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सौर मंडल
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[[चित्र:Solar System True Color BH.png|thumb|upright=1.5|सौर मण्डल क ग्रह (ख़ाली क्रम आ आकार सही पैमाना पर दूरी ना)]]
[[File:Size planets comparison.jpg|thumb|right|upright=1.25|सौर मण्डल की ग्रहन की आकार क तुलना - बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण, पृथिवी, शुक्र, मंगल, बुध]]
'''सौर मंडल''' [[सुरुज]] आ एकरी चारों ओर चक्कर लगावेवाला [[ग्रह]] आ उन्हन की [[उपग्रह]] कुल से मिल के बनल परिवार के कहल जाला। वर्तमान समय में सूर्य क आठ गो ग्रह बाड़ें काहें से कि नौवां ग्रह [[प्लूटो]] के 2006 में अनियमित आकार की कक्षा की कारण ग्रहन की लिस्ट से बाहर क दिहल गइल। अब प्लूटो के [[बौना ग्रह]] कहल जाला।<ref>[http://www.iau.org/static/resolutions/Resolution_GA26-5-6.pdf "सौर मण्डल में ग्रह क परिभाषा: प्रस्ताव 5 आ 6" (PDF)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090620102000/http://www.iau.org/static/resolutions/Resolution_GA26-5-6.pdf |date=2009-06-20 }} (अंग्रेजी में) IAU 2006 General Assembly (International Astronomical Union).</ref>
सूर्य की ओर से क्रम से [[बुध ग्रह|बुध]], [[शुक्र ग्रह|शुक्र]], [[पृथिवी]], [[मंगल ग्रह|मंगल]], [[बृहस्पति ग्रह|बृहस्पति]], [[शनि ग्रह|शनि]], [[यूरेनस ग्रह|यूरेनस]] (अरुण) अउरी [[नेपच्यून ग्रह|नेपच्यून]] (वरुण) इहे आठ गो ग्रह बा। सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति हवे आ सबसे छोट बुध। मंगल आ बृहस्पति के बीच में छोट छोट पिंड सभ के पेटी पावल जाले आ एह पिंड सभ के [[एस्टेरॉइड्स]] कहल जाला।
== सुरुज ==
{{Main article|सुरुज}}
[[File:Planets and sun size comparison.jpg|thumb|upright=1.25|[[सुरुज]] आ ग्रह सभ के आकार के तुलना]]
सुरुज सौर मंडल के [[तारा]] हवे आ बाकी सभ सौरमंडली पिंड सभ के तुलना में सभसे ढेर वजनदार, बाकी सभ से बहुते ढेर वजन वाला पिंड हवे। एकर बिसाल द्रब्यमान (332,900 पृथिवी के बरोबर)<ref>{{cite web|title=Sun: Facts & Figures|publisher=NASA|url=http://solarsystem.nasa.gov/planets/profile.cfm?Object=Sun&Display=Facts&System=Metric |accessdate=14 May 2009 |archiveurl = https://web.archive.org/web/20080102034758/http://solarsystem.nasa.gov/planets/profile.cfm?Object=Sun&Display=Facts&System=Metric |archivedate = 2 January 2008}}</ref> एकरे कोर में अतना बेसी तापमान आ दाब बना देला कि [[हाइड्रोजन]] के [[हीलियम]] में बदलाव के काम परमाणु फ्यूजन द्वारा होखे ला आ एही कारण ई मेन सीक्वेंस तारा हवे।<ref>{{cite book|last=Zirker|first=Jack B.|title=Journey from the Center of the Sun|date=2002|publisher=Princeton University Press|isbn=978-0-691-05781-1|pages=120–127}}</ref> एह कारण भारी मात्रा में ऊर्जा रिलीज होले जेकर ज्यादातर हिस्सा बाहरी अंतरिक्ष में रेडियेशन के रूप में फइले ला आ एह रेडियेशन के सभसे ढेर मात्रा प्रकाश (''विजिबल लाइट'') के रूप में होले।<ref>{{cite web|title=Why is visible light visible, but not other parts of the spectrum?|publisher=The Straight Dome|date=2003|url=http://www.straightdope.com/columns/read/2085/why-is-visible-light-visible-but-not-other-parts-of-the-spectrum|accessdate=14 मई 2009}}</ref>
सुरुज [[जी-प्रकार के मेन-सीक्वेंस तारा]] हवे। अउरी ढेर गरम मेन-सीक्वेंस तारा सभ ज्यादा चमकदार होलें। सुरुज के तापमान [[ओ-प्रकार मेन-सीक्वेंस|सभसे गरम तारा]] सभ आ सभसे ठंढा तारा सभ के बीच में हवे। सुरुज से ढेर ताप आ दमक वाला तारा बहुत कंचित-कला पावल जालें, जबकी एकरे ले बहुत कम चमक आ ताप वाला तारा, जिनहन के ''[[रेड ड्वार्फ]]'' कहल जाला, आकाशगंगा के कुल तारा सभ के 85% हिस्सा हवें।<ref name=sun>{{cite news |first=Ker |last=Than |title=Astronomers Had it Wrong: Most Stars are Single |publisher=SPACE.com |date=30 January 2006 |url=http://www.space.com/scienceastronomy/060130_mm_single_stars.html |accessdate=1 August 2007}}</ref><ref>{{Cite conference|date=2001|pages=119 |author1=Smart, R. L. |author2=Carollo, D. |author3=Lattanzi, M. G. |author4=McLean, B. |author5=Spagna, A. |booktitle=Ultracool Dwarfs: New Spectral Types L and T |editor1=Hugh R. A. Jones |editor2=Iain A. Steele |publisher=Springer |title=The Second Guide Star Catalogue and Cool Stars|bibcode=2001udns.conf..119S}}</ref>
सुरुज [[पापुलेशन I तारा]] हवे; एकरे ले पुरानका पापुलेशन II तारा सभ के तुलना में एह में हाइड्रोजन आ हीलियम से भारी तत्व (खगोलीय पैरालांस में धातु) के मात्रा ढेर पावल जाले।<ref>{{cite journal |author1=T. S. van Albada |author2=Norman Baker |title=On the Two Oosterhoff Groups of Globular Clusters |journal=The Astrophysical Journal |volume=185 |date=1973 |pages=477–498 |doi=10.1086/152434 |bibcode=1973ApJ...185..477V}}</ref> हाइड्रोजन आ हीलियम से भारी तत्व सभ के निर्माण प्राचीन आ बिस्फोटित हो रहल तारा सभ के कोर में भइल, एही से ब्रहमांड में एह पदार्थ सभ के बहुतायत (एनरिचमेंट) खाती एह तारा सभ के मुर्दा होखे के परल होखी। सभसे पुराण तारा सभ में सबसे कम धातु मिले ला, जबकि बाद के तारा सब में ज्यादा। धातु यानी मेटल के मौजूदगी सुरुज के चारों ओर ग्रह मंडली के निर्माण में बहुत महत्वपूर्ण रहल होखी अइसन अनुमान लगावल जाला काहें से कि ग्रह सभ के उत्पत्ती "मेटल" सभ के एकट्ठा होखे से होला।<ref>{{cite journal |title=An Estimate of the Age Distribution of Terrestrial Planets in the Universe: Quantifying Metallicity as a Selection Effect |author=Charles H. Lineweaver |journal=Icarus |date=9 मार्च 2001 |arxiv=astro-ph/0012399 |doi=10.1006/icar.2001.6607 |volume=151 |issue=2 |pages=307–313 |bibcode=2001Icar..151..307L}}</ref>
== अंदरूनी सौरमंडल ==
'''अंदरूनी सौरमंडल''' में सौरमंडल के अइसन हिस्सा आवे ला जे में [[#टेरेस्ट्रियल ग्रह|टेरेस्ट्रियल ग्रह]] आ [[#एस्टेरॉइड्स|एस्टेरॉइड पेटी]] के शामिल कइल जाला।<ref name=inner>{{cite web|title=Inner Solar System |publisher=NASA Science (Planets) |url=http://nasascience.nasa.gov/planetary-science/exploring-the-inner-solar-system |accessdate=9 May 2009 |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20090511182050/http://nasascience.nasa.gov/planetary-science/exploring-the-inner-solar-system |archivedate=11 May 2009 |df= }}</ref> एह अंदरूनी भा भीतरी सौरमंडल के पिंड सभ सिलिका वाला पदार्थ आ धातु सभ से बनल हवें आ तुलना में ई सुरुज के नजदीक बाने; एह पूरा क्षेत्र के त्रिज्या (रेडियस) बृहस्पति आ शनी के कक्षा के अंतर (बीच के दूरी) से भी कम बा। ई इलाका बर्फ रेखा (फ्रॉस्ट लाइन) के भितरे पड़े ला जे सुरुज से करीब 5 एयू के दूरी से कुछ कम (लगभग 700 मिलियन किलोमीटर या 70 करोड़ किलोमीटर) दूरी तक ले मानल जाले।<ref>{{cite web|url=http://www.astronoo.com/en/articles/frost-line.html|title=Frost line or snow line or ice line in the solar system|publisher=}}</ref>
=== {{anchor|टेरेस्ट्रियल ग्रह}} भीतरी ग्रह ===
{{मुख्य लेख|टेरेस्ट्रियल ग्रह|इन्फीरियर आ सुपीरियर ग्रह}}
[[File:Telluric planets size comparison.jpg|thumb|upright=1.25|भीतरी ग्रह, बायें से दाहिने: [[पृथिवी]], [[मंगल]], [[शुक्र]], आ [[बुध (ग्रह)|बुध]] (पैमाना अनुसार साइज में)।]]
चार गो '''भीतरी ग्रह''' (इनर प्लैनेट) सभ के रचना चट्टानी पदार्थ से भइल हवे; [[प्राकृतिक उपग्रह]] नामौजूद बाने या फिर बहुत कम बाने, कौनों छल्ला इनहन के चारो ओर ना मिले लें। इनहन के रचना में रिफ्रेक्शन वाला मटेरियल के बहुलता बा जइसे की सिलिकेट पदार्थ सभ जिनहन से एह ग्रहन के ऊपरी परत - क्रस्ट, आ बिचली परत - मैंटल, के निर्माण भइल हवे, आ धातु वाला पदार्थ जइसे कि लोहा आ निकेल से इनहन के सभसे अंदरूनी भाग - कोर के निर्माण भइल हवे। चार गो भीतरी ग्रह सभ में से तीन गो (शुक्र, मंगल आ पृथिवी) के चारो ओर [[वायुमंडल (सामान्य)|वायुमंडल]] पावल जाला जे [[मौसम|मौसमी घटना]] पैदा करे खाती पर्याप्त बा; सगरी चारों पर इम्पैक्ट क्रेटर पावल जालें आ सतह पर [[प्लेट टेक्टॉनिक्स|टेक्टॉनिक]] [[थलरूप]] मिले लें जइसे कि [[ज्वालामुखी]] आ [[रिफ्ट घाटी]]। ''भीतरी ग्रह'' (inner planet) शब्द के ''[[इन्फीरियर आ सुपीरियर ग्रह|हीन ग्रह]]'' (''inferior planet'') से अलग बूझे के चाहीं, हीन ग्रह में खाली दू गो ग्रह आवे लें (बुध आ शुक्र) जे पृथिवी के तुलना में सुरुज के नजदीक बाने, यानी पृथिवी के ओर से देखे पर भीतर की ओर मौजूद कक्षा में सुरुज के चक्कर लगावे लें।
====बुध====
बुध ({{Convert|0.307|-|0.588|AU|e6km e6mi|abbr=unit}} दूर<ref name="nasa-factsheet">{{cite web |last1=Williams |first1=David |title=Planetary Fact Sheet - Metric |url=https://nssdc.gsfc.nasa.gov/planetary/factsheet/ |website=NASA Goddard Space Flight Center |access-date=11 December 2022 |date=27 December 2021 |archive-date=19 July 2012 |archive-url=https://archive.today/20120719082605/http://nssdc.gsfc.nasa.gov/planetary/factsheet/ |url-status=dead }}</ref>) सुरुज के सभसे नजदीकी ग्रह हवे। सौरमंडल (0.055 MEarth) के सभसे छोट ग्रह, बुध के कौनों प्राकृतिक उपग्रह नइखे। प्रमुख भूबिज्ञान के बिसेसता सभ में इजेक्टा ब्लैंकेट वाला इम्पैक्ट क्रेटर भा बेसिन, मैग्मा के बहाव समेत सुरुआती ज्वालामुखी गतिविधि के अवशेष आ लोब वाला रिज भा रुपिया सभ बाड़ें जे शायद ग्रह के इतिहास के सुरुआत में संकुचन के दौर से पैदा भइल रहलें।<ref>{{Cite journal |last1=Watters |first1=Thomas R. |last2=Solomon |first2=Sean C. |last3=Robinson |first3=Mark S. |last4=Head |first4=James W. |last5=André |first5=Sarah L. |last6=Hauck |first6=Steven A. |last7=Murchie |first7=Scott L. |date=August 2009 |title=The tectonics of Mercury: The view after MESSENGER's first flyby |url=https://linkinghub.elsevier.com/retrieve/pii/S0012821X09000466 |journal=Earth and Planetary Science Letters |language=en |volume=285 |issue=3–4 |pages=283–296 |doi=10.1016/j.epsl.2009.01.025 |bibcode=2009E&PSL.285..283W |access-date=3 April 2022 |archive-date=12 February 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220212122212/https://linkinghub.elsevier.com/retrieve/pii/S0012821X09000466 |url-status=live }}</ref> बुध के बहुत क्षीण वायुमंडल में बुध के चुंबकीय क्षेत्र से फंसल सौर-हवा के कण सभ के साथे-साथ सौर हवा द्वारा एकरे सतह से ब्लास्ट कइल परमाणु सभ बाड़ें।<ref>{{cite web |date=2006 |first=Bill |last=Arnett |title=Mercury |website=Nine Planets |url=http://www.nineplanets.org/mercury.html |access-date=14 September 2006 |archive-date=5 December 2003 |archive-url=https://web.archive.org/web/20031205031515/http://www.nineplanets.org/mercury.html |url-status=live }}</ref><ref>{{cite journal |last1=Domingue |first1=Deborah L. |last2=Koehn |first2=Patrick L. |display-authors=2 |last3=Killen |first3=Rosemary M. |last4=Sprague |first4=Ann L. |last5=Sarantos |first5=Menelaos |last6=Cheng |first6=Andrew F. |last7=Bradley |first7=Eric T. |last8=McClintock |first8=William E. |title=Mercury's Atmosphere: A Surface-Bounded Exosphere |journal=Space Science Reviews |volume=131 |issue=1–4 |pages=161–186 |date=2009 |doi=10.1007/s11214-007-9260-9 |bibcode=2007SSRv..131..161D |s2cid=121301247 |quote=The composition of Mercury's exosphere, with its abundant H and He, clearly indicates a strong solar wind source. Once solar wind plasma and particles gain access to the magnetosphere, they predominantly precipitate to the surface, where solar wind species are neutralized, thermalized, and released again into the exosphere. Moreover, bombardment of the surface by solar wind particles, especially energetic ions, contributes to ejection of neutral species from the surface into the exosphere (via "sputtering") as well as other chemical and physical surface modification processes.}}</ref> एकर अपेक्षाकृत बड़हन लोहा के कोर आ पतला मेंटल के बारे में अबहिन ले पर्याप्त रूप से ब्याख्या नइखे हो पावल। परिकल्पना सभ में ई सामिल बा कि एकर बाहरी परत सभ कौनों भारी धक्का से उधिया गइल, या फिर युवा सुरुज के ऊर्जा के कारण एकरा के पूरा तरीका से जमा होखे से रोकल गइल।<ref>{{cite journal | last1 = Benz | first1 = W. | last2 = Slattery | first2 = W.L. | last3 = Cameron | first3 = A.G.W. | year = 1988 | title = Collisional stripping of Mercury's mantle | journal = Icarus | volume = 74 | issue = 3 | pages = 516–528 | doi = 10.1016/0019-1035(88)90118-2 | bibcode = 1988Icar...74..516B | type = Submitted manuscript | url = https://zenodo.org/record/1253898 | access-date = 25 August 2019 | archive-date = 5 September 2019 | archive-url = https://web.archive.org/web/20190905034903/https://zenodo.org/record/1253898 | url-status = live }}</ref><ref>{{cite journal | last1 = Cameron | first1 = A.G.W. | year = 1985 | title = The partial volatilization of Mercury | journal = Icarus | volume = 64 | issue = 2| pages = 285–294 | doi=10.1016/0019-1035(85)90091-0|bibcode = 1985Icar...64..285C }}</ref>
"वल्केनॉइड" सभ, मने की बुध आ सुरुज के बीच स्थिर कक्षा में मौजूद क्षुद्रग्रह सभ, के खोज करे के कोसिस कइल गइल बा, बाकी कौनों के खोज हो नइखे पवले।<ref>{{cite journal |date=2004 |pages=312–315 |volume=148 |issue=1 |journal=[[Icarus (journal)|Icarus]] |last1=Durda |first1=D .D. |last2=Stern |first2=S. A. |last3=Colwell |first3=W. B. |last4=Parker |first4=J. W. |last5=Levison |first5=H. F. |last6=Hassler |first6=D. M. |title=A New Observational Search for Vulcanoids in SOHO/LASCO Coronagraph Images |doi=10.1006/icar.2000.6520 |bibcode=2000Icar..148..312D}}</ref><ref name=Steffl2013>{{cite journal
|last1=Steffl |first1=A. J.
|last2=Cunningham |first2=N. J. |last3=Shinn |first3=A. B. |last4=Stern |first4=S. A.
|title=A Search for Vulcanoids with the STEREO Heliospheric Imager
|journal=Icarus
|volume=233 |issue=1 |pages=48–56 |date=2013
|doi=10.1016/j.icarus.2012.11.031
|arxiv=1301.3804
|bibcode= 2013Icar..223...48S|s2cid=118612132
}}</ref>
====शुक्र====
शुक्र (सुरुज से {{Convert|0.718|-|0.728|AU|e6km e6mi|abbr=unit}} दूरी पर<ref name="nasa-factsheet" />) आकार में पृथिवी ({{earth mass|0.815}}) के नजदीक बा आ पृथिवी नियर, लोहा के कोर के चारों ओर मोट सिलिकेट मेंटल वाला ग्रह हवे, एकर पर्याप्त वायुमंडल बाटे, आ आंतरिक भूबिज्ञान में गतिविधि के प्रमाण मिले ला। ई पृथिवी के तुलना में बहुत सूखा बा आ एकर वायुमंडल नब्बे गुना घन बा। शुक्र के कवनो प्राकृतिक उपग्रह नइखे। ई सभसे गरम ग्रह हवे, सतह के तापमान {{cvt|400|C|F}} से ढेर बाटे, मुख्य रूप से वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैस सभ के मात्रा के कारण।<ref>{{cite thesis|first=Mark Alan |last=Bullock |title=The Stability of Climate on Venus |publisher=Southwest Research Institute |date=1997 |url=http://www.boulder.swri.edu/~bullock/Homedocs/PhDThesis.pdf |access-date=26 December 2006 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20070614202751/http://www.boulder.swri.edu/~bullock/Homedocs/PhDThesis.pdf |archive-date=14 June 2007 |type=PhD}}</ref> एह ग्रह के कौनों चुंबकीय क्षेत्र नइखे जे एकरे पर्याप्त वायुमंडल के खतम होखे से रोके, ई बतावे ला कि ज्वालामुखी बिस्फोट से एकर वायुमंडल के भरपाई लगातार हो रहल बा।<ref>{{cite web |date=1999 |first=Paul |last=Rincon |title=Climate Change as a Regulator of Tectonics on Venus |work=Johnson Space Center Houston, TX, Institute of Meteoritics, University of New Mexico, Albuquerque, NM |url=http://www.boulder.swri.edu/~bullock/Homedocs/Science2_1999.pdf |access-date=19 November 2006 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20070614202807/http://www.boulder.swri.edu/~bullock/Homedocs/Science2_1999.pdf |archive-date=14 June 2007 }}</ref> तुलनात्मक रूप से युवा एह ग्रह के सतह पर ज्वालामुखी गतिविधि के बिस्तार से सबूत देखे के मिले ला, बाकी ई प्लेट टेक्टोनिक्स से रहित बा। एकरा में 70 करोड़ साल के समय पैमाना पर रिसर्फेसिंग एपिसोड हो सकेला।<ref>{{cite journal
| title=Volcanism and volatile recycling on a one-plate planet: Applications to Venus
| last1=Elkins-Tanton | first1=L. T. | last2=Smrekar | first2=S. E. | last3=Hess | first3=P. C. | last4=Parmentier | first4=E. M.
| journal=Journal of Geophysical Research
| volume=112 | issue=E4 | id=E04S06 | date=March 2007
| doi=10.1029/2006JE002793 | bibcode=2007JGRE..112.4S06E }}</ref>
====पृथिवी====
पृथिवी (सुरुज से {{Convert|0.983|-|1.017|AU|e6km e6mi|abbr=unit}} के दूरी पर) भीतरी ग्रह सभ में सभसे बड़हन आ घन ग्रह हवे, एकलौता अइसन ग्रह हवे जहाँ वर्तमान भूबिज्ञान के गतिविधि मिले ला आ एकलौता अइसन जगह हवे जहाँ जीवन के अस्तित्व बाटे।<ref name=life>{{cite web |title=What are the characteristics of the Solar System that lead to the origins of life? |publisher=NASA Science (Big Questions) |url=https://science.nasa.gov/planetary-science/big-questions/what-are-the-characteristics-of-the-solar-system-that-lead-to-the-origins-of-life-1/ |archive-url=https://web.archive.org/web/20100408055814/http://science.nasa.gov/planetary-science/big-questions/what-are-the-characteristics-of-the-solar-system-that-lead-to-the-origins-of-life-1/ |url-status=dead |archive-date=8 April 2010 |access-date=30 August 2011}}</ref> एकर तरल जलमंडल स्थलीय ग्रह सभ में बिसेस बाटे आ ई एकलौता अइसन ग्रह हवे जहाँ प्लेट टेक्टोनिक्स के घटना मिले ला।<ref>{{cite web | first=Shannon | last=Hall | date=20 July 2017 | title=Earth's Tectonic Activity May Be Crucial for Life—and Rare in Our Galaxy | publisher=Scientific American | url=https://www.scientificamerican.com/article/earths-tectonic-activity-may-be-crucial-for-life-and-rare-in-our-galaxy/ | access-date=12 May 2022 | archive-date=12 May 2022 | archive-url=https://web.archive.org/web/20220512174249/https://www.scientificamerican.com/article/earths-tectonic-activity-may-be-crucial-for-life-and-rare-in-our-galaxy/ | url-status=live }}</ref> पृथिवी के वायुमंडल बाकी ग्रह सभ से बिल्कुल अलग बाटे, जीवन के मौजूदगी से एकरा में बदलाव भइल बा जेह में 21% मुक्त ऑक्सीजन पावल जाला।<ref name=handbook>{{cite book |editor-last=Haynes |editor-first= H. M. |title=[[CRC Handbook of Chemistry and Physics]] |publisher=CRC Press |edition=97th |year=2016–2017 |page=14{{hyphen}}3 |isbn=978-1-4987-5428-6}}</ref><ref name="NYT-20131003">{{cite news |last=Zimmer |first=Carl |author-link=Carl Zimmer |title=Earth's Oxygen: A Mystery Easy to Take for Granted |url=https://www.nytimes.com/2013/10/03/science/earths-oxygen-a-mystery-easy-to-take-for-granted.html |archive-url=https://web.archive.org/web/20131003121909/http://www.nytimes.com/2013/10/03/science/earths-oxygen-a-mystery-easy-to-take-for-granted.html |archive-date=3 October 2013 |url-access=limited |date=3 October 2013 |work=[[The New York Times]] |access-date=3 October 2013}}</ref> एह ग्रह के चुंबकमंडल सतह के सौर आ ब्रह्मांडीय बिकिरण से बचावे ला, वायुमंडलीय स्ट्रिपिंग के सीमित करे ला आ जीवन के रहे के क्षमता के बरकरार रखे ला।<ref>{{cite book
| title=Radioecology: Sources and Consequences of Ionising Radiation in the Environment
| first=R. J.
