विकिपिडिया dtywiki https://dty.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE MediaWiki 1.47.0-wmf.24 first-letter मिडिया बिशेष कुरणि प्रयोगकर्ता प्रयोगकर्ता कुरणि विकिपिडिया विकिपिडिया वार्ता चित्र चित्र कुरणि मिडियाविकि मिडियाविकि कुरणि ढाँचा ढाँचा कुरणि मद्दत मद्दत कुरणि श्रेणी श्रेणी कुरणि TimedText TimedText talk मोड्युल मोड्युल कुरणि Event Event talk गोपाल योञ्जन 0 850 268325 265174 2026-10-19T04:56:33Z InternetArchiveBot 4668 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.6 268325 wikitext text/x-wiki {{Infobox musical artist | name = गोपाल योञ्जन | native_name_lang = nep | image = | image_size = | caption = | background = solo_singer | birth_date = २६ अगस्ट, १९४३ <!--{{birth date|df=y|1943|08|26}}--> | birth_place = [[दार्जिलिङ]], [[बङ्गाल प्रेसीडेन्सी]], [[ब्रिटिश राज|ब्रिटिश भारत]] | death_date = {{death date and age|df=y|1997|05|20|1943|08|26}} | death_place = दिल्ली, भारत | death_cause = | genre = [[चर्चित सङ्गीत|आधुनिक सङ्गीत]] | occupation = गायक, सङ्गीतकार, नाटककार, सम्पादक | instrument = स्वर | years_active = सन् १९६०-१९९० | associated_acts = [[नारायण गोपाल]], [[अरुणा लामा]] | Nationality = नेपाली }} '''गोपाल योञ्जन''' (२६ अगस्ट १९४३ – २० मे १९९७) [[नेपाली सङ्गीत|नेपाली]] गीतकार, गिदारा, रे सङ्गीतकार थ्या।<ref>{{Cite web |title=Gopal Yonjan papers, circa 1960s-1990s. |url=https://rmc.library.cornell.edu/EAD/htmldocs/RMM08534.html |access-date=2026-03-03 |website=rmc.library.cornell.edu |language=en |archive-url=https://web.archive.org/web/20201031050720/https://rmc.library.cornell.edu/EAD/htmldocs/RMM08534.html |archive-date=2020-10-31 |url-status=dead}}</ref> यिन देशभक्ति का नेपाली गीदअन खिलाइ पछ्याणीनान। यिन ले नेपाली गीद-सङ्गीत का लगभग सबै बिधाअन का गीद गाइराइछन। यिन व्यवसायिक रूप मी गीद गाउन्या नेपाली गिदाराअन का पैल्ला पुस्ता मी पड्डान। यिनरा गीद विभिन्न नेपाली चलचित्रअन रे नाटकअन मी लगै समावेश अरीरयान। ==सन्दर्भअन== {{reflist}} ==भाइरा लिङ्कअन== * [http://www.majheri.com/taxonomy/term/44 गोपाल योञ्जनका रचना/गीतहरू (मझेरी डट कममा)] * [http://nepalisamachar.com/?p=3580 Gopal Yonzon, Nepali Samachar] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20201030084238/https://nepalisamachar.com/?p=3580 |date=2020-10-30 }} * [http://www.youtube.com/watch?v=U-yLJNgfeug Gopal Yonzon - Nepal ko Chhoro] * [http://www.nepalicollections.com/artist.php?id=11 Gopal Yonzon's songs] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110714163653/http://www.nepalicollections.com/artist.php?id=11 |date=2011-07-14 }} [[श्रेणी:नेपाली गायकअन]] [[श्रेणी:जीवनी]] [[श्रेणी:नेपाली संगीतकारअन]] m8zawad9mxk6abkjar5bqcifc86wh27 राम 0 2354 268322 267950 2026-10-18T20:40:05Z Rotondus 4070 /* रूपान्तर */ 268322 wikitext text/x-wiki {{Infobox deity | type = हिन्दू | image = Lord Rama with arrows.jpg | caption = राम तीर सम्हाल्दै, १९औँ शताब्दी को चित्रण | name = राम | symbol = [[शारंग]] (धनुष) <br> [[तीर]] | Devanagari = राम | Sanskrit_transliteration = {{IAST|Rāma}} | member_of = [[दशावतार]] | other_names = रामचन्द्र, राघव, [[पुरुषोत्तम|मर्यादा पुरुषोत्तम]] | god_of = आदर्श पुरुष, [[धर्म]] का प्रतीक, सर्वोच्च सत्ता | affiliation = [[विष्णु]] का सातौँ [[अवतार]], [[ब्रह्म]], [[वैष्णव धर्म]] | day = [[बिहीबार]] | parents = {{unbulleted list|[[दशरथ]] (पिता)|[[कौशल्या]] (आमा)|[[कैकेयी]] (सौतेनी आमा)|[[सुमित्रा]] (सौतेनी आमा)}} | spouse = [[सीता]] | abode = {{hlist|[[अयोध्या]]|[[साकेत]]|[[वैकुण्ठ]]}} | weapon = [[शारंग]] धनुष र तीर | texts = ''[[रामायण]]'' र अन्य संस्करण | siblings = {{unbulleted list|[[शान्ता]] (दिदी)|[[लक्ष्मण]]|[[भरत]]|[[शत्रुघ्न]]}} | festivals = {{hlist|[[राम नवमी]]|[[विवाह पंचमी]]|[[दिवाली]]|[[विजयादशमी]]|[[वसन्तोत्सव]]}} | avatar_birth = [[अयोध्या]], [[कोसल]] (हाल [[उत्तर प्रदेश]], [[भारत]]) | avatar_end = [[सरयू नदी]], अयोध्या | children = {{unbulleted list|[[लव]]|[[कुश]]}} | dynasty = [[रघुवंश]]-[[सूर्यवंश]] | predecessor = [[दशरथ]] | gender = पुरुष | successor = [[लव]] (उत्तर कोसल), [[कुश]] (दक्षिण कोसल) | mantra = [[जय श्री राम]]<br/>[[जय सिया राम]]<br>[[हरे राम]]<br>रामनाम जप | weapons = धनुष | army = [[वानर सेना]]<br>अयोध्या सेना | venerated_in = [[रामानन्दी सम्प्रदाय]]<br>[[श्री वैष्णव धर्म]]<br>[[स्मार्त परम्परा]] }} {{Infobox royalty | name = [[दशावतार]] क्रम | predecessor = [[परशुराम]] | successor = [[कृष्ण]] }} '''राम''' अथवा '''श्रीराम''' [[हिन्दू धर्म|हिन्दु]] धर्मका पूज्य देवता भगवान [[विष्णु]]का सातौं अवतारका रुपमी अवतरित देवता हुन् । उनी अयोध्याका राजा दशरथआ छोरा थ्या । उनरी इजाओ नाउँ कौशल्या थ्यो । उनरो ब्या मिथिलाआ राजा जनककी चेली [[सीता]]आ साथ भयाओ थ्यो । उनले पिताओ आज्ञा मान्नाइ निउँती चौध वर्ष वनवास भोग्या थ्या । लंङ्काका राजा रावणलाई मारिवर उनरो वनवास मेटियाको हो । [[रामानन्दी सम्प्रदाय]] जस्ता परम्परा मा राम ला सर्वोच्च परमात्मा मानिन्छ। उनला “मर्यादा पुरुषोत्तम” अर्थात आदर्श पुरुष का रूप मा पनि चिनिन्छ। राम हिन्दू महाकाव्य ''[[रामायण]]'' का मुख्य पात्र हुन्। राम को जन्म प्रत्येक वर्ष [[राम नवमी]] का दिन मनाइन्छ, जुन [[चैत्र]] महिना का शुक्ल पक्ष का नवौँ दिन मा पर्दछ। ''रामायण'' अनुसार राम को जन्म [[दशरथ]] र उनकर पत्नी [[कौशल्या]] का घर [[अयोध्या]] मा भयो। उनकर भाइहरू [[लक्ष्मण]], [[भरत]] र [[शत्रुघ्न]] थिए। उनकर विवाह [[सीता]] संग भयो। राम को जीवन अनेक चुनौती ले भरिएको छ, जसम वनवास, कठिन परिस्थितिहरू र नैतिक निर्णय शामिल छन। सबैभन्दा प्रसिद्ध कथा सीता का [[रावण]] द्वारा अपहरण र राम-लक्ष्मण द्वारा उनला बचाउने यात्रा हो। राम, सीता र उनका साथीहरूको कथा मा मानव जीवन का कर्तव्य, अधिकार र सामाजिक जिम्मेवारी को गहिरो व्याख्या पाइन्छ। यसले [[धर्म]] अनुसार जीवन जिउने आदर्श प्रस्तुत गर्दछ। राम विशेष रूप मा [[वैष्णव धर्म]] मा महत्वपूर्ण छन्। उनला केन्द्र मा राखेर ''रामायण'' दक्षिण एशिया र दक्षिण-पूर्व एशिया मा अत्यन्त लोकप्रिय रह्यो। राम सम्बन्धी कथाहरू माथि धेरै भाष्य (व्याख्या) र साहित्य तयार भएका छन। ''[[अध्यात्म रामायण]]'' र ''[[रामचरितमानस]]'' जस्ता ग्रन्थहरूले धार्मिक र सांस्कृतिक परम्परा मा गहिरो प्रभाव पारेका छन। ''रामचरितमानस'' ले भारत मा हरेक वर्ष हुने [[रामलीला]] प्रदर्शनहरू लाई प्रेरणा दिन्छ। राम का कथा [[जैन धर्म]] र [[बौद्ध धर्म]] का ग्रन्थहरू मा पनि पाइन्छ, जहाँ उनकर नाम “पउम” वा “पद्म” राखिएको छ। [[सिख धर्म]] मा पनि राम को उल्लेख [[दसम ग्रन्थ]] का “चौबीस अवतार” मा गरिएको छ। == व्युत्पत्ति र नामकरण == राम ला राम, रमन, रामर आदि नाम ले भी जानिन्छ, र रामचन्द्र ({{IAST3|Rāmacandra}}, {{Langx|sa|रामचन्द्र}}) नाम ले भी चिनिन्छ। "राम" एक वैदिक संस्कृत शब्द हो, जसका दुई प्रमुख अर्थ छन। एक सन्दर्भ मा, जस्तै ''[[अथर्ववेद]]'' मा पाइन्छ, [[Monier Monier-Williams]] अनुसार, यसको अर्थ “अँध्यारो, कालो” हो, जुन “रात्रि” (रात) संग सम्बन्धित छ। अर्को सन्दर्भ मा अन्य वैदिक ग्रन्थहरू मा यो शब्द को अर्थ “मनपर्ने, रमाइलो, सुन्दर, आकर्षक” हुन्छ। यो शब्द विभिन्न भारतीय भाषा र धर्म मा प्रत्यय (suffix) का रूप मा भी प्रयोग हुन्छ, जस्तै पालि भाषा मा “-राम” ले “मन प्रसन्न पार्ने” अर्थ दिन्छ। वैदिक साहित्य मा “राम” नाम तीन अलग व्यक्तिहरू का लागि प्रयोग भएको पाइन्छ: # [[परशुराम]] (परशु-राम) – [[विष्णु]] का छैटौँ अवतार, जुन ''ऋग्वेद'' का राम जमदग्न्य संग सम्बन्धित मानिन्छ। # '''रामचन्द्र''' – [[विष्णु]] का सातौँ अवतार र ''[[रामायण]]'' का प्रसिद्ध पात्र। # [[बलराम]] – [[कृष्ण]] का दाजु, जुन हिन्दू, बौद्ध र जैन परम्परा मा उल्लेखित छन्। “राम” नाम हिन्दू ग्रन्थहरू मा धेरै विद्वान र राजाहरू का लागि भी प्रयोग गरिएको छ। प्राचीन ''[[उपनिषद]]'' र ''[[आरण्यक]]'' साहित्य मा यो शब्द “सुन्दर, आकर्षक” वा “अँध्यारो” अर्थ मा प्रयोग गरिएको पाइन्छ। [[विष्णु]] का अवतार राम ला अन्य नाम ले भी चिनिन्छ: * रामचन्द्र – सुन्दर चन्द्र जस्तो * दाशरथि – [[दशरथ]] का पुत्र * राघव – रघुवंश का वंशज राम का अन्य क्षेत्रीय नाम: * रामविजय (जाभानी) * फ्रेह रीम (ख्मेर) * फ्रा राम (लाओ र थाई) * मेगट सेरी राम (मलय) * राजा बान्तुगन (मरानाओ) * रामर / रमन (तमिल) * रामुडु (तेलुगु) ''[[विष्णु सहस्रनाम]]'' मा राम [[विष्णु]] का ३९४औँ नाम हुन्। केही अद्वैत वेदान्त परम्परा मा “राम” शब्द ले सर्वोच्च [[ब्रह्म]] (परमात्मा) को संकेत गर्दछ, जुन आनन्दमय आत्मा (आत्मन्) हो, जसमा योगीहरू लीन हुन्छन्। “राम” शब्द को मूल धातु “रम्” हो, जसको अर्थ हुन्छ – “विश्राम गर्नु, आनन्द लिनु, सन्तुष्ट हुनु”। [[Douglas Q. Adams]] अनुसार, संस्कृत “राम” शब्द अन्य इन्डो-युरोपेली भाषा जस्तै तोखारियन भाषा मा भी पाइन्छ, जहाँ यसको अर्थ “सहारा दिनु” वा “स्थिर बनाउनु” हुन्छ। “अँध्यारो” अर्थ भी केही अन्य भाषाहरू मा पाइन्छ। == कथा (दन्त्यकथा) == यो सारांश एक परम्परागत दन्त्यकथा हो, जुन ''[[रामायण]]'' र अन्य ऐतिहासिक मिथक सम्बन्धी ग्रन्थहरू, जस्तै [[बौद्ध धर्म]] र [[जैन धर्म]] का साहित्य मा आधारित छ। [[Sheldon Pollock]] अनुसार, राम को पात्र मा अझ प्राचीन भारतीय मिथक का “रूपात्मक तत्व” (morphemes) समावेश छन, जस्तै ''बाली'' र ''नमुचि'' का कथाहरू। प्राचीन ऋषि [[वाल्मीकि]] ले आफ्नो ''रामायण'' मा यी तत्वहरू लाई उपमा (simile) का रूपमा प्रयोग गरेका छन, जस्तै काण्ड ३.२७, ३.५९, ३.७३, ५.१९ र २९.२८ मा उल्लेख गरिएको छ। === जन्म === [[File:PM at the Pran Pratishtha ceremony of Shree Ram Janmaboomi Temple in Ayodhya, Uttar Pradesh on January 22, 2024 (cropped).jpg|thumb|[[बालक राम]], ५ वर्ष का रूप मा राम, [[राम मन्दिर]] का मुख्य देवता हुन, जुन [[राम जन्मभूमि]] मा अवस्थित छ]] प्राचीन महाकाव्य ''रामायण'' का ''बालकाण्ड'' अनुसार, राम र उनका भाइहरू [[अयोध्या]] मा [[सरयू नदी]] का किनार मा [[दशरथ]] र [[कौशल्या]] का घर जन्मेका थिए। जैन परम्परा का ''रामायण'' का संस्करण, जस्तै ''पउमचरिय'' (विमलसूरि द्वारा लिखित), मा भी राम का बाल्यकाल का विवरण पाइन्छ। यी जैन ग्रन्थहरू सामान्यत: इस्वी सन् ५०० भन्दा पहिले का मानिन्छन्। विद्वान [[Moriz Winternitz]] अनुसार, ''वाल्मीकि रामायण'' पहिले नै प्रसिद्ध थियो, त्यसपछि यसला जैन ग्रन्थ ''पउमचरिय'' मा पुन: लेखन गरिएको थियो। [[दशरथ]] [[कोसल]] का राजा थिए र [[क्षत्रिय]] [[सूर्यवंश]] ([[इक्ष्वाकु]]) का सदस्य थिए। राम की आमा [[कौशल्या]] को नाम ले पनि देखाउँछ कि उनी कोसल क्षेत्र संग सम्बन्धित थिइन्। कोसल राज्य [[बौद्ध धर्म]] र [[जैन धर्म]] का ग्रन्थहरू मा भी उल्लेखित छ, जहाँ यसला प्राचीन भारत का सोलह [[महाजनपद]] मध्ये एक मानिन्छ। यो क्षेत्र जैन र बौद्ध धर्म का लागि महत्वपूर्ण तीर्थस्थल भी रह्यो। तर केही विद्वानहरू बीच यो विषय मा मतभेद छ कि आज को अयोध्या वास्तव मा पुरानो ''रामायण'' मा वर्णन गरिएको अयोध्या नै हो कि होइन। ''रामायण'' अनुसार, राम को जन्म भगवान [[विष्णु]] का अवतार का रूप मा भयो। जब देवताहरू [[ब्रह्मा]] का पास गए र रावण का अत्याचार बाट मुक्ति मागे, तब [[विष्णु]] ले मानव रूप मा राम का रूप मा जन्म लिने वचन दिए। कारण, [[रावण]] ला ब्रह्मा बाट यस्तो वरदान मिलेको थियो कि उसला देवता हरु मार्न सक्दैन थिए, तर मानव द्वारा उसला मार्न सकिन्थ्यो। === युवावस्था, परिवार र सीता संग विवाह === ''[[रामायण]]'' का ''बालकाण्ड'' अनुसार, राम का तीन भाइ थिए — [[लक्ष्मण]], [[भरत]] र [[शत्रुघ्न]]। ग्रन्थ मा उनकर शिक्षा र प्रशिक्षण को संक्षिप्त वर्णन पाइन्छ। राम ला एक सभ्य, आत्म-नियन्त्रित र सद्गुणी युवाको रूपमा देखाइएको छ, जो सधैं अरूको सहायता गर्न तयार रहन्छ। उनकर शिक्षा मा [[वेद]], [[वेदाङ्ग]] र युद्धकला शामिल थिए। राम को बाल्यकाल र युवावस्था का वर्षहरू पछि का हिन्दू ग्रन्थहरू मा अझ विस्तृत रूपमा वर्णन गरिएको छ, जस्तै [[तुलसीदास]] द्वारा लिखित ''रामावली'' मा। यहाँ राम को स्वभाव शान्त, संयमी र अन्तर्मुखी देखाइएको छ, जबकि [[कृष्ण]] को स्वभाव चञ्चल र बहिर्मुखी हुन्छ। [[File:Marriage of Rama to Sita with Brahmins making fire sacrifice. Coloured transfer lithograph.jpg|thumb|राम र सीता को विवाह समारोह]] [[मिथिला]] का राजा [[जनक]] ले आफ्नो राजधानी मा एक [[स्वयंवर]] आयोजना गरे, जहाँ शर्त थियो कि जो राजकुमार [[शिव]] का धनुष (अजगव) लाई तानेर चढाउन सक्छ, उसै संग [[सीता]] को विवाह गरिनेछ। धेरै राजकुमारहरूले प्रयास गरे तर सफल भएनन्। त्यस समय, ऋषि [[विश्वामित्र]] राम र लक्ष्मण ला यज्ञ को रक्षा गर्न जंगल लगेका थिए। स्वयंवर को बारे मा सुनेपछि, विश्वामित्र ले राम ला सहभागी हुन आग्रह गरे। जब धनुष राम का सामने ल्याइयो, उनले सजिलै उठाएर ताने र तोडि दिए। यो देखेर राजा जनक प्रभावित भए र आफ्नी छोरी सीता को विवाह राम संग गर्न सहमत भए। उनले [[दशरथ]] ला मिथिला मा निमन्त्रणा गरे। विवाह पछि, फर्कने क्रममा [[परशुराम]] ले राम ला चुनौती दिए कि यदि उनी [[शारंग]] धनुष तान्न सक्छन् भने। राम सफल भएपछि, परशुराम ले उनला [[विष्णु]] को अवतार भनेर स्वीकार गरे र त्यहाँबाट प्रस्थान गरे। त्यसपछि विवाहको टोली अयोध्या फर्कियो र ठूलो उत्सव संग स्वागत भयो। राम र सीता लगभग १२ वर्ष सम्म सुखपूर्वक साथ बसे। यस बीच, जब राम र उनका भाइहरू बाहिर थिए, [[कैकेयी]] (भरत की आमा) ले राजा [[दशरथ]] ला आफ्नो पुरानो वरदान सम्झाइन्। उनले माग गरिन् कि राम ला १४ वर्ष का लागि वनवास पठाइयोस्। दशरथ अत्यन्त दुःखी भए। भरत र परिवार का अन्य सदस्यहरू पनि असन्तुष्ट भए। तर राम ले आफ्नो पिता को वचन पूरा गर्नु पर्ने बताए। उनले शक्ति, राज्य वा कुनै भौतिक सुख को इच्छा नराख्ने कुरा बताए। [[सीता]] ले पनि राम संग वन जाने निर्णय गरिन्, र [[लक्ष्मण]] ले भाइको रूपमा उनकर साथ दिए। यसरी तीनै जना वनवास को यात्रा मा निस्के। ===वनवास अँ युद्ध=== [[File:Rama exiled to Forest.jpg|thumb|left|राम, अपन कान्छो भाइ [[Lakshmana]] अँ पत्नी [[Sita]] संग जंगल म वनवास गएका।]] राम कोसल राज्य बाहिर निकळ्या, [[Yamuna]] नदी पार कर्या अँ सुरु म [[Chitrakuta]] म, मन्दाकिनी नदी किनार म ऋषि [[Vasishtha]] क आश्रम म बस्या।