विकिपीडिया bhwiki https://bh.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE MediaWiki 1.47.0-wmf.21 first-letter मीडिया विशेष वार्तालाप प्रयोगकर्ता प्रयोगकर्ता वार्ता विकिपीडिया विकिपीडिया वार्ता चित्र चित्र वार्ता मीडियाविकि मीडियाविकि वार्ता टेम्पलेट टेम्पलेट वार्ता मदद मदद वार्ता श्रेणी श्रेणी वार्ता TimedText TimedText talk Module Module talk Event Event talk छठ पूजा 0 2040 805684 784426 2026-09-25T13:47:23Z SM7 3953 +हैटनोट 805684 wikitext text/x-wiki {{redirect|छठ|हिंदू पतरा के तिथी|छठि}}{{Infobox holiday |holiday_name = छठ पूजा |type = हिंदू |image = JanakpurChhathParvaFestival.jpg |imagesize = 250px |caption = [[सुरुज (देवता)|सुरुज]] भगवान के सबेरे के [[पूजा]] आ अरघ दिहल |official_name = |nickname = छठी<br>छठ पर्व<br>डाला छठ |observedby = हिन्दू आ जैन |litcolor = |longtype = |significance = सुरुज के पूजा, लमहर उमिर, संतान आ सुख संपत्ति के खाती |begins = कातिक के छठ से दू दिन पहिले |ends = छठ के अगिला दिने |date = [[कातिक]] सुदी छठ |scheduling = |duration = 4 दिन |frequency = चैती छठ के लेके साल में दू बेर |date2017 = 24 से 27 अक्टूबर<ref>{{cite web|url=http://www.drikpanchang.com/chhath/chhath-puja-calendar.html?l=9190&year=2017|title=2017 छठ पूजा, पटना खाती तिथी |publisher=Drikpanchang.com |date= |accessdate=15 अक्टूबर 2017}}</ref> |date2018 =11 नवंबर से 14 नवंबर |celebrations = |observances = [[नहान]], बरत (भुक्खल), पूजा, अरघा दिहल आ परसाद चढ़ावल। |relatedto = }} '''छठ पूजा''' भा '''छठ परब''' [[भोजपुरी क्षेत्र|भोजपुरी]], [[मिथिला क्षेत्र|मिथिला]], मगध आ [[मधेस]] इलाका के प्रमुख परब हवे। ई [[सूर्य देव|सुरुज]] के पूजा के तिहुआर ह आ मुख्य रूप से [[हिंदू धर्म|हिंदू]] औरत लोग मनावे ला। मुख्य तिथी [[कातिक]] महीना के अँजोर के छठईं तिथी हवे, एकरे दू दिन पहिले से ले के अगिला दिन ले ई तिहुआर मनावल जाला। कातिक के छठ मुख्य हवे जेकरा के डाला छठ भी कहल जाला। एकरे अलावे, चइत के महीना में भी छठ मनावल जाले जेकरा के चइती छठ कहल जाला। नाहन, बरत आ अरघा दिहल एह पूजा के मुख्य कार्यक्रम होला। जघह के हिसाब से, पानी के कवनों अस्थान, नद्दी-पोखरा के घाट पर मुख्य पूजा आ अरघा संपन्न होला। बिसेस परसाद के रूप में कई किसिम के फल आ खास तरीका से बनावल पकवान [[ठेकुआ]] होला जेकरा के माटी के चूल्हा पर पकावल जाला। नया सूप आ डाली में बिबिध किसिम के फल रख के घाट पर ले जाइल जाला। ओहिजा, ई सब सामग्री माटी के बेदी पर सजावल जाले, दिया अगरबत्ती बारल जाला आ कर्हियाइ भर पानी में ऊखि गाड़ल जाला जेह पर [[साड़ी]] चढ़ावल जाले। मेहरारू लोग पानी में खड़ा हो के डूबत सुरुज के पहिला अर्घा आ अगिला दिने फिर दोबारा ओही जे जा के उगत सुरुज के अरघा देला लो। भारत के [[बिहार]], [[झारखंड]], [[पूर्वांचल]] आ नेपाल के मधेस इलाका में, आ जहाँ-जहाँ एह क्षेत्र के लोग पहुँचल बा, धूमधाम से मनावल जाला। बिहार, झारखंड आ पूरबी उतर प्रदेश अउरी नेपाल के मधेस एह परब के मुख्य इलाका हवे। एह क्षेत्र में ई तिहुआर बहुत धूमधाम से मनावल जाला आ नदी किनारे घाट सभ पर एकरे खाती बिसेस तइयारी होले। एह मुख्य इलाका के अलावा, बंगाल, आसाम, दिल्ली, मुंबई, बंगलौर आ बाकी पूरा भारत में जहाँ-जहाँ एक क्षेत्र के लोग निवास करत बा, परंपरागत रूप से ई परब मनावे ला। भारत आ नेपाल के अलावा अउरी कई देसन में एह तिहुआर के मनावल जाला। == नाँव == [[चित्र:Surya statue, New Delhi, India - 20051204.jpg|210px|thumb|[[सूर्य देव]], जिनके एह परब में पूजा कइल जाला]] ''छठ'' भा ''छठि'' (संस्कृत: षष्ठी) के शाब्दिक अरथ हवे महीना के छठईं तिथी। ई तिथि हिंदू धर्म में सुरुज भगवान के पूजा खाती बिसेस महत्व के मानल जाले। एही तिथी के ई परब मनावल जाए के कारन<ref name="Team2013">{{cite book|author=संपादकीय टीम, ओम बुक्स|title=फेस्टिवल्स ऑफ इंडिया|url=https://books.google.com/books?id=UfHvDAAAQBAJ&pg=PA56|year=2013|publisher=ओम बुक्स इंटरनेशनल|isbn=978-93-81607-81-7|pages=56–}}</ref> एकर नावें छठ परब भा छठ पूजा हो गइल बा। हालाँकि, छठ सुरुज भगवान के पूजा के तिहुआर हवे, छठि शब्द, जवन तिथी खाती इस्तेमाल होला, स्त्रीलिंग होखे के कारन, पूजा के ''छठ माई'' के पूजा के रूप में भी कल्पित कइल जाला। कातिक के अँजोर के छठईं तिथी के मनावल जाए वाला एह परब के ''डाला छठ'' भी कहल जाला। ''डाला'' भा ''डाल'', बाँस के बनावल बड़हन आकार के दउरा के कहल जाला जबकि छोट रूप के डाली भा डलिया कहल जाला। नया डाला, जवना के एह पूजा में बिसेस महत्त्व होला, में पूजा के सामग्री आ फल-नरियर-परसाद वगैरह चीज घाट पर रख के चढ़ावे के परंपरा के डाला चढ़ावल भी कहल जाला आ एह चढ़ावा के एह तिहुआर में बिसेस अस्थान होखे के तिहुआर के डाला छठ कहल जाला।<ref name="Singh2015">{{cite book|author=विद्या बिंदु सिंह|title=अवधी लोक साहित्य में प्रकृति पूजा |url=https://books.google.com/books?id=TKuiCQAAQBAJ&pg=PT62|date=23 मई 2015|publisher=प्रभात प्रकाशन|isbn=978-93-82898-50-4|pages=62–}}</ref> == समय == चंद्रमा आधारित [[हिंदू पतरा]] में [[छठ (तिथी)|छठ तिथी]] हर महीना के अन्हार-अँजोर दुनों पाख में पड़े ले। एह तिथी के [[सुरुज देवता]] के पूजा खाती बिसेस महत्व के मानल जाला। हप्ता के दिन सभ में [[अतवार]] के, आ सताइस गो नक्षत्र सभ में अदरा नक्षत्र के सुरुज भगवान के पूजा के बिसेस महत्व हवे, ओही तरीका से तिथी सभ में छठईं तिथी के सुरुज के पूजा खाती निश्चित कइल गइल बा आ हर महीना के छठई तिथि के ''सूर्य षष्ठी'' के नाँव से भी जानल जाला। एह हर महिन्ना परे वाला छठ सभ में भी दू गो, चइत आ कातिक महीना के अँजोर पाख के छठ, के खास महत्व दिहल जाला। चइत वाली छठ के चइती छठ कहल जाला जबकि सभसे धूमधाम से आ ब्यापक रूप से मनावल जाए वाला परब कातिक महीना वाला हवे। == मान्यता == छठ के पूजा कब सुरू भइल आ काहें सुरू भइल एकरे बारे में कई गो कथा आ मान्यता चलन में बाड़ी सऽ। कथा सभ बतावल जालीं कि, सुकन्या नाँव के औरत सूर्य के पूजा कइले रहली जेकरे बाद से ई बरत छठ के रूप में मनावल जाए लागल। कृष्ण के बेटा साम्ब के शापित हो के कोढ़ के रोगी हो जाए के बाद सुरुज देवता के पूजा करे के उल्लेख भी मिले ला। महाभारत के हवाला दे के द्रौपदी के छठ ब्रत रहे के बात कहल जाले आ कुछ जगह कर्ण द्वारा एह पूजा के सुरू करे के बात कहल जाला। रामकथा में सीता द्वारा राम के राज्याभिषेक के बाद भइल दीपावली के बाद छठ के सुरुज भगवान के आराधना करे के बात बतावल जाला।<ref name="Jha2017">{{cite book|author=विनोद नंद झा |title=एक माटी-दो अध्याय|url=https://books.google.com/books?id=eYM2DwAAQBAJ&pg=PT81|date=20 सितंबर 2017|publisher=डायमंड पाकेट बुक्स प्रा॰ लि॰|isbn=978-93-5278-499-8|pages=81–}}</ref> एगो अन्य कथा मिले ले जेह में एह बरत के देवी ''छठी मइया'' के पूजा के बिबरन मिले ला। एह कथा में बतावल गइल बा कि प्रियव्रत मनु, पहिला मनु रहलें जे महर्षि कश्यप के सलाह अनुसार पुत्रेष्टि जग्य कइलेन। एह जगि के बाद उनके पुत्र भइल बाकी मुर्दा पैदा भइल। शोक में बूड़ल प्रियव्रत आ मालिनी के सोझा एगो देवी प्रगट भइली आ उनके छुअले से संतान जिंदा भ गइल। उहे देवी, अपना के ब्रम्हा के मानस पुत्री बतवली आ अपना पूजा खाती कहली। इनही के पूजा छठ मइया के पूजा के रूप में सुरू भइल।<ref>{{cite web|url=http://www.amarujala.com/spirituality/religion/story-of-chhath-parv-hindi-rj |title=कौन हैं छठी मइया और कैसे शुरु हुई इनकी पूजा, पढ़ें रोचक कथा|publisher=Amarujala.com |date= |accessdate=2017-10-15}}</ref> == मनावे वाला लोग == [[चित्र:Chatt Ghat.jpg|210px|thumb|छठ पूजा खाती सजावल गइल घाट]] [[चित्र:Chhath-Puja-Bihar.jpg|210px|thumb|छठ पूजा के दौरान अर्घा देवे से पहिले पानी में खड़ा औरत लोग]] छठ मूल रूप से हिंदू लोग के तिहुआर हवे। हालाँकि, कुछ मुसलमान औरत लोग के भी छठ मनावत देखल गइल बा।<ref name="Madani1993">{{cite book|author=मोहसिन सईदी मदनी|title=इम्पैक्ट ऑफ हिंदू कल्चर ऑन मुस्लिम्स|url=https://books.google.com/books?id=AqdJ7LlfVWUC&pg=PA137|year=1993|publisher=एम॰ डी॰ पब्लिकेशंस प्रा॰ लि॰|isbn=978-81-85880-15-0|pages=137–}}</ref><ref name="Sharma1970">{{cite book|author=रामनाथ शर्मा |title=समकालीन भारतीय समाज और संस्कृति |url=https://books.google.com/books?id=V9lmrAZJpk4C|year=1970|publisher=सरस्वती सदन प्रकाशन}}</ref><ref name="SharmaSharma1962">{{cite book|author1=उर्मिला शर्मा |author2=रामनाथ शर्मा|title=इंडियन कल्चर |url=https://books.google.com/books?id=MbscAAAAMAAJ|year=1962|publisher=केदारनाथ रामनाथ }}</ref><ref name="DinkarNehru1956">{{cite book|author=रामधारी सिंह दिनकर |title=संस्कृति के चार अध्याय |url=https://books.google.com/books?id=t2I_AAAAIAAJ|year=1956|publisher=राजपाल }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.deshbandhu.co.in/states/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%9B%E0%A4%A0-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5-360514-1 |title=हिंदुओं के साथ मुसलमान भी मना रहे हैं छठ पर्व |publisher=Deshbandhu.co.in |date=2009-10-24 |accessdate=2017-10-13 }}{{Dead link|date=July 2025 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref> मुसलमान औरतन द्वारा, कौनों बिसेस कष्ट के स्थिति में, हिंदू औरतन द्वारा सलाह दिहल जाए पर ई बरत करे के बात बतावल गइल बाटे आ एकरा के मुसलमान लो के संस्कृति पर हिंदू संस्कृति के परभाव के रूप में भी देखल जाला।<ref name="Madani1993" /> दुसरा तरीका से देखल जाय त ई बिहारी लोग के खास तिहुआर के रूप में देखल जाला<ref name="Bhatt2005">{{cite book|author=शंकरलाल सी॰ भट्ट|title=लैंड एंड पीपल ऑफ इंडियन स्टेट्स एंड यूनियन टेरिटरीस: इन 36 वॉल्यूम्स. बिहार|url=https://books.google.com/books?id=X9agErBFpGQC&pg=PA355|year=2005|publisher=ज्ञान पब्लिशिंग हाउस |isbn=978-81-7835-361-6|pages=355–}}</ref> आ बिहार के लोग में ई तिहुआर धरम के सीमा से ऊपर उठ चुकल बा आ मुसलमान<ref>{{cite web|url=http://economictimes.indiatimes.com/articleshow/25388401.cms |title=छठ पूजा एबो रेलिजन फॉर अ मुस्लिम फेमिली|publisher=Economictimes.indiatimes.com |date=2013-11-07 |accessdate=2017-10-13}}</ref><ref>{{cite web|author=टाइम्स ऑफ इंडिया |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/indore/Muslims-join-in-Chhat-Puja-celebrations/articleshow/49798221.cms |title=मुस्लिम्स ज्वाइन इन छठ पूजा सेलेब्रेशंस |publisher=Timesofindia.indiatimes.com |date=2015-11-16 |accessdate=2017-10-13}}</ref> आ सिख परिवार के लोग भी एह परब के मना रहल बा।<ref>{{cite web|url=http://www.jagran.com/bihar/patna-city-here-dozens-of-muslim-and-sikh-families-do-chhath-with-full-devotion-14979406.html |title=Here dozens of Muslim and Sikh families do Chhath with full devotion |publisher=Jagran.com |date= |accessdate=2017-10-13}}</ref> छठ मुख्य रूप से मेहरारू लोगन के बरत हवे, हालाँकि अब मरदाना लोग भी एह ब्रत के मनावे में पाछे नइखे रहि गइल।<ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/patna/men-not-far-behind-women-in-celebrating-chhath/articleshow/55251895.cms|title=Men not far behind women in celebrating Chhath {{!}} Patna News - Times of India|date=2016|website=The Times of India|language=en|access-date=2023-02-01}}</ref> == मनावे के तरीका == [[चित्र:Devotee with Offering - Chhath Puja Ceremony - Ramkrishnapur Ghat - Howrah 2013-11-09 4124.JPG|210px|thumb|सूपा में परसाद लिहले पानी में खड़ा एगो ब्रती]] मुख्य रूप से ई सुरुज के पूजा हवे, हालाँकि, एह में जेवना देवी के पूजा कइल जाला उनका के ''छठि मइया'' कहल जाला। एक साथ, सुरुज के अरघा दिहल आ छठी मइया के पूजा के तइयारी [[दिपावली]] के बादे से सुरू हो जाले। दिवाली कातिक के अमौसा के मनावल जाले, एकरे अगिला दिने गोधना कुटाला आ ओहू के अगिला दिने भाई दुइज मनावल जाले। एकरे बाद छठ के तइयारी हो जाला। दू दिन बाद चउथ के तिथि से कार्यक्रम के सुरुआत होला आ अंतिम अरघा सत्तिमी के दिहल जाला। एह चारो दिन के बिबरन नीचे दिहल जात बा: === ''नहाय खाय'' === कातिक सुदी चउथ के छठ पूजा के तइयारी के रूप में ''नहाय खाय'' से सुरुआत होले। एकरा के ''अरवा-अरवइन'' भी कहल जाला। घर के नीक से साफ-सफाई कइल जाला आ एह दिन अइसन सगरी मेहरारू लो जिनके बरत भुक्खे के होला, जे लोग ब्रती कहालीं, कौनों पबित्र जलस्थान, नदी-पोखरा वगैरह में नहान करे लीं। नहान के बाद साफ-सुथरा तरीका से भोजन तइयार कइल जाला। एह दिन मेहरारू लोग एक्के बेरा भोजन करे ला। एह भोजन में लउकी के खास महत्त्व बतावल जाला।<ref>{{cite web|author=आभा सेन |url=https://www.patrika.com/news/jabalpur/start-worship-of-the-chhath-maiya-5624/ |title=छठ पूजा : लौकी की सब्जी ग्रहण कर शुरू किया व्रत|publisher=Patrika.com |date=2015-11-16 |accessdate=2017-10-15}}</ref> अरवा चाउर के भात आ लउकी के तरकारी खा के ब्रत के सुरुआत कइल जाला।<ref name="bhaskar1">{{cite web|author=ट्रेंडिंग न्यूज़ अलर्ट |url=https://www.bhaskar.com/news/JHA-JAMS-chhath-celebration-in-jamshedpur-4786960-PHO.html |title=छठ सेलिव्रेशन इन जमशेदपुर |publisher=Bhaskar.com |date=2014-10-27 |accessdate=2017-10-15}}</ref> === ''खरना'' === ''अरवा-अरवइन'' के अगिला दिने, मने कि पंचिमी के, एक दिन दिन भर के बरत भुक्खल जाला। ई एक तरह से मुख्य बरत से पहिले के तइयारी होला आ एही से एकरा के खरना कहल जाला। ''खर कइल'' के अरथ होला तपावल भा शुद्ध कइल। एह दिन भर के बरत के बाद साँझ के बेरा रोटी के साथे खीर भा बखीर बनावल जाले जेकरा के खरना के परसाद कहल जाला। इहे परसाद खा के मुख्य बरत सुरू होला। === ''पहिला अरघ'' === [[चित्र:Preparation - Chhath Puja Ceremony - Baja Kadamtala Ghat - Kolkata 2013-11-09 4242.JPG|160px|thumb|left|पानी में ऊखि गाड़ के पूजा के तइयारी]] [[चित्र:Chhath in Ranipokhari 03.jpg|210px|thumb|right|छठ पूजा के पहिला अरघ के समय जगमग घाट]] [[चित्र:Offerings - Chhath Puja Ceremony - Baja Kadamtala Ghat - Kolkata 2013-11-09 4315.JPG|210px|thumb|सुपेली में रखल परसाद जेह में [[ठेकुआ]] के बिसेस महत्व होला]] ''खरना'' के बाद के रात, आ छठईं तिथी के पूरा दिन आ रात बरत के रात होले। एही छठ तिथी के साँझ बेर नदी, पोखरा के किनारे घाट पर जाइल जाला। घाट पर जा के पूजा के पहिले घरे परसाद बनावल जाला। छठ के परसाद में [[ठेकुआ]] बनावल जाला जे गोहूँ के आटा में मीठा डारि के अ घीव के मोएन दे के दूध में सानल जाला आ सुद्ध घीव में छानल जाला। उत्तरी बिहार में एकरा के खासतौर पर माटी के साफ चूल्हा पर बनावल जाला आ साफ लकड़ी के इस्तेमाल कइल जाला।