| last=Pentreath
| date=2021
| pages=94–97
| isbn=9781009040334
| publisher=Cambridge University Press
| url=https://www.google.com/books/edition/Radioecology/avRVEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&pg=PA94
| access-date=12 April 2022
| archive-date=20 April 2022
| archive-url=https://web.archive.org/web/20220420161217/https://www.google.com/books/edition/Radioecology/avRVEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&pg=PA94
| url-status=live
}}</ref> एकर एगो प्राकृतिक उपग्रह बा, चंद्रमा, जे सौरमंडल में कौनों स्थलीय ग्रह के एकलौता बड़हन उपग्रह हवे।
====मंगल====
मंगल (सुरुज से {{Convert|1.382|-|1.666|AU|e6km e6mi|abbr=unit}} दूरी पर) पृथिवी आ शुक्र ({{earth mass|0.107}}) से छोट बा। एकर वायुमंडल ज्यादातर कार्बन डाइऑक्साइड से बनल बा आ सतह पर हवादाब {{Convert|6.1|mb|psi inHg}} होला; वायुमंडल पृथिवी के तुलना में लगभग 0.6% बाटे बाकी मौसम के घटना सभ के सपोर्ट करे खातिर पर्याप्त बाटे।<ref>{{cite book|title= Encyclopaedia of the Solar System|editor=Lucy-Ann McFadden|display-editors=etal|chapter=Mars Atmosphere: History and Surface Interactions|first1=David C. |last1=Gatling |first2=Conway |last2=Leovy |pages=301–314|date=2007}}</ref> एकर सतह पर ज्वालामुखी, जइसे कि ओलंपस मोंस, आ रिफ्ट घाटी, जइसे कि वैलेस मैरिनेरिस, भूबिज्ञान के गतिविधि देखावे ले जे हाल के समय में 20 लाख साल पहिले ले रहल हो सके ला।<ref>{{cite web |date=2004 |title=Modern Martian Marvels: Volcanoes? |first=David |last=Noever |work=NASA Astrobiology Magazine |url=https://www.astrobio.net/mars/modern-martian-marvels-volcanoes/ |access-date=23 July 2006 |archive-date=14 March 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200314112555/https://www.astrobio.net/mars/modern-martian-marvels-volcanoes/ |url-status=usurped }}</ref> एकर लाल रंग एकरे माटी में मौजूद आयरन ऑक्साइड (जंग) के कारण हवे।<ref>{{Cite journal |last=Peplow |first=Mark |date=6 May 2004 |title=How Mars got its rust |url=http://www.nature.com/articles/news040503-6 |journal=Nature |language=en |pages=news040503–6 |doi=10.1038/news040503-6 |issn=0028-0836 |access-date=9 April 2022 |archive-date=7 April 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220407105832/https://www.nature.com/articles/news040503-6 |url-status=live }}</ref> मंगल ग्रह पर दू गो छोट-छोट प्राकृतिक उपग्रह (डेइमोस आ फोबोस) बाड़ें जिनहन के या त कैप्चर कइल क्षुद्रग्रह<ref>{{cite web |date=2004 |title=A Survey for Outer Satellites of Mars: Limits to Completeness |first1=Scott S. |last1=Sheppard |first2=David |last2=Jewitt |first3=Jan |last3=Kleyna |work=[[Astronomical Journal]] |url=http://www2.ess.ucla.edu/~jewitt/papers/2004/SJK2004.pdf |access-date=26 December 2006 |archive-date=3 March 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160303205126/http://www2.ess.ucla.edu/~jewitt/papers/2004/SJK2004.pdf |url-status=live }}</ref> मानल जाला या फिर मंगल के इतिहास के सुरुआत में भारी परभाव से बाहर निकालल मलबा मानल जाला।<ref>{{cite journal |first1=Pascal |last1=Rosenblatt |first2=Sébastien |last2=Charnoz |first3=Kevin M. |last3=Dunseath |first4=Mariko |last4=Terao-Dunseath |first5=Antony |last5=Trinh |first6=Ryuki |last6=Hyodo |first7=Hidenori |last7=Genda |first8=Stéven |last8=Toupin |title=Accretion of Phobos and Deimos in an extended debris disc stirred by transient moons |journal=Nature Geoscience |volume=9 |issue=8 |pages=581 |year=2016 |doi=10.1038/ngeo2742 |bibcode=2016NatGe...9..581R |s2cid=133174714 |url=https://hal.archives-ouvertes.fr/hal-01350105/file/Letter.pdf |access-date=25 August 2019 |archive-date=9 March 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200309100516/https://hal.archives-ouvertes.fr/hal-01350105/file/Letter.pdf |url-status=live }}</ref>
== बाहरी सौरमंडल ==
सौरमंडल के बाहरी इलाका में बिसाल ग्रह आ इनहन के बड़हन चंद्रमा सभ के निवास बा। सेंटोर आ कई गो अल्पकालिक धूमकेतु सभ भी एह इलाका में परिक्रमा करे लें। सुरुज से ढेर दूरी के कारण बाहरी सौरमंडल में मौजूद ठोस चीज सभ में भीतरी सौरमंडल के तुलना में वाष्पशील पदार्थ (वोलाटाइल) सभ के मात्रा ढेर होला, जइसे कि पानी, अमोनिया आ मीथेन काहें से कि कम तापमान के कारण ई यौगिक सभ ठोस रहे लें।
=== बाहरी ग्रह ===
चार गो बाहरी ग्रह सभ, जिनहन के बिसाल ग्रह भा जोवियन ग्रह भी कहल जाला, सामूहिक रूप से सुरुज के चक्कर लगावे वाला कुल मालुम द्रब्यमान के 99% हिस्सा हवें। बृहस्पति आ शनि एक साथ मिला के, पृथिवी के द्रब्यमान के 400 गुना से ढेर होलें आ इनहन में भारी मात्रा में हाइड्रोजन आ हीलियम नियन गैस सभ के बाड़ीं, एही से इनहन के गैस दिग्गज (गैस जायंट) नाँव दिहल गइल बा। यूरेनस आ नेपच्यून के द्रब्यमान बहुत कम बाटे – हर एक के द्रब्यमान 20 पृथिवी द्रब्यमान (''M<sub>Earth</sub>'') से कम बा – आ ई मुख्य रूप से बर्फ सभ से बनल बाड़ें। एह कारण सभ के कारण कुछ खगोल बिज्ञानी लोग के सुझाव बा कि ई लोग अपना अलगे श्रेणी में आवे लें जेकरा ''आइस जायंट'' कहल जा सके ला। चारो बिसाल ग्रह सभ में रिंग होलें, हालाँकि पृथिवी से खाली शनि के रिंग सिस्टम के आसानी से देखल जा सके ला। ''[[इन्फीरियर आ सुपीरियर ग्रह|सुपीरियर प्लैनेट]]'' शब्द पृथिवी के कक्षा से बाहर के ग्रह सभ के नाँव देला आ एह तरीका से सुपीरियर ग्रह में सगरी बाहरी ग्रह आ साथे-साथ मंगल के सामिल कइल जाला।
== पुच्छल तारा ==
{{Main|पुच्छल तारा}}
[[File:Comet_Hale-Bopp_1995O1.jpg|left|thumb|Comet Hale–Bopp seen in 1997]]
पुच्छल तारा भा धूमकेतु, चाहे बढ़नी, सभ सौरमंडल के छोट पिंड हवें, आमतौर पर खाली कुछ किलोमीटर के साइज के होलें, ई बहुत हद तक वाष्पशील (वोलाटाइल) बर्फ सभ से बनल होलें। इनहन के कक्षा बहुत चापट होलीं, आमतौर पर भीतरी ग्रह सभ के कक्षा सभ के भीतर एगो पेरिहेलियन आ प्लूटो से बहुत परे एगो एफेलियन होले। जब कौनों पुच्छल तारा भीतरी सौरमंडल में प्रवेश करे ला तब सुरुज के नजदीक होखे के कारण एकर बर्फीला सतह से सब्लिमेशन (ठोस से भाप में बदलाव) शुरू हो जाला आ आयनित हो जाला आ कोमा पैदा हो जाला: गैस आ धूल के एगो लंबा पोंछ अक्सर खाली आँख भर से लउके ला, बिना कौनों यंत्र के मदद के।
अल्पकालिक धूमकेतु सभ के कक्षा दू सौ साल से कम समय ले के चक्कर वाली होखे ले। लंबा अवधि वाला धूमकेतु सभ के कक्षा हजारन साल ले के चक्कर वाली हो सके ले। अल्पकालिक धूमकेतु सभ के उत्पत्ती कुइपर बेल्ट में होखे के बिचार बा जबकि लंबा समय के धूमकेतु सभ, जइसे कि हेल–बोप, के उत्पत्ती ओर्ट बादर में होखे के बिचार बा। कई गो धूमकेतु समूह, जइसे कि क्र्यूट्ज धूप चले वाला लोग, एकल पैरेंट पिंड के टूटला से बनल। हाइपरबोलिक कक्षा वाला कुछ धूमकेतु सभ के उत्पत्ती सौरमंडल से बाहर हो सके ला, बाकी इनहन के सटीक कक्षा सभ के निर्धारण कइल मुश्किल बा। पुरान धूमकेतु सभ जिनहन के वाष्पशील पदार्थ सभ के ज्यादातर सौर ताप के कारण भगा दिहल गइल बा, अक्सर इनहन के एस्टराइड के श्रेणी में रखल जाला।
==इहो देखल जाय==
* [[ब्रह्मांड]]
* [[आकाशगंगा]]
* [[पुच्छल तारा]]
{{clear}}
==संदर्भ==
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==बाहरी कड़ी==
{{commonscat|Solar System}}
* [http://logic-law.com/index.php?title=A_Cosmic_History_of_Human_Evolution#Development_of_the_Solar_System A Cosmic History of the Solar System] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140426232154/http://logic-law.com/index.php?title=A_Cosmic_History_of_Human_Evolution#Development_of_the_Solar_System |date=2014-04-26 }}
* [http://www.joshworth.com/a-tediously-accurate-map-of-the-solar-system/ A Tediously Accurate Map of the Solar System (web based scroll map scaled to the Moon being 1 pixel)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160630160808/http://www.joshworth.com/a-tediously-accurate-map-of-the-solar-system/ |date=2016-06-30 }}
* [http://space.jpl.nasa.gov NASA's Solar System Simulator]
* [http://www.jpl.nasa.gov/solar_system NASA/JPL Solar System main page]
* [http://solarsystem.nasa.gov/planets/profile.cfm?Object=SolarSys&Display=Overview Solar System Profile] by [http://solarsystem.nasa.gov/index.cfm NASA's Solar System Exploration]
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| caption1 = फिजी देस के एगो छोटहन दीप
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| caption2 = ब्रिटिश दीपसमूह कई ठे दीप सभन से मिल के बनल हवे जेह में [[ग्रेट ब्रिटेन]] आ [[आयरलैंड]] सभसे बड़ बाने
| image3 = Small Island in Lower Saranac Lake.jpg
| caption3 = अमेरिका में एगो झील के बीचा में दीप
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| caption4 = चीन में एगो चट्टानी टापू
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| caption5 = [[ब्राजील]] के ई दीप सभ वास्तव में पहाड़ सभन के निचला हिस्सा के बूड़ जाए के कारण बनल हवें
| image6 = Burger OtokKriznaJama.jpg
| caption6 = जमीन के नीचे के गुफा में बनल एगो दीप
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| caption7 = मैनहट्टन में करीब 16 लाख लोग निवास करे ला
| image8 = ISS-38 Hawaiian Island chain.jpg
| caption8 = अंतरिक्ष से हवाई दीप के लिहल फोटो
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| caption9 = जापान के कंसाई हवाइअड्डा एगो बनावटी दीप पर बा
}}
'''दीप''' भा '''टापू''' ({{Lang|en|Island}}; [[हिंदी भाषा|हिंदी]] आ {{Langx|sa|द्वीप}}) [[महादीप|महादीप से छोटहन]] साइज के [[थलरूप|जमीनी]] हिस्सा टुकड़ा होल जेवन चारो ओर से पानी से घेराइल होखे। [[समुंद्र]] में पानी से घेराइल जमीन के दीप भा टापू कहल जाला। [[नदी]] आ [[झील]] में भी अगर कौनों अइसन रचना होखे तब ओहू के दीपे कहल जाला। [[भोजपुरी क्षेत्र]] में नदी के बीच अइसन टापू सभ के ''दिया'' चाहे ''दियारा'' कहल जाला।
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'''दीप''' भा '''टापू''' ({{Lang|en|Island}}; [[हिंदी भाषा|हिंदी]] आ {{Langx|sa|द्वीप}}) [[महादीप|महादीप से छोटहन]] साइज के [[थलरूप|जमीनी]] हिस्सा टुकड़ा होल जेवन चारो ओर से पानी से घेराइल होखे। [[समुंद्र]] में पानी से घेराइल जमीन के दीप भा टापू कहल जाला। [[नदी]] आ [[झील]] में भी अगर कौनों अइसन रचना होखे तब ओहू के दीपे कहल जाला। [[भोजपुरी क्षेत्र]] में नदी के बीच अइसन टापू सभ के ''दिया'' चाहे ''दियारा'' कहल जाला; हालाँकि, ई शब्द नदी के तीरे निचली कछार वाली जमीन खातिर भी इस्तेमाल होला।
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'''दीप''' भा '''टापू''' ({{Lang|en|Island}}; [[हिंदी भाषा|हिंदी]] आ {{Langx|sa|द्वीप}}) [[महादीप|महादीप से छोटहन]] साइज के [[थलरूप|जमीनी]] हिस्सा टुकड़ा होल जेवन चारो ओर से पानी से घेराइल होखे। [[समुंद्र]] में पानी से घेराइल जमीन के दीप भा टापू कहल जाला। दीपन के उनहन के उत्पत्ती के आधार पर कई किसिम में बाँटल जाला। महादीपीय दीप ओह दीपन के कहल जाला, जे [[प्लेट टैक्टॉनिक्स]] के कारण कवनो [[महादीप]] (कंटीनेंट) से अलग होके बनल बाड़ें। जबकि महासागरीय दीप अइसन दीप हउवें, जे कबो कवनो महादीप के हिस्सा ना रहल हवें। महासागरीय दीप [[ज्वालामुखी]] गतिविधि से बन सके लें आ बाद में चल के [[कोरल रीफ]] (मूँगा के चट्टान) के बिकास से ई [[एटॉल]] के रूप ले सके लें। समुंद्र तट पर तलछट के जमाव से दीप बन सके ला, जवना के [[बैरियर आइलैंड]] कहल जाला। [[नदी]] आ [[झील]] में भी अगर कौनों अइसन रचना होखे तब ओहू के दीपे कहल जाला। [[भोजपुरी क्षेत्र]] में नदी के बीच अइसन टापू सभ के ''दिया'' चाहे ''दियारा'' कहल जाला; हालाँकि, ई शब्द नदी के तीरे निचली कछारो वाली जमीन खातिर इस्तेमाल होला। आर्टिफिशियल दीप ऊ दीप हउवें, जे मनुष्य द्वारा बनावल जालें। एहमें लैगून के भीतर बनावल गइल छोट-छोट चट्टानी दीप से ले के, बिकास कार्य खातिर समुद्र भा झील के हिस्सा माटी-बालू भर के तइयार कइल गइल बड़हन साइज के लैंड रिक्लेमेशन परियोजना तक शामिल बाड़ी स।
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'''दीप''' भा '''टापू''' ({{Lang|en|Island}}; [[हिंदी भाषा|हिंदी]] आ {{Langx|sa|द्वीप}}) [[महादीप|महादीप से छोटहन]] साइज के [[थलरूप|जमीनी]] हिस्सा टुकड़ा होल जेवन चारो ओर से पानी से घेराइल होखे। [[समुंद्र]] में पानी से घेराइल जमीन के दीप भा टापू कहल जाला। दीपन के उनहन के उत्पत्ती के आधार पर कई किसिम में बाँटल जाला। महादीपीय दीप ओह दीपन के कहल जाला, जे [[प्लेट टैक्टॉनिक्स]] के कारण कवनो [[महादीप]] (कंटीनेंट) से अलग होके बनल बाड़ें। जबकि महासागरीय दीप अइसन दीप हउवें, जे कबो कवनो महादीप के हिस्सा ना रहल हवें। महासागरीय दीप [[ज्वालामुखी]] गतिविधि से बन सके लें आ बाद में चल के [[कोरल रीफ]] (मूँगा के चट्टान) के बिकास से ई [[एटॉल]] के रूप ले सके लें। समुंद्र तट पर तलछट के जमाव से दीप बन सके ला, जवना के [[बैरियर आइलैंड]] कहल जाला। [[नदी]] आ [[झील]] में भी अगर कौनों अइसन रचना होखे तब ओहू के दीपे कहल जाला। [[भोजपुरी क्षेत्र]] में नदी के बीच अइसन टापू सभ के ''दिया'' चाहे ''दियारा'' कहल जाला; हालाँकि, ई शब्द नदी के तीरे निचली कछारो वाली जमीन खातिर इस्तेमाल होला। आर्टिफिशियल दीप ऊ दीप हउवें, जे मनुष्य द्वारा बनावल जालें। एहमें लैगून के भीतर बनावल गइल छोट-छोट चट्टानी दीप से ले के, बिकास कार्य खातिर समुद्र भा झील के हिस्सा माटी-बालू भर के तइयार कइल गइल बड़हन साइज के लैंड रिक्लेमेशन परियोजना तक शामिल बाड़ी स।
दीप अनेक प्रकार के पेड़-पौधा आ जिया-जंतु के [[हैबीटाट|निवास]] होलें। महासागरीय दीपन के चारों ओर समुंद्र होखे के कारण नया प्रजातियन के उहाँ पहुँचे में प्राकृतिक बाधा रहेला। एहसे जवन प्रजाति दीप तक पहुँच जालीं, ऊ बाकी दुनिया से अलग रहके अपनहीं ढंग से बिकसित होखे लागे लीं। महाद्वीपीय दीपन पर ओह महाद्वीप के पेड़-पौधा आ जीव-जंतु पावल जालें, जवना महादीप से ऊ अलग भइल रहलें। अगर महाद्वीपीय दीप बहुत पहिले महाद्वीप से अलग भइल होखे, त [[नेचुरल सिलेक्शन]] के कारण ओह दीप के जीव-जंतु आ वनस्पति समय के साथ मुख्य भूमि (मेन महादीप) पर पावल जाए वाला प्रजातियन से काफी अलग किसिम के बिकसित हो सके लीं।
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| caption9 = जापान के कंसाई हवाइअड्डा एगो बनावटी दीप पर बा
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'''दीप''' भा '''टापू''' ({{Lang|en|Island}}; [[हिंदी भाषा|हिंदी]] आ {{Langx|sa|द्वीप}}) [[महादीप|महादीप से छोटहन]] साइज के [[थलरूप|जमीनी]] हिस्सा टुकड़ा होल जेवन चारो ओर से पानी से घेराइल होखे। [[समुंद्र]] में पानी से घेराइल जमीन के दीप भा टापू कहल जाला। दीपन के उनहन के उत्पत्ती के आधार पर कई किसिम में बाँटल जाला। महादीपीय दीप ओह दीपन के कहल जाला, जे [[प्लेट टैक्टॉनिक्स]] के कारण कवनो [[महादीप]] (कंटीनेंट) से अलग होके बनल बाड़ें। जबकि महासागरीय दीप अइसन दीप हउवें, जे कबो कवनो महादीप के हिस्सा ना रहल हवें। महासागरीय दीप [[ज्वालामुखी]] गतिविधि से बन सके लें आ बाद में चल के [[कोरल रीफ]] (मूँगा के चट्टान) के बिकास से ई [[एटॉल]] के रूप ले सके लें। समुंद्र तट पर तलछट के जमाव से दीप बन सके ला, जवना के [[बैरियर आइलैंड]] कहल जाला। [[नदी]] आ [[झील]] में भी अगर कौनों अइसन रचना होखे तब ओहू के दीपे कहल जाला। [[भोजपुरी क्षेत्र]] में नदी के बीच अइसन टापू सभ के ''दिया'' चाहे ''दियारा'' कहल जाला; हालाँकि, ई शब्द नदी के तीरे निचली कछारो वाली जमीन खातिर इस्तेमाल होला। आर्टिफिशियल दीप ऊ दीप हउवें, जे मनुष्य द्वारा बनावल जालें। एहमें लैगून के भीतर बनावल गइल छोट-छोट चट्टानी दीप से ले के, बिकास कार्य खातिर समुद्र भा झील के हिस्सा माटी-बालू भर के तइयार कइल गइल बड़हन साइज के लैंड रिक्लेमेशन परियोजना तक शामिल बाड़ी स।
दीप अनेक प्रकार के पेड़-पौधा आ जिया-जंतु के [[हैबीटाट|निवास]] होलें। महासागरीय दीपन के चारों ओर समुंद्र होखे के कारण नया प्रजातियन के उहाँ पहुँचे में प्राकृतिक बाधा रहेला। एहसे जवन प्रजाति दीप तक पहुँच जालीं, ऊ बाकी दुनिया से अलग रहके अपनहीं ढंग से बिकसित होखे लागे लीं। महाद्वीपीय दीपन पर ओह महाद्वीप के पेड़-पौधा आ जीव-जंतु पावल जालें, जवना महादीप से ऊ अलग भइल रहलें। अगर महाद्वीपीय दीप बहुत पहिले महाद्वीप से अलग भइल होखे, त [[नेचुरल सिलेक्शन]] के कारण ओह दीप के जीव-जंतु आ वनस्पति समय के साथ मुख्य भूमि (मेन महादीप) पर पावल जाए वाला प्रजातियन से काफी अलग किसिम के बिकसित हो सके लीं।
मनुष्य कम से कम हजारन साल से दीपन पर रहत आ एक दीप से दुसरे दीप तक जतरा करत आइल बा। इतिहासी जुग में कुछ दीपन पर लोग थलसेतु (लैंड ब्रिज) के जरिये चहुँपल, कुछ महादीपन से अलग भइला के बाद आबाद भइलें, जबकि कई दीपन तक लोग [[नाइ]] से पहुँच के बसल। धरती के बहुत उत्तर भा दक्खिन ([[ध्रुव]] वाला इलाका सभ में) के कुछ दीपन के मौसमी बर्फ भा [[ग्लेशियर|हिमनद]] के बर्फ मुख्य भूमि से जोड़ देले आ ई पुल के काम कइले होखिहें। आज दुनियाँ में मनुष्य के लगभग 10% आबादी दीपन पर रह रहल बाटे। प्राकृतिक सुंदरता, अलगाव आ अनोखा संस्कृति के चलते दीप पर्यटक लोगन के बहुते पसंदीदा पर्यटन स्थल भी हउवें।
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[[श्रेणी:दीप| ]]
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ब्रह्मा
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[[चित्र:Brahma on hamsa.jpg|300px|thumbnail|right|ब्रह्मा के एगो चित्र में देखावल गइल बा]]
'''ब्रह्मा''', '''ब्रम्हा''' या '''बरम्हा''' हिन्दू धर्म में एगो प्रमुख [[देव|देवता]] हवें। ई तीन गो देवता जिनके [[त्रिदेव]] कहल जाला में शामिल हवें आ सृष्टि की रचना के देवता मानल जालें।
ब्रम्हा जी के पत्नी सावित्री मानल गइल हई। ब्रम्हा के [[बेद]] क रचयिता मानल जाला। प्राचीन ग्रंथ में इनकर सम्मान कइल जाला लेकिन इनकर पूजा बहुत (श्राप के कारण) कम होला।[3][4]
== ब्रह्मा जी के आयु ==
== देखल जाय ==
* [[त्रिमूर्ति]]
* [[विष्णु]] आ [[शिव]]
* [[सरस्वती]]
* [[प्रजापति]]
==संदर्भ==
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[[चित्र:Brahma on hamsa.jpg|300px|thumbnail|right|ब्रह्मा के एगो चित्र में देखावल गइल बा]]
'''ब्रह्मा''', '''ब्रम्हा''' या '''बरम्हा''' हिन्दू धर्म में एगो प्रमुख [[देव|देवता]] हवें। ई तीन गो देवता जिनके [[त्रिदेव]] कहल जाला में शामिल हवें आ सृष्टि की रचना के देवता मानल जालें।
ब्रम्हा जी के पत्नी सावित्री मानल गइल हई। ब्रम्हा के [[बेद]] क रचयिता मानल जाला। प्राचीन ग्रंथ में इनकर सम्मान कइल जाला लेकिन इनकर पूजा बहुत (श्राप के कारण) कम होला।[3][4]
== ब्रह्मा जी के आयु ==
श्रीमद्भागवत के अनुसार ब्रह्मा जी के 51 वां वर्ष चल रहल बा [10] ,100 वर्ष आयु भगवान ब्रह्मा जी के बतावाल गइल बा।<ref>{{Cite journal |title=Willamette Collegian 2018-10-10 |url=https://doi.org/10.31096/wua023-collegian-20181010 |doi=10.31096/wua023-collegian-20181010}}</ref>
== देखल जाय ==
* [[त्रिमूर्ति]]
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==संदर्भ==
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[[चित्र:Brahma on hamsa.jpg|300px|thumbnail|right|ब्रह्मा के एगो चित्र में देखावल गइल बा]]
'''ब्रह्मा''', '''ब्रम्हा''' या '''बरम्हा''' हिन्दू धर्म में एगो प्रमुख [[देव|देवता]] हवें। ई तीन गो देवता जिनके [[त्रिदेव]] कहल जाला में शामिल हवें आ सृष्टि की रचना के देवता मानल जालें।
ब्रम्हा जी के पत्नी सावित्री मानल गइल हई। ब्रम्हा के [[बेद]] क रचयिता मानल जाला। प्राचीन ग्रंथ में इनकर सम्मान कइल जाला लेकिन इनकर पूजा बहुत (श्राप के कारण) कम होला।[3][4]
== ब्रह्मा जी के आयु ==
श्रीमद्भागवत के अनुसार ब्रह्मा जी के 51 वां वर्ष चल रहल बा ,100 वर्ष आयु भगवान ब्रह्मा जी के बतावाल गइल बा।<ref>{{Cite journal |title=Willamette Collegian 2018-10-10 |url=https://doi.org/10.31096/wua023-collegian-20181010 |doi=10.31096/wua023-collegian-20181010}}</ref>