<ref name="dalal99">{{harvnb|Dalal|2010|pp=99, 326–327}}</ref> वनवास क दौरान, राम अपन भक्त [[Shabari]] संग भेट कर्या। शबरी उनला यति माया करथी कि जब राम खाणो माग्या, उनलै अपन तोड्या बेर (फल) दिइ। तर हरेक बेर दिइन्दा पहिलै ऊ फल चाखथी ताकि मीठो अँ स्वादिलो होस्, यो उनकै भक्ति क प्रमाण थियो। राम ले उनकै भक्ति बुझ्या अँ ऊ आधा खाया बेर हरु पनि प्रेम सँग खाया। यस्तै राम अपन जनतामाथि करुणा अँ प्रेम देखावन्या। हिन्दु परम्परा अनुसार यो ठाउँ आजक [[Chitrakoot, Madhya Pradesh|चित्रकूट]] (उत्तर प्रदेश अँ मध्य प्रदेश क सीमाना) संग मिल्या मानिन्छ।<ref>{{Cite journal |last=Pargiter |first=F. E. |year=2011 |title=The Geography of Ráma's Exile |url=https://www.researchgate.net/publication/315268069 |journal=Journal of the Royal Asiatic Society |volume=2 |issue=26 |pages=231–264}}</ref> यो क्षेत्र म राम क धेर मन्दिर छन अँ वैष्णव तीर्थ स्थल क रूप म महत्वपूर्ण मानिन्छ।<ref name="dalal99" /> ग्रन्थ हरु म नजिकै ऋषि [[Atri]] जस्ता वैदिक ऋषि क आश्रम हरु क वर्णन मिल्छ, अँ राम जंगल म घुम्दै सादा जीवन बितावन्या, अँ राक्षस हरु ले सताया साधु-सन्त हरुला रक्षा करन्या अँ सहायता दिन्या।<ref name="dalal99" /><ref name="hindery99">{{harvnb|Hindery|1978|pp=98–99}}</ref> दस वर्ष घुमन्ते जीवन अँ संघर्ष पछि, राम [[Panchavati]] म [[Godavari]] नदी किनार पुग्या। यो ठाउँ म धेर राक्षस बस्या करथ्या। एक दिन, राक्षसी [[Shurpanakha]] ले राम देखी अँ उनमा मोहित भई गइ अँ उनलै रिझावन कोसिस करि।<ref name="Dalal2010p326" /> राम ले इनकार कर्या। शूर्पणखा ले रिसाइ सिता ला धम्की दिइ। तब परिवार क रक्षा करन्या भाइ लक्ष्मण ले शूर्पणखा क नाक अँ कान काट दिय्या। यो घटना ले द्वन्द्व बढ्यो अँ अन्त म राक्षस राजा [[Ravana]] सम्म पुग्यो, जो शूर्पणखा क भाइ थियो। रावण बदला लिन [[Panchavati]] आयो, सिता ला देख्या अँ उनमा मोहित भयो। ऊ अपन काका [[Maricha]] ला सुनौलो हरिण क रूप धारण करन को लागि भन्यो ताकि सिता ला लोभ्याउन सकियोस्,<ref>{{Cite news |date=2012-08-16 |title=The golden deer |url=https://www.thehindu.com/features/friday-review/religion/the-golden-deer/article3780783.ece |access-date=2024-04-22 |work=The Hindu |language=en-IN |issn=0971-751X}}</ref> अँ अन्त म सिता ला अपहरण करि [[Lanka|लंका राज्य]] (आजक [[Sri Lanka]] मानिन्छ) म लैग्यो।<ref name="Dalal2010p326" /><ref name="hindery99" /> [[File:Rama and Hanuman fighting Ravana, an album painting on paper, c1820.jpg|thumb|राम [[Hanuman]] क काँध म बसिकर रावण सँग युद्ध गर्दै।]] राम अँ [[Lakshmana]] ले सिता क अपहरण क खबर पाय्या, उनला चिन्ता भयो अँ दुःख लाग्यो, अँ रावण सँग लडन साधन क कमी पनि महसुस भयो। अब उनकै संघर्ष अझ बढ्यो। उनि दक्षिण दिशा तिर गय्या, [[Sugriva]] संग भेट भयो, बन्दर सेना तयार गर्या अँ [[Hanuman]] जस्ता निष्ठावान सेनापति उनकै साथ म आय्या।<ref name="Ramayana">{{cite book | url=https://books.google.com/books?id=4Wzg6wFJ5xwC | title=Ramayana | publisher=University of California Press | author=B. A van Nooten William | year=2000 | isbn=978-0-520-22703-3 | access-date=9 August 2020 | archive-date=31 January 2024 | archive-url=https://web.archive.org/web/20240131062702/https://books.google.com/books?id=4Wzg6wFJ5xwC | url-status=live }}</ref><ref name="Princeton University Press">{{citation | year=1996 | title = The Ramayana of Valmiki: An Epic of Ancient India : Sundarkand | editor1=Robert P. Goldman | editor2=Sally Sutherland Goldman | publisher=Princeton University Press | isbn=978-0-691-06662-2 | pages=80–82 | url=https://books.google.com/books?id=sFmsrEszbxgC&q=parayana&pg=PA80}}</ref> क्षेत्रीय शक्त परम्परा अनुसार, वनवास क दौरान राम दक्षिण भारत क जंगल म [[Vaishno Devi]] संग भेट कर्या। ऊ विष्णु ला पति बनावन क लागि कठोर तपस्या करथी। राम ले सिता प्रति अपन एकनिष्ठता कारण प्रस्ताव अस्वीकार कर्या, तर लंका विजय पछि फेरी भेटन वचन दिइ। कथा अनुसार, फर्कन बेला राम वृद्ध साधु क रूप म आय्या, तर वैष्णवी उनला चिनन सकिन। राम ले उनला सान्त्वना दिइ अँ जीवन क उच्च उद्देश्य बताय्या अँ [[Trikuta]] पर्वत (जम्मू) म तपस्या करन अँ धर्म फैलावन सल्लाह दिइ, साथै [[Hanuman]] ला सुरक्षा क लागि पठाय्या। राम ले वचन पनि दिइ कि कलियुग अन्त म [[Kalki]] अवतार म फेरी आउँदा उनसँग विवाह करन्या।<ref>{{cite book |title=Seeking Mahadevi: Constructing the Identities of the Hindu Great Goddess |url=https://archive.org/details/seekingmahadevic0000unse |editor-last=Pintchman |editor-first=Tracy |publisher=State University of New York Press |year=2001 |isbn=978-0791450086 |pages=[https://archive.org/details/seekingmahadevic0000unse/page/60 60]-61}}</ref><ref>{{cite journal |last1=Foster |first1=Georgana |last2=Stoddard |first2=Robert |title=Vaishno Devi, the Most Famous Goddess Shrine in the Siwāliks |journal=DigitalCommons@University of Nebraska - Lincoln |year=2010 |url=https://digitalcommons.unl.edu/geographyfacpub/26/}}</ref> उतै, रावण सिता ला अपन पत्नी बनावन दबाव दिन्या रह्यो, तर सिता ले इनकार करि। अन्त म रावण रिसाइगयो अँ लंका म ठूलो युद्ध भयो। धेरै उतार-चढाव पछि राम विजय भय्या, रावण अँ अधर्म क शक्ति हरुला नष्ट कर्या अँ सिता ला उद्धार कर्या। त्यसपछि उनि सबै अयोध्या फर्क्या।<ref name="Dalal2010p326" />{{Sfn|Goldman|1996|p=90}} ===युद्ध पछिको जीवन=== राम अयोध्या फर्क्या पछि उनकै राज्याभिषेक गरियो। यसलाई ''Rama pattabhisheka'' भनिन्छ, अँ उनकै शासन लाई ''Rama rajya'' भनिन्छ, जुन न्यायपूर्ण अँ समान शासन मानिन्छ।<ref>{{cite book|author=Ramashraya Sharma|title=A Socio-political Study of the Vālmīki Rāmāyaṇa |url=https://books.google.com/books?id=9Vo0OJtO6DQC&pg=PA2 |year=1986|publisher=Motilal Banarsidass |isbn=978-81-208-0078-6|pages=2–3}}</ref><ref>{{cite book|author=Gregory Claeys|title=The Cambridge Companion to Utopian Literature|url=https://books.google.com/books?id=sFCuoqykV9QC&pg=PA240 |year=2010|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-139-82842-0|pages=240–241}}</ref> धेरै मान्छे मान्दछन् कि जब राम फर्क्या, तब जनताले अपन खुशी ''[[Diya (lamp)|दिया]]'' (बत्ती) बालेर मनाय्या, अँ [[Diwali]] पर्व राम क फर्काइ संग जोड्या मानिन्छ।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=lOnuAAAAIAAJ|title=Self-realization Magazine|date=1971|publisher=Self-Realization Fellowship|pages=[https://books.google.com/books?id=lOnuAAAAIAAJ&q=is+diwali+connected+to+lord+rama+returned 50]|language=en|access-date=6 March 2021|archive-date=31 January 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240131062702/https://books.google.com/books?id=lOnuAAAAIAAJ|url-status=live}}</ref> राम राजा बन्या पछि, अफवाह फैलियो कि सिता रावण संग रहँदा शायद स्वेच्छाले गइ होइ। सिता ले विरोध करि अँ भनिन् कि उनकै अपहरण जबरजस्ती भयो। राम ले जनमत क दबाव म आइ अपन पत्नी ला त्याग कर्या अँ उनलै अपन पवित्रता ''[[Agni]]'' (अग्नि) क अगाडि प्रमाणित करन भन्या। सिता ले अग्नि परीक्षा दिइ अँ सफल भयिन। त्यसपछि राम अँ सिता अयोध्या म सुखपूर्वक बस्या,<ref name="hindery99" /> अँ उनकै दुई छोरा जन्म्या — [[Kusha (Ramayana)|कुश]] अँ [[Lava (Ramayana)|लव]]। तर केही संस्करण म कथा फरक अँ दुःखद छ, जँहा सिता अपन पतिको अविश्वास कारण दुःख म मृत्यु भइ जान्छिन्। यसरी सिता एक नैतिक नायिका क रूप म देखिन्छिन् अँ पाठक ला राम क निर्णय बारे सोच्न बाध्य बनाउँछिन्।{{Sfn|Hindery|1978|p=100}}<ref name="Hess2001" /> यस्ता संस्करण म सिता क मृत्यु पछि राम पनि दुःख म डुबेर अपन जीवन समाप्त कर्या अँ मृत्यु पछि उनि सिता संग फेरि मिल्या।<ref>{{cite book|author=Frye|first=Northrope|url=https://books.google.com/books?id=AV-zCAAAQBAJ&pg=PA191|title=Northrop Frye's Uncollected Prose|publisher=[[University of Toronto Press]]|year=2015|isbn=978-1-4426-4972-9|location=[[Toronto]], [[Canada]]|page=191}}</ref> राम क मृत्यु सम्बन्धी अर्को चित्रण बर्मेली संस्करण ''Thiri Rama'' म भेटिन्छ, जँहा राम अपन जीवन समाप्त गरि आकाश म प्रकट हुन्छन् अँ छ हात भएका [[Vishnu]] क अवतार क रूप म देखिन्छन्।<ref>{{cite book|author=Rooney|first=Dawn F.|url=https://books.google.com/books?id=iiCEDgAAQBAJ|title=The Thiri Rama: Finding Ramayana in Myanmar|publisher=[[Taylor & Francis]]|year=2017|isbn=978-1-315-31395-5|pages=49–51}}</ref> ===रूपान्तर=== [[File:Rama's Court, Folio from a Ramayana (Adventures of Rama) LACMA AC1999.127.36.jpg|thumb|राम दरबार, [[Chamba, Himachal Pradesh#Chamba miniature paintings|चम्बा]] चित्रकला (1775–1800)। सिंहासन म राम अँ सिता, पछाडि राम क भाइहरू, अँ हनुमान, सुग्रीव अँ जाम्बवान आदर प्रकट करदा।]] राम क कथा क्षेत्र अनुसार अँ विभिन्न पाण्डुलिपि अनुसार धेरै फरक-फरक रूप म पाइन्छ। यद्यपि सबै कथा म राम्रो अँ नराम्रो बिच क संघर्ष, आधारभूत कथा अँ मूल्य हरु साझा छन, तर एक मात्र “सही” वा प्रमाणित प्राचीन संस्करण छैन। विद्वान [[Paula Richman]] अनुसार, [[India]], दक्षिण–पूर्व एशिया अँ अन्य ठाउँ म “राम कथा” क सयौं संस्करण छन।<ref name="richman7">{{harvnb|Richman|1991|pp=7–9 (by Richman), pp. 22–46 (Ramanujan)}}</ref><ref name="Iyengar2005p29">{{cite book|author=A. N. Jani|author-link=A. N. Jani|editor=Kodaganallur R.S. Iyengar|title=Asian Variations in Ramayana: Papers Presented at the International Seminar on 'Variations in Ramayana in Asia|url= https://books.google.com/books?id=CU92nFk5fU4C&pg=PA29| year=2005| publisher= Sahitya Akademi|isbn= 978-81-260-1809-3|pages=29–55}}</ref> यी संस्करण हरु स्थानीय संस्कृति, इतिहास अँ समाजिक मान्यता अनुसार फरक हुन्छन्। यसैले यी फरक कथा हरुला “गलत” वा “विकृत” भन्न मिल्दैन, बरु हरेक संस्करण अपन सांस्कृतिक अर्थ म साँचो मानिन्छ।<ref name="richman7" /> कथा हरु विशेष गरी त्यतिखेर फरक देखिन्छन् जब नैतिक प्रश्न स्पष्ट हुन्छ तर सही व्यवहार क उत्तर विवादित हुन्छ।<ref name="Horstmann1991p9">{{cite book|author=Monika Horstmann|author-link=Monika Boehm-Tettelbach|title=Rāmāyaṇa and Rāmāyaṇas|url=https://books.google.com/books?id=40A6s8l1lqQC |year=1991|publisher=Otto Harrassowitz Verlag|isbn=978-3-447-03116-5|pages=9–21}}</ref> उदाहरण क लागि, जब राक्षसी [[Shurpanakha]] स्त्री क रूप धारण करि राम ला रिझावन कोसिस करछी अँ पछि सिता ला सतावन लाग्छी, तब [[Lakshmana]] सामु प्रश्न उठ्छ कि उचित प्रतिक्रिया क होस्। भारतीय परम्परा अनुसार, “एक योद्धा ले स्त्री माथि आक्रमण नगर्नु पर्छ” भन्ने मान्यता छ।<ref name="richman7" /> तर लक्ष्मण क प्रतिक्रिया अँ त्यसक औचित्य विभिन्न संस्करण म फरक पाइन्छ। यस्तै, अयोध्या फर्क्या पछि सिता बारे फैलिएका अफवाह हरु सँग राम कसरी व्यवहार कर्या भन्ने विषय म पनि धेरै फरक कथा छन, किनकि यी अफवाह हरु न त प्रमाणित गर्न सकिन्छ न त पूर्ण रूपमा बेवास्ता गर्न।<ref name="richman7" /> त्यसैगरी, राम, सिता अँ लक्ष्मण क अन्तिम जीवन (मृत्यु) सम्बन्धी विवरण पनि विभिन्न संस्करण म फरक-फरक पाइन्छ।