विकिपुस्तक
hiwikibooks
https://hi.wikibooks.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0
MediaWiki 1.47.0-wmf.12
first-letter
मीडिया
विशेष
वार्ता
सदस्य
सदस्य वार्ता
विकिपुस्तक
विकिपुस्तक वार्ता
चित्र
चित्र वार्ता
मीडियाविकि
मीडियाविकि वार्ता
साँचा
साँचा वार्ता
सहायता
सहायता वार्ता
श्रेणी
श्रेणी वार्ता
रसोई
रसोई वार्ता
विषय
विषय चर्चा
TimedText
TimedText talk
मॉड्यूल
मॉड्यूल वार्ता
Event
Event talk
हिंदी साहित्य का इतिहास (आधुनिक काल)/उपन्यास
0
5735
83136
80323
2026-07-22T16:24:07Z
Sahityapremee
16478
83136
wikitext
text/x-wiki
उपन्यास हिंदी साहित्य की आधुनिक विधा है। इसका आरंभ भारतेंदु युग में हुआ।
== समाजसुधारवादी उपन्यास ==
हिंदी उपन्यास का आरंभ भारतेंदु युग में समाजसुधारवादी उपन्यासों से हुआ। १८८२ ई. में लाला श्रीनिवासदास द्वारा लिखित 'परीक्षा गुरु' प्रकाशित हुआ। आचार्य रामचंद्र सुक्ल हिंदी का पश्चिमी ढंग पर लिखा गया पहला मौलिक उपन्यास मानते हैं। यह पश्चिमी उपन्यास की शैली पर आधारित है। यह उस दौर के यथार्थ जीवन का चित्र भी प्रस्तुत करता है, परन्तु कला की दृष्टि से बहुत अपरिपक्व है। इसमें उपदेश की प्रवृत्ति प्रधान है।
‘परीक्षा-गुरु’ के पूर्व भी कई कथात्मक कृतियाँ लिखी गई थी। इनमें श्रद्धाराम फुल्लौरी का ‘देवरानी-जेठानी’ (1872 ई.) और ‘भाग्यवती’ तथा ‘रीति-रत्नाकर’, ‘वामा शिक्षक’, आदि प्रमुख हैं। परन्तु ये भी मुख्यतः समाज सुधारवादी तथा उपन्यास कला की दृष्टि से अपरिपक्व हैं।
परीक्षागुरु के बाद कई सुधारवादी उपन्यास प्रकाशित हुए। इन मौलिक उपन्यासों में महत्वपूर्ण हैं : पं. बालकृष्ण भट्ट रचित ‘नूतन ब्रह्मचारी’ तथा ‘सौ अजान और एक सुजान’ राधाचरण गोस्वामी का ‘विधवा-विपत्ति’, राधाकृष्ण दास का ‘निस्सहाय हिन्दू’, मेहता लज्जाराम का ‘आदर्श हिंदू’, ‘आदर्श दम्पति’ और ‘हिन्दू गृहस्थ' आदि।
सुधारवादी रवैया इस दौर के प्रेम प्रधान उपन्यासों में भी देखने को मिलता है। इस दृष्टि से ठाकुर जगमोहन सिंह का ‘श्यामा स्वप्न’ उल्लेखनीय है।
== तिलिस्मी और जासूसी उपन्यास ==
भारतेंदु युग के अंतिम दशक में हिंदी में घटनाप्रधान उपन्यासों के लेखन की प्रवृत्ति बढ़ी। इनमें हैरत में डालने वाली घटनाओं की प्रधानता थी। इनमें देवकीनंदन खत्री के तिलिस्मी उपन्यास, गोपालराम गहमरी के जासूसी उपन्यास तथा किशोरीलाल गोस्वामी के इतिहास के कथानक पर आधारित सामाजिक ऐतिहासिक उपन्यास प्रमुख हैं। उपन्यास की यह प्रवृत्ति प्रेमचंद के आने तक प्रमुख बनी रही।
देवकीनन्दन खत्री ने ‘चन्द्रकांता’, ‘चन्द्रकांता-संतति’ तथा ‘भूतनाथ’ नामक तिलस्म और ऐयारी के रोचक उपन्यास कई भागों में प्रकाशित किए। इसके अलावा उन्होंने ‘नरेन्द्रमोहनी’, वीरेन्द्र वीर’ आदि उपन्यास भी लिखे थे। इनमें चंद्रकांता तथा चंद्रकांता सन्तति बहुत लोकप्रीय हुआ। इनके महत्व को रेखांकित करते हुए रामचंद्र सुक्ल लिखते हैं कि बहुत लोगों ने उनके मनोरंजक उपन्यास पढ़ने के लिए ही हिन्दी सीखी।
किशोरीलाल गोस्वामीने सामाजिक और ऐतिहासिक उपन्यास लिखे। किंतु उनमें समाज की बहुत ही स्थूल और ऊपरी झलक है, यथार्थ चित्रण नहीं। उनके ऐतिहासिक उपन्यासों में इतिहास के तथ्यों का उचित निर्वाह नहीं हुआ। देशकाल का भी ध्यान उन्होंने नहीं रखाहै। गोस्वामी जी ने लगभग पैंसठ उपन्यास लिखे हैं। उनमें कुछ उपन्यासों के नाम हैं ‘कुसुमकुमारी’, ‘हृदयहारिणी’, ‘लबंगलता’, ‘रजिया बेगम’, ‘तारा’, ‘कनक कुसुम’, ‘मल्लिका देवी’, ‘राजकुमारी’, लखनऊ की कब्र’, ‘चपला’, ‘प्रेममयी’। जैसा कि नामों में प्रकट है ये उपन्यास नारी-प्रधान और शृंगारिक हैं। वास्तव में उनमें समाज और इतिहास के संदर्भ में कामुकता तथा विलासिता का अंकन हुआ है। उन्होंने ‘उपन्यास’ नामक पत्रिका भी निकाली थी जिसमें उनके पैंसठ छोटे-बड़े उपन्यास प्रकाशित हुए थे। आचार्य शुक्ल ने गोस्वामी जी के सम्बन्ध में लिखा है कि ‘इस द्वितीय उत्थानकाल के भीतर उपन्यासकार इन्हीं को कह सकते हैं, परन्तु वस्तुतः उपन्यासकार की सच्ची प्रतिभा इनमें भी नहीं है।’
गोपालराम गहमरी ‘जासूस’ नामक पत्रिका प्रकाशित करते थे, जिसमें उनके साठ के लगभग उपन्यास छपे। उन्होंने ‘जासूस की भूल’, ‘घर का भेदी’, ‘अद्भुत खून’, ‘भोजपुर की ठगी’, आदि रहस्यपूर्ण, साहसिक और डकैती तथा ठगी की कथाएं निर्मित कीं। ये कथाएं अंग्रेजी के जासूसी उपन्यासों के ढंग पर लिखी गई हैं। उन्होंने जासूसी उपन्यासों के क्षेत्र में भी आदर्श के निर्वाह और लोकोपकार की भावना के समावेश का यत्न किया और आदर्श जासूसों की सृष्टि की।
द्विवेदी युग में कुछ अन्य तरह के उल्लेखनीय उपन्यास लेखकों में- हरिऔध, ब्रजनन्दन सहाय आदि विसेष उल्लेखनीय हैं। हरिऔध ने ‘ठेठ हिन्दी का ठाठ’ और ‘अधखिला फूल’ लिखकर इनमें मुहावरेदार ठेठ भाषा का नमूना पेश किया। ब्रजनन्दन सहाय के ‘सौन्दर्योपासक’ में काव्य का आनन्द मिलता है। द्विवेदी युग में किशोरीलाल गोस्वामी के अतिरिक्त कुछ और लेखकों ने भी ऐतिहासिक उपन्यास लिखें। इनमें उल्लेखनीय हैं : गंगाप्रसाद गुप्त का ‘वीर पत्नी’ और ‘मिश्रबंधुओं के विक्रमादित्य’, चन्द्रगुप्त मौर्य’ तथा ‘पुष्य मित्र’ आदि।
==आदर्शोन्मुख यथार्थवादी उपन्यास ==
१९१८ ई. में प्रेमचंद का पहला हिंदी उपन्यास ‘सेवासदन’ प्रकाशित हुआ। प्रेमचंद के आगमन के साथ ही हिन्दी-कथा साहित्य में एक नये युग का आरम्भ हुआ। इसे प्रेमचंद युग भी कहते हैं। प्रेमचंद ने अपने उपन्यासों को आदर्शोन्मुखी यथार्थवादी कहा है। उन्होंने उपन्यास में मानव मन का स्वाभाविक एवं सजीव अंकन आरम्भ किया। उन्होंने पहली बार हिन्दी उपन्यास में घटना और चरित्र का संतुलन स्थापित कर मनोविज्ञान का उचित समावेश किया। उन्होंने समाज की समस्याओं को कथा-साहित्य में स्थापित किया। उन्होंने जीवन और जगत के विविध क्षेत्रों का, समाज के विभिन्न वर्गों का ग्रामीण तथा नागरिक क्षेत्रों की बहुत-सी दशाओं तथा परिस्थितियों का सूक्ष्म चित्रण किया। उनके प्रमुख उपन्यासों का विवरण निम्नलिकित है-
* ''[[सेवासदन]]'' (१९१८)- यह मूल रूप से उन् होंने 'बाजारे-हुस् न' नाम से पहले उर्दू में लिखा गया लेकिन इसका हिंदी रूप 'सेवासदन' पहले प्रकाशित हुआ। यह एक नारी के वेश् या बनने की कहानी है। डॉ [[रामविलास शर्मा]] 'सेवासदन' की मुख् य समस् या भारतीय नारी की पराधीनता को मानते हैं।
* ''[[प्रेमाश्रम]]'' (१९२२)- यह किसान जीवन पर उनका पहला उपन् यास है। इसका मसौदा भी पहले उर्दू में 'गोशाए-आफियत' नाम से तैयार हुआ था लेकिन इसे पहले हिंदी में प्रकाशित कराया। यह अवध के किसान आंदोलनों के दौर में लिखा गया।
* ''[[रंगभूमि]]'' (१९२५)- इसमें प्रेमचंद एक अंधे भिखारी सूरदास को कथा का नायक बनाकर हिंदी कथा साहित् य में क्रांतिकारी बदलाव का सूत्रपात करते हैं।
* ''[[निर्मला]]'' (१९२५)
* ''[[कायाकल्प]]'' (१९२७)
* ''[[गबन]]'' (१९२८)
* ''[[कर्मभूमि]]'' (१९३२)
* ''[[गोदान]]'' (१९३६)
* ''[[मंगलसूत्र]]'' (अपूर्ण)- यह प्रेमचंद का अधूरा उपन्यास है।
इन उपन्यासों में प्रेमचन्द ने किसानों की आर्थिक दशा, जमीदारों और पुलिस के अत्याचारों, ग्रामीण जीवन की कमजोरियों, समाज की कुरीतियों, शहरी समाज की कमियों, विधवाओं और वेश्याओं की समस्याओं, नारी की आभूषणप्रियता, मध्यवर्ग की झूठी शान और दिखावे की प्रवृत्ति, सम्मिलित हिन्दू-परिवार में नारी की दयनीय स्थिति आदि प्रश्नों को उठाया। कई उपन्यासों में उन्होंने गांव और शहर की कहानी, ग्रामीण और नागरिक जीवन की झांकी साथ-साथ प्रस्तुत की है। अन्तिम दौर में प्रेमचंद का झुकाव साम्यवाद की ओर हो गया था और वे सच्चे अर्थ में यथार्थवादी और प्रगतिशील हो गये थे।
प्रेमचन्द की उपन्यास कला को अनेक उपन्यासकारों ने अपनाया और आदर्शोन्मुख यथार्थवादी उपन्यास लिखा। इनमें विश्वम्भरनाथ शर्मा कौशिक तथा सुदर्शन उल्लेखनीय हैं। कौशिक के उपन्यास ‘मां’ और भिखारिणी नारी-हृदय का मनोवैज्ञानिक चित्र प्रस्तुत करते हैं।
