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हास्य
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अनुनाद सिंह
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'''हास्य''' अर्थात हंसाने वाली बात या कथन। व्यंग्य।
== उक्तियाँ ==
* ''घटं भिन्द्यात्पटं छिन्द्यात्कुर्याद्रासभरोहणम्।
: ''येन केन प्रकारेण प्रसिद्धः पुरुषो भवेत्॥'' -- शार्ङ्गधरपद्धति
: घड़ा फोड़ डाले, कपड़ा फाड़ डाले, गदहे पर सवारी करे, जिस मार्ग से सम्भव हैं उस मार्ग से मनुष्य प्रसिद्ध बन जाये।
: यह सुभाषित व्यंग्यपूर्ण तरीके से स्पष्ट करता हैं कि प्रसिद्धि के भूखे लोग प्रसिद्धि के लिए कुछ भी कर सकते हैं।
* ''यथा जानन्ति बहवः यथा वक्ष्यन्ति दातरि।
: ''तथा धर्मं चरेन्नित्यं न वृथा किञ्चिदाचरेत्॥
: हमेशा इस तरह काम करें कि बहुत से लोग आपको जानें और आप के बारे में दानवीरों को बताएँ। वृथा (बिना पैसे के) कोई काम ना करें।
: यह एक व्यंग्य काव्य है जो अपने अच्छे कामों का बोलबाला करने वाले लोगों का मजाक उड़ा रहा है।
* बिंध्य के बासी उदासी तपोब्रत-धारी महा बिनु नारि दुखारे।
: गौतमतीय तरी तुलसी सों कथा सुनि भे मुनिबंद सुखारे॥
: ह्वै हैं सिला सब चंद्रमुखी परसे पद-मंजुल-कंज तिहारे।
: किन्ही भली रघुनायक जो करुना करि कानन को पद धारे। -- [[गोस्वामी तुलसीदास]]
* हंसी के हमले के आगे कुछ भी नहीं ठहर सकता। -- [[मार्क ट्वेन]]
* हंसी परेशान दुनिया के कंधे पर भगवान का हाथ है। -- बेटैनल हंजनिकर
* हंसी एक सुधारात्मक बल है जो हमें पागल बनने से रोकती है। -- हेनरी बर्गसन
* हम इसलिए नहीं हँसते क्योंकि हम खुश हैं, हम खुश हैं क्योंकि हम हँसते हैं। -- विलियम जेम्स
* जब परिहास चला जाता है, सभ्यता चली जाती है। -- एरमा बौम्बैक
* आपका शरीर बिना खेल के ठीक नहीं हो सकता है। आपका दिमाग बिना हंसी के ठीक नहीं हो सकता है। आपकी आत्मा बिना खुशी के ठीक नहीं हो सकती है। -- कैथरीन रिपेंजर फेनविक
* जब भी हंस सको हंसो। यह एक सस्ती दवा है। -- लार्ड बायरन
* आपकी मुस्कान आपके चेहरे पर भगवान् के हस्ताक्षर हैं, उसे अपने आंसुओं से धुलने या क्रोध से मिटने ना दें। -- ब्रह्माकुमारी शिवानी
* एक अच्छी मुस्कुराहट बहुत से घाव भर देती है। -- मैडलिन एल’
* एक अच्छी हंसी घर में सूरज की रौशनी के समान है। -- विलियम टी
* एक मुस्कुराहट एक एक ऐसा घुमाव है जो सबकुछ सीधा कर देता है। -- फ़िलिस डिलर
* एक हलकी सी मुस्कुराहट होंठों से शुरू होती है, एक अच्छी मुस्कान आँखों तक जाती है, एक हँसी पेट से निकलती है लेकिन एक ठहाका आत्मा से फूटता है, ऊपर से बहता है और चारों और अपने बुलबुले छोड़ता है। -- कैरोलिन बर्मिंघम
* एक संतुलित व्यक्ति वह है जो किसी मुद्दे के दोनों ओर को हंसने योग्य पाता है। -- हर्बर्ट प्रौक्नो
* उनके बीच जिन्हें मैं पसंद करता हूँ या जिनकी प्रशंसा करता हूँ, मुझे कुछ भी कॉमन नहीं दिखता, लेकिन उनके बीच जिन्हें मैं प्यार करता हूँ दिखता है, वे सभी मुझे हंसाते हैं। -- डब्लू एच ऑडेन
* एक आशावादी भूलने के लिए हँसता है; एक निराशावादी हँसना भूल जाता है। -- टॉम नैन्स्बरी
* हमें हर उस सत्य को असत्य कहना चाहिए जिसके साथ कम से में एक हंसी ना रही हो। -- फ्रेडरिक नीत्शे
* जैसे साबुन शरीर के लिए है, वैसे हंसी आत्मा के लिए है। -- एक यहूदी कहावत
* जैसे ही आपने कुछ सोचा, उसके ऊपर हंसिये। -- लाओ त्से
* पृथ्वी फूलों में मुस्कुराती है। -- राल्फ वाल्डो एमर्सन
* यहाँ तक की देवताओं को भी चुटकुले पसंद हैं। -- प्लेटो
* वहां से यहाँ तक, यहाँ से वहां तक, हर जगह मजाकिया चीजें मौजूद हैं। -- डॉ सियस
* भगवान् एक कॉमेडियन हैं जो ऐसे दर्शकों के सामने प्रदर्शन कर रहे हैं जो इतने डरे हुए हैं कि हंस नहीं सकते। -- वोल्टेयर
* हंसी भगवान् की दवा है। -- हेनरी वार्ड बीचर
* वो जो हँसता है, लम्बा जीता है! -- मैरी पेटिबोन पूल
* हास्य आस्था का आरम्भ है और हंसी प्रार्थना की शुरुआत है। -- रीन्होल्ड नेबर
* हास्य उस चीज पर हंसना है जो आपके पास तब नहीं है जब वो आपके पास होनी चाहिए थी। -- जेम्स लैंगस्टन ह्यूजेस
* इस दुनिया में, हंसने का एक अच्छा समय है जब भी आप हंस सकें। -- लिंडा एलेर्बी
* मैंने किसी को हंसी की वजह से मरते हुए नहीं देखा है, लेकिन मैं लाखों लोगों को जानता हूँ जो इसलिए मर रहे हैं क्योंकि वे हंस नहीं रहे हैं। -- डॉ मदन कटारिया
* यदि हंसी आपकी समस्या सॉल्व नहीं कर सकती, तो निश्चित रूप से ये आपकी समस्या डीजौल्व कर देगा; ताकि आप साफ-साफ़ सोच सकें कि उनके बारे में आपको क्या करना है। -- डॉ मदन कटारिया
* यदि आप खुश हैं और आपके आस-पास के लोग खुश नहीं हैं तो वे आपको भी खुश नहीं रहने देंगे। इसलिए आपकी ख़ुशी काफी हद तक ख़ुशी फैलाने की आपकी क्षमता पर निर्भर करती है। -- डॉ मदन कटारिया
* यदि आप अपनी हंसी के बाद शांत हो जाते हैं तो एक दिन आप भगवान् को भी हँसते हुए सुनेंगे, आप पूरे अस्तित्व को हंसते हुए सुनेंगे – पेड़ों और पत्थरों और सितारों के साथ। -- ओशो
* यदि आप अपनी मुसीबतों पर हँसना नहीं सीखते तो आपके पास कुछ भी हंसने के लिए नहीं होगा जब आप बूढ़े होंगे। -- एडगर वाटसन होव
* यदि आपके पास कोई ट्रेजडी नहीं है तो आपके पास कोई कॉमेडी नहीं है। रोना और हँसना एक ही भावना है। यदि आप बहुत अधिक हँसते हैं तो आप रोते हैं। और इसके उलट भी। -- सिड सीजर
* अगर आप चाहते हैं लोग आप पर हँसे नहीं तो खुद पर हंसने वाला पहला व्यक्ति बनिए। -- बेंजामिन फ्रैंकलिन
* हंसीं को दबाना अच्छा नहीं है। यह वापस आपके हिप्स तक जाकर फ़ैल जाती है। -- फ्रेड एलन -- इससे पहले कि कोई और आप पर हँसे, आप खुद पर हंसिये। -- एलसा मैक्सवेल
* हंसीं का कोई फॉरेन एक्सेंट नहीं होता। -- पॉल लोनी
* हंसी आंतरिक जॉगिंग का एक रूप है। -- नॉर्मन कजंस
* हंसी दो लोगों के बीच की सबसे कम दूरी है। -- विक्टर बोर्ज
* हास्य वो सूरज है जो इंसान के चेहरे से सर्दी भगाता है। -- विक्टर ह्यूगो
* हंसी फेफड़ों को खोलती है, और फेफड़ों को खोलना आत्मा को हवा देता है। -- अनाम
* हम वास्तव में उसके साथ कभी प्रेम नहीं कर सकते जिसके साथ हम कभी हँसते नहीं। -- एगनेस रेप्लीयर
* हमारे बारे में मजाकिया बात यह है कि हम खुद को बहुत गंभीरता से लेते हैं। -- रीन्होल्ड नेबर
* खुद पर हँसना सीखना बेहद ज़रूरी है। -- कैथरीन मैन्सफील्ड
* जब आप हंसते हैं, तो आपको भगवान की एक झलक मिलती है। -- मेरिल बेलगम
* जब आप ये महसूस कर लेंगे कि हर चीज कितनी परिपूर्ण है; आप सर पीछे झुकायेंगे और और आसमान पर हँसेंगे। -- बुद्ध
* खुशी और हंसी के साथ झुर्रियां आने दीजिये। -- विलियम शेक्सपीयर
* रात और दिन मेरे ऊपर जो भयानक तनाव था, अगर मैं हँसता नहीं तो मर जाता। -- अब्राहम लिंकन
* झुर्रियों को बस यही बतलाना चाहिए कि मुस्कान कहाँ-कहाँ थीं। -- मार्क ट्वेन
* आप इसलिए हँसना नहीं छोड़ देते क्योंकि आप बूढ़े हो जाते हैं। आप हँसना छोड़ देते है इसलिए बूढ़े हो जाते हैं। -- माइकल पिटचार्ड
* आप उस दिन बड़े हो जाते हैं जिस दिन आप सचमुच अपने ऊपर हँसते हैं। -- एथल बैरीमोर
* हास्य सबसे अच्छी दवा है। -- अज्ञात
* एक अच्छी हंसी एक बहुत ही अच्छी चीज है, बल्कि एक अच्छी चीज जो बहुत दुर्लभ है। -- हर्मन मैलविले
* एक पल के लिए ही सही, किसी और के चेहरे की मुस्कान बनो। -- डेजन स्टोजनोविक
* हंसी के बिना बिताया हुआ दिन बर्वाद किया हुआ दिन है। -- चार्ली चैपलिन
* कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके दिल का दर्द क्या है, हँसने से आप इसे कुछ सेकंड के लिए भूल जाते हैं। -- रेड स्केलेटन
* शायद मुझे पता है कि क्यों अकेला इंसान ही ऐसा है जो हँसता है; वही ही है जो इतनी गहरी पीड़ा से गुजरता है कि उसे हँसी का आविष्कार करना पड़ा। -- फ्रेडरिक डब्ल्यू नीत्शे
* औसतन, एक शिशु दिन भर में लगभग 200 बार हँसता है; एक वयस्क केवल 12 बार। शायद वे इतना इसलिए हँस रहे हैं क्योंकि वे हमें देख रहे हैं। -- आई चिंग
* इस बात को याद रखिये: एक खुशहाल जिन्दगी के लिए बहुत कम चीजों की आवश्यकता होती है। -- मार्कस औरेलियस
* मुस्कान आत्मा का चुम्बन है।
* खुद को खुश करने का सबसे अच्छा तरीका है किस और को खुश करने की कोशिश करना। -- मार्क ट्वेन
* जितना गहरा दुख आपके वजूद में आता है, उतना अधिक खुशी आप खुद में समा सकते हैं। -- [[खलील जिब्रान]]
* वो युवा जो रोया नहीं निर्दयी है, वो वृद्ध जो हंसेगा नहीं मूर्ख है। -- जॉर्ज सैंटयाना
* मुसीबत ने दरवाजा खटखटाया, लेकिन, हंसी सुनकर, वापस चली गयी। -- बेंजामिन फ्रैंकलिन
* हम औरतें प्यार को बहुत गंभीरता से ले लेती हैं। आदमी चाहते हैं उन्हें हंसी के साथ प्यार किया जाए। इसलिए हंसो जानेमन हंसो, वरना जल्द ही तुम्हे रोना पड़ सकता है। -- मिना थॉमस एन्ट्रिम
* मेरा दर्द किसी के लिए हंसने की वजह हो सकता है। पर मेरी हंसी कभी भी किसी के दर्द की वजह नहीं होनी चाहिए। -- चार्ली चैपलिन
==इन्हें भी देखें==
*[[वक्रोक्ति]]
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भाग्य
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अनुनाद सिंह
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'''भाग्य''' अर्थात दैवयोग से बिना कुछ किये ही फल मिल जाना।
'''भाग्य''' (दैव, प्रारब्ध, नसीब) का अर्थ है बिना प्रयास के प्राप्त होने वाला फल। यह एक दार्शनिक, धार्मिक और सांस्कृतिक अवधारणा है, जिसमें यह विश्वास किया जाता है कि जीवन की कुछ घटनाएँ पूर्व निर्धारित होती हैं या दिव्य योजना के अनुसार घटित होती हैं। किंतु भारत के कई दर्शन, ग्रंथ और विचारक यह मानते हैं कि भाग्य से अधिक महत्वपूर्ण '''[[पुरुषार्थ]]''' (कर्म और प्रयास) है।
; परिभाषा
* '''संस्कृत में''' – "दैवयोग" अर्थात ईश्वर की इच्छा या पूर्व जन्म का फल।
* '''हिन्दू दृष्टिकोण''' – प्रारब्ध के अनुसार भाग्य की बात होती है, किंतु कर्म को ही प्रमुख माना गया है।
* '''आधुनिक सोच''' – भाग्य से अधिक स्वयं का प्रयास, निर्णय और विवेक ही भविष्य निर्धारित करता है।
== उक्तियाँ ==
* ''विक्लवो वीर्यहीनो य: स दैवमनुवर्तते।
: ''वीराः संभावितात्मानो न दैवं पर्युपासते॥'' -- वाल्मीकिरामायणम् , अयोध्याकाण्ड
: बलहीन या कापुरुष ही भाग्य के भरोसे बैठा रहता है। स्वावलम्बी पुरुष कर्म के माध्यम से सब कुछ प्राप्त कर लेता है, वह केवल भाग्य के भरोसे नहीं बैठा रहता है।
* कादर मन कहुँ एक अधारा। दैव दैव आलसी पुकारा॥ -- रामचरितमानस, सुन्दरकाण्ड
: (लक्ष्मणजी ने कहा-) यह दैव (भाग्य) तो कायर के मन का एक आधार (तसल्ली देने का उपाय) है। आलसी लोग ही दैव-दैव पुकारा करते हैं॥
* '' उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मी
:'' दैवेन देयमिति कापुरुषा वदन्ति ।
: '' दैवं निहत्य कुरु पौरुषमात्मशक्त्या
: '' यत्नेकृते यदि न सिद्ध्यति कोऽत्रदोषः॥ -- [[भर्तृहरि]]
: लक्ष्मी कर्म करने वाले पुरुषरूपी सिंह के पास आती है, "देवता (भाग्य) देने वाला हैं" ऐसा तो कायर पुरुष कहते हैं। इसलिए देव (भाग्य) को छोड़ कर अपनी शक्ति से पौरुष (कर्म) करो, प्रयत्न करने पर भी यदि कार्य सिद्ध नहीं होता है तो देखो क्या समस्या है (कोई और समस्या तो नहीं?)।
* मनुष्य अपने भाग्य का स्वयं ही निर्माता है। -- स्वामी रामतीर्थ
* भाग्य पर वह भरोसा करता है, जिसमें पौरुष नहीं होता। -- प्रेमचंद
* विचार सारे भाग्य का प्रारंभिक बिंदु है। -- नेपोलियन हिल
* भाग्य के भरोसे बैठे रहने पर भाग्य सोया रहता है, और साहसपूर्वक खड़े होने पर भाग्य भी उठ खड़ा होता है।
* ईश्वर या प्रारब्ध या भाग्य को कोसने से कोई लाभ नहीं क्योंकि अपने को अपमान और लांछना की स्थिति में ला पटकने की सारी जिम्मेदारी हमारी है। -- सुभाषित
* मृत अतीत को दफना दो, अनंत भविष्य तुम्हारे सामने है और स्मरण रखो कि प्रत्येक शब्द, विचार और कर्म तुम्हारे भाग्य का निर्माण करता है। -- [[स्वामी विवेकानन्द]]
* जो कुछ भी होता है, वह अच्छे के लिए होता है। ईश्वर के पास हमेशा एक बेहतर योजना होती है। -- अज्ञात
* अपना सुख उसने अपने भुजबल से ही पाया है॥ -- रामधारी सिंह 'दिनकर'
* अपने पुरुषार्थ से अर्जित ऐश्वर्य का ही दूसरा नाम सौभाग्य है। -- अज्ञात
* भाग्य साहसी मनुष्य की सहायता करता है। -- वर्जिल
* प्रत्येक व्यक्ति का भाग्य एक बार अवश्य उदय होता है। यह बात अलग है कि वह उसका कितना लाभ उठाता है। -- भृगु
* भाग्यचक्र लगातार घूमा करता है, कौन कह सकता है कि आज मैं उच्च शिखर पर पहुँच जाऊंगा। -- कन्फ्यूशस
* सौभाग्य दरवाजा खटखटाता है और पूछता है - "क्या समझदारी घर में मौजूद है ?"