<ref name="Padmanabh216">{{cite book |author=Padmanabh S Jaini |url=https://books.google.com/books?id=-kZFzHCuiFAC |title=Purana Perennis: Reciprocity and Transformation in Hindu and Jaina Texts |publisher=State University of New York Press |year=1993 |isbn=978-0-7914-1381-4 |editor=Wendy Doniger}}</ref> ==सन्दर्भन== {{reflist}} [[Category:हिन्दू धर्म]] flh7ylpf2e0tkfznu58g76rvl9jlhi9 सार्क बे 0 2795 268327 257775 2026-10-19T06:57:55Z InternetArchiveBot 4668 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.6 268327 wikitext text/x-wiki {{Infobox World Heritage Site | WHS = सार्क बे, पश्चिमी अष्ट्रेलिया | image = [[Image:Shark Bay Phytoplankton in Bloom.jpg|280px]] | caption = सार्क बे | Country = [[अस्ट्रेलिया|अष्ट्रेलिया]] | Location = [[पश्चिमी अस्ट्रेलिया|पश्चिमी अष्ट्रेलिया]], [[अस्ट्रेलिया|अष्ट्रेलिया]] | Type = प्राकृतिक | Criteria = vii, viii, ix, x | ID = ५७८ | Link = http://whc.unesco.org/en/list/578 | Region = [[ओसिनियाका विश्व सम्पदा क्षेत्रहरूको सूची|एसिया प्यासेफिक]] | Coordinates = {{coord|25|30|S|113|30|E|type:waterbody_scale:1500000_region:AU-WA|display=inline,title}} | Year = १९९१ | Session = १५ औं | Extension = | Danger = | locmapin = Australia | map_caption = अष्ट्रेलियाको नक्साको पश्चिम भागमा रहेको सार्क बे | map_width = 280 | relief = 1 | lat_degrees = 25 | lat_minutes = 30 | lat_seconds = | lat_direction = S | long_degrees = 113 | long_minutes = 30 | long_seconds = | long_direction = E | child = | embedded = }} '''सार्क बे''' अष्ट्रेलियाको पश्चिमी अष्ट्रेलिया राज्यमी अवस्थित विश्व सम्पदा क्षेत्र हो । == सन्दर्भ सामग्रीअन == {{reflist}} == बाह्य लिङ्कअन == {{Commons category|Shark Bay}} ;आधिकारिक * [[विश्व सम्पदा क्षेत्र|युनेस्को विश्व सम्पदा सूची]]: [http://whc.unesco.org/pg.cfm?cid=31&id_site=578 Shark Bay, Western Australia] * [http://environment.gov.au/heritage/places/world/shark-bay/index.html Australian National Heritage Register listing for Shark Bay, Western Australia] * [http://www.sharkbay.wa.gov.au/world-heritage/discovery-centre/ Shark Bay World Heritage Discovery Centre] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20121102025210/http://www.sharkbay.wa.gov.au/world-heritage/discovery-centre/ |date=2012-11-02 }} * [https://web.archive.org/web/20130331021915/http://www.sharkbay.org/ Shark Bay World Heritage Area]] {{Commonscat|Shark Bay}} [[श्रेणी:विश्व सम्पदा क्षेत्रअन]] [[श्रेणी:अस्ट्रेलियाका विश्व सम्पदा क्षेत्रअन]] 4vm7m8edop3c3dfor1koe019b2ff1k0 बाँके बकुल्ला 0 17891 268329 261336 2026-10-19T07:22:37Z InternetArchiveBot 4668 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.6 268329 wikitext text/x-wiki '''बाँके बकुल्ला''' [[बकुल्लो|बकुल्ला]] प्रजातिमी पड्ड्या होचो बर्णको चणो हो। यै पन्छी विशेष गरि रात रे साँझको समयमी बढी सकृय हुने गर्छ। दिउँसोको समयमी यै प्रजातिको शरीर खैरो रे हल्का कालो रङ्डो धेकिन्छ। यै पन्छी पानी भयाः क्षेत्र वरिपरि यक बगानमी प्रजनन गर्ने अद्दछ। यै पन्छी सफा पानीको मुहान नजिक वा तटीय क्षेत्रमी विश्व व्यापी रुपमी बसोबास गर्ने अद्दछ।<ref >{{cite web|url=https://www.allaboutbirds.org/guide/Black-crowned_Night-Heron/id|title= बाँके बकुल्लाको जानकारी|author=|date=|work=अल अवाउट बर्डस्|accessdate=}}</ref> {{Taxobox | name = बाँके बकुल्ला | status = LC | status_system = IUCN3.1 | status_ref = <ref>{{IUCN|id=22697211 |title=''Nycticorax nycticorax'' |assessor=BirdLife International |assessor-link=BirdLife International |version=२०१३.२ |year=2012 |accessdate=26 November 2013}}</ref> | image =Black-crowned Night Heron RWD7.jpg | image2 = [[File:Nycticorax nycticorax - Black-crowned Night Heron - XC99573.ogg|thumb]] | regnum = [[जन्तु]] जगत | phylum = [[हाड भयाः जीव|हाड भयाः]] | classis = [[चणो|पन्छी]] | ordo = [[Pelecaniformes]] | familia = [[Ardeidae]] | genus = ''[[Nycticorax]]'' | species = ''N. nycticorax'' | binomial = ''Nycticorax nycticorax'' | binomial_authority = (कर्लस लिनियस, १७५८) | range_map = Nycticorax_nycticorax_map.svg | range_map_caption = बाँके बकुल्लाको बासस्थान दायरा {{leftlegend|#FFFF00|प्रजनन दायरा|outline=gray}}{{leftlegend|#008000|वर्ष भरि|outline=gray}}{{leftlegend|#0000FF|शीतकालिन दायरा|outline=gray}} }} ==विवरण== यै प्रजातिका बकुल्लाको यक वयस्कको लम्बाइ {{convert|64|cm|in|abbr=on}} हुन्छ भणे यैको तौल {{convert|800|g|oz|abbr=on}} हुन्छ। यै पन्छीको कालो टाउको, खैरो रे हल्का कालो शरीर, रातो आँखा रे छोटो पहेँलो खुट्टाअन हुनान। यैको हल्का खैरो पखेटा हुन्छ भणे यैको पखेटा तलको भाग सेता हुनान। यै प्रजातिका भाले रे पोथी हेर्दा खेरी एउटै धेकिन्छन् यद्यपि भाले भणे हल्का ठूलो हुन्छ। यै पन्छी बकुल्ला प्रजातिअन मध्ये सब है फरक धेकिने अद्दछ। यै पन्छीको कालो छोटो रे तीखो ठुँड, छोटो रे पहेँलो खुट्टा रे छोटो घाँटी हुन्छ। यै पन्छीको युवा प्रजातिको टाउको, पखेटा रे पछाडिको मधुरो खैरो रे कहीँ कहीँ पहेँलो धब्बाअन लै धेकिन्छ। यै पन्छीको तल्लो भाग हल्का पहेँलो रे खैरा हुनान। यै पन्छीको चल्लाअन सुन्तला रङ्डो आँखा रे हल्का हरियो रे पहेँलो खुट्टाअन हुनान। यै पन्छीअनले बगानी हुँदा निकै आवाज निकाल्ने गद्दछ। ==वितरण रे बासस्थान== यै प्रजातिको बकुल्लाले मुख्यतया बसाइँसराइ गर्ने अद्दछ रे यैको बसाइँसराइ दायरा प्याटेगोनिया सम्म फैलियाः छ। यै पन्छी विश्व व्यापी रुपमी दक्षिण रे उत्तर अमेरिका, एसिया, युरोप रे अफ्रिका माइ पाइन्नान। बाँके बकुल्लाको बासस्थान भिन्न भिन्न ठौर माइ भएता लै यी पन्छी विषेश गरि तालको छेउछाउ, नदि, नहर, पोखरी आदिमी पाइन्नाा। यै पन्छी समुद्र तटमी म्याङ्ग्रोभ क्षेत्र रे हिलो भयाः ठौर माइ लै उत्तिकै मात्रामी पाइन्नान। यै पन्छीको धान खेती लै यक महत्वपूर्ण बासस्थान हो। यो पन्छी कहिलेकाँही गाईवस्तु भयाः ठौरमी लै पाइन्नान। <ref >{{cite web|url=https://www.arkive.org/black-crowned-night-heron/nycticorax-nycticorax/image-G39904.html|title=बाँके बकुल्लाको तस्वीर सङ्ग्रह रे जानकारी|author=|date=|work=द आर्काइभ|accessdate=|archive-date=2019-02-03|archive-url=https://web.archive.org/web/20190203065623/https://www.arkive.org/black-crowned-night-heron/nycticorax-nycticorax/image-G39904.html|url-status=dead}}</ref> == प्रजनन दायरा == यै पन्छीले विश्व व्यापी रुपमी समुन्द्रीको किनार वा नुनिलो पानी भयाः क्षेत्र वरिपरि प्रजनन अर्ने अद्दछ। यै पन्छीको अन्य उप प्रजातिअनले भणे उत्तर रे दक्षिण अमेरिका बठेइ क्यानडा, अर्जेन्टिना रे चिल्ली सम्म प्रजनन अद्दछ। अन्य केइ उप प्रजातिले भणे दक्षिण अमेरिका बठेइ फल्कल्याण्ड टापु, युरोपका अधिकांश मुलुक, एसिया रे अफ्रिका सम्म प्रजनन अर्ने अद्दछ। यै पन्छीको यक समुदायमी रहेर त्यसैको वरिपरि गुण बनाउने गर्छ। यै पन्छीले विषेशगरि अग्लो रुखको टुप्पोमी गुण बनाउने गर्छ। यै पन्छीले यक फृर माइ ३ बठेइ ८ वटा सम्म अण्डा पार्ने अद्दछ। ==आहारा== यै पन्छी मुख्यतया साँझ सकृय हुने भएकाले यसले साँझ रे घाम डुबे पछा सिकार अर्छ। यै पन्छीले आफुनो आहारा विभिन्न माध्यको प्रयोग गरेर समाउने अद्दछ। यैले आफुनो सिकार लाइ लामो दुरीबाटै ठम्याउन सक्छ रे त्यस लाइ निकैबेर हेर्छ रे रामडो मौका पायो भणे आक्रमण गर्ने गर्छ। यसले आहारा समाउन खिलाइ चारोको लै प्रयोग गर्छ जसमी यसले आफुनो प्वाँख रु रुखका पातअन पानिमी फ्याँक्ने अद्दछ। यै पन्छी निकै चलाख हुन्छ भणे यसले आफुनो आहारा पाउन खिलाइ मान्सुले फालेका रोटि रे अन्य खाद्य वस्तु पानीमी फाल्छ रे त्यस लाइ माछाले खान आउँद यसले माछालाई छोप्ने गर्छ। जमिनमी भने यसले आफुनो सिकार लाइ विस्तारै हिँडेर रे दोडिएर समाउने अद्दछ। यसले माछा बाहेक किरा, फटयाङ्ग्रा, माकुरो, गाइनेकिरा आदि खाने गर्छ। ==स्थित== यै पन्छी विश्व लगभग सब्बै मुलुकअनमी सहजै पाइने भएकाले यै लाइ [[अन्तर्राष्ट्रिय प्रकृति संरक्षण सङ्घ]] द्वारा कम चासोका प्रजातिको रुपमी वर्गीकृत गरियाः छ रे यै लाइ [[अन्तर्राष्ट्रिय प्रकृति संरक्षण सङ्घको रातो सूची|आइयुसीएनको रातो सूची]]मी लै सूचीकृत गरियाः छ। ==तस्वीर सङ्ग्रह== <gallery> File:Nycticorax nycticorax MHNT.jpg|बाँके बकुल्लाको अण्डा File:Black-crowned night heron (Nycticorax nycticorax hoactli).jpg|टोबागोमी पाइन्या बाँके बकुल्ला File:Black-crowned Night-Heron with snake.jpg|सर्प समात्दै गरेको यक बाँके बकुल्ला, [[ताइपेइ]] File:Bihoreau Gris.jpg|आहारा खाँदै File:Black-crowned night heron in flight.jpg|उडिरयाः यक युवा बाँके बकुल्ला, [[क्यालिफोर्निया]] File:Black-crowned Night Heron Arches NP.jpeg| File:Black-crowned Night-Heron Nycticorax nycticorax collage.jpg|दक्षिण भारत माइ पाइन्या बाँके बकुल्ला </gallery> == सन्दर्भ सामग्रीअन == {{सन्दर्भसूची}} ==बाइल्ला सूत्रअन== {{Commons|Nycticorax nycticorax|बाँके बकेल्ला}} {{Wikispecies|Nycticorax nycticorax|बाँके बकुल्ला}} * {{cite web | first1=जेभियर | last2=हेन्ज | first2=माइकल | work=चणोअनको विवरण | title=बाँके बकुल्ला | url=http://blascozumeta.com/wp-content/uploads/aragon-birds/non-passeriformes/037.nightheron-nnycticorax.pdf | access-date=2019-10-09 | archive-date=2018-10-25 | archive-url=https://web.archive.org/web/20181025071051/http://blascozumeta.com/wp-content/uploads/aragon-birds/non-passeriformes/037.nightheron-nnycticorax.pdf | url-status=dead }} * [https://web.archive.org/web/20081201005836/http://www.birds.cornell.edu/AllAboutBirds/BirdGuide/Black-crowned_Night-Heron.html पन्छी प्रजातिअा] * [http://www.mbr-pwrc.usgs.gov/id/framlst/i2020id.html ''बाँके बकुल्लाको जानकारी'] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20191009162914/https://www.mbr-pwrc.usgs.gov/id/framlst/i2020id.html |date=2019-10-09 }} * [http://sabap2.adu.org.za/docs/sabap1/076.pdf ''अफ्रिकी बाँके बकुल्ला''] * [http://www.enature.com/fieldguides/detail.asp?recnum=BD0117 ''बाँके बकुल्ला] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110308080756/http://www.enature.com/fieldguides/detail.asp?recnum=BD0117 |date=2011-03-08 }} - इ नेचर * [https://www.flickr.com/groups/birdguide/pool/tags/Nycticorax%20nycticorax फ्लिकरमी बाँके बकेल्लाका तस्वीरअा] * [http://naturdata.com/Nycticorax-nycticorax-6925.htm पोर्चेगलमी पाइन्या बाँके बकुल्लाको विवरण] * {{InternetBirdCollection|black-crowned-night-heron-nycticorax-nycticorax|Black-crowned night-heron|बाँके बकुल्ला}} * {{VIREO|Black-crowned+Night-heron|Black-crowned night-heron}} [[श्रेणी:विकिथन-१ माइ बनाइया वा सुधारिया लेखअन]] 24n04kvjbiqqagknwe5sa3y3axix1bc हरितगृह ग्याँस 0 21102 268328 268119 2026-10-19T07:09:08Z InternetArchiveBot 4668 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.6 268328 wikitext text/x-wiki [[File:Greenhouse-effect-t2.svg|thumb|upright=1.35|पिर्थिबि का सतह मी हरितगृह ग्याँसअन ले सिर्जित सौर्य विकिरण को हरितगृह प्रभाव]] [[File:Physical Drivers of climate change.svg|thumb|upright=1.35|सन् २०११ मी जलवायु परिवर्तन मी भूमिका खेल्ल्या विभिन्न योगदानकर्ताअन को [[रेडियोधर्मी बल]], [[पाँचवाँ आइपिसिसि मूल्याङ्कन प्रतिवेदन]] का अन्सारअ।.]] '''हरितगृह ग्याँस''' तसो ग्याँस हो जै ले तापीय इन्फ्रारेड श्रेणि मी पड्ड्या रेडियन्ट शक्ति लाइ अवशोषित रे उत्सर्जन अद्दान। हरितगृह ग्याँस ले [[हरितगृह प्रभाव]] पैदा अद्दान।<ref name="IPCC AR4-SYR">{{cite web|url=http://www.ipcc.ch/pdf/assessment-report/ar4/syr/ar4_syr_appendix.pdf|title=IPCC AR4 SYR Appendix Glossary|accessdate=14 December 2008|archive-date=17 November 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20181117121314/http://www.ipcc.ch/pdf/assessment-report/ar4/syr/ar4_syr_appendix.pdf|url-status=dead}}</ref> ग्रह का वातावरण या जलवायु मी परिवर्तन रे अंततः [[भूमण्डलीय ऊष्मीकरण]] कि न्युति उत्तरदायी हनान। प्राथमिक हरितगृह ग्याँस [[कार्बन डाइअक्साइड]] ({{CO2}}), [[नाइट्रस अक्साइड]] ({{N2O}}), [[मिथेन]] ({{CH4}}), क्लोरो-फ्लोरो कार्बन, पानी को बाफ ({{H2O}}), [[ओजोन]] ({{O3}}) हन। यदि हरितगृह ग्याँस नहुन्याहन भँण्या पिर्थिबि का सतह को औषत तापक्रम {{convert|-18|°C|°F}},<ref>{{Cite web|url=http://www.giss.nasa.gov/research/briefs/ma_01/|title=NASA GISS: Science Briefs: Greenhouse Gases: Refining the Role of Carbon Dioxide|website=www.giss.nasa.gov|access-date=2016-04-26|archive-date=2016-05-03|archive-url=https://web.archive.org/web/20160503215012/http://www.giss.nasa.gov/research/briefs/ma_01/|url-status=dead}}</ref> हुनेइ थ्यो; जो अच्याल {{convert|15|°C|°F}} छ।<ref>{{cite journal|year=2003|title=Modern global climate change|url=https://zenodo.org/record/1230878|journal=Science|volume=302|issue=5651|pages=1719–23|bibcode=2003Sci...302.1719K|doi=10.1126/science.1090228|pmid=14657489|vauthors=Karl TR, Trenberth KE}}</ref><ref>{{cite book|url=http://www.ipcc.ch/pdf/assessment-report/ar4/wg1/ar4-wg1-chapter1.pdf|title=Historical overview of climate change science.|author1=Le Treut H.|author2=Somerville R.|author3=Cubasch U.|author4=Ding Y.|author5=Mauritzen C.|author6=Mokssit A.|author7=Peterson T.|author8=Prather M.