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गुलज़ार
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[[फाइल:Gulzar_2008_-_still_38227.jpg|गुलज़ार|330x330पिक्सेल]]
'''संपूरण सिंह कालरा "गुलज़ार"''' (जनम-१८ अगस्त १९३६) भारत के प्रख्यात लेखक, कवी, गीतकार अहेन.
== सुरुआती जिंदगी ==
गुलजार का जनम एक सिख खत्री परिवार मा संपूरन सिंह कालरा के रूप मा, माखन सिंह कालरा अउर सुजान कौर के घरे, दीना, झेलम जिला, ब्रिटिश भारत (वर्तमान [[पाकिस्तान]] ) मा भा रहै। स्कूल मा, उइ [[रबीन्द्रनाथ ठाकुर|टैगोर]] के रचनन के अनुवाद पढ़ति रहैं, जिनके कारण उनके जीवन मा विशेष असर परा। बंटवारा के कारण, उनका परिवार अलग होइ गा अउर उनका अपनि पढ़ाई बंद कइके अपने परिवार के भरण पोषण करै के लिए [[मुम्बई|मुंबई]] (जेहिका तब बम्बई कहा जात रहै) आवै का पड़ा। गुलजार अपन जीवन यापन करै के लिए मुंबई मा कईयो छोट-छोट काम किहिन। हुआँ बेलासिस रोड ( [[मुम्बई|मुंबई]] ) पै ''विचारे मोटर्स'' के गैरेज मा काम करिन। <ref>{{Cite AV media|title=Guftagoo – Interview with Gulzar|date=31 July 2012|publisher=Rajyasabha TV|place=India}}</ref> वहिमा उइ दुर्घटना से क्षतिग्रस्त कारन का रंग कइ के सुधारत रहैं। उनके पिता उनका शुरू मा लेखक होवे के लिए डांटत रहैं। पहिले उइ अपन कलम नाम '''गुलजार दीनवी''' लिहिन अउर बाद मा केवल '''गुलजार''' होइगें। <ref name="meghna">{{Cite book|title=''Because he is''|last=Meghna Gulzar|publisher=Rupa & Co.|year=2004|author-link=Meghna Gulzar}}</ref>
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* [[गीतकार]]
* [[कवि]]
* [[लेखक]]
* [[पटकथा लेखक]]
* [[फिल्म निर्देशक]]
* [[फिल्म निर्माता]]
}}
| years_active = 1956–present
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| signature_alt = गुलज़ार दसखत
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}}
'''संपूरण सिंह कालरा "गुलज़ार"''' (जनम-१८ अगस्त १९३६) भारत के प्रख्यात लेखक, कवी, गीतकार अहेन.
== सुरुआती जिंदगी ==
गुलजार का जनम एक सिख खत्री परिवार मा संपूरन सिंह कालरा के रूप मा, माखन सिंह कालरा अउर सुजान कौर के घरे, दीना, झेलम जिला, ब्रिटिश भारत (वर्तमान [[पाकिस्तान]] ) मा भा रहै। स्कूल मा, उइ [[रबीन्द्रनाथ ठाकुर|टैगोर]] के रचनन के अनुवाद पढ़ति रहैं, जिनके कारण उनके जीवन मा विशेष असर परा। बंटवारा के कारण, उनका परिवार अलग होइ गा अउर उनका अपनि पढ़ाई बंद कइके अपने परिवार के भरण पोषण करै के लिए [[मुम्बई|मुंबई]] (जेहिका तब बम्बई कहा जात रहै) आवै का पड़ा। गुलजार अपन जीवन यापन करै के लिए मुंबई मा कईयो छोट-छोट काम किहिन। हुआँ बेलासिस रोड ( [[मुम्बई|मुंबई]] ) पै ''विचारे मोटर्स'' के गैरेज मा काम करिन। <ref>{{Cite AV media|title=Guftagoo – Interview with Gulzar|date=31 July 2012|publisher=Rajyasabha TV|place=India}}</ref> वहिमा उइ दुर्घटना से क्षतिग्रस्त कारन का रंग कइ के सुधारत रहैं। उनके पिता उनका शुरू मा लेखक होवे के लिए डांटत रहैं। पहिले उइ अपन कलम नाम '''गुलजार दीनवी''' लिहिन अउर बाद मा केवल '''गुलजार''' होइगें। <ref name="meghna">{{Cite book|title=''Because he is''|last=Meghna Gulzar|publisher=Rupa & Co.|year=2004|author-link=Meghna Gulzar}}</ref>
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}}
'''संपूरण सिंह कालरा "गुलज़ार"''' (जनम-१८ अगस्त १९३६) भारत के प्रख्यात लेखक, कवी, गीतकार अहेन.
== सुरुआती जिंदगी ==
गुलजार का जनम एक सिख खत्री परिवार मा संपूरन सिंह कालरा के रूप मा, माखन सिंह कालरा अउर सुजान कौर के घरे, दीना, झेलम जिला, ब्रिटिश भारत (वर्तमान [[पाकिस्तान]] ) मा भा रहै। स्कूल मा, उइ [[रबीन्द्रनाथ ठाकुर|टैगोर]] के रचनन के अनुवाद पढ़ति रहैं, जिनके कारण उनके जीवन मा विशेष असर परा। बंटवारा के कारण, उनका परिवार अलग होइ गा अउर उनका अपनि पढ़ाई बंद कइके अपने परिवार के भरण पोषण करै के लिए [[मुम्बई|मुंबई]] (जेहिका तब बम्बई कहा जात रहै) आवै का पड़ा। गुलजार अपन जीवन यापन करै के लिए मुंबई मा कईयो छोट-छोट काम किहिन। हुआँ बेलासिस रोड ( [[मुम्बई|मुंबई]] ) पै ''विचारे मोटर्स'' के गैरेज मा काम करिन। <ref>{{Cite AV media|title=Guftagoo – Interview with Gulzar|date=31 July 2012|publisher=Rajyasabha TV|place=India}}</ref> वहिमा उइ दुर्घटना से क्षतिग्रस्त कारन का रंग कइ के सुधारत रहैं। उनके पिता उनका शुरू मा लेखक होवे के लिए डांटत रहैं। पहिले उइ अपन कलम नाम '''गुलजार दीनवी''' लिहिन अउर बाद मा केवल '''गुलजार''' होइगें। <ref name="meghna">{{Cite book|title=''Because he is''|last=Meghna Gulzar|publisher=Rupa & Co.|year=2004|author-link=Meghna Gulzar}}</ref>
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}}
'''संपूरण सिंह कालरा "गुलज़ार"''' (जनम-१८ अगस्त १९३६) भारत के प्रख्यात लेखक, कवी, गीतकार अहेन.
== सुरुआती जिंदगी ==
गुलजार का जनम एक सिख खत्री परिवार मा संपूरन सिंह कालरा के रूप मा, माखन सिंह कालरा अउर सुजान कौर के घरे, दीना, झेलम जिला, ब्रिटिश भारत (वर्तमान [[पाकिस्तान]] ) मा भा रहै। स्कूल मा, उइ [[रबीन्द्रनाथ ठाकुर|टैगोर]] के रचनन के अनुवाद पढ़ति रहैं, जिनके कारण उनके जीवन मा विशेष असर परा। बंटवारा के कारण, उनका परिवार अलग होइ गा अउर उनका अपनि पढ़ाई बंद कइके अपने परिवार के भरण पोषण करै के लिए [[मुम्बई|मुंबई]] (जेहिका तब बम्बई कहा जात रहै) आवै का पड़ा। गुलजार अपन जीवन यापन करै के लिए मुंबई मा कईयो छोट-छोट काम किहिन। हुआँ बेलासिस रोड ( [[मुम्बई|मुंबई]] ) पै ''विचारे मोटर्स'' के गैरेज मा काम करिन। <ref>{{Cite AV media|title=Guftagoo – Interview with Gulzar|date=31 July 2012|publisher=Rajyasabha TV|place=India}}</ref> वहिमा उइ दुर्घटना से क्षतिग्रस्त कारन का रंग कइ के सुधारत रहैं। उनके पिता उनका शुरू मा लेखक होवे के लिए डांटत रहैं। पहिले उइ अपन कलम नाम '''गुलजार दीनवी''' लिहिन अउर बाद मा केवल '''गुलजार''' होइगें। <ref name="meghna">{{Cite book|title=''Because he is''|last=Meghna Gulzar|publisher=Rupa & Co.|year=2004|author-link=Meghna Gulzar}}</ref>
==संदर्भ==
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बर्लिन
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}}
'''बर्लिन''' [[जर्मनी]] के राजधानी आय। यो बर्लिन-ब्रैन्डनबर्ग मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के मध्य मा, जर्मनी के उत्तर-पूर्वी भाग मा स्थित है। यहिकी जनसंख्या 34 लाख है। यो जर्मनी का सबते बड़ा और यूरोपीय संघ क दूसर सबते बड़ा शहर है। बर्लिन मा जर्मनी के कउनेओ महानगर की अपेक्षा सबते अधिक बहुभाषी रहति हैं।
बर्लिन 13वीं शताब्दी मा स्थापित भा अउर ई क्षेत्र के कई राज्यन साम्राज्यन के राजधानी रहा- प्रुशिया राज्य (1701 से), जर्मन साम्राज्य (1871-1918), वेइमार गणतंत्र (1919-1932) और तीसरी राइख (1933-1945)। दुसरे विश्वयुद्ध के बाद ई सहर का विभाजन होइ गा। पूर्वी बर्लिन जर्मन लोकतान्त्रिक गणराज्य (पूर्वी जर्मनी) के राजधानी बना अउर बर्लिन दीवार ते घिरा पश्चिमी बर्लिन पश्चिमी जर्मनी के हिस्से मा आवा। 1989 मा बर्लिन दीवार के टूटै पर बर्लिन शहर फिर एक होइ गा अउर जर्मनी के एकीकरण के बाद पूरे जर्मनी के राजधानी बना।
बर्लिन यूरोप के राजनीति, संस्कृति अउर विज्ञान का महत्त्वपूर्ण केन्द्र है। यूरोप के यातायात के खातिर यो मानो एक धुरी के समान है। हियाँ कइयो महत्त्वपूर्ण विश्वविद्यालय, संग्रहालय अउर शोध केन्द्र हैं। यो सहर बहुत तेजी ते विकास कइ रहा है। हियाँ के समारोह, उत्सव, अग्रणी कला, वास्तुशिल्प अउर रात्रि-जीवन खुब प्रसिद्ध हैं। 2019 मा 14 मिलियन पर्यटक बर्लिन घूमै आये रहैं, यहिके साथ यो दुनिया के शीर्ष पर्यटन स्थलन मा ते एक बनि गा रहै।
<br><gallery class=center caption="बर्लिन - Berlin">
Berlin-vom Mueggelturm-12-Dahme-Gruenau-2017-gje.jpg
Berlin-Alexanderplatz-06-Brunnen-Fernsehturm-1993-gje.jpg
Berlin-216-Rotes Rathaus durch Bagger-1995-gje.jpg
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Berlin-Franzoesischer Dom-08-Glockenspiel-2017-gje.jpg
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Berlin-Paul-Loebe-Haus-20-Reichstag-2016-gje.jpg
Berlin-Schweizerische Botschaft-02-2006-gje.jpg
Berlin-Staatsoper Unter den Linden-02-Hedwigsdom-2006-gje.jpg
Berlin-Staatsoper Unter den Linden-14-Frauenfigur-2017-gje.jpg
</gallery>
[[श्रेणी:भूगोल]]
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बलभद्र प्रसाद दीक्षित ‘पढ़ीस’
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text/x-wiki
{{Infobox writer <!-- for more information see [[:Template:Infobox writer/doc]] -->
| name =बलभद्र प्रसाद दीक्षित
| pseudonym = पढ़ीस
| image = Balbhadra_Prasad_Dixit.jpg
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| caption =
| birth_date =२५ सितंबर १८९८ (राधाष्टमी, शुक्लपक्ष, भादों, संवत् १९५५)
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| death_date = १४ जुलाई १९४२
| birth_place = [[अम्बरपुर]], [[सीतापुर]], [[संयुक्त प्रांत आगरा एवं अवध]]
| occupation =कवि अउर लेखक
| notableworks = चकल्लस
}}
'''बलभद्र प्रसाद दीक्षित ‘पढ़ीस’''' [[अवधी]] भाषा के अवधी भाषा के विख्यात कवि रहैं। आधुनिक अवधी कविन मा उनका स्थान अग्रगण्य है। पढ़ीस जी का जनम २५ सितम्बर सन् १८९८ का [[सीतापुर]] जिले की [[सिधौली]] तहसील के अंतर्गत अंबरपुर नाँव के गाँव मा भा रहै। इनके पिताजी का नाम श्रीकृष्ण कुमार दीक्षित अउर माताजी का नाम जसोदा रहै। पढ़ीस जी के पूर्वज श्री बत्तीलाल दीक्षित (परबाबा) [[कन्नौज]] के रहै वाले रहैं। इनके दुइ लरिका भें, याकै रहैं जवाहरलाल अउ दूसर रहैं सुर्जबाली परसाद। यई सुर्जबली परसाद, पढ़ीस जी के बाबा रहैं।
खड़ी बोली [[हिन्दी]], [[अंग्रेजी]] अउर [[उर्दू]] के विधिवत ज्ञान के बादौ पढ़ीस जी कविताई अपनी मादरी जुबान मा यानी अवधी मा किहिन। १९३३ ई. मा पढ़ीस जी का काव्य संग्रह ‘[[चकल्लस]]’ प्रकासित भा, जेहिकै भूमिका [[निराला]] जी लिखिन औ’ साफ तौर पै कहिन कि यू संग्रह हिन्दी के तमाम सफल काव्यन ते बढ़िके है। पढ़ीस जी कै ग्रंथावली उ.प्र. हिन्दी संस्थान से छपि चुकी है। पढ़ीस जी सन् १९४२ मा दिवंगत भें।
== प्रकाशित संग्रह ==
* '''चकल्लस (१९३३)'''
===='''चकल्लस मा प्रकाशित उनकी एक कविता का नमूना'''====
उयि का जानिन हम को आहिन? <br/>
दुनिया के अन्नु देवय्या हम,सुख-सम्पति के भरवय्या हम, <br/>
भूखे-नंगे अधमरे परे, रकतन के आँसू रोयि रहे, <br/>
हमका द्याखति अण्टा चढ़िगे, उयि का जानिनि हम को आहिन॥ <br/>
ज्याठ की दुपहरी, भादउँ बरखा, माह कि पाला पथरन मा <br/>
हम कलपि-कलपि अउ सिकुरि-सिकुरि, फिर ठिठुरि-ठिठुरि कयि जिउ देयी; <br/>
ठाकुर सरपट-सों कयिगे, उयि का जानिनि हम को आहिन॥ <br/>
मोटर मा बयिठीं बिसमिल्ला, दुइ-चारि सफरदा सोहदा लयि <br/>
जामा पहिंदे बेसरमी का, खुद कूचवान सरकार बने <br/>
पंछी पेंढुकी मारिनि-खायिनि, उयि का जानिन हम को आहिन! <br/>
हम कुछु आहिन उयि जानयिं तउ, उहु नातु पुरातन मानयिं तउ! <br/>
उयि रहिहयिं तउ हम हूँ रहिबयि, हम ते उनहुन की लाज रही <br/>
घरु जरि कयि बण्टाधारु भवा, तब का जानिनि हम को आहिन॥ <br/>
==बाहर के कड़ियाँ==
*[http://kavitakosh.org/kk/%E0%A4%AA%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A5%80%E0%A4%B8 बलभद्र प्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस' कविता कोश पर]
*[http://gadyakosh.org/gk/%E0%A4%AC%E0%A4%B2%E0%A4%AD%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A6_%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%A4_%27%E0%A4%AA%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A5%80%E0%A4%B8%27#.U-NH70A5HEQ बलभद्र प्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस' गद्य कोश पर] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140813005228/http://www.gadyakosh.org/gk/%E0%A4%AC%E0%A4%B2%E0%A4%AD%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A6_%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%A4_%27%E0%A4%AA%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A5%80%E0%A4%B8%27#.U-NH70A5HEQ |date=2014-08-13 }}
*[http://kavitakosh.org/kk/%E0%A4%AA%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A5%80%E0%A4%B8_/_%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%9A%E0%A4%AF पढ़ीस जी का परिचय]
*[http://awadh.org/category/%E0%A4%AA%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A5%80%E0%A4%B8/ लरिकउनू ए.मे. पास किहिनि] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140812201752/http://awadh.org/category/%E0%A4%AA%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A5%80%E0%A4%B8/ |date=2014-08-12 }}
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox writer <!-- for more information see [[:Template:Infobox writer/doc]] -->
| name =बलभद्र प्रसाद दीक्षित
| pseudonym = पढ़ीस
| image = Balbhadra_Prasad_Dixit.jpg
| imagesize =
| alt =
| caption =
| birth_date =२५ सितंबर १८९८ (राधाष्टमी, शुक्लपक्ष, भादों, संवत् १९५५)
| father =श्रीकृष्ण कुमार दीक्षित
| mother =जसोदा
| death_date = १४ जुलाई १९४२
| birth_place = [[अम्बरपुर]], [[सीतापुर]], [[संयुक्त प्रांत आगरा एवं अवध]]
| occupation =कवि अउर लेखक
| notableworks = चकल्लस
}}
'''बलभद्र प्रसाद दीक्षित ‘पढ़ीस’''' [[अवधी]] भाषा के अवधी भाषा के विख्यात कवि रहैं। आधुनिक अवधी कविन मा उनका स्थान अग्रगण्य है। पढ़ीस जी का जनम २५ सितम्बर सन् १८९८ का [[सीतापुर]] जिले की [[सिधौली]] तहसील के अंतर्गत अंबरपुर नाँव के गाँव मा भा रहै। इनके पिताजी का नाम श्रीकृष्ण कुमार दीक्षित अउर माताजी का नाम जसोदा रहै। पढ़ीस जी के पूर्वज श्री बत्तीलाल दीक्षित (परबाबा) [[कन्नौज]] के रहै वाले रहैं। इनके दुइ लरिका भें, याकै रहैं जवाहरलाल अउ दूसर रहैं सुर्जबाली परसाद। यई सुर्जबली परसाद, पढ़ीस जी के बाबा रहैं।
खड़ी बोली [[हिन्दी]], [[अंग्रेजी]] अउर [[उर्दू]] के विधिवत ज्ञान के बादौ पढ़ीस जी कविताई अपनी मादरी जुबान मा यानी अवधी मा किहिन। १९३३ ई. मा पढ़ीस जी का काव्य संग्रह ‘[[चकल्लस]]’ प्रकासित भा, जेहिकै भूमिका [[निराला]] जी लिखिन औ’ साफ तौर पै कहिन कि यू संग्रह हिन्दी के तमाम सफल काव्यन ते बढ़िके है। पढ़ीस जी कै ग्रंथावली उ.प्र. हिन्दी संस्थान से छपि चुकी है। पढ़ीस जी सन् १९४२ मा दिवंगत भें।
== प्रकाशित संग्रह ==
* '''चकल्लस (१९३३)'''
===='''चकल्लस मा प्रकाशित उनकी एक कविता का नमूना'''====
उयि का जानिन हम को आहिन? <br/>
दुनिया के अन्नु देवय्या हम,सुख-सम्पति के भरवय्या हम, <br/>
भूखे-नंगे अधमरे परे, रकतन के आँसू रोयि रहे, <br/>
हमका द्याखति अण्टा चढ़िगे, उयि का जानिनि हम को आहिन॥ <br/>
ज्याठ की दुपहरी, भादउँ बरखा, माह कि पाला पथरन मा <br/>
हम कलपि-कलपि अउ सिकुरि-सिकुरि, फिर ठिठुरि-ठिठुरि कयि जिउ देयी; <br/>
ठाकुर सरपट-सों कयिगे, उयि का जानिनि हम को आहिन॥ <br/>
मोटर मा बयिठीं बिसमिल्ला, दुइ-चारि सफरदा सोहदा लयि <br/>
जामा पहिंदे बेसरमी का, खुद कूचवान सरकार बने <br/>
पंछी पेंढुकी मारिनि-खायिनि, उयि का जानिन हम को आहिन! <br/>
हम कुछु आहिन उयि जानयिं तउ, उहु नातु पुरातन मानयिं तउ! <br/>
उयि रहिहयिं तउ हम हूँ रहिबयि, हम ते उनहुन की लाज रही <br/>
घरु जरि कयि बण्टाधारु भवा, तब का जानिनि हम को आहिन॥ <br/>
==बाहर के कड़ियाँ==
*[http://kavitakosh.org/kk/%E0%A4%AA%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A5%80%E0%A4%B8 बलभद्र प्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस' कविता कोश पर]
*[http://gadyakosh.org/gk/%E0%A4%AC%E0%A4%B2%E0%A4%AD%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A6_%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%A4_%27%E0%A4%AA%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A5%80%E0%A4%B8%27#.U-NH70A5HEQ बलभद्र प्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस' गद्य कोश पर] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140813005228/http://www.gadyakosh.org/gk/%E0%A4%AC%E0%A4%B2%E0%A4%AD%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A6_%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%A4_%27%E0%A4%AA%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A5%80%E0%A4%B8%27#.U-NH70A5HEQ |date=2014-08-13 }}
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*[http://awadh.org/category/%E0%A4%AA%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A5%80%E0%A4%B8/ लरिकउनू ए.मे. पास किहिनि] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140812201752/http://awadh.org/category/%E0%A4%AA%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A5%80%E0%A4%B8/ |date=2014-08-12 }}
[[श्रेणी:जीवनी]]
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भारतेन्दु मिश्र
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text/x-wiki
{{Infobox writer
| name =भारतेंदु मिश्र
| image =
| imagesize =
| alt =
| caption =
| birth_date = ५ नवंबर १९५९
| father =
| mother =
| death_date = १० अक्टूबर २०२५
| birth_place = [[लखनऊ]] [[उत्तर प्रदेश]]
| occupation =कवि, कथाकार, आलोचक एवं लोकसाहित्य विशेषज्ञ
| notableworks = पारो (गीत-नवगीत), कालाय तस्मै नमः (सतसई), अभिनवगुप्त पादाचार्य (खंडकाव्य)
}}
'''भारतेंदु मिश्र''' अवधी के यहि दौर के अहम गद्य लेखकन मा गिने जाति हैं। मिश्र जी का जनम ५ नवम्बर १९५९ का भा रहै। संस्कृत विषय मा एम ए करै के बादि उइ दिल्ली विश्वविद्यालय ते पी एचडी कीन्हेनि ।
==प्रमुख रचना==
*'''''चंदावती - अवधी उपन्यास'''''
( '''''भारतेंदु मिश्र''''' द्वारा लिखी ''अवधी उपन्यास'' '''चंदावती'''' का अंश )
'''पहली किस्त:''' '''दादा केरि तेरही--'''
'''ते'''रह बाँभन आय गे रहै। उनका अलग चउका लगावा गा रहै, नई तेरह धोती-अँगउछा-जनेऊ-थरिया-लोटिया-नए पाटा,तेरह तुलसी बाबा वाली रामायन के गुटका अउरु तेरह संख बजार ते मँगवाये गे रहै। आस पास कि जवार ते चुने भये तेरह बाँभन नेउते गे रहै। उनकी सकल देखतै बनि परति रहै-ग्वार सुन्दर चोटइयाधारी पंडित -चन्दन टीका लगाये,ई बिधि सजे रहै कि मानौ सीध-म-सीध सरगै ते उतरि के आए होंय । गाँव के भकुआ उनका आँखी फारि फारि द्याखै लाग।छोटकउनू महराज पीतर के थारा मा सबके पाँय धोयेनि,सिवपरसाद अउरु चन्दावती दायी नये अँगउछा ते सबके पाँय पोछेनि। मोलहे उनका देखि कै सकटू ते कहेनि-‘ भाई,द्याखौ ई कतने सुघर पंडित आये है।आँखी जुडाय गयी,‘हाँ मोलहे भाई,किसमत अच्छी रहै हनुमान दादा केरि ई सब पंडित उनकी खातिर सरग केरि सीढी बनइहै।’
‘ठीक कहति हौ भइया,उनका सरग जरूर मिली।देउता रहै हनुमान दादा,सब उनकी करनी का परताप है-बहुत बडे मनई रहै वइ।’ ‘ अब बँभनन ट्वाला मा कउनौ वइस नामी मनई नही बचा है।’ ‘हमतौ कहिति है दुइ -चारि- दस गाँवन मा वइस मनई ढूँडे न मिली।’
हवन क्यार धुआँ सब तन फैलि गवा रहै। अगियारि होयेके बादि संखु-घंटा बाजै लाग। लीपे- पोते आँगन मा तेरहौ बँभनन केरी चउकी सजाय दीन्ही गयी रहै। सब देउता,नौगिरह, गइया-कउआ-कूकुर -चीटी अउरु पंचतत्वन खातिर भोग लगाय दीन गा रहै । अब तेरहौ बाँभन जीमै लाग रहैं।‘वाह चन्दावती दायी,अतना बढिया इंतिजाम,अतना सुन्दर भोजन बरसन बादि मिला है।..हनुमान दादा केरि आत्मा सरग ते देखि रही है तुमका,--बहुत असीस दै रही होई ।’ तेरही वाले बँभनन क्यार मुखिया कहेसि। चन्दावती केरी आँखी भरि आयीं।अपने अँचरे मा अपन मुँहु लुकाय लीन्हेनि।सब मौजूद मनई-मेहेरुआ तरह-तरह की बातै बनावै लाग रहैं। रामफल दादा दूरि बरोठे म बइठ रहैं। वइ सुरू हुइगे,भकुआ मुँहु फैलाय के सुनै लाग-‘प.रामदीन सुकुल उर्फ हनुमान दादा दौलतिपुर केरि नाक रहैं।उनका बडा पौरुखु रहै। दस-पाँच क्वास तके गाँव जवारि मा हनुमान दादा क्यार रुतबा रहै। दौलति पुर क्यार ई सबते बडे किसान रहैं। बसि इनहेन के दुआरे टक्टर ठाढ है।’
दौलतिपुर मा कोई पचास घर हुइहै। तेली,तम्बोली,नाऊ,कहार,धोबी,पासी,चमार,मुरऊ,ठाकुर जैसी सब जातिन क्यार घर दौलतिपुर मा है।गाँव मा बँभनन के कुल जमा तीनि घर रहैं। कउनौ पूँछेसि-‘केत्ती उमिरि रहै हनुमान दादा केरि?’ रामफल फिरि सुरू हुइगे-‘अबही मुसकिल ते पैसठ केरि उमिरि भइ होई हमते पाँच साल छोट रहैं बखत आय गवा सरग सिधार गे। नामी पहेलवान रहैं-तोहार हनुमान दादा। अपनी जवानी मा कुस्ती लडै जाति रहैं तौ सदा जीति कै आवति रहैं। दौलतिपुर केरि असल दौलति तौ हनुमान भइयै रहैं। जस-जस उनका पौरुखु घटा तस-तस गठिया उनका तंग करै लागि रहैं। बिचरऊ जवानी मा बिधुर हुइगे रहैं। तब चन्दावती ते उनका परेम हुइगा,वइ चन्दावती ते बिहाव कीन्हेनि औ वहिका मेहेरुआ केरि जगह दीन्हेनि , फिरि चन्दावती सब तना उनके साथै तीस साल रहीं। चन्दावती उनकी बिरादरी कि न रहैं। तीस साल पहिले उनका परेम हुइगा रहै। हनुमान दादा बीस बिसुआ के कनवजिया औ चन्दावती गाँव कि तेलिनि। तबै चन्दावती क्यार गउना न भवा रहै। गाँव-म उनके मंसवा के मरै केरि खबर आयी रहै। चन्दावती वाकई-म चन्दै रहै। जो कोऊ याक दाँय द्याखै ऊ देखतै रहि जाय,बहुतै खबसूरत रहै चन्दावती।ऊ जमाना रहै जब दबंग बाँभन ठाकुर जउनि नीची जातिन केरि सुन्दरि बिटिया बहुरिया देखि लेति रहैं तौ वहिका जब चहै तब अपनी हवस क सिकार बनाय लेति रहै। तब गरीब परजन के घर की मेहेरुवन केरि कउनौ इज्जति न रहै।कउनौ कानून न रहै इनके ऊपर।चन्दावती के घरवाले चन्दावती के परेम ते बहुतै खुस भे रहै।’.....
‘ द्याखौ दादा सौ-सौ रुपया दच्छिना दीन जाय रहा है’ -मोलहे इसारा कीन्हेनि। ‘रामफल दादा समझायेनि- तेरहीवाले बाँभन आँय,इनका दुरिही ते पैलगी कीन्हेव। इनकी नजर ते बचिकै रहैक चही।‘ ’ सकटू पूछेनि -काहे दादा? ‘
‘ तुम यार यकदमै बउखल हौ,हियाँ आये हौ तेरही खाय ,सवालन केरि झडी लगाय दीन्हेव।‘
‘ सकटू भइया तुम तमाखू बनाओ-लेव चुनौटी पकरौ।‘ ’अबही तमाखू ?अब तौ भोजन के बादि तमाखू खायेव।‘ ’तमाखू कि महिमा तुम नही जानति हौ-सुनौ- कृष्न चले बैकुंठ को राधा पकरी बाँह |हियाँ तमाखू खाय लो हुआँ तमाखू नाहि।...कुछ समझ्यो,अबै टेम है, तब तक तमाखू बनि सकति है। जबतक खानदान के मान्य न खाय ले तबतक हमार नम्बर कइसे लागी।‘ ‘ठीक कहति हौ रामफल दादा।‘ ’कहिति तो हम ठीकै है,..... सुनति तो नही हौ। बनाओ। तमाखू बनाओ।‘ ‘तेरह बाँभन दान दच्छिना लइ कै चलि दीन्हेनि रहै।‘
महाबाँभन के पाँय छुइकै चन्दावती दायी अलग ते वहिका पाँच सौ रुपया दच्छिना दीन्हेनि। वहिकी आँखी चमकि गयी।वहु अपन दुनहू हाँथ ऊपर उठाय के आसिरबाद दीन्हेसि तीके तेरहौ बाँभन अपन हाथ उठाय कै आसीस दीन्हेनि। छोटकउनू महराज चाँदी की तस्तरी-म पान तमाखू ,इलायची,लौग लइकै आगे बढिकै सबका बिदा कीन्हेनि। दुइ ताँगा उनका लइ जाय खातिर पहिलेहे तयार रहै। दुनहू ताँगावाले भोजन कइ लीन्हेनि रहै। उनका केरावा दइ दीन गा रहै, अउरु घर की खातिर परसा बाँधि दीन गा रहै। तेरहौ बाँभन जब ताँगन-म बइठि लीन्हेनि-तब महाबाँभन के इसारे ते ताँगा हाँकि दीन गे। हनुमान दादा की तेरही-म ताँगन-म जुति कै आये दुनहू घोडवनौ केरि दाना- पानी-मेवा ते खुब सेवा कीन गइ रहै,सो वहू मस्त हुइगे रहै।
'''''धारावाहिक उपन्यास'''''
'''किस्त दो :चन्दावती कि नींद'''
बहुत थकि गय रहै चन्दावती।खटिया पर पहुडतै खन नीद आय गय-सब पुरानी बातै सनीमा तना यादि आवै लागीं।...तीस साल पहिले ,वहि दिन चन्दावती सकपहिता खातिर बथुई आनय गय रहै। गोहूँ के ख्यातन मा ई साल न मालुम कहाँ ते बथुई फाटि परी रहै। हाल यू कि जो नीके ते निकावा न जाय तौ पूरी गेहूँ कि फसल चौपट हुइ जाय। जाडे के दिन रहैं। उर्द कि फसल बढिया भइ रहै। चन्दावती अपनि लाल चुनरिया ओढे हनुमान दादा के ख्यात मा बथुई बिनती रहैं। हनुमान दादा अपने रहट पर कटहर के बिरवा के तरे हउदिया तीर बइठ रहैं। न चन्दावती उनका देखिस न वइ चन्दावती का। तब चन्दावती जवान रहै—सुन्दरी तो रहबै कीन। वहि दिन चन्दावती बथुई बीनै के साथ-अपनी तरंग मा जोर –जोर ते -नदि नारे न जाओ स्याम पइयाँ परी, नदि नारे जो जायो तो जइबै कियो बीच धारै न जाओ स्याम पइयाँ परी। बीच धारै जो जायो तो जइबे कियो ,वइ पारै न जाव स्याम पइयाँ परी। वइ पारै जो जायो तो जइबे कियो /सँग सवतिया न लाओ स्याम पइयाँ परी। -- यहै गाना गउती रहैं। हनुमान दादा तब हट्टे-कट्टे पहलवान रहैं। यहि गाना मा न मालुम कउनि बात रहै कि हनुमान दादा चन्दावती ते अपन जिउ हारिगे। जान पहिचान तो पहिलेहे ते रहै। गाँवन मा सब याक दुसरे के घर परिवार का बिना बताये जानि लेति है। वैसे कैइयो लँउडे वहिके पीछे परे रहै,लेकिन आजु हनुमान दादा वहिकी तरफ बढिगे ,जैसे राजा सांतनु जइसे मतसगन्धा की खुसबू ते वाहिकी वार खिंचि गये रहैं वही तना वहि बेरिया हनुमान दादा चन्दावती की तरफ खिंचिगे। युहु गाना उनका बहुतै नीक लागति रहै,जब चन्दावती गाना खतम कइ चुकी तब वहिके तीर पहुचि के पूछेनि- ‘को आय रे?’
चन्दावती सिटपिटाय गय।..फिरि सँभरि के बोली-‘पाँय लागी दादा, हम चन्दावती।’
‘हमरे ख्यात मा का कइ रही हौ?’
‘बथुई बीनिति है........’
‘बीनि.... लेव।’
‘बसि बहुति हुइगै सकपहिता भरेक...हुइगै ’
‘अरे अउरु बीनि लेव। का तुमका बथुई खातिर मना कइ रहेन है।’
‘बसि बहुति हुइगै’
‘तुम्हारि गउनई बहुतै नीकि है,तुम्हार गाना सुनिकै तो हमार जिउ जुडाय गवा।'
चन्दावती सरमाय गयीं,तिनुक नयन चमकाय के कहेनि-
‘कोऊ ते कहेव ना दादा!’
‘काहे?’
‘तुम तौ सबु जानति हौ,बेवा मेहेरुआ कहूँ गाना गाय सकती हैं।..हम तौ बाल-बिधवा हन। ...का करी भउजी जउनु बतायेनि वहै करिति है।’
‘अउरु का बतायेनि रहै भउजी?’
‘ सुर्ज बूडै वाले हैं।..अबही रोटी प्वावैक है। हमरे दद्दू का हमरेहे हाथे कि पनेथी नीकि लागति है।..कबहूँ फुरसत म बतइबे....,अच्छा पाँय लागी।’
चन्दावती चली गय ,लेकिन राम जानै का भवा वहिका गाना- नदि नारे न जाओ...हनुमान दादा के करेजे मा कहूँ भीतर तके समाय गवा रहै। बडी देर तके वइ वहै गाना मनहेम बार बार दोहरावति रहे। रेडियो के बडे सौखीन रहै। चहै ख्यात मा जाँय, चहै बाग मा ट्रांजिस्टर अक्सर अपने साथै लइ कै चलैं। आजु चन्दावती क्यार गाना उनका बेसुध कइगा ,रेडियो पर वइ यहै गाना सैकरन दफा सुनि चुके रहैं तेहूँ चन्दावती के गावै के तरीके मा कुछु अलगै नसा रहै जो जादू करति चला गवा। सोने जस वहिका रंगु ती पर लाल चुनरी ओढिके वा हरे भरे गोंहू के ख्यात मा बइठि बथुई बीनति रहै, मालुम होति रहै मानौ कउनिव सरग कि अपसरा उनके ख्यात मा उतरि आयी है।
खुबसूरत तो चन्दावती रहबै कीन रंगु रूपु अइस कि बँभनन ठकुरन के घर की सबै बिटिया मेहेरुआ वहिके आगे नौकरानी लागैं,बसि यू समझि लेव कि पूरे दौलतिपुर मा वसि सुन्दरी बिटेवा न रहै तब। अब वहिके घरमा तेलु प्यारै क्यार खानदानी काम सबु खतम हुइगा रहै बिजुली वाला कोल्हू बगल के गाँव सुमेरपुर मा लागि गवा रहै। अब चन्दावती के दद्दू मँजूरी करै लाग रहैं।दुइ बिगहा खेती मा गुजारा मुस्किल हुइगा रहै। तेहू भइसिया के दूध ते चन्दावती के घरमा खाय पियै की बहुत मुस्किल न रहै। सुमेरपुर मा चन्दावती बेही गयी रहैं मुला किस्मति क्यार खेलु द्याखौ अबही गउनव न भा रहै कि चन्दावती क्यार मंसवा हैजा-म खतम हुइगा। बडी दौड-भाग कीन्हेनि लखनऊ के मेडिकल कालिज तके लइगे लेकिन वहु बचि न पावा। फिरि ससुरारि वाले कबहूँ चन्दावती क्यार गउना न करायेनि याक दाँय चन्दावती के दद्दू सुमेरपुर जायके बिनती कीन्हेनि तेहूँ कुछु बात न बनी।चन्दावती के ससुर साफ-साफ कहेनि –‘संकर भइया, तुम्हार बहिनिया मनहूस है..बिहाव होतै अपने मंसवा का खायगै,..वहिते अब हमार कउनौ सरबन्ध नही है। हमरे लेखे हमरे लरिकवा के साथ यहौ रिस्ता मरिगवा। ’
चन्दावती के दद्दू बुढवा के बहुत हाथ पाँय जोरेनि लेकिन वहु टस ते मस न भवा। आखिरकार चन्दावती अपने मइकेहेम रहि गयीं,बाल बिधवा के खातिर अउरु कउनौ सहारा न रहै। गाँव कि बडी बूढी चन्दावती –क मनहूस कहै लागी रहैं, लेकिन खुसमिजाज रहै चन्दा। बिधवा जीवन के दुख ते यकदम अंजान ,अबही वहिकी लरिकई वाले सिकडी-गोट्टा-छुपी-छुपउव्वल ख्यालै वाले दिन रहै। अबही जवानी चढि रही रहै । बिहाव तो हुइगा रहै-मुला पति परमेसुर ते संपर्क न हुइ पावा रहै। हियाँ गाँव कि गुँइयन के साथ चन्दा मगन रहै। हुइ सकति है अकेलेम बइठिके रोवति होय,लेकिन गाँवमा कोऊ वहिका रोवति नही देखिसि। संकर अपनी बहिनी का बडे दुलार ते राखति रहैं। संकर कि दुलहिनि चन्दा ते घर के कामकाज करावै लागि रहै। चन्दा दौरि-दौरि सब काम करै लागि रहै। समझदार तौ वा रहबै कीन।
जउनी मेहेरुआ वहिते चिढती रहैं वइ चन्दा क्यार नाव बिगारि दीन्हेनि रहै। कउनौ चंडो कहै,कउनौ रंडो कहै तो कउनिव बुढिया रंडो चंडो नाव धरि दीन्हेसि रहै। दौलतिपुर मा नाव धरै केरि यह पुरानि परंपरा आय। बहरहाल चन्दावती कहै सुनै कि फिकिर न करति रहै, वा खुस रहै। दुसरे दिन हनुमान दादा संकर का बोलवायेनि। संकर घबराय गे ,काहेते वहु दादा ते एक हजार रुपया कर्जु लीन्हेसि रहै। संकर सकुचाति भये हनुमान दादा तीर पहुँचे।हनुमान दादा अपने चौतरा पर बइठ रहैं।
‘ दादा पाँय लागी।’
‘खुस रहौ।आओ,संकर! आओ।...कहौ का हाल चाल ?’
‘तुमरी किरपा ते सबु ठीक चलि रहा है।’
‘चन्दा के ससुरारि वाले का कहेनि?’
‘बुढवा कहेसि हमरे लरिका के साथै यह रिस्तेदारी खतम हुइगै।’
‘हाँ वहौ ठीक कहति है-जब जवान लरिका मरि गवा तो फिरि बहुरिया का घर मा कइसे राखै, चन्दा क्यार गउना?’
गउना कहाँ हुइ पावा रहै दादा।...गउने केरि सब तयारी कइ लीन रहै...कर्जौ हुइगा लेकिन चन्दा केरि किस्मति फूटि गय...का करी दादा।’
‘परेसान न हो संकर! जउनु सबु बिधाता स्वाचति है,तउनु करति है।तुलसी बाबा कहेनि है-होइहै सोइ जो राम रचि राखा.. ’
‘ठीकै कहति हौ दादा!..लेकिन अब हमरे ऊपर बहुति बडी जिम्मेदारी आय गय है।...अब तुमते का छिपायी दादा,..गाँव के कुछु सोहदे हमरी चन्दा कि ताक झाँक मा रहति हैं।..अब हम का करी,वहिका रूपुइ अइस है कि .. ’
‘यह तौ अच्छी बात है...कोई ठीक लरिका होय तौ...चन्दा क्यार दुबारा बिहाव करि देव।’
‘बिहाव करै वाला कउनौ नही है..सब मउज ले वाले है..बेवा ते बिहाव को करी?बडकऊ तेवारी क्यार कमलेस,मिसिरन क्यार बिनोद ई दुनहू चन्दावती के चक्कर मा हैं।’
‘..इनके दुनहू के तौ बिहाव हुइ चुके हैं..दुनहू लरिका मेहेरुआ वाले हैं।’
‘यहै तौ..का बताई?...कुछु समझिम नही आवति..’
हमरी मदति कि जरूरति होय तो बतायो..तुम कहौ तो तेवारी औ मिसिर ते बात करी।’
‘नाही दादा!..बात-क बतंगडु बनि जायी। चन्दा कि बदनामिव होई सेंति मेति,......कोई अउरि जतन करैक परी।’
‘या बात तो ठीक कहति हौ,संकर!..न होय तौ कहूँ अउरु दूसर बिहाव कइ देव।’
‘याक दाँय क्यार कर्जु तौ अबहीं निपटि नही पावा है।...फिरि जो हिम्मति करबौ करी तो दूसर लरिका कहाँ धरा है।’
‘कोई ताजुब नही है कि हमरी तना कउनौ बिधुर मिलि जाय।’
‘तुमरी तना कहाँ मिली..?’
‘काहे?’
‘अरे कहाँ तुम बाँभन देउता, कहाँ हम नीच जाति तेली।’
‘बात तो ठीक है लेकिन हमका कउनौ एतराज नही है।.जब हमरे घरमा वुइ बेमार रहै तब मालिस करै तुमरी दुलहिन के साथ चन्दा आवति रहै। हमका वा तबहे ते बडी नीकि लागति है,कबहूँ कोऊ ते कहा नही हम आजु तुमते बताइति है।...द्याखौ परेसानी तो हमहुक बहुति होई।.....लेकिन जउनु होई तउनु निपटा जायी।....पहिले तुम चन्दावती क्यार मनु लइ लेव,अपने घर मा राय मिलाय लेव। फिरि दुइ-तीन दिन मा जइस होय हमका चुप्पे बतायो।’
‘तुम्हार जस नीक मनई-बाँभन, हमका दिया लइकै ढूढे न मिली,यू तौ हम गरीब परजा पर बहुत उपकार होई।’
‘साफ बात या है कि तुमरी चन्दावती हमहुक बहुत नीकी लगती हैं...लेकिन अबहीं कोऊ गैर ते यह बात न कीन्हेव।’
‘ठीक है दादा।..पाँय लागी..’
‘खुस रहौ।..चन्दावती कि राय जरूर लइ लीन्हेव।’
‘ठीक है..’संकर मनहिम अपनि खुसी दबाये अपने घर की राह लीन्हेनि। संकर कमीज के खलीता ते बीडी निकारेनि तनिक रुकिकै बीडी सुलगायेनि औ खुसी की तरंग मा फिरि घर की तरफ चलि दीन्हेनि। आजु वहिके पाँव सीधे न परि रहे रहैं।
== बाहर के कड़ियाँ ==
* [http://awadh.org/2014/03/19/%E0%A4%9B%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%B8-%E0%A4%89%E0%A4%A0%E0%A5%80/ छपरा कस उठी!] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140818004807/http://awadh.org/2014/03/19/%e0%a4%9b%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b8-%e0%a4%89%e0%a4%a0%e0%a5%80/ |date=2014-08-18 }}
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{{Infobox writer
| name =भारतेंदु मिश्र
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| birth_date = ५ नवंबर १९५९
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| death_date = १० अक्टूबर २०२५
| birth_place = [[लखनऊ]] [[उत्तर प्रदेश]]
| occupation =कवि, कथाकार, आलोचक एवं लोकसाहित्य विशेषज्ञ
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}}
'''भारतेंदु मिश्र''' अवधी के यहि दौर के अहम गद्य लेखकन मा गिने जाति हैं। मिश्र जी का जनम ५ नवम्बर १९५९ का भा रहै। संस्कृत विषय मा एम ए करै के बादि उइ दिल्ली विश्वविद्यालय ते पी एचडी कीन्हेनि ।
==प्रमुख रचना==
*'''''चंदावती - अवधी उपन्यास'''''
( '''''भारतेंदु मिश्र''''' द्वारा लिखी ''अवधी उपन्यास'' '''चंदावती'''' का अंश )
'''पहली किस्त:''' '''दादा केरि तेरही--'''
'''ते'''रह बाँभन आय गे रहै। उनका अलग चउका लगावा गा रहै, नई तेरह धोती-अँगउछा-जनेऊ-थरिया-लोटिया-नए पाटा,तेरह तुलसी बाबा वाली रामायन के गुटका अउरु तेरह संख बजार ते मँगवाये गे रहै। आस पास कि जवार ते चुने भये तेरह बाँभन नेउते गे रहै। उनकी सकल देखतै बनि परति रहै-ग्वार सुन्दर चोटइयाधारी पंडित -चन्दन टीका लगाये,ई बिधि सजे रहै कि मानौ सीध-म-सीध सरगै ते उतरि के आए होंय । गाँव के भकुआ उनका आँखी फारि फारि द्याखै लाग।छोटकउनू महराज पीतर के थारा मा सबके पाँय धोयेनि,सिवपरसाद अउरु चन्दावती दायी नये अँगउछा ते सबके पाँय पोछेनि। मोलहे उनका देखि कै सकटू ते कहेनि-‘ भाई,द्याखौ ई कतने सुघर पंडित आये है।आँखी जुडाय गयी,‘हाँ मोलहे भाई,किसमत अच्छी रहै हनुमान दादा केरि ई सब पंडित उनकी खातिर सरग केरि सीढी बनइहै।’
‘ठीक कहति हौ भइया,उनका सरग जरूर मिली।देउता रहै हनुमान दादा,सब उनकी करनी का परताप है-बहुत बडे मनई रहै वइ।’ ‘ अब बँभनन ट्वाला मा कउनौ वइस नामी मनई नही बचा है।’ ‘हमतौ कहिति है दुइ -चारि- दस गाँवन मा वइस मनई ढूँडे न मिली।’
हवन क्यार धुआँ सब तन फैलि गवा रहै। अगियारि होयेके बादि संखु-घंटा बाजै लाग। लीपे- पोते आँगन मा तेरहौ बँभनन केरी चउकी सजाय दीन्ही गयी रहै। सब देउता,नौगिरह, गइया-कउआ-कूकुर -चीटी अउरु पंचतत्वन खातिर भोग लगाय दीन गा रहै । अब तेरहौ बाँभन जीमै लाग रहैं।‘वाह चन्दावती दायी,अतना बढिया इंतिजाम,अतना सुन्दर भोजन बरसन बादि मिला है।..हनुमान दादा केरि आत्मा सरग ते देखि रही है तुमका,--बहुत असीस दै रही होई ।’ तेरही वाले बँभनन क्यार मुखिया कहेसि। चन्दावती केरी आँखी भरि आयीं।अपने अँचरे मा अपन मुँहु लुकाय लीन्हेनि।सब मौजूद मनई-मेहेरुआ तरह-तरह की बातै बनावै लाग रहैं। रामफल दादा दूरि बरोठे म बइठ रहैं। वइ सुरू हुइगे,भकुआ मुँहु फैलाय के सुनै लाग-‘प.रामदीन सुकुल उर्फ हनुमान दादा दौलतिपुर केरि नाक रहैं।उनका बडा पौरुखु रहै। दस-पाँच क्वास तके गाँव जवारि मा हनुमान दादा क्यार रुतबा रहै। दौलति पुर क्यार ई सबते बडे किसान रहैं। बसि इनहेन के दुआरे टक्टर ठाढ है।’
दौलतिपुर मा कोई पचास घर हुइहै। तेली,तम्बोली,नाऊ,कहार,धोबी,पासी,चमार,मुरऊ,ठाकुर जैसी सब जातिन क्यार घर दौलतिपुर मा है।गाँव मा बँभनन के कुल जमा तीनि घर रहैं। कउनौ पूँछेसि-‘केत्ती उमिरि रहै हनुमान दादा केरि?’ रामफल फिरि सुरू हुइगे-‘अबही मुसकिल ते पैसठ केरि उमिरि भइ होई हमते पाँच साल छोट रहैं बखत आय गवा सरग सिधार गे। नामी पहेलवान रहैं-तोहार हनुमान दादा। अपनी जवानी मा कुस्ती लडै जाति रहैं तौ सदा जीति कै आवति रहैं। दौलतिपुर केरि असल दौलति तौ हनुमान भइयै रहैं। जस-जस उनका पौरुखु घटा तस-तस गठिया उनका तंग करै लागि रहैं। बिचरऊ जवानी मा बिधुर हुइगे रहैं। तब चन्दावती ते उनका परेम हुइगा,वइ चन्दावती ते बिहाव कीन्हेनि औ वहिका मेहेरुआ केरि जगह दीन्हेनि , फिरि चन्दावती सब तना उनके साथै तीस साल रहीं। चन्दावती उनकी बिरादरी कि न रहैं। तीस साल पहिले उनका परेम हुइगा रहै। हनुमान दादा बीस बिसुआ के कनवजिया औ चन्दावती गाँव कि तेलिनि। तबै चन्दावती क्यार गउना न भवा रहै। गाँव-म उनके मंसवा के मरै केरि खबर आयी रहै। चन्दावती वाकई-म चन्दै रहै। जो कोऊ याक दाँय द्याखै ऊ देखतै रहि जाय,बहुतै खबसूरत रहै चन्दावती।ऊ जमाना रहै जब दबंग बाँभन ठाकुर जउनि नीची जातिन केरि सुन्दरि बिटिया बहुरिया देखि लेति रहैं तौ वहिका जब चहै तब अपनी हवस क सिकार बनाय लेति रहै। तब गरीब परजन के घर की मेहेरुवन केरि कउनौ इज्जति न रहै।कउनौ कानून न रहै इनके ऊपर।चन्दावती के घरवाले चन्दावती के परेम ते बहुतै खुस भे रहै।’.....
‘ द्याखौ दादा सौ-सौ रुपया दच्छिना दीन जाय रहा है’ -मोलहे इसारा कीन्हेनि। ‘रामफल दादा समझायेनि- तेरहीवाले बाँभन आँय,इनका दुरिही ते पैलगी कीन्हेव। इनकी नजर ते बचिकै रहैक चही।‘ ’ सकटू पूछेनि -काहे दादा? ‘
‘ तुम यार यकदमै बउखल हौ,हियाँ आये हौ तेरही खाय ,सवालन केरि झडी लगाय दीन्हेव।‘
‘ सकटू भइया तुम तमाखू बनाओ-लेव चुनौटी पकरौ।‘ ’अबही तमाखू ?अब तौ भोजन के बादि तमाखू खायेव।‘ ’तमाखू कि महिमा तुम नही जानति हौ-सुनौ- कृष्न चले बैकुंठ को राधा पकरी बाँह |हियाँ तमाखू खाय लो हुआँ तमाखू नाहि।...कुछ समझ्यो,अबै टेम है, तब तक तमाखू बनि सकति है। जबतक खानदान के मान्य न खाय ले तबतक हमार नम्बर कइसे लागी।‘ ‘ठीक कहति हौ रामफल दादा।‘ ’कहिति तो हम ठीकै है,..... सुनति तो नही हौ। बनाओ। तमाखू बनाओ।‘ ‘तेरह बाँभन दान दच्छिना लइ कै चलि दीन्हेनि रहै।‘
महाबाँभन के पाँय छुइकै चन्दावती दायी अलग ते वहिका पाँच सौ रुपया दच्छिना दीन्हेनि। वहिकी आँखी चमकि गयी।वहु अपन दुनहू हाँथ ऊपर उठाय के आसिरबाद दीन्हेसि तीके तेरहौ बाँभन अपन हाथ उठाय कै आसीस दीन्हेनि। छोटकउनू महराज चाँदी की तस्तरी-म पान तमाखू ,इलायची,लौग लइकै आगे बढिकै सबका बिदा कीन्हेनि। दुइ ताँगा उनका लइ जाय खातिर पहिलेहे तयार रहै। दुनहू ताँगावाले भोजन कइ लीन्हेनि रहै। उनका केरावा दइ दीन गा रहै, अउरु घर की खातिर परसा बाँधि दीन गा रहै। तेरहौ बाँभन जब ताँगन-म बइठि लीन्हेनि-तब महाबाँभन के इसारे ते ताँगा हाँकि दीन गे। हनुमान दादा की तेरही-म ताँगन-म जुति कै आये दुनहू घोडवनौ केरि दाना- पानी-मेवा ते खुब सेवा कीन गइ रहै,सो वहू मस्त हुइगे रहै।
'''''धारावाहिक उपन्यास'''''
'''किस्त दो :चन्दावती कि नींद'''
बहुत थकि गय रहै चन्दावती।खटिया पर पहुडतै खन नीद आय गय-सब पुरानी बातै सनीमा तना यादि आवै लागीं।...तीस साल पहिले ,वहि दिन चन्दावती सकपहिता खातिर बथुई आनय गय रहै। गोहूँ के ख्यातन मा ई साल न मालुम कहाँ ते बथुई फाटि परी रहै। हाल यू कि जो नीके ते निकावा न जाय तौ पूरी गेहूँ कि फसल चौपट हुइ जाय। जाडे के दिन रहैं। उर्द कि फसल बढिया भइ रहै। चन्दावती अपनि लाल चुनरिया ओढे हनुमान दादा के ख्यात मा बथुई बिनती रहैं। हनुमान दादा अपने रहट पर कटहर के बिरवा के तरे हउदिया तीर बइठ रहैं। न चन्दावती उनका देखिस न वइ चन्दावती का। तब चन्दावती जवान रहै—सुन्दरी तो रहबै कीन। वहि दिन चन्दावती बथुई बीनै के साथ-अपनी तरंग मा जोर –जोर ते -नदि नारे न जाओ स्याम पइयाँ परी, नदि नारे जो जायो तो जइबै कियो बीच धारै न जाओ स्याम पइयाँ परी। बीच धारै जो जायो तो जइबे कियो ,वइ पारै न जाव स्याम पइयाँ परी। वइ पारै जो जायो तो जइबे कियो /सँग सवतिया न लाओ स्याम पइयाँ परी। -- यहै गाना गउती रहैं। हनुमान दादा तब हट्टे-कट्टे पहलवान रहैं। यहि गाना मा न मालुम कउनि बात रहै कि हनुमान दादा चन्दावती ते अपन जिउ हारिगे। जान पहिचान तो पहिलेहे ते रहै। गाँवन मा सब याक दुसरे के घर परिवार का बिना बताये जानि लेति है। वैसे कैइयो लँउडे वहिके पीछे परे रहै,लेकिन आजु हनुमान दादा वहिकी तरफ बढिगे ,जैसे राजा सांतनु जइसे मतसगन्धा की खुसबू ते वाहिकी वार खिंचि गये रहैं वही तना वहि बेरिया हनुमान दादा चन्दावती की तरफ खिंचिगे। युहु गाना उनका बहुतै नीक लागति रहै,जब चन्दावती गाना खतम कइ चुकी तब वहिके तीर पहुचि के पूछेनि- ‘को आय रे?’
चन्दावती सिटपिटाय गय।..फिरि सँभरि के बोली-‘पाँय लागी दादा, हम चन्दावती।’
‘हमरे ख्यात मा का कइ रही हौ?’
‘बथुई बीनिति है........’
‘बीनि.... लेव।’
‘बसि बहुति हुइगै सकपहिता भरेक...हुइगै ’
‘अरे अउरु बीनि लेव। का तुमका बथुई खातिर मना कइ रहेन है।’
‘बसि बहुति हुइगै’
‘तुम्हारि गउनई बहुतै नीकि है,तुम्हार गाना सुनिकै तो हमार जिउ जुडाय गवा।'
चन्दावती सरमाय गयीं,तिनुक नयन चमकाय के कहेनि-
‘कोऊ ते कहेव ना दादा!’
‘काहे?’
‘तुम तौ सबु जानति हौ,बेवा मेहेरुआ कहूँ गाना गाय सकती हैं।..हम तौ बाल-बिधवा हन। ...का करी भउजी जउनु बतायेनि वहै करिति है।’
‘अउरु का बतायेनि रहै भउजी?’
‘ सुर्ज बूडै वाले हैं।..अबही रोटी प्वावैक है। हमरे दद्दू का हमरेहे हाथे कि पनेथी नीकि लागति है।..कबहूँ फुरसत म बतइबे....,अच्छा पाँय लागी।’
चन्दावती चली गय ,लेकिन राम जानै का भवा वहिका गाना- नदि नारे न जाओ...हनुमान दादा के करेजे मा कहूँ भीतर तके समाय गवा रहै। बडी देर तके वइ वहै गाना मनहेम बार बार दोहरावति रहे। रेडियो के बडे सौखीन रहै। चहै ख्यात मा जाँय, चहै बाग मा ट्रांजिस्टर अक्सर अपने साथै लइ कै चलैं। आजु चन्दावती क्यार गाना उनका बेसुध कइगा ,रेडियो पर वइ यहै गाना सैकरन दफा सुनि चुके रहैं तेहूँ चन्दावती के गावै के तरीके मा कुछु अलगै नसा रहै जो जादू करति चला गवा। सोने जस वहिका रंगु ती पर लाल चुनरी ओढिके वा हरे भरे गोंहू के ख्यात मा बइठि बथुई बीनति रहै, मालुम होति रहै मानौ कउनिव सरग कि अपसरा उनके ख्यात मा उतरि आयी है।
खुबसूरत तो चन्दावती रहबै कीन रंगु रूपु अइस कि बँभनन ठकुरन के घर की सबै बिटिया मेहेरुआ वहिके आगे नौकरानी लागैं,बसि यू समझि लेव कि पूरे दौलतिपुर मा वसि सुन्दरी बिटेवा न रहै तब। अब वहिके घरमा तेलु प्यारै क्यार खानदानी काम सबु खतम हुइगा रहै बिजुली वाला कोल्हू बगल के गाँव सुमेरपुर मा लागि गवा रहै। अब चन्दावती के दद्दू मँजूरी करै लाग रहैं।दुइ बिगहा खेती मा गुजारा मुस्किल हुइगा रहै। तेहू भइसिया के दूध ते चन्दावती के घरमा खाय पियै की बहुत मुस्किल न रहै। सुमेरपुर मा चन्दावती बेही गयी रहैं मुला किस्मति क्यार खेलु द्याखौ अबही गउनव न भा रहै कि चन्दावती क्यार मंसवा हैजा-म खतम हुइगा। बडी दौड-भाग कीन्हेनि लखनऊ के मेडिकल कालिज तके लइगे लेकिन वहु बचि न पावा। फिरि ससुरारि वाले कबहूँ चन्दावती क्यार गउना न करायेनि याक दाँय चन्दावती के दद्दू सुमेरपुर जायके बिनती कीन्हेनि तेहूँ कुछु बात न बनी।चन्दावती के ससुर साफ-साफ कहेनि –‘संकर भइया, तुम्हार बहिनिया मनहूस है..बिहाव होतै अपने मंसवा का खायगै,..वहिते अब हमार कउनौ सरबन्ध नही है। हमरे लेखे हमरे लरिकवा के साथ यहौ रिस्ता मरिगवा। ’
चन्दावती के दद्दू बुढवा के बहुत हाथ पाँय जोरेनि लेकिन वहु टस ते मस न भवा। आखिरकार चन्दावती अपने मइकेहेम रहि गयीं,बाल बिधवा के खातिर अउरु कउनौ सहारा न रहै। गाँव कि बडी बूढी चन्दावती –क मनहूस कहै लागी रहैं, लेकिन खुसमिजाज रहै चन्दा। बिधवा जीवन के दुख ते यकदम अंजान ,अबही वहिकी लरिकई वाले सिकडी-गोट्टा-छुपी-छुपउव्वल ख्यालै वाले दिन रहै। अबही जवानी चढि रही रहै । बिहाव तो हुइगा रहै-मुला पति परमेसुर ते संपर्क न हुइ पावा रहै। हियाँ गाँव कि गुँइयन के साथ चन्दा मगन रहै। हुइ सकति है अकेलेम बइठिके रोवति होय,लेकिन गाँवमा कोऊ वहिका रोवति नही देखिसि। संकर अपनी बहिनी का बडे दुलार ते राखति रहैं। संकर कि दुलहिनि चन्दा ते घर के कामकाज करावै लागि रहै। चन्दा दौरि-दौरि सब काम करै लागि रहै। समझदार तौ वा रहबै कीन।
जउनी मेहेरुआ वहिते चिढती रहैं वइ चन्दा क्यार नाव बिगारि दीन्हेनि रहै। कउनौ चंडो कहै,कउनौ रंडो कहै तो कउनिव बुढिया रंडो चंडो नाव धरि दीन्हेसि रहै। दौलतिपुर मा नाव धरै केरि यह पुरानि परंपरा आय। बहरहाल चन्दावती कहै सुनै कि फिकिर न करति रहै, वा खुस रहै। दुसरे दिन हनुमान दादा संकर का बोलवायेनि। संकर घबराय गे ,काहेते वहु दादा ते एक हजार रुपया कर्जु लीन्हेसि रहै। संकर सकुचाति भये हनुमान दादा तीर पहुँचे।हनुमान दादा अपने चौतरा पर बइठ रहैं।
‘ दादा पाँय लागी।’
‘खुस रहौ।आओ,संकर! आओ।...कहौ का हाल चाल ?’
‘तुमरी किरपा ते सबु ठीक चलि रहा है।’
‘चन्दा के ससुरारि वाले का कहेनि?’
‘बुढवा कहेसि हमरे लरिका के साथै यह रिस्तेदारी खतम हुइगै।’
‘हाँ वहौ ठीक कहति है-जब जवान लरिका मरि गवा तो फिरि बहुरिया का घर मा कइसे राखै, चन्दा क्यार गउना?’
गउना कहाँ हुइ पावा रहै दादा।...गउने केरि सब तयारी कइ लीन रहै...कर्जौ हुइगा लेकिन चन्दा केरि किस्मति फूटि गय...का करी दादा।’
‘परेसान न हो संकर! जउनु सबु बिधाता स्वाचति है,तउनु करति है।तुलसी बाबा कहेनि है-होइहै सोइ जो राम रचि राखा.. ’
‘ठीकै कहति हौ दादा!..लेकिन अब हमरे ऊपर बहुति बडी जिम्मेदारी आय गय है।...अब तुमते का छिपायी दादा,..गाँव के कुछु सोहदे हमरी चन्दा कि ताक झाँक मा रहति हैं।..अब हम का करी,वहिका रूपुइ अइस है कि .. ’
‘यह तौ अच्छी बात है...कोई ठीक लरिका होय तौ...चन्दा क्यार दुबारा बिहाव करि देव।’
‘बिहाव करै वाला कउनौ नही है..सब मउज ले वाले है..बेवा ते बिहाव को करी?बडकऊ तेवारी क्यार कमलेस,मिसिरन क्यार बिनोद ई दुनहू चन्दावती के चक्कर मा हैं।’
‘..इनके दुनहू के तौ बिहाव हुइ चुके हैं..दुनहू लरिका मेहेरुआ वाले हैं।’
‘यहै तौ..का बताई?...कुछु समझिम नही आवति..’
हमरी मदति कि जरूरति होय तो बतायो..तुम कहौ तो तेवारी औ मिसिर ते बात करी।’
‘नाही दादा!..बात-क बतंगडु बनि जायी। चन्दा कि बदनामिव होई सेंति मेति,......कोई अउरि जतन करैक परी।’
‘या बात तो ठीक कहति हौ,संकर!..न होय तौ कहूँ अउरु दूसर बिहाव कइ देव।’
‘याक दाँय क्यार कर्जु तौ अबहीं निपटि नही पावा है।...फिरि जो हिम्मति करबौ करी तो दूसर लरिका कहाँ धरा है।’
‘कोई ताजुब नही है कि हमरी तना कउनौ बिधुर मिलि जाय।’
‘तुमरी तना कहाँ मिली..?’
‘काहे?’
‘अरे कहाँ तुम बाँभन देउता, कहाँ हम नीच जाति तेली।’
‘बात तो ठीक है लेकिन हमका कउनौ एतराज नही है।.जब हमरे घरमा वुइ बेमार रहै तब मालिस करै तुमरी दुलहिन के साथ चन्दा आवति रहै। हमका वा तबहे ते बडी नीकि लागति है,कबहूँ कोऊ ते कहा नही हम आजु तुमते बताइति है।...द्याखौ परेसानी तो हमहुक बहुति होई।.....लेकिन जउनु होई तउनु निपटा जायी।....पहिले तुम चन्दावती क्यार मनु लइ लेव,अपने घर मा राय मिलाय लेव। फिरि दुइ-तीन दिन मा जइस होय हमका चुप्पे बतायो।’
‘तुम्हार जस नीक मनई-बाँभन, हमका दिया लइकै ढूढे न मिली,यू तौ हम गरीब परजा पर बहुत उपकार होई।’
‘साफ बात या है कि तुमरी चन्दावती हमहुक बहुत नीकी लगती हैं...लेकिन अबहीं कोऊ गैर ते यह बात न कीन्हेव।’
‘ठीक है दादा।..पाँय लागी..’
‘खुस रहौ।..चन्दावती कि राय जरूर लइ लीन्हेव।’
‘ठीक है..’संकर मनहिम अपनि खुसी दबाये अपने घर की राह लीन्हेनि। संकर कमीज के खलीता ते बीडी निकारेनि तनिक रुकिकै बीडी सुलगायेनि औ खुसी की तरंग मा फिरि घर की तरफ चलि दीन्हेनि। आजु वहिके पाँव सीधे न परि रहे रहैं।
== बाहर के कड़ियाँ ==
* [http://awadh.org/2014/03/19/%E0%A4%9B%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%B8-%E0%A4%89%E0%A4%A0%E0%A5%80/ छपरा कस उठी!] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140818004807/http://awadh.org/2014/03/19/%e0%a4%9b%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b8-%e0%a4%89%e0%a4%a0%e0%a5%80/ |date=2014-08-18 }}
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| birth_date = ५ नवंबर १९५९
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| death_date = १० अक्टूबर २०२५
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}}
'''भारतेंदु मिश्र''' अवधी के यहि दौर के अहम गद्य लेखकन मा गिने जाति हैं। मिश्र जी का जनम ५ नवम्बर १९५९ का भा रहै। संस्कृत विषय मा एम ए करै के बादि उइ दिल्ली विश्वविद्यालय ते पी एचडी कीन्हेनि ।
==प्रमुख रचना==
'''कविता संग्रह- '''
* पारो(गीत-नवगीत)
* कलाय तस्मै नम: (सतसई)
* अभिनवगुप्तपादाचार्य(खंडकाव्य)
* जुगलबन्दी(गीत/नवगीत संकलन के सी.डी.)
* अनुभव की सीढी(भारतेन्दु मिश्र के गीत सर्जना-संपादन-डा.रश्मिशील)
'''शोध समीक्षा- '''
*अमरुशतक का साहित्यशास्त्रीय अध्ययन(शोध समीक्षा/पाठालोचन)
*भरतकालीन कलाएँ(शोध)
*समकालीन छन्द्प्रसंग(नवें दशक के छन्दोबद्ध कविता केरि समीक्षा)
*बलभद्र प्रसाद दीक्षित पढ़ीस
*त्रिलोचन शास्त्री
'''संपादित कृतियाँ- '''
*नवगीत एकादश सं.(ग्यारह नवगीतकारन क्यार संकलन)
'''उपन्यास- '''
*कुलांगना
*बालयोगी अष्टावक्र
'''नाटक-'''
*शास्त्रार्थ(नाटक)
*मरे हुए लोग
*लड़की की जात
*दिल्ली चलो।
'''कहानी संग्रह- '''
*खिडकी वाली सीट
'''अवधी रचनाएँ- '''
*कस परजवटि बिसारी(अवधी कविता तथा ललित निबन्ध)
*नई रोसनी (उपन्यास)
*चन्दावती(उपन्यास)
===भारतेंदु मिश्र द्वारा लिखे अवधी उपन्यास चंदावती क अंश :-===
'''पहली किस्त:''' '''दादा केरि तेरही--'''
'''ते'''रह बाँभन आय गे रहै। उनका अलग चउका लगावा गा रहै, नई तेरह धोती-अँगउछा-जनेऊ-थरिया-लोटिया-नए पाटा,तेरह तुलसी बाबा वाली रामायन के गुटका अउरु तेरह संख बजार ते मँगवाये गे रहै। आस पास कि जवार ते चुने भये तेरह बाँभन नेउते गे रहै। उनकी सकल देखतै बनि परति रहै-ग्वार सुन्दर चोटइयाधारी पंडित -चन्दन टीका लगाये,ई बिधि सजे रहै कि मानौ सीध-म-सीध सरगै ते उतरि के आए होंय । गाँव के भकुआ उनका आँखी फारि फारि द्याखै लाग।छोटकउनू महराज पीतर के थारा मा सबके पाँय धोयेनि,सिवपरसाद अउरु चन्दावती दायी नये अँगउछा ते सबके पाँय पोछेनि। मोलहे उनका देखि कै सकटू ते कहेनि-‘ भाई,द्याखौ ई कतने सुघर पंडित आये है।आँखी जुडाय गयी,‘हाँ मोलहे भाई,किसमत अच्छी रहै हनुमान दादा केरि ई सब पंडित उनकी खातिर सरग केरि सीढी बनइहै।’
‘ठीक कहति हौ भइया,उनका सरग जरूर मिली।देउता रहै हनुमान दादा,सब उनकी करनी का परताप है-बहुत बडे मनई रहै वइ।’ ‘ अब बँभनन ट्वाला मा कउनौ वइस नामी मनई नही बचा है।’ ‘हमतौ कहिति है दुइ -चारि- दस गाँवन मा वइस मनई ढूँडे न मिली।’
हवन क्यार धुआँ सब तन फैलि गवा रहै। अगियारि होयेके बादि संखु-घंटा बाजै लाग। लीपे- पोते आँगन मा तेरहौ बँभनन केरी चउकी सजाय दीन्ही गयी रहै। सब देउता,नौगिरह, गइया-कउआ-कूकुर -चीटी अउरु पंचतत्वन खातिर भोग लगाय दीन गा रहै । अब तेरहौ बाँभन जीमै लाग रहैं।‘वाह चन्दावती दायी,अतना बढिया इंतिजाम,अतना सुन्दर भोजन बरसन बादि मिला है।..हनुमान दादा केरि आत्मा सरग ते देखि रही है तुमका,--बहुत असीस दै रही होई ।’ तेरही वाले बँभनन क्यार मुखिया कहेसि। चन्दावती केरी आँखी भरि आयीं।अपने अँचरे मा अपन मुँहु लुकाय लीन्हेनि।सब मौजूद मनई-मेहेरुआ तरह-तरह की बातै बनावै लाग रहैं। रामफल दादा दूरि बरोठे म बइठ रहैं। वइ सुरू हुइगे,भकुआ मुँहु फैलाय के सुनै लाग-‘प.रामदीन सुकुल उर्फ हनुमान दादा दौलतिपुर केरि नाक रहैं।उनका बडा पौरुखु रहै। दस-पाँच क्वास तके गाँव जवारि मा हनुमान दादा क्यार रुतबा रहै। दौलति पुर क्यार ई सबते बडे किसान रहैं। बसि इनहेन के दुआरे टक्टर ठाढ है।’
दौलतिपुर मा कोई पचास घर हुइहै। तेली,तम्बोली,नाऊ,कहार,धोबी,पासी,चमार,मुरऊ,ठाकुर जैसी सब जातिन क्यार घर दौलतिपुर मा है।गाँव मा बँभनन के कुल जमा तीनि घर रहैं। कउनौ पूँछेसि-‘केत्ती उमिरि रहै हनुमान दादा केरि?’ रामफल फिरि सुरू हुइगे-‘अबही मुसकिल ते पैसठ केरि उमिरि भइ होई हमते पाँच साल छोट रहैं बखत आय गवा सरग सिधार गे। नामी पहेलवान रहैं-तोहार हनुमान दादा। अपनी जवानी मा कुस्ती लडै जाति रहैं तौ सदा जीति कै आवति रहैं। दौलतिपुर केरि असल दौलति तौ हनुमान भइयै रहैं। जस-जस उनका पौरुखु घटा तस-तस गठिया उनका तंग करै लागि रहैं। बिचरऊ जवानी मा बिधुर हुइगे रहैं। तब चन्दावती ते उनका परेम हुइगा,वइ चन्दावती ते बिहाव कीन्हेनि औ वहिका मेहेरुआ केरि जगह दीन्हेनि , फिरि चन्दावती सब तना उनके साथै तीस साल रहीं। चन्दावती उनकी बिरादरी कि न रहैं। तीस साल पहिले उनका परेम हुइगा रहै। हनुमान दादा बीस बिसुआ के कनवजिया औ चन्दावती गाँव कि तेलिनि। तबै चन्दावती क्यार गउना न भवा रहै। गाँव-म उनके मंसवा के मरै केरि खबर आयी रहै। चन्दावती वाकई-म चन्दै रहै। जो कोऊ याक दाँय द्याखै ऊ देखतै रहि जाय,बहुतै खबसूरत रहै चन्दावती।ऊ जमाना रहै जब दबंग बाँभन ठाकुर जउनि नीची जातिन केरि सुन्दरि बिटिया बहुरिया देखि लेति रहैं तौ वहिका जब चहै तब अपनी हवस क सिकार बनाय लेति रहै। तब गरीब परजन के घर की मेहेरुवन केरि कउनौ इज्जति न रहै।कउनौ कानून न रहै इनके ऊपर।चन्दावती के घरवाले चन्दावती के परेम ते बहुतै खुस भे रहै।’.....