== देखल जाय ==
* [[त्रिमूर्ति]]
* [[विष्णु]] आ [[शिव]]
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==संदर्भ==
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टेम्पलेट:Coastal geography
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कुछ कड़ी लुकवावल गइल
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* [[आर्किपेलगो]]
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* [[आयर (थलरूप)|आयर]]
* [[बैरियर दीप]]
* [[खाड़ी]] (बेऽ)
* [[खाड़ीमुहाना बार]]
* [[बाइट (खाड़ी)|बाइट]]
* [[बोडेन]] <!-- Bodden -->
* [[नमकीन दलदल]]
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* [[तट]]
* [[समुंद्रतटीय मैदान]]
<!-- * [[Coastal waterfall]]-->
<!-- * [[Continental margin]]-->
* [[कंटीनेंटल शेल्फ]]
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* [[एश्चुअरी]]
* [[फर्थ]]
* [[फयार्ड]]
* [[फियॉर्ड]]
* [[Freshwater marsh]]
* [[Fundus (seabed)|Fundus]]
* [[Gat (landform)|Gat]]
* [[Geo (landscape)|Geo]]
* [[खाड़ी सभ के लिस्ट|खाड़ी]]
* [[Gut (coastal geography)|Gut]]
* [[Headland]]
* [[Inlet]]
* [[Intertidal wetland]]
* [[दीप]]
* [[Islet]]
* [[List of isthmuses|Isthmus]]
* [[लैगून]]
* [[Machair]]
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* [[Mega delta]]
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* [[Mudflat]]
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* [[प्रायदीप]]
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* [[नदी डेल्टा]]
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* [[Shoal]]
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* [[Tidal island]]
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* [[टोम्बोलो]]
* ''[[Windwatt]]''
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[[श्रेणी:भूगोल अउरी जगह नेविगेशन टेम्पलेट]]
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इन्फीरियर आ सुपीरियर ग्रह
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text/x-wiki
[[चित्र:Solar System True Color BH.png|thumb|upright=1.3|alt=सौर मंडल के ग्रह सभ के क्रम देखावत चित्र |[[सौर मंडल]] के [[ग्रह]] (ख़ाली क्रम आ आकार सही पैमाना पर, दूरी पैमाना अनुसार ना देखावल गइल बाटे)।]]
[[सौर मंडल]] में कौनों [[ग्रह]] के दुसरे ग्रह के संदर्भ में '''इन्फीरियर''' (''inferior'') भा '''इंटीरियर''' (''interior'') ग्रह कहल जाला जब ओह ग्रह के कक्षा ([[ऑर्बिट]], सुरुज के चारो ओर चक्कर लगावे वाला रस्ता) पूरा तरीका से दुसरका ग्रह के कक्षा के भीतर होखे। अगर [[पृथिवी]] के संदर्भ मानल जाय तब हमनी के सौर मंडल में दू गो ग्रह [[बुध ग्रह|बुध]] आ [[शुक्र ग्रह|शुक्र]] पृथिवी के संदर्भ में इन्फीरियर ग्रह हवें काहें से कि इनहन के ऑर्बिट पूरा तरीका से पृथिवी के ऑर्बिट से छोट हवे आ एकरे भीतर आवे ले। एह तरीका से सुरुज के चक्कर लगावे में पृथिवी इनहन दुनों से '''सुपीरियर''' (superior) ग्रह हवे। एही तरीका से पृथिवी के सुरुज के चारों ओर चक्कर लगावे वाली कक्षा जिनहन के कक्षा से छोट बाटे ऊ सगरी पिंड पृथिवी से सुपीरियर कहल जालें। [[मंगल ग्रह|मंगल]], [[बृहस्पति ग्रह|बृहस्पति]], [[शनि ग्रह|शनि]], [[यूरेनस ग्रह|यूरेनस]] आ [[नेपच्यून ग्रह|नेपच्यून]] पृथिवी के संदर्भ में सुपीरियर ग्रह हवें। [[बौना ग्रह]] जइसे कि सेरेस आ [[प्लूटो]] आ लगभग सगरी [[एस्टेरॉइड्स|एस्टेरॉइड]] सभ एह अरथ में सुपीरियर कहल जालें काहें कि इनहनों के ऑर्बिट पृथिवी के ऑर्बिट से बड़हन बाटे आ एकरा बहरें पड़े लीं।
== कटेगरी ==
जब पृथिवी के संदर्भ मानल जाला:
* इन्फीरियर ग्रह: बुध, आ शुक्र
* सुपीरियर ग्रह: मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस आ नेपच्यून
[[श्रेणी:सौरमंडल]]
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{{Infobox religious biography | religion = [[इस्लाम]]
| name = अबू रहमान अल-बेरूनी
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| caption = 1973 के सोवियत डाकटिकट पर काल्पनिक चित्रण
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| influenced =
}}
'''अबू रेहान मुहम्मद इब्न अहमद अल-बिरूनी''', जिनका के आमतौर पर '''अल-बरूनी''' कहल जाला, ({{c.|lk=no|973|1050}}){{sfn|Bosworth|2000}} [[ख़्वारिज़्म|ख़्वारिज़्म क्षेत्र]] के [[ईरान|ईरानी मूल]] के<ref>{{harvnb|Strohmaier|2006|p=112}}<br>{{harvnb|MacKenzie|2000}}<br>{{harvnb|Curtis|Stewart|2009|p=85}}<br>{{cite book |last1=Dale |first1=Stephen F. |title=Babur: Timurid Prince and Mughal Emperor, 1483–1530 |date=3 May 2018 |publisher=Cambridge University Press |isbn=978-1-316-99637-9 |page=142 |url=https://books.google.com/books?id=xyluDwAAQBAJ&pg=PA142 |language=en}}<br>{{Cite book |url={{google books |plainurl=y |id=7JmpQwAACAAJ}} |title= The Cambridge History of Iran: The Saljuq and Mongol Periods. Vol |date=1968 |publisher= [[Cambridge University Press]] |language=en |last=Bosworth |first=C. E. |chapter=The Political and Dynastic History of the Iranian World (A.D. 1000–1217) |editor-first=J.A. |editor-last=Boyle |quote=Page 7: "The Iranian scholar al-Biruni says that the Khwarazmian era began when the region was first settled and cultivated, this date being placed in the early 13th-century BC)" page 141 "the Khwarazmian al-Biruni'"|pages=7–141}}<br>{{Cite book|url={{google books |plainurl=y |id=gRKOPwAACAAJ}}|title=The Golden Age of Persia|last=Frye|first=Richard Nelson|date=February 2000|publisher=Phoenix Publishing, Incorporated|isbn=978-0-7538-0944-0|language=en|quote="The contribution of Iranians to Islamic mathematics is overwhelming. ..The name of Abu Raihan Al-Biruni, from Khwarazm, must be mentioned since he was one of the greatest scientists in World History"}}<br>{{cite book |last1=Panaino |first1=Antonio |title=Erexsha'a death or self sacrifice |date=27 October 2021 |publisher=Mimesis |isbn=978-88-575-8526-0 |page=32 |url=https://books.google.com/books?id=XJlKEAAAQBAJ&pg=PA32 |language=it}}</ref> महान बिद्वान आ बहुबिद्याविद (पॉलीमैथ) रहलें। ऊ इस्लामी स्वर्ण युग के प्रमुख बिद्वानन में गिनल जालें। अल-बरूनी के तुलनात्मक धर्म बिज्ञान के जनक, आधुनिक भू-मापन (जियोडेसी) के जनक, भारतबिद्या ([[इंडोलॉजी]]) के संस्थापक आ पहिला मानवविज्ञानी (एंथ्रोपोलॉजिस्ट) के रूप में सम्मान दिहल जाला।{{sfn|Ahmed|1984|pp=9{{ndash}}10}}
अल-बरूनी के [[फिजिक्स]], [[गणित]], [[खगोलिकी]] आ [[प्राकृतिक बिज्ञान]] पर गहिरा ज्ञान रहे। एकरे साथे ऊ [[इतिहासकार]], क्रोनोलॉजिस्ट आ [[भाषा बिज्ञान|भाषाविज्ञानी]] के रूप में भी प्रसिद्ध रहलें। ऊ अपना समय के लगभग सभे प्रमुख बिज्ञानन के अध्ययन कइलें आ ज्ञान के अनेक क्षेत्रन में अपना रिसर्च खातिर भरपूर सम्मान आ संरक्षण प्राप्त कइलें। राजा-महाराजा आ समाज के प्रभावशाली लोग अल-बरूनी के अनुसंधान के आर्थिक सहायता देत रहे आ अलग-अलग प्रोजेक्ट पर काम करे खातिर उनकर सहयोग लेत रहे। अल-बिरूनी खुद बहुत प्रभावशाली विद्वान रहलें, बाकिर ऊ दुसरे देशन के विद्वानन, खासकर [[अरस्तू]] आ अन्य [[प्राचीन यूनानी दर्शन|प्राचीन यूनानी दार्शनिकन]] के विचार से भी प्रभावित रहलें। दर्शन के अध्ययन के दौरान ऊ यूनानी विद्वानन के रचना से प्रेरणा लिहलें।
अल-बेरूनी एगो प्रतिभाशाली भाषाविद् रहलें। ऊ [[ख़्वारिज़्मी]], [[फ़ारसी]], [[अरबी]] आ [[संस्कृत]] भाषा में निपुण रहलें। एकरे अलावा उनकरा [[यूनानी]], [[हिब्रू]] आ [[सीरियाई भाषा]] के ज्ञान रहल। ऊ अपना जिनगी के अधिकतर समय [[गजनी]] में बितवलन, जे ओह समय [[गजनवी साम्राज्य]] के राजधानी रहे। आज ई शहर अफ़गानिस्तान के बिचला-पूरबी हिस्सा में स्थित बा। 1017 ई. में अल बरूनी [[भारतीय उपमहादीप]] के यात्रा कइलें। भारत में ओह जमाना में प्रचलित [[हिंदू धर्म]] आ संस्कृति के गहराई से अध्ययन करे के बाद ऊ ''[[तारीख़ अल-हिंद]]'' (मने कि "भारत के इतिहास") नाम के प्रसिद्ध ग्रंथ लिखलें।
अल बरूनी अपना समय के सबसे निष्पक्ष विद्वानन में गिनल जालें। ऊ अलग-अलग देशन के रीति-रिवाज, विश्वास आ धर्म के बिना पक्षपात के वर्णन कइलें। 11वीं सदी के भारत के बारे में उनकर सटीक आ निष्पक्ष विवरण खातिर विद्वान लोग उनकरा के "अल-उस्ताद" (अर्थात "महान गुरु") के उपाधि दिहलस।
== जिनगी ==
अल-बरूनी अपना जीवन के पहिलका पच्चीस बरिस [[ख़्वारिज़्म]] में बितवलन। एहिजा ऊ इस्लामी न्यायशास्त्र, धर्मशास्त्र, व्याकरण, गणित, खगोल विज्ञान, चिकित्सा आ दर्शनशास्त्र के पढ़ाई कइलें। एकरे साथे ऊ खाली भौतिक विज्ञान में ही ना, बल्कि लगभग सभे प्रमुख विज्ञान के क्षेत्र में भी गहिरा रुचि लिहलें। ख्वारज़्मी भाषा, जे अल-बरूनी के मातृभाषा रहे, इस्लाम के आगमन के बाद भी एह इलाका में कई सौ बरिस तक बोलल जात रहे। बाद में एह क्षेत्र के धीरे-धीरे तुर्कीकरण भइल, लेकिन प्राचीन ख्वारज़्म के कुछ सांस्कृतिक परंपरा तबो बचल रहल। एह बात से ई मानल जा सकेला कि अल-बिरूनी जइसन असाधारण विद्वान, जिनका लगे अनेक विषय के गहिर ज्ञान रहे, ओह इलाका के समृद्ध सांस्कृतिक माहौल में ही तैयार भइल रहलें।
अल-बरूनी अफ़्रीग़िद शासक वंश के समर्थक रहलें। जब 995 ईस्वी में मामूनी वंश अफ़्रीग़िद लोग के हटा के सत्ता पर आ गइल, त अल-बिरूनी अपना मातृभूमि छोड़ के [[बुखारा]] चल गइलें। ओह समय बुखारा पर सामानी शासक मंसूर द्वितीय, जे नूह द्वितीय के बेटा रहलें, के शासन रहे। अल-बरूनी के प्रसिद्ध विद्वान [[इब्न सीना]] (अविसेना) से चिठ्ठी-पत्री होखल करे। एह दुनो महान विद्वान के बीच कई विषय पर विचार-विमर्श भइल, आ ओह बातचीत के कुछ लिखित अभिलेख आजुओ उपलब्ध बाड़ें।
998 ईस्वी में अल बरूनी तबरिस्तान के ज़ियारिद शासक क़ाबूस (शासनकाल: 977–981 आ 997–1012 ईस्वी) के दरबार में गइलें। ओहिजा रहत ऊ अपना पहिलका महत्वपूर्ण किताब ''अल-आसार अल-बाक़िया अन अल-क़ुरून अल-खालिया'' लिखलें। एह किताब में इतिहास आ वैज्ञानिक कालक्रम के विस्तार से चर्चा कइल गइल बा। एकर अंग्रेजी अनुवाद ''क्रोनोलॉजी ऑफ एंशिएंट नेशंस'' (प्राचीन राष्ट्रन के कालक्रम) आ ''वेस्टिजेज ऑफ द पास्ट'' (अतीत के अवशेष) के नाम से जानल जाला। मानल जाला कि ई किताब लगभग 1000 ईस्वी में लिखल गइल रहे, हालाँकि बाद में अल बरूनी एह में कुछ संशोधनो कइलन। एह दौरान ऊ बावंदिद शासक अल-मर्जुबान के दरबार में भी गइल रहलन।जब ई साफ हो गइल कि अफ़्रीग़िद वंश के शासन पूरा तरीका खतम हो चुकल बा आ मामूनी वंश अब ख्वारिज्म पर मजबूती से राज करत बा, तब बरूनी मामूनी शासक लोग से मेल-जोल बना लिहलें। ओह समय गुरगंज (जे ख्वारज़्म में स्थित रहे) के दरबार धीरे-धीरे प्रसिद्ध हो रहल रहे, काहेकि ओहिजा बहुत प्रतिभाशाली वैज्ञानिक आ विद्वान एक जगह जुटत रहलें।
==भौतिक बिज्ञान==
बरूनी मध्यकालीन मैकेनिक्स में [[साइंटिफिक मेथड]] के इस्तेमाल के बढ़ावा देवे वाला प्रमुख बिद्वान लोगन में से रहलें। ऊ घनत्व (डेंसिटी) मापे खातिर एक्सपेरिमेंट पर आधारित तरीका डेवलप कइलें। एह काम खातिर ऊ एक किसिम के हाइड्रोस्टैटिक तरजूई (पानी के सिद्धांत पर काम करे वाला विशेष तरजूई) के इस्तेमाल कइलन। बरूनी के ई तरीका बहुत सटीक रहे, जवना के मदद से ऊ कीमती धातु, रत्न, आ इहाँ तक ले कि हवो के घनत्व मापे में सफल भइलें। ऊ पृथ्वी के त्रिज्या (रेडियस) निकाले खातिर एगो एक्सपेरिमेंट आधारित तरीका अपनवलें। एह खातिर ऊ पहाड़ के चोटी से क्षितिज के उन्नयन कोण मापलें आ ओकर तुलना नजदीक के समतल मैदान से देखल गइल क्षितिज के उन्नयन कोण से कइलें।
घनत्व मापे के तरीका विकसित करे के अलावा, अल-बरूनी घनत्व के विषय पर बिस्तार से लिखलें। ऊ घनत्व के अलग-अलग प्रकार आ ओह लोग के मापे के तरीका के भी समझवलें। एह विषय पर उनकर काम बाद के बैज्ञानिक अध्ययन पर बहुत गहिरा परभाव डललस।
== खगोल बिद्या आ ज्योतिष ==
[[File:Lunar phases al-Biruni.jpg|thumb|अल बरूनी के खगोल बिद्या पर एगो फ़ारसी रचना से लिहल चित्र जेह में [[सुरुज]] के संघे [[चंद्रमा]] के अलग-अलग कला सभ के ब्याख्या कइल गइल बाटे।]]
अल-बरूनी द्वारा लिखल 146 गो किताबिन में से 95 गो किताब खगोल विज्ञान, गणित आ एह से जुड़ल विषय, जइसे गणितीय भूगोल, पर आधारित रहल। ऊ इस्लामी स्वर्ण युग के समय जीयलें। ओह दौर में अब्बासी ख़लीफ़ा लोग खगोल विज्ञान के शोध के बढ़ावा देत रहे। एकर कारण खाली वैज्ञानिक जिज्ञासा ना रहे, बल्कि एकर धार्मिक महत्व भी रहे। इस्लाम में इबादत आ नमाज़ सही तरीका से करे खातिर पवित्र स्थानन के सही दिशा के जानकारी जरूरी मानल जाला, आ ई दिशा के सही-सही पता खगोलीय आँकड़वने के मदद से लगावल जा सके ला।
अल-बरूनी अपना प्रसिद्ध ग्रंथ ''तहक़ीक़ मा लि-ल-हिन्द'' (''किताब उल हिंद'') में [[भारतीय ज्योतिष]] (भारतीय खगोल बिद्या) पर बिस्तार से टिप्पणी लिखलें। एह ग्रंथ के बहुत हिस्सा [[आर्यभट]] के रचना के अनुवाद आ व्याख्या पर आधारित रहल। एहिजे अल-बरूनी ईहो दावा कइलें कि ऊ पृथ्वी के घूर्णन (अपना धुरी पर घूमे) से जुड़ल प्रश्न के समाधान अपना एगो खगोल विज्ञान संबंधी ग्रंथ ''मिफ्ताह इल्म अल-हयअ'' (खगोल विज्ञान के कुंजी) में दे चुकल रहलें। हालाँकि, ई ग्रंथ आज उपलब्ध नइखे।
अल-बरूनी अपना प्रमुख खगोलीय ग्रंथ ''क़ानून मसऊदी'' में ई बतवलें कि [[टॉलेमी]] के मत के विपरीत, सूरज के अपसौर (आकाश में ओकरा उच्चतम स्थिति) स्थिर ना होकर समय के साथ बदलत रहेला। अल-बिरूनी [[एस्ट्रोलेब]] पर एगो अलग ग्रंथ भी लिखलें, जवना में ई यंत्र के इस्तेमाल करके समय पता करे आ भूमि सर्वेक्षण में चतुर्थांश यंत्र (क्वाड्रेंट) के रूप में उपयोग करे के तरीका समझवले बाड़ें। एह ग्रंथ में आठ गो गियर वाला एगो यंत्र के चित्र भी मिलेला, जवना के बाद में विकसित भइल मुस्लिम एस्ट्रोलेब आ घड़ी के प्रारंभिक रूप मानल जाला।
बहुत बाद में, 1749 ईस्वी में डनथॉर्न अल-बिरूनी द्वारा दर्ज कइल गइल सूर्यग्रहण से जुड़ल आँकड़ा के इस्तेमाल करके चंद्रमा के त्वरण निर्धारित करे में मदद लिहलें। एकरे साथे, विषुव (इक्विनॉक्स) के समय आ ग्रहण से संबंधित अल-बरूनी के दिहल आँकड़ा के पृथ्वी के अतीत के घूर्णन के अध्ययन में भी उपयोग कइल गइल।
== रचना सभ ==
अल बरूनी के अधिकतर रचना सभ [[अरबी भाषा]] में लिखल गइल बा। हालाँकि, मानल जाला कि ऊ किताब अल-तफ़हीम के [[फ़ारसी भाषा|फ़ारसी]] आ अरबी, दुनो भाषा में लिखलें, जे ई बतावेला कि दुनो भाषा पर उनकर समान रूप से अच्छा अधिकार रहे। जब बरूनी अपना जीवन के 65वाँ चंद्र बरिस (लगभग 63वाँ सौर बरिस, यानी 1036 ईस्वी) तक पहुँचलें, तब ऊ अपना लिखल किताब आ रचना सभ के एगो लिस्ट खुदे तइयार कइलें। एह लिस्ट में कुल 103 गो रचना सभ के जिकिर बा, जिनहन के ऊ 12 गो विषय में बाँटलन। एह विषयन में [[खगोलिकी|खगोल विज्ञान]], [[गणितीय भूगोल]], गणित, [[फलित ज्योतिष]] से जुड़ल गणना आ ग्रहन के स्थिति (आस्पेक्ट्स - जनमकुंडली में), खगोलीय यंत्र, कालक्रम (क्रोनोलॉजी), [[पुच्छल तारा|धूमकेतु]], एगो अइसन श्रेणी जेकरे बिसय के कवनो नाँव ना दिहलें, ज्योतिष, संस्मरण आ रोचक घटना, धर्म, आ अइसन किताब शामिल रहलीं जे बाद में उनकर खुदे कि लगे उपलब्ध ना रह गइल रहलीं। नीचे इनहन के पूरा लिस्ट दिहल जा रहल बाटे:
=== लिस्ट ===
{| class="wikitable sortable"
! अरबी नाम (देवनागरी लिप्यंतरण)
! अरबी लिपि
! अंग्रेज़ी नाम
! विषय
|-
| '''''तहक़ीक़ मा लि-ल-हिन्द'''''
| تحقيق ما للهند من مقولة معقولة في العقل أو مرذولة
| ''A Critical Study of What India Says, Whether Accepted by Reason or Refused'' (''Kitāb al-Hind'', ''Indica'', ''Alberuni's India'')
| भारत के धर्म, दर्शन, संस्कृति, समाज आ ज्ञान-परंपरा के व्यापक अध्ययन।
|-
| '''''किताब अल-तफ़हीम लि-अवाइल सिना'अत अल-तनजीम'''''
| كتاب التفهيم لأوائل صناعة التنجيم
| ''Book of Instruction in the Elements of the Art of Astrology'' (''Understanding Astrology'')
| ज्योतिष, गणित आ खगोल विज्ञान के परिचय; प्रश्न–उत्तर शैली में लिखल ग्रंथ। ई अरबी आ फ़ारसी दुनो भाषा में उपलब्ध बा।
|-
| '''''अल-आसार अल-बाक़िया अन अल-क़ुरून अल-खालिया'''''
| الآثار الباقية عن القرون الخالية
| ''The Remaining Signs of Past Centuries'' (''Kitab al-Āthār al-Bāqīyah ‘an al-Qurūn al-Khālīyah'')
| अलग-अलग सभ्यता के पंचांग (कैलेंडर) के तुलनात्मक अध्ययन; एह में इतिहास, गणित, खगोल विज्ञान आ सांस्कृतिक कालक्रम से जुड़ल जानकारी बा।
|-
| '''''क़ानून मसऊदी'''''
| قانون مسعودي
| ''The Mas'udi Law''
| खगोल विज्ञान, भूगोल आ अभियंत्रण (इंजीनियरिंग) पर आधारित विश्वकोश।
|-
| —
| —
| ''Pharmacy''
| औषधि, दवाई आ औषधीय पदार्थ (फार्मेसी)।
|-
| '''''अल-जमाहिर फी मआरिफ़त अल-जवाहिर'''''
| الجماهر في معرفة الجواهر
| ''Gems''
| खनिज, रत्न आ भूविज्ञान।
|-
| —
| —
| ''A History of Mahmud of Ghazni and His Father''
| महमूद ग़ज़नवी आ उनका पिता के इतिहास।
|-
| —
| —
| ''A History of Khwarezm''
| ख्वारज़्म के इतिहास।
|-
| '''''रिसाला लि-अल-बिरूनी'''''
| رسالة للبيروني
| ''Risālah li-al-Bīrūnī'' (''Epître de Berūnī'')
| पत्र (रिसाला) या विद्वत् निबंध; विषय निश्चित रूप से ज्ञात नइखे।
|}
== देन आ विरासत ==
अल बरूनी के निधन के बाद उनका काम पर ना त आगे खास रिसर्च भइल आ ना बाद के विद्वान लोग उनकर रचना के अधिक जिकिर कइल। कई सदी बाद, जब [[ब्रिटिश राज]] के समय [[भारत के इतिहास]] आ संस्कृति के अध्ययन में फेर से रुचि बढ़ल, तब भारत पर लिखल अल बरूनी के रचना के दोबारा पढ़ल आ अध्ययन कइल गइल।
अल बरूनी के सम्मान में [[चंद्रमा]] पर स्थित एगो [[चंद्रमा के क्रेटर|क्रेटर]] के नाम अल-बरूनी रखल गइल बा। ''9936 अल-बरूनी'' एस्टेरॉयड के नाम भी उनका सम्मान में रखल गइल बा। अंटार्कटिका में स्थित बरूनी टापू के नाँव इनहीं के नाँव पर रखल गइल बा। ईरान में हर साल अल बरूनी के जन्मदिन पर सर्वे इंजीनियर लोग के सम्मानित कइल जाला; सर्वे इंजीनियर दिवस के रूप में मनावल जाला।
जून 2009 में ईरान वियना में स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के एगो मंडप (पैविलियन) भेंट कइलस। मंडप वियना इंटरनेशनल सेंटर के केंद्रीय स्मारक प्रांगण में स्थापित बा। "स्कॉलर्स पैविलियन" नाम के एह मंडप में ईरान के चार गो महान विद्वान—[[इब्न सीना]] (अविसेना), अबू रैहान अल-बरूनी, ज़करिया राज़ी (रहेज़) आ [[उमर ख़य्याम]]—के मुर्ती लगावल गइल बा।
== संदर्भ ==
{{Reflist|29em}}
== बाहरी कड़ी ==
{{sister project links||d=Q11826|c=Category:Abu Rayhan al-Biruni|n=no|b=no|v=no|voy=no|m=no|mw=no|s=Author:Abu Rayhan Biruni|wikt=no|species=no}}
* [https://dn760009.eu.archive.org/0/items/in.ernet.dli.2015.403160/2015.403160.India-Al.pdf भारत : अल बिरूनी] (किताब उल हिंद का हिंदी अनुवाद), नेशनल बुक ट्रस्ट से छपल पूरा किताब।
* [https://library.bjp.org/jspui/bitstream/123456789/1744/1/12-allbaruni-ka-bharat-agman.pdf अलबरूनी का भारत], सन्तराम बी. ए. (किताब उल हिंद का हिंदी अनुवाद), इंडियन प्रेस, [[इलाहाबाद]] से छपल पूरा किताब।
* [https://www.bbc.com/hindi/institutional-54585844 अल-बेरूनी: समय को 'क़ैद करने' की कोशिश करने वाले वैज्ञानिक, जिन्हें भारतीय सभ्यता में रुचि थी], बीबीसी हिंदी क एगो स्टोरी।
* [http://www.albiruni.nl/ The works of Abu Rayhan (al-)Biruni] – manuscripts, critical editions, and translations compiled by Jan Hogendijk
* Digitized facsimiles of works by al-Biruni at the British Library:
:* the [https://searcharchives.bl.uk/primo_library/libweb/action/display.do?tabs=detailsTab&ct=display&fn=search&doc=IAMS032-002753773&indx=1&recIds=IAMS032-002753773&recIdxs=0&elementId=0&renderMode=poppedOut&displayMode=full&frbrVersion=&frbg=&&dscnt=0&scp.scps=scope%3A%28BL%29&mode=Basic&vid=IAMS_VU2&srt=rank&tab=local&vl(freeText0)=biruni&dum=true&dstmp=1676479606086 {{transliteration|ar|al-Qanūn al-Masʿūdī}}] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20230326025228/https://searcharchives.bl.uk/primo_library/libweb/action/display.do?tabs=detailsTab&ct=display&fn=search&doc=IAMS032-002753773&indx=1&recIds=IAMS032-002753773&recIdxs=0&elementId=0&renderMode=poppedOut&displayMode=full&frbrVersion=&frbg=&&dscnt=0&scp.scps=scope:(BL)&mode=Basic&vid=IAMS_VU2&srt=rank&tab=local&vl(freeText0)=biruni&dum=true&dstmp=1676479606086 |date=26 March 2023 }}
