विकिपीडिया awawiki https://awa.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%A8_%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE MediaWiki 1.47.0-wmf.13 first-letter मीडिया खास बातचीत यूजर यूजर बातचीत विकिपीडिया विकिपीडिया बातचीत फाइल फाइल बातचीत मीडियाविकी मीडियाविकी बातचीत खाँचा खाँचा बातचीत मदद मदद बातचीत श्रेणी श्रेणी बातचीत TimedText TimedText talk मॉड्यूल मॉड्यूल वार्ता Event Event talk भारतेन्दु मिश्र 0 3270 36355 35678 2026-07-31T03:28:07Z CommonsDelinker 98 Removing [[:c:File:BhartenduMishra.jpg|BhartenduMishra.jpg]], it has been deleted from Commons by [[:c:User:Krd|Krd]] because: No license since 23 July 2026. 36355 wikitext text/x-wiki {{Infobox writer | name =भारतेंदु मिश्र | image = | imagesize = | alt = | caption = | birth_date = ५ नवंबर १९५९ | father = | mother = | death_date = १० अक्टूबर २०२५ | birth_place = [[लखनऊ]] [[उत्तर प्रदेश]] | occupation =कवि, कथाकार, आलोचक एवं लोकसाहित्य विशेषज्ञ | notableworks = पारो (गीत-नवगीत), कालाय तस्मै नमः (सतसई), अभिनवगुप्त पादाचार्य (खंडकाव्य) }} '''भारतेंदु मिश्र''' [[अवधी]] के यहि दौर के अहम गद्य लेखकन मा गिने जाति हैं। मिश्र जी का जनम ५ नवम्बर १९५९ का भा रहै। [[संस्कृत]] विषय मा एम. ए. करै के बादि उइ [[दिल्ली विश्वविद्यालय]] ते पी.एचडी. कीन्हेनि । ==प्रमुख रचना== '''कविता संग्रह- ''' * पारो(गीत-नवगीत) * कलाय तस्मै नम: (सतसई) * अभिनवगुप्तपादाचार्य(खंडकाव्य) * जुगलबन्दी(गीत/नवगीत संकलन के सी.डी.) * अनुभव की सीढी(भारतेन्दु मिश्र के गीत सर्जना-संपादन-डा.रश्मिशील) '''शोध समीक्षा- ''' *अमरुशतक का साहित्यशास्त्रीय अध्ययन(शोध समीक्षा/पाठालोचन) *भरतकालीन कलाएँ(शोध) *समकालीन छन्द्प्रसंग(नवें दशक के छन्दोबद्ध कविता केरि समीक्षा) *बलभद्र प्रसाद दीक्षित पढ़ीस *त्रिलोचन शास्त्री '''संपादित कृतियाँ- ''' *नवगीत एकादश सं.(ग्यारह नवगीतकारन क्यार संकलन) '''उपन्यास- ''' *कुलांगना *बालयोगी अष्टावक्र '''नाटक-''' *शास्त्रार्थ(नाटक) *मरे हुए लोग *लड़की की जात *दिल्ली चलो। '''कहानी संग्रह- ''' *खिडकी वाली सीट '''अवधी रचनाएँ- ''' *कस परजवटि बिसारी(अवधी कविता तथा ललित निबन्ध) *नई रोसनी (उपन्यास) *चन्दावती(उपन्यास) ===भारतेंदु मिश्र द्वारा लिखे अवधी उपन्यास चंदावती क अंश :-=== '''पहली किस्त:''' '''दादा केरि तेरही--''' '''ते'''रह बाँभन आय गे रहै। उनका अलग चउका लगावा गा रहै, नई तेरह धोती-अँगउछा-जनेऊ-थरिया-लोटिया-नए पाटा,तेरह तुलसी बाबा वाली रामायन के गुटका अउरु तेरह संख बजार ते मँगवाये गे रहै। आस पास कि जवार ते चुने भये तेरह बाँभन नेउते गे रहै। उनकी सकल देखतै बनि परति रहै-ग्वार सुन्दर चोटइयाधारी पंडित -चन्दन टीका लगाये,ई बिधि सजे रहै कि मानौ सीध-म-सीध सरगै ते उतरि के आए होंय । गाँव के भकुआ उनका आँखी फारि फारि द्याखै लाग।छोटकउनू महराज पीतर के थारा मा सबके पाँय धोयेनि,सिवपरसाद अउरु चन्दावती दायी  नये अँगउछा ते सबके पाँय पोछेनि। मोलहे उनका देखि कै सकटू ते कहेनि-‘ भाई,द्याखौ ई कतने सुघर पंडित आये है।आँखी जुडाय गयी,‘हाँ मोलहे भाई,किसमत अच्छी रहै हनुमान दादा केरि ई सब पंडित उनकी खातिर सरग केरि सीढी बनइहै।’ ‘ठीक कहति हौ भइया,उनका सरग जरूर मिली।देउता रहै हनुमान दादा,सब उनकी करनी का परताप है-बहुत बडे मनई रहै वइ।’  ‘ अब बँभनन ट्वाला मा कउनौ वइस नामी मनई नही बचा है।’ ‘हमतौ कहिति है दुइ -चारि- दस गाँवन मा वइस मनई ढूँडे न मिली।’ हवन क्यार धुआँ सब तन फैलि गवा रहै। अगियारि होयेके बादि संखु-घंटा बाजै लाग। लीपे- पोते आँगन मा तेरहौ बँभनन केरी चउकी सजाय दीन्ही गयी रहै। सब देउता,नौगिरह, गइया-कउआ-कूकुर -चीटी अउरु पंचतत्वन खातिर भोग लगाय दीन गा रहै । अब तेरहौ बाँभन जीमै लाग रहैं।‘वाह चन्दावती दायी,अतना बढिया इंतिजाम,अतना सुन्दर भोजन बरसन बादि मिला है।..हनुमान दादा केरि आत्मा सरग ते देखि रही है तुमका,--बहुत असीस दै रही होई ।’ तेरही वाले बँभनन क्यार मुखिया कहेसि।    चन्दावती केरी आँखी भरि आयीं।अपने अँचरे मा अपन मुँहु लुकाय लीन्हेनि।सब मौजूद मनई-मेहेरुआ तरह-तरह की बातै बनावै लाग रहैं। रामफल दादा दूरि बरोठे म बइठ रहैं। वइ सुरू हुइगे,भकुआ मुँहु फैलाय के सुनै लाग-‘प.रामदीन सुकुल उर्फ हनुमान दादा दौलतिपुर केरि नाक रहैं।उनका बडा पौरुखु रहै। दस-पाँच क्वास तके गाँव जवारि मा हनुमान दादा क्यार रुतबा रहै। दौलति पुर क्यार ई सबते बडे किसान रहैं। बसि इनहेन के दुआरे टक्टर ठाढ है।’  दौलतिपुर मा कोई पचास घर हुइहै। तेली,तम्बोली,नाऊ,कहार,धोबी,पासी,चमार,मुरऊ,ठाकुर जैसी सब जातिन क्यार घर दौलतिपुर मा है।गाँव मा बँभनन के कुल जमा तीनि घर रहैं। कउनौ पूँछेसि-‘केत्ती उमिरि रहै हनुमान दादा केरि?’ रामफल फिरि सुरू हुइगे-‘अबही मुसकिल ते पैसठ केरि उमिरि भइ होई हमते पाँच साल छोट रहैं बखत आय गवा सरग सिधार गे। नामी पहेलवान रहैं-तोहार हनुमान दादा। अपनी जवानी मा कुस्ती लडै जाति रहैं तौ सदा जीति कै आवति रहैं। दौलतिपुर केरि असल दौलति तौ हनुमान भइयै रहैं। जस-जस उनका पौरुखु घटा तस-तस गठिया उनका तंग करै लागि रहैं। बिचरऊ जवानी मा बिधुर हुइगे रहैं। तब चन्दावती ते उनका परेम हुइगा,वइ चन्दावती ते बिहाव कीन्हेनि औ वहिका मेहेरुआ केरि जगह दीन्हेनि , फिरि चन्दावती  सब तना उनके साथै तीस साल रहीं। चन्दावती उनकी बिरादरी कि न रहैं। तीस साल पहिले उनका परेम हुइगा रहै। हनुमान दादा बीस बिसुआ के कनवजिया औ चन्दावती गाँव कि तेलिनि। तबै चन्दावती क्यार गउना न भवा रहै। गाँव-म उनके मंसवा के मरै केरि खबर आयी रहै। चन्दावती वाकई-म चन्दै रहै। जो कोऊ याक दाँय द्याखै ऊ देखतै रहि जाय,बहुतै खबसूरत रहै चन्दावती।ऊ जमाना रहै जब दबंग बाँभन ठाकुर जउनि नीची जातिन केरि सुन्दरि बिटिया बहुरिया देखि लेति रहैं तौ वहिका जब चहै तब अपनी हवस क सिकार बनाय लेति रहै। तब गरीब परजन के घर की मेहेरुवन केरि कउनौ इज्जति न रहै।कउनौ कानून न रहै इनके ऊपर।चन्दावती के घरवाले चन्दावती के परेम ते बहुतै खुस भे रहै।’..... ‘ द्याखौ दादा सौ-सौ रुपया दच्छिना दीन जाय रहा है’ -मोलहे इसारा कीन्हेनि। ‘रामफल दादा समझायेनि- तेरहीवाले बाँभन आँय,इनका दुरिही ते पैलगी कीन्हेव। इनकी नजर ते बचिकै रहैक चही।‘ ’ सकटू पूछेनि -काहे दादा? ‘ ‘ तुम यार यकदमै बउखल हौ,हियाँ आये हौ तेरही खाय ,सवालन केरि झडी लगाय दीन्हेव।‘ ‘ सकटू भइया तुम तमाखू बनाओ-लेव चुनौटी पकरौ।‘ ’अबही तमाखू ?अब तौ भोजन के बादि तमाखू खायेव।‘ ’तमाखू कि महिमा तुम नही जानति हौ-सुनौ- कृष्न चले बैकुंठ को राधा पकरी बाँह |हियाँ तमाखू खाय लो हुआँ तमाखू नाहि।...कुछ समझ्यो,अबै टेम है, तब तक तमाखू बनि सकति है। जबतक खानदान के मान्य न खाय ले तबतक हमार नम्बर कइसे लागी।‘ ‘ठीक कहति हौ रामफल दादा।‘ ’कहिति तो हम ठीकै है,..... सुनति तो नही हौ। बनाओ। तमाखू बनाओ।‘ ‘तेरह बाँभन दान दच्छिना लइ कै चलि दीन्हेनि रहै।‘ महाबाँभन के पाँय छुइकै चन्दावती दायी अलग ते वहिका पाँच सौ रुपया दच्छिना दीन्हेनि। वहिकी आँखी चमकि गयी।वहु अपन दुनहू हाँथ ऊपर उठाय के आसिरबाद दीन्हेसि तीके तेरहौ बाँभन अपन हाथ उठाय कै आसीस दीन्हेनि। छोटकउनू महराज चाँदी की तस्तरी-म पान तमाखू ,इलायची,लौग लइकै आगे बढिकै सबका बिदा कीन्हेनि। दुइ ताँगा उनका लइ जाय खातिर पहिलेहे तयार रहै। दुनहू ताँगावाले भोजन कइ लीन्हेनि रहै। उनका केरावा दइ दीन गा रहै, अउरु घर की खातिर परसा बाँधि दीन गा रहै। तेरहौ बाँभन जब ताँगन-म बइठि लीन्हेनि-तब महाबाँभन के इसारे ते ताँगा हाँकि दीन गे। हनुमान दादा की तेरही-म ताँगन-म जुति कै आये दुनहू घोडवनौ केरि दाना- पानी-मेवा ते  खुब सेवा कीन गइ रहै,सो वहू मस्त हुइगे रहै। '''''धारावाहिक उपन्यास''''' '''किस्त दो :चन्दावती कि नींद''' बहुत थकि गय रहै चन्दावती।खटिया पर पहुडतै खन नीद आय गय-सब पुरानी बातै सनीमा तना यादि आवै लागीं।...तीस साल पहिले ,वहि दिन चन्दावती सकपहिता खातिर बथुई आनय गय रहै। गोहूँ के ख्यातन मा ई साल न मालुम कहाँ ते बथुई फाटि परी रहै। हाल यू कि जो नीके ते निकावा न जाय तौ पूरी गेहूँ कि फसल चौपट हुइ जाय। जाडे के दिन रहैं। उर्द कि फसल बढिया भइ रहै। चन्दावती अपनि लाल चुनरिया ओढे हनुमान दादा के ख्यात मा बथुई बिनती रहैं। हनुमान दादा अपने रहट पर कटहर के बिरवा के तरे हउदिया तीर बइठ रहैं। न चन्दावती उनका देखिस न वइ चन्दावती का। तब चन्दावती जवान रहै—सुन्दरी तो रहबै कीन। वहि दिन चन्दावती बथुई बीनै के साथ-अपनी तरंग मा जोर –जोर ते -नदि नारे न जाओ स्याम पइयाँ परी, नदि नारे जो जायो तो जइबै कियो बीच धारै न जाओ स्याम पइयाँ परी। बीच धारै जो जायो तो जइबे कियो ,वइ पारै न जाव स्याम पइयाँ परी। वइ पारै जो जायो तो जइबे कियो /सँग सवतिया न लाओ स्याम पइयाँ परी। -- यहै गाना गउती रहैं। हनुमान दादा तब हट्टे-कट्टे पहलवान रहैं। यहि गाना मा न मालुम कउनि बात रहै कि हनुमान दादा चन्दावती ते अपन जिउ हारिगे। जान पहिचान तो पहिलेहे ते रहै। गाँवन मा सब याक दुसरे के घर परिवार का बिना बताये जानि लेति है। वैसे कैइयो लँउडे वहिके पीछे परे रहै,लेकिन आजु हनुमान दादा वहिकी तरफ बढिगे ,जैसे राजा सांतनु जइसे मतसगन्धा की खुसबू ते वाहिकी वार खिंचि गये रहैं वही तना वहि बेरिया हनुमान दादा चन्दावती की तरफ खिंचिगे। युहु गाना उनका बहुतै नीक लागति रहै,जब चन्दावती गाना खतम कइ चुकी तब वहिके तीर पहुचि के पूछेनि- ‘को आय रे?’ चन्दावती सिटपिटाय गय।..फिरि सँभरि के बोली-‘पाँय लागी दादा, हम चन्दावती।’ ‘हमरे ख्यात मा का कइ रही हौ?’ ‘बथुई बीनिति है........’ ‘बीनि.... लेव।’ ‘बसि बहुति हुइगै सकपहिता भरेक...हुइगै ’ ‘अरे अउरु बीनि लेव। का तुमका बथुई खातिर मना कइ रहेन है।’ ‘बसि बहुति हुइगै’ ‘तुम्हारि गउनई बहुतै नीकि है,तुम्हार गाना सुनिकै तो हमार जिउ जुडाय गवा।' चन्दावती सरमाय गयीं,तिनुक नयन चमकाय के कहेनि- ‘कोऊ ते कहेव ना दादा!’ ‘काहे?’ ‘तुम तौ सबु जानति हौ,बेवा मेहेरुआ कहूँ गाना गाय सकती हैं।..हम तौ बाल-बिधवा हन। ...का करी भउजी जउनु बतायेनि वहै करिति है।’ ‘अउरु का बतायेनि रहै भउजी?’  ‘ सुर्ज बूडै वाले हैं।..अबही रोटी प्वावैक है। हमरे दद्दू का हमरेहे हाथे कि पनेथी नीकि लागति है।..कबहूँ फुरसत म बतइबे....,अच्छा पाँय लागी।’                चन्दावती चली गय ,लेकिन राम जानै का  भवा वहिका गाना- नदि नारे न जाओ...हनुमान दादा के करेजे मा कहूँ भीतर तके समाय गवा रहै। बडी देर तके वइ वहै गाना मनहेम  बार बार दोहरावति रहे। रेडियो के बडे सौखीन रहै। चहै ख्यात मा जाँय, चहै बाग मा ट्रांजिस्टर अक्सर अपने साथै लइ कै चलैं। आजु चन्दावती क्यार गाना उनका बेसुध कइगा ,रेडियो पर वइ यहै गाना सैकरन दफा सुनि चुके रहैं तेहूँ चन्दावती के गावै के तरीके मा कुछु अलगै नसा रहै जो जादू करति चला गवा। सोने जस वहिका रंगु ती पर लाल चुनरी ओढिके वा हरे भरे गोंहू के ख्यात मा बइठि बथुई बीनति रहै, मालुम होति रहै मानौ कउनिव सरग कि अपसरा उनके ख्यात मा उतरि आयी है। खुबसूरत तो चन्दावती रहबै कीन रंगु रूपु अइस कि बँभनन ठकुरन के घर की सबै बिटिया मेहेरुआ वहिके आगे नौकरानी लागैं,बसि यू समझि लेव कि पूरे दौलतिपुर मा वसि सुन्दरी बिटेवा न रहै तब। अब वहिके घरमा तेलु प्यारै क्यार खानदानी काम सबु खतम हुइगा रहै बिजुली वाला कोल्हू बगल के गाँव सुमेरपुर मा लागि गवा रहै। अब चन्दावती के दद्दू मँजूरी करै लाग रहैं।दुइ बिगहा खेती मा गुजारा मुस्किल हुइगा रहै। तेहू भइसिया के दूध ते चन्दावती के घरमा खाय पियै की बहुत मुस्किल न रहै।   सुमेरपुर मा चन्दावती बेही गयी रहैं मुला किस्मति क्यार खेलु द्याखौ अबही गउनव न भा रहै कि चन्दावती क्यार मंसवा हैजा-म खतम हुइगा। बडी दौड-भाग कीन्हेनि लखनऊ के मेडिकल कालिज तके लइगे लेकिन वहु बचि न पावा। फिरि ससुरारि वाले कबहूँ चन्दावती क्यार गउना न करायेनि याक दाँय चन्दावती के दद्दू सुमेरपुर जायके बिनती कीन्हेनि तेहूँ कुछु बात न बनी।चन्दावती के ससुर साफ-साफ कहेनि –‘संकर भइया, तुम्हार बहिनिया मनहूस है..बिहाव होतै अपने मंसवा का खायगै,..वहिते अब हमार कउनौ सरबन्ध नही है। हमरे लेखे हमरे लरिकवा के साथ यहौ रिस्ता मरिगवा। ’ चन्दावती के दद्दू बुढवा के बहुत हाथ पाँय जोरेनि लेकिन वहु टस ते मस न भवा। आखिरकार चन्दावती अपने मइकेहेम रहि गयीं,बाल बिधवा के खातिर अउरु कउनौ सहारा न रहै। गाँव कि बडी बूढी चन्दावती –क मनहूस कहै लागी रहैं, लेकिन खुसमिजाज रहै चन्दा। बिधवा जीवन के दुख ते यकदम अंजान ,अबही वहिकी लरिकई वाले सिकडी-गोट्टा-छुपी-छुपउव्वल ख्यालै वाले दिन रहै। अबही जवानी चढि रही रहै । बिहाव तो हुइगा रहै-मुला पति परमेसुर ते संपर्क न हुइ पावा रहै। हियाँ गाँव कि गुँइयन के साथ चन्दा मगन रहै। हुइ सकति है अकेलेम बइठिके रोवति होय,लेकिन गाँवमा कोऊ वहिका रोवति नही देखिसि। संकर अपनी बहिनी का बडे दुलार ते राखति रहैं। संकर कि दुलहिनि चन्दा ते घर के कामकाज करावै लागि रहै। चन्दा दौरि-दौरि सब काम करै लागि रहै। समझदार तौ वा रहबै कीन। जउनी मेहेरुआ वहिते चिढती रहैं वइ चन्दा क्यार नाव बिगारि दीन्हेनि रहै। कउनौ चंडो कहै,कउनौ रंडो कहै तो कउनिव बुढिया रंडो चंडो नाव धरि दीन्हेसि रहै। दौलतिपुर मा नाव धरै केरि यह पुरानि परंपरा आय। बहरहाल चन्दावती कहै सुनै कि फिकिर न करति रहै, वा खुस रहै।  दुसरे दिन हनुमान दादा संकर का बोलवायेनि। संकर घबराय गे ,काहेते वहु दादा ते एक हजार रुपया कर्जु लीन्हेसि रहै। संकर सकुचाति भये हनुमान दादा तीर पहुँचे।हनुमान दादा अपने चौतरा पर बइठ रहैं। ‘ दादा पाँय लागी।’ ‘खुस रहौ।आओ,संकर! आओ।...कहौ का हाल चाल ?’      ‘तुमरी किरपा ते सबु ठीक चलि रहा है।’ ‘चन्दा के ससुरारि वाले का कहेनि?’ ‘बुढवा कहेसि हमरे लरिका के साथै यह रिस्तेदारी खतम हुइगै।’ ‘हाँ वहौ ठीक कहति है-जब जवान लरिका मरि गवा तो फिरि बहुरिया का घर मा कइसे राखै, चन्दा क्यार गउना?’  गउना कहाँ हुइ पावा रहै दादा।...गउने केरि सब तयारी कइ लीन रहै...कर्जौ हुइगा लेकिन चन्दा केरि किस्मति फूटि गय...का करी दादा।’ ‘परेसान न हो संकर! जउनु सबु बिधाता स्वाचति है,तउनु करति है।तुलसी बाबा कहेनि है-होइहै सोइ जो राम रचि राखा.. ’ ‘ठीकै कहति हौ दादा!..लेकिन अब हमरे ऊपर बहुति बडी जिम्मेदारी आय गय है।...अब तुमते का छिपायी दादा,..गाँव के कुछु सोहदे हमरी चन्दा कि ताक झाँक मा रहति हैं।..अब हम का करी,वहिका रूपुइ अइस है कि .. ’ ‘यह तौ अच्छी बात है...कोई ठीक लरिका होय तौ...चन्दा क्यार दुबारा बिहाव करि देव।’ ‘बिहाव करै वाला कउनौ नही है..सब मउज ले वाले है..बेवा ते बिहाव को करी?बडकऊ तेवारी क्यार कमलेस,मिसिरन क्यार बिनोद ई दुनहू चन्दावती के चक्कर मा हैं।’ ‘..इनके दुनहू के तौ बिहाव हुइ चुके हैं..दुनहू लरिका मेहेरुआ वाले हैं।’ ‘यहै तौ..का बताई?...कुछु समझिम नही आवति..’ हमरी मदति कि जरूरति होय तो बतायो..तुम कहौ तो तेवारी औ मिसिर ते बात करी।’ ‘नाही दादा!..बात-क बतंगडु बनि जायी। चन्दा कि बदनामिव होई सेंति मेति,......कोई अउरि जतन करैक परी।’ ‘या बात तो ठीक कहति हौ,संकर!..न होय तौ कहूँ अउरु दूसर बिहाव कइ देव।’ ‘याक दाँय क्यार कर्जु तौ अबहीं निपटि नही पावा है।...फिरि जो हिम्मति करबौ करी तो दूसर लरिका कहाँ धरा है।’ ‘कोई ताजुब नही है कि हमरी तना कउनौ बिधुर मिलि जाय।’ ‘तुमरी तना कहाँ मिली..?’ ‘काहे?’ ‘अरे कहाँ तुम बाँभन देउता, कहाँ हम नीच जाति तेली।’ ‘बात तो ठीक है लेकिन हमका कउनौ एतराज नही है।.जब हमरे घरमा वुइ बेमार रहै तब मालिस करै तुमरी दुलहिन के साथ चन्दा आवति रहै। हमका वा तबहे ते बडी नीकि  लागति है,कबहूँ कोऊ ते कहा नही हम आजु तुमते बताइति है।...द्याखौ परेसानी तो हमहुक बहुति होई।.....लेकिन जउनु होई तउनु निपटा जायी।....पहिले तुम चन्दावती क्यार मनु लइ लेव,अपने घर मा राय मिलाय लेव। फिरि दुइ-तीन दिन मा जइस होय हमका चुप्पे बतायो।’ ‘तुम्हार जस नीक मनई-बाँभन, हमका दिया लइकै ढूढे न मिली,यू तौ हम गरीब परजा पर बहुत उपकार होई।’ ‘साफ बात या है कि तुमरी चन्दावती हमहुक बहुत नीकी लगती हैं...लेकिन अबहीं कोऊ गैर ते यह बात न कीन्हेव।’ ‘ठीक है दादा।..पाँय लागी..’ ‘खुस रहौ।..चन्दावती कि राय जरूर लइ लीन्हेव।’ ‘ठीक है..’संकर मनहिम अपनि खुसी दबाये अपने घर की राह लीन्हेनि। संकर कमीज के खलीता ते बीडी निकारेनि तनिक रुकिकै बीडी सुलगायेनि औ खुसी की तरंग मा फिरि घर की तरफ चलि दीन्हेनि। आजु वहिके पाँव सीधे न परि रहे रहैं। == बाहर के कड़ियाँ == * [http://awadh.org/2014/03/19/%E0%A4%9B%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%B8-%E0%A4%89%E0%A4%A0%E0%A5%80/ छपरा कस उठी!] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140818004807/http://awadh.org/2014/03/19/%e0%a4%9b%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b8-%e0%a4%89%e0%a4%a0%e0%a5%80/ |date=2014-08-18 }} [[श्रेणी:जीवनी]] [[श्रेणी:अवधी कवि]] okg5ak0p03b0v0mpvmtd6p3rd8nwibp सिकंदरपुर सरोसी 0 9863 36354 35413 2026-07-31T03:28:04Z CommonsDelinker 98 Removing [[:c:File:BDO_Office_Sarosi.jpg|BDO_Office_Sarosi.jpg]], it has been deleted from Commons by [[:c:User:Krd|Krd]] because: No license since 23 July 2026. 36354 wikitext text/x-wiki {{Infobox settlement | name =सिकंदरपुर सरोसी | native_name = | native_name_lang = | other_name = | nickname = | settlement_type =सामुदायिक विकास खंड | image_skyline = | image_alt = | image_caption = | image_map = Sikandarpur Sarausi block map.png | map_caption = Map of Sikandarpur Sarausi CD block | pushpin_map = India Uttar Pradesh | pushpin_label_position = right | pushpin_map_alt = | pushpin_map_caption = Location in Uttar Pradesh, India | coordinates = | subdivision_type =देस | subdivision_name = {{flag|भारत }} | subdivision_type1 = [[States and territories of India|राज्य]] | subdivision_name1 = [[उत्तर प्रदेश]] | subdivision_type2 = [[List of districts of India|जिला]] | subdivision_name2 = [[Unnao district|उन्नाव]] | established_title = <!-- Established --> | established_date = | founder = | named_for = | government_type = | governing_body = | unit_pref = Metric | area_footnotes = <ref name="Census 2011"/> | area_rank = | area_total_km2 = | elevation_footnotes = | elevation_m = | population_total = 185,779 | population_as_of = 2011 | population_rank = | population_density_km2 = auto | population_demonym = | population_footnotes = <ref name="Census 2011"/> | demographics_type1 =भाषा | demographics1_title1 =आधिकारिक | demographics1_info1 = [[Hindi language|हिंदी]] | demographics1_title2 =अन्य | demographics1_info2 = [[अवधि language|अवधी]] ([[बैसवारी]]) | timezone1 = [[Indian Standard Time|IST]] | utc_offset1 = +5:30 | postal_code_type = [[Postal Index Number|PIN]] | postal_code = | registration_plate = UP-35 | website = | footnotes = }} '''सिकंदरपुर सरोसी''' [[भारत|भारत देश]] के [[उत्तर प्रदेश]] के उन्नाव जिला की उन्नाव तहसील का एक सामुदायिक विकास खण्ड आय । <ref name="Census 2011">{{Cite web |title=Census of India 2011: Uttar Pradesh District Census Handbook - Unnao, Part A (Village and Town Directory) |url=https://censusindia.gov.in/2011census/dchb/UPA.html |access-date=5 July 2021 |website=Census 2011 India |pages=35-54, 262-79}}</ref> यहिमा कुल 96 गाँव हैं, जिनके कुल आबादी 185,779 है। <ref name="Census 2011" /> == गाँवन के सूची== सिकंदरपुर सरोसी सामुदायिक विकास खंड (CD block) मा निम्नलिखित 96 गाँव शामिल हैं:<ref name="Census 2011"/> {| class="wikitable sortable" |- ! गाँव क नाम ! कुल रकबा (हेक्टेयर) ! जनसंख्या (2011 मा) |- | [[कटरी सलेमपुर बिठूर]] || 13.6 || 0 |- | [[कटरी मरौंदा सुचित]] || 382.8 || 0 |- | [[मरौंदा सुचित]] || 568.2 || 2,810 |- | [[मरौंदा मझवारा]] || 451.7 || 3,423 |- | [[सैदापुर, सिकंदरपुर सरौसी|सैदापुर]] || 273.8 || 882 |- | [[परियर]] || 2,105 || 