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श्रेणी:विज्ञान
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2026-05-25T00:31:57Z
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text/x-wiki
'''श्रेणी:विज्ञान''' मँ विज्ञान संबंधी लेख सूची छै।
[[en:Category:Science]]
fwm2cgkdjaann6spcepcwe4vcde8kyw
अंकगणित
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अंकगणित गणित केरो सबसँ पुरानो शाखा मँ सँ एक छेकै ।
[[फाईल:2064 aryabhata-crp.jpg|thumb|upright|[[पुणे]] मँ आर्यभट के मूर्ति]]
'''अंकगणित''' (Arithmetics) [[गणित]] केरो तीन बड़ौ शाखा मँ सँ एक छेकै। [[अंक|अंकों]] तथा [[संख्या|संख्याओं]] की गणनाओं से सम्बंधित गणित की शाखा को अंकगणित कहा जाता हैं। यह गणित की मौलिक शाखा है तथा इसी से गणित की प्रारम्भिक शिक्षा का आरम्भ होता है। प्रत्येक मनुष्य अपने दैनिक जीवन में प्रायः अंकगणित का उपयोग करता है। अंकगणित के अन्तर्गत [[जोड़]], [[घटाना]], [[गुणा]], [[विभाजन (गणित)|भाग]], [[भिन्न]], [[दशमलव पद्धति|दशमलव]] आदि प्रक्रियाएँ आती हैं।
== इतिहास ==
मनुष्य आरम्भ से ही सामाजिक प्राणी रहा है तथा अपने प्रारम्भिक काल में [[कबीला]] बना कर रहा करता था। जब कबीले के सदस्यों में वृद्धि होने पर उनकी गिनती करने के लिये अंकों की आवश्यकता पड़ी। [[अंक]] बनाने के लिये मनुष्य की [[उंगली|अंगुलियाँ]] आधार बनीं। अंको के इतिहास के विषय में बहुत कम जानकारियाँ उपलब्ध हैं। कहा जाता है कि ईसा पूर्व 1850 में बेबीलोन के निवासी गणित की प्रारम्भिक प्रक्रियाओं से अच्छी तरह से परिचित थे। [[भारत]] में अंकगणित का ज्ञान अत्यन्त प्राचीनकाल से रहा है तथा वेदों में गणितीय प्रक्रियाओं का उल्लेख है। [[शून्य]] भी भारत की ही देन है।
== अंक आरू संख्या ==
[[शून्य]] (०) से लेकर [[नौ]] (९) को प्रदर्शित करने वाले संकेतों को अंक कहते हैं। अंक ही गणित का मूल है। दैनिक जीवन के अधिकांश कार्यों में अंकों का प्रयोग होता है।
एक से अधिक अंकों को एक के पास एक रखने से संख्या बनती है। अंक केवल दस होते हैं, किन्तु संख्याएँ अनन्त हैं। उदाहरण के लिए ३४७२ (तीन हजार चार सौ बहत्तर) एक संख्या है जिसमें ३, ४, ७, और २ अंक प्रयुक्त हुए हैं।
== अंकगणित केरो मूल प्रक्रिया ==
अंकगणित की मुख्य चार मूल प्रक्रियाएँ होती हैं
* जोड़
* घटाना
* गुणा
* भाग
=== [[जोड़]] ===
जब किसी संख्या या अंक में एक या एक से अधिक संख्या या अंक को मिलाया जाता है तो उसे जोड़ ([[:en:Addition]]) कहते हैं। जोड़ को + चिह्न से प्रदर्शित किया जाता है।
उदाहरणः<br />
10 + 10 = 20
25 + 50 =75
=== [[घटाना]] ===
जोड़ने की प्रक्रिया के विरुद्ध प्रक्रिया को घटाना ([[:en:Subtraction]]) कहा जाता है। जब किसी संख्या अथवा अंक से किसी दूसरी संख्या या अंक को कम किया जाता है तो उसे घटाना कहा जाता है। घटाने को '''-''' चिह्न से प्रदर्शित किया जाता है।
उदाहरणः
14 - 6 = 8 <br />
२४-१० = १४
=== [[गुणा]] ===
जब किसी संख्या अथवा अंक में उसी संख्या अथवा अंक को एक या एक से अधिक बार जोड़ा जाता है तो उसे गुणा ([[:en:Multiplication]]) कहते हैं। संख्या अथवा अंक को जितनी बार जोड़ा जाता है वह उतनी ही बार गुणा होता है। गुणा को x चिह्न से प्रदर्शित किया जाता है।
उदाहरणः<br />
2 x 4 = 8<br>
4+4=8<br>
1.माना कि किसी व्यक्ति की सैलरी 10,000 हैं और 3 साल बाद उसकी सैलरी 4 गुणा बढ़ जाती है ?
<br>
सैलरी 10,000/-
3 साल बाद सैलरी 4 गुणा बढ जाती है !
4 X 10,000 = 40,000/-
या
10,000+10,000+10,000+10,000 = 40,000/-
=== [[विभाजन (गणित)|भाग]] ===
गुणा करने की प्रक्रिया के विरुद्ध प्रक्रिया को भाग ([[:en:Division]]) कहा जाता है। जब किसी संख्या अथवा अंक में किसी संख्या अथवा अंक को एक से अधिक बार घटाया जाता है तो उसे भाग कहते हैं। संख्या अथवा अंक को जितनी बार विभाजित किया जाता है, उतनी ही बार भाग देना होता है। भाग को / चिह्न से प्रदर्शित किया जाता है।
उदाहरणः
4 / 2 = 2
== ई भी देखौ ==
* [[बीजगणित]]
* [[ज्यामिति]]
* [[त्रिकोणमिति]]
* [[कलन|कैलकुलस]]
== बाहरी कड़ी ==
* [https://web.archive.org/web/20121215045423/http://books.google.co.in/books?id=3e9RpGXth94C&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false प्रतियोगी परीक्षाओं के लिये अंकगणित] (गूगल पुस्तक; लेखक - आर एस अग्रवाल)
* [https://web.archive.org/web/20121215065411/http://books.google.co.in/books?id=B2gsseXsmtsC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false वस्तुनिष्ट अंकगणित] (गूगल पुस्तक ; लेखक -खट्टर)
{{अंकगणित}}
{{संख्या सिद्धान्त}}
[[श्रेणी:गणित]]
[[श्रेणी:अंकगणित]]
0qnjpzm9ux9bjfzd0wu61jn0elygkdl
उष्मा
0
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22720
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text/x-wiki
[[फाईल:Glowing metal.jpg|alt=see caption|thumb|[[तापमान|ताप]] केरौ कारण चमक-गर्म धातु बार।]]
'''उष्मा''' या '''ताप ऊर्जा''' [[ऊर्जा]] के एक रूप छेकै जे ताप के कारण होय छै। ऊर्जा केरऽ अन्य रूपऽ के तरह गर्मी भी बहै छै। कोनो पदार्थ के ताप या शीतलन के कारण ओकरा में जे ऊर्जा निहित छै ओकरा ओकरऽ तापीय ऊर्जा कहलऽ जाय छै। अन्य ऊर्जा के तरह एकरऽ इकाई भी जूल होय छै, लेकिन ई कैलोरी में भी व्यक्त होय छै। कोनो तरह के तापीय परस्पर क्रिया के [[माध्यम]] स॑ एक वस्तु स॑ दोसरऽ वस्तु म॑ ताप के स्थानांतरण होय छै । जेना कि यदि उच्च तापमान वाला लोहा के रॉड पानी में डाललऽ जाय त॑ रॉड स॑ पानी म॑ तापीय ऊर्जा स्थानांतरित होय जैतै । समस्त ब्रह्माण्ड में ताप के अहम भूमिका छै। ताप केरऽ प्रकृति आरू पदार्थऽ प॑ ओकरऽ प्रभाव के अध्ययन संभवतः ओतना वैज्ञानिक विषय नै छै, जेतना कि ई मानव हित स॑ संबंधित छै।<ref>''Thermodynamics and an Introduction to Thermostatics, 2nd Edition,'' by Herbert B. Callen, 1985, http://cvika.grimoar.cz/callen/ {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20181017152028/http://cvika.grimoar.cz/callen/ |date=17 October 2018 }} or http://keszei.chem.elte.hu/1alapFizkem/H.B.Callen-Thermodynamics.pdf {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20161230040339/http://keszei.chem.elte.hu/1alapFizkem/H.B.Callen-Thermodynamics.pdf |date=30 December 2016 }} , p. 8: Energy may be transferred via ... work. "But it is equally possible to transfer energy via the hidden atomic modes of motion as well as via those that happen to be macroscopically observable. An energy transfer via the hidden atomic modes is called ''heat''."</ref>
[[फाईल:171879main LimbFlareJan12 lg.jpg|thumb|[[सूर्य]] ताप के एगो बड़ौ स्रोत छेकै आरो पृथ्वी के अपनौ ताप सूर्य सँ मिलै छै। सूर्य सँ [[पृथ्वी]] तक ताप क प्रवाह होतअ रहै छै।]]
वसंत ऋतु के आगमन पर गर्मी के प्रभाव के कारण कली फूलै छै आरू वनस्पति क्षेत्र में एक नया जीवन के संचार होय छै। [[पृथ्वी]] प ताप केरऽ लगभग सब महत्वपूर्ण प्रभाव के स्रोत [[सूर्य]] छेकै। [[कोयला]], आरो [[पेट्रोलियम]], जेकरा सँ हमरा लोग के अपनौ उर्जा मिलौ छै, प्राचीन युग सँ संचित सूर्यक प्रकाशक प्रतिनिधित्व करै छै।
ताप [[भौतिकी]] केरऽ एगो महत्वपूर्ण शाखा छेकै जेकरा म॑ ताप, तापमान आरू ओकरऽ प्रभाव के वर्णन करलऽ गेलऽ छै। तापमान बढ़ला के साथ लगभग सब पदार्थ के [[आयतन]] बढ़ै छै।
== एकरहो देखौ ==
* [[उष्मागतिकी]]
* [[ऊष्मागतिकी केरौ सिद्धान्त]]
== बाहरी कड़ी ==
* {{In Our Time|Heat|b00fq3d4|Heat}}
* [http://www.foxnews.com/story/0,2933,187464,00.html Plasma heat at 2 gigakelvins] – Article about extremely high temperature generated by scientists (Foxnews.com)
* [http://www.cheresources.com/convection.shtml Correlations for Convective Heat Transfer] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120205133105/http://www.cheresources.com/convection.shtml |date=2012-02-05 }} – ChE Online Resources
== संदर्भ ==
[[श्रेणी:विज्ञान]]
esmrwkxoi975qse05df4xcjy1r7ze2b
उष्मागतिकी
0
605
22985
14716
2026-05-25T00:51:24Z
Kwamikagami
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/* इतिहास */
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text/x-wiki
'''ऊष्मागतिकी''' (अंग्रेजी मँ: '''Thermodynamics ''थर्मोडाय्नेमिक''''') जेकरा [[भौतिकी]] मँ ([[ताप]] + [[गतिशील|गतिशीलता]] = ताप या ताप आरू गति केरऽ गति) [[ऊर्जा]] केरऽ कार्य आरू ताप म॑ परिवर्तन के अध्ययन, आरू [[तापमान]] आरू [[दबाव]] जैसनऽ [[मैक्रोस्कोपिक चर]] स॑ एकरऽ संबंध स॑ संबंधित छै। एकरा म॑ तापमान, दबाव आरू [[आयतन]] के बीच के संबंध भी बतालऽ गेलऽ छै। ऊष्मागतिकी में विज्ञान के उ शाखा छेलै जेकरा मँ केवल ताप के काम में परिणत होय रहलऽ या काम के ताप में परिणत होय के चर्चा करलऽ जाय छेलै।
तापमान म॑ बदलाव के कारण ई अनुपात भी बदलै छै आरू ई परिवर्तन वू ताप स॑ संबंधित छै जेकरा [[अमोनिया केरौ संश्लेषण]] के प्रक्रिया म॑ तापमान क॑ [[अपरिवर्तन|अपरिवर्तित]] रखै लेली मिश्रण स॑ हटाबै के जरूरत छै। ऐन्हऽ अन्य चीजऽ के अध्ययन भी अब॑ ऊष्मागतिकी के तहत छै, जेकरा चलतें एकरऽ क्षेत्र बहुत व्यापक होय गेलऽ छै।
==इतिहास==
[[फाईल:Eight founding schools.png|upright=2|center|thumb|ऊष्मागतिकी के 8 मूल संस्थापक स्कूल (स्कूल)। ऊष्मागतिकी के आधुनिक रूप के सामने लाबै में बर्लिन स्कूल, वियना स्कूल, गिब्सियन स्कूल आदि सबस॑ बेसी योगदान देल॑ छै । बर्लिन स्कूल के [[रुडोल्फ क्लाउसियस]] द्वारा, [[सांख्यिकीय यांत्रिकी]] के वियना स्कूल के [[लुडविग बोल्ट्समैन]], आरो अमेरिकी इंजीनियर विलार्ड गिब्स के गिब्सियन स्कूल के [[येल विश्वविद्यालय]] 'ऑन द इक्विलिब्रियम ऑफ हेटरोजेनिकस सब्स्टेंस', जेकरा स॑ १८७६ म॑ [[केमिकल थर्मोडायनामिक्स]] केरऽ जन्म होय गेलै, ऊष्मागतिकी के क्षेत्र म॑ सबसें महत्वपूर्ण काम छेलै।]]
== एकरहो देखौ ==
* [[ऊष्मागतिकी केरौ सिद्धान्त]]
== बाहरी कड़ी ==
* [https://web.archive.org/web/20140211122258/http://tigger.uic.edu/~mansoori/Thermodynamic.Data.and.Property_html Thermodynamics Data & Property Calculation Websites]
* [https://web.archive.org/web/20150614003926/http://tigger.uic.edu/~mansoori/Thermodynamics.Educational.Sites_html Thermodynamics Educational Websites]
* [http://www.wiley.com/legacy/college/boyer/0470003790/reviews/thermo/thermo_intro.htm Biochemistry Thermodynamics]
* [http://farside.ph.utexas.edu/teaching/sm1/lectures/lectures.html Thermodynamics and Statistical Mechanics]
* [https://web.archive.org/web/20090430200028/http://www.ent.ohiou.edu/~thermo/ Engineering Thermodynamics – A Graphical Approach]
* [http://farside.ph.utexas.edu/teaching/sm1/statmech.pdf Thermodynamics and Statistical Mechanics] by Richard Fitzpatrick
== संदर्भ ==
[[श्रेणी:विज्ञान]]
r6ch3y8bnw57px01ya3evlcwzemfwz1
एड्स
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[[फाईल:Red Ribbon.svg|thumb|upright|एड्स क लाल फीता]]
'''एक्वाइर्ड इम्यूनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम''' या '''एड्स''' (अंग्रेजी: '''AIDS'''); '''मानव इम्यूनोडेफिशिएंसी विषाणु''' ('''HIV''') संक्रमण केरौ बाद एगो स्थिति छेकै, जे मँ मनुष्य क [[प्राकृतिक प्रतिरक्षा]] क नुकसान होय जाय छै। एड्स स्वयं कोनों बीमारी नाय छेकै, एखनी एड्स सँ पीड़ित मानव शरीर संक्रामक बीमारिय के प्रति अपनौ प्राकृतिक [[प्रतिरोधक क्षमता]] खत्म होय जाय छै, जे बैक्टीरिया आरो वायरस के कारण होय छै, केन्हअ की एच.आई.वी (एड्स पैदा करै वाला वायरस) रक्त मँ मौजूद प्रतिरोधी पदार्थ [[लिम्फ]] [[कोशिका]] प हमला करै छै। एड्स सं पीड़ित क शरीर मँ धीरे-धीरे प्रतिरक्षा के नुकसान केरौ कारण कोनो अवसरवादी संक्रमण यानी आम सर्दी सँ लैय क क्षय रोग जैना बीमारिय क इलाज मुश्किल होय जाय छै। एच.आई.वी संक्रमण के एड्स केरौ स्थिति मँ पहुंचै मँ 8 सं 10 साल या ओकरा सं बेसि समय लगै सकै छै। एच.आई.वी सं पीड़ित लोग बिना कोनों विशिष्ट लक्षण के कई साल तक जीयै सकै छै। ई बीमारी असुरक्षित तरीका स॑ एक स॑ अधिक जनऽ संग सम्भोग करला स॑ होय छै।
== एकरहो देखौ ==
== बाहरी कड़ी ==
* [https://www.unaids.org/en/ UNAIDS] – Joint United Nations Program on HIV/AIDS
* [https://hivinfo.nih.gov/home-page HIVinfo] – Information on HIV/AIDS treatment, prevention, and research, U.S. Department of Health and Human Services
* [https://jamanetwork.com/journals/jama/article-abstract/2688574 2018 Recommendations of the International Antiviral Society]
== संदर्भ ==
[[श्रेणी:रोग]]
kbbff8cggv3lp0yndtjkl14pvpol56r
गणित
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text/x-wiki
[[फाईल:2064 aryabhata-crp.jpg|thumb|upright|पुणा मँ आर्यभट की मूर्ति ४७६-५५०]]
'''गणित''' एगो ऐसनो विद्या केरो समूह छेकै जे संख्या, मात्रा, परिमाण, रूप आरू ओकरो आपसी रिश्त, गुण, स्वभाव इत्यादि के अध्ययन करै छै। गणित एगो अमूर्त या निराकार (abstract) आरू निगमनात्मक प्रणालीछेकै। गणित केरो कईएक शाखा छै : [[अंकगणित]], [[रेखागणित]], [[त्रिकोणमिति]], [[सांख्यिकी]], [[बीजगणित]], [[कलन]], इत्यादि। गणित मँ अभ्यस्त व्यक्ति या खोज करै वाला वैज्ञानिक क [[गणितज्ञ]] कहलो जाय छै।
बीसवीं शताब्दी के प्रख्यात ब्रिटिश गणितज्ञ आरू दार्शनिक बर्टेंड रसेल के अनुसार ‘‘गणित क एगो ऐसनो विषय के रूप मँ परिभाषित करलो जाबै सकै छै जेकरा मँ हम्में जानबे नै करै छियै कि हम्में की करी रहलो छियै । न ही हमें यह पता होता है कि जो हम कह रहे हैं वह सत्य भी है या नहीं।’’
गणित कुछ अमूर्त धारणाओं एवं नियमों का संकलन मात्र ही नहीं है, बल्कि दैनंदिन जीवन का मूलाधार है।
== गणित केरो महत्व ==
<!--[[फाईल:brahmagupta089.jpg|thumb|right|ब्रह्मगुप्त]]-->
[[फाईल:Brahmaguptra's theorem.svg|thumb|right|ब्रह्मगुप्त का प्रमेय, इसके अनुसार ''AF'' = ''FD''.]]
पुरातन काल से ही सभी प्रकार के ज्ञान-विज्ञान में गणित का स्थान सर्वोपरि रहा है-
:'''यथा शिखा मयूराणां नागानां मणयो यथा। '''
:'''तथा वेदांगशास्त्राणां गणितं मूर्ध्नि स्थितम्॥ ''' (''[[वेदाङ्ग ज्योतिष|वेदांग ज्योतिष]]'') <br />
('' जिस प्रकार मोरों में शिखा और नागों में मणि का स्थान सबसे उपर है, उसी प्रकार सभी वेदांग और शास्त्रों मे गणित का स्थान सबसे ऊपर है।'')
महान गणितज्ञ गाउस ने कहा था कि गणित सभी विज्ञानों की रानी है। गणित, [[विज्ञान]] और [[प्रौद्योगिकी]] का एक महत्वपूर्ण उपकरण (टूल) है। [[भौतिक शास्त्र|भौतिकी]], [[रसायन विज्ञान]], [[खगोल शास्त्र|खगोल विज्ञान]] आदि गणित के बिना नहीं समझे जा सकते। ऐतिहासिक रूप से देखा जाय तो वास्तव में गणित की अनेक शाखाओं का विकास ही इसलिये किया गया कि प्राकृतिक विज्ञान में इसकी आवश्यकता आ पड़ी थी।
कुछ हद तक हम सब के सब गणितज्ञ हैं। अपने दैनिक जीवन में रोजाना ही हम गणित का इस्तेमाल करते हैं - उस वक्त जब समय जानने के लिए हम घड़ी देखते हैं, अपने खरीदे गए सामान या खरीदारी के बाद बचने वाली रेजगारी का हिसाब जोड़ते हैं या फिर फुटबाल टेनिस या क्रिकेट खेलते समय बनने वाले स्कोर का लेखा-जोखा रखते हैं।
[[व्यवसाय]] और [[उद्योग|उद्योगों]] से जुड़ी लेखा संबंधी संक्रियाएं गणित पर ही आधारित हैं। बीमा (इंश्योरेंस) संबंधी गणनाएं तो अधिकांशतया ब्याज की चक्रवृद्धि दर पर ही निर्भर है। जलयान या विमान का चालक मार्ग के दिशा-निर्धारण के लिए ज्यामिति का प्रयोग करता है। भौगोलिक सर्वेक्षण का तो अधिकांश कार्य ही त्रिकोणमिति पर आधारित होता है। यहां तक कि किसी चित्रकार के आरेखण कार्य में भी गणित मददगार होता है, जैसे कि संदर्भ (पर्सपेक्टिव) में जिसमें कि चित्रकार को त्रिविमीय दुनिया में जिस तरह से इंसान और वस्तुएं असल में दिखाई पड़ते हैं, उन्हीं का तदनुरूप चित्रण वह समतल धरातल पर करता है।
[[संगीत]] में स्वरग्राम तथा संनादी (हार्मोनी) और प्रतिबिंदु (काउंटरपाइंट) के सिद्धांत गणित पर ही आश्रित होते हैं। गणित का विज्ञान में इतना महत्व है तथा विज्ञान की इतनी शाखाओं में इसकी उपयोगिता है कि गणितज्ञ एरिक टेम्पल बेल ने इसे ‘विज्ञान की साम्राज्ञी और सेविका’ की संज्ञा दी है। किसी भौतिकविज्ञानी के लिए अनुमापन तथा गणित का विभिन्न तरीकों का बड़ा महत्व होता है। रसायनविज्ञानी किसी वस्तु की अम्लीयता को सूचित करने वाले पी एच (pH) मान के आकलन के लिए लघुगणक का इस्तेमाल करते हैं। कोणों और क्षेत्रफलों के अनुमापन द्वारा ही खगोलविज्ञानी [[सूर्य]], तारों, [[चन्द्रमा|चंद्र]] और ग्रहों आदि की गति की गणना करते हैं। प्राणी-विज्ञान में कुछ जीव-जन्तुओं के वृद्धि-पैटर्नों के विश्लेषण के लिए विमीय विश्लेषण की मदद ली जाती है।
उच्च गतिवाले संगणकों द्वारा गणनाओं को दूसरी विधियों द्वारा की गई गणनाओं की अपेक्षा एक अंश मात्र समय के अंदर ही सम्पन्न किया जा सकता है। इस तरह कम्यूटरों के आविष्कार ने उन सभी प्रकार की गणनाओं में क्रांति ला दी है जहां गणित उपयोगी हो सकता है। जैसे-जैसे खगोलीय तथा काल मापन संबंधी गणनाओं की प्रामाणिकता में वृद्धि होती गई, वैसे-वैसे नौसंचालन भी आसान होता गया तथा क्रिस्टोफर कोलम्बस और उसके परवर्ती काल से मानव सुदूरगामी नए प्रदेशों की खोज में घर से निकल पड़ा। साथ ही, आगे के मार्ग का नक्शा भी वह बनाता गया। गणित का उपयोग बेहतर किस्म के समुद्री जहाज, रेल के इंजन, मोटर कारों से लेकर हवाई जहाजों के निर्माण तक में हुआ है। राडार प्रणालियों की अभिकल्पना तथा चांद और ग्रहों आदि तक राकेट यान भेजने में भी गणित से काम लिया गया है।
=== भौतिकी मँ गणित केरो महत्व ===
* [[विद्युत्चुम्बकत्व|विद्युतचुम्बकीय सिद्धान्त]] समझने एवं उसका उपयोग करने के लिये के लिये [[सदिश कलन|सदिश विश्लेषण]] बहुत महत्वपूर्ण है।
* ग्रुप सिद्धान्त, [[स्पेक्ट्रोस्कोपी]], [[प्रमात्रा यान्त्रिकी|क्वांटम यांत्रिकी]], [[ठोस अवस्था भौतिकी]] एवं [[नाभिकीय भौतिकी]] के लिये बहुत उपयोगी है।
* भौतिकी में सभी तरह के रेखीय संकायों के विश्लेषण के लिये फुरिअर की युक्तियाँ उपयोगी है।
* क्वान्टम् यान्त्रिकी को समझने के लिये [[मैट्रिक्स]] विश्लेषण जरूरी है।
* विद्युतचुम्बकीय तरंगों का वर्णन करने एवं क्वान्टम यांत्रिकी के लिये समिश्र संख्याओं का उपयोग होता है।
== गणित के इतिहास ==
{{मुख्य|गणित का इतिहास}}
मानव ज्ञान की कुछ प्राथमिक विधाओं में संभवतया गणित भी आता है और यह मानव सभ्यता जितना ही पुराना है। मानव जीवन के विस्तार और इसमें जटिलताओं में वृद्धि के साथ गणित का भी विस्तार हुआ है और उसकी जटिलताएं भी बढ़ी हैं। सभ्यता के इतिहास के पूरे दौर में गुफा में रहने वाले मानव के सरल जीवन से लेकर आधुनिक काल के घोर जटिल एवं बहुआयामी मनुष्य तक आते-आते मानव जीवन में धीरे-धीरे परिवर्तन आया है। इसके साथ ही मानव ज्ञान-विज्ञान की एक व्यापक एवं समृद्ध शाखा के रूप में गणित का विकास भी हुआ है। हालांकि एक आम आदमी को एक हजार साल से बहुत अधिक पीछे के गणित के इतिहास से उतना सरोकार नहीं होना चाहिए, परंतु वैज्ञानिक, गणितज्ञ, प्रौद्योगिकीविद्, अर्थशास्त्री एवं कई अन्य विशेषज्ञ रोजमर्रा के जीवन में गणित की समुन्नत प्रणालियों का किसी न किसी रूप में एक विशाल, अकल्पनीय पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं। आजकल गणित दैनिक जीवन के साथ सर्वव्यापी रूप में समाया हुआ दिखता है।
गणित की उत्पत्ति कैसे हुई, यह आज [[इतिहास]] के पन्नों में ही विस्मृत है। मगर हमें मालूम है कि आज के 4000 वर्ष पहले बेबीलोन तथा मिस्र सभ्यताएं गणित का इस्तेमाल [[पंचांग]] (कैलेंडर) बनाने के लिए किया करती थीं जिससे उन्हें पूर्व जानकारी रहती थी कि कब फसल की बुआई की जानी चाहिए या कब [[नील नदी]] में बाढ़ आएगी, या फिर इसका प्रयोग वे [[वर्ग समीकरण|वर्ग समीकरणों]] को हल करने के लिए किया करती थीं। उन्हें तो उस [[प्रमेय]] (थ्योरम) तक के बारे में जानकारी थी जिसका कि गलत श्रेय [[पाइथागोरस]] को दिया जाता है। उनकी संस्कृतियाँ कृषि पर आधारित थीं और उन्हें सितारों और ग्रहों के पथों के शुद्ध आलेखन और [[सर्वेक्षण]] के लिए सही तरीकों के ज्ञान की जरूरत थी। [[अंकगणित]] का प्रयोग व्यापार में रुपयों-पैसों और वस्तुओं के विनिमय या हिसाब-किताब रखने के लिए किया जाता था। [[ज्यामिति]] का इस्तेमाल खेतों के चारों तरफ की सीमाओं के निर्धारण तथा [[पिरामिड]] जैसे स्मारकों के निर्माण में होता था।
[[फाईल:maya.svg|thumb|[[म्यान संख्या]]]]
मिलेटस निवासी [[थेल्स]] (645-546 ईसा पूर्व) को ही सबसे पहला सैद्धांतिक गणितज्ञ माना जाता है। उसने बताया कि किसी भी वस्तु की ऊंचाई को मापन छड़ी द्वारा निक्षेपित परछाई से तुलना करके मापा जा सकता है। ऐसा मानते हैं कि उसने एक [[सूर्य ग्रहण]] के होने के बारे में भी [[पूर्वानुमान|भविष्यवाणी]] की थी। उसके शिष्य पाइथागोरस ने ज्यामिति को यूनानियों के बीच एक मान्य विज्ञान का स्वरूप दिलाकर [[यूक्लिड]] और आर्किमिडीज के लिए आगे का मार्ग प्रशस्त किया।
बेबीलोन निवासियों के विरासत में मिले ज्ञान में यूनानियों ने काफी वृद्धि की। इसके अलावा गणित को एक तर्कसंगत पद्धति के रूप में उन्होंने स्थापित भी किया-एक ऐसी पद्धति जिसमें कुछ मूल तथ्यों या धारणाओं को सत्य मानकर (जिन्हें [[प्रमेय]] कहते हैं) निष्कर्षों (जिन्हें [[उपपत्ति]] या प्रमाण कहते हैं) तक पहुंचा जाता है।
[[भारत]] के लिये यह गौरव की बात है कि बारहवीं सदी तक गणित की सम्पूर्ण विकास-यात्रा में उसके उन्नयन के लिए किए गये सारे महत्वपूर्ण प्रयास अधिकांशतया भारतीय गणितज्ञों की खोजों पर ही आधारित थे।
इसे भी देखें : '''[[भारतीय गणित]]''', '''[[भारतीय गणितज्ञों की सूची|भारतीय गणितज्ञ सूची]]'''
== गणित कार्यपद्धति ==
गणित मानव मस्तिष्क की उपज है। मानव की गतिविधियों एवं प्रकृति के निरीक्षण द्वारा ही गणित का उद्भव हुआ। मानव मस्तिष्क की चिंतन प्रक्रियाओं के मूल में पैठ कर ही गणित मुखर रूप से उनकी अभिव्यक्ति करता है और वास्तविक संसार [[अवधारणा|अवधारणाओं]] की दुनिया में बदल जाता है। गणित वास्तविक जगत को नियमित करने वाली मूर्त धारणाओं के पीछे काम करने वाले नियमों का अध्ययन करता है। ज्यादातर दैनिक जीवन का गणित इन मूल धारणाओं का ही सार है और इसलिए इसे आसानी से समझा-बूझा जा सकता है। हालांकि अधिकांश धारणाएं अंत:प्रज्ञा के द्वारा ही हम पर प्रकट होती है, फिर भी शुद्ध एवं संक्षेप रूप में उन धारणाओं को व्यक्त करने के लिए उचित [[पारिभाषिक शब्दावली|शब्दावली]] एवं कुछ नियमों और प्रतीकों की आवश्यकता पड़ती है।
अत: गणित की अपनी अलग ही [[भाषा]] एवं [[लिपि]] होती है जिसे पहले जानना-समझना जरूरी होता है। शायद यही कारण है कि दैनिक जीवन से असंबद्धित मानकर इसे समझने की दृष्टि से कठिन माना जाता है, जबकि हकीकत में यह वास्तविक जीवन के साथ अभिन्न रूप से जुड़ा ही नहीं है, बल्कि उसी से इसकी उत्पत्ति भी हुई है। यह विडंबना ही है कि ज्यादातर लोग [[गणित]] के प्रति विमुखता दिखा कर उससे दूर भागते हैं, जबकि वस्तुस्थिति यह है कि जीवन तथा ज्ञान के हर क्षेत्र में इसकी उपयोगिता है। यह केवल संयोग नहीं है कि आर्किमिडीज, न्यूटन(Newton), गौस और लैगरांज जैसे महान वैज्ञानिकों के विज्ञान के साथ-साथ गणित में भी अपना महान योगदान दिया है।
== गणित केरो वर्गीकरण ==
वर्तमान में गणित को मोटे तौर पर दो भागों में बांटा जाता है:
* [[व्यावहारिक गणित|अनुप्रयुक्त गणित]] या नियोज्य गणित (Applied Mathematics) और
* [[शुद्ध गणित]] (Pure Mathematics)।
=== अनुप्रयुक्त गणित ===
[[विज्ञान]], [[अर्थशास्त्र]] और अन्य कई क्षेत्रों में प्रयोग किया जाने वाला गणित प्रायोगिक गणित है और इसमें अध्ययन की जाने वाली गणितीय समस्याओं का स्रोत किसी और क्षेत्र में होता है। इसके अन्तर्गत यंत्रशास्त्र, भूमापन, भूपदार्थ विज्ञान, ज्योतिष आदि विषय है।
:{| style="border:1px solid #ddd; text-align:center; margin: auto;" cellspacing="13"
| [[फाईल:Gravitation space source.png|96px]] || [[फाईल:BernoullisLawDerivationDiagram.png|96px]] || [[फाईल:Maximum boxed.png|96px]]
|| [[फाईल:Two red dice 01.svg|96px]] || [[फाईल:Oldfaithful3.png|96px]] || [[फाईल:Market Data Index NYA on 20050726 202628 UTC.png|96px]] || [[फाईल:Arbitrary-gametree-solved.png|96px]] ||
|-
| [[गणितीय भौतिकी]] || [[तरल यांत्रिकी | तरल गतिकी]] || [[इष्टतमकरण]] || [[प्रायिकता]] || [[सांख्यिकी]] || [[गणितीय वित्त]] || [[खेल सिद्धांत]]
|}