|author5-link=Cecilie Mauritzen|accessdate=14 December 2008|archive-date=26 November 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20181126204443/http://www.ipcc.ch/pdf/assessment-report/ar4/wg1/ar4-wg1-chapter1.pdf|url-status=dead}} in {{harvnb|IPCC AR4 WG1|2007}}</ref><ref name="h2o">{{cite web|url=http://nasascience.nasa.gov/earth-science/oceanography/ocean-earth-system/ocean-water-cycle|title=NASA Science Mission Directorate article on the water cycle|publisher=Nasascience.nasa.gov|url-status=dead|archiveurl=https://web.archive.org/web/20090117143544/http://nasascience.nasa.gov/earth-science/oceanography/ocean-earth-system/ocean-water-cycle|archivedate=17 January 2009|accessdate=2010-10-16}}</ref> शुक्र, मङ्गल रे टाइटन ग्रह का वायुमण्डल मी लगै हरितगृह ग्याँस पायीनान। औद्योगिक क्रान्ति (सन् १७५० तिर) पछा का मानवीय कृयाकलापअन ले पिर्थिबि का [[कार्बनडाइअक्साइड को वायुमण्डलीय सान्द्रता|वायुमण्डल मी कार्बनडाइअक्साइड का सान्द्रता]] मी ४५% ले बड़ोत्तरि होइरछ, सन् १७५० मी २८० पिपियम बठेइ सन् २०१९ मी ४१५ पिपियम सम्म।<ref name="techcrunch">{{cite web|url=https://techcrunch.com/2019/05/12/co2-in-the-atmosphere-just-exceeded-415-parts-per-million-for-the-first-time-in-human-history/|title=CO2 in the atmosphere just exceeded 415 parts per million for the first time in human history|accessdate=31 August 2019}}</ref> छाड्डीबारः [[कार्बन डाइअक्साइड को वायुमण्डलीय सान्द्रता]] इति जेदा ३० लाख वर्ष है पैली थ्यो।<ref>{{Cite web|url=https://www.climate.gov/news-features/understanding-climate/climate-change-atmospheric-carbon-dioxide|title=Climate Change: Atmospheric Carbon Dioxide {{!}} NOAA Climate.gov|website=www.climate.gov|language=en|access-date=2020-03-02|archive-date=2013-06-24|archive-url=https://web.archive.org/web/20130624204311/https://www.climate.gov/news-features/understanding-climate/climate-change-atmospheric-carbon-dioxide|url-status=dead}}</ref> उत्सर्जित आधा है जेदा ग्याँस को खपत [[कार्बन चक्र]] मी शामिल विभिन्न प्राकृतिक प्रक्रिया मी हुनाहुनाइ लै यो वृद्धि होइरैछच।<ref name="cdiac">{{cite web|url=http://cdiac.ornl.gov/pns/faq.html|title=Frequently asked global change questions|publisher=[[Carbon Dioxide Information Analysis Center]]|access-date=2020-06-07|archive-date=2011-08-17|archive-url=https://web.archive.org/web/20110817044713/http://cdiac.ornl.gov/pns/faq.html|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.esrl.noaa.gov/gmd/ccgg/trends/|title=Trends in carbon dioxide|author=ESRL Web Team|date=14 January 2008|publisher=Esrl.noaa.gov|accessdate=2011-09-11}}</ref> जेदा जसो [[वातावरण मी मानवीय प्रभाव|मानवजनित]] कार्बन डाइअक्साइड उत्सर्जन [[जैविक इन्धन]] का [[दहन]] बठेइ निकलन्छ, खास अरिबर [[कोइला]], [[तेल]] रे [[प्राकृतिक ग्याँस]]; येइ मी वनविनाश, जमीनी प्रयोग मी बदलाव, भूक्षय रे कृषि (पशुधन) को लगै हिस्सा छ।<ref name="EPA_GHGdata">{{cite web|url=https://www.epa.gov/ghgemissions/global-greenhouse-gas-emissions-data|title=Global Greenhouse Gas Emissions Data|publisher=[[United States Environmental Protection Agency|U.S. Environmental Protection Agency]]|accessdate=30 December 2019|quote=The burning of coal, natural gas, and oil for electricity and heat is the largest single source of global greenhouse gas emissions.|archive-date=16 August 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160816140828/https://www.epa.gov/ghgemissions/global-greenhouse-gas-emissions-data|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.ipcc.ch/publications_and_data/ar4/syr/en/spms2.html|title=AR4 SYR Synthesis Report Summary for Policymakers – 2 Causes of change|work=ipcc.ch|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20180228235005/http://www.ipcc.ch/publications_and_data/ar4/syr/en/spms2.html|archive-date=28 February 2018|access-date=9 October 2015}}</ref> मानवजनित मिथेन ग्याँस उत्सर्जन का मुख्य स्रोत पशुपालन हो जै पछा ग्याँस, तेल, कोइला रे और उद्योग, ठोस फोहर, फोहर पानि रे धान उत्पादन का बगत लै येइ ग्याँस को उत्सर्जन हन्छ।<ref name="Initiative">{{Cite web |url=https://www.globalmethane.org/documents/gmi-mitigation-factsheet.pdf |title=Archive copy |access-date=2020-06-07 |archive-url=https://web.archive.org/web/20210401215123/https://www.globalmethane.org/documents/gmi-mitigation-factsheet.pdf |archive-date=2021-04-01 |url-status=dead}}</ref> अइल का उत्सर्जन दर ले सन् २०३६ सम्म तापक्रम 2&nbsp;°C (3.6°F) ले बड़ि सकन्छ जै लाइ [[मौसम परिवर्तन सम्बन्धि संयुक्त राष्ट्र संघ को अन्तर सरकारी प्यानल|मौसम परिवर्तन सम्बन्धि संयुक्त राष्ट्र संघ का अन्तर सरकारी प्यानल]] (IPCC) ले "खतरा" को मल्लो तह भँणिबर घोषणा अरिराइछ।<ref>{{cite magazine|last1=Mann|first1=Michael E.|date=2014-04-01|title=Earth Will Cross the Climate Danger Threshold by 2036|url=http://www.scientificamerican.com/article/earth-will-cross-the-climate-danger-threshold-by-2036|magazine=Scientific American|accessdate=30 August 2016}}</ref> == सन्दर्भअन == {{Reflist}} [[श्रेणी:हरितगृह ग्याँस]] [[श्रेणी:विश्व वातावरण दिवस सम्पादनथन २०७७ मी बनायाः लेखअन]] gql39wluegp0p7k8m529p6squn9kcfp नवदुर्गा(देवी) 0 26714 268320 268315 2026-10-18T16:45:41Z Ramesh Deuba 3534 /* नवदुर्गाका नौ स्वरूप */ 268320 wikitext text/x-wiki {{Infobox deity | type = हिन्दु | image = Navadurga_Statues_at_Bhawani_Waghjai_Temple,_Terav.jpg | caption = नवदुर्गाका मूर्ति | name = नवदुर्गा | Devanagari = {{lang|sa|नवदुर्गा}} | Sanskrit_transliteration = {{IAST|navadurgā}} | affiliation = [[आदिशक्ति]], [[दुर्गा]], [[पार्वती]], [[देवी]] | god_of = शक्ति, सामर्थ्य, संरक्षण, ज्ञान, धन, प्रजनन रे मोक्ष | mantra = ॐ ऐं ह्रीं श्रीं महादुर्गायै नमो नमः | weapon = [[खड्ग]], [[धनुष र बाण]], [[त्रिशूल]], [[सुदर्शन चक्र]], [[गदा]], [[ढाल]], [[शङ्ख]], [[घण्टा]] | mount = [[सिंह]], [[बाघ]], [[नन्दी]], [[गोरु]], [[खच्चर]] रे [[कमल]] | festivals = [[नवरात्रि]], [[दुर्गापूजा]], [[विजयादशमी]], [[दुर्गाष्टमी]] | consort = [[शिव]] }} '''नवदुर्गा''' [[हिन्दु धर्म]]मी [[दुर्गा]]का नौवटा स्वरूप तथा अभिव्यक्तिहरू हुन्।<ref name="Navdurgaforms">{{cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/religion/rituals-puja/navdurga-nine-forms-of-energy/articleshow/68207186.cms|title=The Nine Forms of Goddess Mahadevi Durga|access-date=2022-05-03|website=Times of India|date=24 September 2014 |language=en}}</ref><ref name="Melton2010p2600">{{cite book|author1=J. Gordon Melton|first2=Martin|last2=Baumann|title=Religions of the World: A Comprehensive Encyclopedia of Beliefs and Practices, 2nd Edition|url=https://books.google.com/books?id=v2yiyLLOj88C&pg=PA2600 |year=2010|publisher=ABC-CLIO|isbn=978-1-59884-204-3|pages=2600–2602}}</ref> विशेषगरी [[नवरात्रि]] रे [[दुर्गापूजा]]का अवसरमी यी स्वरूपहरूको पूजा गरिन्छ।{{Sfn|Navaratri, TOI}} हिन्दु धर्मका [[शाक्त सम्प्रदाय|शाक्त]] रे [[शैव सम्प्रदाय|शैव]] सम्प्रदायका अनुयायीहरूमाझ नवदुर्गालाई प्रायः सामूहिक रूपमी एउटै देवीका रूपमी पनि मनहान।{{Sfn|Amazzone|2010|p=184}} [[हिन्दु पौराणिक कथा]]अनुसार, नवदुर्गाका नौ स्वरूपहरूलाई राक्षसराज [[महिषासुर]]सँग नौ दिनसम्म चलेको युद्धका क्रममी [[दुर्गा]]ले धारण गरेका नौवटा चरण वा स्वरूपका रूपमी मनहान। यस युद्धको दसौँ दिनलाई [[विजयादशमी]] का रूपमी मनहान। हिन्दुहरू का लागि यो पर्व अत्यन्त महत्त्वपूर्ण चाडहरूमध्ये एक हो।{{Sfn|Ramachandran|2020|pp=21-23}} == पृष्ठभूमि तथा पूजा == {{Main|नौरथा}} [[नौरथा]] वा नवरात्री पर्वका अवसरमी नौ वर्षसम्मका नौ जना अविवाहित कन्याहरूको पूजा गरी उनीहरूलाई भोजन गराइन्छ। ती कन्याहरूलाई नौ देवीका अवतारका रूपमी मनहान।{{Sfn|Amazzone|2010|p=187}} [[दुर्गापूजा]]का क्रममी गरिने नवपत्रिका अनुष्ठानमी आठवटा वनस्पतिका हाँगाहरू रे तिनका पातहरूलाई केराको बोटसँग बाँधिन्छ। संस्कृतमी ''नव'' को अर्थ ‘नौ’ रे ''पत्रिका'' को अर्थ ‘पातहरू’ हुन्छ।{{Sfn|Ostor|2004|p=68}} == नवदुर्गाका नौ स्वरूप == हिन्दु धर्ममी पूजिने दुर्गाका नौ प्रमुख स्वरूपहरू निम्नानुसार छन्: {| class="wikitable" width="98%" style="background:white;" |- style="border-bottom:3px solid #CCCCFF" ! क्र.सं. ! चित्र {{Small|{{small|(चित्रण)}}}} ! नाम ! [[वाहन]] ! [[वर्ण (हिन्दु धर्म)|अवस्था]]{{Refn|[[पार्वती]]लाई नौवटा भिन्न चित्रणमार्फत नौ चरणमी वर्णन गरिएको छ। अन्तिम चरण [[सिद्धिदात्री]]को स्वरूपमी पुगेपछि रे [[सिद्धि]]हरू प्राप्त गरेपछि उनी [[महाशक्ति]] बन्दछिन्।{{Sfn|Ramachandran|2020|p=67}}|group=upper-alpha}} ! [[मन्त्र]] ! स्वरूपको वर्णन ! {{Abbr|सन्दर्भ|सन्दर्भ स्रोत}} |- | १. | [[File:Shailaputri Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|173x173px]] | {{Big|'''[[शैलपुत्री]]'''}} {{Small|“पर्वतकी पुत्री”}} | [[नन्दी (हिन्दु धर्म)|नन्दी]] (बल्ल) | बाल्यावस्थामी रहेकी [[पार्वती]], जसको दिव्य तथा मूल स्वरूप [[दुर्गा]] हो। | ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः | उन्नारो शरीरमी हल्का आभूषण सजिएका छन् रे उनले रातो तथा गुलाबी वस्त्र धारण गरेकी छन्। उनका दुई हातमध्ये एउटामी त्रिशूल रे अर्कोमी कमल छ। उनी सेतो बल्लको पिठ्युँमी विराजमान छिन्। | {{Sfn|Sharma|2021|p=73}} |- | २. | [[File:Brahmacharini.jpg|frameless|158x158px]] | {{Big|'''[[ब्रह्मचारिणी]]'''}} {{Small|“भक्ति रे तपस्याकी देवी”}} | कुनै पनि होइन | तपस्विनी अवस्थाकी दुर्गा। | ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः | उनले तपस्विनीको वेश धारण गरेकी छन्। उनको शरीरमी सुकेका [[रुद्राक्ष]]का दाना रे फूलहरू आभूषणका रूपमी सजिएका छन्। उनका दुई हातमध्ये एउटामी जपमाला रे अर्कोमी जलपात्र छ। | {{Sfn|Ramachandran|2020|p=23}} |- | ३. | [[File:Chandraghanta Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|157x157px]] | {{Big|'''[[चन्द्रघण्टा]]'''}} {{Small|“राक्षसहरूको संहार गर्ने देवी”}} | बाघ | [[शाक्त सम्प्रदाय|शक्ति]] स्वरूपकी दुर्गा। | ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः | उनका दस हात छन्। नौ हातमी त्रिशूल, गदा, धनुष, बाण, कमल, तरबार, घण्टी रे जलपात्रजस्ता आयुध तथा वस्तुहरू छन् भने अर्को हातले भक्तहरूलाई आशीर्वाद दिन्छ। उनी शक्तिशाली बाघमाथि विराजमान छिन्। | {{Sfn|Ramachandran|2020|pp=29-30}} |- | ४. | [[File:Kushmanda Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|154x154px]] | {{Big|'''[[कुशमन्दा]]'''}} {{Small|“ब्रह्माण्डीय अण्डाकी देवी”}} | rowspan="3" | सिंह | [[महाशक्ति]] स्वरूपकी दुर्गा। | ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्माण्डायै नमः | उनका आठ हात छन्। तीमध्ये छ हातमी चक्र, गदा, कमल, धनुष, बाण, तरबार रे जपमालाजस्ता वस्तुहरू छन्। बाँकी दुई हातमा मह रे जलले भरिएका पात्र छन्। उनी सिंहको पिठ्युँमी विराजमान छिन्। | {{Sfn|Mittal|2006|p=63}} |- | ५. | [[File:Skandamata Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|164x164px]] | {{Big|'''[[स्कन्दमाता]]'''}} {{Small|“मातृत्व रे सन्तानकी देवी”}} | मातृत्वको अवस्थामा रहेकी दुर्गा। | ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः | उनका चार हात छन्। दुई हातमी कमलका फूल छन्। अर्को हातमी छवटा शिर भएका बालक कार्तिकेयलाई समातेकी छन्, जो उनको काखमी विराजमान छन्। चौथो हातले भक्तहरूलाई अभय प्रदान गर्छ। उनी सिंहको पिठ्युँमी विराजमान छिन्। | {{Sfn|Ostor|2004|p=34}} |- | ६. | [[File:Katyayani Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|168x168px]] | {{Big|'''[[कात्यायनी]]'''}} {{Small|“शक्तिकी देवी”}} | कुनै पनि असुरसँग युद्ध गर्न तत्पर योद्धा स्वरूपकी दुर्गा। | ॐ देवी कात्यायन्यै नमः | उनका शरीरमी बहुमूल्य आभूषणहरू सजिएका छन् रे उनले हरियो तथा गुलाबी वस्त्र धारण गरेकी छन्। उनका चार हातमी तरबार, ढाल, कमल रे त्रिशूल छन्। उनी भयङ्कर सिंहमाथि विराजमान देखिन्छिन्। | {{Sfn|Ramachandran|2020|pp=48-51}} |- | ७. | [[File:Kalratri Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|163x163px]] | {{Big|'''[[कालरात्रि]]'''}} {{Small|“मङ्गल रे साहसकी देवी”}} | गधा | संहारकारी स्वरूपकी दुर्गा। | ॐ देवी कालरात्र्यै नमः | उनका तीनवटा रक्तवर्णका आँखा छन् रे कपाल अव्यवस्थित छ। उनको घाँटीमी बिजुलीजस्तै चम्किने खप्परहरूको माला छ। उनका चार हातमी त्रिशूल, बाङ्गो तरबार, वज्र रे कचौरा छन्। उनी आफ्नो वाहन गधाको पिठ्युँमी विराजमान छिन्। | {{Sfn|Mishra|1989|p=36}} |- | ८. | [[File:Mahagauri Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|172x172px]] | {{Big|'''[[महागौरी]]'''}} {{Small|“सौन्दर्य रे नारीत्वकी देवी”}} | गोरु | पुनःस्थापनाको स्वरूपकी दुर्गा। | ॐ देवी महागौर्यै नमः | उनका चार हात छन्। तीन हातमी त्रिशूल, सानो डमरु रे गुलाबी कमल छन् भने चौथो हातले भक्तहरूलाई अभय प्रदान गर्छ। उनी सेतो गोरुमाथि विराजमान छिन्। | {{Sfn|Sivkishen|2016|p=176}} |- | ९. | [[File:Siddhidatri Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG|frameless|176x176px]] | {{Big|'''[[सिद्धिदात्री]]'''}} {{Small|“अलौकिक