‘ द्याखौ दादा सौ-सौ रुपया दच्छिना दीन जाय रहा है’ -मोलहे इसारा कीन्हेनि। ‘रामफल दादा समझायेनि- तेरहीवाले बाँभन आँय,इनका दुरिही ते पैलगी कीन्हेव। इनकी नजर ते बचिकै रहैक चही।‘ ’ सकटू पूछेनि -काहे दादा? ‘
‘ तुम यार यकदमै बउखल हौ,हियाँ आये हौ तेरही खाय ,सवालन केरि झडी लगाय दीन्हेव।‘
‘ सकटू भइया तुम तमाखू बनाओ-लेव चुनौटी पकरौ।‘ ’अबही तमाखू ?अब तौ भोजन के बादि तमाखू खायेव।‘ ’तमाखू कि महिमा तुम नही जानति हौ-सुनौ- कृष्न चले बैकुंठ को राधा पकरी बाँह |हियाँ तमाखू खाय लो हुआँ तमाखू नाहि।...कुछ समझ्यो,अबै टेम है, तब तक तमाखू बनि सकति है। जबतक खानदान के मान्य न खाय ले तबतक हमार नम्बर कइसे लागी।‘ ‘ठीक कहति हौ रामफल दादा।‘ ’कहिति तो हम ठीकै है,..... सुनति तो नही हौ। बनाओ। तमाखू बनाओ।‘ ‘तेरह बाँभन दान दच्छिना लइ कै चलि दीन्हेनि रहै।‘
महाबाँभन के पाँय छुइकै चन्दावती दायी अलग ते वहिका पाँच सौ रुपया दच्छिना दीन्हेनि। वहिकी आँखी चमकि गयी।वहु अपन दुनहू हाँथ ऊपर उठाय के आसिरबाद दीन्हेसि तीके तेरहौ बाँभन अपन हाथ उठाय कै आसीस दीन्हेनि। छोटकउनू महराज चाँदी की तस्तरी-म पान तमाखू ,इलायची,लौग लइकै आगे बढिकै सबका बिदा कीन्हेनि। दुइ ताँगा उनका लइ जाय खातिर पहिलेहे तयार रहै। दुनहू ताँगावाले भोजन कइ लीन्हेनि रहै। उनका केरावा दइ दीन गा रहै, अउरु घर की खातिर परसा बाँधि दीन गा रहै। तेरहौ बाँभन जब ताँगन-म बइठि लीन्हेनि-तब महाबाँभन के इसारे ते ताँगा हाँकि दीन गे। हनुमान दादा की तेरही-म ताँगन-म जुति कै आये दुनहू घोडवनौ केरि दाना- पानी-मेवा ते खुब सेवा कीन गइ रहै,सो वहू मस्त हुइगे रहै।
'''''धारावाहिक उपन्यास'''''
'''किस्त दो :चन्दावती कि नींद'''
बहुत थकि गय रहै चन्दावती।खटिया पर पहुडतै खन नीद आय गय-सब पुरानी बातै सनीमा तना यादि आवै लागीं।...तीस साल पहिले ,वहि दिन चन्दावती सकपहिता खातिर बथुई आनय गय रहै। गोहूँ के ख्यातन मा ई साल न मालुम कहाँ ते बथुई फाटि परी रहै। हाल यू कि जो नीके ते निकावा न जाय तौ पूरी गेहूँ कि फसल चौपट हुइ जाय। जाडे के दिन रहैं। उर्द कि फसल बढिया भइ रहै। चन्दावती अपनि लाल चुनरिया ओढे हनुमान दादा के ख्यात मा बथुई बिनती रहैं। हनुमान दादा अपने रहट पर कटहर के बिरवा के तरे हउदिया तीर बइठ रहैं। न चन्दावती उनका देखिस न वइ चन्दावती का। तब चन्दावती जवान रहै—सुन्दरी तो रहबै कीन। वहि दिन चन्दावती बथुई बीनै के साथ-अपनी तरंग मा जोर –जोर ते -नदि नारे न जाओ स्याम पइयाँ परी, नदि नारे जो जायो तो जइबै कियो बीच धारै न जाओ स्याम पइयाँ परी। बीच धारै जो जायो तो जइबे कियो ,वइ पारै न जाव स्याम पइयाँ परी। वइ पारै जो जायो तो जइबे कियो /सँग सवतिया न लाओ स्याम पइयाँ परी। -- यहै गाना गउती रहैं। हनुमान दादा तब हट्टे-कट्टे पहलवान रहैं। यहि गाना मा न मालुम कउनि बात रहै कि हनुमान दादा चन्दावती ते अपन जिउ हारिगे। जान पहिचान तो पहिलेहे ते रहै। गाँवन मा सब याक दुसरे के घर परिवार का बिना बताये जानि लेति है। वैसे कैइयो लँउडे वहिके पीछे परे रहै,लेकिन आजु हनुमान दादा वहिकी तरफ बढिगे ,जैसे राजा सांतनु जइसे मतसगन्धा की खुसबू ते वाहिकी वार खिंचि गये रहैं वही तना वहि बेरिया हनुमान दादा चन्दावती की तरफ खिंचिगे। युहु गाना उनका बहुतै नीक लागति रहै,जब चन्दावती गाना खतम कइ चुकी तब वहिके तीर पहुचि के पूछेनि- ‘को आय रे?’
चन्दावती सिटपिटाय गय।..फिरि सँभरि के बोली-‘पाँय लागी दादा, हम चन्दावती।’
‘हमरे ख्यात मा का कइ रही हौ?’
‘बथुई बीनिति है........’
‘बीनि.... लेव।’
‘बसि बहुति हुइगै सकपहिता भरेक...हुइगै ’
‘अरे अउरु बीनि लेव। का तुमका बथुई खातिर मना कइ रहेन है।’
‘बसि बहुति हुइगै’
‘तुम्हारि गउनई बहुतै नीकि है,तुम्हार गाना सुनिकै तो हमार जिउ जुडाय गवा।'
चन्दावती सरमाय गयीं,तिनुक नयन चमकाय के कहेनि-
‘कोऊ ते कहेव ना दादा!’
‘काहे?’
‘तुम तौ सबु जानति हौ,बेवा मेहेरुआ कहूँ गाना गाय सकती हैं।..हम तौ बाल-बिधवा हन। ...का करी भउजी जउनु बतायेनि वहै करिति है।’
‘अउरु का बतायेनि रहै भउजी?’
‘ सुर्ज बूडै वाले हैं।..अबही रोटी प्वावैक है। हमरे दद्दू का हमरेहे हाथे कि पनेथी नीकि लागति है।..कबहूँ फुरसत म बतइबे....,अच्छा पाँय लागी।’
चन्दावती चली गय ,लेकिन राम जानै का भवा वहिका गाना- नदि नारे न जाओ...हनुमान दादा के करेजे मा कहूँ भीतर तके समाय गवा रहै। बडी देर तके वइ वहै गाना मनहेम बार बार दोहरावति रहे। रेडियो के बडे सौखीन रहै। चहै ख्यात मा जाँय, चहै बाग मा ट्रांजिस्टर अक्सर अपने साथै लइ कै चलैं। आजु चन्दावती क्यार गाना उनका बेसुध कइगा ,रेडियो पर वइ यहै गाना सैकरन दफा सुनि चुके रहैं तेहूँ चन्दावती के गावै के तरीके मा कुछु अलगै नसा रहै जो जादू करति चला गवा। सोने जस वहिका रंगु ती पर लाल चुनरी ओढिके वा हरे भरे गोंहू के ख्यात मा बइठि बथुई बीनति रहै, मालुम होति रहै मानौ कउनिव सरग कि अपसरा उनके ख्यात मा उतरि आयी है।
खुबसूरत तो चन्दावती रहबै कीन रंगु रूपु अइस कि बँभनन ठकुरन के घर की सबै बिटिया मेहेरुआ वहिके आगे नौकरानी लागैं,बसि यू समझि लेव कि पूरे दौलतिपुर मा वसि सुन्दरी बिटेवा न रहै तब। अब वहिके घरमा तेलु प्यारै क्यार खानदानी काम सबु खतम हुइगा रहै बिजुली वाला कोल्हू बगल के गाँव सुमेरपुर मा लागि गवा रहै। अब चन्दावती के दद्दू मँजूरी करै लाग रहैं।दुइ बिगहा खेती मा गुजारा मुस्किल हुइगा रहै। तेहू भइसिया के दूध ते चन्दावती के घरमा खाय पियै की बहुत मुस्किल न रहै। सुमेरपुर मा चन्दावती बेही गयी रहैं मुला किस्मति क्यार खेलु द्याखौ अबही गउनव न भा रहै कि चन्दावती क्यार मंसवा हैजा-म खतम हुइगा। बडी दौड-भाग कीन्हेनि लखनऊ के मेडिकल कालिज तके लइगे लेकिन वहु बचि न पावा। फिरि ससुरारि वाले कबहूँ चन्दावती क्यार गउना न करायेनि याक दाँय चन्दावती के दद्दू सुमेरपुर जायके बिनती कीन्हेनि तेहूँ कुछु बात न बनी।चन्दावती के ससुर साफ-साफ कहेनि –‘संकर भइया, तुम्हार बहिनिया मनहूस है..बिहाव होतै अपने मंसवा का खायगै,..वहिते अब हमार कउनौ सरबन्ध नही है। हमरे लेखे हमरे लरिकवा के साथ यहौ रिस्ता मरिगवा। ’
चन्दावती के दद्दू बुढवा के बहुत हाथ पाँय जोरेनि लेकिन वहु टस ते मस न भवा। आखिरकार चन्दावती अपने मइकेहेम रहि गयीं,बाल बिधवा के खातिर अउरु कउनौ सहारा न रहै। गाँव कि बडी बूढी चन्दावती –क मनहूस कहै लागी रहैं, लेकिन खुसमिजाज रहै चन्दा। बिधवा जीवन के दुख ते यकदम अंजान ,अबही वहिकी लरिकई वाले सिकडी-गोट्टा-छुपी-छुपउव्वल ख्यालै वाले दिन रहै। अबही जवानी चढि रही रहै । बिहाव तो हुइगा रहै-मुला पति परमेसुर ते संपर्क न हुइ पावा रहै। हियाँ गाँव कि गुँइयन के साथ चन्दा मगन रहै। हुइ सकति है अकेलेम बइठिके रोवति होय,लेकिन गाँवमा कोऊ वहिका रोवति नही देखिसि। संकर अपनी बहिनी का बडे दुलार ते राखति रहैं। संकर कि दुलहिनि चन्दा ते घर के कामकाज करावै लागि रहै। चन्दा दौरि-दौरि सब काम करै लागि रहै। समझदार तौ वा रहबै कीन।
जउनी मेहेरुआ वहिते चिढती रहैं वइ चन्दा क्यार नाव बिगारि दीन्हेनि रहै। कउनौ चंडो कहै,कउनौ रंडो कहै तो कउनिव बुढिया रंडो चंडो नाव धरि दीन्हेसि रहै। दौलतिपुर मा नाव धरै केरि यह पुरानि परंपरा आय। बहरहाल चन्दावती कहै सुनै कि फिकिर न करति रहै, वा खुस रहै। दुसरे दिन हनुमान दादा संकर का बोलवायेनि। संकर घबराय गे ,काहेते वहु दादा ते एक हजार रुपया कर्जु लीन्हेसि रहै। संकर सकुचाति भये हनुमान दादा तीर पहुँचे।हनुमान दादा अपने चौतरा पर बइठ रहैं।
‘ दादा पाँय लागी।’
‘खुस रहौ।आओ,संकर! आओ।...कहौ का हाल चाल ?’
‘तुमरी किरपा ते सबु ठीक चलि रहा है।’
‘चन्दा के ससुरारि वाले का कहेनि?’
‘बुढवा कहेसि हमरे लरिका के साथै यह रिस्तेदारी खतम हुइगै।’
‘हाँ वहौ ठीक कहति है-जब जवान लरिका मरि गवा तो फिरि बहुरिया का घर मा कइसे राखै, चन्दा क्यार गउना?’
गउना कहाँ हुइ पावा रहै दादा।...गउने केरि सब तयारी कइ लीन रहै...कर्जौ हुइगा लेकिन चन्दा केरि किस्मति फूटि गय...का करी दादा।’
‘परेसान न हो संकर! जउनु सबु बिधाता स्वाचति है,तउनु करति है।तुलसी बाबा कहेनि है-होइहै सोइ जो राम रचि राखा.. ’
‘ठीकै कहति हौ दादा!..लेकिन अब हमरे ऊपर बहुति बडी जिम्मेदारी आय गय है।...अब तुमते का छिपायी दादा,..गाँव के कुछु सोहदे हमरी चन्दा कि ताक झाँक मा रहति हैं।..अब हम का करी,वहिका रूपुइ अइस है कि .. ’
‘यह तौ अच्छी बात है...कोई ठीक लरिका होय तौ...चन्दा क्यार दुबारा बिहाव करि देव।’
‘बिहाव करै वाला कउनौ नही है..सब मउज ले वाले है..बेवा ते बिहाव को करी?बडकऊ तेवारी क्यार कमलेस,मिसिरन क्यार बिनोद ई दुनहू चन्दावती के चक्कर मा हैं।’
‘..इनके दुनहू के तौ बिहाव हुइ चुके हैं..दुनहू लरिका मेहेरुआ वाले हैं।’
‘यहै तौ..का बताई?...कुछु समझिम नही आवति..’
हमरी मदति कि जरूरति होय तो बतायो..तुम कहौ तो तेवारी औ मिसिर ते बात करी।’
‘नाही दादा!..बात-क बतंगडु बनि जायी। चन्दा कि बदनामिव होई सेंति मेति,......कोई अउरि जतन करैक परी।’
‘या बात तो ठीक कहति हौ,संकर!..न होय तौ कहूँ अउरु दूसर बिहाव कइ देव।’
‘याक दाँय क्यार कर्जु तौ अबहीं निपटि नही पावा है।...फिरि जो हिम्मति करबौ करी तो दूसर लरिका कहाँ धरा है।’
‘कोई ताजुब नही है कि हमरी तना कउनौ बिधुर मिलि जाय।’
‘तुमरी तना कहाँ मिली..?’
‘काहे?’
‘अरे कहाँ तुम बाँभन देउता, कहाँ हम नीच जाति तेली।’
‘बात तो ठीक है लेकिन हमका कउनौ एतराज नही है।.जब हमरे घरमा वुइ बेमार रहै तब मालिस करै तुमरी दुलहिन के साथ चन्दा आवति रहै। हमका वा तबहे ते बडी नीकि लागति है,कबहूँ कोऊ ते कहा नही हम आजु तुमते बताइति है।...द्याखौ परेसानी तो हमहुक बहुति होई।.....लेकिन जउनु होई तउनु निपटा जायी।....पहिले तुम चन्दावती क्यार मनु लइ लेव,अपने घर मा राय मिलाय लेव। फिरि दुइ-तीन दिन मा जइस होय हमका चुप्पे बतायो।’
‘तुम्हार जस नीक मनई-बाँभन, हमका दिया लइकै ढूढे न मिली,यू तौ हम गरीब परजा पर बहुत उपकार होई।’
‘साफ बात या है कि तुमरी चन्दावती हमहुक बहुत नीकी लगती हैं...लेकिन अबहीं कोऊ गैर ते यह बात न कीन्हेव।’
‘ठीक है दादा।..पाँय लागी..’
‘खुस रहौ।..चन्दावती कि राय जरूर लइ लीन्हेव।’
‘ठीक है..’संकर मनहिम अपनि खुसी दबाये अपने घर की राह लीन्हेनि। संकर कमीज के खलीता ते बीडी निकारेनि तनिक रुकिकै बीडी सुलगायेनि औ खुसी की तरंग मा फिरि घर की तरफ चलि दीन्हेनि। आजु वहिके पाँव सीधे न परि रहे रहैं।
== बाहर के कड़ियाँ ==
* [http://awadh.org/2014/03/19/%E0%A4%9B%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%B8-%E0%A4%89%E0%A4%A0%E0%A5%80/ छपरा कस उठी!] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140818004807/http://awadh.org/2014/03/19/%e0%a4%9b%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b8-%e0%a4%89%e0%a4%a0%e0%a5%80/ |date=2014-08-18 }}
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| name =भारतेंदु मिश्र
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}}
'''भारतेंदु मिश्र''' [[अवधी]] के यहि दौर के अहम गद्य लेखकन मा गिने जाति हैं। मिश्र जी का जनम ५ नवम्बर १९५९ का भा रहै। [[संस्कृत]] विषय मा एम. ए. करै के बादि उइ [[दिल्ली विश्वविद्यालय]] ते पी.एचडी. कीन्हेनि ।
==प्रमुख रचना==
'''कविता संग्रह- '''
* पारो(गीत-नवगीत)
* कलाय तस्मै नम: (सतसई)
* अभिनवगुप्तपादाचार्य(खंडकाव्य)
* जुगलबन्दी(गीत/नवगीत संकलन के सी.डी.)
* अनुभव की सीढी(भारतेन्दु मिश्र के गीत सर्जना-संपादन-डा.रश्मिशील)
'''शोध समीक्षा- '''
*अमरुशतक का साहित्यशास्त्रीय अध्ययन(शोध समीक्षा/पाठालोचन)
*भरतकालीन कलाएँ(शोध)
*समकालीन छन्द्प्रसंग(नवें दशक के छन्दोबद्ध कविता केरि समीक्षा)
*बलभद्र प्रसाद दीक्षित पढ़ीस
*त्रिलोचन शास्त्री
'''संपादित कृतियाँ- '''
*नवगीत एकादश सं.(ग्यारह नवगीतकारन क्यार संकलन)
'''उपन्यास- '''
*कुलांगना
*बालयोगी अष्टावक्र
'''नाटक-'''
*शास्त्रार्थ(नाटक)
*मरे हुए लोग
*लड़की की जात
*दिल्ली चलो।
'''कहानी संग्रह- '''
*खिडकी वाली सीट
'''अवधी रचनाएँ- '''
*कस परजवटि बिसारी(अवधी कविता तथा ललित निबन्ध)
*नई रोसनी (उपन्यास)
*चन्दावती(उपन्यास)
===भारतेंदु मिश्र द्वारा लिखे अवधी उपन्यास चंदावती क अंश :-===
'''पहली किस्त:''' '''दादा केरि तेरही--'''
'''ते'''रह बाँभन आय गे रहै। उनका अलग चउका लगावा गा रहै, नई तेरह धोती-अँगउछा-जनेऊ-थरिया-लोटिया-नए पाटा,तेरह तुलसी बाबा वाली रामायन के गुटका अउरु तेरह संख बजार ते मँगवाये गे रहै। आस पास कि जवार ते चुने भये तेरह बाँभन नेउते गे रहै। उनकी सकल देखतै बनि परति रहै-ग्वार सुन्दर चोटइयाधारी पंडित -चन्दन टीका लगाये,ई बिधि सजे रहै कि मानौ सीध-म-सीध सरगै ते उतरि के आए होंय । गाँव के भकुआ उनका आँखी फारि फारि द्याखै लाग।छोटकउनू महराज पीतर के थारा मा सबके पाँय धोयेनि,सिवपरसाद अउरु चन्दावती दायी नये अँगउछा ते सबके पाँय पोछेनि। मोलहे उनका देखि कै सकटू ते कहेनि-‘ भाई,द्याखौ ई कतने सुघर पंडित आये है।आँखी जुडाय गयी,‘हाँ मोलहे भाई,किसमत अच्छी रहै हनुमान दादा केरि ई सब पंडित उनकी खातिर सरग केरि सीढी बनइहै।’
‘ठीक कहति हौ भइया,उनका सरग जरूर मिली।देउता रहै हनुमान दादा,सब उनकी करनी का परताप है-बहुत बडे मनई रहै वइ।’ ‘ अब बँभनन ट्वाला मा कउनौ वइस नामी मनई नही बचा है।’ ‘हमतौ कहिति है दुइ -चारि- दस गाँवन मा वइस मनई ढूँडे न मिली।’
हवन क्यार धुआँ सब तन फैलि गवा रहै। अगियारि होयेके बादि संखु-घंटा बाजै लाग। लीपे- पोते आँगन मा तेरहौ बँभनन केरी चउकी सजाय दीन्ही गयी रहै। सब देउता,नौगिरह, गइया-कउआ-कूकुर -चीटी अउरु पंचतत्वन खातिर भोग लगाय दीन गा रहै । अब तेरहौ बाँभन जीमै लाग रहैं।‘वाह चन्दावती दायी,अतना बढिया इंतिजाम,अतना सुन्दर भोजन बरसन बादि मिला है।..हनुमान दादा केरि आत्मा सरग ते देखि रही है तुमका,--बहुत असीस दै रही होई ।’ तेरही वाले बँभनन क्यार मुखिया कहेसि। चन्दावती केरी आँखी भरि आयीं।अपने अँचरे मा अपन मुँहु लुकाय लीन्हेनि।सब मौजूद मनई-मेहेरुआ तरह-तरह की बातै बनावै लाग रहैं। रामफल दादा दूरि बरोठे म बइठ रहैं। वइ सुरू हुइगे,भकुआ मुँहु फैलाय के सुनै लाग-‘प.रामदीन सुकुल उर्फ हनुमान दादा दौलतिपुर केरि नाक रहैं।उनका बडा पौरुखु रहै। दस-पाँच क्वास तके गाँव जवारि मा हनुमान दादा क्यार रुतबा रहै। दौलति पुर क्यार ई सबते बडे किसान रहैं। बसि इनहेन के दुआरे टक्टर ठाढ है।’
दौलतिपुर मा कोई पचास घर हुइहै। तेली,तम्बोली,नाऊ,कहार,धोबी,पासी,चमार,मुरऊ,ठाकुर जैसी सब जातिन क्यार घर दौलतिपुर मा है।गाँव मा बँभनन के कुल जमा तीनि घर रहैं। कउनौ पूँछेसि-‘केत्ती उमिरि रहै हनुमान दादा केरि?’ रामफल फिरि सुरू हुइगे-‘अबही मुसकिल ते पैसठ केरि उमिरि भइ होई हमते पाँच साल छोट रहैं बखत आय गवा सरग सिधार गे। नामी पहेलवान रहैं-तोहार हनुमान दादा। अपनी जवानी मा कुस्ती लडै जाति रहैं तौ सदा जीति कै आवति रहैं। दौलतिपुर केरि असल दौलति तौ हनुमान भइयै रहैं। जस-जस उनका पौरुखु घटा तस-तस गठिया उनका तंग करै लागि रहैं। बिचरऊ जवानी मा बिधुर हुइगे रहैं। तब चन्दावती ते उनका परेम हुइगा,वइ चन्दावती ते बिहाव कीन्हेनि औ वहिका मेहेरुआ केरि जगह दीन्हेनि , फिरि चन्दावती सब तना उनके साथै तीस साल रहीं। चन्दावती उनकी बिरादरी कि न रहैं। तीस साल पहिले उनका परेम हुइगा रहै। हनुमान दादा बीस बिसुआ के कनवजिया औ चन्दावती गाँव कि तेलिनि। तबै चन्दावती क्यार गउना न भवा रहै। गाँव-म उनके मंसवा के मरै केरि खबर आयी रहै। चन्दावती वाकई-म चन्दै रहै। जो कोऊ याक दाँय द्याखै ऊ देखतै रहि जाय,बहुतै खबसूरत रहै चन्दावती।ऊ जमाना रहै जब दबंग बाँभन ठाकुर जउनि नीची जातिन केरि सुन्दरि बिटिया बहुरिया देखि लेति रहैं तौ वहिका जब चहै तब अपनी हवस क सिकार बनाय लेति रहै। तब गरीब परजन के घर की मेहेरुवन केरि कउनौ इज्जति न रहै।कउनौ कानून न रहै इनके ऊपर।चन्दावती के घरवाले चन्दावती के परेम ते बहुतै खुस भे रहै।’.....
‘ द्याखौ दादा सौ-सौ रुपया दच्छिना दीन जाय रहा है’ -मोलहे इसारा कीन्हेनि। ‘रामफल दादा समझायेनि- तेरहीवाले बाँभन आँय,इनका दुरिही ते पैलगी कीन्हेव। इनकी नजर ते बचिकै रहैक चही।‘ ’ सकटू पूछेनि -काहे दादा? ‘
‘ तुम यार यकदमै बउखल हौ,हियाँ आये हौ तेरही खाय ,सवालन केरि झडी लगाय दीन्हेव।‘
‘ सकटू भइया तुम तमाखू बनाओ-लेव चुनौटी पकरौ।‘ ’अबही तमाखू ?अब तौ भोजन के बादि तमाखू खायेव।‘ ’तमाखू कि महिमा तुम नही जानति हौ-सुनौ- कृष्न चले बैकुंठ को राधा पकरी बाँह |हियाँ तमाखू खाय लो हुआँ तमाखू नाहि।...कुछ समझ्यो,अबै टेम है, तब तक तमाखू बनि सकति है। जबतक खानदान के मान्य न खाय ले तबतक हमार नम्बर कइसे लागी।‘ ‘ठीक कहति हौ रामफल दादा।‘ ’कहिति तो हम ठीकै है,..... सुनति तो नही हौ। बनाओ। तमाखू बनाओ।‘ ‘तेरह बाँभन दान दच्छिना लइ कै चलि दीन्हेनि रहै।‘
महाबाँभन के पाँय छुइकै चन्दावती दायी अलग ते वहिका पाँच सौ रुपया दच्छिना दीन्हेनि। वहिकी आँखी चमकि गयी।वहु अपन दुनहू हाँथ ऊपर उठाय के आसिरबाद दीन्हेसि तीके तेरहौ बाँभन अपन हाथ उठाय कै आसीस दीन्हेनि। छोटकउनू महराज चाँदी की तस्तरी-म पान तमाखू ,इलायची,लौग लइकै आगे बढिकै सबका बिदा कीन्हेनि। दुइ ताँगा उनका लइ जाय खातिर पहिलेहे तयार रहै। दुनहू ताँगावाले भोजन कइ लीन्हेनि रहै। उनका केरावा दइ दीन गा रहै, अउरु घर की खातिर परसा बाँधि दीन गा रहै। तेरहौ बाँभन जब ताँगन-म बइठि लीन्हेनि-तब महाबाँभन के इसारे ते ताँगा हाँकि दीन गे। हनुमान दादा की तेरही-म ताँगन-म जुति कै आये दुनहू घोडवनौ केरि दाना- पानी-मेवा ते खुब सेवा कीन गइ रहै,सो वहू मस्त हुइगे रहै।
'''''धारावाहिक उपन्यास'''''
'''किस्त दो :चन्दावती कि नींद'''
बहुत थकि गय रहै चन्दावती।खटिया पर पहुडतै खन नीद आय गय-सब पुरानी बातै सनीमा तना यादि आवै लागीं।...तीस साल पहिले ,वहि दिन चन्दावती सकपहिता खातिर बथुई आनय गय रहै। गोहूँ के ख्यातन मा ई साल न मालुम कहाँ ते बथुई फाटि परी रहै। हाल यू कि जो नीके ते निकावा न जाय तौ पूरी गेहूँ कि फसल चौपट हुइ जाय। जाडे के दिन रहैं। उर्द कि फसल बढिया भइ रहै। चन्दावती अपनि लाल चुनरिया ओढे हनुमान दादा के ख्यात मा बथुई बिनती रहैं। हनुमान दादा अपने रहट पर कटहर के बिरवा के तरे हउदिया तीर बइठ रहैं। न चन्दावती उनका देखिस न वइ चन्दावती का। तब चन्दावती जवान रहै—सुन्दरी तो रहबै कीन। वहि दिन चन्दावती बथुई बीनै के साथ-अपनी तरंग मा जोर –जोर ते -नदि नारे न जाओ स्याम पइयाँ परी, नदि नारे जो जायो तो जइबै कियो बीच धारै न जाओ स्याम पइयाँ परी। बीच धारै जो जायो तो जइबे कियो ,वइ पारै न जाव स्याम पइयाँ परी। वइ पारै जो जायो तो जइबे कियो /सँग सवतिया न लाओ स्याम पइयाँ परी। -- यहै गाना गउती रहैं। हनुमान दादा तब हट्टे-कट्टे पहलवान रहैं। यहि गाना मा न मालुम कउनि बात रहै कि हनुमान दादा चन्दावती ते अपन जिउ हारिगे। जान पहिचान तो पहिलेहे ते रहै। गाँवन मा सब याक दुसरे के घर परिवार का बिना बताये जानि लेति है। वैसे कैइयो लँउडे वहिके पीछे परे रहै,लेकिन आजु हनुमान दादा वहिकी तरफ बढिगे ,जैसे राजा सांतनु जइसे मतसगन्धा की खुसबू ते वाहिकी वार खिंचि गये रहैं वही तना वहि बेरिया हनुमान दादा चन्दावती की तरफ खिंचिगे। युहु गाना उनका बहुतै नीक लागति रहै,जब चन्दावती गाना खतम कइ चुकी तब वहिके तीर पहुचि के पूछेनि- ‘को आय रे?’
चन्दावती सिटपिटाय गय।..फिरि सँभरि के बोली-‘पाँय लागी दादा, हम चन्दावती।’
‘हमरे ख्यात मा का कइ रही हौ?’
‘बथुई बीनिति है........’
‘बीनि.... लेव।’
‘बसि बहुति हुइगै सकपहिता भरेक...हुइगै ’
‘अरे अउरु बीनि लेव। का तुमका बथुई खातिर मना कइ रहेन है।’
‘बसि बहुति हुइगै’
‘तुम्हारि गउनई बहुतै नीकि है,तुम्हार गाना सुनिकै तो हमार जिउ जुडाय गवा।'
चन्दावती सरमाय गयीं,तिनुक नयन चमकाय के कहेनि-
‘कोऊ ते कहेव ना दादा!’
‘काहे?’
‘तुम तौ सबु जानति हौ,बेवा मेहेरुआ कहूँ गाना गाय सकती हैं।..हम तौ बाल-बिधवा हन। ...का करी भउजी जउनु बतायेनि वहै करिति है।’
‘अउरु का बतायेनि रहै भउजी?’
‘ सुर्ज बूडै वाले हैं।..अबही रोटी प्वावैक है। हमरे दद्दू का हमरेहे हाथे कि पनेथी नीकि लागति है।..कबहूँ फुरसत म बतइबे....,अच्छा पाँय लागी।’
चन्दावती चली गय ,लेकिन राम जानै का भवा वहिका गाना- नदि नारे न जाओ...हनुमान दादा के करेजे मा कहूँ भीतर तके समाय गवा रहै। बडी देर तके वइ वहै गाना मनहेम बार बार दोहरावति रहे। रेडियो के बडे सौखीन रहै। चहै ख्यात मा जाँय, चहै बाग मा ट्रांजिस्टर अक्सर अपने साथै लइ कै चलैं। आजु चन्दावती क्यार गाना उनका बेसुध कइगा ,रेडियो पर वइ यहै गाना सैकरन दफा सुनि चुके रहैं तेहूँ चन्दावती के गावै के तरीके मा कुछु अलगै नसा रहै जो जादू करति चला गवा। सोने जस वहिका रंगु ती पर लाल चुनरी ओढिके वा हरे भरे गोंहू के ख्यात मा बइठि बथुई बीनति रहै, मालुम होति रहै मानौ कउनिव सरग कि अपसरा उनके ख्यात मा उतरि आयी है।
खुबसूरत तो चन्दावती रहबै कीन रंगु रूपु अइस कि बँभनन ठकुरन के घर की सबै बिटिया मेहेरुआ वहिके आगे नौकरानी लागैं,बसि यू समझि लेव कि पूरे दौलतिपुर मा वसि सुन्दरी बिटेवा न रहै तब। अब वहिके घरमा तेलु प्यारै क्यार खानदानी काम सबु खतम हुइगा रहै बिजुली वाला कोल्हू बगल के गाँव सुमेरपुर मा लागि गवा रहै। अब चन्दावती के दद्दू मँजूरी करै लाग रहैं।दुइ बिगहा खेती मा गुजारा मुस्किल हुइगा रहै। तेहू भइसिया के दूध ते चन्दावती के घरमा खाय पियै की बहुत मुस्किल न रहै। सुमेरपुर मा चन्दावती बेही गयी रहैं मुला किस्मति क्यार खेलु द्याखौ अबही गउनव न भा रहै कि चन्दावती क्यार मंसवा हैजा-म खतम हुइगा। बडी दौड-भाग कीन्हेनि लखनऊ के मेडिकल कालिज तके लइगे लेकिन वहु बचि न पावा। फिरि ससुरारि वाले कबहूँ चन्दावती क्यार गउना न करायेनि याक दाँय चन्दावती के दद्दू सुमेरपुर जायके बिनती कीन्हेनि तेहूँ कुछु बात न बनी।चन्दावती के ससुर साफ-साफ कहेनि –‘संकर भइया, तुम्हार बहिनिया मनहूस है..बिहाव होतै अपने मंसवा का खायगै,..वहिते अब हमार कउनौ सरबन्ध नही है। हमरे लेखे हमरे लरिकवा के साथ यहौ रिस्ता मरिगवा। ’
चन्दावती के दद्दू बुढवा के बहुत हाथ पाँय जोरेनि लेकिन वहु टस ते मस न भवा। आखिरकार चन्दावती अपने मइकेहेम रहि गयीं,बाल बिधवा के खातिर अउरु कउनौ सहारा न रहै। गाँव कि बडी बूढी चन्दावती –क मनहूस कहै लागी रहैं, लेकिन खुसमिजाज रहै चन्दा। बिधवा जीवन के दुख ते यकदम अंजान ,अबही वहिकी लरिकई वाले सिकडी-गोट्टा-छुपी-छुपउव्वल ख्यालै वाले दिन रहै। अबही जवानी चढि रही रहै । बिहाव तो हुइगा रहै-मुला पति परमेसुर ते संपर्क न हुइ पावा रहै। हियाँ गाँव कि गुँइयन के साथ चन्दा मगन रहै। हुइ सकति है अकेलेम बइठिके रोवति होय,लेकिन गाँवमा कोऊ वहिका रोवति नही देखिसि। संकर अपनी बहिनी का बडे दुलार ते राखति रहैं। संकर कि दुलहिनि चन्दा ते घर के कामकाज करावै लागि रहै। चन्दा दौरि-दौरि सब काम करै लागि रहै। समझदार तौ वा रहबै कीन।
जउनी मेहेरुआ वहिते चिढती रहैं वइ चन्दा क्यार नाव बिगारि दीन्हेनि रहै। कउनौ चंडो कहै,कउनौ रंडो कहै तो कउनिव बुढिया रंडो चंडो नाव धरि दीन्हेसि रहै। दौलतिपुर मा नाव धरै केरि यह पुरानि परंपरा आय। बहरहाल चन्दावती कहै सुनै कि फिकिर न करति रहै, वा खुस रहै। दुसरे दिन हनुमान दादा संकर का बोलवायेनि। संकर घबराय गे ,काहेते वहु दादा ते एक हजार रुपया कर्जु लीन्हेसि रहै। संकर सकुचाति भये हनुमान दादा तीर पहुँचे।हनुमान दादा अपने चौतरा पर बइठ रहैं।
‘ दादा पाँय लागी।’
‘खुस रहौ।आओ,संकर! आओ।...कहौ का हाल चाल ?’
‘तुमरी किरपा ते सबु ठीक चलि रहा है।’
‘चन्दा के ससुरारि वाले का कहेनि?’
‘बुढवा कहेसि हमरे लरिका के साथै यह रिस्तेदारी खतम हुइगै।’
‘हाँ वहौ ठीक कहति है-जब जवान लरिका मरि गवा तो फिरि बहुरिया का घर मा कइसे राखै, चन्दा क्यार गउना?’
गउना कहाँ हुइ पावा रहै दादा।...गउने केरि सब तयारी कइ लीन रहै...कर्जौ हुइगा लेकिन चन्दा केरि किस्मति फूटि गय...का करी दादा।’
‘परेसान न हो संकर! जउनु सबु बिधाता स्वाचति है,तउनु करति है।तुलसी बाबा कहेनि है-होइहै सोइ जो राम रचि राखा.. ’
‘ठीकै कहति हौ दादा!..लेकिन अब हमरे ऊपर बहुति बडी जिम्मेदारी आय गय है।...अब तुमते का छिपायी दादा,..गाँव के कुछु सोहदे हमरी चन्दा कि ताक झाँक मा रहति हैं।..अब हम का करी,वहिका रूपुइ अइस है कि .. ’
‘यह तौ अच्छी बात है...कोई ठीक लरिका होय तौ...चन्दा क्यार दुबारा बिहाव करि देव।’
‘बिहाव करै वाला कउनौ नही है..सब मउज ले वाले है..बेवा ते बिहाव को करी?बडकऊ तेवारी क्यार कमलेस,मिसिरन क्यार बिनोद ई दुनहू चन्दावती के चक्कर मा हैं।’
‘..इनके दुनहू के तौ बिहाव हुइ चुके हैं..दुनहू लरिका मेहेरुआ वाले हैं।’
‘यहै तौ..का बताई?...कुछु समझिम नही आवति..’
हमरी मदति कि जरूरति होय तो बतायो..तुम कहौ तो तेवारी औ मिसिर ते बात करी।’
‘नाही दादा!..बात-क बतंगडु बनि जायी। चन्दा कि बदनामिव होई सेंति मेति,......कोई अउरि जतन करैक परी।’
‘या बात तो ठीक कहति हौ,संकर!..न होय तौ कहूँ अउरु दूसर बिहाव कइ देव।’
‘याक दाँय क्यार कर्जु तौ अबहीं निपटि नही पावा है।...फिरि जो हिम्मति करबौ करी तो दूसर लरिका कहाँ धरा है।’
‘कोई ताजुब नही है कि हमरी तना कउनौ बिधुर मिलि जाय।’
‘तुमरी तना कहाँ मिली..?’
‘काहे?’
‘अरे कहाँ तुम बाँभन देउता, कहाँ हम नीच जाति तेली।’
‘बात तो ठीक है लेकिन हमका कउनौ एतराज नही है।.जब हमरे घरमा वुइ बेमार रहै तब मालिस करै तुमरी दुलहिन के साथ चन्दा आवति रहै। हमका वा तबहे ते बडी नीकि लागति है,कबहूँ कोऊ ते कहा नही हम आजु तुमते बताइति है।...द्याखौ परेसानी तो हमहुक बहुति होई।.....लेकिन जउनु होई तउनु निपटा जायी।....पहिले तुम चन्दावती क्यार मनु लइ लेव,अपने घर मा राय मिलाय लेव। फिरि दुइ-तीन दिन मा जइस होय हमका चुप्पे बतायो।’
‘तुम्हार जस नीक मनई-बाँभन, हमका दिया लइकै ढूढे न मिली,यू तौ हम गरीब परजा पर बहुत उपकार होई।’
‘साफ बात या है कि तुमरी चन्दावती हमहुक बहुत नीकी लगती हैं...लेकिन अबहीं कोऊ गैर ते यह बात न कीन्हेव।’
‘ठीक है दादा।..पाँय लागी..’
‘खुस रहौ।..चन्दावती कि राय जरूर लइ लीन्हेव।’
‘ठीक है..’संकर मनहिम अपनि खुसी दबाये अपने घर की राह लीन्हेनि। संकर कमीज के खलीता ते बीडी निकारेनि तनिक रुकिकै बीडी सुलगायेनि औ खुसी की तरंग मा फिरि घर की तरफ चलि दीन्हेनि। आजु वहिके पाँव सीधे न परि रहे रहैं।
== बाहर के कड़ियाँ ==
* [http://awadh.org/2014/03/19/%E0%A4%9B%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%B8-%E0%A4%89%E0%A4%A0%E0%A5%80/ छपरा कस उठी!] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140818004807/http://awadh.org/2014/03/19/%e0%a4%9b%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b8-%e0%a4%89%e0%a4%a0%e0%a5%80/ |date=2014-08-18 }}
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}}
'''भारतेंदु मिश्र''' [[अवधी]] के यहि दौर के अहम गद्य लेखकन मा गिने जाति हैं। मिश्र जी का जनम ५ नवम्बर १९५९ का भा रहै। [[संस्कृत]] विषय मा एम. ए. करै के बादि उइ [[दिल्ली विश्वविद्यालय]] ते पी.एचडी. कीन्हेनि ।
==प्रमुख रचना==
'''कविता संग्रह- '''
* पारो(गीत-नवगीत)
* कलाय तस्मै नम: (सतसई)
* अभिनवगुप्तपादाचार्य(खंडकाव्य)
* जुगलबन्दी(गीत/नवगीत संकलन के सी.डी.)
* अनुभव की सीढी(भारतेन्दु मिश्र के गीत सर्जना-संपादन-डा.रश्मिशील)
'''शोध समीक्षा- '''
*अमरुशतक का साहित्यशास्त्रीय अध्ययन(शोध समीक्षा/पाठालोचन)
*भरतकालीन कलाएँ(शोध)
*समकालीन छन्द्प्रसंग(नवें दशक के छन्दोबद्ध कविता केरि समीक्षा)
*बलभद्र प्रसाद दीक्षित पढ़ीस
*त्रिलोचन शास्त्री
'''संपादित कृतियाँ- '''
*नवगीत एकादश सं.(ग्यारह नवगीतकारन क्यार संकलन)
'''उपन्यास- '''
*कुलांगना
*बालयोगी अष्टावक्र
'''नाटक-'''
*शास्त्रार्थ(नाटक)
*मरे हुए लोग
*लड़की की जात
*दिल्ली चलो।
'''कहानी संग्रह- '''
*खिडकी वाली सीट
'''अवधी रचनाएँ- '''
*कस परजवटि बिसारी(अवधी कविता तथा ललित निबन्ध)
*नई रोसनी (उपन्यास)
*चन्दावती(उपन्यास)
===भारतेंदु मिश्र द्वारा लिखे अवधी उपन्यास चंदावती क अंश :-===
'''पहली किस्त:''' '''दादा केरि तेरही--'''
'''ते'''रह बाँभन आय गे रहै। उनका अलग चउका लगावा गा रहै, नई तेरह धोती-अँगउछा-जनेऊ-थरिया-लोटिया-नए पाटा,तेरह तुलसी बाबा वाली रामायन के गुटका अउरु तेरह संख बजार ते मँगवाये गे रहै। आस पास कि जवार ते चुने भये तेरह बाँभन नेउते गे रहै। उनकी सकल देखतै बनि परति रहै-ग्वार सुन्दर चोटइयाधारी पंडित -चन्दन टीका लगाये,ई बिधि सजे रहै कि मानौ सीध-म-सीध सरगै ते उतरि के आए होंय । गाँव के भकुआ उनका आँखी फारि फारि द्याखै लाग।छोटकउनू महराज पीतर के थारा मा सबके पाँय धोयेनि,सिवपरसाद अउरु चन्दावती दायी नये अँगउछा ते सबके पाँय पोछेनि। मोलहे उनका देखि कै सकटू ते कहेनि-‘ भाई,द्याखौ ई कतने सुघर पंडित आये है।आँखी जुडाय गयी,‘हाँ मोलहे भाई,किसमत अच्छी रहै हनुमान दादा केरि ई सब पंडित उनकी खातिर सरग केरि सीढी बनइहै।’
‘ठीक कहति हौ भइया,उनका सरग जरूर मिली।देउता रहै हनुमान दादा,सब उनकी करनी का परताप है-बहुत बडे मनई रहै वइ।’ ‘ अब बँभनन ट्वाला मा कउनौ वइस नामी मनई नही बचा है।’ ‘हमतौ कहिति है दुइ -चारि- दस गाँवन मा वइस मनई ढूँडे न मिली।’
हवन क्यार धुआँ सब तन फैलि गवा रहै। अगियारि होयेके बादि संखु-घंटा बाजै लाग। लीपे- पोते आँगन मा तेरहौ बँभनन केरी चउकी सजाय दीन्ही गयी रहै। सब देउता,नौगिरह, गइया-कउआ-कूकुर -चीटी अउरु पंचतत्वन खातिर भोग लगाय दीन गा रहै । अब तेरहौ बाँभन जीमै लाग रहैं।‘वाह चन्दावती दायी,अतना बढिया इंतिजाम,अतना सुन्दर भोजन बरसन बादि मिला है।..हनुमान दादा केरि आत्मा सरग ते देखि रही है तुमका,--बहुत असीस दै रही होई ।’ तेरही वाले बँभनन क्यार मुखिया कहेसि। चन्दावती केरी आँखी भरि आयीं।अपने अँचरे मा अपन मुँहु लुकाय लीन्हेनि।सब मौजूद मनई-मेहेरुआ तरह-तरह की बातै बनावै लाग रहैं। रामफल दादा दूरि बरोठे म बइठ रहैं। वइ सुरू हुइगे,भकुआ मुँहु फैलाय के सुनै लाग-‘प.रामदीन सुकुल उर्फ हनुमान दादा दौलतिपुर केरि नाक रहैं।उनका बडा पौरुखु रहै। दस-पाँच क्वास तके गाँव जवारि मा हनुमान दादा क्यार रुतबा रहै। दौलति पुर क्यार ई सबते बडे किसान रहैं। बसि इनहेन के दुआरे टक्टर ठाढ है।’
दौलतिपुर मा कोई पचास घर हुइहै। तेली,तम्बोली,नाऊ,कहार,धोबी,पासी,चमार,मुरऊ,ठाकुर जैसी सब जातिन क्यार घर दौलतिपुर मा है।गाँव मा बँभनन के कुल जमा तीनि घर रहैं। कउनौ पूँछेसि-‘केत्ती उमिरि रहै हनुमान दादा केरि?’ रामफल फिरि सुरू हुइगे-‘अबही मुसकिल ते पैसठ केरि उमिरि भइ होई हमते पाँच साल छोट रहैं बखत आय गवा सरग सिधार गे। नामी पहेलवान रहैं-तोहार हनुमान दादा। अपनी जवानी मा कुस्ती लडै जाति रहैं तौ सदा जीति कै आवति रहैं। दौलतिपुर केरि असल दौलति तौ हनुमान भइयै रहैं। जस-जस उनका पौरुखु घटा तस-तस गठिया उनका तंग करै लागि रहैं। बिचरऊ जवानी मा बिधुर हुइगे रहैं। तब चन्दावती ते उनका परेम हुइगा,वइ चन्दावती ते बिहाव कीन्हेनि औ वहिका मेहेरुआ केरि जगह दीन्हेनि , फिरि चन्दावती सब तना उनके साथै तीस साल रहीं। चन्दावती उनकी बिरादरी कि न रहैं। तीस साल पहिले उनका परेम हुइगा रहै। हनुमान दादा बीस बिसुआ के कनवजिया औ चन्दावती गाँव कि तेलिनि। तबै चन्दावती क्यार गउना न भवा रहै। गाँव-म उनके मंसवा के मरै केरि खबर आयी रहै। चन्दावती वाकई-म चन्दै रहै। जो कोऊ याक दाँय द्याखै ऊ देखतै रहि जाय,बहुतै खबसूरत रहै चन्दावती।ऊ जमाना रहै जब दबंग बाँभन ठाकुर जउनि नीची जातिन केरि सुन्दरि बिटिया बहुरिया देखि लेति रहैं तौ वहिका जब चहै तब अपनी हवस क सिकार बनाय लेति रहै। तब गरीब परजन के घर की मेहेरुवन केरि कउनौ इज्जति न रहै।कउनौ कानून न रहै इनके ऊपर।चन्दावती के घरवाले चन्दावती के परेम ते बहुतै खुस भे रहै।’.....
‘ द्याखौ दादा सौ-सौ रुपया दच्छिना दीन जाय रहा है’ -मोलहे इसारा कीन्हेनि। ‘रामफल दादा समझायेनि- तेरहीवाले बाँभन आँय,इनका दुरिही ते पैलगी कीन्हेव। इनकी नजर ते बचिकै रहैक चही।‘ ’ सकटू पूछेनि -काहे दादा? ‘
‘ तुम यार यकदमै बउखल हौ,हियाँ आये हौ तेरही खाय ,सवालन केरि झडी लगाय दीन्हेव।‘
‘ सकटू भइया तुम तमाखू बनाओ-लेव चुनौटी पकरौ।‘ ’अबही तमाखू ?अब तौ भोजन के बादि तमाखू खायेव।‘ ’तमाखू कि महिमा तुम नही जानति हौ-सुनौ- कृष्न चले बैकुंठ को राधा पकरी बाँह |हियाँ तमाखू खाय लो हुआँ तमाखू नाहि।...कुछ समझ्यो,अबै टेम है, तब तक तमाखू बनि सकति है। जबतक खानदान के मान्य न खाय ले तबतक हमार नम्बर कइसे लागी।‘ ‘ठीक कहति हौ रामफल दादा।‘ ’कहिति तो हम ठीकै है,..... सुनति तो नही हौ। बनाओ। तमाखू बनाओ।‘ ‘तेरह बाँभन दान दच्छिना लइ कै चलि दीन्हेनि रहै।‘
महाबाँभन के पाँय छुइकै चन्दावती दायी अलग ते वहिका पाँच सौ रुपया दच्छिना दीन्हेनि। वहिकी आँखी चमकि गयी।वहु अपन दुनहू हाँथ ऊपर उठाय के आसिरबाद दीन्हेसि तीके तेरहौ बाँभन अपन हाथ उठाय कै आसीस दीन्हेनि। छोटकउनू महराज चाँदी की तस्तरी-म पान तमाखू ,इलायची,लौग लइकै आगे बढिकै सबका बिदा कीन्हेनि। दुइ ताँगा उनका लइ जाय खातिर पहिलेहे तयार रहै। दुनहू ताँगावाले भोजन कइ लीन्हेनि रहै। उनका केरावा दइ दीन गा रहै, अउरु घर की खातिर परसा बाँधि दीन गा रहै। तेरहौ बाँभन जब ताँगन-म बइठि लीन्हेनि-तब महाबाँभन के इसारे ते ताँगा हाँकि दीन गे। हनुमान दादा की तेरही-म ताँगन-म जुति कै आये दुनहू घोडवनौ केरि दाना- पानी-मेवा ते खुब सेवा कीन गइ रहै,सो वहू मस्त हुइगे रहै।
'''''धारावाहिक उपन्यास'''''
'''किस्त दो :चन्दावती कि नींद'''
बहुत थकि गय रहै चन्दावती।खटिया पर पहुडतै खन नीद आय गय-सब पुरानी बातै सनीमा तना यादि आवै लागीं।...तीस साल पहिले ,वहि दिन चन्दावती सकपहिता खातिर बथुई आनय गय रहै। गोहूँ के ख्यातन मा ई साल न मालुम कहाँ ते बथुई फाटि परी रहै। हाल यू कि जो नीके ते निकावा न जाय तौ पूरी गेहूँ कि फसल चौपट हुइ जाय। जाडे के दिन रहैं। उर्द कि फसल बढिया भइ रहै। चन्दावती अपनि लाल चुनरिया ओढे हनुमान दादा के ख्यात मा बथुई बिनती रहैं। हनुमान दादा अपने रहट पर कटहर के बिरवा के तरे हउदिया तीर बइठ रहैं। न चन्दावती उनका देखिस न वइ चन्दावती का। तब चन्दावती जवान रहै—सुन्दरी तो रहबै कीन। वहि दिन चन्दावती बथुई बीनै के साथ-अपनी तरंग मा जोर –जोर ते -नदि नारे न जाओ स्याम पइयाँ परी, नदि नारे जो जायो तो जइबै कियो बीच धारै न जाओ स्याम पइयाँ परी। बीच धारै जो जायो तो जइबे कियो ,वइ पारै न जाव स्याम पइयाँ परी। वइ पारै जो जायो तो जइबे कियो /सँग सवतिया न लाओ स्याम पइयाँ परी। -- यहै गाना गउती रहैं। हनुमान दादा तब हट्टे-कट्टे पहलवान रहैं। यहि गाना मा न मालुम कउनि बात रहै कि हनुमान दादा चन्दावती ते अपन जिउ हारिगे। जान पहिचान तो पहिलेहे ते रहै। गाँवन मा सब याक दुसरे के घर परिवार का बिना बताये जानि लेति है। वैसे कैइयो लँउडे वहिके पीछे परे रहै,लेकिन आजु हनुमान दादा वहिकी तरफ बढिगे ,जैसे राजा सांतनु जइसे मतसगन्धा की खुसबू ते वाहिकी वार खिंचि गये रहैं वही तना वहि बेरिया हनुमान दादा चन्दावती की तरफ खिंचिगे। युहु गाना उनका बहुतै नीक लागति रहै,जब चन्दावती गाना खतम कइ चुकी तब वहिके तीर पहुचि के पूछेनि- ‘को आय रे?’
चन्दावती सिटपिटाय गय।..फिरि सँभरि के बोली-‘पाँय लागी दादा, हम चन्दावती।’
‘हमरे ख्यात मा का कइ रही हौ?’
‘बथुई बीनिति है........’
‘बीनि.... लेव।’
‘बसि बहुति हुइगै सकपहिता भरेक...हुइगै ’
‘अरे अउरु बीनि लेव। का तुमका बथुई खातिर मना कइ रहेन है।’
‘बसि बहुति हुइगै’
‘तुम्हारि गउनई बहुतै नीकि है,तुम्हार गाना सुनिकै तो हमार जिउ जुडाय गवा।'
चन्दावती सरमाय गयीं,तिनुक नयन चमकाय के कहेनि-
‘कोऊ ते कहेव ना दादा!’
‘काहे?’
‘तुम तौ सबु जानति हौ,बेवा मेहेरुआ कहूँ गाना गाय सकती हैं।..हम तौ बाल-बिधवा हन। ...का करी भउजी जउनु बतायेनि वहै करिति है।’
‘अउरु का बतायेनि रहै भउजी?’
‘ सुर्ज बूडै वाले हैं।..अबही रोटी प्वावैक है। हमरे दद्दू का हमरेहे हाथे कि पनेथी नीकि लागति है।..कबहूँ फुरसत म बतइबे....,अच्छा पाँय लागी।’
चन्दावती चली गय ,लेकिन राम जानै का भवा वहिका गाना- नदि नारे न जाओ...हनुमान दादा के करेजे मा कहूँ भीतर तके समाय गवा रहै। बडी देर तके वइ वहै गाना मनहेम बार बार दोहरावति रहे। रेडियो के बडे सौखीन रहै। चहै ख्यात मा जाँय, चहै बाग मा ट्रांजिस्टर अक्सर अपने साथै लइ कै चलैं। आजु चन्दावती क्यार गाना उनका बेसुध कइगा ,रेडियो पर वइ यहै गाना सैकरन दफा सुनि चुके रहैं तेहूँ चन्दावती के गावै के तरीके मा कुछु अलगै नसा रहै जो जादू करति चला गवा। सोने जस वहिका रंगु ती पर लाल चुनरी ओढिके वा हरे भरे गोंहू के ख्यात मा बइठि बथुई बीनति रहै, मालुम होति रहै मानौ कउनिव सरग कि अपसरा उनके ख्यात मा उतरि आयी है।
खुबसूरत तो चन्दावती रहबै कीन रंगु रूपु अइस कि बँभनन ठकुरन के घर की सबै बिटिया मेहेरुआ वहिके आगे नौकरानी लागैं,बसि यू समझि लेव कि पूरे दौलतिपुर मा वसि सुन्दरी बिटेवा न रहै तब। अब वहिके घरमा तेलु प्यारै क्यार खानदानी काम सबु खतम हुइगा रहै बिजुली वाला कोल्हू बगल के गाँव सुमेरपुर मा लागि गवा रहै। अब चन्दावती के दद्दू मँजूरी करै लाग रहैं।दुइ बिगहा खेती मा गुजारा मुस्किल हुइगा रहै। तेहू भइसिया के दूध ते चन्दावती के घरमा खाय पियै की बहुत मुस्किल न रहै। सुमेरपुर मा चन्दावती बेही गयी रहैं मुला किस्मति क्यार खेलु द्याखौ अबही गउनव न भा रहै कि चन्दावती क्यार मंसवा हैजा-म खतम हुइगा। बडी दौड-भाग कीन्हेनि लखनऊ के मेडिकल कालिज तके लइगे लेकिन वहु बचि न पावा। फिरि ससुरारि वाले कबहूँ चन्दावती क्यार गउना न करायेनि याक दाँय चन्दावती के दद्दू सुमेरपुर जायके बिनती कीन्हेनि तेहूँ कुछु बात न बनी।चन्दावती के ससुर साफ-साफ कहेनि –‘संकर भइया, तुम्हार बहिनिया मनहूस है..बिहाव होतै अपने मंसवा का खायगै,..वहिते अब हमार कउनौ सरबन्ध नही है। हमरे लेखे हमरे लरिकवा के साथ यहौ रिस्ता मरिगवा। ’
चन्दावती के दद्दू बुढवा के बहुत हाथ पाँय जोरेनि लेकिन वहु टस ते मस न भवा। आखिरकार चन्दावती अपने मइकेहेम रहि गयीं,बाल बिधवा के खातिर अउरु कउनौ सहारा न रहै। गाँव कि बडी बूढी चन्दावती –क मनहूस कहै लागी रहैं, लेकिन खुसमिजाज रहै चन्दा। बिधवा जीवन के दुख ते यकदम अंजान ,अबही वहिकी लरिकई वाले सिकडी-गोट्टा-छुपी-छुपउव्वल ख्यालै वाले दिन रहै। अबही जवानी चढि रही रहै । बिहाव तो हुइगा रहै-मुला पति परमेसुर ते संपर्क न हुइ पावा रहै। हियाँ गाँव कि गुँइयन के साथ चन्दा मगन रहै। हुइ सकति है अकेलेम बइठिके रोवति होय,लेकिन गाँवमा कोऊ वहिका रोवति नही देखिसि। संकर अपनी बहिनी का बडे दुलार ते राखति रहैं। संकर कि दुलहिनि चन्दा ते घर के कामकाज करावै लागि रहै। चन्दा दौरि-दौरि सब काम करै लागि रहै। समझदार तौ वा रहबै कीन।
जउनी मेहेरुआ वहिते चिढती रहैं वइ चन्दा क्यार नाव बिगारि दीन्हेनि रहै। कउनौ चंडो कहै,कउनौ रंडो कहै तो कउनिव बुढिया रंडो चंडो नाव धरि दीन्हेसि रहै। दौलतिपुर मा नाव धरै केरि यह पुरानि परंपरा आय। बहरहाल चन्दावती कहै सुनै कि फिकिर न करति रहै, वा खुस रहै। दुसरे दिन हनुमान दादा संकर का बोलवायेनि। संकर घबराय गे ,काहेते वहु दादा ते एक हजार रुपया कर्जु लीन्हेसि रहै। संकर सकुचाति भये हनुमान दादा तीर पहुँचे।हनुमान दादा अपने चौतरा पर बइठ रहैं।
‘ दादा पाँय लागी।’
‘खुस रहौ।आओ,संकर! आओ।...कहौ का हाल चाल ?’
‘तुमरी किरपा ते सबु ठीक चलि रहा है।’
‘चन्दा के ससुरारि वाले का कहेनि?’
‘बुढवा कहेसि हमरे लरिका के साथै यह रिस्तेदारी खतम हुइगै।’
‘हाँ वहौ ठीक कहति है-जब जवान लरिका मरि गवा तो फिरि बहुरिया का घर मा कइसे राखै, चन्दा क्यार गउना?’
गउना कहाँ हुइ पावा रहै दादा।...गउने केरि सब तयारी कइ लीन रहै...कर्जौ हुइगा लेकिन चन्दा केरि किस्मति फूटि गय...का करी दादा।’
‘परेसान न हो संकर! जउनु सबु बिधाता स्वाचति है,तउनु करति है।तुलसी बाबा कहेनि है-होइहै सोइ जो राम रचि राखा.. ’
‘ठीकै कहति हौ दादा!..लेकिन अब हमरे ऊपर बहुति बडी जिम्मेदारी आय गय है।...अब तुमते का छिपायी दादा,..गाँव के कुछु सोहदे हमरी चन्दा कि ताक झाँक मा रहति हैं।..अब हम का करी,वहिका रूपुइ अइस है कि .. ’
‘यह तौ अच्छी बात है...कोई ठीक लरिका होय तौ...चन्दा क्यार दुबारा बिहाव करि देव।’
‘बिहाव करै वाला कउनौ नही है..सब मउज ले वाले है..बेवा ते बिहाव को करी?बडकऊ तेवारी क्यार कमलेस,मिसिरन क्यार बिनोद ई दुनहू चन्दावती के चक्कर मा हैं।’
‘..इनके दुनहू के तौ बिहाव हुइ चुके हैं..दुनहू लरिका मेहेरुआ वाले हैं।’
‘यहै तौ..का बताई?...कुछु समझिम नही आवति..’
हमरी मदति कि जरूरति होय तो बतायो..तुम कहौ तो तेवारी औ मिसिर ते बात करी।’
‘नाही दादा!..बात-क बतंगडु बनि जायी। चन्दा कि बदनामिव होई सेंति मेति,......कोई अउरि जतन करैक परी।’
‘या बात तो ठीक कहति हौ,संकर!..न होय तौ कहूँ अउरु दूसर बिहाव कइ देव।’
‘याक दाँय क्यार कर्जु तौ अबहीं निपटि नही पावा है।...फिरि जो हिम्मति करबौ करी तो दूसर लरिका कहाँ धरा है।’
‘कोई ताजुब नही है कि हमरी तना कउनौ बिधुर मिलि जाय।’
‘तुमरी तना कहाँ मिली..?’
‘काहे?’
‘अरे कहाँ तुम बाँभन देउता, कहाँ हम नीच जाति तेली।’
‘बात तो ठीक है लेकिन हमका कउनौ एतराज नही है।.जब हमरे घरमा वुइ बेमार रहै तब मालिस करै तुमरी दुलहिन के साथ चन्दा आवति रहै। हमका वा तबहे ते बडी नीकि लागति है,कबहूँ कोऊ ते कहा नही हम आजु तुमते बताइति है।...द्याखौ परेसानी तो हमहुक बहुति होई।.....लेकिन जउनु होई तउनु निपटा जायी।....पहिले तुम चन्दावती क्यार मनु लइ लेव,अपने घर मा राय मिलाय लेव। फिरि दुइ-तीन दिन मा जइस होय हमका चुप्पे बतायो।’
‘तुम्हार जस नीक मनई-बाँभन, हमका दिया लइकै ढूढे न मिली,यू तौ हम गरीब परजा पर बहुत उपकार होई।’
‘साफ बात या है कि तुमरी चन्दावती हमहुक बहुत नीकी लगती हैं...लेकिन अबहीं कोऊ गैर ते यह बात न कीन्हेव।’
‘ठीक है दादा।..पाँय लागी..’