* आज का पुरुषार्थ ही कल का भाग्य है। -- पाल शिरट
== प्राचीन ग्रंथों से उद्धरण ==
=== वाल्मीकि रामायण, अयोध्याकाण्ड ===
* "विक्लवो वीर्यहीनो य: स दैवमनुवर्तते।
वीराः संभावितात्मानो न दैवं पर्युपासते॥"
''बलहीन या कापुरुष ही भाग्य के भरोसे बैठा रहता है। वीर पुरुष अपने पुरुषार्थ से ही फल प्राप्त करते हैं।''
=== रामचरितमानस, सुन्दरकाण्ड ===
* "कादर मन कहुँ एक अधारा। दैव दैव आलसी पुकारा॥"
''दैव (भाग्य) कायर के मन का एक तसल्ली देने वाला बहाना है। केवल आलसी लोग ही दैव की दुहाई देते हैं।''
=== नीति शतक – भर्तृहरि ===
* "उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मी
दैवेन देयमिति कापुरुषा वदन्ति।
दैवं निहत्य कुरु पौरुषमात्मशक्त्या
यत्नेकृते यदि न सिद्ध्यति कोऽत्र दोषः॥"
''लक्ष्मी उस उद्योगी पुरुष के पास आती है जो शेर की तरह कर्मशील है। 'दैव देता है' - यह तो कायर कहते हैं। अगर पूरे प्रयास के बाद भी सफलता न मिले, तो दोष खोजो।''
== आधुनिक विचारकों के उद्धरण ==
=== भारतीय विचारक ===
* "मनुष्य अपने भाग्य का स्वयं निर्माता है।" — '''स्वामी रामतीर्थ'''
* "भाग्य पर वह भरोसा करता है, जिसमें पौरुष नहीं होता।" — '''प्रेमचंद'''
* "मृत अतीत को दफना दो, अनंत भविष्य तुम्हारे सामने है और स्मरण रखो कि प्रत्येक शब्द, विचार और कर्म तुम्हारे भाग्य का निर्माण करता है।" — '''स्वामी विवेकानन्द'''
* "ईश्वर या प्रारब्ध या भाग्य को कोसने से कोई लाभ नहीं, क्योंकि अपमानजनक स्थिति में हम स्वयं ही जिम्मेदार हैं।" — '''सुभाषित'''
* "अपना सुख उसने अपने भुजबल से ही पाया है।" — '''रामधारी सिंह 'दिनकर'''
* "अपने पुरुषार्थ से अर्जित ऐश्वर्य का ही दूसरा नाम सौभाग्य है।" — '''अज्ञात'''
=== अंतरराष्ट्रीय व्यक्तित्व ===
* "विचार सारे भाग्य का प्रारंभिक बिंदु है।" — '''नेपोलियन हिल'''
* "भाग्य साहसी मनुष्य की सहायता करता है।" — '''वर्जिल'''
* "प्रत्येक व्यक्ति का भाग्य एक बार अवश्य उदय होता है, यह बात अलग है कि वह उसका कितना लाभ उठाता है।" — '''भृगु'''
* "भाग्यचक्र लगातार घूमता है। कौन जानता है कि आज कौन शिखर पर पहुँच जाए।" — '''कन्फ्यूशियस'''
* "सौभाग्य दरवाजा खटखटाता है और पूछता है — क्या समझदारी घर में मौजूद है?" — '''अज्ञात'''
* "आज का पुरुषार्थ ही कल का भाग्य है।" — '''पाल शिरट'''
* "जो कुछ भी होता है, वह अच्छे के लिए होता है। ईश्वर के पास हमेशा एक बेहतर योजना होती है।" — '''अज्ञात'''
== सन्दर्भ ==
* [[रामचरितमानस]]
* [[वाल्मीकि रामायण]]
* नीति शतक – भर्तृहरि
* स्वामी विवेकानन्द – 'कार्य और विचार'
* प्रेमचंद – निबंध संग्रह
* दिनकर – 'रश्मिरथी'
== इन्हें भी देखें ==
* [[कर्म]]
* [[पुरुषार्थ]]
* [[प्रेरणा]]
* [[धैर्य]]
* [[साहस]]
* [[धर्म]]
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://www.mlsu.ac.in/naac2023/3.4.4 Offline Research Publications/Journals/J-189 संस्कृत सुभाषित साहित्य में भाग्य की अवधारणा.pdf संस्कृत सुभाषित साहित्य में भाग्य की अवधारणा]
[[Category:दर्शन]]
[[Category:नीति]]
[[Category:हिन्दू दर्शन]]
[[Category:प्रेरक विचार]]
[[Category:संस्कृत उद्धरण]]
[[Category:कर्म और भाग्य]]
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अनुनाद सिंह
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/* बाहरी कड़ियाँ */
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'''भाग्य''' अर्थात दैवयोग से बिना कुछ किये ही फल मिल जाना।
'''भाग्य''' (दैव, प्रारब्ध, नसीब) का अर्थ है बिना प्रयास के प्राप्त होने वाला फल। यह एक दार्शनिक, धार्मिक और सांस्कृतिक अवधारणा है, जिसमें यह विश्वास किया जाता है कि जीवन की कुछ घटनाएँ पूर्व निर्धारित होती हैं या दिव्य योजना के अनुसार घटित होती हैं। किंतु भारत के कई दर्शन, ग्रंथ और विचारक यह मानते हैं कि भाग्य से अधिक महत्वपूर्ण '''[[पुरुषार्थ]]''' (कर्म और प्रयास) है।
; परिभाषा
* '''संस्कृत में''' – "दैवयोग" अर्थात ईश्वर की इच्छा या पूर्व जन्म का फल।
* '''हिन्दू दृष्टिकोण''' – प्रारब्ध के अनुसार भाग्य की बात होती है, किंतु कर्म को ही प्रमुख माना गया है।
* '''आधुनिक सोच''' – भाग्य से अधिक स्वयं का प्रयास, निर्णय और विवेक ही भविष्य निर्धारित करता है।
== उक्तियाँ ==
* ''विक्लवो वीर्यहीनो य: स दैवमनुवर्तते।
: ''वीराः संभावितात्मानो न दैवं पर्युपासते॥'' -- वाल्मीकिरामायणम् , अयोध्याकाण्ड
: बलहीन या कापुरुष ही भाग्य के भरोसे बैठा रहता है। स्वावलम्बी पुरुष कर्म के माध्यम से सब कुछ प्राप्त कर लेता है, वह केवल भाग्य के भरोसे नहीं बैठा रहता है।
* कादर मन कहुँ एक अधारा। दैव दैव आलसी पुकारा॥ -- रामचरितमानस, सुन्दरकाण्ड
: (लक्ष्मणजी ने कहा-) यह दैव (भाग्य) तो कायर के मन का एक आधार (तसल्ली देने का उपाय) है। आलसी लोग ही दैव-दैव पुकारा करते हैं॥
* '' उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मी
:'' दैवेन देयमिति कापुरुषा वदन्ति ।
: '' दैवं निहत्य कुरु पौरुषमात्मशक्त्या
: '' यत्नेकृते यदि न सिद्ध्यति कोऽत्रदोषः॥ -- [[भर्तृहरि]]
: लक्ष्मी कर्म करने वाले पुरुषरूपी सिंह के पास आती है, "देवता (भाग्य) देने वाला हैं" ऐसा तो कायर पुरुष कहते हैं। इसलिए देव (भाग्य) को छोड़ कर अपनी शक्ति से पौरुष (कर्म) करो, प्रयत्न करने पर भी यदि कार्य सिद्ध नहीं होता है तो देखो क्या समस्या है (कोई और समस्या तो नहीं?)।
* मनुष्य अपने भाग्य का स्वयं ही निर्माता है। -- स्वामी रामतीर्थ
* भाग्य पर वह भरोसा करता है, जिसमें पौरुष नहीं होता। -- प्रेमचंद
* विचार सारे भाग्य का प्रारंभिक बिंदु है। -- नेपोलियन हिल
* भाग्य के भरोसे बैठे रहने पर भाग्य सोया रहता है, और साहसपूर्वक खड़े होने पर भाग्य भी उठ खड़ा होता है।
* ईश्वर या प्रारब्ध या भाग्य को कोसने से कोई लाभ नहीं क्योंकि अपने को अपमान और लांछना की स्थिति में ला पटकने की सारी जिम्मेदारी हमारी है। -- सुभाषित
* मृत अतीत को दफना दो, अनंत भविष्य तुम्हारे सामने है और स्मरण रखो कि प्रत्येक शब्द, विचार और कर्म तुम्हारे भाग्य का निर्माण करता है। -- [[स्वामी विवेकानन्द]]
* जो कुछ भी होता है, वह अच्छे के लिए होता है। ईश्वर के पास हमेशा एक बेहतर योजना होती है। -- अज्ञात
* अपना सुख उसने अपने भुजबल से ही पाया है॥ -- रामधारी सिंह 'दिनकर'
* अपने पुरुषार्थ से अर्जित ऐश्वर्य का ही दूसरा नाम सौभाग्य है। -- अज्ञात
* भाग्य साहसी मनुष्य की सहायता करता है। -- वर्जिल
* प्रत्येक व्यक्ति का भाग्य एक बार अवश्य उदय होता है। यह बात अलग है कि वह उसका कितना लाभ उठाता है। -- भृगु
* भाग्यचक्र लगातार घूमा करता है, कौन कह सकता है कि आज मैं उच्च शिखर पर पहुँच जाऊंगा। -- कन्फ्यूशस
* सौभाग्य दरवाजा खटखटाता है और पूछता है - "क्या समझदारी घर में मौजूद है ?"
* आज का पुरुषार्थ ही कल का भाग्य है। -- पाल शिरट
== प्राचीन ग्रंथों से उद्धरण ==
=== वाल्मीकि रामायण, अयोध्याकाण्ड ===
* "विक्लवो वीर्यहीनो य: स दैवमनुवर्तते।
वीराः संभावितात्मानो न दैवं पर्युपासते॥"
''बलहीन या कापुरुष ही भाग्य के भरोसे बैठा रहता है। वीर पुरुष अपने पुरुषार्थ से ही फल प्राप्त करते हैं।''
=== रामचरितमानस, सुन्दरकाण्ड ===
* "कादर मन कहुँ एक अधारा। दैव दैव आलसी पुकारा॥"
''दैव (भाग्य) कायर के मन का एक तसल्ली देने वाला बहाना है। केवल आलसी लोग ही दैव की दुहाई देते हैं।''
=== नीति शतक – भर्तृहरि ===
* "उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मी
दैवेन देयमिति कापुरुषा वदन्ति।
दैवं निहत्य कुरु पौरुषमात्मशक्त्या
यत्नेकृते यदि न सिद्ध्यति कोऽत्र दोषः॥"
''लक्ष्मी उस उद्योगी पुरुष के पास आती है जो शेर की तरह कर्मशील है। 'दैव देता है' - यह तो कायर कहते हैं। अगर पूरे प्रयास के बाद भी सफलता न मिले, तो दोष खोजो।''
== आधुनिक विचारकों के उद्धरण ==
=== भारतीय विचारक ===
* "मनुष्य अपने भाग्य का स्वयं निर्माता है।" — '''स्वामी रामतीर्थ'''
* "भाग्य पर वह भरोसा करता है, जिसमें पौरुष नहीं होता।" — '''प्रेमचंद'''
* "मृत अतीत को दफना दो, अनंत भविष्य तुम्हारे सामने है और स्मरण रखो कि प्रत्येक शब्द, विचार और कर्म तुम्हारे भाग्य का निर्माण करता है।" — '''स्वामी विवेकानन्द'''
* "ईश्वर या प्रारब्ध या भाग्य को कोसने से कोई लाभ नहीं, क्योंकि अपमानजनक स्थिति में हम स्वयं ही जिम्मेदार हैं।" — '''सुभाषित'''
* "अपना सुख उसने अपने भुजबल से ही पाया है।" — '''रामधारी सिंह 'दिनकर'''
* "अपने पुरुषार्थ से अर्जित ऐश्वर्य का ही दूसरा नाम सौभाग्य है।" — '''अज्ञात'''
=== अंतरराष्ट्रीय व्यक्तित्व ===
* "विचार सारे भाग्य का प्रारंभिक बिंदु है।" — '''नेपोलियन हिल'''
* "भाग्य साहसी मनुष्य की सहायता करता है।" — '''वर्जिल'''
* "प्रत्येक व्यक्ति का भाग्य एक बार अवश्य उदय होता है, यह बात अलग है कि वह उसका कितना लाभ उठाता है।" — '''भृगु'''
* "भाग्यचक्र लगातार घूमता है। कौन जानता है कि आज कौन शिखर पर पहुँच जाए।" — '''कन्फ्यूशियस'''
* "सौभाग्य दरवाजा खटखटाता है और पूछता है — क्या समझदारी घर में मौजूद है?" — '''अज्ञात'''
* "आज का पुरुषार्थ ही कल का भाग्य है।" — '''पाल शिरट'''
* "जो कुछ भी होता है, वह अच्छे के लिए होता है। ईश्वर के पास हमेशा एक बेहतर योजना होती है।" — '''अज्ञात'''
== सन्दर्भ ==
* [[रामचरितमानस]]
* [[वाल्मीकि रामायण]]
* नीति शतक – भर्तृहरि
* स्वामी विवेकानन्द – 'कार्य और विचार'
* प्रेमचंद – निबंध संग्रह
* दिनकर – 'रश्मिरथी'
== इन्हें भी देखें ==
* [[कर्म]]
* [[पुरुषार्थ]]
* [[प्रेरणा]]
* [[धैर्य]]
* [[साहस]]
* [[धर्म]]
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://www.mlsu.ac.in/naac2023/3.4.4%20Offline%20Research%20Publications/Journals/J-189%20%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%A4%20%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%A4%20%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%20%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%AF%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%85%E0%A4%B5%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A4%BE.pdf संस्कृत सुभाषित साहित्य में भाग्य की अवधारणा]
[[Category:दर्शन]]
[[Category:नीति]]
[[Category:हिन्दू दर्शन]]
[[Category:प्रेरक विचार]]
[[Category:संस्कृत उद्धरण]]
[[Category:कर्म और भाग्य]]
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'''भाग्य''' अर्थात दैवयोग से बिना कुछ किये ही फल मिल जाना।
'''भाग्य''' (दैव, प्रारब्ध, नसीब) का अर्थ है बिना प्रयास के प्राप्त होने वाला फल। यह एक दार्शनिक, धार्मिक और सांस्कृतिक अवधारणा है, जिसमें यह विश्वास किया जाता है कि जीवन की कुछ घटनाएँ पूर्व निर्धारित होती हैं या दिव्य योजना के अनुसार घटित होती हैं। किंतु भारत के कई दर्शन, ग्रंथ और विचारक यह मानते हैं कि भाग्य से अधिक महत्वपूर्ण '''[[पुरुषार्थ]]''' (कर्म और प्रयास) है।
; परिभाषा
* '''संस्कृत में''' – "दैवयोग" अर्थात ईश्वर की इच्छा या पूर्व जन्म का फल।
* '''हिन्दू दृष्टिकोण''' – प्रारब्ध के अनुसार भाग्य की बात होती है, किंतु कर्म को ही प्रमुख माना गया है।
* '''आधुनिक सोच''' – भाग्य से अधिक स्वयं का प्रयास, निर्णय और विवेक ही भविष्य निर्धारित करता है।
== उक्तियाँ ==
* ''विक्लवो वीर्यहीनो य: स दैवमनुवर्तते।
: ''वीराः संभावितात्मानो न दैवं पर्युपासते॥'' -- वाल्मीकिरामायणम् , अयोध्याकाण्ड
: बलहीन या कापुरुष ही भाग्य के भरोसे बैठा रहता है। स्वावलम्बी पुरुष कर्म के माध्यम से सब कुछ प्राप्त कर लेता है, वह केवल भाग्य के भरोसे नहीं बैठा रहता है।
* कादर मन कहुँ एक अधारा। दैव दैव आलसी पुकारा॥ -- रामचरितमानस, सुन्दरकाण्ड
: (लक्ष्मणजी ने कहा-) यह दैव (भाग्य) तो कायर के मन का एक आधार (तसल्ली देने का उपाय) है। आलसी लोग ही दैव-दैव पुकारा करते हैं॥
* '' उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मी
:'' दैवेन देयमिति कापुरुषा वदन्ति ।
: '' दैवं निहत्य कुरु पौरुषमात्मशक्त्या
: '' यत्नेकृते यदि न सिद्ध्यति कोऽत्रदोषः॥ -- [[भर्तृहरि]]
: लक्ष्मी कर्म करने वाले पुरुषरूपी सिंह के पास आती है, "देवता (भाग्य) देने वाला हैं" ऐसा तो कायर पुरुष कहते हैं। इसलिए देव (भाग्य) को छोड़ कर अपनी शक्ति से पौरुष (कर्म) करो, प्रयत्न करने पर भी यदि कार्य सिद्ध नहीं होता है तो देखो क्या समस्या है (कोई और समस्या तो नहीं?)।
* मनुष्य अपने भाग्य का स्वयं ही निर्माता है। -- स्वामी रामतीर्थ
* भाग्य पर वह भरोसा करता है, जिसमें पौरुष नहीं होता। -- प्रेमचंद
* विचार सारे भाग्य का प्रारंभिक बिंदु है। -- नेपोलियन हिल
* भाग्य के भरोसे बैठे रहने पर भाग्य सोया रहता है, और साहसपूर्वक खड़े होने पर भाग्य भी उठ खड़ा होता है।
* ईश्वर या प्रारब्ध या भाग्य को कोसने से कोई लाभ नहीं क्योंकि अपने को अपमान और लांछना की स्थिति में ला पटकने की सारी जिम्मेदारी हमारी है। -- सुभाषित
* मृत अतीत को दफना दो, अनंत भविष्य तुम्हारे सामने है और स्मरण रखो कि प्रत्येक शब्द, विचार और कर्म तुम्हारे भाग्य का निर्माण करता है। -- [[स्वामी विवेकानन्द]]
* जो कुछ भी होता है, वह अच्छे के लिए होता है। ईश्वर के पास हमेशा एक बेहतर योजना होती है। -- अज्ञात
* अपना सुख उसने अपने भुजबल से ही पाया है॥ -- रामधारी सिंह 'दिनकर'
* अपने पुरुषार्थ से अर्जित ऐश्वर्य का ही दूसरा नाम सौभाग्य है। -- अज्ञात
* भाग्य साहसी मनुष्य की सहायता करता है। -- वर्जिल
* प्रत्येक व्यक्ति का भाग्य एक बार अवश्य उदय होता है। यह बात अलग है कि वह उसका कितना लाभ उठाता है। -- भृगु
* भाग्यचक्र लगातार घूमा करता है, कौन कह सकता है कि आज मैं उच्च शिखर पर पहुँच जाऊंगा। -- कन्फ्यूशस
* सौभाग्य दरवाजा खटखटाता है और पूछता है - "क्या समझदारी घर में मौजूद है ?"