शक्तिहरू अर्थात् [[सिद्धि]] प्रदान गर्ने देवी”}} | कमल | महाशक्तिका रूपमी सर्वोच्च तथा पूर्ण स्वरूप प्राप्त गरेकी दुर्गा। | ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्र्यै नमः | उनका चार हातमध्ये प्रत्येकमा चक्र, शङ्ख, गुलाबी कमल रे गदा छन्। उनी पूर्ण रूपमी फुलेको कमलमाथि विराजमान छिन्। | {{Sfn|Ramachandran|2020|pp=68, 70}} |} === अग्निपुराण === [[अग्निपुराण]]मी नवदुर्गाका स्वरूपहरू निम्नानुसार उल्लेख गरिएका छन्:<ref>{{Cite book |last=Gangadharan |first=N |title=The Agni Purana |publisher=Motilal Banarsidass Publishers |year=1954 |isbn=9788120803596 |pages=132 |language=English}}</ref> # रुद्रचण्डा # प्रचण्डा # चण्डोग्रा # चण्डनायिका # चण्डा # चण्डवती # चण्डरूपा # अतिचण्डिका # उग्रचण्डा == सन्दर्भहरू == === टिप्पणीहरू === {{reflist|group=upper-alpha}} === उद्धरणहरू === {{reflist}} == स्रोतग्रन्थहरू == {{refbegin}} * {{Cite news|title=नवरात्रि २०२१: माँ दुर्गाका नौ स्वरूप रे तिनलाई अर्पण गरिने विशेष प्रसाद|url=https://timesofindia.indiatimes.com/life-style/events/navratri-2019-what-are-the-nine-forms-of-maa-durga-and-the-special-prasad-offered-to-them/articleshow/71335962.cms|access-date=2021-12-31|website=[[द टाइम्स अफ इन्डिया]]|date=7 October 2021 |language=en|ref={{SfnRef|Navaratri, TOI}}}} * {{Cite book|last=Ramachandran|first=Nalini|url=https://books.google.com/books?id=kUcAEAAAQBAJ|title=नवदुर्गा: देवीका नौ स्वरूप|date=2020|publisher=[[पेन्गुइन बुक्स]]|isbn=978-93-5305-981-1|language=en}} * {{Cite book|last=Amazzone|first=Laura|url=https://books.google.com/books?id=JBNtQYFEjeAC|title=देवी दुर्गा र पवित्र नारीशक्ति|date=2010|publisher=[[युनिभर्सिटी प्रेस अफ अमेरिका]]|isbn=978-0-7618-5313-8|language=en}} * {{Cite book|last=Ostor|first=Akos|url=https://books.google.com/books?id=6ASi04hC0BQC|title=देवताहरूको लीला: बङ्गालको एउटा सहरका पर्वहरूमा स्थानीयता, विचारधारा, संरचना र समय|date=2004|publisher=[[ओरिएन्ट ब्ल्याकस्वान]]|isbn=978-81-8028-013-9|language=en}} * {{Cite book|last=Mishra|first=P. K.|url=https://books.google.com/books?id=gCpuAAAAMAAJ|title=संस्कृति, जनजातीय इतिहास र स्वतन्त्रता आन्दोलन: डा. एन. के. साहु स्मृति ग्रन्थ|date=1989|publisher=आगम कला प्रकाशन|language=en}} * {{Cite book|last=Pintchman|first=Tracy|title=महादेवीको खोजी: हिन्दु महादेवीका पहिचानहरूको निर्माण|url=https://books.google.com/books?id=JfXdGInecRIC|date=2001|publisher=[[स्टेट युनिभर्सिटी अफ न्युयोर्क प्रेस]]|isbn=9780791490495|language=en}} * {{Cite book|last=Sharma|first=Vidya Sagar|url=https://books.google.com/books?id=SXhUBQAAQBAJ|title=माता वैष्णो देवी|year=2021|publisher=प्रभात प्रकाशन|isbn=978-81-7315-903-9|language=hi}} * {{Cite book|last=Mittal|first=J. P.|url=https://books.google.com/books?id=b7gOBW8oDFgC|title=प्राचीन भारतको इतिहास (नयाँ संस्करण): ईसा पूर्व ७३०० देखि ४२५० सम्म|date=2006|publisher=एटलान्टिक पब्लिसर्स एन्ड डिस्ट्रिब्युटर्स|isbn=978-81-269-0615-4|language=en}} * {{Cite book|last=Sivkishen|url=https://books.google.com/books?id=kmVZBgAAQBAJ|title=शिवको राज्य|date=2015|publisher=डायमन्ड पकेट बुक्स प्रा. लि.|isbn=978-81-288-3028-0|language=en}} {{refend}} 9q9e6moh73wi1lrrz7j5bggzpqa645z शैलपुत्री 0 26716 268317 2026-10-18T13:17:41Z Ramesh Deuba 3534 नयाँ लेख 268317 wikitext text/x-wiki {{Infobox deity | type = हिन्दु | image = Shailaputri Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG | caption = देवी शैलपुत्री | name = शैलपुत्री | affiliation = [[दुर्गा]] रे [[पार्वती]]को अवतार | father = [[हिमवत]] | mother = मेनावती | god_of = पर्वतकी पुत्री | abode = [[कैलाश पर्वत]] | mantra = ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः | weapon = त्रिशूल रे लौरो | mount = साँढे (वृष) | planet = [[बुधग्रह|बुध]] | consort = [[शिव]] | member_of = [[नवदुर्गा]] }} '''शैलपुत्री''' हिन्दु देवी [[महादेवी]]को एक रूप हुन्, जसलाई [[पार्वती]]को रूपमी पुजिन्छ। उनी [[नवदुर्गा]]मध्येकी प्रथम देवी हुन्, र नवरात्रि को पहिलो दिन उनको विशेष पूजा रे उपासना गरिन्छ।<ref>{{Cite book |last1=Taylor |first1=Patrick |url=https://books.google.com/books?id=XOyYCgAAQBAJ&dq=shailaputri+first+navadurga&pg=PA330 |title=The Encyclopedia of Caribbean Religions: Volume 1: A - L; Volume 2: M - Z |last2=Case |first2=Frederick I. |date=2013-04-30 |publisher=University of Illinois Press |isbn=978-0-252-09433-0 |pages=330 |language=en}}</ref><ref>{{Cite book |last=Dalal |first=Roshen |url=http://archive.org/details/dalal-roshen-2013-2010.-hinduism-an-alphabetical-guide |title=Dalal, Roshen (2013, 2010). 'Hinduism - An Alphabetical Guide' |date=2013 |pages=376}}</ref> [[शिव पुराण]]मी वर्णन गरिए अनुसार, [[नवदुर्गा]]मध्येकी पहिलो स्वरूप शैलपुत्री पर्वतराज हिमवान रे उनकी पत्नी मेनावती (जसलाई मेना वा [[मेनका]] पनि भनिन्छ) की छोरी हुन्। महिषासुर नामक राक्षससँगको युद्धका लागि हिमालयले दुर्गालाई उनको वाहनको रूपमी एउटा '''सिंह''' उपहार दिएको उल्लेख छ। यस कथामी, महिषासुरद्वारा प्रताडित देवताहरूले आफ्नो शक्ति संकलन गरी दुर्गाको सृष्टि गद्दाहन । हिमालयले दिएको सिंहमी सवार भएर देवीले कयौँ दिनसम्म युद्ध गरी महिषासुरको सेनालाई परास्त गर्दै अन्ततः विभिन्न रूप बदल्दै आएको महिषासुरको हृदयमी त्रिशूल प्रहार गरी उसको वध अद्दीछन। शैलपुत्रीको अर्थ "पर्वतकी छोरी" हो (शैल = पर्वत, पुत्री = छोरी)। यिनको वाहन साँढे भएकाले यिनलाई 'वृषारूढा' नामले पनि चिनिन्छ। यिनको दाहिने हातमी त्रिशूल रे देब्रे हातमी कमलको फूल सुशोभित छ। [[योग]] शास्त्र अनुसार, उनलाई मूलाधार चक्रकी देवी मानिन्छ। देवी शैलपुत्रीलाई समर्पित सबैभन्दा प्रमुख मन्दिरहरूमध्ये एक उत्तर प्रदेशको वाराणसीस्थित मढिया घाटमी रहेको '''शैलपुत्री मन्दिर''' हो। नवरात्रिको पहिलो दिन पूजा गरिने शैलपुत्रीले स्थिरता, शुद्धता रे प्रकृतिको आधारभूत शक्तिको प्रतीक मानिन्छिन्। == प्रतिमा == देवी शैलपुत्री ([[पार्वती]])लाई दुई हात भएकी रे निधारमी अर्धचन्द्र धारण गरेकी स्वरूपमी चित्रण गरिएको छ। उनलाई आफ्नो दाहिने हातमी त्रिशूल रे देब्रे हातमी कमलको फूल लिएको देखाइन्छ। उनी आफ्नो वाहन [[नन्दी]] (साँढे) माथि सवार हुन्छिन्।<ref name="ShailputriBasicInfo">{{cite web |title=Shailputri on drikpanchang |url=http://www.drikpanchang.com/hindu-goddesses/parvati/durga/navdurga-shailputri.html |accessdate=21 Sep 2017 |publisher=drikpanchang}}</ref> == श्लोक == :वन्दे वंछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम् | :वृषारूढाम् शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् || <ref name="Preeti jha 2017">{{cite web | author=Preeti jha | title=नवरात्र में प्रथम दिन करें मां के शैलपुत्री रूप का पूजन | website=Dainik Jagran | date=२२ मार्च 2017 | url=https://www.jagran.com/spiritual/puja-path-shailputri-mata-first-goddess-of-navratri-15721905.html | language=हिन्दी भाषा | accessdate=२७ मार्च २०२० | archive-url=https://web.archive.org/web/20200326205155/https://www.jagran.com/spiritual/puja-path-shailputri-mata-first-goddess-of-navratri-15721905.html | archive-date=26 मार्च 2020 | url-status=live }}</ref> == पौराणिक कथा == पूर्वजन्ममी उनी [[दक्ष]]की पुत्री [[सती (देवी)|सती]] थिइन्।<ref name=Shailaputrionastrospeak>{{cite web|title=Shailaputri on Astropeak|url=http://www.astrospeak.com/slides/shailputri-mata|publisher=astrospeak|accessdate= 21 Sep 2017}}</ref> एकपटक दक्षले ठुलो [[यज्ञ]] आयोजना गरेका थिए, जसमी उनले सतीका पति शिवलाई निमन्त्रणा गर्दैनन्। सतीले अपमान महसुस गरे तापनि उक्त यज्ञमी जाने निर्णय गर्छिन्। त्यहाँ दक्षले शिवको घोर अपमान गर्छन्। सतीले यो अपमान सहन नसकेर यज्ञको अग्निमी हाम फालेर आत्मदाह गर्छिन्। अर्को जन्ममी उनी हिमालयकी छोरी पार्वतीका रूपमी जन्मिन्छिन् रे पुनः शिवसँग विवाह गर्छिन्। == सन्दर्भ सामग्रीहरू == {{सन्दर्भसूची}} ge2u8w9a8ic54tkf3fi95o7ma58gm8w ब्रह्मचारिणी 0 26717 268318 2026-10-18T13:30:27Z Ramesh Deuba 3534 नयाँ लेख 268318 wikitext text/x-wiki {{Infobox deity | type = हिन्दु | image = Brahmacharini.jpg | caption = ब्रह्मचारिणी | name = ब्रह्मचारिणी | Devanagari = | deity_of = भक्ति रे तपस्याकी देवी | affiliation = [[दुर्गा]] रे [[पार्वती]]को अवतार | mantra = ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः | symbols = [[कमण्डलु]], कमल, [[रुद्राक्ष]], [[जपमाला]] | texts = [[देवीभागवत पुराण]], [[देवी गीता]] | planet = [[केतु]] | consort = [[शिव]] }} '''ब्रह्मचारिणी''' हिन्दु देवी [[महादेवी]]को एउटा रूप हुन्, जेलाइ [[पार्वती]]ले तपस्विनीको रूप धारण गरेको अवस्थामी पूजा गरिन्छ।<ref>{{cite book |last=McDaniel |first=June |title=Offering Flowers, Feeding Skulls : Popular Goddess Worship in West Bengal: Popular Goddess Worship in West Bengal |url=https://archive.org/details/offeringflowersf0000mcda |publisher=Oxford University Press |year=2004 |isbn=978-0-19-534713-5 |pages=[https://archive.org/details/offeringflowersf0000mcda/page/106 106]–107}}</ref> उनी [[नवदुर्गा]]मध्ये दोस्रो देवी हुन्, रे [[नवरात्रि]]को दोस्रो दिन व्रह्मचारणीको पूजा गरिन्छ।<ref>Manohar Laxman Varadpande (2005), History of Indian Theatre: Classical theatre, Abhinav, {{ISBN|978-8170174301}}, page 54</ref> उनको प्रतिमामी, ब्रह्मचारिणीलाई सेतो कपडा लगाएको, दाहिने हातमी [[जपमाला]] रे देब्रे हातमी [[कमण्डलु]] लिएको अवस्थामी चित्रण गरिएको छ।<ref>{{Cite book |last=Taylor |first=Patrick |url=https://www.google.co.in/books/edition/The_Encyclopedia_of_Caribbean_Religions/XOyYCgAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=&pg=PA330&printsec=frontcover |title=The Encyclopedia of Caribbean Religions: Volume 1: A - L; Volume 2: M - Z |last2=Case |first2=Frederick I. |date=2013-04-30 |publisher=University of Illinois Press |isbn=978-0-252-09433-0 |pages=330 |language=en}}</ref> == व्युत्पत्ति == ''ब्रह्मचारिणी'' शब्द दुईवटा संस्कृत मूलबाटी बनेको छ: #''[[ब्रह्म]]'' ([[ब्रह्म|ब्रह्मन्]]बाटी संक्षिप्त), जसको अर्थ "स्वयम्-अस्तित्वमी रहेको आत्मा, निरपेक्ष सत्य, विश्वव्यापी स्व, व्यक्तिगत ईश्वर, पवित्र ज्ञान" भन्ने हुन्छ।<ref>[http://www.sanskrit-lexicon.uni-koeln.de/scans/MWScan/tamil/index.html brahma] मोनियर विलियम्स संस्कृत शब्दकोश, कोलोन डिजिटल संस्कृत लेक्सिकन, जर्मनी</ref><ref>[[ब्रह्मा]] वा [[ब्राह्मण]]सँग अलमलिनु हुँदैन</ref> #''चारिणी'' भनेको ''चर्या'' को स्त्रीलिङ्गी रूप हो, जसको अर्थ "संलग्न हुनु, अगाडि बढ्नु, व्यवहार, आचरण, अनुसरण गर्नु, हिँड्नु वा पछ्याउनु" भन्ने हुन्छ।<ref>[http://www.sanskrit-lexicon.uni-koeln.de/scans/MWScan/tamil/index.html carya] मोनियर विलियम्स संस्कृत शब्दकोश, कोलोन डिजिटल संस्कृत लेक्सिकन, जर्मनी</ref> वैदिक ग्रन्थहरूमी ''ब्रह्मचारिणी'' शब्दको अर्थ पवित्र धार्मिक ज्ञान प्राप्त गर्न लाग्ने महिला भन्ने हुन्छ।<ref>[http://www.sanskrit-lexicon.uni-koeln.de/scans/MWScan/tamil/index.html brahmacArin] मोनियर विलियम्स संस्कृत शब्दकोश, कोलोन डिजिटल संस्कृत लेक्सिकन, जर्मनी</ref> == पौराणिक कथा == विभिन्न पौराणिक कथाहरूका अनुसार, हिमालयकी पुत्री पार्वतीले भगवान शिवसँग विवाह गर्ने संकल्प गर्छिन्। उनका मातापिताले उनलाई सम्झाउने प्रयास गरे तापनि, उनी आफ्नो निर्णयमी अडिग रहँदै उनले यसको लागि ५,००० वर्षसम्म कठोर तपस्या गर्ने बताउँछिन्।<ref name="Kinsley p.41"/> त्यस समयमी, देवताहरू [[तारकासुर]] नामक असुरबाटी त्रसित थ्या , जसले [[ब्रह्मा]]बाटी शिवको पुत्रबाहेक अरू कसैले मार्न नसक्ने वरदान पाएको थ्या। शिवलाई विवाह गर्न रे सन्तान जन्माउन प्रेरित गर्ने उद्देश्यले देवताहरूले प्रेम रे इच्छाका देवता [[कामदेव]]को सहयोग माग्छन्। कामदेवले ध्यानमग्न शिवमाथि इच्छाको बाण प्रहार गर्छन्। यसबाटी क्रोधित भई शिवले आफ्नो तेस्रो आँखा खोलेर कामदेवलाई भष्म पारिदिन्छन्।<ref name="jl503">James Lochtefeld (2005), "Parvati" in The Illustrated Encyclopedia of Hinduism, Vol. 2: N–Z, pp. 503-505, Rosen Publishing, {{ISBN|0-8239-2287-1}}</ref> यति हुँदा पनि पार्वती आफ्नो संकल्पबाटी विचलित हुँदैनिन्। उनले शिवकै जस्तो तपस्वी जीवनशैली अपनाउँदै पहाडमी बसेर तपस्या, [[योग]] रे वैराग्यको अभ्यास गर्छिन्। उनले केवल [[बेल|बेलका पात]] रे नदीको पानी खाएर जीवन निर्वाह गरिन्। यही रूपमी उनलाई ब्रह्मचारिणीका रूपमी पुज्न थालियो। उनको दृढताले अन्ततः शिवको ध्यान आकर्षित गर्छ रे शिवले भेष बदलेर पार्वतीको नजिक गएर आफ्नै कमजोरी तथा विचित्रताहरू सुनाउँदै उनलाई निरुत्साहित गर्ने प्रयास गर्छन्। तर, पार्वती अविचलित रहन्छिन्।