‘खुस रहौ।..चन्दावती कि राय जरूर लइ लीन्हेव।’
‘ठीक है..’संकर मनहिम अपनि खुसी दबाये अपने घर की राह लीन्हेनि। संकर कमीज के खलीता ते बीडी निकारेनि तनिक रुकिकै बीडी सुलगायेनि औ खुसी की तरंग मा फिरि घर की तरफ चलि दीन्हेनि। आजु वहिके पाँव सीधे न परि रहे रहैं।
== बाहर के कड़ियाँ ==
* [http://awadh.org/2014/03/19/%E0%A4%9B%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%B8-%E0%A4%89%E0%A4%A0%E0%A5%80/ छपरा कस उठी!] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140818004807/http://awadh.org/2014/03/19/%e0%a4%9b%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b8-%e0%a4%89%e0%a4%a0%e0%a5%80/ |date=2014-08-18 }}
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'''रूस''' ([[रूसी भाषा|रूसी]]: ''Росси́йская Федера́ция / रोस्सिज्स्काया फ़ेदेरात्सिया'', ''Росси́я / रोस्सिया'') [[पूरुबी यूरोप]] औ [[उत्तर एशिया]] म एक्ठु बड़ा देस होय। कुल १,७०,७५,४०० किमी<sup>२</sup> कय क्षेत्रफल वाला इ देस विश्व का सब्से बड़ा देस होय। आकार कय नज़र से इ [[भारत]] से पाँच गुना ढेर हय। यतना बडा देस होवैक बावजुदौ रूस कय जनसंख्या विश्व में सतवां जगह पय है जवने कै नाते रूस कय जनसंख्या घनत्व विश्व में सब्से कम में से है। रूस कय ढेर जनसंख्या यकरे यूरोपीय भाग में बसा है। यकर राजधानी [[मॉस्को]] होय। रूस कय प्रधान भाषा औ राजभाषा [[रूसी भाषा|रूसी]] होय।
==सन्दर्भ==
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| era = {{circa}} 1500–600 BCE (Vedic Sanskrit);<ref>{{cite book|author=Uta Reinöhl |title=Grammaticalization and the Rise of Configurationality in Indo-Aryan |url=https://books.google.com/books?id=nR_4CwAAQBAJ |year=2016 |publisher=Oxford University Press| isbn=978-0-19-873666-0|pages=xiv, 1–16}}</ref> <br /> 700 BCE – 1350 CE (Classical Sanskrit)<ref>{{harvnb|Masica|1993|p=55}}: "Thus Classical Sanskrit, fixed by Panini's grammar in probably the fourth century BC on the basis of a class dialect (and preceding grammatical tradition) of probably the seventh century BC, had its greatest literary flowering in the first millennium AD and even later, much of it therefore a full thousand years after the stage of the language it ostensibly represents."</ref>
| script = [[देवनागरी लिपि]] (वर्तमान काल). मूलतः मौखिक। पहिली सताब्दी ईसापूर्व ते [[ब्राह्मी लिपि]], अउर अन्य ब्राह्मी परिवार की लिपिन मा लेखन प्रारम्भ भा।{{efn|name=Salomon1998-epigraphy-book|"In conclusion, there are strong systemic and paleographic indications that the Brahmi script derived from a Semitic prototype, which, mainly on historical grounds, is most likely to have been Aramaic. However, the details of this problem remain to be worked out, and in any case, it is unlikely that a complete letter-by-letter derivation will ever be possible; for Brahmi may have been more of an adaptation and remodeling, rather than a direct derivation, of the presumptive Semitic prototype, perhaps under the influence of a preexisting Indian tradition of phonetic analysis. However, the Semitic hypothesis is not so strong as to rule out the remote possibility that further discoveries could drastically change the picture. In particular, a relationship of some kind, probably partial or indirect, with the protohistoric Indus Valley script should not be considered entirely out of the question." {{harvnb|Salomon|1998|p=30}} }}<ref name="JainCardona2007-script1">{{cite book|last=Jain|first=Dhanesh |editor=George Cardona |editor2=Dhanesh Jain |title=The Indo-Aryan Languages|chapter-url=https://books.google.com/books?id=OtCPAgAAQBAJ&pg=PA51|year=2007|publisher=Routledge|isbn=978-1-135-79711-9|pages=47–66, 51|chapter=Sociolinguistics of the Indo-Aryan languages |quote=In the history of Indo-Aryan, writing was a later development and its adoption has been slow even in modern times. The first written word comes to us through Asokan inscriptions dating back to the third century BC. Originally, Brahmi was used to write Prakrit (MIA); for Sanskrit (OIA) it was used only four centuries later (Masica 1991: 135). The MIA traditions of Buddhist and Jain texts show greater regard for the written word than the OIA Brahminical tradition, though writing was available to Old Indo-Aryans.}}</ref><ref name="JainCardona2007-script2">{{cite book |last=Salomon |first=Richard |author-link=Richard G. Salomon (professor of Asian studies) |editor=George Cardona |editor2=Dhanesh Jain|title=The Indo-Aryan Languages |chapter-url=https://books.google.com/books?id=OtCPAgAAQBAJ&pg=PA67 |year=2007 |publisher=Routledge |isbn=978-1-135-79711-9 |pages=67–102 |chapter=The Writing Systems of the Indo-Aryan Languages |quote=Although in modern usage Sanskrit is most commonly written or printed in Nagari, in theory, it can be represented by virtually any of the main Brahmi-based scripts, and in practice it often is. Thus scripts such as Gujarati, Bangla, and Oriya, as well as the major south Indian scripts, traditionally have been and often still are used in their proper territories for writing Sanskrit. Sanskrit, in other words, is not inherently linked to any particular script, although it does have a special historical connection with Nagari.}}</ref>
| nation = India (state-additional official){{Efn|It is one of 22 [[Eighth Schedule to the Constitution of India|Eighth Schedule languages]] for which the Constitution mandates development.}}
*[[Himachal Pradesh]]
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'''संस्कृत''' भारत के एक शास्त्रीय भाषा है। यहिका '''देववाणी''' अउर '''सुरभारतिउ ''' कहा जात है। या दुनिया के सबते पुरानी उल्लिखित भाषन मा गिनी जाति है। या भाषा [[भारत-यूरोपीय भाषा परिवार]] की शाखा भारतीय आर्यभाषा परिवार ते संबद्ध है। संस्कृत [[हिंदू धर्म]] मा पवित्र भाषा मानी जाति है। यई भाषा मा हिंदू, बौद्ध अउर जैन दर्शनन के सास्त्र लिखे गे हैं। प्राचीन अउर मध्यकालीन दक्षिणी एशिया मा संपर्क भाषा के रूप मा यहै भाषा बैपरी जाति रहै। जब ई भाषा का परचार दक्षिणपूरब एशिया, पूरबी एशिया अउर मध्य एशिया मा भा तब या भाषा हुँआ के उच्च वर्ग के अउर धरम करम के भाषा बनि गै, अउर तो अउर हुआँ हिंदू अउर बौद्ध धर्मन के परचारौ मा मदद कीन्हेसि।
==सन्दर्भ==
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| script = [[देवनागरी लिपि]] (वर्तमान काल). मूलतः मौखिक। पहिली सताब्दी ईसापूर्व ते [[ब्राह्मी लिपि]], अउर अन्य ब्राह्मी परिवार की लिपिन मा लेखन प्रारम्भ भा।{{efn|name=Salomon1998-epigraphy-book|"In conclusion, there are strong systemic and paleographic indications that the Brahmi script derived from a Semitic prototype, which, mainly on historical grounds, is most likely to have been Aramaic. However, the details of this problem remain to be worked out, and in any case, it is unlikely that a complete letter-by-letter derivation will ever be possible; for Brahmi may have been more of an adaptation and remodeling, rather than a direct derivation, of the presumptive Semitic prototype, perhaps under the influence of a preexisting Indian tradition of phonetic analysis. However, the Semitic hypothesis is not so strong as to rule out the remote possibility that further discoveries could drastically change the picture. In particular, a relationship of some kind, probably partial or indirect, with the protohistoric Indus Valley script should not be considered entirely out of the question." {{harvnb|Salomon|1998|p=30}} }}<ref name="JainCardona2007-script1">{{cite book|last=Jain|first=Dhanesh |editor=George Cardona |editor2=Dhanesh Jain |title=The Indo-Aryan Languages|chapter-url=https://books.google.com/books?id=OtCPAgAAQBAJ&pg=PA51|year=2007|publisher=Routledge|isbn=978-1-135-79711-9|pages=47–66, 51|chapter=Sociolinguistics of the Indo-Aryan languages |quote=In the history of Indo-Aryan, writing was a later development and its adoption has been slow even in modern times. The first written word comes to us through Asokan inscriptions dating back to the third century BC. Originally, Brahmi was used to write Prakrit (MIA); for Sanskrit (OIA) it was used only four centuries later (Masica 1991: 135). The MIA traditions of Buddhist and Jain texts show greater regard for the written word than the OIA Brahminical tradition, though writing was available to Old Indo-Aryans.}}</ref><ref name="JainCardona2007-script2">{{cite book |last=Salomon |first=Richard |author-link=Richard G. Salomon (professor of Asian studies) |editor=George Cardona |editor2=Dhanesh Jain|title=The Indo-Aryan Languages |chapter-url=https://books.google.com/books?id=OtCPAgAAQBAJ&pg=PA67 |year=2007 |publisher=Routledge |isbn=978-1-135-79711-9 |pages=67–102 |chapter=The Writing Systems of the Indo-Aryan Languages |quote=Although in modern usage Sanskrit is most commonly written or printed in Nagari, in theory, it can be represented by virtually any of the main Brahmi-based scripts, and in practice it often is. Thus scripts such as Gujarati, Bangla, and Oriya, as well as the major south Indian scripts, traditionally have been and often still are used in their proper territories for writing Sanskrit. Sanskrit, in other words, is not inherently linked to any particular script, although it does have a special historical connection with Nagari.}}</ref>
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*[[Himachal Pradesh]]
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'''संस्कृत''' भारत के एक शास्त्रीय भाषा है। यहिका '''देववाणी''' अउर '''सुरभारतिउ ''' कहा जात है। या दुनिया के सबते पुरानी उल्लिखित भाषन मा गिनी जाति है। या भाषा [[भारत-यूरोपीय भाषा परिवार]] की शाखा भारतीय आर्यभाषा परिवार ते संबद्ध है। संस्कृत [[हिंदू धर्म]] मा पवित्र भाषा मानी जाति है। यई भाषा मा हिंदू, बौद्ध अउर जैन दर्शनन के सास्त्र लिखे गे हैं। प्राचीन अउर मध्यकालीन दक्षिणी एशिया मा संपर्क भाषा के रूप मा यहै भाषा बैपरी जाति रहै। जब ई भाषा का परचार दक्षिणपूरब एशिया, पूरबी एशिया अउर मध्य एशिया मा भा तब या भाषा हुँआ के उच्च वर्ग के अउर धरम करम के भाषा बनि गै, अउर तो अउर हुआँ हिंदू अउर बौद्ध धर्मन के परचारौ मा मदद कीन्हेसि।
==सन्दर्भ==
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}}
'''कैटलिन विलो ओल्सन मैकएलहेनी''' (जन्म 18 अगस्त, 1975) एक अमेरिकी अभिनेत्री हैं। उइ लॉस एंजिल्स मा संडे कंपनी नाम के एक इंप्रोवाइजेशनल थिएटर अऊर स्कूल ग्राउंडलिंग्स मा अपन करियर शुरू किहिन। एफएक्स कॉमेडी श्रृंखला ''इट्स ऑलवेज सनी इन फिलाडेल्फिया'' (2005-वर्तमान) मा डेआंड्रा "स्वीट डी" रेनॉल्ड्स के रूप मा कास्ट कीन जाय से पहिले उइ कई टेलीविजन श्रृंखला मा मामूली भूमिका अदा किहिन।
ओल्सन फॉक्स कॉमेडी श्रृंखला ''द मिक'' (2017–2018) मा मैकेंजी "मिकी" मोल्ंग के रूप मा अऊर क्विबी कॉमेडी श्रृंखला ''फ्लिप्ड'' (2020) मा क्रिकेट मेल्फी के रूप मा अभिनय किहिन जेहिसे उनका लघुरूप हास्य अउर नाटक मा अभूतपूर्व अभिनेत्री का प्राइम टाइम एमी पुरस्कार मिला। उ ''लीप ईयर'' (2010), ''द हीट'' (2013), ''वेकेशन'' (2015), ''फाइंडिंग डोरी'' (2016) अऊर ''एरिज़ोना'' (2018) सहित फिल्मन मा काम किहिन हैं। 2022 अऊर 2024 मा, उ एचबीओ के ''हैक्स'' मा डीजे वैंस के रूप मा अपनी भूमिका के लिए एक कॉमेडी सीरीज मा उत्कृष्ट अतिथि अभिनेत्री के लिए एमी नामांकन अर्जित किहिन। </link><sup class="noprint Inline-Template Template-Fact" style="white-space:nowrap;">[ ''<nowiki><span title="This claim needs references to reliable sources. (July 2024)">उद्धरण चाही</span></nowiki>'' ]</sup>
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'''कैटलिन विलो ओल्सन मैकएलहेनी''' (जन्म 18 अगस्त, 1975) एक अमेरिकी अभिनेत्री हैं। उइ लॉस एंजिल्स मा संडे कंपनी नाम के एक इंप्रोवाइजेशनल थिएटर अऊर स्कूल ग्राउंडलिंग्स मा अपन करियर शुरू किहिन। एफएक्स कॉमेडी श्रृंखला ''इट्स ऑलवेज सनी इन फिलाडेल्फिया'' (2005-वर्तमान) मा डेआंड्रा "स्वीट डी" रेनॉल्ड्स के रूप मा कास्ट कीन जाय से पहिले उइ कई टेलीविजन श्रृंखला मा मामूली भूमिका अदा किहिन।
ओल्सन फॉक्स कॉमेडी श्रृंखला ''द मिक'' (2017–2018) मा मैकेंजी "मिकी" मोल्ंग के रूप मा अऊर क्विबी कॉमेडी श्रृंखला ''फ्लिप्ड'' (2020) मा क्रिकेट मेल्फी के रूप मा अभिनय किहिन जेहिसे उनका लघुरूप हास्य अउर नाटक मा अभूतपूर्व अभिनेत्री का प्राइम टाइम एमी पुरस्कार मिला। उ ''लीप ईयर'' (2010), ''द हीट'' (2013), ''वेकेशन'' (2015), ''फाइंडिंग डोरी'' (2016) अऊर ''एरिज़ोना'' (2018) सहित फिल्मन मा काम किहिन हैं। 2022 अऊर 2024 मा, उ एचबीओ के ''हैक्स'' मा डीजे वैंस के रूप मा अपनी भूमिका के लिए एक कॉमेडी सीरीज मा उत्कृष्ट अतिथि अभिनेत्री के लिए एमी नामांकन अर्जित किहिन। </link><sup class="noprint Inline-Template Template-Fact" style="white-space:nowrap;">[ ''<nowiki><span title="This claim needs references to reliable sources. (July 2024)">उद्धरण चाही</span></nowiki>'' ]</sup>
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'''कैटलिन विलो ओल्सन मैकएलहेनी''' (जन्म 18 अगस्त, 1975) एक अमेरिकी अभिनेत्री हैं। उइ लॉस एंजिल्स मा संडे कंपनी नाम के एक इंप्रोवाइजेशनल थिएटर अऊर स्कूल ग्राउंडलिंग्स मा अपन करियर शुरू किहिन। एफएक्स कॉमेडी श्रृंखला ''इट्स ऑलवेज सनी इन फिलाडेल्फिया'' (2005-वर्तमान) मा डेआंड्रा "स्वीट डी" रेनॉल्ड्स के रूप मा कास्ट कीन जाय से पहिले उइ कई टेलीविजन श्रृंखला मा मामूली भूमिका अदा किहिन।
ओल्सन फॉक्स कॉमेडी श्रृंखला ''द मिक'' (2017–2018) मा मैकेंजी "मिकी" मोल्ंग के रूप मा अऊर क्विबी कॉमेडी श्रृंखला ''फ्लिप्ड'' (2020) मा क्रिकेट मेल्फी के रूप मा अभिनय किहिन जेहिसे उनका लघुरूप हास्य अउर नाटक मा अभूतपूर्व अभिनेत्री का प्राइम टाइम एमी पुरस्कार मिला। उ ''लीप ईयर'' (2010), ''द हीट'' (2013), ''वेकेशन'' (2015), ''फाइंडिंग डोरी'' (2016) अऊर ''एरिज़ोना'' (2018) सहित फिल्मन मा काम किहिन हैं। 2022 अऊर 2024 मा, उ एचबीओ के ''हैक्स'' मा डीजे वैंस के रूप मा अपनी भूमिका के लिए एक कॉमेडी सीरीज मा उत्कृष्ट अतिथि अभिनेत्री के लिए एमी नामांकन अर्जित किहिन। </link><sup class="noprint Inline-Template Template-Fact" style="white-space:nowrap;">[ ''<nowiki><span title="This claim needs references to reliable sources. (July 2024)">उद्धरण चाही</span></nowiki>'' ]</sup>
==संदर्भ==
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श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
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Avimaarak
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text/x-wiki
{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
| image = Rath Yatra Puri 07-11027.jpg
| caption = देवताओं के तीन रथ और पृष्ठभूमि में मंदिर, पुरी
| type = हिंदू
| longtype = [[धार्मिक]]
| observedby =[[हिन्दू|हिन्दू]]
| significance = मोक्ष की ओर आत्मा की यात्रा का प्रतिनिधित्व करता है
| begins = [[आषाढ़]] शुक्ल द्वितीया
| ends = आषाढ़ शुक्ल की दशमी
| date2019 = 4 July
| date2020 = 23 June
| date2021 = 12 July
| date2022 = 1 July
| date2023 = 20 June
| frequency = वार्षिक
| nickname = घोष यात्रा
| duration = 1 सप्ताह, 2 दिन
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}}
विश्व प्रसिद्ध '''श्री जगन्नाथ रथ यात्रा''' हर साल [[ओडिशा]] के [[पुरी]] में आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन होत है<ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। भगवान [[जगन्नाथ]], उनके बड़े भाई [[बलभद्र]] अऊर बहिन [[सुभद्रा]] के लिए हर साल नये लकड़ी के रथ (नंदी घोष, तलाध्वज अऊर दरपदलान) बनावा जात हैं। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==रथ==
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
!बलभद्र
!सुभद्रा
|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के विकल्प का नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|
|
|
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
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|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
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|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|দারোয়ান ( द्वारपाल )
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# चातरा भाँगा राबना (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# নাটম্বর (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
# शुलिदुर्गा
# वाराही
# श्यामाकाली
# मंगला
# विमला
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== सन्दर्भ ==
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
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}}
विश्व प्रसिद्ध '''श्री जगन्नाथ रथ यात्रा''' हर साल [[ओडिशा]] के [[पुरी]] में आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन होत है<ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। भगवान [[जगन्नाथ]], उनके बड़े भाई [[बलभद्र]] अऊर बहिन [[सुभद्रा]] के लिए हर साल नये लकड़ी के रथ (नंदी घोष, तलाध्वज अऊर दरपदलान) बनावा जात हैं। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==रथ==
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
!बलभद्र
!सुभद्रा
|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|
|
|
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
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|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
|42' 3"
|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
|33' x 33'
|31'6" x 31'6"
|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|দারোয়ান ( द्वारपाल )
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# चातरा भाँगा राबना (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
# शुलिदुर्गा
# वाराही
# श्यामाकाली
# मंगला
# विमला
|}
== सन्दर्भ ==
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3578
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
| image = Rath Yatra Puri 07-11027.jpg
| caption = देवताओं के तीन रथ और पृष्ठभूमि में मंदिर, पुरी
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| longtype = [[धार्मिक]]
| observedby =[[हिन्दू|हिन्दू]]
| significance = मोक्ष की ओर आत्मा की यात्रा का प्रतिनिधित्व करता है
| begins = [[आषाढ़]] शुक्ल द्वितीया
| ends = आषाढ़ शुक्ल की दशमी
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}}
विश्व प्रसिद्ध '''श्री जगन्नाथ रथ यात्रा''' हर साल [[ओडिशा]] के [[पुरी]] में आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन होत है<ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। भगवान [[जगन्नाथ]], उनके बड़े भाई [[बलभद्र]] अऊर बहिन [[सुभद्रा]] के लिए हर साल नये लकड़ी के रथ (नंदी घोष, तलाध्वज अऊर दरपदलान) बनावा जात हैं। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==रथ==
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
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|-
|रथ का नाँव
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|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
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|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
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|-
|छवि
|
|
|
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
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|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
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|अभिभावक
|गरुड
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|सारथी
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|-
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|
# शंख
# बलाहक
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|
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|
# रोचिका
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|-
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|शंखचूड़ा नागिन
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|-
|संगी देउता
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|
# जया
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|
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|
# गंगा
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|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
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# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
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# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
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== सन्दर्भ ==
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{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
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| caption = देवताओं के तीन रथ और पृष्ठभूमि में मंदिर, पुरी
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विश्व प्रसिद्ध '''श्री जगन्नाथ रथ यात्रा''' हर साल [[ओडिशा]] के [[पुरी]] में आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन होत है<ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। भगवान [[जगन्नाथ]], उनके बड़े भाई [[बलभद्र]] अऊर बहिन [[सुभद्रा]] के लिए हर साल नये लकड़ी के रथ (नंदी घोष, तलाध्वज अऊर दरपदलान) बनावा जात हैं। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==रथ==
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
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|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|
|
|
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
|42' 3"
|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
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|31'6" x 31'6"
|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|দারোয়ান ( द्वारपाल )
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# चातरा भाँगा राबना (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
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{{Infobox holiday
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विश्व प्रसिद्ध '''श्री जगन्नाथ रथ यात्रा''' हर साल [[ओडिशा]] के [[पुरी]] में आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन होत है<ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। भगवान [[जगन्नाथ]], उनके बड़े भाई [[बलभद्र]] अऊर बहिन [[सुभद्रा]] के लिए हर साल नये लकड़ी के रथ (नंदी घोष, तलाध्वज अऊर दरपदलान) बनावा जात हैं। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==रथ==
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
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|-
|रथ का नाँव
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|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|
|
|
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
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|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
|33' x 33'
|31'6" x 31'6"
|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|द्वारपाल
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# छत्रभंगरावण (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
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विश्व प्रसिद्ध '''श्री जगन्नाथ रथ यात्रा''' हर साल [[ओडिशा]] के [[पुरी]] में आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन होत है<ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। भगवान [[जगन्नाथ]], उनके बड़े भाई [[बलभद्र]] अऊर बहिन [[सुभद्रा]] के लिए हर साल नये लकड़ी के रथ (नंदी घोष, तलाध्वज अऊर दरपदलान) बनावा जात हैं। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
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[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
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|-
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|छवि
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|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
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|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
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|-
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|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
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|-
|अभिभावक
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|वासुदेव
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|-
|सारथी
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|मातलि
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|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
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|
# तीव्रा
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# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
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|-
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|उजर
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|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
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|मदनमोहन
|रामकृष्ण
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|-
|द्वारपाल
|
# जया
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|
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|
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|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
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# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
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# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
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# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
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|
# चंडी
# चामुंडा
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# वनदुर्गा
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विश्व प्रसिद्ध '''श्री जगन्नाथ रथ यात्रा''' हर साल [[ओडिशा]] के [[पुरी]] में आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन होत है<ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। भगवान [[जगन्नाथ]], उनके बड़े भाई [[बलभद्र]] अऊर बहिन [[सुभद्रा]] के लिए हर साल नये लकड़ी के रथ (नंदी घोष, तलाध्वज अऊर दरपदलान) बनावा जात हैं। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==रथ==
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
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!रथ का ब्योरा
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|रथ का नाँव
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|रथ के अउर नाँव
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|छवि
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|[[फाइल:Chariot Taladhwaja of Lord Balabhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|[[फाइल:Chariot Devidalana of Goddess Subhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
|42' 3"
|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
|33' x 33'
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|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
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|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
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|-
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|
# जया
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|
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|
# गंगा
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|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
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# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
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# छत्रभंगरावण (राम)
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|
# गणेश
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# मंगला
# विमला
|}<ref>[https://www.jagannathdham.in/rath-yatra-festival/details-of-rath-yatra-chariots/]</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
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2026-07-06T20:17:19Z
Avimaarak
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
| image = Rath Yatra Puri 07-11027.jpg
| caption = देवताओं के तीन रथ और पृष्ठभूमि में मंदिर, पुरी
| type = हिंदू
| longtype = [[धार्मिक]]
| observedby =[[हिन्दू|हिन्दू]]
| significance = मोक्ष की ओर आत्मा की यात्रा का प्रतिनिधित्व करता है
| begins = [[आषाढ़]] शुक्ल द्वितीया
| ends = आषाढ़ शुक्ल की दशमी
| date2019 = 4 July
| date2020 = 23 June
| date2021 = 12 July
| date2022 = 1 July
| date2023 = 20 June
| frequency = वार्षिक
| nickname = घोष यात्रा
| duration = 1 सप्ताह, 2 दिन
| date =
| date2024 = 7 July, Sunday
| date2025 = 16 जुलाई, गुरूवार<ref>[https://www.drikpanchang.com/festivals/ratha-yatra/jagannatha-rathayatra-date-time.html?year=2025 Ratha Yatra 2025]</ref>
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}}
विश्व प्रसिद्ध '''श्री जगन्नाथ रथ यात्रा''' हर साल [[ओडिशा]] के [[पुरी]] में आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन होत है<ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। भगवान [[जगन्नाथ]], उनके बड़े भाई [[बलभद्र]] अऊर बहिन [[सुभद्रा]] के लिए हर साल नये लकड़ी के रथ (नंदी घोष, तलाध्वज अऊर दरपदलान) बनावा जात हैं। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==रथ==
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
!बलभद्र
!सुभद्रा
|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|[[फाइल:Chariot Nandighosha of Lord Jagannath.jpg|अंगूठाकार]]
|[[फाइल:Chariot Taladhwaja of Lord Balabhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|[[फाइल:Chariot Devidalana of Goddess Subhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
|42' 3"
|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
|33' x 33'
|31'6" x 31'6"
|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|द्वारपाल
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# छत्रभंगरावण (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
# शुलिदुर्गा
# वाराही
# श्यामाकाली
# मंगला
# विमला
|}<ref>[https://www.jagannathdham.in/rath-yatra-festival/details-of-rath-yatra-chariots/]</ref>
==पर्यटन औ धार्मिक महत्त्व==
ई अस्थान का धार्मिक महत्व जगन्नाथजी का मंदिर है। सास्त्रन औ पुराननौ मा रथ-यात्रा के महत्ता स्वीकार कीन गै है। स्कन्द पुरान मा कहा गा है कि रथ-यात्रा मा जउन मनई श्री जगन्नाथ जी के नावँ का कीर्तन करत गुंडीचा नगर तक जात है वो पुनर्जन्म ते मुक्त होइ जात है। जउन मनई श्री जगन्नाथ जी का दरसन करत, परनाम करत, रस्ता के धूरि-कीचड़ मा ल्वाटत जाति हैं उइ सीधे भगवान श्री विष्णु के उत्तम धाम का जाति हैं। जउन मनई गुंडिचा मंडप मा रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम औ सुभद्रा देवी के दरसन दक्खिन दिसा का आवत भए करति हैं, उइ मोच्छ का प्राप्त होति हैं। रथयात्रा एक अइसन परब है जेहमा भगवान जगन्नाथ चलि कै जनता के बीच आवति हैं अउर उनके सुख-दुख मा सहभागी होति हैं। 'सब मनिसा मोर परजा' (सब मनई हमार परजा हैं), ई उनके उद्गार आहीं। भगवान जगन्नाथ तो पुरुषोत्तम हैं। उनमा श्रीराम, श्रीकृष्ण अद्वैत ब्रह्म रूप समाहित है। उनके अनेक नावँ हैं, उइ पतित पावन हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/religion/festivals/photo/bastar-chhattisgarh-unique-rath-yatra-is-celebrated-tupki-salami-tlifd-1289225-2021-07-12|title=यहां निकाली जाती है अनोखी जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी से दी जाती है सलामी|website=आज तक|language=hi|access-date=2021-07-13}}</ref>
== सन्दर्भ ==
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
| image = Rath Yatra Puri 07-11027.jpg
| caption = देवताओं के तीन रथ और पृष्ठभूमि में मंदिर, पुरी
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| longtype = [[धार्मिक]]
| observedby =[[हिन्दू|हिन्दू]]
| significance = मोक्ष की ओर आत्मा की यात्रा का प्रतिनिधित्व करता है
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| ends = आषाढ़ शुक्ल की दशमी
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| date2024 = 7 July, Sunday
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}}
पुरी के रथ-यात्रा, जेहिका रथ जात्रौ (ओड़िया: ରଥଯାତ୍ରା,(/ˈrʌθə ˈjɑːtrɑː/, ओड़िया उच्चारण: [ɾɔt̪ʰɔ dʒat̪ɾa]) कहा जात है, आषाढ़ (जून-जुलाई) के सुक्ल पच्छ मा दूज के दिन हर साल निकारी जाति है। यहिका सबते पुरानि अउर सबते बड़े हिंदू रथपर्व के रूप मा माना जात है।
भगवान [[जगन्नाथ]] जुड़ी या रथ-यात्रा भारत के [[ओडिशा]] राज्य के पुरी सहर मा आयोजित कीन जाति है। ई परब मा तमाम भक्त, तीनों देउतन ([[जगन्नाथ]], उनके भइया [[बलभद्र]] अउर बहिन [[सुभद्रा]]) का तीन बड़े-बड़े लकड़ी के रथन (नंदिघोष, तालध्वज अऊर दर्पदलन) मा बड़ दाँड पर [[गुंडीचा मंदिर[[ तक खींचति हैं, जहाँ उइ एकु हफ्ता तक रहति हैं औ फिर जगन्नाथ मंदिर का लौटि आवति हैं। ई वापसी जात्रा का बहुड़ा यात्रा कहा जात है। गुंडीचा मंदिर ते वापस आवत समय, तीनों देउता मौसी माँ मंदिर के लगे कुछ देर के खातिर रुकति हैं अउर हुवाँ पोड़ा पीठा का भोग लगावा जात है, जउन एक खास तरह का पूआ आय, जेहिका प्रभुजी का सबते मनपसंद माना जात है। सात दिन रहे के बादि, तीनों देउता अपने अस्थान पर लौटि आवति हैं। <ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==रथ==
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
!बलभद्र
!सुभद्रा
|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
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|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|[[फाइल:Chariot Nandighosha of Lord Jagannath.jpg|अंगूठाकार]]
|[[फाइल:Chariot Taladhwaja of Lord Balabhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|[[फाइल:Chariot Devidalana of Goddess Subhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
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|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
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|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
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|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
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|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
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|-
|संगी देउता
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|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
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|
# जया
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|
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# सुनंदा
|
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# जमुना
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|
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# मधुसूदन (विष्णु )
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# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# छत्रभंगरावण (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
# शुलिदुर्गा
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# श्यामाकाली
# मंगला
# विमला
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==पर्यटन औ धार्मिक महत्त्व==
ई अस्थान का धार्मिक महत्व जगन्नाथजी का मंदिर है। सास्त्रन औ पुराननौ मा रथ-यात्रा के महत्ता स्वीकार कीन गै है। स्कन्द पुरान मा कहा गा है कि रथ-यात्रा मा जउन मनई श्री जगन्नाथ जी के नावँ का कीर्तन करत गुंडीचा नगर तक जात है वो पुनर्जन्म ते मुक्त होइ जात है। जउन मनई श्री जगन्नाथ जी का दरसन करत, परनाम करत, रस्ता के धूरि-कीचड़ मा ल्वाटत जाति हैं उइ सीधे भगवान श्री विष्णु के उत्तम धाम का जाति हैं। जउन मनई गुंडिचा मंडप मा रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम औ सुभद्रा देवी के दरसन दक्खिन दिसा का आवत भए करति हैं, उइ मोच्छ का प्राप्त होति हैं। रथयात्रा एक अइसन परब है जेहमा भगवान जगन्नाथ चलि कै जनता के बीच आवति हैं अउर उनके सुख-दुख मा सहभागी होति हैं। 'सब मनिसा मोर परजा' (सब मनई हमार परजा हैं), ई उनके उद्गार आहीं। भगवान जगन्नाथ तो पुरुषोत्तम हैं। उनमा श्रीराम, श्रीकृष्ण अद्वैत ब्रह्म रूप समाहित है। उनके अनेक नावँ हैं, उइ पतित पावन हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/religion/festivals/photo/bastar-chhattisgarh-unique-rath-yatra-is-celebrated-tupki-salami-tlifd-1289225-2021-07-12|title=यहां निकाली जाती है अनोखी जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी से दी जाती है सलामी|website=आज तक|language=hi|access-date=2021-07-13}}</ref>
== सन्दर्भ ==
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
| image = Rath Yatra Puri 07-11027.jpg
| caption = देवताओं के तीन रथ और पृष्ठभूमि में मंदिर, पुरी
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| longtype = [[धार्मिक]]
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पुरी के रथ-यात्रा, जेहिका रथ जात्रौ (ओड़िया: ରଥଯାତ୍ରା,(/ˈrʌθə ˈjɑːtrɑː/, ओड़िया उच्चारण: [ɾɔt̪ʰɔ dʒat̪ɾa]) कहा जात है, आषाढ़ (जून-जुलाई) के सुक्ल पच्छ मा दूज के दिन हर साल निकारी जाति है। यहिका सबते पुरानि अउर सबते बड़े हिंदू रथपर्व के रूप मा माना जात है।
भगवान [[जगन्नाथ]] ते जुड़ी या रथ-यात्रा भारत के [[ओडिशा]] राज्य के पुरी सहर मा आयोजित कीन जाति है। ई परब मा तमाम भक्त, तीनों देउतन ([[जगन्नाथ]], उनके भइया [[बलभद्र]] अउर बहिन [[सुभद्रा]]) का तीन बड़े-बड़े लकड़ी के रथन (नंदिघोष, तालध्वज अऊर दर्पदलन) मा बड़ दाँड पर [[गुंडीचा मंदिर[[ तक खींचति हैं, जहाँ उइ एकु हफ्ता तक रहति हैं औ फिर जगन्नाथ मंदिर का लौटि आवति हैं। ई वापसी जात्रा का बहुड़ा यात्रा कहा जात है। गुंडीचा मंदिर ते वापस आवत समय, तीनों देउता मौसी माँ मंदिर के लगे कुछ देर के खातिर रुकति हैं अउर हुवाँ पोड़ा पीठा का भोग लगावा जात है, जउन एक खास तरह का पूआ आय, जेहिका प्रभुजी का सबते मनपसंद माना जात है। सात दिन रहे के बादि, तीनों देउता अपने अस्थान पर लौटि आवति हैं। <ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==रथ==
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
!बलभद्र
!सुभद्रा
|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
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|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|[[फाइल:Chariot Nandighosha of Lord Jagannath.jpg|अंगूठाकार]]
|[[फाइल:Chariot Taladhwaja of Lord Balabhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|[[फाइल:Chariot Devidalana of Goddess Subhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
|42' 3"
|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
|33' x 33'
|31'6" x 31'6"
|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|द्वारपाल
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# छत्रभंगरावण (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
# शुलिदुर्गा
# वाराही
# श्यामाकाली
# मंगला
# विमला
|}<ref>[https://www.jagannathdham.in/rath-yatra-festival/details-of-rath-yatra-chariots/]</ref>
==पर्यटन औ धार्मिक महत्त्व==
ई अस्थान का धार्मिक महत्व जगन्नाथजी का मंदिर है। सास्त्रन औ पुराननौ मा रथ-यात्रा के महत्ता स्वीकार कीन गै है। स्कन्द पुरान मा कहा गा है कि रथ-यात्रा मा जउन मनई श्री जगन्नाथ जी के नावँ का कीर्तन करत गुंडीचा नगर तक जात है वो पुनर्जन्म ते मुक्त होइ जात है। जउन मनई श्री जगन्नाथ जी का दरसन करत, परनाम करत, रस्ता के धूरि-कीचड़ मा ल्वाटत जाति हैं उइ सीधे भगवान श्री विष्णु के उत्तम धाम का जाति हैं। जउन मनई गुंडिचा मंडप मा रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम औ सुभद्रा देवी के दरसन दक्खिन दिसा का आवत भए करति हैं, उइ मोच्छ का प्राप्त होति हैं। रथयात्रा एक अइसन परब है जेहमा भगवान जगन्नाथ चलि कै जनता के बीच आवति हैं अउर उनके सुख-दुख मा सहभागी होति हैं। 'सब मनिसा मोर परजा' (सब मनई हमार परजा हैं), ई उनके उद्गार आहीं। भगवान जगन्नाथ तो पुरुषोत्तम हैं। उनमा श्रीराम, श्रीकृष्ण अद्वैत ब्रह्म रूप समाहित है। उनके अनेक नावँ हैं, उइ पतित पावन हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/religion/festivals/photo/bastar-chhattisgarh-unique-rath-yatra-is-celebrated-tupki-salami-tlifd-1289225-2021-07-12|title=यहां निकाली जाती है अनोखी जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी से दी जाती है सलामी|website=आज तक|language=hi|access-date=2021-07-13}}</ref>
== सन्दर्भ ==
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
| image = Rath Yatra Puri 07-11027.jpg
| caption = देवताओं के तीन रथ और पृष्ठभूमि में मंदिर, पुरी
| type = हिंदू
| longtype = [[धार्मिक]]
| observedby =[[हिन्दू|हिन्दू]]
| significance = मोक्ष की ओर आत्मा की यात्रा का प्रतिनिधित्व करता है
| begins = [[आषाढ़]] शुक्ल द्वितीया
| ends = आषाढ़ शुक्ल की दशमी
| date2019 = 4 July
| date2020 = 23 June
| date2021 = 12 July
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| nickname = घोष यात्रा
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}}
पुरी के रथ-यात्रा, जेहिका रथ जात्रौ (ओड़िया: ରଥଯାତ୍ରା,(/ˈrʌθə ˈjɑːtrɑː/, ओड़िया उच्चारण: [ɾɔt̪ʰɔ dʒat̪ɾa]) कहा जात है, आषाढ़ (जून-जुलाई) के सुक्ल पच्छ मा दूज के दिन हर साल निकारी जाति है। यहिका सबते पुरानि अउर सबते बड़े हिंदू रथपर्व के रूप मा माना जात है।
भगवान [[जगन्नाथ]] ते जुड़ी या रथ-यात्रा भारत के [[ओडिशा]] राज्य के पुरी सहर मा आयोजित कीन जाति है। ई परब मा तमाम भक्त, तीनों देउतन ([[जगन्नाथ]], उनके भइया [[बलभद्र]] अउर बहिन [[सुभद्रा]]) का तीन बड़े-बड़े लकड़ी के रथन (नंदिघोष, तालध्वज अऊर दर्पदलन) मा बड़ दाँड पर [[गुंडीचा मंदिर]] तक खींचति हैं, जहाँ उइ एकु हफ्ता तक रहति हैं औ फिर जगन्नाथ मंदिर का लौटि आवति हैं। ई वापसी जात्रा का बहुड़ा यात्रा कहा जात है। गुंडीचा मंदिर ते वापस आवत समय, तीनों देउता मौसी माँ मंदिर के लगे कुछ देर के खातिर रुकति हैं अउर हुवाँ पोड़ा पीठा का भोग लगावा जात है, जउन एक खास तरह का पूआ आय, जेहिका प्रभुजी का सबते मनपसंद माना जात है। सात दिन रहे के बादि, तीनों देउता अपने अस्थान पर लौटि आवति हैं। <ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==रथ==
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
!बलभद्र
!सुभद्रा
|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|[[फाइल:Chariot Nandighosha of Lord Jagannath.jpg|अंगूठाकार]]
|[[फाइल:Chariot Taladhwaja of Lord Balabhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|[[फाइल:Chariot Devidalana of Goddess Subhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
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|-
|चौड़ाई
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|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|द्वारपाल
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# छत्रभंगरावण (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
# शुलिदुर्गा
# वाराही
# श्यामाकाली
# मंगला
# विमला
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==पर्यटन औ धार्मिक महत्त्व==
ई अस्थान का धार्मिक महत्व जगन्नाथजी का मंदिर है। सास्त्रन औ पुराननौ मा रथ-यात्रा के महत्ता स्वीकार कीन गै है। स्कन्द पुरान मा कहा गा है कि रथ-यात्रा मा जउन मनई श्री जगन्नाथ जी के नावँ का कीर्तन करत गुंडीचा नगर तक जात है वो पुनर्जन्म ते मुक्त होइ जात है। जउन मनई श्री जगन्नाथ जी का दरसन करत, परनाम करत, रस्ता के धूरि-कीचड़ मा ल्वाटत जाति हैं उइ सीधे भगवान श्री विष्णु के उत्तम धाम का जाति हैं। जउन मनई गुंडिचा मंडप मा रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम औ सुभद्रा देवी के दरसन दक्खिन दिसा का आवत भए करति हैं, उइ मोच्छ का प्राप्त होति हैं। रथयात्रा एक अइसन परब है जेहमा भगवान जगन्नाथ चलि कै जनता के बीच आवति हैं अउर उनके सुख-दुख मा सहभागी होति हैं। 'सब मनिसा मोर परजा' (सब मनई हमार परजा हैं), ई उनके उद्गार आहीं। भगवान जगन्नाथ तो पुरुषोत्तम हैं। उनमा श्रीराम, श्रीकृष्ण अद्वैत ब्रह्म रूप समाहित है। उनके अनेक नावँ हैं, उइ पतित पावन हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/religion/festivals/photo/bastar-chhattisgarh-unique-rath-yatra-is-celebrated-tupki-salami-tlifd-1289225-2021-07-12|title=यहां निकाली जाती है अनोखी जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी से दी जाती है सलामी|website=आज तक|language=hi|access-date=2021-07-13}}</ref>
== सन्दर्भ ==
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text/x-wiki
{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
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| caption = देवताओं के तीन रथ और पृष्ठभूमि में मंदिर, पुरी
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पुरी के रथ-यात्रा, जेहिका रथ जात्रौ (ओड़िया: ରଥଯାତ୍ରା, ({{IPAc-en|ˈ|r|ʌ|θ|ə|_|ˈ|j|ɑː|t|r|ɑː}}, {{IPA|or|ɾɔt̪ʰɔ dʒat̪ɾa}}) कहा जात है, आषाढ़ (जून-जुलाई) के सुक्ल पच्छ मा दूज के दिन हर साल निकारी जाति है। यहिका सबते पुरानि अउर सबते बड़े हिंदू रथपर्व के रूप मा माना जात है।<ref name=":1">{{Cite book |last=Lochtefeld |first=James G. |url=https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |title=The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: N-Z |date=2002 |publisher=Rosen |isbn=978-0-8239-3180-4 |pages=567 |language=en |access-date=23 April 2023 |archive-date=15 April 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230415134917/https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite news |date=2019-07-04 |title=Rath Yatra: The legend behind world's largest chariot festival |language=en-GB |work=BBC News |url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |access-date=2023-06-15 |archive-date=17 February 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230217152645/https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |url-status=live }}</ref>
भगवान [[जगन्नाथ]] ते जुड़ी या रथ-यात्रा भारत के [[ओडिशा]] राज्य के पुरी सहर मा आयोजित कीन जाति है। ई परब मा तमाम भक्त, तीनों देउतन ([[जगन्नाथ]], उनके भइया [[बलभद्र]] अउर बहिन [[सुभद्रा]]) का तीन बड़े-बड़े लकड़ी के रथन (नंदिघोष, तालध्वज अऊर दर्पदलन) मा बड़ दाँड पर [[गुंडीचा मंदिर]] तक खींचति हैं, जहाँ उइ एकु हफ्ता तक रहति हैं औ फिर जगन्नाथ मंदिर का लौटि आवति हैं। ई वापसी जात्रा का बहुड़ा यात्रा कहा जात है।<ref name=":1" /><ref>{{cite web|url=https://www.readwhere.com/read/c/72800774|title=পুরীধাম ও জগন্নাথদেবের ব্রহ্মরূপ বৃত্তান্ত|language=bn|date=28 June 2023|access-date=28 June 2023|website=dainikstatesmannews.com|publisher=[[Dainik Statesman]] (The Statesman Group)|location=Kolkata|first=Yogabrata|last=Chakraborty|trans-title=Puridham and the tale of lord Jagannath's legendary 'Bramharup'|archive-url=https://web.archive.org/web/20230628103603/https://www.readwhere.com/read/c/72800774|archive-date=28 June 2023|url-status=bot: unknown}}</ref> गुंडीचा मंदिर ते वापस आवत समय, तीनों देउता मौसी माँ मंदिर के लगे कुछ देर के खातिर रुकति हैं अउर हुवाँ पोड़ा पीठा का भोग लगावा जात है, जउन एक खास तरह का पुआ आय, जेहिका प्रभुजी का सबते मनपसंद माना जात है। सात दिन रहै के बादि, तीनों देउता अपने अस्थान पर लौटि आवति हैं। <ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==रथ==
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
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|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
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|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
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|छवि
|[[फाइल:Chariot Nandighosha of Lord Jagannath.jpg|अंगूठाकार]]
|[[फाइल:Chariot Taladhwaja of Lord Balabhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|[[फाइल:Chariot Devidalana of Goddess Subhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
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|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
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|-
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|सारथी
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|-
|झण्डा क नाँव
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|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|द्वारपाल
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# छत्रभंगरावण (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
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# शुलिदुर्गा
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==पर्यटन औ धार्मिक महत्त्व==
ई अस्थान का धार्मिक महत्व जगन्नाथजी का मंदिर है। सास्त्रन औ पुराननौ मा रथ-यात्रा के महत्ता स्वीकार कीन गै है। स्कन्द पुरान मा कहा गा है कि रथ-यात्रा मा जउन मनई श्री जगन्नाथ जी के नावँ का कीर्तन करत गुंडीचा नगर तक जात है वो पुनर्जन्म ते मुक्त होइ जात है। जउन मनई श्री जगन्नाथ जी का दरसन करत, परनाम करत, रस्ता के धूरि-कीचड़ मा ल्वाटत जाति हैं उइ सीधे भगवान श्री विष्णु के उत्तम धाम का जाति हैं। जउन मनई गुंडिचा मंडप मा रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम औ सुभद्रा देवी के दरसन दक्खिन दिसा का आवत भए करति हैं, उइ मोच्छ का प्राप्त होति हैं। रथयात्रा एक अइसन परब है जेहमा भगवान जगन्नाथ चलि कै जनता के बीच आवति हैं अउर उनके सुख-दुख मा सहभागी होति हैं। 'सब मनिसा मोर परजा' (सब मनई हमार परजा हैं), ई उनके उद्गार आहीं। भगवान जगन्नाथ तो पुरुषोत्तम हैं। उनमा श्रीराम, श्रीकृष्ण अद्वैत ब्रह्म रूप समाहित है। उनके अनेक नावँ हैं, उइ पतित पावन हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/religion/festivals/photo/bastar-chhattisgarh-unique-rath-yatra-is-celebrated-tupki-salami-tlifd-1289225-2021-07-12|title=यहां निकाली जाती है अनोखी जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी से दी जाती है सलामी|website=आज तक|language=hi|access-date=2021-07-13}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
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35251
2026-07-06T20:57:38Z
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
| image = Rath Yatra Puri 07-11027.jpg
| caption = देवताओं के तीन रथ और पृष्ठभूमि में मंदिर, पुरी
| type = हिंदू
| longtype = [[धार्मिक]]
| observedby =[[हिन्दू|हिन्दू]]
| significance = मोक्ष की ओर आत्मा की यात्रा का प्रतिनिधित्व करता है
| begins = [[आषाढ़]] शुक्ल द्वितीया
| ends = आषाढ़ शुक्ल की दशमी
| date2019 = 4 July
| date2020 = 23 June
| date2021 = 12 July
| date2022 = 1 July
| date2023 = 20 June
| frequency = वार्षिक
| nickname = घोष यात्रा
| duration = 1 सप्ताह, 2 दिन
| date =
| date2024 = 7 July, Sunday
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}}
पुरी के रथ-यात्रा, जेहिका रथ जात्रौ (ओड़िया: ରଥଯାତ୍ରା, ({{IPAc-en|ˈ|r|ʌ|θ|ə|_|ˈ|j|ɑː|t|r|ɑː}}, {{IPA|or|ɾɔt̪ʰɔ dʒat̪ɾa}}) कहा जात है, आषाढ़ (जून-जुलाई) के सुक्ल पच्छ मा दूज के दिन हर साल निकारी जाति है। यहिका सबते पुरान अउर सबते बड़े हिंदू रथपर्व के रूप मा माना जात है।<ref name=":1">{{Cite book |last=Lochtefeld |first=James G. |url=https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |title=The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: N-Z |date=2002 |publisher=Rosen |isbn=978-0-8239-3180-4 |pages=567 |language=en |access-date=23 April 2023 |archive-date=15 April 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230415134917/https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite news |date=2019-07-04 |title=Rath Yatra: The legend behind world's largest chariot festival |language=en-GB |work=BBC News |url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |access-date=2023-06-15 |archive-date=17 February 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230217152645/https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |url-status=live }}</ref>
भगवान [[जगन्नाथ]] ते जुड़ी या रथ-यात्रा भारत के [[ओडिशा]] राज्य के पुरी सहर मा आयोजित कीन जाति है। ई परब मा तमाम भक्त, तीनों देउतन ([[जगन्नाथ]], उनके भइया [[बलभद्र]] अउर बहिन [[सुभद्रा]]) का तीन बड़े-बड़े लकड़ी के रथन (नंदिघोष, तालध्वज अऊर दर्पदलन) मा बड़ दाँड पर [[गुंडीचा मंदिर]] तक खींचति हैं, जहाँ उइ एकु हफ्ता तक रहति हैं औ फिर जगन्नाथ मंदिर का लौटि आवति हैं। ई वापसी जात्रा का बहुड़ा यात्रा कहा जात है।<ref name=":1" /><ref>{{cite web|url=https://www.readwhere.com/read/c/72800774|title=পুরীধাম ও জগন্নাথদেবের ব্রহ্মরূপ বৃত্তান্ত|language=bn|date=28 June 2023|access-date=28 June 2023|website=dainikstatesmannews.com|publisher=[[Dainik Statesman]] (The Statesman Group)|location=Kolkata|first=Yogabrata|last=Chakraborty|trans-title=Puridham and the tale of lord Jagannath's legendary 'Bramharup'|archive-url=https://web.archive.org/web/20230628103603/https://www.readwhere.com/read/c/72800774|archive-date=28 June 2023|url-status=bot: unknown}}</ref> गुंडीचा मंदिर ते वापस आवत समय, तीनों देउता मौसी माँ मंदिर के लगे कुछ देर के खातिर रुकति हैं अउर हुवाँ पोड़ा पीठा का भोग लगावा जात है, जउन एक खास तरह का पुआ आय, जेहिका प्रभुजी का सबते मनपसंद माना जात है। सात दिन रहै के बादि, तीनों देउता अपने अस्थान पर लौटि आवति हैं। <ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==रथ==
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
!बलभद्र
!सुभद्रा
|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|[[File:Nandighosha Ratho.png|thumb|Nandighosha Ratho]][[File:Chariot Nandighosha of Lord Jagannath.jpg|thumb|Chariot Nandighosha of Lord Jagannath]][[File:Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha.jpg|thumb|Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha]]
|[[File:Taladhwaja Ratho.png|thumb|Taladhwaja Ratho]][[फाइल:Chariot Taladhwaja of Lord Balabhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|[[File:Debadalana Ratho.png|thumb|Debadalana Ratho]][[फाइल:Chariot Devidalana of Goddess Subhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
|42' 3"
|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
|33' x 33'
|31'6" x 31'6"
|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|द्वारपाल
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# छत्रभंगरावण (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
# शुलिदुर्गा
# वाराही
# श्यामाकाली
# मंगला
# विमला
|}<ref>[https://www.jagannathdham.in/rath-yatra-festival/details-of-rath-yatra-chariots/]</ref>
==पर्यटन औ धार्मिक महत्त्व==
ई अस्थान का धार्मिक महत्व जगन्नाथजी का मंदिर है। सास्त्रन औ पुराननौ मा रथ-यात्रा के महत्ता स्वीकार कीन गै है। स्कन्द पुरान मा कहा गा है कि रथ-यात्रा मा जउन मनई श्री जगन्नाथ जी के नावँ का कीर्तन करत गुंडीचा नगर तक जात है वो पुनर्जन्म ते मुक्त होइ जात है। जउन मनई श्री जगन्नाथ जी का दरसन करत, परनाम करत, रस्ता के धूरि-कीचड़ मा ल्वाटत जाति हैं उइ सीधे भगवान श्री विष्णु के उत्तम धाम का जाति हैं। जउन मनई गुंडिचा मंडप मा रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम औ सुभद्रा देवी के दरसन दक्खिन दिसा का आवत भए करति हैं, उइ मोच्छ का प्राप्त होति हैं। रथयात्रा एक अइसन परब है जेहमा भगवान जगन्नाथ चलि कै जनता के बीच आवति हैं अउर उनके सुख-दुख मा सहभागी होति हैं। 'सब मनिसा मोर परजा' (सब मनई हमार परजा हैं), ई उनके उद्गार आहीं। भगवान जगन्नाथ तो पुरुषोत्तम हैं। उनमा श्रीराम, श्रीकृष्ण अद्वैत ब्रह्म रूप समाहित है। उनके अनेक नावँ हैं, उइ पतित पावन हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/religion/festivals/photo/bastar-chhattisgarh-unique-rath-yatra-is-celebrated-tupki-salami-tlifd-1289225-2021-07-12|title=यहां निकाली जाती है अनोखी जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी से दी जाती है सलामी|website=आज तक|language=hi|access-date=2021-07-13}}</ref>
== सन्दर्भ ==
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35253
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
| image = Rath Yatra Puri 07-11027.jpg
| caption = देवताओं के तीन रथ और पृष्ठभूमि में मंदिर, पुरी
| type = हिंदू
| longtype = [[धार्मिक]]
| observedby =[[हिन्दू|हिन्दू]]
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| date2023 = 20 June
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}}
पुरी के रथ-यात्रा, जेहिका रथ जात्रौ (ओड़िया: ରଥଯାତ୍ରା, ({{IPAc-en|ˈ|r|ʌ|θ|ə|_|ˈ|j|ɑː|t|r|ɑː}}, {{IPA|or|ɾɔt̪ʰɔ dʒat̪ɾa}}) कहा जात है, आषाढ़ (जून-जुलाई) के सुक्ल पच्छ मा दूज के दिन हर साल निकारी जाति है। यहिका सबते पुरान अउर सबते बड़े हिंदू रथपर्व के रूप मा माना जात है।<ref name=":1">{{Cite book |last=Lochtefeld |first=James G. |url=https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |title=The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: N-Z |date=2002 |publisher=Rosen |isbn=978-0-8239-3180-4 |pages=567 |language=en |access-date=23 April 2023 |archive-date=15 April 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230415134917/https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite news |date=2019-07-04 |title=Rath Yatra: The legend behind world's largest chariot festival |language=en-GB |work=BBC News |url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |access-date=2023-06-15 |archive-date=17 February 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230217152645/https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |url-status=live }}</ref>
भगवान [[जगन्नाथ]] ते जुड़ी या रथ-यात्रा भारत के [[ओडिशा]] राज्य के पुरी सहर मा आयोजित कीन जाति है। ई परब मा तमाम भक्त, तीनों देउतन ([[जगन्नाथ]], उनके भइया [[बलभद्र]] अउर बहिन [[सुभद्रा]]) का तीन बड़े-बड़े लकड़ी के रथन (नंदिघोष, तालध्वज अऊर दर्पदलन) मा बड़ दाँड पर [[गुंडीचा मंदिर]] तक खींचति हैं, जहाँ उइ एकु हफ्ता तक रहति हैं औ फिर जगन्नाथ मंदिर का लौटि आवति हैं। ई वापसी जात्रा का बहुड़ा यात्रा कहा जात है।<ref name=":1" /><ref>{{cite web|url=https://www.readwhere.com/read/c/72800774|title=পুরীধাম ও জগন্নাথদেবের ব্রহ্মরূপ বৃত্তান্ত|language=bn|date=28 June 2023|access-date=28 June 2023|website=dainikstatesmannews.com|publisher=[[Dainik Statesman]] (The Statesman Group)|location=Kolkata|first=Yogabrata|last=Chakraborty|trans-title=Puridham and the tale of lord Jagannath's legendary 'Bramharup'|archive-url=https://web.archive.org/web/20230628103603/https://www.readwhere.com/read/c/72800774|archive-date=28 June 2023|url-status=bot: unknown}}</ref> गुंडीचा मंदिर ते वापस आवत समय, तीनों देउता मौसी माँ मंदिर के लगे कुछ देर के खातिर रुकति हैं अउर हुवाँ पोड़ा पीठा का भोग लगावा जात है, जउन एक खास तरह का पुआ आय, जेहिका प्रभुजी का सबते मनपसंद माना जात है। सात दिन रहै के बादि, तीनों देउता अपने अस्थान पर लौटि आवति हैं। <ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==इतिहास==
रथ-यात्रा का वर्णन ब्रह्म पुरान, पद्म पुरान, स्कन्द पुरान, अउर कपिल संहिता मा पावा जात है। 13वीं सदी ते यूरोपीय यात्रिन के द्वारा ई पर्व का उल्लेख कीन गा है, जेहिमा सबते प्रमुख अउर सजीव वर्णन 17वीं सदी मा दर्ज कीन गे हैं।
==रथ==
जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा के तीनों रथ हर साल फस्सी, धौसा जइसि खास बिरवन के लकड़ी ते बनाए जाति हैं। ई रथ परंपरा के अनुसार पूर्व-रियासत दसपल्ला ते आए बढ़ई लोगन के याक खास टोली के द्वारा बनाए जाति हैं, जिनका यो काम करै का पुश्तैनी अधिकार अउर विसेषाधिकार प्राप्त है। लकड़ी के लट्ठन का पारंपरिक रूप ते महानदी मा बेड़ा बनाय कै बहावा जात है। इनका पुरी के लगे इकट्ठा कीन जात है अउर फिर सड़क के रस्ता ते हुवाँ पहुँचावा जात है।
सदिन ते तय अउर मानी जा रही एक खास बिधी के अनुसार सजाए गे तीनिउ रथ बड़ दाँड पर खड़े कीन जाति हैं। मंदिर के पूरबी दुआर के लगे चौड़े रस्ता पर रथन् का एकु लाइन मा लगावा जात है, जेहिका सिंहदुआरौ कहा जात है।
सब रथन के चारिहुँ ओर नौ पार्श्व देउता होति हैं, जिनका रथ के बगल मा अलग-अलग देउतन का दरसावय वाली रंगीन लकड़ी के मूरति के माध्यम ते दरसावा जात है। हर रथ मा एक सारथी अउर चारि घोड़ा होति हैं।
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
!बलभद्र
!सुभद्रा
|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|[[File:Nandighosha Ratho.png|thumb|Nandighosha Ratho]][[File:Chariot Nandighosha of Lord Jagannath.jpg|thumb|Chariot Nandighosha of Lord Jagannath]][[File:Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha.jpg|thumb|Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha]]
|[[File:Taladhwaja Ratho.png|thumb|Taladhwaja Ratho]][[फाइल:Chariot Taladhwaja of Lord Balabhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|[[File:Debadalana Ratho.png|thumb|Debadalana Ratho]][[फाइल:Chariot Devidalana of Goddess Subhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
|42' 3"
|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
|33' x 33'
|31'6" x 31'6"
|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|द्वारपाल
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# छत्रभंगरावण (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
# शुलिदुर्गा
# वाराही
# श्यामाकाली
# मंगला
# विमला
|}<ref>[https://www.jagannathdham.in/rath-yatra-festival/details-of-rath-yatra-chariots/]</ref>
==पर्यटन औ धार्मिक महत्त्व==
ई अस्थान का धार्मिक महत्व जगन्नाथजी का मंदिर है। सास्त्रन औ पुराननौ मा रथ-यात्रा के महत्ता स्वीकार कीन गै है। स्कन्द पुरान मा कहा गा है कि रथ-यात्रा मा जउन मनई श्री जगन्नाथ जी के नावँ का कीर्तन करत गुंडीचा नगर तक जात है वो पुनर्जन्म ते मुक्त होइ जात है। जउन मनई श्री जगन्नाथ जी का दरसन करत, परनाम करत, रस्ता के धूरि-कीचड़ मा ल्वाटत जाति हैं उइ सीधे भगवान श्री विष्णु के उत्तम धाम का जाति हैं। जउन मनई गुंडिचा मंडप मा रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम औ सुभद्रा देवी के दरसन दक्खिन दिसा का आवत भए करति हैं, उइ मोच्छ का प्राप्त होति हैं। रथयात्रा एक अइसन परब है जेहमा भगवान जगन्नाथ चलि कै जनता के बीच आवति हैं अउर उनके सुख-दुख मा सहभागी होति हैं। 'सब मनिसा मोर परजा' (सब मनई हमार परजा हैं), ई उनके उद्गार आहीं। भगवान जगन्नाथ तो पुरुषोत्तम हैं। उनमा श्रीराम, श्रीकृष्ण अद्वैत ब्रह्म रूप समाहित है। उनके अनेक नावँ हैं, उइ पतित पावन हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/religion/festivals/photo/bastar-chhattisgarh-unique-rath-yatra-is-celebrated-tupki-salami-tlifd-1289225-2021-07-12|title=यहां निकाली जाती है अनोखी जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी से दी जाती है सलामी|website=आज तक|language=hi|access-date=2021-07-13}}</ref>