* आज का पुरुषार्थ ही कल का भाग्य है। -- पाल शिरट
== प्राचीन ग्रंथों से उद्धरण ==
=== वाल्मीकि रामायण, अयोध्याकाण्ड ===
* "विक्लवो वीर्यहीनो य: स दैवमनुवर्तते।
वीराः संभावितात्मानो न दैवं पर्युपासते॥"
''बलहीन या कापुरुष ही भाग्य के भरोसे बैठा रहता है। वीर पुरुष अपने पुरुषार्थ से ही फल प्राप्त करते हैं।''
=== रामचरितमानस, सुन्दरकाण्ड ===
* "कादर मन कहुँ एक अधारा। दैव दैव आलसी पुकारा॥"
''दैव (भाग्य) कायर के मन का एक तसल्ली देने वाला बहाना है। केवल आलसी लोग ही दैव की दुहाई देते हैं।''
=== नीति शतक – भर्तृहरि ===
* "उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मी
दैवेन देयमिति कापुरुषा वदन्ति।
दैवं निहत्य कुरु पौरुषमात्मशक्त्या
यत्नेकृते यदि न सिद्ध्यति कोऽत्र दोषः॥"
''लक्ष्मी उस उद्योगी पुरुष के पास आती है जो शेर की तरह कर्मशील है। 'दैव देता है' - यह तो कायर कहते हैं। अगर पूरे प्रयास के बाद भी सफलता न मिले, तो दोष खोजो।''
== आधुनिक विचारकों के उद्धरण ==
=== भारतीय विचारक ===
* "मनुष्य अपने भाग्य का स्वयं निर्माता है।" — '''स्वामी रामतीर्थ'''
* "भाग्य पर वह भरोसा करता है, जिसमें पौरुष नहीं होता।" — '''प्रेमचंद'''
* "मृत अतीत को दफना दो, अनंत भविष्य तुम्हारे सामने है और स्मरण रखो कि प्रत्येक शब्द, विचार और कर्म तुम्हारे भाग्य का निर्माण करता है।" — '''स्वामी विवेकानन्द'''
* "ईश्वर या प्रारब्ध या भाग्य को कोसने से कोई लाभ नहीं, क्योंकि अपमानजनक स्थिति में हम स्वयं ही जिम्मेदार हैं।" — '''सुभाषित'''
* "अपना सुख उसने अपने भुजबल से ही पाया है।" — '''रामधारी सिंह 'दिनकर'''
* "अपने पुरुषार्थ से अर्जित ऐश्वर्य का ही दूसरा नाम सौभाग्य है।" — '''अज्ञात'''
=== अंतरराष्ट्रीय व्यक्तित्व ===
* "विचार सारे भाग्य का प्रारंभिक बिंदु है।" — '''नेपोलियन हिल'''
* "भाग्य साहसी मनुष्य की सहायता करता है।" — '''वर्जिल'''
* "प्रत्येक व्यक्ति का भाग्य एक बार अवश्य उदय होता है, यह बात अलग है कि वह उसका कितना लाभ उठाता है।" — '''भृगु'''
* "भाग्यचक्र लगातार घूमता है। कौन जानता है कि आज कौन शिखर पर पहुँच जाए।" — '''कन्फ्यूशियस'''
* "सौभाग्य दरवाजा खटखटाता है और पूछता है — क्या समझदारी घर में मौजूद है?" — '''अज्ञात'''
* "आज का पुरुषार्थ ही कल का भाग्य है।" — '''पाल शिरट'''
* "जो कुछ भी होता है, वह अच्छे के लिए होता है। ईश्वर के पास हमेशा एक बेहतर योजना होती है।" — '''अज्ञात'''
== सन्दर्भ ==
* [[रामचरितमानस]]
* [[वाल्मीकि रामायण]]
* नीति शतक – भर्तृहरि
* स्वामी विवेकानन्द – 'कार्य और विचार'
* प्रेमचंद – निबंध संग्रह
* दिनकर – 'रश्मिरथी'
== इन्हें भी देखें ==
* [[कर्म]]
* [[पुरुषार्थ]]
* [[प्रेरणा]]
* [[धैर्य]]
* [[साहस]]
* [[धर्म]]
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://www.mlsu.ac.in/naac2023/3.4.4%20Offline%20Research%20Publications/Journals/J-189%20%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%A4%20%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%A4%20%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%20%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%AF%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%85%E0%A4%B5%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A4%BE.pdf संस्कृत सुभाषित साहित्य में भाग्य की अवधारणा]
*[https://archive.org/details/ClZO_vaidyakiya-subhashita-sahityam-by-bhaskar-govind-ghadekar-series-no.-184-kashi-sanskrit-series/mode/2up वैद्यकीय सुभाषित साहित्यम्] (लेखक - भास्कर गोविन्द घाडेकर)
[[Category:दर्शन]]
[[Category:नीति]]
[[Category:हिन्दू दर्शन]]
[[Category:प्रेरक विचार]]
[[Category:संस्कृत उद्धरण]]
[[Category:कर्म और भाग्य]]
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'''भाग्य''' अर्थात दैवयोग से बिना कुछ किये ही फल मिल जाना।
'''भाग्य''' (दैव, प्रारब्ध, नसीब) का अर्थ है बिना प्रयास के प्राप्त होने वाला फल। यह एक दार्शनिक, धार्मिक और सांस्कृतिक अवधारणा है, जिसमें यह विश्वास किया जाता है कि जीवन की कुछ घटनाएँ पूर्व निर्धारित होती हैं या दिव्य योजना के अनुसार घटित होती हैं। किंतु भारत के कई दर्शन, ग्रंथ और विचारक यह मानते हैं कि भाग्य से अधिक महत्वपूर्ण '''[[पुरुषार्थ]]''' (कर्म और प्रयास) है।
; परिभाषा
* '''संस्कृत में''' – "दैवयोग" अर्थात ईश्वर की इच्छा या पूर्व जन्म का फल।
* '''हिन्दू दृष्टिकोण''' – प्रारब्ध के अनुसार भाग्य की बात होती है, किंतु कर्म को ही प्रमुख माना गया है।
* '''आधुनिक सोच''' – भाग्य से अधिक स्वयं का प्रयास, निर्णय और विवेक ही भविष्य निर्धारित करता है।
== उक्तियाँ ==
* ''विक्लवो वीर्यहीनो य: स दैवमनुवर्तते।
: ''वीराः संभावितात्मानो न दैवं पर्युपासते॥'' -- वाल्मीकिरामायणम् , अयोध्याकाण्ड
: बलहीन या कापुरुष ही भाग्य के भरोसे बैठा रहता है। स्वावलम्बी पुरुष कर्म के माध्यम से सब कुछ प्राप्त कर लेता है, वह केवल भाग्य के भरोसे नहीं बैठा रहता है।
* कादर मन कहुँ एक अधारा। दैव दैव आलसी पुकारा॥ -- रामचरितमानस, सुन्दरकाण्ड
: (लक्ष्मणजी ने कहा-) यह दैव (भाग्य) तो कायर के मन का एक आधार (तसल्ली देने का उपाय) है। आलसी लोग ही दैव-दैव पुकारा करते हैं॥
* '' उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मी
:'' दैवेन देयमिति कापुरुषा वदन्ति ।
: '' दैवं निहत्य कुरु पौरुषमात्मशक्त्या
: '' यत्नेकृते यदि न सिद्ध्यति कोऽत्रदोषः॥ -- [[भर्तृहरि]]
: लक्ष्मी कर्म करने वाले पुरुषरूपी सिंह के पास आती है, "देवता (भाग्य) देने वाला हैं" ऐसा तो कायर पुरुष कहते हैं। इसलिए देव (भाग्य) को छोड़ कर अपनी शक्ति से पौरुष (कर्म) करो, प्रयत्न करने पर भी यदि कार्य सिद्ध नहीं होता है तो देखो क्या समस्या है (कोई और समस्या तो नहीं?)।
* मनुष्य अपने भाग्य का स्वयं ही निर्माता है। -- स्वामी रामतीर्थ
* भाग्य पर वह भरोसा करता है, जिसमें पौरुष नहीं होता। -- प्रेमचंद
* विचार सारे भाग्य का प्रारंभिक बिंदु है। -- नेपोलियन हिल
* भाग्य के भरोसे बैठे रहने पर भाग्य सोया रहता है, और साहसपूर्वक खड़े होने पर भाग्य भी उठ खड़ा होता है।
* ईश्वर या प्रारब्ध या भाग्य को कोसने से कोई लाभ नहीं क्योंकि अपने को अपमान और लांछना की स्थिति में ला पटकने की सारी जिम्मेदारी हमारी है। -- सुभाषित
* मृत अतीत को दफना दो, अनंत भविष्य तुम्हारे सामने है और स्मरण रखो कि प्रत्येक शब्द, विचार और कर्म तुम्हारे भाग्य का निर्माण करता है। -- [[स्वामी विवेकानन्द]]
* जो कुछ भी होता है, वह अच्छे के लिए होता है। ईश्वर के पास हमेशा एक बेहतर योजना होती है। -- अज्ञात
* अपना सुख उसने अपने भुजबल से ही पाया है॥ -- रामधारी सिंह 'दिनकर'
* अपने पुरुषार्थ से अर्जित ऐश्वर्य का ही दूसरा नाम सौभाग्य है। -- अज्ञात
* भाग्य साहसी मनुष्य की सहायता करता है। -- वर्जिल
* प्रत्येक व्यक्ति का भाग्य एक बार अवश्य उदय होता है। यह बात अलग है कि वह उसका कितना लाभ उठाता है। -- भृगु
* भाग्यचक्र लगातार घूमा करता है, कौन कह सकता है कि आज मैं उच्च शिखर पर पहुँच जाऊंगा। -- कन्फ्यूशस
* सौभाग्य दरवाजा खटखटाता है और पूछता है - "क्या समझदारी घर में मौजूद है ?"
* आज का पुरुषार्थ ही कल का भाग्य है। -- पाल शिरट
== प्राचीन ग्रंथों से उद्धरण ==
=== वाल्मीकि रामायण, अयोध्याकाण्ड ===
* "विक्लवो वीर्यहीनो य: स दैवमनुवर्तते।
वीराः संभावितात्मानो न दैवं पर्युपासते॥"
''बलहीन या कापुरुष ही भाग्य के भरोसे बैठा रहता है। वीर पुरुष अपने पुरुषार्थ से ही फल प्राप्त करते हैं।''
=== रामचरितमानस, सुन्दरकाण्ड ===
* "कादर मन कहुँ एक अधारा। दैव दैव आलसी पुकारा॥"
''दैव (भाग्य) कायर के मन का एक तसल्ली देने वाला बहाना है। केवल आलसी लोग ही दैव की दुहाई देते हैं।''
=== नीति शतक – भर्तृहरि ===
* "उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मी
दैवेन देयमिति कापुरुषा वदन्ति।
दैवं निहत्य कुरु पौरुषमात्मशक्त्या
यत्नेकृते यदि न सिद्ध्यति कोऽत्र दोषः॥"
''लक्ष्मी उस उद्योगी पुरुष के पास आती है जो शेर की तरह कर्मशील है। 'दैव देता है' - यह तो कायर कहते हैं। अगर पूरे प्रयास के बाद भी सफलता न मिले, तो दोष खोजो।''
== आधुनिक विचारकों के उद्धरण ==
=== भारतीय विचारक ===
* "मनुष्य अपने भाग्य का स्वयं निर्माता है।" — '''स्वामी रामतीर्थ'''
* "भाग्य पर वह भरोसा करता है, जिसमें पौरुष नहीं होता।" — '''प्रेमचंद'''
* "मृत अतीत को दफना दो, अनंत भविष्य तुम्हारे सामने है और स्मरण रखो कि प्रत्येक शब्द, विचार और कर्म तुम्हारे भाग्य का निर्माण करता है।" — '''स्वामी विवेकानन्द'''
* "ईश्वर या प्रारब्ध या भाग्य को कोसने से कोई लाभ नहीं, क्योंकि अपमानजनक स्थिति में हम स्वयं ही जिम्मेदार हैं।" — '''सुभाषित'''
* "अपना सुख उसने अपने भुजबल से ही पाया है।" — '''रामधारी सिंह 'दिनकर'''
* "अपने पुरुषार्थ से अर्जित ऐश्वर्य का ही दूसरा नाम सौभाग्य है।" — '''अज्ञात'''
=== अंतरराष्ट्रीय व्यक्तित्व ===
* "विचार सारे भाग्य का प्रारंभिक बिंदु है।" — '''नेपोलियन हिल'''
* "भाग्य साहसी मनुष्य की सहायता करता है।" — '''वर्जिल'''
* "प्रत्येक व्यक्ति का भाग्य एक बार अवश्य उदय होता है, यह बात अलग है कि वह उसका कितना लाभ उठाता है।" — '''भृगु'''
* "भाग्यचक्र लगातार घूमता है। कौन जानता है कि आज कौन शिखर पर पहुँच जाए।" — '''कन्फ्यूशियस'''
* "सौभाग्य दरवाजा खटखटाता है और पूछता है — क्या समझदारी घर में मौजूद है?" — '''अज्ञात'''
* "आज का पुरुषार्थ ही कल का भाग्य है।" — '''पाल शिरट'''
* "जो कुछ भी होता है, वह अच्छे के लिए होता है। ईश्वर के पास हमेशा एक बेहतर योजना होती है।" — '''अज्ञात'''
== सन्दर्भ ==
* [[रामचरितमानस]]
* [[वाल्मीकि रामायण]]
* नीति शतक – भर्तृहरि
* स्वामी विवेकानन्द – 'कार्य और विचार'
* प्रेमचंद – निबंध संग्रह
* दिनकर – 'रश्मिरथी'
== इन्हें भी देखें ==
* [[कर्म]]
* [[पुरुषार्थ]]
* [[प्रेरणा]]
* [[धैर्य]]
* [[साहस]]
* [[धर्म]]
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://www.mlsu.ac.in/naac2023/3.4.4%20Offline%20Research%20Publications/Journals/J-189%20%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%A4%20%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%A4%20%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%20%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%20%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%AF%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%85%E0%A4%B5%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A4%BE.pdf संस्कृत सुभाषित साहित्य में भाग्य की अवधारणा]
[[Category:दर्शन]]
[[Category:नीति]]
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[[Category:प्रेरक विचार]]
[[Category:संस्कृत उद्धरण]]
[[Category:कर्म और भाग्य]]
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अनुनाद सिंह
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'''वैद्य''' (परम्परागत भारतीय आयुर्वैदिक चिकित्सक) या डॉक्टर (आधुनिक नाम)। इनका कार्य रोगी के रोग का निदान करना तथा उसकी चिकित्सा करके रोगी को स्वस्थ बनाना है। 'वैद्य' का शाब्दिक अर्थ है, '[[विद्या]] से युक्त'।
== उक्तियाँ ==
* ''तत्त्वाधिगतशास्त्रार्थो दृष्टकर्मा स्वयंकृती।
: ''लघुहस्तः शुचिः शूरः सज्जोपस्करभेषजः॥
: ''प्रत्युत्पन्नमतिर्धीमान् व्यवसायी विशारदः।
: '' सत्यधर्मपरो यश्च स भिषक् पाद उच्यते॥ -- सुश्रुतसंहिता
: अर्थ - वैद्य उसे कहते हैं जो ठीक प्रकार से शास्त्र पढ़ा हुआ, ठीक प्रकार से शास्त्र का अर्थ समझा हुआ, छेदन स्नेहन आदि कर्मों को देखा एवं स्वयं किया हुआ, छेदन आदि शस्त्र-कर्मों में दक्ष हाथ वाला, बाहर एवं अन्दर से पवित्र (रज-तम रहित), शूर (विषाद रहित) , अग्रोपहरणीय अध्याय में वर्णित साज-सामान सहित, प्रत्युत्पन्नमति (उत्तम प्रतिभा-सूझ वाला), बुद्धिमान, व्यवसायी (उत्साहसम्पन्न), विशारद (पण्डित), सत्यनिष्ट, धर्मपरायण हो।
*'' संचयंच प्रकोपंच प्रसरं स्थानसंश्रयम्।
:'' व्यक्ति भेदंच यो वेत्ति दोषाणां स भवेद्धिषक् ॥ -- सुश्रुत संहिता २१/३६
: अर्थात दोषों का संचय, प्रकोप, प्रसर, स्थानसंश्रय, व्यक्ति और भेद को जो जानता है, वही यथार्थ वैद्य है। (इन्हें 'षट् क्रियाकाल' कहते हैं।)
* ''गुरोरधीताऽखिलवैद्यविद्यः पीयूषपाणिः कुशलः क्रियासु ।
: ''गतस्प्रहो धैर्यधरः कृपालुः शुद्धोऽधिकारी भिषगीदृशः स्यात् ॥'' -- वैद्यप्रशंसा
: जिसने अपने गुरुओं से सम्पूर्ण चिकित्सा विज्ञान सीखा हो, शल्यक्रिया करने में इतना कुशल हो कि मानो उसके हाथों में मृतक को भी जीवित करने वाला अमृत हो, ईर्ष्या से रहित, धैर्यवान, दयालु और सरल स्वभाव वाला हो , वही वैद्य वास्तव में एक आदर्श वैद्य होता है।
* ''सुश्रुतो न श्रुतो येन वाग्भटो येन वाग्भटः।
: ''नाधितश्च चरक येन स वैद्यो यम किङ्करः॥
: सुश्रुत जिसने सुना नहीं, वाग्भट्ट जिसे वाग्भट्ट (कंठस्थ) नहीं, चरक का जिसने चिकित्सा उपक्रम पढ़ा नहीं, वो वैद्य वैद्य नहीं, यम का दूत है।
* ''तर्कविहीनो वैद्यः लक्षण हीनश्च पण्डितो लोके ।
: ''भावविहीनो धर्मो नूनं हस्यन्ते त्रीण्यपि ॥
: तर्कविहीन वैद्य, लक्षणविहीन पंडित, और भावरहित धर्म – ये अवश्य ही जगत में हंसी के पात्र बनते हैं।
*'' वैद्यराज नमस्तुभ्यं यमराज सहोदर:।
:'' यमस्तु हरति प्राणान् वैद्य: प्राणान् धनानि च।
:हे यमराज के भाई वैद्यराज! तुम्हें प्रणाम। यमराज तो सिर्फ प्राणों का हरण करता है परन्तु आप प्राण और धन दोनों का हरण कर लेते हो।
* ''सामुद्रिकं वणिजं चोरपूर्वं शलाकधूर्तं च चिकित्सकं च ।
: ''अरिं च मित्रं च कुशीलवं च नैतान्साक्ष्येष्वधिकुर्वीत सप्त ॥
: हस्तरेखा व शरीर के लक्षणों के जानकार को, चोर व चोरी से व्यापारी बने व्यक्ति को, जुआरी को, चिकित्सक को, मित्र को तथा सेवक को - इन सातों को कभी अपना गवाह न बनाएँ, ये कभी भी पलट सकते हैं।
== डॉक्टर पर उक्तियाँ ==
* इस धरती पर सिर्फ दो भगवान् हैं, एक माँ और दूसरा डॉक्टर।
* हर वैध में हनुमान का वास है और वैध के लिए हर मरीज़ की जान भगवान् लक्ष्मण के सामान है।
* कोई दुआ काम नहीं करती, अगर अस्पतालों में डॉक्टर और उनकी लिखीं दवाएं काम नहीं करती।
* अभिभावकों के बाद जीवन की सुरक्षा का बीड़ा चिकित्सक ही उठाते हैं।
* डॉक्टर बिमारी का ईलाज करने से पूर्व मन का इलाज करते हैं।
* दवा से रोग ठीक हो जाते हैं, लेकिन रोगी को चिकित्सक ही ठीक कर सकते हैं। Carl Jung.
