विकिपिडिया dtywiki https://dty.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE MediaWiki 1.47.0-wmf.24 first-letter मिडिया बिशेष कुरणि प्रयोगकर्ता प्रयोगकर्ता कुरणि विकिपिडिया विकिपिडिया वार्ता चित्र चित्र कुरणि मिडियाविकि मिडियाविकि कुरणि ढाँचा ढाँचा कुरणि मद्दत मद्दत कुरणि श्रेणी श्रेणी कुरणि TimedText TimedText talk मोड्युल मोड्युल कुरणि Event Event talk नवदुर्गा(देवी) 0 26714 268314 2026-10-18T04:28:18Z Ramesh Deuba 3534 नयाँ लेख 268314 wikitext text/x-wiki {{Infobox deity | type = हिन्दु | image = Navadurga_Statues_at_Bhawani_Waghjai_Temple,_Terav.jpg | caption = नवदुर्गाका मूर्ति | name = नवदुर्गा | Devanagari = {{lang|sa|नवदुर्गा}} | Sanskrit_transliteration = {{IAST|navadurgā}} | affiliation = [[आदिशक्ति]], [[दुर्गा]], [[पार्वती]], [[देवी]] | god_of = शक्ति, सामर्थ्य, संरक्षण, ज्ञान, धन, प्रजनन रे मोक्ष | mantra = ॐ ऐं ह्रीं श्रीं महादुर्गायै नमो नमः | weapon = [[खड्ग]], [[धनुष र बाण]], [[त्रिशूल]], [[सुदर्शन चक्र]], [[गदा]], [[ढाल]], [[शङ्ख]], [[घण्टा]] | mount = [[सिंह]], [[बाघ]], [[नन्दी]], [[गोरु]], [[खच्चर]] रे [[कमल]] | festivals = [[नवरात्रि]], [[दुर्गापूजा]], [[विजयादशमी]], [[दुर्गाष्टमी]] | consort = [[शिव]] }} '''नवदुर्गा''' [[हिन्दु धर्म]]मी [[दुर्गा]]का नौवटा स्वरूप तथा अभिव्यक्तिहरू हुन्।<ref name="Navdurgaforms">{{cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/religion/rituals-puja/navdurga-nine-forms-of-energy/articleshow/68207186.cms|title=The Nine Forms of Goddess Mahadevi Durga|access-date=2022-05-03|website=Times of India|date=24 September 2014 |language=en}}</ref><ref name="Melton2010p2600">{{cite book|author1=J. Gordon Melton|first2=Martin|last2=Baumann|title=Religions of the World: A Comprehensive Encyclopedia of Beliefs and Practices, 2nd Edition|url=https://books.google.com/books?id=v2yiyLLOj88C&pg=PA2600 |year=2010|publisher=ABC-CLIO|isbn=978-1-59884-204-3|pages=2600–2602}}</ref> विशेषगरी [[नवरात्रि]] रे [[दुर्गापूजा]]का अवसरमी यी स्वरूपहरूको पूजा गरिन्छ।{{Sfn|Navaratri, TOI}} हिन्दु धर्मका [[शाक्त सम्प्रदाय|शाक्त]] रे [[शैव सम्प्रदाय|शैव]] सम्प्रदायका अनुयायीहरूमाझ नवदुर्गालाई प्रायः सामूहिक रूपमी एउटै देवीका रूपमी पनि मनहान।{{Sfn|Amazzone|2010|p=184}} [[हिन्दु पौराणिक कथा]]अनुसार, नवदुर्गाका नौ स्वरूपहरूलाई राक्षसराज [[महिषासुर]]सँग नौ दिनसम्म चलेको युद्धका क्रममी [[दुर्गा]]ले धारण गरेका नौवटा चरण वा स्वरूपका रूपमी मनहान। यस युद्धको दसौँ दिनलाई [[विजयादशमी]] का रूपमी मनहान। हिन्दुहरू का लागि यो पर्व अत्यन्त महत्त्वपूर्ण चाडहरूमध्ये एक हो।{{Sfn|Ramachandran|2020|pp=21-23}} == पृष्ठभूमि तथा पूजा == {{Main|नवरात्रि}} [[नवरात्रि]] पर्वका अवसरमी नौ वर्षसम्मका नौ जना अविवाहित कन्याहरूको पूजा गरी उनीहरूलाई भोजन गराइन्छ। ती कन्याहरूलाई नौ देवीका अवतारका रूपमी मनहान।{{Sfn|Amazzone|2010|p=187}} [[दुर्गापूजा]]का क्रममी गरिने नवपत्रिका अनुष्ठानमी आठवटा वनस्पतिका हाँगाहरू रे तिनका पातहरूलाई केराको बोटसँग बाँधिन्छ। संस्कृतमी ''नव'' को अर्थ ‘नौ’ रे ''पत्रिका'' को अर्थ ‘पातहरू’ हुन्छ।{{Sfn|Ostor|2004|p=68}} == नवदुर्गाका नौ स्वरूप == हिन्दु धर्ममी पूजिने दुर्गाका नौ प्रमुख स्वरूपहरू निम्नानुसार छन्: {| class="wikitable" width="98%" style="background:white;" |- style="border-bottom:3px solid #CCCCFF" ! क्र.सं. ! चित्र {{Small|{{small|(चित्रण)}}}} ! नाम ! [[वाहन]] ! [[वर्ण (हिन्दु धर्म)|अवस्था]]{{Refn|[[पार्वती]]लाई नौवटा भिन्न चित्रणमार्फत नौ चरणमी वर्णन गरिएको छ। अन्तिम चरण [[सिद्धिदात्री]]को स्वरूपमी पुगेपछि रे [[सिद्धि]]हरू प्राप्त गरेपछि उनी [[महाशक्ति]] बन्दछिन्।