<ref name="jl503" /> यसै समयमी, [[प्रकाण्डासुर]] नामक असुरले आफ्ना दस लाख असुरहरूको सेना लिएर पार्वतीमाथि आक्रमण गर्छ। पार्वती आफ्नो तपस्याको अन्तिम चरणमी थिइन् रे आफ्नो रक्षा गर्न असमर्थ थिइन्। पार्वतीलाई असहाय देखेर देवी [[लक्ष्मी]] रे [[सरस्वती]]ले हस्तक्षेप गर्छन् तर असुरहरूको सङ्ख्या धेरै भएकाले उनीहरूलाई गाह्रो हुन्छ। धेरै दिनको युद्धपछि, पार्वतीको छेउमी रहेको कमण्डलु ढल्छ रे त्यसबाटी निस्किएको बाढीले सबै असुरहरूलाई बगाउँछ। आँखा खोल्दा, पार्वतीबाटी ज्वाला उत्पन्न हुन्छ जसले प्रकाण्डासुरलाई भष्म पारिदिन्छ। पार्वतीको कठोर तपस्याले सम्पूर्ण ब्रह्माण्डलाई प्रभावित गर्छ, यद्यपि शिव अझै शान्त नै थिए। अन्ततः, शिव पुनः एक [[ब्रह्मचर्य|ब्रह्मचारी]]को भेषमी उनीकहाँ पुग्छन्। उनले विभिन्न प्रश्नहरूद्वारा पार्वतीको परीक्षा लिन्छन् जसको पार्वतीले सही उत्तर दिन्छिन्। उनको सङ्कल्पलाई स्वीकार गर्दै, शिव आफ्नो वास्तविक रूपमी प्रकट हुन्छन् उनीसँग विवाह गर्न सहमत हुन्छन्।<ref name="Kinsley p.41">David Kinsley, ''Hindu Goddesses: Vision of the Divine Feminine in the Hindu Religious Traditions'' ({{ISBN|81-208-0379-5}}), p. 41-46</ref><ref name="jl503" /> == सन्दर्भ सामग्रीहरू == {{सन्दर्भसूची}} {{Commons category|Brahmacharini|ब्रह्मचारिणी}} lusqbg54bo02i266mpv9d7358skkpf8 चन्द्रघण्टा 0 26718 268319 2026-10-18T16:16:40Z Ramesh Deuba 3534 नयाँ लेख 268319 wikitext text/x-wiki {{Infobox deity | type = हिन्दू | image = Chandraghanta Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG | caption = चन्द्रघण्टाको [[मूर्ति]] | name = चन्द्रघण्टा | affiliation = [[दुर्गा]], [[नवदुर्गा]] | mantra = ''पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।।'' | weapon = तरबार, बाण तथा अन्य अस्त्रशस्त्र | mount = सिंह वा बाघ }} '''चन्द्रघण्टा''' हिन्दू देवी [[दुर्गा]]का नौ स्वरूपमध्ये तेस्रो स्वरूप हुन्। यी नौ स्वरूपलाई सामूहिक रूपमी [[नवदुर्गा]] भान्ना हान । [[नवरात्रि]]को तेस्रो दिन चन्द्रघण्टाको पूजा गरिन्छ। [[गीता प्रेस]]द्वारा प्रकाशित हिन्दी धार्मिक पुस्तिका ''नव दुर्गा''मी उल्लेख भएअनुसार, उनको नाम निधारमी रहेको घण्टीको आकारको अर्धचन्द्रबाटी व्युत्पन्न भएको हो।<ref name="GitaPressNavaDurga">{{cite book |title=Nava Durga |publisher=Gita Press |location=Gorakhpur |language=hi |url=https://gitapress.org/product/nava-durga-hindi |via=Gita Press |access-date=13 October 2026 }}</ref><ref name="GitaPressNavaDurgaArchive">{{cite book |title=Nava Durga |publisher=Gita Press |location=Gorakhpur |language=hi |url=https://archive.org/details/HindiBookNavaDurgaByGitaPress/page/n3/mode/2up |via=Internet Archive |access-date=13 October 2026 }}</ref> == पाठ्य परम्परा == ''[[देवी माहात्म्य|दुर्गा सप्तशती]]''को पाठसँग सम्बन्धित रही पाठ गरिने रक्षात्मक स्तोत्र ''देवी कवच''मी चन्द्रघण्टालाई नवदुर्गामध्ये तेस्रो देवीका रूपमी उल्लेख गरिएको छ। यसका श्लोक ३–५ मी नवदुर्गाको परम्परागत क्रम शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कूष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी रे सिद्धिदात्रीका रूपमी प्रस्तुत गरिएको छ।<ref name="DeviKavacha">{{cite web |title=Devī Kavacam |url=https://sanskritdocuments.org/doc_devii/dkavach.html |website=Sanskrit Documents |language=sa |at=verses 3–5 |access-date=13 October 2026 }}</ref> यस अंशमी नवदुर्गाका नाम रे तिनीहरूको क्रम उल्लेख गरिएको छ, तर चन्द्रघण्टासम्बन्धी छुट्टै कथा प्रस्तुत गरिएको छैन।<ref name="DeviKavacha" /> == मूर्तिकला तथा उपासना == गीता प्रेसद्वारा प्रकाशित ''नव दुर्गा'' नामक पुस्तिकामी चन्द्रघण्टालाई स्वर्णिम वर्ण भएकी, दस हात भएकी तथा निधारमी घण्टीको आकारको अर्धचन्द्र धारण गरेकी देवीका रूपमी वर्णन गरिएको छ। उहाँले तरबार, बाण तथा अन्य अस्त्रशस्त्र धारण गर्नुहुन्छ रे सिंहमा सवार हुनुहुन्छ। युद्धका लागि तत्पर अवस्थामी चित्रण गरिए तापनि उहाँलाई शान्त तथा भक्तजनप्रति दयालु देवीका रूपमी पनि वर्णन गरिएको छ।<ref name="GitaPressNavaDurgaArchive" /> उक्त पुस्तिकाका अनुसार, उहाँको घण्टीको ध्वनिले दुष्ट प्राणीहरूलाई भयभीत बनाउँछ। उहाँको उपासनालाई दुःख, कष्ट तथा बाधाहरूको निवारण रे साहस एवं निर्भयताको प्राप्तिसँग सम्बन्धित मानिएको छ। नवरात्रिको तेस्रो दिन चन्द्रघण्टाको पूजा गरिन्छ। उक्त पुस्तिकाले यस दिनको उपासनालाई [[मणिपूर चक्र]]सँग पनि सम्बन्धित गरेको छ।<ref name="GitaPressNavaDurgaArchive" /> आधुनिक चित्रणमी चन्द्रघण्टाको स्वरूप एकरूप नाईथिन। केही भक्तिपरक स्रोतमी उहाँलाई सिंहको सट्टा बाघ वा बघिनीमी सवार भएको देखाइएको छ।<ref name="DrikPanchang">{{cite web |title=Goddess Chandraghanta |url=https://www.drikpanchang.com/hindu-goddesses/parvati/durga/navdurga-chandraghanta.html |website=Drik Panchang |access-date=13 October 2026 }}</ref> [[File:Mangalore Dasara.jpg|thumb|[[मङ्गलुरु दसरा]]को शोभायात्राका क्रममी प्रदर्शन गरिएको चन्द्रघण्टाको मूर्ति।]] == शिव रे पार्वतीको विवाहसँगको सम्बन्ध == आधुनिक भक्तिपरक विवरणमी चन्द्रघण्टालाई [[पार्वती]]को विवाहित स्वरूपका रूपमी वर्णन गर्ने वा उहाँको प्राकट्यलाई पार्वती रे [[शिव]]को विवाहसँग सम्बन्धित गर्ने पौराणिक कथा पाइन्छ। यी विवरणमी एकरूपता नाईथिन। केही विवरणअनुसार, विवाहपछि अर्धचन्द्र धारण गरेपछि पार्वती चन्द्रघण्टाका नामले प्रसिद्ध हुनुभयो। अन्य विवरणमी विवाहका लागि शिव भयङ्कर स्वरूपमी आइपुग्दा पार्वतीले अस्त्रशस्त्रसहितको स्वरूप धारण गोरिया उल्लेख छ।<ref name="Sharma2025">{{cite book |last=Sharma |first=Yatendra |title=Hindu Festivals |publisher=Giri Trading Agency Private Limited |date=4 June 2025 |page=189 |isbn=978-81-7950-959-3 |url=https://www.google.co.in/books/edition/Hindu_Festivals/elxjEQAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&pg=PT189&printsec=frontcover |language=en }}</ref><ref name="MythoWorld2021">{{cite web |title=Chandraghanta – The Married Form of Durga |url=https://www.mythoworld.com/chandraghanta-the-married-form-of-durga/ |website=Mytho World |date=17 April 2021 |access-date=13 October 2026 }}</ref><ref name="DrikPanchang" /> शिव रे पार्वतीको विवाहसम्बन्धी यस्तै एउटा कथा ''[[शिव पुराण]]''मी पनि पाइन्छ। यसको ''रुद्र संहिता'' अन्तर्गतको ''पार्वती खण्ड''मी शिव असामान्य तथा भयङ्कर रूप भएका प्राणीहरूको समूहसहित विवाहस्थलमी आइपुग्नुभएको वर्णन छ। शिवलाई वृषभमी सवार, पाँच मुख रे तीन नेत्र भएका, जटाधारी, अर्धचन्द्र धारण गरेका, शरीरभरि भस्म लेपिएका तथा हातमी अस्त्रशस्त्र लिएका रूपमी वर्णन गरिएको छ। शिवको यस्तो स्वरूप देखेर पार्वतीकी आमा मेना भयभीत भई अचेत हुनुभयो।<ref name="ShastriSP43">{{cite book |editor-last=Shastri |editor-first=J. L. |title=The Siva-Purana |series=Ancient Indian Tradition and Mythology |volume=II |publisher=Motilal Banarsidass |location=Delhi |year=1970 |chapter=Rudra Samhita, Parvati Khanda, Chapter 43 |at=verses 59–65 |url=https://archive.org/details/SivaPuranaJ.L.ShastriPart2/page/n191/mode/2up |via=Internet Archive |language=en }}</ref> होसमी फर्किएपछि मेनाले विवाहप्रति आपत्ति जनाउँदै शिवको भयङ्कर स्वरूपका कारण उहाँलाई अस्वीकार गर्नुभयो। नारदले शिवले आफ्नो दिव्य लीलाको अंशस्वरूप यस्तो रूप धारण गर्नुभएको हो भनी व्याख्या गर्नुभयो। तथापि, मेनाले विवाहको विरोध गर्न छोड्नुभएन।<ref name="ShastriSP44">{{cite book |editor-last=Shastri |editor-first=J. L. |title=The Siva-Purana |series=Ancient Indian Tradition and Mythology |volume=II |publisher=Motilal Banarsidass |location=Delhi |year=1970 |chapter=Rudra Samhita, Parvati Khanda, Chapter 44 |at=verses 26–32 and 68–72 |url=https://archive.org/details/SivaPuranaJ.L.ShastriPart2/page/n195/mode/2up |via=Internet Archive |language=en }}</ref> त्यसपछिको अध्यायमी नारद शिवकहाँ पुगेर उहाँको स्तुति गर्नुहुन्छ। त्यसपछि शिवले ''अत्यन्त उत्कृष्ट रे दिव्य स्वरूप'' भनी वर्णन गरिएको रूप धारण गर्नुभयो। मेनाले शिवलाई तेजस्वी, मुस्कुराइरहनुभएको रे सुन्दर आभूषणले सजिएको अवस्थामी देख्नुभयो। उनले शिवलाई पार्वतीका वरका रूपमी स्वीकार गर्दै पहिले बोलेका वचनहरू क्षमा गरिदिन अनुरोध गर्नुभयो रे उहाँसामु नतमस्तक हुनुभयो।<ref name="ShastriSP45">{{cite book |editor-last=Shastri |editor-first=J. L. |title=The Siva-Purana |series=Ancient Indian Tradition and Mythology |volume=II |publisher=Motilal Banarsidass |location=Delhi |year=1970 |chapter=Rudra Samhita, Parvati Khanda, Chapter 45 |at=verses 1–24 |url=https://archive.org/details/SivaPuranaJ.L.ShastriPart2/page/n197/mode/2up |via=Internet Archive |language=en }}</ref> रमेश मेनोनद्वारा गरिएको आधुनिक संक्षिप्त पुनर्कथनमी पनि मेनाले शिवको स्वरूपप्रति आपत्ति जनाएको रे त्यसपछि शिवले मनमोहक स्वरूप धारण गर्नुभएको कथा वर्णन गरिएको छ।<ref name="Menon2006">{{cite book |last=Menon |first=Ramesh |title=Siva Purana: The Ancient Book of Siva |year=2006 |url=https://archive.org/details/siva-purana-the-ancient-book-of-siva/page/n197/mode/2up |via=Internet Archive |language=en }}</ref> ''शिव पुराण''का उद्धृत अध्यायमी पार्वतीलाई चन्द्रघण्टाका रूपमी पहिचान गरिएको नाईथिन, न त यस घटनाका क्रममी उहाँले चन्द्रघण्टाको स्वरूप धारण गर्नुभएको उल्लेख छ।<ref name="ShastriSP43" /><ref name="ShastriSP44" /><ref name="ShastriSP45" /> == वाराणसीको चित्रघण्टा मन्दिर == [[वाराणसी]]को चौक क्षेत्रमी चित्रघण्टा देवी मन्दिरका नामले परिचित एक मन्दिर अवस्थित छ। स्थानीय मन्दिरसम्बन्धी विवरणमी चित्रघण्टा देवीलाई चन्द्रघण्टासँग अभिन्न रूपमी सम्बन्धित मानिएको छ। उक्त विवरणअनुसार, उहाँ दुर्गाको तेस्रो स्वरूप हुनुहुन्छ रे नवरात्रिको तेस्रो दिन उहाँको पूजा गरिन्छ।<ref name="VaranasiTemple">{{cite web |title=Chitra Ghanta Devi |url=https://varanasitemples.in/category/devi-temples/chitra-ghanta-devi/ |website=Varanasi Temples |language=en |access-date=13 October 2026 }}</ref> उक्त विवरणमी देवीलाई स्वर्णिम वर्ण भएकी, दस हात भएकी, विभिन्न अस्त्रशस्त्र धारण गरेकी तथा सिंहमा सवार भएकी देवीका रूपमी वर्णन गरिएको छ। यसमी ''काशी खण्ड''लाई उद्धृत गर्दै चित्रकूप, चित्रगुप्तेश्वर रे चित्रघण्टा देवीको मन्दिरसँग सम्बन्धित स्थानीय तीर्थयात्रा परम्पराको पनि उल्लेख गरिएको छ।<ref name="VaranasiTemple" /> == सन्दर्भहरू == {{Reflist}} p37gpv1mgpnztcd42u7aha2lqcxo33h कुशमन्दा 0 26719 268321 2026-10-18T17:23:53Z Ramesh Deuba 3534 नयाँ लेख 268321 wikitext text/x-wiki {{Infobox deity | type = हिन्दू | image = Kushmanda Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG | caption = कुशमन्दाको मूर्ति | name = कूष्माण्डा | affiliation = [[दुर्गा]]; [[नवदुर्गा]] | god_of = सृष्टि तथा सौर ऊर्जा | mantra = ''सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च<br />दधानाः हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे'' | weapon = जलपात्र, धनुष, बाण, कमल, अमृतकलश, चक्र, गदा तथा जपमाला | mount = सिंह }} '''कुशमन्दा''' [[नवदुर्गा]] परम्पराकी चौथी देवी हुन्। यस परम्परामी [[नवरात्रि]]का नौ दिनसम्म क्रमशः [[दुर्गा]]का नौ स्वरूपको पूजा गरिन्छ। नवरात्रिको चौथो दिन कुशमन्दाको उपासना गरिन्छ।<ref name="Dalal2010">{{cite book |last=Dalal |first=Roshen |title=Hinduism: An Alphabetical Guide |publisher=Penguin Books India |year=2010 |page=126 |isbn=978-0-14-341421-6 |url=https://books.google.com/books?id=DH0vmD8ghdMC&pg=PA126 |language=en }}</ref> ''नव दुर्गा'' नामक भक्तिपरक पुस्तकमी प्रस्तुत विवरणअनुसार, उहाँले आफ्नो मुस्कानद्वारा आदिम अन्धकारमी प्रकाश फैलाउनुहुन्छ, जसबाटी ब्रह्माण्डीय अण्ड रे प्रकट ब्रह्माण्डको उत्पत्ति हुन्छ।<ref name="GitaPressCatalogue">{{cite web |title=Nava Durga Hindi |url=https://gitapress.org/product/nava-durga-hindi |website=Gita Press |publisher=Gita Press |location=Gorakhpur |language=hi |access-date=13 October 2026 }}</ref><ref name="NavaDurgaScan">{{cite book |title=Nava Durga |publisher=Gita Press |location=Gorakhpur |language=hi |url=https://archive.org/details/HindiBookNavaDurgaByGitaPress/page/n3/mode/2up |via=Internet Archive |access-date=13 October 2026 }}</ref> == नवदुर्गामध्ये स्थान == ''[[देवी माहात्म्य|दुर्गा सप्तशती]]''को पाठसँग सम्बन्धित रूपमी परम्परागत रूपमी पाठ गरिने ''[https://stotrams.com/stotra/devi-mahatmyam-devi-kavacham/english देवी कवच]''मी कुशमन्दालाई नौ दुर्गामध्ये चौथो देवीका रूपमी उल्लेख गरिएको छ। यसका श्लोक ३–५ मी निम्नानुसार वर्णन गरिएको छ।<ref name="DeviKavacha">{{cite web |title=Devī Kavacam |url=https://sanskritdocuments.org/doc_devii/dkavach.html |website=Sanskrit Documents |language=sa |at=verses 3–5 |access-date=13 October 2026 }}</ref> {{blockquote| प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी ।<br /> तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ॥ ३॥<br /> पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च ।<br /> सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम् ॥ ४॥<br /> नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः ।<br /> उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना ॥ ५॥ }} यस क्रममी शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कुशमन्दा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी रे सिद्धिदात्री रहेका छन्।<ref name="DeviKavacha" /> यी श्लोकहरूले नवदुर्गा समूहमी कूष्माण्डाको स्थान स्पष्ट पार्छन्, तर उहाँको छुट्टै कथा वा शारीरिक स्वरूपको वर्णन गर्दैनन्।<ref name="DeviKavacha" /> ==ब्रह्माण्डको उत्पत्ति रे सौर चरित्र== ''नवदुर्गा'' मी वर्णित विवरणअनुसार, सृष्टिको उत्पत्तिअघि कुनै पनि प्रकट ब्रह्माण्डको अस्तित्व थिएन रे चारैतिर अन्धकार व्याप्त थियो। कुशमन्दाले आफ्नो मन्द मुस्कानद्वारा ब्रह्माण्डीय अण्डाको सृजना गरिन्, जसले सृष्टिको आरम्भलाई सङ्केत गर्दछ। उक्त विवरणमी ब्रह्माण्डीय अण्डासँगको यही सम्बन्धका आधारमी उनको नामको व्याख्या गरिएको छ।<ref name="NavaDurgaScan" /> यस परम्परामी कुशमन्दालाई दुर्गाको सृजनात्मक शक्तिको एक स्वरूपका रूपमी बुझिन्छ। ब्रह्माण्डीय अण्डाको सृजना गर्ने उनको कार्यले अप्रकट अन्धकारको अवस्थाबाटी प्रकाश रे सुव्यवस्थित ब्रह्माण्डतर्फको सङ्क्रमणलाई प्रतिनिधित्व गर्दछ।<ref name="NavaDurgaScan" /> समकालीन भक्तिपरक वर्णनहरूमी पनि उनलाई ब्रह्माण्डीय अण्डा, आदिम ऊष्मा तथा ब्रह्माण्डलाई प्रकट स्वरूप प्रदान गर्ने ऊर्जासँग सम्बन्धित मानिएको छ।<ref name="HinduismOutlook">{{cite web |title=देवी कुष्माण्डा – महत्त्व, मन्त्र, कथा तथा पर्वहरू |url=https://hinduismoutlook.com/maa-kushmanda-devi-story-mantra/ |website=Hinduism Outlook |access-date=13 October 2026 }}</ref><ref name="LalitaChandika">{{cite web |last=Saraswati |first=Pushpa |title=कुष्माण्डा देवी |url=https://www.lalitachandika.org/post/kusmanda-devi |website=Lalita Chandika |date=16 October 2019 |access-date=13 October 2026 }}</ref> यसै परम्परामी कुशमन्दाको निवास सूर्यलोकमी रहेको उल्लेख गरिएको छ, जहाँ उनी सूर्यको तेज सहन सक्ने शक्ति राख्छिन् भन्ने मान्यता छ। उनको तेजलाई सूर्यको तेजसँग तुलना गरिएको छ रे अन्य प्राणीहरूको तेज पनि उनकै शक्तिबाटी उत्पन्न हुने वर्णन गरिएको छ।<ref name="NavaDurgaScan" /> त्यसैले भक्तिपरक साहित्यमी उनलाई ''सूर्यमण्डलान्तर्वासिनी'' अर्थात् ‘सूर्यमण्डलभित्र निवास गर्ने देवी’ का रूपमी समेत चिनिन्छ।<ref name="HinduismOutlook" /> यो सम्बन्धले कुष्माण्डालाई सूर्यभित्र क्रियाशील रही त्यसलाई शक्ति प्रदान गर्ने देवीका रूपमी प्रस्तुत गर्दछ, न कि सूर्यदेव [[सूर्य]] को अर्को नामका रूपमी।<ref name="NavaDurgaScan" /><ref name="HinduismOutlook" /> ==स्वरूप रे आयुधहरू== कुशमन्दालाई दुर्गाको आठ हातयुक्त स्वरूपका रूपमी चित्रण गरिन्छ, त्यसैले उनलाई अष्टभुजा देवी पनि भनिन्छ। ''नवदुर्गा'' मी वर्णित विवरणअनुसार, उनका हातमी कलश, धनुष, बाण, कमल, अमृतपात्र, चक्र, गदा रे जपमाला रहेका छन्। उक्त विवरणमी जपमालालाई आठ सिद्धि रे नौ निधिसँग सम्बन्धित मानिएको छ। उनको वाहन सिंह हो।<ref name="NavaDurgaScan" /> आठ हातयुक्त स्वरूप, आयुधहरू रे सिंहवाहनले कुशमन्दालाई दुर्गाको व्यापक मूर्तिशास्त्रीय परम्पराभित्र प्रस्तुत गर्दछन्। तथापि, कुष्माण्डा दुर्गाकै एक स्वरूप हुन् भन्ने पहिचान यी दृश्यात्मक विशेषताहरूका आधारमी मात्र नभई, नवदुर्गामध्ये उनको समावेश भएको शास्त्रीय उल्लेखका आधारमी स्थापित हुन्छ।<ref name="DeviKavacha" /><ref name="NavaDurgaScan" /> उनको स्वरूपसँग सम्बन्धित संस्कृत प्रार्थना यस प्रकार छ: {{blockquote| सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च ।<br /> दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे ॥ }} यस प्रार्थनामी कमलसदृश आफ्ना हातमी अनुष्ठानमी प्रयोग हुने पात्रहरू धारण गरेकी कुशमन्दालाई आह्वान गर्दै आफूलाई कल्याण प्रदान गर्न प्रार्थना गरिएको छ।<ref name="NavaDurgaScan" /> यसको एउटा अङ्ग्रेजी अनुवादमी ती पात्रहरूमध्ये एउटालाई दिव्य अमृतले भरिएको कलश रे अर्कोलाई रगतले लतपतिएको पात्रका रूपमी व्याख्या गरिएको छ।<ref name="KushmandaPrayer">{{cite web |title=माता कुष्माण्डाको मन्त्र |url=https://shlokam.org/shloka/maa-kushmanda-mantra.htm |website=Shlokam |language=sa, en |access-date=13 October 2026 }}</ref> कुशमन्दाको मूर्तिशास्त्रीय वर्णनमी पूर्ण एकरूपता पाइँदैन। अर्को प्रकाशित विवरणमा उनका आठदेखि दसवटासम्म हात रहेको उल्लेख छ। उक्त विवरणमी उनका आयुध तथा वस्तुहरूमध्ये त्रिशूल, तरबार रे अङ्कुशलाई पनि समावेश गरिएको छ भने उनको वाहन बाघ भएको बताइएको छ।<ref name="Srikala2024">{{cite book |last=Srikala |first=B. |author2=Ramaprasad S. |title=Lalitha Sahasranamam with Meanings |volume=1 |publisher=Pustaka Digital Media |date=19 September 2024 |page=236 |url=https://books.google.com/books?id=tlMrEQAAQBAJ&pg=RA1-PT236 |language=en }}</ref> यसरी, विभिन्न चित्रणमी उनका हातमी रहेका वस्तुहरू तथा सिंह वा बाघमध्ये वाहनको विवरण फरक-फरक पाइन्छ।<ref name="NavaDurgaScan" /><ref name="Srikala2024" /><ref name="HinduismOutlook" /> संस्कृत शब्द ''कुशमन्दा'' को प्रयोग फर्सी वा कुभिण्डोजस्ता फलका लागि पनि गरिन्छ। ''नवदुर्गा'' मी वर्णित विवरणले यस फलको अर्पणलाई देवीसँग सम्बन्धित गरेको छ रे यसलाई उनको नामको अर्को व्याख्याका रूपमी प्रस्तुत गरेको छ।<ref name="NavaDurgaScan" /> ==नवरात्रिमी पूजा== नवरात्रिको चौथो दिन कुशमन्दाको पूजाआराधना गरिन्छ। ''नवदुर्गा'' मी प्रस्तुत योगसम्बन्धी व्याख्याअनुसार, पूजाको यस चरणलाई [[अनाहत]] चक्रसँग सम्बन्धित मानिन्छ। साधकलाई एकाग्रता रे मनको शुद्धतासहित देवीको स्वरूपमी ध्यान गर्न निर्देश दिइएको छ।<ref name="NavaDurgaScan" /> भक्तिपरम्परामी देवीको आराधनालाई कष्टबाटी मुक्ति तथा दीर्घायु, शक्ति, स्वास्थ्य रे कल्याणको प्राप्तिसँग सम्बन्धित मानिन्छ। यी देवीको पूजाबाटी प्राप्त हुने लाभसम्बन्धी धार्मिक मान्यताहरू हुन्।<ref name="NavaDurgaScan" /> == दुर्गाकुण्डस्थित कुशमन्दा मन्दिर == स्थानीय मान्यताअनुसार, कुशमन्दालाई [[वाराणसी]]स्थित [[दुर्गा मन्दिर, वाराणसी|दुर्गाकुण्ड]] मी पूजिने देवीसँग अभिन्न रूपमी सम्बन्धित मानिन्छ। भक्तिपरक विवरणमी यस मन्दिरलाई कुष्माण्डाको पूजाआराधनाको प्रमुख केन्द्रका रूपमी वर्णन गरिएको छ रे विशेष गरी नवरात्रिको चौथो दिनसँग यसको सम्बन्ध उल्लेख गरिएको छ।<ref name="HinduBlogTemple">{{cite web |last=Rajendran |first=Abhilash |title=वाराणसी दुर्गाकुण्ड माता कुष्माण्डा मन्दिरको नवरात्रि महोत्सव २०२६ |url=https://www.hindu-blog.com/2024/01/varanasi-durga-kund-kushmanda-temple-navratri.html |website=Hindu Blog |access-date=13 October 2026 }}</ref> एक मन्दिरसम्बन्धी मार्गदर्शिकामी दुर्गाकुण्डस्थित कुशमन्दा मन्दिरलाई काशीको प्राचीन पवित्र भौगोलिक परम्पराभित्र अवस्थित अठारौँ शताब्दीको मन्दिरका रूपमी वर्णन गरिएको छ। उक्त विवरणले हालको मन्दिरसँग सम्बन्धित ऐतिहासिक कालखण्ड रे देवीसँग सम्बन्धित प्राचीन धार्मिक परम्परालाई अलग-अलग रूपमी प्रस्तुत गरेको छ।<ref name="DharmaRenaissanceTemple">{{cite web |title=वाराणसीस्थित माता कुष्माण्डा देवी मन्दिर: इतिहास र दर्शन |url=https://blog.dharma-renaissance.org/temples/maa-kushmanda-devi-temple-in-varanasi-history-and-darshan/ |website=DharmaRenaissance Blog |date=3 September 2026 |access-date=13 October 2026 }}</ref> अठारौँ शताब्दीको मितिसम्बन्धी विवरण रे मन्दिरको विशिष्ट पहिचानका लागि उपलब्ध अनलाइन स्रोतहरू पुरातात्त्विक सर्वेक्षण नभई भक्तिपरक मन्दिरसम्बन्धी मार्गदर्शिकाहरू हुन्। त्यसैले यी विवरणहरूलाई स्थानीय तथा भक्तिपरक मान्यताका रूपमा प्रस्तुत गरिएको छ।<ref name="HinduBlogTemple" /><ref name="DharmaRenaissanceTemple" /> ==यो पनि हेर्नुहोस्== * [[नवदुर्गा]] * [[दुर्गा]] * [[नवरात्रि]] ==सन्दर्भहरू== {{Reflist}} {{authority control}} 7t29usiyl9140mmrnfwv3rln6juz9fk स्कन्दमाता 0 26720 268323 2026-10-19T04:42:26Z Ramesh Deuba 3534 नयाँ लेख 268323 wikitext text/x-wiki {{Infobox deity | type = हिन्दु | image = Skandamata Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG | caption = स्कन्दमाताको चित्रण | name = स्कन्दमाता | affiliation = [[नवदुर्गा]] | abode = [[कैलाश पर्वत]] | mantra = ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः<br><br>सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया<br>शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी | weapon = | consort = [[शिव]] | mount = [[सिंह]] | planet = [[चन्द्रमा]] | children = [[कार्तिकेय]] | deity_of = मातृत्वकी देवी<ref>{{cite book | title=Menstruation Across Cultures: The Sabarimala Confusion—A Historical Perspective | date=26 August 2021 | publisher=Global Collective Publishers | isbn=978-1-954021-15-0 | url=https://books.google.com/books?id=rRFDEAAAQBAJ&pg=PA278 }}</ref> }} '''स्कन्दमाता''' <ref name="Nagar1998">{{cite book|author=Shanti Lal Nagar|title=Indian Gods and Goddesses: Hindu, Jain, and Buddhist Goddesses|url=https://books.google.com/books?id=iX7XAAAAMAAJ|year=1998|page=43|publisher=B.R. Publishing Corporation|isbn=978-81-7646-497-0}}</ref> हिन्दु देवी [[महादेवी]]को एक स्वरूप हुन्, जईलाई युद्धका देवता [[कार्तिकेय]] (स्कन्द) की माताको रूपमी पूजा अद्दहान ।<ref name="Tripāṭhī2000">{{cite book|author=Bhāgīrthaprasāda Tripāṭhī|title=Shakti, Shiva, and Yoga|url=https://books.google.com/books?id=84vXAAAAMAAJ|year=2000|page=60|publisher=Yagyoga Chetana Pītham|isbn=9788185570136 }}</ref> उन [[नवदुर्गा]] मध्येकी पाँचौँ देवी हुन् तब [[नवरात्रि]]को पाँचौँ दिनमी उनको उपासना अद्दहान। ==प्रतिमा == स्कन्दमाता [[चतुर्भुजा]] (चार हात भएकी), तीन आँखा भएकी रे [[वाहन]]को रूपमी सिंह भएकी देवी हुन्। उनको एक हातले भय नाशक [[अभय मुद्रा]] प्रदर्शन गर्दछ भने अर्को हातले आफ्नो काखमी बालक स्वरूपका छोरा स्कन्दलाई समातेको देखाइन्छ। उनका बाँकी दुई तल्लो हातमी सामान्यतया कमलको फूल हुन्छ। उहाँको वर्ण उज्यालो (गोरो) छ। उनलाई प्रायः कमलको फूलमी बसिरहेको चित्रण गरिने हुनाले, कतिपय अवस्थामी ''पद्मासना'' पनि भान्ना हान ।<ref>{{Cite book |last=Naik |first=Prof Katta Narasimha Reddy, Prof E. Siva Nagi Reddy, Prof K. Krishna |url=https://books.google.com/books?id=prCqEAAAQBAJ&pg=PA375 |title=Kalyana Mitra: Volume 5: Art |date=2023-01-31 |publisher=Blue Rose Publishers |pages=375 |language=en}}</ref> == पौराणिक कथा == [[शिव पुराण]]का अनुसार, [[पार्वती]]सँगको विवाहपछि [[शिव]] आफ्नो निवासस्थान [[कैलाश]]मी सन्न्यास लिई उनीसँग हजार वर्षसम्म रतिमी लीन हुनाहान।<ref>{{Cite book |last=Shastri |first=J. L. |url=https://books.google.com/books?id=tkfmDwAAQBAJ&pg=PA472 |title=The Siva Purana Part 2: Ancient Indian Tradition and Mythology Volume 2 |date=2000-01-01 |publisher=Motilal Banarsidass |isbn=978-81-208-3869-7 |pages=472 |language=en}}</ref> यस अवधिमी, [[तारकासुर]] नामक [[असुर]]को वध गर्न सक्ने पुत्रको अझै जन्म नभएकोमी देवताहरू चिन्तित हुनाहान। शिवलाई बाधा पुर्‍याउन हिचकिचाए तापनि, [[विष्णु]] रे [[ब्रह्मा]]को नेतृत्वमी उनीहरू शिवको दर्शन गर्न कैलाश पुग्छन्। देवताहरूको प्रार्थना स्वीकार गर्दै शिवले आफ्नो वीर्य जमिनमी खसाल्छन्। देवताहरूको आग्रहमी, [[अग्नि]]ले ढुकुरको रूप धारण गरी त्यसलाई नष्ट हुन नदिन निल्छन्, तर त्यसको तेजले उनलाई जलन हुन थाल्छ। यस हस्तक्षेपबाटी असन्तुष्ट भएकी पार्वतीले देवताहरूलाई स्वार्थी भएको आरोप लगाउँदै आफ्नो पतिसँगको मिलनमी बाधा पुर्‍याएकोमी रुष्ट हुन्छिन्। शिवको निर्देशन अनुसार, अग्निले उक्त वीर्य सात ऋषिहरूमध्येका छ [[सप्तर्षि|ऋषि]]का पत्नीहरूले बिहानी स्नान गर्ने स्थानमी राखिदिन्छन्। ती पत्नीहरू गर्भवती हुन्छन् रे त्यसको प्रभाव सहन नसकी उनीहरूले भ्रूणको रूपमी वीर्य त्याग गर्छन् जसलाई [[गङ्गा नदी|गङ्गा]] नदीले धारण गर्छिन्।<ref>{{Cite book |last=Books |first=Kausiki |url=https://books.google.com/books?id=ffZLEAAAQBAJ&pg=PT11 |title=Siva Purana: Rudra Samhitha: 4 Kumara Khanda: English Translation only without Slokas |date=2021-10-24 |publisher=Kausiki Books |pages=11 |language=en}}</ref> यही भ्रूणबाटी मार्गशीर्ष महिनाको शुक्ल पक्षको षष्ठी तिथिका दिन [[कार्तिकेय]]को जन्म हुन्छ। पार्वतीले बालकलाई स्तनपान गराई पालनपोषण गर्छिन् रे देवताहरूले यो जन्मको उत्सव मनाउँछन्। पार्वतीको यही ममतामयी रे पालनपोषण गर्ने स्वरूपलाई '''स्कन्दमाता''' भनिन थालिन्छ। अन्ततः कार्तिकेयले तारकासुरको वध गरी ब्रह्माण्डमी पुनः सुव्यवस्था कायम गर्ने आफ्नो लक्ष्य पूरा गर्छन्।