=== शुद्ध गणित ===
शुद्ध गणित स्वयं गणित में उपजी उन समस्याओं का हल ढूंढता है जिनका अन्य क्षेत्रों से सीधा सम्बन्ध नहीं है। कई बार समय के साथ-साथ शुद्ध गणित के अनुप्रयोग मिलते जाते हैं और इस प्रकार उसका कुछ हिस्सा प्रायोगिक गणित में आता जाता है। शुद्ध गणित के अंतर्गत, [[बीजगणित]], [[ज्यामिति]] और [[संख्या सिद्धान्त|संख्या सिद्धांत]] आदि आते हैं। [[फरमा का अंतिम प्रमेय|फ़रमा का सुप्रसिद्ध प्रमेय]], [[संख्या सिद्धान्त]] का ही एक अंग है। शुद्ध गणित का विकास बीसवीं शताब्दी में बहुत अधिक हुआ और इसके विकास में १९०० में [[डेविड हिल्बर्ट]] के द्वारा [[पेरिस]] में दिये गये व्याख्यान का बहुत योगदान रहा।
==== संख्याएँ====
:{|style="border:1px solid #ddd; text-align:center; margin:auto" cellspacing="20"
|<math>1, 2, 3,\ldots\!</math> || <math>\ldots,-2, -1, 0, 1, 2\,\ldots\!</math> || <math> -2, \frac{2}{3}, 1.21\,\!</math> || <math>-e, \sqrt{2}, 3, \pi\,\!</math> || <math>2, i, -2+3i, 2e^{i\frac{4\pi}{3}}\,\!</math>
|-
|[[प्राकृतिक संख्या]]एँ || [[पूर्णांक]] || [[परिमेय संख्या]]एँ || [[वास्तविक संख्या]]एँ || [[समिश्र संख्या]]एँ
|}
==== संरचनाएँ (structures)====
:{|style="border:1px solid #ddd; text-align:center; margin:auto" cellspacing="15"
|<math>\begin{matrix} (1,2,3) & (1,3,2) \\ (2,1,3) & (2,3,1) \\ (3,1,2) & (3,2,1) \end{matrix}</math> || [[फाईल:Elliptic curve simple.svg|96px]] || [[फाईल:Rubik's cube.svg|96px]] || [[फाईल:Group diagdram D6.svg|96px]] || [[फाईल:Lattice of the divisibility of 60.svg|96px]] || [[फाईल:Braid-modular-group-cover.svg|96px]]
|-
|[[क्रमचय-संचय|सांयोगिकी]] || [[संख्या सिद्धान्त]] || [[समूह सिद्धांत]] || [[ग्राफ़ सिद्धान्त|ग्राफ सिद्धान्त]] || क्रम सिद्धान्त (Order theory) || [[बीजगणित]]
|}
==== आकाश (space)====
:{|style="border:1px solid #ddd; text-align:center; margin:auto" cellspacing="15"
|[[फाईल:Illustration to Euclid's proof of the Pythagorean theorem.svg|96px]] || [[फाईल:Sinusvåg 400px.png|96px]] || [[फाईल:Hyperbolic triangle.svg|96px]] || [[फाईल:Torus.png|96px]] || [[फाईल:Mandel zoom 07 satellite.jpg|96px]] || [[फाईल:Measure illustration.png|70px]]
|-
|[[ज्यामिति]] || [[त्रिकोणमिति]] || [[अवकल ज्यामिति]] || टोपोलोजी || फ्रैक्टल ज्यामिति || मापन सिद्धान्त
|}
==== रूपान्तरण (transformation)====
{|style="border:1px solid #ddd; text-align:center; margin:auto" cellspacing="20"
|[[फाईल:Integral as region under curve.svg|96px]] || [[फाईल:Vector field.svg|96px]] || [[फाईल:Airflow-Obstructed-Duct.png|96px]] || [[फाईल:Limitcycle.svg|96px]] || [[फाईल:Lorenz attractor.svg|96px]] || [[फाईल:Conformal grid after Möbius transformation.svg|96px]]
|-
|[[कलन]] || [[सदिश कलन|सदिश कैलकुलस]] || [[अवकल समीकरण]] || गतीय निकाय|| अक्रम सिद्धान्त (chaos theory) || समिश्र विश्लेषण
|}
===[[विविक्त गणित]] (Discrete mathematics)===
सैद्धान्तिक [[कम्प्यूटर विज्ञान|संगणक विज्ञान]] में काम आने वाले गणित का सामान्य नाम '''विविक्त गणित''' है। इसमें संगणन सिद्धान्त (Theory of Computation), संगणनात्मक जटिलता सिद्धान्त, तथा सैधान्तिक कम्प्यूतर विज्ञान शामिल हैं।
<div style="text-align: center;">
{| style="border:1px solid #999; text-align:center;" cellspacing="15"
| <math>\begin{matrix} \left [ 1,2,3 \right ] & \left [ 1,3,2 \right ] \\ \left [ 2,1,3 \right ] & \left [ 2,3,1 \right ] \\ \left [ 3,1,2 \right ] & \left [ 3,2,1 \right ] \end{matrix} </math> || [[फाईल:Venn A intersect B.svg|96px]] || [[फाईल:DFAexample.svg|96px]] || [[फाईल:Caesar3.svg|96px]] || [[फाईल:6n-graf.svg|96px]]
|-
| [[क्रमचय-संचय|सांयोजिकी]] || सहज कुलक सिद्धांत || [[कम्प्यूटर विज्ञान|संगणन सिद्धान्त]] || कूटन (Encryption) || [[ग्राफ़ सिद्धान्त|ग्राफ सिद्धान्त]]
|}
</div>
== संगणन के उपकरण ==
नीचे कुछ [[मुक्त स्रोत|मुक्तस्रोत]] कम्प्यूटर सॉफ्टवेयरों का नाम दिया गया है जो गणित के विभिन्न कार्य करने के लिए बहुत उपयोगी हैं।
{| style="border:1px solid #999; text-align:center;" cellspacing="20" align="center" width="100%"
|| [[फाईल:Maxima-new.svg|110px]]
| align="left" | मैक्सिमा (Maxima (software))
|| [https://web.archive.org/web/20190510164907/http://maxima.sourceforge.net/ https://web.archive.org/web/20190510164907/http://maxima.sourceforge.net/]
|-
||
| align="left" | [[साईलैब]] (Scilab)
|| [https://web.archive.org/web/20040727171441/http://scilabsoft.inria.fr/ https://web.archive.org/web/20040727171441/http://scilabsoft.inria.fr/]
|-
|| [[फाईल:R logo.svg|80px|R logo]]
| align="left" | आर (सोफ्टवेयर) (R (software))
|| [https://web.archive.org/web/20110305165926/http://www.r-project.org/ https://web.archive.org/web/20110305165926/http://www.r-project.org/]
|-
||
| align="left"| GNU आक्टेव
|| [https://web.archive.org/web/20060209022732/http://www.octave.org/ https://web.archive.org/web/20060209022732/http://www.octave.org/]
|}
== प्रमुख गणितज्ञ==
<gallery>
File:Persian Khwarazmi ir.jpg|अल्-ख्वारिज्मी
File:Jean d'Alembert.jpeg|डी'एलम्बर्ट
File:Domenico-Fetti Archimedes 1620.jpg|[[आर्कीमीडीज]]
File:George Boole.jpg|[[जॉर्ज बूल]]
File:Matematiker georg cantor.jpg|जॉर्ज कैण्टर
File:Augustin-Louis Cauchy 1901.jpg|कउची
File:Dedekind.jpeg|रिचर्ड दडकिंद
File:Frans Hals - Portret van René Descartes.jpg|रेने देकार्तीज
File:Euclid statue, Oxford University Museum of Natural History, UK - 20080315.jpg|उक्लिदेस
File:Leonhard Euler.jpg|[[लियोनार्ड आयलर]]
File:Pierre de Fermat.jpg|[[पियरे डी फर्मा]]
File:Evariste galois.jpg|गलोई
File:Carl Friedrich Gauss.jpg|[[कार्ल फ्रेडरिक गाउस]]
File:1925 kurt gödel.png|[[कुर्त गोडेल|गोडेल्]]
File:WilliamRowanHamilton.jpeg|[[हैमिल्टन]]
File:Hilbert.jpg|[[हिल्बर्ट]]
File:Hypatia portrait.png|[[हिपाशिया]]
File:Carl Jacobi2.jpg|[[जैकोबी]]
File:033-Earth-could-not-answer-nor-the-Seas-that-mourn-q75-829x1159.jpg|[[ओमर खैयाम]]
File:Felix Christian Klein.jpg|फेलिक्स क्लीन
File:Andrej Nikolajewitsch Kolmogorov.jpg|[[आंद्रेई कोल्मोगोरोव|कोल्मोगोरोव]]
File:Лагранж.jpg|[[लाग्रेंज]]
File:Pierre-Simon Laplace.jpg|[[पियरे साइमन लाप्लास]]
File:Gottfried Wilhelm von Leibniz.jpg|[[लैब्नीज]]
File:Lebesgue 2.jpeg|लेबेस्क
File:John Forbes Nash, Jr. by Peter Badge.jpg|[[जॉन नैश]]
File:JohnvonNeumann-LosAlamos.jpg|[[जॉन फॉन न्युमान]]
File:Sir Isaac Newton by Sir Godfrey Kneller, Bt.jpg|[[आइज़क न्यूटन|आइजक न्यूटन]]
File:Noether.jpg|[[एमी नोथर]]
File:Blaise Pascal 2.jpg|[[पास्कल (इकाई)|पास्कल]]
File:Giuseppe Peano.jpg|पियानो
File:Kapitolinischer Pythagoras.jpg|[[पाइथागोरस]]
File:JH Poincare.jpg|पोआनकारे
File:Lev Pontrjagin.jpg|पोटरीआजिन
File:Srinivasa Ramanujan - OPC - 1.jpg|[[श्रीनिवास रामानुजन्|श्रीनिवास रामानुजन]]
File:Riemann.jpg|रेमैन
File:Russell1907-2.jpg|[[बर्ट्राण्ड रसेल]]
File:JakobSteiner.jpg|[[जैकब श्टाइनर]]
File:Hermann Weyl ETH-Bib Portr 00890.jpg|वेल
File:Ernst Zermelo.jpeg|ज़रमेलो
</gallery>
== ई भी देखौ ==
* [[गणित का इतिहास]]
* [[भारतीय गणित]]
* [[भारतीय गणितज्ञों की सूची|भारतीय गणितज्ञ सूची]]
* [[विविक्त गणित]] (Discrete mathematics)
== बाहरी कड़ी ==
* [https://web.archive.org/web/20160420155906/http://ganitanjali.blogspot.in/ '''गणितांजलि''' : गणित का हिन्दी ब्लॉग]
* [https://web.archive.org/web/20110520224225/http://books.google.co.in/books?id=VolV8AtZR1wC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false गणित का इतिहास] (गूगल पुस्तक ; लेखक - डॉ ब्रज मोहन)
* [https://web.archive.org/web/20110520224209/http://books.google.co.in/books?id=rSjueUt34gwC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false गणित की रोचक बातें] (गूगल पुस्तक)
* [https://web.archive.org/web/20080405213640/http://www.tri-murti.com/ancientindia/mathematics.html गणित का इतिहास] (अंग्रेजी में)
* [https://web.archive.org/web/20110708043446/http://itihaasam.blogspot.com/2009/01/blog-post_8758.html भारत में गणित का इतिहास]
* [https://web.archive.org/web/20110520224048/http://books.google.co.in/books?id=WNjRrqTm62QC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false Mathematics and its history] (Google Book ; By John Stillwell)
* [https://web.archive.org/web/20110520224034/http://books.google.co.in/books?id=g_yFmZHqSlUC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false गणित प्रश्नोत्तरी]
* [https://web.archive.org/web/20110520224235/http://books.google.co.in/books?id=-ZH6y-qTh-wC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false गणितशास्त्र के विकास की भारतीय परम्परा] (गूगल पुस्तक ; लेखक - सुद्युम्न आचार्य)
* [https://web.archive.org/web/20101111204113/http://hi.wiktionary.org/wiki/Mathematics_Glossary माध्यमिक गणित शब्दावली] (हिन्दी विक्शनरी)
* [https://web.archive.org/web/20101019221558/http://www.emaths.co.uk/EAL/ALBETAC_Glossary/Grade68/Hindi.pdf Grade 6-8 - 7052_math glossary GRADES 6-8_English_Hindi] (पीडीएफ)
* [http://groups.google.co.in/group/a_teacher/browse_thread/thread/93d3af1418f13124?pli=1 कैसे हो कक्षा में गणित सीखना–सिखाना ?]{{Dead link|date=October 2023 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }} (प्रवीण त्रिवेदी)
* [http://www.patrika.com/article.aspx?id=30840 राष्ट्रीय गणित वर्ष एवं हमारा दायित्व] (पत्रिका)
* [https://web.archive.org/web/20170905225219/http://www.math.pitt.edu/~wjl/MathQuotes.html Mathematical Quotes]
{{गणित}}
{{Pp-semi-template|small=yes}}
[[श्रेणी:गणित| *]]
[[श्रेणी:गणितीय शब्दावली| *]]
r26owoq0plrthxvg561vd7cquti91go
थर्मामीटर
0
1427
22984
17810
2026-05-25T00:50:50Z
Kwamikagami
96
22984
wikitext
text/x-wiki
[[फाईल:Clinical thermometer 38.7.JPG|thumb|एगो चिकित्सकीय तापमापी]]
'''तापमापी''' या थर्मामीटर वू युक्ति छेकै जे [[ताप]] या 'ताप के प्रवणता' क॑ मापने के काम आबै छै। 'तापमिति' (Thermometry) भौतिकी केरऽ वू शाखा के नाम छेकै, जेकरा म॑ तापमापन के विधि पर विचार करलऽ जाय छै। तापमापी अनेक सिद्धान्तऽ के आधार पर निर्मित करलऽ जाब॑ सकै छै । द्रव केरऽ आयतन ताप ग्रहण करी क॑ बढ़ी जाय छै तथा आयतन म॑ होय वाला ई वृद्धि तापक्रम के समानुपाती होय छै । साधारण थर्मामीटर यह॑ सिद्धान्त पर काम करै छै ।
[[फाईल:Thermometer CF.svg|thumb|upright|'''तापमापी''']]
== नियत बिंदु ==
तापमापन की इकाई निर्धारित करने के लिये किसी पदार्थ को क्रमश: दो निश्चित तापीय साम्यावस्थाओं में रखा जाता है। इनको नियत बिंदु (Fixed points) कहते हैं। इन अवस्थाओं में पदार्थ के किसी विशेष गुण के परिमाण निकाल लेते हैं और उनके अंतर को एक निश्चित संख्या में बराबर बराबर बाँट देते हैं। इनमें से प्रत्येक अंश तापमापन की इकाई मानी जाती है, जिसको एक अंश अथवा डिग्री कहते हैं। बहुत समय से तापमापियों (थर्मामीटरों) में हिमबिंदु (Ice point) और भापविंदु (Steam point) का नियत बिंदुओं के रूप में प्रयोग किया जाता रहा है। जिस ताप पर शुद्ध बर्फ और शुद्ध वायुसंतृप्त (air saturated) पानी एक वायुमंडल के दाब पर साथ साथ साम्यावस्था में रहते हैं उसको हिमबिंदु कहते हैं। इसी प्रकार निश्चित दाब पर शुद्ध पानी और शुद्ध भाप का साम्य भापबिंदु बतलाता है।
सामान्य थर्मामीटरों में शीशे की एक छोटी खोखली घुण्डी होती है, जिसमें पारा या द्रव भरा रहता है। तापीय प्रसरण (thermal expansion) के कारण द्रव नली में चढ़ जाता है। उर्पयुक्त दोनों नियत बिंदुओं पर नली में द्रव के तल के सामने चिह्न लगा दिए जाते हैं। सेंटिग्रेड पैमाने में, जिसको अब सेलसियस पैमाना कहते हैं, हिमबिंदु को शून्य और भापबिंदु को 100 डिग्री मानते हैं। इन दोनों चिन्हों के बीच की दूरी को 100 सम भागों में बाँट दिया जाता है। फारेनहाईट मापहाईट मापक्रम में ये दोनों बिंदु क्रमश: 32 और 212 डिग्री माने जाते हैं और इनका अंतर 180 भागों में विभक्त होता है।
उपर्युक्त तापमापियों में तापक्रम तापीय प्रसारण पर आधारित है, किंतु ऐसा आवश्यक नहीं। कोई भी गुण, जो तापवृद्धि के अनुसार एकदिष्टता (monotonically) से बढ़ता है, इस कार्य के लिये प्रयुक्त हो सकता है। वास्तव में प्रयोगशाला के अनेक सुग्राही तापमापी विद्युत्प्रतिरोध के परिवर्तन या तापविद्युत पर आधारित होते हैं। गुणों की तरह द्रव पदार्थो पर भी कोई प्रतिबंध नहीं होता। कोई भी पदार्थ तापमापी में प्रयुक्त किया जा सकता है, किंतु मुख्य समस्या यह है कि पदार्थो और गुणों के भेद से जो विभिन्न तापमापी निर्मित हो सकते हैं उनसे दोनों नियत बिंदुओं को छोड़कर अन्य सब तापों पर पाठ्यांकों में भेद मिलेगा। इससे सिद्ध है कि यह सब मूलत: प्रमाणिक नहीं माने जा सकते।
== परमताप ==
सिद्धांततः [[उष्मागतिकी]] (thermodynamics) पर आधारित मापक्रप स्वत:प्रमाण माना जाता है और दूसरे पैमाने उसके अनुसार शुद्ध कर लिए जाते हैं। इस विज्ञान में ऐसे इंजन की कल्पना की गई है जो एक भट्ठी से ऊष्मा लेकर उसका कुछ अंश महत्तम दक्षता (efficiencey) के साथ कार्य में परिवर्तित कर देता है और शेष भाग एक निम्नतापीय संघनित्र (condenser) को दे देता है। इसको कार्नो (carnot) इंजन, अथवा प्रतिवर्ती (Reversible) इजंन, कहते हैं। सिद्धांत के अनुसार अगर भट्ठी और संघनित्र के बहुत से भिन्न तापीय जोड़े एकत्रित हों और एक कार्नो इंजन प्रत्येक के बीच क्रमश: लगाया जाए, तो उसके द्वारा किया गया कार्य इन जोड़ो के तापातर भेद के समानुपाती होता है। इस प्रकार कार्य के मापन से तापांतर ज्ञात किया जा सकता है। इस इंजन की दक्षता उसके सिलिंडर में भरे हुए द्रव्य और उसकी अवस्था पर निर्भर नहीं करती, इसलिए इसको तापमान का आधार माना गया है और इसके द्वारा निर्धारित ताप को परमताप कहते हैं।
सेंटिग्रेड और फारेनहाइट पैमाने की तरह परमताप मापक्रम का शून्य मनमाना नहीं होता। कार्नो इंजन द्वारा किया गया कार्य भट्ठी और संघनित्र दोनों के ताप पर निर्भर करता है। संघनित्र की तापीय अवस्था ऐसी भी हो सकती है कि यह इंजन भट्ठी से प्राप्त समस्त ऊष्मा को कार्य में बदल दे और संघनित्र को उसका कोई भी अंश प्राप्त न हो। ऐसी स्थिति में संघनित्र का ताप परमशून्य माना जाता है।
डिग्री का परिमाण निर्धारण करने के लिये पहले की तरह दो नियत बिंदुओं की आवश्यकता होती है। 1954 ई0 से पूर्व परमताप पैमाने में भी हिम और भाप बिंदुओं का प्रयोग होता था। इन दोनों के तापभेद को 100° परम (100° पा) माना जाता था। इसका यह अर्थ है कि कार्ने इंजन की भट्ठी को भापबिंदु पर और संघनित्र को हिमबिंदु पर रखने से जो कार्य मिलता है उसका शतांश कार्य एक डिग्री प्रदर्शित करती है। इस प्रबंध में बड़ी कठिनाई यह पड़ती है कि हिमबिंदु की यथार्थता सीमित है और भिन्न वैज्ञानिकों द्वारा प्राप्त राशिमानों में ± 01° पा तक का अंतर पाया जाता है। इससे बचने के लिये सन् 1954 से अंतर्राष्ट्रीय निश्चय के अनुसार केवल एक ही नियत बिंदु (पानी के त्रिकबिदुं) का उपयोग होने लगा है। त्रिक्बिंदु उस ताप को कहते हैं जिसपर पानी, बर्फ और जलवाष्प का साम्य संभव है। इसका मान स्वेच्छा से 273.16° पा मान लिया गया है। ऐसा कहा जा सकता है कि सन् 1954 से पूर्व परमताप पैमाना तीन बिंदुओं, (परमशून्य, हिमबिंदु और भापबिंदु) द्वारा निर्घारित होता था, किंतु अब केवल दो बिंदुओं (परमशून्य और त्रिक्बिंदु) का उपयोग होता है। दूसरें शब्दों में इस लेख के प्रारंभ में वर्णित दो नियत बिंदुओं में से एक परमशून्य और दूसरा त्रिक्बिंदू होता है। त्रिक्बिंदू और परमशून्य के बीच कार्य करनेवाले कार्नो इंजन द्वारा जो कार्य होता है उसका 1/273.16 अंश कार्य एक परम डिग्री का बोध करता है।
कार्नो का इंजन आदर्श मात्र है और व्यवहार में इसका निर्माण संभव नहीं, परंतु यह सिद्ध किया जा सकता है कि आदर्श गैस के तापीय प्रसरण द्वारा निर्मित तापमापी के पाठ्यांक परमताप के बराबर होते हैं। अत: आदर्श गैस पैमाना स्वत: प्रमाण, अथवा प्राथमिक मानक (primary standard), माना जाता है। आदर्श गैस उस गैस को कहते हैं जो निम्नलिखित नियम का पालन करती है:
: PV = RT
जिसमें (P) दाब, (V) आयतन तथा (T) परमाताप होते है। (R) नियतांक है जिसका मान प्रत्येक आदर्श गैस की एक ग्राम-अणु मात्रा के लिए एक समान होता है।
गैस थर्मामीटर दो प्रकार के होते हैं, एक तो स्थिर आयतन वाले और दूसरे स्थिर दाब वाले। पहले की क्रिया सरल है और उसकी त्रुटियों का संशोधन विश्वसनीय रूप से किया जा सकता है। अत: स्थिर आयतन तापमापियों का ही उपयोग होता है। जैसा नाम के प्रकट है, इनसे गैस का आयतन स्थिर रखकर दाब का मापन किया जाता है।
== अंतर्राष्ट्रीय ताप पैमाना ==
[[आदर्श गैस तापमापी]] से ताप निकालने में अथक परिश्रम और समय की आवश्यकता होती है। अनेक कारणों से पाठ में त्रुटियाँ होना संभव है और इनके लिये प्राप्त फलों में संशोधन करना होता है। कुछ त्रुटियाँ तो तापमापी की बनावट में उचित परिवर्तन करके दूर की जाती हैं और कुछ के लिये लंबी गणना करनी होती है। इससे यह सिद्ध है कि गैस तापमापी प्रयोगशाला में दैनिक कार्य के लिये उपयुक्त नहीं हो सकता। इसलिये अंतर्राष्ट्रीय निश्चय के अनुसार कुछ पदार्थों के [[गलनांक]] (melting points) और [[क्वथनांक]] (boiling points) प्राथमिक मानक के रूप में प्रयुक्त होते हें। ये अंक आदर्श गैस-पैमाने से बहुत परिश्रम के पश्चात् ठीक रूप से माप लिए गए हैं और उनके मान अंतर्राष्ट्रीय स्वीकृति पा चुके हैं।
'''नियतांक''' -- '''सैलसियस ताप डिग्री सें0'''
1. पानी का त्रिकबिंदु : 0.01 (मूल मानक)
2. आक्सीजन का क्वथनांक (आक्सीजन विंदु) : -182.97 (मानक)
3. हिम और वायुसंतृप्त पानी का साम्य (हिमबिंदु) : 0 (मानक)
4. पानी का क्वथनांक (भापबिंदु) : 100 (मानक)
5. गंधक का क्वथनांक (गंधक बिंदु) : 444.6 (मानक)
6. एंटिमनी का गलनांक (एंटिमनी बिंदु) : 630.5 (मानक)
7. रजत का गलनांक (रजत बिंदु) : 960.8 (मानक)
8. स्वर्ण का गलनांक (स्वर्ण बिंदु) : 1063 (मानक)
इसके अतिरिक्त और भी कुछ नियत बिंदु द्वितीय मानक के रूप में निश्चित किए गए हैं। प्रयोगशाला में काम आनेवाले तापमापी इनसे मिलाकर शुद्ध कर लिए जाते हैं। नियत बिंदुओं के मध्यवर्ती ताप [[अंतर्वेशन]] (interpolation) द्वारा ज्ञात किए जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय पैमाने के लिये निम्नलिखित अंतर्वेशन विधियाँ चुनी गई है :
(1) '''0 - 180 सें.° सेलसियस तक''' :
इस तापविधि में प्लैटिनम प्रतिरोध तापमापी का प्रयोग किया जाता है। तार शुद्ध प्लैटिनम का और उसका व्यास 0.05 और 0.20 मिमी. के भीतर होना आवश्यक है। ताप निम्नलिखित अंतर्वेशन विधियाँ चुनी गई है :
: R1 = R0 { 1+ At+ Bt<sup>2</sup>+ C (t - 100) t<sup>3</sup>}
इसमें (t°) सें. और 0.00° सें. ताप पर विद्युत प्रतिरोध क्रमश: R1 और R0 है। (A,B,C) स्थिरांक हैं, जो भाप, गंधक और ऑक्सीजन बिंदुओं के प्रतिरोधों द्वारा निकाले जाते हैं।
(2) '''0° से 660° सें तक''':
इसमें भी उपर्युक्त तापमापी प्रयुक्त होता है, किंतु इसका अंतर्वेशन समीकरण निम्नलिखित है :
: Rt = R0 (1+ At+ Bt<sup>2</sup>)
A और B हिम, भाप और गंधक बिंदुओं पर तापमापी के प्रतिरोधों द्वारा निकाले जाते हैं।
(3) '''660° से0 1063° से0 तक'''
इसके लिये एक [[तापांतर युग्म]] (thermocouple) का प्रयोग किया जाता है, जिसका एक तार प्लैटिनम का और दूसरा 90 प्रतिशत प्लैटिनम के साथ 10 प्रतिशत रोडियम की मिश्रधातु का बना होता है। तारों का व्यास 0.35 और 0.65 मिमी0 के भीतर होता है तथा एक जोड़ 0° सें° पर रखा जाता है। अतंर्वेशन सूत्र यह है:
: E = a + b t + Ct<sup>2</sup>
(E) तापांतर युग्म में विकसित विद्युतद्वाहक बल (E.M.F.)) और (t) सें° पैमाने में ताप है। स्थिरांक (a) (b) और (c) एंटिमनी, रजत और स्वर्ण बिंदुओं पर वि0 वा0 ब0 का मान ज्ञात करके निकाले जाते हैं।
(4) '''1063° से ऊपर के ताप''' विकरण तापमापियों द्वारा मापे जाते हैं।
== विद्युतप्रतिरोधी तापमापी ==
जिस प्रकार तापवृद्धि से पदार्थों की लंबाई बढ़ती है उसी प्रकार धातु के तारों के विद्युत्प्रतिरोध (resistance) में भी ताप द्वारा वृद्धि होती है। तापीय प्रसरण की तरह इस वद्धि का भी तापमापन में उपयोग हो सकता है। इस कार्य के लिये अनेक धातुओं के तारों का उपयोग होता है। फिर भी [[प्लैटिनम]] तार के बने तापमापी का महत्व इसलिये अधिक होता है क्योंकि वह अंतरराष्ट्रीय पैमाने के अंतर्वेशन के लिये प्रयुक्त होता है। तार शुद्ध घातु का और विकृतिमुक्त (unstrained) होना आवश्यक है। तार को बल्ब में पतले अभ्रक, या स्फटिक के ढाँचे पर लपेट कर रखते हैं और उसका विद्युतप्रतिरोध मापकर आवश्यकतानुसार उचित समीकरण (जैसे : Rt = R0 (1+ At+ Bt<sup>2</sup>) द्वारा ताप की गणना कर लेते हैं। प्रतिरोधमापन के लिये कई प्रकार के विद्युत्सेतुओं (bridges) का उपयोग किया जाता है। इनमें [[कैलेंडर-ग्रिफिथ का सेतु]] पुराना और सर्वविदित है। यह [[व्हीट्स्टोन सेतु]] के सिद्धांतपर आधारित है।
प्रतिरोधमापन के प्लैटिनम तार को जिन वाहक तारों से संयुक्त किया जाता है वे भी ऊष्मा से गर्म हो जाते हैं, जिससे उनके प्रतिरोध में भी परिवर्तन हो जाता है। यह परिवर्तन भी सेतु द्वारामापित होकर ताप की गणना में अशुद्धि का कारण बन जाता है। कैलेंडर ग्रिफिथ सेतु से इस त्रुटि को दूर करने के लिये ठीक इसी प्रकार के वाहक तार सेतु की संयुग्मी (conjugate) भुजा में भी डाल दिए जाते हैं। दोनों जोड़े तापमापी में पास पास रहते हैं और इनपर ऊष्मा का एक सा प्रभाव पड़ता है। इस कारण सेतु के संतुलन और मापित प्रतिरोध पर इनका कोई असर नहीं होता।
इस त्रुटि को दूर करने का अन्य उपाय यह है कि प्लैटिनम के तार का प्रतिरोध न निकाल कर उसके सिरों के बीच विभवांतर (potential difference) नापते हैं। तार के अंदर निश्चित मात्रा में विदयुद्धारा का प्रवाह किया जाता है। इसके दो सिरों को एक विभवमापी (potentiometer) से जोड़कर विभवातंर माप लेते हैं। प्रतिरोध के समानुपाती होने के कारण विभवांतर से ओम (Ohm) के नियमानुसार प्रतिरोध की गणना कर ली जाती है। इनमें वाहक तारों के प्रतिरोध का प्रभाव पूर्णतया लुप्त हो जाता है।
== तापविद्युत् तापमापी ==
यदि दो भिन्न धातुओं के तार एक परिपथ में संयुक्त हों और उनके संगमबिंदुओं (junctions) को भिन्न ताप (T और T0) पर रखा जाय तो परिपथ में विद्युत धारा का प्रवाह हाने लगता है। यह धारा परिपथ में सुग्राही [[धारामापी]] द्वारा देखी जा सकती है। धारा के उत्पादक बल, अर्थात् विद्युद्वाहक बल (emf) का मान क और ख के तापांतर पर निर्भर करता है। अत: इसको नापकर तापांतर ज्ञात कर सकते हैं। ऐसे तार के जोड़ों को '''तापांतर युग्म''' (thermocouple) कहते हैं।
अंतराष्ट्रीय पैमाने में प्रयुक्त तापांतर युग्मों की धातुओं का वर्णन ऊपर किया गया है, किंतु प्रयोगशाला में सुग्राहिता (sensitivity) और प्रयोग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विभिन्न धातुएँ काम में लाई जाती हैं। तापांतर युग्म में वि0 वा0 ब0 तापांतर पर निर्भर होता है, इसलिये निम्न तापवाले संगम का ताप स्थिर रखा जाता है।
क और ख सिरों को विभवमापी अथवा मिलिवोल्टमापी से संयुक्त करके EMF माप लिया जाता है। मिलिवोल्टमापी में यह सीधा मापित होता है, परंतु यह उतना सुग्राही नहीं है जितना विभवमापी।
== विकिरण तापमामी ==