{{Sfn|Ramachandran|2020|p=67}}|group=upper-alpha}} ! [[मन्त्र]] ! स्वरूपको वर्णन ! {{Abbr|सन्दर्भ|सन्दर्भ स्रोत}} |- | १. | [[File:Shailaputri Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|173x173px]] | {{Big|'''[[शैलपुत्री]]'''}} {{Small|“पर्वतकी पुत्री”}} | [[नन्दी (हिन्दु धर्म)|नन्दी]] (बल्ल) | बाल्यावस्थामी रहेकी [[पार्वती]], जसको दिव्य तथा मूल स्वरूप [[दुर्गा]] हो। | ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः | उन्नारो शरीरमी हल्का आभूषण सजिएका छन् रे उनले रातो तथा गुलाबी वस्त्र धारण गरेकी छन्। उनका दुई हातमध्ये एउटामी त्रिशूल रे अर्कोमी कमल छ। उनी सेतो बल्लको पिठ्युँमी विराजमान छिन्। | {{Sfn|Sharma|2021|p=73}} |- | २. | [[File:Brahmacharini.jpg|frameless|158x158px]] | {{Big|'''[[ब्रह्मचारिणी]]'''}} {{Small|“भक्ति रे तपस्याकी देवी”}} | कुनै पनि होइन | तपस्विनी अवस्थाकी दुर्गा। | ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः | उनले तपस्विनीको वेश धारण गरेकी छन्। उनको शरीरमी सुकेका [[रुद्राक्ष]]का दाना रे फूलहरू आभूषणका रूपमी सजिएका छन्। उनका दुई हातमध्ये एउटामी जपमाला रे अर्कोमी जलपात्र छ। | {{Sfn|Ramachandran|2020|p=23}} |- | ३. | [[File:Chandraghanta Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|157x157px]] | {{Big|'''[[चन्द्रघण्टा]]'''}} {{Small|“राक्षसहरूको संहार गर्ने देवी”}} | बाघ | [[शाक्त सम्प्रदाय|शक्ति]] स्वरूपकी दुर्गा। | ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः | उनका दस हात छन्। नौ हातमी त्रिशूल, गदा, धनुष, बाण, कमल, तरबार, घण्टी रे जलपात्रजस्ता आयुध तथा वस्तुहरू छन् भने अर्को हातले भक्तहरूलाई आशीर्वाद दिन्छ। उनी शक्तिशाली बाघमाथि विराजमान छिन्। | {{Sfn|Ramachandran|2020|pp=29-30}} |- | ४. | [[File:Kushmanda Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|154x154px]] | {{Big|'''[[कूष्माण्डा]]'''}} {{Small|“ब्रह्माण्डीय अण्डाकी देवी”}} | rowspan="3" | सिंह | [[महाशक्ति]] स्वरूपकी दुर्गा। | ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्माण्डायै नमः | उनका आठ हात छन्। तीमध्ये छ हातमी चक्र, गदा, कमल, धनुष, बाण, तरबार रे जपमालाजस्ता वस्तुहरू छन्। बाँकी दुई हातमा मह रे जलले भरिएका पात्र छन्। उनी सिंहको पिठ्युँमी विराजमान छिन्। | {{Sfn|Mittal|2006|p=63}} |- | ५. | [[File:Skandamata Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|164x164px]] | {{Big|'''[[स्कन्दमाता]]'''}} {{Small|“मातृत्व रे सन्तानकी देवी”}} | मातृत्वको अवस्थामा रहेकी दुर्गा। | ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः | उनका चार हात छन्। दुई हातमी कमलका फूल छन्। अर्को हातमी छवटा शिर भएका बालक कार्तिकेयलाई समातेकी छन्, जो उनको काखमी विराजमान छन्। चौथो हातले भक्तहरूलाई अभय प्रदान गर्छ। उनी सिंहको पिठ्युँमी विराजमान छिन्। | {{Sfn|Ostor|2004|p=34}} |- | ६. | [[File:Katyayani Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|168x168px]] | {{Big|'''[[कात्यायनी]]'''}} {{Small|“शक्तिकी देवी”}} | कुनै पनि असुरसँग युद्ध गर्न तत्पर योद्धा स्वरूपकी दुर्गा। | ॐ देवी कात्यायन्यै नमः | उनका शरीरमी बहुमूल्य आभूषणहरू सजिएका छन् रे उनले हरियो तथा गुलाबी वस्त्र धारण गरेकी छन्। उनका चार हातमी तरबार, ढाल, कमल रे त्रिशूल छन्। उनी भयङ्कर सिंहमाथि विराजमान देखिन्छिन्। | {{Sfn|Ramachandran|2020|pp=48-51}} |- | ७. | [[File:Kalratri Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|163x163px]] | {{Big|'''[[कालरात्रि]]'''}} {{Small|“मङ्गल रे साहसकी देवी”}} | गधा | संहारकारी स्वरूपकी दुर्गा। | ॐ देवी कालरात्र्यै नमः | उनका तीनवटा रक्तवर्णका आँखा छन् रे कपाल अव्यवस्थित छ। उनको घाँटीमी बिजुलीजस्तै चम्किने खप्परहरूको माला छ। उनका चार हातमी त्रिशूल, बाङ्गो तरबार, वज्र रे कचौरा छन्। उनी आफ्नो वाहन गधाको पिठ्युँमी विराजमान छिन्। | {{Sfn|Mishra|1989|p=36}} |- | ८. | [[File:Mahagauri Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|172x172px]] | {{Big|'''[[महागौरी]]'''}} {{Small|“सौन्दर्य रे नारीत्वकी देवी”}} | गोरु | पुनःस्थापनाको स्वरूपकी दुर्गा। | ॐ देवी महागौर्यै नमः | उनका चार हात छन्। तीन हातमी त्रिशूल, सानो डमरु रे गुलाबी कमल छन् भने चौथो हातले भक्तहरूलाई अभय प्रदान गर्छ। उनी सेतो गोरुमाथि विराजमान छिन्। | {{Sfn|Sivkishen|2016|p=176}} |- | ९. | [[File:Siddhidatri Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|176x176px]] | {{Big|'''[[सिद्धिदात्री]]'''}} {{Small|“अलौकिक शक्तिहरू अर्थात् [[सिद्धि]] प्रदान गर्ने देवी”}} | कमल | महाशक्तिका रूपमी सर्वोच्च तथा पूर्ण स्वरूप प्राप्त गरेकी दुर्गा। | ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्र्यै नमः | उनका चार हातमध्ये प्रत्येकमा चक्र, शङ्ख, गुलाबी कमल रे गदा छन्। उनी पूर्ण रूपमी फुलेको कमलमाथि विराजमान छिन्। | {{Sfn|Ramachandran|2020|pp=68, 70}} |} === अग्निपुराण === [[अग्निपुराण]]मी नवदुर्गाका स्वरूपहरू निम्नानुसार उल्लेख गरिएका छन्:<ref>{{Cite book |last=Gangadharan |first=N |title=The Agni Purana |publisher=Motilal