<ref>{{Cite book |last=Shastri |first=J. L. |url=https://books.google.com/books?id=tkfmDwAAQBAJ&dq=a&pg=PA756 |title=The Siva Purana Part 2: Ancient Indian Tradition and Mythology Volume 2 |date=2000-01-01 |publisher=Motilal Banarsidass |isbn=978-81-208-3869-7 |pages=756 |language=en}}</ref> == सन्दर्भ सामग्रीहरू == {{सन्दर्भसूची}} [[श्रेणी:हिन्दु देवीहरू]] [[श्रेणी:नवदुर्गाहरू]] e7qox792i2krv7y92m0i82b92jvyesc कात्यायनी 0 26721 268324 2026-10-19T04:51:56Z Ramesh Deuba 3534 नयाँ लेख 268324 wikitext text/x-wiki {{Infobox deity | type = हिन्दु | image = Katyayani Sanghasri 2010 Arnab Dutta.JPG | caption = कात्यायनीको [[मूर्ति]] | name = कात्यायनी | affiliation = [[दुर्गा]]को [[अवतार]] | god_of = शक्तिकी देवी | abode = कैलाश | Devanagari = कात्यायनी | mantra = ॐ देवी कात्यायन्यै नमः<br><br>चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना<br>कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी | weapon = [[तलवार|खड्ग]], [[कमल]], अभयमुद्रा, वरदमुद्रा | mount = [[सिंह]] | father = [[कात्यायन]] | planet = [[मङ्गल ग्रह|मङ्गल]] | consort = [[शिव]] }} '''कात्यायनी''' हिन्दु देवी [[महादेवी]]को एक रूप हुन्, जईलाई अत्याचारी असुर [[महिषासुर]]को वध गर्ने देवीको रूपमी पूजा गरिन्छ। उनी [[नवदुर्गा]]मध्ये छैटौँ रूप भएकाले [[नवरात्रि]]को छैटौँ दिनमी उनकोको पूजा गरिन्छ।<ref name=asso>{{Cite web |url=http://www.s-a-i.info/assoc_change/navarathri_5_6.html |title=The Sixth form of Durga |access-date=2009-06-14 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170511140031/http://www.s-a-i.info/assoc_change/navarathri_5_6.html |archive-date=2017-05-11 |url-status=dead }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20170511140031/http://www.s-a-i.info/assoc_change/navarathri_5_6.html |date=2017-05-11 }}</ref> [[शक्तिवाद]]मी, उनलाई [[शक्ति]] वा दुर्गाको उग्र रूपहरूसँग जोडेर हेरिन्छ, जसमी योद्धा देवी [[भद्रकाली]] रे [[चण्डिका]] पनि समावेश छन्।<ref>''Religious beliefs and practices of North India during the early medieval period'', by Vibhuti Bhushan Mishra. Published by BRILL, 1973. {{ISBN|90-04-03610-5}}. ''Page 22''.</ref> == प्रतिमा == कात्यायनीलाई सामान्यतया चारवटा हात भएकी, सिंहमा सवार, रे हातमी खड्ग (तलवार) तथा कमलको फूल लिएकी देवीको रूपमी चित्रण गरिन्छ। उनका बाँकी दुई हातहरू क्रमशः [[अभयमुद्रा|अभय]] रे [[वरदमुद्रा|वरद]] [[मुद्रा]]मी हुन्छन्, जसलाई सुरक्षा रे वरदानको प्रतीक मानिन्छ। उनीलाई प्रायः सुनौलो रे उज्यालो वर्ण, उग्र आँखा रे दिव्य आभूषणले सुसज्जित रूपमी देखाइन्छ। उनको स्वरूप उग्र भए तापनि, उहाँको अनुहारमी करुणा रे ममता झल्कन्छ, जसले भक्तहरूको संरक्षक रे माताको रूपमी उनको भूमिकालाई स्पष्ट पर्दछ।<ref name="asso" /> परम्परागत रूपमी कात्यायनीलाई शक्तिको आदिम रूप [[पार्वती]] जस्तै रातो रङ्गसँग जोडेर हेरिन्छ। यो तथ्य ईसापूर्व दोस्रो शताब्दीमी [[पाणिनी]]को सूत्रमाथि [[पतञ्जलि]]द्वारा लिखित [[महाभाष्य]]मी पनि उल्लेख गरिएको छ।<ref>''Devī-māhātmya: the crystallization of the goddess tradition'', by Thomas B. Coburn. Published by Motilal Banarsidass Publ., 1988. {{ISBN|81-208-0557-7}}. ''Page 240''.</ref> [[योग]] रे [[तन्त्र]] जस्ता हिन्दु परम्परामी, उनलाई छैटौँ [[आज्ञा चक्र]] वा 'तेस्रो आँखा'सँग सम्बन्धित मानिन्छ, रे यसै बिन्दुमी ध्यान केन्द्रित गरेर आशीर्वाद प्राप्त गर्ने गरिन्छ। == उत्पत्ति == कात्यायनीको पहिलो उल्लेख [[यजुर्वेद]]को [[तैत्तिरीय आरण्यक]] खण्डमी पाइन्छ। [[स्कन्द पुराण]]का अनुसार, उहाँको उत्पत्ति देवताहरूको सामूहिक क्रोधबाटी भएको थियो, जसको परिणामस्वरूप सिंहमा सवार भई असुर महिषासुरको वध सम्भव हुन्छ। यो अवसर भारतका धेरैजसो भागमी वार्षिक [[दुर्गा पूजा]] महोत्सवको रूपमी मनाइन्छ।<ref name="vam">[https://www.sacred-texts.com/hin/hmvp/hmvp34.htm#page_306 CHAPTER VII. UMĀ.] ''Hindu Mythology, Vedic and Puranic'', by W.J. Wilkins. 1900. ''page 306''</ref> कात्यायनीका वीरतापूर्ण कार्यहरूको वर्णन [[देवीभागवत पुराण]] रे [[देवी माहात्म्यम्]]मी गरिएको छ, जुन ऋषि [[मार्कण्डेय]]द्वारा लगभग ईसा संवत् ४००-५०० तिर संस्कृतमी लेखिएको [[मार्कण्डेय पुराण]]को अंश हो। समयक्रमसँगै, उनको उपस्थिति बौद्ध रे जैन ग्रन्थहरूका साथै विभिन्न तान्त्रिक ग्रन्थमी पनि देखा पर्दछ, विशेष गरी १०औँ शताब्दीको [[कालिका पुराण]]मी, जहाँ 'उड्डियान' वा 'ओड्रदेश' ([[ओडिसा]]) लाई कात्यायनी रे [[जगन्नाथ]]को स्थानको रूपमी उल्लेख गरिएको छ।<ref>[https://books.google.com/books?id=DbxE8zOuRbUC&dq=Katyayani&pg=PA9 Uddiyana Pitha] ''Iconography of the Buddhist Sculpture of Orissa: Text'', by Thomas E. Donaldson, Indira Gandhi National Centre for the Arts. Abhinav Publications, 2001. {{ISBN|81-7017-406-6}}. ''Page 9''.</ref> == सन्दर्भ सामग्रीहरू == {{सन्दर्भसूची}} [[श्रेणी:हिन्दु देवीहरू]] 1lojfwc93hmcvuuo30q1u7xiub5y8ln कालरात्रि 0 26722 268326 2026-10-19T05:24:07Z Ramesh Deuba 3534 नयाँ लेख 268326 wikitext text/x-wiki {{Infobox deity<!--Wikipedia:WikiProject Hindu mythology--> | type = हिन्दू | name = कालरात्रि | image = Kalratri_Sanghasri_2010_Arnab_Dutta.JPG | caption = कालरात्रि देवीको मूर्ति | Devanagari = | Sanskrit_transliteration = | script_name = | script = | affiliation = | god_of = शुभता रे साहसकी देवी | abode = | mantra = एकवेणी जपकर्णपुरा नग्न कालरात्री भीषणा{{!}} दंष्ट्रकराल्वदनं घोरं मुक्तकेश्वरम्{{!}}{{!}} ललजतक्षं लंबोष्टिं शतकर्णं तथैव च{{!}} वामपादोल्लासोल्लोह लतकन्तकभूशणम्{{!}}{{!}} | weapon = देदीप्यमान [[वज्र]] रे हँसिया, अभयमुद्रा तथा वरदमुद्रा | consort = [[शिव]] | mount = [[खच्चर]] वा [[गधा]] | planet = [[राहु]] | member_of = [[नवदुर्गा]] }}'''कालरात्रि''' देवी [[महादेवी]]का नौवटा [[नवदुर्गा]] स्वरूपमध्ये सातौँ स्वरूप हुन्। उनको पहिलो उल्लेख [[देवीमाहात्म्य]]मी पाइन्छ। कालरात्रि देवीको उग्र तथा भयङ्कर स्वरूपमध्ये एक हुन्।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/blogs/the-photo-blog/9-days-9-avatars-be-ferocious-like-goddess-kaalratri/|title=९ दिन, ९ अवतार: देवी कालरात्रिजस्तै उग्र बन्नुहोस्|date=7 October 2016 }}</ref><ref>{{cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/religion/festivals/navratri-2022-day-7-maa-kaalratri-colour-story-significance-benefits-and-mantra/articleshow/94583969.cms|title=नवरात्रि २०२२ को सातौँ दिन: माता कालरात्रिको महत्त्व|website = [[The Times of India]]|date=2022-10-02}}</ref> 'काली' रे 'कालरात्रि' नामलाई एकअर्काको पर्यायका रूपमी प्रयोग गरिएको पाइन्छ।<ref>{{Cite web|url=http://www.kamakotimandali.com/misc/mokshapuri.html|title=Mokshapuri Kashi|website=www.kamakotimandali.com|access-date=2016-04-13|archive-date=2016-04-22|archive-url=https://web.archive.org/web/20160422074938/http://www.kamakotimandali.com/misc/mokshapuri.html|url-status=dead}}</ref> यद्यपि, केही विद्वान्हरूले यी दुई देवीलाई अलग-अलग स्वरूप वा अस्तित्वका रूपमी व्याख्या गरेका छन्।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=gCpuAAAAMAAJ|title=Culture, Tribal History, and Freedom Movement: Dr. N.K. Sahu Commemoration Volume|last=Mishra|first=P. K.|date=1989-01-01|publisher=Agam Kala Prakashan|language=en}}</ref> हिन्दू धर्मग्रन्थमी कालीको उल्लेख एक विशिष्ट देवीका रूपमी करिब ईसापूर्व ३०० तिर [[महाभारत]]मी पाइन्छ। महाभारतको रचनाकाल ईसापूर्व पाँचौँदेखि दोस्रो शताब्दीको बीचमी रहेको मानिन्छ, यद्यपि यसको मौखिक परम्परा त्योभन्दा धेरै पुरानो समयदेखि प्रचलित रहेको हुन सक्ने सम्भावना छ। कालरात्रिको पूजा परम्परागत रूपमी [[नवरात्रि]] पर्वका नौ रातमी गरिन्छ।<ref name="asso">[http://www.silambam.asia/god.html दुर्गाको सातौँ स्वरूप] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131216054403/http://www.silambam.asia/god.html |date=2013-12-16 }}</ref> विशेषगरी नवरात्रिको सातौँ दिन उनकै आराधनाका लागि समर्पित छ। उनलाई देवीको सबैभन्दा उग्र स्वरूप मानिन्छ, जसको रूप देख्दा नै भय उत्पन्न हुन्छ। यस स्वरूपकी देवीलाई समस्त दानवीय शक्तिहरू, प्रेत, दुष्ट आत्मा तथा नकारात्मक ऊर्जाको विनाश गर्ने देवीका रूपमी विश्वास गरिन्छ। उनको आगमनको आभास पाउनासाथ ती सबै दुष्ट शक्तिहरू भाग्ने जनविश्वास रहेको छ।<ref name="vedic">{{cite web|last=Saraswati|first=Yogi Ananda|title=कालरात्रि|url=http://vedicgoddess.weebly.com/3/post/2012/8/kalaratri-by-yogi-ananda-saraswati.html|publisher=vedicgoddess.weebly.com|access-date=19 December 2012}}</ref> ''[[सौधिकागम]]''<ref>{{cite book |url=https://www.academia.edu/resource/work/53338171|title=A Brief Introduction to Saudhikagama |first=Sadananda|last=Das|year=2006|publisher=[[Motilal Banarsidass]]|isbn=81-208-2944-1}}</ref> नामक प्राचीन तान्त्रिक ग्रन्थ, जसको उल्लेख ''[[शिल्पप्रकाश]]''मी गरिएको छ,<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=itQUAAAAIAAJ|title=Silpa Prakasa Medieval Orissan Sanskrit Text on Temple Architecture|year=1966|publisher=Brill Archive}}</ref> ले कालरात्रि देवीलाई प्रत्येक पात्रो दिवसको रात्रिकालीन अवधिमाथि शासन गर्ने देवीका रूपमी वर्णन गरेको छ। उनलाई शिरोभागमी अवस्थित [[चक्र (योग)|चक्र]] अर्थात् [[सहस्रार चक्र]]सँग पनि सम्बन्धित मानिन्छ। यस चक्रको आराधनाबाटी उपासकले [[सिद्धि]] (अलौकिक शक्ति वा क्षमता) तथा [[निधि]] (ऐश्वर्य वा धनसम्पत्ति) प्राप्त गर्ने विश्वास गरिन्छ। विशेषगरी ज्ञान, शक्ति रे धनलाई यसका प्रमुख उपलब्धिका रूपमी लिइन्छ। कालरात्रिलाई ''शुभङ्करी'' (शुभंकरी) नामले पनि चिनिन्छ। संस्कृतमी यस नामको अर्थ 'शुभ फल प्रदान गर्ने' भन्ने हुन्छ। आफ्ना भक्तहरूलाई सधैँ सकारात्मक फल प्रदान गर्ने विश्वासका कारण उनलाई यो नाम दिइएको हो। त्यसैले कालरात्रिको आराधनाले भक्तहरूलाई निर्भय बनाउँछ भन्ने धार्मिक मान्यता छ। यस देवीका अन्य कम प्रचलित नामहरूमी रौद्री रे धूमर्णा पनि पर्दछन्।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=uC8VAAAAIAAJ|title=Commemorative Figures|date=1982-01-01|publisher=Brill Archive|isbn=9004067795|language=en}}</ref> == प्रार्थना == === मन्त्र === ॐ देवी कालरात्र्यै नमः। ओम् देवी कालरात्र्यै नमः। माता कालरात्रिको मन्त्र: या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।<ref>{{cite news|url=https://www.indiatimes.com/trending/social-relevance/navratri-2022-day-7-maa-kalaratri-maha-saptami-puja-vidhi-shubh-muhurat-mantras-bhog-and-aarti-lyrics-581007.html|title=नवरात्रि २०२२, सातौँ दिन: माता कालरात्रि तथा महा सप्तमीको पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मन्त्र, भोग र आरतीका शब्द|website= [[Indiatimes]]|date=2022-10-01}}</ref> ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमः। सप्तमं कालरात्रिति। सप्तमं कालरात्र्यै नमः। <ref>{{Cite web |date=3 November 2024 |title=कालरात्रि माता मन्त्र |url=https://bhagwatgeeta.co.in/kaalratri-mata-mantra/ |access-date=3 November 2024 |website=BhagwatGeeta}}</ref> ॐ ऐं ह्रीं क्लीं श्री कालरात्रि सर्व वश्यं कुरु कुरु वीर्यं देहि देहि गणैश्वर्यै नमः। === ध्यान मन्त्र === करालवन्दना घोरां मुक्तकेशी चतुर्भुजाम्। कालरात्रिं करालिकां दिव्यां विद्युत्माला विभूषिताम्॥<ref>{{cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/religion/rituals-puja/navratri-7th-day-maa-kalaratri-mantra-puja-vidhi/articleshow/78782402.cms|title=नवरात्रिको सातौँ दिन: माता कालरात्रिको मन्त्र तथा पूजा विधि|website=[[The Times of India]]|date=2020-10-23}}</ref> लिप्यन्तरण: Karālavandanā ghorāṃ muktakeśī caturbhujām। Kālarātriṃ karālikāṃ divyāṃ vidyutmālā vibhūṣitām॥ == मन्दिरहरू == * कालरात्रि मन्दिर, [[वाराणसी]] — डी. ८/१७, कालिका गल्लीमी अवस्थित छ। यो गल्ली अन्नपूर्णा–विश्वनाथ मन्दिर क्षेत्रसँग समानान्तर रहेको छ।<ref>{{Cite web|title=Google Maps|url=https://www.google.com/maps/place/Adi+Shakti+Kaalratri+Temple/@25.3101882,83.0106347,3a,75y,90t/data=!3m8!1e2!3m6!1sdnLBYxVYgskAAAQYfe0E2g!2e0!3e3!6s//lh4.googleusercontent.com/proxy/hEz6PbBfHH8XXa6w6rh3b2zYGda-HOAO6RPtOUGjA1_XX5Fpry5gbRcMOiz8yXcqzUVyruXdpc76mvS98ygzBkj2itpIje-nP2ehQsE1KZQLOfCz6zIcRNIEAFAtYWaO0q1pys2oGFmUwsAY-xhRBHqNds0=w86-h152-k-no!7i1600!8i2844!4m8!1m2!2m1!1sKalratri+-Varanasi+Temple,+D.8/17,+Kalika+Galli,varanasi,+India!3m4!1s0x398e2e1e5d7dcc49:0x90ffaf7bdb8594b5!8m2!3d25.3101749!4d83.010633|access-date=2020-10-22|website=Google Maps|language=en}}</ref> * कालरात्रि मन्दिर, डुमरी बुजुर्ग, [[नयागाउँ, बिहार|नयागाउँ]], [[बिहार]]।<ref>{{cite web|url=https://www.jagran.com/bihar/saran-maa-kalratri-pujnotsav-tommorow-16576979.html|title=माँ कालरात्रि का वार्षिक पूजनोत्सव समारोह कल}}</ref> * कालरात्रि मन्दिर, [[विन्ध्याचल]], [[मिर्जापुर]], [[उत्तर प्रदेश]]। * कालरात्रि मन्दिर, [[पटियाला]], [[पञ्जाब]]। * कालरात्रि मन्दिर, [[सङ्गरूर]], [[पञ्जाब]]। == यो पनि हेर्नुहोस् == * [[कालभैरव]] == सन्दर्भहरू == {{Reflist}} pniaqltl5s1kp7zhp61kzhm0dxdpuhm