:* the [https://searcharchives.bl.uk/primo_library/libweb/action/display.do?tabs=detailsTab&ct=display&fn=search&doc=IAMS032-002746985&indx=1&recIds=IAMS032-002746985&recIdxs=0&elementId=0&renderMode=poppedOut&displayMode=full&frbrVersion=&frbg=&&dscnt=0&scp.scps=scope%3A%28BL%29&mode=Basic&vid=IAMS_VU2&srt=rank&tab=local&vl(freeText0)=kitab%20al-tafhim&dum=true&dstmp=1676481604659 {{transliteration|ar|Kitāb al-tafhīm li-awā’īl ṣinā‘at al-tanjīm}}] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20230314065502/https://searcharchives.bl.uk/primo_library/libweb/action/display.do?tabs=detailsTab&ct=display&fn=search&doc=IAMS032-002746985&indx=1&recIds=IAMS032-002746985&recIdxs=0&elementId=0&renderMode=poppedOut&displayMode=full&frbrVersion=&frbg=&&dscnt=0&scp.scps=scope%3A(BL)&mode=Basic&vid=IAMS_VU2&srt=rank&tab=local&vl(freeText0)=kitab%20al-tafhim&dum=true&dstmp=1676481604659 |date=14 March 2023 }}
:* the [https://searcharchives.bl.uk/primo_library/libweb/action/display.do?tabs=detailsTab&ct=display&fn=search&doc=IAMS032-002360260&indx=3&recIds=IAMS032-002360260&recIdxs=2&elementId=2&renderMode=poppedOut&displayMode=full&frbrVersion=&frbg=&&dscnt=0&scp.scps=scope%3A%28BL%29&mode=Basic&vid=IAMS_VU2&srt=rank&tab=local&vl(freeText0)=B%C4%ABr%C5%ABn%C4%AB%2C%20Mu%E1%B8%A5ammad%20ibn%20A%E1%B8%A5mad&dum=true&dstmp=1676481935090the {{transliteration|ar|Kitāb istī‘āb al-wujūh al-mumkinah fī ṣan‘at al-asṭurlāb}} ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20230314065443/https://searcharchives.bl.uk/primo_library/libweb/action/display.do?tabs=detailsTab&ct=display&fn=search&doc=IAMS032-002360260&indx=3&recIds=IAMS032-002360260&recIdxs=2&elementId=2&renderMode=poppedOut&displayMode=full&frbrVersion=&frbg=&&dscnt=0&scp.scps=scope%3A(BL)&mode=Basic&vid=IAMS_VU2&srt=rank&tab=local&vl(freeText0)=B%C4%ABr%C5%ABn%C4%AB%2C%20Mu%E1%B8%A5ammad%20ibn%20A%E1%B8%A5mad&dum=true&dstmp=1676481935090the |date=14 March 2023 }}
{{Authority control}}
[[श्रेणी:ईरानी लोग]]
[[श्रेणी:इंडोलॉजिस्ट]]
[[श्रेणी:इतिहासकार]]
[[श्रेणी:भूगोलवेत्ता]]
[[श्रेणी:अरब भूगोलवेत्ता]]<!-- ईरानी होख्ले की बावजूद भूगोल के इतिहास में इनका के अरब जुग के भूगोलवेत्ता सभ में रख के पढ़ल जाला -->
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बिस्तार कइल गइल
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox religious biography | religion = [[इस्लाम]]
| name = अबू रहमान अल-बेरूनी
| image = Biruni-russian.jpg
| caption = 1973 के सोवियत डाकटिकट पर काल्पनिक चित्रण
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| native_name = ابوریحان محمد بن احمد البیرونی
| birth_date = 973
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| death_date = {{c.|1050}} (उमिर 77)
| death_place = [[गजनी]], गजनवी राज (अब [[अफ़गानिस्तान]])
| era = इस्लामी गोल्डन एज
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[[गजनवी बंस]] ([[गजनी]]){{sfn|Ataman|2008|p=58}}
| main_interests = जियोलॉजी, [[फिजिक्स]], [[एन्थ्रोपोलॉजी]], [[समाज शास्त्र]], [[खगोलिकी]], [[रसायनशास्त्र]], [[इतिहास]], [[भूगोल]], [[गणित]], चिकत्सा, [[मनोबिज्ञान]], [[दर्शनशास्त्र|फिलासफी]], [[इस्लामी थियोलॉजी|थियोलॉजी]]
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| notable_works = ''The Remaining Signs of Past Centuries'', ''Gems'', ''[[अल-बरूनी के इंडिका|इंडिका]]'', ''The Mas'udi Canon'', ''Understanding Astrology''
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| influenced =
}}
'''अबू रेहान मुहम्मद इब्न अहमद अल-बिरूनी''', जिनका के आमतौर पर '''अल-बरूनी''' कहल जाला, ({{c.|lk=no|973|1050}}){{sfn|Bosworth|2000}} [[ख़्वारिज़्म|ख़्वारिज़्म क्षेत्र]] के [[ईरान|ईरानी मूल]] के<ref>{{harvnb|Strohmaier|2006|p=112}}<br>{{harvnb|MacKenzie|2000}}<br>{{harvnb|Curtis|Stewart|2009|p=85}}<br>{{cite book |last1=Dale |first1=Stephen F. |title=Babur: Timurid Prince and Mughal Emperor, 1483–1530 |date=3 May 2018 |publisher=Cambridge University Press |isbn=978-1-316-99637-9 |page=142 |url=https://books.google.com/books?id=xyluDwAAQBAJ&pg=PA142 |language=en}}<br>{{Cite book |url={{google books |plainurl=y |id=7JmpQwAACAAJ}} |title= The Cambridge History of Iran: The Saljuq and Mongol Periods. Vol |date=1968 |publisher= [[Cambridge University Press]] |language=en |last=Bosworth |first=C. E. |chapter=The Political and Dynastic History of the Iranian World (A.D. 1000–1217) |editor-first=J.A. |editor-last=Boyle |quote=Page 7: "The Iranian scholar al-Biruni says that the Khwarazmian era began when the region was first settled and cultivated, this date being placed in the early 13th-century BC)" page 141 "the Khwarazmian al-Biruni'"|pages=7–141}}<br>{{Cite book|url={{google books |plainurl=y |id=gRKOPwAACAAJ}}|title=The Golden Age of Persia|last=Frye|first=Richard Nelson|date=February 2000|publisher=Phoenix Publishing, Incorporated|isbn=978-0-7538-0944-0|language=en|quote="The contribution of Iranians to Islamic mathematics is overwhelming. ..The name of Abu Raihan Al-Biruni, from Khwarazm, must be mentioned since he was one of the greatest scientists in World History"}}<br>{{cite book |last1=Panaino |first1=Antonio |title=Erexsha'a death or self sacrifice |date=27 October 2021 |publisher=Mimesis |isbn=978-88-575-8526-0 |page=32 |url=https://books.google.com/books?id=XJlKEAAAQBAJ&pg=PA32 |language=it}}</ref> महान बिद्वान आ बहुबिद्याविद (पॉलीमैथ) रहलें। ऊ इस्लामी स्वर्ण युग के प्रमुख बिद्वानन में गिनल जालें। अल-बरूनी के तुलनात्मक धर्म बिज्ञान के जनक, आधुनिक भू-मापन (जियोडेसी) के जनक, भारतबिद्या ([[इंडोलॉजी]]) के संस्थापक आ पहिला मानवविज्ञानी (एंथ्रोपोलॉजिस्ट) के रूप में सम्मान दिहल जाला।{{sfn|Ahmed|1984|pp=9{{ndash}}10}}
अल-बरूनी के [[फिजिक्स]], [[गणित]], [[खगोलिकी]] आ [[प्राकृतिक बिज्ञान]] पर गहिरा ज्ञान रहे। एकरे साथे ऊ [[इतिहासकार]], क्रोनोलॉजिस्ट आ [[भाषा बिज्ञान|भाषाविज्ञानी]] के रूप में भी प्रसिद्ध रहलें। ऊ अपना समय के लगभग सभे प्रमुख बिज्ञानन के अध्ययन कइलें आ ज्ञान के अनेक क्षेत्रन में अपना रिसर्च खातिर भरपूर सम्मान आ संरक्षण प्राप्त कइलें। राजा-महाराजा आ समाज के प्रभावशाली लोग अल-बरूनी के अनुसंधान के आर्थिक सहायता देत रहे आ अलग-अलग प्रोजेक्ट पर काम करे खातिर उनकर सहयोग लेत रहे। अल-बिरूनी खुद बहुत प्रभावशाली विद्वान रहलें, बाकिर ऊ दुसरे देशन के विद्वानन, खासकर [[अरस्तू]] आ अन्य [[प्राचीन यूनानी दर्शन|प्राचीन यूनानी दार्शनिकन]] के विचार से भी प्रभावित रहलें। दर्शन के अध्ययन के दौरान ऊ यूनानी विद्वानन के रचना से प्रेरणा लिहलें।
अल-बेरूनी एगो प्रतिभाशाली भाषाविद् रहलें। ऊ [[ख़्वारिज़्मी]], [[फ़ारसी]], [[अरबी]] आ [[संस्कृत]] भाषा में निपुण रहलें। एकरे अलावा उनकरा [[यूनानी]], [[हिब्रू]] आ [[सीरियाई भाषा]] के ज्ञान रहल। ऊ अपना जिनगी के अधिकतर समय [[गजनी]] में बितवलन, जे ओह समय [[गजनवी साम्राज्य]] के राजधानी रहे। आज ई शहर अफ़गानिस्तान के बिचला-पूरबी हिस्सा में स्थित बा। 1017 ई. में अल बरूनी [[भारतीय उपमहादीप]] के यात्रा कइलें। भारत में ओह जमाना में प्रचलित [[हिंदू धर्म]] आ संस्कृति के गहराई से अध्ययन करे के बाद ऊ ''[[तारीख़ अल-हिंद]]'' (मने कि "भारत के इतिहास") नाम के प्रसिद्ध ग्रंथ लिखलें।
अल बरूनी अपना समय के सबसे निष्पक्ष विद्वानन में गिनल जालें। ऊ अलग-अलग देशन के रीति-रिवाज, विश्वास आ धर्म के बिना पक्षपात के वर्णन कइलें। 11वीं सदी के भारत के बारे में उनकर सटीक आ निष्पक्ष विवरण खातिर विद्वान लोग उनकरा के "अल-उस्ताद" (अर्थात "महान गुरु") के उपाधि दिहलस।
== जिनगी ==
अल-बरूनी अपना जीवन के पहिलका पच्चीस बरिस [[ख़्वारिज़्म]] में बितवलन। एहिजा ऊ इस्लामी न्यायशास्त्र, धर्मशास्त्र, व्याकरण, गणित, खगोल विज्ञान, चिकित्सा आ दर्शनशास्त्र के पढ़ाई कइलें। एकरे साथे ऊ खाली भौतिक विज्ञान में ही ना, बल्कि लगभग सभे प्रमुख विज्ञान के क्षेत्र में भी गहिरा रुचि लिहलें। ख्वारज़्मी भाषा, जे अल-बरूनी के मातृभाषा रहे, इस्लाम के आगमन के बाद भी एह इलाका में कई सौ बरिस तक बोलल जात रहे। बाद में एह क्षेत्र के धीरे-धीरे तुर्कीकरण भइल, लेकिन प्राचीन ख्वारज़्म के कुछ सांस्कृतिक परंपरा तबो बचल रहल। एह बात से ई मानल जा सकेला कि अल-बिरूनी जइसन असाधारण विद्वान, जिनका लगे अनेक विषय के गहिर ज्ञान रहे, ओह इलाका के समृद्ध सांस्कृतिक माहौल में ही तैयार भइल रहलें।
अल-बरूनी अफ़्रीग़िद शासक वंश के समर्थक रहलें। जब 995 ईस्वी में मामूनी वंश अफ़्रीग़िद लोग के हटा के सत्ता पर आ गइल, त अल-बिरूनी अपना मातृभूमि छोड़ के [[बुखारा]] चल गइलें। ओह समय बुखारा पर सामानी शासक मंसूर द्वितीय, जे नूह द्वितीय के बेटा रहलें, के शासन रहे। अल-बरूनी के प्रसिद्ध विद्वान [[इब्न सीना]] (अविसेना) से चिठ्ठी-पत्री होखल करे। एह दुनो महान विद्वान के बीच कई विषय पर विचार-विमर्श भइल, आ ओह बातचीत के कुछ लिखित अभिलेख आजुओ उपलब्ध बाड़ें।
998 ईस्वी में अल बरूनी तबरिस्तान के ज़ियारिद शासक क़ाबूस (शासनकाल: 977–981 आ 997–1012 ईस्वी) के दरबार में गइलें। ओहिजा रहत ऊ अपना पहिलका महत्वपूर्ण किताब ''अल-आसार अल-बाक़िया अन अल-क़ुरून अल-खालिया'' लिखलें। एह किताब में इतिहास आ वैज्ञानिक कालक्रम के विस्तार से चर्चा कइल गइल बा। एकर अंग्रेजी अनुवाद ''क्रोनोलॉजी ऑफ एंशिएंट नेशंस'' (प्राचीन राष्ट्रन के कालक्रम) आ ''वेस्टिजेज ऑफ द पास्ट'' (अतीत के अवशेष) के नाम से जानल जाला। मानल जाला कि ई किताब लगभग 1000 ईस्वी में लिखल गइल रहे, हालाँकि बाद में अल बरूनी एह में कुछ संशोधनो कइलन। एह दौरान ऊ बावंदिद शासक अल-मर्जुबान के दरबार में भी गइल रहलन।जब ई साफ हो गइल कि अफ़्रीग़िद वंश के शासन पूरा तरीका खतम हो चुकल बा आ मामूनी वंश अब ख्वारिज्म पर मजबूती से राज करत बा, तब बरूनी मामूनी शासक लोग से मेल-जोल बना लिहलें। ओह समय गुरगंज (जे ख्वारज़्म में स्थित रहे) के दरबार धीरे-धीरे प्रसिद्ध हो रहल रहे, काहेकि ओहिजा बहुत प्रतिभाशाली वैज्ञानिक आ विद्वान एक जगह जुटत रहलें।
==भौतिक बिज्ञान==
बरूनी मध्यकालीन मैकेनिक्स में [[साइंटिफिक मेथड]] के इस्तेमाल के बढ़ावा देवे वाला प्रमुख बिद्वान लोगन में से रहलें। ऊ घनत्व (डेंसिटी) मापे खातिर एक्सपेरिमेंट पर आधारित तरीका डेवलप कइलें। एह काम खातिर ऊ एक किसिम के हाइड्रोस्टैटिक तरजूई (पानी के सिद्धांत पर काम करे वाला विशेष तरजूई) के इस्तेमाल कइलन। बरूनी के ई तरीका बहुत सटीक रहे, जवना के मदद से ऊ कीमती धातु, रत्न, आ इहाँ तक ले कि हवो के घनत्व मापे में सफल भइलें। ऊ पृथ्वी के त्रिज्या (रेडियस) निकाले खातिर एगो एक्सपेरिमेंट आधारित तरीका अपनवलें। एह खातिर ऊ पहाड़ के चोटी से क्षितिज के उन्नयन कोण मापलें आ ओकर तुलना नजदीक के समतल मैदान से देखल गइल क्षितिज के उन्नयन कोण से कइलें।
घनत्व मापे के तरीका विकसित करे के अलावा, अल-बरूनी घनत्व के विषय पर बिस्तार से लिखलें। ऊ घनत्व के अलग-अलग प्रकार आ ओह लोग के मापे के तरीका के भी समझवलें। एह विषय पर उनकर काम बाद के बैज्ञानिक अध्ययन पर बहुत गहिरा परभाव डललस।
== खगोल बिद्या आ ज्योतिष ==
[[File:Lunar phases al-Biruni.jpg|thumb|अल बरूनी के खगोल बिद्या पर एगो फ़ारसी रचना से लिहल चित्र जेह में [[सुरुज]] के संघे [[चंद्रमा]] के अलग-अलग कला सभ के ब्याख्या कइल गइल बाटे।]]
अल-बरूनी द्वारा लिखल 146 गो किताबिन में से 95 गो किताब खगोल विज्ञान, गणित आ एह से जुड़ल विषय, जइसे गणितीय भूगोल, पर आधारित रहल। ऊ इस्लामी स्वर्ण युग के समय जीयलें। ओह दौर में अब्बासी ख़लीफ़ा लोग खगोल विज्ञान के शोध के बढ़ावा देत रहे। एकर कारण खाली वैज्ञानिक जिज्ञासा ना रहे, बल्कि एकर धार्मिक महत्व भी रहे। इस्लाम में इबादत आ नमाज़ सही तरीका से करे खातिर पवित्र स्थानन के सही दिशा के जानकारी जरूरी मानल जाला, आ ई दिशा के सही-सही पता खगोलीय आँकड़वने के मदद से लगावल जा सके ला।
अल-बरूनी अपना प्रसिद्ध ग्रंथ ''तहक़ीक़ मा लि-ल-हिन्द'' (''किताब उल हिंद'') में [[भारतीय ज्योतिष]] (भारतीय खगोल बिद्या) पर बिस्तार से टिप्पणी लिखलें। एह ग्रंथ के बहुत हिस्सा [[आर्यभट]] के रचना के अनुवाद आ व्याख्या पर आधारित रहल। एहिजे अल-बरूनी ईहो दावा कइलें कि ऊ पृथ्वी के घूर्णन (अपना धुरी पर घूमे) से जुड़ल प्रश्न के समाधान अपना एगो खगोल विज्ञान संबंधी ग्रंथ ''मिफ्ताह इल्म अल-हयअ'' (खगोल विज्ञान के कुंजी) में दे चुकल रहलें। हालाँकि, ई ग्रंथ आज उपलब्ध नइखे।
अल-बरूनी अपना प्रमुख खगोलीय ग्रंथ ''क़ानून मसऊदी'' में ई बतवलें कि [[टॉलेमी]] के मत के विपरीत, सूरज के अपसौर (आकाश में ओकरा उच्चतम स्थिति) स्थिर ना होकर समय के साथ बदलत रहेला। अल-बिरूनी [[एस्ट्रोलेब]] पर एगो अलग ग्रंथ भी लिखलें, जवना में ई यंत्र के इस्तेमाल करके समय पता करे आ भूमि सर्वेक्षण में चतुर्थांश यंत्र (क्वाड्रेंट) के रूप में उपयोग करे के तरीका समझवले बाड़ें। एह ग्रंथ में आठ गो गियर वाला एगो यंत्र के चित्र भी मिलेला, जवना के बाद में विकसित भइल मुस्लिम एस्ट्रोलेब आ घड़ी के प्रारंभिक रूप मानल जाला।
बहुत बाद में, 1749 ईस्वी में डनथॉर्न अल-बिरूनी द्वारा दर्ज कइल गइल सूर्यग्रहण से जुड़ल आँकड़ा के इस्तेमाल करके चंद्रमा के त्वरण निर्धारित करे में मदद लिहलें। एकरे साथे, विषुव (इक्विनॉक्स) के समय आ ग्रहण से संबंधित अल-बरूनी के दिहल आँकड़ा के पृथ्वी के अतीत के घूर्णन के अध्ययन में भी उपयोग कइल गइल।
==धर्म के इतिहास==
अल-बरूनी के धर्म के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण मुस्लिम बिद्वान लोगन में गिनल जाला। [[तुलनात्मक धर्म अध्ययन]] के क्षेत्र में ऊ अगुआ विद्वान मानल जालें। ऊ जरथुस्त्र धर्म, यहूदी धर्म, हिंदू धर्म, ईसाई धर्म, बौद्ध धर्म आ इस्लाम समेत कई धर्म के गहराई से अध्ययन कइलें आ उनकर आपस में तुलनो कइलें।
अल-बिरूनी [[इस्लाम]] के सबसे श्रेष्ठ धर्म मानें। उनका अनुसार, अलग-अलग धर्म आ संस्कृति के तुलना करे से ई समझल जा सकेला कि इस्लाम के व्यवस्था दूसर अउरी धर्मन के रीति-रिवाज से कइसे अलग बा। हालाँकि, एकरे साथे ऊ दुसरे संस्कृति आ धर्म सभ के कई बातन के खुला मन से सरहबो कइलें। कवनो धर्म पर अपना निष्कर्ष देवे से पहिले ऊ अक्सर ओह धर्म के पवित्र ग्रंथन से सीधे कोटेशन देवे के कोसिस करें। उनकर कोसिस ई रहे कि हर धर्म के ओह धर्म के अपना नजरिया से समझल जाव, ना कि खाली ओकरा के गलत साबित करे के कोसिस कइल जाव। अल-बिरूनी के मान्यता रहे कि दुनिया के सभे संस्कृति एक-दूसरा से जुड़ल बाड़ी स, काहेकि सभे मानव समाज के रचना हई। एह कारण, चाहे अलग-अलग संस्कृति एक-दूसरा से कतनो अलग किसिम के काहे ना लागे, तबो सभ में एगो साझा मानवीय आधार मौजूद बा।
अल-बिरूनी [[हिंदू समाज]] के दू वर्ग में बाँटलें—शिक्षित आ अशिक्षित। उनका अनुसार, शिक्षित हिंदू [[एकेश्वरवाद]] में विश्वास रखेलें। ऊ मानेलें कि भगवान एके बा, अनादि, अनंत आ सर्वशक्तिमान, आ [[मूर्ति-पूजा]] के अस्वीकार करे लें। दुसरा ओर, अशिक्षित लोग अनेक देवी-देवता के मूर्ति के पूजा करे ला। हालाँकि, अल-बिरूनी इहो बात लिखलन कि भगवान के मनुष्य जइसन रूप में माने के धारणा खाली कुछ हिंदूए लोग में ना, बलुक कुछ मुसलमान समूह, जइसे जबरिया, में भी मिले ला।
== रचना सभ ==
अल बरूनी के अधिकतर रचना सभ [[अरबी भाषा]] में लिखल गइल बा। हालाँकि, मानल जाला कि ऊ किताब अल-तफ़हीम के [[फ़ारसी भाषा|फ़ारसी]] आ अरबी, दुनो भाषा में लिखलें, जे ई बतावेला कि दुनो भाषा पर उनकर समान रूप से अच्छा अधिकार रहे। जब बरूनी अपना जीवन के 65वाँ चंद्र बरिस (लगभग 63वाँ सौर बरिस, यानी 1036 ईस्वी) तक पहुँचलें, तब ऊ अपना लिखल किताब आ रचना सभ के एगो लिस्ट खुदे तइयार कइलें। एह लिस्ट में कुल 103 गो रचना सभ के जिकिर बा, जिनहन के ऊ 12 गो विषय में बाँटलन। एह विषयन में [[खगोलिकी|खगोल विज्ञान]], [[गणितीय भूगोल]], गणित, [[फलित ज्योतिष]] से जुड़ल गणना आ ग्रहन के स्थिति (आस्पेक्ट्स - जनमकुंडली में), खगोलीय यंत्र, कालक्रम (क्रोनोलॉजी), [[पुच्छल तारा|धूमकेतु]], एगो अइसन श्रेणी जेकरे बिसय के कवनो नाँव ना दिहलें, ज्योतिष, संस्मरण आ रोचक घटना, धर्म, आ अइसन किताब शामिल रहलीं जे बाद में उनकर खुदे कि लगे उपलब्ध ना रह गइल रहलीं। नीचे इनहन के पूरा लिस्ट दिहल जा रहल बाटे:
=== लिस्ट ===
{| class="wikitable sortable"
! अरबी नाम (देवनागरी लिप्यंतरण)
! अरबी लिपि
! अंग्रेज़ी नाम
! विषय
|-
| '''''तहक़ीक़ मा लि-ल-हिन्द'''''
| تحقيق ما للهند من مقولة معقولة في العقل أو مرذولة
| ''A Critical Study of What India Says, Whether Accepted by Reason or Refused'' (''Kitāb al-Hind'', ''Indica'', ''Alberuni's India'')
| भारत के धर्म, दर्शन, संस्कृति, समाज आ ज्ञान-परंपरा के व्यापक अध्ययन।
|-
| '''''किताब अल-तफ़हीम लि-अवाइल सिना'अत अल-तनजीम'''''
| كتاب التفهيم لأوائل صناعة التنجيم
| ''Book of Instruction in the Elements of the Art of Astrology'' (''Understanding Astrology'')
| ज्योतिष, गणित आ खगोल विज्ञान के परिचय; प्रश्न–उत्तर शैली में लिखल ग्रंथ। ई अरबी आ फ़ारसी दुनो भाषा में उपलब्ध बा।
|-
| '''''अल-आसार अल-बाक़िया अन अल-क़ुरून अल-खालिया'''''
| الآثار الباقية عن القرون الخالية
| ''The Remaining Signs of Past Centuries'' (''Kitab al-Āthār al-Bāqīyah ‘an al-Qurūn al-Khālīyah'')
| अलग-अलग सभ्यता के पंचांग (कैलेंडर) के तुलनात्मक अध्ययन; एह में इतिहास, गणित, खगोल विज्ञान आ सांस्कृतिक कालक्रम से जुड़ल जानकारी बा।
|-
| '''''क़ानून मसऊदी'''''
| قانون مسعودي
| ''The Mas'udi Law''
| खगोल विज्ञान, भूगोल आ अभियंत्रण (इंजीनियरिंग) पर आधारित विश्वकोश।
|-
| —
| —
| ''Pharmacy''
| औषधि, दवाई आ औषधीय पदार्थ (फार्मेसी)।
|-
| '''''अल-जमाहिर फी मआरिफ़त अल-जवाहिर'''''
| الجماهر في معرفة الجواهر
| ''Gems''
| खनिज, रत्न आ भूविज्ञान।
|-
| —
| —
| ''A History of Mahmud of Ghazni and His Father''
| महमूद ग़ज़नवी आ उनका पिता के इतिहास।
|-
| —
| —
| ''A History of Khwarezm''
| ख्वारज़्म के इतिहास।
|-
| '''''रिसाला लि-अल-बिरूनी'''''
| رسالة للبيروني
| ''Risālah li-al-Bīrūnī'' (''Epître de Berūnī'')
| पत्र (रिसाला) या विद्वत् निबंध; विषय निश्चित रूप से ज्ञात नइखे।
|}
== देन आ विरासत ==
अल बरूनी के निधन के बाद उनका काम पर ना त आगे खास रिसर्च भइल आ ना बाद के विद्वान लोग उनकर रचना के अधिक जिकिर कइल। कई सदी बाद, जब [[ब्रिटिश राज]] के समय [[भारत के इतिहास]] आ संस्कृति के अध्ययन में फेर से रुचि बढ़ल, तब भारत पर लिखल अल बरूनी के रचना के दोबारा पढ़ल आ अध्ययन कइल गइल।
अल बरूनी के सम्मान में [[चंद्रमा]] पर स्थित एगो [[चंद्रमा के क्रेटर|क्रेटर]] के नाम अल-बरूनी रखल गइल बा। ''9936 अल-बरूनी'' एस्टेरॉयड के नाम भी उनका सम्मान में रखल गइल बा। अंटार्कटिका में स्थित बरूनी टापू के नाँव इनहीं के नाँव पर रखल गइल बा। ईरान में हर साल अल बरूनी के जन्मदिन पर सर्वे इंजीनियर लोग के सम्मानित कइल जाला; सर्वे इंजीनियर दिवस के रूप में मनावल जाला।
जून 2009 में ईरान वियना में स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के एगो मंडप (पैविलियन) भेंट कइलस। मंडप वियना इंटरनेशनल सेंटर के केंद्रीय स्मारक प्रांगण में स्थापित बा। "स्कॉलर्स पैविलियन" नाम के एह मंडप में ईरान के चार गो महान विद्वान—[[इब्न सीना]] (अविसेना), अबू रैहान अल-बरूनी, ज़करिया राज़ी (रहेज़) आ [[उमर ख़य्याम]]—के मुर्ती लगावल गइल बा।
== संदर्भ ==
{{Reflist|29em}}
== बाहरी कड़ी ==
{{sister project links||d=Q11826|c=Category:Abu Rayhan al-Biruni|n=no|b=no|v=no|voy=no|m=no|mw=no|s=Author:Abu Rayhan Biruni|wikt=no|species=no}}
* [https://dn760009.eu.archive.org/0/items/in.ernet.dli.2015.403160/2015.403160.India-Al.pdf भारत : अल बिरूनी] (किताब उल हिंद का हिंदी अनुवाद), नेशनल बुक ट्रस्ट से छपल पूरा किताब।