==मनोविश्लेषणवादी उपन्यास ==
== ऐतिहासिक उपन्यास ==
== आँचलिक उपन्यास =
== अस्तित्ववादी उपन्यास ==
== व्यंग्यमूलक उपन्यास ==
व्यंग्यमूलक उपन्यासों में डॉ.सुरेश कुमार मिश्रा उरतृप्त कृत ‘इधर उधर के बीच में’ काफी चर्चित है।
यह एक व्यंग्य उपन्यास है। इसके बारे में प्रसिद्ध व्यंग्यकार प्रेम जनमेजय लिखते हैं - व्यंग्य उपन्यास का नाम है ‘इधर उधर के बीच में’। उपन्यास आंरभ होते ही समझ आ जाता है कि इसका कथ्य किस भूमि का अंकुर है। जनगाँव गांव है पर गांव की तरह छोटा नहीं बहुत बड़ा है। इससे परिचित करवाते हुए लेखक कहता है- जनगाँव बहुत बड़ा है। दस हजार की आबादी है। सड़क, बिजली, पानी सब कुछ है। मंदिर-मस्जिद और पुस्तकालय भी है। लोगों को मंदिर-मस्जिद और मोबाइल से फुर्सत नहीं मिलती इसलिए पुस्तकालय पर ताला पड़ा रहता है। सरकारी अस्पताल है, किंतु यहाँ जाने वालों को बड़ी हीन दृष्टि से देखा जाता है। सच कहें तो अस्पताल खुद भी हीन स्थिति में है। डाक्साहब शहर से कभी आते नहीं इसलिए गाँव के सारे मरीज शहर जाते हैं। कहने को तो गाँव में सह-शिक्षा वाला सरकारी स्कूल भी है, लेकिन यहाँ विद्यार्थी नहीं दिखाई देते जहाँ सरपंच की भैंस और मास्साब की तनख्वाह दोनों बंधी बंधाई है। भैंस दूध देती है, मास्साब शिक्षा व्यवस्था को दूह लेते हैं। बाकी विद्यार्थियों का क्या है, उनके लिए है ना भोले गाँव की छाती पर गाड़ दिया गया ’अला-फला कान्वेन्ट स्कूल सारे बच्चों की वैचारिक नस्ल यहाँ बदली जा रही है। बच्चे यहाँ पढ़कर अपने माँ-बाप को गंवारू समझना सीख रहे हैं और वहीं माँ-बाप जमीन बेचकर मोटी फीस भरते हुए अपने बच्चों को समझदार होना मान रहे हैं। कमाल की उलटवासी है। गाँव में हाथ से ज्यादा फोन है. पैरों से ज्यादा चहलकदमी दरअसल, गाँव स्मार्ट हो चला है।’’
जैसे पहली नजंर में नेता की भ्रष्टाचारी मुस्कान, थाने के शिकारी बाड़े, मंदिर - मस्जिद के अंधत्व आदि का पता चल जाता है वैसे ही मुझ जैसी व्यंग्य की दाई को पेट छूकर पता चल जाता है कि ....। चावल के दाने-से इस अंश को देने का मेरा मकसद यह भी है कि जब आगाज ऐसा है तो ...। मैं समझ रहा हूं कि सुरेश की विसंगतियों के लक्ष्य शिक्षा, धर्म, स्वास्थ्य सेवाओं, आदि के गलियारों में घूमते हुए और कहां-कहां विचरण करेगा। सुरेश ‘प्रतिदिन’ लिखने वाला सक्रिय व्यंग्यधर्मी है और उसकी सक्रियता के साथ कदम मिलाना कठिन है पर फिर भी जितनी क्षमता हो उतने कदम मिला़ लेता हूं। सुरेश यथासंभव संक्षिप्त रहकर भाषा का सार्थक प्रहारात्मक प्रयोग करता है। विवरण के मोह में व्यंग्य उपन्यास में सपाटबयानी के खतरे बहुत होते हैं पर जितना पढ़ने के लिए मुझे उपलब्ध हुआ है उसके आधार पर कह सकता हूं कि ऐसे गड्ढे कम हैं। विंसंगतियों को अभिव्यक्त कर उसपर प्रहार की शक्ति का एक छोटा-सा उदाहरण ,‘‘ गांव और शहर में छोटा-सा अंतर है। गांव में कुत्ते बेकार घूमते हैं और गायों को पूजा जाता है। वहीं शहर में कुत्तों की पूजा की जाती है और गायें बेकार घूमती हैं।’’
जनगांव का महत्वपूर्ण चरित्र है इंदिरा, जो लड़की है और उसकी विसंगति यह है कि उसकी फीलिंग लड़के जैसी है। इंदिरा आत्महत्या करना चाहती है। क्यों? यह रहस्य तो पढ़कर ही समझ आ सकता है। इतना बता दूं कि इंदिरा मरने से पहले गंगू से फेशियल करवाती/ करवाता है।
इस किताब में एक अलग तरह का प्रसंग है जहां सुरेश किताब का मानवीकरण करता है और ‘विद्वत् समाज’ में किताब की, किसी दुष्कर्म पीडिता के,थाने में बयान व्यथा का प्रहारक वर्णन करता है। किताब की दीनगाथा घर की एकांत कोठरी में पड़ी बूढ़ी मां की-सी है। पर सुरेश तो सार्थक युवा सोच का है इसलिए अतीत के साथ अत्याधुनिक समाज, बाजारवाद और मशीन होती अपंग मानवाता उसकी वेचाारिक पृष्ठभूमि में है।
प्रो. राजेश कुमार इसी उपन्यास की अस्मितामूलक अंश को रेखांकित करते हुए लिखते हैं - डॉ. सुरेश कुमार मिश्र उरतृप्त ऐसे सिद्धहस्त व्यंग्यकार हैं, जो न केवल व्यंग्य को समझते हैं, इसके विभिन्न उपकरणों को पहचानते हैं, बल्कि अपने कथ्य को प्रभावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करने के लिए वे इन उपकरणों को बहुत कुशलता से इच्छानुसार उपयोग करने में भी माहिर हैं। प्रस्तुत उपन्यास के लिए उन्होंने बहुत ही विचित्र विषय को चुना है, जिसमें एक लड़की है, जो मन से लड़का है। कोढ़ में खाज की तरह वह अपने सहपाठी से प्रेम कर बैठती है, जिसका आभास सहपाठी को नहीं होता। फिर इस एकतरफा प्रेम के बीच से जो विसंगतियाँ उत्पन्न होती हैं, वे ऐसे संसार का सृतन करती हैं, जो हमें समाज की विभिन्न विसंगतियों के सामने ले जाता है। उपन्यास की विशेषता इसकी व्यंग्य से भरपूर शैली है, जिसमें लगभग हर वाक्य में ही व्यंग्य को इस तरह से बुन गया है कि पाठक चमत्कृत होता है, और कथा को पढ़ने का उसका आनंद द्विगुणित होता जाता है। जो विशेषता सुरेश को अन्य व्यंग्यकारों से अलग और बहुत से प्रतिष्ठित व्यंग्यकारों से ऊपर उठाती है, वह यह है कि वे चीज़ों को एक दूसरे के विरोध में रखकर उसके मध्य से सार्थक, और रोचक व्यंग्य की सृष्टि करते हैं। विषय पर पकड़ और कला की इस परिपक्वता ने प्रस्तुत उपन्यास को अत्यंत रोचक और प्रभावपूर्ण बना दिया है, जो किसी रचना का आदर्श प्रस्तुत करने में सक्षम है।
{{BookCat}}
{{Header
| title = यादों में गौरैया: समीक्षा एवं विश्लेषण
| subtitle = डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त' कृत उपन्यास पर एक दृष्टि
| author = प्रोफेसर तोमिओ मिज़ोकामि
| section = हिंदी साहित्य / उपन्यास समीक्षा
}}
= यादों में गौरैया: एक परिचय एवं समीक्षा =
''यादों में गौरैया'' आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रखर व्यंग्यकार और लेखक '''डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त'''' द्वारा रचित एक चर्चित उपन्यास है। यह उपन्यास लुप्त होती मानवीय संवेदनाओं, पारिस्थितिक क्षरण और आधुनिक प्रशासनिक तंत्र के प्रति तीखे व्यंग्य को रेखांकित करता है।
== पृष्ठभूमि एवं लोकप्रियता ==
यह कृति वर्तमान में पाठकों एवं आलोचकों के बीच गंभीर विमर्श का केंद्र बनी हुई है। डिजिटल प्लेटफॉर्मों (जैसे अमेज़न) पर इसकी निरंतर लोकप्रियता यह सिद्ध करती है कि आधुनिक दौर में भी मर्मस्पर्शी और विचारोत्तेजक साहित्य की माँग बनी हुई है।
== कथ्य और मुख्य विषय-वस्तु ==
उपन्यास की कथावस्तु एक नन्ही गौरैया के प्रतीक के माध्यम से बुनी गई है। यह केवल एक पक्षी के विलुप्त होने की कहानी नहीं है, बल्कि आधुनिक समाज में मरती हुई संवेदनाओं की करुण पुकार है।
कथा के प्रमुख बिंदु:
* '''प्रशासनिक एवं राजनीतिक विसंगतियाँ:''' उपन्यास दर्शाती है कि किस प्रकार सत्ता के गलियारों, स्वार्थी राजनीति और प्रशासनिक 'फंडों' की भेंट चढ़कर सामान्य जनजीवन की मासूमियत और प्राकृतिक संतुलन नष्ट हो जाता है।
* '''पर्यावरण और संवेदना का संकट:''' विकास की अंधी दौड़ में मनुष्य द्वारा खोई जा रही संवेदनशीलता पर यह एक तीखा प्रहार है।
* '''प्रतीकवाद:''' यहाँ 'गौरैया' केवल एक पक्षी न होकर लुप्त होती मानवीयता और प्रकृति के प्रति हमारी उपेक्षा का प्रतीक है।
== शैली एवं व्यंग्य-विधान ==
डॉ. उरतृप्त की लेखन शैली में 'मार्मिक व्यंग्य' मुख्य घटक है:
1. '''मार्मिक व्यंग्य (Sublime Satire):''' यहाँ व्यंग्य का प्रयोग क्षणिक मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि पाठकों के अंतर्मन को झकझोरने के लिए किया गया है।
2. '''भाषा और अभिव्यक्ति:''' उपन्यास की भाषा सहज, प्रवाहमयी और दार्शनिक गहराई से युक्त है, जो विद्वानों के साथ-साथ आम पाठकों के हृदय को भी स्पर्श करती है।
3. '''चेतना का जागरण:''' यह उपन्यास पाठक के समक्ष यह चुभता हुआ प्रश्न उपस्थित करता है कि क्या आधुनिक मानव वास्तव में एक संवेदनशून्य समाज की ओर अग्रसर है?