* माता पिता के बाद हमारे जीवन की देखभाल डॉक्टर ही करते है।
* जब हम ज़िंदगी और मौत की लड़ाई हारने लगते है, तो हमे जिताने की कोशिश मे सिर्फ डॉक्टर लग जाते है।
* ईश्वर सबके जीवन की रक्षा खुद से नही कर पाते इसलिए उन्होंने इस धरती पर अपने रूप में डॉक्टर को भेज दिया।
* डॉक्टर न केवल दवाइयां खाने की सलाह देते है बल्कि इससे दूरी बनाने को भी कहते हैं।
* डॉक्टर की लिखी दवा आँखों को भले समझ न आए, पर शरीर को ज़रूर समझ आती है।
* यदि आप अपने शरीर व सेहत को लेकर फिक्रमंद है तो आप स्वयं एक अच्छे डॉक्टर हैं।
* बीमारी से लड़ने की ताकत एक डॉक्टर ही हमे देता है।
* डॉक्टर की एक स्माइल ही मरीज के लिए दवा से कई असरदार होती है।
* बीमारी वह डॉक्टर है जिस पर हम सबसे ज्यादा ध्यान देते हैं; दया के लिए, ज्ञान के लिए, हम केवल वादा करते हैं; दर्द हम मानते हैं। Marcel Proust
* डॉक्टर इस वास्तविक संसार के वास्तविक हीरो होते है, जो जीवन की रक्षा करते है।
* एक अच्छा चिकित्सक दवाई कम और स्वास्थ्य सलाह अधिक देता हैं।
* हर मरीज अपने अंदर अपना डॉक्टर लेकर चलता है।
* सम्मान करिए हर चिकित्सक का क्यूंकि वह किरदार निभाता है एक रक्षक का।
* ज़िन्दगी जीना सिखाती होगी इंसान को, पर एक डॉक्टर ज़िंदा रखता है इंसान को।
* माँ हमारे जीवन की वो सबसे पहली डॉक्टर है, जो जीवन भर हमारी देखभाल करती है।
* जीवन को अच्छे तरीके से जीने के लिए अभिभावकों के बाद चिकित्सक की सलाह लेनी पडती हैं।
* उत्कृष्ट चिकित्सक ने चिकित्सा देखभाल के मानवीय पहलू पर लगातार जोर दिया।
* अधिकांश डॉक्टर अपनी शिक्षा के कैदी हैं और अपने पेशे से बेड़ियों में जकड़े हुए है. Richard Diaz.।
* मरीज़ों का ख्याल रखते-रखते एक डॉक्टर को न अपनी ज़िन्दगी का ख्याल रहता है और ना ही वक़्त का ख़याल रहता है
* मैं एक डॉक्टर हूँ - यह एक ऐसा पेशा है जिसे एक विशेष मिशन, एक भक्ति माना जा सकता है. Ewa Kopacz.।
* जिस तरह मंदिर मे भगवान होते है, उसी तरह हॉस्पिटल मे डॉक्टर ही हमारे भगवान होते है।
* मैंने सुना है डॉटर की पढाई बहुत मुश्किल होती है, और हो भी क्यों न भगवान् का रूप लेना कोई आसान काम नहीं।
* एक डॉक्टर हमे दवा का आदी नही बनाता, बल्कि दवा से कैसे दूर रहे उसकी सलाह ज्यादा देता है।
* हर मरीज़ का इलाज हो सके इसलिए खुदा को डॉक्टर का रूप लेना पड़ा।
* एक डॉक्टर भगवान् तक बात पहुंचने से पहले, इंसान को बचाने पहुँच जाता है
* मेरा यह दायित्व है कि मैं जो कुछ भी जानता हूं उसका उपयोग करके हर डॉक्टर और बेडसाइड और रोगी के लिए वास्तविक, प्रयोग करने योग्य चिकित्सा विज्ञान लाने की कोशिश करूं।
* एक डॉक्टर ही होता है जो रोते हुए आये हुए को हँसाते हुए भेजता है।
* 50 फीसदी बीमारी का इलाज चिकित्सक की सांत्वना से हो जाता हैं।
* हर मरीज़ से दर्द पूछने वाले डॉक्टर से कभी मिलो तो उसका हाल और दर्द तुम भी ज़रूर पूछ लेना।
* जन्म माता-पिता देते हैं, पर एक बच्चे का जन्म नहीं होता अगर एक डॉक्टर नहीं होता।
* एक डॉक्टर के दवा से कही ज्यादा उसके सुझाव कार्य करते है।
* हर मरीज़ का इलाज हो सके इसलिए खुदा को डॉक्टर का रूप लेना पड़ा।
* चिकित्सक को उसके उन उपयोगों के प्रति उपर्युक्त आदर दो, जो तुमने प्राप्त किये हैं, क्योंकि उसका स्रजन परमपिता ने किया हैं।
* बीमारी अपने आप दूर होने लगती है, जब डॉक्टर और अस्पताल पास में होते हैं।
* एक अच्छा डॉक्टर दवा कम ख्याल ज्यादा रखने की सलाह देता है।
* वो सोते नहीं ताकि मरीज़ की आँखे बंद न हों वो कोई और नहीं वो डॉक्टर ही हैं।
* ऐसा एक पल व्यतीत नहीं होता, जब एक डॉक्टर अपने मरीज़ के लिए चिंतित नहीं होता।
* डॉक्टर ही रियल हीरोज होते है जो हमारी जीवन रक्षा करते हैं।
* अब तो लोग भी डॉक्टर को भगवान् मानते हैं, तभी तो मंदिर जाने से पहले वो अस्पताल जाते हैं।
* भंयकर बीमारी को भी चिकित्सक अपनी सूझबूझ से जड़ से मिटा देते हैं।
* उसकी लिखाई भले ही गन्दी लगती हो पर मन उसका साफ़ होता है ,वो डॉक्टर है साहब हर मरीज़ को बचाना ही उसका ख़्वाब होता है।
* मरीज़ सोया है बिस्तर पर और डॉक्टर बिना पलके झपकाए बीमारी से लड़ता है।
* जीवन से प्यार करना एक डॉक्टर ही सीखा देते है।
* एक भगवान् राम ने इंसान के वेश में जन्म लिया था और एक डॉक्टर है जो भगवान् के रूर्प में धरती पर जन्मे हैं।
* अगर बीमारी है तो उसका इलाज जरूर है और अगर भगवान है, तो धरती पर उसका अस्तित्व जरूर है, जो की एक डॉक्टर के रूप मे है।
* कितना महान है हर डॉक्टर खुद को बुखार है, पर आराम करने की सलाह वो मरीज़ को देता है।
* एक चिकित्सक अपने मरीज के स्वास्थ्य को लेकर निरंतर व्यतीत रहता हैं।
* हर जख्म भर जाता है उसके दर पर आ कर वो अस्पताल भी भगवान् के घर से कुछ कम नहीं है।
* इस दुनिया मे नही पता चलता है किसी का करैक्टर आज भी लोगो के लिए दुसरे खुदा है डॉक्टर।
* एक डॉक्टर को कभी भी आपकी जाति या धर्म से मतलब नही होता उसके लिए सभी एक समान होते है।
* एक डॉक्टर जिसकी खुद की जान जोखिम में है, पर वह जोखिम में फंसे मरीज़ को जोखिम से निकालना ज्यादा ज़रूरी समझता है।
* परेशान लोगों की दुनिया में परेशानी से निकालने वाला शख्स केवल एक है डॉक्टर।
* एक शिक्षक जीने का तरीक़ा सिखाता है और एक चिकित्सक जीवित रखने में मदद करता है दोनों ही महत्वपूर्ण हैं।
* सेहत के सुधार के लिए जितनी दवाएं आवश्यक होती है उतना ही डॉ पर विश्वास की भी आवश्यक होती है ।
* एक डॉक्टर की मुस्कराहट उसके दवाओ से कही ज्यादा असर दिखाती है।
* वो दर्द भी देते है, वो दवा भी बेचते है,सुना है हमने वो तो डॉक्टरी के पेशे में है।
* डॉक्टर की पढाई पैसे कमाने के लिए बल्कि मानवता की सेवा के लिए होता हैं ।
* एक सफल डॉक्टर वही होता हैं, जिसके ह्रदय में करुणा के भाव होते हैं।
* मानवता की रक्षा सिर्फ ईश्वर ही नहीं, एक चिकित्सक भी करता हैं।
==इन्हें भी देखें==
* [[औषधि]]
* [[आयुर्वेद]]
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अनुनाद सिंह
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/* इन्हें भी देखें */
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'''वैद्य''' (परम्परागत भारतीय आयुर्वैदिक चिकित्सक) या डॉक्टर (आधुनिक नाम)। इनका कार्य रोगी के रोग का निदान करना तथा उसकी चिकित्सा करके रोगी को स्वस्थ बनाना है। 'वैद्य' का शाब्दिक अर्थ है, '[[विद्या]] से युक्त'।
== उक्तियाँ ==
* ''तत्त्वाधिगतशास्त्रार्थो दृष्टकर्मा स्वयंकृती।
: ''लघुहस्तः शुचिः शूरः सज्जोपस्करभेषजः॥
: ''प्रत्युत्पन्नमतिर्धीमान् व्यवसायी विशारदः।
: '' सत्यधर्मपरो यश्च स भिषक् पाद उच्यते॥ -- सुश्रुतसंहिता
: अर्थ - वैद्य उसे कहते हैं जो ठीक प्रकार से शास्त्र पढ़ा हुआ, ठीक प्रकार से शास्त्र का अर्थ समझा हुआ, छेदन स्नेहन आदि कर्मों को देखा एवं स्वयं किया हुआ, छेदन आदि शस्त्र-कर्मों में दक्ष हाथ वाला, बाहर एवं अन्दर से पवित्र (रज-तम रहित), शूर (विषाद रहित) , अग्रोपहरणीय अध्याय में वर्णित साज-सामान सहित, प्रत्युत्पन्नमति (उत्तम प्रतिभा-सूझ वाला), बुद्धिमान, व्यवसायी (उत्साहसम्पन्न), विशारद (पण्डित), सत्यनिष्ट, धर्मपरायण हो।
*'' संचयंच प्रकोपंच प्रसरं स्थानसंश्रयम्।
:'' व्यक्ति भेदंच यो वेत्ति दोषाणां स भवेद्धिषक् ॥ -- सुश्रुत संहिता २१/३६
: अर्थात दोषों का संचय, प्रकोप, प्रसर, स्थानसंश्रय, व्यक्ति और भेद को जो जानता है, वही यथार्थ वैद्य है। (इन्हें 'षट् क्रियाकाल' कहते हैं।)
* ''गुरोरधीताऽखिलवैद्यविद्यः पीयूषपाणिः कुशलः क्रियासु ।
: ''गतस्प्रहो धैर्यधरः कृपालुः शुद्धोऽधिकारी भिषगीदृशः स्यात् ॥'' -- वैद्यप्रशंसा
: जिसने अपने गुरुओं से सम्पूर्ण चिकित्सा विज्ञान सीखा हो, शल्यक्रिया करने में इतना कुशल हो कि मानो उसके हाथों में मृतक को भी जीवित करने वाला अमृत हो, ईर्ष्या से रहित, धैर्यवान, दयालु और सरल स्वभाव वाला हो , वही वैद्य वास्तव में एक आदर्श वैद्य होता है।
* ''सुश्रुतो न श्रुतो येन वाग्भटो येन वाग्भटः।
: ''नाधितश्च चरक येन स वैद्यो यम किङ्करः॥
: सुश्रुत जिसने सुना नहीं, वाग्भट्ट जिसे वाग्भट्ट (कंठस्थ) नहीं, चरक का जिसने चिकित्सा उपक्रम पढ़ा नहीं, वो वैद्य वैद्य नहीं, यम का दूत है।
* ''तर्कविहीनो वैद्यः लक्षण हीनश्च पण्डितो लोके ।
: ''भावविहीनो धर्मो नूनं हस्यन्ते त्रीण्यपि ॥
: तर्कविहीन वैद्य, लक्षणविहीन पंडित, और भावरहित धर्म – ये अवश्य ही जगत में हंसी के पात्र बनते हैं।
*'' वैद्यराज नमस्तुभ्यं यमराज सहोदर:।
:'' यमस्तु हरति प्राणान् वैद्य: प्राणान् धनानि च।
:हे यमराज के भाई वैद्यराज! तुम्हें प्रणाम। यमराज तो सिर्फ प्राणों का हरण करता है परन्तु आप प्राण और धन दोनों का हरण कर लेते हो।
* ''सामुद्रिकं वणिजं चोरपूर्वं शलाकधूर्तं च चिकित्सकं च ।
: ''अरिं च मित्रं च कुशीलवं च नैतान्साक्ष्येष्वधिकुर्वीत सप्त ॥
: हस्तरेखा व शरीर के लक्षणों के जानकार को, चोर व चोरी से व्यापारी बने व्यक्ति को, जुआरी को, चिकित्सक को, मित्र को तथा सेवक को - इन सातों को कभी अपना गवाह न बनाएँ, ये कभी भी पलट सकते हैं।
== डॉक्टर पर उक्तियाँ ==
* इस धरती पर सिर्फ दो भगवान् हैं, एक माँ और दूसरा डॉक्टर।
* हर वैध में हनुमान का वास है और वैध के लिए हर मरीज़ की जान भगवान् लक्ष्मण के सामान है।
* कोई दुआ काम नहीं करती, अगर अस्पतालों में डॉक्टर और उनकी लिखीं दवाएं काम नहीं करती।
* अभिभावकों के बाद जीवन की सुरक्षा का बीड़ा चिकित्सक ही उठाते हैं।
* डॉक्टर बिमारी का ईलाज करने से पूर्व मन का इलाज करते हैं।
* दवा से रोग ठीक हो जाते हैं, लेकिन रोगी को चिकित्सक ही ठीक कर सकते हैं। Carl Jung.
* माता पिता के बाद हमारे जीवन की देखभाल डॉक्टर ही करते है।
* जब हम ज़िंदगी और मौत की लड़ाई हारने लगते है, तो हमे जिताने की कोशिश मे सिर्फ डॉक्टर लग जाते है।
* ईश्वर सबके जीवन की रक्षा खुद से नही कर पाते इसलिए उन्होंने इस धरती पर अपने रूप में डॉक्टर को भेज दिया।
* डॉक्टर न केवल दवाइयां खाने की सलाह देते है बल्कि इससे दूरी बनाने को भी कहते हैं।
* डॉक्टर की लिखी दवा आँखों को भले समझ न आए, पर शरीर को ज़रूर समझ आती है।
* यदि आप अपने शरीर व सेहत को लेकर फिक्रमंद है तो आप स्वयं एक अच्छे डॉक्टर हैं।
* बीमारी से लड़ने की ताकत एक डॉक्टर ही हमे देता है।
* डॉक्टर की एक स्माइल ही मरीज के लिए दवा से कई असरदार होती है।
* बीमारी वह डॉक्टर है जिस पर हम सबसे ज्यादा ध्यान देते हैं; दया के लिए, ज्ञान के लिए, हम केवल वादा करते हैं; दर्द हम मानते हैं। Marcel Proust
* डॉक्टर इस वास्तविक संसार के वास्तविक हीरो होते है, जो जीवन की रक्षा करते है।
* एक अच्छा चिकित्सक दवाई कम और स्वास्थ्य सलाह अधिक देता हैं।
* हर मरीज अपने अंदर अपना डॉक्टर लेकर चलता है।
* सम्मान करिए हर चिकित्सक का क्यूंकि वह किरदार निभाता है एक रक्षक का।
* ज़िन्दगी जीना सिखाती होगी इंसान को, पर एक डॉक्टर ज़िंदा रखता है इंसान को।
* माँ हमारे जीवन की वो सबसे पहली डॉक्टर है, जो जीवन भर हमारी देखभाल करती है।
* जीवन को अच्छे तरीके से जीने के लिए अभिभावकों के बाद चिकित्सक की सलाह लेनी पडती हैं।
* उत्कृष्ट चिकित्सक ने चिकित्सा देखभाल के मानवीय पहलू पर लगातार जोर दिया।
* अधिकांश डॉक्टर अपनी शिक्षा के कैदी हैं और अपने पेशे से बेड़ियों में जकड़े हुए है. Richard Diaz.।
* मरीज़ों का ख्याल रखते-रखते एक डॉक्टर को न अपनी ज़िन्दगी का ख्याल रहता है और ना ही वक़्त का ख़याल रहता है
* मैं एक डॉक्टर हूँ - यह एक ऐसा पेशा है जिसे एक विशेष मिशन, एक भक्ति माना जा सकता है. Ewa Kopacz.।
* जिस तरह मंदिर मे भगवान होते है, उसी तरह हॉस्पिटल मे डॉक्टर ही हमारे भगवान होते है।
* मैंने सुना है डॉटर की पढाई बहुत मुश्किल होती है, और हो भी क्यों न भगवान् का रूप लेना कोई आसान काम नहीं।
* एक डॉक्टर हमे दवा का आदी नही बनाता, बल्कि दवा से कैसे दूर रहे उसकी सलाह ज्यादा देता है।
* हर मरीज़ का इलाज हो सके इसलिए खुदा को डॉक्टर का रूप लेना पड़ा।
* एक डॉक्टर भगवान् तक बात पहुंचने से पहले, इंसान को बचाने पहुँच जाता है
* मेरा यह दायित्व है कि मैं जो कुछ भी जानता हूं उसका उपयोग करके हर डॉक्टर और बेडसाइड और रोगी के लिए वास्तविक, प्रयोग करने योग्य चिकित्सा विज्ञान लाने की कोशिश करूं।
* एक डॉक्टर ही होता है जो रोते हुए आये हुए को हँसाते हुए भेजता है।
* 50 फीसदी बीमारी का इलाज चिकित्सक की सांत्वना से हो जाता हैं।
* हर मरीज़ से दर्द पूछने वाले डॉक्टर से कभी मिलो तो उसका हाल और दर्द तुम भी ज़रूर पूछ लेना।
* जन्म माता-पिता देते हैं, पर एक बच्चे का जन्म नहीं होता अगर एक डॉक्टर नहीं होता।
* एक डॉक्टर के दवा से कही ज्यादा उसके सुझाव कार्य करते है।
* हर मरीज़ का इलाज हो सके इसलिए खुदा को डॉक्टर का रूप लेना पड़ा।
* चिकित्सक को उसके उन उपयोगों के प्रति उपर्युक्त आदर दो, जो तुमने प्राप्त किये हैं, क्योंकि उसका स्रजन परमपिता ने किया हैं।
* बीमारी अपने आप दूर होने लगती है, जब डॉक्टर और अस्पताल पास में होते हैं।
* एक अच्छा डॉक्टर दवा कम ख्याल ज्यादा रखने की सलाह देता है।
* वो सोते नहीं ताकि मरीज़ की आँखे बंद न हों वो कोई और नहीं वो डॉक्टर ही हैं।
* ऐसा एक पल व्यतीत नहीं होता, जब एक डॉक्टर अपने मरीज़ के लिए चिंतित नहीं होता।
* डॉक्टर ही रियल हीरोज होते है जो हमारी जीवन रक्षा करते हैं।
* अब तो लोग भी डॉक्टर को भगवान् मानते हैं, तभी तो मंदिर जाने से पहले वो अस्पताल जाते हैं।
* भंयकर बीमारी को भी चिकित्सक अपनी सूझबूझ से जड़ से मिटा देते हैं।
* उसकी लिखाई भले ही गन्दी लगती हो पर मन उसका साफ़ होता है ,वो डॉक्टर है साहब हर मरीज़ को बचाना ही उसका ख़्वाब होता है।
* मरीज़ सोया है बिस्तर पर और डॉक्टर बिना पलके झपकाए बीमारी से लड़ता है।
* जीवन से प्यार करना एक डॉक्टर ही सीखा देते है।
* एक भगवान् राम ने इंसान के वेश में जन्म लिया था और एक डॉक्टर है जो भगवान् के रूर्प में धरती पर जन्मे हैं।
* अगर बीमारी है तो उसका इलाज जरूर है और अगर भगवान है, तो धरती पर उसका अस्तित्व जरूर है, जो की एक डॉक्टर के रूप मे है।
* कितना महान है हर डॉक्टर खुद को बुखार है, पर आराम करने की सलाह वो मरीज़ को देता है।
* एक चिकित्सक अपने मरीज के स्वास्थ्य को लेकर निरंतर व्यतीत रहता हैं।
* हर जख्म भर जाता है उसके दर पर आ कर वो अस्पताल भी भगवान् के घर से कुछ कम नहीं है।
* इस दुनिया मे नही पता चलता है किसी का करैक्टर आज भी लोगो के लिए दुसरे खुदा है डॉक्टर।
* एक डॉक्टर को कभी भी आपकी जाति या धर्म से मतलब नही होता उसके लिए सभी एक समान होते है।
* एक डॉक्टर जिसकी खुद की जान जोखिम में है, पर वह जोखिम में फंसे मरीज़ को जोखिम से निकालना ज्यादा ज़रूरी समझता है।
* परेशान लोगों की दुनिया में परेशानी से निकालने वाला शख्स केवल एक है डॉक्टर।
* एक शिक्षक जीने का तरीक़ा सिखाता है और एक चिकित्सक जीवित रखने में मदद करता है दोनों ही महत्वपूर्ण हैं।
* सेहत के सुधार के लिए जितनी दवाएं आवश्यक होती है उतना ही डॉ पर विश्वास की भी आवश्यक होती है ।
* एक डॉक्टर की मुस्कराहट उसके दवाओ से कही ज्यादा असर दिखाती है।
* वो दर्द भी देते है, वो दवा भी बेचते है,सुना है हमने वो तो डॉक्टरी के पेशे में है।
* डॉक्टर की पढाई पैसे कमाने के लिए बल्कि मानवता की सेवा के लिए होता हैं ।
* एक सफल डॉक्टर वही होता हैं, जिसके ह्रदय में करुणा के भाव होते हैं।
* मानवता की रक्षा सिर्फ ईश्वर ही नहीं, एक चिकित्सक भी करता हैं।
==इन्हें भी देखें==
* [[औषधि]]
* [[आयुर्वेद]]
== बाह्य कड़ियाँ ==
*[https://archive.org/details/ClZO_vaidyakiya-subhashita-sahityam-by-bhaskar-govind-ghadekar-series-no.-184-kashi-sanskrit-series/mode/2up वैद्यकीय सुभाषित साहित्यम्] (लेखक - भास्कर गोविन्द घाणेकर)
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अनुनाद सिंह
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text/x-wiki
'''[[:w:वैद्य|वैद्य]]''' (परम्परागत भारतीय आयुर्वैदिक चिकित्सक) या डॉक्टर (आधुनिक नाम)। इनका कार्य रोगी के रोग का निदान करना तथा उसकी चिकित्सा करके रोगी को स्वस्थ बनाना है। 'वैद्य' का शाब्दिक अर्थ है, '[[विद्या]] से युक्त'।
== उक्तियाँ ==
* ''तत्त्वाधिगतशास्त्रार्थो दृष्टकर्मा स्वयंकृती।
: ''लघुहस्तः शुचिः शूरः सज्जोपस्करभेषजः॥
: ''प्रत्युत्पन्नमतिर्धीमान् व्यवसायी विशारदः।
: '' सत्यधर्मपरो यश्च स भिषक् पाद उच्यते॥ -- सुश्रुतसंहिता
: अर्थ - वैद्य उसे कहते हैं जो ठीक प्रकार से शास्त्र पढ़ा हुआ, ठीक प्रकार से शास्त्र का अर्थ समझा हुआ, छेदन स्नेहन आदि कर्मों को देखा एवं स्वयं किया हुआ, छेदन आदि शस्त्र-कर्मों में दक्ष हाथ वाला, बाहर एवं अन्दर से पवित्र (रज-तम रहित), शूर (विषाद रहित) , अग्रोपहरणीय अध्याय में वर्णित साज-सामान सहित, प्रत्युत्पन्नमति (उत्तम प्रतिभा-सूझ वाला), बुद्धिमान, व्यवसायी (उत्साहसम्पन्न), विशारद (पण्डित), सत्यनिष्ट, धर्मपरायण हो।
*'' संचयंच प्रकोपंच प्रसरं स्थानसंश्रयम्।
:'' व्यक्ति भेदंच यो वेत्ति दोषाणां स भवेद्धिषक् ॥ -- सुश्रुत संहिता २१/३६
: अर्थात दोषों का संचय, प्रकोप, प्रसर, स्थानसंश्रय, व्यक्ति और भेद को जो जानता है, वही यथार्थ वैद्य है। (इन्हें 'षट् क्रियाकाल' कहते हैं।)
* ''गुरोरधीताऽखिलवैद्यविद्यः पीयूषपाणिः कुशलः क्रियासु ।
: ''गतस्प्रहो धैर्यधरः कृपालुः शुद्धोऽधिकारी भिषगीदृशः स्यात् ॥'' -- वैद्यप्रशंसा
: जिसने अपने गुरुओं से सम्पूर्ण चिकित्सा विज्ञान सीखा हो, शल्यक्रिया करने में इतना कुशल हो कि मानो उसके हाथों में मृतक को भी जीवित करने वाला अमृत हो, ईर्ष्या से रहित, धैर्यवान, दयालु और सरल स्वभाव वाला हो , वही वैद्य वास्तव में एक आदर्श वैद्य होता है।
* ''सुश्रुतो न श्रुतो येन वाग्भटो येन वाग्भटः।
: ''नाधितश्च चरक येन स वैद्यो यम किङ्करः॥
: सुश्रुत जिसने सुना नहीं, वाग्भट्ट जिसे वाग्भट्ट (कंठस्थ) नहीं, चरक का जिसने चिकित्सा उपक्रम पढ़ा नहीं, वो वैद्य वैद्य नहीं, यम का दूत है।
* ''तर्कविहीनो वैद्यः लक्षण हीनश्च पण्डितो लोके ।
: ''भावविहीनो धर्मो नूनं हस्यन्ते त्रीण्यपि ॥
: तर्कविहीन वैद्य, लक्षणविहीन पंडित, और भावरहित धर्म – ये अवश्य ही जगत में हंसी के पात्र बनते हैं।
*'' वैद्यराज नमस्तुभ्यं यमराज सहोदर:।
:'' यमस्तु हरति प्राणान् वैद्य: प्राणान् धनानि च।
:हे यमराज के भाई वैद्यराज! तुम्हें प्रणाम। यमराज तो सिर्फ प्राणों का हरण करता है परन्तु आप प्राण और धन दोनों का हरण कर लेते हो।
* ''सामुद्रिकं वणिजं चोरपूर्वं शलाकधूर्तं च चिकित्सकं च ।
: ''अरिं च मित्रं च कुशीलवं च नैतान्साक्ष्येष्वधिकुर्वीत सप्त ॥
: हस्तरेखा व शरीर के लक्षणों के जानकार को, चोर व चोरी से व्यापारी बने व्यक्ति को, जुआरी को, चिकित्सक को, मित्र को तथा सेवक को - इन सातों को कभी अपना गवाह न बनाएँ, ये कभी भी पलट सकते हैं।
* सचिव बैद गुर तीनि जौं, प्रिय बोलाहि भय आस।
: राज धरम तन तीनि कर, होइ बेगिहें नास॥ -- [[तुलसीदास]]
: तुलसीदास जी कहते है कि यदि [[गुरु]], वैद्य और [[मंत्री]] से डर या लाभ की आशा से अच्छा बोलते है तो [[धर्म]], [[शरीर]] और [[राज्य]] इन तीनों का विनाश शीघ्र ही तय है।
== डॉक्टर पर उक्तियाँ ==
* इस धरती पर सिर्फ दो भगवान् हैं, एक माँ और दूसरा डॉक्टर।
* हर वैध में हनुमान का वास है और वैध के लिए हर मरीज़ की जान भगवान् लक्ष्मण के सामान है।
* कोई दुआ काम नहीं करती, अगर अस्पतालों में डॉक्टर और उनकी लिखीं दवाएं काम नहीं करती।
* अभिभावकों के बाद जीवन की सुरक्षा का बीड़ा चिकित्सक ही उठाते हैं।
* डॉक्टर बिमारी का ईलाज करने से पूर्व मन का इलाज करते हैं।
* दवा से रोग ठीक हो जाते हैं, लेकिन रोगी को चिकित्सक ही ठीक कर सकते हैं। Carl Jung.