* [https://library.bjp.org/jspui/bitstream/123456789/1744/1/12-allbaruni-ka-bharat-agman.pdf अलबरूनी का भारत], सन्तराम बी. ए. (किताब उल हिंद का हिंदी अनुवाद), इंडियन प्रेस, [[इलाहाबाद]] से छपल पूरा किताब।
* [https://www.bbc.com/hindi/institutional-54585844 अल-बेरूनी: समय को 'क़ैद करने' की कोशिश करने वाले वैज्ञानिक, जिन्हें भारतीय सभ्यता में रुचि थी], बीबीसी हिंदी क एगो स्टोरी।
* [http://www.albiruni.nl/ The works of Abu Rayhan (al-)Biruni] – manuscripts, critical editions, and translations compiled by Jan Hogendijk
* Digitized facsimiles of works by al-Biruni at the British Library:
:* the [https://searcharchives.bl.uk/primo_library/libweb/action/display.do?tabs=detailsTab&ct=display&fn=search&doc=IAMS032-002753773&indx=1&recIds=IAMS032-002753773&recIdxs=0&elementId=0&renderMode=poppedOut&displayMode=full&frbrVersion=&frbg=&&dscnt=0&scp.scps=scope%3A%28BL%29&mode=Basic&vid=IAMS_VU2&srt=rank&tab=local&vl(freeText0)=biruni&dum=true&dstmp=1676479606086 {{transliteration|ar|al-Qanūn al-Masʿūdī}}] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20230326025228/https://searcharchives.bl.uk/primo_library/libweb/action/display.do?tabs=detailsTab&ct=display&fn=search&doc=IAMS032-002753773&indx=1&recIds=IAMS032-002753773&recIdxs=0&elementId=0&renderMode=poppedOut&displayMode=full&frbrVersion=&frbg=&&dscnt=0&scp.scps=scope:(BL)&mode=Basic&vid=IAMS_VU2&srt=rank&tab=local&vl(freeText0)=biruni&dum=true&dstmp=1676479606086 |date=26 March 2023 }}
:* the [https://searcharchives.bl.uk/primo_library/libweb/action/display.do?tabs=detailsTab&ct=display&fn=search&doc=IAMS032-002746985&indx=1&recIds=IAMS032-002746985&recIdxs=0&elementId=0&renderMode=poppedOut&displayMode=full&frbrVersion=&frbg=&&dscnt=0&scp.scps=scope%3A%28BL%29&mode=Basic&vid=IAMS_VU2&srt=rank&tab=local&vl(freeText0)=kitab%20al-tafhim&dum=true&dstmp=1676481604659 {{transliteration|ar|Kitāb al-tafhīm li-awā’īl ṣinā‘at al-tanjīm}}] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20230314065502/https://searcharchives.bl.uk/primo_library/libweb/action/display.do?tabs=detailsTab&ct=display&fn=search&doc=IAMS032-002746985&indx=1&recIds=IAMS032-002746985&recIdxs=0&elementId=0&renderMode=poppedOut&displayMode=full&frbrVersion=&frbg=&&dscnt=0&scp.scps=scope%3A(BL)&mode=Basic&vid=IAMS_VU2&srt=rank&tab=local&vl(freeText0)=kitab%20al-tafhim&dum=true&dstmp=1676481604659 |date=14 March 2023 }}
:* the [https://searcharchives.bl.uk/primo_library/libweb/action/display.do?tabs=detailsTab&ct=display&fn=search&doc=IAMS032-002360260&indx=3&recIds=IAMS032-002360260&recIdxs=2&elementId=2&renderMode=poppedOut&displayMode=full&frbrVersion=&frbg=&&dscnt=0&scp.scps=scope%3A%28BL%29&mode=Basic&vid=IAMS_VU2&srt=rank&tab=local&vl(freeText0)=B%C4%ABr%C5%ABn%C4%AB%2C%20Mu%E1%B8%A5ammad%20ibn%20A%E1%B8%A5mad&dum=true&dstmp=1676481935090the {{transliteration|ar|Kitāb istī‘āb al-wujūh al-mumkinah fī ṣan‘at al-asṭurlāb}} ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20230314065443/https://searcharchives.bl.uk/primo_library/libweb/action/display.do?tabs=detailsTab&ct=display&fn=search&doc=IAMS032-002360260&indx=3&recIds=IAMS032-002360260&recIdxs=2&elementId=2&renderMode=poppedOut&displayMode=full&frbrVersion=&frbg=&&dscnt=0&scp.scps=scope%3A(BL)&mode=Basic&vid=IAMS_VU2&srt=rank&tab=local&vl(freeText0)=B%C4%ABr%C5%ABn%C4%AB%2C%20Mu%E1%B8%A5ammad%20ibn%20A%E1%B8%A5mad&dum=true&dstmp=1676481935090the |date=14 March 2023 }}
{{Authority control}}
[[श्रेणी:ईरानी लोग]]
[[श्रेणी:इंडोलॉजिस्ट]]
[[श्रेणी:इतिहासकार]]
[[श्रेणी:भूगोलवेत्ता]]
[[श्रेणी:अरब भूगोलवेत्ता]]<!-- ईरानी होख्ले की बावजूद भूगोल के इतिहास में इनका के अरब जुग के भूगोलवेत्ता सभ में रख के पढ़ल जाला -->
[[श्रेणी:मध्यजुग के दार्शनिक]]
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{{Infobox religious biography | religion = [[इस्लाम]]
| name = अबू रहमान अल-बेरूनी
| image = Biruni-russian.jpg
| caption = 1973 के सोवियत डाकटिकट पर काल्पनिक चित्रण
| denomination =
| creed =
| native_name = ابوریحان محمد بن احمد البیرونی
| birth_date = 973
| birth_place = Kath, ख़्वारिज़्म (अब [[उज्बेकिस्तान]])
| death_date = {{c.|1050}} (उमिर 77)
| death_place = [[गजनी]], गजनवी राज (अब [[अफ़गानिस्तान]])
| era = इस्लामी गोल्डन एज
| region = ख़्वारिज़्म, सेंट्रल एशिया<br>Buyid dynasty ([[Rey, Iran|Rey]]){{sfn|Kennedy|1975|p=394}}
[[गजनवी बंस]] ([[गजनी]]){{sfn|Ataman|2008|p=58}}
| main_interests = जियोलॉजी, [[फिजिक्स]], [[एन्थ्रोपोलॉजी]], [[समाज शास्त्र]], [[खगोलिकी]], [[रसायनशास्त्र]], [[इतिहास]], [[भूगोल]], [[गणित]], चिकत्सा, [[मनोबिज्ञान]], [[दर्शनशास्त्र|फिलासफी]], [[इस्लामी थियोलॉजी|थियोलॉजी]]
| notable_ideas =
| notable_works = ''The Remaining Signs of Past Centuries'', ''Gems'', ''[[अल-बरूनी के इंडिका|इंडिका]]'', ''The Mas'udi Canon'', ''Understanding Astrology''
| influences =
| influenced =
}}
'''अबू रेहान मुहम्मद इब्न अहमद अल-बिरूनी''', जिनका के आमतौर पर '''अल-बरूनी''' कहल जाला, ({{c.|lk=no|973|1050}}){{sfn|Bosworth|2000}} [[ख़्वारिज़्म|ख़्वारिज़्म क्षेत्र]] के [[ईरान|ईरानी मूल]] के<ref>{{harvnb|Strohmaier|2006|p=112}}<br>{{harvnb|MacKenzie|2000}}<br>{{harvnb|Curtis|Stewart|2009|p=85}}<br>{{cite book |last1=Dale |first1=Stephen F. |title=Babur: Timurid Prince and Mughal Emperor, 1483–1530 |date=3 May 2018 |publisher=Cambridge University Press |isbn=978-1-316-99637-9 |page=142 |url=https://books.google.com/books?id=xyluDwAAQBAJ&pg=PA142 |language=en}}<br>{{Cite book |url={{google books |plainurl=y |id=7JmpQwAACAAJ}} |title= The Cambridge History of Iran: The Saljuq and Mongol Periods. Vol |date=1968 |publisher= [[Cambridge University Press]] |language=en |last=Bosworth |first=C. E. |chapter=The Political and Dynastic History of the Iranian World (A.D. 1000–1217) |editor-first=J.A. |editor-last=Boyle |quote=Page 7: "The Iranian scholar al-Biruni says that the Khwarazmian era began when the region was first settled and cultivated, this date being placed in the early 13th-century BC)" page 141 "the Khwarazmian al-Biruni'"|pages=7–141}}<br>{{Cite book|url={{google books |plainurl=y |id=gRKOPwAACAAJ}}|title=The Golden Age of Persia|last=Frye|first=Richard Nelson|date=February 2000|publisher=Phoenix Publishing, Incorporated|isbn=978-0-7538-0944-0|language=en|quote="The contribution of Iranians to Islamic mathematics is overwhelming. ..The name of Abu Raihan Al-Biruni, from Khwarazm, must be mentioned since he was one of the greatest scientists in World History"}}<br>{{cite book |last1=Panaino |first1=Antonio |title=Erexsha'a death or self sacrifice |date=27 October 2021 |publisher=Mimesis |isbn=978-88-575-8526-0 |page=32 |url=https://books.google.com/books?id=XJlKEAAAQBAJ&pg=PA32 |language=it}}</ref> महान बिद्वान आ बहुबिद्याविद (पॉलीमैथ) रहलें। ऊ इस्लामी स्वर्ण युग के प्रमुख बिद्वानन में गिनल जालें। अल-बरूनी के तुलनात्मक धर्म बिज्ञान के जनक, आधुनिक भू-मापन (जियोडेसी) के जनक, भारतबिद्या ([[इंडोलॉजी]]) के संस्थापक आ पहिला मानवविज्ञानी (एंथ्रोपोलॉजिस्ट) के रूप में सम्मान दिहल जाला।{{sfn|Ahmed|1984|pp=9{{ndash}}10}}
अल-बरूनी के [[फिजिक्स]], [[गणित]], [[खगोलिकी]] आ [[प्राकृतिक बिज्ञान]] पर गहिरा ज्ञान रहे। एकरे साथे ऊ [[इतिहासकार]], क्रोनोलॉजिस्ट आ [[भाषा बिज्ञान|भाषाविज्ञानी]] के रूप में भी प्रसिद्ध रहलें। ऊ अपना समय के लगभग सभे प्रमुख बिज्ञानन के अध्ययन कइलें आ ज्ञान के अनेक क्षेत्रन में अपना रिसर्च खातिर भरपूर सम्मान आ संरक्षण प्राप्त कइलें। राजा-महाराजा आ समाज के प्रभावशाली लोग अल-बरूनी के अनुसंधान के आर्थिक सहायता देत रहे आ अलग-अलग प्रोजेक्ट पर काम करे खातिर उनकर सहयोग लेत रहे। अल-बिरूनी खुद बहुत प्रभावशाली विद्वान रहलें, बाकिर ऊ दुसरे देशन के विद्वानन, खासकर [[अरस्तू]] आ अन्य [[प्राचीन यूनानी दर्शन|प्राचीन यूनानी दार्शनिकन]] के विचार से भी प्रभावित रहलें। दर्शन के अध्ययन के दौरान ऊ यूनानी विद्वानन के रचना से प्रेरणा लिहलें।
अल-बेरूनी एगो प्रतिभाशाली भाषाविद् रहलें। ऊ [[ख़्वारिज़्मी]], [[फ़ारसी]], [[अरबी]] आ [[संस्कृत]] भाषा में निपुण रहलें। एकरे अलावा उनकरा [[यूनानी]], [[हिब्रू]] आ [[सीरियाई भाषा]] के ज्ञान रहल। ऊ अपना जिनगी के अधिकतर समय [[गजनी]] में बितवलन, जे ओह समय [[गजनवी साम्राज्य]] के राजधानी रहे। आज ई शहर अफ़गानिस्तान के बिचला-पूरबी हिस्सा में स्थित बा। 1017 ई. में अल बरूनी [[भारतीय उपमहादीप]] के यात्रा कइलें। भारत में ओह जमाना में प्रचलित [[हिंदू धर्म]] आ संस्कृति के गहराई से अध्ययन करे के बाद ऊ ''[[तारीख़ अल-हिंद]]'' (मने कि "भारत के इतिहास") नाम के प्रसिद्ध ग्रंथ लिखलें।
अल बरूनी अपना समय के सबसे निष्पक्ष विद्वानन में गिनल जालें। ऊ अलग-अलग देशन के रीति-रिवाज, विश्वास आ धर्म के बिना पक्षपात के वर्णन कइलें। 11वीं सदी के भारत के बारे में उनकर सटीक आ निष्पक्ष विवरण खातिर विद्वान लोग उनकरा के "अल-उस्ताद" (अर्थात "महान गुरु") के उपाधि दिहलस।
== जिनगी ==
अल-बरूनी अपना जीवन के पहिलका पच्चीस बरिस [[ख़्वारिज़्म]] में बितवलन। एहिजा ऊ इस्लामी न्यायशास्त्र, धर्मशास्त्र, व्याकरण, गणित, खगोल विज्ञान, चिकित्सा आ दर्शनशास्त्र के पढ़ाई कइलें। एकरे साथे ऊ खाली भौतिक विज्ञान में ही ना, बल्कि लगभग सभे प्रमुख विज्ञान के क्षेत्र में भी गहिरा रुचि लिहलें। ख्वारज़्मी भाषा, जे अल-बरूनी के मातृभाषा रहे, इस्लाम के आगमन के बाद भी एह इलाका में कई सौ बरिस तक बोलल जात रहे। बाद में एह क्षेत्र के धीरे-धीरे तुर्कीकरण भइल, लेकिन प्राचीन ख्वारज़्म के कुछ सांस्कृतिक परंपरा तबो बचल रहल। एह बात से ई मानल जा सकेला कि अल-बिरूनी जइसन असाधारण विद्वान, जिनका लगे अनेक विषय के गहिर ज्ञान रहे, ओह इलाका के समृद्ध सांस्कृतिक माहौल में ही तैयार भइल रहलें।
अल-बरूनी अफ़्रीग़िद शासक वंश के समर्थक रहलें। जब 995 ईस्वी में मामूनी वंश अफ़्रीग़िद लोग के हटा के सत्ता पर आ गइल, त अल-बिरूनी अपना मातृभूमि छोड़ के [[बुखारा]] चल गइलें। ओह समय बुखारा पर सामानी शासक मंसूर द्वितीय, जे नूह द्वितीय के बेटा रहलें, के शासन रहे। अल-बरूनी के प्रसिद्ध विद्वान [[इब्न सीना]] (अविसेना) से चिठ्ठी-पत्री होखल करे। एह दुनो महान विद्वान के बीच कई विषय पर विचार-विमर्श भइल, आ ओह बातचीत के कुछ लिखित अभिलेख आजुओ उपलब्ध बाड़ें।
998 ईस्वी में अल बरूनी तबरिस्तान के ज़ियारिद शासक क़ाबूस (शासनकाल: 977–981 आ 997–1012 ईस्वी) के दरबार में गइलें। ओहिजा रहत ऊ अपना पहिलका महत्वपूर्ण किताब ''अल-आसार अल-बाक़िया अन अल-क़ुरून अल-खालिया'' लिखलें। एह किताब में इतिहास आ वैज्ञानिक कालक्रम के विस्तार से चर्चा कइल गइल बा। एकर अंग्रेजी अनुवाद ''क्रोनोलॉजी ऑफ एंशिएंट नेशंस'' (प्राचीन राष्ट्रन के कालक्रम) आ ''वेस्टिजेज ऑफ द पास्ट'' (अतीत के अवशेष) के नाम से जानल जाला। मानल जाला कि ई किताब लगभग 1000 ईस्वी में लिखल गइल रहे, हालाँकि बाद में अल बरूनी एह में कुछ संशोधनो कइलन। एह दौरान ऊ बावंदिद शासक अल-मर्जुबान के दरबार में भी गइल रहलन।जब ई साफ हो गइल कि अफ़्रीग़िद वंश के शासन पूरा तरीका खतम हो चुकल बा आ मामूनी वंश अब ख्वारिज्म पर मजबूती से राज करत बा, तब बरूनी मामूनी शासक लोग से मेल-जोल बना लिहलें। ओह समय गुरगंज (जे ख्वारज़्म में स्थित रहे) के दरबार धीरे-धीरे प्रसिद्ध हो रहल रहे, काहेकि ओहिजा बहुत प्रतिभाशाली वैज्ञानिक आ विद्वान एक जगह जुटत रहलें।
==भौतिक बिज्ञान==
बरूनी मध्यकालीन मैकेनिक्स में [[साइंटिफिक मेथड]] के इस्तेमाल के बढ़ावा देवे वाला प्रमुख बिद्वान लोगन में से रहलें। ऊ घनत्व (डेंसिटी) मापे खातिर एक्सपेरिमेंट पर आधारित तरीका डेवलप कइलें। एह काम खातिर ऊ एक किसिम के हाइड्रोस्टैटिक तरजूई (पानी के सिद्धांत पर काम करे वाला विशेष तरजूई) के इस्तेमाल कइलन। बरूनी के ई तरीका बहुत सटीक रहे, जवना के मदद से ऊ कीमती धातु, रत्न, आ इहाँ तक ले कि हवो के घनत्व मापे में सफल भइलें। ऊ पृथ्वी के त्रिज्या (रेडियस) निकाले खातिर एगो एक्सपेरिमेंट आधारित तरीका अपनवलें। एह खातिर ऊ पहाड़ के चोटी से क्षितिज के उन्नयन कोण मापलें आ ओकर तुलना नजदीक के समतल मैदान से देखल गइल क्षितिज के उन्नयन कोण से कइलें।
घनत्व मापे के तरीका विकसित करे के अलावा, अल-बरूनी घनत्व के विषय पर बिस्तार से लिखलें। ऊ घनत्व के अलग-अलग प्रकार आ ओह लोग के मापे के तरीका के भी समझवलें। एह विषय पर उनकर काम बाद के बैज्ञानिक अध्ययन पर बहुत गहिरा परभाव डललस।
== खगोल बिद्या आ ज्योतिष ==
[[File:Lunar phases al-Biruni.jpg|thumb|अल बरूनी के खगोल बिद्या पर एगो फ़ारसी रचना से लिहल चित्र जेह में [[सुरुज]] के संघे [[चंद्रमा]] के अलग-अलग कला सभ के ब्याख्या कइल गइल बाटे।]]
अल-बरूनी द्वारा लिखल 146 गो किताबिन में से 95 गो किताब खगोल विज्ञान, गणित आ एह से जुड़ल विषय, जइसे गणितीय भूगोल, पर आधारित रहल। ऊ इस्लामी स्वर्ण युग के समय जीयलें। ओह दौर में अब्बासी ख़लीफ़ा लोग खगोल विज्ञान के शोध के बढ़ावा देत रहे। एकर कारण खाली वैज्ञानिक जिज्ञासा ना रहे, बल्कि एकर धार्मिक महत्व भी रहे। इस्लाम में इबादत आ नमाज़ सही तरीका से करे खातिर पवित्र स्थानन के सही दिशा के जानकारी जरूरी मानल जाला, आ ई दिशा के सही-सही पता खगोलीय आँकड़वने के मदद से लगावल जा सके ला।
अल-बरूनी अपना प्रसिद्ध ग्रंथ ''तहक़ीक़ मा लि-ल-हिन्द'' (''किताब उल हिंद'') में [[भारतीय ज्योतिष]] (भारतीय खगोल बिद्या) पर बिस्तार से टिप्पणी लिखलें। एह ग्रंथ के बहुत हिस्सा [[आर्यभट]] के रचना के अनुवाद आ व्याख्या पर आधारित रहल। एहिजे अल-बरूनी ईहो दावा कइलें कि ऊ पृथ्वी के घूर्णन (अपना धुरी पर घूमे) से जुड़ल प्रश्न के समाधान अपना एगो खगोल विज्ञान संबंधी ग्रंथ ''मिफ्ताह इल्म अल-हयअ'' (खगोल विज्ञान के कुंजी) में दे चुकल रहलें। हालाँकि, ई ग्रंथ आज उपलब्ध नइखे।
अल-बरूनी अपना प्रमुख खगोलीय ग्रंथ ''क़ानून मसऊदी'' में ई बतवलें कि [[टॉलेमी]] के मत के विपरीत, सूरज के अपसौर (आकाश में ओकरा उच्चतम स्थिति) स्थिर ना होकर समय के साथ बदलत रहेला। अल-बिरूनी [[एस्ट्रोलेब]] पर एगो अलग ग्रंथ भी लिखलें, जवना में ई यंत्र के इस्तेमाल करके समय पता करे आ भूमि सर्वेक्षण में चतुर्थांश यंत्र (क्वाड्रेंट) के रूप में उपयोग करे के तरीका समझवले बाड़ें। एह ग्रंथ में आठ गो गियर वाला एगो यंत्र के चित्र भी मिलेला, जवना के बाद में विकसित भइल मुस्लिम एस्ट्रोलेब आ घड़ी के प्रारंभिक रूप मानल जाला।
बहुत बाद में, 1749 ईस्वी में डनथॉर्न अल-बिरूनी द्वारा दर्ज कइल गइल सूर्यग्रहण से जुड़ल आँकड़ा के इस्तेमाल करके चंद्रमा के त्वरण निर्धारित करे में मदद लिहलें। एकरे साथे, विषुव (इक्विनॉक्स) के समय आ ग्रहण से संबंधित अल-बरूनी के दिहल आँकड़ा के पृथ्वी के अतीत के घूर्णन के अध्ययन में भी उपयोग कइल गइल।
==धर्म के इतिहास==
अल-बरूनी के धर्म के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण मुस्लिम बिद्वान लोगन में गिनल जाला। [[तुलनात्मक धर्म अध्ययन]] के क्षेत्र में ऊ अगुआ विद्वान मानल जालें। ऊ जरथुस्त्र धर्म, यहूदी धर्म, हिंदू धर्म, ईसाई धर्म, बौद्ध धर्म आ इस्लाम समेत कई धर्म के गहराई से अध्ययन कइलें आ उनकर आपस में तुलनो कइलें।
अल-बिरूनी [[इस्लाम]] के सबसे श्रेष्ठ धर्म मानें। उनका अनुसार, अलग-अलग धर्म आ संस्कृति के तुलना करे से ई समझल जा सकेला कि इस्लाम के व्यवस्था दूसर अउरी धर्मन के रीति-रिवाज से कइसे अलग बा। हालाँकि, एकरे साथे ऊ दुसरे संस्कृति आ धर्म सभ के कई बातन के खुला मन से सरहबो कइलें। कवनो धर्म पर अपना निष्कर्ष देवे से पहिले ऊ अक्सर ओह धर्म के पवित्र ग्रंथन से सीधे कोटेशन देवे के कोसिस करें। उनकर कोसिस ई रहे कि हर धर्म के ओह धर्म के अपना नजरिया से समझल जाव, ना कि खाली ओकरा के गलत साबित करे के कोसिस कइल जाव। अल-बिरूनी के मान्यता रहे कि दुनिया के सभे संस्कृति एक-दूसरा से जुड़ल बाड़ी स, काहेकि सभे मानव समाज के रचना हई। एह कारण, चाहे अलग-अलग संस्कृति एक-दूसरा से कतनो अलग किसिम के काहे ना लागे, तबो सभ में एगो साझा मानवीय आधार मौजूद बा।
अल-बिरूनी [[हिंदू समाज]] के दू वर्ग में बाँटलें—शिक्षित आ अशिक्षित। उनका अनुसार, शिक्षित हिंदू [[एकेश्वरवाद]] में विश्वास रखेलें। ऊ मानेलें कि भगवान एके बा, अनादि, अनंत आ सर्वशक्तिमान, आ [[मूर्ति-पूजा]] के अस्वीकार करे लें। दुसरा ओर, अशिक्षित लोग अनेक देवी-देवता के मूर्ति के पूजा करे ला। हालाँकि, अल-बिरूनी इहो बात लिखलन कि भगवान के मनुष्य जइसन रूप में माने के धारणा खाली कुछ हिंदूए लोग में ना, बलुक कुछ मुसलमान समूह, जइसे जबरिया, में भी मिले ला।
==एंथ्रोपोलॉजी==
अल-बरूनी [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के लोग, उनकर रीति-रिवाज, संस्कृति आ धर्म के बारे में बहुत बिस्तार से लिखलें। विद्वान अकबर एस. अहमद के हिसाब से, अल-बरूनी के अध्ययन के तरीका आज के आधुनिक एंथ्रोपोलॉजिस्ट (मानवविज्ञानी) लोग से बहुत मिलत-जुलत रहे। ऊ जवन समाज के अध्ययन करत रहलें, ओह लोग के बीच रहके उनकर जीवन के बारीकी से देखत रहलें, उनकर भाषा सीखत रहलें आ उनकर मूल ग्रंथ के पढ़त रहलें। एह अध्ययन के आधार पर ऊ अपना निष्कर्ष निष्पक्षता आ वस्तुनिष्ठता के साथ प्रस्तुत कइलें आ अलग-अलग संस्कृति के आपस में तुलनो कइलन। एही कारण अकबर एस. अहमद के मत बा कि अल-बरूनी के दुनिया के पहिलका एंथ्रोपोलॉजिस्ट मानल जा सकेला। हालाँकि, कुछ दूसर बिद्वान लोग एह मत से सहमत ना बाटे। ओह दुसरहा लोगन के बिचार बा कि परंपरागत अर्थ में अल-बरूनी के मानवविज्ञानी कहल ठीक ना होई, भलहीं उनुकर अध्ययन-पद्धति में मानवविज्ञान के कई महत्वपूर्ण विशेषता मौजूद बाड़ी स।
== रचना सभ ==
अल बरूनी के अधिकतर रचना सभ [[अरबी भाषा]] में लिखल गइल बा। हालाँकि, मानल जाला कि ऊ किताब अल-तफ़हीम के [[फ़ारसी भाषा|फ़ारसी]] आ अरबी, दुनो भाषा में लिखलें, जे ई बतावेला कि दुनो भाषा पर उनकर समान रूप से अच्छा अधिकार रहे। जब बरूनी अपना जीवन के 65वाँ चंद्र बरिस (लगभग 63वाँ सौर बरिस, यानी 1036 ईस्वी) तक पहुँचलें, तब ऊ अपना लिखल किताब आ रचना सभ के एगो लिस्ट खुदे तइयार कइलें। एह लिस्ट में कुल 103 गो रचना सभ के जिकिर बा, जिनहन के ऊ 12 गो विषय में बाँटलन। एह विषयन में [[खगोलिकी|खगोल विज्ञान]], [[गणितीय भूगोल]], गणित, [[फलित ज्योतिष]] से जुड़ल गणना आ ग्रहन के स्थिति (आस्पेक्ट्स - जनमकुंडली में), खगोलीय यंत्र, कालक्रम (क्रोनोलॉजी), [[पुच्छल तारा|धूमकेतु]], एगो अइसन श्रेणी जेकरे बिसय के कवनो नाँव ना दिहलें, ज्योतिष, संस्मरण आ रोचक घटना, धर्म, आ अइसन किताब शामिल रहलीं जे बाद में उनकर खुदे कि लगे उपलब्ध ना रह गइल रहलीं। नीचे इनहन के पूरा लिस्ट दिहल जा रहल बाटे:
=== लिस्ट ===
{| class="wikitable sortable"
! अरबी नाम (देवनागरी लिप्यंतरण)
! अरबी लिपि
! अंग्रेज़ी नाम
! विषय
|-
| '''''तहक़ीक़ मा लि-ल-हिन्द'''''
| تحقيق ما للهند من مقولة معقولة في العقل أو مرذولة
| ''A Critical Study of What India Says, Whether Accepted by Reason or Refused'' (''Kitāb al-Hind'', ''Indica'', ''Alberuni's India'')
| भारत के धर्म, दर्शन, संस्कृति, समाज आ ज्ञान-परंपरा के व्यापक अध्ययन।
|-
| '''''किताब अल-तफ़हीम लि-अवाइल सिना'अत अल-तनजीम'''''
| كتاب التفهيم لأوائل صناعة التنجيم
| ''Book of Instruction in the Elements of the Art of Astrology'' (''Understanding Astrology'')
| ज्योतिष, गणित आ खगोल विज्ञान के परिचय; प्रश्न–उत्तर शैली में लिखल ग्रंथ। ई अरबी आ फ़ारसी दुनो भाषा में उपलब्ध बा।
|-
| '''''अल-आसार अल-बाक़िया अन अल-क़ुरून अल-खालिया'''''
| الآثار الباقية عن القرون الخالية
| ''The Remaining Signs of Past Centuries'' (''Kitab al-Āthār al-Bāqīyah ‘an al-Qurūn al-Khālīyah'')
| अलग-अलग सभ्यता के पंचांग (कैलेंडर) के तुलनात्मक अध्ययन; एह में इतिहास, गणित, खगोल विज्ञान आ सांस्कृतिक कालक्रम से जुड़ल जानकारी बा।