Banarsidass Publishers |year=1954 |isbn=9788120803596 |pages=132 |language=English}}</ref> # रुद्रचण्डा # प्रचण्डा # चण्डोग्रा # चण्डनायिका # चण्डा # चण्डवती # चण्डरूपा # अतिचण्डिका # उग्रचण्डा == सन्दर्भहरू == === टिप्पणीहरू === {{reflist|group=upper-alpha}} === उद्धरणहरू === {{reflist}} == स्रोतग्रन्थहरू == {{refbegin}} * {{Cite news|title=नवरात्रि २०२१: माँ दुर्गाका नौ स्वरूप रे तिनलाई अर्पण गरिने विशेष प्रसाद|url=https://timesofindia.indiatimes.com/life-style/events/navratri-2019-what-are-the-nine-forms-of-maa-durga-and-the-special-prasad-offered-to-them/articleshow/71335962.cms|access-date=2021-12-31|website=[[द टाइम्स अफ इन्डिया]]|date=7 October 2021 |language=en|ref={{SfnRef|Navaratri, TOI}}}} * {{Cite book|last=Ramachandran|first=Nalini|url=https://books.google.com/books?id=kUcAEAAAQBAJ|title=नवदुर्गा: देवीका नौ स्वरूप|date=2020|publisher=[[पेन्गुइन बुक्स]]|isbn=978-93-5305-981-1|language=en}} * {{Cite book|last=Amazzone|first=Laura|url=https://books.google.com/books?id=JBNtQYFEjeAC|title=देवी दुर्गा र पवित्र नारीशक्ति|date=2010|publisher=[[युनिभर्सिटी प्रेस अफ अमेरिका]]|isbn=978-0-7618-5313-8|language=en}} * {{Cite book|last=Ostor|first=Akos|url=https://books.google.com/books?id=6ASi04hC0BQC|title=देवताहरूको लीला: बङ्गालको एउटा सहरका पर्वहरूमा स्थानीयता, विचारधारा, संरचना र समय|date=2004|publisher=[[ओरिएन्ट ब्ल्याकस्वान]]|isbn=978-81-8028-013-9|language=en}} * {{Cite book|last=Mishra|first=P. K.|url=https://books.google.com/books?id=gCpuAAAAMAAJ|title=संस्कृति, जनजातीय इतिहास र स्वतन्त्रता आन्दोलन: डा. एन. के. साहु स्मृति ग्रन्थ|date=1989|publisher=आगम कला प्रकाशन|language=en}} * {{Cite book|last=Pintchman|first=Tracy|title=महादेवीको खोजी: हिन्दु महादेवीका पहिचानहरूको निर्माण|url=https://books.google.com/books?id=JfXdGInecRIC|date=2001|publisher=[[स्टेट युनिभर्सिटी अफ न्युयोर्क प्रेस]]|isbn=9780791490495|language=en}} * {{Cite book|last=Sharma|first=Vidya Sagar|url=https://books.google.com/books?id=SXhUBQAAQBAJ|title=माता वैष्णो देवी|year=2021|publisher=प्रभात प्रकाशन|isbn=978-81-7315-903-9|language=hi}} * {{Cite book|last=Mittal|first=J. P.|url=https://books.google.com/books?id=b7gOBW8oDFgC|title=प्राचीन भारतको इतिहास (नयाँ संस्करण): ईसा पूर्व ७३०० देखि ४२५० सम्म|date=2006|publisher=एटलान्टिक पब्लिसर्स एन्ड डिस्ट्रिब्युटर्स|isbn=978-81-269-0615-4|language=en}} * {{Cite book|last=Sivkishen|url=https://books.google.com/books?id=kmVZBgAAQBAJ|title=शिवको राज्य|date=2015|publisher=डायमन्ड पकेट बुक्स प्रा. लि.|isbn=978-81-288-3028-0|language=en}} {{refend}} bga6nysfl8p7iqdev9jpshkrurjo5f5 268315 268314 2026-10-18T04:36:01Z Ramesh Deuba 3534 /* पृष्ठभूमि तथा पूजा */ 268315 wikitext text/x-wiki {{Infobox deity | type = हिन्दु | image = Navadurga_Statues_at_Bhawani_Waghjai_Temple,_Terav.jpg | caption = नवदुर्गाका मूर्ति | name = नवदुर्गा | Devanagari = {{lang|sa|नवदुर्गा}} | Sanskrit_transliteration = {{IAST|navadurgā}} | affiliation = [[आदिशक्ति]], [[दुर्गा]], [[पार्वती]], [[देवी]] | god_of = शक्ति, सामर्थ्य, संरक्षण, ज्ञान, धन, प्रजनन रे मोक्ष | mantra = ॐ ऐं ह्रीं श्रीं महादुर्गायै नमो नमः | weapon = [[खड्ग]], [[धनुष र बाण]], [[त्रिशूल]], [[सुदर्शन चक्र]], [[गदा]], [[ढाल]], [[शङ्ख]], [[घण्टा]] | mount = [[सिंह]], [[बाघ]], [[नन्दी]], [[गोरु]], [[खच्चर]] रे [[कमल]] | festivals = [[नवरात्रि]], [[दुर्गापूजा]], [[विजयादशमी]], [[दुर्गाष्टमी]] | consort = [[शिव]] }} '''नवदुर्गा''' [[हिन्दु धर्म]]मी [[दुर्गा]]का नौवटा स्वरूप तथा अभिव्यक्तिहरू हुन्।<ref name="Navdurgaforms">{{cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/religion/rituals-puja/navdurga-nine-forms-of-energy/articleshow/68207186.cms|title=The Nine Forms of Goddess Mahadevi Durga|access-date=2022-05-03|website=Times of India|date=24 September 2014 |language=en}}</ref><ref name="Melton2010p2600">{{cite book|author1=J. 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[[वाहन]] ! [[वर्ण (हिन्दु धर्म)|अवस्था]]{{Refn|[[पार्वती]]लाई नौवटा भिन्न चित्रणमार्फत नौ चरणमी वर्णन गरिएको छ। अन्तिम चरण [[सिद्धिदात्री]]को स्वरूपमी पुगेपछि रे [[सिद्धि]]हरू प्राप्त गरेपछि उनी [[महाशक्ति]] बन्दछिन्।