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काज़ी नज़रुल इस्लाम
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2026-05-10T18:51:59Z
~2026-28268-38
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/* कविता */
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text/x-wiki
[[File:Nazrul.jpg|thumb]]
'''काज़ी नजरुल इसलाम''' (কাজী নজরুল ইসলাম), (२४ मई १८९९ - २९ अगस्त १९७६ एक [[बांग्लादेश|बांग्लादेशी]] [[कवि]], [[लेखक]], [[संगीतकार]] और देश के राष्ट्रीय कवि थे। नजरुल को बांग्ला साहित्य के सबसे महान कवियों में से एक माना जाता है। नजरुल के नाम से लोकप्रिय, उन्होंने [[कविता]], [[संगीत]], [[संदेश]], [[उपन्यास]], [[कहानी|कहानियाँ]] आदि का एक बड़ा समूह तैयार किया, जिसमें [[समानता]], [[न्याय]], [[साम्राज्यवाद]]<nowiki/>-विरोधी, मानवता, उत्पीड़न के खिलाफ विद्रोह और धार्मिक भक्ति शामिल थे।
==कविता==
* जनम-जनम बीते बाट जोहते ही,
: मरु-मुसाफ़िर चले, अंत ना कहीं भी।
: बरस पे बरस आएँ, आके लौट जाएँ,
: अश्कों से प्यास अपनी, पी के हम बुझाएँ।
: दिखा कपट-ज्योति, बनके मृगतृष्णा,
: मरु-उपवन पुकारे, गीत गा के वही॥
: था ये मरुथल कभी, सागर का ही जल,
: देखूँ सपना उसी का, आज भी मैं पागल।
: डूबी थी जो कश्ती, सागर के तल में,
: ढूँढूँ उसी के साथी, मरु-पथ पे राही॥
:* जनम जनम बीते
* आ जा देख आमेना अम्मी की गोद में
:भरी चाँदनी का वहाँ चाँद डोले
:जैसे सहर की गोद में (रंगा) सूरज डोले
:* आ जा देख आमेना अम्मी की गोद में
* आपकी वाणी को नहीं किया ग्रहण
:क्षमा कीजिए, हजरत
:भूल गया हूँ आपके आदर्श
:आपका दिखाया हुआ पथ
:क्षमा कीजिए, हजरत।
:विलास वैभव को रौंदा है पाँव तले
:धूल समान आपने प्रभु
:आपने नहीं चाहा कि हम बने
:बादशाह, नवाब कभू।
:इस धरणी की धन सम्पदा
:सभी का है उस पर समान अधिकार,
:आपने कहा था धरती पर हैं सब
:समान पुत्रवत
:क्षमा कीजिए, हजरत।
:आपके धर्म में नास्तिकों से
:आप घृणा नहीं करते,
:आपने उनकी की है सेवा
:आश्रय दिया उन्हें घर में
:भिन्न धर्मियों के पूजा मन्दिर
:तोड़ने का आदेश नहीं दिया, हे वीर !