|-
| '''''क़ानून मसऊदी'''''
| قانون مسعودي
| ''The Mas'udi Law''
| खगोल विज्ञान, भूगोल आ अभियंत्रण (इंजीनियरिंग) पर आधारित विश्वकोश।
|-
| —
| —
| ''Pharmacy''
| औषधि, दवाई आ औषधीय पदार्थ (फार्मेसी)।
|-
| '''''अल-जमाहिर फी मआरिफ़त अल-जवाहिर'''''
| الجماهر في معرفة الجواهر
| ''Gems''
| खनिज, रत्न आ भूविज्ञान।
|-
| —
| —
| ''A History of Mahmud of Ghazni and His Father''
| महमूद ग़ज़नवी आ उनका पिता के इतिहास।
|-
| —
| —
| ''A History of Khwarezm''
| ख्वारज़्म के इतिहास।
|-
| '''''रिसाला लि-अल-बिरूनी'''''
| رسالة للبيروني
| ''Risālah li-al-Bīrūnī'' (''Epître de Berūnī'')
| पत्र (रिसाला) या विद्वत् निबंध; विषय निश्चित रूप से ज्ञात नइखे।
|}
== देन आ विरासत ==
अल बरूनी के निधन के बाद उनका काम पर ना त आगे खास रिसर्च भइल आ ना बाद के विद्वान लोग उनकर रचना के अधिक जिकिर कइल। कई सदी बाद, जब [[ब्रिटिश राज]] के समय [[भारत के इतिहास]] आ संस्कृति के अध्ययन में फेर से रुचि बढ़ल, तब भारत पर लिखल अल बरूनी के रचना के दोबारा पढ़ल आ अध्ययन कइल गइल।
अल बरूनी के सम्मान में [[चंद्रमा]] पर स्थित एगो [[चंद्रमा के क्रेटर|क्रेटर]] के नाम अल-बरूनी रखल गइल बा। ''9936 अल-बरूनी'' एस्टेरॉयड के नाम भी उनका सम्मान में रखल गइल बा। अंटार्कटिका में स्थित बरूनी टापू के नाँव इनहीं के नाँव पर रखल गइल बा। ईरान में हर साल अल बरूनी के जन्मदिन पर सर्वे इंजीनियर लोग के सम्मानित कइल जाला; सर्वे इंजीनियर दिवस के रूप में मनावल जाला।
जून 2009 में ईरान वियना में स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के एगो मंडप (पैविलियन) भेंट कइलस। मंडप वियना इंटरनेशनल सेंटर के केंद्रीय स्मारक प्रांगण में स्थापित बा। "स्कॉलर्स पैविलियन" नाम के एह मंडप में ईरान के चार गो महान विद्वान—[[इब्न सीना]] (अविसेना), अबू रैहान अल-बरूनी, ज़करिया राज़ी (रहेज़) आ [[उमर ख़य्याम]]—के मुर्ती लगावल गइल बा।
== संदर्भ ==
{{Reflist|29em}}
== बाहरी कड़ी ==
{{sister project links||d=Q11826|c=Category:Abu Rayhan al-Biruni|n=no|b=no|v=no|voy=no|m=no|mw=no|s=Author:Abu Rayhan Biruni|wikt=no|species=no}}
* [https://dn760009.eu.archive.org/0/items/in.ernet.dli.2015.403160/2015.403160.India-Al.pdf भारत : अल बिरूनी] (किताब उल हिंद का हिंदी अनुवाद), नेशनल बुक ट्रस्ट से छपल पूरा किताब।
* [https://library.bjp.org/jspui/bitstream/123456789/1744/1/12-allbaruni-ka-bharat-agman.pdf अलबरूनी का भारत], सन्तराम बी. ए. (किताब उल हिंद का हिंदी अनुवाद), इंडियन प्रेस, [[इलाहाबाद]] से छपल पूरा किताब।
* [https://www.bbc.com/hindi/institutional-54585844 अल-बेरूनी: समय को 'क़ैद करने' की कोशिश करने वाले वैज्ञानिक, जिन्हें भारतीय सभ्यता में रुचि थी], बीबीसी हिंदी क एगो स्टोरी।
* [http://www.albiruni.nl/ The works of Abu Rayhan (al-)Biruni] – manuscripts, critical editions, and translations compiled by Jan Hogendijk
* Digitized facsimiles of works by al-Biruni at the British Library:
:* the [https://searcharchives.bl.uk/primo_library/libweb/action/display.do?tabs=detailsTab&ct=display&fn=search&doc=IAMS032-002753773&indx=1&recIds=IAMS032-002753773&recIdxs=0&elementId=0&renderMode=poppedOut&displayMode=full&frbrVersion=&frbg=&&dscnt=0&scp.scps=scope%3A%28BL%29&mode=Basic&vid=IAMS_VU2&srt=rank&tab=local&vl(freeText0)=biruni&dum=true&dstmp=1676479606086 {{transliteration|ar|al-Qanūn al-Masʿūdī}}] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20230326025228/https://searcharchives.bl.uk/primo_library/libweb/action/display.do?tabs=detailsTab&ct=display&fn=search&doc=IAMS032-002753773&indx=1&recIds=IAMS032-002753773&recIdxs=0&elementId=0&renderMode=poppedOut&displayMode=full&frbrVersion=&frbg=&&dscnt=0&scp.scps=scope:(BL)&mode=Basic&vid=IAMS_VU2&srt=rank&tab=local&vl(freeText0)=biruni&dum=true&dstmp=1676479606086 |date=26 March 2023 }}
:* the [https://searcharchives.bl.uk/primo_library/libweb/action/display.do?tabs=detailsTab&ct=display&fn=search&doc=IAMS032-002746985&indx=1&recIds=IAMS032-002746985&recIdxs=0&elementId=0&renderMode=poppedOut&displayMode=full&frbrVersion=&frbg=&&dscnt=0&scp.scps=scope%3A%28BL%29&mode=Basic&vid=IAMS_VU2&srt=rank&tab=local&vl(freeText0)=kitab%20al-tafhim&dum=true&dstmp=1676481604659 {{transliteration|ar|Kitāb al-tafhīm li-awā’īl ṣinā‘at al-tanjīm}}] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20230314065502/https://searcharchives.bl.uk/primo_library/libweb/action/display.do?tabs=detailsTab&ct=display&fn=search&doc=IAMS032-002746985&indx=1&recIds=IAMS032-002746985&recIdxs=0&elementId=0&renderMode=poppedOut&displayMode=full&frbrVersion=&frbg=&&dscnt=0&scp.scps=scope%3A(BL)&mode=Basic&vid=IAMS_VU2&srt=rank&tab=local&vl(freeText0)=kitab%20al-tafhim&dum=true&dstmp=1676481604659 |date=14 March 2023 }}
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{{Authority control}}
[[श्रेणी:ईरानी लोग]]
[[श्रेणी:इंडोलॉजिस्ट]]
[[श्रेणी:इतिहासकार]]
[[श्रेणी:भूगोलवेत्ता]]
[[श्रेणी:अरब भूगोलवेत्ता]]<!-- ईरानी होख्ले की बावजूद भूगोल के इतिहास में इनका के अरब जुग के भूगोलवेत्ता सभ में रख के पढ़ल जाला -->
[[श्रेणी:मध्यजुग के दार्शनिक]]
[[श्रेणी:मुस्लिम बिद्वान]]
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox religious biography | religion = [[इस्लाम]]
| name = अबू रहमान अल-बेरूनी
| image = Biruni-russian.jpg
| caption = 1973 के सोवियत डाकटिकट पर काल्पनिक चित्रण
| denomination =
| creed =
| native_name = ابوریحان محمد بن احمد البیرونی
| birth_date = 973
| birth_place = Kath, ख़्वारिज़्म (अब [[उज्बेकिस्तान]])
| death_date = {{c.|1050}} (उमिर 77)
| death_place = [[गजनी]], गजनवी राज (अब [[अफ़गानिस्तान]])
| era = इस्लामी गोल्डन एज
| region = ख़्वारिज़्म, सेंट्रल एशिया<br>Buyid dynasty ([[Rey, Iran|Rey]]){{sfn|Kennedy|1975|p=394}}
[[गजनवी बंस]] ([[गजनी]]){{sfn|Ataman|2008|p=58}}
| main_interests = जियोलॉजी, [[फिजिक्स]], [[एन्थ्रोपोलॉजी]], [[समाज शास्त्र]], [[खगोलिकी]], [[रसायनशास्त्र]], [[इतिहास]], [[भूगोल]], [[गणित]], चिकत्सा, [[मनोबिज्ञान]], [[दर्शनशास्त्र|फिलासफी]], [[इस्लामी थियोलॉजी|थियोलॉजी]]
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| notable_works = ''The Remaining Signs of Past Centuries'', ''Gems'', ''[[किताब-उल-हिंद]]'', ''The Mas'udi Canon'', ''Understanding Astrology''
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}}
'''अबू रेहान मुहम्मद इब्न अहमद अल-बिरूनी''', जिनका के आमतौर पर '''अल-बरूनी''' कहल जाला, ({{c.|lk=no|973|1050}}){{sfn|Bosworth|2000}} [[ख़्वारिज़्म|ख़्वारिज़्म क्षेत्र]] के [[ईरान|ईरानी मूल]] के<ref>{{harvnb|Strohmaier|2006|p=112}}<br>{{harvnb|MacKenzie|2000}}<br>{{harvnb|Curtis|Stewart|2009|p=85}}<br>{{cite book |last1=Dale |first1=Stephen F. |title=Babur: Timurid Prince and Mughal Emperor, 1483–1530 |date=3 May 2018 |publisher=Cambridge University Press |isbn=978-1-316-99637-9 |page=142 |url=https://books.google.com/books?id=xyluDwAAQBAJ&pg=PA142 |language=en}}<br>{{Cite book |url={{google books |plainurl=y |id=7JmpQwAACAAJ}} |title= The Cambridge History of Iran: The Saljuq and Mongol Periods. Vol |date=1968 |publisher= [[Cambridge University Press]] |language=en |last=Bosworth |first=C. E. |chapter=The Political and Dynastic History of the Iranian World (A.D. 1000–1217) |editor-first=J.A. |editor-last=Boyle |quote=Page 7: "The Iranian scholar al-Biruni says that the Khwarazmian era began when the region was first settled and cultivated, this date being placed in the early 13th-century BC)" page 141 "the Khwarazmian al-Biruni'"|pages=7–141}}<br>{{Cite book|url={{google books |plainurl=y |id=gRKOPwAACAAJ}}|title=The Golden Age of Persia|last=Frye|first=Richard Nelson|date=February 2000|publisher=Phoenix Publishing, Incorporated|isbn=978-0-7538-0944-0|language=en|quote="The contribution of Iranians to Islamic mathematics is overwhelming. ..The name of Abu Raihan Al-Biruni, from Khwarazm, must be mentioned since he was one of the greatest scientists in World History"}}<br>{{cite book |last1=Panaino |first1=Antonio |title=Erexsha'a death or self sacrifice |date=27 October 2021 |publisher=Mimesis |isbn=978-88-575-8526-0 |page=32 |url=https://books.google.com/books?id=XJlKEAAAQBAJ&pg=PA32 |language=it}}</ref> महान बिद्वान आ बहुबिद्याविद (पॉलीमैथ) रहलें। ऊ इस्लामी स्वर्ण युग के प्रमुख बिद्वानन में गिनल जालें। अल-बरूनी के तुलनात्मक धर्म बिज्ञान के जनक, आधुनिक भू-मापन (जियोडेसी) के जनक, भारतबिद्या ([[इंडोलॉजी]]) के संस्थापक आ पहिला मानवविज्ञानी (एंथ्रोपोलॉजिस्ट) के रूप में सम्मान दिहल जाला।{{sfn|Ahmed|1984|pp=9{{ndash}}10}}
अल-बरूनी के [[फिजिक्स]], [[गणित]], [[खगोलिकी]] आ [[प्राकृतिक बिज्ञान]] पर गहिरा ज्ञान रहे। एकरे साथे ऊ [[इतिहासकार]], क्रोनोलॉजिस्ट आ [[भाषा बिज्ञान|भाषाविज्ञानी]] के रूप में भी प्रसिद्ध रहलें। ऊ अपना समय के लगभग सभे प्रमुख बिज्ञानन के अध्ययन कइलें आ ज्ञान के अनेक क्षेत्रन में अपना रिसर्च खातिर भरपूर सम्मान आ संरक्षण प्राप्त कइलें। राजा-महाराजा आ समाज के प्रभावशाली लोग अल-बरूनी के अनुसंधान के आर्थिक सहायता देत रहे आ अलग-अलग प्रोजेक्ट पर काम करे खातिर उनकर सहयोग लेत रहे। अल-बिरूनी खुद बहुत प्रभावशाली विद्वान रहलें, बाकिर ऊ दुसरे देशन के विद्वानन, खासकर [[अरस्तू]] आ अन्य [[प्राचीन यूनानी दर्शन|प्राचीन यूनानी दार्शनिकन]] के विचार से भी प्रभावित रहलें। दर्शन के अध्ययन के दौरान ऊ यूनानी विद्वानन के रचना से प्रेरणा लिहलें।
अल-बेरूनी एगो प्रतिभाशाली भाषाविद् रहलें। ऊ [[ख़्वारिज़्मी]], [[फ़ारसी]], [[अरबी]] आ [[संस्कृत]] भाषा में निपुण रहलें। एकरे अलावा उनकरा [[यूनानी]], [[हिब्रू]] आ [[सीरियाई भाषा]] के ज्ञान रहल। ऊ अपना जिनगी के अधिकतर समय [[गजनी]] में बितवलन, जे ओह समय [[गजनवी साम्राज्य]] के राजधानी रहे। आज ई शहर अफ़गानिस्तान के बिचला-पूरबी हिस्सा में स्थित बा। 1017 ई. में अल बरूनी [[भारतीय उपमहादीप]] के यात्रा कइलें। भारत में ओह जमाना में प्रचलित [[हिंदू धर्म]] आ संस्कृति के गहराई से अध्ययन करे के बाद ऊ ''[[तारीख़ अल-हिंद]]'' (मने कि "भारत के इतिहास") नाम के प्रसिद्ध ग्रंथ लिखलें।
अल बरूनी अपना समय के सबसे निष्पक्ष विद्वानन में गिनल जालें। ऊ अलग-अलग देशन के रीति-रिवाज, विश्वास आ धर्म के बिना पक्षपात के वर्णन कइलें। 11वीं सदी के भारत के बारे में उनकर सटीक आ निष्पक्ष विवरण खातिर विद्वान लोग उनकरा के "अल-उस्ताद" (अर्थात "महान गुरु") के उपाधि दिहलस।
== जिनगी ==
अल-बरूनी अपना जीवन के पहिलका पच्चीस बरिस [[ख़्वारिज़्म]] में बितवलन। एहिजा ऊ इस्लामी न्यायशास्त्र, धर्मशास्त्र, व्याकरण, गणित, खगोल विज्ञान, चिकित्सा आ दर्शनशास्त्र के पढ़ाई कइलें। एकरे साथे ऊ खाली भौतिक विज्ञान में ही ना, बल्कि लगभग सभे प्रमुख विज्ञान के क्षेत्र में भी गहिरा रुचि लिहलें। ख्वारज़्मी भाषा, जे अल-बरूनी के मातृभाषा रहे, इस्लाम के आगमन के बाद भी एह इलाका में कई सौ बरिस तक बोलल जात रहे। बाद में एह क्षेत्र के धीरे-धीरे तुर्कीकरण भइल, लेकिन प्राचीन ख्वारज़्म के कुछ सांस्कृतिक परंपरा तबो बचल रहल। एह बात से ई मानल जा सकेला कि अल-बिरूनी जइसन असाधारण विद्वान, जिनका लगे अनेक विषय के गहिर ज्ञान रहे, ओह इलाका के समृद्ध सांस्कृतिक माहौल में ही तैयार भइल रहलें।
अल-बरूनी अफ़्रीग़िद शासक वंश के समर्थक रहलें। जब 995 ईस्वी में मामूनी वंश अफ़्रीग़िद लोग के हटा के सत्ता पर आ गइल, त अल-बिरूनी अपना मातृभूमि छोड़ के [[बुखारा]] चल गइलें। ओह समय बुखारा पर सामानी शासक मंसूर द्वितीय, जे नूह द्वितीय के बेटा रहलें, के शासन रहे। अल-बरूनी के प्रसिद्ध विद्वान [[इब्न सीना]] (अविसेना) से चिठ्ठी-पत्री होखल करे। एह दुनो महान विद्वान के बीच कई विषय पर विचार-विमर्श भइल, आ ओह बातचीत के कुछ लिखित अभिलेख आजुओ उपलब्ध बाड़ें।
998 ईस्वी में अल बरूनी तबरिस्तान के ज़ियारिद शासक क़ाबूस (शासनकाल: 977–981 आ 997–1012 ईस्वी) के दरबार में गइलें। ओहिजा रहत ऊ अपना पहिलका महत्वपूर्ण किताब ''अल-आसार अल-बाक़िया अन अल-क़ुरून अल-खालिया'' लिखलें। एह किताब में इतिहास आ वैज्ञानिक कालक्रम के विस्तार से चर्चा कइल गइल बा। एकर अंग्रेजी अनुवाद ''क्रोनोलॉजी ऑफ एंशिएंट नेशंस'' (प्राचीन राष्ट्रन के कालक्रम) आ ''वेस्टिजेज ऑफ द पास्ट'' (अतीत के अवशेष) के नाम से जानल जाला। मानल जाला कि ई किताब लगभग 1000 ईस्वी में लिखल गइल रहे, हालाँकि बाद में अल बरूनी एह में कुछ संशोधनो कइलन। एह दौरान ऊ बावंदिद शासक अल-मर्जुबान के दरबार में भी गइल रहलन।जब ई साफ हो गइल कि अफ़्रीग़िद वंश के शासन पूरा तरीका खतम हो चुकल बा आ मामूनी वंश अब ख्वारिज्म पर मजबूती से राज करत बा, तब बरूनी मामूनी शासक लोग से मेल-जोल बना लिहलें। ओह समय गुरगंज (जे ख्वारज़्म में स्थित रहे) के दरबार धीरे-धीरे प्रसिद्ध हो रहल रहे, काहेकि ओहिजा बहुत प्रतिभाशाली वैज्ञानिक आ विद्वान एक जगह जुटत रहलें।
==भौतिक बिज्ञान==
बरूनी मध्यकालीन मैकेनिक्स में [[साइंटिफिक मेथड]] के इस्तेमाल के बढ़ावा देवे वाला प्रमुख बिद्वान लोगन में से रहलें। ऊ घनत्व (डेंसिटी) मापे खातिर एक्सपेरिमेंट पर आधारित तरीका डेवलप कइलें। एह काम खातिर ऊ एक किसिम के हाइड्रोस्टैटिक तरजूई (पानी के सिद्धांत पर काम करे वाला विशेष तरजूई) के इस्तेमाल कइलन। बरूनी के ई तरीका बहुत सटीक रहे, जवना के मदद से ऊ कीमती धातु, रत्न, आ इहाँ तक ले कि हवो के घनत्व मापे में सफल भइलें। ऊ पृथ्वी के त्रिज्या (रेडियस) निकाले खातिर एगो एक्सपेरिमेंट आधारित तरीका अपनवलें। एह खातिर ऊ पहाड़ के चोटी से क्षितिज के उन्नयन कोण मापलें आ ओकर तुलना नजदीक के समतल मैदान से देखल गइल क्षितिज के उन्नयन कोण से कइलें।
घनत्व मापे के तरीका विकसित करे के अलावा, अल-बरूनी घनत्व के विषय पर बिस्तार से लिखलें। ऊ घनत्व के अलग-अलग प्रकार आ ओह लोग के मापे के तरीका के भी समझवलें। एह विषय पर उनकर काम बाद के बैज्ञानिक अध्ययन पर बहुत गहिरा परभाव डललस।
== खगोल बिद्या आ ज्योतिष ==
[[File:Lunar phases al-Biruni.jpg|thumb|अल बरूनी के खगोल बिद्या पर एगो फ़ारसी रचना से लिहल चित्र जेह में [[सुरुज]] के संघे [[चंद्रमा]] के अलग-अलग कला सभ के ब्याख्या कइल गइल बाटे।]]
अल-बरूनी द्वारा लिखल 146 गो किताबिन में से 95 गो किताब खगोल विज्ञान, गणित आ एह से जुड़ल विषय, जइसे गणितीय भूगोल, पर आधारित रहल। ऊ इस्लामी स्वर्ण युग के समय जीयलें। ओह दौर में अब्बासी ख़लीफ़ा लोग खगोल विज्ञान के शोध के बढ़ावा देत रहे। एकर कारण खाली वैज्ञानिक जिज्ञासा ना रहे, बल्कि एकर धार्मिक महत्व भी रहे। इस्लाम में इबादत आ नमाज़ सही तरीका से करे खातिर पवित्र स्थानन के सही दिशा के जानकारी जरूरी मानल जाला, आ ई दिशा के सही-सही पता खगोलीय आँकड़वने के मदद से लगावल जा सके ला।
अल-बरूनी अपना प्रसिद्ध ग्रंथ ''तहक़ीक़ मा लि-ल-हिन्द'' (''किताब उल हिंद'') में [[भारतीय ज्योतिष]] (भारतीय खगोल बिद्या) पर बिस्तार से टिप्पणी लिखलें। एह ग्रंथ के बहुत हिस्सा [[आर्यभट]] के रचना के अनुवाद आ व्याख्या पर आधारित रहल। एहिजे अल-बरूनी ईहो दावा कइलें कि ऊ पृथ्वी के घूर्णन (अपना धुरी पर घूमे) से जुड़ल प्रश्न के समाधान अपना एगो खगोल विज्ञान संबंधी ग्रंथ ''मिफ्ताह इल्म अल-हयअ'' (खगोल विज्ञान के कुंजी) में दे चुकल रहलें। हालाँकि, ई ग्रंथ आज उपलब्ध नइखे।
अल-बरूनी अपना प्रमुख खगोलीय ग्रंथ ''क़ानून मसऊदी'' में ई बतवलें कि [[टॉलेमी]] के मत के विपरीत, सूरज के अपसौर (आकाश में ओकरा उच्चतम स्थिति) स्थिर ना होकर समय के साथ बदलत रहेला। अल-बिरूनी [[एस्ट्रोलेब]] पर एगो अलग ग्रंथ भी लिखलें, जवना में ई यंत्र के इस्तेमाल करके समय पता करे आ भूमि सर्वेक्षण में चतुर्थांश यंत्र (क्वाड्रेंट) के रूप में उपयोग करे के तरीका समझवले बाड़ें। एह ग्रंथ में आठ गो गियर वाला एगो यंत्र के चित्र भी मिलेला, जवना के बाद में विकसित भइल मुस्लिम एस्ट्रोलेब आ घड़ी के प्रारंभिक रूप मानल जाला।
बहुत बाद में, 1749 ईस्वी में डनथॉर्न अल-बिरूनी द्वारा दर्ज कइल गइल सूर्यग्रहण से जुड़ल आँकड़ा के इस्तेमाल करके चंद्रमा के त्वरण निर्धारित करे में मदद लिहलें। एकरे साथे, विषुव (इक्विनॉक्स) के समय आ ग्रहण से संबंधित अल-बरूनी के दिहल आँकड़ा के पृथ्वी के अतीत के घूर्णन के अध्ययन में भी उपयोग कइल गइल।
==धर्म के इतिहास==
अल-बरूनी के धर्म के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण मुस्लिम बिद्वान लोगन में गिनल जाला। [[तुलनात्मक धर्म अध्ययन]] के क्षेत्र में ऊ अगुआ विद्वान मानल जालें। ऊ जरथुस्त्र धर्म, यहूदी धर्म, हिंदू धर्म, ईसाई धर्म, बौद्ध धर्म आ इस्लाम समेत कई धर्म के गहराई से अध्ययन कइलें आ उनकर आपस में तुलनो कइलें।
अल-बिरूनी [[इस्लाम]] के सबसे श्रेष्ठ धर्म मानें। उनका अनुसार, अलग-अलग धर्म आ संस्कृति के तुलना करे से ई समझल जा सकेला कि इस्लाम के व्यवस्था दूसर अउरी धर्मन के रीति-रिवाज से कइसे अलग बा। हालाँकि, एकरे साथे ऊ दुसरे संस्कृति आ धर्म सभ के कई बातन के खुला मन से सरहबो कइलें। कवनो धर्म पर अपना निष्कर्ष देवे से पहिले ऊ अक्सर ओह धर्म के पवित्र ग्रंथन से सीधे कोटेशन देवे के कोसिस करें। उनकर कोसिस ई रहे कि हर धर्म के ओह धर्म के अपना नजरिया से समझल जाव, ना कि खाली ओकरा के गलत साबित करे के कोसिस कइल जाव। अल-बिरूनी के मान्यता रहे कि दुनिया के सभे संस्कृति एक-दूसरा से जुड़ल बाड़ी स, काहेकि सभे मानव समाज के रचना हई। एह कारण, चाहे अलग-अलग संस्कृति एक-दूसरा से कतनो अलग किसिम के काहे ना लागे, तबो सभ में एगो साझा मानवीय आधार मौजूद बा।
अल-बिरूनी [[हिंदू समाज]] के दू वर्ग में बाँटलें—शिक्षित आ अशिक्षित। उनका अनुसार, शिक्षित हिंदू [[एकेश्वरवाद]] में विश्वास रखेलें। ऊ मानेलें कि भगवान एके बा, अनादि, अनंत आ सर्वशक्तिमान, आ [[मूर्ति-पूजा]] के अस्वीकार करे लें। दुसरा ओर, अशिक्षित लोग अनेक देवी-देवता के मूर्ति के पूजा करे ला। हालाँकि, अल-बिरूनी इहो बात लिखलन कि भगवान के मनुष्य जइसन रूप में माने के धारणा खाली कुछ हिंदूए लोग में ना, बलुक कुछ मुसलमान समूह, जइसे जबरिया, में भी मिले ला।
==एंथ्रोपोलॉजी==
अल-बरूनी [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के लोग, उनकर रीति-रिवाज, संस्कृति आ धर्म के बारे में बहुत बिस्तार से लिखलें। विद्वान अकबर एस. अहमद के हिसाब से, अल-बरूनी के अध्ययन के तरीका आज के आधुनिक एंथ्रोपोलॉजिस्ट (मानवविज्ञानी) लोग से बहुत मिलत-जुलत रहे। ऊ जवन समाज के अध्ययन करत रहलें, ओह लोग के बीच रहके उनकर जीवन के बारीकी से देखत रहलें, उनकर भाषा सीखत रहलें आ उनकर मूल ग्रंथ के पढ़त रहलें। एह अध्ययन के आधार पर ऊ अपना निष्कर्ष निष्पक्षता आ वस्तुनिष्ठता के साथ प्रस्तुत कइलें आ अलग-अलग संस्कृति के आपस में तुलनो कइलन। एही कारण अकबर एस. अहमद के मत बा कि अल-बरूनी के दुनिया के पहिलका एंथ्रोपोलॉजिस्ट मानल जा सकेला। हालाँकि, कुछ दूसर बिद्वान लोग एह मत से सहमत ना बाटे। ओह दुसरहा लोगन के बिचार बा कि परंपरागत अर्थ में अल-बरूनी के मानवविज्ञानी कहल ठीक ना होई, भलहीं उनुकर अध्ययन-पद्धति में मानवविज्ञान के कई महत्वपूर्ण विशेषता मौजूद बाड़ी स।
== रचना सभ ==
अल बरूनी के अधिकतर रचना सभ [[अरबी भाषा]] में लिखल गइल बा। हालाँकि, मानल जाला कि ऊ किताब अल-तफ़हीम के [[फ़ारसी भाषा|फ़ारसी]] आ अरबी, दुनो भाषा में लिखलें, जे ई बतावेला कि दुनो भाषा पर उनकर समान रूप से अच्छा अधिकार रहे। जब बरूनी अपना जीवन के 65वाँ चंद्र बरिस (लगभग 63वाँ सौर बरिस, यानी 1036 ईस्वी) तक पहुँचलें, तब ऊ अपना लिखल किताब आ रचना सभ के एगो लिस्ट खुदे तइयार कइलें। एह लिस्ट में कुल 103 गो रचना सभ के जिकिर बा, जिनहन के ऊ 12 गो विषय में बाँटलन। एह विषयन में [[खगोलिकी|खगोल विज्ञान]], [[गणितीय भूगोल]], गणित, [[फलित ज्योतिष]] से जुड़ल गणना आ ग्रहन के स्थिति (आस्पेक्ट्स - जनमकुंडली में), खगोलीय यंत्र, कालक्रम (क्रोनोलॉजी), [[पुच्छल तारा|धूमकेतु]], एगो अइसन श्रेणी जेकरे बिसय के कवनो नाँव ना दिहलें, ज्योतिष, संस्मरण आ रोचक घटना, धर्म, आ अइसन किताब शामिल रहलीं जे बाद में उनकर खुदे कि लगे उपलब्ध ना रह गइल रहलीं। नीचे इनहन के पूरा लिस्ट दिहल जा रहल बाटे:
=== लिस्ट ===
{| class="wikitable sortable"
! अरबी नाम (देवनागरी लिप्यंतरण)
! अरबी लिपि
! अंग्रेज़ी नाम
! विषय
|-
| '''''तहक़ीक़ मा लि-ल-हिन्द'''''
| تحقيق ما للهند من مقولة معقولة في العقل أو مرذولة
| ''A Critical Study of What India Says, Whether Accepted by Reason or Refused'' (''Kitāb al-Hind'', ''Indica'', ''Alberuni's India'')
| भारत के धर्म, दर्शन, संस्कृति, समाज आ ज्ञान-परंपरा के व्यापक अध्ययन।
|-
| '''''किताब अल-तफ़हीम लि-अवाइल सिना'अत अल-तनजीम'''''
| كتاب التفهيم لأوائل صناعة التنجيم
| ''Book of Instruction in the Elements of the Art of Astrology'' (''Understanding Astrology'')
| ज्योतिष, गणित आ खगोल विज्ञान के परिचय; प्रश्न–उत्तर शैली में लिखल ग्रंथ। ई अरबी आ फ़ारसी दुनो भाषा में उपलब्ध बा।
|-
| '''''अल-आसार अल-बाक़िया अन अल-क़ुरून अल-खालिया'''''
| الآثار الباقية عن القرون الخالية
| ''The Remaining Signs of Past Centuries'' (''Kitab al-Āthār al-Bāqīyah ‘an al-Qurūn al-Khālīyah'')
| अलग-अलग सभ्यता के पंचांग (कैलेंडर) के तुलनात्मक अध्ययन; एह में इतिहास, गणित, खगोल विज्ञान आ सांस्कृतिक कालक्रम से जुड़ल जानकारी बा।
|-
| '''''क़ानून मसऊदी'''''
| قانون مسعودي
| ''The Mas'udi Law''
| खगोल विज्ञान, भूगोल आ अभियंत्रण (इंजीनियरिंग) पर आधारित विश्वकोश।
|-
| —
| —
| ''Pharmacy''
| औषधि, दवाई आ औषधीय पदार्थ (फार्मेसी)।
|-
| '''''अल-जमाहिर फी मआरिफ़त अल-जवाहिर'''''
| الجماهر في معرفة الجواهر
| ''Gems''
| खनिज, रत्न आ भूविज्ञान।
|-
| —
| —
| ''A History of Mahmud of Ghazni and His Father''
| महमूद ग़ज़नवी आ उनका पिता के इतिहास।
|-
| —
| —
| ''A History of Khwarezm''
| ख्वारज़्म के इतिहास।
|-
| '''''रिसाला लि-अल-बिरूनी'''''
| رسالة للبيروني
| ''Risālah li-al-Bīrūnī'' (''Epître de Berūnī'')
| पत्र (रिसाला) या विद्वत् निबंध; विषय निश्चित रूप से ज्ञात नइखे।
|}
== देन आ विरासत ==
अल बरूनी के निधन के बाद उनका काम पर ना त आगे खास रिसर्च भइल आ ना बाद के विद्वान लोग उनकर रचना के अधिक जिकिर कइल। कई सदी बाद, जब [[ब्रिटिश राज]] के समय [[भारत के इतिहास]] आ संस्कृति के अध्ययन में फेर से रुचि बढ़ल, तब भारत पर लिखल अल बरूनी के रचना के दोबारा पढ़ल आ अध्ययन कइल गइल।
अल बरूनी के सम्मान में [[चंद्रमा]] पर स्थित एगो [[चंद्रमा के क्रेटर|क्रेटर]] के नाम अल-बरूनी रखल गइल बा। ''9936 अल-बरूनी'' एस्टेरॉयड के नाम भी उनका सम्मान में रखल गइल बा। अंटार्कटिका में स्थित बरूनी टापू के नाँव इनहीं के नाँव पर रखल गइल बा। ईरान में हर साल अल बरूनी के जन्मदिन पर सर्वे इंजीनियर लोग के सम्मानित कइल जाला; सर्वे इंजीनियर दिवस के रूप में मनावल जाला।
जून 2009 में ईरान वियना में स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के एगो मंडप (पैविलियन) भेंट कइलस। मंडप वियना इंटरनेशनल सेंटर के केंद्रीय स्मारक प्रांगण में स्थापित बा। "स्कॉलर्स पैविलियन" नाम के एह मंडप में ईरान के चार गो महान विद्वान—[[इब्न सीना]] (अविसेना), अबू रैहान अल-बरूनी, ज़करिया राज़ी (रहेज़) आ [[उमर ख़य्याम]]—के मुर्ती लगावल गइल बा।
== संदर्भ ==
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== बाहरी कड़ी ==
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* [https://dn760009.eu.archive.org/0/items/in.ernet.dli.2015.403160/2015.403160.India-Al.pdf भारत : अल बिरूनी] (किताब उल हिंद का हिंदी अनुवाद), नेशनल बुक ट्रस्ट से छपल पूरा किताब।
* [https://library.bjp.org/jspui/bitstream/123456789/1744/1/12-allbaruni-ka-bharat-agman.pdf अलबरूनी का भारत], सन्तराम बी. ए. (किताब उल हिंद का हिंदी अनुवाद), इंडियन प्रेस, [[इलाहाबाद]] से छपल पूरा किताब।
* [https://www.bbc.com/hindi/institutional-54585844 अल-बेरूनी: समय को 'क़ैद करने' की कोशिश करने वाले वैज्ञानिक, जिन्हें भारतीय सभ्यता में रुचि थी], बीबीसी हिंदी क एगो स्टोरी।
* [http://www.albiruni.nl/ The works of Abu Rayhan (al-)Biruni] – manuscripts, critical editions, and translations compiled by Jan Hogendijk
* Digitized facsimiles of works by al-Biruni at the British Library:
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[[श्रेणी:ईरानी लोग]]
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{{Infobox religious biography | religion = [[इस्लाम]]
| name = अबू रहमान अल-बेरूनी
| image = Biruni-russian.jpg
| caption = 1973 के सोवियत डाकटिकट पर काल्पनिक चित्रण
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| native_name = ابوریحان محمد بن احمد البیرونی
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[[गजनवी बंस]] ([[गजनी]]){{sfn|Ataman|2008|p=58}}
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| notable_works = ''The Remaining Signs of Past Centuries'', ''Gems'', ''[[किताब-उल-हिंद]]'', ''The Mas'udi Canon'', ''Understanding Astrology''
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}}
'''अबू रेहान मुहम्मद इब्न अहमद अल-बिरूनी''', जिनका के आमतौर पर '''अल-बरूनी''' कहल जाला, ({{c.|lk=no|973|1050}}){{sfn|Bosworth|2000}} [[ख़्वारिज़्म|ख़्वारिज़्म क्षेत्र]] के [[ईरान|ईरानी मूल]] के<ref>{{harvnb|Strohmaier|2006|p=112}}<br>{{harvnb|MacKenzie|2000}}<br>{{harvnb|Curtis|Stewart|2009|p=85}}<br>{{cite book |last1=Dale |first1=Stephen F. |title=Babur: Timurid Prince and Mughal Emperor, 1483–1530 |date=3 May 2018 |publisher=Cambridge University Press |isbn=978-1-316-99637-9 |page=142 |url=https://books.google.com/books?id=xyluDwAAQBAJ&pg=PA142 |language=en}}<br>{{Cite book |url={{google books |plainurl=y |id=7JmpQwAACAAJ}} |title= The Cambridge History of Iran: The Saljuq and Mongol Periods. Vol |date=1968 |publisher= [[Cambridge University Press]] |language=en |last=Bosworth |first=C. E. |chapter=The Political and Dynastic History of the Iranian World (A.D. 1000–1217) |editor-first=J.A. |editor-last=Boyle |quote=Page 7: "The Iranian scholar al-Biruni says that the Khwarazmian era began when the region was first settled and cultivated, this date being placed in the early 13th-century BC)" page 141 "the Khwarazmian al-Biruni'"|pages=7–141}}<br>{{Cite book|url={{google books |plainurl=y |id=gRKOPwAACAAJ}}|title=The Golden Age of Persia|last=Frye|first=Richard Nelson|date=February 2000|publisher=Phoenix Publishing, Incorporated|isbn=978-0-7538-0944-0|language=en|quote="The contribution of Iranians to Islamic mathematics is overwhelming. ..The name of Abu Raihan Al-Biruni, from Khwarazm, must be mentioned since he was one of the greatest scientists in World History"}}<br>{{cite book |last1=Panaino |first1=Antonio |title=Erexsha'a death or self sacrifice |date=27 October 2021 |publisher=Mimesis |isbn=978-88-575-8526-0 |page=32 |url=https://books.google.com/books?id=XJlKEAAAQBAJ&pg=PA32 |language=it}}</ref> महान बिद्वान आ बहुबिद्याविद (पॉलीमैथ) रहलें। ऊ इस्लामी स्वर्ण युग के प्रमुख बिद्वानन में गिनल जालें। अल-बरूनी के तुलनात्मक धर्म बिज्ञान के जनक, आधुनिक भू-मापन (जियोडेसी) के जनक, भारतबिद्या ([[इंडोलॉजी]]) के संस्थापक आ पहिला मानवविज्ञानी (एंथ्रोपोलॉजिस्ट) के रूप में सम्मान दिहल जाला।{{sfn|Ahmed|1984|pp=9{{ndash}}10}}
अल-बरूनी के [[फिजिक्स]], [[गणित]], [[खगोलिकी]] आ [[प्राकृतिक बिज्ञान]] पर गहिरा ज्ञान रहे। एकरे साथे ऊ [[इतिहासकार]], क्रोनोलॉजिस्ट आ [[भाषा बिज्ञान|भाषाविज्ञानी]] के रूप में भी प्रसिद्ध रहलें। ऊ अपना समय के लगभग सभे प्रमुख बिज्ञानन के अध्ययन कइलें आ ज्ञान के अनेक क्षेत्रन में अपना रिसर्च खातिर भरपूर सम्मान आ संरक्षण प्राप्त कइलें। राजा-महाराजा आ समाज के प्रभावशाली लोग अल-बरूनी के अनुसंधान के आर्थिक सहायता देत रहे आ अलग-अलग प्रोजेक्ट पर काम करे खातिर उनकर सहयोग लेत रहे। अल-बिरूनी खुद बहुत प्रभावशाली विद्वान रहलें, बाकिर ऊ दुसरे देशन के विद्वानन, खासकर [[अरस्तू]] आ अन्य [[प्राचीन यूनानी दर्शन|प्राचीन यूनानी दार्शनिकन]] के विचार से भी प्रभावित रहलें। दर्शन के अध्ययन के दौरान ऊ यूनानी विद्वानन के रचना से प्रेरणा लिहलें।
अल-बेरूनी एगो प्रतिभाशाली भाषाविद् रहलें। ऊ [[ख़्वारिज़्मी]], [[फ़ारसी]], [[अरबी]] आ [[संस्कृत]] भाषा में निपुण रहलें। एकरे अलावा उनकरा [[यूनानी]], [[हिब्रू]] आ [[सीरियाई भाषा]] के ज्ञान रहल। ऊ अपना जिनगी के अधिकतर समय [[गजनी]] में बितवलन, जे ओह समय [[गजनवी साम्राज्य]] के राजधानी रहे। आज ई शहर अफ़गानिस्तान के बिचला-पूरबी हिस्सा में स्थित बा। 1017 ई. में अल बरूनी [[भारतीय उपमहादीप]] के यात्रा कइलें। भारत में ओह जमाना में प्रचलित [[हिंदू धर्म]] आ संस्कृति के गहराई से अध्ययन करे के बाद ऊ ''[[तारीख़ अल-हिंद]]'' (मने कि "भारत के इतिहास") नाम के प्रसिद्ध ग्रंथ लिखलें।
अल बरूनी अपना समय के सबसे निष्पक्ष विद्वानन में गिनल जालें। ऊ अलग-अलग देशन के रीति-रिवाज, विश्वास आ धर्म के बिना पक्षपात के वर्णन कइलें। 11वीं सदी के भारत के बारे में उनकर सटीक आ निष्पक्ष विवरण खातिर विद्वान लोग उनकरा के "अल-उस्ताद" (अर्थात "महान गुरु") के उपाधि दिहलस।
== जिनगी ==
अल-बरूनी अपना जीवन के पहिलका पच्चीस बरिस [[ख़्वारिज़्म]] में बितवलन। एहिजा ऊ इस्लामी न्यायशास्त्र, धर्मशास्त्र, व्याकरण, गणित, खगोल विज्ञान, चिकित्सा आ दर्शनशास्त्र के पढ़ाई कइलें। एकरे साथे ऊ खाली भौतिक विज्ञान में ही ना, बल्कि लगभग सभे प्रमुख विज्ञान के क्षेत्र में भी गहिरा रुचि लिहलें। ख्वारज़्मी भाषा, जे अल-बरूनी के मातृभाषा रहे, इस्लाम के आगमन के बाद भी एह इलाका में कई सौ बरिस तक बोलल जात रहे। बाद में एह क्षेत्र के धीरे-धीरे तुर्कीकरण भइल, लेकिन प्राचीन ख्वारज़्म के कुछ सांस्कृतिक परंपरा तबो बचल रहल। एह बात से ई मानल जा सकेला कि अल-बिरूनी जइसन असाधारण विद्वान, जिनका लगे अनेक विषय के गहिर ज्ञान रहे, ओह इलाका के समृद्ध सांस्कृतिक माहौल में ही तैयार भइल रहलें।
अल-बरूनी अफ़्रीग़िद शासक वंश के समर्थक रहलें। जब 995 ईस्वी में मामूनी वंश अफ़्रीग़िद लोग के हटा के सत्ता पर आ गइल, त अल-बिरूनी अपना मातृभूमि छोड़ के [[बुखारा]] चल गइलें। ओह समय बुखारा पर सामानी शासक मंसूर द्वितीय, जे नूह द्वितीय के बेटा रहलें, के शासन रहे। अल-बरूनी के प्रसिद्ध विद्वान [[इब्न सीना]] (अविसेना) से चिठ्ठी-पत्री होखल करे। एह दुनो महान विद्वान के बीच कई विषय पर विचार-विमर्श भइल, आ ओह बातचीत के कुछ लिखित अभिलेख आजुओ उपलब्ध बाड़ें।
998 ईस्वी में अल बरूनी तबरिस्तान के ज़ियारिद शासक क़ाबूस (शासनकाल: 977–981 आ 997–1012 ईस्वी) के दरबार में गइलें। ओहिजा रहत ऊ अपना पहिलका महत्वपूर्ण किताब ''अल-आसार अल-बाक़िया अन अल-क़ुरून अल-खालिया'' लिखलें। एह किताब में इतिहास आ वैज्ञानिक कालक्रम के विस्तार से चर्चा कइल गइल बा। एकर अंग्रेजी अनुवाद ''क्रोनोलॉजी ऑफ एंशिएंट नेशंस'' (प्राचीन राष्ट्रन के कालक्रम) आ ''वेस्टिजेज ऑफ द पास्ट'' (अतीत के अवशेष) के नाम से जानल जाला। मानल जाला कि ई किताब लगभग 1000 ईस्वी में लिखल गइल रहे, हालाँकि बाद में अल बरूनी एह में कुछ संशोधनो कइलन। एह दौरान ऊ बावंदिद शासक अल-मर्जुबान के दरबार में भी गइल रहलन।जब ई साफ हो गइल कि अफ़्रीग़िद वंश के शासन पूरा तरीका खतम हो चुकल बा आ मामूनी वंश अब ख्वारिज्म पर मजबूती से राज करत बा, तब बरूनी मामूनी शासक लोग से मेल-जोल बना लिहलें। ओह समय गुरगंज (जे ख्वारज़्म में स्थित रहे) के दरबार धीरे-धीरे प्रसिद्ध हो रहल रहे, काहेकि ओहिजा बहुत प्रतिभाशाली वैज्ञानिक आ विद्वान एक जगह जुटत रहलें।
==भौतिक बिज्ञान==
बरूनी मध्यकालीन मैकेनिक्स में [[साइंटिफिक मेथड]] के इस्तेमाल के बढ़ावा देवे वाला प्रमुख बिद्वान लोगन में से रहलें। ऊ घनत्व (डेंसिटी) मापे खातिर एक्सपेरिमेंट पर आधारित तरीका डेवलप कइलें। एह काम खातिर ऊ एक किसिम के हाइड्रोस्टैटिक तरजूई (पानी के सिद्धांत पर काम करे वाला विशेष तरजूई) के इस्तेमाल कइलन। बरूनी के ई तरीका बहुत सटीक रहे, जवना के मदद से ऊ कीमती धातु, रत्न, आ इहाँ तक ले कि हवो के घनत्व मापे में सफल भइलें। ऊ पृथ्वी के त्रिज्या (रेडियस) निकाले खातिर एगो एक्सपेरिमेंट आधारित तरीका अपनवलें। एह खातिर ऊ पहाड़ के चोटी से क्षितिज के उन्नयन कोण मापलें आ ओकर तुलना नजदीक के समतल मैदान से देखल गइल क्षितिज के उन्नयन कोण से कइलें।
घनत्व मापे के तरीका विकसित करे के अलावा, अल-बरूनी घनत्व के विषय पर बिस्तार से लिखलें। ऊ घनत्व के अलग-अलग प्रकार आ ओह लोग के मापे के तरीका के भी समझवलें। एह विषय पर उनकर काम बाद के बैज्ञानिक अध्ययन पर बहुत गहिरा परभाव डललस।
== खगोल बिद्या आ ज्योतिष ==
[[File:Lunar phases al-Biruni.jpg|thumb|अल बरूनी के खगोल बिद्या पर एगो फ़ारसी रचना से लिहल चित्र जेह में [[सुरुज]] के संघे [[चंद्रमा]] के अलग-अलग कला सभ के ब्याख्या कइल गइल बाटे।]]
अल-बरूनी द्वारा लिखल 146 गो किताबिन में से 95 गो किताब खगोल विज्ञान, गणित आ एह से जुड़ल विषय, जइसे गणितीय भूगोल, पर आधारित रहल। ऊ इस्लामी स्वर्ण युग के समय जीयलें। ओह दौर में अब्बासी ख़लीफ़ा लोग खगोल विज्ञान के शोध के बढ़ावा देत रहे। एकर कारण खाली वैज्ञानिक जिज्ञासा ना रहे, बल्कि एकर धार्मिक महत्व भी रहे। इस्लाम में इबादत आ नमाज़ सही तरीका से करे खातिर पवित्र स्थानन के सही दिशा के जानकारी जरूरी मानल जाला, आ ई दिशा के सही-सही पता खगोलीय आँकड़वने के मदद से लगावल जा सके ला।
अल-बरूनी अपना प्रसिद्ध ग्रंथ ''तहक़ीक़ मा लि-ल-हिन्द'' (''किताब उल हिंद'') में [[भारतीय ज्योतिष]] (भारतीय खगोल बिद्या) पर बिस्तार से टिप्पणी लिखलें। एह ग्रंथ के बहुत हिस्सा [[आर्यभट]] के रचना के अनुवाद आ व्याख्या पर आधारित रहल। एहिजे अल-बरूनी ईहो दावा कइलें कि ऊ पृथ्वी के घूर्णन (अपना धुरी पर घूमे) से जुड़ल प्रश्न के समाधान अपना एगो खगोल विज्ञान संबंधी ग्रंथ ''मिफ्ताह इल्म अल-हयअ'' (खगोल विज्ञान के कुंजी) में दे चुकल रहलें। हालाँकि, ई ग्रंथ आज उपलब्ध नइखे।
अल-बरूनी अपना प्रमुख खगोलीय ग्रंथ ''क़ानून मसऊदी'' में ई बतवलें कि [[टॉलेमी]] के मत के विपरीत, सूरज के अपसौर (आकाश में ओकरा उच्चतम स्थिति) स्थिर ना होकर समय के साथ बदलत रहेला। अल-बिरूनी [[एस्ट्रोलेब]] पर एगो अलग ग्रंथ भी लिखलें, जवना में ई यंत्र के इस्तेमाल करके समय पता करे आ भूमि सर्वेक्षण में चतुर्थांश यंत्र (क्वाड्रेंट) के रूप में उपयोग करे के तरीका समझवले बाड़ें। एह ग्रंथ में आठ गो गियर वाला एगो यंत्र के चित्र भी मिलेला, जवना के बाद में विकसित भइल मुस्लिम एस्ट्रोलेब आ घड़ी के प्रारंभिक रूप मानल जाला।
बहुत बाद में, 1749 ईस्वी में डनथॉर्न अल-बिरूनी द्वारा दर्ज कइल गइल सूर्यग्रहण से जुड़ल आँकड़ा के इस्तेमाल करके चंद्रमा के त्वरण निर्धारित करे में मदद लिहलें। एकरे साथे, विषुव (इक्विनॉक्स) के समय आ ग्रहण से संबंधित अल-बरूनी के दिहल आँकड़ा के पृथ्वी के अतीत के घूर्णन के अध्ययन में भी उपयोग कइल गइल।
==धर्म के इतिहास==
अल-बरूनी के धर्म के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण मुस्लिम बिद्वान लोगन में गिनल जाला। [[तुलनात्मक धर्म अध्ययन]] के क्षेत्र में ऊ अगुआ विद्वान मानल जालें। ऊ जरथुस्त्र धर्म, यहूदी धर्म, हिंदू धर्म, ईसाई धर्म, बौद्ध धर्म आ इस्लाम समेत कई धर्म के गहराई से अध्ययन कइलें आ उनकर आपस में तुलनो कइलें।
अल-बिरूनी [[इस्लाम]] के सबसे श्रेष्ठ धर्म मानें। उनका अनुसार, अलग-अलग धर्म आ संस्कृति के तुलना करे से ई समझल जा सकेला कि इस्लाम के व्यवस्था दूसर अउरी धर्मन के रीति-रिवाज से कइसे अलग बा। हालाँकि, एकरे साथे ऊ दुसरे संस्कृति आ धर्म सभ के कई बातन के खुला मन से सरहबो कइलें। कवनो धर्म पर अपना निष्कर्ष देवे से पहिले ऊ अक्सर ओह धर्म के पवित्र ग्रंथन से सीधे कोटेशन देवे के कोसिस करें। उनकर कोसिस ई रहे कि हर धर्म के ओह धर्म के अपना नजरिया से समझल जाव, ना कि खाली ओकरा के गलत साबित करे के कोसिस कइल जाव। अल-बिरूनी के मान्यता रहे कि दुनिया के सभे संस्कृति एक-दूसरा से जुड़ल बाड़ी स, काहेकि सभे मानव समाज के रचना हई। एह कारण, चाहे अलग-अलग संस्कृति एक-दूसरा से कतनो अलग किसिम के काहे ना लागे, तबो सभ में एगो साझा मानवीय आधार मौजूद बा।
अल-बिरूनी [[हिंदू समाज]] के दू वर्ग में बाँटलें—शिक्षित आ अशिक्षित। उनका अनुसार, शिक्षित हिंदू [[एकेश्वरवाद]] में विश्वास रखेलें। ऊ मानेलें कि भगवान एके बा, अनादि, अनंत आ सर्वशक्तिमान, आ [[मूर्ति-पूजा]] के अस्वीकार करे लें। दुसरा ओर, अशिक्षित लोग अनेक देवी-देवता के मूर्ति के पूजा करे ला। हालाँकि, अल-बिरूनी इहो बात लिखलन कि भगवान के मनुष्य जइसन रूप में माने के धारणा खाली कुछ हिंदूए लोग में ना, बलुक कुछ मुसलमान समूह, जइसे जबरिया, में भी मिले ला।
==एंथ्रोपोलॉजी==
अल-बरूनी [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के लोग, उनकर रीति-रिवाज, संस्कृति आ धर्म के बारे में बहुत बिस्तार से लिखलें। विद्वान अकबर एस. अहमद के हिसाब से, अल-बरूनी के अध्ययन के तरीका आज के आधुनिक एंथ्रोपोलॉजिस्ट (मानवविज्ञानी) लोग से बहुत मिलत-जुलत रहे। ऊ जवन समाज के अध्ययन करत रहलें, ओह लोग के बीच रहके उनकर जीवन के बारीकी से देखत रहलें, उनकर भाषा सीखत रहलें आ उनकर मूल ग्रंथ के पढ़त रहलें। एह अध्ययन के आधार पर ऊ अपना निष्कर्ष निष्पक्षता आ वस्तुनिष्ठता के साथ प्रस्तुत कइलें आ अलग-अलग संस्कृति के आपस में तुलनो कइलन। एही कारण अकबर एस. अहमद के मत बा कि अल-बरूनी के दुनिया के पहिलका एंथ्रोपोलॉजिस्ट मानल जा सकेला। हालाँकि, कुछ दूसर बिद्वान लोग एह मत से सहमत ना बाटे। ओह दुसरहा लोगन के बिचार बा कि परंपरागत अर्थ में अल-बरूनी के मानवविज्ञानी कहल ठीक ना होई, भलहीं उनुकर अध्ययन-पद्धति में मानवविज्ञान के कई महत्वपूर्ण विशेषता मौजूद बाड़ी स।
== रचना सभ ==
अल बरूनी के अधिकतर रचना सभ [[अरबी भाषा]] में लिखल गइल बा। हालाँकि, मानल जाला कि ऊ किताब अल-तफ़हीम के [[फ़ारसी भाषा|फ़ारसी]] आ अरबी, दुनो भाषा में लिखलें, जे ई बतावेला कि दुनो भाषा पर उनकर समान रूप से अच्छा अधिकार रहे। जब बरूनी अपना जीवन के 65वाँ चंद्र बरिस (लगभग 63वाँ सौर बरिस, यानी 1036 ईस्वी) तक पहुँचलें, तब ऊ अपना लिखल किताब आ रचना सभ के एगो लिस्ट खुदे तइयार कइलें। एह लिस्ट में कुल 103 गो रचना सभ के जिकिर बा, जिनहन के ऊ 12 गो विषय में बाँटलन। एह विषयन में [[खगोलिकी|खगोल विज्ञान]], [[गणितीय भूगोल]], गणित, [[फलित ज्योतिष]] से जुड़ल गणना आ ग्रहन के स्थिति (आस्पेक्ट्स - जनमकुंडली में), खगोलीय यंत्र, कालक्रम (क्रोनोलॉजी), [[पुच्छल तारा|धूमकेतु]], एगो अइसन श्रेणी जेकरे बिसय के कवनो नाँव ना दिहलें, ज्योतिष, संस्मरण आ रोचक घटना, धर्म, आ अइसन किताब शामिल रहलीं जे बाद में उनकर खुदे कि लगे उपलब्ध ना रह गइल रहलीं। नीचे इनहन के पूरा लिस्ट दिहल जा रहल बाटे:
=== लिस्ट ===
{| class="wikitable sortable"
! अरबी नाम (देवनागरी लिप्यंतरण)
! अरबी लिपि
! अंग्रेज़ी नाम
! विषय
|-
| '''''तहक़ीक़ मा लि-ल-हिन्द'''''
| تحقيق ما للهند من مقولة معقولة في العقل أو مرذولة
| ''A Critical Study of What India Says, Whether Accepted by Reason or Refused'' (''Kitāb al-Hind'', ''Indica'', ''Alberuni's India'')
| भारत के धर्म, दर्शन, संस्कृति, समाज आ ज्ञान-परंपरा के व्यापक अध्ययन।
|-
| '''''किताब अल-तफ़हीम लि-अवाइल सिना'अत अल-तनजीम'''''
| كتاب التفهيم لأوائل صناعة التنجيم
| ''Book of Instruction in the Elements of the Art of Astrology'' (''Understanding Astrology'')
| ज्योतिष, गणित आ खगोल विज्ञान के परिचय; प्रश्न–उत्तर शैली में लिखल ग्रंथ। ई अरबी आ फ़ारसी दुनो भाषा में उपलब्ध बा।
|-
| '''''अल-आसार अल-बाक़िया अन अल-क़ुरून अल-खालिया'''''
| الآثار الباقية عن القرون الخالية
| ''The Remaining Signs of Past Centuries'' (''Kitab al-Āthār al-Bāqīyah ‘an al-Qurūn al-Khālīyah'')
| अलग-अलग सभ्यता के पंचांग (कैलेंडर) के तुलनात्मक अध्ययन; एह में इतिहास, गणित, खगोल विज्ञान आ सांस्कृतिक कालक्रम से जुड़ल जानकारी बा।
|-
| '''''क़ानून मसऊदी'''''
| قانون مسعودي
| ''The Mas'udi Law''
| खगोल विज्ञान, भूगोल आ अभियंत्रण (इंजीनियरिंग) पर आधारित विश्वकोश।