* माता पिता के बाद हमारे जीवन की देखभाल डॉक्टर ही करते है।
* जब हम ज़िंदगी और मौत की लड़ाई हारने लगते है, तो हमे जिताने की कोशिश मे सिर्फ डॉक्टर लग जाते है।
* ईश्वर सबके जीवन की रक्षा खुद से नही कर पाते इसलिए उन्होंने इस धरती पर अपने रूप में डॉक्टर को भेज दिया।
* डॉक्टर न केवल दवाइयां खाने की सलाह देते है बल्कि इससे दूरी बनाने को भी कहते हैं।
* डॉक्टर की लिखी दवा आँखों को भले समझ न आए, पर शरीर को ज़रूर समझ आती है।
* यदि आप अपने शरीर व सेहत को लेकर फिक्रमंद है तो आप स्वयं एक अच्छे डॉक्टर हैं।
* बीमारी से लड़ने की ताकत एक डॉक्टर ही हमे देता है।
* डॉक्टर की एक स्माइल ही मरीज के लिए दवा से कई असरदार होती है।
* बीमारी वह डॉक्टर है जिस पर हम सबसे ज्यादा ध्यान देते हैं; दया के लिए, ज्ञान के लिए, हम केवल वादा करते हैं; दर्द हम मानते हैं। Marcel Proust
* डॉक्टर इस वास्तविक संसार के वास्तविक हीरो होते है, जो जीवन की रक्षा करते है।
* एक अच्छा चिकित्सक दवाई कम और स्वास्थ्य सलाह अधिक देता हैं।
* हर मरीज अपने अंदर अपना डॉक्टर लेकर चलता है।
* सम्मान करिए हर चिकित्सक का क्यूंकि वह किरदार निभाता है एक रक्षक का।
* ज़िन्दगी जीना सिखाती होगी इंसान को, पर एक डॉक्टर ज़िंदा रखता है इंसान को।
* माँ हमारे जीवन की वो सबसे पहली डॉक्टर है, जो जीवन भर हमारी देखभाल करती है।
* जीवन को अच्छे तरीके से जीने के लिए अभिभावकों के बाद चिकित्सक की सलाह लेनी पडती हैं।
* उत्कृष्ट चिकित्सक ने चिकित्सा देखभाल के मानवीय पहलू पर लगातार जोर दिया।
* अधिकांश डॉक्टर अपनी शिक्षा के कैदी हैं और अपने पेशे से बेड़ियों में जकड़े हुए है. Richard Diaz.।
* मरीज़ों का ख्याल रखते-रखते एक डॉक्टर को न अपनी ज़िन्दगी का ख्याल रहता है और ना ही वक़्त का ख़याल रहता है
* मैं एक डॉक्टर हूँ - यह एक ऐसा पेशा है जिसे एक विशेष मिशन, एक भक्ति माना जा सकता है. Ewa Kopacz.।
* जिस तरह मंदिर मे भगवान होते है, उसी तरह हॉस्पिटल मे डॉक्टर ही हमारे भगवान होते है।
* मैंने सुना है डॉटर की पढाई बहुत मुश्किल होती है, और हो भी क्यों न भगवान् का रूप लेना कोई आसान काम नहीं।
* एक डॉक्टर हमे दवा का आदी नही बनाता, बल्कि दवा से कैसे दूर रहे उसकी सलाह ज्यादा देता है।
* हर मरीज़ का इलाज हो सके इसलिए खुदा को डॉक्टर का रूप लेना पड़ा।
* एक डॉक्टर भगवान् तक बात पहुंचने से पहले, इंसान को बचाने पहुँच जाता है
* मेरा यह दायित्व है कि मैं जो कुछ भी जानता हूं उसका उपयोग करके हर डॉक्टर और बेडसाइड और रोगी के लिए वास्तविक, प्रयोग करने योग्य चिकित्सा विज्ञान लाने की कोशिश करूं।
* एक डॉक्टर ही होता है जो रोते हुए आये हुए को हँसाते हुए भेजता है।
* 50 फीसदी बीमारी का इलाज चिकित्सक की सांत्वना से हो जाता हैं।
* हर मरीज़ से दर्द पूछने वाले डॉक्टर से कभी मिलो तो उसका हाल और दर्द तुम भी ज़रूर पूछ लेना।
* जन्म माता-पिता देते हैं, पर एक बच्चे का जन्म नहीं होता अगर एक डॉक्टर नहीं होता।
* एक डॉक्टर के दवा से कही ज्यादा उसके सुझाव कार्य करते है।
* हर मरीज़ का इलाज हो सके इसलिए खुदा को डॉक्टर का रूप लेना पड़ा।
* चिकित्सक को उसके उन उपयोगों के प्रति उपर्युक्त आदर दो, जो तुमने प्राप्त किये हैं, क्योंकि उसका स्रजन परमपिता ने किया हैं।
* बीमारी अपने आप दूर होने लगती है, जब डॉक्टर और अस्पताल पास में होते हैं।
* एक अच्छा डॉक्टर दवा कम ख्याल ज्यादा रखने की सलाह देता है।
* वो सोते नहीं ताकि मरीज़ की आँखे बंद न हों वो कोई और नहीं वो डॉक्टर ही हैं।
* ऐसा एक पल व्यतीत नहीं होता, जब एक डॉक्टर अपने मरीज़ के लिए चिंतित नहीं होता।
* डॉक्टर ही रियल हीरोज होते है जो हमारी जीवन रक्षा करते हैं।
* अब तो लोग भी डॉक्टर को भगवान् मानते हैं, तभी तो मंदिर जाने से पहले वो अस्पताल जाते हैं।
* भंयकर बीमारी को भी चिकित्सक अपनी सूझबूझ से जड़ से मिटा देते हैं।
* उसकी लिखाई भले ही गन्दी लगती हो पर मन उसका साफ़ होता है ,वो डॉक्टर है साहब हर मरीज़ को बचाना ही उसका ख़्वाब होता है।
* मरीज़ सोया है बिस्तर पर और डॉक्टर बिना पलके झपकाए बीमारी से लड़ता है।
* जीवन से प्यार करना एक डॉक्टर ही सीखा देते है।
* एक भगवान् राम ने इंसान के वेश में जन्म लिया था और एक डॉक्टर है जो भगवान् के रूर्प में धरती पर जन्मे हैं।
* अगर बीमारी है तो उसका इलाज जरूर है और अगर भगवान है, तो धरती पर उसका अस्तित्व जरूर है, जो की एक डॉक्टर के रूप मे है।
* कितना महान है हर डॉक्टर खुद को बुखार है, पर आराम करने की सलाह वो मरीज़ को देता है।
* एक चिकित्सक अपने मरीज के स्वास्थ्य को लेकर निरंतर व्यतीत रहता हैं।
* हर जख्म भर जाता है उसके दर पर आ कर वो अस्पताल भी भगवान् के घर से कुछ कम नहीं है।
* इस दुनिया मे नही पता चलता है किसी का करैक्टर आज भी लोगो के लिए दुसरे खुदा है डॉक्टर।
* एक डॉक्टर को कभी भी आपकी जाति या धर्म से मतलब नही होता उसके लिए सभी एक समान होते है।
* एक डॉक्टर जिसकी खुद की जान जोखिम में है, पर वह जोखिम में फंसे मरीज़ को जोखिम से निकालना ज्यादा ज़रूरी समझता है।
* परेशान लोगों की दुनिया में परेशानी से निकालने वाला शख्स केवल एक है डॉक्टर।
* एक शिक्षक जीने का तरीक़ा सिखाता है और एक चिकित्सक जीवित रखने में मदद करता है दोनों ही महत्वपूर्ण हैं।
* सेहत के सुधार के लिए जितनी दवाएं आवश्यक होती है उतना ही डॉ पर विश्वास की भी आवश्यक होती है ।
* एक डॉक्टर की मुस्कराहट उसके दवाओ से कही ज्यादा असर दिखाती है।
* वो दर्द भी देते है, वो दवा भी बेचते है,सुना है हमने वो तो डॉक्टरी के पेशे में है।
* डॉक्टर की पढाई पैसे कमाने के लिए बल्कि मानवता की सेवा के लिए होता हैं ।
* एक सफल डॉक्टर वही होता हैं, जिसके ह्रदय में करुणा के भाव होते हैं।
* मानवता की रक्षा सिर्फ ईश्वर ही नहीं, एक चिकित्सक भी करता हैं।
==इन्हें भी देखें==
* [[औषधि]]
* [[आयुर्वेद]]
== बाह्य कड़ियाँ ==
*[https://archive.org/details/ClZO_vaidyakiya-subhashita-sahityam-by-bhaskar-govind-ghadekar-series-no.-184-kashi-sanskrit-series/mode/2up वैद्यकीय सुभाषित साहित्यम्] (लेखक - भास्कर गोविन्द घाणेकर)
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'''[[:w:वैद्य|वैद्य]]''' (परम्परागत भारतीय आयुर्वैदिक चिकित्सक) या डॉक्टर (आधुनिक नाम)। इनका कार्य रोगी के रोग का निदान करना तथा उसकी चिकित्सा करके रोगी को स्वस्थ बनाना है। 'वैद्य' का शाब्दिक अर्थ है, '[[विद्या]] से युक्त'।
== उक्तियाँ ==
* ''तत्त्वाधिगतशास्त्रार्थो दृष्टकर्मा स्वयंकृती।
: ''लघुहस्तः शुचिः शूरः सज्जोपस्करभेषजः॥
: ''प्रत्युत्पन्नमतिर्धीमान् व्यवसायी विशारदः।
: '' सत्यधर्मपरो यश्च स भिषक् पाद उच्यते॥ -- सुश्रुतसंहिता
: अर्थ - वैद्य उसे कहते हैं जो ठीक प्रकार से शास्त्र पढ़ा हुआ, ठीक प्रकार से शास्त्र का अर्थ समझा हुआ, छेदन स्नेहन आदि कर्मों को देखा एवं स्वयं किया हुआ, छेदन आदि शस्त्र-कर्मों में दक्ष हाथ वाला, बाहर एवं अन्दर से पवित्र (रज-तम रहित), शूर (विषाद रहित) , अग्रोपहरणीय अध्याय में वर्णित साज-सामान सहित, प्रत्युत्पन्नमति (उत्तम प्रतिभा-सूझ वाला), बुद्धिमान, व्यवसायी (उत्साहसम्पन्न), विशारद (पण्डित), सत्यनिष्ट, धर्मपरायण हो।
*'' संचयंच प्रकोपंच प्रसरं स्थानसंश्रयम्।
:'' व्यक्ति भेदंच यो वेत्ति दोषाणां स भवेद्धिषक् ॥ -- सुश्रुत संहिता २१/३६
: अर्थात दोषों का संचय, प्रकोप, प्रसर, स्थानसंश्रय, व्यक्ति और भेद को जो जानता है, वही यथार्थ वैद्य है। (इन्हें 'षट् क्रियाकाल' कहते हैं।)
* ''गुरोरधीताऽखिलवैद्यविद्यः पीयूषपाणिः कुशलः क्रियासु ।
: ''गतस्प्रहो धैर्यधरः कृपालुः शुद्धोऽधिकारी भिषगीदृशः स्यात् ॥'' -- वैद्यप्रशंसा
: जिसने अपने गुरुओं से सम्पूर्ण चिकित्सा विज्ञान सीखा हो, शल्यक्रिया करने में इतना कुशल हो कि मानो उसके हाथों में मृतक को भी जीवित करने वाला अमृत हो, ईर्ष्या से रहित, धैर्यवान, दयालु और सरल स्वभाव वाला हो , वही वैद्य वास्तव में एक आदर्श वैद्य होता है।
* ''सुश्रुतो न श्रुतो येन वाग्भटो येन वाग्भटः।
: ''नाधितश्च चरक येन स वैद्यो यम किङ्करः॥
: सुश्रुत जिसने सुना नहीं, वाग्भट्ट जिसे वाग्भट्ट (कंठस्थ) नहीं, चरक का जिसने चिकित्सा उपक्रम पढ़ा नहीं, वो वैद्य वैद्य नहीं, यम का दूत है।
* ''तर्कविहीनो वैद्यः लक्षण हीनश्च पण्डितो लोके ।
: ''भावविहीनो धर्मो नूनं हस्यन्ते त्रीण्यपि ॥
: तर्कविहीन वैद्य, लक्षणविहीन पंडित, और भावरहित धर्म – ये अवश्य ही जगत में हंसी के पात्र बनते हैं।
*'' वैद्यराज नमस्तुभ्यं यमराज सहोदर:।
:'' यमस्तु हरति प्राणान् वैद्य: प्राणान् धनानि च।
:हे यमराज के भाई वैद्यराज! तुम्हें प्रणाम। यमराज तो सिर्फ प्राणों का हरण करता है परन्तु आप प्राण और धन दोनों का हरण कर लेते हो।
* ''सामुद्रिकं वणिजं चोरपूर्वं शलाकधूर्तं च चिकित्सकं च ।
: ''अरिं च मित्रं च कुशीलवं च नैतान्साक्ष्येष्वधिकुर्वीत सप्त ॥
: हस्तरेखा व शरीर के लक्षणों के जानकार को, चोर व चोरी से व्यापारी बने व्यक्ति को, जुआरी को, चिकित्सक को, मित्र को तथा सेवक को - इन सातों को कभी अपना गवाह न बनाएँ, ये कभी भी पलट सकते हैं।
*''वैद्यो गुरुश्च मन्त्री च यस्य राज्ञः प्रियंवदाः ।
: ''शरीर-धर्म-कोशेभ्यः क्षिप्रं स परिहीयते॥'' -- हितोपदेश
: जिस राजा के वैद्य, गुरु और मन्त्री प्रिय बोल्ने वाले होते हैं, उस राजा का शरीर, धर्म और राजकोश शीघ्र ही नष्ट हो जाता है।
* सचिव बैद गुर तीनि जौं, प्रिय बोलाहि भय आस।
: राज धरम तन तीनि कर, होइ बेगिहें नास॥ -- [[तुलसीदास]]
: तुलसीदास जी कहते है कि यदि [[गुरु]], वैद्य और [[मंत्री]] से डर या लाभ की आशा से अच्छा बोलते है तो [[धर्म]], [[शरीर]] और [[राज्य]] इन तीनों का विनाश शीघ्र ही तय है।
== डॉक्टर पर उक्तियाँ ==
* इस धरती पर सिर्फ दो भगवान् हैं, एक माँ और दूसरा डॉक्टर।
* हर वैध में हनुमान का वास है और वैध के लिए हर मरीज़ की जान भगवान् लक्ष्मण के सामान है।
* कोई दुआ काम नहीं करती, अगर अस्पतालों में डॉक्टर और उनकी लिखीं दवाएं काम नहीं करती।
* अभिभावकों के बाद जीवन की सुरक्षा का बीड़ा चिकित्सक ही उठाते हैं।
* डॉक्टर बिमारी का ईलाज करने से पूर्व मन का इलाज करते हैं।
* दवा से रोग ठीक हो जाते हैं, लेकिन रोगी को चिकित्सक ही ठीक कर सकते हैं। Carl Jung.