== सन्दर्भ ==
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2026-07-06T21:23:12Z
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
| image = Rath Yatra Puri 07-11027.jpg
| caption = देवताओं के तीन रथ और पृष्ठभूमि में मंदिर, पुरी
| type = हिंदू
| longtype = [[धार्मिक]]
| observedby =[[हिन्दू|हिन्दू]]
| significance = मोक्ष की ओर आत्मा की यात्रा का प्रतिनिधित्व करता है
| begins = [[आषाढ़]] शुक्ल द्वितीया
| ends = आषाढ़ शुक्ल की दशमी
| date2019 = 4 July
| date2020 = 23 June
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}}
पुरी के रथ-यात्रा, जेहिका रथ जात्रौ (ओड़िया: ରଥଯାତ୍ରା, ({{IPAc-en|ˈ|r|ʌ|θ|ə|_|ˈ|j|ɑː|t|r|ɑː}}, {{IPA|or|ɾɔt̪ʰɔ dʒat̪ɾa}}) कहा जात है, आषाढ़ (जून-जुलाई) के सुक्ल पच्छ मा दूज के दिन हर साल निकारी जाति है। यहिका सबते पुरान अउर सबते बड़े हिंदू रथपर्व के रूप मा माना जात है।<ref name=":1">{{Cite book |last=Lochtefeld |first=James G. |url=https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |title=The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: N-Z |date=2002 |publisher=Rosen |isbn=978-0-8239-3180-4 |pages=567 |language=en |access-date=23 April 2023 |archive-date=15 April 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230415134917/https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite news |date=2019-07-04 |title=Rath Yatra: The legend behind world's largest chariot festival |language=en-GB |work=BBC News |url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |access-date=2023-06-15 |archive-date=17 February 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230217152645/https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |url-status=live }}</ref>
भगवान [[जगन्नाथ]] ते जुड़ी या रथ-यात्रा भारत के [[ओडिशा]] राज्य के पुरी सहर मा आयोजित कीन जाति है। ई परब मा तमाम भक्त, तीनों देउतन ([[जगन्नाथ]], उनके भइया [[बलभद्र]] अउर बहिन [[सुभद्रा]]) का तीन बड़े-बड़े लकड़ी के रथन (नंदिघोष, तालध्वज अऊर दर्पदलन) मा बड़ दाँड पर [[गुंडीचा मंदिर]] तक खींचति हैं, जहाँ उइ एकु हफ्ता तक रहति हैं औ फिर जगन्नाथ मंदिर का लौटि आवति हैं। ई वापसी जात्रा का बहुड़ा यात्रा कहा जात है।<ref name=":1" /><ref>{{cite web|url=https://www.readwhere.com/read/c/72800774|title=পুরীধাম ও জগন্নাথদেবের ব্রহ্মরূপ বৃত্তান্ত|language=bn|date=28 June 2023|access-date=28 June 2023|website=dainikstatesmannews.com|publisher=[[Dainik Statesman]] (The Statesman Group)|location=Kolkata|first=Yogabrata|last=Chakraborty|trans-title=Puridham and the tale of lord Jagannath's legendary 'Bramharup'|archive-url=https://web.archive.org/web/20230628103603/https://www.readwhere.com/read/c/72800774|archive-date=28 June 2023|url-status=bot: unknown}}</ref> गुंडीचा मंदिर ते वापस आवत समय, तीनों देउता मौसी माँ मंदिर के लगे कुछ देर के खातिर रुकति हैं अउर हुवाँ पोड़ा पीठा का भोग लगावा जात है, जउन एक खास तरह का पुआ आय, जेहिका प्रभुजी का सबते मनपसंद माना जात है। सात दिन रहै के बादि, तीनों देउता अपने अस्थान पर लौटि आवति हैं। <ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==इतिहास==
रथ-यात्रा का वर्णन ब्रह्म पुरान, पद्म पुरान, स्कन्द पुरान, अउर कपिल संहिता मा पावा जात है। 13वीं सदी ते यूरोपीय यात्रिन के द्वारा ई पर्व का उल्लेख कीन गा है, जेहिमा सबते प्रमुख अउर सजीव वर्णन 17वीं सदी मा दर्ज कीन गे हैं।
==रथ==
जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा के तीनों रथ हर साल फस्सी, धौसा जइसि खास बिरवन के लकड़ी ते बनाए जाति हैं। ई रथ परंपरा के अनुसार पूर्व-रियासत दसपल्ला ते आए बढ़ई लोगन के याक खास टोली के द्वारा बनाए जाति हैं, जिनका यो काम करै का पुश्तैनी अधिकार अउर विसेषाधिकार प्राप्त है। लकड़ी के लट्ठन का पारंपरिक रूप ते महानदी मा बेड़ा बनाय कै बहावा जात है। इनका पुरी के लगे इकट्ठा कीन जात है अउर फिर सड़क के रस्ता ते हुवाँ पहुँचावा जात है।
सदिन ते तय अउर मानी जा रही एक खास बिधी के अनुसार सजाए गे तीनिउ रथ बड़ दाँड पर खड़े कीन जाति हैं। मंदिर के पूरबी दुआर के लगे चौड़े रस्ता पर रथन् का एकु लाइन मा लगावा जात है, जेहिका सिंहदुआरौ कहा जात है।
सब रथन के चारिहुँ ओर नौ पार्श्व देउता होति हैं, जिनका रथ के बगल मा अलग-अलग देउतन का दरसावय वाली रंगीन लकड़ी के मूरति के माध्यम ते दरसावा जात है। हर रथ मा एक सारथी अउर चारि घोड़ा होति हैं।
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
!बलभद्र
!सुभद्रा
|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|[[File:Nandighosha Ratho.png|thumb|Nandighosha Ratho]][[File:Chariot Nandighosha of Lord Jagannath.jpg|thumb|Chariot Nandighosha of Lord Jagannath]][[File:Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha.jpg|thumb|Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha]]
|[[File:Taladhwaja Ratho.png|thumb|Taladhwaja Ratho]][[फाइल:Chariot Taladhwaja of Lord Balabhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|[[File:Debadalana Ratho.png|thumb|Debadalana Ratho]][[फाइल:Chariot Devidalana of Goddess Subhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
|42' 3"
|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
|33' x 33'
|31'6" x 31'6"
|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|द्वारपाल
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# छत्रभंगरावण (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
# शुलिदुर्गा
# वाराही
# श्यामाकाली
# मंगला
# विमला
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==पर्यटन औ धार्मिक महत्त्व==
ई अस्थान का धार्मिक महत्व जगन्नाथजी का मंदिर है। सास्त्रन औ पुराननौ मा रथ-यात्रा के महत्ता स्वीकार कीन गै है। स्कन्द पुरान मा कहा गा है कि रथ-यात्रा मा जउन मनई श्री जगन्नाथ जी के नावँ का कीर्तन करत गुंडीचा नगर तक जात है वो पुनर्जन्म ते मुक्त होइ जात है। जउन मनई श्री जगन्नाथ जी का दरसन करत, परनाम करत, रस्ता के धूरि-कीचड़ मा ल्वाटत जाति हैं उइ सीधे भगवान श्री विष्णु के उत्तम धाम का जाति हैं। जउन मनई गुंडिचा मंडप मा रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम औ सुभद्रा देवी के दरसन दक्खिन दिसा का आवत भए करति हैं, उइ मोच्छ का प्राप्त होति हैं। रथयात्रा एक अइसन परब है जेहमा भगवान जगन्नाथ चलि कै जनता के बीच आवति हैं अउर उनके सुख-दुख मा सहभागी होति हैं। 'सब मनिसा मोर परजा' (सब मनई हमार परजा हैं), ई उनके उद्गार आहीं। भगवान जगन्नाथ तो पुरुषोत्तम हैं। उनमा श्रीराम, श्रीकृष्ण अद्वैत ब्रह्म रूप समाहित है। उनके अनेक नावँ हैं, उइ पतित पावन हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/religion/festivals/photo/bastar-chhattisgarh-unique-rath-yatra-is-celebrated-tupki-salami-tlifd-1289225-2021-07-12|title=यहां निकाली जाती है अनोखी जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी से दी जाती है सलामी|website=आज तक|language=hi|access-date=2021-07-13}}</ref>
==रथ यात्रा की तारीखैं
{| class="wikitable sortable mw-collapsible citiwise-data" style="text-align:center; font-size:85%; width:500px; margin:0px 0px 0em 0em;"
! colspan="3" | [[रथ यात्रा]] in [[पुरी]]
|-
! scope="col" | Year
! scope="col" | Starting Date
([[आषाढ़]] [[पक्ष|शुक्ल]] [द्वितीया|द्वितीया]])
! scope="col" | Ending Date
(रथयात्रा क नौवां दिन)
|-
! scope="row" | 2015
([[Nabakalebara 2015|Nabakalebara, 2015]])
| 18 जुलाई
| 26 जुलाई
|-
! scope="row" | 2016
| 6 जुलाई
| 14 जुलाई
|-
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| 25 जून
| 3 जुलाई
|-
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| 14 जुलाई
| 22 जुलाई
|-
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| 4 जुलाई
| 12 जुलाई
|-
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| 23 जून
| 1 जुलाई
|-
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| 12 जुलाई
| 20 जुलाई
|-
! scope="row" | 2022
| 1 जुलाई
| 9 जुलाई
|-
! scope="row" | 2023
| 20 जून
| 28 जून
|-
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| 7 जुलाई
| 15 जुलाई
|-
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| 27 जून
| 5 जुलाई
|-
! scope="row" | 2026
| 16 जुलाई
| 24 जुलाई
|-
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| 5 जुलाई
| 13 जुलाई
|-
! scope="row" | 2028
| 23 जून
| 1 जुलाई
|-
! scope="row" | 2029
| 13 जुलाई
| 21 जुलाई
|-
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| 2 जुलाई
| 10 जुलाई
|-
! scope="row" | 2031
| 22 जुलाई
| 30 जुलाई
|-
! scope="row" | 2032
| 9 जुलाई
| 17 जुलाई
|-
! scope="row" | 2033
| 28 जून
| 6 जुलाई
|-
! scope="row" | 2034
([[Nabakalebara|Nabakalebara, 2034]])
| 17 जुलाई
| 25 जुलाई
|-
|}
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== सन्दर्भ ==
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/* पर्यटन औ धार्मिक महत्त्व */
35255
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text/x-wiki
{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
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}}
पुरी के रथ-यात्रा, जेहिका रथ जात्रौ (ओड़िया: ରଥଯାତ୍ରା, ({{IPAc-en|ˈ|r|ʌ|θ|ə|_|ˈ|j|ɑː|t|r|ɑː}}, {{IPA|or|ɾɔt̪ʰɔ dʒat̪ɾa}}) कहा जात है, आषाढ़ (जून-जुलाई) के सुक्ल पच्छ मा दूज के दिन हर साल निकारी जाति है। यहिका सबते पुरान अउर सबते बड़े हिंदू रथपर्व के रूप मा माना जात है।<ref name=":1">{{Cite book |last=Lochtefeld |first=James G. |url=https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |title=The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: N-Z |date=2002 |publisher=Rosen |isbn=978-0-8239-3180-4 |pages=567 |language=en |access-date=23 April 2023 |archive-date=15 April 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230415134917/https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite news |date=2019-07-04 |title=Rath Yatra: The legend behind world's largest chariot festival |language=en-GB |work=BBC News |url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |access-date=2023-06-15 |archive-date=17 February 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230217152645/https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |url-status=live }}</ref>
भगवान [[जगन्नाथ]] ते जुड़ी या रथ-यात्रा भारत के [[ओडिशा]] राज्य के पुरी सहर मा आयोजित कीन जाति है। ई परब मा तमाम भक्त, तीनों देउतन ([[जगन्नाथ]], उनके भइया [[बलभद्र]] अउर बहिन [[सुभद्रा]]) का तीन बड़े-बड़े लकड़ी के रथन (नंदिघोष, तालध्वज अऊर दर्पदलन) मा बड़ दाँड पर [[गुंडीचा मंदिर]] तक खींचति हैं, जहाँ उइ एकु हफ्ता तक रहति हैं औ फिर जगन्नाथ मंदिर का लौटि आवति हैं। ई वापसी जात्रा का बहुड़ा यात्रा कहा जात है।<ref name=":1" /><ref>{{cite web|url=https://www.readwhere.com/read/c/72800774|title=পুরীধাম ও জগন্নাথদেবের ব্রহ্মরূপ বৃত্তান্ত|language=bn|date=28 June 2023|access-date=28 June 2023|website=dainikstatesmannews.com|publisher=[[Dainik Statesman]] (The Statesman Group)|location=Kolkata|first=Yogabrata|last=Chakraborty|trans-title=Puridham and the tale of lord Jagannath's legendary 'Bramharup'|archive-url=https://web.archive.org/web/20230628103603/https://www.readwhere.com/read/c/72800774|archive-date=28 June 2023|url-status=bot: unknown}}</ref> गुंडीचा मंदिर ते वापस आवत समय, तीनों देउता मौसी माँ मंदिर के लगे कुछ देर के खातिर रुकति हैं अउर हुवाँ पोड़ा पीठा का भोग लगावा जात है, जउन एक खास तरह का पुआ आय, जेहिका प्रभुजी का सबते मनपसंद माना जात है। सात दिन रहै के बादि, तीनों देउता अपने अस्थान पर लौटि आवति हैं। <ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==इतिहास==
रथ-यात्रा का वर्णन ब्रह्म पुरान, पद्म पुरान, स्कन्द पुरान, अउर कपिल संहिता मा पावा जात है। 13वीं सदी ते यूरोपीय यात्रिन के द्वारा ई पर्व का उल्लेख कीन गा है, जेहिमा सबते प्रमुख अउर सजीव वर्णन 17वीं सदी मा दर्ज कीन गे हैं।
==रथ==
जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा के तीनों रथ हर साल फस्सी, धौसा जइसि खास बिरवन के लकड़ी ते बनाए जाति हैं। ई रथ परंपरा के अनुसार पूर्व-रियासत दसपल्ला ते आए बढ़ई लोगन के याक खास टोली के द्वारा बनाए जाति हैं, जिनका यो काम करै का पुश्तैनी अधिकार अउर विसेषाधिकार प्राप्त है। लकड़ी के लट्ठन का पारंपरिक रूप ते महानदी मा बेड़ा बनाय कै बहावा जात है। इनका पुरी के लगे इकट्ठा कीन जात है अउर फिर सड़क के रस्ता ते हुवाँ पहुँचावा जात है।
सदिन ते तय अउर मानी जा रही एक खास बिधी के अनुसार सजाए गे तीनिउ रथ बड़ दाँड पर खड़े कीन जाति हैं। मंदिर के पूरबी दुआर के लगे चौड़े रस्ता पर रथन् का एकु लाइन मा लगावा जात है, जेहिका सिंहदुआरौ कहा जात है।
सब रथन के चारिहुँ ओर नौ पार्श्व देउता होति हैं, जिनका रथ के बगल मा अलग-अलग देउतन का दरसावय वाली रंगीन लकड़ी के मूरति के माध्यम ते दरसावा जात है। हर रथ मा एक सारथी अउर चारि घोड़ा होति हैं।
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
!बलभद्र
!सुभद्रा
|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|[[File:Nandighosha Ratho.png|thumb|Nandighosha Ratho]][[File:Chariot Nandighosha of Lord Jagannath.jpg|thumb|Chariot Nandighosha of Lord Jagannath]][[File:Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha.jpg|thumb|Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha]]
|[[File:Taladhwaja Ratho.png|thumb|Taladhwaja Ratho]][[फाइल:Chariot Taladhwaja of Lord Balabhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|[[File:Debadalana Ratho.png|thumb|Debadalana Ratho]][[फाइल:Chariot Devidalana of Goddess Subhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
|42' 3"
|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
|33' x 33'
|31'6" x 31'6"
|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|द्वारपाल
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# छत्रभंगरावण (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
# शुलिदुर्गा
# वाराही
# श्यामाकाली
# मंगला
# विमला
|}<ref>[https://www.jagannathdham.in/rath-yatra-festival/details-of-rath-yatra-chariots/]</ref>
==पर्यटन औ धार्मिक महत्त्व==
ई अस्थान का धार्मिक महत्व जगन्नाथजी का मंदिर है। सास्त्रन औ पुराननौ मा रथ-यात्रा के महत्ता स्वीकार कीन गै है। स्कन्द पुरान मा कहा गा है कि रथ-यात्रा मा जउन मनई श्री जगन्नाथ जी के नावँ का कीर्तन करत गुंडीचा नगर तक जात है वो पुनर्जन्म ते मुक्त होइ जात है। जउन मनई श्री जगन्नाथ जी का दरसन करत, परनाम करत, रस्ता के धूरि-कीचड़ मा ल्वाटत जाति हैं उइ सीधे भगवान श्री विष्णु के उत्तम धाम का जाति हैं। जउन मनई गुंडिचा मंडप मा रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम औ सुभद्रा देवी के दरसन दक्खिन दिसा का आवत भए करति हैं, उइ मोच्छ का प्राप्त होति हैं। रथयात्रा एक अइसन परब है जेहमा भगवान जगन्नाथ चलि कै जनता के बीच आवति हैं अउर उनके सुख-दुख मा सहभागी होति हैं। 'सब मनिसा मोर परजा' (सब मनई हमार परजा हैं), ई उनके उद्गार आहीं। भगवान जगन्नाथ तो पुरुषोत्तम हैं। उनमा श्रीराम, श्रीकृष्ण अद्वैत ब्रह्म रूप समाहित है। उनके अनेक नावँ हैं, उइ पतित पावन हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/religion/festivals/photo/bastar-chhattisgarh-unique-rath-yatra-is-celebrated-tupki-salami-tlifd-1289225-2021-07-12|title=यहां निकाली जाती है अनोखी जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी से दी जाती है सलामी|website=आज तक|language=hi|access-date=2021-07-13}}</ref>
==रथ यात्रा की तारीखैं==
{| class="wikitable sortable mw-collapsible citiwise-data" style="text-align:center; font-size:85%; width:500px; margin:0px 0px 0em 0em;"
! colspan="3" | [[पुरी]] के [[रथ यात्रा]]
|-
! scope="col" | साल
! scope="col" | सुरुआत
([[आषाढ़]] [[पक्ष|शुक्ल]] [[द्वितीया|द्वितीया]])
! scope="col" | आखिरी दिन
(रथयात्रा क नौवां दिन)
|-
! scope="row" | 2015
([[नवकलेवर 2015|[नवकलेवर, 2015]])
| 18 जुलाई
| 26 जुलाई
|-
! scope="row" | 2016
| 6 जुलाई
| 14 जुलाई
|-
! scope="row" | 2017
| 25 जून
| 3 जुलाई
|-
! scope="row" | 2018
| 14 जुलाई
| 22 जुलाई
|-
! scope="row" | 2019
| 4 जुलाई
| 12 जुलाई
|-
! scope="row" | 2020
| 23 जून
| 1 जुलाई
|-
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| 12 जुलाई
| 20 जुलाई
|-
! scope="row" | 2022
| 1 जुलाई
| 9 जुलाई
|-
! scope="row" | 2023
| 20 जून
| 28 जून
|-
! scope="row" | 2024
| 7 जुलाई
| 15 जुलाई
|-
! scope="row" | 2025
| 27 जून
| 5 जुलाई
|-
! scope="row" | 2026
| 16 जुलाई
| 24 जुलाई
|-
! scope="row" | 2027
| 5 जुलाई
| 13 जुलाई
|-
! scope="row" | 2028
| 23 जून
| 1 जुलाई
|-
! scope="row" | 2029
| 13 जुलाई
| 21 जुलाई
|-
! scope="row" | 2030
| 2 जुलाई
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|-
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| 22 जुलाई
| 30 जुलाई
|-
! scope="row" | 2032
| 9 जुलाई
| 17 जुलाई
|-
! scope="row" | 2033
| 28 जून
| 6 जुलाई
|-
! scope="row" | 2034
([[[नवकलेवर|[नवकलेवर, 2034]])
| 17 जुलाई
| 25 जुलाई
|-
|}
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== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
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35256
35255
2026-07-06T21:26:40Z
Avimaarak
3578
/* रथ यात्रा की तारीखैं */
35256
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
| image = Rath Yatra Puri 07-11027.jpg
| caption = देवताओं के तीन रथ और पृष्ठभूमि में मंदिर, पुरी
| type = हिंदू
| longtype = [[धार्मिक]]
| observedby =[[हिन्दू|हिन्दू]]
| significance = मोक्ष की ओर आत्मा की यात्रा का प्रतिनिधित्व करता है
| begins = [[आषाढ़]] शुक्ल द्वितीया
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| date2019 = 4 July
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| date2021 = 12 July
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| date2025 = 16 जुलाई, गुरूवार<ref>[https://www.drikpanchang.com/festivals/ratha-yatra/jagannatha-rathayatra-date-time.html?year=2025 Ratha Yatra 2025]</ref>
| date2026 = 16 July, Thursday<ref>[https://www.drikpanchang.com/festivals/ratha-yatra/jagannatha-rathayatra-date-time.html?year=2026 Ratha Yatra 2026]</ref>
}}
पुरी के रथ-यात्रा, जेहिका रथ जात्रौ (ओड़िया: ରଥଯାତ୍ରା, ({{IPAc-en|ˈ|r|ʌ|θ|ə|_|ˈ|j|ɑː|t|r|ɑː}}, {{IPA|or|ɾɔt̪ʰɔ dʒat̪ɾa}}) कहा जात है, आषाढ़ (जून-जुलाई) के सुक्ल पच्छ मा दूज के दिन हर साल निकारी जाति है। यहिका सबते पुरान अउर सबते बड़े हिंदू रथपर्व के रूप मा माना जात है।<ref name=":1">{{Cite book |last=Lochtefeld |first=James G. |url=https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |title=The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: N-Z |date=2002 |publisher=Rosen |isbn=978-0-8239-3180-4 |pages=567 |language=en |access-date=23 April 2023 |archive-date=15 April 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230415134917/https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite news |date=2019-07-04 |title=Rath Yatra: The legend behind world's largest chariot festival |language=en-GB |work=BBC News |url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |access-date=2023-06-15 |archive-date=17 February 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230217152645/https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |url-status=live }}</ref>
भगवान [[जगन्नाथ]] ते जुड़ी या रथ-यात्रा भारत के [[ओडिशा]] राज्य के पुरी सहर मा आयोजित कीन जाति है। ई परब मा तमाम भक्त, तीनों देउतन ([[जगन्नाथ]], उनके भइया [[बलभद्र]] अउर बहिन [[सुभद्रा]]) का तीन बड़े-बड़े लकड़ी के रथन (नंदिघोष, तालध्वज अऊर दर्पदलन) मा बड़ दाँड पर [[गुंडीचा मंदिर]] तक खींचति हैं, जहाँ उइ एकु हफ्ता तक रहति हैं औ फिर जगन्नाथ मंदिर का लौटि आवति हैं। ई वापसी जात्रा का बहुड़ा यात्रा कहा जात है।<ref name=":1" /><ref>{{cite web|url=https://www.readwhere.com/read/c/72800774|title=পুরীধাম ও জগন্নাথদেবের ব্রহ্মরূপ বৃত্তান্ত|language=bn|date=28 June 2023|access-date=28 June 2023|website=dainikstatesmannews.com|publisher=[[Dainik Statesman]] (The Statesman Group)|location=Kolkata|first=Yogabrata|last=Chakraborty|trans-title=Puridham and the tale of lord Jagannath's legendary 'Bramharup'|archive-url=https://web.archive.org/web/20230628103603/https://www.readwhere.com/read/c/72800774|archive-date=28 June 2023|url-status=bot: unknown}}</ref> गुंडीचा मंदिर ते वापस आवत समय, तीनों देउता मौसी माँ मंदिर के लगे कुछ देर के खातिर रुकति हैं अउर हुवाँ पोड़ा पीठा का भोग लगावा जात है, जउन एक खास तरह का पुआ आय, जेहिका प्रभुजी का सबते मनपसंद माना जात है। सात दिन रहै के बादि, तीनों देउता अपने अस्थान पर लौटि आवति हैं। <ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==इतिहास==
रथ-यात्रा का वर्णन ब्रह्म पुरान, पद्म पुरान, स्कन्द पुरान, अउर कपिल संहिता मा पावा जात है। 13वीं सदी ते यूरोपीय यात्रिन के द्वारा ई पर्व का उल्लेख कीन गा है, जेहिमा सबते प्रमुख अउर सजीव वर्णन 17वीं सदी मा दर्ज कीन गे हैं।
==रथ==
जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा के तीनों रथ हर साल फस्सी, धौसा जइसि खास बिरवन के लकड़ी ते बनाए जाति हैं। ई रथ परंपरा के अनुसार पूर्व-रियासत दसपल्ला ते आए बढ़ई लोगन के याक खास टोली के द्वारा बनाए जाति हैं, जिनका यो काम करै का पुश्तैनी अधिकार अउर विसेषाधिकार प्राप्त है। लकड़ी के लट्ठन का पारंपरिक रूप ते महानदी मा बेड़ा बनाय कै बहावा जात है। इनका पुरी के लगे इकट्ठा कीन जात है अउर फिर सड़क के रस्ता ते हुवाँ पहुँचावा जात है।
सदिन ते तय अउर मानी जा रही एक खास बिधी के अनुसार सजाए गे तीनिउ रथ बड़ दाँड पर खड़े कीन जाति हैं। मंदिर के पूरबी दुआर के लगे चौड़े रस्ता पर रथन् का एकु लाइन मा लगावा जात है, जेहिका सिंहदुआरौ कहा जात है।
सब रथन के चारिहुँ ओर नौ पार्श्व देउता होति हैं, जिनका रथ के बगल मा अलग-अलग देउतन का दरसावय वाली रंगीन लकड़ी के मूरति के माध्यम ते दरसावा जात है। हर रथ मा एक सारथी अउर चारि घोड़ा होति हैं।
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
!बलभद्र
!सुभद्रा
|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|[[File:Nandighosha Ratho.png|thumb|Nandighosha Ratho]][[File:Chariot Nandighosha of Lord Jagannath.jpg|thumb|Chariot Nandighosha of Lord Jagannath]][[File:Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha.jpg|thumb|Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha]]
|[[File:Taladhwaja Ratho.png|thumb|Taladhwaja Ratho]][[फाइल:Chariot Taladhwaja of Lord Balabhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|[[File:Debadalana Ratho.png|thumb|Debadalana Ratho]][[फाइल:Chariot Devidalana of Goddess Subhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
|42' 3"
|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
|33' x 33'
|31'6" x 31'6"
|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
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|-
|झण्डा क नाँव
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|-
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|-
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# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|द्वारपाल
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# छत्रभंगरावण (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
# शुलिदुर्गा
# वाराही
# श्यामाकाली
# मंगला
# विमला
|}<ref>[https://www.jagannathdham.in/rath-yatra-festival/details-of-rath-yatra-chariots/]</ref>
==पर्यटन औ धार्मिक महत्त्व==
ई अस्थान का धार्मिक महत्व जगन्नाथजी का मंदिर है। सास्त्रन औ पुराननौ मा रथ-यात्रा के महत्ता स्वीकार कीन गै है। स्कन्द पुरान मा कहा गा है कि रथ-यात्रा मा जउन मनई श्री जगन्नाथ जी के नावँ का कीर्तन करत गुंडीचा नगर तक जात है वो पुनर्जन्म ते मुक्त होइ जात है। जउन मनई श्री जगन्नाथ जी का दरसन करत, परनाम करत, रस्ता के धूरि-कीचड़ मा ल्वाटत जाति हैं उइ सीधे भगवान श्री विष्णु के उत्तम धाम का जाति हैं। जउन मनई गुंडिचा मंडप मा रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम औ सुभद्रा देवी के दरसन दक्खिन दिसा का आवत भए करति हैं, उइ मोच्छ का प्राप्त होति हैं। रथयात्रा एक अइसन परब है जेहमा भगवान जगन्नाथ चलि कै जनता के बीच आवति हैं अउर उनके सुख-दुख मा सहभागी होति हैं। 'सब मनिसा मोर परजा' (सब मनई हमार परजा हैं), ई उनके उद्गार आहीं। भगवान जगन्नाथ तो पुरुषोत्तम हैं। उनमा श्रीराम, श्रीकृष्ण अद्वैत ब्रह्म रूप समाहित है। उनके अनेक नावँ हैं, उइ पतित पावन हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/religion/festivals/photo/bastar-chhattisgarh-unique-rath-yatra-is-celebrated-tupki-salami-tlifd-1289225-2021-07-12|title=यहां निकाली जाती है अनोखी जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी से दी जाती है सलामी|website=आज तक|language=hi|access-date=2021-07-13}}</ref>
==रथ यात्रा की तारीखैं==
{| class="wikitable sortable mw-collapsible citiwise-data" style="text-align:center; font-size:85%; width:500px; margin:0px 0px 0em 0em;"
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|-
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| 24 जुलाई
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| 30 जुलाई
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([[नवकलेवर|[नवकलेवर, 2034]])
| 17 जुलाई
| 25 जुलाई
|-
|}
<!-- Please do not delete this section. -->
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
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35257
35256
2026-07-06T21:27:17Z
Avimaarak
3578
/* रथ यात्रा की तारीखैं */
35257
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
| image = Rath Yatra Puri 07-11027.jpg
| caption = देवताओं के तीन रथ और पृष्ठभूमि में मंदिर, पुरी
| type = हिंदू
| longtype = [[धार्मिक]]
| observedby =[[हिन्दू|हिन्दू]]
| significance = मोक्ष की ओर आत्मा की यात्रा का प्रतिनिधित्व करता है
| begins = [[आषाढ़]] शुक्ल द्वितीया
| ends = आषाढ़ शुक्ल की दशमी
| date2019 = 4 July
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| date =
| date2024 = 7 July, Sunday
| date2025 = 16 जुलाई, गुरूवार<ref>[https://www.drikpanchang.com/festivals/ratha-yatra/jagannatha-rathayatra-date-time.html?year=2025 Ratha Yatra 2025]</ref>
| date2026 = 16 July, Thursday<ref>[https://www.drikpanchang.com/festivals/ratha-yatra/jagannatha-rathayatra-date-time.html?year=2026 Ratha Yatra 2026]</ref>
}}
पुरी के रथ-यात्रा, जेहिका रथ जात्रौ (ओड़िया: ରଥଯାତ୍ରା, ({{IPAc-en|ˈ|r|ʌ|θ|ə|_|ˈ|j|ɑː|t|r|ɑː}}, {{IPA|or|ɾɔt̪ʰɔ dʒat̪ɾa}}) कहा जात है, आषाढ़ (जून-जुलाई) के सुक्ल पच्छ मा दूज के दिन हर साल निकारी जाति है। यहिका सबते पुरान अउर सबते बड़े हिंदू रथपर्व के रूप मा माना जात है।<ref name=":1">{{Cite book |last=Lochtefeld |first=James G. |url=https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |title=The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: N-Z |date=2002 |publisher=Rosen |isbn=978-0-8239-3180-4 |pages=567 |language=en |access-date=23 April 2023 |archive-date=15 April 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230415134917/https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite news |date=2019-07-04 |title=Rath Yatra: The legend behind world's largest chariot festival |language=en-GB |work=BBC News |url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |access-date=2023-06-15 |archive-date=17 February 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230217152645/https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |url-status=live }}</ref>
भगवान [[जगन्नाथ]] ते जुड़ी या रथ-यात्रा भारत के [[ओडिशा]] राज्य के पुरी सहर मा आयोजित कीन जाति है। ई परब मा तमाम भक्त, तीनों देउतन ([[जगन्नाथ]], उनके भइया [[बलभद्र]] अउर बहिन [[सुभद्रा]]) का तीन बड़े-बड़े लकड़ी के रथन (नंदिघोष, तालध्वज अऊर दर्पदलन) मा बड़ दाँड पर [[गुंडीचा मंदिर]] तक खींचति हैं, जहाँ उइ एकु हफ्ता तक रहति हैं औ फिर जगन्नाथ मंदिर का लौटि आवति हैं। ई वापसी जात्रा का बहुड़ा यात्रा कहा जात है।<ref name=":1" /><ref>{{cite web|url=https://www.readwhere.com/read/c/72800774|title=পুরীধাম ও জগন্নাথদেবের ব্রহ্মরূপ বৃত্তান্ত|language=bn|date=28 June 2023|access-date=28 June 2023|website=dainikstatesmannews.com|publisher=[[Dainik Statesman]] (The Statesman Group)|location=Kolkata|first=Yogabrata|last=Chakraborty|trans-title=Puridham and the tale of lord Jagannath's legendary 'Bramharup'|archive-url=https://web.archive.org/web/20230628103603/https://www.readwhere.com/read/c/72800774|archive-date=28 June 2023|url-status=bot: unknown}}</ref> गुंडीचा मंदिर ते वापस आवत समय, तीनों देउता मौसी माँ मंदिर के लगे कुछ देर के खातिर रुकति हैं अउर हुवाँ पोड़ा पीठा का भोग लगावा जात है, जउन एक खास तरह का पुआ आय, जेहिका प्रभुजी का सबते मनपसंद माना जात है। सात दिन रहै के बादि, तीनों देउता अपने अस्थान पर लौटि आवति हैं। <ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==इतिहास==
रथ-यात्रा का वर्णन ब्रह्म पुरान, पद्म पुरान, स्कन्द पुरान, अउर कपिल संहिता मा पावा जात है। 13वीं सदी ते यूरोपीय यात्रिन के द्वारा ई पर्व का उल्लेख कीन गा है, जेहिमा सबते प्रमुख अउर सजीव वर्णन 17वीं सदी मा दर्ज कीन गे हैं।
==रथ==
जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा के तीनों रथ हर साल फस्सी, धौसा जइसि खास बिरवन के लकड़ी ते बनाए जाति हैं। ई रथ परंपरा के अनुसार पूर्व-रियासत दसपल्ला ते आए बढ़ई लोगन के याक खास टोली के द्वारा बनाए जाति हैं, जिनका यो काम करै का पुश्तैनी अधिकार अउर विसेषाधिकार प्राप्त है। लकड़ी के लट्ठन का पारंपरिक रूप ते महानदी मा बेड़ा बनाय कै बहावा जात है। इनका पुरी के लगे इकट्ठा कीन जात है अउर फिर सड़क के रस्ता ते हुवाँ पहुँचावा जात है।
सदिन ते तय अउर मानी जा रही एक खास बिधी के अनुसार सजाए गे तीनिउ रथ बड़ दाँड पर खड़े कीन जाति हैं। मंदिर के पूरबी दुआर के लगे चौड़े रस्ता पर रथन् का एकु लाइन मा लगावा जात है, जेहिका सिंहदुआरौ कहा जात है।
सब रथन के चारिहुँ ओर नौ पार्श्व देउता होति हैं, जिनका रथ के बगल मा अलग-अलग देउतन का दरसावय वाली रंगीन लकड़ी के मूरति के माध्यम ते दरसावा जात है। हर रथ मा एक सारथी अउर चारि घोड़ा होति हैं।
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
!बलभद्र
!सुभद्रा
|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|[[File:Nandighosha Ratho.png|thumb|Nandighosha Ratho]][[File:Chariot Nandighosha of Lord Jagannath.jpg|thumb|Chariot Nandighosha of Lord Jagannath]][[File:Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha.jpg|thumb|Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha]]
|[[File:Taladhwaja Ratho.png|thumb|Taladhwaja Ratho]][[फाइल:Chariot Taladhwaja of Lord Balabhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|[[File:Debadalana Ratho.png|thumb|Debadalana Ratho]][[फाइल:Chariot Devidalana of Goddess Subhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
|42' 3"
|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
|33' x 33'
|31'6" x 31'6"
|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|द्वारपाल
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# छत्रभंगरावण (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
# शुलिदुर्गा
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# श्यामाकाली
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# विमला
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==पर्यटन औ धार्मिक महत्त्व==
ई अस्थान का धार्मिक महत्व जगन्नाथजी का मंदिर है। सास्त्रन औ पुराननौ मा रथ-यात्रा के महत्ता स्वीकार कीन गै है। स्कन्द पुरान मा कहा गा है कि रथ-यात्रा मा जउन मनई श्री जगन्नाथ जी के नावँ का कीर्तन करत गुंडीचा नगर तक जात है वो पुनर्जन्म ते मुक्त होइ जात है। जउन मनई श्री जगन्नाथ जी का दरसन करत, परनाम करत, रस्ता के धूरि-कीचड़ मा ल्वाटत जाति हैं उइ सीधे भगवान श्री विष्णु के उत्तम धाम का जाति हैं। जउन मनई गुंडिचा मंडप मा रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम औ सुभद्रा देवी के दरसन दक्खिन दिसा का आवत भए करति हैं, उइ मोच्छ का प्राप्त होति हैं। रथयात्रा एक अइसन परब है जेहमा भगवान जगन्नाथ चलि कै जनता के बीच आवति हैं अउर उनके सुख-दुख मा सहभागी होति हैं। 'सब मनिसा मोर परजा' (सब मनई हमार परजा हैं), ई उनके उद्गार आहीं। भगवान जगन्नाथ तो पुरुषोत्तम हैं। उनमा श्रीराम, श्रीकृष्ण अद्वैत ब्रह्म रूप समाहित है। उनके अनेक नावँ हैं, उइ पतित पावन हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/religion/festivals/photo/bastar-chhattisgarh-unique-rath-yatra-is-celebrated-tupki-salami-tlifd-1289225-2021-07-12|title=यहां निकाली जाती है अनोखी जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी से दी जाती है सलामी|website=आज तक|language=hi|access-date=2021-07-13}}</ref>
==रथ यात्रा की तारीखैं==
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|-
! scope="col" | साल
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([[आषाढ़]] [[पक्ष|शुक्ल]] [[द्वितीया|द्वितीया]])
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(रथयात्रा क नौवां दिन)
|-
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([[नवकलेवर 2015|[नवकलेवर, 2015]])
| 18 जुलाई
| 26 जुलाई
|-
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| 14 जुलाई
|-
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| 3 जुलाई
|-
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| 22 जुलाई
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| 12 जुलाई
|-
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|-
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| 15 जुलाई
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| 5 जुलाई
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| '''24 जुलाई'''
|-
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| 13 जुलाई
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|-
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| 30 जुलाई
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| 17 जुलाई
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([[नवकलेवर|[नवकलेवर, 2034]])
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| 25 जुलाई
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== सन्दर्भ ==
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/* पर्यटन औ धार्मिक महत्त्व */
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text/x-wiki
{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
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| date2026 = 16 July, Thursday<ref>[https://www.drikpanchang.com/festivals/ratha-yatra/jagannatha-rathayatra-date-time.html?year=2026 Ratha Yatra 2026]</ref>
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पुरी के रथ-यात्रा, जेहिका रथ जात्रौ (ओड़िया: ରଥଯାତ୍ରା, ({{IPAc-en|ˈ|r|ʌ|θ|ə|_|ˈ|j|ɑː|t|r|ɑː}}, {{IPA|or|ɾɔt̪ʰɔ dʒat̪ɾa}}) कहा जात है, आषाढ़ (जून-जुलाई) के सुक्ल पच्छ मा दूज के दिन हर साल निकारी जाति है। यहिका सबते पुरान अउर सबते बड़े हिंदू रथपर्व के रूप मा माना जात है।<ref name=":1">{{Cite book |last=Lochtefeld |first=James G. |url=https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |title=The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: N-Z |date=2002 |publisher=Rosen |isbn=978-0-8239-3180-4 |pages=567 |language=en |access-date=23 April 2023 |archive-date=15 April 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230415134917/https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite news |date=2019-07-04 |title=Rath Yatra: The legend behind world's largest chariot festival |language=en-GB |work=BBC News |url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |access-date=2023-06-15 |archive-date=17 February 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230217152645/https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |url-status=live }}</ref>
भगवान [[जगन्नाथ]] ते जुड़ी या रथ-यात्रा भारत के [[ओडिशा]] राज्य के पुरी सहर मा आयोजित कीन जाति है। ई परब मा तमाम भक्त, तीनों देउतन ([[जगन्नाथ]], उनके भइया [[बलभद्र]] अउर बहिन [[सुभद्रा]]) का तीन बड़े-बड़े लकड़ी के रथन (नंदिघोष, तालध्वज अऊर दर्पदलन) मा बड़ दाँड पर [[गुंडीचा मंदिर]] तक खींचति हैं, जहाँ उइ एकु हफ्ता तक रहति हैं औ फिर जगन्नाथ मंदिर का लौटि आवति हैं। ई वापसी जात्रा का बहुड़ा यात्रा कहा जात है।<ref name=":1" /><ref>{{cite web|url=https://www.readwhere.com/read/c/72800774|title=পুরীধাম ও জগন্নাথদেবের ব্রহ্মরূপ বৃত্তান্ত|language=bn|date=28 June 2023|access-date=28 June 2023|website=dainikstatesmannews.com|publisher=[[Dainik Statesman]] (The Statesman Group)|location=Kolkata|first=Yogabrata|last=Chakraborty|trans-title=Puridham and the tale of lord Jagannath's legendary 'Bramharup'|archive-url=https://web.archive.org/web/20230628103603/https://www.readwhere.com/read/c/72800774|archive-date=28 June 2023|url-status=bot: unknown}}</ref> गुंडीचा मंदिर ते वापस आवत समय, तीनों देउता मौसी माँ मंदिर के लगे कुछ देर के खातिर रुकति हैं अउर हुवाँ पोड़ा पीठा का भोग लगावा जात है, जउन एक खास तरह का पुआ आय, जेहिका प्रभुजी का सबते मनपसंद माना जात है। सात दिन रहै के बादि, तीनों देउता अपने अस्थान पर लौटि आवति हैं। <ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==इतिहास==
रथ-यात्रा का वर्णन ब्रह्म पुरान, पद्म पुरान, स्कन्द पुरान, अउर कपिल संहिता मा पावा जात है। 13वीं सदी ते यूरोपीय यात्रिन के द्वारा ई पर्व का उल्लेख कीन गा है, जेहिमा सबते प्रमुख अउर सजीव वर्णन 17वीं सदी मा दर्ज कीन गे हैं।
==रथ==
जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा के तीनों रथ हर साल फस्सी, धौसा जइसि खास बिरवन के लकड़ी ते बनाए जाति हैं। ई रथ परंपरा के अनुसार पूर्व-रियासत दसपल्ला ते आए बढ़ई लोगन के याक खास टोली के द्वारा बनाए जाति हैं, जिनका यो काम करै का पुश्तैनी अधिकार अउर विसेषाधिकार प्राप्त है। लकड़ी के लट्ठन का पारंपरिक रूप ते महानदी मा बेड़ा बनाय कै बहावा जात है। इनका पुरी के लगे इकट्ठा कीन जात है अउर फिर सड़क के रस्ता ते हुवाँ पहुँचावा जात है।
सदिन ते तय अउर मानी जा रही एक खास बिधी के अनुसार सजाए गे तीनिउ रथ बड़ दाँड पर खड़े कीन जाति हैं। मंदिर के पूरबी दुआर के लगे चौड़े रस्ता पर रथन् का एकु लाइन मा लगावा जात है, जेहिका सिंहदुआरौ कहा जात है।
सब रथन के चारिहुँ ओर नौ पार्श्व देउता होति हैं, जिनका रथ के बगल मा अलग-अलग देउतन का दरसावय वाली रंगीन लकड़ी के मूरति के माध्यम ते दरसावा जात है। हर रथ मा एक सारथी अउर चारि घोड़ा होति हैं।
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
!बलभद्र
!सुभद्रा
|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|[[File:Nandighosha Ratho.png|thumb|Nandighosha Ratho]][[File:Chariot Nandighosha of Lord Jagannath.jpg|thumb|Chariot Nandighosha of Lord Jagannath]][[File:Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha.jpg|thumb|Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha]]
|[[File:Taladhwaja Ratho.png|thumb|Taladhwaja Ratho]][[फाइल:Chariot Taladhwaja of Lord Balabhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|[[File:Debadalana Ratho.png|thumb|Debadalana Ratho]][[फाइल:Chariot Devidalana of Goddess Subhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
|42' 3"
|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
|33' x 33'
|31'6" x 31'6"
|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|द्वारपाल
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# छत्रभंगरावण (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
# शुलिदुर्गा
# वाराही
# श्यामाकाली
# मंगला
# विमला
|}<ref>[https://www.jagannathdham.in/rath-yatra-festival/details-of-rath-yatra-chariots/]</ref>
==पर्यटन अउर धार्मिक महत्त्व==
ई अस्थान का धार्मिक महत्व जगन्नाथजी का मंदिर है। सास्त्रन औ पुराननौ मा रथ-यात्रा के महत्ता स्वीकार कीन गै है। स्कन्द पुरान मा कहा गा है कि रथ-यात्रा मा जउन मनई श्री जगन्नाथ जी के नावँ का कीर्तन करत गुंडीचा नगर तक जात है वो पुनर्जन्म ते मुक्त होइ जात है। जउन मनई श्री जगन्नाथ जी का दरसन करत, परनाम करत, रस्ता के धूरि-कीचड़ मा ल्वाटत जाति हैं उइ सीधे भगवान श्री विष्णु के उत्तम धाम का जाति हैं। जउन मनई गुंडिचा मंडप मा रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम औ सुभद्रा देवी के दरसन दक्खिन दिसा का आवत भए करति हैं, उइ मोच्छ का प्राप्त होति हैं। रथयात्रा एक अइसन परब है जेहमा भगवान जगन्नाथ चलि कै जनता के बीच आवति हैं अउर उनके सुख-दुख मा सहभागी होति हैं। 'सब मनिसा मोर परजा' (सब मनई हमार परजा हैं), ई उनके उद्गार आहीं। भगवान जगन्नाथ तो पुरुषोत्तम हैं। उनमा श्रीराम, श्रीकृष्ण अद्वैत ब्रह्म रूप समाहित है। उनके अनेक नावँ हैं, उइ पतित पावन हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/religion/festivals/photo/bastar-chhattisgarh-unique-rath-yatra-is-celebrated-tupki-salami-tlifd-1289225-2021-07-12|title=यहां निकाली जाती है अनोखी जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी से दी जाती है सलामी|website=आज तक|language=hi|access-date=2021-07-13}}</ref>
==रथ यात्रा की तारीखैं==
{| class="wikitable sortable mw-collapsible citiwise-data" style="text-align:center; font-size:85%; width:500px; margin:0px 0px 0em 0em;"
! colspan="3" | [[पुरी]] के [[रथ यात्रा]]
|-
! scope="col" | साल
! scope="col" | सुरुआत
([[आषाढ़]] [[पक्ष|शुक्ल]] [[द्वितीया|द्वितीया]])
! scope="col" | आखिरी दिन
(रथयात्रा क नौवां दिन)
|-
! scope="row" | 2015
([[नवकलेवर 2015|[नवकलेवर, 2015]])
| 18 जुलाई
| 26 जुलाई
|-
! scope="row" | 2016
| 6 जुलाई
| 14 जुलाई
|-
! scope="row" | 2017
| 25 जून
| 3 जुलाई
|-
! scope="row" | 2018
| 14 जुलाई
| 22 जुलाई
|-
! scope="row" | 2019
| 4 जुलाई
| 12 जुलाई
|-
! scope="row" | 2020
| 23 जून
| 1 जुलाई
|-
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| 12 जुलाई
| 20 जुलाई
|-
! scope="row" | 2022
| 1 जुलाई
| 9 जुलाई
|-
! scope="row" | 2023
| 20 जून
| 28 जून
|-
! scope="row" | 2024
| 7 जुलाई
| 15 जुलाई
|-
! scope="row" | 2025
| 27 जून
| 5 जुलाई
|-
! scope="row" | 2026
| '''16 जुलाई'''
| '''24 जुलाई'''
|-
! scope="row" | 2027
| 5 जुलाई
| 13 जुलाई
|-
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| 23 जून
| 1 जुलाई
|-
! scope="row" | 2029
| 13 जुलाई
| 21 जुलाई
|-
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| 2 जुलाई
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|-
! scope="row" | 2031
| 22 जुलाई
| 30 जुलाई
|-
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| 9 जुलाई
| 17 जुलाई
|-
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| 28 जून
| 6 जुलाई
|-
! scope="row" | 2034
([[नवकलेवर|[नवकलेवर, 2034]])
| 17 जुलाई
| 25 जुलाई
|-
|}
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== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
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35259
35258
2026-07-06T21:46:26Z
Avimaarak
3578
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
| image = Rath Yatra Puri 07-11027.jpg
| caption = देवताओं के तीन रथ और पृष्ठभूमि में मंदिर, पुरी
| type = हिंदू
| longtype = [[धार्मिक]]
| observedby =[[हिन्दू|हिन्दू]]
| significance = मोक्ष की ओर आत्मा की यात्रा का प्रतिनिधित्व करता है
| begins = [[आषाढ़]] शुक्ल द्वितीया
| ends = आषाढ़ शुक्ल की दशमी
| date2019 = 4 July
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| date =
| date2024 = 7 July, Sunday
| date2025 = 16 जुलाई, गुरूवार<ref>[https://www.drikpanchang.com/festivals/ratha-yatra/jagannatha-rathayatra-date-time.html?year=2025 Ratha Yatra 2025]</ref>
| date2026 = 16 July, Thursday<ref>[https://www.drikpanchang.com/festivals/ratha-yatra/jagannatha-rathayatra-date-time.html?year=2026 Ratha Yatra 2026]</ref>
}}
पुरी के रथ-यात्रा, जेहिका रथ जात्रौ (ओड़िया: ରଥଯାତ୍ରା, ({{IPAc-en|ˈ|r|ʌ|θ|ə|_|ˈ|j|ɑː|t|r|ɑː}}, {{IPA|or|ɾɔt̪ʰɔ dʒat̪ɾa}}) कहा जात है, आषाढ़ (जून-जुलाई) के सुक्ल पच्छ मा दूज के दिन हर साल निकारी जाति है। यहिका सबते पुरान अउर सबते बड़े हिंदू रथपर्व के रूप मा माना जात है।<ref name=":1">{{Cite book |last=Lochtefeld |first=James G. |url=https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |title=The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: N-Z |date=2002 |publisher=Rosen |isbn=978-0-8239-3180-4 |pages=567 |language=en |access-date=23 April 2023 |archive-date=15 April 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230415134917/https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite news |date=2019-07-04 |title=Rath Yatra: The legend behind world's largest chariot festival |language=en-GB |work=BBC News |url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |access-date=2023-06-15 |archive-date=17 February 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230217152645/https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |url-status=live }}</ref>
भगवान [[जगन्नाथ]] ते जुड़ी या रथ-यात्रा भारत के [[ओडिशा]] राज्य के पुरी सहर मा आयोजित कीन जाति है। ई परब मा तमाम भक्त, तीनों देउतन ([[जगन्नाथ]], उनके भइया [[बलभद्र]] अउर बहिन [[सुभद्रा]]) का तीन बड़े-बड़े लकड़ी के रथन (नंदिघोष, तालध्वज अऊर दर्पदलन) मा बड़ दाँड पर [[गुंडीचा मंदिर]] तक खींचति हैं, जहाँ उइ एकु हफ्ता तक रहति हैं औ फिर जगन्नाथ मंदिर का लौटि आवति हैं। ई वापसी जात्रा का बहुड़ा यात्रा कहा जात है।<ref name=":1" /><ref>{{cite web|url=https://www.readwhere.com/read/c/72800774|title=পুরীধাম ও জগন্নাথদেবের ব্রহ্মরূপ বৃত্তান্ত|language=bn|date=28 June 2023|access-date=28 June 2023|website=dainikstatesmannews.com|publisher=[[Dainik Statesman]] (The Statesman Group)|location=Kolkata|first=Yogabrata|last=Chakraborty|trans-title=Puridham and the tale of lord Jagannath's legendary 'Bramharup'|archive-url=https://web.archive.org/web/20230628103603/https://www.readwhere.com/read/c/72800774|archive-date=28 June 2023|url-status=bot: unknown}}</ref> गुंडीचा मंदिर ते वापस आवत समय, तीनों देउता मौसी माँ मंदिर के लगे कुछ देर के खातिर रुकति हैं अउर हुवाँ पोड़ा पीठा का भोग लगावा जात है, जउन एक खास तरह का पुआ आय, जेहिका प्रभुजी का सबते मनपसंद माना जात है। सात दिन रहै के बादि, तीनों देउता अपने अस्थान पर लौटि आवति हैं। <ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==इतिहास==
रथ-यात्रा का वर्णन ब्रह्म पुरान, पद्म पुरान, स्कन्द पुरान, अउर कपिल संहिता मा पावा जात है। 13वीं सदी ते यूरोपीय यात्रिन के द्वारा ई पर्व का उल्लेख कीन गा है, जेहिमा सबते प्रमुख अउर सजीव वर्णन 17वीं सदी मा दर्ज कीन गे हैं।
==रथ==
जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा के तीनों रथ हर साल फस्सी, धौसा जइसि खास बिरवन के लकड़ी ते बनाए जाति हैं। ई रथ परंपरा के अनुसार पूर्व-रियासत दसपल्ला ते आए बढ़ई लोगन के याक खास टोली के द्वारा बनाए जाति हैं, जिनका यो काम करै का पुश्तैनी अधिकार अउर विसेषाधिकार प्राप्त है। लकड़ी के लट्ठन का पारंपरिक रूप ते महानदी मा बेड़ा बनाय कै बहावा जात है। इनका पुरी के लगे इकट्ठा कीन जात है अउर फिर सड़क के रस्ता ते हुवाँ पहुँचावा जात है।
सदिन ते तय अउर मानी जा रही एक खास बिधी के अनुसार सजाए गे तीनिउ रथ बड़ दाँड पर खड़े कीन जाति हैं। मंदिर के पूरबी दुआर के लगे चौड़े रस्ता पर रथन् का एकु लाइन मा लगावा जात है, जेहिका सिंहदुआरौ कहा जात है।
सब रथन के चारिहुँ ओर नौ पार्श्व देउता होति हैं, जिनका रथ के बगल मा अलग-अलग देउतन का दरसावय वाली रंगीन लकड़ी के मूरति के माध्यम ते दरसावा जात है। हर रथ मा एक सारथी अउर चारि घोड़ा होति हैं।
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
!बलभद्र
!सुभद्रा
|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|[[File:Nandighosha Ratho.png|thumb|Nandighosha Ratho]][[File:Chariot Nandighosha of Lord Jagannath.jpg|thumb|Chariot Nandighosha of Lord Jagannath]][[File:Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha.jpg|thumb|Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha]]
|[[File:Taladhwaja Ratho.png|thumb|Taladhwaja Ratho]][[फाइल:Chariot Taladhwaja of Lord Balabhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|[[File:Debadalana Ratho.png|thumb|Debadalana Ratho]][[फाइल:Chariot Devidalana of Goddess Subhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
|42' 3"
|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
|33' x 33'
|31'6" x 31'6"
|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
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|-
|सारथी
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|-
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# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|द्वारपाल
|
# जया
# विजया
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# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# छत्रभंगरावण (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
# शुलिदुर्गा
# वाराही
# श्यामाकाली
# मंगला
# विमला
|}<ref>[https://www.jagannathdham.in/rath-yatra-festival/details-of-rath-yatra-chariots/]</ref>
==पर्यटन अउर धार्मिक महत्त्व==
ई अस्थान का धार्मिक महत्व जगन्नाथजी का मंदिर है। सास्त्रन औ पुराननौ मा रथ-यात्रा के महत्ता स्वीकार कीन गै है। स्कन्द पुरान मा कहा गा है कि रथ-यात्रा मा जउन मनई श्री जगन्नाथ जी के नावँ का कीर्तन करत गुंडीचा नगर तक जात है वो पुनर्जन्म ते मुक्त होइ जात है। जउन मनई श्री जगन्नाथ जी का दरसन करत, परनाम करत, रस्ता के धूरि-कीचड़ मा ल्वाटत जाति हैं उइ सीधे भगवान श्री विष्णु के उत्तम धाम का जाति हैं। जउन मनई गुंडिचा मंडप मा रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम औ सुभद्रा देवी के दरसन दक्खिन दिसा का आवत भए करति हैं, उइ मोच्छ का प्राप्त होति हैं। रथयात्रा एक अइसन परब है जेहमा भगवान जगन्नाथ चलि कै जनता के बीच आवति हैं अउर उनके सुख-दुख मा सहभागी होति हैं। 'सब मनिसा मोर परजा' (सब मनई हमार परजा हैं), ई उनके उद्गार आहीं। भगवान जगन्नाथ तो पुरुषोत्तम हैं। उनमा श्रीराम, श्रीकृष्ण अद्वैत ब्रह्म रूप समाहित है। उनके अनेक नावँ हैं, उइ पतित पावन हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/religion/festivals/photo/bastar-chhattisgarh-unique-rath-yatra-is-celebrated-tupki-salami-tlifd-1289225-2021-07-12|title=यहां निकाली जाती है अनोखी जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी से दी जाती है सलामी|website=आज तक|language=hi|access-date=2021-07-13}}</ref>
==यात्रा का स्वरूप==
===सेवा-समर्पण===
जगन्नाथ मंदिर मा कई तरह के सेवक होति हैं जउन रथ पर अपनि सेवा देति हैं।
*सुआरा
*महासुआरा
*====डाहुक:==== रथ डाहुक बोलि (ओड़िया: ଡାହୁକ ବୋଲି, जिनका "डाहुक गीतौ" (ଡାହୁକ ଗୀତ) कहा जात है) काव्यात्मक पाठ आहीं। रथ-यात्रा प्रजनन अउर जीवन चक्र के याक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति आय, डाहुक द्वारा गाए जाय वाली ई "बोलि" मा अश्लील/फूहड़ गीत सामिल होति हैं। यहौ माना जात है कि जब तक डाहुक बोलि नहीं गावा जात है, तब तक 'रथ नहीं चलत है। ई गीत बिना कउनो रोक-टोक के खुलेआम गाए जाति हैं। डाहुक परब के समय रथ के गति का नियंत्रित कीन जात है।
*दइता पति
*पुस्पालक
*बनाटी खेलाड़ी: बनाटी याक बहुत पुरान कला आय, जेहमा एकु मनई रस्सी के छोर पर बंधे आगि लगे गोला का घुमावत है। हर साल रथ-यात्रा मा भक्त भगवान जगन्नाथ का खुस करै के खातिर "बनाटी" करति हैं। बनाटी मा जुड़े चाकू अउर आगि के गोला, देउता के जुलूस मा तब रंग भरि देति हैं जब वहु आपन मंजिल तक पहुँचत है।
हेरा पंचमी
हेरा पंचमी पुरी के बड़ जगन्नाथ मंदिर मा रथ-यात्रा के दौरान मनावा जाय वाला एकु अनुष्ठान आय। यहिका देवी लक्ष्मी के रसम के रूप मा जाना जात है। रथ-यात्रा ते पाँचवाँ दिन, यानी आषाढ़ के सुक्ल पच्छ के पाँचवाँ दिन हेरा पंचमी के रूप मा जाना जात है। रथ-यात्रा मा, भगवान जगन्नाथ आपन मेहरारू महालक्ष्मी का पीछे छोड़ि कै, आपन भइया बलभद्र अउर बहिन सुभद्रा के साथै आपन दिव्य हथियार सुदर्शन का लइ कै एकु दिव्य सैर पर निकरति हैं। देवी देउता के खातिर आपन गुस्सा देखावति हैं। उइ सुबर्ण महालक्ष्मी के रूप मा याक पालकी मा गुंडीचा मंदिर, अड़प मंडप तक जाति हैं अउर भगवान का जल्दी ते जल्दी मंदिर लौटि आवै के धमकी देति हैं। उनका खुस करै के खातिर, देउता उनका आज्ञा माला (सहमति के माला) दे कै मानि जाति हैं। देवी का गुस्सा मा देखि कै, सेवक लोग गुंडीचा के मुख्य दुआर बंद कइ देति हैं। महालक्ष्मी नाकाचना गेट ते मुख्य मंदिर मा लौटि आवति हैं। याक अनोखी रसम मा, देवी आपन एकु सेवक का नंदिघोष रथ के एकु हिस्सा का नुकसान पहुँचावय का आदेस देति हैं। यहिके बादि उइ गुंडीचा मंदिर के बाहिर एकु इमली के पेड़ के पीछे छिपि जाति हैं। कुछ देर बादि, उइ हेरा गोहरी लेन के नाँव ते जाने जाय वाले एकु अलग रस्ता ते चुपचाप आपन घर-मंदिर भागि जाति हैं। जगन्नाथ के लाखन भक्त ई अनोखी रसम का आनंद लेति हैं। श्रीमुंदिर के एकु महत्वपूरन कारज के रूप मा हेरा पंचमी के रसम के जिकिर स्कन्द पुरान मा पावा जात है। मंदिर के इतिहास के अनुसार, ई "उच्छौ" महाराजा कपिलेंद्र देब के समय मा सुरू भा रहै। वहिका राज ते पहिले, हेरा पंचमी कारज का मंतरन के पाठ के साथै प्रतीकात्मक रूप मा मनावा जात रहै। जइसा कि मादला पांजी मा कहा गा है, राजा कपिलेंद्र देब सोने के बनी महालक्ष्मी के मूरति लइ कै ई परथा का बदल दिहिन अउर ई परब का अउर जादा असली बनाय दिहिन।
चंदन जात्रा
चंदन जात्रा या "चंदन परब" 42 दिन का समय आय जउन रथन के निर्माण काम के सुरूआत का दरसावत है। ई समय का आधा-आधा बांटा गा है, जेहमा हर एकु मा 21 दिन होति हैं। पहिले आधा भाग का बाहिर चंदन कहा जात है, जेहमा प्रमुख देउतन के प्रतिनिधि मूरतिन का रंगीन जुलूस मा बाहिर निकाला जात है अउर हर दिन नरेंद्र तालाब मा एकु अनुष्ठानिक नाव के सवारी करावा जात है। ई देउतन मा मदन मोहन (जगन्नाथ), राम-कृष्ण, लक्ष्मी, सरस्वती अउर पंच पांडव - पाँच मुख्य शिव मंदिरन के प्रमुख देउता सामिल आहीं। बाद वाला हिस्सा, जेहिका भीतर चंदन कहा जात है, ओहमा कई अइसन रसम होति हैं जउन जनता के खातिर नाइ खुली होति। रथन के निर्माण अच्छय तृतीया का, वैशाख के सुक्ल पच्छ के तीसरे दिन, अनुष्ठानिक अगिन पूजा के साथै सुरू होत है। यो पुरी के राजा के महल के सामने अउर पुरी मंदिर के मुख्य कार्यालय के उल्टे दिसा मा होत है। बादि मा देउतन का तालाब के बीच एकु छोटे मंदिर मा पानी, चंदन के लेप, इत्तर अउर फूलन ते भरे पत्थर के टब मा अनुष्ठानिक असनान करावा जात है।
ई चंदन परब के समाप्ती सनान जात्रा या "असनान परब" मा होत है जउन जेठ महीना के पूरनमासी के दिन होत है। जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा का 108 घड़ा पानी ते अन्हवावा जात है अउर फिर उइ लगभग दुई हफ्ता तक प्रतीकात्मक अउर अनुष्ठानिक स्वास्थ्य-लाभ (बीमारी ते उबरै के समय) मा रहति हैं। उनका जनता के दरसन ते रोक दीन जात है। खाली तीन खास पट्ट चित्र, कलफ ते कड़े कीन गै कपड़ा पर प्राकृतिक रंगन ते बनी पारंपरिक ओड़िया चित्रकारी, जेहिका अणसर पट्टी कहा जात है, बाँस के परदा पर टांगि दीन जाति हैं जउन उनका जनता के नजर ते छिपउती हैं। ई समय मा, तीनों देउतन का उनकी बीमारी ठीक करै के खातिर खाली जड़ि, पत्ता, बेरि अउर फल दीन जात है। यह रसम जगन्नाथ पंथ के जनम अउर बिकास मा मजबूत आदिवासी तत्वन के याद दिलावत है। सुरुवाती आदिवासी उपासक बिस्वाबसु, जउन सिकारिन के सरदार रहैं, उनकी बिटिया ललिता अउर ब्राह्मण पुजारी बिद्यापति के संतान दइतापति या दइता के नाँव ते जाने जाति हैं। उनके लगे बीमारी ते उबरै के समय अउर रथ जात्रा या रथ परब के पूरे समय प्रभुजी के सेवा करै का विसेस अधिकार होत है।
*सुना बेश
जगन्नाथ के सुना बेश-
तीनों देउतन के रथ गुंडीचा मंदिर ते मुख्य मंदिर लौटि आवै के बादि, उनका सोने के गहना पहिराए जाति है अउर रथन पर उनकी पूजा कीन जाति है। ई उच्छौ का सुना बेश कहा जात है। परंपरा बतावति है कि या घटना सबते पहिले राजा कपिलेंद्र देव द्वारा 1460 मा सुरू कीन गै रहै, जब जुद्ध ते जीत कै लौटै के बादि जगन्नाथ का सोना दान किहिन रहैं। देउतन का लगभग 208 किलो वजन के सोने के गहिना ते सजावा जात है। 2014 मा 9 जुलाई का भए ई कारज का लगभग नौ लाख भक्तन देखिन रहैं।
2015 के रथ-यात्रा अउर पहंडी
रथजात्रा 2017 के समय जगन्नाथ के पहंडी।
2015 मा रथ-यात्रा के मौका पर, 19 साल बादि रथन पर नए रूप (नबकलेबर) मा देउतन के याक झलक पावै के खातिर लाखन भक्त तटीय सहर पुरी मा भीड़ लगाय दिहिन। यो ओडिशा मा अब तक के सबते बड़ धार्मिक सम्मेलन रहै। (हवाला चाही)
2025 के रथ-यात्रा
2025 के रथ-यात्रा डिजिटल तकनीक के जुड़ाव के साथै भक्ति मा एकु बड़ बदलाव का दरसाय दिहिस। लाखन भक्तन के पारंपरिक रूप ते इकट्ठा होए के साथ-साथ, बड़ संख्या मा मनई लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए वर्चुअली जुड़िन, जउन धार्मिक पालन मा याक डिजिटल क्रांति के आवै का देखावत है। 2025 के जात्रा के मुख्य बातन मा स्थानीय प्रसासन द्वारा लागू कीन गै भीड़ प्रबंधन के बेहतर रणनीति, ग्लोबल लाइव स्ट्रीमिंग जेहते जादा लोग सामिल होइ पाइन, अउर पर्यावरण स्थिरता पर ध्यान सामिल रहै। बायोडिग्रेडेबल (आसानी ते सड़ै वाले) चढ़ावा का उपयोग अउर सिंगल-यूज प्लास्टिक का कम करै जइसन पर्यावरण के अनुकूल पहल सुरू कीन गइन, जेहते ई परब पहिले के सालन के तुलना मा पर्यावरण के प्रति जादा जिम्मेदार बनि गा।
==रथ यात्रा की तारीखैं==
{| class="wikitable sortable mw-collapsible citiwise-data" style="text-align:center; font-size:85%; width:500px; margin:0px 0px 0em 0em;"
! colspan="3" | [[पुरी]] के [[रथ यात्रा]]
|-
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([[आषाढ़]] [[पक्ष|शुक्ल]] [[द्वितीया|द्वितीया]])
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(रथयात्रा क नौवां दिन)
|-
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([[नवकलेवर 2015|[नवकलेवर, 2015]])
| 18 जुलाई
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|-
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|-
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|-
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| 22 जुलाई
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([[नवकलेवर|[नवकलेवर, 2034]])
| 17 जुलाई
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== सन्दर्भ ==
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/* यात्रा का स्वरूप */
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{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
| image = Rath Yatra Puri 07-11027.jpg
| caption = देवताओं के तीन रथ और पृष्ठभूमि में मंदिर, पुरी
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}}
पुरी के रथ-यात्रा, जेहिका रथ जात्रौ (ओड़िया: ରଥଯାତ୍ରା, ({{IPAc-en|ˈ|r|ʌ|θ|ə|_|ˈ|j|ɑː|t|r|ɑː}}, {{IPA|or|ɾɔt̪ʰɔ dʒat̪ɾa}}) कहा जात है, आषाढ़ (जून-जुलाई) के सुक्ल पच्छ मा दूज के दिन हर साल निकारी जाति है। यहिका सबते पुरान अउर सबते बड़े हिंदू रथपर्व के रूप मा माना जात है।<ref name=":1">{{Cite book |last=Lochtefeld |first=James G. |url=https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |title=The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: N-Z |date=2002 |publisher=Rosen |isbn=978-0-8239-3180-4 |pages=567 |language=en |access-date=23 April 2023 |archive-date=15 April 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230415134917/https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite news |date=2019-07-04 |title=Rath Yatra: The legend behind world's largest chariot festival |language=en-GB |work=BBC News |url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |access-date=2023-06-15 |archive-date=17 February 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230217152645/https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |url-status=live }}</ref>
भगवान [[जगन्नाथ]] ते जुड़ी या रथ-यात्रा भारत के [[ओडिशा]] राज्य के पुरी सहर मा आयोजित कीन जाति है। ई परब मा तमाम भक्त, तीनों देउतन ([[जगन्नाथ]], उनके भइया [[बलभद्र]] अउर बहिन [[सुभद्रा]]) का तीन बड़े-बड़े लकड़ी के रथन (नंदिघोष, तालध्वज अऊर दर्पदलन) मा बड़ दाँड पर [[गुंडीचा मंदिर]] तक खींचति हैं, जहाँ उइ एकु हफ्ता तक रहति हैं औ फिर जगन्नाथ मंदिर का लौटि आवति हैं। ई वापसी जात्रा का बहुड़ा यात्रा कहा जात है।<ref name=":1" /><ref>{{cite web|url=https://www.readwhere.com/read/c/72800774|title=পুরীধাম ও জগন্নাথদেবের ব্রহ্মরূপ বৃত্তান্ত|language=bn|date=28 June 2023|access-date=28 June 2023|website=dainikstatesmannews.com|publisher=[[Dainik Statesman]] (The Statesman Group)|location=Kolkata|first=Yogabrata|last=Chakraborty|trans-title=Puridham and the tale of lord Jagannath's legendary 'Bramharup'|archive-url=https://web.archive.org/web/20230628103603/https://www.readwhere.com/read/c/72800774|archive-date=28 June 2023|url-status=bot: unknown}}</ref> गुंडीचा मंदिर ते वापस आवत समय, तीनों देउता मौसी माँ मंदिर के लगे कुछ देर के खातिर रुकति हैं अउर हुवाँ पोड़ा पीठा का भोग लगावा जात है, जउन एक खास तरह का पुआ आय, जेहिका प्रभुजी का सबते मनपसंद माना जात है। सात दिन रहै के बादि, तीनों देउता अपने अस्थान पर लौटि आवति हैं। <ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==इतिहास==
रथ-यात्रा का वर्णन ब्रह्म पुरान, पद्म पुरान, स्कन्द पुरान, अउर कपिल संहिता मा पावा जात है। 13वीं सदी ते यूरोपीय यात्रिन के द्वारा ई पर्व का उल्लेख कीन गा है, जेहिमा सबते प्रमुख अउर सजीव वर्णन 17वीं सदी मा दर्ज कीन गे हैं।
==रथ==
जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा के तीनों रथ हर साल फस्सी, धौसा जइसि खास बिरवन के लकड़ी ते बनाए जाति हैं। ई रथ परंपरा के अनुसार पूर्व-रियासत दसपल्ला ते आए बढ़ई लोगन के याक खास टोली के द्वारा बनाए जाति हैं, जिनका यो काम करै का पुश्तैनी अधिकार अउर विसेषाधिकार प्राप्त है। लकड़ी के लट्ठन का पारंपरिक रूप ते महानदी मा बेड़ा बनाय कै बहावा जात है। इनका पुरी के लगे इकट्ठा कीन जात है अउर फिर सड़क के रस्ता ते हुवाँ पहुँचावा जात है।
सदिन ते तय अउर मानी जा रही एक खास बिधी के अनुसार सजाए गे तीनिउ रथ बड़ दाँड पर खड़े कीन जाति हैं। मंदिर के पूरबी दुआर के लगे चौड़े रस्ता पर रथन् का एकु लाइन मा लगावा जात है, जेहिका सिंहदुआरौ कहा जात है।
सब रथन के चारिहुँ ओर नौ पार्श्व देउता होति हैं, जिनका रथ के बगल मा अलग-अलग देउतन का दरसावय वाली रंगीन लकड़ी के मूरति के माध्यम ते दरसावा जात है। हर रथ मा एक सारथी अउर चारि घोड़ा होति हैं।