<ref>{{cite web |url=http://www.festivalsofindia.in/chhatpuja/Chhathpuja-rituals-Hindi.aspx |title=छठपूजा के रसà¥?म रिवाज, छठपूजा नियम, छठपूजा परंपरा |publisher=Festivalsofindia.in |date=2017-08-09 |accessdate=2017-10-15 |archive-date=2017-10-20 |archive-url=https://web.archive.org/web/20171020041835/http://www.festivalsofindia.in/chhatpuja/Chhathpuja-rituals-Hindi.aspx |url-status=dead }}</ref> बाकी परसाद में कम से कम तीन किसिम के [[फल]] रहे ला। फल सभ में सिंघाड़ा, गंजी, केला, अनन्नास, गागल नींबू, नरियर, आ मुरई वगैरह सामिल रहे ला।<ref name="bhaskar1"/><ref>{{cite web|url=https://navbharattimes.indiatimes.com/state/punjab-and-haryana/gurgaon/chhath-puja-special-importance-of-vegetables-in/articleshow/25336452.cms |title=Chhath Puja special importance of vegetables in&#124;छठ पूजन में सब्जियों का विशेष महत्व - Navbharat Times |language=en |publisher=Navbharattimes.indiatimes.com |date= |accessdate=2017-10-15}}</ref> घाट पर पहिले से घर के सवाँग लोग सफाई क के माटी के बेदी बनवले रहे ला लोग। घर से दउरा में सगरी परसाद सामग्री सजा के ले जाइल जाला जहाँ दिया-अगरबत्ती बार के परसाद के सूप में सजा के पूजा कइल जाला आ छठ मइया के गीत गावल जाला। एकरे बाद सुरुज के डूबे से पहिले मेहरारू लोग लगभग कर्हियाइ भर से ऊपर पानी में खड़ा हो के सुरुज भगवान के पूजा करे ला। कुछ जगह, जहाँ छठ मइया के साड़ी चढ़ावे के बिधान भी होला, पानी में पाँच गो ऊखि गाड़ल जालीं जिनहन के पतई आपसे में बान्हल रहे ला आ ओही में साड़ी के सजा के ओकरा पाछे से सुरुज के पूजा कइल जाला। पूजा के बाद सुरुज भगवान के अरघा दिहल जाला। अर्घ में पानी में कई तरह के सुगंधित सामग्री मिला के तामा भा पीतर के लोटा में ले के दुनों हाथ से टिकासन से ऊपर उठा के सुरुज के सोझा धार के रूप में गिरावल जाला जेवना से ओह धार से हो के सुरुज के रोशनी चढ़ावे वाला के देह पर परे। पहिला अर्घा के बाद घाट से सगरी चीज बटोर के घरे आ जाला। कुछ लोग जे संतान खाती मनौती मनले रहे ला एह रात के अँगना में एक तरह के पूजा करे ला जेकरा कोसी भा कोसिया भरल कहल जाला। ''कोसिया'' माटी के एगो खास तरह के बर्तन होला जे कोहा के आकार के होला आ एकरा बरि पर दिया बनल रहे लें। एही में चढ़ावा के सामग्री भर के आ दिया सभ के बार के गीति गावल जाला। === ''दुसरा अरघ'' === छठ तिथी के अगिला दिने, सत्तिमी के भोरे में लोग घाट पर दोबारा चहुँप जाला आ ओही घाट आ बेदी पर फिर से सारा पूजा के सामग्री सजावल जाले। पानी में खड़ा हो के ब्रती लोग सुरुज उगे के इंतजारी करे ला आ उगत सुरुज के भोर के ''दुसरा अरघा'' दियाला। एकरे बाद घरे लवट के परसाद खा के बरत टूटे ला आ पारन कइल जाला। == क्षेत्र == [[बिहार]] छठ के पूजा के मूल अस्थान हवे आ मानल जाला कि हेइजे से ई बरत बाकी इलाकन में चहुँपल।<ref name="UpadhyayPandey1993">{{cite book|author1=Vijay S. Upadhyay|author2=Gaya Pandey|title=History of Anthropological Thought|url=https://books.google.com/books?id=SNw5zVN1V0oC&pg=PA154|year=1993|publisher=Concept Publishing Company|isbn=978-81-7022-492-1|pages=154–}}</ref> बिहार के औरंगाबाद जिला में देव सूर्य मंदिर बा।<ref>{{cite web|url=http://www.bihartourism.gov.in/districts/aurangabad/Deosuryatemple.html |title=Welcome to Bihar Tourism |publisher=Bihartourism.gov.in |date= |accessdate=2017-10-13}}</ref> मानल जाला कि एही जा से छठ के पूजा सुरू हो के बिहार आ बाद में आसपास के राज्य सभ में फइलल।<ref name="UpadhyayPandey1993"/> बतावल जाला कि औरंगाबाद के ई जगह, देवकुंडा, महर्षी च्यवन के आश्रम रहल आ उनके पत्नी हेइजा छठ के बरत करें।<ref name="UpadhyayPandey1993" /> इहाँ मौजूद वर्तमान सूर्य मंदिर महाराज भैरवेंद्र देव के जमाना (~1450 ईसवी) के मानल जाला।<ref name="SaranPandey1992b">{{cite book|author1=Anirudha Behari Saran|author2=Gaya Pandey|title=Sun Worship in India: A Study of Deo Sun-Shrine|url=https://books.google.com/books?id=8XimO39s7_gC&pg=PA50|year=1992|publisher=Northern Book Centre|isbn=978-81-7211-030-7|pages=50–}}</ref> एकरे लग्गे कुछ दूरी पर सूर्यकुंड भी बा। मूल रूप से बिहार, पूरबी उत्तर प्रदेश आ तराई के इलाका के ई तिहुआर इहाँ के लोग के साथ-साथ भारत के बाकी इलाका में भी पहुँचल बा आ पूर्वोत्तर भारत, बंगाल आ मध्य प्रदेश में भी मनावल जाला।<ref>{{cite book|title=World Encyclopaedia of Interfaith Studies: World religions|url=https://books.google.com/books?id=fFwi7qRRgosC|year=2009|publisher=Jnanada Prakashan|isbn=978-81-7139-280-3|page=679}}</ref> भारत के राजधानी दिल्ली में छठ खाती सरकारी तौर पर इंतजाम कइल जाए लागल बा<ref>{{cite web |url=http://www.inkhabar.com/national/52549-mahaparv-chhath-puja-2017-delhi-government-started-preparation-of-chhath-mahaparv-2017 |title=महापर्व छठ पूजा 2017: केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में छठ पूजा की तैयारियां शुरू की mahaparv chhath puja 2017: Delhi government started preparation of chhath mahaparv 2017 |language=en |publisher=Inkhabar.com |date= |accessdate=2017-10-13 }}{{Dead link|date=October 2023 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref><ref>{{cite web|author=भाषा |url=http://www.jansatta.com/rajya/new-delhi/delhi-chhath-pooja-rpf-preparation/178843/ |title=delhi chhath pooja rpf preparation |publisher=Jansatta |date=2016-11-06 |accessdate=2017-10-13}}</ref> आ मुंबई में भी छठ के सार्वजनिक तौर पर आयोजन कइल जा चुकल बा।<ref>{{cite web|url=https://navbharattimes.indiatimes.com/metro/mumbai/other-news/such-was-the-first-chhath-puja-in-mumbai/articleshow/55143270.cms |title=Such was the first Chhath Puja in Mumbai&#124;ऐसी थी मुंबई की पहली छठ पूजा - Navbharat Times |language=en |publisher=Navbharattimes.indiatimes.com |date= |accessdate=2017-10-13}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.punjabkesari.in/national/news/chhath-puja--devendra-fadnavis--mumbai-536205 |title=मुंबई के जुहू बीच पर छठ पूजा में शामिल हुए CM फडणवीस |publisher=Punjabkesari.in |date=2016-11-07 |accessdate=2017-10-13}}</ref> दिल्ली मुंबई नियर शहर जहाँ बिहार आ उत्तर प्रदेश के लोग के काफी संख्या बा इहाँ त छठ मनावले जालाम अब ई दक्खिन भारत के बंगलौर<ref>{{cite web|url=http://www.bbc.com/hindi/lg/india/2009/10/091024_chhath_festival_mb.shtml |title=BBC Hindi - भारत - छठ का पर्व तस्वीरों में |publisher=Bbc.com |date= |accessdate=2017-10-13}}</ref> आ चेन्नई नियर शहर सभ में भी मनावल जाए लागल बा जहाँ यूपी बिहार के लोग के मौजूदगी बा।<ref>{{cite web |url=https://khabar.ndtv.com/news/india/bihar-jharkhand-chhath-festival-in-southern-india-boom-1244484 |title=Bihar-Jharkhand Chhath festival in southern India boom - दक्षिण भारत में भी बिहार-झारखंड के छठ पर्व की धूम |publisher=Khabar.ndtv.com |date=2015-11-17 |accessdate=2017-10-13 |archive-date=2015-11-20 |archive-url=https://web.archive.org/web/20151120050543/http://khabar.ndtv.com/news/india/bihar-jharkhand-chhath-festival-in-southern-india-boom-1244484 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/chennai/Sun-worshippers-ditch-river-do-puja-in-swimming-pool/articleshow/17301342.cms|title=Sun worshippers ditch river, do puja in swimming pool - Times of India|author=|date=2012-11-21|publisher=Timesofindia.indiatimes.com|accessdate=2017-10-13}}</ref> == संस्कृति == छठ पर्ब के बिहार आ पूर्वांचल के लोग के सांस्कृतिक पहिचान के रूप में देखल जाला। कारण की ई पर्ब इहाँ के लोग द्वारा मनावल जाए वाला एगो यूनिक तिहुआर बाटे आ ई तिहुआर इहँवे के लोग मनावे ला, चाहे अपना मूल इलाका में भा जहाँ दुसरी जगह इहाँ के लोग परवास क रहल बा। छठ के बिबिध महत्व सभ में इहो एगो महत्व देखल गइल बा कि ई नया पीढ़ी के आपस में जोड़े के माध्यम बन रहल बा।<ref>{{Cite web|url=https://www.prabhatkhabar.com/vishesh-aalekh/887843|title=छठ : युवाओं को आपस में जोड़नेवाला सांस्कृतिक बंधन|website=Prabhat Khabar|language=hi|access-date=2023-02-01}}</ref> हाल में आइल एगो बीडियो में नया पीढ़ी के लोग द्वारा छठ अपनावे के एगो भावुक बीडियो सोशल मीडिया पर वाइरल भइल बा। एह बीडियो में भोजपुरी-बिहारी इलाका से बाहर दुसरे राज्य में रहत युवा लोग द्वारा छठ अपनावे के प्रेरणा दिहल गइल बा। == चैती छठ पूजा == एह 4 दिन के महोत्सव के बारे में रउरा सभे के जाने के जरूरत बा। छठ पूजा के हिन्दू कैलेंडर में [[चइत|चैत्र]] आ कार्तिक महीना के दौरान हर साल दू बेर मनावल जाला आ एकरा के सभसे शुभ हिन्दू पर्व सभ में से एक मानल जाला। छठी मईया आ सूर्य भगवान के प्रति समर्पित, ई उत्सव 4 दिन के रेंज में देखल जाला, जवना के शुरुआत नाहाय खय के समारोह से आ ओकरा बाद खरना भा लोहंडा, संध्या अर्घ्या से होला आ उषा अर्घ्य के साथ पराकाष्ठा होला जवन आखिरी दिन उगते सूरज के प्रस्तावित होला। चैतला पक्ष शश्थी पर चैती छठ के मनावल जाला आ चैतर महीना में मनावल जाला आ चैत्र नवरात्रि के दौरान देखल जाला। एह उत्सव के अतिरिक्त रूप से यमुना छठ कहल जाला। मानल जाला कि यमुना नदी एह दिन धरती पर उतरल आ, एह हिसाब से, ई ओही तरह से देवी यमुना भा यमुना जयंत के जनम के सालगिरह के दर्शावेला। [https://www.business-standard.com/india-news/chaiti-chhath-puja-2024-all-you-need-to-know-about-this-4-day-festival-124041200761_1.html] == संदर्भ == {{Reflist|35em}} == बाहरी कड़ी == {{commons category|Chhath|छठ}} {{हिंदू तिहुआर}} [[श्रेणी:हिंदू तिहुआर]] [[श्रेणी:भोजपुरी संस्कृति]] [[श्रेणी:बिहार के संस्कृति]] [[श्रेणी:नेपाल के संस्कृति]] [[श्रेणी:कातिक महीना के तिहुआर]] g2tukqvpmywaydf901atuirqenf39dc 805685 805684 2026-09-25T13:49:30Z SM7 3953 +विकिकड़ी जोड़ल गइल 805685 wikitext text/x-wiki {{redirect|छठ|हिंदू पतरा के तिथी|छठि}}{{Infobox holiday |holiday_name = छठ पूजा |type = हिंदू |image = JanakpurChhathParvaFestival.jpg |imagesize = 250px |caption = [[सुरुज (देवता)|सुरुज]] भगवान के सबेरे के [[पूजा]] आ अरघ दिहल |official_name = |nickname = छठी<br>छठ पर्व<br>डाला छठ |observedby = हिन्दू आ जैन |litcolor = |longtype = |significance = सुरुज के पूजा, लमहर उमिर, संतान आ सुख संपत्ति के खाती |begins = कातिक के छठ से दू दिन पहिले |ends = छठ के अगिला दिने |date = [[कातिक]] सुदी छठ |scheduling = |duration = 4 दिन |frequency = चैती छठ के लेके साल में दू बेर |date2017 = 24 से 27 अक्टूबर<ref>{{cite web|url=http://www.drikpanchang.com/chhath/chhath-puja-calendar.html?l=9190&year=2017|title=2017 छठ पूजा, पटना खाती तिथी |publisher=Drikpanchang.com |date= |accessdate=15 अक्टूबर 2017}}</ref> |date2018 =11 नवंबर से 14 नवंबर |celebrations = |observances = [[नहान]], बरत (भुक्खल), पूजा, अरघा दिहल आ परसाद चढ़ावल। |relatedto = }} '''छठ पूजा''' भा '''छठ परब''' [[भोजपुरी क्षेत्र|भोजपुरी]], [[मिथिला क्षेत्र|मिथिला]], मगध आ [[मधेस]] इलाका के प्रमुख परब हवे। ई [[सूर्य देव|सुरुज]] के पूजा के तिहुआर ह आ मुख्य रूप से [[हिंदू धर्म|हिंदू]] औरत लोग मनावे ला। मुख्य तिथी [[कातिक]] महीना के अँजोर के छठईं तिथी हवे, एकरे दू दिन पहिले से ले के अगिला दिन ले ई तिहुआर मनावल जाला। कातिक के छठ मुख्य हवे जेकरा के डाला छठ भी कहल जाला। एकरे अलावे, चइत के महीना में भी छठ मनावल जाले जेकरा के चइती छठ कहल जाला। नाहन, बरत आ अरघा दिहल एह पूजा के मुख्य कार्यक्रम होला। जघह के हिसाब से, पानी के कवनों अस्थान, नद्दी-पोखरा के घाट पर मुख्य पूजा आ अरघा संपन्न होला। बिसेस परसाद के रूप में कई किसिम के फल आ खास तरीका से बनावल पकवान [[ठेकुआ]] होला जेकरा के माटी के चूल्हा पर पकावल जाला। नया सूप आ डाली में बिबिध किसिम के फल रख के घाट पर ले जाइल जाला। ओहिजा, ई सब सामग्री माटी के बेदी पर सजावल जाले, दिया अगरबत्ती बारल जाला आ कर्हियाइ भर पानी में ऊखि गाड़ल जाला जेह पर [[साड़ी]] चढ़ावल जाले। मेहरारू लोग पानी में खड़ा हो के डूबत सुरुज के पहिला अर्घा आ अगिला दिने फिर दोबारा ओही जे जा के उगत सुरुज के अरघा देला लो। भारत के [[बिहार]], [[झारखंड]], [[पूर्वांचल]] आ नेपाल के मधेस इलाका में, आ जहाँ-जहाँ एह क्षेत्र के लोग पहुँचल बा, धूमधाम से मनावल जाला। बिहार, झारखंड आ पूरबी उतर प्रदेश अउरी नेपाल के मधेस एह परब के मुख्य इलाका हवे। एह क्षेत्र में ई तिहुआर बहुत धूमधाम से मनावल जाला आ नदी किनारे घाट सभ पर एकरे खाती बिसेस तइयारी होले। एह मुख्य इलाका के अलावा, बंगाल, आसाम, दिल्ली, मुंबई, बंगलौर आ बाकी पूरा भारत में जहाँ-जहाँ एक क्षेत्र के लोग निवास करत बा, परंपरागत रूप से ई परब मनावे ला। भारत आ नेपाल के अलावा अउरी कई देसन में एह तिहुआर के मनावल जाला। == नाँव == [[चित्र:Surya statue, New Delhi, India - 20051204.jpg|210px|thumb|[[सूर्य देव]], जिनके एह परब में पूजा कइल जाला]] ''छठ'' भा ''[[छठि]]'' (संस्कृत: षष्ठी) के शाब्दिक अरथ हवे महीना के छठईं [[तिथी]]। ई तिथि हिंदू धर्म में सुरुज भगवान के पूजा खाती बिसेस महत्व के मानल जाले। एही तिथी के ई परब मनावल जाए के कारन<ref name="Team2013">{{cite book|author=संपादकीय टीम, ओम बुक्स|title=फेस्टिवल्स ऑफ इंडिया|url=https://books.google.com/books?id=UfHvDAAAQBAJ&pg=PA56|year=2013|publisher=ओम बुक्स इंटरनेशनल|isbn=978-93-81607-81-7|pages=56–}}</ref> एकर नावें छठ परब भा छठ पूजा हो गइल बा। हालाँकि, छठ सुरुज भगवान के पूजा के तिहुआर हवे, छठि शब्द, जवन तिथी खाती इस्तेमाल होला, स्त्रीलिंग होखे के कारन, पूजा के ''छठ माई'' के पूजा के रूप में भी कल्पित कइल जाला। कातिक के अँजोर के छठईं तिथी के मनावल जाए वाला एह परब के ''डाला छठ'' भी कहल जाला। ''डाला'' भा ''डाल'', बाँस के बनावल बड़हन आकार के दउरा के कहल जाला जबकि छोट रूप के डाली भा डलिया कहल जाला। नया डाला, जवना के एह पूजा में बिसेस महत्त्व होला, में पूजा के सामग्री आ फल-नरियर-परसाद वगैरह चीज घाट पर रख के चढ़ावे के परंपरा के डाला चढ़ावल भी कहल जाला आ एह चढ़ावा के एह तिहुआर में बिसेस अस्थान होखे के तिहुआर के डाला छठ कहल जाला।