विकिपीडिया
hiwiki
https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0
MediaWiki 1.47.0-wmf.12
first-letter
मीडिया
विशेष
वार्ता
सदस्य
सदस्य वार्ता
विकिपीडिया
विकिपीडिया वार्ता
चित्र
चित्र वार्ता
मीडियाविकि
मीडियाविकि वार्ता
साँचा
साँचा वार्ता
सहायता
सहायता वार्ता
श्रेणी
श्रेणी वार्ता
प्रवेशद्वार
प्रवेशद्वार वार्ता
TimedText
TimedText talk
मॉड्यूल
मॉड्यूल वार्ता
Event
Event talk
विकिपीडिया:चौपाल
4
1001
6591368
6587626
2026-07-23T17:38:18Z
Shivraj sahu sk
937856
/* Shivraj sahu mamli */ नया अनुभाग
6591368
wikitext
text/x-wiki
{{/शीर्ष}}
<!-- इस लाइन को न हटायें। नए अनुभाग पृष्ठ पर सबसे नीचे बनायें। -->
== Deletion of non free images which are not linked to any article ==
Sorry for posting in English. Non free fair use images are not permitted if they are not used in any article. such images are to be deleted as it will be a copyright violation. There are 111 non free images in te.wiki which are not linked to any article. they need to be deleted. For kind attention. {{ping|DreamRimmer}} {{ping|SM7}} {{ping|अजीत कुमार तिवारी }} {{ping|अनिरुद्ध कुमार}} {{ping|संजीव कुमार }}
#[[:file:1000_Bangladeshi_taka_Obs_2011.jpg]]
#[[:file:10_INR_Obs_2017.jpg]]
#[[:file:10_INR_Rev_2017.jpg]]
#[[:file:Amazing_Spider-Man_teaser_poster.jpg]]
#[[:file:AnandabazarFront.JPG]]
#[[:file:Andpictures.png]]
#[[:file:Anupamaa.jpg]]
#[[:file:Avengers_Assemble_-_Music_From_And_Inspired_By_The_Motion_Picture.jpg]]
#[[:file:Avengers_Infinity_War_soundtrack_cover.jpg]]
#[[:file:Baahubali_poster.jpg]]
#[[:file:Bairan_Banjaare_.png]]
#[[:file:Barfi!_Audio_CD.jpg]]
#[[:file:Batman_begins.jpg]]
#[[:file:BiggBoss10.jpg]]
#[[:file:Bigmagic.jpeg]]
#[[:file:BournePoster.jpg]]
#[[:file:Bumblebee_(film)_poster.png]]
#[[:file:Cars_2006.jpg]]
#[[:file:Casino_Royale_3.jpg]]
#[[:file:Colors_TV.svg.png]]
#[[:file:Crime_Patrol_Satark.jpg]]
#[[:file:DHTCD.jpg]]
#[[:file:Dabbe-_Curse_of_the_Jinn_poster.jpg]]
#[[:file:Dear_Zindagi_Soundtrack.png]]
#[[:file:Dhoom_series.JPG]]
#[[:file:Die_another_Day_-_UK_cinema_poster.jpg]]
#[[:file:Don_album.jpg]]
#[[:file:Eragon_Teaser_Poster_10.jpg]]
#[[:file:Fast_Five_poster.jpg]]
#[[:file:Fast_and_Furious4.jpg]]
#[[:file:Fast_and_the_furious_poster.jpg]]
#[[:file:FastandFurious6-teaserposter.jpg]]
#[[:file:Filmfare_awards.jpg]]
#[[:file:First_Phantom_Sunday_strip.jpg]]
#[[:file:Free_Guy_Theatrical_First_Poster.jpg]]
#[[:file:Geraftaarfilm.jpg]]
#[[:file:Google_Play_screenshot.png]]
#[[:file:Gunday_(2013_film).jpg]]
#[[:file:Gurdas-Maan-Roti.jpg]]
#[[:file:Hacked_film_poster.jpg]]
#[[:file:Harry_Potter_and_the_Goblet_of_Fire_Poster.jpg]]
#[[:file:Harry_Potter_and_the_Order_of_the_Phoenix_poster.jpg]]
#[[:file:Harry_Potter_and_the_Prisoner_of_Azkaban_poster.png]]
#[[:file:Himmatjaunpurii.jpg]]
#[[:file:Images.jpg]]
#[[:file:IndianOcean_desertRain.jpg]]
#[[:file:IndianoceanKandisa.jpg]]
#[[:file:Jaishankar_Prasad,1889-1937.jpg]]
#[[:file:Jkkk.jpg]]
#[[:file:Justice_League_(soundtrack).jpg]]
#[[:file:Laal_Singh_Chaddha.jpg]]
#[[:file:LinkinParkATSCover.jpg]]
#[[:file:Linkin_park_hybrid_theory.jpg]]
#[[:file:Main_baabul_ke_Des.png]]
#[[:file:Manchester_City.png]]
#[[:file:MeteoraLP.jpg]]
#[[:file:Minutes_to_Midnight_cover.jpg]]
#[[:file:Neelkamal_1947.jpg]]
#[[:file:New_PSG.png]]
#[[:file:Nil_Battey_Sannata_(cover).jpg]]
#[[:file:Os_kii_bunda.jpg]]
#[[:file:Pagglait_poster.jpg]]
#[[:file:Pepsi_IPL_logo.png]]
#[[:file:Php-logo-90.png]]
#[[:file:Pon_de_Replay_cover.png]]
#[[:file:Race_2_2013.jpg]]
#[[:file:Rihanna_-_Music_of_the_Sun.png]]
#[[:file:Rock_On_2_poster.jpg]]
#[[:file:Saiyaara_film_poster.jpg]]
#[[:file:Sohan_Singh_Bhakna.jpg]]
#[[:file:Sony_Pix_new_logo.png]]
#[[:file:Sony_Wah_new_logo.png]]
#[[:file:Sony_Yay_new_logo.png]]
#[[:file:Spain_National_Football_Team_badge.png]]
#[[:file:Spider-Man_Far_From_Home_Soundtrack_Cover.jpg]]
#[[:file:Spider-Man_Into_the_Spider-Verse_(2018_poster).png]]
#[[:file:Swachchhand.jpg]]
#[[:file:Terminator1984movieposter.jpg]]
#[[:file:Terminator2poster.jpg]]
#[[:file:The-dirty-picture.jpg]]
#[[:file:The_Amazing_Spiderman_2.jpg]]
#[[:file:The_Incredible_Hulk_poster.jpg]]
#[[:file:The_Matrix_soundtrack_cover.jpg]]
#[[:file:Transformers07.jpg]]
#[[:file:Troy2004Poster.jpg]]
#[[:file:Wonder_Woman_1984.jpg]]
#[[:file:आप_से_मौसिकी.jpg]]
#[[:file:आयरन_मैन_२_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:एक_पहेली_लीला_एल्बम_कवर.jpg]]
#[[:file:एक्स-मेन_ऑरिजिंस-_वूल्वरिन_फिल्म_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:एक्स-मैन_फिल्म_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:कबाली_-_फिल्म_.jpg]]
#[[:file:घोस्ट_राइडर_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:जॉन_कार्टर_फ़िल्म_पोस्टर.jpg]]
#[[:file:डेस्पासिटो.png]]
#[[:file:डॉक्टर_सट्रेंज-फिल्म_पोस्टर.jpg]]
#[[:file:तुम_ही_हो.jpg]]
#[[:file:नट_बोल्टू.png]]
#[[:file:पद्मावत_(फ़िल्म_एल्बम).jpg]]
#[[:file:पार्टी_विद_द_भूतनाथ.jpg]]
#[[:file:बालवीर_रिटर्न्स.png]]
#[[:file:यहाँ_मैं_घर_घर_खेली.jpg]]
#[[:file:यार_ना_मिले.jpg]]
#[[:file:रक्षा_बंधन.png]]
#[[:file:लाहौर_चिह्न.jpg]]
#[[:file:शपथ_लाइफ_ओके.jpg]]
#[[:file:समुंदर_के_लुटेरे-_अन्तिम_घडी_पोस्टर.jpeg]]
#[[:file:सोनिक_निकलोडियन.webp]]
#[[:file:सौदागर.jpg]]
#[[:file:स्कायफॉल_फिल्म_पोस्टर_और_हिंदी_वीसीडी.png]]
#[[:file:हैरी_पॉटर_और_रहस्यमयी_तहख़ाना_फिल्म_डीवीडी_कवर.jpeg]]
[[सदस्य:Balajijagadesh|Balajijagadesh]] ([[सदस्य वार्ता:Balajijagadesh|वार्ता]]) 09:04, 14 जुलाई 2026 (UTC)
:{{सुनो प्रबंधक}} मेंशन बिना हस्ताक्षर के किया गया था; अतः पिंग प्रणाली के कार्य न करने से किसी के पास मेंशन की अधिसूचना नहीं पहुँची। प्रबंधकों को दुबारा पिंग किया जा रहा।
:उपर्युक्त में से कई तो ऐसे चित्र हैं जिनका उपयोग संभवतः बाद के संपादनों में हट गया लगता है। उदाहरण के लिये फिल्मों के पोस्टर, जबकि फ़िल्म पर लेख मौजूद है। ऐसे चित्रों को दुबारा फ़िल्म ज्ञानसंदूक में जोड़ा जा सकता है। {{पिंग|हिंदुस्थान वासी}} जी शायद कुछ मदद कर पायें।
:जिन्हें किसी लेख में नहीं जोड़ा जा सकता उन्हें हटा दिया जाना चाहिये।--[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 12:33, 14 जुलाई 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:SM7|SM7]] जी और @[[सदस्य:Balajijagadesh|Balajijagadesh]] जी, मैं ऐसे चित्रों की हर कुछ माह से समीक्षा करता हूँ। हालांकि आधे चित्र पुनरीक्षण के अभाव में हटाये हुये होते हैं अतः इनका पुनरीक्षण करना पड़ेगा। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 17:12, 15 जुलाई 2026 (UTC)
::ऐसा ही कुछ हुआ होगा। यदि केवल इतने ही चित्र ऐसे हैं तो समीक्षा करके हटाए या रखे जा सकते हैं। [[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|<font color="80 00 80">हिंदुस्थान वासी</font>]]<sup> ''' [[सदस्य वार्ता:हिंदुस्थान वासी|वार्ता]]''' </sup> 07:01, 16 जुलाई 2026 (UTC)
:::@[[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|हिंदुस्थान वासी]] नमस्ते। समीक्षा में नहीं इन्हें वापस उन संबंधित लेखों में जोड़ने के कार्य में मदद माँग रहा था, क्योंकि आपकी रुचि फिल्मों में है। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 08:11, 16 जुलाई 2026 (UTC)
::::अच्छा। बात तो वही आएगी पर। यदि नए चित्र पोस्टर के तौर पर लगा दिए गए हैं। तो इनका शीह नामांकन ही होगा। पक्का तो नहीं कह सकता। लेकिन इनको देखेंगे का प्रयत्न करूंगा। [[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|<font color="80 00 80">हिंदुस्थान वासी</font>]]<sup> ''' [[सदस्य वार्ता:हिंदुस्थान वासी|वार्ता]]''' </sup> 08:24, 16 जुलाई 2026 (UTC)
== धर्मजित जिज्ञासु पर हिंदी विकिपीडिया पृष्ठ बनाने का अनुरोध ==
30 जनवरी 1948 को बिड़ला भवन में महात्मा गांधी की हत्या के समय वहाँ उपस्थित थे। इस संबंध में अनेक वीडियो, समाचार सामग्री और पुस्तकों में उल्लेख उपलब्ध हैं। चूँकि यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है, मेरा मानना है कि उन पर एक पृष्ठ (पेज) आरंभ किया जाना चाहिए।
मैं धर्मजित जिज्ञासु (8 नवंबर 1915 – 30 मार्च 2006) पर हिंदी विकिपीडिया पर एक पृष्ठ आरंभ करने का अनुरोध कर रहा हूँ। वे भारत के एक स्वतंत्रता सेनानी, आर्य समाजी और योग शिक्षक थे।
वे 30 जनवरी 1948 को बिड़ला भवन (नई दिल्ली) में महात्मा गांधी की हत्या के समय वहाँ उपस्थित थे और अन्य लोगों के साथ मिलकर गांधीजी के पार्थिव शरीर को प्रार्थना स्थल से भवन के भीतर ले जाने में सहयोग देने वालों में से एक थे।
इसके अतिरिक्त, वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदार रहे — वर्ष 1932 में भागीदारी के चलते उन्हें दिल्ली जेल में बंदी बनाया गया, और 1930 के दशक में वे ब्रिटिश सरकार से बचने हेतु भूमिगत भी रहे। बाद में वे अमेरिका चले गए, जहाँ उन्होंने 1979 में न्यूयॉर्क में आर्य समाज हिंदू संस्था की स्थापना की और योग पर एक पुस्तक भी लिखी।
इस विषय की पुष्टि हेतु उपलब्ध विश्वसनीय स्रोतों में शामिल हैं:
CBS News, "Mahatma Gandhi & My Grandfather," 1 फरवरी 2007
GandhiServe वीडियो संग्रह
Vedic Sarvadeshik (द आर्य समाज), नवंबर 2023 अंक
prabook.com जीवनी प्रविष्टि
फूलचंद जैन, "स्वतंत्रता सेनानी ग्रंथमाला-10, दिल्ली के स्वतंत्रता सेनानी", कॉन्सेप्ट पब्लिशिंग कंपनी, नई दिल्ली, 1999
प्रो. चिंतामणि शुक्ल, "मथुरा जनपद का राजनैतिक इतिहास", शुक्ल प्रकाशन, मथुरा, 1983
चंद्रमोहन उपाध्याय, "सोनई गाँव की संघर्ष गाथा", निखिल पब्लिशर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स, आगरा
चूँकि यह विषय भारतीय इतिहास की एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना से जुड़ा है और पर्याप्त विश्वसनीय स्रोतों द्वारा समर्थित है, मेरा मानना है कि इस पर एक विश्वकोशीय पृष्ठ होना उचित रहेगा। मैंने संदर्भों सहित एक प्रारंभिक मसौदा भी तैयार किया है, जिसे आवश्यकतानुसार साझा किया जा सकता है।
धन्यवाद,
== Shivraj sahu mamli ==
shivraj sahu mamli jinka real name shivraj sahu hai vo pese se ek farmer hai jo apne village me farming karte hai unki hobby kabaddi hai or vo YouTubeer bhi rah chuke hai jinke 100000 subscribe hai or unki instagram profile name @shivasahusk ke name se hai or unka Facebook profile shivrajsahu012 ke name se hai unko sabhi bahut pasand karte hai vo abhi unmarried hai lekin sunne me aaya ki vo bhi kisi realation me hai kisi ladki ke sath uski ladki ka name laxmi hai shivraj sahu ke chahne wale bahut hai shivraj sahu mamli jinko singing karna pasand hai or song sunna travling karna riding karna bahut pasand hai vo akasar charcha me rahte hai par vo kbhi showoff nhi karte hai [[सदस्य:Shivraj sahu sk|Shivraj sahu sk]] ([[सदस्य वार्ता:Shivraj sahu sk|वार्ता]]) 17:38, 23 जुलाई 2026 (UTC)
p2h44o56spjyerotxtq6sv3fe2dk019
6591369
6591368
2026-07-23T17:38:48Z
Shivraj sahu sk
937856
/* Shivraj sahu mamli */ उत्तर
6591369
wikitext
text/x-wiki
{{/शीर्ष}}
<!-- इस लाइन को न हटायें। नए अनुभाग पृष्ठ पर सबसे नीचे बनायें। -->
== Deletion of non free images which are not linked to any article ==
Sorry for posting in English. Non free fair use images are not permitted if they are not used in any article. such images are to be deleted as it will be a copyright violation. There are 111 non free images in te.wiki which are not linked to any article. they need to be deleted. For kind attention. {{ping|DreamRimmer}} {{ping|SM7}} {{ping|अजीत कुमार तिवारी }} {{ping|अनिरुद्ध कुमार}} {{ping|संजीव कुमार }}
#[[:file:1000_Bangladeshi_taka_Obs_2011.jpg]]
#[[:file:10_INR_Obs_2017.jpg]]
#[[:file:10_INR_Rev_2017.jpg]]
#[[:file:Amazing_Spider-Man_teaser_poster.jpg]]
#[[:file:AnandabazarFront.JPG]]
#[[:file:Andpictures.png]]
#[[:file:Anupamaa.jpg]]
#[[:file:Avengers_Assemble_-_Music_From_And_Inspired_By_The_Motion_Picture.jpg]]
#[[:file:Avengers_Infinity_War_soundtrack_cover.jpg]]
#[[:file:Baahubali_poster.jpg]]
#[[:file:Bairan_Banjaare_.png]]
#[[:file:Barfi!_Audio_CD.jpg]]
#[[:file:Batman_begins.jpg]]
#[[:file:BiggBoss10.jpg]]
#[[:file:Bigmagic.jpeg]]
#[[:file:BournePoster.jpg]]
#[[:file:Bumblebee_(film)_poster.png]]
#[[:file:Cars_2006.jpg]]
#[[:file:Casino_Royale_3.jpg]]
#[[:file:Colors_TV.svg.png]]
#[[:file:Crime_Patrol_Satark.jpg]]
#[[:file:DHTCD.jpg]]
#[[:file:Dabbe-_Curse_of_the_Jinn_poster.jpg]]
#[[:file:Dear_Zindagi_Soundtrack.png]]
#[[:file:Dhoom_series.JPG]]
#[[:file:Die_another_Day_-_UK_cinema_poster.jpg]]
#[[:file:Don_album.jpg]]
#[[:file:Eragon_Teaser_Poster_10.jpg]]
#[[:file:Fast_Five_poster.jpg]]
#[[:file:Fast_and_Furious4.jpg]]
#[[:file:Fast_and_the_furious_poster.jpg]]
#[[:file:FastandFurious6-teaserposter.jpg]]
#[[:file:Filmfare_awards.jpg]]
#[[:file:First_Phantom_Sunday_strip.jpg]]
#[[:file:Free_Guy_Theatrical_First_Poster.jpg]]
#[[:file:Geraftaarfilm.jpg]]
#[[:file:Google_Play_screenshot.png]]
#[[:file:Gunday_(2013_film).jpg]]
#[[:file:Gurdas-Maan-Roti.jpg]]
#[[:file:Hacked_film_poster.jpg]]
#[[:file:Harry_Potter_and_the_Goblet_of_Fire_Poster.jpg]]
#[[:file:Harry_Potter_and_the_Order_of_the_Phoenix_poster.jpg]]
#[[:file:Harry_Potter_and_the_Prisoner_of_Azkaban_poster.png]]
#[[:file:Himmatjaunpurii.jpg]]
#[[:file:Images.jpg]]
#[[:file:IndianOcean_desertRain.jpg]]
#[[:file:IndianoceanKandisa.jpg]]
#[[:file:Jaishankar_Prasad,1889-1937.jpg]]
#[[:file:Jkkk.jpg]]
#[[:file:Justice_League_(soundtrack).jpg]]
#[[:file:Laal_Singh_Chaddha.jpg]]
#[[:file:LinkinParkATSCover.jpg]]
#[[:file:Linkin_park_hybrid_theory.jpg]]
#[[:file:Main_baabul_ke_Des.png]]
#[[:file:Manchester_City.png]]
#[[:file:MeteoraLP.jpg]]
#[[:file:Minutes_to_Midnight_cover.jpg]]
#[[:file:Neelkamal_1947.jpg]]
#[[:file:New_PSG.png]]
#[[:file:Nil_Battey_Sannata_(cover).jpg]]
#[[:file:Os_kii_bunda.jpg]]
#[[:file:Pagglait_poster.jpg]]
#[[:file:Pepsi_IPL_logo.png]]
#[[:file:Php-logo-90.png]]
#[[:file:Pon_de_Replay_cover.png]]
#[[:file:Race_2_2013.jpg]]
#[[:file:Rihanna_-_Music_of_the_Sun.png]]
#[[:file:Rock_On_2_poster.jpg]]
#[[:file:Saiyaara_film_poster.jpg]]
#[[:file:Sohan_Singh_Bhakna.jpg]]
#[[:file:Sony_Pix_new_logo.png]]
#[[:file:Sony_Wah_new_logo.png]]
#[[:file:Sony_Yay_new_logo.png]]
#[[:file:Spain_National_Football_Team_badge.png]]
#[[:file:Spider-Man_Far_From_Home_Soundtrack_Cover.jpg]]
#[[:file:Spider-Man_Into_the_Spider-Verse_(2018_poster).png]]
#[[:file:Swachchhand.jpg]]
#[[:file:Terminator1984movieposter.jpg]]
#[[:file:Terminator2poster.jpg]]
#[[:file:The-dirty-picture.jpg]]
#[[:file:The_Amazing_Spiderman_2.jpg]]
#[[:file:The_Incredible_Hulk_poster.jpg]]
#[[:file:The_Matrix_soundtrack_cover.jpg]]
#[[:file:Transformers07.jpg]]
#[[:file:Troy2004Poster.jpg]]
#[[:file:Wonder_Woman_1984.jpg]]
#[[:file:आप_से_मौसिकी.jpg]]
#[[:file:आयरन_मैन_२_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:एक_पहेली_लीला_एल्बम_कवर.jpg]]
#[[:file:एक्स-मेन_ऑरिजिंस-_वूल्वरिन_फिल्म_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:एक्स-मैन_फिल्म_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:कबाली_-_फिल्म_.jpg]]
#[[:file:घोस्ट_राइडर_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:जॉन_कार्टर_फ़िल्म_पोस्टर.jpg]]
#[[:file:डेस्पासिटो.png]]
#[[:file:डॉक्टर_सट्रेंज-फिल्म_पोस्टर.jpg]]
#[[:file:तुम_ही_हो.jpg]]
#[[:file:नट_बोल्टू.png]]
#[[:file:पद्मावत_(फ़िल्म_एल्बम).jpg]]
#[[:file:पार्टी_विद_द_भूतनाथ.jpg]]
#[[:file:बालवीर_रिटर्न्स.png]]
#[[:file:यहाँ_मैं_घर_घर_खेली.jpg]]
#[[:file:यार_ना_मिले.jpg]]
#[[:file:रक्षा_बंधन.png]]
#[[:file:लाहौर_चिह्न.jpg]]
#[[:file:शपथ_लाइफ_ओके.jpg]]
#[[:file:समुंदर_के_लुटेरे-_अन्तिम_घडी_पोस्टर.jpeg]]
#[[:file:सोनिक_निकलोडियन.webp]]
#[[:file:सौदागर.jpg]]
#[[:file:स्कायफॉल_फिल्म_पोस्टर_और_हिंदी_वीसीडी.png]]
#[[:file:हैरी_पॉटर_और_रहस्यमयी_तहख़ाना_फिल्म_डीवीडी_कवर.jpeg]]
[[सदस्य:Balajijagadesh|Balajijagadesh]] ([[सदस्य वार्ता:Balajijagadesh|वार्ता]]) 09:04, 14 जुलाई 2026 (UTC)
:{{सुनो प्रबंधक}} मेंशन बिना हस्ताक्षर के किया गया था; अतः पिंग प्रणाली के कार्य न करने से किसी के पास मेंशन की अधिसूचना नहीं पहुँची। प्रबंधकों को दुबारा पिंग किया जा रहा।
:उपर्युक्त में से कई तो ऐसे चित्र हैं जिनका उपयोग संभवतः बाद के संपादनों में हट गया लगता है। उदाहरण के लिये फिल्मों के पोस्टर, जबकि फ़िल्म पर लेख मौजूद है। ऐसे चित्रों को दुबारा फ़िल्म ज्ञानसंदूक में जोड़ा जा सकता है। {{पिंग|हिंदुस्थान वासी}} जी शायद कुछ मदद कर पायें।
:जिन्हें किसी लेख में नहीं जोड़ा जा सकता उन्हें हटा दिया जाना चाहिये।--[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 12:33, 14 जुलाई 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:SM7|SM7]] जी और @[[सदस्य:Balajijagadesh|Balajijagadesh]] जी, मैं ऐसे चित्रों की हर कुछ माह से समीक्षा करता हूँ। हालांकि आधे चित्र पुनरीक्षण के अभाव में हटाये हुये होते हैं अतः इनका पुनरीक्षण करना पड़ेगा। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 17:12, 15 जुलाई 2026 (UTC)
::ऐसा ही कुछ हुआ होगा। यदि केवल इतने ही चित्र ऐसे हैं तो समीक्षा करके हटाए या रखे जा सकते हैं। [[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|<font color="80 00 80">हिंदुस्थान वासी</font>]]<sup> ''' [[सदस्य वार्ता:हिंदुस्थान वासी|वार्ता]]''' </sup> 07:01, 16 जुलाई 2026 (UTC)
:::@[[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|हिंदुस्थान वासी]] नमस्ते। समीक्षा में नहीं इन्हें वापस उन संबंधित लेखों में जोड़ने के कार्य में मदद माँग रहा था, क्योंकि आपकी रुचि फिल्मों में है। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 08:11, 16 जुलाई 2026 (UTC)
::::अच्छा। बात तो वही आएगी पर। यदि नए चित्र पोस्टर के तौर पर लगा दिए गए हैं। तो इनका शीह नामांकन ही होगा। पक्का तो नहीं कह सकता। लेकिन इनको देखेंगे का प्रयत्न करूंगा। [[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|<font color="80 00 80">हिंदुस्थान वासी</font>]]<sup> ''' [[सदस्य वार्ता:हिंदुस्थान वासी|वार्ता]]''' </sup> 08:24, 16 जुलाई 2026 (UTC)
== धर्मजित जिज्ञासु पर हिंदी विकिपीडिया पृष्ठ बनाने का अनुरोध ==
30 जनवरी 1948 को बिड़ला भवन में महात्मा गांधी की हत्या के समय वहाँ उपस्थित थे। इस संबंध में अनेक वीडियो, समाचार सामग्री और पुस्तकों में उल्लेख उपलब्ध हैं। चूँकि यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है, मेरा मानना है कि उन पर एक पृष्ठ (पेज) आरंभ किया जाना चाहिए।
मैं धर्मजित जिज्ञासु (8 नवंबर 1915 – 30 मार्च 2006) पर हिंदी विकिपीडिया पर एक पृष्ठ आरंभ करने का अनुरोध कर रहा हूँ। वे भारत के एक स्वतंत्रता सेनानी, आर्य समाजी और योग शिक्षक थे।
वे 30 जनवरी 1948 को बिड़ला भवन (नई दिल्ली) में महात्मा गांधी की हत्या के समय वहाँ उपस्थित थे और अन्य लोगों के साथ मिलकर गांधीजी के पार्थिव शरीर को प्रार्थना स्थल से भवन के भीतर ले जाने में सहयोग देने वालों में से एक थे।
इसके अतिरिक्त, वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदार रहे — वर्ष 1932 में भागीदारी के चलते उन्हें दिल्ली जेल में बंदी बनाया गया, और 1930 के दशक में वे ब्रिटिश सरकार से बचने हेतु भूमिगत भी रहे। बाद में वे अमेरिका चले गए, जहाँ उन्होंने 1979 में न्यूयॉर्क में आर्य समाज हिंदू संस्था की स्थापना की और योग पर एक पुस्तक भी लिखी।
इस विषय की पुष्टि हेतु उपलब्ध विश्वसनीय स्रोतों में शामिल हैं:
CBS News, "Mahatma Gandhi & My Grandfather," 1 फरवरी 2007
GandhiServe वीडियो संग्रह
Vedic Sarvadeshik (द आर्य समाज), नवंबर 2023 अंक
prabook.com जीवनी प्रविष्टि
फूलचंद जैन, "स्वतंत्रता सेनानी ग्रंथमाला-10, दिल्ली के स्वतंत्रता सेनानी", कॉन्सेप्ट पब्लिशिंग कंपनी, नई दिल्ली, 1999
प्रो. चिंतामणि शुक्ल, "मथुरा जनपद का राजनैतिक इतिहास", शुक्ल प्रकाशन, मथुरा, 1983
चंद्रमोहन उपाध्याय, "सोनई गाँव की संघर्ष गाथा", निखिल पब्लिशर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स, आगरा
चूँकि यह विषय भारतीय इतिहास की एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना से जुड़ा है और पर्याप्त विश्वसनीय स्रोतों द्वारा समर्थित है, मेरा मानना है कि इस पर एक विश्वकोशीय पृष्ठ होना उचित रहेगा। मैंने संदर्भों सहित एक प्रारंभिक मसौदा भी तैयार किया है, जिसे आवश्यकतानुसार साझा किया जा सकता है।
धन्यवाद,
== Shivraj sahu mamli ==
shivraj sahu mamli jinka real name shivraj sahu hai vo pese se ek farmer hai jo apne village me farming karte hai unki hobby kabaddi hai or vo YouTubeer bhi rah chuke hai jinke 100000 subscribe hai or unki instagram profile name @shivasahusk ke name se hai or unka Facebook profile shivrajsahu012 ke name se hai unko sabhi bahut pasand karte hai vo abhi unmarried hai lekin sunne me aaya ki vo bhi kisi realation me hai kisi ladki ke sath uski ladki ka name laxmi hai shivraj sahu ke chahne wale bahut hai shivraj sahu mamli jinko singing karna pasand hai or song sunna travling karna riding karna bahut pasand hai vo akasar charcha me rahte hai par vo kbhi showoff nhi karte hai [[सदस्य:Shivraj sahu sk|Shivraj sahu sk]] ([[सदस्य वार्ता:Shivraj sahu sk|वार्ता]]) 17:38, 23 जुलाई 2026 (UTC)
:nice [[सदस्य:Shivraj sahu sk|Shivraj sahu sk]] ([[सदस्य वार्ता:Shivraj sahu sk|वार्ता]]) 17:38, 23 जुलाई 2026 (UTC)
nae5dxg9g1qjd9x9f52wbucyp43yui4
6591371
6591369
2026-07-23T18:07:28Z
SM7
89247
[[विशेष:योगदान/AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] ([[सदस्य वार्ता:AMAN KUMAR|वार्ता]]) के अवतरण 6587567 पर पुनर्स्थापित
6591371
wikitext
text/x-wiki
{{/शीर्ष}}
<!-- इस लाइन को न हटायें। नए अनुभाग पृष्ठ पर सबसे नीचे बनायें। -->
== Deletion of non free images which are not linked to any article ==
Sorry for posting in English. Non free fair use images are not permitted if they are not used in any article. such images are to be deleted as it will be a copyright violation. There are 111 non free images in te.wiki which are not linked to any article. they need to be deleted. For kind attention. {{ping|DreamRimmer}} {{ping|SM7}} {{ping|अजीत कुमार तिवारी }} {{ping|अनिरुद्ध कुमार}} {{ping|संजीव कुमार }}
#[[:file:1000_Bangladeshi_taka_Obs_2011.jpg]]
#[[:file:10_INR_Obs_2017.jpg]]
#[[:file:10_INR_Rev_2017.jpg]]
#[[:file:Amazing_Spider-Man_teaser_poster.jpg]]
#[[:file:AnandabazarFront.JPG]]
#[[:file:Andpictures.png]]
#[[:file:Anupamaa.jpg]]
#[[:file:Avengers_Assemble_-_Music_From_And_Inspired_By_The_Motion_Picture.jpg]]
#[[:file:Avengers_Infinity_War_soundtrack_cover.jpg]]
#[[:file:Baahubali_poster.jpg]]
#[[:file:Bairan_Banjaare_.png]]
#[[:file:Barfi!_Audio_CD.jpg]]
#[[:file:Batman_begins.jpg]]
#[[:file:BiggBoss10.jpg]]
#[[:file:Bigmagic.jpeg]]
#[[:file:BournePoster.jpg]]
#[[:file:Bumblebee_(film)_poster.png]]
#[[:file:Cars_2006.jpg]]
#[[:file:Casino_Royale_3.jpg]]
#[[:file:Colors_TV.svg.png]]
#[[:file:Crime_Patrol_Satark.jpg]]
#[[:file:DHTCD.jpg]]
#[[:file:Dabbe-_Curse_of_the_Jinn_poster.jpg]]
#[[:file:Dear_Zindagi_Soundtrack.png]]
#[[:file:Dhoom_series.JPG]]
#[[:file:Die_another_Day_-_UK_cinema_poster.jpg]]
#[[:file:Don_album.jpg]]
#[[:file:Eragon_Teaser_Poster_10.jpg]]
#[[:file:Fast_Five_poster.jpg]]
#[[:file:Fast_and_Furious4.jpg]]
#[[:file:Fast_and_the_furious_poster.jpg]]
#[[:file:FastandFurious6-teaserposter.jpg]]
#[[:file:Filmfare_awards.jpg]]
#[[:file:First_Phantom_Sunday_strip.jpg]]
#[[:file:Free_Guy_Theatrical_First_Poster.jpg]]
#[[:file:Geraftaarfilm.jpg]]
#[[:file:Google_Play_screenshot.png]]
#[[:file:Gunday_(2013_film).jpg]]
#[[:file:Gurdas-Maan-Roti.jpg]]
#[[:file:Hacked_film_poster.jpg]]
#[[:file:Harry_Potter_and_the_Goblet_of_Fire_Poster.jpg]]
#[[:file:Harry_Potter_and_the_Order_of_the_Phoenix_poster.jpg]]
#[[:file:Harry_Potter_and_the_Prisoner_of_Azkaban_poster.png]]
#[[:file:Himmatjaunpurii.jpg]]
#[[:file:Images.jpg]]
#[[:file:IndianOcean_desertRain.jpg]]
#[[:file:IndianoceanKandisa.jpg]]
#[[:file:Jaishankar_Prasad,1889-1937.jpg]]
#[[:file:Jkkk.jpg]]
#[[:file:Justice_League_(soundtrack).jpg]]
#[[:file:Laal_Singh_Chaddha.jpg]]
#[[:file:LinkinParkATSCover.jpg]]
#[[:file:Linkin_park_hybrid_theory.jpg]]
#[[:file:Main_baabul_ke_Des.png]]
#[[:file:Manchester_City.png]]
#[[:file:MeteoraLP.jpg]]
#[[:file:Minutes_to_Midnight_cover.jpg]]
#[[:file:Neelkamal_1947.jpg]]
#[[:file:New_PSG.png]]
#[[:file:Nil_Battey_Sannata_(cover).jpg]]
#[[:file:Os_kii_bunda.jpg]]
#[[:file:Pagglait_poster.jpg]]
#[[:file:Pepsi_IPL_logo.png]]
#[[:file:Php-logo-90.png]]
#[[:file:Pon_de_Replay_cover.png]]
#[[:file:Race_2_2013.jpg]]
#[[:file:Rihanna_-_Music_of_the_Sun.png]]
#[[:file:Rock_On_2_poster.jpg]]
#[[:file:Saiyaara_film_poster.jpg]]
#[[:file:Sohan_Singh_Bhakna.jpg]]
#[[:file:Sony_Pix_new_logo.png]]
#[[:file:Sony_Wah_new_logo.png]]
#[[:file:Sony_Yay_new_logo.png]]
#[[:file:Spain_National_Football_Team_badge.png]]
#[[:file:Spider-Man_Far_From_Home_Soundtrack_Cover.jpg]]
#[[:file:Spider-Man_Into_the_Spider-Verse_(2018_poster).png]]
#[[:file:Swachchhand.jpg]]
#[[:file:Terminator1984movieposter.jpg]]
#[[:file:Terminator2poster.jpg]]
#[[:file:The-dirty-picture.jpg]]
#[[:file:The_Amazing_Spiderman_2.jpg]]
#[[:file:The_Incredible_Hulk_poster.jpg]]
#[[:file:The_Matrix_soundtrack_cover.jpg]]
#[[:file:Transformers07.jpg]]
#[[:file:Troy2004Poster.jpg]]
#[[:file:Wonder_Woman_1984.jpg]]
#[[:file:आप_से_मौसिकी.jpg]]
#[[:file:आयरन_मैन_२_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:एक_पहेली_लीला_एल्बम_कवर.jpg]]
#[[:file:एक्स-मेन_ऑरिजिंस-_वूल्वरिन_फिल्म_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:एक्स-मैन_फिल्म_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:कबाली_-_फिल्म_.jpg]]
#[[:file:घोस्ट_राइडर_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:जॉन_कार्टर_फ़िल्म_पोस्टर.jpg]]
#[[:file:डेस्पासिटो.png]]
#[[:file:डॉक्टर_सट्रेंज-फिल्म_पोस्टर.jpg]]
#[[:file:तुम_ही_हो.jpg]]
#[[:file:नट_बोल्टू.png]]
#[[:file:पद्मावत_(फ़िल्म_एल्बम).jpg]]
#[[:file:पार्टी_विद_द_भूतनाथ.jpg]]
#[[:file:बालवीर_रिटर्न्स.png]]
#[[:file:यहाँ_मैं_घर_घर_खेली.jpg]]
#[[:file:यार_ना_मिले.jpg]]
#[[:file:रक्षा_बंधन.png]]
#[[:file:लाहौर_चिह्न.jpg]]
#[[:file:शपथ_लाइफ_ओके.jpg]]
#[[:file:समुंदर_के_लुटेरे-_अन्तिम_घडी_पोस्टर.jpeg]]
#[[:file:सोनिक_निकलोडियन.webp]]
#[[:file:सौदागर.jpg]]
#[[:file:स्कायफॉल_फिल्म_पोस्टर_और_हिंदी_वीसीडी.png]]
#[[:file:हैरी_पॉटर_और_रहस्यमयी_तहख़ाना_फिल्म_डीवीडी_कवर.jpeg]]
[[सदस्य:Balajijagadesh|Balajijagadesh]] ([[सदस्य वार्ता:Balajijagadesh|वार्ता]]) 09:04, 14 जुलाई 2026 (UTC)
:{{सुनो प्रबंधक}} मेंशन बिना हस्ताक्षर के किया गया था; अतः पिंग प्रणाली के कार्य न करने से किसी के पास मेंशन की अधिसूचना नहीं पहुँची। प्रबंधकों को दुबारा पिंग किया जा रहा।
:उपर्युक्त में से कई तो ऐसे चित्र हैं जिनका उपयोग संभवतः बाद के संपादनों में हट गया लगता है। उदाहरण के लिये फिल्मों के पोस्टर, जबकि फ़िल्म पर लेख मौजूद है। ऐसे चित्रों को दुबारा फ़िल्म ज्ञानसंदूक में जोड़ा जा सकता है। {{पिंग|हिंदुस्थान वासी}} जी शायद कुछ मदद कर पायें।
:जिन्हें किसी लेख में नहीं जोड़ा जा सकता उन्हें हटा दिया जाना चाहिये।--[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 12:33, 14 जुलाई 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:SM7|SM7]] जी और @[[सदस्य:Balajijagadesh|Balajijagadesh]] जी, मैं ऐसे चित्रों की हर कुछ माह से समीक्षा करता हूँ। हालांकि आधे चित्र पुनरीक्षण के अभाव में हटाये हुये होते हैं अतः इनका पुनरीक्षण करना पड़ेगा। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 17:12, 15 जुलाई 2026 (UTC)
::ऐसा ही कुछ हुआ होगा। यदि केवल इतने ही चित्र ऐसे हैं तो समीक्षा करके हटाए या रखे जा सकते हैं। [[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|<font color="80 00 80">हिंदुस्थान वासी</font>]]<sup> ''' [[सदस्य वार्ता:हिंदुस्थान वासी|वार्ता]]''' </sup> 07:01, 16 जुलाई 2026 (UTC)
:::@[[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|हिंदुस्थान वासी]] नमस्ते। समीक्षा में नहीं इन्हें वापस उन संबंधित लेखों में जोड़ने के कार्य में मदद माँग रहा था, क्योंकि आपकी रुचि फिल्मों में है। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 08:11, 16 जुलाई 2026 (UTC)
::::अच्छा। बात तो वही आएगी पर। यदि नए चित्र पोस्टर के तौर पर लगा दिए गए हैं। तो इनका शीह नामांकन ही होगा। पक्का तो नहीं कह सकता। लेकिन इनको देखेंगे का प्रयत्न करूंगा। [[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|<font color="80 00 80">हिंदुस्थान वासी</font>]]<sup> ''' [[सदस्य वार्ता:हिंदुस्थान वासी|वार्ता]]''' </sup> 08:24, 16 जुलाई 2026 (UTC)
ql1oayn0ilobpvy5za1onnkk64v8bv8
6591372
6591371
2026-07-23T18:07:46Z
~2026-41160-86
937861
/* Shivraj sahu mamli ke bare me */ नया अनुभाग
6591372
wikitext
text/x-wiki
{{/शीर्ष}}
<!-- इस लाइन को न हटायें। नए अनुभाग पृष्ठ पर सबसे नीचे बनायें। -->
== Deletion of non free images which are not linked to any article ==
Sorry for posting in English. Non free fair use images are not permitted if they are not used in any article. such images are to be deleted as it will be a copyright violation. There are 111 non free images in te.wiki which are not linked to any article. they need to be deleted. For kind attention. {{ping|DreamRimmer}} {{ping|SM7}} {{ping|अजीत कुमार तिवारी }} {{ping|अनिरुद्ध कुमार}} {{ping|संजीव कुमार }}
#[[:file:1000_Bangladeshi_taka_Obs_2011.jpg]]
#[[:file:10_INR_Obs_2017.jpg]]
#[[:file:10_INR_Rev_2017.jpg]]
#[[:file:Amazing_Spider-Man_teaser_poster.jpg]]
#[[:file:AnandabazarFront.JPG]]
#[[:file:Andpictures.png]]
#[[:file:Anupamaa.jpg]]
#[[:file:Avengers_Assemble_-_Music_From_And_Inspired_By_The_Motion_Picture.jpg]]
#[[:file:Avengers_Infinity_War_soundtrack_cover.jpg]]
#[[:file:Baahubali_poster.jpg]]
#[[:file:Bairan_Banjaare_.png]]
#[[:file:Barfi!_Audio_CD.jpg]]
#[[:file:Batman_begins.jpg]]
#[[:file:BiggBoss10.jpg]]
#[[:file:Bigmagic.jpeg]]
#[[:file:BournePoster.jpg]]
#[[:file:Bumblebee_(film)_poster.png]]
#[[:file:Cars_2006.jpg]]
#[[:file:Casino_Royale_3.jpg]]
#[[:file:Colors_TV.svg.png]]
#[[:file:Crime_Patrol_Satark.jpg]]
#[[:file:DHTCD.jpg]]
#[[:file:Dabbe-_Curse_of_the_Jinn_poster.jpg]]
#[[:file:Dear_Zindagi_Soundtrack.png]]
#[[:file:Dhoom_series.JPG]]
#[[:file:Die_another_Day_-_UK_cinema_poster.jpg]]
#[[:file:Don_album.jpg]]
#[[:file:Eragon_Teaser_Poster_10.jpg]]
#[[:file:Fast_Five_poster.jpg]]
#[[:file:Fast_and_Furious4.jpg]]
#[[:file:Fast_and_the_furious_poster.jpg]]
#[[:file:FastandFurious6-teaserposter.jpg]]
#[[:file:Filmfare_awards.jpg]]
#[[:file:First_Phantom_Sunday_strip.jpg]]
#[[:file:Free_Guy_Theatrical_First_Poster.jpg]]
#[[:file:Geraftaarfilm.jpg]]
#[[:file:Google_Play_screenshot.png]]
#[[:file:Gunday_(2013_film).jpg]]
#[[:file:Gurdas-Maan-Roti.jpg]]
#[[:file:Hacked_film_poster.jpg]]
#[[:file:Harry_Potter_and_the_Goblet_of_Fire_Poster.jpg]]
#[[:file:Harry_Potter_and_the_Order_of_the_Phoenix_poster.jpg]]
#[[:file:Harry_Potter_and_the_Prisoner_of_Azkaban_poster.png]]
#[[:file:Himmatjaunpurii.jpg]]
#[[:file:Images.jpg]]
#[[:file:IndianOcean_desertRain.jpg]]
#[[:file:IndianoceanKandisa.jpg]]
#[[:file:Jaishankar_Prasad,1889-1937.jpg]]
#[[:file:Jkkk.jpg]]
#[[:file:Justice_League_(soundtrack).jpg]]
#[[:file:Laal_Singh_Chaddha.jpg]]
#[[:file:LinkinParkATSCover.jpg]]
#[[:file:Linkin_park_hybrid_theory.jpg]]
#[[:file:Main_baabul_ke_Des.png]]
#[[:file:Manchester_City.png]]
#[[:file:MeteoraLP.jpg]]
#[[:file:Minutes_to_Midnight_cover.jpg]]
#[[:file:Neelkamal_1947.jpg]]
#[[:file:New_PSG.png]]
#[[:file:Nil_Battey_Sannata_(cover).jpg]]
#[[:file:Os_kii_bunda.jpg]]
#[[:file:Pagglait_poster.jpg]]
#[[:file:Pepsi_IPL_logo.png]]
#[[:file:Php-logo-90.png]]
#[[:file:Pon_de_Replay_cover.png]]
#[[:file:Race_2_2013.jpg]]
#[[:file:Rihanna_-_Music_of_the_Sun.png]]
#[[:file:Rock_On_2_poster.jpg]]
#[[:file:Saiyaara_film_poster.jpg]]
#[[:file:Sohan_Singh_Bhakna.jpg]]
#[[:file:Sony_Pix_new_logo.png]]
#[[:file:Sony_Wah_new_logo.png]]
#[[:file:Sony_Yay_new_logo.png]]
#[[:file:Spain_National_Football_Team_badge.png]]
#[[:file:Spider-Man_Far_From_Home_Soundtrack_Cover.jpg]]
#[[:file:Spider-Man_Into_the_Spider-Verse_(2018_poster).png]]
#[[:file:Swachchhand.jpg]]
#[[:file:Terminator1984movieposter.jpg]]
#[[:file:Terminator2poster.jpg]]
#[[:file:The-dirty-picture.jpg]]
#[[:file:The_Amazing_Spiderman_2.jpg]]
#[[:file:The_Incredible_Hulk_poster.jpg]]
#[[:file:The_Matrix_soundtrack_cover.jpg]]
#[[:file:Transformers07.jpg]]
#[[:file:Troy2004Poster.jpg]]
#[[:file:Wonder_Woman_1984.jpg]]
#[[:file:आप_से_मौसिकी.jpg]]
#[[:file:आयरन_मैन_२_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:एक_पहेली_लीला_एल्बम_कवर.jpg]]
#[[:file:एक्स-मेन_ऑरिजिंस-_वूल्वरिन_फिल्म_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:एक्स-मैन_फिल्म_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:कबाली_-_फिल्म_.jpg]]
#[[:file:घोस्ट_राइडर_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:जॉन_कार्टर_फ़िल्म_पोस्टर.jpg]]
#[[:file:डेस्पासिटो.png]]
#[[:file:डॉक्टर_सट्रेंज-फिल्म_पोस्टर.jpg]]
#[[:file:तुम_ही_हो.jpg]]
#[[:file:नट_बोल्टू.png]]
#[[:file:पद्मावत_(फ़िल्म_एल्बम).jpg]]
#[[:file:पार्टी_विद_द_भूतनाथ.jpg]]
#[[:file:बालवीर_रिटर्न्स.png]]
#[[:file:यहाँ_मैं_घर_घर_खेली.jpg]]
#[[:file:यार_ना_मिले.jpg]]
#[[:file:रक्षा_बंधन.png]]
#[[:file:लाहौर_चिह्न.jpg]]
#[[:file:शपथ_लाइफ_ओके.jpg]]
#[[:file:समुंदर_के_लुटेरे-_अन्तिम_घडी_पोस्टर.jpeg]]
#[[:file:सोनिक_निकलोडियन.webp]]
#[[:file:सौदागर.jpg]]
#[[:file:स्कायफॉल_फिल्म_पोस्टर_और_हिंदी_वीसीडी.png]]
#[[:file:हैरी_पॉटर_और_रहस्यमयी_तहख़ाना_फिल्म_डीवीडी_कवर.jpeg]]
[[सदस्य:Balajijagadesh|Balajijagadesh]] ([[सदस्य वार्ता:Balajijagadesh|वार्ता]]) 09:04, 14 जुलाई 2026 (UTC)
:{{सुनो प्रबंधक}} मेंशन बिना हस्ताक्षर के किया गया था; अतः पिंग प्रणाली के कार्य न करने से किसी के पास मेंशन की अधिसूचना नहीं पहुँची। प्रबंधकों को दुबारा पिंग किया जा रहा।
:उपर्युक्त में से कई तो ऐसे चित्र हैं जिनका उपयोग संभवतः बाद के संपादनों में हट गया लगता है। उदाहरण के लिये फिल्मों के पोस्टर, जबकि फ़िल्म पर लेख मौजूद है। ऐसे चित्रों को दुबारा फ़िल्म ज्ञानसंदूक में जोड़ा जा सकता है। {{पिंग|हिंदुस्थान वासी}} जी शायद कुछ मदद कर पायें।
:जिन्हें किसी लेख में नहीं जोड़ा जा सकता उन्हें हटा दिया जाना चाहिये।--[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 12:33, 14 जुलाई 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:SM7|SM7]] जी और @[[सदस्य:Balajijagadesh|Balajijagadesh]] जी, मैं ऐसे चित्रों की हर कुछ माह से समीक्षा करता हूँ। हालांकि आधे चित्र पुनरीक्षण के अभाव में हटाये हुये होते हैं अतः इनका पुनरीक्षण करना पड़ेगा। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 17:12, 15 जुलाई 2026 (UTC)
::ऐसा ही कुछ हुआ होगा। यदि केवल इतने ही चित्र ऐसे हैं तो समीक्षा करके हटाए या रखे जा सकते हैं। [[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|<font color="80 00 80">हिंदुस्थान वासी</font>]]<sup> ''' [[सदस्य वार्ता:हिंदुस्थान वासी|वार्ता]]''' </sup> 07:01, 16 जुलाई 2026 (UTC)
:::@[[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|हिंदुस्थान वासी]] नमस्ते। समीक्षा में नहीं इन्हें वापस उन संबंधित लेखों में जोड़ने के कार्य में मदद माँग रहा था, क्योंकि आपकी रुचि फिल्मों में है। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 08:11, 16 जुलाई 2026 (UTC)
::::अच्छा। बात तो वही आएगी पर। यदि नए चित्र पोस्टर के तौर पर लगा दिए गए हैं। तो इनका शीह नामांकन ही होगा। पक्का तो नहीं कह सकता। लेकिन इनको देखेंगे का प्रयत्न करूंगा। [[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|<font color="80 00 80">हिंदुस्थान वासी</font>]]<sup> ''' [[सदस्य वार्ता:हिंदुस्थान वासी|वार्ता]]''' </sup> 08:24, 16 जुलाई 2026 (UTC)
== Shivraj sahu mamli ke bare me ==
shivraj sahu mamli jinka real name shivraj sahu hai vo pese se ek farmer hai jo apne village me farming karte hai unki hobby kabaddi hai or vo YouTubeer bhi rah chuke hai jinke 100000 subscribe hai or unki instagram profile name @shivasahusk ke name se hai or unka Facebook profile shivrajsahu012 ke name se hai unko sabhi bahut pasand karte hai vo abhi unmarried hai lekin sunne me aaya ki vo bhi kisi realation me hai kisi ladki ke sath uski ladki ka name laxmi hai shivraj sahu ke chahne wale bahut hai shivraj sahu mamli jinko singing karna pasand hai or song sunna travling karna riding karna bahut pasand hai vo akasar charcha me rahte hai par vo kbhi showoff nhi karte hai [[विशेष:योगदान/~2026-41160-86|~2026-41160-86]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-41160-86|वार्ता]]) 18:07, 23 जुलाई 2026 (UTC)
sepwrm7mvh1jvuk13wfxgj7t3hyj45j
6591398
6591372
2026-07-24T01:36:05Z
DreamRimmer
651050
[[Special:Contributions/~2026-41160-86|~2026-41160-86]] ([[User talk:~2026-41160-86|Talk]]) के संपादनों को हटाकर [[User:SM7|SM7]] के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया
6591371
wikitext
text/x-wiki
{{/शीर्ष}}
<!-- इस लाइन को न हटायें। नए अनुभाग पृष्ठ पर सबसे नीचे बनायें। -->
== Deletion of non free images which are not linked to any article ==
Sorry for posting in English. Non free fair use images are not permitted if they are not used in any article. such images are to be deleted as it will be a copyright violation. There are 111 non free images in te.wiki which are not linked to any article. they need to be deleted. For kind attention. {{ping|DreamRimmer}} {{ping|SM7}} {{ping|अजीत कुमार तिवारी }} {{ping|अनिरुद्ध कुमार}} {{ping|संजीव कुमार }}
#[[:file:1000_Bangladeshi_taka_Obs_2011.jpg]]
#[[:file:10_INR_Obs_2017.jpg]]
#[[:file:10_INR_Rev_2017.jpg]]
#[[:file:Amazing_Spider-Man_teaser_poster.jpg]]
#[[:file:AnandabazarFront.JPG]]
#[[:file:Andpictures.png]]
#[[:file:Anupamaa.jpg]]
#[[:file:Avengers_Assemble_-_Music_From_And_Inspired_By_The_Motion_Picture.jpg]]
#[[:file:Avengers_Infinity_War_soundtrack_cover.jpg]]
#[[:file:Baahubali_poster.jpg]]
#[[:file:Bairan_Banjaare_.png]]
#[[:file:Barfi!_Audio_CD.jpg]]
#[[:file:Batman_begins.jpg]]
#[[:file:BiggBoss10.jpg]]
#[[:file:Bigmagic.jpeg]]
#[[:file:BournePoster.jpg]]
#[[:file:Bumblebee_(film)_poster.png]]
#[[:file:Cars_2006.jpg]]
#[[:file:Casino_Royale_3.jpg]]
#[[:file:Colors_TV.svg.png]]
#[[:file:Crime_Patrol_Satark.jpg]]
#[[:file:DHTCD.jpg]]
#[[:file:Dabbe-_Curse_of_the_Jinn_poster.jpg]]
#[[:file:Dear_Zindagi_Soundtrack.png]]
#[[:file:Dhoom_series.JPG]]
#[[:file:Die_another_Day_-_UK_cinema_poster.jpg]]
#[[:file:Don_album.jpg]]
#[[:file:Eragon_Teaser_Poster_10.jpg]]
#[[:file:Fast_Five_poster.jpg]]
#[[:file:Fast_and_Furious4.jpg]]
#[[:file:Fast_and_the_furious_poster.jpg]]
#[[:file:FastandFurious6-teaserposter.jpg]]
#[[:file:Filmfare_awards.jpg]]
#[[:file:First_Phantom_Sunday_strip.jpg]]
#[[:file:Free_Guy_Theatrical_First_Poster.jpg]]
#[[:file:Geraftaarfilm.jpg]]
#[[:file:Google_Play_screenshot.png]]
#[[:file:Gunday_(2013_film).jpg]]
#[[:file:Gurdas-Maan-Roti.jpg]]
#[[:file:Hacked_film_poster.jpg]]
#[[:file:Harry_Potter_and_the_Goblet_of_Fire_Poster.jpg]]
#[[:file:Harry_Potter_and_the_Order_of_the_Phoenix_poster.jpg]]
#[[:file:Harry_Potter_and_the_Prisoner_of_Azkaban_poster.png]]
#[[:file:Himmatjaunpurii.jpg]]
#[[:file:Images.jpg]]
#[[:file:IndianOcean_desertRain.jpg]]
#[[:file:IndianoceanKandisa.jpg]]
#[[:file:Jaishankar_Prasad,1889-1937.jpg]]
#[[:file:Jkkk.jpg]]
#[[:file:Justice_League_(soundtrack).jpg]]
#[[:file:Laal_Singh_Chaddha.jpg]]
#[[:file:LinkinParkATSCover.jpg]]
#[[:file:Linkin_park_hybrid_theory.jpg]]
#[[:file:Main_baabul_ke_Des.png]]
#[[:file:Manchester_City.png]]
#[[:file:MeteoraLP.jpg]]
#[[:file:Minutes_to_Midnight_cover.jpg]]
#[[:file:Neelkamal_1947.jpg]]
#[[:file:New_PSG.png]]
#[[:file:Nil_Battey_Sannata_(cover).jpg]]
#[[:file:Os_kii_bunda.jpg]]
#[[:file:Pagglait_poster.jpg]]
#[[:file:Pepsi_IPL_logo.png]]
#[[:file:Php-logo-90.png]]
#[[:file:Pon_de_Replay_cover.png]]
#[[:file:Race_2_2013.jpg]]
#[[:file:Rihanna_-_Music_of_the_Sun.png]]
#[[:file:Rock_On_2_poster.jpg]]
#[[:file:Saiyaara_film_poster.jpg]]
#[[:file:Sohan_Singh_Bhakna.jpg]]
#[[:file:Sony_Pix_new_logo.png]]
#[[:file:Sony_Wah_new_logo.png]]
#[[:file:Sony_Yay_new_logo.png]]
#[[:file:Spain_National_Football_Team_badge.png]]
#[[:file:Spider-Man_Far_From_Home_Soundtrack_Cover.jpg]]
#[[:file:Spider-Man_Into_the_Spider-Verse_(2018_poster).png]]
#[[:file:Swachchhand.jpg]]
#[[:file:Terminator1984movieposter.jpg]]
#[[:file:Terminator2poster.jpg]]
#[[:file:The-dirty-picture.jpg]]
#[[:file:The_Amazing_Spiderman_2.jpg]]
#[[:file:The_Incredible_Hulk_poster.jpg]]
#[[:file:The_Matrix_soundtrack_cover.jpg]]
#[[:file:Transformers07.jpg]]
#[[:file:Troy2004Poster.jpg]]
#[[:file:Wonder_Woman_1984.jpg]]
#[[:file:आप_से_मौसिकी.jpg]]
#[[:file:आयरन_मैन_२_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:एक_पहेली_लीला_एल्बम_कवर.jpg]]
#[[:file:एक्स-मेन_ऑरिजिंस-_वूल्वरिन_फिल्म_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:एक्स-मैन_फिल्म_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:कबाली_-_फिल्म_.jpg]]
#[[:file:घोस्ट_राइडर_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:जॉन_कार्टर_फ़िल्म_पोस्टर.jpg]]
#[[:file:डेस्पासिटो.png]]
#[[:file:डॉक्टर_सट्रेंज-फिल्म_पोस्टर.jpg]]
#[[:file:तुम_ही_हो.jpg]]
#[[:file:नट_बोल्टू.png]]
#[[:file:पद्मावत_(फ़िल्म_एल्बम).jpg]]
#[[:file:पार्टी_विद_द_भूतनाथ.jpg]]
#[[:file:बालवीर_रिटर्न्स.png]]
#[[:file:यहाँ_मैं_घर_घर_खेली.jpg]]
#[[:file:यार_ना_मिले.jpg]]
#[[:file:रक्षा_बंधन.png]]
#[[:file:लाहौर_चिह्न.jpg]]
#[[:file:शपथ_लाइफ_ओके.jpg]]
#[[:file:समुंदर_के_लुटेरे-_अन्तिम_घडी_पोस्टर.jpeg]]
#[[:file:सोनिक_निकलोडियन.webp]]
#[[:file:सौदागर.jpg]]
#[[:file:स्कायफॉल_फिल्म_पोस्टर_और_हिंदी_वीसीडी.png]]
#[[:file:हैरी_पॉटर_और_रहस्यमयी_तहख़ाना_फिल्म_डीवीडी_कवर.jpeg]]
[[सदस्य:Balajijagadesh|Balajijagadesh]] ([[सदस्य वार्ता:Balajijagadesh|वार्ता]]) 09:04, 14 जुलाई 2026 (UTC)
:{{सुनो प्रबंधक}} मेंशन बिना हस्ताक्षर के किया गया था; अतः पिंग प्रणाली के कार्य न करने से किसी के पास मेंशन की अधिसूचना नहीं पहुँची। प्रबंधकों को दुबारा पिंग किया जा रहा।
:उपर्युक्त में से कई तो ऐसे चित्र हैं जिनका उपयोग संभवतः बाद के संपादनों में हट गया लगता है। उदाहरण के लिये फिल्मों के पोस्टर, जबकि फ़िल्म पर लेख मौजूद है। ऐसे चित्रों को दुबारा फ़िल्म ज्ञानसंदूक में जोड़ा जा सकता है। {{पिंग|हिंदुस्थान वासी}} जी शायद कुछ मदद कर पायें।
:जिन्हें किसी लेख में नहीं जोड़ा जा सकता उन्हें हटा दिया जाना चाहिये।--[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 12:33, 14 जुलाई 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:SM7|SM7]] जी और @[[सदस्य:Balajijagadesh|Balajijagadesh]] जी, मैं ऐसे चित्रों की हर कुछ माह से समीक्षा करता हूँ। हालांकि आधे चित्र पुनरीक्षण के अभाव में हटाये हुये होते हैं अतः इनका पुनरीक्षण करना पड़ेगा। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 17:12, 15 जुलाई 2026 (UTC)
::ऐसा ही कुछ हुआ होगा। यदि केवल इतने ही चित्र ऐसे हैं तो समीक्षा करके हटाए या रखे जा सकते हैं। [[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|<font color="80 00 80">हिंदुस्थान वासी</font>]]<sup> ''' [[सदस्य वार्ता:हिंदुस्थान वासी|वार्ता]]''' </sup> 07:01, 16 जुलाई 2026 (UTC)
:::@[[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|हिंदुस्थान वासी]] नमस्ते। समीक्षा में नहीं इन्हें वापस उन संबंधित लेखों में जोड़ने के कार्य में मदद माँग रहा था, क्योंकि आपकी रुचि फिल्मों में है। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 08:11, 16 जुलाई 2026 (UTC)
::::अच्छा। बात तो वही आएगी पर। यदि नए चित्र पोस्टर के तौर पर लगा दिए गए हैं। तो इनका शीह नामांकन ही होगा। पक्का तो नहीं कह सकता। लेकिन इनको देखेंगे का प्रयत्न करूंगा। [[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|<font color="80 00 80">हिंदुस्थान वासी</font>]]<sup> ''' [[सदस्य वार्ता:हिंदुस्थान वासी|वार्ता]]''' </sup> 08:24, 16 जुलाई 2026 (UTC)
ql1oayn0ilobpvy5za1onnkk64v8bv8
6591513
6591398
2026-07-24T09:19:54Z
Pushkar Singh
415569
/* विकी परियोजनाओं का अनुवाद */ नया अनुभाग
6591513
wikitext
text/x-wiki
{{/शीर्ष}}
<!-- इस लाइन को न हटायें। नए अनुभाग पृष्ठ पर सबसे नीचे बनायें। -->
== Deletion of non free images which are not linked to any article ==
Sorry for posting in English. Non free fair use images are not permitted if they are not used in any article. such images are to be deleted as it will be a copyright violation. There are 111 non free images in te.wiki which are not linked to any article. they need to be deleted. For kind attention. {{ping|DreamRimmer}} {{ping|SM7}} {{ping|अजीत कुमार तिवारी }} {{ping|अनिरुद्ध कुमार}} {{ping|संजीव कुमार }}
#[[:file:1000_Bangladeshi_taka_Obs_2011.jpg]]
#[[:file:10_INR_Obs_2017.jpg]]
#[[:file:10_INR_Rev_2017.jpg]]
#[[:file:Amazing_Spider-Man_teaser_poster.jpg]]
#[[:file:AnandabazarFront.JPG]]
#[[:file:Andpictures.png]]
#[[:file:Anupamaa.jpg]]
#[[:file:Avengers_Assemble_-_Music_From_And_Inspired_By_The_Motion_Picture.jpg]]
#[[:file:Avengers_Infinity_War_soundtrack_cover.jpg]]
#[[:file:Baahubali_poster.jpg]]
#[[:file:Bairan_Banjaare_.png]]
#[[:file:Barfi!_Audio_CD.jpg]]
#[[:file:Batman_begins.jpg]]
#[[:file:BiggBoss10.jpg]]
#[[:file:Bigmagic.jpeg]]
#[[:file:BournePoster.jpg]]
#[[:file:Bumblebee_(film)_poster.png]]
#[[:file:Cars_2006.jpg]]
#[[:file:Casino_Royale_3.jpg]]
#[[:file:Colors_TV.svg.png]]
#[[:file:Crime_Patrol_Satark.jpg]]
#[[:file:DHTCD.jpg]]
#[[:file:Dabbe-_Curse_of_the_Jinn_poster.jpg]]
#[[:file:Dear_Zindagi_Soundtrack.png]]
#[[:file:Dhoom_series.JPG]]
#[[:file:Die_another_Day_-_UK_cinema_poster.jpg]]
#[[:file:Don_album.jpg]]
#[[:file:Eragon_Teaser_Poster_10.jpg]]
#[[:file:Fast_Five_poster.jpg]]
#[[:file:Fast_and_Furious4.jpg]]
#[[:file:Fast_and_the_furious_poster.jpg]]
#[[:file:FastandFurious6-teaserposter.jpg]]
#[[:file:Filmfare_awards.jpg]]
#[[:file:First_Phantom_Sunday_strip.jpg]]
#[[:file:Free_Guy_Theatrical_First_Poster.jpg]]
#[[:file:Geraftaarfilm.jpg]]
#[[:file:Google_Play_screenshot.png]]
#[[:file:Gunday_(2013_film).jpg]]
#[[:file:Gurdas-Maan-Roti.jpg]]
#[[:file:Hacked_film_poster.jpg]]
#[[:file:Harry_Potter_and_the_Goblet_of_Fire_Poster.jpg]]
#[[:file:Harry_Potter_and_the_Order_of_the_Phoenix_poster.jpg]]
#[[:file:Harry_Potter_and_the_Prisoner_of_Azkaban_poster.png]]
#[[:file:Himmatjaunpurii.jpg]]
#[[:file:Images.jpg]]
#[[:file:IndianOcean_desertRain.jpg]]
#[[:file:IndianoceanKandisa.jpg]]
#[[:file:Jaishankar_Prasad,1889-1937.jpg]]
#[[:file:Jkkk.jpg]]
#[[:file:Justice_League_(soundtrack).jpg]]
#[[:file:Laal_Singh_Chaddha.jpg]]
#[[:file:LinkinParkATSCover.jpg]]
#[[:file:Linkin_park_hybrid_theory.jpg]]
#[[:file:Main_baabul_ke_Des.png]]
#[[:file:Manchester_City.png]]
#[[:file:MeteoraLP.jpg]]
#[[:file:Minutes_to_Midnight_cover.jpg]]
#[[:file:Neelkamal_1947.jpg]]
#[[:file:New_PSG.png]]
#[[:file:Nil_Battey_Sannata_(cover).jpg]]
#[[:file:Os_kii_bunda.jpg]]
#[[:file:Pagglait_poster.jpg]]
#[[:file:Pepsi_IPL_logo.png]]
#[[:file:Php-logo-90.png]]
#[[:file:Pon_de_Replay_cover.png]]
#[[:file:Race_2_2013.jpg]]
#[[:file:Rihanna_-_Music_of_the_Sun.png]]
#[[:file:Rock_On_2_poster.jpg]]
#[[:file:Saiyaara_film_poster.jpg]]
#[[:file:Sohan_Singh_Bhakna.jpg]]
#[[:file:Sony_Pix_new_logo.png]]
#[[:file:Sony_Wah_new_logo.png]]
#[[:file:Sony_Yay_new_logo.png]]
#[[:file:Spain_National_Football_Team_badge.png]]
#[[:file:Spider-Man_Far_From_Home_Soundtrack_Cover.jpg]]
#[[:file:Spider-Man_Into_the_Spider-Verse_(2018_poster).png]]
#[[:file:Swachchhand.jpg]]
#[[:file:Terminator1984movieposter.jpg]]
#[[:file:Terminator2poster.jpg]]
#[[:file:The-dirty-picture.jpg]]
#[[:file:The_Amazing_Spiderman_2.jpg]]
#[[:file:The_Incredible_Hulk_poster.jpg]]
#[[:file:The_Matrix_soundtrack_cover.jpg]]
#[[:file:Transformers07.jpg]]
#[[:file:Troy2004Poster.jpg]]
#[[:file:Wonder_Woman_1984.jpg]]
#[[:file:आप_से_मौसिकी.jpg]]
#[[:file:आयरन_मैन_२_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:एक_पहेली_लीला_एल्बम_कवर.jpg]]
#[[:file:एक्स-मेन_ऑरिजिंस-_वूल्वरिन_फिल्म_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:एक्स-मैन_फिल्म_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:कबाली_-_फिल्म_.jpg]]
#[[:file:घोस्ट_राइडर_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:जॉन_कार्टर_फ़िल्म_पोस्टर.jpg]]
#[[:file:डेस्पासिटो.png]]
#[[:file:डॉक्टर_सट्रेंज-फिल्म_पोस्टर.jpg]]
#[[:file:तुम_ही_हो.jpg]]
#[[:file:नट_बोल्टू.png]]
#[[:file:पद्मावत_(फ़िल्म_एल्बम).jpg]]
#[[:file:पार्टी_विद_द_भूतनाथ.jpg]]
#[[:file:बालवीर_रिटर्न्स.png]]
#[[:file:यहाँ_मैं_घर_घर_खेली.jpg]]
#[[:file:यार_ना_मिले.jpg]]
#[[:file:रक्षा_बंधन.png]]
#[[:file:लाहौर_चिह्न.jpg]]
#[[:file:शपथ_लाइफ_ओके.jpg]]
#[[:file:समुंदर_के_लुटेरे-_अन्तिम_घडी_पोस्टर.jpeg]]
#[[:file:सोनिक_निकलोडियन.webp]]
#[[:file:सौदागर.jpg]]
#[[:file:स्कायफॉल_फिल्म_पोस्टर_और_हिंदी_वीसीडी.png]]
#[[:file:हैरी_पॉटर_और_रहस्यमयी_तहख़ाना_फिल्म_डीवीडी_कवर.jpeg]]
[[सदस्य:Balajijagadesh|Balajijagadesh]] ([[सदस्य वार्ता:Balajijagadesh|वार्ता]]) 09:04, 14 जुलाई 2026 (UTC)
:{{सुनो प्रबंधक}} मेंशन बिना हस्ताक्षर के किया गया था; अतः पिंग प्रणाली के कार्य न करने से किसी के पास मेंशन की अधिसूचना नहीं पहुँची। प्रबंधकों को दुबारा पिंग किया जा रहा।
:उपर्युक्त में से कई तो ऐसे चित्र हैं जिनका उपयोग संभवतः बाद के संपादनों में हट गया लगता है। उदाहरण के लिये फिल्मों के पोस्टर, जबकि फ़िल्म पर लेख मौजूद है। ऐसे चित्रों को दुबारा फ़िल्म ज्ञानसंदूक में जोड़ा जा सकता है। {{पिंग|हिंदुस्थान वासी}} जी शायद कुछ मदद कर पायें।
:जिन्हें किसी लेख में नहीं जोड़ा जा सकता उन्हें हटा दिया जाना चाहिये।--[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 12:33, 14 जुलाई 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:SM7|SM7]] जी और @[[सदस्य:Balajijagadesh|Balajijagadesh]] जी, मैं ऐसे चित्रों की हर कुछ माह से समीक्षा करता हूँ। हालांकि आधे चित्र पुनरीक्षण के अभाव में हटाये हुये होते हैं अतः इनका पुनरीक्षण करना पड़ेगा। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 17:12, 15 जुलाई 2026 (UTC)
::ऐसा ही कुछ हुआ होगा। यदि केवल इतने ही चित्र ऐसे हैं तो समीक्षा करके हटाए या रखे जा सकते हैं। [[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|<font color="80 00 80">हिंदुस्थान वासी</font>]]<sup> ''' [[सदस्य वार्ता:हिंदुस्थान वासी|वार्ता]]''' </sup> 07:01, 16 जुलाई 2026 (UTC)
:::@[[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|हिंदुस्थान वासी]] नमस्ते। समीक्षा में नहीं इन्हें वापस उन संबंधित लेखों में जोड़ने के कार्य में मदद माँग रहा था, क्योंकि आपकी रुचि फिल्मों में है। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 08:11, 16 जुलाई 2026 (UTC)
::::अच्छा। बात तो वही आएगी पर। यदि नए चित्र पोस्टर के तौर पर लगा दिए गए हैं। तो इनका शीह नामांकन ही होगा। पक्का तो नहीं कह सकता। लेकिन इनको देखेंगे का प्रयत्न करूंगा। [[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|<font color="80 00 80">हिंदुस्थान वासी</font>]]<sup> ''' [[सदस्य वार्ता:हिंदुस्थान वासी|वार्ता]]''' </sup> 08:24, 16 जुलाई 2026 (UTC)
== विकी परियोजनाओं का अनुवाद ==
हिन्दी विकिपीडिया पर अन्य भाषाओं की तुलना में काफ़ी चीज़ों के बारे में जानकारी कम है, हालांकि औसतन कहना चाहिए कम नहीं। स्थान, व्यक्ति, कोई सिद्धान्त, पुस्तक आदि पर तो काम हो जायेगा लेकिन मुझे लगता है कई सांचों में कमी है या वो हिंदी के अनुरूप नहीं है। इसी तरह बहुत से परियोजना पन्ना का हिंदी में अंतरभाषा कड़ी नहीं है या कड़ी है लेकिन सीधा अंग्रेज़ी की कड़ी हैं।
मेरा मानना है , प्रबन्धक नीति-निर्देश, शर्तें आदि पर ध्यान दें। केवल प्रबंधकों पर ही पूरा बोझ डालना भी सही नहीं है क्योंकि उनके अन्य कार्य भी हैं, तो सामान्य संपादकों को भी इस काम पर लगना चाहिए।
उदाहरण के लिए ये
[[https://en.wikipedia.org/wiki/Wikipedia:Compare_criteria_Good_v._Featured_article|क्या यह हिंदी में अन्य नाम से है या नया पृष्ठ बनाना चाहिए]] अंग्रेज़ी विकी से। [[सदस्य:Pushkar Singh|<span style="color:DeepPink;">पुष्कर सिंह</span>]] [[सदस्य वार्ता:Pushkar Singh|<span style="color:Red;">✉️</span>]] 09:19, 24 जुलाई 2026 (UTC)
4h1o426u355pqanlsje5aetod5ahlfl
चेन्नई
0
1764
6591425
6548804
2026-07-24T02:20:27Z
Dimple323
881290
[[Special:Contributions/संजीव कुमार|संजीव कुमार]] ([[User talk:संजीव कुमार|वार्ता]]) द्वारा किए गए बदलाव [[Special:Diff/6548804|6548804]] को पूर्ववत किया
6591425
wikitext
text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक अवस्थापन
| name = चेन्नै
| native_name = {{hlist|சென்னை|Chennai}}
| settlement_type = [[महानगर]]
| image_seal =
| pushpin_map = India
| pushpin_label_position = right
| subdivision_type = देश
| subdivision_name = {{IND}}
| subdivision_type1 = [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|राज्य]]
| subdivision_name1 = [[तमिलनाडु]]
| subdivision_type2 = [[भारत के ज़िले|ज़िला]]
| subdivision_name2 = [[चेन्नई जिला|चेन्नै]]
| population_as_of = २०११
| population_total = ६७४८०२६
| population_metro = ८६९६०१०
| population_footnotes = <ref name="pop">{{Cite web |url=http://www.census2011.co.in/city.php |title=संग्रहीत प्रति |access-date=23 अप्रैल 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190321092118/http://www.census2011.co.in/city.php |archive-date=21 मार्च 2019 |url-status=dead }}</ref>
| timezone1 = [[भारतीय मानक समय]]
| utc_offset1 = +5:30
| website = {{URL|www.chennaicorporation.gov.in}}
| footnotes =
| official_name =
| translit_lang1_type =
| image_skyline = {{multiple image
|perrow = 1/2/2/2
|border = infobox
|total_width = 300
|image1 = Chennai Central.jpg
|caption1 = [[चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन|चेन्नै सेंट्रल रेऽलवे स्टेशन]]
|image2 = Kapaleeswarar_Temple%2C_Mylapore%2C_Chennai.jpg
|caption2 = [[कपालीश्वर मंदिर]]
|image3 = Valluvar_Kottam_Edit1.JPG
|caption3 = वल्लुवर कोट्टम
|image4 = Chennai LabourStatue Closeup.jpg
|caption4 = श्रम की प्रतिमा
|image5 = Kathipara Crop.jpg
|caption5 = कत्तिपारा जंक्शन
|image6 = Ripon Building Chennai.JPG
|caption6 = [[राइपन बिल्डिंग]]
|image7 = Chennai - bird's-eye view.jpg
|caption7 = [[मरीना बीच (चेन्नई)|मरीना बीच]]
}}
| image_shield = Chennai Corporation Emblem.png
| government_type = [[नगर निगम (भारत)|नगर निगम]]
| governing_body = चेन्नै नगर निगम
| leader_title = महापौर
| leader_name = प्रिया राजन
| leader_title1 = अध्यक्ष
| leader_name1 = जे. कुमारगुरुवरन
| area_total_km2 = ४२६
| area_metro_km2 = ५०९४
| elevation_m = ७
| population_density_km2 = auto
| area_code = +91-44
| registration_plate = टीएन-01, टीएन-14, टीएन-18, टीएन-22 एवं टीएन-85
| blank_info_sec1 = ६००xxx
| blank_name_sec1 = [[डाक सूचक संख्या|पिन]]
| blank1_name_sec1 = आधिकारिक भाषाएँ
| blank1_info_sec1 = {{hlist|[[तमिल भाषा|तमिल]]|[[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]}}
| other_name = मद्रास
}}
'''चेन्नै''' ({{Langx|ta|சென்னை|Ceṉṉai}}; चेऩ्ऩै, {{Langx|en|Chennai|italic=no}}), जिसे १९९६ तक '''मद्रास''' के नाम से जाना जाता था, [[बंगाल की खाड़ी]] के कोरोमंडल तट पर स्थित यह दक्षिण [[भारत]] के सबसे बड़े सांस्कृतिक, आर्थिक और शैक्षिक केंद्रों में से सबसे प्रमुख है। चेन्नै भारतीय राज्य [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]] की राजधानी है। २०११ की भारतीय जनगणना (चेन्नै नगर की नयी सीमाओं के लिए समायोजित) के अनुसार, यह चौथा सबसे बड़ा नगर है और भारत में चौथा सबसे अधिक आबादी वाला नगरीय ढाँचा है। आस-पास के क्षेत्रों के साथ नगर चेन्नै मेट्र'पॉलिटन एरिया है, जो दुनिया की जनसंख्या के अनुसार ३६वाँ सबसे बड़ा नगरीय क्षेत्र है। चेन्नै विदेशी पर्यटकों द्वारा सबसे ज़्यादा जाने-माने भारतीय नगरों में से एक है। यह वर्ष २०१५ में दुनिया में ४३वें सबसे अधिक दौरा करने वाला स्थल था। लिविंग सर्वेक्षण की गुणवत्ता ने चेन्नै को भारत में सबसे सुरक्षित नगर के रूप में दर्जा दिया। चेन्नै भारत में आने वाले ४५% स्वास्थ्य पर्यटकों और ३०% से ४०% घरेलू स्वास्थ्य पर्यटकों को आकर्षित करती है। जैसे, इसे "भारत का स्वास्थ्य पूँजी" कहा जाता है। एक विकासशील देश में बढ़ते महानगरीय नगर के रूप में, चेन्नै पर्याप्त प्रदूषण और अन्य सैन्य और सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का सामना करता है।
चेन्नै में भारत की तीसरी सबसे बड़ी प्रवासी जनसंख्या क्रमशः २००९ में ३५ लाख, २०११ में ८५ लाख थी और २०१८ तक डेढ़ करोड़ से अधिक का अनुमान है। राजस्थान का मारवाड़ी समुदाय यहाँ व्यापारी वर्ग में मुख्यत: लिप्त है। चेन्नै में मारवाड़ी समुदाय की ५०,००० से अधिक दुकानें हैं। मारवाड़ियों का रामदेवजी का वरघोड़ा मुख्य पर्व है, जिसमें प्रतिवर्ष २ लाख से ज़्यादा मारवाड़ी लोग एकत्रित होते हैं। जो मिंट स्ट्रीट ,आदियाप्प, गोविंदप्प, एनएससी बोस रोड ओर नेनियप्पा से गुज़रते हैं। १०१५ में यात्रा करने के लिए पर्यटन गाइड प्रकाशक लोनली प्लैनिट ने चेन्नै को दुनिया के शीर्ष दस नगरों में से एक का नाम दिया है। चेन्नै को ग्लोबल सिटीज़ इंडेक्स में बेटा स्तरीय नगर के रूप में स्थान दिया गया है और २०१४ में इंडिया टडेऽ के वार्षिक भारतीय सर्वेक्षण में भारत के सबसे अच्छा नगर के रूप में रहा। २०१५ में, चेन्नै को आधुनिक और पारंपरिक दोनों मूल्यों के मिश्रण का हवाला देते हुए, बीबीसी द्वारा "सबसे गर्म" नगर (मूल्य का दौरा किया और दीर्घकालिक रहने के लिए) के रूप में रहा। नैशनल जिऑग्रफ़िक ने चेन्नै के भोजन को दुनिया में दूसरा सबसे अच्छा स्थान दिया है; यह सूची में शामिल होने वाला एकमात्र भारतीय नगर था। लोनली प्लैनिट द्वारा चेन्नै को दुनिया का नौवाँ सबसे अच्छा महानगर भी नामित किया गया था।
चेन्नै मेट्र'पॉलिटन एरिया भारत की सबसे बड़ी नगर अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। चेन्नै को "भारत के डिट्रॉइट" की उपाधि दी गयी है, जो नगर में स्थित भारत के ऑटोमोबिल उद्योग का एक-तिहाई से भी अधिक है। जनवरी २०१५ में, प्रति व्यक्ति जीडीपी के संदर्भ में यह तीसरा स्थान था। चेन्नै को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्मार्ट सिटीज़ मिशन के तहत एक स्मार्ट नगर के रूप में विकसित किये जाने वाले १०० भारतीय नगरो में से एक के रूप में चुना गया है।
भारत में ब्रिटिश राज के स्थापित होने से पहले ही मद्रास का जन्म हुआ। माना जाता है कि बंदरगाह-रूपी नगर के पुर्तगाली प्रभाव के चलते इसका नाम मद्रास रखा गया, जो कि एक पुर्तगाली वाक्यांश 'मैए दे दीस' से उत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ है 'भगवान की माता'। कुछ स्रोतों के अनुसार, इस नगर का नाम फ़ॉर्ट सेंट जॉर्ज के उत्तर में एक मछली पकड़ने वाले गाँव मद्रासपट्टिनम से लिया गया था। हालाँकि, यह नाम यूरोपियों के आने से पहले उपयोग में था, इस पर अनिश्चितता है। ब्रिटिश सैन्य मानचित्रकों का मानना था कि मद्रास मूल रूप से मुंदिर-राज या मुंदिरराज के रूप में था। वर्ष १३६७ में विजयनगर युग का एक शिलालेख को, जो कि मादरसन पट्टणम बंदरगाह का उल्लेख करता है, पूर्व तट पर अन्य छोटे बंदरगाहों के साथ २०१५ में खोजा गया था और यह अनुमान लगाया गया था कि उक्त बंदरगाह रोयापुरम का मछली पकड़ने का बंदरगाह है।
नगर के चेन्नै नाम का तेलुगु मूल का शब्द होना स्पष्ट रूप से इतिहासकारों द्वारा सिद्ध किया गया है। यह एक तेलुगु शासक दमारला चेन्नाप्प नायकुडू के नाम से प्राप्त हुआ था, जो कि दमनकारी शासक वेंकटपति के नायक थे और विजयनगर साम्राज्य के वेंकट तृतीय के तहत सामान्य रूप से काम करते थे, जहाँ से ब्रिटिश ने नगर को १६३९ में हासिल किया था। चेन्नै नाम का पहला आधिकारिक उपयोग, ८ अगस्त १६३९ को, ईस्ट इंडिया कंपनी के फ़्रांसिस डे से पहले, सेन्नेकेसु पेरुमल मंदिर १६४६ में बनाया गया था।
१९९६ में, तमिलनाडु सरकार ने आधिकारिक तौर पर मद्रास से चेन्नै का नाम बदल दिया। उस समय, कई भारतीय नगरों के नाम बदल गये थे। हालाँकि, इसके "मद्रास" नाम नगर के साथ-साथ यहाँ के स्थानों के नामों में, जैसे मद्रास विश्वविद्यालय, आइआइटी मद्रास, मद्रास इंस्टीट्यूट ऑव टेक्नॉलजी, मद्रास मेडिकल कॉलिज, मद्रास पशु चिकित्सा कॉलिज, मद्रास क्रिश्चन कॉलिज, आदि में कभी-कभार प्रयुक्त होता रहा है।
चेन्नै में ऑटोमोबिल, प्रौद्योगिकी, हार्डवेयर उत्पादन और स्वास्थ्य-संबंधी उद्योग हैं। यह नगर [[सॉफ्टवेयर|सॉफ़्टवेयर]] एवं [[सूचना प्रौद्योगिकी]] संबंधी उत्पादों में भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक नगर है। चेन्नै एवं इसके उपनगरीय क्षेत्र में ऑटोमोबाइल उद्योग विकसित है।<ref name="itchennai1">{{cite news
|title=IT in India
|url=http://www.business-standard.com/india/storypage.php?autono=299725
|work=बिज़निस स्टैंडर्ड
|date=३० सितंबर २००७
|accessdate=19 फरवरी 2009
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090302114400/http://www.business-standard.com/india/storypage.php?autono=299725
|archive-date=2 मार्च 2009
|url-status=live
}}</ref><ref name="itchennai2">{{cite news
|title=Chennai emerging as India's Silicon Valley?
|url=http://economictimes.indiatimes.com/Infotech/Software/Chennai_emerging_as_Indias_Silicon_Valley/articleshow/3000410.cms
|work=दि इकिनॉमिक टाइम्स
|date=मई 1, 2008
|accessdate=17 मई 2008
|archive-url=https://web.archive.org/web/20080505100206/http://economictimes.indiatimes.com/Infotech/Software/Chennai_emerging_as_Indias_Silicon_Valley/articleshow/3000410.cms
|archive-date=5 मई 2008
|url-status=live
}}</ref> चेन्नै मंडल तमिलनाडु के [[सकल घरेलू उत्पाद|जीडीपी]] का ३९% का और देश के ऑटोमोटिव़ निर्यात में ६०% का भागीदार है। इसी कारण से, इसे [[दक्षिण एशिया]] का डिट्रॉइट भी कहा जाता है।<ref>{{cite web |url=http://www.thehindubusinessline.com/2007/10/19/stories/2007101951332300.htm |title=CII launches Chennai Zone |publisher= द हिन्दू बिज़निस-लाइन |date=19 अक्टूबर 2007 |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100602132120/http://www.thehindubusinessline.com/2007/10/19/stories/2007101951332300.htm |archive-date=2 जून 2010 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |author=एन माधवन |url=http://businesstoday.digitaltoday.in/index.php?option=com_content&task=view&id=6059&issueid=34&Itemid=1 |title=India's Detroit |publisher=बिज़िनिस टडेऽ |date=7 जुलाई 2008 |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090101090125/http://businesstoday.digitaltoday.in/index.php?option=com_content&task=view&id=6059&issueid=34&Itemid=1 |archive-date=1 जनवरी 2009 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2005/12/04/AR2005120401094.html |title=डेट्रॉएट्स नेक्स्ट बिग थ्रेट |publisher=वॉशिंगटनपोस्ट |date= |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110628215213/http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2005/12/04/AR2005120401094.html |archive-date=28 जून 2011 |url-status=live }}</ref>
चेन्नै सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है। यहाँ के वार्षिक मद्रास म्यूज़िक सीज़न में सैकड़ों कलाकार भाग लेते हैं। चेन्नै में रंगशाला संस्कृति भी अच्छे स्तर पर है और यह [[भरतनाट्यम]] का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ का [[तमिल चलचित्र]] उद्योग, जिसे [[कॉलीवुड]] भी कहते हैं, भारत का द्वितीय सबसे बड़ा फ़िल्म उद्योग केंद्र है।
== नामकरण ==
मद्रास नाम मद्रासपट्नम से लिया गया है। मद्रासपट्नम [[ईस्ट इण्डिया कम्पनी|ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी]] द्वारा सन १६३९ में चुना गया स्थायी निवास-स्थल था। इसके दक्षिण में चेन्नपट्नम नामक गाँव उपस्थित था। कुछ समय बाद, इन दोनों गाँवों के संयोग से मिलकर बने नगर को "मद्रास" नाम दिया गया। किंतु उसी जगह के निवासी इसे "चेन्नपट्नम" या "चेन्नपुरी" कहते थे। सन १९९६ में नगर का नाम बदलकर "चेन्नै" किया गया, क्योंकि "मद्रास" शब्द को पुर्तगाली नाम माना जाता था। यह माना जाता है कि इस नगर का पुर्तगाली नाम माद्रे-दे-सॉइस नामक एक पुर्तगाली सरकारी अफ़सर के नाम से लिया गया था, जो लगभग सन [[१५५०]] में इस जगह को अपने स्थायी निवास बनाने वाले पहले लोगों में शामिल थे। पर कुछ लोग यह भी मानते हैं कि "मद्रास" शब्द ही तमिल मूल का है तथा "चेन्नै" शब्द किसी अन्य भाषा का हो सकता है।
== इतिहास ==
{{main|चेन्नई का इतिहास}}
[[चित्र:Victoria Public Hall, Chennai.JPG|thumb|right|200px|पार्क टाउन, चेन्नै में स्थित [[विक्टोरिया पब्लिक हॉल|व़िक्टॉरिया पब्लिक हॉऽल]] - चेन्नै में ब्रिटिश स्थापत्य कला के सबसे उत्कृष्ट स्थलों में से एक के रूप में]]
{{Historical populations|type=
|align = left
|१८८१| 405848
|१८९१| 452518
|१९०१| 509346
|१९११| 518660
|१९२१| 526000
|१९३१| 645000
|१९४१| 776000
|१९५१|1416056
|१९६१|1729141
|१९७१|2420000
|१९८१|3266034
|१९९१|3841398
|२००१|4216268
}}
चेन्नै एवं इसके आस-पास के क्षेत्र पहली सदी से ही महत्वपूर्ण प्रशासनिक, सैनिक एवं आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र रहे हैं। यह [[दक्षिण भारत]] के बहुत से महत्वपूर्ण राजवंशों यथा, [[पल्लव वंश|पल्लव]], [[चोल वंश|चोल]], [[पांड्य साम्राज्य|पांड्य]] एवं [[विजयनगर साम्राज्य|विजयनगर]] आदि का भी केंद्र-बिंदु रहा है। [[मयलापुर]] नगर, जो कि अब चेन्नै नगर का हिस्सा है, पल्लवों के ज़माने में एक महत्वपूर्ण [[बंदरगाह]] हुआ करता था। आधुनिक काल में [[पुर्तगाल|पुर्तगालियों]] ने [[१५२२]] में यहाँ आने के बाद एक और बंदरगाह बनाया, जिसे साओ तोमे कहा गया। पुर्तगालियों ने अपना बसेरा आज के चेन्नै के उत्तर में [[पुलीकट]] नामक स्थान पर बसाया और वहीं [[डच ईस्ट इंडिया कंपनी]] की नींव रखी।
[[२२ अगस्त]] [[१६३९]], को संत फ़्रांसिस दिवस के मौके पर ब्रिटिश [[ईस्ट इंडिया कंपनी]] ने विजयनगर के राजा पेडा वेंकट राय से [[कोरोमंडल|कोरोमंडल तट]] [[चंद्रगिरी]] में कुछ ज़मीनें ख़रीदी। इस इलाक़े में दमरेला वेंकटपति, जो इस इलाक़े के नायक थे, उनका शासन था। उन्होंने ब्रितानी व्यापारियों को वहाँ पर एक फ़ैक्ट्री एवं गोदाम बनाने की अनुमति दी। एक वर्ष वाद, ब्रितानी व्यापारियों ने [[सेंट जॉर्ज फोर्ट|सेंट जॉर्ज क़िला]] बनवाया, जो कि बाद में [[उपनिवेश|औपनिवेशिक]] गतिविधियों का केंद्र-बिंदु बन गया। [[१७४६]] में, मद्रास एवं सेंट जॉर्ज क़िले पर [[फ़्रान्स|फ़्रॉंसिसी]] फ़ौजों ने अपना क़ब्ज़ा जमा लिया। बाद में, ब्रितानी कंपनी का इस क्षेत्र पर नियंत्रण पुनः [[१७४९]] में [[एक्स ला चैपल संधि|एक्स ला चेपल संधि]] ([[१७४८]]) के माध्यम से प्राप्त हुआ। इस क्षेत्र को फ़्रॉंसिसियों एवं [[मैसूर]] के [[सुल्तान]] [[हैदर अली]] के हमलों से बचाने के लिए इस पूरे क्षेत्र की क़िलेबंदी कर दी गयी थी। अठारहवीं सदी के अंत होते-होते ब्रितानियों ने लगभग पूरे आधुनिक [[तमिलनाडु]], [[आंध्र प्रदेश]] एवं [[कर्नाटक]] के हिस्सों को अपने अधीन कर लिया एवं [[मद्रास प्रैज़िडन्सी|मद्रास प्रेज़िडंसी]] की स्थापना की, जिसकी राजधानी मद्रास घोषित की गयी।<ref>{{cite encyclopedia
| title = मद्रास, इंडिया (कैपिटल)
| url = http://www.1911encyclopedia.org/Madras,_India_(Capital)
| encyclopedia = एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका
| edition = ग्यारहवां संस्करण
| year = १९११
| accessdate = २००७-०९-०४
| archive-url = https://web.archive.org/web/20080501001404/http://www.1911encyclopedia.org/Madras,_India_(Capital)
| archive-date = 1 मई 2008
| url-status = live
}}</ref> ब्रितानियों की हुक़ूमत के अधीन, चेन्नै नगर एक महत्वपूर्ण आधुनिक नगरीय क्षेत्र एवं जलसेना के रूप में उभरा।
== भूगोल ==
{{main|चेन्नई का भूगोल}}
[[चित्र:Kamarajar Salai and Marina Beach.jpg|thumb|कामराजर सालै, जो मरीना बीच के साथ साथ चलने वाली एक सड़क है।]]चेन्नै भारत के दक्षिण पूर्वी तट पर तमिलनाडु राज्य के उत्तरी पूर्वी तटीय क्षेत्र में स्थित है। इस तटीय क्षेत्र को [[पूर्वी तटीय मैदानी क्षेत्र]] भी कहा जाता है। इस क्षेत्र की समुद्र तल से औसत ऊँचाई ६.७ मीटर है<ref>{{cite web
|title=Geographical and physical features
|work=District Profile
|publisher=Govt of India
|url=http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#geog
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20130730180830/http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#geog
|archive-date=30 जुलाई 2013
|url-status=dead
}}</ref> और यह ६० मीटर की ऊँचाई पर सबसे ऊँचा स्थान है।<ref name="highest-point">{{cite journal
|last = Pulikesi
|first = M
|author2= P. Baskaralingam, D. Elango, V.N. Rayudu, V. Ramamurthi, S. Sivanesan
|title=Air quality monitoring in Chennai, भारत, in the summer of 2005
|journal = Journal of Hazardous Materials
|volume = 136
|issue = 3
|pages = 589–596
|date=अगस्त 25, 2006
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|quote=Chennai is fairly low-lying, its highest point being only 300 metres (934 ft) above sea level is a rugged barren hill opposite to the Airport called Pallavapuram Hill.
|doi = 10.1016/j.jhazmat.2005.12.039 |issn=0304-3894}}</ref> [[मरीना बीच]] से प्रसिद्ध चेन्नै के समुद्र तट का विस्तार १२ किलोमीटर तक है। नगर के मध्य में बहने वाली [[कूवम नदी]] और दक्षिण से बहने वाली [[अड्यार नदी]] आज की तारीख़ में बहुत ज़्यादा दूषित हो चुकी हैं। अड्यार नदी कूवम से कम प्रदूषित है और इसके तट पर अनेक पशु-पक्षियों का बसेरा है।<ref>{{cite news
|last=Baskaran
|first=Theodore S
|title=Death of an Estuary
|work=द हिन्दू
|date=जनवरी 12, 2003
|url=http://www.hindu.com/thehindu/mag/2003/01/12/stories/2003011200110200.htm
|accessdate=12 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090213173125/http://www.hindu.com/thehindu/mag/2003/01/12/stories/2003011200110200.htm
|archive-date=13 फ़रवरी 2009
|url-status=live
}}</ref><ref name="adyarestuary2">{{cite news
|last=Doraisamy
|first=Vani
|title=A breather for the Adyar estuary
|work=द हिन्दू
|date=अक्टूबर 31, 2005
|url=http://www.hindu.com/2005/10/31/stories/2005103106660500.htm
|accessdate=12 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090213180648/http://www.hindu.com/2005/10/31/stories/2005103106660500.htm
|archive-date=13 फ़रवरी 2009
|url-status=live
}}</ref> इन दोनों नदियों को [[बकिंघम नहर|बकिंगम नहर]] के द्वारा जोड़ा गया है। यह नहर अपनी ४ किलोमीटर की दूरी समुद्री तट के समानांतर तय करती है। नगर के पश्चिमी भाग में कई झीलें हैं, जिनमें से [[रेड हिल्स|रेड हिल्ज़]], शोलावरम और चेम्बरामबक्क्म से पेय जल की आपूर्ति होती है। चेन्नै का भूमिगत जल भी प्रदूषित होता जा रहा है।<ref>{{cite news
|last=Lakshmi
|first=K
|title=It's no cola, it's the water supplied in Korattur
|work=द हिन्दू
|date=जुलाई 13, 2004
|url=http://www.hindu.com/2004/07/13/stories/2004071312840300.htm
|accessdate=9 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071012215946/http://hindu.com/2004/07/13/stories/2004071312840300.htm
|archive-date=12 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref>
[[चित्र:Cooum2.JPG|thumb|left|चेन्नै में बहने वाली कूवम नदी। प्रदूषण के कारण इस नदी पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है।]]
चेन्नै नगर को उत्तर, मध्य, दक्षिण और पश्चिमी चेन्नै नामक चार भागों में बँटा है। उत्तरी चेन्नै एक औद्योगिक क्षेत्र है। मध्य चेन्नै नगर का व्यावसायिक केंद्र है। यहाँ पर स्थित पेरिज कॉर्नर, जिसे स्थानीय लोग पेरिज भी कहते हैं, एक प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र है। दक्षिण और पश्चिमी चेन्नै सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र के रूप में उभरे हैं। बढ़ती आबादी के कारण से, नगर विभिन्न दिशाओं में बढ़ता जा रहा है। जिन क्षेत्रों में सर्वाधिक विकास हो रहा है, वे हैं- ओल्ड [[महाबलीपुरम]] रोड, दक्षिणी ग्रैंड ट्रंक रोड और पश्चिम में अंबातूर, [[कोयंबतूर]] और श्रीपेरंबतूर के क्षेत्र।<ref>{{cite web
|title=Structure of Chennai
|work=Second Master Plan - II
|publisher=Chennai Metropolitan Development Authority
|pages=pp. II–9, II–10, II–11, II–15
|url=http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/B_Chap%20II%20_Structure%20of%20Chennai.pdf
|format=PDF
|accessdate=9 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071128071252/http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/B_Chap%20II%20_Structure%20of%20Chennai.pdf
|archive-date=28 नवंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref> चेन्नै की नगर सीमा में एक राष्ट्रीय उद्यान भी है, जिसे गिंडी राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना जाता है।<ref>{{cite web
|title=Guindy National Park
|publisher=Govt. of Tamil Nadu
|url=http://www.forests.tn.nic.in/WildBiodiversity/np_gnp.html
|accessdate=10 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20120928004229/http://www.forests.tn.nic.in/WildBiodiversity/np_gnp.html
|archive-date=28 सितंबर 2012
|url-status=dead
}}</ref>
चेन्नै में वार्षिक तापमान लगभग एक समान होता है। इसका कारण से, चेन्नै का समुद्री तट पर एवं थर्मल इक्वेटर पर स्थित होता है। वर्षभर मौसम आम तौर पर गर्म एवं उमस भरा होता है। मई एवं जून का प्रथम सप्ताह वर्ष का सबसे गर्म समय होता है। इस समय जब तापमान ३८-४२ डिग्री सेल्सियस के आस-पास पहुँच जाता है, तब स्थानीय लोग इसे अग्नि नक्षत्रम या कथिरि वेय्यी कहते है।<ref>{{cite news
|last=Ramakrishnan
|first=T
|title=Hot spell may continue for some more weeks in the State
|work=द हिन्दू
|date=मई 18, 2005
|url=http://www.hindu.com/2005/05/18/stories/2005051813790700.htm
|accessdate=4 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090213191416/http://www.hindu.com/2005/05/18/stories/2005051813790700.htm
|archive-date=13 फ़रवरी 2009
|url-status=live
}}</ref> वर्ष का सबसे ठंडा महीना जनवरी का होता है, जब न्यूनतम तापमान १८-२० डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है। अब तक यहाँ का सबसे न्यूनतम तापमान १५.८ डिग्री सेल्सियस और उच्चतम तापमान ४५ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।<ref name=Singapore-temp>{{cite web
|title=Climate of India
|work=National Environment Agency – Singapore
|url=http://app.nea.gov.sg/cms/htdocs/article.asp?pid=1111
|accessdate=4 अगस्त 2005
|archive-url=https://web.archive.org/web/20061006131405/http://app.nea.gov.sg/cms/htdocs/article.asp?pid=1111
|archive-date=6 अक्तूबर 2006
|url-status=dead
}}</ref><ref name=hightemp>{{cite news
|title=Highest temperature
|work=द हिन्दू
|date=मई 31, 2003
|url=http://www.hinduonnet.com/2003/05/31/stories/2003053104790101.htm
|accessdate=25 अप्रैल 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20110711171303/http://www.hinduonnet.com/2003/05/31/stories/2003053104790101.htm
|archive-date=11 जुलाई 2011
|url-status=dead
}}</ref>
चेन्नै में वर्ष में औसतन १,३०० मिलीमीटर वर्षा होती है। मुख्यतः वर्षा के सितंबर से दिसंबर के मध्य होती है। देश के अन्य भागों से विपरीत चेन्नै में वर्षा [[मानसून|मॉनसून]] के लौटने के दौरान उत्तर-पूर्वी हवाओं के चलते होती है। बंगाल की खाड़ी में आने वाले चक्रवात कई बार चेन्नै भी पहुँच जाते हैं। सन २००५ में आज तक की सबसे ज़्यादा वर्षा २,५७० मिलीमीटर दर्ज की गयी थी।<ref>{{cite news
|last=Ramakrishnan
|first=T
|title=Entering 2006, city's reservoirs filled to the brim
|work=द हिन्दू
|date=जनवरी 3, 2006
|url=http://www.hindu.com/2006/01/03/stories/2006010315310300.htm
|accessdate=4 मई 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070228083427/http://www.hindu.com/2006/01/03/stories/2006010315310300.htm
|archive-date=28 फ़रवरी 2007
|url-status=live
}}</ref> २ नवंबर २०१७ को श्रीलंका के नज़दीक में, बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के कारण चेन्नै में लगातार पाँच घंटे तक बारिश हुई थी, जिसके कारण से अनेक इलाक़ों में पानी भर गया था। <ref>{{cite news|first1=दिग्पाल|last1=सिंह|title=चेन्नई की बारिश बजा रही खतरे की घंटी|url=http://www.jagran.com/news/national-jagran-special-on-chennai-rains-and-climate-change-16966039.html|accessdate=7 नवम्बर 2017|agency=दैनिक जागरण|archive-url=https://web.archive.org/web/20171107165805/http://www.jagran.com/news/national-jagran-special-on-chennai-rains-and-climate-change-16966039.html|archive-date=7 नवंबर 2017|url-status=live}}</ref>
{{Infobox Weather
|collapsed=yes
|metric_first=Yes
|single_line=Yes
|location = चेन्नई, भारत
|Jan_Hi_°F = 83.12
|Feb_Hi_°F = 85.82
|Mar_Hi_°F = 89.42
|Apr_Hi_°F = 92.48
|May_Hi_°F = 97.52
|Jun_Hi_°F = 97.88
|Jul_Hi_°F = 94.46
|Aug_Hi_°F = 93.02
|Sep_Hi_°F = 92.3
|Oct_Hi_°F = 88.52
|Nov_Hi_°F = 84.56
|Dec_Hi_°F = 82.58
|Year_Hi_°F = 90.14
|Jan_Lo_°F = 69.08
|Feb_Lo_°F = 70.16
|Mar_Lo_°F = 73.58
|Apr_Lo_°F = 78.62
|May_Lo_°F = 81.68
|Jun_Lo_°F = 80.96
|Jul_Lo_°F = 78.62
|Aug_Lo_°F = 77.54
|Sep_Lo_°F = 77.54
|Oct_Lo_°F = 75.74
|Nov_Lo_°F = 73.04
|Dec_Lo_°F = 70.88
|Year_Lo_°F = 75.62
|Jan_Precip_mm = 16.2
|Feb_Precip_mm = 3.7
|Mar_Precip_mm = 3.0
|Apr_Precip_mm = 13.6
|May_Precip_mm = 48.9
|Jun_Precip_mm = 53.7
|Jul_Precip_mm = 97.8
|Aug_Precip_mm = 149.7
|Sep_Precip_mm = 109.1
|Oct_Precip_mm = 282.7
|Nov_Precip_mm = 350.3
|Dec_Precip_mm = 138.2
|Year_Precip_mm = 1266.9
|source =भारत मौसम विज्ञान विभाग<ref name=weather>{{cite web |url=http://www.imd.ernet.in/section/climate/chennai1.htm |title=Climatological Information for Chennai |accessdate=25 जनवरी 2009 |publisher=Indian Meteorological Department |archive-url=https://web.archive.org/web/20090302144024/http://www.imd.ernet.in/section/climate/chennai1.htm |archive-date=2 मार्च 2009 |url-status=dead }}</ref>
|accessdate = 25 जनवरी 2009
}}
== प्रशासनिक एवं उपयोगी सेवाएं ==
{{main|चेन्नई का प्रशासन }}
{{See also|चेन्नई का स्थापत्य |भारत के उपभाग }}
{|cellpadding="2" cellspacing="0" border="1" style="float:right; border-collapse:collapse; border:2px white solid; font-size:x-small; font-family:verdana;"
|-
|style="background:#659ec7; color:white;"|<div style="text-align: center;">'''नगर के अधिकारीगण, (सितं. ०७)'''</div>
{| cellpadding="2" cellspacing="0" border="1" style="background:white; border-collapse:collapse; border:1px #747170 solid; font-size:x-small; font-family:verdana;"
|-
|[[महापौर]]<ref>{{Cite web |url=http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/whoswho.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 अगस्त 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070923001521/http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/whoswho.htm |archive-date=23 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.tn.gov.in/telephone/hod/hodPage57.html |title=दूरभाष-निदेशिका – पुलिस आयुक्त |publisher=Tn.gov.in |date=21 जनवरी 2009 |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090217205426/http://www.tn.gov.in/telephone/hod/hodPage57.html |archive-date=17 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref>
|<div style="text-align: center;">'''मा. सुब्रह्मानियम</div>
|-
|उप-[[महापौर]]
|<div style="text-align: center;">'''आर सत्यभामा </div>
|-
| नगर निगम आयुक्त
|<div style="text-align: center;">'''राजेश लखोनी'''</div>
|-
|पुलिस आयुक्त
|<div style="text-align: center;">'''के राधाकृष्णन'''</div>
|}
|}
चेन्नै नगर का प्रशासन [[चेन्नई नगर निगम|चेन्नै नगर निगम]] के पास है। [[१६८८]] में स्थापित हुआ यह निगम भारत में ही नहीं, [[ब्रिटेन]] के बाहर किसी भी [[राष्ट्रमंडल देश]] में सबसे पहला नगर निगम है। इसमें १५५ पार्षद है, जो चेन्नै के १५५ वॉऽर्डों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनका चुनाव सीधे चेन्नै की जनता ही करती है। ये लोग अपने आप में से ही एक [[महापौर]] एवं एक उप-महापौर को चुनते हैं, जो छह समितियों का संचालन करता है।<ref name=corp>{{cite web
|title=कार्यपालक सारणी
|work=अबाउट सी.ओ.सी
|publisher=चेन्नई कार्पोरेशन
|url=http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/org-chart.htm
|accessdate=4 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20080211111439/http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/org-chart.htm
|archive-date=11 फ़रवरी 2008
|url-status=dead
}}</ref> चेन्नै, [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]] राज्य की राजधानी होने से राज्य की कार्यपालिका और न्यायपालिका के मुख्यालय नगर में मुख्य रूप से फ़ॉर्ट सेंट जॉर्ज में सचिवालय इमारत में और शेष कार्यालय नगर में विभिन्न स्थानों पर अनेक इमारतों में स्थित हैं। [[मद्रास उच्च न्यायालय]] का अधिकार-क्षेत्र [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]] राज्य और [[पुदुचेरी (नगर)|पुदुचेरी]] तक है। यह राज्य की सर्वोच्च न्याय संस्था है और चेन्नै में ही स्थापित है। चेन्नै में तीन लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं – चेन्नै उत्तर, चेन्नै मध्य और चेन्नै दक्षिण और १८ विधान-सभा निर्वाचन क्षेत्र हैं।
[[चित्र:Gcp patrol car.jpg|thumb|left|चेन्नै मेट्रिपॉलिटन पुलिस का पट्रॉलिंग]]
चेन्नै का महानगरीय क्षेत्र कई उपनगरों तक व्याप्त है, जिसमें [[कांचीपुरम जिला|काँचीपुरम]] और तिरुवल्लुर ज़िले के भी क्षेत्र आते हैं। बड़े उपनगरों में वहाँ की टाउन-नगर पालिकाएँ हैं और छोटे क्षेत्रों में टाउन-परिषद हैं, जिन्हें पंचायत कहते हैं। नगर का क्षेत्र जहाँ १७४ किमी² (६७ मील²) है,<ref name="cityarea">{{cite web
|title=General Staticstics
|publisher=कॉर्प'रेशन ऑव चेन्नै
|url=http://www.chennaicorporation.com/general_stats.htm
|accessdate=4 अगस्त 2005
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070909100447/http://www.chennaicorporation.com/general_stats.htm
|archive-date=9 सितंबर 2007
|url-status=live
}}</ref> वहीं उपनगरीय क्षेत्र ११८९ किमी² (४५८ मील²) तक फैले हुए हैं।<ref name="metroarea">{{cite web
|title=Chennai Metropolitan Area- Profile
|publisher=चेन्नै मेट्र'पॉलिटन डिव़ेलपमंट अथॉरिटी
|url=http://www.cmdachennai.org
|accessdate=15 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070927092854/http://www.cmdachennai.org/
|archive-date=27 सितंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref> चेन्नै महानगर विकास प्राधिकरण (सी.एम.डी.ए) ने नगर के निकट उपनगरों के विकास के उद्देश्य से एक द्वितीय मास्टरप्लैन को ड्राफ़्ट तैयार किया है। निकटस्थ उपनगरों में [[महाबलिपुरम]] (दक्षिण में), [[चेंगलपट्टु]] और मरियामलै नगर दक्षिण-पश्चिम में, [[श्रीपेरंबुदूर]], [[तिरुवल्लुर]] और [[अरक्कोणम]] पश्चिम में आते हैं।
ग्रेऽटर चेन्नै पुलिस विभाग [[तमिल नाडु पुलिस|तमिलनाडु पुलिस]] का ही एक अनुभाग है, जो नगर में क़ानून-व्यवस्था की देखरेख में संलग्न है। नगर की पुलिस के अध्यक्ष पुलिस आयुक्त, चेन्नै हैं और प्रशासनिक नियंत्रण राज्य गृह मंत्रालय के पास है। इस विभाग में ३६ उप-भाग और १२१ पुलिस स्टेशन हैं। नगर का यातायात [[चेन्नई सिटी ट्रैफिक पुलिस|चेन्नै सिटी ट्रैफ़िक पुलिस]] द्वारा नियंत्रित होता है। महानगर के उपनगर [[चेन्नई मेट्रोपॉलिटन पुलिस|चेन्नै मेट्र'पॉलिटन पुलिस]] के अधीन आते हैं एवं बाहरी ज़िले [[कांचीपुरम|काँचीपुरम]] एवं [[तिरुवल्लुर]] पुलिस विभागों के अंतर्गत है।
[[चित्र:Ripon Building panorama.jpg|thumb|राइपन बिल्डिंग, १९१३ में निर्मित, [[चेन्नई नगर निगम|चेन्नै नगर निगम]] का मुख्यालय तत्कालीन [[वाइसरॉय]] [[लॉर्ड राइपन]] के नाम पर है।]]
चेन्नै नगर निगम और उपनगरीय नगरपालिकाएँ नागरिक सुविधाएँ मुहैया कराती हैं। अधिकांश क्षेत्रों में कूड़ा-प्रबंधन नील मेटल फ़नालिका इन्वायरनमंट मैनिजमंट; एक निजी कंपनी और कुछ अन्य क्षेत्रों में नगर निगम देखता है। जल-आपूर्ति एवं मल-निकास (स्यूइज ट्रीटमंट) की निगरानी चेन्नै मेट्रिपॉलिटन वॉटर सप्लाइ ऐंड स्यूइज बॉर्ड द्वारा होती है। विद्युत आपूर्ति तमिलनाडु विद्युत बॉर्ड प्रबंध करता है।<ref>{{cite web
|title=Emergency and Utility Services Contact Details at Chennai
|publisher=Govt. of Tamil Nadu
|url=http://chennai.nic.in/emergency.htm
|accessdate=7 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070930014904/http://chennai.nic.in/emergency.htm
|archive-date=30 सितंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref> नगर की दूरभाष सेवा छह मोबाइल और चार लैंडलाइन कंपनियों के द्वारा प्रदान होती है<ref>{{cite press release|title=इन्फ़र्मेशन नोट टू द प्रेस (प्रेस विज्ञप्ति सं. ७१/२००७)|publisher=Telecom Regulatory Authority of India, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण|date=२४ अगस्त २००७|url=http://www.trai.gov.in/trai/upload/PressReleases/486/pr24aug07no71.pdf|format=PDF|accessdate=4 अक्टूबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20120515114849/http://www.trai.gov.in/trai/upload/PressReleases/486/pr24aug07no71.pdf|archive-date=15 मई 2012|url-status=live}}, Annexure I lists these six entities as the licensed cellular operators for the Chennai circle. The [[CDMA]] Development Group's official website lists [[Tata Teleservices]] and [[Reliance Communications]] as the only operators to have deployed [[CDMA]] on cellular systems in India. {{cite web|url=http://www.cdg.org/worldwide/index.asp?h_area=1|title=CDMA Worldwide: Deployment search - Asia-Pacific|publisher=CDMA Development Group|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011073228/http://cdg.org/worldwide/index.asp?h_area=1|archive-date=11 अक्तूबर 2007|accessdate=4 अक्टूबर 2007|url-status=live}}</ref><ref>{{cite news
|last=नारायणन
|first=आर वाय
|title=टचटेल अराइव्ज़ इन [[कोयंबतूर]]
|work=[[द हिन्दु]]
|date=५ सितंबर २००२
|url=http://www.thehindubusinessline.com/2002/09/05/stories/2002090502151700.htm
|accessdate=7 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090110085422/http://www.thehindubusinessline.com/2002/09/05/stories/2002090502151700.htm
|archive-date=10 जनवरी 2009
|url-status=live
}}</ref> और सिफ़ी तथा हैथवे जैसे कंपनियाँ [[ब्रॉडबैंड सेवा]] द्वारा इंटरनेट भी उपलब्ध कराती हैं।
नगर के क्षेत्र से कोई मुख्य नदी नहीं गुज़रती है, अतः चेन्नै में वार्षिक [[मानसून|मॉनसून]] वर्षा के जल को सरोवरों में सहजकर रखने का इतिहास रहा है। नगर की बढ़ती आबादी और [[भूमिगत जल]] के गिरते स्तर के कारण नगर को जल अभाव का सामना करना पड़ा है। इस दिशा में वीरानम झील परियोजना भी कारगर नहीं सिद्ध हुई है। नयी वीरानम परियोजना ने काफ़ी हद तक इस समस्या का समाधान किया है और शहर के सुदूर स्रोतों पर निर्भरता घटी है।<ref>{{cite web
|title=Management of water supply during acute water scarcity in 2003 & 2004
|work=Operations and maintenance
|publisher=Chennai Metropolitan Water Supply and Sewage Board
|url=http://www.chennaimetrowater.com/engg/operationmaintenance/cmwdrw04.htm
|accessdate=16 मार्च 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070812071544/http://www.chennaimetrowater.com/engg/operationmaintenance/cmwdrw04.htm
|archive-date=12 अगस्त 2007
|url-status=dead
}}</ref> हाल के वर्षों में भारी मॉनसूनी वर्षाओं के चलते [[अन्ना नगर]] में जल पुनर्चक्रीकरण को सहारा मिला है और इससे नगर में जलाभावों की काफ़ी कमी आयी है।<ref name=hindu_rwh_bangalore>{{cite news
|last = लक्ष्मी
|first = के
|title = बेंगलुरु टीम विज़िट्स RWH स्ट्रक्चर्ज़ इन सिटी
|work = द हिन्दू
|date = [[३ अगस्त]][[२००७]]
|url = http://www.hindu.com/2007/08/03/stories/2007080360510500.htm
|accessdate = 11 अगस्त 2007
|archive-url = https://web.archive.org/web/20071001015212/http://www.hindu.com/2007/08/03/stories/2007080360510500.htm
|archive-date = 1 अक्तूबर 2007
|url-status = live
}}</ref> इसके साथ ही, [[तेलुगु गंगा परियोजना]] जैसे नयी परियोजनाओं द्वारा [[आंध्र प्रदेश]] से [[कृष्णा नदी|कृष्ण नदी]] का जल भी पहुचाया जा रहा है, जिसने इस संकट को लगभग समाप्त ही कर दिया है। नगर में समुद्री जल के अलवणीकरण-संयंत्र की स्थापना भी प्रगति पर है, जिससे [[सागर]] के जल को भी जलापूर्ति में प्रयोग किया जा सकेगा।<ref>{{cite news
|title=IVRCL to set up desalination plant near Chennai
|work=द हिन्दू
|date=अगस्त 12, 2005
|url=http://www.thehindubusinessline.com/2005/08/12/stories/2005081202820300.htm
|accessdate=18 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090213183507/http://www.thehindubusinessline.com/2005/08/12/stories/2005081202820300.htm
|archive-date=13 फ़रवरी 2009
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite news
|last=Radhakrishnan
|first=R.K
|title=Preliminary work on desalination plant to be completed by December-end
|work=द हिन्दू
|date=सितम्बर 4, 2007
|url=http://www.hindu.com/2007/09/04/stories/2007090460440400.htm
|accessdate=18 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071012002902/http://hindu.com/2007/09/04/stories/2007090460440400.htm
|archive-date=12 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref>
== संस्कृति ==
{{main|चेन्नई की संस्कृति |चेन्नई के व्यंजन }}
{{See also|तमिल खाना|तमिल चलचित्र}}
[[चित्र:anianianiy.jpg|150px|thumb|एक [[भरतनाट्यम]] नर्तकी]]
चेन्नै भारत की सांस्कृतिक एवं संगीत राजधानी है।<ref>[http://www.hindu.com/thehindu/mag/2002/12/01/stories/2002120100770500.htm द हिन्दू] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20101118022937/http://hindu.com/thehindu/mag/2002/12/01/stories/2002120100770500.htm |date=18 नवंबर 2010 }} पर चेन्नै</ref> नगर शास्त्रीय नृत्य-संगीत कार्यक्रमों और मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। प्रत्येक वर्ष, चेन्नै में पंच-सप्ताह [[मद्रास म्यूज़िक सीज़न]] कार्यक्रम का आयोजन होता है। यह १९२७ में मद्रास संगीत अकादेमी की स्थापना की वर्षगाँठ मानने के साथ आयोजित होता है।<ref name=Music_season>{{cite news
|title=Music musings
|work=द हिन्दू
|url=http://www.hindu.com/2005/02/03/stories/2005020301281000.htm
|date=फ़रवरी 3, 2005
|accessdate=4 अगस्त 2005
|archive-url=https://web.archive.org/web/20050207150555/http://www.hindu.com/2005/02/03/stories/2005020301281000.htm
|archive-date=7 फ़रवरी 2005
|url-status=live
}}</ref> इसमें नगर और निकट के सैंकड़ों कलाकारों के शास्त्रीय [[कर्नाटक संगीत]] के कार्यक्रम आयोजित होते हैं। एक अन्य उत्सम [[चेन्नई संगमम|चेन्नै संगमम]] प्रत्येक वर्ष [[जनवरी]] में [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]] राज्य की विभिन्न कलाओं को दर्शाता है। चेन्नै को [[भरतनाट्यम]] के लिए भी जाना जाता है। यह दक्षिण-भारत की प्रसिद्ध नृत्य शैली है। नगर के दक्षिणी भाग में तटीय क्षेत्र में कलाक्षेत्र नामक स्थान [[भरतनाट्यम]] का प्रसिद्ध सांस्कृतिक केन्द्र है।<ref>{{cite news
|author=GR
|url=http://www.hinduonnet.com/2000/12/02/stories/0902033h.htm
|title=Yearning for Chennai ambience
|accessdate=7 सितंबर 2007
|date=दिसम्बर 2, 2000
|work=द हिन्दू
|archive-url=https://web.archive.org/web/20081229133413/http://www.hinduonnet.com/2000/12/02/stories/0902033h.htm
|archive-date=29 दिसंबर 2008
|url-status=dead
}}</ref> चेन्नै में भारत के कुछ सर्वोत्तम कॉयर्ज़ हैं, जो [[क्रिसमस]] के अवसर पर अंग्रेज़ी और तमिल में विभिन्न ''कैरल'' कार्यक्रम करते हैं।<ref>{{cite news
|url=http://archives.chennaionline.com/columns/ethnomusic/durga23.asp
|title=Chennai as a home for Music – IV
|work=Chennai Online
|date=2009
|accessdate=24 फरवरी 2009
|archive-url=https://web.archive.org/web/20100117155239/http://archives.chennaionline.com/columns/Ethnomusic/durga23.asp
|archive-date=17 जनवरी 2010
|url-status=dead
}}</ref><ref>{{cite news
|url=http://www.go-nxg.com/?p=3155
|title=There's a song in the air...
|work=NXg
|date=जनवरी 2009
|accessdate=24 फरवरी 2009
|archive-url=https://web.archive.org/web/20130615082343/http://www.go-nxg.com/?p=3155
|archive-date=15 जून 2013
|url-status=dead
}}</ref> मद्रास म्यूज़िकल असोसिएशन भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठावान कॉयर्ज़ में से एक हैं और इन्होंने विश्वभर में कार्यक्रम किये हैं।<ref>{{cite news
|url=http://www.hindu.com/2006/06/16/stories/2006061616030200.htm
|title=Chennai choir to sing in England
|work=द हिन्दू
|date=जून 16, 2009
|accessdate=24 फरवरी 2009
|archive-url=https://web.archive.org/web/20080129234646/http://www.hindu.com/2006/06/16/stories/2006061616030200.htm
|archive-date=29 जनवरी 2008
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite news
|url=http://www.hindu.com/mp/2007/09/03/stories/2007090350690700.htm
|title=An aural treat
|work=द हिन्दू
|date=सितम्बर 03, 2007
|accessdate=24 फरवरी 2009
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090926071718/http://www.hindu.com/mp/2007/09/03/stories/2007090350690700.htm
|archive-date=26 सितंबर 2009
|url-status=live
}}</ref>
चेन्नै [[तमिल चलचित्र]] उद्योग, जिसे [[कॉलीवुड]] भी कहते हैं, का आधार नगर है। यह उद्योग [[कोडमबक्कम]] में स्थित है, जहाँ बड़ी संख्या में फ़िल्म स्टूडियो हैं।<ref>{{cite book
|last = Ellens
|first = Dan
|author2= Lakshmi Srinivas
|title=A Time for India
|publisher=Vantage Press Inc., New York
|year = 2006
|page = 150
|isbn = 0533150922
|url=http://books.google.com/books?id=6Nsyr3J1fpIC&printsec=frontcover&dq=kollywood#PPA150,M1
|accessdate=7 सितंबर 2007}}</ref> इस उद्योग द्वारा आजकल १५० से अधिक फ़िल्में वार्षिक तौर पर बनायी जाती हैं<ref>{{cite book
|last = Ganti
|first = Tejaswini
|title = Bollywood: A Guidebook To Popular Hindi Cinema
|publisher = Routledge, London
|year = 2004
|page = 3
|isbn = 0415288541
|url = http://books.google.com/books?id=GTEa93azj9EC&pg=PA3&dq=tamil+films+per+year&sig=Q9a_mC8aqRjWWyxHaHpsbCV6xuE
|accessdate = 7 सितंबर 2007
|archive-url = https://web.archive.org/web/20130604042330/http://books.google.com/books?id=GTEa93azj9EC
|archive-date = 4 जून 2013
|url-status = live
}}</ref> और इनके साउंडट्रैक के ऐल्बम भी नगर को संगीतमय करते हैं। इस उद्योग से जुड़े कुछ व्यक्तियों के नाम [[इलैयाराजा]], [[के बालाचंदर]], [[शिवाजी गणेशन]], [[एम जी रामचंद्रन]], [[रजनीकान्त|रजनीकांत]], [[कमल हासन]], [[मणि रत्नम]] और [[एस शंकर]] हैं। <!-- [[चित्र:Idly sambar vada.JPG|thumb|[[सांभर |सांभर वड़ा]] और [[इडली]]]]--> [[चित्र:Chennai Veg Cuisine-hi.jpg|thumb|200px|विभिन्न प्रकार के तमिल व्यंजन]]
[[ए॰ आर॰ रहमान|ए. आर. रहमान]] ने चेन्नै को अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्धि दिलायी है। रहमान को [[२००९]] में [[स्लमडॉग मिलियनेयर|स्लमडॉग मिलेनियर]] के लिए दो [[ऑस्कर सम्मान]] मिले थे।<ref>{{cite news
|url=http://www.voanews.com/english/Entertainment/2009-02-23-voa15.cfm
|title=India Celebrates 'Slumdog Millionaire's' Oscar Sweep
|work=VOA News
|date=फ़रवरी 23, 2009
|accessdate=24 फरवरी 2009
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090224173347/http://www.voanews.com/english/Entertainment/2009-02-23-voa15.cfm
|archive-date=24 फ़रवरी 2009
|url-status=live
}}</ref> चेन्नै में रंगमंच पर तमिल नाटक मंचित किये जाते हैं, जिनमें राजनीतिक, व्यंग्य, हास्य, पौराणिक, आदि सभी रसों का मिश्रण होता है।<ref>{{cite news
|last=Ramesh
|first=V
|url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2003/07/17/stories/2003071700060100.htm
|title=The Sultan of sarcasm
|work=द हिन्दू
|date=जुलाई 17, 2003
|accessdate=22 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20081230073420/http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2003/07/17/stories/2003071700060100.htm
|archive-date=30 दिसंबर 2008
|url-status=dead
}}</ref><ref>{{cite news
|last=अशोक कुमार
|first=एस आर
|url=http://www.hindu.com/2006/01/11/stories/2006011115150700.htm
|title=एक्टर आर एस मनोहर डेड
|work=द हिन्दू
|date=जनवरी 11, 2006
|accessdate=22 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090626151134/http://www.hindu.com/2006/01/11/stories/2006011115150700.htm
|archive-date=26 जून 2009
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite news
|last=Kumar
|first=Ranee
|url=http://www.hindu.com/mp/2003/12/10/stories/2003121000390100.htm
|title=Laughter, the best medicine
|work=द हिन्दू
|date=दिसम्बर 10, 2003
|accessdate=22 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20100130103808/http://www.hindu.com/mp/2003/12/10/stories/2003121000390100.htm
|archive-date=30 जनवरी 2010
|url-status=live
}}</ref> इनके अलावा, अंग्रेज़ी नाटकों का भी मंचन आयोजित होता है।
नगर के उत्सवों में [[जनवरी]] माह में आने वाला पंच-दिवसीय [[पोंगल]] प्रमुख है। इसके अलावा, सभी मुख्य त्योहार, जैसे [[दीपावली|दीवाली]], [[ईद]], [[क्रिसमस]] आदि भी हर्षोल्लास से मनाये जाते हैं। [[तमिल]] व्यंजनों में [[शाकाहारी]] और [[मांसाहारी|माँसाहारी]] दोनों ही व्यंजनों का सम्मिलन है। नगर में विभिन्न स्थानों पर अल्पाहार या टिफ़िन भी उपलब्ध हैं, जिनमें [[पोंगल]], [[दोसा]], [[इडली]], [[वड़ा]], आदि मिलते हैं, जिनको गरमागरम या ठंडी कॉफ़ी के साथ परोसा जाता है।
== अर्थव्यवस्था ==
[[चित्र:Tidel Park.jpg|thumb|टाइडल पार्क]]
चेन्नै दक्षिण भारत के प्रमुख व्यवसाय-वाणिज्य एवं यातायात का केन्द्र है। १९वीं शताब्दी के अन्त में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना चेन्नै में हुई। चेन्नै के निकट पेरांबूर में [[भारत]] सरकार द्वारा एशिया का सबसे विशाल रेल्वे डिब्बा निर्माण का कारखाना इंटिग्रल कोच बिल्डिंग फ़ैक्ट्री को स्थापित किया गया है। यहाँ के उद्योगों में सूती वस्त्र उद्योग, रासायनिक उद्योग, काग़ज़ एवं कागज से निर्मित वस्तुओं के उद्योग, मुद्रण यंत्र एवं इससे सम्बन्धित उद्योग, चमड़ा, डीज़ल इंजन, मोटरगाड़ी, साइकिल, सिमेंट, चीनी, दियासलाई, रेल के डिब्बे तैयार करने के उद्योग, आदि प्रमुख हैं। इसके अलावा, सरकार द्वारा संचालित विभिन्न प्रकार के उद्योग एवं कारखाने चेन्नै में उपस्थित हैं। इनमें इंटिग्रल कोच फ़ैक्ट्री, हिन्दुस्तान टेलिप्रिंटर, चेन्नै रिफ़ाइनरी एवं चेन्नै फ़र्टिलाइज़र आदि प्रमुख हैं। मद्रास पेट्र'केमिकल्ज़ में पेट्रो-रसायन पदार्थ का उत्पादन होता है।
== जनसांख्यिकी ==
[[चित्र:Chennai Shopping.jpg|thumb|right|रंगनाथन स्ट्रीट [[टी नगर]] में पटरी पर ख़रीदने-बेचने वालों की भीड़ लगी रहती है।]]
चेन्नै के वासी को अंग्रेज़ी में चेन्नैयाइट और हिन्दी में प्रायः मद्रासी कह दिया जाता है। [[२००१]] में [[भारत की जनगणना]] के अनुसार चेन्नै नगर की जनसंख्या ४३.४ लाख थी, जबकि कुल महानगरीय जनसंख्या ७०.४ लाख थी।<ref name="masterplan_popfigs">{{cite web
|title=डेमोग्राफ़ी
|work=द्वितीय मास्टर प्लान - II
|pages=पृ. I-५, I-१०
|publisher=चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डवलपमेंट अथॉरिटी
|url=http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf
|format=पी.डी.एफ़
|accessdate=6 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071128071240/http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf
|archive-date=28 नवंबर 2007
|url-status=dead
}} The population density for Chennai city and the metropolitan area have been calculated using the population figures and the total area of the respective regions, mentioned in the Second Master Plan. The conversion rate of {{convert|1|mi|km|0|sing=on}} = 1.609 km. has been used to compute the density per sq. mile.</ref> २००६ की अनुमानित महानगरीय जनसंख्या ४५ लाख आयी है।<ref name="Hindu-CMDA">{{cite news
|last=श्रीवास्तन
|first=ए
|title=न्यू लैंड यूज़ प्रॉपोज़ल्स मूटेड इन ड्राफ़्ट मास्टर प्लान
|date=१२ अप्रैल २००७
|url=http://www.hindu.com/2007/04/12/stories/2007041213350400.htm
|work=[[द हिन्दु]]
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071012041105/http://hindu.com/2007/04/12/stories/2007041213350400.htm
|archive-date=12 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref> २००१ में नगर का [[जनसंख्या घनत्व]] २४,६८२ वर्ग किमी (६३,९२६ प्रति वर्ग मील) था, जबकि महानगरीय क्षेत्र का घनत्व ५,९२२ प्रति वर्ग किमी था, जिससे यह विश्व के सर्वोच्च जनसंख्या वाले नगरों में गिना जाने लगा।<ref name="masterplan_popfigs"/><ref>{{cite web
|title=अएबन एरियाज़ बाए पॉपुलेशन डेन्सिटी
|work=वर्ल्ड अर्बन एरियाज़ (वर्ल्ड एग्लोमरेशंस)
|pages=p. 77
|month=मार्च
|year=२००७
|publisher=डेमोग्राफ़िया
|url=http://www.demographia.com/db-worldua.pdf
|format=पी.डी.एफ़
|accessdate=9 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20180503021711/http://www.demographia.com/db-worldua.pdf
|archive-date=3 मई 2018
|url-status=dead
}} In terms of population density, Chennai was ranked 51st among all urban agglomerations in the world with over 500,000 people.</ref> यहाँ का [[लिंग अनुपात]] ९५१ स्त्रियाँ/१००० पुरुष है,<ref name="sex-ratio-nic">{{cite web
|title=सेन्सस २००१ डाटा
|work=भारत की जनगणना
|publisher=तमिल नाडु सरकार
|url=http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#CENSUS
|accessdate=5 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20130730180830/http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#CENSUS
|archive-date=30 जुलाई 2013
|url-status=dead
}}</ref> जो राष्ट्रीय औसत ९४४ से कुछ अधिक ही है।<ref name=CIA_World_Factbook>{{cite web| title= इंडिया| work= CIA World Factbook| url= https://www.cia.gov/library/publications/the-world-factbook/geos/in.html| accessdate= 4 अगस्त 2005| archive-url= https://web.archive.org/web/20080611033144/https://www.cia.gov/library/publications/the-world-factbook/geos/in.html| archive-date= 11 जून 2008| url-status= live}}</ref> नगर की औसत साक्षरता दर ८०.१४% है,<ref name=literacy>{{cite web
|title=डिस्ट्रिक्ट्स पर्फ़ॉर्मैन्स ऑन लिट्रेसी रेट इन तमिल नाडु फ़ॉर ईयर २००१
|work=Department of school education
|url=http://www.tn.gov.in/schooleducation/statistics/table7and8.htm
|accessdate=4 अगस्त 2005
|archive-url=https://web.archive.org/web/20050817143108/http://www.tn.gov.in/schooleducation/statistics/table7and8.htm
|archive-date=17 अगस्त 2005
|url-status=live
}}</ref> जो राष्ट्रीय औसत दर ६४.५% से कहीं अधिक है। नगर में झुग्गी-झोंपड़ी निवासियों की जनसंख्या भारत के अन्य महानगरों के मुकाबले चौथे स्थान पर आती है, जिसमें ८,२०,००० लोग (कुल जनसंख्या का १८.६%) लोग हैं।<ref name=slum>{{cite web
|title=स्लम पॉपुलेशन – सेन्सस २००१
|publisher=भारत सरकार
|url=http://www.censusindia.gov.in/
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070621135109/http://www.censusindia.net/results/slum/Intro_slum.pdf
|archive-date=21 जून 2007
|format=PDF
|accessdate=8 मार्च 2007
|url-status=live
}}</ref> यह संख्या भारत की कुल जनसंख्या का ५% है। [[२००५]] में नगर में अपराध दर ३१३.३ प्रति १ लाख व्यक्ति थी, जो भारत के सभी प्रधान नगरों में हुए अपराधों का ६.२% है।<ref>{{cite web
|url=http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/Table%201.6.pdf
|format=PDF
|accessdate=19 सितंबर 2007
|title=Incidence & Rate Of Total Cognizable Crimes (IPC) In States, UTs & Cities During 2005
|publisher=भारत सरकार
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070927005155/http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/Table%201.6.pdf
|archive-date=27 सितंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref> ये आंकड़े २००४ से ६१.८% बढ़े हैं।<ref>{{cite web
|url=http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/CHAP2.pdf
|format=पी.डी.एफ़
|accessdate=19 सितंबर 2007
|title=क्राइम इन मेगा सिटीज़
|work=क्राइम इन इन्डिया – २००५
|publisher=भारत सरकार
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070614203644/http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/CHAP2.pdf
|archive-date=14 जून 2007
|url-status=live
}}</ref>
चेन्नै में [[तमिल]] लोग बहुसंख्यक हैं। यहाँ की मुख्य भाषा [[तमिल]] ही है। व्यापार, शिक्षा और अन्य अधिकारी वर्ग के व्यवसायों एवं नौकरियों में [[अंग्रेज़ी]] मुख्यता से बोली जाती है। इनके अलावा, कम किंतु गणनीय संख्या [[तेलुगु]] तथा [[मलयाली]] लोगों की भी है।<ref>{{cite web |url=http://chennai-online.in/Profile/Culture/ |title=चेन्नई कल्चर |publisher=chennai-online.in |accessdate=8 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071006034403/http://chennai-online.in/Profile/Culture/ |archive-date=6 अक्तूबर 2007 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै में तमिलनाडु के अन्य भागों व भारत के सभी भागों से आये लोगों की भी अच्छी संख्या है। २००१ के आँकड़ों के अनुसार, नगर के ९,३७,००० प्रवासियों (चेन्नै की कुल जनसंख्या का २१.५७%) में से; ७४.५% राज्य के अन्य भागों से आये थे, २३.८% देश के अन्य भागों से तथा १.७% विदेशियों की जनसंख्या थी।<ref>{{cite web
|url=http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf
|format=PDF
|title=डेमोग्राफ़ी
|work=द्वितीय मास्टर प्लान - II
|pages=पृ. I-11
|publisher=चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डवलपमेंट अथॉरिटी
|accessdate=6 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071128071240/http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf
|archive-date=28 नवंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref>
कुल जनसंख्या में ८२.२७% [[हिन्दू]], ८.३७% [[मुस्लिम]], ७.६३% [[ईसाई]] और १.०५% [[जैन]] हैं।<ref>{{cite web
|url=http://www.chennai.tn.nic.in/shb-pdf/SHB001%20-%20AREA%20POPULATION.pdf
|format=PDF
|title=एरिया एंड पॉपुलेशन
|publisher=तमिल नाडु सरकार
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20130830215520/http://www.chennai.tn.nic.in/shb-pdf/SHB001%20-%20AREA%20POPULATION.pdf
|archive-date=30 अगस्त 2013
|url-status=dead
}}</ref>
== यातायात ==
<!-- [[Image:Madras Port In 1996.jpg|thumb|200px|right|Chennai Port]]
-->
{{main|चेन्नई में यातायात }}
[[चित्र:Tidel Park junction panorama.jpg|thumb|300px|चेन्नै में आइ टी हाइवे, जिसके शिरोपरि [[एम आर टी एस (चेन्नई)|एम आर टी एस (चेन्नै)]] निकलता हुआ दिखायी दे रहा है।]]
चेन्नै दक्षिण भारत के प्रवेशद्वार की भाँति प्रतीत होता है, जिसमें अन्ना अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल एवं कामराज अन्तर्देशीय टर्मिनल सहित [[चेन्नई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा|चेन्नै अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डा]] [[भारत]] का [[भारत के विमानक्षेत्र|तीसरा व्यस्ततम विमानक्षेत्र]] है।<ref>{{cite web
|url=http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex3.pdf
|format=PDF
|publisher=[[भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण]]
|title=Traffic statistics - Passengers (Intl+Domestic), Annexure IIIC
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070926044903/http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex3.pdf
|archive-date=26 सितंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref><ref>{{cite web
|url=http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex2.pdf
|format=PDF
|publisher=भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण
|title=Traffic statistics - Aircraft movements (Intl+Domestic), Annexure IIC
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070926044906/http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex2.pdf
|archive-date=26 सितंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref> चेन्नै नगर दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, पूर्वी एशिया, मध्य पूर्व, [[यूरोप]] एवं [[उत्तर अमेरिका|उत्तरी अमरीका]] के प्रधान बिंदुओं पर ३० से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं से जुड़ा हुआ है। यह विमानक्षेत्र देश का दूसरा व्यस्ततम कार्गो टर्मिनस है। वर्तमान विमानक्षेत्र में अधिक आधुनिकीकरण और विस्तार कार्य प्रगति पर हैं। इसके अलावा [[श्रीपेरंबुदूर]] में नया ग्रीनफ़ील्ड एयरपॉर्ट लगभग ₹२००० करोड़ की लागत से बनना तय हुआ है।<ref name=New_Airport>{{cite news
|title=New greenfield airport to be set up near Chennai
|work=द हिन्दू
|url=http://www.hindu.com/thehindu/holnus/001200705221441.htm
|date=मई 22, 2007
|accessdate=22 मई 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20121026105518/http://www.hindu.com/thehindu/holnus/001200705221441.htm
|archive-date=26 अक्तूबर 2012
|url-status=live
}}</ref>
नगर में दो प्रधान सागरपत्तन (बंदरगाह) हैं, [[चेन्नई पोर्ट|चेन्नै पॉर्ट]] जो सबसे बड़े कृत्रिम बंदरगाहों में एक है, तथा [[एन्नोर पोर्ट]]। चेन्नै पॉर्ट [[बंगाल की खाड़ी]] में सबसे बड़ा बंदरगाह और भारत का दूसरा सबसे बड़ा सागरीय-व्यापार केन्द्र है, जहाँ ऑटोमोबिल, मोटरसाइकिल, सामान्य औद्योगिक माल और अन्य थोक खनिज की आवाजाही होती है।<ref>{{cite news
|url=http://app.mfa.gov.sg/pr/read_content.asp?View,4753,
|publisher=Business Times
|title=Gateway to India for Singapore firms
|date=जुलाई 6, 2006
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20100312232206/http://app.mfa.gov.sg/pr/read_content.asp?View,4753,
|archive-date=12 मार्च 2010
|url-status=dead
}}</ref> [[मुम्बई]] के बाद भारत का यही सबसे बड़ा पत्तन है। इस कृत्रिम बन्दरगाह में जलयानों के लंगर डालने के लिए कॉन्क्रीट की मोटी दीवारें सागर में खड़ी करके एक साथ दर्जनों जलयानों के ठहराने योग्य पोताश्रय बना लिया गया है। दक्षिणी भारत का सारा दक्षिण-पूर्वी भाग ([[तमिलनाडु]], दक्षिणी आन्ध्र प्रदेश तथा कर्नाटक राज्य) इसकी पृष्ठभूमि है। यहाँ मुख्य निर्यात मूँगफली और इसका तेल, तम्बाकू, प्याज़, कहवा, अरबरक, मैंग्नीज़, चाय, मसाला, तिलहन, चमड़ा, नारियल, इत्यादि हैं तथा आयात में कोयला, पिट्रॉलियम, धातु, मशीनरी, लकड़ी, कागज़, मोटर-साइकिल, रसायन, चावल और खाद्यान्न, लम्बे रेशे वाली कपास, रासायनिक पदार्थ, आदि प्रमुख हैं। एक छोटा बंदरगाह [[रोयापुरम]] में भी है, जो स्थानीय मछुआरों और जलपोतों द्वारा प्रयोग होता है। पूर्वी तट पर चेन्नै की महत्त्वपूर्ण स्थिति ने प्राकृतिक सुविधा के अभाव में भी कृत्रिम व्यवस्था द्वारा एक पत्तन का विकास पाया है। एक बन्दरगाह होने के कारण कोलकाता, विशाखापट्टनम, कोलम्बों, रंगून, पोर्ट ब्लेयर आदि स्थानों से समुद्री मार्ग द्वारा सम्बद्ध है।
[[चित्र:Velachery Railway station June 2010.jpg|thumb|left|चेन्नै में [[सामूहिक त्वरित यातायात प्रणाली (चेन्नई)|एम.आर.टी.एस]] ट्रेन का स्टेशन]]
आज रेलमार्गों और सड़कों के मुख्य जंक्शन होने के कारण से, यह नगर देश के विभिन्न नगरों से जुड़ा हुआ है। यह वायु मार्ग द्वारा [[बेंगलुरु|बेंगलूरु]], कोलकाता, मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद आदि देश के विभिन्न नगरों से जुड़ा हुआ है। चेन्नै देश के अन्य भागों से रेल द्वारा भी भली-भाँति जुड़ा हुआ है। यहाँ से, पाँच मुख्य [[भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग|राष्ट्रीय राजमार्ग]] नगर को [[मुंबई]], [[कोलकाता]], [[तिरुचिरापल्ली]], [[तिरुवल्लुर]], तिंडिवनम और [[पुदुचेरी]] को जोड़ते हैं।<ref name=transport>{{cite web | title= GIS database for Chennai city roads and strategies for improvement | publisher= Geospace Work Portal | url= http://www.gisdevelopment.net/application/Utility/transport/utilitytr0001.htm | accessdate= 4 अगस्त 2005 | archive-url= https://web.archive.org/web/20120717045706/http://www.gisdevelopment.net/application/Utility/transport/utilitytr0001.htm | archive-date= 17 जुलाई 2012 | url-status= dead }}</ref> चेन्नै मोफ़स्सिल बस टर्मिनस शहर की सभी अन्तर्राज्यीय बस सेवाओं का अड्डा है। यह [[एशिया]] का सबसे बड़ा बस-अड्डा है।<ref name="thehindu20051228">{{cite news
|last=Dorairaj
|first=S
|url=http://www.hindu.com/2005/12/28/stories/2005122816740400.htm
|work=द हिन्दू
|title=Koyambedu bus terminus gets ISO certification
|date=दिसम्बर 28, 2005
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20111107232736/http://www.hindu.com/2005/12/28/stories/2005122816740400.htm
|archive-date=7 नवंबर 2011
|url-status=live
}}</ref> सात सरकारी यातायात निगम अन्तर-नगरीय और अन्तर्राज्यीय बस सेवाएँ संचालित करते हैं। बहुत-सी निजी बस सेवाएँ भी चेन्नै को अन्य नगरों से सुलभ कराती हैं।
चेन्नै [[दक्षिण रेलवे (भारत)|दक्षिण रेलवे]] का मुख्यालय है। नगर में दो मुख्य रेलवे टर्मिनल हैं। [[चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन|चेन्नै सेंट्रल रेऽलवे स्टेशन]], जहाँ से सभी बड़े नगरों जैसे [[मुम्बई|मुंबई]], [[कोलकाता]], [[बेंगलुरु|बेंगलूरु]], [[दिल्ली]], [[हैदराबाद]], [[कोच्चि]], [[कोयंबतूर]], [[तिरुवनंतपुरम]], इत्यादि के लिए रेल-सुविधा उपलब्ध हैं।<ref>{{cite web|url=http://www.southernrailway.org/sutt/arr-dep.php|title=Sub-urban Train timings|publisher=Indian Railways|accessdate=6 अक्टूबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011023042/http://southernrailway.org/sutt/arr-dep.php|archive-date=11 अक्तूबर 2007|url-status=dead}}</ref> [[चेन्नई एगमोर रेलवे स्टेशन|चेन्नै एगमोर रेलवे स्टेशन]] से प्रायः [[तमिलनाडु]] के नगरों की रेल सेवाएँ ही उपलब्ध हैं। कुछ निकटवर्ती राज्य के नगरों की भी रेलगाड़ियाँ यहाँ से चलती हैं।<ref name="egmore-trains">{{cite news
|title=35 trains to run at higher speed
|date=अगस्त 27, 2004
|url=http://www.hindu.com/2004/08/28/stories/2004082807870500.htm
|work=द हिन्दू
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071013122036/http://hindu.com/2004/08/28/stories/2004082807870500.htm
|archive-date=13 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref>
[[चित्र:Chennai Royapettah clock tower.jpg|thumb|एमटीसी की वॉल्वो बस]]<!-- end of image -->
नगर में लोक यातायात हेतु बस, रेल, ऑटोरिक्शा आदि सर्वसुलभ साधन हैं। [[चेन्नई उपनगरीय रेलवे|चेन्नै उपनगरीय रेलवे]] नेट्वर्क भारत में सबसे पुराना है। इसमें चार [[ब्रॉड गेज|ब्रॉड गेऽज]] वाले रेऽल क्षेत्र हैं, जो नगर में दो स्थानों [[चेन्नई सेंट्रल|चेन्नै सेंट्रल]] और [[चेन्नई बीच रेलवे स्टेशन|चेन्नै बीच रेलवे स्टेशन]] पर मिलते हैं। इन टर्मिनल से नगर में निम्न सेक्टरों के लिए नियमित सेवाएँ उपलब्ध हैं:
* [[चेन्नई सेंट्रल|चेन्नै सेंट्रल]]/[[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] - [[अरक्कोणम]] - [[तिरुट्टनी]] ([[चेन्नई उपनगरीय रेलवे – पश्चिम लाइन|चेन्नै उपनगरीय रेलवे – पश्चिम लाइन]])
* [[चेन्नई सेंट्रल|चेन्नै सेंट्रल]]/ [[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] – गुम्मिडीपूंडी - सुलुरपेट ([[चेन्नई उपनगरीय रेलवे|चेन्नै उपनगरीय रेलवे]])
* [[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] – [[तांबरम]] - [[चेंगलपट्टू]] - तिरुमलैपुर ([[कांचीपुरम|काँचीपुरम]]) ([[चेन्नई उपनगरीय रेलवे – दक्षिण लाइन|चेन्नै उपनगरीय रेलवे – दक्षिण लाइन]])
* चौथा सेक्टर भूमि से उच्च स्तर पर है और [[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] को [[वेलाचेरी]] से जोड़ता है और शेष जाल से भी जुड़ा हुआ है।
[[चेन्नई मेट्रो|चेन्नै मेट्रो]] चेन्नै के लिए अनुमोदित एक त्वरित यातायात सेवा है। इसके प्रथम चरण में दो लाइनें प्रयोग में है एवं अन्य लाइनों का कार्य निर्माणाधीन है। इस पूरी परियोजना में, पहले चरण के दो गलियारों की लागत ₹१४,६०० करोड़ है, जो ५०.१ किमी तक लंबे हैं। २००७ के आकलन से ₹९,५९६ करोड़ की लागत आयी थी।<ref name="hindumetrorail">{{cite web
|first=TheCSR
|title=Chennai metro work begins
|date=अप्रैल 18, 2008
|url=http://www.hindu.com/2008/04/18/stories/2008041860651200.htm
|work=द हिन्दू
|accessdate=17 जुलाई 2009
|archive-url=https://web.archive.org/web/20081101201943/http://www.hindu.com/2008/04/18/stories/2008041860651200.htm
|archive-date=1 नवंबर 2008
|url-status=live
}}</ref>
मेट्र'पॉलिटन ट्रांसपॉर्ट कॉर्परेशन (एमटीसी) नगर में बस यातायात संचालित करता है। निगम का २७७३ बसों का बेड़ा २८८ मार्गों पर ३२.५ लाख यात्रियों को दैनिक परिवहन उपलब्ध कराता है।<ref name=mtc_details>{{cite web
|title=The Growth
|publisher=Metropolitan Transport Corporation (Chennai) Ltd
|url=http://www.mtcbus.org/
|date=मई 31, 2008
|accessdate=31 मई 2008
|archive-url=https://web.archive.org/web/20080526170357/http://mtcbus.org/
|archive-date=26 मई 2008
|url-status=dead
}}</ref>
नगर के बहुत से मार्गों पर मैक्सी कैब नाम से वैन और सवारी भाड़े पर ऑटोरिक्शा भी चलते हैं, जो बस सेवा का विकल्प देते हैं। चेन्नै की यातायात संरचना अच्छा संपर्क उपलब्ध कराती है, किंतु बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ-साथ यातायात संकुलन और प्रदूषण की समस्याएँ भी खड़ी हो गयी हैं। प्रशासन ने इन समस्याओं के समाधान के लिए फ़्लाइओवर तथा ग्रेऽड-सेपिरेटर निर्माण किये हैं, जिनका शुभारंभ [[१९७३]] में जेमिनाइ फ़्लाइओवर से नगर की सबसे महत्वपूर्ण सड़क अन्ना सालै से हुआ था।<ref>{{cite web
|url=http://www.hindu.com/nic/draftmasterplanii_short.pdf
|format=PDF
|title=Land Use and Planning Strategy
|work=Draft Master Plan – II for Chennai Metropolitan Area
|publisher=Chennai Metropolitan Development Authority
|page=p. 60
|accessdate=16 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070927005157/http://www.hindu.com/nic/draftmasterplanii_short.pdf
|archive-date=27 सितंबर 2007
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite news
|last=Srivathsan
|first=A
|url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/thscrip/print.pl?file=2007092950161200.htm&date=2007/09/29/&prd=pp&
|title=Bridge across time Skyline
|work=द हिन्दू
|date=सितम्बर 29, 2007
|accessdate=16 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20110327174358/http://www.hinduonnet.com/thehindu/thscrip/print.pl?file=2007092950161200.htm&date=2007%2F09%2F29%2F&prd=pp&
|archive-date=27 मार्च 2011
|url-status=dead
}}</ref> और हाल ही में तैयार हुई इस शृंखला की नवीनतम कड़ी काठीपाड़ा फ़्लाइओवर है।
== शिक्षा ==
[[चित्र:Anna-university.jpg|thumb|चेन्नै में स्थित अन्ना विश्वविद्यालय]]
चेन्नै में सरकारी एवं निजी दोनों प्रकार के विद्यालय हैं। शिक्षा का माध्यम तमिल अथवा अंग्रेज़ी है। अधिकांश विद्यालय तमिलनाडु राज्य शिक्षा मंडल या केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बॉर्ड (सीबीएसई) से जुड़े हैं।<ref>{{cite news
|url=http://www.hindu.com/edu/2006/11/20/stories/2006112000410100.htm
|title=Balancing uniformity and diversity
|work=द हिन्दू
|date=नवम्बर 20, 2006
|author=रामचंद्रन, के. एवं श्रीनिवासन, मीरा
|accessdate=7 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071013193537/http://hindu.com/edu/2006/11/20/stories/2006112000410100.htm
|archive-date=13 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref> नगर में कुल १,३८९ विद्यालय हैं, जिनमें से ७३१ प्राथमिक, २३२ माध्यमिक और ४२६ उच्च माध्यमिक विद्यालय हैं।<ref>{{cite web
|url=http://www.schools.tn.nic.in/TownSchools.asp?DCODE=02&VTCODE=40200988
|title=No. of Schools in the Town : Chennai
|publisher=Govt. of Tamil Nadu
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090409225017/http://www.schools.tn.nic.in/TownSchools.asp?DCODE=02&VTCODE=40200988
|archive-date=9 अप्रैल 2009
|url-status=dead
}}</ref>
इंजिनियरिंग शिक्षा के लिए, चेन्नै में [[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान चेन्नई|भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान]], १७९४ में स्थापित कॉलिज ऑव इंजिनियरिंग, गिंडी, १९४९ में स्थापित मद्रास प्रौद्योगिकी संस्थान और एस आर एम विश्वविद्यालय जाने माने संस्थान हैं। अधिकांश इंजिनियरिंग महाविद्यालय [[अन्ना विश्वविद्यालय]] से संबद्ध हैं। मद्रास मेडिकल कॉलिज, स्टेनली मेडिकल कॉलिज, किलपॉक मेडिकल कॉलिज और एस आर. एम. मेडिकल कॉलिज एवं अनुसंधान संस्थान चेन्नै के प्रमुख चिकित्सा महाविद्यालय हैं।
विज्ञान, कला एवं वाणिज्य क्षेत्र में शिक्षा प्रदान कराने वाले अधिकांश महाविद्यालय मद्रास विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। मद्रास विश्वविद्यालय की नगर में तीन परिसर हैं। मद्रास क्रिश्चन कॉलिज, लॉयला कॉलिज, द न्यू कॉलिज और पेट्रिशन कॉलिज कुछ प्रसिद्ध स्व-वित्तपोषित महाविद्यालय हैं। चेन्नै में कई अनुसंधान केन्द्र भी हैं।
== खेल-कूद ==
[[चित्र:M. A. Chidambaram Stadium Challenger Trophy 2006.jpg|thumb|एम ए चिदंबरम स्टेडियम]] चेन्नै नगर विविध खेलों के लिए प्रसिद्ध है। नगर ने भारत को कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिये हैं। एस वेंकट राघवन और [[कृष्णम्माचारी श्रीकांत]] ने [[क्रिकेट]] में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।<ref>{{cite web|title=Srinivas Venkataraghavan|publisher=क्रिक इन्फ़ो|url=http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/35656.html|first=प्रताप|last=रामचंद|accessdate=15 अक्टूबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011202950/http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/35656.html|archive-date=11 अक्तूबर 2007|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|title=Kris Srikanth|publisher=क्रिक इन्फ़ो|url=http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/34103.html|first=प्रताप|last=रामचंद|accessdate=१५ अक्टूबर २००७|archive-url=https://web.archive.org/web/20090214140744/http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/34103.html|archive-date=१४ फ़रवरी २००९|url-status=live}}</ref> [[इंग्लैण्ड|इंग्लैंड]] के प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी [[नासिर हुसैन (क्रिकेट खिलाड़ी)|नासिर हुसैन]] का जन्म भी चेन्नै में हुआ था। [[एम आर एफ़ पेस फ़ाउंडेशन]] एक प्रसिद्ध तेज गेंदबाजी सिखाने की संस्था है, जो सन १९८७ से चेन्नै में संचालित हो रही है। [[इंडियन प्रीमियर लीग|इंडियन प्रेमियर लीग]] में चेन्नै के स्थानीय टीम का नाम [[चेन्नई सुपर किंग्स|चेन्नै सूपर किंग्ज़]] है, जिसके कप्तान [[महेंद्र सिंह धोनी]] हैं। चेपुक में स्थित [[एम ए चिदंबरम स्टेडियम]] भारत के सबसे पुराने क्रिकेट के मैदानो में से एक है।<ref>{{cite web
|last=श्रीराम
|first=नटराजन
|url=http://content-usa.cricinfo.com/india/content/ground/58008.html
|title=MA Chidambaram stadium
|publisher=क्रिक्इन्फ़ो
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20061104024506/http://content-usa.cricinfo.com/india/content/ground/58008.html
|archive-date=4 नवंबर 2006
|url-status=live
}}</ref>
मेयर राधाकृष्णन स्टेडियम [[हॉकी]] का एक लोकप्रिय मैदान है। यहाँ एशिया कप एवं चैंपियंज़ ट्रोफ़ी जैसी प्रमुख हॉकी प्रतियोगिताएँ हो चुकी हैं।<ref>{{cite news
|url=http://www.hindu.com/2007/09/10/stories/2007091055590100.htm
|title=India retains Asia Cup hockey title
|work=द हिन्दू
|date=सितम्बर 10, 2007
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20110629021257/http://www.hindu.com/2007/09/10/stories/2007091055590100.htm
|archive-date=29 जून 2011
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite news
|url=http://www.hindu.com/2004/10/20/stories/2004102004161800.htm
|title=Radhakrishnan stadium to have new turf
|work=द हिन्दू
|date=अक्टूबर 20, 2004
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090825233850/http://www.hindu.com/2004/10/20/stories/2004102004161800.htm
|archive-date=25 अगस्त 2009
|url-status=live
}}</ref>
प्रेमियर हॉकी लीग में चेन्नै का प्रतिनिधित्व चेन्नै वीरंज़ नामक एक टीम करती है।
[[चित्र:Nungambakkam SDAT Tennis Stadium floodlit match panorama.jpg|thumb|चेन्नै में आयोजित होने वाली चेन्नै ओपन प्रतियोगिता]][[चेन्नई ओपन|चेन्नै ओपन]] चेन्नै में आयोजित होने वाली एक प्रसिद्ध [[टेनिस]] प्रतियोगिता है। यह भारत की एक मात्र एटीपी प्रतियोगिता है। [[विजय अमृतराज]] और [[रमेश कृष्णन]] प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी हैं, जो चेन्नै से संबंध रखते हैं।<ref name="amirtharajs">{{cite news
|last=बसु
|first=अरुंधती
|title=Off-court ace
|date=मार्च 19, 2005
|url=http://www.telegraphindia.com/1050319/asp/weekend/story_4513588.asp
|work=द टेलिग्रैफ़
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011164652/http://telegraphindia.com/1050319/asp/weekend/story_4513588.asp
|archive-date=11 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite news
|last=Srinivasan
|first=Kamesh
|title=For Paes and Bhupathi, glory days began in Chennai
|date=दिसम्बर 28, 2001
|url=http://www.hindu.com/2001/12/28/stories/2001122801651900.htm
|work=द हिन्दू
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011212144/http://hindu.com/2001/12/28/stories/2001122801651900.htm
|archive-date=11 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref><ref name="ramanathan-krishnan">{{cite news
|last=Keerthivasan
|first=K
|title=A trip down memory lane
|date=दिसम्बर 30, 2004
|url=http://www.hindu.com/2004/12/30/stories/2004123006512000.htm
|work=द हिन्दू
|accessdate=11 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071029135800/http://www.hindu.com/2004/12/30/stories/2004123006512000.htm
|archive-date=29 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite web
|url=http://www.chennaiopen.org
|title=About the venue
|publisher=[[International Management Group]]
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20190602204450/http://www.chennaiopen.org/
|archive-date=2 जून 2019
|url-status=live
}}</ref>
सन [[१९९५]] में चेन्नै साउथ एशन गेम्ज़ का मेज़बान रहा है।<ref>{{cite news
|last=Thyagarajan
|first=S
|title=On the road to restoration
|date=दिसम्बर 4, 2003
|url=http://www.hindu.com/mp/2003/12/04/stories/2003120400820400.htm
|work=द हिन्दू
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071013194123/http://hindu.com/mp/2003/12/04/stories/2003120400820400.htm
|archive-date=13 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref>
जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम फ़ुटबॉल एवं ऐथिलेटिक स्पर्धाओं के लिए उपयोग होता है। कई अन्य स्पर्धाएँ, जैसे वॉलिबॉल, बास्किटबॉल और टेबल टेनिस का आयोजन, इसी स्टेडियम में होता है। जल क्रीड़ा स्पर्धाओं का आयोजन वेलाचेरी अक्वेटिक कॉम्प्लेक्स में होता है।
कार दौड़ प्रतियोगिताओं में चेन्नै का नाम भारत में सर्वप्रथम लिया जाता है। [[श्रीपेरम्बदूर]] में स्थित इरुन्गट्टुकोट्टाइ में एक रेऽस ट्रैक है, जिसे अंतरराष्ट्रीय कार रेऽस प्रतियोगिता के लिए उपयोग में लाया जाता है।<ref name="hindumotorsport">{{cite news
|last=Thyagarajan
|first=S
|title=On the right track
|date=अगस्त 22, 2002
|url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2002/08/22/stories/2002082200640400.htm
|work=द हिन्दू
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011182248/http://hinduonnet.com/thehindu/mp/2002/08/22/stories/2002082200640400.htm
|archive-date=11 अक्तूबर 2007
|url-status=dead
}}</ref> घुड़दौड़ गिंडी रेऽस कॉर्स में होती है। मद्रास बोट क्लब नौकायान प्रतियोगिता को करवाता है। चेन्नै में दो गोल्फ़ मैदान हैं: कॉस्म'पॉलिटन क्लब और जिम क्लब। विश्वप्रसिद्ध शतरंज खिलाड़ी [[विश्वनाथ आनंद]] का बचपन भी चेन्नै में बीता है।<ref>{{cite news
|last = Brijnath
|first = Rohit
|url = http://www.hindu.com/2007/10/06/stories/2007100655521900.htm
|title = India's most consistent champion
|work = [[द हिन्दू]]
|date = अक्टूबर 6, 2007
|accessdate = 11 अक्टूबर 2007
|archive-url = https://web.archive.org/web/20071011192157/http://www.hindu.com/2007/10/06/stories/2007100655521900.htm
|archive-date = 11 अक्तूबर 2007
|url-status = live
}}</ref><ref>{{cite news
|last=Fide
|first=
|url=http://ratings.fide.com/toparc.phtml?cod=117
|title=FIDE Top 100 Players October 2007
|work=Fide
|date=अक्टूबर 15, 2007
|accessdate=15 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20080424104027/http://ratings.fide.com/toparc.phtml?cod=117
|archive-date=24 अप्रैल 2008
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite news
|last=Official site of the 2007 World Chess Championship
|first=
|url=http://www.chessmexico.com/es/index.php?option=com_content&task=blogcategory&id=22&Itemid=114
|title=Viswanathan Anand the new World Champion 2007
|work=
|date=अक्टूबर 15, 2007
|accessdate=15 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071014143041/http://www.chessmexico.com/es/index.php?option=com_content&task=blogcategory&id=22&Itemid=114
|archive-date=14 अक्तूबर 2007
|url-status=dead
}}</ref>
२००६ राष्ट्रमंडल खेलों में [[टेबल टेनिस]] में स्वर्ण जीतने वाले शरद कमाल<ref>{{cite news
|last=Srinivasan
|first=Meera
|url=http://www.hindu.com/2007/09/07/stories/2007090760930400.htm
|title=Four Chennai teachers have a reason to rejoice
|work=[[द हिन्दू]]
|date=सितम्बर 7, 2007
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071012041902/http://hindu.com/2007/09/07/stories/2007090760930400.htm
|archive-date=12 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref> और दो बार की विश्व [[कैरम]] विजेता मारिया इरुदयम भी चेन्नै के निवासी हैं।<ref>{{cite web
|url=http://sportal.nic.in/front.asp?maincatid=51&headingid=71
|publisher=Govt. of India
|title=Indian Teams in International Competitions
|accessdate=11 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070927012135/http://sportal.nic.in/front.asp?maincatid=51&headingid=71
|archive-date=27 सितंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref>
== पर्यटन ==
चेन्नै को सूपर प्रसारित नगर कहते हैं। यहाँ अनेक दर्शनीय स्थल हैं, जिनमें [[मद्रास विश्वविद्यालय]], चेपक महल, मत्स्य पालन केंद्र, कपिलेश्वर और पार्थसारथी का मंदिर, अजायबघर और चिड़ियाघर आदि प्रमुख हैं। चेन्नै का एक अन्य महत्वपूर्ण आकर्षण है [[सेंट जॉर्ज फोर्ट|सेंट जॉर्ज फ़ॉर्ट]]। इसे सन् [[१६४०]] में ईस्ट इंडिया कंपनी के फ़्रांसिंस डे ने बनाया था। यह क़िला ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापारिक केंद्र था। १५० वर्षों तक यह युद्धों और षड्यंत्रों का केंद्र बना रहा। इस क़िले में पुरानी सैनिक छावनी, अधिकारियों के मकान, सेंट मेअरी गिरजाघर एवं रॉबर्ट क्लाइव़ का घर है। सेंट मेअरी गिरजाघर अंग्रेज़ों द्वारा भारत में बनवाया गया सबसे पुराना चर्च माना जाता है।
चेन्नै का [[मरीना बीच (चेन्नई)|मरीना बीच]] पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण है। यह विश्व का दूसरा सबसे लंबा समुद्र तट है। इसके दो सौ से तीन सौ गज चौड़े रेतीले तट पर शाम को इतनी अधिक भीड़ होती है कि लगता है, मानो सारा नगर वहीं आ गया है। सारे दिन की थकान से चेन्नैवासी शाम को मरीना बीच के किनारे भ्रमण करके मुक्ति पाते हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए मरीना बीच पर एक स्वीमिंग पूल है, जो दुर्घटनाओं को घटने से रोकता है, क्योंकि यहाँ समुद्र की गहराई और लहरों का तेज प्रवाह ख़तरनाक है। [[शार्क]] मछलियों की अधिकता भी है, अतः स्नान या तैरने के लिए स्वीमिंग पूल का ही लाभ लेना चाहिए। इसी के पास एक मछलीघर भी है, जिसमें तरह-तरह की देशी-विदेशी मछलियाँ दर्शनार्थ रखी गयी हैं। मरीना तट का उत्तरी भाग पूर्व मुख्यमंत्री [[अन्नादुरै]] के समाधि-स्थल के रूप में विकसित किया गया है। यहाँ लोगों को श्रद्धानवत होते देखा जा सकता है। साथ में, एम.जी.आर. स्मारक भी है, जिसका प्रवेश द्वार दो विशाल हाथी दाँत के रूप में बनाया गया है। यहाँ एक मशाल हमेशा प्रज्ज्वलित रहती है।
चेन्नै का स्नेक पार्क भी पर्यटकों को प्रभावित करता है। यह अपनी तरह का एक अलग ही पार्क है, जिसका निर्माण रोमुलस विटेकर नामक एक अमेरिकी ने किया था। यह ५०० से भी ज़्यादा ख़तरनाक भारतीय [[साँपों]] का जीवित संग्रहालय कहा जा सकता है। रेंगते हुए ये विषधर भय मिश्रित रोमांच पैदा करते हैं। यहाँ पर साँपों के अलावा [[सरीसृप वर्ग]] के अन्य जीव, जैसे [[मगरमच्छ]], घड़ियाल इत्यादि भी रखे गये हैं। चेन्नै महानगर की कलात्मक संस्कृति के दर्शन पैंथियान रोड स्थित नैशनल आर्ट गैलिरी में सहज ही किये जा सकते हैं।
धार्मिक दृष्टिकोण से संपूर्ण [[दक्षिण भारत]] एक तीर्थ है, जहाँ वास्तुकला और मूर्तिकला के अद्वितीय उदाहरण हैं। इन मंदिरों में भव्यता और कलाशिल्प देखने योग्य है। [[उत्तर भारत]] से एकदम अलग शैली के मंदिर होने के बावजूद श्रद्धा और भक्ति में ये समस्त भारतीय आस्तिकों को आकर्षित करते हैं। तिरुषैलिफेनी में स्थित पार्थ सारथी मंदिर का उल्लेख है, जिसका निर्माण आठवीं शताब्दी में राजा पल्लव ने करवाया था। इस देवस्थान की दीवारों पर सुंदर कलाकृतियाँ अंकित हैं। दूसरा आकर्षक मंदिर है, द्राविड़ शिल्पकला में निर्मित मिलापोर में स्थित कालीश्वर मंदिर। यहाँ माता पार्वती की उपासना की गाथा अंकित है। समुद्र की रेत से तपता यह क्षेत्र अत्यंत गर्म जलवायु लिये हुए है, जो केले, नारियल और पाम के पेड़ों से ख़ूबसूरत लगता है।
== चित्र दीर्घा ==
<gallery>
File:MylaporeKapaleeshwararTemple.jpg|मल्यापुर कपिलेश्वर मंदिर
File:Chennai_corp.jpg| चेन्नै महानगर पालिका भवन
File:M. A. Chidambaram Stadium Challenger Trophy 2006.jpg| एम. ए. चिदंबरम क्रिकिट स्टेडियम
File:Chennai_National_Art_Gallery.jpg| चेन्नै में स्थित राष्ट्रीय कला दीर्घा
File:Chettinad Palace, Chennai.jpg| अड्यार नदी के तट पर स्थित चेट्टीनाड महल
File:Santhome Basilica.jpg| सान्तोम बासेलिका
File:Anna Samadhi entrance.jpg| मरीना बीच पर स्थित अन्ना समाधि का प्रवेशद्वार
File:Iitm maingate logo.jpg| भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, चेन्नै के प्रवेशद्वार पर लगा संस्था का प्रतीक चिह्न
</gallery>
== सन्दर्भ ==
{{reflist|2}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
{{Commonscat|Chennai|चेन्नई}}
* [https://web.archive.org/web/20090422032753/http://www.tourismchennai.com/ चेन्नै पर्यटन]
* [https://web.archive.org/web/20110429011354/http://www.chennai.tn.nic.in/ चेन्नै प्रशासन का आधिकारिक जालस्थल]
* [https://web.archive.org/web/20080501095016/http://www.chennaicorporation.com/ चेन्नै नगर निगम - आधिकारिक जालस्थल]
* [https://web.archive.org/web/20070927092854/http://www.cmdachennai.org/ चेन्नै महानगर विकास प्राधिकरण का जालस्थल]
{{चेन्नई}}{{चेन्नई में त्वरित यातायात}}
{{भारतीय मेट्रोपॉलिटन शहर}}
{{भारत के राज्य और केन्द्रशासित प्रदेश के राजधानी}}
{{भारत के मिलियन+ नगर}}
.