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
!बलभद्र
!सुभद्रा
|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|[[File:Nandighosha Ratho.png|thumb|Nandighosha Ratho]][[File:Chariot Nandighosha of Lord Jagannath.jpg|thumb|Chariot Nandighosha of Lord Jagannath]][[File:Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha.jpg|thumb|Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha]]
|[[File:Taladhwaja Ratho.png|thumb|Taladhwaja Ratho]][[फाइल:Chariot Taladhwaja of Lord Balabhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|[[File:Debadalana Ratho.png|thumb|Debadalana Ratho]][[फाइल:Chariot Devidalana of Goddess Subhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
|42' 3"
|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
|33' x 33'
|31'6" x 31'6"
|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|द्वारपाल
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# छत्रभंगरावण (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
# शुलिदुर्गा
# वाराही
# श्यामाकाली
# मंगला
# विमला
|}<ref>[https://www.jagannathdham.in/rath-yatra-festival/details-of-rath-yatra-chariots/]</ref>
==पर्यटन अउर धार्मिक महत्त्व==
ई अस्थान का धार्मिक महत्व जगन्नाथजी का मंदिर है। सास्त्रन औ पुराननौ मा रथ-यात्रा के महत्ता स्वीकार कीन गै है। स्कन्द पुरान मा कहा गा है कि रथ-यात्रा मा जउन मनई श्री जगन्नाथ जी के नावँ का कीर्तन करत गुंडीचा नगर तक जात है वो पुनर्जन्म ते मुक्त होइ जात है। जउन मनई श्री जगन्नाथ जी का दरसन करत, परनाम करत, रस्ता के धूरि-कीचड़ मा ल्वाटत जाति हैं उइ सीधे भगवान श्री विष्णु के उत्तम धाम का जाति हैं। जउन मनई गुंडिचा मंडप मा रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम औ सुभद्रा देवी के दरसन दक्खिन दिसा का आवत भए करति हैं, उइ मोच्छ का प्राप्त होति हैं। रथयात्रा एक अइसन परब है जेहमा भगवान जगन्नाथ चलि कै जनता के बीच आवति हैं अउर उनके सुख-दुख मा सहभागी होति हैं। 'सब मनिसा मोर परजा' (सब मनई हमार परजा हैं), ई उनके उद्गार आहीं। भगवान जगन्नाथ तो पुरुषोत्तम हैं। उनमा श्रीराम, श्रीकृष्ण अद्वैत ब्रह्म रूप समाहित है। उनके अनेक नावँ हैं, उइ पतित पावन हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/religion/festivals/photo/bastar-chhattisgarh-unique-rath-yatra-is-celebrated-tupki-salami-tlifd-1289225-2021-07-12|title=यहां निकाली जाती है अनोखी जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी से दी जाती है सलामी|website=आज तक|language=hi|access-date=2021-07-13}}</ref>
==यात्रा का स्वरूप==
===सेवा-समर्पण===
जगन्नाथ मंदिर मा कई तरह के सेवक होति हैं जउन रथ पर अपनि सेवा देति हैं।
*सुआरा
*महासुआरा
*डाहुक: रथ डाहुक बोलि (ओड़िया: ଡାହୁକ ବୋଲି, जिनका "डाहुक गीतौ" (ଡାହୁକ ଗୀତ) कहा जात है) काव्यात्मक पाठ आहीं। रथ-यात्रा प्रजनन अउर जीवन चक्र के याक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति आय, डाहुक द्वारा गाए जाय वाली ई "बोलि" मा अश्लील/फूहड़ गीत सामिल होति हैं। यहौ माना जात है कि जब तक डाहुक बोलि नहीं गावा जात है, तब तक 'रथ नहीं चलत है। ई गीत बिना कउनो रोक-टोक के खुलेआम गाए जाति हैं। डाहुक परब के समय रथ के गति का नियंत्रित कीन जात है।
*दइता पति
*पुस्पालक
*बनाटी खेलाड़ी: बनाटी याक बहुत पुरान कला आय, जेहमा एकु मनई रस्सी के छोर पर बंधे आगि लगे गोला का घुमावत है। हर साल रथ-यात्रा मा भक्त भगवान जगन्नाथ का खुस करै के खातिर "बनाटी" करति हैं। बनाटी मा जुड़े चाकू अउर आगि के गोला, देउता के जुलूस मा तब रंग भरि देति हैं जब वहु आपन मंजिल तक पहुँचत है।
*===हेरा पंचमी===
हेरा पंचमी पुरी के जगन्नाथ मंदिर मा रथयात्रा के दौरान मनावा जाय वाला एक अनुष्ठान आय। यहिका देवी लक्ष्मी के रसम के रूप मा जाना जात है। रथ-यात्रा ते पँचए दिन, माने आषाढ़ के सुक्ल पच्छ का पाँचवाँ दिन हेरा पंचमी के रूप मा जाना जात है। रथ-यात्रा मा, भगवान जगन्नाथ अपनी अर्धांगिनी महालक्ष्मी का पीछे छोड़ि कै, अपनि भइया बलभद्र अउर बहिन सुभद्रा के साथै अपन दिव्य हथियार सुदर्शन का लइ कै एक दिव्य यात्रा पर निकरति हैं। देवी, देउता के खातिर आपन गुस्सा देखाउती हैं। उइ सुबर्ण महालक्ष्मी के रूप मा याक पालकी मा गुंडीचा मंदिर,अड़प मंडप तक जउती हैं अउर भगवान का जल्दी ते जल्दी मंदिर लौटि आवै के धमकी देति हैं। उनका खुस करै के खातिर, देउता उनका आज्ञा माला (सहमति के माला) दइ के मनावति हैं। देवी का गुस्सा मा देखि कै, सेवक लोग गुंडीचा के मुख्य दुआर बंद कइ देति हैं। महालक्ष्मी नाकाचना गेट ते मुख्य मंदिर मा लौटि अउती हैं। एक अनोखी रसम मा, देवी अपने एक सेवक का नंदिघोष रथ के एक हिस्सा का नुकसान पहुँचावय का आदेस देती हैं। यहिके बादि उइ गुंडीचा मंदिर के बाहिर एक इमली के पेड़ के पीछे छिपि जाती हैं। कुछ देर बादि, उइ हेरा गोहरी लेन के नाँव ते जाने जाय वाले एक अलग रस्ता ते चुपचाप अपने घर-मंदिर का भागि जाती हैं। जगन्नाथजी के लाखन भक्त ई अनोखी रसम का आनंद लेति हैं। श्रीमंदिर की एक महत्वपूर्ण रसम के रूप मा हेरा पंचमी के रसम क जिकिर स्कन्द पुरान मा पावा जात है। मंदिर के इतिहास के अनुसार, यो उत्सव महाराजा कपिलेंद्र देब के समय मा सुरू भा रहै। उनके राज ते पहिले, हेरा पंचमी का मंत्रन के पाठ के साथै प्रतीकात्मक रूप मा मनावा जात रहै। जइस कि मादला पांजी मा कहा गा है, राजा कपिलेंद्र देब सोने के बनी महालक्ष्मी के मूरति लइ कै ई परथा का बदल दिहिन अउर ई परब का अउर जादा नीक बना दिहिन।
*चंदन जात्रा-
चंदन जात्रा या "चंदन परब" 42 दिन का समय है जेहिमा रथन के निर्माण काम के सुरूआत होति है। ई समय का आधा-आधा बांटा गा है, जेहिमा हर एक मा 21 दिन होति हैं। पहिले आधे भाग का बाहिर चंदन कहा जात है, जेहिमा प्रमुख देउतन की प्रतिनिधि मूरतिन का रंगीन जुलूस मा बाहिर निकाला जात है अउर हर दिन नरेंद्र तालाब मा एक अनुष्ठानिक नाव के सवारी कराई जाति है। ई देउतन मा मदन मोहन (जगन्नाथ), राम-कृष्ण, लक्ष्मी, सरस्वती अउर पंच पांडव - पाँच मुख्य शिव मंदिरन के प्रमुख देउता सामिल होति हैं। बाद वाला हिस्सा, जेहिका भीतर चंदन कहा जात है, वहिमा कई अइसी रसमैं होती हैं जिनका जनता के खातिर नहीं खवाला जात। रथन का निर्माण अच्छय तृतीया का, वैशाख के सुक्ल पच्छ के तिसरे दिन, अनुष्ठानिक अगिन पूजा के साथै सुरू होत है। यो पुरी के राजा के महल के सामने अउर पुरी मंदिर के मुख्य कार्यालय की उल्टी दिसा मा होत है। बादि मा देउतन का तालाब के बीच एकु छोटे मंदिर मा पानी, चंदन के लेप, इत्तर अउर फूलन ते भरे पत्थर के टब मा अनुष्ठानिक असनान करावा जात है।
ई चंदन परब के समाप्ती सनान जात्रा या "असनान परब" मा होत है जउन जेठ महीना के पूरनमासी के दिन होत है। जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा का 108 घड़ा पानी ते अन्हवावा जात है अउर फिर उइ लगभग दुई हफ्ता तक प्रतीकात्मक अउर अनुष्ठानिक स्वास्थ्य-लाभ (बीमारी ते उबरै के समय) मा रहति हैं। उनका जनता के दरसन ते रोक दीन जात है। खाली तीन खास पट्ट चित्र, कलफ ते कड़े कीन गै कपड़ा पर प्राकृतिक रंगन ते बनी पारंपरिक ओड़िया चित्रकारी, जेहिका अणसर पट्टी कहा जात है, बाँस के परदा पर टांगि दीन जाति हैं जउन उनका जनता के नजर ते छिपउती हैं। ई समय मा, तीनों देउतन का उनकी बीमारी ठीक करै के खातिर खाली जड़ि, पत्ता, बेरि अउर फल दीन जात है। यह रसम जगन्नाथ पंथ के जनम अउर बिकास मा मजबूत आदिवासी तत्वन के याद दिलावत है। सुरुवाती आदिवासी उपासक बिस्वाबसु, जउन सिकारिन के सरदार रहैं, उनकी बिटिया ललिता अउर ब्राह्मण पुजारी बिद्यापति के संतान दइतापति या दइता के नाँव ते जाने जाति हैं। उनके लगे बीमारी ते उबरै के समय अउर रथ जात्रा या रथ परब के पूरे समय प्रभुजी के सेवा करै का विसेस अधिकार होत है।
*सुना बेश
जगन्नाथ के सुना बेश-
तीनों देउतन के रथ गुंडीचा मंदिर ते मुख्य मंदिर लौटि आवै के बादि, उनका सोने के गहना पहिराए जाति है अउर रथन पर उनकी पूजा कीन जाति है। ई उत्सव का सुना बेश कहा जात है। परंपरा बतावति है कि या प्रथा सबते पहिले राजा कपिलेंद्र देव द्वारा 1460 मा सुरू कीन गै रहै, जब उइ जुद्ध ते जीति कै लउटै के बादि जगन्नाथ का सोना दान कीन्हेनि रहैं। तीनों देउतन का लगभग 208 किलो वजन के सोने के गहनन ते सजावा जात है। 2014 मा 9 जुलाई का भे ई रसम का लगभग नौ लाख भक्तन देखिन रहैं।
2015 मा रथ-यात्रा के मौका पर, 19 साल बादि रथन पर नए रूप (नबकलेबर) मा देउतन के याक झलक पावै के खातिर लाखन भक्त तटीय सहर पुरी मा भीड़ लगा दिहिन। यो ओडिशा मा अब तक का सबते बड़ा धार्मिक सम्मेलन रहै।
==2025 के रथ-यात्रा==
2025 के रथ-यात्रा मा डिजिटल तकनीक के जुड़ाव के साथै भक्ति मा एकु बड़ा बदलाव देखा परा। लाखन भक्तन के पारंपरिक रूप ते इकट्ठा होए के साथ-साथ, बड़ी संख्या मा मनई लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए वर्चुअली जुड़े, जउन धार्मिक पालन मा याक डिजिटल क्रांति के प्रवेश का देखावत है। 2025 की जात्रा केरी मुख्य बातन मा स्थानीय प्रसासन द्वारा लागू कीन गै भीड़ प्रबंधन के बेहतर रणनीति, ग्लोबल लाइव स्ट्रीमिंग (जेहते जादा लोग सामिल होइ पाइन), अउर पर्यावरण स्थिरता पर ध्यान सामिल रहै। बायोडिग्रेडेबल (आसानी ते सड़ै वाले) चढ़ावा का उपयोग अउर सिंगल-यूज प्लास्टिक का कम करै जइसि पर्यावरण के अनुकूल पहल सुरू कीन गै, जेहिते ई परब पहिले के सालन के तुलना मा पर्यावरण के प्रति जादा जिम्मेदार बना।
==रथ यात्रा की तारीखैं==
{| class="wikitable sortable mw-collapsible citiwise-data" style="text-align:center; font-size:85%; width:500px; margin:0px 0px 0em 0em;"
! colspan="3" | [[पुरी]] के [[रथ यात्रा]]
|-
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([[आषाढ़]] [[पक्ष|शुक्ल]] [[द्वितीया|द्वितीया]])
! scope="col" | आखिरी दिन
(रथयात्रा क नौवां दिन)
|-
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([[नवकलेवर 2015|[नवकलेवर, 2015]])
| 18 जुलाई
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|-
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|-
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|-
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|-
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|-
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|-
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|-
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| '''24 जुलाई'''
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|-
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| 2 जुलाई
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|-
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| 22 जुलाई
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| 28 जून
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|-
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([[नवकलेवर|[नवकलेवर, 2034]])
| 17 जुलाई
| 25 जुलाई
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== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
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2026-07-06T22:08:29Z
Avimaarak
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/* सेवा-समर्पण */
35261
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
| image = Rath Yatra Puri 07-11027.jpg
| caption = देवताओं के तीन रथ और पृष्ठभूमि में मंदिर, पुरी
| type = हिंदू
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}}
पुरी के रथ-यात्रा, जेहिका रथ जात्रौ (ओड़िया: ରଥଯାତ୍ରା, ({{IPAc-en|ˈ|r|ʌ|θ|ə|_|ˈ|j|ɑː|t|r|ɑː}}, {{IPA|or|ɾɔt̪ʰɔ dʒat̪ɾa}}) कहा जात है, आषाढ़ (जून-जुलाई) के सुक्ल पच्छ मा दूज के दिन हर साल निकारी जाति है। यहिका सबते पुरान अउर सबते बड़े हिंदू रथपर्व के रूप मा माना जात है।<ref name=":1">{{Cite book |last=Lochtefeld |first=James G. |url=https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |title=The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: N-Z |date=2002 |publisher=Rosen |isbn=978-0-8239-3180-4 |pages=567 |language=en |access-date=23 April 2023 |archive-date=15 April 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230415134917/https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite news |date=2019-07-04 |title=Rath Yatra: The legend behind world's largest chariot festival |language=en-GB |work=BBC News |url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |access-date=2023-06-15 |archive-date=17 February 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230217152645/https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |url-status=live }}</ref>
भगवान [[जगन्नाथ]] ते जुड़ी या रथ-यात्रा भारत के [[ओडिशा]] राज्य के पुरी सहर मा आयोजित कीन जाति है। ई परब मा तमाम भक्त, तीनों देउतन ([[जगन्नाथ]], उनके भइया [[बलभद्र]] अउर बहिन [[सुभद्रा]]) का तीन बड़े-बड़े लकड़ी के रथन (नंदिघोष, तालध्वज अऊर दर्पदलन) मा बड़ दाँड पर [[गुंडीचा मंदिर]] तक खींचति हैं, जहाँ उइ एकु हफ्ता तक रहति हैं औ फिर जगन्नाथ मंदिर का लौटि आवति हैं। ई वापसी जात्रा का बहुड़ा यात्रा कहा जात है।<ref name=":1" /><ref>{{cite web|url=https://www.readwhere.com/read/c/72800774|title=পুরীধাম ও জগন্নাথদেবের ব্রহ্মরূপ বৃত্তান্ত|language=bn|date=28 June 2023|access-date=28 June 2023|website=dainikstatesmannews.com|publisher=[[Dainik Statesman]] (The Statesman Group)|location=Kolkata|first=Yogabrata|last=Chakraborty|trans-title=Puridham and the tale of lord Jagannath's legendary 'Bramharup'|archive-url=https://web.archive.org/web/20230628103603/https://www.readwhere.com/read/c/72800774|archive-date=28 June 2023|url-status=bot: unknown}}</ref> गुंडीचा मंदिर ते वापस आवत समय, तीनों देउता मौसी माँ मंदिर के लगे कुछ देर के खातिर रुकति हैं अउर हुवाँ पोड़ा पीठा का भोग लगावा जात है, जउन एक खास तरह का पुआ आय, जेहिका प्रभुजी का सबते मनपसंद माना जात है। सात दिन रहै के बादि, तीनों देउता अपने अस्थान पर लौटि आवति हैं। <ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==इतिहास==
रथ-यात्रा का वर्णन ब्रह्म पुरान, पद्म पुरान, स्कन्द पुरान, अउर कपिल संहिता मा पावा जात है। 13वीं सदी ते यूरोपीय यात्रिन के द्वारा ई पर्व का उल्लेख कीन गा है, जेहिमा सबते प्रमुख अउर सजीव वर्णन 17वीं सदी मा दर्ज कीन गे हैं।
==रथ==
जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा के तीनों रथ हर साल फस्सी, धौसा जइसि खास बिरवन के लकड़ी ते बनाए जाति हैं। ई रथ परंपरा के अनुसार पूर्व-रियासत दसपल्ला ते आए बढ़ई लोगन के याक खास टोली के द्वारा बनाए जाति हैं, जिनका यो काम करै का पुश्तैनी अधिकार अउर विसेषाधिकार प्राप्त है। लकड़ी के लट्ठन का पारंपरिक रूप ते महानदी मा बेड़ा बनाय कै बहावा जात है। इनका पुरी के लगे इकट्ठा कीन जात है अउर फिर सड़क के रस्ता ते हुवाँ पहुँचावा जात है।
सदिन ते तय अउर मानी जा रही एक खास बिधी के अनुसार सजाए गे तीनिउ रथ बड़ दाँड पर खड़े कीन जाति हैं। मंदिर के पूरबी दुआर के लगे चौड़े रस्ता पर रथन् का एकु लाइन मा लगावा जात है, जेहिका सिंहदुआरौ कहा जात है।
सब रथन के चारिहुँ ओर नौ पार्श्व देउता होति हैं, जिनका रथ के बगल मा अलग-अलग देउतन का दरसावय वाली रंगीन लकड़ी के मूरति के माध्यम ते दरसावा जात है। हर रथ मा एक सारथी अउर चारि घोड़ा होति हैं।
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
!बलभद्र
!सुभद्रा
|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|[[File:Nandighosha Ratho.png|thumb|Nandighosha Ratho]][[File:Chariot Nandighosha of Lord Jagannath.jpg|thumb|Chariot Nandighosha of Lord Jagannath]][[File:Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha.jpg|thumb|Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha]]
|[[File:Taladhwaja Ratho.png|thumb|Taladhwaja Ratho]][[फाइल:Chariot Taladhwaja of Lord Balabhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|[[File:Debadalana Ratho.png|thumb|Debadalana Ratho]][[फाइल:Chariot Devidalana of Goddess Subhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
|42' 3"
|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
|33' x 33'
|31'6" x 31'6"
|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|द्वारपाल
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
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# नारायण (विष्णु )
# छत्रभंगरावण (राम)
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|
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# विमला
|}<ref>[https://www.jagannathdham.in/rath-yatra-festival/details-of-rath-yatra-chariots/]</ref>
==पर्यटन अउर धार्मिक महत्त्व==
ई अस्थान का धार्मिक महत्व जगन्नाथजी का मंदिर है। सास्त्रन औ पुराननौ मा रथ-यात्रा के महत्ता स्वीकार कीन गै है। स्कन्द पुरान मा कहा गा है कि रथ-यात्रा मा जउन मनई श्री जगन्नाथ जी के नावँ का कीर्तन करत गुंडीचा नगर तक जात है वो पुनर्जन्म ते मुक्त होइ जात है। जउन मनई श्री जगन्नाथ जी का दरसन करत, परनाम करत, रस्ता के धूरि-कीचड़ मा ल्वाटत जाति हैं उइ सीधे भगवान श्री विष्णु के उत्तम धाम का जाति हैं। जउन मनई गुंडिचा मंडप मा रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम औ सुभद्रा देवी के दरसन दक्खिन दिसा का आवत भए करति हैं, उइ मोच्छ का प्राप्त होति हैं। रथयात्रा एक अइसन परब है जेहमा भगवान जगन्नाथ चलि कै जनता के बीच आवति हैं अउर उनके सुख-दुख मा सहभागी होति हैं। 'सब मनिसा मोर परजा' (सब मनई हमार परजा हैं), ई उनके उद्गार आहीं। भगवान जगन्नाथ तो पुरुषोत्तम हैं। उनमा श्रीराम, श्रीकृष्ण अद्वैत ब्रह्म रूप समाहित है। उनके अनेक नावँ हैं, उइ पतित पावन हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/religion/festivals/photo/bastar-chhattisgarh-unique-rath-yatra-is-celebrated-tupki-salami-tlifd-1289225-2021-07-12|title=यहां निकाली जाती है अनोखी जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी से दी जाती है सलामी|website=आज तक|language=hi|access-date=2021-07-13}}</ref>
==यात्रा का स्वरूप==
===सेवा-समर्पण===
जगन्नाथ मंदिर मा कई तरह के सेवक होति हैं जउन रथ पर अपनि सेवा देति हैं।
*सुआरा
*महासुआरा
*डाहुक: रथ डाहुक बोलि (ओड़िया: ଡାହୁକ ବୋଲି, जिनका "डाहुक गीतौ" (ଡାହୁକ ଗୀତ) कहा जात है) काव्यात्मक पाठ आहीं। रथ-यात्रा प्रजनन अउर जीवन चक्र के याक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति आय, डाहुक द्वारा गाए जाय वाली ई "बोलि" मा अश्लील/फूहड़ गीत सामिल होति हैं। यहौ माना जात है कि जब तक डाहुक बोलि नहीं गावा जात है, तब तक 'रथ नहीं चलत है। ई गीत बिना कउनो रोक-टोक के खुलेआम गाए जाति हैं। डाहुक परब के समय रथ के गति का नियंत्रित कीन जात है।
*दइता पति
*पुस्पालक
*बनाटी खेलाड़ी: बनाटी याक बहुत पुरान कला आय, जेहमा एकु मनई रस्सी के छोर पर बंधे आगि लगे गोला का घुमावत है। हर साल रथ-यात्रा मा भक्त भगवान जगन्नाथ का खुस करै के खातिर "बनाटी" करति हैं। बनाटी मा जुड़े चाकू अउर आगि के गोला, देउता के जुलूस मा तब रंग भरि देति हैं जब वहु आपन मंजिल तक पहुँचत है।
*हेरा पंचमी
हेरा पंचमी पुरी के जगन्नाथ मंदिर मा रथयात्रा के दौरान मनावा जाय वाला एक अनुष्ठान आय। यहिका देवी लक्ष्मी के रसम के रूप मा जाना जात है। रथ-यात्रा ते पँचए दिन, माने आषाढ़ के सुक्ल पच्छ का पाँचवाँ दिन हेरा पंचमी के रूप मा जाना जात है। रथ-यात्रा मा, भगवान जगन्नाथ अपनी अर्धांगिनी महालक्ष्मी का पीछे छोड़ि कै, अपनि भइया बलभद्र अउर बहिन सुभद्रा के साथै अपन दिव्य हथियार सुदर्शन का लइ कै एक दिव्य यात्रा पर निकरति हैं। देवी, देउता के खातिर आपन गुस्सा देखाउती हैं। उइ सुबर्ण महालक्ष्मी के रूप मा याक पालकी मा गुंडीचा मंदिर,अड़प मंडप तक जउती हैं अउर भगवान का जल्दी ते जल्दी मंदिर लौटि आवै के धमकी देति हैं। उनका खुस करै के खातिर, देउता उनका आज्ञा माला (सहमति के माला) दइ के मनावति हैं। देवी का गुस्सा मा देखि कै, सेवक लोग गुंडीचा के मुख्य दुआर बंद कइ देति हैं। महालक्ष्मी नाकाचना गेट ते मुख्य मंदिर मा लौटि अउती हैं। एक अनोखी रसम मा, देवी अपने एक सेवक का नंदिघोष रथ के एक हिस्सा का नुकसान पहुँचावय का आदेस देती हैं। यहिके बादि उइ गुंडीचा मंदिर के बाहिर एक इमली के पेड़ के पीछे छिपि जाती हैं। कुछ देर बादि, उइ हेरा गोहरी लेन के नाँव ते जाने जाय वाले एक अलग रस्ता ते चुपचाप अपने घर-मंदिर का भागि जाती हैं। जगन्नाथजी के लाखन भक्त ई अनोखी रसम का आनंद लेति हैं। श्रीमंदिर की एक महत्वपूर्ण रसम के रूप मा हेरा पंचमी के रसम क जिकिर स्कन्द पुरान मा पावा जात है। मंदिर के इतिहास के अनुसार, यो उत्सव महाराजा कपिलेंद्र देब के समय मा सुरू भा रहै। उनके राज ते पहिले, हेरा पंचमी का मंत्रन के पाठ के साथै प्रतीकात्मक रूप मा मनावा जात रहै। जइस कि मादला पांजी मा कहा गा है, राजा कपिलेंद्र देब सोने के बनी महालक्ष्मी के मूरति लइ कै ई परथा का बदल दिहिन अउर ई परब का अउर जादा नीक बना दिहिन।
*चंदन जात्रा-
चंदन जात्रा या "चंदन परब" 42 दिन का समय है जेहिमा रथन के निर्माण काम के सुरूआत होति है। ई समय का आधा-आधा बांटा गा है, जेहिमा हर एक मा 21 दिन होति हैं। पहिले आधे भाग का बाहिर चंदन कहा जात है, जेहिमा प्रमुख देउतन की प्रतिनिधि मूरतिन का रंगीन जुलूस मा बाहिर निकाला जात है अउर हर दिन नरेंद्र तालाब मा एक अनुष्ठानिक नाव के सवारी कराई जाति है। ई देउतन मा मदन मोहन (जगन्नाथ), राम-कृष्ण, लक्ष्मी, सरस्वती अउर पंच पांडव - पाँच मुख्य शिव मंदिरन के प्रमुख देउता सामिल होति हैं। बाद वाला हिस्सा, जेहिका भीतर चंदन कहा जात है, वहिमा कई अइसी रसमैं होती हैं जिनका जनता के खातिर नहीं खवाला जात। रथन का निर्माण अच्छय तृतीया का, वैशाख के सुक्ल पच्छ के तिसरे दिन, अनुष्ठानिक अगिन पूजा के साथै सुरू होत है। यो पुरी के राजा के महल के सामने अउर पुरी मंदिर के मुख्य कार्यालय की उल्टी दिसा मा होत है। बादि मा देउतन का तालाब के बीच एकु छोटे मंदिर मा पानी, चंदन के लेप, इत्तर अउर फूलन ते भरे पत्थर के टब मा अनुष्ठानिक असनान करावा जात है।
ई चंदन परब के समाप्ती सनान जात्रा या "असनान परब" मा होत है जउन जेठ महीना के पूरनमासी के दिन होत है। जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा का 108 घड़ा पानी ते अन्हवावा जात है अउर फिर उइ लगभग दुई हफ्ता तक प्रतीकात्मक अउर अनुष्ठानिक स्वास्थ्य-लाभ (बीमारी ते उबरै के समय) मा रहति हैं। उनका जनता के दरसन ते रोक दीन जात है। खाली तीन खास पट्ट चित्र, कलफ ते कड़े कीन गै कपड़ा पर प्राकृतिक रंगन ते बनी पारंपरिक ओड़िया चित्रकारी, जेहिका अणसर पट्टी कहा जात है, बाँस के परदा पर टांगि दीन जाति हैं जउन उनका जनता के नजर ते छिपउती हैं। ई समय मा, तीनों देउतन का उनकी बीमारी ठीक करै के खातिर खाली जड़ि, पत्ता, बेरि अउर फल दीन जात है। यह रसम जगन्नाथ पंथ के जनम अउर बिकास मा मजबूत आदिवासी तत्वन के याद दिलावत है। सुरुवाती आदिवासी उपासक बिस्वाबसु, जउन सिकारिन के सरदार रहैं, उनकी बिटिया ललिता अउर ब्राह्मण पुजारी बिद्यापति के संतान दइतापति या दइता के नाँव ते जाने जाति हैं। उनके लगे बीमारी ते उबरै के समय अउर रथ जात्रा या रथ परब के पूरे समय प्रभुजी के सेवा करै का विसेस अधिकार होत है।
*सुना बेश
जगन्नाथ के सुना बेश-
तीनों देउतन के रथ गुंडीचा मंदिर ते मुख्य मंदिर लौटि आवै के बादि, उनका सोने के गहना पहिराए जाति है अउर रथन पर उनकी पूजा कीन जाति है। ई उत्सव का सुना बेश कहा जात है। परंपरा बतावति है कि या प्रथा सबते पहिले राजा कपिलेंद्र देव द्वारा 1460 मा सुरू कीन गै रहै, जब उइ जुद्ध ते जीति कै लउटै के बादि जगन्नाथ का सोना दान कीन्हेनि रहैं। तीनों देउतन का लगभग 208 किलो वजन के सोने के गहनन ते सजावा जात है। 2014 मा 9 जुलाई का भे ई रसम का लगभग नौ लाख भक्तन देखिन रहैं।
2015 मा रथ-यात्रा के मौका पर, 19 साल बादि रथन पर नए रूप (नबकलेबर) मा देउतन के याक झलक पावै के खातिर लाखन भक्त तटीय सहर पुरी मा भीड़ लगा दिहिन। यो ओडिशा मा अब तक का सबते बड़ा धार्मिक सम्मेलन रहै।
==2025 के रथ-यात्रा==
2025 के रथ-यात्रा मा डिजिटल तकनीक के जुड़ाव के साथै भक्ति मा एकु बड़ा बदलाव देखा परा। लाखन भक्तन के पारंपरिक रूप ते इकट्ठा होए के साथ-साथ, बड़ी संख्या मा मनई लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए वर्चुअली जुड़े, जउन धार्मिक पालन मा याक डिजिटल क्रांति के प्रवेश का देखावत है। 2025 की जात्रा केरी मुख्य बातन मा स्थानीय प्रसासन द्वारा लागू कीन गै भीड़ प्रबंधन के बेहतर रणनीति, ग्लोबल लाइव स्ट्रीमिंग (जेहते जादा लोग सामिल होइ पाइन), अउर पर्यावरण स्थिरता पर ध्यान सामिल रहै। बायोडिग्रेडेबल (आसानी ते सड़ै वाले) चढ़ावा का उपयोग अउर सिंगल-यूज प्लास्टिक का कम करै जइसि पर्यावरण के अनुकूल पहल सुरू कीन गै, जेहिते ई परब पहिले के सालन के तुलना मा पर्यावरण के प्रति जादा जिम्मेदार बना।
==रथ यात्रा की तारीखैं==
{| class="wikitable sortable mw-collapsible citiwise-data" style="text-align:center; font-size:85%; width:500px; margin:0px 0px 0em 0em;"
! colspan="3" | [[पुरी]] के [[रथ यात्रा]]
|-
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([[आषाढ़]] [[पक्ष|शुक्ल]] [[द्वितीया|द्वितीया]])
! scope="col" | आखिरी दिन
(रथयात्रा क नौवां दिन)
|-
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([[नवकलेवर 2015|[नवकलेवर, 2015]])
| 18 जुलाई
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|-
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|-
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|-
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|-
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|-
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|-
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|-
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([[नवकलेवर|[नवकलेवर, 2034]])
| 17 जुलाई
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== सन्दर्भ ==
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{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
| image = Rath Yatra Puri 07-11027.jpg
| caption = देवताओं के तीन रथ और पृष्ठभूमि में मंदिर, पुरी
| type = हिंदू
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| significance = मोक्ष की ओर आत्मा की यात्रा का प्रतिनिधित्व करता है
| begins = [[आषाढ़]] शुक्ल द्वितीया
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पुरी के रथ-यात्रा, जेहिका रथ जात्रौ (ओड़िया: ରଥଯାତ୍ରା, ({{IPAc-en|ˈ|r|ʌ|θ|ə|_|ˈ|j|ɑː|t|r|ɑː}}, {{IPA|or|ɾɔt̪ʰɔ dʒat̪ɾa}}) कहा जात है, आषाढ़ (जून-जुलाई) के सुक्ल पच्छ मा दूज के दिन हर साल निकारी जाति है। यहिका सबते पुरान अउर सबते बड़े हिंदू रथपर्व के रूप मा माना जात है।<ref name=":1">{{Cite book |last=Lochtefeld |first=James G. |url=https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |title=The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: N-Z |date=2002 |publisher=Rosen |isbn=978-0-8239-3180-4 |pages=567 |language=en |access-date=23 April 2023 |archive-date=15 April 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230415134917/https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite news |date=2019-07-04 |title=Rath Yatra: The legend behind world's largest chariot festival |language=en-GB |work=BBC News |url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |access-date=2023-06-15 |archive-date=17 February 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230217152645/https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |url-status=live }}</ref>
भगवान [[जगन्नाथ]] ते जुड़ी या रथ-यात्रा भारत के [[ओडिशा]] राज्य के पुरी सहर मा आयोजित कीन जाति है। ई परब मा तमाम भक्त, तीनों देउतन ([[जगन्नाथ]], उनके भइया [[बलभद्र]] अउर बहिन [[सुभद्रा]]) का तीन बड़े-बड़े लकड़ी के रथन (नंदिघोष, तालध्वज अऊर दर्पदलन) मा बड़ दाँड पर [[गुंडीचा मंदिर]] तक खींचति हैं, जहाँ उइ एकु हफ्ता तक रहति हैं औ फिर जगन्नाथ मंदिर का लौटि आवति हैं। ई वापसी जात्रा का बहुड़ा यात्रा कहा जात है।<ref name=":1" /><ref>{{cite web|url=https://www.readwhere.com/read/c/72800774|title=পুরীধাম ও জগন্নাথদেবের ব্রহ্মরূপ বৃত্তান্ত|language=bn|date=28 June 2023|access-date=28 June 2023|website=dainikstatesmannews.com|publisher=[[Dainik Statesman]] (The Statesman Group)|location=Kolkata|first=Yogabrata|last=Chakraborty|trans-title=Puridham and the tale of lord Jagannath's legendary 'Bramharup'|archive-url=https://web.archive.org/web/20230628103603/https://www.readwhere.com/read/c/72800774|archive-date=28 June 2023|url-status=bot: unknown}}</ref> गुंडीचा मंदिर ते वापस आवत समय, तीनों देउता मौसी माँ मंदिर के लगे कुछ देर के खातिर रुकति हैं अउर हुवाँ पोड़ा पीठा का भोग लगावा जात है, जउन एक खास तरह का पुआ आय, जेहिका प्रभुजी का सबते मनपसंद माना जात है। सात दिन रहै के बादि, तीनों देउता अपने अस्थान पर लौटि आवति हैं। <ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==इतिहास==
रथ-यात्रा का वर्णन ब्रह्म पुरान, पद्म पुरान, स्कन्द पुरान, अउर कपिल संहिता मा पावा जात है। 13वीं सदी ते यूरोपीय यात्रिन के द्वारा ई पर्व का उल्लेख कीन गा है, जेहिमा सबते प्रमुख अउर सजीव वर्णन 17वीं सदी मा दर्ज कीन गे हैं।
==रथ==
जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा के तीनों रथ हर साल फस्सी, धौसा जइसि खास बिरवन के लकड़ी ते बनाए जाति हैं। ई रथ परंपरा के अनुसार पूर्व-रियासत दसपल्ला ते आए बढ़ई लोगन के याक खास टोली के द्वारा बनाए जाति हैं, जिनका यो काम करै का पुश्तैनी अधिकार अउर विसेषाधिकार प्राप्त है। लकड़ी के लट्ठन का पारंपरिक रूप ते महानदी मा बेड़ा बनाय कै बहावा जात है। इनका पुरी के लगे इकट्ठा कीन जात है अउर फिर सड़क के रस्ता ते हुवाँ पहुँचावा जात है।
सदिन ते तय अउर मानी जा रही एक खास बिधी के अनुसार सजाए गे तीनिउ रथ बड़ दाँड पर खड़े कीन जाति हैं। मंदिर के पूरबी दुआर के लगे चौड़े रस्ता पर रथन् का एकु लाइन मा लगावा जात है, जेहिका सिंहदुआरौ कहा जात है।
सब रथन के चारिहुँ ओर नौ पार्श्व देउता होति हैं, जिनका रथ के बगल मा अलग-अलग देउतन का दरसावय वाली रंगीन लकड़ी के मूरति के माध्यम ते दरसावा जात है। हर रथ मा एक सारथी अउर चारि घोड़ा होति हैं।
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
!बलभद्र
!सुभद्रा
|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|[[File:Nandighosha Ratho.png|thumb|Nandighosha Ratho]][[File:Chariot Nandighosha of Lord Jagannath.jpg|thumb|Chariot Nandighosha of Lord Jagannath]][[File:Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha.jpg|thumb|Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha]]
|[[File:Taladhwaja Ratho.png|thumb|Taladhwaja Ratho]][[फाइल:Chariot Taladhwaja of Lord Balabhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|[[File:Debadalana Ratho.png|thumb|Debadalana Ratho]][[फाइल:Chariot Devidalana of Goddess Subhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
|42' 3"
|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
|33' x 33'
|31'6" x 31'6"
|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|द्वारपाल
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# छत्रभंगरावण (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
# शुलिदुर्गा
# वाराही
# श्यामाकाली
# मंगला
# विमला
|}<ref>[https://www.jagannathdham.in/rath-yatra-festival/details-of-rath-yatra-chariots/]</ref>
==पर्यटन अउर धार्मिक महत्त्व==
ई अस्थान का धार्मिक महत्व जगन्नाथजी का मंदिर है। सास्त्रन औ पुराननौ मा रथ-यात्रा के महत्ता स्वीकार कीन गै है। स्कन्द पुरान मा कहा गा है कि रथ-यात्रा मा जउन मनई श्री जगन्नाथ जी के नावँ का कीर्तन करत गुंडीचा नगर तक जात है वो पुनर्जन्म ते मुक्त होइ जात है। जउन मनई श्री जगन्नाथ जी का दरसन करत, परनाम करत, रस्ता के धूरि-कीचड़ मा ल्वाटत जाति हैं उइ सीधे भगवान श्री विष्णु के उत्तम धाम का जाति हैं। जउन मनई गुंडिचा मंडप मा रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम औ सुभद्रा देवी के दरसन दक्खिन दिसा का आवत भए करति हैं, उइ मोच्छ का प्राप्त होति हैं। रथयात्रा एक अइसन परब है जेहमा भगवान जगन्नाथ चलि कै जनता के बीच आवति हैं अउर उनके सुख-दुख मा सहभागी होति हैं। 'सब मनिसा मोर परजा' (सब मनई हमार परजा हैं), ई उनके उद्गार आहीं। भगवान जगन्नाथ तो पुरुषोत्तम हैं। उनमा श्रीराम, श्रीकृष्ण अद्वैत ब्रह्म रूप समाहित है। उनके अनेक नावँ हैं, उइ पतित पावन हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/religion/festivals/photo/bastar-chhattisgarh-unique-rath-yatra-is-celebrated-tupki-salami-tlifd-1289225-2021-07-12|title=यहां निकाली जाती है अनोखी जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी से दी जाती है सलामी|website=आज तक|language=hi|access-date=2021-07-13}}</ref>
==यात्रा का स्वरूप==
===सेवा-समर्पण===
जगन्नाथ मंदिर मा कई तरह के सेवक होति हैं जउन रथ पर अपनि सेवा देति हैं।
*सुआरा
*महासुआरा
*डाहुक: रथ डाहुक बोलि (ओड़िया: ଡାହୁକ ବୋଲି, जिनका "डाहुक गीतौ" (ଡାହୁକ ଗୀତ) कहा जात है) काव्यात्मक पाठ आहीं। रथ-यात्रा प्रजनन अउर जीवन चक्र के याक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति आय, डाहुक द्वारा गाए जाय वाली ई "बोलि" मा अश्लील/फूहड़ गीत सामिल होति हैं। यहौ माना जात है कि जब तक डाहुक बोलि नहीं गावा जात है, तब तक 'रथ नहीं चलत है। ई गीत बिना कउनो रोक-टोक के खुलेआम गाए जाति हैं। डाहुक परब के समय रथ के गति का नियंत्रित कीन जात है।
*दइता पति
*पुस्पालक
*बनाटी खेलाड़ी: बनाटी याक बहुत पुरान कला आय, जेहमा एकु मनई रस्सी के छोर पर बंधे आगि लगे गोला का घुमावत है। हर साल रथ-यात्रा मा भक्त भगवान जगन्नाथ का खुस करै के खातिर "बनाटी" करति हैं। बनाटी मा जुड़े चाकू अउर आगि के गोला, देउता के जुलूस मा तब रंग भरि देति हैं जब वहु आपन मंजिल तक पहुँचत है।
===हेरा पंचमी===
*हेरा पंचमी पुरी के जगन्नाथ मंदिर मा रथयात्रा के दौरान मनावा जाय वाला एक अनुष्ठान आय। यहिका देवी लक्ष्मी के रसम के रूप मा जाना जात है। रथ-यात्रा ते पँचए दिन, माने आषाढ़ के सुक्ल पच्छ का पाँचवाँ दिन हेरा पंचमी के रूप मा जाना जात है। रथ-यात्रा मा, भगवान जगन्नाथ अपनी अर्धांगिनी महालक्ष्मी का पीछे छोड़ि कै, अपनि भइया बलभद्र अउर बहिन सुभद्रा के साथै अपन दिव्य हथियार सुदर्शन का लइ कै एक दिव्य यात्रा पर निकरति हैं। देवी, देउता के खातिर आपन गुस्सा देखाउती हैं। उइ सुबर्ण महालक्ष्मी के रूप मा याक पालकी मा गुंडीचा मंदिर,अड़प मंडप तक जउती हैं अउर भगवान का जल्दी ते जल्दी मंदिर लौटि आवै के धमकी देति हैं। उनका खुस करै के खातिर, देउता उनका आज्ञा माला (सहमति के माला) दइ के मनावति हैं। देवी का गुस्सा मा देखि कै, सेवक लोग गुंडीचा के मुख्य दुआर बंद कइ देति हैं। महालक्ष्मी नाकाचना गेट ते मुख्य मंदिर मा लौटि अउती हैं। एक अनोखी रसम मा, देवी अपने एक सेवक का नंदिघोष रथ के एक हिस्सा का नुकसान पहुँचावय का आदेस देती हैं। यहिके बादि उइ गुंडीचा मंदिर के बाहिर एक इमली के पेड़ के पीछे छिपि जाती हैं। कुछ देर बादि, उइ हेरा गोहरी लेन के नाँव ते जाने जाय वाले एक अलग रस्ता ते चुपचाप अपने घर-मंदिर का भागि जाती हैं। जगन्नाथजी के लाखन भक्त ई अनोखी रसम का आनंद लेति हैं। श्रीमंदिर की एक महत्वपूर्ण रसम के रूप मा हेरा पंचमी के रसम क जिकिर स्कन्द पुरान मा पावा जात है। मंदिर के इतिहास के अनुसार, यो उत्सव महाराजा कपिलेंद्र देब के समय मा सुरू भा रहै। उनके राज ते पहिले, हेरा पंचमी का मंत्रन के पाठ के साथै प्रतीकात्मक रूप मा मनावा जात रहै। जइस कि मादला पांजी मा कहा गा है, राजा कपिलेंद्र देब सोने के बनी महालक्ष्मी के मूरति लइ कै ई परथा का बदल दिहिन अउर ई परब का अउर जादा नीक बना दिहिन।
*चंदन जात्रा-
चंदन जात्रा या "चंदन परब" 42 दिन का समय है जेहिमा रथन के निर्माण काम के सुरूआत होति है। ई समय का आधा-आधा बांटा गा है, जेहिमा हर एक मा 21 दिन होति हैं। पहिले आधे भाग का बाहिर चंदन कहा जात है, जेहिमा प्रमुख देउतन की प्रतिनिधि मूरतिन का रंगीन जुलूस मा बाहिर निकाला जात है अउर हर दिन नरेंद्र तालाब मा एक अनुष्ठानिक नाव के सवारी कराई जाति है। ई देउतन मा मदन मोहन (जगन्नाथ), राम-कृष्ण, लक्ष्मी, सरस्वती अउर पंच पांडव - पाँच मुख्य शिव मंदिरन के प्रमुख देउता सामिल होति हैं। बाद वाला हिस्सा, जेहिका भीतर चंदन कहा जात है, वहिमा कई अइसी रसमैं होती हैं जिनका जनता के खातिर नहीं खवाला जात। रथन का निर्माण अच्छय तृतीया का, वैशाख के सुक्ल पच्छ के तिसरे दिन, अनुष्ठानिक अगिन पूजा के साथै सुरू होत है। यो पुरी के राजा के महल के सामने अउर पुरी मंदिर के मुख्य कार्यालय की उल्टी दिसा मा होत है। बादि मा देउतन का तालाब के बीच एकु छोटे मंदिर मा पानी, चंदन के लेप, इत्तर अउर फूलन ते भरे पत्थर के टब मा अनुष्ठानिक असनान करावा जात है।
ई चंदन परब के समाप्ती सनान जात्रा या "असनान परब" मा होत है जउन जेठ महीना के पूरनमासी के दिन होत है। जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा का 108 घड़ा पानी ते अन्हवावा जात है अउर फिर उइ लगभग दुई हफ्ता तक प्रतीकात्मक अउर अनुष्ठानिक स्वास्थ्य-लाभ (बीमारी ते उबरै के समय) मा रहति हैं। उनका जनता के दरसन ते रोक दीन जात है। खाली तीन खास पट्ट चित्र, कलफ ते कड़े कीन गै कपड़ा पर प्राकृतिक रंगन ते बनी पारंपरिक ओड़िया चित्रकारी, जेहिका अणसर पट्टी कहा जात है, बाँस के परदा पर टांगि दीन जाति हैं जउन उनका जनता के नजर ते छिपउती हैं। ई समय मा, तीनों देउतन का उनकी बीमारी ठीक करै के खातिर खाली जड़ि, पत्ता, बेरि अउर फल दीन जात है। यह रसम जगन्नाथ पंथ के जनम अउर बिकास मा मजबूत आदिवासी तत्वन के याद दिलावत है। सुरुवाती आदिवासी उपासक बिस्वाबसु, जउन सिकारिन के सरदार रहैं, उनकी बिटिया ललिता अउर ब्राह्मण पुजारी बिद्यापति के संतान दइतापति या दइता के नाँव ते जाने जाति हैं। उनके लगे बीमारी ते उबरै के समय अउर रथ जात्रा या रथ परब के पूरे समय प्रभुजी के सेवा करै का विसेस अधिकार होत है।
*सुना बेश
जगन्नाथ के सुना बेश-
तीनों देउतन के रथ गुंडीचा मंदिर ते मुख्य मंदिर लौटि आवै के बादि, उनका सोने के गहना पहिराए जाति है अउर रथन पर उनकी पूजा कीन जाति है। ई उत्सव का सुना बेश कहा जात है। परंपरा बतावति है कि या प्रथा सबते पहिले राजा कपिलेंद्र देव द्वारा 1460 मा सुरू कीन गै रहै, जब उइ जुद्ध ते जीति कै लउटै के बादि जगन्नाथ का सोना दान कीन्हेनि रहैं। तीनों देउतन का लगभग 208 किलो वजन के सोने के गहनन ते सजावा जात है। 2014 मा 9 जुलाई का भे ई रसम का लगभग नौ लाख भक्तन देखिन रहैं।
2015 मा रथ-यात्रा के मौका पर, 19 साल बादि रथन पर नए रूप (नबकलेबर) मा देउतन के याक झलक पावै के खातिर लाखन भक्त तटीय सहर पुरी मा भीड़ लगा दिहिन। यो ओडिशा मा अब तक का सबते बड़ा धार्मिक सम्मेलन रहै।
==2025 के रथ-यात्रा==
2025 के रथ-यात्रा मा डिजिटल तकनीक के जुड़ाव के साथै भक्ति मा एकु बड़ा बदलाव देखा परा। लाखन भक्तन के पारंपरिक रूप ते इकट्ठा होए के साथ-साथ, बड़ी संख्या मा मनई लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए वर्चुअली जुड़े, जउन धार्मिक पालन मा याक डिजिटल क्रांति के प्रवेश का देखावत है। 2025 की जात्रा केरी मुख्य बातन मा स्थानीय प्रसासन द्वारा लागू कीन गै भीड़ प्रबंधन के बेहतर रणनीति, ग्लोबल लाइव स्ट्रीमिंग (जेहते जादा लोग सामिल होइ पाइन), अउर पर्यावरण स्थिरता पर ध्यान सामिल रहै। बायोडिग्रेडेबल (आसानी ते सड़ै वाले) चढ़ावा का उपयोग अउर सिंगल-यूज प्लास्टिक का कम करै जइसि पर्यावरण के अनुकूल पहल सुरू कीन गै, जेहिते ई परब पहिले के सालन के तुलना मा पर्यावरण के प्रति जादा जिम्मेदार बना।
==रथ यात्रा की तारीखैं==
{| class="wikitable sortable mw-collapsible citiwise-data" style="text-align:center; font-size:85%; width:500px; margin:0px 0px 0em 0em;"
! colspan="3" | [[पुरी]] के [[रथ यात्रा]]
|-
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([[आषाढ़]] [[पक्ष|शुक्ल]] [[द्वितीया|द्वितीया]])
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(रथयात्रा क नौवां दिन)
|-
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([[नवकलेवर 2015|[नवकलेवर, 2015]])
| 18 जुलाई
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|-
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|-
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|-
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|-
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|-
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== सन्दर्भ ==
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35263
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
| image = Rath Yatra Puri 07-11027.jpg
| caption = देवताओं के तीन रथ और पृष्ठभूमि में मंदिर, पुरी
| type = हिंदू
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पुरी के रथ-यात्रा, जेहिका रथ जात्रौ (ओड़िया: ରଥଯାତ୍ରା, ({{IPAc-en|ˈ|r|ʌ|θ|ə|_|ˈ|j|ɑː|t|r|ɑː}}, {{IPA|or|ɾɔt̪ʰɔ dʒat̪ɾa}}) कहा जात है, आषाढ़ (जून-जुलाई) के सुक्ल पच्छ मा दूज के दिन हर साल निकारी जाति है। यहिका सबते पुरान अउर सबते बड़े हिंदू रथपर्व के रूप मा माना जात है।<ref name=":1">{{Cite book |last=Lochtefeld |first=James G. |url=https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |title=The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: N-Z |date=2002 |publisher=Rosen |isbn=978-0-8239-3180-4 |pages=567 |language=en |access-date=23 April 2023 |archive-date=15 April 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230415134917/https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite news |date=2019-07-04 |title=Rath Yatra: The legend behind world's largest chariot festival |language=en-GB |work=BBC News |url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |access-date=2023-06-15 |archive-date=17 February 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230217152645/https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |url-status=live }}</ref>
भगवान [[जगन्नाथ]] ते जुड़ी या रथ-यात्रा भारत के [[ओडिशा]] राज्य के पुरी सहर मा आयोजित कीन जाति है। ई परब मा तमाम भक्त, तीनों देउतन ([[जगन्नाथ]], उनके भइया [[बलभद्र]] अउर बहिन [[सुभद्रा]]) का तीन बड़े-बड़े लकड़ी के रथन (नंदिघोष, तालध्वज अऊर दर्पदलन) मा बड़ दाँड पर [[गुंडीचा मंदिर]] तक खींचति हैं, जहाँ उइ एकु हफ्ता तक रहति हैं औ फिर जगन्नाथ मंदिर का लौटि आवति हैं। ई वापसी जात्रा का बहुड़ा यात्रा कहा जात है।<ref name=":1" /><ref>{{cite web|url=https://www.readwhere.com/read/c/72800774|title=পুরীধাম ও জগন্নাথদেবের ব্রহ্মরূপ বৃত্তান্ত|language=bn|date=28 June 2023|access-date=28 June 2023|website=dainikstatesmannews.com|publisher=[[Dainik Statesman]] (The Statesman Group)|location=Kolkata|first=Yogabrata|last=Chakraborty|trans-title=Puridham and the tale of lord Jagannath's legendary 'Bramharup'|archive-url=https://web.archive.org/web/20230628103603/https://www.readwhere.com/read/c/72800774|archive-date=28 June 2023|url-status=bot: unknown}}</ref> गुंडीचा मंदिर ते वापस आवत समय, तीनों देउता मौसी माँ मंदिर के लगे कुछ देर के खातिर रुकति हैं अउर हुवाँ पोड़ा पीठा का भोग लगावा जात है, जउन एक खास तरह का पुआ आय, जेहिका प्रभुजी का सबते मनपसंद माना जात है। सात दिन रहै के बादि, तीनों देउता अपने अस्थान पर लौटि आवति हैं। <ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==इतिहास==
रथ-यात्रा का वर्णन ब्रह्म पुरान, पद्म पुरान, स्कन्द पुरान, अउर कपिल संहिता मा पावा जात है। 13वीं सदी ते यूरोपीय यात्रिन के द्वारा ई पर्व का उल्लेख कीन गा है, जेहिमा सबते प्रमुख अउर सजीव वर्णन 17वीं सदी मा दर्ज कीन गे हैं।
==रथ==
जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा के तीनों रथ हर साल फस्सी, धौसा जइसि खास बिरवन के लकड़ी ते बनाए जाति हैं। ई रथ परंपरा के अनुसार पूर्व-रियासत दसपल्ला ते आए बढ़ई लोगन के याक खास टोली के द्वारा बनाए जाति हैं, जिनका यो काम करै का पुश्तैनी अधिकार अउर विसेषाधिकार प्राप्त है। लकड़ी के लट्ठन का पारंपरिक रूप ते महानदी मा बेड़ा बनाय कै बहावा जात है। इनका पुरी के लगे इकट्ठा कीन जात है अउर फिर सड़क के रस्ता ते हुवाँ पहुँचावा जात है।
सदिन ते तय अउर मानी जा रही एक खास बिधी के अनुसार सजाए गे तीनिउ रथ बड़ दाँड पर खड़े कीन जाति हैं। मंदिर के पूरबी दुआर के लगे चौड़े रस्ता पर रथन् का एकु लाइन मा लगावा जात है, जेहिका सिंहदुआरौ कहा जात है।
सब रथन के चारिहुँ ओर नौ पार्श्व देउता होति हैं, जिनका रथ के बगल मा अलग-अलग देउतन का दरसावय वाली रंगीन लकड़ी के मूरति के माध्यम ते दरसावा जात है। हर रथ मा एक सारथी अउर चारि घोड़ा होति हैं।
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
!बलभद्र
!सुभद्रा
|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|[[File:Nandighosha Ratho.png|thumb|Nandighosha Ratho]][[File:Chariot Nandighosha of Lord Jagannath.jpg|thumb|Chariot Nandighosha of Lord Jagannath]][[File:Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha.jpg|thumb|Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha]]
|[[File:Taladhwaja Ratho.png|thumb|Taladhwaja Ratho]][[फाइल:Chariot Taladhwaja of Lord Balabhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|[[File:Debadalana Ratho.png|thumb|Debadalana Ratho]][[फाइल:Chariot Devidalana of Goddess Subhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
|42' 3"
|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
|33' x 33'
|31'6" x 31'6"
|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|द्वारपाल
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# छत्रभंगरावण (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
# शुलिदुर्गा
# वाराही
# श्यामाकाली
# मंगला
# विमला
|}<ref>[https://www.jagannathdham.in/rath-yatra-festival/details-of-rath-yatra-chariots/]</ref>
==पर्यटन अउर धार्मिक महत्त्व==
ई अस्थान का धार्मिक महत्व जगन्नाथजी का मंदिर है। सास्त्रन औ पुराननौ मा रथ-यात्रा के महत्ता स्वीकार कीन गै है। स्कन्द पुरान मा कहा गा है कि रथ-यात्रा मा जउन मनई श्री जगन्नाथ जी के नावँ का कीर्तन करत गुंडीचा नगर तक जात है वो पुनर्जन्म ते मुक्त होइ जात है। जउन मनई श्री जगन्नाथ जी का दरसन करत, परनाम करत, रस्ता के धूरि-कीचड़ मा ल्वाटत जाति हैं उइ सीधे भगवान श्री विष्णु के उत्तम धाम का जाति हैं। जउन मनई गुंडिचा मंडप मा रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम औ सुभद्रा देवी के दरसन दक्खिन दिसा का आवत भए करति हैं, उइ मोच्छ का प्राप्त होति हैं। रथयात्रा एक अइसन परब है जेहमा भगवान जगन्नाथ चलि कै जनता के बीच आवति हैं अउर उनके सुख-दुख मा सहभागी होति हैं। 'सब मनिसा मोर परजा' (सब मनई हमार परजा हैं), ई उनके उद्गार आहीं। भगवान जगन्नाथ तो पुरुषोत्तम हैं। उनमा श्रीराम, श्रीकृष्ण अद्वैत ब्रह्म रूप समाहित है। उनके अनेक नावँ हैं, उइ पतित पावन हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/religion/festivals/photo/bastar-chhattisgarh-unique-rath-yatra-is-celebrated-tupki-salami-tlifd-1289225-2021-07-12|title=यहां निकाली जाती है अनोखी जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी से दी जाती है सलामी|website=आज तक|language=hi|access-date=2021-07-13}}</ref>
==यात्रा का स्वरूप==
===सेवा-समर्पण===
जगन्नाथ मंदिर मा कई तरह के सेवक होति हैं जउन रथ पर अपनि सेवा देति हैं।
*सुआरा
*महासुआरा
*डाहुक: रथ डाहुक बोलि (ओड़िया: ଡାହୁକ ବୋଲି, जिनका "डाहुक गीतौ" (ଡାହୁକ ଗୀତ) कहा जात है) काव्यात्मक पाठ आहीं। रथ-यात्रा प्रजनन अउर जीवन चक्र के याक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति आय, डाहुक द्वारा गाए जाय वाली ई "बोलि" मा अश्लील/फूहड़ गीत सामिल होति हैं। यहौ माना जात है कि जब तक डाहुक बोलि नहीं गावा जात है, तब तक 'रथ नहीं चलत है। ई गीत बिना कउनो रोक-टोक के खुलेआम गाए जाति हैं। डाहुक परब के समय रथ के गति का नियंत्रित कीन जात है।
*दइता पति
*पुस्पालक
*बनाटी खेलाड़ी: बनाटी याक बहुत पुरान कला आय, जेहमा एकु मनई रस्सी के छोर पर बंधे आगि लगे गोला का घुमावत है। हर साल रथ-यात्रा मा भक्त भगवान जगन्नाथ का खुस करै के खातिर "बनाटी" करति हैं। बनाटी मा चाकू अउर आगि के गोला, यात्रा मा तब रंग भरि देति हैं जब वह अपनी मंजिल तक पहुँचत है।
===हेरा पंचमी===
*हेरा पंचमी पुरी के जगन्नाथ मंदिर मा रथयात्रा के दौरान मनावा जाय वाला एक अनुष्ठान आय। यहिका देवी लक्ष्मी के रसम के रूप मा जाना जात है। रथ-यात्रा ते पँचए दिन, माने आषाढ़ के सुक्ल पच्छ का पाँचवाँ दिन हेरा पंचमी के रूप मा जाना जात है। रथ-यात्रा मा, भगवान जगन्नाथ अपनी अर्धांगिनी महालक्ष्मी का पीछे छोड़ि कै, अपनि भइया बलभद्र अउर बहिन सुभद्रा के साथै अपन दिव्य हथियार सुदर्शन का लइ कै एक दिव्य यात्रा पर निकरति हैं। देवी, देउता के खातिर आपन गुस्सा देखाउती हैं। उइ सुबर्ण महालक्ष्मी के रूप मा याक पालकी मा गुंडीचा मंदिर,अड़प मंडप तक जउती हैं अउर भगवान का जल्दी ते जल्दी मंदिर लौटि आवै के धमकी देति हैं। उनका खुस करै के खातिर, देउता उनका आज्ञा माला (सहमति के माला) दइ के मनावति हैं। देवी का गुस्सा मा देखि कै, सेवक लोग गुंडीचा के मुख्य दुआर बंद कइ देति हैं। महालक्ष्मी नाकाचना गेट ते मुख्य मंदिर मा लौटि अउती हैं। एक अनोखी रसम मा, देवी अपने एक सेवक का नंदिघोष रथ के एक हिस्सा का नुकसान पहुँचावय का आदेस देती हैं। यहिके बादि उइ गुंडीचा मंदिर के बाहिर एक इमली के पेड़ के पीछे छिपि जाती हैं। कुछ देर बादि, उइ हेरा गोहरी लेन के नाँव ते जाने जाय वाले एक अलग रस्ता ते चुपचाप अपने घर-मंदिर का भागि जाती हैं। जगन्नाथजी के लाखन भक्त ई अनोखी रसम का आनंद लेति हैं। श्रीमंदिर की एक महत्वपूर्ण रसम के रूप मा हेरा पंचमी के रसम क जिकिर स्कन्द पुरान मा पावा जात है। मंदिर के इतिहास के अनुसार, यो उत्सव महाराजा कपिलेंद्र देब के समय मा सुरू भा रहै। उनके राज ते पहिले, हेरा पंचमी का मंत्रन के पाठ के साथै प्रतीकात्मक रूप मा मनावा जात रहै। जइस कि मादला पांजी मा कहा गा है, राजा कपिलेंद्र देब सोने के बनी महालक्ष्मी के मूरति लइ कै ई परथा का बदल दिहिन अउर ई परब का अउर जादा नीक बना दिहिन।
*चंदन जात्रा-
चंदन जात्रा या "चंदन परब" 42 दिन का समय है जेहिमा रथन के निर्माण काम के सुरूआत होति है। ई समय का आधा-आधा बांटा गा है, जेहिमा हर एक मा 21 दिन होति हैं। पहिले आधे भाग का बाहिर चंदन कहा जात है, जेहिमा प्रमुख देउतन की प्रतिनिधि मूरतिन का रंगीन जुलूस मा बाहिर निकाला जात है अउर हर दिन नरेंद्र तालाब मा एक अनुष्ठानिक नाव के सवारी कराई जाति है। ई देउतन मा मदन मोहन (जगन्नाथ), राम-कृष्ण, लक्ष्मी, सरस्वती अउर पंच पांडव - पाँच मुख्य शिव मंदिरन के प्रमुख देउता सामिल होति हैं। बाद वाला हिस्सा, जेहिका भीतर चंदन कहा जात है, वहिमा कई अइसी रसमैं होती हैं जिनका जनता के खातिर नहीं खवाला जात। रथन का निर्माण अच्छय तृतीया का, वैशाख के सुक्ल पच्छ के तिसरे दिन, अनुष्ठानिक अगिन पूजा के साथै सुरू होत है। यो पुरी के राजा के महल के सामने अउर पुरी मंदिर के मुख्य कार्यालय की उल्टी दिसा मा होत है। बादि मा देउतन का तालाब के बीच एकु छोटे मंदिर मा पानी, चंदन के लेप, इत्तर अउर फूलन ते भरे पत्थर के टब मा अनुष्ठानिक असनान करावा जात है।
ई चंदन परब के समाप्ती सनान जात्रा या "असनान परब" मा होत है जउन जेठ महीना के पूरनमासी के दिन होत है। जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा का 108 घड़ा पानी ते अन्हवावा जात है अउर फिर उइ लगभग दुई हफ्ता तक प्रतीकात्मक अउर अनुष्ठानिक स्वास्थ्य-लाभ (बीमारी ते उबरै के समय) मा रहति हैं। उनका जनता के दरसन ते रोक दीन जात है। खाली तीन खास पट्ट चित्र, कलफ ते कड़े कीन गै कपड़ा पर प्राकृतिक रंगन ते बनी पारंपरिक ओड़िया चित्रकारी, जेहिका अणसर पट्टी कहा जात है, बाँस के परदा पर टांगि दीन जाति हैं जउन उनका जनता के नजर ते छिपउती हैं। ई समय मा, तीनों देउतन का उनकी बीमारी ठीक करै के खातिर खाली जड़ि, पत्ता, बेरि अउर फल दीन जात है। यह रसम जगन्नाथ पंथ के जनम अउर बिकास मा मजबूत आदिवासी तत्वन के याद दिलावत है। सुरुवाती आदिवासी उपासक बिस्वाबसु, जउन सिकारिन के सरदार रहैं, उनकी बिटिया ललिता अउर ब्राह्मण पुजारी बिद्यापति के संतान दइतापति या दइता के नाँव ते जाने जाति हैं। उनके लगे बीमारी ते उबरै के समय अउर रथ जात्रा या रथ परब के पूरे समय प्रभुजी के सेवा करै का विसेस अधिकार होत है।
*सुना बेश
जगन्नाथ के सुना बेश-
तीनों देउतन के रथ गुंडीचा मंदिर ते मुख्य मंदिर लौटि आवै के बादि, उनका सोने के गहना पहिराए जाति है अउर रथन पर उनकी पूजा कीन जाति है। ई उत्सव का सुना बेश कहा जात है। परंपरा बतावति है कि या प्रथा सबते पहिले राजा कपिलेंद्र देव द्वारा 1460 मा सुरू कीन गै रहै, जब उइ जुद्ध ते जीति कै लउटै के बादि जगन्नाथ का सोना दान कीन्हेनि रहैं। तीनों देउतन का लगभग 208 किलो वजन के सोने के गहनन ते सजावा जात है। 2014 मा 9 जुलाई का भे ई रसम का लगभग नौ लाख भक्तन देखिन रहैं।
2015 मा रथ-यात्रा के मौका पर, 19 साल बादि रथन पर नए रूप (नबकलेबर) मा देउतन के याक झलक पावै के खातिर लाखन भक्त तटीय सहर पुरी मा भीड़ लगा दिहिन। यो ओडिशा मा अब तक का सबते बड़ा धार्मिक सम्मेलन रहै।
==2025 के रथ-यात्रा==
2025 के रथ-यात्रा मा डिजिटल तकनीक के जुड़ाव के साथै भक्ति मा एकु बड़ा बदलाव देखा परा। लाखन भक्तन के पारंपरिक रूप ते इकट्ठा होए के साथ-साथ, बड़ी संख्या मा मनई लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए वर्चुअली जुड़े, जउन धार्मिक पालन मा याक डिजिटल क्रांति के प्रवेश का देखावत है। 2025 की जात्रा केरी मुख्य बातन मा स्थानीय प्रसासन द्वारा लागू कीन गै भीड़ प्रबंधन के बेहतर रणनीति, ग्लोबल लाइव स्ट्रीमिंग (जेहते जादा लोग सामिल होइ पाइन), अउर पर्यावरण स्थिरता पर ध्यान सामिल रहै। बायोडिग्रेडेबल (आसानी ते सड़ै वाले) चढ़ावा का उपयोग अउर सिंगल-यूज प्लास्टिक का कम करै जइसि पर्यावरण के अनुकूल पहल सुरू कीन गै, जेहिते ई परब पहिले के सालन के तुलना मा पर्यावरण के प्रति जादा जिम्मेदार बना।
==रथ यात्रा की तारीखैं==
{| class="wikitable sortable mw-collapsible citiwise-data" style="text-align:center; font-size:85%; width:500px; margin:0px 0px 0em 0em;"
! colspan="3" | [[पुरी]] के [[रथ यात्रा]]
|-
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([[आषाढ़]] [[पक्ष|शुक्ल]] [[द्वितीया|द्वितीया]])
! scope="col" | आखिरी दिन
(रथयात्रा क नौवां दिन)
|-
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([[नवकलेवर 2015|[नवकलेवर, 2015]])
| 18 जुलाई
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|-
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|-
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|-
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|-
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|-
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([[नवकलेवर|[नवकलेवर, 2034]])
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== सन्दर्भ ==
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{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
| image = Rath Yatra Puri 07-11027.jpg
| caption = देवताओं के तीन रथ और पृष्ठभूमि में मंदिर, पुरी
| type = हिंदू
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}}
पुरी के रथ-यात्रा, जेहिका रथ जात्रौ (ओड़िया: ରଥଯାତ୍ରା, ({{IPAc-en|ˈ|r|ʌ|θ|ə|_|ˈ|j|ɑː|t|r|ɑː}}, {{IPA|or|ɾɔt̪ʰɔ dʒat̪ɾa}}) कहा जात है, आषाढ़ (जून-जुलाई) के सुक्ल पच्छ मा दूज के दिन हर साल निकारी जाति है। यहिका सबते पुरान अउर सबते बड़े हिंदू रथपर्व के रूप मा माना जात है।<ref name=":1">{{Cite book |last=Lochtefeld |first=James G. |url=https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |title=The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: N-Z |date=2002 |publisher=Rosen |isbn=978-0-8239-3180-4 |pages=567 |language=en |access-date=23 April 2023 |archive-date=15 April 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230415134917/https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite news |date=2019-07-04 |title=Rath Yatra: The legend behind world's largest chariot festival |language=en-GB |work=BBC News |url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |access-date=2023-06-15 |archive-date=17 February 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230217152645/https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |url-status=live }}</ref>
भगवान [[जगन्नाथ]] ते जुड़ी या रथ-यात्रा भारत के [[ओडिशा]] राज्य के पुरी सहर मा आयोजित कीन जाति है। ई परब मा तमाम भक्त, तीनों देउतन ([[जगन्नाथ]], उनके भइया [[बलभद्र]] अउर बहिन [[सुभद्रा]]) का तीन बड़े-बड़े लकड़ी के रथन (नंदिघोष, तालध्वज अऊर दर्पदलन) मा बड़ दाँड पर [[गुंडीचा मंदिर]] तक खींचति हैं, जहाँ उइ एकु हफ्ता तक रहति हैं औ फिर जगन्नाथ मंदिर का लौटि आवति हैं। ई वापसी जात्रा का बहुड़ा यात्रा कहा जात है।<ref name=":1" /><ref>{{cite web|url=https://www.readwhere.com/read/c/72800774|title=পুরীধাম ও জগন্নাথদেবের ব্রহ্মরূপ বৃত্তান্ত|language=bn|date=28 June 2023|access-date=28 June 2023|website=dainikstatesmannews.com|publisher=[[Dainik Statesman]] (The Statesman Group)|location=Kolkata|first=Yogabrata|last=Chakraborty|trans-title=Puridham and the tale of lord Jagannath's legendary 'Bramharup'|archive-url=https://web.archive.org/web/20230628103603/https://www.readwhere.com/read/c/72800774|archive-date=28 June 2023|url-status=bot: unknown}}</ref> गुंडीचा मंदिर ते वापस आवत समय, तीनों देउता मौसी माँ मंदिर के लगे कुछ देर के खातिर रुकति हैं अउर हुवाँ पोड़ा पीठा का भोग लगावा जात है, जउन एक खास तरह का पुआ आय, जेहिका प्रभुजी का सबते मनपसंद माना जात है। सात दिन रहै के बादि, तीनों देउता अपने अस्थान पर लौटि आवति हैं। <ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==इतिहास==
रथ-यात्रा का वर्णन ब्रह्म पुरान, पद्म पुरान, स्कन्द पुरान, अउर कपिल संहिता मा पावा जात है। 13वीं सदी ते यूरोपीय यात्रिन के द्वारा ई पर्व का उल्लेख कीन गा है, जेहिमा सबते प्रमुख अउर सजीव वर्णन 17वीं सदी मा दर्ज कीन गे हैं।
==रथ==
जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा के तीनों रथ हर साल फस्सी, धौसा जइसि खास बिरवन के लकड़ी ते बनाए जाति हैं। ई रथ परंपरा के अनुसार पूर्व-रियासत दसपल्ला ते आए बढ़ई लोगन के याक खास टोली के द्वारा बनाए जाति हैं, जिनका यो काम करै का पुश्तैनी अधिकार अउर विसेषाधिकार प्राप्त है। लकड़ी के लट्ठन का पारंपरिक रूप ते महानदी मा बेड़ा बनाय कै बहावा जात है। इनका पुरी के लगे इकट्ठा कीन जात है अउर फिर सड़क के रस्ता ते हुवाँ पहुँचावा जात है।
सदिन ते तय अउर मानी जा रही एक खास बिधी के अनुसार सजाए गे तीनिउ रथ बड़ दाँड पर खड़े कीन जाति हैं। मंदिर के पूरबी दुआर के लगे चौड़े रस्ता पर रथन् का एकु लाइन मा लगावा जात है, जेहिका सिंहदुआरौ कहा जात है।
सब रथन के चारिहुँ ओर नौ पार्श्व देउता होति हैं, जिनका रथ के बगल मा अलग-अलग देउतन का दरसावय वाली रंगीन लकड़ी के मूरति के माध्यम ते दरसावा जात है। हर रथ मा एक सारथी अउर चारि घोड़ा होति हैं।
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
!बलभद्र
!सुभद्रा
|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|[[File:Nandighosha Ratho.png|thumb|Nandighosha Ratho]][[File:Chariot Nandighosha of Lord Jagannath.jpg|thumb|Chariot Nandighosha of Lord Jagannath]][[File:Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha.jpg|thumb|Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha]]
|[[File:Taladhwaja Ratho.png|thumb|Taladhwaja Ratho]][[फाइल:Chariot Taladhwaja of Lord Balabhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|[[File:Debadalana Ratho.png|thumb|Debadalana Ratho]][[फाइल:Chariot Devidalana of Goddess Subhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
|42' 3"
|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
|33' x 33'
|31'6" x 31'6"
|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|द्वारपाल
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# छत्रभंगरावण (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
# शुलिदुर्गा
# वाराही
# श्यामाकाली
# मंगला
# विमला
|}<ref>[https://www.jagannathdham.in/rath-yatra-festival/details-of-rath-yatra-chariots/]</ref>
==पर्यटन अउर धार्मिक महत्त्व==
ई अस्थान का धार्मिक महत्व जगन्नाथजी का मंदिर है। सास्त्रन औ पुराननौ मा रथ-यात्रा के महत्ता स्वीकार कीन गै है। स्कन्द पुरान मा कहा गा है कि रथ-यात्रा मा जउन मनई श्री जगन्नाथ जी के नावँ का कीर्तन करत गुंडीचा नगर तक जात है वो पुनर्जन्म ते मुक्त होइ जात है। जउन मनई श्री जगन्नाथ जी का दरसन करत, परनाम करत, रस्ता के धूरि-कीचड़ मा ल्वाटत जाति हैं उइ सीधे भगवान श्री विष्णु के उत्तम धाम का जाति हैं। जउन मनई गुंडिचा मंडप मा रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम औ सुभद्रा देवी के दरसन दक्खिन दिसा का आवत भए करति हैं, उइ मोच्छ का प्राप्त होति हैं। रथयात्रा एक अइसन परब है जेहमा भगवान जगन्नाथ चलि कै जनता के बीच आवति हैं अउर उनके सुख-दुख मा सहभागी होति हैं। 'सब मनिसा मोर परजा' (सब मनई हमार परजा हैं), ई उनके उद्गार आहीं। भगवान जगन्नाथ तो पुरुषोत्तम हैं। उनमा श्रीराम, श्रीकृष्ण अद्वैत ब्रह्म रूप समाहित है। उनके अनेक नावँ हैं, उइ पतित पावन हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/religion/festivals/photo/bastar-chhattisgarh-unique-rath-yatra-is-celebrated-tupki-salami-tlifd-1289225-2021-07-12|title=यहां निकाली जाती है अनोखी जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी से दी जाती है सलामी|website=आज तक|language=hi|access-date=2021-07-13}}</ref>
==यात्रा का स्वरूप==
===सेवा-समर्पण===
जगन्नाथ मंदिर मा कई तरह के सेवक होति हैं जउन रथ पर अपनि सेवा देति हैं।
*सुआरा
*महासुआरा
*डाहुक: रथ डाहुक बोलि (ओड़िया: ଡାହୁକ ବୋଲି, जिनका "डाहुक गीतौ" (ଡାହୁକ ଗୀତ) कहा जात है) काव्यात्मक पाठ आहीं। रथ-यात्रा प्रजनन अउर जीवन चक्र के याक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति आय, डाहुक द्वारा गाए जाय वाली ई "बोलि" मा अश्लील/फूहड़ गीत सामिल होति हैं। यहौ माना जात है कि जब तक डाहुक बोलि नहीं गावा जात है, तब तक 'रथ नहीं चलत है। ई गीत बिना कउनो रोक-टोक के खुलेआम गाए जाति हैं। डाहुक परब के समय रथ के गति का नियंत्रित कीन जात है।
*दइता पति
*पुस्पालक
*बनाटी खेलाड़ी: बनाटी याक बहुत पुरान कला आय, जेहमा एकु मनई रस्सी के छोर पर बंधे आगि लगे गोला का घुमावत है। हर साल रथ-यात्रा मा भक्त भगवान जगन्नाथ का खुस करै के खातिर "बनाटी" करति हैं। बनाटी मा चाकू अउर आगि के गोला, यात्रा मा तब रंग भरि देति हैं जब वह अपनी मंजिल तक पहुँचत है।
===हेरा पंचमी===
*हेरा पंचमी पुरी के जगन्नाथ मंदिर मा रथयात्रा के दौरान मनावा जाय वाला एक अनुष्ठान आय। यहिका देवी लक्ष्मी के रसम के रूप मा जाना जात है। रथ-यात्रा ते पँचए दिन, माने आषाढ़ के सुक्ल पच्छ का पाँचवाँ दिन हेरा पंचमी के रूप मा जाना जात है। रथ-यात्रा मा, भगवान जगन्नाथ अपनी अर्धांगिनी महालक्ष्मी का पीछे छोड़ि कै, अपनि भइया बलभद्र अउर बहिन सुभद्रा के साथै अपन दिव्य हथियार सुदर्शन का लइ कै एक दिव्य यात्रा पर निकरति हैं। देवी, देउता के खातिर आपन गुस्सा देखाउती हैं। उइ सुबर्ण महालक्ष्मी के रूप मा याक पालकी मा गुंडीचा मंदिर,अड़प मंडप तक जउती हैं अउर भगवान का जल्दी ते जल्दी मंदिर लौटि आवै के धमकी देति हैं। उनका खुस करै के खातिर, देउता उनका आज्ञा माला (सहमति के माला) दइ के मनावति हैं। देवी का गुस्सा मा देखि कै, सेवक लोग गुंडीचा के मुख्य दुआर बंद कइ देति हैं। महालक्ष्मी नाकाचना गेट ते मुख्य मंदिर मा लौटि अउती हैं। एक अनोखी रसम मा, देवी अपने एक सेवक का नंदिघोष रथ के एक हिस्सा का नुकसान पहुँचावय का आदेस देती हैं। यहिके बादि उइ गुंडीचा मंदिर के बाहिर एक इमली के पेड़ के पीछे छिपि जाती हैं। कुछ देर बादि, उइ हेरा गोहरी लेन के नाँव ते जाने जाय वाले एक अलग रस्ता ते चुपचाप अपने घर-मंदिर का भागि जाती हैं। जगन्नाथजी के लाखन भक्त ई अनोखी रसम का आनंद लेति हैं। श्रीमंदिर की एक महत्वपूर्ण रसम के रूप मा हेरा पंचमी के रसम क जिकिर स्कन्द पुरान मा पावा जात है। मंदिर के इतिहास के अनुसार, यो उत्सव महाराजा कपिलेंद्र देब के समय मा सुरू भा रहै। उनके राज ते पहिले, हेरा पंचमी का मंत्रन के पाठ के साथै प्रतीकात्मक रूप मा मनावा जात रहै। जइस कि मादला पांजी मा कहा गा है, राजा कपिलेंद्र देब सोने के बनी महालक्ष्मी के मूरति लइ कै ई परथा का बदल दिहिन अउर ई परब का अउर जादा नीक बना दिहिन।
===चंदन जात्रा===
चंदन जात्रा या "चंदन परब" 42 दिन का समय है जेहिमा रथन के निर्माण काम के सुरूआत होति है। ई समय का आधा-आधा बांटा गा है, जेहिमा हर एक मा 21 दिन होति हैं। पहिले आधे भाग का बाहिर चंदन कहा जात है, जेहिमा प्रमुख देउतन की प्रतिनिधि मूरतिन का रंगीन जुलूस मा बाहिर निकाला जात है अउर हर दिन नरेंद्र तालाब मा एक अनुष्ठानिक नाव के सवारी कराई जाति है। ई देउतन मा मदन मोहन (जगन्नाथ), राम-कृष्ण, लक्ष्मी, सरस्वती अउर पंच पांडव - पाँच मुख्य शिव मंदिरन के प्रमुख देउता सामिल होति हैं। बाद वाला हिस्सा, जेहिका भीतर चंदन कहा जात है, वहिमा कई अइसी रसमैं होती हैं जिनका जनता के खातिर नहीं खवाला जात। रथन का निर्माण अच्छय तृतीया का, वैशाख के सुक्ल पच्छ के तिसरे दिन, अनुष्ठानिक अगिन पूजा के साथै सुरू होत है। यो पुरी के राजा के महल के सामने अउर पुरी मंदिर के मुख्य कार्यालय की उल्टी दिसा मा होत है। बादि मा देउतन का तालाब के बीच एकु छोटे मंदिर मा पानी, चंदन के लेप, इत्तर अउर फूलन ते भरे पत्थर के टब मा अनुष्ठानिक असनान करावा जात है।