<ref name="Singh2015">{{cite book|author=विद्या बिंदु सिंह|title=अवधी लोक साहित्य में प्रकृति पूजा |url=https://books.google.com/books?id=TKuiCQAAQBAJ&pg=PT62|date=23 मई 2015|publisher=प्रभात प्रकाशन|isbn=978-93-82898-50-4|pages=62–}}</ref> == समय == चंद्रमा आधारित [[हिंदू पतरा]] में [[छठ (तिथी)|छठ तिथी]] हर महीना के अन्हार-अँजोर दुनों पाख में पड़े ले। एह तिथी के [[सुरुज देवता]] के पूजा खाती बिसेस महत्व के मानल जाला। हप्ता के दिन सभ में [[अतवार]] के, आ सताइस गो नक्षत्र सभ में अदरा नक्षत्र के सुरुज भगवान के पूजा के बिसेस महत्व हवे, ओही तरीका से तिथी सभ में छठईं तिथी के सुरुज के पूजा खाती निश्चित कइल गइल बा आ हर महीना के छठई तिथि के ''सूर्य षष्ठी'' के नाँव से भी जानल जाला। एह हर महिन्ना परे वाला छठ सभ में भी दू गो, चइत आ कातिक महीना के अँजोर पाख के छठ, के खास महत्व दिहल जाला। चइत वाली छठ के चइती छठ कहल जाला जबकि सभसे धूमधाम से आ ब्यापक रूप से मनावल जाए वाला परब कातिक महीना वाला हवे। == मान्यता == छठ के पूजा कब सुरू भइल आ काहें सुरू भइल एकरे बारे में कई गो कथा आ मान्यता चलन में बाड़ी सऽ। कथा सभ बतावल जालीं कि, सुकन्या नाँव के औरत सूर्य के पूजा कइले रहली जेकरे बाद से ई बरत छठ के रूप में मनावल जाए लागल। कृष्ण के बेटा साम्ब के शापित हो के कोढ़ के रोगी हो जाए के बाद सुरुज देवता के पूजा करे के उल्लेख भी मिले ला। महाभारत के हवाला दे के द्रौपदी के छठ ब्रत रहे के बात कहल जाले आ कुछ जगह कर्ण द्वारा एह पूजा के सुरू करे के बात कहल जाला। रामकथा में सीता द्वारा राम के राज्याभिषेक के बाद भइल दीपावली के बाद छठ के सुरुज भगवान के आराधना करे के बात बतावल जाला।<ref name="Jha2017">{{cite book|author=विनोद नंद झा |title=एक माटी-दो अध्याय|url=https://books.google.com/books?id=eYM2DwAAQBAJ&pg=PT81|date=20 सितंबर 2017|publisher=डायमंड पाकेट बुक्स प्रा॰ लि॰|isbn=978-93-5278-499-8|pages=81–}}</ref> एगो अन्य कथा मिले ले जेह में एह बरत के देवी ''छठी मइया'' के पूजा के बिबरन मिले ला। एह कथा में बतावल गइल बा कि प्रियव्रत मनु, पहिला मनु रहलें जे महर्षि कश्यप के सलाह अनुसार पुत्रेष्टि जग्य कइलेन। एह जगि के बाद उनके पुत्र भइल बाकी मुर्दा पैदा भइल। शोक में बूड़ल प्रियव्रत आ मालिनी के सोझा एगो देवी प्रगट भइली आ उनके छुअले से संतान जिंदा भ गइल। उहे देवी, अपना के ब्रम्हा के मानस पुत्री बतवली आ अपना पूजा खाती कहली। इनही के पूजा छठ मइया के पूजा के रूप में सुरू भइल।<ref>{{cite web|url=http://www.amarujala.com/spirituality/religion/story-of-chhath-parv-hindi-rj |title=कौन हैं छठी मइया और कैसे शुरु हुई इनकी पूजा, पढ़ें रोचक कथा|publisher=Amarujala.com |date= |accessdate=2017-10-15}}</ref> == मनावे वाला लोग == [[चित्र:Chatt Ghat.jpg|210px|thumb|छठ पूजा खाती सजावल गइल घाट]] [[चित्र:Chhath-Puja-Bihar.jpg|210px|thumb|छठ पूजा के दौरान अर्घा देवे से पहिले पानी में खड़ा औरत लोग]] छठ मूल रूप से हिंदू लोग के तिहुआर हवे। हालाँकि, कुछ मुसलमान औरत लोग के भी छठ मनावत देखल गइल बा।<ref name="Madani1993">{{cite book|author=मोहसिन सईदी मदनी|title=इम्पैक्ट ऑफ हिंदू कल्चर ऑन मुस्लिम्स|url=https://books.google.com/books?id=AqdJ7LlfVWUC&pg=PA137|year=1993|publisher=एम॰ डी॰ पब्लिकेशंस प्रा॰ लि॰|isbn=978-81-85880-15-0|pages=137–}}</ref><ref name="Sharma1970">{{cite book|author=रामनाथ शर्मा |title=समकालीन भारतीय समाज और संस्कृति |url=https://books.google.com/books?id=V9lmrAZJpk4C|year=1970|publisher=सरस्वती सदन प्रकाशन}}</ref><ref name="SharmaSharma1962">{{cite book|author1=उर्मिला शर्मा |author2=रामनाथ शर्मा|title=इंडियन कल्चर |url=https://books.google.com/books?id=MbscAAAAMAAJ|year=1962|publisher=केदारनाथ रामनाथ }}</ref><ref name="DinkarNehru1956">{{cite book|author=रामधारी सिंह दिनकर |title=संस्कृति के चार अध्याय |url=https://books.google.com/books?id=t2I_AAAAIAAJ|year=1956|publisher=राजपाल }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.deshbandhu.co.in/states/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%9B%E0%A4%A0-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5-360514-1 |title=हिंदुओं के साथ मुसलमान भी मना रहे हैं छठ पर्व |publisher=Deshbandhu.co.in |date=2009-10-24 |accessdate=2017-10-13 }}{{Dead link|date=July 2025 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref> मुसलमान औरतन द्वारा, कौनों बिसेस कष्ट के स्थिति में, हिंदू औरतन द्वारा सलाह दिहल जाए पर ई बरत करे के बात बतावल गइल बाटे आ एकरा के मुसलमान लो के संस्कृति पर हिंदू संस्कृति के परभाव के रूप में भी देखल जाला।<ref name="Madani1993" /> दुसरा तरीका से देखल जाय त ई बिहारी लोग के खास तिहुआर के रूप में देखल जाला<ref name="Bhatt2005">{{cite book|author=शंकरलाल सी॰ भट्ट|title=लैंड एंड पीपल ऑफ इंडियन स्टेट्स एंड यूनियन टेरिटरीस: इन 36 वॉल्यूम्स. बिहार|url=https://books.google.com/books?id=X9agErBFpGQC&pg=PA355|year=2005|publisher=ज्ञान पब्लिशिंग हाउस |isbn=978-81-7835-361-6|pages=355–}}</ref> आ बिहार के लोग में ई तिहुआर धरम के सीमा से ऊपर उठ चुकल बा आ मुसलमान<ref>{{cite web|url=http://economictimes.indiatimes.com/articleshow/25388401.cms |title=छठ पूजा एबो रेलिजन फॉर अ मुस्लिम फेमिली|publisher=Economictimes.indiatimes.com |date=2013-11-07 |accessdate=2017-10-13}}</ref><ref>{{cite web|author=टाइम्स ऑफ इंडिया |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/indore/Muslims-join-in-Chhat-Puja-celebrations/articleshow/49798221.cms |title=मुस्लिम्स ज्वाइन इन छठ पूजा सेलेब्रेशंस |publisher=Timesofindia.indiatimes.com |date=2015-11-16 |accessdate=2017-10-13}}</ref> आ सिख परिवार के लोग भी एह परब के मना रहल बा।<ref>{{cite web|url=http://www.jagran.com/bihar/patna-city-here-dozens-of-muslim-and-sikh-families-do-chhath-with-full-devotion-14979406.html |title=Here dozens of Muslim and Sikh families do Chhath with full devotion |publisher=Jagran.com |date= |accessdate=2017-10-13}}</ref> छठ मुख्य रूप से मेहरारू लोगन के बरत हवे, हालाँकि अब मरदाना लोग भी एह ब्रत के मनावे में पाछे नइखे रहि गइल।<ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/patna/men-not-far-behind-women-in-celebrating-chhath/articleshow/55251895.cms|title=Men not far behind women in celebrating Chhath {{!}} Patna News - Times of India|date=2016|website=The Times of India|language=en|access-date=2023-02-01}}</ref> == मनावे के तरीका == [[चित्र:Devotee with Offering - Chhath Puja Ceremony - Ramkrishnapur Ghat - Howrah 2013-11-09 4124.JPG|210px|thumb|सूपा में परसाद लिहले पानी में खड़ा एगो ब्रती]] मुख्य रूप से ई सुरुज के पूजा हवे, हालाँकि, एह में जेवना देवी के पूजा कइल जाला उनका के ''छठि मइया'' कहल जाला। एक साथ, सुरुज के अरघा दिहल आ छठी मइया के पूजा के तइयारी [[दिपावली]] के बादे से सुरू हो जाले। दिवाली कातिक के अमौसा के मनावल जाले, एकरे अगिला दिने गोधना कुटाला आ ओहू के अगिला दिने भाई दुइज मनावल जाले। एकरे बाद छठ के तइयारी हो जाला। दू दिन बाद चउथ के तिथि से कार्यक्रम के सुरुआत होला आ अंतिम अरघा सत्तिमी के दिहल जाला। एह चारो दिन के बिबरन नीचे दिहल जात बा: === ''नहाय खाय'' === कातिक सुदी चउथ के छठ पूजा के तइयारी के रूप में ''नहाय खाय'' से सुरुआत होले। एकरा के ''अरवा-अरवइन'' भी कहल जाला। घर के नीक से साफ-सफाई कइल जाला आ एह दिन अइसन सगरी मेहरारू लो जिनके बरत भुक्खे के होला, जे लोग ब्रती कहालीं, कौनों पबित्र जलस्थान, नदी-पोखरा वगैरह में नहान करे लीं। नहान के बाद साफ-सुथरा तरीका से भोजन तइयार कइल जाला। एह दिन मेहरारू लोग एक्के बेरा भोजन करे ला। एह भोजन में लउकी के खास महत्त्व बतावल जाला।<ref>{{cite web|author=आभा सेन |url=https://www.patrika.com/news/jabalpur/start-worship-of-the-chhath-maiya-5624/ |title=छठ पूजा : लौकी की सब्जी ग्रहण कर शुरू किया व्रत|publisher=Patrika.com |date=2015-11-16 |accessdate=2017-10-15}}</ref> अरवा चाउर के भात आ लउकी के तरकारी खा के ब्रत के सुरुआत कइल जाला।<ref name="bhaskar1">{{cite web|author=ट्रेंडिंग न्यूज़ अलर्ट |url=https://www.bhaskar.com/news/JHA-JAMS-chhath-celebration-in-jamshedpur-4786960-PHO.html |title=छठ सेलिव्रेशन इन जमशेदपुर |publisher=Bhaskar.com |date=2014-10-27 |accessdate=2017-10-15}}</ref> === ''खरना'' === ''अरवा-अरवइन'' के अगिला दिने, मने कि पंचिमी के, एक दिन दिन भर के बरत भुक्खल जाला। ई एक तरह से मुख्य बरत से पहिले के तइयारी होला आ एही से एकरा के खरना कहल जाला। ''खर कइल'' के अरथ होला तपावल भा शुद्ध कइल। एह दिन भर के बरत के बाद साँझ के बेरा रोटी के साथे खीर भा बखीर बनावल जाले जेकरा के खरना के परसाद कहल जाला। इहे परसाद खा के मुख्य बरत सुरू होला। === ''पहिला अरघ'' === [[चित्र:Preparation - Chhath Puja Ceremony - Baja Kadamtala Ghat - Kolkata 2013-11-09 4242.JPG|160px|thumb|left|पानी में ऊखि गाड़ के पूजा के तइयारी]] [[चित्र:Chhath in Ranipokhari 03.jpg|210px|thumb|right|छठ पूजा के पहिला अरघ के समय जगमग घाट]] [[चित्र:Offerings - Chhath Puja Ceremony - Baja Kadamtala Ghat - Kolkata 2013-11-09 4315.JPG|210px|thumb|सुपेली में रखल परसाद जेह में [[ठेकुआ]] के बिसेस महत्व होला]] ''खरना'' के बाद के रात, आ छठईं तिथी के पूरा दिन आ रात बरत के रात होले। एही छठ तिथी के साँझ बेर नदी, पोखरा के किनारे घाट पर जाइल जाला। घाट पर जा के पूजा के पहिले घरे परसाद बनावल जाला। छठ के परसाद में [[ठेकुआ]] बनावल जाला जे गोहूँ के आटा में मीठा डारि के अ घीव के मोएन दे के दूध में सानल जाला आ सुद्ध घीव में छानल जाला। उत्तरी बिहार में एकरा के खासतौर पर माटी के साफ चूल्हा पर बनावल जाला आ साफ लकड़ी के इस्तेमाल कइल जाला।<ref>{{cite web |url=http://www.festivalsofindia.in/chhatpuja/Chhathpuja-rituals-Hindi.aspx |title=छठपूजा के रसà¥?म रिवाज, छठपूजा नियम, छठपूजा परंपरा |publisher=Festivalsofindia.in |date=2017-08-09 |accessdate=2017-10-15 |archive-date=2017-10-20 |archive-url=https://web.archive.org/web/20171020041835/http://www.festivalsofindia.in/chhatpuja/Chhathpuja-rituals-Hindi.aspx |url-status=dead }}</ref> बाकी परसाद में कम से कम तीन किसिम के [[फल]] रहे ला। फल सभ में सिंघाड़ा, गंजी, केला, अनन्नास, गागल नींबू, नरियर, आ मुरई वगैरह सामिल रहे ला।<ref name="bhaskar1"/><ref>{{cite web|url=https://navbharattimes.indiatimes.com/state/punjab-and-haryana/gurgaon/chhath-puja-special-importance-of-vegetables-in/articleshow/25336452.cms |title=Chhath Puja special importance of vegetables in&#124;छठ पूजन में सब्जियों का विशेष महत्व - Navbharat Times |language=en |publisher=Navbharattimes.indiatimes.com |date= |accessdate=2017-10-15}}</ref> घाट पर पहिले से घर के सवाँग लोग सफाई क के माटी के बेदी बनवले रहे ला लोग। घर से दउरा में सगरी परसाद सामग्री सजा के ले जाइल जाला जहाँ दिया-अगरबत्ती बार के परसाद के सूप में सजा के पूजा कइल जाला आ छठ मइया के गीत गावल जाला। एकरे बाद सुरुज के डूबे से पहिले मेहरारू लोग लगभग कर्हियाइ भर से ऊपर पानी में खड़ा हो के सुरुज भगवान के पूजा करे ला। कुछ जगह, जहाँ छठ मइया के साड़ी चढ़ावे के बिधान भी होला, पानी में पाँच गो ऊखि गाड़ल जालीं जिनहन के पतई आपसे में बान्हल रहे ला आ ओही में साड़ी के सजा के ओकरा पाछे से सुरुज के पूजा कइल जाला। पूजा के बाद सुरुज भगवान के अरघा दिहल जाला। अर्घ में पानी में कई तरह के सुगंधित सामग्री मिला के तामा भा पीतर के लोटा में ले के दुनों हाथ से टिकासन से ऊपर उठा के सुरुज के सोझा धार के रूप में गिरावल जाला जेवना से ओह धार से हो के सुरुज के रोशनी चढ़ावे वाला के देह पर परे। पहिला अर्घा के बाद घाट से सगरी चीज बटोर के घरे आ जाला। कुछ लोग जे संतान खाती मनौती मनले रहे ला एह रात के अँगना में एक तरह के पूजा करे ला जेकरा कोसी भा कोसिया भरल कहल जाला। ''कोसिया'' माटी के एगो खास तरह के बर्तन होला जे कोहा के आकार के होला आ एकरा बरि पर दिया बनल रहे लें। एही में चढ़ावा के सामग्री भर के आ दिया सभ के बार के गीति गावल जाला। === ''दुसरा अरघ'' === छठ तिथी के अगिला दिने, सत्तिमी के भोरे में लोग घाट पर दोबारा चहुँप जाला आ ओही घाट आ बेदी पर फिर से सारा पूजा के सामग्री सजावल जाले। पानी में खड़ा हो के ब्रती लोग सुरुज उगे के इंतजारी करे ला आ उगत सुरुज के भोर के ''दुसरा अरघा'' दियाला। एकरे बाद घरे लवट के परसाद खा के बरत टूटे ला आ पारन कइल जाला। == क्षेत्र == [[बिहार]] छठ के पूजा के मूल अस्थान हवे आ मानल जाला कि हेइजे से ई बरत बाकी इलाकन में चहुँपल।<ref name="UpadhyayPandey1993">{{cite book|author1=Vijay S. Upadhyay|author2=Gaya Pandey|title=History of Anthropological Thought|url=https://books.google.com/books?id=SNw5zVN1V0oC&pg=PA154|year=1993|publisher=Concept Publishing Company|isbn=978-81-7022-492-1|pages=154–}}</ref> बिहार के औरंगाबाद जिला में देव सूर्य मंदिर बा।<ref>{{cite web|url=http://www.bihartourism.gov.in/districts/aurangabad/Deosuryatemple.html |title=Welcome to Bihar Tourism |publisher=Bihartourism.gov.in |date= |accessdate=2017-10-13}}</ref> मानल जाला कि एही जा से छठ के पूजा सुरू हो के बिहार आ बाद में आसपास के राज्य सभ में फइलल।<ref name="UpadhyayPandey1993"/> बतावल जाला कि औरंगाबाद के ई जगह, देवकुंडा, महर्षी च्यवन के आश्रम रहल आ उनके पत्नी हेइजा छठ के बरत करें।<ref name="UpadhyayPandey1993" /> इहाँ मौजूद वर्तमान सूर्य मंदिर महाराज भैरवेंद्र देव के जमाना (~1450 ईसवी) के मानल जाला।<ref name="SaranPandey1992b">{{cite book|author1=Anirudha Behari Saran|author2=Gaya Pandey|title=Sun Worship in India: A Study of Deo Sun-Shrine|url=https://books.google.com/books?id=8XimO39s7_gC&pg=PA50|year=1992|publisher=Northern Book Centre|isbn=978-81-7211-030-7|pages=50–}}</ref> एकरे लग्गे कुछ दूरी पर सूर्यकुंड भी बा। मूल रूप से बिहार, पूरबी उत्तर प्रदेश आ तराई के इलाका के ई तिहुआर इहाँ के लोग के साथ-साथ भारत के बाकी इलाका में भी पहुँचल बा आ पूर्वोत्तर भारत, बंगाल आ मध्य प्रदेश में भी मनावल जाला।<ref>{{cite book|title=World Encyclopaedia of Interfaith Studies: World religions|url=https://books.google.com/books?id=fFwi7qRRgosC|year=2009|publisher=Jnanada Prakashan|isbn=978-81-7139-280-3|page=679}}</ref> भारत के राजधानी दिल्ली में छठ खाती सरकारी तौर पर इंतजाम कइल जाए लागल बा<ref>{{cite web |url=http://www.inkhabar.com/national/52549-mahaparv-chhath-puja-2017-delhi-government-started-preparation-of-chhath-mahaparv-2017 |title=महापर्व छठ पूजा 2017: केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में छठ पूजा की तैयारियां शुरू की mahaparv chhath puja 2017: Delhi government started preparation of chhath mahaparv 2017 |language=en |publisher=Inkhabar.com |date= |accessdate=2017-10-13 }}{{Dead link|date=October 2023 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref><ref>{{cite web|author=भाषा |url=http://www.jansatta.com/rajya/new-delhi/delhi-chhath-pooja-rpf-preparation/178843/ |title=delhi chhath pooja rpf preparation |publisher=Jansatta |date=2016-11-06 |accessdate=2017-10-13}}</ref> आ मुंबई में भी छठ के सार्वजनिक तौर पर आयोजन कइल जा चुकल बा।