[[श्रेणी:चेन्नई]]
[[श्रेणी:तमिलनाडु]]
[[श्रेणी:भारत के महानगर]]
[[श्रेणी:तमिल नाडु के शहर]]
[[श्रेणी:कॉमन्स पर निर्वाचित चित्र युक्त लेख]]
[[श्रेणी:चेन्नई ज़िला]]
[[श्रेणी:कोरोमंडल तट]]
dcacq58fusq583h8krzl2s10syvv1ol
6591430
6591425
2026-07-24T02:31:56Z
AMAN KUMAR
911487
[[Special:Contributions/Dimple323|Dimple323]] ([[User talk:Dimple323|Talk]]) के संपादनों को हटाकर [[User:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया
6426859
wikitext
text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक अवस्थापन
| name = चेन्नई
| native_name = {{hlist|சென்னை|Chennai}}
| settlement_type = [[महानगर]]
| image_seal =
| pushpin_map = India
| pushpin_label_position = right
| subdivision_type = देश
| subdivision_name = {{IND}}
| subdivision_type1 = [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|राज्य]]
| subdivision_name1 = [[तमिल नाडु]]
| subdivision_type2 = [[भारत के ज़िले|ज़िला]]
| subdivision_name2 = [[चेन्नई जिला|चेन्नई]]
| population_as_of = 2011
| population_total = 6748026
| population_metro = 8696010
| population_footnotes = <ref name="pop">{{Cite web |url=http://www.census2011.co.in/city.php |title=संग्रहीत प्रति |access-date=23 अप्रैल 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190321092118/http://www.census2011.co.in/city.php |archive-date=21 मार्च 2019 |url-status=dead }}</ref>
| timezone1 = [[भारतीय मानक समय|IST]]
| utc_offset1 = +5:30
| website = {{URL|www.chennaicorporation.gov.in}}
| footnotes =
| official_name =
| translit_lang1_type =
| image_skyline = {{multiple image
|perrow = 1/2/2/2
|border = infobox
|total_width = 300
|image1 = Chennai Central.jpg
|caption1 = [[चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन]]
|image2 = Kapaleeswarar_Temple%2C_Mylapore%2C_Chennai.jpg
|caption2 = [[कपालीश्वर मंदिर]]
|image3 = Valluvar_Kottam_Edit1.JPG
|caption3 = [[वल्लुवर कोट्टम]]
|image4 = Chennai LabourStatue Closeup.jpg
|caption4 = [[श्रम की प्रतिमा]]
|image5 = Kathipara Crop.jpg
|caption5 = [[कत्तिपारा जंक्शन]]
|image6 = Ripon Building Chennai.JPG
|caption6 = [[राइपन बिल्डिंग]]
|image7 = Chennai - bird's-eye view.jpg
|caption7 = [[मरीना बीच (चेन्नई)|मरीना बीच]]
}}
| image_shield = Chennai Corporation Emblem.png
| government_type = [[नगर निगम (भारत)|नगर निगम]]
| governing_body = [[चेन्नई नगर निगम]]
| leader_title = महापौर
| leader_name = प्रिया राजन
| leader_title1 = अध्यक्ष
| leader_name1 = ज. कुमारगुरुबरन
| area_total_km2 = 426
| area_metro_km2 = 5904
| elevation_m = 7
| population_density_km2 = auto
| area_code = +91-44
| registration_plate = TN-01 से TN-14, TN-18, TN-22, TN-85
| blank_info_sec1 = 600xxx
| blank_name_sec1 = [[डाक सूचक संख्या|PIN]]
| blank1_name_sec1 = आधिकारिक भाषाएँ
| blank1_info_sec1 = {{hlist|[[तमिल भाषा|तमिल]]|[[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]}}
| other_name = मद्रास
}}
'''चेन्नई''' ({{Langx|ta|சென்னை}}, {{Langx|en|Chennai|italic=no}}), जिसे 1996 तक '''मद्रास''' के नाम से जाना जाता था, [[बंगाल की खाड़ी]] के कोरोमंडल तट पर स्थित यह दक्षिण [[भारत]] के सबसे बड़े सांस्कृतिक, आर्थिक और शैक्षिक केंद्रों में से सबसे प्रमुख है। चेन्नई भारतीय राज्य [[तमिल नाडु]] की राजधानी है। 2011 की भारतीय जनगणना (चेन्नई नगर की नई सीमाओं के लिए समायोजित) के अनुसार, यह चौथा सबसे बड़ा नगर है और भारत में चौथा सबसे अधिक आबादी वाला नगरीय ढांचा है। आस-पास के क्षेत्रों के साथ नगर चेन्नई मेट्रोपॉलिटन एरिया है, जो दुनिया की जनसंख्या के अनुसार 36 वां सबसे बड़ा नगरीय क्षेत्र है। [ चेन्नई विदेशी पर्यटकों द्वारा सबसे ज्यादा जाने-माने भारतीय नगरो में से एक है यह वर्ष 2015 के लिए दुनिया में 43 वें सबसे अधिक का दौरा किया गया था। लिविंग सर्वेक्षण की गुणवत्ता ने चेन्नई को भारत में सबसे सुरक्षित नगर के रूप में दर्जा दिया। चेन्नई भारत में आने वाले 45 प्रतिशत स्वास्थ्य पर्यटकों और 30 से 40 प्रतिशत घरेलू स्वास्थ्य पर्यटकों को आकर्षित करती है। जैसे, इसे "भारत का स्वास्थ्य पूंजी" कहा जाता है एक विकासशील देश में बढ़ते महानगरीय नगर के रूप में, चेन्नई पर्याप्त प्रदूषण और अन्य सैन्य और सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का सामना करता है।
चेन्नई में भारत की तीसरी सबसे बड़ी प्रवासी जनसंख्या 2009 में 35 लाख थी, 2011 में 85 लाख थी और 2018 तक डेढ़ करोड से अधिक का अनुमान है। राजस्थान का मारवाड़ी समुदाय यहाँ व्यापारी वर्ग में मुखत: हे चेन्नई में मारवाड़ी समुदाय की 50000 से अधिक दुकान हे , मारवाड़ीयो का रामदेवजी का वरघोड़ा मुख्य पर्व हे जिसमें प्रतिवर्ष २ लाख से ज़्यादा मारवाड़ी लोग एकत्रित होते हे ये मिंट स्ट्रीट ,आदियाप्पा, गोविंदप्पा, nsc बोस रोड ओर नेनियप्पा से गुज़रते हे 2015 में यात्रा करने के लिए पर्यटन गाइड प्रकाशक लोनली प्लैनेट ने चेन्नई को दुनिया के शीर्ष दस नगरो में से एक का नाम दिया है। चेन्नई को ग्लोबल सिटीज इंडेक्स में एक बीटा स्तरीय नगर के रूप में स्थान दिया गया है और भारत का 2014 का वार्षिक भारतीय सर्वेक्षण में भारत टुडे द्वारा भारत का सबसे अच्छा नगर रहा। 2015 में, चेन्नई को आधुनिक और पारंपरिक दोनों मूल्यों के मिश्रण का हवाला देते हुए, बीबीसी द्वारा "सबसे गर्म" नगर (मूल्य का दौरा किया, और दीर्घकालिक रहने के लिए) का नाम दिया गया। नेशनल ज्योग्राफिक ने चेन्नई के भोजन को दुनिया में दूसरा सबसे अच्छा स्थान दिया है; यह सूची में शामिल होने वाला एकमात्र भारतीय नगर था। लोनाली प्लैनेट द्वारा चेन्नई को दुनिया का नौवां सबसे अच्छा महानगर भी नामित किया गया था।
चेन्नई मेट्रोपॉलिटन एरिया भारत की सबसे बड़ी नगर अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। चेन्नई को "भारत का डेट्रोइट" नाम दिया गया है, जो नगर में स्थित भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग का एक-तिहाई से भी अधिक है। जनवरी 2015 में, प्रति व्यक्ति जीडीपी के संदर्भ में यह तीसरा स्थान था। चेन्नई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्मार्ट सिटीज मिशन के तहत एक स्मार्ट नगर के रूप में विकसित किए जाने वाले 100 भारतीय नगरो में से एक के रूप में चुना गया है।
भारत में ब्रिटिश उपस्थिति स्थापित होने से पहले ही मद्रास का जन्म हुआ। माना जाता है कि मद्रास नामक पुर्तगाली वाक्यांश "मैए डी डीस" से उत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ है "भगवान की मां", बंदरगाह नगर पर पुर्तगाली प्रभाव के कारण। कुछ स्रोतों के अनुसार, मद्रास को फोर्ट सेंट जॉर्ज के उत्तर में एक मछली पकड़ने वाले गांव मद्रासपट्टिनम से लिया गया था। हालांकि, यह अनिश्चित है कि क्या नाम यूरोपियों के आने से पहले उपयोग में था। ब्रिटिश सैन्य मानचित्रकों का मानना था कि मद्रास मूल रूप से मुंदिर-राज या मुंदिरराज थे। वर्ष 1367 में एक विजयनगर युग शिलालेख जो कि मादरसन पट्टणम बंदरगाह का उल्लेख करता है, पूर्व तट पर अन्य छोटे बंदरगाहों के साथ 2015 में खोजा गया था और यह अनुमान लगाया गया था कि उपर्युक्त बंदरगाह रोयापुरम का मछली पकड़ने का बंदरगाह है।
चेन्नई नाम की जन्मजात, तेलुगू मूल का होना स्पष्ट रूप से इतिहासकारों द्वारा साबित हुई है। यह एक तेलुगू शासक दमारला चेन्नाप्पा नायकुडू के नाम से प्राप्त हुआ था, जो कि नायक शासक एक दमनदार वेंकटपति नायक था, जो विजयनगर साम्राज्य के वेंकट III के तहत सामान्य रूप में काम करता था, जहां से ब्रिटिश ने नगर को 1639 में हासिल किया था। चेन्नई नाम का पहला आधिकारिक उपयोग, 8 अगस्त 1639 को, ईस्ट इंडिया कंपनी के फ्रांसिस डे से पहले, सेन्नेकेसु पेरुमल मंदिर 1646 में बनाया गया था।
1 99 6 में, तमिलनाडु सरकार ने आधिकारिक तौर पर मद्रास से चेन्नई का नाम बदल दिया। उस समय कई भारतीय नगरो में नाम बदल गया था। हालांकि, मद्रास का नाम नगर के लिए कभी-कभी उपयोग में जारी है, साथ ही साथ नगर के नाम पर स्थानों जैसे मद्रास विश्वविद्यालय, आईआईटी मद्रास, मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मद्रास मेडिकल कॉलेज, मद्रास पशु चिकित्सा कॉलेज, मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज।
'''चेन्नई''' ([[तमिल भाषा|तमिल]]: [[wikt:சென்னை|சென்னை]] {{IPA-all|ˈtʃɛnnəɪ}}), [[भारत]] में [[बंगाल की खाड़ी]] के [[कोरोमंडल तट]] पर स्थित [[तमिलनाडु]] की राजधानी, भारत का चोथा बड़ा नगर तथा तीसरा सबसे बड़ा बन्दरगाह है। इसकी जनसंख्या ८३ लाख ४० हजार है।<ref>{{cite web |url=http://www.censusindia.net/results/town.php?stad=A&state5=999 |title=पॉपुलेशन, पॉपुलेशन इन एज ग्रुप ०-६ ऽ लिट्रेट्स ब्य सेक्स – सिटीज़ ऽ टाउन्स |publisher=वेब आर्कीव्स |date= |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20040616075334/http://www.censusindia.net/results/town.php?stad=A&state5=999 |archive-date=16 जून 2004 |url-status=bot: unknown }}</ref> यह नगर अपनी संस्कृति एवं परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। ब्रिटिश लोगों ने [[१७वीं शताब्दी]] में एक छोटी-सी बस्ती मद्रासपट्ट्नम का विस्तार करके इस नगर का निर्माण किया था। उन्होंने इसे एक प्रधान नगर एवं नौसैनिक अड्डे के रूप में विकसित किया। बीसवीं शताब्दी तक यह [[मद्रास प्रेसिडेंसी]] की राजधानी एवं एक प्रमुख प्रशासनिक केन्द्र बन चुका था।
चेन्नई में ऑटोमोबाइल, प्रौद्योगिकी, हार्डवेयर उत्पादन और स्वास्थ्य सम्बंधी उद्योग हैं। यह नगर [[सॉफ्टवेयर]], [[सूचना प्रौद्योगिकी]] सम्बंधी उत्पादों में भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक नगर है। चेन्नई एवं इसके उपनगरीय क्षेत्र में ऑटोमोबाइल उद्योग विकसित है।<ref name=itchennai1>{{cite news
|title=आईटी इन इण्डिया
|url=http://www.business-standard.com/india/storypage.php?autono=299725
|work=बिज़नेस स्टैण्डर्ड
|date=३० सितंबर २००७
|accessdate=19 फरवरी 2009
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090302114400/http://www.business-standard.com/india/storypage.php?autono=299725
|archive-date=2 मार्च 2009
|url-status=live
}}</ref><ref name=itchennai2>{{cite news
|title=चेन्नई एमर्जिंग ऐज़ इण्डियाज़ सिलिकॉन वैली?
|url=http://economictimes.indiatimes.com/Infotech/Software/Chennai_emerging_as_Indias_Silicon_Valley/articleshow/3000410.cms
|work=द इकोनोमिक टाइम्स
|date=मई 1, 2008
|accessdate=17 मई 2008
|archive-url=https://web.archive.org/web/20080505100206/http://economictimes.indiatimes.com/Infotech/Software/Chennai_emerging_as_Indias_Silicon_Valley/articleshow/3000410.cms
|archive-date=5 मई 2008
|url-status=live
}}</ref> चेन्नई मंडल तमिलानाडु के [[सकल घरेलू उत्पाद|जीडीपी]] का ३९% का और देश के ऑटोमोटिव निर्यात में ६०% का भागीदार है। इसी कारण इसे '''[[दक्षिण एशिया]] का [[डेट्रॉएट]] ''' भी कहा जाता है।<ref>{{cite web |url=http://www.thehindubusinessline.com/2007/10/19/stories/2007101951332300.htm |title=सी आई आई लॉन्चेज़ चेन्नई ज़ोन |publisher=द हिन्दू बिज़नेस लाइन |date=19 अक्टूबर 2007 |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100602132120/http://www.thehindubusinessline.com/2007/10/19/stories/2007101951332300.htm |archive-date=2 जून 2010 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |author=एन माधवन |url=http://businesstoday.digitaltoday.in/index.php?option=com_content&task=view&id=6059&issueid=34&Itemid=1 |title=इण्डियाज़ डेट्रॉएट |publisher=बिज़नेसटुडे.डिजिटलटुडे.इन |date=7 जुलाई 2008 |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090101090125/http://businesstoday.digitaltoday.in/index.php?option=com_content&task=view&id=6059&issueid=34&Itemid=1 |archive-date=1 जनवरी 2009 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2005/12/04/AR2005120401094.html |title=डेट्रॉएट्स नेक्स्ट बिग थ्रेट |publisher=वॉशिंगटनपोस्ट |date= |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110628215213/http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2005/12/04/AR2005120401094.html |archive-date=28 जून 2011 |url-status=live }}</ref>
चेन्नई सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है, यहाँ वार्षिक मद्रास म्यूज़िक सीज़न में सैंकड़ॊ कलाकार भाग लेते हैं। चेन्नई]] में रंगशाला संस्कृति भी अच्छे स्तर पर है और यह [[भरतनाट्यम]] का एक महत्त्वपूर्ण केन्द्र है। यहाँ का [[तमिल चलचित्र]] उद्योग, जिसे [[कॉलीवुड]] भी कहते हैं, भारत का द्वितीय सबसे बड़ा फिल्म उद्योग केन्द्र है।
== नामकरण ==
मद्रास नाम मद्रासपट्नम से लिया गया है। मद्रासपट्नम [[ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी]] द्वारा सन् १६३९ में चुना गया स्थायी निवास स्थल है। इसके दक्षिण में चेन्नपट्नम नामक गाँव स्थित था। कुछ समय बाद इन दोनों गाँवों के संयोग से मिलकर बने नगर को "मद्रास" नाम दिया गया। परन्तु उसी जगह के निवासी इसे "चेन्नपट्नम" या "चेन्नपुरी" कहते थे। सन् १९९६ में नगर का नाम बदल कर "चेन्नै" रखा गया (हिन्दी में "चेन्नई" भी लिखा जाता है), क्योंकि "मद्रास" शब्द को पुर्तगी नाम माना जाता था। यह माना जाता है कि इस नगर का पुर्तगी नाम "माद्रे-डि-सॉइस" नामक पुर्तगी सरकारी अफ़सर के नाम से लिया गया था, जो लगभग सन् [[१५५०]] में इस जगह को अपने स्थायी निवास बनाने वाले पहले लोगों में शामिल थे। पर कुछ लोग यह मानते हैं कि "मद्रास" शब्द ही तमिल मूल का है, तथा "चेन्नई" शब्द किसी अन्य भाषा का हो सकता है।
== इतिहास ==
{{main|चेन्नई का इतिहास}}
[[चित्र:Victoria Public Hall, Chennai.JPG|thumb|right|200px|पार्क टाउन, चेन्नई स्थित [[विक्टोरिया पब्लिक हॉल]] - चेन्नई में ब्रिटिश स्थापत्य कला के सबसे उत्कृष्ट नमूनों में से एक]]
{{Historical populations|type=
|align = left
|१८८१| 405848
|१८९१| 452518
|१९०१| 509346
|१९११| 518660
|१९२१| 526000
|१९३१| 645000
|१९४१| 776000
|१९५१|1416056
|१९६१|1729141
|१९७१|2420000
|१९८१|3266034
|१९९१|3841398
|२००१|4216268
}}
चेन्नई एवं आस-पास का क्षेत्र पहली सदी से ही महत्त्वपूर्ण प्रशासनिक, सैनिक, एवं आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र रहा है। यह [[दक्षिण भारत]] के बहुत से महत्त्वपूर्ण राजवंशों यथा, [[पल्लव वंश|पल्लव]], [[चोल वंश|चोल]], [[पांड्य साम्राज्य|पांड्य]], एवं [[विजयनगर साम्राज्य|विजयनगर]] इत्यादि का केन्द्र बिन्दु रहा है। [[मयलापुर]] नगर जो अब चेन्नई नगर का हिस्सा है, पल्लवों के जमाने में एक महत्त्वपूर्ण [[बंदरगाह]] हुआ करता था। आधुनिक काल में [[पुर्तगाल|पुर्तगालियों]] ने [[१५२२]] में यहाँ आने के बाद एक और बंदरगाह बनाया जिसे ''साओ तोमे'' कहा गया। पुर्तगालियों ने अपना बसेरा आज के चेन्नई के उत्तर में [[पुलीकट]] नामक स्थान पर बसाया और वहीं [[डच इस्ट इंडिया कंपनी]] की नींव रखी।
[[२२ अगस्त]] [[१६३९]], को संत फ्रांसिस दिवस के मौके पर ब्रिटिश [[ईस्ट इंडिया कंपनी]] ने विजयनगर के राजा पेडा वेंकट राय से [[कोरोमंडल|कोरोमंडल तट]] [[चंद्रगिरी]] में कुछ जमीन खरीदी। इस इलाके में दमरेला वेंकटपति, जो इस इलाके के नायक थे, उनका शासन था। उन्होंने ब्रितानी व्यापारियों को वहाँ एक फैक्ट्री एवं गोदाम बनाने की अनुमति दी। एक वर्ष वाद, ब्रितानी व्यापारियों ने [[सेंट जॉर्ज किला]] बनवाया जो बाद में [[उपनिवेश|औपनिवेशिक]] गतिविधियों का केन्द्र बिन्दु बन गया। [[१७४६]] में, मद्रास एवं सेंट जॉर्ज के किले पर [[फ्रांस|फ्रासिंसी]] फौजों ने अपना कब्जा जमा लिया। बाद में ब्रितानी कंपनी का इस क्षेत्र पर नियंत्रण पुनः [[१७४९]] में [[एक्स ला चैपल संधि]] ([[१७४८]]) की बदौलत हुआ। इस क्षेत्र को फ्रांसिसियों एवं [[मैसूर]] के [[सुल्तान]] [[हैदर अली]] के हमलों से बचाने के लिए इस पूरे क्षेत्र की किलेबंदी कर दी गयी। अठारहवीं सदी के अंत होते-होते ब्रिटिशों ने लगभग पूरे आधुनिक [[तमिलनाडु]], [[आंध्र प्रदेश]] एवं [[कर्नाटक]] के हिस्सों को अपने अधीन कर लिया एवं [[मद्रास प्रेसिडेंसी]] की स्थापना की जिसकी राजधानी मद्रास घोषित की गयी।<ref>{{cite encyclopedia
| title = मद्रास, इंडिया (कैपिटल)
| url = http://www.1911encyclopedia.org/Madras,_India_(Capital)
| encyclopedia = एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका
| edition = ग्यारहवां संस्करण
| year = १९११
| accessdate = २००७-०९-०४
| archive-url = https://web.archive.org/web/20080501001404/http://www.1911encyclopedia.org/Madras,_India_(Capital)
| archive-date = 1 मई 2008
| url-status = live
}}</ref> ब्रिटिशों की हुकुमत के अधीन चेन्नई नगर एक महत्त्वपूर्ण आधुनिक नगरीय क्षेत्र एवं जलसेना केन्द्र बनकर उभरा।
== भूगोल ==
{{main|चेन्नई का भूगोल}}
[[चित्र:Kamarajar Salai and Marina Beach.jpg|thumb|कामाराजार सलाई जो मरीना बीच के साथ साथ चलने वाली एक सड़क है]]चेन्नई भारत के दक्षिण पूर्वी तट पर तमिलनाडु प्रदेश के उत्तरी पूर्वी तटीय क्षेत्र में स्थित है। इस तटीय क्षेत्र को [[पूर्वी तटीय मैदानी क्षेत्र]] भी कहा जाता है। इस क्षेत्र की समुद्र तल से औसत ऊँचाई ६.७ मीटर है<ref>{{cite web
|title=Geographical and physical features
|work=District Profile
|publisher=Govt of India
|url=http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#geog
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20130730180830/http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#geog
|archive-date=30 जुलाई 2013
|url-status=dead
}}</ref> और सबसे ऊँचा स्थान ६० मीटर की ऊँचाई पर है।<ref name="highest-point">{{cite journal
|last = Pulikesi
|first = M
|author2= P. Baskaralingam, D. Elango, V.N. Rayudu, V. Ramamurthi, S. Sivanesan
|title=Air quality monitoring in Chennai, भारत, in the summer of 2005
|journal = Journal of Hazardous Materials
|volume = 136
|issue = 3
|pages = 589–596
|date=अगस्त 25, 2006
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|quote=Chennai is fairly low-lying, its highest point being only 300 metres (934 ft) above sea level is a rugged barren hill opposite to the Airport called Pallavapuram Hill.
|doi = 10.1016/j.jhazmat.2005.12.039 |issn=0304-3894}}</ref> [[मरीना बीच]] के नाम से प्रसिद्ध चेन्नई के समुद्र तट का विस्तार १२ किलोमीटर तक है। नगर के मध्य में बहने वाली [[कूवम नदी]] और दक्षिण से बहने वाली [[अड्यार नदी]] आज की तारीख में बहुत ही ज्यादा प्रदूषित हो चुकी हैं। अड्यार नदी कूवम से कम प्रदूषित है और इसके तट पर अनेक पशु-पक्षियों का बसेरा है।<ref>{{cite news
|last=Baskaran
|first=Theodore S
|title=Death of an Estuary
|work=द हिन्दू
|date=जनवरी 12, 2003
|url=http://www.hindu.com/thehindu/mag/2003/01/12/stories/2003011200110200.htm
|accessdate=12 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090213173125/http://www.hindu.com/thehindu/mag/2003/01/12/stories/2003011200110200.htm
|archive-date=13 फ़रवरी 2009
|url-status=live
}}</ref><ref name="adyarestuary2">{{cite news
|last=Doraisamy
|first=Vani
|title=A breather for the Adyar estuary
|work=द हिन्दू
|date=अक्टूबर 31, 2005
|url=http://www.hindu.com/2005/10/31/stories/2005103106660500.htm
|accessdate=12 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090213180648/http://www.hindu.com/2005/10/31/stories/2005103106660500.htm
|archive-date=13 फ़रवरी 2009
|url-status=live
}}</ref> इन दोनों नदियों को [[बकिंघम नहर]] के द्वारा जोड़ा गया है। यह नहर अपनी ४ किलोमीटर की दूरी सागर तट के सामानान्तर तय करती है। नगर के पश्चिमी भाग में कई झीलें हैं, जिनमें से [[रेड हिल्स]], [[शोलावरम]] और [[चेम्बरामबक्क्म]] से पेय जल की आपूर्ति होती है। चेन्नई का भूमिगत जल भी प्रदूषित होता जा रहा है।<ref>{{cite news
|last=Lakshmi
|first=K
|title=It's no cola, it's the water supplied in Korattur
|work=द हिन्दू
|date=जुलाई 13, 2004
|url=http://www.hindu.com/2004/07/13/stories/2004071312840300.htm
|accessdate=9 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071012215946/http://hindu.com/2004/07/13/stories/2004071312840300.htm
|archive-date=12 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref>
[[चित्र:Cooum2.JPG|thumb|left|चेन्नई में बहने वाली कूवम नदी। प्रदूषण के कारण इस नदी पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है।]]
चेन्नई नगर को उत्तर, मध्य, दक्षिण और पश्चिमी चेन्नई नामक चार भागों में बँटा है। है। उत्तरी चेन्नई एक औद्योगिक क्षेत्र है। मध्य चेन्नई नगर का व्यावसायिक केंद्र है। यहाँ पर स्थित पेरिज कार्नर, जिसे स्थानीय लोग पेरिज भी कहते हैं, एक प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र है। दक्षिण और पश्चिमी चेन्नई सूचना प्रौद्योगिकी का क्षेत्र बनता जा रहा है। बढ़ती आबादी के कारण नगर विभिन्न दिशाओं में बढ़ता जा रहा है। जिन क्षेत्रों में सर्वाधिक विकास हो रहा है वह हैं- पुराना [[महाबलीपुरम]] रोड, दक्षिणी ग्रांड ट्रंक रोड और पश्चिम में अंबात्तुर, कोयमबेडु और श्रीपेरम्बदूर की दिशा के क्षेत्र।<ref>{{cite web
|title=Structure of Chennai
|work=Second Master Plan - II
|publisher=Chennai Metropolitan Development Authority
|pages=pp. II–9, II–10, II–11, II–15
|url=http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/B_Chap%20II%20_Structure%20of%20Chennai.pdf
|format=PDF
|accessdate=9 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071128071252/http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/B_Chap%20II%20_Structure%20of%20Chennai.pdf
|archive-date=28 नवंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref> चेन्नई की नगर सीमा में एक राष्ट्रीय उद्यान भी है, जिसे गुंडी राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना जाता है।<ref>{{cite web
|title=Guindy National Park
|publisher=Govt. of Tamil Nadu
|url=http://www.forests.tn.nic.in/WildBiodiversity/np_gnp.html
|accessdate=10 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20120928004229/http://www.forests.tn.nic.in/WildBiodiversity/np_gnp.html
|archive-date=28 सितंबर 2012
|url-status=dead
}}</ref>
चेन्नई में वार्षिक तापमान लगभग एक समान होता है। इसका कारण चेन्नई का सागर तट पर एवं थर्मल इक्वेटर पर स्थित होना है। वर्ष भर मौसम आम तौर पर गर्म एवं उमस भरा होता है। मई एवं जून का प्रथम सप्ताह वर्ष का सबसे गर्म समय होता है। इस समय जब तापमान ३८-४२ डिग्री सेल्सियस के आस-पास पहुँच जाता है, तो स्थानीय लोग इसे अग्नि नक्षत्रम या कथिरि वेय्यी कहते है।<ref>{{cite news
|last=Ramakrishnan
|first=T
|title=Hot spell may continue for some more weeks in the State
|work=द हिन्दू
|date=मई 18, 2005
|url=http://www.hindu.com/2005/05/18/stories/2005051813790700.htm
|accessdate=4 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090213191416/http://www.hindu.com/2005/05/18/stories/2005051813790700.htm
|archive-date=13 फ़रवरी 2009
|url-status=live
}}</ref> वर्ष का सबसे ठंडा महीना जनवरी का होता है, जब न्यूनतम तापमान १८-२० डिग्री सेल्सियस तक पँहुच जाता है। अब तक यहाँ का सबसे न्यूनतम तापमान १५.८ डिग्री सेल्सियस और उच्चतम तापमान ४५ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।<ref name=Singapore-temp>{{cite web
|title=Climate of India
|work=National Environment Agency – Singapore
|url=http://app.nea.gov.sg/cms/htdocs/article.asp?pid=1111
|accessdate=4 अगस्त 2005
|archive-url=https://web.archive.org/web/20061006131405/http://app.nea.gov.sg/cms/htdocs/article.asp?pid=1111
|archive-date=6 अक्तूबर 2006
|url-status=dead
}}</ref><ref name=hightemp>{{cite news
|title=Highest temperature
|work=द हिन्दू
|date=मई 31, 2003
|url=http://www.hinduonnet.com/2003/05/31/stories/2003053104790101.htm
|accessdate=25 अप्रैल 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20110711171303/http://www.hinduonnet.com/2003/05/31/stories/2003053104790101.htm
|archive-date=11 जुलाई 2011
|url-status=dead
}}</ref>
चेन्नई में वर्ष में औसतन १,३०० मिलीमीटर वर्षा होती है। मुख्यतः वर्षा सितम्बर से दिसम्बर के मध्य होती है। देश के अन्य भागों से विपरीत चेन्नई में वर्षा मानसून के लौटने के दौरान उत्तर-पूर्वी हवाओं के चलते होती है। बंगाल की खाड़ी में आने वाले चक्रवात कई बार चेन्नई भी पहुँच जाते है। सन २००५ में आज तक की सबसे ज्यादा वर्षा २,५७० मिलीमीटर दर्ज की गई थी।<ref>{{cite news
|last=Ramakrishnan
|first=T
|title=Entering 2006, city's reservoirs filled to the brim
|work=द हिन्दू
|date=जनवरी 3, 2006
|url=http://www.hindu.com/2006/01/03/stories/2006010315310300.htm
|accessdate=4 मई 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070228083427/http://www.hindu.com/2006/01/03/stories/2006010315310300.htm
|archive-date=28 फ़रवरी 2007
|url-status=live
}}</ref> नवम्बर २, २०१७ को श्रीलंका के नजदीक बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के कारण चेन्नई में लगातार पांच घंटे बारिश हुई थी जिसके कारण अनेक इलाकों में पानी भर गया था। <ref>{{cite news|first1=दिग्पाल|last1=सिंह|title=चेन्नई की बारिश बजा रही खतरे की घंटी|url=http://www.jagran.com/news/national-jagran-special-on-chennai-rains-and-climate-change-16966039.html|accessdate=7 नवम्बर 2017|agency=दैनिक जागरण|archive-url=https://web.archive.org/web/20171107165805/http://www.jagran.com/news/national-jagran-special-on-chennai-rains-and-climate-change-16966039.html|archive-date=7 नवंबर 2017|url-status=live}}</ref>
{{Infobox Weather
|collapsed=yes
|metric_first=Yes
|single_line=Yes
|location = चेन्नई, भारत
|Jan_Hi_°F = 83.12
|Feb_Hi_°F = 85.82
|Mar_Hi_°F = 89.42
|Apr_Hi_°F = 92.48
|May_Hi_°F = 97.52
|Jun_Hi_°F = 97.88
|Jul_Hi_°F = 94.46
|Aug_Hi_°F = 93.02
|Sep_Hi_°F = 92.3
|Oct_Hi_°F = 88.52
|Nov_Hi_°F = 84.56
|Dec_Hi_°F = 82.58
|Year_Hi_°F = 90.14
|Jan_Lo_°F = 69.08
|Feb_Lo_°F = 70.16
|Mar_Lo_°F = 73.58
|Apr_Lo_°F = 78.62
|May_Lo_°F = 81.68
|Jun_Lo_°F = 80.96
|Jul_Lo_°F = 78.62
|Aug_Lo_°F = 77.54
|Sep_Lo_°F = 77.54
|Oct_Lo_°F = 75.74
|Nov_Lo_°F = 73.04
|Dec_Lo_°F = 70.88
|Year_Lo_°F = 75.62
|Jan_Precip_mm = 16.2
|Feb_Precip_mm = 3.7
|Mar_Precip_mm = 3.0
|Apr_Precip_mm = 13.6
|May_Precip_mm = 48.9
|Jun_Precip_mm = 53.7
|Jul_Precip_mm = 97.8
|Aug_Precip_mm = 149.7
|Sep_Precip_mm = 109.1
|Oct_Precip_mm = 282.7
|Nov_Precip_mm = 350.3
|Dec_Precip_mm = 138.2
|Year_Precip_mm = 1266.9
|source =भारत मौसम विज्ञान विभाग<ref name=weather>{{cite web |url=http://www.imd.ernet.in/section/climate/chennai1.htm |title=Climatological Information for Chennai |accessdate=25 जनवरी 2009 |publisher=Indian Meteorological Department |archive-url=https://web.archive.org/web/20090302144024/http://www.imd.ernet.in/section/climate/chennai1.htm |archive-date=2 मार्च 2009 |url-status=dead }}</ref>
|accessdate = 25 जनवरी 2009
}}
== प्रशासनिक एवं उपयोगी सेवाएं ==
{{main|चेन्नई का प्रशासन }}
{{See also|चेन्नई का स्थापत्य |भारत के उपभाग }}
{|cellpadding="2" cellspacing="0" border="1" style="float:right; border-collapse:collapse; border:2px white solid; font-size:x-small; font-family:verdana;"
|-
|style="background:#659ec7; color:white;"|<div style="text-align: center;">'''नगर के अधिकारीगण, (सितं. ०७)'''</div>
{| cellpadding="2" cellspacing="0" border="1" style="background:white; border-collapse:collapse; border:1px #747170 solid; font-size:x-small; font-family:verdana;"
|-
|[[महापौर]]<ref>{{Cite web |url=http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/whoswho.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 अगस्त 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070923001521/http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/whoswho.htm |archive-date=23 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.tn.gov.in/telephone/hod/hodPage57.html |title=दूरभाष-निदेशिका – पुलिस आयुक्त |publisher=Tn.gov.in |date=21 जनवरी 2009 |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090217205426/http://www.tn.gov.in/telephone/hod/hodPage57.html |archive-date=17 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref>
|<div style="text-align: center;">'''मा. सुब्रह्मानियम</div>
|-
|उप-[[महापौर]]
|<div style="text-align: center;">'''आर सत्यभामा </div>
|-
| नगर निगम आयुक्त
|<div style="text-align: center;">'''राजेश लखोनी'''</div>
|-
|पुलिस आयुक्त
|<div style="text-align: center;">'''के राधाकृष्णन'''</div>
|}
|}
चेन्नई नगर का प्रशासन [[चेन्नई नगर निगम]] के पास है। [[१६८८]] में स्थापित हुआ यह निगम भारत में ही नहीं, [[ब्रिटेन]] के बाहर किसी भी [[राष्ट्रमंडल देश]] में सबसे पहला नगर निगम है। इसमें १५५ पार्षद है, जो चेन्नई के १५५ वार्डों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनका चुनाव सीधे चेन्नई की जनता ही करती है। ये लोग अपने आप में से ही एक [[महापौर]] एवं एक उप-महापौर चुनते हैं जो छः समितियों का संचालन करता है।<ref name=corp>{{cite web
|title=कार्यपालक सारणी
|work=अबाउट सी.ओ.सी
|publisher=चेन्नई कार्पोरेशन
|url=http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/org-chart.htm
|accessdate=4 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20080211111439/http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/org-chart.htm
|archive-date=11 फ़रवरी 2008
|url-status=dead
}}</ref> चेन्नई, [[तमिल नाडु]] राज्य की राजधानी होने से राज्य की कार्यपालिका और न्यायपालिका के मुख्यालय नगर में मुख्य रूप से [[फोर्ट सेंट जॉर्ज]] में सचिवालय इमारत में और शेष कार्यालय नगर में विभिन्न स्थानों पर अनेक इमारतों में स्थित हैं। [[मद्रास उच्च न्यायालय]] का अधिकार-क्षेत्र [[तमिल नाडु]] राज्य और [[पुदुचेरी]] तक है। यह राज्य की सर्वोच्च न्याय संस्था है और चेन्नई में ही स्थापित है। चेन्नई में तीन लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं – चेन्नई उत्तर, चेन्नई मध्य और चेन्नई दक्षिण और १८ विधान-सभा निर्वाचन क्षेत्र हैं।
[[चित्र:Gcp patrol car.jpg|thumb|left|चेन्नई मेट्रोपॉलिटन पुलिस पैट्रोल]]
चेन्नई का महानगरीय क्षेत्र कई उपनगरों तक व्याप्त है, जिसमें [[कांचीपुरम जिला]] और [[तिरुवल्लुर जिला]] के भी क्षेत्र आते हैं। बडए उपनगरों में वहां की टाउन-नगर पालिकाएं हैं और छोटे क्षेत्रों में टाउन-परिषद हैं जिन्हें पंचायत कहते हैं। नगर का क्षेत्र जहां १७४ कि॰मी॰² (६७ मील²) है,<ref name=cityarea>{{cite web
|title=जनरल स्टैटिस्टिक्स
|publisher=कार्पोरेशन ऑफ चेन्नई
|url=http://www.chennaicorporation.com/general_stats.htm
|accessdate=4 अगस्त 2005
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070909100447/http://www.chennaicorporation.com/general_stats.htm
|archive-date=9 सितंबर 2007
|url-status=live
}}</ref> वहीं उपनगरीय क्षेत्र ११८९ कि॰मी॰² (४५८ मील²) तक फैले हुए हैं।<ref name=metroarea>{{cite web
|title=चेन्नई मेट्रो पॉलिटन एरिया - प्रोफाइल
|publisher=चेन्नई मेट्रोपॉलिटान डवलपमेंट अथॉरिटी
|url=http://www.cmdachennai.org
|accessdate=15 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070927092854/http://www.cmdachennai.org/
|archive-date=27 सितंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref> [[चेन्नई महानगर विकास प्राधिकरण]] ([[चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डवलपमेंट अथॉरिटी|सी.एम.डी.ए]]) ने नगर के निकट उपग्रह-नगरो के विकास के उद्देश्य से एक द्वितीय मास्टर प्लान का ड्राफ़्ट तैयार किया है। निकटस्थ उपग्रह नगरो में [[महाबलिपुरम]] (दक्षिण में), [[चेंगलपट्टु]] और [[मरियामलै नगर]] दक्षिण-पश्चिम में, [[श्रीपेरंबुदूर]], [[तिरुवल्लुर]] और [[अरक्कोणम]] पश्चिम में आते हैं।
[[ग्रेटर चेन्नई पुलिस]] विभाग [[तमिल नाडु पुलिस]] का ही एक अनुभाग है, जो नगर में कानून एवं सुरक्षा व्यवस्था की देखरेख में संलग्न है। नगर की पुलिस के अध्यक्ष पुलिस आयुक्त, चेन्नई हैं और प्रशासनिक नियंत्रण राज्य गृह मंत्रालय के पास है। इस विभाग में ३६ उप-भाग और १२१ पुलिस-स्टेशन है। नगर खा यातायात [[चेन्नई सिटी ट्रैफिक पुलिस]] द्वारा नियंत्रित होता है। महानगर के उपनगर [[चेन्नई मेट्रोपॉलिटन पुलिस]] के अधीन आते हैं, एवं बाहरी जेले [[कांचीपुरम]] एवं [[तिरुवल्लुर]] पुलिस विभागों के अन्तर्गत्त हैं।
[[चित्र:Ripon Building panorama.jpg|thumb|राइपन बिल्डिंग, १९१३ में निर्मित, [[चेन्नई नगर निगम]] का मुख्यालय तत्कालिण [[वाइसरॉय]] [[लॉर्ड राइपन]] के नाम पर है।]]
चेन्नई नगर निगम और उपनगरीय नगरपालिकाएं नागरिक सुविधाएं मुहैया कराती हैं। अधिकांश क्षेत्रों में कूड़ा-प्रबंधन नील मेटल फैनालिका एन्वायरनमेंट मैनेजमेंट; एक निजी कंपनी और कुछ अन्य क्षेत्रों में नगर निगम देखता है। जल-आपूर्ति एवं मल-निकास (सीवेज ट्रीटमेंट) [[चेन्नई मेट्रोपॉलिटन वॉटर सप्लाई एंड सीवेज बोर्ड]] देखाता है। विद्युत आपूर्ति [[तमिल नाडु विद्युत बोर्ड]] प्रबंध करता है।<ref>{{cite web
|title=Emergency and Utility Services Contact Details at Chennai
|publisher=Govt. of Tamil Nadu
|url=http://chennai.nic.in/emergency.htm
|accessdate=7 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070930014904/http://chennai.nic.in/emergency.htm
|archive-date=30 सितंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref> नगर की दूरभाष सेवा छः मोबाइल और चार लैंडलाइन कंपनियों के द्वारा प्रबंध होता है,<ref>{{cite press release|title=इन्फ़ॉर्मेशन नोट टू द प्रेस (प्रेस विज्ञप्ति सं. ७१/२००७)|publisher=Telecom Regulatory Authority of Indiaटेलीकॉम रेग्युलेत्री अथॉरिटी ऑफ इंडिया|date=२४ अगस्त २००७|url=http://www.trai.gov.in/trai/upload/PressReleases/486/pr24aug07no71.pdf|format=PDF|accessdate=4 अक्टूबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20120515114849/http://www.trai.gov.in/trai/upload/PressReleases/486/pr24aug07no71.pdf|archive-date=15 मई 2012|url-status=live}}, Annexure I lists these six entities as the licensed cellular operators for the Chennai circle. The [[CDMA]] Development Group's official website lists [[Tata Teleservices]] and [[Reliance Communications]] as the only operators to have deployed [[CDMA]] on cellular systems in India. {{cite web|url=http://www.cdg.org/worldwide/index.asp?h_area=1|title=CDMA Worldwide: Deployment search - Asia-Pacific|publisher=CDMA Development Group|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011073228/http://cdg.org/worldwide/index.asp?h_area=1|archive-date=11 अक्तूबर 2007|accessdate=4 अक्टूबर 2007|url-status=live}}</ref><ref>{{cite news
|last=नारायणन
|first=आर वाई
|title=टचटेल अराइव्स इन [[कोयंबतूर]]
|work=[[द हिन्दु]]
|date=५ सितंबर २००२
|url=http://www.thehindubusinessline.com/2002/09/05/stories/2002090502151700.htm
|accessdate=7 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090110085422/http://www.thehindubusinessline.com/2002/09/05/stories/2002090502151700.htm
|archive-date=10 जनवरी 2009
|url-status=live
}}</ref> और यही कंपनियां तथा सिफी और हैथवे [[ब्रॉडबैंड सेवा]] द्वारा इंटरनेट भी उपलब्ध कराती हैं।
नगर के क्षेत्र से कोई मुख्य नदी नहीं गुजरती है, अतः चेन्नई में वार्षिक [[मानसून]] वर्षा के जल को सरोवरों में सहेज कर रखने का इतिहास रहा है। नगर की बढ़ती आबादी और [[भूमिगत जल]] के गिरते स्तर के कारण नगर को जल अभाव का सामना करना पड़ा है। इस दिशा में [[वीरानम झील]] परियोजना भी कारगर नहीम सिद्ध हुई है। नई वीरानम परियोजना ने काफ़ी हद तक इस समस्या का समाधान किया है और शाहर की सुदूर स्रोतों पर निर्भरता घटी है।<ref>{{cite web
|title=Management of water supply during acute water scarcity in 2003 & 2004
|work=Operations and maintenance
|publisher=Chennai Metropolitan Water Supply and Sewage Board
|url=http://www.chennaimetrowater.com/engg/operationmaintenance/cmwdrw04.htm
|accessdate=16 मार्च 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070812071544/http://www.chennaimetrowater.com/engg/operationmaintenance/cmwdrw04.htm
|archive-date=12 अगस्त 2007
|url-status=dead
}}</ref> हाल के वर्षों में भारी मानसीनी वर्षाओं के चलते [[अन्ना नगर]] में जल पुनर्चक्रीकरण को सहारा मिला है और इससे नगर में जलाभावों की काफ़ी कमी आयी है।<ref name=hindu_rwh_bangalore>{{cite news
|last = लक्ष्मी
|first = के
|title = बंगलुरु टीम विज़िट्स RWH स्ट्रक्चर्स इन सिटी
|work = द हिन्दू
|date = [[३ अगस्त]],[[२००७]]
|url = http://www.hindu.com/2007/08/03/stories/2007080360510500.htm
|accessdate = 11 अगस्त 2007
|archive-url = https://web.archive.org/web/20071001015212/http://www.hindu.com/2007/08/03/stories/2007080360510500.htm
|archive-date = 1 अक्तूबर 2007
|url-status = live
}}</ref> इसके साथ साथ [[तेलुगु गंगा परियोजना]] जैसे नई परियोजनाओं द्वारा [[आंध्र प्रदेश]] से [[कृष्णा नदी]] का जल भी पहुचाया जा रहा है, जिसने इस संकट को लगभग समाप्त ही कर दिया है। नगर में सागरीय जल के अलवणीकरण-संयंत्र की स्थापना भी प्रगति पर है, जिससे [[सागर]] के जल को भी जलापूर्ति में प्रयोग किया जा सकेगा।<ref>{{cite news
|title=IVRCL to set up desalination plant near Chennai
|work=द हिन्दू
|date=अगस्त 12, 2005
|url=http://www.thehindubusinessline.com/2005/08/12/stories/2005081202820300.htm
|accessdate=18 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090213183507/http://www.thehindubusinessline.com/2005/08/12/stories/2005081202820300.htm
|archive-date=13 फ़रवरी 2009
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite news
|last=Radhakrishnan
|first=R.K
|title=Preliminary work on desalination plant to be completed by December-end
|work=द हिन्दू
|date=सितम्बर 4, 2007
|url=http://www.hindu.com/2007/09/04/stories/2007090460440400.htm
|accessdate=18 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071012002902/http://hindu.com/2007/09/04/stories/2007090460440400.htm
|archive-date=12 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref>
== संस्कृति ==
{{main|चेन्नई की संस्कृति |चेन्नई के व्यंजन }}
{{See also|तमिल खाना|तमिल चलचित्र}}
[[चित्र:anianianiy.jpg|150px|thumb|एक [[भरतनाट्यम]] नर्तकी]]
चेन्नई भारत की सांस्कृतिक एवं संगीत राजधानी है।<ref>[http://www.hindu.com/thehindu/mag/2002/12/01/stories/2002120100770500.htm द हिन्दू] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20101118022937/http://hindu.com/thehindu/mag/2002/12/01/stories/2002120100770500.htm |date=18 नवंबर 2010 }} पर चेन्नै</ref> नगर शास्त्रीय नृत्य-संगीत कार्यक्रमों और मंदिरों के लि प्रसिद्ध है। प्रत्येक वर्ष चेन्नई में पंच-सप्ताह [[मद्रास म्यूज़िक सीज़न]] कार्यक्रम का आयोजन होता है। यह १९२७ में मद्रास संगीत अकादमी की स्थापना की वर्षगांठ मानने के साथ आयोजित होता है।<ref name=Music_season>{{cite news
|title=Music musings
|work=द हिन्दू
|url=http://www.hindu.com/2005/02/03/stories/2005020301281000.htm
|date=फ़रवरी 3, 2005
|accessdate=4 अगस्त 2005
|archive-url=https://web.archive.org/web/20050207150555/http://www.hindu.com/2005/02/03/stories/2005020301281000.htm
|archive-date=7 फ़रवरी 2005
|url-status=live
}}</ref> इसमें नगर और निकट के सैंकड़ों कलाकारों के शास्त्रीय [[कर्नाटक संगीत]] के कार्यक्रम आयोजित होते हैं। एक अन्य उत्सम [[चेन्नई संगमम]] प्रत्येक वर्ष [[जनवरी]] में [[तमिल नाडु]] राज्य की विभिन्न कलाओं को दर्शाता है। चेन्नई को [[भरतनाट्यम]] के लिए भी जाना जाता है। यह दक्षिण-भारत की प्रसिद्ध नृत्य शैली है। नगर के दक्षिणी भाग में तटीय क्षेत्र में कलाक्षेत्र नामक स्थान [[भरतनाट्यम]] का प्रसिद्ध सांस्कृतिक केन्द्र है।<ref>{{cite news
|author=GR
|url=http://www.hinduonnet.com/2000/12/02/stories/0902033h.htm
|title=Yearning for Chennai ambience
|accessdate=7 सितंबर 2007
|date=दिसम्बर 2, 2000
|work=द हिन्दू
|archive-url=https://web.archive.org/web/20081229133413/http://www.hinduonnet.com/2000/12/02/stories/0902033h.htm
|archive-date=29 दिसंबर 2008
|url-status=dead
}}</ref> चेन्नई में भारत के कुछ सर्वोत्तम कॉयर्स हैं, जो [[क्रिसमस]] के अवसर पर अंग्रेज़ी और तमिल में विभिन्न ''कैरल'' कार्यक्रम करते हैं।<ref>{{cite news
|url=http://archives.chennaionline.com/columns/ethnomusic/durga23.asp
|title=Chennai as a home for Music – IV
|work=Chennai Online
|date=2009
|accessdate=24 फरवरी 2009
|archive-url=https://web.archive.org/web/20100117155239/http://archives.chennaionline.com/columns/Ethnomusic/durga23.asp
|archive-date=17 जनवरी 2010
|url-status=dead
}}</ref><ref>{{cite news
|url=http://www.go-nxg.com/?p=3155
|title=There's a song in the air...
|work=NXg
|date=जनवरी 2009
|accessdate=24 फरवरी 2009
|archive-url=https://web.archive.org/web/20130615082343/http://www.go-nxg.com/?p=3155
|archive-date=15 जून 2013
|url-status=dead
}}</ref> मद्रास म्यूज़िकल असोसियेशन भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठावान क्वायर्स में से एक हैं और इन्होंने विश्व भर में कार्यक्रम दिये हैं।<ref>{{cite news
|url=http://www.hindu.com/2006/06/16/stories/2006061616030200.htm
|title=Chennai choir to sing in England
|work=द हिन्दू
|date=जून 16, 2009
|accessdate=24 फरवरी 2009
|archive-url=https://web.archive.org/web/20080129234646/http://www.hindu.com/2006/06/16/stories/2006061616030200.htm
|archive-date=29 जनवरी 2008
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite news
|url=http://www.hindu.com/mp/2007/09/03/stories/2007090350690700.htm
|title=An aural treat
|work=द हिन्दू
|date=सितम्बर 03, 2007
|accessdate=24 फरवरी 2009
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090926071718/http://www.hindu.com/mp/2007/09/03/stories/2007090350690700.htm
|archive-date=26 सितंबर 2009
|url-status=live
}}</ref>
चेन्नई [[तमिल चलचित्र]] उद्योग, जिसे [[कॉलीवुड]] भी कहते हैं, का आधार नगर है। यह उद्योग [[कोडमबक्कम]] में स्थित है, जहां अधिकांश फिल्म स्टूडियों हैं।<ref>{{cite book
|last = Ellens
|first = Dan
|author2= Lakshmi Srinivas
|title=A Time for India
|publisher=Vantage Press Inc., New York
|year = 2006
|page = 150
|isbn = 0533150922
|url=http://books.google.com/books?id=6Nsyr3J1fpIC&printsec=frontcover&dq=kollywood#PPA150,M1
|accessdate=7 सितंबर 2007}}</ref> इस उद्योग के द्वारा आजकल १५० से अधिक फिल्में वार्षिक बनायी जाती हैं<ref>{{cite book
|last = Ganti
|first = Tejaswini
|title = Bollywood: A Guidebook To Popular Hindi Cinema
|publisher = Routledge, London
|year = 2004
|page = 3
|isbn = 0415288541
|url = http://books.google.com/books?id=GTEa93azj9EC&pg=PA3&dq=tamil+films+per+year&sig=Q9a_mC8aqRjWWyxHaHpsbCV6xuE
|accessdate = 7 सितंबर 2007
|archive-url = https://web.archive.org/web/20130604042330/http://books.google.com/books?id=GTEa93azj9EC
|archive-date = 4 जून 2013
|url-status = live
}}</ref> और इनके साउण्डट्रैक के एल्बम भी नगर को संगीतमय करते हैं। इस उद्योग से जुड़े कुछ व्यक्तियों के नामों में [[इलैयाराजा]], [[के बालाचंदर]], [[शिवाजी गणेशन]], [[एम जी रामचंद्रन]], [[रजनीकांत]], [[कमल हसन]], [[मणि रत्नम]] और [[एस शंकर]] हैं। <!-- [[चित्र:Idly sambar vada.JPG|thumb|[[सांभर |सांभर वड़ा]] और [[इडली]]]]--> [[चित्र:Chennai Veg Cuisine-hi.jpg|thumb|200px|तरह तरह के तमिल व्यंजन]]
[[ए आर रहमान]] ने चेन्नई को अन्तर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि दिलायी है। रहमान को [[२००९]] में [[स्लमडॉग मिलेनियर]] के लिए दो [[ऑस्कर सम्मान]] मिले थे।<ref>{{cite news
|url=http://www.voanews.com/english/Entertainment/2009-02-23-voa15.cfm
|title=India Celebrates 'Slumdog Millionaire's' Oscar Sweep
|work=VOA News
|date=फ़रवरी 23, 2009
|accessdate=24 फरवरी 2009
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090224173347/http://www.voanews.com/english/Entertainment/2009-02-23-voa15.cfm
|archive-date=24 फ़रवरी 2009
|url-status=live
}}</ref> चेन्नई में रंगमंच पर तमिल नाटक मंचित किये जाते हैं, जिनमें राजनीतिक, व्यंग्य, हास्य, पौराणिक, आदि सभी रसों का मिश्रण होता है।<ref>{{cite news
|last=Ramesh
|first=V
|url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2003/07/17/stories/2003071700060100.htm
|title=The Sultan of sarcasm
|work=द हिन्दू
|date=जुलाई 17, 2003
|accessdate=22 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20081230073420/http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2003/07/17/stories/2003071700060100.htm
|archive-date=30 दिसंबर 2008
|url-status=dead
}}</ref><ref>{{cite news
|last=अशोक कुमार
|first=एस आर
|url=http://www.hindu.com/2006/01/11/stories/2006011115150700.htm
|title=एक्टर आर एस मनोहर डेड
|work=द हिन्दू
|date=जनवरी 11, 2006
|accessdate=22 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090626151134/http://www.hindu.com/2006/01/11/stories/2006011115150700.htm
|archive-date=26 जून 2009
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite news
|last=Kumar
|first=Ranee
|url=http://www.hindu.com/mp/2003/12/10/stories/2003121000390100.htm
|title=Laughter, the best medicine
|work=द हिन्दू
|date=दिसम्बर 10, 2003
|accessdate=22 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20100130103808/http://www.hindu.com/mp/2003/12/10/stories/2003121000390100.htm
|archive-date=30 जनवरी 2010
|url-status=live
}}</ref> इनके अलावा अंग्रेज़ी नाटकों का भी मंचन आयोजित होता है।
नगर के उत्सवों में [[जनवरी]] माह में आने वाला पंच-दिवसीय [[पोंगल]] प्रमुख है। इसके अलावा सभी मुख्य त्यौहार जैसे [[दीपावली]], [[ईद]], [[क्रिसमस]] आदि भी हर्षोल्लास से मनाये जाते हैं। [[तमिल]] व्यंजनों में [[शाकाहारी]] और [[मांसाहारी]] दोनों ही व्यंजनों का सम्मिलन है। नगर में विभिन्न स्थानों पर अल्पाहार या टिफिन भी उपलब्ध है, जिसमें [[पोंगल]], [[दोसा]], [[इडली]], [[वड़ा]], आदि मिलते हैं, जिसको गर्मा गर्म या ठंडी कॉफी के साथ परोसा जाता है।
== अर्थव्यवस्था ==
[[चित्र:Tidel Park.jpg|thumb|Tidel Park]]
चेन्नई दक्षिण भारत के प्रमुख व्यवसाय-वाणिज्य एवं यातायात का केन्द्र है। १९वीं शताब्दी के अन्त में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना चेन्नई में हुई। चेन्नई के निकट पेराम्बूर में [[भारत]] सरकार द्वारा एशिया का सबसे विशाल रेलवे डिब्बा निर्माण का कारखाना इन्टीग्रल कोच बिल्डिंग फैक्टरी स्थापित किया गया है। यहाँ के उद्योगों में सूती वस्त्र उद्योग, रासायनिक उद्योग, कागज एवं कागज से निर्मित वस्तुओं के उद्योग, मुद्रण यंत्र एवं इससे सम्बन्धित उद्योग, चमड़ा, डीजल इंजन, मोटरगाड़ी, साइकिल, सीमेन्ट, चीनी, दियासलाई, रेल के डिब्बे तैयार करने के उद्योग आदि प्रमुख हैं। इसके अलावा सरकार द्वारा संचालित विभिन्न प्रकार के उद्योग एवं कारखाने चेन्नई में अवस्थित हैं। इनमें इण्टिग्रल कोच फैक्टरी, हिन्दुस्तान टेलीप्रिन्टर, चेन्नई रिफाईनरी एवं चेन्नई फर्टिलाइजर आदि प्रमुख हैं। मद्रास पेट्रोकेमिकल्स में पेट्रो-रसायन पदार्थ का उत्पादन होता है।
== जनसांख्यिकी ==
[[चित्र:Chennai Shopping.jpg|thumb|right|[[रंगनाथन स्ट्रीट]] [[टी नगर]] में पटरी पर खरीदने बेचने वालों की भीड़ लगी रहती है।]]
चेन्नई के वासी को अंग्रेज़ी में चेन्नैयाइट और हिन्दी में प्रायः मद्रासी कह दिया जाता है। [[२००१]] में [[भारत की जनगणना]] के अनुसार चेन्नई नगर की जनसंख्या ४३.४ लाख थी जबकि कुल महानगरीय जनसंख्या ७०.४ लाख थी।<ref name="masterplan_popfigs">{{cite web
|title=डेमोग्राफ़ी
|work=द्वितीय मास्टर प्लान - II
|pages=पृ. I-५, I-१०
|publisher=चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डवलपमेंट अथॉरिटी
|url=http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf
|format=पी.डी.एफ़
|accessdate=6 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071128071240/http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf
|archive-date=28 नवंबर 2007
|url-status=dead
}} The population density for Chennai city and the metropolitan area have been calculated using the population figures and the total area of the respective regions, mentioned in the Second Master Plan. The conversion rate of {{convert|1|mi|km|0|sing=on}} = 1.609 km. has been used to compute the density per sq. mile.</ref> २००६ की अनुमानित महानगरीय जनसंख्या ४५ लाख आयी है।<ref name="Hindu-CMDA">{{cite news
|last=श्रीवास्तन
|first=ए
|title=न्यू लैंड यूज़ प्रॉपोज़ल्स मूटेड इन ड्राफ़्ट मास्टर प्लान
|date=१२ अप्रैल २००७
|url=http://www.hindu.com/2007/04/12/stories/2007041213350400.htm
|work=[[द हिन्दु]]
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071012041105/http://hindu.com/2007/04/12/stories/2007041213350400.htm
|archive-date=12 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref> २००१ में नगर का [[जनसंख्या घनत्व]] २४,६८२ वर्ग कि॰मी॰ (६३,९२६ प्रति वर्ग मील) था, जबकि महानगरीय क्षेत्र का घनत्व ५,९२२ प्रति वर्ग कि॰मी॰ था, जिससे यह विश्व के सर्वोच्च जनसंख्या वाले नगरो में गिना जाने लगा।<ref name="masterplan_popfigs"/><ref>{{cite web
|title=अएबन एरियाज़ बाए पॉपुलेशन डेन्सिटी
|work=वर्ल्ड अर्बन एरियाज़ (वर्ल्ड एग्लोमरेशंस)
|pages=p. 77
|month=मार्च
|year=२००७
|publisher=डेमोग्राफ़िया
|url=http://www.demographia.com/db-worldua.pdf
|format=पी.डी.एफ़
|accessdate=9 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20180503021711/http://www.demographia.com/db-worldua.pdf
|archive-date=3 मई 2018
|url-status=dead
}} In terms of population density, Chennai was ranked 51st among all urban agglomerations in the world with over 500,000 people.</ref> यहां का [[लिंग अनुपात]] ९५१ स्त्रियां/१००० पुरुष है,<ref name="sex-ratio-nic">{{cite web
|title=सेन्सस २००१ डाटा
|work=भारत की जनगणना
|publisher=तमिल नाडु सरकार
|url=http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#CENSUS
|accessdate=5 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20130730180830/http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#CENSUS
|archive-date=30 जुलाई 2013
|url-status=dead
}}</ref> जो राष्ट्रीय औसत ९४४ से कुछ अधिक ही है।<ref name=CIA_World_Factbook>{{cite web| title= इंडिया| work= CIA World Factbook| url= https://www.cia.gov/library/publications/the-world-factbook/geos/in.html| accessdate= 4 अगस्त 2005| archive-url= https://web.archive.org/web/20080611033144/https://www.cia.gov/library/publications/the-world-factbook/geos/in.html| archive-date= 11 जून 2008| url-status= live}}</ref> नगर की औसत साक्षरता दर ८०.१४% है,<ref name=literacy>{{cite web
|title=डिस्ट्रिक्ट्स पर्फ़ॉर्मैन्स ऑन लिट्रेसी रेट इन तमिल नाडु फ़ॉर ईयर २००१
|work=Department of school education
|url=http://www.tn.gov.in/schooleducation/statistics/table7and8.htm
|accessdate=4 अगस्त 2005
|archive-url=https://web.archive.org/web/20050817143108/http://www.tn.gov.in/schooleducation/statistics/table7and8.htm
|archive-date=17 अगस्त 2005
|url-status=live
}}</ref> जो राष्ट्रीय औसत दर ६४.५% से कहीं अधिक है। नगर में झुग्गी-झोंपड़ी निवासियों की जनसंख्या भारत के अन्य महानगरों के मुकाबले चौथे स्थान पर आती है, जिसमें ८,२०,००० लोग (कुल जनसंख्या का १८.६%) लोग हैं।<ref name=slum>{{cite web
|title=स्लम पॉपुलेशन – सेन्सस २००१
|publisher=भारत सरकार
|url=http://www.censusindia.gov.in/
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070621135109/http://www.censusindia.net/results/slum/Intro_slum.pdf
|archive-date=21 जून 2007
|format=PDF
|accessdate=8 मार्च 2007
|url-status=live
}}</ref> यह संख्या भारत की कुल जनसंख्या का ५% है। [[२००५]] में नगर में अपराध दर ३१३.३ प्रति १ लाख व्यक्ति थी, जो भारत के सभी प्रधान नगरो में हुए अपराधों का ६.२% है।<ref>{{cite web
|url=http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/Table%201.6.pdf
|format=PDF
|accessdate=19 सितंबर 2007
|title=Incidence & Rate Of Total Cognizable Crimes (IPC) In States, UTs & Cities During 2005
|publisher=भारत सरकार
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070927005155/http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/Table%201.6.pdf
|archive-date=27 सितंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref> ये आंकड़े २००४ से ६१.८% बढ़े हैं।<ref>{{cite web
|url=http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/CHAP2.pdf
|format=पी.डी.एफ़
|accessdate=19 सितंबर 2007
|title=क्राइम इन मेगा सिटीज़
|work=क्राइम इन इन्डिया – २००५
|publisher=भारत सरकार
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070614203644/http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/CHAP2.pdf
|archive-date=14 जून 2007
|url-status=live
}}</ref>
चेन्नई में [[तमिल]] लोग बहुसंख्यक हैं। यहां की मुख्य भाषा [[तमिल]] ही है। व्यापार, शिक्षा और अन्य अधिकारी वर्ग के व्यवसायों एवं नौकरियों में [[अंग्रेज़ी]] मुख्यता से बोली जाती है। इनके अलावा कम किंतु गणनीय संख्या [[तेलुगु]] तथा [[मलयाली]] लोगों की भी है।<ref>{{cite web |url=http://chennai-online.in/Profile/Culture/ |title=चेन्नई कल्चर |publisher=chennai-online.in |accessdate=8 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071006034403/http://chennai-online.in/Profile/Culture/ |archive-date=6 अक्तूबर 2007 |url-status=dead }}</ref> चेन्नई में तमिल नाडु के अन्य भागों व भारत के सभी भागों से आये लोगों की भी अच्छी संख्या है। २००१ के आंकड़ों के अनुसार नगर के ९,३७,००० प्रवासियों (चेन्नई की कुल जनसंख्या का २१.५७%) में से; ७४.५% राज्य के अन्य भागों से आये थे, २३.८% देश के अन्य भागों से तथा १.७% विदेशियों की जनसंख्या थी।<ref>{{cite web
|url=http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf
|format=PDF
|title=डेमोग्राफ़ी
|work=द्वितीय मास्टर प्लान - II
|pages=पृ. I-11
|publisher=चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डवलपमेंट अथॉरिटी
|accessdate=6 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071128071240/http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf
|archive-date=28 नवंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref>
कुल जनसंख्या में ८२.२७% [[हिन्दू]], ८.३७% [[मुस्लिम]], ७.६३% [[ईसाई]] और १.०५% [[जैन]] हैं।<ref>{{cite web
|url=http://www.chennai.tn.nic.in/shb-pdf/SHB001%20-%20AREA%20POPULATION.pdf
|format=PDF
|title=एरिया एंड पॉपुलेशन
|publisher=तमिल नाडु सरकार
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20130830215520/http://www.chennai.tn.nic.in/shb-pdf/SHB001%20-%20AREA%20POPULATION.pdf
|archive-date=30 अगस्त 2013
|url-status=dead
}}</ref>
== यातायात ==
<!-- [[Image:Madras Port In 1996.jpg|thumb|200px|right|Chennai Port]]
-->
{{main|चेन्नई में यातायात }}
[[चित्र:Tidel Park junction panorama.jpg|thumb|300px|चेन्नई में आई.टी हाइवे, जिसके शिरोपरि [[एम आर टी एस (चेन्नई)]] निकलता हुआ दिखाई दे रहा है]]
चेन्नई दक्षिण भारत के प्रवेशद्वार की भांति प्रतीत होता है, जिसमें अन्ना अन्तर्राष्ट्रीय टर्मिनल एवं कामराज अन्तर्देशीय टार्मिनल सहित [[चेन्नई अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा]] [[भारत]] का [[भारत के विमानक्षेत्र|तीसरा व्यस्ततम विमानक्षेत्र]] है।<ref>{{cite web
|url=http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex3.pdf
|format=PDF
|publisher=[[भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण]]
|title=Traffic statistics - Passengers (Intl+Domestic), Annexure IIIC
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070926044903/http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex3.pdf
|archive-date=26 सितंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref><ref>{{cite web
|url=http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex2.pdf
|format=PDF
|publisher=भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण
|title=Traffic statistics - Aircraft movements (Intl+Domestic), Annexure IIC
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070926044906/http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex2.pdf
|archive-date=26 सितंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref> चेन्नई नगर दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, पूर्वी एशिया, मध्य पूर्व, [[यूरोप]] एवं [[उत्तरी अमरीका]] के प्रधान बिन्दुओं पर ३० से अधिक राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय विमान सेवाओं से जुड़ा हुआ है। यह विमानक्षेत्र देश का दूसरा व्यस्ततम कार्गो टर्मिनस है। वर्तमान विमानक्षेत्र में अधिक आधुनिकीकरण और विस्तार कार्य प्रगति पर हैं। इसके अलावा [[श्रीपेरंबुदूर]] में नया ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट लगभग २००० करोड़ रु. की लागत से बनना तय हुआ है।<ref name=New_Airport>{{cite news
|title=New greenfield airport to be set up near Chennai
|work=द हिन्दू
|url=http://www.hindu.com/thehindu/holnus/001200705221441.htm
|date=मई 22, 2007
|accessdate=22 मई 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20121026105518/http://www.hindu.com/thehindu/holnus/001200705221441.htm
|archive-date=26 अक्तूबर 2012
|url-status=live
}}</ref>
नगर में दो प्रधान सागरपत्तन (बंदरगाह) हैं, [[चेन्नई पोर्ट]] जो सबसे बड़े कृत्रिम बंदरगाहों में एक है, तथा [[एन्नोर पोर्ट]]। चेन्नई पोर्ट [[बंगाल की खाड़ी]] में सबसे बड़ा बंदरगाह और भारत का दूसरा सबसे बड़ा सागरीय-व्यापार केन्द्र है, जहां ऑटोमोबाइल, मोटरसाइकिल, सामान्य औद्योगिक माल और अन्य थोक खनिज की आवाजाही होती है।<ref>{{cite news
|url=http://app.mfa.gov.sg/pr/read_content.asp?View,4753,
|publisher=Business Times
|title=Gateway to India for Singapore firms
|date=जुलाई 6, 2006
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20100312232206/http://app.mfa.gov.sg/pr/read_content.asp?View,4753,
|archive-date=12 मार्च 2010
|url-status=dead
}}</ref> [[मुम्बई]] के बाद भारत का यही सबसे बड़ा पत्तन है। इस कृत्रिम बन्दरगाह में जलयानों के लंगर डालने के लिए कंक्रीट की मोटी दीवारें सागर में खड़ी करके एक साथ दर्जनों जलयानों के ठहराने योग्य पोताश्रय बना लिया गया है। दक्षिणी भारत का सारा दक्षिण-पूर्वी भाग ([[तमिलनाडु]], दक्षिणी आन्ध्रप्रदेश तथा कर्नाटक राज्य) इसकी पृष्ठभूमि है। यहाँ मुख्य निर्यात मूँगफली और इसका तेल, तम्बाकू, प्याज, कहवा, अबरख, मैंगनीज, चाय, मसाला, तेलहन, चमड़ा, नारियल इत्यादि हैं तथा आयात में कोयला, पेट्रोलियम, धातु, मशीनरी, लकड़ी, कागज, मोटर-साइकिल, रसायन, चावल और खाद्यान्न, लम्बे रेशे वाली कपास, रासायनिक पदार्थ, प्रमुख हैं। एक छोटा बंदरगाह [[रोयापुरम]] में भी है, जो स्थानीय मछुआरों और जलपोतों द्वारा प्रयोग होता है। पूर्वी तट पर चेन्नई की महत्त्वपूर्ण स्थिति ने प्राकृतिक सुविधा के अभाव में भी कृत्रिम व्यवस्था द्वारा एक पत्तन का विकास पाया है। एक बन्दरगाह होने के कारण कोलकाता, विशाखापट्टनम, कोलम्बों, रंगून, पोर्ट ब्लेयर आदि स्थानों से समुद्री मार्ग द्वारा सम्बद्ध है।
[[चित्र:Velachery Railway station June 2010.jpg|thumb|left|चेन्नई में [[सामूहिक त्वरित यातायात प्रणाली (चेन्नई)|एम.आर.टी.एस]] ट्रेन का स्टेशन]]
आज रेलमार्गों और सड़कों का मुख्य जंक्शन होने के कारण यह नगर देश के विभिन्न नगरो से जुड़ा हुआ है। यह वायु मार्ग द्वारा [[बंगलोर]], कोलकाता, मुम्बई, दिल्ली, हैदराबाद आदि देश के विभिन्न नगरो से जुड़ा हुआ है। चेन्नई देश के अन्य भागों से रेल द्वारा भी भली-भांति जुड़ा हुआ है। यहां से पाँच मुख्य [[भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग|राष्ट्रीय राजमार्ग]] नगर को [[मुंबई]], [[कोलकाता]], [[तिरुचिरापल्ली]], [[तिरुवल्लुर]], तिंडिवनम और [[पुदुचेरी]] को जोड़ते हैं।<ref name=transport>{{cite web | title= GIS database for Chennai city roads and strategies for improvement | publisher= Geospace Work Portal | url= http://www.gisdevelopment.net/application/Utility/transport/utilitytr0001.htm | accessdate= 4 अगस्त 2005 | archive-url= https://web.archive.org/web/20120717045706/http://www.gisdevelopment.net/application/Utility/transport/utilitytr0001.htm | archive-date= 17 जुलाई 2012 | url-status= dead }}</ref> चेन्नई मोफस्सिल बस टर्मिनस, चेन्नई से सभी अन्तर्राज्यीय बस सेवाओं का अड्डा है। यह [[एशिया]] का सबसे बड़ा बस-अड्डा है।<ref name="thehindu20051228">{{cite news
|last=Dorairaj
|first=S
|url=http://www.hindu.com/2005/12/28/stories/2005122816740400.htm
|work=द हिन्दू
|title=Koyambedu bus terminus gets ISO certification
|date=दिसम्बर 28, 2005
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20111107232736/http://www.hindu.com/2005/12/28/stories/2005122816740400.htm
|archive-date=7 नवंबर 2011
|url-status=live
}}</ref> सात सरकारी यातायात निगम अन्तर-नगरीय और अन्तर्राज्यीय बस सेवाएं संचालित करते हैं। बहुत सी निजी बस सेवाएं भी चेन्नई को अन्य नगरो से सुलभ कराती हैं।
चेन्नई [[दक्षिण रेलवे (भारत)|दक्षिण रेलवे]] का मुख्यालय है। नगर में दो मुख्य रेलवे टार्मिनल हैं। [[चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन]], जहां से सभी बड़े नगरो जैसे [[मुंबई]], [[कोलकाता]], [[बंगलुरु]], [[दिल्ली]], [[हैदराबाद]], [[कोच्चि]], [[कोयंबतूर]], [[तिरुवनंतपुरम]], इत्यादि के लिए रेल-सुविधा उपलब्ध हैं।<ref>{{cite web|url=http://www.southernrailway.org/sutt/arr-dep.php|title=Sub-urban Train timings|publisher=Indian Railways|accessdate=6 अक्टूबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011023042/http://southernrailway.org/sutt/arr-dep.php|archive-date=11 अक्तूबर 2007|url-status=dead}}</ref> [[चेन्नई एगमोर रेलवे स्टेशन]] से प्रायः [[तमिलनाडु]] के नगरो की रेल सेवाएं ही उपलब्ध हैं। कुछ निकटवर्ती राज्य के नगरो की भी रेलगाड़ियां यहां से चलती हैं।<ref name="egmore-trains">{{cite news
|title=35 trains to run at higher speed
|date=अगस्त 27, 2004
|url=http://www.hindu.com/2004/08/28/stories/2004082807870500.htm
|work=द हिन्दू
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071013122036/http://hindu.com/2004/08/28/stories/2004082807870500.htm
|archive-date=13 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref>
[[चित्र:Chennai Royapettah clock tower.jpg|thumb|[[मेट्रोपॉलिटान ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन, चेन्नई|एम.टी.सी]] की वॉल्वो बस]]<!-- end of image -->
नगर में लोक यातायात हेतु बस, रेल, ऑटोरिक्शा आदि सर्वसुलभ यातायात हैं।[[चेन्नई उपनगरीय रेलवे]] नेटवर्क भारत में सबसे पुराना है। इसमें चार [[ब्रॉड गेज]] रेल क्षेत्र हैं जो नगर में दो स्थानों [[चेन्नई सेंट्रल]] और [[चेन्नई बीच रेलवे स्टेशन]] पर मिलते हैं। इन टर्मिनल से नगर में निम्न सेक्टरों के लिए नियमित सेवाएं उपलब्ध हैं:
* [[चेन्नई सेंट्रल]]/[[चेन्नई बीच]] - [[अरक्कोणम]] - [[तिरुट्टनी]] ([[चेन्नई उपनगरीय रेलवे – पश्चिम लाइन]])
* [[चेन्नई सेंट्रल]]/ [[चेन्नई बीच]] – [[गुम्मिडीपूंडी]] - [[सुलुरपेट]] ([[चेन्नई उपनगरीय रेलवे]])
* [[चेन्नई बीच]] – [[तांबरम]] - [[चेंगलपट्टू]] - तिरुमलैपुर ([[कांचीपुरम]]) ([[चेन्नई उपनगरीय रेलवे – दक्षिण लाइन]])
* चौथा सेक्टर भूमि से उच्च स्तर पर है और [[चेन्नई बीच]] को [[वेलाचेरी]] से जोड़ता है और शेष जाल से भी जुड़ा हुआ है।
[[चेन्नई मेट्रो]] चेन्नई मेट्रो चेन्नई के लिए अनुमोदित एक त्वरित यातायात सेवा है। इसके प्रथम चरण में दो लाइने प्रयोग में है एवम् अन्य लाइनों का कार्य निर्माणाधीन है यह पूरी परियोजना पहले चरण के दो गलियारों की लागत १४,६०० करोड़ रुपये है। जो ५०.१ कि॰मी॰ लंबे है २००७ के अनुंआन से ९५९६ करोड लागत आयी थी।[3].<ref name="hindumetrorail">{{cite web
|first=TheCSR
|title=Chennai metro work begins
|date=अप्रैल 18, 2008
|url=http://www.hindu.com/2008/04/18/stories/2008041860651200.htm
|work=द हिन्दू
|accessdate=17 जुलाई 2009
|archive-url=https://web.archive.org/web/20081101201943/http://www.hindu.com/2008/04/18/stories/2008041860651200.htm
|archive-date=1 नवंबर 2008
|url-status=live
}}</ref>
[[मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन, चेन्नई|मेट्रोपॉलिटन ट्रांस्पोर्ट कार्पोरेशन]] (MTC) नगर में बस यातायात संचालित करता है। निगम का २७७३ बसों का बेड़ा २८८ मार्गों पर ३२.५ लाख यात्रियों को दैनिक परिवहन उपलब्ध कराता है।<ref name=mtc_details>{{cite web
|title=The Growth
|publisher=Metropolitan Transport Corporation (Chennai) Ltd
|url=http://www.mtcbus.org/
|date=मई 31, 2008
|accessdate=31 मई 2008
|archive-url=https://web.archive.org/web/20080526170357/http://mtcbus.org/
|archive-date=26 मई 2008
|url-status=dead
}}</ref>
नगर के बहुत से मार्गों पर मैक्सी कैब नाम से वैन और सवारी भाड़े पर ऑटोरिक्शा भी चलते हैं, जो बस सेवा का विकल्प देते हैं। चेन्नई की यातायात संरचना अच्छा संपर्क उपलब्ध कराती है, किंतु बढती हुई जनसंख्या को देखते हुए यातायात संकुलन (कंजेशन) और प्रदूषण की समस्याएं भी खड़ी हो गयी हैं। प्रशासन ने इन समस्याओं के समाधान स्वरूप फ्लाईओवर तथा ग्रेड-सेपरेटर निर्माण किये हैं, जिसका शुभारंभ [[१९७३]] में जेमिनी फ्लाईओवर से नगर की सबसे महत्त्वपूर्ण सड़क [[अन्ना सालै]] से हुआ था।<ref>{{cite web
|url=http://www.hindu.com/nic/draftmasterplanii_short.pdf
|format=PDF
|title=Land Use and Planning Strategy
|work=Draft Master Plan – II for Chennai Metropolitan Area
|publisher=Chennai Metropolitan Development Authority
|page=p. 60
|accessdate=16 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070927005157/http://www.hindu.com/nic/draftmasterplanii_short.pdf
|archive-date=27 सितंबर 2007
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite news
|last=Srivathsan
|first=A
|url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/thscrip/print.pl?file=2007092950161200.htm&date=2007/09/29/&prd=pp&
|title=Bridge across time Skyline
|work=द हिन्दू
|date=सितम्बर 29, 2007
|accessdate=16 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20110327174358/http://www.hinduonnet.com/thehindu/thscrip/print.pl?file=2007092950161200.htm&date=2007%2F09%2F29%2F&prd=pp&
|archive-date=27 मार्च 2011
|url-status=dead
}}</ref> और हाल ही में तैयार हुआ इस शृंखला की नवीनतम कड़ी [[काठीपाड़ा फ़्लाईओवर]] है।
== शिक्षा ==
[[चित्र:Anna-university.jpg|thumb|चेन्नई में स्थित अन्ना विश्वविद्यालय]]
चेन्नई में सरकारी एवं निजी दोनो प्रकार के विद्यालय है। शिक्षा का माध्यम तमिल अथवा अंग्रेजी होता है। अधिकांश विद्यालय तमिलनाडु राज्य शिक्षा मंडल या केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से जुड़े है।<ref>{{cite news
|url=http://www.hindu.com/edu/2006/11/20/stories/2006112000410100.htm
|title=Balancing uniformity and diversity
|work=द हिन्दू
|date=नवम्बर 20, 2006
|author=Ramachandran, K. and Srinivasan, Meera
|accessdate=7 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071013193537/http://hindu.com/edu/2006/11/20/stories/2006112000410100.htm
|archive-date=13 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref> नगर में कुल १,३८९ विद्यालय है जिस में से ७३१ प्राथमिक, २३२ माध्यमिक और ४२६ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय है।<ref>{{cite web
|url=http://www.schools.tn.nic.in/TownSchools.asp?DCODE=02&VTCODE=40200988
|title=No. of Schools in the Town : Chennai
|publisher=Govt. of Tamil Nadu
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090409225017/http://www.schools.tn.nic.in/TownSchools.asp?DCODE=02&VTCODE=40200988
|archive-date=9 अप्रैल 2009
|url-status=dead
}}</ref>
इंजीनियरिंग शिक्षा के लिये चेन्नई में [[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान चेन्नई|भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान]], १७९४ में स्थापित कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग गिन्डी, १९४९ में स्थापित [[मद्रास प्रौद्योगिकी संस्थान]] (Madras Institute of Technology) और [[एस आर एम विश्वविद्यालय]] जाने माने संस्थान है। अधिकांश इंजीनियरिंग महाविद्यालय [[अन्ना विश्वविद्यालय]] से संबंधित है। [[मद्रास मेडिकल कॉलेज]], स्तेनली मेडिकल कॉलेज, किलपौक मेडिकल कॉलेज और एस आर एम मेडिकल कॉलेज एवं अनुसंधान संस्थान चेन्नई के प्रमुख चिकित्सीय महाविद्यालय है।
विज्ञान, कला एवं वाणिज्य क्षेत्र में शिक्षा प्रदान कराने वाले अधिकांश महाविद्यालय मद्रास विश्वविद्यालय से संबद्धित है। मद्रास विश्वविद्यालय की नगर में तीन परिसर है। मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज, लोयोला कॉलेज, द न्यू कॉलेज और पेट्रीसियन कॉलेज कुछ प्रसिद्ध स्वशासी महाविद्यालय है। चेन्नई में कई अनुसंधान केन्द्र भी है।
== खेल-कूद ==
[[चित्र:M. A. Chidambaram Stadium Challenger Trophy 2006.jpg|thumb|एम ए चिदंबरम स्टेडियम]] चेन्नई नगर विविध खेलो के लिये प्रसिद्ध है। नगर ने भारत को कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिये हैं। [[एस वेन्कट राघवन]] और [[कृष्णम्माचारी श्रीकांत]] ने [[क्रिकेट]] में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।<ref>{{cite web|title=Srinivas Venkataraghavan|publisher=क्रिक इन्फ़ो|url=http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/35656.html|first=पर्ताब|last=रामचंद|accessdate=15 अक्टूबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011202950/http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/35656.html|archive-date=11 अक्तूबर 2007|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|title=क्रिस श्रीकांत|publisher=क्रिक इन्फ़ो|url=http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/34103.html|first=पर्ताब|last=रामचंद|accessdate=१५ अक्टूबर|archive-url=https://web.archive.org/web/20090214140744/http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/34103.html|archive-date=14 फ़रवरी 2009|url-status=live}}</ref> [[इंगलैंड]] के प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी [[नासिर हुसैन (क्रिकेट खिलाड़ी)|नासिर हुसैन]] का जन्म भी चेन्नई में हुआ था। [[एम आर एफ़ पेस फ़ाउंडेशन]] एक प्रसिद्ध तेज गेंदबाजी सिखाने की संस्था है जो सन १९८७ से चेन्नई में संचालित हो रही है। [[इंडियन प्रीमियर लीग]] में चेन्नई के स्थानीय टीम का नाम [[चेन्नई सुपर किंग्स]] है जिसके कप्तान [[महेन्द्र धोनी]] है। चेपुक में स्थित [[एम ए चिदंबरम स्टेडियम]] भारत के सबसे पुराने क्रिकेट के मैदानो में से एक है।<ref>{{cite web
|last=Sriram
|first=Natarajan
|url=http://content-usa.cricinfo.com/india/content/ground/58008.html
|title=MA Chidambaram stadium
|publisher=[[Cricinfo]]
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20061104024506/http://content-usa.cricinfo.com/india/content/ground/58008.html
|archive-date=4 नवंबर 2006
|url-status=live
}}</ref>
[[मेयर राधाकृष्णन स्टेडियम]] [[हॉकी]] का एक लोकप्रिय मैदान है। यहां एशिया कप एवं चैम्पियन ट्रॉफ़ी जैसी प्रमुख हॉकी प्रतियोगिताएं आयोजित हो चुकीं है।<ref>{{cite news
|url=http://www.hindu.com/2007/09/10/stories/2007091055590100.htm
|title=India retains Asia Cup hockey title
|work=द हिन्दू
|date=सितम्बर 10, 2007
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20110629021257/http://www.hindu.com/2007/09/10/stories/2007091055590100.htm
|archive-date=29 जून 2011
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite news
|url=http://www.hindu.com/2004/10/20/stories/2004102004161800.htm
|title=Radhakrishnan stadium to have new turf
|work=द हिन्दू
|date=अक्टूबर 20, 2004
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090825233850/http://www.hindu.com/2004/10/20/stories/2004102004161800.htm
|archive-date=25 अगस्त 2009
|url-status=live
}}</ref>
[[प्रिमियर हॉकी लीग]] में चेन्नई का प्रतिनिधि [[चेन्नई वीरन्स]] नामक टीम करती है।
[[चित्र:Nungambakkam SDAT Tennis Stadium floodlit match panorama.jpg|thumb|चेन्नई में आयोजित होने वाली चेन्नई ओपन प्रतियोगिता]][[चेन्नई ओपन]] चेन्नई में आयोजित होने वाली एक प्रसिद्ध [[टेनिस]] प्रतियोगिता है। यह भारत की एक मात्र ए टी पी प्रतियोगिता है। [[विजय अमृतराज]] और [[रमेश कृष्णन]] प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी है जो चेन्नई से संबंध रखते है।<ref name="amirtharajs">{{cite news
|last=Basu
|first=Arundhati
|title=Off-court ace
|date=मार्च 19, 2005
|url=http://www.telegraphindia.com/1050319/asp/weekend/story_4513588.asp
|work=The Telegraph
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011164652/http://telegraphindia.com/1050319/asp/weekend/story_4513588.asp
|archive-date=11 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite news
|last=Srinivasan
|first=Kamesh
|title=For Paes and Bhupathi, glory days began in Chennai
|date=दिसम्बर 28, 2001
|url=http://www.hindu.com/2001/12/28/stories/2001122801651900.htm
|work=द हिन्दू
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011212144/http://hindu.com/2001/12/28/stories/2001122801651900.htm
|archive-date=11 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref><ref name="ramanathan-krishnan">{{cite news
|last=Keerthivasan
|first=K
|title=A trip down memory lane
|date=दिसम्बर 30, 2004
|url=http://www.hindu.com/2004/12/30/stories/2004123006512000.htm
|work=द हिन्दू
|accessdate=11 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071029135800/http://www.hindu.com/2004/12/30/stories/2004123006512000.htm
|archive-date=29 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite web
|url=http://www.chennaiopen.org
|title=About the venue
|publisher=[[International Management Group]]
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20190602204450/http://www.chennaiopen.org/
|archive-date=2 जून 2019
|url-status=live
}}</ref>
सन [[१९९५]] में चेन्नई दक्षिण एशियन गेम्स का मेजबान रहा है।<ref>{{cite news
|last=Thyagarajan
|first=S
|title=On the road to restoration
|date=दिसम्बर 4, 2003
|url=http://www.hindu.com/mp/2003/12/04/stories/2003120400820400.htm
|work=द हिन्दू
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071013194123/http://hindu.com/mp/2003/12/04/stories/2003120400820400.htm
|archive-date=13 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref>
जवाहर लाल नेहरु स्टेडियम फ़ुटबॉल एवं एथलेटिक स्पर्धाओं के लिये उपयोग होता है। कई अंतरंग स्पर्धाए जैसे वॉलीबॉल, बास्केटबॉल और टेबल टेनिस का आयोजन इसी स्टेडियम में होता है। जल क्रीड़ा स्पर्धाओं का आयोजन वेलाचेरी अक्वेटिक कॉम्पलेक्स में होता है।
कार दौड़ प्रतियोगिताओं में चेन्नई का नाम भारत में सर्वप्रथम लिया जाता है। [[श्रीपेरम्बदूर]] में स्थित इरुन्गट्टुकोट्टाइ में एक रेस ट्रेक जो अन्तरराष्ट्रीय कार दौड़ प्रतियोगिता के लिये उपयोग में लिया जाता है।<ref name="hindumotorsport">{{cite news
|last=Thyagarajan
|first=S
|title=On the right track
|date=अगस्त 22, 2002
|url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2002/08/22/stories/2002082200640400.htm
|work=द हिन्दू
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011182248/http://hinduonnet.com/thehindu/mp/2002/08/22/stories/2002082200640400.htm
|archive-date=11 अक्तूबर 2007
|url-status=dead
}}</ref> घुड़दौड़ [[गिंडी रेस कोर्स]] में आयोजित होती है। [[मद्रास बोट क्लब]] नौकायान प्रतियोगिता का आयोजन करता है। चेन्नई में दो गोल्फ़ के मैदान है: कॉस्मोपालिटन क्लब और जिमखाना क्लब। विश्वप्रसिद्ध शतरंज खिलाड़ी [[विश्वनाथ आनंद]] का बचपन भी चेन्नई में बीता है।<ref>{{cite news
|last = Brijnath
|first = Rohit
|url = http://www.hindu.com/2007/10/06/stories/2007100655521900.htm
|title = India's most consistent champion
|work = [[द हिन्दू]]
|date = अक्टूबर 6, 2007
|accessdate = 11 अक्टूबर 2007
|archive-url = https://web.archive.org/web/20071011192157/http://www.hindu.com/2007/10/06/stories/2007100655521900.htm
|archive-date = 11 अक्तूबर 2007
|url-status = live
}}</ref><ref>{{cite news
|last=Fide
|first=
|url=http://ratings.fide.com/toparc.phtml?cod=117
|title=FIDE Top 100 Players October 2007
|work=Fide
|date=अक्टूबर 15, 2007
|accessdate=15 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20080424104027/http://ratings.fide.com/toparc.phtml?cod=117
|archive-date=24 अप्रैल 2008
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite news
|last=Official site of the 2007 World Chess Championship
|first=
|url=http://www.chessmexico.com/es/index.php?option=com_content&task=blogcategory&id=22&Itemid=114
|title=Viswanathan Anand the new World Champion 2007
|work=
|date=अक्टूबर 15, 2007
|accessdate=15 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071014143041/http://www.chessmexico.com/es/index.php?option=com_content&task=blogcategory&id=22&Itemid=114
|archive-date=14 अक्तूबर 2007
|url-status=dead
}}</ref>
२००६ के राष्ट्रमंडल खेलो में [[टेबल टेनिस]] में स्वर्ण जीतने वाले शरथ कमाल<ref>{{cite news
|last=Srinivasan
|first=Meera
|url=http://www.hindu.com/2007/09/07/stories/2007090760930400.htm
|title=Four Chennai teachers have a reason to rejoice
|work=[[द हिन्दू]]
|date=सितम्बर 7, 2007
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071012041902/http://hindu.com/2007/09/07/stories/2007090760930400.htm
|archive-date=12 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref> और दो बार की विश्व [[कैरम]] विजेता मारिया इरुदयम भी चेन्नई के निवासी है।<ref>{{cite web
|url=http://sportal.nic.in/front.asp?maincatid=51&headingid=71
|publisher=Govt. of India
|title=Indian Teams in International Competitions
|accessdate=11 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070927012135/http://sportal.nic.in/front.asp?maincatid=51&headingid=71
|archive-date=27 सितंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref>
== पर्यटन ==
चेन्नई को सुपर प्रसारित नगर कहते हैं यहाँ अनेक दर्शनीय स्थल हैं जिनमें [[मद्रास विश्वविद्यालय]], चेपॉक महल, मत्स्य पालन केन्द्र, कपिलेश्वर और पार्थसारथी का मंदिर, अजायबघर और चिड़ियाघर आदि प्रमुख हैं। चेन्नई का एक अन्य महत्वपूर्ण आकर्षण है [[सेंट जॉर्ज फोर्ट]]। इसे सन् [[१६४०]] में ईस्ट इंडिया कंपनी के फ्रांसिंस डे ने बनाया था। यह किला ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापारिक केंद्र था। १५० वर्षों तक यह युद्धों और षड्यंत्रों का केंद्र बना रहा। इस किले में पुरानी सैनिक छावनी, अधिकारियों के मकान, [[सेंट मेरी गिरजाघर]] एवं रॉबर्ट क्लाइव का घर है। सेंट मेरी गिरजाघर अँगरेजों द्वारा भारत में बनवाया गया सबसे पुराना चर्च माना जाता है।
चेन्नई का [[मरीना बीच]] पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण है। यह विश्व का दूसरा सबसे लंबा समुद्र तट है। इसके दो सौ से तीन सौ गज चौड़े रेतीले तट पर शाम को इतनी अधिक भीड़ होती है कि लगता है मानो सारा नगर वहीं आ गया है। सारे दिन की थकान को चेन्नई वासी शाम को मरीना बीच की अथाह जल राशि में बहा देना चाहते हों। पर्यटकों की सुविधा के लिए मेरीना बीच पर एक स्वीमिंग पूल है जो दुर्घटनाओं को घटने से रोकता है क्योंकि यहाँ समुद्र की गहराई और लहरों का तेज प्रवाह खतरनाक है। [[शार्क]] मछलियों की अधिकता भी है, अतः स्नान या तैरने के लिए स्वीमिंग पूल का ही लाभ लेना चाहिए। इसी के पास एक मछलीघर भी है, जिसमें तरह-तरह की देशी-विदेशी मछलियाँ दर्शनार्थ रखी गई हैं। मरीना तट का उत्तरी भाग पूर्व मुख्यमंत्री [[अन्नादुरै]] के समाधि-स्थल के रूप में विकसित किया गया है। यहाँ लोगों को श्रद्धानवत होते देखा जा सकता है। साथ ही एम.जी.आर. स्मारक भी है जिसका प्रवेश द्वार दो विशाल हाथी दाँत के रूप में बनाया गया है। यहाँ एक मशाल हमेशा प्रज्वलित रहती है।
चेन्नई का स्नेक पार्क भी पर्यटकों को प्रभावित करता है। यह अपनी तरह का एक अलग ही पार्क है जिसका निर्माण रोमुलस व्हिटेकर नामक अमेरिकी ने किया था। यह पाँच सौ से भी ज्यादा खतरनाक भारतीय [[साँपों]] का जीवित संग्रहालय कहा जा सकता है। रेंगते हुए ये विषधर भय मिश्रित रोमांच पैदा करते हैं। यहाँ पर साँपों के अलावा [[सरीसृप वर्ग]] के अन्य जीव जैसे [[मगरमच्छ]], घड़ियाल इत्यादि भी रखे गए हैं। चेन्नई महानगर की कलात्मक संस्कृति के दर्शन पैंथियान रोड स्थित नेशनल आर्ट गैलरी में सहज ही किए जा सकते हैं।
धार्मिक दृष्टिकोण से संपूर्ण [[दक्षिण भारत]] एक तीर्थ है जहाँ वास्तुकला और मूर्तिकला के अद्वितीय उदाहरण हैं। इन मंदिरों में भव्यता और कलाशिल्प देखने योग्य है। [[उत्तर भारत]] से एकदम अलग शैली के मंदिर होने के बावजूद श्रद्धा और भक्ति में ये समस्त भारतीय आस्तिकों को आकर्षित करते हैं। तिरुषैलिफेनी स्थित पार्थ सारथि मंदिर के लिए उल्लेख है कि इसका निर्माण आठवीं शताब्दी में राजा पल्लव ने करवाया था। इस देवस्थान की दीवारों पर सुंदर कलाकृतियाँ अंकित हैं। दूसरा आकर्षक मंदिर है [[द्रविड़ शिल्पकला]] में निर्मित मिलापोर स्थित कालीश्वर मंदिर। यहाँ माता पार्वती की उपासना की गाथा अंकित है। समुद्र की रेत से तपता यह क्षेत्र अत्यंत गरम जलवायु लिए हुए है जो केले, नारियल और पाम के पेड़ों से खूबसूरत लगता है।
== चित्र दीर्घा ==
<gallery>
File:MylaporeKapaleeshwararTemple.jpg|मैलापुर कपिलेश्वर मंदिर
File:Chennai_corp.jpg| चेन्नई महानगर पालिका भवन
File:M. A. Chidambaram Stadium Challenger Trophy 2006.jpg| एम ए चिदंबरम क्रिकेट स्टेडियम
File:Chennai_National_Art_Gallery.jpg| चेन्नई स्थित राष्ट्रीय कला दीर्घा
File:Chettinad Palace, Chennai.jpg| अडयार नदी के तट पर स्थित चेट्टीनाड महल
File:Santhome Basilica.jpg| सान्तोम बासेलिका
File:Anna Samadhi entrance.jpg| मरीना बीच पर स्थित अन्ना समाधि का प्रवेशद्वार
File:Iitm maingate logo.jpg| भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, चेन्नई के प्रवेशद्वार पर लगा संस्था का प्रतीक चिन्ह
</gallery>
== सन्दर्भ ==
{{reflist|2}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
{{Commonscat|Chennai|चेन्नई}}
* [https://web.archive.org/web/20090422032753/http://www.tourismchennai.com/ चेन्नई पर्यटन]
* [https://web.archive.org/web/20110429011354/http://www.chennai.tn.nic.in/ चेन्नई प्रशासन का आधिकारिक जालस्थल]
* [https://web.archive.org/web/20080501095016/http://www.chennaicorporation.com/ चेन्नई नगर निगम - आधिकारिक जालस्थल]
* [https://web.archive.org/web/20070927092854/http://www.cmdachennai.org/ चेन्नई महानगर विकास प्राधिकरण का जालस्थल]
{{चेन्नई}}{{चेन्नई में त्वरित यातायात}}
{{भारतीय मेट्रोपॉलिटन शहर}}
{{भारत के राज्य और केन्द्रशासित प्रदेश के राजधानी}}
{{भारत के मिलियन+ नगर}}
.
[[श्रेणी:चेन्नई]]
[[श्रेणी:तमिलनाडु]]
[[श्रेणी:भारत के महानगर]]
[[श्रेणी:तमिल नाडु के शहर]]
[[श्रेणी:कॉमन्स पर निर्वाचित चित्र युक्त लेख]]
[[श्रेणी:चेन्नई ज़िला]]
[[श्रेणी:कोरोमंडल तट]]
3my5xs37h9t6qmpodei44d9t8doj0gj
6591445
6591430
2026-07-24T02:47:09Z
Dimple323
881290
कुछ तमिल शब्दों एवं दक्षिण भारतीय शासकों के नाम की वर्तनी ठीक की गयी है
6591445
wikitext
text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक अवस्थापन
| name = चेन्नै
| native_name = {{hlist|சென்னை|Chennai}}
| settlement_type = [[महानगर]]
| image_seal =
| pushpin_map = India
| pushpin_label_position = right
| subdivision_type = देश
| subdivision_name = {{IND}}
| subdivision_type1 = [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|राज्य]]
| subdivision_name1 = [[तमिलनाडु]]
| subdivision_type2 = [[भारत के ज़िले|ज़िला]]
| subdivision_name2 = [[चेन्नई जिला|चेन्नै]]
| population_as_of = २०११
| population_total = ६७४८०२६
| population_metro = ८६९६०१०
| population_footnotes = <ref name="pop">{{Cite web |url=http://www.census2011.co.in/city.php |title=संग्रहीत प्रति |access-date=23 अप्रैल 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190321092118/http://www.census2011.co.in/city.php |archive-date=21 मार्च 2019 |url-status=dead }}</ref>
| timezone1 = [[भारतीय मानक समय]]
| utc_offset1 = +5:30
| website = {{URL|www.chennaicorporation.gov.in}}
| footnotes =
| official_name =
| translit_lang1_type =
| image_skyline = {{multiple image
|perrow = 1/2/2/2
|border = infobox
|total_width = 300
|image1 = Chennai Central.jpg
|caption1 = [[चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन|चेन्नै सेंट्रल रेऽलवे स्टेशन]]
|image2 = Kapaleeswarar_Temple%2C_Mylapore%2C_Chennai.jpg
|caption2 = [[कपालीश्वर मंदिर]]
|image3 = Valluvar_Kottam_Edit1.JPG
|caption3 = वल्लुवर कोट्टम
|image4 = Chennai LabourStatue Closeup.jpg
|caption4 = श्रम की प्रतिमा
|image5 = Kathipara Crop.jpg
|caption5 = कत्तिपारा जंक्शन
|image6 = Ripon Building Chennai.JPG
|caption6 = [[राइपन बिल्डिंग]]
|image7 = Chennai - bird's-eye view.jpg
|caption7 = [[मरीना बीच (चेन्नई)|मरीना बीच]]
}}
| image_shield = Chennai Corporation Emblem.png
| government_type = [[नगर निगम (भारत)|नगर निगम]]
| governing_body = चेन्नै नगर निगम
| leader_title = महापौर
| leader_name = प्रिया राजन
| leader_title1 = अध्यक्ष
| leader_name1 = जे. कुमारगुरुवरन
| area_total_km2 = ४२६
| area_metro_km2 = ५०९४
| elevation_m = ७
| population_density_km2 = auto
| area_code = +91-44
| registration_plate = टीएन-01, टीएन-14, टीएन-18, टीएन-22 एवं टीएन-85
| blank_info_sec1 = ६००xxx
| blank_name_sec1 = [[डाक सूचक संख्या|पिन]]
| blank1_name_sec1 = आधिकारिक भाषाएँ
| blank1_info_sec1 = {{hlist|[[तमिल भाषा|तमिल]]|[[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]}}
| other_name = मद्रास
}}
'''चेन्नै''' ({{Langx|ta|சென்னை|Ceṉṉai}}; चेऩ्ऩै, {{Langx|en|Chennai|italic=no}}), जिसे १९९६ तक '''मद्रास''' के नाम से जाना जाता था, [[बंगाल की खाड़ी]] के कोरोमंडल तट पर स्थित यह दक्षिण [[भारत]] के सबसे बड़े सांस्कृतिक, आर्थिक और शैक्षिक केंद्रों में से सबसे प्रमुख है। चेन्नै भारतीय राज्य [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]] की राजधानी है। २०११ की भारतीय जनगणना (चेन्नै नगर की नयी सीमाओं के लिए समायोजित) के अनुसार, यह चौथा सबसे बड़ा नगर है और भारत में चौथा सबसे अधिक आबादी वाला नगरीय ढाँचा है। आस-पास के क्षेत्रों के साथ नगर चेन्नै मेट्र'पॉलिटन एरिया है, जो दुनिया की जनसंख्या के अनुसार ३६वाँ सबसे बड़ा नगरीय क्षेत्र है। चेन्नै विदेशी पर्यटकों द्वारा सबसे ज़्यादा जाने-माने भारतीय नगरों में से एक है। यह वर्ष २०१५ में दुनिया में ४३वें सबसे अधिक दौरा करने वाला स्थल था। लिविंग सर्वेक्षण की गुणवत्ता ने चेन्नै को भारत में सबसे सुरक्षित नगर के रूप में दर्जा दिया। चेन्नै भारत में आने वाले ४५% स्वास्थ्य पर्यटकों और ३०% से ४०% घरेलू स्वास्थ्य पर्यटकों को आकर्षित करती है। जैसे, इसे "भारत का स्वास्थ्य पूँजी" कहा जाता है। एक विकासशील देश में बढ़ते महानगरीय नगर के रूप में, चेन्नै पर्याप्त प्रदूषण और अन्य सैन्य और सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का सामना करता है।
चेन्नै में भारत की तीसरी सबसे बड़ी प्रवासी जनसंख्या क्रमशः २००९ में ३५ लाख, २०११ में ८५ लाख थी और २०१८ तक डेढ़ करोड़ से अधिक का अनुमान है। राजस्थान का मारवाड़ी समुदाय यहाँ व्यापारी वर्ग में मुख्यत: लिप्त है। चेन्नै में मारवाड़ी समुदाय की ५०,००० से अधिक दुकानें हैं। मारवाड़ियों का रामदेवजी का वरघोड़ा मुख्य पर्व है, जिसमें प्रतिवर्ष २ लाख से ज़्यादा मारवाड़ी लोग एकत्रित होते हैं। जो मिंट स्ट्रीट ,आदियाप्प, गोविंदप्प, एनएससी बोस रोड ओर नेनियप्पा से गुज़रते हैं। १०१५ में यात्रा करने के लिए पर्यटन गाइड प्रकाशक लोनली प्लैनिट ने चेन्नै को दुनिया के शीर्ष दस नगरों में से एक का नाम दिया है। चेन्नै को ग्लोबल सिटीज़ इंडेक्स में बेटा स्तरीय नगर के रूप में स्थान दिया गया है और २०१४ में इंडिया टडेऽ के वार्षिक भारतीय सर्वेक्षण में भारत के सबसे अच्छा नगर के रूप में रहा। २०१५ में, चेन्नै को आधुनिक और पारंपरिक दोनों मूल्यों के मिश्रण का हवाला देते हुए, बीबीसी द्वारा "सबसे गर्म" नगर (मूल्य का दौरा किया और दीर्घकालिक रहने के लिए) के रूप में रहा। नैशनल जिऑग्रफ़िक ने चेन्नै के भोजन को दुनिया में दूसरा सबसे अच्छा स्थान दिया है; यह सूची में शामिल होने वाला एकमात्र भारतीय नगर था। लोनली प्लैनिट द्वारा चेन्नै को दुनिया का नौवाँ सबसे अच्छा महानगर भी नामित किया गया था।
चेन्नै मेट्र'पॉलिटन एरिया भारत की सबसे बड़ी नगर अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। चेन्नै को "भारत के डिट्रॉइट" की उपाधि दी गयी है, जो नगर में स्थित भारत के ऑटोमोबिल उद्योग का एक-तिहाई से भी अधिक है। जनवरी २०१५ में, प्रति व्यक्ति जीडीपी के संदर्भ में यह तीसरा स्थान था। चेन्नै को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्मार्ट सिटीज़ मिशन के तहत एक स्मार्ट नगर के रूप में विकसित किये जाने वाले १०० भारतीय नगरो में से एक के रूप में चुना गया है।
भारत में ब्रिटिश राज के स्थापित होने से पहले ही मद्रास का जन्म हुआ। माना जाता है कि बंदरगाह-रूपी नगर के पुर्तगाली प्रभाव के चलते इसका नाम मद्रास रखा गया, जो कि एक पुर्तगाली वाक्यांश 'मैए दे दीस' से उत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ है 'भगवान की माता'। कुछ स्रोतों के अनुसार, इस नगर का नाम फ़ॉर्ट सेंट जॉर्ज के उत्तर में एक मछली पकड़ने वाले गाँव मद्रासपट्टनम से लिया गया था। हालाँकि, यह नाम यूरोपियों के आने से पहले उपयोग में था, इस पर अनिश्चितता है। ब्रिटिश सैन्य मानचित्रकों का मानना था कि मद्रास मूल रूप से मंदिर-राज या मंदिरराज के रूप में था। वर्ष १३६७ में विजयनगर युग का एक शिलालेख को, जो कि मद्रासपट्टनम बंदरगाह का उल्लेख करता है, पूर्व तट पर अन्य छोटे बंदरगाहों के साथ २०१५ में खोजा गया था और यह अनुमान लगाया गया था कि उक्त बंदरगाह रोयापुरम का मछली पकड़ने का बंदरगाह है।
नगर के चेन्नै नाम का तेलुगु मूल का शब्द होना स्पष्ट रूप से इतिहासकारों द्वारा सिद्ध किया गया है। यह एक तेलुगु शासक दमर्ळा चेन्नप्प नायक्कर के नाम से प्राप्त हुआ था, जो कि दमनकारी शासक वेंकटपति के नायक थे और विजयनगर साम्राज्य के वेंकट तृतीय के तहत सामान्य रूप से काम करते थे, जहाँ से ब्रिटिश ने नगर को १६३९ में हासिल किया था। चेन्नै वा सेन्नै शब्द का पहला आधिकारिक उपयोग ८ अगस्त १६३९ को ईस्ट इंडिया कंपनी के फ़्रांसिस डे से पहले सेन्नैकेसु पेरुमल मंदिर के नाम में १६४६ में किया गया था।
१९९६ में, तमिलनाडु सरकार ने आधिकारिक तौर पर मद्रास से चेन्नै का नाम बदल दिया। उस समय, कई भारतीय नगरों के नाम बदल गये थे। हालाँकि, इसके "मद्रास" नाम नगर के साथ-साथ यहाँ के स्थानों के नामों में, जैसे मद्रास विश्वविद्यालय, आइआइटी मद्रास, मद्रास इंस्टीट्यूट ऑव टेक्नॉलजी, मद्रास मेडिकल कॉलिज, मद्रास पशु चिकित्सा कॉलिज, मद्रास क्रिश्चन कॉलिज, आदि में कभी-कभार प्रयुक्त होता रहा है।
चेन्नै में ऑटोमोबिल, प्रौद्योगिकी, हार्डवेयर उत्पादन और स्वास्थ्य-संबंधी उद्योग हैं। यह नगर [[सॉफ्टवेयर|सॉफ़्टवेयर]] एवं [[सूचना प्रौद्योगिकी]] संबंधी उत्पादों में भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक नगर है। चेन्नै एवं इसके उपनगरीय क्षेत्र में ऑटोमोबाइल उद्योग विकसित है।<ref name="itchennai1">{{cite news
|title=IT in India
|url=http://www.business-standard.com/india/storypage.php?autono=299725
|work=बिज़निस स्टैंडर्ड
|date=३० सितंबर २००७
|accessdate=19 फरवरी 2009
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090302114400/http://www.business-standard.com/india/storypage.php?autono=299725
|archive-date=2 मार्च 2009
|url-status=live
}}</ref><ref name="itchennai2">{{cite news
|title=Chennai emerging as India's Silicon Valley?
|url=http://economictimes.indiatimes.com/Infotech/Software/Chennai_emerging_as_Indias_Silicon_Valley/articleshow/3000410.cms
|work=दि इकिनॉमिक टाइम्स
|date=मई 1, 2008
|accessdate=17 मई 2008
|archive-url=https://web.archive.org/web/20080505100206/http://economictimes.indiatimes.com/Infotech/Software/Chennai_emerging_as_Indias_Silicon_Valley/articleshow/3000410.cms
|archive-date=5 मई 2008
|url-status=live
}}</ref> चेन्नै मंडल तमिलनाडु के [[सकल घरेलू उत्पाद|जीडीपी]] का ३९% का और देश के ऑटोमोटिव़ निर्यात में ६०% का भागीदार है। इसी कारण से, इसे [[दक्षिण एशिया]] का डिट्रॉइट भी कहा जाता है।<ref>{{cite web |url=http://www.thehindubusinessline.com/2007/10/19/stories/2007101951332300.htm |title=CII launches Chennai Zone |publisher= द हिन्दू बिज़निस-लाइन |date=19 अक्टूबर 2007 |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100602132120/http://www.thehindubusinessline.com/2007/10/19/stories/2007101951332300.htm |archive-date=2 जून 2010 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |author=एन माधवन |url=http://businesstoday.digitaltoday.in/index.php?option=com_content&task=view&id=6059&issueid=34&Itemid=1 |title=India's Detroit |publisher=बिज़िनिस टडेऽ |date=7 जुलाई 2008 |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090101090125/http://businesstoday.digitaltoday.in/index.php?option=com_content&task=view&id=6059&issueid=34&Itemid=1 |archive-date=1 जनवरी 2009 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2005/12/04/AR2005120401094.html |title=डेट्रॉएट्स नेक्स्ट बिग थ्रेट |publisher=वॉशिंगटनपोस्ट |date= |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110628215213/http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2005/12/04/AR2005120401094.html |archive-date=28 जून 2011 |url-status=live }}</ref>
चेन्नै सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है। यहाँ के वार्षिक मद्रास म्यूज़िक सीज़न में सैकड़ों कलाकार भाग लेते हैं। चेन्नै में रंगशाला संस्कृति भी अच्छे स्तर पर है और यह [[भरतनाट्यम]] का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ का [[तमिल चलचित्र]] उद्योग, जिसे [[कॉलीवुड]] भी कहते हैं, भारत का द्वितीय सबसे बड़ा फ़िल्म उद्योग केंद्र है।
== नामकरण ==
मद्रास नाम मद्रासपट्नम से लिया गया है। मद्रासपट्नम [[ईस्ट इण्डिया कम्पनी|ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी]] द्वारा सन १६३९ में चुना गया स्थायी निवास-स्थल था। इसके दक्षिण में चेन्नपट्नम नामक गाँव उपस्थित था। कुछ समय बाद, इन दोनों गाँवों के संयोग से मिलकर बने नगर को "मद्रास" नाम दिया गया। किंतु उसी जगह के निवासी इसे "चेन्नपट्नम" या "चेन्नपुरी" कहते थे। सन १९९६ में नगर का नाम बदलकर "चेन्नै" किया गया, क्योंकि "मद्रास" शब्द को पुर्तगाली नाम माना जाता था। यह माना जाता है कि इस नगर का पुर्तगाली नाम माद्रे-दे-सॉइस नामक एक पुर्तगाली सरकारी अफ़सर के नाम से लिया गया था, जो लगभग सन [[१५५०]] में इस जगह को अपने स्थायी निवास बनाने वाले पहले लोगों में शामिल थे। पर कुछ लोग यह भी मानते हैं कि "मद्रास" शब्द ही तमिल मूल का है तथा "चेन्नै" शब्द किसी अन्य भाषा का हो सकता है।
== इतिहास ==
{{main|चेन्नई का इतिहास}}
[[चित्र:Victoria Public Hall, Chennai.JPG|thumb|right|200px|पार्क टाउन, चेन्नै में स्थित [[विक्टोरिया पब्लिक हॉल|व़िक्टॉरिया पब्लिक हॉऽल]] - चेन्नै में ब्रिटिश स्थापत्य कला के सबसे उत्कृष्ट स्थलों में से एक के रूप में]]
{{Historical populations|type=
|align = left
|१८८१| 405848
|१८९१| 452518
|१९०१| 509346
|१९११| 518660
|१९२१| 526000
|१९३१| 645000
|१९४१| 776000
|१९५१|1416056
|१९६१|1729141
|१९७१|2420000
|१९८१|3266034
|१९९१|3841398
|२००१|4216268
}}
चेन्नै एवं इसके आस-पास के क्षेत्र पहली सदी से ही महत्वपूर्ण प्रशासनिक, सैनिक एवं आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र रहे हैं। यह [[दक्षिण भारत]] के बहुत से महत्वपूर्ण राजवंशों यथा, [[पल्लव वंश|पल्लव]], [[चोल वंश|चोल]], [[पांड्य साम्राज्य|पांड्य]] एवं [[विजयनगर साम्राज्य|विजयनगर]] आदि का भी केंद्र-बिंदु रहा है। [[मयलापुर]] नगर, जो कि अब चेन्नै नगर का हिस्सा है, पल्लवों के ज़माने में एक महत्वपूर्ण [[बंदरगाह]] हुआ करता था। आधुनिक काल में [[पुर्तगाल|पुर्तगालियों]] ने [[१५२२]] में यहाँ आने के बाद एक और बंदरगाह बनाया, जिसे साओ तोमे कहा गया। पुर्तगालियों ने अपना बसेरा आज के चेन्नै के उत्तर में [[पुलीकट]] नामक स्थान पर बसाया और वहीं [[डच ईस्ट इंडिया कंपनी]] की नींव रखी।
[[२२ अगस्त]] [[१६३९]], को संत फ़्रांसिस दिवस के मौके पर ब्रिटिश [[ईस्ट इंडिया कंपनी]] ने विजयनगर के राजा पेडा वेंकट राय से [[कोरोमंडल|कोरोमंडल तट]] [[चंद्रगिरी]] में कुछ ज़मीनें ख़रीदी। इस इलाक़े में दमरेला वेंकटपति, जो इस इलाक़े के नायक थे, उनका शासन था। उन्होंने ब्रितानी व्यापारियों को वहाँ पर एक फ़ैक्ट्री एवं गोदाम बनाने की अनुमति दी। एक वर्ष वाद, ब्रितानी व्यापारियों ने [[सेंट जॉर्ज फोर्ट|सेंट जॉर्ज क़िला]] बनवाया, जो कि बाद में [[उपनिवेश|औपनिवेशिक]] गतिविधियों का केंद्र-बिंदु बन गया। [[१७४६]] में, मद्रास एवं सेंट जॉर्ज क़िले पर [[फ़्रान्स|फ़्रॉंसिसी]] फ़ौजों ने अपना क़ब्ज़ा जमा लिया। बाद में, ब्रितानी कंपनी का इस क्षेत्र पर नियंत्रण पुनः [[१७४९]] में [[एक्स ला चैपल संधि|एक्स ला चेपल संधि]] ([[१७४८]]) के माध्यम से प्राप्त हुआ। इस क्षेत्र को फ़्रॉंसिसियों एवं [[मैसूर]] के [[सुल्तान]] [[हैदर अली]] के हमलों से बचाने के लिए इस पूरे क्षेत्र की क़िलेबंदी कर दी गयी थी। अठारहवीं सदी के अंत होते-होते ब्रितानियों ने लगभग पूरे आधुनिक [[तमिलनाडु]], [[आंध्र प्रदेश]] एवं [[कर्नाटक]] के हिस्सों को अपने अधीन कर लिया एवं [[मद्रास प्रैज़िडन्सी|मद्रास प्रेज़िडंसी]] की स्थापना की, जिसकी राजधानी मद्रास घोषित की गयी।<ref>{{cite encyclopedia
| title = मद्रास, इंडिया (कैपिटल)
| url = http://www.1911encyclopedia.org/Madras,_India_(Capital)
| encyclopedia = एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका
| edition = ग्यारहवां संस्करण
| year = १९११
| accessdate = २००७-०९-०४
| archive-url = https://web.archive.org/web/20080501001404/http://www.1911encyclopedia.org/Madras,_India_(Capital)
| archive-date = 1 मई 2008
| url-status = live
}}</ref> ब्रितानियों की हुक़ूमत के अधीन, चेन्नै नगर एक महत्वपूर्ण आधुनिक नगरीय क्षेत्र एवं जलसेना के रूप में उभरा।
== भूगोल ==
{{main|चेन्नई का भूगोल}}
[[चित्र:Kamarajar Salai and Marina Beach.jpg|thumb|कामराजर सालै, जो मरीना बीच के साथ साथ चलने वाली एक सड़क है।]]चेन्नै भारत के दक्षिण पूर्वी तट पर तमिलनाडु राज्य के उत्तरी पूर्वी तटीय क्षेत्र में स्थित है। इस तटीय क्षेत्र को [[पूर्वी तटीय मैदानी क्षेत्र]] भी कहा जाता है। इस क्षेत्र की समुद्र तल से औसत ऊँचाई ६.७ मीटर है<ref>{{cite web
|title=Geographical and physical features
|work=District Profile
|publisher=Govt of India
|url=http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#geog
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20130730180830/http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#geog
|archive-date=30 जुलाई 2013
|url-status=dead
}}</ref> और यह ६० मीटर की ऊँचाई पर सबसे ऊँचा स्थान है।<ref name="highest-point">{{cite journal
|last = Pulikesi
|first = M
|author2= P. Baskaralingam, D. Elango, V.N. Rayudu, V. Ramamurthi, S. Sivanesan
|title=Air quality monitoring in Chennai, भारत, in the summer of 2005
|journal = Journal of Hazardous Materials
|volume = 136
|issue = 3
|pages = 589–596
|date=अगस्त 25, 2006
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|quote=Chennai is fairly low-lying, its highest point being only 300 metres (934 ft) above sea level is a rugged barren hill opposite to the Airport called Pallavapuram Hill.
|doi = 10.1016/j.jhazmat.2005.12.039 |issn=0304-3894}}</ref> [[मरीना बीच]] से प्रसिद्ध चेन्नै के समुद्र तट का विस्तार १२ किलोमीटर तक है। नगर के मध्य में बहने वाली [[कूवम नदी]] और दक्षिण से बहने वाली [[अड्यार नदी]] आज की तारीख़ में बहुत ज़्यादा दूषित हो चुकी हैं। अड्यार नदी कूवम से कम प्रदूषित है और इसके तट पर अनेक पशु-पक्षियों का बसेरा है।<ref>{{cite news
|last=Baskaran
|first=Theodore S
|title=Death of an Estuary
|work=द हिन्दू
|date=जनवरी 12, 2003
|url=http://www.hindu.com/thehindu/mag/2003/01/12/stories/2003011200110200.htm
|accessdate=12 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090213173125/http://www.hindu.com/thehindu/mag/2003/01/12/stories/2003011200110200.htm
|archive-date=13 फ़रवरी 2009
|url-status=live
}}</ref><ref name="adyarestuary2">{{cite news
|last=Doraisamy
|first=Vani
|title=A breather for the Adyar estuary
|work=द हिन्दू
|date=अक्टूबर 31, 2005
|url=http://www.hindu.com/2005/10/31/stories/2005103106660500.htm
|accessdate=12 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090213180648/http://www.hindu.com/2005/10/31/stories/2005103106660500.htm
|archive-date=13 फ़रवरी 2009
|url-status=live
}}</ref> इन दोनों नदियों को [[बकिंघम नहर|बकिंगम नहर]] के द्वारा जोड़ा गया है। यह नहर अपनी ४ किलोमीटर की दूरी समुद्री तट के समानांतर तय करती है। नगर के पश्चिमी भाग में कई झीलें हैं, जिनमें से [[रेड हिल्स|रेड हिल्ज़]], शोलावरम और चेम्बरामबक्क्म से पेय जल की आपूर्ति होती है। चेन्नै का भूमिगत जल भी प्रदूषित होता जा रहा है।<ref>{{cite news
|last=Lakshmi
|first=K
|title=It's no cola, it's the water supplied in Korattur
|work=द हिन्दू
|date=जुलाई 13, 2004
|url=http://www.hindu.com/2004/07/13/stories/2004071312840300.htm
|accessdate=9 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071012215946/http://hindu.com/2004/07/13/stories/2004071312840300.htm
|archive-date=12 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref>
[[चित्र:Cooum2.JPG|thumb|left|चेन्नै में बहने वाली कूवम नदी। प्रदूषण के कारण इस नदी पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है।]]
चेन्नै नगर को उत्तर, मध्य, दक्षिण और पश्चिमी चेन्नै नामक चार भागों में बँटा है। उत्तरी चेन्नै एक औद्योगिक क्षेत्र है। मध्य चेन्नै नगर का व्यावसायिक केंद्र है। यहाँ पर स्थित पेरिज कॉर्नर, जिसे स्थानीय लोग पेरिज भी कहते हैं, एक प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र है। दक्षिण और पश्चिमी चेन्नै सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र के रूप में उभरे हैं। बढ़ती आबादी के कारण से, नगर विभिन्न दिशाओं में बढ़ता जा रहा है। जिन क्षेत्रों में सर्वाधिक विकास हो रहा है, वे हैं- ओल्ड [[महाबलीपुरम]] रोड, दक्षिणी ग्रैंड ट्रंक रोड और पश्चिम में अंबातूर, [[कोयंबतूर]] और श्रीपेरंबतूर के क्षेत्र।<ref>{{cite web
|title=Structure of Chennai
|work=Second Master Plan - II
|publisher=Chennai Metropolitan Development Authority
|pages=pp. II–9, II–10, II–11, II–15
|url=http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/B_Chap%20II%20_Structure%20of%20Chennai.pdf
|format=PDF
|accessdate=9 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071128071252/http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/B_Chap%20II%20_Structure%20of%20Chennai.pdf
|archive-date=28 नवंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref> चेन्नै की नगर सीमा में एक राष्ट्रीय उद्यान भी है, जिसे गिंडी राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना जाता है।<ref>{{cite web
|title=Guindy National Park
|publisher=Govt. of Tamil Nadu
|url=http://www.forests.tn.nic.in/WildBiodiversity/np_gnp.html
|accessdate=10 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20120928004229/http://www.forests.tn.nic.in/WildBiodiversity/np_gnp.html
|archive-date=28 सितंबर 2012
|url-status=dead
}}</ref>
चेन्नै में वार्षिक तापमान लगभग एक समान होता है। इसका कारण से, चेन्नै का समुद्री तट पर एवं थर्मल इक्वेटर पर स्थित होता है। वर्षभर मौसम आम तौर पर गर्म एवं उमस भरा होता है। मई एवं जून का प्रथम सप्ताह वर्ष का सबसे गर्म समय होता है। इस समय जब तापमान ३८-४२ डिग्री सेल्सियस के आस-पास पहुँच जाता है, तब स्थानीय लोग इसे अग्नि नक्षत्रम या कथिरि वेय्यी कहते है।<ref>{{cite news
|last=Ramakrishnan
|first=T
|title=Hot spell may continue for some more weeks in the State
|work=द हिन्दू
|date=मई 18, 2005
|url=http://www.hindu.com/2005/05/18/stories/2005051813790700.htm
|accessdate=4 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090213191416/http://www.hindu.com/2005/05/18/stories/2005051813790700.htm
|archive-date=13 फ़रवरी 2009
|url-status=live
}}</ref> वर्ष का सबसे ठंडा महीना जनवरी का होता है, जब न्यूनतम तापमान १८-२० डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है। अब तक यहाँ का सबसे न्यूनतम तापमान १५.८ डिग्री सेल्सियस और उच्चतम तापमान ४५ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।<ref name=Singapore-temp>{{cite web
|title=Climate of India
|work=National Environment Agency – Singapore
|url=http://app.nea.gov.sg/cms/htdocs/article.asp?pid=1111
|accessdate=4 अगस्त 2005
|archive-url=https://web.archive.org/web/20061006131405/http://app.nea.gov.sg/cms/htdocs/article.asp?pid=1111
|archive-date=6 अक्तूबर 2006
|url-status=dead
}}</ref><ref name=hightemp>{{cite news
|title=Highest temperature
|work=द हिन्दू
|date=मई 31, 2003
|url=http://www.hinduonnet.com/2003/05/31/stories/2003053104790101.htm
|accessdate=25 अप्रैल 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20110711171303/http://www.hinduonnet.com/2003/05/31/stories/2003053104790101.htm
|archive-date=11 जुलाई 2011
|url-status=dead
}}</ref>
चेन्नै में वर्ष में औसतन १,३०० मिलीमीटर वर्षा होती है। मुख्यतः वर्षा के सितंबर से दिसंबर के मध्य होती है। देश के अन्य भागों से विपरीत चेन्नै में वर्षा [[मानसून|मॉनसून]] के लौटने के दौरान उत्तर-पूर्वी हवाओं के चलते होती है। बंगाल की खाड़ी में आने वाले चक्रवात कई बार चेन्नै भी पहुँच जाते हैं। सन २००५ में आज तक की सबसे ज़्यादा वर्षा २,५७० मिलीमीटर दर्ज की गयी थी।<ref>{{cite news
|last=Ramakrishnan
|first=T
|title=Entering 2006, city's reservoirs filled to the brim
|work=द हिन्दू
|date=जनवरी 3, 2006
|url=http://www.hindu.com/2006/01/03/stories/2006010315310300.htm
|accessdate=4 मई 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070228083427/http://www.hindu.com/2006/01/03/stories/2006010315310300.htm
|archive-date=28 फ़रवरी 2007
|url-status=live
}}</ref> २ नवंबर २०१७ को श्रीलंका के नज़दीक में, बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के कारण चेन्नै में लगातार पाँच घंटे तक बारिश हुई थी, जिसके कारण से अनेक इलाक़ों में पानी भर गया था। <ref>{{cite news|first1=दिग्पाल|last1=सिंह|title=चेन्नई की बारिश बजा रही खतरे की घंटी|url=http://www.jagran.com/news/national-jagran-special-on-chennai-rains-and-climate-change-16966039.html|accessdate=7 नवम्बर 2017|agency=दैनिक जागरण|archive-url=https://web.archive.org/web/20171107165805/http://www.jagran.com/news/national-jagran-special-on-chennai-rains-and-climate-change-16966039.html|archive-date=7 नवंबर 2017|url-status=live}}</ref>
{{Infobox Weather
|collapsed=yes
|metric_first=Yes
|single_line=Yes
|location = चेन्नई, भारत
|Jan_Hi_°F = 83.12
|Feb_Hi_°F = 85.82
|Mar_Hi_°F = 89.42
|Apr_Hi_°F = 92.48
|May_Hi_°F = 97.52
|Jun_Hi_°F = 97.88
|Jul_Hi_°F = 94.46
|Aug_Hi_°F = 93.02
|Sep_Hi_°F = 92.3
|Oct_Hi_°F = 88.52
|Nov_Hi_°F = 84.56
|Dec_Hi_°F = 82.58
|Year_Hi_°F = 90.14
|Jan_Lo_°F = 69.08
|Feb_Lo_°F = 70.16
|Mar_Lo_°F = 73.58
|Apr_Lo_°F = 78.62
|May_Lo_°F = 81.68
|Jun_Lo_°F = 80.96
|Jul_Lo_°F = 78.62
|Aug_Lo_°F = 77.54
|Sep_Lo_°F = 77.54
|Oct_Lo_°F = 75.74
|Nov_Lo_°F = 73.04
|Dec_Lo_°F = 70.88
|Year_Lo_°F = 75.62
|Jan_Precip_mm = 16.2
|Feb_Precip_mm = 3.7
|Mar_Precip_mm = 3.0
|Apr_Precip_mm = 13.6
|May_Precip_mm = 48.9
|Jun_Precip_mm = 53.7
|Jul_Precip_mm = 97.8
|Aug_Precip_mm = 149.7
|Sep_Precip_mm = 109.1
|Oct_Precip_mm = 282.7
|Nov_Precip_mm = 350.3
|Dec_Precip_mm = 138.2
|Year_Precip_mm = 1266.9
|source =भारत मौसम विज्ञान विभाग<ref name=weather>{{cite web |url=http://www.imd.ernet.in/section/climate/chennai1.htm |title=Climatological Information for Chennai |accessdate=25 जनवरी 2009 |publisher=Indian Meteorological Department |archive-url=https://web.archive.org/web/20090302144024/http://www.imd.ernet.in/section/climate/chennai1.htm |archive-date=2 मार्च 2009 |url-status=dead }}</ref>
|accessdate = 25 जनवरी 2009
}}
== प्रशासनिक एवं उपयोगी सेवाएं ==
{{main|चेन्नई का प्रशासन }}
{{See also|चेन्नई का स्थापत्य |भारत के उपभाग }}
{|cellpadding="2" cellspacing="0" border="1" style="float:right; border-collapse:collapse; border:2px white solid; font-size:x-small; font-family:verdana;"
|-
|style="background:#659ec7; color:white;"|<div style="text-align: center;">'''नगर के अधिकारीगण, (सितं. ०७)'''</div>
{| cellpadding="2" cellspacing="0" border="1" style="background:white; border-collapse:collapse; border:1px #747170 solid; font-size:x-small; font-family:verdana;"
|-
|[[महापौर]]<ref>{{Cite web |url=http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/whoswho.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 अगस्त 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070923001521/http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/whoswho.htm |archive-date=23 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.tn.gov.in/telephone/hod/hodPage57.html |title=दूरभाष-निदेशिका – पुलिस आयुक्त |publisher=Tn.gov.in |date=21 जनवरी 2009 |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090217205426/http://www.tn.gov.in/telephone/hod/hodPage57.html |archive-date=17 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref>
|<div style="text-align: center;">'''मा. सुब्रह्मानियम</div>
|-
|उप-[[महापौर]]
|<div style="text-align: center;">'''आर सत्यभामा </div>
|-
| नगर निगम आयुक्त
|<div style="text-align: center;">'''राजेश लखोनी'''</div>
|-
|पुलिस आयुक्त
|<div style="text-align: center;">'''के राधाकृष्णन'''</div>
|}
|}
चेन्नै नगर का प्रशासन [[चेन्नई नगर निगम|चेन्नै नगर निगम]] के पास है। [[१६८८]] में स्थापित हुआ यह निगम भारत में ही नहीं, [[ब्रिटेन]] के बाहर किसी भी [[राष्ट्रमंडल देश]] में सबसे पहला नगर निगम है। इसमें १५५ पार्षद है, जो चेन्नै के १५५ वॉऽर्डों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनका चुनाव सीधे चेन्नै की जनता ही करती है। ये लोग अपने आप में से ही एक [[महापौर]] एवं एक उप-महापौर को चुनते हैं, जो छह समितियों का संचालन करता है।<ref name=corp>{{cite web
|title=कार्यपालक सारणी
|work=अबाउट सी.ओ.सी
|publisher=चेन्नई कार्पोरेशन
|url=http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/org-chart.htm
|accessdate=4 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20080211111439/http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/org-chart.htm
|archive-date=11 फ़रवरी 2008
|url-status=dead
}}</ref> चेन्नै, [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]] राज्य की राजधानी होने से राज्य की कार्यपालिका और न्यायपालिका के मुख्यालय नगर में मुख्य रूप से फ़ॉर्ट सेंट जॉर्ज में सचिवालय इमारत में और शेष कार्यालय नगर में विभिन्न स्थानों पर अनेक इमारतों में स्थित हैं। [[मद्रास उच्च न्यायालय]] का अधिकार-क्षेत्र [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]] राज्य और [[पुदुचेरी (नगर)|पुदुचेरी]] तक है। यह राज्य की सर्वोच्च न्याय संस्था है और चेन्नै में ही स्थापित है। चेन्नै में तीन लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं – चेन्नै उत्तर, चेन्नै मध्य और चेन्नै दक्षिण और १८ विधान-सभा निर्वाचन क्षेत्र हैं।
[[चित्र:Gcp patrol car.jpg|thumb|left|चेन्नै मेट्रिपॉलिटन पुलिस का पट्रॉलिंग]]
चेन्नै का महानगरीय क्षेत्र कई उपनगरों तक व्याप्त है, जिसमें [[कांचीपुरम जिला|काँचीपुरम]] और तिरुवल्लुर ज़िले के भी क्षेत्र आते हैं। बड़े उपनगरों में वहाँ की टाउन-नगर पालिकाएँ हैं और छोटे क्षेत्रों में टाउन-परिषद हैं, जिन्हें पंचायत कहते हैं। नगर का क्षेत्र जहाँ १७४ किमी² (६७ मील²) है,<ref name="cityarea">{{cite web
|title=General Staticstics
|publisher=कॉर्प'रेशन ऑव चेन्नै
|url=http://www.chennaicorporation.com/general_stats.htm
|accessdate=4 अगस्त 2005
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070909100447/http://www.chennaicorporation.com/general_stats.htm
|archive-date=9 सितंबर 2007
|url-status=live
}}</ref> वहीं उपनगरीय क्षेत्र ११८९ किमी² (४५८ मील²) तक फैले हुए हैं।<ref name="metroarea">{{cite web
|title=Chennai Metropolitan Area- Profile
|publisher=चेन्नै मेट्र'पॉलिटन डिव़ेलपमंट अथॉरिटी
|url=http://www.cmdachennai.org
|accessdate=15 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070927092854/http://www.cmdachennai.org/
|archive-date=27 सितंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref> चेन्नै महानगर विकास प्राधिकरण (सी.एम.डी.ए) ने नगर के निकट उपनगरों के विकास के उद्देश्य से एक द्वितीय मास्टरप्लैन को ड्राफ़्ट तैयार किया है। निकटस्थ उपनगरों में [[महाबलिपुरम]] (दक्षिण में), [[चेंगलपट्टु]] और मरियामलै नगर दक्षिण-पश्चिम में, [[श्रीपेरंबुदूर]], [[तिरुवल्लुर]] और [[अरक्कोणम]] पश्चिम में आते हैं।
ग्रेऽटर चेन्नै पुलिस विभाग [[तमिल नाडु पुलिस|तमिलनाडु पुलिस]] का ही एक अनुभाग है, जो नगर में क़ानून-व्यवस्था की देखरेख में संलग्न है। नगर की पुलिस के अध्यक्ष पुलिस आयुक्त, चेन्नै हैं और प्रशासनिक नियंत्रण राज्य गृह मंत्रालय के पास है। इस विभाग में ३६ उप-भाग और १२१ पुलिस स्टेशन हैं। नगर का यातायात [[चेन्नई सिटी ट्रैफिक पुलिस|चेन्नै सिटी ट्रैफ़िक पुलिस]] द्वारा नियंत्रित होता है। महानगर के उपनगर [[चेन्नई मेट्रोपॉलिटन पुलिस|चेन्नै मेट्र'पॉलिटन पुलिस]] के अधीन आते हैं एवं बाहरी ज़िले [[कांचीपुरम|काँचीपुरम]] एवं [[तिरुवल्लुर]] पुलिस विभागों के अंतर्गत है।
[[चित्र:Ripon Building panorama.jpg|thumb|राइपन बिल्डिंग, १९१३ में निर्मित, [[चेन्नई नगर निगम|चेन्नै नगर निगम]] का मुख्यालय तत्कालीन [[वाइसरॉय]] [[लॉर्ड राइपन]] के नाम पर है।]]
चेन्नै नगर निगम और उपनगरीय नगरपालिकाएँ नागरिक सुविधाएँ मुहैया कराती हैं। अधिकांश क्षेत्रों में कूड़ा-प्रबंधन नील मेटल फ़नालिका इन्वायरनमंट मैनिजमंट; एक निजी कंपनी और कुछ अन्य क्षेत्रों में नगर निगम देखता है। जल-आपूर्ति एवं मल-निकास (स्यूइज ट्रीटमंट) की निगरानी चेन्नै मेट्रिपॉलिटन वॉटर सप्लाइ ऐंड स्यूइज बॉर्ड द्वारा होती है। विद्युत आपूर्ति तमिलनाडु विद्युत बॉर्ड प्रबंध करता है।<ref>{{cite web
|title=Emergency and Utility Services Contact Details at Chennai
|publisher=Govt. of Tamil Nadu
|url=http://chennai.nic.in/emergency.htm
|accessdate=7 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070930014904/http://chennai.nic.in/emergency.htm
|archive-date=30 सितंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref> नगर की दूरभाष सेवा छह मोबाइल और चार लैंडलाइन कंपनियों के द्वारा प्रदान होती है<ref>{{cite press release|title=इन्फ़र्मेशन नोट टू द प्रेस (प्रेस विज्ञप्ति सं. ७१/२००७)|publisher=Telecom Regulatory Authority of India, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण|date=२४ अगस्त २००७|url=http://www.trai.gov.in/trai/upload/PressReleases/486/pr24aug07no71.pdf|format=PDF|accessdate=4 अक्टूबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20120515114849/http://www.trai.gov.in/trai/upload/PressReleases/486/pr24aug07no71.pdf|archive-date=15 मई 2012|url-status=live}}, Annexure I lists these six entities as the licensed cellular operators for the Chennai circle. The [[CDMA]] Development Group's official website lists [[Tata Teleservices]] and [[Reliance Communications]] as the only operators to have deployed [[CDMA]] on cellular systems in India. {{cite web|url=http://www.cdg.org/worldwide/index.asp?h_area=1|title=CDMA Worldwide: Deployment search - Asia-Pacific|publisher=CDMA Development Group|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011073228/http://cdg.org/worldwide/index.asp?h_area=1|archive-date=11 अक्तूबर 2007|accessdate=4 अक्टूबर 2007|url-status=live}}</ref><ref>{{cite news
|last=नारायणन
|first=आर वाय
|title=टचटेल अराइव्ज़ इन [[कोयंबतूर]]
|work=[[द हिन्दु]]
|date=५ सितंबर २००२
|url=http://www.thehindubusinessline.com/2002/09/05/stories/2002090502151700.htm
|accessdate=7 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090110085422/http://www.thehindubusinessline.com/2002/09/05/stories/2002090502151700.htm
|archive-date=10 जनवरी 2009
|url-status=live
}}</ref> और सिफ़ी तथा हैथवे जैसे कंपनियाँ [[ब्रॉडबैंड सेवा]] द्वारा इंटरनेट भी उपलब्ध कराती हैं।
नगर के क्षेत्र से कोई मुख्य नदी नहीं गुज़रती है, अतः चेन्नै में वार्षिक [[मानसून|मॉनसून]] वर्षा के जल को सरोवरों में सहजकर रखने का इतिहास रहा है। नगर की बढ़ती आबादी और [[भूमिगत जल]] के गिरते स्तर के कारण नगर को जल अभाव का सामना करना पड़ा है। इस दिशा में वीरानम झील परियोजना भी कारगर नहीं सिद्ध हुई है। नयी वीरानम परियोजना ने काफ़ी हद तक इस समस्या का समाधान किया है और शहर के सुदूर स्रोतों पर निर्भरता घटी है।<ref>{{cite web
|title=Management of water supply during acute water scarcity in 2003 & 2004
|work=Operations and maintenance
|publisher=Chennai Metropolitan Water Supply and Sewage Board
|url=http://www.chennaimetrowater.com/engg/operationmaintenance/cmwdrw04.htm
|accessdate=16 मार्च 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070812071544/http://www.chennaimetrowater.com/engg/operationmaintenance/cmwdrw04.htm
|archive-date=12 अगस्त 2007
|url-status=dead
}}</ref> हाल के वर्षों में भारी मॉनसूनी वर्षाओं के चलते [[अन्ना नगर]] में जल पुनर्चक्रीकरण को सहारा मिला है और इससे नगर में जलाभावों की काफ़ी कमी आयी है।<ref name=hindu_rwh_bangalore>{{cite news
|last = लक्ष्मी
|first = के
|title = बेंगलुरु टीम विज़िट्स RWH स्ट्रक्चर्ज़ इन सिटी
|work = द हिन्दू
|date = [[३ अगस्त]][[२००७]]
|url = http://www.hindu.com/2007/08/03/stories/2007080360510500.htm
|accessdate = 11 अगस्त 2007
|archive-url = https://web.archive.org/web/20071001015212/http://www.hindu.com/2007/08/03/stories/2007080360510500.htm
|archive-date = 1 अक्तूबर 2007
|url-status = live
}}</ref> इसके साथ ही, [[तेलुगु गंगा परियोजना]] जैसे नयी परियोजनाओं द्वारा [[आंध्र प्रदेश]] से [[कृष्णा नदी|कृष्ण नदी]] का जल भी पहुचाया जा रहा है, जिसने इस संकट को लगभग समाप्त ही कर दिया है। नगर में समुद्री जल के अलवणीकरण-संयंत्र की स्थापना भी प्रगति पर है, जिससे [[सागर]] के जल को भी जलापूर्ति में प्रयोग किया जा सकेगा।<ref>{{cite news
|title=IVRCL to set up desalination plant near Chennai
|work=द हिन्दू
|date=अगस्त 12, 2005
|url=http://www.thehindubusinessline.com/2005/08/12/stories/2005081202820300.htm
|accessdate=18 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090213183507/http://www.thehindubusinessline.com/2005/08/12/stories/2005081202820300.htm
|archive-date=13 फ़रवरी 2009
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite news
|last=Radhakrishnan
|first=R.K
|title=Preliminary work on desalination plant to be completed by December-end
|work=द हिन्दू
|date=सितम्बर 4, 2007
|url=http://www.hindu.com/2007/09/04/stories/2007090460440400.htm
|accessdate=18 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071012002902/http://hindu.com/2007/09/04/stories/2007090460440400.htm
|archive-date=12 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref>
== संस्कृति ==
{{main|चेन्नई की संस्कृति |चेन्नई के व्यंजन }}
{{See also|तमिल खाना|तमिल चलचित्र}}
[[चित्र:anianianiy.jpg|150px|thumb|एक [[भरतनाट्यम]] नर्तकी]]
चेन्नै भारत की सांस्कृतिक एवं संगीत राजधानी है।<ref>[http://www.hindu.com/thehindu/mag/2002/12/01/stories/2002120100770500.htm द हिन्दू] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20101118022937/http://hindu.com/thehindu/mag/2002/12/01/stories/2002120100770500.htm |date=18 नवंबर 2010 }} पर चेन्नै</ref> नगर शास्त्रीय नृत्य-संगीत कार्यक्रमों और मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। प्रत्येक वर्ष, चेन्नै में पंच-सप्ताह [[मद्रास म्यूज़िक सीज़न]] कार्यक्रम का आयोजन होता है। यह १९२७ में मद्रास संगीत अकादेमी की स्थापना की वर्षगाँठ मानने के साथ आयोजित होता है।<ref name=Music_season>{{cite news
|title=Music musings
|work=द हिन्दू
|url=http://www.hindu.com/2005/02/03/stories/2005020301281000.htm
|date=फ़रवरी 3, 2005
|accessdate=4 अगस्त 2005
|archive-url=https://web.archive.org/web/20050207150555/http://www.hindu.com/2005/02/03/stories/2005020301281000.htm
|archive-date=7 फ़रवरी 2005
|url-status=live
}}</ref> इसमें नगर और निकट के सैंकड़ों कलाकारों के शास्त्रीय [[कर्नाटक संगीत]] के कार्यक्रम आयोजित होते हैं। एक अन्य उत्सम [[चेन्नई संगमम|चेन्नै संगमम]] प्रत्येक वर्ष [[जनवरी]] में [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]] राज्य की विभिन्न कलाओं को दर्शाता है। चेन्नै को [[भरतनाट्यम]] के लिए भी जाना जाता है। यह दक्षिण-भारत की प्रसिद्ध नृत्य शैली है। नगर के दक्षिणी भाग में तटीय क्षेत्र में कलाक्षेत्र नामक स्थान [[भरतनाट्यम]] का प्रसिद्ध सांस्कृतिक केन्द्र है।<ref>{{cite news
|author=GR
|url=http://www.hinduonnet.com/2000/12/02/stories/0902033h.htm
|title=Yearning for Chennai ambience
|accessdate=7 सितंबर 2007
|date=दिसम्बर 2, 2000
|work=द हिन्दू
|archive-url=https://web.archive.org/web/20081229133413/http://www.hinduonnet.com/2000/12/02/stories/0902033h.htm
|archive-date=29 दिसंबर 2008
|url-status=dead
}}</ref> चेन्नै में भारत के कुछ सर्वोत्तम कॉयर्ज़ हैं, जो [[क्रिसमस]] के अवसर पर अंग्रेज़ी और तमिल में विभिन्न ''कैरल'' कार्यक्रम करते हैं।<ref>{{cite news
|url=http://archives.chennaionline.com/columns/ethnomusic/durga23.asp
|title=Chennai as a home for Music – IV
|work=Chennai Online
|date=2009
|accessdate=24 फरवरी 2009
|archive-url=https://web.archive.org/web/20100117155239/http://archives.chennaionline.com/columns/Ethnomusic/durga23.asp
|archive-date=17 जनवरी 2010
|url-status=dead
}}</ref><ref>{{cite news
|url=http://www.go-nxg.com/?p=3155
|title=There's a song in the air...