ई चंदन परब के समाप्ती सनान जात्रा या "असनान परब" मा होत है जउन जेठ महीना के पूरनमासी के दिन होत है। जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा का 108 घड़ा पानी ते अन्हवावा जात है अउर फिर उइ लगभग दुई हफ्ता तक प्रतीकात्मक अउर अनुष्ठानिक स्वास्थ्य-लाभ (बीमारी ते उबरै के समय) मा रहति हैं। उनका जनता के दरसन ते रोक दीन जात है। खाली तीन खास पट्ट चित्र, कलफ ते कड़े कीन गै कपड़ा पर प्राकृतिक रंगन ते बनी पारंपरिक ओड़िया चित्रकारी, जेहिका अणसर पट्टी कहा जात है, बाँस के परदा पर टांगि दीन जाति हैं जउन उनका जनता के नजर ते छिपउती हैं। ई समय मा, तीनों देउतन का उनकी बीमारी ठीक करै के खातिर खाली जड़ि, पत्ता, बेरि अउर फल दीन जात है। यह रसम जगन्नाथ पंथ के जनम अउर बिकास मा मजबूत आदिवासी तत्वन के याद दिलावत है। सुरुवाती आदिवासी उपासक बिस्वाबसु, जउन सिकारिन के सरदार रहैं, उनकी बिटिया ललिता अउर ब्राह्मण पुजारी बिद्यापति के संतान दइतापति या दइता के नाँव ते जाने जाति हैं। उनके लगे बीमारी ते उबरै के समय अउर रथ जात्रा या रथ परब के पूरे समय प्रभुजी के सेवा करै का विसेस अधिकार होत है।
===सुना बेश===
जगन्नाथ के सुना बेश-
तीनों देउतन के रथ गुंडीचा मंदिर ते मुख्य मंदिर लौटि आवै के बादि, उनका सोने के गहना पहिराए जाति है अउर रथन पर उनकी पूजा कीन जाति है। ई उत्सव का सुना बेश कहा जात है। परंपरा बतावति है कि या प्रथा सबते पहिले राजा कपिलेंद्र देव द्वारा 1460 मा सुरू कीन गै रहै, जब उइ जुद्ध ते जीति कै लउटै के बादि जगन्नाथ का सोना दान कीन्हेनि रहैं। तीनों देउतन का लगभग 208 किलो वजन के सोने के गहनन ते सजावा जात है। 2014 मा 9 जुलाई का भे ई रसम का लगभग नौ लाख भक्तन देखिन रहैं।
2015 मा रथ-यात्रा के मौका पर, 19 साल बादि रथन पर नए रूप (नबकलेबर) मा देउतन के याक झलक पावै के खातिर लाखन भक्त तटीय सहर पुरी मा भीड़ लगा दिहिन। यो ओडिशा मा अब तक का सबते बड़ा धार्मिक सम्मेलन रहै।
==2025 के रथ-यात्रा==
2025 के रथ-यात्रा मा डिजिटल तकनीक के जुड़ाव के साथै भक्ति मा एकु बड़ा बदलाव देखा परा। लाखन भक्तन के पारंपरिक रूप ते इकट्ठा होए के साथ-साथ, बड़ी संख्या मा मनई लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए वर्चुअली जुड़े, जउन धार्मिक पालन मा याक डिजिटल क्रांति के प्रवेश का देखावत है। 2025 की जात्रा केरी मुख्य बातन मा स्थानीय प्रसासन द्वारा लागू कीन गै भीड़ प्रबंधन के बेहतर रणनीति, ग्लोबल लाइव स्ट्रीमिंग (जेहते जादा लोग सामिल होइ पाइन), अउर पर्यावरण स्थिरता पर ध्यान सामिल रहै। बायोडिग्रेडेबल (आसानी ते सड़ै वाले) चढ़ावा का उपयोग अउर सिंगल-यूज प्लास्टिक का कम करै जइसि पर्यावरण के अनुकूल पहल सुरू कीन गै, जेहिते ई परब पहिले के सालन के तुलना मा पर्यावरण के प्रति जादा जिम्मेदार बना।
==रथ यात्रा की तारीखैं==
{| class="wikitable sortable mw-collapsible citiwise-data" style="text-align:center; font-size:85%; width:500px; margin:0px 0px 0em 0em;"
! colspan="3" | [[पुरी]] के [[रथ यात्रा]]
|-
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([[आषाढ़]] [[पक्ष|शुक्ल]] [[द्वितीया|द्वितीया]])
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(रथयात्रा क नौवां दिन)
|-
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([[नवकलेवर 2015|[नवकलेवर, 2015]])
| 18 जुलाई
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|-
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|-
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|-
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|-
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== सन्दर्भ ==
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{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
| image = Rath Yatra Puri 07-11027.jpg
| caption = देवताओं के तीन रथ और पृष्ठभूमि में मंदिर, पुरी
| type = हिंदू
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}}
पुरी के रथ-यात्रा, जेहिका रथ जात्रौ (ओड़िया: ରଥଯାତ୍ରା, ({{IPAc-en|ˈ|r|ʌ|θ|ə|_|ˈ|j|ɑː|t|r|ɑː}}, {{IPA|or|ɾɔt̪ʰɔ dʒat̪ɾa}}) कहा जात है, आषाढ़ (जून-जुलाई) के सुक्ल पच्छ मा दूज के दिन हर साल निकारी जाति है। यहिका सबते पुरान अउर सबते बड़े हिंदू रथपर्व के रूप मा माना जात है।<ref name=":1">{{Cite book |last=Lochtefeld |first=James G. |url=https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |title=The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: N-Z |date=2002 |publisher=Rosen |isbn=978-0-8239-3180-4 |pages=567 |language=en |access-date=23 April 2023 |archive-date=15 April 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230415134917/https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite news |date=2019-07-04 |title=Rath Yatra: The legend behind world's largest chariot festival |language=en-GB |work=BBC News |url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |access-date=2023-06-15 |archive-date=17 February 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230217152645/https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |url-status=live }}</ref>
भगवान [[जगन्नाथ]] ते जुड़ी या रथ-यात्रा भारत के [[ओडिशा]] राज्य के पुरी सहर मा आयोजित कीन जाति है। ई परब मा तमाम भक्त, तीनों देउतन ([[जगन्नाथ]], उनके भइया [[बलभद्र]] अउर बहिन [[सुभद्रा]]) का तीन बड़े-बड़े लकड़ी के रथन (नंदिघोष, तालध्वज अऊर दर्पदलन) मा बड़ दाँड पर [[गुंडीचा मंदिर]] तक खींचति हैं, जहाँ उइ एकु हफ्ता तक रहति हैं औ फिर जगन्नाथ मंदिर का लौटि आवति हैं। ई वापसी जात्रा का बहुड़ा यात्रा कहा जात है।<ref name=":1" /><ref>{{cite web|url=https://www.readwhere.com/read/c/72800774|title=পুরীধাম ও জগন্নাথদেবের ব্রহ্মরূপ বৃত্তান্ত|language=bn|date=28 June 2023|access-date=28 June 2023|website=dainikstatesmannews.com|publisher=[[Dainik Statesman]] (The Statesman Group)|location=Kolkata|first=Yogabrata|last=Chakraborty|trans-title=Puridham and the tale of lord Jagannath's legendary 'Bramharup'|archive-url=https://web.archive.org/web/20230628103603/https://www.readwhere.com/read/c/72800774|archive-date=28 June 2023|url-status=bot: unknown}}</ref> गुंडीचा मंदिर ते वापस आवत समय, तीनों देउता मौसी माँ मंदिर के लगे कुछ देर के खातिर रुकति हैं अउर हुवाँ पोड़ा पीठा का भोग लगावा जात है, जउन एक खास तरह का पुआ आय, जेहिका प्रभुजी का सबते मनपसंद माना जात है। सात दिन रहै के बादि, तीनों देउता अपने अस्थान पर लौटि आवति हैं। <ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==इतिहास==
रथ-यात्रा का वर्णन ब्रह्म पुरान, पद्म पुरान, स्कन्द पुरान, अउर कपिल संहिता मा पावा जात है। 13वीं सदी ते यूरोपीय यात्रिन के द्वारा ई पर्व का उल्लेख कीन गा है, जेहिमा सबते प्रमुख अउर सजीव वर्णन 17वीं सदी मा दर्ज कीन गे हैं।
==रथ==
जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा के तीनों रथ हर साल फस्सी, धौसा जइसि खास बिरवन के लकड़ी ते बनाए जाति हैं। ई रथ परंपरा के अनुसार पूर्व-रियासत दसपल्ला ते आए बढ़ई लोगन के याक खास टोली के द्वारा बनाए जाति हैं, जिनका यो काम करै का पुश्तैनी अधिकार अउर विसेषाधिकार प्राप्त है। लकड़ी के लट्ठन का पारंपरिक रूप ते महानदी मा बेड़ा बनाय कै बहावा जात है। इनका पुरी के लगे इकट्ठा कीन जात है अउर फिर सड़क के रस्ता ते हुवाँ पहुँचावा जात है।
सदिन ते तय अउर मानी जा रही एक खास बिधी के अनुसार सजाए गे तीनिउ रथ बड़ दाँड पर खड़े कीन जाति हैं। मंदिर के पूरबी दुआर के लगे चौड़े रस्ता पर रथन् का एकु लाइन मा लगावा जात है, जेहिका सिंहदुआरौ कहा जात है।
सब रथन के चारिहुँ ओर नौ पार्श्व देउता होति हैं, जिनका रथ के बगल मा अलग-अलग देउतन का दरसावय वाली रंगीन लकड़ी के मूरति के माध्यम ते दरसावा जात है। हर रथ मा एक सारथी अउर चारि घोड़ा होति हैं।
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
!बलभद्र
!सुभद्रा
|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|[[File:Nandighosha Ratho.png|thumb|Nandighosha Ratho]][[File:Chariot Nandighosha of Lord Jagannath.jpg|thumb|Chariot Nandighosha of Lord Jagannath]][[File:Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha.jpg|thumb|Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha]]
|[[File:Taladhwaja Ratho.png|thumb|Taladhwaja Ratho]][[फाइल:Chariot Taladhwaja of Lord Balabhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|[[File:Debadalana Ratho.png|thumb|Debadalana Ratho]][[फाइल:Chariot Devidalana of Goddess Subhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
|42' 3"
|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
|33' x 33'
|31'6" x 31'6"
|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|द्वारपाल
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# छत्रभंगरावण (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
# शुलिदुर्गा
# वाराही
# श्यामाकाली
# मंगला
# विमला
|}<ref>[https://www.jagannathdham.in/rath-yatra-festival/details-of-rath-yatra-chariots/]</ref>
==पर्यटन अउर धार्मिक महत्त्व==
ई अस्थान का धार्मिक महत्व जगन्नाथजी का मंदिर है। सास्त्रन औ पुराननौ मा रथ-यात्रा के महत्ता स्वीकार कीन गै है। स्कन्द पुरान मा कहा गा है कि रथ-यात्रा मा जउन मनई श्री जगन्नाथ जी के नावँ का कीर्तन करत गुंडीचा नगर तक जात है वो पुनर्जन्म ते मुक्त होइ जात है। जउन मनई श्री जगन्नाथ जी का दरसन करत, परनाम करत, रस्ता के धूरि-कीचड़ मा ल्वाटत जाति हैं उइ सीधे भगवान श्री विष्णु के उत्तम धाम का जाति हैं। जउन मनई गुंडिचा मंडप मा रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम औ सुभद्रा देवी के दरसन दक्खिन दिसा का आवत भए करति हैं, उइ मोच्छ का प्राप्त होति हैं। रथयात्रा एक अइसन परब है जेहमा भगवान जगन्नाथ चलि कै जनता के बीच आवति हैं अउर उनके सुख-दुख मा सहभागी होति हैं। 'सब मनिसा मोर परजा' (सब मनई हमार परजा हैं), ई उनके उद्गार आहीं। भगवान जगन्नाथ तो पुरुषोत्तम हैं। उनमा श्रीराम, श्रीकृष्ण अद्वैत ब्रह्म रूप समाहित है। उनके अनेक नावँ हैं, उइ पतित पावन हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/religion/festivals/photo/bastar-chhattisgarh-unique-rath-yatra-is-celebrated-tupki-salami-tlifd-1289225-2021-07-12|title=यहां निकाली जाती है अनोखी जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी से दी जाती है सलामी|website=आज तक|language=hi|access-date=2021-07-13}}</ref>
==यात्रा का स्वरूप==
===सेवा-समर्पण===
जगन्नाथ मंदिर मा कई तरह के सेवक होति हैं जउन रथ पर अपनि सेवा देति हैं।
*सुआरा
*महासुआरा
*डाहुक: रथ डाहुक बोलि (ओड़िया: ଡାହୁକ ବୋଲି, जिनका "डाहुक गीतौ" (ଡାହୁକ ଗୀତ) कहा जात है) काव्यात्मक पाठ आहीं। रथ-यात्रा प्रजनन अउर जीवन चक्र के याक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति आय, डाहुक द्वारा गाए जाय वाली ई "बोलि" मा अश्लील/फूहड़ गीत सामिल होति हैं। यहौ माना जात है कि जब तक डाहुक बोलि नहीं गावा जात है, तब तक 'रथ नहीं चलत है। ई गीत बिना कउनो रोक-टोक के खुलेआम गाए जाति हैं। डाहुक परब के समय रथ के गति का नियंत्रित कीन जात है।
*दइता पति
*पुस्पालक
*बनाटी खेलाड़ी: बनाटी याक बहुत पुरान कला आय, जेहमा एकु मनई रस्सी के छोर पर बंधे आगि लगे गोला का घुमावत है। हर साल रथ-यात्रा मा भक्त भगवान जगन्नाथ का खुस करै के खातिर "बनाटी" करति हैं। बनाटी मा चाकू अउर आगि के गोला, यात्रा मा तब रंग भरि देति हैं जब वह अपनी मंजिल तक पहुँचत है।
===हेरा पंचमी===
हेरा पंचमी पुरी के जगन्नाथ मंदिर मा रथयात्रा के दौरान मनावा जाय वाला एक अनुष्ठान आय। यहिका देवी लक्ष्मी के रसम के रूप मा जाना जात है। रथ-यात्रा ते पँचए दिन, माने आषाढ़ के सुक्ल पच्छ का पाँचवाँ दिन हेरा पंचमी के रूप मा जाना जात है। रथ-यात्रा मा, भगवान जगन्नाथ अपनी अर्धांगिनी महालक्ष्मी का पीछे छोड़ि कै, अपनि भइया बलभद्र अउर बहिन सुभद्रा के साथै अपन दिव्य हथियार सुदर्शन का लइ कै एक दिव्य यात्रा पर निकरति हैं। देवी, देउता के खातिर आपन गुस्सा देखाउती हैं। उइ सुबर्ण महालक्ष्मी के रूप मा याक पालकी मा गुंडीचा मंदिर,अड़प मंडप तक जउती हैं अउर भगवान का जल्दी ते जल्दी मंदिर लौटि आवै के धमकी देति हैं। उनका खुस करै के खातिर, देउता उनका आज्ञा माला (सहमति के माला) दइ के मनावति हैं। देवी का गुस्सा मा देखि कै, सेवक लोग गुंडीचा के मुख्य दुआर बंद कइ देति हैं। महालक्ष्मी नाकाचना गेट ते मुख्य मंदिर मा लौटि अउती हैं। एक अनोखी रसम मा, देवी अपने एक सेवक का नंदिघोष रथ के एक हिस्सा का नुकसान पहुँचावय का आदेस देती हैं। यहिके बादि उइ गुंडीचा मंदिर के बाहिर एक इमली के पेड़ के पीछे छिपि जाती हैं। कुछ देर बादि, उइ हेरा गोहरी लेन के नाँव ते जाने जाय वाले एक अलग रस्ता ते चुपचाप अपने घर-मंदिर का भागि जाती हैं। जगन्नाथजी के लाखन भक्त ई अनोखी रसम का आनंद लेति हैं। श्रीमंदिर की एक महत्वपूर्ण रसम के रूप मा हेरा पंचमी के रसम क जिकिर स्कन्द पुरान मा पावा जात है। मंदिर के इतिहास के अनुसार, यो उत्सव महाराजा कपिलेंद्र देब के समय मा सुरू भा रहै। उनके राज ते पहिले, हेरा पंचमी का मंत्रन के पाठ के साथै प्रतीकात्मक रूप मा मनावा जात रहै। जइस कि मादला पांजी मा कहा गा है, राजा कपिलेंद्र देब सोने के बनी महालक्ष्मी के मूरति लइ कै ई परथा का बदल दिहिन अउर ई परब का अउर जादा नीक बना दिहिन।
===चंदन जात्रा===
चंदन जात्रा या "चंदन परब" 42 दिन का समय है जेहिमा रथन के निर्माण काम के सुरूआत होति है। ई समय का आधा-आधा बांटा गा है, जेहिमा हर एक मा 21 दिन होति हैं। पहिले आधे भाग का बाहिर चंदन कहा जात है, जेहिमा प्रमुख देउतन की प्रतिनिधि मूरतिन का रंगीन जुलूस मा बाहिर निकाला जात है अउर हर दिन नरेंद्र तालाब मा एक अनुष्ठानिक नाव के सवारी कराई जाति है। ई देउतन मा मदन मोहन (जगन्नाथ), राम-कृष्ण, लक्ष्मी, सरस्वती अउर पंच पांडव - पाँच मुख्य शिव मंदिरन के प्रमुख देउता सामिल होति हैं। बाद वाला हिस्सा, जेहिका भीतर चंदन कहा जात है, वहिमा कई अइसी रसमैं होती हैं जिनका जनता के खातिर नहीं खवाला जात। रथन का निर्माण अच्छय तृतीया का, वैशाख के सुक्ल पच्छ के तिसरे दिन, अनुष्ठानिक अगिन पूजा के साथै सुरू होत है। यो पुरी के राजा के महल के सामने अउर पुरी मंदिर के मुख्य कार्यालय की उल्टी दिसा मा होत है। बादि मा देउतन का तालाब के बीच एकु छोटे मंदिर मा पानी, चंदन के लेप, इत्तर अउर फूलन ते भरे पत्थर के टब मा अनुष्ठानिक असनान करावा जात है।
ई चंदन परब के समाप्ती सनान जात्रा या "असनान परब" मा होत है जउन जेठ महीना के पूरनमासी के दिन होत है। जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा का 108 घड़ा पानी ते अन्हवावा जात है अउर फिर उइ लगभग दुई हफ्ता तक प्रतीकात्मक अउर अनुष्ठानिक स्वास्थ्य-लाभ (बीमारी ते उबरै के समय) मा रहति हैं। उनका जनता के दरसन ते रोक दीन जात है। खाली तीन खास पट्ट चित्र, कलफ ते कड़े कीन गै कपड़ा पर प्राकृतिक रंगन ते बनी पारंपरिक ओड़िया चित्रकारी, जेहिका अणसर पट्टी कहा जात है, बाँस के परदा पर टांगि दीन जाति हैं जउन उनका जनता के नजर ते छिपउती हैं। ई समय मा, तीनों देउतन का उनकी बीमारी ठीक करै के खातिर खाली जड़ि, पत्ता, बेरि अउर फल दीन जात है। यह रसम जगन्नाथ पंथ के जनम अउर बिकास मा मजबूत आदिवासी तत्वन के याद दिलावत है। सुरुवाती आदिवासी उपासक बिस्वाबसु, जउन सिकारिन के सरदार रहैं, उनकी बिटिया ललिता अउर ब्राह्मण पुजारी बिद्यापति के संतान दइतापति या दइता के नाँव ते जाने जाति हैं। उनके लगे बीमारी ते उबरै के समय अउर रथ जात्रा या रथ परब के पूरे समय प्रभुजी के सेवा करै का विसेस अधिकार होत है।
===सुना बेश===
जगन्नाथ के सुना बेश-
तीनों देउतन के रथ गुंडीचा मंदिर ते मुख्य मंदिर लौटि आवै के बादि, उनका सोने के गहना पहिराए जाति है अउर रथन पर उनकी पूजा कीन जाति है। ई उत्सव का सुना बेश कहा जात है। परंपरा बतावति है कि या प्रथा सबते पहिले राजा कपिलेंद्र देव द्वारा 1460 मा सुरू कीन गै रहै, जब उइ जुद्ध ते जीति कै लउटै के बादि जगन्नाथ का सोना दान कीन्हेनि रहैं। तीनों देउतन का लगभग 208 किलो वजन के सोने के गहनन ते सजावा जात है। 2014 मा 9 जुलाई का भे ई रसम का लगभग नौ लाख भक्तन देखिन रहैं।
2015 मा रथ-यात्रा के मौका पर, 19 साल बादि रथन पर नए रूप (नबकलेबर) मा देउतन के याक झलक पावै के खातिर लाखन भक्त तटीय सहर पुरी मा भीड़ लगा दिहिन। यो ओडिशा मा अब तक का सबते बड़ा धार्मिक सम्मेलन रहै।
==2025 के रथ-यात्रा==
2025 के रथ-यात्रा मा डिजिटल तकनीक के जुड़ाव के साथै भक्ति मा एकु बड़ा बदलाव देखा परा। लाखन भक्तन के पारंपरिक रूप ते इकट्ठा होए के साथ-साथ, बड़ी संख्या मा मनई लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए वर्चुअली जुड़े, जउन धार्मिक पालन मा याक डिजिटल क्रांति के प्रवेश का देखावत है। 2025 की जात्रा केरी मुख्य बातन मा स्थानीय प्रसासन द्वारा लागू कीन गै भीड़ प्रबंधन के बेहतर रणनीति, ग्लोबल लाइव स्ट्रीमिंग (जेहते जादा लोग सामिल होइ पाइन), अउर पर्यावरण स्थिरता पर ध्यान सामिल रहै। बायोडिग्रेडेबल (आसानी ते सड़ै वाले) चढ़ावा का उपयोग अउर सिंगल-यूज प्लास्टिक का कम करै जइसि पर्यावरण के अनुकूल पहल सुरू कीन गै, जेहिते ई परब पहिले के सालन के तुलना मा पर्यावरण के प्रति जादा जिम्मेदार बना।
==रथ यात्रा की तारीखैं==
{| class="wikitable sortable mw-collapsible citiwise-data" style="text-align:center; font-size:85%; width:500px; margin:0px 0px 0em 0em;"
! colspan="3" | [[पुरी]] के [[रथ यात्रा]]
|-
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([[आषाढ़]] [[पक्ष|शुक्ल]] [[द्वितीया|द्वितीया]])
! scope="col" | आखिरी दिन
(रथयात्रा क नौवां दिन)
|-
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([[नवकलेवर 2015|[नवकलेवर, 2015]])
| 18 जुलाई
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|-
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|-
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|-
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|-
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|-
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|-
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|-
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([[नवकलेवर|[नवकलेवर, 2034]])
| 17 जुलाई
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== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
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/* पर्यटन अउर धार्मिक महत्त्व */
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
| image = Rath Yatra Puri 07-11027.jpg
| caption = देवताओं के तीन रथ और पृष्ठभूमि में मंदिर, पुरी
| type = हिंदू
| longtype = [[धार्मिक]]
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| significance = मोक्ष की ओर आत्मा की यात्रा का प्रतिनिधित्व करता है
| begins = [[आषाढ़]] शुक्ल द्वितीया
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| date2025 = 16 जुलाई, गुरूवार<ref>[https://www.drikpanchang.com/festivals/ratha-yatra/jagannatha-rathayatra-date-time.html?year=2025 Ratha Yatra 2025]</ref>
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}}
पुरी के रथ-यात्रा, जेहिका रथ जात्रौ (ओड़िया: ରଥଯାତ୍ରା, ({{IPAc-en|ˈ|r|ʌ|θ|ə|_|ˈ|j|ɑː|t|r|ɑː}}, {{IPA|or|ɾɔt̪ʰɔ dʒat̪ɾa}}) कहा जात है, आषाढ़ (जून-जुलाई) के सुक्ल पच्छ मा दूज के दिन हर साल निकारी जाति है। यहिका सबते पुरान अउर सबते बड़े हिंदू रथपर्व के रूप मा माना जात है।<ref name=":1">{{Cite book |last=Lochtefeld |first=James G. |url=https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |title=The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: N-Z |date=2002 |publisher=Rosen |isbn=978-0-8239-3180-4 |pages=567 |language=en |access-date=23 April 2023 |archive-date=15 April 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230415134917/https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite news |date=2019-07-04 |title=Rath Yatra: The legend behind world's largest chariot festival |language=en-GB |work=BBC News |url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |access-date=2023-06-15 |archive-date=17 February 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230217152645/https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |url-status=live }}</ref>
भगवान [[जगन्नाथ]] ते जुड़ी या रथ-यात्रा भारत के [[ओडिशा]] राज्य के पुरी सहर मा आयोजित कीन जाति है। ई परब मा तमाम भक्त, तीनों देउतन ([[जगन्नाथ]], उनके भइया [[बलभद्र]] अउर बहिन [[सुभद्रा]]) का तीन बड़े-बड़े लकड़ी के रथन (नंदिघोष, तालध्वज अऊर दर्पदलन) मा बड़ दाँड पर [[गुंडीचा मंदिर]] तक खींचति हैं, जहाँ उइ एकु हफ्ता तक रहति हैं औ फिर जगन्नाथ मंदिर का लौटि आवति हैं। ई वापसी जात्रा का बहुड़ा यात्रा कहा जात है।<ref name=":1" /><ref>{{cite web|url=https://www.readwhere.com/read/c/72800774|title=পুরীধাম ও জগন্নাথদেবের ব্রহ্মরূপ বৃত্তান্ত|language=bn|date=28 June 2023|access-date=28 June 2023|website=dainikstatesmannews.com|publisher=[[Dainik Statesman]] (The Statesman Group)|location=Kolkata|first=Yogabrata|last=Chakraborty|trans-title=Puridham and the tale of lord Jagannath's legendary 'Bramharup'|archive-url=https://web.archive.org/web/20230628103603/https://www.readwhere.com/read/c/72800774|archive-date=28 June 2023|url-status=bot: unknown}}</ref> गुंडीचा मंदिर ते वापस आवत समय, तीनों देउता मौसी माँ मंदिर के लगे कुछ देर के खातिर रुकति हैं अउर हुवाँ पोड़ा पीठा का भोग लगावा जात है, जउन एक खास तरह का पुआ आय, जेहिका प्रभुजी का सबते मनपसंद माना जात है। सात दिन रहै के बादि, तीनों देउता अपने अस्थान पर लौटि आवति हैं। <ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==इतिहास==
रथ-यात्रा का वर्णन ब्रह्म पुरान, पद्म पुरान, स्कन्द पुरान, अउर कपिल संहिता मा पावा जात है। 13वीं सदी ते यूरोपीय यात्रिन के द्वारा ई पर्व का उल्लेख कीन गा है, जेहिमा सबते प्रमुख अउर सजीव वर्णन 17वीं सदी मा दर्ज कीन गे हैं।
==रथ==
जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा के तीनों रथ हर साल फस्सी, धौसा जइसि खास बिरवन के लकड़ी ते बनाए जाति हैं। ई रथ परंपरा के अनुसार पूर्व-रियासत दसपल्ला ते आए बढ़ई लोगन के याक खास टोली के द्वारा बनाए जाति हैं, जिनका यो काम करै का पुश्तैनी अधिकार अउर विसेषाधिकार प्राप्त है। लकड़ी के लट्ठन का पारंपरिक रूप ते महानदी मा बेड़ा बनाय कै बहावा जात है। इनका पुरी के लगे इकट्ठा कीन जात है अउर फिर सड़क के रस्ता ते हुवाँ पहुँचावा जात है।
सदिन ते तय अउर मानी जा रही एक खास बिधी के अनुसार सजाए गे तीनिउ रथ बड़ दाँड पर खड़े कीन जाति हैं। मंदिर के पूरबी दुआर के लगे चौड़े रस्ता पर रथन् का एकु लाइन मा लगावा जात है, जेहिका सिंहदुआरौ कहा जात है।
सब रथन के चारिहुँ ओर नौ पार्श्व देउता होति हैं, जिनका रथ के बगल मा अलग-अलग देउतन का दरसावय वाली रंगीन लकड़ी के मूरति के माध्यम ते दरसावा जात है। हर रथ मा एक सारथी अउर चारि घोड़ा होति हैं।
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
!बलभद्र
!सुभद्रा
|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|[[File:Nandighosha Ratho.png|thumb|Nandighosha Ratho]][[File:Chariot Nandighosha of Lord Jagannath.jpg|thumb|Chariot Nandighosha of Lord Jagannath]][[File:Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha.jpg|thumb|Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha]]
|[[File:Taladhwaja Ratho.png|thumb|Taladhwaja Ratho]][[फाइल:Chariot Taladhwaja of Lord Balabhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|[[File:Debadalana Ratho.png|thumb|Debadalana Ratho]][[फाइल:Chariot Devidalana of Goddess Subhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
|42' 3"
|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
|33' x 33'
|31'6" x 31'6"
|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|द्वारपाल
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# छत्रभंगरावण (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
# शुलिदुर्गा
# वाराही
# श्यामाकाली
# मंगला
# विमला
|}<ref>[https://www.jagannathdham.in/rath-yatra-festival/details-of-rath-yatra-chariots/]</ref>
==पर्यटन अउर धार्मिक महत्त्व==
{{wide image|Bahuda Jatra, Nabakalebara 2015.jpg|1150px|ଡାହାଣରୁ ଶ୍ରୀ ଜଗନ୍ନାଥଙ୍କ ନନ୍ଦିଘୋଷ ରଥ, ମା [[ସୁଭଦ୍ରା]]ଙ୍କ ଦେବଦଳନ ରଥ ଓ ଶ୍ରୀ [[ବଳଭଦ୍ର]]ଙ୍କ ତାଳଧ୍ୱଜ ବାହୁଡ଼ାଯାତ୍ରା, ନବକଳେବର ୨୦୧୫ ବେଳେ ଗୁଣ୍ଡିଚା ମନ୍ଦୀର ସମ୍ମୁଖରେ ଛିଡ଼ା ହୋଇଛନ୍ତି ।}}
ई अस्थान का धार्मिक महत्व जगन्नाथजी का मंदिर है। सास्त्रन औ पुराननौ मा रथ-यात्रा के महत्ता स्वीकार कीन गै है। स्कन्द पुरान मा कहा गा है कि रथ-यात्रा मा जउन मनई श्री जगन्नाथ जी के नावँ का कीर्तन करत गुंडीचा नगर तक जात है वो पुनर्जन्म ते मुक्त होइ जात है। जउन मनई श्री जगन्नाथ जी का दरसन करत, परनाम करत, रस्ता के धूरि-कीचड़ मा ल्वाटत जाति हैं उइ सीधे भगवान श्री विष्णु के उत्तम धाम का जाति हैं। जउन मनई गुंडिचा मंडप मा रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम औ सुभद्रा देवी के दरसन दक्खिन दिसा का आवत भए करति हैं, उइ मोच्छ का प्राप्त होति हैं। रथयात्रा एक अइसन परब है जेहमा भगवान जगन्नाथ चलि कै जनता के बीच आवति हैं अउर उनके सुख-दुख मा सहभागी होति हैं। 'सब मनिसा मोर परजा' (सब मनई हमार परजा हैं), ई उनके उद्गार आहीं। भगवान जगन्नाथ तो पुरुषोत्तम हैं। उनमा श्रीराम, श्रीकृष्ण अद्वैत ब्रह्म रूप समाहित है। उनके अनेक नावँ हैं, उइ पतित पावन हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/religion/festivals/photo/bastar-chhattisgarh-unique-rath-yatra-is-celebrated-tupki-salami-tlifd-1289225-2021-07-12|title=यहां निकाली जाती है अनोखी जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी से दी जाती है सलामी|website=आज तक|language=hi|access-date=2021-07-13}}</ref>
==यात्रा का स्वरूप==
===सेवा-समर्पण===
जगन्नाथ मंदिर मा कई तरह के सेवक होति हैं जउन रथ पर अपनि सेवा देति हैं।
*सुआरा
*महासुआरा
*डाहुक: रथ डाहुक बोलि (ओड़िया: ଡାହୁକ ବୋଲି, जिनका "डाहुक गीतौ" (ଡାହୁକ ଗୀତ) कहा जात है) काव्यात्मक पाठ आहीं। रथ-यात्रा प्रजनन अउर जीवन चक्र के याक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति आय, डाहुक द्वारा गाए जाय वाली ई "बोलि" मा अश्लील/फूहड़ गीत सामिल होति हैं। यहौ माना जात है कि जब तक डाहुक बोलि नहीं गावा जात है, तब तक 'रथ नहीं चलत है। ई गीत बिना कउनो रोक-टोक के खुलेआम गाए जाति हैं। डाहुक परब के समय रथ के गति का नियंत्रित कीन जात है।
*दइता पति
*पुस्पालक
*बनाटी खेलाड़ी: बनाटी याक बहुत पुरान कला आय, जेहमा एकु मनई रस्सी के छोर पर बंधे आगि लगे गोला का घुमावत है। हर साल रथ-यात्रा मा भक्त भगवान जगन्नाथ का खुस करै के खातिर "बनाटी" करति हैं। बनाटी मा चाकू अउर आगि के गोला, यात्रा मा तब रंग भरि देति हैं जब वह अपनी मंजिल तक पहुँचत है।
===हेरा पंचमी===
हेरा पंचमी पुरी के जगन्नाथ मंदिर मा रथयात्रा के दौरान मनावा जाय वाला एक अनुष्ठान आय। यहिका देवी लक्ष्मी के रसम के रूप मा जाना जात है। रथ-यात्रा ते पँचए दिन, माने आषाढ़ के सुक्ल पच्छ का पाँचवाँ दिन हेरा पंचमी के रूप मा जाना जात है। रथ-यात्रा मा, भगवान जगन्नाथ अपनी अर्धांगिनी महालक्ष्मी का पीछे छोड़ि कै, अपनि भइया बलभद्र अउर बहिन सुभद्रा के साथै अपन दिव्य हथियार सुदर्शन का लइ कै एक दिव्य यात्रा पर निकरति हैं। देवी, देउता के खातिर आपन गुस्सा देखाउती हैं। उइ सुबर्ण महालक्ष्मी के रूप मा याक पालकी मा गुंडीचा मंदिर,अड़प मंडप तक जउती हैं अउर भगवान का जल्दी ते जल्दी मंदिर लौटि आवै के धमकी देति हैं। उनका खुस करै के खातिर, देउता उनका आज्ञा माला (सहमति के माला) दइ के मनावति हैं। देवी का गुस्सा मा देखि कै, सेवक लोग गुंडीचा के मुख्य दुआर बंद कइ देति हैं। महालक्ष्मी नाकाचना गेट ते मुख्य मंदिर मा लौटि अउती हैं। एक अनोखी रसम मा, देवी अपने एक सेवक का नंदिघोष रथ के एक हिस्सा का नुकसान पहुँचावय का आदेस देती हैं। यहिके बादि उइ गुंडीचा मंदिर के बाहिर एक इमली के पेड़ के पीछे छिपि जाती हैं। कुछ देर बादि, उइ हेरा गोहरी लेन के नाँव ते जाने जाय वाले एक अलग रस्ता ते चुपचाप अपने घर-मंदिर का भागि जाती हैं। जगन्नाथजी के लाखन भक्त ई अनोखी रसम का आनंद लेति हैं। श्रीमंदिर की एक महत्वपूर्ण रसम के रूप मा हेरा पंचमी के रसम क जिकिर स्कन्द पुरान मा पावा जात है। मंदिर के इतिहास के अनुसार, यो उत्सव महाराजा कपिलेंद्र देब के समय मा सुरू भा रहै। उनके राज ते पहिले, हेरा पंचमी का मंत्रन के पाठ के साथै प्रतीकात्मक रूप मा मनावा जात रहै। जइस कि मादला पांजी मा कहा गा है, राजा कपिलेंद्र देब सोने के बनी महालक्ष्मी के मूरति लइ कै ई परथा का बदल दिहिन अउर ई परब का अउर जादा नीक बना दिहिन।
===चंदन जात्रा===
चंदन जात्रा या "चंदन परब" 42 दिन का समय है जेहिमा रथन के निर्माण काम के सुरूआत होति है। ई समय का आधा-आधा बांटा गा है, जेहिमा हर एक मा 21 दिन होति हैं। पहिले आधे भाग का बाहिर चंदन कहा जात है, जेहिमा प्रमुख देउतन की प्रतिनिधि मूरतिन का रंगीन जुलूस मा बाहिर निकाला जात है अउर हर दिन नरेंद्र तालाब मा एक अनुष्ठानिक नाव के सवारी कराई जाति है। ई देउतन मा मदन मोहन (जगन्नाथ), राम-कृष्ण, लक्ष्मी, सरस्वती अउर पंच पांडव - पाँच मुख्य शिव मंदिरन के प्रमुख देउता सामिल होति हैं। बाद वाला हिस्सा, जेहिका भीतर चंदन कहा जात है, वहिमा कई अइसी रसमैं होती हैं जिनका जनता के खातिर नहीं खवाला जात। रथन का निर्माण अच्छय तृतीया का, वैशाख के सुक्ल पच्छ के तिसरे दिन, अनुष्ठानिक अगिन पूजा के साथै सुरू होत है। यो पुरी के राजा के महल के सामने अउर पुरी मंदिर के मुख्य कार्यालय की उल्टी दिसा मा होत है। बादि मा देउतन का तालाब के बीच एकु छोटे मंदिर मा पानी, चंदन के लेप, इत्तर अउर फूलन ते भरे पत्थर के टब मा अनुष्ठानिक असनान करावा जात है।
ई चंदन परब के समाप्ती सनान जात्रा या "असनान परब" मा होत है जउन जेठ महीना के पूरनमासी के दिन होत है। जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा का 108 घड़ा पानी ते अन्हवावा जात है अउर फिर उइ लगभग दुई हफ्ता तक प्रतीकात्मक अउर अनुष्ठानिक स्वास्थ्य-लाभ (बीमारी ते उबरै के समय) मा रहति हैं। उनका जनता के दरसन ते रोक दीन जात है। खाली तीन खास पट्ट चित्र, कलफ ते कड़े कीन गै कपड़ा पर प्राकृतिक रंगन ते बनी पारंपरिक ओड़िया चित्रकारी, जेहिका अणसर पट्टी कहा जात है, बाँस के परदा पर टांगि दीन जाति हैं जउन उनका जनता के नजर ते छिपउती हैं। ई समय मा, तीनों देउतन का उनकी बीमारी ठीक करै के खातिर खाली जड़ि, पत्ता, बेरि अउर फल दीन जात है। यह रसम जगन्नाथ पंथ के जनम अउर बिकास मा मजबूत आदिवासी तत्वन के याद दिलावत है। सुरुवाती आदिवासी उपासक बिस्वाबसु, जउन सिकारिन के सरदार रहैं, उनकी बिटिया ललिता अउर ब्राह्मण पुजारी बिद्यापति के संतान दइतापति या दइता के नाँव ते जाने जाति हैं। उनके लगे बीमारी ते उबरै के समय अउर रथ जात्रा या रथ परब के पूरे समय प्रभुजी के सेवा करै का विसेस अधिकार होत है।
===सुना बेश===
जगन्नाथ के सुना बेश-
तीनों देउतन के रथ गुंडीचा मंदिर ते मुख्य मंदिर लौटि आवै के बादि, उनका सोने के गहना पहिराए जाति है अउर रथन पर उनकी पूजा कीन जाति है। ई उत्सव का सुना बेश कहा जात है। परंपरा बतावति है कि या प्रथा सबते पहिले राजा कपिलेंद्र देव द्वारा 1460 मा सुरू कीन गै रहै, जब उइ जुद्ध ते जीति कै लउटै के बादि जगन्नाथ का सोना दान कीन्हेनि रहैं। तीनों देउतन का लगभग 208 किलो वजन के सोने के गहनन ते सजावा जात है। 2014 मा 9 जुलाई का भे ई रसम का लगभग नौ लाख भक्तन देखिन रहैं।
2015 मा रथ-यात्रा के मौका पर, 19 साल बादि रथन पर नए रूप (नबकलेबर) मा देउतन के याक झलक पावै के खातिर लाखन भक्त तटीय सहर पुरी मा भीड़ लगा दिहिन। यो ओडिशा मा अब तक का सबते बड़ा धार्मिक सम्मेलन रहै।
==2025 के रथ-यात्रा==
2025 के रथ-यात्रा मा डिजिटल तकनीक के जुड़ाव के साथै भक्ति मा एकु बड़ा बदलाव देखा परा। लाखन भक्तन के पारंपरिक रूप ते इकट्ठा होए के साथ-साथ, बड़ी संख्या मा मनई लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए वर्चुअली जुड़े, जउन धार्मिक पालन मा याक डिजिटल क्रांति के प्रवेश का देखावत है। 2025 की जात्रा केरी मुख्य बातन मा स्थानीय प्रसासन द्वारा लागू कीन गै भीड़ प्रबंधन के बेहतर रणनीति, ग्लोबल लाइव स्ट्रीमिंग (जेहते जादा लोग सामिल होइ पाइन), अउर पर्यावरण स्थिरता पर ध्यान सामिल रहै। बायोडिग्रेडेबल (आसानी ते सड़ै वाले) चढ़ावा का उपयोग अउर सिंगल-यूज प्लास्टिक का कम करै जइसि पर्यावरण के अनुकूल पहल सुरू कीन गै, जेहिते ई परब पहिले के सालन के तुलना मा पर्यावरण के प्रति जादा जिम्मेदार बना।
==रथ यात्रा की तारीखैं==
{| class="wikitable sortable mw-collapsible citiwise-data" style="text-align:center; font-size:85%; width:500px; margin:0px 0px 0em 0em;"
! colspan="3" | [[पुरी]] के [[रथ यात्रा]]
|-
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! scope="col" | सुरुआत
([[आषाढ़]] [[पक्ष|शुक्ल]] [[द्वितीया|द्वितीया]])
! scope="col" | आखिरी दिन
(रथयात्रा क नौवां दिन)
|-
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([[नवकलेवर 2015|[नवकलेवर, 2015]])
| 18 जुलाई
| 26 जुलाई
|-
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|-
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|-
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|-
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|-
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|-
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|-
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| '''24 जुलाई'''
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|-
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|-
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|-
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| 22 जुलाई
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|-
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([[नवकलेवर|[नवकलेवर, 2034]])
| 17 जुलाई
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== सन्दर्भ ==
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/* पर्यटन अउर धार्मिक महत्त्व */
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{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
| image = Rath Yatra Puri 07-11027.jpg
| caption = देवताओं के तीन रथ और पृष्ठभूमि में मंदिर, पुरी
| type = हिंदू
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| significance = मोक्ष की ओर आत्मा की यात्रा का प्रतिनिधित्व करता है
| begins = [[आषाढ़]] शुक्ल द्वितीया
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}}
पुरी के रथ-यात्रा, जेहिका रथ जात्रौ (ओड़िया: ରଥଯାତ୍ରା, ({{IPAc-en|ˈ|r|ʌ|θ|ə|_|ˈ|j|ɑː|t|r|ɑː}}, {{IPA|or|ɾɔt̪ʰɔ dʒat̪ɾa}}) कहा जात है, आषाढ़ (जून-जुलाई) के सुक्ल पच्छ मा दूज के दिन हर साल निकारी जाति है। यहिका सबते पुरान अउर सबते बड़े हिंदू रथपर्व के रूप मा माना जात है।<ref name=":1">{{Cite book |last=Lochtefeld |first=James G. |url=https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |title=The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: N-Z |date=2002 |publisher=Rosen |isbn=978-0-8239-3180-4 |pages=567 |language=en |access-date=23 April 2023 |archive-date=15 April 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230415134917/https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite news |date=2019-07-04 |title=Rath Yatra: The legend behind world's largest chariot festival |language=en-GB |work=BBC News |url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |access-date=2023-06-15 |archive-date=17 February 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230217152645/https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |url-status=live }}</ref>
भगवान [[जगन्नाथ]] ते जुड़ी या रथ-यात्रा भारत के [[ओडिशा]] राज्य के पुरी सहर मा आयोजित कीन जाति है। ई परब मा तमाम भक्त, तीनों देउतन ([[जगन्नाथ]], उनके भइया [[बलभद्र]] अउर बहिन [[सुभद्रा]]) का तीन बड़े-बड़े लकड़ी के रथन (नंदिघोष, तालध्वज अऊर दर्पदलन) मा बड़ दाँड पर [[गुंडीचा मंदिर]] तक खींचति हैं, जहाँ उइ एकु हफ्ता तक रहति हैं औ फिर जगन्नाथ मंदिर का लौटि आवति हैं। ई वापसी जात्रा का बहुड़ा यात्रा कहा जात है।<ref name=":1" /><ref>{{cite web|url=https://www.readwhere.com/read/c/72800774|title=পুরীধাম ও জগন্নাথদেবের ব্রহ্মরূপ বৃত্তান্ত|language=bn|date=28 June 2023|access-date=28 June 2023|website=dainikstatesmannews.com|publisher=[[Dainik Statesman]] (The Statesman Group)|location=Kolkata|first=Yogabrata|last=Chakraborty|trans-title=Puridham and the tale of lord Jagannath's legendary 'Bramharup'|archive-url=https://web.archive.org/web/20230628103603/https://www.readwhere.com/read/c/72800774|archive-date=28 June 2023|url-status=bot: unknown}}</ref> गुंडीचा मंदिर ते वापस आवत समय, तीनों देउता मौसी माँ मंदिर के लगे कुछ देर के खातिर रुकति हैं अउर हुवाँ पोड़ा पीठा का भोग लगावा जात है, जउन एक खास तरह का पुआ आय, जेहिका प्रभुजी का सबते मनपसंद माना जात है। सात दिन रहै के बादि, तीनों देउता अपने अस्थान पर लौटि आवति हैं। <ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==इतिहास==
रथ-यात्रा का वर्णन ब्रह्म पुरान, पद्म पुरान, स्कन्द पुरान, अउर कपिल संहिता मा पावा जात है। 13वीं सदी ते यूरोपीय यात्रिन के द्वारा ई पर्व का उल्लेख कीन गा है, जेहिमा सबते प्रमुख अउर सजीव वर्णन 17वीं सदी मा दर्ज कीन गे हैं।
==रथ==
जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा के तीनों रथ हर साल फस्सी, धौसा जइसि खास बिरवन के लकड़ी ते बनाए जाति हैं। ई रथ परंपरा के अनुसार पूर्व-रियासत दसपल्ला ते आए बढ़ई लोगन के याक खास टोली के द्वारा बनाए जाति हैं, जिनका यो काम करै का पुश्तैनी अधिकार अउर विसेषाधिकार प्राप्त है। लकड़ी के लट्ठन का पारंपरिक रूप ते महानदी मा बेड़ा बनाय कै बहावा जात है। इनका पुरी के लगे इकट्ठा कीन जात है अउर फिर सड़क के रस्ता ते हुवाँ पहुँचावा जात है।
सदिन ते तय अउर मानी जा रही एक खास बिधी के अनुसार सजाए गे तीनिउ रथ बड़ दाँड पर खड़े कीन जाति हैं। मंदिर के पूरबी दुआर के लगे चौड़े रस्ता पर रथन् का एकु लाइन मा लगावा जात है, जेहिका सिंहदुआरौ कहा जात है।
सब रथन के चारिहुँ ओर नौ पार्श्व देउता होति हैं, जिनका रथ के बगल मा अलग-अलग देउतन का दरसावय वाली रंगीन लकड़ी के मूरति के माध्यम ते दरसावा जात है। हर रथ मा एक सारथी अउर चारि घोड़ा होति हैं।
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
!बलभद्र
!सुभद्रा
|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|[[File:Nandighosha Ratho.png|thumb|Nandighosha Ratho]][[File:Chariot Nandighosha of Lord Jagannath.jpg|thumb|Chariot Nandighosha of Lord Jagannath]][[File:Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha.jpg|thumb|Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha]]
|[[File:Taladhwaja Ratho.png|thumb|Taladhwaja Ratho]][[फाइल:Chariot Taladhwaja of Lord Balabhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|[[File:Debadalana Ratho.png|thumb|Debadalana Ratho]][[फाइल:Chariot Devidalana of Goddess Subhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
|42' 3"
|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
|33' x 33'
|31'6" x 31'6"
|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|द्वारपाल
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# छत्रभंगरावण (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
# शुलिदुर्गा
# वाराही
# श्यामाकाली
# मंगला
# विमला
|}<ref>[https://www.jagannathdham.in/rath-yatra-festival/details-of-rath-yatra-chariots/]</ref>
==पर्यटन अउर धार्मिक महत्त्व==
ई अस्थान का धार्मिक महत्व जगन्नाथजी का मंदिर है। सास्त्रन औ पुराननौ मा रथ-यात्रा के महत्ता स्वीकार कीन गै है। स्कन्द पुरान मा कहा गा है कि रथ-यात्रा मा जउन मनई श्री जगन्नाथ जी के नावँ का कीर्तन करत गुंडीचा नगर तक जात है वो पुनर्जन्म ते मुक्त होइ जात है। जउन मनई श्री जगन्नाथ जी का दरसन करत, परनाम करत, रस्ता के धूरि-कीचड़ मा ल्वाटत जाति हैं उइ सीधे भगवान श्री विष्णु के उत्तम धाम का जाति हैं। जउन मनई गुंडिचा मंडप मा रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम औ सुभद्रा देवी के दरसन दक्खिन दिसा का आवत भए करति हैं, उइ मोच्छ का प्राप्त होति हैं। रथयात्रा एक अइसन परब है जेहमा भगवान जगन्नाथ चलि कै जनता के बीच आवति हैं अउर उनके सुख-दुख मा सहभागी होति हैं। 'सब मनिसा मोर परजा' (सब मनई हमार परजा हैं), ई उनके उद्गार आहीं। भगवान जगन्नाथ तो पुरुषोत्तम हैं। उनमा श्रीराम, श्रीकृष्ण अद्वैत ब्रह्म रूप समाहित है। उनके अनेक नावँ हैं, उइ पतित पावन हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/religion/festivals/photo/bastar-chhattisgarh-unique-rath-yatra-is-celebrated-tupki-salami-tlifd-1289225-2021-07-12|title=यहां निकाली जाती है अनोखी जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी से दी जाती है सलामी|website=आज तक|language=hi|access-date=2021-07-13}}</ref>
==यात्रा का स्वरूप==
===सेवा-समर्पण===
जगन्नाथ मंदिर मा कई तरह के सेवक होति हैं जउन रथ पर अपनि सेवा देति हैं।
*सुआरा
*महासुआरा
*डाहुक: रथ डाहुक बोलि (ओड़िया: ଡାହୁକ ବୋଲି, जिनका "डाहुक गीतौ" (ଡାହୁକ ଗୀତ) कहा जात है) काव्यात्मक पाठ आहीं। रथ-यात्रा प्रजनन अउर जीवन चक्र के याक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति आय, डाहुक द्वारा गाए जाय वाली ई "बोलि" मा अश्लील/फूहड़ गीत सामिल होति हैं। यहौ माना जात है कि जब तक डाहुक बोलि नहीं गावा जात है, तब तक 'रथ नहीं चलत है। ई गीत बिना कउनो रोक-टोक के खुलेआम गाए जाति हैं। डाहुक परब के समय रथ के गति का नियंत्रित कीन जात है।
*दइता पति
*पुस्पालक
*बनाटी खेलाड़ी: बनाटी याक बहुत पुरान कला आय, जेहमा एकु मनई रस्सी के छोर पर बंधे आगि लगे गोला का घुमावत है। हर साल रथ-यात्रा मा भक्त भगवान जगन्नाथ का खुस करै के खातिर "बनाटी" करति हैं। बनाटी मा चाकू अउर आगि के गोला, यात्रा मा तब रंग भरि देति हैं जब वह अपनी मंजिल तक पहुँचत है।
===हेरा पंचमी===
हेरा पंचमी पुरी के जगन्नाथ मंदिर मा रथयात्रा के दौरान मनावा जाय वाला एक अनुष्ठान आय। यहिका देवी लक्ष्मी के रसम के रूप मा जाना जात है। रथ-यात्रा ते पँचए दिन, माने आषाढ़ के सुक्ल पच्छ का पाँचवाँ दिन हेरा पंचमी के रूप मा जाना जात है। रथ-यात्रा मा, भगवान जगन्नाथ अपनी अर्धांगिनी महालक्ष्मी का पीछे छोड़ि कै, अपनि भइया बलभद्र अउर बहिन सुभद्रा के साथै अपन दिव्य हथियार सुदर्शन का लइ कै एक दिव्य यात्रा पर निकरति हैं। देवी, देउता के खातिर आपन गुस्सा देखाउती हैं। उइ सुबर्ण महालक्ष्मी के रूप मा याक पालकी मा गुंडीचा मंदिर,अड़प मंडप तक जउती हैं अउर भगवान का जल्दी ते जल्दी मंदिर लौटि आवै के धमकी देति हैं। उनका खुस करै के खातिर, देउता उनका आज्ञा माला (सहमति के माला) दइ के मनावति हैं। देवी का गुस्सा मा देखि कै, सेवक लोग गुंडीचा के मुख्य दुआर बंद कइ देति हैं। महालक्ष्मी नाकाचना गेट ते मुख्य मंदिर मा लौटि अउती हैं। एक अनोखी रसम मा, देवी अपने एक सेवक का नंदिघोष रथ के एक हिस्सा का नुकसान पहुँचावय का आदेस देती हैं। यहिके बादि उइ गुंडीचा मंदिर के बाहिर एक इमली के पेड़ के पीछे छिपि जाती हैं। कुछ देर बादि, उइ हेरा गोहरी लेन के नाँव ते जाने जाय वाले एक अलग रस्ता ते चुपचाप अपने घर-मंदिर का भागि जाती हैं। जगन्नाथजी के लाखन भक्त ई अनोखी रसम का आनंद लेति हैं। श्रीमंदिर की एक महत्वपूर्ण रसम के रूप मा हेरा पंचमी के रसम क जिकिर स्कन्द पुरान मा पावा जात है। मंदिर के इतिहास के अनुसार, यो उत्सव महाराजा कपिलेंद्र देब के समय मा सुरू भा रहै। उनके राज ते पहिले, हेरा पंचमी का मंत्रन के पाठ के साथै प्रतीकात्मक रूप मा मनावा जात रहै। जइस कि मादला पांजी मा कहा गा है, राजा कपिलेंद्र देब सोने के बनी महालक्ष्मी के मूरति लइ कै ई परथा का बदल दिहिन अउर ई परब का अउर जादा नीक बना दिहिन।
===चंदन जात्रा===
चंदन जात्रा या "चंदन परब" 42 दिन का समय है जेहिमा रथन के निर्माण काम के सुरूआत होति है। ई समय का आधा-आधा बांटा गा है, जेहिमा हर एक मा 21 दिन होति हैं। पहिले आधे भाग का बाहिर चंदन कहा जात है, जेहिमा प्रमुख देउतन की प्रतिनिधि मूरतिन का रंगीन जुलूस मा बाहिर निकाला जात है अउर हर दिन नरेंद्र तालाब मा एक अनुष्ठानिक नाव के सवारी कराई जाति है। ई देउतन मा मदन मोहन (जगन्नाथ), राम-कृष्ण, लक्ष्मी, सरस्वती अउर पंच पांडव - पाँच मुख्य शिव मंदिरन के प्रमुख देउता सामिल होति हैं। बाद वाला हिस्सा, जेहिका भीतर चंदन कहा जात है, वहिमा कई अइसी रसमैं होती हैं जिनका जनता के खातिर नहीं खवाला जात। रथन का निर्माण अच्छय तृतीया का, वैशाख के सुक्ल पच्छ के तिसरे दिन, अनुष्ठानिक अगिन पूजा के साथै सुरू होत है। यो पुरी के राजा के महल के सामने अउर पुरी मंदिर के मुख्य कार्यालय की उल्टी दिसा मा होत है। बादि मा देउतन का तालाब के बीच एकु छोटे मंदिर मा पानी, चंदन के लेप, इत्तर अउर फूलन ते भरे पत्थर के टब मा अनुष्ठानिक असनान करावा जात है।
ई चंदन परब के समाप्ती सनान जात्रा या "असनान परब" मा होत है जउन जेठ महीना के पूरनमासी के दिन होत है। जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा का 108 घड़ा पानी ते अन्हवावा जात है अउर फिर उइ लगभग दुई हफ्ता तक प्रतीकात्मक अउर अनुष्ठानिक स्वास्थ्य-लाभ (बीमारी ते उबरै के समय) मा रहति हैं। उनका जनता के दरसन ते रोक दीन जात है। खाली तीन खास पट्ट चित्र, कलफ ते कड़े कीन गै कपड़ा पर प्राकृतिक रंगन ते बनी पारंपरिक ओड़िया चित्रकारी, जेहिका अणसर पट्टी कहा जात है, बाँस के परदा पर टांगि दीन जाति हैं जउन उनका जनता के नजर ते छिपउती हैं। ई समय मा, तीनों देउतन का उनकी बीमारी ठीक करै के खातिर खाली जड़ि, पत्ता, बेरि अउर फल दीन जात है। यह रसम जगन्नाथ पंथ के जनम अउर बिकास मा मजबूत आदिवासी तत्वन के याद दिलावत है। सुरुवाती आदिवासी उपासक बिस्वाबसु, जउन सिकारिन के सरदार रहैं, उनकी बिटिया ललिता अउर ब्राह्मण पुजारी बिद्यापति के संतान दइतापति या दइता के नाँव ते जाने जाति हैं। उनके लगे बीमारी ते उबरै के समय अउर रथ जात्रा या रथ परब के पूरे समय प्रभुजी के सेवा करै का विसेस अधिकार होत है।
===सुना बेश===
जगन्नाथ के सुना बेश-
तीनों देउतन के रथ गुंडीचा मंदिर ते मुख्य मंदिर लौटि आवै के बादि, उनका सोने के गहना पहिराए जाति है अउर रथन पर उनकी पूजा कीन जाति है। ई उत्सव का सुना बेश कहा जात है। परंपरा बतावति है कि या प्रथा सबते पहिले राजा कपिलेंद्र देव द्वारा 1460 मा सुरू कीन गै रहै, जब उइ जुद्ध ते जीति कै लउटै के बादि जगन्नाथ का सोना दान कीन्हेनि रहैं। तीनों देउतन का लगभग 208 किलो वजन के सोने के गहनन ते सजावा जात है। 2014 मा 9 जुलाई का भे ई रसम का लगभग नौ लाख भक्तन देखिन रहैं।
2015 मा रथ-यात्रा के मौका पर, 19 साल बादि रथन पर नए रूप (नबकलेबर) मा देउतन के याक झलक पावै के खातिर लाखन भक्त तटीय सहर पुरी मा भीड़ लगा दिहिन। यो ओडिशा मा अब तक का सबते बड़ा धार्मिक सम्मेलन रहै।
==2025 के रथ-यात्रा==
2025 के रथ-यात्रा मा डिजिटल तकनीक के जुड़ाव के साथै भक्ति मा एकु बड़ा बदलाव देखा परा। लाखन भक्तन के पारंपरिक रूप ते इकट्ठा होए के साथ-साथ, बड़ी संख्या मा मनई लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए वर्चुअली जुड़े, जउन धार्मिक पालन मा याक डिजिटल क्रांति के प्रवेश का देखावत है। 2025 की जात्रा केरी मुख्य बातन मा स्थानीय प्रसासन द्वारा लागू कीन गै भीड़ प्रबंधन के बेहतर रणनीति, ग्लोबल लाइव स्ट्रीमिंग (जेहते जादा लोग सामिल होइ पाइन), अउर पर्यावरण स्थिरता पर ध्यान सामिल रहै। बायोडिग्रेडेबल (आसानी ते सड़ै वाले) चढ़ावा का उपयोग अउर सिंगल-यूज प्लास्टिक का कम करै जइसि पर्यावरण के अनुकूल पहल सुरू कीन गै, जेहिते ई परब पहिले के सालन के तुलना मा पर्यावरण के प्रति जादा जिम्मेदार बना।
==रथ यात्रा की तारीखैं==
{| class="wikitable sortable mw-collapsible citiwise-data" style="text-align:center; font-size:85%; width:500px; margin:0px 0px 0em 0em;"
! colspan="3" | [[पुरी]] के [[रथ यात्रा]]
|-
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([[आषाढ़]] [[पक्ष|शुक्ल]] [[द्वितीया|द्वितीया]])
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(रथयात्रा क नौवां दिन)
|-
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([[नवकलेवर 2015|[नवकलेवर, 2015]])
| 18 जुलाई
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|-
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|-
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|-
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| '''24 जुलाई'''
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|-
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|-
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([[नवकलेवर|[नवकलेवर, 2034]])
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|}
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== सन्दर्भ ==
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{{Infobox holiday
| holiday_name = पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा
| image = Rath Yatra Puri 07-11027.jpg
| caption = देवताओं के तीन रथ और पृष्ठभूमि में मंदिर, पुरी
| type = हिंदू
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| significance = मोक्ष की ओर आत्मा की यात्रा का प्रतिनिधित्व करता है
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पुरी के रथ-यात्रा (ओड़िया: ରଥଯାତ୍ରା, ({{IPAc-en|ˈ|r|ʌ|θ|ə|_|ˈ|j|ɑː|t|r|ɑː}}, {{IPA|or|ɾɔt̪ʰɔ dʒat̪ɾa}}) आषाढ़ (जून-जुलाई) के सुक्ल पच्छ मा दूज के दिन हर साल निकारी जाति है। यहिका सबते पुरान अउर सबते बड़े हिंदू रथपर्व के रूप मा माना जात है।<ref name=":1">{{Cite book |last=Lochtefeld |first=James G. |url=https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |title=The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: N-Z |date=2002 |publisher=Rosen |isbn=978-0-8239-3180-4 |pages=567 |language=en |access-date=23 April 2023 |archive-date=15 April 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230415134917/https://books.google.com/books?id=GnmPzgEACAAJ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite news |date=2019-07-04 |title=Rath Yatra: The legend behind world's largest chariot festival |language=en-GB |work=BBC News |url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |access-date=2023-06-15 |archive-date=17 February 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230217152645/https://www.bbc.com/news/world-asia-india-48864239 |url-status=live }}</ref>
भगवान [[जगन्नाथ]] ते जुड़ी या रथ-यात्रा भारत के [[ओडिशा]] राज्य के पुरी सहर मा आयोजित कीन जाति है। ई परब मा तमाम भक्त, तीनों देउतन ([[जगन्नाथ]], उनके भइया [[बलभद्र]] अउर बहिन [[सुभद्रा]]) का तीन बड़े-बड़े लकड़ी के रथन (नंदिघोष, तालध्वज अऊर दर्पदलन) मा बड़ दाँड पर [[गुंडीचा मंदिर]] तक खींचति हैं, जहाँ उइ एकु हफ्ता तक रहति हैं औ फिर जगन्नाथ मंदिर का लौटि आवति हैं। ई वापसी जात्रा का बहुड़ा यात्रा कहा जात है।<ref name=":1" /><ref>{{cite web|url=https://www.readwhere.com/read/c/72800774|title=পুরীধাম ও জগন্নাথদেবের ব্রহ্মরূপ বৃত্তান্ত|language=bn|date=28 June 2023|access-date=28 June 2023|website=dainikstatesmannews.com|publisher=[[Dainik Statesman]] (The Statesman Group)|location=Kolkata|first=Yogabrata|last=Chakraborty|trans-title=Puridham and the tale of lord Jagannath's legendary 'Bramharup'|archive-url=https://web.archive.org/web/20230628103603/https://www.readwhere.com/read/c/72800774|archive-date=28 June 2023|url-status=bot: unknown}}</ref> गुंडीचा मंदिर ते वापस आवत समय, तीनों देउता मौसी माँ मंदिर के लगे कुछ देर के खातिर रुकति हैं अउर हुवाँ पोड़ा पीठा का भोग लगावा जात है, जउन एक खास तरह का पुआ आय, जेहिका प्रभुजी का सबते मनपसंद माना जात है। सात दिन रहै के बादि, तीनों देउता अपने अस्थान पर लौटि आवति हैं। <ref name="m697">{{cite book | title=MAHAPRABHU SHRI JAGANNATH CHETNA EVM BHA | url=https://www.google.co.in/books/edition/MAHAPRABHU_SHRI_JAGANNATH_CHETNA_EVM_BHA/4RdtEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5+%E0%A4%B0%E0%A4%A5+%E0%A4%86%E0%A4%B7%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC+%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2+%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA159&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google|2022 | via=Google Books}} | access-date=4 July 2026}}</ref>। वर्ष 2026 मा, जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होई अऊर 24 जुलाई तक जारी रही।<ref name="m359">{{cite web | last= Jagran Desk | first=Digital | title=Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी जाने से पहले जान लें रथ यात्रा से जुड़ी हर जानकारी | website=Jagran | date=4 July 2026 | url=https://www.jagran.com/odisha/bhubaneshwar-jagannath-rath-yatra-2026-puri-accommodation-route-travel-guide-40294430.html | language=hi | access-date=4 July 2026}}</ref>
==इतिहास==
रथ-यात्रा का वर्णन ब्रह्म पुरान, पद्म पुरान, स्कन्द पुरान, अउर कपिल संहिता मा पावा जात है। 13वीं सदी ते यूरोपीय यात्रिन के द्वारा ई पर्व का उल्लेख कीन गा है, जेहिमा सबते प्रमुख अउर सजीव वर्णन 17वीं सदी मा दर्ज कीन गे हैं।
==रथ==
जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा के तीनों रथ हर साल फस्सी, धौसा जइसि खास बिरवन के लकड़ी ते बनाए जाति हैं। ई रथ परंपरा के अनुसार पूर्व-रियासत दसपल्ला ते आए बढ़ई लोगन के याक खास टोली के द्वारा बनाए जाति हैं, जिनका यो काम करै का पुश्तैनी अधिकार अउर विसेषाधिकार प्राप्त है। लकड़ी के लट्ठन का पारंपरिक रूप ते महानदी मा बेड़ा बनाय कै बहावा जात है। इनका पुरी के लगे इकट्ठा कीन जात है अउर फिर सड़क के रस्ता ते हुवाँ पहुँचावा जात है।
सदिन ते तय अउर मानी जा रही एक खास बिधी के अनुसार सजाए गे तीनिउ रथ बड़ दाँड पर खड़े कीन जाति हैं। मंदिर के पूरबी दुआर के लगे चौड़े रस्ता पर रथन् का एकु लाइन मा लगावा जात है, जेहिका सिंहदुआरौ कहा जात है।
सब रथन के चारिहुँ ओर नौ पार्श्व देउता होति हैं, जिनका रथ के बगल मा अलग-अलग देउतन का दरसावय वाली रंगीन लकड़ी के मूरति के माध्यम ते दरसावा जात है। हर रथ मा एक सारथी अउर चारि घोड़ा होति हैं।
[[फाइल:Partsofthechariot.jpg|अंगूठाकार]]
{| class="wikitable sortable"
!रथ का ब्योरा
!जगन्नाथ
!बलभद्र
!सुभद्रा
|-
|रथ का नाँव
|नंदिघोष (ନନ୍ଦିଘୋଷ)
|तालध्वज (ତାଳଧ୍ୱଜ)
|दरपदलन (ଦର୍ପଦଳନ)
|-
|रथ के अउर नाँव
|गरुड़ध्वज, कपिध्वज
|लांगलध्वज
|देवदलन, पद्मध्वज
|-
|छवि
|[[File:Nandighosha Ratho.png|thumb|Nandighosha Ratho]][[File:Chariot Nandighosha of Lord Jagannath.jpg|thumb|Chariot Nandighosha of Lord Jagannath]][[File:Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha.jpg|thumb|Lord Shri Jagannath on His Chariot Nandighosha]]
|[[File:Taladhwaja Ratho.png|thumb|Taladhwaja Ratho]][[फाइल:Chariot Taladhwaja of Lord Balabhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|[[File:Debadalana Ratho.png|thumb|Debadalana Ratho]][[फाइल:Chariot Devidalana of Goddess Subhadra.jpg|अंगूठाकार]]
|-
|चाकरन के संख्या
|१६
|१४
|१२
|-
|उपयोग कीन गे काठे के टुकड़न के संख्या
|८३२
|७६३
|५९३
|-
|ऊंचाई
|44' 2"
|43' 3"
|42' 3"
|-
|चौड़ाई
|34'6" x 34'6"
|33' x 33'
|31'6" x 31'6"
|-
|कनात का रंग
|लाल, पियर
|लाल, नीला, हरियर
|लाल, करिया
|-
|अभिभावक
|गरुड
|वासुदेव
|जयदुर्गा
|-
|सारथी
|दारुका
|मातलि
|अर्जुन
|-
|झण्डा क नाँव
|त्रैलोक्यमोहिनी
|उन्नानी
|नादाम्बिका
|-
|झण्डा के निशानी
|
|पाम क्यार बिरवा
|
|-
|घोड़ा क नाँव
|
# शंख
# बलाहक
# श्वेता
# हरिदाश्व
|
# तीव्रा
# घोरा
# दीर्घशर्मा
# स्वर्णनाभा
|
# रोचिका
# मचिका
# जिता
# अपराजिता
|-
|घोड़ा क रंग
|उजर
|करिया
|लाल
|-
|रथ के रसरी के देउता
|शंखचूड़ा नागिन
|वासुकि नाग
|स्वर्णचूड़ा नागिन
|-
|संगी देउता
|मदनमोहन
|रामकृष्ण
|सुदर्शन
|-
|द्वारपाल
|
# जया
# विजया
|
# नंदा
# सुनंदा
|
# गंगा
# जमुना
|-
|नौ ठईं पार्श्वदेउता
|
# पंचमुखी महावीर ( हनुमान )
# हरिहर
# मधुसूदन (विष्णु )
# गिरिधर ( कृष्ण )
# पांडु नरसिंह
# चितामणि कृष्ण
# नारायण (विष्णु )
# छत्रभंगरावण (राम)
# हनुमान के ऊपर बइठि राम
|
# गणेश
# कार्तिकेय
# सर्वमंगला
# प्रलाम्बरी (बलराम)
# हलायुध (बलराम)
# मृत्युंजय (शिव)
# नटेश्वर (शिव)
# मुक्तेश्वर (शिव)
# शेषदेव
|
# चंडी
# चामुंडा
# उग्रतारा
# वनदुर्गा
# शुलिदुर्गा
# वाराही
# श्यामाकाली
# मंगला
# विमला
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==पर्यटन अउर धार्मिक महत्त्व==
ई अस्थान का धार्मिक महत्व जगन्नाथजी का मंदिर है। सास्त्रन औ पुराननौ मा रथ-यात्रा के महत्ता स्वीकार कीन गै है। स्कन्द पुरान मा कहा गा है कि रथ-यात्रा मा जउन मनई श्री जगन्नाथ जी के नावँ का कीर्तन करत गुंडीचा नगर तक जात है वो पुनर्जन्म ते मुक्त होइ जात है। जउन मनई श्री जगन्नाथ जी का दरसन करत, परनाम करत, रस्ता के धूरि-कीचड़ मा ल्वाटत जाति हैं उइ सीधे भगवान श्री विष्णु के उत्तम धाम का जाति हैं। जउन मनई गुंडिचा मंडप मा रथ पर विराजमान श्री कृष्ण, बलराम औ सुभद्रा देवी के दरसन दक्खिन दिसा का आवत भए करति हैं, उइ मोच्छ का प्राप्त होति हैं। रथयात्रा एक अइसन परब है जेहमा भगवान जगन्नाथ चलि कै जनता के बीच आवति हैं अउर उनके सुख-दुख मा सहभागी होति हैं। 'सब मनिसा मोर परजा' (सब मनई हमार परजा हैं), ई उनके उद्गार आहीं। भगवान जगन्नाथ तो पुरुषोत्तम हैं। उनमा श्रीराम, श्रीकृष्ण अद्वैत ब्रह्म रूप समाहित है। उनके अनेक नावँ हैं, उइ पतित पावन हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/religion/festivals/photo/bastar-chhattisgarh-unique-rath-yatra-is-celebrated-tupki-salami-tlifd-1289225-2021-07-12|title=यहां निकाली जाती है अनोखी जगन्नाथ रथ यात्रा, तुपकी से दी जाती है सलामी|website=आज तक|language=hi|access-date=2021-07-13}}</ref>
==यात्रा का स्वरूप==
===सेवा-समर्पण===
जगन्नाथ मंदिर मा कई तरह के सेवक होति हैं जउन रथ पर अपनि सेवा देति हैं।
*सुआरा
*महासुआरा
*डाहुक: रथ डाहुक बोलि (ओड़िया: ଡାହୁକ ବୋଲି, जिनका "डाहुक गीतौ" (ଡାହୁକ ଗୀତ) कहा जात है) काव्यात्मक पाठ आहीं। रथ-यात्रा प्रजनन अउर जीवन चक्र के याक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति आय, डाहुक द्वारा गाए जाय वाली ई "बोलि" मा अश्लील/फूहड़ गीत सामिल होति हैं। यहौ माना जात है कि जब तक डाहुक बोलि नहीं गावा जात है, तब तक 'रथ नहीं चलत है। ई गीत बिना कउनो रोक-टोक के खुलेआम गाए जाति हैं। डाहुक परब के समय रथ के गति का नियंत्रित कीन जात है।
*दइता पति
*पुस्पालक
*बनाटी खेलाड़ी: बनाटी याक बहुत पुरान कला आय, जेहमा एकु मनई रस्सी के छोर पर बंधे आगि लगे गोला का घुमावत है। हर साल रथ-यात्रा मा भक्त भगवान जगन्नाथ का खुस करै के खातिर "बनाटी" करति हैं। बनाटी मा चाकू अउर आगि के गोला, यात्रा मा तब रंग भरि देति हैं जब वह अपनी मंजिल तक पहुँचत है।
===हेरा पंचमी===
हेरा पंचमी पुरी के जगन्नाथ मंदिर मा रथयात्रा के दौरान मनावा जाय वाला एक अनुष्ठान आय। यहिका देवी लक्ष्मी के रसम के रूप मा जाना जात है। रथ-यात्रा ते पँचए दिन, माने आषाढ़ के सुक्ल पच्छ का पाँचवाँ दिन हेरा पंचमी के रूप मा जाना जात है। रथ-यात्रा मा, भगवान जगन्नाथ अपनी अर्धांगिनी महालक्ष्मी का पीछे छोड़ि कै, अपनि भइया बलभद्र अउर बहिन सुभद्रा के साथै अपन दिव्य हथियार सुदर्शन का लइ कै एक दिव्य यात्रा पर निकरति हैं। देवी, देउता के खातिर आपन गुस्सा देखाउती हैं। उइ सुबर्ण महालक्ष्मी के रूप मा याक पालकी मा गुंडीचा मंदिर,अड़प मंडप तक जउती हैं अउर भगवान का जल्दी ते जल्दी मंदिर लौटि आवै के धमकी देति हैं। उनका खुस करै के खातिर, देउता उनका आज्ञा माला (सहमति के माला) दइ के मनावति हैं। देवी का गुस्सा मा देखि कै, सेवक लोग गुंडीचा के मुख्य दुआर बंद कइ देति हैं। महालक्ष्मी नाकाचना गेट ते मुख्य मंदिर मा लौटि अउती हैं। एक अनोखी रसम मा, देवी अपने एक सेवक का नंदिघोष रथ के एक हिस्सा का नुकसान पहुँचावय का आदेस देती हैं। यहिके बादि उइ गुंडीचा मंदिर के बाहिर एक इमली के पेड़ के पीछे छिपि जाती हैं। कुछ देर बादि, उइ हेरा गोहरी लेन के नाँव ते जाने जाय वाले एक अलग रस्ता ते चुपचाप अपने घर-मंदिर का भागि जाती हैं। जगन्नाथजी के लाखन भक्त ई अनोखी रसम का आनंद लेति हैं। श्रीमंदिर की एक महत्वपूर्ण रसम के रूप मा हेरा पंचमी के रसम क जिकिर स्कन्द पुरान मा पावा जात है। मंदिर के इतिहास के अनुसार, यो उत्सव महाराजा कपिलेंद्र देब के समय मा सुरू भा रहै। उनके राज ते पहिले, हेरा पंचमी का मंत्रन के पाठ के साथै प्रतीकात्मक रूप मा मनावा जात रहै। जइस कि मादला पांजी मा कहा गा है, राजा कपिलेंद्र देब सोने के बनी महालक्ष्मी के मूरति लइ कै ई परथा का बदल दिहिन अउर ई परब का अउर जादा नीक बना दिहिन।
===चंदन जात्रा===
चंदन जात्रा या "चंदन परब" 42 दिन का समय है जेहिमा रथन के निर्माण काम के सुरूआत होति है। ई समय का आधा-आधा बांटा गा है, जेहिमा हर एक मा 21 दिन होति हैं। पहिले आधे भाग का बाहिर चंदन कहा जात है, जेहिमा प्रमुख देउतन की प्रतिनिधि मूरतिन का रंगीन जुलूस मा बाहिर निकाला जात है अउर हर दिन नरेंद्र तालाब मा एक अनुष्ठानिक नाव के सवारी कराई जाति है। ई देउतन मा मदन मोहन (जगन्नाथ), राम-कृष्ण, लक्ष्मी, सरस्वती अउर पंच पांडव - पाँच मुख्य शिव मंदिरन के प्रमुख देउता सामिल होति हैं। बाद वाला हिस्सा, जेहिका भीतर चंदन कहा जात है, वहिमा कई अइसी रसमैं होती हैं जिनका जनता के खातिर नहीं खवाला जात। रथन का निर्माण अच्छय तृतीया का, वैशाख के सुक्ल पच्छ के तिसरे दिन, अनुष्ठानिक अगिन पूजा के साथै सुरू होत है। यो पुरी के राजा के महल के सामने अउर पुरी मंदिर के मुख्य कार्यालय की उल्टी दिसा मा होत है। बादि मा देउतन का तालाब के बीच एकु छोटे मंदिर मा पानी, चंदन के लेप, इत्तर अउर फूलन ते भरे पत्थर के टब मा अनुष्ठानिक असनान करावा जात है।
ई चंदन परब के समाप्ती सनान जात्रा या "असनान परब" मा होत है जउन जेठ महीना के पूरनमासी के दिन होत है। जगन्नाथ, बलभद्र अउर सुभद्रा का 108 घड़ा पानी ते अन्हवावा जात है अउर फिर उइ लगभग दुई हफ्ता तक प्रतीकात्मक अउर अनुष्ठानिक स्वास्थ्य-लाभ (बीमारी ते उबरै के समय) मा रहति हैं। उनका जनता के दरसन ते रोक दीन जात है। खाली तीन खास पट्ट चित्र, कलफ ते कड़े कीन गै कपड़ा पर प्राकृतिक रंगन ते बनी पारंपरिक ओड़िया चित्रकारी, जेहिका अणसर पट्टी कहा जात है, बाँस के परदा पर टांगि दीन जाति हैं जउन उनका जनता के नजर ते छिपउती हैं। ई समय मा, तीनों देउतन का उनकी बीमारी ठीक करै के खातिर खाली जड़ि, पत्ता, बेरि अउर फल दीन जात है। यह रसम जगन्नाथ पंथ के जनम अउर बिकास मा मजबूत आदिवासी तत्वन के याद दिलावत है। सुरुवाती आदिवासी उपासक बिस्वाबसु, जउन सिकारिन के सरदार रहैं, उनकी बिटिया ललिता अउर ब्राह्मण पुजारी बिद्यापति के संतान दइतापति या दइता के नाँव ते जाने जाति हैं। उनके लगे बीमारी ते उबरै के समय अउर रथ जात्रा या रथ परब के पूरे समय प्रभुजी के सेवा करै का विसेस अधिकार होत है।
===सुना बेश===
जगन्नाथ के सुना बेश-
तीनों देउतन के रथ गुंडीचा मंदिर ते मुख्य मंदिर लौटि आवै के बादि, उनका सोने के गहना पहिराए जाति है अउर रथन पर उनकी पूजा कीन जाति है। ई उत्सव का सुना बेश कहा जात है। परंपरा बतावति है कि या प्रथा सबते पहिले राजा कपिलेंद्र देव द्वारा 1460 मा सुरू कीन गै रहै, जब उइ जुद्ध ते जीति कै लउटै के बादि जगन्नाथ का सोना दान कीन्हेनि रहैं। तीनों देउतन का लगभग 208 किलो वजन के सोने के गहनन ते सजावा जात है। 2014 मा 9 जुलाई का भे ई रसम का लगभग नौ लाख भक्तन देखिन रहैं।
2015 मा रथ-यात्रा के मौका पर, 19 साल बादि रथन पर नए रूप (नबकलेबर) मा देउतन के याक झलक पावै के खातिर लाखन भक्त तटीय सहर पुरी मा भीड़ लगा दिहिन। यो ओडिशा मा अब तक का सबते बड़ा धार्मिक सम्मेलन रहै।
==2025 के रथ-यात्रा==
2025 के रथ-यात्रा मा डिजिटल तकनीक के जुड़ाव के साथै भक्ति मा एकु बड़ा बदलाव देखा परा। लाखन भक्तन के पारंपरिक रूप ते इकट्ठा होए के साथ-साथ, बड़ी संख्या मा मनई लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए वर्चुअली जुड़े, जउन धार्मिक पालन मा याक डिजिटल क्रांति के प्रवेश का देखावत है। 2025 की जात्रा केरी मुख्य बातन मा स्थानीय प्रसासन द्वारा लागू कीन गै भीड़ प्रबंधन के बेहतर रणनीति, ग्लोबल लाइव स्ट्रीमिंग (जेहते जादा लोग सामिल होइ पाइन), अउर पर्यावरण स्थिरता पर ध्यान सामिल रहै। बायोडिग्रेडेबल (आसानी ते सड़ै वाले) चढ़ावा का उपयोग अउर सिंगल-यूज प्लास्टिक का कम करै जइसि पर्यावरण के अनुकूल पहल सुरू कीन गै, जेहिते ई परब पहिले के सालन के तुलना मा पर्यावरण के प्रति जादा जिम्मेदार बना।
==रथ यात्रा की तारीखैं==