जब किसी ठोस वस्तु को गरम किया जाता है तो उससे उर्जा का विद्युच्चुंबकीय (electromagnetic) तरंगों के रूप में विकिरण (radiation) होता है। कम तापवृद्धि होने पर तरंगों का तरंगदैर्ध्य (wave length) कम होता है और उनसे ऊष्मा का अनुभव होता हैं। अधिक तापवृद्धि होने पर छोटे तरंगदैर्ध्यवाली तरंगों का आधिक्य हो जाता है, जिनसे प्रकाश की प्रतीति होती है। विकीर्ण ऊर्जा की मात्रा और उसके गुण गर्म वस्तु की अवस्था पर भी निर्भर करते हैं। पूर्णतया काली वस्तु में यह गुण होता है कि वह अपने ऊपर पड़नेवाली समस्त विकीर्ण ऊर्जा का शोषण कर लेती है और स्वत: अधिकतम ऊर्जा का विकिरण करती है। ऐसी वस्तु को कृष्ण वस्तु अथवा कृष्णका भी कहते हैं। यदि चारों ओर से बंद खोखले पिंड की दीवारों को समताप पर रखा जाए तो उसके भीतर उत्पन्न विकीर्ण ऊर्जा गुण और मात्रा में पूर्णतया कृष्णिका विकिरण के समान होती है। अत: प्रयोगशाला में कृष्णिका के लिये ऐसे ही खोखले बर्तन का उपयोग करते हैं। यह अवश्य करते हैं कि उसमें एक छोटा छिद्र बना देते हैं, जिससे भीतर से ऊर्जा बाहर आ सके और उसके गुणों का अध्ययन संभव हो। उच्चतम तापमान के लिये कृष्णिका का उपयोग करते हैं। इसपर आधारित तापमापी दो प्रकार के होते हैं। एक में पूर्ण विकिरण की मात्रा का पापन किया जाता है। इसको पूर्ण '''विकिरण उत्तापमापी''' (Total Radiation pyrometer) कहते हैं। दूसरें प्रकार में विकिरण के गुणों का अध्ययन करते हैं। इनको '''प्रकाशीय उत्तापमापी''' (Optical Pyrometer) कहते हैं। इन उत्तापमापियों में यह गुण होता है कि इनमें तापमापी को गर्म पदार्थ से संलग्न रखने की आवश्यकता नहीं होती और इनसे ऊँचा ताप मापित हो सकता है। पर इनमें दोष यह है कि सिद्धांतत: इनसे केवल कृष्णिका का तापमापन संभव है। अन्य वस्तुओं का ताप वास्तविक ताप से कम मिलेगा, जिसके लिये संशोधन की आवश्यकता होती है।
=== पूर्ण विकिरण उत्तापमापी ===
यह [[स्टीफन का नियम|स्टीफन के नियम]] पर आधारित है। इस नियम के अनुसार किसी कृष्णिका द्वारा विकीर्ण ऊर्जा (E), परम ताप (T) के चौथे घात की समानुपाती होती है, अर्थात्
: E = s T <sup>4</sup>
(s) एक स्थिरांक है। तापमापन के लिये उच्चतापीय वस्तु का विकिरण किसी लेंस अथवा दर्पण से तापांतर युग्म के एक सिरे पर फोकस कर देते है उससे ऊर्जा ऊज्ञात हो जाती है। अगर स्थिरांक मालूम हो तो उपरोक्त समीकरण द्वारा ताप की गणना हो सकती है। वास्तव में अनेक त्रुटियों के कारण ताप का घात 4 से थोड़ा भिन्न होता है। इसलिए व्यवहार में नीचे दिए गए समीकरण का प्रयोग करते हैं:
: E = a (T<sup>b</sup> - T<sup>b</sup><sub>0</sub>)
इसमें (a) और (b) स्थिरांक हैं। b स्टीफन के नियमानुसार 4 होना चाहिए, किंतु यहाँ इसको अज्ञात मान लेते हैं। (T) उच्चतापीय कृष्णिका का ताप और (T0) तापांतर युग्म को ताप है। उत्तापमापक को निश्चित तापों की कृष्णिकाओं के समक्ष रखकर a और b का मान निकाल लिया जाता है। यंत्र में विकिरण के फोकसीकरण का ऐसा प्रबंध रहता है कि उससे मापित ताप उच्चतापीय वस्तु की दूरी पर निर्भर नहीं करता। यदि वस्तु पूर्णतया कृष्ण न हो तो इस अशुद्धि के लिये संशोधन कर लिया जाता है।
=== प्रकाशीय उत्तापमापी ===
इनमें कृष्णिका से प्राप्त विकिरण के वर्णक्रम (spectrum) का सूक्ष्म अंश, जिसका तरंगदैर्ध्य लगभग एक होता है, छाँट लिया जाता है और इसकी तीव्रता (intensity) की तुलना एक मानक लैंप की विकिरण तीव्रता से की जाती है। यदि (l) तरंगदैर्ध्य के लिये (T1) परमताप पर कृष्णिका की विकिरण तीव्रता (T1) पर उसकी तीव्रता (E2) हो, तो प्लांक के नियमानुसार
: log (E1 / E2) = (C2 / l) (1/ T2 - 1 / T1)
(C2) एक स्थिरांक होता है जिसका मान प्लांक सिद्धांत द्वारा निश्चित है। यदि E1, E2 और T1 ज्ञात हों, तो T2 ज्ञात हो जाता है।
अदृश्य तंतु अत्तापमापियों (Disappearing Filament Pyrometer) में मानक बत्ती की विकिरणतीव्रता में इस प्रकार परिवर्तन करते हैं कि उसकी तीव्रता मापी जानेवाली विकीर्ण ऊर्जा की तीव्रता के बराबर हो जाए। उस समय [[बत्ती]] का तंतु अदृश्य हो जाता है।
एक अन्य प्रकार के प्रकाशीय उत्तापमापियों में मानक विकिरण की तीव्रता स्थायी रखी जाती है और अज्ञात ताप के पिंड के विकिरण के सहित उत्तापमापी में प्रवेश करती हैं। दानों को लंबवत् तलों में रेखाध्रुवित (plane polarised) कर दिया जाता है। ऐसा प्रबंध किया जाता है कि प्रत्येक विकिरण का प्रतिबिम्ब अर्धगोलीय तथा एक दूसरे से सटा हुआ बने। इनको एक निकल (nicol) प्रिज्म़ द्वारा देखा जाता है, जिसको इतना घुमाते है कि दोनों प्रतिबिंबों की प्रकाशतीव्रता एक सी पड़े। निकल के घूर्णनकोण से E1/E2 ज्ञात करके उपरोक्त सूत्र से ताप ज्ञात कर लेते हैं।
== अतिनिम्न ताप केरऽ मापन ==
अंतर्राष्ट्रीय पैमाने के संबंध में 'निम्न ताप' का 1900 सें0 तक मापन वर्णित है। इससे कम ताप के लिए वाष्पदाबीय तापमापियों (vapour pressure thermometers) का प्रयोग होता है। द्रव की वाष्पदाब उसके ताप पर निर्भर करती है। अत: गैसों को द्रव रूप में परिणत करके उनको वाष्पदाबमापियों में भर लेते हैं। दाब की मात्रा से तुरंत ताप ज्ञात हो जाता हे। इसके लिये आक्सीजन, नाइट्रोजन तथा हीलियम द्रव रूप में प्रयुक्त होते हैं। हीलियम वाष्पदाबीय तापमापियों से लगभग 10 तक ताप मापित हो सकता है। इससे निम्न ताप के लिये चुंबकीय तापमापियों का प्रयोग होता है। इसमें एक समचुंबकीय लवण (paramagnetic salt) नापी जाती है और क्यूरी के नियम के अनुसार गणना करके ताप निकाल लेते हैं। साधारणत: इस ताप में त्रुटियाँ होती हैं, जिनका संशोधन करके परमताप निकाला जाता है।
== पारा केरऽ तापमापी ==
[[पारा|पारे]] का तापमापी सर्वविदित है। अपने अनेक गुणों के कारण यह सर्वसामान्य रूप से प्रयोग में लाया जाता है, किंतु इसकी यथार्थता (accuracy) सीमित होती है। जहाँ विशेष यथार्थता की आवश्यकता होती है वहाँ इसके वाचन में अनेक त्रुटियों के लिये संशोधन करना पड़ता है। इनमें सबसे मुख्य त्रुटि यह होती है कि शून्य चिन्ह बदलता रहता है। यह दो कारणो से होता है। तापमापी जब बनाया जाता है उसके बहुत समय पश्चात् तक उसका शीशा सिकुड़ता रहता है, जिससे शून्य चिन्ह बदलता रहता है। दूसरे, जब भी किसी गरम वस्तु का ताप नापते है, तब शीशे को अपनी सामान्य अवस्था में आने में बहुत समय लगता हैं।
== प्राथमिक आरू द्वितीयक तापमापी ==
अन्तर्निहित [[थर्मोडाइनेमिक]] नियमों और राशियों के भौतिक आधार की जानकारी के स्तर के अनुसार तापमापी या थर्मामीटर को दो अलग समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है। '''प्राथमिक तापमापी''' के लिए, पदार्थ की मापित विशेषता इतनी भली प्रकार ज्ञात होती है कि तापमान को बिना किसी अज्ञात परिमाण के परिकलित किया जा सकता है। इसके उदाहरण वे तापमापी हैं जो एक गैस की अवस्था के समीकरण पर, एक गैस में ध्वनि के वेग पर, थर्मल शोर ([[जॉनसन-न्यिकिस्ट शोर]] को देखें) वोल्टेज या एक विद्युत प्रतिरोधक के प्रवाह (धारा) पर और एक चुंबकीय क्षेत्र में कुछ [[रेडियोधर्मी नाभिक]] के गामा किरण उत्सर्जन की कोणीय असमदिग्वर्ती होने की दशा पर आधारित होते हैं। प्राथमिक तापमापी अपेक्षाकृत जटिल होते हैं।
== तापमान ==
{| class="wikitable sortable"
|-
! तापमापी !! हिमबिंदु !! भापबिंदु
|-
| सेंटिग्रेड || 0<sup>०</sup>C || 100<sup>०</sup>C
|-
| फारेनहाइट || 32<sup>०</sup>F || 212<sup>०</sup>F
|}
== विकास ==
== मापांकन (कैलीब्रेशन) ==
== यथार्थता, विशुद्धता और पुनरुत्पादकता ==
== प्रयोग ==
== तापमापी केरऽ अन्य प्रकार ==
== एकरहो देखौ ==
* [[तापयुग्म]] (थर्मोकपल)
* [[ऊष्मामिति]]
== बाहरी कड़ी ==
* [https://web.archive.org/web/20080225095414/http://www.zytemp.com/tutorial/History_Of_Thermometry.htm History of Temperature and Thermometry]
* [https://web.archive.org/web/20040310210718/http://www.chemeducator.org/sbibs/s0005002/spapers/520088jw.htm ''The Chemical Educator'', Vol. 5, No. 2 (2000)] The Thermometer—From The Feeling To The Instrument
== सन्दर्भ ==
[[श्रेणी:मापन]]
[[श्रेणी:प्रयोगशाला सामग्री]]
[[श्रेणी:तापमान]]
[[श्रेणी: ऊष्मागतिकी]]
[[श्रेणी: विज्ञान]]
[[श्रेणी: SI इकाई]]
[[श्रेणी: भौतिक मात्रा]]
cbpmdbl24b2hkvngu1kpaade9717lk1
वनस्पति
0
2641
22979
21404
2026-05-25T00:45:51Z
Kwamikagami
96
/* वर्गीकरण */
22979
wikitext
text/x-wiki
पेड़-पौधा या वनस्पतिलोक के अर्थ छेकै, कोनो क्षेत्र के वनस्पति जीवन या भूमि पर मौजूद पेड़-पौधा । ओकरो संबंध कोनो विशिष्ट जाति, जीवन के रूप, रचना, स्थानिक प्रसार, या अन्य वानस्पतिक या भौगोलिक गुणो स नैय छै ।
{{For|अन्य तकनीकी वनस्पति वैज्ञानिक शब्दावली|वनस्पति (फ्लोरा)}}
{{उद्धरणहीन|date=अगस्त 2016}}
ई शब्द ''[[फ्लोरा]]'' शब्द स कहीं अधिक बड़ा छै जे विशेष रूप स जाति के संरचना सँ संबधित होय छै। शायद सबसऺ करीबी पर्याय [[शाकाहारी समाज|''वनस्पति'' समाज]] छेकै, लेकिन पेड़-पौधा शब्द स्थानिक पैमाना के विस्तृत श्रेणी स संबध राखै सकअ छै, जेकरा म समस्त विश्व के वनस्पति-संपदा समाविष्ट छै। प्राचीन लाल लकड़ी केरौ जंगल, तटीय सदाबहार वन, दलदल म जमै वाला काई, रेगिस्तानी मट्टी के परत, सड़क के करगी प उगै वाला घास, गेहूं के खेत, बाग-बगीचा ई सभ''पेड़-पौधा'' के परिभाषा म शामिल छै।{{For|अन्य तकनीकी वनस्पति वैज्ञानिक शब्दावली|वनस्पति (फ्लोरा)}}
{{उद्धरणहीन|date=अगस्त 2016}}
'''पेड़-पौधा या वनस्पतिलोक''' के अर्थ, कोय क्षेत्र के वनस्पति जीवन या भूमि प मौजूद पेड़-पौधा आरू हेकरो संबंध कोय विशिष्ट जाति, जीवन के ऱूप, रचना, स्थानिक प्रसार या अन्य वानस्पतिक या भौगोलिक गुण स नै छै। ई शब्द ''[[फ्लोरा]]'' शब्द स कहीं अधिक बड़ो छै जे विशेष रूप स जाति के संरचना स संबधित होय छै।
== महत्व ==
पेड़-पौधे बायोस्फीयर के महत्वपूर्ण कार्यों में हर संभव स्थानिक पैमानों पर सहायक होते हैं। प्रथम: पेड़-पौधे अनेकानेक बायोजीयोकेमिकल, विशेषकर जल, कार्बन और नाइट्रोजन के चक्रों के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं। इनका स्थानीय और विश्व [[ऊर्जा संतुलन]] में भी भारी महत्व होता है। ऐसे चक्र न केवल वनस्पति के वैश्विक, बल्कि जलवायु के भी स्वरूपों के लिये महत्वपूर्ण होते हैं। दूसरे: पेड़-पौधे मिट्टी के गुणों को भी प्रबल रूप से प्रभावित करते हैं, जिनमें मिट्टी का आयतन, रसायनिकता और बनावट शामिल हैं, जो बदले में [[उत्पादकता]] और रचना सहित विभिन्न वनस्पति गुणों को प्रभावित करती है। तीसरे: पेड़-पौधे इस ग्रह पर मौजूद जन्तुओं की विशाल सरणी (उनके लिये जो आहार के लिये इन पर निर्भर हैं) के लिये वन्यजीवन आवास और ऊर्जा के स्रोत का काम करते हैं। संभवतः सबसे महत्वपूर्ण पर अकसर नजर अंदाज की जाने वाली बात यह है कि वैश्विक वनस्पति (शैवाल जाति सहित) वातावरण में आक्सीजन का प्रमुख स्रोत है, जो आक्सीजन पर निर्भर चयापचय तंत्रों के प्रादुर्भाव और कायम रहने में सहायक होती है।<ref>{{Cite web|url=https://www.jagran.com/punjab/chandigarh-8966077.html|title=वनस्पति संरक्षण को महत्व दें युवा|last=|first=|date=|website=जागरण|archive-url=https://web.archive.org/web/20220925080043/https://www.jagran.com/punjab/chandigarh-8966077.html|archive-date=2022-09-25|dead-url=|access-date=}}</ref>
== वर्गीकरण ==
[[फाईल:Vegetation-no-legend.PNG|thumb|left|upright=1.25|वर्गीकृत द्वारा बायोमास वनस्पति]]
{| style="border:1px solid #CCCCCC;background-color:transparent" align="center" width="100%"
| width="33%"
| {{Legend|#c0c0c0|Ice desert}}{{Legend|#9fd6c9|Tundra}}{{Legend|#006d64|Taiga}}{{Legend|#a4e05d|Temperate broadleaf}}{{Legend|#f7ec6f|Temperate steppe}}{{Legend|#0d7e0d|Subtropical rainforest}}{{Legend|#907699|Mediterranean}}{{Legend|#6f956f|Monsoon forest}}{{Legend|#95583c|Desert}}{{Legend|#b97553|Xeric shrubland}}{{Legend|#9b8447|Dry steppe}}{{Legend|#deb887|Semidesert}}{{Legend|#cdc954|Grass savanna}}{{Legend|#aca719|Tree savanna}}{{Legend|#768e34|Subtropical dry forest}}{{Legend|#005c00|Tropical rainforest}}{{Legend|#a7bddb|Alpine tundra}}{{Legend|#3c9798|Montane forests}}
|}
वनस्पति के वर्गीकरण पर अधिकांश कार्य यूरोपीय और उत्तर अमरीकी परिस्थिति वैज्ञानिकों ने किया है और उनके तरीके भी मूल रूप से भिन्न हैं। उत्तर अमेरिका में वनस्पति के प्रकार निम्न मापदंडों के संयुक्त रूप पर आधारित हैं – जलवायु के प्रतिमान, [[पौधों के आवास]], [[फेनॉलॉजी]] और/या विकास के प्रकार और प्रधान जाति। वर्तमान यूएस मानक में (फेडरल जिओग्राफिक डाटा कमेटी द्वारा स्वीकृत और मूल रूप से [[युनेस्को|यूनेस्को]] व [[द नेचर कंजरवेंसी]] द्वारा विकसित) वर्गीकरण [[पदानुक्रमित]] है और नॉन फ्लोरिस्चिक मापदंडों को ऊपरी (सबसे साधारण) मापदंडों में केवल निचले (सबसे विशिष्ट) दो स्तरों में ही समाविष्ट करता है। यूरोप में, वर्गीकरण अकसर बिना जलवायु, फेनॉलॉजी या विकास के स्वरूपों के बारे में स्पष्ट बात किये, अधिकतर और कभी-कभी पूरी तरह फ्लोरिस्टिक (जाति) संरचना पर निर्भर करता है। यह अकसर सांकेतिक या नैदानिक जाति पर जोर देता है जो एक प्रकार को दूसरे से अलग करती है।
एफजीडीसी मानक में, सबसे साधारण से सबसे विशिष्ट, पदानुक्रमित स्तर हैं – ''तंत्र, वर्ग, उपवर्ग, समूह, बनावट, मेल'' और ''संबंध'' . सबसे निचला स्तर, या संबंध, सबसे सही तरीके से परिभाषित है और एक प्रकार की एक से तीन प्रमुख जातियों के नामों का समावेस करता है। उदाहरण के लिये, वर्ग के स्तर पर किसी वनस्पति प्रकार की परिभाषा, "''वन, कैनोपी कवर 60%'' " हो सकता है, बनावट के स्तर पर, "''जाड़े की वर्षा, चौड़े पत्ते वाला, सदाबहार, स्क्लीरोफिल्लस, क्लोज्ड कैनोपी वन"; मेल के स्तर पर, "आरबूटस मेनिजी वन"; और संबंध के स्तर पर, "''''आरबूटस मेन्जीसी'' -लिथोकार्पस डेंसीफ्लोरा'' वन'' ", कहा जाता है, जो कैलिफोर्निया और ओरिगन, यूएसए में पाए जाने वाले पैसिफिक मैड्रोन-टैनओक वन हैं। व्यवहार में, मेल और/या संबंध के स्तर सबसे अधिक प्रयुक्त होते हैं, विशेषकर वनस्पति मैपिंग में,
ठीक वैसे ही जैसे टैक्सॉनमी और सामान्य बातचीत में किसी जाति के विषय में चर्चा के समय लैटिन बाइनोमियल का सबसे अधिक प्रयोग होता है।
[[ऑस्ट्रेलिया|आस्ट्रेलिया]] में [[विक्टोरिया]] में वनस्पति को [[परिस्थितिवैज्ञानिक वनस्पति वर्ग]] के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है।
== गतिकी ==
सभी जैविक तंत्रों की तरह, वनस्पति समाज सामयिक और स्थानिक रूप से गतिमान होता है। ये हर संभव पैमानों पर बदलते रहते हैं। वनस्पति में गतिशीलता को मुख्यतः जाति की संरचना और/या वनस्पति रचना के रूप में परिभाषित किया जाता है।
=== सामयिक गतिकी ===
सामयिक रूप से, अनेक प्रकार की प्रक्रियाएं या घटनाएं परिवर्तन ला सकती हैं किंतु सरलता के लिये उन्हें अचानक या धीमी श्रेणियों में बांटा जा सकता है। अचानक होने वाले परिवर्तन सामान्यतः [[उपद्रव]] कहलाते हैं – इनमें [[जंगल की आग]], [[तेज हवाएं]], [[भूस्खलन]], [[बाढ़]], [[हिमस्खलन]] जैसी घटनाएं शामिल हैं। इनके कारण साधारणतः समुदाय के बाहर ([[बहिर्जात]]) होते हैं ये प्राकृतिक प्रक्रियाएं होती हैं जो (अधिकतर) समुदाय की प्राकृतिक प्रक्रियाओं (जैसे अंकुरण, विकास, मृत्यु आदि) से स्वतंत्र होती हैं। ऐसी घटनाएं वनस्पति रचना और जाति की संरचना में बहुत तेजी से और लंबी समयावधि के लिये परिवर्तन ला सकती हैं और विशाल क्षेत्र को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे बहुत कम परितंत्र हैं जिनमें नियमित रूप से और बार-बार किसी तरह के उपद्रव नहीं होते और ये हर दीर्घकालिक गतिशील [[तन्त्र|तंत्र]] का हिस्सा होते हैं। [[आग]] और हवा के उपद्रव विश्व भर में अनेक वनस्पति प्रकारों में विशेष रूप से आम हैं। आग खास तौर पर प्रबल होती है क्यौंकि यह न केवल जीवित पेड़-पोधों बल्कि बीजों, बीजाणुओं और जीवित [[मेरिस्टेमों]], जो अगली पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं, को भी नष्ट कर सकती है और जीव-जन्तुओं, मिट्टी के गुणों और अन्य परितंत्रीय तत्वों व प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है। (इस विषय पर अधिक चर्चा के लिये देखें, [[आग परितंत्र]])।
धीमी गति से सामयिक परिवर्तन सर्वव्यापी होता है –इसमें [[परितंत्रीय आवर्तन]] का क्षेत्र निहित होता है। आवर्तन रचना और वर्गीकरण के संयोजन में अपेक्षाकृत धीमा परिवर्तन होता है जो समय के साथ वनस्पति द्वारा स्वयं प्रकाश, जल और पोषण स्तरों जैसे पर्यावरण के विभिन्न परिवर्तनशील घटकों में लाए गए [[संशोधनों]] के कारण उत्पन्न होता है। ये संशोधन किसी भी क्षेत्र में बढ़ने, बचने और प्रजनन में सर्वाधिक योग्य जाति को बदल देते हैं, जिससे फ्लोरा में परिवर्तन होते हैं। इन फ्लोरिस्टिक परिवर्तनों के कारण वे ऱचनात्मक परिवर्तन होते हैं जो पौधे के विकास में जाति के परिवर्तनों के अभाव की स्थिति में भी स्वाभाविक रूप से होते हैं, जिससे वनस्पति में धीमे और पूर्वज्ञात परिवर्तन (विशेषकर ऐसे पौधे जिनका बड़ा अधिकतम आकार होता है, अर्थात् वृक्ष) आते हैं। आवर्तन में किसी भी समय उपद्रव द्वारा रूकावट हो सकती है जिससे तंत्र वापस अपनी पूर्व दशा में लौट जाता है या और किसी [[मार्ग]] पर चल पड़ता है। इसके कारण आवर्ती प्रक्रियाएं किसी स्थिर, [[अंतिम दशा]] में पहंच या न पहुंच सकती हैं। इसके अलावा, ऐसी दशाओं के गुणों की भविष्यवाणी, भले वह न घटे, हमेशा संभव नहीं है। संक्षिप्त में, वनस्पति समुदाय अनेक परिवर्तकों पर निर्भर होते हैं जो मिलकर भविष्य की दशाओं की संभावनाओं की सीमाएं निश्चित करते हैं।
== वैज्ञानिक अध्ययन ==
वनस्पति वैज्ञानिक स्थानों और समय के विभिन्न पैमानों पर वनस्पति में देखे जाने वाले प्रकारों और प्रक्रियाओं के कारणों का अध्ययन करते हैं। जातियों के संयोजन और रचना सहित वनस्पति की विशेषताओं पर जलवायु, मिट्टी, स्थलाकृति और इतिहास की आपेक्षिक भूमिकाओं के विषय में प्रश्न विशेष रूचि और महत्व रखते हैं। ऐसे प्रश्न अकसर बड़े पैमाने पर होते हैं और इसलिये किसी जोड़-तोड़ के प्रयोग द्वारा आसानी से [[अर्थपूर्ण]] तरीके से हल नहीं किये जा सकते. इसीलिये व्नस्पतिशास्त्र, पेलियोवनस्पतिशास्त्र, परिस्थितिशास्त्र, मृदाविज्ञान आदि की जानकारी के सहयोग से अवलोकनीय अध्ययन वनस्पति विज्ञान में बहुत आम हैं।
=== इतिहास ===
==== 1900 के पूर्व ====
वनस्पति विज्ञान का सूत्रपात 18वीं शताब्दी में, या कुछ मामलों में उससे पहले वनस्पतिशास्त्रियों और/या प्रकृतिवादियों के कार्य से हुआ। इनमें से अनेक खोज के युग में [[खोज की यात्रा]] पर निकले विश्व यात्री थे और उनका कार्य वनस्पतिशास्त्र और भूगोल का संश्लेषित संयोग था जिसे आजकल हम वनस्पतिक [[बायोजियोग्राफी]] (या ''फाइटोजियोग्राफी'') कहते हैं। उस समय विश्वभर के फ्लोरिस्टिक या वनस्पति प्रकारों के बारे में बहुत कम जानकारी थी और यह तो नहीं के बराबर ज्ञात था कि वे किस पर निर्भर थे, इसलिये अधिकांश कार्य पौधों के नमूनों को जमा करने, वर्गीकृत करने और नामकरण करने तक सीमित था। 19वीं शताब्दी तक बहुत कम सैद्धांतिक कार्य हुआ। प्रारंभिक प्रकृतिवादियों में सबसे अधिक परिमाण में कार्य करने वाले व्यक्ति थे [[एलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट]] जिन्होंने 1799 से 1804 तक की दक्षिण और मध्य अमेरिका की अपनी पांच वर्षीय यात्रा के दौरान 60000 वनस्पति नमूने जमा किये. हमबोल्ट पहले ऐसे वैज्ञानिकों में से एक थे जिन्होंने जलवायु और वनस्पति पैटर्नों के बीच संबंध को अपने विशाल जीवनभर के कार्य, "[[वायेज टू द इक्विनाक्शियल रीजन्स ऑफ द न्यू वर्ल्ड]]" - में प्रलेखित किया, जो उन्होंने अपने साथी वनस्पतिशास्त्री [[एमी बॉप्लैंड]] के साथ मिलकर लिखा. हम्बोल्ट ने वनस्पति को टेक्सानमी के अलावा फिजियोग्नामिक तरीके से वर्णित किया। उनके कार्य ने पर्यावरण-वनस्पति के संबंधों पर गहन कार्य की शुरूआत की जो आज तक चालू है। (बारबर और अन्य, 1987).
आज कल होने वाले नस्पति अध्ययन का प्रारंभ 19वीं सदी के अंत में यूरोप और रूस में, विशेषकर एक पोल, जोजेफ पैकजोस्की और एक रूसी, [[लियोंटी रेमेन्स्की]] के द्वारा हुआ। वे दोनों मिलकर अपने समय से बहुत आगे थे और उन्होंने पश्चिम से बहुत पहले आज के महत्वपूर्ण लगभग सभी विषयों का परिचय या वर्णन किया। इन विषयों में वनस्पति समुदाय विश्लेषण, या [[फाइटोसोशियॉलाजी]], [[ग्रेडियेंट विश्लेषण]], आवर्तन और वनस्पति [[इकोफिजियालाजी]] और फंक्शनल इकालाजी पर लेख शामिल थे। भाषा और/या राजनीतिक काऱणों से 20वीं सदी तक अधिकांश विश्व, विशेषकर अंग्रेजी बोलने वाले विश्व को उनके अधिकतर कार्य का पता नहीं था।
==== 1900 के पश्चात ====
युनाइटेड स्टेट्स में [[हेनरी कोल्स]] और [[फ्रेड्रिक क्लेमेंट्स]] ने 20वीं सदी के शुरू में वनस्पति आवर्तन के विचारों का विकास किया। क्लेमेंट अब अमान्य [[सुपरआर्गानिज्म]] के रूप में वनस्पति समुदाय के वर्णन के लिये प्रसिद्ध है। उसने तर्क पेश किया किजैसे किसी व्यक्ति में सभी अवयव तंत्र मिलकर काम करके शरीर के अच्छी तरह से काम करने में मदद करते हैं और जो व्यक्ति के वयस्क होने के साथ मिलकर विकसित होते हैं, उसी तरह वनस्पति समुदाय में भी हर जाति अत्यंत कड़े समन्वय और तालमेल के साथ विकसित होती है और परस्पर सहयोग करती है और वनस्पति समुदाय को एक परिभाषित और पूर्वनियत अंत स्थिति की ओर धकेलती है। हालांकि क्लेमेंट्स ने उत्तरी अमेरिकन वनस्पति पर बहुत कार्य किया, सुपरआर्गानिज्म के प्रति उसकी भक्ति ने उसकी प्रतिष्ठा को धक्का पहुंचाया है, क्यौंकि अनेकों शोधकर्ताओं द्वारा किये गए कार्य में उसके विचार को समर्थन नहीं मिला है।
क्लेमेंट्स के प्रतिकूल, अनेक परिस्थिति वैज्ञनिकों ने दर्शाया है कि [[वैयक्तिक परिकल्पना]], जो कहती है कि वनस्पति समुदाय पर्यावरण के प्रति प्रतिक्रिया कर रही जातियों के एक समूह का कुल जमा है, सही है और समय और स्थान में एक साथ घटती है। रेमेन्स्की ने रूस में यह विचार प्रस्तुत किया और 1926 में [[हेनरी ग्लियासन]] ने युनाइटेड स्टेट्स में इसे एक पेपर में विकसित किया। क्लेमेंट्सियन के विचारों का इतना अधिक प्रभाव था कि ग्लियासन के विचारों को कई सालों तक अस्वीकार किया गया। लेकिन 1950 व 60 के दशकों में [[राबर्ट व्हिटेकर]] के अच्छी तरह से तैयार किये गए अध्ययनों की श्रंखला ने ग्लियासन के तर्कों के लिये मजबुत सबूत पेश किये. सबसे योग्य अमेरिकन वनस्पति परिवैज्ञानिकों में से एक, व्हिटेकर [[ग्रेडियेंट एनेलिसिस]] का विकासक और समर्थक था जिसमें वैयक्तिक जाति की बहुलताओं को मापे जा सकने वाले पर्यावरण के परिवर्तकों (या उनके संबंधित [[wiktionary:Surrogate|सरोगेटों]]) के सम्मुख मापा जाता है। तीन अत्यंत भिन्न [[मान्टेन]] परितंत्रों के अध्ययनों में, व्हिटेकर ने दिखाया कि जातियां मुख्यतः पर्यावरण के सम्मुख प्रतिक्रिया करती हैं और अन्य साथ में मौजूद जातियों से उसका कोई समन्वय नहीं होता. अन्य कार्य विशेषकर [[पेलियोबाटनी]] पर किया गया कार्य बड़े सामयिक और स्थानिक पैमानों पर इस विचार को समर्थन देता है।
=== हाल की घटनाएं ===
1960 के दशक से, वनस्पतिलोक पर अधिकतर शोध [[कार्यात्मक परिस्थितिशास्त्र]] के विषयों पर केंद्रित हो गया है। कार्यात्मक ढांचे में, वर्गीकरणीय वनस्पतिशास्त्र का कम महत्व होता है और सारी खोजबीन जातियों के आकृतिक, शरीर-रचना और शरीरक्रियात्मक वर्गीकरण पर केंद्रित रहती है और इसका उद्देश्य यह भविष्यवाणी करना होता है कि विशिष्ट समूह विभिन्न पर्यावरणीय परिवर्तकों के प्रति कैसे बर्ताव करेंगे. इस तरह के दृष्टिकोण का आधार यह धारणा है कि [[केंद्राभिमुख विकास]] और [[अनुकूलित विकिरण]] के कारण विशेषकर फाइलोजेनेटिक वर्गीकरण के उच्च स्तरों और बड़े स्थानिक पैमानों पर अकसर [[फाइलोजेनेटिक]] अपेक्षा और पर्यावर्णीय [[अनुकूलन]] के बीच मजबूत संबंध नहीं होता है। कार्यात्मक वर्गीकरण 1930 के दशक में [[रांकियर]] के एपाइकल [[मेरिस्टेमों]] के स्थान पर आधारित पौधों के समूहों में विभाजन के साथ शुरू हुआ। इसके बाद अन्य वर्गीकरण जैसे [[मैकआर्थर]] का - [[आर प्रति के – चुनिंदा]] जाति (न केवल वनस्पति बल्कि सभी जीवों पर लागू) और [[ग्राइम]] द्वारा प्रस्तावित सी-एस-आर योजना, जिसमें जातियों को तीन में से एक या अधिक रणनीतियों के अनुसार, प्रत्येक का पक्ष एक [[चुनिंदा दबाव]] द्वारा लेकर-प्रतिस्पर्धी, दबाव को सहने वाले और रूडरल्स में बांटा गया है।
कार्यात्मक वर्गीकरण वनस्पति-पर्यावरण की परस्पर क्रियाओं की रचना में महत्वपूर्ण होता है, जो कि वनस्पति परिशास्त्र में पिछले 30 से अधिक वर्षों में मुख्य विषय रहा है। आजकल विश्व [[जलवायु बदलाव]], विशेषकर तापमान, वर्षा और [[उपद्रव में परिवर्तनों]] की प्रतिक्रिया में स्थानीय, क्षेत्रीय और वैश्विक वनस्पति परिवर्तनों की रचना पर बहुत जोर दिया जा रहा है। ऊपर दिये गए कार्यात्मक वर्गीकरण के उदाहरण, जो सभी वनस्पति जातियों को बहुत छोटे समूहों में विभाजित करते हैं, आगे आने वाले विभिन्न रचनात्मक उद्देश्यों पर असरकारी होंगे, इसकी कम संभावना है। यह आम तौर पर माना जाता है कि सरल, सर्व-उद्देश्यक वर्गीकरणों के स्थान पर अधिक विस्तृत और कार्यात्मक वर्गीकरण आ जाएंगे. इसके लिये शरीर क्रिया विज्ञान, शरीर रचनाविज्ञान और विकासीय जीव विज्ञान की अब से बेहतर समझ की जरूरत होगी. ऐसा अधिक जातियों के लिये जरूरी होगा भले ही अधिकांश वनस्पति जातियों में से मुख्य जाति को ही लिया जाय.