== समीक्षात्मक निष्कर्ष ==
''यादों में गौरैया'' समाज की कड़वी सच्चाइयों और व्यवस्था की विसंगतियों को समझने के लिए एक महत्त्वपूर्ण कृति है। यह केवल एक साहित्यिक रचना नहीं, बल्कि जन-चेतना को झंकृत करने वाला एक सांस्कृतिक दस्तावेज़ है।
----
== समीक्षक परिचय ==
* '''समीक्षक:''' प्रोफेसर तोमिओ मिज़ोकामि (Prof. Tomio Mizokami)
* '''उपाधि/सम्मान:''' पद्मश्री (2018 में भारत सरकार द्वारा सम्मानित)
* '''पद:''' प्रोफेसर एमेरिटस, ओसाका यूनिवर्सिटी, जापान (Emeritus Professor, Osaka University, Japan)
=== समीक्षक की टिप्पणी ===
> "यह केवल एक पक्षी की तलाश की कहानी नहीं है, बल्कि हमारे अपने भीतर मरती हुई संवेदनाओं की करुण पुकार है... डॉ. उरतृप्त ने जिस कथा-संसार को बुना है, वह हमें उस भयावह यथार्थ के सामने खड़ा कर देता है जहाँ मासूमियत भी सत्ता के गलियारों और प्रशासनिक 'फंड' की भेंट चढ़ जाती है। यह पुस्तक चेतना को झंकृत करने वाली एक कालजयी कृति है।"
>
> — '''प्रोफेसर तोमिओ मिज़ोकामि'''
== इन्हें भी देखें ==
* [[हिंदी साहित्य]]
* [[आधुनिक हिंदी उपन्यास]]
* [[व्यंग्य साहित्य]]
[[Category:हिंदी उपन्यास]]
[[Category:पुस्तक समीक्षा]]
[[Category:डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त']]
== अस्मितामूलक उपन्यास ==
1aow8wgghcaoniw6sihui24qsozmgzw
83137
83136
2026-07-22T16:26:16Z
Sahityapremee
16478
83137
wikitext
text/x-wiki
उपन्यास हिंदी साहित्य की आधुनिक विधा है। इसका आरंभ भारतेंदु युग में हुआ।
== समाजसुधारवादी उपन्यास ==
हिंदी उपन्यास का आरंभ भारतेंदु युग में समाजसुधारवादी उपन्यासों से हुआ। १८८२ ई. में लाला श्रीनिवासदास द्वारा लिखित 'परीक्षा गुरु' प्रकाशित हुआ। आचार्य रामचंद्र सुक्ल हिंदी का पश्चिमी ढंग पर लिखा गया पहला मौलिक उपन्यास मानते हैं। यह पश्चिमी उपन्यास की शैली पर आधारित है। यह उस दौर के यथार्थ जीवन का चित्र भी प्रस्तुत करता है, परन्तु कला की दृष्टि से बहुत अपरिपक्व है। इसमें उपदेश की प्रवृत्ति प्रधान है।
‘परीक्षा-गुरु’ के पूर्व भी कई कथात्मक कृतियाँ लिखी गई थी। इनमें श्रद्धाराम फुल्लौरी का ‘देवरानी-जेठानी’ (1872 ई.) और ‘भाग्यवती’ तथा ‘रीति-रत्नाकर’, ‘वामा शिक्षक’, आदि प्रमुख हैं। परन्तु ये भी मुख्यतः समाज सुधारवादी तथा उपन्यास कला की दृष्टि से अपरिपक्व हैं।
परीक्षागुरु के बाद कई सुधारवादी उपन्यास प्रकाशित हुए। इन मौलिक उपन्यासों में महत्वपूर्ण हैं : पं. बालकृष्ण भट्ट रचित ‘नूतन ब्रह्मचारी’ तथा ‘सौ अजान और एक सुजान’ राधाचरण गोस्वामी का ‘विधवा-विपत्ति’, राधाकृष्ण दास का ‘निस्सहाय हिन्दू’, मेहता लज्जाराम का ‘आदर्श हिंदू’, ‘आदर्श दम्पति’ और ‘हिन्दू गृहस्थ' आदि।
सुधारवादी रवैया इस दौर के प्रेम प्रधान उपन्यासों में भी देखने को मिलता है। इस दृष्टि से ठाकुर जगमोहन सिंह का ‘श्यामा स्वप्न’ उल्लेखनीय है।
== तिलिस्मी और जासूसी उपन्यास ==
भारतेंदु युग के अंतिम दशक में हिंदी में घटनाप्रधान उपन्यासों के लेखन की प्रवृत्ति बढ़ी। इनमें हैरत में डालने वाली घटनाओं की प्रधानता थी। इनमें देवकीनंदन खत्री के तिलिस्मी उपन्यास, गोपालराम गहमरी के जासूसी उपन्यास तथा किशोरीलाल गोस्वामी के इतिहास के कथानक पर आधारित सामाजिक ऐतिहासिक उपन्यास प्रमुख हैं। उपन्यास की यह प्रवृत्ति प्रेमचंद के आने तक प्रमुख बनी रही।
देवकीनन्दन खत्री ने ‘चन्द्रकांता’, ‘चन्द्रकांता-संतति’ तथा ‘भूतनाथ’ नामक तिलस्म और ऐयारी के रोचक उपन्यास कई भागों में प्रकाशित किए। इसके अलावा उन्होंने ‘नरेन्द्रमोहनी’, वीरेन्द्र वीर’ आदि उपन्यास भी लिखे थे। इनमें चंद्रकांता तथा चंद्रकांता सन्तति बहुत लोकप्रीय हुआ। इनके महत्व को रेखांकित करते हुए रामचंद्र सुक्ल लिखते हैं कि बहुत लोगों ने उनके मनोरंजक उपन्यास पढ़ने के लिए ही हिन्दी सीखी।
किशोरीलाल गोस्वामीने सामाजिक और ऐतिहासिक उपन्यास लिखे। किंतु उनमें समाज की बहुत ही स्थूल और ऊपरी झलक है, यथार्थ चित्रण नहीं। उनके ऐतिहासिक उपन्यासों में इतिहास के तथ्यों का उचित निर्वाह नहीं हुआ। देशकाल का भी ध्यान उन्होंने नहीं रखाहै। गोस्वामी जी ने लगभग पैंसठ उपन्यास लिखे हैं। उनमें कुछ उपन्यासों के नाम हैं ‘कुसुमकुमारी’, ‘हृदयहारिणी’, ‘लबंगलता’, ‘रजिया बेगम’, ‘तारा’, ‘कनक कुसुम’, ‘मल्लिका देवी’, ‘राजकुमारी’, लखनऊ की कब्र’, ‘चपला’, ‘प्रेममयी’। जैसा कि नामों में प्रकट है ये उपन्यास नारी-प्रधान और शृंगारिक हैं। वास्तव में उनमें समाज और इतिहास के संदर्भ में कामुकता तथा विलासिता का अंकन हुआ है। उन्होंने ‘उपन्यास’ नामक पत्रिका भी निकाली थी जिसमें उनके पैंसठ छोटे-बड़े उपन्यास प्रकाशित हुए थे। आचार्य शुक्ल ने गोस्वामी जी के सम्बन्ध में लिखा है कि ‘इस द्वितीय उत्थानकाल के भीतर उपन्यासकार इन्हीं को कह सकते हैं, परन्तु वस्तुतः उपन्यासकार की सच्ची प्रतिभा इनमें भी नहीं है।’
गोपालराम गहमरी ‘जासूस’ नामक पत्रिका प्रकाशित करते थे, जिसमें उनके साठ के लगभग उपन्यास छपे। उन्होंने ‘जासूस की भूल’, ‘घर का भेदी’, ‘अद्भुत खून’, ‘भोजपुर की ठगी’, आदि रहस्यपूर्ण, साहसिक और डकैती तथा ठगी की कथाएं निर्मित कीं। ये कथाएं अंग्रेजी के जासूसी उपन्यासों के ढंग पर लिखी गई हैं। उन्होंने जासूसी उपन्यासों के क्षेत्र में भी आदर्श के निर्वाह और लोकोपकार की भावना के समावेश का यत्न किया और आदर्श जासूसों की सृष्टि की।
द्विवेदी युग में कुछ अन्य तरह के उल्लेखनीय उपन्यास लेखकों में- हरिऔध, ब्रजनन्दन सहाय आदि विसेष उल्लेखनीय हैं। हरिऔध ने ‘ठेठ हिन्दी का ठाठ’ और ‘अधखिला फूल’ लिखकर इनमें मुहावरेदार ठेठ भाषा का नमूना पेश किया। ब्रजनन्दन सहाय के ‘सौन्दर्योपासक’ में काव्य का आनन्द मिलता है। द्विवेदी युग में किशोरीलाल गोस्वामी के अतिरिक्त कुछ और लेखकों ने भी ऐतिहासिक उपन्यास लिखें। इनमें उल्लेखनीय हैं : गंगाप्रसाद गुप्त का ‘वीर पत्नी’ और ‘मिश्रबंधुओं के विक्रमादित्य’, चन्द्रगुप्त मौर्य’ तथा ‘पुष्य मित्र’ आदि।
==आदर्शोन्मुख यथार्थवादी उपन्यास ==
१९१८ ई. में प्रेमचंद का पहला हिंदी उपन्यास ‘सेवासदन’ प्रकाशित हुआ। प्रेमचंद के आगमन के साथ ही हिन्दी-कथा साहित्य में एक नये युग का आरम्भ हुआ। इसे प्रेमचंद युग भी कहते हैं। प्रेमचंद ने अपने उपन्यासों को आदर्शोन्मुखी यथार्थवादी कहा है। उन्होंने उपन्यास में मानव मन का स्वाभाविक एवं सजीव अंकन आरम्भ किया। उन्होंने पहली बार हिन्दी उपन्यास में घटना और चरित्र का संतुलन स्थापित कर मनोविज्ञान का उचित समावेश किया। उन्होंने समाज की समस्याओं को कथा-साहित्य में स्थापित किया। उन्होंने जीवन और जगत के विविध क्षेत्रों का, समाज के विभिन्न वर्गों का ग्रामीण तथा नागरिक क्षेत्रों की बहुत-सी दशाओं तथा परिस्थितियों का सूक्ष्म चित्रण किया। उनके प्रमुख उपन्यासों का विवरण निम्नलिकित है-
* ''[[सेवासदन]]'' (१९१८)- यह मूल रूप से उन् होंने 'बाजारे-हुस् न' नाम से पहले उर्दू में लिखा गया लेकिन इसका हिंदी रूप 'सेवासदन' पहले प्रकाशित हुआ। यह एक नारी के वेश् या बनने की कहानी है। डॉ [[रामविलास शर्मा]] 'सेवासदन' की मुख् य समस् या भारतीय नारी की पराधीनता को मानते हैं।
* ''[[प्रेमाश्रम]]'' (१९२२)- यह किसान जीवन पर उनका पहला उपन् यास है। इसका मसौदा भी पहले उर्दू में 'गोशाए-आफियत' नाम से तैयार हुआ था लेकिन इसे पहले हिंदी में प्रकाशित कराया। यह अवध के किसान आंदोलनों के दौर में लिखा गया।
* ''[[रंगभूमि]]'' (१९२५)- इसमें प्रेमचंद एक अंधे भिखारी सूरदास को कथा का नायक बनाकर हिंदी कथा साहित् य में क्रांतिकारी बदलाव का सूत्रपात करते हैं।
* ''[[निर्मला]]'' (१९२५)
* ''[[कायाकल्प]]'' (१९२७)
* ''[[गबन]]'' (१९२८)
* ''[[कर्मभूमि]]'' (१९३२)
* ''[[गोदान]]'' (१९३६)
* ''[[मंगलसूत्र]]'' (अपूर्ण)- यह प्रेमचंद का अधूरा उपन्यास है।
इन उपन्यासों में प्रेमचन्द ने किसानों की आर्थिक दशा, जमीदारों और पुलिस के अत्याचारों, ग्रामीण जीवन की कमजोरियों, समाज की कुरीतियों, शहरी समाज की कमियों, विधवाओं और वेश्याओं की समस्याओं, नारी की आभूषणप्रियता, मध्यवर्ग की झूठी शान और दिखावे की प्रवृत्ति, सम्मिलित हिन्दू-परिवार में नारी की दयनीय स्थिति आदि प्रश्नों को उठाया। कई उपन्यासों में उन्होंने गांव और शहर की कहानी, ग्रामीण और नागरिक जीवन की झांकी साथ-साथ प्रस्तुत की है। अन्तिम दौर में प्रेमचंद का झुकाव साम्यवाद की ओर हो गया था और वे सच्चे अर्थ में यथार्थवादी और प्रगतिशील हो गये थे।