<ref>{{cite web|url=https://navbharattimes.indiatimes.com/metro/mumbai/other-news/such-was-the-first-chhath-puja-in-mumbai/articleshow/55143270.cms |title=Such was the first Chhath Puja in Mumbai&#124;ऐसी थी मुंबई की पहली छठ पूजा - Navbharat Times |language=en |publisher=Navbharattimes.indiatimes.com |date= |accessdate=2017-10-13}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.punjabkesari.in/national/news/chhath-puja--devendra-fadnavis--mumbai-536205 |title=मुंबई के जुहू बीच पर छठ पूजा में शामिल हुए CM फडणवीस |publisher=Punjabkesari.in |date=2016-11-07 |accessdate=2017-10-13}}</ref> दिल्ली मुंबई नियर शहर जहाँ बिहार आ उत्तर प्रदेश के लोग के काफी संख्या बा इहाँ त छठ मनावले जालाम अब ई दक्खिन भारत के बंगलौर<ref>{{cite web|url=http://www.bbc.com/hindi/lg/india/2009/10/091024_chhath_festival_mb.shtml |title=BBC Hindi - भारत - छठ का पर्व तस्वीरों में |publisher=Bbc.com |date= |accessdate=2017-10-13}}</ref> आ चेन्नई नियर शहर सभ में भी मनावल जाए लागल बा जहाँ यूपी बिहार के लोग के मौजूदगी बा।<ref>{{cite web |url=https://khabar.ndtv.com/news/india/bihar-jharkhand-chhath-festival-in-southern-india-boom-1244484 |title=Bihar-Jharkhand Chhath festival in southern India boom - दक्षिण भारत में भी बिहार-झारखंड के छठ पर्व की धूम |publisher=Khabar.ndtv.com |date=2015-11-17 |accessdate=2017-10-13 |archive-date=2015-11-20 |archive-url=https://web.archive.org/web/20151120050543/http://khabar.ndtv.com/news/india/bihar-jharkhand-chhath-festival-in-southern-india-boom-1244484 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/chennai/Sun-worshippers-ditch-river-do-puja-in-swimming-pool/articleshow/17301342.cms|title=Sun worshippers ditch river, do puja in swimming pool - Times of India|author=|date=2012-11-21|publisher=Timesofindia.indiatimes.com|accessdate=2017-10-13}}</ref> == संस्कृति == छठ पर्ब के बिहार आ पूर्वांचल के लोग के सांस्कृतिक पहिचान के रूप में देखल जाला। कारण की ई पर्ब इहाँ के लोग द्वारा मनावल जाए वाला एगो यूनिक तिहुआर बाटे आ ई तिहुआर इहँवे के लोग मनावे ला, चाहे अपना मूल इलाका में भा जहाँ दुसरी जगह इहाँ के लोग परवास क रहल बा। छठ के बिबिध महत्व सभ में इहो एगो महत्व देखल गइल बा कि ई नया पीढ़ी के आपस में जोड़े के माध्यम बन रहल बा।<ref>{{Cite web|url=https://www.prabhatkhabar.com/vishesh-aalekh/887843|title=छठ : युवाओं को आपस में जोड़नेवाला सांस्कृतिक बंधन|website=Prabhat Khabar|language=hi|access-date=2023-02-01}}</ref> हाल में आइल एगो बीडियो में नया पीढ़ी के लोग द्वारा छठ अपनावे के एगो भावुक बीडियो सोशल मीडिया पर वाइरल भइल बा। एह बीडियो में भोजपुरी-बिहारी इलाका से बाहर दुसरे राज्य में रहत युवा लोग द्वारा छठ अपनावे के प्रेरणा दिहल गइल बा। == चैती छठ पूजा == एह 4 दिन के महोत्सव के बारे में रउरा सभे के जाने के जरूरत बा। छठ पूजा के हिन्दू कैलेंडर में [[चइत|चैत्र]] आ कार्तिक महीना के दौरान हर साल दू बेर मनावल जाला आ एकरा के सभसे शुभ हिन्दू पर्व सभ में से एक मानल जाला। छठी मईया आ सूर्य भगवान के प्रति समर्पित, ई उत्सव 4 दिन के रेंज में देखल जाला, जवना के शुरुआत नाहाय खय के समारोह से आ ओकरा बाद खरना भा लोहंडा, संध्या अर्घ्या से होला आ उषा अर्घ्य के साथ पराकाष्ठा होला जवन आखिरी दिन उगते सूरज के प्रस्तावित होला। चैतला पक्ष शश्थी पर चैती छठ के मनावल जाला आ चैतर महीना में मनावल जाला आ चैत्र नवरात्रि के दौरान देखल जाला। एह उत्सव के अतिरिक्त रूप से यमुना छठ कहल जाला। मानल जाला कि यमुना नदी एह दिन धरती पर उतरल आ, एह हिसाब से, ई ओही तरह से देवी यमुना भा यमुना जयंत के जनम के सालगिरह के दर्शावेला। [https://www.business-standard.com/india-news/chaiti-chhath-puja-2024-all-you-need-to-know-about-this-4-day-festival-124041200761_1.html] == संदर्भ == {{Reflist|35em}} == बाहरी कड़ी == {{commons category|Chhath|छठ}} {{हिंदू तिहुआर}} [[श्रेणी:हिंदू तिहुआर]] [[श्रेणी:भोजपुरी संस्कृति]] [[श्रेणी:बिहार के संस्कृति]] [[श्रेणी:नेपाल के संस्कृति]] [[श्रेणी:कातिक महीना के तिहुआर]] 2p0ks4vo4oh5tqviblymkmqmikr05cy सरजू नदी 0 9270 805689 712195 2026-09-25T16:11:40Z SM7 3953 सुधार कइल गइल 805689 wikitext text/x-wiki '''सरजू नदी''' चाहे '''घाघरा नदी''' (सरयू नदी सरजू मइया) [[हिमालय|हिमालय पर्वत]] से निकले वाली आ उत्तरी [[भारत]] की [[गंगा मैदान]] में बहे वाली एगो [[नदी]] ह जेवन [[नेपाल]] से भारत में प्रवेश करेले आ [[बलिया]] आ [[छपरा]] की बीच में [[गंगा नदी]] नदी में मिल जाले। [[हिंदू धर्म]] में [[अवतार]] मानल जाए वाला [[राम|भगवान राम]] के जनम एही सरयू नदी की तीरे [[अयोध्या|अजोध्या]] में भइल रहे। अपनी ऊपरी हिस्सा में ई नदी दू गो धारा में पहिचानल जाले [[काली]] आ [[करनाली]] (घाघरा) जिनहन की संगम की बाद ए के सरयू या घाघरा कहल जाला। थोड़ी दूर बाद ए में [[शारदा]] (नेपाल में नाँव: महाकाली) नदी मिल जाली। भारत में ई नदी पूरा रास्ता भर [[उत्तर प्रदेश]] में बहेले आ अंत में थोड़ी दूर ले उत्तर प्रदेश आ [[बिहार]] क सीमा बनावेले। सरजू नदी क प्रमुख सहायक नदी [[राप्ती]] हवे जेवना की तीरे [[गोरखपुर]] नगर बसल बा आ ई [[बरहज]] की लगे सरजू जी में मिल जाले। राप्ती की आलावा अउरी कई गो छोट-बड़ नदी ए में मिलेली। सरजू जी अपनी विशाल जलराशि खातिर जानल जाली आ निचला हिस्सा में कबो-कबो [[बाढ़ि]] आवेले। लखीमपुर-खीरी जिला में ई नदी [[दुधवा बाघ अभयारण्य]] से हो के गुजरेली आ हाले में [[सूँस]] की संरक्षण खातिर एहू नदी में कोसिस कइल जात बा। [[राम नवमी]] के अजोध्या जी में लाखन लोग सरजू जी में अस्नान करे आवेला। {{clear}} ==संदर्भ== {{Reflist|33em}} {{Waters of South Asia}} {{Hydrography of Uttar Pradesh}} [[श्रेणी:भारत के नदी]] [[श्रेणी:गंगा के सहायिका]] [[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के नदी]] [[श्रेणी:एशिया के इंटरनेशनल नदी]] [[श्रेणी:नेपाल के नदी]] {{नदी-आधार}} gpm3j21f3nq0axpm5afm2bkgj151pi8 805690 805689 2026-09-25T16:14:58Z SM7 3953 ज्ञानसंदूक जोड़ल गइल 805690 wikitext text/x-wiki {{Infobox river | name = Ghaghara | native_name = | native_name_lang = | 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[[बलिया]] आ [[छपरा]] की बीच में [[गंगा नदी]] नदी में मिल जाले। [[हिंदू धर्म]] में [[अवतार]] मानल जाए वाला [[राम|भगवान राम]] के जनम एही सरयू नदी की तीरे [[अयोध्या|अजोध्या]] में भइल रहे। अपनी ऊपरी हिस्सा में ई नदी दू गो धारा में पहिचानल जाले [[काली]] आ [[करनाली]] (घाघरा) जिनहन की संगम की बाद ए के सरयू या घाघरा कहल जाला। थोड़ी दूर बाद ए में [[शारदा]] (नेपाल में नाँव: महाकाली) नदी मिल जाली। भारत में ई नदी पूरा रास्ता भर [[उत्तर प्रदेश]] में बहेले आ अंत में थोड़ी दूर ले उत्तर प्रदेश आ [[बिहार]] क सीमा बनावेले। सरजू नदी क प्रमुख सहायक नदी [[राप्ती]] हवे जेवना की तीरे [[गोरखपुर]] नगर बसल बा आ ई [[बरहज]] की लगे सरजू जी में मिल जाले। राप्ती की आलावा अउरी कई गो छोट-बड़ नदी ए में मिलेली। सरजू जी अपनी विशाल जलराशि खातिर जानल जाली आ निचला हिस्सा में कबो-कबो [[बाढ़ि]] आवेले। लखीमपुर-खीरी जिला में ई नदी [[दुधवा बाघ अभयारण्य]] से हो के गुजरेली आ हाले में [[सूँस]] की संरक्षण खातिर एहू नदी में कोसिस कइल जात बा। [[राम नवमी]] के अजोध्या जी में लाखन लोग सरजू जी में अस्नान करे आवेला। {{clear}} ==संदर्भ== {{Reflist|33em}} {{Waters of South Asia}} {{Hydrography of Uttar Pradesh}} [[श्रेणी:भारत के नदी]] [[श्रेणी:गंगा के सहायिका]] [[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के नदी]] [[श्रेणी:एशिया के इंटरनेशनल नदी]] [[श्रेणी:नेपाल के नदी]] {{नदी-आधार}} ocifyxy9fnf1yp0a9hw8sf9t4uw8jxf वरुण 0 27369 805710 297444 2026-09-26T10:08:13Z SM7 3953 अपडेट कइल गइल 805710 wikitext text/x-wiki {{Infobox deity | type = Hindu | image = File:Rajarani Temple 03 (cropped).jpg | caption = Sculpture of Varuna at the 11th-century Rajarani [[Hindu temple]].<ref name="Michell1977p45">{{cite book |author=George Michell |title=The Hindu Temple: An Introduction to Its Meaning and Forms |url=https://books.google.com/books?id=ajgImLs62gwC |year=1977 |publisher=University of Chicago Press |isbn=978-0-226-53230-1 |pages=4, 44–45 with Figure 15}}</ref> | name = Varuna | god_of = '''[[Vedic mythology|Vedic]]:''' God of Sky, [[Ṛta|Order]], [[Satya|Truth]], [[Ap (water)|Water]] and [[Māyā|Magic]] ---- '''[[Itihasa-Purana|Itihasa-Puranic]]:''' God of Water, Lakes, Streams, Rivers and Oceans | member_of = [[Adityas]] and [[Dikpala]] | affiliation = '''Vedic:''' [[Asuras]], [[Deva (Hinduism)|Devas]], [[Adityas]] ---- '''Itihasa-Puranic:''' [[Deva (Hinduism)|Devas]], [[Adityas]], [[Dikpala]]s | abode = Ocean | mantra = ''Oṃ jala bimbāya vidmahe<br>nīla puruṣāya dhīmahi<br>tanno varuṇaḥ pracodayāt<br>Oṃ Varunāya Namaḥ'' | weapon = [[Noose]], [[Varunastra]], [[Gandiva]] | mount = [[Makara (Hindu mythology)|Makara]] | father = [[Kashyapa]] | mother = [[Aditi]] | planet = [[Neptune]]<ref>{{Cite web |date=2007-12-17 |title=Planetary Linguistics |url=http://seds.lpl.arizona.edu/nineplanets/nineplanets/days.html |access-date=2025-01-28 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071217070734/http://seds.lpl.arizona.edu/nineplanets/nineplanets/days.html |archive-date=17 December 2007 }}</ref> | spouse = '''Itihasa-Puranic:''' {{hlist|[[Varunani]]|Gauri|Charshani|Jyeshtha<ref name=":2" />}} | children = '''Itihasa-Puranic:''' * Bala (son) * [[Varuni#Varuna's daughter|Varuni or Sura]] (daughter)<ref name=":2" /> * Pushkara (son) * [[Vasishtha]] and [[Agastya]] (twin-sons) * Go (son) * Vandi (son) * Sushena (son, a [[vanara]]) * [[Shrutayudha]] (son) * [[Adharma|Andharmaka]] (son) * Kali (son, [[Jaya-Vijaya|Jaya and Vijaya]]'s father)<ref>{{Cite book|url=https://archive.org/details/BrahmandaPuranaG.V.TagarePart3|title=Brahmanda Purana – English Translation – Part 3 of 5|last=G.V.Tagare|date=1958|pages=[https://archive.org/details/BrahmandaPuranaG.V.TagarePart3/page/n77 794]}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.wisdomlib.org/definition/stuta|title=Stuta, Stutā: 5 definitions|last=www.wisdomlib.org|date=2017-10-09|website=www.wisdomlib.org|access-date=2020-01-15}}</ref> * [[Manu (Hinduism)|Dakshasavarni Manu]] (son) | greek_equivalent = [[Poseidon]]<ref>{{cite web |title=Poseidon diety |url=https://www.ebsco.com/research-starters/arts-and-entertainment/poseidon-deity}}</ref> | roman_equivalent = [[Neptune (mythology)|Neptune]] | norse_equivalent = [[Njörðr]] | other_names = {{hlist|Sindhu|Samudra|Ratnākara}} }} '''वरुण''' [[हिन्दू धर्म]] में एगो [[वैदिक]] [[देवता]] बाड़ें। इनके जल, मतलब पानी, के देवता मानल गइल रहे। बाद में बरखा करावे वाला देवता के रूप में [[इंद्र]] के प्रतिष्ठा ढेर बढ़ल। पौराणिक काल में बिष्णु आ शिव के महत्व बढ़ले के साथै साथ वरुण के महत्व कम हो गइल। ==संदर्भ== {{Reflist}} {{हिंदू धर्म बिसय}} [[श्रेणी:हिंदू धर्म]] [[श्रेणी:वैदिक देवता]] {{हिंदू-आधार}} gvycn8wjstjhpq4mrqwdjiilm1ckngx टेम्पलेट:हिंदू कलेंडर 10 36169 805687 391512 2026-09-25T13:55:36Z SM7 3953 हिज्जे/इस्पेलिंग सुधार 805687 wikitext text/x-wiki {{Navbox |name = हिंदू कलेंडर |title = [[हिंदू कलेंडर]] के महीना सभ |state = {{{state|autocollapse}}} |listclass = hlist hnum |list1 = # [[चइत]] ({{lang|sa|चैत्र}}) # [[बइसाख]] ({{lang|sa|वैशाख}}) # [[जेठ]] ({{lang|sa|ज्येष्ठ}}) # [[असाढ़]] ({{lang|sa|आषाढ}}) # [[सावन]] ({{lang|sa|श्रावण}}) # [[भादो]] ({{lang|sa|भाद्रपद}}) # [[कुआर]] ({{lang|sa|आश्विन्}}) # [[कातिक]] ({{lang|sa|कार्तिक}}) # [[अगहन]] ({{lang|sa|मार्गशीर्ष}}) # [[पूस]] ({{lang|sa|पौष}}) # [[माघ]] ({{lang|sa|माघ}}) # [[फागुन]] ({{lang|sa|फाल्गुन}}) }}<noinclude> {{collapsible option}} [[श्रेणी:हिंदू धर्म टेम्पलेट|कलेंडर]] [[श्रेणी:हिंदू कलेंडर के महीना]] </noinclude> bbfwnzp1prnn879o0gyv38wyg6tu74i टेम्पलेट:हिंदू तिथि सभ 10 36452 805682 791466 2026-09-25T13:42:01Z SM7 3953 सुधार कइल गइल 805682 wikitext text/x-wiki {{Navbox | name = हिंदू तिथि सभ | title = [[हिंदू कैलेंडर]] के [[तिथि]] सभ | state = {{{state<includeonly>|autocollapse</includeonly>}}} | listclass = hlist | list1 = # [[एक्कम]] # [[दुइज]] # [[तीज|तीजि]] # [[चउथि]] # [[पंचिमी]] # [[छठि]] # [[सत्तिमी]] # [[अष्टिमी]] # [[नउमी]] # [[दसिमी]] # [[एकादसी]] # [[दुआदसी]] # [[तेरस]] # [[चतुर्दसी]] # [[पुर्नवासी]]/[[अमौसा]] }}<noinclude> {{collapsible option}} [[श्रेणी:समय, तारीख आ कैलेंडर टेम्पलेट]] </noinclude> 44snbj95k6r5tqzbsbpiisa19oaeen7 ऊटी 0 49407 805688 803341 2026-09-25T13:59:22Z SM7 3953 +विकिकड़ी जोड़ल गइल 805688 wikitext text/x-wiki {{Infobox settlement | name = ऊटी | native_name = | native_name_lang = | other_name = ऊटकमंड, उदगमंडलम् | settlement_type = [[कस्बा]] आ [[हिल स्टेशन]] | image_skyline = Emerald Lake Nilgiris.jpg | image_alt = | image_caption = | nickname = हिल स्टेशन सभ के रानी | map_alt = | map_caption = | pushpin_map = India Tamil Nadu | pushpin_label_position = right | pushpin_map_alt = | pushpin_map_caption = | coordinates = {{coord|11.41|N|76.70|E|display=inline,title}} | subdivision_type = देस | subdivision_name = भारत | subdivision_type1 = राज्य | subdivision_type2 = जिला | subdivision_name1 = [[तमिल नाडु]] | subdivision_name2 = [[नीलगिरी जिला]] | established_title = | established_date = | founder = | named_for = | unit_pref = | area_footnotes = | area_total_km2 = | area_rank = | elevation_footnotes = <ref name="municipality">{{cite web|url=http://municipality.tn.gov.in/ooty/abt-muni.htm |title=About Municipality |access-date=15 February 2008 |publisher=municipality.tn.gov.in |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20080115070843/http://municipality.tn.gov.in/ooty/abt-muni.htm |archivedate=15 January 2008 |df= }}</ref> | elevation_m = 2240 | population_total = 88,430 | population_as_of = 2011 | population_footnotes = <ref>{{Cite web|url=http://www.censusindia.gov.in/pca/SearchDetails.aspx?Id=688772|title=Census 2011|publisher=GOI}}</ref> | population_density_km2 = auto | population_rank = | population_demonym = | demographics_type1 = भाषा | demographics1_title1 = ऑफिशियल | timezone1 = [[भारतीय मानक समय|IST]] | utc_offset1 = +5:30 | postal_code_type = [[पिनकोड]] | postal_code = 643 001 | area_code = 91423 | area_code_type = टेलीफोन | registration_plate = TN 43 | website = }} '''उदगमंडलम्''' चाहे '''ऊटी''' ({{Lang|en|Ooty}}) [[तमिलनाडु]] में एगो [[कस्बा]] आ म्युनिस्पैलिटी बा आ ई एगो परसिद्ध [[हिल स्टेशन|हिल इस्टेशन]] ह। ई [[नीलगिरी जिला|नीलगिरि जिला]] के मुख्यालय भी बा। [[नीलगिरि|नीलगिरी]] के पहाड़ी पर {{convert|2240|m}} के ऊँचाई पर मौजूद ई जगह एगो परसिद्ध पहाड़ी पर्यटन स्थल बा। [[कोयंबटूर]] से 86 किमी उत्तर आ मैसूर से 158 किमी दक्खिन में मौजूद ई कस्बा नीलगिरि घाट सड़क आ नीलगिरि माउंटेन रेलवे से जुड़ल बाटे आ गर्मी के सीजन खातिर एगो पापुलर पर्यटन केंद्र हवे। 