|work=NXg
|date=जनवरी 2009
|accessdate=24 फरवरी 2009
|archive-url=https://web.archive.org/web/20130615082343/http://www.go-nxg.com/?p=3155
|archive-date=15 जून 2013
|url-status=dead
}}</ref> मद्रास म्यूज़िकल असोसिएशन भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठावान कॉयर्ज़ में से एक हैं और इन्होंने विश्वभर में कार्यक्रम किये हैं।<ref>{{cite news
|url=http://www.hindu.com/2006/06/16/stories/2006061616030200.htm
|title=Chennai choir to sing in England
|work=द हिन्दू
|date=जून 16, 2009
|accessdate=24 फरवरी 2009
|archive-url=https://web.archive.org/web/20080129234646/http://www.hindu.com/2006/06/16/stories/2006061616030200.htm
|archive-date=29 जनवरी 2008
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite news
|url=http://www.hindu.com/mp/2007/09/03/stories/2007090350690700.htm
|title=An aural treat
|work=द हिन्दू
|date=सितम्बर 03, 2007
|accessdate=24 फरवरी 2009
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090926071718/http://www.hindu.com/mp/2007/09/03/stories/2007090350690700.htm
|archive-date=26 सितंबर 2009
|url-status=live
}}</ref>
चेन्नै [[तमिल चलचित्र]] उद्योग, जिसे [[कॉलीवुड]] भी कहते हैं, का आधार नगर है। यह उद्योग [[कोडमबक्कम]] में स्थित है, जहाँ बड़ी संख्या में फ़िल्म स्टूडियो हैं।<ref>{{cite book
|last = Ellens
|first = Dan
|author2= Lakshmi Srinivas
|title=A Time for India
|publisher=Vantage Press Inc., New York
|year = 2006
|page = 150
|isbn = 0533150922
|url=http://books.google.com/books?id=6Nsyr3J1fpIC&printsec=frontcover&dq=kollywood#PPA150,M1
|accessdate=7 सितंबर 2007}}</ref> इस उद्योग द्वारा आजकल १५० से अधिक फ़िल्में वार्षिक तौर पर बनायी जाती हैं<ref>{{cite book
|last = Ganti
|first = Tejaswini
|title = Bollywood: A Guidebook To Popular Hindi Cinema
|publisher = Routledge, London
|year = 2004
|page = 3
|isbn = 0415288541
|url = http://books.google.com/books?id=GTEa93azj9EC&pg=PA3&dq=tamil+films+per+year&sig=Q9a_mC8aqRjWWyxHaHpsbCV6xuE
|accessdate = 7 सितंबर 2007
|archive-url = https://web.archive.org/web/20130604042330/http://books.google.com/books?id=GTEa93azj9EC
|archive-date = 4 जून 2013
|url-status = live
}}</ref> और इनके साउंडट्रैक के ऐल्बम भी नगर को संगीतमय करते हैं। इस उद्योग से जुड़े कुछ व्यक्तियों के नाम [[इलैयाराजा]], [[के बालाचंदर]], [[शिवाजी गणेशन]], [[एम जी रामचंद्रन]], [[रजनीकान्त|रजनीकांत]], [[कमल हासन]], [[मणि रत्नम]] और [[एस शंकर]] हैं। <!-- [[चित्र:Idly sambar vada.JPG|thumb|[[सांभर |सांभर वड़ा]] और [[इडली]]]]--> [[चित्र:Chennai Veg Cuisine-hi.jpg|thumb|200px|विभिन्न प्रकार के तमिल व्यंजन]]
[[ए॰ आर॰ रहमान|ए. आर. रहमान]] ने चेन्नै को अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्धि दिलायी है। रहमान को [[२००९]] में [[स्लमडॉग मिलियनेयर|स्लमडॉग मिलेनियर]] के लिए दो [[ऑस्कर सम्मान]] मिले थे।<ref>{{cite news
|url=http://www.voanews.com/english/Entertainment/2009-02-23-voa15.cfm
|title=India Celebrates 'Slumdog Millionaire's' Oscar Sweep
|work=VOA News
|date=फ़रवरी 23, 2009
|accessdate=24 फरवरी 2009
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090224173347/http://www.voanews.com/english/Entertainment/2009-02-23-voa15.cfm
|archive-date=24 फ़रवरी 2009
|url-status=live
}}</ref> चेन्नै में रंगमंच पर तमिल नाटक मंचित किये जाते हैं, जिनमें राजनीतिक, व्यंग्य, हास्य, पौराणिक, आदि सभी रसों का मिश्रण होता है।<ref>{{cite news
|last=Ramesh
|first=V
|url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2003/07/17/stories/2003071700060100.htm
|title=The Sultan of sarcasm
|work=द हिन्दू
|date=जुलाई 17, 2003
|accessdate=22 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20081230073420/http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2003/07/17/stories/2003071700060100.htm
|archive-date=30 दिसंबर 2008
|url-status=dead
}}</ref><ref>{{cite news
|last=अशोक कुमार
|first=एस आर
|url=http://www.hindu.com/2006/01/11/stories/2006011115150700.htm
|title=एक्टर आर एस मनोहर डेड
|work=द हिन्दू
|date=जनवरी 11, 2006
|accessdate=22 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090626151134/http://www.hindu.com/2006/01/11/stories/2006011115150700.htm
|archive-date=26 जून 2009
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite news
|last=Kumar
|first=Ranee
|url=http://www.hindu.com/mp/2003/12/10/stories/2003121000390100.htm
|title=Laughter, the best medicine
|work=द हिन्दू
|date=दिसम्बर 10, 2003
|accessdate=22 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20100130103808/http://www.hindu.com/mp/2003/12/10/stories/2003121000390100.htm
|archive-date=30 जनवरी 2010
|url-status=live
}}</ref> इनके अलावा, अंग्रेज़ी नाटकों का भी मंचन आयोजित होता है।
नगर के उत्सवों में [[जनवरी]] माह में आने वाला पंच-दिवसीय [[पोंगल]] प्रमुख है। इसके अलावा, सभी मुख्य त्योहार, जैसे [[दीपावली|दीवाली]], [[ईद]], [[क्रिसमस]] आदि भी हर्षोल्लास से मनाये जाते हैं। [[तमिल]] व्यंजनों में [[शाकाहारी]] और [[मांसाहारी|माँसाहारी]] दोनों ही व्यंजनों का सम्मिलन है। नगर में विभिन्न स्थानों पर अल्पाहार या टिफ़िन भी उपलब्ध हैं, जिनमें [[पोंगल]], [[दोसा]], [[इडली]], [[वड़ा]], आदि मिलते हैं, जिनको गरमागरम या ठंडी कॉफ़ी के साथ परोसा जाता है।
== अर्थव्यवस्था ==
[[चित्र:Tidel Park.jpg|thumb|टाइडल पार्क]]
चेन्नै दक्षिण भारत के प्रमुख व्यवसाय-वाणिज्य एवं यातायात का केन्द्र है। १९वीं शताब्दी के अन्त में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना चेन्नै में हुई। चेन्नै के निकट पेरांबूर में [[भारत]] सरकार द्वारा एशिया का सबसे विशाल रेल्वे डिब्बा निर्माण का कारखाना इंटिग्रल कोच बिल्डिंग फ़ैक्ट्री को स्थापित किया गया है। यहाँ के उद्योगों में सूती वस्त्र उद्योग, रासायनिक उद्योग, काग़ज़ एवं कागज से निर्मित वस्तुओं के उद्योग, मुद्रण यंत्र एवं इससे सम्बन्धित उद्योग, चमड़ा, डीज़ल इंजन, मोटरगाड़ी, साइकिल, सिमेंट, चीनी, दियासलाई, रेल के डिब्बे तैयार करने के उद्योग, आदि प्रमुख हैं। इसके अलावा, सरकार द्वारा संचालित विभिन्न प्रकार के उद्योग एवं कारखाने चेन्नै में उपस्थित हैं। इनमें इंटिग्रल कोच फ़ैक्ट्री, हिन्दुस्तान टेलिप्रिंटर, चेन्नै रिफ़ाइनरी एवं चेन्नै फ़र्टिलाइज़र आदि प्रमुख हैं। मद्रास पेट्र'केमिकल्ज़ में पेट्रो-रसायन पदार्थ का उत्पादन होता है।
== जनसांख्यिकी ==
[[चित्र:Chennai Shopping.jpg|thumb|right|रंगनाथन स्ट्रीट [[टी नगर]] में पटरी पर ख़रीदने-बेचने वालों की भीड़ लगी रहती है।]]
चेन्नै के वासी को अंग्रेज़ी में चेन्नैयाइट और हिन्दी में प्रायः मद्रासी कह दिया जाता है। [[२००१]] में [[भारत की जनगणना]] के अनुसार चेन्नै नगर की जनसंख्या ४३.४ लाख थी, जबकि कुल महानगरीय जनसंख्या ७०.४ लाख थी।<ref name="masterplan_popfigs">{{cite web
|title=डेमोग्राफ़ी
|work=द्वितीय मास्टर प्लान - II
|pages=पृ. I-५, I-१०
|publisher=चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डवलपमेंट अथॉरिटी
|url=http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf
|format=पी.डी.एफ़
|accessdate=6 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071128071240/http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf
|archive-date=28 नवंबर 2007
|url-status=dead
}} The population density for Chennai city and the metropolitan area have been calculated using the population figures and the total area of the respective regions, mentioned in the Second Master Plan. The conversion rate of {{convert|1|mi|km|0|sing=on}} = 1.609 km. has been used to compute the density per sq. mile.</ref> २००६ की अनुमानित महानगरीय जनसंख्या ४५ लाख आयी है।<ref name="Hindu-CMDA">{{cite news
|last=श्रीवास्तन
|first=ए
|title=न्यू लैंड यूज़ प्रॉपोज़ल्स मूटेड इन ड्राफ़्ट मास्टर प्लान
|date=१२ अप्रैल २००७
|url=http://www.hindu.com/2007/04/12/stories/2007041213350400.htm
|work=[[द हिन्दु]]
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071012041105/http://hindu.com/2007/04/12/stories/2007041213350400.htm
|archive-date=12 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref> २००१ में नगर का [[जनसंख्या घनत्व]] २४,६८२ वर्ग किमी (६३,९२६ प्रति वर्ग मील) था, जबकि महानगरीय क्षेत्र का घनत्व ५,९२२ प्रति वर्ग किमी था, जिससे यह विश्व के सर्वोच्च जनसंख्या वाले नगरों में गिना जाने लगा।<ref name="masterplan_popfigs"/><ref>{{cite web
|title=अएबन एरियाज़ बाए पॉपुलेशन डेन्सिटी
|work=वर्ल्ड अर्बन एरियाज़ (वर्ल्ड एग्लोमरेशंस)
|pages=p. 77
|month=मार्च
|year=२००७
|publisher=डेमोग्राफ़िया
|url=http://www.demographia.com/db-worldua.pdf
|format=पी.डी.एफ़
|accessdate=9 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20180503021711/http://www.demographia.com/db-worldua.pdf
|archive-date=3 मई 2018
|url-status=dead
}} In terms of population density, Chennai was ranked 51st among all urban agglomerations in the world with over 500,000 people.</ref> यहाँ का [[लिंग अनुपात]] ९५१ स्त्रियाँ/१००० पुरुष है,<ref name="sex-ratio-nic">{{cite web
|title=सेन्सस २००१ डाटा
|work=भारत की जनगणना
|publisher=तमिल नाडु सरकार
|url=http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#CENSUS
|accessdate=5 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20130730180830/http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#CENSUS
|archive-date=30 जुलाई 2013
|url-status=dead
}}</ref> जो राष्ट्रीय औसत ९४४ से कुछ अधिक ही है।<ref name=CIA_World_Factbook>{{cite web| title= इंडिया| work= CIA World Factbook| url= https://www.cia.gov/library/publications/the-world-factbook/geos/in.html| accessdate= 4 अगस्त 2005| archive-url= https://web.archive.org/web/20080611033144/https://www.cia.gov/library/publications/the-world-factbook/geos/in.html| archive-date= 11 जून 2008| url-status= live}}</ref> नगर की औसत साक्षरता दर ८०.१४% है,<ref name=literacy>{{cite web
|title=डिस्ट्रिक्ट्स पर्फ़ॉर्मैन्स ऑन लिट्रेसी रेट इन तमिल नाडु फ़ॉर ईयर २००१
|work=Department of school education
|url=http://www.tn.gov.in/schooleducation/statistics/table7and8.htm
|accessdate=4 अगस्त 2005
|archive-url=https://web.archive.org/web/20050817143108/http://www.tn.gov.in/schooleducation/statistics/table7and8.htm
|archive-date=17 अगस्त 2005
|url-status=live
}}</ref> जो राष्ट्रीय औसत दर ६४.५% से कहीं अधिक है। नगर में झुग्गी-झोंपड़ी निवासियों की जनसंख्या भारत के अन्य महानगरों के मुकाबले चौथे स्थान पर आती है, जिसमें ८,२०,००० लोग (कुल जनसंख्या का १८.६%) लोग हैं।<ref name=slum>{{cite web
|title=स्लम पॉपुलेशन – सेन्सस २००१
|publisher=भारत सरकार
|url=http://www.censusindia.gov.in/
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070621135109/http://www.censusindia.net/results/slum/Intro_slum.pdf
|archive-date=21 जून 2007
|format=PDF
|accessdate=8 मार्च 2007
|url-status=live
}}</ref> यह संख्या भारत की कुल जनसंख्या का ५% है। [[२००५]] में नगर में अपराध दर ३१३.३ प्रति १ लाख व्यक्ति थी, जो भारत के सभी प्रधान नगरों में हुए अपराधों का ६.२% है।<ref>{{cite web
|url=http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/Table%201.6.pdf
|format=PDF
|accessdate=19 सितंबर 2007
|title=Incidence & Rate Of Total Cognizable Crimes (IPC) In States, UTs & Cities During 2005
|publisher=भारत सरकार
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070927005155/http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/Table%201.6.pdf
|archive-date=27 सितंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref> ये आंकड़े २००४ से ६१.८% बढ़े हैं।<ref>{{cite web
|url=http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/CHAP2.pdf
|format=पी.डी.एफ़
|accessdate=19 सितंबर 2007
|title=क्राइम इन मेगा सिटीज़
|work=क्राइम इन इन्डिया – २००५
|publisher=भारत सरकार
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070614203644/http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/CHAP2.pdf
|archive-date=14 जून 2007
|url-status=live
}}</ref>
चेन्नै में [[तमिल]] लोग बहुसंख्यक हैं। यहाँ की मुख्य भाषा [[तमिल]] ही है। व्यापार, शिक्षा और अन्य अधिकारी वर्ग के व्यवसायों एवं नौकरियों में [[अंग्रेज़ी]] मुख्यता से बोली जाती है। इनके अलावा, कम किंतु गणनीय संख्या [[तेलुगु]] तथा [[मलयाली]] लोगों की भी है।<ref>{{cite web |url=http://chennai-online.in/Profile/Culture/ |title=चेन्नई कल्चर |publisher=chennai-online.in |accessdate=8 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071006034403/http://chennai-online.in/Profile/Culture/ |archive-date=6 अक्तूबर 2007 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै में तमिलनाडु के अन्य भागों व भारत के सभी भागों से आये लोगों की भी अच्छी संख्या है। २००१ के आँकड़ों के अनुसार, नगर के ९,३७,००० प्रवासियों (चेन्नै की कुल जनसंख्या का २१.५७%) में से; ७४.५% राज्य के अन्य भागों से आये थे, २३.८% देश के अन्य भागों से तथा १.७% विदेशियों की जनसंख्या थी।<ref>{{cite web
|url=http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf
|format=PDF
|title=डेमोग्राफ़ी
|work=द्वितीय मास्टर प्लान - II
|pages=पृ. I-11
|publisher=चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डवलपमेंट अथॉरिटी
|accessdate=6 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071128071240/http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf
|archive-date=28 नवंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref>
कुल जनसंख्या में ८२.२७% [[हिन्दू]], ८.३७% [[मुस्लिम]], ७.६३% [[ईसाई]] और १.०५% [[जैन]] हैं।<ref>{{cite web
|url=http://www.chennai.tn.nic.in/shb-pdf/SHB001%20-%20AREA%20POPULATION.pdf
|format=PDF
|title=एरिया एंड पॉपुलेशन
|publisher=तमिल नाडु सरकार
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20130830215520/http://www.chennai.tn.nic.in/shb-pdf/SHB001%20-%20AREA%20POPULATION.pdf
|archive-date=30 अगस्त 2013
|url-status=dead
}}</ref>
== यातायात ==
<!-- [[Image:Madras Port In 1996.jpg|thumb|200px|right|Chennai Port]]
-->
{{main|चेन्नई में यातायात }}
[[चित्र:Tidel Park junction panorama.jpg|thumb|300px|चेन्नै में आइ टी हाइवे, जिसके शिरोपरि [[एम आर टी एस (चेन्नई)|एम आर टी एस (चेन्नै)]] निकलता हुआ दिखायी दे रहा है।]]
चेन्नै दक्षिण भारत के प्रवेशद्वार की भाँति प्रतीत होता है, जिसमें अन्ना अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल एवं कामराज अन्तर्देशीय टर्मिनल सहित [[चेन्नई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा|चेन्नै अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डा]] [[भारत]] का [[भारत के विमानक्षेत्र|तीसरा व्यस्ततम विमानक्षेत्र]] है।<ref>{{cite web
|url=http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex3.pdf
|format=PDF
|publisher=[[भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण]]
|title=Traffic statistics - Passengers (Intl+Domestic), Annexure IIIC
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070926044903/http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex3.pdf
|archive-date=26 सितंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref><ref>{{cite web
|url=http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex2.pdf
|format=PDF
|publisher=भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण
|title=Traffic statistics - Aircraft movements (Intl+Domestic), Annexure IIC
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070926044906/http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex2.pdf
|archive-date=26 सितंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref> चेन्नै नगर दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, पूर्वी एशिया, मध्य पूर्व, [[यूरोप]] एवं [[उत्तर अमेरिका|उत्तरी अमरीका]] के प्रधान बिंदुओं पर ३० से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं से जुड़ा हुआ है। यह विमानक्षेत्र देश का दूसरा व्यस्ततम कार्गो टर्मिनस है। वर्तमान विमानक्षेत्र में अधिक आधुनिकीकरण और विस्तार कार्य प्रगति पर हैं। इसके अलावा [[श्रीपेरंबुदूर]] में नया ग्रीनफ़ील्ड एयरपॉर्ट लगभग ₹२००० करोड़ की लागत से बनना तय हुआ है।<ref name=New_Airport>{{cite news
|title=New greenfield airport to be set up near Chennai
|work=द हिन्दू
|url=http://www.hindu.com/thehindu/holnus/001200705221441.htm
|date=मई 22, 2007
|accessdate=22 मई 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20121026105518/http://www.hindu.com/thehindu/holnus/001200705221441.htm
|archive-date=26 अक्तूबर 2012
|url-status=live
}}</ref>
नगर में दो प्रधान सागरपत्तन (बंदरगाह) हैं, [[चेन्नई पोर्ट|चेन्नै पॉर्ट]] जो सबसे बड़े कृत्रिम बंदरगाहों में एक है, तथा [[एन्नोर पोर्ट]]। चेन्नै पॉर्ट [[बंगाल की खाड़ी]] में सबसे बड़ा बंदरगाह और भारत का दूसरा सबसे बड़ा सागरीय-व्यापार केन्द्र है, जहाँ ऑटोमोबिल, मोटरसाइकिल, सामान्य औद्योगिक माल और अन्य थोक खनिज की आवाजाही होती है।<ref>{{cite news
|url=http://app.mfa.gov.sg/pr/read_content.asp?View,4753,
|publisher=Business Times
|title=Gateway to India for Singapore firms
|date=जुलाई 6, 2006
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20100312232206/http://app.mfa.gov.sg/pr/read_content.asp?View,4753,
|archive-date=12 मार्च 2010
|url-status=dead
}}</ref> [[मुम्बई]] के बाद भारत का यही सबसे बड़ा पत्तन है। इस कृत्रिम बन्दरगाह में जलयानों के लंगर डालने के लिए कॉन्क्रीट की मोटी दीवारें सागर में खड़ी करके एक साथ दर्जनों जलयानों के ठहराने योग्य पोताश्रय बना लिया गया है। दक्षिणी भारत का सारा दक्षिण-पूर्वी भाग ([[तमिलनाडु]], दक्षिणी आन्ध्र प्रदेश तथा कर्नाटक राज्य) इसकी पृष्ठभूमि है। यहाँ मुख्य निर्यात मूँगफली और इसका तेल, तम्बाकू, प्याज़, कहवा, अरबरक, मैंग्नीज़, चाय, मसाला, तिलहन, चमड़ा, नारियल, इत्यादि हैं तथा आयात में कोयला, पिट्रॉलियम, धातु, मशीनरी, लकड़ी, कागज़, मोटर-साइकिल, रसायन, चावल और खाद्यान्न, लम्बे रेशे वाली कपास, रासायनिक पदार्थ, आदि प्रमुख हैं। एक छोटा बंदरगाह [[रोयापुरम]] में भी है, जो स्थानीय मछुआरों और जलपोतों द्वारा प्रयोग होता है। पूर्वी तट पर चेन्नै की महत्त्वपूर्ण स्थिति ने प्राकृतिक सुविधा के अभाव में भी कृत्रिम व्यवस्था द्वारा एक पत्तन का विकास पाया है। एक बन्दरगाह होने के कारण कोलकाता, विशाखापट्टनम, कोलम्बों, रंगून, पोर्ट ब्लेयर आदि स्थानों से समुद्री मार्ग द्वारा सम्बद्ध है।
[[चित्र:Velachery Railway station June 2010.jpg|thumb|left|चेन्नै में [[सामूहिक त्वरित यातायात प्रणाली (चेन्नई)|एम.आर.टी.एस]] ट्रेन का स्टेशन]]
आज रेलमार्गों और सड़कों के मुख्य जंक्शन होने के कारण से, यह नगर देश के विभिन्न नगरों से जुड़ा हुआ है। यह वायु मार्ग द्वारा [[बेंगलुरु|बेंगलूरु]], कोलकाता, मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद आदि देश के विभिन्न नगरों से जुड़ा हुआ है। चेन्नै देश के अन्य भागों से रेल द्वारा भी भली-भाँति जुड़ा हुआ है। यहाँ से, पाँच मुख्य [[भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग|राष्ट्रीय राजमार्ग]] नगर को [[मुंबई]], [[कोलकाता]], [[तिरुचिरापल्ली]], [[तिरुवल्लुर]], तिंडिवनम और [[पुदुचेरी]] को जोड़ते हैं।<ref name=transport>{{cite web | title= GIS database for Chennai city roads and strategies for improvement | publisher= Geospace Work Portal | url= http://www.gisdevelopment.net/application/Utility/transport/utilitytr0001.htm | accessdate= 4 अगस्त 2005 | archive-url= https://web.archive.org/web/20120717045706/http://www.gisdevelopment.net/application/Utility/transport/utilitytr0001.htm | archive-date= 17 जुलाई 2012 | url-status= dead }}</ref> चेन्नै मोफ़स्सिल बस टर्मिनस शहर की सभी अन्तर्राज्यीय बस सेवाओं का अड्डा है। यह [[एशिया]] का सबसे बड़ा बस-अड्डा है।<ref name="thehindu20051228">{{cite news
|last=Dorairaj
|first=S
|url=http://www.hindu.com/2005/12/28/stories/2005122816740400.htm
|work=द हिन्दू
|title=Koyambedu bus terminus gets ISO certification
|date=दिसम्बर 28, 2005
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20111107232736/http://www.hindu.com/2005/12/28/stories/2005122816740400.htm
|archive-date=7 नवंबर 2011
|url-status=live
}}</ref> सात सरकारी यातायात निगम अन्तर-नगरीय और अन्तर्राज्यीय बस सेवाएँ संचालित करते हैं। बहुत-सी निजी बस सेवाएँ भी चेन्नै को अन्य नगरों से सुलभ कराती हैं।
चेन्नै [[दक्षिण रेलवे (भारत)|दक्षिण रेलवे]] का मुख्यालय है। नगर में दो मुख्य रेलवे टर्मिनल हैं। [[चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन|चेन्नै सेंट्रल रेऽलवे स्टेशन]], जहाँ से सभी बड़े नगरों जैसे [[मुम्बई|मुंबई]], [[कोलकाता]], [[बेंगलुरु|बेंगलूरु]], [[दिल्ली]], [[हैदराबाद]], [[कोच्चि]], [[कोयंबतूर]], [[तिरुवनंतपुरम]], इत्यादि के लिए रेल-सुविधा उपलब्ध हैं।<ref>{{cite web|url=http://www.southernrailway.org/sutt/arr-dep.php|title=Sub-urban Train timings|publisher=Indian Railways|accessdate=6 अक्टूबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011023042/http://southernrailway.org/sutt/arr-dep.php|archive-date=11 अक्तूबर 2007|url-status=dead}}</ref> [[चेन्नई एगमोर रेलवे स्टेशन|चेन्नै एगमोर रेलवे स्टेशन]] से प्रायः [[तमिलनाडु]] के नगरों की रेल सेवाएँ ही उपलब्ध हैं। कुछ निकटवर्ती राज्य के नगरों की भी रेलगाड़ियाँ यहाँ से चलती हैं।<ref name="egmore-trains">{{cite news
|title=35 trains to run at higher speed
|date=अगस्त 27, 2004
|url=http://www.hindu.com/2004/08/28/stories/2004082807870500.htm
|work=द हिन्दू
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071013122036/http://hindu.com/2004/08/28/stories/2004082807870500.htm
|archive-date=13 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref>
[[चित्र:Chennai Royapettah clock tower.jpg|thumb|एमटीसी की वॉल्वो बस]]<!-- end of image -->
नगर में लोक यातायात हेतु बस, रेल, ऑटोरिक्शा आदि सर्वसुलभ साधन हैं। [[चेन्नई उपनगरीय रेलवे|चेन्नै उपनगरीय रेलवे]] नेट्वर्क भारत में सबसे पुराना है। इसमें चार [[ब्रॉड गेज|ब्रॉड गेऽज]] वाले रेऽल क्षेत्र हैं, जो नगर में दो स्थानों [[चेन्नई सेंट्रल|चेन्नै सेंट्रल]] और [[चेन्नई बीच रेलवे स्टेशन|चेन्नै बीच रेलवे स्टेशन]] पर मिलते हैं। इन टर्मिनल से नगर में निम्न सेक्टरों के लिए नियमित सेवाएँ उपलब्ध हैं:
* [[चेन्नई सेंट्रल|चेन्नै सेंट्रल]]/[[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] - [[अरक्कोणम]] - [[तिरुट्टनी]] ([[चेन्नई उपनगरीय रेलवे – पश्चिम लाइन|चेन्नै उपनगरीय रेलवे – पश्चिम लाइन]])
* [[चेन्नई सेंट्रल|चेन्नै सेंट्रल]]/ [[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] – गुम्मिडीपूंडी - सुलुरपेट ([[चेन्नई उपनगरीय रेलवे|चेन्नै उपनगरीय रेलवे]])
* [[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] – [[तांबरम]] - [[चेंगलपट्टू]] - तिरुमलैपुर ([[कांचीपुरम|काँचीपुरम]]) ([[चेन्नई उपनगरीय रेलवे – दक्षिण लाइन|चेन्नै उपनगरीय रेलवे – दक्षिण लाइन]])
* चौथा सेक्टर भूमि से उच्च स्तर पर है और [[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] को [[वेलाचेरी]] से जोड़ता है और शेष जाल से भी जुड़ा हुआ है।
[[चेन्नई मेट्रो|चेन्नै मेट्रो]] चेन्नै के लिए अनुमोदित एक त्वरित यातायात सेवा है। इसके प्रथम चरण में दो लाइनें प्रयोग में है एवं अन्य लाइनों का कार्य निर्माणाधीन है। इस पूरी परियोजना में, पहले चरण के दो गलियारों की लागत ₹१४,६०० करोड़ है, जो ५०.१ किमी तक लंबे हैं। २००७ के आकलन से ₹९,५९६ करोड़ की लागत आयी थी।<ref name="hindumetrorail">{{cite web
|first=TheCSR
|title=Chennai metro work begins
|date=अप्रैल 18, 2008
|url=http://www.hindu.com/2008/04/18/stories/2008041860651200.htm
|work=द हिन्दू
|accessdate=17 जुलाई 2009
|archive-url=https://web.archive.org/web/20081101201943/http://www.hindu.com/2008/04/18/stories/2008041860651200.htm
|archive-date=1 नवंबर 2008
|url-status=live
}}</ref>
मेट्र'पॉलिटन ट्रांसपॉर्ट कॉर्परेशन (एमटीसी) नगर में बस यातायात संचालित करता है। निगम का २७७३ बसों का बेड़ा २८८ मार्गों पर ३२.५ लाख यात्रियों को दैनिक परिवहन उपलब्ध कराता है।<ref name=mtc_details>{{cite web
|title=The Growth
|publisher=Metropolitan Transport Corporation (Chennai) Ltd
|url=http://www.mtcbus.org/
|date=मई 31, 2008
|accessdate=31 मई 2008
|archive-url=https://web.archive.org/web/20080526170357/http://mtcbus.org/
|archive-date=26 मई 2008
|url-status=dead
}}</ref>
नगर के बहुत से मार्गों पर मैक्सी कैब नाम से वैन और सवारी भाड़े पर ऑटोरिक्शा भी चलते हैं, जो बस सेवा का विकल्प देते हैं। चेन्नै की यातायात संरचना अच्छा संपर्क उपलब्ध कराती है, किंतु बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ-साथ यातायात संकुलन और प्रदूषण की समस्याएँ भी खड़ी हो गयी हैं। प्रशासन ने इन समस्याओं के समाधान के लिए फ़्लाइओवर तथा ग्रेऽड-सेपिरेटर निर्माण किये हैं, जिनका शुभारंभ [[१९७३]] में जेमिनाइ फ़्लाइओवर से नगर की सबसे महत्वपूर्ण सड़क अन्ना सालै से हुआ था।<ref>{{cite web
|url=http://www.hindu.com/nic/draftmasterplanii_short.pdf
|format=PDF
|title=Land Use and Planning Strategy
|work=Draft Master Plan – II for Chennai Metropolitan Area
|publisher=Chennai Metropolitan Development Authority
|page=p. 60
|accessdate=16 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070927005157/http://www.hindu.com/nic/draftmasterplanii_short.pdf
|archive-date=27 सितंबर 2007
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite news
|last=Srivathsan
|first=A
|url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/thscrip/print.pl?file=2007092950161200.htm&date=2007/09/29/&prd=pp&
|title=Bridge across time Skyline
|work=द हिन्दू
|date=सितम्बर 29, 2007
|accessdate=16 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20110327174358/http://www.hinduonnet.com/thehindu/thscrip/print.pl?file=2007092950161200.htm&date=2007%2F09%2F29%2F&prd=pp&
|archive-date=27 मार्च 2011
|url-status=dead
}}</ref> और हाल ही में तैयार हुई इस शृंखला की नवीनतम कड़ी काठीपाड़ा फ़्लाइओवर है।
== शिक्षा ==
[[चित्र:Anna-university.jpg|thumb|चेन्नै में स्थित अन्ना विश्वविद्यालय]]
चेन्नै में सरकारी एवं निजी दोनों प्रकार के विद्यालय हैं। शिक्षा का माध्यम तमिल अथवा अंग्रेज़ी है। अधिकांश विद्यालय तमिलनाडु राज्य शिक्षा मंडल या केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बॉर्ड (सीबीएसई) से जुड़े हैं।<ref>{{cite news
|url=http://www.hindu.com/edu/2006/11/20/stories/2006112000410100.htm
|title=Balancing uniformity and diversity
|work=द हिन्दू
|date=नवम्बर 20, 2006
|author=रामचंद्रन, के. एवं श्रीनिवासन, मीरा
|accessdate=7 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071013193537/http://hindu.com/edu/2006/11/20/stories/2006112000410100.htm
|archive-date=13 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref> नगर में कुल १,३८९ विद्यालय हैं, जिनमें से ७३१ प्राथमिक, २३२ माध्यमिक और ४२६ उच्च माध्यमिक विद्यालय हैं।<ref>{{cite web
|url=http://www.schools.tn.nic.in/TownSchools.asp?DCODE=02&VTCODE=40200988
|title=No. of Schools in the Town : Chennai
|publisher=Govt. of Tamil Nadu
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090409225017/http://www.schools.tn.nic.in/TownSchools.asp?DCODE=02&VTCODE=40200988
|archive-date=9 अप्रैल 2009
|url-status=dead
}}</ref>
इंजिनियरिंग शिक्षा के लिए, चेन्नै में [[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान चेन्नई|भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान]], १७९४ में स्थापित कॉलिज ऑव इंजिनियरिंग, गिंडी, १९४९ में स्थापित मद्रास प्रौद्योगिकी संस्थान और एस आर एम विश्वविद्यालय जाने माने संस्थान हैं। अधिकांश इंजिनियरिंग महाविद्यालय [[अन्ना विश्वविद्यालय]] से संबद्ध हैं। मद्रास मेडिकल कॉलिज, स्टेनली मेडिकल कॉलिज, किलपॉक मेडिकल कॉलिज और एस आर. एम. मेडिकल कॉलिज एवं अनुसंधान संस्थान चेन्नै के प्रमुख चिकित्सा महाविद्यालय हैं।
विज्ञान, कला एवं वाणिज्य क्षेत्र में शिक्षा प्रदान कराने वाले अधिकांश महाविद्यालय मद्रास विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। मद्रास विश्वविद्यालय की नगर में तीन परिसर हैं। मद्रास क्रिश्चन कॉलिज, लॉयला कॉलिज, द न्यू कॉलिज और पेट्रिशन कॉलिज कुछ प्रसिद्ध स्व-वित्तपोषित महाविद्यालय हैं। चेन्नै में कई अनुसंधान केन्द्र भी हैं।
== खेल-कूद ==
[[चित्र:M. A. Chidambaram Stadium Challenger Trophy 2006.jpg|thumb|एम ए चिदंबरम स्टेडियम]] चेन्नै नगर विविध खेलों के लिए प्रसिद्ध है। नगर ने भारत को कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिये हैं। एस वेंकट राघवन और [[कृष्णम्माचारी श्रीकांत]] ने [[क्रिकेट]] में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।<ref>{{cite web|title=Srinivas Venkataraghavan|publisher=क्रिक इन्फ़ो|url=http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/35656.html|first=प्रताप|last=रामचंद|accessdate=15 अक्टूबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011202950/http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/35656.html|archive-date=11 अक्तूबर 2007|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|title=Kris Srikanth|publisher=क्रिक इन्फ़ो|url=http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/34103.html|first=प्रताप|last=रामचंद|accessdate=१५ अक्टूबर २००७|archive-url=https://web.archive.org/web/20090214140744/http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/34103.html|archive-date=१४ फ़रवरी २००९|url-status=live}}</ref> [[इंग्लैण्ड|इंग्लैंड]] के प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी [[नासिर हुसैन (क्रिकेट खिलाड़ी)|नासिर हुसैन]] का जन्म भी चेन्नै में हुआ था। [[एम आर एफ़ पेस फ़ाउंडेशन]] एक प्रसिद्ध तेज गेंदबाजी सिखाने की संस्था है, जो सन १९८७ से चेन्नै में संचालित हो रही है। [[इंडियन प्रीमियर लीग|इंडियन प्रेमियर लीग]] में चेन्नै के स्थानीय टीम का नाम [[चेन्नई सुपर किंग्स|चेन्नै सूपर किंग्ज़]] है, जिसके कप्तान [[महेंद्र सिंह धोनी]] हैं। चेपुक में स्थित [[एम ए चिदंबरम स्टेडियम]] भारत के सबसे पुराने क्रिकेट के मैदानो में से एक है।<ref>{{cite web
|last=श्रीराम
|first=नटराजन
|url=http://content-usa.cricinfo.com/india/content/ground/58008.html
|title=MA Chidambaram stadium
|publisher=क्रिक्इन्फ़ो
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20061104024506/http://content-usa.cricinfo.com/india/content/ground/58008.html
|archive-date=4 नवंबर 2006
|url-status=live
}}</ref>
मेयर राधाकृष्णन स्टेडियम [[हॉकी]] का एक लोकप्रिय मैदान है। यहाँ एशिया कप एवं चैंपियंज़ ट्रोफ़ी जैसी प्रमुख हॉकी प्रतियोगिताएँ हो चुकी हैं।<ref>{{cite news
|url=http://www.hindu.com/2007/09/10/stories/2007091055590100.htm
|title=India retains Asia Cup hockey title
|work=द हिन्दू
|date=सितम्बर 10, 2007
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20110629021257/http://www.hindu.com/2007/09/10/stories/2007091055590100.htm
|archive-date=29 जून 2011
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite news
|url=http://www.hindu.com/2004/10/20/stories/2004102004161800.htm
|title=Radhakrishnan stadium to have new turf
|work=द हिन्दू
|date=अक्टूबर 20, 2004
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20090825233850/http://www.hindu.com/2004/10/20/stories/2004102004161800.htm
|archive-date=25 अगस्त 2009
|url-status=live
}}</ref>
प्रेमियर हॉकी लीग में चेन्नै का प्रतिनिधित्व चेन्नै वीरंज़ नामक एक टीम करती है।
[[चित्र:Nungambakkam SDAT Tennis Stadium floodlit match panorama.jpg|thumb|चेन्नै में आयोजित होने वाली चेन्नै ओपन प्रतियोगिता]][[चेन्नई ओपन|चेन्नै ओपन]] चेन्नै में आयोजित होने वाली एक प्रसिद्ध [[टेनिस]] प्रतियोगिता है। यह भारत की एक मात्र एटीपी प्रतियोगिता है। [[विजय अमृतराज]] और [[रमेश कृष्णन]] प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी हैं, जो चेन्नै से संबंध रखते हैं।<ref name="amirtharajs">{{cite news
|last=बसु
|first=अरुंधती
|title=Off-court ace
|date=मार्च 19, 2005
|url=http://www.telegraphindia.com/1050319/asp/weekend/story_4513588.asp
|work=द टेलिग्रैफ़
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011164652/http://telegraphindia.com/1050319/asp/weekend/story_4513588.asp
|archive-date=11 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite news
|last=Srinivasan
|first=Kamesh
|title=For Paes and Bhupathi, glory days began in Chennai
|date=दिसम्बर 28, 2001
|url=http://www.hindu.com/2001/12/28/stories/2001122801651900.htm
|work=द हिन्दू
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011212144/http://hindu.com/2001/12/28/stories/2001122801651900.htm
|archive-date=11 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref><ref name="ramanathan-krishnan">{{cite news
|last=Keerthivasan
|first=K
|title=A trip down memory lane
|date=दिसम्बर 30, 2004
|url=http://www.hindu.com/2004/12/30/stories/2004123006512000.htm
|work=द हिन्दू
|accessdate=11 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071029135800/http://www.hindu.com/2004/12/30/stories/2004123006512000.htm
|archive-date=29 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite web
|url=http://www.chennaiopen.org
|title=About the venue
|publisher=[[International Management Group]]
|accessdate=13 सितंबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20190602204450/http://www.chennaiopen.org/
|archive-date=2 जून 2019
|url-status=live
}}</ref>
सन [[१९९५]] में चेन्नै साउथ एशन गेम्ज़ का मेज़बान रहा है।<ref>{{cite news
|last=Thyagarajan
|first=S
|title=On the road to restoration
|date=दिसम्बर 4, 2003
|url=http://www.hindu.com/mp/2003/12/04/stories/2003120400820400.htm
|work=द हिन्दू
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071013194123/http://hindu.com/mp/2003/12/04/stories/2003120400820400.htm
|archive-date=13 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref>
जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम फ़ुटबॉल एवं ऐथिलेटिक स्पर्धाओं के लिए उपयोग होता है। कई अन्य स्पर्धाएँ, जैसे वॉलिबॉल, बास्किटबॉल और टेबल टेनिस का आयोजन, इसी स्टेडियम में होता है। जल क्रीड़ा स्पर्धाओं का आयोजन वेलाचेरी अक्वेटिक कॉम्प्लेक्स में होता है।
कार दौड़ प्रतियोगिताओं में चेन्नै का नाम भारत में सर्वप्रथम लिया जाता है। [[श्रीपेरम्बदूर]] में स्थित इरुन्गट्टुकोट्टाइ में एक रेऽस ट्रैक है, जिसे अंतरराष्ट्रीय कार रेऽस प्रतियोगिता के लिए उपयोग में लाया जाता है।<ref name="hindumotorsport">{{cite news
|last=Thyagarajan
|first=S
|title=On the right track
|date=अगस्त 22, 2002
|url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2002/08/22/stories/2002082200640400.htm
|work=द हिन्दू
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011182248/http://hinduonnet.com/thehindu/mp/2002/08/22/stories/2002082200640400.htm
|archive-date=11 अक्तूबर 2007
|url-status=dead
}}</ref> घुड़दौड़ गिंडी रेऽस कॉर्स में होती है। मद्रास बोट क्लब नौकायान प्रतियोगिता को करवाता है। चेन्नै में दो गोल्फ़ मैदान हैं: कॉस्म'पॉलिटन क्लब और जिम क्लब। विश्वप्रसिद्ध शतरंज खिलाड़ी [[विश्वनाथ आनंद]] का बचपन भी चेन्नै में बीता है।<ref>{{cite news
|last = Brijnath
|first = Rohit
|url = http://www.hindu.com/2007/10/06/stories/2007100655521900.htm
|title = India's most consistent champion
|work = [[द हिन्दू]]
|date = अक्टूबर 6, 2007
|accessdate = 11 अक्टूबर 2007
|archive-url = https://web.archive.org/web/20071011192157/http://www.hindu.com/2007/10/06/stories/2007100655521900.htm
|archive-date = 11 अक्तूबर 2007
|url-status = live
}}</ref><ref>{{cite news
|last=Fide
|first=
|url=http://ratings.fide.com/toparc.phtml?cod=117
|title=FIDE Top 100 Players October 2007
|work=Fide
|date=अक्टूबर 15, 2007
|accessdate=15 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20080424104027/http://ratings.fide.com/toparc.phtml?cod=117
|archive-date=24 अप्रैल 2008
|url-status=live
}}</ref><ref>{{cite news
|last=Official site of the 2007 World Chess Championship
|first=
|url=http://www.chessmexico.com/es/index.php?option=com_content&task=blogcategory&id=22&Itemid=114
|title=Viswanathan Anand the new World Champion 2007
|work=
|date=अक्टूबर 15, 2007
|accessdate=15 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071014143041/http://www.chessmexico.com/es/index.php?option=com_content&task=blogcategory&id=22&Itemid=114
|archive-date=14 अक्तूबर 2007
|url-status=dead
}}</ref>
२००६ राष्ट्रमंडल खेलों में [[टेबल टेनिस]] में स्वर्ण जीतने वाले शरद कमाल<ref>{{cite news
|last=Srinivasan
|first=Meera
|url=http://www.hindu.com/2007/09/07/stories/2007090760930400.htm
|title=Four Chennai teachers have a reason to rejoice
|work=[[द हिन्दू]]
|date=सितम्बर 7, 2007
|accessdate=4 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20071012041902/http://hindu.com/2007/09/07/stories/2007090760930400.htm
|archive-date=12 अक्तूबर 2007
|url-status=live
}}</ref> और दो बार की विश्व [[कैरम]] विजेता मारिया इरुदयम भी चेन्नै के निवासी हैं।<ref>{{cite web
|url=http://sportal.nic.in/front.asp?maincatid=51&headingid=71
|publisher=Govt. of India
|title=Indian Teams in International Competitions
|accessdate=11 अक्टूबर 2007
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070927012135/http://sportal.nic.in/front.asp?maincatid=51&headingid=71
|archive-date=27 सितंबर 2007
|url-status=dead
}}</ref>
== पर्यटन ==
चेन्नै को सूपर प्रसारित नगर कहते हैं। यहाँ अनेक दर्शनीय स्थल हैं, जिनमें [[मद्रास विश्वविद्यालय]], चेपक महल, मत्स्य पालन केंद्र, कपिलेश्वर और पार्थसारथी का मंदिर, अजायबघर और चिड़ियाघर आदि प्रमुख हैं। चेन्नै का एक अन्य महत्वपूर्ण आकर्षण है [[सेंट जॉर्ज फोर्ट|सेंट जॉर्ज फ़ॉर्ट]]। इसे सन् [[१६४०]] में ईस्ट इंडिया कंपनी के फ़्रांसिंस डे ने बनाया था। यह क़िला ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापारिक केंद्र था। १५० वर्षों तक यह युद्धों और षड्यंत्रों का केंद्र बना रहा। इस क़िले में पुरानी सैनिक छावनी, अधिकारियों के मकान, सेंट मेअरी गिरजाघर एवं रॉबर्ट क्लाइव़ का घर है। सेंट मेअरी गिरजाघर अंग्रेज़ों द्वारा भारत में बनवाया गया सबसे पुराना चर्च माना जाता है।
चेन्नै का [[मरीना बीच (चेन्नई)|मरीना बीच]] पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण है। यह विश्व का दूसरा सबसे लंबा समुद्र तट है। इसके दो सौ से तीन सौ गज चौड़े रेतीले तट पर शाम को इतनी अधिक भीड़ होती है कि लगता है, मानो सारा नगर वहीं आ गया है। सारे दिन की थकान से चेन्नैवासी शाम को मरीना बीच के किनारे भ्रमण करके मुक्ति पाते हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए मरीना बीच पर एक स्वीमिंग पूल है, जो दुर्घटनाओं को घटने से रोकता है, क्योंकि यहाँ समुद्र की गहराई और लहरों का तेज प्रवाह ख़तरनाक है। [[शार्क]] मछलियों की अधिकता भी है, अतः स्नान या तैरने के लिए स्वीमिंग पूल का ही लाभ लेना चाहिए। इसी के पास एक मछलीघर भी है, जिसमें तरह-तरह की देशी-विदेशी मछलियाँ दर्शनार्थ रखी गयी हैं। मरीना तट का उत्तरी भाग पूर्व मुख्यमंत्री [[अन्नादुरै]] के समाधि-स्थल के रूप में विकसित किया गया है। यहाँ लोगों को श्रद्धानवत होते देखा जा सकता है। साथ में, एम.जी.आर. स्मारक भी है, जिसका प्रवेश द्वार दो विशाल हाथी दाँत के रूप में बनाया गया है। यहाँ एक मशाल हमेशा प्रज्ज्वलित रहती है।
चेन्नै का स्नेक पार्क भी पर्यटकों को प्रभावित करता है। यह अपनी तरह का एक अलग ही पार्क है, जिसका निर्माण रोमुलस विटेकर नामक एक अमेरिकी ने किया था। यह ५०० से भी ज़्यादा ख़तरनाक भारतीय [[साँपों]] का जीवित संग्रहालय कहा जा सकता है। रेंगते हुए ये विषधर भय मिश्रित रोमांच पैदा करते हैं। यहाँ पर साँपों के अलावा [[सरीसृप वर्ग]] के अन्य जीव, जैसे [[मगरमच्छ]], घड़ियाल इत्यादि भी रखे गये हैं। चेन्नै महानगर की कलात्मक संस्कृति के दर्शन पैंथियान रोड स्थित नैशनल आर्ट गैलिरी में सहज ही किये जा सकते हैं।
धार्मिक दृष्टिकोण से संपूर्ण [[दक्षिण भारत]] एक तीर्थ है, जहाँ वास्तुकला और मूर्तिकला के अद्वितीय उदाहरण हैं। इन मंदिरों में भव्यता और कलाशिल्प देखने योग्य है। [[उत्तर भारत]] से एकदम अलग शैली के मंदिर होने के बावजूद श्रद्धा और भक्ति में ये समस्त भारतीय आस्तिकों को आकर्षित करते हैं। तिरुषैलिफेनी में स्थित पार्थ सारथी मंदिर का उल्लेख है, जिसका निर्माण आठवीं शताब्दी में राजा पल्लव ने करवाया था। इस देवस्थान की दीवारों पर सुंदर कलाकृतियाँ अंकित हैं। दूसरा आकर्षक मंदिर है, द्राविड़ शिल्पकला में निर्मित मिलापोर में स्थित कालीश्वर मंदिर। यहाँ माता पार्वती की उपासना की गाथा अंकित है। समुद्र की रेत से तपता यह क्षेत्र अत्यंत गर्म जलवायु लिये हुए है, जो केले, नारियल और पाम के पेड़ों से ख़ूबसूरत लगता है।
== चित्र दीर्घा ==
<gallery>
File:MylaporeKapaleeshwararTemple.jpg|मल्यापुर कपिलेश्वर मंदिर
File:Chennai_corp.jpg| चेन्नै महानगर पालिका भवन
File:M. A. Chidambaram Stadium Challenger Trophy 2006.jpg| एम. ए. चिदंबरम क्रिकिट स्टेडियम
File:Chennai_National_Art_Gallery.jpg| चेन्नै में स्थित राष्ट्रीय कला दीर्घा
File:Chettinad Palace, Chennai.jpg| अड्यार नदी के तट पर स्थित चेट्टीनाड महल
File:Santhome Basilica.jpg| सान्तोम बासेलिका
File:Anna Samadhi entrance.jpg| मरीना बीच पर स्थित अन्ना समाधि का प्रवेशद्वार
File:Iitm maingate logo.jpg| भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, चेन्नै के प्रवेशद्वार पर लगा संस्था का प्रतीक चिह्न
</gallery>
== सन्दर्भ ==
{{reflist|2}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
{{Commonscat|Chennai|चेन्नई}}
* [https://web.archive.org/web/20090422032753/http://www.tourismchennai.com/ चेन्नै पर्यटन]
* [https://web.archive.org/web/20110429011354/http://www.chennai.tn.nic.in/ चेन्नै प्रशासन का आधिकारिक जालस्थल]
* [https://web.archive.org/web/20080501095016/http://www.chennaicorporation.com/ चेन्नै नगर निगम - आधिकारिक जालस्थल]
* [https://web.archive.org/web/20070927092854/http://www.cmdachennai.org/ चेन्नै महानगर विकास प्राधिकरण का जालस्थल]
{{चेन्नई}}{{चेन्नई में त्वरित यातायात}}
{{भारतीय मेट्रोपॉलिटन शहर}}
{{भारत के राज्य और केन्द्रशासित प्रदेश के राजधानी}}
{{भारत के मिलियन+ नगर}}
.
[[श्रेणी:चेन्नई]]
[[श्रेणी:तमिलनाडु]]
[[श्रेणी:भारत के महानगर]]
[[श्रेणी:तमिल नाडु के शहर]]
[[श्रेणी:कॉमन्स पर निर्वाचित चित्र युक्त लेख]]
[[श्रेणी:चेन्नई ज़िला]]
[[श्रेणी:कोरोमंडल तट]]
3u6mm776bec5uulcyf4j4qtrrmhtmng
घाटमपुर
0
2582
6591462
6344444
2026-07-24T03:33:15Z
~2026-41225-98
937905
/* इन्हें भी देखें */
6591462
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox settlement
|name=घाटमपुर
|other_name=Ghatampur
|image=Ghatampur.jpeg
|image_caption=घाटमपुर रेलस्टेशन
|pushpin_label=घाटमपुर
|pushpin_map=India Uttar Pradesh
|coordinates={{coord|26.151|80.169|display=inline, title}}
|pushpin_map_caption=उत्तर प्रदेश में स्थिति
|subdivision_type=देश |subdivision_name={{IND}}
|subdivision_type1=[[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|राज्य]] |subdivision_name1=[[उत्तर प्रदेश]]
|subdivision_type2=[[भारत के ज़िले|ज़िला]] |subdivision_name2=[[कानपुर नगर ज़िला]]
|population_total=40623
|population_as_of=2011
|demographics_type1=भाषाएँ
|demographics1_title1=प्रचलित
|demographics1_info1=[[हिन्दी]]
|timezone1=[[भारतीय मानक समय]] |utc_offset1=+5:30
}}
'''घाटमपुर''' (Ghatampur) [[भारत]] के [[उत्तर प्रदेश]] राज्य के [[कानपुर नगर ज़िले]] में स्थित एक नगर पालिका है। यह इसी नाम की तहसील का मुख्यालय भी है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=qzUqk7TWF4wC Uttar Pradesh in Statistics]," Kripa Shankar, APH Publishing, 1987, ISBN 9788170240716</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=S46rbUL6GrMC Political Process in Uttar Pradesh: Identity, Economic Reforms, and Governance] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20170423083533/https://books.google.com/books?id=S46rbUL6GrMC|date=23 अप्रैल 2017}}," Sudha Pai (editor), Centre for Political Studies, Jawaharlal Nehru University, Pearson Education India, 2007, ISBN 9788131707975</ref>
== इतिहास ==
माना जाता है कि घाटमपुर की स्थापना राजा घाटमदेव ने की थी। शहर के पूरब में कूष्मांडा देवी का एक प्राचीन मन्दिर है जो हिन्दुओं की श्रद्धा का महान केंद्र है।जो नवरात्रि में चौथी देवी क़े रूप मैं पूजी जाती है, जहां कार्तिक पूर्निमा में हर साल विशाल मेले का अयोजन होता है शहर के दक्षिण में एक ऐतिहासिक बौद्ध मन्दिर है। शहर की पूर्वोत्तर दिशा में १३ किलोमीटर दूर भीतरगांव नामक स्थान पर एक गुप्तकालीन प्राचीन मन्दिर है। 20 किलोमीटर दक्षिण में जिला हमीरपूर स्थित है जिसे पवित्र नदी [[यमुना]] ने घाटमपुर से अलग किया है। कानपुर की सबसे बडी तहसील होने का गौरव भी इसे प्राप्त है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार इसकी स्थापना राजा घाटमदेव ने की थी जिस कारण इसका नाम घाटमपुर पड़ा।
== राजनैतिक इतिहास ==
सन 1967 के चुनाव में कांग्रेस से बेनी सिंह अवस्थी विधायक चुने गए, जिन्हे खाद्य रसद, स्वायत्त शासन समेत कई विभागों के कैबिनेट की जिम्मेदारी रही। 1980 एवं 85 में चुने गए कुंवर शिवनाथ सिंह विधायक के बाद विधानसभा उपाध्यक्ष और राज्यमंत्री भी बनाए गए। रामआसरे 1977 में जेएनपी से और 1989 में जनता दल से विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद 1996 में राजाराम पाल विधायक चुनने के बाद राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त बने। वहीं 2017 में भाजपा की ओर से कमलारानी वरुण विधायक बनीं। तो वर्तमान यूपी सरकार ने उन्हें मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी दी। बीमारी की चपेट में आने से अकस्मात निधन हो गया। तत्पश्चात उपचुनाव में वर्ष 2020 में भाजपा प्रत्याशी उपेंद्रनाथ पासवान विधायक बने। 2022 में अपना दल से सरोज कुरील ने समाजवादी पार्टी के भगवती सागर को 14474 वोटों के मार्जिन से हराया था।<ref>{{cite news |title=घाटमपुर (सुरक्षित) विधानसभा चुनाव परिणाम 2022 |url=https://hindi.oneindia.com/ghatampur-assembly-elections-up-218/ |accessdate=10 मार्च 2022}}</ref>
== प्रमुख त्योहार ==
मां कुष्मांडा देवी मंदिर के कारण प्रत्येक नवरात्रि के चौथे दिन घाटमपुर में होने वाला दीपदान का पर्व दर्शनीय है। साथ ही महाशिवरात्रि के दिन घाटमपुर में आयोजित कार्यक्रम भी आसपास के क्षेत्र में प्रसिद्ध है।
== दर्शनीय स्थल ==
अज्योरी (सजेती) गांव के बिहारेश्वर महादेव मंदिर को दिल्ली सम्राट अकबर के प्रिय मंत्री बीरबल ने बनवाया था।। इतिहासकारों के मुताबिक दिल्ली में औरंगजेब की कैद में रखे गए मराठा सरदार छत्रपति शिवाजी जेल से फरार होने के बाद काफी दिनों तक इसी मंदिर में भेष बदलकर रुके थे। मंदिर कानपुर-सागर राजमार्ग के ठीक किनारे स्थित है। सिधौल गांव में स्थित मार्कण्डेयश्वर महादेव का मंदिर भी काफी प्राचीन है। पतारा के बैजनाथ धाम मंदिर का वर्णन परिमाल रासो (आल्हाखंड) में मिलता है। पतरसा गांव के पातालेश्वर महादेव और नंदना गांव के रामेश्वर महादेव मंदिर में मेला और रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
रिंद नदी के किनारे बसे बरनांव गांव का बाणेश्वर महादेव मंदिर, सिमौर गांव के कालेश्वर और चौबेपुर (नवेड़ी) गांव के भोलेश्वर महादेव मंदिर भी प्राचीन और दर्शनीय हैं। नई तहसील नर्वल का सृजन होने के बाद कई प्राचीन शिवालय घाटमपुर तहसील के राजस्व नक्शे से बाहर हो गए हैं। इनमें पुरातत्व विभाग से संरक्षित रिंद नदी के किनारे बसे करचुलीपुर गांव का औलियाश्वर महादेव मंदिर के अलावा परौली, कोरथा, गोपालपुर और पालपुर गांव के प्राचीन शिवालय शामिल हैं। घाटमपुर से मात्र 12 किमी दूर स्थित चौधरी धरमंगदपुर ग्राम सभा में माँ छौकरा देवी का अति प्राचीन मंदिर है कहा जाता है की माँ छौकरा देवी ( वैभवलक्ष्मी ) महा कवि भूषण के आवाहन पर प्रकट हुई और दर्शन दिए थे बाद में शिवाजी महाराज ने इस मंदिर का निर्माण कराया था | श्री कृष्णा जन्मआष्ट्मी में यहाँ प्रति वर्ष 7 दिवसीय भजन कीर्तन और भंडारे का आयोजन होता है |
== यातायात ==
यहाँ एक रेलवे स्टेशन भी है। यह कानपुर-मानिकपुर रेलमार्ग पर स्थित है। लखनऊ-भोपाल राजमार्ग भी यहाँ से होकर गुजरता है। [[राष्ट्रीय राजमार्ग 34 (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग 34]] यहाँ से गुज़रता है। घाटमपुर के सबसे निकट चकेरी एयरपोर्ट स्थित है।
== जनसंख्या ==
भारत की जनगणना 2011 द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, घाटमपुर नगर पालिका परिषद की जनसंख्या 40,623 है, जिसमें 21,334 पुरुष हैं, जबकि 19,289 महिलाएं हैं। घाटमपुर नगर पालिका परिषद की वर्तमान अनुमानित जनसंख्या 2024 में लगभग 55,000 है।<ref>{{Cite web|url=https://www.census2011.co.in/data/town/801007-ghatampur-uttar-pradesh.html#:~:text=Current%20estimated%20population%20of%20Ghatampur,in%202024%20is%20approximately%2055,000.|title=Ghatampur Nagar Palika Parishad City Population Census 2011-2024 {{!}} Uttar Pradesh|website=www.census2011.co.in|access-date=2024-12-19}}</ref>
== पावर प्लांट प्रोजेक्ट ==
घाटमपुर में 1980 मेगावाट की यह परियोजना नेवेली लिग्नाइट और उत्तर प्रदेश विदयुत उत्पादन निगम लिमिटेड का एक संयुक्त उपक्रम है। इसमें 51 प्रतिशत भागीदारी एनएलसी की होगी जबकि 29 प्रतिशत भागीदारी यूपीआरवीयूएनएल की होगी।इससे पैदा होने वाली बिजली का 80 फीसदी बिजली उत्तर प्रदेश को मिलेगी तथा 20 फीसदी बिजली केन्द्रीय ग्रिड को दी जाएंगी। उन्होंने बताया कि बिजली संयत्र स्थापित हो जाने से उत्तर प्रदेश में बिजली की कमी पूरी तरह से खत्म हो जायेगी और प्रदेश में बिजली की समस्या का हल निकल आएगा।
'''शैक्षणिक संस्थान'''
जनता शिक्षा संस्थान महाविद्यालय
कैप्टन सुखवाशी सिंह स्मारक जनता महाविद्यालय
दयानंद दीनानाथ एजूकेशन सेंटर(DDEC)
बाल उद्यान शिक्षण संस्थान
सूर्या पब्लिक स्कूल
एसेंट पब्लिक स्कूल
शांति शिक्षा निकेतन
जीपीआरपी एजुकेसन सेन्टर
चीना पब्लिक स्कूल
== इन्हें भी देखें ==
* [[कानपुर नगर ज़िला]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== इन्हें भी देखें ==
[[श्रेणी:कानपुर नगर ज़िला]]
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के नगर]]
[[श्रेणी:कानपुर नगर ज़िले के नगर]]
tuwd5x9jaexz11bwu8q21xji1uikyo8
राम
0
2977
6591323
6581910
2026-07-23T12:21:51Z
Pushkar Singh
415569
/* नाम-व्युत्पत्ति एवं अर्थ */
6591323
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox deity
| type = Hindu
| image = Lord Rama with arrows.jpg
| caption = धनुष और बाण लेकर खड़े हुए श्याम वर्ण राम
| name = राम
| symbol = कोदंड/सारंग [[धनुष]] <br> [[बाण]] <br> [[शंख]] <br> [[कमल]]
| Devanagari = राम
| Sanskrit_transliteration = {{IAST|Rāma}}
| member_of = [[दशावतार]]
| other_names = राघव, रामचन्द्र, रघुनन्दन, काकुत्स्थ, सीतावल्लभ, कौशल्यानंदन
| god_of = {{hlist|मर्यादा पुरुषोत्तम<br> [[विष्णु]] के सातवें अंशअवतार}}
| affiliation = विष्णु के सातवें अंश अवतार अथवा अंश अवतार
| day = [[गुरुवार]]
| parents = {{unbulleted list|[[दशरथ]] (पिता)|[[कौशल्या]] (माता)|[[कैकयी]] (सौतेली माता)|[[सुमित्रा]] (सौतेली माता)}}
| spouse = [[सीता]]
| abode = {{hlist|[[अयोध्या]]|[[साकेतधाम]]|[[वैकुंठ]]}}
| weapon = कोदंड धनुष तथा बाण, कौमुदी [[गदा]], तलवार
| texts = [[वाल्मीकि रामायण]]<br>[[रामचरितमानस]]<br>[[विष्णु पुराण]]<br>[[भागवत पुराण]]<br>[[अध्यात्म रामायण]]
| siblings = {{unbulleted list|[[लक्ष्मण]] (सौतेला भाई)|[[भरत]] (सौतेला भाई)|[[शत्रुघ्न]] (सौतेला भाई)}}
| festivals = {{hlist|[[राम नवमी]]|विवाह पंचमी|[[दिवाली]]|[[विजयादशमी]]|[[वसंतोत्सव]]}}
| avatar_birth = [[अयोध्या]], [[कोसल]] (वर्तमान [[उत्तर प्रदेश]], [[भारत]])
| avatar_end = [[सरयू|सरयू नदी]], अयोध्या, कोसल (वर्तमान उत्तर प्रदेश, भारत)
| children = {{unbulleted list|[[लव]] (पुत्र)|[[कुश]] (पुत्र)}}
| dynasty = [[रघुवंश]]-[[सूर्यवंश]]
| predecessor = [[दशरथ]]
| gender = पुरुष
| successor = [[लव]] (उत्तर कोसल)<br>[[कुश]] (दक्षिण कोसल)
| mantra = [[जय श्री राम]]<br/>जय सियाराम<br>ॐ श्रीरामचंद्राय नमः<br>[[सीताराम]]
| army = वानर सेना
| venerated_in = [[रामानंदी संप्रदाय]]<br>[[श्री वैष्णव संप्रदाय]]<br/>[[स्मार्त संप्रदाय]]
}}
{{Infobox royalty
| name = दशावतार क्रमांक
| predecessor = [[परशुराम]]
| successor = [[कृष्ण]]
}}
'''राम''' (जिन्हें '''श्रीराम''' भी कहा जाता है) एक प्रसिद्ध हिंदू देवता हैं, जिन्हें [[भगवान विष्णु]] का सातवां अंश अवतार माना जाता है और श्री राम अंश अवतार थे। उनका जीवन धर्मयुक्त और आदर्श माना जाता है, जिसके कारण उन्हें '''मर्यादा पुरुषोत्तम''' भी कहा जाता है।<ref>{{Cite web|url=https://study.com/academy/lesson/rama-hindu-god-history-facts-overview.html|title=Shri Ram}}</ref>
[[वैष्णव]] परंपराओं में उन्हें सर्वोच्च देवता के रूप में पूजा जाता है। उनके जीवन पर आधारित महाकाव्य [[वाल्मीकि रामायण]] ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से अत्यंत लोकप्रिय है। राम को भारत तथा संपूर्ण दक्षिण एशिया में व्यापक तौर पर पूजा जाता है।
राम के जीवनचरित्र का मुख्य आधार [[संस्कृत]] भाषा का आदिकाव्य महर्षि वाल्मीकि कृत [[रामायण]] है। इसके अनुसार [[त्रेतायुग]] में जब लंका का राजा [[रावण]] अधर्म और अत्याचार फैला रहा था, तब अयोध्या के महाराज [[दशरथ]] और उनकी तीन रानियां [[कौशल्या]], [[सुमित्रा]] और [[कैकयी]] पुत्रहीन थे। रावण के अत्याचारों का अंत करने एवं धर्म की रक्षा करने के लिए [[भगवान विष्णु]] ने कौशल्या के गर्भ से राम के रूप में अवतार लिया। उनकी सहायता के लिए [[लक्ष्मी]] ने [[सीता]], [[शेषनाग]] ने [[लक्ष्मण]], और [[शिव]] ने [[हनुमान]] के रूप में अवतार लिया। चैत्र शुक्ल नवमी के दिन राम, लक्ष्मण, [[भरत]] और [[शत्रुघ्न]] का जन्म हुआ। बाल्यकाल में उन्होंने कुलगुरु वशिष्ठ से शिक्षा प्राप्त की।
शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात राम और लक्ष्मण ऋषि [[विश्वामित्र]] के साथ आश्रमों में राक्षसों का संहार करने गए। यज्ञ की रक्षा करने के बाद उन्होंने मिथिला में सीता स्वयंवर में भाग लिया। वहां राम ने शिव धनुष को भंग करके [[सीता]] से विवाह किया। कुछ समय बाद राजा दशरथ ने राम को अपना उत्तराधिकारी बनाने का विचार किया, लेकिन महारानी [[कैकेयी|कैकयी]] ने दासी मन्थरा के बहकावे में आकर दशरथ से अपने वचनों के रूप में राम के लिए 14 वर्ष का वनवास और अपने पुत्र भरत के लिए अयोध्या का राज्य मांग लिया।
अपने माता-पिता के वचन और आज्ञा को शिरोधार्य कर राजसुख त्याग कर राम ने वनवास स्वीकार किया। भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता ने भी राम का साथ दिया। वनवास के दौरान राम ने अनेक राक्षसों का संहार किया और अंत में [[दंडकारण्य]] में निवास किया। वहां राम ने रावण के भाई खर-दूषण का सेना समेत नाश किया और [[शूर्पणखा]] को दंडित किया। इसके प्रतिशोध में रावण ने सीता की सुंदरता से आकर्षित होकर छद्मवेष में कपट से उनका अपहरण कर लिया और उन्हें बचाने आए पक्षीराज [[जटायु]] का वध कर दिया।
राम और लक्ष्मण ने जटायु और [[शबरी]] को सद्गति देकर वानरराज [[सुग्रीव]] से मित्रता की। राम ने [[बाली]] का वध कर सुग्रीव को राजा बनाया। समस्त वानर और रीछ जाति की सहायता से सीता की खोज की गई। राम ने अपने प्रताप से समुद्र पर [[रामसेतु]] का निर्माण किया और [[रामेश्वरम तीर्थ|रामेश्वर ज्योतिर्लिंग]] की स्थापना की। लंका युद्ध में राम ने [[कुंभकर्ण]], [[इंद्रजीत]] और [[रावण]] सहित समस्त राक्षस सेना का अंत करके सीता और बंधक देवताओं को मुक्त करवाया। पश्चात सीता और राम का राज्याभिषेक हुआ। [[वाल्मीकि रामायण]] के अनुसार राम ने 11 हजार वर्ष तक [[अयोध्या]] पर सुशासन किया, जिसे "रामराज्य" कहा जाता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.valmiki.iitk.ac.in/sloka?field_kanda_tid=1&language=dv&field_sarga_value=1|title=Valmiki Ramayana}}</ref> रामराज्य में प्रजा सुखी थी और समाज से अधर्म व अशांति समाप्त हो चुकी थी।<ref name=":0" />
[[File:Sree Raghunandan - Ram Laxman Sita and Hanuman, M V Dhurandar.jpg|thumb]]
अपने कर्तव्य पूर्ण करने के बाद अपने पुत्रों [[लव]] और [[कुश]] को राज्य सौंप कर राम ने वैकुंठ गमन किया। राम ने एक आदर्श पुत्र, मित्र, भाई, पति और राजा का कर्तव्य निभाया। राम की यह जीवनगाथा वैष्णव शास्त्रों में विस्तार से उल्लेखित है।<ref>{{Cite book|title=रामचरितमानस|last=गोस्वामी|first=तुलसीदास|publisher=गीताप्रेस गोरखपुर|year=2019|location=गोरखपुर}}</ref>
== नाम-व्युत्पत्ति एवं अर्थ ==
'रम्' धातु में 'घञ्' प्रत्यय के योग से 'राम' शब्द निष्पन्न होता है।<ref>संस्कृत-हिन्दी कोश, वामन शिवराम आप्टे।</ref> 'रम्' धातु का अर्थ रमण (निवास, विहार) करने से सम्बद्ध है। वे प्राणीमात्र के हृदय में 'रमण' करते हैं, इसलिए 'राम' हैं तथा भक्तजन उनमें ध्याननिष्ठ होते हैं, इसलिए भी वे 'राम' हैं - "रमते कणे कणे इति रामः"। '[[विष्णुसहस्रनाम]]' पर लिखित अपने भाष्य में आद्य [[शंकराचार्य]] ने [[पद्मपुराण]] का उल्लेख करते हुए कहा है कि ''नित्यानन्दस्वरूप भगवान् में योगिजन रमण करते हैं, इसलिए वे 'राम' हैं।''<ref>श्रीविष्णुसहस्रनाम, सानुवाद शांकर भाष्य सहित, गीताप्रेस गोरखपुर, संस्करण-1999, पृष्ठ-143.</ref>
== अवतार रूप में प्राचीनता ==
[[वैदिक साहित्य]] में 'राम' का उल्लेख प्रचलित रूप में नहीं मिलता है। [[ऋग्वेद]] में केवल दो स्थलों पर ही 'राम' शब्द का प्रयोग हुआ है<ref>ऋग्वेद पदानां अकारादि वर्णक्रमानुक्रमणिका, संपादक- स्वामी विश्वेश्वरानंद एवं नित्यानंद, निर्णय सागर प्रेस, मुंबई, संस्करण-1908, पृ०-348.</ref> (१०-३-३ तथा १०-९३-१४)। उनमें से एक जगह काले रंग (रात के अंधकार) के अर्थ में<ref>ऋग्वेदसंहिता (श्रीसायणाचार्य कृत भाष्य एवं भाष्यानुवाद सहित) भाग-5, चौखम्बा कृष्णदास अकादमी, वाराणसी, संस्करण-2013, पृष्ठ-3892.</ref> तथा एक जगह व्यक्ति के अर्थ में प्रयोग हुआ है<ref>ऋग्वेदसंहिता (श्रीसायणाचार्यजी कृत भाष्य एवं भाष्यानुवाद सहित) भाग-5, चौखम्बा कृष्णदास अकादमी, वाराणसी, संस्करण-2013, पृष्ठ-4406.</ref>; लेकिन वहाँ भी उनके अवतारी पुरुष या दशरथ के पुत्र होने का कोई संकेत नहीं है। यद्यपि [[नीलकण्ठ चतुर्धर]] ने ऋग्वेद के अनेक मन्त्रों को स्वविवेक से चुनकर उनके रामकथापरक अर्थ किये हैं, परन्तु यह उनकी निजी मान्यता है। ऋग्वेद में एक स्थल पर 'इक्ष्वाकुः' (१०-६०-४) का<ref>ऋग्वेद पदानां अकारादि वर्णक्रमानुक्रमणिका, संपादक- स्वामी विश्वेश्वरानंद एवं नित्यानंद, निर्णय सागर प्रेस, मुंबई, संस्करण-1908, पृ०-79.</ref> तथा एक स्थल पर<ref>वैदिक-पदानुक्रम-कोषः, संहिता विभाग, तृतीय खण्ड, संपादक- विश्वबन्धुजी शास्त्री, [[विश्वेश्वरानन्द वैदिक शोध संस्थान]], होशिआरपुर, संस्करण-1956, पृष्ठ-1550; एवं ऋग्वेद पदानां अकारादि वर्णक्रमानुक्रमणिका, संपादक- स्वामी विश्वेश्वरानंद एवं नित्यानंद, निर्णय सागर प्रेस, मुंबई, संस्करण-1908, पृ०-195.</ref> 'दशरथ' (१-१२६-४) शब्द का भी प्रयोग हुआ है, परन्तु उनके राम से सम्बद्ध होने का कोई संकेत नहीं मिल पाता।<ref>हिन्दी साहित्य कोश, भाग-2, संपादक- डॉ० धीरेंद्र वर्मा एवं अन्य, ज्ञानमंडल लिमिटेड, वाराणसी, संस्करण-2011, पृष्ठ-497.</ref>
ब्राह्मण साहित्य में 'राम' शब्द का प्रयोग [[ऐतरेय ब्राह्मण]] में दो स्थलों पर<ref name="अ">वैदिक-पदानुक्रमकोषः, ब्राह्मण-आरण्यक विभाग, द्वितीय खण्ड, विश्वेश्वरानन्द वैदिक शोध संस्थान, लवपुर, संस्करण-1936, पृष्ठ-852.</ref> हुआ है; परन्तु वहाँ उन्हें 'रामो मार्गवेयः' कहा गया है, जिसका अर्थ आचार्य सायण के अनुसार 'मृगवु' नामक स्त्री का पुत्र है।<ref>ऐतरेयब्राह्मणम् (सायण भाष्य एवं हिन्दी अनुवाद सहित) भाग-2, संपादक एवं अनुवादक- डॉ० सुधाकर मालवीय, तारा प्रिंटिंग वर्क्स, वाराणसी, संस्करण-1983, पृष्ठ-1201.</ref> [[शतपथ ब्राह्मण]] में एक स्थल पर<ref name="अ" /> 'राम' शब्द का प्रयोग हुआ है। यहाँ 'राम' यज्ञ के आचार्य के रूप में हैं तथा उन्हें 'राम औपतपस्विनि' कहा गया है।<ref>शतपथब्राह्मण (सटीक), भाग-1, विजयकुमार गोविंदराम हासानंद, दिल्ली, संस्करण-2010, पृष्ठ-657.</ref> तात्पर्य यह है कि प्रचलित राम का अवतारी रूप [[वाल्मीकि रामायण|वाल्मीकीय रामायण]] एवं [[पुराण|पुराणों]] की ही देन है।
== जन्म ==
[[File:The Birth of rama.jpg |thumb|राम-जन्म, अकबर की रामायण से ]]
राम की कथा से सम्बद्ध सर्वाधिक प्रमाणभूत ग्रन्थ वाल्मीकीय रामायण में राम के जन्म के सम्बन्ध में निम्नलिखित वर्णन उपलब्ध है:-
'''...................... चैत्रे नावमिके तिथौ।।'''
'''नक्षत्रेऽदितिदैवत्ये स्वोच्चसंस्थेषु पञ्चसु।'''
'''ग्रहेषु कर्कटे लग्ने वाक्पताविन्दुना सह।।'''<ref name=":0">श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण (सटीक), प्रथम भाग, बालकाण्ड- 1.1.97; गीताप्रेस गोरखपुर, संस्करण-1996 ई०, पृष्ठ-57.</ref>
अर्थात् चैत्र मास की नवमी तिथि में, पुनर्वसु नक्षत्र में, पाँच ग्रहों के अपने उच्च स्थान में रहने पर तथा कर्क लग्न में चन्द्रमा के साथ बृहस्पति के स्थित होने पर राम का जन्म हुआ।
यहाँ केवल बृहस्पति तथा चन्द्रमा की स्थिति स्पष्ट होती है। आगे पन्द्रहवें श्लोक में सूर्य के उच्च होने का उल्लेख है। प्रायः विद्वानों ने राम के जन्म के समय में सूर्य, मंगल, बृहस्पति, शुक्र तथा शनि को उच्च में स्थित माना है।
=== जन्म-समय पर आधुनिक शोध ===
परम्परागत रूप से राम का जन्म त्रेता युग में माना जाता है। हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार एक चतुर्युगी में 43,20,000 वर्ष होते हैं। चूँकि कलियुग का अभी प्रारंभ ही हुआ है (लगभग 5,500 वर्ष ही बीते हैं) और राम का जन्म त्रेता के अंत में हुआ, अतः परंपरागत रूप से राम का जन्म आज से लगभग 8,80,100 वर्ष पहले माना जाता है।
प्रख्यात शोधकर्ता डॉ॰ [[पद्माकर विष्णु वर्तक]] ने अपने ग्रंथ 'वास्तव रामायण' में मुख्यतः ग्रहगतियों के आधार पर गणित करके<ref>A REALISTIC APPROACH TO THE VALMIKI RAMAYANA, ibid, p.290-300.</ref> वाल्मीकीय रामायण में उल्लिखित ग्रहस्थिति के अनुसार राम की जन्म-तिथि 4 दिसंबर 7323 ईसापूर्व सुनिश्चित की है।<ref>A REALISTIC APPROACH TO THE VALMIKI RAMAYANA, ibid, p.300.</ref>
डॉ॰ वर्तक के शोध के अनेक वर्षों बाद 'आई-सर्व' के एक शोध दल ने राम का जन्म 10 जनवरी 5114 ईसापूर्व में सिद्ध किया। परंतु यह समय संदेहास्पद माना गया क्योंकि उनके द्वारा प्रयुक्त सॉफ्टवेयर ईसा पूर्व 3000 से पहले का सही ग्रह-गणित करने में सक्षम नहीं था।<ref>इतिहास का उपहास (राम की जन्मतिथि एवं जन्मकुण्डली की भ्रामक व्याख्या का निराकरण), विनय झा, अखिल भारतीय विद्वत् परिषद्, वाराणसी, संस्करण-2015, पृष्ठ-10-11.</ref>
== जीवन की प्रमुख घटनाएँ ==
=== बालपन और सीता-स्वयंवर ===
पुराणों के अनुसार राम का जन्म वर्तमान [[उत्तर प्रदेश]] के [[अयोध्या]] में हुआ था। राम के पूर्वज रघु थे।
[[File:Birth of rama.jpg|राम जन्म|thumb]]
राम बचपन से ही शान्त स्वभाव के वीर पुरूष थे। उन्होंने मर्यादाओं को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया। राम ने अपने तीनों भाइयों के साथ गुरु वशिष्ठ से शिक्षा प्राप्त की। किशोरावस्था में गुरु [[विश्वामित्र]] उन्हें वन में राक्षसों द्वारा मचाए जा रहे उत्पात को समाप्त करने के लिए साथ ले गए, जहाँ राम ने [[ताड़का]] नामक राक्षसी का वध किया तथा [[मारीच]] को पलायन के लिए मजबूर किया। इस दौरान गुरु विश्वामित्र उन्हें [[मिथिला]] ले गए, जहाँ राजा [[जनक]] ने अपनी पुत्री [[सीता]] के लिए स्वयंवर आयोजित किया था। राम ने शिव के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर उसे भंग कर दिया और सीता से उनका विवाह हुआ।
[[File:Rama breaking the bow to win Sita as wife.jpg|thumb ]]
धनुष टूटने की ध्वनि सुनकर महर्षि [[परशुराम]] वहाँ आ गए और क्रोधित हुए। लक्ष्मण से उनका विवाद हुआ, तब राम ने बीच-बचाव किया। इसके पश्चात् राम और सीता सुखपूर्वक अयोध्या में रहने लगे।
[[File:Rama Sita Playing.jpg|thumb|सीताराम]]
=== वनवास ===
[[File:Rama, Sita, Lakshmana in exile in forest having a meal, pahari painting.jpg|सीताराम और लक्ष्मण वनवास के दौरान|thumb ]]
राजा दशरथ के वानप्रस्थ लेने का समय आने पर उन्होंने राम को राज्य सौंपने का विचार किया। परंतु कैकेयी की दासी [[मन्थरा]] ने कैकेयी को भड़का दिया। कैकेयी ने राजा दशरथ से पूर्व में मिले दो वरों के आधार पर राम के लिए 14 वर्ष का वनवास और भरत के लिए राजसिंहासन मांग लिया। पिता की आज्ञा का पालन करते हुए राम, उनकी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण वनवास के लिए निकल पड़े।
=== सीता का हरण ===
वनवास के समय, लंका के राजा [[रावण]] ने सीता का हरण किया। रामायण के अनुसार, रावण के मामा [[मारीच]] ने सुनहरे हिरण का रूप धारण किया। सीता के अनुरोध पर राम उसका पीछा करते हुए दूर चले गए। राम के बाण से मरते हुए मारीच ने राम की आवाज़ में लक्ष्मण को पुकारा। सीता के आग्रह पर लक्ष्मण राम की खोज में गए और सुरक्षा के लिए एक रेखा खींची जिसे [[लक्ष्मण रेखा]] कहा जाता है। लक्ष्मण की अनुपस्थिति में रावण ने साधु का वेश धरकर सीता का अपहरण कर लिया।
[[File:Ravi Varma-Ravana Sita Jathayu.jpg|Ravi_Varma-Ravana_Sita_Jathayu|thumb]]
सीता की खोज में राम और लक्ष्मण की भेंट [[हनुमान]] और [[सुग्रीव]] से हुई। हनुमान राम के सबसे बड़े भक्त बने।
=== रावण का वध ===
[[File:Anonymous - Rama and Laksmana Fighting Ravana - 1953.357 - Cleveland Museum of Art.tiff|thumb]]
सीता को पुनः प्राप्त करने के लिए राम ने हनुमान, विभीषण और वानर सेना की मदद से रावण और उसकी सेना को पराजित किया। लौटते समय राम ने विभीषण को लंका का राजा नियुक्त किया।
=== अयोध्या वापसी ===
[[File:Rama and Sita, with Lakshmana returning to Ayodhya.jpg|thumb|राम का अयोध्या में पुनः आगमन]]
रावण को परास्त करने के पश्चात् राम, सीता, लक्ष्मण और अन्य वानर पुष्पक विमान से अयोध्या लौटे। राम और सीता का अयोध्या में राज्याभिषेक हुआ।
[[File:Lord Rama Raj Tilak Ramayana.jpg|thumb|सीताराम का राज्याभिषेक ]]
== दैहिक त्याग ==
[[File:Rama meet Brahma at heaven.jpg |thumb| ब्रह्मा द्वारा राम का स्वर्ग मे स्वागत]]
सीता के भूगर्भ में समा जाने के पश्चात, राम ने अपने दोनों पुत्रों [[कुश]] और [[लव]] को राज्य सौंप दिया। अंततः उन्होंने सरयू नदी के तट पर गुप्तार घाट में दैहिक त्याग किया और पुनः [[साकेतधाम]] में अपने दिव्य स्वरूप में विराजमान हो गए।
== संबंधित पृष्ठ ==
* [[रामायण]]
* [[सीता]]
* [[रामचरितमानस]]
* [[साकेतधाम]]
* [[हनुमान]]
* [[जैन धर्म में राम]]
* [[रामानंदी संप्रदाय]]
* [[तुलसीदास]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
{{Commonscat|Rama|राम}}
* [https://www.valmiki.iitk.ac.in/sloka?field_kanda_tid=1&language=dv&field_sarga_value=1 वाल्मीकि रामायण]
{{श्री राम चरित मानस}}
{{दशावतार}}
{{हिन्दू देवी देवता}}
{{Authority control}}
[[श्रेणी:हिन्दू धर्म]]
[[श्रेणी:राम]]
[[श्रेणी:अयोध्याकुल]]
[[श्रेणी:विष्णु अवतार]]
[[श्रेणी:रामायण के पात्र]]
cpjbxrh3co31s5btuwodt99izl39joi
यूट्यूब
0
8066
6591354
6579143
2026-07-23T15:32:48Z
Paul Sumesh
933321
6591354
wikitext
text/x-wiki
{{Wikidata Infobox}}
'''यूट्यूब''' (YouTube) एक [[अमेरिकी]] ऑनलाइन वीडियो शेयरिंग और सोशल मीडिया मंच है, जिसका स्वामित्व [[गूगल]] के पास है। इसकी स्थापना फरवरी 2005 में [[पेपाल]] के तीन पूर्व कर्मचारियों— [[चाड हर्ले]], [[स्टीव चैन]] और [[जावेद करीम]] ने मिलकर की थी। नवम्बर 2006 में [[गूगल]] ने इसे 1.65 अरब अमेरिकी डॉलर में खरीद लिया था और तब से यह गूगल की ही एक सहायक कंपनी के रूप में काम कर रहा है।
यूट्यूब अपने उपयोगकर्ताओं को वीडियो देखने, अपलोड करने, शेयर करने, प्लेलिस्ट बनाने, वीडियो पर टिप्पणी करने, रिपोर्ट करने और अन्य उपयोगकर्ताओं के चैनल की सदस्यता लेने की सुविधा प्रदान करता है। इस मंच पर आम लोगों से लेकर कई बड़ी मीडिया कंपनियों द्वारा अपलोड किए गए वीडियो मौजूद हैं। इनमें वीडियो क्लिप, टीवी कार्यक्रम, संगीत वीडियो, मूवी ट्रेलर, लाइव स्ट्रीम और वीडियो [[चिट्ठा|ब्लॉगिंग]] आदि शामिल हैं। गैर-पंजीकृत उपयोगकर्ता साइट पर केवल वीडियो देख सकते हैं, जबकि पंजीकृत सदस्य असीमित वीडियो अपलोड कर सकते हैं और टिप्पणियाँ कर सकते हैं। ऐसे वीडियो जिनमें [[हिंसा|हिंसक]], आपत्तिजनक, या 18 वर्ष से कम आयु के दर्शकों के लिए अनुपयुक्त सामग्री होती है, उन्हें आयु-प्रतिबंधित श्रेणी में रखा जाता है, जिन्हें केवल 18+ आयु के पंजीकृत सदस्य ही देख सकते हैं।
यूट्यूब अपनी आय मुख्य रूप से विज्ञापनों के माध्यम से अर्जित करता है, जो साइट की सामग्री और दर्शकों की रुचियों के आधार पर दिखाए जाते हैं। साइट पर अधिकांश वीडियो निःशुल्क उपलब्ध हैं, लेकिन कुछ प्रीमियम सामग्री के लिए भुगतान करना पड़ता है। इसमें '[[यूट्यूब प्रीमियम]]' की सदस्यता शामिल है, जो उपयोगकर्ताओं को विज्ञापन-रहित वीडियो देखने की सुविधा देती है। इसके अतिरिक्त, कुछ विशेष वीडियो और फ़िल्में केवल किराए पर लेकर या प्रीमियम सदस्यता के माध्यम से ही देखी जा सकती हैं।
Jana Nayagan (OTT Rights South Language also Amazon Prime Video & Hindi Version also Amazon Prime Video), (Satellite Rights Hindi Version also Zee Cinema).<ref>{{Cite web |date=26 July 2026 |title=Jana Nayagan OTT Rights & Hindi Dubbed Satellite Rights Updates YouTube Subscribe to SR Filmy Point|url=https://youtube.com/videos/jana-nayagan-ott-rights-and-hindi-dubbed-satellite-rights-updates-youtube-subscribe-sr-filmy-point/|publisher=YouTube|access-date=26 July 2026|archive-date=26 July 2026}}</ref><br>Toxic (OTT Rights South Language also Amazon Prime Video and Hindi Version also Amazon Prime Video), (Satellite Rights Hindi Version also Zee Cinema).<ref>{{Cite web |date=27 August 2026 |title=Toxic OTT Rights and Hindi Dubbed Satellite Rights Updates YouTube Subscribe to SR Filmy Point|url=https://youtube.com/videos/toxic-ott-rights-and-hindi-dubbed-satellite-rights-updates/publisher=YouTube|access-date=27 August 2026|archive-date=27 August 2026}}</ref>
== इतिहास ==
[[चित्र:Youtube founders.jpg|thumb|400px|''दाँए से बाँए:'' [[चाड हर्ले]], [[स्टीव चैन]], और [[जावेद करीम]]|बाएँ]]
[[पेपाल]] के तीन पूर्व कर्मचारियों— [[चाड हर्ले]], [[स्टीव चैन]], और [[जावेद करीम]] ने मध्य फरवरी 2005 में यूट्यूब की स्थापना की थी।<ref name=":0">[http://www.usatoday.com/tech/news/2006-10-11-youtube-karim_x.htm "यूट्यूब का एक तीसरा संस्थापक भी है"] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120728054901/http://www.usatoday.com/tech/news/2006-10-11-youtube-karim_x.htm |date=28 जुलाई 2012 }}, USATODAY, अक्टूबर 11, 2006.</ref> [[सैन ब्रूनो, कैलिफोर्निया|सैन ब्रूनो]] आधारित यह सेवा उपयोगकर्ताओं द्वारा निर्मित वीडियो सामग्री, जिसमें मूवी क्लिप्स, टीवी क्लिप्स और संगीत वीडियो शामिल हैं, को प्रदर्शित करने के लिए एडोब फ़्लैश और एचटीएमएल5 तकनीक का उपयोग करती है। इसके साथ ही शौकिया [[टेलीविजन कार्यक्रम|सामग्री]] जैसे छोटे संगीत वीडियो और वीडियो ब्लॉग भी इस पर उपलब्ध हैं। अक्टूबर 2006 में, [[गूगल|गूगल इंक.]] ने घोषणा की थी कि उसने इस कम्पनी का अधिग्रहण करने के लिए 1.65 अरब [[अमेरिकी डॉलर]] के स्टॉक का समझौता किया है। 13 नवम्बर 2006 को यह समझौता पूरा कर लिया गया।<ref>{{Cite web |url=http://www.theage.com.au/news/Busness/Google-closes-A2b-YouTube-deal/2006/11/14/1163266548827.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071220214911/http://www.theage.com.au/news/Busness/Google-closes-A2b-YouTube-deal/2006/11/14/1163266548827.html |archive-date=20 दिसंबर 2007 |url-status=live }}</ref>
यूट्यूब पर अपलोड किया गया सबसे पहला वीडियो ''[[मी ऐट द ज़ू]]'' (मैं चिड़ियाघर में) है, जिसमें इसके सह-संस्थापक [[जावेद करीम]] सैन डिएगो चिड़ियाघर में दिखाई दे रहे हैं। यह 23 अप्रैल 2005 को अपलोड किया गया था और इसे आज भी यूट्यूब पर देखा जा सकता है।<ref>{{cite web|url=https://www.youtube.com/watch?v=jNQXAC9IVRw|title=मी ऐट द ज़ू (मैं चिड़ियाघर में)|date=23 अप्रैल 2005|publisher=यूट्यूब|archive-url=https://web.archive.org/web/20190916011958/https://www.youtube.com/watch?v=jNQXAC9IVRw|archive-date=16 सितंबर 2019|accessdate=२९ अप्रैल २०१६|url-status=live}}</ref>
वर्तमान में यूट्यूब के 5 सबसे अधिक सब्सक्राइब किए गए चैनल निम्नलिखित हैं:
# [[मिस्टर बीस्ट]]
# [[टी-सीरीज़]]
# [[कोकोमेलन]]
# [[सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न|सेट इंडिया]]
# [[व्लाद एंड निकी]]
मीडिया में अक्सर दोहराई जाने वाली एक कहानी के अनुसार, [[चाड हर्ले]] और [[स्टीव चैन]] को 2005 के शुरुआती महीनों के दौरान सैन फ्रांसिस्को में चैन के अपार्टमेंट में हुई एक डिनर पार्टी में लिए गए वीडियो को बाँटने में काफी कठिनाई आई थी, और इसी घटना से यूट्यूब का विचार जन्मा। करीम इस पार्टी में शामिल नहीं थे और उन्होंने इस बात से इनकार किया है कि ऐसी कोई पार्टी हुई थी। चैन ने बाद में इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, "यह एक कहानी है जिसे पचाने में आसान बनाने के लिए विपणन विचारों से मजबूत किया गया था।"<ref name="टाइम">{{cite news|url=http://www.time.com/time/printout/0,8816,1570721,00.html|title=The Gurus of YouTube|last=क्लाउड|first=जॉन|date=16 दिसंबर 2006|work=टाइम पत्रिका|accessdate=29 नवंबर 2008|archive-url=https://web.archive.org/web/20070219222540/http://www.time.com/time/printout/0%2C8816%2C1570721%2C00.html|archive-date=19 फ़रवरी 2007|language=en|trans-title=यूट्यूब के गुरु|url-status=dead}}</ref>
करीम ने बताया है कि यूट्यूब बनाने की असली प्रेरणा उन्हें 2004 में हिन्द महासागर में आई सुनामी की ऑनलाइन वीडियो क्लिप्स न मिल पाने से मिली थी।<ref>{{cite web|url=https://usatoday30.usatoday.com/tech/news/2006-10-11-youtube-karim_x.htm|title=Surprise! There's a third YouTube co-founder|last=हॉपकिंस|first=जिम|date=अक्टूबर 11, 2006|website=यूएसए टुडे|language=en|trans-title=आश्चर्य! वहाँ एक तीसरा यूट्यूब के सह-संस्थापक है|archive-url=https://web.archive.org/web/20130318193654/http://usatoday30.usatoday.com/tech/news/2006-10-11-youtube-karim_x.htm|archive-date=18 मार्च 2013|accessdate=19 जून 2013|url-status=live}}</ref> वहीं, हर्ले और चैन ने कहा कि यूट्यूब के लिए उनका मूल विचार एक [[ऑनलाइन डेटिंग सेवा]] का वीडियो संस्करण बनाना था, जो उस समय की लोकप्रिय वेबसाइट ''हॉट और नॉट'' से प्रभावित था।<ref>{{cite web|url=http://www.time.com/time/magazine/article/0,9171,1570795-5,00.html|title=The YouTube Gurus|last=क्लाउड|first=जॉन|website=टाइम|language=en|trans-title=यूट्यूब के गुरु|archive-url=https://web.archive.org/web/20130814024303/http://www.time.com/time/magazine/article/0,9171,1570795-5,00.html|archive-date=14 अगस्त 2013|access-date=29 अप्रैल 2016|url-status=dead}}</ref>
यूट्यूब की शुरुआत एक उद्यम वित्त पोषित प्रौद्योगिकी स्टार्टअप के रूप में हुई थी। इसे नवम्बर 2005 और अप्रैल 2006 के बीच सिकोइया कैपिटल से 1.15 करोड़ डॉलर का निवेश प्राप्त हुआ था।<ref>{{Cite news|url=https://www.nytimes.com/2006/10/10/technology/venture-firm-shares-a-youtube-jackpot.html|title=Venture Firm Shares a YouTube Jackpot|last=हेल्फ्ट|first=मिगुयेल|date=2006-10-10|work=द न्यूयॉर्क टाइम्स|access-date=2025-07-24|last2=रिच्टेल|first2=मैट्ट|language=en-US|issn=0362-4331}}</ref> यूट्यूब का प्रारम्भिक मुख्यालय सैन मेटिओ (कैलिफोर्निया) में एक पिज़्ज़ेरिया और जापानी रेस्तरां के ऊपर स्थित था।<ref>{{cite news|url=http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2006/10/06/AR2006100600660.html|title=Ready for Its Close-Up|last=केहेलौन्न|first=सारा|date=7 अक्टूबर 2006|work=वाशिंगटन पोस्ट|accessdate=नवम्बर 29, 2008|archive-url=https://web.archive.org/web/20110504054300/http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2006/10/06/AR2006100600660.html|archive-date=4 मई 2011|language=en|trans-title=अपने घनिष्ठ-अप के लिए तैयार|url-status=live}}</ref> वेबसाइट का [[डोमेन नाम]] `www.youtube.com` 14 फरवरी 2005 को सक्रिय किया गया था और बाद के महीनों में इस वेबसाइट को पूरी तरह से विकसित किया गया।<ref>{{cite web|url=http://whois.domaintools.com/youtube.com|title=Whois Record for Youtube.com|website=डोमेन टूल|archive-url=https://web.archive.org/web/20190402130611/http://whois.domaintools.com/youtube.com|archive-date=2 अप्रैल 2019|access-date=15 जून 2020|url-status=live}}</ref>
== सामाजिक प्रभाव ==
2005 में यूट्यूब की शुरुआत से पहले, आम कंप्यूटर उपयोगकर्ताओं के लिए ऑनलाइन वीडियो पोस्ट करने के बहुत कम और आसान तरीके उपलब्ध थे। इसके उपयोग में आसान इंटरफ़ेस ने यह संभव बनाया कि बुनियादी कंप्यूटर ज्ञान रखने वाला कोई भी व्यक्ति वीडियो पोस्ट कर सके, जिसे कुछ ही मिनटों में लाखों लोग देख सकते हैं। यूट्यूब ने विविध विषयों पर वीडियो साझा करने की इस प्रक्रिया को [[इंटरनेट संस्कृति]] का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है।
यूट्यूब के सामाजिक प्रभाव का एक शुरुआती उदाहरण 2006 में 'बस अंकल' वीडियो की सफलता थी। इस वीडियो में [[हॉन्ग कॉन्ग|हांगकांग]] की एक बस में एक युवा और एक बुजुर्ग व्यक्ति के बीच हुई तीखी बहस को दिखाया गया था, जिसकी मुख्यधारा की मीडिया में व्यापक चर्चा हुई थी। व्यापक कवरेज प्राप्त करने वाला एक अन्य शुरुआती वीडियो 'गिटार' था, जिसमें जोहान पाशेलबेल के 'कैनन' की प्रस्तुति एक इलेक्ट्रिक गिटार पर दी गई थी। इस वीडियो में कलाकार का नाम नहीं बताया गया था, फिर भी इसे लाखों दर्शकों ने देखा। बाद में ''[[दि न्यू यॉर्क टाइम्स|द न्यूयॉर्क टाइम्स]]'' ने खुलासा किया कि वह गिटारवादक [[दक्षिण कोरिया]] का 23 वर्षीय जियोंग-ह्युन लिम था, जिसने यह ट्रैक अपने बेडरूम में रिकॉर्ड किया था।
यूट्यूब प्लेटफॉर्म पर लोग अलग-अलग उद्देश्यों से अपना चैनल बनाते हैं, लेकिन लक्ष्य चाहे जो भी हो, यूट्यूब लगभग हर व्यक्ति के उद्देश्य को पूरा करने में सहायक है। कुछ लोग मज़ेदार वीडियो बनाकर दर्शकों का मनोरंजन करना चाहते हैं, जबकि अन्य इसका उपयोग अपने व्यवसाय के प्रचार-प्रसार के लिए करते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://buyingrealyoutubeviews.com/top-notch-advantages-of-creating-a-youtube-channel/|title=Top-Notch Advantages Of Creating A Youtube Channel! – BRYV|language=en-US|access-date=2023-01-12}}</ref>
== सेवा की शर्तें ==
यूट्यूब की सेवा शर्तों के अनुसार,<ref>[http://youtube.com/t/terms यूट्यूब इस्तेमाल करने ] की शर्तें ५ मई २००७ तक</ref> कोई भी उपयोगकर्ता केवल तभी वीडियो अपलोड कर सकता है जब उसके पास वीडियो का कॉपीराइट हो या उसमें दिखाए गए लोगों की अनुमति हो। साइट पर अश्लीलता, नग्नता, मानहानि, उत्पीड़न, अनधिकृत वाणिज्यिक विज्ञापन और आपराधिक आचरण को प्रोत्साहित करने वाली सामग्री सख्त वर्जित है।
अपलोड करने वाला व्यक्ति यूट्यूब को यह अधिकार देता है कि वह अपलोड की गई सामग्री को किसी भी उद्देश्य के लिए वितरित या संशोधित कर सके। हालाँकि, जब अपलोडर अपनी सामग्री को साइट से हटा देता है, तो यह लाइसेंस स्वतः रद्द हो जाता है। उपयोगकर्ता साइट पर वीडियो केवल तभी तक देख सकते हैं जब तक कि वे इन सेवा शर्तों से सहमत हों; बिना अनुमति के वीडियो डाउनलोड करना या उसकी नकल करना निषिद्ध है।
== यूट्यूब की कमाई ==
मई 2007 में, यूट्यूब ने अपना पार्टनर प्रोग्राम लॉन्च किया था। यह 'गूगल एडसेंस' पर आधारित एक प्रणाली है, जो वीडियो अपलोड करने वालों को साइट पर विज्ञापनों द्वारा उत्पन्न राजस्व का हिस्सा प्राप्त करने की अनुमति देती है। यूट्यूब आमतौर पर वीडियो से होने वाली विज्ञापन कमाई का 45 प्रतिशत हिस्सा स्वयं रखता है, जबकि 55 प्रतिशत हिस्सा अपलोडर को दिया जाता है।<ref>{{cite web |last1=Edwards |first1=Jim |title=The biggest stars on YouTube make huge incomes ... yet they can't keep the vast majority of it |url=https://www.businessinsider.com/money-youtube-stars-actually-make-2014-2 |website=Business Insider}}</ref><ref>{{cite web |last1=Carmody |first1=Tim |title=It's not TV, it's the Web: YouTube partners complain about Google ads, revenue sharing |url=https://www.theverge.com/2013/3/4/4062810/youtube-partners-complain-revenue-sharing-google-ads |website=The Verge |date=4 मार्च 2013}}</ref> वर्तमान में यूट्यूब सहयोगी कार्यक्रम के दस लाख से अधिक सदस्य हैं।<ref>{{cite web |title=YouTube Official Blog |url=https://www.youtube.com/yt/press/statistics.html |website=blog.youtube |language=en-us}}</ref>
यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम में शामिल होकर कमाई शुरू करने के लिए क्रिएटर के चैनल पर कम से कम 1,000 सदस्य और पिछले 12 महीनों के भीतर 4,000 घंटे का वॉच-टाइम होना एक प्रमुख मानदंड है।<ref>{{Cite web|url=https://youtubemonetized.com/how-to-reach-1000-subs/|title=How to Reach 1,000 Subs? - YouTube Monetized|date=2022-01-20|language=en-US|access-date=2022-12-08}}</ref><ref>{{cite web |title=Additional Changes to the YouTube Partner Program (YPP) to Better Protect Creators |url=https://youtube-creators.googleblog.com/2018/01/additional-changes-to-youtube-partner.html |website=blog.youtube |language=en-us}}</ref> (इस नियम को 16 जनवरी 2018 को लागू किया गया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल गुणवत्तापूर्ण वीडियो का ही मुद्रीकरण हो, हालाँकि छोटे चैनलों ने इस नीति की आलोचना की थी।) इसके अतिरिक्त, 2013 में यूट्यूब ने बड़े चैनलों (कम से कम 1000 सदस्य वाले) के लिए एक विकल्प पेश किया, जिससे वे दर्शकों से वीडियो देखने के लिए सशुल्क सदस्यता ले सकते हैं।<ref>{{cite web |last1=McCue |first1=T. J. |title=Google's YouTube Introduces Paid Content Subscriptions |url=https://www.forbes.com/sites/tjmccue/2013/01/30/google-youtube-introduces-paid-content-subscriptions/#7841841b2625 |website=Forbes |language=en}}</ref>
यूट्यूब की नीतियां "विज्ञापनदाता-अनुकूल" सामग्री पर जोर देती हैं। ऐसे वीडियो जिनमें अत्यधिक हिंसा, अभद्र भाषा, यौन सामग्री, या युद्ध, राजनीतिक संघर्ष और प्राकृतिक आपदाओं जैसे विवादास्पद/संवेदनशील विषय शामिल होते हैं, उन पर मुद्रीकरण प्रतिबंधित होता है।<ref>{{cite web |last1=Spangler |first1=Todd |last2=Spangler |first2=Todd |title=YouTube Explains Which Profanities and ‘Inappropriate Language’ Are Not OK for Ad-Supported Videos |url=https://variety.com/2019/digital/news/yo'utube-profanity-ad-supported-video-demonetized-1203107619/ |website=Variety |date=14 जनवरी 2019}}</ref> सितंबर 2016 में, जब यूट्यूब ने इन उल्लंघनों के बारे में सूचना प्रणाली शुरू की, तो कई बड़े क्रिएटर्स ने इसे "सेंसरशिप" बताते हुए इसका विरोध किया था।<ref>{{cite web |last1=Robertson |first1=Adi |title=Why is YouTube being accused of censoring vloggers? |url=https://www.theverge.com/2016/9/1/12753108/youtube-is-over-party-advertising-monetization-censorship |website=The Verge |date=1 सितम्बर 2016}}</ref>
नवंबर 2020 (अमेरिका में) और जून 2021 (दुनिया भर में) तक लागू किए गए नए नियमों के अनुसार, यूट्यूब यह अधिकार सुरक्षित रखता है कि वह प्लेटफ़ॉर्म पर मौजूद किसी भी वीडियो पर विज्ञापन चला सकता है, भले ही उस वीडियो को अपलोड करने वाला चैनल यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम का हिस्सा न हो। ऐसी स्थिति में सारा विज्ञापन राजस्व सीधे गूगल को जाता है और अपलोडर को इसका कोई हिस्सा नहीं मिलता।<ref>{{cite web |title=YouTube announces changes in its terms of services |url=https://www.telegraphindia.com/business/youtube-announces-changes-in-its-terms-of-services/cid/1816154 |website=www.telegraphindia.com}}</ref><ref>{{cite web |last1=Graham |first1=Megan |title=YouTube will put ads on non-partner videos but won't pay the creators |url=https://www.cnbc.com/2020/11/19/youtube-will-put-ads-on-non-partner-videos-but-wont-pay-the-creators.html |website=CNBC |language=en}}</ref>
=== यूट्यूब क्रिएटर पुरस्कार ===
यूट्यूब अपने प्लेटफ़ॉर्म के सबसे लोकप्रिय चैनलों को उनकी सफलता के लिए 'यूट्यूब प्ले बटन' (क्रिएटर रिवॉर्ड्स) देकर सम्मानित करता है।<ref>{{cite web |title=Youtube Creator Awards |url=https://www.indiasikho.com/youtube-creator-awards/ |date=4 दिसम्बर 2022}}</ref> सदस्य की संख्या के आधार पर निम्नलिखित पुरस्कार दिए जाते हैं:
* 1 लाख पर: सिल्वर प्ले बटन
* 10 लाख सदस्य पर: गोल्ड प्ले बटन
* 1 करोड़ सदस्य पर: डायमंड प्ले बटन
* 5 करोड़ सदस्य पर: कस्टम (रूबी) प्ले बटन
* 10 करोड़ सदस्य पर: रेड डायमंड प्ले बटन
== आलोचना ==
यूट्यूब की अक्सर इस बात के लिए आलोचना की जाती है कि वह ऑनलाइन सामग्री के [[कॉपीराइट]] (प्रतिलिप्यधिकार) कानूनों का सख्ती से पालन नहीं करता है। कोई भी वीडियो अपलोड करते समय, उपयोगकर्ता को स्क्रीन पर निम्नलिखित चेतावनी संदेश दिखाया जाता है:
<blockquote>"किसी भी टीवी शो, संगीत वीडियो, संगीत कार्यक्रम या ऐसी सामग्री जिसे आपने स्वयं नहीं बनाया है, उसे मूल स्वामी की अनुमति के बिना अपलोड न करें। हमारा कॉपीराइट टिप्स पेज और समुदाय दिशानिर्देश आपको दूसरों के कॉपीराइट का उल्लंघन न करने में मदद करेंगे।"</blockquote>
इस चेतावनी के बावजूद, यूट्यूब पर टीवी शो, फिल्मों और संगीत वीडियो की कई अनधिकृत क्लिप्स लगातार मौजूद रहती हैं। चूँकि यूट्यूब अपलोड होने से पहले सभी वीडियो की मैन्युअल रूप से जांच नहीं करता है, इसलिए 'डिजिटल मिलेनियम कॉपीराइट एक्ट' के तहत कॉपीराइट उल्लंघन का नोटिस जारी करने की जिम्मेदारी स्वयं कॉपीराइट धारक की होती है। [[वायकॉम]] और इंग्लिश [[प्रीमियर लीग]] जैसे कई बड़े संगठनों ने यूट्यूब पर कॉपीराइट उल्लंघन को रोकने में अपर्याप्त प्रयास करने का आरोप लगाते हुए उस पर [[मुकदमा]] किया है। वायकॉम ने 1 अरब डॉलर के [[क्षतिपूर्ति|हर्जाने]] की माँग करते हुए दावा किया था कि उसने यूट्यूब पर अपनी सामग्री की 1,50,000 से अधिक अनधिकृत क्लिप्स पाई हैं, जिन्हें 1.5 अरब से अधिक बार देखा जा चुका था। इसके जवाब में यूट्यूब ने तर्क दिया कि वह सामग्री के मालिकों को उनके अधिकारों की रक्षा करने में मदद कर रहा है, जो उसकी कानूनी बाध्यताओं से कहीं अधिक है। वायकॉम के मुकदमे के बाद, यूट्यूब ने एक उन्नत 'डिजिटल फिंगरप्रिंटिंग' प्रणाली शुरू की, जो अपलोड किए जा रहे वीडियो में कॉपीराइट उल्लंघन की स्वचालित रूप से पहचान करती है और उसे रोकती है।
जुलाई 2008 में, वायकॉम के पक्ष में एक अदालती फैसला आया, जिसमें यूट्यूब को साइट पर वीडियो देखने वाले उपयोगकर्ताओं के डेटा और देखने की आदतों का विवरण सौंपने का आदेश दिया गया। इस आदेश ने निजता के संबंध में बड़ी परेशानी खड़ी कर दी, क्योंकि किसी भी उपयोगकर्ता के देखने की आदतों की पहचान उसके [[आईपी पता|आईपी पते]] और लॉग-इन आईडी के संयोजन से की जा सकती थी। 'इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फाउंडेशन' ने इस अदालती फैसले की कड़ी आलोचना की और इसे निजता के अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन बताया। हालाँकि, जिला न्यायालय के न्यायाधीश लुई स्टैंटन ने इन निजता संबंधी चिंताओं को 'काल्पनिक' बताते हुए खारिज कर दिया और यूट्यूब को लगभग 12 [[टेराबाइट]] डेटा वाले दस्तावेज़ सौंपने का आदेश दिया। इसके साथ ही, न्यायाधीश स्टैंटन ने वायकॉम के उस अनुरोध को ठुकरा दिया जिसमें यूट्यूब के [[खोज इंजन|सर्च इंजन]] का [[स्रोत कोड|सोर्स कोड]] माँगा गया था। अदालत ने यह भी कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि यूट्यूब ने स्वयं जानबूझकर वीडियो के कॉपीराइट का उल्लंघन किया हो।
कॉपीराइट के अतिरिक्त, यूट्यूब को अपने प्लेटफॉर्म पर आपराधिक और अनुचित सामग्री वाले कुछ वीडियो के कारण भी कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है। हालाँकि यूट्यूब की 'सेवा की शर्तें' अनुचित, हिंसक या [[मानहानि]] करने वाली सामग्री अपलोड करने पर सख्त रोक लगाती हैं, लेकिन अपलोड होने वाले लाखों वीडियो की तुरंत जांच करना असंभव है; इस कारण समय-समय पर ऐसी कमियाँ सामने आती रहती हैं। यूट्यूब पर अपलोड किए गए कुछ बेहद विवादास्पद वीडियो में 'होलोकॉस्ट से इनकार' और 'हिल्सबोरो आपदा' से जुड़ी असंवेदनशील सामग्री शामिल रही है।
== प्रतिबंध और सेंसरशिप ==
यूट्यूब की शुरुआत के बाद से, कई देशों—जिनमें [[तूनिसीया]], [[थाईलैंड]] और [[ईरान]] शामिल हैं—ने विभिन्न कारणों से इस प्लेटफॉर्म पर रोक लगाई, जिसे बाद में हटा लिया गया। 1 अक्टूबर 2007 को [[तुर्की]] में भी यूट्यूब के कुछ पेजों को प्रतिबंधित कर दिया गया था, हालांकि दो दिन बाद यह रोक हटा ली गई। इसके बाद 22 जनवरी 2008 को तुर्की में एक बार फिर यूट्यूब पर रोक लगाई गई, जिसे तीन दिन बाद हटा लिया गया। बाद में 5 मई 2008 से तुर्की में यूट्यूब पर एक लंबा प्रतिबंध लगा रहा। [[संयुक्त अरब अमीरात]] में भी यूट्यूब के कुछ विशिष्ट पेजों और वीडियो पर रोक लगी हुई है।
23 फरवरी 2008 को, [[पाकिस्तान]] ने पैगंबर [[मुहम्मद]] के चित्र दिखाकर [[इस्लाम]] के खिलाफ अपमानजनक सामग्री प्रदर्शित करने का आरोप लगाते हुए यूट्यूब को अपने देश में प्रतिबंधित कर दिया था।<ref>{{cite web|date=23 फरवरी 2008|archive-url= https://web.archive.org/web/20080225175336/http://www.rsf.org/article.php3?id_article=25889 |archive-date=25 फ़रवरी 2008|url=http://www.rsf.org/article.php3?id_article=25889|title=Access to YouTube blocked until further notice because of "non-Islamic" videos|trans-title= गैर इस्लामी वीडियॊ के कारण यूट्यूब पर अगली नॊटिस तक के लिए रॊक लगायी गयी|language=en|publisher=रिपोर्टर्स विदाउट बोर्डर्स |access-date= 24 फरवरी 2008}}</ref> पाकिस्तानी अधिकारियों की इस कार्रवाई के कारण तकनीकी गड़बड़ी उत्पन्न हुई, जिससे पूरी दुनिया में यूट्यूब की साइट कम से कम दो घंटों के लिए क्रैश (ब्लॉक) हो गई।<ref>{{Cite news|url=http://news.bbc.co.uk/2/hi/technology/7262071.stm|title=Pakistan lifts the ban on YouTube|date=2008-02-26|access-date=2025-07-24|language=en-GB|publisher=बीबीसी समाचार |trans-title=यूट्यूब आउटेज़ बीबीसी ने पाकिस्तान को दोषी ठहराया |archive-url=https://web.archive.org/web/20090215160354/http://news.bbc.co.uk/1/hi/technology/7262071.stm |archive-date=15 फ़रवरी 2009 }}</ref> इस प्रतिबंध के दौरान, हजारों पाकिस्तानी उपयोगकर्ताओं ने 'हॉटस्पॉट शील्ड' नामक एक [[वीपीएन]] सॉफ़्टवेयर का उपयोग करके इस तीन दिवसीय ब्लॉक को दरकिनार किया।<ref>{{cite web|date=27 फरवरी 2008 |url=http://www.siliconrepublic.com/news/news.nv?storyid=single10381 |title=Pakistan web users get round YouTube ban |trans-title=पाकिस्तान वेबसाइट प्रयोगकर्ता हमेशा यू ट्यूब रोक |language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20080629065235/http://www.siliconrepublic.com/news/news.nv?storyid=single10381 |archive-date=29 जून 2008 |access-date= 27 फरवरी 2008}}</ref> 26 फरवरी 2008 को जब यूट्यूब ने वह आपत्तिजनक सामग्री अपनी साइट से हटा ली, तब पाकिस्तान ने यह प्रतिबंध समाप्त कर दिया।<ref name="PAK-ban-lifted">{{cite news | title = Pakistan lifts YouTube ban | url = http://www.abc.net.au/news/stories/2008/02/27/2173501.htm?section=world | publisher = एबीसी न्यूज़ | date = 2008-02-26 | accessdate = 2008-02-26}}</ref>
यूट्यूब पर उपलब्ध विशाल और विविध सामग्री के कारण, इसे अक्सर कई देशों की सरकारों के प्रतिबंधों का डर सताता रहता है। मुख्यभूमि [[चीन]] में भी 18 अक्टूबर से यूट्यूब को ताइवानी झंडे वाले एक वीडियो के कारण ब्लॉक कर दिया गया था। उस दौरान चीन में यूट्यूब के URL को उनके अपने सर्च इंजन बैदू पर अनुप्रेषित कर दिया गया था। बाद में 31 अक्टूबर को इसे फिर से खोल दिया गया।<ref>{{Cite web|url=http://udn.com/NEWS/INFOTECH/INFS1/4061683.shtml|title=संदर्भ|archive-url=https://web.archive.org/web/20071021040312/http://udn.com/NEWS/INFOTECH/INFS1/4061683.shtml|archive-date=21 अक्तूबर 2007|access-date=27 फ़रवरी 2009|url-status=live}}</ref>
राष्ट्रीय सेंसरशिप के अलावा, कई देशों के स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों ने भी छात्रों के दुर्व्यवहार, आपसी झगड़ों, नस्लवादी टिप्पणियों, और इंटरनेट बैंडविड्थ की अधिक खपत को रोकने के लिए अपने परिसरों में यूट्यूब को ब्लॉक किया हुआ है।
== स्पैमिंग ==
ईमेल स्पैम फ़िल्टरिंग तकनीक में हुए हालिया विकास और इसके व्यापक उपयोग के कारण, स्पैमर्स ने विज्ञापनों के लिए यूट्यूब जैसी लोकप्रिय वीडियो साइटों का उपयोग करना शुरू कर दिया। इसे रोकने के लिए यूट्यूब ने 2006 में टिप्पणियों में यूआरएल जोड़ने पर रोक लगा दी थी। यदि कोई उपयोगकर्ता अपनी टिप्पणी में यूआरएल डालकर पोस्ट करने का प्रयास करता है, तो उसे अस्वीकार कर दिया जाता है और वह दिखाई नहीं देता।
अगस्त 2007 में इस सुविधा (प्रतिबंध) को प्रोफाइल टिप्पणियों तक भी बढ़ा दिया गया था, जहाँ ऐसा करने पर उपयोगकर्ता को "आपकी टिप्पणी की प्रक्रिया में त्रुटि" का संदेश प्राप्त होता है। हालाँकि, बुलेटिन, निजी संदेशों या समूह चर्चाओं में लिंक पोस्ट करना अभी भी संभव है। इसके साथ ही, यदि कोई उपयोगकर्ता बहुत ही कम समय में लगातार कई टिप्पणियाँ पोस्ट करता है, तो स्पैमिंग को रोकने के लिए उसे एक [[कॅप्चा|कैप्चा]] भरने के लिए कहा जा सकता है। हालाँकि, साइट के कुछ हिस्सों में अभी भी कैप्चा प्रणाली का अभाव मौजूद है।
स्पैमर्स के अन्य तरीकों में वीडियो टिप्पणियों में भ्रामक, अंधविश्वासी या धमकी भरे संदेश भेजना शामिल है (जैसे: "इस संदेश को 10 दोस्तों को भेजो, वरना इतने घंटों में आपका दुर्भाग्य आएगा")। वे उपयोगकर्ताओं के इनबॉक्स में भी ऐसे स्पैम संदेश भेज सकते हैं। इसके अलावा, कुछ स्पैम खातों ने यूट्यूब पर अश्लील वीडियो पोस्ट करने का भी प्रयास किया है।
यूट्यूब ने ईमेल के माध्यम से "अपने दोस्तों को आमंत्रित करें" नामक एक नई सुविधा शुरू की थी, जिसका वास्तविक उद्देश्य यूट्यूब उपयोगकर्ताओं का एक बड़ा समुदाय बनाना था। लेकिन जब स्पैमर्स को इसका पता चला, तो उन्होंने इसका दुरुपयोग करते हुए हर संभव ईमेल पते पर स्पैम भेजना शुरू कर दिया। यहाँ तक कि वे इस व्यवस्था को चकमा देने में भी सक्षम हो गए।
{{cquote|''ये संदेश service@youtube.com से आए थे। [...] ये संदेश दिखने में यूट्यूब के एक वैध आमंत्रण जैसे लगते हैं, लेकिन इनमें शेयर बाज़ार के फ़र्ज़ी प्रचार और स्पैम वेबसाइटों के लिंक जैसी विशिष्ट स्पैम सामग्री शामिल होती है। इनमें से कई संदेश माइक्रोसॉफ्ट के तत्कालीन लोकप्रिय एक्सबॉक्स 360 गेम "हेलो 3" का लालच देते हुए प्राप्तकर्ता को बताते हैं कि उन्होंने गेम की एक मुफ्त कॉपी जीती है और उन्हें एक वेबसाइट पर जाना चाहिए। यदि वे इस जाल में फँसकर 'winhalo3.com' पर क्लिक करते हैं, तो वह वेबसाइट उनके सिस्टम को स्टॉर्म वर्म वायरस से संक्रमित कर देती है, जो अगस्त से ही इंटरनेट पर सक्रिय था।''<ref name="internetnews">[http://www.internetnews.com/security/article.php/3704541 Internetnews: YouTube's Not-so-'Friendly' Spam]</ref>}}
वर्तमान में स्पैमर्स इस तरीके का अधिक उपयोग कर रहे हैं क्योंकि इसकी मदद से वे ईमेल स्पैम फ़िल्टर को आसानी से बायपास कर सकते हैं और अपने दुर्भावनापूर्ण लिंक पर क्लिक या व्यूज़ प्राप्त कर सकते हैं। अंततः, ये भी अन्य सामान्य स्पैमर्स की तरह ही काम करते हैं।
== तकनीकी नोट ==
=== वीडियो प्रारूप ===
यूट्यूब की शुरुआती वीडियो प्लेबैक तकनीक [[मैक्रोमीडिया]] के फ़्लैश प्लेयर पर आधारित थी। इस तकनीक ने साइट को [[विंडोज़ मीडिया प्लेयर]], क्विकटाइम और रियलप्लेयर जैसे तत्कालीन स्थापित वीडियो प्लेयर की तुलना में कम बफरिंग के साथ अच्छी गुणवत्ता वाले वीडियो प्रदर्शित करने की सुविधा दी थी। पहले उपयोगकर्ताओं को वीडियो देखने के लिए एक [[वेब ब्राउज़र|वेब ब्राउज़र प्लग-इन]] डाउनलोड और इंस्टॉल करना पड़ता था, लेकिन उस समय फ़्लैश प्लेयर दुनिया भर के लगभग 90% ऑनलाइन कंप्यूटरों पर पहले से मौजूद रहता था।<ref>[http://www.adobe.com/products/player_census/flashplayer/version_penetration.html एडोब फ़्लैश प्लेयर संस्करण प्रवेश ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120218013034/http://www.adobe.com/products/flashplatformruntimes/statistics.html|date=18 फ़रवरी 2012}} [[एडोब इंक.|एडोब]]</ref> जनवरी 2015 से, यूट्यूब ने डिफ़ॉल्ट रूप से [[एचटीएमएल५|HTML5]] वीडियो प्लेयर का उपयोग करना शुरू कर दिया, जिससे अब फ़्लैश प्लग-इन की आवश्यकता पूरी तरह से समाप्त हो गई है।
उपयोगकर्ता 'डिफ़ॉल्ट मोड', 'थिएटर मोड' या 'पूर्ण स्क्रीन' में वीडियो देख सकते हैं। प्लेयर की तकनीक वीडियो को बिना रीलोड किए प्लेबैक के दौरान अलग-अलग मोड में स्विच करने की अनुमति देती है। इसके अतिरिक्त, तृतीय पक्ष मीडिया प्लेयर जैसे जीओएम प्लेयर, [[वीएलसी मीडिया प्लेयर|वीएलसी मीडिया प्लेयर]] और एफएफएमपीईजी आधारित वीडियो प्लेयर के माध्यम से भी यूट्यूब वीडियो को स्ट्रीम किया जा सकता है।
मार्च 2006 में, यूट्यूब ने सामान्य वीडियो की लंबाई पर 10 मिनट की सीमा लगा दी थी, क्योंकि उस समय साइट पर कॉपीराइट वाले टेलीविजन शो और फिल्मों के लंबे वीडियो अपलोड किए जा रहे थे।<ref>यू ट्यूब की सहायता खंड कहता है :"आप दस मिनट से अधिक विडियो अपलोड नही कर सकते...दस मिनट की सीमा मार्च २००६ में तब शुरू की गई जब यू ट्यूब ने महसूस किया कि इस लम्बाई कि अधिकांश विडियो टेलिविज़न शो और फ़िल्म से थे।"</ref> हालांकि, वर्तमान में यह सीमा हटा दी गई है। अब सत्यापित खाते वाले उपयोगकर्ता 12 घंटे तक की अवधि और अधिकतम 256 [[गीगाबाइट]] फ़ाइल साइज़ तक के वीडियो अपलोड कर सकते हैं।
यूट्यूब कई प्रकार के वीडियो फ़ाइल स्वरूपों को अपलोड करने के लिए स्वीकार करता है। यूट्यूब के सर्वर अपलोड किए गए वीडियो को स्ट्रीमिंग के लिए उपयुक्त प्रारूपों में स्वचालित रूप से बदल देते हैं।<ref>{{Cite web |url=http://www.codinghorror.com/blog/archives/000755.html |title=Did YouTube Cut the Gordian Knot of Video Codecs? |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090302051409/http://www.codinghorror.com/blog/archives/000755.html |archive-date=2 मार्च 2009 |url-status=live }}</ref> स्वीकृत अपलोड स्वरूपों में मुख्य रूप से [[विंडोज मीडिया वीडियो|डब्लूएमवी (.WMV)]], एवीआई (.AVI), एमओवी (.MOV), एमपीईजी (MPEG), वेबएम (WebM) और एमपी४ शामिल हैं। यह 3जीपी स्वरूप का भी समर्थन करता है, जो वीडियो को सीधे [[स्मार्टफोन|मोबाइल फ़ोन]] से अपलोड करने की अनुमति देता है।<ref>{{Cite web |url=http://www.google.com/support/youtube/bin/answer.py?answer=55744&topic=10526 |title=यूट्यूब अधिकारिक रूप में किस प्रारूप में अपलोड विडियो स्वीकार करता है |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090317024831/http://www.google.com/support/youtube/bin/answer.py?answer=55744&topic=10526 |archive-date=17 मार्च 2009 |url-status=live }}</ref>
=== स्तरीय और उच्च गुणवत्ता का वीडियो ===
शुरुआत में यूट्यूब वीडियो की मानक गुणवत्ता 320 [[पिक्सल]] चौड़ाई और 240 पिक्सल ऊँचाई वाले चित्र तक सीमित थी। इसमें सोरेंसन स्पार्क H.263 वीडियो कोडेक का उपयोग किया गया था। वीडियो सिग्नल की बिट दर लगभग 314 किलोबिट प्रति सेकंड थी, जो अपलोड किए गए वीडियो की फ्रेम दर पर निर्भर करती थी।<ref>इन्टरनेट संरचना विश्लेषकों द्वारा परीक्षित और नए अपलोड किए गए वीडियो के आधार पर, 19 नवंबर 2007</ref>
मार्च 2008 में, यूट्यूब ने एक नई सुविधा शुरू की, जिसने 'उच्च गुणवत्ता' प्रारूप में वीडियो देखने की अनुमति दी। यह प्रारूप इस तिथि के बाद अपलोड किए गए किसी भी वीडियो के लिए बेहतर रिज़ॉल्यूशन (320x240 पिक्सल के स्थान पर 480x360 पिक्सल) प्रदर्शित करने में सक्षम था। यूट्यूब के सर्वर स्वयं यह निर्धारित करते थे कि मूल रूप से अपलोड किया गया कौन सा वीडियो इस उन्नत मानक का समर्थन करने में सक्षम है। उपयोगकर्ता अपने खाते के [https://web.archive.org/web/20080517102330/http://www.youtube.com/video_quality_settings वीडियो गुणवत्ता सेटिंग पृष्ठ] पर जाकर डिफ़ॉल्ट रूप से "जब भी उपलब्ध हो, मुझे हमेशा उच्च गुणवत्ता वाला वीडियो दिखाएँ" विकल्प को चुन सकते थे।
यूट्यूब के उच्च गुणवत्ता वाले वीडियो दो संस्करणों में उपलब्ध कराए गए थे, और दोनों में ही 480x360 [[पिक्सल]] का चित्र आकार था। किसी वीडियो के वेब पते के अंत में `&fmt=6` जोड़कर, उसे H.263 कोडेक और मोनो ध्वनि के साथ प्ले किया जा सकता था। वहीं URL के अंत में `&fmt=18` जोड़कर इसे H.264/MPEG-4 AVC कोडेक और AAC स्टीरियो साउंडट्रैक के साथ चलाया जा सकता था।
उस समय जब पूछा गया कि यूट्यूब ने शुरुआत में ही एचडी प्रारूप को क्यों नहीं अपनाया, तो साइट ने उत्तर दिया था, "हमारा मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिक से अधिक लोग यूट्यूब तक पहुँच सकें और उनके वीडियो तुरंत और आसानी से प्ले हो सकें। यही एकमात्र कारण है कि हम 'सुपर डुपर यूट्यूब एचडी' जैसा कोई दावा नहीं करते, क्योंकि अधिकांश दर्शक वीडियो शुरू होने के लिए अधिक देर तक बफ़रिंग का इंतज़ार नहीं कर सकते।"<ref>{{Cite web |url=http://www.trustedreviews.com/software/news/2008/03/19/YouTube-Launches-High-Quality-Videos/p1 |title=यूट्यूब ने उच्च गुणवत्ता वाले वीडियो का प्रारम्भ किया |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080720051626/http://www.trustedreviews.com/software/news/2008/03/19/YouTube-Launches-High-Quality-Videos/p1 |archive-date=20 जुलाई 2008 |url-status=dead }}</ref>
=== ध्वनि प्रारूप ===
शुरुआती मानक गुणवत्ता वाले यूट्यूब वीडियो में [[एमपी३|MP3 (एमपी3)]] ऑडियो स्ट्रीम शामिल होती थी। डिफ़ॉल्ट रूप से यह ऑडियो मोनो मोड में 64 किलोबिट प्रति सेकंड की बिट दर पर कूटबद्ध की जाती थी, जिसे 22,050 [[हर्ट्ज़|हर्ट्ज]] पर नमूनीकृत (Sampled) किया जाता था। इससे लगभग 10 किलोहर्ट्ज़ की ऑडियो बैंडविड्थ प्राप्त होती थी। यह निम्न बिट दर स्पष्ट आवाज़ तो प्रदान करती थी, लेकिन यह 'हाई फाई' ऑडियो मानक के अनुरूप नहीं थी।
बाद में, एक मानक यूट्यूब वीडियो के लिए स्टीरियो ऑडियो ट्रैक का होना भी संभव हो गया, बशर्ते वीडियो फ़ाइल को यूट्यूब पर अपलोड करने से पहले ही फ़्लैश वीडियो प्रारूप में एन्कोड किया गया हो। इस प्रक्रिया को विभिन्न सॉफ्टवेयर प्रोग्रामों की मदद से किया जा सकता था, जैसे— [[लिनक्स]] और [[माइक्रोसॉफ्ट विंडोज़|विंडोज़]] के लिए एफएफएमपीईजी, मैकिन्टोश के लिए एफएफएमपीईजी-एक्स, या विंडोज़ के लिए वाणिज्यिक 'रीवा एफएलवी एन्कोडर'।
<span id="accessibility"></span>
=== सामग्री पहुँच ===
==== यूट्यूब पर ====
यूट्यूब सामान्य वीडियो फ़ाइल स्वरूपों को स्वीकार करता है और उन्हें ऑनलाइन देखने के लिए अनुकूलित प्रारूपों में बदल देता है। शुरुआत में यूट्यूब ने फ्लैश वीडियो का उपयोग किया था, लेकिन जून 2007 से नए अपलोड किए गए वीडियो के लिए उन्नत एच.२६४ एन्कोडिंग तकनीक का प्रयोग शुरू कर दिया गया, जो बेहतर गुणवत्ता प्रदान करती है। वर्तमान में यूट्यूब मुख्य रूप से HTML5 वीडियो प्लेयर का उपयोग करता है।
==== यूट्यूब के बाहर ====
यूट्यूब पर मौजूद प्रत्येक वीडियो एक [[एचटीएमएल]] 'एम्बेड' कोड के साथ आता है, जिसका उपयोग उस वीडियो को किसी भी अन्य वेबपेज या ब्लॉग पर जोड़ने के लिए किया जा सकता है। यह विकल्प विशेष रूप से [[सामाजिक नेटवर्किंग सेवा|सोशल नेटवर्किंग]] साइटों के उपयोगकर्ताओं के बीच बहुत लोकप्रिय है। इसके अलावा, एक छोटी सी कोडिंग की मदद से किसी भी एम्बेडेड वीडियो को वेबपेज लोड होते ही स्वतः प्ले होने की अनुमति भी दी जा सकती है।
मूल रूप से यूट्यूब वीडियो केवल इंटरनेट कनेक्शन के साथ ऑनलाइन देखने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, और प्लेटफ़ॉर्म आधिकारिक तौर पर वीडियो डाउनलोड करने की प्रत्यक्ष सुविधा नहीं देता (सिवाय 'यूट्यूब प्रीमियम' के ऑफ़लाइन डाउनलोड फीचर के)। इसके बावजूद, वीडियो डाउनलोड करने के लिए इंटरनेट पर कई थर्ड-पार्टी वेबसाइट्स, मोबाइल एप्लिकेशन और ब्राउज़र एक्सटेंशन मौजूद हैं।
==== मोबाइल पर ====
यूट्यूब ने 15 जून 2007 को अपनी आधिकारिक मोबाइल साइट लॉन्च की थी। यह शुरुआती मोबाइल संस्करण xHTML पर आधारित था और H.263/AMR कोडेक तथा RTSP स्ट्रीमिंग के साथ 3GP वीडियो प्रारूप का समर्थन करता था। वर्तमान में यूट्यूब का मोबाइल ऐप (Android और iOS दोनों के लिए) विश्व स्तर पर सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले एप्लिकेशन में से एक है।
==== टेलीविज़न पर ====
यूट्यूब की वीडियो सामग्री को टेलीविज़न पर भी देखा जा सकता है। शुरुआत में, 7 जनवरी 2008 को 'Information TV 2' नामक एक चैनल ने यूट्यूब वेबसाइट की साझा सामग्री को टीवी पर प्रसारित करना शुरू किया था। आज के समय में लगभग सभी स्मार्ट टीवी और स्ट्रीमिंग डिवाइस में यूट्यूब का एक समर्पित एप्लिकेशन पहले से इंस्टॉल होता है।
==== एप्पल डिवाइस ====
20 जून 2007 को [[एप्पल इंक.|एप्पल इंक.]] ने घोषणा की थी कि एक मुफ्त सॉफ्टवेयर अपडेट के बाद यूट्यूब 'एप्पल टीवी' पर भी उपलब्ध होगा। इस सुविधा ने उपयोगकर्ताओं को श्रेणियों के आधार पर वीडियो ब्राउज़ करने, सर्च करने और एप्पल टीवी से सीधे अपने यूट्यूब खाते में लॉग-इन करने की अनुमति दी। एप्पल के तत्कालीन वीपी डेविड मूडी के अनुसार, शुरुआत में सभी वीडियो उपलब्ध न होने का कारण यह था कि एप्पल के वीडियो मानकों के अनुरूप यूट्यूब की सभी पुरानी सामग्री को एच.२६४ प्रारूप में ट्रांसकोड करना आवश्यक था।
एप्पल ने यह भी घोषणा की थी कि आईफोन के लॉन्च के साथ ही यूट्यूब उस पर उपलब्ध होगा। आईफोन के लिए यूट्यूब के वीडियो विशेष रूप से एप्पल के एच.२६४ प्रारूप में एन्कोड किए गए थे। शुरुआत में, यूट्यूब ने वीडियो के दो संस्करण बनाए थे—एक उच्च बैंडविड्थ वाला (Wi-Fi के लिए) और दूसरा निम्न रिज़ॉल्यूशन वाला (एज/3G नेटवर्क के लिए)।
=== टिप्पणियाँ ===
जून 2008 में, यूट्यूब ने 'एनोटेशन' सुविधा का बीटा परीक्षण शुरू किया था। यह सुविधा रचनाकारों को अपने वीडियो के ऊपर टेक्स्ट टिप्पणियाँ या लिंक प्रदर्शित करने की अनुमति देती थी। एनोटेशन की मदद से वीडियो में अतिरिक्त जानकारी जोड़ी जा सकती थी; उदाहरण के लिए, संवादात्मक कहानियाँ बनाना, जहाँ दर्शक अगला दृश्य चुनने के लिए स्क्रीन पर क्लिक कर सकते थे, या अन्य यूट्यूब वीडियो के लिंक देना। हालाँकि, शुरुआत में यूट्यूब वेबसाइट के बाहर किसी अन्य वेबपेज पर एम्बेड किए गए वीडियो में ये एनोटेशन दिखाई नहीं देते थे।
''(नोट: मोबाइल उपकरणों पर इसका समर्थन न होने के कारण 15 जनवरी 2019 को यूट्यूब ने इस एनोटेशन सुविधा को पूरी तरह से बंद कर दिया और इसके स्थान पर 'एंड स्क्रीन' और 'कार्ड्स' की आधुनिक सुविधा पेश की।)''
== स्थानीकरण ==
19 जून 2007 को गूगल के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक श्मिट ने [[पेरिस]] में यूट्यूब के नए स्थानीकरण कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इसके तहत दुनिया के विभिन्न देशों के लिए यूट्यूब वेबसाइट का पूरा इंटरफ़ेस स्थानीय संस्करणों और भाषाओं में उपलब्ध कराया गया।
{| class="wikitable sortable"
! देश !! URL !! भाषाएँ !! लॉन्च की तिथि
|-
| {{AUS}} || [https://web.archive.org/web/20081218061511/http://au.youtube.com/ au.youtube.com] || [[ऑस्ट्रेलियाई अंग्रेजी|अंग्रेज़ी (ऑस्ट्रेलिया)]] || 22 अक्टूबर 2007<ref name="AUS-NZ">{{Cite web |url=http://mashable.com/2007/10/22/youtube-australia-new-zealand/ |title=यूट्यूब ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में लॉन्च करता है |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190403142649/https://mashable.com/2007/10/22/youtube-australia-new-zealand/ |archive-date=3 अप्रैल 2019 |url-status=live }}</ref>
|-
| {{BRA}} || [https://web.archive.org/web/20090122224743/http://br.youtube.com/ br.youtube.com] || [[ब्राज़ीलियाई पुर्तगाली|पुर्तगाली (ब्राजील)]] || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|-
| {{CAN}} || [https://web.archive.org/web/20090114224859/http://ca.youtube.com/ ca.youtube.com] || अंग्रेज़ी (कनाडा) || 6 नवंबर 2007<ref>{{Cite web |url=http://mashable.com/2007/11/06/youtube-canada/ |title=यूट्यूब अब कनाडा लाइव |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190403183030/https://mashable.com/2007/11/06/youtube-canada/ |archive-date=3 अप्रैल 2019 |url-status=live }}</ref>
|-
| {{FRA}} || [https://web.archive.org/web/20090126213904/http://fr.youtube.com/ fr.youtube.com] || [[फ़्रान्सीसी भाषा|फ़्रेंच]] || 19 जून 2007<ref name="local">{{Cite web |url=http://www.pcadvisor.co.uk/news/index.cfm?NewsID=9772 |title=गूगल यूट्यूब फ्रांस न्यूज़ को लॉन्च करता है -- पीसी सलाहकार |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110325161722/http://www.pcadvisor.co.uk/news/index.cfm?NewsID=9772 |archive-date=25 मार्च 2011 |url-status=live }}</ref>
|-
| {{GER}} || [https://web.archive.org/web/20081218134509/http://de.youtube.com/ de.youtube.com] || [[जर्मन भाषा|जर्मन]] || 8 नवंबर 2007<ref>{{Cite web |url=http://mashable.com/2007/11/08/youtube-germany/ |title=यूट्यूब जर्मनी लॉन्च करता है |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190403120958/https://mashable.com/2007/11/08/youtube-germany/ |archive-date=3 अप्रैल 2019 |url-status=live }}</ref>
|-
| {{HKG}} || [https://web.archive.org/web/20081218061355/http://hk.youtube.com/ hk.youtube.com] || [[पारम्परिक चीनी वर्ण|चीनी (पारंपरिक)]] || 17 अक्टूबर 2007<ref>{{Cite web |url=http://chita.us/community/viewtopic.php?f=9&t=1294 |title=Chita •检视主题-- YouTube台湾版推出 |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20081205151456/http://chita.us/community/viewtopic.php?f=9&t=1294 |archive-date=5 दिसंबर 2008 |url-status=dead }}</ref>
|-
| {{IND}} || [https://web.archive.org/web/20081218061420/http://in.youtube.com/ in.youtube.com] || [[भारतीय अंग्रेज़ी|अंग्रेज़ी (भारत)]] || 7 मई 2008<ref>{{Cite web |url=http://www.hindu.com/2008/05/08/stories/2008050857242200.htm |title=यूट्यूब के पास अब एक भारतीय अवतार है |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20131128004152/http://www.hindu.com/2008/05/08/stories/2008050857242200.htm |archive-date=28 नवंबर 2013 |url-status=live }}</ref>
|-
| {{IRL}} || [https://web.archive.org/web/20081231010855/http://ie.youtube.com/ ie.youtube.com] || अंग्रेज़ी (आयरलैंड) || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|-
| {{ITA}} || [https://web.archive.org/web/20090113004033/http://it.youtube.com/ it.youtube.com] || [[इतालवी भाषा|इतालवी]] || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|-
| {{JPN}} || [https://web.archive.org/web/20090112051634/http://jp.youtube.com/ jp.youtube.com] || [[जापानी भाषा|जापानी]] || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|-
| {{KOR}} || [https://web.archive.org/web/20090110014401/http://kr.youtube.com/ kr.youtube.com] || [[कोरियाई भाषा|कोरियाई]] || 23 जनवरी 2008
|-
| {{MEX}} || [https://web.archive.org/web/20081218061353/http://mx.youtube.com/ mx.youtube.com] || स्पैनिश (मेक्सिको) || 10 अक्टूबर 2007
|-
| {{NLD}} || [https://web.archive.org/web/20081218061353/http://nl.youtube.com/ nl.youtube.com] || [[डच भाषा|डच]] || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|-
| {{NZL}} || [https://web.archive.org/web/20081216095659/http://nz.youtube.com/ nz.youtube.com] || अंग्रेज़ी (न्यूजीलैंड) || 22 अक्टूबर 2007<ref name="AUS-NZ"/>
|-
| {{POL}} || [https://web.archive.org/web/20081218061138/http://pl.youtube.com/ pl.youtube.com] || [[पोलिश भाषा|पोलिश]] || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|-
| {{RUS}} || [https://web.archive.org/web/20090113054547/http://ru.youtube.com/ ru.youtube.com] || [[रूसी भाषा|रूसी]] || 13 नवंबर 2007
|-
| {{ESP}} || [https://web.archive.org/web/20090122224458/http://es.youtube.com/ es.youtube.com] || [[स्पेनी भाषा|स्पैनिश]] || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|-
| {{TWN}} || [https://web.archive.org/web/20081218062111/http://tw.youtube.com/ tw.youtube.com] || [[पारम्परिक चीनी वर्ण|चीनी (पारंपरिक)]] || 18 अक्टूबर 2007<ref>{{Cite web |url=http://chita.us/community/viewtopic.php?f=9&t=1294 |title=Chita •检视主题-- YouTube台湾版推出 |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20081205151456/http://chita.us/community/viewtopic.php?f=9&t=1294 |archive-date=5 दिसंबर 2008 |url-status=dead }}</ref>
|-
| {{UK}} || [https://web.archive.org/web/20081223010735/http://uk.youtube.com/ uk.youtube.com] || [[ब्रिटिश अंग्रेज़ी|अंग्रेज़ी (ब्रिटेन)]] || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|}
गूगल का मुख्य उद्देश्य फ्रांस में स्थानीय वीडियो शेयरिंग वेबसाइट [[डेलीमोशन]] के साथ प्रतिस्पर्धा करना था। इसके लिए उसने स्थानीय टेलीविजन स्टेशनों जैसे एम6 और फ्रांस टेलीविज़न के साथ वीडियो सामग्री के कानूनी प्रसारण के लिए कई समझौते किए।
17 अक्टूबर 2007 को यूट्यूब के होन्ग कोंग संस्करण को लॉन्च करने की घोषणा की गई थी। उस दौरान यूट्यूब के सह-संस्थापक स्टीव चेन ने यह भी संकेत दिया था कि उनका अगला लक्ष्य ताइवान संस्करण लॉन्च करना है।<ref>{{Cite web |url=http://pshweb01.881903.com/apps/news/html/news/20071017/2007101715593573500.htm |title=1903.com वाणिज्यिक रेडियो |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071223205642/http://pshweb01.881903.com/apps/news/html/news/20071017/2007101715593573500.htm |archive-date=23 दिसंबर 2007 |url-status=dead }}</ref><ref>{{Cite web |url=http://inews.i-cable.com/webapps/news_detail.php?id=250154&category=2 |title=CableTV |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080315023733/http://inews.i-cable.com/webapps/news_detail.php?id=250154&category=2 |archive-date=15 मार्च 2008 |url-status=dead }}</ref>
22 अक्टूबर 2007 को न्यूजीलैंड संस्करण की लॉन्च पार्टी आयोजित की गई थी, जिसका उद्देश्य वहां के स्थानीय यूट्यूब रचनाकारों को आगे बढ़ने में सहायता प्रदान करना था।
तुर्की में यूट्यूब का स्थानीय संस्करण स्थापित करने की योजना लंबे समय तक विवादों और कानूनी अड़चनों में फंसी रही। तुर्की के अधिकारियों ने यूट्यूब से मांग की थी कि वह देश के कानूनों के अधीन काम करने के लिए तुर्की में अपना एक आधिकारिक कार्यालय खोले। हालांकि, यूट्यूब ने उस समय स्पष्ट किया था कि उसका ऐसा कोई इरादा नहीं है और उसके वीडियो तुर्की के कानूनों के अधीन नहीं आते। तुर्की प्रशासन ने यह चिंता भी व्यक्त की थी कि मंच पर अपलोड किए गए कुछ वीडियो का उपयोग मुस्तफा कमाल अतातुर्क (तुर्की के संस्थापक) का अपमान करने और मुस्लिमों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए किया जा रहा है।
=== चैनल के प्रकार ===
यूट्यूब अपने पंजीकृत सदस्यों को "चैनल प्रकार" नामक समूहों में शामिल होने का विकल्प देता था, जो उनके चैनल को एक विशिष्ट पहचान प्रदान करता था। शुरुआत में जब उपयोगकर्ता 'निदेशक' खाता सेटिंग्स का चयन करते थे, तो उन्हें असीमित लंबाई के वीडियो अपलोड करने की सुविधा दी जाती थी। हालांकि बाद में इस विकल्प को नए उपयोगकर्ताओं के लिए बंद कर दिया गया, लेकिन जिन पुराने उपयोगकर्ताओं ने शुरुआत में इस ग्रुप को ज्वाइन कर लिया था, उनके पास यह असीमित लंबाई की सेटिंग सुरक्षित रही। उस समय उनके खातों के लिए फ़ाइल आकार की सीमा 100 एमबी थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 1024 एमबी (1 जीबी) कर दिया गया था। ये चैनल प्रकार निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित थे:
* '''यूट्यूबर:''' यूट्यूब का एक सामान्य पंजीकृत दर्शक या उपयोगकर्ता।
* '''निर्देशक:''' फिल्म या वीडियो निर्माता, जो अपने द्वारा बनाई गई शॉर्ट फिल्मों या वीडियो को यूट्यूब दर्शकों के सामने प्रदर्शित करते थे।
* '''संगीतकार:''' संगीतकार, गायक या बैंड जो कवर गाने, मूल रचनाएँ या गिटार/संगीत सीखने से जुड़े ट्यूटोरियल अपलोड करते थे।
* '''हास्य कलाकार:''' ऐसे कलाकार जो यूट्यूब दर्शकों के मनोरंजन के लिए हास्य और व्यंग्य से भरपूर वीडियो बनाते थे।
* '''गुरु:''' किसी विशेष क्षेत्र या विषय के अनुभवी लोग, जो अपनी विशेषज्ञता के आधार पर ज्ञानवर्धक और शैक्षणिक वीडियो बनाते थे।
* '''गैर-लाभकारी संस्था:''' 501(c)(3) कर-मुक्त दर्जा प्राप्त गैर-लाभकारी संगठनों को यूट्यूब के गैर-लाभकारी कार्यक्रम के तहत विशेष खाते दिए जाते थे।
* '''पत्रकार:''' नागरिक या पेशेवर पत्रकार, जो स्थानीय, अंतरराष्ट्रीय या समसामयिक घटनाओं पर समाचार वीडियो और ग्राउंड रिपोर्ट तैयार करते थे।
== वीडियो रैंकिंग ==
यूट्यूब लोकप्रिय वीडियो को सम्मान देने के लिए उन्हें विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत करता है। इनमें सबसे प्रमुख "सबसे अधिक देखे गए" की श्रेणी है, जिसे चार अवधियों में बाँटा जाता है: आज, इस सप्ताह, इस महीने और अब तक। यूट्यूब की अन्य प्रमुख रैंकिंग श्रेणियों में शामिल हैं:
* सर्वाधिक देखा गया
* सर्वोच्च श्रेणी
* सर्वाधिक चर्चा में
* शीर्ष पसंद
* उभरते/ट्रेंडिंग वीडियो<ref>{{Cite web|url=https://freeviewsyoutube.com/2022/09/06/5-good-reasons-to-buy-youtube-views/|title=5 Good Reasons To Buy Youtube Views! – FreeViewsYouTube|access-date=2023-04-11}}</ref>
* हाल ही में प्रदर्शित
* सर्वाधिक उत्तरित
=== वीडियो रैंकिंग पर विवाद ===
यूट्यूब के कुछ सर्वाधिक देखे गए वीडियो समय-समय पर विवादों का विषय रहे हैं। अक्सर यह आरोप लगाया जाता है कि इन वीडियो के व्यूज़ बढ़ाने के लिए स्वचालित बॉट्स या अनैतिक तरीकों का इस्तेमाल किया गया है, जो यूट्यूब की 'सेवा की शर्तों' का सीधा उल्लंघन है।<ref>यूट्यूब के इस्तेमाल की शर्तें (धारा 4H) स्पष्ट करती हैं: "आप साइट तक पहुँचने के लिए किसी भी स्वचालित प्रणाली (जिसमें 'रोबोट', 'स्पाइडर' या 'ऑफ़लाइन रीडर' शामिल हैं) का उपयोग न करने के लिए सहमत हैं, जो यूट्यूब सर्वर पर इतने अधिक अनुरोध भेजती हो, जितने एक सामान्य मानव उसी अवधि में वेब ब्राउज़र का उपयोग करके नहीं भेज सकता।"</ref>
मार्च 2008 में, ब्राज़ीलियाई बैंड 'कैनसी डी सेर सेक्सी' के गाने "म्यूज़िक इज़ माई हॉट हॉट सेक्स" के अनौपचारिक वीडियो को 11.4 करोड़ व्यूज़ मिले थे। लेकिन स्वचालित हैकिंग के जरिए व्यूज़ बढ़ाने के आरोपों के बाद यूट्यूब ने इसे अस्थायी रूप से हटा दिया और बाद में अपलोडर ने इसे हमेशा के लिए डिलीट कर दिया। यूट्यूब के एक प्रवक्ता ने स्पष्ट किया, "हम यूट्यूब पर व्यूज़ और आँकड़ों की सुरक्षा के लिए कई तकनीकी उपाय करते हैं। जैसे ही हमारे संज्ञान में आता है कि किसी ने शीर्ष रैंकिंग में आने के लिए गलत या कृत्रिम तरीकों का इस्तेमाल किया है, हम उस वीडियो या चैनल को हटा देते हैं।" इटली के क्लारुस बार्टेल, जिन्होंने यह वीडियो अपलोड किया था, ने व्यूज़ बढ़ाने के किसी भी प्रयास से इनकार करते हुए कहा, "मेरा इन सबसे कोई लेना-देना नहीं है। मुझ पर लगे हैकिंग के आरोपों से मैं बहुत दुखी हूँ।"
इसके अलावा, कनाडाई गायिका [[एवरिल लैवीन]] के गाने "गर्लफ्रेंड" के वीडियो पर भी कृत्रिम रूप से व्यूज़ बढ़ाने के आरोप लगे थे। 'एवरिल बैंड एड्स' नामक एक फैनसाइट पर एक लिंक दिया गया था, जो हर 15 सेकंड में यूट्यूब पर इस वीडियो को स्वतः रीलोड (Reload) करता था। इस फैनसाइट ने प्रशंसकों को प्रोत्साहित किया कि वे "इंटरनेट ब्राउज़ करते समय, परीक्षा की पढ़ाई करते समय, या यहाँ तक कि सोते समय भी इस पेज को खुला छोड़ दें" और "व्यूज़ बढ़ाने के लिए एक ही ब्राउज़र में दो या अधिक विंडो खोलें"। इसी के चलते जुलाई 2008 तक, इस वीडियो ने जुडसन लैप्ली के "एवोल्यूशन ऑफ़ डांस" को पीछे छोड़ते हुए यूट्यूब पर अब तक का सबसे अधिक देखा जाने वाला वीडियो बनने का रिकॉर्ड बना लिया था। अगस्त 2008 तक इन दोनों वीडियो को लगभग 9.5 करोड़ दर्शकों ने देखा था।
एक जापानी एनीमे फ्रैंचाइज़ी से जुड़े यूट्यूब वीडियो को 9.7 करोड़ व्यूज़ मिले थे, लेकिन कृत्रिम रूप से व्यूज़ बढ़ाने के कारण इसे भी यूट्यूब की आधिकारिक सूची से बाहर कर दिया गया था।
=== यूट्यूब वीडियो पुरस्कार ===
2006 में, यूट्यूब ने वार्षिक 'यूट्यूब वीडियो पुरस्कार' की शुरुआत की थी।<ref>{{Cite web |url=http://www.youtube.com/ytawards |title=यू ट्यूब.कॉम /वाई टी पुरस्कार |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20081201114824/http://www.youtube.com./ytawards |archive-date=1 दिसंबर 2008 |url-status=live }}</ref> इसकी श्रेणियों में "सबसे अधिक पसंद किया जाने वाला वीडियो" भी शामिल था। इस पुरस्कार प्रक्रिया में यूट्यूब स्वयं दावेदारों को नामांकित करता था और उपयोगकर्ता मतदान करके विजेता का निर्णय करते थे। इसमें केवल वास्तविक और उपयोगकर्ताओं द्वारा बनाए गए वीडियो को ही नामांकित किया जाता था। 2006 के पुरस्कारों के प्रमुख नामांकितों में पीटर ओकले, लोनलीगर्ल15, द वाइनकोन, रेनेट्टो, नेज़ोमिक और चाड वाडर जैसे प्रसिद्ध रचनाकार शामिल थे।
=== हाल की घटनाएँ ===
==== राजनीतिक अभियान ====
2008 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में राजनीतिक उम्मीदवारों ने अपने चुनाव प्रचार के लिए यूट्यूब का व्यापक उपयोग किया था। मतदाता उम्मीदवारों के बयानों को देख सकते थे और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों (उदाहरण के लिए: [[रॉन पॉल]], हिलेरी क्लिंटन, [[बराक ओबामा]] और [[जो बाइडन]]) के पक्ष या विपक्ष में वीडियो बना सकते थे। तीसरे दल के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों ने भी यूट्यूब का बड़े पैमाने पर प्रयोग किया।
अमेरिकी मीडिया ने अक्सर यह टिप्पणी की है कि यूट्यूब ने रिपब्लिकन सीनेटर जॉर्ज एलेन की 2006 की हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, क्योंकि चुनाव अभियान के दौरान उनकी एक कथित नस्लभेदी टिप्पणी वाली वीडियो क्लिप को यूट्यूब दर्शकों द्वारा व्यापक रूप से देखा और साझा किया गया था।<ref>{{cite news| author = Andrew Sullivan| title = Video power: the potent new political force| publisher = [[The Sunday Times]]| date = 2007-02-04| url = http://www.timesonline.co.uk/tol/comment/columnists/andrew_sullivan/article1321781.ece| accessdate = 2007-04-28}}{{Dead link|date=जुलाई 2026 |bot=InternetArchiveBot }} "बिना किसी विरोधी कैमरे और ब्लॉग जगत के एलेन चुनाव जीत गए होते, लेकिन यह वीडियो यूट्यूब पर पहुँच गया और उसके बाद टेलीविज़न नेटवर्क ने भी इसे दिखा दिया।"</ref><ref>{{cite video| people = Howard Kurtz, Glenn Reynolds, Ryan Lizza, Andrea Koppel| title = [http://edition.cnn.com/TRANSCRIPTS/0608/20/rs.06.html Reliable Sources]| medium = TV-Series| publisher = [[CNN]] [[Reliable Sources]]| date = 2006-08-20 }} "एलेन ने एक भारतीय-अमेरिकी स्वयंसेवक के लिए एक शब्द का प्रयोग किया और उस वेबकैम वीडियो को लोकप्रिय वेबसाइट यूट्यूब.कॉम पर पोस्ट कर दिया गया, जहाँ इसे 1,00,000 से अधिक बार देखा गया।"</ref>
जेम्स कोटेकी जैसे राजनीतिक विश्लेषक भी यूट्यूब की राजनीतिक दुनिया में सक्रिय रहे हैं। कई विश्लेषक यूट्यूब पर राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के वीडियो बनाते हैं या अपने राजनीतिक विचार व्यक्त करने के लिए यूट्यूब का उपयोग करते हैं। केवल अमेरिका में ही नहीं, बल्कि फ्रांस और इटली के राजनेता, जैसे एंटोनियो डी पिएत्रो, भी इस साइट का उपयोग अपने राजनीतिक अभियानों के हिस्से के रूप में करते रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री [[जॉन हावर्ड]] ने भी 2007 के संघीय चुनाव से पहले प्रचार के लिए यूट्यूब का इस्तेमाल किया था।
==== सीएनएन-यूट्यूब राष्ट्रपति चुनाव बहस ====
[[चित्र:CNN-YouTube Republican Debate.jpg|thumb|28 नवंबर 2007 को आयोजित सीएनएन-यूट्यूब रिपब्लिकन बहस]]
2008 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पूर्व, [[सीएनएन]] ने टेलीविज़न पर ऐसी राजनीतिक बहसें प्रसारित कीं, जिनमें राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों ने यूट्यूब उपयोगकर्ताओं द्वारा वीडियो के माध्यम से पूछे गए सवालों के जवाब दिए। समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों द्वारा इंटरनेट तकनीक का उपयोग करके सीधे सवाल पूछने की इस सुविधा के कारण, इस मंच को उस समय इतिहास की "सबसे लोकतांत्रिक राष्ट्रपति बहस" माना गया था।
=== अप्रैल फूल प्रैंक ===
1 अप्रैल 2008 को '[[अप्रैल फूल दिवस]]' के अवसर पर, यूट्यूब ने अपने मुख्य पृष्ठ के सभी फीचर्ड वीडियो को ब्रिटिश गायक रिक ऐस्टले के लोकप्रिय संगीत वीडियो "नेवर गोना गिव यू अप" पर अनुप्रेषित कर दिया था। इस प्रकार यूट्यूब ने उस दिन साइट पर वीडियो देखने का प्रयास करने वाले सभी उपयोगकर्ताओं के साथ इंटरनेट का प्रसिद्ध 'रिकरोलिंग' प्रैंक किया था।
=== यूट्यूब सहयोगी कार्यक्रम ===
यूट्यूब सहयोगी कार्यक्रम रचनाकारों को यूट्यूब के विशेष टूल और सुविधाओं तक पहुँच प्रदान करता है, जिसमें 'निर्माता सहायता टीम' से सीधा संपर्क शामिल है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह कार्यक्रम क्रिएटर्स को उनके वीडियो पर दिखाए जाने वाले विज्ञापनों से होने वाली राजस्व का साझा हिस्सा प्राप्त करने की अनुमति देता है।
यूट्यूब की मुद्रीकरण नीतियां उन नियमों का एक समूह हैं जो यह निर्धारित करती हैं कि किन चैनलों को कमाई करने की अनुमति दी जाएगी। एक यूट्यूब भागीदार के रूप में, क्रिएटर्स को अपने अनुबंध और 'यूट्यूब सहयोगी कार्यक्रम नीतियों' के अनुसार इन मुद्रीकरण नियमों का कड़ाई से पालन करना आवश्यक होता है, ताकि वे प्लेटफ़ॉर्म से अपनी आय सफलतापूर्वक अर्जित कर सकें।<ref>{{Cite web|url=https://youtubepartnerprogram.com/youtube-partner-program-2021-how-it-works-and-updates/|title=YouTube Partner Program 2022: How it works & Updates – YouTubePartnerProgram|language=en-US|access-date=2022-12-09|archive-date=9 दिसंबर 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20221209132525/https://youtubepartnerprogram.com/youtube-partner-program-2021-how-it-works-and-updates/|url-status=dead}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{reflist|2}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20050428014715/http://www.youtube.com/ यूट्यूब]
{{Google Inc.}}
[[श्रेणी:अंतरजाल]]
[[श्रेणी:ऑनलाइन सामाजिक नेटवर्किंग]]
[[श्रेणी:अमेरिकी कम्पनियाँ]]
9hzoq7q3qfpfr556wuk8js4ec1hhjnc
6591357
6591354
2026-07-23T15:49:54Z
Paul Sumesh
933321
/* */
6591357
wikitext
text/x-wiki
{{Wikidata Infobox}}
'''यूट्यूब''' (YouTube) एक [[अमेरिकी]] ऑनलाइन वीडियो शेयरिंग और सोशल मीडिया मंच है, जिसका स्वामित्व [[गूगल]] के पास है। इसकी स्थापना फरवरी 2005 में [[पेपाल]] के तीन पूर्व कर्मचारियों— [[चाड हर्ले]], [[स्टीव चैन]] और [[जावेद करीम]] ने मिलकर की थी। नवम्बर 2006 में [[गूगल]] ने इसे 1.65 अरब अमेरिकी डॉलर में खरीद लिया था और तब से यह गूगल की ही एक सहायक कंपनी के रूप में काम कर रहा है।
यूट्यूब अपने उपयोगकर्ताओं को वीडियो देखने, अपलोड करने, शेयर करने, प्लेलिस्ट बनाने, वीडियो पर टिप्पणी करने, रिपोर्ट करने और अन्य उपयोगकर्ताओं के चैनल की सदस्यता लेने की सुविधा प्रदान करता है। इस मंच पर आम लोगों से लेकर कई बड़ी मीडिया कंपनियों द्वारा अपलोड किए गए वीडियो मौजूद हैं। इनमें वीडियो क्लिप, टीवी कार्यक्रम, संगीत वीडियो, मूवी ट्रेलर, लाइव स्ट्रीम और वीडियो [[चिट्ठा|ब्लॉगिंग]] आदि शामिल हैं। गैर-पंजीकृत उपयोगकर्ता साइट पर केवल वीडियो देख सकते हैं, जबकि पंजीकृत सदस्य असीमित वीडियो अपलोड कर सकते हैं और टिप्पणियाँ कर सकते हैं। ऐसे वीडियो जिनमें [[हिंसा|हिंसक]], आपत्तिजनक, या 18 वर्ष से कम आयु के दर्शकों के लिए अनुपयुक्त सामग्री होती है, उन्हें आयु-प्रतिबंधित श्रेणी में रखा जाता है, जिन्हें केवल 18+ आयु के पंजीकृत सदस्य ही देख सकते हैं।
यूट्यूब अपनी आय मुख्य रूप से विज्ञापनों के माध्यम से अर्जित करता है, जो साइट की सामग्री और दर्शकों की रुचियों के आधार पर दिखाए जाते हैं। साइट पर अधिकांश वीडियो निःशुल्क उपलब्ध हैं, लेकिन कुछ प्रीमियम सामग्री के लिए भुगतान करना पड़ता है। इसमें '[[यूट्यूब प्रीमियम]]' की सदस्यता शामिल है, जो उपयोगकर्ताओं को विज्ञापन-रहित वीडियो देखने की सुविधा देती है। इसके अतिरिक्त, कुछ विशेष वीडियो और फ़िल्में केवल किराए पर लेकर या प्रीमियम सदस्यता के माध्यम से ही देखी जा सकती हैं।
Jana Nayagan (OTT Rights South Language also Amazon Prime Video & Hindi Version also Amazon Prime Video), (Satellite Rights Hindi Version also Zee Cinema).<ref>{{Cite web |date=26 July 2026 |title=Jana Nayagan OTT Rights & Hindi Dubbed Satellite Rights Updates YouTube Subscribe to SR Filmy Point|url=https://youtube.com/videos/kr_filmy_point/jana-nayagan-ott-rights-and-hindi-dubbed-satellite-rights-updates-youtube-subscribe-sr-filmy-point/|publisher=YouTube|access-date=26 July 2026|archive-date=26 July 2026}}</ref><br>Toxic (OTT Rights South Language also Amazon Prime Video and Hindi Version also Amazon Prime Video), (Satellite Rights Hindi Version also Zee Cinema).<ref>{{Cite web |date=27 August 2026 |title=Toxic OTT Rights and Hindi Dubbed Satellite Rights Updates YouTube Subscribe to SR Filmy Point|url=https://youtube.com/videos/kr_filmy_point/toxic-ott-rights-and-hindi-dubbed-satellite-rights-updates/publisher=YouTube|access-date=27 August 2026|archive-date=27 August 2026}}</ref>
== इतिहास ==
[[चित्र:Youtube founders.jpg|thumb|400px|''दाँए से बाँए:'' [[चाड हर्ले]], [[स्टीव चैन]], और [[जावेद करीम]]|बाएँ]]
[[पेपाल]] के तीन पूर्व कर्मचारियों— [[चाड हर्ले]], [[स्टीव चैन]], और [[जावेद करीम]] ने मध्य फरवरी 2005 में यूट्यूब की स्थापना की थी।<ref name=":0">[http://www.usatoday.com/tech/news/2006-10-11-youtube-karim_x.htm "यूट्यूब का एक तीसरा संस्थापक भी है"] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120728054901/http://www.usatoday.com/tech/news/2006-10-11-youtube-karim_x.htm |date=28 जुलाई 2012 }}, USATODAY, अक्टूबर 11, 2006.</ref> [[सैन ब्रूनो, कैलिफोर्निया|सैन ब्रूनो]] आधारित यह सेवा उपयोगकर्ताओं द्वारा निर्मित वीडियो सामग्री, जिसमें मूवी क्लिप्स, टीवी क्लिप्स और संगीत वीडियो शामिल हैं, को प्रदर्शित करने के लिए एडोब फ़्लैश और एचटीएमएल5 तकनीक का उपयोग करती है। इसके साथ ही शौकिया [[टेलीविजन कार्यक्रम|सामग्री]] जैसे छोटे संगीत वीडियो और वीडियो ब्लॉग भी इस पर उपलब्ध हैं। अक्टूबर 2006 में, [[गूगल|गूगल इंक.]] ने घोषणा की थी कि उसने इस कम्पनी का अधिग्रहण करने के लिए 1.65 अरब [[अमेरिकी डॉलर]] के स्टॉक का समझौता किया है। 13 नवम्बर 2006 को यह समझौता पूरा कर लिया गया।<ref>{{Cite web |url=http://www.theage.com.au/news/Busness/Google-closes-A2b-YouTube-deal/2006/11/14/1163266548827.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071220214911/http://www.theage.com.au/news/Busness/Google-closes-A2b-YouTube-deal/2006/11/14/1163266548827.html |archive-date=20 दिसंबर 2007 |url-status=live }}</ref>
यूट्यूब पर अपलोड किया गया सबसे पहला वीडियो ''[[मी ऐट द ज़ू]]'' (मैं चिड़ियाघर में) है, जिसमें इसके सह-संस्थापक [[जावेद करीम]] सैन डिएगो चिड़ियाघर में दिखाई दे रहे हैं। यह 23 अप्रैल 2005 को अपलोड किया गया था और इसे आज भी यूट्यूब पर देखा जा सकता है।<ref>{{cite web|url=https://www.youtube.com/watch?v=jNQXAC9IVRw|title=मी ऐट द ज़ू (मैं चिड़ियाघर में)|date=23 अप्रैल 2005|publisher=यूट्यूब|archive-url=https://web.archive.org/web/20190916011958/https://www.youtube.com/watch?v=jNQXAC9IVRw|archive-date=16 सितंबर 2019|accessdate=२९ अप्रैल २०१६|url-status=live}}</ref>
वर्तमान में यूट्यूब के 5 सबसे अधिक सब्सक्राइब किए गए चैनल निम्नलिखित हैं:
# [[मिस्टर बीस्ट]]
# [[टी-सीरीज़]]
# [[कोकोमेलन]]
# [[सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न|सेट इंडिया]]
# [[व्लाद एंड निकी]]
मीडिया में अक्सर दोहराई जाने वाली एक कहानी के अनुसार, [[चाड हर्ले]] और [[स्टीव चैन]] को 2005 के शुरुआती महीनों के दौरान सैन फ्रांसिस्को में चैन के अपार्टमेंट में हुई एक डिनर पार्टी में लिए गए वीडियो को बाँटने में काफी कठिनाई आई थी, और इसी घटना से यूट्यूब का विचार जन्मा। करीम इस पार्टी में शामिल नहीं थे और उन्होंने इस बात से इनकार किया है कि ऐसी कोई पार्टी हुई थी। चैन ने बाद में इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, "यह एक कहानी है जिसे पचाने में आसान बनाने के लिए विपणन विचारों से मजबूत किया गया था।"<ref name="टाइम">{{cite news|url=http://www.time.com/time/printout/0,8816,1570721,00.html|title=The Gurus of YouTube|last=क्लाउड|first=जॉन|date=16 दिसंबर 2006|work=टाइम पत्रिका|accessdate=29 नवंबर 2008|archive-url=https://web.archive.org/web/20070219222540/http://www.time.com/time/printout/0%2C8816%2C1570721%2C00.html|archive-date=19 फ़रवरी 2007|language=en|trans-title=यूट्यूब के गुरु|url-status=dead}}</ref>
करीम ने बताया है कि यूट्यूब बनाने की असली प्रेरणा उन्हें 2004 में हिन्द महासागर में आई सुनामी की ऑनलाइन वीडियो क्लिप्स न मिल पाने से मिली थी।<ref>{{cite web|url=https://usatoday30.usatoday.com/tech/news/2006-10-11-youtube-karim_x.htm|title=Surprise! There's a third YouTube co-founder|last=हॉपकिंस|first=जिम|date=अक्टूबर 11, 2006|website=यूएसए टुडे|language=en|trans-title=आश्चर्य! वहाँ एक तीसरा यूट्यूब के सह-संस्थापक है|archive-url=https://web.archive.org/web/20130318193654/http://usatoday30.usatoday.com/tech/news/2006-10-11-youtube-karim_x.htm|archive-date=18 मार्च 2013|accessdate=19 जून 2013|url-status=live}}</ref> वहीं, हर्ले और चैन ने कहा कि यूट्यूब के लिए उनका मूल विचार एक [[ऑनलाइन डेटिंग सेवा]] का वीडियो संस्करण बनाना था, जो उस समय की लोकप्रिय वेबसाइट ''हॉट और नॉट'' से प्रभावित था।<ref>{{cite web|url=http://www.time.com/time/magazine/article/0,9171,1570795-5,00.html|title=The YouTube Gurus|last=क्लाउड|first=जॉन|website=टाइम|language=en|trans-title=यूट्यूब के गुरु|archive-url=https://web.archive.org/web/20130814024303/http://www.time.com/time/magazine/article/0,9171,1570795-5,00.html|archive-date=14 अगस्त 2013|access-date=29 अप्रैल 2016|url-status=dead}}</ref>
यूट्यूब की शुरुआत एक उद्यम वित्त पोषित प्रौद्योगिकी स्टार्टअप के रूप में हुई थी। इसे नवम्बर 2005 और अप्रैल 2006 के बीच सिकोइया कैपिटल से 1.15 करोड़ डॉलर का निवेश प्राप्त हुआ था।<ref>{{Cite news|url=https://www.nytimes.com/2006/10/10/technology/venture-firm-shares-a-youtube-jackpot.html|title=Venture Firm Shares a YouTube Jackpot|last=हेल्फ्ट|first=मिगुयेल|date=2006-10-10|work=द न्यूयॉर्क टाइम्स|access-date=2025-07-24|last2=रिच्टेल|first2=मैट्ट|language=en-US|issn=0362-4331}}</ref> यूट्यूब का प्रारम्भिक मुख्यालय सैन मेटिओ (कैलिफोर्निया) में एक पिज़्ज़ेरिया और जापानी रेस्तरां के ऊपर स्थित था।<ref>{{cite news|url=http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2006/10/06/AR2006100600660.html|title=Ready for Its Close-Up|last=केहेलौन्न|first=सारा|date=7 अक्टूबर 2006|work=वाशिंगटन पोस्ट|accessdate=नवम्बर 29, 2008|archive-url=https://web.archive.org/web/20110504054300/http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2006/10/06/AR2006100600660.html|archive-date=4 मई 2011|language=en|trans-title=अपने घनिष्ठ-अप के लिए तैयार|url-status=live}}</ref> वेबसाइट का [[डोमेन नाम]] `www.youtube.com` 14 फरवरी 2005 को सक्रिय किया गया था और बाद के महीनों में इस वेबसाइट को पूरी तरह से विकसित किया गया।<ref>{{cite web|url=http://whois.domaintools.com/youtube.com|title=Whois Record for Youtube.com|website=डोमेन टूल|archive-url=https://web.archive.org/web/20190402130611/http://whois.domaintools.com/youtube.com|archive-date=2 अप्रैल 2019|access-date=15 जून 2020|url-status=live}}</ref>
== सामाजिक प्रभाव ==
2005 में यूट्यूब की शुरुआत से पहले, आम कंप्यूटर उपयोगकर्ताओं के लिए ऑनलाइन वीडियो पोस्ट करने के बहुत कम और आसान तरीके उपलब्ध थे। इसके उपयोग में आसान इंटरफ़ेस ने यह संभव बनाया कि बुनियादी कंप्यूटर ज्ञान रखने वाला कोई भी व्यक्ति वीडियो पोस्ट कर सके, जिसे कुछ ही मिनटों में लाखों लोग देख सकते हैं। यूट्यूब ने विविध विषयों पर वीडियो साझा करने की इस प्रक्रिया को [[इंटरनेट संस्कृति]] का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है।
यूट्यूब के सामाजिक प्रभाव का एक शुरुआती उदाहरण 2006 में 'बस अंकल' वीडियो की सफलता थी। इस वीडियो में [[हॉन्ग कॉन्ग|हांगकांग]] की एक बस में एक युवा और एक बुजुर्ग व्यक्ति के बीच हुई तीखी बहस को दिखाया गया था, जिसकी मुख्यधारा की मीडिया में व्यापक चर्चा हुई थी। व्यापक कवरेज प्राप्त करने वाला एक अन्य शुरुआती वीडियो 'गिटार' था, जिसमें जोहान पाशेलबेल के 'कैनन' की प्रस्तुति एक इलेक्ट्रिक गिटार पर दी गई थी। इस वीडियो में कलाकार का नाम नहीं बताया गया था, फिर भी इसे लाखों दर्शकों ने देखा। बाद में ''[[दि न्यू यॉर्क टाइम्स|द न्यूयॉर्क टाइम्स]]'' ने खुलासा किया कि वह गिटारवादक [[दक्षिण कोरिया]] का 23 वर्षीय जियोंग-ह्युन लिम था, जिसने यह ट्रैक अपने बेडरूम में रिकॉर्ड किया था।
यूट्यूब प्लेटफॉर्म पर लोग अलग-अलग उद्देश्यों से अपना चैनल बनाते हैं, लेकिन लक्ष्य चाहे जो भी हो, यूट्यूब लगभग हर व्यक्ति के उद्देश्य को पूरा करने में सहायक है। कुछ लोग मज़ेदार वीडियो बनाकर दर्शकों का मनोरंजन करना चाहते हैं, जबकि अन्य इसका उपयोग अपने व्यवसाय के प्रचार-प्रसार के लिए करते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://buyingrealyoutubeviews.com/top-notch-advantages-of-creating-a-youtube-channel/|title=Top-Notch Advantages Of Creating A Youtube Channel! – BRYV|language=en-US|access-date=2023-01-12}}</ref>
== सेवा की शर्तें ==
यूट्यूब की सेवा शर्तों के अनुसार,<ref>[http://youtube.com/t/terms यूट्यूब इस्तेमाल करने ] की शर्तें ५ मई २००७ तक</ref> कोई भी उपयोगकर्ता केवल तभी वीडियो अपलोड कर सकता है जब उसके पास वीडियो का कॉपीराइट हो या उसमें दिखाए गए लोगों की अनुमति हो। साइट पर अश्लीलता, नग्नता, मानहानि, उत्पीड़न, अनधिकृत वाणिज्यिक विज्ञापन और आपराधिक आचरण को प्रोत्साहित करने वाली सामग्री सख्त वर्जित है।
अपलोड करने वाला व्यक्ति यूट्यूब को यह अधिकार देता है कि वह अपलोड की गई सामग्री को किसी भी उद्देश्य के लिए वितरित या संशोधित कर सके। हालाँकि, जब अपलोडर अपनी सामग्री को साइट से हटा देता है, तो यह लाइसेंस स्वतः रद्द हो जाता है। उपयोगकर्ता साइट पर वीडियो केवल तभी तक देख सकते हैं जब तक कि वे इन सेवा शर्तों से सहमत हों; बिना अनुमति के वीडियो डाउनलोड करना या उसकी नकल करना निषिद्ध है।
== यूट्यूब की कमाई ==
मई 2007 में, यूट्यूब ने अपना पार्टनर प्रोग्राम लॉन्च किया था। यह 'गूगल एडसेंस' पर आधारित एक प्रणाली है, जो वीडियो अपलोड करने वालों को साइट पर विज्ञापनों द्वारा उत्पन्न राजस्व का हिस्सा प्राप्त करने की अनुमति देती है। यूट्यूब आमतौर पर वीडियो से होने वाली विज्ञापन कमाई का 45 प्रतिशत हिस्सा स्वयं रखता है, जबकि 55 प्रतिशत हिस्सा अपलोडर को दिया जाता है।<ref>{{cite web |last1=Edwards |first1=Jim |title=The biggest stars on YouTube make huge incomes ... yet they can't keep the vast majority of it |url=https://www.businessinsider.com/money-youtube-stars-actually-make-2014-2 |website=Business Insider}}</ref><ref>{{cite web |last1=Carmody |first1=Tim |title=It's not TV, it's the Web: YouTube partners complain about Google ads, revenue sharing |url=https://www.theverge.com/2013/3/4/4062810/youtube-partners-complain-revenue-sharing-google-ads |website=The Verge |date=4 मार्च 2013}}</ref> वर्तमान में यूट्यूब सहयोगी कार्यक्रम के दस लाख से अधिक सदस्य हैं।<ref>{{cite web |title=YouTube Official Blog |url=https://www.youtube.com/yt/press/statistics.html |website=blog.youtube |language=en-us}}</ref>
यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम में शामिल होकर कमाई शुरू करने के लिए क्रिएटर के चैनल पर कम से कम 1,000 सदस्य और पिछले 12 महीनों के भीतर 4,000 घंटे का वॉच-टाइम होना एक प्रमुख मानदंड है।<ref>{{Cite web|url=https://youtubemonetized.com/how-to-reach-1000-subs/|title=How to Reach 1,000 Subs? - YouTube Monetized|date=2022-01-20|language=en-US|access-date=2022-12-08}}</ref><ref>{{cite web |title=Additional Changes to the YouTube Partner Program (YPP) to Better Protect Creators |url=https://youtube-creators.googleblog.com/2018/01/additional-changes-to-youtube-partner.html |website=blog.youtube |language=en-us}}</ref> (इस नियम को 16 जनवरी 2018 को लागू किया गया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल गुणवत्तापूर्ण वीडियो का ही मुद्रीकरण हो, हालाँकि छोटे चैनलों ने इस नीति की आलोचना की थी।) इसके अतिरिक्त, 2013 में यूट्यूब ने बड़े चैनलों (कम से कम 1000 सदस्य वाले) के लिए एक विकल्प पेश किया, जिससे वे दर्शकों से वीडियो देखने के लिए सशुल्क सदस्यता ले सकते हैं।<ref>{{cite web |last1=McCue |first1=T. J. |title=Google's YouTube Introduces Paid Content Subscriptions |url=https://www.forbes.com/sites/tjmccue/2013/01/30/google-youtube-introduces-paid-content-subscriptions/#7841841b2625 |website=Forbes |language=en}}</ref>