प्रेमचन्द की उपन्यास कला को अनेक उपन्यासकारों ने अपनाया और आदर्शोन्मुख यथार्थवादी उपन्यास लिखा। इनमें विश्वम्भरनाथ शर्मा कौशिक तथा सुदर्शन उल्लेखनीय हैं। कौशिक के उपन्यास ‘मां’ और भिखारिणी नारी-हृदय का मनोवैज्ञानिक चित्र प्रस्तुत करते हैं।
==मनोविश्लेषणवादी उपन्यास ==
== ऐतिहासिक उपन्यास ==
== आँचलिक उपन्यास =
== अस्तित्ववादी उपन्यास ==
== व्यंग्यमूलक उपन्यास ==
व्यंग्यमूलक उपन्यासों में डॉ.सुरेश कुमार मिश्रा उरतृप्त कृत ‘इधर उधर के बीच में’ काफी चर्चित है।
यह एक व्यंग्य उपन्यास है। इसके बारे में प्रसिद्ध व्यंग्यकार प्रेम जनमेजय लिखते हैं - व्यंग्य उपन्यास का नाम है ‘इधर उधर के बीच में’। उपन्यास आंरभ होते ही समझ आ जाता है कि इसका कथ्य किस भूमि का अंकुर है। जनगाँव गांव है पर गांव की तरह छोटा नहीं बहुत बड़ा है। इससे परिचित करवाते हुए लेखक कहता है- जनगाँव बहुत बड़ा है। दस हजार की आबादी है। सड़क, बिजली, पानी सब कुछ है। मंदिर-मस्जिद और पुस्तकालय भी है। लोगों को मंदिर-मस्जिद और मोबाइल से फुर्सत नहीं मिलती इसलिए पुस्तकालय पर ताला पड़ा रहता है। सरकारी अस्पताल है, किंतु यहाँ जाने वालों को बड़ी हीन दृष्टि से देखा जाता है। सच कहें तो अस्पताल खुद भी हीन स्थिति में है। डाक्साहब शहर से कभी आते नहीं इसलिए गाँव के सारे मरीज शहर जाते हैं। कहने को तो गाँव में सह-शिक्षा वाला सरकारी स्कूल भी है, लेकिन यहाँ विद्यार्थी नहीं दिखाई देते जहाँ सरपंच की भैंस और मास्साब की तनख्वाह दोनों बंधी बंधाई है। भैंस दूध देती है, मास्साब शिक्षा व्यवस्था को दूह लेते हैं। बाकी विद्यार्थियों का क्या है, उनके लिए है ना भोले गाँव की छाती पर गाड़ दिया गया ’अला-फला कान्वेन्ट स्कूल सारे बच्चों की वैचारिक नस्ल यहाँ बदली जा रही है। बच्चे यहाँ पढ़कर अपने माँ-बाप को गंवारू समझना सीख रहे हैं और वहीं माँ-बाप जमीन बेचकर मोटी फीस भरते हुए अपने बच्चों को समझदार होना मान रहे हैं। कमाल की उलटवासी है। गाँव में हाथ से ज्यादा फोन है. पैरों से ज्यादा चहलकदमी दरअसल, गाँव स्मार्ट हो चला है।’’
जैसे पहली नजंर में नेता की भ्रष्टाचारी मुस्कान, थाने के शिकारी बाड़े, मंदिर - मस्जिद के अंधत्व आदि का पता चल जाता है वैसे ही मुझ जैसी व्यंग्य की दाई को पेट छूकर पता चल जाता है कि ....। चावल के दाने-से इस अंश को देने का मेरा मकसद यह भी है कि जब आगाज ऐसा है तो ...। मैं समझ रहा हूं कि सुरेश की विसंगतियों के लक्ष्य शिक्षा, धर्म, स्वास्थ्य सेवाओं, आदि के गलियारों में घूमते हुए और कहां-कहां विचरण करेगा। सुरेश ‘प्रतिदिन’ लिखने वाला सक्रिय व्यंग्यधर्मी है और उसकी सक्रियता के साथ कदम मिलाना कठिन है पर फिर भी जितनी क्षमता हो उतने कदम मिला़ लेता हूं। सुरेश यथासंभव संक्षिप्त रहकर भाषा का सार्थक प्रहारात्मक प्रयोग करता है। विवरण के मोह में व्यंग्य उपन्यास में सपाटबयानी के खतरे बहुत होते हैं पर जितना पढ़ने के लिए मुझे उपलब्ध हुआ है उसके आधार पर कह सकता हूं कि ऐसे गड्ढे कम हैं। विंसंगतियों को अभिव्यक्त कर उसपर प्रहार की शक्ति का एक छोटा-सा उदाहरण ,‘‘ गांव और शहर में छोटा-सा अंतर है। गांव में कुत्ते बेकार घूमते हैं और गायों को पूजा जाता है। वहीं शहर में कुत्तों की पूजा की जाती है और गायें बेकार घूमती हैं।’’
जनगांव का महत्वपूर्ण चरित्र है इंदिरा, जो लड़की है और उसकी विसंगति यह है कि उसकी फीलिंग लड़के जैसी है। इंदिरा आत्महत्या करना चाहती है। क्यों? यह रहस्य तो पढ़कर ही समझ आ सकता है। इतना बता दूं कि इंदिरा मरने से पहले गंगू से फेशियल करवाती/ करवाता है।
इस किताब में एक अलग तरह का प्रसंग है जहां सुरेश किताब का मानवीकरण करता है और ‘विद्वत् समाज’ में किताब की, किसी दुष्कर्म पीडिता के,थाने में बयान व्यथा का प्रहारक वर्णन करता है। किताब की दीनगाथा घर की एकांत कोठरी में पड़ी बूढ़ी मां की-सी है। पर सुरेश तो सार्थक युवा सोच का है इसलिए अतीत के साथ अत्याधुनिक समाज, बाजारवाद और मशीन होती अपंग मानवाता उसकी वेचाारिक पृष्ठभूमि में है।
प्रो. राजेश कुमार इसी उपन्यास की अस्मितामूलक अंश को रेखांकित करते हुए लिखते हैं - डॉ. सुरेश कुमार मिश्र उरतृप्त ऐसे सिद्धहस्त व्यंग्यकार हैं, जो न केवल व्यंग्य को समझते हैं, इसके विभिन्न उपकरणों को पहचानते हैं, बल्कि अपने कथ्य को प्रभावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करने के लिए वे इन उपकरणों को बहुत कुशलता से इच्छानुसार उपयोग करने में भी माहिर हैं। प्रस्तुत उपन्यास के लिए उन्होंने बहुत ही विचित्र विषय को चुना है, जिसमें एक लड़की है, जो मन से लड़का है। कोढ़ में खाज की तरह वह अपने सहपाठी से प्रेम कर बैठती है, जिसका आभास सहपाठी को नहीं होता। फिर इस एकतरफा प्रेम के बीच से जो विसंगतियाँ उत्पन्न होती हैं, वे ऐसे संसार का सृतन करती हैं, जो हमें समाज की विभिन्न विसंगतियों के सामने ले जाता है। उपन्यास की विशेषता इसकी व्यंग्य से भरपूर शैली है, जिसमें लगभग हर वाक्य में ही व्यंग्य को इस तरह से बुन गया है कि पाठक चमत्कृत होता है, और कथा को पढ़ने का उसका आनंद द्विगुणित होता जाता है। जो विशेषता सुरेश को अन्य व्यंग्यकारों से अलग और बहुत से प्रतिष्ठित व्यंग्यकारों से ऊपर उठाती है, वह यह है कि वे चीज़ों को एक दूसरे के विरोध में रखकर उसके मध्य से सार्थक, और रोचक व्यंग्य की सृष्टि करते हैं। विषय पर पकड़ और कला की इस परिपक्वता ने प्रस्तुत उपन्यास को अत्यंत रोचक और प्रभावपूर्ण बना दिया है, जो किसी रचना का आदर्श प्रस्तुत करने में सक्षम है।
{{BookCat}}
= यादों में गौरैया: एक परिचय एवं समीक्षा =
''यादों में गौरैया'' आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रखर व्यंग्यकार और लेखक '''डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त'''' द्वारा रचित एक चर्चित उपन्यास है। यह उपन्यास लुप्त होती मानवीय संवेदनाओं, पारिस्थितिक क्षरण और आधुनिक प्रशासनिक तंत्र के प्रति तीखे व्यंग्य को रेखांकित करता है।
== पृष्ठभूमि एवं लोकप्रियता ==
यह कृति वर्तमान में पाठकों एवं आलोचकों के बीच गंभीर विमर्श का केंद्र बनी हुई है। डिजिटल प्लेटफॉर्मों (जैसे अमेज़न) पर इसकी निरंतर लोकप्रियता यह सिद्ध करती है कि आधुनिक दौर में भी मर्मस्पर्शी और विचारोत्तेजक साहित्य की माँग बनी हुई है।
== कथ्य और मुख्य विषय-वस्तु ==
उपन्यास की कथावस्तु एक नन्ही गौरैया के प्रतीक के माध्यम से बुनी गई है। यह केवल एक पक्षी के विलुप्त होने की कहानी नहीं है, बल्कि आधुनिक समाज में मरती हुई संवेदनाओं की करुण पुकार है।
कथा के प्रमुख बिंदु:
* '''प्रशासनिक एवं राजनीतिक विसंगतियाँ:''' उपन्यास दर्शाती है कि किस प्रकार सत्ता के गलियारों, स्वार्थी राजनीति और प्रशासनिक 'फंडों' की भेंट चढ़कर सामान्य जनजीवन की मासूमियत और प्राकृतिक संतुलन नष्ट हो जाता है।
* '''पर्यावरण और संवेदना का संकट:''' विकास की अंधी दौड़ में मनुष्य द्वारा खोई जा रही संवेदनशीलता पर यह एक तीखा प्रहार है।
* '''प्रतीकवाद:''' यहाँ 'गौरैया' केवल एक पक्षी न होकर लुप्त होती मानवीयता और प्रकृति के प्रति हमारी उपेक्षा का प्रतीक है।
== शैली एवं व्यंग्य-विधान ==
डॉ. उरतृप्त की लेखन शैली में 'मार्मिक व्यंग्य' मुख्य घटक है:
1. '''मार्मिक व्यंग्य (Sublime Satire):''' यहाँ व्यंग्य का प्रयोग क्षणिक मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि पाठकों के अंतर्मन को झकझोरने के लिए किया गया है।
2. '''भाषा और अभिव्यक्ति:''' उपन्यास की भाषा सहज, प्रवाहमयी और दार्शनिक गहराई से युक्त है, जो विद्वानों के साथ-साथ आम पाठकों के हृदय को भी स्पर्श करती है।
3. '''चेतना का जागरण:''' यह उपन्यास पाठक के समक्ष यह चुभता हुआ प्रश्न उपस्थित करता है कि क्या आधुनिक मानव वास्तव में एक संवेदनशून्य समाज की ओर अग्रसर है?
== समीक्षात्मक निष्कर्ष ==
''यादों में गौरैया'' समाज की कड़वी सच्चाइयों और व्यवस्था की विसंगतियों को समझने के लिए एक महत्त्वपूर्ण कृति है। यह केवल एक साहित्यिक रचना नहीं, बल्कि जन-चेतना को झंकृत करने वाला एक सांस्कृतिक दस्तावेज़ है।