{{Sfn|Ramachandran|2020|p=67}}|group=upper-alpha}} ! [[मन्त्र]] ! स्वरूपको वर्णन ! {{Abbr|सन्दर्भ|सन्दर्भ स्रोत}} |- | १. | [[File:Shailaputri Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|173x173px]] | {{Big|'''[[शैलपुत्री]]'''}} {{Small|“पर्वतकी पुत्री”}} | [[नन्दी (हिन्दु धर्म)|नन्दी]] (बल्ल) | बाल्यावस्थामी रहेकी [[पार्वती]], जसको दिव्य तथा मूल स्वरूप [[दुर्गा]] हो। | ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः | उन्नारो शरीरमी हल्का आभूषण सजिएका छन् रे उनले रातो तथा गुलाबी वस्त्र धारण गरेकी छन्। उनका दुई हातमध्ये एउटामी त्रिशूल रे अर्कोमी कमल छ। उनी सेतो बल्लको पिठ्युँमी विराजमान छिन्। | {{Sfn|Sharma|2021|p=73}} |- | २. | [[File:Brahmacharini.jpg|frameless|158x158px]] | {{Big|'''[[ब्रह्मचारिणी]]'''}} {{Small|“भक्ति रे तपस्याकी देवी”}} | कुनै पनि होइन | तपस्विनी अवस्थाकी दुर्गा। | ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः | उनले तपस्विनीको वेश धारण गरेकी छन्। उनको शरीरमी सुकेका [[रुद्राक्ष]]का दाना रे फूलहरू आभूषणका रूपमी सजिएका छन्। उनका दुई हातमध्ये एउटामी जपमाला रे अर्कोमी जलपात्र छ। | {{Sfn|Ramachandran|2020|p=23}} |- | ३. | [[File:Chandraghanta Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|157x157px]] | {{Big|'''[[चन्द्रघण्टा]]'''}} {{Small|“राक्षसहरूको संहार गर्ने देवी”}} | बाघ | [[शाक्त सम्प्रदाय|शक्ति]] स्वरूपकी दुर्गा। | ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः | उनका दस हात छन्। नौ हातमी त्रिशूल, गदा, धनुष, बाण, कमल, तरबार, घण्टी रे जलपात्रजस्ता आयुध तथा वस्तुहरू छन् भने अर्को हातले भक्तहरूलाई आशीर्वाद दिन्छ। उनी शक्तिशाली बाघमाथि विराजमान छिन्। | {{Sfn|Ramachandran|2020|pp=29-30}} |- | ४. | [[File:Kushmanda Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|154x154px]] | {{Big|'''[[कूष्माण्डा]]'''}} {{Small|“ब्रह्माण्डीय अण्डाकी देवी”}} | rowspan="3" | सिंह | [[महाशक्ति]] स्वरूपकी दुर्गा। | ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्माण्डायै नमः | उनका आठ हात छन्। तीमध्ये छ हातमी चक्र, गदा, कमल, धनुष, बाण, तरबार रे जपमालाजस्ता वस्तुहरू छन्। बाँकी दुई हातमा मह रे जलले भरिएका पात्र छन्। उनी सिंहको पिठ्युँमी विराजमान छिन्। | {{Sfn|Mittal|2006|p=63}} |- | ५. | [[File:Skandamata Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|164x164px]] | {{Big|'''[[स्कन्दमाता]]'''}} {{Small|“मातृत्व रे सन्तानकी देवी”}} | मातृत्वको अवस्थामा रहेकी दुर्गा। | ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः | उनका चार हात छन्। दुई हातमी कमलका फूल छन्। अर्को हातमी छवटा शिर भएका बालक कार्तिकेयलाई समातेकी छन्, जो उनको काखमी विराजमान छन्। चौथो हातले भक्तहरूलाई अभय प्रदान गर्छ। उनी सिंहको पिठ्युँमी विराजमान छिन्। | {{Sfn|Ostor|2004|p=34}} |- | ६. | [[File:Katyayani Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|168x168px]] | {{Big|'''[[कात्यायनी]]'''}} {{Small|“शक्तिकी देवी”}} | कुनै पनि असुरसँग युद्ध गर्न तत्पर योद्धा स्वरूपकी दुर्गा। | ॐ देवी कात्यायन्यै नमः | उनका शरीरमी बहुमूल्य आभूषणहरू सजिएका छन् रे उनले हरियो तथा गुलाबी वस्त्र धारण गरेकी छन्। उनका चार हातमी तरबार, ढाल, कमल रे त्रिशूल छन्। उनी भयङ्कर सिंहमाथि विराजमान देखिन्छिन्। | {{Sfn|Ramachandran|2020|pp=48-51}} |- | ७. | [[File:Kalratri Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|163x163px]] | {{Big|'''[[कालरात्रि]]'''}} {{Small|“मङ्गल रे साहसकी देवी”}} | गधा | संहारकारी स्वरूपकी दुर्गा। | ॐ देवी कालरात्र्यै नमः | उनका तीनवटा रक्तवर्णका आँखा छन् रे कपाल अव्यवस्थित छ। उनको घाँटीमी बिजुलीजस्तै चम्किने खप्परहरूको माला छ। उनका चार हातमी त्रिशूल, बाङ्गो तरबार, वज्र रे कचौरा छन्। उनी आफ्नो वाहन गधाको पिठ्युँमी विराजमान छिन्। | {{Sfn|Mishra|1989|p=36}} |- | ८. | [[File:Mahagauri Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|172x172px]] | {{Big|'''[[महागौरी]]'''}} {{Small|“सौन्दर्य रे नारीत्वकी देवी”}} | गोरु | पुनःस्थापनाको स्वरूपकी दुर्गा। | ॐ देवी महागौर्यै नमः | उनका चार हात छन्। तीन हातमी त्रिशूल, सानो डमरु रे गुलाबी कमल छन् भने चौथो हातले भक्तहरूलाई अभय प्रदान गर्छ। उनी सेतो गोरुमाथि विराजमान