यूट्यूब की नीतियां "विज्ञापनदाता-अनुकूल" सामग्री पर जोर देती हैं। ऐसे वीडियो जिनमें अत्यधिक हिंसा, अभद्र भाषा, यौन सामग्री, या युद्ध, राजनीतिक संघर्ष और प्राकृतिक आपदाओं जैसे विवादास्पद/संवेदनशील विषय शामिल होते हैं, उन पर मुद्रीकरण प्रतिबंधित होता है।<ref>{{cite web |last1=Spangler |first1=Todd |last2=Spangler |first2=Todd |title=YouTube Explains Which Profanities and ‘Inappropriate Language’ Are Not OK for Ad-Supported Videos |url=https://variety.com/2019/digital/news/yo'utube-profanity-ad-supported-video-demonetized-1203107619/ |website=Variety |date=14 जनवरी 2019}}</ref> सितंबर 2016 में, जब यूट्यूब ने इन उल्लंघनों के बारे में सूचना प्रणाली शुरू की, तो कई बड़े क्रिएटर्स ने इसे "सेंसरशिप" बताते हुए इसका विरोध किया था।<ref>{{cite web |last1=Robertson |first1=Adi |title=Why is YouTube being accused of censoring vloggers? |url=https://www.theverge.com/2016/9/1/12753108/youtube-is-over-party-advertising-monetization-censorship |website=The Verge |date=1 सितम्बर 2016}}</ref>
नवंबर 2020 (अमेरिका में) और जून 2021 (दुनिया भर में) तक लागू किए गए नए नियमों के अनुसार, यूट्यूब यह अधिकार सुरक्षित रखता है कि वह प्लेटफ़ॉर्म पर मौजूद किसी भी वीडियो पर विज्ञापन चला सकता है, भले ही उस वीडियो को अपलोड करने वाला चैनल यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम का हिस्सा न हो। ऐसी स्थिति में सारा विज्ञापन राजस्व सीधे गूगल को जाता है और अपलोडर को इसका कोई हिस्सा नहीं मिलता।<ref>{{cite web |title=YouTube announces changes in its terms of services |url=https://www.telegraphindia.com/business/youtube-announces-changes-in-its-terms-of-services/cid/1816154 |website=www.telegraphindia.com}}</ref><ref>{{cite web |last1=Graham |first1=Megan |title=YouTube will put ads on non-partner videos but won't pay the creators |url=https://www.cnbc.com/2020/11/19/youtube-will-put-ads-on-non-partner-videos-but-wont-pay-the-creators.html |website=CNBC |language=en}}</ref>
=== यूट्यूब क्रिएटर पुरस्कार ===
यूट्यूब अपने प्लेटफ़ॉर्म के सबसे लोकप्रिय चैनलों को उनकी सफलता के लिए 'यूट्यूब प्ले बटन' (क्रिएटर रिवॉर्ड्स) देकर सम्मानित करता है।<ref>{{cite web |title=Youtube Creator Awards |url=https://www.indiasikho.com/youtube-creator-awards/ |date=4 दिसम्बर 2022}}</ref> सदस्य की संख्या के आधार पर निम्नलिखित पुरस्कार दिए जाते हैं:
* 1 लाख पर: सिल्वर प्ले बटन
* 10 लाख सदस्य पर: गोल्ड प्ले बटन
* 1 करोड़ सदस्य पर: डायमंड प्ले बटन
* 5 करोड़ सदस्य पर: कस्टम (रूबी) प्ले बटन
* 10 करोड़ सदस्य पर: रेड डायमंड प्ले बटन
== आलोचना ==
यूट्यूब की अक्सर इस बात के लिए आलोचना की जाती है कि वह ऑनलाइन सामग्री के [[कॉपीराइट]] (प्रतिलिप्यधिकार) कानूनों का सख्ती से पालन नहीं करता है। कोई भी वीडियो अपलोड करते समय, उपयोगकर्ता को स्क्रीन पर निम्नलिखित चेतावनी संदेश दिखाया जाता है:
<blockquote>"किसी भी टीवी शो, संगीत वीडियो, संगीत कार्यक्रम या ऐसी सामग्री जिसे आपने स्वयं नहीं बनाया है, उसे मूल स्वामी की अनुमति के बिना अपलोड न करें। हमारा कॉपीराइट टिप्स पेज और समुदाय दिशानिर्देश आपको दूसरों के कॉपीराइट का उल्लंघन न करने में मदद करेंगे।"</blockquote>
इस चेतावनी के बावजूद, यूट्यूब पर टीवी शो, फिल्मों और संगीत वीडियो की कई अनधिकृत क्लिप्स लगातार मौजूद रहती हैं। चूँकि यूट्यूब अपलोड होने से पहले सभी वीडियो की मैन्युअल रूप से जांच नहीं करता है, इसलिए 'डिजिटल मिलेनियम कॉपीराइट एक्ट' के तहत कॉपीराइट उल्लंघन का नोटिस जारी करने की जिम्मेदारी स्वयं कॉपीराइट धारक की होती है। [[वायकॉम]] और इंग्लिश [[प्रीमियर लीग]] जैसे कई बड़े संगठनों ने यूट्यूब पर कॉपीराइट उल्लंघन को रोकने में अपर्याप्त प्रयास करने का आरोप लगाते हुए उस पर [[मुकदमा]] किया है। वायकॉम ने 1 अरब डॉलर के [[क्षतिपूर्ति|हर्जाने]] की माँग करते हुए दावा किया था कि उसने यूट्यूब पर अपनी सामग्री की 1,50,000 से अधिक अनधिकृत क्लिप्स पाई हैं, जिन्हें 1.5 अरब से अधिक बार देखा जा चुका था। इसके जवाब में यूट्यूब ने तर्क दिया कि वह सामग्री के मालिकों को उनके अधिकारों की रक्षा करने में मदद कर रहा है, जो उसकी कानूनी बाध्यताओं से कहीं अधिक है। वायकॉम के मुकदमे के बाद, यूट्यूब ने एक उन्नत 'डिजिटल फिंगरप्रिंटिंग' प्रणाली शुरू की, जो अपलोड किए जा रहे वीडियो में कॉपीराइट उल्लंघन की स्वचालित रूप से पहचान करती है और उसे रोकती है।
जुलाई 2008 में, वायकॉम के पक्ष में एक अदालती फैसला आया, जिसमें यूट्यूब को साइट पर वीडियो देखने वाले उपयोगकर्ताओं के डेटा और देखने की आदतों का विवरण सौंपने का आदेश दिया गया। इस आदेश ने निजता के संबंध में बड़ी परेशानी खड़ी कर दी, क्योंकि किसी भी उपयोगकर्ता के देखने की आदतों की पहचान उसके [[आईपी पता|आईपी पते]] और लॉग-इन आईडी के संयोजन से की जा सकती थी। 'इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फाउंडेशन' ने इस अदालती फैसले की कड़ी आलोचना की और इसे निजता के अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन बताया। हालाँकि, जिला न्यायालय के न्यायाधीश लुई स्टैंटन ने इन निजता संबंधी चिंताओं को 'काल्पनिक' बताते हुए खारिज कर दिया और यूट्यूब को लगभग 12 [[टेराबाइट]] डेटा वाले दस्तावेज़ सौंपने का आदेश दिया। इसके साथ ही, न्यायाधीश स्टैंटन ने वायकॉम के उस अनुरोध को ठुकरा दिया जिसमें यूट्यूब के [[खोज इंजन|सर्च इंजन]] का [[स्रोत कोड|सोर्स कोड]] माँगा गया था। अदालत ने यह भी कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि यूट्यूब ने स्वयं जानबूझकर वीडियो के कॉपीराइट का उल्लंघन किया हो।
कॉपीराइट के अतिरिक्त, यूट्यूब को अपने प्लेटफॉर्म पर आपराधिक और अनुचित सामग्री वाले कुछ वीडियो के कारण भी कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है। हालाँकि यूट्यूब की 'सेवा की शर्तें' अनुचित, हिंसक या [[मानहानि]] करने वाली सामग्री अपलोड करने पर सख्त रोक लगाती हैं, लेकिन अपलोड होने वाले लाखों वीडियो की तुरंत जांच करना असंभव है; इस कारण समय-समय पर ऐसी कमियाँ सामने आती रहती हैं। यूट्यूब पर अपलोड किए गए कुछ बेहद विवादास्पद वीडियो में 'होलोकॉस्ट से इनकार' और 'हिल्सबोरो आपदा' से जुड़ी असंवेदनशील सामग्री शामिल रही है।
== प्रतिबंध और सेंसरशिप ==
यूट्यूब की शुरुआत के बाद से, कई देशों—जिनमें [[तूनिसीया]], [[थाईलैंड]] और [[ईरान]] शामिल हैं—ने विभिन्न कारणों से इस प्लेटफॉर्म पर रोक लगाई, जिसे बाद में हटा लिया गया। 1 अक्टूबर 2007 को [[तुर्की]] में भी यूट्यूब के कुछ पेजों को प्रतिबंधित कर दिया गया था, हालांकि दो दिन बाद यह रोक हटा ली गई। इसके बाद 22 जनवरी 2008 को तुर्की में एक बार फिर यूट्यूब पर रोक लगाई गई, जिसे तीन दिन बाद हटा लिया गया। बाद में 5 मई 2008 से तुर्की में यूट्यूब पर एक लंबा प्रतिबंध लगा रहा। [[संयुक्त अरब अमीरात]] में भी यूट्यूब के कुछ विशिष्ट पेजों और वीडियो पर रोक लगी हुई है।
23 फरवरी 2008 को, [[पाकिस्तान]] ने पैगंबर [[मुहम्मद]] के चित्र दिखाकर [[इस्लाम]] के खिलाफ अपमानजनक सामग्री प्रदर्शित करने का आरोप लगाते हुए यूट्यूब को अपने देश में प्रतिबंधित कर दिया था।<ref>{{cite web|date=23 फरवरी 2008|archive-url= https://web.archive.org/web/20080225175336/http://www.rsf.org/article.php3?id_article=25889 |archive-date=25 फ़रवरी 2008|url=http://www.rsf.org/article.php3?id_article=25889|title=Access to YouTube blocked until further notice because of "non-Islamic" videos|trans-title= गैर इस्लामी वीडियॊ के कारण यूट्यूब पर अगली नॊटिस तक के लिए रॊक लगायी गयी|language=en|publisher=रिपोर्टर्स विदाउट बोर्डर्स |access-date= 24 फरवरी 2008}}</ref> पाकिस्तानी अधिकारियों की इस कार्रवाई के कारण तकनीकी गड़बड़ी उत्पन्न हुई, जिससे पूरी दुनिया में यूट्यूब की साइट कम से कम दो घंटों के लिए क्रैश (ब्लॉक) हो गई।<ref>{{Cite news|url=http://news.bbc.co.uk/2/hi/technology/7262071.stm|title=Pakistan lifts the ban on YouTube|date=2008-02-26|access-date=2025-07-24|language=en-GB|publisher=बीबीसी समाचार |trans-title=यूट्यूब आउटेज़ बीबीसी ने पाकिस्तान को दोषी ठहराया |archive-url=https://web.archive.org/web/20090215160354/http://news.bbc.co.uk/1/hi/technology/7262071.stm |archive-date=15 फ़रवरी 2009 }}</ref> इस प्रतिबंध के दौरान, हजारों पाकिस्तानी उपयोगकर्ताओं ने 'हॉटस्पॉट शील्ड' नामक एक [[वीपीएन]] सॉफ़्टवेयर का उपयोग करके इस तीन दिवसीय ब्लॉक को दरकिनार किया।<ref>{{cite web|date=27 फरवरी 2008 |url=http://www.siliconrepublic.com/news/news.nv?storyid=single10381 |title=Pakistan web users get round YouTube ban |trans-title=पाकिस्तान वेबसाइट प्रयोगकर्ता हमेशा यू ट्यूब रोक |language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20080629065235/http://www.siliconrepublic.com/news/news.nv?storyid=single10381 |archive-date=29 जून 2008 |access-date= 27 फरवरी 2008}}</ref> 26 फरवरी 2008 को जब यूट्यूब ने वह आपत्तिजनक सामग्री अपनी साइट से हटा ली, तब पाकिस्तान ने यह प्रतिबंध समाप्त कर दिया।<ref name="PAK-ban-lifted">{{cite news | title = Pakistan lifts YouTube ban | url = http://www.abc.net.au/news/stories/2008/02/27/2173501.htm?section=world | publisher = एबीसी न्यूज़ | date = 2008-02-26 | accessdate = 2008-02-26}}</ref>
यूट्यूब पर उपलब्ध विशाल और विविध सामग्री के कारण, इसे अक्सर कई देशों की सरकारों के प्रतिबंधों का डर सताता रहता है। मुख्यभूमि [[चीन]] में भी 18 अक्टूबर से यूट्यूब को ताइवानी झंडे वाले एक वीडियो के कारण ब्लॉक कर दिया गया था। उस दौरान चीन में यूट्यूब के URL को उनके अपने सर्च इंजन बैदू पर अनुप्रेषित कर दिया गया था। बाद में 31 अक्टूबर को इसे फिर से खोल दिया गया।<ref>{{Cite web|url=http://udn.com/NEWS/INFOTECH/INFS1/4061683.shtml|title=संदर्भ|archive-url=https://web.archive.org/web/20071021040312/http://udn.com/NEWS/INFOTECH/INFS1/4061683.shtml|archive-date=21 अक्तूबर 2007|access-date=27 फ़रवरी 2009|url-status=live}}</ref>
राष्ट्रीय सेंसरशिप के अलावा, कई देशों के स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों ने भी छात्रों के दुर्व्यवहार, आपसी झगड़ों, नस्लवादी टिप्पणियों, और इंटरनेट बैंडविड्थ की अधिक खपत को रोकने के लिए अपने परिसरों में यूट्यूब को ब्लॉक किया हुआ है।
== स्पैमिंग ==
ईमेल स्पैम फ़िल्टरिंग तकनीक में हुए हालिया विकास और इसके व्यापक उपयोग के कारण, स्पैमर्स ने विज्ञापनों के लिए यूट्यूब जैसी लोकप्रिय वीडियो साइटों का उपयोग करना शुरू कर दिया। इसे रोकने के लिए यूट्यूब ने 2006 में टिप्पणियों में यूआरएल जोड़ने पर रोक लगा दी थी। यदि कोई उपयोगकर्ता अपनी टिप्पणी में यूआरएल डालकर पोस्ट करने का प्रयास करता है, तो उसे अस्वीकार कर दिया जाता है और वह दिखाई नहीं देता।
अगस्त 2007 में इस सुविधा (प्रतिबंध) को प्रोफाइल टिप्पणियों तक भी बढ़ा दिया गया था, जहाँ ऐसा करने पर उपयोगकर्ता को "आपकी टिप्पणी की प्रक्रिया में त्रुटि" का संदेश प्राप्त होता है। हालाँकि, बुलेटिन, निजी संदेशों या समूह चर्चाओं में लिंक पोस्ट करना अभी भी संभव है। इसके साथ ही, यदि कोई उपयोगकर्ता बहुत ही कम समय में लगातार कई टिप्पणियाँ पोस्ट करता है, तो स्पैमिंग को रोकने के लिए उसे एक [[कॅप्चा|कैप्चा]] भरने के लिए कहा जा सकता है। हालाँकि, साइट के कुछ हिस्सों में अभी भी कैप्चा प्रणाली का अभाव मौजूद है।
स्पैमर्स के अन्य तरीकों में वीडियो टिप्पणियों में भ्रामक, अंधविश्वासी या धमकी भरे संदेश भेजना शामिल है (जैसे: "इस संदेश को 10 दोस्तों को भेजो, वरना इतने घंटों में आपका दुर्भाग्य आएगा")। वे उपयोगकर्ताओं के इनबॉक्स में भी ऐसे स्पैम संदेश भेज सकते हैं। इसके अलावा, कुछ स्पैम खातों ने यूट्यूब पर अश्लील वीडियो पोस्ट करने का भी प्रयास किया है।
यूट्यूब ने ईमेल के माध्यम से "अपने दोस्तों को आमंत्रित करें" नामक एक नई सुविधा शुरू की थी, जिसका वास्तविक उद्देश्य यूट्यूब उपयोगकर्ताओं का एक बड़ा समुदाय बनाना था। लेकिन जब स्पैमर्स को इसका पता चला, तो उन्होंने इसका दुरुपयोग करते हुए हर संभव ईमेल पते पर स्पैम भेजना शुरू कर दिया। यहाँ तक कि वे इस व्यवस्था को चकमा देने में भी सक्षम हो गए।
{{cquote|''ये संदेश service@youtube.com से आए थे। [...] ये संदेश दिखने में यूट्यूब के एक वैध आमंत्रण जैसे लगते हैं, लेकिन इनमें शेयर बाज़ार के फ़र्ज़ी प्रचार और स्पैम वेबसाइटों के लिंक जैसी विशिष्ट स्पैम सामग्री शामिल होती है। इनमें से कई संदेश माइक्रोसॉफ्ट के तत्कालीन लोकप्रिय एक्सबॉक्स 360 गेम "हेलो 3" का लालच देते हुए प्राप्तकर्ता को बताते हैं कि उन्होंने गेम की एक मुफ्त कॉपी जीती है और उन्हें एक वेबसाइट पर जाना चाहिए। यदि वे इस जाल में फँसकर 'winhalo3.com' पर क्लिक करते हैं, तो वह वेबसाइट उनके सिस्टम को स्टॉर्म वर्म वायरस से संक्रमित कर देती है, जो अगस्त से ही इंटरनेट पर सक्रिय था।''<ref name="internetnews">[http://www.internetnews.com/security/article.php/3704541 Internetnews: YouTube's Not-so-'Friendly' Spam]</ref>}}
वर्तमान में स्पैमर्स इस तरीके का अधिक उपयोग कर रहे हैं क्योंकि इसकी मदद से वे ईमेल स्पैम फ़िल्टर को आसानी से बायपास कर सकते हैं और अपने दुर्भावनापूर्ण लिंक पर क्लिक या व्यूज़ प्राप्त कर सकते हैं। अंततः, ये भी अन्य सामान्य स्पैमर्स की तरह ही काम करते हैं।
== तकनीकी नोट ==
=== वीडियो प्रारूप ===
यूट्यूब की शुरुआती वीडियो प्लेबैक तकनीक [[मैक्रोमीडिया]] के फ़्लैश प्लेयर पर आधारित थी। इस तकनीक ने साइट को [[विंडोज़ मीडिया प्लेयर]], क्विकटाइम और रियलप्लेयर जैसे तत्कालीन स्थापित वीडियो प्लेयर की तुलना में कम बफरिंग के साथ अच्छी गुणवत्ता वाले वीडियो प्रदर्शित करने की सुविधा दी थी। पहले उपयोगकर्ताओं को वीडियो देखने के लिए एक [[वेब ब्राउज़र|वेब ब्राउज़र प्लग-इन]] डाउनलोड और इंस्टॉल करना पड़ता था, लेकिन उस समय फ़्लैश प्लेयर दुनिया भर के लगभग 90% ऑनलाइन कंप्यूटरों पर पहले से मौजूद रहता था।<ref>[http://www.adobe.com/products/player_census/flashplayer/version_penetration.html एडोब फ़्लैश प्लेयर संस्करण प्रवेश ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120218013034/http://www.adobe.com/products/flashplatformruntimes/statistics.html|date=18 फ़रवरी 2012}} [[एडोब इंक.|एडोब]]</ref> जनवरी 2015 से, यूट्यूब ने डिफ़ॉल्ट रूप से [[एचटीएमएल५|HTML5]] वीडियो प्लेयर का उपयोग करना शुरू कर दिया, जिससे अब फ़्लैश प्लग-इन की आवश्यकता पूरी तरह से समाप्त हो गई है।
उपयोगकर्ता 'डिफ़ॉल्ट मोड', 'थिएटर मोड' या 'पूर्ण स्क्रीन' में वीडियो देख सकते हैं। प्लेयर की तकनीक वीडियो को बिना रीलोड किए प्लेबैक के दौरान अलग-अलग मोड में स्विच करने की अनुमति देती है। इसके अतिरिक्त, तृतीय पक्ष मीडिया प्लेयर जैसे जीओएम प्लेयर, [[वीएलसी मीडिया प्लेयर|वीएलसी मीडिया प्लेयर]] और एफएफएमपीईजी आधारित वीडियो प्लेयर के माध्यम से भी यूट्यूब वीडियो को स्ट्रीम किया जा सकता है।
मार्च 2006 में, यूट्यूब ने सामान्य वीडियो की लंबाई पर 10 मिनट की सीमा लगा दी थी, क्योंकि उस समय साइट पर कॉपीराइट वाले टेलीविजन शो और फिल्मों के लंबे वीडियो अपलोड किए जा रहे थे।<ref>यू ट्यूब की सहायता खंड कहता है :"आप दस मिनट से अधिक विडियो अपलोड नही कर सकते...दस मिनट की सीमा मार्च २००६ में तब शुरू की गई जब यू ट्यूब ने महसूस किया कि इस लम्बाई कि अधिकांश विडियो टेलिविज़न शो और फ़िल्म से थे।"</ref> हालांकि, वर्तमान में यह सीमा हटा दी गई है। अब सत्यापित खाते वाले उपयोगकर्ता 12 घंटे तक की अवधि और अधिकतम 256 [[गीगाबाइट]] फ़ाइल साइज़ तक के वीडियो अपलोड कर सकते हैं।
यूट्यूब कई प्रकार के वीडियो फ़ाइल स्वरूपों को अपलोड करने के लिए स्वीकार करता है। यूट्यूब के सर्वर अपलोड किए गए वीडियो को स्ट्रीमिंग के लिए उपयुक्त प्रारूपों में स्वचालित रूप से बदल देते हैं।<ref>{{Cite web |url=http://www.codinghorror.com/blog/archives/000755.html |title=Did YouTube Cut the Gordian Knot of Video Codecs? |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090302051409/http://www.codinghorror.com/blog/archives/000755.html |archive-date=2 मार्च 2009 |url-status=live }}</ref> स्वीकृत अपलोड स्वरूपों में मुख्य रूप से [[विंडोज मीडिया वीडियो|डब्लूएमवी (.WMV)]], एवीआई (.AVI), एमओवी (.MOV), एमपीईजी (MPEG), वेबएम (WebM) और एमपी४ शामिल हैं। यह 3जीपी स्वरूप का भी समर्थन करता है, जो वीडियो को सीधे [[स्मार्टफोन|मोबाइल फ़ोन]] से अपलोड करने की अनुमति देता है।<ref>{{Cite web |url=http://www.google.com/support/youtube/bin/answer.py?answer=55744&topic=10526 |title=यूट्यूब अधिकारिक रूप में किस प्रारूप में अपलोड विडियो स्वीकार करता है |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090317024831/http://www.google.com/support/youtube/bin/answer.py?answer=55744&topic=10526 |archive-date=17 मार्च 2009 |url-status=live }}</ref>
=== स्तरीय और उच्च गुणवत्ता का वीडियो ===
शुरुआत में यूट्यूब वीडियो की मानक गुणवत्ता 320 [[पिक्सल]] चौड़ाई और 240 पिक्सल ऊँचाई वाले चित्र तक सीमित थी। इसमें सोरेंसन स्पार्क H.263 वीडियो कोडेक का उपयोग किया गया था। वीडियो सिग्नल की बिट दर लगभग 314 किलोबिट प्रति सेकंड थी, जो अपलोड किए गए वीडियो की फ्रेम दर पर निर्भर करती थी।<ref>इन्टरनेट संरचना विश्लेषकों द्वारा परीक्षित और नए अपलोड किए गए वीडियो के आधार पर, 19 नवंबर 2007</ref>
मार्च 2008 में, यूट्यूब ने एक नई सुविधा शुरू की, जिसने 'उच्च गुणवत्ता' प्रारूप में वीडियो देखने की अनुमति दी। यह प्रारूप इस तिथि के बाद अपलोड किए गए किसी भी वीडियो के लिए बेहतर रिज़ॉल्यूशन (320x240 पिक्सल के स्थान पर 480x360 पिक्सल) प्रदर्शित करने में सक्षम था। यूट्यूब के सर्वर स्वयं यह निर्धारित करते थे कि मूल रूप से अपलोड किया गया कौन सा वीडियो इस उन्नत मानक का समर्थन करने में सक्षम है। उपयोगकर्ता अपने खाते के [https://web.archive.org/web/20080517102330/http://www.youtube.com/video_quality_settings वीडियो गुणवत्ता सेटिंग पृष्ठ] पर जाकर डिफ़ॉल्ट रूप से "जब भी उपलब्ध हो, मुझे हमेशा उच्च गुणवत्ता वाला वीडियो दिखाएँ" विकल्प को चुन सकते थे।
यूट्यूब के उच्च गुणवत्ता वाले वीडियो दो संस्करणों में उपलब्ध कराए गए थे, और दोनों में ही 480x360 [[पिक्सल]] का चित्र आकार था। किसी वीडियो के वेब पते के अंत में `&fmt=6` जोड़कर, उसे H.263 कोडेक और मोनो ध्वनि के साथ प्ले किया जा सकता था। वहीं URL के अंत में `&fmt=18` जोड़कर इसे H.264/MPEG-4 AVC कोडेक और AAC स्टीरियो साउंडट्रैक के साथ चलाया जा सकता था।
उस समय जब पूछा गया कि यूट्यूब ने शुरुआत में ही एचडी प्रारूप को क्यों नहीं अपनाया, तो साइट ने उत्तर दिया था, "हमारा मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिक से अधिक लोग यूट्यूब तक पहुँच सकें और उनके वीडियो तुरंत और आसानी से प्ले हो सकें। यही एकमात्र कारण है कि हम 'सुपर डुपर यूट्यूब एचडी' जैसा कोई दावा नहीं करते, क्योंकि अधिकांश दर्शक वीडियो शुरू होने के लिए अधिक देर तक बफ़रिंग का इंतज़ार नहीं कर सकते।"<ref>{{Cite web |url=http://www.trustedreviews.com/software/news/2008/03/19/YouTube-Launches-High-Quality-Videos/p1 |title=यूट्यूब ने उच्च गुणवत्ता वाले वीडियो का प्रारम्भ किया |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080720051626/http://www.trustedreviews.com/software/news/2008/03/19/YouTube-Launches-High-Quality-Videos/p1 |archive-date=20 जुलाई 2008 |url-status=dead }}</ref>
=== ध्वनि प्रारूप ===
शुरुआती मानक गुणवत्ता वाले यूट्यूब वीडियो में [[एमपी३|MP3 (एमपी3)]] ऑडियो स्ट्रीम शामिल होती थी। डिफ़ॉल्ट रूप से यह ऑडियो मोनो मोड में 64 किलोबिट प्रति सेकंड की बिट दर पर कूटबद्ध की जाती थी, जिसे 22,050 [[हर्ट्ज़|हर्ट्ज]] पर नमूनीकृत (Sampled) किया जाता था। इससे लगभग 10 किलोहर्ट्ज़ की ऑडियो बैंडविड्थ प्राप्त होती थी। यह निम्न बिट दर स्पष्ट आवाज़ तो प्रदान करती थी, लेकिन यह 'हाई फाई' ऑडियो मानक के अनुरूप नहीं थी।
बाद में, एक मानक यूट्यूब वीडियो के लिए स्टीरियो ऑडियो ट्रैक का होना भी संभव हो गया, बशर्ते वीडियो फ़ाइल को यूट्यूब पर अपलोड करने से पहले ही फ़्लैश वीडियो प्रारूप में एन्कोड किया गया हो। इस प्रक्रिया को विभिन्न सॉफ्टवेयर प्रोग्रामों की मदद से किया जा सकता था, जैसे— [[लिनक्स]] और [[माइक्रोसॉफ्ट विंडोज़|विंडोज़]] के लिए एफएफएमपीईजी, मैकिन्टोश के लिए एफएफएमपीईजी-एक्स, या विंडोज़ के लिए वाणिज्यिक 'रीवा एफएलवी एन्कोडर'।
<span id="accessibility"></span>
=== सामग्री पहुँच ===
==== यूट्यूब पर ====
यूट्यूब सामान्य वीडियो फ़ाइल स्वरूपों को स्वीकार करता है और उन्हें ऑनलाइन देखने के लिए अनुकूलित प्रारूपों में बदल देता है। शुरुआत में यूट्यूब ने फ्लैश वीडियो का उपयोग किया था, लेकिन जून 2007 से नए अपलोड किए गए वीडियो के लिए उन्नत एच.२६४ एन्कोडिंग तकनीक का प्रयोग शुरू कर दिया गया, जो बेहतर गुणवत्ता प्रदान करती है। वर्तमान में यूट्यूब मुख्य रूप से HTML5 वीडियो प्लेयर का उपयोग करता है।
==== यूट्यूब के बाहर ====
यूट्यूब पर मौजूद प्रत्येक वीडियो एक [[एचटीएमएल]] 'एम्बेड' कोड के साथ आता है, जिसका उपयोग उस वीडियो को किसी भी अन्य वेबपेज या ब्लॉग पर जोड़ने के लिए किया जा सकता है। यह विकल्प विशेष रूप से [[सामाजिक नेटवर्किंग सेवा|सोशल नेटवर्किंग]] साइटों के उपयोगकर्ताओं के बीच बहुत लोकप्रिय है। इसके अलावा, एक छोटी सी कोडिंग की मदद से किसी भी एम्बेडेड वीडियो को वेबपेज लोड होते ही स्वतः प्ले होने की अनुमति भी दी जा सकती है।
मूल रूप से यूट्यूब वीडियो केवल इंटरनेट कनेक्शन के साथ ऑनलाइन देखने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, और प्लेटफ़ॉर्म आधिकारिक तौर पर वीडियो डाउनलोड करने की प्रत्यक्ष सुविधा नहीं देता (सिवाय 'यूट्यूब प्रीमियम' के ऑफ़लाइन डाउनलोड फीचर के)। इसके बावजूद, वीडियो डाउनलोड करने के लिए इंटरनेट पर कई थर्ड-पार्टी वेबसाइट्स, मोबाइल एप्लिकेशन और ब्राउज़र एक्सटेंशन मौजूद हैं।
==== मोबाइल पर ====
यूट्यूब ने 15 जून 2007 को अपनी आधिकारिक मोबाइल साइट लॉन्च की थी। यह शुरुआती मोबाइल संस्करण xHTML पर आधारित था और H.263/AMR कोडेक तथा RTSP स्ट्रीमिंग के साथ 3GP वीडियो प्रारूप का समर्थन करता था। वर्तमान में यूट्यूब का मोबाइल ऐप (Android और iOS दोनों के लिए) विश्व स्तर पर सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले एप्लिकेशन में से एक है।
==== टेलीविज़न पर ====
यूट्यूब की वीडियो सामग्री को टेलीविज़न पर भी देखा जा सकता है। शुरुआत में, 7 जनवरी 2008 को 'Information TV 2' नामक एक चैनल ने यूट्यूब वेबसाइट की साझा सामग्री को टीवी पर प्रसारित करना शुरू किया था। आज के समय में लगभग सभी स्मार्ट टीवी और स्ट्रीमिंग डिवाइस में यूट्यूब का एक समर्पित एप्लिकेशन पहले से इंस्टॉल होता है।
==== एप्पल डिवाइस ====
20 जून 2007 को [[एप्पल इंक.|एप्पल इंक.]] ने घोषणा की थी कि एक मुफ्त सॉफ्टवेयर अपडेट के बाद यूट्यूब 'एप्पल टीवी' पर भी उपलब्ध होगा। इस सुविधा ने उपयोगकर्ताओं को श्रेणियों के आधार पर वीडियो ब्राउज़ करने, सर्च करने और एप्पल टीवी से सीधे अपने यूट्यूब खाते में लॉग-इन करने की अनुमति दी। एप्पल के तत्कालीन वीपी डेविड मूडी के अनुसार, शुरुआत में सभी वीडियो उपलब्ध न होने का कारण यह था कि एप्पल के वीडियो मानकों के अनुरूप यूट्यूब की सभी पुरानी सामग्री को एच.२६४ प्रारूप में ट्रांसकोड करना आवश्यक था।
एप्पल ने यह भी घोषणा की थी कि आईफोन के लॉन्च के साथ ही यूट्यूब उस पर उपलब्ध होगा। आईफोन के लिए यूट्यूब के वीडियो विशेष रूप से एप्पल के एच.२६४ प्रारूप में एन्कोड किए गए थे। शुरुआत में, यूट्यूब ने वीडियो के दो संस्करण बनाए थे—एक उच्च बैंडविड्थ वाला (Wi-Fi के लिए) और दूसरा निम्न रिज़ॉल्यूशन वाला (एज/3G नेटवर्क के लिए)।
=== टिप्पणियाँ ===
जून 2008 में, यूट्यूब ने 'एनोटेशन' सुविधा का बीटा परीक्षण शुरू किया था। यह सुविधा रचनाकारों को अपने वीडियो के ऊपर टेक्स्ट टिप्पणियाँ या लिंक प्रदर्शित करने की अनुमति देती थी। एनोटेशन की मदद से वीडियो में अतिरिक्त जानकारी जोड़ी जा सकती थी; उदाहरण के लिए, संवादात्मक कहानियाँ बनाना, जहाँ दर्शक अगला दृश्य चुनने के लिए स्क्रीन पर क्लिक कर सकते थे, या अन्य यूट्यूब वीडियो के लिंक देना। हालाँकि, शुरुआत में यूट्यूब वेबसाइट के बाहर किसी अन्य वेबपेज पर एम्बेड किए गए वीडियो में ये एनोटेशन दिखाई नहीं देते थे।
''(नोट: मोबाइल उपकरणों पर इसका समर्थन न होने के कारण 15 जनवरी 2019 को यूट्यूब ने इस एनोटेशन सुविधा को पूरी तरह से बंद कर दिया और इसके स्थान पर 'एंड स्क्रीन' और 'कार्ड्स' की आधुनिक सुविधा पेश की।)''
== स्थानीकरण ==
19 जून 2007 को गूगल के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक श्मिट ने [[पेरिस]] में यूट्यूब के नए स्थानीकरण कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इसके तहत दुनिया के विभिन्न देशों के लिए यूट्यूब वेबसाइट का पूरा इंटरफ़ेस स्थानीय संस्करणों और भाषाओं में उपलब्ध कराया गया।
{| class="wikitable sortable"
! देश !! URL !! भाषाएँ !! लॉन्च की तिथि
|-
| {{AUS}} || [https://web.archive.org/web/20081218061511/http://au.youtube.com/ au.youtube.com] || [[ऑस्ट्रेलियाई अंग्रेजी|अंग्रेज़ी (ऑस्ट्रेलिया)]] || 22 अक्टूबर 2007<ref name="AUS-NZ">{{Cite web |url=http://mashable.com/2007/10/22/youtube-australia-new-zealand/ |title=यूट्यूब ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में लॉन्च करता है |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190403142649/https://mashable.com/2007/10/22/youtube-australia-new-zealand/ |archive-date=3 अप्रैल 2019 |url-status=live }}</ref>
|-
| {{BRA}} || [https://web.archive.org/web/20090122224743/http://br.youtube.com/ br.youtube.com] || [[ब्राज़ीलियाई पुर्तगाली|पुर्तगाली (ब्राजील)]] || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|-
| {{CAN}} || [https://web.archive.org/web/20090114224859/http://ca.youtube.com/ ca.youtube.com] || अंग्रेज़ी (कनाडा) || 6 नवंबर 2007<ref>{{Cite web |url=http://mashable.com/2007/11/06/youtube-canada/ |title=यूट्यूब अब कनाडा लाइव |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190403183030/https://mashable.com/2007/11/06/youtube-canada/ |archive-date=3 अप्रैल 2019 |url-status=live }}</ref>
|-
| {{FRA}} || [https://web.archive.org/web/20090126213904/http://fr.youtube.com/ fr.youtube.com] || [[फ़्रान्सीसी भाषा|फ़्रेंच]] || 19 जून 2007<ref name="local">{{Cite web |url=http://www.pcadvisor.co.uk/news/index.cfm?NewsID=9772 |title=गूगल यूट्यूब फ्रांस न्यूज़ को लॉन्च करता है -- पीसी सलाहकार |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110325161722/http://www.pcadvisor.co.uk/news/index.cfm?NewsID=9772 |archive-date=25 मार्च 2011 |url-status=live }}</ref>
|-
| {{GER}} || [https://web.archive.org/web/20081218134509/http://de.youtube.com/ de.youtube.com] || [[जर्मन भाषा|जर्मन]] || 8 नवंबर 2007<ref>{{Cite web |url=http://mashable.com/2007/11/08/youtube-germany/ |title=यूट्यूब जर्मनी लॉन्च करता है |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190403120958/https://mashable.com/2007/11/08/youtube-germany/ |archive-date=3 अप्रैल 2019 |url-status=live }}</ref>
|-
| {{HKG}} || [https://web.archive.org/web/20081218061355/http://hk.youtube.com/ hk.youtube.com] || [[पारम्परिक चीनी वर्ण|चीनी (पारंपरिक)]] || 17 अक्टूबर 2007<ref>{{Cite web |url=http://chita.us/community/viewtopic.php?f=9&t=1294 |title=Chita •检视主题-- YouTube台湾版推出 |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20081205151456/http://chita.us/community/viewtopic.php?f=9&t=1294 |archive-date=5 दिसंबर 2008 |url-status=dead }}</ref>
|-
| {{IND}} || [https://web.archive.org/web/20081218061420/http://in.youtube.com/ in.youtube.com] || [[भारतीय अंग्रेज़ी|अंग्रेज़ी (भारत)]] || 7 मई 2008<ref>{{Cite web |url=http://www.hindu.com/2008/05/08/stories/2008050857242200.htm |title=यूट्यूब के पास अब एक भारतीय अवतार है |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20131128004152/http://www.hindu.com/2008/05/08/stories/2008050857242200.htm |archive-date=28 नवंबर 2013 |url-status=live }}</ref>
|-
| {{IRL}} || [https://web.archive.org/web/20081231010855/http://ie.youtube.com/ ie.youtube.com] || अंग्रेज़ी (आयरलैंड) || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|-
| {{ITA}} || [https://web.archive.org/web/20090113004033/http://it.youtube.com/ it.youtube.com] || [[इतालवी भाषा|इतालवी]] || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|-
| {{JPN}} || [https://web.archive.org/web/20090112051634/http://jp.youtube.com/ jp.youtube.com] || [[जापानी भाषा|जापानी]] || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|-
| {{KOR}} || [https://web.archive.org/web/20090110014401/http://kr.youtube.com/ kr.youtube.com] || [[कोरियाई भाषा|कोरियाई]] || 23 जनवरी 2008
|-
| {{MEX}} || [https://web.archive.org/web/20081218061353/http://mx.youtube.com/ mx.youtube.com] || स्पैनिश (मेक्सिको) || 10 अक्टूबर 2007
|-
| {{NLD}} || [https://web.archive.org/web/20081218061353/http://nl.youtube.com/ nl.youtube.com] || [[डच भाषा|डच]] || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|-
| {{NZL}} || [https://web.archive.org/web/20081216095659/http://nz.youtube.com/ nz.youtube.com] || अंग्रेज़ी (न्यूजीलैंड) || 22 अक्टूबर 2007<ref name="AUS-NZ"/>
|-
| {{POL}} || [https://web.archive.org/web/20081218061138/http://pl.youtube.com/ pl.youtube.com] || [[पोलिश भाषा|पोलिश]] || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|-
| {{RUS}} || [https://web.archive.org/web/20090113054547/http://ru.youtube.com/ ru.youtube.com] || [[रूसी भाषा|रूसी]] || 13 नवंबर 2007
|-
| {{ESP}} || [https://web.archive.org/web/20090122224458/http://es.youtube.com/ es.youtube.com] || [[स्पेनी भाषा|स्पैनिश]] || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|-
| {{TWN}} || [https://web.archive.org/web/20081218062111/http://tw.youtube.com/ tw.youtube.com] || [[पारम्परिक चीनी वर्ण|चीनी (पारंपरिक)]] || 18 अक्टूबर 2007<ref>{{Cite web |url=http://chita.us/community/viewtopic.php?f=9&t=1294 |title=Chita •检视主题-- YouTube台湾版推出 |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20081205151456/http://chita.us/community/viewtopic.php?f=9&t=1294 |archive-date=5 दिसंबर 2008 |url-status=dead }}</ref>
|-
| {{UK}} || [https://web.archive.org/web/20081223010735/http://uk.youtube.com/ uk.youtube.com] || [[ब्रिटिश अंग्रेज़ी|अंग्रेज़ी (ब्रिटेन)]] || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|}
गूगल का मुख्य उद्देश्य फ्रांस में स्थानीय वीडियो शेयरिंग वेबसाइट [[डेलीमोशन]] के साथ प्रतिस्पर्धा करना था। इसके लिए उसने स्थानीय टेलीविजन स्टेशनों जैसे एम6 और फ्रांस टेलीविज़न के साथ वीडियो सामग्री के कानूनी प्रसारण के लिए कई समझौते किए।
17 अक्टूबर 2007 को यूट्यूब के होन्ग कोंग संस्करण को लॉन्च करने की घोषणा की गई थी। उस दौरान यूट्यूब के सह-संस्थापक स्टीव चेन ने यह भी संकेत दिया था कि उनका अगला लक्ष्य ताइवान संस्करण लॉन्च करना है।<ref>{{Cite web |url=http://pshweb01.881903.com/apps/news/html/news/20071017/2007101715593573500.htm |title=1903.com वाणिज्यिक रेडियो |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071223205642/http://pshweb01.881903.com/apps/news/html/news/20071017/2007101715593573500.htm |archive-date=23 दिसंबर 2007 |url-status=dead }}</ref><ref>{{Cite web |url=http://inews.i-cable.com/webapps/news_detail.php?id=250154&category=2 |title=CableTV |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080315023733/http://inews.i-cable.com/webapps/news_detail.php?id=250154&category=2 |archive-date=15 मार्च 2008 |url-status=dead }}</ref>
22 अक्टूबर 2007 को न्यूजीलैंड संस्करण की लॉन्च पार्टी आयोजित की गई थी, जिसका उद्देश्य वहां के स्थानीय यूट्यूब रचनाकारों को आगे बढ़ने में सहायता प्रदान करना था।
तुर्की में यूट्यूब का स्थानीय संस्करण स्थापित करने की योजना लंबे समय तक विवादों और कानूनी अड़चनों में फंसी रही। तुर्की के अधिकारियों ने यूट्यूब से मांग की थी कि वह देश के कानूनों के अधीन काम करने के लिए तुर्की में अपना एक आधिकारिक कार्यालय खोले। हालांकि, यूट्यूब ने उस समय स्पष्ट किया था कि उसका ऐसा कोई इरादा नहीं है और उसके वीडियो तुर्की के कानूनों के अधीन नहीं आते। तुर्की प्रशासन ने यह चिंता भी व्यक्त की थी कि मंच पर अपलोड किए गए कुछ वीडियो का उपयोग मुस्तफा कमाल अतातुर्क (तुर्की के संस्थापक) का अपमान करने और मुस्लिमों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए किया जा रहा है।
=== चैनल के प्रकार ===
यूट्यूब अपने पंजीकृत सदस्यों को "चैनल प्रकार" नामक समूहों में शामिल होने का विकल्प देता था, जो उनके चैनल को एक विशिष्ट पहचान प्रदान करता था। शुरुआत में जब उपयोगकर्ता 'निदेशक' खाता सेटिंग्स का चयन करते थे, तो उन्हें असीमित लंबाई के वीडियो अपलोड करने की सुविधा दी जाती थी। हालांकि बाद में इस विकल्प को नए उपयोगकर्ताओं के लिए बंद कर दिया गया, लेकिन जिन पुराने उपयोगकर्ताओं ने शुरुआत में इस ग्रुप को ज्वाइन कर लिया था, उनके पास यह असीमित लंबाई की सेटिंग सुरक्षित रही। उस समय उनके खातों के लिए फ़ाइल आकार की सीमा 100 एमबी थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 1024 एमबी (1 जीबी) कर दिया गया था। ये चैनल प्रकार निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित थे:
* '''यूट्यूबर:''' यूट्यूब का एक सामान्य पंजीकृत दर्शक या उपयोगकर्ता।
* '''निर्देशक:''' फिल्म या वीडियो निर्माता, जो अपने द्वारा बनाई गई शॉर्ट फिल्मों या वीडियो को यूट्यूब दर्शकों के सामने प्रदर्शित करते थे।
* '''संगीतकार:''' संगीतकार, गायक या बैंड जो कवर गाने, मूल रचनाएँ या गिटार/संगीत सीखने से जुड़े ट्यूटोरियल अपलोड करते थे।
* '''हास्य कलाकार:''' ऐसे कलाकार जो यूट्यूब दर्शकों के मनोरंजन के लिए हास्य और व्यंग्य से भरपूर वीडियो बनाते थे।
* '''गुरु:''' किसी विशेष क्षेत्र या विषय के अनुभवी लोग, जो अपनी विशेषज्ञता के आधार पर ज्ञानवर्धक और शैक्षणिक वीडियो बनाते थे।
* '''गैर-लाभकारी संस्था:''' 501(c)(3) कर-मुक्त दर्जा प्राप्त गैर-लाभकारी संगठनों को यूट्यूब के गैर-लाभकारी कार्यक्रम के तहत विशेष खाते दिए जाते थे।
* '''पत्रकार:''' नागरिक या पेशेवर पत्रकार, जो स्थानीय, अंतरराष्ट्रीय या समसामयिक घटनाओं पर समाचार वीडियो और ग्राउंड रिपोर्ट तैयार करते थे।
== वीडियो रैंकिंग ==
यूट्यूब लोकप्रिय वीडियो को सम्मान देने के लिए उन्हें विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत करता है। इनमें सबसे प्रमुख "सबसे अधिक देखे गए" की श्रेणी है, जिसे चार अवधियों में बाँटा जाता है: आज, इस सप्ताह, इस महीने और अब तक। यूट्यूब की अन्य प्रमुख रैंकिंग श्रेणियों में शामिल हैं:
* सर्वाधिक देखा गया
* सर्वोच्च श्रेणी
* सर्वाधिक चर्चा में
* शीर्ष पसंद
* उभरते/ट्रेंडिंग वीडियो<ref>{{Cite web|url=https://freeviewsyoutube.com/2022/09/06/5-good-reasons-to-buy-youtube-views/|title=5 Good Reasons To Buy Youtube Views! – FreeViewsYouTube|access-date=2023-04-11}}</ref>
* हाल ही में प्रदर्शित
* सर्वाधिक उत्तरित
=== वीडियो रैंकिंग पर विवाद ===
यूट्यूब के कुछ सर्वाधिक देखे गए वीडियो समय-समय पर विवादों का विषय रहे हैं। अक्सर यह आरोप लगाया जाता है कि इन वीडियो के व्यूज़ बढ़ाने के लिए स्वचालित बॉट्स या अनैतिक तरीकों का इस्तेमाल किया गया है, जो यूट्यूब की 'सेवा की शर्तों' का सीधा उल्लंघन है।<ref>यूट्यूब के इस्तेमाल की शर्तें (धारा 4H) स्पष्ट करती हैं: "आप साइट तक पहुँचने के लिए किसी भी स्वचालित प्रणाली (जिसमें 'रोबोट', 'स्पाइडर' या 'ऑफ़लाइन रीडर' शामिल हैं) का उपयोग न करने के लिए सहमत हैं, जो यूट्यूब सर्वर पर इतने अधिक अनुरोध भेजती हो, जितने एक सामान्य मानव उसी अवधि में वेब ब्राउज़र का उपयोग करके नहीं भेज सकता।"</ref>
मार्च 2008 में, ब्राज़ीलियाई बैंड 'कैनसी डी सेर सेक्सी' के गाने "म्यूज़िक इज़ माई हॉट हॉट सेक्स" के अनौपचारिक वीडियो को 11.4 करोड़ व्यूज़ मिले थे। लेकिन स्वचालित हैकिंग के जरिए व्यूज़ बढ़ाने के आरोपों के बाद यूट्यूब ने इसे अस्थायी रूप से हटा दिया और बाद में अपलोडर ने इसे हमेशा के लिए डिलीट कर दिया। यूट्यूब के एक प्रवक्ता ने स्पष्ट किया, "हम यूट्यूब पर व्यूज़ और आँकड़ों की सुरक्षा के लिए कई तकनीकी उपाय करते हैं। जैसे ही हमारे संज्ञान में आता है कि किसी ने शीर्ष रैंकिंग में आने के लिए गलत या कृत्रिम तरीकों का इस्तेमाल किया है, हम उस वीडियो या चैनल को हटा देते हैं।" इटली के क्लारुस बार्टेल, जिन्होंने यह वीडियो अपलोड किया था, ने व्यूज़ बढ़ाने के किसी भी प्रयास से इनकार करते हुए कहा, "मेरा इन सबसे कोई लेना-देना नहीं है। मुझ पर लगे हैकिंग के आरोपों से मैं बहुत दुखी हूँ।"
इसके अलावा, कनाडाई गायिका [[एवरिल लैवीन]] के गाने "गर्लफ्रेंड" के वीडियो पर भी कृत्रिम रूप से व्यूज़ बढ़ाने के आरोप लगे थे। 'एवरिल बैंड एड्स' नामक एक फैनसाइट पर एक लिंक दिया गया था, जो हर 15 सेकंड में यूट्यूब पर इस वीडियो को स्वतः रीलोड (Reload) करता था। इस फैनसाइट ने प्रशंसकों को प्रोत्साहित किया कि वे "इंटरनेट ब्राउज़ करते समय, परीक्षा की पढ़ाई करते समय, या यहाँ तक कि सोते समय भी इस पेज को खुला छोड़ दें" और "व्यूज़ बढ़ाने के लिए एक ही ब्राउज़र में दो या अधिक विंडो खोलें"। इसी के चलते जुलाई 2008 तक, इस वीडियो ने जुडसन लैप्ली के "एवोल्यूशन ऑफ़ डांस" को पीछे छोड़ते हुए यूट्यूब पर अब तक का सबसे अधिक देखा जाने वाला वीडियो बनने का रिकॉर्ड बना लिया था। अगस्त 2008 तक इन दोनों वीडियो को लगभग 9.5 करोड़ दर्शकों ने देखा था।
एक जापानी एनीमे फ्रैंचाइज़ी से जुड़े यूट्यूब वीडियो को 9.7 करोड़ व्यूज़ मिले थे, लेकिन कृत्रिम रूप से व्यूज़ बढ़ाने के कारण इसे भी यूट्यूब की आधिकारिक सूची से बाहर कर दिया गया था।
=== यूट्यूब वीडियो पुरस्कार ===
2006 में, यूट्यूब ने वार्षिक 'यूट्यूब वीडियो पुरस्कार' की शुरुआत की थी।<ref>{{Cite web |url=http://www.youtube.com/ytawards |title=यू ट्यूब.कॉम /वाई टी पुरस्कार |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20081201114824/http://www.youtube.com./ytawards |archive-date=1 दिसंबर 2008 |url-status=live }}</ref> इसकी श्रेणियों में "सबसे अधिक पसंद किया जाने वाला वीडियो" भी शामिल था। इस पुरस्कार प्रक्रिया में यूट्यूब स्वयं दावेदारों को नामांकित करता था और उपयोगकर्ता मतदान करके विजेता का निर्णय करते थे। इसमें केवल वास्तविक और उपयोगकर्ताओं द्वारा बनाए गए वीडियो को ही नामांकित किया जाता था। 2006 के पुरस्कारों के प्रमुख नामांकितों में पीटर ओकले, लोनलीगर्ल15, द वाइनकोन, रेनेट्टो, नेज़ोमिक और चाड वाडर जैसे प्रसिद्ध रचनाकार शामिल थे।
=== हाल की घटनाएँ ===
==== राजनीतिक अभियान ====
2008 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में राजनीतिक उम्मीदवारों ने अपने चुनाव प्रचार के लिए यूट्यूब का व्यापक उपयोग किया था। मतदाता उम्मीदवारों के बयानों को देख सकते थे और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों (उदाहरण के लिए: [[रॉन पॉल]], हिलेरी क्लिंटन, [[बराक ओबामा]] और [[जो बाइडन]]) के पक्ष या विपक्ष में वीडियो बना सकते थे। तीसरे दल के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों ने भी यूट्यूब का बड़े पैमाने पर प्रयोग किया।
अमेरिकी मीडिया ने अक्सर यह टिप्पणी की है कि यूट्यूब ने रिपब्लिकन सीनेटर जॉर्ज एलेन की 2006 की हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, क्योंकि चुनाव अभियान के दौरान उनकी एक कथित नस्लभेदी टिप्पणी वाली वीडियो क्लिप को यूट्यूब दर्शकों द्वारा व्यापक रूप से देखा और साझा किया गया था।<ref>{{cite news| author = Andrew Sullivan| title = Video power: the potent new political force| publisher = [[The Sunday Times]]| date = 2007-02-04| url = http://www.timesonline.co.uk/tol/comment/columnists/andrew_sullivan/article1321781.ece| accessdate = 2007-04-28}}{{Dead link|date=जुलाई 2026 |bot=InternetArchiveBot }} "बिना किसी विरोधी कैमरे और ब्लॉग जगत के एलेन चुनाव जीत गए होते, लेकिन यह वीडियो यूट्यूब पर पहुँच गया और उसके बाद टेलीविज़न नेटवर्क ने भी इसे दिखा दिया।"</ref><ref>{{cite video| people = Howard Kurtz, Glenn Reynolds, Ryan Lizza, Andrea Koppel| title = [http://edition.cnn.com/TRANSCRIPTS/0608/20/rs.06.html Reliable Sources]| medium = TV-Series| publisher = [[CNN]] [[Reliable Sources]]| date = 2006-08-20 }} "एलेन ने एक भारतीय-अमेरिकी स्वयंसेवक के लिए एक शब्द का प्रयोग किया और उस वेबकैम वीडियो को लोकप्रिय वेबसाइट यूट्यूब.कॉम पर पोस्ट कर दिया गया, जहाँ इसे 1,00,000 से अधिक बार देखा गया।"</ref>
जेम्स कोटेकी जैसे राजनीतिक विश्लेषक भी यूट्यूब की राजनीतिक दुनिया में सक्रिय रहे हैं। कई विश्लेषक यूट्यूब पर राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के वीडियो बनाते हैं या अपने राजनीतिक विचार व्यक्त करने के लिए यूट्यूब का उपयोग करते हैं। केवल अमेरिका में ही नहीं, बल्कि फ्रांस और इटली के राजनेता, जैसे एंटोनियो डी पिएत्रो, भी इस साइट का उपयोग अपने राजनीतिक अभियानों के हिस्से के रूप में करते रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री [[जॉन हावर्ड]] ने भी 2007 के संघीय चुनाव से पहले प्रचार के लिए यूट्यूब का इस्तेमाल किया था।
==== सीएनएन-यूट्यूब राष्ट्रपति चुनाव बहस ====
[[चित्र:CNN-YouTube Republican Debate.jpg|thumb|28 नवंबर 2007 को आयोजित सीएनएन-यूट्यूब रिपब्लिकन बहस]]
2008 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पूर्व, [[सीएनएन]] ने टेलीविज़न पर ऐसी राजनीतिक बहसें प्रसारित कीं, जिनमें राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों ने यूट्यूब उपयोगकर्ताओं द्वारा वीडियो के माध्यम से पूछे गए सवालों के जवाब दिए। समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों द्वारा इंटरनेट तकनीक का उपयोग करके सीधे सवाल पूछने की इस सुविधा के कारण, इस मंच को उस समय इतिहास की "सबसे लोकतांत्रिक राष्ट्रपति बहस" माना गया था।
=== अप्रैल फूल प्रैंक ===
1 अप्रैल 2008 को '[[अप्रैल फूल दिवस]]' के अवसर पर, यूट्यूब ने अपने मुख्य पृष्ठ के सभी फीचर्ड वीडियो को ब्रिटिश गायक रिक ऐस्टले के लोकप्रिय संगीत वीडियो "नेवर गोना गिव यू अप" पर अनुप्रेषित कर दिया था। इस प्रकार यूट्यूब ने उस दिन साइट पर वीडियो देखने का प्रयास करने वाले सभी उपयोगकर्ताओं के साथ इंटरनेट का प्रसिद्ध 'रिकरोलिंग' प्रैंक किया था।
=== यूट्यूब सहयोगी कार्यक्रम ===
यूट्यूब सहयोगी कार्यक्रम रचनाकारों को यूट्यूब के विशेष टूल और सुविधाओं तक पहुँच प्रदान करता है, जिसमें 'निर्माता सहायता टीम' से सीधा संपर्क शामिल है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह कार्यक्रम क्रिएटर्स को उनके वीडियो पर दिखाए जाने वाले विज्ञापनों से होने वाली राजस्व का साझा हिस्सा प्राप्त करने की अनुमति देता है।
यूट्यूब की मुद्रीकरण नीतियां उन नियमों का एक समूह हैं जो यह निर्धारित करती हैं कि किन चैनलों को कमाई करने की अनुमति दी जाएगी। एक यूट्यूब भागीदार के रूप में, क्रिएटर्स को अपने अनुबंध और 'यूट्यूब सहयोगी कार्यक्रम नीतियों' के अनुसार इन मुद्रीकरण नियमों का कड़ाई से पालन करना आवश्यक होता है, ताकि वे प्लेटफ़ॉर्म से अपनी आय सफलतापूर्वक अर्जित कर सकें।<ref>{{Cite web|url=https://youtubepartnerprogram.com/youtube-partner-program-2021-how-it-works-and-updates/|title=YouTube Partner Program 2022: How it works & Updates – YouTubePartnerProgram|language=en-US|access-date=2022-12-09|archive-date=9 दिसंबर 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20221209132525/https://youtubepartnerprogram.com/youtube-partner-program-2021-how-it-works-and-updates/|url-status=dead}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{reflist|2}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20050428014715/http://www.youtube.com/ यूट्यूब]
{{Google Inc.}}
[[श्रेणी:अंतरजाल]]
[[श्रेणी:ऑनलाइन सामाजिक नेटवर्किंग]]
[[श्रेणी:अमेरिकी कम्पनियाँ]]
oliaxfyn0655c6p19nmhq486c64z9lu
6591416
6591357
2026-07-24T02:02:12Z
AMAN KUMAR
911487
[[Special:Contributions/Paul Sumesh|Paul Sumesh]] ([[User talk:Paul Sumesh|Talk]]) के संपादनों को हटाकर [[User:InternetArchiveBot|InternetArchiveBot]] के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया
6579143
wikitext
text/x-wiki
{{Wikidata Infobox}}
'''यूट्यूब''' (YouTube) एक [[अमेरिकी]] ऑनलाइन वीडियो शेयरिंग और सोशल मीडिया मंच है, जिसका स्वामित्व [[गूगल]] के पास है। इसकी स्थापना फरवरी 2005 में [[पेपाल]] के तीन पूर्व कर्मचारियों— [[चाड हर्ले]], [[स्टीव चैन]] और [[जावेद करीम]] ने मिलकर की थी। नवम्बर 2006 में [[गूगल]] ने इसे 1.65 अरब अमेरिकी डॉलर में खरीद लिया था और तब से यह गूगल की ही एक सहायक कंपनी के रूप में काम कर रहा है।
यूट्यूब अपने उपयोगकर्ताओं को वीडियो देखने, अपलोड करने, शेयर करने, प्लेलिस्ट बनाने, वीडियो पर टिप्पणी करने, रिपोर्ट करने और अन्य उपयोगकर्ताओं के चैनल की सदस्यता लेने की सुविधा प्रदान करता है। इस मंच पर आम लोगों से लेकर कई बड़ी मीडिया कंपनियों द्वारा अपलोड किए गए वीडियो मौजूद हैं। इनमें वीडियो क्लिप, टीवी कार्यक्रम, संगीत वीडियो, मूवी ट्रेलर, लाइव स्ट्रीम और वीडियो [[चिट्ठा|ब्लॉगिंग]] आदि शामिल हैं। गैर-पंजीकृत उपयोगकर्ता साइट पर केवल वीडियो देख सकते हैं, जबकि पंजीकृत सदस्य असीमित वीडियो अपलोड कर सकते हैं और टिप्पणियाँ कर सकते हैं। ऐसे वीडियो जिनमें [[हिंसा|हिंसक]], आपत्तिजनक, या 18 वर्ष से कम आयु के दर्शकों के लिए अनुपयुक्त सामग्री होती है, उन्हें आयु-प्रतिबंधित श्रेणी में रखा जाता है, जिन्हें केवल 18+ आयु के पंजीकृत सदस्य ही देख सकते हैं।
यूट्यूब अपनी आय मुख्य रूप से विज्ञापनों के माध्यम से अर्जित करता है, जो साइट की सामग्री और दर्शकों की रुचियों के आधार पर दिखाए जाते हैं। साइट पर अधिकांश वीडियो निःशुल्क उपलब्ध हैं, लेकिन कुछ प्रीमियम सामग्री के लिए भुगतान करना पड़ता है। इसमें '[[यूट्यूब प्रीमियम]]' की सदस्यता शामिल है, जो उपयोगकर्ताओं को विज्ञापन-रहित वीडियो देखने की सुविधा देती है। इसके अतिरिक्त, कुछ विशेष वीडियो और फ़िल्में केवल किराए पर लेकर या प्रीमियम सदस्यता के माध्यम से ही देखी जा सकती हैं।
== इतिहास ==
[[चित्र:Youtube founders.jpg|thumb|400px|''दाँए से बाँए:'' [[चाड हर्ले]], [[स्टीव चैन]], और [[जावेद करीम]]|बाएँ]]
[[पेपाल]] के तीन पूर्व कर्मचारियों— [[चाड हर्ले]], [[स्टीव चैन]], और [[जावेद करीम]] ने मध्य फरवरी 2005 में यूट्यूब की स्थापना की थी।<ref name=":0">[http://www.usatoday.com/tech/news/2006-10-11-youtube-karim_x.htm "यूट्यूब का एक तीसरा संस्थापक भी है"] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120728054901/http://www.usatoday.com/tech/news/2006-10-11-youtube-karim_x.htm |date=28 जुलाई 2012 }}, USATODAY, अक्टूबर 11, 2006.</ref> [[सैन ब्रूनो, कैलिफोर्निया|सैन ब्रूनो]] आधारित यह सेवा उपयोगकर्ताओं द्वारा निर्मित वीडियो सामग्री, जिसमें मूवी क्लिप्स, टीवी क्लिप्स और संगीत वीडियो शामिल हैं, को प्रदर्शित करने के लिए एडोब फ़्लैश और एचटीएमएल5 तकनीक का उपयोग करती है। इसके साथ ही शौकिया [[टेलीविजन कार्यक्रम|सामग्री]] जैसे छोटे संगीत वीडियो और वीडियो ब्लॉग भी इस पर उपलब्ध हैं। अक्टूबर 2006 में, [[गूगल|गूगल इंक.]] ने घोषणा की थी कि उसने इस कम्पनी का अधिग्रहण करने के लिए 1.65 अरब [[अमेरिकी डॉलर]] के स्टॉक का समझौता किया है। 13 नवम्बर 2006 को यह समझौता पूरा कर लिया गया।<ref>{{Cite web |url=http://www.theage.com.au/news/Busness/Google-closes-A2b-YouTube-deal/2006/11/14/1163266548827.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071220214911/http://www.theage.com.au/news/Busness/Google-closes-A2b-YouTube-deal/2006/11/14/1163266548827.html |archive-date=20 दिसंबर 2007 |url-status=live }}</ref>
यूट्यूब पर अपलोड किया गया सबसे पहला वीडियो ''[[मी ऐट द ज़ू]]'' (मैं चिड़ियाघर में) है, जिसमें इसके सह-संस्थापक [[जावेद करीम]] सैन डिएगो चिड़ियाघर में दिखाई दे रहे हैं। यह 23 अप्रैल 2005 को अपलोड किया गया था और इसे आज भी यूट्यूब पर देखा जा सकता है।<ref>{{cite web|url=https://www.youtube.com/watch?v=jNQXAC9IVRw|title=मी ऐट द ज़ू (मैं चिड़ियाघर में)|date=23 अप्रैल 2005|publisher=यूट्यूब|archive-url=https://web.archive.org/web/20190916011958/https://www.youtube.com/watch?v=jNQXAC9IVRw|archive-date=16 सितंबर 2019|accessdate=२९ अप्रैल २०१६|url-status=live}}</ref>
वर्तमान में यूट्यूब के 5 सबसे अधिक सब्सक्राइब किए गए चैनल निम्नलिखित हैं:
# [[मिस्टर बीस्ट]]
# [[टी-सीरीज़]]
# [[कोकोमेलन]]
# [[सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न|सेट इंडिया]]
# [[व्लाद एंड निकी]]
मीडिया में अक्सर दोहराई जाने वाली एक कहानी के अनुसार, [[चाड हर्ले]] और [[स्टीव चैन]] को 2005 के शुरुआती महीनों के दौरान सैन फ्रांसिस्को में चैन के अपार्टमेंट में हुई एक डिनर पार्टी में लिए गए वीडियो को बाँटने में काफी कठिनाई आई थी, और इसी घटना से यूट्यूब का विचार जन्मा। करीम इस पार्टी में शामिल नहीं थे और उन्होंने इस बात से इनकार किया है कि ऐसी कोई पार्टी हुई थी। चैन ने बाद में इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, "यह एक कहानी है जिसे पचाने में आसान बनाने के लिए विपणन विचारों से मजबूत किया गया था।"<ref name="टाइम">{{cite news|url=http://www.time.com/time/printout/0,8816,1570721,00.html|title=The Gurus of YouTube|last=क्लाउड|first=जॉन|date=16 दिसंबर 2006|work=टाइम पत्रिका|accessdate=29 नवंबर 2008|archive-url=https://web.archive.org/web/20070219222540/http://www.time.com/time/printout/0%2C8816%2C1570721%2C00.html|archive-date=19 फ़रवरी 2007|language=en|trans-title=यूट्यूब के गुरु|url-status=dead}}</ref>
करीम ने बताया है कि यूट्यूब बनाने की असली प्रेरणा उन्हें 2004 में हिन्द महासागर में आई सुनामी की ऑनलाइन वीडियो क्लिप्स न मिल पाने से मिली थी।<ref>{{cite web|url=https://usatoday30.usatoday.com/tech/news/2006-10-11-youtube-karim_x.htm|title=Surprise! There's a third YouTube co-founder|last=हॉपकिंस|first=जिम|date=अक्टूबर 11, 2006|website=यूएसए टुडे|language=en|trans-title=आश्चर्य! वहाँ एक तीसरा यूट्यूब के सह-संस्थापक है|archive-url=https://web.archive.org/web/20130318193654/http://usatoday30.usatoday.com/tech/news/2006-10-11-youtube-karim_x.htm|archive-date=18 मार्च 2013|accessdate=19 जून 2013|url-status=live}}</ref> वहीं, हर्ले और चैन ने कहा कि यूट्यूब के लिए उनका मूल विचार एक [[ऑनलाइन डेटिंग सेवा]] का वीडियो संस्करण बनाना था, जो उस समय की लोकप्रिय वेबसाइट ''हॉट और नॉट'' से प्रभावित था।<ref>{{cite web|url=http://www.time.com/time/magazine/article/0,9171,1570795-5,00.html|title=The YouTube Gurus|last=क्लाउड|first=जॉन|website=टाइम|language=en|trans-title=यूट्यूब के गुरु|archive-url=https://web.archive.org/web/20130814024303/http://www.time.com/time/magazine/article/0,9171,1570795-5,00.html|archive-date=14 अगस्त 2013|access-date=29 अप्रैल 2016|url-status=dead}}</ref>
यूट्यूब की शुरुआत एक उद्यम वित्त पोषित प्रौद्योगिकी स्टार्टअप के रूप में हुई थी। इसे नवम्बर 2005 और अप्रैल 2006 के बीच सिकोइया कैपिटल से 1.15 करोड़ डॉलर का निवेश प्राप्त हुआ था।<ref>{{Cite news|url=https://www.nytimes.com/2006/10/10/technology/venture-firm-shares-a-youtube-jackpot.html|title=Venture Firm Shares a YouTube Jackpot|last=हेल्फ्ट|first=मिगुयेल|date=2006-10-10|work=द न्यूयॉर्क टाइम्स|access-date=2025-07-24|last2=रिच्टेल|first2=मैट्ट|language=en-US|issn=0362-4331}}</ref> यूट्यूब का प्रारम्भिक मुख्यालय सैन मेटिओ (कैलिफोर्निया) में एक पिज़्ज़ेरिया और जापानी रेस्तरां के ऊपर स्थित था।<ref>{{cite news|url=http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2006/10/06/AR2006100600660.html|title=Ready for Its Close-Up|last=केहेलौन्न|first=सारा|date=7 अक्टूबर 2006|work=वाशिंगटन पोस्ट|accessdate=नवम्बर 29, 2008|archive-url=https://web.archive.org/web/20110504054300/http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2006/10/06/AR2006100600660.html|archive-date=4 मई 2011|language=en|trans-title=अपने घनिष्ठ-अप के लिए तैयार|url-status=live}}</ref> वेबसाइट का [[डोमेन नाम]] `www.youtube.com` 14 फरवरी 2005 को सक्रिय किया गया था और बाद के महीनों में इस वेबसाइट को पूरी तरह से विकसित किया गया।<ref>{{cite web|url=http://whois.domaintools.com/youtube.com|title=Whois Record for Youtube.com|website=डोमेन टूल|archive-url=https://web.archive.org/web/20190402130611/http://whois.domaintools.com/youtube.com|archive-date=2 अप्रैल 2019|access-date=15 जून 2020|url-status=live}}</ref>
== सामाजिक प्रभाव ==
2005 में यूट्यूब की शुरुआत से पहले, आम कंप्यूटर उपयोगकर्ताओं के लिए ऑनलाइन वीडियो पोस्ट करने के बहुत कम और आसान तरीके उपलब्ध थे। इसके उपयोग में आसान इंटरफ़ेस ने यह संभव बनाया कि बुनियादी कंप्यूटर ज्ञान रखने वाला कोई भी व्यक्ति वीडियो पोस्ट कर सके, जिसे कुछ ही मिनटों में लाखों लोग देख सकते हैं। यूट्यूब ने विविध विषयों पर वीडियो साझा करने की इस प्रक्रिया को [[इंटरनेट संस्कृति]] का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है।
यूट्यूब के सामाजिक प्रभाव का एक शुरुआती उदाहरण 2006 में 'बस अंकल' वीडियो की सफलता थी। इस वीडियो में [[हॉन्ग कॉन्ग|हांगकांग]] की एक बस में एक युवा और एक बुजुर्ग व्यक्ति के बीच हुई तीखी बहस को दिखाया गया था, जिसकी मुख्यधारा की मीडिया में व्यापक चर्चा हुई थी। व्यापक कवरेज प्राप्त करने वाला एक अन्य शुरुआती वीडियो 'गिटार' था, जिसमें जोहान पाशेलबेल के 'कैनन' की प्रस्तुति एक इलेक्ट्रिक गिटार पर दी गई थी। इस वीडियो में कलाकार का नाम नहीं बताया गया था, फिर भी इसे लाखों दर्शकों ने देखा। बाद में ''[[दि न्यू यॉर्क टाइम्स|द न्यूयॉर्क टाइम्स]]'' ने खुलासा किया कि वह गिटारवादक [[दक्षिण कोरिया]] का 23 वर्षीय जियोंग-ह्युन लिम था, जिसने यह ट्रैक अपने बेडरूम में रिकॉर्ड किया था।
यूट्यूब प्लेटफॉर्म पर लोग अलग-अलग उद्देश्यों से अपना चैनल बनाते हैं, लेकिन लक्ष्य चाहे जो भी हो, यूट्यूब लगभग हर व्यक्ति के उद्देश्य को पूरा करने में सहायक है। कुछ लोग मज़ेदार वीडियो बनाकर दर्शकों का मनोरंजन करना चाहते हैं, जबकि अन्य इसका उपयोग अपने व्यवसाय के प्रचार-प्रसार के लिए करते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://buyingrealyoutubeviews.com/top-notch-advantages-of-creating-a-youtube-channel/|title=Top-Notch Advantages Of Creating A Youtube Channel! – BRYV|language=en-US|access-date=2023-01-12}}</ref>
== सेवा की शर्तें ==
यूट्यूब की सेवा शर्तों के अनुसार,<ref>[http://youtube.com/t/terms यूट्यूब इस्तेमाल करने ] की शर्तें ५ मई २००७ तक</ref> कोई भी उपयोगकर्ता केवल तभी वीडियो अपलोड कर सकता है जब उसके पास वीडियो का कॉपीराइट हो या उसमें दिखाए गए लोगों की अनुमति हो। साइट पर अश्लीलता, नग्नता, मानहानि, उत्पीड़न, अनधिकृत वाणिज्यिक विज्ञापन और आपराधिक आचरण को प्रोत्साहित करने वाली सामग्री सख्त वर्जित है।
अपलोड करने वाला व्यक्ति यूट्यूब को यह अधिकार देता है कि वह अपलोड की गई सामग्री को किसी भी उद्देश्य के लिए वितरित या संशोधित कर सके। हालाँकि, जब अपलोडर अपनी सामग्री को साइट से हटा देता है, तो यह लाइसेंस स्वतः रद्द हो जाता है। उपयोगकर्ता साइट पर वीडियो केवल तभी तक देख सकते हैं जब तक कि वे इन सेवा शर्तों से सहमत हों; बिना अनुमति के वीडियो डाउनलोड करना या उसकी नकल करना निषिद्ध है।
== यूट्यूब की कमाई ==
मई 2007 में, यूट्यूब ने अपना पार्टनर प्रोग्राम लॉन्च किया था। यह 'गूगल एडसेंस' पर आधारित एक प्रणाली है, जो वीडियो अपलोड करने वालों को साइट पर विज्ञापनों द्वारा उत्पन्न राजस्व का हिस्सा प्राप्त करने की अनुमति देती है। यूट्यूब आमतौर पर वीडियो से होने वाली विज्ञापन कमाई का 45 प्रतिशत हिस्सा स्वयं रखता है, जबकि 55 प्रतिशत हिस्सा अपलोडर को दिया जाता है।<ref>{{cite web |last1=Edwards |first1=Jim |title=The biggest stars on YouTube make huge incomes ... yet they can't keep the vast majority of it |url=https://www.businessinsider.com/money-youtube-stars-actually-make-2014-2 |website=Business Insider}}</ref><ref>{{cite web |last1=Carmody |first1=Tim |title=It's not TV, it's the Web: YouTube partners complain about Google ads, revenue sharing |url=https://www.theverge.com/2013/3/4/4062810/youtube-partners-complain-revenue-sharing-google-ads |website=The Verge |date=4 मार्च 2013}}</ref> वर्तमान में यूट्यूब सहयोगी कार्यक्रम के दस लाख से अधिक सदस्य हैं।<ref>{{cite web |title=YouTube Official Blog |url=https://www.youtube.com/yt/press/statistics.html |website=blog.youtube |language=en-us}}</ref>
यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम में शामिल होकर कमाई शुरू करने के लिए क्रिएटर के चैनल पर कम से कम 1,000 सदस्य और पिछले 12 महीनों के भीतर 4,000 घंटे का वॉच-टाइम होना एक प्रमुख मानदंड है।<ref>{{Cite web|url=https://youtubemonetized.com/how-to-reach-1000-subs/|title=How to Reach 1,000 Subs? - YouTube Monetized|date=2022-01-20|language=en-US|access-date=2022-12-08}}</ref><ref>{{cite web |title=Additional Changes to the YouTube Partner Program (YPP) to Better Protect Creators |url=https://youtube-creators.googleblog.com/2018/01/additional-changes-to-youtube-partner.html |website=blog.youtube |language=en-us}}</ref> (इस नियम को 16 जनवरी 2018 को लागू किया गया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल गुणवत्तापूर्ण वीडियो का ही मुद्रीकरण हो, हालाँकि छोटे चैनलों ने इस नीति की आलोचना की थी।) इसके अतिरिक्त, 2013 में यूट्यूब ने बड़े चैनलों (कम से कम 1000 सदस्य वाले) के लिए एक विकल्प पेश किया, जिससे वे दर्शकों से वीडियो देखने के लिए सशुल्क सदस्यता ले सकते हैं।<ref>{{cite web |last1=McCue |first1=T. J. |title=Google's YouTube Introduces Paid Content Subscriptions |url=https://www.forbes.com/sites/tjmccue/2013/01/30/google-youtube-introduces-paid-content-subscriptions/#7841841b2625 |website=Forbes |language=en}}</ref>
यूट्यूब की नीतियां "विज्ञापनदाता-अनुकूल" सामग्री पर जोर देती हैं। ऐसे वीडियो जिनमें अत्यधिक हिंसा, अभद्र भाषा, यौन सामग्री, या युद्ध, राजनीतिक संघर्ष और प्राकृतिक आपदाओं जैसे विवादास्पद/संवेदनशील विषय शामिल होते हैं, उन पर मुद्रीकरण प्रतिबंधित होता है।<ref>{{cite web |last1=Spangler |first1=Todd |last2=Spangler |first2=Todd |title=YouTube Explains Which Profanities and ‘Inappropriate Language’ Are Not OK for Ad-Supported Videos |url=https://variety.com/2019/digital/news/yo'utube-profanity-ad-supported-video-demonetized-1203107619/ |website=Variety |date=14 जनवरी 2019}}</ref> सितंबर 2016 में, जब यूट्यूब ने इन उल्लंघनों के बारे में सूचना प्रणाली शुरू की, तो कई बड़े क्रिएटर्स ने इसे "सेंसरशिप" बताते हुए इसका विरोध किया था।<ref>{{cite web |last1=Robertson |first1=Adi |title=Why is YouTube being accused of censoring vloggers? |url=https://www.theverge.com/2016/9/1/12753108/youtube-is-over-party-advertising-monetization-censorship |website=The Verge |date=1 सितम्बर 2016}}</ref>
नवंबर 2020 (अमेरिका में) और जून 2021 (दुनिया भर में) तक लागू किए गए नए नियमों के अनुसार, यूट्यूब यह अधिकार सुरक्षित रखता है कि वह प्लेटफ़ॉर्म पर मौजूद किसी भी वीडियो पर विज्ञापन चला सकता है, भले ही उस वीडियो को अपलोड करने वाला चैनल यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम का हिस्सा न हो। ऐसी स्थिति में सारा विज्ञापन राजस्व सीधे गूगल को जाता है और अपलोडर को इसका कोई हिस्सा नहीं मिलता।<ref>{{cite web |title=YouTube announces changes in its terms of services |url=https://www.telegraphindia.com/business/youtube-announces-changes-in-its-terms-of-services/cid/1816154 |website=www.telegraphindia.com}}</ref><ref>{{cite web |last1=Graham |first1=Megan |title=YouTube will put ads on non-partner videos but won't pay the creators |url=https://www.cnbc.com/2020/11/19/youtube-will-put-ads-on-non-partner-videos-but-wont-pay-the-creators.html |website=CNBC |language=en}}</ref>
=== यूट्यूब क्रिएटर पुरस्कार ===
यूट्यूब अपने प्लेटफ़ॉर्म के सबसे लोकप्रिय चैनलों को उनकी सफलता के लिए 'यूट्यूब प्ले बटन' (क्रिएटर रिवॉर्ड्स) देकर सम्मानित करता है।<ref>{{cite web |title=Youtube Creator Awards |url=https://www.indiasikho.com/youtube-creator-awards/ |date=4 दिसम्बर 2022}}</ref> सदस्य की संख्या के आधार पर निम्नलिखित पुरस्कार दिए जाते हैं:
* 1 लाख पर: सिल्वर प्ले बटन
* 10 लाख सदस्य पर: गोल्ड प्ले बटन
* 1 करोड़ सदस्य पर: डायमंड प्ले बटन
* 5 करोड़ सदस्य पर: कस्टम (रूबी) प्ले बटन
* 10 करोड़ सदस्य पर: रेड डायमंड प्ले बटन
== आलोचना ==
यूट्यूब की अक्सर इस बात के लिए आलोचना की जाती है कि वह ऑनलाइन सामग्री के [[कॉपीराइट]] (प्रतिलिप्यधिकार) कानूनों का सख्ती से पालन नहीं करता है। कोई भी वीडियो अपलोड करते समय, उपयोगकर्ता को स्क्रीन पर निम्नलिखित चेतावनी संदेश दिखाया जाता है:
<blockquote>"किसी भी टीवी शो, संगीत वीडियो, संगीत कार्यक्रम या ऐसी सामग्री जिसे आपने स्वयं नहीं बनाया है, उसे मूल स्वामी की अनुमति के बिना अपलोड न करें। हमारा कॉपीराइट टिप्स पेज और समुदाय दिशानिर्देश आपको दूसरों के कॉपीराइट का उल्लंघन न करने में मदद करेंगे।"</blockquote>
इस चेतावनी के बावजूद, यूट्यूब पर टीवी शो, फिल्मों और संगीत वीडियो की कई अनधिकृत क्लिप्स लगातार मौजूद रहती हैं। चूँकि यूट्यूब अपलोड होने से पहले सभी वीडियो की मैन्युअल रूप से जांच नहीं करता है, इसलिए 'डिजिटल मिलेनियम कॉपीराइट एक्ट' के तहत कॉपीराइट उल्लंघन का नोटिस जारी करने की जिम्मेदारी स्वयं कॉपीराइट धारक की होती है। [[वायकॉम]] और इंग्लिश [[प्रीमियर लीग]] जैसे कई बड़े संगठनों ने यूट्यूब पर कॉपीराइट उल्लंघन को रोकने में अपर्याप्त प्रयास करने का आरोप लगाते हुए उस पर [[मुकदमा]] किया है। वायकॉम ने 1 अरब डॉलर के [[क्षतिपूर्ति|हर्जाने]] की माँग करते हुए दावा किया था कि उसने यूट्यूब पर अपनी सामग्री की 1,50,000 से अधिक अनधिकृत क्लिप्स पाई हैं, जिन्हें 1.5 अरब से अधिक बार देखा जा चुका था। इसके जवाब में यूट्यूब ने तर्क दिया कि वह सामग्री के मालिकों को उनके अधिकारों की रक्षा करने में मदद कर रहा है, जो उसकी कानूनी बाध्यताओं से कहीं अधिक है। वायकॉम के मुकदमे के बाद, यूट्यूब ने एक उन्नत 'डिजिटल फिंगरप्रिंटिंग' प्रणाली शुरू की, जो अपलोड किए जा रहे वीडियो में कॉपीराइट उल्लंघन की स्वचालित रूप से पहचान करती है और उसे रोकती है।
जुलाई 2008 में, वायकॉम के पक्ष में एक अदालती फैसला आया, जिसमें यूट्यूब को साइट पर वीडियो देखने वाले उपयोगकर्ताओं के डेटा और देखने की आदतों का विवरण सौंपने का आदेश दिया गया। इस आदेश ने निजता के संबंध में बड़ी परेशानी खड़ी कर दी, क्योंकि किसी भी उपयोगकर्ता के देखने की आदतों की पहचान उसके [[आईपी पता|आईपी पते]] और लॉग-इन आईडी के संयोजन से की जा सकती थी। 'इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फाउंडेशन' ने इस अदालती फैसले की कड़ी आलोचना की और इसे निजता के अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन बताया। हालाँकि, जिला न्यायालय के न्यायाधीश लुई स्टैंटन ने इन निजता संबंधी चिंताओं को 'काल्पनिक' बताते हुए खारिज कर दिया और यूट्यूब को लगभग 12 [[टेराबाइट]] डेटा वाले दस्तावेज़ सौंपने का आदेश दिया। इसके साथ ही, न्यायाधीश स्टैंटन ने वायकॉम के उस अनुरोध को ठुकरा दिया जिसमें यूट्यूब के [[खोज इंजन|सर्च इंजन]] का [[स्रोत कोड|सोर्स कोड]] माँगा गया था। अदालत ने यह भी कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि यूट्यूब ने स्वयं जानबूझकर वीडियो के कॉपीराइट का उल्लंघन किया हो।
कॉपीराइट के अतिरिक्त, यूट्यूब को अपने प्लेटफॉर्म पर आपराधिक और अनुचित सामग्री वाले कुछ वीडियो के कारण भी कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है। हालाँकि यूट्यूब की 'सेवा की शर्तें' अनुचित, हिंसक या [[मानहानि]] करने वाली सामग्री अपलोड करने पर सख्त रोक लगाती हैं, लेकिन अपलोड होने वाले लाखों वीडियो की तुरंत जांच करना असंभव है; इस कारण समय-समय पर ऐसी कमियाँ सामने आती रहती हैं। यूट्यूब पर अपलोड किए गए कुछ बेहद विवादास्पद वीडियो में 'होलोकॉस्ट से इनकार' और 'हिल्सबोरो आपदा' से जुड़ी असंवेदनशील सामग्री शामिल रही है।
== प्रतिबंध और सेंसरशिप ==
यूट्यूब की शुरुआत के बाद से, कई देशों—जिनमें [[तूनिसीया]], [[थाईलैंड]] और [[ईरान]] शामिल हैं—ने विभिन्न कारणों से इस प्लेटफॉर्म पर रोक लगाई, जिसे बाद में हटा लिया गया। 1 अक्टूबर 2007 को [[तुर्की]] में भी यूट्यूब के कुछ पेजों को प्रतिबंधित कर दिया गया था, हालांकि दो दिन बाद यह रोक हटा ली गई। इसके बाद 22 जनवरी 2008 को तुर्की में एक बार फिर यूट्यूब पर रोक लगाई गई, जिसे तीन दिन बाद हटा लिया गया। बाद में 5 मई 2008 से तुर्की में यूट्यूब पर एक लंबा प्रतिबंध लगा रहा। [[संयुक्त अरब अमीरात]] में भी यूट्यूब के कुछ विशिष्ट पेजों और वीडियो पर रोक लगी हुई है।
23 फरवरी 2008 को, [[पाकिस्तान]] ने पैगंबर [[मुहम्मद]] के चित्र दिखाकर [[इस्लाम]] के खिलाफ अपमानजनक सामग्री प्रदर्शित करने का आरोप लगाते हुए यूट्यूब को अपने देश में प्रतिबंधित कर दिया था।<ref>{{cite web|date=23 फरवरी 2008|archive-url= https://web.archive.org/web/20080225175336/http://www.rsf.org/article.php3?id_article=25889 |archive-date=25 फ़रवरी 2008|url=http://www.rsf.org/article.php3?id_article=25889|title=Access to YouTube blocked until further notice because of "non-Islamic" videos|trans-title= गैर इस्लामी वीडियॊ के कारण यूट्यूब पर अगली नॊटिस तक के लिए रॊक लगायी गयी|language=en|publisher=रिपोर्टर्स विदाउट बोर्डर्स |access-date= 24 फरवरी 2008}}</ref> पाकिस्तानी अधिकारियों की इस कार्रवाई के कारण तकनीकी गड़बड़ी उत्पन्न हुई, जिससे पूरी दुनिया में यूट्यूब की साइट कम से कम दो घंटों के लिए क्रैश (ब्लॉक) हो गई।<ref>{{Cite news|url=http://news.bbc.co.uk/2/hi/technology/7262071.stm|title=Pakistan lifts the ban on YouTube|date=2008-02-26|access-date=2025-07-24|language=en-GB|publisher=बीबीसी समाचार |trans-title=यूट्यूब आउटेज़ बीबीसी ने पाकिस्तान को दोषी ठहराया |archive-url=https://web.archive.org/web/20090215160354/http://news.bbc.co.uk/1/hi/technology/7262071.stm |archive-date=15 फ़रवरी 2009 }}</ref> इस प्रतिबंध के दौरान, हजारों पाकिस्तानी उपयोगकर्ताओं ने 'हॉटस्पॉट शील्ड' नामक एक [[वीपीएन]] सॉफ़्टवेयर का उपयोग करके इस तीन दिवसीय ब्लॉक को दरकिनार किया।<ref>{{cite web|date=27 फरवरी 2008 |url=http://www.siliconrepublic.com/news/news.nv?storyid=single10381 |title=Pakistan web users get round YouTube ban |trans-title=पाकिस्तान वेबसाइट प्रयोगकर्ता हमेशा यू ट्यूब रोक |language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20080629065235/http://www.siliconrepublic.com/news/news.nv?storyid=single10381 |archive-date=29 जून 2008 |access-date= 27 फरवरी 2008}}</ref> 26 फरवरी 2008 को जब यूट्यूब ने वह आपत्तिजनक सामग्री अपनी साइट से हटा ली, तब पाकिस्तान ने यह प्रतिबंध समाप्त कर दिया।<ref name="PAK-ban-lifted">{{cite news | title = Pakistan lifts YouTube ban | url = http://www.abc.net.au/news/stories/2008/02/27/2173501.htm?section=world | publisher = एबीसी न्यूज़ | date = 2008-02-26 | accessdate = 2008-02-26}}</ref>
यूट्यूब पर उपलब्ध विशाल और विविध सामग्री के कारण, इसे अक्सर कई देशों की सरकारों के प्रतिबंधों का डर सताता रहता है। मुख्यभूमि [[चीन]] में भी 18 अक्टूबर से यूट्यूब को ताइवानी झंडे वाले एक वीडियो के कारण ब्लॉक कर दिया गया था। उस दौरान चीन में यूट्यूब के URL को उनके अपने सर्च इंजन बैदू पर अनुप्रेषित कर दिया गया था। बाद में 31 अक्टूबर को इसे फिर से खोल दिया गया।<ref>{{Cite web|url=http://udn.com/NEWS/INFOTECH/INFS1/4061683.shtml|title=संदर्भ|archive-url=https://web.archive.org/web/20071021040312/http://udn.com/NEWS/INFOTECH/INFS1/4061683.shtml|archive-date=21 अक्तूबर 2007|access-date=27 फ़रवरी 2009|url-status=live}}</ref>
राष्ट्रीय सेंसरशिप के अलावा, कई देशों के स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों ने भी छात्रों के दुर्व्यवहार, आपसी झगड़ों, नस्लवादी टिप्पणियों, और इंटरनेट बैंडविड्थ की अधिक खपत को रोकने के लिए अपने परिसरों में यूट्यूब को ब्लॉक किया हुआ है।
== स्पैमिंग ==
ईमेल स्पैम फ़िल्टरिंग तकनीक में हुए हालिया विकास और इसके व्यापक उपयोग के कारण, स्पैमर्स ने विज्ञापनों के लिए यूट्यूब जैसी लोकप्रिय वीडियो साइटों का उपयोग करना शुरू कर दिया। इसे रोकने के लिए यूट्यूब ने 2006 में टिप्पणियों में यूआरएल जोड़ने पर रोक लगा दी थी। यदि कोई उपयोगकर्ता अपनी टिप्पणी में यूआरएल डालकर पोस्ट करने का प्रयास करता है, तो उसे अस्वीकार कर दिया जाता है और वह दिखाई नहीं देता।
अगस्त 2007 में इस सुविधा (प्रतिबंध) को प्रोफाइल टिप्पणियों तक भी बढ़ा दिया गया था, जहाँ ऐसा करने पर उपयोगकर्ता को "आपकी टिप्पणी की प्रक्रिया में त्रुटि" का संदेश प्राप्त होता है। हालाँकि, बुलेटिन, निजी संदेशों या समूह चर्चाओं में लिंक पोस्ट करना अभी भी संभव है। इसके साथ ही, यदि कोई उपयोगकर्ता बहुत ही कम समय में लगातार कई टिप्पणियाँ पोस्ट करता है, तो स्पैमिंग को रोकने के लिए उसे एक [[कॅप्चा|कैप्चा]] भरने के लिए कहा जा सकता है। हालाँकि, साइट के कुछ हिस्सों में अभी भी कैप्चा प्रणाली का अभाव मौजूद है।
स्पैमर्स के अन्य तरीकों में वीडियो टिप्पणियों में भ्रामक, अंधविश्वासी या धमकी भरे संदेश भेजना शामिल है (जैसे: "इस संदेश को 10 दोस्तों को भेजो, वरना इतने घंटों में आपका दुर्भाग्य आएगा")। वे उपयोगकर्ताओं के इनबॉक्स में भी ऐसे स्पैम संदेश भेज सकते हैं। इसके अलावा, कुछ स्पैम खातों ने यूट्यूब पर अश्लील वीडियो पोस्ट करने का भी प्रयास किया है।
यूट्यूब ने ईमेल के माध्यम से "अपने दोस्तों को आमंत्रित करें" नामक एक नई सुविधा शुरू की थी, जिसका वास्तविक उद्देश्य यूट्यूब उपयोगकर्ताओं का एक बड़ा समुदाय बनाना था। लेकिन जब स्पैमर्स को इसका पता चला, तो उन्होंने इसका दुरुपयोग करते हुए हर संभव ईमेल पते पर स्पैम भेजना शुरू कर दिया। यहाँ तक कि वे इस व्यवस्था को चकमा देने में भी सक्षम हो गए।
{{cquote|''ये संदेश service@youtube.com से आए थे। [...] ये संदेश दिखने में यूट्यूब के एक वैध आमंत्रण जैसे लगते हैं, लेकिन इनमें शेयर बाज़ार के फ़र्ज़ी प्रचार और स्पैम वेबसाइटों के लिंक जैसी विशिष्ट स्पैम सामग्री शामिल होती है। इनमें से कई संदेश माइक्रोसॉफ्ट के तत्कालीन लोकप्रिय एक्सबॉक्स 360 गेम "हेलो 3" का लालच देते हुए प्राप्तकर्ता को बताते हैं कि उन्होंने गेम की एक मुफ्त कॉपी जीती है और उन्हें एक वेबसाइट पर जाना चाहिए। यदि वे इस जाल में फँसकर 'winhalo3.com' पर क्लिक करते हैं, तो वह वेबसाइट उनके सिस्टम को स्टॉर्म वर्म वायरस से संक्रमित कर देती है, जो अगस्त से ही इंटरनेट पर सक्रिय था।''<ref name="internetnews">[http://www.internetnews.com/security/article.php/3704541 Internetnews: YouTube's Not-so-'Friendly' Spam]</ref>}}
वर्तमान में स्पैमर्स इस तरीके का अधिक उपयोग कर रहे हैं क्योंकि इसकी मदद से वे ईमेल स्पैम फ़िल्टर को आसानी से बायपास कर सकते हैं और अपने दुर्भावनापूर्ण लिंक पर क्लिक या व्यूज़ प्राप्त कर सकते हैं। अंततः, ये भी अन्य सामान्य स्पैमर्स की तरह ही काम करते हैं।
== तकनीकी नोट ==
=== वीडियो प्रारूप ===
यूट्यूब की शुरुआती वीडियो प्लेबैक तकनीक [[मैक्रोमीडिया]] के फ़्लैश प्लेयर पर आधारित थी। इस तकनीक ने साइट को [[विंडोज़ मीडिया प्लेयर]], क्विकटाइम और रियलप्लेयर जैसे तत्कालीन स्थापित वीडियो प्लेयर की तुलना में कम बफरिंग के साथ अच्छी गुणवत्ता वाले वीडियो प्रदर्शित करने की सुविधा दी थी। पहले उपयोगकर्ताओं को वीडियो देखने के लिए एक [[वेब ब्राउज़र|वेब ब्राउज़र प्लग-इन]] डाउनलोड और इंस्टॉल करना पड़ता था, लेकिन उस समय फ़्लैश प्लेयर दुनिया भर के लगभग 90% ऑनलाइन कंप्यूटरों पर पहले से मौजूद रहता था।<ref>[http://www.adobe.com/products/player_census/flashplayer/version_penetration.html एडोब फ़्लैश प्लेयर संस्करण प्रवेश ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120218013034/http://www.adobe.com/products/flashplatformruntimes/statistics.html|date=18 फ़रवरी 2012}} [[एडोब इंक.|एडोब]]</ref> जनवरी 2015 से, यूट्यूब ने डिफ़ॉल्ट रूप से [[एचटीएमएल५|HTML5]] वीडियो प्लेयर का उपयोग करना शुरू कर दिया, जिससे अब फ़्लैश प्लग-इन की आवश्यकता पूरी तरह से समाप्त हो गई है।
उपयोगकर्ता 'डिफ़ॉल्ट मोड', 'थिएटर मोड' या 'पूर्ण स्क्रीन' में वीडियो देख सकते हैं। प्लेयर की तकनीक वीडियो को बिना रीलोड किए प्लेबैक के दौरान अलग-अलग मोड में स्विच करने की अनुमति देती है। इसके अतिरिक्त, तृतीय पक्ष मीडिया प्लेयर जैसे जीओएम प्लेयर, [[वीएलसी मीडिया प्लेयर|वीएलसी मीडिया प्लेयर]] और एफएफएमपीईजी आधारित वीडियो प्लेयर के माध्यम से भी यूट्यूब वीडियो को स्ट्रीम किया जा सकता है।
मार्च 2006 में, यूट्यूब ने सामान्य वीडियो की लंबाई पर 10 मिनट की सीमा लगा दी थी, क्योंकि उस समय साइट पर कॉपीराइट वाले टेलीविजन शो और फिल्मों के लंबे वीडियो अपलोड किए जा रहे थे।<ref>यू ट्यूब की सहायता खंड कहता है :"आप दस मिनट से अधिक विडियो अपलोड नही कर सकते...दस मिनट की सीमा मार्च २००६ में तब शुरू की गई जब यू ट्यूब ने महसूस किया कि इस लम्बाई कि अधिकांश विडियो टेलिविज़न शो और फ़िल्म से थे।"</ref> हालांकि, वर्तमान में यह सीमा हटा दी गई है। अब सत्यापित खाते वाले उपयोगकर्ता 12 घंटे तक की अवधि और अधिकतम 256 [[गीगाबाइट]] फ़ाइल साइज़ तक के वीडियो अपलोड कर सकते हैं।
यूट्यूब कई प्रकार के वीडियो फ़ाइल स्वरूपों को अपलोड करने के लिए स्वीकार करता है। यूट्यूब के सर्वर अपलोड किए गए वीडियो को स्ट्रीमिंग के लिए उपयुक्त प्रारूपों में स्वचालित रूप से बदल देते हैं।<ref>{{Cite web |url=http://www.codinghorror.com/blog/archives/000755.html |title=Did YouTube Cut the Gordian Knot of Video Codecs? |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090302051409/http://www.codinghorror.com/blog/archives/000755.html |archive-date=2 मार्च 2009 |url-status=live }}</ref> स्वीकृत अपलोड स्वरूपों में मुख्य रूप से [[विंडोज मीडिया वीडियो|डब्लूएमवी (.WMV)]], एवीआई (.AVI), एमओवी (.MOV), एमपीईजी (MPEG), वेबएम (WebM) और एमपी४ शामिल हैं। यह 3जीपी स्वरूप का भी समर्थन करता है, जो वीडियो को सीधे [[स्मार्टफोन|मोबाइल फ़ोन]] से अपलोड करने की अनुमति देता है।<ref>{{Cite web |url=http://www.google.com/support/youtube/bin/answer.py?answer=55744&topic=10526 |title=यूट्यूब अधिकारिक रूप में किस प्रारूप में अपलोड विडियो स्वीकार करता है |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090317024831/http://www.google.com/support/youtube/bin/answer.py?answer=55744&topic=10526 |archive-date=17 मार्च 2009 |url-status=live }}</ref>
=== स्तरीय और उच्च गुणवत्ता का वीडियो ===
शुरुआत में यूट्यूब वीडियो की मानक गुणवत्ता 320 [[पिक्सल]] चौड़ाई और 240 पिक्सल ऊँचाई वाले चित्र तक सीमित थी। इसमें सोरेंसन स्पार्क H.263 वीडियो कोडेक का उपयोग किया गया था। वीडियो सिग्नल की बिट दर लगभग 314 किलोबिट प्रति सेकंड थी, जो अपलोड किए गए वीडियो की फ्रेम दर पर निर्भर करती थी।<ref>इन्टरनेट संरचना विश्लेषकों द्वारा परीक्षित और नए अपलोड किए गए वीडियो के आधार पर, 19 नवंबर 2007</ref>
मार्च 2008 में, यूट्यूब ने एक नई सुविधा शुरू की, जिसने 'उच्च गुणवत्ता' प्रारूप में वीडियो देखने की अनुमति दी। यह प्रारूप इस तिथि के बाद अपलोड किए गए किसी भी वीडियो के लिए बेहतर रिज़ॉल्यूशन (320x240 पिक्सल के स्थान पर 480x360 पिक्सल) प्रदर्शित करने में सक्षम था। यूट्यूब के सर्वर स्वयं यह निर्धारित करते थे कि मूल रूप से अपलोड किया गया कौन सा वीडियो इस उन्नत मानक का समर्थन करने में सक्षम है। उपयोगकर्ता अपने खाते के [https://web.archive.org/web/20080517102330/http://www.youtube.com/video_quality_settings वीडियो गुणवत्ता सेटिंग पृष्ठ] पर जाकर डिफ़ॉल्ट रूप से "जब भी उपलब्ध हो, मुझे हमेशा उच्च गुणवत्ता वाला वीडियो दिखाएँ" विकल्प को चुन सकते थे।
यूट्यूब के उच्च गुणवत्ता वाले वीडियो दो संस्करणों में उपलब्ध कराए गए थे, और दोनों में ही 480x360 [[पिक्सल]] का चित्र आकार था। किसी वीडियो के वेब पते के अंत में `&fmt=6` जोड़कर, उसे H.263 कोडेक और मोनो ध्वनि के साथ प्ले किया जा सकता था। वहीं URL के अंत में `&fmt=18` जोड़कर इसे H.264/MPEG-4 AVC कोडेक और AAC स्टीरियो साउंडट्रैक के साथ चलाया जा सकता था।
उस समय जब पूछा गया कि यूट्यूब ने शुरुआत में ही एचडी प्रारूप को क्यों नहीं अपनाया, तो साइट ने उत्तर दिया था, "हमारा मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिक से अधिक लोग यूट्यूब तक पहुँच सकें और उनके वीडियो तुरंत और आसानी से प्ले हो सकें। यही एकमात्र कारण है कि हम 'सुपर डुपर यूट्यूब एचडी' जैसा कोई दावा नहीं करते, क्योंकि अधिकांश दर्शक वीडियो शुरू होने के लिए अधिक देर तक बफ़रिंग का इंतज़ार नहीं कर सकते।"<ref>{{Cite web |url=http://www.trustedreviews.com/software/news/2008/03/19/YouTube-Launches-High-Quality-Videos/p1 |title=यूट्यूब ने उच्च गुणवत्ता वाले वीडियो का प्रारम्भ किया |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080720051626/http://www.trustedreviews.com/software/news/2008/03/19/YouTube-Launches-High-Quality-Videos/p1 |archive-date=20 जुलाई 2008 |url-status=dead }}</ref>
=== ध्वनि प्रारूप ===
शुरुआती मानक गुणवत्ता वाले यूट्यूब वीडियो में [[एमपी३|MP3 (एमपी3)]] ऑडियो स्ट्रीम शामिल होती थी। डिफ़ॉल्ट रूप से यह ऑडियो मोनो मोड में 64 किलोबिट प्रति सेकंड की बिट दर पर कूटबद्ध की जाती थी, जिसे 22,050 [[हर्ट्ज़|हर्ट्ज]] पर नमूनीकृत (Sampled) किया जाता था। इससे लगभग 10 किलोहर्ट्ज़ की ऑडियो बैंडविड्थ प्राप्त होती थी। यह निम्न बिट दर स्पष्ट आवाज़ तो प्रदान करती थी, लेकिन यह 'हाई फाई' ऑडियो मानक के अनुरूप नहीं थी।
बाद में, एक मानक यूट्यूब वीडियो के लिए स्टीरियो ऑडियो ट्रैक का होना भी संभव हो गया, बशर्ते वीडियो फ़ाइल को यूट्यूब पर अपलोड करने से पहले ही फ़्लैश वीडियो प्रारूप में एन्कोड किया गया हो। इस प्रक्रिया को विभिन्न सॉफ्टवेयर प्रोग्रामों की मदद से किया जा सकता था, जैसे— [[लिनक्स]] और [[माइक्रोसॉफ्ट विंडोज़|विंडोज़]] के लिए एफएफएमपीईजी, मैकिन्टोश के लिए एफएफएमपीईजी-एक्स, या विंडोज़ के लिए वाणिज्यिक 'रीवा एफएलवी एन्कोडर'।
<span id="accessibility"></span>
=== सामग्री पहुँच ===
==== यूट्यूब पर ====
यूट्यूब सामान्य वीडियो फ़ाइल स्वरूपों को स्वीकार करता है और उन्हें ऑनलाइन देखने के लिए अनुकूलित प्रारूपों में बदल देता है। शुरुआत में यूट्यूब ने फ्लैश वीडियो का उपयोग किया था, लेकिन जून 2007 से नए अपलोड किए गए वीडियो के लिए उन्नत एच.२६४ एन्कोडिंग तकनीक का प्रयोग शुरू कर दिया गया, जो बेहतर गुणवत्ता प्रदान करती है। वर्तमान में यूट्यूब मुख्य रूप से HTML5 वीडियो प्लेयर का उपयोग करता है।
==== यूट्यूब के बाहर ====
यूट्यूब पर मौजूद प्रत्येक वीडियो एक [[एचटीएमएल]] 'एम्बेड' कोड के साथ आता है, जिसका उपयोग उस वीडियो को किसी भी अन्य वेबपेज या ब्लॉग पर जोड़ने के लिए किया जा सकता है। यह विकल्प विशेष रूप से [[सामाजिक नेटवर्किंग सेवा|सोशल नेटवर्किंग]] साइटों के उपयोगकर्ताओं के बीच बहुत लोकप्रिय है। इसके अलावा, एक छोटी सी कोडिंग की मदद से किसी भी एम्बेडेड वीडियो को वेबपेज लोड होते ही स्वतः प्ले होने की अनुमति भी दी जा सकती है।
मूल रूप से यूट्यूब वीडियो केवल इंटरनेट कनेक्शन के साथ ऑनलाइन देखने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, और प्लेटफ़ॉर्म आधिकारिक तौर पर वीडियो डाउनलोड करने की प्रत्यक्ष सुविधा नहीं देता (सिवाय 'यूट्यूब प्रीमियम' के ऑफ़लाइन डाउनलोड फीचर के)। इसके बावजूद, वीडियो डाउनलोड करने के लिए इंटरनेट पर कई थर्ड-पार्टी वेबसाइट्स, मोबाइल एप्लिकेशन और ब्राउज़र एक्सटेंशन मौजूद हैं।
==== मोबाइल पर ====
यूट्यूब ने 15 जून 2007 को अपनी आधिकारिक मोबाइल साइट लॉन्च की थी। यह शुरुआती मोबाइल संस्करण xHTML पर आधारित था और H.263/AMR कोडेक तथा RTSP स्ट्रीमिंग के साथ 3GP वीडियो प्रारूप का समर्थन करता था। वर्तमान में यूट्यूब का मोबाइल ऐप (Android और iOS दोनों के लिए) विश्व स्तर पर सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले एप्लिकेशन में से एक है।
==== टेलीविज़न पर ====
यूट्यूब की वीडियो सामग्री को टेलीविज़न पर भी देखा जा सकता है। शुरुआत में, 7 जनवरी 2008 को 'Information TV 2' नामक एक चैनल ने यूट्यूब वेबसाइट की साझा सामग्री को टीवी पर प्रसारित करना शुरू किया था। आज के समय में लगभग सभी स्मार्ट टीवी और स्ट्रीमिंग डिवाइस में यूट्यूब का एक समर्पित एप्लिकेशन पहले से इंस्टॉल होता है।
==== एप्पल डिवाइस ====
20 जून 2007 को [[एप्पल इंक.|एप्पल इंक.]] ने घोषणा की थी कि एक मुफ्त सॉफ्टवेयर अपडेट के बाद यूट्यूब 'एप्पल टीवी' पर भी उपलब्ध होगा। इस सुविधा ने उपयोगकर्ताओं को श्रेणियों के आधार पर वीडियो ब्राउज़ करने, सर्च करने और एप्पल टीवी से सीधे अपने यूट्यूब खाते में लॉग-इन करने की अनुमति दी। एप्पल के तत्कालीन वीपी डेविड मूडी के अनुसार, शुरुआत में सभी वीडियो उपलब्ध न होने का कारण यह था कि एप्पल के वीडियो मानकों के अनुरूप यूट्यूब की सभी पुरानी सामग्री को एच.२६४ प्रारूप में ट्रांसकोड करना आवश्यक था।
एप्पल ने यह भी घोषणा की थी कि आईफोन के लॉन्च के साथ ही यूट्यूब उस पर उपलब्ध होगा। आईफोन के लिए यूट्यूब के वीडियो विशेष रूप से एप्पल के एच.२६४ प्रारूप में एन्कोड किए गए थे। शुरुआत में, यूट्यूब ने वीडियो के दो संस्करण बनाए थे—एक उच्च बैंडविड्थ वाला (Wi-Fi के लिए) और दूसरा निम्न रिज़ॉल्यूशन वाला (एज/3G नेटवर्क के लिए)।
=== टिप्पणियाँ ===
जून 2008 में, यूट्यूब ने 'एनोटेशन' सुविधा का बीटा परीक्षण शुरू किया था। यह सुविधा रचनाकारों को अपने वीडियो के ऊपर टेक्स्ट टिप्पणियाँ या लिंक प्रदर्शित करने की अनुमति देती थी। एनोटेशन की मदद से वीडियो में अतिरिक्त जानकारी जोड़ी जा सकती थी; उदाहरण के लिए, संवादात्मक कहानियाँ बनाना, जहाँ दर्शक अगला दृश्य चुनने के लिए स्क्रीन पर क्लिक कर सकते थे, या अन्य यूट्यूब वीडियो के लिंक देना। हालाँकि, शुरुआत में यूट्यूब वेबसाइट के बाहर किसी अन्य वेबपेज पर एम्बेड किए गए वीडियो में ये एनोटेशन दिखाई नहीं देते थे।
''(नोट: मोबाइल उपकरणों पर इसका समर्थन न होने के कारण 15 जनवरी 2019 को यूट्यूब ने इस एनोटेशन सुविधा को पूरी तरह से बंद कर दिया और इसके स्थान पर 'एंड स्क्रीन' और 'कार्ड्स' की आधुनिक सुविधा पेश की।)''
== स्थानीकरण ==
19 जून 2007 को गूगल के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक श्मिट ने [[पेरिस]] में यूट्यूब के नए स्थानीकरण कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इसके तहत दुनिया के विभिन्न देशों के लिए यूट्यूब वेबसाइट का पूरा इंटरफ़ेस स्थानीय संस्करणों और भाषाओं में उपलब्ध कराया गया।
{| class="wikitable sortable"
! देश !! URL !! भाषाएँ !! लॉन्च की तिथि
|-
| {{AUS}} || [https://web.archive.org/web/20081218061511/http://au.youtube.com/ au.youtube.com] || [[ऑस्ट्रेलियाई अंग्रेजी|अंग्रेज़ी (ऑस्ट्रेलिया)]] || 22 अक्टूबर 2007<ref name="AUS-NZ">{{Cite web |url=http://mashable.com/2007/10/22/youtube-australia-new-zealand/ |title=यूट्यूब ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में लॉन्च करता है |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190403142649/https://mashable.com/2007/10/22/youtube-australia-new-zealand/ |archive-date=3 अप्रैल 2019 |url-status=live }}</ref>
|-
| {{BRA}} || [https://web.archive.org/web/20090122224743/http://br.youtube.com/ br.youtube.com] || [[ब्राज़ीलियाई पुर्तगाली|पुर्तगाली (ब्राजील)]] || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|-
| {{CAN}} || [https://web.archive.org/web/20090114224859/http://ca.youtube.com/ ca.youtube.com] || अंग्रेज़ी (कनाडा) || 6 नवंबर 2007<ref>{{Cite web |url=http://mashable.com/2007/11/06/youtube-canada/ |title=यूट्यूब अब कनाडा लाइव |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190403183030/https://mashable.com/2007/11/06/youtube-canada/ |archive-date=3 अप्रैल 2019 |url-status=live }}</ref>
|-
| {{FRA}} || [https://web.archive.org/web/20090126213904/http://fr.youtube.com/ fr.youtube.com] || [[फ़्रान्सीसी भाषा|फ़्रेंच]] || 19 जून 2007<ref name="local">{{Cite web |url=http://www.pcadvisor.co.uk/news/index.cfm?NewsID=9772 |title=गूगल यूट्यूब फ्रांस न्यूज़ को लॉन्च करता है -- पीसी सलाहकार |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110325161722/http://www.pcadvisor.co.uk/news/index.cfm?NewsID=9772 |archive-date=25 मार्च 2011 |url-status=live }}</ref>
|-
| {{GER}} || [https://web.archive.org/web/20081218134509/http://de.youtube.com/ de.youtube.com] || [[जर्मन भाषा|जर्मन]] || 8 नवंबर 2007<ref>{{Cite web |url=http://mashable.com/2007/11/08/youtube-germany/ |title=यूट्यूब जर्मनी लॉन्च करता है |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190403120958/https://mashable.com/2007/11/08/youtube-germany/ |archive-date=3 अप्रैल 2019 |url-status=live }}</ref>
|-
| {{HKG}} || [https://web.archive.org/web/20081218061355/http://hk.youtube.com/ hk.youtube.com] || [[पारम्परिक चीनी वर्ण|चीनी (पारंपरिक)]] || 17 अक्टूबर 2007<ref>{{Cite web |url=http://chita.us/community/viewtopic.php?f=9&t=1294 |title=Chita •检视主题-- YouTube台湾版推出 |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20081205151456/http://chita.us/community/viewtopic.php?f=9&t=1294 |archive-date=5 दिसंबर 2008 |url-status=dead }}</ref>
|-
| {{IND}} || [https://web.archive.org/web/20081218061420/http://in.youtube.com/ in.youtube.com] || [[भारतीय अंग्रेज़ी|अंग्रेज़ी (भारत)]] || 7 मई 2008<ref>{{Cite web |url=http://www.hindu.com/2008/05/08/stories/2008050857242200.htm |title=यूट्यूब के पास अब एक भारतीय अवतार है |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20131128004152/http://www.hindu.com/2008/05/08/stories/2008050857242200.htm |archive-date=28 नवंबर 2013 |url-status=live }}</ref>
|-
| {{IRL}} || [https://web.archive.org/web/20081231010855/http://ie.youtube.com/ ie.youtube.com] || अंग्रेज़ी (आयरलैंड) || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|-
| {{ITA}} || [https://web.archive.org/web/20090113004033/http://it.youtube.com/ it.youtube.com] || [[इतालवी भाषा|इतालवी]] || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|-
| {{JPN}} || [https://web.archive.org/web/20090112051634/http://jp.youtube.com/ jp.youtube.com] || [[जापानी भाषा|जापानी]] || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|-
| {{KOR}} || [https://web.archive.org/web/20090110014401/http://kr.youtube.com/ kr.youtube.com] || [[कोरियाई भाषा|कोरियाई]] || 23 जनवरी 2008
|-
| {{MEX}} || [https://web.archive.org/web/20081218061353/http://mx.youtube.com/ mx.youtube.com] || स्पैनिश (मेक्सिको) || 10 अक्टूबर 2007
|-
| {{NLD}} || [https://web.archive.org/web/20081218061353/http://nl.youtube.com/ nl.youtube.com] || [[डच भाषा|डच]] || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|-
| {{NZL}} || [https://web.archive.org/web/20081216095659/http://nz.youtube.com/ nz.youtube.com] || अंग्रेज़ी (न्यूजीलैंड) || 22 अक्टूबर 2007<ref name="AUS-NZ"/>
|-
| {{POL}} || [https://web.archive.org/web/20081218061138/http://pl.youtube.com/ pl.youtube.com] || [[पोलिश भाषा|पोलिश]] || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|-
| {{RUS}} || [https://web.archive.org/web/20090113054547/http://ru.youtube.com/ ru.youtube.com] || [[रूसी भाषा|रूसी]] || 13 नवंबर 2007
|-
| {{ESP}} || [https://web.archive.org/web/20090122224458/http://es.youtube.com/ es.youtube.com] || [[स्पेनी भाषा|स्पैनिश]] || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|-
| {{TWN}} || [https://web.archive.org/web/20081218062111/http://tw.youtube.com/ tw.youtube.com] || [[पारम्परिक चीनी वर्ण|चीनी (पारंपरिक)]] || 18 अक्टूबर 2007<ref>{{Cite web |url=http://chita.us/community/viewtopic.php?f=9&t=1294 |title=Chita •检视主题-- YouTube台湾版推出 |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20081205151456/http://chita.us/community/viewtopic.php?f=9&t=1294 |archive-date=5 दिसंबर 2008 |url-status=dead }}</ref>
|-
| {{UK}} || [https://web.archive.org/web/20081223010735/http://uk.youtube.com/ uk.youtube.com] || [[ब्रिटिश अंग्रेज़ी|अंग्रेज़ी (ब्रिटेन)]] || 19 जून 2007<ref name="local"/>
|}
गूगल का मुख्य उद्देश्य फ्रांस में स्थानीय वीडियो शेयरिंग वेबसाइट [[डेलीमोशन]] के साथ प्रतिस्पर्धा करना था। इसके लिए उसने स्थानीय टेलीविजन स्टेशनों जैसे एम6 और फ्रांस टेलीविज़न के साथ वीडियो सामग्री के कानूनी प्रसारण के लिए कई समझौते किए।
17 अक्टूबर 2007 को यूट्यूब के होन्ग कोंग संस्करण को लॉन्च करने की घोषणा की गई थी। उस दौरान यूट्यूब के सह-संस्थापक स्टीव चेन ने यह भी संकेत दिया था कि उनका अगला लक्ष्य ताइवान संस्करण लॉन्च करना है।<ref>{{Cite web |url=http://pshweb01.881903.com/apps/news/html/news/20071017/2007101715593573500.htm |title=1903.com वाणिज्यिक रेडियो |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071223205642/http://pshweb01.881903.com/apps/news/html/news/20071017/2007101715593573500.htm |archive-date=23 दिसंबर 2007 |url-status=dead }}</ref><ref>{{Cite web |url=http://inews.i-cable.com/webapps/news_detail.php?id=250154&category=2 |title=CableTV |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080315023733/http://inews.i-cable.com/webapps/news_detail.php?id=250154&category=2 |archive-date=15 मार्च 2008 |url-status=dead }}</ref>
22 अक्टूबर 2007 को न्यूजीलैंड संस्करण की लॉन्च पार्टी आयोजित की गई थी, जिसका उद्देश्य वहां के स्थानीय यूट्यूब रचनाकारों को आगे बढ़ने में सहायता प्रदान करना था।
तुर्की में यूट्यूब का स्थानीय संस्करण स्थापित करने की योजना लंबे समय तक विवादों और कानूनी अड़चनों में फंसी रही। तुर्की के अधिकारियों ने यूट्यूब से मांग की थी कि वह देश के कानूनों के अधीन काम करने के लिए तुर्की में अपना एक आधिकारिक कार्यालय खोले। हालांकि, यूट्यूब ने उस समय स्पष्ट किया था कि उसका ऐसा कोई इरादा नहीं है और उसके वीडियो तुर्की के कानूनों के अधीन नहीं आते। तुर्की प्रशासन ने यह चिंता भी व्यक्त की थी कि मंच पर अपलोड किए गए कुछ वीडियो का उपयोग मुस्तफा कमाल अतातुर्क (तुर्की के संस्थापक) का अपमान करने और मुस्लिमों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए किया जा रहा है।
=== चैनल के प्रकार ===
यूट्यूब अपने पंजीकृत सदस्यों को "चैनल प्रकार" नामक समूहों में शामिल होने का विकल्प देता था, जो उनके चैनल को एक विशिष्ट पहचान प्रदान करता था। शुरुआत में जब उपयोगकर्ता 'निदेशक' खाता सेटिंग्स का चयन करते थे, तो उन्हें असीमित लंबाई के वीडियो अपलोड करने की सुविधा दी जाती थी। हालांकि बाद में इस विकल्प को नए उपयोगकर्ताओं के लिए बंद कर दिया गया, लेकिन जिन पुराने उपयोगकर्ताओं ने शुरुआत में इस ग्रुप को ज्वाइन कर लिया था, उनके पास यह असीमित लंबाई की सेटिंग सुरक्षित रही। उस समय उनके खातों के लिए फ़ाइल आकार की सीमा 100 एमबी थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 1024 एमबी (1 जीबी) कर दिया गया था। ये चैनल प्रकार निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित थे:
* '''यूट्यूबर:''' यूट्यूब का एक सामान्य पंजीकृत दर्शक या उपयोगकर्ता।
* '''निर्देशक:''' फिल्म या वीडियो निर्माता, जो अपने द्वारा बनाई गई शॉर्ट फिल्मों या वीडियो को यूट्यूब दर्शकों के सामने प्रदर्शित करते थे।
* '''संगीतकार:''' संगीतकार, गायक या बैंड जो कवर गाने, मूल रचनाएँ या गिटार/संगीत सीखने से जुड़े ट्यूटोरियल अपलोड करते थे।
* '''हास्य कलाकार:''' ऐसे कलाकार जो यूट्यूब दर्शकों के मनोरंजन के लिए हास्य और व्यंग्य से भरपूर वीडियो बनाते थे।
* '''गुरु:''' किसी विशेष क्षेत्र या विषय के अनुभवी लोग, जो अपनी विशेषज्ञता के आधार पर ज्ञानवर्धक और शैक्षणिक वीडियो बनाते थे।
* '''गैर-लाभकारी संस्था:''' 501(c)(3) कर-मुक्त दर्जा प्राप्त गैर-लाभकारी संगठनों को यूट्यूब के गैर-लाभकारी कार्यक्रम के तहत विशेष खाते दिए जाते थे।
* '''पत्रकार:''' नागरिक या पेशेवर पत्रकार, जो स्थानीय, अंतरराष्ट्रीय या समसामयिक घटनाओं पर समाचार वीडियो और ग्राउंड रिपोर्ट तैयार करते थे।
== वीडियो रैंकिंग ==
यूट्यूब लोकप्रिय वीडियो को सम्मान देने के लिए उन्हें विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत करता है। इनमें सबसे प्रमुख "सबसे अधिक देखे गए" की श्रेणी है, जिसे चार अवधियों में बाँटा जाता है: आज, इस सप्ताह, इस महीने और अब तक। यूट्यूब की अन्य प्रमुख रैंकिंग श्रेणियों में शामिल हैं:
* सर्वाधिक देखा गया
* सर्वोच्च श्रेणी
* सर्वाधिक चर्चा में
* शीर्ष पसंद
* उभरते/ट्रेंडिंग वीडियो<ref>{{Cite web|url=https://freeviewsyoutube.com/2022/09/06/5-good-reasons-to-buy-youtube-views/|title=5 Good Reasons To Buy Youtube Views! – FreeViewsYouTube|access-date=2023-04-11}}</ref>
* हाल ही में प्रदर्शित
* सर्वाधिक उत्तरित
=== वीडियो रैंकिंग पर विवाद ===
यूट्यूब के कुछ सर्वाधिक देखे गए वीडियो समय-समय पर विवादों का विषय रहे हैं। अक्सर यह आरोप लगाया जाता है कि इन वीडियो के व्यूज़ बढ़ाने के लिए स्वचालित बॉट्स या अनैतिक तरीकों का इस्तेमाल किया गया है, जो यूट्यूब की 'सेवा की शर्तों' का सीधा उल्लंघन है।<ref>यूट्यूब के इस्तेमाल की शर्तें (धारा 4H) स्पष्ट करती हैं: "आप साइट तक पहुँचने के लिए किसी भी स्वचालित प्रणाली (जिसमें 'रोबोट', 'स्पाइडर' या 'ऑफ़लाइन रीडर' शामिल हैं) का उपयोग न करने के लिए सहमत हैं, जो यूट्यूब सर्वर पर इतने अधिक अनुरोध भेजती हो, जितने एक सामान्य मानव उसी अवधि में वेब ब्राउज़र का उपयोग करके नहीं भेज सकता।"</ref>
मार्च 2008 में, ब्राज़ीलियाई बैंड 'कैनसी डी सेर सेक्सी' के गाने "म्यूज़िक इज़ माई हॉट हॉट सेक्स" के अनौपचारिक वीडियो को 11.4 करोड़ व्यूज़ मिले थे। लेकिन स्वचालित हैकिंग के जरिए व्यूज़ बढ़ाने के आरोपों के बाद यूट्यूब ने इसे अस्थायी रूप से हटा दिया और बाद में अपलोडर ने इसे हमेशा के लिए डिलीट कर दिया। यूट्यूब के एक प्रवक्ता ने स्पष्ट किया, "हम यूट्यूब पर व्यूज़ और आँकड़ों की सुरक्षा के लिए कई तकनीकी उपाय करते हैं। जैसे ही हमारे संज्ञान में आता है कि किसी ने शीर्ष रैंकिंग में आने के लिए गलत या कृत्रिम तरीकों का इस्तेमाल किया है, हम उस वीडियो या चैनल को हटा देते हैं।" इटली के क्लारुस बार्टेल, जिन्होंने यह वीडियो अपलोड किया था, ने व्यूज़ बढ़ाने के किसी भी प्रयास से इनकार करते हुए कहा, "मेरा इन सबसे कोई लेना-देना नहीं है। मुझ पर लगे हैकिंग के आरोपों से मैं बहुत दुखी हूँ।"
इसके अलावा, कनाडाई गायिका [[एवरिल लैवीन]] के गाने "गर्लफ्रेंड" के वीडियो पर भी कृत्रिम रूप से व्यूज़ बढ़ाने के आरोप लगे थे। 'एवरिल बैंड एड्स' नामक एक फैनसाइट पर एक लिंक दिया गया था, जो हर 15 सेकंड में यूट्यूब पर इस वीडियो को स्वतः रीलोड (Reload) करता था। इस फैनसाइट ने प्रशंसकों को प्रोत्साहित किया कि वे "इंटरनेट ब्राउज़ करते समय, परीक्षा की पढ़ाई करते समय, या यहाँ तक कि सोते समय भी इस पेज को खुला छोड़ दें" और "व्यूज़ बढ़ाने के लिए एक ही ब्राउज़र में दो या अधिक विंडो खोलें"। इसी के चलते जुलाई 2008 तक, इस वीडियो ने जुडसन लैप्ली के "एवोल्यूशन ऑफ़ डांस" को पीछे छोड़ते हुए यूट्यूब पर अब तक का सबसे अधिक देखा जाने वाला वीडियो बनने का रिकॉर्ड बना लिया था। अगस्त 2008 तक इन दोनों वीडियो को लगभग 9.5 करोड़ दर्शकों ने देखा था।
एक जापानी एनीमे फ्रैंचाइज़ी से जुड़े यूट्यूब वीडियो को 9.7 करोड़ व्यूज़ मिले थे, लेकिन कृत्रिम रूप से व्यूज़ बढ़ाने के कारण इसे भी यूट्यूब की आधिकारिक सूची से बाहर कर दिया गया था।
=== यूट्यूब वीडियो पुरस्कार ===
2006 में, यूट्यूब ने वार्षिक 'यूट्यूब वीडियो पुरस्कार' की शुरुआत की थी।<ref>{{Cite web |url=http://www.youtube.com/ytawards |title=यू ट्यूब.कॉम /वाई टी पुरस्कार |access-date=27 फ़रवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20081201114824/http://www.youtube.com./ytawards |archive-date=1 दिसंबर 2008 |url-status=live }}</ref> इसकी श्रेणियों में "सबसे अधिक पसंद किया जाने वाला वीडियो" भी शामिल था। इस पुरस्कार प्रक्रिया में यूट्यूब स्वयं दावेदारों को नामांकित करता था और उपयोगकर्ता मतदान करके विजेता का निर्णय करते थे। इसमें केवल वास्तविक और उपयोगकर्ताओं द्वारा बनाए गए वीडियो को ही नामांकित किया जाता था। 2006 के पुरस्कारों के प्रमुख नामांकितों में पीटर ओकले, लोनलीगर्ल15, द वाइनकोन, रेनेट्टो, नेज़ोमिक और चाड वाडर जैसे प्रसिद्ध रचनाकार शामिल थे।
=== हाल की घटनाएँ ===
==== राजनीतिक अभियान ====
2008 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में राजनीतिक उम्मीदवारों ने अपने चुनाव प्रचार के लिए यूट्यूब का व्यापक उपयोग किया था। मतदाता उम्मीदवारों के बयानों को देख सकते थे और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों (उदाहरण के लिए: [[रॉन पॉल]], हिलेरी क्लिंटन, [[बराक ओबामा]] और [[जो बाइडन]]) के पक्ष या विपक्ष में वीडियो बना सकते थे। तीसरे दल के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों ने भी यूट्यूब का बड़े पैमाने पर प्रयोग किया।
अमेरिकी मीडिया ने अक्सर यह टिप्पणी की है कि यूट्यूब ने रिपब्लिकन सीनेटर जॉर्ज एलेन की 2006 की हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, क्योंकि चुनाव अभियान के दौरान उनकी एक कथित नस्लभेदी टिप्पणी वाली वीडियो क्लिप को यूट्यूब दर्शकों द्वारा व्यापक रूप से देखा और साझा किया गया था।<ref>{{cite news| author = Andrew Sullivan| title = Video power: the potent new political force| publisher = [[The Sunday Times]]| date = 2007-02-04| url = http://www.timesonline.co.uk/tol/comment/columnists/andrew_sullivan/article1321781.ece| accessdate = 2007-04-28}}{{Dead link|date=जुलाई 2026 |bot=InternetArchiveBot }} "बिना किसी विरोधी कैमरे और ब्लॉग जगत के एलेन चुनाव जीत गए होते, लेकिन यह वीडियो यूट्यूब पर पहुँच गया और उसके बाद टेलीविज़न नेटवर्क ने भी इसे दिखा दिया।"</ref><ref>{{cite video| people = Howard Kurtz, Glenn Reynolds, Ryan Lizza, Andrea Koppel| title = [http://edition.cnn.com/TRANSCRIPTS/0608/20/rs.06.html Reliable Sources]| medium = TV-Series| publisher = [[CNN]] [[Reliable Sources]]| date = 2006-08-20 }} "एलेन ने एक भारतीय-अमेरिकी स्वयंसेवक के लिए एक शब्द का प्रयोग किया और उस वेबकैम वीडियो को लोकप्रिय वेबसाइट यूट्यूब.कॉम पर पोस्ट कर दिया गया, जहाँ इसे 1,00,000 से अधिक बार देखा गया।"</ref>
जेम्स कोटेकी जैसे राजनीतिक विश्लेषक भी यूट्यूब की राजनीतिक दुनिया में सक्रिय रहे हैं। कई विश्लेषक यूट्यूब पर राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के वीडियो बनाते हैं या अपने राजनीतिक विचार व्यक्त करने के लिए यूट्यूब का उपयोग करते हैं। केवल अमेरिका में ही नहीं, बल्कि फ्रांस और इटली के राजनेता, जैसे एंटोनियो डी पिएत्रो, भी इस साइट का उपयोग अपने राजनीतिक अभियानों के हिस्से के रूप में करते रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री [[जॉन हावर्ड]] ने भी 2007 के संघीय चुनाव से पहले प्रचार के लिए यूट्यूब का इस्तेमाल किया था।
==== सीएनएन-यूट्यूब राष्ट्रपति चुनाव बहस ====
[[चित्र:CNN-YouTube Republican Debate.jpg|thumb|28 नवंबर 2007 को आयोजित सीएनएन-यूट्यूब रिपब्लिकन बहस]]
2008 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पूर्व, [[सीएनएन]] ने टेलीविज़न पर ऐसी राजनीतिक बहसें प्रसारित कीं, जिनमें राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों ने यूट्यूब उपयोगकर्ताओं द्वारा वीडियो के माध्यम से पूछे गए सवालों के जवाब दिए। समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों द्वारा इंटरनेट तकनीक का उपयोग करके सीधे सवाल पूछने की इस सुविधा के कारण, इस मंच को उस समय इतिहास की "सबसे लोकतांत्रिक राष्ट्रपति बहस" माना गया था।
=== अप्रैल फूल प्रैंक ===
1 अप्रैल 2008 को '[[अप्रैल फूल दिवस]]' के अवसर पर, यूट्यूब ने अपने मुख्य पृष्ठ के सभी फीचर्ड वीडियो को ब्रिटिश गायक रिक ऐस्टले के लोकप्रिय संगीत वीडियो "नेवर गोना गिव यू अप" पर अनुप्रेषित कर दिया था। इस प्रकार यूट्यूब ने उस दिन साइट पर वीडियो देखने का प्रयास करने वाले सभी उपयोगकर्ताओं के साथ इंटरनेट का प्रसिद्ध 'रिकरोलिंग' प्रैंक किया था।
=== यूट्यूब सहयोगी कार्यक्रम ===
यूट्यूब सहयोगी कार्यक्रम रचनाकारों को यूट्यूब के विशेष टूल और सुविधाओं तक पहुँच प्रदान करता है, जिसमें 'निर्माता सहायता टीम' से सीधा संपर्क शामिल है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह कार्यक्रम क्रिएटर्स को उनके वीडियो पर दिखाए जाने वाले विज्ञापनों से होने वाली राजस्व का साझा हिस्सा प्राप्त करने की अनुमति देता है।
यूट्यूब की मुद्रीकरण नीतियां उन नियमों का एक समूह हैं जो यह निर्धारित करती हैं कि किन चैनलों को कमाई करने की अनुमति दी जाएगी। एक यूट्यूब भागीदार के रूप में, क्रिएटर्स को अपने अनुबंध और 'यूट्यूब सहयोगी कार्यक्रम नीतियों' के अनुसार इन मुद्रीकरण नियमों का कड़ाई से पालन करना आवश्यक होता है, ताकि वे प्लेटफ़ॉर्म से अपनी आय सफलतापूर्वक अर्जित कर सकें।<ref>{{Cite web|url=https://youtubepartnerprogram.com/youtube-partner-program-2021-how-it-works-and-updates/|title=YouTube Partner Program 2022: How it works & Updates – YouTubePartnerProgram|language=en-US|access-date=2022-12-09|archive-date=9 दिसंबर 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20221209132525/https://youtubepartnerprogram.com/youtube-partner-program-2021-how-it-works-and-updates/|url-status=dead}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{reflist|2}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20050428014715/http://www.youtube.com/ यूट्यूब]
{{Google Inc.}}
[[श्रेणी:अंतरजाल]]
[[श्रेणी:ऑनलाइन सामाजिक नेटवर्किंग]]
[[श्रेणी:अमेरिकी कम्पनियाँ]]
phx9b6v8fketaaoxmdo412sr1xmalhk
पक्षी
0
9331
6591370
6325795
2026-07-23T17:45:57Z
~2026-41341-53
937858
Fixed typo
6591370
wikitext
text/x-wiki
{{taxobox
|name = पक्षी
|fossil_range = लेट जुरासिक–आधुनिक
|image = Bird Diversity 2013.png
|image_caption = पक्षियों में आश्चर्यजनक विविधता पायी जाती है।
|taxon = Aves
|authority = [[लिनियस]], 1758<ref>{{Cite web | url=http://www.taxonomy.nl/Main/Classification/51354.htm | title=Systema Naturae 2000 / Classification, Class Aves | accessdate=4 फ़रवरी 2009 | last=Brands | first=Sheila | authorlink= | date=14 अगस्त 2008 | work=Project: The Taxonomicon | archive-url=https://web.archive.org/web/20090528084402/http://www.taxonomy.nl/Main/Classification/51354.htm | archive-date=28 मई 2009 | url-status=dead }}</ref>
|subdivision_ranks = [[Class (biology)|Subclasses]]
}}
[[चित्र:House sparrow04.jpg|thumb|'''[[गौरैया]]''', भारत में सर्वाधिक पाए जाने वाले पक्षियों में से एक है।]]
[[File:A bird is flying in the yellow sky.jpg|thumb|पीला आकाश में उड़ता हुआ परिंदा]]
पंख वाले या उड़ने वाले किसी भी [[कशेरुकी प्राणी|जन्तु]] को '''पक्षी''' कहा जाता है। [[जीव विज्ञान]] में एविस् श्रेणी के जन्तुओं को पक्षी कहते हैं।<ref>{{cite book |last=Newton |first=Ian |year=2003 |title=पक्षियों के बायोजियोग्राफी प्रजातीकरण |location=Amsterdam |publisher=Academic Press |isbn=0-12-517375-X |pages=[https://archive.org/details//page/ p. 463] |url=https://archive.org/details//page/ }}</ref><ref>{{Cite book|last=del Hoyo |first=Josep |author2=Andy Elliott and Jordi Sargatal |title=[[Handbook of Birds of the World]], Volume 1: Ostrich to Ducks |year=1992 |publisher=[[Lynx Edicions]] |location=Barcelona |isbn=84-87334-10-5}}</ref> इस [[अण्डा]] देने वाले [[रीढ़]]धारी प्राणी की लगभग १०,००० प्रजातियाँ इस समय इस धरती पर निवास करती हैं। इनका आकार २ इंच से ८ फीट तक हो सकता है तथा ये आर्कटिक से अन्टार्कटिक तक सर्वत्र पाई जाती हैं। पक्षी ऊँचे पहाडों को उड़ कर पार कर जाते हैं। ये गहरे जल में २५० मीटर तक डुबकी लगा लेते हैं। इन्हें ऐसे महासागरों के ऊपर उड़ते देखा गया है जहाँ से तट हजारों किलोमीटर दूर है। इनका शरीर पंखों से ढँका होता है। सभी प्राणियों में पक्षी सबसे अधिक सुन्दर एवं आकर्षक प्राणी हैं। पंख रहते हुए भी कुछ पक्षी उड़ नहीं सकते हैं परन्तु अधिकतर पक्षी [[आकाश]] में उड़ते हैं।
इनका सम्पूर्ण शरीर नौकाकार होता है और पंखों से ढँका होता है। शरीर सिर, गर्दन, धड़ और पूँछ में विभक्त रहता है। अग्रपाद डैनों में रूपान्तरित होते हैं। जबड़े चोंच में रूपान्तरित हो जाते हैं जिनमें दाँत नहीं पाये जाते हैं।
== विकास और वर्गीकरण ==
{{मुख्य|पक्षियों का उद्भव}}
{{userboxtop| toptext= }}
{{clade|style=font-size:75%
|1= {{clade
|1= {{clade
|1= [[घड़ियाल]]
|2= '''पक्षी'''
}}
|2= [[छिपकली]] व [[साँप]] सहित
}}
|2= [[कछुआ]]
}}
<div style="text-align: center;"><small>पक्षियों के प्रमुख रहने वाले साँप समूहों वंशावली संबंध।</small></div>
{{userboxbottom}}
पक्षियों का पहला वर्गीकरण फ्रांसिस विलुगबी और जॉन रे के द्वारा सन् 1676 में आयतन ओमिथोलोजी में विकसित किया गया था। कारोलस लिनिअस ने इसको संशोधित किया है कि 1758 में काम वर्गीकरण प्रणाली वसीयत करने के लिए वर्तमान में उपयोग में पक्षियों को जैविक श्रेणी एविस के रूप में वर्गीकृत कर रहे हैं। लिनियन वर्गीकरण में जातिवृत्तिक वर्गीकरण स्थानों [[डायनासोर]] क्लेड थेरोपोडा में एविस और एविस की एक बहन समूह, क्लेड क्रोडिलिया, साँप क्लेड अर्चोसोरिया के ही रहने वाले प्रतिनिधि होते हैं। 20 वीं सदी के दौरान, एविस सामान्यतः आधुनिक पक्षियों और आर्कियोप्टेरिक्स लिथोग्रोफिया के सबसे हाल ही में आम पूर्वज के सभी सन्तान के रूप में किया गया था जाति - इतिहास के आधार पर परिभाषित है। हालाँकि, एक वैकल्पिक रूप से जैक्स गोथर और फाइलोकोड के लिए एविस परिभाषित प्रणाली के अनुयायियों सहित वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तावित परिभाषा केवल आधुनिक पक्षी समूहों, ताज समूह में शामिल हैं। यह सबसे पुराने जीवाश्म से ही जाना जाता था। कुछ समूहों को छोड़कर और उन्हें बताए गए अनुसार समुह में शामिल किया गया था, अनिश्चितताओं से बचने के लिए भाग में पशुओं के संबंध में आर्कियोप्टेरिक्स के स्थान त्रिपदीय [[डायनासोर]] के रूप में पारंपरिक रूप के बारे में सोचा।
सभी आधुनिक पक्षी ताज समूह निओर्निथेस भीतर है, जो दो उप विभाजनों में है। Palaeognathae, जो उड़ान (ऐसे शुतुरमुर्ग के रूप में) रेटिस और उड़ान तिनामोउस कमजोर और अत्यंत विविध Neognathae के अन्य सभी पक्षियों से युक्त इन दो सब्दिविजंस अक्सर superorder, का रैंक दिया जाता है। हालाँकि लिवजी और ज़ुसी उन्हें "काउहोट" रैंक सौंपा जो वर्गीकरण दृष्टिकोण पर निर्भर करता है, यहाँ प्रजातियों की संख्या बदलती रहती है। यह संख्या लगभग 9800 से 10,050 तक है।
=== डायनासोर और पक्षियों की उत्पत्ति ===
जीवाश्म और जैविक साक्ष्य के आधार पर, अधिकांश वैज्ञानिकों स्वीकार करते हैं कि पक्षियों त्रिपदीय [[डायनासोर]] की एक विशेष उपसमूह है।
==== वैकल्पिक सिद्धांत और विवाद ====
पक्षियों की उत्पत्ति पर जल्दी ही कई वैज्ञानिको की असहमति शामिल हो गई कि क्या पक्षी डायनासोर या अधिक आदिम आर्चोशोर से विकसित है। हालांकि ओर्निथिस्कियन (पक्षी म्लान) डायनासोर आधुनिक पक्षियों के हिप संरचना का हिस्सा है, पक्षियों के लिए saurischian से उत्पन्न किया है लगा रहे हैं (छिपकली - म्लान) डायनासोर और इसलिए उनकी हिप संरचना को स्वतंत्र रूप से विकसित वास्तव में, एक पक्षी की तरह कूल्हे संरचना थेरोपोड्स की एक अजीब समूह Therizinosauridae के रूप में जाना जाता है यह इनके बीच तीसरी बार विकसित हुए हैं।
[[File:Scrub wren female Vocalising444.jpg|thumb|स्क्रब व्रन मादा वोकलाइजिंग ४४४ ]]
=== आधुनिक पक्षियों का विविधीकरण ===
=== आधुनिक पक्षी आदेश का वर्गीकरण ===
== वितरण ==
== शारीरिक रचना और शरीर विज्ञान ==
=== गुणसूत्रों में ===
=== पंख, पक्षति और तुलना ===
=== पक्षी की उड़ान ===
पक्षी की उड़ान उसकी खुद की उड़ान होती है।
वह अपनी उड़ान को अपनी पंखो से करती है
[[चित्र:Restless flycatcher04.jpg|left|alt= Black bird with white chest in flight with wings facing down and tail fanned and down pointing| thumb|फड़फड़ा उड़ान करते बेचैन एक पक्षी]]
अधिकांश पक्षी उड़ सकते है, जो उन्हें लगभग सभी अन्य हड्डीवाला वर्गों से अलग करते है। उड़ान अधिकांश पक्षी प्रजातियों के लिए हरकत की प्राथमिक साधन है और प्रजनन के लिए प्रयोग किया जाता है, भोजन और शिकारी परिहार और बचने के लिये पक्षी उड़ान के लिए विभिन्न रूपांतरों के एक हल्के कंकाल, दो बड़ी उड़ान की मांसपेशियों, पेक्ट्रोलिस (जो पक्षी के कुल द्रव्यमान का 15% के लिए खातों) और सुपराकोराकोडस, के रूप में अच्छी तरह से एक बार संशोधित (पंख) है कि एक पख के रूप में कार्य करता है, इसका आकार आम तौर पर एक पक्षी प्रजाति 'की उड़ान के प्रकार का निर्धारण, कई पक्षियों संचालित गठबंधन, कम ऊर्जा की गहन बढ़ते उड़ान के साथ उड़ान फड़फड़ा करते है। वर्तमान के बारे में 60 प्रजातियों के पक्षी उड़ने में हैं, जैसा कि कई विलुप्त पक्षी थे। Flightlessness अलग द्वीपों, शायद सीमित संसाधनों और शिकारियों के अभाव के कारण पक्षियों में अक्सर उठता है। हालाँकि, पेंगुइन इसी तरह की मांसलता और आंदोलनों का उपयोग पानी में तैरने के लिये करते है। उनके भारी शरीर के कारण वह हवा में उड़ान भरने में अक्षम होते है।
== व्यवहार ==
=== आहार और भोजन ===
[[चित्र:BirdBeaksA.svg|thumb|upright|right|alt= Illustration of the heads of 16 types of birds with different shapes and sizes of beak|Feeding adaptations in beaks]]
पक्षी विविध प्रकार के भोजन करते हैं जिनमे पराग, फल, पौधों, बीज, सडा हुआ मांस और विभिन्न छोटे जानवरों को अन्य पक्षियों सहित शामिल हैं। क्योंकि पक्षियों के दाँत नहीं होते, उनके पाचन तंत्र के कारण पूरे निगल जाते हैं। जो बिना चबाए खाने वाले खाद्य पदार्थों की प्रक्रिया के लिए अनुकूलित है।
पक्षी खाद्य पदार्थों की एक किस्म पर भोजन या फ़ीड प्राप्त करने के लिए कई रणनीतियों को रोजगार के रूप में उपयोग करते है, जबकि दूसरों कि विशिष्ट खाद्य पदार्थों पर समय और प्रयास ध्यान केंद्रित या भोजन प्राप्त करने के लिए एक एकल रणनीति का ही उपयोग करते है, विशेषज्ञों ने माना जाता है। पक्षी रणनीतियों वाले प्रजातियों से भिन्न है। कई पक्षी कीड़े, अकशेरुकी, फल, या बीज के लिए बीनना। एक शाखा से अचानक हमला करके कुछ शिकार कीड़े आदि कई मामलों में उन प्रजातियों कि कीट कीड़े की तलाश लाभकारी जैविक नियंत्रण एजेंट 'और उनके जैविक कीट नियंत्रण कार्यक्रम में प्रोत्साहित उपस्थिति पर विचार कर रहे हैं। जैसे hummingbirds, sunbirds, lories और दूसरों के बीच lorikeets पराग भक्षण विशेष रूप से झबरा जीभ अनुकूलित किया है। 'shorebirds बिल विभिन्न लंबाई और पारिस्थितिक niches के जुदाई में खिला तरीकों परिणाम loons, डाइविंग बतख, पेंगुइन, अकशेरूकीय के लिए लंबे समय के बिल जांच के साथ सह अनुकूलित फूल न्यूजीलैंड और shorebirds को फिट करने के लिए डिज़ाइन विधेयक और auks अपने शिकार पानी के नीचे का पीछा, प्रणोदन के लिए अपने पंखों या पैरों का उपयोग, sulids, किंगफिशर और अपने शिकार के बाद terns डुबकी डुबकी के रूप में हवाई शिकारियों में करते है जबकि राजहंस prion की तीन प्रजातियां और कुछ बतख फिल्टर भक्षण करने में करते है। कुछ कलहंस और बतख dabbling मुख्य रूप से कर रहे हैं।
=== प्रवास ===
=== संचार ===
=== संगठ ===
==== सामाजिक व्यवस्था ====
==== घोंसले के शिकार शासित प्रदेशों और ऊष्मायन ====
==== पैतृक देखभाल और उड़ने के योग्य बनाना ====
==== परजीवी ====
== मनुष्यों के साथ संबंध ==
=== आर्थिक महत्व ===
=== लोकगीत, धर्म और संस्कृति ===
== संरक्षण ==
[[चित्र:California-Condor3-Szmurlo edit.jpg|thumb|right|alt= Large black bird with featherless head and hooked bill|upright|कैलिफोर्निया कोंडोर में एक बार केवल 22 पक्षियों को गिना गया, लेकिन संरक्षण के उपायों के कारण आज 300 से अधिक हो गए है।]]
हालाँकि मानव गतिविधियों ने बार्न स्वैलो और यूरोपीय स्टार्लिंग जैसी कुछ प्रजातियों के विस्तार की अनुमति दी है, परन्तु कई अन्य प्रजातियों में जनसंख्या घट जाती है या विलुप्त होने का कारण है।
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
== इन्हें भी देखें==
* [[पक्षिविज्ञान]]
* [[पक्षियों का प्रव्रजन]] (माइग्रेशन ऑफ बर्ड्स)
* [[पक्षियों का वर्गीकरण]]
* [[भारतीय पक्षियों की सूची]]
== बाहरी कड़ियाँ==
*[https://www.natureweb.net/taxa/birds/hindibirdnames पक्षियों के हिन्दी नाम]
[[श्रेणी:पक्षी]]
[[श्रेणी:कशेरुक]]
[[श्रेणी:प्राणी विज्ञान]]
nmisawh53j1bsv7g9wr4qqjp6mmdkvy
अरावली
0
10679
6591465
6552239
2026-07-24T04:22:33Z
~2026-41061-31
937910
6591465
wikitext
text/x-wiki
'''अरावली''' भारत की सबसे प्राचीन [[पर्वत]] श्रृंखलाओं में से एक मानी जाती है। यह [[पर्वतमाला]] मुख्य रूप से [[राजस्थान]], [[हरियाणा]], [[गुजरात]] और [[दिल्ली]] तक फैली हुई है। राजस्थान में इसे कई स्थानों पर “आड़ावाला पर्वत” के नाम से भी जाना जाता है। भूगर्भ वैज्ञानिकों के अनुसार अरावली पर्वतमाला का निर्माण [[:en:Precambrian|प्रीकैम्ब्रियन युग]] में हुआ था, यानी यह करोड़ों वर्ष पुरानी पर्वत श्रृंखला है। यही कारण है कि इसे दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रंखलाओं में भी गिना जाता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.britannica.com/place/Aravalli-Range|title=Aravalli Range}}</ref>
अरावली केवल एक पर्वत श्रृंखला नहीं है, बल्कि यह [[उत्तर पश्चिम भारत|उत्तर-पश्चिम भारत]] के पर्यावरणीय संतुलन की रीढ़ मानी जाती है। यह राजस्थान को उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम भागों में विभाजित करती है तथा थार [[मरुस्थल]] के विस्तार को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि अरावली पर्वतमाला नहीं होती, तो राजस्थान का [[रेगिस्तान]] हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक तेजी से फैल सकता था।
अरावली की कुल लंबाई लगभग 692 किलोमीटर है, जो गुजरात के [[पालनपुर]] से शुरू होकर दिल्ली की [[रायसीना की पहाड़ी|रायसीना पहाड़ियों]] तक जाती है। दिल्ली में स्थित [[राष्ट्रपति भवन]] भी अरावली की एक पहाड़ी पर बना है। अरावली का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान में है, इसलिए इसे राजस्थान की जीवनरेखा भी कहा जाता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.bbc.com/news/articles/cn5ln4wee7wo|title=Aravalli: Why India's ancient hills are at the centre of growing protests|date=2025-12-22|website=www.bbc.com|language=en-GB|access-date=2026-05-14}}</ref>
अरावली का सबसे ऊंचा शिखर “गुरु शिखर” है, जो राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित [[माउंट आबू]] में है। इसकी ऊंचाई लगभग 1722+5
मीटर है। माउंट आबू राजस्थान का एकमात्र प्रमुख [[पर्वतीय पर्यटन स्थल|हिल स्टेशन]] है और अरावली क्षेत्र का सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य, वन क्षेत्र और ठंडा मौसम बहुत सारे पर्यटकों को आकर्षित करता है।
अरावली पर्वतमाला [[प्राकृतिक संसाधन|प्राकृतिक संसाधनों]] से भरपूर है। यहां [[संगमरमर]], ग्रेनाइट, तांबा, जस्ता, सीसा और कई अन्य महत्वपूर्ण खनिज पाए जाते हैं। राजस्थान के कई खनन क्षेत्र अरावली क्षेत्र में ही हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में अवैध खनन और पत्थर कटाई ने इस पर्वतमाला को बहुत नुकसान पहुंचाया है। पर्यावरणविद लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि अगर अरावली का विनाश इसी तरह जारी रहा, तो इसका सीधा असर जलवायु, भूजल स्तर और पर्यावरण पर पड़ेगा।
अरावली क्षेत्र सदियों से [[भील]] जैसी जनजातियों का घर रहा है। यहां की संस्कृति, लोक परंपराएं और जीवनशैली प्रकृति से जुड़ी हुई हैं। अरावली की पहाड़ियों से कई महत्वपूर्ण नदियों का उद्गम होता है, जिनमें [[बनास नदी|बनास]], [[लूणी नदी|लूनी]] और [[साबरमती नदी|साबरमती]] प्रमुख हैं। ये नदियां राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में जल का महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, अरावली का निर्माण मुख्य रूप से ग्रेनाइट, नीस, क्वार्टजाइट और शिस्ट जैसी कठोर चट्टानों से हुआ है। करोड़ों वर्षों तक अपरदन और अपक्षय की प्रक्रियाओं के कारण यह पर्वतमाला अब अवशिष्ट पर्वत के रूप में दिखाई देती है। वैज्ञानिक अक्सर इसकी तुलना अमेरिका की [[एपलाशियन पर्वतमाला|एप्लेशियन पर्वतमाला]] से भी करते हैं।
आज अरावली केवल एक भौगोलिक संरचना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। बढ़ते शहरीकरण, अवैध निर्माण और माइनिंग के कारण इसके जंगल और पहाड़ तेजी से खत्म हो रहे हैं। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट को भी कई बार अरावली क्षेत्र में अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। इसके बावजूद कई इलाकों में चोरी-छिपे खनन जारी है, जिससे पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंच रहा है।<ref>{{Cite web|url=https://timelybharat.com/aravalli-illegal-mining-supreme-court-ban/|title=Aravalli Illegal Mining: Supreme Court Ban के बाद भी क्यों नहीं रुक रही अरावली के पहाड़ों की लूट? ग्राउंड रिपोर्ट|date=2026-05-02|language=en-US|access-date=2026-05-14}}</ref>
khsw14vm14uhqhu61vuly7qe5ech1fy
विकिपीडिया:सदस्य पन्ना
4
26135
6591468
6516724
2026-07-24T04:55:27Z
Pushkar Singh
415569
/* शब्दावली और पृष्ठ स्थान */
6591468
wikitext
text/x-wiki
{{नीति|वि:सदस्यपन्ना|वि:सप|category=विकिपीडिया नीतियाँ एवं दिशानिर्देश}}
{{nutshell|सदस्य पृष्ठ सम्पर्क और सहयोग के लिए हैं। जबकि इन्हें व्यक्तिगत बनाने और प्रबन्धित करने की यथेष्ट छुट दी जाती है लेकिन ये सामुदायिक परियोजना के पृष्ठ हैं जो [[वि:सामाजिकनेटवर्क|ब्लॉग, वेबसाईट सेवा, स्मारक स्थल या सामाजिक नेटवर्क नहीं]] है। इन्हें समुदाय में सहभागिता बढ़ाने के काम में लिया जाना चाहिए। इन्हें न तो असम्बंधित प्रयोजनों को बढ़ावा देने और न ही परियोजना को बदनामी की ओर ले जाने के लिए प्रयुक्त करना चाहिये।}}
'''सदस्य पृष्ठ''' या '''सदस्य पन्ना''' वो पृष्ठ हैं जो सदस्य और सदस्य वार्ता के [[विकिपीडिया:नामस्थान|नामस्थान]] से बने हैं, यह पृष्ठ सदस्यों को विकिपीडिया संबंधित कार्यो को व्यवस्थित और उसमें सहायता करने में उपयोगी होते हैं, और अन्योन्यक्रिया और सदस्यों के बीच सहभाजन को सुविधाजनक बनाते हैं। सदस्य पृष्ठ मुख्य रूप से पारस्परिक चर्चा, चेतावनी (Notice), परीक्षण और ड्राफ्ट के लिए होते हैं और यदि आवश्यक हो तो सीमित आत्मकथात्मक और व्यक्तिगत सामग्री भी इन पर डाली जा सकती हैं। सदस्य पृष्ठ व्यक्तिगत रूप से विकिपीडिया सदस्यों के लिए उपलब्ध हैं, जिनका उद्देश्य विकिपीडिया परियोजना के साथ संगत हो और समुदाय को स्वीकार्य हो; [[वि:ब्लॉगनहीं|विकिपीडिया ब्लॉग, वेबसाईट सेवा या सामाजिक नेटवर्क नहीं है।]] [[विकिपीडिया:नीतियाँ और दिशानिर्देश|पृष्ठों की सामग्री के विषय में]] विकिपीडिया की नीतियाँ सदस्य पृष्ठों पर लागू हो सकती हैं और सामान्यतः लागू हैं भी और सदस्यों को इन नीतियों का पालन करना चाहिए।
== शब्दावली और पृष्ठ स्थान ==
''टिप्पणी: "आपके" से इस सन्दर्भ में मतलब यह है कि सम्बंधित पन्ना आपसे जुड़ा हुआ हैं, न कि आपके स्वामित्व वाला है।''
=== सदस्य पृष्ठ ===
आपके सदस्य पृष्ठ नाम का कुछ इस तरह से है: सदस्य:''उदाहरण''। ([[विशेष:मेरा पृष्ठ|यह कड़ी आपके पृष्ठ पर जाती हैं]]) इसका सामान्य उपयोग अपने बारे में या अपने विकिमीडिया से संबंधित गतिविधियों के बारे में बुनियादी जानकारी देना है, ''यदि आप चाहते हैं''। आपको अपने बारे में कुछ भी कहने की ज़रूरत नहीं है। अगर आप कुछ भी यहाँ डालना नहीं चाहते, तो आप अन्य संपादकों की सुविधा के लिए इसको अपने सदस्य वार्ता पृष्ठ पर [[वि:पुनर्निर्देशन|पुनर्निर्देशित]] कर सकते हैं।
=== सदस्य वार्ता पृष्ठ ===
आपके सदस्य वार्ता पृष्ठ का नाम कुछ इस तरह से है: सदस्य वार्ता:''उदाहरण''। ([[विशेष:मेरी वार्ता|यह कड़ी आपके वार्ता पृष्ठ पर जाती है।]]) इसका सामान्य उपयोग अन्य संपादकों के साथ संदेशों का आदान-प्रदान और चर्चा करना है।
== सदस्य पृष्ठों पर उपलब्ध विकल्प ==
एक लेख पृष्ठ से सुलभ सामान्य जानकारी के अलावा जैसे पृष्ठ इतिहास और "[[विकिपीडिया:वार्ता दिशानिर्देश|इस पृष्ठ पर चर्चा करें]]", सदस्य और सदस्य वार्ता पर जाकर "सदस्य योगदान" क्लिक कर सकते हैं, (साइडबार में या पृष्ठ के नीचे) देखने के लिए कि आपने विकिपीडिया पर क्या-क्या योगदान दिया हैं। (ध्यान दें आपके सदस्य पृष्ठ को हटा देने से आपका व्यापक योगदान '''नष्ट नहीं''' होता हैं।) यदि आपने अपने [[विशेष:वरीयताएँ|सदस्य वरीयताओं]] में विकल्प चुना हुआ है कि ईमेल भेजने और प्राप्त करने में सक्षम हो, तो आपके सदस्य पृष्ठ पर आने वाले "इस सदस्य को ई-मेल भेजें" पर क्लिक कर आपको विकिपीडिया की ज्ञ-मेल सेवा के द्वारा अपना संदेश भेज सकते हैं। आपका ईमेल पता गुप्त रहेगा जब तक आपने उसे व्यक्त नहीं किया होगा, इसे उजागर करने के लिए विकल्प का चयन करें (वरीयताओं में), या विकिपीडिया के बाहर एक ईमेल प्रणाली का उपयोग करते हुए उत्तर दे।
== मेरे सदस्य पृष्ठों में ''क्या हो सकता है?'' ==
{{shortcut|वि:सपृहाँ}}
सदस्य पृष्ठों के लिए कोई निश्चित उपयोग परिभाषित नहीं है, सिवाय इसके कि आमतौर पर एक सदस्य पृष्ठ अपने बारे में कुछ होता है और एक वार्ता पृष्ठ संदेश भेजने के लिए प्रयोग किया जाता है।
सदस्य अपने उपयोगकर्ता पृष्ठों, सदस्य वार्ता पृष्ठों, या दोनों पर एक सदस्य पृष्ठ की सूचना लगा सकते हैं। एक सदस्य पृष्ठ के शुरू में साँचा <code>{{tl|सदस्य पृष्ठ}}</code> रखकर, सदस्य पाठकों के लिए पृष्ठ की प्रकृति की पहचान करवा सकते हैं।
संचार के अलावा, सदस्य पृष्ठों के कुछ अन्य वैध उपयोग हैं
:
:{| class="wikitable"
|-
|
* '''अपने द्वारा निर्मित या संपादित महत्वपूर्ण पृष्ठों की सूचना देना
''' (स्वैच्छिक लेकिन अनुशंसा की जाती हैं)
** चीजें जो अन्य संपादक उपयोगी पा सकते हैं, जैसे [[विकिपीडिया:कठपुतली|वैकल्पिक खाते]] की सूचना देना
** <p>अगर आप किसी कंपनी, संगठन, समूह, उत्पाद या व्यक्ति के लिए या की ओर से सम्पादन कर रहे हैं जिसके बारे में आप सम्पादन समुदाय के साथ अच्छा रिश्ता हासिल करने के लिए खुला रहना चाहते हैं।</p><p>(संपादन हमेशा तटस्थ और विश्वकोश मानदंडों के भीतर होना चाहिए। छुपे हुये हित और एजेंडा वाले संपादकों को अन्य संपादक अविश्वास की नज़र से देखते हैं। खुले तौर पर इस तरह के हितों का खुलासा करने से सम्मान मिलता हैं, दूसरों को मदद करने के लिए आमंत्रित करता हैं और उचित रूप से संपादन करने की इच्छा को दर्शाता है।)</p>
|-
|
* '''अपने विकिपीडिया काम और गतिविधियों से संबंधित सूची'''
** वर्तमान या योजनाबद्ध लेख, विषय क्षेत्र, निकट भविष्य की कार्यसूची, अनुस्मारक, जिन लेखों पर काम किया, [[:en:wp:Barnstars|वाहवाही]] और अन्य सफलताएं, सहयोगात्मक निर्माण, मसौदा प्रस्ताव, (प्रलक्षित) विकिपीडिया के लेखों या नीतियों पर विचार और उन्हें कैसे बदला जाना चाहिए आदि।
** बिंदुओं जो कहीं और विकि पर चर्चाओं में बनाई जा रही है (या जो आपने बनाई हैं) उनके लिए विस्तार और विस्तृत पूर्तिकर (बैकअप)।
|-
|
* '''कार्य जो प्रगति पर है या वो सामग्री जिसपर आप भविष्य में वापस आ सकते हैं''' (आमतौर पर [[विकिपीडिया:उपपृष्ठ|उपपृष्ठ]] पर)
** प्रारूप (ड्राफ़्ट), विशेष रूप से, जहां आप चर्चा चाहते हैं या पहले अन्य सदस्यों की राय जानना चाहते हैं, उदाहरण के लिए [[विकिपीडिया:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीयता]] के चलते या बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखने के चलते।
** लेख का प्रारंभिक पाठ जो आपके खुद के सदस्य स्थान में लिखा जा रहा है क्योंकि लक्ष्य पृष्ठ ही [[विकिपीडिया:सुरक्षित पृष्ठ|सुरक्षित]] है और सूची एवं लेखों के लिए कार्यकारी सामग्री (कुछ सामग्री को अनिश्चित काल के नहीं रखा जा सकता है)।
|-
|
* '''उपयोगी कड़ियाँ, उपकरण और लिपियाँ (स्क्रिप्ट)'''
|-
|
* '''सदस्य स्थान पुरालेख'''
** पुरानी वार्ता पृष्ठ चर्चाएँ आदि। (कुछ सामग्री को सदस्य स्थान में अनिश्चित काल के लिए नहीं रखा जा सकता है अगर वो अप्रयुक्त है।)
|-
|
* '''मामले जो पर्याप्त लम्बे हैं, या जो पर्याप्त सक्रिय हैं, कि उन्हें खुद का एक पृष्ठ आवंटन किया जा सके'''
|-
|
* '''निजी लेखन जो विकिपीडिया समुदाय के भीतर उपयुक्त हैं'''
** गैर लेख विकिपीडिया सामग्री जैसे उचित विकिपीडिया परिहास के रूप में, निबंध और परिप्रेक्ष्य, व्यक्तिगत दर्शन, विकिपीडिया के मामलों पर टिप्पणियाँ
** महत्वपूर्ण मामलों के खुलासे जैसे अनुपस्थिति या आत्म सुधार जिसके बारे में आप अन्य संपादकों को बताना चाहते हैं।
** <p>प्रमुख घटनाओं के लिए बधाइयाँ या संवेदना का वक्तव्य, विशेष रूप से जब वो विकिपीडिया के संपादकत्व या प्रमुख जीवन की घटनाओं से संबंधित हो।</p><p>(सुनिश्चित करें कि सदस्य विकि में सार्वजनिक रूप से इनका उल्लेख करना चाहते हैं, उनकी इच्छा इन्हें निजी रखने की हो सकती हैं)</p>
|-
|
* '''प्रयोगकार्य''' (आमतौर पर उपपृष्ठ पर)
** साँचों के लिए परीक्षण पृष्ठ, अपरिचित या विशेषज्ञ [[विकिपीडिया:लेख को कैसे बदलें?|मार्कअप]] आदि, व्यक्तिगत प्रयोगपृष्ठ के रूप में
** <p>नुकसान करे बिना [[विकिपीडिया:बॉट|बॉट]] और [[विकिपीडिया:स्क्रिप्ट|लिपि (स्क्रिप्ट)]] के परीक्षण करने के लिए।</p><p>सदस्य पृष्ठ और सदस्य उपपृष्ठ को [[Wikipedia:Transclusion|ट्रान्सकुलुडेड ]] और [[Wikipedia:Substitution|प्रतिस्थापित]] किया जा सकता हैं, जिससे वो साँचो की तरह व्यवहार करते हैं, और इस तरह के रूप में उन पर परीक्षण किया जा सकता है।</p>
|-
|
* '''सीमित आत्मकथात्मक सामग्री'''
** उदाहरण के लिए, भाषाएँ जो आप जानते हैं (देखें [[विकिपीडिया:बेबल]]) या क्षेत्र जिसमें आपको ज्ञान है।
|-
|
* '''एक ''छोटे और आनुपातिक'' मात्रा में उपयुक्त असंबंधित सामग्री '''
** <p>कई सदस्यों के पास विकिपीडिया और संबंधित परियोजनाओं से सामग्री होती हैं जैसे [[विकिमीडिया कॉमन्स]] से चित्र (निःशुल्क उपयोग), पसंदीदा विकिपीडिया के लेख या वो उद्धरण जो उन्हें पसंद हैं।</p><p>'''असंबंधित मामलों के लिए [[विकिपीडिया:विकिपीडिया क्या नहीं है#विकिपीडिया भाषण देने या प्रचार करने का मंच नहीं है|प्रचार]] या [[विकिपीडिया:विकिपीडिया क्या नहीं है#विकिपीडिया भाषण देने या प्रचार करने का मंच नहीं है|भाषण का मंच]] या [[विकिपीडिया:विकिपीडिया क्या नहीं है#विकिपीडिया जंग का मैदान नहीं है|युद्धक्षेत्र]] की तरह प्रयुक्त होने वाले पृष्ठ, आमतौर पर इस मानदंड से बाहर माने जाते हैं।''' उदाहरण के लिए: अपने बैंड के लिए एक पांच पृष्ठ का रिज्यूमे और विज्ञापन शायद बहुत ज्यादा हो जाएगा, एक संक्षिप्त तीन वाक्य का सारांश कि आप क्षेत्र 'क' में काम करते हैं और आपका 'ख' नामक एक बैंड हैं, ठीक रहेगा।</p><p>संपादक अपने सदस्य स्थान का उपयोग अपने विकिपीडिया योगदान के लिए मुआवजा मांगने के लिए नहीं कर सकते।</p>
|}
===निजी और गोपनीयता उल्लंघन वाली सामग्री===
कुछ लोग व्यक्तिगत जानकारी जोड़ देते हैं जैसे संपर्क विवरण (ईमेल, त्वरित संदेश, आदि), तस्वीर, अपना असली नाम, अपना स्थान, अपनी विशेषज्ञता के क्षेत्रों के बारे में जानकारी और रुचि, पसंद और नापसंद, आदि। एक बार जब यह जानकारी जोड़ी गई तो फिर इसकी कम ही संभावना हैं कि ये फिर से निजी बनेगी। यह कहीं और कॉपी की जा सकता है या यहां तक कि भविष्य में इसका इस्तेमाल आपको परेशान करने के लिए हो सकता हैं। '''अपने सदस्य पृष्ठ पर गैर सार्वजनिक जानकारी जोड़ने से पहले आपको ध्यान से सोचने के लिए आगाह कर रहे हैं क्योंकि इसकी संभावना नहीं हैं कि आप जानकारी को बाद में वापिस ले पाएँगे, यहाँ तक कि जब आप अपना मन बदल ले।'''
गोपनीयता-उल्लंघन वाली गैर सार्वजनिक सामग्री, चाहे वो खुद के द्वारा जोड़ी गई हो या दूसरों के, अनुरोध पर प्रबंधकों द्वारा किसी भी पृष्ठ से ''' हटाई जा सकती हैं'''।
==मेरे सदस्य पृष्ठों में ''क्या नहीं हो सकता है?''==
{{shortcut|वि:सपृनहीं}}
आम तौर पर, '''आपको विकिपीडिया से काफ़ी असंबंधित सामग्री को अपने सदस्य पृष्ठ पर डालने से बचना चाहिए'''। [[विकिपीडिया:विकिपीडिया क्या नहीं है#विकिपीडिया ब्लॉग, वेबसाईट सेवा, स्मारक स्थल या सामाजिक नेटवर्क नहीं है। विकिपीडिया एक सामान्य होस्टिंग सेवा नहीं हैं]], तो आपका सदस्य पृष्ठ एक निजी वेबसाइट नहीं है। आपका सदस्य पृष्ठ, एक विकिपीडियन के रूप में आपके के बारे में है और आपके सदस्य स्थान में पृष्ठ परियोजना में योगदान करने के आपके प्रयासों के हिस्से के रूप में इस्तेमाल किए जाने चाहिए।
इसके अलावा, इसपर व्यापक सहमति हैं कि '''आप अपने सदस्य स्थान पर ऐसी सामग्री नहीं डाल सकते जिसके चलते परियोजना को बदनामी मिले''', या जिसके चलते बड़े पैमाने पर नाराज़ी होने की संभावना हैं। चाहे गंभीर हो या [[ट्रॉल (इण्टरनेट)|ट्रॉलिंग]] इत्यादि।
'''[[विकिपीडिया:मंचनहीं|विकिपीडिया भाषण देने या प्रचार करने का मंच नहीं है]]'''। भाषण का मंच नहीं हैं की आम तौर पर व्याख्या की गई हैं की यह सदस्य स्थान पर लागू हैं और साथ ही विश्वकोश पर, और "[[वि:सेंसर|विकिपीडिया सेंसर नहीं है]]" लेख पृष्ठों और छवियों से संबंधित है; अन्य नामस्थान में '''सीमाएँ हैं''' समुदाय के लिए प्रासंगिक, मूल्य, और गैर व्यवधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से। ''अत्यंत आपत्तिजनक सामग्री किसी भी संपादक द्वारा देखते ही हटाई जा सकती हैं।''
=== अत्यधिक असंबंधित सामग्री ===
असंबंधित सामग्री में शामिल है, लेकिन सीमित नहीं है:
<!-- वि:मटर के अनुसार, दूसरों को सुझाव मत दो, ये सिर्फ़ कुछ सदस्यों को आज़माने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। -->
:{| class="wikitable"
|- valign="top"
! <span id="GAMES"></span>लेखन, जानकारी, विचार विमर्श, और गतिविधियाँ जो विकिपीडिया के लक्ष्यों से बारीकी से संबंधित नहीं
|
* एक [[ब्लॉग]] की तरह गैर विकिपीडिया गतिविधियों को रिकॉर्ड करना।
* व्यापक चर्चा जो विकिपीडिया से संबंधित नहीं।
* विकिपीडिया के असंबंधित मामलों पर व्यापक व्यक्तिगत राय, विकी दर्शन, सहयोग, मुफ्त सामग्री, [[क्रिएटिव कॉमन्स]], आदि।
* व्यापक लेखन और उन विषयों पर सामग्री जिसका इस परियोजना, समुदाय, या किसी विश्वकोश लेख के लिए सीधे उपयोगी होने की लगभग कोई संभावना नहीं हैं। (उदाहरण के लिए अन्य स्थिति में, चूँकि यह [[वि:नहीं|मूल शोध]] की श्रेणी में आता है जो नियमावली का अन्य कारणों से सीधा उल्लंघन है।)
* विकिपीडिया से असंबंधित संचार, परियोजना या इससे संबंधित काम से असंबद्ध लोगों के साथ।
{{shortcut|वि:सपृ#GAMES}}
|- valign="top"
! <span id="PROMO"></span>प्रचार और पक्षसमर्थन सामग्री और कड़ियाँ
|
{{shortcut|वि:सपृ#प्रचार}}
* किसी व्यक्ति, व्यवसाय, संगठन, समूह का विज्ञापन करना या बढ़ावा देना, या विकिपीडिया से असंबंधित दृष्टिकोण। (जैसे वाणिज्यिक साइटों या रेफरल लिंक के रूप में)
*व्यापक आत्म प्रचार सामग्री, विशेष रूप से जब वो विकिपीडिया के लिए सीधे प्रासंगिक न हो।
|- valign="top"
! <span id="POLEMIC"></span>बहुत विभाजनकारी या आक्रामक सामग्री जो विश्वकोश संपादन से संबंधित नहीं
|
{{shortcut|वि:सपृ#विवादात्मक|WP:POLEMIC}}
* विकिपीडिया से असंबंधित विवादात्मक वक्तव्य, या वक्तव्य जो संपादकों के समूहों, व्यक्तियों, या अन्य संस्थाओं पर हमला या गालियां देना हैं।
* अन्य संपादकों पर हमला करने के रूप में देखी जा सकने वाली सामग्री, जिसमें कथित खामियों की रिकॉर्डिंग करना भी शामिल हैं। सदस्य उपपृष्ठ में तथ्यात्मक सबूत (अंतर) का संकलन करना उन उद्देश्यों के लिए जैसे विवाद समाधान प्रक्रिया के लिए तैयारी, कि अनुमति है ''बशर्ते'' इनका समय पर ढंग से उपयोग किया जाएगा।
* सदस्यों को आम तौर पर बहुत अच्छे कारण के बिना दूसरों से संबंधित नकारात्मक जानकारी सार्वजनिक दृश्य में नहीं बनाए रखनी चाहिए।
|- valign="top"
! <span id="USERBIO"></span>व्यक्तिगत जानकारी
|
{{shortcut|WP:USERBIO}}
* सहमति के बिना अन्य व्यक्तियों की निजी जानकारी।
* विकिपीडिया से असंबंधित अनुचित या अत्यधिक व्यक्तिगत जानकारी।
|- valign="top"
! <span id="NOTSUITED"></span>विकिपीडिया सामग्री जो सदस्य स्थान के लिए अनुकूल नहीं
|
{{shortcut|वि:सपृ#NOTSUITED}}
* छवियाँ जिनका उपयोग करने के लिए आप स्वतंत्र नहीं हैं (आमतौर पर उचित उपयोग छवियाँ, [[#गैर मुक्त छवियाँ|नीचे देखें]])।
* श्रेणियाँ और साँचे अन्य उपयोग के लिए आशयित, विशेष रूप से लेख और दिशा निर्देशों के लिए।
|}
सामान्य तौर पर, अगर आप के पास वो सामाग्री हैं जिसपर आप चाहते हैं कि कोई संपादन न करें, या जो अन्यथा विकिपीडिया के लिए अनुचित हैं, तो उसे किसी व्यक्तिगत वेब साइट पर रखा जाना चाहिए। कई नि:शुल्क और कम कीमत वाले वेब होस्टिंग, ईमेल, और ब्लॉग सेवाएं व्यापक रूप से उपलब्ध हैं, और विकिपीडिया से असंबंधित सामग्री के लिए एक उचित जगह है। विकी शैली जैसे समुदाय के सहयोग के लिए, आप [[MW:|मीडियाविकि]] सॉफ्टवेयर डाउनलोड कर सकते हैं और अपने खुद के सर्वर पर स्थापित कर सकते हैं अगर आप पूरा नियंत्रण चाहते हैं, या कई ऑनलाइन विकि फार्मों में से एक का उपयोग करें।
==गैर मुक्त छवियाँ==
अपने सदस्य पृष्ठ पर या उसके किसी उपपृष्ठ पर गैर मुक्त छवियों (कॉपीराइट वाली छवियाँ जिनमें मुफ्त सामग्री अनुज्ञप्ति का अभाव हैं) को शामिल न करें (यह आधिकारिक छवि उपयोग नीति है और हमेशा की तरह विस्तृत सदस्य स्थान छूट लागू नहीं होती)। एक सदस्य पृष्ठ (सदस्य वार्ता पृष्ठ सहित) पर पाई गैर मुक्त छवियों को हटा दिया जाएगा (अधिमानतः छवि के लिए कड़ी के साथ बदल कर) बिना किसी चेतावनी के और, अगर विकिपीडिया के किसी लेख में इस्तेमाल नहीं तो पूरी तरह से हटा दिया जाएगा।
==कॉपीराइट उल्लंघन==
सदस्य स्थान पर मुद्राधिकार (कॉपीराइट) के लिए वही नियम लागू होते हैं जो लेखों पर होते हैं। पाठ या तो निःशुल्क अनुज्ञप्ति के साथ होना चाहिए या कॉपीराइट से बाहर होना चाहिए; अन्यथा केवल एक छोटा उद्धरण का उपयोग किया जा सकता है। अगर आप अपने सदस्य पृष्ठ पर किसी अन्य स्रोत से लिया गए पाठ का उपयोग करते हैं, तब भी लेखक को श्रेय दिया जाना चाहिए, चाहे वो वर्तमान में कॉपीराइट में या नहीं।
==स्वामित्व==
परम्परागत रूप से विकिपीडिया सदस्यों को व्यापक छूट देती हैं कि वो अपने सदस्य स्थान का प्रबंधन जैसे चाहे वैसे करे। लेकिन सदस्य स्थान में पृष्ठ व्यापक समुदाय से संबंध रखते हैं। वे निजी मुखपृष्ठ '''नहीं हैं''', और सदस्यों की संपत्ति नहीं हैं।{{efn|अन्य सभी संपादन की तरह सदस्य स्थान के योगदान कॉपी करने और पुनः उपयोग के लिए क्रिएटिव कॉमन्स एट्रिब्युशन/शेयर अलाइक अनुज्ञप्ति और गैर मुक्त प्रलेखन अनुज्ञप्ति के तहत अपरिवर्तनीय अनुज्ञप्ति प्राप्त होते हैं।}} वे विकिपीडिया का हिस्सा हैं, और सम्पादकों के बीच सहयोग को आसान बनाने के लिए मौजूद हैं।
==टिप्पणियां==
{{notelist}}
{{विकिनीतियाँ और दिशानिर्देश}}
e64bksy9gpkj8g9y45o4rexfcjzjrrq
विकिपीडिया:प्रबन्धक सूचनापट
4
28428
6591411
6591179
2026-07-24T01:59:42Z
AMAN KUMAR
911487
सदस्य रिपोर्ट: Sarund mata mandir
6591411
wikitext
text/x-wiki
{{/शीर्ष}}
<!-- ------------------------- चर्चाएँ/सूचनायें/प्रस्ताव --------------------------- -->
<!-- ------------------------- नया अनुभाग हमेशा सबसे नीचे बनायें --------------------------- -->
== सदस्य रिपोर्ट 10 जुलाई 2026 ==
*{{vandal|~2026-38915-40}} – गलत जानकारी जोड़ना जाँचे तथा अवरोधित करें [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:22, 10 जुलाई 2026 (UTC)
*:@[[सदस्य:SM7|SM7]] जी, अब बर्बरता भी कर रहे हैं [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:26, 10 जुलाई 2026 (UTC)
*::@[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] कितने दिनों से कर रहे हैं? --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 04:42, 10 जुलाई 2026 (UTC)
*:::@[[सदस्य:SM7|SM7]] जी, इन्होंने सम्पादन आज ही शुरू किया है, मेरे [[एप्पल इंक॰]] पर इनकी जानकारी को वापस लिया था जिसके उपरांत इन्होंने पुनः उसे जोड़ दिया और इन्होंने [[लालू प्रसाद यादव]], [[रिलायन्स इण्डस्ट्रीज]] में भी गलत जानकारी जोड़ी थी [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:47, 10 जुलाई 2026 (UTC)
*::::@[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] आज ही शुरू किया है तो (इसी अस्थाई खाते से यदि उत्पात जारी रहें) दो दिनों के बाद रपट लिखवाईयेगा। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 04:50, 10 जुलाई 2026 (UTC)
*:::::@[[सदस्य:SM7|SM7]] जी, क्या मैं [[एप्पल इंक॰]] से गलत जानकारी हटा दूं, वह सम्पादन युद्ध तो नहीं होगा? [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:52, 10 जुलाई 2026 (UTC)
== सदस्य Akthakur2001 द्वारा घृणा फैलाने और फर्जी इतिहास लिखने के संबंध में (शीघ्र हटाने और ब्लॉक हेतु) ==
<blockquote>नमस्ते प्रबंधक जी,
मैं आपका ध्यान सदस्य Akthakur2001 के प्रयोगपृष्ठ (सदस्य:Akthakur2001/प्रयोगपृष्ठ) की ओर दिलाना चाहता हूँ। इस सदस्य ने विकिपीडिया के निजी स्पेस का दुरुपयोग करके "गुज्जरों और मुगल वैवाहिक सम्बन्ध" नाम से पूरी तरह से मनगढ़ंत, झूठी और फर्जी सूची बनाई है।
इसमें जानबूझकर समाज में आपसी विद्वेष और नफ़रत फैलाने के उद्देश्य से 'नोएडा' (जो कि 1976 में बना आधुनिक नाम है) जैसी जगहों और 'बेसल खा', 'लिडीमर खा' जैसे पूरी तरह से काल्पनिक नामों को इतिहास बताकर लिखा गया है। साथ ही स्थापित राजपूत रानी 'हरका बाई' के नाम को विकृत करके 'हरका गुचरी' लिखा गया है, जो सीधे तौर पर विकिपीडिया की 'घृणा भाषण' (Hate Speech) और 'बर्बरता' (Vandalism) नीतियों का घोर उल्लंघन है।
चूंकि यह सामग्री किसी भी प्रामाणिक स्रोत से नहीं है और इसका एकमात्र उद्देश्य एक समाज को नीचा दिखाना और विद्वेष भड़काना है, अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि:
# इस प्रयोगपृष्ठ (Sandbox) को शीघ्र हटाने की नीति (G10/G12) के तहत '''तुरंत और हमेशा के लिए डिलीट''' किया जाए।
# इस प्रकार की दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों के लिए उक्त सदस्य को '''स्थायी रूप से ब्लॉक (Block)''' किया जाए।
<nowiki>धन्यवाद। ~~~~</nowiki></blockquote>[[सदस्य:Official Anshika Patel|Official Anshika Patel]] ([[सदस्य वार्ता:Official Anshika Patel|वार्ता]]) 16:33, 11 जुलाई 2026 (UTC)
== सदस्य रिपोर्ट 12 जुलाई 2026 ==
*{{vandal|~2026-38156-35}} – [[सदस्य:SM7|SM7]] जी, फालतू कड़ी जोड़ना और यह खाता 3 जुलाई को बनाया गया था [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 14:18, 12 जुलाई 2026 (UTC)
*:@[[सदस्य:AMAN KUMAR|अमन कुमार]] जी यह कोई खाता नहीं बल्कि बिना खाते के प्रयोगकर्ता हैं। विकिपीडिया पर बिना खाते के भी लिखने हेतु अनुमति है। हालांकि गोपनीयता आदि कारणों से ये सहूलियत दी जाती है लेकिन ऐसे योगदान आमतौर पर विश्वसनीय नहीं माने जाते हैं , न ही विकी के विशेष feature का इस्तेमाल कर पाते हैं। [[सदस्य:Pushkar Singh|<span style="color:DeepPink;">पुष्कर सिंह</span>]] [[सदस्य वार्ता:Pushkar Singh|<span style="color:Red;">✉️</span>]] 08:30, 22 जुलाई 2026 (UTC)
== विकिपीडिया पर ज्ञानसंदूकों की कमी या सांचों में अपूर्णता ==
मुझे लगता है हिंदी विकिपीडिया पर '''सांचों की कमी''' है, कुछ तो अंग्रेज़ी से आयातित हैं और कुछ हिंदी में काम भी नहीं करते हैं। इसी तरह देश, राज्य से सम्बन्धित 'ज्ञानसंदूक' में literacy या साक्षरता जैसे प्राचल गायब रहते हैं। यदि infobox बोझिल या विस्तृत न लगे तो मैं चाहता हूं ये प्राचल भी जोड़ा जाए। वरिष्ठ सम्पादक या प्रबंधक अथवा विकी समुदाय के सदस्य इस पर विचार करें। [[सदस्य:Pushkar Singh|<span style="color:DeepPink;">पुष्कर सिंह</span>]] [[सदस्य वार्ता:Pushkar Singh|<span style="color:Red;">✉️</span>]] 08:41, 22 जुलाई 2026 (UTC)
== सदस्य रिपोर्ट 24 जुलाई 2026 ==
*{{vandal|Sarund mata mandir}} – गोपनीय जानकारी तथा प्रचार करना [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 01:59, 24 जुलाई 2026 (UTC)
oi4mdftr49ajt8bwosncs4190q9apvi
भारतीय राज्यों के वर्तमान राज्यपालों की सूची
0
32193
6591488
6591273
2026-07-24T06:40:15Z
CommonsDelinker
743
"Acharya_Dev_Vrat_in_December_2015.jpg" को हटाया। इसे कॉमन्स से [[commons:User:Krd|Krd]] ने हटा दिया है। कारण: No license since 16 July 2026
6591488
wikitext
text/x-wiki
[[File:The President, Shri Ram Nath Kovind with the Governors of the States and Lt. Governors and Administrators of UTs, on the eve of ‘Governors Conference -2019’, at Rashtrapati Bhavan, in New Delhi on November 22, 2019.jpg|thumb|upright=2|राज्यपाल, उप राज्यपाल और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासक 'गवर्नर्स कॉन्फ्रेंस 2019' की पूर्व संध्या पर, [[राष्ट्रपति भवन]], [[नई दिल्ली]] में नवंबर 2019 को भारत के राष्ट्रपति के साथ।]]
[[भारत गणराज्य]] में राज्यपाल [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|28 राज्यों]] में राज्य प्रमुख का संवैधानिक पद होता है। राज्यपाल की नियुक्ति [[भारत के राष्ट्रपति| राष्ट्रपति]] पाँच वर्ष के लिए करते हैं और वे राष्ट्रपति की मर्जी पर पद पर रहते हैं। राज्यपाल राज्य सरकार का विधित मुखिया होता है जिसकी कार्यकारी कार्रवाई राज्यपाल के नाम पर सम्पन्न होती है।
==भारत के वर्तमान राज्यपाल==
{| class="sortable wikitable" style="text-align:center"
|-
!scope=col style="width: 175px;"| राज्य<br />{{small|(पूर्व राज्यपाल)}}
!scope=col style="width: 175px;"| नाम<ref>{{Cite web|url=https://www.india.gov.in/my-government/whos-who/governors|title=Governors {{!}} National Portal of India|website=[[भारत का राष्ट्रीय पोर्टल]]|access-date=2020-08-19}}</ref>
!scope=col class=unsortable| चित्र
!scope=col style="width: 125px;"| कार्यकाल<br />{{small|(अवधि)}}
!scope="col" | नियुक्तकर्त्ता
!scope=col class=unsortable| {{abbr|स॰|सन्दर्भ}}
|-
| [[अरुणाचल प्रदेश]]<br />{{small|([[अरुणाचल प्रदेश के राज्यपालों की सूची |सूची]])}}
| [[कैवल्य त्रिविक्रम परनाइक]]
| [[चित्र:Kaiwalya_Trivikram_Parnaik.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2023|02|16}}<br />{{small|({{age in years and days|2023|02|16}})}}
| rowspan="3"| [[द्रौपदी मुर्मू]]