7,363 |- | [[कटरी मरौंदा मझवारा]] || 598.6 || 1,140 |- | [[कटरी परियर]] || 930.8 || 1,033 |- | [[बहरौला]] || 213.8 || 1,859 |- | [[कटरी बहरौला]] || 212.5 || 929 |- | [[कटरी रामपुर]] || 94.9 || 0 |- | [[रामपुर, सिकंदरपुर सरौसी|रामपुर]] || 106.8 || 498 |- | [[अतरी]] || 285 || 1,027 |- | [[बढ़ली]] || 158.9 || 571 |- | [[सादमपुर]] || 85.9 || 1,212 |- | [[मुबारकपुर, सिकंदरपुर सरौसी|मुबारकपुर]] || 38.3 || 378 |- | [[बिलारी गोज्हा]] || 54 || 971 |- | [[मोमिनपुर]] || 133.8 || 1,260 |- | [[फैजपुर सादेरा]] || 115 || 913 |- | [[भदेउना]] || 827 || 5,941 |- | [[पियारेपुर]] || 447.7 || 1,503 |- | [[बुलंदपुर]] || 191.1 || 1,688 |- | [[जगदीशपुर, सिकंदरपुर सरौसी|जगदीशपुर]] || 389.8 || 1,836 |- | [[ऐरा भदियार]] || 656.2 || 3,783 |- | [[नागवा, सिकंदरपुर सरौसी|नागवा]] || 298.1 || 958 |- | [[परमानी]] || 384 || 1,304 |- | [[सथरा]] || 768.3 || 3,784 |- | [[अमलोना]] || 30.2 || 491 |- | [[इशूनिया]] || 252.4 || 2,615 |- | [[दमगढी]] || 90.5 || 812 |- | [[कंजौरा]] || 424.2 || 3,123 |- | [[बंदाखेड़ा]] || 460.3 || 3,071 |- | [[रौकरना]] || 1,077.2 || 8,705 |- | [[तालिब नगर, उन्नाव|तालिब नगर]] || 141 || 259 |- | [[बौनामऊ]] || 318 || 3,890 |- | [[पुरानिस्फ पंसारी]] || 768.6 || 4,692 |- | [[पतियारा]] || 205.5 || 992 |- | [[अकबरपुर डबौली]] || 270 || 2,382 |- | [[थाना, उन्नाव|थाना]] || 901.4 || 7,423 |- | [[भटवान]] || 258.9 || 2,189 |- | [[सरोसी]] || 564.3 || 4,920 |- | [[सुल्तानपुर ग्रांट]] || 145.9 || 676 |- | [[पटारी, सिकंदरपुर सरौसी|पटारी]] || 972.3 || 8,330 |- | [[राजे पुर]] || 274.9 || 2,777 |- | [[दोस्तीनगर]] || 325.7 || 3,236 |- | [[सैयद अब्बास पुर]] || 248.3 || 1,802 |- | [[सिकंदरपुर, सिकंदरपुर सरोसी|सिकंदरपुर]] || 557.9 || 4,510 |- | [[अर्झोरा मऊ]] || 167.6 || 942 |- | [[कंजौरा]] || 62.5 || 337 |- | [[हफीजाबाद]] || 255.7 || 1,420 |- | [[चिलौला]] || 419.8 || 2,899 |- | [[सिहुरा]] || 592.8 || 1,022 |- | [[सिलाउली गढ़ी]] || 211.5 || 971 |- | [[गंगौली]] || 184.1 || 1,492 |- | [[कनिकामऊ]] || 185.4 || 860 |- | [[भतपुरवा]] || 21.6 || 361 |- | [[लालूपुर]] || 258.1 || 758 |- | [[कटरी बसधना]] || 578.6 || 0 |- | [[बसधना]] || 245.1 || 1,564 |- | [[हाजीपुर, उन्नाव|हाजीपुर]] || 450.1 || 2,162 |- | [[अगेहरा]] || 523.5 || 2,095 |- | [[रौतापुर]] || 246.4 || 3,389 |- | [[कटरी रौतापुर]] || 335.4 || 0 |- | [[मिर्जापुर, उन्नाव|मिर्जापुर]] || 136.4 || 848 |- | [[कटरी मिर्जापुर]] || 320.2 || 0 |- | [[सन्नी, उन्नाव|सन्नी]] || 344.5 || 1,965 |- | [[शंकरपुर सराय]] || 507.2 || 4,195 |- | [[पिपरी, सिकंदरपुर सरौसी|पिपरी]] || 210.3 || 1,594 |- | [[कन्हावापुर]] || 126.8 || 313 |- | [[पहाड़ीपुर, उन्नाव|पहाड़ीपुर]] || 117.9 || 0 |- | [[मनभौना]] || 174.7 || 437 |- | [[हरिहरपुर गैर एहतमाली]] || 143.4 || 0 |- | [[खैराहा गैर एहतमाली]] || 62.7 || 0 |- | [[सरैया, सिकंदरपुर सरौसी|सरैया]] || 137 || 1,167 |- | [[खैराहा एहतमाली]] || 119.2 || 656 |- | [[लखमी खेड़ा]] || 104.1 || 343 |- | [[हरिहरपुर एहतमाली]] || 293 || 0 |- | [[नेतुआ]] || 32.6 || 6,300 |- | [[मुस्तफापुर, उन्नाव|मुस्तफापुर]] || 71.4 || 628 |- | [[बनी, उन्नाव|बनी]] || 166.2 || 2,190 |- | [[पिंडोरवा]] || 287 || 1,842 |- | [[बेहटा]] || 218.2 || 2,619 |- | [[देवारा कलां]] || 652.8 || 6,317 |- | [[देवारा खुर्द]] || 169.2 || 1,030 |- | [[खटाई, उन्नाव|खटाई]] || 182.5 || 1,385 |- | [[ख्वाजगीपुर]] || 826.7 || 7,619 |- | [[सलेमपुर, सिकंदरपुर सरौसी|सलेमपुर]] || 172.6 || 3,422 |- | [[चौरा, उन्नाव|चौरा]] || 282.3 || 2,445 |- | [[फ़तेहुल्ला नगर]] || 78.8 || 1,531 |- | [[लोहार खेड़ा]] || 86.7 || 536 |- | [[बरबत, उन्नाव|बरबत]] || 201.6 || 1,253 |- | [[अकरमपुर]] || 282.1 || 378 |- | [[सिंगरौसी]] || 422 || 533 |} ==संदर्भ== mplora7n9kiqxrktlivx6lubmkg8nse बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय क्यार कुलगीत 0 10258 36353 36129 2026-07-31T03:22:40Z CommonsDelinker 98 Removing [[:c:File:BHU_Kulgeet.ogg|BHU_Kulgeet.ogg]], it has been deleted from Commons by [[:c:User:Krd|Krd]] because: No permission since 23 July 2026. 36353 wikitext text/x-wiki {{Infobox गान | लिप्यंतरण = मधुर मनोहर अतीव सुंदर | शीर्षक = | अंग्रेज़ी_शीर्षक = | चित्र = BHU Logo with Tagline.png | चित्र_आकार = 180 | चित्र_विवरण = | संस्था_या_देश = [[काशी हिन्दू विश्वविद्यालय]] | उपसर्ग = | प्रकार = कुलगीत | गीतकार = [[शांति स्वरूप भटनागर]] | संगीतकार = [[ओंकारनाथ ठाकुर|पं. ओंकारनाथ ठाकुर]] | ध्वनि = | ध्वनि_शीर्षक = दीक्षांत समारोह 2024 मा कुलगीत क गायन }} '''काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलगीत''' के रचना भारतीय रसायनशास्त्री शांति स्वरूप भटनागर द्वारा कीन गै रहै, जब उइ हियाँ पर आचार्य के रूप मा सेवारत रहैं।