2011 में एह कस्बा के कुल आबादी 88,430 रहल। मूल रूप से ई एरिया टोडा लोग के रहल जे अठारहवीं सदी के अंत के समय में ईस्ट इंडिया कंपनी के कब्जा में आइल। एहिजे के अर्थब्यवस्था पर्यटन आ खेती-किसानी पर टिकल बाटे, एकरे साथे-साथ कुछ किसिम के दवाई आ फोटोग्राफिक फिल्म (रील) के मैनुफैक्चरिंग एहिजे होखे ला; कई ठो फिलिम सभ के शूटिंग के लोकेशन के रूप में भी एह जगह के बीछल जा चुकल बा। एकरा के पॉपुलर नाँव "क्वीन ऑफ़ हिल स्टेशंस" (हिल स्टेशन सभ के रानी) आ "क्वीन ऑफ़ वेस्टर्न घाट्स" (पच्छिमी घाट के रानी) से बोलावल जाला। ई मद्रास प्रेसिडेंसी के गर्मी के सीजन के राजधानियो रहल। == नाँव == एकरे नाँव के बारे में सटीक जानकारी नइखे। नाँव के पहिला लिखित परमान मार्च 1821 में ''मद्रास गैजेट'' नाँव के अखबार के लिखल एगो चिट्ठी में ''Wotokymund'' हिज्जे के साथे मिले ला। मानल जाला कि पुराना समय में ई ''ओट्टकल मंडू'' कहल जाय। इहो अनुमान लगावल जाला कि नाँव उदगमंडलम रहे जे बाद में, ब्रिटिश काल में, बदल के ऊटकमंड भ गइल, जे अउरियो बाद में छोट हो के ऊटी भइल। नाँव के पहिला हिस्सा संभव बा कि नीलगिरी परबत के बिचला हिस्सा के लोकल नाँव के बिगड़े से बनल हवे। ऊट्टा-कल के शाब्दिक अरथ "एक ठो पाथर" होखे ला। हो सके ला कि ई कौनों अइसन पबित्र पाथर रहल होखे जे लोकल टोडा लोग द्वारा मानल जात होखे। दुसरा हिस्सा मंड टोडा भाषा के मांडू शब्द के बिगड़ल रूप हवे जेकर अरथ गाँव होला। ऊटी नीलगिरि के परबत में बा; खुद नीलगिरि (नीला परबत) कुरुंजी नाँव के एगो फूल से आवे ला जे एह परबत पर लमहर समय (बारह बरिस) के बाद फुलाला आ पूरा ढाल सभ के नीलछाहूँ क देला। == इतिहास == उदगमंडलम् मूल रूप से आदिवासी लोगन के इलाका रहल आ एहिजे तमिल, टोडा, कोटा, ईरुला, आ कुरुंबा जनजाति के लोग रहे। 1818 में असिस्टेंट जे. सी. विश आ एन. डब्लू. किंडर्सले लोग जे जॉन सुलिवान, ओह समय के कोयंबटूर के जिला कलेक्टर, के सहजोगी रहल, ऊटी के जात्रा कइलें लोग आ रिपोट जमा कइल लोग। सुलिवान कोटागिरी के उत्तर में दिम्बाती में जनवरी 1819 में कैंप कइलें आ एकरे सुन्दरता के चकित रहि गइलें। मई 1819 में टोडा लोग एह क़स्बा के कुछ हिस्सा सुलिवान के दे दिहल आ ऊ दिम्भाती में आपन बंगला बनवावे शुरू कइलें। एही साल ऊ सिरुमुगाई से दिम्भाती खातिर रोड के निर्माण सुरू करववलें रो मई 1823 में बन के तइयार भइल आ बाद में 1830-32 में कुन्नूर ले बढावल गइल। अरानमोर महल जे ऊटी में बा, मद्रास प्रेसिडेंसी के राजधानी के रूप में काम करे गर्मी के सीजन खाती।ई ब्रिटिश अधिकारी लोग एहिजे आवे जब गर्मी के सीजन होखे आ ई पापुलर रिजार्ट बन गइल। सिपाही लोगन के तरोताजा होखे खातिर वेलिंगटन भेजल जाय। अब्बो वेलिंगटन भारतीय सेना के मदरास रेजिमेंट के घरेलू अस्थान हवे। भारत के आजादी के बाद ऊटी के हिल स्टेशन के रूप में बिकसित कइल गइल। == भूगोल == === लोकेशन === ऊटी [[नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व]] में पड़े ला। कई सारा जंगली एरिया आ जलभंडार सभ तक आम पहुँच ना बाटे जे एह इलाका के नाजुक [[इकोसिस्टम]] के संरक्षित रखे खातिर सुरक्षित कइल गइल बाड़ें। बायोस्फीयर रिजर्व के कुल इलाका के कुछ हिस्सा चिन्हित कइल गइल बाड़ें जहाँ पर्यटन खातिर आवाजाही हो सके ला। साथे साथ अइसनो उपाय कइल गइल बाड़ें कि पर्यटक लोगन खातिर खुला रखे के संघे एह इलाका के सुरक्षो कइल जा सके।<ref>{{cite news|title= Ban on carry bags|url = http://www.hindu.com/2005/02/04/stories/2005020401370300.htm|archive-url = https://web.archive.org/web/20050220103729/http://www.hindu.com/2005/02/04/stories/2005020401370300.htm|url-status = dead|archive-date = 20 February 2005| location=Chennai, India|work= [[The Hindu]]|date=4 February 2005}}</ref> ऊटी [[नीलगिरि]] के पहाड़ी पर [[समुंद्र तल]] से {{convert|2240|m|ft|abbr=off}} के ऊँचाई पर बसल कस्बा हवे।<ref name="municipality"/> === जलवायु === [[File:Boat House in Ooty Lake, Ooty - Tamil Nadu.JPG|thumb|upright=1.2|ऊटी झील में एगो बोटहाउस]] ऊटी के जलवायु [[उपोष्णकटिबंधी हाइलैंड जलवायु]] वाला इलाका हवे जे [[कोपेन के जलवायु वर्गीकरण|कोपेन के जलवायु बर्गीकरण]] में Cwb प्रकार में आवे ला।<ref name="Climate-Data.org">{{cite web|title=Climate: Ooty – Climate graph, Temperature graph, Climate table|url=http://en.climate-data.org/location/24046/|publisher=Climate-Data.org|access-date=30 September 2015 | archive-url=https://web.archive.org/web/20140227100008/http://en.climate-data.org/location/24046/ |archive-date=27 February 2014}}</ref> भले ई [[उष्णकटिबंध]] के क्षेत्र में होखे, एकरे बावजूद इहाँ के मौसम साल भर सुहावन आ [[बसंत]] नियर रहे ला। हालाँकि, जनवरी-फरवरी में रात के तापमान ठंढा होखे ला। सालों भर औसत तापमान लगभग बरोबर रहे ला; सालाना औसत हाई टेम्परेचर {{convert|17|-|20|C|F|0}} आ औसत लो टेम्परेचर लगभग {{convert|5|-|12|C|F|0}} के बीचा में रहे ला। अबतक ले के सभसे बेसी रिकार्ड तापमान ऊटी में {{convert|28.5|C|F}} रहल बा जे एह उष्णकटिबंधी क्षेत्र में पड़े वाला जगह खातिर कम्मे बाटे आ [[दक्खिन एशिया|दक्खिनी एशिया]] के हिसाब से एकरा के ठंढा मानल जा सके ला। [[बरसात]] के सीजन एहिजा ठंढा आ तेज बयार भरल रहे ला। हवा के चलते ठंढा (विंड चिल प्रभाव) दिन में {{convert|5|C|F}} के एहसास करावे वाला हो सके ला। हवा एहिजा सालों भर तेज बहे ले। इहाँ रिकार्ड कइल गइल सभसे कम तापमान {{convert|-2|C|F}} रहल बा।<ref>{{cite web |url=http://citypatriots.com/asia/india/tamil-nadu/ooty |title=Ooty in Tamil Nadu |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20160305184727/http://citypatriots.com/asia/india/tamil-nadu/ooty |archive-date=5 March 2016}}</ref> एहिजे सालाना औसत बरखा {{convert|1050|mm|in}} होखे ला आ दिसंबर से मार्च के मौसम सूखल रहे ला। {{Weather box | location = Ooty (Udhagamandalam) 1981–2010, extremes 1901–2012 | width = auto | metric first = Yes | single line = Yes | Jan record high C = 26.8 | Feb record high C = 27.3 | Mar record high C = 27.5 | Apr record high C = 28.5 | May record high C = 28.0 | Jun record high C = 26.1 | Jul record high C = 22.8 | Aug record high C = 23.0 | Sep record high C = 23.3 | Oct record high C = 25.5 | Nov record high C = 25.4 | Dec record high C = 27.4 | year record high C = 28.5 | Jan high C = 21.4 | Feb high C = 22.1 | Mar high C = 23.2 | Apr high C = 23.3 | May high C = 22.9 | Jun high C = 18.7 | Jul high C = 17.7 | Aug high C = 17.7 | Sep high C = 19.2 | Oct high C = 19.3 | Nov high C = 19.5 | Dec high C = 20.9 | year high C = 20.5 | Jan low C = 6.2 | Feb low C = 7.1 | Mar low C = 9.3 | Apr low C = 11.2 | May low C = 11.8 | Jun low C = 11.4 | Jul low C = 11.1 | Aug low C = 11.2 | Sep low C = 10.7 | Oct low C = 10.4 | Nov low C = 9.0 | Dec low C = 7.1 | year low C = 9.7 | Jan record low C = -2.1 | Feb record low C = 0.0 | Mar record low C = 1.1 | Apr record low C = 5.0 | May record low C = 4.4 | Jun record low C = 2.2 | Jul record low C = 2.5 | Aug record low C = 4.6 | Sep record low C = 4.4 | Oct record low C = 0.0 | Nov record low C = -1.1 | Dec record low C = -1.1 | year record low C = -2.1 | rain colour = green | Jan rain mm = 9.7 | Feb rain mm = 7.4 | Mar rain mm = 20.6 | Apr rain mm = 73.1 | May rain mm = 98.7 | Jun rain mm = 124.1 | Jul rain mm = 149.4 | Aug rain mm = 97.9 | Sep rain mm = 132.1 | Oct rain mm = 169.6 | Nov rain mm = 110.4 | Dec rain mm = 47.7 | year rain mm = 1040.9 | Jan rain days = 1.1 | Feb rain days = 0.6 | Mar rain days = 1.9 | Apr rain days = 5.6 | May rain days = 8.7 | Jun rain days = 10.7 | Jul rain days = 11.2 | Aug rain days = 10.0 | Sep rain days = 10.1 | Oct rain days = 11.7 | Nov rain days = 7.6 | Dec rain days = 3.3 | year rain days = 82.4 |time day = 17:30 [[भारतीय मानक समय|आइएसटी]] | Jan humidity = 65 | Feb humidity = 62 | Mar humidity = 59 | Apr humidity = 66 | May humidity = 73 | Jun humidity = 84 | Jul humidity = 86 | Aug humidity = 87 | Sep humidity = 84 | Oct humidity = 84 | Nov humidity = 82 | Dec humidity = 72 |year humidity = 75 |source 1 = [[India Meteorological Department]]<ref name=IMDnormals> {{cite web | archive-url = https://web.archive.org/web/20200205040301/http://imdpune.gov.in/library/public/1981-2010%20CLIM%20NORMALS%20%28STATWISE%29.pdf | archive-date = 5 February 2020 | url = https://imdpune.gov.in/library/public/1981-2010%20CLIM%20NORMALS%20%28STATWISE%29.pdf | title = Station: Octacamund Climatological Table 1981–2010 | work = Climatological Normals 1981–2010 | publisher = India Meteorological Department | date = January 2015 | pages = 573–574 | access-date = 1 March 2020}}</ref><ref name=IMDextremes> {{cite web | archive-url = https://web.archive.org/web/20200205042509/http://imdpune.gov.in/library/public/EXTREMES%20OF%20TEMPERATURE%20and%20RAINFALL%20upto%202012.pdf | archive-date = 5 February 2020 | url = https://imdpune.gov.in/library/public/EXTREMES%20OF%20TEMPERATURE%20and%20RAINFALL%20upto%202012.pdf | title = Extremes of Temperature & Rainfall for Indian Stations (Up to 2012) | publisher = India Meteorological Department | date = December 2016 | page = M207 | access-date = 1 March 2020}}</ref> }} {{clear}} ==देखे-घूमे लायक जगह== ऊटी एगो लोकप्रिय पर्यटन स्थल हवे जहाँ शहर आ आसपास के कई जगह बाड़ी सऽ। ===बगइचा आ पार्क=== सरकारी गुलाब के बगीचा (पहिले सेंटेनरी गुलाब पार्क) भारत के सभसे बड़ गुलाब के बगीचा हवे। ई ऊटी शहर के विजयनगरम में एल्क हिल के ढलान पर स्थित बा। 2,200 मीटर (7,200 फीट) के ऊंचाई पर बा। आज ई बगीचा देश के सभसे बड़ गुलाब के संग्रह में से एक बाटे जहाँ 2,800 कल्टीवेर सभ के 20,000 से ढेर किसिम के गुलाब के संग्रह बाटे। एह संग्रह में हाइब्रिड टी गुलाब, मिनीएचर रोज़, पॉलियान्थास, पपाजेना, फ्लोरिबुंडा, रैम्बलर्स, याकिमोर आ करिया आ हरियर जइसन असामान्य रंग के गुलाब शामिल बा. 8.9 हेक्टेयर (22 एकड़) के ऊटी वनस्पति उद्यान के बिस्तार 1847 में भइल आ एकर रखरखाव तमिलनाडु सरकार द्वारा कइल जाला। वनस्पति उद्यान रसीला, हरियर, आ बढ़िया से रखरखाव कइल गइल बा। हर मई में दुर्लभ पौधा प्रजाति के प्रदर्शनी के संगे फूल शो के आयोजन कइल जाला। एह बगीचा सभ में लगभग एक हजार प्रजाति के पौधा, झाड़ी, फर्न, पेड़, हर्बल आ बोनसाई पौधा सभ के बिदेसी आ देशी दुनों प्रजाति पावल जालीं। एह बगीचा में 20 मिलियन साल पुरान जीवाश्म वाला पेड़ बा। हिरण पार्क ऊटी झील के किनारे स्थित बा। उत्तराखंड के नैनीताल के चिड़ियाघर के छोड़ के ई भारत के सभसे ऊँच ऊँचाई वाला चिड़ियाघर हवे। ई पार्क कई प्रजाति सभ के हिरण आ अउरी जानवर सभ के रखे खातिर बनावल गइल == संदर्भ == {{Reflist|35em}} ==अउरी पढ़े खातिर== * {{cite book |title=Decaying splendours: two palaces: reflections in an Indian mirror |last=Weeks |first=Stephen |year=1979 |publisher=British Broadcasting Corporation |location=University of California |isbn=978-0-563-17516-2 |url=https://books.google.com/books?id=gTo2AAAAIAAJ&q=Decaying+Splendours;+two+palaces:+reflections+in+an+Indian+mirror|access-date=19 August 2011}} == बाहरी कड़ी == * [http://www.nilgiris.tn.gov.in/tour_ooty.html ऑफिशियल इतिहास आ पर्यटन वेबसाइट]{{Dead link|date=September 2023 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }} {{In lang|en}} {{Authority control}} [[श्रेणी:तमिल नाडु के शहर आ कस्बा]] [[श्रेणी:भारत के हिल स्टेशन]] gznnm6ol6yrxuhzcgu0wb2ko1y47xab सुदामा पांडे 'धूमिल' 0 50863 805700 791764 2026-09-25T18:15:54Z SM7 3953 +विकिकड़ी जोड़ल गइल 805700 wikitext text/x-wiki {{Rquote|right| लोहे का स्वाद<br /> लुहार से मत पूछो<br /> उस घोड़े से पूछो<br /> जिसके मुँह में लगाम है<br />- <small>"संसद से सड़क तक"</small>: ‘धूमिल’}} '''सुदामा पांडे "धूमिल"''' (9 नवंबर 1936 – 10 फरवरी 1975) [[हिंदी भाषा]] के कवि रहलें। [[बनारस]] के धूमिल हिंदी साहित्य के साठोत्तरी पीढ़ी के प्रमुख कवी मानल जालें<ref>{{cite book|author= नरेंद्र सिंह |title=Adhunik Sahitya Chintan Aur Kuch Vishitha Sahityakar|url=https://books.google.com/books?id=Wp9IuQ3wiAoC&pg=PT121|publisher=[[वाणी प्रकाशन]]|pages=121–}}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.deshbandhu.co.in/vichar/%E0%A4%A7%E0%A5%82%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B6%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF-30805-2 |title=धूमिल की कविताओं की शक्ति |publisher=Deshbandhu.co.in |date=2016-02-21 |accessdate=2017-10-16 |archive-date=2022-10-06 |archive-url=https://web.archive.org/web/20221006142957/https://www.deshbandhu.co.in/vichar/%E0%A4%A7%E0%A5%82%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B6%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF-30805-2 |url-status=dead }}</ref>, आ उनके बागी तेवर<ref name="Kumar2014">{{cite book|author=Akshaya Kumar|title=Poetry, Politics and Culture: Essays on Indian Texts and Contexts|url=https://books.google.com/books?id=68ITAwAAQBAJ&pg=PA36|date=14 March 2014|publisher=Routledge|isbn=978-1-317-80963-0|pages=36–}}</ref> खातिर जानल जाला। धूमिल के जिनगी रहत, खाली एक ठो कबिता-संग्रह छपल ''संसद से सड़क तक'' आ दुसरा संग्रह मरे के बाद छपल, ''कल सुनना मुझे'', दुसरका खातिर उनके साहित्य अकादमी के पुरस्कार मिलल। धूमिल के निधन 38 बरिस के उमिर में ब्रेन ट्यूमर (दिमागी गाँठ) से हो गइल। ==जिनगी== धूमिल के जनम उत्तर प्रदेश के बनारस के लगे खेवली नाँव के गाँव में 9 नवंबर 1936 के भइल।