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'''उन्नाव जिला''' मध्य भारत के [[उत्तर प्रदेश]] राज्य का एक [[उत्तर प्रदेश कय ज़िला|जिला]] है। उन्नाव शहर यहिका जिला मुख्यालय है। यो जिला [[लखनऊ मंडल]] का हिस्सा है। 2011 की जनगणना के अनुसार, उन्नाव जिला के आबादी 3,108,367 है, जउन यहिका उत्तर प्रदेश क्या 31वाँ सबसे ज़्यादा आबादी वाला जिला बनावत है। यो एक मुख्य रूप ते ग्रामीण आबादी वाला जिला है, जेहिमा 80% ते ज्यादा आबादी ग्रामीण क्षेत्रन मा रहति है। <ref name="Census 2011" />
== महाकाव्यन मा उन्नाव ==
[[रामायण]] मा, देवी सीता का सुतियातारा चौराहा (जेहिका तब सीता-उतारा जंगल कहा जात रहै) मा लक्ष्मण जी द्वारा छोड़ दीन गा रहै। अब सुतियातारा मा एक चौराहा अउर एक [[शिव]] मंदिर है। उइ अपने दुसरे बनबास मा हियैं परियर (परियर) गाँव मा रहत रहीं, जहाँ पर ऋषि वाल्मीकि क्यार आश्रम रहै। तबै हियाँ पर आम, नीम, बरगद, [[पीपर|पीपल के पेड़न]] आदि ते हरा भरा जंगल रहै। वही मा उइ अपने दून्हो लरिकन का जन्म दिहिन। अब, हियाँ पर सीता, कुश अउर लव का एक प्रसिद्ध मंदिर है जेहिका जानकी कुंड कहा जात है (मतलब एक अइसि जगह जहाँ ते सीता मइया अपनी आध्यात्मिक महतारी भुइँया माता के साथ क्षीर सागर मा समा गई रहैं) अउर हियाँ एक शिवालौ बना है जेहिका लोधेसुर कहा जात है।
==सन्दर्भ==
<ref name="Census 2011">{{Cite web |title=Census of India 2011: Uttar Pradesh District Census Handbook - Unnao, Part A (Village and Town Directory) |url=https://censusindia.gov.in/2011census/dchb/UPA.html |access-date=26 June 2021 |website=Census 2011 India |pages=xiii-xv, 5–11, 14, 19–20, 75, 93, 110, 135, 160, 178, 204, 237, 262, 280, 298, 323, 348, 373, 390, 416, 525–39}}</ref>
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'''सिकंदरपुर करन''' [[भारत|भारत देश]] के [[उत्तर प्रदेश]] के उन्नाव जिला का एक गाँव अउर सामुदायिक विकास खंड है।<ref name="Census 2011">{{Cite web |title=Census of India 2011: Uttar Pradesh District Census Handbook - Unnao, Part A (Village and Town Directory) |url=https://censusindia.gov.in/2011census/dchb/UPA.html |access-date=6 July 2021 |website=Census 2011 India |pages=298–322}}</ref> यो उन्नाव-लालगंज राष्ट्रीय राजमार्ग ते जुड़ा है। हियाँ पर पाँच प्राथमिक विद्यालय हैं। स्वास्थ्य देखभाल के कउनो सुविधा नहीं है। हियाँ पर याक दैनिक बाजार लागति है।<ref name="Census 2011" /> 2011 की जनगणना के अनुसार हियाँ 836 घर हैं अउर 4,548 मनई निवास करति हैं।<ref name="Census 2011" />
== गाँव ==
सिकंदरपुर करन सीडी ब्लाक मा निम्नलिखित 117 गाँव हैं: <ref name="Census 2011">{{Cite web |title=Census of India 2011: Uttar Pradesh District Census Handbook - Unnao, Part A (Village and Town Directory) |url=https://censusindia.gov.in/2011census/dchb/UPA.html |access-date=6 July 2021 |website=Census 2011 India |pages=298–322}}<cite class="citation web cs1" data-ve-ignore="">[https://censusindia.gov.in/2011census/dchb/UPA.html "Census of India 2011: Uttar Pradesh District Census Handbook - Unnao, Part A (Village and Town Directory)"]. ''Census 2011 India''. pp. <span class="nowrap">298–</span>322<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">6 July</span> 2021</span>.</cite></ref>
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'''सिकंदरपुर कर्ण ''' [[भारत|भारत देश]] के [[उत्तर प्रदेश]] के उन्नाव जिला का एक गाँव अउर सामुदायिक विकास खंड है।<ref name="Census 2011">{{Cite web |title=Census of India 2011: Uttar Pradesh District Census Handbook - Unnao, Part A (Village and Town Directory) |url=https://censusindia.gov.in/2011census/dchb/UPA.html |access-date=6 July 2021 |website=Census 2011 India |pages=298–322}}</ref> यो उन्नाव-लालगंज राष्ट्रीय राजमार्ग ते जुड़ा है। हियाँ पर पाँच प्राथमिक विद्यालय हैं। स्वास्थ्य देखभाल के कउनो सुविधा नहीं है। हियाँ पर याक दैनिक बाजार लागति है।<ref name="Census 2011" /> 2011 की जनगणना के अनुसार हियाँ 836 घर हैं अउर 4,548 मनई निवास करति हैं।<ref name="Census 2011" />
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'''सिकंदरपुर कर्ण ''' [[भारत|भारत देश]] के [[उत्तर प्रदेश]] के उन्नाव जिला का एक गाँव अउर सामुदायिक विकास खंड है।<ref name="Census 2011">{{Cite web |title=Census of India 2011: Uttar Pradesh District Census Handbook - Unnao, Part A (Village and Town Directory) |url=https://censusindia.gov.in/2011census/dchb/UPA.html |access-date=6 July 2021 |website=Census 2011 India |pages=298–322}}</ref> यो उन्नाव-लालगंज राष्ट्रीय राजमार्ग ते जुड़ा है। हियाँ पर पाँच प्राथमिक विद्यालय हैं। स्वास्थ्य देखभाल के कउनो सुविधा नहीं है। हियाँ पर याक दैनिक बाजार लागति है।<ref name="Census 2011" /> 2011 की जनगणना के अनुसार हियाँ 836 घर हैं अउर 4,548 मनई निवास करति हैं।<ref name="Census 2011" />
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सिकंदरपुर कर्ण सीडी ब्लाक मा निम्नलिखित 117 गाँव हैं: <ref name="Census 2011">{{Cite web |title=Census of India 2011: Uttar Pradesh District Census Handbook - Unnao, Part A (Village and Town Directory) |url=https://censusindia.gov.in/2011census/dchb/UPA.html |access-date=6 July 2021 |website=Census 2011 India |pages=298–322}}<cite class="citation web cs1" data-ve-ignore="">[https://censusindia.gov.in/2011census/dchb/UPA.html "Census of India 2011: Uttar Pradesh District Census Handbook - Unnao, Part A (Village and Town Directory)"]. ''Census 2011 India''. pp. <span class="nowrap">298–</span>322<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">6 July</span> 2021</span>.</cite></ref>
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सिकंदरपुर कर्ण
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"[[:en:Special:Redirect/revision/1332420833|Sikandarpur Karan]]" पन्ना कै अनुवाद कइके बनवा गा
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text/x-wiki
'''सिकंदरपुर कर्ण''' [[भारत|भारत देश]] के [[उत्तर प्रदेश]] के उन्नाव जिला का एक गाँव अउर सामुदायिक विकास खंड है।<ref name="Census 2011">{{Cite web |title=Census of India 2011: Uttar Pradesh District Census Handbook - Unnao, Part A (Village and Town Directory) |url=https://censusindia.gov.in/2011census/dchb/UPA.html |access-date=6 July 2021 |website=Census 2011 India |pages=298–322}}<cite class="citation web cs1" data-ve-ignore="">[https://censusindia.gov.in/2011census/dchb/UPA.html "Census of India 2011: Uttar Pradesh District Census Handbook - Unnao, Part A (Village and Town Directory)"]. ''Census 2011 India''. pp. <span class="nowrap">298–</span>322<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">6 July</span> 2021</span>.</cite></ref> यो उन्नाव-रायबरेली राष्ट्रीय राजमार्ग ते जुड़ा है। हियाँ पर पाँच प्राथमिक विद्यालय हैं। स्वास्थ्य देखभाल के कउनो सुविधा नहीं है। हियाँ एक दैनिक बाजार लागत है। <ref name="Census 2011" /> 2011 की जनगणना के अनुसार ई गाँव मा 836 घर हैं अउर 4,548 मनई निवास करति हैं।
== गाँव ==
सिकंदरपुर कर्ण सीडी ब्लाक मा निम्नलिखित 117 गाँव हैं: <ref name="Census 2011">{{Cite web |title=Census of India 2011: Uttar Pradesh District Census Handbook - Unnao, Part A (Village and Town Directory) |url=https://censusindia.gov.in/2011census/dchb/UPA.html |access-date=6 July 2021 |website=Census 2011 India |pages=298–322}}</ref>
== संदर्भ ==
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पन्ना कय खाली कै गय
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'''सिकंदरपुर कर्ण ''' [[भारत|भारत देश]] के [[उत्तर प्रदेश]] के उन्नाव जिला का एक गाँव अउर सामुदायिक विकास खंड है।<ref name="Census 2011">{{Cite web |title=Census of India 2011: Uttar Pradesh District Census Handbook - Unnao, Part A (Village and Town Directory) |url=https://censusindia.gov.in/2011census/dchb/UPA.html |access-date=6 July 2021 |website=Census 2011 India |pages=298–322}}</ref> यो उन्नाव-लालगंज राष्ट्रीय राजमार्ग ते जुड़ा है। हियाँ पर पाँच प्राथमिक विद्यालय हैं। स्वास्थ्य देखभाल के कउनो सुविधा नहीं है। हियाँ पर याक दैनिक बाजार लागति है।<ref name="Census 2011" /> 2011 की जनगणना के अनुसार हियाँ 836 घर हैं अउर 4,548 मनई निवास करति हैं।<ref name="Census 2011" />
== गाँव ==
सिकंदरपुर कर्ण सीडी ब्लाक मा निम्नलिखित 117 गाँव हैं: <ref name="Census 2011">{{Cite web |title=Census of India 2011: Uttar Pradesh District Census Handbook - Unnao, Part A (Village and Town Directory) |url=https://censusindia.gov.in/2011census/dchb/UPA.html |access-date=6 July 2021 |website=Census 2011 India |pages=298–322}}<cite class="citation web cs1" data-ve-ignore="">[https://censusindia.gov.in/2011census/dchb/UPA.html "Census of India 2011: Uttar Pradesh District Census Handbook - Unnao, Part A (Village and Town Directory)"]. ''Census 2011 India''. pp. <span class="nowrap">298–</span>322<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">6 July</span> 2021</span>.</cite></ref>
== संदर्भ ==
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'''सिकंदरपुर कर्ण ''' [[भारत|भारत देश]] के [[उत्तर प्रदेश]] के उन्नाव जिला का एक गाँव अउर सामुदायिक विकास खंड है।<ref name="Census 2011">{{Cite web |title=Census of India 2011: Uttar Pradesh District Census Handbook - Unnao, Part A (Village and Town Directory) |url=https://censusindia.gov.in/2011census/dchb/UPA.html |access-date=6 July 2021 |website=Census 2011 India |pages=298–322}}</ref> यो उन्नाव-लालगंज राष्ट्रीय राजमार्ग ते जुड़ा है। हियाँ पर पाँच प्राथमिक विद्यालय हैं। स्वास्थ्य देखभाल के कउनो सुविधा नहीं है। हियाँ पर याक दैनिक बाजार लागति है।<ref name="Census 2011" /> 2011 की जनगणना के अनुसार हियाँ 836 घर हैं अउर 4,548 मनई निवास करति हैं।<ref name="Census 2011" />
== गाँव ==
सिकंदरपुर कर्ण सीडी ब्लाक मा निम्नलिखित 117 गाँव हैं: <ref name="Census 2011">{{Cite web |title=Census of India 2011: Uttar Pradesh District Census Handbook - Unnao, Part A (Village and Town Directory) |url=https://censusindia.gov.in/2011census/dchb/UPA.html |access-date=6 July 2021 |website=Census 2011 India |pages=298–322}}<cite class="citation web cs1" data-ve-ignore="">[https://censusindia.gov.in/2011census/dchb/UPA.html "Census of India 2011: Uttar Pradesh District Census Handbook - Unnao, Part A (Village and Town Directory)"]. ''Census 2011 India''. pp. <span class="nowrap">298–</span>322<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">6 July</span> 2021</span>.</cite></ref> <ref name="Census 2011"/>
{| class="wikitable sortable"
|-
! Village name
! Total land area (hectares)
! Population (in 2011)
|-
| [[मगरवारा]] || 479.3 || 6,584
|-
| [[गलगलहा]] || 120 || 1,607
|-
| [[मसवासी, उन्नाव|मसवासी]] || 555.2 || 6,530
|-
| [[सहजनी]] || 95.1 || 770
|-
| [[फतेहपुर, Sikandarpur Karan|Fatehpur]] || 138.2 || 1,069
|-
| [[Kathadal Narain Pur]] || 120.5 || 1,723
|-
| [[Haibatpur, Sikandarpur Karan|Haibatpur]] || 165 || 695
|-
| [[Dhaudhi Rautapur]] || 358 || 2,343
|-
| [[Sheshpur Nari]] || 544.6 || 6,984
|-
| [[Mahadevna]] || 94.7 || 415
|-
| [[Banthar]] || 203.6 || 7,165
|-
| [[Ata, Unnao|Ata]] || 563.6 || 4,120
|-
| [[Bhagwatpur, Unnao|Bhagwatpur]] || 79.6 || 232
|-
| [[Karaundi]] || 145.3 || 1,473
|-
| [[Tajpur, Sikandarpur Karan|Tajpur]] || 27.4 || 1,048
|-
| [[Jagjeewan Pur]] || 57.6 || 1,322
|-
| [[Kanti, Unnao|Kanti]] || 67.1 || 662
|-
| [[Kurmapur]] || 83.4 || 730
|-
| [[Behiti Gopalpur]] || 39.6 || 856
|-
| [[Gadari, Unnao|Gadari]] || 70.7 || 752
|-
| [[Hadha]] || 1,471.4 || 10,812
|-
| [[Lohcha]] || 96.2 || 1,316
|-
| [[Mawaiya Mafi]] || 169.4 || 1,442
|-
| [[Karnipur Shivpuri]] || 275.4 || 1,626
|-
| [[Chapri Shahpur]] || 276.5 || 815
|-
| [[Saidpur, Sikandarpur Karan|Saidpur]] || 252 || 1,567
|-
| [[Vasaina]] || 366.5 || 2,425
|-
| [[Benthar]] || 915.8 || 5,446
|-
| [[Band Hameer Pur]] || 172.2 || 1,596
|-
| [[Mainha]] || 145.2 || 1,312
|-
| [[Bhadohi, Unnao|Bhadohi]] || 141.4 || 695
|-
| [[Bhainshi Naubasta]] || 370.3 || 2,014
|-
| [[Kisanpur, Unnao|Kisanpur]] || 108.2 || 361
|-
| [[Gauri Tribhanpur]] || 197 || 861
|-
| [[Poni, Unnao|Poni]] || 122.3 || 1,078
|-
| [[Kader Patari]] || 257.8 || 769
|-
| [[Dakary]] || 156 || 572
|-
| [[Karmi Vizhlamau]] || 157.8 || 1,655
|-
| [[Majhara Piper Khera G/Ehatmali]] || 444.4 || 5,899
|-
| [[Katri Badarka Turkiya]] || 274.3 || 0
|-
| [[Badarka Turkiya]] || 20.8 || 739
|-
| [[Rajwa Khera]] || 47.1 || 1,879
|-
| [[Lakha Pur]] || 74.1 || 1,016
|-
| [[Ramchara Mau]] || 49.8 || 359
|-
| [[Alhuapur Saresa]] || 7.4 || 0
|-
| [[Katri Alhuapur Sares]] || 559.6 || 1,336
|-
| [[Badarka Harbansh]] || 68.1 || 2,834
|-
| [[Rawal, Unnao|Rawal]] || 154 || 842
|-
| [[Supasi, Unnao|Supasi]] || 336.8 || 3,088
|-
| [[Sathara]] || 172.5 || 736
|-
| [[Garsar]] || 157.1 || 710
|-
| [[Maviya Layak]] || 106.5 || 861
|-
| [[Chheriha]] || 177 || 1,548
|-
| [[Tikry Ganesh Gair Ehatmali]] || 56.1 || 1,302
|-
| [[Shukul Pur]] || 53.2 || 971
|-
| [[Manohar Pur]] || 188 || 1,975
|-
| [[Tikry Ganeshgair Ehatmali]] || 101.9 || 0
|-
| [[Sakhagar]] || 342.4 || 922
|-
| [[Bairagar]] || 185.9 || 935
|-
| [[Tikry Padmara]] || 173.8 || 731
|-
| [[Dudhaora]] || 83.2 || 1,029
|-
| [[Katri Balai]] || 568.7 || 0
|-
| [[Balai, Unnao|Balai]] || 726.6 || 2,176
|-
| [[Chak Udai Chandpur]] || 21.7 || 0
|-
| [[Jamuni Pur]] || 131.5 || 357
|-
| [[Ghurwa Khera]] || 156.8 || 901
|-
| [[Malmau]] || 377.1 || 1,201
|-
| [[Katri Malmau]] || 134 || 0
|-
| [[Katri Khutha Naugwan]] || 91.2 || 0
|-
| [[Khutha Naugwan]] || 354.1 || 1,610
|-
| [[Rithanai]] || 397.6 || 1,582
|-
| [[Jhaoha]] || 254.8 || 837
|-
| [[Katri Majhra Bhikhna]] || 160.3 || 0
|-
| [[Majhara Bhikhna]] || 418.4 || 221
|-
| [[Koluhuwa Gara]] || 563.3 || 2,166
|-
| [[Kutkuri]] || 128.2 || 483
|-
| [[Satan, Unnao|Satan]] || 596.3 || 3,249
|-
| [[Ajabpur]] || 860.3 || 0
|-
| [[Singha, Unnao|Singha]] || 226.1 || 747
|-
| [[Terwa]] || 91.7 || 277
|-
| [[Nibai Ehatmali]] || 107.4 || 0
|-
| [[Nibai Gair Ehatmali]] || 272.2 || 1,458
|-
| [[Maharamau]] || 172.4 || 550
|-
| [[Barua, Sikandarpur Karan|Barua]] || 93.9 || 726
|-
| [[Pachodda Sarai]] || 354.4 || 3,767
|-
| [[Abhilah]] || 104.2 || 446
|-
| [[Hasanapur]] || 124.5 || 773
|-
| [[Rawatpur, Sikandarpur Karan|Rawatpur]] || 207.4 || 1,276
|-
| [[Tikauli]] || 255.8 || 1,119
|-
| [[Manpur, Sikandarpur Karan|Manpur]] || 204.8 || 663
|-
| '''Sikanderpur Karan''' (block headquarters) || 515.5 || 4,548
|-
| [[Anup Pur]] || 260.1 || 1,076
|-
| [[Bhainshi Koyalpur]] || 304.4 || 1,394
|-
| [[Bhainshi Chatur]] || 174.2 || 619
|-
| [[Sripat Pur]] || 37.7 || 528
|-
| [[Dubey Pur]] || 325.4 || 1,240
|-
| [[Pahar Pur Suwas]] || 240.4 || 1,057
|-
| [[पंसारी]] || 773.7 || 4,471
|-
| [[महाई, उन्नाव|महाई]] || 325.6 || 1,959
|-
| [[रामपुर, सिकंदरपुर कर्ण|रामपुर]] || 92.1 || 469
|-
| [[अकबरपुर, सिकंदरपुर कर्ण| |अकबरपुर]] || 75 || 685
|-
| [[बहुराजमऊ]] || 677.8 || 3,052
|-
| [[कुलहा बगहा]] || 670.1 || 3,152
|-
| [[Vikrampur, Unnao|Vikrampur]] || 121.6 || 287
|-
| [[रैथाना]] || 431.7 || 2,538
|-
| [[Kathar, Sikandarpur Karan|Kathar]] || 128.6 || 1,314
|-
| [[Ranipur, Sikandarpur Karan|Ranipur]] || 1,001 || 2,989
|-
| [[Katri Badiya Khera]] || 128 || 0
|-
| [[Badiya Khera]] || 868 || 1,453
|-
| [[Kharaoli]] || 482.2 || 2,355
|-
| [[Sumraha]] || 304.5 || 1,293
|-
| [[Kanpur, Unnao|Kanpur]] || 92 || 147
|-
| [[Sirsi, Unnao|Sirsi]] || 69.1 || 311
|-
| [[Baidra]] || 148.3 || 897
|-
| [[Pahi, Unnao|Pahi]] || 430.9 || 569
|-
| [[Vibhaora Chandan Pur]] || 335.8 || 1,919
|-
| [[Devpur Khera]] || 426.2 || 1,635
|-
| [[Unnao Rural]] || 1,855.4 || 4,148
|-
| [[Seshpur Rural]] || 234.2 || 2
|-
| [[Ibrahimabad, Sikandarpur Karan|Ibrahimabad]] || 118.8 || 6
|}
== संदर्भ ==
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पंसारी
0
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2026-07-06T18:03:15Z
Avimaarak
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'{{Infobox settlement | name =पंसारी | native_name = | native_name_lang = | other_name = | nickname = | settlement_type =गाँव | image_skyline = | image_alt = | image_caption = | image_map = |...' कय साथे नँवा पन्ना बनावा गय
35236
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox settlement
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'''पंसारी ''' [[भारत|भारत देश]] के [[उत्तर प्रदेश]] के उन्नाव जिला की एक ग्राम पंचायत है।<ref name="Census 2011">{{Cite web |title=Census of India 2011: Uttar Pradesh District Census Handbook - Unnao, Part A (Village and Town Directory) |url=https://censusindia.gov.in/2011census/dchb/UPA.html |access-date=6 July 2021 |website=Census 2011 India |pages=298–322}}</ref> यो उन्नाव-लालगंज राष्ट्रीय राजमार्ग ते जुड़ा है। हियाँ पर एक कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय अउर दुइ प्राथमिक विद्यालय हैं। स्वास्थ्य देखभाल के लिये एक प्राथमिक उपचार केंद्र अउर एक आयुर्वेदिक अस्पताल है। हियाँ पर याक साप्ताहिक बाजार लागति है।<ref name="Census 2011" /> 2011 की जनगणना के अनुसार हियाँ पर 4471 मनई निवास करति हैं।<ref name="Census 2011" />
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Avimaarak
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text/x-wiki
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'''पंसारी ''' [[भारत|भारत देश]] के [[उत्तर प्रदेश]] के उन्नाव जिला की एक ग्राम पंचायत है।<ref name="Census 2011">{{Cite web |title=Census of India 2011: Uttar Pradesh District Census Handbook - Unnao, Part A (Village and Town Directory) |url=https://censusindia.gov.in/2011census/dchb/UPA.html |access-date=6 July 2021 |website=Census 2011 India |pages=298–322}}</ref> यो सिकंदरपुर कर्ण महाई ग्रामीण मार्ग ते जुड़ा है। हियाँ पर एक कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय अउर दुइ प्राथमिक विद्यालय हैं। स्वास्थ्य देखभाल के लिये एक प्राथमिक उपचार केंद्र अउर एक आयुर्वेदिक अस्पताल है। हियाँ पर याक साप्ताहिक बाजार लागति है।<ref name="Census 2011" /> 2011 की जनगणना के अनुसार हियाँ पर 4471 मनई निवास करति हैं।<ref name="Census 2011" />
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'''पंसारी ''' [[भारत|भारत देश]] के [[उत्तर प्रदेश]] के उन्नाव जिला की एक ग्राम पंचायत है।<ref name="Census 2011">{{Cite web |title=Census of India 2011: Uttar Pradesh District Census Handbook - Unnao, Part A (Village and Town Directory) |url=https://censusindia.gov.in/2011census/dchb/UPA.html |access-date=6 July 2021 |website=Census 2011 India |pages=298–322}}</ref> यो सिकंदरपुर कर्ण महाई ग्रामीण मार्ग ते जुड़ा है। हियाँ पर एक कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय अउर दुइ प्राथमिक विद्यालय हैं। स्वास्थ्य देखभाल के लिये एक प्राथमिक उपचार केंद्र अउर एक आयुर्वेदिक अस्पताल है। हियाँ पर याक साप्ताहिक बाजार लागति है।<ref name="Census 2011" /> 2011 की जनगणना के अनुसार हियाँ पर 4471 मनई निवास करति हैं।<ref name="Census 2011" />
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'''[[पंसारी]]''' [[भारत|भारत देश]] के [[उत्तर प्रदेश]] के उन्नाव जिला की एक ग्राम पंचायत है।<ref name="Census 2011">{{Cite web |title=Census of India 2011: Uttar Pradesh District Census Handbook - Unnao, Part A (Village and Town Directory) |url=https://censusindia.gov.in/2011census/dchb/UPA.html |access-date=6 July 2021 |website=Census 2011 India |pages=298–322}}</ref> यो [[सिकंदरपुर कर्ण]] महाई ग्रामीण मार्ग ते जुड़ा है। हियाँ पर एक कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय अउर दुइ प्राथमिक विद्यालय हैं। स्वास्थ्य देखभाल के लिये एक प्राथमिक उपचार केंद्र अउर एक आयुर्वेदिक अस्पताल है। हियाँ पर याक साप्ताहिक बाजार लागति है।<ref name="Census 2011" /> 2011 की जनगणना के अनुसार हियाँ पर 4471 मनई निवास करति हैं।<ref name="Census 2011" />
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दिल्ली विश्वविद्यालय
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{{Infobox University|name=दिल्ली विश्वविद्यालय|native_name=|other_name=DU|image_name=Delhi University's official logo.png|image_size=90px|caption=दिल्ली विश्वविद्यालय का प्रतीक चिन्ह|latin_name=|motto=निष्ठा धृति: सत्यम्|motto_lang=sa|mottoeng=Dedication, Steadfastness and Truth|established={{start date and age|1922}}|closed=|type=[[सार्वजनिक विश्वविद्यालय|सार्वजनिक]]|affiliation=[[विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (भारत)|यूजीसी]]|endowment=₹ १००० करोड़ <ref>{{Cite web |url=http://www.du.ac.in/du/index.php?page=The-Endowment-Fund |title=संग्रहीत प्रति |access-date=3 मार्च 2020 |archive-date=27 फ़रवरी 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200227132419/http://www.du.ac.in/du/index.php?page=The-Endowment-Fund |url-status=dead }}</ref>|officer_in_charge=|chancellor=[[भारत के उपराष्ट्रपति]]|president=|vice-president=|superintendent=|provost=|vice_chancellor=प्रो.योगेश सिंह <ref>{{Cite web |url=http://www.du.ac.in/du/index.php?page=vice-chancellor |title=संग्रहीत प्रति |access-date=1 जनवरी 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141026142028/http://du.ac.in/du/index.php?page=vice-chancellor |archive-date=26 अक्तूबर 2014 |url-status=dead }}</ref>|free_label=प्रतिकुलाधिपति|free=[[भारत के मुख्य न्यायाधीश]]|rector=|principal=|dean=|director=|faculty=१४<ref name="DU History">{{cite web|url=http://www.du.ac.in/history.html|title=DU History|access-date=14 अप्रैल 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20070731181705/http://www.du.ac.in/history.html|archive-date=31 जुलाई 2007|url-status=live}}</ref>|staff=|students=२,२०,०००<ref name="DU History"/>|undergrad=|postgrad=|doctoral=|other=|city=[[ न्यू दिल्ली]]|state=[[दिल्ली]]|province=|country=[[भारत]]|coor=|campus=[[शहरी क्षेत्र|शहरी]]|former_names=|sports=|colors=|colours=|nickname=|mascot=[[हाथी]]|athletics=|affiliations=इंस्टीट्यूट आफ एम्नीमेंस|website=[http://www.du.ac.in दिल्ली विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट]|logo=|footnotes=}}'''दिल्ली विश्वविद्यालय''' (डीयू) भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है। भारत की [[राजधानी]] दिल्ली मा स्थित ई विश्वविद्यालय कय स्थापना सन् 1922 मा भै रहै। भारत के [[भारत कय उपराष्ट्रपति|उपराष्ट्रपति]] ई विश्वविद्यालय के कुलपति होति हैं।
यो विश्वविद्यालय, THES-QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग के अनुसार भारत मा शीर्ष गैर-आईआईटी विश्वविद्यालय है, जउन 474 वें स्थान पर आवत है <ref>{{Cite web |date=2012-12-06 |title=University of Delhi |url=https://www.topuniversities.com/universities/university-delhi/undergrad |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20190213003952/https://www.topuniversities.com/universities/university-delhi/undergrad |archive-date=13 फ़रवरी 2019 |access-date=2020-03-03 |website=Top Universities |language=en}}</ref> ।
दिल्ली विश्वविद्यालय के दुई परिसर दिल्ली के उत्तरी अउर दक्खिनी भाग मा स्थित हैं। इनका क्रमशः 'उत्तर परिसर' अऊर 'दक्षिण परिसर' कहा जात है। दिल्ली विश्वविद्यालय क नार्थ कैम्पस दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन ते जुड़ा हवै। ई मेट्रो स्टेशन क नाँव 'विश्वविद्यालय' रखा गा है। उत्तरी परिसर केंद्रीय सचिवालय ते 2.5 किलोमीटर अउर महाराणा प्रताप अंतर राज्य बस टर्मिनल (कश्मीरी गेट) ते 7.0 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहिका साउथ कैम्पस पिंक लाइन ते जुड़ा है। ई मेट्रो स्टेशन का नाँव 'दुर्गाबाई देशमुख साउथ कैम्पस' रखा गा है। ई विश्वविद्यालय मा पूरे दिल्ली मा फैले कइयो कॉलेज अऊर संस्थान हैं।
== इतिहास ==
दिल्ली विश्वविद्यालय के स्थापना 1922 मा ब्रिटिश भारत के तत्कालीन केन्द्रीय विधान सभा के एक अधिनियम द्वारा एक एकात्मक, शिक्षण औ आवासीय विश्वविद्यालय के रूप मा कीन गै रहै। हरिसिंह गौड़ 1922 ते 1926 तक विश्वविद्यालय के पहिल कुलपति के रूप मा काम किहिन। उइ समय दिल्ली मा चार कॉलेज मौजूद रहैं: 1818 मा स्थापित भा सेंट स्टीफन कॉलेज, 1899 मा स्थापित हिन्दू कॉलेज, 1792 मा स्थापित जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज (तब दिल्ली कॉलेज के नाँव से जाना जात रहै), अउर 1917 मा स्थापित रामजस कॉलेज। विश्वविद्यालय मा शुरू मा दुइ संकाय (कला अउर विज्ञान) रहैं अउर लगभग 750 छात्र रहैं।
जब सर मौरिस गौर 1937 मा ब्रिटिश भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप मा सेवा करै खातिर भारत लौटे, तब उनका दिल्ली विश्वविद्यालय क कुलपति बनावा गा। उनके कार्यकाल मा, स्नातकोत्तर शिक्षण पाठ्यक्रम शुरू कीन गै अउर विश्वविद्यालय मा प्रयोगशाला स्थापित कीन गै रहै। संकाय सदस्यन मा भौतिकी मा दौलत सिंह कोठारी अउ र वनस्पति विज्ञान मा पंचानन माहेश्वरी शामिल रहैं। गौयर का "विश्वविद्यालय क निर्माता" कहा जात है। उइ 1950 तक कुलपति के रूप मा काम किहिन। <ref>{{Cite web |title=About University of Delhi - University of Delhi |url=http://www.du.ac.in/du/index.php?page=about-du-2 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20150923225131/http://www.du.ac.in/du/index.php?page=about-du-2 |archive-date=23 सितंबर 2015 |access-date=2020-03-03 |website=www.du.ac.in}}</ref>
विश्वविद्यालय के रजत जयंती वर्ष 1947 मा भारत के आजादी के साथ मनावा गा, विजयेन्द्र कस्तूरी रंगा वरदराजा राव मुख्य भवन मा पहिली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराइन। भारत के बटवारा के कारन वहि साल दीक्षांत समारोह न भा रहै। यहिके बजाय, 1948 मा एक विशेष समारोह आयोजित कीन गा रहै, जेहिमा भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू के साथ-साथ लार्ड माउंटबेटन, लेडी माउंटबेटन, अबुल कलाम आजाद, जाकिर हुसैन अऊर शांति स्वरूप भटनागर शामिल भे रहैं। पच्चीस साल बाद 1973 मा स्वर्ण जयंती समारोह मा भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी, सत्यजीत रे, अमृता प्रीतम, अउर एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी सामिल भईं रहैं।
{| style="width: 100%"
| valign="top" style="width: 459px" |
=== चांसलरन के सूची ===
{| class="wikitable"
! नै।
! कुलपति
! कार्यकाल
|-
| 1
| [[सर्वपल्ली राधाकृष्णन]]
| 13 मई 1952 – 12 मई 1962
|-
| 2
| [[ज़ाकिर हुसैन (राजनीतिज्ञ)|जाकिर हुसैन]]
| 13 मई 1962 – 12 मई 1967
|-
| 3
| [[वी॰ वी॰ गिरि|वी.वी.गिरी]]
| 13 मई 1967 – 3 मई 1969
|-
| 4
| गोपाल स्वरूप पाठक
| 31 अगस्त 1969 – 30 अगस्त 1974
|-
| 5
| [[बासप्पा दनप्पा जत्ती|बसप्पा दनप्पा जट्टी]]
| 31 अगस्त 1974 – 30 अगस्त 1979
|-
| 6
| [[मुहम्मद हिदायतुल्लाह]]
| 31 अगस्त 1979 – 30 अगस्त 1984
|-
| 7
| [[रामस्वामी वेंकटरमण|रामास्वामी वेंकटरमन]]
| 31 अगस्त 1984 – 27 जुलाई 1987
|-
| 8
| [[शंकरदयाल शर्मा|शंकर दयाल शर्मा]]
| 3 सितम्बर 1987 – 24 जुलाई 1992
|-
| 9
| [[कोच्चेरील रामन नारायणन|के.आर. नारायणन]]
| 21 अगस्त 1992 – 24 जुलाई 1997
|-
| 10
| [[कृष्ण कांत]]
| 21 अगस्त 1997 – 27 जुलाई 2002
|-
| 11
| [[भैरोंसिंह शेखावत|भैरों सिंह शेखावत]]
| अगस्त 2002 – 21 जुलाई 2007
|-
| 12
| [[मोहम्मद हामिद अंसारी]]
| 11 अगस्त 2007 – 11 अगस्त 2017
|-
| 13
| वेंकैया नायडू
| अगस्त 11, 2017 - 7 अगस्त, 2022
|-
| 14
| जगदीप धनखड़
| अगस्त 2022 से
|}
|}
{| style="width: 100%"
| valign="top" style="width: 459px" |
=== कुलपतिन के सूची ===
{| class="wikitable"
! एस.नम्बर
! नाव
! कार्यकाल
|-
| 1.
| हरि सिंह गौर
| १९२२-२६
|-
| 2.
| मोती सागर
| 1926-30
|-
| 3.
| अब्दुर रहमान
| 1930-34
|-
| 4.
| राम किशोर
| 1934-38
|-
| 5.
| [[मॉरिस ग्वायर]]
| 1938-50
|-
| 6.
| एस.एन.सेन
| 1950-53
|-
| 7.
| जी.एस.महाजनी
| 1953-57
|-
| 8.
| वी.के.आर.वी.राव
| 1957-60
|-
| 9.
| एन.के.सिद्धान्त
| 1960-61
|-
| 10.
| सी. डी. देशमुख
| 1962-67
|-
| 11.
| बी.एन. गांगुली
| 1967-69
|-
| 12.
| [[के.एन. राज]]
| 1969-70
|-
| 13.
| सरुप सिंह
| 1971-74
|-
| 14.
| आर.सी. मेहरोत्रा
| 1974-79
|-
| 15.
| गुरबक्ष सिंह
| 1980-85
|-
| 16.
| [[मूनिस रज़ा|मूनिस रजा]]
| 1985-90
|-
| 17.
| [[उपेन्द्र बक्शी|उपेंद्र बक्शी]]
| 1990-94
|-
| 18.
| वी.आर. मेहता
| 1995-2000
|-
| 19.
| [[दीपक नैयर|दीपक नायर]]
| 2000-2005
|-
| 20.
| [[दीपक पेंटल]]
| 2005-2010
|-
| 20.
| दिनेश सिंह
| 2010-2015
|-
| 21.
| योगेश त्यागी
| 2016 से 2021 तक
|}
22. |प्रोफेसर योगेश सिंह |2021 से आज तक
|}
== बर्तमान ==
दिल्ली विश्वविद्यालय मा वर्तमान मा 16 संकाय, 86 अकादमिक विभाग, 77 कॉलेज अउर 5 अन्य संबद्ध संस्थान हैं जउन पूरे शहर मा फैले हैं, जेहिमा 132,435 नियमित छात्र (114,494 स्नातक अऊर 17,941 स्नातकोत्तर) नामांकित हैं। गैर-औपचारिक शिक्षा कार्यक्रमन मा 261,169 छात्र (258,831 स्नातक अऊर 2338 स्नातकोत्तर) हैं। डीयू के रसायन विज्ञान, भूगर्भ विज्ञान, प्राणीशास्त्र, समाजशास्त्र अऊर इतिहास विभागन का उन्नत अध्ययन केंद्र का दर्जा प्रदान कीन गा है। उन्नत अध्ययन के ई केंद्र अपने क्षेत्रन मा शिक्षण अऊर अनुसंधान मा उत्कृष्टता के केंद्र के रूप मा खुद का स्थापित किहिन हैं। यहिके अलावा, विश्वविद्यालय के कइयो विभागन का अपने उत्कृष्ट शैक्षणिक काम के मान्यता मा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के विशेष सहायता कार्यक्रम के तहत अनुदान मिलत है।
डीयू भारत मा सबसे ज्यादा मांग वाली उच्च शिक्षा संस्थानन मा ते एक है। भारतीय विश्वविद्यालयन मा यहिके प्रकाशन दर सबते ज्यादा है। <ref>{{Cite web |last=https://www.careers360.com |date=2015-03-17 |title=Top Universities in India 2015- Research Ranking |url=https://university.careers360.com/articles/top-universities-in-india-2015-research-ranking |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20180723034844/https://university.careers360.com/articles/top-universities-in-india-2015-research-ranking |archive-date=23 जुलाई 2018 |access-date=2020-03-03 |website=university.careers360.com |language=en}}</ref>
विश्वविद्यालय के वार्षिक मानद डिग्री समारोह मा फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, कार्टून कलाकार आर.के. लक्ष्मण, रसायनज्ञ सी.एन.आर. राव अउर यूनाइटेड किंगडम के पूर्व प्रधानमंत्री भूमि गॉर्डन जइस बड़े बड़े लोगन का सम्मानित कीन गा है।
== दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रमुख महाविद्यालय ==
'''संबद्ध / घटक / मान्यता प्राप्त''' '''महाविद्यालय''' <ref>{{Cite web |title=List of Colleges - University of Delhi |url=http://www.du.ac.in/du/index.php?page=list-of-colleges |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20180612211507/http://www.du.ac.in/du/index.php?page=list-of-colleges |archive-date=12 जून 2018 |access-date=2020-03-03 |website=www.du.ac.in}}</ref> :
== पाठ्यक्रम अउर कॉलेज ==
प्रमुख पाठ्यक्रम-
* पीएच.डी.
* एम.फिल
* एम.ए./एम.बी.ए./एम.कॉम/एम.एससी
* बीए/बीएमएस/बीकॉम/बीएस
* भाषा सिखावै
* यूजी डिप्लोमा
* प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम
== महाविद्यालय ==
{| class="wikitable sortable" style=""
!नाम
!स्थापना वर्ष
!स्थिति/परिसर
|-
|अदिति महाविद्यालय
|१९९४
| rowspan="16" |उत्तरी परिसर
|-
|जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज
|१६९६
|-
|[[दौलत राम कॉलेज]]
|१९६०
|-
|हिन्दू कॉलेज
|१८९९
|-
|हंसराज कॉलेज
|१९४८
|-
|इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर विमेन
|१९२४
|-
|किरोड़ीमल महाविद्यालय
|१९५४
|-
|मिरांडा हाउस
|१९४८
|-
|रामजस कॉलेज
|१९१७
|-
|सेंट स्टीफ़न कॉलेज
|१८८१
|-
|शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ़ बिजनेस स्टडीज़
|१९८७
|-
|श्रीराम कॉलेज ऑफ कामर्स
|१९२६
|-
|[[श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज]]
|१९५१
|-
|मुक्त शिक्षा विद्यालय
|१९६२
|-
|[[स्वामी श्रद्धानन्द कॉलेज]]
|१९६७
|-
|[[वल्लभभाई पटेल चेस्ट इन्स्टिट्यूट्]]
|१९४९
|-
|आचार्य नरेन्द्र देव कॉलेज
|१९९१
| rowspan="27" |दक्षिणी परिसर
|-
|[[आर्यभट्ट कॉलेज]]
|१९७३
|-
|आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज
|१९५९
|-
|दिल्ली कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स एंड कॉमर्स
|१९८७
|-
|[[जीसस एंड मैरी कॉलेज]]
|१९६८
|-
|[[मैत्रेयी कॉलेज]]
|१९६७
|-
|[[मोतीलाल नेहरू कॉलेज]]
|१९६४
|-
|[[मोतीलाल नेहरू कॉलेज (सायंकालीन)]]
|१९६५
|-
|[[राम लाल आनन्द कॉलेज]]
|१९६४
|-
|[[श्री वेंकटेश्वर कॉलेज]]
|१९६१
|-
|[[कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज़]]
|१९७२
|-
|[[दिल्ली इन्स्टिट्यूट् ऑफ़ फ़ार्मासूटिकल साइंसेस एंड रिसर्च]]
|१९६४
|-
|देशबंधु कॉलेज
|१९५२
|-
|दयाल सिंह कॉलेज
|१९५९
|-
|गार्गी महाविद्यालय
|१९६७
|-
|[[इन्स्टिट्यूट् ऑफ़ होम इकॉनोमिक्स]]
|१९६१
|-
|[[कमला नेहरू कॉलेज]]
|१९६४
|-
|लेडी श्रीराम महिला महाविद्यालय
|१९५६
|-
|[[पी जी डी ए वी कॉलेज]]
|१९५७
|-
|[[पी जी डी ए वी कॉलेज (सायंकालीन)]]
|१९५८
|-
|[[राजकुमारी अमृत कौर कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग]] <ref>{{Cite web |title=RAKCON |url=http://rakcon.com/ |access-date=2023-03-25 |website=rakcon.com}}</ref>
|१९४६
|-
|[[रामानुजन कॉलेज]]
|२०१०
|-
|[[श्री अरविन्द कॉलेज]]
|१९७२
|-
|[[श्री अरविन्द कॉलेज (सायंकालीन)]]
|१९८४
|-
|शहीद भगत सिंह कॉलेज
|१९६७
|-
|[[शहीद भगत सिंह कॉलेज (सायंकालीन)]]
|१९७३
|-
|[[वन्दे मातरम कॉलेज]]
|१९५८
|-
|तिब्बिया कॉलेज
|१९१६
| rowspan="11" |मध्य परिसर
|-
|[[कॉलेज ऑफ़ आर्ट]]
|१९४२
|-
|[[जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज]]
|१९५९
|-
|लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज
|१९१६
|-
|लेडी इरविन कॉलेज
|१९३२
|-
|माता सुंदरी कॉलेज
|१९६७
|-
|[[मौलाना आज़ाद इन्स्टिट्यूट् ऑफ़ डेंटल साइंसेस]]
|२००३
|-
|[[मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज]]
|१९५६
|-
|[[श्री गुरु नानक देव खालसा कॉलेज]]
|१९५७
|-
|जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज
|१७९२
|-
|[[जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज (सायंकालीन)]]
|१९५८
|-
|महाराजा अग्रसेन कॉलेज
|१९९४
| rowspan="6" |पूर्वी दिल्ली
|-
|[[महर्षि वालमिकी कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन]]
|१९९६
|-
|[[शहीद राजगुरु कॉलेज ऑफ़ अप्लाइड साइंसेस फॉर विमेन]]
|१९८९
|-
|[[श्याम लाल कॉलेज]]
|१९६४
|-
|[[श्याम लाल कॉलेज (सायंकालीन)]]
|१९६९
|-
|[[विवेकानन्द कॉलेज]]
|१९७०
|-
|[[नेहरू होमियोपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल]]
|१९६७
|दक्षिणी दिल्ली
|-
|[[भीम राव अम्बेडकर कॉलेज]]
|१९९१
| rowspan="2" |[[उत्तर पूर्वी दिल्ली]]
|-
|[[यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेस]]
|१९७१
|-
|भारती कॉलेज
|१९७१
| rowspan="7" |[[पश्चिमी दिल्ली]]
|-
|दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज
|१९९०
|-
|[[इन्दिरा गांधी इन्स्टिट्यूट ऑफ फ़िज़िकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स साइंसेस]]
|१९८७
|-
|[[कालिंदी कॉलेज]]
|१९६७
|-
|[[राज्धानी कॉलेज]]
|१९६४
|-
|[[शिवाजी कॉलेज]]
|१९६१
|-
|श्यामाप्रसाद मुखर्जी कालेज
|१९६९
|-
|केशव महाविद्यालय
|१९९४
| rowspan="5" |[[उत्तर पश्चिमी दिल्ली]]
|-
|[[लक्ष्मीबाई कॉलेज]]
|१९६५
|-
|सत्यवती कॉलेज
|१९७२
|-
|[[सत्यवती कॉलेज (सायंकालीन)]]
|१९७३
|-
|[[श्री गुरु गोविन्द सिंह कॉलेज ऑफ कॉमर्स]]
|१९८४
|-
|[[भगिनि निवेदिता कॉलेज]]
|१९९३
| rowspan="3" |[[दक्षिण पश्चिमी दिल्ली]]
|-
|लेडी इरविन कॉलेज
|१९३२
|-
|[[भास्कराचार्य कॉलेज ऑफ अप्लाइड साइंसेस]]
|१९९५
|}
== अन्य शैक्षिक संस्थान ==
* इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र
== परिसर ==
* [[उत्तरी परिसर, दिल्ली विश्वविद्यालय|नार्थ कैम्पस, दिल्ली विश्वविद्यालय]]
* [[दक्षिणी परिसर, दिल्ली विश्वविद्यालय|साउथ कैम्पस, दिल्ली विश्वविद्यालय]]
== छात्रावास ==
* [[ग्वायर हाल|ग्वायर हॉल]]
* [[इंटरनेशनल स्टूडेंटस हाउस|अंतर्राष्ट्रीय छात्र घर]]
* [[जुबिली हाल|जुबली हॉल]]
* [[मेघदूत हाल|मेघदूत हॉल]]
* [[मानसरोवर छात्रावास]]
* [[पी.जी.मैन्स छात्रावास|पी जी पुरुषन के छात्रावास]]
== सीसीटीवी गेट ==
विश्वविद्यालय चौक दिल्ली रिंग रोड पै एक चौराहा है, जेहिका गुरु तेग बहादुर मार्ग काटत है। दिल्ली मेट्रो के येलो लाइन शाखा पर एक विश्वविद्यालय स्टेशनौ है।
== यहौ द्याखौ ==
* भारत के विश्वविद्यालय
* पटना विश्वविद्यालय
* कुलाधिपति (शिक्षा)
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
== बाहरी लिंक ==
* [https://web.archive.org/web/20110808062215/http://www.du.ac.in/index.php?id=4&L=1 '''दिल्ली विश्वविद्यालय कय''' वेबसाइट]
* [https://web.archive.org/web/20091004234739/http://www.du.ac.in/hindi/index.html दिल्ली यूनिवर्सिटी कै आधिकारिक वेबसाइट]
* [https://web.archive.org/web/20130501113154/http://www.topuniversities.com/universities/indian-institute-technology-delhi-iitd/ranking-details शीर्ष विश्वविद्यालयन के सूची]
* [https://web.archive.org/web/20110326193627/http://www.dupedia.com/ डुपीडिया] - दिल्ली विश्वविद्यालय अऊर ओनके ऑनलाइन शैक्षणिक नोट्स के बारे मा जानकारी
* [https://web.archive.org/web/20190924051915/https://www.mapsofindia.com/maps/delhi/ https://वेब.आर्काइव.ऑर्ग/वेब/20190924051915/https://www.मैप्सोफिंडिया.कॉम/मैप्स/दिल्ली/]
[[श्रेणी:शिक्षा]]
[[श्रेणी:विश्वविद्यालय]]
[[श्रेणी:उच्च शिक्षा]]
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{{Infobox University
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|image_size=90px|caption=दिल्ली विश्वविद्यालय का प्रतीक चिन्ह
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|motto=निष्ठा धृति: सत्यम्
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|established=1922
|type=[[सार्वजनिक विश्वविद्यालय|सार्वजनिक]]
|affiliation=[[विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (भारत)|यूजीसी]]|endowment=₹ १००० करोड़ <ref>{{Cite web |url=http://www.du.ac.in/du/index.php?page=The-Endowment-Fund |title=संग्रहीत प्रति |access-date=3 मार्च 2020 |archive-date=27 फ़रवरी 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200227132419/http://www.du.ac.in/du/index.php?page=The-Endowment-Fund |url-status=dead }}</ref>|officer_in_charge=|chancellor=[[भारत के उपराष्ट्रपति]]|president=|vice-president=|superintendent=|provost=|vice_chancellor=प्रो.योगेश सिंह <ref>{{Cite web |url=http://www.du.ac.in/du/index.php?page=vice-chancellor |title=संग्रहीत प्रति |access-date=1 जनवरी 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141026142028/http://du.ac.in/du/index.php?page=vice-chancellor |archive-date=26 अक्तूबर 2014 |url-status=dead }}</ref>|free_label=प्रतिकुलाधिपति|free=[[भारत के मुख्य न्यायाधीश]]|rector=|principal=|dean=|director=|faculty=१४<ref name="DU History">{{cite web|url=http://www.du.ac.in/history.html|title=DU History|access-date=14 अप्रैल 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20070731181705/http://www.du.ac.in/history.html|archive-date=31 जुलाई 2007|url-status=live}}</ref>
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}}
'''दिल्ली विश्वविद्यालय''' (डीयू) भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है। भारत की [[राजधानी]] दिल्ली मा स्थित ई विश्वविद्यालय कय स्थापना सन् 1922 मा भै रहै। भारत के [[भारत कय उपराष्ट्रपति|उपराष्ट्रपति]] ई विश्वविद्यालय के कुलपति होति हैं। यो विश्वविद्यालय, THES-QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग के अनुसार भारत मा शीर्ष गैर-आईआईटी विश्वविद्यालय है, जउन 474 वें स्थान पर आवत है <ref>{{Cite web |date=2012-12-06 |title=University of Delhi |url=https://www.topuniversities.com/universities/university-delhi/undergrad |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20190213003952/https://www.topuniversities.com/universities/university-delhi/undergrad |archive-date=13 फ़रवरी 2019 |access-date=2020-03-03 |website=Top Universities |language=en}}</ref> ।
दिल्ली विश्वविद्यालय के दुई परिसर दिल्ली के उत्तरी अउर दक्खिनी भाग मा स्थित हैं। इनका क्रमशः 'उत्तर परिसर' अऊर 'दक्षिण परिसर' कहा जात है। दिल्ली विश्वविद्यालय क नार्थ कैम्पस दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन ते जुड़ा हवै। ई मेट्रो स्टेशन क नाँव 'विश्वविद्यालय' रखा गा है। उत्तरी परिसर केंद्रीय सचिवालय ते 2.5 किलोमीटर अउर महाराणा प्रताप अंतर राज्य बस टर्मिनल (कश्मीरी गेट) ते 7.0 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहिका साउथ कैम्पस पिंक लाइन ते जुड़ा है। ई मेट्रो स्टेशन का नाँव 'दुर्गाबाई देशमुख साउथ कैम्पस' रखा गा है। ई विश्वविद्यालय मा पूरे दिल्ली मा फैले कइयो कॉलेज अऊर संस्थान हैं।
== इतिहास ==
दिल्ली विश्वविद्यालय के स्थापना 1922 मा ब्रिटिश भारत के तत्कालीन केन्द्रीय विधान सभा के एक अधिनियम द्वारा एक एकात्मक, शिक्षण औ आवासीय विश्वविद्यालय के रूप मा कीन गै रहै। हरिसिंह गौड़ 1922 ते 1926 तक विश्वविद्यालय के पहिल कुलपति के रूप मा काम किहिन। उइ समय दिल्ली मा चार कॉलेज मौजूद रहैं: 1818 मा स्थापित भा सेंट स्टीफन कॉलेज, 1899 मा स्थापित हिन्दू कॉलेज, 1792 मा स्थापित जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज (तब दिल्ली कॉलेज के नाँव से जाना जात रहै), अउर 1917 मा स्थापित रामजस कॉलेज। विश्वविद्यालय मा शुरू मा दुइ संकाय (कला अउर विज्ञान) रहैं अउर लगभग 750 छात्र रहैं।
जब सर मौरिस गौर 1937 मा ब्रिटिश भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप मा सेवा करै खातिर भारत लौटे, तब उनका दिल्ली विश्वविद्यालय क कुलपति बनावा गा। उनके कार्यकाल मा, स्नातकोत्तर शिक्षण पाठ्यक्रम शुरू कीन गै अउर विश्वविद्यालय मा प्रयोगशाला स्थापित कीन गै रहै। संकाय सदस्यन मा भौतिकी मा दौलत सिंह कोठारी अउ र वनस्पति विज्ञान मा पंचानन माहेश्वरी शामिल रहैं। गौयर का "विश्वविद्यालय क निर्माता" कहा जात है। उइ 1950 तक कुलपति के रूप मा काम किहिन। <ref>{{Cite web |title=About University of Delhi - University of Delhi |url=http://www.du.ac.in/du/index.php?page=about-du-2 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20150923225131/http://www.du.ac.in/du/index.php?page=about-du-2 |archive-date=23 सितंबर 2015 |access-date=2020-03-03 |website=www.du.ac.in}}</ref>
विश्वविद्यालय के रजत जयंती वर्ष 1947 मा भारत के आजादी के साथ मनावा गा, विजयेन्द्र कस्तूरी रंगा वरदराजा राव मुख्य भवन मा पहिली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराइन। भारत के बटवारा के कारन वहि साल दीक्षांत समारोह न भा रहै। यहिके बजाय, 1948 मा एक विशेष समारोह आयोजित कीन गा रहै, जेहिमा भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू के साथ-साथ लार्ड माउंटबेटन, लेडी माउंटबेटन, अबुल कलाम आजाद, जाकिर हुसैन अऊर शांति स्वरूप भटनागर शामिल भे रहैं। पच्चीस साल बाद 1973 मा स्वर्ण जयंती समारोह मा भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी, सत्यजीत रे, अमृता प्रीतम, अउर एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी सामिल भईं रहैं।
{| style="width: 100%"
| valign="top" style="width: 459px" |
=== कुलाधिपतिन के सूची ===
{| class="wikitable"
! नै।
! कुलपति
! कार्यकाल
|-
| 1
| [[सर्वपल्ली राधाकृष्णन]]
| 13 मई 1952 – 12 मई 1962
|-
| 2
| [[ज़ाकिर हुसैन (राजनीतिज्ञ)|जाकिर हुसैन]]
| 13 मई 1962 – 12 मई 1967
|-
| 3
| [[वी॰ वी॰ गिरि|वी.वी.गिरी]]
| 13 मई 1967 – 3 मई 1969
|-
| 4
| गोपाल स्वरूप पाठक
| 31 अगस्त 1969 – 30 अगस्त 1974
|-
| 5
| [[बासप्पा दनप्पा जत्ती|बसप्पा दनप्पा जट्टी]]
| 31 अगस्त 1974 – 30 अगस्त 1979
|-
| 6
| [[मुहम्मद हिदायतुल्लाह]]
| 31 अगस्त 1979 – 30 अगस्त 1984
|-
| 7
| [[रामस्वामी वेंकटरमण|रामास्वामी वेंकटरमन]]
| 31 अगस्त 1984 – 27 जुलाई 1987
|-
| 8
| [[शंकरदयाल शर्मा|शंकर दयाल शर्मा]]
| 3 सितम्बर 1987 – 24 जुलाई 1992
|-
| 9
| [[कोच्चेरील रामन नारायणन|के.आर. नारायणन]]
| 21 अगस्त 1992 – 24 जुलाई 1997
|-
| 10
| [[कृष्ण कांत]]
| 21 अगस्त 1997 – 27 जुलाई 2002
|-
| 11
| [[भैरोंसिंह शेखावत|भैरों सिंह शेखावत]]
| अगस्त 2002 – 21 जुलाई 2007
|-
| 12
| [[मोहम्मद हामिद अंसारी]]
| 11 अगस्त 2007 – 11 अगस्त 2017
|-
| 13
| वेंकैया नायडू
| अगस्त 11, 2017 - 7 अगस्त, 2022
|-
| 14
| जगदीप धनखड़
| अगस्त 2022 से
|}
|}
{| style="width: 100%"
| valign="top" style="width: 459px" |
=== कुलपतिन के सूची ===
{| class="wikitable"
! एस.नम्बर
! नाव
! कार्यकाल
|-
| 1.
| हरि सिंह गौर
| १९२२-२६
|-
| 2.
| मोती सागर
| 1926-30
|-
| 3.
| अब्दुर रहमान
| 1930-34
|-
| 4.
| राम किशोर
| 1934-38
|-
| 5.
| [[मॉरिस ग्वायर]]
| 1938-50
|-
| 6.
| एस.एन.सेन
| 1950-53
|-
| 7.
| जी.एस.महाजनी
| 1953-57
|-
| 8.
| वी.के.आर.वी.राव
| 1957-60
|-
| 9.
| एन.के.सिद्धान्त
| 1960-61
|-
| 10.
| सी. डी. देशमुख
| 1962-67
|-
| 11.
| बी.एन. गांगुली
| 1967-69
|-
| 12.
| [[के.एन. राज]]
| 1969-70
|-
| 13.
| सरुप सिंह
| 1971-74
|-
| 14.
| आर.सी. मेहरोत्रा
| 1974-79
|-
| 15.
| गुरबक्ष सिंह
| 1980-85
|-
| 16.
| [[मूनिस रज़ा|मूनिस रजा]]
| 1985-90
|-
| 17.
| [[उपेन्द्र बक्शी|उपेंद्र बक्शी]]
| 1990-94
|-
| 18.
| वी.आर. मेहता
| 1995-2000
|-
| 19.
| [[दीपक नैयर|दीपक नायर]]
| 2000-2005
|-
| 20.
| [[दीपक पेंटल]]
| 2005-2010
|-
| 20.
| दिनेश सिंह
| 2010-2015
|-
| 21.
| योगेश त्यागी
| 2016 से 2021 तक
|}
22. |प्रोफेसर योगेश सिंह |2021 से आज तक
|}
== बर्तमान ==
दिल्ली विश्वविद्यालय मा वर्तमान मा 16 संकाय, 86 अकादमिक विभाग, 77 कॉलेज अउर 5 अन्य संबद्ध संस्थान हैं जउन पूरे शहर मा फैले हैं, जेहिमा 132,435 नियमित छात्र (114,494 स्नातक अऊर 17,941 स्नातकोत्तर) नामांकित हैं। गैर-औपचारिक शिक्षा कार्यक्रमन मा 261,169 छात्र (258,831 स्नातक अऊर 2338 स्नातकोत्तर) हैं। डीयू के रसायन विज्ञान, भूगर्भ विज्ञान, प्राणीशास्त्र, समाजशास्त्र अऊर इतिहास विभागन का उन्नत अध्ययन केंद्र का दर्जा प्रदान कीन गा है। उन्नत अध्ययन के ई केंद्र अपने क्षेत्रन मा शिक्षण अऊर अनुसंधान मा उत्कृष्टता के केंद्र के रूप मा खुद का स्थापित किहिन हैं। यहिके अलावा, विश्वविद्यालय के कइयो विभागन का अपने उत्कृष्ट शैक्षणिक काम के मान्यता मा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के विशेष सहायता कार्यक्रम के तहत अनुदान मिलत है।
डीयू भारत मा सबसे ज्यादा मांग वाली उच्च शिक्षा संस्थानन मा ते एक है। भारतीय विश्वविद्यालयन मा यहिके प्रकाशन दर सबते ज्यादा है। <ref>{{Cite web |last=https://www.careers360.com |date=2015-03-17 |title=Top Universities in India 2015- Research Ranking |url=https://university.careers360.com/articles/top-universities-in-india-2015-research-ranking |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20180723034844/https://university.careers360.com/articles/top-universities-in-india-2015-research-ranking |archive-date=23 जुलाई 2018 |access-date=2020-03-03 |website=university.careers360.com |language=en}}</ref>
विश्वविद्यालय के वार्षिक मानद डिग्री समारोह मा फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, कार्टून कलाकार आर.के. लक्ष्मण, रसायनज्ञ सी.एन.आर. राव अउर यूनाइटेड किंगडम के पूर्व प्रधानमंत्री भूमि गॉर्डन जइस बड़े बड़े लोगन का सम्मानित कीन गा है।
== दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रमुख महाविद्यालय ==
'''संबद्ध / घटक / मान्यता प्राप्त''' '''महाविद्यालय''' <ref>{{Cite web |title=List of Colleges - University of Delhi |url=http://www.du.ac.in/du/index.php?page=list-of-colleges |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20180612211507/http://www.du.ac.in/du/index.php?page=list-of-colleges |archive-date=12 जून 2018 |access-date=2020-03-03 |website=www.du.ac.in}}</ref> :
== पाठ्यक्रम अउर कॉलेज ==
प्रमुख पाठ्यक्रम-
* पीएच.डी.
* एम.फिल
* एम.ए./एम.बी.ए./एम.कॉम/एम.एससी
* बीए/बीएमएस/बीकॉम/बीएस
* भाषा सिखावै
* यूजी डिप्लोमा
* प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम
== महाविद्यालय ==
{| class="wikitable sortable" style=""
!नाम
!स्थापना वर्ष
!स्थिति/परिसर
|-
|अदिति महाविद्यालय
|१९९४
| rowspan="16" |उत्तरी परिसर
|-
|जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज
|१६९६
|-
|[[दौलत राम कॉलेज]]
|१९६०
|-
|हिन्दू कॉलेज
|१८९९
|-
|हंसराज कॉलेज
|१९४८
|-
|इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर विमेन
|१९२४
|-
|किरोड़ीमल महाविद्यालय
|१९५४
|-
|मिरांडा हाउस
|१९४८
|-
|रामजस कॉलेज
|१९१७
|-
|सेंट स्टीफ़न कॉलेज
|१८८१
|-
|शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ़ बिजनेस स्टडीज़
|१९८७
|-
|श्रीराम कॉलेज ऑफ कामर्स
|१९२६
|-
|[[श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज]]
|१९५१
|-
|मुक्त शिक्षा विद्यालय
|१९६२
|-
|[[स्वामी श्रद्धानन्द कॉलेज]]
|१९६७
|-
|[[वल्लभभाई पटेल चेस्ट इन्स्टिट्यूट्]]
|१९४९
|-
|आचार्य नरेन्द्र देव कॉलेज
|१९९१
| rowspan="27" |दक्षिणी परिसर
|-
|[[आर्यभट्ट कॉलेज]]
|१९७३
|-
|आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज
|१९५९
|-
|दिल्ली कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स एंड कॉमर्स
|१९८७
|-
|[[जीसस एंड मैरी कॉलेज]]
|१९६८
|-
|[[मैत्रेयी कॉलेज]]
|१९६७
|-
|[[मोतीलाल नेहरू कॉलेज]]
|१९६४
|-
|[[मोतीलाल नेहरू कॉलेज (सायंकालीन)]]
|१९६५
|-
|[[राम लाल आनन्द कॉलेज]]
|१९६४
|-
|[[श्री वेंकटेश्वर कॉलेज]]
|१९६१
|-
|[[कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज़]]
|१९७२
|-
|[[दिल्ली इन्स्टिट्यूट् ऑफ़ फ़ार्मासूटिकल साइंसेस एंड रिसर्च]]
|१९६४
|-
|देशबंधु कॉलेज
|१९५२
|-
|दयाल सिंह कॉलेज
|१९५९
|-
|गार्गी महाविद्यालय
|१९६७
|-
|[[इन्स्टिट्यूट् ऑफ़ होम इकॉनोमिक्स]]
|१९६१
|-
|[[कमला नेहरू कॉलेज]]
|१९६४
|-
|लेडी श्रीराम महिला महाविद्यालय
|१९५६
|-
|[[पी जी डी ए वी कॉलेज]]
|१९५७
|-
|[[पी जी डी ए वी कॉलेज (सायंकालीन)]]
|१९५८
|-
|[[राजकुमारी अमृत कौर कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग]] <ref>{{Cite web |title=RAKCON |url=http://rakcon.com/ |access-date=2023-03-25 |website=rakcon.com}}</ref>
|१९४६
|-
|[[रामानुजन कॉलेज]]
|२०१०
|-
|[[श्री अरविन्द कॉलेज]]
|१९७२
|-
|[[श्री अरविन्द कॉलेज (सायंकालीन)]]
|१९८४
|-
|शहीद भगत सिंह कॉलेज
|१९६७
|-
|[[शहीद भगत सिंह कॉलेज (सायंकालीन)]]
|१९७३
|-
|[[वन्दे मातरम कॉलेज]]
|१९५८
|-
|तिब्बिया कॉलेज
|१९१६
| rowspan="11" |मध्य परिसर
|-
|[[कॉलेज ऑफ़ आर्ट]]
|१९४२
|-
|[[जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज]]
|१९५९
|-
|लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज
|१९१६
|-
|लेडी इरविन कॉलेज
|१९३२
|-
|माता सुंदरी कॉलेज
|१९६७
|-
|[[मौलाना आज़ाद इन्स्टिट्यूट् ऑफ़ डेंटल साइंसेस]]
|२००३
|-
|[[मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज]]
|१९५६
|-
|[[श्री गुरु नानक देव खालसा कॉलेज]]
|१९५७
|-
|जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज
|१७९२
|-
|[[जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज (सायंकालीन)]]
|१९५८
|-
|महाराजा अग्रसेन कॉलेज
|१९९४
| rowspan="6" |पूर्वी दिल्ली
|-
|[[महर्षि वालमिकी कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन]]
|१९९६
|-
|[[शहीद राजगुरु कॉलेज ऑफ़ अप्लाइड साइंसेस फॉर विमेन]]
|१९८९
|-
|[[श्याम लाल कॉलेज]]
|१९६४
|-
|[[श्याम लाल कॉलेज (सायंकालीन)]]
|१९६९
|-
|[[विवेकानन्द कॉलेज]]
|१९७०
|-
|[[नेहरू होमियोपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल]]
|१९६७
|दक्षिणी दिल्ली
|-
|[[भीम राव अम्बेडकर कॉलेज]]
|१९९१
| rowspan="2" |[[उत्तर पूर्वी दिल्ली]]
|-
|[[यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेस]]
|१९७१
|-
|भारती कॉलेज
|१९७१
| rowspan="7" |[[पश्चिमी दिल्ली]]
|-
|दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज
|१९९०
|-
|[[इन्दिरा गांधी इन्स्टिट्यूट ऑफ फ़िज़िकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स साइंसेस]]
|१९८७
|-
|[[कालिंदी कॉलेज]]
|१९६७
|-
|[[राज्धानी कॉलेज]]
|१९६४
|-
|[[शिवाजी कॉलेज]]
|१९६१
|-
|श्यामाप्रसाद मुखर्जी कालेज
|१९६९
|-
|केशव महाविद्यालय
|१९९४
| rowspan="5" |[[उत्तर पश्चिमी दिल्ली]]
|-
|[[लक्ष्मीबाई कॉलेज]]
|१९६५
|-
|सत्यवती कॉलेज
|१९७२
|-
|[[सत्यवती कॉलेज (सायंकालीन)]]
|१९७३
|-
|[[श्री गुरु गोविन्द सिंह कॉलेज ऑफ कॉमर्स]]
|१९८४
|-
|[[भगिनि निवेदिता कॉलेज]]
|१९९३
| rowspan="3" |[[दक्षिण पश्चिमी दिल्ली]]
|-
|लेडी इरविन कॉलेज
|१९३२
|-
|[[भास्कराचार्य कॉलेज ऑफ अप्लाइड साइंसेस]]
|१९९५
|}
== अन्य शैक्षिक संस्थान ==
* इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र
== परिसर ==
* [[उत्तरी परिसर, दिल्ली विश्वविद्यालय|नार्थ कैम्पस, दिल्ली विश्वविद्यालय]]
* [[दक्षिणी परिसर, दिल्ली विश्वविद्यालय|साउथ कैम्पस, दिल्ली विश्वविद्यालय]]
== छात्रावास ==
* [[ग्वायर हाल|ग्वायर हॉल]]
* [[इंटरनेशनल स्टूडेंटस हाउस|अंतर्राष्ट्रीय छात्र घर]]
* [[जुबिली हाल|जुबली हॉल]]
* [[मेघदूत हाल|मेघदूत हॉल]]
* [[मानसरोवर छात्रावास]]
* [[पी.जी.मैन्स छात्रावास|पी जी पुरुषन के छात्रावास]]
== सीसीटीवी गेट ==
विश्वविद्यालय चौक दिल्ली रिंग रोड पै एक चौराहा है, जेहिका गुरु तेग बहादुर मार्ग काटत है। दिल्ली मेट्रो के येलो लाइन शाखा पर एक विश्वविद्यालय स्टेशनौ है।
== यहौ द्याखौ ==
* भारत के विश्वविद्यालय
* पटना विश्वविद्यालय
* कुलाधिपति (शिक्षा)
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
== बाहरी लिंक ==
* [https://web.archive.org/web/20110808062215/http://www.du.ac.in/index.php?id=4&L=1 '''दिल्ली विश्वविद्यालय कय''' वेबसाइट]
* [https://web.archive.org/web/20091004234739/http://www.du.ac.in/hindi/index.html दिल्ली यूनिवर्सिटी कै आधिकारिक वेबसाइट]
* [https://web.archive.org/web/20130501113154/http://www.topuniversities.com/universities/indian-institute-technology-delhi-iitd/ranking-details शीर्ष विश्वविद्यालयन के सूची]
* [https://web.archive.org/web/20110326193627/http://www.dupedia.com/ डुपीडिया] - दिल्ली विश्वविद्यालय अऊर ओनके ऑनलाइन शैक्षणिक नोट्स के बारे मा जानकारी
* [https://web.archive.org/web/20190924051915/https://www.mapsofindia.com/maps/delhi/ https://वेब.आर्काइव.ऑर्ग/वेब/20190924051915/https://www.मैप्सोफिंडिया.कॉम/मैप्स/दिल्ली/]
[[श्रेणी:शिक्षा]]
[[श्रेणी:विश्वविद्यालय]]
[[श्रेणी:उच्च शिक्षा]]
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35278
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2026-07-07T09:06:56Z
Avimaarak
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wikitext
text/x-wiki
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है। भारत की [[राजधानी]] दिल्ली मा स्थित ई विश्वविद्यालय कय स्थापना सन् 1922 मा भै रहै। भारत के [[भारत कय उपराष्ट्रपति|उपराष्ट्रपति]] ई विश्वविद्यालय के कुलपति होति हैं। यो विश्वविद्यालय, THES-QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग के अनुसार भारत मा शीर्ष गैर-आईआईटी विश्वविद्यालय है, जउन 474 वें स्थान पर आवत है <ref>{{Cite web |date=2012-12-06 |title=University of Delhi |url=https://www.topuniversities.com/universities/university-delhi/undergrad |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20190213003952/https://www.topuniversities.com/universities/university-delhi/undergrad |archive-date=13 फ़रवरी 2019 |access-date=2020-03-03 |website=Top Universities |language=en}}</ref> ।
दिल्ली विश्वविद्यालय के दुई परिसर दिल्ली के उत्तरी अउर दक्खिनी भाग मा स्थित हैं। इनका क्रमशः 'उत्तर परिसर' अऊर 'दक्षिण परिसर' कहा जात है। दिल्ली विश्वविद्यालय क नार्थ कैम्पस दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन ते जुड़ा हवै। ई मेट्रो स्टेशन क नाँव 'विश्वविद्यालय' रखा गा है। उत्तरी परिसर केंद्रीय सचिवालय ते 2.5 किलोमीटर अउर महाराणा प्रताप अंतर राज्य बस टर्मिनल (कश्मीरी गेट) ते 7.0 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहिका साउथ कैम्पस पिंक लाइन ते जुड़ा है। ई मेट्रो स्टेशन का नाँव 'दुर्गाबाई देशमुख साउथ कैम्पस' रखा गा है। ई विश्वविद्यालय मा पूरे दिल्ली मा फैले कइयो कॉलेज अऊर संस्थान हैं।
== इतिहास ==
दिल्ली विश्वविद्यालय के स्थापना 1922 मा ब्रिटिश भारत के तत्कालीन केन्द्रीय विधान सभा के एक अधिनियम द्वारा एक एकात्मक, शिक्षण औ आवासीय विश्वविद्यालय के रूप मा कीन गै रहै। हरिसिंह गौड़ 1922 ते 1926 तक विश्वविद्यालय के पहिल कुलपति के रूप मा काम किहिन। उइ समय दिल्ली मा चार कॉलेज मौजूद रहैं: 1818 मा स्थापित भा सेंट स्टीफन कॉलेज, 1899 मा स्थापित हिन्दू कॉलेज, 1792 मा स्थापित जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज (तब दिल्ली कॉलेज के नाँव से जाना जात रहै), अउर 1917 मा स्थापित रामजस कॉलेज। विश्वविद्यालय मा शुरू मा दुइ संकाय (कला अउर विज्ञान) रहैं अउर लगभग 750 छात्र रहैं।
जब सर मौरिस गौर 1937 मा ब्रिटिश भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप मा सेवा करै खातिर भारत लौटे, तब उनका दिल्ली विश्वविद्यालय क कुलपति बनावा गा। उनके कार्यकाल मा, स्नातकोत्तर शिक्षण पाठ्यक्रम शुरू कीन गै अउर विश्वविद्यालय मा प्रयोगशाला स्थापित कीन गै रहै। संकाय सदस्यन मा भौतिकी मा दौलत सिंह कोठारी अउ र वनस्पति विज्ञान मा पंचानन माहेश्वरी शामिल रहैं। गौयर का "विश्वविद्यालय क निर्माता" कहा जात है। उइ 1950 तक कुलपति के रूप मा काम किहिन। <ref>{{Cite web |title=About University of Delhi - University of Delhi |url=http://www.du.ac.in/du/index.php?page=about-du-2 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20150923225131/http://www.du.ac.in/du/index.php?page=about-du-2 |archive-date=23 सितंबर 2015 |access-date=2020-03-03 |website=www.du.ac.in}}</ref>
विश्वविद्यालय के रजत जयंती वर्ष 1947 मा भारत के आजादी के साथ मनावा गा, विजयेन्द्र कस्तूरी रंगा वरदराजा राव मुख्य भवन मा पहिली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराइन। भारत के बटवारा के कारन वहि साल दीक्षांत समारोह न भा रहै। यहिके बजाय, 1948 मा एक विशेष समारोह आयोजित कीन गा रहै, जेहिमा भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू के साथ-साथ लार्ड माउंटबेटन, लेडी माउंटबेटन, अबुल कलाम आजाद, जाकिर हुसैन अऊर शांति स्वरूप भटनागर शामिल भे रहैं। पच्चीस साल बाद 1973 मा स्वर्ण जयंती समारोह मा भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी, सत्यजीत रे, अमृता प्रीतम, अउर एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी सामिल भईं रहैं।
{| style="width: 100%"
| valign="top" style="width: 459px" |
=== कुलाधिपतिन के सूची ===
{| class="wikitable"
! नै।
! कुलपति
! कार्यकाल
|-
| 1
| [[सर्वपल्ली राधाकृष्णन]]
| 13 मई 1952 – 12 मई 1962
|-
| 2
| [[ज़ाकिर हुसैन (राजनीतिज्ञ)|जाकिर हुसैन]]
| 13 मई 1962 – 12 मई 1967
|-
| 3
| [[वी॰ वी॰ गिरि|वी.वी.गिरी]]
| 13 मई 1967 – 3 मई 1969
|-
| 4
| गोपाल स्वरूप पाठक
| 31 अगस्त 1969 – 30 अगस्त 1974
|-
| 5
| [[बासप्पा दनप्पा जत्ती|बसप्पा दनप्पा जट्टी]]
| 31 अगस्त 1974 – 30 अगस्त 1979
|-
| 6
| [[मुहम्मद हिदायतुल्लाह]]
| 31 अगस्त 1979 – 30 अगस्त 1984
|-
| 7
| [[रामस्वामी वेंकटरमण|रामास्वामी वेंकटरमन]]
| 31 अगस्त 1984 – 27 जुलाई 1987
|-
| 8
| [[शंकरदयाल शर्मा|शंकर दयाल शर्मा]]
| 3 सितम्बर 1987 – 24 जुलाई 1992
|-
| 9
| [[कोच्चेरील रामन नारायणन|के.आर. नारायणन]]
| 21 अगस्त 1992 – 24 जुलाई 1997
|-
| 10
| [[कृष्ण कांत]]
| 21 अगस्त 1997 – 27 जुलाई 2002
|-
| 11
| [[भैरोंसिंह शेखावत|भैरों सिंह शेखावत]]
| अगस्त 2002 – 21 जुलाई 2007
|-
| 12
| [[मोहम्मद हामिद अंसारी]]
| 11 अगस्त 2007 – 11 अगस्त 2017
|-
| 13
| वेंकैया नायडू
| अगस्त 11, 2017 - 7 अगस्त, 2022
|-
| 14
| जगदीप धनखड़
| अगस्त 2022 से
|}
|}
{| style="width: 100%"
| valign="top" style="width: 459px" |
=== कुलपतिन के सूची ===
{| class="wikitable"
! एस.नम्बर
! नाव
! कार्यकाल
|-
| 1.
| हरि सिंह गौर
| १९२२-२६
|-
| 2.
| मोती सागर
| 1926-30
|-
| 3.
| अब्दुर रहमान
| 1930-34
|-
| 4.
| राम किशोर
| 1934-38
|-
| 5.
| [[मॉरिस ग्वायर]]
| 1938-50
|-
| 6.
| एस.एन.सेन
| 1950-53
|-
| 7.
| जी.एस.महाजनी
| 1953-57
|-
| 8.
| वी.के.आर.वी.राव
| 1957-60
|-
| 9.
| एन.के.सिद्धान्त
| 1960-61
|-
| 10.
| सी. डी. देशमुख
| 1962-67
|-
| 11.
| बी.एन. गांगुली
| 1967-69
|-
| 12.
| [[के.एन. राज]]
| 1969-70
|-
| 13.
| सरुप सिंह
| 1971-74
|-
| 14.
| आर.सी. मेहरोत्रा
| 1974-79
|-
| 15.
| गुरबक्ष सिंह
| 1980-85
|-
| 16.
| [[मूनिस रज़ा|मूनिस रजा]]
| 1985-90
|-
| 17.
| [[उपेन्द्र बक्शी|उपेंद्र बक्शी]]
| 1990-94
|-
| 18.
| वी.आर. मेहता
| 1995-2000
|-
| 19.
| [[दीपक नैयर|दीपक नायर]]
| 2000-2005
|-
| 20.
| [[दीपक पेंटल]]
| 2005-2010
|-
| 20.
| दिनेश सिंह
| 2010-2015
|-
| 21.
| योगेश त्यागी
| 2016 से 2021 तक
|}
22. |प्रोफेसर योगेश सिंह |2021 से आज तक
|}
== बर्तमान ==
दिल्ली विश्वविद्यालय मा वर्तमान मा 16 संकाय, 86 अकादमिक विभाग, 77 कॉलेज अउर 5 अन्य संबद्ध संस्थान हैं जउन पूरे शहर मा फैले हैं, जेहिमा 132,435 नियमित छात्र (114,494 स्नातक अऊर 17,941 स्नातकोत्तर) नामांकित हैं। गैर-औपचारिक शिक्षा कार्यक्रमन मा 261,169 छात्र (258,831 स्नातक अऊर 2338 स्नातकोत्तर) हैं। डीयू के रसायन विज्ञान, भूगर्भ विज्ञान, प्राणीशास्त्र, समाजशास्त्र अऊर इतिहास विभागन का उन्नत अध्ययन केंद्र का दर्जा प्रदान कीन गा है। उन्नत अध्ययन के ई केंद्र अपने क्षेत्रन मा शिक्षण अऊर अनुसंधान मा उत्कृष्टता के केंद्र के रूप मा खुद का स्थापित किहिन हैं। यहिके अलावा, विश्वविद्यालय के कइयो विभागन का अपने उत्कृष्ट शैक्षणिक काम के मान्यता मा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के विशेष सहायता कार्यक्रम के तहत अनुदान मिलत है।
डीयू भारत मा सबसे ज्यादा मांग वाली उच्च शिक्षा संस्थानन मा ते एक है। भारतीय विश्वविद्यालयन मा यहिके प्रकाशन दर सबते ज्यादा है। <ref>{{Cite web |last=https://www.careers360.com |date=2015-03-17 |title=Top Universities in India 2015- Research Ranking |url=https://university.careers360.com/articles/top-universities-in-india-2015-research-ranking |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20180723034844/https://university.careers360.com/articles/top-universities-in-india-2015-research-ranking |archive-date=23 जुलाई 2018 |access-date=2020-03-03 |website=university.careers360.com |language=en}}</ref>
विश्वविद्यालय के वार्षिक मानद डिग्री समारोह मा फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, कार्टून कलाकार आर.के. लक्ष्मण, रसायनज्ञ सी.एन.आर. राव अउर यूनाइटेड किंगडम के पूर्व प्रधानमंत्री भूमि गॉर्डन जइस बड़े बड़े लोगन का सम्मानित कीन गा है।
== दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रमुख महाविद्यालय ==
'''संबद्ध / घटक / मान्यता प्राप्त''' '''महाविद्यालय''' <ref>{{Cite web |title=List of Colleges - University of Delhi |url=http://www.du.ac.in/du/index.php?page=list-of-colleges |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20180612211507/http://www.du.ac.in/du/index.php?page=list-of-colleges |archive-date=12 जून 2018 |access-date=2020-03-03 |website=www.du.ac.in}}</ref> :
== पाठ्यक्रम अउर कॉलेज ==
प्रमुख पाठ्यक्रम-
* पीएच.डी.