----
== समीक्षक परिचय ==
* '''समीक्षक:''' प्रोफेसर तोमिओ मिज़ोकामि (Prof. Tomio Mizokami)
* '''उपाधि/सम्मान:''' पद्मश्री (2018 में भारत सरकार द्वारा सम्मानित)
* '''पद:''' प्रोफेसर एमेरिटस, ओसाका यूनिवर्सिटी, जापान (Emeritus Professor, Osaka University, Japan)
=== समीक्षक की टिप्पणी ===
> "यह केवल एक पक्षी की तलाश की कहानी नहीं है, बल्कि हमारे अपने भीतर मरती हुई संवेदनाओं की करुण पुकार है... डॉ. उरतृप्त ने जिस कथा-संसार को बुना है, वह हमें उस भयावह यथार्थ के सामने खड़ा कर देता है जहाँ मासूमियत भी सत्ता के गलियारों और प्रशासनिक 'फंड' की भेंट चढ़ जाती है। यह पुस्तक चेतना को झंकृत करने वाली एक कालजयी कृति है।"
>
> — '''प्रोफेसर तोमिओ मिज़ोकामि'''
== इन्हें भी देखें ==
* [[हिंदी साहित्य]]
* [[आधुनिक हिंदी उपन्यास]]
* [[व्यंग्य साहित्य]]
[[Category:हिंदी उपन्यास]]
[[Category:पुस्तक समीक्षा]]
[[Category:डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त']]
== अस्मितामूलक उपन्यास ==
8e1m0amsvsdwu3aurxeq6h1mxduxg1g
श्रेणी:डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त'
14
11533
83138
2026-07-22T16:32:09Z
Sahityapremee
16478
"= डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त' = '''डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त'''' हिंदी साहित्य, व्यंग्य, बाल साहित्य एवं भाषा शिक्षण के क्षेत्र में एक प्रमुख एवं बहुमुखी प्रतिभा..." के साथ नया पृष्ठ बनाया
83138
wikitext
text/x-wiki
= डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त' =
'''डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त'''' हिंदी साहित्य, व्यंग्य, बाल साहित्य एवं भाषा शिक्षण के क्षेत्र में एक प्रमुख एवं बहुमुखी प्रतिभा संपन्न हस्ताक्षर हैं। 'उरतृप्त' उपनाम से प्रसिद्ध डॉ. मिश्रा अपनी भावनाओं और विचारों को अत्यंत ईमानदारी, निष्ठा और गहराई से अभिव्यक्त करते हैं। वे एक सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार, कवि, बाल साहित्यकार तथा पाठ्यपुस्तक निर्माण विशेषज्ञ हैं। <ref>[https://ncert.nic.in/pdf/publication/journalsandperiodicals/bhartiyaadhunikshiksha/BAS_July-October_2024.pdf NCERT भारतीय आधुनिक शिक्षा (जुलाई-अक्टूबर 2024), पृष्ठ 22]</ref>
== साहित्यिक अवदान एवं व्यंग्य लेखन ==
डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त' के व्यंग्य लेखन ने उन्हें समकालीन हिंदी साहित्य में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है। उनका व्यंग्य '''‘शिक्षक की मौत’''' इंडिया टुडे समूह के 'साहित्य तक' चैनल पर अत्यधिक प्रसारित (वायरल) हुआ, जिसे 10 लाख (1 मिलियन) से अधिक बार देखा और पढ़ा गया, जो हिंदी व्यंग्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=Sy_lSQeP2rw साहित्य तक - शिक्षक की मौत (डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त')]</ref>
=== प्रमुख कृतियाँ एवं व्यंग्य संग्रह ===
* '''एक तिनका इक्यावन आँखें''' (व्यंग्य संग्रह) – इसमें उनकी कालजयी एवं चर्चित रचना ''‘किताबों की अंतिम यात्रा’'' शामिल है। <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=l6U_W8cTwSY साहित्य तक - किताबों की अंतिम यात्रा]</ref>
* '''म्यान एक, तलवार अनेक''' (व्यंग्य संग्रह) <ref>[https://archive.org/details/20260604_20260604_1824 इंटरनेट आर्काइव - म्यान एक तलवार अनेक]</ref>
* '''इधर-उधर के बीच में''' – तीसरी दुनिया के सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य को रेखांकित करने वाला अनोखा व्यंग्य उपन्यास।
* '''गपोड़ी अड्डा''' (व्यंग्य संग्रह)
* '''सब रंग में मेरे रंग''' (व्यंग्य संग्रह)
* '''यादों की पगडंडी''' (कहानी संग्रह) <ref>[https://archive.org/details/yadon-ki-pagdandi-kahani-sangrah-complete-book इंटरनेट आर्काइव - यादों की पगडंडी]</ref>
* '''धूप-छाँव के रिश्ते''' (कहानी संग्रह) <ref>[https://archive.org/details/dhoop-chhaon-complete-book इंटरनेट आर्काइव - धूप-छाँव के रिश्ते]</ref>
* '''बूँद-बूँद समुंदर''' (कहानी संग्रह) <ref>[https://archive.org/details/boond-boond-samundar-complete-book इंटरनेट आर्काइव - बूँद-बूँद समुंदर]</ref>
* '''तेलंगाना गांधीः के.सी.आर.''' <ref>[https://archive.org/details/20260604_20260604_1828 इंटरनेट आर्काइव - तेलंगाना गांधीः के.सी.आर.]</ref>
=== साहित्य तक (इंडिया टुडे ग्रुप) पर प्रसारित अन्य प्रमुख रचनाएँ ===
* जीवन की नदी में <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=N4CXyfJ1Huo साहित्य तक - जीवन की नदी में]</ref>
* दल बदलू नेता <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=4ZJZN1wfSdU साहित्य तक - दल बदलू नेता]</ref>
* बेबसी की मौत <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=wH7hIlPk280 साहित्य तक - बेबसी की मौत]</ref>
* कैसे-कैसे विज्ञापन <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=fFV2WP_dKOk साहित्य तक - कैसे-कैसे विज्ञापन]</ref>
* बचपन की यादों में <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=jc9OPq7y8zY साहित्य तक - बचपन की यादों में]</ref>
* सरकारी बाबू <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=f825r52oiXw साहित्य तक - सरकारी बाबू]</ref>
== बाल साहित्य एवं भाषा शिक्षण ==
डॉ. उरतृप्त ने बाल मनोविज्ञान को ध्यान में रखते हुए सुगम और मनोरंजक बाल साहित्य की रचना की है:
* '''नन्हों का सृजन आसमान''' (बाल साहित्य पुस्तक)
* '''हे इंसानी नाखूनः एक सचित्र यात्रा''' <ref>[https://archive.org/details/hey-insani-nakhoon-dr.-suresh-kumar-mishra-uratrupt इंटरनेट आर्काइव - हे इंसानी नाखून]</ref>
* '''बेटी के नाम कंठस्थ पत्र''' <ref>[https://archive.org/details/beti-ke-naam-kantasth-patra-dr.-suresh-kumar-mishra-uratrupt-5_202510 इंटरनेट आर्काइव - बेटी के नाम कंठस्थ पत्र]</ref>
* '''चिट्ठी''' <ref>[https://archive.org/details/chitthi-dr.-suresh-kumar-mishra-uratrupt इंटरनेट आर्काइव - चिट्ठी]</ref>
* '''सफारी जूँ''' <ref>[https://archive.org/details/safari-joon-dr.-suresh-kumar-mishra-uratript-4 इंटरनेट आर्काइव - सफारी जूँ]</ref>
* '''पाठशाला के गीत''' <ref>[https://archive.org/details/pathashala-ke-geet-dr.-suresh-kumar-mishra-complete-book इंटरनेट आर्काइव - पाठशाला के गीत]</ref>
* '''गुनगुनी की तान''' <ref>[https://archive.org/details/gunguni-ki-taan-dr.-suresh-kumar-mishra-complete-book इंटरनेट आर्काइव - गुनगुनी की तान]</ref>
* '''खेल-खेल में भाषा सीखें''' <ref>[https://archive.org/details/khel-khel-mein-bhasha-seekhen-dr.-suresh-kumar-mishra-uratript इंटरनेट आर्काइव - खेल-खेल में भाषा सीखें]</ref>
* '''सरल, सुगम, संक्षिप्त व्याकरण पुस्तक''' <ref>[https://archive.org/details/saral-sugam-sankshipt-vyakaran-dr.-suresh-kumar-mishra-complete-grammar-book_202510 इंटरनेट आर्काइव - संपूर्ण व्याकरण पुस्तक]</ref>
== शैक्षणिक एवं पाठ्यपुस्तक निर्माण में योगदान ==
डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त' ने विद्यालयी एवं विश्वविद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक कार्य किया है। उन्होंने तेलंगाना सरकार (TGSCERT) के लिए प्राथमिक स्कूल, हाई स्कूल, कॉलेज तथा विश्वविद्यालय स्तर पर कुल 55 से अधिक पुस्तकों के लेखन, संपादन एवं समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
=== TGSCERT (तेलंगाना राज्य) पाठ्यपुस्तकें एवं मॉड्यूल ===
* '''कक्षा 10 हिंदी प्रथम भाषा''' (पृष्ठ 101) <ref>[https://scert.telangana.gov.in/pdf/publication/ebooks2019/fl%20x%20hindi%202025-26.pdf TGSCERT Class 10 FL Hindi Textbook]</ref>
* '''कक्षा 10 हिंदी द्वितीय भाषा''' (पृष्ठ 82) <ref>[https://scert.telangana.gov.in/pdf/publication/ebooks2019/sl%20x%20hindi%202025-26.pdf TGSCERT Class 10 SL Hindi Textbook]</ref>