== इन्हें भी देखें ==
{{Portalbox|Environment|Ecology|Earth sciences|Biology}}
* [[बायोकोएनोसिस]]
* [[बायोम]]
* [[ब्रिटिश राष्ट्रीय वनस्पति वर्गीकरण]]
* [[पारिस्थितिक उत्तराधिकार]]
* [[इकोरीजियन]]
* [[इकोसिस्टम]]
* [[रोबेल पोल]]
* [[वनस्पति और ढलान स्थिरता]]
{{Br}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20190217084946/https://webcollection.co.in/natural-vegetation-in-india/ भारत में प्राकृतिक वनस्पति]
* [https://web.archive.org/web/20120422181247/http://www.kew.org/hindi/hi-plants-fungi/index.htm '''KEW'''] - पादपों तथा कवकों का विशेषज्ञ साइट
==== वर्गीकरण ====
* [https://web.archive.org/web/20081122032744/http://conserveonline.org/docs/2001/03/vol1.pdf टेरेस्ट्रियल वेजिटेशन ऑफ़ द युनाइटेड स्टेट्स वोल्यूम I - द नैशनल वेजिटेशन क्लासिफिकेशन सिस्टम: डेवेलपमेंट, स्टेटस और ऐप्लिकेशंस] (पीडीऍफ़)
* [https://web.archive.org/web/20051028140442/http://biology.usgs.gov/fgdc.veg/ फेडरल जियोग्राफिक डेटा कमिटी वेजिटेशन सबकमिटी]
* [https://web.archive.org/web/20051030140148/http://www.fgdc.gov/standards/documents/standards/vegetation/vegclass.pdf वेजिटेशन क्लासिफिकेशन स्टैण्डर्ड] [ऍफ़जीडीसी-एसटीडी-05, जून 1997] (पीडीऍफ़)
* [https://web.archive.org/web/20070903061004/http://www.daffa.gov.au/brs/forest-veg/vast क्लासिफाइंग वेजिटेशन कंडीशन: वेजिटेशन एसेट्स स्टेट्स एण्ड ट्रांज़िशंस (वास्ट)]
==== मानचित्रण संबंधी ====
* [https://web.archive.org/web/20081004181121/http://maps.howstuffworks.com/world-vegetation-map.htm हाउस्टफ़्वर्क्स द्वारा इंटरैक्टिव वर्ल्ड वेजिटेशन मैप]
* [https://web.archive.org/web/20110705065330/http://biology.usgs.gov/npsveg/ युएसजीएस - एनपीएस वेजिटेशन मैपिंग प्रोग्राम]
* [http://www.lib.ber .html चेकलिस्ट ऑफ़ ऑनलाइन वेजिटेशन एण्ड प्लांट डिस्ट्रीब्युशन मैप्स]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}
* [http://www.vgt.vcentre वीटो (VITO) पर]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}
* [https://web.archive.org/web/20190628190200/http://www.spot-vegetation.com/ स्पॉट-वेजिटेशन प्रोग्राम वेब पेज]
==== जलवायु चित्र ====
* [https://web.archive.org/web/20180928225953/http://www.zoolex.org/walter.html जलवायु चित्र को विस्तार से बताया]
* [https://web.archive.org/web/20181103045724/http://climatediagrams.com/ ClimateDiagrams.com] 3000 मौसम स्टेशनों की तुलना में जलवायु के लिए और अधिक चित्र प्रदान करता है और विश्व भर से अलग अलग अवधियों के लिए जलवायु. उपयोगकर्ताओं को भी अपने स्वयं के डेटा के साथ अपने स्वयं आरेख बना सकते हैं।
* [https://web.archive.org/web/20181021022914/http://www.globalbioclimatics.org/plot/diagram.htm WBCS विश्वव्यापी जलवायु आरेख]
== संदर्भ और आगे पढ़ें ==
* अर्कीबोल्ड, ओ. डब्लू. ''इकोलॉजि ऑफ़ वर्ल्ड वेजिटेशन'' . [[न्यूयॉर्क|न्यू यॉर्क]]: स्प्रिंगर प्रकाशन, 1994.
* बार्बोर, एम. जी. और डब्लू. डि. बिलिंग्स (संपादक). ''उत्तर अमेरिकी स्थलीय वनस्पति'' . [[कैम्ब्रिज]]: [[कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस]], 1999.
* बार्बोर, एम. जी, जे. एच. बर्क और डब्लू.डि. पिट्स. "स्थलीय संयंत्र पारिस्थितिकीय". मेंलो पार्क: बेंजामिन कमिंग्स, 1987.
* ब्रेकले, एस-डब्लू. ''वॉल्टर'स वेजिटेशन ऑफ़ द अर्थ'' . न्यू यॉर्क: स्प्रिंगर प्रकाशन, 2002.
* बुरौज़, सी.जे. ''प्रोसेसेस ऑफ़ वेजिटेशन चेंज'' . [[ऑक्सफ़ोर्ड|ऑक्सफोर्ड]]: रोउटलेज प्रेस, 1990.
* फेल्डमेयर-क्रिस्टी, ई., एन. इ. ज़िमरमैन और एस. घोष. ''मॉडर्न एप्रोचेस इन वेजिटेशन मॉनिटरिंग'' [[बुडापेस्ट]]: एकाडेमिई काईडॉ, 2005.
* ग्लिअसों, एच.ए. 1926. संयंत्र संघ के व्यक्तिपरक अवधारणा. टोर्री वानस्पतिक क्लब के बुलेटिन, 53:1-20.
* ग्रीम, जे.पी. 1987. ''वनस्पति रणनीतिएं और संयंत्र प्रक्रियाएं'' . विले इंटरसाइंस, न्यूयॉर्क एनवाई.
* कबाट, पी., एट अल. (संपादकों). ''वनस्पति, पानी, मनुष्य और जलवायु: एक इंटरएक्टिव सिस्टम पर नई परिप्रेक्ष्य'' . [[हेइडेलबर्ग]]: [[स्प्रिंगर-वेर्लग]] 2004.
* मैकआर्थर, आर.एच. और इ.ओ. विल्सन. ''द थ्योरी ऑफ़ आइलैंड बायोजियोग्राफी'' . प्रिंसटन: प्रिंसटन यूनिवर्सिटी प्रेस. 1967
* म्यूएलर-डोम्बोईस, डी., एच. एलेंबर्ग. ''एम्स एण्ड मेथड्स ऑफ़ वेजिटेशन इकॉलौजी.'' द ब्लैकबर्न प्रेस, 2003.
* वान डेर मारेल, ई. ''वनस्पति पारिस्थितिकीय'' . ऑक्सफोर्ड: ब्लैकवेल प्रकाशक, 2004.
* वंकट, जे.एल. ''द नैचुरल वेजिटेशन ऑफ़ नोर्थ अमेरिका'' . क्रेइजर प्रकाशन कं, 1992.
[[श्रेणी:वनस्पति विज्ञान]]
[[श्रेणी:पारिस्थितिक उत्तराधिकार]]
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पेड़-पौधा या वनस्पतिलोक के अर्थ छेकै, कोनो क्षेत्र के वनस्पति जीवन या भूमि पर मौजूद पेड़-पौधा । ओकरो संबंध कोनो विशिष्ट जाति, जीवन के रूप, रचना, स्थानिक प्रसार, या अन्य वानस्पतिक या भौगोलिक गुणो स नैय छै ।
{{For|अन्य तकनीकी वनस्पति वैज्ञानिक शब्दावली|वनस्पति (फ्लोरा)}}
{{उद्धरणहीन|date=अगस्त 2016}}
ई शब्द ''[[फ्लोरा]]'' शब्द स कहीं अधिक बड़ा छै जे विशेष रूप स जाति के संरचना सँ संबधित होय छै। शायद सबसऺ करीबी पर्याय [[शाकाहारी समाज|''वनस्पति'' समाज]] छेकै, लेकिन पेड़-पौधा शब्द स्थानिक पैमाना के विस्तृत श्रेणी स संबध राखै सकअ छै, जेकरा म समस्त विश्व के वनस्पति-संपदा समाविष्ट छै। प्राचीन लाल लकड़ी केरौ जंगल, तटीय सदाबहार वन, दलदल म जमै वाला काई, रेगिस्तानी मट्टी के परत, सड़क के करगी प उगै वाला घास, गेहूं के खेत, बाग-बगीचा ई सभ''पेड़-पौधा'' के परिभाषा म शामिल छै।{{For|अन्य तकनीकी वनस्पति वैज्ञानिक शब्दावली|वनस्पति (फ्लोरा)}}
{{उद्धरणहीन|date=अगस्त 2016}}
'''पेड़-पौधा या वनस्पतिलोक''' के अर्थ, कोय क्षेत्र के वनस्पति जीवन या भूमि प मौजूद पेड़-पौधा आरू हेकरो संबंध कोय विशिष्ट जाति, जीवन के ऱूप, रचना, स्थानिक प्रसार या अन्य वानस्पतिक या भौगोलिक गुण स नै छै। ई शब्द ''[[फ्लोरा]]'' शब्द स कहीं अधिक बड़ो छै जे विशेष रूप स जाति के संरचना स संबधित होय छै।
== महत्व ==
पेड़-पौधे बायोस्फीयर के महत्वपूर्ण कार्यों में हर संभव स्थानिक पैमानों पर सहायक होते हैं। प्रथम: पेड़-पौधे अनेकानेक बायोजीयोकेमिकल, विशेषकर जल, कार्बन और नाइट्रोजन के चक्रों के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं। इनका स्थानीय और विश्व [[ऊर्जा संतुलन]] में भी भारी महत्व होता है। ऐसे चक्र न केवल वनस्पति के वैश्विक, बल्कि जलवायु के भी स्वरूपों के लिये महत्वपूर्ण होते हैं। दूसरे: पेड़-पौधे मिट्टी के गुणों को भी प्रबल रूप से प्रभावित करते हैं, जिनमें मिट्टी का आयतन, रसायनिकता और बनावट शामिल हैं, जो बदले में [[उत्पादकता]] और रचना सहित विभिन्न वनस्पति गुणों को प्रभावित करती है। तीसरे: पेड़-पौधे इस ग्रह पर मौजूद जन्तुओं की विशाल सरणी (उनके लिये जो आहार के लिये इन पर निर्भर हैं) के लिये वन्यजीवन आवास और ऊर्जा के स्रोत का काम करते हैं। संभवतः सबसे महत्वपूर्ण पर अकसर नजर अंदाज की जाने वाली बात यह है कि वैश्विक वनस्पति (शैवाल जाति सहित) वातावरण में आक्सीजन का प्रमुख स्रोत है, जो आक्सीजन पर निर्भर चयापचय तंत्रों के प्रादुर्भाव और कायम रहने में सहायक होती है।<ref>{{Cite web|url=https://www.jagran.com/punjab/chandigarh-8966077.html|title=वनस्पति संरक्षण को महत्व दें युवा|last=|first=|date=|website=जागरण|archive-url=https://web.archive.org/web/20220925080043/https://www.jagran.com/punjab/chandigarh-8966077.html|archive-date=2022-09-25|dead-url=|access-date=}}</ref>
== वर्गीकरण ==
[[फाईल:Vegetation-no-legend.PNG|thumb|center|upright=2|वर्गीकृत द्वारा बायोमास वनस्पति<br>
{| style="border:1px solid #CCCCCC;background-color:transparent" align="center" width="100%"
|-
| {{Legend|#c0c0c0|Ice desert}}{{Legend|#9fd6c9|Tundra}}{{Legend|#006d64|Taiga}}{{Legend|#a4e05d|Temperate broadleaf}}{{Legend|#f7ec6f|Temperate steppe}}{{Legend|#0d7e0d|Subtropical rainforest}}{{Legend|#907699|Mediterranean}}{{Legend|#6f956f|Monsoon forest}}{{Legend|#95583c|Desert}}{{Legend|#b97553|Xeric shrubland}}{{Legend|#9b8447|Dry steppe}}{{Legend|#deb887|Semidesert}}{{Legend|#cdc954|Grass savanna}}{{Legend|#aca719|Tree savanna}}{{Legend|#768e34|Subtropical dry forest}}{{Legend|#005c00|Tropical rainforest}}{{Legend|#a7bddb|Alpine tundra}}{{Legend|#3c9798|Montane forests}}
|}]]
वनस्पति के वर्गीकरण पर अधिकांश कार्य यूरोपीय और उत्तर अमरीकी परिस्थिति वैज्ञानिकों ने किया है और उनके तरीके भी मूल रूप से भिन्न हैं। उत्तर अमेरिका में वनस्पति के प्रकार निम्न मापदंडों के संयुक्त रूप पर आधारित हैं – जलवायु के प्रतिमान, [[पौधों के आवास]], [[फेनॉलॉजी]] और/या विकास के प्रकार और प्रधान जाति। वर्तमान यूएस मानक में (फेडरल जिओग्राफिक डाटा कमेटी द्वारा स्वीकृत और मूल रूप से [[युनेस्को|यूनेस्को]] व [[द नेचर कंजरवेंसी]] द्वारा विकसित) वर्गीकरण [[पदानुक्रमित]] है और नॉन फ्लोरिस्चिक मापदंडों को ऊपरी (सबसे साधारण) मापदंडों में केवल निचले (सबसे विशिष्ट) दो स्तरों में ही समाविष्ट करता है। यूरोप में, वर्गीकरण अकसर बिना जलवायु, फेनॉलॉजी या विकास के स्वरूपों के बारे में स्पष्ट बात किये, अधिकतर और कभी-कभी पूरी तरह फ्लोरिस्टिक (जाति) संरचना पर निर्भर करता है। यह अकसर सांकेतिक या नैदानिक जाति पर जोर देता है जो एक प्रकार को दूसरे से अलग करती है।
एफजीडीसी मानक में, सबसे साधारण से सबसे विशिष्ट, पदानुक्रमित स्तर हैं – ''तंत्र, वर्ग, उपवर्ग, समूह, बनावट, मेल'' और ''संबंध'' . सबसे निचला स्तर, या संबंध, सबसे सही तरीके से परिभाषित है और एक प्रकार की एक से तीन प्रमुख जातियों के नामों का समावेस करता है। उदाहरण के लिये, वर्ग के स्तर पर किसी वनस्पति प्रकार की परिभाषा, "''वन, कैनोपी कवर 60%'' " हो सकता है, बनावट के स्तर पर, "''जाड़े की वर्षा, चौड़े पत्ते वाला, सदाबहार, स्क्लीरोफिल्लस, क्लोज्ड कैनोपी वन"; मेल के स्तर पर, "आरबूटस मेनिजी वन"; और संबंध के स्तर पर, "''''आरबूटस मेन्जीसी'' -लिथोकार्पस डेंसीफ्लोरा'' वन'' ", कहा जाता है, जो कैलिफोर्निया और ओरिगन, यूएसए में पाए जाने वाले पैसिफिक मैड्रोन-टैनओक वन हैं। व्यवहार में, मेल और/या संबंध के स्तर सबसे अधिक प्रयुक्त होते हैं, विशेषकर वनस्पति मैपिंग में,
ठीक वैसे ही जैसे टैक्सॉनमी और सामान्य बातचीत में किसी जाति के विषय में चर्चा के समय लैटिन बाइनोमियल का सबसे अधिक प्रयोग होता है।
[[ऑस्ट्रेलिया|आस्ट्रेलिया]] में [[विक्टोरिया]] में वनस्पति को [[परिस्थितिवैज्ञानिक वनस्पति वर्ग]] के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है।
== गतिकी ==
सभी जैविक तंत्रों की तरह, वनस्पति समाज सामयिक और स्थानिक रूप से गतिमान होता है। ये हर संभव पैमानों पर बदलते रहते हैं। वनस्पति में गतिशीलता को मुख्यतः जाति की संरचना और/या वनस्पति रचना के रूप में परिभाषित किया जाता है।
=== सामयिक गतिकी ===
सामयिक रूप से, अनेक प्रकार की प्रक्रियाएं या घटनाएं परिवर्तन ला सकती हैं किंतु सरलता के लिये उन्हें अचानक या धीमी श्रेणियों में बांटा जा सकता है। अचानक होने वाले परिवर्तन सामान्यतः [[उपद्रव]] कहलाते हैं – इनमें [[जंगल की आग]], [[तेज हवाएं]], [[भूस्खलन]], [[बाढ़]], [[हिमस्खलन]] जैसी घटनाएं शामिल हैं। इनके कारण साधारणतः समुदाय के बाहर ([[बहिर्जात]]) होते हैं ये प्राकृतिक प्रक्रियाएं होती हैं जो (अधिकतर) समुदाय की प्राकृतिक प्रक्रियाओं (जैसे अंकुरण, विकास, मृत्यु आदि) से स्वतंत्र होती हैं। ऐसी घटनाएं वनस्पति रचना और जाति की संरचना में बहुत तेजी से और लंबी समयावधि के लिये परिवर्तन ला सकती हैं और विशाल क्षेत्र को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे बहुत कम परितंत्र हैं जिनमें नियमित रूप से और बार-बार किसी तरह के उपद्रव नहीं होते और ये हर दीर्घकालिक गतिशील [[तन्त्र|तंत्र]] का हिस्सा होते हैं। [[आग]] और हवा के उपद्रव विश्व भर में अनेक वनस्पति प्रकारों में विशेष रूप से आम हैं। आग खास तौर पर प्रबल होती है क्यौंकि यह न केवल जीवित पेड़-पोधों बल्कि बीजों, बीजाणुओं और जीवित [[मेरिस्टेमों]], जो अगली पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं, को भी नष्ट कर सकती है और जीव-जन्तुओं, मिट्टी के गुणों और अन्य परितंत्रीय तत्वों व प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है। (इस विषय पर अधिक चर्चा के लिये देखें, [[आग परितंत्र]])।
धीमी गति से सामयिक परिवर्तन सर्वव्यापी होता है –इसमें [[परितंत्रीय आवर्तन]] का क्षेत्र निहित होता है। आवर्तन रचना और वर्गीकरण के संयोजन में अपेक्षाकृत धीमा परिवर्तन होता है जो समय के साथ वनस्पति द्वारा स्वयं प्रकाश, जल और पोषण स्तरों जैसे पर्यावरण के विभिन्न परिवर्तनशील घटकों में लाए गए [[संशोधनों]] के कारण उत्पन्न होता है। ये संशोधन किसी भी क्षेत्र में बढ़ने, बचने और प्रजनन में सर्वाधिक योग्य जाति को बदल देते हैं, जिससे फ्लोरा में परिवर्तन होते हैं। इन फ्लोरिस्टिक परिवर्तनों के कारण वे ऱचनात्मक परिवर्तन होते हैं जो पौधे के विकास में जाति के परिवर्तनों के अभाव की स्थिति में भी स्वाभाविक रूप से होते हैं, जिससे वनस्पति में धीमे और पूर्वज्ञात परिवर्तन (विशेषकर ऐसे पौधे जिनका बड़ा अधिकतम आकार होता है, अर्थात् वृक्ष) आते हैं। आवर्तन में किसी भी समय उपद्रव द्वारा रूकावट हो सकती है जिससे तंत्र वापस अपनी पूर्व दशा में लौट जाता है या और किसी [[मार्ग]] पर चल पड़ता है। इसके कारण आवर्ती प्रक्रियाएं किसी स्थिर, [[अंतिम दशा]] में पहंच या न पहुंच सकती हैं। इसके अलावा, ऐसी दशाओं के गुणों की भविष्यवाणी, भले वह न घटे, हमेशा संभव नहीं है। संक्षिप्त में, वनस्पति समुदाय अनेक परिवर्तकों पर निर्भर होते हैं जो मिलकर भविष्य की दशाओं की संभावनाओं की सीमाएं निश्चित करते हैं।
== वैज्ञानिक अध्ययन ==
वनस्पति वैज्ञानिक स्थानों और समय के विभिन्न पैमानों पर वनस्पति में देखे जाने वाले प्रकारों और प्रक्रियाओं के कारणों का अध्ययन करते हैं। जातियों के संयोजन और रचना सहित वनस्पति की विशेषताओं पर जलवायु, मिट्टी, स्थलाकृति और इतिहास की आपेक्षिक भूमिकाओं के विषय में प्रश्न विशेष रूचि और महत्व रखते हैं। ऐसे प्रश्न अकसर बड़े पैमाने पर होते हैं और इसलिये किसी जोड़-तोड़ के प्रयोग द्वारा आसानी से [[अर्थपूर्ण]] तरीके से हल नहीं किये जा सकते. इसीलिये व्नस्पतिशास्त्र, पेलियोवनस्पतिशास्त्र, परिस्थितिशास्त्र, मृदाविज्ञान आदि की जानकारी के सहयोग से अवलोकनीय अध्ययन वनस्पति विज्ञान में बहुत आम हैं।
=== इतिहास ===
==== 1900 के पूर्व ====
वनस्पति विज्ञान का सूत्रपात 18वीं शताब्दी में, या कुछ मामलों में उससे पहले वनस्पतिशास्त्रियों और/या प्रकृतिवादियों के कार्य से हुआ। इनमें से अनेक खोज के युग में [[खोज की यात्रा]] पर निकले विश्व यात्री थे और उनका कार्य वनस्पतिशास्त्र और भूगोल का संश्लेषित संयोग था जिसे आजकल हम वनस्पतिक [[बायोजियोग्राफी]] (या ''फाइटोजियोग्राफी'') कहते हैं। उस समय विश्वभर के फ्लोरिस्टिक या वनस्पति प्रकारों के बारे में बहुत कम जानकारी थी और यह तो नहीं के बराबर ज्ञात था कि वे किस पर निर्भर थे, इसलिये अधिकांश कार्य पौधों के नमूनों को जमा करने, वर्गीकृत करने और नामकरण करने तक सीमित था। 19वीं शताब्दी तक बहुत कम सैद्धांतिक कार्य हुआ। प्रारंभिक प्रकृतिवादियों में सबसे अधिक परिमाण में कार्य करने वाले व्यक्ति थे [[एलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट]] जिन्होंने 1799 से 1804 तक की दक्षिण और मध्य अमेरिका की अपनी पांच वर्षीय यात्रा के दौरान 60000 वनस्पति नमूने जमा किये. हमबोल्ट पहले ऐसे वैज्ञानिकों में से एक थे जिन्होंने जलवायु और वनस्पति पैटर्नों के बीच संबंध को अपने विशाल जीवनभर के कार्य, "[[वायेज टू द इक्विनाक्शियल रीजन्स ऑफ द न्यू वर्ल्ड]]" - में प्रलेखित किया, जो उन्होंने अपने साथी वनस्पतिशास्त्री [[एमी बॉप्लैंड]] के साथ मिलकर लिखा. हम्बोल्ट ने वनस्पति को टेक्सानमी के अलावा फिजियोग्नामिक तरीके से वर्णित किया। उनके कार्य ने पर्यावरण-वनस्पति के संबंधों पर गहन कार्य की शुरूआत की जो आज तक चालू है। (बारबर और अन्य, 1987).
आज कल होने वाले नस्पति अध्ययन का प्रारंभ 19वीं सदी के अंत में यूरोप और रूस में, विशेषकर एक पोल, जोजेफ पैकजोस्की और एक रूसी, [[लियोंटी रेमेन्स्की]] के द्वारा हुआ। वे दोनों मिलकर अपने समय से बहुत आगे थे और उन्होंने पश्चिम से बहुत पहले आज के महत्वपूर्ण लगभग सभी विषयों का परिचय या वर्णन किया। इन विषयों में वनस्पति समुदाय विश्लेषण, या [[फाइटोसोशियॉलाजी]], [[ग्रेडियेंट विश्लेषण]], आवर्तन और वनस्पति [[इकोफिजियालाजी]] और फंक्शनल इकालाजी पर लेख शामिल थे। भाषा और/या राजनीतिक काऱणों से 20वीं सदी तक अधिकांश विश्व, विशेषकर अंग्रेजी बोलने वाले विश्व को उनके अधिकतर कार्य का पता नहीं था।
==== 1900 के पश्चात ====
युनाइटेड स्टेट्स में [[हेनरी कोल्स]] और [[फ्रेड्रिक क्लेमेंट्स]] ने 20वीं सदी के शुरू में वनस्पति आवर्तन के विचारों का विकास किया। क्लेमेंट अब अमान्य [[सुपरआर्गानिज्म]] के रूप में वनस्पति समुदाय के वर्णन के लिये प्रसिद्ध है। उसने तर्क पेश किया किजैसे किसी व्यक्ति में सभी अवयव तंत्र मिलकर काम करके शरीर के अच्छी तरह से काम करने में मदद करते हैं और जो व्यक्ति के वयस्क होने के साथ मिलकर विकसित होते हैं, उसी तरह वनस्पति समुदाय में भी हर जाति अत्यंत कड़े समन्वय और तालमेल के साथ विकसित होती है और परस्पर सहयोग करती है और वनस्पति समुदाय को एक परिभाषित और पूर्वनियत अंत स्थिति की ओर धकेलती है। हालांकि क्लेमेंट्स ने उत्तरी अमेरिकन वनस्पति पर बहुत कार्य किया, सुपरआर्गानिज्म के प्रति उसकी भक्ति ने उसकी प्रतिष्ठा को धक्का पहुंचाया है, क्यौंकि अनेकों शोधकर्ताओं द्वारा किये गए कार्य में उसके विचार को समर्थन नहीं मिला है।
क्लेमेंट्स के प्रतिकूल, अनेक परिस्थिति वैज्ञनिकों ने दर्शाया है कि [[वैयक्तिक परिकल्पना]], जो कहती है कि वनस्पति समुदाय पर्यावरण के प्रति प्रतिक्रिया कर रही जातियों के एक समूह का कुल जमा है, सही है और समय और स्थान में एक साथ घटती है। रेमेन्स्की ने रूस में यह विचार प्रस्तुत किया और 1926 में [[हेनरी ग्लियासन]] ने युनाइटेड स्टेट्स में इसे एक पेपर में विकसित किया। क्लेमेंट्सियन के विचारों का इतना अधिक प्रभाव था कि ग्लियासन के विचारों को कई सालों तक अस्वीकार किया गया। लेकिन 1950 व 60 के दशकों में [[राबर्ट व्हिटेकर]] के अच्छी तरह से तैयार किये गए अध्ययनों की श्रंखला ने ग्लियासन के तर्कों के लिये मजबुत सबूत पेश किये. सबसे योग्य अमेरिकन वनस्पति परिवैज्ञानिकों में से एक, व्हिटेकर [[ग्रेडियेंट एनेलिसिस]] का विकासक और समर्थक था जिसमें वैयक्तिक जाति की बहुलताओं को मापे जा सकने वाले पर्यावरण के परिवर्तकों (या उनके संबंधित [[wiktionary:Surrogate|सरोगेटों]]) के सम्मुख मापा जाता है। तीन अत्यंत भिन्न [[मान्टेन]] परितंत्रों के अध्ययनों में, व्हिटेकर ने दिखाया कि जातियां मुख्यतः पर्यावरण के सम्मुख प्रतिक्रिया करती हैं और अन्य साथ में मौजूद जातियों से उसका कोई समन्वय नहीं होता. अन्य कार्य विशेषकर [[पेलियोबाटनी]] पर किया गया कार्य बड़े सामयिक और स्थानिक पैमानों पर इस विचार को समर्थन देता है।
=== हाल की घटनाएं ===
1960 के दशक से, वनस्पतिलोक पर अधिकतर शोध [[कार्यात्मक परिस्थितिशास्त्र]] के विषयों पर केंद्रित हो गया है। कार्यात्मक ढांचे में, वर्गीकरणीय वनस्पतिशास्त्र का कम महत्व होता है और सारी खोजबीन जातियों के आकृतिक, शरीर-रचना और शरीरक्रियात्मक वर्गीकरण पर केंद्रित रहती है और इसका उद्देश्य यह भविष्यवाणी करना होता है कि विशिष्ट समूह विभिन्न पर्यावरणीय परिवर्तकों के प्रति कैसे बर्ताव करेंगे. इस तरह के दृष्टिकोण का आधार यह धारणा है कि [[केंद्राभिमुख विकास]] और [[अनुकूलित विकिरण]] के कारण विशेषकर फाइलोजेनेटिक वर्गीकरण के उच्च स्तरों और बड़े स्थानिक पैमानों पर अकसर [[फाइलोजेनेटिक]] अपेक्षा और पर्यावर्णीय [[अनुकूलन]] के बीच मजबूत संबंध नहीं होता है। कार्यात्मक वर्गीकरण 1930 के दशक में [[रांकियर]] के एपाइकल [[मेरिस्टेमों]] के स्थान पर आधारित पौधों के समूहों में विभाजन के साथ शुरू हुआ। इसके बाद अन्य वर्गीकरण जैसे [[मैकआर्थर]] का - [[आर प्रति के – चुनिंदा]] जाति (न केवल वनस्पति बल्कि सभी जीवों पर लागू) और [[ग्राइम]] द्वारा प्रस्तावित सी-एस-आर योजना, जिसमें जातियों को तीन में से एक या अधिक रणनीतियों के अनुसार, प्रत्येक का पक्ष एक [[चुनिंदा दबाव]] द्वारा लेकर-प्रतिस्पर्धी, दबाव को सहने वाले और रूडरल्स में बांटा गया है।
कार्यात्मक वर्गीकरण वनस्पति-पर्यावरण की परस्पर क्रियाओं की रचना में महत्वपूर्ण होता है, जो कि वनस्पति परिशास्त्र में पिछले 30 से अधिक वर्षों में मुख्य विषय रहा है। आजकल विश्व [[जलवायु बदलाव]], विशेषकर तापमान, वर्षा और [[उपद्रव में परिवर्तनों]] की प्रतिक्रिया में स्थानीय, क्षेत्रीय और वैश्विक वनस्पति परिवर्तनों की रचना पर बहुत जोर दिया जा रहा है। ऊपर दिये गए कार्यात्मक वर्गीकरण के उदाहरण, जो सभी वनस्पति जातियों को बहुत छोटे समूहों में विभाजित करते हैं, आगे आने वाले विभिन्न रचनात्मक उद्देश्यों पर असरकारी होंगे, इसकी कम संभावना है। यह आम तौर पर माना जाता है कि सरल, सर्व-उद्देश्यक वर्गीकरणों के स्थान पर अधिक विस्तृत और कार्यात्मक वर्गीकरण आ जाएंगे. इसके लिये शरीर क्रिया विज्ञान, शरीर रचनाविज्ञान और विकासीय जीव विज्ञान की अब से बेहतर समझ की जरूरत होगी. ऐसा अधिक जातियों के लिये जरूरी होगा भले ही अधिकांश वनस्पति जातियों में से मुख्य जाति को ही लिया जाय.