<ref>{{Cite web |title=Dr. Shanti Swarup Bhatnagar Death Anniversary : बीएचयू ने देश को दिया था रिसर्च लैबोरेटरी का जनक |url=https://www.jagran.com/uttar-pradesh/varanasi-city-dr-shanti-swarup-bhatnagar-death-anniversary-bhu-gave-country-father-of-research-laboratory-jagran-special-21223957.html |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20211231130553/https://www.jagran.com/uttar-pradesh/varanasi-city-dr-shanti-swarup-bhatnagar-death-anniversary-bhu-gave-country-father-of-research-laboratory-jagran-special-21223957.html |archive-date=31 December 2021 |access-date=2021-12-31 |website=Dainik Jagran |language=hi}}</ref> <ref>{{Cite web |date=2019-01-01 |title=Shanti Swarup Bhatnagar, a petroleum luminary who fired up India's science & tech pursuit |url=https://theprint.in/theprint-profile/shanti-swarup-bhatnagar-a-petroleum-luminary-who-fired-up-indias-science-tech-pursuit/171129/ |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20211231130552/https://theprint.in/theprint-profile/shanti-swarup-bhatnagar-a-petroleum-luminary-who-fired-up-indias-science-tech-pursuit/171129/ |archive-date=31 December 2021 |access-date=2021-12-31 |website=ThePrint |language=en-US}}</ref> <ref>{{Cite web |title=काशी हिंदू विश्वविद्यालय का कुलगीत – डॉ. शांति स्वरूप भटनागर – नवनीत हिंदी |url=https://www.navneethindi.com/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%82-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF/ |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20220125021627/http://www.navneethindi.com/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%82-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF/ |archive-date=25 January 2022 |access-date=2022-01-17 |website=www.navneethindi.com}}</ref> यहिका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर औ महान संगीतकार पं. ओंकार नाथ ठाकुर जी संगीतबद्ध कीन्हेनि रहैं। विश्वविद्यालय मा या प्रथा है कि कउनो आधिकारिक कार्यक्रम शुरू होए ते पहिले ई गीत का समूह गान कीन जात है। <ref>{{Cite web |title=BHU में पाकिस्तान समर्थक अल्लामा की तस्वीर पर हंगामा:उर्दू विभाग ने इनविटेशन कार्ड से मदन मोहन मालवीय की फोटो हटा दी, भड़के छात्र |url=https://www.bhaskar.com/local/uttar-pradesh/varanasi/news/students-furious-over-the-photo-of-allama-a-supporter-of-two-nation-in-place-of-malviya-ji-in-the-urdu-department-in-varanasi-professors-dont-even-sing-kulgeet-129101498.html?ref=inbound_More_News |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20211111024030/https://www.bhaskar.com/local/uttar-pradesh/varanasi/news/students-furious-over-the-photo-of-allama-a-supporter-of-two-nation-in-place-of-malviya-ji-in-the-urdu-department-in-varanasi-professors-dont-even-sing-kulgeet-129101498.html?ref=inbound_More_News |archive-date=2021-11-11 |website=[[Dainik Bhaskar]]}}</ref> <ref>{{Cite web |date=2021-11-15 |title=राजस्थान के राजभवन में गूंजा BHU का कुलगीत: वाराणसी के दीन दयाल पीठ की 17 किताबों का राज्यपाल कलराज मिश्र ने किया लोकार्पण |url=https://www.bhaskar.com/local/uttar-pradesh/varanasi/news/governor-kalraj-mishra-inaugurated-17-books-of-deen-dayal-peeth-of-varanasi-129120198.html?ref=inbound_More_News |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20211231130552/https://www.bhaskar.com/local/uttar-pradesh/varanasi/news/governor-kalraj-mishra-inaugurated-17-books-of-deen-dayal-peeth-of-varanasi-129120198.html?ref=inbound_More_News |archive-date=31 December 2021 |access-date=2021-12-31 |website=Dainik Bhaskar |language=hi}}</ref> <ref>{{Cite web |date=2021-11-09 |title=Row erupts over photo of 'Sare Jahan Se Accha' writer in BHU |url=https://www.hindustantimes.com/india-news/row-erupts-over-photo-of-sare-jahan-se-accha-writer-in-bhu-101636482550507.html |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20220104063215/https://www.hindustantimes.com/india-news/row-erupts-over-photo-of-sare-jahan-se-accha-writer-in-bhu-101636482550507.html |archive-date=4 January 2022 |access-date=2022-01-04 |website=Hindustan Times |language=en}}</ref> <ref>{{Cite web |title=BHU: कला संकाय के युवा महोत्सव में दिखी विभिन्न राज्यों की संस्कृति, VIDEO |url=https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/varanasi/story-bhu-culture-of-various-states-seen-in-youth-festival-of-faculty-of-arts-video-3003785.html |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20230419033442/https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/varanasi/story-bhu-culture-of-various-states-seen-in-youth-festival-of-faculty-of-arts-video-3003785.html |archive-date=19 April 2023 |access-date=2022-02-11 |website=Hindustan |language=hindi}}</ref> ई कवितक आखिरी छंद विश्वविद्यालय के संस्थापक मालवीय जी का समर्पित है। विश्वविद्यालय के टैगलाइन "सर्व विद्या की राजधानी" यही के याक पंक्ति आय। <ref>{{Cite web |title=Microsoft Word - Executive Summary |url=https://www.bhu.ac.in/RAR/ExecutiveSummary.pdf |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20140326094912/http://bhu.ac.in/RAR/ExecutiveSummary.pdf |archive-date=2014-03-26}}</ref> <ref>{{Citation|title=Graphic Identity of Brand BHU|url=https://intranet.bhu.ac.in/BHU%20LOGO%20March%2014Com%20Center/GAD%20Not.pdf|pages=13|publication-date=13 November 2013|type=BHU Act & Statues|archive-url=https://web.archive.org/web/20211112125507/http://intranet.bhu.ac.in/BHU%20LOGO%20March%2014Com%20Center/GAD%20Not.pdf|archive-date=12 November 2021}}</ref> == गीत == {| class="wikitable" ! हिन्दी ! रोमन लिप्यंतरण ! आधिकारिक अंग्रेजी अनुवाद |- | मधुर मनोहर अतीव सुन्दर, यह सर्वविद्या की राजधानी। | Madhur manohar ateev sundar, yeh sarvvidya ki rajdhani. | So sweet, serene, infinitely beautiful,<br />This is the presiding center of all learning. |- | यह तीन लोकों से न्यारी काशी,<br />सुज्ञान धर्म और सत्यराशी॥<br />बसी है गंगा के रम्य तट पर, यह सर्वविद्या की राजधानी।<br />मधुर मनोहर अतीव सुन्दर, यह सर्वविद्या की राजधानी॥ | Yeh teen lokon se nyari kashi,<br />Sugyan dharm aur satyarashi.<br />Basi hai ganga ke ramya tat pr, yeh sarvvidya ki rajdhani.<br />Madhur manohar ateev sundar, yeh sarvvidya ki rajdhani. | Radiant Kashi, wonder of the three worlds,<br />Treasure-Chest of Jnana, Dharma and Satya.<br />Nesting on Ganga's bank, center of all disciplines.<br />(So sweet, serene, infinitely beautiful) |- | नये नहीं हैं ये ईंट पत्थर,<br />है विश्वकर्मा का कार्य सुन्दर॥<br />रचे हैं विद्या के भव्य मन्दिर, यह सर्वसृष्टि की राजधानी।<br />मधुर मनोहर अतीव सुन्दर, यह सर्वविद्या की राजधानी॥ | Naye nahi hain ye eent pathar,<br />Hai vishwakarma ka karya sundar.<br />Rachein hain vidya ke bhavya mandir, yeh sarvsrishti ki rajdhani.<br />Madhur manohar ateev sundar, yeh sarvvidya ki rajdhani. | No recent work of brick and stone,<br />Primordial design of divinity alone.<br />Mansions of Vidya, center of all creation.<br />(So sweet, serene, infinitely beautiful) |- | यहाँ की है यह पवित्र शिक्षा,<br />कि सत्य पहले फिर आत्म-रक्षा॥<br />बिके हरिश्चन्द्र थे यहीं पर, यह सत्यशिक्षा की राजधानी।<br />मधुर मनोहर अतीव सुन्दर, यह सर्वविद्या की राजधानी॥ | Yahan ki hai yeh pavitra siksha,<br />Ki satya pahle phir aatm-raksha.<br />Bike harischandra yahin par, yeh satyasiksha ki rajdhani.<br />Madhur manohar ateev sundar, yeh sarvvidya ki rajdhani. | Clear here is the doctrine pure,<br />Truth first, then only one's self.<br />Home of Harishchandra, Truth's testing ground.<br />(So sweet, serene, infinitely beautiful) |- | वह वेद ईश्वर की सत्यवाणी,<br />बनें जिन्हें पढ़ के ब्रह्मज्ञानी॥<br />थे व्यास जी ने रचे यहीं पर, यह ब्रह्म-विद्या की राजधानी।<br />मधुर मनोहर अतीव सुन्दर, यह सर्वविद्या की राजधानी॥ | Weh ved ishwar ki satyavani,<br />Bane jinhe padh ke brahmgyani.<br />They vyas ji ne rache yahin par, yeh brahm-vidya ki rajdhani.<br />Madhur manohar ateev sundar, yeh sarvvidya ki rajdhani. | The voice of God in Vedic record,<br />Constant inspiration for soul-accord.<br />Work-shop of Veda Vyasa, center for Brahma Vidya.<br />(So sweet, serene, infinitely beautiful) |- | वह मुक्तिपद को दिलाने वाले,<br />सुधर्म पथ पर चलाने वाले॥<br />यहीं फले-फूले बुद्ध, शंकर, यह राज-ऋषियों की राजधानी।<br />मधुर मनोहर अतीव सुन्दर, यह सर्वविद्या की राजधानी॥ | Weh muktipad ko dilane wale,<br />Sudharm path par chalane waale.<br />Yahi phale phule buddh shankar, yeh raaj-rishiyon ki rajdhani.<br />Madhur manohar ateev sundar, yeh sarvvidya ki rajdhani. | Find here the steps of freedom,<br />Tread here the path of Dharma.<br />Flaming trail of Buddha and Shankara, center for philosopher-kings.