* '''कक्षा 9 हिंदी द्वितीय भाषा''' (पृष्ठ 74) <ref>[https://scert.telangana.gov.in/pdf/publication/ebooks2019/sl%20ix%20hindi%202025-26.pdf TGSCERT Class 9 SL Hindi Textbook]</ref>
* '''कक्षा 8 हिंदी द्वितीय भाषा''' (पृष्ठ 74) <ref>[https://scert.telangana.gov.in/pdf/publication/ebooks2019/sl%20viii%20hindi%202025-26.pdf TGSCERT Class 8 SL Hindi Textbook]</ref>
* '''कक्षा 7 हिंदी प्रथम भाषा''' (पृष्ठ 127) एवं द्वितीय भाषा (पृष्ठ 74) <ref>[https://scert.telangana.gov.in/pdf/publication/ebooks2019/fl%20vii%20hindi%202025-26.pdf TGSCERT Class 7 FL Hindi Textbook]</ref>
* '''कक्षा 6 हिंदी प्रथम भाषा''' (पृष्ठ 113) एवं द्वितीय भाषा (पृष्ठ 74) <ref>[https://scert.telangana.gov.in/pdf/publication/ebooks2019/fl%20vi%20hindi%202025-26.pdf TGSCERT Class 6 FL Hindi Textbook]</ref>
* '''कक्षा 1 से 5 (प्राथमिक स्तर) हिंदी पाठ्यपुस्तकें''' (कक्षा 5: पृ. 128, कक्षा 4: पृ. 136, कक्षा 3: पृ. 128, कक्षा 2: पृ. 138, कक्षा 1: पृ. 186)
* '''अध्यापक मार्गदर्शिका (Teacher Training Module)''' <ref>[https://scert.telangana.gov.in/pdf/publication/others/hindi%20module%2011%2009%202018.pdf TGSCERT Teacher Training Module (p. 3)]</ref>
* '''B.Ed. Text Book (Hindi)''' (पृष्ठ 2) <ref>[https://scert.telangana.gov.in/PDF/publication/bed/BEd_Hindi.pdf TGSCERT B.Ed Hindi Textbook]</ref>
* '''State Curriculum Framework (SCF-2011) Position Paper on Hindi''' (पृष्ठ 44) <ref>[https://scert.telangana.gov.in/pdf/publication/general/hindi%20final.pdf TGSCERT Position Paper on Hindi]</ref>
=== विश्वविद्यालयी पाठ्यक्रम में समावेश ===
1. '''तेलगु अकादमी (तेलंगाना सरकार):''' बी.ए. तृतीय सेमेस्टर (B.A. Sem.-3) के लिए लिखित पुस्तक ''‘हिंदी साहित्य संगम’'' के पृष्ठ 42-43 पर डॉ. मिश्रा का संदर्भ दर्ज है (ISBN: 978-8181807519)। <ref>[https://archive.org/details/degree-final-year-hindi-text-book-govt.-of-telangana इंटरनेट आर्काइव - डिग्री फाइनल ईयर हिंदी पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 42-43)]</ref>
2. '''राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020):''' बी.ए. तृतीय सेमेस्टर हेतु डॉ. शिखा रस्तोगी द्वारा लिखित पुस्तक ''‘हिंदी गद्य’'' के पृष्ठ 48 पर (ISBN: 978-9392208331)।
3. '''बिहार व अन्य राज्य स्नातक पाठ्यक्रम (MJC-3):''' डॉ. कौशलेन्द्र कुमार एवं डॉ. अश्विनी कुमार द्वारा लिखित ''‘हिन्दी साहित्य का इतिहास—आधुनिक काल’'' (ठाकुर पब्लिकेशन, पटना/लखनऊ, ISBN: 978-93-6180-557-8)।
== राष्ट्रीय ई-कंटेंट एवं मीडिया सम्बद्धता ==
=== NCERT Official (DD Dish Channel No. 945) ई-पाठ ===
राष्ट्रीय स्तर के डिजिटल ई-कंटेंट में विषय-विशेषज्ञ के रूप में डॉ. मिश्रा के 25 से अधिक ऑडियो/वीडियो पाठों का प्रसारण हुआ है:
* '''नाव बनाओ नाव बनाओ''' (कक्षा 4) <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=l1Mjsz39Clw NCERT Official - नाव बनाओ नाव बनाओ Part-2]</ref>
* '''दान का हिसाब''' (कक्षा 4) <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=pKJfTyu_VdU NCERT Official - दान का हिसाब Part-1]</ref> <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=EacsbQ9vSII NCERT Official - दान का हिसाब Part-2]</ref>
* '''कौन''' (कक्षा 4) <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=0D026p66qos NCERT Official - कौन Part-1]</ref> <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=eqKL8yjRhbI NCERT Official - कौन Part-2]</ref>
* '''गुरु और चेला''' (कक्षा 5) <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=JxsiEdJ6t0U NCERT Official - गुरु और चेला Part-1]</ref> <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=Otn72TQZtQI NCERT Official - गुरु और चेला Part-2]</ref> <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=Lk9jfXg0oSo NCERT Official - गुरु और चेला Part-3]</ref>
* '''बंदर बांट''' (कक्षा 3) <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=wWon001aUhU NCERT Official - बंदर बांट Part-1]</ref> <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=VcYb_a2sMZA NCERT Official - बंदर बांट Part-2]</ref>
* '''पड़क्कू की सूझ''' (कक्षा 4) <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=PKnIAI26Q8Y NCERT Official - पड़क्कू की सूझ]</ref>
* '''अन्य ई-लेसन:''' बिना जड़ का पेड़ (कक्षा 5), मेरी बिल्ली (कक्षा 2), बर्तन बोलते हैं (कक्षा 1), बातें किताबों की (कक्षा 2), बुलबुल (कक्षा 2), सच्चा दोस्त (कक्षा 2), चलो पतंग बनाते हैं (कक्षा 3), कौआ और लोमड़ी (कक्षा 3), साफ़ सफ़ाई (कक्षा 3), वारली चित्रशैली (कक्षा 1), आओ बनाएं पतंग (कक्षा 1), पत्ते ही पत्ते (कक्षा 1), कब आऊं (कक्षा 3)।
=== T-SAT (तेलंगाना शैक्षणिक चैनल) एवं दूरदर्शन ===
* T-SAT चैनल पर कक्षा 10वीं के प्रश्न पत्रों तथा कक्षा 6वीं के पाठ शिक्षण पर परिचर्चा एवं प्रस्तुति। <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=lT4BMHZDhRo T-SAT - 10th Hindi Question Paper Discussion]</ref> <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=OnJLI1SJnG8 T-SAT - Class 6 Teaching]</ref>
* '''दूरदर्शन (सप्तगिरि चैनल):''' 13 मार्च 2024 को विशेष साक्षात्कार, जिसमें उनके साहित्यिक एवं पाठ्यपुस्तकीय अवदान की सराहना की गई। <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=Zcn_kkxCqGA Doordarshan Saptagiri - Interview with Dr. Suresh Kumar Mishra 'Uratrupt']</ref>
== राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में संदर्भ ==
* '''NCERT पत्रिका 'भारतीय आधुनिक शिक्षा':''' जुलाई-अक्टूबर 2024 (पृ. 22) <ref>[https://ncert.nic.in/pdf/publication/journalsandperiodicals/bhartiyaadhunikshiksha/BAS_July-October_2024.pdf NCERT BAS July-Oct 2024]</ref> एवं अक्टूबर 2022 (पृ. 41) <ref>[https://ncert.nic.in/pdf/publication/journalsandperiodicals/bhartiyaadhunikshiksha/BAS_Oct2022.pdf NCERT BAS Oct 2022]</ref>
* '''NCERT पत्रिका 'प्राथमिक शिक्षक':''' जुलाई 2020 (पृ. 14) <ref>[https://ncert.nic.in/pdf/publication/journalsandperiodicals/prathmikshikshak/Parathmik_Shikshak_July%202020.pdf NCERT Prathmik Shikshak July 2020]</ref>, जनवरी 2021 (पृ. 57) <ref>[https://ncert.nic.in/pdf/publication/journalsandperiodicals/prathmikshikshak/PrathmikShikshak_Jan_2021.pdf NCERT Prathmik Shikshak Jan 2021]</ref>, अक्टूबर 2022 (पृ. 5) <ref>[https://ncert.nic.in/pdf/publication/journalsandperiodicals/prathmikshikshak/PrathmikShikshakOctober2022.pdf NCERT Prathmik Shikshak Oct 2022]</ref>
* '''NBT (नेशनल बुक ट्रस्ट) बुलेटिन:''' जनवरी-फरवरी 2023 (पृ. 11) <ref>[https://www.nbtindia.gov.in/writereaddata/attachment/tuesday-july-18-20234-49-17-pmjanuary-to-february-2023.pdf NBT Publication Jan-Feb 2023]</ref>
* '''केंद्रीय हिंदी संस्थान पत्रिका 'समन्वय दक्षिण':''' विभिन्न अंकों में पृष्ठ 64, 66, 46 एवं 174 पर संदर्भ दर्ज। <ref>[https://khs.ac.in/ research-publications/journal/ केंद्रीय हिंदी संस्थान - समन्वय दक्षिण]</ref>
== सम्मान एवं पुरस्कार ==
* '''श्रेष्ठ नवयुवा रचनाकार सम्मान (2021):''' तेलंगाना हिंदी अकादमी, तेलंगाना सरकार द्वारा तत्कालीन मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के कर-कमलों द्वारा प्रदान किया गया।
* '''राजस्थान बाल साहित्य अकादमी पुरस्कार:''' बाल साहित्य कृति ''‘नन्हों का सृजन आसमान’'' हेतु।
* '''साहित्य सृजन सम्मान (2021):''' भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा।
* '''रवींद्रनाथ त्यागी सोपान सम्मान:''' व्यंग्य यात्रा संस्था द्वारा।
== वरिष्ठ साहित्यकारों की सम्मतियाँ ==