छिन्। | {{Sfn|Sivkishen|2016|p=176}} |- | ९. | [[File:Siddhidatri Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|176x176px]] | {{Big|'''[[सिद्धिदात्री]]'''}} {{Small|“अलौकिक शक्तिहरू अर्थात् [[सिद्धि]] प्रदान गर्ने देवी”}} | कमल | महाशक्तिका रूपमी सर्वोच्च तथा पूर्ण स्वरूप प्राप्त गरेकी दुर्गा। | ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्र्यै नमः | उनका चार हातमध्ये प्रत्येकमा चक्र, शङ्ख, गुलाबी कमल रे गदा छन्। उनी पूर्ण रूपमी फुलेको कमलमाथि विराजमान छिन्। | {{Sfn|Ramachandran|2020|pp=68, 70}} |} === अग्निपुराण === [[अग्निपुराण]]मी नवदुर्गाका स्वरूपहरू निम्नानुसार उल्लेख गरिएका छन्:<ref>{{Cite book |last=Gangadharan |first=N |title=The Agni Purana |publisher=Motilal Banarsidass Publishers |year=1954 |isbn=9788120803596 |pages=132 |language=English}}</ref> # रुद्रचण्डा # प्रचण्डा # चण्डोग्रा # चण्डनायिका # चण्डा # चण्डवती # चण्डरूपा # अतिचण्डिका # उग्रचण्डा == सन्दर्भहरू == === टिप्पणीहरू === {{reflist|group=upper-alpha}} === उद्धरणहरू === {{reflist}} == स्रोतग्रन्थहरू == {{refbegin}} * {{Cite news|title=नवरात्रि २०२१: माँ दुर्गाका नौ स्वरूप रे तिनलाई अर्पण गरिने विशेष प्रसाद|url=https://timesofindia.indiatimes.com/life-style/events/navratri-2019-what-are-the-nine-forms-of-maa-durga-and-the-special-prasad-offered-to-them/articleshow/71335962.cms|access-date=2021-12-31|website=[[द टाइम्स अफ इन्डिया]]|date=7 October 2021 |language=en|ref={{SfnRef|Navaratri, TOI}}}} * {{Cite book|last=Ramachandran|first=Nalini|url=https://books.google.com/books?id=kUcAEAAAQBAJ|title=नवदुर्गा: देवीका नौ स्वरूप|date=2020|publisher=[[पेन्गुइन बुक्स]]|isbn=978-93-5305-981-1|language=en}} * {{Cite book|last=Amazzone|first=Laura|url=https://books.google.com/books?id=JBNtQYFEjeAC|title=देवी दुर्गा र पवित्र नारीशक्ति|date=2010|publisher=[[युनिभर्सिटी प्रेस अफ अमेरिका]]|isbn=978-0-7618-5313-8|language=en}} * {{Cite book|last=Ostor|first=Akos|url=https://books.google.com/books?id=6ASi04hC0BQC|title=देवताहरूको लीला: बङ्गालको एउटा सहरका पर्वहरूमा स्थानीयता, विचारधारा, संरचना र समय|date=2004|publisher=[[ओरिएन्ट ब्ल्याकस्वान]]|isbn=978-81-8028-013-9|language=en}} * {{Cite book|last=Mishra|first=P. K.|url=https://books.google.com/books?id=gCpuAAAAMAAJ|title=संस्कृति, जनजातीय इतिहास र स्वतन्त्रता आन्दोलन: डा. एन. के. साहु स्मृति ग्रन्थ|date=1989|publisher=आगम कला प्रकाशन|language=en}} * {{Cite book|last=Pintchman|first=Tracy|title=महादेवीको खोजी: हिन्दु महादेवीका पहिचानहरूको निर्माण|url=https://books.google.com/books?id=JfXdGInecRIC|date=2001|publisher=[[स्टेट युनिभर्सिटी अफ न्युयोर्क प्रेस]]|isbn=9780791490495|language=en}} * {{Cite book|last=Sharma|first=Vidya Sagar|url=https://books.google.com/books?id=SXhUBQAAQBAJ|title=माता वैष्णो देवी|year=2021|publisher=प्रभात प्रकाशन|isbn=978-81-7315-903-9|language=hi}} * {{Cite book|last=Mittal|first=J. P.|url=https://books.google.com/books?id=b7gOBW8oDFgC|title=प्राचीन भारतको इतिहास (नयाँ संस्करण): ईसा पूर्व ७३०० देखि ४२५० सम्म|date=2006|publisher=एटलान्टिक पब्लिसर्स एन्ड डिस्ट्रिब्युटर्स|isbn=978-81-269-0615-4|language=en}} * {{Cite book|last=Sivkishen|url=https://books.google.com/books?id=kmVZBgAAQBAJ|title=शिवको राज्य|date=2015|publisher=डायमन्ड पकेट बुक्स प्रा. लि.|isbn=978-81-288-3028-0|language=en}} {{refend}} fvkh3bx2vesqz93jdk8wzre2hpnowwa नौरथा 0 26715 268316 2026-10-18T05:03:16Z Ramesh Deuba 3534 नयाँ लेख 268316 wikitext text/x-wiki {{Infobox holiday | holiday_name = नवरात्रि | type = हिन्दु | image = Durga Puja A.JPG | caption = दुर्गा पूजा पण्डाल | nickname = {{Hlist|नवरात्रि|नवरात्रम्|नौरथा|नौरात्रि|नवरात्र|नराते|नवरतन|नौरता|नौरात|[[दुर्गापूजा]]|शरद् उत्सव|[[दशैं]]|मोहनी|गर्भोत्सव|देवी पक्ष|बथुकम्मा|साँझी|गोम्बे हब्बा|गोलु}} | observedby = [[हिन्दु धर्मावलम्बी]] | date = बहुदिवसीय | begins = | ends = | frequency = वार्षिक | celebrations = नौ रात | significance = [[नवदुर्गा]]का नामले परिचित देवी [[दुर्गा]]का नौ स्वरूपको आराधना | observances = *सामाजिक तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम *प्रार्थना *व्रत *पूजा *पूजामण्डपहरूको