|-
| —
| —
| ''Pharmacy''
| औषधि, दवाई आ औषधीय पदार्थ (फार्मेसी)।
|-
| '''''अल-जमाहिर फी मआरिफ़त अल-जवाहिर'''''
| الجماهر في معرفة الجواهر
| ''Gems''
| खनिज, रत्न आ भूविज्ञान।
|-
| —
| —
| ''A History of Mahmud of Ghazni and His Father''
| महमूद ग़ज़नवी आ उनका पिता के इतिहास।
|-
| —
| —
| ''A History of Khwarezm''
| ख्वारज़्म के इतिहास।
|-
| '''''रिसाला लि-अल-बिरूनी'''''
| رسالة للبيروني
| ''Risālah li-al-Bīrūnī'' (''Epître de Berūnī'')
| पत्र (रिसाला) या विद्वत् निबंध; विषय निश्चित रूप से ज्ञात नइखे।
|}
== देन आ विरासत ==
अल बरूनी के निधन के बाद उनका काम पर ना त आगे खास रिसर्च भइल आ ना बाद के विद्वान लोग उनकर रचना के अधिक जिकिर कइल। कई सदी बाद, जब [[ब्रिटिश राज]] के समय [[भारत के इतिहास]] आ संस्कृति के अध्ययन में फेर से रुचि बढ़ल, तब भारत पर लिखल अल बरूनी के रचना के दोबारा पढ़ल आ अध्ययन कइल गइल।
अल बरूनी के सम्मान में [[चंद्रमा]] पर स्थित एगो [[चंद्रमा के क्रेटर|क्रेटर]] के नाम अल-बरूनी रखल गइल बा। ''9936 अल-बरूनी'' एस्टेरॉयड के नाम भी उनका सम्मान में रखल गइल बा। अंटार्कटिका में स्थित बरूनी टापू के नाँव इनहीं के नाँव पर रखल गइल बा। ईरान में हर साल अल बरूनी के जन्मदिन पर सर्वे इंजीनियर लोग के सम्मानित कइल जाला; सर्वे इंजीनियर दिवस के रूप में मनावल जाला।
जून 2009 में ईरान वियना में स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के एगो मंडप (पैविलियन) भेंट कइलस। मंडप वियना इंटरनेशनल सेंटर के केंद्रीय स्मारक प्रांगण में स्थापित बा। "स्कॉलर्स पैविलियन" नाम के एह मंडप में ईरान के चार गो महान विद्वान—[[इब्न सीना]] (अविसेना), अबू रैहान अल-बरूनी, ज़करिया राज़ी (रहेज़) आ [[उमर ख़य्याम]]—के मुर्ती लगावल गइल बा।
== संदर्भ ==
{{Reflist|29em}}
== बाहरी कड़ी ==
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* [https://dn760009.eu.archive.org/0/items/in.ernet.dli.2015.403160/2015.403160.India-Al.pdf भारत : अल बिरूनी] (किताब उल हिंद का हिंदी अनुवाद), नेशनल बुक ट्रस्ट से छपल पूरा किताब।
* [https://library.bjp.org/jspui/bitstream/123456789/1744/1/12-allbaruni-ka-bharat-agman.pdf अलबरूनी का भारत], सन्तराम बी. ए. (किताब उल हिंद का हिंदी अनुवाद), इंडियन प्रेस, [[इलाहाबाद]] से छपल पूरा किताब।
* [https://www.bbc.com/hindi/institutional-54585844 अल-बेरूनी: समय को 'क़ैद करने' की कोशिश करने वाले वैज्ञानिक, जिन्हें भारतीय सभ्यता में रुचि थी], बीबीसी हिंदी क एगो स्टोरी।
* [http://www.albiruni.nl/ The works of Abu Rayhan (al-)Biruni] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20170506202554/http://www.albiruni.nl/ |date=2017-05-06 }} – manuscripts, critical editions, and translations compiled by Jan Hogendijk
* Digitized facsimiles of works by al-Biruni at the British Library:
:* the [https://searcharchives.bl.uk/primo_library/libweb/action/display.do?tabs=detailsTab&ct=display&fn=search&doc=IAMS032-002753773&indx=1&recIds=IAMS032-002753773&recIdxs=0&elementId=0&renderMode=poppedOut&displayMode=full&frbrVersion=&frbg=&&dscnt=0&scp.scps=scope%3A%28BL%29&mode=Basic&vid=IAMS_VU2&srt=rank&tab=local&vl(freeText0)=biruni&dum=true&dstmp=1676479606086 {{transliteration|ar|al-Qanūn al-Masʿūdī}}] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20230326025228/https://searcharchives.bl.uk/primo_library/libweb/action/display.do?tabs=detailsTab&ct=display&fn=search&doc=IAMS032-002753773&indx=1&recIds=IAMS032-002753773&recIdxs=0&elementId=0&renderMode=poppedOut&displayMode=full&frbrVersion=&frbg=&&dscnt=0&scp.scps=scope:(BL)&mode=Basic&vid=IAMS_VU2&srt=rank&tab=local&vl(freeText0)=biruni&dum=true&dstmp=1676479606086 |date=26 March 2023 }}
:* the [https://searcharchives.bl.uk/primo_library/libweb/action/display.do?tabs=detailsTab&ct=display&fn=search&doc=IAMS032-002746985&indx=1&recIds=IAMS032-002746985&recIdxs=0&elementId=0&renderMode=poppedOut&displayMode=full&frbrVersion=&frbg=&&dscnt=0&scp.scps=scope%3A%28BL%29&mode=Basic&vid=IAMS_VU2&srt=rank&tab=local&vl(freeText0)=kitab%20al-tafhim&dum=true&dstmp=1676481604659 {{transliteration|ar|Kitāb al-tafhīm li-awā’īl ṣinā‘at al-tanjīm}}] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20230314065502/https://searcharchives.bl.uk/primo_library/libweb/action/display.do?tabs=detailsTab&ct=display&fn=search&doc=IAMS032-002746985&indx=1&recIds=IAMS032-002746985&recIdxs=0&elementId=0&renderMode=poppedOut&displayMode=full&frbrVersion=&frbg=&&dscnt=0&scp.scps=scope%3A(BL)&mode=Basic&vid=IAMS_VU2&srt=rank&tab=local&vl(freeText0)=kitab%20al-tafhim&dum=true&dstmp=1676481604659 |date=14 March 2023 }}
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{{Authority control}}
[[श्रेणी:ईरानी लोग]]
[[श्रेणी:इंडोलॉजिस्ट]]
[[श्रेणी:इतिहासकार]]
[[श्रेणी:भूगोलवेत्ता]]
[[श्रेणी:अरब भूगोलवेत्ता]]<!-- ईरानी होख्ले की बावजूद भूगोल के इतिहास में इनका के अरब जुग के भूगोलवेत्ता सभ में रख के पढ़ल जाला -->
[[श्रेणी:मध्यजुग के दार्शनिक]]
[[श्रेणी:मुस्लिम बिद्वान]]
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किताब-उल-हिंद
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अंग्रेजी से अनुबाद क के नया आधार लेख
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{{Infobox book
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| title_orig = <!-- चित्र अनुसार, काहें कि इहाँ अंग्रेजी अनुबाद के किताब के उदाहरण दिहल गइल बाटे -->A Critical Study of Indian Doctrines, Whether Rationally Acceptable or Rejected<br/> (تحقيق ما للهند من مقولة مقبولة في العقل أو مرذولة);<br/> Kitab al-Bīrūnī fī Taḥqīq mā li-al-Hind
| translator = Eduard Sachau
| image = Alberunis India.jpg
| caption = अंग्रेजी संस्करण के कभर
| author = [[अल-बरूनी]]
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'''किताब-उल-हिंद''', जेकर पूरा नाँव '''''तहक़ीक़ मा ली-ल-हिंद मिन मक़ूल मक़बूल फ़ी ल-अक़्ल औ मरदूल''''' ({{langx|ar|تحقيق ما للهند من مقولة مقبولة في العقل أو مرذولة|lit=A Critical Study of Indian Doctrines, Whether Rationally Acceptable or Not|translit=Taḥqīq mā li-l-hind min maqūla maqbūla fī l-ʿaql aw mardhūla}}) हवे, प्रसिद्ध ईरानी यात्री, बिद्वान आ इतिहासकार [[अल-बरूनी]] के भारत पर लिखल किताब हवे।
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== संदर्भ ==
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[[श्रेणी:भारत के इतिहास]]
[[श्रेणी:इंडोलॉजी]]
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'''''किताब-उल-हिंद''''' ({{Langx|en|Kitab al-Hind|italic=yes}}){{efn|हेकर पूरा नाँव '''''तहक़ीक़ मा ली-ल-हिंद मिन मक़ूल मक़बूल फ़ी ल-अक़्ल औ मरदूल''''' ({{langx|ar|تحقيق ما للهند من مقولة مقبولة في العقل أو مرذولة|lit=A Critical Study of Indian Doctrines, Whether Rationally Acceptable or Not|translit=Taḥqīq mā li-l-hind min maqūla maqbūla fī l-ʿaql aw mardhūla}} हवे। ई जर्मन आ अंग्रेजी में पहिले अनुबादित भइल। बाद में एकर हिंदियो में अनुबाद भइल।}} हवे, प्रसिद्ध ईरानी यात्री, बिद्वान आ इतिहासकार [[अल-बरूनी]] के भारत पर लिखल किताब हवे। एह में बरूनी तत्कालीन भारत के इतिहास, समाज-संस्कृति, धर्म आ अउरी बिबिध बिसय सभ के डिटेल में बिबरन देले बाड़न।
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'''''किताब-उल-हिंद''''' ({{Langx|en|Kitab al-Hind|italic=yes}}){{efn|हेकर पूरा नाँव '''''तहक़ीक़ मा ली-ल-हिंद मिन मक़ूल मक़बूल फ़ी ल-अक़्ल औ मरदूल''''' ({{langx|ar|تحقيق ما للهند من مقولة مقبولة في العقل أو مرذولة|lit=A Critical Study of Indian Doctrines, Whether Rationally Acceptable or Not|translit=Taḥqīq mā li-l-hind min maqūla maqbūla fī l-ʿaql aw mardhūla}} हवे। ई जर्मन आ अंग्रेजी में पहिले अनुबादित भइल। बाद में एकर हिंदियो में अनुबाद भइल।}} हवे, प्रसिद्ध ईरानी यात्री, बिद्वान आ इतिहासकार [[अल-बरूनी]] के भारत पर लिखल किताब हवे। एह में बरूनी तत्कालीन भारत के इतिहास, समाज-संस्कृति, धर्म आ अउरी बिबिध बिसय सभ के डिटेल में बिबरन देले बाड़न। अल-हिंद के इस्लामी अध्ययन की परसिद्ध विदुषी [[एनेमारी शिमेल]] [[धर्म के इतिहास]] पर लिखल दुनियाँ के पहिलकी वस्तुनिष्ठ (निष्पक्ष) ग्रंथ बतवले बाड़ी। बाद में एह किताब के [[एडुआर्ड साखाउ]] पहिले [[जर्मन भाषा]] में आ ओकरा बाद [[अंग्रेज़ी]] में (''Alberuni's India'' नाँव से) अनुबाद कइलें।
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== संदर्भ ==
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[[श्रेणी:इंडोलॉजी]]
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संदर्भ जोड़ल/सुधारल गइल
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{{Infobox book
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'''''किताब-उल-हिंद''''' ({{Langx|en|Kitab al-Hind|italic=yes}}){{efn|हेकर पूरा नाँव '''''तहक़ीक़ मा ली-ल-हिंद मिन मक़ूल मक़बूल फ़ी ल-अक़्ल औ मरदूल''''' ({{langx|ar|تحقيق ما للهند من مقولة مقبولة في العقل أو مرذولة|lit=A Critical Study of Indian Doctrines, Whether Rationally Acceptable or Not|translit=Taḥqīq mā li-l-hind min maqūla maqbūla fī l-ʿaql aw mardhūla}} हवे। ई जर्मन आ अंग्रेजी में पहिले अनुबादित भइल। बाद में एकर हिंदियो में अनुबाद भइल।}} हवे, प्रसिद्ध ईरानी यात्री, बिद्वान आ इतिहासकार [[अल-बरूनी]] के भारत पर लिखल किताब हवे।<ref name=":0">{{Cite journal |last=Ataman |first=Kemal |date=April 2005 |title=Re-reading al-birūnī's India : a case for intercultural understanding |url=https://www.tandfonline.com/doi/full/10.1080/09596410500059623 |journal=Islam and Christian–Muslim Relations |language=en |volume=16 |issue=2 |pages=141–154 |doi=10.1080/09596410500059623 |issn=0959-6410|url-access=subscription }}</ref> एह में बरूनी तत्कालीन भारत के इतिहास, समाज-संस्कृति, धर्म आ अउरी बिबिध बिसय सभ के डिटेल में बिबरन देले बाड़न। अल-हिंद के इस्लामी अध्ययन की परसिद्ध विदुषी [[एनेमारी शिमेल]] [[धर्म के इतिहास]] पर लिखल दुनियाँ के पहिलकी वस्तुनिष्ठ (निष्पक्ष) ग्रंथ बतवले बाड़ी। बाद में एह किताब के [[एडुआर्ड साखाउ]] पहिले [[जर्मन भाषा]] में आ ओकरा बाद [[अंग्रेज़ी]] में (''Alberuni's India'' नाँव से) अनुबाद कइलें।<ref>{{cite book|last1=Kūrush.|first1=Ṣafavī|title=Introduction to Linguistics History|isbn=978-964-8727-32-6|publisher=Pazhvāk-i Kayvān|date=2007}}</ref><ref>{{cite book |last1=Kozah |first1=Mario |title=The Birth of Indology as an Islamic Science: Al-Bīrūnī's Treatise on Yoga Psychology |date=20 October 2015 |publisher=BRILL |isbn=978-90-04-30554-0 |pages=23–31 |url=https://books.google.com/books?id=v_7dCgAAQBAJ&dq=Kit%C4%81b+al-tahqiq+biruni&pg=PA23 |access-date=2 September 2022 |language=en}}</ref><ref>{{cite book |last1=Sunar |first1=Lutfi |title=Eurocentrism at the Margins: Encounters, Critics and Going Beyond |date=5 May 2016 |publisher=Routledge |isbn=978-1-317-13996-6 |pages=88, 89 |url=https://books.google.com/books?id=fNAeDAAAQBAJ&dq=Kit%C4%81b+al-tahqiq+biruni&pg=PA88 |access-date=2 September 2022 |language=en}}</ref>
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== संदर्भ ==
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[[श्रेणी:भारत के इतिहास]]
[[श्रेणी:इंडोलॉजी]]
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बाहरी कड़ी जोड़ल गइल
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'''''किताब-उल-हिंद''''' ({{Langx|en|Kitab al-Hind|italic=yes}}){{efn|हेकर पूरा नाँव '''''तहक़ीक़ मा ली-ल-हिंद मिन मक़ूल मक़बूल फ़ी ल-अक़्ल औ मरदूल''''' ({{langx|ar|تحقيق ما للهند من مقولة مقبولة في العقل أو مرذولة|lit=A Critical Study of Indian Doctrines, Whether Rationally Acceptable or Not|translit=Taḥqīq mā li-l-hind min maqūla maqbūla fī l-ʿaql aw mardhūla}} हवे। ई जर्मन आ अंग्रेजी में पहिले अनुबादित भइल। बाद में एकर हिंदियो में अनुबाद भइल।}} हवे, प्रसिद्ध ईरानी यात्री, बिद्वान आ इतिहासकार [[अल-बरूनी]] के भारत पर लिखल किताब हवे।<ref name=":0">{{Cite journal |last=Ataman |first=Kemal |date=April 2005 |title=Re-reading al-birūnī's India : a case for intercultural understanding |url=https://www.tandfonline.com/doi/full/10.1080/09596410500059623 |journal=Islam and Christian–Muslim Relations |language=en |volume=16 |issue=2 |pages=141–154 |doi=10.1080/09596410500059623 |issn=0959-6410|url-access=subscription }}</ref> एह में बरूनी तत्कालीन भारत के इतिहास, समाज-संस्कृति, धर्म आ अउरी बिबिध बिसय सभ के डिटेल में बिबरन देले बाड़न। अल-हिंद के इस्लामी अध्ययन की परसिद्ध विदुषी [[एनेमारी शिमेल]] [[धर्म के इतिहास]] पर लिखल दुनियाँ के पहिलकी वस्तुनिष्ठ (निष्पक्ष) ग्रंथ बतवले बाड़ी। बाद में एह किताब के [[एडुआर्ड साखाउ]] पहिले [[जर्मन भाषा]] में आ ओकरा बाद [[अंग्रेज़ी]] में (''Alberuni's India'' नाँव से) अनुबाद कइलें।<ref>{{cite book|last1=Kūrush.|first1=Ṣafavī|title=Introduction to Linguistics History|isbn=978-964-8727-32-6|publisher=Pazhvāk-i Kayvān|date=2007}}</ref><ref>{{cite book |last1=Kozah |first1=Mario |title=The Birth of Indology as an Islamic Science: Al-Bīrūnī's Treatise on Yoga Psychology |date=20 October 2015 |publisher=BRILL |isbn=978-90-04-30554-0 |pages=23–31 |url=https://books.google.com/books?id=v_7dCgAAQBAJ&dq=Kit%C4%81b+al-tahqiq+biruni&pg=PA23 |access-date=2 September 2022 |language=en}}</ref><ref>{{cite book |last1=Sunar |first1=Lutfi |title=Eurocentrism at the Margins: Encounters, Critics and Going Beyond |date=5 May 2016 |publisher=Routledge |isbn=978-1-317-13996-6 |pages=88, 89 |url=https://books.google.com/books?id=fNAeDAAAQBAJ&dq=Kit%C4%81b+al-tahqiq+biruni&pg=PA88 |access-date=2 September 2022 |language=en}}</ref>
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== नोट ==
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== संदर्भ ==
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== बाहरी कड़ी ==
* {{Cite book |last=Starr |first=S. Frederick |url=https://academic.oup.com/book/49424 |title=The Genius of their Age: Ibn Sina, Biruni, and the Lost Enlightenment |publisher=Oxford University Press |year=2023 |isbn=978-0-19-767555-7 |edition=1 |language=en |doi=10.1093/oso/9780197675557.001.0001}}
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== संदर्भ ==
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== बाहरी कड़ी ==
* {{Cite book |last=Starr |first=S. Frederick |url=https://academic.oup.com/book/49424 |title=The Genius of their Age: Ibn Sina, Biruni, and the Lost Enlightenment |publisher=Oxford University Press |year=2023 |isbn=978-0-19-767555-7 |edition=1 |language=en |doi=10.1093/oso/9780197675557.001.0001}}
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* [https://dn760009.eu.archive.org/0/items/in.ernet.dli.2015.403160/2015.403160.India-Al.pdf भारत : अल बिरूनी] (किताब उल हिंद का हिंदी अनुवाद), नेशनल बुक ट्रस्ट से छपल पूरा किताब।
* [https://library.bjp.org/jspui/bitstream/123456789/1744/1/12-allbaruni-ka-bharat-agman.pdf अलबरूनी का भारत], सन्तराम बी. ए. (किताब उल हिंद का हिंदी अनुवाद), इंडियन प्रेस, [[इलाहाबाद]] से छपल पूरा किताब।
* [https://www.bbc.com/hindi/institutional-54585844 अल-बेरूनी: समय को 'क़ैद करने' की कोशिश करने वाले वैज्ञानिक, जिन्हें भारतीय सभ्यता में रुचि थी], बीबीसी हिंदी क एगो स्टोरी।
* {{Cite book |last=Starr |first=S. Frederick |url=https://academic.oup.com/book/49424 |title=The Genius of their Age: Ibn Sina, Biruni, and the Lost Enlightenment |publisher=Oxford University Press |year=2023 |isbn=978-0-19-767555-7 |edition=1 |language=en |doi=10.1093/oso/9780197675557.001.0001}}
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दाल पीठा
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अंग्रेजी से अनुबाद क के नया आधार लेख
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'''दाल पीठा''', '''दल पिठा''' चाहे '''दल पिठिया''' भा '''दल पिठी''', [[बिहार]] के एगो पारंपरिक व्यंजन हवे। एहमें [[चाउर]] के पिसान के लोई के भीतर मसालेदार दाल के भरावन भरल जाला, आ एकरा के खउलत पानी के भाप में पकावल जाला। भारतीय भाषा सभ में "दल" के अर्थ [[दाल]] आ "पिठा" भा "पिठी" के अर्थ [[गोहूँ]] भा ताजा चाउर के आटा से बनल पकवान होला। भाप में पकावल गइल दल पिठा के साइज-शेप परंपरागत रूप से गुझिया जइसन होखेला। [[पूर्वांचल]] के [[भोजपुरी क्षेत्र]] में एकरा के '''गोझा''' के नाँव से जानल जाला।
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'''दाल पीठा''', '''दल पिठा''' चाहे '''दल पिठिया''' भा '''दल पिठी''', [[उत्तर प्रदेश|यूपी]] आ [[बिहार]] के [[भोजपुरी क्षेत्र]] क एगो पारंपरिक व्यंजन हवे। एहमें [[चाउर]] के पिसान के लोई के भीतर मसालेदार दाल के भरावन भरल जाला, आ एकरा के खउलत पानी के भाप में पकावल जाला। भारतीय भाषा सभ में "दल" के अर्थ [[दाल]] आ "पिठा" भा "पिठी" के अर्थ [[गोहूँ]] भा ताजा चाउर के आटा से बनल पकवान होला। भाप में पकावल गइल दल पिठा के साइज-शेप परंपरागत रूप से गुझिया जइसन होखेला। [[पूर्वांचल]] के [[भोजपुरी क्षेत्र]] में एकरा के '''गोझा''', '''भकोसा''' आ '''फारा''' के नाँव से जानल जाला।
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[[श्रेणी:बिहार के खाना]]
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संदर्भ जोड़ल/सुधारल गइल
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| name = दाल पीठा
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| alternative_name = दलपीठा, गोझा, फारा, भकोसा
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'''दाल पीठा''', '''दल पिठा''' चाहे '''दल पिठिया''' भा '''दल पिठी''', [[उत्तर प्रदेश|यूपी]] आ [[बिहार]] के [[भोजपुरी क्षेत्र]] क एगो पारंपरिक व्यंजन हवे। एहमें [[चाउर]] के पिसान के लोई के भीतर मसालेदार दाल के भरावन भरल जाला, आ एकरा के खउलत पानी के भाप में पकावल जाला। भारतीय भाषा सभ में "दल" के अर्थ [[दाल]] आ "पिठा" भा "पिठी" के अर्थ [[गोहूँ]] भा ताजा चाउर के आटा से बनल पकवान होला। भाप में पकावल गइल दल पिठा के साइज-शेप परंपरागत रूप से गुझिया जइसन होखेला। [[पूर्वांचल]] के [[भोजपुरी क्षेत्र]] में एकरा के '''गोझा''', '''भकोसा''' आ '''फारा''' के नाँव से जानल जाला।<ref>{{cite web |title=गुजिया तो आप सब ने खाया होगा पर क्या आपने गोझा खाया है? चखिए गोझे का स्वाद आ गई रे चटोरी में |url=https://khabarlahariya.org/new-recipe-of-goza/ |website=Khabar Lahariya (खबर लहरिया) |access-date=10 जुलाई 2026 |language=en |date=8 अक्टूबर 2020}}</ref><ref>{{cite web |last1=रावत |first1=उमा |title=उत्तर भारतीय चना दाल फरा रेसिपी {{!}} भकोसा {{!}} गोझा {{!}} चावल के फरे |url=https://www.foodzlife.com/post/bhakosarecipe?srsltid=AfmBOortQJ5UXh6U02Jwdex8Mg_oNocBfvRsVFth3hMdR-BJBH5w8WAm |website=FoodzLife |access-date=10 जुलाई 2026 |language=hi |date=13 जनवरी 2022}}</ref>
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== संदर्भ ==
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[[श्रेणी:बिहार के खाना]]
[[श्रेणी:भोजपुरी क्षेत्र]]
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