* माता पिता के बाद हमारे जीवन की देखभाल डॉक्टर ही करते है।
* जब हम ज़िंदगी और मौत की लड़ाई हारने लगते है, तो हमे जिताने की कोशिश मे सिर्फ डॉक्टर लग जाते है।
* ईश्वर सबके जीवन की रक्षा खुद से नही कर पाते इसलिए उन्होंने इस धरती पर अपने रूप में डॉक्टर को भेज दिया।
* डॉक्टर न केवल दवाइयां खाने की सलाह देते है बल्कि इससे दूरी बनाने को भी कहते हैं।
* डॉक्टर की लिखी दवा आँखों को भले समझ न आए, पर शरीर को ज़रूर समझ आती है।
* यदि आप अपने शरीर व सेहत को लेकर फिक्रमंद है तो आप स्वयं एक अच्छे डॉक्टर हैं।
* बीमारी से लड़ने की ताकत एक डॉक्टर ही हमे देता है।
* डॉक्टर की एक स्माइल ही मरीज के लिए दवा से कई असरदार होती है।
* बीमारी वह डॉक्टर है जिस पर हम सबसे ज्यादा ध्यान देते हैं; दया के लिए, ज्ञान के लिए, हम केवल वादा करते हैं; दर्द हम मानते हैं। Marcel Proust
* डॉक्टर इस वास्तविक संसार के वास्तविक हीरो होते है, जो जीवन की रक्षा करते है।
* एक अच्छा चिकित्सक दवाई कम और स्वास्थ्य सलाह अधिक देता हैं।
* हर मरीज अपने अंदर अपना डॉक्टर लेकर चलता है।
* सम्मान करिए हर चिकित्सक का क्यूंकि वह किरदार निभाता है एक रक्षक का।
* ज़िन्दगी जीना सिखाती होगी इंसान को, पर एक डॉक्टर ज़िंदा रखता है इंसान को।
* माँ हमारे जीवन की वो सबसे पहली डॉक्टर है, जो जीवन भर हमारी देखभाल करती है।
* जीवन को अच्छे तरीके से जीने के लिए अभिभावकों के बाद चिकित्सक की सलाह लेनी पडती हैं।
* उत्कृष्ट चिकित्सक ने चिकित्सा देखभाल के मानवीय पहलू पर लगातार जोर दिया।
* अधिकांश डॉक्टर अपनी शिक्षा के कैदी हैं और अपने पेशे से बेड़ियों में जकड़े हुए है. Richard Diaz.।
* मरीज़ों का ख्याल रखते-रखते एक डॉक्टर को न अपनी ज़िन्दगी का ख्याल रहता है और ना ही वक़्त का ख़याल रहता है
* मैं एक डॉक्टर हूँ - यह एक ऐसा पेशा है जिसे एक विशेष मिशन, एक भक्ति माना जा सकता है. Ewa Kopacz.।
* जिस तरह मंदिर मे भगवान होते है, उसी तरह हॉस्पिटल मे डॉक्टर ही हमारे भगवान होते है।
* मैंने सुना है डॉटर की पढाई बहुत मुश्किल होती है, और हो भी क्यों न भगवान् का रूप लेना कोई आसान काम नहीं।
* एक डॉक्टर हमे दवा का आदी नही बनाता, बल्कि दवा से कैसे दूर रहे उसकी सलाह ज्यादा देता है।
* हर मरीज़ का इलाज हो सके इसलिए खुदा को डॉक्टर का रूप लेना पड़ा।
* एक डॉक्टर भगवान् तक बात पहुंचने से पहले, इंसान को बचाने पहुँच जाता है
* मेरा यह दायित्व है कि मैं जो कुछ भी जानता हूं उसका उपयोग करके हर डॉक्टर और बेडसाइड और रोगी के लिए वास्तविक, प्रयोग करने योग्य चिकित्सा विज्ञान लाने की कोशिश करूं।
* एक डॉक्टर ही होता है जो रोते हुए आये हुए को हँसाते हुए भेजता है।
* 50 फीसदी बीमारी का इलाज चिकित्सक की सांत्वना से हो जाता हैं।
* हर मरीज़ से दर्द पूछने वाले डॉक्टर से कभी मिलो तो उसका हाल और दर्द तुम भी ज़रूर पूछ लेना।
* जन्म माता-पिता देते हैं, पर एक बच्चे का जन्म नहीं होता अगर एक डॉक्टर नहीं होता।
* एक डॉक्टर के दवा से कही ज्यादा उसके सुझाव कार्य करते है।
* हर मरीज़ का इलाज हो सके इसलिए खुदा को डॉक्टर का रूप लेना पड़ा।
* चिकित्सक को उसके उन उपयोगों के प्रति उपर्युक्त आदर दो, जो तुमने प्राप्त किये हैं, क्योंकि उसका स्रजन परमपिता ने किया हैं।
* बीमारी अपने आप दूर होने लगती है, जब डॉक्टर और अस्पताल पास में होते हैं।
* एक अच्छा डॉक्टर दवा कम ख्याल ज्यादा रखने की सलाह देता है।
* वो सोते नहीं ताकि मरीज़ की आँखे बंद न हों वो कोई और नहीं वो डॉक्टर ही हैं।
* ऐसा एक पल व्यतीत नहीं होता, जब एक डॉक्टर अपने मरीज़ के लिए चिंतित नहीं होता।
* डॉक्टर ही रियल हीरोज होते है जो हमारी जीवन रक्षा करते हैं।
* अब तो लोग भी डॉक्टर को भगवान् मानते हैं, तभी तो मंदिर जाने से पहले वो अस्पताल जाते हैं।
* भंयकर बीमारी को भी चिकित्सक अपनी सूझबूझ से जड़ से मिटा देते हैं।
* उसकी लिखाई भले ही गन्दी लगती हो पर मन उसका साफ़ होता है ,वो डॉक्टर है साहब हर मरीज़ को बचाना ही उसका ख़्वाब होता है।
* मरीज़ सोया है बिस्तर पर और डॉक्टर बिना पलके झपकाए बीमारी से लड़ता है।
* जीवन से प्यार करना एक डॉक्टर ही सीखा देते है।
* एक भगवान् राम ने इंसान के वेश में जन्म लिया था और एक डॉक्टर है जो भगवान् के रूर्प में धरती पर जन्मे हैं।
* अगर बीमारी है तो उसका इलाज जरूर है और अगर भगवान है, तो धरती पर उसका अस्तित्व जरूर है, जो की एक डॉक्टर के रूप मे है।
* कितना महान है हर डॉक्टर खुद को बुखार है, पर आराम करने की सलाह वो मरीज़ को देता है।
* एक चिकित्सक अपने मरीज के स्वास्थ्य को लेकर निरंतर व्यतीत रहता हैं।
* हर जख्म भर जाता है उसके दर पर आ कर वो अस्पताल भी भगवान् के घर से कुछ कम नहीं है।
* इस दुनिया मे नही पता चलता है किसी का करैक्टर आज भी लोगो के लिए दुसरे खुदा है डॉक्टर।
* एक डॉक्टर को कभी भी आपकी जाति या धर्म से मतलब नही होता उसके लिए सभी एक समान होते है।
* एक डॉक्टर जिसकी खुद की जान जोखिम में है, पर वह जोखिम में फंसे मरीज़ को जोखिम से निकालना ज्यादा ज़रूरी समझता है।
* परेशान लोगों की दुनिया में परेशानी से निकालने वाला शख्स केवल एक है डॉक्टर।
* एक शिक्षक जीने का तरीक़ा सिखाता है और एक चिकित्सक जीवित रखने में मदद करता है दोनों ही महत्वपूर्ण हैं।
* सेहत के सुधार के लिए जितनी दवाएं आवश्यक होती है उतना ही डॉ पर विश्वास की भी आवश्यक होती है ।
* एक डॉक्टर की मुस्कराहट उसके दवाओ से कही ज्यादा असर दिखाती है।
* वो दर्द भी देते है, वो दवा भी बेचते है,सुना है हमने वो तो डॉक्टरी के पेशे में है।
* डॉक्टर की पढाई पैसे कमाने के लिए बल्कि मानवता की सेवा के लिए होता हैं ।
* एक सफल डॉक्टर वही होता हैं, जिसके ह्रदय में करुणा के भाव होते हैं।
* मानवता की रक्षा सिर्फ ईश्वर ही नहीं, एक चिकित्सक भी करता हैं।
==इन्हें भी देखें==
* [[औषधि]]
* [[आयुर्वेद]]
== बाह्य कड़ियाँ ==
*[https://archive.org/details/ClZO_vaidyakiya-subhashita-sahityam-by-bhaskar-govind-ghadekar-series-no.-184-kashi-sanskrit-series/mode/2up वैद्यकीय सुभाषित साहित्यम्] (लेखक - भास्कर गोविन्द घाणेकर)
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आशा
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अनुनाद सिंह
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आशा, भरोसा या सम्यक फल मिलने का विश्वास।
== उद्धरण ==
* ''आशा नाम मनुष्याणां काश्चिदाश्चर्यशृङ्खला ।
: ''यया बद्धा प्रधावन्ति मुक्तास्तिष्ठन्ति कुत्रचित् ॥'' -- महासुभषितसंग्रह
: आशा नाम की एक आश्चर्यपूर्ण जंजीर है जिससे बंधे हुए व्यक्ति इधर-उधर भागते हुए नजर आते हैं लेकिन जो व्यक्ति उससे (आशा से) मुक्त हैं वे कहीं (एक जगह) बैठे रहते हैं।
* ''आशायाः ये दासाः ते दासास्सर्वलोकस्य ।
: ''आशा येषां दासी तेषां दासायते लोकः ॥'' -- कवितामृतकूपः
: जो लोग आशा के दास होते हैं वे सब लोगों के दास होते हैं। किन्तु आशा जिनकी दासी होती है, लोग उनके दास बनकर आचरण करते हैं।
* ''क्षुधातृषाशाः कुटुम्बन्य मयि जीवति न अन्यगाः।
: ''तासां आशा महासाध्वी कदाचित् मां न मुञ्चति॥१४॥
: भूख, प्यास और आशा मनुष्य की पत्नियाँ हैं जो जीवनपर्यन्त मनुष्य का साथ निभाती हैं। इन तीनों में आशा महासाध्वी है क्योंकि वह क्षणभर भी मनुष्य का साथ नहीं छोड़ती, जबकि भूख और प्यास कुछ कुछ समय के लिए मनुष्य का साथ छोड़ देते हैं।
* तुलसी अदभुत देवता आसा देवी नाम ।
: सेएँ सोक समर्पई बिमुख भएँ अभिराम ॥
: गोस्वामी तुलसीदास जी कहते है कि आशा देवी नाम की एक अदभुत देवी हैं, यह सेवा करने पर दुख देतीं हैं और विमुख होने पर सुख।
* आशा उत्साह की जननी है। आशा में तेज है, बल है, जीवन है। आशा ही संसार की संचालक शक्ति है। -- [[मुंशी प्रेमचन्द]]
* खेती आशा का एक पेशा है। -- Brett Brian
* प्रेम आशा की खेती करता है। आशा है तो उर्वरता को बढ़ावा मिलेगा, और हम सभी सपने के किसान हो सकते हैं। -- जॉर्ज ई मिलर
* नेता, आशा का व्यापारी होता है। -- [[नेपोलियन बोनापार्ट]]
* हमें क्षणिक निराशा को स्वीकार करना चाहिए, लेकिन अनन्त आशा को कभी नहीं खोना चाहिए। -- मार्टिन लूथर किंग जूनियर
* बिना आशा के जीवन जीना, जीना छोड़ने के समान है। -- फ्योदोर दोस्तोवस्की
* जहां कोई लक्ष्य नहींं होता, वहां कोई आशा भी नहीं होती। -- जॉर्ज वाशिंगटन
* आशा वास्तव में सभी बुराइयों में सबसे बुरी है क्योंकि यह मनुष्य की पीड़ा को लम्बा खींचती है। -- फ्रेडरिक नीत्से
* आशा वह है जो यह देख सकती है कि अंधेरे के बावजूद प्रकाश है। -- डेशमन्ड टूटू
* आशा ही एकमात्र मधुमक्खी है जो फूलों के बिना शहद बनाती है। -- रॉबर्ट ग्रीन इंगेरसोल
* लेकिन मुझे पता है कि जब अंधेरा होता है, केवल तभी आप सितारों को देख सकते हैं। -- [[मार्टिन लूथ्र किंग जूनियर]]
* धन्य वह है जो कुछ भी आशा नहीं करता, क्योंकि वह कभी निराश नहीं होगा। -- अलेक्जैंडर पोप
* अशा जगृत स्वप्न है। -- [[अरस्तू]]
* आशा कभी मत छोड़ो। तूफान लोगों को मजबूत बनाते हैं और हमेशा के लिए कभी नहीं रहते। -- रॉय टी बेन्नेट
* जहां कोई आशा नहीं है, उसका आविष्कार करना हम पर निर्भर है। -- अल्ब्र्ट कामुस (Albert Camus)
* अगर व्यक्ति पर्याप्त आशा रखता है तो वह अविश्वसनीय चीजें कर सकता है। -- शैनन के बूचर
== इन्हें भी देखें ==
* [[निराशा]]
* [[आशावाद]]
* [[तृष्णा]]
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मार्क ट्वेन
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अनुनाद सिंह
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[[चित्र:Mark Twain.jpg|right|thumb|300px|मार्क ट्वेन]]
'''[[:w:मार्क ट्वेन]]''' (Mark Twain) एक अमेरिकी व्यंग्यकार थे। उनका जन्म 30 नवंबर 1835 को संयुक्त राज्य के फ्लोरिडा के मिज़ुरी में हुआ था।
== उक्तियाँ ==
* 'क्लासिक' - एक ऐसी पुस्तक जिसकी लोग प्रशंशा करते हैं पर पढ़ते नहीं।
* अगर हमें सुनने से ज्यादा बोलना होता, तो हमारे पास दो मुंह और एक कान होता।
* अच्छे दोस्त, अच्छी किताबें और एक सुप्त अंतःकरण; यही आदर्श जीवन है।
* अपने संदेह से अधिक अपनी इच्छा पर ध्यान केंद्रित करें और सपना अपने आप ठीक हो जाएगा।
* आइये ऐसे जियें कि जब हम मरने वाले हों तो क्रिया-करम का व्यवसाय करने वाले भी अफ़सोस करें।
* आगे बढ़ने का सबसे बड़ा राज शुरुआत करना हैं।
* आज से बीस साल बाद तुम यह सोचकर निराश हो उठोगे कि तुम्हें वह सब नहीं करना चाहिए था जो तुम कर बैठे। इसीलिए मैं तुमसे कहता हूँ कि अपने पाल गिरा दो और सुरक्षित बंदरगाहों से बहुत दूर चले जाओ। पूर्वी हवाओं को पकड़ कर अपने सपनों की राह पर चलते चलो। जाने कितना कुछ अभी खोजने के लिए है!