<ref name="jivan">{{cite book |author=धूमिल |date=2015 |title= संसद से सड़क तक|url= |location= नई दिल्ली |publisher= राजकमल प्रकाशन |page= i|isbn= 9788126724499|access-date= }}</ref> उनके नाँव सुदामा पांडे रहल आ ऊ एक ठो निचला तबका के परिवार से रहलें। 12 बरिस के उमिर में मूरत देवी से बियाह भइल। 1953 में हरहुआ से हाईस्कूल पास कइलें। कमाई करे खातिर [[कलकत्ता]] गइलेन आ कुछ दिन मजूरी करे के परल। बाद में बनारस में आ के इलेक्ट्रानिक्स में आईटीआई क के नोकरी करे लगलें। असह कपार दरद के सिकाइत पर उनके काशी विश्वविद्यालय के मेडिकल कॉलेज में दाखिल करावल गइल जहाँ डाक्टर लोग दिमाग में गाँठ (ब्रेन ट्यूमर) बतावल। लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल कालेज में भरती करा के आप्रेसन भइल जेकरा बाद कोमा में चल गइलें आ बेहोसी के दसा में 10 फरवरी 1975 के दुनिया से गुजर गइलें। ==परभाव== धूमिल के बागी कवी मानल जाला। आजादी का बाद, यानि उपनिवेशी शासन के खतम होखे के बाद, के राजीनीत के ले के उनुका मन में भयानक त्रास के भाव रहल आ ई उनुका कबिता के प्रमुख बिसयन में से एक रहल बा।<ref name="AmesKasulis1998">{{cite book|author1=Roger T. Ames|author2=Thomas P. Kasulis|author3=Wimal Dissanayake|title=Self as Image in Asian Theory and Practice|url=https://books.google.com/books?id=s0QDTh9ggEoC&pg=PA254|date=30 April 1998|publisher=SUNY Press|isbn=978-0-7914-2726-2|pages=254–}}</ref> [[अशोक वाजपेयी]] के शब्द में: "धूमिल कबिता के मुनासिब कार्रवाई मानें: कबिता खातिर जवन कामचलाऊ रवइया अनेक नया प्रगतिशील लोगन में बा ओकरा से ऊ सर्वथा मुक्त रहलें..." आ "...धूमिल के प्रासंगिकता एह बात में बा कि ऊ अपने कवित्त के आचरण से सिद्ध कइलें कि कबितइयो प्रामाणिक कर्म हवे।"<ref name="Vajpayee2003">{{cite book|author=Ashok Vajpayee|title=Kuch Purvgrah|url=https://books.google.com/books?id=ow_AdYkFsTwC&pg=PA42|year=2003|publisher=Rajkamal Prakashan Pvt Ltd|isbn=978-81-267-0546-7|pages=42–}}</ref> धूमिल के जयंती हर साल उनका गाँव खेवली में मनावल जाला।<ref>{{cite web|url=http://www.dnaindia.com/locality/gu/varanasi/dhumils-78th-anniversary-observed-village-khevli-45843 |title=Dhumil's 78th anniversary observed in Village Khevli &#124; DNA |language=hi |publisher=Dnaindia.com |date= |accessdate=2017-10-16}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.dnaindia.com/locality/gu/varanasi/kavi-dhumil-jayanti-celebrated-khewali-village-75204 |title=Kavi Dhumil jayanti celebrated in Khewali village |language=hi |publisher=Dnaindia.com |date= |accessdate=2017-10-16}}</ref> ==संदर्भ== {{Reflist|35em}} ==बाहरी कड़ी== * ''[https://books.google.co.in/books?id=stVJsblgJXEC&lpg=PA29&dq=%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%A6%20%E0%A4%B8%E0%A5%87%20%E0%A4%B8%E0%A5%9C%E0%A4%95%20%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A4%B2&pg=PP1#v=onepage&q=%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%A6%20%E0%A4%B8%E0%A5%87%20%E0%A4%B8%E0%A5%9C%E0%A4%95%20%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A4%B2&f=false संसद से सड़क तक]'', धूमिल, राजकमल प्रकाशन, दिल्ली। {{In lang|hi}} (गूगल किताब पर) * [https://sol.du.ac.in/mod/mediagallery/view.php?id=475 धूमिल के आवाज में उनके एक ठो कबिता: "शांति पाठ"], दिल्ली विश्वविद्यालय के सौजन्य से। [[श्रेणी:हिंदी-भाषा के कवि]] [[श्रेणी:भारतीय कवि]] [[श्रेणी:बनारस के लोग]] [[श्रेणी:1936 में जनम]] [[श्रेणी:1975 में निधन]] {{poet-stub}} n68nq57tze9knnfj5e3rklpcx4ectuh टेम्पलेट:Hydrography of Uttar Pradesh 10 66140 805691 728003 2026-09-25T17:09:57Z SM7 3953 सुधार कइल गइल / कड़ी 805691 wikitext text/x-wiki {{Navbox |name = Hydrography of Uttar Pradesh |title = [[उत्तर प्रदेश]] के हाइड्रोग्राफी |state = {{{state|autocollapse}}} |listclass = hlist |groupstyle = line-height:1.3em; <!--reduces gap between wrapped groupname lines--> |group1 = नदी |list1 = {{Navbox|subgroup |group1 = प्रमुख |list1 = * [[गंगा नदी|गंगा]] * [[जमुना नदी|जमुना]] * [[सरजू नदी|सरजू (घाघरा)]] |group2 = उत्तर मुँह |list2 = * [[बेतवा नदी|बेतवा]] * [[चंबल नदी|चंबल]] * [[धसान नदी|धसान]] * [[जामनी नदी|जामनी]] * [[कन्हार नदी|कन्हार]] * [[कर्मनाशा नदी|कर्मनाशा]] * [[केन नदी|केन]] * [[रिहंद नदी|रिहंद]] * [[सिंध नदी|सिंध]] * [[सोन नदी|सोन]] * [[तमसा नदी|तमसा]] * [[टोंस नदी|टोंस]] ** [[बेलन नदी]] |group3 = दक्खिन मुँह |list3= * [[बबई नदी]] * [[गौला नदी]] * [[घाघरा नदी]] * [[गोमती नदी|गोमती]] * [[हिंडन नदी|हिंडन]] * [[काली नदी (उत्तर प्रदेश)|काली नदी]] * [[कुकरैल नदी|कुकरैल]] * [[रामगंगा]] * [[रोहिणी नदी|रोहिणी]] * [[सरजू नदी]] * [[बरुना नदी]] * [[राप्ती नदी]] }} |group4 = झील / ताल |list4 = * [[कीथम झील|कीथम]] * [[चित्तौड़ा झील]] * [[बरुआ सागर ताल]] * [[बेलासागर झील|बेलासागर]] * [[मोती झील]] * [[राजा का ताल]] * [[रामगढ़ ताल]] * [[सुरहा ताल]] |group5 = बंधा आ बैराज |list5 = * [[गंगा बैराज]] * [[माताटीला]] * [[पारीछा बान्ह]] * [[राजघाट बान्ह]] * [[रिहंद बान्ह]] * [[शारदा बैराज]] |group6 = नहर |list6 = * [[ऊपरी गंगा नहर]] * [[निचली गंगा नहर]] * [[आगरा नहर]] * [[शारदा नहर]] |group7 = पुल |list7 = * [[राजघाट पुल|मालवीय ब्रिज]] * [[शाही पुल|शाही पुल, जौनपुर]] * [[नवका यमुना पुल|नवका जमुना पुल]] |group8 = संबंधित |list8 = * [[अचिरावती]] * [[चर्म्णावती]] * [[सरस्वती नदी]] * [[त्रिवेणी संगम]] * [[दुआब]] * [[:टेम्पलेट:Son basin|सोन बेसिन]] |group9 = आसपास के <br> हाइड्रोग्राफी |list9 = * [[:Template:Hydrography of Uttarakhand|उत्तराखंड]] * 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पहिला बेर ई पुरस्कार साल १९५५ में दिहल गइल। पुरस्कार के स्थापना के समय इनाम के धन पांच हजार रुपया रहे, जवन साल १९८३ में दस हजार रुपया तक बढ़ा दिहल गइल अउरी साल १९८८ में एकरा के बढ़ा के पच्चीस हजार रुपया क दिहल गइल। साल २००१ से एह रकम के बढ़ा के चालीस हजार रुपिया कर दिहल गइल। साल २००३ से ई रकम बढ़ा के पचास हजार रुपिया हो गइल बा। <ref>{{Cite web|url=https://www.jagranjosh.com/current-affairs/sahitya-akademi-award-2019-full-list-in-hindi-1576736334-null|title=साहित्य अकादमी पुरस्कार के बारे में|last=|first=|date=|website=Jagaran Josh|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=}}{{Dead link|date=September 2023 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref> [[श्रेणी:अवार्ड, पुरस्कार आ सम्मान]] aoq9oz658h6rja07jnpbff0kqm7fib5 805705 805704 2026-09-26T09:35:11Z SM7 3953 सुधार कइल गइल, ज्ञानसंदूक जोड़ल गइल 805705 wikitext text/x-wiki {{Infobox award | name = Sahitya Akademi Award | image = Sahitya Akademi Award - Surjit Patar.JPG | image_size = | alt = | caption = | subheader = Award for individual contributions to [[Literature]] | awarded_for = Literary award in India | sponsor = [[Sahitya Akademi]], [[Government of India]] | lastawarded = {{End date and age|2025}} | reward = | year = {{Start date and age|1954}} | former name = | holder_label = Most recent winner | holder = | award1_type = Total awarded | award1_winner = 24 (2025) | award2_type = First winner | award2_winner = | award3_type = Last winner | award3_winner = | website = {{URL|http://www.sahitya-akademi.gov.in|sahitya-akademi.gov.in}} | previous = | next = }} '''साहित्य अकादमी पुरस्कार''' भारत के एगो साहित्यिक सम्मान हवे जे [[साहित्य अकादमी]] द्वारा हर साल भारत में मान्यता वाली हर प्रमुख भाषा में प्रकाशित सर्वश्रेष्ठ साहित्यिक रचना के दिहल जाला। [[भारतीय संविधान]] के आठवीं अनुसूची में शामिल 22 गो भारतीय भाषा सभ के अलावा ई राजस्थानी आ [[अंग्रेजी]] भाषा सभ; माने कि कुल 24 गो भाषा के इंतजाम कइल गइल बा। पहिला बेर ई पुरस्कार साल 1955 में दिहल गइल। पुरस्कार के स्थापना के समय इनाम के धन पांच हजार रुपया रहे, जवन साल 1983 में दस हजार रुपया तक बढ़ा दिहल गइल अउरी साल 1988 में एकरा के बढ़ा के पच्चीस हजार रुपया क दिहल गइल। साल 2001 से एह रकम के बढ़ा के चालीस हजार रुपिया कर दिहल गइल। साल 2003 से ई रकम बढ़ा के पचास हजार रुपिया हो गइल बा।<ref>{{Cite web|url=https://www.jagranjosh.com/current-affairs/sahitya-akademi-award-2019-full-list-in-hindi-1576736334-null|title=साहित्य अकादमी पुरस्कार के बारे में|last=|first=|date=|website=Jagaran Josh|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=}}{{Dead link|date=September 2023 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref> {{clear}} == संदर्भ == {{Reflist|29em}} [[श्रेणी:अवार्ड, पुरस्कार आ सम्मान]] a4o8w8enryncqv23h7xm8f9ub4qwros पीडीएफ 0 93078 805695 805608 2026-09-25T17:49:55Z SM7 3953 सुधार कइल गइल 805695 wikitext text/x-wiki [[चित्र:PDF file icon.svg|160px|thumb|पीडीएफ के आइकन]] '''पोर्टेबल डॉक्यूमेंट फॉर्मेट''' (PDF), जेकरा के ISO 32000 के रूप में मानकीकृत कइल गइल बा, एगो [[फाइल फॉर्मेट]] हवे जे [[एडोब इंक.|एडोब]] द्वारा 1992 में बिकसित कइल गइल बा आ एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर आ ऑपरेटिंग सिस्टम से स्वतंत्र तरीका से टेक्स्ट फॉर्मेटिंग आ इमेज समेत दस्तावेज सभ के प्रस्तुत करे खातिर बिकसित कइल गइल। पोस्टस्क्रिप्ट भाषा के आधार पर हर पीडीएफ फाइल में फिक्स्ड-लेआउट फ्लैट डॉक्यूमेंट के पूरा बिबरन दिहल जाला, जवना में टेक्स्ट, फॉन्ट, वेक्टर ग्राफिक्स, रास्टर इमेज आ अउरी जानकारी के जरूरत होला जे एकरा के देखावे खातिर जरूरी होला। पीडीएफ के जड़ "द कैमलोट प्रोजेक्ट" में बा जे एडोब के सह-संस्थापक जॉन वार्नॉक द्वारा 1991 में शुरू कइल गइल। पीडीएफ के 2008 में आईएसओ 32000 के रूप में मानकीकरण कइल गइल। अंतिम संस्करण आईएसओ 32000-2:2020 के रूप में दिसंबर 2020 में प्रकाशित भइल। पीडीएफ फाइल सभ में फ्लैट टेक्स्ट आ ग्राफिक्स के अलावा कई किसिम के सामग्री हो सके ला जेह में लॉजिकल स्ट्रक्चरिंग तत्व, इंटरैक्टिव तत्व जइसे कि एनोटेशन आ फॉर्म-फील्ड, लेयर, रिच मीडिया (वीडियो सामग्री सहित), यू3डी भा पीआरसी के इस्तेमाल से थ्री-डायमेंशनल ऑब्जेक्ट आ अउरी कई तरह के सामग्री हो सके ला डेटा प्रारूप के बारे में बतावल गइल बा। पीडीएफ स्पेसिफिकेशन में एन्क्रिप्शन आ डिजिटल सिग्नेचर, फाइल अटैचमेंट, आ मेटाडाटा के भी प्रावधान कइल गइल बा जेह से कि एह फीचर सभ के जरूरत वाला वर्कफ़्लो सभ के सक्षम कइल जा सके। [[श्रेणी:कंप्यूटर फाइल फारमेट]] {{कंप्यूटर-आधार}} 8zcxqqettvrx9ymwgsqpruepje9h8xf 805696 805695 2026-09-25T17:50:34Z SM7 3953 [[विकिपीडिया:हॉट-कैट|हॉट-कैट]] द्वारा [[श्रेणी:कंप्यूटर फाइल]] जोड़ल गइल 805696 wikitext text/x-wiki [[चित्र:PDF file icon.svg|160px|thumb|पीडीएफ के आइकन]] '''पोर्टेबल डॉक्यूमेंट फॉर्मेट''' (PDF), जेकरा के ISO 32000 के रूप में मानकीकृत कइल गइल बा, एगो [[फाइल फॉर्मेट]] हवे जे [[एडोब इंक.|एडोब]] द्वारा 1992 में बिकसित कइल गइल बा आ एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर आ ऑपरेटिंग सिस्टम से स्वतंत्र तरीका से टेक्स्ट फॉर्मेटिंग आ इमेज समेत दस्तावेज सभ के प्रस्तुत करे खातिर बिकसित कइल गइल। पोस्टस्क्रिप्ट भाषा के आधार पर हर पीडीएफ फाइल में फिक्स्ड-लेआउट फ्लैट डॉक्यूमेंट के पूरा बिबरन दिहल जाला, जवना में टेक्स्ट, फॉन्ट, वेक्टर ग्राफिक्स, रास्टर इमेज आ अउरी जानकारी के जरूरत होला जे एकरा के देखावे खातिर जरूरी होला। पीडीएफ के जड़ "द कैमलोट प्रोजेक्ट" में बा जे एडोब के सह-संस्थापक जॉन वार्नॉक द्वारा 1991 में शुरू कइल गइल। पीडीएफ के 2008 में आईएसओ 32000 के रूप में मानकीकरण कइल गइल। अंतिम संस्करण आईएसओ 32000-2:2020 के रूप में दिसंबर 2020 में प्रकाशित भइल। पीडीएफ फाइल सभ में फ्लैट टेक्स्ट आ ग्राफिक्स के अलावा कई किसिम के सामग्री हो सके ला जेह में लॉजिकल स्ट्रक्चरिंग तत्व, इंटरैक्टिव तत्व जइसे कि एनोटेशन आ फॉर्म-फील्ड, लेयर, रिच मीडिया (वीडियो सामग्री सहित), यू3डी भा पीआरसी के इस्तेमाल से थ्री-डायमेंशनल ऑब्जेक्ट आ अउरी कई तरह के सामग्री हो सके ला डेटा प्रारूप के बारे में बतावल गइल बा। पीडीएफ स्पेसिफिकेशन में एन्क्रिप्शन आ डिजिटल सिग्नेचर, फाइल अटैचमेंट, आ मेटाडाटा के भी प्रावधान कइल गइल बा जेह से कि एह फीचर सभ के जरूरत वाला वर्कफ़्लो सभ के सक्षम कइल जा सके। [[श्रेणी:कंप्यूटर फाइल फारमेट]] [[श्रेणी:कंप्यूटर फाइल]] {{कंप्यूटर-आधार}} e4y2rt4uzqh0v3wgeuy90yhihnu55w5 805697 805696 2026-09-25T17:50:50Z SM7 3953 [[विकिपीडिया:हॉट-कैट|हॉट-कैट]] द्वारा [[श्रेणी:कंप्यूटर टर्मावली]] जोड़ल गइल 805697 wikitext text/x-wiki [[चित्र:PDF file icon.svg|160px|thumb|पीडीएफ के आइकन]] '''पोर्टेबल डॉक्यूमेंट फॉर्मेट''' (PDF), जेकरा के ISO 32000 के रूप में मानकीकृत कइल गइल बा, एगो [[फाइल फॉर्मेट]] हवे जे [[एडोब इंक.