== इन्हें भी देखें ==
{{Portalbox|Environment|Ecology|Earth sciences|Biology}}
* [[बायोकोएनोसिस]]
* [[बायोम]]
* [[ब्रिटिश राष्ट्रीय वनस्पति वर्गीकरण]]
* [[पारिस्थितिक उत्तराधिकार]]
* [[इकोरीजियन]]
* [[इकोसिस्टम]]
* [[रोबेल पोल]]
* [[वनस्पति और ढलान स्थिरता]]
{{Br}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20190217084946/https://webcollection.co.in/natural-vegetation-in-india/ भारत में प्राकृतिक वनस्पति]
* [https://web.archive.org/web/20120422181247/http://www.kew.org/hindi/hi-plants-fungi/index.htm '''KEW'''] - पादपों तथा कवकों का विशेषज्ञ साइट
==== वर्गीकरण ====
* [https://web.archive.org/web/20081122032744/http://conserveonline.org/docs/2001/03/vol1.pdf टेरेस्ट्रियल वेजिटेशन ऑफ़ द युनाइटेड स्टेट्स वोल्यूम I - द नैशनल वेजिटेशन क्लासिफिकेशन सिस्टम: डेवेलपमेंट, स्टेटस और ऐप्लिकेशंस] (पीडीऍफ़)
* [https://web.archive.org/web/20051028140442/http://biology.usgs.gov/fgdc.veg/ फेडरल जियोग्राफिक डेटा कमिटी वेजिटेशन सबकमिटी]
* [https://web.archive.org/web/20051030140148/http://www.fgdc.gov/standards/documents/standards/vegetation/vegclass.pdf वेजिटेशन क्लासिफिकेशन स्टैण्डर्ड] [ऍफ़जीडीसी-एसटीडी-05, जून 1997] (पीडीऍफ़)
* [https://web.archive.org/web/20070903061004/http://www.daffa.gov.au/brs/forest-veg/vast क्लासिफाइंग वेजिटेशन कंडीशन: वेजिटेशन एसेट्स स्टेट्स एण्ड ट्रांज़िशंस (वास्ट)]
==== मानचित्रण संबंधी ====
* [https://web.archive.org/web/20081004181121/http://maps.howstuffworks.com/world-vegetation-map.htm हाउस्टफ़्वर्क्स द्वारा इंटरैक्टिव वर्ल्ड वेजिटेशन मैप]
* [https://web.archive.org/web/20110705065330/http://biology.usgs.gov/npsveg/ युएसजीएस - एनपीएस वेजिटेशन मैपिंग प्रोग्राम]
* [http://www.lib.ber .html चेकलिस्ट ऑफ़ ऑनलाइन वेजिटेशन एण्ड प्लांट डिस्ट्रीब्युशन मैप्स]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}
* [http://www.vgt.vcentre वीटो (VITO) पर]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}
* [https://web.archive.org/web/20190628190200/http://www.spot-vegetation.com/ स्पॉट-वेजिटेशन प्रोग्राम वेब पेज]
==== जलवायु चित्र ====
* [https://web.archive.org/web/20180928225953/http://www.zoolex.org/walter.html जलवायु चित्र को विस्तार से बताया]
* [https://web.archive.org/web/20181103045724/http://climatediagrams.com/ ClimateDiagrams.com] 3000 मौसम स्टेशनों की तुलना में जलवायु के लिए और अधिक चित्र प्रदान करता है और विश्व भर से अलग अलग अवधियों के लिए जलवायु. उपयोगकर्ताओं को भी अपने स्वयं के डेटा के साथ अपने स्वयं आरेख बना सकते हैं।
* [https://web.archive.org/web/20181021022914/http://www.globalbioclimatics.org/plot/diagram.htm WBCS विश्वव्यापी जलवायु आरेख]
== संदर्भ और आगे पढ़ें ==
* अर्कीबोल्ड, ओ. डब्लू. ''इकोलॉजि ऑफ़ वर्ल्ड वेजिटेशन'' . [[न्यूयॉर्क|न्यू यॉर्क]]: स्प्रिंगर प्रकाशन, 1994.
* बार्बोर, एम. जी. और डब्लू. डि. बिलिंग्स (संपादक). ''उत्तर अमेरिकी स्थलीय वनस्पति'' . [[कैम्ब्रिज]]: [[कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस]], 1999.
* बार्बोर, एम. जी, जे. एच. बर्क और डब्लू.डि. पिट्स. "स्थलीय संयंत्र पारिस्थितिकीय". मेंलो पार्क: बेंजामिन कमिंग्स, 1987.
* ब्रेकले, एस-डब्लू. ''वॉल्टर'स वेजिटेशन ऑफ़ द अर्थ'' . न्यू यॉर्क: स्प्रिंगर प्रकाशन, 2002.
* बुरौज़, सी.जे. ''प्रोसेसेस ऑफ़ वेजिटेशन चेंज'' . [[ऑक्सफ़ोर्ड|ऑक्सफोर्ड]]: रोउटलेज प्रेस, 1990.
* फेल्डमेयर-क्रिस्टी, ई., एन. इ. ज़िमरमैन और एस. घोष. ''मॉडर्न एप्रोचेस इन वेजिटेशन मॉनिटरिंग'' [[बुडापेस्ट]]: एकाडेमिई काईडॉ, 2005.
* ग्लिअसों, एच.ए. 1926. संयंत्र संघ के व्यक्तिपरक अवधारणा. टोर्री वानस्पतिक क्लब के बुलेटिन, 53:1-20.
* ग्रीम, जे.पी. 1987. ''वनस्पति रणनीतिएं और संयंत्र प्रक्रियाएं'' . विले इंटरसाइंस, न्यूयॉर्क एनवाई.
* कबाट, पी., एट अल. (संपादकों). ''वनस्पति, पानी, मनुष्य और जलवायु: एक इंटरएक्टिव सिस्टम पर नई परिप्रेक्ष्य'' . [[हेइडेलबर्ग]]: [[स्प्रिंगर-वेर्लग]] 2004.
* मैकआर्थर, आर.एच. और इ.ओ. विल्सन. ''द थ्योरी ऑफ़ आइलैंड बायोजियोग्राफी'' . प्रिंसटन: प्रिंसटन यूनिवर्सिटी प्रेस. 1967
* म्यूएलर-डोम्बोईस, डी., एच. एलेंबर्ग. ''एम्स एण्ड मेथड्स ऑफ़ वेजिटेशन इकॉलौजी.'' द ब्लैकबर्न प्रेस, 2003.
* वान डेर मारेल, ई. ''वनस्पति पारिस्थितिकीय'' . ऑक्सफोर्ड: ब्लैकवेल प्रकाशक, 2004.
* वंकट, जे.एल. ''द नैचुरल वेजिटेशन ऑफ़ नोर्थ अमेरिका'' . क्रेइजर प्रकाशन कं, 1992.
[[श्रेणी:वनस्पति विज्ञान]]
[[श्रेणी:पारिस्थितिक उत्तराधिकार]]
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समुच्चय सिद्धान्त
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[[फाईल:Venn A intersect B.svg|right|thumb|वेन-आरेख द्वारा दो समुच्चयों के सर्वनिष्ठ का सरल प्रदर्शन]]
'''समुच्चय सिद्धान्त''' (set theory), [[गणित]] केरौ एगो शाखा छेकै जे समुच्चयो केरौ अध्ययन करै छै । समान सिनी क सुपरिभाषित (well defined) संग्रह (collection) क समुच्चय कहै छै। यद्यपि '''समुच्चय''' के अन्तर्गत किसी भी प्रकार की वस्तुओं का संग्रह सम्भव है, किन्तु समुच्चय सिद्धान्त मुख्यतः गणित से सम्बन्धित समुच्चयों का ही अध्ययन करता है। स्थूल रूप से [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]] समुच्चय के पर्याय 'सेट' (set), ऐग्रिगेट (aggregate), क्लास (class), डोमेन (domain) तथा टोटैलिटी (totality) हैं। समुच्चय में अवयवों का विभिन्न होना आवश्यक है।
[[प्रथम श्रेणी के तर्क]] (first-order logic) से सुव्यवस्थित (formalized) किया हुआ समुच्चय सिद्धान्त आज गणित का सर्वाधिक प्रयुक्त आधारभूत तन्त्र है। समुच्चय सिद्धान्त की भाषा गणित के लगभग सभी वस्तुओं (यथा- [[फलन]]) को परिभाषित करने के काम आती है। समुच्चय सिद्धान्त के आरम्भिक कांसेप्ट इतने सरल हैं कि इन्हें प्राथमिक विद्यालयों के पाठ्यक्रम में भी पढाया जा सकता है।
== इतिहास ==
आधुनिक समुच्चय सिद्धान्त का आरम्भ [[जार्ज कैंटर]] (Georg Cantor) एवं डेड्काइन्ड (Dedekind) ने सन १८७० में किया।
== मौलिक अवधारणाएँ एवं परिभाषाएँ ==
=== व्यवहार ===
किसी समुच्चयों के सदस्यों के बारे में निम्नलिखित चार प्रकार से बताते हैं:
(१) सभी सदस्यों को लिखना ;
: उदाहरण A={3,5,7,9,11}
(२) कुछ सदस्यों को लिखने के बाद डॉट-डॉट लगाकर छोड़ देना;
: जैसे A={2,4,6,8,.............}
(३) कोई विवरण देना, जैसे
: S={सभी सम संख्याएँ}
(४) [[बीजगणित]] की सहायता से;
: जैसे C={x : 2 < x < 7, x एक पूर्ण संख्या है}। इसका अर्थ है कि समुच्चय C के सदस्य वे सभी पूर्णांक हैं जो 2 से अधिक तथा 7 से कम हैं।; अर्थात् C={3,4,5,6}
=== समुच्चय के प्रकार ===
(१) '''परिमित समुच्चय''' (finite set) : जिसके सदस्यों की संख्या सीमित हो, जैसे {3,7,9}।
(२) '''अपरिमित समुच्चय''' (infinite set) : जिसके सदस्यों की संख्या असीमित हो, जैसे A={2,4,6,8,.............}
(३) '''रिक्त समुच्चय''' या शून्य समुच्चय (empty set या null set) : जिसमें सदस्यों की संख्या शून्य हो या जिसका कोई सदस्य ही न हो। इसे <math> \empty </math> अथवा {} से निरूपित करते हैं।
=== समुच्चय की सदस्यता ===
<math> \in </math>यह चिह्न देकर बताते हैं कि कौन समुच्चय का सदस्य है। उदाहरण के लिए, S={2,5,6,7,9} का एक सदस्य 7 है। इसे हम लिख सकते हैं कि <math>7 \in S</math> इसके विपरीत <math> \notin </math> चिह्न यह बताता है कि अमुक चीज समुच्चय का सदस्य '''नहीं''' है। जैसे 3 संख्या पूर्वोक्त समुच्चय S का सदस्य नहीं है; इसे हम लिखते हैं कि <math>3 \notin S</math>।
"<math> \in </math>" इस चिह्न को 'सदस्य है' (belongs to) कहते हैं।
=== उपसमुच्चय ===
[[फाईल:Venn A subset B.svg|thumb|<math>A \subseteq B</math>]]
यदि किसी समुच्चय A के सभी सदस्य किसी अन्य समुच्चय B के भी सदस्य हैं तो यह कहा जाता है कि A, B का उपसमुच्चय (subset) है। जैसे, A={p,q,r}
एवं B={p,q,r,s} हो तो हम लिखते हैं कि <math> A \subset B </math> प्रत्येक समुच्चय के दो उपसमुच्चय अवश्य होते हैं; एक तो स्वयं वही समुच्चय अपने आप का उपसमुच्चय होता है, दूसरा शून्य समुच्चय सभी समुच्चयों का उपसमुच्चय है।
==== उदाहरण ====
समुच्चय {a,b,c} के सभी उपसमुच्चयों को लिखें तो <math> \empty </math>, {a}, {b}, {c}, {a,b}, {a,c}, {b,c} एवं {a,b,c} तथा शून्य समुच्चय।
यदि किसी समुच्चय में n सदस्य हों तो उसके सभी उपसमुच्चयों की संख्या <math> 2^n </math> होगी।
जिस उपसमुच्चय में सदस्यों की संख्या मूल समुच्चय के सदस्यों की संख्या से कम हो उसे 'उचित उपसमुच्चय' (proper subset) कहते हैं।
=== सर्वसमावेशी समुच्चय (universal set)===
किसी समस्या में विद्यमान सभी उपादानों को लेने पर जो समुच्चय बनता है उसे उस समस्या के सापेक्ष सर्वसमावेशी समुच्चय कहते हैं। उदाहरण के लिए, ११ संख्या तक सभी विषम संख्याओं का सर्वसमावेशी समुच्चय होगा (११ संख्या सहित) - <math> \xi\ </math>={1,3,5,7,9,11}
=== वेन आरेख ===
वेन आरेख का उपयोग करके समुच्चय सिद्धान्त के बहुत सी समस्याओं का आसानी से समाधान किया जाता है। सर्वसमावेशी समुच्चय को एक आयत द्वारा निरूपित किया जाता है तथा इसके सभी उपसमुच्चयों को वृत्त द्वारा दर्शाया जाता है। इस चित्र में A के पूरक समुच्चय को छायांकित करके दिखाया जाता है, अर्थात् <math> A^c </math>। इसके अलावा वृत्त के भीतर वृत्त बनाकर उपसमुच्चयों को दर्शाते हैं। जैसे <math>B \subseteq A </math>
=== समुच्चय संघ एवं समुच्चय सर्वनिष्ठ ===
[[फाईल:Venn0001.svg|thumb|<math>A \cap B</math><br />]]
[[फाईल:Venn0111.svg|thumb|<math>A \cup B</math>]]
[[फाईल:Venn0100.svg|thumb|<math>A \setminus B</math>]]
दो समुच्चय A और B हों तो इनका '''सर्वनिष्ठ समुच्चय''' वह समुच्चय होगा जिसमें वे सदस्य होंगे जो A और B दोनों में हों। जैसे यदि A={2,4,7} एवं B={2,3,7,8} हो तो A और B का सर्वनिष्ठ समुच्चय {2,7} होगा जिसको हम इस तरह लिखते हैं: <math>A \cap B</math>={2,7}
चित्र में वेन आरेख में छाया द्वारा जो दिखाया गया है वह <math>A \cap B</math> है।
दो समुच्चय A और B का '''संघ''' (यूनिअन) वह समुच्चय है जिसके सदस्य वे हैं जो A में हैं, या B में हैं या दोनों में हैं। उदाहरणार्थ यदि A={3,4,6} एवं B={2,3,4,5,6,7,8} हो तो इन दोनों समुच्चयों का संघ समुच्चय को हम यों लिखेंगे: <math>A \cup B</math>={2,3,4,5,6,7,8}।
यदि दो समुच्चयों A और B में कोई भी सदस्य उभयनिष्ठ (कॉमन) नहीं है तो इन दोनों समुच्चयों को असंयुक्त समुच्चय (disjoint set) कहा जाता है।
इसे हम ऐसे लिखते हैं: <math>A \cap B</math>=<math> \empty </math>
=== विविध ===
समुच्चय में अवयवों का विभिन्न होना आवश्यक है। यदि '''x''' समुच्चय '''A''' का कोई अवयव है, तो हम लिखते है : '''x ∈ A'''। सभी अवयवों का ब्यौरा न देकर, उन्हें नियम द्वारा भी बताया जा सकता है, जैसे विषम संख्याओं का समुच्चय। '''B''' को '''A''' का '''उपसमुच्चय''' (Subset) तब कहते हैं, जब B का प्रत्येक अवयव A का सदस्य हो और इसे इस प्रकार लिखते हैं : '''B ⊂ A''' . इसे यों भी पढ़ते हैं : B, A में समाविष्ट है। यदि A में कम से कम एक ऐसा अवयव हो जो B का सदस्य नहीं है और B, A का उपसमुच्चय है, तो B को A का '''वास्तविक (proper) उपसमुच्चय''' कहते हैं। ऐसे समुच्चय को, जिसका एक भी अवयव न हो, '''शून्य (null) समुच्चय''' कहते हैं और इसे '''φ''' से प्रकट करते हैं। शून्य समुच्चय सैद्धांतिक विवेचन में उपयोगी होते हैं।
समुच्चयों पर मूल क्रियाएँ ये हैं : तार्किक (logical) योग, तार्किक गुणन, तार्किक व्यकलन।
*दो समुच्चयों का योग '''A + B''', जिसे '''AUB''' अर्थात् '''A और B का संघ''' (union) भी कहते हैं, उन सभी अवयवों का समुच्चय है जो A और B दोनों में या किसी एक में हों।
*दो समुच्चयों का गुणनफल '''A.B''', जिसे '''A∩B''' भी लिखते हैं और जिसे '''A तथा B का सर्वनिष्ठ''' (intersection) कहते हैं, उन सभी अवयवों का समुच्चय है जो A तथा B दोनों के सदस्य हैं।
*'''अंतर''' '''A-B''' उन अवयवों का समुच्चय है जो A में हैं किंतु B में नहीं हैं। यदि '''B ⊂ A''', तो A-B को A के प्रति B का संपूरक (complement) कहते हैं।
तार्किक योग और गुणन सामान्य [[बीजगणित]] के [[साहचर्य]] (associative), [[क्रमविनिमेय]] (commutative) और [[वितरण]] (distributive) नियमों का पालन करते हैं।
== गुणधर्म ==
सम्बन्ध <math>\subseteq</math> के लिए फलन <math>\mathcal P(X)</math> आंशिक क्रमित हो तो, सभी <math>A,B,C\subseteq X</math> के लिए, :
* [[स्वतुल्य सम्बन्ध]] (Reflexive relation): <math>A\subseteq A</math>
* [[प्रतिसममित संबंध]] (Antisymmetrische Relation): यदि <math>A\subseteq B</math> तथा <math>B\subseteq A</math> तो <math>A = B</math>
* [[संक्रामी संबंध]] (Transitive Relation): यदि <math>A\subseteq B</math> तथा <math>B\subseteq C</math> तो <math>A\subseteq C</math>
समुच्चयों का सर्वनिष्ठ <math>\cap</math> तथा संघ (यूनिअन)<math>\cup</math> क्रमविनिमेय, साहचर्य तथा वितरण नियमों का पालन करता है:
* [[साहचर्य नियम]]: <math>\left(A \cup B \right) \cup C = A \cup \left(B \cup C \right)</math> तथा <math>\left(A \cap B \right) \cap C = A \cap \left(B \cap C \right)</math>
* [[क्रमविनिमेय नियम]]: <math>A \cup B = B \cup A</math> तथा <math>A \cap B = B \cap A</math>
* [[वितरण नियम]]: <math>A \cup \left(B \cap C \right) = \left(A \cup B \right) \cap \left(A \cup C \right)</math> तथा <math>A \cap \left(B \cup C \right) = \left(A \cap B \right) \cup \left(A \cap C \right)</math>
* [[डी मार्गन का नियम]]: <math>\left(A \cup B \right)^C = A^C \cap B^C</math> तथा <math>\left(A \cap B \right)^C = A^C \cup B^C</math>
* अवशोषण: <math>A \cup \left(A \cap B \right) =A </math> तथा <math>A \cap \left(A \cup B \right) = A </math>
अन्तर के लिए निम्नलिखित नियम लागू होते हैं:
* साहचर्य नियम: <math>(A \setminus B) \setminus C = A \setminus (B \cup C)</math> तथा <math>A \setminus (B \setminus C) = (A \setminus B) \cup (A \cap C)</math>
* वितरण नियम: <math>(A \cap B) \setminus C = (A \setminus C) \cap (B \setminus C)</math> तथा <math>(A \cup B) \setminus C = (A \setminus C) \cup (B \setminus C)</math> तथा <math>A \setminus (B \cap C) = (A \setminus B) \cup (A \setminus C)</math> तथा <math>A \setminus (B \cup C) = (A \setminus B) \cap (A \setminus C)</math>
सममित अंतर के लिए निम्नलिखित नियम लागू होते हैं:
* साहचर्य नियम: <math>(A \triangle B) \triangle C = A \triangle (B \triangle C)</math>
* क्रमविनिमेय नियम: <math>A \triangle B = B \triangle A</math>
* वितरण नियम: <math>(A \triangle B) \cap C = (A \cap C) \triangle (B \cap C)</math>
: <math>A \triangle \emptyset = A \quad A \triangle A = \emptyset</math>
[[श्रेणी:गणित]]
[[श्रेणी:गणितीय तर्क]]
[[श्रेणी:समुच्चय सिद्धान्त|*]]
fxp2lz2vo3wq81e3uompss0ij13w59t
घास
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wikitext
text/x-wiki
[[फाईल:Golf bunkers Filton.jpg|thumb|right|घास केरौ मैदान]]
[[फाईल:Carpet Grass.JPG|thumb|right|घास]]
'''घास''' एगो [[एकबीजपत्री]] हरौ गाछ होय छै। एकरौ हर गाँठ सँ रेखीय पत्ती सब निकललौ दिखाय परै छै। साधारणतः ई कमजोर, शाखायुक्त, रेंगनेवाला पौधा छेकै। [[बाँस]], [[मक्का]] आरू [[धान]] केरौ पौधा भी घास ही छेकै। [[Mr Indian Hacker]]
==परिचय==
घास शब्द का अर्थ बहुत व्यापक है। साधारणतया घासों में वे सब वनस्पतियाँ सम्मिलित की जाती हैं जो [[गाय]], [[भैंस]], [[भेड़]], [[बकरी]] आदि पालतू पशुओं के चारे के रूप में काम आती हैं, परन्तु आधुनिक युग में वानस्पतिक वर्गीकरण के अनुसार केवल [[पोएसी|घास कुल]] (ग्रेमिनी कुल, Gramineae family) के पौधे ही इसके अंतर्गत माने जाते हैं। लगभग दो लाख फूलने और फलने वाले पौधों में से पाँच हजार इस कुल के अंतर्गत आते हैं। [[चरागाह]] एवं खेल के मैदान ऐसे स्थानों में होने वाले पौधे, जैसे [[हाथी घास]] (नेपियर ग्रास, Napier grass), [[सूडान घास]], [[घास|दूब]] आदि को तो घास कहते ही हैं हमारे भोजन के अधिकांश अनाज, जैसे [[गेहूँ]], [[धान]], [[मक्का]], [[ज्वार]], [[बजड़ी|बाजरा]] आदि भी घास कुल में ही परिगणित हैं। इनके अतिरिक्त [[गन्ना|ईख]], [[बाँस]] आदि भी इसी कुल में सम्मिलित हैं।
[[फाईल:Wildebeest-during-Great-Migration.JPG|center|thumb|upright=1.5|घास के एक मैदान में चरते हुए 'वाइल्डबीस्ट']]
==विशेषताएँ==
घासों के आकार एवं ऊँचाई में भिन्नता होती है। कुछ पौधे केवल कुछ इंच लंबे हाते हैं, जैसे खेल के मैदान एवं [[लान]] (lawn) की घासें; कुछ मध्यम वर्ग के होते हैं, जैसे गेहूँ, मक्का आदि तथा कुछ बहुत ही ऊँचे होते हैं, जैसे ईख, बाँस आदि। कुछ प्रकार के पौधों में फूल अलग-अलग तथा कुछ में गुच्छों में होते हैं। अनाजवाले पौधे अधिकतर वार्षिक होते है, किंतु बाँस, काँस आदि ३०-४० वर्ष, या इससे भी अधिक, जीवित रहते हैं। कुछ घासें पानी में उगती हैं या प्राय: नदी,तालाब और समुद्र के किनारे पाई जाती हैं। इसके विपरीत कुछ प्रकार की घासें केवल कम वर्षावाले स्थानों तथा मरुस्थलों में ही जीवित रहती हैं।
घासों की जड़ें प्राय: रेशेदार होती हैं। तने ठोस तथा संधियुक्त होते हैं। संधियों के बीच के भागों को पोर या पोरी (internodes) कहते हैं। पत्तियाँ नुकीली और तने के जोड़ों पर एक के बाद दूसरी ओर मुड़ी रहती हैं। पत्तियाँ सदैव समांतरमुखी (parallel viewed) होती हैं। और दो स्पष्ट भागों, मुतान (sheath) एवं फलक (blade), में विभाजित होती हैं। पत्तियाँ तने के जोड़ से निकलती हैं और मुतान पोरी को घेरे रहती हैं। मुतान में फलक के मूल के कुछ ऊपर से विशेष प्रकार के अस्तर (linings) निकलते हैं। इन्हें छोटी जीभ (Little tongue) कहते हैं। कुछ घासों की पत्तियों के नीचे फलक के मूल पर एक विशेष प्रकार के वृद्धि उपांग (growth appendages) होते हैं, जिन्हें कर्णाभ (Auricles) कहते हैं। इस प्रकार घास की पत्तियों की बनावट विशेष प्रकार की होती है तथा पत्तियों द्वारा ही इस कुल के पौधों को पहचाना जाता है। कुछ घासों में नीचे की ओर की कुछ पोरियाँ कुछ अधिक लंबी और उपवर्तुल (Subglobular) होकर पौधे के लिये भोजन तत्व इकट्ठा करने का स्थान बना लेती हैं। इस पकार के पौधे कंदीय (bulbus) कहलाते हैं।
जिस प्रकार पत्ती की बनावट से ग्रैमिनी कुल के पौधे पहचाने जाते हैं उसी प्रकार फूलों और बीजों द्वारा जातियाँ पहचानी जा सकती हैं। फूलों के गुच्छे विभिन्न प्रकार के होते हैं। फूल अकेले या समूह में फूल देनेवाली अनुशूकियों (spikelets) पर लगे होते हैं।
[[पुंकेशर चक्र|पुंकेसर]] (stamens) और [[स्त्रीकेसर]] (pistils) प्राय: साथ-साथ होते हैं, किंतु [[मक्का]] जैसे पौधों में अलग-अलग भी होते हैं। फूल के अतिरिक्त अनुशूकी में दो या अधिक निपत्र (bracts) होते हैं, जिन्हे तुषनिपत्र ( glumes) कहते हैं। इनमें फूलों के नीचेवाले तुषनिपत्र को बाह्य पुष्पकवच (लेमा, Lemmas) और उनके ऊपरवालों को अंत: पुष्पकवच (पेलिया, palea) कहते हैं। कभी कभी बाह्य पुष्पकवच में नुकीली तथा काँटे की तरह वृद्धि होती है, जिसे सीकुर (Awn) कहते हैं, जैसे गेहूँ, जौ इत्यादि में। फूलों में आकर्षित करनेवाला कोई रंग या सुंगध नहीं होती। परागण प्राय: हवा द्वारा होता है। कुछ फूलों में स्वयं परागण (self pollination) भी होता है। कैलिक्स (calyx) और पँखड़ियों (petals) के स्थान पर दो या तीन पतले पारभासक शल्क होते हैं, जिन्हें परिपुष्पक (Lodicules) कहते हैं। जब फूलों के खिलने का समय आता है तब परिपुष्पक एक प्रकर के रस से भर जाते हैं और बाह्मपुष्पकवच तथा अंत:पुष्पकवच पर दबाव पड़ता है, जिससे फूल खिल जाते हैं। इस अवस्था में वायु द्वारा परागण होता है।
सभी पौधों का फल एक बीज वाला होता है, जिसमें बीजावरण (seed coat), या बीजकवच (Testa), फलकवच (fruit coat) फलावरण (pericarp) से चिपका रहता है। घासों के बीज बहुत छोटे होते हैं तथा बहुत अधिक मात्रा में पैदा होते हैं। ये बहुत दिनों तक जीवित रह सकते हैं और विभिन्न प्रकार की जलवायु और मिट्टी में उगाए जा सते हैं। बीजों का विकिरण (dispersal) उनकी बनवाट के अनुसार विभिन्न प्रकार से होता है, परंतु मुख्य रूप से हवा, पानी मनुष्यों और पशुओं द्वारा होता है।
भारत मे पाई जाने वाली कास घास के पुष्प श्वेत होते हैं।
==मिट्टी और घास==
मिट्टी और उसपर उगनेवाली वनस्पति में परस्पर बहुत घनिष्ठ संबंध होता है। संसार की कुछ प्रकार की मिट्टियाँ घासों के प्रकार और उपज से विशेष रूप से संबंधित हैं। जिन प्रदेशों में बड़ी-बड़ी घासें उगती हैं, वहाँ की मिट्टी अधिक उपजाऊ होती है। बहुत अधिक घास उपजाने वाले स्थलों (grass lands) को प्राय: ब्रेड बास्केट्स (Bread Baskets) कहा जाता है। उदाहरण के लिये [[संयुक्त राज्य अमेरिका|संयुक्त राज्य अमरीका]], तथा [[कनाडा]] के [[प्रेरिज]] (prairies), [[अर्जेंटाइना]] के [[पंपाज]] (pampas), [[ऑस्ट्रेलिया|आस्ट्रेलिया]] की [[ग्रेन बेल्ट]] (Grain belt) और यूरेशिया में स्टेप्स के बहुत से भाग, विशेषकर [[युक्रेन|यूक्रेन]] प्रदेश में स्थित भाग आजकल संसार के मुख्य मुख्य ब्रेड बास्केट्स हैं IS WAS KNOW OF MY YOUTUBER CHANNEL HE IS PLEASE GOING OF YOUTUBER CHANNEL SUBSCRIBE ME
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==महत्व==
कुछ प्रकार की घासें, जिनमें प्रसारण (propagation), विरोहक (stolon) तथा प्रकंद (rhizone) से होता है, कम वर्षा वाले प्रदेशों में बहुत उगती हैं। इनमें दूब प्रधान घास है। इसे धर्मग्रंथों में राष्ट्ररक्षक (Preserver of nations) एवं '[[भारत]] की ढाल' (Shield of India) कहा गया है। मिट्टी के भीतर इन घासों की जड़ों का घना जाल रहता है, जिससे वर्षाजल से मिट्टी का कटाव या बहाव कम होता है। भूमि के ऊपर घनी पत्तियाँ होने से वायु द्वारा मिट्टी का कटाव नहीं होता। हवा और पानी से कटाव रोककर भूमिसंरक्षण करने में घासें बड़ी सहायक होती हैं।
इसके अतिरिक्त घासों की जड़ों में आश्रय पाने वाले उपयोगी [[जीवाणु]] वहाँ से [[नाइट्रोजन]] संचित कर [[मृदा|मिट्टी]] की उर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं तथा उनकी जड़ों द्वारा मिट्टी का विन्यास (texture) अत्यधिक उत्तम हो जाता है। इस प्रकार घासों द्वारा पथरीली या कम उपजाऊ भूमि भी अधिक उपजाऊ बनाई जा सकती है।
इसका महत्व गाय,भैंस तथा बकरी आदि के चारे के उपयोग के आता है।
==इन्हें भी देखें==
*[[चरागाह]]
*[[चारा]]
*[https://kissanmadad.blogspot.com/2022/06/treatment-of-mastitis.html गाय भैंस में थनैला रोग की पहचान | Identification of mastitis disease in cow buffalo]
*[https://kissanmadad.blogspot.com/2022/07/let-down-of-milk-in-cow-or-buffalo.html Let down of milk in cow or buffalo | गाय भैंस में दूध का उतरना]
[https://kissanmadad.blogspot.com/2022/06/retention-of-placenta-rop-gaay-mein-jer.html गाय में जेर समय से न डालने की समस्या भैंस की जेर का अटकना | retention of placenta ROP | gaay mein jer samay se na daalane kee samasya bhains jer ka atakana]
[[श्रेणी:वनस्पति विज्ञान]]
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श्रेणी:भौतिक शास्त्र
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'''श्रेणी:भौतिक शास्त्र''' के अंतर्गत भौतिक शास्त्र, भौतिक विज्ञान या भौतिकी आबै बला श्रेणी छेकै।
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मानवशास्त्र
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{{मानवशास्त्र}}
[[File:Da Vinci Vitruve Luc Viatour.jpg |upright|thumb|लियोनार्डो दा विंची की कलाकृति-विट्रुवियन पुरुष,आदर्श मानव शारिरिक अनुपात की धारणा प्रदर्शित करती है]]
'''मानवशास्त्र''' या '''नृविज्ञान''' ([[अंग्रेज़ी]]-[[:en:Anthropology|''Anthropology'']]) [[होमो सेपियन्स|मानव]], हुनकौ [[अनुवांशिकी|अनुवांशिकी]], [[संस्कृति]] आरू समाज केरौ वैज्ञानिक आरू समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण सँ अध्ययन छेकै। एकरौ अंतर्गत मनुष्य के समाज के अतीत आरू वर्तमान के विभिन्न पहलुऔ के अध्ययन करलौ जाय छै। '''सामाजिक नृविज्ञान''' और '''सांस्कृतिक नृविज्ञान''' के तहत मानदंडों और समाज के मूल्यों का अध्ययन किया जाता है। '''भाषाई नृविज्ञान''' में पढ़ा जाता है कि कैसे भाषा, सामाजिक जीवन को प्रभावित करती है। '''जैविक''' या '''शारीरिक नृविज्ञान''' में मनुष्य के जैविक विकास का अध्ययन किया जाता है।
नृविज्ञान एक वैश्विक विद्या है, जिसमे मानविकी, सामाजिक और प्राकृतिक विज्ञान को एक दूसरे का सामना करने के लिए मजबूर किया जाता है। मानव विज्ञान, प्राकृतिक विज्ञान के समेत मनुष्य उत्पत्ति, मानव शारीरिक लक्षण, मानव शरीर में बदलाव, मनुष्य प्रजातियों में आये बदलावों इत्यादि से ज्ञान की रचना करता है।
'''सामाजिक-सांस्कृतिक नृविज्ञान''', संरचनात्मक और उत्तराधुनिक सिद्धांतों से ज़ोरदार रुप से प्रभावित हुआ है।
== शाखाएँ ==
एंथ्रोपोलाजी यानी नृतत्व विज्ञान की कई शाखाएं हैं। इनमें से कुछ हैं:
* सामाजिक सांस्कृतिक नृतत्व विज्ञान,
* प्रागैतिहासिक नृतत्व विज्ञान या आर्कियोलाजी,
* भौतिक और जैव नृतत्व विज्ञान,
* भाषिक नृतत्तव विज्ञान और
* अनुप्रयुक्त नृतत्व विज्ञान
* शारिरीक मानव विज्ञान
=== सामाजिक-सांस्कृतिक नृतत्व विज्ञान ===
इसका संबंध सामाजिक-सांस्कृतिक व्यवहार के विभिन्न पहलुओं, जैसे समूह और समुदायों के गठन और संस्कृतियों के विकास से है। इसमें सामाजिक-आर्थिक बदलावों, जैसे विभिन्न समुदायों और के बीच सांस्कृतिक भिन्नताओं और इस तरह की भिन्नताओं के कारणों; विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद; भाषाओं के विकास, टेक्नोलाजी के विकास और विभिन्न संस्कृतियों क बीच परिवर्तन की प्रवृत्तियों का अध्ययन किया जाता है।
=== प्रागैतिहासिक नृतत्व विज्ञान या पुरातत्व विज्ञान ===
इसमें प्रतिमाओं, हड्डियों, सिक्कों और अन्य ऐतिहासिक पुरावशेषों के आधार पर इतिहास का पुनर्निर्धारण किया जाता है। इस तरह के अवशेषों की खोज से प्राचीन काल के लोगों के इतिहास का लेखन किया जाता है और सामाजिक रीति रिवाजों तथा परम्पराओं का पता लगाया जाता है। पुरातत्व वैज्ञानिक इस तरह की खोजों से उस काल की सामाजिक गतिविधियों का भी विश्लेषण करते हैं। वे अपनी खोज के मिलान समसामयिक अभिलेखों या ऐतिहासिक दस्तावेजों से करके प्राचीन मानव इतिहास का पुनर्निर्माण करते हैं।
=== भौतिक या जैव नृतत्व विज्ञान ===
'''{{मुख्य|जैविक नृविज्ञान}}'''
इस शाखा का संबंध आदि मानवों और मानव के पूर्वजों की भौतिक या जैव विशेषताओं तथा मानव जैसे अन्य जीवों, जैसे चिमपैन्जी, गोरिल्ला और बंदरों से समानताओं से है। यह शाखा विकास श्रृंखला के जरिए सामाजिक रीति रिवाजों को समझने का प्रयास करती है। यह जातियों के बीच भौतिक अंतरों की पहचान करती है और इस बात का भी पता लगाती है कि विभिन्न प्रजातियों ने किस तरह अपने आप को शारीरिक रूप से परिवेश के अनुरूप ढाला. इसमें यह भी अध्ययन किया जाता है कि विभिन्न परिवेशों का उनपर क्या असर पड़ा. जैव या भौतिक नृतत्व विज्ञान की अन्य उप शाखाएं और विभाग भी हैं जिनमें और भी अधिक विशेषज्ञता हासिल की जा सकती है। इनमें आदि मानव जीव विज्ञान, ओस्टियोलाजी (हड्डियों और कंकाल का अध्ययन), पैलीओएंथ्रोपोलाजी यानी पुरा नृतत्व विज्ञान और फोरेंसिक एंथ्रोपोलाजी.