* '''पद्मश्री तोमियो मिज़ोकामी (जापान):''' जापानी हिंदी विद्वान पद्मश्री तोमियो मिज़ोकामी ने डॉ. उरतृप्त के साहित्यिक अवदान की सराहना की है। <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=Lm1F1s_Xc44 यूट्यूब - पद्मश्री तोमियो मिज़ोकामी की सम्मति]</ref>
* '''गोपाल चतुर्वेदी:''' सुप्रसिद्ध हिंदी व्यंग्यकार गोपाल चतुर्वेदी ने उनके व्यंग्य लेखन को उच्च कोटि का माना है। <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=fX7DHlT6MHU यूट्यूब - गोपाल चतुर्वेदी की टिप्पणी]</ref>
== संदर्भ ==
<references />
5bh5rnz06n1ex7qniqouveod6t3tzo3
डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा उरतृप्त
0
11534
83139
2026-07-22T16:44:53Z
Sahityapremee
16478
"= डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त' = '''डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त'''' हिंदी साहित्य, व्यंग्य, बाल साहित्य एवं भाषा शिक्षण के क्षेत्र में एक प्रमुख एवं बहुमुखी प्रतिभा..." के साथ नया पृष्ठ बनाया
83139
wikitext
text/x-wiki
= डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त' =
'''डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त'''' हिंदी साहित्य, व्यंग्य, बाल साहित्य एवं भाषा शिक्षण के क्षेत्र में एक प्रमुख एवं बहुमुखी प्रतिभा संपन्न हस्ताक्षर हैं। 'उरतृप्त' उपनाम से प्रसिद्ध डॉ. मिश्रा अपनी भावनाओं और विचारों को अत्यंत ईमानदारी, निष्ठा और गहराई से अभिव्यक्त करते हैं। वे एक सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार, कवि, बाल साहित्यकार तथा पाठ्यपुस्तक निर्माण विशेषज्ञ हैं। <ref>[https://ncert.nic.in/pdf/publication/journalsandperiodicals/bhartiyaadhunikshiksha/BAS_July-October_2024.pdf NCERT भारतीय आधुनिक शिक्षा (जुलाई-अक्टूबर 2024), पृष्ठ 22]</ref>
== साहित्यिक अवदान एवं व्यंग्य लेखन ==
डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त' के व्यंग्य लेखन ने उन्हें समकालीन हिंदी साहित्य में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है। उनका व्यंग्य '''‘शिक्षक की मौत’''' इंडिया टुडे समूह के 'साहित्य तक' चैनल पर अत्यधिक प्रसारित (वायरल) हुआ, जिसे 10 लाख (1 मिलियन) से अधिक बार देखा और पढ़ा गया, जो हिंदी व्यंग्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=Sy_lSQeP2rw साहित्य तक - शिक्षक की मौत (डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त')]</ref>
=== प्रमुख कृतियाँ एवं व्यंग्य संग्रह ===
* '''एक तिनका इक्यावन आँखें''' (व्यंग्य संग्रह) – इसमें उनकी कालजयी एवं चर्चित रचना ''‘किताबों की अंतिम यात्रा’'' शामिल है। <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=l6U_W8cTwSY साहित्य तक - किताबों की अंतिम यात्रा]</ref>
* '''म्यान एक, तलवार अनेक''' (व्यंग्य संग्रह) <ref>[https://archive.org/details/20260604_20260604_1824 इंटरनेट आर्काइव - म्यान एक तलवार अनेक]</ref>
* '''इधर-उधर के बीच में''' – तीसरी दुनिया के सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य को रेखांकित करने वाला अनोखा व्यंग्य उपन्यास।
* '''गपोड़ी अड्डा''' (व्यंग्य संग्रह)
* '''सब रंग में मेरे रंग''' (व्यंग्य संग्रह)
* '''यादों की पगडंडी''' (कहानी संग्रह) <ref>[https://archive.org/details/yadon-ki-pagdandi-kahani-sangrah-complete-book इंटरनेट आर्काइव - यादों की पगडंडी]</ref>
* '''धूप-छाँव के रिश्ते''' (कहानी संग्रह) <ref>[https://archive.org/details/dhoop-chhaon-complete-book इंटरनेट आर्काइव - धूप-छाँव के रिश्ते]</ref>
* '''बूँद-बूँद समुंदर''' (कहानी संग्रह) <ref>[https://archive.org/details/boond-boond-samundar-complete-book इंटरनेट आर्काइव - बूँद-बूँद समुंदर]</ref>
* '''तेलंगाना गांधीः के.सी.आर.''' <ref>[https://archive.org/details/20260604_20260604_1828 इंटरनेट आर्काइव - तेलंगाना गांधीः के.सी.आर.]</ref>
=== साहित्य तक (इंडिया टुडे ग्रुप) पर प्रसारित अन्य प्रमुख रचनाएँ ===
* जीवन की नदी में <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=N4CXyfJ1Huo साहित्य तक - जीवन की नदी में]</ref>
* दल बदलू नेता <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=4ZJZN1wfSdU साहित्य तक - दल बदलू नेता]</ref>
* बेबसी की मौत <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=wH7hIlPk280 साहित्य तक - बेबसी की मौत]</ref>
* कैसे-कैसे विज्ञापन <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=fFV2WP_dKOk साहित्य तक - कैसे-कैसे विज्ञापन]</ref>
* बचपन की यादों में <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=jc9OPq7y8zY साहित्य तक - बचपन की यादों में]</ref>
* सरकारी बाबू <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=f825r52oiXw साहित्य तक - सरकारी बाबू]</ref>
== बाल साहित्य एवं भाषा शिक्षण ==
डॉ. उरतृप्त ने बाल मनोविज्ञान को ध्यान में रखते हुए सुगम और मनोरंजक बाल साहित्य की रचना की है:
* '''नन्हों का सृजन आसमान''' (बाल साहित्य पुस्तक)
* '''हे इंसानी नाखूनः एक सचित्र यात्रा''' <ref>[https://archive.org/details/hey-insani-nakhoon-dr.-suresh-kumar-mishra-uratrupt इंटरनेट आर्काइव - हे इंसानी नाखून]</ref>
* '''बेटी के नाम कंठस्थ पत्र''' <ref>[https://archive.org/details/beti-ke-naam-kantasth-patra-dr.-suresh-kumar-mishra-uratrupt-5_202510 इंटरनेट आर्काइव - बेटी के नाम कंठस्थ पत्र]</ref>
* '''चिट्ठी''' <ref>[https://archive.org/details/chitthi-dr.-suresh-kumar-mishra-uratrupt इंटरनेट आर्काइव - चिट्ठी]</ref>
* '''सफारी जूँ''' <ref>[https://archive.org/details/safari-joon-dr.-suresh-kumar-mishra-uratript-4 इंटरनेट आर्काइव - सफारी जूँ]</ref>
* '''पाठशाला के गीत''' <ref>[https://archive.org/details/pathashala-ke-geet-dr.-suresh-kumar-mishra-complete-book इंटरनेट आर्काइव - पाठशाला के गीत]</ref>
* '''गुनगुनी की तान''' <ref>[https://archive.org/details/gunguni-ki-taan-dr.-suresh-kumar-mishra-complete-book इंटरनेट आर्काइव - गुनगुनी की तान]</ref>
* '''खेल-खेल में भाषा सीखें''' <ref>[https://archive.org/details/khel-khel-mein-bhasha-seekhen-dr.-suresh-kumar-mishra-uratript इंटरनेट आर्काइव - खेल-खेल में भाषा सीखें]</ref>
* '''सरल, सुगम, संक्षिप्त व्याकरण पुस्तक''' <ref>[https://archive.org/details/saral-sugam-sankshipt-vyakaran-dr.-suresh-kumar-mishra-complete-grammar-book_202510 इंटरनेट आर्काइव - संपूर्ण व्याकरण पुस्तक]</ref>
== शैक्षणिक एवं पाठ्यपुस्तक निर्माण में योगदान ==
डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा 'उरतृप्त' ने विद्यालयी एवं विश्वविद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक कार्य किया है। उन्होंने तेलंगाना सरकार (TGSCERT) के लिए प्राथमिक स्कूल, हाई स्कूल, कॉलेज तथा विश्वविद्यालय स्तर पर कुल 55 से अधिक पुस्तकों के लेखन, संपादन एवं समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
=== TGSCERT (तेलंगाना राज्य) पाठ्यपुस्तकें एवं मॉड्यूल ===
* '''कक्षा 10 हिंदी प्रथम भाषा''' (पृष्ठ 101) <ref>[https://scert.telangana.gov.in/pdf/publication/ebooks2019/fl%20x%20hindi%202025-26.pdf TGSCERT Class 10 FL Hindi Textbook]</ref>
* '''कक्षा 10 हिंदी द्वितीय भाषा''' (पृष्ठ 82) <ref>[https://scert.telangana.gov.in/pdf/publication/ebooks2019/sl%20x%20hindi%202025-26.pdf TGSCERT Class 10 SL Hindi Textbook]</ref>
* '''कक्षा 9 हिंदी द्वितीय भाषा''' (पृष्ठ 74) <ref>[https://scert.telangana.gov.in/pdf/publication/ebooks2019/sl%20ix%20hindi%202025-26.pdf TGSCERT Class 9 SL Hindi Textbook]</ref>
* '''कक्षा 8 हिंदी द्वितीय भाषा''' (पृष्ठ 74) <ref>[https://scert.telangana.gov.in/pdf/publication/ebooks2019/sl%20viii%20hindi%202025-26.pdf TGSCERT Class 8 SL Hindi Textbook]</ref>
* '''कक्षा 7 हिंदी प्रथम भाषा''' (पृष्ठ 127) एवं द्वितीय भाषा (पृष्ठ 74) <ref>[https://scert.telangana.gov.in/pdf/publication/ebooks2019/fl%20vii%20hindi%202025-26.pdf TGSCERT Class 7 FL Hindi Textbook]</ref>