भ्रमण *मूर्तिको विसर्जन *देवी दुर्गा र पार्वतीको आराधनाका लागि अग्निपूजा | relatedto = [[दुर्गाष्टमी]], [[नवमी]], [[विजयादशमी]], [[दशैं]], [[दुर्गापूजा]], [[गरबा (नृत्य)|गरबा]], [[विद्यारम्भम्]], [[साँझी]], [[गोलु (पर्व)]], [[बथुकम्मा]], [[रामलीला]], [[मोहनी]] | duration = नौ रात | date2026 = वसन्त नवरात्रि: १९ मार्च (बिहीबार) – २७ मार्च (शुक्रबार)<ref>{{cite web|title=Navratri Vasant 2026 date Schedule|url=https://timesofindia.indiatimes.com/chaitra-navratri-2021-when-why-and-how-is-it-celebrated/articleshow/81950403.cms|publisher=[[Times of India]]}}</ref><br> शारदीय नवरात्रि: ११ अक्टोबर (आइतबार) – १९ अक्टोबर (सोमबार)<ref>{{cite web|title=Shardiya Navratri 2026 date Schedule|url=https://www.drikpanchang.com/navratri/ashwin-shardiya-navratri-dates.html|publisher=DrikPanchang}}</ref> }} '''नौरथा''', '''नवरात्र''' अथवा '''नवरात्रि'''मी प्रतिपदादेखि नवमीसम्म नौवटी देवीको पूजाआराधना गरिन्छ।<ref>{{Cite web|url=https://purbelinews.com/pradesh/68999|title=नौरथा संगै पाथीभरामा दर्शनार्थी आउने क्रम सुरु, आज मात्रै दुई हजार बढी दर्शनार्थी|website=Purbeli News|language=en-US|accessdate=2022-11-08|archive-url=https://web.archive.org/web/20221108120920/https://purbelinews.com/pradesh/68999|archive-date=2022-11-08}}</ref> यी देवीहरू हुन्ः [[शैलपुत्री]], [[व्रह्मचारणी]], [[चन्द्रघण्टा|चन्द्रघन्टा]], [[कुशमन्दा]], [[स्कन्दमाता]], [[कात्यायनी]], [[कालरात्री]], [[महागौरी]] रे [[सिद्धिदात्री]]। यी देवीहरूलाई नवदुर्गाको नामले पुकारिन्छ। नौ दिनसम्म नवदुर्गा भवानी नौवटा विभिन्न स्वरूपमी उपासकहरूलाई दर्शन दिनुहुन्छ भन्ने कथन छ। यसैले भक्तहरू आफ्नो मनको इच्छा पूरा हुने उत्कट अभिलाषाले यस '''नवरात्रि''' पर्वमी नवदुर्गा देवीलाई राँगा, बोका, भेडा, हाँस, कुभिण्डो अथवा पञ्चबलि चढाइ आ-आफ्ना भाकल पूरा गर्ने पनि गर्दछन्।<ref>{{Cite web|url=https://www.imagekhabar.com/news/21934/|title=नौरथा लागेसँगै दन्तकाली मन्दिरमा दर्शनार्थीको घुइँचो|website=Imagekhabar - Online News Portal of Nepal|language=en|accessdate=2022-11-08}}</ref> नौरथामी पुजिने नवदुर्गाको स्वरूपहरू यस प्रकार छन्।<ref>{{Cite web|url=https://www.jankarikendra.com/news/44355/|title=आज सोह्रश्राद्ध सकिँदै, भोलीबाट दशैंको नौरथा सुरु|website=Jankari Kendra|accessdate=2022-11-08}}{{Dead link|date=April 2025 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref> ==प्रतिपदा== [[चित्र:Jamara.jpg|alt=घटस्थापनाको दिन जमराको बीज छरिन्छ।|thumb|घटस्थापनाको दिन जमराको बीज छरिन्छ।]] प्रतिपदाका दिन पूजाआराधना गरिने शक्तिस्वरूपा भगवतीको पहिलो स्वरूपको नाम शैलपुत्री हो। पर्वतराज हिमालयका पुत्रीका रूपमी उत्पन्न भएकीले यी भगवतीलाई शैलपुत्री भनिएको हो। साँढेमी बसेकी यी देवीको दाहिने हातमा त्रिशूल रे बायाँ हातमी कमलको फूल सुशोभित छ। पूर्वजन्ममी यिनी प्रजापति दक्षकी छोरीको रूपमी जन्मेकी थिइन्। त्यसबेला यिनको नाम सती थियो। यिनको विवाह भगवान् शंकरजीसँग भएको थियो। एकचोटी प्रजापति दक्षले एक ठूलो यज्ञको आयोजना गरी सारा देवताहरूलाई यज्ञको भाग लिन निमन्त्रणा गरेका थिए तर भगवान् शंकरलाई चाहिँ बेलाएका थिएनन्। उनकी छोरी सतीले पनि उक्त कुरा थाहा पाइन् रे उनले आफ्नो पतिको अनुमति बेगर त्यस यज्ञमी भाग लिन पुगिन्। त्यहाँ उनले जताततैबाटी भगवान् शंकरको उपेक्षा गरिएको पाइन् यहाँसम्म कि आफ्नो पिताको मुखबाटी समेत पतिको निन्दा गरेको पाइन्। त्यसपछि उनको मनले आफ्नो पतिको निन्दा सुन्न नसकी त्यही यज्ञमी आफूलाई जलाएर भष्म गरिन्। अघिल्लो जन्ममी शैलराज हिमालयकी पुत्रीका रूपमी जन्म लिएकी शैलपुत्रीको विवाह पनि शंकरजीकै साथ भएको थियो। यस जन्ममी पनि उनी शिवजीको अर्धाङ्गनि बनिन्। ==द्वितिया== नौरथाको दोस्रो दिन पूजा गरिने देवीको नाम ब्रहृमचारिणी हो। यो माता दुर्गाको दोस्रो स्वरूप हो। ब्रहृम शब्दको अर्थ तपस्या हुन्छ। यसैले तपको आराधना गर्ने देवी भनेर यिनलाई ब्रहृमचारिणी भनिएको हो। यी देवीको स्वरूप पूर्ण ज्योतिमय एवं अत्यन्त भव्य देखिन्छ। यी देवीको दायाँ हातमी जपको माला रे बायाँ हातमी कमण्डलु हुन्छ। यी देवीको उपासना गर्नाले मानिसमा तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम वृद्धि हुँदै जान्छ रे उसलाई सर्वत्र सिद्धि एवं विजय हात लाग्दछ। पूर्वजन्ममी जब यिनी हिमालयको घरमी छोरीको रूपमी जन्मेकी थिइन्, त्यसबेला नारदको उपदेशले यिनले भगवान् शंकरलाई पतिको रूपमी