=== अनुप्रयुक्त नृतत्व विज्ञान ===
इसमें नृतत्व विज्ञान की अन्य शाखाओं से प्राप्त सूचनाओं का उपयोग किया जाता है और इन सूचनाओं के आधार पर संतति निरोध, स्वास्थ्य चिकित्सा, कुपोषण की रोकथाम, बाल अपराधों की रोकथाम, श्रम समस्या के समाधान, कारखानों में मजदूरों की समस्याओं के समाधान, खेती के तौर तरीकों में सुधार, जनजातीय कल्याण और उनके जबरन विस्थापन भूमि अधिग्रहण की स्थिति में जनजातीय लोगों के पुनर्वास के काम में सहायता ली जाती है।
=== भाषिक नृतत्व विज्ञान ===
इसमें मौखिक और लिखित भाषा की उत्पत्ति और विकास का अध्ययन किया जाता है। इसमें भाषाओं और बोलियों के तुलनात्मक अध्ययन की भी गुंजाइश है। इसके जरिए यह पता लगाया जाता है कि किस तरह सांस्कृतिक आदान प्रदान से विभिन्न संस्कृतियों भाषाओं पर असर पड़ा है और किस तरह भाषा विभिन्न सांस्कृतिक रीति रिवाजों और प्रथाओं की सूचक है। भाषायी नृतत्व विज्ञान सांस्कृतिक नृतत्व विज्ञान से घनिष्ठ रूप से संबद्ध है।
'''शारिरीक मानव विज्ञान'''
शारिरीक मानव विज्ञान भी मानव विज्ञान का एक महत्वपूर्ण शाखा है। इस शारिरीक मानव विज्ञान मे मानव की शारीर का अध्ययन किया जाता है। इसमें मानव की उत्पत्ति से लेकर अब तक की उसकी शारिरीक बनावट तथा समय के साथ उसमे क्या बदलाव आए?का अध्ययन किया जाता है।
== इन्हें भी देखें ==
* [[नृतत्वशास्त्र के सिद्धांत]]
* [[सांस्कृतिक मानवशास्त्र]]
* [[भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण]]
== बाहरी कड़ी ==
* [https://web.archive.org/web/20121215051552/http://books.google.co.in/books?id=tMfyW2KLG0kC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false मानवशास्त्र] (गूगल पुस्तक ; लेखक - रामनाथ शर्मा, राजेंद्र कुमार शर्मा)
* [https://iasgyanhindi.com/branches-of-anthropology/ मानवशास्त्र की शाखाएँ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20230417165533/https://iasgyanhindi.com/branches-of-anthropology/ |date=2023-04-17 }}
{{जीव विज्ञान}}
[[श्रेणी:समाजशास्त्र]]
[[श्रेणी:मानवशास्त्र]]
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[[श्रेणी:मानवशास्त्र]]
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[[File:4 Kittens.jpg|right|thumb|पैतृक गुणसूत्रों के पुनर्संयोजन के फलस्वरूप एक ही पीढी की संतानें भी भिन्न हो सकती हैं।]]
'''आनुवंशिकी''' (जेनेटिक्स) [[जीव विज्ञान]] केरौ वू शाखा छकै, जेकरौ अन्तर्गत आनुवंशिकता (हेरेडिटी) आरू जीवौ केरौ विभिन्नता (वैरिएशन) सब केरौ अध्ययन करलौ जाय छै। आनुवंशिकता के अध्ययन म ग्रेगर जॉन मेंडेल के मूलभूत उपलब्धि क आजकल आनुवंशिकी के अंतर्गत समाहित करी लेलो गेलो छै। प्रत्येक सजीव प्राणी के निर्माण मूल रूप स कोशिका द्वारा ही होय छै। ई कोशिका म कुछ [[गुणसूत्र]] (क्रोमोसोम) पयलो जाय छै। इनको संख्या प्रत्येक जाति (स्पीशीज) म निश्चित होय छै। ई गुणसूत्र के अन्दर माला के मोती के भाँति कुछ डी एन ए के रासायनिक इकाई पयलो जाय छै जेकरा [[जीन]] कहै छै। ई जीन, गुणसूत्र के लक्षण अथवा गुण के प्रकट होला, कार्य करला आरु अर्जित करला के लेली जिम्मेवार होय छै। ई विज्ञान के मूल उद्देश्य आनुवंशिकता के ढंग (पैटर्न) के अध्ययन करना छीकै,अर्थात् संतति अपनो जनक स कौन प्रकार मीलै जुलै अथवा भिन्न होय छै।
समस्त जीव, चाहे वे जन्तु हों या वनस्पति, अपने पूर्वजों के यथार्थ प्रतिरूप होते हैं। वैज्ञानिक भाषा में इसे 'समान से समान की उत्पति' (लाइक बिगेट्स लाइक) का सिद्धान्त कहते हैं। आनुवंशिकी के अन्तर्गत कतिपय कारकों का विशेष रूप से अध्ययन किया जाता हैः
*प्रथम कारक आनुवंशिकता है। किसी जीव की आनुवंशिकता उसके जनकों (पूर्वजों या माता पिता) की जननकोशिकाओं द्वारा प्राप्त रासायनिक सूचनाएँ होती हैं। जैसे कोई प्राणी किस प्रकार परिवर्धित होगा, इसका निर्धारण उसकी आनुवंशिकता ही करेगी।
*दूसरा कारक विभेद है जिसे हम किसी प्राणी तथा उसकी सन्तान में पाते या पा सकते हैं। प्रायः सभी जीव अपने माता पिता या कभी कभी बाबा, दादी या उनसे पूर्व की पीढ़ी के लक्षण प्रदर्शित करते हैं। ऐसा भी सम्भव है कि उसके कुछ लक्षण सर्वथा नवीन हों। इस प्रकार के परिवर्तनों या विभेदों के अनेक कारण होते हैं।
जीवों का परिवर्धन तथा उनके परिवेश (एन्वाइरनमेंट) पर भी निर्भर करता है। प्राणियों के परिवेश अत्यन्त जटिल होते हैं; इसके अंतर्गत जीव के वे समस्त पदार्थ (सब्स्टैंस), बल (फोर्स) तथा अन्य सजीव प्राणी (आर्गेनिज़्म) समाहित हैं, जो उनके जीवन को प्रभावित करते रहते हैं।
वैज्ञानिक इन समस्त कारकों का सम्यक् अध्ययन करता है, एक वाक्य में हम यह कह सकते हैं कि आनुवंशिकी वह विज्ञान है, जिसके अन्तर्गत आनुवंश्किता के कारण जीवों तथा उनके पूर्वजों (या संततियों) में समानता तथा विभेदों, उनकी उत्पत्ति के कारणों और विकसित होने की संभावनाओं का अध्ययन किया जाता है।
[[जोहानसेन]] ने सन् १९११ (1911) में जीवों के बाह्य लक्षणों (फ़ेनोटाइप) तथा पित्रागत लक्षणों (जीनोटाइप) में भेद स्थापित किया। जीवों के बाह्म लक्षण उनके परिवर्धन के साथ-साथ परिवर्तित होते रहते हैं, जैसे जीवों की भ्रूणावस्था, शैशव, यौवन तथा वृद्धावस्था में पर्याप्त शारीरिक विभेद दृष्टिगोचर होता है। इसके विपरीत उनके पित्रागत लक्षण या विशेषताएँ स्थिर तथा अपरिवर्तनशील होती हैं। किसी भी जीव के पित्रागत लक्षण और परिवेश की अंतक्रियाओं के फलस्वरूप उसकी वृद्धि और परिवर्धन होता है। अतः पित्रागत लक्षण जीवों के 'प्रतिक्रया के मानदंड' (नार्म ऑव रिऐक्शन) अर्थात् परिवेश के प्रति उनकी प्रतिक्रिया (रेस्पांस) के ढंग का निधार्रण करते हैं। इस प्रकार की प्रतिक्रियाओं से जीवों के बाह्य लक्षण (फ़ेनोटाइप) का निर्माण होता है।
आनुवंशिक तत्व का [[कृषि विज्ञान]] में फसलों के आकार, उत्पादन, रोगरोधन तथा पालतू पशुओं आदि के नस्ल सुधार आदि में उपयोग किया जाता है। आनुवंशिक तत्वों की सहायता से उद्विकास (इवाल्यूशन), भ्रौणिकी (एँब्रायोलाजी) तथा अन्य संबद्ध विज्ञानों के अध्ययन में सुविधा होती हैं। पित्रागत लक्षणों तथा रोगों संबंधी अनेक भ्रमों का इस विज्ञान ने निराकरण किया है। जुड़वाँ संतानों की उत्पत्त्िा और सुसंततिशास्त्र (यूजेनिक्स) की अनेक समस्याओं पर इस विज्ञान ने प्रकाश डाला है। इसी प्रकार जनसंख्या-आनुवंशिक-तत्व (पापुलेशन जेनेटिक्स) की अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियों से मानव समाज लाभान्वित हुआ है।
[[टी.एच. मार्गन]] (1886–1945) तथा उनके सहयोगियों ने यह दर्शाया कि कतिपय जीन, जिनका वंशानुक्रम (इन्हेरिटेंस) विनिमय (क्रासिंगओवर) प्रयोगों द्वारा ज्ञात हुआ, अणुवीक्षण यंत्रों द्वारा ही दृष्ट कतिपय गुणसूत्रों (क्रोमोसोम) में उपस्थित रहते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी बतलाया कि गुणसूत्रों के भीतर ये जीन एक निर्धारित अनुक्रम में व्यवस्थित रहते हैं जिसके कारण इनका आनुवंशिकीय चित्र (जेनेटिक मैप) बनाना संभव होता है। इन लोगों ने कदली मक्खी, ड्रोसोफिला, के जीन के अनेक चित्र बनाए। प्रोफेसर मुलर का इस दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रयोगों द्वारा नए नए वैज्ञानिक अनुसंधानों का मार्गदर्शन किया। कृत्रिम उत्परिवर्तनों (आर्टिफ़िशियल या इंडयूस्ड म्यूटेशन) की अनेक विधियों द्वारा पालतू पशुओं तथा कृषि की नस्लों में अद्भुत सुधार कार्य किए गए। यह सब आनुवंशिकी की ही देन है जो मानवकल्याण के लिए परम हितकारी सिद्ध हुई हैं।
अनेक वैज्ञानिकों का मत है कि मनुष्य का आनुवंशिक अध्ययन सरल कार्य नहीं है। इसका कारण यह बतलाया जाता है कि मनुष्य की संतान के जन्म में लगभग १० मास लग जाते हैं और इसे पूर्ण वयस्क होने में कम से कम २० वर्ष लगते हैं। अतः एक दो पीढ़ी के ही अध्ययन के लिए २०,२२ वर्षो का समय लगने के कारण मनुष्य का आनुवंशिक अध्ययन जटिल है। इसके साथ ही मनुष्य को एक बार में साधारणतया एक ही बच्चा उत्पन्न होता है, इससे भी अध्ययन में कठिनाई होती है। इन कठिनाइयों के बावजूद मनुष्य के शरीर की बाहरी रचना, रोगों, उनके लक्षणों एवं कारणों आदि का अध्ययन सरल होता है। मनुष्यों की जीवरासायनिक आनुवंशिकी (बायोकेमिकल जेनेटिक्स) का प्रथम अध्ययन लंदन के चिकित्सक आर्चिबाल्ड गैरोड (१८५७–१९३६) ने किया था किंतु सन् १९४० के पूर्व इस विषय पर विस्तृत अध्ययन नहीं हुए थे। मनुष्यों में जीन के संबंध में लगभग ६० गुणों (ट्रेट्स) का पता चला है।
जीवविज्ञान में आनुवंशिकी के अध्ययन का वही महत्व है जो भौतिक विज्ञान में परमाणवीय सिद्धांतों का है। मनुष्य के आनुवंशिक अध्ययनों के आरंभिक रूपों में बह्वांगुलिता (अतिरिक्त अंगुलियों का होना), हीमोफ़ीलिया, तथा वर्णांधता (कलर-ब्लाइंडनेस) मुख्य विषय थे। उदाहरणार्थ सन् १७५० में बर्लिन में मॉपर्टुइस ने मेंडेल के नियमों के आधार पर बह्वांगुलिता का वर्णन किया था। इसी प्रकार ओटो (१८०३), हे (१८१३) और बुएल्स (१८१५) ने न्यू इंग्लैंड के तीन विभिन्न परिवारों में लिंगसहलग्न हीमोफ़ीलिया रोग़ के आनुवंशिक कारणों पर प्रकाश डाला था। सन् १८७६ में स्विट्.जरलैंड के चिकित्सक, हार्नर ने वर्णांधता का वर्णन किया। सन् १९५८ में जार्ज बीडिल को 'कायकी तथा औषधि' विषयक जैवरासायानिक आनुवंशिकी क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ। सन् १९५९ में जिरोम लेजुईन ने मंगोलीय मूढ़ता (मंगोलायड ईडिओसी) का विद्वत्तापूर्ण वर्णन प्रस्तुत किया। सन् १९५६ में जे.एच.जिओ, अल्बर्ट लीवान, चार्ल्स फोर्ड एवं जान हैमर्टन ने मुनष्य के गुणसूत्रों की संख्या ४६ बतलाई; इसके पूर्व लोगों का मत था कि यह संख्या ४८ होती है।
== इतिहास ==
अपने माता-पिता से विरासत में मिली चीजों का अवलोकन करने का उपयोग प्रागैतिहासिक काल से फसल के पौधों और जानवरों को जीवित प्रजनन के माध्यम से करने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया को समझने की कोशिश करने वाले आनुवांशिकी के आधुनिक विज्ञान ने 19 वीं शताब्दी के मध्य में अगस्टिनियन तले ग्रेगर मेंडल के काम के साथ शुरू किया। [[मेंडलीफ|मेंडल]] से पहले, [[इमरे फेस्टेटिक्स]], एक हंगेरियन रईस, जो मेंडेल से पहले कोसेजेग में रहता था, वह पहला व्यक्ति था जिसने "आनुवंशिकी" शब्द का इस्तेमाल किया था। उन्होंने अपने काम में आनुवांशिक वंशानुक्रम के कई नियमों का वर्णन किया प्रकृति का [[आनुवंशिक नियम]] (डाई जीनिटिस गेसटेज डेर नटुर, 1819)। उसका दूसरा नियम वही है जो मेंडल ने प्रकाशित किया था। अपने तीसरे नियम में, उन्होंने उत्परिवर्तन के मूल सिद्धांतों को विकसित किया (उन्हें ह्यूगो वियर्स का अग्रदूत माना जा सकता है)। सम्मिश्रित विरासत से हर विशेषता का औसत निकलता है, जिसे इंजीनियर फ्लेमिंग जेनकिन ने इंगित किया था, चयन के विकास को असंभव बना देता है। विरासत के अन्य सिद्धांतों ने मेंडल के काम से पहले। 19 वीं शताब्दी के दौरान एक लोकप्रिय सिद्धांत, और चार्ल्स डार्विन के 1859 ऑन द ओरिजिन ऑफ स्पीसीज़ द्वारा निहित, विरासत में मिलावट थी: यह विचार कि व्यक्ति अपने माता-पिता से लक्षणों का एक सहज मिश्रण प्राप्त करते हैं। मेंडल के काम ने ऐसे उदाहरण प्रदान किए जहां संकरण के बाद लक्षण निश्चित रूप से मिश्रित नहीं थे, यह दर्शाता है कि लक्षण एक निरंतर मिश्रण के बजाय विभिन्न जीनों के संयोजन द्वारा निर्मित होते हैं। पूर्वजों में लक्षणों के सम्मिश्रण को अब कई जीनों की क्रिया द्वारा मात्रात्मक प्रभावों के साथ समझाया गया है। एक अन्य सिद्धांत जिसका उस समय कुछ समर्थन था, अधिग्रहित विशेषताओं का उत्तराधिकार था: यह विश्वास कि व्यक्तियों को विरासत में अपने माता-पिता द्वारा मजबूत किया गया था। यह सिद्धांत (आमतौर पर जीन-बैप्टिस्ट लैमार्क के साथ जुड़ा हुआ है) को अब गलत माना जाता है - व्यक्तियों के अनुभव उनके बच्चों के पास जाने वाले जीन को प्रभावित नहीं करते हैं, हालांकि एपिगेनेटिक्स के क्षेत्र में सबूत ने [[लैमार्क]] के सिद्धांत के कुछ पहलुओं को पुनर्जीवित किया है। अन्य सिद्धांतों में चार्ल्स डार्विन (जो अधिग्रहित और विरासत में प्राप्त दोनों पहलू थे) के पैंगनेस शामिल थे और फ्रांसिस गेल्टन ने पैंग्नेस के सुधार को कण और विरासत दोनों के रूप में सुधार दिया।
== मेंडेलियन और शास्त्रीय आनुवंशिकी ==
मॉर्गन ने सेक्स से जुड़े वंशानुक्रम के अवलोकन को ड्रोसोफिला में सफेद आंखों का कारण बना दिया, जिससे उन्हें यह अनुमान लगाया गया कि जीन गुणसूत्रों पर स्थित हैं।
आधुनिक आनुवांशिकी मेंडेल के पौधों में विरासत की प्रकृति के अध्ययन के साथ शुरू हुई। 1865 में ब्रुनन में नेचुरोफ़ोर्सचेंडर वेरीन (सोसाइटी फ़ॉर रिसर्च इन नेचर) में प्रस्तुत अपने पेपर "वर्सुचे बर पबलानज़ेनहाइब्रेन" ("प्रयोगों पर पादप संकरण") में, मेंडल ने मटर के पौधों में कुछ लक्षणों के वंशानुक्रम पैटर्न का पता लगाया और उन्हें गणितीय रूप से वर्णित किया। हालांकि वंशानुक्रम का यह पैटर्न केवल कुछ लक्षणों के लिए देखा जा सकता है, मेंडल के काम ने सुझाव दिया कि आनुवंशिकता को कण-कण में रखा गया था, अधिग्रहित नहीं किया गया था, और यह कि कई लक्षणों के वंशानुक्रम पैटर्न को सरल नियमों और अनुपातों के माध्यम से समझाया जा सकता है।
मेंडल के काम के महत्व को 1900 तक व्यापक समझ नहीं मिली, उनकी मृत्यु के बाद, जब ह्यूगो डी वीस और अन्य वैज्ञानिकों ने उनके शोध को फिर से खोज लिया। मेंडल के काम के प्रस्तावक विलियम बेटसन ने 1905 में आनुवांशिकी शब्द गढ़ा था, (ग्रीक शब्द जीनसिस से लिया गया विशेषण आनुवंशिक- γένεσις, "मूल", संज्ञा से पूर्ववर्ती है और पहली बार एक जैविक अर्थ में प्रयुक्त हुआ था) 1860 में )। बेटसन दोनों ने एक संरक्षक के रूप में काम किया और कैम्ब्रिज के न्यून्हम कॉलेज के अन्य वैज्ञानिकों के काम से काफी प्रभावित हुए, विशेष रूप से बेकी सॉन्डर्स, नोरा डार्विन बार्लो और मुरील व्हील्डेल ओन्सलो का काम। [१ed] बेटसन ने 1906 में लंदन में प्लांट हाइब्रिडाइजेशन पर तीसरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में अपने उद्घाटन भाषण में विरासत के अध्ययन का वर्णन करने के लिए आनुवंशिकी शब्द के उपयोग को लोकप्रिय बनाया।
मेंडल के कार्य के पुनर्वितरण के बाद, वैज्ञानिकों ने यह निर्धारित करने का प्रयास किया कि कोशिका में कौन से अणु वंशानुक्रम के लिए जिम्मेदार थे। 1911 में थॉमस हंट मॉर्गन ने तर्क दिया कि जीन गुणसूत्रों पर होते हैं, जो फल मक्खियों में एक सेक्स-लिंक्ड व्हाइट आई म्यूटेशन के अवलोकन पर आधारित होते हैं। 1913 में, उनके छात्र अल्फ्रेड स्टुरटेवेंट ने आनुवंशिक लिंकेज की घटना का उपयोग करके यह दिखाने के लिए कि गुणसूत्र पर जीन को रैखिक रूप से व्यवस्थित किया जाता है।
== वंशानुक्रम के लिए आणविक आधार ==
=== डीएनए और गुणसूत्र ===
==== मुख्य लेख: डीएनए और गुणसूत्र ====
डीएनए की आणविक संरचना। स्ट्रैंड्स के बीच हाइड्रोजन बॉन्डिंग की व्यवस्था के माध्यम से जोड़े जाते हैं।
जीन के लिए आणविक आधार डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड (डीएनए) है। डीएनए न्यूक्लियोटाइड्स की एक श्रृंखला से बना है, जिनमें से चार प्रकार हैं: एडेनिन (ए), [[साइटोसिन (सी]]), गुआनिन (जी), और थाइमिन (टी)। इन न्यूक्लियोटाइड के अनुक्रम में आनुवंशिक जानकारी मौजूद है, और जीन डीएनए श्रृंखला के साथ अनुक्रम के फैलाव के रूप में मौजूद हैं। [४ the] वायरस इस नियम का एकमात्र अपवाद हैं - कभी-कभी वायरस डीएनए के बजाय उनके आनुवंशिक पदार्थ के समान अणु RNA का उपयोग करते हैं। [४ exception] वायरस एक मेजबान के बिना प्रजनन नहीं कर सकते हैं और कई आनुवंशिक प्रक्रियाओं से अप्रभावित रहते हैं, इसलिए जीवित जीव नहीं माना जाता है।
डीएनए सामान्य रूप से एक डबल-असहाय अणु के रूप में मौजूद होता है, एक दोहरे [[हेलिक्स नेब्यूला|हेलिक्स]] के आकार में कुंडलित होता है। डीएनए में प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड अपने पार्टनर [[न्यूक्लियोटाइड]] के साथ विपरीत स्ट्रैंड पर अधिमानतः जोड़े: टी के साथ एक जोड़े और जी के साथ सी जोड़े। इस प्रकार, इसके दो-फंसे हुए रूप में, प्रत्येक स्ट्रैंड में प्रभावी रूप से सभी आवश्यक जानकारी होती है, अपने साथी स्ट्रैंड के साथ बेमानी। डीएनए की यह संरचना वंशानुक्रम के लिए भौतिक आधार है: डीएनए प्रतिकृति, किस्में को विभाजित करके और प्रत्येक स्ट्रैंड का उपयोग करके नए साथी स्ट्रैंड के संश्लेषण के लिए टेम्पलेट के रूप में आनुवंशिक जानकारी की नकल करता है।
[[डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक अम्ल|डीएनए]] बेस-जोड़ी अनुक्रमों की लंबी श्रृंखलाओं के साथ जीन को रैखिक रूप से व्यवस्थित किया जाता है। बैक्टीरिया में, प्रत्येक कोशिका में आमतौर पर एक एकल गोलाकार जीनोफोर होता है, जबकि यूकेरियोटिक जीव (जैसे पौधे और जानवर) उनके डीएनए को कई रैखिक गुणसूत्रों में व्यवस्थित करते हैं। ये डीएनए किस्में अक्सर बेहद लंबी होती हैं; उदाहरण के लिए, सबसे बड़ा मानव गुणसूत्र, लंबाई में लगभग 247 मिलियन आधार जोड़े हैं। [[गुणसूत्र]] का डीएनए संरचनात्मक प्रोटीनों से जुड़ा होता है जो क्रोमेटिन नामक सामग्री का निर्माण, डीएनए तक पहुंच, नियंत्रण और नियंत्रण करता है; यूकेरियोट्स में, क्रोमेटिन आमतौर पर न्यूक्लियोसोम से बना होता है, हिस्टोन प्रोटीन के कोर के चारों ओर डीएनए घाव के खंड। एक जीव में वंशानुगत सामग्री का पूरा सेट (आमतौर पर सभी गुणसूत्रों के संयुक्त डीएनए अनुक्रम) को जीनोम कहा जाता है।
जबकि अगुणित जीवों में प्रत्येक गुणसूत्र की केवल एक प्रति होती है, अधिकांश पशु और कई पौधे द्विगुणित होते हैं, जिनमें प्रत्येक गुणसूत्र की दो और इस प्रकार प्रत्येक जीन की दो प्रतियाँ होती हैं। एक जीन के लिए दो एलील दो समरूप गुणसूत्रों के समान स्थान पर स्थित होते हैं, प्रत्येक एलील एक अलग माता-पिता से विरासत में मिला है।
[[सुकेन्द्रिक|यूकेरियोटिक]] कोशिका विभाजन के वाल्टर फ्लेमिंग का 1882 आरेख। क्रोमोसोम की नकल, संघनित और व्यवस्थित होती है। फिर, जैसे ही [[कोशिका]] विभाजित होती है, गुणसूत्र प्रतियां बेटी कोशिकाओं में अलग हो जाती हैं।
कई प्रजातियों में तथाकथित सेक्स क्रोमोसोम होते हैं जो प्रत्येक जीव के लिंग का निर्धारण करते हैं। मनुष्यों और कई अन्य जानवरों में, वाई गुणसूत्र में जीन होता है जो विशेष रूप से पुरुष विशेषताओं के विकास को ट्रिगर करता है। विकासवाद में, इस गुणसूत्र ने अपनी अधिकांश सामग्री को खो दिया है और इसके अधिकांश जीन को भी खो दिया है, जबकि एक्स गुणसूत्र अन्य गुणसूत्रों के समान है और इसमें कई जीन शामिल हैं। एक्स और वाई गुणसूत्र एक दृढ़ता से विषम जोड़ी बनाते हैं।
== प्रजनन ==
=== मुख्य लेख: अलैंगिक प्रजनन और यौन प्रजनन =====
जब कोशिकाएं विभाजित होती हैं, तो उनका पूरा जीनोम कॉपी किया जाता है और प्रत्येक बेटी कोशिका को एक प्रति विरासत में मिलती है। माइटोसिस नामक यह प्रक्रिया, प्रजनन का सबसे सरल रूप है और [[अलैंगिक प्रजनन]] का आधार है। अलैंगिक प्रजनन बहुकोशिकीय जीवों में भी हो सकते हैं, जो एक एकल माता-पिता से उनके जीन वंशानुक्रम का उत्पादन करते हैं। वंश जो आनुवंशिक रूप से अपने माता-पिता के समान हैं, उन्हें क्लोन कहा जाता है।
[[सुकेन्द्रिक|यूकेरियोटिक जीव]] अक्सर संतान उत्पन्न करने के लिए [[यौन शिक्षा|यौन]] [[जनन|प्रजनन]] का उपयोग करते हैं जिसमें दो अलग-अलग माता-पिता से विरासत में मिली आनुवंशिक सामग्री का मिश्रण होता है। उन रूपों के बीच वैकल्पिक रूप से यौन प्रजनन की प्रक्रिया जिसमें जीनोम (अगुणित) की एकल प्रतियां और डबल प्रतियां (द्विगुणित) शामिल हैं। हाप्लोइड कोशिकाएं युग्मित गुणसूत्रों के साथ द्विगुणित कोशिका बनाने के लिए आनुवंशिक सामग्री को फ्यूज और संयोजित करती हैं। द्विगुणित जीव अपने डीएनए की प्रतिकृति के बिना, विभाजित करके हाप्लोइड्स बनाते हैं, बेटी कोशिकाओं को बनाने के लिए जो प्रत्येक जोड़ी के गुणसूत्रों में से एक को बेतरतीब ढंग से विरासत में लेते हैं। अधिकांश जानवरों और कई पौधों को उनके जीवन काल के लिए द्विगुणित किया जाता है, अगुणित रूप से [[शुक्राणु]] या [[अंडाणु|अंडे]] जैसे एकल कोशिका युग्मक को कम किया जाता है।
हालांकि वे यौन प्रजनन के अगुणित / द्विगुणित विधि का उपयोग नहीं करते हैं, बैक्टीरिया में नई आनुवंशिक जानकारी प्राप्त करने के कई तरीके हैं। कुछ बैक्टीरिया संयुग्मन से गुजर सकते हैं, डीएनए के एक छोटे से गोल टुकड़े को दूसरे जीवाणु में स्थानांतरित कर सकते हैं। बैक्टीरिया पर्यावरण में पाए जाने वाले कच्चे डीएनए अंशों को भी ग्रहण कर सकते हैं और उन्हें अपने जीनोम में परिवर्तित कर सकते हैं, जिसे रूपांतरण के रूप में जाना जाता है। [ इन प्रक्रियाओं के परिणामस्वरूप क्षैतिज जीन स्थानांतरण होता है, जीवों के बीच आनुवंशिक जानकारी के टुकड़े संचारित होते हैं जो अन्यथा असंबंधित होंगे।
=== पुनर्संयोजन और आनुवंशिक संबंध ===