| <ref>{{Cite web|url=https://www.jagran.com/jharkhand/ranchi-cp-radhakrishnan-became-new-governor-of-jharkhand-23326780.html|title=Jharkhand: सीपी राधाकृष्णन बने झारखंड के नए राज्यपाल, रमेश बैस को सौंपी गई महाराष्ट्र की जिम्मेवारी |website=दैनिक जागरण |language=hi|access-date=2024-09-30}}</ref>
|-
| [[असम]]<br />{{small|([[असम के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[लक्ष्मण आचार्य]]
| [[चित्र:Lakshman_Prasad_Acharya.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2024|07|28}}<br />{{small|({{age in years and days|2024|07|28}})}}
| <ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/india/news/story/lakshman-prasad-acharya-become-governor-of-assam-gulab-chand-kataria-sent-to-punjab-many-governors-changed-ntc-1993877-2024-07-28|title=लक्ष्मण प्रसाद आचार्य बने असम के राज्यपाल, मणिपुर का भी मिला प्रभार, कई राज्यों के गवर्नर बदले|date=2024-07-28|website=आज तक|language=hi|access-date=2024-09-30}}</ref>
|-
| [[आन्ध्र प्रदेश]]<br />{{small|([[आन्ध्र प्रदेश के राज्यपालों की सूची |सूची]])}}
| [[सैयद अब्दुल नज़ीर]]
|[[चित्र:The_Governor_of_Andhra_Pradesh,_Shri_Justice_(Retd.)_S._Abdul_Nazeer_called_on_the_President_of_India.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2023|02|12}}<br />{{small|({{age in years and days|2023|02|12}})}}
| <ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/legal-news/story/abdul-nazeer-governor-judiciary-constitution-rules-detail-ntc-1635250-2023-02-12|title=रिटायर्ड जस्टिस अब्दुल नजीर को राज्यपाल बनाने पर बवाल क्यों? कांग्रेस के सवालों के बीच जानें क्या कहते हैं नियम|date=2023-02-12|website=आज तक|language=hi|access-date=2024-09-30}}</ref>
|-
| [[उत्तर प्रदेश]]<br />{{small|([[उत्तर प्रदेश के राज्यपालों की सूची |सूची]])}}
| [[आनन्दीबेन पटेल]]
|
|{{dts|format=dmy|2019|7|29}}<br />{{small|({{age in years and days|2019|7|29}})}}
| rowspan="2" | [[रामनाथ कोविंद]]
| <ref>{{cite web|url=https://www.ndtv.com/india-news/anandiben-patel-takes-oath-as-uttar-pradesh-governor-2076920|title=Anandiben Patel Takes Oath As Uttar Pradesh Governor|website=[[एनडीटीवी इंडिया]]|access-date=2020-08-19}}</ref>
|-
| [[उत्तराखण्ड]]<br />{{small|([[उत्तराखण्ड के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[गुरमीत सिंह (लेफ्टिनेंट जनरल)|गुरमीत सिंह]]
| [[चित्र:Lt_Gen_Gurmit_Singh.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2021|9|11}}<br />{{small|({{age in years and days|2021|9|11}})}}
| <ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/baby-rani-maurya-sworn-in-as-new-uttarakhand-governor/articleshow/65552443.cms|title=Baby Rani Maurya sworn in as new Uttarakhand governor|work=[[द इकॉनोमिक टाइम्स]]|access-date=2020-08-19}}</ref>
|-
| [[ओडिशा]]<br />{{small|([[ओडिशा के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[कमभमपति हरिबाबू]]
|[[चित्र:K. Hari Babu.jpg|केंद्र|110x110पिक्सेल]]
|{{dts|format=dmy|2025|1|3}}<br />{{small|({{age in years and days|2025|1|3}})}}
|[[द्रौपदी मुर्मू]]
| <ref>{{Cite web|url=https://www.rajbhavanodisha.gov.in/view/profile.php|title=RAJ BHAVAN ODISHA|website=www.rajbhavanodisha.gov.in|access-date=2025-04-22}}</ref>
|-
| [[कर्नाटक]]<br />{{small|([[कर्नाटक के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[थावरचंद गहलोत]]
| [[चित्र:Thawar_Chand_Gehlot.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2021|7|11}}<br />{{small|({{age in years and days|2021|7|11}})}}
| [[रामनाथ कोविंद]]
| <ref>{{Cite web|url=https://hindi.news18.com/news/knowledge/who-is-karnataka-governor-thavarchand-gehlot-agreeing-to-proscute-cm-siddaramaiah-in-muda-scam-8609191.html|title=कौन हैं कर्नाटक के गवर्नर गहलोत, जिन्होंने बढ़ा दिया सीएम सिद्धारमैया का संकट|date=2024-08-18|website=न्यूज़18 हिंदी|language=hi|access-date=2024-09-30|archive-date=21 अगस्त 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240821123609/https://hindi.news18.com/news/knowledge/who-is-karnataka-governor-thavarchand-gehlot-agreeing-to-proscute-cm-siddaramaiah-in-muda-scam-8609191.html|url-status=dead}}</ref>
|-
| [[केरल]]<br />{{small|([[केरल के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[राजेन्द्र अर्लेकर]]
| [[चित्र:Rajendra Arlekar.jpg|केंद्र|116x116पिक्सेल]]
| {{dts|format=dmy|2025|1|2}}<br />{{small|({{age in years and days|2025|1|2}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
| <ref>{{Cite web|url=https://www.rajbhavan.kerala.gov.in/index.php/the-governor/governor-profile|title=Governor Profile|website=www.rajbhavan.kerala.gov.in|access-date=2025-04-22}}</ref>
|-
| [[गुजरात]]<br />{{small|([[गुजरात के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[आचार्य देवव्रत]]
|
|{{dts|format=dmy|2019|7|22}}<br />{{small|({{age in years and days|2019|7|22}})}}
| rowspan="2" |[[राम नाथ कोविन्द]]
| <ref>{{Cite web|url=https://www.ndtv.com/india-news/acharya-devvrat-takes-oath-as-new-gujarat-governor-2073313|title=Acharya Devvrat Takes Oath As New Gujarat Governor|website=एनडीटीवी इंडिया|access-date=2020-08-19}}</ref>
|-
| [[गोवा]]<br />{{small|([[गोवा के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[पी एस श्रीधरन पिल्लई]]
|[[चित्र:PS_Sreedharan_Pillai.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2021|7|15}}<br />{{small|({{age in years and days|2021|7|15}})}}
| <ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/political-untouchability-is-a-crime-says-sreedharan-pillai/article68638856.ece|title=Political untouchability is a crime, says Goa Governor Sreedharan Pillai||date=2024-09-13|work=द हिन्दू|access-date=2024-09-30|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref>
|-
| [[छत्तीसगढ़]]<br />{{small|([[छत्तीसगढ़ के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[रामेन डेका]]
| [[चित्र:Ramen_Deka_with_President_Murmu_(cropped).jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2024|7|31}}<br />{{small|({{age in years and days|2024|7|31}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
| <ref>{{Cite web|url=https://www.jagran.com/chhattisgarh/raipur-ramen-deka-sworn-in-as-chhattisgarh-governor-know-everything-about-him-23769247.html|title=Ramen Deka: कौन हैं रमेन डेका जो चुने गए छत्तीसगढ़ के 10वें राज्यपाल, दो बार रह चुके भाजपा सांसद |website=दैनिक जागरण |language=hi|access-date=2024-09-30}}</ref>
|-
| [[झारखण्ड]]<br />{{small|([[झारखण्ड के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[संतोष गंगवार]]
| [[चित्र:Santosh_Kumar_Gangwar_(cropped).jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2024|7|31}}<br />{{small|({{age in years and days|2024|7|31}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
|
|-
| [[तमिलनाडु]]<br />{{small|([[तमिल नाडु के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[रविन्द्र नारायण रवि]]
| [[चित्र:R.N._Ravi.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2021|9|18}}<br />{{small|({{age in years and days|2021|9|18}})}}
| [[राम नाथ कोविन्द]]
| <ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/tamil-nadu/secularism-is-european-concept-not-bhartiya-tamil-nadu-governor/article68677169.ece|title=Tamil Nadu Governor R N Ravi says Secularism is a ‘European concept, not Bhartiya’|date=2024-09-24|work=द हिन्दू |access-date=2024-09-30|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref>
|-
| [[तेलंगाना]]<br />{{small|([[तेलंगाना के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[जिष्णु देव वर्मा]]
|[[File:The Chief Minister of Tripura, Shri Biplab Kumar Deb and the Deputy Chief Minister, Shri Jishnu Debbarma calling on the Union Home Minister, Shri Rajnath Singh, in New Delhi on March 20, 2018 (cropped).jpg|center|100px]]
|{{dts|format=dmy|2024|7|31}}<br />{{small|({{age in years and days|2024|7|31}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
| <ref>{{Cite web|url=https://www.newsonair.gov.in/hi/shri-jishnu-dev-varma-will-take-oath-as-the-governor-of-telangana-today-at-raj-bhavan-hyderabad/|title=आज हैदराबाद के राजभवन में तेलंगाना के राज्यपाल के रूप में शपथ लेंगे श्री जिष्णु देव वर्मा|date=31 जुलाई 2024|website=न्यूज़ ऑन एआईआर|access-date=30 सितम्बर 2024}}</ref>
|-
| [[नागालैण्ड]]<br />{{small|([[नागालैण्ड के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[ल गणेशन]]
|[[File:La Ganesan Ji (cropped).jpg|center|100px]]
|{{dts|format=dmy|2023|2|20}}<br />{{small|({{age in years and days|2023|2|20}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
|
|-
| [[पंजाब (भारत)|पंजाब]]<br />{{small|([[पंजाब (भारत) के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[गुलाब चन्द कटारिया]]
| [[File:GC Kataria.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2024|7|31}}<br />{{small|({{age in years and days|2024|7|31}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
|
|-
| [[पश्चिम बंगाल]]<br />{{small|([[पश्चिम बंगाल के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[सी. वी. आनंद बोस]]
| [[File:C. V. Ananda Bose (4x5).jpg|center|100px]]
|{{dts|format=dmy|2022|11|23}}<br />{{small|({{age in years and days|2022|11|23}})}}
| rowspan="2"| [[द्रौपदी मुर्मू]]
|
|-
| [[बिहार]]<br />{{small|([[बिहार के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[आरिफ़ मोहम्मद ख़ान]]
| [[चित्र:Governor Arif Mohammad Khan.jpg|केंद्र|123x123पिक्सेल]]
| {{dts|format=dmy|2025|1|2}}<br />{{small|({{age in years and days|2025|1|2}})}}
| <ref>{{Cite web|url=https://www.bbc.com/hindi/articles/ckg3r39k3zxo|title=आरिफ़ मोहम्मद ख़ान का बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य का राज्यपाल बनना क्या किसी के लिए फ़ायदेमंद होगा?|date=2024-12-28|website=बीबीसी हिंदी|language=hi|access-date=2025-04-22}}</ref>
|-
| [[मणिपुर]]<br />{{small|([[मणिपुर के राज्यपालों की सूची |सूची]])}}
| [[अजय कुमार भल्ला]]
| [[चित्र:The Secretary, Ministry of Power, Shri Ajay Kumar Bhalla in New Delhi on May 31, 2019 (cropped).jpg|केंद्र|126x126पिक्सेल]]
| {{dts|format=dmy|2025|1|3}}<br />{{small|({{age in years and days|2025|1|3}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
| <ref>{{Cite web|url=https://www.rajbhavanassam.gov.in/excellency.html|title=Wayback Machine|website=www.rajbhavanassam.gov.in|access-date=2025-04-22}}</ref>
|-
| [[मध्य प्रदेश]]<br />{{small|([[मध्य प्रदेश के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[मंगूभाई छगनभाई पटेल]]
|
|{{dts|format=dmy|2021|7|8}}<br />{{small|({{age in years and days|2021|7|8}})}}
| [[राम नाथ कोविन्द]]
|
|-
| [[महाराष्ट्र]]<br />{{small|([[महाराष्ट्र के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[सी.पी. राधाकृष्णन]]
|
| {{dts|format=dmy|2024|7|31}}<br />{{small|({{age in years and days|2024|7|31}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
|
|-
| [[मिज़ोरम]]<br />{{small|([[मिज़ोरम के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[विजय कुमार सिंह]]
| [[चित्र:VK Singh.jpg|केंद्र|141x141पिक्सेल]]
| {{dts|format=dmy|2025|1|16}}<br />{{small|({{age in years and days|2025|1|16}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
|
|-
| [[मेघालय]]<br />{{small|([[मेघालय के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[चंद्रशेखर विजयशंकर]]
| [[File:C H Vijayashankar.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2024|7|30}} {{small|({{age in years and days|2024|7|30}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
|
|-
| [[राजस्थान]]<br />{{small|([[राजस्थान के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[हरिभाऊ बागड़े]]
| [[File:Haribhau Bagade (cropped).jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2024|7|31}}<br />{{small|({{age in years and days|2024|7|31}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
|
|-
| [[सिक्किम]]<br />{{small|([[सिक्किम के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[ओम प्रकाश माथुर]]
| [[File:Om Prakash Mathur, 18th Governer of Sikkim.jpg|100px]]
| {{dts|format=dmy|2024|7|31}}<br />{{small|({{age in years and days|2024|7|31}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
|
|-
| [[हरियाणा]]<br />{{small|([[हरियाणा के राज्यपालों की सूची |सूची]])}}
| [[बंडारू दत्तात्रेय]]
| [[File:Bandaru Dattatreya.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2021|7|15}}<br />{{small|({{age in years and days|2021|7|15}})}}
| [[राम नाथ कोविन्द]]
|
|-
| [[हिमाचल प्रदेश]]<br />([[हिमाचल प्रदेश के राज्यपालों की सूची|सूची]])
| [[शिव प्रताप शुक्ल]]
| [[File:Shivpratap Shukla.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2023|2|18}}<br />{{small|({{age in years and days|2023|2|18}})}}
| rowspan="2" | [[द्रौपदी मुर्मू]]
|-
| [[त्रिपुरा]]<br />{{small|([[त्रिपुरा के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[नल्लू इंद्रसेन रेड्डी]]
|[[File:Indrasena Reddy.jpg|center|100px]]
|{{dts|format=dmy|2023|10|26}}<br />{{small|({{age in years and days|2023|10|26}})}}
|}
== केन्द्रशासित प्रदेशों के उप-राज्यपाल ==
{| class="sortable wikitable"
|+
|-
! केन्द्रशासित प्रदेशों<br /><small>(उप-राज्यपाल)
! नाम
! चित्र
! कार्यकाल
! सन्दर्भ
|-
| [[अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह]]<br /> के उप-राज्यपाल<br /><small>([[अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्यपालों की सूची|सूची]])
| [[देवेंद्र कुमार जोशी]]
|[[चित्र:DK Joshi official portrait.jpg|100px]]
| {{dts|format=dmy|2017|10|8}}<br /><small>({{age in years and days|2017|10|8}})
|<ref>"[http://www.and.nic.in/gov/lgprofile.php Profile of Lieutenant Governor Andaman & Nicobar Islands] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20150402161739/http://www.and.nic.in/gov/lgprofile.php |date=2 अप्रैल 2015 }}", अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह प्रशासन, अभिगमन तिथि: ५ मार्च २०१४</ref>
|-
|[[जम्मू और कश्मीर]]<br />के उप-राज्यपाल<br /><small>([[जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपालों की सूची|सूची]])
| [[मनोज सिन्हा]]
| [[चित्र:Manoj Sinha.jpg|100px]]
| {{dts|format=dmy|2020|08|07}}<br /><small>({{age in years and days|2020|08|07}})
|<ref>{{Cite web |url=https://www.indiatoday.in/india/story/jammu-and-kashmir-bifurcation-preparations-underway-for-swearing-in-of-lgs-of-j-k-ladakh-1613898-2019-10-29 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=30 अक्तूबर 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20191030100502/https://www.indiatoday.in/india/story/jammu-and-kashmir-bifurcation-preparations-underway-for-swearing-in-of-lgs-of-j-k-ladakh-1613898-2019-10-29 |archive-date=30 अक्तूबर 2019 |url-status=live }}</ref>
|-
| [[दिल्ली]]<br />के उप-राज्यपाल<br /><small>([[दिल्ली के लॅफ़्टिनॅण्ट गवर्नरों की सूची|सूची]])
| [[विनय कुमार सक्सेना]]
| [[चित्र:Vinai Kumar Saxena in 2018.jpg|100px]]
| {{dts|format=dmy|2022|6|26}}<br /><small>({{age in years and days|2022|6|26}})
|
|-
| [[पुदुच्चेरी]]<br />के उप-राज्यपाल<br /><small>([[पुदुच्चेरी के उपराज्यपालों की सूची|सूची]])
| [[कुनियिल कैलाशनाथन]]
| [[File:K Kailashnathan.jpg|100px]]
| {{dts|format=dmy|2024|8|7}}<br /><small>({{age in years and days|2024|8|7}})
|
|-
| [[लद्दाख]]<br />के उप-राज्यपाल<br /><small>([[लद्दाख के उपराज्यपालों की सूची|सूची]])
| [[बी॰डी॰ मिश्रा]]
| [[चित्र:The Minister of State for Tourism (IC), Shri Alphons Kannanthanam meeting the Governor of Arunachal Pradesh, Brigadier (Retd.) (Dr.) B.D. Mishra, in New Delhi on July 31, 2018 (cropped).JPG|124x124पिक्सेल]]
| {{dts|format=dmy|2023|2|19}}<br /><small>({{age in years and days|2023|2|19}})
|
|-
|}
== केन्द्रशासित प्रदेशों के प्रशासक ==
{| class="sortable wikitable"
|+
|-
! केन्द्रशासित प्रदेश<br /><small>(प्रशासक)
! नाम
! चित्र
! कार्यकाल
! सन्दर्भ
|-align=center style="height: 60px;"
| [[चण्डीगढ़]]<br /> के प्रशासक<br /><small>([[चण्डीगढ़ के प्रशासकों की सूची|सूची]])
| [[गुलाब चन्द कटारिया]]
| [[File:GC Kataria.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2024|7|31}}<br />{{small|({{age in years and days|2024|7|31}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
|
|- align=center style="height: 60px;"
| [[दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव]]<br />के प्रशासक<br /><small>([[दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव के प्राशासक|सूची]])
| [[प्रफुल्ल खोदा पटेल]]
| [[File:Shri Praful Khoda Patel.jpg|100px]]
| {{dts|format=dmy|2020|01|26}}<br /><small>({{age in years and days|2020|01|26}})
|<ref name="daman.nic.in">[http://daman.nic.in/websites/Administrator/index.asp Profile of Hon'ble Administrator (माननीय प्रशासक की प्रोफाइल)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140214082418/http://daman.nic.in/websites/Administrator/index.asp |date=14 फ़रवरी 2014 }}, [[दमन और दीव|दमन और दीव प्रशासन]], अभिगमन तिथि: १२ जनवरी २०१५</ref>
|- align=center style="height: 60px;"
| [[लक्षद्वीप]]<br />के प्रशासक<br /><small>([[लक्षद्वीप के प्रशासकों की सूची|सूची]])
| [[प्रफुल्ल खोदा पटेल]] (अतिरिक्त कार्यभार)
| [[File:Shri Praful Khoda Patel.jpg|100px]]
| {{dts|format=dmy|2020|12|5}}<br /><small>({{age in years and days|2020|12|5}})
|
|-
|}
== इन्हें भी देखें ==
* [[भारतीय राज्यों के मुख्यमंत्री|भारतीय राज्य सरकार]]
*[[भारतीय राज्यों के मुख्यमंत्री|राज्यों के मुख्यमंत्री]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ियाँ==
*[https://web.archive.org/web/20131219052834/http://www.archive.india.gov.in/hindi/govt/whoswho.php?id=6 भारतीय राज्यों के वर्तमान राज्यपाल]
*[[भारतीय प्रशासनिक सेवा]]
{{भारतीय राज्यों के वर्तमान राज्यपाल}}
{{भारत सरकार}}
[[श्रेणी:भारत के राज्यों के राज्यपाल]]
[[श्रेणी:भारत से सम्बन्धित सूचियाँ]]
dawsitmgrdohoousqrgepw373qvk7ek
6591490
6591488
2026-07-24T06:41:13Z
CommonsDelinker
743
"VK_Singh.jpg" को हटाया। इसे कॉमन्स से [[commons:User:Krd|Krd]] ने हटा दिया है। कारण: No license since 16 July 2026
6591490
wikitext
text/x-wiki
[[File:The President, Shri Ram Nath Kovind with the Governors of the States and Lt. Governors and Administrators of UTs, on the eve of ‘Governors Conference -2019’, at Rashtrapati Bhavan, in New Delhi on November 22, 2019.jpg|thumb|upright=2|राज्यपाल, उप राज्यपाल और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासक 'गवर्नर्स कॉन्फ्रेंस 2019' की पूर्व संध्या पर, [[राष्ट्रपति भवन]], [[नई दिल्ली]] में नवंबर 2019 को भारत के राष्ट्रपति के साथ।]]
[[भारत गणराज्य]] में राज्यपाल [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|28 राज्यों]] में राज्य प्रमुख का संवैधानिक पद होता है। राज्यपाल की नियुक्ति [[भारत के राष्ट्रपति| राष्ट्रपति]] पाँच वर्ष के लिए करते हैं और वे राष्ट्रपति की मर्जी पर पद पर रहते हैं। राज्यपाल राज्य सरकार का विधित मुखिया होता है जिसकी कार्यकारी कार्रवाई राज्यपाल के नाम पर सम्पन्न होती है।
==भारत के वर्तमान राज्यपाल==
{| class="sortable wikitable" style="text-align:center"
|-
!scope=col style="width: 175px;"| राज्य<br />{{small|(पूर्व राज्यपाल)}}
!scope=col style="width: 175px;"| नाम<ref>{{Cite web|url=https://www.india.gov.in/my-government/whos-who/governors|title=Governors {{!}} National Portal of India|website=[[भारत का राष्ट्रीय पोर्टल]]|access-date=2020-08-19}}</ref>
!scope=col class=unsortable| चित्र
!scope=col style="width: 125px;"| कार्यकाल<br />{{small|(अवधि)}}
!scope="col" | नियुक्तकर्त्ता
!scope=col class=unsortable| {{abbr|स॰|सन्दर्भ}}
|-
| [[अरुणाचल प्रदेश]]<br />{{small|([[अरुणाचल प्रदेश के राज्यपालों की सूची |सूची]])}}
| [[कैवल्य त्रिविक्रम परनाइक]]
| [[चित्र:Kaiwalya_Trivikram_Parnaik.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2023|02|16}}<br />{{small|({{age in years and days|2023|02|16}})}}
| rowspan="3"| [[द्रौपदी मुर्मू]]
| <ref>{{Cite web|url=https://www.jagran.com/jharkhand/ranchi-cp-radhakrishnan-became-new-governor-of-jharkhand-23326780.html|title=Jharkhand: सीपी राधाकृष्णन बने झारखंड के नए राज्यपाल, रमेश बैस को सौंपी गई महाराष्ट्र की जिम्मेवारी |website=दैनिक जागरण |language=hi|access-date=2024-09-30}}</ref>
|-
| [[असम]]<br />{{small|([[असम के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[लक्ष्मण आचार्य]]
| [[चित्र:Lakshman_Prasad_Acharya.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2024|07|28}}<br />{{small|({{age in years and days|2024|07|28}})}}
| <ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/india/news/story/lakshman-prasad-acharya-become-governor-of-assam-gulab-chand-kataria-sent-to-punjab-many-governors-changed-ntc-1993877-2024-07-28|title=लक्ष्मण प्रसाद आचार्य बने असम के राज्यपाल, मणिपुर का भी मिला प्रभार, कई राज्यों के गवर्नर बदले|date=2024-07-28|website=आज तक|language=hi|access-date=2024-09-30}}</ref>
|-
| [[आन्ध्र प्रदेश]]<br />{{small|([[आन्ध्र प्रदेश के राज्यपालों की सूची |सूची]])}}
| [[सैयद अब्दुल नज़ीर]]
|[[चित्र:The_Governor_of_Andhra_Pradesh,_Shri_Justice_(Retd.)_S._Abdul_Nazeer_called_on_the_President_of_India.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2023|02|12}}<br />{{small|({{age in years and days|2023|02|12}})}}
| <ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/legal-news/story/abdul-nazeer-governor-judiciary-constitution-rules-detail-ntc-1635250-2023-02-12|title=रिटायर्ड जस्टिस अब्दुल नजीर को राज्यपाल बनाने पर बवाल क्यों? कांग्रेस के सवालों के बीच जानें क्या कहते हैं नियम|date=2023-02-12|website=आज तक|language=hi|access-date=2024-09-30}}</ref>
|-
| [[उत्तर प्रदेश]]<br />{{small|([[उत्तर प्रदेश के राज्यपालों की सूची |सूची]])}}
| [[आनन्दीबेन पटेल]]
|
|{{dts|format=dmy|2019|7|29}}<br />{{small|({{age in years and days|2019|7|29}})}}
| rowspan="2" | [[रामनाथ कोविंद]]
| <ref>{{cite web|url=https://www.ndtv.com/india-news/anandiben-patel-takes-oath-as-uttar-pradesh-governor-2076920|title=Anandiben Patel Takes Oath As Uttar Pradesh Governor|website=[[एनडीटीवी इंडिया]]|access-date=2020-08-19}}</ref>
|-
| [[उत्तराखण्ड]]<br />{{small|([[उत्तराखण्ड के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[गुरमीत सिंह (लेफ्टिनेंट जनरल)|गुरमीत सिंह]]
| [[चित्र:Lt_Gen_Gurmit_Singh.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2021|9|11}}<br />{{small|({{age in years and days|2021|9|11}})}}
| <ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/baby-rani-maurya-sworn-in-as-new-uttarakhand-governor/articleshow/65552443.cms|title=Baby Rani Maurya sworn in as new Uttarakhand governor|work=[[द इकॉनोमिक टाइम्स]]|access-date=2020-08-19}}</ref>
|-
| [[ओडिशा]]<br />{{small|([[ओडिशा के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[कमभमपति हरिबाबू]]
|[[चित्र:K. Hari Babu.jpg|केंद्र|110x110पिक्सेल]]
|{{dts|format=dmy|2025|1|3}}<br />{{small|({{age in years and days|2025|1|3}})}}
|[[द्रौपदी मुर्मू]]
| <ref>{{Cite web|url=https://www.rajbhavanodisha.gov.in/view/profile.php|title=RAJ BHAVAN ODISHA|website=www.rajbhavanodisha.gov.in|access-date=2025-04-22}}</ref>
|-
| [[कर्नाटक]]<br />{{small|([[कर्नाटक के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[थावरचंद गहलोत]]
| [[चित्र:Thawar_Chand_Gehlot.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2021|7|11}}<br />{{small|({{age in years and days|2021|7|11}})}}
| [[रामनाथ कोविंद]]
| <ref>{{Cite web|url=https://hindi.news18.com/news/knowledge/who-is-karnataka-governor-thavarchand-gehlot-agreeing-to-proscute-cm-siddaramaiah-in-muda-scam-8609191.html|title=कौन हैं कर्नाटक के गवर्नर गहलोत, जिन्होंने बढ़ा दिया सीएम सिद्धारमैया का संकट|date=2024-08-18|website=न्यूज़18 हिंदी|language=hi|access-date=2024-09-30|archive-date=21 अगस्त 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240821123609/https://hindi.news18.com/news/knowledge/who-is-karnataka-governor-thavarchand-gehlot-agreeing-to-proscute-cm-siddaramaiah-in-muda-scam-8609191.html|url-status=dead}}</ref>
|-
| [[केरल]]<br />{{small|([[केरल के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[राजेन्द्र अर्लेकर]]
| [[चित्र:Rajendra Arlekar.jpg|केंद्र|116x116पिक्सेल]]
| {{dts|format=dmy|2025|1|2}}<br />{{small|({{age in years and days|2025|1|2}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
| <ref>{{Cite web|url=https://www.rajbhavan.kerala.gov.in/index.php/the-governor/governor-profile|title=Governor Profile|website=www.rajbhavan.kerala.gov.in|access-date=2025-04-22}}</ref>
|-
| [[गुजरात]]<br />{{small|([[गुजरात के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[आचार्य देवव्रत]]
|
|{{dts|format=dmy|2019|7|22}}<br />{{small|({{age in years and days|2019|7|22}})}}
| rowspan="2" |[[राम नाथ कोविन्द]]
| <ref>{{Cite web|url=https://www.ndtv.com/india-news/acharya-devvrat-takes-oath-as-new-gujarat-governor-2073313|title=Acharya Devvrat Takes Oath As New Gujarat Governor|website=एनडीटीवी इंडिया|access-date=2020-08-19}}</ref>
|-
| [[गोवा]]<br />{{small|([[गोवा के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[पी एस श्रीधरन पिल्लई]]
|[[चित्र:PS_Sreedharan_Pillai.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2021|7|15}}<br />{{small|({{age in years and days|2021|7|15}})}}
| <ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/political-untouchability-is-a-crime-says-sreedharan-pillai/article68638856.ece|title=Political untouchability is a crime, says Goa Governor Sreedharan Pillai||date=2024-09-13|work=द हिन्दू|access-date=2024-09-30|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref>
|-
| [[छत्तीसगढ़]]<br />{{small|([[छत्तीसगढ़ के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[रामेन डेका]]
| [[चित्र:Ramen_Deka_with_President_Murmu_(cropped).jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2024|7|31}}<br />{{small|({{age in years and days|2024|7|31}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
| <ref>{{Cite web|url=https://www.jagran.com/chhattisgarh/raipur-ramen-deka-sworn-in-as-chhattisgarh-governor-know-everything-about-him-23769247.html|title=Ramen Deka: कौन हैं रमेन डेका जो चुने गए छत्तीसगढ़ के 10वें राज्यपाल, दो बार रह चुके भाजपा सांसद |website=दैनिक जागरण |language=hi|access-date=2024-09-30}}</ref>
|-
| [[झारखण्ड]]<br />{{small|([[झारखण्ड के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[संतोष गंगवार]]
| [[चित्र:Santosh_Kumar_Gangwar_(cropped).jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2024|7|31}}<br />{{small|({{age in years and days|2024|7|31}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
|
|-
| [[तमिलनाडु]]<br />{{small|([[तमिल नाडु के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[रविन्द्र नारायण रवि]]
| [[चित्र:R.N._Ravi.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2021|9|18}}<br />{{small|({{age in years and days|2021|9|18}})}}
| [[राम नाथ कोविन्द]]
| <ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/tamil-nadu/secularism-is-european-concept-not-bhartiya-tamil-nadu-governor/article68677169.ece|title=Tamil Nadu Governor R N Ravi says Secularism is a ‘European concept, not Bhartiya’|date=2024-09-24|work=द हिन्दू |access-date=2024-09-30|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref>
|-
| [[तेलंगाना]]<br />{{small|([[तेलंगाना के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[जिष्णु देव वर्मा]]
|[[File:The Chief Minister of Tripura, Shri Biplab Kumar Deb and the Deputy Chief Minister, Shri Jishnu Debbarma calling on the Union Home Minister, Shri Rajnath Singh, in New Delhi on March 20, 2018 (cropped).jpg|center|100px]]
|{{dts|format=dmy|2024|7|31}}<br />{{small|({{age in years and days|2024|7|31}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
| <ref>{{Cite web|url=https://www.newsonair.gov.in/hi/shri-jishnu-dev-varma-will-take-oath-as-the-governor-of-telangana-today-at-raj-bhavan-hyderabad/|title=आज हैदराबाद के राजभवन में तेलंगाना के राज्यपाल के रूप में शपथ लेंगे श्री जिष्णु देव वर्मा|date=31 जुलाई 2024|website=न्यूज़ ऑन एआईआर|access-date=30 सितम्बर 2024}}</ref>
|-
| [[नागालैण्ड]]<br />{{small|([[नागालैण्ड के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[ल गणेशन]]
|[[File:La Ganesan Ji (cropped).jpg|center|100px]]
|{{dts|format=dmy|2023|2|20}}<br />{{small|({{age in years and days|2023|2|20}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
|
|-
| [[पंजाब (भारत)|पंजाब]]<br />{{small|([[पंजाब (भारत) के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[गुलाब चन्द कटारिया]]
| [[File:GC Kataria.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2024|7|31}}<br />{{small|({{age in years and days|2024|7|31}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
|
|-
| [[पश्चिम बंगाल]]<br />{{small|([[पश्चिम बंगाल के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[सी. वी. आनंद बोस]]
| [[File:C. V. Ananda Bose (4x5).jpg|center|100px]]
|{{dts|format=dmy|2022|11|23}}<br />{{small|({{age in years and days|2022|11|23}})}}
| rowspan="2"| [[द्रौपदी मुर्मू]]
|
|-
| [[बिहार]]<br />{{small|([[बिहार के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[आरिफ़ मोहम्मद ख़ान]]
| [[चित्र:Governor Arif Mohammad Khan.jpg|केंद्र|123x123पिक्सेल]]
| {{dts|format=dmy|2025|1|2}}<br />{{small|({{age in years and days|2025|1|2}})}}
| <ref>{{Cite web|url=https://www.bbc.com/hindi/articles/ckg3r39k3zxo|title=आरिफ़ मोहम्मद ख़ान का बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य का राज्यपाल बनना क्या किसी के लिए फ़ायदेमंद होगा?|date=2024-12-28|website=बीबीसी हिंदी|language=hi|access-date=2025-04-22}}</ref>
|-
| [[मणिपुर]]<br />{{small|([[मणिपुर के राज्यपालों की सूची |सूची]])}}
| [[अजय कुमार भल्ला]]
| [[चित्र:The Secretary, Ministry of Power, Shri Ajay Kumar Bhalla in New Delhi on May 31, 2019 (cropped).jpg|केंद्र|126x126पिक्सेल]]
| {{dts|format=dmy|2025|1|3}}<br />{{small|({{age in years and days|2025|1|3}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
| <ref>{{Cite web|url=https://www.rajbhavanassam.gov.in/excellency.html|title=Wayback Machine|website=www.rajbhavanassam.gov.in|access-date=2025-04-22}}</ref>
|-
| [[मध्य प्रदेश]]<br />{{small|([[मध्य प्रदेश के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[मंगूभाई छगनभाई पटेल]]
|
|{{dts|format=dmy|2021|7|8}}<br />{{small|({{age in years and days|2021|7|8}})}}
| [[राम नाथ कोविन्द]]
|
|-
| [[महाराष्ट्र]]<br />{{small|([[महाराष्ट्र के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[सी.पी. राधाकृष्णन]]
|
| {{dts|format=dmy|2024|7|31}}<br />{{small|({{age in years and days|2024|7|31}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
|
|-
| [[मिज़ोरम]]<br />{{small|([[मिज़ोरम के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[विजय कुमार सिंह]]
|
| {{dts|format=dmy|2025|1|16}}<br />{{small|({{age in years and days|2025|1|16}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
|
|-
| [[मेघालय]]<br />{{small|([[मेघालय के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[चंद्रशेखर विजयशंकर]]
| [[File:C H Vijayashankar.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2024|7|30}} {{small|({{age in years and days|2024|7|30}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
|
|-
| [[राजस्थान]]<br />{{small|([[राजस्थान के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[हरिभाऊ बागड़े]]
| [[File:Haribhau Bagade (cropped).jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2024|7|31}}<br />{{small|({{age in years and days|2024|7|31}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
|
|-
| [[सिक्किम]]<br />{{small|([[सिक्किम के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[ओम प्रकाश माथुर]]
| [[File:Om Prakash Mathur, 18th Governer of Sikkim.jpg|100px]]
| {{dts|format=dmy|2024|7|31}}<br />{{small|({{age in years and days|2024|7|31}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
|
|-
| [[हरियाणा]]<br />{{small|([[हरियाणा के राज्यपालों की सूची |सूची]])}}
| [[बंडारू दत्तात्रेय]]
| [[File:Bandaru Dattatreya.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2021|7|15}}<br />{{small|({{age in years and days|2021|7|15}})}}
| [[राम नाथ कोविन्द]]
|
|-
| [[हिमाचल प्रदेश]]<br />([[हिमाचल प्रदेश के राज्यपालों की सूची|सूची]])
| [[शिव प्रताप शुक्ल]]
| [[File:Shivpratap Shukla.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2023|2|18}}<br />{{small|({{age in years and days|2023|2|18}})}}
| rowspan="2" | [[द्रौपदी मुर्मू]]
|-
| [[त्रिपुरा]]<br />{{small|([[त्रिपुरा के राज्यपालों की सूची|सूची]])}}
| [[नल्लू इंद्रसेन रेड्डी]]
|[[File:Indrasena Reddy.jpg|center|100px]]
|{{dts|format=dmy|2023|10|26}}<br />{{small|({{age in years and days|2023|10|26}})}}
|}
== केन्द्रशासित प्रदेशों के उप-राज्यपाल ==
{| class="sortable wikitable"
|+
|-
! केन्द्रशासित प्रदेशों<br /><small>(उप-राज्यपाल)
! नाम
! चित्र
! कार्यकाल
! सन्दर्भ
|-
| [[अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह]]<br /> के उप-राज्यपाल<br /><small>([[अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्यपालों की सूची|सूची]])
| [[देवेंद्र कुमार जोशी]]
|[[चित्र:DK Joshi official portrait.jpg|100px]]
| {{dts|format=dmy|2017|10|8}}<br /><small>({{age in years and days|2017|10|8}})
|<ref>"[http://www.and.nic.in/gov/lgprofile.php Profile of Lieutenant Governor Andaman & Nicobar Islands] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20150402161739/http://www.and.nic.in/gov/lgprofile.php |date=2 अप्रैल 2015 }}", अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह प्रशासन, अभिगमन तिथि: ५ मार्च २०१४</ref>
|-
|[[जम्मू और कश्मीर]]<br />के उप-राज्यपाल<br /><small>([[जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपालों की सूची|सूची]])
| [[मनोज सिन्हा]]
| [[चित्र:Manoj Sinha.jpg|100px]]
| {{dts|format=dmy|2020|08|07}}<br /><small>({{age in years and days|2020|08|07}})
|<ref>{{Cite web |url=https://www.indiatoday.in/india/story/jammu-and-kashmir-bifurcation-preparations-underway-for-swearing-in-of-lgs-of-j-k-ladakh-1613898-2019-10-29 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=30 अक्तूबर 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20191030100502/https://www.indiatoday.in/india/story/jammu-and-kashmir-bifurcation-preparations-underway-for-swearing-in-of-lgs-of-j-k-ladakh-1613898-2019-10-29 |archive-date=30 अक्तूबर 2019 |url-status=live }}</ref>
|-
| [[दिल्ली]]<br />के उप-राज्यपाल<br /><small>([[दिल्ली के लॅफ़्टिनॅण्ट गवर्नरों की सूची|सूची]])
| [[विनय कुमार सक्सेना]]
| [[चित्र:Vinai Kumar Saxena in 2018.jpg|100px]]
| {{dts|format=dmy|2022|6|26}}<br /><small>({{age in years and days|2022|6|26}})
|
|-
| [[पुदुच्चेरी]]<br />के उप-राज्यपाल<br /><small>([[पुदुच्चेरी के उपराज्यपालों की सूची|सूची]])
| [[कुनियिल कैलाशनाथन]]
| [[File:K Kailashnathan.jpg|100px]]
| {{dts|format=dmy|2024|8|7}}<br /><small>({{age in years and days|2024|8|7}})
|
|-
| [[लद्दाख]]<br />के उप-राज्यपाल<br /><small>([[लद्दाख के उपराज्यपालों की सूची|सूची]])
| [[बी॰डी॰ मिश्रा]]
| [[चित्र:The Minister of State for Tourism (IC), Shri Alphons Kannanthanam meeting the Governor of Arunachal Pradesh, Brigadier (Retd.) (Dr.) B.D. Mishra, in New Delhi on July 31, 2018 (cropped).JPG|124x124पिक्सेल]]
| {{dts|format=dmy|2023|2|19}}<br /><small>({{age in years and days|2023|2|19}})
|
|-
|}
== केन्द्रशासित प्रदेशों के प्रशासक ==
{| class="sortable wikitable"
|+
|-
! केन्द्रशासित प्रदेश<br /><small>(प्रशासक)
! नाम
! चित्र
! कार्यकाल
! सन्दर्भ
|-align=center style="height: 60px;"
| [[चण्डीगढ़]]<br /> के प्रशासक<br /><small>([[चण्डीगढ़ के प्रशासकों की सूची|सूची]])
| [[गुलाब चन्द कटारिया]]
| [[File:GC Kataria.jpg|center|100px]]
| {{dts|format=dmy|2024|7|31}}<br />{{small|({{age in years and days|2024|7|31}})}}
| [[द्रौपदी मुर्मू]]
|
|- align=center style="height: 60px;"
| [[दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव]]<br />के प्रशासक<br /><small>([[दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव के प्राशासक|सूची]])
| [[प्रफुल्ल खोदा पटेल]]
| [[File:Shri Praful Khoda Patel.jpg|100px]]
| {{dts|format=dmy|2020|01|26}}<br /><small>({{age in years and days|2020|01|26}})
|<ref name="daman.nic.in">[http://daman.nic.in/websites/Administrator/index.asp Profile of Hon'ble Administrator (माननीय प्रशासक की प्रोफाइल)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140214082418/http://daman.nic.in/websites/Administrator/index.asp |date=14 फ़रवरी 2014 }}, [[दमन और दीव|दमन और दीव प्रशासन]], अभिगमन तिथि: १२ जनवरी २०१५</ref>
|- align=center style="height: 60px;"
| [[लक्षद्वीप]]<br />के प्रशासक<br /><small>([[लक्षद्वीप के प्रशासकों की सूची|सूची]])
| [[प्रफुल्ल खोदा पटेल]] (अतिरिक्त कार्यभार)
| [[File:Shri Praful Khoda Patel.jpg|100px]]
| {{dts|format=dmy|2020|12|5}}<br /><small>({{age in years and days|2020|12|5}})
|
|-
|}
== इन्हें भी देखें ==
* [[भारतीय राज्यों के मुख्यमंत्री|भारतीय राज्य सरकार]]
*[[भारतीय राज्यों के मुख्यमंत्री|राज्यों के मुख्यमंत्री]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ियाँ==
*[https://web.archive.org/web/20131219052834/http://www.archive.india.gov.in/hindi/govt/whoswho.php?id=6 भारतीय राज्यों के वर्तमान राज्यपाल]
*[[भारतीय प्रशासनिक सेवा]]
{{भारतीय राज्यों के वर्तमान राज्यपाल}}
{{भारत सरकार}}
[[श्रेणी:भारत के राज्यों के राज्यपाल]]
[[श्रेणी:भारत से सम्बन्धित सूचियाँ]]
38bftctatcmesvpdcd8v0r9if5xc9rw
यूरोप में विश्व धरोहर स्थलों की सूची
0
36141
6591378
6579826
2026-07-23T18:54:51Z
CommonsDelinker
743
6591378
wikitext
text/x-wiki
यह यूरोप में स्थित [[विश्व धरोहर स्थलों की सूची|यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों]] की एक सूची है।
तारांकन चिह्न (*) लगे स्थल, [[खतरे में विश्व धरोहर स्थलों की सूची]] में भी शामिल हैं।
{{TOCright}}
== दो या अधिक देशों के बीच साझा स्थल (11) ==
* [[बेल्जियम और फ्रांस के घंटाघर]] — [[#बेल्जियम|बेल्जियम]] और [[#फ्रांस|फ्रांस]] के बीच साझा धरोहर स्थलें। सार्वजनिक घंटाघरों या इमारतें जैसे की सभामण्डप आदि के अलावा इस सुची में अन्य: आवर लेडी का कैथेड्रल [नोट्रे-डेम], एंटवर्प; सेंट रंबॉल्ड्स टॉवर, मेचेलन; सेंट लियोनार्ड चर्च, ज़ॉटलियुव - फ्लैंडर्स, बेल्जियम में सभी तीन आदि शामिल है।
* [[बिलवज़्काया पुश्चा राष्ट्रीय उद्यान]]/[[बिआलोविज़ा वन]] (1979, 1992) — बेलारूस और [[#पोलैंड|पोलैंड]] के बीच साझा।
* एगटेलेक और स्लोवेंस्की कोर (स्लोवाक कर्स्ट) की गुफाएं (1995, 2000) — [[#हंगरी|हंगरी]] और [[#स्लोवाकिया|स्लोवाकिया]] के बीच साझा।
* फेर्तो/नेउसेडलर्सी का सांस्कृतिक परिदृश्य (2001) — [[#हंगरी|हंगरी]] और [[#ऑस्ट्रिया|ऑस्ट्रिया]] के बीच साझा।
* कौरोनियन स्पिट — [[#लिथुआनिया|लिथुआनिया]] और [[#यूरोपियन रूस|रूसी संघ]] के बीच साझा।
* [[रोमन लाइम्स|रोमन साम्राज्य के सीमांत]]: [[लाइम जर्मनिकस|ऊपरी जर्मन और रावटियन लाइम्स]] और [[हार्डियन की दीवार]] — [[#जर्मनी|जर्मनी]] और [[#इंग्लैंड|यूनाइटेड किंगडम]] के बीच साझा। (ref. [https://web.archive.org/web/20181215174622/http://whc.unesco.org/en/list/430/multiple%3D1%26unique_number%3D499 whc.unesco.org ID 430bis])
* [[होगा कुस्टेन|उच्च तट]] और[[क्वारकें]] द्वीपसमूह — [[#स्वीडन|स्वीडन]] और [[#फिनलैंड|फिनलैंड]] के बीच साझा।
* [[रोम]] के ऐतिहासिक केंद्र, ([[वैटिकन सिटी|वेटिकन सिटी]]) और [[दीवारों के बाहर सेंट पॉल का राजभवन]] — [[#धर्ममण्डल|धर्ममण्डल]] और [[इटली]] के बीच साझा।
* [[मुस्कुएर पार्क]]/[[पार्क मुज़कोवस्की]] निस्से नदी के दोनों ओर — [[#जर्मनी|जर्मनी]] और [[#पोलैंड|पोलैंड]] के बीच साझा।
* [[पायरेनीस]]/[[पिरिनोस]]: [[मोंटे पेरडीडो]]/[[मोंट पेर्दू]] (1997, 1999) — [[#फ्रांस|फ्रांस]] और [[#स्पेन|स्पेन]] के बीच साझा।
* [[स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क]] (2005) — [[#बेलारस|बेलारूस]], [[#एस्टोनिया|एस्टोनिया]], [[#फिनलैंड|फिनलैंड]], [[#लताविया|लताविया]], [[#लिथुआनिया|लिथुआनिया]], [[#मोल्दोवा|मोल्दोवा]], [[#नॉर्वे|नॉर्वे]], [[#स्वीडन|स्वीडन]], [[#यूरोपियन रूस|रूसी संघ]] और [[#यूक्रेन|यूक्रेन]]
== देश अनुसार स्थलों की सूची ==
=== [[अल्बानिया|अलबानिया]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=75%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Butrint, Albania.jpg|150px|]]
||[[बुत्रिन्ट]]
||1992
|बुत्रिन्ट, [[वोरो काउंटी]]<br/><small>{{coord|39|44|44|N|20|1|14|E|region:AL_type:landmark|name=Butrint}}</small>
|570; iii (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र: Gjirokastra.jpg|150px|]]
||[[जीरोकेस्टर]] का संग्रहालय-नगर
||2005
|[[बेरत]], [[बेरत प्रांत]] और <br/>[[जीरोकेस्टर]], [[जीरोकेस्टर काउंटी]]<br/><small>{{coord|40|4|10|N|20|8|0|E|region:AL_type:landmark|name=Historic Centres of Berat and Gjirokastra}}</small>
|569; iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[अण्डोरा|अन्डोरा]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=75%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Refuge_perafita_andorra.jpg|150px|]]
||[[मैड्रियू-क्लेरोर-पैराफिटा घाटी]]
||2004
|एस्काल्डेस-एंगोर्डनी, अन्डोरा
|v (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[आर्मीनिया]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=75%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Zvartnots img 6965.jpg|100px|]]
||वाघरशपत के कैथेड्रल और चर्च और ज़्वरत्नोट्स के पुरातत्व स्थल
||2000
||अर्मावीर क्षेत्र <br/><small>{{coord|41|5|42|N|44|42|37|E|}}</small>
||1011; 2000; ii, iii (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Haghpat-Nshan.jpg|100px|]]
||[[हाघपत मठ|हाघपत]] और [[सानहिन]] के मठ
||1996
||हाघपत और सानहिन गांव, लोरी क्षेत्र<br/><small>{{coord|40|9|33.5|N|44|17|42.5|E|}}</small>
||777; 1996; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Geghard lion cross reliefs-IMG 2562.JPG|100px|]]
||गेघार्ड के मठ और ऊपरी अज़ैट घाटी
||2000
||गौत गांव के पास, कोतक क्षेत्र<br/><small>{{coord|40|9|32|N|44|47|48|E|}}</small>
||960; 2000; ii (सांस्कृतिक)
|
|-
|}
=== [[ऑस्ट्रिया]]<ref>{{cite web|url=https://whc.unesco.org/en/statesparties/at|title=ऑस्ट्रिया के विश्व धरोहर स्थल|publisher=[[युनेस्को|यूनेस्को]] आधिकारिक वेबसाइट|access-date=11 अप्रैल 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180411175738/https://whc.unesco.org/en/statesparties/at|archive-date=11 अप्रैल 2018|url-status=live}}</ref> ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:1906 - Salzburg - View from Mönchsberg.JPG|150px]]
||[[साल्ज़बर्ग|साल्ज़बोर्ग]] के ऐतिहासिक केंद्र
||1996
|[[साल्ज़बर्ग|साल्ज़बोर्ग]]
|784; ii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Wien Schoenbrunn Rueckseite.jpg|150px|]]
||[[शनब्रन महल]]
||1996
|[[वियना]]
|786; i, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Dachsteingosau.JPG|150px|]]
||[[हॉलस्टैट]]–[[डाखश्टाइन]] [[सल्ज़कामरगुत]] के सांस्कृतिक परिदृश्य
||1997
|[[सल्ज़कामरगुत]]
|806; iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Semmeringbahn um 1900.jpeg|150px|]]
||[[सिमरिंग रेलवे]]
||1998
|ग्लोग्ग्निट्ज़, सिमरिंग
|785; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:GrazView-Kunsthaus.jpg|150px|]]
||[[ग्राज़]] के ऐतिहासिक केंद्र
||1999
|ग्राज़
|931; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Stift melk 001.jpg|150px|]]
||[[वाचौ]] के सांस्कृतिक परिदृश्य
||2000
|वाचौ
|970; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Wien Staatsoper.jpg|150px|]]
||[[वियना]] के ऐतिहासिक केंद्र <sup>†</sup>
||2001
|[[वियना]]
|1033; ii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Neusiedler See im Winter.jpg|150px|]]
||[[न्युसीडल झील]]
||2001
|[[बुर्गेनलैंड]]
|772; v (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[अज़रबैजान]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Qobustan.jpg|150px|]]
||[[गोबस्तान राष्ट्रीय उद्यान]]
||2007
||गरदाघ जिला और अबेहरॉन जिला
||1076; iii (प्राकृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Baku Skyline.JPG|150px|]]
||[[बाकू|बाकू दीवार वाला शहर]], [[पैलेस ऑफ द शिरवंश|शिरवंश पैलेस]] और [[मेडन टॉवर (बाकू)|मैडेन टॉवर]]
||2000
||[[बाकू]]
||958; iv (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[बेलारूस|बेलारुस]] ===
{{Legend|#D0E7FF|* साझा स्थल|outline=silver}}
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Poland Bialowieza - BPN.jpg|150px|]]
||[[बिलवज़्काया पुश्चा राष्ट्रीय उद्यान]]*
||1979
|style="background-color: #D0E7FF" |ब्रेस्ट प्रांत और ग्रोडो प्रांत <br/>({{flag|पोलैंड}} के साथ साझा) <br/><small>{{coord|52|30|N|23|35|E|name=बिलवज़्काया पुश्चा राष्ट्रीय उद्यान}}</small>
||vii (प्राकृतिक)
|
|-
|[[File:Мир (замок).jpg|150px]]
||[[मीर कैसल भवन-समूह]]
||2000
||[[मीर, बेलारुस|मीर]], [[ग्रोडो प्रांत]] <br/><small>{{coord|53|27|4|N|26|28|22|E|type:landmark_region:BY|name=मीर कैसल भवन-समूह}}</small>
||ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Belarus-Niasvizh-Radziwill Castle-4.jpg|150px|]]
||[[नेसविज़्ह दुर्ग]]
||2005
||[[नेसविज़्ह]], [[मिन्स्क प्रांत]] <br/><small>{{coord|53|13|22|N|26|41|29|E|type:landmark_region:BY|name=Architectural, Residential and Cultural Complex of the Radziwill Family at Nesvizh}}</small>
|ii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Hammerfest, fuglenes, memoriale per l'arco geodetico di struve, misurato a partire da qui, colonna 02.jpg|150px|]]
||[[स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क]]*
||2005
|style="background-color: #D0E7FF" |ब्रेस्ट प्रांत और [[ग्रोडो प्रांत]] <br/>({{flag|एस्टोनिया}}, {{flag|फिनलैंड}}, {{flag|लातविया}}, <br/>{{flag|लिथुआनिया}}, {{flag|मोल्डोवा}}, {{flag|नॉर्वे}}, {{flag|रूस}}, <br/>{{flag|स्वीडन}} और {{flag|यूक्रेन}} के साथ साझा)<br/>
<small>{{coord|52.160556|25.571389|format=dms|name=स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क (Leskovichi station point in Belarus)}}</small>
<br/><small>{{coord|52.215278|25.553333|format=dms|name=स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क (Chekutsk station point in Belarus)}}</small>
<br/><small>{{coord|52.289167|25.649444|format=dms|name=स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क (Ossovnitsa station point in Belarus)}}</small>
<br/><small>{{coord|53.560278|24.869722|format=dms|name=स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क (Lopaty station point in Belarus)}}</small>
<br/><small>{{coord|54.291389|26.045278|format=dms|name=स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क (Tupishki station point in Belarus)}}</small>
|ii, iii, vi (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[बेल्जियम]] ===
{{Legend|#D0E7FF|* साझा स्थल|outline=silver}}
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:BeguinageTerHoyenGhent04.jpg|150px]]
||[[बेगुइनेज़]]
||1998
||[[फ़्लैंडर्स]]
|855; 1998; ii, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Grand place brussels_WQ3.jpg|150px]]
||[[ग्रैंड प्लेस]]
||1998
||[[ब्रुसेल्स|ब्रुसेल्स शहर]], ब्रुसेल्स-राजधानी
|857; 1998; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Houdeng-Goegnies JPG02.jpg|150px]]
||[[कैनाल डु सेन्टर के नाँव उत्थापक]]
||1998
||[[हैनौत (प्रांत)]] <br/><small>{{coord|50|28|16|N|4|05|42|E|}}</small>
||856; 1998, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Belfort Brugge.jpg|150px]]
|style="background:#D0E7FF;"|[[बेल्जियम और फ्रांस के घंटाघर]]*
||1999
||बेल्जियम और उत्तरी फ्रांस
|943; 1999, 2005 (विस्तारित); ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Bruggewasser.jpg|150px]]
||[[ब्रुग्ज]] के ऐतिहासिक केन्द्र
||2000
|[[ब्रुग्ज]], वेस्ट फ्लैंडर्स <br/><small>{{coord|51|13|N|3|14|E|}}</small>
|996; 2000; ii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[File:Tassel House stairway.JPG|150px]]
||[[ब्रुसेल्स]] में [[विक्टर हॉर्टा]] के प्रमुख शहरी इमारत;<br/>(टेसल होटल, सॉल्वे होटेल, वैन एटवेल्डे होटल, <br/>और मैसन एंड एटेलियर हॉर्टा)
||2000
||[[ब्रुसेल्स]] और सैंट-गिलेस, ब्रसेल्स-राजधानी
||1005; 2000; i, ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[File:Minières néolithiques de silex - Spiennes (1).jpg|150px]]
|| [[स्पेंनेस]] के निओलिथिक चमकीले पत्थर कि खान, [[मॉन्स]]
||2000
||मॉन्स, हैनौत
||1006; 2000; i, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Tournai pan.jpg|150px]]
||[[टूर्नेय कैथेड्रल]], [[टूर्नेय]]
||2000
||टूर्नेय, हैनौत
||1009; 2000; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[File:Bois du Cazier 2.jpg|150px]]
|[[वालोनिया की प्रमुख खनन स्थल]]
|2012
||[[वालोनिया]] <br/><small>{{coord|50|26|07|N|3|50|18|E|}}</small>
|1344; 2012; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Library_of_Plantin-Moretus_Museum_in_Antwerp.jpg|150px]]
||[[प्लांटिन-मोरटस संग्रहालय]]
||2000
||[[एंटवर्प]]
||1185; 2005; ii, iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|
||[[स्टोक्लेट महल]]
||2009
||वोलुवे-सेंट-पिएर्रे, ब्रसेल्स-राजधानी <br/><small>{{coord|50|50|07|N|4|24|58|E|}}</small>
||1298; 2009; i, ii (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[बॉस्निया और हर्ज़ेगोविना]] (3) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Stari Most22.jpg|150px]]
||[[स्टारी मोस्ट|मोस्टर के पुराने शहर का पुराना पुल क्षेत्र]]
||2005
||[[मोस्टर]]<br/><small>{{Coord|43|20|13.56|N|17|48|53.46|E}}</small>
||946; vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[File:Visegrad_bridge_by_Klackalica.jpg|150px]]
||[[विसेग्राड]], का [[मेहमद पासा सोकोलोविच पुल]]
||2007
|[[विसेग्राड]]<br/><small>{{coord|43|46|56|N|19|17|16|E}}</small>
|1260; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[File:Bosniangraves bosniska gravar februari 2007 stecak stecci3.jpg|150px]]
|style="background:#D0E7FF;"|[[स्टेक्सी|स्टेक्सी मध्यकालीन समाधि-स्तंभ कब्रिस्तान]]*
||2016
||रादीमलजा और अन्य 19 स्थलें
|1504; iii, vi (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[बुल्गारिया]] (9) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Boyana Church.jpg|150px]]
||[[बोयाना चर्च]]
||1979
|[[सोफिया]] के बॉयना क्वार्टर <br/><small>{{coord|42|39|0|N|23|16|0|E |region:BG_type:landmark |name=बोयाना चर्च}}</small>
|ii, iii (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[File:Caballero_de_Madara,_reserva_histórico-arqueológica_Nacional_de_Madara,_Bulgaria,_2016-05-27,_DD_39.jpg|150px]]
||[[मदारा राइडर]]
||1979
|पूर्वोत्तर बुल्गारिया में शूमेन के पूर्वी, मदरा के गांव निकट<br/><small>{{coord|43|43|0|N|25|58|0|E}}</small>
|i, iii: (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Ivanovo kirche2.jpg|150px]]
||[[इवानोवो के शिलाखंडित चर्च]]
||1979
|इवानोवो गांव, डेन्यूब पर रास के दक्षिण में<br/><small>{{coord|43|43|0|N|25|58|0|E}}</small>
|ii, iii: (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Reproduction of Thracian tomb 2.jpg|150px]]
||[[कज़ानलक के थ्रेसियन कब्र]]
||1979
|कज़ानलाक शहर के पास, मध्य बुल्गारिया<br/><small>{{coord|42|37|0|N|25|24|0|E}}</small>
|:i,iii,iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Nessebar Pantocrator.jpg|150px]]
||प्राचीन शहर [[नासेबार]]
||1983
|काला सागर पर, बर्गास के उत्तर में,<br/>नासेबार का पुराना हिस्सा<br/><small>{{coord|42|39|22|N|27|43|48|E}}</small>
|:iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Pirin national park.jpg|150px]]
||[[पिरिन राष्ट्रीय उद्यान]]
||1983
||बुल्गारिया के दक्षिण पश्चिम में [[पिरीन पर्वत]] के निकट<br/><small>{{coord|41|40|0|N|23|30|0|E}}</small>
||vii, viii, ix (प्राकृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Bulgarien 0905.JPG|150px]]
||[[रीला मठ]]
||1983
|सोफिया के दक्षिण में, उत्तर पश्चिमी रीला पहाड़ों के, रीला मठ प्रकृति पार्क में<br/><small>{{coord|42|7|0|N|23|24|0|E}}</small>
|vi (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Srebarna-Lake.jpg|150px]]
||[[स्रबरना नेचर रिज़र्व]]
||1983
||[[डेन्यूब नदी]] के दक्षिण में, उत्तर पूर्व बुल्गारिया के दक्षिणी डोब्रूजा में<br/><small>{{coord|44|6|51.98|N|27|4|41.02|E}}</small>
||x: (प्राकृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Sveshtari Thracian tomb Bulgaria IFB.JPG|150px]]
||[[सेवेशत्री की थ्रेशियन कब्र]]
||1985
|पूर्वोत्तर बुल्गारिया के राजग्राड में सेवशर्ती गांव के पास<br/><small>{{coord|43|40|0.01|N|26|40|0.01|E}}</small>
||i, iii (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[क्रोएशिया]] (7) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[File:Peristyle of Diocletian's Palace, Split (11908116224).jpg|150px]]
||[[डायोक्लेशियन महल|डायोक्लेशियन का महल]] के साथ [[स्प्लिट]] का ऐतिहासिक कॉम्प्लेक्स
||1979
||[[स्प्लिट]],<br/><small>{{coord|43|30|30|N|16|26|24|E}}</small>
||ii, iii, iv, (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Dubrovnik-L04-1.jpg|150px]]
||[[डुब्रोवनिक]] का पुराना नगर
||1979, 1998
||डुब्रोवनिक,
|95; i, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:HR - Plitvice (Plitvička Jezera)1.JPG|150px]]
||[[प्लिटवाइस झील राष्ट्रीय उद्यान]]
||1979
||प्लिटवीका जैज़ेरा,<br/><small>{{coord|44|52|50|N|15|36|58|E}}</small>
||98; vii, viii, ix (प्राकृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Croatia Porec Euphrasius Basilika BW 2014-10-08 10-43-24.jpg|150px]]
||[[पोरेक]] के ऐतिहासिक केंद्र में [[युफ्रेशियन बेसिलिका]] के एपिस्कोपल कॉम्प्लेक्स
||1997
||पोरेक
||809; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Katedrála sv. Vavřince v Trogiru.JPG|150px]]
||[[ट्रोगिर]] का ऐतिहासिक नगर
||1997
||ट्रोगिर <br/><small>{{coord|43|31|0.85|N|16|15|4.91|E|region:HR|display=inline,title}}</small>
||810; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[File:St. Jacobuskathedraal ; Sibenik.jpg|150px]]
||[[सिबेनिक]] का [[सिबेनिक कैथेड्रल|सेंट जेम्स का कैथेड्रल]]
||2000
||सिबेनिक <br/><small>{{coord|43|44|8.38|N|15|53|20.93|E}}</small>
||963; i, ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[File:Aerial image of the Stari Grad Plain (view from the southwest).jpg|150px]]
||[[स्टारी ग्राड मैदान]]
||2000
||हवर
||1240; ii, iii, v (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[साइप्रस]] (3) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[File:Khirokitia1.jpg|150x150px|alt=Small white circular huts with flat roof.]]
||[[खिरोकिशिआ]]
||1998
|[[लार्नाका जिला]]<br/><small>{{coord|34|47|54|N|33|20|36|E}}</small>
||सांस्कृतिक:(Ii) (iii) (iv)
|
|-
| [[चित्र:House of Aion, Paphos - Apollo and Marsyas Mosaic.jpg|150px]]
||[[पेफॉस]]
||1980
|पेफॉस जिला<br/><small>{{coord|34|45|30|N|32|24|20|E}}</small>
|सांस्कृतिक:(Iii) (vi)
|
|-
|[[File:Pedoulas Konstantin.jpg|150px]]
||[[ट्रोदोस क्षेत्र के चित्रित चर्च]]
||(1985, 2001)
|ट्रोदोस पर्वत, लिमासोल और निकोसिया जिला<br/><small>{{coord|34|55|13|N|33|5|45|E}}</small>
|सांस्कृतिक:(Iii) (vi)
|
|}
<!--*[[Apostolos Andreas Monastery]] not according to the UNESCO website-->
=== [[चेक गणराज्य]] (12) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Cesky_Krumlov_01.jpg|100px]]
||[[चेस्की क्रमलोव]] का ऐतिहासिक केंद्र
||1992
|चेस्की क्रमलोव,दक्षिण बोहेमियन क्षेत्र<br/><small>{{coord|48|49|0|N|14|19|0|E}}</small>
|617; 1992; iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Hradschin Prag.jpg|100px]]
||[[प्राग]] का ऐतिहासिक केंद्र
||1992
|प्राग<br/><small>{{coord|50|5|23|N|14|25|10|E|region:CZ_type:landmark |name=प्राग का ऐतिहासिक केंद्र}}</small>
|616; 1992; ii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Telc - main square.jpg|100px]]
||[[टेल्च]] का ऐतिहासिक केंद्र
||1992
|टेल्च, विसोचिना क्षेत्र<br/><small>{{coord|49|10|59.988|N|15|27|0|E|}}</small>
|621; 1992; i, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Zelená hora - poutní kostel.jpg|100px]]||[[ज़ेलेना होरा]] में [[नेपोमुक के सेंट जॉन का तीर्थयात्री चर्च]]||1994
|ज़ाद नाद साजावो, विसोचिना क्षेत्र<br/><small>{{coord|49|34|49|N|15|56|31|E}}</small>
|690; 1994; iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Kutná Hora - pohled od Svaté Barbory.jpg|100px]]||[[कुटना होरा]]: ऐतिहासिक शहर केन्द्र||1995
|कुटना होरा, सेंट्रल बोहेमियन क्षेत्र<br/><small>{{coord|49|57|0|N|15|16|0|E|}}</small>
|732; 1995; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Lednice castle.jpg|100px]]
||[[लेडनिस-वाल्टिस सांस्कृतिक परिदृश्य]]
||1996
||[[दक्षिण मोरावियन क्षेत्र]]
||763; 1996; i, ii, iv (सांस्कृतिक)
||
|-
| [[चित्र:Kromeriz, Marktpl, Schl.jpg|100px]]
||[[क्रोमिरीज़ दुर्ग|क्रोमिरीज़ आर्कबिशप महल]]
||1998
| [[क्रोमिरीज़]], [[ज़लिन प्रदेश]]
| 860; 1998; ii, iv
|
|-
| [[चित्र:Holašovice.jpg|100px]]
||[[होलासविस]] का ऐतिहासिक आरक्षित गांव
||1998
|[[दक्षिण बोहेमियाई क्षेत्र]]
| 861; 1998; ii, iv
|
|-
| [[चित्र:Litomyšl, Schloss.jpg|100px]]
||[[लिटोमैसल दुर्ग]]
||2000
|पार्दुबिस प्रदेश
|901; 1999; ii, iv
|
|-
| [[चित्र:Holy Trinity Column.jpg|100px]]
||[[ओलोमौक में पवित्र ट्रिनिटी कॉलम]]
||2000
|[[ओलोमौक]], [[ओलोमौक क्षेत्र]]
|859; 2000; i, iv
|
|-
| [[चित्र:Villa Tugendhat front.JPG|100px]]
||[[विला तुगेन्दाट]]
||2001
|[[ब्रनो]], [[दक्षिण मोरावियन क्षेत्र]]
|1052; 2001; ii, iv
|
|-
| [[चित्र:Třebíč Ghetto 'Entry'.jpg|100px]]
||[[ट्रेबिस में यहूदी क्वार्टर और सेंट प्रोकोपियस बेसिलिका]]
||2003
| [[ट्रेबिस]], [[विसोकिना क्षेत्र]]
| 1078; 2003; ii, iii
|
|}
=== [[डेनमार्क]] (4) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Jelling_gr_kl_Stein.JPG|150px]]
||[[जेलिंग पत्थर|जेलिंग रूनिक पत्थर]]
||1994
|जेलिंग, वेजल नगर पालिका, दक्षिणी डेनमार्क
|Iii, (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Roskilde_domkirke_west_fassade.jpg|150px]]
||[[रोस्किल्ड कैथेड्रल]]
||1995
|रोज़किल्डे, ज़ीलैंड क्षेत्र
|सांस्कृतिक:(ii), (iv)
|
|-
|[[चित्र:Helsingor Kronborg.jpg|150px]]
||[[क्रोंबोर्ग|क्रोंबोर्ग दुर्ग]]
||2000
|हेलसिंगिंग, राजधानी क्षेत्र, ज़ीलैंड
|सांस्कृतिक:(Iv)
|
|-
|[[चित्र:Ilulisat_Isfjord.jpg|100px]]
||[[लुलिसत आइसफॉर्ड]]
|1996
|[[ग्रीनलैण्ड|ग्रीनलैंड]], डेनमार्क
|प्राकृतिक:(vii), (viii)
|
|}
=== [[एस्टोनिया]] ===
{| class="wikitable" width=90%
!width=6%|
!width=76%|
!width=8%|
|-
| [[चित्र:Tallinna vanalinn.jpg|100px]]||[[ताल्लिन]] के ऐतिहासिक केंद्र (पुराना शहर||1997
|-
| [[चित्र:Hammerfest Meridianstein.jpg|100px]]||[[स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क]] — [[#बेलारस|बेलारूस]], [[#एस्टोनिया|एस्टोनिया]], [[#फिनलैंड|फिनलैंड]], [[#लताविया|लताविया]], [[#लिथुआनिया|लिथुआनिया]], [[#मोल्दोवा|मोल्दोवा]], [[#नॉर्वे|नॉर्वे]], [[#स्वीडन|स्वीडन]], [[#यूरोपियन रूस|रूसी संघ]] और [[#यूक्रेन|यूक्रेन]] के साथ साझा||2005
|}
=== [[फ़िनलैण्ड|फ़िनलैंड]] (7) ===
{| class="wikitable" width=90%
!width=6%|
!width=76%|
!width=8%|
|-
|[[चित्र:Suomenlinna.jpg|100px]]
||[[हेलसिंकी]] के पास, [[सुमेनलिन्ना]] का किला
||1991
|-
|[[चित्र:Rauma Finland Helsingintori 20051225.jpg|100px]]
||[[ओल्ड राउमा]], [[राउमा]] के लकड़ी के शहर के केंद्र
||1991
|-
|[[चित्र:Petäjävesi Old Church from south.JPG|100px]]
||[[पेटजावेसी पुराना चर्च]]
||1994
|-
|[[चित्र:Verla.JPG|100px]]
||जाला का [[वेरला]] ग्राउंडवुड और बोर्ड मिल
||1996
|-
|[[चित्र:Sammallahdenmaki.jpg|100px]]
||[[लप्पी]] में [[सम्मल्लाहडेनमकी]] की कांस्य युगीन कब्र स्थल
||1999
|-
|[[चित्र:Kvarken.png|100px]]
||[[हेगा कुस्तेन|उच्च तट]] और [[क्वार्केन]] द्वीपसमूह — [[#स्वीडन|स्वीडन]] के साथ साझा
||2000, 2006
|-
|[[चित्र:Hammerfest Meridianstein.jpg|100px]]
||[[स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क]] — [[#बेलारस|बेलारूस]], [[#एस्टोनिया|एस्टोनिया]], [[#फिनलैंड|फिनलैंड]], [[#लताविया|लताविया]], [[#लिथुआनिया|लिथुआनिया]], [[#मोल्दोवा|मोल्दोवा]], [[#नॉर्वे|नॉर्वे]], [[#स्वीडन|स्वीडन]], [[#यूरोपियन रूस|रूसी संघ]] और [[#यूक्रेन|यूक्रेन]] के साथ साझा
||2005
|}
=== [[फ़्रान्स|फ़्रांस]] (31) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Chartres 1.jpg|100px|]]
||[[चार्टर्स कैथेड्रल]]
||1979
|[[सेंटर-वैल दे लोयर]]
|1979, 81; सांस्कृतिक
|
|-
|[[चित्र:Lascaux2.jpg|100px]]
||[[वेजेरे घाटी]] की प्रागैतिहासिक स्थलें और [[लैसकॉक्स|सजाए गए सुंदर चित्रमयकन्दरा]]
||1979
|[[नॉवेले एक्विटाइन]]
|1979, 85; सांस्कृतिक
|
|-
|[[चित्र:200506 - Mont Saint-Michel 02.JPG|100px]]
||[[ले मॉन्ट-सेंट-मिशेल]] और इसकी खाड़ी
||1979
|
|
|
|-
|[[चित्र:Versailles Garden.jpg|100px]]
||[[पैलेस ऑफ़ वर्सेलिस|वर्सेलिस के महल और उद्यान]]
||1979
|
|
|
|-
|[[चित्र:Vezelay Ste Madeleine Westfassade.jpg|100px]]
||[[वेज़ेले एबे|वेज़ेले, चर्च और पहाड़ी]]
||1979
|
|
|
|-
|[[चित्र:Amiens-cathédrale.jpg|100px]]
||[[एमियंस कैथेड्रल]]
||1981
|
|
|
|-
|[[चित्र:Abbaye de Fontenay-EgliseBatiments.jpg|100px]]
||[[सिस्टर्सन्स]] [[ऐबी ऑफ़ फोन्टेन]]
||1981
|
|
|
|-
|[[चित्र:Fontainebleau 119.jpg|100px]]
||[[फ़ॉन्टाइनेब्लू का महल|फ़ॉन्टाइनेब्लू के महल और उद्यान]]
||1981
|
|
|
|-
|[[चित्र:Amphitheatre Arles.jpg|100px]]
||[[अर्ल्स]] के रोमन और रोमनस्क स्मारक
||1981
|
|
|
|-
|[[चित्र:Theatre-antique vue-generale-sud.jpg|100px]]
||रोमन रंगमंच और इसके आसपास के क्षेत्र और ऑरेंज का [[विजय स्मारक]]
||1981
|
|
|
|-
|[[चित्र:Koenigliche Saline in Arc-et-Senans Bild1 800px.jpg|100px]]
||[[आर्क-एट-सेनान का रॉयल साल्टवर्क्स]]
||1982
|
|
|
|-
|[[चित्र:Corse-04860-calanche de Piana-château fort.jpg|100px]]
||केप गिरोलटा, केप पोर्टो, स्कैंडोला नेचर रिजर्व और पियाना कैलंच, [[कोर्सिका]]
||1983
|
|
|
|-
|[[चित्र:Meister von Saint-Savin-sur-Gartempe 001.jpg|100px]]
||[[सेंट-साविन-सुर-गार्टमेपे का एबी चर्च]]
||1983
|
|
|
|-
|[[चित्र:Nancy Place Stanislas BW 2015-07-18 13-49-20 1.jpg|100px]]
||[[नांसी]] के [[प्लेस स्टेनिस्लस]], प्लेस दे ला कैरिएर, और प्लेस दे एलायंस
||1983
|
|
|
|-
|[[चित्र:Pont du Gard 2006.jpg|100px]]
||[[पोंट डू गार्ड]], [[रोमन साम्राज्य|रोमन]] [[जलवाही सेतु]]
||1983
|
|
|
|-
|[[चित्र:Absolute ponts couverts 02.jpg|100px]]
||[[स्ट्रासबर्ग]]–[[ग्रांड आइल, स्ट्रैसबर्ग|ग्रांड आइल]]
||1988
|
|
|
|-
|[[चित्र:Facade de la Cathédrale de Reims - Avenue libergier.jpg|100px]]
||[[रीम्स कैथेड्रल]]: पूर्व [[सेंट-रेमी का एबी]] और [[टाऊ का महल]], [[रिम्स]]
||1991
|
|
|
|-
|[[चित्र:Aftnn The Seine from the Eiffel Tower.jpg|100px]]
||[[पेरिस|पैरिस]], [[सीन नदी|सीन नदी का किनारा]]
||1991
|
|
|
|-
|[[चित्र:Bourges Cathedral exterior 004.JPG|100px]]
||[[बोर्गेस कैथेड्रल]]
||1992
|
|
|
|-
|[[चित्र:Die Brücke von Avignon.JPG|100px]]
||[[अविगनोन]] का ऐतिहासिक केंद्र
||1995
|
|
|
|-
|[[चित्र:Bridge over Canal du Midi.jpg|100px]]
||[[कैनाल दु मिडी]]
||1996
|
|
|
|-
|[[चित्र:Carcassonne JPG01.jpg|100px]]
||[[कारकैसन]] का ऐतिहासिक किलाबन्द शहर
||1997
|
|
|
|-
|[[चित्र:Pirineo Ordesa 3.jpg|100px]]
||[[पायरेनीस]]/पिरिनोस: मोंटे पेरडीडो/[[मोंट पेर्दू]] — फ्रांस और स्पेन के बीच साझा।
||1997, 1999
|
|
|
|-
|[[चित्र:Hotel-dieu lyon fourviere.jpg|100px]]
||[[ल्यों]] के ऐतिहासिक स्थल
||1998
|
|
|
|-
|[[चित्र:Poitiers notre dame5.JPG|100px]]
||[[फ्रांस में सैंटियागो दे कंपोस्टेला के मार्गों की विश्व विरासत स्थल|फ्रांस में सैंटियागो दे कंपोस्टेला के मार्ग]]
||1998
|
|
|
|-
|[[चित्र:Cloitre cordeliers st emilion01.JPG|100px]]
||[[सेंट-एमिलियन]] का क्षेत्राधिकार
||1999
|
|
|
|-
|[[चित्र:Cher spiegelbeeld.jpg|100px]]
||[[लवार घाटी|सुली सुर लवार और चालोंनेस सुर लवार के बीच स्थित लवार घाटी]]
||2000
|
|
|
|-
|[[चित्र:Provins10.jpg|100px]]
||[[प्रोविंस]], मध्ययुगीन मेले का शहर
||2001
|
|
|
|-
|[[चित्र:Beffroi de Loos (3).JPG|100px]]
||[[बेल्जियम और फ्रांस के घंटाघर]] — बेल्जियम और फ्रांस के बीच साझा धरोहर स्थलें।
||(1999), 2005
|
|
|
|-
|[[चित्र:Le Havre Vue Plage 14 07 2005.jpg|100px]]
||[[ल हावरे]], [[ऑगस्ट पेरेट]] द्वारा पुनर्निर्मित शहर
||2005
|
|
|
|-
|[[चित्र:Bordeaux view from tower Pey Berland.png|100px]]
||[[बोर्दो]] का शहर
||2007
|
|
|
|}
=== [[जॉर्जिया (देश)|जॉर्जिया]] (3) ===
{| class="wikitable" width=90%
!width=6%|
!width=76%|
!width=8%|
|-
| [[चित्र:Bagrati cathedral, georgia.jpg|100px]]<br />[[चित्र:Kutaisi gelati.jpg|100px]]
||कुटैसी और जेलसी मठ में बागर्टी कैथेड्रल||1994
|-
| [[चित्र:Sweticxoveli.jpg|100px]]||मत्शेता के ऐतिहासिक स्मारक ||1994
|-
| [[चित्र:Svanetiskt torn.jpg|100px]] ||ऊपरी [[स्वनेती]]||1996
|}
=== [[जर्मनी]] (32) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Aachener Dom BW 2016-07-09 16-20-40.jpg|100px|]]
||[[आचेन कैथेड्रल]]
||1978
|
|
|
|-
|[[चित्र:Speyerer Dom Altrheinschleife.jpg|100px]]
||[[स्पीयर कैथेड्रल]]
||1981
|
|
|
|-
||[[चित्र:2004-06-27-Germany-Wuerzburg-Lutz Marten-Residenz side view 1.jpg|100px]]
|[[वुर्जबर्ग निवास]],प्रांगण उद्यान और निवास स्क्वायर के साथ
||1981
|
|
|
|-
|[[चित्र:Wies eingang.jpg|100px]]
||[[वीस चर्च|वीस]] का तीर्थ चर्च
||1983
|
|
|
|-
|[[चित्र:Augustusburg c.JPG|100px]]
||ब्रूल, ([[राइनलैन्ड]]) का [[ऑगस्टसबर्ग और फाल्कनलस्ट महल]]
||1984
|
|
|
|-
|[[चित्र:Hildesheim Cathedral.South.Tower.JPG|100px]]
||[[हिल्डशेइम]] का [[सेंट मैरी कैथेड्रल]] और [[सेंट माइकल चर्च]]
||1985
|
|
|
|-
|[[चित्र:Trier Porta Nigra BW 1.JPG|100px]]
||[[ट्रीअर]], जर्मनी का सबसे पुराना शहर, 9 स्मारक
||1986
|
|
|
|-
|[[चित्र:Lübeck Holstentor.jpg|100px]]
||[[ल्यूबेक]] का [[हंसियाटिक लीग|हंसियाटिक नगर]]
||1987
|
|
|
|-
|[[चित्र:Ostteil Sanssouci.jpg|100px]]
||[[पॉट्सडैम और बर्लिन के महल और उद्यान]] (ताला [[संस्सौची]] सहित)
||1990, 1992, 1999
|
|
|
|-
|[[चित्र:Lorsch.jpg|100px|]]
||[[लोर्श एबे|लोर्श के एबी और अल्टेनमुन्स्टर]]
||1991
|
|
|
|-
|[[चित्र:Goslar kaiserpfalz.jpg|100px]]
||[[रमेल्सबर्ग]] की खदान और [[गोस्लर]] का ऐतिहासिक नगर
||1992
|
|
|
|-
|[[चित्र:Bamberger Dom BW 6.JPG|100px]]
||[[बैम्बर्ग]] का नगर
||1993
|
|
|
|-
|[[चित्र:KlosterMaulbronnBrunnenhausInnen.jpg|100px]]
||[[मौलब्रॉन मठ]]
||1993
|
|
|
|-
|[[चित्र:Quedlinburg Schlossberg.jpg|100px]]
||कॉलेजिएट चर्च,[[कुडलिनबर्ग]] दुर्ग और पुराना शहर
||1994
|
|
|
|-
|[[चित्र:VH Hochofen1 pano.jpg|100px]]
||[[वोल्क्लिंगेन आयरनवर्क्स]]
||1994
|
|
|
|-
|[[चित्र:Grube Messel fg04.jpg|100px]]
||[[मेस्सेल पिट]] [[जीवाश्म]] स्थल
||1995
|
|
|
|-
|[[चित्र:Bauhaus.JPG|100px]]
||[[वाइमर]] और [[डेसौ]] की [[बोहौस]] और इसके स्थल
||1996
|
|
|
|-
|[[चित्र:Cologne Cathedral.jpg|100px]]
||[[कोलोन कैथेड्रल]]
||1996
|
|
|
|-
|[[चित्र:Stadtkirche Wittenberg.JPG|100px]]
||[[इस्लेबेन]] और [[विटनबर्ग]] के [[मार्टिन लुथर|लूथर मेमोरियल]]
||1996
|
|
|
|-
|[[चित्र:Markt Weimar.jpg|100px]]
||शास्त्रीय [[वाइमर]]
||1998
|
|
|
|-
|[[चित्र:Bodemuseum.jpg|100px]]
||[[संग्रहालय द्वीप]] ''(मुसुमसिंसेल),'' [[बर्लिन]]
||1999
|
|
|
|-
|[[चित्र:Wartburg Eisenach DSCN3512.jpg|100px]]
||[[वार्टबर्ग|वार्टबर्ग किला]]
||1999
|
|
|
|-
|[[चित्र:Riesigk.jpg|100px]]
||[[डेसौ-वोरलिट्ज गार्डन क्षेत्र]]
||2000
|
|
|
|-
|[[चित्र:StGeorgReichenau-pjt.jpg|100px]]
|| [[रेइचेनॉ द्वीप|रेइचेनॉ द्वीप के मठ]]
||2000
|
|
|
|-
|[[चित्र:ZecheZollverein.jpg|100px]]
||[[ज़ोलवेरिन कोयला खान औद्योगिक परिसर]]
||2001
||[[एस्सेन|एस्सेन, जर्मनी]]
|सांस्कृतिक:(ii), (iii)
|
|-
|[[चित्र:Stralsund St Nikolai.jpg|100px]]
||[[स्ट्रॉलसंड]] और [[विस्मर]] के ऐतिहासिक केंद्र
||2002
|[[मेक्क्लेंबुर्ग]], जर्मनी
|2002: (ii), (iv) सांस्कृतिक
|
|-
|[[चित्र:Mittelrhein Burg Katz.jpg|100px]]
||[[राइन जॉर्ज|ऊपरी मध्य राइन घाटी]]
||2002
|[[राइनलैन्ड]], जर्मनी
|2002:(ii), (iv), (v) सांस्कृतिक
|
|-
|[[चित्र:Bremen-rathaus-dom-buergerschaft.jpg|100px]]
||ब्रेमेन बाजार चौक में स्थित [[ब्रेमेन सिटी हॉल|सिटी हॉल]] और [[ब्रेमेन रोलैंड|रोलैंड]]
||2004
|[[ब्रेमेन]], जर्मनी
|सांस्कृतिक:(iii), (iv), (vi)
|
|-
|[[चित्र:Dresden2.jpg|100px]]
||[[ड्रेस्डेन एल्बे घाटी]]*
||2004
|[[सैक्सोनी]], जर्मनी
|सांस्कृतिक:(ii), (iii),(iv), (v)
|वाल्डस्क्लोस्चेन पुल के निर्माण के बाद स्थल को सूची से हटा दिया गया है।
|-
|[[चित्र:Park Muzakowski5.jpg|100px]]
||[[मुस्काउ उद्यान]] [[लुसैटियन नीइस|नीइस नदी]] के दोनों किनारों पर — [[#पोलैंड|पोलैंड]] के साथ साझा, जिसे वहाँ [[पार्क मुजाकोव्स्की]] के नाम से जाना जाता है।
||2004
|ऊपरी लुसैटिया, जर्मनी; पोलैंड
|सांस्कृतिक:(i), (iv)
|
|-
|[[चित्र:Saalburg.jpg|100px]]
||[[रोमन लाइम्स|रोमन साम्राज्य के सीमांत]]: [[#इंग्लैण्ड|युनाइटेड किंगडम]] के साथ साझा।
||2005
|जर्मनी, इंग्लैण्ड
|सांस्कृतिक:(ii), (iii), (iv)
|
|-
|[[चित्र:Regensburg 08 2006 2.jpg|100px]]
||स्टडैमोफ के साथ [[रेगेन्सबुर्ग]] का पुराना शहर
||2006
|रेगेन्सबुर्ग, जर्मनी
|(ii), (iii), (iv) सांस्कृतिक
|
|}
=== [[यूनान]] (18) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" width=35% | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" width=25%| अवस्थिति
! scope="col" width=20%| [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Bassai Temple Of Apollo Detail.jpg|100px]]
||[[बास्सै|बास्सै का अपोलो का मंदिर]]
||1986
|[[बास्सै]], [[मेस्सेनिआ]] [[पेलोपोनीज़ प्रदेश]]<br />{{coord|37.429722|21.900278|name=बास्सै}}
|392; 1986; i, ii, iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Acropolis of Athens 01361.JPG|100px]]
||[[एथेन्स का दुर्ग]]
|| 1987
|[[एथेंस]], [[अटिका]]<br />{{coord|37.97|23.73|name=Acropolis of Athens}}
|404; 1987; i, ii, iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Greece Delphi Tholos.jpg|100px]]
||[[डेल्फी]] की पुरातात्विक स्थल
||1987
|[[फोसिस]],[[मध्य ग्रीस क्षेत्र]]<br />{{coord|38.48|22.5|name=डेल्फी की पुरातात्विक स्थल}}
|393; 1987;i, ii, iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Theater of Epidaurus 1.jpg|100px]]
||[[एपिडौरुस]] की पुरातात्विक स्थल
||1988
|एपिडौरुस,[[पेलोपोनीज़ प्रदेश]]<br />{{coord|37.633333|23.133333|name=एपिडौरुस}}
|491; 1988; i, ii, iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:PorteDeRhodesGrece010906.JPG|100px]]
||[[रोड्स]] का मध्ययुगीन शहर
||1988
|रोड्स, [[दक्षिण एजियन]]<br />{{coord|36.433333|28.216667|name=रोड्स}}
|493; 1988;ii, iv, v (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Meteora Greece 2006.JPG|100px]]
||[[मेटेओरा]]
||1988
|[[कलाबका]] के पास, [[थेसली]]<br />{{coord|39.714167|21.631111|name=मेटेओरा}}
|455; 1988;i, ii, iv, v, vii
|
|-
| [[चित्र:Athos-simonos-petra.jpg|100px]]
||[[एथोस पर्वत]]
||1988
|उत्तरपूर्वी ग्रीस, <br />{{coord|40.157222|24.326389|name=एथोस पर्वत}}
|454; 1988; i, ii, iv, v, vi, vii
|
|-
| [[चित्र:Thessaloniki-Arch of Galerius (eastern face).jpg|100px]]
||[[थेसालोनिकी के पैलिओक्रिस्चियन और बैजन्टाईन स्मारक]]
||1988
|[[थेसालोनिकी]], [[केंद्रीय मैसेडोनिया क्षेत्र]]<br />{{coord|40.65|22.9}}
|456; 1988; i, ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Olympos.jpg|100px]]
||[[ओलिम्पिया]] के पुरातात्विक स्थल
||1989
|[[एलिस रीजनल यूनिट|एलिस]], [[पश्चिमी ग्रीस क्षेत्र]]<br />{{coord|37.64|21.67|name=ओलिम्पिया के पुरातात्विक स्थल}}
|517; 1989; i, ii, iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Mistra 7.jpg|100px]]
||[[मिस्ट्रस|मिस्ट्रस के पुरातात्विक स्थल]]
||1989
|[[लकोनिआ]], [[पेलोपोनीज़ प्रदेश]]<br />{{coord|37.08|22.37|name=मिस्ट्रस के पुरातात्विक स्थल}}
|511; 1989;ii, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:House of Cleopatra, Delos.jpg|100px]]
||[[डेलोस]] के द्वीप
||1990
|[[सिक्लेडिस]], [[दक्षिण एजियन]]<br />{{coord|37.39|25.16|name=डेलोस}}
|530; 1990; ii, iii, iv, vi
|
|-
| [[File:20090803 hosiosloukas12.jpg|100px]] [[File:Gotic Dafni.jpg|100px]] [[File:Nea Moni - buildings.JPG|100px]]
||[[चिओस]] के [[डेफनी मठ]], [[होसिओस लोकास]] का मठ<br />और [[चिओस के नीआ मोनी|नीआ मोनी]] का मठ
||1990
|होसिओस लोकास: [[डिस्टोमो]], [[बोएशिया]]<br />{{coord|38.394722|22.746667}}<br>डेफनी मठ: [[चैडारी]], [[अटिका]]<br />{{coord|38.013056|23.635833}}<br>नीआ मोनी: [[चिओस]], [[उत्तरी एजियन क्षेत्र]]<br />{{coord|38.373906|26.055739}}
|537; 1990; i, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Heraion of Samos (Greece), the only standing column.jpg|100px]]
||[[समोस]] का [[पायथागोरियन]] और [[समोस का हेरायन|हेरायन]]
||1992
|समोस, [[उत्तरी एजियन क्षेत्र]] <br />{{coord|37.701208|26.868783}}
|595; 1992; ii, iii
|
|-
| [[चित्र:Vergina2.jpg|100px]]
||एगाई की पुरातात्विक स्थल (आधुनिक नाम [[वर्जिना]])
||1996
|[[इमाथिया]] [[केंद्रीय मैसेडोनिया क्षेत्र]]<br />{{coord|40.47|22.43|}}
|780; 1996; i, iii (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Mycenae lion gate dsc06382.jpg|100px]]
||[[मैसीन]] और [[तीर्यंस]] की पुरातात्विक स्थल
||1999
|अर्गोलिस, [[पेलोपोनीज़ प्रदेश]]<br />{{coord|37.64|22.75}}
|941; 1999; i, ii, iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[File:Chora di Patmos con il Monastero di San Giovanni "il teologo".JPG|100px]]
||[[सेंट जॉन थियोलॉजियन का मठ]]<br />और उसके पास के ऐतिहासिक केंद्र
||1999
|[[पाटमोस]], [[दक्षिण एजियन]]<br />{{coord|37.309189|26.548053|name=}}
|942; 1999; iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:St. Spyridon Church in Corfu.jpg|100px]]
||[[कोरफू]] का प्राचीन नगर
||2007
|कोरफू, [[आयनियन द्वीप क्षेत्र]]<br />{{coord|39.616667|19.916667|name=Corfu}}
|978; 2007; iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[File:Ancient Theatre, built by Philip II in the 4th century BC and later reconstructed by the Romans, Philippi (7272297822).jpg|100px]]
|[[फिलिप्पी]]
|2016
|फिलिप्पी, [[कावाला]] [[पूर्वी मैसेडोनिया और थ्रेस]]<br />{{coord|41.013056|24.286389|name=}}
|1517; 2016;iii, iv
|
|}
=== [[वैटिकन सिटी|वेटिकन सिटी]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Roma San Paolo fuori le mura BW 2021-09-29 14-02-11 v2.jpg|100px]]
||रोम का ऐतिहासिक केंद्र, और दीवार के बाहर सैंट पॉल बेसिलिका, [[इटली]] के साथ साझा
||1980, 1990
|[[वैटिकन सिटी|वेटिकन सिटी]]
|सांस्कृतिक: i, ii, iv, vi
|
|-
| [[चित्र:StPetersBasilicaEarlyMorning.jpg|100px]]
||[[वैटिकन सिटी|वेटिकन सिटी]]
||1984
|वेटिकन सिटी
|सांस्कृतिक: i, ii, iv, vi
|
|}
=== [[हंगरी]] (8) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:ParliamentFromDanube.jpg|100px]]
||[[बुडापेस्ट]]; [[डैन्यूब नदी|डेन्यूब]] का किनारा, [[बुडा क़िला]] क्वार्टर और [[एंड्रैसी एवेन्यू]] सहित।
||1987,2002
|{{sort|हंगरी|[[बुडापेस्ट]], {{flag|हंगरी}}<br/><small>{{coord|47|28|57|N|19|4|14|E}}</small>}}
|400; 1987; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Okt 12.jpg|100px]]
||[[होलोको]]
||1987
|[[नॉग्रैड काउंटी]] {{flag|हंगरी}}<br/><small>{{coord|47|59|40|N|19|31|45|E|}}</small>
|401; 1987; v (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Aggtelek National Park, Baradla Cave.jpg|100px]]
||[[एजटेलेक कार्स्ट और स्लोवाक कार्स्ट की गुफाएं]]
||1995
|कोसेक क्षेत्र, [[स्लोवेनिया]] और <br/>[[एजटेलेक]], [[हंगरी]] के बीच साझा।<br/><small>{{coord|48|28|33|N|20|29|13|E}}</small>
|725; 1995; vii (सांस्कृतिक)
|
|-
|
||[[पन्नोन्हाल्मा आर्चएबी|पन्नोन्हाल्मा का मिलेनरी बेनेडिक्टिन मठ]] और इसके प्राकृतिक पर्यावरण
||1996
|[[पन्नोन्हाल्मा]], [[ग्योर-मोसोन-सोपरोन काउंटी]], हंगरी
|
|
|-
| [[चित्र:Hungarian Grey cattle-1.jpg|100px]]
||[[हॉर्टोबैजी राष्ट्रीय उद्यान]] — द ''पस्ज़ता''
||1999
|[[बोर्सोद-अबौज-ज़ेम्प्लेन काउंटी]], [[हंगरी]] <br/><small>{{coord|47|35|40|N|21|9|24|E}}</small>
|474; 1999; iv, v (प्राकृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Hungary pecs - szekesegyhaz1.jpg|100px]]
||[[पेक्स]] के प्रारंभिक ईसाई क़ब्रिस्तान
||2000
|[[पेक्स]], [[बरानिया काउंटी]], [[हंगरी]]<br/><small>{{coord|46.07732|N|18.22376|E}}</small>
|853; 2000; iii, iv(सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Podersdorf Nordstrand.jpg|100px]]
||[[न्युसिडल झील]] के सांस्कृतिक परिदृश्य
||2001
|[[बुर्गेनलैंड]], [[ऑस्ट्रिया]] और<br/> [[ग्योर-मोसोन-सोपरोन काउंटी]] <br/>[[हंगरी]] के साथ साझा। <br/><small>{{coord|47|43|9|N|16|43|22|E}}</small>
|772; 2001; v (प्राकृतिक)
|
|-
| [[File:Tokaj - Hegyalja-06.jpg|100px]]
||[[टोकज वाइन क्षेत्र|टोकज वाइन क्षेत्र सांस्कृतिक परिदृश्य]]
||2002
|बोर्सोड-एबौज-ज़ेम्प्लेन काउंटी {{flag|हंगरी}}<br/><small>{{coord|48|9|N|21|21|E}}</small>
|1063; 2002; iii, v
|
|}
=== [[आइसलैण्ड|आईस्लैंड]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Öxará01.jpg|100px]]
||[[थिंगवेल्लिर]] राष्ट्रीय उद्यान
||2004
|
|
|
|}
=== [[आयरलैण्ड गणराज्य]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Newgrange ireland 750px.jpg|100px]]
||[[न्यूग्रेंज]] के पुरातात्विक एन्सेबल
||1993
|
|
|
|-
| [[चित्र:Skelligmichsteps.jpg|100px]]
||[[स्केलिग माइकल]]
|| 1996
|
|
|
|}
=== [[इटली]] (41) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" width=45% | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Capodiponte0001.jpg|100px]]
||[[वेल्कामोनिका के शिला चित्रकारी]]
||1979
||[[ब्रेसिया प्रांत]], [[लोम्बार्डी]]
||94; 1979; iii, vi (सांस्कृतिक)
||
|-
|[[चित्र:Santa Maria delle Grazie Milano.jpg|100px]]
||[[लिओनार्दो दा विंची|लियोनार्डो दा विन्ची]] द्वारा "[[द लास्ट सपर]]" के साथ [[सांता मारिया डेले ग्राज़ी]] के चर्च और डोमिनिकन कॉन्वेंट
||1980
||[[मिलान]], [[लोम्बार्डी]]
||93; 1980; i, ii (सांस्कृतिक)
||
|-
||[[चित्र:Na Koloseum i K Franciszki Rzymianki.JPG|100px]]
|[[रोम]] का ऐतिहासिक केंद्र, और दीवार के बाहर सैंट पॉल बेसिलिका
||1980, 1990
| [[रोम]], [[लात्सियो]] <br/>[[#वेटिकन सिटी|वेटिकन सिटी]] के साथ साझा
|91; 1980;[nb 3] i, ii, iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Santa Maria del Fiore.jpg|100px]]
||[[फ़्लोरेन्स]] का ऐतिहासिक केंद्र
||1982
|[[फ़्लोरेन्स]], [[टस्कनी]]
|174; 1982; i, ii, iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Cathedral and Campanary - Pisa 2014 (2).JPG|100px]]
||[[पियाज़ा देई मिराकली|पियाज़ा देई मिराकली, पीसा]]
||1987, 2007
|[[पीसा]], [[टस्कनी]]
|395; 1987; i, ii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Venezia 2004.jpg|100px]]
||[[वेनिस]] और इसके [[अनूप झील|अनूप]]
||1987
| [[वेनिस प्रांत]], [[वैनेतो]]
|394; 1987; i, ii, iii, iv, v, vi (मिश्रित)
|
|-
|[[चित्र:View -3.jpg|100px]]
||[[सैन गिमिग्नानो]] का ऐतिहासिक केंद्र
||1990
|[[सिएना प्रांत]], [[टस्कनी]]
|550; 1990; i, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Matera01.jpg|100px]]
||[[सासी दि मटेरा|सासी]] और [[मटेरा]] के पैदल यात्री चर्चों का पार्क
||1993
|मटेरा, [[बाज़िलीकाता]]
|670; 1993; iii, iv, v (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:La Rotonda.png|100px]]
||[[विसेंज़ा]] शहर और [[वेनेतो के पैलाडियन विला]]
||1994, 1996
|[[वैनेतो]]
|712; 1994; i, ii (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Crespi d'Adda fabbrica.JPG|100px|]]
||[[क्रेस्पी डी'अडा]]
||1995
|[[बर्गेमो प्रांत]], [[लोम्बार्डी]]
|730; 1995; iv, v (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Ferrara Castello Estense 28mar06 01.jpg|100px]]
||[[फेरारा]], पुनर्जागरण का शहर, और इसके [[पो (नदी)#डेल्टा|पो डेल्टा]]
||1995, 1999
|फेरारा शहर, [[एमीलिया-रोमाञा]]
|733; 1995; ii, iii, iv, v, vi (मिश्रित)
|
|-
|[[चित्र:Naplesbay01.jpg|100px]]
||[[नेपल्स]] का ऐतिहासिक केंद्र
||1993
|नेपल्स शहर, [[कांपानिया]]
|726; 1995; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Piazza_del_Campo_(Siena).jpg|100px]]
||[[सिएना]] का ऐतिहासिक केंद्र
||1995
|सिएना शहर, [[टस्कनी]]
|717; 1995; i, ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Castel del Monte BW 2016-10-14 12-26-11 r.jpg|100px]]
|[[कास्टेल डेल मोंटे]]
||1994
|[[आंद्रिया]] और [[कोरेटो]], [[बारी प्रांत]], [[पुलिया]]
|398; 1996; i, ii, iii (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Ravenna BW 3.JPG|100px]]
||[[रवेना]] के शुरुआती ईसाई स्मारक
||1996
|रवेना शहर, [[एमीलिया-रोमाञा]]
|788; 1996; i, ii, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Dom Fassade3- s.jpg|100px]]
||[[पियेन्ज़ा]] शहर का ऐतिहासिक केंद्र
||1996
| पियेन्ज़ा, [[सिएना प्रांत]], [[टस्कनी]]
|789; 1996; i, ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Alberobello BW 2016-10-16 13-43-03.jpg|100px|]]
||[[अल्बेरोबेलो]] की [[ट्रुलो|ट्रुली]]
||1996
|[[बारी प्रांत]], [[पुलिया क्षेत्र]]
|787; 1996; iii, iv, v (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Der bourbonische Königspalast in Caserta.jpg|100px]]
||कसेर्टा में 18वीं शताब्दी का [[कसेर्टा का महल|शाही महल]] और उद्यान, [[वान्वितेली का जलवाही सेतु]], और [[सैन लुइसियो]] परिसर
||1997
|[[कसेर्टा प्रांत|कसेर्टा]] और [[बेनेवेंटो प्रांत]], [[कांपानिया]]
|549; 1997; i, ii, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Temple of Concordia, Agrigento.jpg|100px]]
||[[वैले देई टेम्पली|एग्रीजेंटो के पुरातात्विक क्षेत्र]]
||1997
|[[एग्रीजेंटो प्रांत]], [[सिसिली]]
|831; 1997; i, ii, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Herculaneum12.jpg|100px]]
|| [[पांपेई|पोम्पेई]] के पुरातात्विक क्षेत्र, [[हरक्यूलेनियम]] और [[टोरे अनुजीएता]]
||1997
|[[नेपल्स प्रांत]], [[कांपानिया]]
|829; 1997; iii, iv, v (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Orto botanico padova.JPG|100px]]
||वनस्पति-उद्यान (ऑर्टो बोटानिको दी पडोवा), [[पडुआ]]
||1997
|[[पादुआ प्रांत]], [[वैनेतो]]
|824; 1997; ii, iii
|
|-
|[[चित्र:Modena-Ghirlandina.jpg|100px]]
||[[मोडेना कैथेड्रल|कैथेड्रल]], [[टोरे सिविक]] और [[पियाज़ा ग्रांडे]], [[मोडेना]]
||1997
|[[मोडेना प्रांत]], [[एमीलिया-रोमाञा]]
|827; 1997; i, ii, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Vue de Positano depuis la plage.JPG|100px]]
||[[अमाफली तट]]
||1997
|[[सालेर्नो प्रांत]], [[कांपानिया]]
|830; 1997; ii, iv, v (प्राकृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Portovenere-vista01.jpg|100px]]
||[[पोर्टो वेनेरे]], [[सिंक टेरे]], और उनके द्वीप समूह ([[पलमारिया द्वीप|पलमारिया]], [[टिनो द्वीप|टिनो]] और [[टिनेटो]])
||1997
|[[ला स्पेज़िया प्रांत]], [[लिगुरिया]]
|826; 1997; ii, iv, v
|
|-
|[[चित्र:Stupinigi.jpg|100px]]
||[[रॉयल हाउस ऑफ सवोय के निवास]]
||1997
|[[ट्यूरिन प्रांत]], [[पिडमांट]]
|823; 1997; i, ii, iv, v (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[File:Nuraghe Su Nuraxi - Barumini - Sardinia - Italy - 29.jpg|100px]]
||[[सु नूरैक्सी]]
||1997
|[[मेडियो कैम्पिडानो प्रांत]], [[सार्डिनिया|सारडीनिया]]
|833; 1997; i, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Casale Bikini.jpg|100px]]
||[[विला रोमाना डेल कैसल]]
||1997
|[[एना प्रांत]], [[सिसिली]]
|832; 1997; i, ii, iii (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Aquileia Basilica, esterno - Foto Giovanni Dall'Orto.jpg|100px]]
||[[एक्विलिआ]] के पितृसत्तात्मक बेसिलिका और पुरातत्व क्षेत्र
||1998
|[[यूडाइन प्रांत]], [[फ्रिउली–वेनज़िआ जुलिआ]]
|825; 1998; iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Paestum BW 2013-05-17 13-58-28.jpg|100px]]
||[[सेलेन्टो और वेलो डी डियानो राष्ट्रीय उद्यान]], [[पेस्तुम]] और [[वेलिया]] के पुरातत्व स्थल और सर्टोसा डी पादुला के सहित
||1998
|[[सालेर्नो प्रांत]], [[कांपानिया]]
|842; 1998; iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Urbino z02.jpg|100px]]
||[[अरबीनो]] के ऐतिहासिक केंद्र
||1998
|[[पेसारो और अरबीनो प्रांत]], [[मार्श]]
|828; 1998; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Canopus vanaf serapium.jpg|100px]]
||[[विला एड्रियाना]] (टिवोली)
||1999
|[[रोम प्रांत]], लात्सियो
|907; 1999; i, ii, iii (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Assisi San Francesco BW 2.JPG|100px]]
||[[असीसी]], [[सैन फ्रांसेस्को डी अससी के बेसिलिका|सैन फ्रांसेस्को की बेसिलिका]] और अन्य फ्रांसिसन स्थलें
||2000
|[[पेरुजिया प्रांत]], [[उम्ब्रिआ]]
|990; 2000; i, ii, iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:L'Arena.JPG|100px]]
||[[वेरोना]] शहर
||2000
|[[वेरोना प्रांत]], [[वैनेतो]]
|797; 2000; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Eolie.jpg|100px]]
||इसोले इओली ([[एओलियन द्वीप समूह]])
||2000
|दक्षिणी [[तिरहेनियन सागर]], [[सिसिली]]
|908; 2000; viii
|
|-
|[[चित्र:Villa d'Este 01.jpg|100px]]
||[[विला डी'एस्टे]], टिवोली
||2001
|[[रोम प्रांत]], लात्सियो
|1025; 2001; i, ii, iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:San domenico church01.jpg|100px]]
||[[वैल डी नोटो]] (दक्षिण-पूर्वी [[सिसिली]]) के गत [[बरॉक]] नगर
||2002
|[[सिसिली]]
|1024; 2002; i, ii, iv, v (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Sacro Monte di Crea. Cappella del Paradiso3.jpg|100px]]
||[[पिडमांट और लोम्बार्डी के सैक्री मोंटी]]
||2003
|[[लोम्बार्डी]], [[पिडमांट]]
|1068; 2003; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Tarquinia Tomb of the Leopards.jpg|100px]]
||[[सर्विटेरी]] और [[टेरक्विनिआ]] के एट्रस्कैन नेक्रोपोलिस
||2004
|[[विटेर्बो प्रांत]], लात्सियो
|1158; 2004; i, iii, iv
|
|-
|[[चित्र:Val d'orcia -pienza.JPG|100px]]
||[[वैल डी'ओर्सिया]]
||2004
|[[सिएना प्रांत]], [[टस्कनी]]
|1026; 2004; iv, vi
|
|-
|[[चित्र:Syracuse theatre2.jpg|100px]]
||पेंटालिका के [[सायराक्रूस]] और [[पेंटालिका के नेक्रोपोलिस|चट्टानी नेक्रोपोलिस]]
||2005
|[[सायराक्रूस प्रांत]], [[सिसिली]]
|1200; 2005; ii, iii, iv, vi
|
|-
|[[चित्र:Genova-DSCF7470.JPG|100px]]
||[[जेनोआ]]: ले स्ट्रैड नुओव और [[पलाज़ी देई रोली]] की प्रणाली
||2006
|[[जेनोवा प्रांत]], [[लिगुरिया]]
|1211; 2006; ii, iv
|
|}
=== [[लातविया]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Riga Dom-Düna.jpg|100px]]
||[[रीगा]] के ऐतिहासिक केंद्र
||1997
|-
|[[चित्र:Hammerfest Meridianstein.jpg|100px]]
||[[स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क]] — [[#बेलारस|बेलारूस]], [[#एस्टोनिया|एस्टोनिया]], [[#फिनलैंड|फिनलैंड]], [[#लताविया|लताविया]], [[#लिथुआनिया|लिथुआनिया]], [[#मोल्दोवा|मोल्दोवा]], [[#नॉर्वे|नॉर्वे]], [[#स्वीडन|स्वीडन]], [[#यूरोपियन रूस|रूसी संघ]] और [[#यूक्रेन|यूक्रेन]] के साथ साझा
||1997
|}
=== [[लिथुआनिया]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Vilnius Ostrobramska.jpg|100px]]
||[[विल्नुस]] के ऐतिहासिक केंद्र (पुराना शहर)
||1994
|-
|
||[[कौरोनियन स्पिट]]
||2000
|-
|[[चित्र:Lithuania Kierniów mounds2.jpg|100px]]
||[[कर्नवे]] पुरातत्व स्थल (कर्नवे के सांस्कृतिक अरक्षित)
||2004
|-
|[[चित्र:Hammerfest Meridianstein.jpg|100px]]
||[[स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क]] — [[#बेलारस|बेलारूस]], [[#एस्टोनिया|एस्टोनिया]], [[#फिनलैंड|फिनलैंड]], [[#लताविया|लताविया]], [[#लिथुआनिया|लिथुआनिया]], [[#मोल्दोवा|मोल्दोवा]], [[#नॉर्वे|नॉर्वे]], [[#स्वीडन|स्वीडन]], [[#यूरोपियन रूस|रूसी संघ]] और [[#यूक्रेन|यूक्रेन]] के साथ साझा
||2005
|}
=== [[लक्ज़मबर्ग]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Mudam 04 jnl.jpg|100px]]
||[[लक्ज़मबर्ग नगर]]: इसके पुराने आवास और किलेबंदी
||1994
|}
=== [[माल्टा]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:St Sebastian Curtain.jpg|100px]]
||[[वैलेटा|वैलेटा नगर]]
||1980
|-
|[[चित्र:Malta 04 Hypogeum Hal Saflieni.jpg|100px]]
||[[हेल-सफ्लिनी का हायपोजियम]]
||1980
|-
|
||*[[माल्टा के बड़े पत्थरों का बना मंदिर]]: [[गंतिजा]], [[हैगर किम]], [[मनेज्ड्रा]], और [[टारज़िएन मंदिर]]
||1980, 1992
|}
=== [[मॉल्डोवा|मोल्डोवा]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Hammerfest Meridianstein.jpg|100px]]
| [[स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क]] — [[#बेलारस|बेलारूस]], [[#एस्टोनिया|एस्टोनिया]], [[#फिनलैंड|फिनलैंड]], [[#लताविया|लताविया]], [[#लिथुआनिया|लिथुआनिया]], [[#मोल्दोवा|मोल्दोवा]], [[#नॉर्वे|नॉर्वे]], [[#स्वीडन|स्वीडन]], [[#यूरोपियन रूस|रूसी संघ]] और [[#यूक्रेन|यूक्रेन]] के साथ साझा
| 2005
|}
=== [[मॉन्टेनीग्रो]] (2) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Alley kotor.JPG|100px]]
| [[कोटोर]] का प्राकृतिक और सांस्कृतिक-ऐतिहासिक क्षेत्र
| 1979
|-
| [[चित्र:Durmitor - near Minin bogaz.jpg|100px]]
| [[डर्मिटर राष्ट्रीय उद्यान]]
| 1980, 2005
|}
=== [[नीदरलैण्ड|नीदरलैंड]] (10) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Schokland4.jpg|100px]]
| [[शोकलैंड]] और आसपास के स्थान
| 1995
|नूरदूस्तपोल्डेर, [[फ्लेवोलैंड]]<br /><small>{{Coord|52|38|19|N|5|46|18|E|display=inline}}<small>
|739; सांस्कृतिक (iii, v)
|
|-
| [[चित्र:Muizenfort.jpg|100px]]
| [[स्टेलिंग वैन एम्स्टर्डम|एम्स्टर्डम की सुरक्षा घेरा]]
| 1996
| [[उत्तर हॉलैंड]], [[यूट्रेक्ट]]<br /><small>{{Coord|52|22|28|N|4|53|35|E|display=inline}}<small>
| 759; सांस्कृतिक (ii, iv, v)
|
|-
| [[चित्र:Willemstad harbor.jpg|100px]]
| [[विलेमस्टाद|विलेमस्टाद, भीतरी शहर और बंदरगाह, कुराकाओ का ऐतिहासिक क्षेत्र]]
| 1997
| [[विलेमस्टाद]], कुराकाओ <br /><small>{{Coord|12|6|6.984|N|68|54|7.99|W}}<small>
| सांस्कृतिक (ii, iv, v)
|
|-
| [[चित्र:Windmills of Kinderdijk (11).JPG|100px]]
| [[किंडरडिज्क की पवन चक्कियाँ|किंडरडिज्क-एल्शआउट के चक्कियों का संजाल]]
| 1997
| [[अल्बलास्डरम]] और [[नीउव-लेक्करलैंड]], [[दक्षिण हॉलैंड]]<br /><small>{{Coord|51|52|57|N|4|38|58|E|display=inline}}<small>
| 818; सांस्कृतिक (i, ii, iv)
|
|-
| [[चित्र:Woudagemaal 03.JPG|100px]]
| [[आईआर.डी.एफ. वाउडेजेमाल]] (डी.एफ. वौडा भाप पंपिंग स्टेशन)
| 1998
| [[लेमर]], [[लेमस्टरलैंड]] [[फ्राइजलैंड]]<br /><small>{{Coord|52|50|44.988|N|5|40|44.00|E|display=inline}}<small>
| सांस्कृतिक (i, ii, iv)
|
|-
| [[चित्र:Beemster 1869.png|100px]]
| ड्रूगमेकेरिज दे बीमस्टर ([[बीमस्टर]] पोल्डर)
| 1999
| [[बीमस्टर]], [[उत्तर हॉलैंड]]<br /><small>{{Coord|52|32|56|N|4|54|40|E|display=inline}}<small>
| सांस्कृतिक (i, ii, iv)
|
|-
| [[चित्र:Rietveldschroderhuis.jpg|100px]]
| रित्वेल्ड स्क्रोडरूइस ([[रित्वेल्ड स्क्रोडर घर]])
| 2000
| [[यूट्रेक्ट]], यूट्रेक्ट<br /><small>{{Coord|52|5|7|N|5|8|50|E|display=inline}}<small>
| सांस्कृतिक (i, ii)
|
|-
|[[File:Waddenzee zon.jpg|100px]]
|[[वैडन सागर]]
|2009
|[[फ्राइजलैंड]], [[उत्तर हॉलैंड]]<br /><small>{{Coord|53|23|27|N|5|39|57|E|display=inline}}<small>
|1314; प्राकृतिक (viii, ix, x)
|
|-
|[[File:Amsterdam airphoto.jpg|100px]]
|[[एम्स्टर्डम की नहरें]]
|2010
|[[एम्स्टर्डम]], [[उत्तर हॉलैंड]]<br /><small>{{Coord|52|21|54|N|4|53|16|E|display=inline}}</small>
|सांस्कृतिक (i, ii, iv)
|
|-
|[[File:Rotterdam van nelle fabriek.jpg|100px]]
|[[वैन नेले फैक्टरी]]
|2014
|[[रॉटरडैम]], [[दक्षिण हॉलैंड]]<br /><small>{{Coord|51|55|24|N|4|26|00|E|display=inline}}</small>
|सांस्कृतिक (ii, iv)
|
|}
=== [[नॉर्वे|नार्वे]] (8) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Bryggen, Bergen3.JPG|100px]]
| [[ब्रायगन]]
| 1979
|[[होर्डलैंड]]<br/><small>{{coord|60|23|50|N|5|19|23|E}}</small>
|सांस्कृतिक: (Iii)
|
|-
| [[चित्र:Urnesstavkirke.jpg|100px]]
| [[उर्नेस स्टाव चर्च]]
| 1980
| [[सॉयन ऑग फ्योर्डेन]]<br/><small>{{coord|61|18|00|N|7|20|00|E}}</small>
| सांस्कृतिक:(i) (ii) (iii)
|
|-
| [[चित्र:Rorosmartna 20070220.JPG|100px]]
| [[रोरोस|रोरोस खनन शहर और उसके परिदृश्य]]
| 1980
| [[सुर-त्रोंदेलाग]]<br/><small>{{coord|62|34|26|N|11|23|08|E}}</small>
| सांस्कृतिक:(Iii) (iv) (v)
|
|-
| [[चित्र:Altarockcarvings2.jpg|100px]]
| [[आल्टा के शिला नक्काशियाँ]]
| 1985
| [[फ़िनमार्क]]<br/><small>{{coord|69|57|00|N|23|11|00|E}}</small>
| सांस्कृतिक:(Iii)
|
|-
| [[चित्र:Vegavista.jpg|100px]]
| [[वेगावयेन|वेगा द्वीप]] — वेगा द्वीपसमूह
| 2004
| [[नोर्डलैंड]]<br/><small>{{coord|65|37|00|N|11|45|00|E}}</small>
| सांस्कृतिक: (v)
|
|-
| [[चित्र:Hammerfest Meridianstein.jpg|100px]]
| [[स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क]] - बेलारूस, एस्टोनिया, फिनलैंड, लताविया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, स्वीडन, रूसी संघ और यूक्रेन के साथ साझा
| 2005
| [[फ़िनमार्क]]
| सांस्कृतिक:(II) (iii) (vi)
|
|-
| [[चित्र:207 Geirangerfjord.jpg|100px]]
| पश्चिम नार्वेजियन फॉर्ड्स - [[गीरेंजरफॉजर्ड]] और [[नेरोफॉजर्ड]]
| 2005
| [[मोर ओग रोंस्डल]] और [[सॉयन ऑग फ्योर्डेन]]<br/><small>{{coord|62|07|00|N|7|10|00|E}}</small>
| प्राकृतिक: (vii) (viii)
|
|-
| [[File:Ammoniakkvannfabrikken Notodden 1914 1916.jpg|150x150px]]
| [[रुजुकन-नोटोडेन औद्योगिक विरासत स्थल]]
| 2015
| [[टेलीमार्क]]<br/><small>{{coord|59|52|43|N|8|35|37|E}}</small>
| सांस्कृतिक: (ii)(iv)
|
|}
=== [[पोलैंड]] (13) ===
{{details|पोलैंड के विश्व धरोहर स्थल}}
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Sukiennice at night (2007).jpg|100px]]
|| [[क्रकाउ पुराना शहर|क्राको के ऐतिहासिक केंद्र]]
|| 1978
| [[क्रकाउ]]
| 29; 1978; iv
|
|-
| [[चित्र:Wieliczka-daVinci.jpg|100px]]
|| [[विएलिस्ज़्का]] और [[बोस्चनिया]] के शाही नमक खान
|| 1978
| [[विएलिस्ज़्का]]
| 32; 1978; iv
|
|-
| [[चित्र:Birkenau gate.JPG|100px]]
|| [[आउशवित्स यातना शिविर|आउशवित्स बिर्कनाउ, जर्मन नाज़ी यातना शिविर]] (1940-1945)
|| 1979
| [[औसवेसिम]]
| 31; 1979; vi
|
|-
| [[चित्र:Wisent.jpg|100px]]
|| [[बिआलोविज़ा वन]]
|| 1979, 1992
| बेलारूस और पोलैंड के बीच साझा
| 33; 1979; vii
|
|-
| [[चित्र:Warszawa Rynek2.png|100px]]
|| [[वारसॉ|वारसॉ के ऐतिहासिक केंद्र]]
|| 1980
| [[वारसॉ]]
|30; 1980; ii, vi
|
|-
| [[चित्र:Zamosc 12.jpg|100px]]
|| [[ज़मोज़]] का पुराना नगर
|| 1992
|| [[ज़मोज़]]
|| 564; 1992; iv
|
|-
| [[चित्र:Malbork 1.jpg|100px]]
|| [[मेलबोर्क किला|मेलबोर्क में टेटोनिक आदेश का महल]]
|| 1997
| [[मेलबोर्क]]
| 847; 1997; ii, iii, iv
|
|-
| [[चित्र:Torun01CenterWithWall level corr.jpg|100px]]
|| [[टोरून के मध्ययुगीन नगर]]
|| 1997
| [[टोरून]]
| 835; 1997; ii, iv
|
|-
| [[चित्र:Monastery in Kalwaria Zebrzydowska 02.JPG|100px]]
|| [[कलवारिया ज़ेब्राइज़ोव्स्का]]: मैननेरिस्ट वास्तु और उद्यान परिदृश्य परिसर और तीर्थयात्री उद्यान
|| 1999
| [[कलवारिया ज़ेब्राइज़ोव्स्का]]
| 905; 1999; ii, iv
|
|-
| [[चित्र:Jawor2.jpg|100px]]
|| [[शांति के चर्च|जवोर और स्विडनिका में शांति के चर्च]]
|| 2001
| [[जवोर]], [[स्विडनिका]]
| 1054; 2001; iii, iv, vi
|
|-
| [[चित्र:Kosciol Haczow.JPG|100px]]
|| [[दक्षिणी लघुतर पोलैंड के लकड़ी के चर्च]]
|| 2003
| [[लघुतर पोलैंड वोइवोडीशिप]]
| 1053; 2003; iii, iv
|
|-
| [[चित्र:Park Muzakowski4.jpg|100px]]
|| [[मुस्कुएर उद्यान]]/[[मुज़कोवस्की उद्यान]], [[लुसैटियन नीस|निसा नदी]] के दोनों ओर
|| 2004
| जर्मनी और पोलैंड के बीच साझा।
| 1127; 2004; i, iv
|
|-
| [[चित्र:Wrocław - Jahrhunderthalle5.jpg|100px]]
|| वरोक्लाव का [[शताब्दी महाकक्ष]]
|| 2006
| [[वरोक्लाव]]
| 1165; 2006; i, ii, iv
|
|}
=== [[पुर्तगाल]] (15)===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Cidade de Angra do Heroísmo, ilha Terceira, Açores.jpg|100px]]
| अज़ोरेस के [[आंगरा दो हेरोइसमो]] शहर का केंद्रीय क्षेत्र
| 1983
| [[ट्रेसिरा द्वीप]]
| 206; 1983; iv, vi सांस्कृतिक
|
|-
| [[चित्र:Tomartemplarschurch2.jpg|100px]]
| [[तोमर गोत्र (जाट)|तोमर]] का [[मसीह का सम्मेलन]]
| 1983
| [[तोमर गोत्र (जाट)|तोमर]]
| 265; 1983; i, vi सांस्कृतिक
|
|-
| [[चित्र:BatalhaFacade1.jpg|100px]]
| [[बटाल्हा का मठ]]
| 1983
| [[बटाल्हा]]
| 264; 1983; i, ii सांस्कृतिक
|
|-
| [[चित्र:JeronimosMonastery1.jpg|100px]]
| [[लिस्बन]] में [[जेरोनीमोस मठ|हियरोनाइट्स का मठ]] और [[बेलेम मीनार]]
| 1983
| [[लिस्बन]]
| 263; 1983, 2008 (विस्तारित); iii, iv; सांस्कृतिक
|
|-
| [[File:Templo romano de Évora (1).jpg|100px]]
| [[एवोरा]] का ऐतिहासिक केंद्र
| 1986
| [[एवोरा]]
| 361; 1986; ii, iv सांस्कृतिक
|
|-
| [[चित्र:Mosteiro de Alcobaça (Portugal).jpg|100px]]
| [[अल्कोबेसा मठ]]
| 1989
| [[अल्कोबेसा]]
| 505; 1989; i, iv सांस्कृतिक
|
|-
| [[चित्र:Nt-sintra1.jpg|100px]]
| [[सिंट्रा]] का सांस्कृतिक परिदृश्य
| 1995
| [[सिंट्रा]]
| 723; 1995; ii, iv, v; सांस्कृतिक
|
|-
| [[चित्र:PortoCityHall.jpg|100px]]
| [[पोर्टो]] का ऐतिहासिक केंद्र
| 1996
| [[पोर्टो]]
| 755; 1996; iv सांस्कृतिक
|
|-
| [[चित्र:Rock Art Foz Coa 01.jpg|100px]]
| [[सिगा वर्दे]] और [[कोआ घाटी की प्रागैतिहासिक शिला कलाकृति स्थल]]
| 1998
| डोरो क्षेत्र (स्पेन के साथ साझा)
| 866; 1998, 2010 (विस्तारित); i, iii सांस्कृतिक
|
|-
| [[चित्र:Forest Los Tilos.jpg|100px]]
| [[मदेरा]] के [[लॉरेल वन|लॉरीसिल्वा]] वन क्षेत्र
| 1999
| [[मदेरा]]
| 934; 1999; ix, x प्राकृतिक
|
|-
| [[चित्र:Rio douro.jpg|100px]]
| [[अल्टो डोरो|अल्टो डोरो वाइन क्षेत्र]]
| 2001
| [[डोरो सब्रेगियन]]
| 1046; 2001; iii, iv, v;
|
|-
| [[File:D. Afonso Torre.jpg|100px]]
| [[गुइमारीस]] का ऐतिहासिक केंद्र
| 2001
| [[गुइमारीस]], [[मिन्हो प्रांत]]
| 1031; 2001; ii, iii, iv; सांस्कृतिक
|
|-
| [[चित्र:Landscape of the Pico Island Vineyard Culture.jpg|100px]]
| [[पिको द्वीप वाइनयार्ड संस्कृति का परिदृश्य]]
| 2004
| [[पिको द्वीप]], [[एज़ोरेस]]
| 1117; 2004; iii, v;
|
|-
| [[File:Elvas e muralhas.jpg|100px]]
| [[एल्वस के सीमा गढ़सेना नगर और इसकी किलेबंदी]]
| 2012
| [[एल्वस]]
| 1367; 2012; iv
|
|-
| [[File:Royal Palace, Universidade de Coimbra (10249002256).jpg|100px]]
| [[कोइम्ब्रा विश्वविद्यालय|कोइम्ब्रा विश्वविद्यालय - अल्ता और सोफिया]]
| 2013
| [[कोइम्ब्रा]]
| 1387; 2013; ii, iii, iv, vi;
|
|}
=== [[रोमानिया]] (7) ===
{{Main|UNESCO World Heritage Sites in Romania}}
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Delta_Dunarii_500.jpg|100px|]]
||[[डेन्यूब डेल्टा]]
||1991
|[[टलसी काउंटी]]
| 588; 1991; vii, x
|
|-
|[[File:Mănăstirea Arbore.JPG|100px|]][[File:Mănăstirea Sfântul Ioan cel Nou26.jpg|100px|]]
||[[मोल्दाविया के चर्च]]
||1993
| [[सुसेवा काउंटी]]
|598; 1993, 2010 (विस्तारित); i, iv
|
|-
|[[चित्र:Horezu_church.jpg|100px|]]
||[[होरेज़ू मठ]]
||1993
|[[होरेज़ू]], [[वैल्सिया काउंटी]]
|597; 1993; ii
|
|-
|[[चित्र:Biertan_IMG_5606.jpg|100px|]]
||[[ट्रांसिल्वेनिया के किलेबंद चर्चों के साथ गांव]]
||1993, 1999
|ट्रांसिल्वेनिया
|596; 1993, 1999 (विस्तारित); iv
|
|-
|[[चित्र:Sarmizegetusa_temples.jpg|100px|]][[File:Costesti Cetatuie Dacian Fortress 2011 - Tower House One and Stairs-4.jpg|100px|]]
||[[ओरस्टी पहाड़ों के डासियन किले]]
||1999
| [[हूनेदोआरा काउंटी]], [[अल्बा काउंटी]]
|906; 1999; ii, iii, iv
|
|-
| [[File:Sighisoara - Strada Turnului.jpg|100px|]]
||[[सिघिसोरा का ऐतिहासिक केंद्र]]
||1999
|सिघिसोरा, [[म्यूरेस काउंटी]]
|902; 1999; iii, iv
|
|-
|[[चित्र:S%C3%A2rbi_Josani.jpg|100px|]][[File:Biserca de lemn de la Șurdești, Maramureș.jpg|100px|]]
||[[मारमुरेस के लकड़ी के चर्च]]
||1999
| [[मारमुरेस काउंटी]]
| 904; 1999; iv
|
|}
=== [[रूस|रूसी संघ]] (युरोपियाई रूस) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" width=30%| स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" width=30%| अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Trinitylavra.jpg|100px]]
| [[सेंट सर्जियस के ट्रिनिटी लैव्रा|ट्रिनिटी सर्जियस लैव्रा]] के वास्तुशिल्प एन्सेबल
| 1993
| [[सेर्गियेव पोसाद]], [[मास्को ओब्लास्ट]]
| 657; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Kolomen00.jpg|100px]]
| असेंशन चर्च, [[कोलोमेन्सकोय]]
| 1994
| [[मास्को]]
| 634; ii (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Derbent winter.jpg|100px]]
| [[डेर्बेन्ट]] के नगरकोट, प्राचीन शहर और किले की इमारतें
| 2003
| [[डेर्बेन्ट]], [[दाग़िस्तान]]
| 1070; iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Barents old.jpg|100px]]
| [[सॉलोवेत्स्की द्वीप समूह|सॉलोवेत्स्की द्वीपों]] का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक समष्टि
| 1992
| [[सॉलोवेत्स्की द्वीप समूह]], [[आरख़ान्गेल्स्क ओब्लास्त|अर्खांगेल्स्क ओब्लास्ट]]
| 632; iv
|
|-
| [[File:Вид с озера Лебедь на залив.jpg|100px]]
| [[कौरोनियन स्पिट]]
| 2000
| [[कलिनिनग्रैड ओब्लास्ट]]- [[#लिथुआनिया|लिथुआनिया]] के साथ साझा
| 994; v
|
|-
| [[चित्र:Ferapontovo.jpg|100px]]
| [[फेरापोंतोव मठ]] के समष्टि
| 2000
| [[वोलोडा ओब्लास्ट]]
| 982; i, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Novodevichy zima.jpg|100px]]
| [[नवोदेवीची कान्वेंट]] के समष्टि
| 2004
| [[मास्को|मॉस्को]]
| 1097; i, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Kazan.jpg|100px]]
| [[काज़ान क्रेमलिन]] के ऐतिहासिक और वास्तुशिल्प परिसर
| 2000
| [[काज़ान]], [[तातारस्तान]]
| 980; ii, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:PeterhoffFountains.jpg|100px]]
| [[सेंट पीटर्सबर्ग के ऐतिहासिक केंद्र और स्मारकों के संबंधित समूह]]
| 1990
| [[सेंट पीटर्सबर्ग]]
| 540; i, ii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Kotorosl.jpg|100px]]
| [[यरोस्लाव]] शहर के ऐतिहासिक केंद्र
| 2005
| [[यरोस्लावी ओब्लास्ट]]
| 1170; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Natalya dulchenko kokui.jpg|100px]]
| [[वेलीकी नोव्गोरोड|नोव्गोरोड]] और परिवेश के ऐतिहासिक स्मारक
| 1992
| [[नॉवग्रोद ओब्लास्ट]]
| 604; ii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Kischi Kirchen und Glockenturm.JPG|100px]]
| [[किजी पोगोस्त]]
| 1990
| [[कारेलिया गणतंत्र]]
| 544; i, iv, v (प्राकृतिक)
|
|-
| [[चित्र:2003-04-18 Moscow Kremlin.jpg|100px]]
| [[मॉस्को क्रेमलिन]] और [[रेड स्क्वायर]]
| 1990
| [[मास्को|मॉस्को]]
| 545; i, ii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Hammerfest Meridianstein.jpg|100px]]
| [[स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क]]
| 2005
| [[लेनिनग्राद ओब्लास्ट]]- बेलारूस, एस्टोनिया, फिनलैंड, लताविया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, नॉर्वे, स्वीडन और यूक्रेन के बीच साझा।
| 1187; ii, iii, vi (प्राकृतिक)
|
|-
| [[File:Four herous01.JPG|100px]]
| [[वर्जिन कोमी वन]]
| 1995
| [[कोमी गणराज्य]]
| 719; vii, ix (प्राकृतिक)
|
|-
| [[File:Rododendron1.jpg|100px]]
| [[पश्चिमी काकेशस]]
| 1999
| [[क्रास्नोदार क्राय]] और [[आदिगेया]]
| 900; ix, x (प्राकृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Bogolyubovo.jpg|100px]]
| [[व्लादिमीर और सुजदेल के सफेद स्मारक]]
| 1992
| [[व्लादिमीर ओब्लास्ट]]
| 633; i, ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[सर्बिया]] (4)===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Sopocani monastery16.jpg|100px]]
| [[स्टारी रस]] और [[सोपोचीनी मठ]] का सांस्कृतिक-ऐतिहासिक क्षेत्र
| 1979
| [[रास्का (क्षेत्र)|रास्का]]
| 96; i, iii (सांस्कृतिक)
|
|-
|
| [[स्टूडेनिका मठ]]
| 1986
| [[क्रलजेवो]]
| 389; i, ii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:14th-century_fresco_of_Jesus_Christ_bearing_the_cross,_Visoki_Dečani,_Kosovo.jpg|100px]]
| [[कोसोवो के मध्ययुगीन स्मारक]]
||2004, 2006
| [[डेकानी]], [[ग्रेकेनिका]], [[पेजे]], [[प्रिजरेन]]
| 724; ii, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Felix romuliana.jpg|100px]]
| [[गेम्जिग्राद|गेम्जिग्राद-रोम्यूलिन, गैलेरियस का महल]]
| 2007
| [[ज़ेजेकार]]
| 1253; iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[स्लोवाकिया]] (7)===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Banska Stiavnica- pohlad z Katovej ulice.jpg|100px]]
||[[बेन्स्का स्टायवेनिका]] का ऐतिहासिक नगर
|| 1993
| [[बेन्स्का स्टायवेनिका]], [[बैंस्का बिस्त्रिका क्षेत्र]]
| सांस्कृतिक: (iv), (v)
|
|-
| [[चित्र:Spisska nova ves...castle.jpg|100px]]
||[[लेवोका, स्पिस किला और संबंधित सांस्कृतिक स्मारक]]
|| 1993
| [[प्रीसोव क्षेत्र|प्रीसोव]] और [[कोसिस क्षेत्र]]
| सांस्कृतिक: (Iv)
|
|-
| [[चित्र:Vlkolinecslovakia001.jpg|100px]]
||[[वल्कोलिनेस]]
|| 1993
| [[रुजोमबेरोक जिला]], [[ज़िलिना प्रदेश]]
| सांस्कृतिक:(iv), (v)
|
|-
| [[चित्र:Zadielska tiesnava.jpg|100px]]
| [[एजटेलेक कार्स्ट और स्लोवाक कार्स्ट की गुफाएं]]*
|| 1995, 2000
| कोसेक क्षेत्र, [[स्लोवेनिया]] और एजटेलेक, [[हंगरी]] के बीच साझा।
| प्राकृतिक: (Vii)
|
|-
| [[चित्र:Bardejov_namesti_3773.JPG|100px]]
||[[बर्डेजोव]] नगर संरक्षण आरक्षित
|| 2000
||बर्डेजोव, [[प्रीसोव क्षेत्र]]
||सांस्कृतिक: (iii), (iv)
|
|-
||[[File:Ручей в Стужице.JPG|100px]]
||[[कार्पैथियंस के आद्य बीच वन और यूरोप के अन्य क्षेत्र]]
|| 2007
| [[प्रीसोव क्षेत्र]]- [[#यूक्रेन|यूक्रेन]] के साथ साझा
| प्राकृतिक: (ix)
|
|-
||[[File:Bodruzal 2011 Cerkva sv Mikulasa.jpg|100px]]
||[[स्लोवाक कार्पैथियंस के लकड़ी का चर्च]]
|| 2008
| [[कोसिस क्षेत्र|कोसिस]], [[बैंस्का बिस्त्रिका क्षेत्र|बैंस्का बिस्त्रिका]], [[ज़िलिना प्रदेश|ज़िलिना]] और [[प्रीसोव क्षेत्र]]
| सांस्कृतिक: (iii), (iv)
|
|}
=== [[स्लोवेनिया]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Skocjanske jame.jpg|100px]]
| [[स्कोज़न गुफाएं]]
| 1986
|}
=== [[स्पेन]] (40) ===
{{Main|स्पेन के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल}}
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Spain Andalusia Granada BW 2015-10-25 17-22-07.jpg|100px|]]
||[[अलहम्ब्रा]], [[ज़ेनेरालाइफ]] और [[अलबैज़िन]],
||1984, 1994
|[[ग्रेनाडा|ग्रेनेडा]]
|314; 1984, 1 99 4 (विस्तारित); i, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Catedral de Burgos-Fernán González.JPG|100px]]
||[[बर्गोस कैथेड्रल]]
||1984
|[[बर्गोस]]
|316; 1984; ii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
||[[चित्र:Mezquita Orange Tree Courtyard.jpg|100px]]
| [[कोर्डोबा, स्पेन|कोर्डोबा]] का ऐतिहासिक केंद्र
||1984, 1994
|[[कोर्डोबा, स्पेन|कोर्डोबा]]
|313; 1984, 1 99 4 (विस्तारित); i, ii, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:El Escorial-Madrid.jpg|100px]]
||[[एल एस्कोरल|मठ और एस्कोरियल स्थल]],
||1984
|[[मद्रिद|मैड्रिड]]
|318; 1984; i, ii, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Casa Milà - Barcelona, Spain - Jan 2007.jpg|100px]]
||एंटोनी गोदी की कृतियाँ
||1984, 2005
|बार्सिलोना
|320; 1984, 2005 (विस्तारित); i, ii, iv
|
|-
|[[चित्र:Techo de Altamira (replica)-Museo Arqueológico Nacional.jpg|100px]]
||[[अल्तामिरा की गुफा]]
||1985
|कंटैब्रिया, एस्टुरिस
|310; 1 9 85, 2008 (विस्तारित); i, iii
|
|-
|[[चित्र:Oviedo el viajero JMM.JPG|100px]]
||[[एस्टुरिस वास्तुकला|ओवेडियो के स्मारक और एस्टुरिस राज्य]]
||1985, 1998
|ओवेडियो, एस्टुरिस
|312; 1 9 85, 1 99 8 (विस्तारित); i, ii, iv
|
|-
|[[चित्र:Ávila 24-8-2002.jpg|100px]]
||[[आवीला]] का पुराना शहर, और इसका एक्सट्रा-मुरुस चर्च
||1985
|[[आवीला]], कैस्टिले और लेओन
|348; 1985, 2007 (संशोधित); iii, iv
|
|-
|[[चित्र:Segovia - 02.jpg|100px]]
||[[सेगोविया]] का पुराना शहर और इसका [[जलवाही सेतु]]
||1985
|[[सेगोविया]], कैस्टिले और लेओन
|311; 1985; i, iii, iv
|
|-
|[[चित्र:Catedral santiago compostela.jpg|100px|]]
||[[सांतिआगो दे कोम्पोस्तेला]] (पुराना शहर)
||1985
|[[सांतिआगो दे कोम्पोस्तेला]], [[गलिशिया]]
|347; 1985; i, ii, vi
|
|-
|[[चित्र:Garajonay3.JPG|100px]]
||[[गैराजोनेय राष्ट्रीय उद्यान]]
||1986
|ला गोमेरा, [[कैनरी द्वीपसमूह]]
|380; 1986; vii, ix
|
|-
|[[चित्र:Toledo Skyline Panorama, Spain - Dec 2006.jpg|100px]]
||[[तोलेदो, स्पेन|तोलेदो]] का ऐतिहासिक शहर Historic City of [[Toledo, Spain|Toledo]]
||1986
|[[तोलेदो, स्पेन|तोलेदो]], [[कास्तिया-ला मांचा]]
|379; 1986; i, ii, iii, iv
|
|-
|[[चित्र:La Aljafería - Palacio taifa 02.JPG|100px]]
||[[आरागोन की मदेजर वास्तुकला]]
||1986, 2001
|तेरूल और ज़ारागोज़ा प्रांत, [[आरागोन]]
|378; 1986, 2001 (विस्तारित); iv
|
|-
|[[चित्र:Caceres Spain Plaza Mayor Arco.jpg|100px]]
|[[काकेरेस]] का पुराना शहर
||1986
|काकेरेस, [[एक्सत्रेमेद्युरा]]
|384; 1986; iii, iv
|
|-
|[[चित्र:Cathedral and Archivo de Indias - Seville.jpg|100px]]
||सेविला का [[सेविला कैथेड्रल|कैथेड्रल]], [[सेविला अल्काज़ार|अल्काज़ार]] और [[इंडीज के जनरल आर्काइव|आर्चिवो दे इंडियास]]
||1987
|[[सेविला]], [[आंदालुसिया]]
|383; 1987; i, ii, iii, iv
|
|-
|[[चित्र:Catedralnuevaslc.jpg|100px]]
||[[सालामानका]] का पुराना शहर
||1988
|[[सालामानका]], [[कैस्टिले और लेओन]]
|381; 1988; i, ii, iv
|
|-
|[[चित्र:Poblet Monastery.jpg|100px|]]
||[[पोबलेत मठ]]
||1991
|विम्बोदी, [[कैटलोनिया|कातालोन्या]]
|518; 1991; i, iv
|
|-
|[[चित्र:Merida Roman Theatre1.jpg|100px]]
||[[मेरिदा]] के पुरातत्व सम्मिलन
||1993
|मेरिदा, एक्सत्रेमेद्युरा
|664; 1993; iii, iv
|
|-
|[[चित्र:Spain Santiago de Compostela - Cathedral.jpg|100px]]
||[[सेन्ट जेम्स का मार्ग|सैंटियागो डी कॉम्पोस्टेला का मार्ग]]
||1993
|[[आरागोन]], [[कैस्टिले और लेओन]], [[गलिशिया]], [[नावारा]], और [[ला रियोजा]]
|669; 1993; ii, iv, vi
|
|-
|[[चित्र:Monasterio de Guadalupe.jpg|100px]]
||[[सांता मारिया दे ग्वाडालूप]] का शाही मठ
||1993
|[[ग्वाडालूप]], [[एक्सत्रेमेद्युरा]]
|665; 1993; iv, vi
|
|-
|[[File:Doñana National Park from the river.jpg|100px]]
||[[दोनाना नेशनल पार्क|दोनाना राष्ट्रीय उद्यान]]
||1994
|ह्यूएलवा और [[सेविला]]
|685; 1994, 2005 (विस्तारित); vii, ix, x
|
|-
|[[चित्र:Cuenca-panoramica4.JPG|100px]]
||[[कुऐनका]] का दीवार वाला ऐतिहासिक शहर
||1996
|कुऐनका, [[कास्तिया-ला मांचा]]
|781; 1996; ii, v
|
|-
|[[चित्र:Lonja de Valencia1.jpg|100px]]
|[[वालेंसिया]] का [[ल्लोत्ज़ा दे ला सीदा]]
||1996
|वालेंसिया
|782; 1996; i, iv
|
|-
|[[चित्र:Panorámica de Las Médulas.jpg|100px]]
||[[लास मेदुलास]]
||1997
|[[पोनफेरादा]], [[कैस्टिले और लेओन]]
|803; 1997; i, ii, iii, iv
|
|-
|[[चित्र:Domènech.i.Montaner.Palau.Musica.Catalana.8.Barcelona.JPG|100px]]
||[[पलाऊ दे ला मुसिका कतालाना]] और [[सेंट पाऊ दे अस्पताल]]
||1997
|[[बार्सिलोना]] [[कैटलोनिया|कातालोन्या]]
|804; 1997; i, ii, iv
|
|-
|[[चित्र:Punta Treserols y Mallo de Marmorés.jpg|100px]]
||[[पिरिनी पर्वत शृंखला]] - [[पेर्दु पर्वत]] विश्व धरोहर स्थल
||1997, 1999
|ह्यूसका प्रांत, [[आरागोन]] (फ्रांस के साथ साझा)
|773; 1997, 1 999 (विस्तारित); iii, iv, v, vii, viii
|
|-
|[[चित्र:Monasterio de Suso.jpg|100px]]
||[[सैन मिलन दे ला कोगोला के मठ]]
||1997
|[[सैन मिलन दे ला कोगोला]], [[ला रिओजा]]
|805; 1997; ii, iv, vi
|
|-
|[[चित्र:España y Portugal.jpg|100px]]
||[[इबेरिया प्रायद्वीप|इबेरियन प्रायद्वीप]] पर भूमध्य बेसिन के भित्ती-चित्र
||1998
|अन्डालुसिया, [[आरागोन]], [[कास्तिया-ला मांचा]], [[कैटलोनिया|कातालोन्या]], मर्सिया और वेलेंसिया
|874; 1998; iii
|
|-
|[[चित्र:Alcala de Henares, Spain, Plaza de Cervantes.jpg|100px]]
||[[अल्कला डी हेनरेस]] के विश्वविद्यालय और ऐतिहासिक पूर्वार्द्ध
||1998
|[[अल्कला डी हेनरेस]], मेड्रिड
|876; 1998; ii, iv, vi
|
|-
|[[चित्र:Ibiza.Nono.jpg|100px]]
||[[इबिसा]], जैव विविधता और संस्कृति
||1999
|[[इबिसा]], [[बैलेरिक द्वीपसमूह]]
|417; 1999; ii, iii, iv, ix, x
|
|-
|[[चित्र:PlazadelAdelantado.JPG|100px]]
||[[सान क्रिसतोबल दे ला लागुना]]
||1999
|सान क्रिसतोबल दे ला लागुना, [[कैनरी द्वीपसमूह]]
|929; 1999; ii, iv
|
|-
|[[चित्र:Tarragona.Circo.Romano.jpg|100px]]
||तारागोना में [[तराको]] के पुरातत्व सम्मिलन
||2000
|[[तारागोना]], [[कैटलोनिया|कातालोन्या]]
|875; 2000; ii, iii
|
|-
|[[चित्र:CuevasAtapuerca.jpg|100px]]
||[[अटापुरेका]] की पुरातात्विक स्थल
||2000
||अटापुरेका, [[कैस्टिले और लेओन]]
|
|
|-
|[[चित्र:Taull001.jpg|100px]]
|| [[वाल दे वोइ]] के [[कातालान]] रोमन चर्च
||2000
|
|
|
|-
|[[चित्र:Elche el palmeral.JPG|100px]]
||[[एल्चे]] के ताड़ के पेड़ों के जंगल
||2000
|
|
|
|-
|[[चित्र:Lugo 060420.jpg|100px]]
||[[लूगो]] की रोमन दीवारें
||2000
|
|
|
|-
|[[चित्र:Aranjuez PalacioReal cadena.jpg|100px]]
||[[आरानखुएस का शाही महल]]
||2001
|
|
|
|-
|[[चित्र:Ubeda.jpg|100px]]
||[[उबेदा]] और [[बाएज़ा]] के पुनर्जागरण स्मारकीय अभिरुचि
||2003
|
|
|
|-
|[[चित्र:Zubia jun.jpg|100px]]
||[[विज़काया पुल]]
||2006
|
|
|
|-
|[[चित्र:Teide rock foreground.JPG|100px]]
||[[पिको देल तेइदे|तेइदे]] राष्ट्रीय उद्यान
||2007
|
|
|
|}
=== [[स्वीडन|स्वीडेन]] (15) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" width=25% | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Drottningholmpalace.jpg|100px]]
| [[ड्रोटनिंगहोम महल]], [[ड्रोटनिंगहोम महल नाटकघर|नाटकघर]]
| 1991
| [[स्टॉकहोम लैन|स्टॉकहोम]]
|559; iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:BirkaExcavation1.png|100px]]
| [[बिर्का]] और [[होगार्डन]]
| 1993
| [[स्टॉकहोम लैन]]
| 555; iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Engelsberg-Huettenwerk-01.jpg|100px]]
| [[एंजल्सबर्ग लौह कारखाना]]
| 1993
| [[वेस्तमानलान्द लैन]]
| 556; iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Tanumshede 2005 rock carvings 5.jpg|100px]]
| [[तनुमशेद|तनुमशेद के शिला कलाकृति]]
| 1994
| [[वेस्त्रा योतालान्द लैन]]
| 557; i, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[File:Drottningholmpalace.jpg|100px]]
| [[ड्रोटनिंगहोम महल]]
| 1991
| [[स्टॉकहोम लैन]]
| 559; iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Skogskyrk Grav 2006.jpg|100px]]
| [[वुडलैंड कब्रिस्तान]] ([[स्टॉकहोम]] में)
| 1994
| [[स्टॉकहोम लैन]]
| 558; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Visby stadtmauer.jpg|100px]]
| [[विस्बी]] के हंसियाटिक टाउन
| 1995
| [[गॉतलान्द लैन|गॉतलान्द]]
| 731; iv, वी (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Gammelstad.jpg|100px]]
| [[गैमेलस्टेड चर्च शहर]]
| 1996
| [[नॉरबॉत्तेन लैन|नॉरबॉत्तेन]]
| 762; ii, iv, v (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Sapmi Lappland.jpg|100px]]
| [[लैपोनियन क्षेत्र]]
| 1996
| [[नॉरबॉत्तेन लैन|नॉरबॉत्तेन]]
| 774; iii, v, vii, viii, ix (मिश्रित)
|
|-
| [[चित्र:Fredrikskyrkan Karlskrona.jpg|100px]]
| [[कार्ल्सक्रोना]] का नौसेना बंदरगाह
| 1998
| [[ब्लकिंगे लैन|ब्लकिंगे]]
| 871; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Öland Gettlinge.jpg|100px]]
| [[स्टोरा अल्वेट|दक्षिणी अलैण्ड़ के कृषि परिदृश्य]]
| 2000
| [[कल्मार लैन|कल्मार]]
| 968; iv, वी (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Höga Kusten, Gulf Rödviken near Ullånger, Sweden.jpg|100px]]
| [[हेगा कुस्तेन|उच्च तट]] और [[क्वार्केन]] द्वीपसमूह*
| 2000, 2006
| [[वेस्तरनॉरलान्द लैन|वेस्तरनॉरलान्द]]-<br /> [[#फिनलैंड]] के साथ साझा
| 898; viii (प्राकृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Stora stöten.jpg|100px]]
| [[फालुन तांबे की खान]]
| 2001
| [[दालारना लैन|दालारना]]
| 1027; ii, iii, v (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Grimetonmasterna.jpg|100px]]
| [[वरबर्ग रेडियो स्टेशन]]
| 2004
| [[हल्लान्द लैन|हल्लान्द]]
| 1134; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Hammerfest Meridianstein.jpg|100px]]
| [[स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क]]
| 2005
| [[नॉरबॉत्तेन लैन|नॉरबोटन काउंटी]]<br />- बेलारूस, एस्टोनिया, फिनलैंड, लताविया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, नॉर्वे, रूसी संघ और यूक्रेन के साथ साझा
| 1187; ii, iii, vi (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[स्विट्ज़रलैण्ड]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Muestair Kloster.jpg|100px|]]
||[[सेंट जॉन एबी|मस्तैर के सेंट जॉन का बेनेडिक्टिन कॉन्वेंट]]
||1983
| [[मस्तैर]]
| सांस्कृतिक: (Iii)
|
|-
|[[चित्र:Convent of St Gall.jpg|100px|]]
||[[सेंट गैल एबी|सेंट गैल का मठ]]
||1983
| [[सेंट गैलेन छावनी]]
| सांस्कृतिक: (ii), (iv)
|
|-
|[[चित्र:The cathedral- Das Münster.JPG|100px|]]
||[[बर्न का पुराना शहर]]
||1983
| [[बर्न]]
| सांस्कृतिक: (iii)
|
|-
|[[चित्र:Bellinzona 066.jpg|100px|]]
||[[बेलिंज़ोआ का महल|बेलिंज़ोआ के तीन महल]]
||2000
| [[बेलिंज़ोआ]]
|सांस्कृतिक: (Iv)
|
|-
|[[चित्र:Aerial image of Finsteraarhorn (view from the east).jpg|100px|]]
||[[जंगफ्रू-एलेत्स संरक्षित क्षेत्र|जंगफ्रू-एलेत्स-बायेट्सशोर्न]] का पर्वतीय क्षेत्र
||2001
| [[बर्न कैन्टन]] और [[वाले कैन्टन]]
| प्राकृतिक: (vii), (viii), (ix)
|
|-
|[[चित्र:Lake Lugano.jpg|100px|]]
||[[मोंटे सैन जियोर्जियो]]
||2003
| [[तिचीनो कैन्टन]]; स्विट्ज़रलैण्ड और इटली के बीच साझा
| प्राकृतिक: (viii)
|
|-
|[[चित्र:Lake Geneva Lavaux.jpg|100px|]]
||[[लैवॉक्स]] के शराब बनाने वाले क्षेत्र
||2007
| [[वो कैन्टन]]
| सांस्कृतिक: (iii), (iv), (v)
|
|}
=== पूर्व युगोस्लाव गणराज्य मैसेडोनिया ===
<!-- DO NOT MOVE THIS ENTRY FROM ITS CURRENT LOCATION AS IN "Republic of Macedonia", "Macedonia", "Macedonia, Republic of" etc. - "the Former Yugoslav Republic of Macedonia" as an UNESCO state party, unser "t", is correct in this list.
DO NOT USE ANY OTHER VARIATON AS: "FYROM", "FYR of Macedonia", "Macedonia, Former Yugoslav Republic of" etc. Official web site: http://whc.unesco.org/en/states parties/mk
See also [[WP:MOSMAC]] -->
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[File:Ohridpanorama.jpg|150px]]
||[[ओहरिड|ओहरिड क्षेत्र के सांस्कृतिक]] और [[ओहरिड झील|प्राकृतिक]] विरासत
||1979, 1980
|}
=== [[तुर्की]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Goreme valley.jpg|100px|]]
||कप्पाडोसिया की [[गॉरम|गॉरम नेशनल पार्क]] और चट्टान स्थलें
||1985
| [[नेविसिर प्रांत]]
| मिश्रित: (I) (iii) (v) (vii)
|
|-
|[[चित्र:DivrigiUluCamiportal (2006).jpg|100px|]]
||[[दिव्रिजी के महान मस्जिद और अस्पताल]]
||1985
| [[सिवास प्रांत]]
| सांस्कृतिक: (i) (iv)
|
|-
|[[चित्र:Aya sofya.jpg|100px|]]
||[[इस्तांबुल]] के ऐतिहासिक क्षेत्र
||1985
||[[इस्तांबुल प्रांत]]
||सांस्कृतिक: (iii)(iv)(vii)
|
|-
|[[चित्र:Hattusa.liongate.jpg|100px|]]
||[[हत्तुसा]]
||1986
|[[कॉरम प्रांत]]
|सांस्कृतिक: (i) (ii) (iii) (iv)
|
|-
|[[चित्र:Mount Nemrut.jpg|100px|]]
||[[माउंट नेमरूद]]
||1987
|[[आदियामान प्रांत]]
|सांस्कृतिक: (i) (iii) (iv)
|
|-
|[[चित्र:Pamukkale00.JPG|100px|]]
||[[हीरापोलिस]]-[[पामुक्कले]]
||1988
|[[देनिज्ली प्रांत]]
| मिश्रित: (iii) (iv) (vii)
|
|-
|[[चित्र:Lycian sarcophagus at Xanthos.jpg|100px|]]
||[[संथोस]]–[[लेटून]]
||1988
|[[अंताल्या प्रांत|अंताल्या]] और [[मुगला प्रांत]]
|सांस्कृतिक:(Ii) (iii)
|
|-
|[[चित्र:Safranbolu traditional houses.jpg|100px|]]
||[[साफ्रांबोलू|साफ्रांबोलू शहर]]
||1994
| [[कराबुक प्रांत]]
|सांस्कृतिक:(Ii) (iv) (v)
|
|-
|[[चित्र:Troy1.jpg|100px|]]
||[[ट्रॉय|ट्रॉय के पुरातात्विक स्थल]]
||1998
|[[कनक्केल प्रांत]]
|सांस्कृतिक:(Ii) (iii) (vi)
|
|-
|[[चित्र:Ani-Cathedral, Ruine.jpeg|100px|]]
||[[एनी|एनी के पुरातात्विक स्थल]]
||1998
|[[कार्स प्रांत]]
|सांस्कृतिक:(Ii) (iii) (iv)
|
|-
|[[चित्र:Aphrodisias turkey.jpg|100px|]]
||[[एफ्रोडिसियस]]
||2017
|[[आयदीन प्रांत]]
|सांस्कृतिक:(Ii) (iii) (iv) (vi)
|
|-
|[[चित्र:Cumalıkızık 7121.jpg|100px]]
|[[बर्सा]] और Cumalıkızık: तुर्क साम्राज्य का जन्म
|2014
|[[बुर्सा प्रांत]]
|सांस्कृतिक:(I) (ii) (iv) (vi)
|
|}
=== [[युक्रेन|यूक्रेन]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Chrám svaté Sofie (Kyjev).jpg|100px|]]
||[[सेंट सोफिया कैथेड्रल]]
||1990
|-
|[[चित्र:Lwow-panorama-m.jpg|100px|]]
||[[ल्वीव का पुराना नगर]]
||1998
|-
|[[चित्र:Hammerfest Meridianstein.jpg|100px|]]
||[[स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क]] — [[#बेलारस|बेलारूस]], [[#एस्टोनिया|एस्टोनिया]], [[#फिनलैंड|फिनलैंड]], [[#लताविया|लताविया]], [[#लिथुआनिया|लिथुआनिया]], [[#मोल्दोवा|मोल्दोवा]], [[#नॉर्वे|नॉर्वे]], [[#स्वीडन|स्वीडन]] और [[#यूरोपियन रूस|रूसी संघ]] के साथ साझा।
||1998
|-
|
||कार्पैथियंस के आद्य बीच वन
||2007
|}
=== [[यूनाइटेड किंगडम]] ===
''मुख्य लेख:[[यूनाइटेड किंगडम में यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों की सूची]]''
टिप्पणी: इस सूची में ब्रिटिश विदेश क्षेत्रों के स्थल भी शामिल हैं
:'''''सांस्कृतिक'''
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:BlaenavonWorkingmensInstitute.jpg|100px|]]
||[[ब्लेनावों औद्योगिक परिदृश्य]]
||2000
| [[ब्लेनावों]] [[वेल्स]]
| 984; 2000; iii, iv
|
|-
| [[चित्र:Blenheim main entrance.jpg|100px|]]
||[[ब्लेनहेम महल]]
||1987
|[[वुडस्टॉक]] [[ऑक्सफ़र्डशायर]], इंगलैंड
| 425; 1987;ii, iv
|
|-
| [[चित्र:Canterbury Cathedral - Portal Nave Cross-spire.jpeg|100px|]]
||[[कैंटरबरी कैथेड्रल]], [[सेंट ऑगस्टीन एबी]] और [[सेंट मार्टिन चर्च]]
||1988
| [[कैंटरबरी]], [[केंट]], इंगलैंड
| 496; 1988;i, ii, vi
|
|-
|[[चित्र:Beaumaris Castle 1.jpg|100px|]]
||[[ग्विनडेड में राजा एडवर्ड का महल और शहरी दीवार]]
||1986
| [[कोन्वे]], [[एंग्लेसी]], [[वेल्स]]
| 374; 1986; i, iii, iv
|
|-
| [[चित्र:Royal.crescent.aerial.bath.arp.jpg|100px]]
||[[बाथ|बाथ नगर]]
||1987
| [[बाथ]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 428; 1987; i, ii, iv
|
|-
|[[चित्र:Hayle old quay.jpg|100px|]]
||[[कॉर्नवल और पश्चिमी डेवन खनन परिदृश्य]]
||2006
| [[कॉर्नवल]] और [[डेवन]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 1,215; 2006; ii, iii, iv
|
|-
|[[चित्र:Arkwright Masson Mills.jpg|100px|]]
||[[डेरवेंट घाटी मिल्स]]
||2001
| [[डर्बीशायर]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 1,030; 2001; ii, iv
|
|-
|[[चित्र:yard2.jpg|100px|]]
||[[डुरहम कासल]] और [[डुरहम कैथेड्रल]]
||1986
| [[काउंटी डरहम]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 370; 1986; ii, iv, vi
|
|-
|[[चित्र:Orkney_Skara_Brae.jpg|100px|]]
||[[नियोलिथिक ऑर्कनी का दिल]]
||1999
| [[ओर्कनेय]], [[स्कॉट्लैण्ड|स्कॉटलैंड]]
| 514; 1999;i, ii, iii, iv
|
|-
|[[चित्र:Hadrian's wall at Greenhead Lough.jpg|100px]]
||[[हैडरिन की दीवार]]
||2005
|
|
|
|-
|[[चित्र:Bermuda-Harbour and Town of St George.jpg|100px|]]
||[[सेंट जोर्ज'स का ऐतिहासिक शहर और संबंधित किले, बरमूडा]]
||2000
| [[सेंट जोर्ज'स]], [[बरमूडा]]
| 983; 2000; iv
|
|-
|[[चित्र:Ironbridge002.JPG|100px|]]
||[[आयरनब्रिज जॉर्ज]]
||1986
| [[श्रॉपशायर]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 371; 1986; i, ii, iv, vi
|
|-
|[[चित्र:Liverpool skyline, closeup.jpg|100px|]]
||[[लिवरपूल]] - ''मैरिटाइम मर्चेन्टाइल सिटी''
||2004
| [[मर्सीसाइड]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 1,150; 2004; ii, iii, iv
|
|-
|[[चित्र:2005-06-27_-_United_Kingdom_-_England_-_London_-_Greenwich.jpg|100px|]]
||[[ग्रेनिश|तटिय ग्रीनविच]]
|1997
| [[ग्रेटर लंदन]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 795; 1997; i, ii, iv, vi
|
|-
|[[चित्र:NewlanarkNL06.jpg|100px|]]
||[[न्यू लैनार्क]]
||2001
| [[दक्षिण लैनार्कशायर]], [[स्कॉट्लैण्ड|स्कॉटलैंड]]
| 429; 2001; ii, iv, vi
|
|-
|[[चित्र:EdinburghgeorgeIV.jpg|100px|]]
||[[एडिनबर्ग]] का [[ओल्ड टाउन, एडिनबर्ग|ओल्ड टाउन]] और [[न्यू टाउन, एडिनबर्ग|न्यू टाउन]]
||1995
| [[एडिनबर्ग]], [[स्कॉट्लैण्ड|स्कॉटलैंड]]
| 728; 1995; ii, iv
|
|-
|[[चित्र:kew.gardens.palm.house.london.arp.jpg|100px|]]
||[[शाही वनस्पतिक उद्यान, क्यू]]
||2003
| [[ग्रेटर लंदन]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 1,084; 2003; ii, iii, iv
|
|-
|[[चित्र:Saltaire from Leeds and Liverpool Canal.jpg|100px|]]
||[[साल्टेरे]]
||2001
| [[वेस्ट यॉर्कशायर]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 1,028; 2001; ii, iv
|
|-
|[[चित्र:Stonehenge back wide.jpg|100px|]]
||[[स्टोनहेंज, एवेबरी और संबन्धित स्थलें]]
||1986
| [[विल्टशायर]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 373; 1 9 86 (2008 में संशोधित);i, ii, iii
|
|-
|[[चित्र:Banqueting House.jpg|100px|]]
||[[एबी फव्वारे]] के खंडहर सहित [[स्टडली शाही उद्यान]]
||1986
| [[नॉर्थ यॉर्कशायर]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 372; 1986; i, iv
|
|-
|[[चित्र:Tower_Of_London_Traitors'_Gate_Seen_From_The_River.jpg|100px|]]
||[[टॉवर ऑफ़ लंदन|टावर ऑफ़ लंदन]]
||1988
| [[ग्रेटर लंदन]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 488; 1988; ii, iv
|
|-
|[[चित्र:Westminster abbey night.jpg|100px|]]
||[[सेंट मार्गरेट्स, वेस्टमिंस्टर|सेंट मार्गरेट चर्च]] और [[वेस्ट्मिन्स्टर ऍबी|वेस्टमिंस्टर ऐबी]] सहित [[पैलेस ऑफ़ वेस्ट्मिन्स्टर|वेस्टमिंस्टर का महल]]
||1987
| [[ग्रेटर लंदन]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 426; 1987 (2008 में संशोधित);i, ii, iv
|
|}
:'''''मिश्रित'''''
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:St Kilda Village Bay.jpg|100px|]]
||[[सेंट किल्डा, स्कॉटलैंड|सेंट किल्डा]]
||1986
|[[सेंट किल्डा, स्कॉटलैंड|सेंट किल्डा]], [[स्कॉट्लैण्ड|स्कॉटलैंड]]
|387; 1987 (2005 और 2008 में संशोधित);ii, iii, iv
|
|}
:'''''प्राकृतिक'''''
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Causeway-code poet-4.jpg|100px]]
||[[दैत्य सेतुक]]
||1986
|[[एंट्रीम काउंटी]], उत्तरी आयरलैंड
|369; 1986; vii, viii
|
|-
|[[चित्र:Gough island top view.png|100px|]]
||[[गफ और इनेक्सेसिबल द्वीप समूह]]
||1995
| [[सेंट हेलेना, असेंशन और त्रिस्तान दा कुन्हा]], [[अटलांटिक महासागर]]
| 740; 1 99 5 (2004 में संशोधित);vii, x
|
|-
|[[चित्र:HendersonISS004-E-6793.PNG|100px|]]
||[[हेंडरसन द्वीप (पिटकेरेन द्वीप समूह)|हेंडरसन द्वीप]]
||1988
| [[पिटकेम द्वीप समूह]], [[प्रशान्त महासागर]]
| 487; 1988;vii, x
|
|-
|[[चित्र:england_dorset_jc_kimmeridge.jpg|100px|]]
||[[जुरासिक तट]]
||2001
|
|
|
|}
==इन्हें भी देखें==
* [[अफ्रीका में विश्व धरोहर स्थलों की सूची]]
* [[अरब राज्यों में विश्व धरोहर स्थलों की सूची]]
* [[एशिया एवं ऑस्ट्रेलेशिया में विश्व धरोहर स्थलों की सूची]]
* [[अमरीका में विश्व धरोहर स्थलों की सूची]]
* [[खतरे में विश्व धरोहर स्थलों की सूची]]
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
* [http://www.unesco.org/whc यूनेस्को विश्व विरासत स्थल] — आधिकारिक वेबसाइट
* [https://web.archive.org/web/20070606091740/http://whc.unesco.org/pg.cfm?cid=31 यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र] — आधिकारिक वेबसाइट
* [https://web.archive.org/web/20071116123131/http://whc.unesco.org/heritage.htm यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की सूची] — आधिकारिक वेबसाइट
* [https://web.archive.org/web/20181106021403/http://vrheritage.org/ VRheritage.org] — विश्व धरोहर स्थलों का दस्तावेज़ीकरण
* [https://web.archive.org/web/20050324003746/http://worldheritage-forum.net/ Worldheritage-Forum] — विश्व धरोहर मुद्दों पर सूचना और वेबलॉग
<br />{{Lists of World Heritage Sites}}
<!--Categories-->
[[श्रेणी:यूरोप में विश्व धरोह स्थल|*]]
<!--Other languages-->
3f0lvke6wmqendgkadzlqtcrxrac6ev
सुधीर पांडे
0
38269
6591517
5381247
2026-07-24T10:05:34Z
~2026-41224-14
937959
पंजाबी फ़िल्म Des Hoyaa Pardes 2004 table
6591517
wikitext
text/x-wiki
{{infobox actor
| image = Javed Hyder M.jpg
| caption = 2018 में सुधीर पांडे
| name = सुधीर पांडे
| birth_place = [[काशीपुर, उत्तराखंड|काशीपुर]] शहर [[उत्तराखण्ड|उत्तराखंड]], [[भारत]]
| nationality = [[भारत | भारतीय]]
| birth_date = 22 दिसंबर 1950
| occupation = अभिनेता
| parents = देवकिनंदन पांडे
}}
'''सुधीर पांडे''' [[हिन्दी]] फ़िल्मों के एक [[अभिनेता]] हैं।<ref>https://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-newdelhi/Eyeing-bigger-roles-on-big-screen/article15994629.ece</ref>
== व्यक्तिगत जीवन ==
== प्रमुख फिल्में<ref>{{Cite web |url=https://www.imdb.com/name/nm1106058/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=4 सितंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181228152321/https://www.imdb.com/name/nm1106058/ |archive-date=28 दिसंबर 2018 |url-status=live }}</ref>==
{| class="sortable" border="2" cellpadding="4" cellspacing="0" width="95%" style="margin: 1em 1em 1em 0; background: #f9f9f9; border: 1px #aaa solid; border-collapse: collapse; font-size: 95%;"
|- bgcolor="#CCCCCC" align="center"
! वर्ष !! फ़िल्म !! चरित्र !! टिप्पणी
|-
|[[:श्रेणी:2007 में बनी हिन्दी फ़िल्म|2007]] || [[अनवर (2007 फ़िल्म)|अनवर]] || ||
|-
|[[:श्रेणी:2007 में बनी हिन्दी फ़िल्म|2007]] || [[गुरु (२००७ फ़िल्म)|गुरु]] || ||
|-
|2004
|देश होया परदेस
|
|पंजाबी फ़िल्म
|-
|[[:श्रेणी:2003 में बनी हिन्दी फ़िल्म|2003]] || [[मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूँ (2003 फ़िल्म)|मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूँ]] || ||
|-
|[[:श्रेणी:2003 में बनी हिन्दी फ़िल्म|2003]] || [[हासिल (2003 फ़िल्म)|हासिल]] || ||
|-
|[[:श्रेणी:1997 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1997]] || [[दिल के झरोखे में (1997 फ़िल्म)|दिल के झरोखे में]] || ||
|-
|[[:श्रेणी:1996 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1996]] || [[हाहाकार (1996 फ़िल्म)|हाहाकार]] || ||
|-
|[[:श्रेणी:1995 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1995]] || [[पाँडव (1995 फ़िल्म)|पाँडव]] || ||
|-
|[[:श्रेणी:1995 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1995]] || [[वीरगति (1995 फ़िल्म)|वीरगति]] || ||
|-
|[[:श्रेणी:1993 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1993]] || [[साहिबाँ]] || ||
|-
|[[:श्रेणी:1992 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1992]] || [[दिल ही तो है (1992 फ़िल्म)|दिल ही तो है]] || ||
|-
|[[:श्रेणी:1991 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1991]] || [[बंजारन (1991 फ़िल्म)|बंजारन]] || ||
|-
|[[:श्रेणी:1991 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1991]] || [[बेनाम बादशाह (1991 फ़िल्म)|बेनाम बादशाह]] || ||
|-
|[[:श्रेणी:1991 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1991]] || [[मौत की सज़ा (1991 फ़िल्म)|मौत की सज़ा]] || ||
|-
|[[:श्रेणी:1991 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1991]] || [[पत्थर (1991 फ़िल्म)|पत्थर]] || ||
|-
|[[:श्रेणी:1990 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1990]] || [[तुम मेरे हो (1990 फ़िल्म)|तुम मेरे हो]] || ||
|-
|[[:श्रेणी:1990 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1990]] || [[अम्बा (1990 फ़िल्म)|अम्बा]] || ||
|-
|[[:श्रेणी:1990 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1990]] || [[अव्वल नम्बर (1990 फ़िल्म)|अव्वल नम्बर]] || सुन्दरम ||
|-
|[[:श्रेणी:1989 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1989]] || [[भ्र्ष्टाचार (1989 फ़िल्म)|भ्र्ष्टाचार]] || ||
|-
|[[:श्रेणी:1989 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1989]] || [[ज़ुर्रत (1989 फ़िल्म)|ज़ुर्रत]] || इंस्पेक्टर पाण्डे ||
|-
|[[:श्रेणी:1989 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1989]] || [[मैं आज़ाद हूँ (1989 फ़िल्म)|मैं आज़ाद हूँ]] || ||
|-
|[[:श्रेणी:1989 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1989]] || [[काला बाज़ार (1989 फ़िल्म)|काला बाज़ार]] || ||
|-
|[[:श्रेणी:1988 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1988]] || [[हम तो चले परदेस (1988 फ़िल्म)|हम तो चले परदेस]] || डॉक्टर ||
|-
|[[:श्रेणी:1988 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1988]] || [[वारिस (1988 फ़िल्म)|वारिस]] || ||
|-
|[[:श्रेणी:1988 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1988]] || [[दयावान]] || ||
|-
|[[:श्रेणी:1986 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1986]] || [[मेरा धर्म (1986 फ़िल्म)|मेरा धर्म]] || ||
|-
|[[:श्रेणी:1985 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1985]] || [[सागर (1985 फ़िल्म)|सागर]] || ||
|-
|[[:श्रेणी:1984 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1984]] || [[माटी माँगे खून (1984 फ़िल्म)|माटी माँगे खून]] || राम सिंह ||
|-
|[[:श्रेणी:1982 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1982]] || [[ये नज़दीकियाँ (1982 फ़िल्म)|ये नज़दीकियाँ]] || राजेश ||
|-
|[[:श्रेणी:1981 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1981]] || [[चक्र (1981 फ़िल्म)|चक्र]] || ||
|-
|[[:श्रेणी:1980 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1980]] || [[शान (फ़िल्म)|शान]] || तिवारी ||
|-
|
|
|
|
|-
|}
== नामांकन और पुरस्कार ==
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
[[श्रेणी:बॉलीवुड]]
[[श्रेणी:टेलिविज़न अभिनेता]]
[[श्रेणी:हिन्दी अभिनेता]]
[[श्रेणी:1953 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
72uvspp1b3p2t628twzmxn9eywv4tr6
अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ
0
43048
6591382
6505381
2026-07-23T21:39:21Z
ATallSteve
542504
/* */ उर्दू उच्चारण का सुधार
6591382
wikitext
text/x-wiki
'''अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ''' ({{lang-ur|{{Nastaliq| انجمن ترقی پسند مصنفین ہند}}}}, ''अंजुमने तरक़्क़ीपसंद मुसन्निफ़ीने हिंद'') ({{lang-en|Progressive Writers' Movement of India}}) बीसवीं शती के प्रारंभ में स्थापित हुआ भारतीय प्रगतिशील लेखकों का एक समूह है। यह लेखक समूह अपने लेखन से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समानता का समर्थन करता है और कुरीतियों अन्याय व पिछड़ेपन का विरोध करता है। इसकी स्थापना [[१९३६]] में [[लंदन]] में हुई। इसके प्रणेता [[सज्जाद ज़हीर]] थे।
[[१९३५]] के अंत तक [[लंदन]] से अपनी शिक्षा समाप्त करके सज्जाद ज़हीर [[भारत]] लौटे। यहाँ आने से पूर्व वे [[अलीगढ़]] में [[डॉ॰ अशरफ]], [[इलाहबाद]] में [[अहमद अली]], [[मुम्बई]] में [[कन्हैया लाल मुंशी]], [[बनारस]] में [[प्रेमचंद]], कलकत्ता में [[प्रो॰ हीरन मुखर्जी]] और [[अमृतसर]] में [[रशीद जहाँ]] को घोषणापत्र की प्रतियाँ भेज चुके थे। वे भारतीय अतीत की गौरवपूर्ण संस्कृति से उसका मानव प्रेम, उसकी यथार्थ प्रियता और उसका सौन्दर्य तत्त्व लेने के पक्ष में थे लेकिन वे प्राचीन दौर के अंधविश्वासों और [[धार्मिक साम्प्रदायिकता]] के ज़हरीले प्रभाव को समाप्त करना चाहते थे। उनका विचार था कि ये [[साम्राज्यवाद]] और [[जागीरदारी]] की सैद्धांतिक बुनियादें हैं। [[इलाहाबाद]] पहुंचकर सज्जाद ज़हीर [[अहमद अली]] से मिले जो विश्वविद्यालय में अंग्रेज़ी के प्रवक्ता थे। अहमद अली ने उन्हें [[प्रो॰एजाज़ हुसैन]], [[रघुपति सहाय फिराक]], [[एहतिशाम हुसैन]] तथा [[विकार अजीम]] से मिलवाया. सबने सज्जाद ज़हीर का समर्थन किया। [[शिवदान सिंह चौहान]] और [[नरेन्द्र शर्मा]] ने भी सहयोग का आश्वासन दिया। [[प्रो॰ ताराचंद]] और [[अमरनाथ झा]] से स्नेहपूर्ण प्रोत्साहन मिला। सौभाग्य से जनवरी [[१९३६]] में १२-१४ को [[हिन्दुस्तानी एकेडमी]] का वार्षिक अधिवेशन हुआ। अनेक साहित्यकार यहाँ एकत्र हुए - [[सच्चिदानंद सिन्हा]], [[डॉ॰ अब्दुल हक़]], [[गंगा नाथ झा]], [[जोश मलीहाबादी]], [[प्रेमचंद]], रशीद जहाँ, अब्दुस्सत्तार सिद्दीकी इत्यादि। सज्जाद ज़हीर ने प्रेमचंद के साथ प्रगतिशील संगठन के घोषणापत्र पर खुलकर बात-चीत की। सभी ने घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर दिए। अहमद अली के घर को लेखक संगठन का कार्यालय बना दिया गया। पत्र-व्यव्हार की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई। सज्जाद ज़हीर पंजाब के दौरे पर निकल पड़े. इस बीच अलीगढ में सज्जाद ज़हीर के मित्रों -डॉ॰ अशरफ, अली सरदार जाफरी, [[डॉ॰ अब्दुल अलीम]], [[जाँनिसार अख्तर]] आदि ने स्थानीय प्रगतिशील लेखकों का एक जलसा ख्वाजा मंज़ूर अहमद के मकान पर फरवरी [[१९३६]] में कर डाला। [[अलीगढ]] में उन दिनों साम्यवाद का बेहद ज़ोर था। वहां की अंजुमन के लगभग सभी सदस्य साम्यवादी थे और पार्टी के सक्रिय सदस्य भी.