* एम.फिल
* एम.ए./एम.बी.ए./एम.कॉम/एम.एससी
* बीए/बीएमएस/बीकॉम/बीएस
* भाषा सिखावै
* यूजी डिप्लोमा
* प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम
== महाविद्यालय ==
{| class="wikitable sortable" style=""
!नाम
!स्थापना वर्ष
!स्थिति/परिसर
|-
|अदिति महाविद्यालय
|१९९४
| rowspan="16" |उत्तरी परिसर
|-
|जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज
|१६९६
|-
|[[दौलत राम कॉलेज]]
|१९६०
|-
|हिन्दू कॉलेज
|१८९९
|-
|हंसराज कॉलेज
|१९४८
|-
|इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर विमेन
|१९२४
|-
|किरोड़ीमल महाविद्यालय
|१९५४
|-
|मिरांडा हाउस
|१९४८
|-
|रामजस कॉलेज
|१९१७
|-
|सेंट स्टीफ़न कॉलेज
|१८८१
|-
|शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ़ बिजनेस स्टडीज़
|१९८७
|-
|श्रीराम कॉलेज ऑफ कामर्स
|१९२६
|-
|[[श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज]]
|१९५१
|-
|मुक्त शिक्षा विद्यालय
|१९६२
|-
|[[स्वामी श्रद्धानन्द कॉलेज]]
|१९६७
|-
|[[वल्लभभाई पटेल चेस्ट इन्स्टिट्यूट्]]
|१९४९
|-
|आचार्य नरेन्द्र देव कॉलेज
|१९९१
| rowspan="27" |दक्षिणी परिसर
|-
|[[आर्यभट्ट कॉलेज]]
|१९७३
|-
|आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज
|१९५९
|-
|दिल्ली कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स एंड कॉमर्स
|१९८७
|-
|[[जीसस एंड मैरी कॉलेज]]
|१९६८
|-
|[[मैत्रेयी कॉलेज]]
|१९६७
|-
|[[मोतीलाल नेहरू कॉलेज]]
|१९६४
|-
|[[मोतीलाल नेहरू कॉलेज (सायंकालीन)]]
|१९६५
|-
|[[राम लाल आनन्द कॉलेज]]
|१९६४
|-
|[[श्री वेंकटेश्वर कॉलेज]]
|१९६१
|-
|[[कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज़]]
|१९७२
|-
|[[दिल्ली इन्स्टिट्यूट् ऑफ़ फ़ार्मासूटिकल साइंसेस एंड रिसर्च]]
|१९६४
|-
|देशबंधु कॉलेज
|१९५२
|-
|दयाल सिंह कॉलेज
|१९५९
|-
|गार्गी महाविद्यालय
|१९६७
|-
|[[इन्स्टिट्यूट् ऑफ़ होम इकॉनोमिक्स]]
|१९६१
|-
|[[कमला नेहरू कॉलेज]]
|१९६४
|-
|लेडी श्रीराम महिला महाविद्यालय
|१९५६
|-
|[[पी जी डी ए वी कॉलेज]]
|१९५७
|-
|[[पी जी डी ए वी कॉलेज (सायंकालीन)]]
|१९५८
|-
|[[राजकुमारी अमृत कौर कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग]] <ref>{{Cite web |title=RAKCON |url=http://rakcon.com/ |access-date=2023-03-25 |website=rakcon.com}}</ref>
|१९४६
|-
|[[रामानुजन कॉलेज]]
|२०१०
|-
|[[श्री अरविन्द कॉलेज]]
|१९७२
|-
|[[श्री अरविन्द कॉलेज (सायंकालीन)]]
|१९८४
|-
|शहीद भगत सिंह कॉलेज
|१९६७
|-
|[[शहीद भगत सिंह कॉलेज (सायंकालीन)]]
|१९७३
|-
|[[वन्दे मातरम कॉलेज]]
|१९५८
|-
|तिब्बिया कॉलेज
|१९१६
| rowspan="11" |मध्य परिसर
|-
|[[कॉलेज ऑफ़ आर्ट]]
|१९४२
|-
|[[जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज]]
|१९५९
|-
|लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज
|१९१६
|-
|लेडी इरविन कॉलेज
|१९३२
|-
|माता सुंदरी कॉलेज
|१९६७
|-
|[[मौलाना आज़ाद इन्स्टिट्यूट् ऑफ़ डेंटल साइंसेस]]
|२००३
|-
|[[मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज]]
|१९५६
|-
|[[श्री गुरु नानक देव खालसा कॉलेज]]
|१९५७
|-
|जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज
|१७९२
|-
|[[जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज (सायंकालीन)]]
|१९५८
|-
|महाराजा अग्रसेन कॉलेज
|१९९४
| rowspan="6" |पूर्वी दिल्ली
|-
|[[महर्षि वालमिकी कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन]]
|१९९६
|-
|[[शहीद राजगुरु कॉलेज ऑफ़ अप्लाइड साइंसेस फॉर विमेन]]
|१९८९
|-
|[[श्याम लाल कॉलेज]]
|१९६४
|-
|[[श्याम लाल कॉलेज (सायंकालीन)]]
|१९६९
|-
|[[विवेकानन्द कॉलेज]]
|१९७०
|-
|[[नेहरू होमियोपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल]]
|१९६७
|दक्षिणी दिल्ली
|-
|[[भीम राव अम्बेडकर कॉलेज]]
|१९९१
| rowspan="2" |[[उत्तर पूर्वी दिल्ली]]
|-
|[[यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेस]]
|१९७१
|-
|भारती कॉलेज
|१९७१
| rowspan="7" |[[पश्चिमी दिल्ली]]
|-
|दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज
|१९९०
|-
|[[इन्दिरा गांधी इन्स्टिट्यूट ऑफ फ़िज़िकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स साइंसेस]]
|१९८७
|-
|[[कालिंदी कॉलेज]]
|१९६७
|-
|[[राज्धानी कॉलेज]]
|१९६४
|-
|[[शिवाजी कॉलेज]]
|१९६१
|-
|श्यामाप्रसाद मुखर्जी कालेज
|१९६९
|-
|केशव महाविद्यालय
|१९९४
| rowspan="5" |[[उत्तर पश्चिमी दिल्ली]]
|-
|[[लक्ष्मीबाई कॉलेज]]
|१९६५
|-
|सत्यवती कॉलेज
|१९७२
|-
|[[सत्यवती कॉलेज (सायंकालीन)]]
|१९७३
|-
|[[श्री गुरु गोविन्द सिंह कॉलेज ऑफ कॉमर्स]]
|१९८४
|-
|[[भगिनि निवेदिता कॉलेज]]
|१९९३
| rowspan="3" |[[दक्षिण पश्चिमी दिल्ली]]
|-
|लेडी इरविन कॉलेज
|१९३२
|-
|[[भास्कराचार्य कॉलेज ऑफ अप्लाइड साइंसेस]]
|१९९५
|}
== अन्य शैक्षिक संस्थान ==
* इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र
== परिसर ==
* [[उत्तरी परिसर, दिल्ली विश्वविद्यालय|नार्थ कैम्पस, दिल्ली विश्वविद्यालय]]
* [[दक्षिणी परिसर, दिल्ली विश्वविद्यालय|साउथ कैम्पस, दिल्ली विश्वविद्यालय]]
== छात्रावास ==
* [[ग्वायर हाल|ग्वायर हॉल]]
* [[इंटरनेशनल स्टूडेंटस हाउस|अंतर्राष्ट्रीय छात्र घर]]
* [[जुबिली हाल|जुबली हॉल]]
* [[मेघदूत हाल|मेघदूत हॉल]]
* [[मानसरोवर छात्रावास]]
* [[पी.जी.मैन्स छात्रावास|पी जी पुरुषन के छात्रावास]]
== सीसीटीवी गेट ==
विश्वविद्यालय चौक दिल्ली रिंग रोड पै एक चौराहा है, जेहिका गुरु तेग बहादुर मार्ग काटत है। दिल्ली मेट्रो के येलो लाइन शाखा पर एक विश्वविद्यालय स्टेशनौ है।
== यहौ द्याखौ ==
* भारत के विश्वविद्यालय
* पटना विश्वविद्यालय
* कुलाधिपति (शिक्षा)
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
== बाहरी लिंक ==
* [https://web.archive.org/web/20110808062215/http://www.du.ac.in/index.php?id=4&L=1 '''दिल्ली विश्वविद्यालय कय''' वेबसाइट]
* [https://web.archive.org/web/20091004234739/http://www.du.ac.in/hindi/index.html दिल्ली यूनिवर्सिटी कै आधिकारिक वेबसाइट]
* [https://web.archive.org/web/20130501113154/http://www.topuniversities.com/universities/indian-institute-technology-delhi-iitd/ranking-details शीर्ष विश्वविद्यालयन के सूची]
* [https://web.archive.org/web/20110326193627/http://www.dupedia.com/ डुपीडिया] - दिल्ली विश्वविद्यालय अऊर ओनके ऑनलाइन शैक्षणिक नोट्स के बारे मा जानकारी
* [https://web.archive.org/web/20190924051915/https://www.mapsofindia.com/maps/delhi/ https://वेब.आर्काइव.ऑर्ग/वेब/20190924051915/https://www.मैप्सोफिंडिया.कॉम/मैप्स/दिल्ली/]
[[श्रेणी:शिक्षा]]
[[श्रेणी:विश्वविद्यालय]]
[[श्रेणी:उच्च शिक्षा]]
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विनोद कुमार शुक्ल
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"[[:en:Special:Redirect/revision/1355809656|Vinod Kumar Shukla]]" पन्ना कै अनुवाद कइके बनवा गा
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'''विनोद कुमार शुक्ल''' (1 जनवरी 1937 - 23 दिसंबर 2025) एक भारतीय [[हिन्दी|हिंदी]] लेखक रहैं। उइ अपनी विलक्षण लेखन शैली के लिए जाने जात रहैं जेहिका जादुई यथार्थवाद के नाम ते जाना जात है। इनकी रचनन मा ''नौकर की कमीज'' (नौकर के कमीज) अउर ''दीवार में एक खिड़की रहती थी'' उपन्यास शामिल रहैं। ''दीवार में एक खिड़की रहती थी'' का 1999 मा सर्वश्रेष्ठ हिंदी काम के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। <ref>{{Cite web |date=23 March 2025 |title='A storyteller of hope & light': Vinod Kumar Shukla wins Jnanpith award |url=https://indianexpress.com/article/india/a-storyteller-of-hope-light-vinod-kumar-shukla-wins-jnanpith-award-9900773/ |access-date=27 May 2025 |website=The Indian Express |language=en}}</ref> रंगमंच-निर्देशक मोहन महर्षि द्वारा ई उपन्यास का मंचीय नाटक के रूप मा परिवर्तन कीन गा है। {{Reflist}}
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| birth_date = {{birth date|1937|1|1|df=y}}
| birth_place = [[राजनांदगाँव]], [[नंदगाँव राज्य]], [[ब्रिटिश भारत]]
| death_date = 23 दिसंबर 2025
| death_place = [[रायपुर]], छत्तीसगढ़, भारत
| occupation = कवि, उपन्यासकार, लघुकथा लेखक, शिक्षक
| language = [[हिन्दी]]
| nationality = भारतीय
| citizenship = भारत
| education = कृषि विज्ञान में स्नातकोत्तर
| alma_mater = जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर
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| notableworks = दीवार में एक खिड़की रहती थी
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* [[ज्ञानपीठ पुरस्कार]] (2024)
* [[साहित्य अकादमी पुरस्कार]] (1999)
* पीईएन/नाबोकोव अवार्ड (2023)
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}}
'''विनोद कुमार शुक्ल''' (1 जनवरी 1937 - 23 दिसंबर 2025) एक भारतीय [[हिन्दी|हिंदी]] लेखक रहैं। उइ अपनी विलक्षण लेखन शैली के लिए जाने जात रहैं जेहिका जादुई यथार्थवाद के नाम ते जाना जात है। इनकी रचनन मा ''नौकर की कमीज'' (नौकर के कमीज) अउर ''दीवार में एक खिड़की रहती थी'' उपन्यास शामिल रहैं। ''दीवार में एक खिड़की रहती थी'' का 1999 मा सर्वश्रेष्ठ हिंदी काम के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। <ref>{{Cite web |date=23 March 2025 |title='A storyteller of hope & light': Vinod Kumar Shukla wins Jnanpith award |url=https://indianexpress.com/article/india/a-storyteller-of-hope-light-vinod-kumar-shukla-wins-jnanpith-award-9900773/ |access-date=27 May 2025 |website=The Indian Express |language=en}}</ref> रंगमंच-निर्देशक मोहन महर्षि द्वारा ई उपन्यास का मंचीय नाटक के रूप मा परिवर्तन कीन गा है। {{Reflist}}
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* पीईएन/नाबोकोव अवार्ड (2023)
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'''विनोद कुमार शुक्ल''' (1 जनवरी 1937 - 23 दिसंबर 2025) एक भारतीय [[हिन्दी|हिंदी]] लेखक रहैं। उइ अपनी विलक्षण लेखन शैली के लिए जाने जात रहैं जेहिका जादुई यथार्थवाद के नाम ते जाना जात है। इनकी रचनन मा ''नौकर की कमीज'' (नौकर के कमीज) अउर ''दीवार में एक खिड़की रहती थी'' उपन्यास शामिल रहैं। ''दीवार में एक खिड़की रहती थी'' का 1999 मा सर्वश्रेष्ठ हिंदी काम के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। <ref>{{Cite web |date=23 March 2025 |title='A storyteller of hope & light': Vinod Kumar Shukla wins Jnanpith award |url=https://indianexpress.com/article/india/a-storyteller-of-hope-light-vinod-kumar-shukla-wins-jnanpith-award-9900773/ |access-date=27 May 2025 |website=The Indian Express |language=en}}</ref> रंगमंच-निर्देशक मोहन महर्षि द्वारा ई उपन्यास का मंचीय नाटक के रूप मा परिवर्तन कीन गा है। {{Reflist}}
== प्रमुख कृती==
=== कविता संग्रह===
* 'लगभग जयहिंद ' वर्ष 1971
* वह आदमी चला गया नया गरम कोट पहिनकर विचार की तरह' वर्ष 1981.
* सब कुछ होना बचा रहेगा ' वर्ष 1992.
* अतिरिक्त नहीं ' वर्ष 2000.
* कविता से लंबी कविता ' वर्ष 2001.
* आकाश धरती को खटखटाता है ' वर्ष 2006.
* पचास कविताएँ' वर्ष 2011
* कभी के बाद अभी ' वर्ष 2012.
* कवि ने कहा ' -चुनी हुई कविताएँ वर्ष 2012.
* प्रतिनिधि कविताएँ ' वर्ष 2013.
===उपन्यास===
* ' नौकर की कमीज़ ' वर्ष 1979.
* ' खिलेगा तो देखेंगे ' वर्ष 1996.
* ' दीवार में एक खिड़की रहती थी ' वर्ष 1997.
* ' हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाड़ ' वर्ष 2011.
* ' यासि रासा त ' वर्ष 2016
* ' एक चुप्पी जगह' वर्ष 2018.
===कहानी संग्रह===
* पेड़ पर कमरा ' वर्ष 1988.
* महाविद्यालय ' वर्ष 1996.
* एक कहानी ' वर्ष 2021.
* घोड़ा और अन्य कहानियाँ ' वर्ष 2021.
===कहानी/कविता पर पुस्तक===
* ‘गोदाम’, वर्ष 2020.
* ‘गमले में जंगल’, वर्ष 2021.
===कृतियन के अनुवाद===
* ‘The Servant’s Shirt’, Year 1999 (Novel)
* ‘A Window Lived In The Wall’, Year 2005 (Novel)
* ‘Once It Flowers’, Year 2014 (Novel)
* ‘Moonrise From The green Grass Roof’, Year 2017 (Novel)
* ‘Blue Is Like Blue’ Year 2019 (Stories Collection)
* ‘The Windows In Our House Are Little Doors’ Year 2020 (Novel)
* उपन्यास ' [[नौकर की कमीज|नौकर की कमीज़]] ' का फ्रेंच सहित प्रमुख भारतीय भाषन मा अनुवाद/प्रकाशन।
* उपन्यास ' [[दीवार में एक खिड़की रहती थी]] ' का प्रमुख भारतीय भाषन मा अनुवाद/प्रकाशन।
* कविताओं का एक संग्रह इतालवी मा ।
* कवितन के [[स्वीडिश भाषा|स्वीडिश]], [[जर्मन भाषा|जर्मन]], [[अरबी भाषा|अरबी]], अंग्रेजी सहित प्रमुख भारतीय भाषन मा अनुवाद ।
* पेड़ पर कमरा ' कहानी संग्रह का मराठी, अंग्रेजी मा अनुवाद
===अन्य कृती===
* बच्चों की कविताओं के पोस्टकार्ड प्रकाशित, वर्ष 2020.
==सम्मान एवं पुरस्कार ==
* गजानन माधव मुक्तिबोध फेलोशिप ' (म.प्र. शासन)
* रज़ा पुरस्कार ' (मध्यप्रदेश कला परिषद)
* शिखर सम्मान ' (म.प्र. शासन)
* राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान ' (म.प्र. शासन)
* दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान' (मोदी फाउंडेशन)
* साहित्य अकादमी पुरस्कार', (भारत सरकार)
* हिन्दी गौरव सम्मान' (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, उ.प्र. शासन)
* मातृभूमि' पुरस्कार, वर्ष 2020 (अंग्रेजी कहानी संग्रह ‘Blue Is Like Blue’ के बरे)
* साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के सर्वोच्च सम्मान “महत्तर सदस्य” चुने गें, वर्ष 2021.
* 2024 का 59वां [[ज्ञानपीठ पुरस्कार]] समग्र साहित्य पर दीन गा।
==कृतियन पर काम==
* उपन्यास ' नौकर की कमीज़ ' एवं कहानी 'बोझ' पर विख्यात फिल्मकार मणिकौल सन् 1999 मा फिल्म निर्माण कीन्हेनि। फिल्म 'केरल अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह ' मा पुरस्कृत भै।
* कहानी 'आदमी की औरत' अउर 'पेड़ पर कमरा' पर राष्ट्रीय फिल्म इंस्टीट्यूट, पूना द्वारा अमित दत्ता के निर्देशन मा फिल्म का निर्माण। फिल्म वेनिस अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह 2009 मा ‘स्पेशल मेनशन अवार्ड’ ते सम्मानित।
* उपन्यास ' दीवार में एक खिड़की रहती थी' पर प्रसिद्ध नाट्य निर्देशक मोहन महर्षि नाट्य मंचन कीन्हेनि।
==अन्य उपलब्धी==
* निराला सृजन पीठ, भारत भवन, भोपाल मा रहे।
* साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के सदस्य रहे।
* वर्ष अप्रैल 2013 ते लइके अप्रैल 2014 तक, अतिथि लेखक (राइटर इन रेसीडेंस), महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा, महाराष्ट्र,.
* वर्ष 2023 का पैन-नाबोकोव पुरुस्कार
*ज्ञानपीठ पुरस्कार
[[श्रेणी:हिन्दी गद्यकार]]
[[श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत हिन्दी भाषा के साहित्यकार]]
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}}
'''विनोद कुमार शुक्ल''' (1 जनवरी 1937 - 23 दिसंबर 2025) एक भारतीय [[हिन्दी|हिंदी]] लेखक रहैं। उइ अपनी विलक्षण लेखन शैली के लिए जाने जात रहैं जेहिका जादुई यथार्थवाद के नाम ते जाना जात है। इनकी रचनन मा ''नौकर की कमीज'' (नौकर के कमीज) अउर ''दीवार में एक खिड़की रहती थी'' उपन्यास शामिल रहैं। ''दीवार में एक खिड़की रहती थी'' का 1999 मा सर्वश्रेष्ठ हिंदी काम के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। <ref>{{Cite web |date=23 March 2025 |title='A storyteller of hope & light': Vinod Kumar Shukla wins Jnanpith award |url=https://indianexpress.com/article/india/a-storyteller-of-hope-light-vinod-kumar-shukla-wins-jnanpith-award-9900773/ |access-date=27 May 2025 |website=The Indian Express |language=en}}</ref> रंगमंच-निर्देशक मोहन महर्षि द्वारा ई उपन्यास का मंचीय नाटक के रूप मा परिवर्तन कीन गा है। {{Reflist}}
== प्रमुख कृती==
=== कविता संग्रह===
* 'लगभग जयहिंद ' वर्ष 1971
* वह आदमी चला गया नया गरम कोट पहिनकर विचार की तरह' वर्ष 1981.
* सब कुछ होना बचा रहेगा ' वर्ष 1992.
* अतिरिक्त नहीं ' वर्ष 2000.
* कविता से लंबी कविता ' वर्ष 2001.
* आकाश धरती को खटखटाता है ' वर्ष 2006.
* पचास कविताएँ' वर्ष 2011
* कभी के बाद अभी ' वर्ष 2012.
* कवि ने कहा ' -चुनी हुई कविताएँ वर्ष 2012.
* प्रतिनिधि कविताएँ ' वर्ष 2013.
===उपन्यास===
* ' नौकर की कमीज़ ' वर्ष 1979.
* ' खिलेगा तो देखेंगे ' वर्ष 1996.
* ' दीवार में एक खिड़की रहती थी ' वर्ष 1997.
* ' हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाड़ ' वर्ष 2011.
* ' यासि रासा त ' वर्ष 2016
* ' एक चुप्पी जगह' वर्ष 2018.
===कहानी संग्रह===
* पेड़ पर कमरा ' वर्ष 1988.
* महाविद्यालय ' वर्ष 1996.
* एक कहानी ' वर्ष 2021.
* घोड़ा और अन्य कहानियाँ ' वर्ष 2021.
===कहानी/कविता पर पुस्तक===
* ‘गोदाम’, वर्ष 2020.
* ‘गमले में जंगल’, वर्ष 2021.
===कृतियन के अनुवाद===
* ‘The Servant’s Shirt’, Year 1999 (Novel)
* ‘A Window Lived In The Wall’, Year 2005 (Novel)
* ‘Once It Flowers’, Year 2014 (Novel)
* ‘Moonrise From The green Grass Roof’, Year 2017 (Novel)
* ‘Blue Is Like Blue’ Year 2019 (Stories Collection)
* ‘The Windows In Our House Are Little Doors’ Year 2020 (Novel)
* उपन्यास ' [[नौकर की कमीज|नौकर की कमीज़]] ' का फ्रेंच सहित प्रमुख भारतीय भाषन मा अनुवाद/प्रकाशन।
* उपन्यास ' [[दीवार में एक खिड़की रहती थी]] ' का प्रमुख भारतीय भाषन मा अनुवाद/प्रकाशन।
* कविताओं का एक संग्रह इतालवी मा ।
* कवितन के [[स्वीडिश भाषा|स्वीडिश]], [[जर्मन भाषा|जर्मन]], [[अरबी भाषा|अरबी]], अंग्रेजी सहित प्रमुख भारतीय भाषन मा अनुवाद ।
* पेड़ पर कमरा ' कहानी संग्रह का मराठी, अंग्रेजी मा अनुवाद
===अन्य कृती===
* बच्चों की कविताओं के पोस्टकार्ड प्रकाशित, वर्ष 2020.
==सम्मान एवं पुरस्कार ==
* गजानन माधव मुक्तिबोध फेलोशिप ' (म.प्र. शासन)
* रज़ा पुरस्कार ' (मध्यप्रदेश कला परिषद)
* शिखर सम्मान ' (म.प्र. शासन)
* राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान ' (म.प्र. शासन)
* दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान' (मोदी फाउंडेशन)
* साहित्य अकादमी पुरस्कार', (भारत सरकार)
* हिन्दी गौरव सम्मान' (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, उ.प्र. शासन)
* मातृभूमि' पुरस्कार, वर्ष 2020 (अंग्रेजी कहानी संग्रह ‘Blue Is Like Blue’ के बरे)
* साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के सर्वोच्च सम्मान “महत्तर सदस्य” चुने गें, वर्ष 2021.
* 2024 का 59वां [[ज्ञानपीठ पुरस्कार]] समग्र साहित्य पर दीन गा।
==कृतियन पर काम==
* उपन्यास ' नौकर की कमीज़ ' एवं कहानी 'बोझ' पर विख्यात फिल्मकार मणिकौल सन् 1999 मा फिल्म निर्माण कीन्हेनि। फिल्म 'केरल अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह ' मा पुरस्कृत भै।
* कहानी 'आदमी की औरत' अउर 'पेड़ पर कमरा' पर राष्ट्रीय फिल्म इंस्टीट्यूट, पूना द्वारा अमित दत्ता के निर्देशन मा फिल्म का निर्माण। फिल्म वेनिस अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह 2009 मा ‘स्पेशल मेनशन अवार्ड’ ते सम्मानित।
* उपन्यास ' दीवार में एक खिड़की रहती थी' पर प्रसिद्ध नाट्य निर्देशक मोहन महर्षि नाट्य मंचन कीन्हेनि।
==अन्य उपलब्धी==
* निराला सृजन पीठ, भारत भवन, भोपाल मा रहे।
* साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के सदस्य रहे।
* वर्ष अप्रैल 2013 ते लइके अप्रैल 2014 तक, अतिथि लेखक (राइटर इन रेसीडेंस), महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा, महाराष्ट्र,.
* वर्ष 2023 का पैन-नाबोकोव पुरुस्कार
*ज्ञानपीठ पुरस्कार
==संदर्भ==
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| occupation = कवि, उपन्यासकार, लघुकथा लेखक, शिक्षक
| language = [[हिन्दी]]
| nationality = भारतीय
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| alma_mater = जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर
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| notableworks = दीवार में एक खिड़की रहती थी
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* [[ज्ञानपीठ पुरस्कार]] (2024)
* [[साहित्य अकादमी पुरस्कार]] (1999)
* पीईएन/नाबोकोव अवार्ड (2023)
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}}
'''विनोद कुमार शुक्ल''' (1 जनवरी 1937 - 23 दिसंबर 2025) एक भारतीय [[हिन्दी|हिंदी]] लेखक रहैं। उइ अपनी विलक्षण लेखन शैली के लिए जाने जात रहैं जेहिका जादुई यथार्थवाद के नाम ते जाना जात है। इनकी रचनन मा ''नौकर की कमीज'' (नौकर के कमीज) अउर ''दीवार में एक खिड़की रहती थी'' उपन्यास शामिल रहैं। ''दीवार में एक खिड़की रहती थी'' का 1999 मा सर्वश्रेष्ठ हिंदी काम के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।<ref>{{Reflist|1}}</ref> रंगमंच-निर्देशक मोहन महर्षि द्वारा ई उपन्यास का मंचीय नाटक के रूप मा परिवर्तन कीन गा है।
== प्रमुख कृती==
=== कविता संग्रह===
* 'लगभग जयहिंद ' वर्ष 1971
* वह आदमी चला गया नया गरम कोट पहिनकर विचार की तरह' वर्ष 1981.
* सब कुछ होना बचा रहेगा ' वर्ष 1992.
* अतिरिक्त नहीं ' वर्ष 2000.
* कविता से लंबी कविता ' वर्ष 2001.
* आकाश धरती को खटखटाता है ' वर्ष 2006.
* पचास कविताएँ' वर्ष 2011
* कभी के बाद अभी ' वर्ष 2012.
* कवि ने कहा ' -चुनी हुई कविताएँ वर्ष 2012.
* प्रतिनिधि कविताएँ ' वर्ष 2013.
===उपन्यास===
* ' नौकर की कमीज़ ' वर्ष 1979.
* ' खिलेगा तो देखेंगे ' वर्ष 1996.
* ' दीवार में एक खिड़की रहती थी ' वर्ष 1997.
* ' हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाड़ ' वर्ष 2011.
* ' यासि रासा त ' वर्ष 2016
* ' एक चुप्पी जगह' वर्ष 2018.
===कहानी संग्रह===
* पेड़ पर कमरा ' वर्ष 1988.
* महाविद्यालय ' वर्ष 1996.
* एक कहानी ' वर्ष 2021.
* घोड़ा और अन्य कहानियाँ ' वर्ष 2021.
===कहानी/कविता पर पुस्तक===
* ‘गोदाम’, वर्ष 2020.
* ‘गमले में जंगल’, वर्ष 2021.
===कृतियन के अनुवाद===
* ‘The Servant’s Shirt’, Year 1999 (Novel)
* ‘A Window Lived In The Wall’, Year 2005 (Novel)
* ‘Once It Flowers’, Year 2014 (Novel)
* ‘Moonrise From The green Grass Roof’, Year 2017 (Novel)
* ‘Blue Is Like Blue’ Year 2019 (Stories Collection)
* ‘The Windows In Our House Are Little Doors’ Year 2020 (Novel)
* उपन्यास ' [[नौकर की कमीज|नौकर की कमीज़]] ' का फ्रेंच सहित प्रमुख भारतीय भाषन मा अनुवाद/प्रकाशन।
* उपन्यास ' [[दीवार में एक खिड़की रहती थी]] ' का प्रमुख भारतीय भाषन मा अनुवाद/प्रकाशन।
* कविताओं का एक संग्रह इतालवी मा ।
* कवितन के [[स्वीडिश भाषा|स्वीडिश]], [[जर्मन भाषा|जर्मन]], [[अरबी भाषा|अरबी]], अंग्रेजी सहित प्रमुख भारतीय भाषन मा अनुवाद ।
* पेड़ पर कमरा ' कहानी संग्रह का मराठी, अंग्रेजी मा अनुवाद
===अन्य कृती===
* बच्चों की कविताओं के पोस्टकार्ड प्रकाशित, वर्ष 2020.
==सम्मान एवं पुरस्कार ==
* गजानन माधव मुक्तिबोध फेलोशिप ' (म.प्र. शासन)
* रज़ा पुरस्कार ' (मध्यप्रदेश कला परिषद)
* शिखर सम्मान ' (म.प्र. शासन)
* राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान ' (म.प्र. शासन)
* दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान' (मोदी फाउंडेशन)
* साहित्य अकादमी पुरस्कार', (भारत सरकार)
* हिन्दी गौरव सम्मान' (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, उ.प्र. शासन)
* मातृभूमि' पुरस्कार, वर्ष 2020 (अंग्रेजी कहानी संग्रह ‘Blue Is Like Blue’ के बरे)
* साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के सर्वोच्च सम्मान “महत्तर सदस्य” चुने गें, वर्ष 2021.
* 2024 का 59वां [[ज्ञानपीठ पुरस्कार]] समग्र साहित्य पर दीन गा।
==कृतियन पर काम==
* उपन्यास ' नौकर की कमीज़ ' एवं कहानी 'बोझ' पर विख्यात फिल्मकार मणिकौल सन् 1999 मा फिल्म निर्माण कीन्हेनि। फिल्म 'केरल अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह ' मा पुरस्कृत भै।
* कहानी 'आदमी की औरत' अउर 'पेड़ पर कमरा' पर राष्ट्रीय फिल्म इंस्टीट्यूट, पूना द्वारा अमित दत्ता के निर्देशन मा फिल्म का निर्माण। फिल्म वेनिस अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह 2009 मा ‘स्पेशल मेनशन अवार्ड’ ते सम्मानित।
* उपन्यास ' दीवार में एक खिड़की रहती थी' पर प्रसिद्ध नाट्य निर्देशक मोहन महर्षि नाट्य मंचन कीन्हेनि।
==अन्य उपलब्धी==
* निराला सृजन पीठ, भारत भवन, भोपाल मा रहे।
* साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के सदस्य रहे।
* वर्ष अप्रैल 2013 ते लइके अप्रैल 2014 तक, अतिथि लेखक (राइटर इन रेसीडेंस), महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा, महाराष्ट्र,.
* वर्ष 2023 का पैन-नाबोकोव पुरुस्कार
*ज्ञानपीठ पुरस्कार
==संदर्भ==
<ref>{{Cite web |date=23 March 2025 |title='A storyteller of hope & light': Vinod Kumar Shukla wins Jnanpith award |url=https://indianexpress.com/article/india/a-storyteller-of-hope-light-vinod-kumar-shukla-wins-jnanpith-award-9900773/ |access-date=27 May 2025 |website=The Indian Express |language=en}}</ref>
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{{Infobox writer
| name = विनोद कुमार शुक्ल
| image = Vinod-kumar-shukla-aankh-band-kar-lene-se 1650620989.jpg
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| birth_date = {{birth date|1937|1|1|df=y}}
| birth_place = [[राजनांदगाँव]], [[नंदगाँव राज्य]], [[ब्रिटिश भारत]]
| death_date = 23 दिसंबर 2025
| death_place = [[रायपुर]], छत्तीसगढ़, भारत
| occupation = कवि, उपन्यासकार, लघुकथा लेखक, शिक्षक
| language = [[हिन्दी]]
| nationality = भारतीय
| citizenship = भारत
| education = कृषि विज्ञान में स्नातकोत्तर
| alma_mater = जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर
| period = 1971-2025
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| notableworks = दीवार में एक खिड़की रहती थी
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* [[ज्ञानपीठ पुरस्कार]] (2024)
* [[साहित्य अकादमी पुरस्कार]] (1999)
* पीईएन/नाबोकोव अवार्ड (2023)
| signature =
| years_active = 1971–2025
| website =
}}
'''विनोद कुमार शुक्ल''' (1 जनवरी 1937 - 23 दिसंबर 2025) एक भारतीय [[हिन्दी|हिंदी]] लेखक रहैं। उइ अपनी विलक्षण लेखन शैली के लिए जाने जात रहैं जेहिका [[जादुई यथार्थवाद]] के नाम ते जाना जात है। इनकी रचनन मा ''नौकर की कमीज'' (नौकर के कमीज) अउर [[''दीवार में एक खिड़की रहती थी'']] उपन्यास शामिल रहैं। ''दीवार में एक खिड़की रहती थी'' का 1999 मा सर्वश्रेष्ठ हिंदी काम के लिए [[साहित्य अकादमी पुरस्कार]] मिला।<ref>{{Reflist|1}}</ref> रंगमंच-निर्देशक [[मोहन महर्षि]] द्वारा ई उपन्यास का मंचीय नाटक के रूप मा परिवर्तन कीन गा है।
== प्रमुख कृती==
=== कविता संग्रह===
* 'लगभग जयहिंद ' वर्ष 1971
* वह आदमी चला गया नया गरम कोट पहिनकर विचार की तरह' वर्ष 1981.
* सब कुछ होना बचा रहेगा ' वर्ष 1992.
* अतिरिक्त नहीं ' वर्ष 2000.
* कविता से लंबी कविता ' वर्ष 2001.
* आकाश धरती को खटखटाता है ' वर्ष 2006.
* पचास कविताएँ' वर्ष 2011
* कभी के बाद अभी ' वर्ष 2012.
* कवि ने कहा ' -चुनी हुई कविताएँ वर्ष 2012.
* प्रतिनिधि कविताएँ ' वर्ष 2013.
===उपन्यास===
* ' नौकर की कमीज़ ' वर्ष 1979.
* ' खिलेगा तो देखेंगे ' वर्ष 1996.
* ' दीवार में एक खिड़की रहती थी ' वर्ष 1997.
* ' हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाड़ ' वर्ष 2011.
* ' यासि रासा त ' वर्ष 2016
* ' एक चुप्पी जगह' वर्ष 2018.
===कहानी संग्रह===
* पेड़ पर कमरा ' वर्ष 1988.
* महाविद्यालय ' वर्ष 1996.
* एक कहानी ' वर्ष 2021.
* घोड़ा और अन्य कहानियाँ ' वर्ष 2021.
===कहानी/कविता पर पुस्तक===
* ‘गोदाम’, वर्ष 2020.
* ‘गमले में जंगल’, वर्ष 2021.
===कृतियन के अनुवाद===
* ‘The Servant’s Shirt’, Year 1999 (Novel)
* ‘A Window Lived In The Wall’, Year 2005 (Novel)
* ‘Once It Flowers’, Year 2014 (Novel)
* ‘Moonrise From The green Grass Roof’, Year 2017 (Novel)
* ‘Blue Is Like Blue’ Year 2019 (Stories Collection)
* ‘The Windows In Our House Are Little Doors’ Year 2020 (Novel)
* उपन्यास ' [[नौकर की कमीज|नौकर की कमीज़]] ' का फ्रेंच सहित प्रमुख भारतीय भाषन मा अनुवाद/प्रकाशन।
* उपन्यास ' [[दीवार में एक खिड़की रहती थी]] ' का प्रमुख भारतीय भाषन मा अनुवाद/प्रकाशन।
* कविताओं का एक संग्रह इतालवी मा ।
* कवितन के [[स्वीडिश भाषा|स्वीडिश]], [[जर्मन भाषा|जर्मन]], [[अरबी भाषा|अरबी]], अंग्रेजी सहित प्रमुख भारतीय भाषन मा अनुवाद ।
* पेड़ पर कमरा ' कहानी संग्रह का मराठी, अंग्रेजी मा अनुवाद
===अन्य कृती===
* बच्चों की कविताओं के पोस्टकार्ड प्रकाशित, वर्ष 2020.
==सम्मान एवं पुरस्कार ==
* गजानन माधव मुक्तिबोध फेलोशिप ' (म.प्र. शासन)
* रज़ा पुरस्कार ' (मध्यप्रदेश कला परिषद)
* शिखर सम्मान ' (म.प्र. शासन)
* राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान ' (म.प्र. शासन)
* दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान' (मोदी फाउंडेशन)
* साहित्य अकादमी पुरस्कार', (भारत सरकार)
* हिन्दी गौरव सम्मान' (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, उ.प्र. शासन)
* मातृभूमि' पुरस्कार, वर्ष 2020 (अंग्रेजी कहानी संग्रह ‘Blue Is Like Blue’ के बरे)
* साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के सर्वोच्च सम्मान “महत्तर सदस्य” चुने गें, वर्ष 2021.
* 2024 का 59वां [[ज्ञानपीठ पुरस्कार]] समग्र साहित्य पर दीन गा।
==कृतियन पर काम==
* उपन्यास ' नौकर की कमीज़ ' एवं कहानी 'बोझ' पर विख्यात फिल्मकार [[मणि कौल]] सन् 1999 मा फिल्म निर्माण कीन्हेनि। फिल्म 'केरल अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह ' मा पुरस्कृत भै।
* कहानी 'आदमी की औरत' अउर 'पेड़ पर कमरा' पर राष्ट्रीय फिल्म इंस्टीट्यूट, पूना द्वारा अमित दत्ता के निर्देशन मा फिल्म का निर्माण। फिल्म वेनिस अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह 2009 मा ‘स्पेशल मेनशन अवार्ड’ ते सम्मानित।
* उपन्यास ' दीवार में एक खिड़की रहती थी' पर प्रसिद्ध नाट्य निर्देशक मोहन महर्षि नाट्य मंचन कीन्हेनि।
==अन्य उपलब्धी==
* निराला सृजन पीठ, भारत भवन, भोपाल मा रहे।
* साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के सदस्य रहे।
* वर्ष अप्रैल 2013 ते लइके अप्रैल 2014 तक, अतिथि लेखक (राइटर इन रेसीडेंस), महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा, महाराष्ट्र,.
* वर्ष 2023 का पैन-नाबोकोव पुरुस्कार
*[[ज्ञानपीठ पुरस्कार]]
==संदर्भ==
<ref>{{Cite web |date=23 March 2025 |title='A storyteller of hope & light': Vinod Kumar Shukla wins Jnanpith award |url=https://indianexpress.com/article/india/a-storyteller-of-hope-light-vinod-kumar-shukla-wins-jnanpith-award-9900773/ |access-date=27 May 2025 |website=The Indian Express |language=en}}</ref>
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जादुई यथार्थवाद
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"[[:en:Special:Redirect/revision/1361666136|Magical realism]]" पन्ना कै अनुवाद कइके बनवा गा
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'''जादुई यथार्थवाद''', '''जादुई यथार्थवाद''', या '''अद्भुत यथार्थवाद''' कथा अउर कला के याक शैली या विधा है जउन दुनिया का यथार्थवादी दृष्टिकोण प्रस्तुत करत है अउर साथै साथ जादुई तत्वनौ का शामिल करति है, जी अक्सर संभावना अउर वास्तविकता के बीच के रेखा का धुंधला करति हैं। <ref>{{Cite web |title=What Is Magical Realism? Definition and Examples of Magical Realism in Literature, Plus 7 Magical Realism Novels You Should Read |url=https://www.masterclass.com/articles/what-is-magical-realism |website=MasterClass}}</ref>
== संदर्भ ==
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महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय
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'''महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय''' (संक्षेप मा '''MAHGU''' ; पुरान नाँव '''हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय''' ) [[उत्तराखण्ड|उत्तराखंड के]] पौड़ी गढ़वाल जिला मा स्थित एक भारतीय निजी विश्वविद्यालय है। MAHGU [[उत्तराखण्ड विधानसभा|उत्तराखंड विधान सभा]] के 2016 के अधिनियम संख्या 33 के अनुसार स्थापित कीन गा रहै। <ref>{{Cite web |title=Private University Uttarakhand |url=https://www.ugc.ac.in/privateuniversitylist.aspx?id=byxR5GCw1Am5pJwU3d9Ncw==&Unitype=So1CNBLvrigKjpQTxHMrAQ== |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20210123220540/https://www.ugc.ac.in/privateuniversitylist.aspx?id=byxR5GCw1Am5pJwU3d9Ncw==&Unitype=So1CNBLvrigKjpQTxHMrAQ== |archive-date=23 January 2021 |access-date=30 April 2018 |publisher=[[University Grants Commission (India)|University Grants Commission]]}}</ref> <ref>{{Cite web |date=6 December 2016 |title=15 bills passed in Uttarakhand assembly await governor's nod |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/dehradun/15-bills-passed-in-Ukhand-assembly-await-governors-nod/articleshow/55819695.cms |access-date=30 April 2018 |website=Yogesh Kumar |publisher=[[The Times of India]]}}</ref>
== उपलब्ध पाठ्यक्रम ==
यो विश्वविद्यालय विज्ञान, कला, [[अभियान्त्रिकी|इंजीनियरिंग]], आईटी, प्रबंधन, कानून, डिजाइन आदि मा कइयो स्नातक अउर स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रम अउर कार्यक्रम प्रदान करत है जेहिमा डॉक्टरेट आदि कार्यक्रमौ शामिल हैं।
== पुरस्कार ==
* उद्योग इंटरफेस 2022 (सीईजीआर) के लिए उत्तर भारत मा सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय से सम्मानित।
* जुलाई 2022 का 6 वें राष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह 2022 के दौरान इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली द्वारा शिक्षा, कौशल अउर अनुसंधान मा उत्कृष्ट योगदान के लिए "पहाड़ी क्षेत्र 2022 के लिए सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय" उपाधि से सम्मानित
* महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय के अध्यक्ष श्री शिव कुमार गुप्ता का 27 अगस्त 2022 का सिंगापुर (एनसीआर) मा आयोजित प्रतिष्ठित जागरण अचीवर अवार्ड प्रदान कीन गा
== संदर्भ ==
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== बाहरी लिंक ==
* Official website
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'''महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय''' (संक्षेप मा '''MAHGU''' ; पुरान नाँव '''हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय''' ) [[उत्तराखण्ड|उत्तराखंड के]] पौड़ी गढ़वाल जिला मा स्थित एक भारतीय निजी विश्वविद्यालय है। MAHGU [[उत्तराखण्ड विधानसभा|उत्तराखंड विधान सभा]] के 2016 के अधिनियम संख्या 33 के अनुसार स्थापित कीन गा रहै। <ref>{{Cite web |title=Private University Uttarakhand |url=https://www.ugc.ac.in/privateuniversitylist.aspx?id=byxR5GCw1Am5pJwU3d9Ncw==&Unitype=So1CNBLvrigKjpQTxHMrAQ== |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20210123220540/https://www.ugc.ac.in/privateuniversitylist.aspx?id=byxR5GCw1Am5pJwU3d9Ncw==&Unitype=So1CNBLvrigKjpQTxHMrAQ== |archive-date=23 January 2021 |access-date=30 April 2018 |publisher=[[University Grants Commission (India)|University Grants Commission]]}}</ref> <ref>{{Cite web |date=6 December 2016 |title=15 bills passed in Uttarakhand assembly await governor's nod |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/dehradun/15-bills-passed-in-Ukhand-assembly-await-governors-nod/articleshow/55819695.cms |access-date=30 April 2018 |website=Yogesh Kumar |publisher=[[The Times of India]]}}</ref>
== उपलब्ध पाठ्यक्रम ==
यो विश्वविद्यालय विज्ञान, कला, [[अभियान्त्रिकी|इंजीनियरिंग]], आईटी, प्रबंधन, कानून, डिजाइन आदि मा कइयो स्नातक अउर स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रम अउर कार्यक्रम प्रदान करत है जेहिमा डॉक्टरेट आदि कार्यक्रमौ शामिल हैं।
== पुरस्कार ==
* उद्योग इंटरफेस 2022 (सीईजीआर) के लिए उत्तर भारत मा सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय से सम्मानित।
* जुलाई 2022 का 6 वें राष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह 2022 के दौरान इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली द्वारा शिक्षा, कौशल अउर अनुसंधान मा उत्कृष्ट योगदान के लिए "पहाड़ी क्षेत्र 2022 के लिए सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय" उपाधि से सम्मानित
* महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय के अध्यक्ष श्री शिव कुमार गुप्ता का 27 अगस्त 2022 का सिंगापुर (एनसीआर) मा आयोजित प्रतिष्ठित जागरण अचीवर अवार्ड प्रदान कीन गा
== संदर्भ ==
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== बाहरी लिंक ==
* Official website
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== उपलब्ध पाठ्यक्रम ==
यो विश्वविद्यालय विज्ञान, कला, [[अभियान्त्रिकी|इंजीनियरिंग]], आईटी, प्रबंधन, कानून, डिजाइन आदि मा कइयो स्नातक अउर स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रम अउर कार्यक्रम प्रदान करत है जेहिमा डॉक्टरेट आदि कार्यक्रमौ शामिल हैं।
== पुरस्कार ==
* उद्योग इंटरफेस 2022 (सीईजीआर) के लिए उत्तर भारत मा सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय से सम्मानित।
* जुलाई 2022 का 6 वें राष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह 2022 के दौरान इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली द्वारा शिक्षा, कौशल अउर अनुसंधान मा उत्कृष्ट योगदान के लिए "पहाड़ी क्षेत्र 2022 के लिए सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय" उपाधि से सम्मानित
* महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय के अध्यक्ष श्री शिव कुमार गुप्ता का 27 अगस्त 2022 का सिंगापुर (एनसीआर) मा आयोजित प्रतिष्ठित जागरण अचीवर अवार्ड प्रदान कीन गा
== संदर्भ ==
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== बाहरी लिंक ==
* Official website
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'''महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय''' (संक्षेप मा '''MAHGU'''; पुरान नाँव '''हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय''' ) [[उत्तराखण्ड|उत्तराखंड के]] पौड़ी गढ़वाल जिला मा स्थित एक भारतीय निजी विश्वविद्यालय है। MAHGU [[उत्तराखण्ड विधानसभा|उत्तराखंड विधान सभा]] के 2016 के अधिनियम संख्या 33 के अनुसार स्थापित कीन गा रहै। <ref>{{Cite web |title=Private University Uttarakhand |url=https://www.ugc.ac.in/privateuniversitylist.aspx?id=byxR5GCw1Am5pJwU3d9Ncw==&Unitype=So1CNBLvrigKjpQTxHMrAQ== |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20210123220540/https://www.ugc.ac.in/privateuniversitylist.aspx?id=byxR5GCw1Am5pJwU3d9Ncw==&Unitype=So1CNBLvrigKjpQTxHMrAQ== |archive-date=23 January 2021 |access-date=30 April 2018 |publisher=[[University Grants Commission (India)|University Grants Commission]]}}</ref> <ref>{{Cite web |date=6 December 2016 |title=15 bills passed in Uttarakhand assembly await governor's nod |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/dehradun/15-bills-passed-in-Ukhand-assembly-await-governors-nod/articleshow/55819695.cms |access-date=30 April 2018 |website=Yogesh Kumar |publisher=[[The Times of India]]}}</ref>
== उपलब्ध पाठ्यक्रम ==
यो विश्वविद्यालय विज्ञान, कला, [[अभियान्त्रिकी|इंजीनियरिंग]], आईटी, प्रबंधन, कानून, डिजाइन आदि मा कइयो स्नातक अउर स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रम अउर कार्यक्रम प्रदान करत है जेहिमा डॉक्टरेट आदि कार्यक्रमौ शामिल हैं।
== पुरस्कार ==
* उद्योग इंटरफेस 2022 (सीईजीआर) के लिए उत्तर भारत मा सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय से सम्मानित।
* जुलाई 2022 का 6 वें राष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह 2022 के दौरान इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली द्वारा शिक्षा, कौशल अउर अनुसंधान मा उत्कृष्ट योगदान के लिए "पहाड़ी क्षेत्र 2022 के लिए सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय" उपाधि से सम्मानित।
* महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय के अध्यक्ष श्री शिव कुमार गुप्ता का 27 अगस्त 2022 का सिंगापुर (एनसीआर) मा आयोजित प्रतिष्ठित जागरण अचीवर अवार्ड प्रदान कीन गा।
== संदर्भ ==
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भाग खेसारी भाग
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"[[:en:Special:Redirect/revision/1342959873|Bhag Khesari Bhag]]" पन्ना कै अनुवाद कइके बनवा गा
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text/x-wiki
'''''भाग खेसारी भाग''''' एक 2019 भारतीय [[भोजपुरी भाषा|भोजपुरी भाषा के]] खेल आधारित ड्रामा फिल्म है जेहिका निर्देशन प्रेमांशु सिंह द्वारा कीन गा है। उमाशंकर प्रसाद अउर "जेपी स्टार्स पिक्चर्स" के बैनर तले आयुष राज गुप्ता द्वारा यहिका सहनिर्माण कीन गा है। फिल्म मा खेसारी लाल यादव अउर स्मृति सिन्हा मुख्य भूमिका मा हैं। जबकि अयाज खान, अमित शुक्ला, संजय वर्मा, अमित चौधरी, सत्य प्रकाश, प्रीतम कुमार, राहुल साहू अउर अन्य सहायक भूमिका निभाइन हैं। कहानी लिखिन हैं श्री मनोज कुशवाहा।
== कलाकार वृंद ==
* खेसारी लाल यादव
* स्मृति सिन्हा <ref>{{Cite web |title=When Bhojpuri actress Smriti Sinha met with accident on the sets of Khesari Lal's 'Bhag Khesari Bhag' {{!}} Bhojpuri Movie News - Times of India |url=https://timesofindia.indiatimes.com/videos/entertainment/regional/bhojpuri/when-bhojpuri-actress-smriti-sinha-met-with-accident-on-the-sets-of-khesari-lals-bhag-khesari-bhag/videoshow/71705433.cms |access-date=2020-07-07 |website=timesofindia.indiatimes.com}}</ref>
* अयाज खान
* अमित शुक्ला
* संजय वर्मा
* अमित चौधरी
* सत्य प्रकाश
* प्रीतम कुमार
* राहुल साहू <ref name="Youtube">{{Cite web |last=Enter10 Music Bhojpuri |date=8 October 2019 |title=Bhag Khesari Bhag (Khesari Lal Yadav, Smriti Sinha) Bhojpuri Film 2019 Teaser |url=https://m.youtube.com/watch?v=t4vdep_wKpE |access-date=12 October 2019 |website=[[YouTube]]}}</ref>
== निर्माण ==
ई फिलिम का निर्देशन प्रेमांशु सिंह अउर निर्माण उमाशंकर प्रसाद किहिन हैं, साथै सह-निर्माता आयुष राज गुप्ता अउर लेखक मनोज के कुशवाह हैं। छायांकन सरफराज रशीद खान द्वारा कीन गा है जबकि कोरियोग्राफी रिक्की गुप्ता अउर राम देवन द्वारा कीन गै है। जितेन्द्र सिंह (जीतू) संपादक हैं। भोजपुरी के मशहूर जोड़ी कविता-सुनीता द्वारा ड्रेस डिजाइनिंग कीन गै है। <ref name="Youtube">{{Cite web |last=Enter10 Music Bhojpuri |date=8 October 2019 |title=Bhag Khesari Bhag (Khesari Lal Yadav, Smriti Sinha) Bhojpuri Film 2019 Teaser |url=https://m.youtube.com/watch?v=t4vdep_wKpE |access-date=12 October 2019 |website=[[YouTube]]}}<cite class="citation web cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFEnter10_Music_Bhojpuri2019">Enter10 Music Bhojpuri (8 October 2019). [https://m.youtube.com/watch?v=t4vdep_wKpE "Bhag Khesari Bhag (Khesari Lal Yadav, Smriti Sinha) Bhojpuri Film 2019 Teaser"]. ''[[YouTube]]''<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">12 October</span> 2019</span>.</cite><span class="cs1-maint citation-comment" data-ve-ignore=""><code class="cs1-code"><nowiki>{{</nowiki>[[खाँचा:Cite web|cite web]]<nowiki>}}</nowiki></code>: CS1 maint: numeric names: authors list ([[:Category:CS1 maint: numeric names: authors list|link]])</span>
[[Category:CS1 maint: numeric names: authors list]]</ref>
== रिलीज ==
ई फिलिम 1 नवंबर 2019 का [[बिहार]] अउर [[झारखण्ड|झारखंड]] के सब थिएटरन मा [[छठ पर्व|छठ पूजा]] के अवसर पर रिलीज कीन गै रहै। <ref>{{Cite web |date=2019-11-01 |title=बिहार-झारखंड में रिलीज हुई खेसारीलाल यादव की भोजपुरी फिल्म 'भाग खेसारी भाग' |url=https://zeenews.india.com/hindi/entertainment/bhojpuri/khesari-lal-yadavs-bhojpuri-film-bhaag-khesari-bhaag-released-in-bihar-jharkhand/591630 |access-date=2020-07-07 |website=Zee News Hindi}}</ref> <ref>{{Cite web |title=Chhath Puja special, Khesari Lal Yadav New Bhojpuri Movie: Bhojpuri superstar Khesari Lal Yadav and Smriti Sinha's film 'Bhaag Khesari Bhaag' to hit the screen on Chhath Puja |url=https://timesofindia.indiatimes.com/videos/entertainment/hindi/chhath-puja-special-khesari-lal-yadav-new-bhojpuri-movie-bhojpuri-superstar-khesari-lal-yadav-and-smriti-sinhas-film-bhaag-khesari-bhaag-to-hit-the-screen-on-chhath-puja/videoshow/71848737.cms |access-date=2020-07-07 |website=timesofindia.indiatimes.com}}</ref>
== संगीत ==
<templatestyles src="Hlist/styles.css"></templatestyles><templatestyles src="Plainlist/styles.css"></templatestyles><templatestyles src="Module:Infobox/styles.css"></templatestyles>"भाग खेसारी भाग" का संगीत ओम झा द्वारा बनावा गा है जेहिका गीत प्यारे लाल यादव, आजाद सिंह, श्याम देहाती, प्रकाश बारूद, यादव राज अऊर पवन पांडे द्वारा लिखा गा है। संगीत "एंटर10 म्यूजिक भोजपुरी" म्यूजिक कंपनी के तहत बनावा गा है।
अक्टूबर 2019 का रिलीज भा गीत "बिस्कुट डुबाके" यूट्यूब पै 20 मिलियन से अधिक बार द्याखा गा। <ref>{{Cite web |date=2019-12-08 |title=2019 के सुपरहिट गानों में शामिल खेसारी का ये सॉन्ग, प्रियंका सिंह संग 'बिस्कुट डुबाके' में मचाया धमाल |url=https://www.jansatta.com/entertainment/bhojpuri/bhojpuri-gaane-bhojpuri-news-khesari-lal-yadav-new-song-video-biscuit-dubake-from-movie-bhag-khesari-bhag-priyanka-singh-dancing-moves-super-smooth-with-khesari-2019-superhit-chartbuster/1245479/ |access-date=2020-07-07 |website=Jansatta |language=hi}}</ref><templatestyles src="Module:Track listing/styles.css"></templatestyles>
== संदर्भ ==
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35300
35299
2026-07-07T11:54:27Z
Avimaarak
3578
35300
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox film
| name = Bhag Khesari Bhag
| image = Bhag Khesari Bhag Official Poster.jpg
| alt =
| caption = Bhag Khesari Bhag Official Poster
| director = Premanshu Singh
| producer = Umashankar Prasad
| writer = Manoj K Kushwaha
| screenplay = {{ubl|Premanshu Singh|Manoj K Kushwaha}}
| story = {{ubl|Premanshu Singh|Manoj K Kushwaha}}
| starring = {{ubl|[[Khesari Lal Yadav]]|Smriti Sinha|Amit Shukla|Ayaz Khan|Sanjay Verma}}
| music = Om Jha
| cinematography = Sarfaraj Rashid Khan
| editing = Jitendra Singh (Jeetu)
| studio = J P Star Pictures
| distributor = Yashi Films
| released = {{Film date|2019|11|01|[[Bihar]]|df=y}}
| runtime =
| country = [[India]]
| language = [[Bhojpuri language|Bhojpuri]]
| budget = <!--Must be attributed to a reliable source-->
}}
'''''भाग खेसारी भाग''''' एक 2019 भारतीय [[भोजपुरी भाषा|भोजपुरी भाषा के]] खेल आधारित ड्रामा फिल्म है जेहिका निर्देशन प्रेमांशु सिंह द्वारा कीन गा है। उमाशंकर प्रसाद अउर "जेपी स्टार्स पिक्चर्स" के बैनर तले आयुष राज गुप्ता द्वारा यहिका सहनिर्माण कीन गा है। फिल्म मा खेसारी लाल यादव अउर स्मृति सिन्हा मुख्य भूमिका मा हैं। जबकि अयाज खान, अमित शुक्ला, संजय वर्मा, अमित चौधरी, सत्य प्रकाश, प्रीतम कुमार, राहुल साहू अउर अन्य सहायक भूमिका निभाइन हैं। कहानी लिखिन हैं श्री मनोज कुशवाहा।
== कलाकार वृंद ==
* खेसारी लाल यादव
* स्मृति सिन्हा <ref>{{Cite web |title=When Bhojpuri actress Smriti Sinha met with accident on the sets of Khesari Lal's 'Bhag Khesari Bhag' {{!}} Bhojpuri Movie News - Times of India |url=https://timesofindia.indiatimes.com/videos/entertainment/regional/bhojpuri/when-bhojpuri-actress-smriti-sinha-met-with-accident-on-the-sets-of-khesari-lals-bhag-khesari-bhag/videoshow/71705433.cms |access-date=2020-07-07 |website=timesofindia.indiatimes.com}}</ref>
* अयाज खान
* अमित शुक्ला
* संजय वर्मा
* अमित चौधरी
* सत्य प्रकाश
* प्रीतम कुमार
* राहुल साहू <ref name="Youtube">{{Cite web |last=Enter10 Music Bhojpuri |date=8 October 2019 |title=Bhag Khesari Bhag (Khesari Lal Yadav, Smriti Sinha) Bhojpuri Film 2019 Teaser |url=https://m.youtube.com/watch?v=t4vdep_wKpE |access-date=12 October 2019 |website=[[YouTube]]}}</ref>
== निर्माण ==
ई फिलिम का निर्देशन प्रेमांशु सिंह अउर निर्माण उमाशंकर प्रसाद किहिन हैं, साथै सह-निर्माता आयुष राज गुप्ता अउर लेखक मनोज के कुशवाह हैं। छायांकन सरफराज रशीद खान द्वारा कीन गा है जबकि कोरियोग्राफी रिक्की गुप्ता अउर राम देवन द्वारा कीन गै है। जितेन्द्र सिंह (जीतू) संपादक हैं। भोजपुरी के मशहूर जोड़ी कविता-सुनीता द्वारा ड्रेस डिजाइनिंग कीन गै है। <ref name="Youtube">{{Cite web |last=Enter10 Music Bhojpuri |date=8 October 2019 |title=Bhag Khesari Bhag (Khesari Lal Yadav, Smriti Sinha) Bhojpuri Film 2019 Teaser |url=https://m.youtube.com/watch?v=t4vdep_wKpE |access-date=12 October 2019 |website=[[YouTube]]}}<cite class="citation web cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFEnter10_Music_Bhojpuri2019">Enter10 Music Bhojpuri (8 October 2019). [https://m.youtube.com/watch?v=t4vdep_wKpE "Bhag Khesari Bhag (Khesari Lal Yadav, Smriti Sinha) Bhojpuri Film 2019 Teaser"]. ''[[YouTube]]''<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">12 October</span> 2019</span>.</cite><span class="cs1-maint citation-comment" data-ve-ignore=""><code class="cs1-code"><nowiki>{{</nowiki>[[खाँचा:Cite web|cite web]]<nowiki>}}</nowiki></code>: CS1 maint: numeric names: authors list ([[:Category:CS1 maint: numeric names: authors list|link]])</span>
[[Category:CS1 maint: numeric names: authors list]]</ref>
== रिलीज ==
ई फिलिम 1 नवंबर 2019 का [[बिहार]] अउर [[झारखण्ड|झारखंड]] के सब थिएटरन मा [[छठ पर्व|छठ पूजा]] के अवसर पर रिलीज कीन गै रहै। <ref>{{Cite web |date=2019-11-01 |title=बिहार-झारखंड में रिलीज हुई खेसारीलाल यादव की भोजपुरी फिल्म 'भाग खेसारी भाग' |url=https://zeenews.india.com/hindi/entertainment/bhojpuri/khesari-lal-yadavs-bhojpuri-film-bhaag-khesari-bhaag-released-in-bihar-jharkhand/591630 |access-date=2020-07-07 |website=Zee News Hindi}}</ref> <ref>{{Cite web |title=Chhath Puja special, Khesari Lal Yadav New Bhojpuri Movie: Bhojpuri superstar Khesari Lal Yadav and Smriti Sinha's film 'Bhaag Khesari Bhaag' to hit the screen on Chhath Puja |url=https://timesofindia.indiatimes.com/videos/entertainment/hindi/chhath-puja-special-khesari-lal-yadav-new-bhojpuri-movie-bhojpuri-superstar-khesari-lal-yadav-and-smriti-sinhas-film-bhaag-khesari-bhaag-to-hit-the-screen-on-chhath-puja/videoshow/71848737.cms |access-date=2020-07-07 |website=timesofindia.indiatimes.com}}</ref>
== संगीत ==
<templatestyles src="Hlist/styles.css"></templatestyles><templatestyles src="Plainlist/styles.css"></templatestyles><templatestyles src="Module:Infobox/styles.css"></templatestyles>"भाग खेसारी भाग" का संगीत ओम झा द्वारा बनावा गा है जेहिका गीत प्यारे लाल यादव, आजाद सिंह, श्याम देहाती, प्रकाश बारूद, यादव राज अऊर पवन पांडे द्वारा लिखा गा है। संगीत "एंटर10 म्यूजिक भोजपुरी" म्यूजिक कंपनी के तहत बनावा गा है।
अक्टूबर 2019 का रिलीज भा गीत "बिस्कुट डुबाके" यूट्यूब पै 20 मिलियन से अधिक बार द्याखा गा। <ref>{{Cite web |date=2019-12-08 |title=2019 के सुपरहिट गानों में शामिल खेसारी का ये सॉन्ग, प्रियंका सिंह संग 'बिस्कुट डुबाके' में मचाया धमाल |url=https://www.jansatta.com/entertainment/bhojpuri/bhojpuri-gaane-bhojpuri-news-khesari-lal-yadav-new-song-video-biscuit-dubake-from-movie-bhag-khesari-bhag-priyanka-singh-dancing-moves-super-smooth-with-khesari-2019-superhit-chartbuster/1245479/ |access-date=2020-07-07 |website=Jansatta |language=hi}}</ref><templatestyles src="Module:Track listing/styles.css"></templatestyles>
== संदर्भ ==
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