:हम आजकल सहन
:नहीं कर पाते दूसरों का मत
:क्षमा कीजिए, हजरत।
:नहीं चाहा आपने कि हो धर्म के नाम पर
:ग्लानिकर हत्या — जीवन हानि
:तलवार आपने नहीं दी हाथ में
:दी है अमर वाणी
:हमने भूल कर आपकी उदारता
:बढ़ा ली है धर्मान्धता,
:जन्नत से नहीं झरती है अब
:तभी आपकी रहमत
:क्षमा कीजिए, हजरत।
:आपकी वाणी को नहीं किया ग्रहण
:क्षमा कीजिए, हजरत
:भूल गया हूँ आपके आदर्श
:आपका दिखाया हुआ पथ
:क्षमा कीजिए, हजरत।
:* क्षमा कीजिए हजरत: अनुवाद: सुलोचना वर्मा[https://kavitakosh.org/kk/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%80_%E0%A4%A8%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%B2_%E0%A4%87%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AE]
== बाहरी संबंध ==
{{विकिपीडिया}}
[[श्रेणी:कवि]]
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/* कविता */
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text/x-wiki
[[File:Nazrul.jpg|thumb]]
'''काज़ी नजरुल इसलाम''' (কাজী নজরুল ইসলাম), (२४ मई १८९९ - २९ अगस्त १९७६ एक [[बांग्लादेश|बांग्लादेशी]] [[कवि]], [[लेखक]], [[संगीतकार]] और देश के राष्ट्रीय कवि थे। नजरुल को बांग्ला साहित्य के सबसे महान कवियों में से एक माना जाता है। नजरुल के नाम से लोकप्रिय, उन्होंने [[कविता]], [[संगीत]], [[संदेश]], [[उपन्यास]], [[कहानी|कहानियाँ]] आदि का एक बड़ा समूह तैयार किया, जिसमें [[समानता]], [[न्याय]], [[साम्राज्यवाद]]<nowiki/>-विरोधी, मानवता, उत्पीड़न के खिलाफ विद्रोह और धार्मिक भक्ति शामिल थे।
==कविता==
* जनम-जनम बीते बाट जोहते ही,
: मरु-मुसाफ़िर चले, अंत ना कहीं भी।
: बरस पे बरस आएँ, आके लौट जाएँ,
: अश्कों से प्यास अपनी, पी के हम बुझाएँ।
: दिखा कपट-ज्योति, बनके मृगतृष्णा,
: मरु-उपवन पुकारे, गीत गा के वही॥
: था ये मरुथल कभी, सागर का ही जल,
: देखूँ सपना उसी का, आज भी मैं पागल।
: डूबी थी जो कश्ती, सागर के तल में,
: ढूँढूँ उसी के साथी, मरु-पथ पे राही॥
:* जनम जनम बीते
* आ जा देख आमेना अम्मी की गोद में
:भरी चाँदनी का वहाँ चाँद डोले
:जैसे सहर की गोद में (रंगा) सूरज डोले
:* आ जा देख आमेना अम्मी की गोद में
* आपकी वाणी को नहीं किया ग्रहण
:क्षमा कीजिए, हजरत
:भूल गया हूँ आपके आदर्श
:आपका दिखाया हुआ पथ
:क्षमा कीजिए, हजरत।
:विलास वैभव को रौंदा है पाँव तले
:धूल समान आपने प्रभु
:आपने नहीं चाहा कि हम बने
:बादशाह, नवाब कभू।
:इस धरणी की धन सम्पदा
:सभी का है उस पर समान अधिकार,
:आपने कहा था धरती पर हैं सब
:समान पुत्रवत
:क्षमा कीजिए, हजरत।
:आपके धर्म में नास्तिकों से
:आप घृणा नहीं करते,
:आपने उनकी की है सेवा
:आश्रय दिया उन्हें घर में
:भिन्न धर्मियों के पूजा मन्दिर
:तोड़ने का आदेश नहीं दिया, हे वीर !
:हम आजकल सहन
:नहीं कर पाते दूसरों का मत
:क्षमा कीजिए, हजरत।
:नहीं चाहा आपने कि हो धर्म के नाम पर
:ग्लानिकर हत्या — जीवन हानि
:तलवार आपने नहीं दी हाथ में
:दी है अमर वाणी
:हमने भूल कर आपकी उदारता
:बढ़ा ली है धर्मान्धता,
:जन्नत से नहीं झरती है अब
:तभी आपकी रहमत
:क्षमा कीजिए, हजरत।
:आपकी वाणी को नहीं किया ग्रहण
:क्षमा कीजिए, हजरत
:भूल गया हूँ आपके आदर्श
:आपका दिखाया हुआ पथ
:क्षमा कीजिए, हजरत।
:* क्षमा कीजिए हजरत: अनुवाद: सुलोचना वर्मा[https://kavitakosh.org/kk/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%80_%E0%A4%A8%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%B2_%E0%A4%87%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AE]
== बाहरी संबंध ==
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