मौजूदा दौर में भी प्रगतिशील लेखक संघ सक्रिय है। इसका सत्रहवाँ राष्ट्रीय सम्मेलन जयपुर में हुआ था जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर तमिल के बहुप्रतिष्ठित लेखक श्री पुन्नीलन और राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर पंजाबी के प्रसिद्ध लेखक प्रो. सुखदेव सिंह सिरसा चुने गए थे। अब अगला सम्मेलन 20, 21 और 22 अगस्त को हरिशंकर परसाई की जन्मशताब्दी के अवसर पर जबलपुर में आयोजित होगा।
== विकास और अवसान ==
देखते-देखते सम्पूर्ण देश में प्रगतिशील लेखक संगठन की शाखाएँ फैलने लगीं। ९-१० अप्रैल [[१९३६]] को प्रेमचंद की अध्यक्षता में होने वाले लखनऊ अधिवेशन में उस समय के प्रसिद्ध लेखक प्रेमचंद और [[जैनेन्द्र]] इसमें शामिल हुए। इस अधिवेशन में प्रेमचंद का अध्यक्षीय भाषण जब हिन्दी में रूपांतरित हुआ तो हिन्दी लेखकों की प्रेरणा का स्रोत बन गया। लखनऊ अधिवेशन में कई आलेख पढ़े गए जिनमें अहमद अली, [[रघुपति सहाय]], [[मह्मूदुज्ज़फर]] और [[हीरन मुखर्जी]] के नाम उल्लेख्य हैं। [[गुजरात]], [[महाराष्ट्र]] और [[मद्रास]] के प्रतिनिधियों ने भी भाषण दिए। प्रेमचंद के बाद सबसे महत्त्वपूर्ण वक्तव्य [[हसरत मोहानी]] का था। हसरत ने खुले शब्दों में साम्यवाद की वकालत करते हुए कहा " '''''हमारे साहित्य को स्वाधीनता आन्दोलन की सशक्त अभ्व्यक्ति करनी चाहिए और साम्राज्यवादी, अत्याचारी तथा आक्रामक पूंजीपतियों का विरोध करना चाहिए. उसे मजदूरों, किसानों और सम्पूर्ण पीड़ित जनता का पक्षधर होना चाहिए. उसमें जन सामान्य के दुःख-सुख, उनकी इच्छाओं-आकांक्षाओं को इस प्रकार व्यक्त करना चाहिए कि इससे उनकी इन्क़लाबी शक्तियों को बल मिले और वह एकजुट और संगठित होकर अपने संघर्ष को सफल बना सकें. केवल प्रगतिशीलता पर्याप्त नहीं है। नए साहित्य को समाजवाद और कम्युनिज्म का भी प्रचार करना चाहिए.'''''" अधिवेशन के दूसरे दिन संध्या की गोष्ठी में जय प्रकाश नारायण, यूसुफ मेहर अली, इन्दुलाल याज्ञिक, कमलादेवी चट्टोपाध्याय आदि भी सम्मिलित हो गए थे। इस अवसर पर संगठन का एक संविधान भी स्वीकार किया गया और सज्जाद ज़हीर को संगठन का प्रधान मंत्री निर्वाचित किया गया।
इसका दूसरा द्वितीय अखिल भारतीय अधिवेशन : कोलकाता [[१९३८]], तृतीय अखिल भारतीय अधिवेशन : दिल्ली [[१९४२]], चौथा अखिल भारतीय अधिवेशन : मुम्बई [[१९४५]], पांचवां अखिल भारतीय अधिवेशन : भीमड़ी [[१९४९]], छठा अखिल भारतीय अधिवेशन : दिल्ली [[१९५३]] में हुआ। [[१९५४]] तक पहुँचते पहुँचते यह आंदोलन आपसी सामंजस्य की कमी, सामाजिक परिवर्तनों और उद्देश्यहीनता के कारण धीमा पढ़ने लगा और इसका बाद इसका कोई अधिवेशन नहीं हुआ।<ref>{{cite web|url= http://yugvimarsh.blogspot.com/2008/06/blog-post_14.html|title= प्रगतिशील लेखक आन्दोलन : जड़ों की पहचान|access-date= [[२६ जून]] [[2008]]|format= एचटीएमएल|publisher= युग विमर्श|language= |archive-url= https://web.archive.org/web/20160305121647/http://yugvimarsh.blogspot.com/2008/06/blog-post_14.html|archive-date= 5 मार्च 2016|url-status= dead}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:साहित्यिक संगठन]]
[[श्रेणी:साहित्यिक आंदोलन]]
[[श्रेणी:प्रगतिवाद]]
hrup92vumjw03n1gf5m7j8ro5ibtr61
गुप्तचर
0
48695
6591374
6486776
2026-07-23T18:33:24Z
InternetArchiveBot
500600
Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5
6591374
wikitext
text/x-wiki
{{स्रोतहीन|date=मार्च 2014}}
गुप्त रूप से राजनीतिक या अन्य प्रकार की सूचना देनेवाले व्यक्ति को '''गुप्तचर''' (spy) या [[जासूसी|जासूस]] कहते हैं। इनके कार्य को [[चर कार्य|गुप्तचर्या]] या [[चर कार्य|गुप्तचरी]] कहते हैं। इनके द्वारा जो सूचना एकत्र की जाती है उसे 'आसूचना' (इन्टेलिजेन्स) कहते हैं।
गुप्तचर अति प्राचीन काल से ही [[शासन]] की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता माना जाता रहा है। [[भारत|भारतवर्ष]] में गुप्तचरों का उल्लेख [[मनुस्मृति]] और [[चाणक्य|कौटिल्य]] के [[अर्थशास्त्र]] में मिलता है। [[कौटिल्य]] ने अपने अर्थशास्त्र में गुप्तचरों के उपयोग और उनकी श्रेणियों का विशद वर्णन किया है।{{cn}} राज्याधिपति को राज्य के अधिकारियों और जनता की गतिविधियों एवं समीपवर्ती शासकों की नीतियों के संबंध में सूचनाएँ देने का महत्वपूर्ण कार्य उनके गुप्तचरों द्वारा संपन्न होता था। [[रामायण]] में वर्णित [[दुर्मुख]] ऐसा ही एक गुप्तचर था जिसने [[राम|रामचंद्र]] को [[सीता]] के विषय में (लंका प्रवास के बाद) जनापवाद की जानकरी दी थी।
== भारतीय इतिहास में उल्लेख ==
[[अर्थशास्त्र शास्त्र)|अर्थशास्त्र]] में उल्लेख है कि [[राजा]] के पास विश्वासपात्र गुप्तचरों का समुदाय होना चाहिए और इन गुप्तचरों को योग्य एवं विश्वस्त मंत्रियों के निर्देशन में काम करना चाहिए। अर्थशास्त्र में 'समष्ट' एवं 'संचार' नामक दो प्रकार के गुप्तचरों का उल्लेख मिलता है। समष्ट कोटि के गुप्तचर स्थानीय सूचनाएँ देते थे और संचार कोटि के गुप्तचर विभिन्न स्थानों का परिभ्रमण करके सूसचनाएँ एकत्र करते थे। समष्ट कोटि के गुप्तचरों के अनेक प्रकार होते थे, यथा कापातिक, उष्ठित, गृहपतिक, वैदाहक तथा तापस। संचार नामक गुप्तचर में सत्रितिक्ष्ण, राशद एवं स्त्री गुप्तचर जैसे भिक्षुकी, परिव्राजिका, मुंड, विशाली भी होती थीं। [[चन्द्रगुप्त मौर्य|चंद्रगुप्त मौर्य]] के युग में सुदूर स्थित अधिकारियों पर नियंत्रण करने के लिये गुप्त संवाददाता एवं भ्रमणशील निर्णायकों का उपयोग किया जाता था। ये संवाददाता अथवा निर्णायक उन अधिकारियों के कार्यकलापों का भलीभाँति निरीक्षण एवं मूल्यांकन करते थे और राजा को इस संबंध में गुप्त रूप से सूचनाएँ भेजते थे। हिंदूकाल में इस प्रकार के गुप्तचरों का वर्ग [[सम्राट अशोक|अशोक]] के काल तक सुचारु रूप से कार्य करता रहा। उसके बाद भी शासन में गुप्तचरों का महत्त्व बना रहा। इन गुप्तचरों का पद राज्य के अत्यंत विश्वासपात्र व्यक्तियों को ही दिया जाता था।
कौटिल्य के अर्थशास्त्र में आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में चार प्रकार के ख़तरों की चर्चा की गई है। ये ख़तरे हैं बाहरी–आंतरिक, आंतरिक–बाहरी, बाहरी–बाहरी और आंतरिक–आंतरिक।
कौटिल्य के उपाय (साम, दान, दण्ड, भेद) एक प्रकार से 'सूक्ष्म हथियार' हैं।
== मुस्लिम और मुगलकाल ==
गुप्तचरों का उपयोग संगठित रूप से और विस्तृत पैमाने पर मुस्लिम और मुगलकाल में नहीं हुआ। मुस्लिम और मुगलकालीन पुलिस शासन, जिसकी नींव शेरशाह ने डाली थी, स्थानीय मुखिया, प्रधान अथवा स्थानीय पुलिस अधिकारियों के दायित्वों के सिद्धांतों पर आधारित था। किंतु थोड़ी सी संख्या में शासन के अधिकारियों एवं प्रजाजनों की मनोवृत्तियों तथा कार्यकलापों की सूचना देने के लिये राजा द्वारा अपने विश्वासपात्र और चतुर अनुचरों का प्रयोग मात्र होता रहा।
== आधुनिक काल ==
=== विश्वयुद्ध ===
वर्तमान समय में राजनीतिक प्रयोजनों के निमित्त देश के भीतर और बाहर गुप्तचरों का प्रयोग एक सर्वमान्य राजनीतिक धारणा है। [[जर्मनी]] के [[गेस्टापो]] दल ने नात्सी शासन को देश के भीतर सुदृढ़ बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण योग दिया। नात्सी-शासन-विरोधी तत्वों का दमन करने की जो नीति [[एडोल्फ़ हिटलर|हिटलर]] और उसके प्रमुख सहायक हिमलर ने अपनाई उसकी सफलता का श्रेय गेस्टापो दल को ही है जिसके गुप्तचरों द्वारा प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में आतंक और भय की भावनाएँ निरंतर बनी रहती थीं। जर्मनी में इस गुप्तचर दल का संगठन इतना व्यापक था कि नागरिकों की शासन विरोधी प्रत्येक गतिविधि की सूचना सरकार को तुरंत मिल जाती थी और वह व्यक्ति अभियुक्त बनकर दंड का भागी होता था। जारशाही और उसके बाद कम्यूनिस्ट शासन की स्थापना की अवधि में रूस में गुप्तचर दलों ने शासनविरोधी कार्यकलापों की सूचनाएँ देने का कार्य किया जिसके परिणामस्वरूप जनता शासनविरोधी कथन और कार्य से सदैव ही डरती रही।
पिछले दो विश्वयुद्धों में, विशेषकर [[द्वितीय विश्वयुद्ध]] के समय, अंतरराष्ट्रीय गुप्तचर दलों का युद्ध में संलग्न देशों द्वारा संगठन किया गया। सैनिक संस्थानों, आयुधागारों, कारखानों, सैनिक योजनाओं और अभियानों की पूर्वसूचना प्राप्त करने के लिए एक देश द्वारा दूसरे देश में या तो एजेंट बनाए गए या भेजे गए। इन एजेंटों में महिलाएँ भी होती थीं। ये एजेंट शत्रुदेश के अधिकारियों अथवा विशिष्ट व्यक्तियों से घनिष्ठता स्थापित करके अथवा अन्य किसी गोपनीय युक्ति से आवश्यक सूचनाएँ प्राप्त करके उन्हें प्रेषित अथवा प्रसारित करते थे। ऐसे अनेक गुप्तचर युद्धकाल में पकड़े गए और उन्हें कठोर दंड दिया गया।
राजनीतिक गुप्तचरों का संगठन वर्तमान समय में व्यापक रूप से प्रचलित है। विद्रोही अथवा राज्य विरोधी तत्वों से प्रत्येक सरकार आक्रांत है। जहाँ राजशासन है वहाँ प्रजातंत्र के समर्थक राज्यसत्ता उलटने की चेष्टाएँ करते हैं। प्रजातंत्रवादी देशों में जो साम्यवादी नहीं हैं, साम्यवादी विचारोंवाले, अराजकतावादी अथवा अन्य अप्रजातांत्रिक तत्त्व सत्ता हथियाने की चेष्टा करते हैं और अपनी कार्यवाहियों से बाहरी देशों का समर्थन अथवा संबंध बनाए रखते हैं। राज्यहित की दृष्टि से उनकी गतिविधियों की जानकारी गुप्तचरों द्वारा दी जाती है। संसार के देशों में जो दो विरोधी वर्ग इस समय स्थापित हैं उनमें एक दूसरे के राजनीतिक अथवा सैनिक रहस्यों की जानकारी के निमित्त (एस्पायोनेज और काउंटर एस्पायोनेज की) युक्तियों का प्रयोग होता है। गुप्त सूचनाओं के एकत्रीकरण के निमित्त अब वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग हो रहा है। सन् 1960 की यू-2 विमान घटना वैज्ञानिक उपकरणों के उपयोग का प्रमुख उदाहरण है जब नभमंडल में पृथ्वी से पर्याप्त ऊँचाई पर वैज्ञानिक साधनों एवं फोटोग्राफी की विशिष्ट सामग्री से युक्त लड़नेवाले अमरीकी विमानचालक को रूस ने तोपों द्वारा गिरा लिया था और इस प्रकार रूसी सैनिक संस्थानों की फोटो लेने की अमरीकी युक्ति का अनावरण किया था।
राजनीतिक गुप्तचरों (जासूसों) के अतिरिक्त प्रत्येक देश में शासन व्यवस्था के अंग के रूप में एक अन्य प्रकार के गुप्तचर होते हैं जिन्हें सामान्यत: खुफिया पुलिस (डिटेक्टिव पुलिस) कहते हैं। इनका काम अपराध और अपराधियों की छानबीन अप्रत्यक्ष रूप से करना है। वे घटनास्थल पर प्राप्त अपराध के सूत्रों के सहारे अपराधी की खोज करते हैं। इस प्रकार उनका यह कार्य विस्मयकारी और रोमांचक होता है। फलत: उनके कार्यों पर आधारित उपन्यास और कहानी की एक स्वतंत्र विधा का विकास हुआ है जो जासूसी साहित्य के नाम से प्रख्यात है।
खुफिया पुलिस के अतिरिक्त अनेक देशों में स्वतंत्र जासूसों या गुप्तचरों का एक व्यावसायिक रूप भी है। इन लोगों को स्वतंत्र रूप से लोग अपने निजी मामलों में खोज करने के लिए नियुक्त करते हैं और वे गोपनीय ढंग से उनके लिए आवश्यक सूचनाएँ प्राप्त करते हें।
==गुप्तचर सेवाएँ==
===[[भारत]]===
* [[रिसर्च एंड एनालिसिस विंग|रॉ]]
===[[पाकिस्तान]]===
* [[इंटर-सर्विसेस इंटेलिजेंस|आई एस आई]]
===[[ब्रिटेन]]===
* [[एम आई ५]]
* [[एम आई ६]]
===[[संयुक्त राज्य अमेरिका|अमेरिका]]===
* [[सी आइ ए|सी आई ए]]
===[[सोवियत संघ]]===
* [[केजीबी|के जी बी]]
===[[इज़राइल|इज़राईल]]===
* [[मोसाद]]
== कुछ प्रसिद्ध जासूस ==
* [[किम फिल्बी]], गाय बर्गेस, मॅकलीन,
* [[नूर इनायत ख़ान|नूर इनायत खान]]
* [[माता हारी]]
; प्रसिद्ध काल्पनिक जासूस
* [[जेम्स बॉण्ड|जेम्स बाँड]]
== कुछ प्रसिद्ध जासूसी काँड ==
* [[साम्बा जासूसी काँड]]
* [[किम फिल्बी काँड]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
==इन्हें भी देखें==
* [[चर कार्य|चरकार्य]] (spionage)
* [[प्रति-गुप्तचरी]]
* [[गुप्तचर संस्था]]
* [[नूर इनायत ख़ान|नूर इनायत खान]]
* [[दूत]]
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://www.jankipul.com/2018/07/प्राचीन-भारत-में-गुप्तचर.html प्राचीन भारत में गुप्तचर-व्यवस्था : एक संक्षिप्त शोध]
*[https://www.shitalrcsgyan.com/intelligence-agencies/ प्रमुख देशों की गुप्तचर संस्थाएं] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20200221063407/https://www.shitalrcsgyan.com/intelligence-agencies/ |date=21 फ़रवरी 2020 }}
*[https://thecrediblehistory.com/2023/05/espionage-history/ भारत में गुप्तचर तंत्र का इतिहास] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20250217203809/https://thecrediblehistory.com/2023/05/espionage-history/ |date=17 फ़रवरी 2025 }}
*[https://www.bhartiyadharohar.com/mahabharat-yug-ke-guptchar/ महाभारत युग के गुप्तचर]
[[श्रेणी:शासन]]
[[श्रेणी:राजनीति]]
[[श्रेणी:जासूस]]
oz3hxl5csytvd0tjqct927pezlnhvdr
दण्ड
0
52949
6591387
6375866
2026-07-23T23:39:33Z
Schekinov Alexey Victorovich
12203
6591387
wikitext
text/x-wiki
[[चित्र:Women's_prison_punishment_(early_modern_era).jpg|अंगूठाकार|{{PAGENAME}}]]
[[राजा]], राज्य और छत्र की शक्ति और संप्रभुता का द्योतक और किसी अपराधी को उसके अपराध के निमित्त दी गयी सजा को '''दण्ड''' कहते हैं। एक दूसरे सन्दर्भ में, [[राजनीति|राजनीतिशास्त्र]] के चार उपायों - [[उपाय|साम]], [[कीमत|दाम]], '''दंड''' और [[भेद]] में एक [[उपाय]]। दण्ड का शाब्दिक अर्थ 'डण्डा' (छड़ी) है जिससे किसी को पीटा जाता है।
== हिन्दू धर्म में दण्ड का संस्कारगत अर्थ ==
संस्कारगत क्षेत्र में मुख्य रूप से [[ब्रह्मचारी]] विद्यार्थी के द्वारा धारण किए जानेवाले दंड का उल्लेख किया जा सकता है। [[स्मार्त सूत्र|गृह्यसूत्रों]], [[बृहत्संहिता]] तथा साधारणतया [[धर्मशास्त्र]] के अन्य ग्रंथों में तत्संबंधी विशद विवरण मिलते हैं। तदनुसार [[ब्राह्मण]], [[क्षत्रिय]] और [[वैश्य]] बालक भिन्न भिन्न अवस्थाओं में जब आचार्य के द्वारा [[यज्ञ]]विधि से [[यज्ञोपवीत|उपनयन संस्कार]] से संस्कृत होते हैं तो उन्हें सौम्यदर्शन और अनुद्वेगकर दण्ड भी धारण करने होते हैं। शास्त्रगत विधान और परंपरागत मान्यताएँ ये हैं कि ब्राह्मण बालक केशांतपर्यंत विल्वदंड, क्षत्रिय बालक ललाटपर्यंत पलाशदंड और वैश्यबालक नासिकापर्यंत उदुंबर ([[गूलर]]) का दंड धारण करें ([[मनुस्मृति]], द्वितीय, 45-47; वृहत्संहिता, 72.3-4)।
== राजनीति एवं प्रशासन ==
दण्ड शब्द का मुख्य रूप से प्रयोग राजनीतिशास्त्र और प्रशासन के सम्बन्ध में किया जाता है। जिसके द्वारा अपराधियों को दंडित किया जाय वही दंड है, किंतु इसका प्रयोग होता है राज्य और शासन की सीमा के भीतर। जब राज्य की सीमा के बाहर किसी, शत्रु, मित्र, मध्यस्थ अथवा उदासीन राज्य के प्रति उसका प्रयोग किया जाय तो वह राजनीति के चार उपायों में एक हो जाता है और उससे तात्पर्य होता है '''सैन्य प्रयोग''' का। इन बातों के विचार से संबंध रखनेवाला शास्त्र होता है दंडशास्त्र और उसकी नीति होती है [[दण्डनीति|दंडनीति]]। दंडनीति सरकार और प्रशासन का विज्ञान है, जिसका आधार है नैतिकता और विधि का पालन, जो दंड धारण करनेवाले तथा दंड पानेवाले दोनों ही पर समान रूप से लागू होती है। उसके बिना लोकयात्रा संभव नहीं। (''तस्यामायत्ता लोकयात्रा'' - [[अर्थशास्त्र (ग्रन्थ)|अर्थशास्त्र]], प्रथम आधि, 4-7)। [[कामन्दकीय नीतिसार|कामन्दक नीतिसार]] (द्वितीय 15) ([[शुक्रनीति]], प्रथम, 14) और [[महाभारत]] (शांतिपर्व, 15-8) की परिभाषा के अनुसार अपराधों का दमन (दम) ही दंड अथवा "नीति" कहलाता है। इस कार्य को करनेवाला अर्थात् इस गुण का प्रतीक राजा 'दंडी' कहलाता है, नयन (समाज का सुमार्ग पर नेतृत्व) के कारण। [[शंकराचार्य]] ने [[कामन्दकीय नीतिसार|कामंदक]] की टीका करते हुए [[मनुस्मृति]] (सप्तम्-22) को उद्धृत किया है, जहाँ यह कहा गया है कि सम्पूर्ण लोक दण्ड के भय के कारण ही जगत् का भोग संभव हो पाता है।
: ''तस्यसर्वाणि भूतानि स्थावराणि चराणि च ।
: ''भयाद्भोगायकल्पन्ते स्वधर्मान्न चलन्ति च ॥
अर्थात, दण्ड वह विधान है, जिसके भय से सभी प्राणी अपना-अपना भोग करने में समर्थ होते हैं, अन्यथा बलवान व्यक्ति दुर्बल व्यक्ति के धन, पत्नी आदि का ग्रहण कर लेता। इसी प्रकार वृक्ष आदि स्थावरों को काट कर भी वह दूसरों को न भोगने देता। राजा के डर से सज्जन भी नित्य नैमित्तिक आदि नियमों का पालन करते है। [[याज्ञवल्क्य]] के अनुसार दुराचारियों अर्थात अपराधियों का दमन करना ही दण्ड है। मनुष्य को प्रमाद से बचाने तथा उसके धन की रक्षा करने के लिए संसार में जो मर्यादा स्थापित की गयी है दण्ड उसी का नाम है। इससे स्पष्ट होता है कि दण्ड वह विधान है जो सामाजिक सम्बन्धों, सम्पत्ति के अधिकारों एवं परम्पराओं का सही ढंग से परिपालन करवाता था। स्पष्ट है, भारतीय राजनीतिशास्त्र में दंड का अत्यधिक महत्व था जो वास्तविक और प्रतीकात्मक, दोनों स्वरूपों से व्यक्त होता था।
===मनुस्मृति में दण्ड===
दण्ड के बारे में [[मनुस्मृति]] में बहुत बातें कही गईं हैं। [[मनु]] कहते हैं कि जो दण्ड है वही राजा, वही न्याय का प्रचारकर्त्ता और सब का शासनकर्त्ता, वही चार वर्ण और आश्रमों के धर्म का प्रतिभू अर्थात् जामिन है। वही राजा व दण्ड प्रजा का शासनकर्त्ता, सब प्रजा का रक्षक, सोते हुए प्रजास्थ मनुष्यों में जागता है, इसी लिये बुद्धिमान लोग दण्ड ही को [[धर्म]] कहते हैं। यदि राजा दण्ड को अच्छे प्रकार विचार से धारण करे तो वह सब प्रजा को आनन्दित कर देता है और जो विना विचारे चलाया जाय तो सब ओर से राजा का विनाश कर देता है। विना दण्ड के सब वर्ण अर्थात् प्रजा दूषित और सब मर्यादा छिन्न-भिन्न हो जाती है। दण्ड के यथावत् न होने से सब लोगों का राजा व राज्य व्यवस्था के विरुद्ध प्रकोप हो सकता है। यह भी कहा है कि दण्ड बड़ा तेजोमय है जिसे अविद्वान् व अधर्मात्मा धारण नहीं कर सकता। तब ऐसी स्थिति में वह दण्ड धर्म से रहित राजा व उसके कुटुम्ब का ही नाश कर देता है। यह भी कहा गया है कि जो राजा विद्या, सुशिक्षा से रहित, विषयों में आसक्त व मूढ़ है, वह न्याय से दण्ड को चलाने में समर्थ कभी नहीं हो सकता।
== दण्ड की उत्पत्ति ==
दण्ड की उत्पत्ति राज्यसंस्था की उत्पत्ति के साथ हुई। [[मनुस्मृति]] (सप्तम अध्याय) और [[महाभारत]] (शांतिपर्व: 56.13-33) में यह कहा गया है कि मानव जाति की प्रारंभिक स्थिति अत्यंत पवित्र स्वभाव, दोषरहित कर्म, सत्वप्रकृति और ऋतु की थी, जब न तो किसी राजा की स्थिति थी, न राज्य था, न दंड था, न दंडी था और सभी लोग धर्म के द्वारा ही एक दूसरे की रक्षा करते थे।
: ''न राज्यं न च राजासीत न दण्डो न च दाण्डिकः।''
: ''स्वयमेव प्रजाः सर्वा रक्षन्ति स्म परस्परम ॥''
किंतु कालांतर में तामस्गुणों का प्राबल्य बढ़ने लगा, मनुष्य समाज अपनी आदिम सत्व प्रकृति से च्युत हो गया और मात्स्य न्याय छा गया। बलवान् कमजोरों को खाने लगे। ऐसी स्थिति में राज्य और राजा की उत्पत्ति हुई और सबको सही रास्तों पर रखने के लिये दंड का विधान हुआ। दंड राज्य शक्ति का प्रतीक हुआ जो सारी प्रजाओं का शासक, रक्षक तथा सभी के सोते हुए जागनेवाला था। अत: दंड को ही धर्म स्वीकार किया गया (मनुस्मृति 7.18)। इससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि [[धर्म]] का साधक केवल दंड ही माना गया। वह धर्म जिसमें [[अर्थ]] और [[काम]] भी समाहित है अर्थात् दंड त्रिवर्ग का साधक स्वीकृत हुआ। आदर्श से स्खलन को दूर करने के लिये दंड की आवश्यकता हुई।
राज्य की शक्ति के रूप में दंड न्यायिक क्षेत्र में प्रसारित होने लगा। उसका उद्देश्य था समाज और धर्म की मान्यताओं और यथास्थिति की रक्षा करना। वह यथास्थिति धर्म के नाम से अभिहित थी और धर्म के भी वर्ण, जाति, आश्रम, देश, काल, समूह, वर्ग, परिवार और व्यवसाय आदि भेदों पर आधारित और भिन्न भिन्न रूपों में मान्य अनेक प्रकार थे, जिनका ज्ञान धर्मासनस्थ दंडकर्त्ता के लिये अत्यावश्यक होता था। दंड का प्रयोग करनेवाला राजा भी यदि धर्म का उल्लंघन करे तो दंड का भागी होता था। धर्म अर्थात् विधि से परे कोई न था धर्म राजाओं का भी राजा था। राज्य का प्रधान राजा अथवा अन्य कोई शक्ति, यथा गणतंत्र का मुखिया न्यायिकय संगठन का प्रधान अवश्य था, किंतु विधि का प्रधान वह कभी नहीं हो सका और विधि के उल्लंघन करने पर दंड उसपर भी सवार हो जाता था। भारत में विधि और दंड की यह संप्रभुता ब्राह्मणकाल से लेकर मनुस्मृति और महाभारत के युग के बीच विकसित हुई दिखाई देती है।
== दण्ड के सिद्धान्त ==
आधुनिक [[विधिशास्त्री]] दण्ड के चार सिद्धान्त मानते हैं --
* प्रतीकारात्मक (Retributive)
* निषेघात्मक (Deterrent)
* अवरोधक (Preventive)
* सुधारात्मक (Reformative)
सभी देशों में समाज की अत्यंत प्रारंभिक अवस्था '''प्रतीकारात्मक दंड''' की थी, जिसमें आँख के बदले आँख और दाँत के बदले दाँत (फोड़ देने और उखाड़ देने) का सिद्धांत चलता था। वैदिक साहित्य की "जीवगृभ" जैसी संज्ञाएँ इस बात की द्योतक हें कि भारतीय इतिहास के अत्यंत प्रारंभिक काल का न्याय कठोर और प्रतीकारात्मक ही था। इस सिद्धान्त की मान्यता है कि एक अपराधी को कठोर दण्ड देने से दूसरे लोग अपराध करने से डरते हैं।
'''निषेधात्मक सिद्धान्त''' की मान्यता है कि अपराधी को दण्ड देने से जिसके प्रति अपराध हुआ है उसे उसका 'बदला' मिल जाता है। यह सभी सिद्धान्तों में सबसे बुरा सिद्धान्त है क्योंकि इसमें समाज का कल्याण या समाज की सुरक्षा की भावना नहीं है।
तीसरी अवस्था में दंड का स्वरूप प्रतीकारात्मक के बदले '''अवरोधक''' हो गया। इसका कारण था दोषी मनुष्य के प्रति दोष किए गए हुए मनुष्य का निपट लेने के बजाय दंड धारण करनेवाले राज्य का बीच में आ जाना। व्यक्तिगत बदले की भावना को समाप्त कर राजकीय दंड की महिमा को स्थापित करना राज्य का उद्देश्य और उसकी बढ़ती हुई शक्ति का द्योतक हो गया। दीवानी के मामलों में अर्थदंड आदि द्वारा दोष किए गए हुए व्यक्ति को कुछ बदला दिलाना यद्यपि वैध माना गया, फौजदारी के मामलों में बदला लेना अब असंभव था। किंतु कठोर - कभी कभी तो अत्यंत क्रूर और असभ्य दंडों का दिया जाना प्रायः नियम सा था। यदि हम उपनिषदों के दैवदंडों, बौद्धग्रंथों (हिस्ट्री ऑव कोशल—वि पाठक, पृष्ठ 338-342) में वर्णित दंडों, [[अर्थशास्त्र]] के द्वारा हाथ पाँव काट लिए जाने की अनुशंसाओं तथा [[मेगेस्थनीज]] द्वारा की जानेवाली उसकी संपुष्टियों को देखें अथवा पूर्व और पश्चिम दोनों ही ओर प्रचलित मध्यकालीन और कुछ हद तक आधुनिक काल के प्रारंभ तक के दंडों का विवेचन करें तो यह कहना होगा कि वे अत्यन्त ही क्रूर और आधुनिक दृष्टि से बर्बर थे। उनका उद्देशय था औरों में अपराध करने के प्रति भय उत्पन्न करना। इनमें अंग-भंग, जीवित जला दिया जाना, मृत्युदंड, आजीवन कारावास और असह्य यातनाओं से भरे हुए दंड होते हैं। निरोधक दंडों में अपराध के कारण अथवा उसके भविष्य के कर्ता को ही उससे रोक देने का उपाय किया जाता है, जो उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता छीनकर संपन्न होता है। भारतवर्ष का निरोधक जेल विधान (Preventive Detention Act) इसी श्रेणी में है।
चौथा और सर्वोत्तम दंड का प्रकार है सुधारात्मक। सभ्यता के विकास के क्रम में भी यद्यपि सभी देशों में संभावित दोषियों के प्रति दोषों के गंभीर परिणाम और दंडयातनाओं का भय उपस्थित करने के लिय कठोर अवरोधक दंड दिए जाते रहे हैं, पर कभी-कभी सुधारात्मक प्रवृत्तियाँ भी उठती रही हैं। प्राचीन रोम में दोषी की स्वतंत्रता का हरण (जेल में डाल देना) मात्र ही सबसे बड़ा दंड माना गया और उसके बाद कोई यातना आवश्यक नहीं समझी गई (ad continendos non ad puriendos)। भारतवर्ष में [[चाणक्य|कौटिल्य]] ने काराग्रस्तों को प्रायश्चित्त कराने और अपने पापों का बोध कराने की व्यवस्था के द्वारा उन्हें विशुद्ध कराने का उल्लेख (द्वितीय, 36,589) किया है। अशोक ने भी अपने चतुर्थ स्तंभलेख में व्यवहारसमता और दंडसमता के साथ शुद्धचरित्र, धर्मरत और सद्व्यवहारी दोषियों के दंडों को कम करने का आदेश दिया है। ये बातें दंड विधान की सुधारात्मक प्रवृत्ति की द्योतक हैं। स्मृतियों में धिग्दंड अथवा वाग्दंड की चर्चाएँ आती हैं, जो सर्वदा कायदंड और वधदंड से पहले आता था। उसका तात्पर्य यह था कि सामाजिक निंदा मात्र से यदि काम चल जाय तो कठोर यातनाओं की आवश्यकताएँ ही क्या ? एक नियम तो सर्वमान्य था और वह यह कि दंड "यथाहै" हो और वह आप्तदोष होने पर ही दिया जाना चाहिए।
20वीं शती में दंडविधान को '''सुधारात्मक''' स्वरूप देने के प्रयत्न हो रहे हैं। 1872 ई में [[लंदन|लन्दन]] में एक अंतरराष्ट्रीय जेल सुधार और दंडविधान के किसी अंतरराष्ट्रीय स्वरूप को निश्चित करने के लिये सभा हुई। बाद में तत्संबंधी सामूहिक संघटन भी स्थापित हुए पर उसके सदस्य अधिकांशत: यूरोपीय देश ही रहे। धीरे धीरे कठोर दंडों के स्थान पर काराग्रस्त दोषी के नैतिक जीवन का पुनरुज्जीवन लक्ष्य माना जाने लगा। उसमें भय की अपेक्षा आशा अधिक रखी जाने लगी है। दंड के सुधारात्मक सिद्धांत में उसका विधान दोषी की अवस्था, सामाजिक वातावरण और स्थितिविशेष के आधार पर किया जाता है। दोषों के लिये समाज और वातावरण को भी उत्तरदायी माना जाता है। अत: दोषी को सुधारने के लिये मनोवैज्ञानिक उपायों का प्रयोग, उसका वैयक्तिक स्तर पर विचार, दोषी बालकों के लिय सुधारभवनों की व्यवस्था, औद्योगिक शिक्षा, साधारण शिक्षा, नैतिक और धार्मिक व्याख्यान और अन्य सुनियोजित व्यवस्थाएँ की जाती हैं। भारतवर्ष में भी कुछ अन्य देशों की तरह काराग्रस्तों को बँधनेवाले बाँधों, सड़कों अथवा अन्य निर्माणों में नौकरी और मजदूरी कराने अथवा औद्योगिक शिक्षाओं के द्वारा समाजोपयोगी और परिवारसेवी बनाने के प्रयत्न प्रारंभ हैं। असंभव नहीं कि कुछ सदियों में व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अपहरण मात्र सबसे बड़ा दंड माना जाय और मानव स्वभाव इतना उदात्त और पवित्र हो जाये कि प्राणाहरण और आजीवन कठोर कारावास जैसे दंडों की आवश्यकता ही न रहे।
==इन्हें भी देखें==
* [[दण्डनीति]]
* [[दण्ड (समय की प्राचीन ईकाई)]]
* [[दण्डी]] -- संस्कृत के महान कवि
* [[दण्डसंहिता]]
* [[भारतीय दण्ड संहिता]]
* [[दण्ड (पूर्ण विराम)]]
==बाहरी कड़ियाँ==
* [http://ignited.in/I/a/303556 प्राचीन भारतीय दंड व्यवस्था] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20220618090833/http://www.ignited.in/I/a/303556 |date=18 जून 2022 }}
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:विधि]]
[[श्रेणी:समाज]]
[[श्रेणी:न्याय]]
[[श्रेणी:दण्ड न्याय]]
[[श्रेणी:दण्ड|*]]
hs7dmg2rwhdcmjw0049ufunzfvbqro5
गुलज़ार (गीतकार)
0
70547
6591381
6486547
2026-07-23T19:58:28Z
InternetArchiveBot
500600
Rescuing 2 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5
6591381
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox Actor
|name = गुलज़ार
|image = Gulzar 2008 - still 38227.jpg
|birthname = सम्पूर सिंह कालर ।
|birthdate = {{birth date and age|1934|8|18}}
|birth_place = [[दीना]], [[झेलम ज़िला|झेलम जिला]], [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]], [[ब्रिटिश भारत के प्रेसीडेंसी और प्रांत|ब्रिटिश भारत]]
|occupation = [[निर्देशक]],<br />[[गीतकार]],<br />[[पटकथा लेखक]],<br />[[फ़िल्म-निर्माण|निर्माता]],<br />[[कवि]]
|yearsactive = 1961 - वर्तमान
| spouse = [[राखी गुलज़ार]]
| parents =
|children = [[मेघना गुलज़ार]]
| awards= {{awd|[[Academy Award for Best Original Song|Best Original Song]]|2009|[[Slumdog Millionaire (soundtrack)|Slumdog Millionaire]]}}<br>'''[[Filmfare Best Lyricist Award|Best Lyricist]]'''<br />1977 ''Do diwane is shahar mein...'' [[Gharaonda]]<br />1979 ''Aanewala pal jaane wala hai...'' [[Gol Maal]]<br />1980 ''Hazaar raahen...'' Thodi Si Bewafaai<br />1983 ''Tujhse naaraz nahin zindagi...'' [[Masoom]]<br />1988 ''Mera kuch saamaan...'' [[Ijaazat]]<br />1991 ''Yaara sili sili...'' [[Lekin...]]<br />1998 ''Chhaiyya Chhaiyya...'' [[Dil Se]]<br />2003 ''Saathiya...'' [[Saathiya]]<br />'''[[Filmfare Best Dialogue Award|Best Dialogue]]'''<br />1971 [[Anand (film)|Anand]]<br />1973 [[Namak Haraam]]<br />1996 [[Maachis]]<br />2003 [[Saathiya]]<br />'''[[Filmfare Best Story Award|Best Story]]'''<br />1996 [[Maachis]]<br />'''[[Filmfare Best Director Award|Best Director]]''' <br />1976 [[Mausam]]<br />'''[[Filmfare Critics Award for Best Movie|Best Feature Film (Critics)]]'''<br />1975 [[Aandhi]]<br />2002 '''[[Filmfare Lifetime Achievement Award|Lifetime Achievement Award]]'''<br>'''[[National Film Award for Best Directing|Best Director]]''' <br />1976 [[Mausam]]<br />'''[[National Film Award for Best Lyrics|Best Lyricist]]'''<br />1988 ''Mera kuch saaman...'' [[Ijaazat]]<br />1991 ''Yaara sili sili...'' [[Lekin...]]<br />'''[[National Film Award for Best Popular Film Providing Wholesome Entertainment|Best Film for Wholesome Entertainment]]'''<br />1996 [[Maachis]]<br />'''[[National Film Award for Best Screenplay|Best Screenplay]]'''<br />1972 [[Koshish]]<br />'''Best Documentary''' <br />1991 ''Ustad [[Amjad Ali Khan]]''<br />1991 ''Pt [[Bhimsen Joshi]]''
}}
'''ग़ुलज़ार''' नाम से प्रसिद्ध '''सम्पूर्ण सिंह कालरा''' (जन्म-१८ अगस्त १९३४)<ref>{{Cite web |url=http://hindi.webdunia.com/%E0%A4%B9%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%9A%E0%A5%87%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BE%E0%A4%B0/%E0%A4%B9%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%9A%E0%A5%87%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BE%E0%A4%B0-1080818037_1.htm |title=हजार चेहरों वाले गुलज़ार |access-date=9 अगस्त 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121112063608/http://hindi.webdunia.com/%E0%A4%B9%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%9A%E0%A5%87%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BE%E0%A4%B0/%E0%A4%B9%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%9A%E0%A5%87%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BE%E0%A4%B0-1080818037_1.htm |archive-date=12 नवंबर 2012 |url-status=dead }}</ref> [[हिन्दी सिनेमा|हिन्दी फिल्मों]] के एक प्रसिद्ध गीतकार हैं। इसके अतिरिक्त वे एक कवि, पटकथा लेखक, फ़िल्म निर्देशक नाटककार तथा प्रसिद्ध शायर हैं। उनकी रचनाएँ मुख्यतः [[हिन्दी]], [[उर्दू भाषा|उर्दू]] तथा [[पंजाबी]] में हैं, परन्तु [[बृज भाषा|ब्रज भाषा]], [[खड़ीबोली|खड़ी बोली]], [[मारवाड़ी]] और [[हरियाणवी भाषा|हरियाणवी]] में भी इन्होंने रचनायएँ कीं। गुलज़ार को वर्ष २००२ में [[साहित्य अकादमी पुरस्कार|सहित्य अकादमी पुरस्कार]] और वर्ष २००४ में भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान [[पद्म भूषण]] से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष २००९ में [[डैनी बॉयल]] निर्देशित फ़िल्म [[स्लम्डाग मिलियनेयर]] में उनके द्वारा लिखे गीत [[जय हो]] के लिये उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीत का [[अकेडमी पुरस्कार|ऑस्कर पुरस्कार]] मिल चुका है। इसी गीत के लिये उन्हें [[ग्रैमी पुरस्कार]] से भी सम्मानित किया जा चुका है।
== प्रारम्भिक जीवन ==
गुलज़ार का जन्म [[भारत]] के [[झेलम नदी|झेलम]] जिला [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] के दीना गाँव में, जो अब [[पाकिस्तान]] में है, १८ अगस्त १९३४ को हुआ था। गुलज़ार अपने पिता की दूसरी पत्नी की इकलौती संतान हैं। उनकी माँ उन्हें बचपन में ही छोड़ कर चल बसीं। माँ के आँचल की छाँव और पिता का दुलार भी नहीं मिला। वह नौ भाई-बहन में चौथे नंबर पर थे। बंटवारे के बाद उनका परिवार [[अमृतसर]] ([[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]], [[भारत]]) आकर बस गया, वहीं गुलज़ार साहब मुंबई चले गये। वर्ली के एक गेरेज में वे बतौर मेकेनिक [पेंट के रंग मैचिंग-(डेंटिंग होने पर)] का काम करने लगे और खाली समय में किताबें पढने लगे, और लिखने का आकर्षण बढने लगा। फ़िल्म इंडस्ट्री में उन्होंने बिमल राय, हृषिकेश मुख़र्जी और हेमंत कुमार के सहायक के तौर पर काम शुरू किया। बिमल राय की फ़िल्म [[बन्दिनी (1963 फ़िल्म)|बन्दिनी]] के लिए गुलज़ार ने अपना पहला गीत लिखा।
गुलज़ार त्रिवेणी छ्न्द के सर्जक हैं।
== रचनात्मक लेखन ==
गुलजार द्वारा लिखी गई पुस्तकों की सूची-
* चौरस रात (लघु कथाएँ, 1962)
* जानम (कविता संग्रह, 1963)
* एक बूँद चाँद (कविताएँ, 1972)
* रावी पार (कथा संग्रह, 1997)
* रात, चाँद और मैं (2002)
* रात पश्मीने की
* खराशें (2003)
== चलचित्र सृजन ==
=== निर्देशन ===
गुलजार ने बतौर निर्देशक अपना सफर १९७१ में ''[[मेरे अपने (1971 फ़िल्म)|मेरे अपने]]'' से शुरू किया। इससे पहले उन्होंने ''[[आशीर्वाद (1968 फ़िल्म)|आशीर्वाद]]'', ''[[आनन्द (फ़िल्म)|आनन्द]]'', ''[[ख़ामोशी]]'' और अन्य जैसी फिल्मों के लिए संवाद और पटकथा लिखी थी। ''मेरे अपने'' फिल्म [[तपन सिन्हा]] की बंगाली फिल्म ''अपंजन'' (१९६९) की पुनर्निर्मीती थी। इस फ़िल्म में [[मीना कुमारी]] ने आनंदी देवी की प्रमुख भूमिका निभाई, जो एक बुढी विधवा है जो बेरोजगारों और पीड़ित युवाओं की स्थानीय झगड़ों के बीच गिर जाती है। एसे हि एक झगड़े में आनंदी देवी की मौत के कारण उन्हें पता चलता है कि हिंसा कैसे व्यर्थ है।
१९७२ में आयी [[संजीव कुमार]] और [[जया बच्चन|जया भादुङी]] अभिनीत फिल्म ''कोशिश'' जो एक गूंगे बहरे दम्पति के जीवन पर आधारित कहानी थी, ने आलोचकों को भी हैरान कर दिया। संजीव कुमार को इस फ़िल्म के लिए [[राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार - सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार]] मिला।
इसके बाद गुलजार ने संजीव कुमार के साथ ''आंधी'' (१९७५), ''मौसम'' (१९७५), ''अंगूर'' (१९८१) और ''नमकीन'' (१९८२) जैसी फिल्मे निर्देशित की।
गुलजार द्वारा निर्देशित चलचित्रों की सूची-
* ''[[मेरे अपने (1971 फ़िल्म)|मेरे अपने]]'' (१९७१)
* ''[[परिचय (1972 फ़िल्म)|परिचय]]'' (१९७२)
* ''[[कोशिश (1972 फ़िल्म)|कोशिश]]'' (१९७२)
* ''[[अचानक (1973 फ़िल्म)|अचानक]]'' (१९७३)
* ''खुशबू'' (१९७५)
* ''[[आँधी (1975 फ़िल्म)|आँधी]]'' (१९७५)
* ''[[मौसम (1975 फ़िल्म)|मौसम]]'' (१९७६)
* ''[[किनारा (1977 फ़िल्म)|किनारा]]'' (१९७७)
* ''किताब'' (१९७८)
* ''[[मीरा (1979 फ़िल्म)|मीरा]]'' (१९७९)
* ''[[अंगूर (1982 फ़िल्म)|अंगूर]]'' (१९८२)
* ''[[नमकीन (फ़िल्म)|नमकीन]]'' (१९८२)
* ''[[इजाज़त|इजाजत]]'' (१९८७)
* ''[[लिबास (1988 फ़िल्म)|लिबास]]'' (१९८८)
* ''[[लेकिन (1990 फ़िल्म)|लेकिन]]'' (१९९०)
* ''माचिस'' (१९९६)
* ''[[हु तू तू (1999 फ़िल्म)|हु तू तू]]'' (१९९९)
=== गीत लेखन ===
गुलजार द्वारा लिखे गए गीतों वाले फिल्मों की सूची-
* [[ओमकारा]]
* [[रेनकोट]]
* [[पिंजर (फ़िल्म)|पिंजर]]
* [[दिल से]]
* [[आँधी (1975 फ़िल्म)|आँधी]]
* [[दूसरी सीता (1974 फ़िल्म)|दूसरी सीता]]
* [[इजाज़त|इजाजत]]
=== पटकथा लेखन ===
* [[आँधी (1975 फ़िल्म)|आँधी]] (1975) - पटकथा, संवाद
* [[मीरा (1979 फ़िल्म)|मीरा]] (1979) - पटकथा, संवाद
== पुरस्कार और सम्मान ==
* [[फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार]] सर्वश्रेष्ठ गीतकार - १९७७, १९७९, १९८०, १९८३, १९८८, १९८८, १९९१, १९९८, २००२, २००५
* [[साहित्य अकादमी पुरस्कार]] २००२ में
* [[पद्म भूषण|पद्मभूषण]] - २००४ ''' गुलज़ार ''' को [[भारत सरकार]] द्वारा सन [[२००४]] में [[कला]] क्षेत्र में [[पद्म भूषण]] से सम्मानित किया गया था। ये [[महाराष्ट्र]] राज्य से हैं।
* ऑस्कर (सर्वश्रेष्ठ मौलिक गीत का) - २००९ में अंग्रेजी चलचित्र '[[स्लमडॉग मिलियनेयर]]' के गीत 'जय हो' के लिए
* ग्रैमी पुरस्कार- २०१० में।
* [[दादासाहेब फाल्के पुरस्कार|दादा साहब फाल्के सम्मान]] - २०१३<ref name="IndiaToday-20140412">{{cite news|url=http://indiatoday.intoday.in/story/gulzar-to-get-dadasaheb-phalke-award/1/355422.html|title=Gulzar to get Dadasaheb Phalke award|trans-title=गुलज़ार को मिलेगा दादा साहब फाल्के पुरस्कार|date=१२ अप्रैल २०१४|work=इण्डिया टुडे डॉट इन|publisher=इण्डिया टुडे समूह|accessdate=१२ अप्रैल २०१४|language=अंग्रेज़ी|archive-url=https://web.archive.org/web/20140503214231/http://indiatoday.intoday.in/story/gulzar-to-get-dadasaheb-phalke-award/1/355422.html|archive-date=3 मई 2014|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|title=गुलज़ार को मिला दादा साहब फाल्के|url=http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/04/140412_gulzar_phalke_award_vt.shtml|date=१२ अप्रैल २०१४|accessdate=१२ अप्रैल २०१४|publisher=बीबीसी हिन्दी|archive-url=https://web.archive.org/web/20140413163426/http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/04/140412_gulzar_phalke_award_vt.shtml|archive-date=13 अप्रैल 2014|url-status=live}}</ref>
ज्ञानपीठ पुरस्कार 2023 से गुलजार को सम्मानित किया जाएगा।(प्रस्तावित)
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20090410100027/http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%9C%E0%A4%BC%E0%A4%BE%E0%A4%B0 गुलज़ार (कविता कोश)]
* [https://web.archive.org/web/20100209015240/http://www.hindimedia.in/index.php?option=com_content&task=view&id=10074&Itemid=86 इब्ने बतूता के जूते ने की गुलजार की फज़ीहत]
* {{imdb name|0347899|गुलज़ार}}<ref>{{Cite web|url=https://onlineurdupoetry.com/reality-gulzar-quotes-on-life/|title=Best 210+ Reality Gulzar Quotes on Life {{!}} Gulzar Poetry 2025|date=2025-02-05|language=en-US|access-date=2025-10-13|archive-date=10 सितंबर 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20250910210703/https://onlineurdupoetry.com/reality-gulzar-quotes-on-life/|url-status=dead}}</ref>
* [https://onlineurdupoetry.com/reality-gulzar-quotes-on-life/ गुलज़ार के जीवन पर वास्तविक उद्धरण] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20250910210703/https://onlineurdupoetry.com/reality-gulzar-quotes-on-life/ |date=10 सितंबर 2025 }}<br />
{{पद्म भूषण धारक 2000–2009}}
{{दादासाहेब फाल्के पुरस्कार}}
{{फ़िल्मफ़ेयर लाइफ़ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार}}
{{फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार}}
{{फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखन पुरस्कार}}
[[श्रेणी:२००४ पद्म भूषण]]
[[श्रेणी:राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार विजेता]]
[[श्रेणी:फ़िल्मी गीतकार]]
[[श्रेणी:हिन्दी कथाकार]]
[[श्रेणी:हिन्दी कवि]]
[[श्रेणी:उर्दू शायर]]
[[श्रेणी:सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का फिल्म फेयर पुरस्कार]]
[[श्रेणी:दादासाहेब फाल्के पुरस्कार विजेता]]
[[श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत उर्दू भाषा के साहित्यकार]]
[[श्रेणी:1936 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
1j12lia7e7at72zwd9hrh3uz1gysftx
मान कवि
0
80219
6591350
4785037
2026-07-23T15:26:45Z
Phantomcipher
849651
6591350
wikitext
text/x-wiki
'''मान कवि''' (१६२९ ई॰ - २२ अक्टूबर १६८० ई॰) मेवाड़ के महाराजा राजसिंह के दरबारी कवि थे। वो वीररस के कवि थे। इनके जीवन काल पर अधिक जानकारी नहीं है परन्तु इतना ज्ञात है की इनका जन्म राव जाति में हुआ था, जो राजस्थान के परिपेक्ष में एक कवित्व वाली यौद्धा जाति मानी जाती है।<ref>{{cite book|title=हिन्दी साहित्य का दूसरा इतिहास|url=http://books.google.co.in/books?id=3KmlYsIRAHcC&pg=PA254|page=२५४|author=बच्चन सिंह|isbn=9788183611800|publisher=राधाकृष्ण प्रकाशन|access-date=11 दिसंबर 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20131214052135/http://books.google.co.in/books?id=3KmlYsIRAHcC&pg=PA254|archive-date=14 दिसंबर 2013|url-status=live}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:1629 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:१६८० मृत्यु]]
[[श्रेणी:भारतीय कवि]]
[[श्रेणी:वीर काव्य]]
nullcj5znkzf2d6t8yeg77k8kbwfilp
हीरा लाल देवपुरा
0
146038
6591365
6391144
2026-07-23T16:35:21Z
~2026-41315-78
937851
/* व्यक्तिगत जीवन */ भारत
6591365
wikitext
text/x-wiki
{{seealso|राजस्थान के मुख्यमंत्री}}
{{seealso|भारत के मुख्यमंत्रियों की सूची}}
{{Infobox Indian politician
| name = हीरा लाल देवपुरा
| image =Hiralal Devpura.jpg
| caption =
| birth_date = 1925
| birth_place =
| residence =
| death_date = 2004
| death_place =
| constituency =[[कुम्भलगढ़ दुर्ग|कुंभलगढ़]]
| office = [[राजस्थान के मुख्यमंत्रियों की सूची|राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री]]
| term = फरवरी 23, 1985 – मार्च 10, 1985
| predecessor = [[शिवचरण माथुर]]
| successor =[[हरिदेव जोशी]]
| party = [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]
| religion =
| spouse =
| website =
| footnotes =
| date =
| year =
| source =
}}
हीरा लाल देवपुरा एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता है और [[राजस्थान]] के [[मुख्यमन्त्री (भारत)|मुख्यमंत्री]] रह चुके है।
राजस्थान के मुख्यमंत्रियों में अब तक सबसे कम कार्यकाल हीरा लाल देवपुरा का रहा मात्र 15 दिन रहा
== व्यक्तिगत जीवन ==
राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष राजस्थान 7 मई 1999
1 april 2000- 31 march 2005
== राजनीतिक जीवन ==
हीरा लाल देवपुरा सबसे कम समय की अवधि (मात्र 16 दिन) के लिए राज्य के मुख्यमंत्री बने थे।{{cn|date=अप्रैल 2022}}
== सन्दर्भ ==
== बाहरी कड़ियाँ==
[[श्रेणी:राजस्थान]]
[[श्रेणी:राजस्थान के मुख्यमंत्री]]
[[श्रेणी:राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष]]
[[श्रेणी:मुख्यमंत्री]]
[[श्रेणी:राजनीतिज्ञ]]
980wov1ughqug5ytshitqtptz3vpx09
6591420
6591365
2026-07-24T02:04:52Z
AMAN KUMAR
911487
[[विशेष:योगदान/~2026-41315-78|~2026-41315-78]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-41315-78|वार्ता]]) द्वारा किया गया1 संपादन प्रत्यावर्तित किया गया: स्रोतहीन जानकारी हटाई
6591420
wikitext
text/x-wiki
{{seealso|राजस्थान के मुख्यमंत्री}}
{{seealso|भारत के मुख्यमंत्रियों की सूची}}
{{Infobox Indian politician
| name = हीरा लाल देवपुरा
| image =Hiralal Devpura.jpg
| caption =
| birth_date = 1925
| birth_place =
| residence =
| death_date = 2004
| death_place =
| constituency =[[कुम्भलगढ़ दुर्ग|कुंभलगढ़]]
| office = [[राजस्थान के मुख्यमंत्रियों की सूची|राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री]]
| term = फरवरी 23, 1985 – मार्च 10, 1985
| predecessor = [[शिवचरण माथुर]]
| successor =[[हरिदेव जोशी]]
| party = [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]
| religion =
| spouse =
| website =
| footnotes =
| date =
| year =
| source =
}}
हीरा लाल देवपुरा एक [[भारत|भारतीय]] राजनेता है और [[राजस्थान]] के [[मुख्यमन्त्री (भारत)|मुख्यमंत्री]] रह चुके है।
राजस्थान के मुख्यमंत्रियों में अब तक सबसे कम कार्यकाल हीरा लाल देवपुरा का रहा मात्र 15 दिन रहा
== व्यक्तिगत जीवन ==
== राजनीतिक जीवन ==
हीरा लाल देवपुरा सबसे कम समय की अवधि (मात्र 16 दिन) के लिए राज्य के मुख्यमंत्री बने थे।{{cn|date=अप्रैल 2022}}
== सन्दर्भ ==
== बाहरी कड़ियाँ==
[[श्रेणी:राजस्थान]]
[[श्रेणी:राजस्थान के मुख्यमंत्री]]
[[श्रेणी:राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष]]
[[श्रेणी:मुख्यमंत्री]]
[[श्रेणी:राजनीतिज्ञ]]
i3xlh15bwslspiy2noeaj94qszt4u2i
वार्ता:एंड्रॉइड (प्रचालन तंत्र)
1
197547
6591380
3997723
2026-07-23T19:23:09Z
~2026-41223-14
937879
/* 24 मई 2017 */ उत्तर
6591380
wikitext
text/x-wiki
{{वार्ता शीर्षक}}
==आज का आलेख मूल्यांकन==
===24 मई 2017===
{{सुनो|Ankitsharma3003}}
* सन्दर्भों में सुधार बाकी मतलब उनमें ( |trans_title= |language= ) जोड़े उदाहरण के लिए [[गतिमान एक्सप्रेस]] या [[वॉनाक्राय रैनसमवेयर हमला]] के संदर्भ देखें। वैसे संदर्भ इसी फॉरमेट में लिखे जाते हैं पर आप आसान फॉरमेट जैसे :- (जब संदर्भ हिंदी में हो)
**<nowiki><ref>[https://www.aajtak.com/yogi_new_up_cm योगी बने यूपी के नये सीएम] - [[आजतक]] - 24 मई 2017</ref></nowiki> या
**(जब किसी अन्य भाषा जैसे इंग्लिश में हो तो उसका हिंदी में अनुवाद शीर्षक भी लिखा जाता है)
**<nowiki><ref>[http://www.aljazeera.com/news/2017/05/ransomware-avoid-170513041345145.html WannaCry: What is ransomware and how to avoid it - वॉनाक्राय: रैनसमवेयर क्या है और इससे कैसे बचें]
(इंग्लिश में)- [[अल जज़ीरा]] - 13 मई 2017</ref></nowiki> में भी लिख सकते हैं।
*पेज पर उसी के नाम से इंटरविकि लिंक दिया गया है। जो पेज है उसी पर उसके ही नाम का लिंक देने से क्या फायदा। (एंड्रॉइड पेज पर अनेक जगह एंड्रॉइड का लिंक दिया गया है उसे हटाएँ)
*पहले संदर्भ को भी सही करें इसके लिए भी आप गतिमान एक्सप्रेस पेज के संदर्भ देख सकते हैं कि उन्हें कैसे, किस फॉरमेट में लिखा गया है।
संदर्भ के विषय में कुछ समझ न आने पे अवश्य पूछें, यहां सक्रिय सदस्यों की कमी है अतः धैर्य बनाये रखें।
आपके अभी तक के योगदान हेतु धन्यवाद।। ---<small><span style="border:2px ;background:#00008B">[[User:चक्रपाणी|'''<span style="background:#00008B;color:white"> चक्रपाणी </span>''']][[User talk:चक्रपाणी|<span style=";background-color:skyblue"> वार्ता </span>]]</span></small> 11:01, 24 मई 2017 (UTC)
:{{सुनो|चक्रपाणी}}नमस्ते , मैंने सन्दर्भ व् इंटरविकी लिंक में सुधर कर दिया है,आपके मार्गदर्शन हेतु धन्यवाद |[[सदस्य:Ankitsharma3003|अंकित3003]] ([[सदस्य वार्ता:Ankitsharma3003|वार्ता]]) 12:33, 24 मई 2017 (UTC)
:@[[सदस्य:चक्रपाणी|चक्रपाणी]] [[विशेष:योगदान/~2026-41223-14|~2026-41223-14]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-41223-14|वार्ता]]) 19:23, 23 जुलाई 2026 (UTC)
{{ping|Ankitsharma3003}} संदर्भों में अभी सुधार बाकी है उन्हें हिंदी में ने अनुवाद शीर्षक के साथ लिखें। ---<small><span style="border:2px ;background:#00008B">[[User:चक्रपाणी|'''<span style="background:#00008B;color:white"> चक्रपाणी </span>''']][[User talk:चक्रपाणी|<span style=";background-color:skyblue"> वार्ता </span>]]</span></small> 10:40, 26 मई 2017 (UTC)
== पृष्ठ के नाम को बदलने के लिए अनुरोध ==
जैसा की शीर्षक से ही पता चलता हैं, इस पृष्ठ के नाम में अशुद्धि हैं, इसे एंड्रॉइड से बदलकर एंड्रॉयड करना चाहिए {{अहस्ताक्षरित|Pratikthink|18:38, 29 अक्टूबर 2018 (UTC)}}
:शीर्षक से तो सिर्फ नाम पता चल रहा है। वैसे कई समाचार वेबसाइट में वर्तमान नाम (एंड्रॉइड) का ही इस्तेमाल हो रहा है। जैसे [https://www.jagran.com/technology/latest-launch-google-android-pie-operating-system-launched-these-devices-will-get-early-access-18289340.html दैनिक जागरण], [https://m.dailyhunt.in/news/india/hindi/my+khabar+hindi-epaper-mykrhin/google+os+ke+letest+varjan+android+p+ka+nam+android+pistachio+to+nahi-newsid-92181410 डेलीहंट], [https://www.bhaskar.com/tech-knowledge/compare/news/iphone-vs-android-phone-comparison-security-hardware-os-battery-and-ai-0840209.html दैनिक भास्कर] हालांकि इस नाम को ढूंढते ढूंढते मुझे एंड्राइड शब्द भी कई बार दिखा था। --[[स:स|स]] ([[सवा:स|वार्ता]]) 18:29, 8 नवम्बर 2018 (UTC)
myodb5cqgd131vt2hwco41lzlt9lt5h
जूल (इकाई)
0
248132
6591340
5688998
2026-07-23T13:53:29Z
~2026-41311-45
937827
/* SI गुणक */
6591340
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox Unit
| bgcolour =
| name = जूल
| image =
| caption =
| standard = [[व्युत्पन्न इकाइयाँ|व्युत्पन्न इकाई]]
| quantity = [[ऊर्जा]]
| symbol = J
| namedafter = [[जेम्स प्रेस्कॉट जूल]]
| units1 = [[मूल इकाइयाँ|SI मूल इकाईयां]]
| inunits1 = १ [[किलोग्राम|kg]]·[[मीटर|m]]<sup>२</sup>/[[सेकेंड|s]]<sup>२</sup>
| units2 = [[CGS इकाई]]यां
| inunits2 = {{val|1|e=7}} [[अर्ग]]
| units3 = [[किलोवाट घंटा]]
| inunits3 = {{val|2.78|e=-७|u=kW h}}
| units3 = [[कैलोरी|किलोकैलोरी]]
| inunits3 = {{val|2.39|e=-4|u=kcal}}
}}
'''जूल''' (संकेताक्षर: '''J'''), [[अन्तरराष्ट्रीय मात्रक प्रणाली|अंतर्राष्ट्रीय इकाई प्रणाली]] के अंतर्गत [[ऊर्जा]] या [[कार्य (भौतिकी)|कार्य]] की एक [[व्युत्पन्न इकाइयाँ|व्युत्पन्न इकाई]] है। एक जूल, एक [[न्यूटन (इकाई)|न्यूटन]] [[बल]] को बल की दिशा में, एक [[मीटर]] दूरी तक लगाने में, या फिर एक [[एम्पियर]] की [[विद्युत धारा]] को एक [[ओम (इकाई)|ओम]] के [[विद्युत प्रतिरोध|प्रतिरोध]] से एक [[सेकेंड|सेकण्ड]] तक गुजारने में व्यय हुई ऊर्जा या किये गये कार्य के बराबर होता है। इस इकाई को अंग्रेज भौतिक विज्ञानी [[जेम्स प्रेस्कॉट जूल]] के नाम पर नामित किया गया है।<ref>[http://education.yahoo.com/reference/dictionary/entry/joule American Heritage Dictionary of the English Language] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120618091004/http://education.yahoo.com/reference/dictionary/entry/joule |date=18 जून 2012 }}, Online Edition (2009). Houghton Mifflin Co., hosted by [http://education.yahoo.com/ Yahoo! Education] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20101106162151/http://education.yahoo.com/ |date=6 नवंबर 2010 }}.</ref><ref>''The American Heritage Dictionary'', Second College Edition (1985). Boston: Houghton Mifflin Co., p. 691.</ref><ref>''McGraw-Hill Dictionary of Physics'', Fifth Edition (1997). McGraw-Hill, Inc., p. 224.</ref>
अन्य [[अन्तरराष्ट्रीय मात्रक प्रणाली|एस आई]] इकाइयों के संदर्भ में:
:<math>\rm 1~J = 1~N \cdot m = 1~\frac{kg \cdot m}{s^2} \cdot m ={}</math> <math>\rm 1~\frac{kg \cdot m^2}{s^2} ={}</math> <math>\rm 1~Pa \cdot m^3={}</math> <math>\rm 1~W \cdot s</math>
जहां N [[न्यूटन (इकाई)|न्यूटन]], m [[मीटर]], kg [[किलोग्राम]], s [[सेकेंड|सेकण्ड]], Pa [[पास्कल (इकाई)|पास्कल]] और W [[वॉट|वाट]] है।
==Niranjan ==
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== इन्हें भी देखें ==
== बाहरी कड़ियाँ ==
{{अन्तर्राष्ट्रीय इकाई प्रणाली}}
[[श्रेणी:ऊर्जा की इकाई]]
[[श्रेणी:एस आई व्युत्पन्न इकाइयाँ]]
e2mv53a83h4iszk6vwiuxzasvkzxoua
6591414
6591340
2026-07-24T02:00:29Z
AMAN KUMAR
911487
[[Special:Contributions/~2026-41311-45|~2026-41311-45]] ([[User talk:~2026-41311-45|Talk]]) के संपादनों को हटाकर [[User:Sa6h9hheje|Sa6h9hheje]] के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया
5688998
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox Unit
| bgcolour =
| name = जूल
| image =
| caption =
| standard = [[व्युत्पन्न इकाइयाँ|व्युत्पन्न इकाई]]
| quantity = [[ऊर्जा]]
| symbol = J
| namedafter = [[जेम्स प्रेस्कॉट जूल]]
| units1 = [[मूल इकाइयाँ|SI मूल इकाईयां]]
| inunits1 = १ [[किलोग्राम|kg]]·[[मीटर|m]]<sup>२</sup>/[[सेकेंड|s]]<sup>२</sup>
| units2 = [[CGS इकाई]]यां
| inunits2 = {{val|1|e=7}} [[अर्ग]]
| units3 = [[किलोवाट घंटा]]
| inunits3 = {{val|2.78|e=-७|u=kW h}}
| units3 = [[कैलोरी|किलोकैलोरी]]
| inunits3 = {{val|2.39|e=-4|u=kcal}}
}}
'''जूल''' (संकेताक्षर: '''J'''), [[अन्तरराष्ट्रीय मात्रक प्रणाली|अंतर्राष्ट्रीय इकाई प्रणाली]] के अंतर्गत [[ऊर्जा]] या [[कार्य (भौतिकी)|कार्य]] की एक [[व्युत्पन्न इकाइयाँ|व्युत्पन्न इकाई]] है। एक जूल, एक [[न्यूटन (इकाई)|न्यूटन]] [[बल]] को बल की दिशा में, एक [[मीटर]] दूरी तक लगाने में, या फिर एक [[एम्पियर]] की [[विद्युत धारा]] को एक [[ओम (इकाई)|ओम]] के [[विद्युत प्रतिरोध|प्रतिरोध]] से एक [[सेकेंड|सेकण्ड]] तक गुजारने में व्यय हुई ऊर्जा या किये गये कार्य के बराबर होता है। इस इकाई को अंग्रेज भौतिक विज्ञानी [[जेम्स प्रेस्कॉट जूल]] के नाम पर नामित किया गया है।<ref>[http://education.yahoo.com/reference/dictionary/entry/joule American Heritage Dictionary of the English Language] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120618091004/http://education.yahoo.com/reference/dictionary/entry/joule |date=18 जून 2012 }}, Online Edition (2009). Houghton Mifflin Co., hosted by [http://education.yahoo.com/ Yahoo! Education] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20101106162151/http://education.yahoo.com/ |date=6 नवंबर 2010 }}.</ref><ref>''The American Heritage Dictionary'', Second College Edition (1985). Boston: Houghton Mifflin Co., p. 691.</ref><ref>''McGraw-Hill Dictionary of Physics'', Fifth Edition (1997). McGraw-Hill, Inc., p. 224.</ref>
अन्य [[अन्तरराष्ट्रीय मात्रक प्रणाली|एस आई]] इकाइयों के संदर्भ में:
:<math>\rm 1~J = 1~N \cdot m = 1~\frac{kg \cdot m}{s^2} \cdot m ={}</math> <math>\rm 1~\frac{kg \cdot m^2}{s^2} ={}</math> <math>\rm 1~Pa \cdot m^3={}</math> <math>\rm 1~W \cdot s</math>
जहां N [[न्यूटन (इकाई)|न्यूटन]], m [[मीटर]], kg [[किलोग्राम]], s [[सेकेंड|सेकण्ड]], Pa [[पास्कल (इकाई)|पास्कल]] और W [[वॉट|वाट]] है।
==SI गुणक==
{{SI गुणक|unit=जूल (इकाई)|symbol=J}}
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== इन्हें भी देखें ==
== बाहरी कड़ियाँ ==
{{अन्तर्राष्ट्रीय इकाई प्रणाली}}
[[श्रेणी:ऊर्जा की इकाई]]
[[श्रेणी:एस आई व्युत्पन्न इकाइयाँ]]
jftt4os4opdsrar6ftew5qudomey6wo
गूगल समाचार
0
248434
6591383
6565323
2026-07-23T21:40:19Z
InternetArchiveBot
500600
Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5
6591383
wikitext
text/x-wiki
<!-- translate {{Infobox Website
|name = Google News
|logo = [[Image:Google news logo.png|200px]]
|screenshot = [[Image:GoogleNewsInterface.png|225px]]
|caption = Google News homepage
|url = [http://news.google.com news.google.com]
|commercial =
|type = News
|language = Arabic, Chinese, Czech, Dutch, English, French, German, Greek, Hebrew, [[Hindi]], Hungarian, Italian, Japanese, Korean, [[Malayalam]], Norwegian, Polish, Portuguese, Russian, Spanish, Swedish, [[Tamil language|Tamil]], [[Telugu language|Telugu]] and Turkish.
|registration = Not required
|owner = Google
|author = Google
|launch date = March 2002
|revenue =
|slogan =
}}-->
'''गूगल समाचार''', [[गूगल]] इंक द्वारा प्रदान किया गया एक स्वचालित समाचार एग्रीगेटर है। प्रारंभिक विचार स्टोरीरैंक - गूगल के पेजरैंक फोर्मुला से संबंधित - को 2001 में गूगल के प्रमुख शोध वैज्ञानिक कृष्ण भरत द्वारा विकसित किया गया था। एकत्रीकरण एल्गोरिथ्म में फेरबदल के अलावा कोई भी व्यक्ति मुख पृष्ठ या स्टोरी प्रोमोशन में शामिल नहीं है। गूगल समाचार ने जनवरी 2006 में बीटा को पीछे छोड़ दिया। <ref>कृष्णा, भरत [http://googleblog.blogspot.com/2006/01/and-now-news.html "एंड नाव, न्यूज़"], एक आधिकारिक गूगल ब्लॉग है, 23 जनवरी 2006. "हमलोग गूगल समाचार को बीटा से आगे ले जा रहे हैं! जब हम सितम्बर 2002 में अंग्रेजी भाषा के संस्करण का शुभारंभ किया, हम समाचार ब्राउज़िंग में एक भव्य प्रयोग के साथ बिना स्वाद के पानी में प्रवेश किया - कंप्यूटर का उपयोग करते हुए वास्तविक समय में दुनिया की खबर को संगठित किया और दुनिया में किसी भी विषय में जो भी घटित हो रहा था उस पर हमने एक पैनी नज़र को बनाए रखा. समाचार "क्लस्टर्स" (एक समूह में संबंधित लेख) को पेश करने के द्वारा, हमने सोचा कि शायद यह पाठकों को खबर में गहराई तक जाने के लिए एक व्यापक परिप्रेक्ष्य पाने के लिए प्रोत्साहित करेगा - और मुद्दे से संबंधित तथ्यों की बेहतर समझ को वे हासिल करेंगे, जिससे अंततः समाज को लाभ हो सकता है। तीन साल और कुछ दिनों में, हमने 10 भाषाओं में 22 क्षेत्रीय संस्करणों में इसे प्रस्तुत किया और गूगल समाचार का उपयोग कैसे लोग उपयोग करते हैं इस पर हमारी एक बेहतर समझ है।" 6 जून 2008 को अभिगम किया गया।</ref> इस सेवा में विभिन्न वेबसाइटों में प्रकाशित पिछले 30 दिनों के समाचार लेख शामिल हैं। इस कारण से, केवल इन 30 दिनों के विडों के भीतर ही साइट के लिए लिंक, लक्षित लेख को प्राप्त करता है। pawan
== तकनीकी विनिर्देशन ==
मार्च 2002 में बीटा रिलीज के रूप में शुरू, गूगल समाचार सेवा 23 जनवरी 2006 को बीटा से बाहर आई. जारी विकास के साथ एग्रीगेटर के विभिन्न संस्करण 19 भाषाओं में 40 से भी अधिक क्षेत्रों में उपलब्ध हैं (31 जुलाई 2008से). वर्तमान में, निम्नलिखित भाषाओं में सेवा की पेशकश है: अरबी, [[चीनी भाषा|चीनी]], चेक, [[डच भाषा|डच]], [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]], [[फ़्रांसीसी भाषा|फ्रेंच]], [[जर्मन भाषा|जर्मन]], [[यूनानी भाषा|ग्रीक]], [[इब्रानी भाषा|हिब्रू]], हिंदी, हंगरी, [[इतालवी भाषा|इतालवी]], [[जापानी भाषा|जापानी]], [[कोरियायी भाषा और साहित्य|कोरियाई]], [[मलयालम]], [[नॉर्वेजियन भाषा|नॉर्वेजियाई]], पोलिश, [[पुर्तगाली भाषा|पुर्तगाली]], [[रूसी भाषा|रूसी]], [[स्पेनिश भाषा|स्पैनिश]], [[स्वीडिश भाषा|स्वीडिश]], [[तमिल भाषा|तमिल]], [[तेलुगू भाषा|तेलुगु]] और [[तुर्की भाषा|तुर्की]].
सेवा में विभिन्न समाचार वेबसाइटों पर पिछले 30 दिनों के भीतर दिखाई देने वाले समाचार लेखों को शामिल किया गया है। कुल मिलाकर, गूगल समाचार 25000 से भी अधिक प्रकाशकों से समाचार सामग्री समुच्चय करता है।<ref>{{Cite news|first=Joshua |last=Cohen |authorlink= |coauthors= |title=Same Protocol, More Options for News Publishers |url=http://googlenewsblog.blogspot.com/2009/12/same-protocol-more-options-for-news.html |quote=There are more than 25,000 publishers from around the world in Google News today. |publisher=Google News Blog |date=December 2, 2009 |accessdate=2010-04-05 }}</ref> [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी भाषा]] के लिए यह लगभग 4500 साइटों {{Citation needed|date=October 2007}} को कवर करती है; जबकि अन्य भाषाओं के लिए कम साइटों को कवर करती है। इसके मुख पृष्ठ में लेख के लगभग 200 अक्षरों को प्रदर्शित करती है और उसी लेख से संबंधित पूरी जानकारी के लिए एक लिंक प्रदान करती है। वेबसाइटों को सदस्यता की आवश्यकता हो भी सकती है और नहीं भी; लेकिन लेख विवरण के लिए सदस्यता जरूरी है।<ref>{{Cite news|first= |last= |authorlink= |coauthors= |title=Technical Requirements: Registration/subscription sites |url=http://www.google.com/support/news_pub/bin/answer.py?hl=en&answer=40543 |quote=[...] we'll add a "(subscription)" tag to your publication name when your articles appear in our search results. |publisher=Google News Help Center |date= |accessdate=2010-04-05 }}</ref>
== लेख चयन ==
मार्च 2005 में गूगल ने व्हाइट सुपरमेसिस्ट ''नेशनल वैनगार्ड'' पत्रिका को शामिल करने पर ध्यान दिया और परिणामस्वरूप इसकी सेवा से साइट को निकालने को लेकर गूगल समाचार में विवाद खड़ा हुआ। एक अन्य मामले में, चीन में सेंसर स्रोतों को गूगल में शामिल नहीं करने पर कड़ी आलोचना की गई। 27 सितम्बर 2004 को आधिकारिक [http://googleblog.blogspot.com/2004/09/china-google-news-and-source-inclusion.html गूगल ब्लॉग] पर गूगल दल ने लिखा: "चीन गणराज्य के उपयोगकर्ताओं के लिए हमने स्त्रोतों को शामिल नहीं करने का फैसला किया है क्योंकि उस देश के भीतर वह दुर्गम है।"
== समाचार एजेंसी ==
मार्ट 2005 में एजेंस फ्रांस प्रेसे (एएफपी) ने $17.5 मिलियन के लिए गूगल पर मुकदमा किया और आरोप लगाया कि गूगल ने इसके कॉपीराइट का उल्लंघन किया है क्योंकि "गूगल ने एजेंस फ्रांस प्रेसे से अनुमति लिए बिना एएफपी की तस्वीरें, लेख और समाचार सुर्खियों को गूगल समाचार में शामिल किया[http://www.resourceshelf.com/legaldocs/afpvgoogle1.pdf] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20050512032757/http://www.resourceshelf.com/legaldocs/afpvgoogle1.pdf |date=12 मई 2005 }} [http://news.dcealumni.com/376/20305-googles-news-sued-for-infringing-agence-france-presse-copyrighted-work/] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130217024710/http://news.dcealumni.com/376/20305-googles-news-sued-for-infringing-agence-france-presse-copyrighted-work/ |date=17 फ़रवरी 2013 }} यह भी आरोप लगाया गया था कि गूगल ने स्थगन और विराम आदेश को भी अनदेखा किया है, हालांकि गूगल ने प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा कि इसमें ऑप्ट-आउट प्रक्रिया है जिसका पालन एएफपी कर सकता था लेकिन नहीं किया। वर्तमान में गूगल अजेंस फ्रांस-प्रेसे के साथ-साथ [[एसोसिएटेड प्रेस]], प्रेस एसोसिएशन और कैनेडियाई प्रेस की समाचारों की मेजबानी करता है। इस व्यवस्था को अगस्त 2007 में शुरू किया गया था।<ref>{{Cite news|url=http://news.directtrafficmedia.co.uk/Google_starts_hosting_news_stories_18265222.html|title=Google starts hosting news stories|publisher=DTM news|date=3 अगस्त 2007|access-date=18 फ़रवरी 2011|archive-date=29 अक्तूबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20071029232516/http://news.directtrafficmedia.co.uk/Google_starts_hosting_news_stories_18265222.html|url-status=dead}}</ref> 2007 में गूगल ने घोषणा की कि गूगल समाचार में एसोसिएटेड प्रेस की सामग्री के लिए भूगतान किया जाता था, बहरहाल लेख स्थायी रूप से संग्रहीत नहीं होते हैं।<ref>{{Cite news |first= |last= |authorlink= |coauthors= |title=Google News Becomes A Publisher. |url=http://www.informationweek.com/news/internet/showArticle.jhtml;jsessionid=PBT2QGMTUGF0AQSNDLOSKH0CJUNN2JVN?articleID=201803549&_requestid=555255 |quote="Because the Associated Press, Agence France-Presse, U.K. Press Association and the Canadian Press don't have a consumer Web site where they publish their content, they have not been able to benefit from the traffic that Google News drives to other publishers," Josh Cohen, business product manager for Google News, explained in a blog post. "As a result, we're hosting it on Google News." |publisher=[[Information Week]] |date=August 31, 2007 |accessdate=2008-04-26 |archive-date=27 जून 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080627154658/http://www.informationweek.com/news/internet/showArticle.jhtml;jsessionid=PBT2QGMTUGF0AQSNDLOSKH0CJUNN2JVN?articleID=201803549&_requestid=555255 |url-status=dead }}</ref><ref>{{Cite web|url=http://googlenewsblog.blogspot.com/2007/08/original-stories-from-source.html |title=Original stories, from the source. |accessdate=2008-04-26 |quote=Today we’re launching a new feature on Google News that will help you quickly and easily find original stories from news publishers -- including stories from some of the top news agencies in the world, such as the Associated Press, Agence France-Presse, UK Press Association and the Canadian Press -- and go directly to the original source to read more. |publisher=[[Google]] }}</ref> इस व्यवस्था को 23 दिसम्बर 2009 में बंद किया गया जब गूगल समाचार एसोसिएटेड प्रेस की सामग्री को शामिल करना बंद कर दिया.<ref>{{Cite news |author= |coauthors= |title=Google News stops hosting AP stories |url=http://money.cnn.com/2010/01/11/news/companies/google_associated_press/ |quote=Google News has stopped hosting new articles from the Associated Press the search giant confirmed Monday, in a sign that contract negotiations between the two companies may have broken down. |work=[[सीएनएन]] |date=जनवरी 11, 2010 |accessdate=2010-01-12 |first=Julianne |last=Pepitone |archive-date=7 दिसंबर 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20101207142254/http://money.cnn.com/2010/01/11/news/companies/google_associated_press/ |url-status=dead }}</ref>
== बेल्जियम विरोध ==
2007 में, एक बेल्जियम अदालत ने फैसला सुनाया कि जब गूगल समाचार लेखों को प्रदर्शित करता है तब गूगल के पास बेल्जियम समाचार स्त्रोतों से पहले अनुच्छेद को प्रदर्शित करने का अधिकार नहीं है।<ref>{{Cite news |first= |last= |authorlink= |coauthors= |title=Bad news for Google in Belgium. |url=http://www.iht.com/articles/2006/09/22/business/google.php |quote=The earlier decision required Google to stop displaying extracts of French and German-language articles from Belgian newspapers. |publisher=[[International Herald Tribune]] |date=September 22, 2006 |accessdate=2007-09-25 |archiveurl=https://web.archive.org/web/20080124071011/http://www.iht.com/articles/2006/09/22/business/google.php |archivedate=24 जनवरी 2008 |url-status=live }}</ref>
== सुविधाएं और अनुकूलन ==
{{POV|date=September 2010}}
गूगल समाचार खोज प्रदान करता है और तारीख और प्रकाशन के समय (समाचार के घटित होने की तारीख और समय से भ्रमित न हो), उन्हें समूहीकृत करने (बिना खोज के भी समूहीकृत) के विकल्पों के अनुसार अपने परिणामों को प्रदर्शित करता है। अंग्रेजी संस्करण में, चयनित राष्ट्रीय दर्शकों के लिए समूहीकरण को सही बनाने का एक विकल्प होता है।
उपयोगकर्ता गूगल न्यूज़ अलर्ट्स में सदस्यता लेने के द्वारा विभिन्न कुंजीशब्द विषयों पर [[ईमेल|ई-मेल]] "अलर्ट्स" के लिए अनुरोध कर सकते हैं। जब भी उनके अनुरोध के अनुसार कोई लेख ऑनलाइन आते हैं तब ग्राहकों को ई-मेल भेजा जाता है। आरएसएस और एटम फ़ीड के भी माध्यम से अलर्ट उपलब्ध होता है।
उपयोगकर्ता पृष्ठ पर उनके लोकेशन में प्रदर्शित भाग को अनुकूलित करने में सक्षम होते जाते हैं और [[जावास्क्रिप्ट]] आधारित जितने भी लेख दिखाई देती हैं वे इंटरफेश को ड्रैग और ड्रॉप कर लेते हैं। हालांकि अमेरिकी साइट में एक नए लेआउट को प्रोत्साहित करने के लिए यह निष्क्रिय होती है जिससे गूगल के सहायता प्रणाली में कई नकारात्मक टिप्पणियां की गई थी; निकट भविष्य में इस अलोकप्रिय नए लेआउट को अन्य स्थानों से बाहर करने की योजना बनाई गई है। गूगल समाचार के विभिन्न संस्करणों की कहानियां कुकी में संग्रहीत एक विकल्प के साथ, एक व्यक्तिगत पृष्ठ के निर्माण को संयुक्त किया जा सकता है। नवंबर 2005 के बाद से गूगल खोज इतिहास के साथ इस सेवा को एकीकृत किया गया है। बीटा से क्रमश:वृद्धि की क्रम में एक अनुभाग को जोड़ा गया जिसके तहत उपयोगकर्ता के गूगल समाचार खोज इतिहास और जिस लेख पर उपयोगकर्ता क्लिक करता है (यदि उपयोगकर्ता ने सर्च हिस्टरी के लिए साइन-अप किया है) उसके आधार पर आकर्षक समाचार को प्रदर्शित किया गया।
== समाचार संग्रह खोज ==
{{Main|Google News Archive}}
6 जून 2006 को, गूगल समाचार ने विस्तार किया और एक समाचार संग्रह खोज सुविधा को शामिल किया, प्रयोक्ताओं के सामने इसके कुछ स्त्रोतों के माध्यम से 200 वर्ष से भी अधिक पुराने लेखों को खोजने का प्रस्ताव रखा। विभिन्न वर्षों के खबरों का चयन करने के लिए इसमें एक समय रेखा प्रदर्शन उपलब्ध है।
इस सेवा के विस्तार को 8 सितम्बर 2008 को घोषित किया गया, जब गूगल समाचार ने स्कैन अखबार से अनुक्रमित सामग्री की शुरूआत की थी।<ref>{{Cite news|first= |last= |authorlink= |coauthors= |title=Bringing history online, one newspaper at a time|url=http://googleblog.blogspot.com/2008/09/bringing-history-online-one-newspaper.html |quote=Today, we're launching an initiative to make more old newspapers accessible and searchable online by partnering with newspaper publishers to digitize millions of pages of news archives.|publisher=[[Google]] |date=September 8, 2008 |accessdate=2008-09-08 }}</ref> कालानुक्रमिक कवरेज की गहराई विविधतापूर्वक हुई; 2008 में शुरुआत हुई और न्यूयॉर्क टाइम्स के 1851 में स्थापना से लेकर पूरी सामग्री इसमें उपलब्ध है।
2010 के प्रारम्भ में, गूगल के मुख्य पृष्ठ से गूगल समाचार संग्रह खोज, उन्नत समाचार खोज और डिफ़ॉल्ट खोज परिणाम पृष्ठों के लिए सीधी पहुंच को हटा दिया गया। ये पृष्ठ "किसी भी समय" खोज की सूचना देते हैं लेकिन संग्रह को शामिल नहीं करते हैं केवल हाल ही के समाचारों को इसमें शामिल किया गया है। यह सुविधा पहले "सभी तारीखों" पर क्लिक करने के माध्यम से उपलब्ध कराया गया था। वर्तमान में [http://news.google.com/archivesearch संग्रह खोज] पृष्ठ के लिए उन्नत खोज पृष्ठ पर क्लिक करने के द्वारा इसे प्राप्त किया जा सकता है।
2010 की गर्मियों के दौरान गूगल ने गूगल समाचार पृष्ठ के स्वरूप के डिजाइन को फिर से बनाने का फैसला किया और शिकायतों के फायरस्टोर्म का निर्माण किया।<ref>http://www.google.com/support/forum/p/news/label?lid=06c20bed07a04da6&hl=en</ref>
== कवरेज कलाकृतियां ==
7 सितम्बर 2007 को यूनाइटेड एयरलाइंस जिसे अनुक्रमित और संग्रहीत लेखों में शामिल होना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और बाद में 1 बिलियन के बाज़ार मूल्य को प्राप्त नहीं कर पाया, लेकिन जब 2002 के ''[[शिकागो ट्रिब्यून]]'' लेख में उस वर्ष एअरलाइन में दाखिल दिवालिएपन के बारे में लेख दिखाई दिया तब उस समय एक सदस्यीय पेपर ''सन-सेन्टीनेल'' के वेबसाइट पर सबसे ज्यादा देंखे गए वर्ग में इसे पाया गया।<ref name="Helft"/> गूगल समाचार के सूचकांक की अगली पास नए खबर के रूप में लिंक को पाया गया और आय सुरक्षा सलाहकार नए समाचार के रूप में गूगल परिणाम को पाया, जो कि ब्लूमबर्ग न्यूज़ के साथ पास हुई थी जहां यह उस समय का वर्तमान का मुख्य समाचार था और व्यापक तौर पर इसे देखा गया था।<ref name="Helft">{{Cite news|author=Helft, Miguel|title=How a Series of Mistakes Hurt Shares of United|url=http://www.nytimes.com/2008/09/15/technology/15google.html|work=[[दि न्यू यॉर्क टाइम्स|द न्यूयॉर्क टाइम्स]]|publisher=दि न्यू यॉर्क टाइम्स Company|accessdate=2008-09-15 | date=September 15, 2008}}</ref>
== फर्स्ट क्लिक फ्री ==
1 दिसम्बर 2009 को गूगल ने "फर्स्ट क्लिक फ्री" कार्यक्रम में परिवर्तन होने की घोषणा की,<ref>{{Cite web |url=http://googlewebmastercentral.blogspot.com/2008/10/first-click-free-for-web-search.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=18 फ़रवरी 2011 |archive-date=2 दिसंबर 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20101202035750/http://googlewebmastercentral.blogspot.com/2008/10/first-click-free-for-web-search.html |url-status=dead }}</ref> जो कि 2008 से चली आ रही थी और यह उपयोगकर्ताओं को पेवॉल के समर्थन से लेख खोजने और पढ़ने की अनुमति देती थी। पाठकों के लिए सामग्री के लिए पहला क्लिक मुफ्त है और उसके बाद जितने क्लिक होंगे उसे सामग्री प्रदाता की ओर से निर्धारित किया जाएगा.<ref>{{Cite news|first= Scott|last= Morrison|authorlink= |coauthors= |title=Google To Let News Groups Set Reader Limits |url=http://www.theaustralian.com.au/business/media/google-to-let-news-groups-set-reader-limits/story-e6frg996-1225805985859 |quote= |work=[[The Australian]] |date=December 2, 2009 |accessdate=2010-04-02 }}</ref>
== खबरों के लिए स्रोत ==
एक खबर एग्रीगेटर साइट के रूप में, गूगल ऑनलाइन समाचार स्त्रोतों से किस लेख को प्रदर्शित करना हैं, उसके निर्धारण के लिए यह अपने खुद के सॉफटवेयर का इस्तेमाल करता है। मानव संपादकीय इनपुट सिस्टम में ज़रूर आते हैं, यह चुनाव करने के लिए कि वास्तव में गूगल न्यूज़ किन स्रोतों का चुनाव करेगा। यह वह स्थान है जहां गूगल समाचार को लेकर कुछ विवाद उत्पन्न होते हैं, जब कुछ समाचार स्त्रोतों को शामिल किया जाता है और दर्शकों को पसंद नहीं आता और अन्य समाचार स्त्रोतों को शामिल नहीं किया जाता जबकि दर्शकों को लगता है कि उन्हें शामिल किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, उपरोक्त इंडिमीडिया, या नेशनल वैनगार्ड को देखा जा सकता है।
सूत्रों के वास्तविक सूची को गूगल से बाहर नहीं जाना जाता है। गूगल की ओर से यह सूचना दी गई है कि यह 4500 से भी अधिक अंग्रेजी भाषा के समाचार साइटों को देखता है। एक सूची के अभाव में, कई स्वतंत्र साइट गूगल के समाचार स्रोतों का निर्धारण करने के अपने तरीके के साथ आगे आए हैं जिसका चार्ट नीचे दिया जा रहा है।
वर्ष 2009 में कुछ समय तक गूगल का समाचार स्रोत विकिपीडिया था।<ref>{{Cite web |url=http://searchengineland.com/official-wikipedia-is-google-news-source-21381 |title=मैट मैकगी, "इट्स ऑफिसियल: विकिपीडिया इज ए गूगल न्यूज़ सोर्स," ''सर्च इंजन लैंड'', 22 जून 2009 |access-date=18 फ़रवरी 2011 |archive-date=8 मार्च 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110308035333/http://searchengineland.com/official-wikipedia-is-google-news-source-21381 |url-status=dead }}</ref>
=== मई 2007 तक अंग्रेजी संस्करण के लिए स्रोतों की उदाहरण सूची ===
गूगल समाचार रिपोर्ट साइट गूगल समाचार मुखपृष्ठ की निगरानी करता है और मई 2007 के लिए शीर्ष 26 साइटों को गूगल समाचार द्वारा सन्दर्भित साइटों की सूची में प्रकाशित किया है।
{| class="wikitable"
|-
! रैंक
! समाचार स्रोत
|-
| 1
| [[न्यू यॉर्क टाइम्स|दी न्यूयॉर्क टाइम्स]]
|-
| 2
| द वाशिंगटन पोस्ट
|-
| 3
| हूस्टन क्रॉनिकल
|-
| 4
| ब्लूमबर्ग एल.पी.
|-
| 5
| लॉस एंजल्स टाइम्स
|-
| 6
| रायटर्स
|-
| 7
| फोर्ब्स
|-
| 8
| मॉन्सटर्स और Critics.com
|-
| 9
| guardian.co.uk
|-
| 10
| [[वॉयस ऑफ़ अमेरिका|वोइस ऑफ अमेरिका]]
|-
| 11
| [[इंटरनेशनल हेराल्ड ट्रिब्यून]]
|-
| 12
| बोस्टन ग्लोब
|-
| 13
| [[शिकागो ट्रिब्यून]]
|-
| 14
| बीबीसी समाचार
|-
| 15
| [[सॅन फ्रेन्सिस्को क्रॉनिकल|सेन फ्रांसिस्को क्रॉनिकल]]
|-
| 16
| सीबीएस समाचार.
|-
| 17
| टाइम्स ऑनलाइन
|-
| 18
| सिन्हुआ
|-
| 19
| वॉल स्ट्रीट जर्नल
|-
| 20
| यूएसए टूडे
|-
| 21
| फॉक्स न्यूज़
|-
| 22
| सीएनएन
|-
| 23
| सिएटल पोस्ट इंटेलीजेनसर.
|-
| 24
| MSNBC
|-
| 25
| ABC न्यूज
|-
| 25
| डेली मेल और मेल ऑन संडे
|-
| 26
| [[द टाईम्स ऑफ़ इंडिया]]
|}
== इन्हें भी देंख ==
{{Wikinews|Google convicted in case brought by Belgian press}}
{{multicol}}
* आस्क बिगन्यूज़
* BigNews.biz
* गूगल फास्ट फ्लिप
* गूगल खोज
{{col-break}}
* गूगल (Google) सेवाओं और उपकरणों की सूची
* Yahoo! न्यूज़
{{col-end}}
== नोट्स ==
{{Reflist|2}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://news.google.com गूगल समाचार वेबसाइट]
* [http://news.google.com/archivesearch गूगल समाचार संग्रह खोज]
* [http://googleblog.blogspot.com/2006/01/and-now-news.html आधिकारिक गूगल ब्लॉग: और अब, समाचार]
* [http://www.readandpost.com ReadAndPost.com एक आरएसएस फ़ीड एग्रीगेटर, गूगल समाचार फ़ीड से बनाया गया है] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20150123002131/http://www.readandpost.com/ |date=23 जनवरी 2015 }}
* [http://www.newsknife.com Newsknife.com समाचार साइट दर + गूगल समाचार में पत्रकार अपने प्रदर्शित होने के आधार पर]
{{Google Inc.}}
[[श्रेणी:गूगल सेवाएँ]]
[[श्रेणी:वेब 2.0]]
[[श्रेणी:समाचार वेबसाइट]]
[[श्रेणी:2006 में स्थापित इंटरनेट विशेषताएं]]
{{आधार}}
7g26paz9qccppttu4izq64fd33o2v7k
कंप्यूटर सुरक्षा
0
261868
6591338
6583863
2026-07-23T13:41:58Z
Dr.Devendra Baghel
937529
/* growthexperiments-addlink-summary-summary:3|0|0 */
6591338
wikitext
text/x-wiki
[[File:Computer locked.jpg|thumb|right|भौतिक सुरक्षा उपाय का एक उदाहरण: [[हार्डवेयर]] से छेड़छाड़ को रोकने के लिए [[व्यक्तिगत संगणक]] के पीछे लगा धातु का लॉक।]]
'''कंप्यूटर सुरक्षा''' (जिसे '''साइबर सुरक्षा''', डिजिटल सुरक्षा या '''सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सुरक्षा''' भी कहा जाता है) [[कंप्यूटर]] सॉफ़्टवेयर, [[प्रणालियों]] और [[नेटवर्क]] की उन खतरों से रक्षा करने के लिए है, जो अनधिकृत जानकारी के खुलासे, [[हार्डवेयर]], [[सॉफ़्टवेयर]] या [[डेटा]] की चोरी (या क्षति) के साथ-साथ उनकी सेवाओं में व्यवधान या गलत दिशा में ले जाने का कारण बन सकते हैं।<ref name=":2">{{Cite journal |last1=Schatz |first1=Daniel |last2=Bashroush |first2=Rabih |last3=Wall |first3=Julie |date=2017 |title=Towards a More Representative Definition of Cyber Security |url=https://commons.erau.edu/jdfsl/vol12/iss2/8/ |journal=Journal of Digital Forensics, Security and Law |language=en |volume=12 |issue=2 |issn=1558-7215}}</ref><ref>{{Britannica|130682}}</ref>
यह क्षेत्र इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कंप्यूटर प्रणालियों, [[इंटरनेट]]<ref>{{Cite news |last=Tate |first=Nick|date=7 May 2013 |title=Reliance spells end of road for ICT amateurs |newspaper=The Australian |url=https://www.theaustralian.com.au/news/reliance-spells-end-of-road-for-ict-amateurs/news-story/6f84ad403b8721100f5957a472a945eb |url-access=subscription}}</ref> और वायरलेस नेटवर्क मानकों पर बढ़ती निर्भरता है। यह स्मार्ट उपकरणों के विकास के कारण भी महत्वपूर्ण है, जिसमें [[स्मार्टफ़ोन]], [[टेलीविज़न]] और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) से जुड़े विभिन्न उपकरण शामिल हैं। सूचना प्रणालियों की जटिलता और उनके द्वारा समर्थित समाजों के कारण साइबर सुरक्षा समकालीन दुनिया के सामने सबसे महत्वपूर्ण नई चुनौतियों में से एक है। सुरक्षा उन प्रणालियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो बिजली वितरण, चुनाव और वित्त जैसे बड़े पैमाने पर काम करने वाली प्रणालियों को नियंत्रित करती हैं और जिनका व्यापक भौतिक प्रभाव होता है।<ref>{{cite journal |last1=Kianpour |first1=Mazaher |last2=Kowalski |first2=Stewart |last3=Øverby |first3=Harald |date=2021 |title=Systematically Understanding Cybersecurity Economics: A Survey |journal=Sustainability |volume=13 |issue=24 |page=13677 |doi=10.3390/su132413677 |doi-access=free|hdl=11250/2978306 |hdl-access=free | issn=2071-1050 }}</ref><ref>{{cite journal |last1=Stevens |first1=Tim |date=11 June 2018 |title=Global Cybersecurity: New Directions in Theory and Methods |url=https://kclpure.kcl.ac.uk/portal/files/97261726/PaG_6_2_Global_Cybersecurity_New_Directions_in_Theory_and_Methods.pdf |archive-url=https://web.archive.org/web/20190904151257/https://kclpure.kcl.ac.uk/portal/files/97261726/PaG_6_2_Global_Cybersecurity_New_Directions_in_Theory_and_Methods.pdf |archive-date=2019-09-04 |url-status=live |journal=Politics and Governance |volume=6 |issue=2 |pages=1–4 |doi=10.17645/pag.v6i2.1569 |doi-access=free}}</ref>
कंप्यूटर सुरक्षा के कई पहलू डिजिटल सुरक्षा से जुड़े होते हैं, जैसे इलेक्ट्रॉनिक पासवर्ड और एन्क्रिप्शन, लेकिन अनधिकृत छेड़छाड़ को रोकने के लिए अभी भी धातु के ताले जैसी भौतिक सुरक्षा उपायों का उपयोग किया जाता है। आईटी सुरक्षा [[सूचना सुरक्षा]] का एक सही उपसमुच्चय नहीं है, इसलिए यह सुरक्षा सम्मेलन योजना में पूरी तरह फिट नहीं होती।
==कमज़ोरियाँ और हमले==
{{Main article|भेद्यता (कंप्यूटिंग)}}
भेद्यता एक दोष को संदर्भित करती है जो कंप्यूटर या प्रणाली की संरचना, निष्पादन, कार्यप्रणाली या आंतरिक निगरानी में होती है, जिससे उसकी सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है। अब तक खोजी गई अधिकांश भेद्यताओं को कॉमन वल्नरेबिलिटीज एंड एक्सपोजर्स (CVE) डेटाबेस में प्रलेखित किया गया है।<ref>{{Cite web |title=About the CVE Program |url=https://www.cve.org/About/Overview |access-date=2023-04-12 |website=www.cve.org}}</ref> एक शोषण योग्य भेद्यता वह होती है, जिसके लिए कम से कम एक प्रभावी हमला या शोषण मौजूद होता है।<ref>{{cite conference | last=Zlatanov | first=Nikola |title=Computer Security and Mobile Security Challenges |url=https://www.researchgate.net/publication/298807979 |conference=Tech Security Conference At: San Francisco, CA |date=3 December 2015 }}</ref> जो व्यक्ति या समूह जानबूझकर भेद्यताओं की तलाश करते हैं, उन्हें खतरे के रूप में जाना जाता है। भेद्यताओं पर शोध किया जा सकता है, उन्हें रिवर्स-इंजीनियरिंग, शिकार या स्वचालित उपकरणों या अनुकूलित स्क्रिप्ट का उपयोग करके शोषित किया जा सकता है।<ref>{{cite web |title=Ghidra |url=https://www.nsa.gov/resources/everyone/ghidra/ |url-status=dead |access-date=17 August 2020 |archive-date=15 August 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200815201448/https://www.nsa.gov/resources/everyone/ghidra/ | website=nsa.gov | date=1 August 2018 }}</ref><ref>{{cite web |last=Larabel |first=Michael |date=2017-12-28 |title=Syzbot: Google Continuously Fuzzing The Linux Kernel |url=https://www.phoronix.com/scan.php?page=news_item&px=Syzbot-Linux-Kernel-Fuzzing/ |access-date=2021-03-25 |website=www.phoronix.com/ |language=en-US}}</ref>
विभिन्न लोग या समूह साइबर हमलों के शिकार हो सकते हैं, लेकिन विभिन्न समूहों को अलग-अलग प्रकार के हमले ज्यादा झेलने पड़ते हैं।<ref name="crowdstrike.com">{{Cite web |title=Cyber attacks on SMBs: Current Stats and How to Prevent Them |url=https://www.crowdstrike.com/solutions/small-business/cyber-attacks-on-smbs/ |access-date=2023-11-30 |website=crowdstrike.com |language=en}}</ref>
अप्रैल 2023 में, यूनाइटेड किंगडम के विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी विभाग ने पिछले 12 महीनों में हुए साइबर हमलों पर एक रिपोर्ट जारी की।<ref name="Cyber breaches 2023">{{Cite web |title=Cyber security breaches survey 2023 |url=https://www.gov.uk/government/statistics/cyber-security-breaches-survey-2023/cyber-security-breaches-survey-2023 |access-date=2023-11-30 |website=GOV.UK |language=en}}</ref> इसमें उन्होंने 2,263 यूके व्यवसायों, 1,174 यूके में पंजीकृत चैरिटीज़ और 554 शैक्षणिक संस्थानों का सर्वेक्षण किया। शोध में पाया गया कि "32% व्यवसाय और 24% चैरिटीज़ ने पिछले 12 महीनों में किसी भी प्रकार के उल्लंघन या हमलों का अनुभव किया।" ये आंकड़े "मध्यम व्यवसायों (59%), बड़े व्यवसायों (69%), और उच्च आय वाली चैरिटीज़ जिनकी वार्षिक आय £500,000 या उससे अधिक है (56%)" के लिए अधिक थे।<ref name="Cyber breaches 2023"/> हालांकि मध्यम और बड़े व्यवसाय अधिकतर शिकार होते हैं, क्योंकि बड़े व्यवसायों ने पिछले दशक में अपनी सुरक्षा में सुधार किया है, लेकिन छोटे और मध्यम आकार के व्यवसाय (SMBs) भी तेजी से अधिक भेद्य होते जा रहे हैं क्योंकि उनके पास व्यापार की रक्षा के लिए उन्नत उपकरण नहीं होते।<ref name="crowdstrike.com"/> SMBs आमतौर पर मैलवेयर, रैंसमवेयर, [[फिशिंग|फ़िशिंग]], मैन-इन-द-मिडल अटैक्स, और डिनायल-ऑफ सर्विस (DoS) हमलों से प्रभावित होते हैं।<ref name="crowdstrike.com"/>
साधारण इंटरनेट उपयोगकर्ताओं पर सबसे अधिक अप्रत्यक्ष साइबर हमलों का खतरा होता है।<ref name="Cyber attacks">{{Cite web |title=How cyber attacks work |url=https://www.ncsc.gov.uk/information/how-cyber-attacks-work |access-date=2023-11-30 |website=www.ncsc.gov.uk |language=en}}</ref> इन हमलों में हमलावर जितने संभव हो उतने उपकरणों, सेवाओं या उपयोगकर्ताओं को अंधाधुंध रूप से निशाना बनाते हैं। वे इंटरनेट की खुली प्रकृति का लाभ उठाकर यह करते हैं। इन रणनीतियों में मुख्य रूप से फ़िशिंग, रैंसमवेयर, वॉटर होलिंग और स्कैनिंग शामिल होती हैं।<ref name="Cyber attacks"/>
किसी कंप्यूटर प्रणाली को सुरक्षित करने के लिए, यह समझना महत्वपूर्ण है कि उस पर कौन-कौन से हमले किए जा सकते हैं। आमतौर पर इन खतरों को निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
===बैकडोर===
कंप्यूटर सिस्टम, क्रिप्टोसिस्टम, या एल्गोरिदम में एक बैकडोर एक गुप्त तरीका होता है, जो सामान्य प्रमाणीकरण या सुरक्षा नियंत्रणों को दरकिनार करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह कमजोरी कई कारणों से हो सकती है, जिसमें मूल डिज़ाइन या खराब कॉन्फ़िगरेशन शामिल है।<ref>{{Cite web |date=2023-11-30 |title=What is a backdoor attack? Definition and prevention {{!}} NordVPN |url=https://nordvpn.com/blog/backdoor-attack/ |access-date=2024-01-03 |website=nordvpn.com |language=en}}</ref> बैकडोर की प्रकृति के कारण, ये कंपनियों और डेटाबेस के लिए अधिक चिंता का विषय होते हैं, न कि व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं के लिए।
बैकडोर को किसी अधिकृत पक्ष द्वारा वैध पहुंच की अनुमति देने के लिए जोड़ा जा सकता है, या फिर हमलावर इसे दुर्भावनापूर्ण उद्देश्यों के लिए स्थापित कर सकते हैं। अपराधी अक्सर मैलवेयर का उपयोग करके बैकडोर स्थापित करते हैं, जिससे उन्हें सिस्टम पर रिमोट प्रशासनिक पहुंच मिल जाती है।<ref name="McAfee-2023">{{Cite web |date=December 4, 2023 |title=What is a backdoor attack? |url=https://www.mcafee.com/learn/backdoor-threat/ |access-date=December 4, 2023 |website=McAfee}}</ref> एक बार पहुंच प्राप्त करने के बाद, साइबर अपराधी फाइलों को संशोधित कर सकते हैं, व्यक्तिगत जानकारी चुरा सकते हैं, अवांछित सॉफ़्टवेयर स्थापित कर सकते हैं, और यहां तक कि पूरे कंप्यूटर का नियंत्रण भी ले सकते हैं।<ref name="McAfee-2023" />
बैकडोर का पता लगाना बहुत कठिन हो सकता है और आमतौर पर इसे वही व्यक्ति खोज सकता है जिसे एप्लिकेशन के स्रोत कोड या कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम की गहरी जानकारी हो।
===डिनायल-ऑफ-सर्विस हमला===
डिनायल-ऑफ-सर्विस (DoS) हमले एक मशीन या नेटवर्क संसाधन को उसके इच्छित उपयोगकर्ताओं के लिए अनुपलब्ध बनाने के उद्देश्य से किए जाते हैं।<ref name="DoS guidance">{{Cite web |title=Denial of Service (DoS) guidance |url=https://www.ncsc.gov.uk/collection/denial-service-dos-guidance-collection |access-date=2023-12-04 |website=www.ncsc.gov.uk |language=en}}</ref> हमलावर सेवा को व्यक्तिगत पीड़ितों से इनकार कर सकते हैं, जैसे कि जानबूझकर कई बार गलत पासवर्ड दर्ज करना ताकि पीड़ित का खाता लॉक हो जाए, या वे मशीन या नेटवर्क की क्षमताओं को ओवरलोड कर सभी उपयोगकर्ताओं को एक साथ ब्लॉक कर सकते हैं। जबकि एक नेटवर्क हमले को एकल आईपी पते से फायरवॉल नियम जोड़कर ब्लॉक किया जा सकता है, कई प्रकार के वितरित डिनायल-ऑफ-सर्विस (DDoS) हमले संभव हैं, जहां हमला कई बिंदुओं से होता है। इस मामले में, इन हमलों से बचाव करना कहीं अधिक कठिन होता है। ऐसे हमले ज़ॉम्बी कंप्यूटरों की एक बॉटनेट से उत्पन्न हो सकते हैं या अन्य तकनीकों जैसे वितरित रिफ्लेक्टिव डिनायल-ऑफ-सर्विस (DRDoS) से हो सकते हैं, जहां निर्दोष सिस्टमों को धोखा देकर ट्रैफ़िक पीड़ित की ओर भेजा जाता है।<ref name="DoS guidance"/> इस तरह के हमलों में वृद्धि कारक हमलावर के लिए हमले को आसान बना देता है क्योंकि उन्हें अपने स्वयं के बैंडविड्थ का कम उपयोग करना पड़ता है। यह समझने के लिए कि हमलावर इन हमलों को क्यों अंजाम देते हैं, 'हमलावर की प्रेरणा' अनुभाग देखें।
===डायरेक्ट-एक्सेस हमला===
डायरेक्ट-एक्सेस हमला तब होता है जब एक अनधिकृत उपयोगकर्ता (हमलावर) किसी कंप्यूटर तक भौतिक रूप से पहुंच प्राप्त करता है, सबसे अधिक संभावना है कि वह इससे डेटा को सीधे कॉपी कर सके या जानकारी चुरा सके।<ref>{{Cite web |title=Computer Security |url=https://www.interelectronix.com/computer-security.html |access-date=2023-11-30 |website=www.interelectronix.com}}</ref> हमलावर सुरक्षा से समझौता कर सकते हैं जैसे कि ऑपरेटिंग सिस्टम में बदलाव करना, सॉफ़्टवेयर वर्म्स, कीलॉगर्स, गुप्त सुनने वाले उपकरणों को स्थापित करना या वायरलेस माइक्रोफोन का उपयोग करना। यहां तक कि जब सिस्टम मानक सुरक्षा उपायों से सुरक्षित होता है, तो भी इन उपायों को एक अन्य ऑपरेटिंग सिस्टम या टूल को CD-ROM या अन्य बूटेबल मीडिया से बूट करके बाईपास किया जा सकता है। डिस्क एन्क्रिप्शन और ट्रस्टेड प्लेटफार्म मॉड्यूल (TPM) मानक को इन हमलों को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
डायरेक्ट सर्विस हमलावर का सिद्धांत डायरेक्ट मेमोरी हमलों से संबंधित है, जो हमलावर को कंप्यूटर की मेमोरी तक सीधे पहुंच प्रदान करते हैं।<ref name="Kroll">{{Cite web |title=What Is a DMA Attack? Analysis & Mitigation |url=https://www.kroll.com/en/insights/publications/cyber/what-is-dma-attack-understanding-mitigating-threat |access-date=2023-12-04 |website=Kroll |language=en}}</ref> ये हमले "आधुनिक कंप्यूटरों की एक विशेषता का फायदा उठाते हैं, जो बाहरी [[हार्ड डिस्क ड्राइव|हार्ड ड्राइव]], ग्राफिक्स कार्ड, या नेटवर्क कार्ड जैसी कुछ डिवाइसों को कंप्यूटर की मेमोरी तक सीधे पहुंचने की अनुमति देती हैं।"<ref name="Kroll" />
===ईव्सड्रॉपिंग===
ईव्सड्रॉपिंग एक निजी कंप्यूटर संवाद (संचार) को चुपके से सुनने का कार्य है, जो आमतौर पर नेटवर्क पर होस्ट्स के बीच होता है। यह तब होता है जब कोई उपयोगकर्ता ऐसे नेटवर्क से जुड़ता है जहां ट्रैफ़िक सुरक्षित या एन्क्रिप्टेड नहीं होता और वह संवेदनशील व्यावसायिक डेटा एक सहकर्मी को भेजता है, जिसे हमलावर द्वारा सुनकर शोषित किया जा सकता है।<ref name="Fortinet">{{Cite web |title=What Are Eavesdropping Attacks? |url=https://www.fortinet.com/resources/cyberglossary/eavesdropping |access-date=2023-12-05 |website=Fortinet |language=en}}</ref> "खुले नेटवर्क" के माध्यम से भेजे गए डेटा को हमलावर विभिन्न तरीकों से भेद्यता का फायदा उठाकर इंटरसेप्ट कर सकता है।
मैलवेयर, डायरेक्ट-एक्सेस हमलों या अन्य साइबर हमलों के विपरीत, ईव्सड्रॉपिंग हमले नेटवर्क या उपकरणों के प्रदर्शन को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने की संभावना कम रखते हैं, जिससे इन्हें पहचानना मुश्किल हो जाता है।<ref name="Fortinet" /> वास्तव में, "हमलावर को सॉफ़्टवेयर से किसी भी निरंतर कनेक्शन की आवश्यकता नहीं होती। हमलावर सॉफ़्टवेयर को किसी संक्रमित उपकरण पर डाल सकता है, चाहे वह सीधे हो या किसी वायरस या अन्य मैलवेयर के माध्यम से, और फिर बाद में किसी भी डेटा को प्राप्त करने या डेटा भेजने के लिए सॉफ़्टवेयर को सक्रिय करने के लिए वापस आ सकता है।"<ref>{{Citation |last=York |first=Dan |title=Chapter 3 – Eavesdropping and Modification |date=2010-01-01 |url=https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/B978159749547900003X |work=Seven Deadliest Unified Communications Attacks |pages=41–69 |editor-last=York |editor-first=Dan |access-date=2023-12-05 |place=Boston |publisher=Syngress |isbn=978-1-59749-547-9}}</ref>
वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का उपयोग करना, जो दो बिंदुओं के बीच डेटा को एन्क्रिप्ट करता है, ईव्सड्रॉपिंग के खिलाफ सुरक्षा का एक सबसे सामान्य रूप है। वायरलेस नेटवर्क के लिए सबसे अच्छी एन्क्रिप्शन विधि का उपयोग करना और एन्क्रिप्टेड HTTP (HTTPS) का उपयोग करना भी एक बेहतरीन तरीका है।<ref>{{Cite web |title=What Are Eavesdropping Attacks & How To Prevent Them |url=https://enterprise.verizon.com/resources/articles/s/what-are-eavesdropping-attacks/ |access-date=2023-12-05 |website=Verizon Enterprise |language=en}}</ref>
कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा भी ईव्सड्रॉपिंग के लिए कुछ प्रोग्रामों का उपयोग किया जाता है, जैसे कि Carnivore और NarusInSight, जिन्हें FBI और NSA द्वारा इंटरनेट सेवा प्रदाताओं की प्रणालियों की निगरानी के लिए उपयोग किया गया है। यहां तक कि बंद प्रणालियों (जिनका बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं होता) को भी ईव्सड्रॉप किया जा सकता है, जो हार्डवेयर द्वारा उत्पन्न सूक्ष्म विद्युतचुंबकीय प्रसारणों की निगरानी करके किया जाता है। TEMPEST एक NSA विनिर्देश है जो इन हमलों का संदर्भ देता है।
===मैलवेयर===
मैलिशियस सॉफ़्टवेयर (मैलवेयर) किसी भी सॉफ़्टवेयर कोड या कंप्यूटर प्रोग्राम को कहा जाता है, जिसे जानबूझकर कंप्यूटर सिस्टम या उसके उपयोगकर्ताओं को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से लिखा जाता है।<ref name="Malware-IBM">{{Cite web |title=What is Malware? {{!}} IBM |url=https://www.ibm.com/topics/malware |access-date=2023-12-06 |website=www.ibm.com |date=14 April 2022 |language=en-us}}</ref> एक बार कंप्यूटर में मौजूद होने पर, यह संवेदनशील जानकारी जैसे व्यक्तिगत और व्यावसायिक जानकारी, पासवर्ड लीक कर सकता है, सिस्टम का नियंत्रण हमलावर को दे सकता है, और डेटा को भ्रष्ट या स्थायी रूप से हटा सकता है।<ref>{{cite journal |last1=Bendovschi |first1=Andreea |year=2015 |title=Cyber-Attacks – Trends, Patterns and Security Countermeasures |journal=Procedia Economics and Finance |volume=28 |pages=24–31 |doi=10.1016/S2212-5671(15)01077-1 |doi-access=free}}</ref> मैलवेयर का एक प्रकार रैनसमवेयर होता है, जिसमें मैलवेयर पीड़ित की मशीन पर खुद को इंस्टॉल करता है, उसकी फ़ाइलों को एन्क्रिप्ट करता है, और फिर उस डेटा को वापस देने के लिए फिरौती (आमतौर पर बिटकॉइन में) की मांग करता है।<ref>{{Cite web |title=What is malware? |url=https://www.mcafee.com/en-gb/antivirus/malware.html |access-date=30 November 2023 |website=McAfee}}</ref>
मैलवेयर के कुछ प्रकार निम्नलिखित हैं:
*वायरस: यह एक प्रकार का मैलवेयर होता है, जो सॉफ़्टवेयर को हाइजैक करता है और नुकसान पहुँचाने और खुद की प्रतिलिपियाँ फैलाने का इरादा रखता है। यह अन्य प्रोग्रामों में फैलने के लिए कॉपियाँ बनाता है।<ref name="Malware-IBM"/>
*वर्म्स: वायरस के समान होते हैं, लेकिन वायरस को कार्य करने के लिए उपयोगकर्ता द्वारा एक समझौता किए गए प्रोग्राम को चलाने की आवश्यकता होती है। वर्म्स स्वयं-प्रतिकृति करने वाले मैलवेयर होते हैं, जो बिना मानव हस्तक्षेप के प्रोग्रामों, ऐप्स और डिवाइसों के बीच फैलते हैं।<ref name="Malware-IBM"/>
*ट्रोजन हॉर्स: ये प्रोग्राम होते हैं, जो उपयोगी या वैध सॉफ़्टवेयर के रूप में छिपे रहते हैं या खुद को दिखाते हैं ताकि उपयोगकर्ताओं को उन्हें इंस्टॉल करने के लिए धोखा दिया जा सके। एक बार इंस्टॉल होने के बाद, रिमोट एक्सेस ट्रोजन (RAT) प्रभावित डिवाइस पर एक गुप्त बैकडोर बना सकता है, जिससे नुकसान पहुँचाया जा सके।<ref name="Malware-IBM"/>
*स्पाइवेयर: यह एक प्रकार का मैलवेयर होता है, जो संक्रमित कंप्यूटर से जानकारी एकत्र करता है और इसे हमलावर को भेजता है। स्पाइवेयर का एक सामान्य रूप कीलॉगर्स होते हैं, जो उपयोगकर्ता की सभी कीबोर्ड इनपुट/कीस्ट्रोक को रिकॉर्ड करते हैं, जिससे हमलावर यूज़रनेम, पासवर्ड, बैंक खाते और [[क्रेडिट कार्ड]] नंबर प्राप्त कर सकते हैं।<ref name="Malware-IBM"/>
*स्केयरवेयर: जैसा कि नाम से पता चलता है, यह एक प्रकार का मैलवेयर होता है, जो उपयोगकर्ताओं को डराने, झटका देने, चिंता उत्पन्न करने, या खतरे की धारणा का सुझाव देकर उन्हें अवांछित सॉफ़्टवेयर खरीदने या इंस्टॉल करने के लिए धोखा देता है। ये हमले अक्सर एक अचानक पॉप-अप संदेश के साथ शुरू होते हैं, जो उपयोगकर्ता को यह चेतावनी देते हैं कि उन्होंने कानून तोड़ा है या उनके डिवाइस में वायरस है।<ref name="Malware-IBM"/>
===मैन-इन-द-मिडिल हमले===
मैन-इन-द-मिडिल (MITM) हमलों में एक दुर्भावनापूर्ण हमलावर, दो पक्षों के बीच संचार को रोकने, निगरानी करने या उसमें परिवर्तन करने की कोशिश करता है। वह दोनों पक्षों की पहचान को स्पूफ करके खुद को बीच में डाल लेता है।<ref name="verizon-mitm">
{{Cite web |url=https://www.verizon.com/business/resources/articles/s/what-is-a-man-in-the-middle-attack-and-how-can-i-protect-my-organization/ |title=What is a man-in-the-middle attack and how can I protect my organization? |website=[[verizon|verizon.com]]}}
</ref> MITM हमलों के कुछ प्रकार निम्नलिखित हैं:
*आईपी एड्रेस स्पूफिंग: इसमें हमलावर रूटिंग प्रोटोकॉल को हाईजैक कर लक्ष्य का ट्रैफिक किसी कमजोर नेटवर्क नोड पर पुनः निर्देशित करता है ताकि ट्रैफिक को इंटरसेप्ट या इंजेक्ट किया जा सके।
*मैसेज स्पूफिंग (ईमेल, एसएमएस, या ओटीटी मैसेजिंग के जरिए): इसमें हमलावर लक्ष्य का इस्तेमाल करते हुए ईमेल, एसएमएस या ओटीटी मैसेजिंग एप्स के माध्यम से किसी की पहचान या सेवा को स्पूफ करता है। हमलावर तब बातचीत की निगरानी कर सकता है, सामाजिक हमले कर सकता है, या और अधिक हमलों के लिए जीरो-डे कमजोरियों का फायदा उठा सकता है।
*वाईफाई SSID स्पूफिंग: इसमें हमलावर एक वाईफाई बेस स्टेशन SSID की नकल करता है ताकि इंटरनेट ट्रैफिक और लेन-देन को कैप्चर और संशोधित किया जा सके। यह स्थानीय नेटवर्क एड्रेसिंग और कमजोर नेटवर्क सुरक्षा का उपयोग करके फ़ायरवॉल में प्रवेश कर सकता है।
*डीएनएस स्पूफिंग: इसमें हमलावर डोमेन नाम असाइनमेंट को हाईजैक करता है ताकि ट्रैफिक को अपने नियंत्रण वाले सिस्टम पर पुनः निर्देशित किया जा सके, जिससे ट्रैफिक की निगरानी की जा सके या अन्य हमलों को अंजाम दिया जा सके।
*एसएसएल हाईजैकिंग: इसमें हमलावर एसएसएल ऑथेंटिकेशन और एन्क्रिप्शन प्रोटोकॉल को सर्टिफिकेट अथॉरिटी इंजेक्शन के माध्यम से स्पूफ करता है ताकि ट्रैफिक को डिक्रिप्ट, मॉनिटर और संशोधित किया जा सके।<ref name="verizon-mitm"/>
===बहु-वेक्टर, बहुरूपी हमले===
2017 में उभरने वाला एक नया वर्ग, मल्टी-वेक्टर,<ref>{{cite web | title=Multi-Vector Attacks Demand Multi-Vector Protection | website=MSSP Alert | date=24 July 2017 | url=https://www.msspalert.com/analysis/multi-vector-attacks-demand-multi-vector-protection }}</ref> पॉलीमॉर्फिक<ref>{{cite news |first=Renee |last=Millman |title=New polymorphic malware evades three-quarters of AV scanners |work=SC Magazine UK |date=15 December 2017 |url=https://www.scmagazineuk.com/new-polymorphic-malware-evades-three-quarters-of-av-scanners/article/718757/ |access-date=12 सितंबर 2024 |archive-date=14 जून 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180614034417/https://www.scmagazineuk.com/new-polymorphic-malware-evades-three-quarters-of-av-scanners/article/718757/ |url-status=dead }}</ref> साइबर हमलों का होता है, जिसमें कई प्रकार के हमले एक साथ होते हैं और ये हमले फैलते हुए साइबर सुरक्षा नियंत्रणों से बचने के लिए अपना रूप बदल लेते हैं।
मल्टी-वेक्टर पॉलीमॉर्फिक हमले, जैसा कि नाम से स्पष्ट है, दोनों मल्टी-वेक्टर और पॉलीमॉर्फिक होते हैं।<ref name="Tounsi-2019">{{Citation |last=Tounsi |first=Wiem |title=What is Cyber Threat Intelligence and How is it Evolving? |date=2019-05-15 |url=https://onlinelibrary.wiley.com/doi/10.1002/9781119618393.ch1 |work=Cyber-Vigilance and Digital Trust |pages=1–49 |editor-last=Tounsi |editor-first=Wiem |access-date=2023-12-06 |edition=1 |publisher=Wiley |language=en |doi=10.1002/9781119618393.ch1 |isbn=978-1-78630-448-3|s2cid=187294508 |url-access=subscription }}</ref> सबसे पहले, यह एक ऐसा हमला है जिसमें कई प्रकार के हमले शामिल होते हैं। इस दृष्टिकोण से, यह "मल्टी-वेक्टर" है, यानी हमला वेब, ईमेल और एप्लिकेशन जैसे कई माध्यमों से फैल सकता है। इसके अलावा, ये हमले मल्टी-स्टेज होते हैं, यानी ये नेटवर्क में घुसपैठ कर सकते हैं और नेटवर्क के अंदर साइड मूवमेंट कर सकते हैं।<ref name="Tounsi-2019"/> ये हमले पॉलीमॉर्फिक भी हो सकते हैं, जिसका मतलब है कि साइबर हमले जैसे वायरस, वर्म या ट्रोजन लगातार अपना रूप बदलते हैं, जिससे सिग्नेचर-आधारित सुरक्षा उपायों से इनका पता लगाना लगभग असंभव हो जाता है।<ref name="Tounsi-2019"/>
===फ़िशिंग===
[[File:PhishingTrustedBank.png|thumb|एक फ़िशिंग ईमेल का उदाहरण, जो (काल्पनिक) बैंक के आधिकारिक ईमेल के रूप में प्रच्छन्न है। भेजने वाला प्राप्तकर्ता को धोखे से गोपनीय जानकारी उजागर करने के लिए फिशर की वेबसाइट पर पुष्टि करने के लिए प्रेरित करने का प्रयास कर रहा है। "received" और "discrepancy" जैसे शब्दों की गलत वर्तनी को क्रमशः rec''ie''ved और discrep''e''ncy के रूप में नोट करें। हालाँकि बैंक के वेबपेज का URL वैध प्रतीत होता है, लेकिन हाइपरलिंक फिशर की वेबसाइट की ओर इशारा करता है।]]
फ़िशिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें उपयोगकर्ताओं को धोखा देकर उनके संवेदनशील जानकारी जैसे यूज़रनेम, पासवर्ड और क्रेडिट कार्ड की जानकारी हासिल की जाती है।<ref>{{cite web |url=https://www.case.edu/its/kba/its-kba-27196-phishing-attempt/ |title=Identifying Phishing Attempts |publisher=Case |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20150913200707/http://www.case.edu/its/kba/its-kba-27196-phishing-attempt/ |archive-date=13 September 2015 |access-date=4 July 2016 }}</ref> फ़िशिंग आमतौर पर ईमेल स्पूफिंग, इंस्टेंट मैसेजिंग, टेक्स्ट मैसेज, या फोन कॉल के जरिए की जाती है। इसमें उपयोगकर्ताओं को ऐसे नकली वेबसाइट पर जाने के लिए प्रेरित किया जाता है जो देखने और महसूस करने में असली वेबसाइट के समान होती है।<ref>{{Cite web |title=Protect yourself from phishing – Microsoft Support |url=https://support.microsoft.com/en-us/windows/protect-yourself-from-phishing-0c7ea947-ba98-3bd9-7184-430e1f860a44 |access-date=2023-12-06 |website=support.microsoft.com}}</ref> यह नकली वेबसाइट व्यक्तिगत जानकारी मांगती है, जैसे लॉगिन विवरण और पासवर्ड, जिसे फिर असली वेबसाइट पर उपयोगकर्ता के खाते तक पहुंचने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
फ़िशिंग पीड़ित की भरोसे की भावना का शोषण करता है, और इसे सोशल इंजीनियरिंग का एक रूप माना जा सकता है। हमलावर असली खातों तक पहुंचने के लिए रचनात्मक तरीकों का उपयोग कर सकते हैं। एक सामान्य धोखा यह होता है कि हमलावर उपयोगकर्ताओं को नकली इलेक्ट्रॉनिक चालान भेजते हैं,<ref>{{cite web |last=Lazarus |first=Ari |date=23 February 2018 |title=Phishers send fake invoices |url=https://www.consumer.ftc.gov/blog/2018/02/phishers-send-fake-invoices |access-date=17 February 2020 |website=Consumer Information |language=en}}</ref> यह दिखाते हुए कि उन्होंने हाल ही में संगीत, ऐप्स या अन्य चीज़ें खरीदी हैं, और यदि यह खरीदारी अधिकृत नहीं है, तो एक लिंक पर क्लिक करने का निर्देश देते हैं। फ़िशिंग का एक अधिक रणनीतिक प्रकार स्पीयर-फ़िशिंग है, जिसमें व्यक्तिगत या संगठन-विशिष्ट जानकारी का उपयोग किया जाता है ताकि हमलावर को एक विश्वसनीय स्रोत के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। स्पीयर-फ़िशिंग हमले विशेष व्यक्तियों को लक्षित करते हैं, जबकि सामान्य फ़िशिंग प्रयासों में अधिक व्यापक समूह को निशाना बनाया जाता है।<ref name=":3">{{cite web | website=Trellix | title=Email Security | date=17 May 2022 | url=https://www.trellix.com/en-us/platform/email-security.html | archive-url=https://web.archive.org/web/20220522081555/https://www.trellix.com/en-us/platform/email-security.html | archive-date=22 May 2022 | url-status=dead | access-date=24 October 2022 }}</ref>
===विशेषाधिकार वृद्धि===
विशेषाधिकार वृद्धि (प्रिविलेज एस्केलेशन) उस स्थिति को दर्शाता है जहां एक हमलावर, कुछ सीमित पहुंच के साथ, बिना अनुमति के अपने अधिकार या पहुंच स्तर को बढ़ाने में सक्षम हो जाता है।<ref name="Privilege escalation" /> उदाहरण के लिए, एक साधारण कंप्यूटर उपयोगकर्ता सिस्टम में किसी कमजोरी का फायदा उठाकर प्रतिबंधित डेटा तक पहुंच सकता है, या यहां तक कि रूट (root) उपयोगकर्ता बनकर पूरे सिस्टम पर बिना किसी प्रतिबंध के नियंत्रण प्राप्त कर सकता है। ऐसे हमलों की गंभीरता मामूली अवांछित ईमेल भेजने से लेकर बड़ी मात्रा में डेटा पर रैंसमवेयर हमले तक हो सकती है। प्रिविलेज एस्केलेशन अक्सर सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों, विशेष रूप से फ़िशिंग, से शुरू होती है।<ref name="Privilege escalation" />
प्रिविलेज एस्केलेशन को दो रणनीतियों में विभाजित किया जा सकता है: क्षैतिज (horizontal) और लंबवत (vertical) प्रिविलेज एस्केलेशन।
* क्षैतिज एस्केलेशन (horizontal escalation): इसमें हमलावर एक सामान्य उपयोगकर्ता खाते की पहुंच प्राप्त करता है, जिसमें अपेक्षाकृत कम स्तर के अधिकार होते हैं। यह आमतौर पर उपयोगकर्ता का यूज़रनेम और पासवर्ड चुराकर किया जाता है। इस "पायदान" पर पहुंचने के बाद, हमलावर इसी तरह के स्तर के अन्य उपयोगकर्ताओं के नेटवर्क में घूम सकता है और समान अधिकार वाले डेटा तक पहुंच प्राप्त कर सकता है।<ref name="Privilege escalation" />
* लंबवत एस्केलेशन (vertical escalation): इसमें हमलावर का लक्ष्य किसी कंपनी में उच्च अधिकार वाले व्यक्तियों तक पहुंच प्राप्त करना होता है, जैसे आईटी कर्मचारी जिनके पास अधिक प्रशासनिक अधिकार होते हैं। इस तरह के खाते का उपयोग करके हमलावर अन्य खातों तक पहुंचने में सक्षम हो जाता है।<ref name="Privilege escalation">{{Cite web |title=What is Privilege Escalation? – CrowdStrike |url=https://www.crowdstrike.com/cybersecurity-101/privilege-escalation/ |access-date=2023-12-07 |website=crowdstrike.com |language=en}}</ref>
===साइड-चैनल हमला===
{{Main article|साइड-चैनल हमला}}
किसी भी संगणकीय प्रणाली का उसके परिवेश पर कुछ न कुछ प्रभाव अवश्य पड़ता है। यह प्रभाव विद्युत-चुंबकीय विकिरण से लेकर RAM कोशिकाओं पर बची हुई जानकारी तक हो सकता है, जिससे कोल्ड बूट अटैक संभव हो जाता है, या हार्डवेयर कार्यान्वयन की त्रुटियाँ होती हैं जो सामान्य रूप से अप्राप्य मानों तक पहुँचने या उनका अनुमान लगाने की अनुमति देती हैं। साइड-चैनल अटैक परिदृश्यों में, हमलावर इस प्रकार की जानकारी एकत्र करता है ताकि वह सिस्टम या नेटवर्क की आंतरिक स्थिति का अनुमान लगा सके और परिणामस्वरूप उस जानकारी तक पहुँच सके जिसे पीड़ित सुरक्षित मानता है।
===सोशल इंजीनियरिंग===
कंप्यूटर सुरक्षा के संदर्भ में सोशल इंजीनियरिंग का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को इस तरह से धोखा देना होता है कि वे अपने पासवर्ड, कार्ड नंबर आदि जैसी गोपनीय जानकारी साझा कर दें, या शारीरिक पहुंच की अनुमति दें, जैसे कि किसी वरिष्ठ अधिकारी, बैंक, ठेकेदार या ग्राहक का प्रतिरूपण किया जाए।<ref>{{cite web |last=Arcos Sergio |title=Social Engineering |url=http://upcommons.upc.edu/pfc/bitstream/2099.1/12289/1/73827.pdf |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20131203043630/http://upcommons.upc.edu/pfc/bitstream/2099.1/12289/1/73827.pdf |archive-date=3 December 2013 |access-date=2019-04-16 |website=upc.edu}}</ref> यह आमतौर पर लोगों के विश्वास का फायदा उठाता है और उनके संज्ञानात्मक पूर्वाग्रहों पर आधारित होता है। एक सामान्य घोटाला वह होता है जिसमें लेखा और वित्त विभाग के कर्मचारियों को उनके [[मुख्य कार्यकारी अधिकारी|CEO]] का प्रतिरूपण करते हुए ईमेल भेजा जाता है और तुरंत कुछ कार्रवाई करने का अनुरोध किया जाता है। सोशल इंजीनियरिंग की मुख्य तकनीकों में फ़िशिंग हमले शामिल होते हैं।
2016 की शुरुआत में, FBI ने बताया कि इस प्रकार के बिजनेस ईमेल समझौते (BEC) धोखाधड़ी ने लगभग दो वर्षों में अमेरिकी व्यवसायों को 2 बिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान पहुंचाया।<ref>{{cite news |last1=Scannell |first1=Kara |title=CEO email scam costs companies $2bn |url=http://www.ft.com/intl/cms/s/0/83b4e9be-db16-11e5-a72f-1e7744c66818.html#axzz41pN5YBV4 |access-date=7 मई 2016 |work=Financial Times |issue=25 फ़रवरी 2016 |date=24 फ़रवरी 2016 |url-status=dead <!-- technically unfit but effectively dead--> |archive-url=https://web.archive.org/web/20160623105523/http://www.ft.com/intl/cms/s/0/83b4e9be-db16-11e5-a72f-1e7744c66818.html#axzz41pN5YBV4 |archive-date=23 जून 2016}}</ref>
मई 2016 में, मिलवॉकी बक्स NBA टीम इस प्रकार के साइबर घोटाले का शिकार हुई, जिसमें एक अपराधी ने टीम के अध्यक्ष पीटर फेगिन का प्रतिरूपण किया, जिसके परिणामस्वरूप टीम के सभी कर्मचारियों के 2015 के W-2 कर फॉर्म सौंप दिए गए।<ref>{{cite news|title=Bucks leak tax info of players, employees as result of email scam|url=https://www.espn.com/nba/story/_/id/15615363/milwaukee-bucks-leak-tax-information-players-employees-result-email-scam|access-date=20 मई 2016| agency=Associated Press |date=20 मई 2016|url-status=live <!-- technically unfit but effectively dead--> |archive-url= https://web.archive.org/web/20160520144908/http://espn.go.com/nba/story/_/id/15615363/milwaukee-bucks-leak-tax-informatiopn-players-employees-result-email-scam |archive-date=20 मई 2016}}</ref>
===स्पूफिंग===
{{Main article|स्पूफिंग हमला}}
स्पूफिंग (Spoofing) एक ऐसा कार्य है जिसमें कोई व्यक्ति या प्रणाली, डेटा (जैसे IP पता या उपयोगकर्ता नाम) को झूठा प्रस्तुत करके एक वैध इकाई होने का दिखावा करती है, ताकि वह ऐसी जानकारी या संसाधनों तक पहुँच सके, जिन तक पहुँचने का उसे अधिकार नहीं है। स्पूफिंग का फ़िशिंग से निकट संबंध है।<ref>{{cite web |title=What is Spoofing? – Definition from Techopedia |url=https://www.techopedia.com/definition/5398/spoofing |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20160630134737/https://www.techopedia.com/definition/5398/spoofing |archive-date=30 June 2016 |access-date=2022-01-16 |website=techopedia.com}}</ref><ref>{{cite encyclopedia|chapter-url=http://www.oxfordreference.com/view/10.1093/acref/9780199688975.001.0001/acref-9780199688975-e-4987|chapter=spoofing|access-date=8 October 2017|title=A Dictionary of Computer Science|doi=10.1093/acref/9780199688975.001.0001|isbn=978-0199688975|publisher=Oxford University Press|date=21 January 2016|editor1-last=Butterfield|editor1-first=Andrew|editor2-last=Ngondi|editor2-first=Gerard Ekembe}}</ref> स्पूफिंग के कई प्रकार होते हैं, जिनमें शामिल हैं:
*ईमेल स्पूफिंग: इसमें हमलावर ईमेल के स्रोत पते (From या source) को नकली बनाता है।
*आईपी पता स्पूफिंग: इसमें हमलावर नेटवर्क पैकेट में स्रोत IP पते को बदलता है ताकि उसकी पहचान छिपी रहे या वह किसी अन्य कंप्यूटिंग प्रणाली का प्रतिरूपण कर सके।
*MAC स्पूफिंग: इसमें हमलावर अपने नेटवर्क इंटरफेस नियंत्रक के मीडिया एक्सेस कंट्रोल (MAC) पते को बदलता है ताकि अपनी पहचान छिपा सके या किसी अन्य व्यक्ति का प्रतिरूपण कर सके।
*बायोमेट्रिक स्पूफिंग: इसमें हमलावर नकली बायोमेट्रिक नमूना बनाकर किसी अन्य उपयोगकर्ता के रूप में दिखावा करता है।<ref>{{cite book|editor1-last=Marcel|editor1-first=Sébastien|editor2-last=Nixon|editor2-first=Mark|editor3-last=Li|editor3-first=Stan|year=2014|title=Handbook of Biometric Anti-Spoofing: Trusted Biometrics under Spoofing Attacks|url=https://archive.org/details/handbookofbiomet0000marc|language=en|location=London|publisher=Springer|doi=10.1007/978-1-4471-6524-8|isbn=978-1447165248|issn=2191-6594|lccn=2014942635|series=Advances in Computer Vision and Pattern Recognition|s2cid=27594864}}</ref>
*एड्रेस रिज़ॉल्यूशन प्रोटोकॉल (ARP) स्पूफिंग: इसमें हमलावर स्थानीय क्षेत्र नेटवर्क पर नकली ARP संदेश भेजता है ताकि उसका MAC पता किसी अन्य होस्ट के IP पते से जुड़ जाए, जिससे डेटा उस होस्ट के बजाय हमलावर को भेजा जाता है।
2018 में, साइबर सुरक्षा फर्म ट्रेलिक्स ने हेल्थकेयर उद्योग में स्पूफिंग के जीवन-धमकाने वाले जोखिम पर शोध प्रकाशित किया।<ref>{{Cite web |title=80 to 0 in Under 5 Seconds: Falsifying a Medical Patient's Vitals |url=https://www.trellix.com/en-us/about/newsroom/stories/research/80-to-0-in-under-5-seconds-falsifying-a-medical-patients-vitals.html |access-date=2023-02-09 |website=www.trellix.com |language=en |archive-date=30 नवंबर 2024 |archive-url=https://web.archive.org/web/20241130200826/https://www.trellix.com/en-us/about/newsroom/stories/research/80-to-0-in-under-5-seconds-falsifying-a-medical-patients-vitals.html |url-status=dead }}</ref>
===टैम्परिंग===
टैम्परिंग (Tampering) एक दुर्भावनापूर्ण संशोधन या डेटा में बदलाव को दर्शाता है। यह एक जानबूझकर किया गया, लेकिन अवैध कार्य होता है, जिसके परिणामस्वरूप किसी सिस्टम, सिस्टम के घटकों, उसकी निर्धारित कार्यप्रणाली, या डेटा में बदलाव किया जाता है। तथाकथित एविल मेड हमले और सुरक्षा सेवाओं द्वारा राउटर्स में निगरानी क्षमता स्थापित करना इसके उदाहरण हैं।<ref>{{cite web |last=Gallagher |first=Sean |url=https://arstechnica.com/tech-policy/2014/05/photos-of-an-nsa-upgrade-factory-show-cisco-router-getting-implant/ |title=Photos of an NSA "upgrade" factory show Cisco router getting implant |website=Ars Technica |date=14 May 2014 |access-date=3 August 2014 |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20140804130416/http://arstechnica.com/tech-policy/2014/05/photos-of-an-nsa-upgrade-factory-show-cisco-router-getting-implant/ |archive-date=4 August 2014 }}</ref>
===एचटीएमएल तस्करी===
एचटीएमएल स्मगलिंग हमले में हमलावर किसी विशेष एचटीएमएल या वेब पेज के अंदर दुर्भावनापूर्ण कोड "छुपाने" में सक्षम होता है।<ref name="Intelligence-2021">{{Cite web |last=Intelligence |first=Microsoft Threat |date=2021-11-11 |title=HTML smuggling surges: Highly evasive loader technique increasingly used in banking malware, targeted attacks |url=https://www.microsoft.com/en-us/security/blog/2021/11/11/html-smuggling-surges-highly-evasive-loader-technique-increasingly-used-in-banking-malware-targeted-attacks/ |access-date=2023-12-07 |website=Microsoft Security Blog |language=en-US}}</ref> एचटीएमएल फाइलें हानिरहित, निष्क्रिय डेटा के रूप में पेलोड को छुपा सकती हैं ताकि सामग्री फिल्टर को मात दी जा सके। इन पेलोड्स को फिल्टर के दूसरी ओर फिर से संगठित किया जा सकता है।<ref>{{Cite web |title=Obfuscated Files or Information: HTML Smuggling, Sub-technique T1027.006 – Enterprise {{!}} MITRE ATT&CK® |url=https://attack.mitre.org/techniques/T1027/006/ |access-date=2023-02-22 |website=attack.mitre.org}}</ref>
जब लक्षित उपयोगकर्ता एचटीएमएल खोलता है, तो दुर्भावनापूर्ण कोड सक्रिय हो जाता है; [[वेब ब्राउज़र]] स्क्रिप्ट को "डिकोड" करता है, जो फिर लक्ष्य के डिवाइस पर मैलवेयर को छोड़ देता है।<ref name="Intelligence-2021"/>
==सूचना सुरक्षा नियम==
कर्मचारी व्यवहार का संगठनों में सूचना सुरक्षा पर बड़ा प्रभाव हो सकता है। सांस्कृतिक अवधारणाएँ संगठन के विभिन्न वर्गों को सूचना सुरक्षा की दिशा में प्रभावी ढंग से काम करने में मदद कर सकती हैं या इसके विपरीत प्रभाव डाल सकती हैं। सूचना सुरक्षा संस्कृति को इस प्रकार परिभाषित किया गया है: "यह संगठन में व्यवहार के उन सभी पैटर्न का योग है, जो सभी प्रकार की सूचनाओं की सुरक्षा में योगदान करते हैं।"<ref>{{cite journal | last1=Lim | first1=Joo S. | last2=Chang | first2=Shanton | last3=Maynard | first3=Sean | last4=Ahmad | first4=Atif | title=Exploring the Relationship between Organizational Culture and Information Security Culture | journal=Proceedings of the 7th Australian Information Security Management Conference | date=2009 | publisher=Security Research Institute (SRI), Edith Cowan University | volume=Perth | doi=10.4225/75/57B4065130DEF | page=1st to 3rd December 2009 | url=http://ro.ecu.edu.au/ism/12}}</ref>
एंडर्सन और रीमर्स (2014) ने पाया कि कर्मचारी अक्सर खुद को अपनी संगठन की सूचना सुरक्षा प्रयासों का हिस्सा नहीं मानते और अक्सर ऐसे कार्य करते हैं जो संगठनात्मक परिवर्तनों में बाधा डालते हैं।<ref>{{cite conference | last1=Reimers | first1=Karl | last2=Andersson | first2=David | conference=ICERI2017 Proceedings | title=Post-secondary Education Network Security: the End User Challenge and Evolving Threats | publisher=IATED | year=2017 | volume=1 | page= | issn=2340-1095 | doi=10.21125/iceri.2017.0554 | pages=1787–1796 | isbn=978-84-697-6957-7 |url=https://library.iated.org/view/REIMERS2017POS}}</ref> वास्तव में, वेरिज़ोन डेटा ब्रीच जांच रिपोर्ट 2020, जिसने 3,950 सुरक्षा उल्लंघनों की जांच की, ने पाया कि 30% साइबर सुरक्षा घटनाओं में कंपनी के भीतर आंतरिक कर्मियों का हाथ था।<ref>{{cite report|title=Verizon Data Breach Investigations Report 2020 |url=https://enterprise.verizon.com/resources/reports/2020-data-breach-investigations-report.pdf |archive-url=https://web.archive.org/web/20200519161153/https://enterprise.verizon.com/resources/reports/2020-data-breach-investigations-report.pdf |archive-date=2020-05-19 |url-status=live |access-date=2021-09-17 |website=verizon.com}}</ref> शोध से पता चलता है कि सूचना सुरक्षा संस्कृति को लगातार बेहतर बनाए रखने की आवश्यकता होती है। "विश्लेषण से परिवर्तन तक सूचना सुरक्षा संस्कृति" में लेखकों ने टिप्पणी की, "यह एक अंतहीन प्रक्रिया है, मूल्यांकन और परिवर्तन या रखरखाव का एक चक्र।" सूचना सुरक्षा संस्कृति का प्रबंधन करने के लिए पाँच कदम उठाए जाने चाहिए: पूर्व-मूल्यांकन, रणनीतिक योजना, क्रियात्मक योजना, कार्यान्वयन, और उत्तर-मूल्यांकन।<ref name="Schlienger, Thomas 2003">{{cite journal | last1 = Schlienger | first1 = Thomas | last2 = Teufel | first2 = Stephanie | year = 2003 | title = Information security culture-from analysis to change | journal = South African Computer Journal | volume = 31 | pages = 46–52 |hdl=10520/EJC27949}}</ref>
*पूर्व-मूल्यांकन: कर्मचारियों में सूचना सुरक्षा के प्रति जागरूकता की पहचान करना और मौजूदा सुरक्षा नीतियों का विश्लेषण करना।
*रणनीतिक योजना: बेहतर जागरूकता कार्यक्रम तैयार करने के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए जाने चाहिए। इसे प्राप्त करने के लिए कुशल पेशेवरों की एक टीम का गठन करना सहायक होता है।
*क्रियात्मक योजना: एक अच्छी सुरक्षा संस्कृति आंतरिक संचार, प्रबंधन की प्रतिबद्धता, सुरक्षा जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम पर आधारित हो सकती है।<ref name="Schlienger, Thomas 2003"/>
*कार्यान्वयन: सूचना सुरक्षा संस्कृति को लागू करने के लिए चार चरणों का उपयोग किया जाना चाहिए:
#प्रबंधन की प्रतिबद्धता
#संगठन के सदस्यों के साथ संचार
#सभी संगठनात्मक सदस्यों के लिए पाठ्यक्रम
#कर्मचारियों की प्रतिबद्धता<ref name="Schlienger, Thomas 2003"/>
*उत्तर-मूल्यांकन: योजना और कार्यान्वयन की सफलता का आकलन करने के लिए, और अनसुलझे चिंताओं के क्षेत्रों की पहचान करने के लिए।
==कंप्यूटर सुरक्षा (प्रतिविधान)==
कंप्यूटर सुरक्षा में, एक प्रतिविधान (countermeasure) एक क्रिया, उपकरण, प्रक्रिया, या तकनीक होती है जो किसी खतरे, भेद्यता, या हमले को समाप्त करने, रोकने, उससे होने वाले नुकसान को कम करने, या उसे पहचानकर और रिपोर्ट करके उसे ठीक करने के लिए की जाने वाली कार्रवाई को संदर्भित करती है।<ref>{{cite ietf|rfc=2828|title=Internet Security Glossary}}</ref><ref>{{cite web |date=26 April 2010 |title=CNSS Instruction No. 4009 |url=http://www.cnss.gov/Assets/pdf/cnssi_4009.pdf |archive-url=https://web.archive.org/web/20120227163121/http://www.cnss.gov/Assets/pdf/cnssi_4009.pdf |archive-date=27 February 2012}}</ref><ref>{{cite web |title=InfosecToday Glossary |url=http://www.infosectoday.com/Articles/Glossary.pdf |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20141120041536/http://www.infosectoday.com/Articles/Glossary.pdf |archive-date=20 November 2014}}</ref>
कुछ सामान्य प्रतिविधानों को निम्नलिखित वर्गों में सूचीबद्ध किया गया है:
===डिज़ाइन द्वारा सुरक्षा===
{{Main|डिज़ाइन द्वारा सुरक्षित}}
डिज़ाइन द्वारा सुरक्षा या सुरक्षित डिज़ाइन का मतलब है कि सॉफ़्टवेयर को शुरू से ही सुरक्षित बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस मामले में, सुरक्षा को एक मुख्य विशेषता के रूप में माना जाता है।
यूके सरकार के नेशनल साइबर सिक्योरिटी सेंटर ने सुरक्षित साइबर डिज़ाइन सिद्धांतों को पाँच भागों में विभाजित किया है:<ref>{{Cite web |title=Cyber security design principles |url=https://www.ncsc.gov.uk/collection/cyber-security-design-principles/cyber-security-design-principles |access-date=2023-12-11 |website=www.ncsc.gov.uk |language=en}}</ref>
# किसी सुरक्षित सिस्टम के निर्माण या अद्यतन से पहले, कंपनियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे उस सिस्टम के बुनियादी सिद्धांतों और संदर्भ को समझें, जिसे वे बना रहे हैं, और सिस्टम में किसी भी कमजोरियों की पहचान करें।
# कंपनियों को अपने डेटा या सिस्टम पर हमले को स्वाभाविक रूप से चुनौतीपूर्ण बनाने के लिए सुरक्षा तकनीकों और रक्षा तंत्रों के चारों ओर अपनी डिज़ाइन को केंद्रित करना चाहिए।
# कंपनियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके कोर सेवाएँ, जो तकनीक पर निर्भर हैं, संरक्षित रहें ताकि सिस्टम कभी डाउन न हो।
# हालांकि सिस्टम को कई तरह के हमलों से सुरक्षित बनाया जा सकता है, इसका मतलब यह नहीं है कि हमले नहीं किए जाएंगे। सभी कंपनियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे हमले का पता लगा सकें और जैसे ही हमला हो, तुरंत जवाब दे सकें।
# कंपनियों को ऐसे सुरक्षित सिस्टम डिज़ाइन करने चाहिए ताकि किसी भी सफल हमले की गंभीरता कम से कम हो।
सुरक्षित डिज़ाइन के इन सिद्धांतों में निम्नलिखित तकनीकें शामिल हो सकती हैं:
* न्यूनतम विशेषाधिकार का सिद्धांत, जहाँ सिस्टम के प्रत्येक भाग के पास केवल वही विशेषाधिकार होते हैं जो उसके कार्य के लिए आवश्यक होते हैं।
* स्वचालित प्रमेय सिद्ध करना, ताकि महत्वपूर्ण सॉफ़्टवेयर उपप्रणालियों की शुद्धता सिद्ध की जा सके।
* कोड समीक्षा और यूनिट परीक्षण, जहाँ औपचारिक शुद्धता प्रमाण संभव नहीं होते हैं, वहां मॉड्यूल को अधिक सुरक्षित बनाने के दृष्टिकोण।
* गहराई में रक्षा (Defense in Depth), जहाँ डिज़ाइन इस तरह से होती है कि सिस्टम की अखंडता को तोड़ने के लिए एक से अधिक उपप्रणालियों का उल्लंघन करना पड़े।
* डिफ़ॉल्ट सुरक्षित सेटिंग्स, और डिज़ाइन को इस तरह बनाना कि विफल होने पर यह सुरक्षित रूप से विफल हो।
* ऑडिट ट्रेल्स, जो सिस्टम की गतिविधियों को ट्रैक करते हैं ताकि किसी सुरक्षा उल्लंघन के मामले में उल्लंघन का तरीका और उसका दायरा निर्धारित किया जा सके।
* सभी कमजोरियों का पूर्ण प्रकटीकरण, ताकि जब बग का पता चले, तो भेद्यता की विंडो को यथासंभव छोटा रखा जा सके।
===सुरक्षा वास्तुकला===
सुरक्षा आर्किटेक्चर को "कंप्यूटर सिस्टम्स को सुरक्षा लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए डिज़ाइन करने का अभ्यास" के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।<ref name="NSCS security arch">{{Cite web |title=How the NCSC thinks about security architecture |url=https://www.ncsc.gov.uk/blog-post/how-ncsc-thinks-about-security-architecture |access-date=2023-12-18 |website=www.ncsc.gov.uk |language=en}}</ref> ये लक्ष्य "सुरक्षा द्वारा डिज़ाइन" के सिद्धांतों से जुड़े होते हैं, जैसे "सिस्टम के प्रारंभिक समझौते को कठिन बनाना" और "किसी भी समझौते के प्रभाव को सीमित करना।"<ref name="NSCS security arch" /> व्यवहार में, एक सुरक्षा आर्किटेक्ट की भूमिका यह सुनिश्चित करना होगी कि सिस्टम की संरचना उसकी सुरक्षा को मजबूत करे, और नए परिवर्तन सुरक्षित हों और संगठन की सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करें।<ref>{{Cite web |title=Secure System Architecture and Design |url=https://www.ukcybersecuritycouncil.org.uk/careers-and-learning/cyber-career-framework/secure-system-architecture-design| date=2024| access-date=4 January 2024 |website=UK Cyber Security Council |language=en }}</ref><ref>{{Cite web |title=security architecture – Glossary {{!}} CSRC |url=https://csrc.nist.gov/glossary/term/security_architecture |access-date=2023-12-18 |website=csrc.nist.gov |language=EN-US}}</ref>
इसी तरह, टेकोपेडिया सुरक्षा आर्किटेक्चर को "एक एकीकृत सुरक्षा डिज़ाइन के रूप में परिभाषित करता है जो एक विशेष स्थिति या वातावरण में आवश्यकताओं और संभावित खतरों को संबोधित करता है। यह यह भी निर्दिष्ट करता है कि सुरक्षा नियंत्रणों को कब और कहाँ लागू करना है। डिज़ाइन प्रक्रिया सामान्य रूप से पुनरावृत्त होती है।" सुरक्षा आर्किटेक्चर की प्रमुख विशेषताएं हैं:<ref>{{cite web |last1=Jannsen |first1=Cory |title=Security Architecture |url=http://www.techopedia.com/definition/72/security-architecture |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20141003064643/http://www.techopedia.com/definition/72/security-architecture |archive-date=3 October 2014 |access-date=9 October 2014 |website=Techopedia |publisher=Janalta Interactive Inc}}</ref>
* विभिन्न घटकों के बीच संबंध और वे एक-दूसरे पर कैसे निर्भर होते हैं।
* जोखिम आकलन, अच्छे अभ्यास, वित्तीय और कानूनी मामलों के आधार पर नियंत्रण का निर्धारण।
* नियंत्रणों का मानकीकरण।
सुरक्षा आर्किटेक्चर का अभ्यास संगठन में व्यापार, आईटी और सुरक्षा चिंताओं को व्यवस्थित रूप से संबोधित करने के लिए सही नींव प्रदान करता है।
===सुरक्षा उपाय===
कंप्यूटर सुरक्षा की स्थिति एक वैचारिक आदर्श है, जिसे तीन प्रक्रियाओं के उपयोग से प्राप्त किया जाता है: खतरे की रोकथाम, पहचान और प्रतिक्रिया। ये प्रक्रियाएँ विभिन्न नीतियों और प्रणाली घटकों पर आधारित होती हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
* उपयोगकर्ता खाते के एक्सेस नियंत्रण का उपयोग करके व्यक्तियों की पहुंच को सीमित करना और क्रिप्टोग्राफी का उपयोग करके सिस्टम फाइलों और डेटा को सुरक्षित रखना।
* फायरवॉल नेटवर्क सुरक्षा के दृष्टिकोण से सबसे सामान्य रोकथाम प्रणाली हैं, क्योंकि वे (यदि सही तरीके से कॉन्फ़िगर की गई हैं) आंतरिक नेटवर्क सेवाओं तक पहुंच को ढाल सकती हैं और पैकेट फिल्टरिंग के माध्यम से कुछ प्रकार के हमलों को रोक सकती हैं। फायरवॉल हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर दोनों प्रकार के हो सकते हैं। ये कंप्यूटर नेटवर्क के इनकमिंग और आउटगोइंग ट्रैफिक की निगरानी और नियंत्रण करते हैं और विश्वसनीय नेटवर्क और अविश्वसनीय नेटवर्क के बीच एक अवरोध स्थापित करते हैं।<ref name="Oppliger-1997">{{Cite journal |last=Oppliger |first=Rolf |date=1997-05-01 |title=Internet security: firewalls and beyond |journal=Communications of the ACM |volume=40 |issue=5 |pages=92–102 |doi=10.1145/253769.253802 |issn=0001-0782|doi-access=free }}</ref>
* इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम (IDS) उत्पाद नेटवर्क में प्रगति पर हमलों का पता लगाने और पोस्ट-हमले फॉरेंसिक में सहायता के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जबकि व्यक्तिगत सिस्टम के लिए ऑडिट ट्रेल्स और लॉग समान कार्य करते हैं।
* प्रतिक्रिया को किसी विशिष्ट प्रणाली की आंकी गई सुरक्षा आवश्यकताओं द्वारा परिभाषित किया जाता है और इसमें सुरक्षा उन्नयन से लेकर कानूनी अधिकारियों को सूचित करना, काउंटर-अटैक तक का दायरा हो सकता है। कुछ विशेष मामलों में, समझौता की गई प्रणाली को पूरी तरह से नष्ट कर देना पसंद किया जा सकता है, क्योंकि यह हो सकता है कि सभी समझौता किए गए संसाधनों का पता न चले।
* साइबर खतरों और हमलों से निपटने के लिए साइबर सुरक्षा जागरूकता प्रशिक्षण।<ref>{{Cite web |title=How to Increase Cybersecurity Awareness |url=https://www.isaca.org/resources/isaca-journal/issues/2019/volume-2/how-to-increase-cybersecurity-awareness |access-date=2023-02-25 |website=ISACA}}</ref>
* फॉरवर्ड वेब प्रॉक्सी समाधान क्लाइंट को दुर्भावनापूर्ण वेब पृष्ठों पर जाने से रोक सकते हैं और क्लाइंट मशीनों पर डाउनलोड करने से पहले सामग्री का निरीक्षण कर सकते हैं।
आज, कंप्यूटर सुरक्षा में मुख्य रूप से रोकथाम के उपाय शामिल हैं, जैसे फायरवॉल या एक्जिट प्रक्रियाएँ। फायरवॉल को नेटवर्क डेटा को फ़िल्टर करने के एक तरीके के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जो एक होस्ट या नेटवर्क और इंटरनेट जैसी किसी अन्य नेटवर्क के बीच होता है। ये मशीन पर चल रहे सॉफ़्टवेयर के रूप में लागू किए जा सकते हैं, नेटवर्क स्टैक में हुकिंग करते हैं (या, अधिकांश यूनिक्स-आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे [[लिनक्स]] के मामले में, ऑपरेटिंग सिस्टम कर्नेल में निर्मित होते हैं) ताकि रीयल-टाइम फ़िल्टरिंग और ब्लॉकिंग प्रदान की जा सके।<ref name="Oppliger-1997"/> एक अन्य कार्यान्वयन एक भौतिक फायरवॉल है, जो नेटवर्क ट्रैफ़िक को फ़िल्टर करने वाली एक अलग मशीन से बना होता है। फायरवॉल उन मशीनों के बीच आम हैं जो इंटरनेट से स्थायी रूप से जुड़ी रहती हैं।
कुछ संगठन बड़े डेटा प्लेटफ़ॉर्म, जैसे अपाचे हाडोप, की ओर रुख कर रहे हैं ताकि डेटा तक पहुंच बढ़ाई जा सके और उन्नत स्थायी खतरों का पता लगाने के लिए [[यंत्र शिक्षण|मशीन लर्निंग]] का उपयोग किया जा सके।<ref>{{Cite news |last=Woodie |first=Alex |date=9 May 2016 |title=Why ONI May Be Our Best Hope for Cyber Security Now |url=http://www.datanami.com/2016/05/09/oni-may-best-hope-cyber-security-now/ |url-status=live |access-date=13 July 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160820015812/https://www.datanami.com/2016/05/09/oni-may-best-hope-cyber-security-now/ |archive-date=20 August 2016}}</ref>
पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, नेटवर्क की गोपनीयता, अखंडता और उपलब्धता, जिसे सीआईए ट्रायड के रूप में जाना जाता है, की सुरक्षा करना आवश्यक है, और इसे सूचना सुरक्षा की नींव माना जाता है।<ref>{{cite web |last=Walkowski |first=Debbie |date=9 July 2019 |title=What Is The CIA Triad? |url=https://www.f5.com/labs/articles/education/what-is-the-cia-triad.html |access-date=25 February 2020 |website=F5 Labs |language=en }}{{Dead link|date=जनवरी 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए, प्रशासनिक, भौतिक और तकनीकी सुरक्षा उपायों को लागू किया जाना चाहिए। किसी संपत्ति को प्रदान की गई सुरक्षा की मात्रा केवल तभी निर्धारित की जा सकती है जब उसकी मूल्य ज्ञात हो।<ref>{{cite web |date=3 December 2018 |title=Knowing Value of Data Assets is Crucial to Cybersecurity Risk Management {{!}} SecurityWeek.Com |url=https://www.securityweek.com/knowing-value-data-assets-crucial-cybersecurity-risk-management |access-date=25 February 2020 |website=www.securityweek.com}}</ref>
===भेद्यता प्रबंधन===
{{Main|भेद्यता प्रबंधन}}
कमजोरी प्रबंधन (Vulnerability Management) कमजोरियों की पहचान, सुधार या उन्हें कम करने का एक चक्र है,<ref>{{cite book |last=Foreman |first=Park |title=Vulnerability Management |url=https://archive.org/details/vulnerabilityman0000fore |date=2009 |publisher=Auerbach Publications |isbn=978-1-4398-0150-5 |publication-place=Boca Raton, Fla. |page=[https://archive.org/details/vulnerabilityman0000fore/page/1 1]}}</ref> विशेष रूप से सॉफ़्टवेयर और फ़र्मवेयर में। यह कंप्यूटर सुरक्षा और नेटवर्क सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कमजोरियों की पहचान एक वल्नरेबिलिटी स्कैनर के माध्यम से की जा सकती है, जो कंप्यूटर सिस्टम का विश्लेषण करता है ताकि ज्ञात कमजोरियों,<ref>{{Cite book |last=Johnson |first=A. |url=https://books.google.com/books?id=FxRbDwAAQBAJ&q=Vulnerabilities+can+be+discovered+with+a+vulnerability+scanner,+which+analyzes+a+computer+system+in+search+of+known+vulnerabilities&pg=SA5-PA83 |title=CCNA Cybersecurity Operations Companion Guide |date=2018 |publisher=Cisco Press |isbn=978-0135166246 |language=en}}</ref> जैसे खुले पोर्ट, असुरक्षित सॉफ़्टवेयर कॉन्फ़िगरेशन और मैलवेयर की संवेदनशीलता का पता लगाया जा सके। इन टूल्स के प्रभावी होने के लिए, इन्हें विक्रेता द्वारा जारी किए गए हर नए अपडेट के साथ अद्यतन रखना आवश्यक होता है। आमतौर पर, ये अपडेट हाल ही में उत्पन्न कमजोरियों का पता लगाने के लिए स्कैन करते हैं।
वल्नरेबिलिटी स्कैनिंग के अलावा, कई संगठन अपने सिस्टम में कमजोरियों की पहचान के लिए बाहरी सुरक्षा ऑडिटर्स को नियमित रूप से पैनीट्रेशन टेस्ट (Penetration Tests) चलाने के लिए अनुबंधित करते हैं। कुछ क्षेत्रों में, यह एक संविदात्मक आवश्यकता होती है।<ref>{{cite book |last1=Calder |first1=Alan |title=PCI DSS: A Pocket Guide |last2=Williams |first2=Geraint |publisher=IT Governance Limited |year=2014 |isbn=978-1849285544 |edition=3rd |quote=network vulnerability scans at least quarterly and after any significant change in the network}}</ref>
===कमजोरियों को कम करना===
साइबर हमलों की कमजोरियों का आकलन और उन्हें कम करने की प्रक्रिया को आमतौर पर [[सूचना प्रौद्योगिकी]] सुरक्षा आकलन (Information Technology Security Assessments) कहा जाता है। इसका उद्देश्य प्रणालियों का जोखिम आकलन करना और उनकी कमजोरियों का पूर्वानुमान और परीक्षण करना होता है। हालांकि कंप्यूटर सिस्टम्स की शुद्धता की औपचारिक पुष्टि करना संभव है,<ref>{{cite conference |last1=Harrison |first1=J. |year=2003 |title=Formal verification at Intel |conference=18th Annual IEEE Symposium of Logic in Computer Science, 2003. Proceedings |pages=45–54 |doi=10.1109/LICS.2003.1210044 |isbn=978-0769518848 |s2cid=44585546}}</ref><ref>{{cite conference |last1=Umrigar |first1=Zerksis D. |last2=Pitchumani |first2=Vijay |year=1983 |title=Formal verification of a real-time hardware design |url=http://portal.acm.org/citation.cfm?id=800667 |conference=Proceeding DAC '83 Proceedings of the 20th Design Automation Conference |publisher=IEEE Press |pages=221–227 |isbn=978-0818600265}}</ref> यह अभी तक आम नहीं है। औपचारिक रूप से सत्यापित ऑपरेटिंग सिस्टम में seL4<ref>{{cite web |title=Abstract Formal Specification of the seL4/ARMv6 API |url=https://sel4.systems/Docs/seL4-spec.pdf |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20150521171234/https://sel4.systems/Docs/seL4-spec.pdf |archive-date=21 May 2015 |access-date=19 May 2015}}</ref> और SYSGO का PikeOS शामिल हैं,<ref>{{cite conference |last1=Baumann |first1=Christoph |last2=Beckert |first2=Bernhard |last3=Blasum |first3=Holger |last4=Bormer |first4=Thorsten |title=Ingredients of Operating System Correctness? Lessons Learned in the Formal Verification of PikeOS |url=http://www-wjp.cs.uni-saarland.de/publikationen/Ba10EW.pdf |conference=Embedded World Conference, Nuremberg, Germany |archive-url=https://web.archive.org/web/20110719110932/http://www-wjp.cs.uni-saarland.de/publikationen/Ba10EW.pdf |archive-date=19 July 2011 |access-date=14 सितंबर 2024 |archivedate=19 जुलाई 2011 |archiveurl=https://web.archive.org/web/20110719110932/http://www-wjp.cs.uni-saarland.de/publikationen/Ba10EW.pdf }}</ref><ref>{{cite web |last=Ganssle |first=Jack |title=Getting it Right |url=http://www.ganssle.com/rants/gettingitright.htm |archive-url=https://web.archive.org/web/20130504191958/http://www.ganssle.com/rants/gettingitright.htm |archive-date=4 May 2013}}</ref> लेकिन इनका बाजार में बहुत कम हिस्सा है।
एक हमलावर की संभावना को कम करना संभव है, जैसे कि सिस्टम को सुरक्षा पैच और अपडेट के साथ अद्यतन रखना और सुरक्षा में विशेषज्ञता रखने वाले लोगों को नियुक्त करना। बड़े खतरे वाले संगठनों के लिए सुरक्षा संचालन केंद्र (SOC) विश्लेषकों को नियुक्त करना एक विकल्प होता है। ये साइबर रक्षा के विशेषज्ञ होते हैं, जिनकी भूमिका खतरे का विश्लेषण करने से लेकर किसी नए मुद्दे की रिपोर्ट की जांच करना और आपदा वसूली योजनाओं की तैयारी और परीक्षण तक होती है।<ref>{{Cite web |title=Everything you need for a career as a SOC analyst |url=https://www.cybersecurityjobsite.com/staticpages/10300/everything-you-need-for-a-career-as-a-soc-analyst/ |access-date=2023-12-19 |website=www.cybersecurityjobsite.com}}</ref>
हालांकि कोई भी उपाय पूरी तरह से हमले को रोकने की गारंटी नहीं दे सकता, ये उपाय संभावित हमलों से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद कर सकते हैं। डेटा की हानि या क्षति के प्रभावों को भी सावधानीपूर्वक बैकअप और बीमा के माध्यम से कम किया जा सकता है।
औपचारिक आकलनों के बाहर, कमजोरियों को कम करने के विभिन्न तरीके होते हैं। दो-चरण प्रमाणीकरण (Two-Factor Authentication) अनधिकृत पहुंच को रोकने का एक तरीका है।<ref>{{Cite web |title=Turn on 2-step verification (2SV) |url=https://www.ncsc.gov.uk/collection/top-tips-for-staying-secure-online/activate-2-step-verification-on-your-email |access-date=2023-12-19 |website=www.ncsc.gov.uk |language=en}}</ref> इसमें कुछ ऐसा शामिल होता है जिसे आप जानते हैं: पासवर्ड या पिन, और कुछ ऐसा जो आपके पास होता है: कार्ड, डोंगल, मोबाइल फोन, या कोई अन्य हार्डवेयर। इससे सुरक्षा बढ़ती है क्योंकि एक अनधिकृत व्यक्ति को दोनों की आवश्यकता होती है।
सामाजिक अभियंत्रण (social engineering) और सीधे कंप्यूटर तक पहुंच (भौतिक) के खिलाफ सुरक्षा केवल गैर-कंप्यूटर उपायों द्वारा की जा सकती है, जो जानकारी की संवेदनशीलता के अनुपात में लागू करना मुश्किल हो सकता है। इस जोखिम को कम करने के लिए अक्सर प्रशिक्षण शामिल होता है, जिससे लोगों के सुरक्षा के ज्ञान में सुधार होता है और खतरों के प्रति जागरूकता बढ़ती है।<ref>{{Cite web |title=NCSC's cyber security training for staff now available |url=https://www.ncsc.gov.uk/blog-post/ncsc-cyber-security-training-for-staff-now-available |access-date=2023-12-19 |website=www.ncsc.gov.uk |language=en}}</ref> हालांकि, अत्यधिक अनुशासित वातावरण (जैसे कि सैन्य संगठन) में भी, सामाजिक अभियंत्रण हमलों की पूर्वानुमान और रोकथाम मुश्किल हो सकती है।
टीकाकरण सिद्धांत (Inoculation Theory) से उत्पन्न होने वाला टीकाकरण, सामाजिक अभियंत्रण और अन्य धोखाधड़ी युक्तियों और जालों को रोकने का प्रयास करता है, जो लोगों को समान या संबंधित प्रयासों के संपर्क में लाकर उन्हें प्रतिरोध की क्षमता प्रदान करता है।<ref>{{cite conference |last1=Treglia |first1=J. |last2=Delia |first2=M. |year=2017 |title=Cyber Security Inoculation |conference=NYS Cyber Security Conference, Empire State Plaza Convention Center, Albany, NY, 3–4 June}}</ref>
===हार्डवेयर सुरक्षा तंत्र===
{{See also|हार्डवेयर विफलता के कारण कंप्यूटर सुरक्षा से समझौता किया गया}}
हार्डवेयर-आधारित या सहायक कंप्यूटर सुरक्षा सॉफ्टवेयर-आधारित सुरक्षा के विकल्प के रूप में एक अन्य विकल्प प्रदान करती है। इसमें डोंगल्स, ट्रस्टेड प्लेटफॉर्म मॉड्यूल्स (TPMs), इंट्रूज़न-अवेयर केस, ड्राइव लॉक, USB पोर्ट्स को अक्षम करना, और मोबाइल-इनेबल्ड एक्सेस जैसे उपकरण और तरीके शामिल होते हैं, जो भौतिक पहुंच या परिष्कृत बैकडोर एक्सेस की आवश्यकता के कारण अधिक सुरक्षित माने जा सकते हैं। इनमें से प्रत्येक को नीचे विस्तार से समझाया गया है।