====== मुख्य लेख: क्रोमोसोमल क्रॉसओवर और जेनेटिक लिंकेज ======
गुणसूत्रों की द्विगुणित प्रकृति अलग-अलग गुणसूत्रों पर जीनों को स्वतंत्र रूप से आत्मसात करने या यौन प्रजनन के दौरान उनके घरेलू जोड़े से अलग होने की अनुमति देती है जिसमें अगुणित युग्मक बनते हैं। इस तरह से संभोग जोड़ी के वंश में जीन के नए संयोजन हो सकते हैं। एक ही गुणसूत्र पर जीन सैद्धांतिक रूप से कभी दोबारा नहीं जुड़ेंगे। हालांकि, वे [[गुणसूत्र|क्रोमोसोमल]] क्रॉसओवर की सेलुलर प्रक्रिया के माध्यम से करते हैं। क्रॉसओवर के दौरान, गुणसूत्र डीएनए के स्ट्रेच का आदान-प्रदान करते हैं, गुणसूत्रों के बीच जीन एलील को प्रभावी ढंग से फेरबदल करते हैं। क्रोमोसोमल क्रॉसओवर की यह प्रक्रिया आम तौर पर अर्धसूत्रीविभाजन के दौरान होती है, जो कोशिका विभाजन की एक श्रृंखला है जो अगुणित कोशिकाएं बनाती है।
क्रॉसिंग ओवर का पहला साइटोलॉजिकल प्रदर्शन 1931 में हैरिएट क्रेइटन और बारबरा मैक्लिंटॉक द्वारा किया गया था। मकई पर उनके शोध और प्रयोगों ने आनुवांशिक सिद्धांत के लिए साइटोलॉजिकल साक्ष्य प्रदान किए जो कि युग्मित गुणसूत्रों से जुड़े जीन एक होमोलॉग से दूसरे में वास्तव में विनिमय स्थानों पर करते हैं।
गुणसूत्र पर दो दिए गए बिंदुओं के बीच क्रोमोसोमल क्रॉसओवर की संभावना बिंदुओं के बीच की दूरी से संबंधित है। मनमाने ढंग से लंबी दूरी के लिए, क्रॉसओवर की संभावना काफी अधिक है कि जीन की विरासत प्रभावी रूप से झगड़े वाली है। उन जीनों के लिए, जो एक साथ करीब हैं, हालांकि, क्रॉसओवर की कम संभावना का मतलब है कि जीन आनुवंशिक संबंध प्रदर्शित करते हैं; दो जीनों के लिए एलील्स एक साथ विरासत में मिलते हैं। जीन की एक श्रृंखला के बीच लिंकेज की मात्रा को रेखीय लिंकेज मैप बनाने के लिए जोड़ा जा सकता है जो क्रोमोसोम के साथ [[जीन]] की व्यवस्था का लगभग वर्णन करता है।
== आनुवंशिक परिवर्तन ==
=== उत्परिवर्तन ===
मुख्य लेख: [[उत्परिवर्तन]]
जीन दोहराव अतिरेक प्रदान करके विविधीकरण की अनुमति देता है: एक जीन जीव को नुकसान पहुंचाए बिना अपने मूल कार्य को म्यूट और खो सकता है।
डीएनए प्रतिकृति की प्रक्रिया के दौरान, दूसरी स्ट्रैंड के बहुलकीकरण में कभी-कभी त्रुटियां होती हैं। म्यूटेशन नामक ये त्रुटियां किसी जीव के फेनोटाइप को प्रभावित कर सकती हैं, खासकर अगर वे एक जीन के प्रोटीन कोडिंग अनुक्रम के भीतर होती हैं। डीएनए पोलीमरेज़ की "प्रूफरीडिंग" क्षमता के कारण, प्रत्येक 10–100 मिलियन बेस में त्रुटि दर आमतौर पर बहुत कम होती है। डीएनए में परिवर्तन की दर को बढ़ाने वाली प्रक्रियाओं को उत्परिवर्तजन कहा जाता है: उत्परिवर्तजन रसायन डीएनए प्रतिकृति में त्रुटियों को बढ़ावा देते हैं, अक्सर आधार-युग्मन की संरचना में हस्तक्षेप करके, जबकि यूवी विकिरण डीएनए संरचना को नुकसान पहुंचाकर उत्परिवर्तन को प्रेरित करता है। डीएनए के लिए रासायनिक क्षति स्वाभाविक रूप से होती है और कोशिकाएँ बेमेल और टूटने की मरम्मत के लिए डीएनए मरम्मत तंत्र का उपयोग करती हैं। हालांकि, मरम्मत हमेशा मूल अनुक्रम को पुनर्स्थापित नहीं करती है।
डीएनए और पुनः संयोजक जीनों के आदान-प्रदान के लिए क्रोमोसोमल क्रॉसओवर का उपयोग करने वाले जीवों में, अर्धसूत्रीविभाजन के दौरान संरेखण में त्रुटियां भी उत्परिवर्तन का कारण बन सकती हैं। क्रॉसओवर में त्रुटियां विशेष रूप से होने की संभावना है जब समान अनुक्रम पार्टनर गुणसूत्रों को गलत संरेखण को अपनाने का कारण बनाते हैं; यह जीनोम में कुछ क्षेत्रों को इस तरह से उत्परिवर्तन के लिए अधिक प्रवण बनाता है। ये त्रुटियां डीएनए अनुक्रम में बड़े संरचनात्मक परिवर्तन पैदा करती हैं - दोहराव, व्युत्क्रम, संपूर्ण क्षेत्रों का विलोपन - या विभिन्न गुणसूत्रों (गुणसूत्र अनुवाद) के बीच अनुक्रमों के पूरे भागों का आकस्मिक विनिमय।
=== प्राकृतिक चयन और विकास ===
==== मुख्य लेख: विकास ====
अधिक जानकारी: [[प्राकृतिक वरण|प्राकृतिक चयन]]
उत्परिवर्तन एक जीव के जीनोटाइप को बदल देते हैं और कभी-कभी यह विभिन्न फेनोटाइप को प्रकट करने का कारण बनता है। अधिकांश उत्परिवर्तन एक जीव के फेनोटाइप, स्वास्थ्य या प्रजनन फिटनेस पर बहुत कम प्रभाव डालते हैं। ]ऐसे प्रभा मुझेव जो आमतौर पर हानिकारक होते हैं, लेकिन कभी-कभी कुछ लाभकारी हो सकते हैं। फ्लाई ड्रोसोफिला मेलानोगास्टर के अध्ययन से पता चलता है कि अगर एक उत्परिवर्तन जीन द्वारा उत्पादित प्रोटीन को बदलता है, तो इनमें से लगभग 70 प्रतिशत उत्परिवर्तन शेष तटस्थ या कमजोर रूप से फायदेमंद होने के साथ हानिकारक होगा।
यूकेरियोटिक जीवों का एक विकासवादी पेड़, जो कई ऑर्थोलॉगस जीन अनुक्रमों की तुलना द्वारा निर्मित है।
जनसंख्या आनुवंशिकी आबादी के भीतर आनुवंशिक अंतर के वितरण का अध्ययन करती है और समय के साथ ये वितरण कैसे बदलते हैं। आबादी में एक एलील की आवृत्ति में परिवर्तन मुख्य रूप से प्राकृतिक चयन से प्रभावित होता है, जहां एक दिया एलील जीव को एक चयनात्मक या प्रजनन लाभ प्रदान करता है, साथ ही अन्य कारक जैसे उत्परिवर्तन, आनुवंशिक बहाव, आनुवंशिक हिचहाइकिंग, कृत्रिम चयन और प्रवास।
कई पीढ़ियों से, जीवों के जीनोम में महत्वपूर्ण परिवर्तन हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप विकास होता है। अनुकूलन नामक प्रक्रिया में, लाभकारी उत्परिवर्तन के लिए चयन एक प्रजाति को उनके पर्यावरण में जीवित रहने के लिए बेहतर रूप में विकसित करने का कारण बन सकता है। नई प्रजातियां अटकलों की प्रक्रिया के माध्यम से बनती हैं, जो अक्सर भौगोलिक अलगाव के कारण होती हैं जो आबादी को एक दूसरे के साथ आदान-प्रदान करने से रोकती हैं।
विभिन्न प्रजातियों के जीनोम के बीच की होमोलॉजी की तुलना करके, उनके बीच विकासवादी दूरी की गणना करना संभव है और जब वे अलग हो सकते हैं। आनुवंशिक तुलना को आमतौर पर फेनोटाइपिक विशेषताओं की तुलना में प्रजातियों के बीच संबंधितता को चिह्नित करने का एक अधिक सटीक तरीका माना जाता है। प्रजातियों के बीच विकासवादी दूरी का उपयोग विकासवादी पेड़ बनाने के लिए किया जा सकता है; ये पेड़ समय के साथ सामान्य वंश और प्रजातियों के विचलन का प्रतिनिधित्व करते हैं, हालांकि वे असंबंधित प्रजातियों (क्षैतिज जीन स्थानांतरण और बैक्टीरिया में सबसे आम के रूप में ज्ञात) के बीच आनुवंशिक सामग्री के हस्तांतरण को नहीं दिखाते हैं।
=== मॉडल जीव ===
सामान्य फल [[डिप्टेरा|मक्खी]] (ड्रोसोफिला मेलानोगास्टर) आनुवंशिकी अनुसंधान में एक लोकप्रिय मॉडल जीव है।
यद्यपि आनुवांशिकतावादियों ने मूल रूप से जीवों की एक विस्तृत श्रृंखला में विरासत का अध्ययन किया, शोधकर्ताओं ने जीवों के एक विशेष उप-समूह के आनुवांशिकी का अध्ययन करने में विशेषज्ञ होना शुरू कर दिया। यह तथ्य कि किसी दिए गए जीव के लिए पहले से ही महत्वपूर्ण शोध मौजूद है, नए शोधकर्ताओं को इसे आगे के अध्ययन के लिए चुनने के लिए प्रोत्साहित करेगा, और इसलिए अंततः कुछ मॉडल जीव अधिकांश आनुवांशिकी अनुसंधान के लिए आधार बन गए। मॉडल जीव आनुवांशिकी में सामान्य शोध विषयों में जीन विनियमन और विकास और कैंसर में जीन की भागीदारी का अध्ययन शामिल है।
भाग में जीवों को चुना गया था, सुविधा के लिए - छोटी पीढ़ी के समय और आसान आनुवंशिक हेरफेर ने कुछ जीवों को लोकप्रिय आनुवंशिकी अनुसंधान उपकरण बनाया। व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले मॉडल जीवों में आंत जीवाणु एस्चेरिचिया कोलाई, प्लांट अरेबिडोप्सिस थालियाना, बेकर का खमीर (सैच्रोमाइसेस सेरेविसिए), नेमाटोड कैनेरोब्वाइटिस एलिगेंस, आम फल मक्खी (ड्रोसोफिला मेलानोगास्टर), और सामान्य घर माउस मस्क्यूलर माउस शामिल हैं।
दवा
[[जैव रसायन]], आनुवांशिकी और [[आणविक जीवविज्ञान]] के बीच योजनाबद्ध संबंध।
चिकित्सा आनुवंशिकी यह समझना चाहती है कि मानव स्वास्थ्य और रोग से आनुवंशिक विविधता कैसे संबंधित है। जब एक अज्ञात जीन की खोज की जाती है जो किसी बीमारी में शामिल हो सकती है, तो शोधकर्ता आमतौर पर रोग से जुड़े जीनोम पर स्थान खोजने के लिए आनुवांशिक लिंकेज और आनुवंशिक वंशावली चार्ट का उपयोग करते हैं। जनसंख्या स्तर पर, शोधकर्ता जीनोम में उन स्थानों की तलाश के लिए मेंडेलियन यादृच्छिकता का लाभ उठाते हैं जो बीमारियों से जुड़े होते हैं, एक विधि जो विशेष रूप से बहु जीनिक लक्षणों के लिए उपयोगी है जो स्पष्ट रूप से एकल जीन द्वारा परिभाषित नहीं हैं। एक बार एक उम्मीदवार जीन मिल जाने के बाद, मॉडल जीवों के संबंधित (या समरूप) जीन पर अक्सर शोध किया जाता है। आनुवांशिक बीमारियों का अध्ययन करने के अलावा, जीनोटाइपिंग विधियों की बढ़ी हुई उपलब्धता ने फार्माकोजेनेटिक्स के क्षेत्र को आगे बढ़ाया है: जीनोटाइप दवा की प्रतिक्रियाओं को कैसे प्रभावित कर सकता है इसका अध्ययन।
कैंसर विकसित करने की उनकी विरासत की प्रवृत्ति में व्यक्ति भिन्न होते हैं, [और कैंसर एक आनुवांशिक बीमारी है। शरीर में कैंसर के विकास की प्रक्रिया घटनाओं का एक संयोजन है। विभाजन कभी-कभी शरीर में कोशिकाओं के भीतर भी होते हैं क्योंकि वे विभाजित होते हैं। यद्यपि ये उत्परिवर्तन किसी भी संतान को विरासत में नहीं मिलेंगे, वे कोशिकाओं के व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं, कभी-कभी उन्हें बढ़ने और अधिक बार विभाजित करने के कारण। जैविक तंत्र हैं जो इस प्रक्रिया को रोकने का प्रयास करते हैं; संकेतों को अनुचित रूप से विभाजित कोशिकाओं को दिया जाता है जो कोशिका मृत्यु को ट्रिगर करना चाहिए, लेकिन कभी-कभी अतिरिक्त उत्परिवर्तन होते हैं जो इन संदेशों को अनदेखा करने के लिए कोशिकाओं का कारण बनते हैं। प्राकृतिक चयन की एक आंतरिक प्रक्रिया भीतर होती है
*[[मनुष्य पितृवंश समूह]]
*[[पितृवंश समूह के]]
*[[पितृवंश समूह आर१ए]]
[[श्रेणी:आयुर्विज्ञान]]
[[श्रेणी:जीव विज्ञान]]
[[श्रेणी:अनुवांशिकी]]
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स्टीव जॉब्स
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wikitext
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{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=स्टीव जॉब्स
<!-- Before changing this image, double check the talk page, as there is discussion there titled "Infobox Picture" -->|image=Steve Jobs Headshot 2010-CROP.jpg|image_size=250px|birth_name=स्टीवन पॉल जॉब्स|birth_date={{जन्म तिथि|1955|2|24}}|birth_place={{nowrap|सैन फ्रांसिस्को}}|death_date={{मृत्यु तिथि एवं आयु|2011|10|5}}|death_place=56 years 7 months 11 days[[पालो आल्टो, कैलिफ़ोर्निया|पालो आल्टो]], [[कैलिफ़ोर्निया]], [[संयुक्त राज्य अमेरिका]]|nationality=अमेरिकी|occupation=को-फ़ाउंडर, चेरमन और सी॰ई॰ओ॰, [[एप्पल इंक°]], [[पिक्सार (Pixar)]], को-फ़ाउंडर और सी॰ई॰ओ॰, [[नेक्स्ट इंक॰]]|years_active=१९७४–२०११|networth=$७.० बिलियन [[अमेरिकी डॉलर|डॉलर]]|boards=[[द वॉल्ट डिज़्नी कंपनी]], [[एप्पल इंक॰]]|religion=[[बौद्ध धर्म]]|spouse=[[लॉरेन पॉवेल जॉब्स]]<br />(१९९१–२०११, उसका मौत)|children=४ – [[लीसा ब्रेनन-जॉब्स]], रीड, एरिन, ईव|relatives=[[मोना सिम्पसन]] (बहन)|signature=SteveJobsSignatureInsideOriginalMacintoshCase-Villenero.jpg|signature_size=120px}}'''स्टीवन पॉल "स्टीव" जॉब्स''' ({{Lang-en|Steven Paul "Steve" Jobs}}) (जन्म: २४ फरवरी, १९५५ - अक्टूबर ५, २०११) एगो अमेरिकी बिजनेस टाईकून आरू आविष्कारक छेलै। हुनी एप्पल इंक केरौ सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी छेलै। अगस्त २०११ मँ हुनी हैय पद सँ त्यागपत्र दै देलकै। जॉब्स पिक्सर एनीमेशन स्टूडियोज केरौ मुख्य कार्यकारी अधिकारीहो छेलै। सन् २००६ मँ हुनी दि वाल्ट डिज्नी कम्पनी केरौ निदेशक मंडल क सदस्यहो छेलै, जेकरौ बाद डिज्नी न पिक्सर क अधिग्रहण करी लेलौ छेलै। १९९५ मँ ऐलौ फिल्म टॉय स्टोरी क हुनी कार्यकारी निर्माता छेलै ।
== परिचय ==
कंप्यूटर, लैपटॉप आरू मोबाइल फोन बनै वाला कंपनी एप्पल के पूर्व सीईओ आरू जानल मानल अमेरिकी उद्योगपति स्टीव जॉब्स संघर्ष करी क॑ जीवन म॑ ई मुकाम हासिल करलकै। कैलिफोर्निया के सैन फ्रांसिस्को में जनमलै स्टीव के पाउल आरू कालरा जॉब्स हुनका माय स॑ गोद लेलकै। जॉब्स कैलिफोर्निया म॑ ही पढ़लै। वू समय हुनका पास पैसा के कमी छेलै आरू वू अपनौ ई आर्थिक परेशानी दूर करै लेली गर्मी के छुट्टी म॑ काम करै छेलै।
१९७२ में जॉब्स पोर्टलैंड के रीड कॉलेज सँ स्नातक करलकै। पढ़ाई के दौरान हुनका अपनौ दोस्त के कमरा मँ जमीन पर सुतना पड़लै। वू कोक के खाली बोतल बेची क॑ खाय लेली पैसा जुटबै छेलै आरू पास के कृष्ण मंदिर सँ हफ्ता मँ एक बार मिलै वाला मुफ्त भोजन भी करै छेलै। धनवान बनी जाय के बाद जॉब्स के पास लगभग ५.१ अरब डॉलर के संपत्ति छेलै आरू वू अमेरिका के ४३वाँ सबसै धनी आदमी मानलौ गेलै। जॉब्स आध्यात्मिक ज्ञान लेली भारत के यात्रा करलकै आरू बौद्ध धर्म अपनालकै। वू कैंची आश्रम नैनीताल अल्मोड़ा के संत नीम करोली बाबा सँ भी मिललौ छेलै जे हुनकरौ उज्ज्वल भविष्य के सटीक भविष्यवाणी करनै छेलै। जॉब्स १९९१ मँ लोरेन पॉवेल सँ बियाह करनै छेलै। हुनकरौ एक बेटा छै।
== प्रारंभिक जीवन ==
''स्टीव जॉब्स के जनम २४ फरवरी १९५५ के सैन फ्रांसिस्को, कैलिफोर्निया में होलै छेलै। स्टीव के जनम के समय हुनकौ माता-पिता के बियाह नै होलै छेलै, यही वास्तें स्टीव के कैलिफोर्निया के पॉल रेनहोल्ड जॉब्स आरू क्लारा जॉब्स गोद ल लेलकै छेलै। क्लारा जॉब्स कॉलेज सँ स्नातक के उपाधि नै लेनै छेलै आरू पॉल जॉब्स खाली उच्च विद्यालय तक के ही शिक्षा लेने छेलै।''
[[फाईल:Apple_Computer_Logo_rainbow.svg|बाएँ|अंगूठाकार|upright|एप्पल लोगो]]
[[फाईल:Apple_logo_black.svg|अंगूठाकार|upright|27 अगस्त 1999 से उपयोग किया जा रहा लोगो।]]
== निजी जीवन ==
जॉब्स के एगो बहिन छै जेकरौ नाम मोना सिम्प्सन छेकै। हुनकौ एगो पुरान संबंध सँ १९७८ में हुनकौ पहिलौ बेटी के जनम होलै जेकरौ नाम लीज़ा ब्रेनन जॉब्स छै। सन् १९९१ में वू लौरेन पावेल सँ बियाह करलकै। ई बियाह सँ हुनका तीन गो बच्चा होलै - एगो बेटा आरू दू गो बेटी। बेटा के नाम रीड छै जेकरौ जनम सन् १९९१ में होलै। हुनकरौ बड़की बेटी के नाम एरिन छै जेकरौ जनम सन् १९९५ में होलै, आरू छुटकी बेटी के नाम ईव छै जेकरौ जनम सन् १९९८ में होलै। वू संगीतकार 'दि बीटल्स' के बहुत बड़ौ प्रशंसक छेलै आरू हुनका सब सँ बहुत प्रेरित होलै।
== निधन ==
२००३ में हुनका पैनक्रियाटिक कैंसर के बीमारी होलै। हुनी ई बीमारी के इलाज ठीक से नै करैलकै। जॉब्स के ५ अक्टूबर २०११ के ३ बजे के आसपास पालो अल्टो, कैलिफ़ोर्निया के घर में निधन होय गेलै। हुनकर अंतिम संस्कार अक्टूबर २०११ में होलै। हुनकर निधन के मौका पर माइक्रोसॉफ्ट आर डिज्नी जैसनौ बड़-बड़ कंपनी सब शोक मनैलकै। पूरा अमेरिका में शोक मनाय गेलै। हुनी निधन के बाद आपनौ पत्नी आर तीन बच्चा के छोड़ी क चल गेलै।
स्टीव के आखिरी शब्द छेलै - "हम बिजनेस के दुनिया में सफलता के चोटी पर पहुँची चुकलौ छियै। जबकि दूसरौ के नजर में हमरौ जिंदगी सफलता के दूसरौ नाम छै। लेकिन काम के छोड़ी क अगर हम आपनौ जिंदगी के बारे में बात करै छियै त हमरा यही समझ में ऐलै कि पैसा जीवन के खाली एक हिस्सा छै आर हम एकरौ आदी होय चुकलौ छियै। आज ई बिस्तर पर पड़लौ-पड़लौ अगर हम आपनौ पूरा जिंदगी के याद करै छियै त हमरा लगै छै कि जिंदगी में हमरा जे नाम आर पैसा मिललै वू मौत के समय कोनो काम के नै छै। आज हम यहाँ अँधेरा में लाइफ सपोर्टिंग मशीन के हरियरौ बत्ती देखी रहलौ छियै। साथ ही भगवान के भी महसूस करी रहलौ छियै। हमरा मौत पास आबैतौ नजर आबी रहलौ छै। हम कहै चाहै छियै कि जब तों आपनौ आखिरी समय के लिए बहुत पैसा जमा करी लेहै छौं, त तोरा रिश्ता, आपनौ कला आर बचपन के सपना पर ध्यान देलौ चाहियौ। हमेशा आर लगातार पैसा कमाबै के आदत तोरा हमरौ जैसनौ ही एक बिगड़लौ इंसान बना देतो।"
== पुरस्कार ==
१९८२ में टाइम पत्रिका हुनका द्वारा बनैलौ गेलै एप्पल कंप्यूटर के 'मशीन ऑफ द ईयर' के खिताब देलकै। १९८५ में हुनका अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा नेशनल मेडल ऑफ टेक्नोलॉजी मिललै। वही साल हुनका आपनौ योगदान के लिए सैमुअल एस. बियर्ड पुरस्कार मिललै। नवंबर २००७ में फॉर्च्यून पत्रिका हुनका उद्योग में सबसै शक्तिशाली पुरुष के खिताब देलकै। वही साल हुनका 'कैलिफोर्निया हॉल ऑफ फेम' के पुरस्कार भी मिललै।
अगस्त २००९ मँ, वू जूनियर उपलब्धि द्वारा एक सर्वेक्षण मँ किशोरऽ के बीच सबसै अधिक प्रशंसा मिलनै वाला उद्यमी के रूप मँ चुनलौ गेलै। पहलें इंक पत्रिका द्वारा २० साल पहलें १९८९ मँ 'दशक के उद्यमी' नामित करलौ गेलै। ५ नवम्बर २००९ क॑, जॉब्स् फॉर्च्यून पत्रिका द्वारा दशक के सीईओ नामित करलौ गेलै। नवम्बर २०१० मँ, जॉब्स् फोरब्स पत्रिका हुनक॑ अपनऽ 'पर्सन ऑफ द ईयर' चुनलकै। २१ दिसम्बर २०११ क॑ बुडापेस्ट मँ ग्राफिसॉफ्ट कंपनी हुनक॑ आधुनिक युग के महानतम व्यक्तित्वऽ मँ सँ एक चुनी क॑, स्टीव जॉब्स क॑ दुनिया के पहिलऽ कांस्य प्रतिमा भेंट करलकै।
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== बाहरी कड़ी सिनी ==
* [http://www.dw-world.de/dw/article/0, 15343295,00.html एप्पल को मशीन बनाने वाले जॉब्स का इस्तीफा] {{Dead link|date=अगस्त 2021}}
* [https://web.archive.org/web/20111007111609/http://raviwar.com/news/616_steve-jobs-apple-three-story.shtml मेरे जीवन की तीन कहानियां- स्टीव जॉब्स]
* [http://www.bbc.co.uk/hindi/mobile/international/2012/10/121005_international_usplus_stevejobs_death_aniiv_pa.shtml सात चीज़ें जो स्टीव के मरणोपरांत बदल गईं।]
[[श्रेणी:विज्ञान]]
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{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=स्टीव जॉब्स
<!-- Before changing this image, double check the talk page, as there is discussion there titled "Infobox Picture" -->|image=Steve Jobs Headshot 2010-CROP.jpg|image_size=250px|birth_name=स्टीवन पॉल जॉब्स|birth_date={{जन्म तिथि|1955|2|24}}|birth_place={{nowrap|सैन फ्रांसिस्को}}|death_date={{मृत्यु तिथि एवं आयु|2011|10|5}}|death_place=56 years 7 months 11 days[[पालो आल्टो, कैलिफ़ोर्निया|पालो आल्टो]], [[कैलिफ़ोर्निया]], [[संयुक्त राज्य अमेरिका]]|nationality=अमेरिकी|occupation=को-फ़ाउंडर, चेरमन और सी॰ई॰ओ॰, [[एप्पल इंक°]], [[पिक्सार (Pixar)]], को-फ़ाउंडर और सी॰ई॰ओ॰, [[नेक्स्ट इंक॰]]|years_active=१९७४–२०११|networth=$७.० बिलियन [[अमेरिकी डॉलर|डॉलर]]|boards=[[द वॉल्ट डिज़्नी कंपनी]], [[एप्पल इंक॰]]|religion=[[बौद्ध धर्म]]|spouse=[[लॉरेन पॉवेल जॉब्स]]<br />(१९९१–२०११, उसका मौत)|children=४ – [[लीसा ब्रेनन-जॉब्स]], रीड, एरिन, ईव|relatives=[[मोना सिम्पसन]] (बहन)|signature=SteveJobsSignatureInsideOriginalMacintoshCase-Villenero.jpg|signature_size=120px}}'''स्टीवन पॉल "स्टीव" जॉब्स''' ({{Lang-en|Steven Paul "Steve" Jobs}}) (जन्म: २४ फरवरी, १९५५ - अक्टूबर ५, २०११) एगो अमेरिकी बिजनेस टाईकून आरू आविष्कारक छेलै। हुनी एप्पल इंक केरौ सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी छेलै। अगस्त २०११ मँ हुनी हैय पद सँ त्यागपत्र दै देलकै। जॉब्स पिक्सर एनीमेशन स्टूडियोज केरौ मुख्य कार्यकारी अधिकारीहो छेलै। सन् २००६ मँ हुनी दि वाल्ट डिज्नी कम्पनी केरौ निदेशक मंडल क सदस्यहो छेलै, जेकरौ बाद डिज्नी न पिक्सर क अधिग्रहण करी लेलौ छेलै। १९९५ मँ ऐलौ फिल्म टॉय स्टोरी क हुनी कार्यकारी निर्माता छेलै ।
== परिचय ==
कंप्यूटर, लैपटॉप आरू मोबाइल फोन बनै वाला कंपनी एप्पल के पूर्व सीईओ आरू जानल मानल अमेरिकी उद्योगपति स्टीव जॉब्स संघर्ष करी क॑ जीवन म॑ ई मुकाम हासिल करलकै। कैलिफोर्निया के सैन फ्रांसिस्को में जनमलै स्टीव के पाउल आरू कालरा जॉब्स हुनका माय स॑ गोद लेलकै। जॉब्स कैलिफोर्निया म॑ ही पढ़लै। वू समय हुनका पास पैसा के कमी छेलै आरू वू अपनौ ई आर्थिक परेशानी दूर करै लेली गर्मी के छुट्टी म॑ काम करै छेलै।
१९७२ में जॉब्स पोर्टलैंड के रीड कॉलेज सँ स्नातक करलकै। पढ़ाई के दौरान हुनका अपनौ दोस्त के कमरा मँ जमीन पर सुतना पड़लै। वू कोक के खाली बोतल बेची क॑ खाय लेली पैसा जुटबै छेलै आरू पास के कृष्ण मंदिर सँ हफ्ता मँ एक बार मिलै वाला मुफ्त भोजन भी करै छेलै। धनवान बनी जाय के बाद जॉब्स के पास लगभग ५.१ अरब डॉलर के संपत्ति छेलै आरू वू अमेरिका के ४३वाँ सबसै धनी आदमी मानलौ गेलै। जॉब्स आध्यात्मिक ज्ञान लेली भारत के यात्रा करलकै आरू बौद्ध धर्म अपनालकै। वू कैंची आश्रम नैनीताल अल्मोड़ा के संत नीम करोली बाबा सँ भी मिललौ छेलै जे हुनकरौ उज्ज्वल भविष्य के सटीक भविष्यवाणी करनै छेलै। जॉब्स १९९१ मँ लोरेन पॉवेल सँ बियाह करनै छेलै। हुनकरौ एक बेटा छै।
== प्रारंभिक जीवन ==