पाउनको लागि कठिन तपस्या गरेकी थिइन्। यस्तो कठिन तपस्याको कारण यिनलाई तपश्चारिणी अर्थात् ब्रहृमचारिणी नामले जानिन्छ। हजार वर्षसम्म यिनले पानी पनि नखाइकन तपस्या गरेकी थिइन्। उनको कठिन तपस्या देखेपछि पितामह ब्रहृमाले आकाशवाणीद्वारा 'भगवान् शिवजी तिमीलाई पतिको रूपमी प्राप्त हुनेछन्' भनेर उनको मनोकामना सबै पूर्ण हुने जानकारी दिएका थिए रे पछि त्यस्तै भयो पनि। ==तृतिया== माता दुर्गाको तेस्रो शक्तिको नाम चन्द्रघण्टा हो। नौरथा पूजापर्वमी तेस्रो दिन यिनको स्वरूपको पूजाआजा गरिन्छ। सुवर्णमय चन्द्रघण्टा देवीको स्वरूप परम शान्तिदायक एवं कल्याणकारी छ। यिनको दस हातमी खड्ग आदि शस्त्र तथा वाण आदि अस्त्र विभूषित छन्। उनको टाउकोमी घण्टाको आकारको अर्धचन्द्र छ, यही कारणले गर्दा यिनीलाई चन्द्रघण्टादेवी भनेर जानिन्छ। यिनको शरीरको रे स्वर्णको समान चम्किलो देखिन्छ। शास्त्रानुसार हातको घण्टाको आवाजले राक्षसहरू डराउने भएकाले यिनको नाम चन्द्रघण्टा राखिएको हो। यी दुर्गाको वाहन सिंह हो। यसैले यिनका उपासक पनि सिंहजस्तै पराक्रमी हुन्छन्। यिनको मुद्रा युद्धको लागि तत्पर भइरहेको जस्तो देन्छि यिनको ध्यान, आराधना रे उपासना गर्नाले भूत, प्रेत, बाधा आदिबाटी रक्षा गर्छ रे भक्तको सारा पाप एवं बाधा नष्ट भएर जान्छ। रिसाहा स्वभाव भएकी यी देवीको पूजा गर्नाले घण्टाको ध्वनिको आवाज भक्तको कानमी परिहाल्छ। यी देवीको उपासना गर्दा परलोकका लागि कल्याण रे सद्गति प्राप्त हुन्छ। ==चतुर्थी== चतुर्थीका दिन पूजा गरिने भगवतीको नाम कुष्माण्डा हो। सूर्यको जस्तो तेज भएकी रे वाहन सिंह भएकी यी भगवतीको अट्टहासमी ब्रहृमाण्डको सृष्टि रे प्रलय हुने भएकोले उनलाई कुष्माण्डा भनिएको हो। आफ्नो मन्द मुस्कानद्वारा ब्रहृमाण्डको उत्पन्न गरेकोले यिनलाई कुष्माण्डादेवी भनिएको हो। सृष्टिको अस्तित्व नभएको बेला चारैतिर जताततै अन्धकार व्याप्त थियो। यस्तो अवस्थामी यी देवी कुष्माण्डाले खिसिक्क हाँसेर ब्रहृमाण्डको सृष्टि गर्नुभयो। पृथ्वीको यही सृष्टिको आदिस्वरूप नै उनी हुन्। यी देवीको आठ हात भएका हुनाले यी देवीको अर्को नाम अष्टभुजा देवी पनि हो। यी देवीको सात हातमी क्रमशः कमण्डलु, धनुष, वाण, कमलपुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा छन् भने अर्को हातमी भक्तजनलाई सिद्धि रे निधि दिन सक्ने जपमाला रहेको छ। यी देवीलाई कुभिण्डोको बलि ज्यादै मनपर्ने हुनाले पनि यी देवीलाई कुष्माण्डा पनि भनिन्छ। यी देवीको तेजको तुलना यिनीसँग मात्रै गर्न सकिन्छ। अरू कुनै पनि देवता यी देवीको तेजको प्रभावलाई खप्न सक्दैनन्। यी देवीको भक्ति गर्नाले आयु, यश, बल एवं आरोग्य वृद्धि हुन्छ। ==पञ्चमी== नौरथाको पञ्चमीका दिन पूजा गरिने शक्तिस्वरूपा भगवती स्कन्दमाता हुन्। कमलको फूल आसन भएकी, सेतो वर्ण, चार हात भएकी, स्कन्दकुमारकी माता भएकीले उनलाई स्कन्दमाता भनिएको हो। यी देवीको काखमी सुपुत्र स्कन्दकुमार आनन्दले रहनुहुन्छ। कमल ओछ्याएर बस्ने आदत भएकोले यी देवीलाई पद्मासना देवी पनि भनिन्छ। स्कन्दमाताको सेवा गर्नाले स्वामी कार्तिकेयको पनि उपासना गरे सरह हुन्छ। यस्तो विशेषता केवल यिनीलाई मात्र प्राप्त छ। सूर्यमण्डलकी अधिष्ठात्री देवी भएको कारण यी देवीको पूजाआजा गर्ने भक्तजन अलौकिक तेज रे कान्तिले सुसम्पन्न हुने हुन्छन्। ==षष्ठी== नौरथाको षष्ठीका दिन पूजा गरिने देवीलाई कात्यायनी भनिन्छ। चार हात भएकी यी देवीको वाहन सिंह हो। यी देवीको कात्यायनी नाम रहन गएको कथा यस प्रकार देखिन्छ- कत नाम गरेका एक ऋषि थिए। उनका पुत्र ऋषि कात्य भए। कात्यको गोत्रमी विश्वप्रसिद्ध महषिर् कात्यायन पैदा भए। यिनले भगवती पराम्बाको उपासना गर्दै धेरै वर्षसम्म कठिन तपस्या गरेका थिए। भगवतीको जन्म मेरो घरमी छोरीको रूपमी होस् भन्ने उनको इच्छा थियो। माता भगवतीले उनको प्रार्थना स्वीकार गरिदिनुभयो। केही कालपछि जब महिषासुर दानवको अत्याचार पृथ्वीमी बढ्दै गयो, त्यसैबेला यस दैत्यको वधको लागि ब्रहृमा, विष्णु रे शिव तीन देवताको शक्तिको तेजले एक देवीको जन्म भयो। यी देवीको पूजा गर्ने पहिलो ऋषि नै कात्यायन थिए। यसैकारण यी देवी कात्यायनी कहलाईन्। ==सप्तमी == [[चित्र:Kali by Raja Ravi Varma.jpg|thumb|सप्तमीको दिन कालरात्रिको आराधना गरिन्छ । ]] सप्तमी अर्थात् फूलपातीका दिन पूजा गरिने शक्तिस्वरूपा भगवतीलाई कालरात्रि भनिन्छ। कालो घना वर्णकी, गधा वाहन भएकी, तीन आँखा भएकी, चार हात भएकी, उक्त हातहरूमा क्रमशः तरबार, मसाल, वरमुद्रा रे अभयमुद्रा लिएकी देवी कालरात्रि हुन्। उनको टाउकाको झाँक्रो फिजाएको जस्तो देखिन्छ। घाँटीमी बिजुली सरह झल्कने माला छ। श्वास फेर्दा पनि कहिलेकाहीँ आगोको राँको निस्केको जस्तो देखिन्छ। माता कालरात्रिको