विक्षनरी
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text/x-wiki
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{{-noun-}}
* [[तिब्बती]]
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ष
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क्शत्रिय
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सही जानकारी दी मैंने डार्क रिसर्च करके।
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text/x-wiki
{{हिन्दी वर्णमाला}}
{{देवनागरी वर्ण सूचना|hex=0905|name=देवनागरी अक्षर '''ष'''|image=[[चित्र:Devanagari ʂ ष.gif |100px]]}}
= {{हिन्दी}} =
==उच्चारण==
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== प्रकाशितकोशों से अर्थ ==
=== शब्दसागर ===
ष संस्कृत या हिंदी वर्णमाला के व्यंजन वर्णों में २७ वाँ वर्ण या अक्षर । इसका उच्चारणस्थान मूर्धा है । इससे यह मूर्धंन्य वर्णों में कहा गया है । इसका प्रयोग केवल संस्कृत के शब्दों में होता है और उच्चारण दो प्रकार से होता है । कुछ लोग 'श' के समान इसका उच्घारण करते हैं। अनेक धातुएँ जो तालव्य 'श' से आरंभ हैं वे संस्कृत धातुपाठ में मूर्धन्य 'ष' से लिखी गई हैं इस अक्षर का परिवर्तन अधिकतर 'श', और 'ष' के रूप में होता है । एक तरह से इसका शुद्ध उच्चारण 'ऋ' की तरह, लुप्तप्राय है । व्रज और अवधी में यह 'रि' लिखा जाता है ।
ष ^१ संज्ञा पुं॰ <br><br>१. विद्वान् पुरुष । आचार्य । <br><br>२. कुच । चूचुक । <br><br>३. नाश । <br><br>४. शेष । बाका । <br><br>५. प्राप्त ज्ञान का क्षय । <br><br>६. मुक्ति । मोक्ष । <br><br>७. स्वर्ग । <br><br>८. अंत । समाप्ति । अवधि । <br><br>९. गर्भ । <br><br>१०. धैर्य । सहिष्णुता । <br><br>११. निद्रा । नींद (को॰) । <br><br>१२. कच । केश । बाल (को॰) । <br><br>१३. गर्भविमाचन (को॰) ।
ष ^२ वि॰ <br><br>१. बहुत अच्छा । उत्तम । श्रेष्ठ । <br><br>२. विद्वान् (को॰) ।
[[श्रेणी: हिन्दी-प्रकाशितकोशों से अर्थ-शब्दसागर]]
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क्शत्रिय
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३१ वाँ व्यंजन है
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==उच्चारण==
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== प्रकाशितकोशों से अर्थ ==
=== शब्दसागर ===
ष संस्कृत या हिंदी वर्णमाला के व्यंजन वर्णों में ३१ वाँ वर्ण या अक्षर । इसका उच्चारणस्थान मूर्धा है । इससे यह मूर्धंन्य वर्णों में कहा गया है । इसका प्रयोग केवल संस्कृत के शब्दों में होता है और उच्चारण दो प्रकार से होता है । कुछ लोग 'श' के समान इसका उच्घारण करते हैं। अनेक धातुएँ जो तालव्य 'श' से आरंभ हैं वे संस्कृत धातुपाठ में मूर्धन्य 'ष' से लिखी गई हैं इस अक्षर का परिवर्तन अधिकतर 'श', और 'ष' के रूप में होता है । एक तरह से इसका शुद्ध उच्चारण 'ऋ' की तरह, लुप्तप्राय है । व्रज और अवधी में यह 'रि' लिखा जाता है ।
ष ^१ संज्ञा पुं॰ <br><br>१. विद्वान् पुरुष । आचार्य । <br><br>२. कुच । चूचुक । <br><br>३. नाश । <br><br>४. शेष । बाका । <br><br>५. प्राप्त ज्ञान का क्षय । <br><br>६. मुक्ति । मोक्ष । <br><br>७. स्वर्ग । <br><br>८. अंत । समाप्ति । अवधि । <br><br>९. गर्भ । <br><br>१०. धैर्य । सहिष्णुता । <br><br>११. निद्रा । नींद (को॰) । <br><br>१२. कच । केश । बाल (को॰) । <br><br>१३. गर्भविमाचन (को॰) ।
ष ^२ वि॰ <br><br>१. बहुत अच्छा । उत्तम । श्रेष्ठ । <br><br>२. विद्वान् (को॰) ।
[[श्रेणी: हिन्दी-प्रकाशितकोशों से अर्थ-शब्दसागर]]
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བོད་སྐད་
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#पुनर्प्रेषित [[བོད་སྐད]]
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