''स्टीव जॉब्स के जनम २४ फरवरी १९५५ के सैन फ्रांसिस्को, कैलिफोर्निया में होलै छेलै। स्टीव के जनम के समय हुनकौ माता-पिता के बियाह नै होलै छेलै, यही वास्तें स्टीव के कैलिफोर्निया के पॉल रेनहोल्ड जॉब्स आरू क्लारा जॉब्स गोद ल लेलकै छेलै। क्लारा जॉब्स कॉलेज सँ स्नातक के उपाधि नै लेनै छेलै आरू पॉल जॉब्स खाली उच्च विद्यालय तक के ही शिक्षा लेने छेलै।''
[[फाईल:Apple_Computer_Logo_rainbow.svg|बाएँ|अंगूठाकार|upright=0.5|एप्पल लोगो]]
[[फाईल:Apple_logo_black.svg|अंगूठाकार|upright=0.5|27 अगस्त 1999 से उपयोग किया जा रहा लोगो।]]
== निजी जीवन ==
जॉब्स के एगो बहिन छै जेकरौ नाम मोना सिम्प्सन छेकै। हुनकौ एगो पुरान संबंध सँ १९७८ में हुनकौ पहिलौ बेटी के जनम होलै जेकरौ नाम लीज़ा ब्रेनन जॉब्स छै। सन् १९९१ में वू लौरेन पावेल सँ बियाह करलकै। ई बियाह सँ हुनका तीन गो बच्चा होलै - एगो बेटा आरू दू गो बेटी। बेटा के नाम रीड छै जेकरौ जनम सन् १९९१ में होलै। हुनकरौ बड़की बेटी के नाम एरिन छै जेकरौ जनम सन् १९९५ में होलै, आरू छुटकी बेटी के नाम ईव छै जेकरौ जनम सन् १९९८ में होलै। वू संगीतकार 'दि बीटल्स' के बहुत बड़ौ प्रशंसक छेलै आरू हुनका सब सँ बहुत प्रेरित होलै।
== निधन ==
२००३ में हुनका पैनक्रियाटिक कैंसर के बीमारी होलै। हुनी ई बीमारी के इलाज ठीक से नै करैलकै। जॉब्स के ५ अक्टूबर २०११ के ३ बजे के आसपास पालो अल्टो, कैलिफ़ोर्निया के घर में निधन होय गेलै। हुनकर अंतिम संस्कार अक्टूबर २०११ में होलै। हुनकर निधन के मौका पर माइक्रोसॉफ्ट आर डिज्नी जैसनौ बड़-बड़ कंपनी सब शोक मनैलकै। पूरा अमेरिका में शोक मनाय गेलै। हुनी निधन के बाद आपनौ पत्नी आर तीन बच्चा के छोड़ी क चल गेलै।
स्टीव के आखिरी शब्द छेलै - "हम बिजनेस के दुनिया में सफलता के चोटी पर पहुँची चुकलौ छियै। जबकि दूसरौ के नजर में हमरौ जिंदगी सफलता के दूसरौ नाम छै। लेकिन काम के छोड़ी क अगर हम आपनौ जिंदगी के बारे में बात करै छियै त हमरा यही समझ में ऐलै कि पैसा जीवन के खाली एक हिस्सा छै आर हम एकरौ आदी होय चुकलौ छियै। आज ई बिस्तर पर पड़लौ-पड़लौ अगर हम आपनौ पूरा जिंदगी के याद करै छियै त हमरा लगै छै कि जिंदगी में हमरा जे नाम आर पैसा मिललै वू मौत के समय कोनो काम के नै छै। आज हम यहाँ अँधेरा में लाइफ सपोर्टिंग मशीन के हरियरौ बत्ती देखी रहलौ छियै। साथ ही भगवान के भी महसूस करी रहलौ छियै। हमरा मौत पास आबैतौ नजर आबी रहलौ छै। हम कहै चाहै छियै कि जब तों आपनौ आखिरी समय के लिए बहुत पैसा जमा करी लेहै छौं, त तोरा रिश्ता, आपनौ कला आर बचपन के सपना पर ध्यान देलौ चाहियौ। हमेशा आर लगातार पैसा कमाबै के आदत तोरा हमरौ जैसनौ ही एक बिगड़लौ इंसान बना देतो।"
== पुरस्कार ==
१९८२ में टाइम पत्रिका हुनका द्वारा बनैलौ गेलै एप्पल कंप्यूटर के 'मशीन ऑफ द ईयर' के खिताब देलकै। १९८५ में हुनका अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा नेशनल मेडल ऑफ टेक्नोलॉजी मिललै। वही साल हुनका आपनौ योगदान के लिए सैमुअल एस. बियर्ड पुरस्कार मिललै। नवंबर २००७ में फॉर्च्यून पत्रिका हुनका उद्योग में सबसै शक्तिशाली पुरुष के खिताब देलकै। वही साल हुनका 'कैलिफोर्निया हॉल ऑफ फेम' के पुरस्कार भी मिललै।
अगस्त २००९ मँ, वू जूनियर उपलब्धि द्वारा एक सर्वेक्षण मँ किशोरऽ के बीच सबसै अधिक प्रशंसा मिलनै वाला उद्यमी के रूप मँ चुनलौ गेलै। पहलें इंक पत्रिका द्वारा २० साल पहलें १९८९ मँ 'दशक के उद्यमी' नामित करलौ गेलै। ५ नवम्बर २००९ क॑, जॉब्स् फॉर्च्यून पत्रिका द्वारा दशक के सीईओ नामित करलौ गेलै। नवम्बर २०१० मँ, जॉब्स् फोरब्स पत्रिका हुनक॑ अपनऽ 'पर्सन ऑफ द ईयर' चुनलकै। २१ दिसम्बर २०११ क॑ बुडापेस्ट मँ ग्राफिसॉफ्ट कंपनी हुनक॑ आधुनिक युग के महानतम व्यक्तित्वऽ मँ सँ एक चुनी क॑, स्टीव जॉब्स क॑ दुनिया के पहिलऽ कांस्य प्रतिमा भेंट करलकै।
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== बाहरी कड़ी सिनी ==
* [http://www.dw-world.de/dw/article/0, 15343295,00.html एप्पल को मशीन बनाने वाले जॉब्स का इस्तीफा] {{Dead link|date=अगस्त 2021}}
* [https://web.archive.org/web/20111007111609/http://raviwar.com/news/616_steve-jobs-apple-three-story.shtml मेरे जीवन की तीन कहानियां- स्टीव जॉब्स]
* [http://www.bbc.co.uk/hindi/mobile/international/2012/10/121005_international_usplus_stevejobs_death_aniiv_pa.shtml सात चीज़ें जो स्टीव के मरणोपरांत बदल गईं।]
[[श्रेणी:विज्ञान]]
[[श्रेणी:तकनीक]]
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[[फाईल:Kismet_robot_at_MIT_Museum.jpg|अंगूठाकार|कृत्रिम बुद्धि सँ बनलौ रोबोट]]
'''कृत्रिम बुद्धिमत्ता''' अथवा '''कृत्रिम बुद्धि''' ([[अंग्रेजी भाषा|अंग्रेज़ी]]: Artificial Intelligence; संक्षेप मँ: '''AI''', '''एआई''', '''कृ॰बु॰''') मानव आरो अन्य जन्तु सिनी द्वारा प्रदर्शित प्राकृतिक बुद्धि केरौ विपरीत मशीन सिनी द्वारा प्रदर्शित बुद्धि छेकै। कंप्यूटर विज्ञान मँ कृत्रिम बुद्धि केरौ शोध क "इंटेलिजेंट एजेंट" केरौ अध्ययन मानलौ जाय छै। इंटेलिजेंट एजेंट एगो ऐन्हॅ सयंत्र छेकै जे अपनौ पर्यावरण क लौक क, अपनौ लक्ष्य क प्राप्त करै के कोशिश करै छै। एकरौ लेली आम बोलचाल के भाषा मँ, "कृत्रिम बुद्धि" शब्द केरौ प्रयोग होय छै। कृत्रिम बुद्धिमत्ता केरौ प्रयोग करैत एगो मशीन इंसान सिनी केरौ "संज्ञानात्मक" कार्य सिनी के नकल करै छै। एंड्रियास कपलान आरो माइकल हाएनलेन कृत्रिम बुद्धिमत्ता क “कोय प्रणाली केरौ द्वारा बाहरी डेटा क सही ढंग सँ व्याख्या करै, ऐन्हॅ डेटा सँ अपनै सीखै आरो सुविधाजनक रूपांतरण केरौ माध्यम सँ विशिष्ट लक्ष्य सिनी आरो कार्य सिनी क पूरा करै मँ हौव सीखलौ चीज सिनी केरौ उपयोग करै केरौ छिमता” केरौ रूप मँ परिभाषित करै छै। यह कार्य "सीखने" और "समस्या निवारण" को एक साथ जोड़ती है। [3] कृत्रिम बुद्धि (प्रज्ञाकल्प, कृत्रिमप्रज्ञा, कृतकधी) [[कंप्यूटर|संगणक]] में अर्पित बुद्धि है। मानव सोचने, विश्लेषण करने व याद रखने का काम भी अपने दिमाग के स्थान पर [[कंप्यूटर|कम्प्यूटर]] से कराना चाहता है।
AI यानी '''Artificial Intelligence''' ('''कृत्रिम बुद्धिमत्ता''') एगो ऐन्हौ तकनीक छेकै जेकरा मँ मशीन सिनी आरो कंप्यूटर सिस्टम सिनी क मानव केरौ रंकी सोचै, समझै आरो निर्णय लै केरौ क्षमता देलौ जाय छै। एकरा सरल शब्द मँ कहौ त, AI मशीन सिनी क “स्मार्ट” बनाबै केरौ कला छेकै ताकि उ सिनी इंसान सिनी केरौ रंकी काम करि सकै।
[https://www.palamsolutions.com/category/%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%b2-%e0%a4%87%e0%a4%82%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%b8/ कृत्रिम बुद्धि], कंप्यूटर विज्ञान केरौ एगो शाखा छेकै जे मशीन सिनी आरो सॉफ्टवेयर क बुद्धि केरौ साथ विकसित करै छै। 1955 मँ जॉन मैकार्थी एकरा कृत्रिम बुद्धि केरौ नाम देलकै आरो एकरा "विज्ञान आरो इंजीनियरिंग केरौ द्वारा बुद्धिमान मशीन सिनी क बनाबै" केरौ रूप परिभाषित करलकै। कृत्रिम बुद्धि अनुसंधान केरौ लक्ष्य सिनी मँ तर्क, ज्ञान केरौ योजना बनाबै, सीखै, धारण करै आरो वस्तु सिनी मँ हेरफेर करै केरौ छिमता, अरिन शामिल छै। वर्तमान मँ, हैय लक्ष्य तक पहुँचै केरौ लेली सांख्यिकीय विधि सिनी, कम्प्यूटेशनल बुद्धि आरो पारंपरिक खुफिया तकनीकी शामिल छै। कृत्रिम बुद्धि क लैय क दावा करलौ जाय छै के ई मानव केरौ बुद्धि केरौ एगो केंद्रीय संपत्ति केरौ रूप मँ मशीन द्वारा अनुकरण करि सकै छै। हुन्नअ दार्शनिक मुद्दा सिनी केरौ प्राणी बनाबै केरौ नैतिकता केरौ बारे मँ प्रश्न उठैलौ गेलौ छेलै। पर आय, ई प्रौद्योगिकी उद्योग केरौ सब्भे सँ महत्वपूर्ण आरो अनिवार्य हिस्सा बनि गेलै छै।
कृत्रिम बुद्धि (एआई) केरौ दायरा विवादित छै: कियैकि मशीन सिनी तेजी सँ सक्षम होय रहल छै, जौन काम सिनी केरौ लेली पहिनँ मानव केरौ बुद्धिमत्ता चाहियौ छेलै, अबअ उ काम "कृत्रिम बुद्धिमत्ता" केरौ दायरा मँ आबै छै। उदाहरण केरौ लेली, लिखलौ शब्द सिनी क पहचानै मँ अबअ मशीन एतेक सक्षम होय चुकलौ छै के एकरा अबअ होशियारी नाय मानलौ जाय छै। आज काल, एआई केरौ दायरा मँ आबै वाला काम छै, इंसानी वाणी क समझै, शतरंज या "गो" केरौ खेलौ मँ माहिर इंसान सिनी सँ हो जीतै, बिना इंसानी सहारा केरौ गाड़ी अपनै चलाय।
== इतिहास ==
यांत्रिक या "औपचारिक" तर्क केरौ अध्ययन गणितज्ञ सिनी केरौ साथ प्राचीन कालौ मँ आरंभ होलै। गणितीयतर्क केरौ अध्ययन "एलन ट्यूरिंग" (जे एगो कंप्यूटर वैज्ञानिक छेलै) केरौ "कंप्यूटर सिद्धांत" केरौ जन्म देलकै। हैय सिद्धांत केरौ मानना छै के मशीन, "०" आरो "१" रंकी सरल चिह्न, क जोड़ी-तोड़ी क कोय्यो बोधगम्य गणना करै सकै छै। उ योहो कहै छै के आय केरौ साधारण कंप्यूटर ऐन्हॅ मशीन छेकै। ई दृष्टि, के कंप्यूटर औपचारिक तर्क केरौ कोय हो प्रक्रिया क अनुकरण करै सकै छै, जेकरा चर्च-ट्यूरिंग थीसिस केरौ नाम सँ जानलौ जाय छै। न्यूरोबायोलॉजी (दिमाग केरौ जीवविज्ञान), सूचना केरौ विज्ञान आरो साइबरनेटिक मँ खोज शोधकर्ता सिनी क इलेक्ट्रॉनिक मस्तिष्क बनाबै केरौ संभावना पँ विचार करै लेली प्रेरित करलकै। ट्यूरिंग (एगो कंप्यूटर वैज्ञानिक) प्रस्तावित करलकै के "यदि कोय मनुष्य मशीन आरो मानव सँ प्रतिक्रिया सिनी केरौ बीच अंतर नाय करै सकै छै, त मशीन क "मानव केरौ रंकी बुद्धिमान" मानलौ जाय सकै छै। पहलौ काम जेकरा भरसक एआई केरौ रूप मँ पहचानलौ जाय छै उ "मैकुलचच" आरो "पिट्स" केरौ 1943 औपचारिक डिजाइन "ट्यूरिंग-पूर्ण" "कृत्रिम न्यूरॉन्स" केरौ लेली छेलै। एगो "ट्यूरिंग-पूर्ण" मशीन कोय हो बोधगम्य गणना करै सकै छै।
1950 केरौ दशक तक, मशीनी बुद्धिमत्ता क कैन्हॅ प्राप्त करलौ जाय, एकरौ लेली दुगो दृष्टिकोण आगू ऐलै। एगो दृष्टि, जेकरा प्रतीकात्मक AI या GOFAI केरौ रूप मँ जानलौ जाय छै, कंप्यूटर केरौ उपयोग दुनिया आरो सिस्टम केरौ एगो प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व बनाबै केरौ लेली करै के छेलै जे दुनिया केरौ बारे मँ तर्क करि सकै। समर्थक सिनी मँ एलन नेवेल, हर्बर्ट ए साइमन आरो मार्विन मिन्स्की शामिल छेलै। हैय दृष्टिकोण केरौ साथ निकटता सँ जुड़ल "अनुमानी खोज" दृष्टिकोण छेलै, जे बुद्धिमत्ता केरौ तुलना उत्तर केरौ लेली संभावना सिनी केरौ स्थान केरौ खोज केरौ समस्या सँ करलकै। दोसरौ दृष्टि, जेकरा कनेक्शनवादी दृष्टिकोण केरौ रूप मँ जानलौ जाय छै, सीखै केरौ माध्यम सँ बुद्धि प्राप्त करै केरौ माँग करलकै। हैय दृष्टिकोण केरौ समर्थक, सब्भे सँ प्रमुख रूप सँ फ्रैंक रोसेनब्लैट, न्यूरॉन्स केरौ कनेक्शन सँ प्रेरित तरीका सिनी सँ परसेप्ट्रॉन क जोड़ै केरौ माँग करलकै। जेम्स मन्यिका आरो अन्य दिमाग (प्रतीकात्मक एआई) आरो मस्तिष्क (कनेक्शनिस्ट) केरौ दुगो दृष्टिकोण सिनी केरौ तुलना करलकै छै। मन्यिका केरौ तर्क छै के डेसकार्टे, बूले, गॉटलोब फ्रेगे, बर्ट्रेंड रसेल आरो अन्य केरौ बौद्धिक परंपरा सिनी केरौ संबंध मँ हैय अवधि मँ प्रतीकात्मक दृष्टिकोण कृत्रिम बुद्धि केरौ लेली महत्वपूर्ण रहलै। साइबरनेटिक्स या कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क[१] पँ आधारित सम्बन्धवादी दृष्टिकोण क पृष्ठभूमि मँ धकेलि देलौ गेलौ छेलै, पर हाल केरौ दशक सिनी मँ नयी प्रमुखता प्राप्त होलै छै।
भले की मशीन केरौ बुद्धि विकसित रौ शोध क आरंभ 1943 मँ होलौ हुअ पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता शब्द क पहलौ बेर उपयोग जॉन मैकार्थीहे 1956 मँ [[:en:Dartmouth workshop]] करलौ छेलै आरू कहआलू छेलै कि विज्ञान आरो अभियांत्रिकी केरौ इस्तेमाल करि क एगो ऐन्हॅ कंप्यूटर बनालौ जाय सकै छै जे के अपनै सँ सोचि समझि क निर्णय लैय सकै तै खातिर हम्मँ सिनी [[जॉन मैकार्थी]]<nowiki/>हे ए.आई. केरौ पिता केरौ रूप मँ जानै छियै।
== कुशल, तर्क आरू समस्या क निपटारा ==
पहिनँ, कृत्रिम बुद्धि शोधकर्ता सिनी ऐन्हॅ एल्गोरिदम विकसित करलकै जे मानुस क हल करैत समय उपयोग या तार्किक निर्णय लै केरौ लेली उपयोग करै छेलै। उ सिनी अनिश्चित या अधूरी जानकारी केरौ साथ संभावना केरौ संकल्पना निपटाबै छै।
== ज्ञान प्रतिनिधित्व ==
समस्या रौ हल करै समय, मशीन सिनी क संसार केरौ बारे मँ व्यापक ज्ञान केरौ जरूरत होतै। कृत्रिम बुद्धि क प्रतिनिधित्व करै लेली जरूरत के चीज सिनी छै: वस्तु, गुण, श्रेणी, समाधान, घटना, समय, कारण आरो प्रभाव केरौ बीच संबंध अरिन।
== प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण ==
प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण सब्भे सँ तेजी गति सँ विकास करै वाला AI क्षेत्र सिनी मँ सँ एक छेकै। प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण मँ भाषा-संबंधी AI एप्लिकेशन केरौ विकास पँ ध्यान केंद्रित करलौ जाय छै, जैन्हौ वॉयस असिस्टेंट, चैटबॉट आरो भाषा अनुवाद। वॉयस-टू-टेक्स्ट समझ क सक्षम करि क, मानव-कंप्यूटर इंटरैक्शन क बढ़ालौ जाय सकै छै।
== उपकरण ==
=== तर्क ===
तर्क, मुख्य रूप सँ ज्ञान प्रतिनिधित्व आरो समस्या क हल करै केरौ लेली उपयोग करलौ जाय छै। पर ई दोसर समस्या सिनी केरौ लेलीहो करलौ जाय सकै छै। तर्क केरौ कत्तेक अलग अलग रूप सिनी केरौ कृत्रिम बुद्धि अनुसंधान मँ उपयोग करलौ जाय छै। तर्क केरौ सहायता सँ हम्मँ सिनी निर्णय करि सकै छियै के की सही छै या की गलत छै।
=== अनिश्चित तर्क लेली संभाव्य उपाय सिनी ===
समस्या सिनी केरौ अधिकांश हिन्नअ अनिश्चित आरो अधूरी जानकारी छै। कृत्रिम बुद्धि शोधकर्ता सिनी संभाव्यता सिद्धांत आरो अर्थशास्त्र सँ विधि सिनी केरौ उपयोग करि क ई समस्या सिनी क हल करै केरौ लेली शक्तिशाली उपकरण केरौ एगो संख्या तैयार करि लेलकै छै। संभाव्यता एल्गोरिदम क छानै आरो डेटा केरौ भविष्यवाणी केरौ लेली इस्तेमाल करलौ जाय सकै छै।
== AI टेक्नोलॉजी केरौ अनुप्रयोग ==
आज केरौ तकनीकी दौर मँ जहाँ मशीन सिनी कत्तेक व्यवसाय सिनी मँ अपनौ सेवा सिनी द रहल छै हुन्नै AI टेक्नोलॉजीहो अबअ कुछ सीमित इंडस्ट्रीज सँ निकलि क कत्तेक दोसर महत्वपूर्ण इंडस्ट्रीज मँ प्रयोग करलौ जाय लगलै छै। कुछ बरिस पहिनँ तक AI टेक्नोलॉजी क कंप्यूटर आरो एकरा सँ जुड़लौ सेवा सिनी तकहे सीमित मानलौ जाय छेलै, पर वर्तमान समय मँ AI टेक्नोलॉजी केरौ विस्तार दोसर कत्तेक इंडस्ट्रीज मँ हो देखै ल मिलि रहल छै। आज केरौ समय मँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केरौ प्रयोग शिक्षा, ग्राहक सेवा, मनोरंजन, ऑटोमोबाइल आरो एकरौ साथहे परिवहन व संचार केरौ क्षेत्र सिनी मँ हो देखै ल मिलि रहल छै। आबै वाला समय मँ हैय तकनीकी केरौ प्रयोग बड़ौ पैमाना पँ दोसर इंडस्ट्रीज मँ हो होय केरौ अटूट संभावना छै। हैय कारण सँ [https://www.thestockbeat.in/2024/08/ai-stocks-in-india-2024-ai.html AI टेक्नोलॉजी से संबंधित कंपनियों] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20250825222718/https://www.thestockbeat.in/2024/08/ai-stocks-in-india-2024-ai.html |date=2025-08-25 }} क बड़ौ मापदंड प लाभ क असरो छै। एकरौ एक उदाहरण Neuralink द्वारा मानव मस्तिस्क मँ एगो चिपसेट क इंप्लांट करलौ जैतै।
== रचनात्मकता ==
कृत्रिम बुद्धि केरौ एगो उप-क्षेत्र सैद्धांतिक रूप सँ (एगो दार्शनिक आरो मनोवैज्ञानिक नजरिया सँ) रचनात्मकता दुनु पता लगै छै आरो व्यावहारिक रूप सँ (द्वारा उत्पन्न उत्पादन रचनात्मक मानलौ जाय सकै छै के सिस्टम, या सिस्टम छै के पहचानै आरो रचनात्मकता केरौ आकलन केरौ implementations विशिष्ट)। कम्प्यूटेशनल रिसर्च केरौ संबंधित क्षेत्र सिनी कृत्रिम अंतर्ज्ञान आरो कृत्रिम सोच छै।
== सामान्य बुद्धि ==
शोधकर्ता सिनी आरो हुनकौ काम: एगो मशीन मँ सामान्य बुद्धि केरौ साथ (मजबूत एआई केरौ रूप मँ जानलौ जाय छै), शामिल करलौ जैतै के लागै छै सब्भे सँ उप्पर कौशल आरो मानवीय छिमता सिनी मँ सब्भे सँ बेसी सँ बेसी केरौ या व सब्भे केरौ संयोजन। कुछ केरौ बिस्सास छै के कृत्रिम चेतना या एगो कृत्रिम मस्तिष्क केरौ रंकी मानवाकृतीय सुविधा सिनी ऐन्हॅ एगो परियोजना केरौ लेली जरूरत होय सकै छै। उप्पर देलौ समस्या सिनी मँ सँ कत्तेक क हल करै केरौ लेली सामान्य बुद्धि केरौ जरूरत होय सकै छै। उदाहरण केरौ लेली, हिन्नअ तक के मशीनी अनुवाद केरौ रंकी एगो सोझ, विशिष्ट काम मँ मशीन क पढ़ै आरो (एनएलपी) दुनु भाषा सिनी मँ लिखै, लेखक केरौ तर्क (कारण) केरौ पालन करै, जानै के की (ज्ञान) केरौ बारे मँ बात करलौ जाय रहल छै आरो सच्चाई सँ लेखक केरौ इरादा (सामाजिक बुद्धि) क फेर सँ उत्पन्न करै केरौ जरूरत छै। मशीनी अनुवाद केरौ रंकी एगो समस्या "ऐ-पूर्ण" मानलौ जाय छै। हैय विशेष समस्या क हल करै केरौ लेली, तोरा सब्भे समस्या सिनी क हल करना चाहियौ।
== AI सुरक्षा ==
=== परिभाषा ===
एआई सुरक्षा व शाखा छेकै जे एआई-सिस्टम सिनी, हुनकौ प्रशिक्षण डेटा, मॉडल तथा समर्थन इंफ्रास्ट्रक्चर क विभिन्न प्रकार केरौ खतरा आरो कमजोरी सिनी सँ सुरक्षित रखै केरौ काम करै छै।
=== प्रमुख खतरा आरू चुनौती सिनी ===
** '''डेटा पॉइज़निंग''' – जेखनी प्रशिक्षण डेटा मँ दुर्भावनापूर्ण या गलत डेटा शामिल करि देलौ जाय छै, जेकरा सँ मॉडल गलत या हानिकारक निर्णय लै लगै।
** '''मॉडल इनवर्ज़न आक्रमण''' – मॉडल केरौ आउटपुट केरौ आधार पँ हमलावर प्रशिक्षण डेटा या संवेदनशील जानकारी केरौ उजागर करि सकै छै।
** '''प्रतिस्पर्धात्मक (एडवर्सेरियल) आक्रमण''' – मॉडल क ऐन्हॅ इनपुट देलौ जाय छै जेकरा सँ उ गलत या मनचाहा आउटपुट दै लगै छै।
** '''प्रॉम्प्ट इंजेक्शन''' – विशेष रूप सँ लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) मँ इनपुट केरौ माध्यम सँ मॉडल क गैर-इच्छित क्रिया सिनी करै लेली प्रेरित करै करना।
=== सुरक्षा प्रमुख बिंदु आरू उपाय ===
** '''गोपनीयता, अखंडता, उपलब्धता (CIA) त्रय''' – एआई प्रणाली मँ हैय तीनगो मौलिक सुरक्षा गुण सिनी क सुनिश्चित करै के जरूरी छै।
** '''निरंतर निगरानी एवं जोखिम आकलन''' – मॉडल आरो ओकरौ परिवेश मँ समय-समय पँ सुरक्षा परीक्षण, मॉनिटरिंग आरो आकलन जरूरी छै।
** '''पहुँच नियंत्रण आरो एन्क्रिप्शन''' – प्रशिक्षण डेटा, मॉडल आरो आउटपुट तक पहुँच क सीमित करै के तथा डेटा ट्रांसमिशन आरो संग्रहण मँ एन्क्रिप्शन उपयोग करै के।[१]
** '''देरी-रहित प्रतिक्रिया (Incident Response)''' – एआई द्वारा उत्पन्न या प्रभावित घटना लेली त्वरित प्रतिक्रिया योजना सिनी आरो स्वचालित नियंत्रण।
=== एआई सुरक्षा केरौ अनुप्रयोग क्षेत्र ===
एआई सुरक्षा व्यापक रूप सँ नीच्चँ-लिखलौ क्षेत्र सिनी मँ महत्वपूर्ण भूमिका निभावै छै:
** '''वित्तीय सेवा सिनी''' — धोखाधड़ी पहचान, जोखिम आकलन तथा लेन-देन सुरक्षा।
** '''स्वास्थ्य सेवा''' — रोग निदान मॉडल्स, रोग-सँबंधित डेटा तथा गोपनीयता।
** '''आधारभूत संरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर)''' — स्मार्ट ग्रिड्स, IoT उपकरण सिनी तथा संवेदनशील सिस्टम सिनी।
** '''रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र''' — स्वायत्त प्रणाली सिनी, ड्रोन आरो निर्णय-सहायक प्रणाली।
=== लौकतअ रुझान ===
एआई सुरक्षा मँ हाल-फिलहाल मँ नीच्चँ-लिखलौ प्रमुख रुझान सिनी देखलौ जाय रहलौ छै:
** एजेंटिक एआई आरो स्वायत्त हमलावर उपकरण सिनी-पँ आधारित खतरा सिनी।
** एआई जीवन-चक्र (डेटा → मॉडल → तैनाती → उपयोग) क सुरक्षित रखै केरौ लेली समग्र सुरक्षा फ्रेमवर्क।
** नियामक, नैतिकता एवं जवाबदेही — एआई केरौ निर्णय, पूर्वाग्रह आरो पारदर्शिता द्वारा सुरक्षा जोखिम उत्पन्न होय सकै छै।
== एकरहो देखौ ==
* [[क्वांटम कंप्यूटिंग|प्रमात्रा संगणन (क्वांटम कंप्यूटिंग)]]
== सन्दर्भ ==
[[श्रेणी:विज्ञान]]
[[श्रेणी:तकनीक]]
[[श्रेणी:प्रौद्योगिकी]]
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संज्ञानात्मक विज्ञान
0
5697
22988
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2026-05-25T00:53:07Z
Kwamikagami
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wikitext
text/x-wiki
[[फाईल:Cognitive_Science_Hexagon.svg|दाएँ|अंगूठाकार|हैय चित्रौ मँ व विषय सिनी क देखालौ गेलौ छै जेकरौ बोध विज्ञान केरौ जन्मौ मँ योगदान छेलै।]]
'''संज्ञानात्मक विज्ञान''' या '''बोध विज्ञान (Cognitive science)''' [[मस्तिष्क]] आरो ओकरौ प्रक्रिया सिनी केरौ अनतरविषयी वैज्ज्यानिक अध्ययन छेकै। ई [[संज्ञान]] केरौ प्रकृति आरो ओकरौ काम सिनी केरौ खोजबीन करै छै। संज्ञानात्मक वैज्ञानिक सिनी [[बुद्धि]] आरो [[व्यवहार]] केरौ अध्ययन करै छै जेकरा मँ फोकस हैय बातौ पँ रहै छै के [[तंत्रिका तंत्र]] कैन्हॅ सूचना सिनी केरौ कैन्हॅ निरूपण करै छै, कैन्हॅ हुनकौ प्रसंस्करण करै छै आरो कैन्हॅ हुनका रूपान्तरित करै छै। बोध विज्ञानी केरौ लेली महत्व केरौ कुछ विषय सिनी ई छेकै- [[भाषा]], [[अवगम]] (perception), [[स्मृति]], [[ध्यान]] (attention), तर्कणा (reasoning), तथा [[संवेग]] (emotion)। हैय विषय सिनी क समझै केरौ लेली बोध विज्ञानी [[भाषाविज्ञान]], [[मनोविज्ञान]], [[कृत्रिम बुद्धि]], [[दर्शन]], [[तंत्रिका विज्ञान]] (neuroscience) तथा [[नृविज्ञान]] (anthropology) अरिन केरौ सहारा लै छै।
[[श्रेणी:विज्ञान]]
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