|एडोब]] द्वारा 1992 में बिकसित कइल गइल बा आ एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर आ ऑपरेटिंग सिस्टम से स्वतंत्र तरीका से टेक्स्ट फॉर्मेटिंग आ इमेज समेत दस्तावेज सभ के प्रस्तुत करे खातिर बिकसित कइल गइल। पोस्टस्क्रिप्ट भाषा के आधार पर हर पीडीएफ फाइल में फिक्स्ड-लेआउट फ्लैट डॉक्यूमेंट के पूरा बिबरन दिहल जाला, जवना में टेक्स्ट, फॉन्ट, वेक्टर ग्राफिक्स, रास्टर इमेज आ अउरी जानकारी के जरूरत होला जे एकरा के देखावे खातिर जरूरी होला। पीडीएफ के जड़ "द कैमलोट प्रोजेक्ट" में बा जे एडोब के सह-संस्थापक जॉन वार्नॉक द्वारा 1991 में शुरू कइल गइल। पीडीएफ के 2008 में आईएसओ 32000 के रूप में मानकीकरण कइल गइल। अंतिम संस्करण आईएसओ 32000-2:2020 के रूप में दिसंबर 2020 में प्रकाशित भइल। पीडीएफ फाइल सभ में फ्लैट टेक्स्ट आ ग्राफिक्स के अलावा कई किसिम के सामग्री हो सके ला जेह में लॉजिकल स्ट्रक्चरिंग तत्व, इंटरैक्टिव तत्व जइसे कि एनोटेशन आ फॉर्म-फील्ड, लेयर, रिच मीडिया (वीडियो सामग्री सहित), यू3डी भा पीआरसी के इस्तेमाल से थ्री-डायमेंशनल ऑब्जेक्ट आ अउरी कई तरह के सामग्री हो सके ला डेटा प्रारूप के बारे में बतावल गइल बा। पीडीएफ स्पेसिफिकेशन में एन्क्रिप्शन आ डिजिटल सिग्नेचर, फाइल अटैचमेंट, आ मेटाडाटा के भी प्रावधान कइल गइल बा जेह से कि एह फीचर सभ के जरूरत वाला वर्कफ़्लो सभ के सक्षम कइल जा सके। [[श्रेणी:कंप्यूटर फाइल फारमेट]] [[श्रेणी:कंप्यूटर फाइल]] [[श्रेणी:कंप्यूटर टर्मावली]] {{कंप्यूटर-आधार}} nuq8446mf8b4oihqyu9gz80mrdlegnk विकिपीडिया:आँकड़ा सभ/२०२६/सितंबर 4 101472 805702 805624 2026-09-25T19:21:32Z NeechalBOT 7874 statistics 805702 wikitext text/x-wiki <!--- stats starts--->{{प्रयोगकर्ता:Neechalkaran/statnotice}}{| class="wikitable sortable" style="width:90%" |- ! 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5a05hvef4lugmdq89oqb6e2ypnklgx2 चउथि 0 101589 805679 2026-09-25T13:31:47Z SM7 3953 नया आधार लेख 805679 wikitext text/x-wiki '''चउथि''' भा '''चउथ''' ({{Langx|sa|चतुर्थी}}) [[चंद्रमा आधारित कैलेंडर|चंद्रमा आधारित]] [[हिंदू पतरा|हिंदू कलेंडर]] में आ बाकी कई [[चंद्रमा आधारित कैलेंडर]] सभ में चउथी [[तिथी]] ह। ई हर महीना के दुनों [[पाख]] में चउथा दिन होखे ला। एकरे अगिली तिथी [[पंचिमी]] होले। संस्कृत में एकरा के '''चतुर्थी''' कहल जाला। हिंदू धर्म में ई खास क के [[गणेश]] के पूजा के रूप में मनावल जाले; एहू में भादो महीना के अँजोर के चउथ बिसेस रूप से [[गणेश चउथ]] भा गणेशोत्सव के रूप में मनावल जाला जे महाराष्ट्र के सभसे प्रमुख तिहुआर हवे आ दस दिन ले चले ला। {{clear}} == संदर्भ == {{Reflist|29em}} {{हिंदू तिथि सभ}} [[श्रेणी:हिंदू कलेंडर]] 6ecft0jzq8pg385q62dxzf1cuup8to3 चउथ 0 101590 805680 2026-09-25T13:32:04Z SM7 3953 पन्ना [[चउथि]] पर अनुप्रेषित कइल गइल 805680 wikitext text/x-wiki #REDIRECT [[चउथि]] nkg03n63epcgkybw6hafo2t8ilidk1l 805681 805680 2026-09-25T13:32:17Z SM7 3953 Added {{[[:Template:R 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805686 805683 2026-09-25T13:52:19Z SM7 3953 +हैटनोट 805686 wikitext text/x-wiki {{about|हिंदू पतरा के तिथि|बिसेस तिहुआर|छठ पूजा}} '''छठि''' भा '''छठ''' ({{Langx|sa|षष्ठी}}) [[चंद्रमा आधारित कैलेंडर|चंद्रमा आधारित]] [[हिंदू पतरा|हिंदू कलेंडर]] में आ बाकी कई [[चंद्रमा आधारित कैलेंडर]] सभ में छठई [[तिथी]] ह। ई हर महीना के दुनों [[पाख]] में छठवाँ दिन होखे ला। एकरे पहिले के तिथि [[पंचिमी]] आ अगिली तिथी [[सत्तिमी]] होले। संस्कृत में एकरा के '''षष्टी''' कहल जाला। हिंदू धर्म में ई खास क के [[सुरुज (देवता)]] के पूजा के रूप में मनावल जाले; एहू में [[कातिक]] महीना के अँजोर के छठ बिसेस रूप से '''[[छठ पूजा]]''' भा '''छठ परब''' के रूप में मनावल जाला जे [[बिहार]], [[नेपाल]] आ [[पूर्वांचल]] के सभसे प्रमुख तिहुआर हवे। {{clear}} == संदर्भ == {{Reflist|29em}} {{हिंदू तिथि सभ}} [[श्रेणी:हिंदू कलेंडर]] k4lydjgfn7evfp3vrna6f03n279bbeh धसान नदी 0 101592 805692 2026-09-25T17:24:16Z SM7 3953 नया आधार लेख 805692 wikitext text/x-wiki [[File:Madhya Pradesh Br 26.jpg|thumb|धसान नदी]] '''धसान नदी''' बिचला भारत में बहे वाला एगो [[नदी]] ह। ई [[बेतवा नदी]] के दहिना ओर से एह में मिले वाली [[सहायिका नदी]] ह। ई [[मध्य प्रदेश]] आ [[उत्तर प्रदेश]] के [[बुंदेलखंड]] इलाका में बहे ले। == उदगम आ लंबाई == धसान नदी के उद्गम बेगमगंज तहसील, [[रायसेन जिला]], मध्य प्रदेश में होला। एकरा बाद ई [[सागर जिला]] में बहे ले। ई नदी उत्तर प्रदेश के [[ललितपुर जिला]] के दक्खिन-पूरबी सीमा बनावेला। एकर कुल लंबाई 365 किलोमीटर बा, जवना में से 240 किलोमीटर मध्य प्रदेश में, 54 किलोमीटर मध्य प्रदेश आ उत्तर प्रदेश के सझिया बाडर के रूप में, आ 71 किलोमीटर उत्तर प्रदेश में बा। ==हाइड्रोग्राफी== कथन, मंगरार, बचनेरी, सुखनई आ रोहनी एकर सहायक नदियन में शामिल बाड़ी स। धसान नदी पर दू गो बाँध बनावल गइल बा—एगो पहाड़ी पर बनल बान सुजारा बाँध आ दूसरा आगे घाट लहचूरा बाँध। 1910 में तीन शाखा वाला सिंचनी खातिर बनल नहर खोलल गइल, जे नदी के कुछ पानी दुसरका ओर मोड़ के बुंदेलखंड इलाका में पानी पहुँचावेला। पुरान समय में एह नदी के दशार्णा नाँव से जानल जात रहे। आसपास के गाँव के निवासी एह नदी के एगो पवित्र नदी मानेलें। {{clear}} == संदर्भ == {{Reflist|29em}} {{Hydrography of Uttar Pradesh}} [[श्रेणी:मध्य प्रदेश के नदी]] [[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के नदी]] {{नदी-आधार}} 5z62unr8uvdgq62ry15keki95qm78n8 805693 805692 2026-09-25T17:29:37Z SM7 3953 ज्ञानसंदूक जोड़ल गइल 805693 wikitext text/x-wiki {{Infobox river | name = धसान नदी | image = Madhya Pradesh Br 26.jpg | image_caption = धसान के एगो सीन | image_alt = धसान के एगो सीन | map = | map_size = | map_caption = | pushpin_map = | pushpin_map_size = | pushpin_caption = <!---------------------- LOCATION --> | subdivision_name1 = [[भारत]] | subdivision_name2 = [[मध्य प्रदेश]]<br>[[उत्तर प्रदेश]] | subdivision_name3 = बिचला भारत, [[बुंदेलखंड]] | mouth = [[बेतवा नदी]] | mouth_coordinates = {{coord|25.48|79.24|format=dms|type:river_region:IN|display=inline,title}} }} '''धसान नदी''' बिचला भारत में बहे वाला एगो [[नदी]] ह। ई [[बेतवा नदी]] के दहिना ओर से एह में मिले वाली [[सहायिका नदी]] ह। ई [[मध्य प्रदेश]] आ [[उत्तर प्रदेश]] के [[बुंदेलखंड]] इलाका में बहे ले। == उदगम आ लंबाई == धसान नदी के उद्गम बेगमगंज तहसील, [[रायसेन जिला]], मध्य प्रदेश में होला। एकरा बाद ई [[सागर जिला]] में बहे ले। ई नदी उत्तर प्रदेश के [[ललितपुर जिला]] के दक्खिन-पूरबी सीमा बनावेला। एकर कुल लंबाई 365 किलोमीटर बा, जवना में से 240 किलोमीटर मध्य प्रदेश में, 54 किलोमीटर मध्य प्रदेश आ उत्तर प्रदेश के सझिया बाडर के रूप में, आ 71 किलोमीटर उत्तर प्रदेश में बा। ==हाइड्रोग्राफी== कथन, मंगरार, बचनेरी, सुखनई आ रोहनी एकर सहायक नदियन में शामिल बाड़ी स। धसान नदी पर दू गो बाँध बनावल गइल बा—एगो पहाड़ी पर बनल बान सुजारा बाँध आ दूसरा आगे घाट लहचूरा बाँध। 1910 में तीन शाखा वाला सिंचनी खातिर बनल नहर खोलल गइल, जे नदी के कुछ पानी दुसरका ओर मोड़ के बुंदेलखंड इलाका में पानी पहुँचावेला। पुरान समय में एह नदी के दशार्णा नाँव से जानल जात रहे। आसपास के गाँव के निवासी एह नदी के एगो पवित्र नदी मानेलें। {{clear}} == संदर्भ == {{Reflist|29em}} {{Hydrography of Uttar Pradesh}} [[श्रेणी:मध्य प्रदेश के नदी]] [[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के नदी]] {{नदी-आधार}} 4znz0l0njljjp22m9ek52cejdptf4xx 805694 805693 2026-09-25T17:38:50Z SM7 3953 संदर्भ जोड़ल/सुधारल गइल 805694 wikitext text/x-wiki {{Infobox river | name = धसान नदी | image = Madhya Pradesh Br 26.jpg | image_caption = धसान के एगो सीन | image_alt = धसान के एगो सीन | map = | map_size = | map_caption = | pushpin_map = | pushpin_map_size = | pushpin_caption = <!---------------------- LOCATION --> | subdivision_name1 = [[भारत]] | subdivision_name2 = [[मध्य प्रदेश]]<br>[[उत्तर प्रदेश]] | subdivision_name3 = बिचला भारत, [[बुंदेलखंड]] | mouth = [[बेतवा नदी]] | mouth_coordinates = {{coord|25.48|79.24|format=dms|type:river_region:IN|display=inline,title}} }} '''धसान नदी''' बिचला भारत में बहे वाला एगो [[नदी]] ह। ई [[बेतवा नदी]] के दहिना ओर से एह में मिले वाली [[सहायिका नदी]] ह। ई [[मध्य प्रदेश]] आ [[उत्तर प्रदेश]] के [[बुंदेलखंड]] इलाका में बहे ले। == उदगम आ लंबाई == धसान नदी के उद्गम बेगमगंज तहसील, [[रायसेन जिला]], मध्य प्रदेश में होला। एकरा बाद ई [[सागर जिला]] में बहे ले। ई नदी उत्तर प्रदेश के [[ललितपुर जिला]] के दक्खिन-पूरबी सीमा बनावेला। एकर कुल लंबाई 365 किलोमीटर बा, जवना में से 240 किलोमीटर मध्य प्रदेश में, 54 किलोमीटर मध्य प्रदेश आ उत्तर प्रदेश के सझिया बाडर के रूप में, आ 71 किलोमीटर उत्तर प्रदेश में बा। ==हाइड्रोग्राफी== कथन, मंगरार, बचनेरी, सुखनई आ रोहनी एकर सहायक नदियन में शामिल बाड़ी स। धसान नदी पर दू गो बाँध बनावल गइल बा—एगो पहाड़ी पर बनल बान सुजारा बाँध आ दूसरा आगे घाट लहचूरा बाँध। 1910 में तीन शाखा वाला सिंचनी खातिर बनल नहर खोलल गइल, जे नदी के कुछ पानी दुसरका ओर मोड़ के बुंदेलखंड इलाका में पानी पहुँचावेला। कुछ बिद्वान लोगन के हिसाब से पुरान समय में एह नदी के दशार्ण नाँव से जानल जात रहे<ref>{{cite book |last1=Rayeen |first1=Arif |title=Bundelkhand Ki Prodyogiki Sanskriti |date=24 मार्च 2020 |publisher=Book Rivers |isbn=978-93-88727-90-7 |pages=22-23 |url=https://www.google.co.in/books/edition/Bundelkhand_Ki_Prodyogiki_Sanskriti/JXXYDwAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%A6%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3&pg=PA22&printsec=frontcover |access-date=25 सितंबर 2026 |language=hi}}</ref><ref>{{cite book |last1=Tiwari |first1=Prof (Dr ) Ravindra Nath |last2=Sharma |first2=Dr Brahmanand |last3=Bhaghel |first3=Shri Aditya Singh |last4=Mishra |first4=Shri Ashish Kumar |title=Uttar Pradesh Ki Nadiyan |date=23 अगस्त 2025 |publisher=Prabhat Prakashan |isbn=978-93-86870-68-1 |url=https://www.google.co.in/books/edition/Uttar_Pradesh_Ki_Nadiyan/pICDDwAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%A7%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8%20%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80&pg=PA12&printsec=frontcover |access-date=25 सितंबर 2026 |language=hi}}</ref><ref>{{cite book |last1=द्विवेदी |first1=राकेश नारायण |title=स्थान-नाम समय के साक्षी (ललितपुर जनपद के संदर्भ में) |isbn=978-81-908912-2-6 |page=15 |url=https://www.google.co.in/books/edition/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8_%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AE_%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%AF_%E0%A4%95/mdztBAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%A7%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8%20%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80&pg=PA15&printsec=frontcover |access-date=25 सितंबर 2026 |language=hi}}</ref> आ एही के नाँव प बुंदेलखंड के एह इलाका के दशार्ण प्रदेश कहल जाय। आसपास के गाँव के निवासी एह नदी के एगो पवित्र नदी मानेलें। {{clear}} == संदर्भ == {{Reflist|29em}} {{Hydrography of Uttar Pradesh}} [[श्रेणी:मध्य प्रदेश के नदी]] [[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के नदी]] {{नदी-आधार}} bf7t5esifqcfpwbeyzm3f314vmlp15h अल-ग़ज़ाली 0 101593 805698 2026-09-25T18:09:04Z SM7 3953 नया आधार लेख / अंग्रेजी विकिपीडिया से अनुबाद कइ के 805698 wikitext text/x-wiki '''अल-ग़ज़ाली''' (ल. 1058 – 19 दिसंबर 1111), जिनके नाँव के लैटिन रूप '''''अल्गाज़ेलस''''' लिखल जाय, शाफ़िई सुन्नी मुस्लिम फारसी विद्वान आ बहुबिद्याविद (पॉलीमैथ) रहलें। इस्लामी इतिहास में ऊ सबसे प्रमुख आ प्रभावशाली इस्लामी कानून के जानकार, कानूनी सिद्धांतकार, मुफ़्ती, दार्शनिक, धर्मशास्त्री, तर्कशास्त्री आ सूफ़ी लोगन में गिनल जालें। सुन्नी मुस्लिम लोग अल-ग़ज़ाली के 11वीं सदी के ''मुजद्दिद'' मानेलें। मुजद्दिद के मतलब ईमान के नवीकरण करे वाला ह, जेकरा बारे में पैगंबरी हदीस में कहल गइल बा कि ऊ हर 100 साल में एक बेर आ के इस्लामी समुदाय के ईमान के फेर से मजबूत करेला। अल-ग़ज़ाली के काम के उनकर समकालीन लोग एतना सराहल कि उनका के “इस्लाम के सबूत” (हुज्जत अल-इस्लाम) के सम्मानसूचक उपाधि दिहल गइल। अल-ग़ज़ाली शाफ़िई फ़िक़्ही परंपरा में एगो प्रमुख मुज्तहिद रहलें। अल-ग़ज़ाली के बहुते काम (रचना) बगदाद के निज़ामिया के मुखिया बनावल गइल के बाद पैदा भइल उनकर खुद के आध्यात्मिक संकट के आसपास केंद्रित रहल। ओह समय निज़ामिया मुस्लिम दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित एकेडमिक पद रहल। एहसे ऊ आखिरकार 10 साल से अधिक समय खातिर मुस्लिम दुनिया से गायब हो गइलें। एह दौरान उनका के एह बात के एहसास भइल कि ऊ भगवान के राह के जगह ओहदा आ अहंकार के राह चुन लिहले रहलें। एह दौर में उनकर कई महान रचना लिखाइल। उनका के लागल कि इस्लामी आध्यात्मिक परंपरा निष्क्रिय हो गइल बा आ मुस्लिम लोग के पहिला पीढ़ी द्वारा सिखावल आध्यात्मिक ज्ञान के बिसार दिहल गइल बा। एह सोच से ऊ आपन सबसे बड़ रचना इह्या उलूम अद-दीन (Iḥyā’ ‘ulūm ad-dīn, “धार्मिक ज्ञान के पुनर्जीवन”) लिखलें। उनकर दूसर कृति में तहाफ़ुत अल-फलासिफ़ा (Tahāfut al-Falāsifa, “दार्शनिक लोगन के असंगति”) भी शामिल बा, जे दर्शन के इतिहास में एगो महत्वपूर्ण रचना ह। एहमें अरस्तूवादी बिज्ञान के आलोचना कइल गइल बा, जेकरा के बाद में 14वीं सदी के यूरोप में अउरी विकसित कइल गइल। [[श्रेणी:इस्लाम]] {{जीवनी-आधार}} {{दार्शनिक-आधार}} it3h5359oewfzpwe5k8miw7htgjvz3g अशोक वाजपेयी 0 101594 805699 2026-09-25T18:15:23Z SM7 3953 नया आधार लेख / अंग्रेजी विकिपीडिया से अनुबाद कइ के 805699 wikitext text/x-wiki '''अशोक वाजपेयी''' (जनम 1941) भारत के [[हिंदी भाषा|हिंदी-भाषा]] के कवि, निबंधकार आ साहित्यिक-सांस्कृतिक आलोचक बाड़ें। एकरा अलावा ऊ एगो जानल-मानल सांस्कृतिक आ कला प्रशासक आ पहिले सिविल सर्वेंट भी रहलें। ऊ भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन भारत के नेशनल एकेडमी ऑफ आर्ट्स, ललित कला अकादमी, के 2008 से 2011 ले चेयरमैन रहलें। उनका 23 से अधिक कविता, आलोचना आ कला से जुड़ल किताब प्रकाशित भइल बा। 1994 में उनका कविता-संग्रह कहीं नहीं वहीं खातिर भारत के नेशनल एकेडमी ऑफ लेटर्स, साहित्य अकादमी, के ओर से [[साहित्य अकादमी अवार्ड]] दिहल गइल। उनकर प्रमुख कविता-संग्रहन में ''शहर अब भी संभावना है'' (1966), ''तत्पुरुष'' (1986), ''बहुरी अकेला'' (1992), ''इबारत से गिरी मात्राएँ'', ''उम्मीद का दूसरा नाम'' (2004) आ ''विवक्षा'' (2006) शामिल बाड़ीं। एकरा अलावा ऊ साहित्यिक आ कला आलोचना पर भी कई रचना प्रकाशित कइले बाड़ें, जवना में ''फिलहाल'', ''कुछ पूर्वाग्रह'', ''समय से बाहर'', ''कविता का गल्प'' आ ''सीढ़ियाँ शुरू हो गई हैं'' शामिल बाड़ी स। [[श्रेणी:हिंदी-भाषा के लेखक]] {{लेखक-आधार}} ecrs7thmv65s4gx9iaaypmpydai55ol 805701 805699 2026-09-25T18:19:27Z SM7 3953 ज्ञानसंदूक जोड़ल गइल 805701 wikitext text/x-wiki {{Infobox writer <!