<br />(So sweet, serene, infinitely beautiful) |- | सुरम्य धाराएँ वरूणा अस्सी,<br />नहाये जिनमें कबीर तुलसी॥<br />भला हो कविता का क्यों न आकर, यह वाग्विद्या की राजधानी।<br />मधुर मनोहर अतीव सुन्दर, यह सर्वविद्या की राजधानी॥ | Suramya dharayain varuna assi,<br />Nahaye jinme kabir tulsi.<br />Bhala ho kavita ka kyo na aakar, yeh vaagvidya ki rajdhani.<br />Madhur manohar ateev sundar, yeh sarvvidya ki rajdhani. | Life-giving waters of Varuna and Assi,<br />Sustenance of Kabir and Tulsi.<br />Fountainhead of eloquent speech and poetry.<br />(So sweet, serene, infinitely beautiful) |- | विविध कला अर्थशास्त्र गायन,<br />गणित खनिज औषधि रसायन॥<br />प्रतीचि-प्राची का मेल सुन्दर, यह विश्वविद्या की राजधानी।<br />मधुर मनोहर अतीव सुन्दर, यह सर्वविद्या की राजधानी॥ | Vividh kala arthsahstra gayan,<br />Ganit khanij ausadhi rasayan.<br />Pratichi-prachi ka mel sundar, yeh vishwavidya ki rajdhani.<br />Madhur manohar ateev sundar, yeh sarvvidya ki rajdhani. | Music, Economics, other arts so many,<br />Maths, Mining, Medicine and Chemistry.<br />Fraternal forum of East and West, university in true sense.<br />(So sweet, serene, infinitely beautiful) |- | यह मालवीय जी की देशभक्ति,<br />यह उनका साहस यह उनकी शक्ति॥<br />प्रगट हुई है नवीन होकर, यह कर्मवीरों की राजधानी।<br />मधुर मनोहर अतीव सुन्दर, यह सर्वविद्या की राजधानी॥ | Yeh malviya ji ki deshbhakti,<br />Yeh unka saahas, ye unki shakti.<br />Pragat hui hai naveen hokar, yeh karmveero ki rajdhani.<br />Madhur manohar ateev sundar, yeh sarvvidya ki rajdhani. | Patriotism of Malviyaji,<br />His intrepidity and energy.<br />All in youthful manifestation, center for men of action.<br />(So sweet, serene, infinitely beautiful) |} == आचार संहिता == ''कुलगीत'' का विश्वविद्यालय मा सामूहिक रूप ते गावा जात है, अकेले बहुत कम गावा जात है। सम्मान के तौर पर ''कुलगीत'' के बादि तारी नहीं बजाई जाति है। <ref>{{Cite AV media|url=https://www.youtube.com/watch?v=gsw0rYke3dM|title=PM Modi at Centenary Year Convocation of the Banaras Hindu University, Varanasi|date=22 Feb 2016|last=Modi|first=Narendra|type=Videotape|language=Sanskrit, Hindi|access-date=14 May 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20220514185333/https://www.youtube.com/watch?v=gsw0rYke3dM|archive-date=14 May 2022}}</ref> पं॰ ओंकारनाथ ठाकुर कै संगीत रचना यहिके आधिकारिक रचना है। <ref>{{Cite web |title=BHU Kulgeet |url=https://www.bhu.ac.in/kulgeet.htm#:~:text=Anthem%20Madhur%20Monohar%20............-,DOWNLOAD%20MUSIC,-NOTICE |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20221003213407/https://www.bhu.ac.in/kulgeet.htm#:~:text=Anthem%20Madhur%20Monohar%20............-,DOWNLOAD%20MUSIC,-NOTICE |archive-date=3 October 2022 |access-date=2022-05-14 |website=www.bhu.ac.in}}</ref> कउनो आधिकारिक लंबाई निर्धारित नहीं है, लेकिन आधिकारिक रचना मा आमतौर पर लगभग चार मिनट अउर तीस सेकंड लागति हैं। <ref>{{Cite AV media|url=https://www.youtube.com/watch?v=02YIezQM210|title=KULGEET OF BHU|last=Tiwari|first=Vaibhav|type=Videotape|language=hi|access-date=14 May 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20220514185326/https://www.youtube.com/watch?v=02YIezQM210&gl=US&hl=en|archive-date=14 May 2022}}</ref> <ref>{{Cite AV media|url=https://www.youtube.com/watch?v=a1N6emAyc44|title=BHU Kul geet 2019|date=9 Dec 2019|last=Shukla|first=Anurag|type=Videotape|language=hi|access-date=14 May 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20220514185326/https://www.youtube.com/watch?v=a1N6emAyc44&gl=US&hl=en|archive-date=14 May 2022}}</ref><gallery mode="packed" caption="कुलगीत के योगदानकर्ता"> फाइल:Shanti_Swaroop_Bhatnagar_1994_stamp_of_India.jpg|पाठ=Shanti Swaroop Bhatnagar, who wrote the Kulgeet| शांति स्वरूप भटनागर जी कुलगीत लिखेनि। फाइल:Omkarnath_Thakur_1997_stamp_of_India.jpg|पाठ=Omkarnath Thakur, who provided music for the Kulgeet| पं॰ ओंकारनाथ ठाकुर जी कुलगीत का संगीत प्रदान कीन्हेनि। </gallery> == यहौ द्याखौ == * [[काशी हिन्दू विश्वविद्यालय|बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय]] * शांति स्वरूप भटनागर == संदर्भ == {{Reflist}} gmw0hs4udp0xkkzy0jzgrhm4e8e8do0 शिवपुरी 0 10320 36356 2026-07-31T10:55:15Z ~2026-42477-42 5471 'DEEPAK SHARMA' कय साथे नँवा पन्ना बनावा गय 36356 wikitext text/x-wiki DEEPAK SHARMA hayw0lrogiqyveq1nbwhl0uj267iojk