*USB डोंगल्स का उपयोग आमतौर पर सॉफ़्टवेयर लाइसेंसिंग योजनाओं में सॉफ़्टवेयर क्षमताओं को अनलॉक करने के लिए किया जाता है,<ref>{{Cite web |title=What is a license dongle? |url=https://www.revenera.com/software-monetization/glossary/license-dongle |access-date=2024-06-12 |website=www.revenera.com |language=en}}</ref> लेकिन इन्हें कंप्यूटर या अन्य उपकरणों के सॉफ़्टवेयर तक अनधिकृत पहुंच को रोकने के तरीके के रूप में भी देखा जा सकता है। डोंगल या कुंजी सॉफ़्टवेयर एप्लिकेशन और कुंजी के बीच एक सुरक्षित एन्क्रिप्टेड सुरंग बनाता है। इसका सिद्धांत यह है कि डोंगल पर एक एन्क्रिप्शन योजना, जैसे एडवांस्ड एन्क्रिप्शन स्टैंडर्ड (AES), मजबूत सुरक्षा प्रदान करती है क्योंकि डोंगल को हैक करना और उसकी नकल करना, मूल सॉफ़्टवेयर की एक प्रति बनाने और इसे दूसरी मशीन पर चलाने की तुलना में कठिन होता है। डोंगल का एक अन्य सुरक्षा अनुप्रयोग यह है कि इसे वेब-आधारित सामग्री, जैसे क्लाउड सॉफ़्टवेयर या वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPNs) तक पहुंचने के लिए उपयोग किया जाए।<ref>{{cite web |title=Token-based authentication |url=http://www.safenet-inc.com/multi-factor-authentication/authenticators/pki-usb-authentication/etoken-5200-token-based-authentication/ |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20140320234026/http://www.safenet-inc.com/multi-factor-authentication/authenticators/pki-usb-authentication/etoken-5200-token-based-authentication/ |archive-date=20 March 2014 |access-date=20 March 2014 |publisher=SafeNet.com}}</ref> इसके अलावा, एक USB डोंगल को कंप्यूटर को लॉक या अनलॉक करने के लिए भी कॉन्फ़िगर किया जा सकता है।<ref>{{cite web |date=10 February 2010 |title=Lock and protect your Windows PC |url=http://www.thewindowsclub.com/lock-protect-your-windows-pc-using-a-usb-drive-with-predator |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20140320220321/http://www.thewindowsclub.com/lock-protect-your-windows-pc-using-a-usb-drive-with-predator |archive-date=20 March 2014 |access-date=20 March 2014 |publisher=TheWindowsClub.com}}</ref>
*ट्रस्टेड प्लेटफॉर्म मॉड्यूल्स (TPMs) क्रिप्टोग्राफ़िक क्षमताओं को एक्सेस डिवाइसों पर एकीकृत करके उपकरणों को सुरक्षित करते हैं, जिसका उपयोग माइक्रोप्रोसेसरों के माध्यम से किया जाता है। सर्वर-साइड सॉफ़्टवेयर के साथ संयोजन में TPMs हार्डवेयर उपकरणों का पता लगाने और प्रमाणीकरण करने का एक तरीका प्रदान करते हैं, जिससे अनधिकृत नेटवर्क और डेटा तक पहुंच को रोका जा सकता है।<ref>{{cite web |author=James Greene |year=2012 |title=Intel Trusted Execution Technology: White Paper |url=http://www.intel.com/content/dam/www/public/us/en/documents/white-papers/trusted-execution-technology-security-paper.pdf |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20140611161421/http://www.intel.com/content/dam/www/public/us/en/documents/white-papers/trusted-execution-technology-security-paper.pdf |archive-date=11 June 2014 |access-date=18 December 2013 |publisher=Intel Corporation}}</ref>
*कंप्यूटर केस इंट्रूज़न डिटेक्शन एक उपकरण को संदर्भित करता है, जो आमतौर पर एक पुश-बटन स्विच होता है, जो कंप्यूटर केस खोले जाने पर इसका पता लगाता है। अगली बार जब कंप्यूटर बूट होता है, तो फर्मवेयर या BIOS ऑपरेटर को एक चेतावनी दिखाने के लिए प्रोग्राम किया जाता है।
*ड्राइव लॉक मूल रूप से हार्ड ड्राइव्स को एन्क्रिप्ट करने के लिए सॉफ़्टवेयर टूल्स होते हैं, जिससे उन्हें चोरों द्वारा एक्सेस नहीं किया जा सकता।<ref>{{cite web |date=4 October 2008 |title=SafeNet ProtectDrive 8.4 |url=http://www.scmagazine.com/safenet-protectdrive-84/review/2596/ |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20140320220133/http://www.scmagazine.com/safenet-protectdrive-84/review/2596/ |archive-date=20 March 2014 |access-date=20 March 2014 |publisher=SCMagazine.com}}</ref> बाहरी ड्राइव्स को एन्क्रिप्ट करने के लिए विशिष्ट उपकरण भी मौजूद हैं।<ref>{{cite web |date=11 May 2009 |title=Secure Hard Drives: Lock Down Your Data |url=https://www.pcmag.com/article2/0,2817,2342798,00.asp |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20170621202140/http://www.pcmag.com/article2/0,2817,2342798,00.asp |archive-date=21 June 2017 |publisher=PCMag.com}}</ref>
*USB पोर्ट्स को अक्षम करना एक सुरक्षा विकल्प है जो एक सुरक्षित कंप्यूटर में अनधिकृत और दुर्भावनापूर्ण पहुंच को रोकता है। नेटवर्क वर्ल्ड पत्रिका के अनुसार, फ़ायरवॉल के अंदर किसी कंप्यूटर से जुड़े संक्रमित USB डोंगल्स कंप्यूटर नेटवर्क्स के सामने सबसे सामान्य हार्डवेयर खतरा हैं।
*उन परिधीय उपकरणों (जैसे कैमरा, GPS, हटाने योग्य भंडारण) को डिस्कनेक्ट करना या अक्षम करना जो उपयोग में नहीं हैं।<ref>{{cite journal |last1=Souppaya |first1=Murugiah P. |last2=Scarfone |first2=Karen |date=2013 |title=Guidelines for Managing the Security of Mobile Devices in the Enterprise |url=https://www.nist.gov/publications/guidelines-managing-security-mobile-devices-enterprise |journal=National Institute of Standards and Technology |series=Special Publication (NIST SP) |location=Gaithersburg, MD |doi=10.6028/NIST.SP.800-124r1 |doi-access=free}}</ref>
*मोबाइल-इनेबल्ड एक्सेस डिवाइस अपनी सर्वव्यापकता के कारण लोकप्रियता प्राप्त कर रहे हैं।<ref>{{Cite web |date=2024-02-23 |title=Access Control Statistics: Trends & Insights |url=https://entrycare.com/access-control-statistics/ |access-date=2024-04-26 |language=en-US}}</ref> बिल्ट-इन क्षमताएं जैसे ब्लूटूथ, नया ब्लूटूथ लो एनर्जी (LE), नॉन-iOS डिवाइसों पर नियर-फील्ड कम्युनिकेशन (NFC) और बायोमेट्रिक सत्यापन जैसे अंगूठे के निशान की पहचान, और मोबाइल उपकरणों के लिए डिज़ाइन किया गया QR कोड रीडर सॉफ़्टवेयर, मोबाइल फोन को एक्सेस कंट्रोल सिस्टम्स से जोड़ने के नए और सुरक्षित तरीके प्रदान करते हैं। ये कंट्रोल सिस्टम कंप्यूटर सुरक्षा प्रदान करते हैं और सुरक्षित भवनों तक पहुंच को नियंत्रित करने के लिए भी उपयोग किए जा सकते हैं।<ref>{{cite web |date=4 November 2013 |title=Forget IDs, use your phone as credentials |url=http://video.foxbusiness.com/v/2804966490001/forget-ids-use-your-phone-as-credentials/?playlist_id=937116503001#sp=show-clips |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20140320215829/http://video.foxbusiness.com/v/2804966490001/forget-ids-use-your-phone-as-credentials/?playlist_id=937116503001#sp=show-clips |archive-date=20 March 2014 |access-date=20 March 2014 |publisher=[[Fox Business Network]]}}</ref>
*IOMMUs मोबाइल और डेस्कटॉप कंप्यूटरों में डायरेक्ट मेमोरी एक्सेस सुरक्षा का उपयोग करके हार्डवेयर-आधारित सैंडबॉक्सिंग की अनुमति देते हैं।<ref>{{cite web |title=Direct memory access protections for Mac computers |url=https://support.apple.com/guide/security/direct-memory-access-protections-seca4960c2b5/1/web/1 |access-date=16 November 2022 |website=Apple}}</ref><ref>{{cite web |title=Using IOMMU for DMA Protection in UEFI Firmware |url=https://www.intel.com/content/dam/develop/external/us/en/documents/intel-whitepaper-using-iommu-for-dma-protection-in-uefi-820238.pdf |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20211209062425/https://www.intel.com/content/dam/develop/external/us/en/documents/intel-whitepaper-using-iommu-for-dma-protection-in-uefi-820238.pdf |archive-date=2021-12-09 |access-date=16 November 2022 |publisher=Intel Corporation}}</ref>
*फिजिकल अनक्लोनेबल फंक्शंस (PUFs) को डिजिटल फ़िंगरप्रिंट या हार्डवेयर के लिए एक अद्वितीय पहचानकर्ता के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जो उपयोगकर्ताओं को उनके सिस्टम में जा रहे हार्डवेयर सप्लाई चेन को सुरक्षित करने की क्षमता प्रदान करता है।<ref>{{Cite journal |last1=Babaei |first1=Armin |last2=Schiele |first2=Gregor |last3=Zohner |first3=Michael |date=2022-07-26 |title=Reconfigurable Security Architecture (RESA) Based on PUF for FPGA-Based IoT Devices |journal=Sensors |language=en |volume=22 |issue=15 |pages=5577 |bibcode=2022Senso..22.5577B |doi=10.3390/s22155577 |issn=1424-8220 |pmc=9331300 |pmid=35898079 |doi-access=free}}</ref><ref>{{Cite journal |last1=Hassija |first1=Vikas |last2=Chamola |first2=Vinay |last3=Gupta |first3=Vatsal |last4=Jain |first4=Sarthak |last5=Guizani |first5=Nadra |date=2021-04-15 |title=A Survey on Supply Chain Security: Application Areas, Security Threats, and Solution Architectures |url=https://ieeexplore.ieee.org/document/9203862 |journal=IEEE Internet of Things Journal |volume=8 |issue=8 |pages=6222–6246 |doi=10.1109/JIOT.2020.3025775 |issn=2327-4662 |s2cid=226767829}}</ref>
===सुरक्षित ऑपरेटिंग सिस्टम===
{{Main article|सुरक्षा-मूल्यांकित ऑपरेटिंग सिस्टम}}
कंप्यूटर सुरक्षा शब्द का एक उपयोग उस तकनीक को संदर्भित करता है जिसका उपयोग सुरक्षित ऑपरेटिंग सिस्टम को लागू करने के लिए किया जाता है। सुरक्षित ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग करना कंप्यूटर सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक अच्छा तरीका है। ये ऐसे सिस्टम होते हैं जिन्होंने बाहरी सुरक्षा-ऑडिटिंग संगठन से प्रमाणन प्राप्त किया होता है, और सबसे लोकप्रिय मूल्यांकन कॉमन क्राइटेरिया (CC) होते हैं।<ref>{{Cite web |title=The Most Secure OS: What is the Safest OS Available? |url=https://tech.co/antivirus-software/what-is-the-most-secure-os |access-date=2023-12-19 |website=Tech.co |language=en-US}}</ref>
===सुरक्षित कोडिंग===
{{Main|सुरक्षित कोडिंग}}
सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में, सुरक्षित कोडिंग का उद्देश्य सुरक्षा कमजोरियों के आकस्मिक रूप से प्रवेश को रोकना होता है। इसके अलावा, ऐसी सॉफ़्टवेयर प्रणाली भी बनाई जा सकती है जो प्रारंभ से ही सुरक्षित हो। ऐसी प्रणालियों को सुरक्षित बाय डिज़ाइन कहा जाता है। इसके अलावा, औपचारिक सत्यापन (formal verification) का उद्देश्य प्रणाली के तहत एल्गोरिदम की शुद्धता को सिद्ध करना होता है,<ref>{{cite journal |last=Sanghavi |first=Alok |date=21 May 2010 |title=What is formal verification? |journal=EE Times_Asia}}</ref> जो क्रिप्टोग्राफ़िक प्रोटोकॉल के लिए महत्वपूर्ण है।
===क्षमताएं और पहुंच नियंत्रण सूचियां===
{{Main|कंट्रोल सूची को खोलो|भूमिका-आधारित पहुँच नियंत्रण|क्षमता-आधारित सुरक्षा}}
कंप्यूटर सिस्टम के भीतर, विशेषाधिकार पृथक्करण (privilege separation) को लागू करने वाले दो मुख्य सुरक्षा मॉडल एक्सेस कंट्रोल लिस्ट (ACL) और रोल-आधारित एक्सेस कंट्रोल (RBAC) हैं।
एक्सेस कंट्रोल लिस्ट (ACL), कंप्यूटर फ़ाइल सिस्टम के संदर्भ में, किसी ऑब्जेक्ट से जुड़े अनुमतियों की सूची होती है। ACL यह निर्दिष्ट करता है कि किन उपयोगकर्ताओं या सिस्टम प्रक्रियाओं को ऑब्जेक्ट्स तक पहुंच प्रदान की गई है, साथ ही किन ऑब्जेक्ट्स पर कौन से कार्य किए जा सकते हैं।
रोल-आधारित एक्सेस कंट्रोल (RBAC) एक ऐसा तरीका है जो सिस्टम की पहुंच को अधिकृत उपयोगकर्ताओं तक सीमित करता है,<ref>{{cite journal |author1=Ferraiolo, D.F. |author2=Kuhn, D.R. |name-list-style=amp |date=October 1992 |title=Role-Based Access Control |url=http://csrc.nist.gov/groups/SNS/rbac/documents/ferraiolo-kuhn-92.pdf |journal=15th National Computer Security Conference |pages=554–563 |access-date=16 सितंबर 2024 |archive-date=5 जून 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110605102255/http://csrc.nist.gov/groups/SNS/rbac/documents/ferraiolo-kuhn-92.pdf |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite journal |last1=Sandhu |first1=R |last2=Coyne |first2=EJ |last3=Feinstein |first3=HL |last4=Youman |first4=CE |date=August 1996 |title=Role-Based Access Control Models |url=http://csrc.nist.gov/rbac/sandhu96.pdf |journal=IEEE Computer |volume=29 |issue=2 |pages=38–47 |citeseerx=10.1.1.50.7649 |doi=10.1109/2.485845 |s2cid=1958270 |access-date=16 सितंबर 2024 |archive-date=5 जून 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110605095531/http://csrc.nist.gov/rbac/sandhu96.pdf |url-status=dead }}</ref><ref>{{Cite conference |author1=Abreu, Vilmar |author2=Santin, Altair O. |author3=Viegas, Eduardo K. |author4=Stihler, Maicon |date=2017 |title=A multi-domain role activation model |url=https://secplab.ppgia.pucpr.br/files/papers/2017-1.pdf |conference=2017 IEEE International Conference on Communications (ICC) |publisher=IEEE Press |pages=1–6 |doi=10.1109/ICC.2017.7997247 |isbn=978-1467389990 |s2cid=6185138}}</ref> जिसका उपयोग 500 से अधिक कर्मचारियों वाले अधिकांश उद्यमों द्वारा किया जाता है।<ref name="autogenerated2002">{{cite book |author1=A.C. O'Connor |url=http://csrc.nist.gov/groups/SNS/rbac/documents/20101219_RBAC2_Final_Report.pdf |title=Economic Analysis of Role-Based Access Control |author2=R.J. Loomis |date=2002 |publisher=Research Triangle Institute |pages=145 |name-list-style=amp |access-date=16 सितंबर 2024 |archive-date=21 जुलाई 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110721060434/http://csrc.nist.gov/groups/SNS/rbac/documents/20101219_RBAC2_Final_Report.pdf |url-status=dead }}</ref> यह अनिवार्य एक्सेस कंट्रोल (MAC) या स्वैच्छिक एक्सेस कंट्रोल (DAC) को भी लागू कर सकता है।
एक और दृष्टिकोण, क्षमता-आधारित सुरक्षा (capability-based security), ज्यादातर शोध ऑपरेटिंग सिस्टम तक ही सीमित रही है। हालाँकि, क्षमताओं को भाषा स्तर पर भी लागू किया जा सकता है, जिससे प्रोग्रामिंग की एक ऐसी शैली सामने आती है जो अनिवार्य रूप से मानक ऑब्जेक्ट-ओरिएंटेड डिज़ाइन का परिष्करण है। इस क्षेत्र में एक ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट "E भाषा" है।
===उपयोगकर्ता सुरक्षा प्रशिक्षण===
अंतिम उपयोगकर्ता (end-user) को सुरक्षा श्रृंखला की सबसे कमजोर कड़ी के रूप में व्यापक रूप से पहचाना जाता है,<ref>{{cite web |date=22 January 2014 |title=Studies prove once again that users are the weakest link in the security chain |url=https://www.csoonline.com/article/2137210/security-awareness/studies-prove-once-again-that-users-are-the-weakest-link-in-the-security-chain.html |access-date=8 October 2018 |website=CSO Online}}</ref> और यह अनुमान लगाया जाता है कि 90% से अधिक सुरक्षा घटनाओं और उल्लंघनों में किसी न किसी प्रकार की मानव त्रुटि शामिल होती है।<ref>{{cite web |date=2 September 2014 |title=The Role of Human Error in Successful Security Attacks |url=https://securityintelligence.com/the-role-of-human-error-in-successful-security-attacks/ |access-date=8 October 2018 |website=IBM Security Intelligence}}</ref><ref>{{cite web |date=15 April 2015 |title=90% of security incidents trace back to PEBKAC and ID10T errors |url=https://www.computerworld.com/article/2910316/90-of-security-incidents-trace-back-to-pebkac-and-id10t-errors.html |access-date=8 October 2018 |website=Computerworld}}</ref> आमतौर पर दर्ज की गई त्रुटियों और गलत निर्णयों में कमजोर पासवर्ड प्रबंधन, संवेदनशील डेटा और अटैचमेंट वाले ईमेल गलत प्राप्तकर्ता को भेजना, भ्रामक URL को पहचानने में असमर्थता, नकली वेबसाइटों और खतरनाक ईमेल अटैचमेंट की पहचान न कर पाना शामिल हैं। उपयोगकर्ताओं द्वारा की जाने वाली एक सामान्य गलती यह है कि वे बैंकिंग साइटों में लॉगिन को आसान बनाने के लिए अपने ब्राउज़र में यूज़र आईडी/पासवर्ड सहेज लेते हैं। यह उन हमलावरों के लिए एक उपहार साबित होता है, जो किसी तरह से किसी मशीन तक पहुंच हासिल कर चुके होते हैं। इस जोखिम को दो-कारक प्रमाणीकरण (two-factor authentication) के उपयोग से कम किया जा सकता है।<ref>{{cite web |date=7 October 2018 |title=Protect your online banking with 2FA |url=https://www.nzba.org.nz/2018/10/08/protect-your-online-banking-with-2fa/ |access-date=7 September 2019 |website=NZ Bankers Association |archive-date=21 जनवरी 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200121073825/https://www.nzba.org.nz/2018/10/08/protect-your-online-banking-with-2fa/ |url-status=dead }}</ref>
चूंकि साइबर जोखिम में मानव तत्व विशेष रूप से यह निर्धारित करने में प्रासंगिक है कि किसी संगठन को किस प्रकार के वैश्विक साइबर जोखिम का सामना करना पड़ रहा है,<ref>{{cite web |year=2014 |title=IBM Security Services 2014 Cyber Security Intelligence Index |url=https://pcsite.co.uk/computer-security/IBM_Security_Services_2014_Cyber_Security_Intelligence_Index.pdf |access-date=9 October 2020 |website=PcSite }}{{Dead link|date=मई 2025 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> इसलिए सभी स्तरों पर सुरक्षा जागरूकता प्रशिक्षण न केवल नियामक और उद्योग जनादेशों के साथ औपचारिक अनुपालन प्रदान करता है,<ref>{{cite news |last1=Caldwell |first1=Tracey |date=12 February 2013 |title=Risky business: why security awareness is crucial for employees |newspaper=The Guardian |url=https://www.theguardian.com/media-network/media-network-blog/2013/feb/12/business-cyber-security-risks-employees |access-date=8 October 2018}}</ref> बल्कि साइबर जोखिम को कम करने और व्यक्तियों और कंपनियों को अधिकांश साइबर खतरों से बचाने में भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
अंतिम उपयोगकर्ता पर ध्यान केंद्रित करना कई सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए एक गहन सांस्कृतिक परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है, जिन्होंने परंपरागत रूप से साइबर सुरक्षा को केवल एक तकनीकी दृष्टिकोण से देखा है। यह प्रमुख सुरक्षा केंद्रों द्वारा सुझाई गई<ref>{{cite web |title=Developing a Security Culture |url=https://www.cpni.gov.uk/developing-security-culture |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20181009013120/https://www.cpni.gov.uk/developing-security-culture |archive-date=9 October 2018 |access-date=8 October 2018 |website=CPNI – Centre for the Protection of National Infrastructure}}</ref> पंक्तियों के साथ आगे बढ़ता है, ताकि संगठन के भीतर साइबर जागरूकता की संस्कृति को विकसित किया जा सके, इस बात को मान्यता देते हुए कि सुरक्षा-जागरूक उपयोगकर्ता साइबर हमलों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सुरक्षा पंक्ति प्रदान करता है।
===डिजिटल स्वच्छता===
एंड-यूज़र प्रशिक्षण से संबंधित, डिजिटल हाइजीन या साइबर हाइजीन सूचना सुरक्षा से जुड़ा एक बुनियादी सिद्धांत है, और जैसा कि व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ इसकी तुलना की जाती है, यह साइबर खतरों से जोखिम को कम करने के लिए सरल नियमित उपायों को स्थापित करने के बराबर है। यह मान्यता है कि अच्छी साइबर हाइजीन प्रथाएं नेटवर्क से जुड़े उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान कर सकती हैं, जिससे एक कमजोर नोड का उपयोग हमले करने या किसी अन्य नोड या नेटवर्क को समझौता करने के जोखिम को कम किया जा सकता है, विशेष रूप से सामान्य साइबर हमलों से।<ref name="Cyber Hygiene">{{cite web |title=Cyber Hygiene – ENISA |url=https://www.enisa.europa.eu/publications/cyber-hygiene |access-date=27 September 2018 |language=en-gb}}</ref> साइबर हाइजीन को सैन्य शब्दावली में इस्तेमाल होने वाले सक्रिय साइबर रक्षा के साथ भ्रमित नहीं करना चाहिए।<ref name="Kaljulaid-2017">{{cite web |last=Kaljulaid |first=Kersti |date=16 October 2017 |title=President of the Republic at the Aftenposten's Technology Conference |url=https://president.ee/en/official-duties/speeches/13671-president-of-the-republic-at-the-aftenpostens-technology-conference/index.html |access-date=27 September 2018}}</ref>
डिजिटल हाइजीन के सबसे सामान्य कार्यों में मैलवेयर सुरक्षा को अपडेट करना, क्लाउड बैकअप, पासवर्ड, और सीमित एडमिन अधिकारों और नेटवर्क फायरवॉल को सुनिश्चित करना शामिल हो सकता है।<ref>{{Cite web |title=Cyber security breaches survey 2023 |url=https://www.gov.uk/government/statistics/cyber-security-breaches-survey-2023/cyber-security-breaches-survey-2023 |access-date=2023-12-27 |website=GOV.UK |language=en}}</ref> साइबर हाइजीन मुख्य रूप से सरल तकनीकी उपायों पर आधारित होता है, जिन्हें लागू करना तकनीकी रूप से आसान होता है और यह अनुशासन<ref>{{Cite news |last=Kuchler |first=Hannah |date=27 April 2015 |title=Security execs call on companies to improve 'cyber hygiene' |work=Financial Times |url=https://www.ft.com/content/8468cfda-e9e3-11e4-a687-00144feab7de |url-access=subscription |access-date=27 September 2018 |archive-url=https://ghostarchive.org/archive/20221210/https://www.ft.com/content/8468cfda-e9e3-11e4-a687-00144feab7de |archive-date=10 December 2022}}</ref> या शिक्षा पर निर्भर होता है।<ref>{{Cite news |title=From AI to Russia, Here's How Estonia's President Is Planning for the Future |language=en-US |magazine=Wired |url=https://www.wired.com/story/from-ai-to-russia-heres-how-estonias-president-is-planning-for-the-future/ |access-date=28 September 2018}}</ref> इसे एक अमूर्त सूची के रूप में देखा जा सकता है, जिसमें उन उपायों का उल्लेख होता है जो व्यक्तिगत या सामूहिक डिजिटल सुरक्षा पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इन उपायों को सामान्य लोग भी कर सकते हैं, न कि केवल सुरक्षा विशेषज्ञ।
साइबर हाइजीन का संबंध व्यक्तिगत स्वच्छता से उसी तरह है जैसे कंप्यूटर वायरस का संबंध जैविक वायरस (या रोगाणु) से है। हालाँकि, कंप्यूटर वायरस शब्द का प्रयोग कंप्यूटर वायरस की पहली कार्यशील स्थिति के साथ लगभग एक साथ शुरू हुआ था,<ref>{{Cite news |date=1 November 2017 |title=Professor Len Adleman explains how he coined the term "computer virus" |language=en-US |work=WeLiveSecurity |url=https://www.welivesecurity.com/2017/11/01/professor-len-adleman-explains-computer-virus-term/ |access-date=28 September 2018}}</ref> साइबर हाइजीन शब्द बाद में आया, शायद 2000 में<ref>{{cite web |title=Statement of Dr. Vinton G. Cerf |url=https://www.jec.senate.gov/archive/Documents/Hearings/cerf22300.htm |access-date=28 September 2018 |website=www.jec.senate.gov}}</ref> इंटरनेट अग्रणी विंट सर्फ द्वारा। तब से इसे संयुक्त राज्य अमेरिका की कांग्रेस और सीनेट,<ref>{{USBill|115|HR|3010|pipe=Promoting Good Cyber Hygiene Act of 2017|site=yes}}</ref><ref>{{cite news |title=Analysis {{!}} The Cybersecurity 202: Agencies struggling with basic cybersecurity despite Trump's pledge to prioritize it |language=en |newspaper=The Washington Post |url=https://www.washingtonpost.com/news/powerpost/paloma/the-cybersecurity-202/2018/07/26/the-cybersecurity-202-agencies-struggling-with-basic-cybersecurity-despite-trump-s-pledge-to-prioritize-it/5b58a84e1b326b1e64695548/ |access-date=28 September 2018}}</ref> एफबीआई,<ref>{{cite web |title=Protected Voices |url=https://www.fbi.gov/investigate/counterintelligence/foreign-influence/protected-voices |access-date=28 September 2018 |website=Federal Bureau of Investigation |language=en-us}}</ref> [[यूरोपीय संघ]] के संस्थानों<ref name="Cyber Hygiene"/> और राज्य प्रमुखों द्वारा अपनाया गया है।<ref name="Kaljulaid-2017"/>
===उल्लंघनों पर प्रतिक्रिया देने में कठिनाई===
सुरक्षा उल्लंघनों का जवाब देना कई कारणों से बहुत मुश्किल होता है, जिनमें शामिल हैं:
* हमलावरों की पहचान करना कठिन होता है क्योंकि वे प्रॉक्सी, अस्थायी गुमनाम डायल-अप खाते, वायरलेस कनेक्शन और अन्य गुमनाम प्रक्रियाओं का उपयोग करते हैं, जिससे उनका पता लगाना मुश्किल हो जाता है, और अक्सर वे दूसरे अधिकार क्षेत्र में होते हैं। यदि वे सुरक्षा को सफलतापूर्वक भेदते हैं, तो वे अक्सर पर्याप्त प्रशासनिक पहुंच प्राप्त कर लेते हैं, जिससे वे अपने निशान मिटाने के लिए लॉग्स को हटा सकते हैं।
* स्वचालित वल्नरेबिलिटी स्कैनर और कंप्यूटर वर्म्स द्वारा किए गए हमलों की संख्या इतनी अधिक होती है कि संगठन हर एक का पीछा नहीं कर सकते।
* कानून प्रवर्तन अधिकारियों के पास अक्सर हमलावरों को पकड़ने के लिए आवश्यक कौशल, रुचि या बजट नहीं होता है। इसके अलावा, नेटवर्क पर हमलावरों की पहचान करने के लिए नेटवर्क के कई स्थानों और विभिन्न देशों से लॉग एकत्र करना आवश्यक हो सकता है, जो जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया हो सकती है।
* जहाँ हमले सफल होते हैं और उल्लंघन होता है, वहाँ कई क्षेत्रों में अब अनिवार्य सुरक्षा उल्लंघन अधिसूचना कानून लागू हो चुके हैं।
===सुरक्षा और गोपनीयता के प्रकार===
* एक्सेस कंट्रोल
* एंटी-कीलॉगर
* एंटी-मैलवेयर
* एंटी-स्पायवेयर
* एंटी-सबवर्जन सॉफ़्टवेयर
* एंटी-टैम्पर सॉफ़्टवेयर
* एंटी-थेफ्ट
* [[एंटीवायरस सॉफ्टवेयर]]
* क्रिप्टोग्राफिक सॉफ़्टवेयर
* कंप्यूटर-एडेड डिस्पैच (CAD)
* डेटा लॉस प्रिवेंशन सॉफ़्टवेयर
* [[फ़ायरवॉल (नेटवर्किंग)|फ़ायरवॉल]]
* इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम (IDS)
* इंट्रूज़न प्रिवेंशन सिस्टम (IPS)
* लॉग मैनेजमेंट सॉफ़्टवेयर
* पेरेंटल कंट्रोल
* रिकॉर्ड्स मैनेजमेंट
* [[सैंडबॉक्स]]
* सिक्योरिटी इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट
* सिक्योरिटी इन्फॉर्मेशन और इवेंट मैनेजमेंट (SIEM)
* सॉफ़्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम अपडेटिंग
* वल्नरेबिलिटी मैनेजमेंट
==जोखिम में प्रणालियाँ==
कंप्यूटर प्रणालियों की संख्या में वृद्धि और व्यक्तियों, व्यवसायों, उद्योगों, और सरकारों द्वारा उन पर बढ़ती निर्भरता का मतलब है कि जोखिम में आने वाली प्रणालियों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है।
===वित्तीय प्रणालियाँ===
वित्तीय नियामकों और संस्थानों जैसे अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (एसईसी), स्विफ्ट, निवेश बैंक, और वाणिज्यिक बैंकों के कंप्यूटर सिस्टम साइबर अपराधियों के प्रमुख हैकिंग लक्ष्यों में शामिल हैं, जो बाजारों में हेरफेर करने और अवैध लाभ प्राप्त करने में रुचि रखते हैं।<ref>{{Cite journal|title=The New Market Manipulation|first=Tom C. W.|last=Lin|date=3 July 2017|ssrn=2996896|journal= Emory Law Journal |volume=66|page=1253 }}</ref> जिन वेबसाइटों और ऐप्स में क्रेडिट कार्ड नंबर, ब्रोकरेज खाते, और बैंक खाते की जानकारी संग्रहीत होती है, वे भी प्रमुख लक्ष्य हैं, क्योंकि वहां से धन हस्तांतरण, खरीदारी, या जानकारी को काले बाजार में बेचकर त्वरित वित्तीय लाभ प्राप्त किया जा सकता है।<ref>{{cite journal|title=Financial Weapons of War |journal=Minnesota Law Review|year= 2016|ssrn=2765010|last1=Lin|first1=Tom C. W.}}</ref> इन-स्टोर भुगतान प्रणालियों और एटीएम मशीनों में भी ग्राहकों की खाता जानकारी और पिन प्राप्त करने के लिए छेड़छाड़ की गई है।
यूसीएलए इंटरनेट रिपोर्ट: डिजिटल भविष्य का सर्वेक्षण (2000) के अनुसार, व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता ऑनलाइन बिक्री के लिए बाधा उत्पन्न करती है, और 10 में से 9 से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता क्रेडिट कार्ड सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।<ref>{{cite report|last1=Cole|first1=Jeffrey I.|first2=Michael|last2=Suman|first3=Phoebe|last3=Schramm|first4=Daniel|last4=van Bel|first5=B.|last5=Lunn|first6=Phyllisane|last6=Maguire|first7=Koran|last7=Hanson|first8=Rajesh|last8=Singh|first9=Jedrix-Sean|last9=Aquino|first10=Harlan|last10=Lebo|title=The UCLA Internet report: Surveying the digital future|website=ccp.ucla.edu|year=2000|url=http://ccp.ucla.edu/UCLA-Internet-Report-2000.pdf|archive-url=https://web.archive.org/web/20030423221926/http://ccp.ucla.edu/UCLA-Internet-Report-2000.pdf|archive-date=23 April 2003|url-status=dead|access-date=15 September 2023}} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20030423221926/http://ccp.ucla.edu/UCLA-Internet-Report-2000.pdf |date=23 अप्रैल 2003 }}</ref>
वेब ब्राउज़रों और वेबसाइटों के बीच सुरक्षा सुधारने के लिए सबसे आम तकनीकें एसएसएल (Secure Sockets Layer) और इसके उत्तराधिकारी टीएलएस (Transport Layer Security) हैं। इन प्रोटोकॉल के साथ पहचान प्रबंधन और प्रमाणीकरण सेवाएँ, और डोमेन नाम सेवाएँ कंपनियों और उपभोक्ताओं को सुरक्षित संचार और व्यापार में सक्षम बनाती हैं। एसएसएल और टीएलएस के कई संस्करण आज वेब ब्राउज़िंग, [[ईमेल|ई-मेल]], इंटरनेट फैक्सिंग, इंस्टेंट मैसेजिंग और VoIP (Voice-over-IP) जैसे अनुप्रयोगों में उपयोग किए जाते हैं। इन तकनीकों के विभिन्न इंटरऑपरेबल कार्यान्वयन मौजूद हैं, जिनमें से कम से कम एक ओपन-सोर्स है, जो किसी को भी ऐप्लिकेशन का सोर्स कोड देखने और कमजोरियों की रिपोर्ट करने की अनुमति देता है।
क्रेडिट कार्ड कंपनियाँ, वीज़ा और मास्टरकार्ड, ने सुरक्षित ईएमवी चिप विकसित की है, जो क्रेडिट कार्ड में एम्बेडेड होती है। इस क्षेत्र में अन्य विकासों में चिप प्रमाणीकरण कार्यक्रम (Chip Authentication Program) शामिल है, जिसमें बैंक ग्राहकों को ऑनलाइन सुरक्षित लेनदेन करने के लिए हैंड-हेल्ड कार्ड रीडर प्रदान करते हैं। अन्य प्रगति में तत्काल जारीकरण जैसी तकनीक का विकास शामिल है, जिसने शॉपिंग मॉल कियोस्क को बैंकों की ओर से ऑन-द-स्पॉट क्रेडिट कार्ड जारी करने में सक्षम बनाया है।
===उपयोगिताएँ और औद्योगिक उपकरण===
कंप्यूटर कई उपयोगिताओं में महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करते हैं, जिनमें दूरसंचार का समन्वय, पावर ग्रिड, परमाणु ऊर्जा संयंत्र, और जल और गैस नेटवर्क में वाल्व खोलना और बंद करना शामिल हैं। यदि ये मशीनें इंटरनेट से जुड़ी होती हैं, तो इंटरनेट एक संभावित हमले का मार्ग बन सकता है। लेकिन स्टक्सनेट वर्म ने यह दिखाया कि इंटरनेट से न जुड़े कंप्यूटरों द्वारा नियंत्रित उपकरण भी असुरक्षित हो सकते हैं। 2014 में, कंप्यूटर इमरजेंसी रेडीनेस टीम (Computer Emergency Readiness Team), जो कि होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की एक शाखा है, ने ऊर्जा कंपनियों में 79 हैकिंग घटनाओं की जांच की।<ref>{{cite web |last1=Pagliery |first1=Jose |title=Hackers attacked the U.S. energy grid 79 times this year |url=https://money.cnn.com/2014/11/18/technology/security/energy-grid-hack/ |website=CNN Money |publisher=Cable News Network |access-date=16 April 2015 |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20150218070238/https://money.cnn.com/2014/11/18/technology/security/energy-grid-hack |archive-date=18 February 2015 |date=18 November 2014 }}</ref>
===विमानन===
विमानन उद्योग अत्यधिक जटिल प्रणालियों पर निर्भर करता है, जिन पर हमले किए जा सकते हैं।<ref>{{cite conference |first=P. G. |last=Neumann |title=Computer Security in Aviation: Vulnerabilities, Threats, and Risks |conference=International Conference on Aviation Safety and Security in the 21st Century, White House Commission on Safety and Security |year=1997 |url=https://www.csl.sri.com/~neumann/air.html}}</ref> एक साधारण बिजली आउटेज भी एक हवाई अड्डे पर वैश्विक स्तर पर परिणाम उत्पन्न कर सकता है।<ref>{{cite report | last=Dillingham | first=Gerald L. | title=Aviation security : terrorist acts demonstrate urgent need to improve security at the nation's airports | publisher=United States. General Accounting Office | date=20 September 2001 | url=https://rosap.ntl.bts.gov/view/dot/33937}}</ref> इन प्रणालियों का अधिकांश हिस्सा रेडियो प्रसारण पर निर्भर करता है, जिसे बाधित किया जा सकता है।<ref>{{cite web|url=http://www.securityweek.com/air-traffic-control-systems-vulnerabilities-could-make-unfriendly-skies-black-hat|title=Air Traffic Control Systems Vulnerabilities Could Make for Unfriendly Skies [Black Hat] – SecurityWeek.Com|date=27 July 2012 |url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20150208070914/http://www.securityweek.com/air-traffic-control-systems-vulnerabilities-could-make-unfriendly-skies-black-hat|archive-date=8 February 2015}}</ref> महासागरों के ऊपर विमान नियंत्रण विशेष रूप से खतरनाक है क्योंकि रडार कवरेज समुद्र से 175 से 225 मील तक ही सीमित है।<ref>{{cite web |date=4 August 2014 |title=Hacker Says He Can Break into Airplane Systems Using In-Flight Wi-Fi |url=https://www.npr.org/blogs/alltechconsidered/2014/08/04/337794061/hacker-says-he-can-break-into-airplane-systems-using-in-flight-wi-fi |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20150208072554/http://www.npr.org/blogs/alltechconsidered/2014/08/04/337794061/hacker-says-he-can-break-into-airplane-systems-using-in-flight-wi-fi |archive-date=8 February 2015 |access-date=2020-03-19 |work=NPR}}</ref> एक विमान के भीतर से भी हमले की संभावना हो सकती है।<ref>{{cite news |author=Jim Finkle |date=4 August 2014 |title=Hacker says to show passenger jets at risk of cyber attack |newspaper=Reuters |url=https://www.reuters.com/article/us-cybersecurity-hackers-airplanes-idUSKBN0G40WQ20140804 |url-status=live |access-date=2021-11-21 |archive-url=https://web.archive.org/web/20151013061705/http://www.reuters.com/article/2014/08/04/us-cybersecurity-hackers-airplanes-idUSKBN0G40WQ20140804 |archive-date=13 October 2015}}</ref>
विमानन प्रणालियों में सुरक्षा सुधार लाना एक अनूठी चुनौती प्रस्तुत करता है, क्योंकि कुशल हवाई परिवहन पर वजन और आकार का गहरा प्रभाव पड़ता है। विमानों में भौतिक सुरक्षा उपकरण जोड़ने से उनके बिना लोड किए वजन में वृद्धि हो सकती है, जिससे माल या यात्री क्षमता में कमी आ सकती है।<ref>{{cite magazine | last = Cesar | first = Alan | title = Online course bolsters cybersecurity in aviation | magazine = Aerogram | date = 15 Dec 2023 | url = https://engineering.purdue.edu/AAE/Aerogram/2023-2024/articles/41-cyber-course | publisher=Purdue University School of Aeronautics and Astronautics| access-date =2024-01-09 }}</ref>
यूरोप में (पैन-यूरोपीय नेटवर्क सेवा)<ref>{{cite web|url=https://www.eurocontrol.int/articles/pan-european-network-services-pens|title=Pan-European Network Services (PENS) – Eurocontrol.int|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20161212175606/https://www.eurocontrol.int/articles/pan-european-network-services-pens|archive-date=12 December 2016}}</ref> और न्यूपेन्स,<ref>{{cite web|url=https://www.eurocontrol.int/news/centralised-services-newpens-moves-forward|title=Centralised Services: NewPENS moves forward – Eurocontrol.int|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20170319025329/https://www.eurocontrol.int/news/centralised-services-newpens-moves-forward|archive-date=19 March 2017|date=17 January 2016}}</ref> और अमेरिका में अगली पीढ़ी (NextGen) कार्यक्रम के साथ,<ref>{{cite web|url=https://www.faa.gov/nextgen/update/progress_and_plans/data_comm/|title=NextGen Data Communication|publisher=FAA|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20150313110025/http://www.faa.gov/nextgen/update/progress_and_plans/data_comm/|archive-date=13 March 2015|access-date=15 June 2017}}</ref> एयर नेविगेशन सेवा प्रदाता अपनी समर्पित नेटवर्क बनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं।
कई आधुनिक पासपोर्ट अब बायोमेट्रिक पासपोर्ट हैं, जिनमें एक एम्बेडेड माइक्रोचिप होती है जो एक डिजिटाइज़्ड फ़ोटोग्राफ़ और व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम, लिंग और जन्मतिथि संग्रहीत करती है। इसके अलावा, अधिक देशों में{{कौन|date=December 2012}} पहचान से संबंधित धोखाधड़ी को कम करने के लिए चेहरे की पहचान तकनीक को लागू किया जा रहा है। ई-पासपोर्ट की शुरुआत ने पासपोर्ट धारक की पहचान की पुष्टि करने में सीमा अधिकारियों की मदद की है, जिससे यात्री प्रक्रिया तेजी से हो रही है।<ref>{{Cite web |title=e-Passports {{!}} Homeland Security |url=https://www.dhs.gov/e-passports |access-date=2023-02-03 |website=www.dhs.gov}}</ref> [[अमेरिका]], [[यूके]], और [[ऑस्ट्रेलिया]] में [[रेटिना]] और फिंगरप्रिंट पहचान तकनीक के साथ स्मार्टगेट कियोस्क पेश करने की योजनाएं चल रही हैं।<ref>{{Cite web|url=http://www.dfat.gov.au/dept/passports/|title=The Australian ePassport. Australian Government Department of Foreign Affairs and Trade website|access-date=1 May 2023|archive-date=9 January 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150109033115/http://www.dfat.gov.au/dept/passports/|url-status=dead}}</ref> एयरलाइन उद्योग पारंपरिक कागजी टिकटों की बजाय इलेक्ट्रॉनिक टिकटों (e-tickets) की ओर बढ़ रहा है। यह ऑनलाइन क्रेडिट कार्ड लेन-देन में प्रगति के कारण संभव हुआ है, जो एयरलाइनों के साथ साझेदारी में किया जा रहा है। लंबी दूरी की बस कंपनियां{{कौन|date=December 2012}} भी आज ई-टिकट लेन-देन की ओर बढ़ रही हैं।
एक सफल हमले के परिणाम गोपनीयता की हानि से लेकर प्रणाली अखंडता की हानि, हवाई यातायात नियंत्रण आउटेज, विमान की हानि, और यहां तक कि जान की हानि तक हो सकते हैं।
===उपभोक्ता उपकरण===
डेस्कटॉप कंप्यूटर और लैपटॉप आमतौर पर पासवर्ड या वित्तीय खाता जानकारी जुटाने या किसी अन्य लक्ष्य पर हमला करने के लिए बॉटनेट बनाने के लिए निशाना बनाए जाते हैं। [[स्मार्टफोन]], [[टैबलेट कंप्यूटर]], स्मार्ट घड़ियां, और अन्य [[मोबाइल फ़ोन|मोबाइल डिवाइस]] जैसे कि गतिविधि ट्रैकर्स के रूप में उपयोग होने वाले उपकरणों में [[कैमरा|कैमरे]], [[माइक्रोफोन]], GPS रिसीवर, कंपास और एक्सेलेरोमीटर जैसे सेंसर होते हैं जिन्हें हैक किया जा सकता है और यह व्यक्तिगत जानकारी, जिसमें संवेदनशील स्वास्थ्य जानकारी भी शामिल है, एकत्र कर सकते हैं। इनमें से किसी भी डिवाइस पर [[वाई-फ़ाई]], [[ब्लूटूथ]] और सेल फोन नेटवर्क हमले के लिए उपयोग किए जा सकते हैं, और सेंसर एक सफल ब्रीच के बाद दूरस्थ रूप से सक्रिय किए जा सकते हैं।<ref name="nestwatch">{{cite web|url=https://www.npr.org/blogs/alltechconsidered/2014/08/06/338334508/is-your-watch-or-thermostat-a-spy-cyber-security-firms-are-on-it|title=Is Your Watch Or Thermostat A Spy? Cybersecurity Firms Are On It|date=6 August 2014|work=NPR|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20150211064650/http://www.npr.org/blogs/alltechconsidered/2014/08/06/338334508/is-your-watch-or-thermostat-a-spy-cyber-security-firms-are-on-it|archive-date=11 February 2015}}</ref>
घर के स्वचालन उपकरणों की बढ़ती संख्या, जैसे कि नेस्ट थर्मोस्टेट, भी संभावित लक्ष्यों में शामिल हैं।<ref name="nestwatch"/>
"सुरक्षा केवल ताले और चाबियों से नहीं आती, बल्कि जागरूकता और विवेक से आती है।"
===स्वास्थ्य देखभाल===
आज कई स्वास्थ्य सेवा प्रदाता और स्वास्थ्य बीमा कंपनियां इंटरनेट का उपयोग करके बेहतर उत्पाद और सेवाएं प्रदान करती हैं, जैसे टेली-हेल्थ का उपयोग करके बेहतर गुणवत्ता और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की संभावना, या फिटनेस ट्रैकर्स का उपयोग करके बीमा प्रीमियम कम करना।
स्वास्थ्य सेवा कंपनी ह्यूमाना, वेबएमडी, ओरेकल कॉर्पोरेशन, ईडीएस और माइक्रोसॉफ्ट के साथ साझेदारी करती है, जिससे उसके सदस्य अपने स्वास्थ्य सेवा रिकॉर्ड तक पहुंच सकते हैं, साथ ही स्वास्थ्य सेवा योजनाओं का अवलोकन प्राप्त कर सकते हैं।<ref>{{cite web|url=http://www.prnewswire.com/cgi-bin/stories.pl?ACCT=104&STORY=/www/story/11-15-2000/0001367189&EDATE=|title=Humana Web Site Named Best Interactive Site by eHealthcare Strategy & Trends; re LOUISVILLE, Ky., Nov. 15 PRNewswire |date=15 November 2000|publisher=|access-date=|author=Humana Inc.|work=prnewswire.com}}</ref> रोगियों के रिकॉर्ड तेजी से सुरक्षित इन-हाउस नेटवर्क पर रखे जा रहे हैं, जिससे अतिरिक्त भंडारण स्थान की आवश्यकता कम हो रही है।<ref>{{Cite journal |last1=Kruse |first1=CB |last2=Smith |first2=B |last3=Vanderlinden |first3=H |last4=Nealand |first4=A |date=July 21, 2017 |title=Security Techniques for the Electronic Health Records |journal=Journal of Medical Systems |volume=41 |issue=8 |page=127 |doi=10.1007/s10916-017-0778-4 |pmc=5522514 |pmid=28733949}}</ref>
===बड़े निगम===
बड़ी कंपनियां सामान्यतः हमलों के निशाने पर होती हैं। कई मामलों में हमलों का उद्देश्य [[पहचान की चोरी]] के माध्यम से वित्तीय लाभ प्राप्त करना होता है और इसमें डेटा उल्लंघनों का समावेश होता है। उदाहरणों में होम डिपो,<ref>{{cite news |author=Melvin Backman |date=18 September 2014 |title=Home Depot: 56 million cards exposed in breach |publisher=[[CNNMoney]] |url=https://money.cnn.com/2014/09/18/technology/security/home-depot-hack/ |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20141218221105/https://money.cnn.com/2014/09/18/technology/security/home-depot-hack/ |archive-date=18 December 2014 }}</ref> स्टेपल्स,<ref>{{cite magazine |url=http://fortune.com/2014/12/19/staples-cards-affected-breach/ |title=Staples: Breach may have affected 1.16 million customers' cards |magazine=Fortune.com |date=19 December 2014 |access-date=21 December 2014 |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20141221160612/http://fortune.com/2014/12/19/staples-cards-affected-breach/ |archive-date=21 December 2014 }}</ref> टारगेट कॉरपोरेशन,<ref>{{cite news|author=<!--Not stated.-->|title=Target: 40 million credit cards compromised|url=https://money.cnn.com/2013/12/18/news/companies/target-credit-card/index.html|access-date=29 November 2017|work=CNN|date=19 December 2013|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20171201035530/https://money.cnn.com/2013/12/18/news/companies/target-credit-card/index.html|archive-date=1 December 2017}}</ref> और इक्विफैक्स<ref>{{cite news|last1=Cowley|first1=Stacy|title=2.5 Million More People Potentially Exposed in Equifax Breach|url=https://www.nytimes.com/2017/10/02/business/equifax-breach.html|access-date=29 November 2017|work=The New York Times|date=2 October 2017|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20171201054900/https://www.nytimes.com/2017/10/02/business/equifax-breach.html|archive-date=1 December 2017}}</ref> द्वारा लाखों ग्राहकों के क्रेडिट कार्ड और वित्तीय विवरणों का नुकसान शामिल है।
चिकित्सा रिकॉर्ड सामान्य पहचान चोरी, स्वास्थ्य बीमा धोखाधड़ी, और मनोरंजन उद्देश्यों या पुनर्विक्रय के लिए नशीली दवाओं के लिए मरीजों का प्रतिरूपण करने के लिए लक्षित किए गए हैं।<ref>{{cite news|url=https://www.reuters.com/article/us-cybersecurity-healthcare-fbi-exclusiv-idUSBREA3M1Q920140423|title=Exclusive: FBI warns healthcare sector vulnerable to cyber attacks|author=Jim Finkle|date=23 April 2014|newspaper=Reuters|access-date=23 May 2016|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20160604120725/http://www.reuters.com/article/us-cybersecurity-healthcare-fbi-exclusiv-idUSBREA3M1Q920140423|archive-date=4 June 2016}}</ref> हालांकि साइबर खतरों में लगातार वृद्धि हो रही है, 2015 में सभी संगठनों में से 62% ने अपने व्यवसाय के लिए सुरक्षा प्रशिक्षण नहीं बढ़ाया।<ref>{{Cite news|url=https://www.infosecurity-magazine.com/news/lack-of-employee-security-training/|title=Lack of Employee Security Training Plagues US Businesses|last=Seals|first=Tara|date=6 November 2015|work=Infosecurity Magazine|access-date=8 November 2017|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20171109081033/https://www.infosecurity-magazine.com/news/lack-of-employee-security-training/|archive-date=9 November 2017}}</ref>
हालांकि सभी हमले वित्तीय रूप से प्रेरित नहीं होते: सुरक्षा फर्म एचबीगैरी फेडरल को 2011 में हैक्टिविस्ट समूह अनोनिमस द्वारा गंभीर हमलों का सामना करना पड़ा, क्योंकि फर्म के सीईओ ने उनके समूह में घुसपैठ करने का दावा किया था।<ref>{{cite web |last=Bright |first=Peter |url=https://arstechnica.com/tech-policy/news/2011/02/anonymous-speaks-the-inside-story-of-the-hbgary-hack.ars/ |title=Anonymous speaks: the inside story of the HBGary hack |publisher=Arstechnica.com |date=15 February 2011 |access-date=29 March 2011 |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20110327045801/http://arstechnica.com/tech-policy/news/2011/02/anonymous-speaks-the-inside-story-of-the-hbgary-hack.ars |archive-date=27 March 2011 }}</ref><ref>{{cite web |last=Anderson |first=Nate |url=https://arstechnica.com/tech-policy/news/2011/02/how-one-security-firm-tracked-anonymousand-paid-a-heavy-price.ars/ |title=How one man tracked down Anonymous{{snd}}and paid a heavy price |publisher=Arstechnica.com |date=9 February 2011 |access-date=29 March 2011 |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20110329090824/http://arstechnica.com/tech-policy/news/2011/02/how-one-security-firm-tracked-anonymousand-paid-a-heavy-price.ars |archive-date=29 March 2011 }}</ref> 2014 में सोनी पिक्चर्स को हैक कर लिया गया, जिसमें कंपनी को डेटा लीक के माध्यम से शर्मिंदा करने और वर्कस्टेशनों और सर्वरों को मिटाकर कंपनी को अपंग बनाने का दोहरा उद्देश्य प्रतीत हुआ।<ref>{{cite web |url=https://money.cnn.com/2014/12/24/technology/security/sony-hack-facts/ |title=What caused Sony hack: What we know now |first=Jose |last=Palilery |website=[[CNN Money]] |date=24 December 2014 |access-date=4 January 2015 |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20150104195455/https://money.cnn.com/2014/12/24/technology/security/sony-hack-facts/ |archive-date=4 January 2015 }}</ref><ref>{{cite news |author=James Cook |date=16 December 2014 |url=http://www.businessinsider.com/the-sony-hackers-still-have-a-massive-amount-of-data-that-hasnt-been-leaked-yet-2014-12 |title=Sony Hackers Have Over 100 Terabytes Of Documents. Only Released 200 Gigabytes So Far |work=[[Business Insider]] |access-date=18 December 2014 |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20141217204735/http://www.businessinsider.com/the-sony-hackers-still-have-a-massive-amount-of-data-that-hasnt-been-leaked-yet-2014-12 |archive-date=17 December 2014 }}</ref>
===ऑटोमोबाइल===
{{See also|स्वायत्त कार#संभावित नुकसान|स्वचालित ड्राइविंग प्रणाली#जोखिम और देयताएं|ऑटोमोटिव हैकिंग}}
वाहन तेजी से कम्प्यूटरीकृत हो रहे हैं, जिसमें कई मॉडलों में इंजन टाइमिंग, क्रूज़ कंट्रोल, एंटी-लॉक ब्रेक्स, सीट बेल्ट टेंशनर्स, डोर लॉक, एयरबैग और उन्नत ड्राइवर-सहायता प्रणाली शामिल हैं। इसके अलावा, कनेक्टेड कारें ऑनबोर्ड उपभोक्ता उपकरणों और सेल फोन नेटवर्क के साथ संचार करने के लिए वाईफाई और ब्लूटूथ का उपयोग कर सकती हैं।<ref name="vox" /> सेल्फ-ड्राइविंग कारें और भी जटिल होने की उम्मीद है। इन सभी प्रणालियों में कुछ सुरक्षा जोखिम होते हैं, और ऐसे मुद्दों ने व्यापक ध्यान आकर्षित किया है।<ref>{{cite report | url=http://www.markey.senate.gov/imo/media/doc/2015-02-06_MarkeyReport-Tracking_Hacking_CarSecurity%202.pdf | title=Tracking & Hacking: Security & Privacy Gaps Put American Drivers at Risk | date=6 February 2015 | access-date=4 November 2016 | url-status=live | archive-url=https://web.archive.org/web/20161109040112/http://www.markey.senate.gov/imo/media/doc/2015-02-06_MarkeyReport-Tracking_Hacking_CarSecurity%202.pdf | archive-date=9 November 2016 | df=dmy-all }}</ref><ref>{{cite web|author=<!--Not stated.-->|title=Cybersecurity expert: It will take a 'major event' for companies to take this issue seriously|url=https://www.aol.com/article/news/2016/12/26/expert-warns-major-event-will-need-to-happen-for-cybersecurity/21632630/|website=AOL.com|date=5 January 2017 |access-date=22 January 2017|language=en|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20170120180918/https://www.aol.com/article/news/2016/12/26/expert-warns-major-event-will-need-to-happen-for-cybersecurity/21632630/|archive-date=20 January 2017}}</ref><ref>{{cite news|title=The problem with self-driving cars: who controls the code?|url=https://www.theguardian.com/technology/2015/dec/23/the-problem-with-self-driving-cars-who-controls-the-code|newspaper=The Guardian|access-date=22 January 2017|date=23 December 2015|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20170316152605/https://www.theguardian.com/technology/2015/dec/23/the-problem-with-self-driving-cars-who-controls-the-code|archive-date=16 March 2017}}</ref>
जोखिम के सरल उदाहरणों में एक दुर्भावनापूर्ण कॉम्पैक्ट डिस्क का उपयोग अटैक वेक्टर के रूप में किया जाना शामिल है,<ref>{{cite conference|url=http://www.autosec.org/pubs/cars-usenixsec2011.pdf|title=Comprehensive Experimental Analyses of Automotive Attack Surfaces|year=2011|conference=SEC'11 Proceedings of the 20th USENIX conference on Security|pages=6|publisher=USENIX Association|location=Berkeley, California, US|author1=Stephen Checkoway|author2=Damon McCoy|author3=Brian Kantor|author-link3=Brian Kantor|author4=Danny Anderson|author5=Hovav Shacham|author6=Stefan Savage|author-link6=Stefan Savage|author7=Karl Koscher|author8=Alexei Czeskis|author9=Franziska Roesner|author10=Tadayoshi Kohno|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20150221064614/http://www.autosec.org/pubs/cars-usenixsec2011.pdf|archive-date=21 February 2015}}</ref> और कार के ऑनबोर्ड माइक्रोफोन का उपयोग ईव्सड्रॉपिंग के लिए किया जा सकता है। हालांकि, यदि कार के आंतरिक कंट्रोलर एरिया नेटवर्क तक पहुंच प्राप्त की जाती है, तो खतरा बहुत अधिक हो जाता है<ref name="vox">{{cite web|url=https://www.vox.com/2015/1/18/7629603/car-hacking-dangers|title=The next frontier of hacking: your car|author=Timothy B. Lee|date=18 January 2015|work=Vox|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20170317212726/http://www.vox.com/2015/1/18/7629603/car-hacking-dangers|archive-date=17 March 2017}}</ref> – और 2015 के एक व्यापक रूप से प्रचारित परीक्षण में, हैकर्स ने 10 मील दूर से एक वाहन को रिमोट कंट्रोल करके उसे खाई में गिरा दिया।<ref>{{cite magazine|last1=Greenberg|first1=Andy|title=Hackers Remotely Kill a Jeep on the Highway{{snd}}With Me in It|magazine=Wired|url=https://www.wired.com/2015/07/hackers-remotely-kill-jeep-highway/|access-date=22 January 2017|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20170119103855/https://www.wired.com/2015/07/hackers-remotely-kill-jeep-highway/|archive-date=19 January 2017|date=21 July 2015}}</ref><ref>{{cite news|title=Hackers take control of car, drive it into a ditch|url=https://www.independent.co.uk/news/science/hackers-remotely-carjack-jeep-from-10-miles-away-and-drive-it-into-ditch-10406554.html|newspaper=The Independent|access-date=22 January 2017|date=22 July 2015|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20170202061247/http://www.independent.co.uk/news/science/hackers-remotely-carjack-jeep-from-10-miles-away-and-drive-it-into-ditch-10406554.html|archive-date=2 February 2017}}</ref>
निर्माता विभिन्न तरीकों से प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जिसमें 2016 में टेस्ला ने अपनी कारों के कंप्यूटर सिस्टम में कुछ सुरक्षा फिक्स को ओवर-द-एयर धकेल दिया।<ref>{{cite news|title=Tesla fixes software bug that allowed Chinese hackers to control car remotely|url=https://www.telegraph.co.uk/technology/2016/09/21/tesla-fixes-software-bug-that-allowed-chinese-hackers-to-control/|newspaper=The Telegraph|access-date=22 January 2017|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20170202014932/http://www.telegraph.co.uk/technology/2016/09/21/tesla-fixes-software-bug-that-allowed-chinese-hackers-to-control/|archive-date=2 February 2017|date=21 September 2016|author=<!--Not stated.-->}}</ref> स्वायत्त वाहनों के क्षेत्र में, सितंबर 2016 में संयुक्त राज्य अमेरिका के परिवहन विभाग ने कुछ प्रारंभिक सुरक्षा मानकों की घोषणा की और राज्यों से एकसमान नीतियां बनाने का आह्वान किया।<ref>{{cite news|last1=Kang|first1=Cecilia|title=Self-Driving Cars Gain Powerful Ally: The Government|url=https://www.nytimes.com/2016/09/20/technology/self-driving-cars-guidelines.html|newspaper=The New York Times|access-date=22 January 2017|date=19 September 2016|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20170214045032/https://www.nytimes.com/2016/09/20/technology/self-driving-cars-guidelines.html?_r=0|archive-date=14 February 2017}}</ref><ref>{{cite web|title=Federal Automated Vehicles Policy|url=https://www.transportation.gov/sites/dot.gov/files/docs/AV%20policy%20guidance%20PDF.pdf|access-date=22 January 2017|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20170121161404/https://www.transportation.gov/sites/dot.gov/files/docs/AV%20policy%20guidance%20PDF.pdf|archive-date=21 January 2017}}</ref><ref>{{Cite web |title=Vehicle Cybersecurity |url=https://www.nhtsa.gov/technology-innovation/vehicle-cybersecurity |access-date=2022-11-25 |website=nhtsa.gov |language=en |archive-date=30 दिसंबर 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20231230000028/https://www.nhtsa.gov/technology-innovation/vehicle-cybersecurity |url-status=dead }}</ref>
इसके अलावा, e-ड्राइवर्स लाइसेंस भी उसी तकनीक का उपयोग करके विकसित किए जा रहे हैं। उदाहरण के लिए, मैक्सिको के लाइसेंसिंग प्राधिकरण (ICV) ने मोन्टेरी शहर, न्यूवो लियोन राज्य को पहले e-ड्राइवर्स लाइसेंस जारी करने के लिए एक [[स्मार्ट कार्ड]] प्लेटफॉर्म का उपयोग किया है।<ref>{{cite web | title=Thales supplies smart driver license to 4 states in Mexico | website=Thales Group | url=https://www.thalesgroup.com/en/markets/digital-identity-and-security/government/customer-cases/mexico }}</ref>
===शिपिंग===
शिपिंग कंपनियों<ref>{{Cite web |title=4 Companies Using RFID for Supply Chain Management |url=https://www.atlasrfidstore.com/rfid-insider/4-companies-using-rfid-for-supply-chain-management |access-date=2023-02-03 |website=atlasRFIDstore |language=en}}</ref> ने RFID (रेडियो फ़्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) तकनीक को एक कुशल, डिजिटल रूप से सुरक्षित ट्रैकिंग डिवाइस के रूप में अपनाया है। बारकोड के विपरीत, आरएफआईडी को 20 फीट की दूरी से पढ़ा जा सकता है। फेडएक्स<ref>{{Cite web|url=https://www.supplychainmarket.com/doc/the-cutting-edge-of-rfid-technology-and-appli-0001|title = The Cutting Edge of RFID Technology and Applications for Manufacturing and Distribution| website=Supply Chain Market}}</ref> और यूपीएस<ref>{{cite conference|last1=Rahman|first1=Mohammad Anwar|last2=Khadem|first2=Mohammad Miftaur|last3=Sarder|first3=MD.|title=Application of RFID in Supply Chain System|conference=Proceedings of the 2010 International Conference on Industrial Engineering and Operations Management Dhaka, Bangladesh, January 9 – 10, 2010|citeseerx=10.1.1.397.7831}}</ref> द्वारा आरएफआईडी का उपयोग किया जाता है।
===सरकार===
सरकारी और सैन्य कंप्यूटर प्रणालियों पर आमतौर पर कार्यकर्ताओं<ref>{{cite news |url=https://www.telegraph.co.uk/news/worldnews/northamerica/usa/4320901/Gary-McKinnon-profile-Autistic-hacker-who-started-writing-computer-programs-at-14.html |location=London |work=The Daily Telegraph |title=Gary McKinnon profile: Autistic 'hacker' who started writing computer programs at 14 |date=23 January 2009 |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20100602065423/http://www.telegraph.co.uk/news/worldnews/northamerica/usa/4320901/Gary-McKinnon-profile-Autistic-hacker-who-started-writing-computer-programs-at-14.html |archive-date=2 June 2010 }}</ref><ref>{{cite news |url=https://www.bbc.co.uk/news/uk-19506090 |title=Gary McKinnon extradition ruling due by 16 October |work=BBC News |date=6 September 2012 |access-date=25 September 2012 |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20120906185731/http://www.bbc.co.uk/news/uk-19506090 |archive-date=6 September 2012 }}</ref><ref>{{cite court |url=https://publications.parliament.uk/pa/ld200708/ldjudgmt/jd080730/mckinn-1.htm |litigants=Mckinnon V Government of The United States of America and Another |court=House of Lords |date=16 June 2008 |quote=15. ... alleged to total over $700,000 |access-date=30 January 2010 }}</ref> और विदेशी शक्तियों द्वारा हमले किए जाते हैं।<ref>{{cite news | title=Fresh Leak on US Spying: NSA Accessed Mexican President's Email | website=SPIEGEL ONLINE | date=2013-10-20 | url=http://www.spiegel.de/international/world/nsa-hacked-email-account-of-mexican-president-a-928817.html | archive-url=https://web.archive.org/web/20151106193613/http://www.spiegel.de/international/world/nsa-hacked-email-account-of-mexican-president-a-928817.html | archive-date=2015-11-06 | url-status=dead <!-- technically unfit but effectively dead-->}}</ref><ref>{{cite web |url=https://www.npr.org/sections/thetwo-way/2015/06/04/412086068/massive-data-breach-puts-4-million-federal-employees-records-at-risk |title=Massive Data Breach Puts 4 Million Federal Employees' Records at Risk |work=NPR |date=4 June 2015 |access-date=5 June 2015 |author=Sanders, Sam |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20150605041629/http://www.npr.org/sections/thetwo-way/2015/06/04/412086068/massive-data-breach-puts-4-million-federal-employees-records-at-risk |archive-date=5 June 2015 }}</ref><ref>{{cite news |url=http://www.cnn.com/2015/06/04/politics/federal-agency-hacked-personnel-management/ |title=U.S. government hacked; feds think China is the culprit |work=CNN |date=4 June 2015 |access-date=5 June 2015 |author=Liptak, Kevin |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20150606063139/http://www.cnn.com/2015/06/04/politics/federal-agency-hacked-personnel-management/ |archive-date=6 June 2015 }}</ref><ref>{{cite news |title=Encryption "would not have helped" at OPM, says DHS official |author=Sean Gallagher |url=https://arstechnica.com/security/2015/06/encryption-would-not-have-helped-at-opm-says-dhs-official/ |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20170624014751/https://arstechnica.com/security/2015/06/encryption-would-not-have-helped-at-opm-says-dhs-official/ |archive-date=24 June 2017 }}</ref> स्थानीय और क्षेत्रीय सरकारी बुनियादी ढांचा जैसे ट्रैफिक लाइट नियंत्रण, पुलिस और खुफिया एजेंसी संचार, कर्मियों के रिकॉर्ड, साथ ही छात्र रिकॉर्ड।<ref>{{cite journal|url=http://www.edweek.org/ew/articles/2015/10/21/lessons-learned-from-security-breaches.html|title=Schools Learn Lessons From Security Breaches|date=19 October 2015|journal=Education Week|access-date=23 May 2016|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20160610130749/http://www.edweek.org/ew/articles/2015/10/21/lessons-learned-from-security-breaches.html|archive-date=10 June 2016|last1=Davis|first1=Michelle R.}}</ref>
एफबीआई, सीआईए, और पेंटागन सभी अपनी इमारतों के लिए सुरक्षित नियंत्रित पहुंच तकनीक का उपयोग करते हैं। हालांकि, इस प्रकार की तकनीक का उपयोग उद्यमशील दुनिया में भी तेजी से फैल रहा है। अधिक से अधिक कंपनियां डिजिटल रूप से सुरक्षित नियंत्रित पहुंच तकनीक के विकास का लाभ उठा रही हैं। उदाहरण के लिए, जीई का ACUVision एकल पैनल प्लेटफ़ॉर्म प्रदान करता है जो पहुंच नियंत्रण, अलार्म निगरानी और डिजिटल रिकॉर्डिंग के लिए उपयोग होता है।<ref>{{cite web |title=GE's Introduces ACUVision as a Single Panel Solution |url=https://www.securityinfowatch.com/access-identity/access-control/press-release/10577631/ge-infrastructure-security-ges-introduces-acuvision-as-a-single-panel-solution |website=www.securityinfowatch.com |date=11 August 2005 |publisher=Security Info Watch |accessdate=24 September 2019}}</ref>
===इंटरनेट ऑफ थिंग्स और भौतिक सुरक्षा कमज़ोरियाँ===
इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) ऐसे भौतिक वस्तुओं का नेटवर्क है, जैसे कि उपकरण, वाहन, और इमारतें, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, सॉफ़्टवेयर, सेंसर और नेटवर्क कनेक्टिविटी से लैस होते हैं, जिससे वे डेटा एकत्र और आदान-प्रदान कर सकते हैं।<ref>{{cite web|url=http://www.itu.int/en/ITU-T/gsi/iot/Pages/default.aspx|title=Internet of Things Global Standards Initiative|work=ITU|access-date=26 June 2015|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20150626125229/http://www.itu.int/en/ITU-T/gsi/iot/Pages/default.aspx|archive-date=26 June 2015}}</ref> इस विकास के साथ सुरक्षा चुनौतियों पर उचित ध्यान न दिए जाने की चिंताएँ उठाई गई हैं।<ref>{{cite journal|last1=Singh|first1=Jatinder|last2=Pasquier|first2=Thomas|last3=Bacon|first3=Jean|last4=Ko|first4=Hajoon|last5=Eyers|first5=David|title=Twenty Cloud Security Considerations for Supporting the Internet of Things|journal=IEEE Internet of Things Journal|volume=3|issue=3|date=2015|pages=269–284|doi=10.1109/JIOT.2015.2460333|s2cid=4732406|url=https://dash.harvard.edu/bitstream/1/35349952/1/iot-2016.pdf|url-access=}}</ref><ref>{{cite news|url=https://www.forbes.com/sites/chrisclearfield/2013/09/18/why-the-ftc-cant-regulate-the-internet-of-things/|title=Why The FTC Can't Regulate The Internet Of Things|author=Chris Clearfield|work=Forbes|access-date=26 June 2015|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20150627090938/http://www.forbes.com/sites/chrisclearfield/2013/09/18/why-the-ftc-cant-regulate-the-internet-of-things/|archive-date=27 June 2015}}</ref>
जहां IoT भौतिक दुनिया को कंप्यूटर आधारित सिस्टमों में सीधे एकीकृत करने के अवसर प्रदान करता है,<ref>{{cite web | url=https://hbr.org/resources/pdfs/comm/verizon/18980_HBR_Verizon_IoT_Nov_14.pdf |archive-url=https://web.archive.org/web/20150317052909/https://hbr.org/resources/pdfs/comm/verizon/18980_HBR_Verizon_IoT_Nov_14.pdf |archive-date=2015-03-17 |url-status=live | title=Internet of Things: Science Fiction or Business Fact? | work=Harvard Business Review | access-date=4 November 2016}}</ref><ref>{{cite web | url=http://www.internet-of-things-research.eu/pdf/Converging_Technologies_for_Smart_Environments_and_Integrated_Ecosystems_IERC_Book_Open_Access_2013.pdf | title=Internet of Things: Converging Technologies for Smart Environments and Integrated Ecosystems | publisher=River Publishers | access-date=4 November 2016 | author=Ovidiu Vermesan | author2=Peter Friess | url-status=live | archive-url=https://web.archive.org/web/20161012010519/http://www.internet-of-things-research.eu/pdf/Converging_Technologies_for_Smart_Environments_and_Integrated_Ecosystems_IERC_Book_Open_Access_2013.pdf | archive-date=12 October 2016 | df=dmy-all }}</ref> वहीं यह दुरुपयोग के अवसर भी प्रदान करता है। विशेष रूप से, जैसे-जैसे IoT का विस्तार हो रहा है, साइबर हमले भौतिक (केवल वर्चुअल नहीं) खतरे के रूप में सामने आ सकते हैं।<ref>{{cite journal | last=Clearfield | first=Chris | title=Rethinking Security for the Internet of Things | journal=Harvard Business Review | date=2013-06-20 | url=http://blogs.hbr.org/2013/06/rethinking-security-for-the-in/ | archive-url=https://web.archive.org/web/20130920145534/http://blogs.hbr.org/2013/06/rethinking-security-for-the-in/ | archive-date=2013-09-20 | url-status=live }}</ref> यदि एक मुख्य दरवाजे की ताला इंटरनेट से जुड़ी हो और इसे फोन से लॉक/अनलॉक किया जा सकता हो, तो एक अपराधी एक चुराए या हैक किए गए फोन के बटन दबाकर घर में घुस सकता है। IoT-सक्षम उपकरणों द्वारा नियंत्रित दुनिया में लोग अपने क्रेडिट कार्ड नंबर से कहीं ज्यादा खो सकते हैं। चोरों ने गैर-इंटरनेट-संयुक्त होटल दरवाजों की तालों को इलेक्ट्रॉनिक साधनों से बायपास भी किया है।<ref>{{cite web|url=https://arstechnica.com/security/2012/11/hotel-room-burglars-exploit-critical-flaw-in-electronic-door-locks/|title=Hotel room burglars exploit critical flaw in electronic door locks|work=Ars Technica|access-date=23 May 2016|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20160514002208/http://arstechnica.com/security/2012/11/hotel-room-burglars-exploit-critical-flaw-in-electronic-door-locks/|archive-date=14 May 2016|date=26 November 2012}}</ref>
एक ऐसा हमला जो भौतिक ढांचे या मानव जीवन को लक्षित करता है, उसे साइबर-किनेटिक हमला कहा जाता है। जैसे-जैसे IoT उपकरण और एप्लायंसेस अधिक व्यापक होते जा रहे हैं, साइबर-किनेटिक हमलों की प्रचलन और संभावित क्षति में काफी वृद्धि हो सकती है।
===चिकित्सा प्रणालियाँ===
{{See also|चिकित्सा उपकरण अपहरण|चिकित्सा डेटा उल्लंघन}}
चिकित्सा उपकरणों पर या तो सफलतापूर्वक हमला किया गया है या उनमें संभावित घातक कमजोरियों का प्रदर्शन किया गया है, जिनमें अस्पताल में उपयोग किए जाने वाले निदान उपकरण<ref>{{cite web|url=http://www.darkreading.com/vulnerabilities---threats/hospital-medical-devices-used-as-weapons-in-cyberattacks/d/d-id/1320751|title=Hospital Medical Devices Used As Weapons in Cyberattacks|work=Dark Reading|date=6 August 2015|access-date=23 May 2016|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20160529002947/http://www.darkreading.com/vulnerabilities---threats/hospital-medical-devices-used-as-weapons-in-cyberattacks/d/d-id/1320751|archive-date=29 May 2016}}</ref> और प्रत्यारोपित उपकरण जैसे पेसमेकर<ref>{{cite web|url=http://www.computerworld.com/article/2492453/malware-vulnerabilities/pacemaker-hack-can-deliver-deadly-830-volt-jolt.html|title=Pacemaker hack can deliver deadly 830-volt jolt|author=Jeremy Kirk|date=17 October 2012|work=Computerworld|access-date=23 May 2016|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20160604201841/http://www.computerworld.com/article/2492453/malware-vulnerabilities/pacemaker-hack-can-deliver-deadly-830-volt-jolt.html|archive-date=4 June 2016}}</ref> और इंसुलिन पंप शामिल हैं।<ref>{{cite news|url=http://www.thedailybeast.com/articles/2014/11/17/how-your-pacemaker-will-get-hacked.html|title=How Your Pacemaker Will Get Hacked|newspaper=The Daily Beast|access-date=23 May 2016|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20160520155616/http://www.thedailybeast.com/articles/2014/11/17/how-your-pacemaker-will-get-hacked.html|archive-date=20 May 2016|date=17 November 2014|agency=Kaiser Health News}}</ref> अस्पतालों और अस्पताल संगठनों के हैक होने की कई रिपोर्टें हैं, जिनमें रैंसमवेयर हमले,<ref>{{cite magazine|last1=Leetaru|first1=Kalev|title=Hacking Hospitals And Holding Hostages: Cybersecurity In 2016|url=https://www.forbes.com/sites/kalevleetaru/2016/03/29/hacking-hospitals-and-holding-hostages-cybersecurity-in-2016/|magazine=Forbes|access-date=29 December 2016|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20161229104021/http://www.forbes.com/sites/kalevleetaru/2016/03/29/hacking-hospitals-and-holding-hostages-cybersecurity-in-2016/|archive-date=29 December 2016}}</ref><ref name="wiwo1">{{cite web|title=Cyber-Angriffe: Krankenhäuser rücken ins Visier der Hacker|date=7 December 2016 |url=http://www.wiwo.de/technologie/digitale-welt/cyber-angriffe-krankenhaeuser-ruecken-ins-visier-der-hacker/14946040.html|publisher=Wirtschafts Woche|access-date=29 December 2016|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20161229101724/http://www.wiwo.de/technologie/digitale-welt/cyber-angriffe-krankenhaeuser-ruecken-ins-visier-der-hacker/14946040.html|archive-date=29 December 2016}}</ref><ref>{{cite web|title=Hospitals keep getting attacked by ransomware{{snd}}Here's why|url=http://www.businessinsider.com/hospital-ransomware-hack-2016-5|website=Business Insider|access-date=29 December 2016|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20161229101247/http://www.businessinsider.com/hospital-ransomware-hack-2016-5|archive-date=29 December 2016}}</ref><ref>{{cite web|title=MedStar Hospitals Recovering After 'Ransomware' Hack|url=https://www.nbcnews.com/news/us-news/medstar-hospitals-recovering-after-ransomware-hack-n548121|work=NBC News|date=31 March 2016 |access-date=29 December 2016|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20161229103355/https://www.nbcnews.com/news/us-news/medstar-hospitals-recovering-after-ransomware-hack-n548121|archive-date=29 December 2016}}</ref> विंडोज़ XP कमजोरियों का शोषण,<ref>{{cite web|last1=Pauli|first1=Darren|title=US hospitals hacked with ancient exploits|url=https://www.theregister.co.uk/2016/06/28/medjack/|website=The Register|access-date=29 December 2016|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20161116141207/http://www.theregister.co.uk/2016/06/28/medjack|archive-date=16 November 2016}}</ref><ref>{{cite web|last1=Pauli|first1=Darren|title=Zombie OS lurches through Royal Melbourne Hospital spreading virus|url=https://www.theregister.co.uk/2016/01/19/melbourne_hospital_pathology_wing_splattered_by_virus/|website=The Register|access-date=29 December 2016|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20161229101019/http://www.theregister.co.uk/2016/01/19/melbourne_hospital_pathology_wing_splattered_by_virus/|archive-date=29 December 2016}}</ref> वायरस<ref>{{cite news|title=Hacked Lincolnshire hospital computer systems 'back up'|url=https://www.bbc.com/news/uk-england-humber-37849746|work=BBC News|access-date=29 December 2016|date=2 November 2016|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20161229101819/http://www.bbc.com/news/uk-england-humber-37849746|archive-date=29 December 2016}}</ref><ref>{{cite news|title=Lincolnshire operations cancelled after network attack|url=https://www.bbc.com/news/uk-england-humber-37822084|work=BBC News|access-date=29 December 2016|date=31 October 2016|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20161229101209/http://www.bbc.com/news/uk-england-humber-37822084|archive-date=29 December 2016}}</ref> और अस्पताल के सर्वरों पर संग्रहीत संवेदनशील डेटा के डेटा उल्लंघन शामिल हैं।<ref>{{cite news|title=Legion cyber-attack: Next dump is sansad.nic.in, say hackers|url=http://indianexpress.com/article/technology/tech-news-technology/legion-hacking-no-political-agenda-just-computer-geeks-says-hacker-4423167/|newspaper=The Indian Express|access-date=29 December 2016|date=12 December 2016|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20161229100631/http://indianexpress.com/article/technology/tech-news-technology/legion-hacking-no-political-agenda-just-computer-geeks-says-hacker-4423167/|archive-date=29 December 2016}}</ref><ref name="wiwo1" /><ref>{{cite web|title=Former New Hampshire Psychiatric Hospital Patient Accused Of Data Breach|url=http://boston.cbslocal.com/2016/12/27/former-patient-accused-data-breech-new-hampshire-psychiatric-hospital/|publisher=CBS Boston|access-date=29 December 2016|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20170929233237/http://boston.cbslocal.com/2016/12/27/former-patient-accused-data-breech-new-hampshire-psychiatric-hospital/|archive-date=29 September 2017|date=27 December 2016}}</ref><ref>{{cite web|title=Texas Hospital hacked, affects nearly 30,000 patient records|url=http://www.healthcareitnews.com/news/texas-hospital-hacked-affects-nearly-30000-patient-records|publisher=Healthcare IT News|access-date=29 December 2016|date=4 November 2016|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20161229171117/http://www.healthcareitnews.com/news/texas-hospital-hacked-affects-nearly-30000-patient-records|archive-date=29 December 2016}}</ref> 28 दिसंबर 2016 को अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन (FDA) ने इंटरनेट से जुड़े उपकरणों की सुरक्षा बनाए रखने के लिए चिकित्सा उपकरण निर्माताओं के लिए अपनी सिफारिशें जारी कीं, लेकिन प्रवर्तन के लिए कोई संरचना नहीं प्रदान की।<ref>{{cite web|last1=Becker|first1=Rachel|title=New cybersecurity guidelines for medical devices tackle evolving threats|url=https://www.theverge.com/2016/12/27/14095166/fda-guidance-medical-device-cybersecurity-cyberattack-hacking-guidelines|website=The Verge|access-date=29 December 2016|date=27 December 2016|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20161228210257/http://www.theverge.com/2016/12/27/14095166/fda-guidance-medical-device-cybersecurity-cyberattack-hacking-guidelines|archive-date=28 December 2016}}</ref><ref>{{cite web|title=Postmarket Management of Cybersecurity in Medical Devices|website=[[Food and Drug Administration]]|url=https://www.fda.gov/downloads/MedicalDevices/DeviceRegulationandGuidance/GuidanceDocuments/UCM482022.pdf|access-date=29 December 2016|date=28 December 2016|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20161229102808/https://www.fda.gov/downloads/MedicalDevices/DeviceRegulationandGuidance/GuidanceDocuments/UCM482022.pdf|archive-date=29 December 2016}}</ref>
===ऊर्जा क्षेत्र===
डेली एनर्जी इनसाइडर के अनुसार, वितरित उत्पादन प्रणालियों में साइबर हमले का खतरा वास्तविक है। एक हमला एक बड़े क्षेत्र में लंबे समय तक बिजली की हानि का कारण बन सकता है, और ऐसा हमला प्राकृतिक आपदा जितना गंभीर परिणाम ला सकता है। कोलंबिया जिले में एक वितरित ऊर्जा संसाधन (DER) प्राधिकरण बनाने पर विचार किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य ग्राहकों को अपनी ऊर्जा खपत के बारे में अधिक जानकारी देना और स्थानीय विद्युत उपयोगिता कंपनी, पेपको, को ऊर्जा मांग का बेहतर अनुमान लगाने का अवसर देना है। हालांकि, डी.सी. का यह प्रस्ताव "तीसरे पक्ष के विक्रेताओं को ऊर्जा वितरण के कई बिंदु बनाने की अनुमति देगा, जिससे साइबर हमलावरों के लिए बिजली ग्रिड को खतरा पहुंचाने के अधिक अवसर पैदा हो सकते हैं।"<ref>{{Cite news|url=https://dailyenergyinsider.com/featured/13110-d-c-distributed-4:.energy-proposal-draws-concerns-of-increased-cybersecurity-risks/|title=D.C. distributed energy proposal draws concerns of increased cybersecurity risks|last=Brandt|first=Jaclyn|date=18 June 2018|work=Daily Energy Insider|access-date=4 July 2018|language=en-US}}</ref>
===दूरसंचार===
शायद सबसे व्यापक रूप से जाना जाने वाला डिजिटल रूप से सुरक्षित दूरसंचार उपकरण सिम (सबसक्राइबर आइडेंटिटी मॉड्यूल) कार्ड है, जो दुनिया के अधिकांश सेलुलर उपकरणों में सेवा प्राप्त करने से पहले एम्बेड किया जाता है। सिम कार्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित वातावरण की शुरुआत मात्र है।
स्मार्ट कार्ड [[वेब सर्वर]] (SCWS) का ड्राफ्ट मानक एक स्मार्ट कार्ड में HTTP सर्वर के इंटरफेस को परिभाषित करता है।<ref>{{cite web|url=http://www.openmobilealliance.org/Technical/release_program/scws_v1_0.aspx|title=Current Releases - The Open Mobile Alliance|work=openmobilealliance.org}}</ref> [[मोबाइल फोन]] से और उसके लिए ओवर-द-एयर (OTA) भुगतान और क्रेडिट कार्ड की जानकारी को सुरक्षित करने के लिए परीक्षण किए जा रहे हैं। स्मार्ट वीडियो कार्ड तकनीक के माध्यम से संयोजन सिम/डीवीडी उपकरण विकसित किए जा रहे हैं, जो एक नियमित सिम कार्ड के शरीर में डीवीडी-समर्पित ऑप्टिकल डिस्क को एम्बेड करते हैं।
डिजिटल सुरक्षा से जुड़े अन्य दूरसंचार विकासों में मोबाइल हस्ताक्षर शामिल हैं, जो एक कानूनी रूप से बाध्यकारी इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर उत्पन्न करने के लिए एम्बेडेड [[सिम कार्ड]] का उपयोग करते हैं।
==सुरक्षा उल्लंघनों की लागत और प्रभाव==
सुरक्षा उल्लंघनों के कारण गंभीर वित्तीय नुकसान हुए हैं, लेकिन किसी घटना की लागत का अनुमान लगाने के लिए कोई मानक मॉडल नहीं है, इसलिए उपलब्ध डेटा केवल वही है जो संबंधित संगठनों द्वारा सार्वजनिक किया जाता है। "कई कंप्यूटर सुरक्षा परामर्श कंपनियाँ वायरस और वर्म हमलों और सामान्य रूप से शत्रुतापूर्ण डिजिटल कृत्यों के कारण होने वाले विश्वव्यापी नुकसानों का अनुमान लगाती हैं। 2003 में इन कंपनियों द्वारा दिए गए नुकसान के अनुमान $13 बिलियन (केवल वर्म और वायरस) से लेकर $226 बिलियन (सभी प्रकार के गुप्त हमलों के लिए) तक थे। इन अनुमानों की विश्वसनीयता अक्सर चुनौती दी जाती है; इसका आधारभूत तरीका आमतौर पर उपाख्यानात्मक होता है।"<ref>{{cite report |last1=Cashell|first1=B.|last2=Jackson|first2=W. D.|last3=Jickling|first3=M.|last4=Webel|first4=B. |year=2004 |title=The Economic Impact of Cyber-Attacks |publisher=Congressional Research Service, Government, and Finance Division |location=Washington DC |url=https://sgp.fas.org/crs/misc/RL32331.pdf |id=RL32331}}</ref>
हालांकि, सुरक्षा उल्लंघनों की वित्तीय लागत का उचित अनुमान लगाने से संगठन तर्कसंगत निवेश निर्णय ले सकते हैं। सूचना सुरक्षा में निवेश के लिए क्लासिक गॉर्डन-लोएब मॉडल के अनुसार, यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि किसी कंपनी को सूचना की सुरक्षा के लिए किए गए खर्च को अपेक्षित नुकसान के छोटे हिस्से तक ही सीमित रखना चाहिए (अर्थात, साइबर/सूचना सुरक्षा उल्लंघन से होने वाले नुकसान का अपेक्षित मूल्य)।<ref>{{cite journal |last1=Gordon |first1=Lawrence |last2=Loeb |first2=Martin |title=The Economics of Information Security Investment |journal=ACM Transactions on Information and System Security |date=November 2002 |volume=5 |issue=4 |pages=438–457 |doi=10.1145/581271.581274|s2cid=1500788 }}</ref>
==हमलावर प्रेरणा==
जिस प्रकार शारीरिक सुरक्षा में होता है, कंप्यूटर सुरक्षा उल्लंघनों के लिए भी हमलावरों की प्रेरणाएँ भिन्न होती हैं। कुछ हमलावर केवल रोमांच की तलाश में होते हैं या तोड़फोड़ करना चाहते हैं, कुछ कार्यकर्ता होते हैं, जबकि अन्य अपराधी होते हैं जो आर्थिक लाभ की खोज में होते हैं। राज्य-प्रायोजित हमलावर अब आम हो गए हैं और उनके पास अच्छे संसाधन होते हैं, लेकिन यह शुरुआत शौकिया लोगों से हुई थी, जैसे कि मार्कस हेस, जिसने केजीबी के लिए हैकिंग की, जैसा कि क्लिफोर्ड स्टॉल ने अपनी पुस्तक द कुकूज़ एग में बताया है।
हमलावरों की प्रेरणाएँ हमलों के प्रकार के अनुसार भिन्न हो सकती हैं, जैसे कि आनंद प्राप्त करने से लेकर राजनीतिक उद्देश्यों तक।<ref name="DoS guidance" /> उदाहरण के लिए, "हैक्टिविस्ट" किसी कंपनी या संगठन को निशाना बना सकते हैं जो उनके विचारों से मेल नहीं खाता। इसका उद्देश्य कंपनी की वेबसाइट को गिराकर उसे बदनाम करना हो सकता है।
उच्च क्षमता वाले हैकर, जो बड़े वित्तीय समर्थन या राज्य-प्रायोजन के साथ काम करते हैं, अपने वित्तीय समर्थकों की मांगों के अनुसार हमला कर सकते हैं। ऐसे हमले अधिक गंभीर होते हैं, जैसे कि 2015 में यूक्रेन के पावर ग्रिड पर हुआ हमला, जिसमें स्पीयर-फिशिंग, फाइलों का नष्ट होना, और डिनायल-ऑफ-सर्विस (DoS) जैसे तकनीकों का उपयोग किया गया था।<ref>{{Cite news |last1=Sanger |first1=David E. |last2=Barnes |first2=Julian E. |date=2021-12-20 |title=U.S. and Britain Help Ukraine Prepare for Potential Russian Cyberassault |language=en-US |work=The New York Times |url=https://www.nytimes.com/2021/12/20/us/politics/russia-ukraine-cyberattacks.html |access-date=2023-12-04 |issn=0362-4331}}</ref><ref>{{Cite web |date=2021-07-20 |title=Cyber-Attack Against Ukrainian Critical Infrastructure {{!}} CISA |url=https://www.cisa.gov/news-events/ics-alerts/ir-alert-h-16-056-01 |access-date=2023-12-04 |website=www.cisa.gov |language=en}}</ref>
इसके अतिरिक्त, हाल के हमलावरों की प्रेरणाएँ उग्रवादी संगठनों से भी जुड़ी होती हैं, जो राजनीतिक लाभ प्राप्त करने या सामाजिक एजेंडे को बाधित करने के लिए हमले करते हैं।<ref>{{Cite journal|last1=Han|first1=Chen|last2=Dongre|first2=Rituja|date=2014|title=Q&A. What Motivates Cyber-Attackers?|journal=Technology Innovation Management Review|language=en|volume=4|issue=10|pages=40–42|doi=10.22215/timreview/838|issn=1927-0321|doi-access=free}}</ref> इंटरनेट, मोबाइल प्रौद्योगिकियों, और सस्ते कंप्यूटिंग उपकरणों के प्रसार ने क्षमताओं को बढ़ाया है, लेकिन साथ ही उन वातावरणों के लिए जोखिम भी बढ़ाया है, जिन्हें संचालन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। सभी महत्वपूर्ण लक्षित वातावरण समझौतों के प्रति संवेदनशील होते हैं, और इसने विभिन्न प्रकार के हमलावरों की प्रेरणाओं को ध्यान में रखते हुए जोखिम को कम करने के लिए कई अध्ययन किए हैं।<ref>{{cite journal |last1=Chermick |first1=Steven |last2=Freilich |first2=Joshua |last3=Holt |first3=Thomas |title=Exploring the Subculture of Ideologically Motivated Cyber-Attackers |journal=Journal of Contemporary Criminal Justice |date= April 2017 |volume=33 |issue=3 |pages=212–233 |doi=10.1177/1043986217699100|s2cid=152277480 }}</ref>
किसी भी प्रणाली के लिए खतरे की मॉडलिंग का एक महत्वपूर्ण पहलू संभावित हमलों के पीछे की प्रेरणाओं और उन्हें अंजाम देने वाले व्यक्तियों या समूहों की पहचान करना है। सुरक्षा उपायों का स्तर और विवरण उस विशेष प्रणाली के अनुसार भिन्न होंगे जिसे संरक्षित किया जा रहा है। उदाहरण के लिए, एक व्यक्तिगत होम कंप्यूटर, एक बैंक, और एक वर्गीकृत सैन्य नेटवर्क के सामने अलग-अलग खतरे होते हैं, भले ही वे समान तकनीकी आधार का उपयोग करते हों।<ref>{{Cite book|last=Anderson|first=Ross |title=Security engineering : a guide to building dependable distributed systems|date=2020|isbn=978-1119642817|edition=3rd | publisher=John Wiley & Sons|location=Indianapolis, IN|oclc=1224516855}}</ref>
==कंप्यूटर सुरक्षा घटना प्रबंधन==
[[कंप्यूटर सुरक्षा]] घटना प्रबंधन एक संगठित दृष्टिकोण है जिसका उद्देश्य कंप्यूटर सुरक्षा घटना या समझौते के परिणामों का समाधान करना और प्रबंधन करना है, ताकि उल्लंघन को रोका जा सके या साइबर हमले को विफल किया जा सके। यदि किसी घुसपैठ को समय पर पहचाना और प्रबंधित नहीं किया जाता है, तो यह आमतौर पर डेटा उल्लंघन या सिस्टम विफलता जैसी अधिक हानिकारक घटना में बदल जाता है। कंप्यूटर सुरक्षा घटना प्रतिक्रिया योजना का उद्देश्य घटना को नियंत्रित करना, नुकसान को सीमित करना और व्यवसाय को सामान्य स्थिति में पुनर्स्थापित करने में सहायता करना है। समझौतों का तेजी से जवाब देना, कमजोरियों का शोषण कम कर सकता है, सेवाओं और प्रक्रियाओं को पुनर्स्थापित कर सकता है और नुकसान को कम कर सकता है।<ref>{{cite web|url=https://www.icims.com/gc/incident-response-procedures/|access-date=2021-03-13| publisher=iCIMS | title= The Leading Cloud Recruiting Software}}</ref> घटना प्रतिक्रिया योजना से संगठनों को घुसपैठ को नुकसान पहुँचाने से पहले रोकने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं की एक श्रृंखला स्थापित करने की अनुमति मिलती है। सामान्य घटना प्रतिक्रिया योजनाओं में लिखित निर्देशों का एक सेट होता है, जो साइबर हमले के जवाब में संगठन की प्रक्रिया को रेखांकित करता है। बिना दस्तावेजी योजना के, संगठन किसी घुसपैठ या समझौते का सफलतापूर्वक पता नहीं लगा सकता और हितधारक अपने कर्तव्यों, प्रक्रियाओं और प्रक्रियाओं को समझ नहीं पाते, जिससे संगठन की प्रतिक्रिया और समाधान की गति धीमी हो जाती है।
कंप्यूटर सुरक्षा घटना प्रतिक्रिया योजना के चार प्रमुख घटक होते हैं:
#तैयारी: कंप्यूटर सुरक्षा घटनाओं या समझौतों को संभालने के लिए प्रक्रियाओं पर हितधारकों को तैयार करना।
#पता लगाना और विश्लेषण: संदिग्ध गतिविधि की पहचान करना और जांच करना ताकि सुरक्षा घटना की पुष्टि हो सके, प्रभाव के आधार पर प्रतिक्रिया को प्राथमिकता देना और घटना की सूचना के समन्वय में सहायता करना।
#नियंत्रण, उन्मूलन और पुनर्प्राप्ति: प्रभावित प्रणालियों को अलग करना ताकि वृद्धि को रोका जा सके और प्रभाव को सीमित किया जा सके, घटना के मूल कारण का पता लगाना, मैलवेयर, प्रभावित प्रणालियों और बुरे कारकों को वातावरण से हटाना और जब कोई खतरा न रहे तो प्रणालियों और डेटा को पुनर्स्थापित करना।
#घटना के बाद की गतिविधि: घटना, उसके मूल कारण और संगठन की प्रतिक्रिया का विश्लेषण ताकि घटना प्रतिक्रिया योजना और भविष्य की प्रतिक्रिया प्रयासों में सुधार किया जा सके।<ref>Wilcox, S. and Brown, B. (2005) 'Responding to Security Incidents – Sooner or Later Your Systems Will Be Compromised', ''Journal of Health Care Compliance'', 7(2), pp. 41–48</ref>
== इन्हें भी देखें ==
{{Portal|कंप्यूटर}}
{{multicol}}
* अटैक ट्री
* प्रमाणीकरण
* प्राधिकरण
* कॅप्चा (CAPTCHA)
* सीईआरटी (CERT)
* क्लाउड कंप्यूटिंग सुरक्षा
* कंप्यूटर असुरक्षा
* कंप्यूटर सुरक्षा मॉडल
* काउंटरमेज़र (कंप्यूटर)
* [[बीज-लेखन|कूट-लेखन]]
* साइबर सुरक्षा मानक
* नाचते सूअर
* डिस्क एन्क्रिप्शन
* डेटा हानि की रोकथाम के उत्पाद
* डेटा सुरक्षा
* विभेदित सुरक्षा
* शोषण (कंप्यूटर सुरक्षा)
* दोष सहिष्णुता
* फायरवॉल
* पूर्ण प्रकटीकरण
* उच्च प्रौद्योगिकी अपराध जांच संघ
{{multicol-break}}
* ह्युमन-कंप्यूटर संपर्क (सुरक्षा)
* अभिज्ञान प्रबंधन
* सूचना रिसाव निवारण
* सूचना सुरक्षा
* इंटरनेट की गोपनीयता
* आईटी (IT) जोखिम
* आईएसओ/आईईसी (ISO/IEC) 15408
* नेटवर्क सुरक्षा टूलकिट
* नेटवर्क सुरक्षा
* ओडब्ल्यूएएसपी (OWASP)
* निवेश परीक्षा
* शारीरिक सूचना सुरक्षा
* शारीरिक सुरक्षा
* प्रकल्पित सुरक्षा
* प्रोएक्टिव साइबर डिफेन्स
* सैंडबॉक्स (कंप्यूटर सुरक्षा)
* सुरक्षा वास्तुकला
* संरक्षण और सुरक्षा के भिन्नता
* भय (कंप्यूटर)
* अरक्षितता (कंप्यूटिंग)
* गोपनीयता सॉफ्टवेयर
{{multicol-end}}
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची|3}}
===उद्धरण===
<div class="references-small">
* रॉस जे. एंडरसन: <cite>[https://web.archive.org/web/20110226114349/http://www.cl.cam.ac.uk/~rja14/book.html सिक्युरिटी इंजीनियरिंग: अ गाइड टू बिल्डिंग डिपेंडबल डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम्स]</cite>, ISBN 0-471-38922-6
* मोरी गैसर: [https://web.archive.org/web/20110516000305/http://cs.unomaha.edu/~stanw/gasserbook.pdf <cite>बिल्डिंग अ सिक्युर कंप्यूटर सिस्टम</cite>]</cite> ISBN 0-442-23022-2 1988
* स्टीफन हाग, मैव कमिंग्स, डॉनल्ड मैककबरी, एलेन पिंसोंनिऔल्ट, रिचर्ड डोनोवन: <cite>मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम्स फॉर द इंफॉर्मेशन एज</cite>, ISBN 0-07-091120-7
* ई. स्टीवर्ट ली: [https://web.archive.org/web/20110604181418/http://www.cl.cam.ac.uk/~mgk25/lee-essays.pdf <cite>एसेज़ अबाउट कंप्यूटर सिक्युरिटी</cite>]</cite> कैम्ब्रिज, 1999
* पीटर जी न्यूमैन: [http://www.csl.sri.com/neumann/chats4.pdf <cite>प्रिंसिपल्ड अश्योर्डली ट्रस्टवर्दी कौम्पोज़बल आर्किटेकचर्स</cite>]{{Dead link|date=जून 2023 |bot=InternetArchiveBot }}</cite> 2004
* पॉल ए कर्गेर, रॉजर आर. शेल: [http://www.acsac.org/2002/papers/classic-multics.pdf<cite>थर्टी इयर्स लेटर: लेसंस फ्रॉम द मल्टिक्स सेक्युरिटी एवैल्युएशन</cite>]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}, आईबीएम (IBM) व्हाइट पेपर.
* ब्रूस श्नीडर: <cite>सीक्रेट्स एंड लाइज़: डिजिटल सिक्युरिटी इन अ नेटवर्क्ड वर्ल्ड</cite>, ISBN 0-471-25311-1
* रॉबर्ट सी. सीकॉर्ड:<cite> सिक्युर कोडिंग इन C and C++</cite>. एडिसन वेस्ली, सितंबर, 2005. ISBN 0-321-33572-4
* क्लिफर्ड स्टोल: <cite>ककुज़ एग: ट्रेकिंग अ स्पाई थ्रू द मेज़ ऑफ़ कंयूटर एस्पिएनेज</cite>, पॉकेट बुक्स, ISBN 0-7434-1146-3
* [https://web.archive.org/web/20090507174754/http://www.springer.com/computer/communications/book/978-1-4419-0165-1 ''नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्युरिटी'' ], एंगस वोंग और एलन यौंग, स्प्रिंगर, 2009.
</div>
==बाहरी कड़ियाँ==
{{Commonscat|कंप्यूटर सुरक्षा}}
* [[मुक्त निर्देशिका परियोजना|ओपन डाइरेक्ट्री प्रोजेक्ट]] से [https://web.archive.org/web/20110308061312/http://www.dmoz.org/Computers/Security/Advisories_and_Patches सिक्युरिटी एडवाइज़रिज़ लिंक्स]
* नेटवर्क वर्ल्ड से [https://web.archive.org/web/20101229221246/https://www.networkworld.com/community/node/59971 शीर्ष 5 सिक्युरिटी नो ब्रेनर्स फॉर बिजनीसेज़]
* [https://web.archive.org/web/20110426194554/http://www.securityincidents.org/ औद्योगिक सुरक्षा घटनाओं के भंडार]
{{DEFAULTSORT:Computer Security}}
[[श्रेणी:कंप्यूटर सुरक्षा]]
[[श्रेणी:इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य]]
[[श्रेणी:सुरक्षित संचार]]
[[श्रेणी:कंप्यूटर नेटवर्क सुरक्षा]]
[[श्रेणी:अपराध निवारण]]
[[श्रेणी:राष्ट्रीय सुरक्षा]]
crjojez5n0jrlsucuvbaj013nsqu0wk
विकिपीडिया वार्ता:अपलोड
5
446164
6591523
6590909
2026-07-24T10:54:29Z
SM7
89247
[[विशेष:योगदान/DreamRimmer|DreamRimmer]] ([[सदस्य वार्ता:DreamRimmer|वार्ता]]) के अवतरण 6582934 पर पुनर्स्थापित : Rv / test
6591523
wikitext
text/x-wiki
{{वार्ता शीर्ष}}
tko106qz2rso0prevd9fq6pmmoht0nz
सदस्य वार्ता:SM7
3
520128
6591473
6587025
2026-07-24T05:37:46Z
Pushkar Singh
415569
/* Wikidata की जानकारी */ नया अनुभाग
6591473
wikitext
text/x-wiki
<!-- Please do NOT delete this line. Thanks! -->{{/header}}
<!-- कृपया इस लाइन और ऊपर की लाइन को को न हटायें, धन्यवाद !-->
== नए साल की शुभकामनाएँ ==
<div style="background:#E8F5E9; padding:10px; border:1px solid #81C784; border-radius:6px;">
'''SM7 जी, नववर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ!'''
यह नया साल आपके और आपके परिवार के लिए अच्छा स्वास्थ्य, सफलता और सुख-समृद्धि लेकर आए।
[[File:Everlasting Fireworks looped.gif|left|x173px]]
हिंदी विकिपीडिया पर आपके योगदान के लिए धन्यवाद।
[[सदस्य:Chronos.Zx|<span style="color:blue; font-weight:bold;">क्रोनोस.Zx</span>]] ([[सदस्य वार्ता:Chronos.Zx|वार्ता]]) 13:15, 1 जनवरी 2026 (UTC)
</div>
:@[[सदस्य:Chronos.Zx|Chronos.Zx]] जी, बहुत-बहुत धन्यवाद। आपको भी नववर्ष अत्यंत मंगलमय हो। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 17:24, 2 जनवरी 2026 (UTC)
== विशेष: कार्यक्रम आयोजक अधिकार ==
नमस्ते [[सदस्य:SM7|SM7]], आप मुझे कार्यक्रम आयोजक के अधिकार के आवेदन दर्ज करने के लिए पृष्ठ बताने के कृपा करे | [[सदस्य:Dev Jadiya|Dev Jadiya]] ([[सदस्य वार्ता:Dev Jadiya|वार्ता]]) 09:08, 18 मार्च 2026 (UTC)
== व7 के अंतर्गत हटाए गए लेख के पुनर्विचार हेतु अनुरोध ==
@[[सदस्य:SM7|SM7]] महोदय, मैं आपको [[कमलेश कमल]] लेख के संबंध में लिख रहा हूँ जिसे आपने [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व7|व7]] के अंतर्गत हटाया था।
जब लेख को शीघ्र हटाने के लिए चिह्नित किया गया, तब मैंने तुरंत उठाई गई आपत्तियों को दूर करने के लिए आवश्यक बदलाव किए। मैंने पूरे लेख में महत्वपूर्ण सुधार किए, जिसमें प्रचारात्मक और प्रशंसात्मक भाषा हटाना, सामग्री को निष्पक्ष दृष्टिकोण (neutral point of view) में दोबारा लिखना, और इसे अधिक विश्वकोशीय बनाने के लिए विस्तार करना शामिल था।
मेरा मानना है कि संशोधित संस्करण अब प्रचारात्मक नहीं था, या कम से कम इतना नहीं कि उसे व7 के अंतर्गत हटाया जाए। मैंने इन परिवर्तनों का उल्लेख लेख के वार्ता पृष्ठ पर भी किया था।
मेरी समझ के अनुसार, व7 उन पृष्ठों पर लागू होता है जो पूरी तरह से प्रचारात्मक होते हैं और जिनमें सुधार की संभावना नहीं होती। किए गए सुधारों को देखते हुए, आपसे निवेदन है कि कृपया लेख को पुनर्स्थापित करने पर विचार करें।
साथ ही, यदि कोई अन्य कमी या समस्या शेष हो, तो कृपया उसे बताने का कष्ट करें ताकि मैं सामग्री में और सुधार कर सकूँ। [[सदस्य:BBBhagwati|BBBhagwati]] ([[सदस्य वार्ता:BBBhagwati|वार्ता]]) 16:41, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
== रोलबैक अधिकार के नामांकन पर आपके विचार/मत हेतु ==
<div style="background-color: #FFF9E6; padding: 15px; border: 1px solid #DAA520; border-radius: 8px; margin-top: 10px;">
नमस्ते, आशा है आप सकुशल होंगे।
मैं पिछले कुछ समय से हिंदी विकिपीडिया पर सक्रिय रूप से गश्त कर रहा हूँ और हाल के बदलावों में स्पष्ट बर्बरता को हटाने का प्रयास कर रहा हूँ। अपने इस कार्य को और अधिक सुचारू बनाने के लिए, मैंने स्वयं को '''रोलबैक अधिकार''' के लिए नामांकित किया है।
चूँकि आप हिंदी विकिपीडिया के एक अनुभवी सदस्य हैं, इसलिए मेरा आपसे विनम्र आग्रह है कि कृपया मेरे हालिया योगदानों की समीक्षा करें और अपना बहुमूल्य मत या सुझाव प्रदान करें। आपका समर्थन और मार्गदर्शन मेरे लिए अत्यंत उत्साहजनक होगा।
'''नामांकन यहाँ देखें:''' [[विकिपीडिया:रोलबैकर्स अधिकार हेतु निवेदन#AMAN KUMAR|मेरे नामांकन पर अपना मत दें]]
सहयोग के लिए अग्रिम धन्यवाद!
सादर,<br>
[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 11:29, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
</div>
== पिण्डार या पिण्डर नदी ==
नमस्ते SM7 जी, मैं आज [[पिण्डार नदी]] नामक लेख पर देख रहा हूँ कि आपने इसके समकक्ष भोजपुरी लेख निर्मित किया। वहाँ आपने शीर्षक में "पिण्डार" के स्थान पर "पिंडर" रखा। इस हिसाब से यहाँ भी "पिण्डर नदी" या "पिंडर नदी" होना चाहिए। यदि आपको सही लगता है तो यह स्थानान्तरण कर देना चाहिए। मुझे इसकी सही जानकारी नहीं है।<span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 18:36, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय, अब जांचा तो कुछ उदाहरण मिले
:*[https://www.livehindustan.com/uttarakhand/story-garhwal-pindar-river-water-poured-into-kumaon-kosi-river-jal-jeevan-mission-6775827.html लाइव हिन्दुस्तान]
:* [https://www.jagran.com/uttarakhand/almora-pindar-river-water-advocates-for-release-in-nonviolent-rivers-19447355.html दैनिक जागरण]
:* [https://www.drishtiias.com/hindi/state-pcs-current-affairs/pindari-glacier-to-make-kumaon-s-drying-rivers-sadaneera दृष्टि आईएएस]
:इन संदर्भों के अनुसार इसका नाम स्थानांतरण करके [[पिंडर नदी]] करना चाहिए| [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 18:56, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] @[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] हाँ, इसके नाम में ड पर आ की मात्रा नहीं है। मैं इस नदी का पानी भी पी चुका हूँ, पर मेरी हिम्मत नहीं कि मैं आधा ण हटाऊँ। यह विवादास्पद बदलाव लेख के वार्ता पन्ने पे चर्चा के बाद पर्याप्त समर्थन से किया जाय तो बेहतर होगा। सादर। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 08:37, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
:::जी, चर्चा के बिना मैं स्थानान्तरित कर सकता हूँ। बाकी आप चाहो तो चर्चा भी आरम्भ कर सकते हैं। @[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी, आपने जो स्रोत दिये हैं उनमें पिंडर और पिंडार दोनों लिखे हैं। इसके अतिरिक्त दृष्टि आईएएस वाला स्रोत विश्वसनीय नहीं है जबकि समाचार वाले भी एकरूप नहीं होने के कारण उचित नहीं माने जा सकते। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 13:41, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
::::कृपया {{tlx|virusbox}} को भी देखें। इसे आपने बहुत पहले आयात किया था लेकिन सम्बंधित मोड्यूल का आयात नहीं किया गया। @[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी ने {{tlx|विषाणु}} क्यों निर्मित किया है, मुझे इसका कोई कारण समझ में नहीं आया। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 13:45, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
::::नमस्ते SM7 जी, @[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, आप स्थानान्तरित कर सकते है। खोजने पर काफ़ी विश्वसनीय स्रोत है, जिन में '''पिंडर नदी''' ही लिखा है। [https://www.google.co.th/books/edition/Prachin_Madhya_Himalaya_izkphu_e_fgeky/SeKkhjTwMbcC?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0+%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80&pg=PA8&printsec=frontcover], [https://www.google.co.th/books/edition/2026_27_UKPSV_UKSSSC_Special_General_Stu/YOS4EQAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0+%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80&pg=PA132&printsec=frontcover], [https://www.google.co.th/books/edition/Aao_Karen_Himalaya_Mein_Trekking/qfVzBQAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0+%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80&pg=PA95&printsec=frontcover] <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 13:55, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
:::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय,
:::::नदी के नाम पर उचित मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद। वर्तनी के संबंध में आपका निर्णय मुझे पूरी तरह स्वीकार है, कृपया आप ही इसे उपयुक्त नाम पर स्थानांतरित कर दें।
:::::'''<code><nowiki>{{विषाणु}}</nowiki></code>''' साँचे के निर्माण का कारण केवल तकनीकी था। पुराना <code><nowiki>{{virusbox}}</nowiki></code> साँचा संबंधित मॉड्यूल्स के अभाव में काम नहीं कर रहा था और लेखों में कोडिंग की त्रुटियाँ (error) दिखा रहा था। मुझे जटिल मॉड्यूल आयात करने की जानकारी नहीं थी, इसलिए लेखों को त्रुटिमुक्त करने के लिए मैंने सीधे स्वदेशी '''<code><nowiki>{{ज्ञानसंदूक}}</nowiki></code>''' ढाँचे का उपयोग करके यह नया साँचा बनाया, जिसे किसी बाहरी मॉड्यूल की आवश्यकता ही नहीं है। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 13:58, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
::::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, मैं मूल साँचे को और मॉड्यूल को अद्यतन कर दूंगा। वैसे यह मुझे भी समझ में नहीं आया कि जब यह बिना मॉड्यूल के काम नहीं कर रहा तो मैंने यह काम अधूरा क्यों छोड़ा। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 18:53, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
==जिज्ञासा==
नमस्कार! SM7 जी, लेख हटाने हेतु चल रही चर्चाओं के संबंध में एक जिज्ञासा है। सामान्यतः ऐसी चर्चाओं की एक निर्धारित समयसीमा होती है, किन्तु देखा गया है कि [[:श्रेणी:लेख हटाने हेतु वर्तमान चर्चाएँ|कई चर्चाएँ लंबे समय तक बिना किसी निष्कर्ष]] के लंबित रहती हैं। कुछ लेखों पर हुई चर्चाओं का अभी तक कोई स्पष्ट परिणाम सामने नहीं आया है कि उन्हें रखा जाना है या हटाया जाना है।
* जिज्ञासा ये है की सामान्यतः इन चर्चाओं के निष्कर्ष तक पहुँचने की समय-सीमा क्या निर्धारित होती है तथा किन परिस्थितियों में इनका परिणाम घोषित किया जाता है।<span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 09:56, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]] जी, यह इस बात पे निर्भर है कि चर्चा में भागीदार लोग कितने हैं और उनके मतों के आधार पर स्पष्ट राय क्या निकल कर आई है। अंग्रेजी की तरह यहाँ पर समय सीमा या रीलिस्ट करने जैसा कुछ नहीं है। ऐसी चर्चाओं में सदस्यों की कम भागीदारी हिंदी विकिपीडिया की एक बड़ी समस्या है। ऐसी ही स्थिति नाम बदलाव या कुछ अन्य चीजों को लेकर भी है जहाँ काम इसलिए लंबित रहता है क्योंकि चर्चा में भाग लेने वाले लोग नहीं हैं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 18:34, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
== सुझाव दें ==
@[[सदस्य:SM7|SM7]] महोदय मैने [[विकिपीडिया:चौपाल|चौपाल]] पर एक प्रस्ताव रखा है
[[विकिपीडिया:चौपाल#पृष्ठ स्थानांतरण (Page Move) अधिकार और नए सुरक्षा स्तर पर पुनर्विचार हेतु प्रस्ताव|पृष्ठ स्थानांतरण (Page Move) अधिकार और नए सुरक्षा स्तर पर पुनर्विचार हेतु प्रस्ताव]] [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 19:00, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
==निवेदन पर मत आमंत्रण==
नमस्कार, SM7 जी! मेरे [[विकिपीडिया:स्वतः_परीक्षित_अधिकार_हेतु_निवेदन#चाहर_धर्मेंद्र|स्वतः परीक्षित अधिकार हेतु किए गए निवेदन]] के संबंध में आपके विचार मेरे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। आपसे विनम्र निवेदन है कि कृपया समय निकालकर इस पर अपना मत अवश्य प्रदान करें।
* आपके सुझाव एवं प्रतिक्रिया मेरे लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे।<span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 04:30, 22 अप्रैल 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]] जी, कोई चर्चा शुरू करके उसकी सूचना चौपाल पे दे देना पर्याप्त होता है। जिसे मन होगा ज़रूर चर्चा में हिस्सा लेगा। अपने द्वारा शुरू की गई चर्चा (विशेषकर कोई नामांकन) पर घूम-घूम के सबसे वार्ता पन्ने पे संदेश लिखना उचित नहीं होता, यह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव प्रचार (कैनवासिंग) है और इस तरह के काम को मैं बिल्कुल पसंद नहीं करता; हालाँकि, जब मैं नया था तब मैंने भी ऐसे काम किये थे। बाद में समझ में आया कि यह बेवजह की उछलकूद है।
:मैं आपके स्वनामंकन से पहले ही कुछ दिनों पूर्व ख़ुद आपका नामांकन करने के बारे में सोच रहा था; फिर जब आपने नामांकन किया तब समर्थन करने की भी सोच रहा था। अब आपने यहाँ संदेश लिख दिया। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 05:46, 22 अप्रैल 2026 (UTC)
::SM7 जी! आपके सुझाव एवं मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद। मैं आपकी बात से सहमत हूँ और भविष्य में इस प्रकार की सूचना देने के संबंध में अधिक सावधानी रखूँगा।
::* मेरा उद्देश्य केवल सूचना साझा करना था, न कि किसी प्रकार का कैनवासिंग करना। यदि इससे असुविधा हुई हो तो उसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ।
::आपके समर्थन के विचार के लिए भी धन्यवाद। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 06:07, 22 अप्रैल 2026 (UTC)
== लेख निर्वाचन नामांकन ==
SM7 जी! क्या ‘[[राष्ट्रीय उद्यान]]’ लेख को निर्वाचित लेख हेतु नामांकित करना उपयुक्त होगा? आपसे अनुरोध है कि कृपया समय निकालकर एक बार लेख का अवलोकन करें और मार्गदर्शन प्रदान करें कि क्या इसमें किसी प्रकार के और सुधार या संशोधन की आवश्यकता है।
आपके सुझाव मेरे लिए अत्यंत उपयोगी होंगे। <span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 15:10, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]] जी नमस्ते। लेख अच्छा बनाया है आपने और आप इसपर बेहतरीन कार्य करने के लिये बधाई के पात्र हैं। मेरा सुझाव है कि आप इसे पहले '''[[वि:श्रेष्ठ लेख|श्रेष्ठ लेख]]''' हेतु नामांकित करें। इसके मापदंड निर्वाचित लेख की तुलना में थोड़े हल्के और आसान हैं। हालाँकि, हिंदी विकिपीडिया पर श्रेष्ठ लेख बनाने की प्रक्रिया उपलब्ध और लागू है पर आज तक किसी ने इसका उपयोग नहीं किया। तो हो सकता है आप '''श्रेष्ठ लेख बनाने वाले पहले विकिपीडियन''' बनें। (वैसे मैंने अभी देखा कि एक नामांकन 2018 में नवीन सिंह जी द्वारा किया गया था परंतु उसकी समीक्षा नहीं हुई - शायद उन्होंने सूचित नहीं किया चौपाल पे)।
:एक बार श्रेष्ठ लेख के लिये प्रारंभिक समीक्षा हो जाने के बाद आप इसे '''निर्वाचित लेख''' के लिये भी नामांकित कर सकते हैं - जहाँ सामूहिक समीक्षा और सुधार सुझाये जायेंगे। अतः आप स्टेप-बाई-स्टेप चलें तो बेहतर होगा।
:बाक़ी आपकी मर्जी है। अगर आप निर्वाचित लेख नामांकन करना चाहें तो सीधे भी कर सकते हैं। बस एक बात का ध्यान रखियेगा कि निर्वाचित लेख घोषित होने में काफ़ी समय लग सकता है - क्योंकि यहाँ समीक्षा इत्यादि में भाग लेने वालों की काफ़ी कमी है।
:मैं दोनों ही प्रक्रियाओं में आपकी मदद अवश्य कर सकता हूँ। शुभकामनायें। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 15:46, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
::नमस्कार, SM7 जी! लेख के संबंध में आपके विस्तृत सुझाव एवं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक धन्यवाद। आपने जो चरणबद्ध प्रक्रिया (पहले श्रेष्ठ लेख, तत्पश्चात निर्वाचित लेख) सुझाई है, वह अत्यंत उपयोगी एवं व्यावहारिक प्रतीत होती है।
::मैं आपके सुझाव के अनुसार पहले इसे श्रेष्ठ लेख हेतु नामांकित करने पर विचार करूँगा, ताकि प्रारंभिक समीक्षा के माध्यम से आवश्यक सुधार किए जा सकें। इसके पश्चात निर्वाचित लेख के लिए नामांकन करना अधिक उपयुक्त रहेगा।
::आगे की प्रक्रिया में आपके सहयोग के प्रस्ताव के लिए भी धन्यवाद—यह मेरे लिए अत्यंत सहायक होगा। <span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 01:53, 27 अप्रैल 2026 (UTC)
:::@[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]] दोनों में अंतर के लिये कृपया एक बार [[:en:WP:GVF|WP:GVF]] देखें। और जहाँ तक मुझे नियमावली याद है, वर्तमान सक्रिय सदस्यों में [[स:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी ही इकलौते सदस्य हैं जो इस समीक्षा को क्रियान्वित करने के लिये अर्ह हैं। अतः चौपाल पर और संजीव जी को अवश्य सूचित कीजियेगा। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 02:00, 27 अप्रैल 2026 (UTC)
::::जी, सूचना एवं मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद। आपके सुझाव के अनुसार मैं चौपाल पर तथा संजीव कुमार जी को भी अवश्य सूचित करूँगा, ताकि समीक्षा प्रक्रिया उचित रूप से आगे बढ़ सके। <span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 02:33, 27 अप्रैल 2026 (UTC)
== रोड़ लेख संबंध में==
'[[रोड़]]’ लेख तथा ‘[[वार्ता:रोड़]]’ पृष्ठ पर बार-बार जोड़ी जा रही जानकारी के संदर्भों की जाँच करने पर विषय से संबंधित कोई भी पर्याप्त एवं विश्वसनीय जानकारी प्राप्त नहीं हो रही है। कृपया इस संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करें कि ऐसी स्थिति में क्या उपयुक्त कार्यवाही की जानी चाहिए।<span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 14:27, 29 अप्रैल 2026 (UTC)
== नाम परिवर्तन ==
SM7 जी नमस्ते। ‘[[जेचेम पेंट]]’ लेख हाल ही में निर्मित किया गया है, जबकि सॉफ़्टवेयर का प्रचलित एवं उपयुक्त नाम “जेकेमपेंट” एक शब्द के रूप में प्रयोग होता है। अतः शीर्षक का इस रूप में होना अधिक उचित प्रतीत होता है।
चूँकि लेख अभी नया है, कृपया मार्गदर्शन प्रदान करने का कष्ट करें कि क्या इस स्थिति में सीधे स्थानांतरण (नाम परिवर्तन) किया जा सकता है, अथवा इसके लिए औपचारिक अनुरोध प्रक्रिया अपनाना आवश्यक होगा।<span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 09:20, 30 अप्रैल 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]] जी, आप आश्वस्त हों तो सीधे कर दें। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 11:55, 30 अप्रैल 2026 (UTC)
== [[:साँचा:Personbox|साँचा:Personbox]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:साँचा:Personbox|साँचा:Personbox]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।
अप्रचलित साँचा
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं।
== क्या यह उचित है। ==
महोदय, मैने एक नया खाता [[सदस्य:AMAN KUMAR Bot]] बनाया है जिसके माध्यम से bot के लिए परीक्षण कर रहा हूं अभी [[विकिपीडिया:बॉट/अनुमोदन हेतु अनुरोध]] नहीं किया है। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 03:06, 13 जून 2026 (UTC)
== हटाए गए लेख के पुनर्निर्माण एवं शीह टैग हटाने के संबंध में ==
SM7 जी नमस्ते! ‘स्टोरिको सेरामिका’ लेख को पूर्व में दो बार साफ़ प्रचार मापदंड के अंतर्गत हटाया जा चुका है। इसके बावजूद, ‘[[स्टोरिको सेरामिका (एलएलपी)]]’ नाम से लेख को पुनः निर्मित किया गया है।
साथ ही, इस पर किए गए शीघ्र हटाने के अनुरोध को भी बार-बार हटाया जा रहा है। ऐसी स्थिति में कृपया इस विषय की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई करने का कष्ट करें, ताकि बार-बार पुनर्निर्माण एवं अनुचित रूप से हटाए जा रहे अनुरोधों की समस्या का समाधान हो सके।<span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 18:27, 26 जून 2026 (UTC)
== [[:अंडकाश्म/अडुक|अंडकाश्म/अडुक]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:अंडकाश्म/अडुक|अंडकाश्म/अडुक]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल4|मापदंड ल4]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल4|ल4]]{{*}} प्रतिलिपि लेख'''</center>
इस मापदंड के अंतर्गत वो लेख आते हैं जो किसी पुराने लेख की प्रतिलिपि हैं। इसमें वे लेख भी आते हैं जो किसी ऐसे विषय पर बनाए गए हैं जिनपर पहले से लेख मौजूद है और पुराना लेख नए लेख से बेहतर है।
कृपया लेख बनाने से पहले उस शीर्षक के लिये [[विशेष:Search|खोज]] कर लिया करें। यदि आप इस विषय पर और लिखना चाहते हैं तो मूल लेख पर लिखें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:01, 9 जुलाई 2026 (UTC)
== Compromise ==
Hey, if you'd like to adjust the block I'm letting you know there are no signs of an account compromise on [[User:अनुज साव22]]. Best regards! [[सदस्य:A09|A09]] ([[सदस्य वार्ता:A09|वार्ता]]) 08:23, 18 जुलाई 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:A09|A09]] Thanks. I checked he is deleting contents from articles created by himself. Let him reply what exactly is the reason. Regards. --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 09:05, 18 जुलाई 2026 (UTC)
== Wikidata की जानकारी ==
मैंने अपना सदस्य पृष्ठ रिक्त कर दिया है लेकिन meta Wiki की जानकारी कैसे दिखेगी पृष्ठ पर। हो सके तो इसका समाधान कर दीजिए। [[सदस्य:Pushkar Singh|<span style="color:DeepPink;">पुष्कर सिंह</span>]] [[सदस्य वार्ता:Pushkar Singh|<span style="color:Red;">✉️</span>]] 05:37, 24 जुलाई 2026 (UTC)
r4pirdldh5uxu2m3o42pt8oidw4ypin
6591506
6591473
2026-07-24T08:36:39Z
AMAN KUMAR
911487
/* जाँच करें */ नया अनुभाग
6591506
wikitext
text/x-wiki
<!-- Please do NOT delete this line. Thanks! -->{{/header}}
<!-- कृपया इस लाइन और ऊपर की लाइन को को न हटायें, धन्यवाद !-->
== नए साल की शुभकामनाएँ ==
<div style="background:#E8F5E9; padding:10px; border:1px solid #81C784; border-radius:6px;">
'''SM7 जी, नववर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ!'''
यह नया साल आपके और आपके परिवार के लिए अच्छा स्वास्थ्य, सफलता और सुख-समृद्धि लेकर आए।
[[File:Everlasting Fireworks looped.gif|left|x173px]]
हिंदी विकिपीडिया पर आपके योगदान के लिए धन्यवाद।
[[सदस्य:Chronos.Zx|<span style="color:blue; font-weight:bold;">क्रोनोस.Zx</span>]] ([[सदस्य वार्ता:Chronos.Zx|वार्ता]]) 13:15, 1 जनवरी 2026 (UTC)
</div>
:@[[सदस्य:Chronos.Zx|Chronos.Zx]] जी, बहुत-बहुत धन्यवाद। आपको भी नववर्ष अत्यंत मंगलमय हो। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 17:24, 2 जनवरी 2026 (UTC)
== विशेष: कार्यक्रम आयोजक अधिकार ==
नमस्ते [[सदस्य:SM7|SM7]], आप मुझे कार्यक्रम आयोजक के अधिकार के आवेदन दर्ज करने के लिए पृष्ठ बताने के कृपा करे | [[सदस्य:Dev Jadiya|Dev Jadiya]] ([[सदस्य वार्ता:Dev Jadiya|वार्ता]]) 09:08, 18 मार्च 2026 (UTC)
== व7 के अंतर्गत हटाए गए लेख के पुनर्विचार हेतु अनुरोध ==
@[[सदस्य:SM7|SM7]] महोदय, मैं आपको [[कमलेश कमल]] लेख के संबंध में लिख रहा हूँ जिसे आपने [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व7|व7]] के अंतर्गत हटाया था।
जब लेख को शीघ्र हटाने के लिए चिह्नित किया गया, तब मैंने तुरंत उठाई गई आपत्तियों को दूर करने के लिए आवश्यक बदलाव किए। मैंने पूरे लेख में महत्वपूर्ण सुधार किए, जिसमें प्रचारात्मक और प्रशंसात्मक भाषा हटाना, सामग्री को निष्पक्ष दृष्टिकोण (neutral point of view) में दोबारा लिखना, और इसे अधिक विश्वकोशीय बनाने के लिए विस्तार करना शामिल था।
मेरा मानना है कि संशोधित संस्करण अब प्रचारात्मक नहीं था, या कम से कम इतना नहीं कि उसे व7 के अंतर्गत हटाया जाए। मैंने इन परिवर्तनों का उल्लेख लेख के वार्ता पृष्ठ पर भी किया था।
मेरी समझ के अनुसार, व7 उन पृष्ठों पर लागू होता है जो पूरी तरह से प्रचारात्मक होते हैं और जिनमें सुधार की संभावना नहीं होती। किए गए सुधारों को देखते हुए, आपसे निवेदन है कि कृपया लेख को पुनर्स्थापित करने पर विचार करें।
साथ ही, यदि कोई अन्य कमी या समस्या शेष हो, तो कृपया उसे बताने का कष्ट करें ताकि मैं सामग्री में और सुधार कर सकूँ। [[सदस्य:BBBhagwati|BBBhagwati]] ([[सदस्य वार्ता:BBBhagwati|वार्ता]]) 16:41, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
== रोलबैक अधिकार के नामांकन पर आपके विचार/मत हेतु ==
<div style="background-color: #FFF9E6; padding: 15px; border: 1px solid #DAA520; border-radius: 8px; margin-top: 10px;">
नमस्ते, आशा है आप सकुशल होंगे।
मैं पिछले कुछ समय से हिंदी विकिपीडिया पर सक्रिय रूप से गश्त कर रहा हूँ और हाल के बदलावों में स्पष्ट बर्बरता को हटाने का प्रयास कर रहा हूँ। अपने इस कार्य को और अधिक सुचारू बनाने के लिए, मैंने स्वयं को '''रोलबैक अधिकार''' के लिए नामांकित किया है।
चूँकि आप हिंदी विकिपीडिया के एक अनुभवी सदस्य हैं, इसलिए मेरा आपसे विनम्र आग्रह है कि कृपया मेरे हालिया योगदानों की समीक्षा करें और अपना बहुमूल्य मत या सुझाव प्रदान करें। आपका समर्थन और मार्गदर्शन मेरे लिए अत्यंत उत्साहजनक होगा।
'''नामांकन यहाँ देखें:''' [[विकिपीडिया:रोलबैकर्स अधिकार हेतु निवेदन#AMAN KUMAR|मेरे नामांकन पर अपना मत दें]]
सहयोग के लिए अग्रिम धन्यवाद!
सादर,<br>
[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 11:29, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
</div>
== पिण्डार या पिण्डर नदी ==
नमस्ते SM7 जी, मैं आज [[पिण्डार नदी]] नामक लेख पर देख रहा हूँ कि आपने इसके समकक्ष भोजपुरी लेख निर्मित किया। वहाँ आपने शीर्षक में "पिण्डार" के स्थान पर "पिंडर" रखा। इस हिसाब से यहाँ भी "पिण्डर नदी" या "पिंडर नदी" होना चाहिए। यदि आपको सही लगता है तो यह स्थानान्तरण कर देना चाहिए। मुझे इसकी सही जानकारी नहीं है।<span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 18:36, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय, अब जांचा तो कुछ उदाहरण मिले
:*[https://www.livehindustan.com/uttarakhand/story-garhwal-pindar-river-water-poured-into-kumaon-kosi-river-jal-jeevan-mission-6775827.html लाइव हिन्दुस्तान]
:* [https://www.jagran.com/uttarakhand/almora-pindar-river-water-advocates-for-release-in-nonviolent-rivers-19447355.html दैनिक जागरण]
:* [https://www.drishtiias.com/hindi/state-pcs-current-affairs/pindari-glacier-to-make-kumaon-s-drying-rivers-sadaneera दृष्टि आईएएस]
:इन संदर्भों के अनुसार इसका नाम स्थानांतरण करके [[पिंडर नदी]] करना चाहिए| [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 18:56, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] @[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] हाँ, इसके नाम में ड पर आ की मात्रा नहीं है। मैं इस नदी का पानी भी पी चुका हूँ, पर मेरी हिम्मत नहीं कि मैं आधा ण हटाऊँ। यह विवादास्पद बदलाव लेख के वार्ता पन्ने पे चर्चा के बाद पर्याप्त समर्थन से किया जाय तो बेहतर होगा। सादर। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 08:37, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
:::जी, चर्चा के बिना मैं स्थानान्तरित कर सकता हूँ। बाकी आप चाहो तो चर्चा भी आरम्भ कर सकते हैं। @[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी, आपने जो स्रोत दिये हैं उनमें पिंडर और पिंडार दोनों लिखे हैं। इसके अतिरिक्त दृष्टि आईएएस वाला स्रोत विश्वसनीय नहीं है जबकि समाचार वाले भी एकरूप नहीं होने के कारण उचित नहीं माने जा सकते। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 13:41, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
::::कृपया {{tlx|virusbox}} को भी देखें। इसे आपने बहुत पहले आयात किया था लेकिन सम्बंधित मोड्यूल का आयात नहीं किया गया। @[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी ने {{tlx|विषाणु}} क्यों निर्मित किया है, मुझे इसका कोई कारण समझ में नहीं आया। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 13:45, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
::::नमस्ते SM7 जी, @[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, आप स्थानान्तरित कर सकते है। खोजने पर काफ़ी विश्वसनीय स्रोत है, जिन में '''पिंडर नदी''' ही लिखा है। [https://www.google.co.th/books/edition/Prachin_Madhya_Himalaya_izkphu_e_fgeky/SeKkhjTwMbcC?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0+%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80&pg=PA8&printsec=frontcover], [https://www.google.co.th/books/edition/2026_27_UKPSV_UKSSSC_Special_General_Stu/YOS4EQAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0+%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80&pg=PA132&printsec=frontcover], [https://www.google.co.th/books/edition/Aao_Karen_Himalaya_Mein_Trekking/qfVzBQAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0+%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80&pg=PA95&printsec=frontcover] <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 13:55, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
:::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय,
:::::नदी के नाम पर उचित मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद। वर्तनी के संबंध में आपका निर्णय मुझे पूरी तरह स्वीकार है, कृपया आप ही इसे उपयुक्त नाम पर स्थानांतरित कर दें।
:::::'''<code><nowiki>{{विषाणु}}</nowiki></code>''' साँचे के निर्माण का कारण केवल तकनीकी था। पुराना <code><nowiki>{{virusbox}}</nowiki></code> साँचा संबंधित मॉड्यूल्स के अभाव में काम नहीं कर रहा था और लेखों में कोडिंग की त्रुटियाँ (error) दिखा रहा था। मुझे जटिल मॉड्यूल आयात करने की जानकारी नहीं थी, इसलिए लेखों को त्रुटिमुक्त करने के लिए मैंने सीधे स्वदेशी '''<code><nowiki>{{ज्ञानसंदूक}}</nowiki></code>''' ढाँचे का उपयोग करके यह नया साँचा बनाया, जिसे किसी बाहरी मॉड्यूल की आवश्यकता ही नहीं है। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 13:58, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
::::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, मैं मूल साँचे को और मॉड्यूल को अद्यतन कर दूंगा। वैसे यह मुझे भी समझ में नहीं आया कि जब यह बिना मॉड्यूल के काम नहीं कर रहा तो मैंने यह काम अधूरा क्यों छोड़ा। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 18:53, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
==जिज्ञासा==
नमस्कार! SM7 जी, लेख हटाने हेतु चल रही चर्चाओं के संबंध में एक जिज्ञासा है। सामान्यतः ऐसी चर्चाओं की एक निर्धारित समयसीमा होती है, किन्तु देखा गया है कि [[:श्रेणी:लेख हटाने हेतु वर्तमान चर्चाएँ|कई चर्चाएँ लंबे समय तक बिना किसी निष्कर्ष]] के लंबित रहती हैं। कुछ लेखों पर हुई चर्चाओं का अभी तक कोई स्पष्ट परिणाम सामने नहीं आया है कि उन्हें रखा जाना है या हटाया जाना है।
* जिज्ञासा ये है की सामान्यतः इन चर्चाओं के निष्कर्ष तक पहुँचने की समय-सीमा क्या निर्धारित होती है तथा किन परिस्थितियों में इनका परिणाम घोषित किया जाता है।<span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 09:56, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]] जी, यह इस बात पे निर्भर है कि चर्चा में भागीदार लोग कितने हैं और उनके मतों के आधार पर स्पष्ट राय क्या निकल कर आई है। अंग्रेजी की तरह यहाँ पर समय सीमा या रीलिस्ट करने जैसा कुछ नहीं है। ऐसी चर्चाओं में सदस्यों की कम भागीदारी हिंदी विकिपीडिया की एक बड़ी समस्या है। ऐसी ही स्थिति नाम बदलाव या कुछ अन्य चीजों को लेकर भी है जहाँ काम इसलिए लंबित रहता है क्योंकि चर्चा में भाग लेने वाले लोग नहीं हैं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 18:34, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
== सुझाव दें ==
@[[सदस्य:SM7|SM7]] महोदय मैने [[विकिपीडिया:चौपाल|चौपाल]] पर एक प्रस्ताव रखा है
[[विकिपीडिया:चौपाल#पृष्ठ स्थानांतरण (Page Move) अधिकार और नए सुरक्षा स्तर पर पुनर्विचार हेतु प्रस्ताव|पृष्ठ स्थानांतरण (Page Move) अधिकार और नए सुरक्षा स्तर पर पुनर्विचार हेतु प्रस्ताव]] [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 19:00, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
==निवेदन पर मत आमंत्रण==
नमस्कार, SM7 जी! मेरे [[विकिपीडिया:स्वतः_परीक्षित_अधिकार_हेतु_निवेदन#चाहर_धर्मेंद्र|स्वतः परीक्षित अधिकार हेतु किए गए निवेदन]] के संबंध में आपके विचार मेरे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। आपसे विनम्र निवेदन है कि कृपया समय निकालकर इस पर अपना मत अवश्य प्रदान करें।
* आपके सुझाव एवं प्रतिक्रिया मेरे लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे।<span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 04:30, 22 अप्रैल 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]] जी, कोई चर्चा शुरू करके उसकी सूचना चौपाल पे दे देना पर्याप्त होता है। जिसे मन होगा ज़रूर चर्चा में हिस्सा लेगा। अपने द्वारा शुरू की गई चर्चा (विशेषकर कोई नामांकन) पर घूम-घूम के सबसे वार्ता पन्ने पे संदेश लिखना उचित नहीं होता, यह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव प्रचार (कैनवासिंग) है और इस तरह के काम को मैं बिल्कुल पसंद नहीं करता; हालाँकि, जब मैं नया था तब मैंने भी ऐसे काम किये थे। बाद में समझ में आया कि यह बेवजह की उछलकूद है।
:मैं आपके स्वनामंकन से पहले ही कुछ दिनों पूर्व ख़ुद आपका नामांकन करने के बारे में सोच रहा था; फिर जब आपने नामांकन किया तब समर्थन करने की भी सोच रहा था। अब आपने यहाँ संदेश लिख दिया। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 05:46, 22 अप्रैल 2026 (UTC)
::SM7 जी! आपके सुझाव एवं मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद। मैं आपकी बात से सहमत हूँ और भविष्य में इस प्रकार की सूचना देने के संबंध में अधिक सावधानी रखूँगा।
::* मेरा उद्देश्य केवल सूचना साझा करना था, न कि किसी प्रकार का कैनवासिंग करना। यदि इससे असुविधा हुई हो तो उसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ।
::आपके समर्थन के विचार के लिए भी धन्यवाद। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 06:07, 22 अप्रैल 2026 (UTC)
== लेख निर्वाचन नामांकन ==
SM7 जी! क्या ‘[[राष्ट्रीय उद्यान]]’ लेख को निर्वाचित लेख हेतु नामांकित करना उपयुक्त होगा? आपसे अनुरोध है कि कृपया समय निकालकर एक बार लेख का अवलोकन करें और मार्गदर्शन प्रदान करें कि क्या इसमें किसी प्रकार के और सुधार या संशोधन की आवश्यकता है।
आपके सुझाव मेरे लिए अत्यंत उपयोगी होंगे। <span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 15:10, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]] जी नमस्ते। लेख अच्छा बनाया है आपने और आप इसपर बेहतरीन कार्य करने के लिये बधाई के पात्र हैं। मेरा सुझाव है कि आप इसे पहले '''[[वि:श्रेष्ठ लेख|श्रेष्ठ लेख]]''' हेतु नामांकित करें। इसके मापदंड निर्वाचित लेख की तुलना में थोड़े हल्के और आसान हैं। हालाँकि, हिंदी विकिपीडिया पर श्रेष्ठ लेख बनाने की प्रक्रिया उपलब्ध और लागू है पर आज तक किसी ने इसका उपयोग नहीं किया। तो हो सकता है आप '''श्रेष्ठ लेख बनाने वाले पहले विकिपीडियन''' बनें। (वैसे मैंने अभी देखा कि एक नामांकन 2018 में नवीन सिंह जी द्वारा किया गया था परंतु उसकी समीक्षा नहीं हुई - शायद उन्होंने सूचित नहीं किया चौपाल पे)।
:एक बार श्रेष्ठ लेख के लिये प्रारंभिक समीक्षा हो जाने के बाद आप इसे '''निर्वाचित लेख''' के लिये भी नामांकित कर सकते हैं - जहाँ सामूहिक समीक्षा और सुधार सुझाये जायेंगे। अतः आप स्टेप-बाई-स्टेप चलें तो बेहतर होगा।
:बाक़ी आपकी मर्जी है। अगर आप निर्वाचित लेख नामांकन करना चाहें तो सीधे भी कर सकते हैं। बस एक बात का ध्यान रखियेगा कि निर्वाचित लेख घोषित होने में काफ़ी समय लग सकता है - क्योंकि यहाँ समीक्षा इत्यादि में भाग लेने वालों की काफ़ी कमी है।
:मैं दोनों ही प्रक्रियाओं में आपकी मदद अवश्य कर सकता हूँ। शुभकामनायें। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 15:46, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
::नमस्कार, SM7 जी! लेख के संबंध में आपके विस्तृत सुझाव एवं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक धन्यवाद। आपने जो चरणबद्ध प्रक्रिया (पहले श्रेष्ठ लेख, तत्पश्चात निर्वाचित लेख) सुझाई है, वह अत्यंत उपयोगी एवं व्यावहारिक प्रतीत होती है।
::मैं आपके सुझाव के अनुसार पहले इसे श्रेष्ठ लेख हेतु नामांकित करने पर विचार करूँगा, ताकि प्रारंभिक समीक्षा के माध्यम से आवश्यक सुधार किए जा सकें। इसके पश्चात निर्वाचित लेख के लिए नामांकन करना अधिक उपयुक्त रहेगा।
::आगे की प्रक्रिया में आपके सहयोग के प्रस्ताव के लिए भी धन्यवाद—यह मेरे लिए अत्यंत सहायक होगा। <span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 01:53, 27 अप्रैल 2026 (UTC)
:::@[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]] दोनों में अंतर के लिये कृपया एक बार [[:en:WP:GVF|WP:GVF]] देखें। और जहाँ तक मुझे नियमावली याद है, वर्तमान सक्रिय सदस्यों में [[स:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी ही इकलौते सदस्य हैं जो इस समीक्षा को क्रियान्वित करने के लिये अर्ह हैं। अतः चौपाल पर और संजीव जी को अवश्य सूचित कीजियेगा। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 02:00, 27 अप्रैल 2026 (UTC)
::::जी, सूचना एवं मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद। आपके सुझाव के अनुसार मैं चौपाल पर तथा संजीव कुमार जी को भी अवश्य सूचित करूँगा, ताकि समीक्षा प्रक्रिया उचित रूप से आगे बढ़ सके। <span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 02:33, 27 अप्रैल 2026 (UTC)
== रोड़ लेख संबंध में==
'[[रोड़]]’ लेख तथा ‘[[वार्ता:रोड़]]’ पृष्ठ पर बार-बार जोड़ी जा रही जानकारी के संदर्भों की जाँच करने पर विषय से संबंधित कोई भी पर्याप्त एवं विश्वसनीय जानकारी प्राप्त नहीं हो रही है। कृपया इस संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करें कि ऐसी स्थिति में क्या उपयुक्त कार्यवाही की जानी चाहिए।<span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 14:27, 29 अप्रैल 2026 (UTC)
== नाम परिवर्तन ==
SM7 जी नमस्ते। ‘[[जेचेम पेंट]]’ लेख हाल ही में निर्मित किया गया है, जबकि सॉफ़्टवेयर का प्रचलित एवं उपयुक्त नाम “जेकेमपेंट” एक शब्द के रूप में प्रयोग होता है। अतः शीर्षक का इस रूप में होना अधिक उचित प्रतीत होता है।
चूँकि लेख अभी नया है, कृपया मार्गदर्शन प्रदान करने का कष्ट करें कि क्या इस स्थिति में सीधे स्थानांतरण (नाम परिवर्तन) किया जा सकता है, अथवा इसके लिए औपचारिक अनुरोध प्रक्रिया अपनाना आवश्यक होगा।<span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 09:20, 30 अप्रैल 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]] जी, आप आश्वस्त हों तो सीधे कर दें। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 11:55, 30 अप्रैल 2026 (UTC)
== [[:साँचा:Personbox|साँचा:Personbox]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:साँचा:Personbox|साँचा:Personbox]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।
अप्रचलित साँचा
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं।
== क्या यह उचित है। ==
महोदय, मैने एक नया खाता [[सदस्य:AMAN KUMAR Bot]] बनाया है जिसके माध्यम से bot के लिए परीक्षण कर रहा हूं अभी [[विकिपीडिया:बॉट/अनुमोदन हेतु अनुरोध]] नहीं किया है। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 03:06, 13 जून 2026 (UTC)
== हटाए गए लेख के पुनर्निर्माण एवं शीह टैग हटाने के संबंध में ==
SM7 जी नमस्ते! ‘स्टोरिको सेरामिका’ लेख को पूर्व में दो बार साफ़ प्रचार मापदंड के अंतर्गत हटाया जा चुका है। इसके बावजूद, ‘[[स्टोरिको सेरामिका (एलएलपी)]]’ नाम से लेख को पुनः निर्मित किया गया है।
साथ ही, इस पर किए गए शीघ्र हटाने के अनुरोध को भी बार-बार हटाया जा रहा है। ऐसी स्थिति में कृपया इस विषय की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई करने का कष्ट करें, ताकि बार-बार पुनर्निर्माण एवं अनुचित रूप से हटाए जा रहे अनुरोधों की समस्या का समाधान हो सके।<span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 18:27, 26 जून 2026 (UTC)
== [[:अंडकाश्म/अडुक|अंडकाश्म/अडुक]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:अंडकाश्म/अडुक|अंडकाश्म/अडुक]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल4|मापदंड ल4]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल4|ल4]]{{*}} प्रतिलिपि लेख'''</center>
इस मापदंड के अंतर्गत वो लेख आते हैं जो किसी पुराने लेख की प्रतिलिपि हैं। इसमें वे लेख भी आते हैं जो किसी ऐसे विषय पर बनाए गए हैं जिनपर पहले से लेख मौजूद है और पुराना लेख नए लेख से बेहतर है।
कृपया लेख बनाने से पहले उस शीर्षक के लिये [[विशेष:Search|खोज]] कर लिया करें। यदि आप इस विषय पर और लिखना चाहते हैं तो मूल लेख पर लिखें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:01, 9 जुलाई 2026 (UTC)
== Compromise ==
Hey, if you'd like to adjust the block I'm letting you know there are no signs of an account compromise on [[User:अनुज साव22]]. Best regards! [[सदस्य:A09|A09]] ([[सदस्य वार्ता:A09|वार्ता]]) 08:23, 18 जुलाई 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:A09|A09]] Thanks. I checked he is deleting contents from articles created by himself. Let him reply what exactly is the reason. Regards. --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 09:05, 18 जुलाई 2026 (UTC)
== Wikidata की जानकारी ==
मैंने अपना सदस्य पृष्ठ रिक्त कर दिया है लेकिन meta Wiki की जानकारी कैसे दिखेगी पृष्ठ पर। हो सके तो इसका समाधान कर दीजिए। [[सदस्य:Pushkar Singh|<span style="color:DeepPink;">पुष्कर सिंह</span>]] [[सदस्य वार्ता:Pushkar Singh|<span style="color:Red;">✉️</span>]] 05:37, 24 जुलाई 2026 (UTC)
== जाँच करें ==
@[[सदस्य:SM7|SM7]] जी, [[अनुराग बसु]] पर प्रयोगकर्ता ने मेरा रोलबैक पूर्ववत किया तय मेरे फिर रोलबैक करने पर संपादन युद्ध होगा? [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 08:36, 24 जुलाई 2026 (UTC)
a0dagzcpcgodh0dwpx0vaycuw6mphr2
वार्ता:चमार
1
523567
6591526
6548280
2026-07-24T11:20:12Z
~2026-41295-62
937971
/* सुधार अपेक्षित */ उत्तर
6591526
wikitext
text/x-wiki
{{वार्ता शीर्षक}}
चमार का अर्थ है की जो चमडे का काम करता हो
== सुधार अपेक्षित ==
# लेख में कई स्थानों पर विकिपीडिया विश्वकोष की दृष्टि से अनावश्यक विशेषणों का प्रयोग हुआ है, जैसे एक से अधिक बार डॉ., महान अभिनेत्री, बाबासाहब, महान नेता, भगवान, आदि जिनकी आवश्यकता नहीं है। डॉ उपाधि भी मात्र अधिकतम एक बार प्रयोग कर सकते हैं।
# ''इस जाति के लोग सामाजिक होते है। '' :- इस प्रकार के वाक्य ये जताते हैं कि किसी जाति या समूह में ये जन्मजात गुण होता है, जबकि ये एक मानवीय गुण है तथा किसी में भी उपस्थित हो या नहीं हो सकता है। इसका अर्थ ये नहीं होना चाहिये कि क्या अन्य अधिकांश जातियों के लोग असामाजिक हुआ करते हैं?
# ''आदि शहरों में ये बहुत मजबूत स्थिति में है।'': क्या ये कोई सेना आदि है जो मजबूत स्थिति बतायी जा रही है? साधारण भाषा जैसे -- इन राज्यों में इस समूह या जाति के लोग बहुतायत में पाये जाते हैं। -- इसे लिखा जाना चाहिये।
# मेरे विचार से यहां गौतम बुद्ध जी के चित्र का औचित्य समझ नहीं आया। हालांकि इन चित्रों को दीर्घा में व्यवस्थित रूप में विशेषण यथासंभव रूप से हटा कर लगा दिया है, किन्तु इस चित्र विशेष की आवश्यकता ???
# ''आज भी भारत में ब्राह्मण के बाद सर्वाधिक IAS , IPS और PCS चमार जाति से है'' आज भी ??? भारतीय सेवाओं में किसी जाति विशेष के लोगों की संख्या की परस्पर तुलना शायद विश्वकोषीय सामग्री नहीं होगी।
:: उपरोक्त बिन्दुओं पर सम्मति/राय/सुधार आदि अपेक्षित हैं। -- [[User:आशीष भटनागर|<span style="text-shadow:#EE82EE 3px 3px 2px;"><font color="#0000FF"><b>आशीष भटनागर</b></font></span>]]<sup>[[User talk:आशीष भटनागर|<font color="#FF007F">वार्ता</font>]]</sup> 05:31, 11 फ़रवरी 2017 (UTC)
:::{{समर्थन}} सुधार में मेरा भी सहयोग रहेगा। दूसरे भी एसे बहुत से लेख है और बन रहे है। काम में दूसरे सदस्यों का सहयोग भी इच्छनिय है।--<span style="color:gr।।e।।।।।en;">☆★</span>[[u:आर्यावर्त|<u><span style="color:red;">आर्यावर्त</span></u>]] ([[User talk:आर्यावर्त|<span style="color:green;">✉✉</span>]]) 06:30, 11 फ़रवरी 2017 (UTC)
:::::अंबेडकर जी के नाम में '''बार-बार बाबा बाबासाहब जोड़ने की आवश्यकता नहीं''' है, क्योंकि विश्वकोष में एक बार ये अवश्य आना चाहिये कि उन्हें लोग बाबासाहब कहा करते थे, किन्तु उनका मुख्य नाम तो मात्र भीमराव ही था, व हमें किसी के मूल नाम से छेड़छाड़ करने की न तो आवश्यकता है, न अनुमत ही है। यह संदेश जी को समझना चाहिये।
:::::ऐसे ही किसी के नाम में श्री या जी भी नहीं जोड़ना चाहिये। यह सम्मान का विषय नहीं अपितु विकिपीडिया के विष्वकोषीय सिद्धांत का विषय है। विकिपीडिया के लिये महात्मा गांधी, बाबासाहेब आंबेडकर या नाथुराम गौड़से में कोई अंतर नहीं होना चाहिये, वैसे ही जैसे विष, अमृत या औषधि के लेखों में कोई अंतर नहीं होना चाहिये। इसी समान पृथ्वी/आकाश, स्वर्ग/नर्क, मित्र/शत्रु, रूस/संयुक्त राज्य/पाकिस्तान, आदि भी उदाहरणार्थ हैं। --[[User:आशीष भटनागर|<span style="text-shadow:#EE82EE 3px 3px 2px;"><font color="#0000FF"><b>आशीष भटनागर</b></font></span>]]<sup>[[User talk:आशीष भटनागर|<font color="#FF007F">वार्ता</font>]]</sup> 06:47, 11 फ़रवरी 2017 (UTC)
::::::Sahi baat boli ashish ji ne [[विशेष:योगदान/2401:4900:5C27:5EF1:6AE0:2D8B:C38A:F687|2401:4900:5C27:5EF1:6AE0:2D8B:C38A:F687]] ([[सदस्य वार्ता:2401:4900:5C27:5EF1:6AE0:2D8B:C38A:F687|वार्ता]]) 12:40, 22 जुलाई 2024 (UTC)
चमार समूह के '''आदर्श''' व्यक्तिओं में [[गौतम बुद्ध]], [[संत रविदास]] और [[डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर]] इनके नाम आते है। और संत रविदास की तरह गौतम बुद्ध और डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर चमार जाति से नहीं है। चमार जाति के '''प्रसिद्ध''' व्यक्तिओं में संत रविदास, कांशीराम, जगजीवन राम, मायावती, दिव्या भारती आदी के नाम आते है।
[[सदस्य:संदेश हिवाळे|संदेश हिवाळे]] ([[सदस्य वार्ता:संदेश हिवाळे|वार्ता]]) 10:47, 11 फ़रवरी 2017 (UTC)
:संविधान निर्माता बाबा साहब को लेखक चमार बनाने के पीछे क्यों पड़े हैं मुझे समझ नही आ रहा है बाबा साहब महार जाति से थे न कि चमार। [[सदस्य:अर्जुन सिंह वाल्मीकि|अर्जुन सिंह वाल्मीकि]] ([[सदस्य वार्ता:अर्जुन सिंह वाल्मीकि|वार्ता]]) 11:31, 11 मई 2023 (UTC)
:क्या संत रवि दास चमार थे क्या सबूत है इनके पास [[विशेष:योगदान/2401:4900:5C27:5EF1:6AE0:2D8B:C38A:F687|2401:4900:5C27:5EF1:6AE0:2D8B:C38A:F687]] ([[सदस्य वार्ता:2401:4900:5C27:5EF1:6AE0:2D8B:C38A:F687|वार्ता]]) 12:50, 22 जुलाई 2024 (UTC)
::संदेश हिवाळे जी आप कृपया इंग्लिश विकिपीडिया में ''' [[:w:B._R._Ambedkar|B. R. Ambedkar]]''' का लेख पढ़े| इससे आंबेडकर का वास्तविक ज्ञान और कैसे लेख लिखा जाये यह आप को पता लग जायेगा
--[[सदस्य:Teacher1943| ए० एल० मिश्र]] ([[सदस्य वार्ता:Teacher1943|वार्ता]]) 11:23, 11 फ़रवरी 2017 (UTC)
*अंग्रेजी विकिपीडिया में नियमो का पालन तथा लेख का यथा शीघ्र परीक्षण होता है। लेख के नियमानुसार न होने पर लेख हटा दिया जाता है --[[सदस्य:Teacher1943| ए० एल० मिश्र]] ([[सदस्य वार्ता:Teacher1943|वार्ता]]) 11:23, 11 फ़रवरी 2017 (UTC)
*'''सुझाव '''*
*अंग्रेजी विकिपीडिया में नाम के पूर्व विशेषण लिखने का नियम नहीं है
*लेख में उप नाम का उल्लेख हो सकता है.