-- For more information see [[:Template:Infobox Writer/doc]]. --> | name = अशोक वाजपेयी | image = Ashok Vajpeyi.jpg | image_size = | alt = | caption = इग्नू में एगो सेमीनार में अपना किताबिन के संघे | pen_name = | birth_name = | birth_date = {{Birth year and age|1941}}<!-- {{Birth date and age|df=yes|Year|Month|Day}} --> | birth_place = [[दुर्ग]], [[सेंट्रल प्रोविंस एंड बरार]], [[ब्रिटिश भारत]] | death_date = <!-- {{Death date and age|df=yes|Year|Month|Day|Year|Month|Day}} --> | death_place = | resting_place = | occupation = कबी, निबंधकार, लेखक, समालोचक | language = [[हिंदी भाषा|हिंदी]] | ethnicity = | citizenship = | education = | alma_mater = | period = | genre = | subject = | movement = | notable_works = | spouse = | partner = | children = | relatives = | influences = | influenced = | signature = | signature_alt = | website = }} '''अशोक वाजपेयी''' (जनम 1941) भारत के [[हिंदी भाषा|हिंदी-भाषा]] के कवि, निबंधकार आ साहित्यिक-सांस्कृतिक आलोचक बाड़ें। एकरा अलावा ऊ एगो जानल-मानल सांस्कृतिक आ कला प्रशासक आ पहिले सिविल सर्वेंट भी रहलें। ऊ भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन भारत के नेशनल एकेडमी ऑफ आर्ट्स, ललित कला अकादमी, के 2008 से 2011 ले चेयरमैन रहलें। उनका 23 से अधिक कविता, आलोचना आ कला से जुड़ल किताब प्रकाशित भइल बा। 1994 में उनका कविता-संग्रह कहीं नहीं वहीं खातिर भारत के नेशनल एकेडमी ऑफ लेटर्स, साहित्य अकादमी, के ओर से [[साहित्य अकादमी अवार्ड]] दिहल गइल। उनकर प्रमुख कविता-संग्रहन में ''शहर अब भी संभावना है'' (1966), ''तत्पुरुष'' (1986), ''बहुरी अकेला'' (1992), ''इबारत से गिरी मात्राएँ'', ''उम्मीद का दूसरा नाम'' (2004) आ ''विवक्षा'' (2006) शामिल बाड़ीं। एकरा अलावा ऊ साहित्यिक आ कला आलोचना पर भी कई रचना प्रकाशित कइले बाड़ें, जवना में ''फिलहाल'', ''कुछ पूर्वाग्रह'', ''समय से बाहर'', ''कविता का गल्प'' आ ''सीढ़ियाँ शुरू हो गई हैं'' शामिल बाड़ी स। {{clear}} == संदर्भ == {{Reflist|29em}} [[श्रेणी:हिंदी-भाषा के लेखक]] {{लेखक-आधार}} 2lbs8gaacupa3lrgekxlt6hb1yg433s 805703 805701 2026-09-26T09:32:09Z SM7 3953 ±श्रेणी सुधार कइल गइल, सुधार कइल गइल 805703 wikitext text/x-wiki {{Infobox writer <!-- For more information see [[:Template:Infobox Writer/doc]]. --> | name = अशोक वाजपेयी | image = Ashok Vajpeyi.jpg | image_size = | alt = | caption = इग्नू में एगो सेमीनार में अपना किताबिन के संघे | pen_name = | birth_name = | birth_date = {{Birth year and age|1941}}<!-- {{Birth date and age|df=yes|Year|Month|Day}} --> | birth_place = [[दुर्ग]], [[सेंट्रल प्रोविंस एंड बरार]], [[ब्रिटिश भारत]] | death_date = <!-- {{Death date and age|df=yes|Year|Month|Day|Year|Month|Day}} --> | death_place = | resting_place = | occupation = कबी, निबंधकार, लेखक, समालोचक | language = [[हिंदी भाषा|हिंदी]] 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(2006) शामिल बाड़ीं। एकरा अलावा ऊ साहित्यिक आ कला आलोचना पर भी कई रचना प्रकाशित कइले बाड़ें, जवना में ''फिलहाल'', ''कुछ पूर्वाग्रह'', ''समय से बाहर'', ''कविता का गल्प'' आ ''सीढ़ियाँ शुरू हो गई हैं'' शामिल बाड़ी स। {{clear}} == संदर्भ == {{Reflist|29em}} [[श्रेणी:1941 में जनम]] [[श्रेणी:जियत लोग]] [[श्रेणी:मध्य प्रदेश के लोग]] [[श्रेणी:छत्तीसगढ़ के लोग]] [[श्रेणी:हिंदी-भाषा के लेखक]] [[श्रेणी:हिंदी-भाषा के कवि]] {{लेखक-आधार}} {{कवि-आधार}} 42vc7glvs8nwjbwkqw3hpzu0lmhv5su कुकरैल नदी 0 101595 805706 2026-09-26T09:51:12Z SM7 3953 नया आधार लेख 805706 wikitext text/x-wiki '''कुकरैल नदी''' [[गोमती नदी]] में बायाँ ओर से आ के मिले वाली एगो छोट सहायिका नदी बा, जे [[उत्तर प्रदेश]] के राजधानी [[लखनऊ]] में गोमती में मिले ले। == हाइड्रोग्राफी == ई नदी लखनऊ के बख्शी का तालाब इलाका के अस्ति गाँव में दसर बाबा पोखरा के लगे एगो कुआँ से निकसे ले। एकरा बाद ई [[कुकरैल रिजर्व फॉरेस्ट]] में करीबन 6 किलोमीटर ले बहेले। गोमती नदी में मिले से पहिले एकर कुल बहाव करीब 28 किलोमीटर के बा।<ref name=":0">{{Cite news |title=50 metres area along Kukrail river declared ‘floodplain’ |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/lucknow/50-metres-area-along-kukrail-river-declared-floodplain/amp_articleshow/111120565.cms |access-date=2024-06-20 |work=The Times of India |issn=0971-8257}}</ref><ref name=":1">{{Cite news |title=A River That Was... |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/lucknow/revival-of-kukrail-river-in-lucknow-by-yogi-adityanath-government/amp_articleshow/110923538.cms |access-date=2024-06-20 |work=The Times of India |issn=0971-8257}}</ref> == इतिहास == लोकल लोककथा आ किंबदंती सभ के मोताबिक, ई नदी करीब 200 साल पहिले अस्तित्व में आइल। आसपास के बड़हन इलाका में इहो मान्यता बाटे कि कुक्कुर काटे पर एह नदी में नहाये से रैबीज ना होला।<ref>{{cite news |title=लखनऊ की इस छोटी सी नदी का नाम कुकरैल क्यों पड़ा, जानकर हैरान रह जाएंगे आप |url=https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/story-know-why-kukrail-river-of-lucknow-got-its-name-bathing-in-the-river-cures-dog-bites-8774116.html |access-date=26 सितंबर 2026 |work=www.livehindustan.com |date=28 सितंबर 2023 |language=hi}}</ref> एकर पहिला लिखित उल्लेख 1904 के गजेटियर में मिलेला। 1960 में एकर पानी के स्तर 113.2 मीटर तक पहुँच गइल रहे, जेकरा चलते 1962 में नदी के किनारे तटबंध बनावल गइल। 1980 में कुकरैल आ गोमती के दुसर सहायक नदियन के बीच के जमीन, जेकरा के म्युनिसिपल स्लेड फार्म कहल जात रहे, विकास खातिर [[लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी]] (एलडीए) के दे दिहल गइल। == संरक्षण == 2024 में कुकरैल नदी के दुनु ओर 50 मीटर चौड़ा पट्टी के बाढ़ मैदान (फ्लड प्लेन) घोषित कइल गइल। एकर हिस्सा के रूप में लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी अकबरनगर इलाका में बड़हन ध्वस्तीकरण अभियान चलवलस, जवना में 1,800 से अधिक अबैध निर्माण हटा दिहल गइल।<ref name=":0" /> {{clear}} == संदर्भ == {{Reflist|29em}} {{Hydrography of Uttar Pradesh}} [[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के नदी]] [[श्रेणी:लखनऊ]] {{नदी-आधार}} 5z947sup3tqghuuuh59r00spxfre2zv 805707 805706 2026-09-26T09:55:10Z SM7 3953 संदर्भ जोड़ल/सुधारल गइल 805707 wikitext text/x-wiki '''कुकरैल नदी''' [[गोमती नदी]] में बायाँ ओर से आ के मिले वाली एगो छोट सहायिका नदी बा, जे [[उत्तर प्रदेश]] के राजधानी [[लखनऊ]] में गोमती में मिले ले।<ref>{{cite web |last1=दत्ता |first1=वेंकटेश |title=गोमती के अस्तित्व के लिए अपरिहार्य अविरल निर्मल कुकरैल नदी |url=https://hindi.indiawaterportal.org/river-and-pond/gomati-ke-astitv-ke-lie-aparihary-aviral-nirmal-kukrel-nadi |website=India Water Portal - Hindi |access-date=26 सितंबर 2026 |language=hi |date=7 अगस्त 2023}}</ref> == हाइड्रोग्राफी == ई नदी लखनऊ के बख्शी का तालाब इलाका के अस्ति गाँव में दसर बाबा पोखरा के लगे एगो कुआँ से निकसे ले। एकरा बाद ई [[कुकरैल रिजर्व फॉरेस्ट]] में करीबन 6 किलोमीटर ले बहेले। गोमती नदी में मिले से पहिले एकर कुल बहाव करीब 28 किलोमीटर के बा।<ref name=":0">{{Cite news |title=50 metres area along Kukrail river declared ‘floodplain’ |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/lucknow/50-metres-area-along-kukrail-river-declared-floodplain/amp_articleshow/111120565.cms |access-date=2024-06-20 |work=The Times of India |issn=0971-8257}}</ref><ref name=":1">{{Cite news |title=A River That Was... |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/lucknow/revival-of-kukrail-river-in-lucknow-by-yogi-adityanath-government/amp_articleshow/110923538.cms |access-date=2024-06-20 |work=The Times of India |issn=0971-8257}}</ref> == इतिहास == लोकल लोककथा आ किंबदंती सभ के मोताबिक, ई नदी करीब 200 साल पहिले अस्तित्व में आइल। आसपास के बड़हन इलाका में इहो मान्यता बाटे कि कुक्कुर काटे पर एह नदी में नहाये से रैबीज ना होला।<ref>{{cite news |title=लखनऊ की इस छोटी सी नदी का नाम कुकरैल क्यों पड़ा, जानकर हैरान रह जाएंगे आप |url=https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/story-know-why-kukrail-river-of-lucknow-got-its-name-bathing-in-the-river-cures-dog-bites-8774116.html |access-date=26 सितंबर 2026 |work=www.livehindustan.com |date=28 सितंबर 2023 |language=hi}}</ref> एकर पहिला लिखित उल्लेख 1904 के गजेटियर में मिलेला। 1960 में एकर पानी के स्तर 113.2 मीटर तक पहुँच गइल रहे, जेकरा चलते 1962 में नदी के किनारे तटबंध बनावल गइल। 1980 में कुकरैल आ गोमती के दुसर सहायक नदियन के बीच के जमीन, जेकरा के म्युनिसिपल स्लेड फार्म कहल जात रहे, विकास खातिर [[लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी]] (एलडीए) के दे दिहल गइल। == संरक्षण == 2024 में कुकरैल नदी के दुनु ओर 50 मीटर चौड़ा पट्टी के बाढ़ मैदान (फ्लड प्लेन) घोषित कइल गइल। एकर हिस्सा के रूप में लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी अकबरनगर इलाका में बड़हन ध्वस्तीकरण अभियान चलवलस, जवना में 1,800 से अधिक अबैध निर्माण हटा दिहल गइल।<ref name=":0" /> {{clear}} == संदर्भ == {{Reflist|29em}} {{Hydrography of Uttar Pradesh}} [[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के नदी]] [[श्रेणी:लखनऊ]] {{नदी-आधार}} 5rzkhuul1polk8phs29uil0yvd3u1l5 805708 805707 2026-09-26T09:55:12Z KiranBOT 38109 removed AMP tracking from URLs ([[:m:User:KiranBOT/AMP|details]]) ([[User talk:Usernamekiran|report error]]) v3.1.1s 805708 wikitext text/x-wiki '''कुकरैल नदी''' [[गोमती नदी]] में बायाँ ओर से आ के मिले वाली एगो छोट सहायिका नदी बा, जे [[उत्तर प्रदेश]] के राजधानी [[लखनऊ]] में गोमती में मिले ले।<ref>{{cite web |last1=दत्ता |first1=वेंकटेश |title=गोमती के अस्तित्व के लिए अपरिहार्य अविरल निर्मल कुकरैल नदी |url=https://hindi.indiawaterportal.org/river-and-pond/gomati-ke-astitv-ke-lie-aparihary-aviral-nirmal-kukrel-nadi |website=India Water Portal - Hindi |access-date=26 सितंबर 2026 |language=hi |date=7 अगस्त 2023}}</ref> == हाइड्रोग्राफी == ई नदी लखनऊ के बख्शी का तालाब इलाका के अस्ति गाँव में दसर बाबा पोखरा के लगे एगो कुआँ से निकसे ले। एकरा बाद ई [[कुकरैल रिजर्व फॉरेस्ट]] में करीबन 6 किलोमीटर ले बहेले। गोमती नदी में मिले से पहिले एकर कुल बहाव करीब 28 किलोमीटर के बा।<ref name=":0">{{Cite news |title=50 metres area along Kukrail river declared ‘floodplain’ |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/lucknow/50-metres-area-along-kukrail-river-declared-floodplain/articleshow/111120565.cms |access-date=2024-06-20 |work=The Times of India |issn=0971-8257}}</ref><ref name=":1">{{Cite news |title=A River That Was... |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/lucknow/revival-of-kukrail-river-in-lucknow-by-yogi-adityanath-government/articleshow/110923538.cms |access-date=2024-06-20 |work=The Times of India |issn=0971-8257}}</ref> == इतिहास == लोकल लोककथा आ किंबदंती सभ के मोताबिक, ई नदी करीब 200 साल पहिले अस्तित्व में आइल। आसपास के बड़हन इलाका में इहो मान्यता बाटे कि कुक्कुर काटे पर एह नदी में नहाये से रैबीज ना होला।<ref>{{cite news |title=लखनऊ की इस छोटी सी नदी का नाम कुकरैल क्यों पड़ा, जानकर हैरान रह जाएंगे आप |url=https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/story-know-why-kukrail-river-of-lucknow-got-its-name-bathing-in-the-river-cures-dog-bites-8774116.html |access-date=26 सितंबर 2026 |work=www.livehindustan.com |date=28 सितंबर 2023 |language=hi}}</ref> एकर पहिला लिखित उल्लेख 1904 के गजेटियर में मिलेला। 1960 में एकर पानी के स्तर 113.2 मीटर तक पहुँच गइल रहे, जेकरा चलते 1962 में नदी के किनारे तटबंध बनावल गइल। 1980 में कुकरैल आ गोमती के दुसर सहायक नदियन के बीच के जमीन, जेकरा के म्युनिसिपल स्लेड फार्म कहल जात रहे, विकास खातिर [[लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी]] (एलडीए) के दे दिहल गइल। == संरक्षण == 2024 में कुकरैल नदी के दुनु ओर 50 मीटर चौड़ा पट्टी के बाढ़ मैदान (फ्लड प्लेन) घोषित कइल गइल। एकर हिस्सा के रूप में लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी अकबरनगर इलाका में बड़हन ध्वस्तीकरण अभियान चलवलस, जवना में 1,800 से अधिक अबैध निर्माण हटा दिहल गइल।<ref name=":0" /> {{clear}} == संदर्भ == {{Reflist|29em}} {{Hydrography of Uttar Pradesh}} [[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के नदी]] [[श्रेणी:लखनऊ]] {{नदी-आधार}} 8pzry4dcct8pchbl8b3j0nki2504b6n काली नदी (उत्तर प्रदेश) 0 101596 805709 2026-09-26T10:02:45Z SM7 3953 नया आधार लेख 805709 wikitext text/x-wiki '''काली नदी''', उत्तर प्रदेश में बहे वाली एगो छोटहन नदी हवे जे ऊपरी शिवालिक से निकसे ले आ [[सहारनपुर जिला|सहारनपुर]], [[मुजफ्फरनगर जिला|मुजफ्फरनगर]] आ [[बागपत जिला]] से होके बहे ले। बागपत जिला के बरनावा में ई [[हिंडन नदी]] में मिल जाला। हिंडन आगे [[दिल्ली]] के लगे [[जमुना नदी]] में मिले ले। जमुना फेर गंगा नदी में मिल जाले आ आखिर में गंगा बंगाल के खाड़ी में गिरे ले; एह तरीका से ई गंगा थाला के नदी हवे। अपना उद्गम से हिंडन नदी में मिले तक काली नदी के कुल लंबाई 150 किलोमीटर बा। एह नदी के नाँव हिंदू देवी काली के नाँव पर पड़ल मानल जाला। ==प्रदूषण== काली नदी में बिना साफ कइल सीवेज आ इंडस्ट्रियल डिस्चार्ज दुनो से प्रदूषण होखेला। ई अइसन नदियन में से ह, जेकर सफाई खातिर नेशनल गंगा रिवर बेसिन अथॉरिटी (एनजीआरबीए) के तहत काम कइल जा रहल बा। {{clear}} == संदर्भ == {{Reflist|29em}} {{Hydrography of Uttar Pradesh}} [[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के नदी]] [[श्रेणी:सहारनपुर जिला]] [[श्रेणी:मुजफ्फरनगर जिला]] [[श्रेणी:बागपत जिला]] {{नदी-आधार}} 9z3mhyr8lmw9tnt77o742cdafel376j