स्वरूप डरलाग्दो जस्तो देखिन्छ तर यिनी भक्तलाई शुभ फल दिने गर्दछिन्। यसैले यी देवीको एक नाम 'शङ्करी' पनि रहेको छ। देवी कालरात्रि दुर्जनहरूको उछित्व गर्ने हुनुहुन्छ। यी देवीको स्मरण गर्नाले पनि दानव, दैत्य, राक्षस, भूतप्रेत भागेर जान्छन् भनिएको छ। ==अष्टमी== नौरथाको महाष्टमीका दिन पूजा गरिने शक्तिस्वरूपा भगवती महागौरी हुन्। सेतो वर्ण रे सेतो पहिरन गरेकी, वृष वाहन भएकी, चार हात भएकी देवीलाई महागौरी भनिन्छ। यी देवीको माथिल्लो दाहिने हातमा अभयमुद्रा, तल्लो दाहिने हातमी त्रिशूल छन् भने बायाँ हातको माथिल्लो हातमा डमरु रे अर्को बायाँ हातमी वरमुद्रा छन्। यी देवीको मुद्रा शान्त खालको देखिन्छ। यी माताको स्वरूप गोरो वर्णको छ। यीनको सबै कपडा रे गरगहना पनि सेतै छन्। बालककालमी पार्वती हुँदादेखि नै शिव पति पाउन यिनले कठोर तपस्या गरेकी थिइन्। यिनको प्रतिज्ञा थियो कि महादेवलाई पाए वरण गर्छु, नत्र कुमारी नै भएर बस्छु। यस कठोर तपस्याको कारण यिनको शरीर एकदम कालो हुन पुगेको थियो। यिनको तपस्याले खुसी भएका शिवजीले यिनको शरीरलाई गङ्गाजलमी गएर नुहाइदिएपछि उनी गोरी भइन् रे उनको नामै गौरी रहन गएको हो रे यी देवीको शक्ति अमोघ छ रे प्रत्यक्ष फल दिने हुन्छ। यी भगवतीको भक्ति आराधना गर्नाले भक्तजनहरूको सबै दोष नाश हुन्छ रे पछिसम्म पनि बाधा आउन छोड्छ। ==नवमी== [[चित्र:Taleju Temple (17231063613) (cropped) (cropped).jpg|alt=काठमाडौं दरबारमी स्थित तलेजु भवानीको मन्दिर महानवमीको दिन मात्र सर्वसाधरणका खोलिन्छ।|thumb|काठमाडौं दरबारमी स्थित [[तलेजु भवानी]]को मन्दिर महानवमीको दिन मात्र सर्वसाधरणका लागि खोलिन्छ। ]] नवरात्रको अन्तिम अर्थात् महानवमीका दिन पूजा गरिने शक्तिस्वरूपा भगवतीको नाम सिद्धिदात्री हो। यी देवी कमलको फूलमी बस्छिन्। यी देवीको दाहिनेतर्फका तल्लो हातमी चक्र, अर्को हातमी गदा तथा बायाँतर्फको तल्लो हातमी शंख तथा अर्को हातमी कमलको फूल सुशोभित छ। यस संसारमी यी देवीको लागि सिद्धि गर्न नसकिने कामकुरो केही पनि छैन। ब्रहृमाण्डमी पूरा विजय प्राप्त गर्न सक्ने शक्ति यी देवीमी रहेको छ। यिनी भक्तजनहरूलाई जुनसुकै सिद्धि पनि दिन सक्ने साथै इच्छाअनुसारको फल प्राप्त गराइदिने भएकी हुनाले उनको नाम सिद्धिदात्री रहन गएको हो। देवी पुराणअनुसार पार्वतीबाटी आएको सिद्धि नै भगवान् शिवजीबाटी आएको सिद्धि हो। यिनकै कृपाले गर्दा भगवान् शिव अर्धनारीश्वर हुनुभएको हो। यसैले यस संसारमी भगवान् शिव अर्धनारीश्वर नामले प्रसिद्ध छन्। ==ग्रह पूजा== नौरथाको नौ दिनमी [[नव ग्रह]] पूजा गर्ने परम्परा रहेको छ। प्रतिपदामी मङ्गल द्वितीयामी राहु, तृतीयामी बृहस्पति ,चतुर्थीमी शनि, पञ्चमी मी बुध, षष्ठीमी केतु, सप्तमीमी दिन शुक्र, अष्टमीमी सूर्य एवं नवमीमी चन्द्रमाको ग्रह शान्ति पूजा गरिन्छ। == ऋतु परिवर्तन == हिन्दू पञ्चांगको आश्विन महिनाको नौरथालाई शारदीय नौरथा पनि भन्ने गरिन्छ। विज्ञानको दृष्टि सँग शारदीय नवरात्रमी शरद ऋतुमी दिन साना हुन थाल्छन् रे रात ठूला। साथसाथै चैतको नौरथामी दिन ठूला हुन थाल्दछन् रे रात घट्छ, ऋतुहरूको परिवर्तन कालको असर मानव जीवनमी नपरोस, यसैको लागि साधनाको बहानामी हाम्रो ऋषि-मुनियोंले पनि यिनी नौ दिनहरूमी उपवासको विधान गरेका थिए।<br>संभवत: यसैको लागि पनि ऋतुको बदलावको यस कालमी मनुष्य खान-पानको संयम रे श्रेष्ठ आध्यात्मिक चिंतन गरेर स्वयंको भित्र सँग सबल बन्नसकोस भनेर गरिन्छ ताकि मौसमको बदलावको असर हामीमी नपरोस। शायद यसैको लागि यसलाई शक्तिको आराधनाको पर्व पनि भनियो। यही कारण हो कि भिन्न स्वरूपमी त्यहि अवधिमी जगत जननीको आराधना-उपासना पनि गरिन्छ।<br>नौरथा पर्वको समयमी प्राकृतिक सौंदर्य पनि बढ्छ। यस्तो लाग्छ कि ईश्वरको साक्षात् रूप यही हो। प्राकृतिक सुंदरताको साथ-साथै वातावरण सुखद पनि हुन्छ। आश्विन महिनामी मौसममा न अधिक चिसो रहन्छ न त अधिक गर्मी। प्रकृतिको यो रूपले सबैको मनलाई उत्साहित गर्छ। जसले गर्दा नौरथाको समय शक्ति साधकोंको लागि अनुकूल हुन जान्छ। त्यसपछि नियमपूर्वक साधना व अनुष्ठान गर्छन्, व्रत-उपवास, हवन रे नियम-संयम सँग उनकी शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक शक्ति जाग्छ, जसले ऊर्जावान बनाउछ।<br>यस कालमी लौकिक उत्सवको साथ नै प्राकृतिक रूप सँग ऋतु परिवर्तन हुन्छ। शरद ऋतुको शुरुवात हुन्छ, वर्षाको मौसम बिदा हुन थाल्छ। यस कारणले बनेको सुखद वातावरणले यो सन्देश दिन्छ कि जीवनको संघर्ष रे बीतेको समयको असफलताहरूलाई पछाडी छोडी मानसिक रूप सँग सशक्त एवं ऊर्जावान बनेर नयाँ आशा रे उम्मीदहरूको साथ अगाडि बढौं। == सन्दर्भ == <references></references> [[श्रेणी:चाडपर्वहरू]] recln7spxmve86hzuzv0fhn0bustsx1