* '''कक्षा 6 हिंदी प्रथम भाषा''' (पृष्ठ 113) एवं द्वितीय भाषा (पृष्ठ 74) <ref>[https://scert.telangana.gov.in/pdf/publication/ebooks2019/fl%20vi%20hindi%202025-26.pdf TGSCERT Class 6 FL Hindi Textbook]</ref>
* '''कक्षा 1 से 5 (प्राथमिक स्तर) हिंदी पाठ्यपुस्तकें''' (कक्षा 5: पृ. 128, कक्षा 4: पृ. 136, कक्षा 3: पृ. 128, कक्षा 2: पृ. 138, कक्षा 1: पृ. 186)
* '''अध्यापक मार्गदर्शिका (Teacher Training Module)''' <ref>[https://scert.telangana.gov.in/pdf/publication/others/hindi%20module%2011%2009%202018.pdf TGSCERT Teacher Training Module (p. 3)]</ref>
* '''B.Ed. Text Book (Hindi)''' (पृष्ठ 2) <ref>[https://scert.telangana.gov.in/PDF/publication/bed/BEd_Hindi.pdf TGSCERT B.Ed Hindi Textbook]</ref>
* '''State Curriculum Framework (SCF-2011) Position Paper on Hindi''' (पृष्ठ 44) <ref>[https://scert.telangana.gov.in/pdf/publication/general/hindi%20final.pdf TGSCERT Position Paper on Hindi]</ref>
=== विश्वविद्यालयी पाठ्यक्रम में समावेश ===
1. '''तेलगु अकादमी (तेलंगाना सरकार):''' बी.ए. तृतीय सेमेस्टर (B.A. Sem.-3) के लिए लिखित पुस्तक ''‘हिंदी साहित्य संगम’'' के पृष्ठ 42-43 पर डॉ. मिश्रा का संदर्भ दर्ज है (ISBN: 978-8181807519)। <ref>[https://archive.org/details/degree-final-year-hindi-text-book-govt.-of-telangana इंटरनेट आर्काइव - डिग्री फाइनल ईयर हिंदी पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 42-43)]</ref>
2. '''राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020):''' बी.ए. तृतीय सेमेस्टर हेतु डॉ. शिखा रस्तोगी द्वारा लिखित पुस्तक ''‘हिंदी गद्य’'' के पृष्ठ 48 पर (ISBN: 978-9392208331)।
3. '''बिहार व अन्य राज्य स्नातक पाठ्यक्रम (MJC-3):''' डॉ. कौशलेन्द्र कुमार एवं डॉ. अश्विनी कुमार द्वारा लिखित ''‘हिन्दी साहित्य का इतिहास—आधुनिक काल’'' (ठाकुर पब्लिकेशन, पटना/लखनऊ, ISBN: 978-93-6180-557-8)।
== राष्ट्रीय ई-कंटेंट एवं मीडिया सम्बद्धता ==
=== NCERT Official (DD Dish Channel No. 945) ई-पाठ ===
राष्ट्रीय स्तर के डिजिटल ई-कंटेंट में विषय-विशेषज्ञ के रूप में डॉ. मिश्रा के 25 से अधिक ऑडियो/वीडियो पाठों का प्रसारण हुआ है:
* '''नाव बनाओ नाव बनाओ''' (कक्षा 4) <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=l1Mjsz39Clw NCERT Official - नाव बनाओ नाव बनाओ Part-2]</ref>
* '''दान का हिसाब''' (कक्षा 4) <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=pKJfTyu_VdU NCERT Official - दान का हिसाब Part-1]</ref> <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=EacsbQ9vSII NCERT Official - दान का हिसाब Part-2]</ref>
* '''कौन''' (कक्षा 4) <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=0D026p66qos NCERT Official - कौन Part-1]</ref> <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=eqKL8yjRhbI NCERT Official - कौन Part-2]</ref>
* '''गुरु और चेला''' (कक्षा 5) <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=JxsiEdJ6t0U NCERT Official - गुरु और चेला Part-1]</ref> <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=Otn72TQZtQI NCERT Official - गुरु और चेला Part-2]</ref> <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=Lk9jfXg0oSo NCERT Official - गुरु और चेला Part-3]</ref>
* '''बंदर बांट''' (कक्षा 3) <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=wWon001aUhU NCERT Official - बंदर बांट Part-1]</ref> <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=VcYb_a2sMZA NCERT Official - बंदर बांट Part-2]</ref>
* '''पड़क्कू की सूझ''' (कक्षा 4) <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=PKnIAI26Q8Y NCERT Official - पड़क्कू की सूझ]</ref>
* '''अन्य ई-लेसन:''' बिना जड़ का पेड़ (कक्षा 5), मेरी बिल्ली (कक्षा 2), बर्तन बोलते हैं (कक्षा 1), बातें किताबों की (कक्षा 2), बुलबुल (कक्षा 2), सच्चा दोस्त (कक्षा 2), चलो पतंग बनाते हैं (कक्षा 3), कौआ और लोमड़ी (कक्षा 3), साफ़ सफ़ाई (कक्षा 3), वारली चित्रशैली (कक्षा 1), आओ बनाएं पतंग (कक्षा 1), पत्ते ही पत्ते (कक्षा 1), कब आऊं (कक्षा 3)।
=== T-SAT (तेलंगाना शैक्षणिक चैनल) एवं दूरदर्शन ===
* T-SAT चैनल पर कक्षा 10वीं के प्रश्न पत्रों तथा कक्षा 6वीं के पाठ शिक्षण पर परिचर्चा एवं प्रस्तुति। <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=lT4BMHZDhRo T-SAT - 10th Hindi Question Paper Discussion]</ref> <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=OnJLI1SJnG8 T-SAT - Class 6 Teaching]</ref>
* '''दूरदर्शन (सप्तगिरि चैनल):''' 13 मार्च 2024 को विशेष साक्षात्कार, जिसमें उनके साहित्यिक एवं पाठ्यपुस्तकीय अवदान की सराहना की गई। <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=Zcn_kkxCqGA Doordarshan Saptagiri - Interview with Dr. Suresh Kumar Mishra 'Uratrupt']</ref>
== राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में संदर्भ ==
* '''NCERT पत्रिका 'भारतीय आधुनिक शिक्षा':''' जुलाई-अक्टूबर 2024 (पृ. 22) <ref>[https://ncert.nic.in/pdf/publication/journalsandperiodicals/bhartiyaadhunikshiksha/BAS_July-October_2024.pdf NCERT BAS July-Oct 2024]</ref> एवं अक्टूबर 2022 (पृ. 41) <ref>[https://ncert.nic.in/pdf/publication/journalsandperiodicals/bhartiyaadhunikshiksha/BAS_Oct2022.pdf NCERT BAS Oct 2022]</ref>
* '''NCERT पत्रिका 'प्राथमिक शिक्षक':''' जुलाई 2020 (पृ. 14) <ref>[https://ncert.nic.in/pdf/publication/journalsandperiodicals/prathmikshikshak/Parathmik_Shikshak_July%202020.pdf NCERT Prathmik Shikshak July 2020]</ref>, जनवरी 2021 (पृ. 57) <ref>[https://ncert.nic.in/pdf/publication/journalsandperiodicals/prathmikshikshak/PrathmikShikshak_Jan_2021.pdf NCERT Prathmik Shikshak Jan 2021]</ref>, अक्टूबर 2022 (पृ. 5) <ref>[https://ncert.nic.in/pdf/publication/journalsandperiodicals/prathmikshikshak/PrathmikShikshakOctober2022.pdf NCERT Prathmik Shikshak Oct 2022]</ref>
* '''NBT (नेशनल बुक ट्रस्ट) बुलेटिन:''' जनवरी-फरवरी 2023 (पृ. 11) <ref>[https://www.nbtindia.gov.in/writereaddata/attachment/tuesday-july-18-20234-49-17-pmjanuary-to-february-2023.pdf NBT Publication Jan-Feb 2023]</ref>
* '''केंद्रीय हिंदी संस्थान पत्रिका 'समन्वय दक्षिण':''' विभिन्न अंकों में पृष्ठ 64, 66, 46 एवं 174 पर संदर्भ दर्ज। <ref>[https://khs.ac.in/ research-publications/journal/ केंद्रीय हिंदी संस्थान - समन्वय दक्षिण]</ref>
== सम्मान एवं पुरस्कार ==
* '''श्रेष्ठ नवयुवा रचनाकार सम्मान (2021):''' तेलंगाना हिंदी अकादमी, तेलंगाना सरकार द्वारा तत्कालीन मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के कर-कमलों द्वारा प्रदान किया गया।
* '''राजस्थान बाल साहित्य अकादमी पुरस्कार:''' बाल साहित्य कृति ''‘नन्हों का सृजन आसमान’'' हेतु।
* '''साहित्य सृजन सम्मान (2021):''' भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा।
* '''रवींद्रनाथ त्यागी सोपान सम्मान:''' व्यंग्य यात्रा संस्था द्वारा।
== वरिष्ठ साहित्यकारों की सम्मतियाँ ==
* '''पद्मश्री तोमियो मिज़ोकामी (जापान):''' जापानी हिंदी विद्वान पद्मश्री तोमियो मिज़ोकामी ने डॉ. उरतृप्त के साहित्यिक अवदान की सराहना की है। <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=Lm1F1s_Xc44 यूट्यूब - पद्मश्री तोमियो मिज़ोकामी की सम्मति]</ref>
* '''गोपाल चतुर्वेदी:''' सुप्रसिद्ध हिंदी व्यंग्यकार गोपाल चतुर्वेदी ने उनके व्यंग्य लेखन को उच्च कोटि का माना है। <ref>[https://www.youtube.com/watch?v=fX7DHlT6MHU यूट्यूब - गोपाल चतुर्वेदी की टिप्पणी]</ref>
== संदर्भ ==
<references />
5bh5rnz06n1ex7qniqouveod6t3tzo3