* आपके जीवन में दो सबसे महत्वपूर्ण दिन हैं - एक वो दिन जब आप जन्म लेते हैं और दूसरा वो दिन जिस दिन आपको अपने जीने का उद्देश्य पता चलता हैं।
* आमतौर पे मुझे बिना तैयारी के दिए जाने वाले भाषण को तैयार करने में तीन हफ्ते लगते हैं।
* आयु शरीर से अधिक मन की अवस्था है। अगर आपको कोई आपत्ति नहीं है तो कोई बात नहीं।
* आवश्यकता जोखिम उठाने की जननी है।
* इतिहास खुद को दोहराता नहीं है, लेकिन यह तुकबंदी करता है।
* इंसान ही एक ऐसा प्राणी है जो शर्मिंदा होता है- या जिसे जरूरत पड़ती है।
* ईश्वर की कृपा से हमारे देश में तीन बेहद कीमती चीजें उपलब्ध हैं: भाषण की स्वतंत्रता, अंतरात्मा की स्वतंत्रता,और इनमे से किसी का भी प्रयोग ना करने का विवेक।
* उन लोगों से दूर रहें जो आपकी महत्वाकांक्षाओं को कम करने की कोशिश करते हैं। छोटे लोग हमेशा ऐसा करते हैं, लेकिन महान लोग आपको भी ऐसा महसूस कराते हैं कि आप भी महान बन सकते हैं।
* एक अच्छा तत्काल भाषण तैयार करने में मुझे आमतौर पर तीन सप्ताह से अधिक समय लगता है।
* एक आदमी के चरित्र को उन विशेषणों से सीखा जा सकता है जिनका वह आदतन बातचीत में उपयोग करता है।
* ऐसा क्यों होता कि हम किसी के पैदा होने पर खुश होते हैं और मरने पर दुखी, क्योंकि हम खुद वो व्यक्ति नहीं होते हैं।
* किताबें उन लोगों के लिए होती हैं जो चाहते हैं कि वे कहीं और हों।
* कोई भी सबूत किसी बेवकूफ को कभी राजी नहीं करेगा।
* क्रोध एक ऐसा तेज़ाब है जो जिस चीज पे डाला जाता है उससे ज्यादा उस पात्र को नुकसान पहुंचाता सकता है जिसमें वो रखा है।
* खुद को खुश करने का सबसे अच्छा तरीका है किसी और को खुश करने की कोशिश करना।
* चिंता करना उस कर्ज का भुगतान करने जैसा है जो आप पर बकाया नहीं है।
* चीजों को जितना ज्यादा वर्जित किया जाता है वो उतना ही लोकप्रिय हो जाती हैं।
* जब भी आप खुद को बहुमत की तरफ पाएं तो समझ जाइये कि अब रुक कर सोचने का समय है।
* जब संदेह में हों तो सच बोल दें।
* जमीन खरीदिये वो इसे अब और नहीं बना रहे है।
* जलवायु वह है जिसकी हम अपेक्षा करते हैं, मौसम वह है जो हमें मिलता है।
* जितना अधिक आप समझाते हैं, उतना अधिक मुझे नहीं समझ आता।
* ज़िन्दगी कहीं ज्यादा खुशहाल होती अगर हम 80 साल के पैदा होते और धीरे-धीरे 18 की तरफ बढ़ते।
* जीवन में सफल होने के लिए, आपको दो चीजों की आवश्यकता है। -: अनभिज्ञता और आत्मविश्वास।
* जो आप परसों कर सकते हैं उसे कभी कल पर मत टालिए।
* जो व्यक्ति नहीं पढ़ेगा, उसे उस व्यक्ति की अपेक्षा कोई लाभ नहीं होगा जो पढ़ नहीं सकता।
* जो व्यक्ति पढता नहीं है वो ना पढ़ पाने वाले व्यक्ति की अपेक्षा कोई लाभ नहीं है।
* झूठ होते हैं, बहुत बड़े झूठ होते हैं और फिर आंकड़े होते हैं।
* तीन तरह के झूठ होते है – झूठ, बड़ा झूठ, और आँकड़े।
* दया वह भाषा है जिसे बहरे सुन सकते हैं और अंधे देख सकते हैं।
* देश के प्रति वफादारी हमेशा।सरकार के प्रति वफादारी जब वो उसके लायक हो।
* धन की कमी सभी बुराई की जड़ है।
* पवित्रता और खुशी एक असंभव संयोजन है।
* पहले अपने तथ्यों को प्राप्त करें, फिर आप उन्हें अपनी ख़ुशी से तोड़ मरोड़ सकते हैं।
* पुरस्कार लेने से मना करने; और अधिक शोर के साथ पुरस्कार लेने का तरीका है।
* पैसे की कमी सभी समस्याओं की जड़ है।
* बाईबल के वो भाग जिन्हें मैं समझा नहीं पता मुझे चिंतित नहीं करते , वो भाग करते हैं जिन्हें मैं समझता हूँ।
* बैंकर एक ऐसा साथी है जो सूरज के चमकने पर आपको अपना छाता उधार देता है, लेकिन जब बारिश शुरू होती है तो वह उसे वापस लेना चाहता है।
* बोल कर सारा संदेह ख़तम कर देने से अच्छा है चुप रह कर बेवकूफ समझा जाना।
* भले ही आप कपडे पहनने में लापरवाह रहिये पर अपनी आत्मा को दुरुस्त रखिये।
* मनुष्य – एक ऐसा जीव जो साप्ताहिक कार्य के अंत में बनाया गया जब भगवान थके थे।
* मूर्खों से कभी बहस मत करो, वे तुम्हें अपने स्तर तक नीचे खींच लेंगे और फिर तुम्हें अनुभव से हरा देंगे।
* मूलतः दो तरह के लोग होते हैं। वो जो चीजें हासिल करते हैं, और वो जो जीजें हासिल करने का दावा करते हैं। पहले समूह में भीड़ कम होती है।
* मृत्यु का भय जीवन के भय से शुरू होता है। वही आदमी पूरी तरह से जीता है जो हर समय मरने के लिए तैयार हो।
* मेरी किताबें पानी की तरह हैं; और उन महान प्रतिभाओं की शराब की तरह। (सौभाग्यवश) सभी लोग पानी पीते हैं।
* मेल-जोल घृणा को जन्म देता है- और बच्चों को भी।
* मैं एक अच्छी तारीफ पर दो महीने तक रह सकता हूँ।
* मैं एक बुजुर्ग हूँ और मैंने कई संकटों को जाना है, पर उनमे से ज्यादातर कभी आये नहीं।
* मैं एक बूढ़ा आदमी हूं और मैंने बहुत सारी मुसीबतें जानी हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर कभी नहीं हुईं।
* मैं मौत से नहीं डरता। मैं पैदा होने से पहले अरबों और अरबों साल पहले मर चुका था, और इससे मुझे थोड़ी सी भी असुविधा नहीं हुई थी।
* यदि आप अखबार नहीं पढ़ते हैं, तो आप बेख़बर हैं। यदि आप अखबार पढ़ते हैं, तो आपको गलत सूचना दी जाती है।
* यदि आप एक भूखे कुत्ते को उठाकर उसे समृद्ध बनाते हैं तो वह आपको नहीं काटेगा। यह कुत्ते और आदमी के बीच मुख्य अंतर है।
* यदि आप सच कहते हैं, तो आपको कुछ याद रखने की जरूरत नहीं रहती।
* यदि आपका काम एक मेंढक खाना है तो सबसे अच्छा होगा कि सुबह सबसे पहले ये काम करें। और यदि आपका काम दो मेंढक खाना है तो बड़े वाले को पहले खाना अच्छा होगा।
* यदि आपमें इसे बदलने की इच्छा नहीं है, तो आपको इसकी आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है।
* यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि सत्य कल्पना से अधिक अजनबी है। कहानी को अर्थपूर्ण होना चाहिए।
* ये बेहतर है कि आप सम्मान के लायक हों और वो आपको ना मिले। बजाये इसके कि वो आपको मिले और आप उसके लायक ना हों।
* लड़ाई में कुत्ते का आकर मायने नहीं रखता, कुत्ते में लड़ाई का आकार मायने रखता है।
* वास्तविकता को पर्याप्त कल्पना से हराया जा सकता है।
* विलंबित पूर्णता की तुलना में निरंतर सुधार बेहतर है।
* सत्य कल्पना से अलग है, लेकिन ऐसा इसलिए है क्योंकि कल्पना संभावनाओं से चिपके रहने के लिए बाध्य है; सच नहीं है।
* सबसे बुरा अकेलापन खुद के साथ सहज न होना है।
* सबसे महान आविष्कारक का नाम बताइए। दुर्घटना।
* सभी जानवरों में से, मनुष्य ही एकमात्र ऐसा है जो क्रूर है। वह अकेला है जो इसे करने की खुशी के लिए दर्द देता है।
* सभी सामान्यीकरणगलत होते हैं। ये भी।
* समृद्धि, सिद्धांत का सबसे बड़ा रक्षक है।
* सही शब्द प्रभावी हो सकता है , पर कभी भी कोई शब्द इतना प्रभावी नहीं हुआ है जितना कि सही समय पर दिया गया एक विराम।
* स्कूली शिक्षा को अपनी शिक्षा में हस्तक्षेप न करने दें।
* स्मोकिंग छोड़ना दुनिया का सबसे आसान काम है। मुझे पता है क्योंकि मैंने ये हज़ारों बार किया है।
* स्वस्थ्य सम्बन्धी किताबों को पढने में सावधानी बरतिए। एक मुद्रणदोष की वजह से आपकी मौत हो सकती है।
* स्वास्थ्य संबंधी पुस्तकें पढ़ने में सावधानी बरतें। आप गलत छपने से मर भी सकते हो।
* हमेशा सही करें। ये कुछ लोगों को संतुष्ट करेगा और बाकियों को अचंभित।
* हर कोई एक चाँद है, और उनकी एक साइड ऐसी होती है जो वह कभी किसी को नहीं दिखाता।
* हर कोई चाँद है, और उसका एक स्याह पक्ष है जो वह कभी किसी को नहीं दिखाता।
* हर दिन को अपने जीवन का सबसे खूबसूरत दिन बनने का मौका दें।
* हास्य मानव जाति की सबसे बड़ी आशीर्वाद है।
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[[चित्र:Mark Twain.jpg|right|thumb|300px|मार्क ट्वेन]]
'''[[:w:मार्क ट्वेन|मार्क ट्वेन]]''' (Mark Twain) एक अमेरिकी [[व्यंग्य|व्यंग्यकार]] थे। उनका जन्म 30 नवंबर 1835 को संयुक्त राज्य के फ्लोरिडा के मिज़ुरी में हुआ था।
== उक्तियाँ ==
* 'क्लासिक' - एक ऐसी पुस्तक जिसकी लोग प्रशंशा करते हैं पर पढ़ते नहीं।
* अगर हमें सुनने से ज्यादा बोलना होता, तो हमारे पास दो मुंह और एक कान होता।
* अच्छे दोस्त, अच्छी किताबें और एक सुप्त अंतःकरण; यही आदर्श जीवन है।
* अपने संदेह से अधिक अपनी इच्छा पर ध्यान केंद्रित करें और सपना अपने आप ठीक हो जाएगा।
* आइये ऐसे जियें कि जब हम मरने वाले हों तो क्रिया-करम का व्यवसाय करने वाले भी अफ़सोस करें।
* आगे बढ़ने का सबसे बड़ा राज शुरुआत करना हैं।
* आज से बीस साल बाद तुम यह सोचकर निराश हो उठोगे कि तुम्हें वह सब नहीं करना चाहिए था जो तुम कर बैठे। इसीलिए मैं तुमसे कहता हूँ कि अपने पाल गिरा दो और सुरक्षित बंदरगाहों से बहुत दूर चले जाओ। पूर्वी हवाओं को पकड़ कर अपने सपनों की राह पर चलते चलो। जाने कितना कुछ अभी खोजने के लिए है!
* आपके जीवन में दो सबसे महत्वपूर्ण दिन हैं - एक वो दिन जब आप जन्म लेते हैं और दूसरा वो दिन जिस दिन आपको अपने जीने का उद्देश्य पता चलता हैं।
* आमतौर पे मुझे बिना तैयारी के दिए जाने वाले भाषण को तैयार करने में तीन हफ्ते लगते हैं।
* आयु शरीर से अधिक मन की अवस्था है। अगर आपको कोई आपत्ति नहीं है तो कोई बात नहीं।
* आवश्यकता जोखिम उठाने की जननी है।
* इतिहास खुद को दोहराता नहीं है, लेकिन यह तुकबंदी करता है।
* इंसान ही एक ऐसा प्राणी है जो शर्मिंदा होता है- या जिसे जरूरत पड़ती है।
* ईश्वर की कृपा से हमारे देश में तीन बेहद कीमती चीजें उपलब्ध हैं: भाषण की स्वतंत्रता, अंतरात्मा की स्वतंत्रता,और इनमे से किसी का भी प्रयोग ना करने का विवेक।
* उन लोगों से दूर रहें जो आपकी महत्वाकांक्षाओं को कम करने की कोशिश करते हैं। छोटे लोग हमेशा ऐसा करते हैं, लेकिन महान लोग आपको भी ऐसा महसूस कराते हैं कि आप भी महान बन सकते हैं।
* एक अच्छा तत्काल भाषण तैयार करने में मुझे आमतौर पर तीन सप्ताह से अधिक समय लगता है।
* एक आदमी के चरित्र को उन विशेषणों से सीखा जा सकता है जिनका वह आदतन बातचीत में उपयोग करता है।
* ऐसा क्यों होता कि हम किसी के पैदा होने पर खुश होते हैं और मरने पर दुखी, क्योंकि हम खुद वो व्यक्ति नहीं होते हैं।
* किताबें उन लोगों के लिए होती हैं जो चाहते हैं कि वे कहीं और हों।
* कोई भी सबूत किसी बेवकूफ को कभी राजी नहीं करेगा।
* क्रोध एक ऐसा तेज़ाब है जो जिस चीज पे डाला जाता है उससे ज्यादा उस पात्र को नुकसान पहुंचाता सकता है जिसमें वो रखा है।
* खुद को खुश करने का सबसे अच्छा तरीका है किसी और को खुश करने की कोशिश करना।
* चिंता करना उस कर्ज का भुगतान करने जैसा है जो आप पर बकाया नहीं है।
* चीजों को जितना ज्यादा वर्जित किया जाता है वो उतना ही लोकप्रिय हो जाती हैं।
* जब भी आप खुद को बहुमत की तरफ पाएं तो समझ जाइये कि अब रुक कर सोचने का समय है।
* जब संदेह में हों तो सच बोल दें।
* जमीन खरीदिये वो इसे अब और नहीं बना रहे है।
* जलवायु वह है जिसकी हम अपेक्षा करते हैं, मौसम वह है जो हमें मिलता है।
* जितना अधिक आप समझाते हैं, उतना अधिक मुझे नहीं समझ आता।
* ज़िन्दगी कहीं ज्यादा खुशहाल होती अगर हम 80 साल के पैदा होते और धीरे-धीरे 18 की तरफ बढ़ते।
* जीवन में सफल होने के लिए, आपको दो चीजों की आवश्यकता है। -: अनभिज्ञता और आत्मविश्वास।
* जो आप परसों कर सकते हैं उसे कभी कल पर मत टालिए।
* जो व्यक्ति नहीं पढ़ेगा, उसे उस व्यक्ति की अपेक्षा कोई लाभ नहीं होगा जो पढ़ नहीं सकता।
* जो व्यक्ति पढता नहीं है वो ना पढ़ पाने वाले व्यक्ति की अपेक्षा कोई लाभ नहीं है।
* झूठ होते हैं, बहुत बड़े झूठ होते हैं और फिर आंकड़े होते हैं।
* तीन तरह के झूठ होते है – झूठ, बड़ा झूठ, और आँकड़े।
* दया वह भाषा है जिसे बहरे सुन सकते हैं और अंधे देख सकते हैं।
* देश के प्रति वफादारी हमेशा।सरकार के प्रति वफादारी जब वो उसके लायक हो।
* धन की कमी सभी बुराई की जड़ है।
* पवित्रता और खुशी एक असंभव संयोजन है।
* पहले अपने तथ्यों को प्राप्त करें, फिर आप उन्हें अपनी ख़ुशी से तोड़ मरोड़ सकते हैं।
* पुरस्कार लेने से मना करने; और अधिक शोर के साथ पुरस्कार लेने का तरीका है।
* पैसे की कमी सभी समस्याओं की जड़ है।
* बाईबल के वो भाग जिन्हें मैं समझा नहीं पता मुझे चिंतित नहीं करते , वो भाग करते हैं जिन्हें मैं समझता हूँ।
* बैंकर एक ऐसा साथी है जो सूरज के चमकने पर आपको अपना छाता उधार देता है, लेकिन जब बारिश शुरू होती है तो वह उसे वापस लेना चाहता है।
* बोल कर सारा संदेह ख़तम कर देने से अच्छा है चुप रह कर बेवकूफ समझा जाना।
* भले ही आप कपडे पहनने में लापरवाह रहिये पर अपनी आत्मा को दुरुस्त रखिये।
* मनुष्य – एक ऐसा जीव जो साप्ताहिक कार्य के अंत में बनाया गया जब भगवान थके थे।
* मूर्खों से कभी बहस मत करो, वे तुम्हें अपने स्तर तक नीचे खींच लेंगे और फिर तुम्हें अनुभव से हरा देंगे।
* मूलतः दो तरह के लोग होते हैं। वो जो चीजें हासिल करते हैं, और वो जो जीजें हासिल करने का दावा करते हैं। पहले समूह में भीड़ कम होती है।
* मृत्यु का भय जीवन के भय से शुरू होता है। वही आदमी पूरी तरह से जीता है जो हर समय मरने के लिए तैयार हो।
* मेरी किताबें पानी की तरह हैं; और उन महान प्रतिभाओं की शराब की तरह। (सौभाग्यवश) सभी लोग पानी पीते हैं।
* मेल-जोल घृणा को जन्म देता है- और बच्चों को भी।
* मैं एक अच्छी तारीफ पर दो महीने तक रह सकता हूँ।
* मैं एक बुजुर्ग हूँ और मैंने कई संकटों को जाना है, पर उनमे से ज्यादातर कभी आये नहीं।
* मैं एक बूढ़ा आदमी हूं और मैंने बहुत सारी मुसीबतें जानी हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर कभी नहीं हुईं।
* मैं मौत से नहीं डरता। मैं पैदा होने से पहले अरबों और अरबों साल पहले मर चुका था, और इससे मुझे थोड़ी सी भी असुविधा नहीं हुई थी।
* यदि आप अखबार नहीं पढ़ते हैं, तो आप बेख़बर हैं। यदि आप अखबार पढ़ते हैं, तो आपको गलत सूचना दी जाती है।
* यदि आप एक भूखे कुत्ते को उठाकर उसे समृद्ध बनाते हैं तो वह आपको नहीं काटेगा। यह कुत्ते और आदमी के बीच मुख्य अंतर है।
* यदि आप सच कहते हैं, तो आपको कुछ याद रखने की जरूरत नहीं रहती।
* यदि आपका काम एक मेंढक खाना है तो सबसे अच्छा होगा कि सुबह सबसे पहले ये काम करें। और यदि आपका काम दो मेंढक खाना है तो बड़े वाले को पहले खाना अच्छा होगा।
* यदि आपमें इसे बदलने की इच्छा नहीं है, तो आपको इसकी आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है।
* यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि सत्य कल्पना से अधिक अजनबी है। कहानी को अर्थपूर्ण होना चाहिए।
* ये बेहतर है कि आप सम्मान के लायक हों और वो आपको ना मिले। बजाये इसके कि वो आपको मिले और आप उसके लायक ना हों।
* लड़ाई में कुत्ते का आकर मायने नहीं रखता, कुत्ते में लड़ाई का आकार मायने रखता है।
* वास्तविकता को पर्याप्त कल्पना से हराया जा सकता है।
* विलंबित पूर्णता की तुलना में निरंतर सुधार बेहतर है।
* सत्य कल्पना से अलग है, लेकिन ऐसा इसलिए है क्योंकि कल्पना संभावनाओं से चिपके रहने के लिए बाध्य है; सच नहीं है।
* सबसे बुरा अकेलापन खुद के साथ सहज न होना है।
* सबसे महान आविष्कारक का नाम बताइए। दुर्घटना।
* सभी जानवरों में से, मनुष्य ही एकमात्र ऐसा है जो क्रूर है। वह अकेला है जो इसे करने की खुशी के लिए दर्द देता है।
* सभी सामान्यीकरणगलत होते हैं। ये भी।
* समृद्धि, सिद्धांत का सबसे बड़ा रक्षक है।
* सही शब्द प्रभावी हो सकता है , पर कभी भी कोई शब्द इतना प्रभावी नहीं हुआ है जितना कि सही समय पर दिया गया एक विराम।
* स्कूली शिक्षा को अपनी शिक्षा में हस्तक्षेप न करने दें।
* स्मोकिंग छोड़ना दुनिया का सबसे आसान काम है। मुझे पता है क्योंकि मैंने ये हज़ारों बार किया है।
* स्वस्थ्य सम्बन्धी किताबों को पढने में सावधानी बरतिए। एक मुद्रणदोष की वजह से आपकी मौत हो सकती है।
* स्वास्थ्य संबंधी पुस्तकें पढ़ने में सावधानी बरतें। आप गलत छपने से मर भी सकते हो।
* हमेशा सही करें। ये कुछ लोगों को संतुष्ट करेगा और बाकियों को अचंभित।
* हर कोई एक चाँद है, और उनकी एक साइड ऐसी होती है जो वह कभी किसी को नहीं दिखाता।
* हर कोई चाँद है, और उसका एक स्याह पक्ष है जो वह कभी किसी को नहीं दिखाता।
* हर दिन को अपने जीवन का सबसे खूबसूरत दिन बनने का मौका दें।
* हास्य मानव जाति की सबसे बड़ी आशीर्वाद है।
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राजीव मल्होत्रा
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अनुनाद सिंह
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[[चित्र:Rajiv Malhotra.jpg|right|thumb|300px|भारत को विकसित होने से रोकने के लिए भारतीय सामाजिक संगठनों को लाखों डॉलर दिए जाते हैं। -- '''राजीव मल्होत्रा''']]
'''[[:w:राजीव मल्होत्रा|राजीव मल्होत्रा]]''' ( जन्म : 15 सितंबर 1950) एक लेखक और विचारक हैं। वे 'इनफ़िनिटी फ़ाउंडेशन' नामक एक संस्था चलाते हैं।
राजीव मल्होत्रा ने सेंट स्टीफंस कॉलेज से भौतिकी की पढ़ाई की, फिर न्यूयॉर्क चले गए और वहां की सिरैक्यूज़ यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस पढ़े। इसके बाद राजीव मल्होत्रा ने इन्फ़ॉरमेशन टेक्नॉलजी और मीडिया इंडस्ट्री में उद्यमी (आंत्रप्रेन्योर) के रूप में काम शुरू किया। 1994 में ही उन्होंने रिटायरमेंट ले लिया। तब वो केवल 44 वर्ष के थे। सेवानिवृत्ति के बाद, 1995 में न्यू जर्सी में उन्होंने इस संस्था की स्थापना की। उद्देश्य था प्राचीन भारतीय धर्मों की कथित ग़लत व्याख्या से लड़ना और विश्व सभ्यता में भारत के योगदान को दर्ज कराना।
इनफिनिटी फ़ाउंडेशन के नाम पर ही एक यूट्यूब चैनल भी है। राजीव यहां AI, हिंदू सभ्यता के साहित्य और छात्रों के साथ अपने इंटरैक्शन के वीडियो डालते हैं।
== उक्तियाँ ==
* संयुक्त राज्य अमेरिका का 'फोर्ड फाउंडेशन' भारत विरोधी संस्थानों को लाखों डॉलर की वित्तीय सहायता प्रदान करता है क्योंकि कोई भी नहीं चाहता कि भारत प्रगति करे।
* अमेरिका में शक्तिशाली ताकतों द्वारा भारत के खिलाफ एक गहन युद्ध चल रहा है।
* भारत को विकसित होने से रोकने के लिए भारतीय सामाजिक संगठनों को लाखों डॉलर दिए जाते हैं।
* यह कैसे संभव है कि एक ओर तो भारतीय समाज के अध्ययन हेतु हम विचारों का आयात करें तथा साथ ही विश्व गुरु होने के भरम में भी भरमाए रहें?
* भारतीय गर्व से कहते हैं कि उनका राष्ट्र एवं उनकी विरासत विश्व गुरु हैं अर्थात् वे पूरे संसार के गुरु अथवा बौद्धिक मार्गदर्शक हैं। इस सुखद अनुभूति देने वाले विचार के समर्थन में वे योग की लोकप्रियता, भारतीय उद्यमियों एवं चिकित्सकों की वैश्विक सफलता और यहां तक कि प्रधानमंत्री मोदी की विश्व पटल पर प्रासंगिकता को भी गिनाते हैं। बहुत लोगों को लगता है कि भारत का युग प्रारम्भ हो गया है तथा वह सच्चे अर्थों में एक बार पुनः विश्व गुरु के रूप में स्थापित हो गया है।<br> परंतु आवश्यकता है धैर्य के साथ संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की। गुरु का अर्थ होता है ज्ञानदाता और विश्व गुरु अर्थात् वह जो पूरे विश्व को ज्ञान देता हो। अतः विश्व गुरु उसे कहना उचित होगा जिसके अर्जित ज्ञान को विश्व स्वीकारता एवं अपनाता हो, सम्भवतः जिस ज्ञान में कई वैश्विक समस्याओं का हल मिलता हो।
* इस प्रकार से देखने पर हम पाते हैं कि मानविकी, समाज विज्ञान तथा लिबरल आर्ट्स विभागों में अति प्रभावशाली विचारधाराएं बनाने में हार्वर्ड जैसी पश्चिमी अकादमियां बड़ी भूमिका निभा रही हैं। <br> वे विश्व को पढ़ा रही हैं कि भारत एवं उसकी हिन्दू सभ्यता के बारे में क्या और कैसे सोचना चाहिए। वे भारत के छोटे-से-छोटे पहलुओं का अध्ययन करती हैं। उनकी आकांक्षा है भारत-संबंधी आर्काइव्स तथा ‘बिग डाटा’ का विशालतम संग्रह एकत्रित करना तथा उसे बौद्धिक सम्पदा के रूप में उपयोग करना।
* गुरु-शिष्य परंपरा की भांति ही हार्वर्ड के पूर्व छात्रों के नेटवर्क उसके सिद्धांतों के प्रचार-प्रसार एवं बचाव का कार्य करते हैं तथा इन नेटवर्कों को अब प्रत्यक्ष रूप से ‘लिनिएज’ अर्थात् ‘वंशावली’ की संज्ञा दी जा रही है। भारतीय न केवल हार्वर्ड में शिक्षित होने का कोई भी अवसर मिलने पर खुशी में झूम उठते हैं अपितु खूब सारा पैसा खर्च करके उसकी ब्रेनवॉशिंग के लिए स्वयं को समर्पित करने को भी तत्पर रहते हैं।
* विश्व-गुरु होने के बजाय भारतीय तो 'विश्व-शिष्य' बन चुके हैं। वे अपनी समालोचनात्मक चिन्तन क्षमता को दरकिनार कर चुके हैं और पश्चिमी अकादमियों द्वारा उगली गयी किसी भी बात को सत्य मान प्रसन्न हो रहे हैं।
* यह पुस्तक द्रविड़-आन्दोलन तथा दलित पहचान की ऐतिहासिकता पर नज़र डालती है और साथ ही साथ उन ताक़तों को भी संज्ञान में लेती है जो देश में इन अलगाववादी पहचानों को बढ़ावा देने में कार्यरत हैं। इस किताब में ऐसे लोगों, संस्थाओं और उनके इस दिशा में कार्यरत होने के कारणों, क्रियाकलापों और उनके मूल ध्येय का भी समावेश है। ऐसी शक्तियां ज़्यादातर अमरीका और यूरोपीय देशों में हैं लेकिन इनकी संख्या भारत में भी बढ़ने लगी है – भारत में इनके संस्थान इन विदेशी शक्तियों के स्थानीय कार्यालय की तरह काम करते हैं। -- राजीव मल्होत्रा, 'ब्रेकिंग इंडिया' के बारे में
* अधिकतर भारतीयों को यह पता ही नहीं है कि विनाशकारी ताक़तें देश तोड़ने में लगी हैं।
* ९० के दशक की बात है, प्रिंसटन विश्वविद्यालय के एक अफ्रीकन-अमरीकन विद्वान ने बातों बातों में ज़िक्र किया कि वे भारत के दौरे से लौटे हैं जहाँ वे ‘एफ्रो-दलित’ प्रोजेक्ट पर काम करने गए थे। तब मुझे मालूम चला कि यह अमरीका द्वारा संचालित तथा वित्तीय सहायता-प्रदान प्रोजेक्ट भारत में अंतर्जातीय-वर्ण सम्बन्धों तथा दलित आंदोलन को अमरीकन नज़रिए से देखने का प्रकल्प है । एफ्रो-दलित पोजेक्ट दलितों को ‘काला’ तथा ग़ैर -दलितों को ‘गोरा’ जताता है। -- अपनी पुस्तक 'ब्रेकिंग इंडिया' की भूमिका में
* मैं ‘आर्य’ लोगों के बारे में ये जानने के लिए भी अध्ययन कर रहा था कि वे कौन थे और क्या संस्कृत भाषा और वेद को कोई बाहरी आक्रान्ता ले कर आए थे या ये सब हमारी ही ईजाद और धरोहर हैं। इस सन्दर्भ में मैंने कई पुरातात्विक , भाषाई तथा इतिहास प्रेरित सम्मेलन और पुस्तक प्रोजेक्ट्स भी आयोजित किये ताकि इस मामले की पड़ताल में गहराई से जाया जा सके। इसके चलते मैं ने अंग्रेज़ों की उस ‘खोज’ की ओर भी ध्यान दिया जिसके हिसाब से उन्होंने द्रविड़-पहचान को ईजाद किया था- जो असल में १९ वीं शताब्दी के पहले कभी थी ही नहीं और केवल ‘आर्यन थ्योरी’ को मज़बूत जताने के लिए किसी तरह रच दी गयी थी। इस ‘द्रविड़-पहचान’ के सिद्धांत को प्रासंगिक रहने के लिए “विदेशी आर्य” के सिद्धांत का होना और उन विदेशियों के कुकृत्यों को सही मानना आवश्यक था। -- राजीव मल्होत्रा, 'ब्रेकिं इंडिया' की भूमिका में
* अमरीका तथा यूरोपीय विश्वविद्यालयों में दक्षिण एशियाई अध्ययन में इस तरह के कार्यकर्ताओं (ऐक्टिविस्ट्स) को नियमित तौर पर आमंत्रित किया जाता है और उन्हें वहां प्रमुखता दी जाती है। ये वे ही संस्थान हैं जो खालिस्तानियों, कश्मीरी उग्रवादियों, माओवादियों तथा इस प्रकार के विध्वंसक तत्वों को आमंत्रित कर वैचारिक मदद तथा प्रोत्साहन देते रहे हैं।<br> इसके चलते मुझे यह संदेह हुआ कि ये भारत के दलितों/द्रविड़ों तथा अल्पसंख्यकों की सहायता वाली बात कहीं कुछ पश्चिमी देशों की विदेश नीति का हिस्सा तो नहीं है – प्रत्यक्ष रूप से न सही पर परोक्ष रूप में सही ! मुझे भारत के अलावा एक भी ऐसे देश की जानकारी नहीं है जहाँ (भारत की तरह) स्थानीय नियंत्रण/जांच के बिना इतने बड़े स्तर पर गतिविधियाँ बाहर से संचालित की जा रही हों<br> तब मेरी समझ में आया कि भारत में अलगाववादी तकतों के निर्माण में इतना कुछ खर्च सिर्फ इसलिए किया जा रहा है ताकि यह अलगाववादी विचार अंततोगत्वा एक बेरोकटोक आतंकवाद में बदल जाए जिससे भारत का राजनीतिक विघटन संभव हो सके !<br> इसके चलते मुझे यह संदेह हुआ कि ये भारत के दलितों/द्रविड़ों तथा अल्पसंख्यकों की सहायता वाली बात कहीं कुछ पश्चिमी देशों की विदेश नीति का हिस्सा तो नहीं है – प्रत्यक्ष रूप से न सही पर परोक्ष रूप में सही ! मुझे भारत के अलावा एक भी ऐसे देश की जानकारी नहीं है जहाँ (भारत की तरह) स्थानीय नियंत्रण/जांच के बिना इतने बड़े स्तर पर गतिविधियाँ बाहर से संचालित की जा रही हों। -- राजीव मल्होत्रा, 'ब्रेकिं इंडिया' की भूमिका में
* “धर्म” शब्द के अनेकों अर्थ हैं जो सन्दर्भों के आधार पर निर्भर होते हैं जिसमें उनका प्रयोग होता है I इनमें सम्मिलित हैं: आचरण, कर्तव्य, उचित, न्याय, धर्माचरण, नैतिकता, रिलिजन, धार्मिक गुण, उचित कार्य जो अच्छे या बुरे कर्मों के अनुसार निर्धारित होते हैं, इत्यादि I कई अन्य अर्थ भी सूचित किये गए हैं, जैसे कि, न्याय या “तोराह”(यहूदियों के सन्दर्भ में), “लोगोस” (ग्रीक के सन्दर्भ में), “वे” (ईसाई के सन्दर्भ में) और यहाँ तक कि “टाओ” (चीन के सन्दर्भ ) में I इनमें से कोई भी पूर्णतयः परिशुद्ध नहीं हैं और कोई भी पूर्ण दबाव के साथ संस्कृत में इस शब्द का अर्थ नहीं व्यक्त करने में सक्षम हैं I धर्म का कोई भी तुल्यार्थक शब्द नहीं है पश्चिमी कोष में I
== राजीव मल्होत्र के बारे में अन्य लोगों के विचार ==
* विश्वस्त होने का एक अन्तिम कारण यह है कि राम स्वरूप, सीताराम गोयल, कोएनराद एल्स्त, डेविड फाउली और राजीव मल्होत्रा के कृतियों के कारण बना पाठसंग्रह अपने क्रिटिकल मास पर पहुँच गया है। अतः हम सोच सकते हैं कि कुछ वर्षों में भारत के लिये एक पुस्तकालय होगा और भारत का एक पुस्तकालय होगा। -- [[अरुण शौरी]] का 'इन्द्रास नेट पर लेख' (3 March 2014). Transcript: Arun Shourie's Lecture on 'Indra's Net'. Hitchhiker's Guide to Rajiv Malhotra's Works. Retrieved on 24 March 2014..
* श्री राजीव मल्होत्रा जी भारतीय वैदिक हिन्दू धर्म की सार्वभौमिकता व वैज्ञानिकता को लेकर पूरी प्रामाणिकता के साथ वैश्विक पटल पर एक आदर्श कार्य कर रहे हैं। -- [[रामदेव|स्वामी रामदेव]]
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://rajivmalhotra.com/ rajivmalhotra.com]
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काव्यशास्त्र
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अनुनाद सिंह
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/* उद्धरण */
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text/x-wiki
'''काव्यशास्त्र''' (poetics) काव्य और साहित्य का दर्शन तथा विज्ञान है। यह काव्यकृतियों के विश्लेषण के आधार पर समय-समय पर उद्भावित सिद्धान्तों की ज्ञानराशि है। काव्यशास्त्र के लिए पुराने नाम 'साहित्यशास्त्र' तथा 'अलंकारशास्त्र' हैं।
== उद्धरण ==
* शब्दार्थौ सहितौ काव्यम् (शब्द और अर्थ का समन्वय काव्य है।) (भामह) ;
* संक्षेपात् वाक्यमिष्टार्थव्यवच्छिन्ना, पदावली काव्यम् (अग्नि पुराण);
* शरीरं तावदिष्टार्थव्यवच्छिन्ना पदावली (दंडी);
* ननु शब्दार्थों कायम् (रुद्रट);
* काव्य शब्दोयं गुणलंकार संस्कृतयोः शब्दार्थयोर्वर्तते (आचार्य वामन);
*शब्दार्थशरीरं तावत् काव्यम् (आनन्दवर्धन);
* निर्दोषं गुणवत् काव्यं अलंकारैरलंकृतं रसान्तितम् (भोजराज);
* तददोषौ शब्दार्थों सगुणावनलंकृती पुनः क्वापि (मम्मट)
* गुणालंकाररीतिरससहितौ दोषरहिती शब्दार्थों काव्यम् (वाग्भट);
* निर्दोषा लक्षणवी सरीतिर्गुणभूषिता, सालंकाररसानेकवृत्तिर्भाक् काव्यशब्दभाक् (जयदेव);
* काव्यं रसादिमद्वाक्यं श्रुतं सुखविशेषकृत् (आचार्य शौद्धोदनि);
* वाक्यं रसात्मकं काव्यम् (विश्वनाथ);
* गुणवदलङकृतंच काव्यम् (राजशेखर)
* ''औचित्यं नाम सर्वत्र कार्यं काव्येषु निर्मले।
: ''यथा पात्रक्रियावर्णप्रसङ्गवचनादिषु॥'' -- क्षेमेन्द्र , औचित्यविचारचर्चा में
: अर्थात् काव्य के शुद्ध रूप में औचित्य का सर्वत्र होना आवश्यक है, जैसे पात्र, क्रिया, वर्ण, प्रसंग, वचन आदि में।
* ''उचितं प्राहुराचार्याः सदृशं किल यस्य यत्
: ''उचितस्य च यो भावस्तदौचित्यं प्रचक्षते ।'' -- क्षेमेन्द्र , औचित्यविचारचर्चा में
: अर्थ - आचार्यो ने कहा है कि जो जिसके अनुरूप है, सदृश है - वह उसके लिए उचित है और इसी उचित का भाव औचित्य है।
* ''अलंकारास्त्वलंकारा गुणा एव सदा गुणाः ।
: ''औचित्यं रससिद्धस्य स्थिरं काव्यस्य जीवितम् ॥'' -- क्षेमेन्द्र , औचित्यविचारचर्चा में
* ''उचितस्थानविन्यासादलंकृतिरलंकृतिः ।
: ''औचित्यादच्युता नित्यं भवन्त्येव गुणागुणाः ॥
: ''कण्ठे मेखलया नितम्ब फलके तारेण हारेण वा
: ''पाणौ नूपुरबन्धनेन चरणे केयूरपाशेन वा ।
: ''शौर्येण प्रणतै, रिपौ करुणया नायान्ति के हास्यताम्।
: ''औचित्येन बिना रुचिं प्रतनुते नालंकृतिर्नोगुणाः॥
: अर्थ - उचित स्थान पर विन्यस्त होने पर ही अलंकार अलंकार और गुण गुण होते है। गले मेखला, कटि में हार, हाथों में नूपुर, चरणों में केयूर पहनने पर, शरणागत पर शौर्य दिखाने तथा शत्रु के प्रति करुणा-प्रदर्शन से किसका हास्य नहीं होता है? औचित्य के अभाव में न तो अलंकार ही रुचिकर होते हैं और न ही गुण ।
* ''पदे वाक्ये प्रबन्धार्थे गुणेऽलंकरणे रसे।
: ''क्रियायां कारके लिंगे वचने च विशेषणे ॥
: ''उपसर्गे निपाते च काले देशे कुले व्रते ।
: ''तत्वे सत्त्वेप्यभिप्राये स्वभावे सार संग्रहे ।
: ''प्रतिभायां मवस्थायां विचारे नाम्न्यथाशिषि ।
: ''काव्यस्यांगेषु च प्राहुरौचित्यं व्यापि जीवितम् ॥
: अर्थ - पद, वाक्य, प्रबन्धार्थ, गुण, अलंकार, रस, क्रिया, कारक, लिंग, वचन, विशेषण, उपसर्ग, निपात, काल, देश, कुल, व्रत, तत्व, सत्व, अभिप्राय, स्वभाव, सारसंग्रह, प्रतिभा, अवस्था, नाम, आशीर्वाद तथा काव्य के अन्य विविध अंग औचित्य के भेद हैं।
==इन्हें भी देखें==
*[[काव्य]]
42g11oxwcodm83otjkfiw6rpuhlzwj0
व्यंग्य
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2026-06-28T15:46:36Z
अनुनाद सिंह
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[[हास्य]] को अनुप्रेषित
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text/x-wiki
#पुनर्प्रेषित [[हास्य]]
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अभिज्ञानशाकुन्तलम्
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2026-06-28T17:52:37Z
अनुनाद सिंह
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"'''अभिज्ञानशाकुन्तलम्''' [[कालिदास]] का प्रसिद्ध संस्कृत नाटक है। == सूक्तियाँ == *'' पातुं न प्रथमं व्यवस्यति जलं युष्मास्वपीतेषु या : ''नादत्ते प्रियमण्डना अपि भवतां स्ने..." के साथ नया पृष्ठ बनाया
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'''अभिज्ञानशाकुन्तलम्''' [[कालिदास]] का प्रसिद्ध संस्कृत नाटक है।
== सूक्तियाँ ==
*'' पातुं न प्रथमं व्यवस्यति जलं युष्मास्वपीतेषु या
: ''नादत्ते प्रियमण्डना अपि भवतां स्नेहेन या पल्लवम् ।
: ''आद्ये वः कुसुमप्रसूतिसमये यस्या भवत्युत्सवः
: ''सेयं याति शकुन्तला पतिगृहं सर्वैरनुज्ञायताम् ॥
: (ऋषि कण्व कहते हैं कि हे तपोवन के वृक्षो!) जो तुम्हें पानी दिए बिना स्वयं पानी नहीं पीती थी, जिसको अलङ्कार अधिक प्रिय होने पर भी तुम्हारे प्रति अगाध प्रेम होने के कारण वह तुम्हारे नये पत्तों को नहीं तोड़ती थी, तुम्हारे नवपुष्पोद्भव के समय जिसका उत्सव होता था, वह शकुन्तला अब पतिगृह को जा रही है । इसलिए तुम सभी अपनी स्वीकृति दो।
== अभिज्ञानशाकुन्तलम् के बारे में उक्तियाँ ==
* ''काव्येषु नाटकं रम्यं तत्र रम्या शकुन्तला।
: ''तत्रापि च चतुर्थोऽकस्तत्र श्लोकचतुष्टयम्॥
: काव्य के जितने भी प्रकार हैं उनमें नाटक विशेष सुन्दर होता है। नाटकों में भी काव्य-सौन्दर्य की दृष्टि से अभिज्ञान शाकुन्तलं का नाम सबसे ऊपर है। अभिज्ञान शाकुन्तलं का नाम सबसे ऊपर है। अभिज्ञान शाकुन्तलं में भी उसका चतुर्थ अंक और इस अंक में भी चौथा श्लोक तो बहुत ही रमणीय है।
* यदि तुम युवावस्था के फूल प्रौढ़ावस्था के फल और अन्य ऐसी सामग्रियां एक ही स्थान पर खोजना चाहो जिनसे आत्मा प्रभावित होता हो, तृप्त होता हो और शान्ति पाता हो, अर्थात् यदि तुम स्वर्ग और मर्त्यलोक को एक ही स्थान पर देखना चाहते हो तो मेरे मुख से सहसा एक ही नाम निकल पड़ता है - शाकुन्तलम्, महान कवि कालिदास की एक अमर रचना ! -- जर्मन कवि [[गेटे]]
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मंत्री
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अनुनाद सिंह
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