*उपाधियाँ शिक्षा के शीर्षक के अन्तर्गत होनी चाहिए ,नाम के पहले नहीं जैसे डॉक्टर आदि। .
*बार -बार पूरे नाम के स्थान पर अंतिम नाम का उल्लेख करें।
*आप जिस उपाधि या अन्य तथ्य का उल्लेख करें उसे सन्दर्भ देकर पुष्टि भी करें
*लेख में किसी भी तथ्य की बार -बार पुनरावृत्ति न करें।--[[सदस्य:Teacher1943| ए० एल० मिश्र]] ([[सदस्य वार्ता:Teacher1943|वार्ता]]) 11:55, 11 फ़रवरी 2017 (UTC)
::: अंग्रेज़ी विकि क्या ये तो विकिपीडिया और सही कहें तो विश्वकोश की ही नीति है कि कोई विशेषण बार बार प्रयोग नहीं किया जाता है। शिक्षण से संबंधी उपाधियां शिक्षा उपशीर्षक के अन्तर्गत दें, अन्य लोकप्रिय उपाधियां भी एक बार उपनाम के विवरण के समय दे दें, या कोई विशेष उपाधि किसी विशेष प्रसंग से जुड़ी हो, तो उसे वहां ही दें। इसके अलावा चौथे बिन्दु का भी ध्यान रखा जाना चाहिये, अर्थात बार बार व हर बार <u>बाबासाहब डॉ. भीमराव आम्बेडकर</u>, इतना बड़ा नाम लिखा जाये तो पढ़ने में भी कठिन व खिजाने वाला लगता है। इसीलिये साहित्य में '''आप''' सर्वनाम का प्रयोग किया जाता है, व विश्वकोश/विकिपीडिया में अंतिम नाम जैसे आम्बेडकर ही प्रयोग किया जाता है, न कि पूरा नाम, या डॉ.आम्बेडकर, या श्री आम्बेडकर, वरन मात्र आम्बेडकर। बल्कि बाल्यकाल के जीवनी अंश में तो भीमराव भी प्रयोग कर सकते हैं। ये अच्छे साहित्य के अंग होते हैं। सबको ज्ञात होता है कि विश्वकोश में शब्दकोश की ही भांति कोई सम्मान या अपमान नहीं देखा जाता है। मिश्र जी के प्रत्येक बिन्दु की सराहना तो मैं क्या करूंगा, किन्तु सम्मानपूर्वक समर्थन (व पालन भी) करूंगा, व आशा करता हूं कि अन्य सदस्य भी प्रेरणा लेंगे।[[User:आशीष भटनागर|<span style="text-shadow:#EE82EE 3px 3px 2px;"><font color="#0000FF"><b>आशीष भटनागर</b></font></span>]]<sup>[[User talk:आशीष भटनागर|<font color="#FF007F">वार्ता</font>]]</sup> 13:29, 11 फ़रवरी 2017 (UTC)
चवर (चमार) वंश का इतिहास बड़ा ही गौरव शाली है खास कर भारत का, आप इसमें जितना ही डूबेंगे उतना ही आपको मजा आएगा, आइये कुछ झलक देखते है और अब जानते हैं चमार एवं खटिक जाति का गौरवशाली इतिहास के बारे में ।
सिकन्दर लोदी (१४८९-१५१७) के शासनकाल से पहले पूरे भारतीय इतिहास में 'चमार' नाम की किसी जाति का उल्लेख नहीं मिलता। आज जिन्हें हम 'चमार' जाति से संबोधित करते हैं और जिनके साथ छूआछूत का व्यवहार करते हैं, दरअसल वह वीर चंवरवंश के क्षत्रिय हैं। जिन्हें सिकन्दर लोदी ने चमार घोषित करके अपमानित करने की चेष्टा की।भारत के सबसे विश्वसनीय इतिहास लेखकों में से एक विद्वान कर्नल टाड को माना जाता है जिन्होनें अपनी पुस्तक 'द हिस्ट्री आफ राजस्थान' में चंवरवंश के बारे में विस्तार से लिखा है। प्रख्यात लेखक डॉ विजय सोनकर शास्त्री ने भी गहन शोध के बाद इनके स्वर्णिम अतीत को विस्तार से बताने वाली पुस्तक "हिन्दू चर्ममारी जातिः एक स्वर्णिम गौरवशाली राजवंशीय इतिहास" लिखी। महाभारत के अनुशासन पर्व में भी इस राजवंश का उल्लेख है। डॉ शास्त्री के अनुसार प्राचीनकाल में न तो चमार कोई शब्द था और न ही इस नाम की कोई जाति ही थी। 'अर्वनाइजेशन' की लेखिका डॉ हमीदा खातून लिखती हैं, मध्यकालीन इस्लामी शासन से पूर्व भारत में चर्म एवं सफाई कर्म के लिए किसी विशेष जाति का एक भी उल्लेख नहीं मिलता है। हिंदू चमड़े को निषिद्ध व हेय समझते थे। लेकिन भारत में मुस्लिम शासकों के आने के बाद इसके उत्पादन के भारी प्रयास किए गये थे। डा विजय सोनकर शास्त्री के अनुसार तुर्क आक्रमणकारियों के काल में चंवर राजवंश का शासन भारत के पश्चिमी भाग में था और इसके प्रतापी राजा चंवरसेन थे। इस क्षत्रिय वंश के राज परिवार का वैवाहिक संबंध बाप्पा रावल वंश के साथ था। राणा सांगा व उनकी पत्नी झाली रानी ने चंवरवंश से संबंध रखने वाले संत रैदासजी को अपना गुरु बनाकर उनको मेवाड़ के राजगुरु की उपाधि दी थी और उनसे चित्तौड़ के किले में रहने की प्रार्थना की थी। संत रविदास चित्तौड़ किले में कई महीने रहे थे। उनके महान व्यक्तित्व एवं उपदेशों से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें गुरू माना और उनके अनुयायी बने। उसी का परिणाम है आज भी विशेषकर पश्चिम भारत में बड़ी संख्या में रविदासी हैं। राजस्थान में चमार जाति का बर्ताव आज भी लगभग राजपूतों जैसा ही है। औरतें लम्बा घूंघट रखती हैं आदमी ज़्यादातर मूंछे और पगड़ी रखते थे।संत रविदास की प्रसिद्धी इतनी बढ़ने लगी कि इस्लामिक शासन घबड़ा गया सिकन्दर लोदी ने मुल्ला सदना फकीर को संत रविदास को मुसलमान बनाने के लिए भेजा वह जानता था की यदि रविदास इस्लाम स्वीकार लेते हैं तो भारत में बहुत बड़ी संख्या में इस्लाम मतावलंबी हो जायेगे लेकिन उसकी सोच धरी की धरी रह गयी स्वयं मुल्ला सदना फकीर शास्त्रार्थ में पराजित हो गये और कोई उत्तर न दे सका और उनकी भक्ति से प्रभावित होकर अपना नाम रामदास रखकर उनका भक्त वैष्णव (हिन्दू) हो गया। दोनों संत मिलकर हिन्दू धर्म के प्रचार में लग गए जिसके फलस्वरूप सिकंदर लोदी आगबबूला हो उठा एवं उसने संत रैदास को कैद कर लिया और इनके अनुयायियों को चमार यानी अछूत चंडाल घोषित कर दिया। उनसे कारावास में खाल खिचवाने, खाल-चमड़ा पीटने, जुती बनाने इत्यादि काम जबरदस्ती कराया गया उन्हें मुसलमान बनाने के लिए बहुत शारीरिक कष्ट दिए। लेकिन उन्होंने कहा-"वेद धर्म सबसे बड़ा, अनुपम सच्चा ज्ञान, फिर मै क्यों छोडू इसे, पढ़ लू झूठ कुरान. वेद धर्म छोडू नहीं, कोसिस करो हज़ार, तिल-तिल काटो चाहि, गोदो अंग कटार" (रैदास रामायण) संत रैदास पर हो रहे अत्याचारों के प्रतिउत्तर में चंवर वंश के क्षत्रियों ने दिल्ली को घेर लिया। इससे भयभीत हो सिकन्दर लोदी को संत रैदास को छोड़ना पड़ा था। संत रैदास का यह दोहा देखिए: बादशाह ने वचन उचारा। मत प्यारा इसलाम हमारा ।। खंडन करै उसे रविदासा। उसे करौ प्राण कौ नाशा ।। जब तक राम नाम रट लावे। दाना पानी यह नहींपावे ।। जब इसलाम धर्म स्वीकारे। मुख से कलमा आपा उचारै ।। पढे नमाज जभी चितलाई। दाना पानी तब यह पाई । समस्या तो यह है कि लोगो संत रविदास के दोहों को ही नहीं पढ़ा, जिसमें उस समय के समाज का चित्रण है जो बादशाह सिकंदर लोदी के अत्याचार, इस्लाम में जबरदस्ती धर्मांतरण और इसका विरोध करने वाले हिंदू ब्राहमणों व क्षत्रियों को निम्न कर्म में धकेलने की ओर संकेत करता है। चंवरवंश के वीर क्षत्रिय जिन्हें सिकंदर लोदी ने 'चमार' बनाया और हिंदू पुरखों और रजपूरोहीत पंडितों ने सत्ता और धन के लालच में हिन्दू धर्म में इनको निम्न वर्ग और अछूत बना कर इस्लामी बर्बरता का हाथ मजबूत किया। इस समाज ने पददलित और अपमानित होना स्वीकार किया, लेकिन विधर्मी होना स्वीकार नहीं किया आज भी यह समाज हिन्दू धर्म का आधार बनकर खड़ा है। लेकिन इतिहास में इनके पूर्वजों को कारागार में रहना पडा, इनकी सम्पत्ति इस्लामिक राजाओं ने जप्त कर ली और इनके परिवार को समाज की मुख्य धारा से अलग दिया गया फिर इन्हें जंगल में रहना पडा और घास फूंस,कच्ची फसलों और मरे जानवरों का मांस खाना पडा अपने जीवन को बचाने के लिए
खटिक जाति के बारे में :-खटिक जाति मूल रूप से वो ब्राहमण जाति है, जिनका काम आदि काल में याज्ञिक पशु बलि देना होता था। आदि काल में यज्ञ में बकरे की बलि दी जाती थी। संस्कृत में इनके लिए शब्द है, 'खटिटक'। मध्यकाल में जब क्रूर इस्लामी अक्रांताओं ने हिंदू मंदिरों पर हमला किया तो सबसे पहले खटिक जाति के ब्राहमणों ने ही उनका प्रतिकार किया। राजा व सेना तो बाद में आती थी। मंदिर परिसर में रहने वाले खटिक ही सर्वप्रथम उनका सामना करते थे। तैमूरलंग को दीपालपुर व अजोधन में खटिक योद्धाओं ने ही रोका था और सिकंदर को भारत में प्रवेश से रोकने वाली सेना में भी सबसे अधिक खटिक जाति के ही योद्धा थे। तैमूर खटिकों के प्रतिरोध से इतना भयाक्रांत हुआ कि उसने सोते हुए हजारों खटिक सैनिकों की हत्या करवा दी और एक लाख सैनिकों के सिर का ढेर लगवाकर उस पर रमजान की तेरहवीं तारीख पर नमाज अदा बर्बर दिल्ली सल्तनत में गुलाम, तुर्क, लोदी वंश और मुगल शासनकाल में जब अत्याचारों की मारी हिंदू जाति मौत या इस्लाम का चुनाव कर रही थी तो खटिक जाति ने अपने धर्म की रक्षा और बहू बेटियों को मुगलों की गंदी नजर से बचाने के लिए अपने घर के आसपास सूअर बांधना शुरू किया। इस्लाम में सूअर को हराम माना गया है। मुगल तो इसे देखना भी हराम समझते थे। और खटिकों ने मुस्लिम शासकों से बचाव के लिए सूअर पालन शुरू कर दिया। उसे उन्होंने हिंदू के देवता विष्णु के वराह (सूअर) अवतार के रूप में लिया। मुस्लिमों की गो हत्या के जवाब में खटिकों ने सूअर का मांस बेचना शुरू कर दिया और धीरे धीरे यह स्थिति आई कि वह अपने ही हिंदू समाज में पददलित होते चले गए। कल के शूरवीर ब्राहण आज अछूत और दलित श्रेणी में हैं। 1857 की लडाई में मेरठ व उसके आसपास अंग्रेजों के पूरे के पूरे परिवारों को मौत के घाट उतारने वालों में खटिक समाज सबसे आगे था। इससे गुस्साए अंग्रेजों ने 1891 में पूरी खटिक जाति को ही वांटेड और अपराधी जाति घोषित कर दिया।जब आप मेरठ से लेकर कानपुर तक 1857 के विद्रोह की दासतान पढ़ेंगे तो रोंगटे खडे हो जाएंगे। जैसे को तैसा पर चलते हुए खटिक जाति ने न केवल अंग्रेज अधिकारियों, बल्कि उनकी पत्नी बच्चों को इस निर्दयता से मारा कि अंग्रेज थर्रा उठे। क्रांति को कुचलने के बाद अंग्रेजों ने खटिकों के गांव के गांव को सामूहिक रूप से फांसी दे दिया गया और बाद में उन्हें अपराधि जाति घोषित कर समाज के एक कोने में ढकेल दिया। आजादी से पूर्व जब मोहम्मद अली जिन्ना ने डायरेक्ट एक्शन की घोषणा की थी तो मुस्लिमों ने कोलकाता शहर में हिंदुओं का नरसंहार शुरू किया, लेकिन एक दो दिन में ही पासा पलट गया खटिक जाति ने मुस्लिमों का इतना भयंकर नरसंहार किया कि बंगाल के मुस्लिम लीग के मंत्री ने सार्वजनिक रूप से कहा कि हमसे भूल हो गई। अगर भारत के चमारों और खटीको ने इस्लाम की शर्तों को मानकर मुसलमान बन गये होते तो आज भारत में मुस्लिम जनसंख्या 60 करोड़ के पार होती और आज भारत एक मुस्लिम राष्ट्र बन चुका होता। यहाँ भी जेहाद का बोलबाला होता और ईराक, सीरिया, सोमालिया, पाकिस्तान और अफगानिस्तान आदि देशों की तरह बम धमाके, मार-काट और खून-खराबे का माहौल होता। हिन्दू या तो मार डाले जाते या फिर धर्मान्तरित कर दिये जाते या फिर हमें काफिर के रूप में अत्यंत ही गलीज जिन्दगी मिलती। धन्य हैं चमार जाती जिन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी अत्याचार और अपमान सहकर भी हिन्दुत्व का गौरव बचाये रखा और स्वयं अपमानित और गरीब रहकर भी हर प्रकार से हिंदू धर्म को बचाये रखा। [[विशेष:योगदान/2409:4055:4E4B:4EC0:E3EC:7FE0:6C02:BCF1|2409:4055:4E4B:4EC0:E3EC:7FE0:6C02:BCF1]] ([[सदस्य वार्ता:2409:4055:4E4B:4EC0:E3EC:7FE0:6C02:BCF1|वार्ता]]) 11:42, 18 मई 2024 (UTC)
:अरे भाई अगर चमार इतने बड़े राजवंशी थे तो इनके इस तरह be इज़्जत नहीं किया जाता इनके समशान घाट अलग है क्यूं है जब इतने बड़े चंवर वंशी थे तो उस टाइम लड़े क्यों नहीं बहुत कारण होगे ना तो ये चावर वंशी है और न ही बौद्ध के ये किसी के सगे नही हुए आज तक [[विशेष:योगदान/2401:4900:5C27:5EF1:6AE0:2D8B:C38A:F687|2401:4900:5C27:5EF1:6AE0:2D8B:C38A:F687]] ([[सदस्य वार्ता:2401:4900:5C27:5EF1:6AE0:2D8B:C38A:F687|वार्ता]]) 12:47, 22 जुलाई 2024 (UTC)
::उस टाइम भी सब अपने हक के लिए लड़े थे [[विशेष:योगदान/2401:4900:5C27:5EF1:6AE0:2D8B:C38A:F687|2401:4900:5C27:5EF1:6AE0:2D8B:C38A:F687]] ([[सदस्य वार्ता:2401:4900:5C27:5EF1:6AE0:2D8B:C38A:F687|वार्ता]]) 12:48, 22 जुलाई 2024 (UTC)
::Aap log bahut lde tabhi to mugalo aur angrejo ke gulam huye [[विशेष:योगदान/2402:3A80:11A3:A36A:B4CA:31FF:FEC7:1AEA|2402:3A80:11A3:A36A:B4CA:31FF:FEC7:1AEA]] ([[सदस्य वार्ता:2402:3A80:11A3:A36A:B4CA:31FF:FEC7:1AEA|वार्ता]]) 03:19, 8 अक्टूबर 2024 (UTC)
::kyunki inhone tyag diya tha tumhari tarah nhi ki sala bna kuch uper ghulam or ban gye [[विशेष:योगदान/~2026-41295-62|~2026-41295-62]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-41295-62|वार्ता]]) 11:20, 24 जुलाई 2026 (UTC)
sdrdluxyfcdqbi33y8qchszv89fy17y
अनुराग बसु
0
524797
6591325
6164243
2026-07-23T12:37:24Z
AlphaVictorDelta0107
790236
6591325
wikitext
text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति
| image = Anurag Basu.jpg
| caption =
| birth_date =
| birth_place = [[भिलाई]], मध्य प्रदेश, भारत
| spouse =
| occupation = [[फ़िल्म निर्देशक|निदेशक]], [[पटकथा लेखक|लेखक]]
| yearsactive = 1993 - वर्तमान
}}
'''अनुराग सुव्रत वसु''' ({{lang-bn|অনুরাগ সুব্রত বসু}}) एक भारतीय [[फ़िल्म]], [[टीवी विज्ञापन]], निर्माता और निर्देशक, [[अभिनेता]] और पटकथा लेखक हैं। वसु ने प्रारम्भिक सफलता अन्यगमन और [[वासना|व्यभिचार के विषयों]] से जुड़ी फ़िल्मों में प्राप्त की<ref>{{cite news|first=सुरुचि|last=मजुमदार|url=http://www.screenindia.com/news/anurag-basu-to-direct-hrithik-roshan/284345/|title=Anurag Basu to direct Hrithik Roshan|publisher=Screen|date=14 मार्च 2008|access-date=13 जुलाई 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20081022113637/http://www.screenindia.com/news/Anurag-Basu-to-direct-Hrithik-Roshan/284345/|archive-date=22 अक्तूबर 2008|url-status=dead}}</ref> जैसे [[लाइफ़ इन ए... मेट्रो]] (2007), [[काइट्स]] (2010), [[गैंगस्टर (2006 फ़िल्म)|गैंगस्टर]] (2006) और [[मर्डर (2004 फ़िल्म)|मर्डर]] (2004) आदि। वसु ने अपना निर्देशन का कार्य १९९५ के शुरुआती दौर से टेलीविजन शो से आरम्भ किया , ११०० से भी अधिक एपिसोडों का निर्देशन किया और धीरे-धीरे 2002 तक महत्त्वपूर्ण फ़िल्मों की ओर मुड़ गये।
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{IMDb name|id=1397301}}
{{अनुराग वसु}}
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:1970 में जन्मे लोग]]
{{फ़िल्म-आधार}}
moh8odyov6zx7hsjv1lv4sad2dujzx6
6591326
6591325
2026-07-23T12:38:55Z
AlphaVictorDelta0107
790236
6591326
wikitext
text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति
| image = Anurag Basu.jpg
| caption =
| birth_date = {{birthdateandage|1970|5|8|df=y}}
| birth_place = [[भिलाई]], मध्य प्रदेश, भारत
| spouse =
| occupation = [[फ़िल्म निर्देशक|निदेशक]], [[पटकथा लेखक|लेखक]]
| yearsactive = 1993 - वर्तमान
}}
'''अनुराग सुव्रत वसु''' ({{lang-bn|অনুরাগ সুব্রত বসু}}) एक भारतीय [[फ़िल्म]], [[टीवी विज्ञापन]], निर्माता और निर्देशक, [[अभिनेता]] और पटकथा लेखक हैं। वसु ने प्रारम्भिक सफलता अन्यगमन और [[वासना|व्यभिचार के विषयों]] से जुड़ी फ़िल्मों में प्राप्त की<ref>{{cite news|first=सुरुचि|last=मजुमदार|url=http://www.screenindia.com/news/anurag-basu-to-direct-hrithik-roshan/284345/|title=Anurag Basu to direct Hrithik Roshan|publisher=Screen|date=14 मार्च 2008|access-date=13 जुलाई 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20081022113637/http://www.screenindia.com/news/Anurag-Basu-to-direct-Hrithik-Roshan/284345/|archive-date=22 अक्तूबर 2008|url-status=dead}}</ref> जैसे [[लाइफ़ इन ए... मेट्रो]] (2007), [[काइट्स]] (2010), [[गैंगस्टर (2006 फ़िल्म)|गैंगस्टर]] (2006) और [[मर्डर (2004 फ़िल्म)|मर्डर]] (2004) आदि। वसु ने अपना निर्देशन का कार्य १९९५ के शुरुआती दौर से टेलीविजन शो से आरम्भ किया , ११०० से भी अधिक एपिसोडों का निर्देशन किया और धीरे-धीरे 2002 तक महत्त्वपूर्ण फ़िल्मों की ओर मुड़ गये।
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{IMDb name|id=1397301}}
{{अनुराग वसु}}
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:1970 में जन्मे लोग]]
{{फ़िल्म-आधार}}
o91nnszz83y7icym8m29b60rs0jtvm5
6591328
6591326
2026-07-23T12:41:39Z
AlphaVictorDelta0107
790236
6591328
wikitext
text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति
| image = Anurag Basu.jpg
| caption =
| birth_date = {{birth date and age|1970|5|8|df=y}}
| birth_place = [[भिलाई]], मध्य प्रदेश, भारत
| spouse =
| occupation = [[फ़िल्म निर्देशक|निदेशक]], [[पटकथा लेखक|लेखक]]
| yearsactive = 1993 - वर्तमान
}}
'''अनुराग सुव्रत वसु''' ({{lang-bn|অনুরাগ সুব্রত বসু}}) एक भारतीय [[फ़िल्म]], [[टीवी विज्ञापन]], निर्माता और निर्देशक, [[अभिनेता]] और पटकथा लेखक हैं। वसु ने प्रारम्भिक सफलता अन्यगमन और [[वासना|व्यभिचार के विषयों]] से जुड़ी फ़िल्मों में प्राप्त की<ref>{{cite news|first=सुरुचि|last=मजुमदार|url=http://www.screenindia.com/news/anurag-basu-to-direct-hrithik-roshan/284345/|title=Anurag Basu to direct Hrithik Roshan|publisher=Screen|date=14 मार्च 2008|access-date=13 जुलाई 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20081022113637/http://www.screenindia.com/news/Anurag-Basu-to-direct-Hrithik-Roshan/284345/|archive-date=22 अक्तूबर 2008|url-status=dead}}</ref> जैसे [[लाइफ़ इन ए... मेट्रो]] (2007), [[काइट्स]] (2010), [[गैंगस्टर (2006 फ़िल्म)|गैंगस्टर]] (2006) और [[मर्डर (2004 फ़िल्म)|मर्डर]] (2004) आदि। वसु ने अपना निर्देशन का कार्य १९९५ के शुरुआती दौर से टेलीविजन शो से आरम्भ किया , ११०० से भी अधिक एपिसोडों का निर्देशन किया और धीरे-धीरे 2002 तक महत्त्वपूर्ण फ़िल्मों की ओर मुड़ गये।
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{IMDb name|id=1397301}}
{{अनुराग वसु}}
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:1970 में जन्मे लोग]]
{{फ़िल्म-आधार}}
pt0zk5t8axumfoyc7g2y4rpmjk1wr2b
6591408
6591328
2026-07-24T01:57:26Z
AMAN KUMAR
911487
[[Special:Contributions/AlphaVictorDelta0107|AlphaVictorDelta0107]] ([[User talk:AlphaVictorDelta0107|Talk]]) के संपादनों को हटाकर [[User:DreamRimmer bot III|DreamRimmer bot III]] के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया
6164243
wikitext
text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति
| name = अनुराग बसु
| image = Anurag Basu.jpg
| caption =
| birth_date =
| birth_place = [[भिलाई]], [[छत्तीसगढ़]], [[भारत]]
| spouse =
| occupation = [[फ़िल्म निर्देशक|निदेशक]], [[पटकथा लेखक|लेखक]]
| yearsactive = 1993 - वर्तमान
| nationality = भारतीय
| religion = [[हिन्दू धर्म]]
}}
'''अनुराग बसु''' ({{lang-bn|অনুরাগ বসু}}) एक भारतीय [[फ़िल्म]], [[टीवी विज्ञापन]], निर्माता और निर्देशक, [[अभिनेता]] और पटकथा लेखक हैं। बसु ने प्रारम्भिक सफलता अन्यगमन और [[वासना|व्यभिचार के विषयों]] से जुड़ी फ़िल्मों में प्राप्त की<ref>{{cite news|first=सुरुचि|last=मजुमदार|url=http://www.screenindia.com/news/anurag-basu-to-direct-hrithik-roshan/284345/|title=Anurag Basu to direct Hrithik Roshan|publisher=Screen|date=14 मार्च 2008|access-date=13 जुलाई 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20081022113637/http://www.screenindia.com/news/Anurag-Basu-to-direct-Hrithik-Roshan/284345/|archive-date=22 अक्तूबर 2008|url-status=dead}}</ref> जैसे [[लाइफ़ इन ए... मेट्रो]] (2007), [[काइट्स]] (2010), [[गैंगस्टर (2006 फ़िल्म)|गैंगस्टर]] (2006) और [[मर्डर (2004 फ़िल्म)|मर्डर]] (2004) आदि। बसु ने अपना निर्देशन का कार्य १९९५ के शुरुआती दौर से टेलीविजन शो से आरम्भ किया , ११०० से भी अधिक एपिसोडों का निर्देशन किया और धीरे-धीरे 2002 तक महत्त्वपूर्ण फ़िल्मों की ओर मुड़ गये।
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{IMDb name|id=1397301}}
{{अनुराग बसु}}
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:1970 में जन्मे लोग]]
{{फ़िल्म-आधार}}
c2546vtc875e8r1d5frkdd4um8dd4bo
6591467
6591408
2026-07-24T04:44:36Z
AlphaVictorDelta0107
790236
[[Special:Contributions/AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] ([[User talk:AMAN KUMAR|वार्ता]]) द्वारा किए गए बदलाव [[Special:Diff/6591408|6591408]] को पूर्ववत किया अनावश्यक सम्पादन वापस किया
6591467
wikitext
text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति
| image = Anurag Basu.jpg
| caption =
| birth_date = {{birth date and age|1970|5|8|df=y}}
| birth_place = [[भिलाई]], मध्य प्रदेश, भारत
| spouse =
| occupation = [[फ़िल्म निर्देशक|निदेशक]], [[पटकथा लेखक|लेखक]]
| yearsactive = 1993 - वर्तमान
}}
'''अनुराग सुव्रत वसु''' ({{lang-bn|অনুরাগ সুব্রত বসু}}) एक भारतीय [[फ़िल्म]], [[टीवी विज्ञापन]], निर्माता और निर्देशक, [[अभिनेता]] और पटकथा लेखक हैं। वसु ने प्रारम्भिक सफलता अन्यगमन और [[वासना|व्यभिचार के विषयों]] से जुड़ी फ़िल्मों में प्राप्त की<ref>{{cite news|first=सुरुचि|last=मजुमदार|url=http://www.screenindia.com/news/anurag-basu-to-direct-hrithik-roshan/284345/|title=Anurag Basu to direct Hrithik Roshan|publisher=Screen|date=14 मार्च 2008|access-date=13 जुलाई 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20081022113637/http://www.screenindia.com/news/Anurag-Basu-to-direct-Hrithik-Roshan/284345/|archive-date=22 अक्तूबर 2008|url-status=dead}}</ref> जैसे [[लाइफ़ इन ए... मेट्रो]] (2007), [[काइट्स]] (2010), [[गैंगस्टर (2006 फ़िल्म)|गैंगस्टर]] (2006) और [[मर्डर (2004 फ़िल्म)|मर्डर]] (2004) आदि। वसु ने अपना निर्देशन का कार्य १९९५ के शुरुआती दौर से टेलीविजन शो से आरम्भ किया , ११०० से भी अधिक एपिसोडों का निर्देशन किया और धीरे-धीरे 2002 तक महत्त्वपूर्ण फ़िल्मों की ओर मुड़ गये।
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{IMDb name|id=1397301}}
{{अनुराग वसु}}
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:1970 में जन्मे लोग]]
{{फ़िल्म-आधार}}
pt0zk5t8axumfoyc7g2y4rpmjk1wr2b
विजय कुमार सिंह
0
534067
6591491
6380243
2026-07-24T06:41:16Z
CommonsDelinker
743
"VK_Singh.jpg" को हटाया। इसे कॉमन्स से [[commons:User:Krd|Krd]] ने हटा दिया है। कारण: No license since 16 July 2026
6591491
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox military person
| name= जनरल विजय कुमार सिंह
| imagesize = 200px
| death_date=
| birth_date= 10 मई 1951
| birth_place= बापोरा , भिवानी, भारत
| death_place=
| placeofburial=
| image=
| caption= जनरल विजय कुमार सिंह, सेना प्रमुख
| nickname=
| allegiance={{flag|भारत}}
| branch=[[भारतीय सशस्त्र सेनाएँ|भारतीय सेना]]
| serviceyears= 1970–2012
| rank= जनरल
| commands= [[भारत के राष्ट्रपति]] को माननीय सैन्यादेशवाहक<br>राजपूत रेजीमेंट के कर्नल<br>ब्रिगेड ऑफ गार्डस के मानद कर्नल<br>जीओसी-इन-सी पूर्वी कमान<br>जीओसी खड्ग वाहिनी<br>जीओसी राष्ट्रीय राइफल्स फोर्स<br>कमांडर इन्फैंट्री ब्रिगेड<br>सीओ २ राजपूत (कलि चिंदी)
| unit= 2 राजपूत
| battles=[[१९७१ का भारत-पाक युद्ध]],<br/>[[ऑपरेशन पवन]]
| awards= [[परम विशिष्ट सेवा पदक|परम विशिष्ट सेवा मैडल]]<br/>[[परम विशिष्ट सेवा पदक|अति विशिष्ट सेवा मैडल]]<br>[[युद्ध सेवा पदक|युद्ध सेवा मैडल]]
|laterwork=
}}
जनरल '''विजय कुमार सिंह''', [[परम विशिष्ट सेवा पदक|परम विशिष्ट सेवा मैडल]], [[परम विशिष्ट सेवा पदक|अति विशिष्ट सेवा मैडल]], [[युद्ध सेवा पदक|युद्ध सेवा मैडल]], [[ऐड-डि-कैम्प|एडीसी]] (जन्म: 10 मई 1951) भारतीय सेना को २६वें थल-सेनाध्यक्ष थे।<ref name=":0">{{cite news |url=http://www.thehindu.com/news/national/article3474071.ece |title=Gen. V.K. Singh to retire today |trans-title=जनरल वी॰के॰ सिंह आज सेवानिवृत होंगे |publisher=द हिन्दू |date=31 मई 2012 |location=नई दिल्ली |accessdate=22 सितम्बर 2013 |language=अंग्रेज़ी |archive-url=https://web.archive.org/web/20120602001841/http://www.thehindu.com/news/national/article3474071.ece |archive-date=2 जून 2012 |url-status=live }}</ref> वर्तमान में वे [[ग़ाज़ियाबाद लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|गाज़ियाबाद]] से [[भारतीय जनता पार्टी|भाजपा]] के [[सांसद]] है तथा [[नरेन्द्र मोदी|नरेंद्र मोदी]] नीत सरकार में उत्तर-पूर्वी भारत से संबंधित मामलों के राज्यमंत्री एवं मोदी सरकार के प्रथम कार्यकाल में[[विदेश राज्यमंत्री, भारत सरकार|विदेश राज्य मंत्री]]रहे। वर्तमान में गाजियाबाद लोक सभा से दुबारा जीत कर लोकसभा पहुंचे हैं और भारत सरकार में सड़क, परिवहन एवं राष्ट्रीय राज्यमार्ग राज्य मंत्री है। जनरल के पद तक पहुँचने वाले वे '''पहले''' प्रशिक्षित कमांडो हैं और वे एसे प्रथम भारतीय सेना प्रमुख हैं जो सरकार को न्यायालय तक र गये।
जनरल <ref name=":0" />'''विजय कुमार सिंह''' केंद्रीय मंत्री परिषद और भारत के सड़क और परिवहन मंत्री<ref name=":1" />। जनरैल वी। के। सिंह के पुत्र विवेक [फ्रामहाउस के मालिक]। जनरल वी.के. सिंह नेफ्यू पीयूष [भारत के पेट्रोलियम प्रमुख]। कुणाल [भाजपा में मंत्री]। हैरी [क्लबों के मालिक सभी क्लब भारत से बाहर हैं]। हार्दिक [स्कूल एसटीजे में अध्ययन]। जनरल वी के सिंह पूर्व विदेश मंत्री । <ref name="deccanherald" />
== पूर्व जीवन और शिक्षा==
विजय कुमार सिंह [[भारतीय]] [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|राज्य]] [[हरियाणा]] के [[भिवानी जिला|भिवानी ज़िले]] के बपोरा गाँव से हैं। वो लगातार तीसरी पीढ़ी में अधिकारी हैं।<ref name="deccanherald">{{cite web |url=http://www.deccanherald.com/content/48203/lt-gen-v-k-singh.html |title=Lt Gen V K Singh named next Army Chief |publisher=deccanherald.com |date=22 जनवरी 2010 |accessdate=22 सितम्बर 2013 |language=अंग्रेज़ी |archive-url=https://web.archive.org/web/20130921060236/http://www.deccanherald.com/content/48203/lt-gen-v-k-singh.html |archive-date=21 सितंबर 2013 |url-status=live }}</ref> उनके पिता भारतीय सेना में कर्नल थे और उनके पितामह (दादा) जूनियर कमीशन अफ़सर (JCO) थे। सिंह ने बिड़ला पब्लिक स्कूल, [[पिलानी]], [[राजस्थान]] से शिक्षा प्राप्त की।<ref name=":1">{{cite news|url=http://www.tribuneindia.com/2010/20100124/main6.htm|title=Bapoda village basks in Gen VK Singh’s glory|last=मोहन|first=रमन|date=24 जनवरी 2010|publisher=द ट्राइब्यून|accessdate=22 सितम्बर 2013|language=अंग्रेज़ी|location=चण्डिगढ़|archive-url=https://web.archive.org/web/20190720095140/https://www.tribuneindia.com/2010/20100124/main6.htm|archive-date=20 जुलाई 2019|url-status=live}}</ref>
== सैन्य करियर ==
सिंह को 14 जून 1970 को [[राजपूत रेजिमेंट|राजपूत रेजीमेंट]] की द्वितीय वाहिनी (काली चिण्डी) में नियुक्त किया गया। बाद में उन्होंने इसी इकाई कमान सम्भाली जब इसे [[पाकिस्तान]] के साथ [[नियंत्रण रेखा]] पर तैनात किया गया।<ref>{{cite news|last=दत्ता|first=सुजान|url=http://www.telegraphindia.com/1110730/jsp/nation/story_14309462.jsp|title=Generation shift in air force|trans-title=वायु सेना में पीढ़ी बदलाव|date=30 जुलाई 2011|newspaper=द टेलीग्राफ|accessdate=22 सितम्बर 2013|language=अंग्रेज़ी|archive-url=https://web.archive.org/web/20130927101528/http://www.telegraphindia.com/1110730/jsp/nation/story_14309462.jsp|archive-date=27 सितंबर 2013|url-status=live}}</ref>
== सेवा निवृत्ति ==
सिंह 31 मई 2012 को २६ माह की सेवा के बाद थल-सेनाध्यक्ष के पद से मुक्त हुए। उनके बाद इस पद पर बिक्रम सिंह पदस्त हुए।<ref>{{cite news |url=http://www.thehindu.com/news/national/article3474071.ece |title=Gen. V.K. Singh to retire today |publisher=द हिन्दू |date=31 मई 2012 |accessdate=22 सितम्बर 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120602001841/http://www.thehindu.com/news/national/article3474071.ece |archive-date=2 जून 2012 |url-status=live }}</ref> सेवानिवृत्ति के तुरन्त बाद सिंह ने [[अन्ना हजारे]] द्वारा चलाये जा रहे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का समर्थन प्रदर्शित किया।<ref>{{cite news| url= http://www.thehindu.com/news/national/article3723926.ece| title= V.K. Singh: throw the corrupt out of power| date= 4 अगस्त 2012| access-date= 22 सितंबर 2013| archive-url= https://web.archive.org/web/20130927054121/http://www.thehindu.com/news/national/article3723926.ece| archive-date= 27 सितंबर 2013| url-status= live}}</ref>
== सम्मान और पुरस्कार ==
11 मार्च 2011 को यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी वर कॉलेज (२००१ के स्नातक वर्ग में) ने इंटरनेशनल फेलोज हॉल ऑफ़ फेम (अंतर्राष्ट्रीय अध्येता) से प्रतिष्ठापित किया। अंतर्राष्ट्रीय अध्येता के रूप में नवाजे गये वो प्रथम भारतीय सेना-अधिकारी एवं कुल ३३वें व्यक्ति हैं।<ref name="DailyBhaskar20120326">{{cite news|url=http://daily.bhaskar.com/article/NAT-TOP-vk-singh-the-veteran-of-wars-who-lost-the-age-battle-2846615.html?LHS-|title=V. K. Singh: the veteran of wars who lost the age battle|accessdate=22 सितम्बर 2013|language=अंग्रेज़ी|publisher=डेली भास्कर|date=26 मार्च 2012|archive-url=https://web.archive.org/web/20130927121857/http://daily.bhaskar.com/article/NAT-TOP-vk-singh-the-veteran-of-wars-who-lost-the-age-battle-2846615.html?LHS-|archive-date=27 सितंबर 2013|url-status=live}}</ref>
*[[परम विशिष्ट सेवा पदक|परम विशिष्ट सेवा मैडल]]
*[[परम विशिष्ट सेवा पदक|अति विशिष्ट सेवा मैडल]]
*[[ऑपरेशन पवन]] के दौरान विशिष्ट सेवा के लिए [[युद्ध सेवा पदक|युद्ध सेवा मैडल]]<ref name="deccanherald" />
*रेंजर टैब
<div style="text-align: center;">
{|
|-
|{{Ribbon devices|number=0|type=award-star|ribbon=Param Vishisht Seva Medal ribbon.svg|width=106}}
|{{Ribbon devices|number=0|type=award-star|ribbon=Ati Vishisht Seva Medal ribbon.svg|width=106}}
|{{Ribbon devices|number=0|type=award-star|ribbon=Yudh Seva Medal ribbon.svg|width=106}}
|{{Ribbon devices|number=0|type=award-star|ribbon=IND Poorvi Star Ribbon.svg|width=106}}
|-
|{{Ribbon devices|number=0|type=award-star|ribbon=IND Special Service Medal Ribbon.svg|width=106}}
|{{Ribbon devices|number=0|type=award-star|ribbon=IND Sangram Medal Ribbon.svg|width=106}}
|{{Ribbon devices|number=0|type=award-star|ribbon=IND Operation Vijay medal.svg|width=106}}
|{{Ribbon devices|number=0|type=award-star|ribbon=IND Operation Parakram medal.svg|width=106}}
|-
|{{Ribbon devices|number=0|type=award-star|ribbon=IND Sainya Seva Medal Ribbon.svg|width=106}}
|{{Ribbon devices|number=0|type=award-star|ribbon=IND High Altitude Medal Ribbon.svg|width=106}}
|{{Ribbon devices|number=0|type=award-star|ribbon=IND Videsh Seva Medal Ribbon.svg|width=106}}
|{{Ribbon devices|number=0|type=award-star|ribbon=IND 50th Anniversary Independence medal.svg|width=106}}
|-
|{{Ribbon devices|number=0|type=award-star|ribbon=IND 25th Anniversary Independence medal.svg|width=106}}
|{{Ribbon devices|number=0|type=award-star|ribbon=IND 30 Years Long Service Ribbon.svg|width=106}}
|{{Ribbon devices|number=0|type=award-star|ribbon=IND 20YearsServiceMedalRibbon.svg|width=106}}
|{{Ribbon devices|number=0|type=award-star|ribbon=IND 9YearsServiceMedalRibbon.svg|width=106}}
|-
|colspan="4" align="center" |<div style="text-align: center;">[[File:Ranger Tab.svg|106px]]</div>
|}</div>
== राजनीति ==
वर्तमान में जनरल वी॰के॰ सिँह भारत के [[ग़ाज़ियाबाद ज़िला|गाजियाबाद]] संसदीय क्षेत्र से [[सांसद]] है। वे 1 मार्च 2014 को वी॰के॰ सिंह [[भारतीय जनता पार्टी]] (भाजपा) में शामिल हुए। इस मौके पर जनरल सिंह ने कहा कि "भाजपा ही राष्ट्रहित में काम करने वाली पार्टी है और एक सैनिक के नाते 42 साल तक देश की रक्षा करने के बाद अब मैं इस पार्टी के जरिए देश की सेवा करना चाहता हूं"। इससे पहले उन्होंने [[हरियाणा]] में भाजपा के प्रधनमंत्री पद के उम्मीद्वार [[नरेन्द्र मोदी|नरेंद्र मोदी]] की रैली में उनके साथ मंच साझा किया था।<ref>{{cite news |url=http://navbharattimes.indiatimes.com/election-news/former-army-chief-vk-singh-joins-bjp/articleshow/31208318.cms |title=जनरल वी.के. सिंह बीजेपी में शामिल |publisher=नवभारत टाइम्स |date=1 मार्च 2014 |accessdate= |archive-url=https://web.archive.org/web/20140312024029/http://navbharattimes.indiatimes.com/election-news/former-army-chief-vk-singh-joins-bjp/articleshow/31208318.cms |archive-date=12 मार्च 2014 |url-status=live }}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ==
* [https://web.archive.org/web/20160304002748/http://indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTemp1PTC2C.aspx?MnId=gu2SQjjzA2ZrATPYjNNihA%3D%3D&ParentID=gIyq+7+0NXWW0Oxns3FqNQ%3D%3D&flag=j4%2FKYJcjKMntc2WI61dzcw%3D%3D General V. K. Singh, PVSM, AVSM, YSM, ADC] in the Indian Army official website
* द अमेरिकन बाज़ार पर [https://web.archive.org/web/20130928041642/http://www.americanbazaaronline.com/2013/09/04/nobody-fancy-dress-party-line-control-gen-singh/ जनरल वी॰के॰ सिंह, विशेष साक्षात्कार]
{{s-start}}
{{s-mil}}
{{succession box | before = [[दीपक कपूर]]|title = [[भारत के थलसेनाध्यक्ष]] | years = 2010–2012| after = [[बिक्रम सिंह]]}}
{{s-end}}
{{भारत के थलसेनाध्यक्ष}}
{{भारतीय सेना}}
{{Persondata <!-- मेटाडाटा: [[विकिपीडिया:व्यक्तिगत आँकड़े]] देखें। -->
| NAME = सिंह, विजय कुमार
| ALTERNATIVE NAMES =
| SHORT DESCRIPTION = भारतीय जनरल
| DATE OF BIRTH = 10 मई 1950
| PLACE OF BIRTH = भिवानी, हरियाणा, भारत
| DATE OF DEATH =
| PLACE OF DEATH =
}}
{{DEFAULTSORT:सिंह, विजय कुमार}}
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:1951 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:भारत के थलसेनाध्यक्ष]]
[[श्रेणी:१६वीं लोक सभा के सदस्य]]
[[श्रेणी:भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिज्ञ]]
[[श्रेणी:हरियाणा के लोग]]
[[श्रेणी:भिवानी के लोग]]
[[श्रेणी:१७वीं लोक सभा के सदस्य]]
[[श्रेणी:मोदी मंत्रिमंडल]]
fj56ul5yamd5yyztrhjanvmtprvbtye
भारत के थलसेनाध्यक्ष
0
559791
6591492
6577138
2026-07-24T06:41:20Z
CommonsDelinker
743
"VK_Singh.jpg" को हटाया। इसे कॉमन्स से [[commons:User:Krd|Krd]] ने हटा दिया है। कारण: No license since 16 July 2026
6591492
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox political post
|post = थलसेनाध्यक्ष
|body =भारत
|nativename = चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (CoAS)
|flag = Flag_COAS.svg
|flagsize = 120px
|flagcaption = थल सेनाध्यक्ष की पताका
|insignia =
|insigniasize =
|insigniacaption =
|image = General Upendra Dwivedi, PVSM, AVSM (2024).jpg
|incumbent = [[उपेंद्र द्विवेदी]]
|incumbentsince = 30 जून 2024
|department = [[भारतीय सशस्त्र सेनाएँ|भारतीय सेना]]
|seat = [[केन्द्रीय सचिवालय]]
|appointer = [[भारत के राष्ट्रपति]]
|termlength_qualified = 3 वर्ष या 62 वर्ष की आयु पूरी होने तक, जो भी पहले हो
|precursor = कमांडर इन चीफ, भारतीय सेना
|formation = 1 अप्रैल 1955
|first = जनरल [[राजेन्द्रसिंहजी जड़ेजा]]
|succession =
|deputy =
}}
भारत के थलसेनाध्यक्ष (चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) [[भारतीय थलसेना|भारत की थलसेना]] के सेनापति होते हैं। इस पद पर सामान्यतः [[जनरल]] पद के अधिकारी होते हैं।
वर्तमान में '''जनरल उपेंद्र द्विवेदी''' इस पद पर आसीन है।
== चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ का पद ==
इस पद की स्थापना 1955 में भारतीय संसद द्वारा पारित ''द कमांडर इन चीफ, आर्मी (चेंज इन डेसिगनेशन) एक्ट'' के अंतर्गत हुई। इससे पूर्व इस पद का नाम कमांडर इन चीफ, आर्मी हुआ करता था।<ref name=india-cincact>{{cite web|url=http://www.vakilno1.com/bareacts/laws/The-Commanders-In-Chief-Change-in-Designation-Act-1955.html|title=The Commanders-In-Chief (Change in Designation) Act, 1955|publisher=VakilNo1.com|accessdate=2011-10-18|archive-url=https://web.archive.org/web/20111111144149/http://vakilno1.com/bareacts/laws/The-Commanders-In-Chief-Change-in-Designation-Act-1955.html|archive-date=11 नवंबर 2011|url-status=dead}}</ref> इनका कार्यालय दिल्ली की रायसीना हिल्स में स्थित केन्द्रीय सचिवालय के साऊथ ब्लॉक में है। इस पद पर नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। इस पद के कार्यकाल की समयसीमा है- अधिकतम 3 वर्ष या 62 वर्ष की आयु पूरी होने तक, जो भी पहले हो।
== पदासीन ==
भारत की स्वतंत्रता के बाद से इस पद को सुशोभित करने वाले महानुभावों की सूची इस प्रकार है<ref name=ia-coas>{{cite web|url=http://indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTemp1PTC2C.aspx?MnId=oDh0T8OwkS94bMpSUEC5qQ==&ParentID=no1EyXv/1frtlrCSwDzk4Q==&flag=ME/QE+cjVT6HFH7fxoR5MQ==|title=Chief of the Army Staff|publisher=Indian Army|accessdate=2011-11-01|archive-url=https://web.archive.org/web/20120516050322/http://indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTemp1PTC2C.aspx?MnId=oDh0T8OwkS94bMpSUEC5qQ%3D%3D&ParentID=no1EyXv%2F1frtlrCSwDzk4Q%3D%3D&flag=ME%2FQE%20cjVT6HFH7fxoR5MQ%3D%3D|archive-date=16 मई 2012|url-status=dead}}</ref>:
=== कमांडर इन चीफ, भारतीय सेना (1947-1949)===
([[ब्रिटिश भारतीय सेना]]'')
{|class="wikitable" border="1" cellpadding="0" cellspacing="0" style="width:70%; margin:0 left;"
|-
!bgcolor="#CCCCCC" |क्रमांक
!bgcolor="#CCCCCC" |नाम
!bgcolor="#CCCCCC" |रैंक
!bgcolor="#CCCCCC" |चित्र
!bgcolor="#CCCCCC"|तिथि से
!bgcolor="#CCCCCC"|तिथि तक
!bgcolor="#CCCCCC"|अलंकरण
|-
|-
|1 || [[रॉबर्ट लॉकहार्ट]]* || जनरल || || 15 अगस्त 1947 || 31 दिसम्बर 1947 || [[Order of the Bath|KCB]], [[Order of the Indian Empire|CIE]], [[Military Cross|MC]]
|-
|2 || [[रॉय बुचर]]* || जनरल || || 1 जनवरी 1948 || 15 जनवरी 1949 || [[Order of the British Empire|KBE]], [[Order of the Bath|CB]], [[Military Cross|MC]]
|-
|3 || [[के एम करिअप्पा]] || फील्ड मार्शल || [[File:General_K._M._Cariappa.jpg|50px]] || 16 जनवरी 1949 || 14 जनवरी 1953||[[Order of the British Empire|OBE]]
|-
|4 || [[राजेन्द्रसिंहजी जड़ेजा]] || जनरल || [[File:Gen Maharaj Shri Rajendrasinhji Jadeja.jpg|50px]] || 14 जनवरी 1953 || 1 अप्रैल 1955 || [[Distinguished Service Order|DSO]]<ref>{{Cite web |url=http://www.bharat-rakshak.com/LAND-FORCES/Personnel/Chiefs/123-Shri-Rajendrasinhji.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=6 मार्च 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140306062835/http://www.bharat-rakshak.com/LAND-FORCES/Personnel/Chiefs/123-Shri-Rajendrasinhji.html |archive-date=6 मार्च 2014 |url-status=dead }}</ref>
|}
=== चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (1949-वर्तमान)===
{|class="wikitable" border="1" cellpadding="0" cellspacing="0" style="width:70%; margin:0 left;"
|-
!bgcolor="#CCCCCC" |क्रमांक
!bgcolor="#CCCCCC" |नाम
!bgcolor="#CCCCCC" |रैंक
!bgcolor="#CCCCCC" |चित्र
!bgcolor="#CCCCCC"|तिथि से
!bgcolor="#CCCCCC"|तिथि तक
!bgcolor="#CCCCCC"|अलंकरण
|-
|-
|1 || [[राजेन्द्रसिंहजी जड़ेजा]] || जनरल|| [[File:Gen Maharaj Shri Rajendrasinhji Jadeja.jpg|50px]] || 1 अप्रैल 1955 || 14 मई 1955 || [[Distinguished Service Order|DSO]]
|-
|2 || [[सत्यवन्त मल्लान्नाह श्रीनागेश|एस एम श्रीनागेश]] || जनरल|| [[File:General Satyawant Mallana Srinagesh.jpg|50px]] || 15 मई 1955 || 7 मई 1957 ||
|-
|3 || [[के एस थिमैया]] || जनरल|| [[File:General_Kodandera_Subayya_Thimayya.jpg|50px]] || 8 मई 1957 || 7 मई 1961 || [[पद्म विभूषण]], [[Distinguished Service Order|DSO]], [[ऐड-डि-कैम्प|एडीसी]]<ref>Gen K.S. Thimayya was commissioned and first attached to the 2nd Battalion, [[Highland Light Infantry]] with status "Unattached List Indian Army". Later he joined the 4th Battalion [[19th Hyderabad Regiment]], which became his parent battalion. The 19th Hyderabad Regiment later became the [[Kumaon Regiment]] after [[Independence Day (India)|India gained independence]].Khanduri, Chandra B.(2006)</ref>
|-
|4 || [[प्राण नाथ थापर]] || जनरल|| [[File:General Pran Nath Thapar.jpg|50px]] || 8 मई 1961 || 19 नवम्बर 1962<ref>[http://indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTemp1PTC2C.aspx?MnId=nmPFmqeV29s=&ParentID=oYjJbpqKulY= Entry] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20101125161633/http://indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTemp1PTC2C.aspx?MnId=nmPFmqeV29s=&ParentID=oYjJbpqKulY= |date=25 नवंबर 2010 }} on Gen P.N. Thapar at the [http://indianarmy.nic.in/Index.aspx?flag=LfcULYFlbeQ= Official Indian Army Website] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20100811005828/http://indianarmy.nic.in/Index.aspx?flag=LfcULYFlbeQ= |date=11 अगस्त 2010 }}. Accessed 2 अगस्त 2010.</ref> ||
|-
|5 || [[जयंत नाथ चौधरी]] || जनरल|| [[File:General Jayanto Nath Chaudhuri.jpg|50px]] || 20 नवम्बर 1962 || 7 जून 1966 || [[पद्म विभूषण]], OBE
|-
|6 || [[परमशिव प्रभाकर कुमारमंगलम]] || जनरल|| [[File:General Paramasiva Prabhakar Kumramangalam.jpg|50px]] || 8 जून 1966 || 7 जून 1969 || [[पद्म विभूषण]], [[Distinguished Service Order|DSO]], [[Order of the British Empire|MBE]]
|-
|7 || [[सैम मानेकशॉ]] || जनरल|| [[File:Field marshal SHFJ Manekshaw.jpg|50px]] || 8 जून 1969 || 31 दिसम्बर 1972 || [[पद्म विभूषण]], [[पद्म भूषण]], [[मिलिट्री क्रॉस]]<ref>{{Cite web |url=http://www.indiaonline.in/About/administration/who/army.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=6 मार्च 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140306055845/http://www.indiaonline.in/About/administration/who/army.html |archive-date=6 मार्च 2014 |url-status=dead }}</ref>
|-
|8 || [[सैम मानेकशॉ]] || फील्ड मार्शल || [[File:Field marshal SHFJ Manekshaw.jpg|50px]] || 1 जनवरी 1973 || 15 जनवरी 1973 || [[पद्म विभूषण]], [[पद्म भूषण]], [[मिलिट्री क्रॉस]]<ref>{{Cite web |url=http://www.indiaonline.in/About/administration/who/army.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=6 मार्च 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140306055845/http://www.indiaonline.in/About/administration/who/army.html |archive-date=6 मार्च 2014 |url-status=dead }}</ref>
|-
|9 || [[गोपाल गुरुनाथ बेवूर]] || जनरल|| [[File:General Gopal Gurnath Bewoor.jpg|50px]] || 16 जनवरी 1973 || 31 मई 1975 || [[परम विशिष्ट सेवा पदक]]
|-
|10 || [[तपीश्वर नारायण रैना]] || जनरल|| [[File:General Tapishwar Narain Raina.jpg|50px]] || 1 जून 1975 || 31 मई 1978 || [[पद्म भूषण]], [[महावीर चक्र]]
|-
|11 || [[ओम प्रकाश मलहोत्रा]] || जनरल|| [[File:General Om Prakash Malhotra.jpg|50px]] || 1 जून 1978 || 31 मई 1981 || [[परम विशिष्ट सेवा पदक]]
|-
|12 || [[के वी कृष्ण राव]] || जनरल|| [[File:General Kotikalapudi Venkata Krishna Rao.jpg|50px]] || 1 जून 1981 || 31 जुलाई 1983 || [[परम विशिष्ट सेवा पदक]]
|-
|13 || [[अरुण श्रीधर वैद्य]] || जनरल|| [[File:General Arunkumar Shridhar Vaidya.jpg|50px]] || 1 अगस्त 1983 || 31 जनवरी 1985 || [[पद्म विभूषण]], [[परम विशिष्ट सेवा पदक]], [[महा वीर चक्र]](बार), [[अति विशिष्ट सेवा पदक]]
|-
|14 || [[कृष्णास्वामी सुंदरजी]] || जनरल|| [[File:General Krishnaswami Sundarji.jpg|50px]] || 1 फ़रवरी 1985 || 31 मई 1988 || [[परम विशिष्ट सेवा पदक]], [[ऐड-डि-कैम्प|एडीसी]]
|-
|15 || [[विश्वनाथ शर्मा]] || जनरल|| [[File:General Vishwa Nath Sharma.jpg|50px]] || 1 जून 1988 || 30 जून 1990 || [[परम विशिष्ट सेवा पदक]], [[अति विशिष्ट सेवा पदक]], [[ऐड-डि-कैम्प|एडीसी]]
|-
|16 || [[एस एफ रोड्रिग्स|सुनीत फ्रांसिस रोड्रिग्स]] || जनरल|| [[File:General Sunith Francis Rodrigues.jpg|50px]] || 1 जुलाई 1990 || 30 जून 1993 || [[परम विशिष्ट सेवा पदक]], [[विशिष्ट सेवा पदक]]
|-
|17 || [[बिपिन चंद्र जोशी]] || जनरल|| [[File:General_Bipin_Chandra_Joshi.jpg|50px]] || 1 जुलाई 1993 || 19 नवम्बर 1994 ||[[परम विशिष्ट सेवा पदक]], [[अति विशिष्ट सेवा पदक]], [[ऐड-डि-कैम्प|एडीसी]]
|-
|18 || [[शंकर रॉयचौधरी]] || जनरल|| [[File:Gen Shankar Roy Chowdhary.jpg|50px]] || 20 नवम्बर 1994 || 30 सितंबर 1997 || [[परम विशिष्ट सेवा पदक]], [[ऐड-डि-कैम्प|एडीसी]]
|-
|19 || [[वेद प्रकाश मलिक]] || जनरल|| [[File:General Ved Prakash Malik.jpg|50px]] || 1 अक्टूबर 1997 || 30 सितंबर 2000 || [[परम विशिष्ट सेवा पदक]], [[अति विशिष्ट सेवा पदक|AVSM]], [[ऐड-डि-कैम्प|एडीसी]]
|-
|20 || [[सुंदरराजन पद्मनाभन]] || जनरल|| [[File:General Sundararajan Padmanabhan.jpg|50px]] || 1 अक्टूबर 2000 || 30 दिसम्बर 2002 || [[परम विशिष्ट सेवा पदक]], [[अति विशिष्ट सेवा पदक]],[[विशिष्ट सेवा पदक]], [[ऐड-डि-कैम्प|एडीसी]]
|-
|21 || [[निर्मल चंद्र विज]] || जनरल|| [[File:General Nirmal Chander Vij.jpg|50px]]|| 31 दिसम्बर 2002 || 31 जनवरी 2005 || [[परम विशिष्ट सेवा पदक]], [[उत्तम युद्ध सेवा पदक]], [[अति विशिष्ट सेवा पदक]]
|-
|22 || [[जोगिन्दर जसवन्त सिंह]] || जनरल|| [[File:General JJ Singh.png|50px]] || 31 जनवरी 2005 || 30 सितंबर 2007 || [[परम विशिष्ट सेवा पदक]], [[अति विशिष्ट सेवा पदक]], [[विशिष्ट सेवा पदक]], [[ऐड-डि-कैम्प|एडीसी]]
|-
|23 || [[दीपक कपूर]] || जनरल||[[File:General Deepak Kapoor.jpg|50px]]|| 30 सितंबर 2007 || 31 मार्च 2010 || [[परम विशिष्ट सेवा पदक]], [[अति विशिष्ट सेवा पदक]], SM, [[विशिष्ट सेवा पदक]], [[ऐड-डि-कैम्प|एडीसी]]
|-
|24 || [[विजय कुमार सिंह]] || जनरल|| || 31 मार्च 2010 || 31 मई 2012 || [[परम विशिष्ट सेवा पदक]] <br/> [[अति विशिष्ट सेवा पदक]] <br/> [[युद्ध सेवा पदक]] <br/> [[ऐड-डि-कैम्प|एडीसी]]
|-
|25 || [[बिक्रम सिंह]] || जनरल|| [[File:General Bikram Singh taking over as the new Chief of the Army Staff, in New Delhi on May 31, 2012.jpg|50px]] || 31 मई 2012 || 31 जुलाई 2014 ||
[[परम विशिष्ट सेवा पदक]] <br/> [[उत्तम युद्ध सेवा पदक]] <br/> [[अति विशिष्ट सेवा पदक]] <br/> [[विशिष्ट सेवा पदक]] <br/> [[सेना मेडल]] <br/> [[ऐड-डि-कैम्प|एडीसी]]<ref>{{Cite web |url=http://timesofindia.indiatimes.com/india/Bikram-Singh-assumes-charge-as-new-Army-chief/articleshow/13684772.cms |title=संग्रहीत प्रति |access-date=6 मार्च 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160113054624/http://timesofindia.indiatimes.com/india/Bikram-Singh-assumes-charge-as-new-Army-chief/articleshow/13684772.cms |archive-date=13 जनवरी 2016 |url-status=live }}</ref>
|-
|26 || [[दलबीर सिंह सुहाग]] || जनरल|| [[File:General Dalbir Singh official photo.jpg|50px]] || 31 जुलाई 2014 || 31 दिसंबर 2016 || [[परम विशिष्ट सेवा पदक]] <br /> [[उत्तम युद्ध सेवा पदक]] <br /> [[अति विशिष्ट सेवा पदक]] <br /> [[विशिष्ट सेवा पदक]]
|-
|27|| [[बिपिन रावत]] || जनरल|| [[File:Bipin_Rawat_(CDS).jpg|50px]] || 31 दिसंबर 2016 || 31 दिसंबर 2019 || [[अति विशिष्ट सेवा पदक]] <br/> [[युद्ध सेवा पदक]] <br/> [[सेना मेडल|सेना पदक]] <br/> [[विशिष्ट सेवा पदक]]
|-
|28|| [[मनोज मुकुंद नरवणे]] || जनरल|| [[File:General Manoj Mukund Naravane PVSM AVSM SM VSM ADC (1).jpg|50px]] || 31 दिसंबर 2019 || 30 अप्रैल 2022 || [[परम विशिष्ट सेवा पदक]] <br/> [[अति विशिष्ट सेवा पदक]] <br/> [[सेना मेडल]] <br/> [[विशिष्ट सेवा पदक]] <br/> [[ऐड-डि-कैम्प|एडीसी]]
|-
|29|| [[जनरल मनोज पांडे|मनोज पांडे]] || जनरल||[[File:Gen Manoj Pandey.jpg|50px]]|| 30 अप्रैल 2022 || 30 जून 2024 || [[परम विशिष्ट सेवा पदक]] <br/> [[अति विशिष्ट सेवा पदक]] <br/> [[विशिष्ट सेवा पदक]] <br/> [[ऐड-डि-कैम्प|एडीसी]]
|-
|30|| [[उपेंद्र द्विवेदी]] || जनरल||[[File:General Upendra Dwivedi, PVSM, AVSM (2024).jpg|50px]]|| 30 जून 2024 || पदस्थ || [[परम विशिष्ट सेवा पदक]] <br/> [[अति विशिष्ट सेवा पदक]]
|}
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
* {{cite book |title=Thimayya: an amazing life |last=Khanduri |first=Chandra B. |authorlink= |coauthors= |year=2006 |publisher=Knowledge World |location=नई दिल्ली |isbn=978-81-87966-36-4 |page= |pages=394 |url=http://books.google.co.in/books?id=ZWXfAAAAMAAJ |accessdate=30 Jul 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20111025144353/http://books.google.co.in/books?id=ZWXfAAAAMAAJ |archive-date=25 अक्तूबर 2011 |url-status=live }}
{{भारत के थलसेनाध्यक्ष}}
{{भारतीय सेना}}
[[श्रेणी:भारत के थलसेनाध्यक्ष]]
[[श्रेणी:भारतीय सेनाध्यक्ष]]
[[श्रेणी:भारतीय सेना]]
3o5asky4tcrrj7gud8hcyv8nj2e50ur
हिमाचल प्रदेश के राज्यपालों की सूची
0
661695
6591489
6486319
2026-07-24T06:40:18Z
CommonsDelinker
743
"Acharya_Dev_Vrat_in_December_2015.jpg" को हटाया। इसे कॉमन्स से [[commons:User:Krd|Krd]] ने हटा दिया है। कारण: No license since 16 July 2026
6591489
wikitext
text/x-wiki
{{See also|भारत के राज्यों के वर्तमान राज्यपालों की सूची}}
{{Infobox official post
|post = राज्यपाल
|title = राज्यपाल
|body = [[हिमाचल प्रदेश]]
|flag = Flag of India.svg
|flagsize = 110px
|flagcaption =
|insignia = Emblem of India.svg
|insigniasize = 50px
|insigniacaption =
|image =
|imagesize =
|incumbent = [[राजेन्द्र अर्लेकर|राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर]]
|incumbentsince = 13 जुलाई 2021
|style = महामहिम
|residence =
|termlength =5Y, (pleasure/resign)
|appointer = [[भारत के राष्ट्रपति]]
|formation = {{start date and years ago|df=yes|1947|08|15}}
|inaugural =
|website = https://himachalrajbhavan.nic.in
}}
15 अगस्त 1947 को [[भारत]] की स्वतंत्रता के बाद से [[हिमाचल प्रदेश]] एक केंद्र शासित प्रदेश बना। 25 जनवरी 1971 को यह पूर्ण राज्य बना। [[हिमाचल प्रदेश के राज्यपालों की सूची|राज्यपाल हिमाचल प्रदेश]] का आधिकारिक निवास स्थान [[राजभवन (हिमाचल प्रदेश)|राजभवन शिमला]] है जो कि राजधानी [[शिमला]] में स्थित है।
== सूची ==
==सूची==
===उप-राज्यपाल 01 मार्च 1952 से 24 जनवरी 1971===
{| class="sortable wikitable"
|+
|-
!क्र.
! नाम
! चित्र
! पदग्रहण
! पदत्याग
|- style="height: 60px;" align="center"
|1
|[[मे. ज. हिम्मत सिंह]] (से.)
|
|1 मार्च 1952
|31 दिसम्बर 1954
|- style="height: 60px;" align="center"
|2
|[[राजा बजरंग बहादुर सिंह]]
|[[File:Raja Bajrang Bahadur Singh of Bhadri (1905-1970).jpg|125px]]
|1 जनवरी 1955
|13 अगस्त 1963
|- style="height: 60px;" align="center"
|3
|[[भगवान सहाय]] (भा. प्र. से.) से.
|
|14 अगस्त 1963
|25 फरवरी 1966
|- style="height: 60px;" align="center"
|4
|[[वी. विश्वनाथन]](भा. प्र. से.) से.
|
|26 फरवरी 1966
|6 मई 1967
|- style="height: 60px;" align="center"
|5
|ओम प्रकाश
|
|7 मई 1967
|15 मई 1967
|- style="height: 60px;" align="center"
|6
|[[ले. ज. के बहादुर सिंह]] (से.)
|
|16 मई 1967
|24 जनवरी 1971
|- style="height: 60px;" align="center"
|}
===राज्यपाल 25 जनवरी 1971 से अब तक===
{| class="sortable wikitable"
|+
|-
!क्र.
! नाम
! चित्र
! पदग्रहण
! पदत्याग
|- style="height: 60px;" align="center"
|1
| एस चक्रवर्ती
|
| 25 जनवरी 1971
| 16 फरवरी 1977
|-
|2
|[[अमीनुद्दीन अहमद खान]]
|[[File:Loharu_State,_State_Court_Fee_Stamp,_8_Annas.JPG|125px]]
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|3
|[[ऐ. एन. बैनर्जी]] (भा. प्र. से.)
|
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|4
|[[होकिशे सीमा]]
| [[चित्र:Hokishe_Sema_portrait.jpg|125px]]
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|5
|[[प्रबोध दिनाकरराव देसाई]]
|
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|6
|[[आर. के. एस. गांधी]]
|[[File:RKSGhandhi.jpg|125px]]
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|7
|[[एस. एच. एम. बर्नी]]
|
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|8
|[[एस. एच. ऐ. बरारी]]
|
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|9
|[[बी. रच्या]]
| [[चित्र:B._Rachaiah_Lok_Sabha_photo.jpg|125px]]
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|10
|[[वीरेंद्र वर्मा]]
| [[चित्र:Virendra_Verma_Lok_Sabha_photo.jpg|125px]]
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|11
|[[सुरेंद्र नाथ]]
|
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|12
|[[बली राम भगत]]
|[[File:Nicolae Ceauşescu and B.R. Bhagat (cropped).png|125px]]
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|13
|[[गुलशेर अहमद]]
| [[चित्र:Gulsher_Ahmed_Lok_Sabha_photo.jpg|125px]]
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|14
|[[सुरेंद्र नाथ]]
|
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|15
|[[विश्वनाथन रत्नम]]
|
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|16
|[[सुधाकरराव नाईक]]
| [[चित्र:Sudhakarrao_Naik_Lok_Sabha_photo_portrait_1998-03-18.jpg|125px]]
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|17
|[[महाबीर प्रसाद]]
|[[File:The_Union_Minister_for_Micro,_Small_%26_Medium_Enterprises,_Shri_Mahabir_Prasad_addressing_the_concluding_function_of_Hindi_Divas,_in_New_Delhi_on_June_05,_2008.jpg|125px]]
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|18
|[[शीला कौल]]
|
[[चित्र:Sheila_Kaul_Lok_Sabha_photo.jpg|125px]]
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|19
|[[महाबीर प्रसाद]]
|[[File:The_Union_Minister_for_Micro,_Small_%26_Medium_Enterprises,_Shri_Mahabir_Prasad_addressing_the_concluding_function_of_Hindi_Divas,_in_New_Delhi_on_June_05,_2008.jpg|125px]]
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|20
|[[वी एस रमादेवी]]
| [[चित्र:VS_RamaDevi.jpg|125px]]
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|21
|[[विष्णु कांत शास्त्री]]
| [[चित्र:Vishnu_Kant_Shastri_(cropped).jpg|125px]]
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|22
|[[सूरज भान]]
|[[File:The_Chairman_of_the_National_Commission_for_Scheduled_Castes_Dr._Suraj_Bhan_and_the_Chairperson_of_the_National_Commission_for_Scheduled_Tribes_Shri_Kanwar_Singh_briefing_the_Press_on_issues_regarding_reservation_in_Government.jpg|125px]]
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|23
|[[विष्णु सदाशिव कोकजे]]
|[[File:The_Governor_of_Himachal_Pradesh,_Justice_(Retd.)_Shri_V.S.Kokje_called_on_the_Vice_President,_Mohammad_Hamid_Ansari_in_New_Delhi_on_April_23,_2008.jpg|125px]]
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|24
|[[प्रभा राव]]
| [[चित्र:Prabha_Rau.jpg|125px]]
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|25
|[[उर्मिला सिंह]]
|[[File:Governor_of_Himachal_Pradesh_Urmila_Singh.jpg|125px]]
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|26
|[[कल्याण सिंह]]
|[[File:Kalyan_Singh_2.jpg|125px]]
|
|
|- style="height: 60px;" align="center"
|27
|[[आचार्य देवव्रत]]
|
|12 अगस्त 2015
|21 जुलाई 2019
|- style="height: 60px;" align="center"
|28
| [[कलराज मिश्र]]
|[[File:Kalraj_Mishra_Minister.jpg|125px]]
|22 जुलाई 2019
|10 सितम्बर 2019
|- style="height: 60px;" align="center"
|29
|[[बण्डारू दत्तारेय|बंडारू दत्तात्रेय]]
|[[File:Bandaru_Dattatreya.jpg|125px]]
|11 सितम्बर 2019
|13 जुलाई 2021
|- style="height: 60px;" align="center"
|30
|[[राजेन्द्र अर्लेकर|राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर]]
| [[चित्र:Rajendra_Arlekar,_Governor_of_Kerala.jpg|125px]]
|13 जुलाई 2021
|वर्तमान तक
|-
|}
==इन्हें भी देखें==
*[[राजभवन शिमला]]; [[शिमला]]
*[[हिमाचल प्रदेश के मुख्यमन्त्रियों की सूची]]
==बाहरी कड़ियाँ==
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{भारत के राज्यों और संघक्षेत्रों के राज्यपाल और लॅफ़्टिनॅण्ट गवर्नर}}
[[श्रेणी:भारत के राज्यों के राज्यपाल]]
ilxu75r9906faycu4ul1p50qvnnc8c8
मूठली
0
668955
6591464
5824703
2026-07-24T04:06:07Z
Dsrprj
780832
/* */ Cr
6591464
wikitext
text/x-wiki
'''मूठली'''<ref>{{Cite web |title=Moothali Village Population - Siwana - Barmer, Rajasthan |url=https://www.census2011.co.in/data/village/87522-moothali-rajasthan.html |access-date=2024-08-11 |website=www.census2011.co.in}}</ref> [[राजस्थान]] के [[बाड़मेर जिला|बाड़मेर जिले]] की [[सिवाना]] [[तहसील]] में बसा एक गाँव है।
==अवस्थिति==
मूठली राजस्थान के बाड़मेर जिले की सिवाना तहसील में बालोतरा-जालोर राजमार्ग पर बसा हुआ है। सिवाना से 17 कि॰मी॰ और बालोतरा से 18 कि॰मी॰ व ब्रह्माजी मंदिर [[ब्रह्मधाम आसोतरा]] से मात्र 5 कि॰ की दूरी पर है। यहां से राज्यमार्ग 38 व राष्ट्रिय राजमार्ग 325 भी गुजरता है।
==जनसांख्यिकी==
गाँव की कुल जनसंख्या 2976 है जिसमें 1612 पुरुष और 1364 महिलायें है।<ref>[http://indikosh.com/vill/94845/moothali मूठली गाँव की जनसंख्या] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160919162154/http://indikosh.com/vill/94845/moothali |date=19 सितंबर 2016 }} http://indikosh.com/vill/94845/moothali {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160919162154/http://indikosh.com/vill/94845/moothali |date=19 सितंबर 2016 }} पर।</ref>
==अन्य==
कहा जाता है कि इसका गौरवमयी इतिहास रहा है। इसका अंदाजा गाँव में प्रवेश करते ही तालाब के किनारे बनी छतरियों (थान) से लग जाता है। यहाँ के कई वीर योद्धाओं ने गौ, ब्राह्मण व मातृभूमि के लिए बलिदान किये है। जो जुंजार भोमियाजी व मामाजी के नाम से पूजे जाते है। मूठली भायलों के मुख्य 12 गाँवों में से एक है। राजपूतों में भायलों के अलावा धांधल राठौड़, महेचा राठौड़, धवेचा राठौड़, चौहान और परमारों के भी काफी घर हैं। इनके अलावा राजपुरोहितो के भी काफी घर है। सुथार, नाई, देवासी, जैन, भील, मेघवाल और हरिजनों के लोग भी रहते है यंहा पर। शिक्षा के क्षेत्र में यंहा पर कुल मिलाकर 5 विद्यालय है जिनमे एक निजी व चार सरकारी है। बड़ी स्कूल 12वीं तक है जिसमे करीबन 800 विद्यार्थी पढ़ते है। खेल जगत में भी यंहा की अच्छी पहचान है। कई युवक राज्य स्तरीय खेलो में भाग ले चुके है। खेलने के लिए क्रिकेट, वॉलीबॉल और बास्केटबॉल के मैदान भी है। जिनमे हाई स्कूल के मंगलाराम जी अध्यापक का अच्छा योगदान रहा है। राजनेतिक दृष्टि में 2015 से पहले मूठली और थापन की मिलाकर ग्राम पंचायत थी लेकिन 2015 के बाद मूठली की अलग से पंचायत बनी है जिसका पहला सरपंच चुन्नीलाल भील बना। यंहा पर एक शिव मंदिर है जंहा पर [[श्री खेताराम जी]] ने अपने जीवन का कुछ समय बिताया था उनके समय का एक धुणा अभी भी विद्यमान है। यंहा पर हर त्यौहार अच्छी तरह से व मिलजुल कर मनाया जाता है जिसमे यंहा के कुछ युवको की अच्छी भागीदारी रहती है। व्यापारिक दृष्टि से भी यह गाँव सुदृढ़ है लगभग छोटी बड़ी वस्तु यंही मिल जाती है। यंहा के कई लोग प्रदेशो में व्यापार करते है।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:बाड़मेर ज़िले के गाँव]]
{{आधार}}
jj60wvm99zwues1hymjyapswtt75ras
पचपदरा
0
674173
6591494
6496126
2026-07-24T07:09:54Z
Dsrprj
780832
/* इन्हें भी देखें */ थूम्बली
6591494
wikitext
text/x-wiki
'''पचपदरा''' भारत में [[राजस्थान]] राज्य के [[बालोतरा]] जिले की एक तहसील है। पदपदरा नमक उत्पादक के लिए विश्व प्रसिद्ध है। <ref>{{Cite web |url=http://pincode.net.in/RAJASTHAN/BARMER/P/PACHPADRA_CITY |title=संग्रहीत प्रति |access-date=12 दिसंबर 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20151222121216/http://pincode.net.in/RAJASTHAN/BARMER/P/PACHPADRA_CITY |archive-date=22 दिसंबर 2015 |url-status=dead }}</ref> <ref>{{Cite web |url=http://www.mapsofindia.com/pincode/india/rajasthan/barmer/pachpadra-city.html%26sa |title=संग्रहीत प्रति |access-date=15 जून 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20151222153655/http://www.mapsofindia.com/pincode/india/rajasthan/barmer/pachpadra-city.html%26sa |archive-date=22 दिसंबर 2015 |url-status=live }}</ref>
{{Infobox settlement
|name = पचपदरा
|other_name =Pachpadra
| settlement_type =
| image_skyline = Jain Temple in Pachpadra 4.jpg
| image_alt =
| coordinates = {{coord|25|55|0|N|72|16|0|E|display=inline,title}}
|subdivision_type = देश |subdivision_name = {{IND}}
|subdivision_type1 = [[भारत के राज्य|राज्य]] |subdivision_name1 = [[राजस्थान]]
|subdivision_type2 = [[भारत के ज़िले|ज़िला]] |subdivision_name2 = [[बालोतरा ज़िला]]
|subdivision_type3 = [[तहसील]] |subdivision_name3 = [[पचपदरा]]
|elevation_m =
|population_total = 8481
|population_as_of = 2011
|demographics_type1 = भाषा
|demographics1_title1= प्रचलित
|demographics1_info1= [[राजस्थानी भाषा|राजस्थानी]], [[हिन्दी]],[[मारवाड़ी]]
|timezone1 = [[भारतीय मानक समय]] |utc_offset1 = +5:30
}}
[[राजस्थान]] में रिफायनरी यहां पर निर्माणाधीन है।
[[पचपदरा रिफाइनरी]]<ref>{{Cite web|url=https://www.balotranews.com/city/balotra-barmer/pachpadra-balotra-2/law-and-order-of-panchpadra-refinery-area-became-subordinate-to-popa-bais-rule/|title=“पोपा बाई के राज“ के अधीनस्थ हुई पंचपदरा रिफाइनरी क्षेत्र की क़ानून व्यवस्था ! » Balotra News-बालोतरा न्यूज़|date=2023-09-10|language=en-US|access-date=2023-09-22}}</ref> [[बाड़मेर तेल शोधनागार]] भारत के राजस्थान के [[बालोतरा]] जिले में एक आगामी सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल परिसर है। यह एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (एचआरआरएल) के स्वामित्व में है, जो [[हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड]] और [[राजस्थान सरकार]] के बीच एक संयुक्त उद्यम है । यह रिफाइनरी अमृतसर जामनगर एक्सप्रेसवे के माध्यम से जामनगर रिफाइनरी और बठिंडा रिफाइनरी से जुड़ी होगी ।
== इन्हें भी देखें ==
*[[मदन प्रजापत]]
* [[बाड़मेर ज़िला]]
* [[बालोतरा ज़िला]]
* [[पचपदरा झील]]
* [[आकड़ली धनसिंह]]
* [[थूम्बली]]
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:बाड़मेर ज़िले के गाँव]]
[[श्रेणी:राजस्थान की तहसीलें]]
8xf61mwcpabx6prlac831zx9pnx3ob5
पश्चिमी पाकिस्तान
0
717771
6591510
6424552
2026-07-24T09:08:07Z
Abirtel
689424
6591510
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox Former Country
|conventional_long_name = पश्चिमी पाकिस्तान
|native_name = {{lang|ur|{{nastaliq|مغربى پاکستان}}}}<br/>{{lang|bn|পশ্চিম পাকিস্তান}}
|common_name = पश्चिमी पाकिस्तान
|continent = एशिया
|region = [[भारतीय उपमहाद्वीप]]
|country = पाकिस्तान
|status = साबिक़ अटूट पाकिस्तान की पश्चिमी भूभाग
|p1 = ब्रिटिश राज
|flag_p1 = British Raj Red Ensign.svg
|s1 = पाकिस्तान
|flag_s1 = Flag of Pakistan.svg
|image_flag = Flag of Pakistan.svg
|image_coat = Emblem of West Pakistan (green version).svg
|image_map = Pakistan (orthographic projection).svg
|image_map_caption = पश्चिमी पाकिस्तान का मानचित्र
|national_motto = "ईमान, इत्तेहाद, नज़्म"
|national_anthem = [[ क़ौमी तराना]]<br/>
|capital = {{nowrap|[[ कराँची]] <small>(1947–1955)</small><br/>[[ लाहौर]] <small>(घोषित)</small><br>[[इस्लामाबाद]] <small>(1965–1970)</small>}}
|common_languages = {{nowrap|[[उर्दू भाषा| उर्दू]] <small>([[ राजभाषा]])</small><br/>[[अंग्रेज़ी भाषा| अंग्रेज़ी]] <small>(आधिकारिक)</small><br/> विभिन्न क्षेत्रीय भाषाएँ}}
<!--|latd=23 |latm=42 |latNS=N |longd=90 |longm=21 |longEW=E-->
|religion = [[इस्लाम]]<br/>[[ सनातन धर्म]]<br/>[[ईसाई धर्म]]
|government_type = {{nowrap|[[संसदीय प्रणाली|संसदीय]] [[अधिराज्य]] <small>(1947–58)</small><br/>[[राष्ट्रपति|राष्ट्रपतिज्ञ रानाराज्य]] <small>(1960–69)</small><br/>सैन्य तानाशाही<small>(1969–70)</small>}}
|legislature =
|title_leader = मुख्यमंत्री
|title_deputy = प्रशासक<sup>a</sup>
|era = शीतयुद्ध
|event_start = [[ पाकिस्तान आंदोलन|स्थापना]]
|date_start = 14 अगस्त
|year_start = 1947
|event1 = [[ एक इकाई व्यवस्था|अंतिम विस्थापन]]
|date_event1 = 22 नवम्बर 1954
|event_end = {{nowrap|[[ क़ानूनी ढाँचा आदेश, 1970|विस्थापन]]<ref name="Story of Pakistan, West Pakistan">{{cite web |last=Story of Pakistan |title=West Pakistan Established as One Unit [1955] |url=http://www.storyofpakistan.com/articletext.asp?artid=A137 |work=Story of Pakistan (Note: One Unit continued until General Yahya Khan dissolved it on July 1, 1970) |publisher=Story of Pakistan, West Pakistan |accessdate=27 February 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120130210717/http://www.storyofpakistan.com/articletext.asp?artid=A137 |archive-date=30 जनवरी 2012 |url-status=live }}</ref>}}
|date_end = 1 जुलाई
|year_end = 1970
|stat_year1 = |stat_area1 = |stat_pop1 =
|currency = [[ पाकिस्तानी रुपय]] (M)
|calling_code = 92
|today = {{flagu|पाकिस्तान}}
|footnote_a = सैन्य शासन के अधीन
}}
'''पश्चिमी पाकिस्तान''' ({{lang-ur|{{nq|مغربی پاکستان}}}}, ''मग़रिबी पाकिस्तान''; {{lang-bn|পশ্চিম পাকিস্তান}}, ''पोश्चिम पाकिस्तान'') [[एक इकाई व्यवस्था]] के तहत, तत्कालीन [[पाकिस्तान (१९५६–१९७१)|पाकिस्तान]]) की पश्चिमी इकाई थी, जो अब, ([[बांग्लादेश]] के अलग होने के बाद से) वर्तमान [[पाकिस्तान]] के शनाख़्त पर है।<ref name="Story of Pakistan (West Pakistan Established as One Unit [1955])">{{cite web|last=SoP|title=Story of Pakistan (West Pakistan Established as One Unit [1955] )|url=http://www.storyofpakistan.com/articletext.asp?artid=A137|publisher=Story of Pakistan (West Pakistan Established as One Unit [1955])|accessdate=25 March 2012|archive-url=https://web.archive.org/web/20120130210717/http://www.storyofpakistan.com/articletext.asp?artid=A137|archive-date=30 जनवरी 2012|url-status=live}}</ref>
==पृष्ठभूमि==
पाकिस्तान की स्थापना [[पाकिस्तान आंदोलन]] का सीधा परिणाम था, जिसके रहनुमा [[मोहम्मद अली जिन्नाह|मुहम्मद अली जिन्नाह]] थे। सन 1947 में [[भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम १९४७|भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम]] के पारित होने के साथ ही, भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान की स्थापना हुई थी। इस विभाजन के तहत [[ब्रिटिश भारत के प्रेसीडेंसी और प्रांत|ब्रिटिश भारत]] के पूर्वी व पष्चिमी छोरों पर मुस्लिम बहुल इलाकों को पाकिस्तान में शामिल कर दिया गया। साथ ही इसी विभाजन के तहत, ब्रिटिश-भारत के पंजाब एवं बंगाल प्रांतों को भी विभाजित कर दिया गया और [[पूर्वी बंगाल]] और [[पंजाब (पाकिस्तान)|पश्चिमी पंजाब]] को पाकिस्तान में सम्मिलित कर दिया गया। पाकिस्तान के भूक्षेत्र में [[ब्रिटिश भारत के प्रेसीडेंसी और प्रांत|ब्रिटिश-शासित भारत]] के पाँच प्रांत थे: [[पूर्वी बंगाल]], [[पंजाब (पाकिस्तान)|पश्चिमी पंजाब]], [[बलूचिस्तान (पाकिस्तान)|बलूचिस्तान]], [[सिंध]] और [[उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत]]। साथ ही कुछ [[ब्रिटिश भारत में रियासतें|रियासतों]] ने भी पाकिस्तानी संध में शामिल होने का प्रस्ताव स्वीकार किया था।
[[File:West Pakistan Map.gif|thumb|left|300px| पश्चिमी पाकिस्तान का मानचित्र]]
विभाजन के बाद, धर्म के नाम पर लाखों लोगों ने इस रेखा के दोनो पार पलायन किया था। तत्पश्चात, क्योंकि उस देश में कोई भी संविधान नहिं था, इसीलिए पाकिस्तान को १९३५ के भारत सरकार अधिनियम के अंतर्गत शासित किया जा रहाथा। संविधान नहीं बन पाने का एक महत्वपूर्ण कारण यह भी था, की दोनों भागों के सियासी नेतृत्व, संविधान से सम्बंधित कई अहम विषयों पर समन्वय की स्थिति में नहीं आ पा रहे थे। विभाजन व पाकिस्तान की स्थापना के पश्चात्, ऐसी स्थिति में, व्यवस्थापिका को [[पाकिस्तान]] के दो पृथक भागों को, जो करीब हजार मील की भारतीय भूमि से अलग-थलग थे, को एक ही जगह से, प्रशासित करने में खासी असुविधा का सामना करना पड़ रहा था। इसके अलावा, पश्चिमी भाग स्वयं ही चार प्रांतों, कबाइली इलाके एवं विभिन्न रियासतों में विभाजित था, जबकी पूर्वी भाग को एक प्रांत था। इसके अलावा, पूर्वी भाग में पश्चिमी भाग के मुकाबले, व्यवस्था, नौकरशाही व सैन्य सुरक्षा की अति निष्पर्याप्ती थी। तथा, पश्चिमी भाग तुलनात्मक रूप से अधिक विकसित था एवं उसके पास बड़ी सेना व पर्याप्त नौकरशाही व व्यवस्थापिका थी। अतः पूर्वी भाग, जो पश्चिम के ही तुलनात्मक जनसंख्या रखता था, के लिये विकास व सम्पन्नता का रास्ता कठिन एवं पश्चिम के मुकाबले असाम्य था। ऐसी स्थिति में पूर्वी हिस्से की नेत्रित्व के मन में भाषा व सांस्कृतिक मुद्दों के अलावा, शक्तियों व सुविधाओं के बंटवारे व सामरिक व आर्थिक समानता के विषय को लेकर गंभीर प्रश्न थे।<ref>{{Cite web |url=http://historypak.com/one-unit/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=7 जून 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160704211704/http://historypak.com/one-unit/ |archive-date=4 जुलाई 2016 |url-status=dead }}</ref>
इस भौगोलिक स्थिति से उपजी प्रशासनिक व असमानता की कठिनाई, व आर्थिक नाउम्मीदी के समाधान के लिए एक विशेष प्रांतीय व्यवस्था का मसौदा तैयार किया गया, जिसे "[[एक इकाई व्यवस्था]]" कहा गया, जिसके तहत दोनों हिसों में केवल एक ही प्रांत होगा, अतः दोनों को बराबर की राजनीतिक शक्ति प्राप्त होगी। साथ ही, इस योजना में अन्य विकस नीतियों को भी शामिल किया गया था। [[प्रधानमन्त्री|प्रधानमंत्री]] [[चौधरी मुहम्मद अली]] ने १४ अक्टूब १९५५ को, ३० सितंबर १९५५ मे [[पाकिस्तान की राष्ट्रीय सभा]] में पारित, पश्चिमी पाकिस्तान के सभी प्रांतों को मिला देने के अधिनियम को कार्यान्वित कर, वन युनिट सिस्टम को लागू कर दिया। तत्पूर्व, [[प्रधानमंत्री (पाकिस्तान) |प्रधानमंत्री]] [[मोहम्मद अली बोगरा]] ने २२ नवंबर १९५४ को इसकी आधिकारिक घोषणा की थी।
इस सब के अतिरिक्त, इस व्यवस्था का एक और पहलू था: कई राजनीतिज्ञों का यह भी प्रयास था की पाकिस्तान के विभिन्न क्षेत्रीय परम्पराओं व संस्कृतीयो को खत्म कर के पाकिस्तान को एक राष्ट्रीय संस्कृति के तरफ ले जाया जाये। अतः विभिन्न क्षेत्रीय प्रांतों के अंत से पूरे देश को एक सांस्कृतिक इकाई बनाने में सुविधा होती। अतः इस नीति को प्रांतीय व क्षेत्रीय संस्कृतियों को खत्म कर, एक राष्ट्रीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए भी लाया गया था।
===एक इकाई व्यवस्था===
{{मुख्य|एक इकाई व्यवस्था}}
[[File:Historical Pakistan.gif|300px|left|thumb|स्वतंत्रता पश्चात पाकिस्तानी भूमि का मानचित्र, पाकिस्तान के दोनों भागों को दखा जा सकता है।]]
एक इकाई व्यवस्था अथवा वन-यूनिट सीस्टम, [[पाकिस्तान]] की एक पुर्वतः परवर्तित प्रशासनिक व्यवस्था थी, जिसके अंतर्गत, तत्कालीन [[पाकिस्तान|पाकिस्तानी भूमि]] के दोनों भिन्न टुकड़ों को "एक प्रशासनिक इकाई" के रूप में ही शासित किये जाने की योजना रखी गई थी। इस तरह की प्रशासनिक नीति को अपनाने का मुख्य कारण, सर्कार द्वारा, [[पाकिस्तान अधिराज्य|पाकिस्तानी अधिराज्य]] के दो विभक्त एवं पृथक भौगोलिक आंचलों की एक ही केंद्रीय व्यवस्था के अंतर्गत शासन में आने वाली घोर प्रशासनिक असुविधाएँ, एवं भौगोलिक कठिनाईयाँ बताई गई थी। अतः इस भौगोलिक व प्रशासनिक विषय के समाधान के रूप में, सरकार ने इन दो भौगोलीय हिस्सों को ही, एक [[संघ (प्रशासन)|महासंघीय ढांचे]] के अंतर्गत, पाकिस्तान के दो वाहिद प्रशासनिक इकाइयों के रूप में स्थापित करने की नीति बनाई गई। इस्के तहत, तत्कालीन मुमलिकात-ए-पाकिस्तान के, पूर्वी भाग में मौजूद स्थिति के अनुसार ही, पश्चिमी भाग के पाँचों प्रांतों व उनकी प्रांतीय सरकारों को भंग कर, एक प्रांत, [[पश्चिमी पाकिस्तान]] गठित किया गया, वहीं पूर्वी भाग (जो अब [[बांग्लादेश]] है) को [[पूर्वी पाकिस्तान]] कह कर गठित किया गया। तत्प्रकार, पाकिस्तान, एक इकाई योजना के तहत, महज दो प्रांतों में विभाजित एक राज्य बन गया।
वन यूनिट योजना की घोषणा [[प्रधानमन्त्री|प्रधानमंत्री]] [[मोहम्मद अली बोगरा]] के शासनकाल के दौरान २२ नवंबर १९५४ को की गई, और १४ अक्टूबर १९५५ को देश के पश्चिमी भाग के सभी प्रांतों को एकीकृत कर, [[पश्चिमी पाकिस्तान]] प्रांत गठित किया गया, जिसमें, सभी प्रांतों के अलावा तत्कालीन, [[ब्रिटिशकालीन भारत के रियासतों की सूची|राजशाहियों]] और [[संघ शासित जनजातीय क्षेत्र|कबाइली इलाके]] भी शामिल थे। इस प्रांत में १२ प्रमंडल थे, और इसकी राजधानी [[लाहौर]] थी। दूसरी ओर [[पूर्वी बंगाल]] के प्रांत को [[पूर्वी पाकिस्तान]] का नाम दिया गया, जिसकी राजधानी [[ढाका]] थी। संघीय राजधानी(कार्यपालिका) को वर्ष १९५९ में [[कराँची]] से [[रावलपिंडी]] स्थानांतरित किया गया, जहां सेना मुख्यालय था, और नई राजधानी, [[इस्लामाबाद]] के पूरा होने तक यहां मौजूद रहा जबकि संघीय विधानपालिका को [[ढाका]] में स्थापित किया गया।
इस नीति का उद्देश्य बज़ाहिर प्रशासनिक सुधार लाना था लेकिन कई लिहाज से यह बहुत विनाशकारी कदम था। पश्चिमी पाकिस्तान में मौजूद बहुत सारी राज्यों ने इस आश्वासन पर विभाजन के समय पाकिस्तान में शामिल हो गए थे कि उनकी स्वायत्तता कायम रखी जाएगी लेकिन वन इकाई बना देने के फैसले से सभी स्थानीय राज्यों का अंत हो गया। इस संबंध में बहावलपुर, खीरिपोर और कलात के राज्य विशेषकर उल्लेखनीय हैं।
मामले इस समय अधिक गंभीर समय १९५८ ई। के तख्तापलट के बाद मुख्यमंत्री का पद समाप्त कर दिया गया और राष्ट्रपति ने पश्चिमी पाकिस्तान के विकल्प अपने पास रख लिए। राजनीतिक विशेषज्ञों यह भी समझते हैं कि पश्चिमी पाकिस्तान के सभी प्रांतों को एकजुट करने के उद्देश्य पूर्वी पाकिस्तान की भाषाई और राजनीतिक इकाई का जोर तोड़ना था।
अंततः एक जुलाई १९७० को राष्ट्रपति [[याह्या ख़ान|याह्या खान]] ने एक इकाई का सफाया करते हुए [[पश्चिमी पाकिस्तान]] के सभी प्रांतों बहाल कर दिया।
==इतिहास==
==शासन प्रणाली==
==इन्हें भी देखें==
*[[एक इकाई व्यवस्था]]
*[[पूर्वी पाकिस्तान ]]
*[[पाकिस्तान का इतिहास]]
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
[[श्रेणी:पश्चिमी पाकिस्तान]]
[[श्रेणी:पाकिस्तान की राजनीति]]
[[श्रेणी:एक इकाई व्यवस्था]]
eqieddlyeq618i45oarg12r1vm6d72f
6591511
6591510
2026-07-24T09:09:46Z
Abirtel
689424
/* */
6591511
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox Former Country
|conventional_long_name = पश्चिमी पाकिस्तान
|native_name = {{lang|ur|{{nastaliq|مغربى پاکستان}}}}<br/>{{lang|bn|পশ্চিম পাকিস্তান}}
|common_name = पश्चिमी पाकिस्तान
|continent = एशिया
|region = [[भारतीय उपमहाद्वीप]]
|country = पाकिस्तान
|status = साबिक़ अटूट पाकिस्तान की पश्चिमी भूभाग
|p1 = ब्रिटिश राज
|flag_p1 = British Raj Red Ensign.svg
|s1 = पाकिस्तान
|flag_s1 = Flag of Pakistan.svg
|image_flag = Flag of Pakistan.svg
|image_coat = Emblem of West Pakistan (green version).svg
|image_map = Pakistan (orthographic projection).svg
|image_map_caption = पश्चिमी पाकिस्तान का मानचित्र
|national_motto = "ईमान, इत्तेहाद, नज़्म"
|national_anthem = [[ क़ौमी तराना]]<br/>
|capital = {{nowrap|[[ कराँची]] <small>(1947–1955)</small><br/>[[ लाहौर]] <small>(घोषित)</small><br>[[इस्लामाबाद]] <small>(1965–1970)</small>}}
|common_languages = {{nowrap|[[उर्दू भाषा| उर्दू]] <small>([[ राजभाषा]])</small><br/>[[अंग्रेज़ी भाषा| अंग्रेज़ी]] <small>(आधिकारिक)</small><br/> विभिन्न क्षेत्रीय भाषाएँ}}
<!--|latd=23 |latm=42 |latNS=N |longd=90 |longm=21 |longEW=E-->
|religion = [[इस्लाम]]<br/>[[ सनातन धर्म]]<br/>[[ईसाई धर्म]]
|government_type = {{nowrap|[[संसदीय प्रणाली|संसदीय]] [[अधिराज्य]] <small>(1947–58)</small><br/>[[राष्ट्रपति|राष्ट्रपतिज्ञ रानाराज्य]] <small>(1960–69)</small><br/>सैन्य तानाशाही<small>(1969–70)</small>}}
|legislature =
|title_leader = मुख्यमंत्री
|title_deputy = प्रशासक<sup>a</sup>
|era = शीतयुद्ध
|event_start = [[ पाकिस्तान आंदोलन|स्थापना]]
|date_start = 14 अगस्त
|year_start = 1947
|event1 = [[ एक इकाई व्यवस्था|अंतिम विस्थापन]]
|date_event1 = 22 नवम्बर 1954
|event_end = {{nowrap|[[ क़ानूनी ढाँचा आदेश, 1970|विस्थापन]]<ref name="Story of Pakistan, West Pakistan">{{cite web |last=Story of Pakistan |title=West Pakistan Established as One Unit [1955] |url=http://www.storyofpakistan.com/articletext.asp?artid=A137 |work=Story of Pakistan (Note: One Unit continued until General Yahya Khan dissolved it on July 1, 1970) |publisher=Story of Pakistan, West Pakistan |accessdate=27 February 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120130210717/http://www.storyofpakistan.com/articletext.asp?artid=A137 |archive-date=30 जनवरी 2012 |url-status=live }}</ref>}}
|date_end = 1 जुलाई
|year_end = 1970
|stat_year1 = |stat_area1 = |stat_pop1 =
|currency = [[ पाकिस्तानी रुपय]] (M)
|calling_code = 92
|today = {{flagu|पाकिस्तान}}
|footnote_a = सैन्य शासन के अधीन
}}
'''पश्चिमी पाकिस्तान''' ({{lang-ur|{{nq|مغربی پاکستان}}}}, ''मग़रिबी पाकिस्तान''; {{lang-bn|পশ্চিম পাকিস্তান}}, ''पोश्चिम पाकिस्तान'') [[एक इकाई व्यवस्था]] के तहत, तत्कालीन [[पाकिस्तान (१९५६–१९७१)|पाकिस्तान]] की पश्चिमी इकाई थी, जो अब [[बांग्लादेश]] के अलग होने के बाद से वर्तमान [[पाकिस्तान]] के शनाख़्त पर मौजूद है।<ref name="Story of Pakistan (West Pakistan Established as One Unit [1955])">{{cite web|last=SoP|title=Story of Pakistan (West Pakistan Established as One Unit [1955] )|url=http://www.storyofpakistan.com/articletext.asp?artid=A137|publisher=Story of Pakistan (West Pakistan Established as One Unit [1955])|accessdate=25 March 2012|archive-url=https://web.archive.org/web/20120130210717/http://www.storyofpakistan.com/articletext.asp?artid=A137|archive-date=30 जनवरी 2012|url-status=live}}</ref>
==पृष्ठभूमि==
पाकिस्तान की स्थापना [[पाकिस्तान आंदोलन]] का सीधा परिणाम था, जिसके रहनुमा [[मोहम्मद अली जिन्नाह|मुहम्मद अली जिन्नाह]] थे। सन 1947 में [[भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम १९४७|भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम]] के पारित होने के साथ ही, भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान की स्थापना हुई थी। इस विभाजन के तहत [[ब्रिटिश भारत के प्रेसीडेंसी और प्रांत|ब्रिटिश भारत]] के पूर्वी व पष्चिमी छोरों पर मुस्लिम बहुल इलाकों को पाकिस्तान में शामिल कर दिया गया। साथ ही इसी विभाजन के तहत, ब्रिटिश-भारत के पंजाब एवं बंगाल प्रांतों को भी विभाजित कर दिया गया और [[पूर्वी बंगाल]] और [[पंजाब (पाकिस्तान)|पश्चिमी पंजाब]] को पाकिस्तान में सम्मिलित कर दिया गया। पाकिस्तान के भूक्षेत्र में [[ब्रिटिश भारत के प्रेसीडेंसी और प्रांत|ब्रिटिश-शासित भारत]] के पाँच प्रांत थे: [[पूर्वी बंगाल]], [[पंजाब (पाकिस्तान)|पश्चिमी पंजाब]], [[बलूचिस्तान (पाकिस्तान)|बलूचिस्तान]], [[सिंध]] और [[उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत]]। साथ ही कुछ [[ब्रिटिश भारत में रियासतें|रियासतों]] ने भी पाकिस्तानी संध में शामिल होने का प्रस्ताव स्वीकार किया था।
[[File:West Pakistan Map.gif|thumb|left|300px| पश्चिमी पाकिस्तान का मानचित्र]]
विभाजन के बाद, धर्म के नाम पर लाखों लोगों ने इस रेखा के दोनो पार पलायन किया था। तत्पश्चात, क्योंकि उस देश में कोई भी संविधान नहिं था, इसीलिए पाकिस्तान को १९३५ के भारत सरकार अधिनियम के अंतर्गत शासित किया जा रहाथा। संविधान नहीं बन पाने का एक महत्वपूर्ण कारण यह भी था, की दोनों भागों के सियासी नेतृत्व, संविधान से सम्बंधित कई अहम विषयों पर समन्वय की स्थिति में नहीं आ पा रहे थे। विभाजन व पाकिस्तान की स्थापना के पश्चात्, ऐसी स्थिति में, व्यवस्थापिका को [[पाकिस्तान]] के दो पृथक भागों को, जो करीब हजार मील की भारतीय भूमि से अलग-थलग थे, को एक ही जगह से, प्रशासित करने में खासी असुविधा का सामना करना पड़ रहा था। इसके अलावा, पश्चिमी भाग स्वयं ही चार प्रांतों, कबाइली इलाके एवं विभिन्न रियासतों में विभाजित था, जबकी पूर्वी भाग को एक प्रांत था। इसके अलावा, पूर्वी भाग में पश्चिमी भाग के मुकाबले, व्यवस्था, नौकरशाही व सैन्य सुरक्षा की अति निष्पर्याप्ती थी। तथा, पश्चिमी भाग तुलनात्मक रूप से अधिक विकसित था एवं उसके पास बड़ी सेना व पर्याप्त नौकरशाही व व्यवस्थापिका थी। अतः पूर्वी भाग, जो पश्चिम के ही तुलनात्मक जनसंख्या रखता था, के लिये विकास व सम्पन्नता का रास्ता कठिन एवं पश्चिम के मुकाबले असाम्य था। ऐसी स्थिति में पूर्वी हिस्से की नेत्रित्व के मन में भाषा व सांस्कृतिक मुद्दों के अलावा, शक्तियों व सुविधाओं के बंटवारे व सामरिक व आर्थिक समानता के विषय को लेकर गंभीर प्रश्न थे।<ref>{{Cite web |url=http://historypak.com/one-unit/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=7 जून 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160704211704/http://historypak.com/one-unit/ |archive-date=4 जुलाई 2016 |url-status=dead }}</ref>
इस भौगोलिक स्थिति से उपजी प्रशासनिक व असमानता की कठिनाई, व आर्थिक नाउम्मीदी के समाधान के लिए एक विशेष प्रांतीय व्यवस्था का मसौदा तैयार किया गया, जिसे "[[एक इकाई व्यवस्था]]" कहा गया, जिसके तहत दोनों हिसों में केवल एक ही प्रांत होगा, अतः दोनों को बराबर की राजनीतिक शक्ति प्राप्त होगी। साथ ही, इस योजना में अन्य विकस नीतियों को भी शामिल किया गया था। [[प्रधानमन्त्री|प्रधानमंत्री]] [[चौधरी मुहम्मद अली]] ने १४ अक्टूब १९५५ को, ३० सितंबर १९५५ मे [[पाकिस्तान की राष्ट्रीय सभा]] में पारित, पश्चिमी पाकिस्तान के सभी प्रांतों को मिला देने के अधिनियम को कार्यान्वित कर, वन युनिट सिस्टम को लागू कर दिया। तत्पूर्व, [[प्रधानमंत्री (पाकिस्तान) |प्रधानमंत्री]] [[मोहम्मद अली बोगरा]] ने २२ नवंबर १९५४ को इसकी आधिकारिक घोषणा की थी।
इस सब के अतिरिक्त, इस व्यवस्था का एक और पहलू था: कई राजनीतिज्ञों का यह भी प्रयास था की पाकिस्तान के विभिन्न क्षेत्रीय परम्पराओं व संस्कृतीयो को खत्म कर के पाकिस्तान को एक राष्ट्रीय संस्कृति के तरफ ले जाया जाये। अतः विभिन्न क्षेत्रीय प्रांतों के अंत से पूरे देश को एक सांस्कृतिक इकाई बनाने में सुविधा होती। अतः इस नीति को प्रांतीय व क्षेत्रीय संस्कृतियों को खत्म कर, एक राष्ट्रीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए भी लाया गया था।
===एक इकाई व्यवस्था===
{{मुख्य|एक इकाई व्यवस्था}}
[[File:Historical Pakistan.gif|300px|left|thumb|स्वतंत्रता पश्चात पाकिस्तानी भूमि का मानचित्र, पाकिस्तान के दोनों भागों को दखा जा सकता है।]]
एक इकाई व्यवस्था अथवा वन-यूनिट सीस्टम, [[पाकिस्तान]] की एक पुर्वतः परवर्तित प्रशासनिक व्यवस्था थी, जिसके अंतर्गत, तत्कालीन [[पाकिस्तान|पाकिस्तानी भूमि]] के दोनों भिन्न टुकड़ों को "एक प्रशासनिक इकाई" के रूप में ही शासित किये जाने की योजना रखी गई थी। इस तरह की प्रशासनिक नीति को अपनाने का मुख्य कारण, सर्कार द्वारा, [[पाकिस्तान अधिराज्य|पाकिस्तानी अधिराज्य]] के दो विभक्त एवं पृथक भौगोलिक आंचलों की एक ही केंद्रीय व्यवस्था के अंतर्गत शासन में आने वाली घोर प्रशासनिक असुविधाएँ, एवं भौगोलिक कठिनाईयाँ बताई गई थी। अतः इस भौगोलिक व प्रशासनिक विषय के समाधान के रूप में, सरकार ने इन दो भौगोलीय हिस्सों को ही, एक [[संघ (प्रशासन)|महासंघीय ढांचे]] के अंतर्गत, पाकिस्तान के दो वाहिद प्रशासनिक इकाइयों के रूप में स्थापित करने की नीति बनाई गई। इस्के तहत, तत्कालीन मुमलिकात-ए-पाकिस्तान के, पूर्वी भाग में मौजूद स्थिति के अनुसार ही, पश्चिमी भाग के पाँचों प्रांतों व उनकी प्रांतीय सरकारों को भंग कर, एक प्रांत, [[पश्चिमी पाकिस्तान]] गठित किया गया, वहीं पूर्वी भाग (जो अब [[बांग्लादेश]] है) को [[पूर्वी पाकिस्तान]] कह कर गठित किया गया। तत्प्रकार, पाकिस्तान, एक इकाई योजना के तहत, महज दो प्रांतों में विभाजित एक राज्य बन गया।
वन यूनिट योजना की घोषणा [[प्रधानमन्त्री|प्रधानमंत्री]] [[मोहम्मद अली बोगरा]] के शासनकाल के दौरान २२ नवंबर १९५४ को की गई, और १४ अक्टूबर १९५५ को देश के पश्चिमी भाग के सभी प्रांतों को एकीकृत कर, [[पश्चिमी पाकिस्तान]] प्रांत गठित किया गया, जिसमें, सभी प्रांतों के अलावा तत्कालीन, [[ब्रिटिशकालीन भारत के रियासतों की सूची|राजशाहियों]] और [[संघ शासित जनजातीय क्षेत्र|कबाइली इलाके]] भी शामिल थे। इस प्रांत में १२ प्रमंडल थे, और इसकी राजधानी [[लाहौर]] थी। दूसरी ओर [[पूर्वी बंगाल]] के प्रांत को [[पूर्वी पाकिस्तान]] का नाम दिया गया, जिसकी राजधानी [[ढाका]] थी। संघीय राजधानी(कार्यपालिका) को वर्ष १९५९ में [[कराँची]] से [[रावलपिंडी]] स्थानांतरित किया गया, जहां सेना मुख्यालय था, और नई राजधानी, [[इस्लामाबाद]] के पूरा होने तक यहां मौजूद रहा जबकि संघीय विधानपालिका को [[ढाका]] में स्थापित किया गया।
इस नीति का उद्देश्य बज़ाहिर प्रशासनिक सुधार लाना था लेकिन कई लिहाज से यह बहुत विनाशकारी कदम था। पश्चिमी पाकिस्तान में मौजूद बहुत सारी राज्यों ने इस आश्वासन पर विभाजन के समय पाकिस्तान में शामिल हो गए थे कि उनकी स्वायत्तता कायम रखी जाएगी लेकिन वन इकाई बना देने के फैसले से सभी स्थानीय राज्यों का अंत हो गया। इस संबंध में बहावलपुर, खीरिपोर और कलात के राज्य विशेषकर उल्लेखनीय हैं।
मामले इस समय अधिक गंभीर समय १९५८ ई। के तख्तापलट के बाद मुख्यमंत्री का पद समाप्त कर दिया गया और राष्ट्रपति ने पश्चिमी पाकिस्तान के विकल्प अपने पास रख लिए। राजनीतिक विशेषज्ञों यह भी समझते हैं कि पश्चिमी पाकिस्तान के सभी प्रांतों को एकजुट करने के उद्देश्य पूर्वी पाकिस्तान की भाषाई और राजनीतिक इकाई का जोर तोड़ना था।
अंततः एक जुलाई १९७० को राष्ट्रपति [[याह्या ख़ान|याह्या खान]] ने एक इकाई का सफाया करते हुए [[पश्चिमी पाकिस्तान]] के सभी प्रांतों बहाल कर दिया।
==इतिहास==
==शासन प्रणाली==
==इन्हें भी देखें==
*[[एक इकाई व्यवस्था]]
*[[पूर्वी पाकिस्तान ]]
*[[पाकिस्तान का इतिहास]]
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
[[श्रेणी:पश्चिमी पाकिस्तान]]
[[श्रेणी:पाकिस्तान की राजनीति]]
[[श्रेणी:एक इकाई व्यवस्था]]
euo0y6e1pfvwwji2vwv7hyriqqa3z49
कुंवर चैन सिंह
0
736695
6591375
6513834
2026-07-23T18:42:03Z
Kapilmewada1
937871
/* सन्दर्भ */ authentic book reference
6591375
wikitext
text/x-wiki
'''कुंवर चैन सिंह''' (१८०० - १८२४) [[मध्य प्रदेश]] में [[भोपाल]] के निकट स्थित [[नरसिंहगढ़]] रियासत के राजकुमार थे, जो [[24 जुलाई]] [[1824]] को अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। [[१८५७ का प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम|1857 के सशस्त्र स्वाधीनता संग्राम]] से भी लगभग 33 वर्ष पूर्व की यह घटना कुंवर चैन सिंह को इस अंचल के पहले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में प्रतिष्ठित करती है।<ref>[https://www.amarujala.com/photo-gallery/madhya-pradesh/sehore/even-before-the-1857-revolution-in-madhya-pradesh-kunwar-chain-singh-had-waged-the-war-of-independence 1857 की क्रांति से पहले कुंवर चैन सिंह ने छेड़ी थी आजादी की जंग, मातृभूमि की रक्षा में हुए थे शहीद]</ref> मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015 से [[सीहोर]] स्थित कुंवर चैन सिंह की छतरी पर गार्ड ऑफ ऑनर प्रारम्भ किया है।<ref name="pib">{{cite web | url=http://pib.nic.in/newsite/hindifeature.aspx | title=मालवा का मंगल पांडे- शहीद कुंवर चैन सिंह | publisher=पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार | work=अखिल कुमार नामदेव, उप निदेशक, पीआईबी, भोपाल | date=20 अगस्त 2016 | accessdate=30 अगस्त 2016 | author=नामदेव, अखिल कुमार | archive-url=https://web.archive.org/web/20141008232430/http://www.pib.nic.in/newsite/hindifeature.aspx | archive-date=8 अक्तूबर 2014 | url-status=live }}</ref>
==पृष्ठभूमि==
सन 1818 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने भोपाल के तत्कालीन नवाब से समझौता करके सीहोर में एक हजार सैनिकों की छावनी स्थापित की। कंपनी द्वारा नियुक्त पॉलिटिकल एजेंट मैडॉक को इन फौजियों का प्रभारी बनाया गया। इस फौजी टुकड़ी का वेतन भोपाल रियासत के शाही खजाने से दिया जाता था। समझौते के तहत पॉलिटिकल एजेंट मैडॉक को भोपाल सहित नजदीकी नरसिंहगढ़, खिलचीपुर और राजगढ़ रियासत से संबंधित राजनीतिक अधिकार भी सौंप दिए गए। बाकी तो चुप रहे, लेकिन इस फैसले को नरसिंहगढ़ रियासत के युवराज कुंवर चैन सिंह ने गुलामी की निशानी मानते हुए स्वीकार नहीं किया।<ref name="pib"/>
==अंग्रेजों से विरोध==
रियासत के दीवान आनंदराम बख्शी और मंत्री रूपराम बोहरा अंग्रेजों से मिले हुए थे। यह पता चलने पर कुंवर चैन सिंह ने इन दोनों को मार दिया।
मंत्री रूपराम के भाई ने इसकी की शिकायत कलकत्ता स्थित गवर्नर जनरल से की, जिसके निर्देश पर पॉलिटिकल एजेंट मैडॉक ने कुंवर चैन सिंह को भोपाल के नजदीक बैरसिया में एक बैठक के लिए बुलाया। बैठक में मैडॉक ने कुंवर चैन सिंह को हत्या के अभियोग से बचाने के लिए दो शर्तें रखीं। पहली शर्त थी कि नरसिंहगढ़ रियासत, अंग्रेजों की अधीनता स्वीकारे। दूसरी शर्त थी कि क्षेत्र में पैदा होनेवाली अफीम की पूरी फसल सिर्फ अंग्रेजों को ही बेची जाए। कुंवर चैन सिंह द्वारा दोनों ही शर्तें ठुकरा देने पर मैडॉक ने उन्हें 24 जुलाई 1824 को सीहोर पहुंचने का आदेश दिया। अंग्रेजों की बदनीयती का अंदेशा होने के बाद भी कुंवर चैन सिंह नरसिंहगढ़ से अपने विश्वस्त साथी सारंगपुर निवासी हिम्मत खां और बहादुर खां सहित 43 सैनिकों के साथ सीहोर पहुंचे। जहां पॉलिटिकल एजेंट मैडॉक और अंग्रेज सैनिकों से उनकी जमकर मुठभेड़ हुई। कुंवर चैन सिंह और उनके मुट्ठी भर विश्वस्त साथियों ने शस्त्रों से सुसज्जित अंग्रेजों की फौज से डटकर मुकाबला किया। घंटों चली लड़ाई में अंग्रेजों के तोपखाने ओर बंदूकों के सामने कुंवर चैन सिंह और उनके जांबाज लड़ाके डटे रहे।
ऐसा कहा जाता है कि युद्ध के दौरान कुंवर चैन सिंह ने अंग्रेजों की अष्टधातु से बनी तोप पर अपनी तलवार से प्रहार किया जिससे तलवार तोप को काटकर उसमे फंस गई। मौके का फायदा उठाकर अंग्रेज तोपची ने उनकी गर्दन पर तलवार का प्रहार कर दिया जिससे कुंवर चैन सिंह की गर्दन रणभूमि में ही गिर गई और उनका स्वामीभक्त घोड़ा शेष धड़ को लेकर नरसिंहगढ़ आ गया। कुंवर चैन सिंह की धर्मपत्नी कुंवरानी राजावत जी ने उनकी याद में [[परशुराम सागर]] के पास एक मंदिर भी बनवाया जिसे'कुंवरानी जी के मंदिर' के नाम से जानते हैं।<ref name="pib"/>
== शहीद कुंवर चैन सिंह स्मारक ==
कुंवर चैन सिंह के स्मारक, समाधियाँ और मकबरे सीहोर-इंदौर मार्ग पर लोटिया नदी के किनारे स्थित दशाहरा वाला मैदान में 2 किलोमीटर दूर स्थित हैं। <ref>[https://sehore.nic.in/en/tourist-place/cenotaphs-of-kunwar-chain-singh/ Cenotaphs of Kunwar Chain Singh]</ref>
https://www.nbtindia.gov.in/books_detail__60__pm-yuva-series__3373__malwa-ke-mahanayak-kunwar-chain-singh.nbt
gv8d5cdmnipxo00yci1xqakauvf63il
6591376
6591375
2026-07-23T18:46:36Z
Kapilmewada1
937871
authentic information
6591376
wikitext
text/x-wiki
'''कुंवर चैन सिंह''' (१८०० - १८२४) [[मध्य प्रदेश]] में [[भोपाल]] के निकट स्थित [[नरसिंहगढ़]] रियासत के राजकुमार थे, जो [[24 जुलाई]] [[1824]] को अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। [[१८५७ का प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम|1857 के सशस्त्र स्वाधीनता संग्राम]] से भी लगभग 33 वर्ष पूर्व की यह घटना कुंवर चैन सिंह को इस अंचल के पहले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में प्रतिष्ठित करती है।<ref>[https://www.amarujala.com/photo-gallery/madhya-pradesh/sehore/even-before-the-1857-revolution-in-madhya-pradesh-kunwar-chain-singh-had-waged-the-war-of-independence 1857 की क्रांति से पहले कुंवर चैन सिंह ने छेड़ी थी आजादी की जंग, मातृभूमि की रक्षा में हुए थे शहीद]</ref> मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015 से [[सीहोर]] स्थित कुंवर चैन सिंह की छतरी पर गार्ड ऑफ ऑनर प्रारम्भ किया है।<ref name="pib">{{cite web | url=http://pib.nic.in/newsite/hindifeature.aspx | title=मालवा का मंगल पांडे- शहीद कुंवर चैन सिंह | publisher=पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार | work=अखिल कुमार नामदेव, उप निदेशक, पीआईबी, भोपाल | date=20 अगस्त 2016 | accessdate=30 अगस्त 2016 | author=नामदेव, अखिल कुमार | archive-url=https://web.archive.org/web/20141008232430/http://www.pib.nic.in/newsite/hindifeature.aspx | archive-date=8 अक्तूबर 2014 | url-status=live }}</ref>
अधिक तथ्यात्मक जानकारी के लिए पढ़ें: मालवा के महानायक "कुँवर चैन सिंह", 2022 राष्ट्रीय पुस्तक न्यास नई दिल्ली, लेखक कपिल मेवाड़ा. <ref>[https://www.nbtindia.gov.in/books_detail__60__pm-yuva-series__3373__malwa-ke-mahanayak-kunwar-chain-singh.nbt]
==पृष्ठभूमि==
सन 1818 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने भोपाल के तत्कालीन नवाब से समझौता करके सीहोर में एक हजार सैनिकों की छावनी स्थापित की। कंपनी द्वारा नियुक्त पॉलिटिकल एजेंट मैडॉक को इन फौजियों का प्रभारी बनाया गया। इस फौजी टुकड़ी का वेतन भोपाल रियासत के शाही खजाने से दिया जाता था। समझौते के तहत पॉलिटिकल एजेंट मैडॉक को भोपाल सहित नजदीकी नरसिंहगढ़, खिलचीपुर और राजगढ़ रियासत से संबंधित राजनीतिक अधिकार भी सौंप दिए गए। बाकी तो चुप रहे, लेकिन इस फैसले को नरसिंहगढ़ रियासत के युवराज कुंवर चैन सिंह ने गुलामी की निशानी मानते हुए स्वीकार नहीं किया।<ref name="pib"/>
==अंग्रेजों से विरोध==
रियासत के दीवान आनंदराम बख्शी और मंत्री रूपराम बोहरा अंग्रेजों से मिले हुए थे। यह पता चलने पर कुंवर चैन सिंह ने इन दोनों को मार दिया।
मंत्री रूपराम के भाई ने इसकी की शिकायत कलकत्ता स्थित गवर्नर जनरल से की, जिसके निर्देश पर पॉलिटिकल एजेंट मैडॉक ने कुंवर चैन सिंह को भोपाल के नजदीक बैरसिया में एक बैठक के लिए बुलाया। बैठक में मैडॉक ने कुंवर चैन सिंह को हत्या के अभियोग से बचाने के लिए दो शर्तें रखीं। पहली शर्त थी कि नरसिंहगढ़ रियासत, अंग्रेजों की अधीनता स्वीकारे। दूसरी शर्त थी कि क्षेत्र में पैदा होनेवाली अफीम की पूरी फसल सिर्फ अंग्रेजों को ही बेची जाए। कुंवर चैन सिंह द्वारा दोनों ही शर्तें ठुकरा देने पर मैडॉक ने उन्हें 24 जुलाई 1824 को सीहोर पहुंचने का आदेश दिया। अंग्रेजों की बदनीयती का अंदेशा होने के बाद भी कुंवर चैन सिंह नरसिंहगढ़ से अपने विश्वस्त साथी सारंगपुर निवासी हिम्मत खां और बहादुर खां सहित 43 सैनिकों के साथ सीहोर पहुंचे। जहां पॉलिटिकल एजेंट मैडॉक और अंग्रेज सैनिकों से उनकी जमकर मुठभेड़ हुई। कुंवर चैन सिंह और उनके मुट्ठी भर विश्वस्त साथियों ने शस्त्रों से सुसज्जित अंग्रेजों की फौज से डटकर मुकाबला किया। घंटों चली लड़ाई में अंग्रेजों के तोपखाने ओर बंदूकों के सामने कुंवर चैन सिंह और उनके जांबाज लड़ाके डटे रहे।
ऐसा कहा जाता है कि युद्ध के दौरान कुंवर चैन सिंह ने अंग्रेजों की अष्टधातु से बनी तोप पर अपनी तलवार से प्रहार किया जिससे तलवार तोप को काटकर उसमे फंस गई। मौके का फायदा उठाकर अंग्रेज तोपची ने उनकी गर्दन पर तलवार का प्रहार कर दिया जिससे कुंवर चैन सिंह की गर्दन रणभूमि में ही गिर गई और उनका स्वामीभक्त घोड़ा शेष धड़ को लेकर नरसिंहगढ़ आ गया। कुंवर चैन सिंह की धर्मपत्नी कुंवरानी राजावत जी ने उनकी याद में [[परशुराम सागर]] के पास एक मंदिर भी बनवाया जिसे'कुंवरानी जी के मंदिर' के नाम से जानते हैं।<ref name="pib"/>
== शहीद कुंवर चैन सिंह स्मारक ==
कुंवर चैन सिंह के स्मारक, समाधियाँ और मकबरे सीहोर-इंदौर मार्ग पर लोटिया नदी के किनारे स्थित दशाहरा वाला मैदान में 2 किलोमीटर दूर स्थित हैं। <ref>[https://sehore.nic.in/en/tourist-place/cenotaphs-of-kunwar-chain-singh/ Cenotaphs of Kunwar Chain Singh]</ref>
https://www.nbtindia.gov.in/books_detail__60__pm-yuva-series__3373__malwa-ke-mahanayak-kunwar-chain-singh.nbt
4esvnsjb8977hffmslivnbk3ygydhbp
6591421
6591376
2026-07-24T02:07:00Z
AMAN KUMAR
911487
[[Special:Contributions/Kapilmewada1|Kapilmewada1]] ([[User talk:Kapilmewada1|Talk]]) के संपादनों को हटाकर [[User:अनुनाद सिंह|अनुनाद सिंह]] के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया
6513834
wikitext
text/x-wiki
'''कुंवर चैन सिंह''' (१८०० - १८२४) [[मध्य प्रदेश]] में [[भोपाल]] के निकट स्थित [[नरसिंहगढ़]] रियासत के राजकुमार थे, जो [[24 जुलाई]] [[1824]] को अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। [[१८५७ का प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम|1857 के सशस्त्र स्वाधीनता संग्राम]] से भी लगभग 33 वर्ष पूर्व की यह घटना कुंवर चैन सिंह को इस अंचल के पहले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में प्रतिष्ठित करती है।<ref>[https://www.amarujala.com/photo-gallery/madhya-pradesh/sehore/even-before-the-1857-revolution-in-madhya-pradesh-kunwar-chain-singh-had-waged-the-war-of-independence 1857 की क्रांति से पहले कुंवर चैन सिंह ने छेड़ी थी आजादी की जंग, मातृभूमि की रक्षा में हुए थे शहीद]</ref> मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015 से [[सीहोर]] स्थित कुंवर चैन सिंह की छतरी पर गार्ड ऑफ ऑनर प्रारम्भ किया है।<ref name="pib">{{cite web | url=http://pib.nic.in/newsite/hindifeature.aspx | title=मालवा का मंगल पांडे- शहीद कुंवर चैन सिंह | publisher=पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार | work=अखिल कुमार नामदेव, उप निदेशक, पीआईबी, भोपाल | date=20 अगस्त 2016 | accessdate=30 अगस्त 2016 | author=नामदेव, अखिल कुमार | archive-url=https://web.archive.org/web/20141008232430/http://www.pib.nic.in/newsite/hindifeature.aspx | archive-date=8 अक्तूबर 2014 | url-status=live }}</ref>
==पृष्ठभूमि==
सन 1818 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने भोपाल के तत्कालीन नवाब से समझौता करके सीहोर में एक हजार सैनिकों की छावनी स्थापित की। कंपनी द्वारा नियुक्त पॉलिटिकल एजेंट मैडॉक को इन फौजियों का प्रभारी बनाया गया। इस फौजी टुकड़ी का वेतन भोपाल रियासत के शाही खजाने से दिया जाता था। समझौते के तहत पॉलिटिकल एजेंट मैडॉक को भोपाल सहित नजदीकी नरसिंहगढ़, खिलचीपुर और राजगढ़ रियासत से संबंधित राजनीतिक अधिकार भी सौंप दिए गए। बाकी तो चुप रहे, लेकिन इस फैसले को नरसिंहगढ़ रियासत के युवराज कुंवर चैन सिंह ने गुलामी की निशानी मानते हुए स्वीकार नहीं किया।<ref name="pib"/>
==अंग्रेजों से विरोध==
रियासत के दीवान आनंदराम बख्शी और मंत्री रूपराम बोहरा अंग्रेजों से मिले हुए थे। यह पता चलने पर कुंवर चैन सिंह ने इन दोनों को मार दिया।
मंत्री रूपराम के भाई ने इसकी की शिकायत कलकत्ता स्थित गवर्नर जनरल से की, जिसके निर्देश पर पॉलिटिकल एजेंट मैडॉक ने कुंवर चैन सिंह को भोपाल के नजदीक बैरसिया में एक बैठक के लिए बुलाया। बैठक में मैडॉक ने कुंवर चैन सिंह को हत्या के अभियोग से बचाने के लिए दो शर्तें रखीं। पहली शर्त थी कि नरसिंहगढ़ रियासत, अंग्रेजों की अधीनता स्वीकारे। दूसरी शर्त थी कि क्षेत्र में पैदा होनेवाली अफीम की पूरी फसल सिर्फ अंग्रेजों को ही बेची जाए। कुंवर चैन सिंह द्वारा दोनों ही शर्तें ठुकरा देने पर मैडॉक ने उन्हें 24 जुलाई 1824 को सीहोर पहुंचने का आदेश दिया। अंग्रेजों की बदनीयती का अंदेशा होने के बाद भी कुंवर चैन सिंह नरसिंहगढ़ से अपने विश्वस्त साथी सारंगपुर निवासी हिम्मत खां और बहादुर खां सहित 43 सैनिकों के साथ सीहोर पहुंचे। जहां पॉलिटिकल एजेंट मैडॉक और अंग्रेज सैनिकों से उनकी जमकर मुठभेड़ हुई। कुंवर चैन सिंह और उनके मुट्ठी भर विश्वस्त साथियों ने शस्त्रों से सुसज्जित अंग्रेजों की फौज से डटकर मुकाबला किया। घंटों चली लड़ाई में अंग्रेजों के तोपखाने ओर बंदूकों के सामने कुंवर चैन सिंह और उनके जांबाज लड़ाके डटे रहे।
ऐसा कहा जाता है कि युद्ध के दौरान कुंवर चैन सिंह ने अंग्रेजों की अष्टधातु से बनी तोप पर अपनी तलवार से प्रहार किया जिससे तलवार तोप को काटकर उसमे फंस गई। मौके का फायदा उठाकर अंग्रेज तोपची ने उनकी गर्दन पर तलवार का प्रहार कर दिया जिससे कुंवर चैन सिंह की गर्दन रणभूमि में ही गिर गई और उनका स्वामीभक्त घोड़ा शेष धड़ को लेकर नरसिंहगढ़ आ गया। कुंवर चैन सिंह की धर्मपत्नी कुंवरानी राजावत जी ने उनकी याद में [[परशुराम सागर]] के पास एक मंदिर भी बनवाया जिसे'कुंवरानी जी के मंदिर' के नाम से जानते हैं।<ref name="pib"/>
== शहीद कुंवर चैन सिंह स्मारक ==
कुंवर चैन सिंह के स्मारक, समाधियाँ और मकबरे सीहोर-इंदौर मार्ग पर लोटिया नदी के किनारे स्थित दशाहरा वाला मैदान में 2 किलोमीटर दूर स्थित हैं। <ref>[https://sehore.nic.in/en/tourist-place/cenotaphs-of-kunwar-chain-singh/ Cenotaphs of Kunwar Chain Singh]</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:मध्य प्रदेश का इतिहास]]
[[श्रेणी:मध्य प्रदेश के लोग]]
[[श्रेणी:मालवा का इतिहास]]
[[श्रेणी:निधन वर्ष अनुपलब्ध]]
[[श्रेणी:भारत में ब्रिटिश राज]]
[[श्रेणी:भारतीय स्वतंत्रता सेनानी]]
soj4aa2eaiv06wce9uuglfuss4125s9
धर्मेंद्र प्रधान
0
737943
6591367
6591087
2026-07-23T17:19:22Z
~2026-41223-79
937854
6591367
wikitext
text/x-wiki
https://www.newindianexpress.com/states/odisha/2021/Jul/09/dharmendra-pradhan-takes-charge-prioritises-integration-of-education-with-employment-2327646.html{{Infobox officeholder
| office = शिक्षा मन्त्रालय,कौशल विकास और उद्यमिता मन्त्री भारत सरकार<ref>{{Cite web|url=https://hindi.news18.com/news/business/modi-2-0-portfolios-announced-dharmendra-pradhan-get-oil-gas-and-steel-ministry-2060260.html|title=धर्मेंद्र प्रधान को मिली ऑयल, गैस और स्टील मंत्रालय की जिम्मेदारी– News18 हिंदी|website=News18 India|access-date=2026-05-19|archive-date=8 जून 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190608014640/https://hindi.news18.com/news/business/modi-2-0-portfolios-announced-dharmendra-pradhan-get-oil-gas-and-steel-ministry-2060260.html|url-status=dead}}</ref>
| native_name = ଧର୍ମେନ୍ଦ୍ର ପ୍ରଧାନ
| native_name_lang = ओडिया
| image = Dharmendra Pradhan, Minister of Education.jpg
| predecessor = [[वीरप्पा मोइली]]
| primeminister = [[नरेन्द्र मोदी]]
| term_start = 26 मई 2014
| term_end =
| successor = जोशुआ एल
| footnotes =
| date = 19 जून 2022
| year =
| source =
| office1 = [[शिक्षा मन्त्रालय, भारत सरकार|शिक्षा मन्त्री]]
| predecessor1 =
| primeminister1 = [[नरेन्द्र मोदी]]
| successor1 = चौधरी बीरेन्द्र सिंह
| term_start1 = 30 मई 2019
| term_end1 =
| office2 = [[कौशल विकास और उद्यमिता मन्त्रालय|कौशल विकास और उद्यमिता मन्त्री]]
| predecessor2 = [[राजीव प्रताप रूडी]]
| primeminister2 = [[नरेन्द्र मोदी]]
| successor2 = [[महेन्द्र नाथ पाण्डेय]]
| term_start2 = 3 सितम्बर 2017
| term_end2 = 30 मई 2019
| office3 = [[सांसद, राज्य सभा]]<ref>{{Cite news|url=https://hindi.news18.com/news/madhya-pradesh/bhopal-dharmendra-pradhan-files-nomination-for-rajya-sabha-from-madhya-pradesh-1299781.html|title=राज्यसभा चुनावः धर्मेंद्र प्रधान और गहलोत सहित के चारों प्रत्याशियों ने पर्चा भरा|work=News18 हिंदी|access-date=2026-05-19|language=hi-IN|archive-date=16 जनवरी 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210116095035/https://hindi.news18.com/news/madhya-pradesh/bhopal-dharmendra-pradhan-files-nomination-for-rajya-sabha-from-madhya-pradesh-1299781.html|url-status=dead}}</ref>
| constituency3 = [[मध्य प्रदेश]]
| predecessor3 = [[प्रकाश जावड़ेकर]]
| successor3 =
| term_start3 = 3 अप्रैल 2018
| term_end3 =
| office5 = [[सांसद, राज्य सभा]]
| constituency5 = [[बिहार]]
| term_start5 = 3 अप्रैल 2012
| term_end5 = 2 अप्रैल 2018
| successor5 = [[मनोज झा]]
| office6 = [[सांसद, लोक सभा]]
| constituency6 = [[देवगढ़, ओड़िशा]]<ref>{{Cite web|url=https://www.jansatta.com/national/dharmendra-pradhan-takes-oath-as-cabinet-minister-read-here-about-political-travelogue/420725/|title=जानिए कैसा रहा धर्मेंद्र प्रधान का छात्र नेता से कैबिनेट मंत्री बनने तक का सफर|date=2017-09-03|website=Jansatta|language=hi|access-date=2026-05-19}}</ref>
| term_start6 = 2004
| term_end6 = 2009
| predecessor6 = [[देबेन्द्र प्रधान|देवेन्द्र प्रधान]]
| successor6 =
| father = [[देबेन्द्र प्रधान|देवेन्द्र प्रधान]]
| mother = वसन्तमञ्जरी प्रधान
| birth_date = {{Birth date and age|1969|6|26|df=y}}
| birth_place = [[तालचेर]], ओडिशा, भारत
| spouse = मृदुला ठाकुर<ref>{{Cite web|url=https://www.jagran.com/haryana/faridabad-teej-mahotsav-18306376.html|title=जमकर झूमीं केंद्रीय मंत्री और सांसदों की पत्नियां - teej mahotsav|website=Jagran|language=hi|access-date=2026-05-19}}</ref>
| children = 2
| party = [[भारतीय जनता पार्टी]]
| education = [[कला स्नातकोत्तर]]
| alma_mater = [[उत्कल विश्वविद्यालय]]
}}
'''धर्मेन्द्र प्रधान'''<ref>{{Cite web|url=https://navbharattimes.indiatimes.com/?back=1|title=Hindi News, Hindi Samachar, हिंदी न्यूज़, News in Hindi, हिंदी समाचार|website=Navbharat Times|language=hi|access-date=2026-05-19}}</ref> (जन्म 26 जून 1969) एक भारतीय [[राजनीतिज्ञ]] तथा वर्तमान में [[भारत सरकार]] के मानव संसाधन विकास मंत्रालय (शिक्षा) के कैबिनेट मन्त्री हैं। पिछली मोदी सरकार में वे कौशल विकास और उद्यमिता विभाग के केन्द्रीय कैबिनेट मन्त्री भी थे।<ref>{{Cite web|url=https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1566477|title=केंद्रीय मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा में नुआ ओडिशा- धर्मपद संवाद के अवसर पर 427 स्थानों के प्रतिभागियों को संबोधित किया|website=pib.gov.in|access-date=2026-05-19}}</ref> मार्च 2018 में प्रधान [[मध्यप्रदेश]] से [[राज्यसभा]] के लिए चुने गए।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatv.in/india/politics-rajya-sabha-five-candidates-elected-unopposed-from-madhya-pradesh-573232|title=मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए धर्मेन्द्र प्रधान सहित पांचों प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए|last=Kumar|first=Niraj|last2=Hindi|first2=India TV|date=2018-03-15|website=India TV Hindi|language=hi|access-date=2026-05-19}}</ref> प्रधान [[चौदहवीं लोकसभा]] में [[देवगढ़, ओड़िशा]] से सांसद चुने गये थे। अभी वर्तमान में भारत के शिक्षा मंत्री हैं। धर्मेंद्र प्रधान ओडिशा की 12 वीं विधानसभा (2000-2004) में पल्ललहारा निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे। वह एबीवीपी के सदस्य भी हैं एवं पूर्व केन्द्रीय मन्त्री और वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. देबेन्द्र प्रधान के पुत्र हैं।
प्रधान, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य हैं। महासचिव होने के अलावा, उन्हें अगस्त 2011 में झारखण्ड में पार्टी की गतिविधियों की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई थी। धर्मेन्द्र प्रधान प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के करीबी सहयोगी और भरोसेमन्द माने जाते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.india.com/hindi-news/india-hindi/who-are-the-most-close-central-ministers-of-prime-minister-narendra-modi-1466276/|title=who are the most close central ministers of prime minister Narendra Modi {{!}} ये हैं मोदी के तीन अनमोल रतन - Latest News & Updates in Hindi at India.com Hindi|website=www.india.com|language=hi|access-date=2026-05-19}}</ref> 2014 के लोकसभा चुनाव में बिहार में भाजपा की जीत के प्रमुख रणनीतिकार भी प्रधान ही हैं।<ref>{{Cite web|url=https://zeenews.india.com/hindi/india/bihar-jharkhand/dharmendra-pradhan-takes-oath-as-union-minister-in-modi-cabinet/533674|title=कभी रहे बिहार बीजेपी के प्रभारी, लगातार दूसरी बार मिली मोदी कैबिनेट में जगह|website=Zee-Bihar-Jharkhand|language=hi|access-date=2026-05-19}}</ref>
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:राज्यसभा सदस्य]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:मोदी मंत्रिमंडल]]
[[श्रेणी:1969 में जन्मे लोग]]
{{भारतीय-राजनीतिज्ञ-आधार}}
homlve2gfpvk7c48r238qxn3l3a9usf
रामपुर रियासत
0
762604
6591324
6591293
2026-07-23T12:34:56Z
Mundhalia746
934684
6591324
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox former subdivision
|native_name = रामपुर रियासत<br / >ریاست رام پور
|conventional_long_name =Rampur State
|common_name =रामपुर
|nation = [[ब्रिट्रिस भारत]]
|subdivision = Princely State
|era =
|year_start = 7 अक्टूबर 1774
|date_start =
|event_start=
|year_end = 15 अगस्त 1947
|date_end =
|event_end= [[स्वतंत्र भारत]]
|event1 =
|date_event1 =
|p1 =Rohilkhand
|s1 = India
|flag_p1 =
|flag_s1 = Flag of India.svg
|image_flag = Flag of the Rampur State.svg
|image_coat = Rampur State Coat of Arms.png
|image_map = Map of the United Provinces from The Imperial Gazetteer of India (1907-1909).jpg
|image_map_caption = रामपुर रियासत चित्र ( 1907-1909 ) ईस्वी
|national_motto = ''Lā fata ʾillā ʿAlī; lā sayf ʾillā Zulfiqar Ḏū l-Fiqār.''
|stat_area1 =2310
|stat_year1 = 1941
|stat_pop1 = 477042
|today = [[उत्तर प्रदेश]], [[भारत]]
|footnotes = {{EB1911}}
}}
'''रामपुर रियासत'''; [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]]:
Rampur State, रामपुर रियासत के संस्थापक और प्रथम शासक नवाब फेजुल्लाह खांन थे नवाब [[फ़ैजुल्लाह ख़ान|फेजुल्लाह खाँन]] का जन्म 1733 ईस्वी में आंवला जोकि अब [[बरेली]] जनपद की तहसील है में हुआ था उन्होने बाद में रामपुर को रियासत की राजधानी बनाया इनके बाद रामपुर रियासत पर दस शासकों ने रामपुर रियासत पर शासन किया दूसरे शासक नवाब मुहम्मद अली खाँन थे लेकिन इनका शासन काल केबल 24 दिन रहा उनकी रात के अंधेरे में हत्या कर दी गयी तीसरे शासक नवाब गुलाम मुहम्मद खाँन बने लेकिन उन्होने भी तीन महीने 22 दिन ही नवाबी की चौथे नवाब अहमद अली खाँन थे जोकि नौ वर्ष की आयु में ही सिंहासन पर वैठे थे और 42 वर्ष तक शासन किया।.<ref>{{Cite web |url=http://www.royalark.net/India/rampur.htm |title=Rampur State - Royalark |access-date=24 जनवरी 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20171028231659/http://www.royalark.net/India/rampur.htm |archive-date=28 अक्तूबर 2017 |url-status=dead }}</ref>
==नबाव==
{| class="wikitable"
! colspan=2 | नाम
! शासन
! शासन खत्म
|-
! 1
| [[फ़ैजुल्लाह ख़ान]]
| 15 सितम्बर 1748
| 24 जूलाई 1793
|-
!
| [[हाफ़िज़ रहमत ख़ान]] - ''Regent''
| 15 सितम्बर 1748
| 23 अप्रैल 1774
|-
! 2
| [[मुहम्मद अली ख़ान वहादूर|मुहम्मद अली ख़ान बहादुर]]
| 24 जूलाई 1793
| 11 अगस्त 1793
|-
! 3
| [[गुलाम मुहम्मद ख़ान वहादूर|गुलाम मुहम्मद ख़ान बहादुर]]
| 11 अगस्त 1793
| 24 अक्टूबर 1794
|-
! 4
| [[अहमद अली ख़ान वहादूर|अहमद अली ख़ान बहादुर]]
| 24 अक्टूबर 1794
| 5 जूलाई 1840
|-
!
| नसरउल्लाह ख़ान - ''Regent ''
| 24 अक्टूबर 1794
| 1811
|-
! 5
| [[मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर|मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर]]
| 5 जूलाई 1840
| 1 अप्रैल 1855
|-
! 6
| [[युसुफ अली ख़ान बहादुर|युसुफ अली ख़ान बहादुर]]
| 1 अप्रैल 1855
| 21 अप्रैल 1865
|-
! 7
| [[कल्ब अली ख़ान वहादूर]]
| 21 अप्रैल 1865
| 23 मार्च 1887
|-
! 8
| [[मुहम्मद मुश्ताक अली ख़ान बहादुर|मुहम्मद मुश्ताक अली ख़ान बहादुर]]
| 23 मार्च 1887
| 25 फरबरी 1889
|-
! 9
| [[हामिद अली ख़ान बहादुर|हामिद अली ख़ानबहादुर ]]
| 25 फरबरी 1889
| 20 जून 1930
|-
!
| ''Regency''
| 25 फरबरी 1889
| 4 अप्रैल 1894
|-
|}
== इन्हें भी देखें ==
* [[रुहेलखण्ड राज्य]]
* [[रोहिलखंड]]
==सन्दर्भ==
[[श्रेणी:भारत के क्षेत्र]]
[[श्रेणी:भारत का इतिहास]]
{{आधार}}
2qqzlmz1dktvt0njy6zgmec5pcmkwz8
6591351
6591324
2026-07-23T15:28:09Z
Mundhalia746
934684
6591351
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox former subdivision
|native_name = रामपुर रियासत<br / >ریاست رام پور
|conventional_long_name =Rampur State
|common_name =रामपुर
|nation = [[ब्रिट्रिस भारत]]
|subdivision = Princely State
|era =
|year_start = 7 अक्टूबर 1774
|date_start =
|event_start=
|year_end = 15 अगस्त 1947
|date_end =
|event_end= [[स्वतंत्र भारत]]
|event1 =
|date_event1 =
|p1 =Rohilkhand
|s1 = India
|flag_p1 =
|flag_s1 = Flag of India.svg
|image_flag = Flag of the Rampur State.svg
|image_coat = Rampur State Coat of Arms.png
|image_map = Map of the United Provinces from The Imperial Gazetteer of India (1907-1909).jpg
|image_map_caption = रामपुर रियासत चित्र ( 1907-1909 ) ईस्वी
|national_motto = ''Lā fata ʾillā ʿAlī; lā sayf ʾillā Zulfiqar Ḏū l-Fiqār.''
|stat_area1 =2310
|stat_year1 = 1941
|stat_pop1 = 477042
|today = [[उत्तर प्रदेश]], [[भारत]]
|footnotes = {{EB1911}}
}}
'''रामपुर रियासत'''; [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]]:
Rampur State, रामपुर रियासत के संस्थापक और प्रथम शासक नवाब फेजुल्लाह खांन थे नवाब [[फ़ैजुल्लाह ख़ान|फेजुल्लाह खाँन]] का जन्म 1733 ईस्वी में आंवला जोकि अब [[बरेली]] जनपद की तहसील है में हुआ था उन्होने बाद में रामपुर को रियासत की राजधानी बनाया इनके बाद रामपुर रियासत पर दस शासकों ने रामपुर रियासत पर शासन किया दूसरे शासक नवाब मुहम्मद अली खाँन थे लेकिन इनका शासन काल केबल 24 दिन रहा उनकी रात के अंधेरे में हत्या कर दी गयी तीसरे शासक नवाब गुलाम मुहम्मद खाँन बने लेकिन उन्होने भी तीन महीने 22 दिन ही नवाबी की चौथे नवाब अहमद अली खाँन थे जोकि नौ वर्ष की आयु में ही सिंहासन पर वैठे थे और 42 वर्ष तक शासन किया।.<ref>{{Cite web |url=http://www.royalark.net/India/rampur.htm |title=Rampur State - Royalark |access-date=24 जनवरी 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20171028231659/http://www.royalark.net/India/rampur.htm |archive-date=28 अक्तूबर 2017 |url-status=dead }}</ref>
==नबाव==
{| class="wikitable"
! colspan=2 | नाम
! शासन
! शासन खत्म
|-
! 1
| [[फ़ैजुल्लाह ख़ान]]
| 15 सितम्बर 1748
| 24 जूलाई 1793
|-
!
| [[हाफ़िज़ रहमत ख़ान]] - ''Regent''
| 15 सितम्बर 1748
| 23 अप्रैल 1774
|-
! 2
| [[मुहम्मद अली ख़ान वहादूर|मुहम्मद अली ख़ान बहादुर]]
| 24 जूलाई 1793
| 11 अगस्त 1793
|-
! 3
| [[गुलाम मुहम्मद ख़ान वहादूर|गुलाम मुहम्मद ख़ान बहादुर]]
| 11 अगस्त 1793
| 24 अक्टूबर 1794
|-
! 4
| [[अहमद अली ख़ान वहादूर|अहमद अली ख़ान बहादुर]]
| 24 अक्टूबर 1794
| 5 जूलाई 1840
|-
!
| नसरउल्लाह ख़ान - ''Regent ''
| 24 अक्टूबर 1794
| 1811
|-
! 5
| [[मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर|मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर]]
| 5 जूलाई 1840
| 1 अप्रैल 1855
|-
! 6
| [[युसुफ अली ख़ान बहादुर|युसुफ अली ख़ान बहादुर]]
| 1 अप्रैल 1855
| 21 अप्रैल 1865
|-
! 7
| [[कल्ब अली ख़ान वहादूर]]
| 21 अप्रैल 1865
| 23 मार्च 1887
|-
! 8
| [[मुहम्मद मुश्ताक अली ख़ान बहादुर|मुहम्मद मुश्ताक अली ख़ान बहादुर]]
| 23 मार्च 1887
| 25 फरबरी 1889
|-
! 9
| [[हामिद अली ख़ान बहादुर|हामिद अली ख़ान बहादुर ]]
| 25 फरबरी 1889
| 20 जून 1930
|-
!
| ''Regency''
| 25 फरबरी 1889
| 4 अप्रैल 1894
|-
|}
== इन्हें भी देखें ==
* [[रुहेलखण्ड राज्य]]
* [[रोहिलखंड]]
==सन्दर्भ==
[[श्रेणी:भारत के क्षेत्र]]
[[श्रेणी:भारत का इतिहास]]
{{आधार}}
447evyfaoq0vf3a3ylw0uf978wpg8zy
6591352
6591351
2026-07-23T15:32:14Z
Mundhalia746
934684
6591352
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox former subdivision
|native_name = रामपुर रियासत<br / >ریاست رام پور
|conventional_long_name =Rampur State
|common_name =रामपुर
|nation = [[ब्रिट्रिस भारत]]
|subdivision = Princely State
|era =
|year_start = 7 अक्टूबर 1774
|date_start =
|event_start=
|year_end = 15 अगस्त 1947
|date_end =
|event_end= [[स्वतंत्र भारत]]
|event1 =
|date_event1 =
|p1 =Rohilkhand
|s1 = India
|flag_p1 =
|flag_s1 = Flag of India.svg
|image_flag = Flag of the Rampur State.svg
|image_coat = Rampur State Coat of Arms.png
|image_map = Map of the United Provinces from The Imperial Gazetteer of India (1907-1909).jpg
|image_map_caption = रामपुर रियासत चित्र ( 1907-1909 ) ईस्वी
|national_motto = ''Lā fata ʾillā ʿAlī; lā sayf ʾillā Zulfiqar Ḏū l-Fiqār.''
|stat_area1 =2310
|stat_year1 = 1941
|stat_pop1 = 477042
|today = [[उत्तर प्रदेश]], [[भारत]]
|footnotes = {{EB1911}}
}}
'''रामपुर रियासत'''; [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]]:
Rampur State, रामपुर रियासत के संस्थापक और प्रथम शासक नवाब फेजुल्लाह खांन थे नवाब [[फ़ैजुल्लाह ख़ान|फेजुल्लाह खाँन]] का जन्म 1733 ईस्वी में आंवला जोकि अब [[बरेली]] जनपद की तहसील है में हुआ था उन्होने बाद में रामपुर को रियासत की राजधानी बनाया इनके बाद रामपुर रियासत पर दस शासकों ने रामपुर रियासत पर शासन किया दूसरे शासक नवाब मुहम्मद अली खाँन थे लेकिन इनका शासन काल केबल 24 दिन रहा उनकी रात के अंधेरे में हत्या कर दी गयी तीसरे शासक नवाब गुलाम मुहम्मद खाँन बने लेकिन उन्होने भी तीन महीने 22 दिन ही नवाबी की चौथे नवाब अहमद अली खाँन थे जोकि नौ वर्ष की आयु में ही सिंहासन पर वैठे थे और 42 वर्ष तक शासन किया।.<ref>{{Cite web |url=http://www.royalark.net/India/rampur.htm |title=Rampur State - Royalark |access-date=24 जनवरी 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20171028231659/http://www.royalark.net/India/rampur.htm |archive-date=28 अक्तूबर 2017 |url-status=dead }}</ref>
==नबाव==
{| class="wikitable"
! colspan=2 | नाम
! शासन
! शासन खत्म
|-
! 1
| [[फ़ैजुल्लाह ख़ान]]
| 15 सितम्बर 1748
| 24 जूलाई 1793
|-
!
| [[हाफ़िज़ रहमत ख़ान]] - ''Regent''
| 15 सितम्बर 1748
| 23 अप्रैल 1774
|-
! 2
| [[मुहम्मद अली ख़ान वहादूर|मुहम्मद अली ख़ान बहादुर]]
| 24 जूलाई 1793
| 11 अगस्त 1793
|-
! 3
| [[गुलाम मुहम्मद ख़ान वहादूर|गुलाम मुहम्मद ख़ान बहादुर]]
| 11 अगस्त 1793
| 24 अक्टूबर 1794
|-
! 4
| [[अहमद अली ख़ान वहादूर|अहमद अली ख़ान बहादुर]]
| 24 अक्टूबर 1794
| 5 जूलाई 1840
|-
!
| नसरउल्लाह ख़ान - ''Regent ''
| 24 अक्टूबर 1794
| 1811
|-
! 5
| [[मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर|मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर]]
| 5 जूलाई 1840
| 1 अप्रैल 1855
|-
! 6
| [[युसुफ अली ख़ान बहादुर|युसुफ अली ख़ान बहादुर]]
| 1 अप्रैल 1855
| 21 अप्रैल 1865
|-
! 7
| [[कल्ब अली ख़ान वहादूर|कल्ब अली ख़ान बहादुर]]
| 21 अप्रैल 1865
| 23 मार्च 1887
|-
! 8
| [[मुहम्मद मुश्ताक अली ख़ान बहादुर|मुहम्मद मुश्ताक अली ख़ान बहादुर]]
| 23 मार्च 1887
| 25 फरबरी 1889
|-
! 9
| [[हामिद अली ख़ान बहादुर|हामिद अली ख़ान बहादुर ]]
| 25 फरबरी 1889
| 20 जून 1930
|-
!
| ''Regency''
| 25 फरबरी 1889
| 4 अप्रैल 1894
|-
|}
== इन्हें भी देखें ==
* [[रुहेलखण्ड राज्य]]
* [[रोहिलखंड]]
==सन्दर्भ==
[[श्रेणी:भारत के क्षेत्र]]
[[श्रेणी:भारत का इतिहास]]
{{आधार}}
o18kxxluc6s75hdnn4hx90acx8cpezd
मीडियाविकि:Gadget-RTRC.js
8
925698
6591366
6590850
2026-07-23T17:04:45Z
SM7
89247
[[Special:Diff/6590850|6590850]] को पूर्ववत किया / .css लोड होने में समस्या / इसे परीक्षण गैजेट के रूप में स्थापित किया जायेगा
6591366
javascript
text/javascript
// [[File:Krinkle_RTRC.js]]
mw.loader.load('//meta.wikimedia.org/w/index.php?title=User:Krinkle/RTRC.js&action=raw&ctype=text/javascript');
ndkhi77a00yiopz7c1qtn9uj8m0lmx8
विकिपीडिया:प्रयोगस्थल
4
935970
6591362
6591191
2026-07-23T16:24:53Z
Raje sagar
937834
6591362
wikitext
text/x-wiki
{{Please leave this line alone (sandbox heading)}}<!--
* Welcome to the sandbox! *
* Please leave this part alone *
* The page is cleared regularly *
* Feel free to try your editing skills below *
* अपने परीक्षण संपादन इस लाइन के नीचे करें *
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■-->
लकीरें मीट गई तो क्या लकीरें फिर लिखेंगे हम |
है ये दोस्ती सच्ची कहीं फिर से मिलेंगे हम |
मुलाक़ातों का ये सरगम कभी जो टूट जाए तो |
आस है दिल की ये मेरे मिले फिर हर जन्म में हम |
h3vibhr20f0f8vxgow60o7pm8uyfoz5
6591363
6591362
2026-07-23T16:32:15Z
Raje sagar
937834
6591363
wikitext
text/x-wiki
सागर
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■-->
लकीरें मीट गई तो क्या लकीरें फिर लिखेंगे हम |
है ये दोस्ती सच्ची कहीं फिर से मिलेंगे हम |
मुलाक़ातों का ये सरगम कभी जो टूट जाए तो |
आस है दिल की ये मेरे मिले फिर हर जन्म में हम |
1gwo7ido9qgr3b420vrnhheixba8yx5
6591388
6591363
2026-07-24T00:00:04Z
Sanjeev bot
127039
बॉट: प्रयोगस्थल खाली किया।
6591388
wikitext
text/x-wiki
{{Please leave this line alone (sandbox heading)}}<!--
* Welcome to the sandbox! *
* Please leave this part alone *
* The page is cleared regularly *
* Feel free to try your editing skills below *
* अपने परीक्षण संपादन इस लाइन के नीचे करें *
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■-->
nqyrael75jv4pl2ws5ryi3yf27rl3hh
6591469
6591388
2026-07-24T05:09:10Z
PRAVIN R TIWARI
937907
6591469
wikitext
text/x-wiki
{{Please leave this line alone (sandbox heading)}}<!--
* Welcome to the sandbox! *
* Please leave this part alone *
* The page is cleared regularly *
* Feel free to try your editing skills below *
* अपने परीक्षण संपादन इस लाइन के नीचे करें *
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■-->प्रवीण आर तिवारी राष्ट्रीय अध्यक्ष जन सेवा ड्राइवर पार्टी मेरा जन्म स्थान जौनपुर उत्तर प्रदेश मेरी शिक्षा 10वी है मैंने अपने कार्य की शुरुआत ट्रक ड्राइवर के तौर पर की उस दरमियान कई कड़वा अनुभव हुआ इस देश में ट्रक ड्राइवर को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है उसे ध्यान में रखकर ड्राइवर सेवा के नाम पर सामाजिक संगठन 2008 में बनाया कई बार धरना प्रदर्शन आंदोलन मांग पत्रों से कोई उचित परिणाम नहीं मिला उसके बाद ऐसा लगा कि जब तक राजनीतिक ताकत नहीं होगी तब तक कोई व्यवस्था में बदलाव नहीं होगा हमने 2021 में जन सेवा ड्राइवर पार्टी भारतीय राजनीतिक दल के रूप मे गठन किया और देश के ड्राइवर भाइयों को राजनीतिक मंच पर आने एवं समर्थन करने के लिए अवसर दिया
euaiu0c0ijnd1r27zrv7l9arc4k99yb
वीरापांड्या कट्टाबोम्मन
0
937605
6591482
6477693
2026-07-24T06:28:20Z
Hindustanilanguage
39545
[[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:1761 में जन्मे लोग]] हटाई; [[श्रेणी:1760 में जन्मे लोग]] जोड़ी
6591482
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox royalty
| name = वीरापांड्या कट्टाबोम्मन यादव
| title = पांचालांकुरिचि का पलाइयाक्करार
| image = Veerapandiya Kattabomman postage stamp.jpg
| caption = वीरापांड्या कट्टाबोम्मन यदुवंशी क्षत्रिय यादव के नाम पर डाक टिकट डाक विभाग द्वारा जारी की गई
| reign = 2 फरवरी 1760 – 16 अक्टोबर 1799
| dynasty =
| successor = [[ब्रिटिश राज]]
| father = जगवीरा कट्टाबोमैन
| mother = अरुमुगाथमल
| spouse = जक्कम्मल
| birth_date = 3 जनवरी 1760
| birth_place = [[पांचालांकुरिचि]], [[तामिलनाडु]], भारत
| death_date = {{death date and age|df=yes|1799|10|16|1760|1|3}}
| death_place = [[कयाथार]], [[तामिलनाडु]]
| burial_date =
| burial_place =
}}
'''वीरापांड्या कट्टाबोम्मन यादव''' एक स्वतंत्रता सेनानी है <ref>{{cite book|last=Narwekar|first=Sanjit|title=Directory of Indian film-makers and films|url=https://books.google.com/books?id=UYUjAQAAIAAJ&q=veerapandiya+katta+brahmana&dq=veerapandiya+katta+brahmana&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwi3s4DvsrXZAhWIgVQKHQN9CBYQ6AEIPzAF|access-date=11 अगस्त 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20131231121847/http://books.google.com/books?id=UYUjAQAAIAAJ|archive-date=31 दिसंबर 2013|url-status=live}}</ref><ref>{{cite news|url=http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-features/tp-fridayreview/glimpse-into-history/article2272718.ece|title=The Hindu: Glimpse into history|date=20 July 2011|access-date=5 March 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180305203039/http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-features/tp-fridayreview/glimpse-into-history/article2272718.ece|archive-date=5 मार्च 2018|url-status=live}}</ref><ref>{{cite news|url=http://www.thehindu.com/thehindu/mp/2005/01/22/stories/2005012202470100.htm|title=The hindu news|date = 22 January 2005| access-date=5 March 2018}}</ref> 18 वीं शताब्दी में पलायककर और भारत के तमिलनाडु में पंचलंकुरिची के सरदार थे। उन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की संप्रभुता को स्वीकार करने से इंकार कर दिया और उनके खिलाफ युद्ध किया। जिसे आगे चल कर [[पॉलीगर का युद्ध#पॉलीगर का पहला युद्ध|पॉलीगर का पहला युद्ध]] कहा गया। उन्हें पुदुकोट्टाई , विजया रघुनाथ टोंडाइमन राज्य के शासक की सहायता से अंग्रेजों ने कब्जा कर लिया था, और 16 अक्टूबर 1799 को कायथार में फांसी दी गई थी। <ref>{{cite journal|last=Yang|first=Anand A.|title=Bandits and Kings: Moral Authority and Resistance in Early Colonial India |url=https://archive.org/details/sim_journal-of-asian-studies_2007-11_66_4/page/881|journal=The Journal of Asian Studies |volume=66 |issue=4 |date=November 2007 |pages=881–896 |jstor=20203235 |subscription=yes}}</ref>
कट्टाबोमैन के बारे में बताए गए विभिन्न पारंपरिक कहानियां हैं जो उन्हें और उनके राज्य की महिमा करने के लिए प्रवृत्त होती हैं। वह तेलुगु- बोलने वाली जातियों के एक समूह के लिए एक ढीला शब्द था, जिसमें वटुका (उत्तरपूर्वी) था, जिसमें 1565 में नायक- नियंत्रित विजयनगर साम्राज्य के पतन के बाद शुष्क परिवार तिरुनेलवेली क्षेत्र में बसने के लिए दक्षिण में स्थानांतरित होने का दावा करने वाले परिवार शामिल थे। पहले शाही अदालत में कुछ प्रमुखता थी और सूखे परिस्थितियों में खेती करने के लिए उपयुक्त हो सकता था, हालांकि यह भी संभव है कि उनके पास बसने के अलावा कोई विकल्प नहीं था क्योंकि उन्होंने तिरुनेलवेली के अन्य महत्वपूर्ण समुदाय - मारवार्स - पहले से ही कब्जा कर लिया था अधिक अनुकूल क्षेत्रों। कट्टाबोमैन कंबलटर जाति के सदस्य थे, अन्य दो वतुका समुदाय कम्मावर्स और रेड्डीज थे। <ref>{{cite book |title=The Hollow Crown: Ethnohistory of an Indian Kingdom |url=https://archive.org/details/hollowcrownethno00dirk_392 |first=Nicholas B. |last=Dirks |authorlink=Nicholas Dirks |publisher=Cambridge University Press |year=1987 |isbn=0-521-32604-4 |pages=[https://archive.org/details/hollowcrownethno00dirk_392/page/n95 60]-70, 174}}</ref>
[[शिवाजी गणेश]] अभिनेता रहे [[तमिल भाषा]] की फिल्म वीरापांड्या कट्टाबोम्मन इनके जीवन पर आधारित फिल्म है। <ref>{{cite news |url=http://www.thehindu.com/features/cinema/veera-pandya-kattabomman-1959/article7188251.ece |work=The Hindu |title=Veera Pandya Kattabomman 1959 |date=9 May 2015 |first=Randor |last=Guy |access-date=20 February 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150510043441/http://www.thehindu.com/features/cinema/veera-pandya-kattabomman-1959/article7188251.ece |archive-date=10 मई 2015 |url-status=live }}</ref>
==विरासत==
[[File:Kattapomman Memorial.JPG|thumb|right|250px|कयाथार में कट्टाबोमैन स्मारक]]
इतिहासकार सुसान बेली का कहना है कि स्थानीय लोककथाओं में कट्टाबोमैन को रॉबिन हूड -जैसा चित्र माना जाता है और यह कम्मी कविता रूप में कई पारंपरिक कथाओं के गीतों का विषय है। कायथार में उनके निष्पादन की साइट एक "शक्तिशाली स्थानीय मंदिर" बन गई है और एक बार भेड़ों को त्याग दिया गया था। <ref>{{cite book |title=Saints, Goddesses and Kings: Muslims and Christians in South Indian society, 1700–1900 |url=https://archive.org/details/saintsgoddessesk0000bayl |first=Susan |last=Bayly |authorlink=Susan Bayly |publisher=Cambridge University Press |year=1989 |isbn=0-521-37201-1 |page=[https://archive.org/details/saintsgoddessesk0000bayl/page/207 207]}}</ref> तमिलनाडु सरकार कयाथार में एक स्मारक रखती है और पंचलंकुरिची में पुराने किले के अवशेषों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित किया जाता है। <ref>{{cite web|url=http://www.thoothukudi.tn.nic.in/upinfo/tourism/Panchalankurichi.html|title=Tourism in Thoothukudi district|publisher=Government of Tamil Nadu|access-date=11 अगस्त 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20160304051620/http://www.thoothukudi.tn.nic.in/upinfo/tourism/Panchalankurichi.html|archive-date=4 मार्च 2016|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite news|url=http://www.thehindu.com/news/national/tamil-nadu/jayalalithaa-inaugurates-memorial-for-freedom-fighter-veerapandia-kattaboman/article7332931.ece|title=Jayalalithaa inaugurates memorial for Veerapandia Kattaboman|work=[[The Hindu]]|date=19 June 2015}}</ref> 2006 में, तिरुनेलवेली जिला प्रशासन ने उनकी जयंती पर पंचलंकुरिची में एक त्यौहार आयोजित किया। <ref>{{cite news|url=http://www.hindu.com/2006/05/14/stories/2006051410250300.htm|title=Kattabomman festival celebrated|work=The Hindu|date=14 May 2006|accessdate=2018-03-04|archive-url=https://web.archive.org/web/20121022122753/http://www.hindu.com/2006/05/14/stories/2006051410250300.htm|archive-date=22 अक्तूबर 2012|url-status=live}}</ref>
कट्टाबोमैन की फांसी की बीसेंटेनेरी मनाने के लिए, भारत सरकार ने 16 अक्टूबर 1999 को उनके सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया। <ref>{{Cite web|url=http://www.tamilnadupost.nic.in/phil/statmps_f.htm|title=Tamilnadu postal circle — stamps|publisher=Tamil Nadu post|access-date=11 अगस्त 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180909052642/http://www.tamilnadupost.nic.in/phil/statmps_f.htm|archive-date=9 सितंबर 2018|url-status=dead}}</ref> विजयनारायणम में भारतीय नौसेना संचार केंद्र का नाम आईएनएस कट्टाबोमैन रखा गया है। <ref>{{cite web|url=http://www.globalsecurity.org/military/world/india/ins-kattabomman.htm|publisher=Global security|title=INS Kattabomman|access-date=11 अगस्त 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20190321172731/https://www.globalsecurity.org/military/world/india/ins-kattabomman.htm|archive-date=21 मार्च 2019|url-status=live}}</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[पॉलीगर का युद्ध]]
* [[पुली थेवर]]
* [[धीरन चिन्नमलै]]
* [[मारुथु पांडियार]]
* [[वीरन सुंदरालिंगम|वीरन सुंदरलिंगम]]
* [[ऊमैथुरई|ओमेथिथराई]], वीरपंदिया कट्टाबोमैन का छोटा भाई
* [[वेलु नचियार]]
==सन्दर्भ==
{{सन्दर्भ}}
==अधिक पठन==
*{{cite book |title=History of People and Their Environs: Essays in Honour of Prof. B.S. Chandrababu |editor1-first=S. |editor1-last=Ganeshram |editor2-first=C. |editor2-last=Bhavani |publisher=Bharathi Puthakalayam |year=2011 |isbn=978-9-38032-591-0 |url=https://books.google.co.uk/books?id=crxUQR_qBXYC&pg=PA369 |chapter=A Political History of Ettayapuram of Thirunelvelli District, Tamil Nadu |first=K. |last=Karunakarapandian |access-date=11 अगस्त 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181127110638/https://books.google.co.uk/books?id=crxUQR_qBXYC&pg=PA369 |archive-date=27 नवंबर 2018 |url-status=live }}
*{{cite book |title=The View from Below: Indigenous Society, Temples, and the Early Colonial State in Tamilnadu, 1700–1835 |first=Kanakalatha |last=Mukund |publisher=Orient Blackswan |year=2005 |isbn=978-8-12502-800-0 |url=https://books.google.co.uk/books?id=5BMljBxJXtoC&pg=PA170 |access-date=11 अगस्त 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180303225708/https://books.google.co.uk/books?id=5BMljBxJXtoC&pg=PA170 |archive-date=3 मार्च 2018 |url-status=live }}
==बाहरी कड़ियाँ==
* https://www.thebetterindia.com/126570/kattabomman-legendary-chieftain-didnt-bow-british/
* https://web.archive.org/web/20180809194759/http://www.itstamil.com/veerapandiya-kattabomman.html / तामिल भाशा मे कट्टाबोम्मन पर लेख
{{Authority control}}
{{DEFAULTSORT:Kattabomman, Veerapandiya}}
[[श्रेणी:1760 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:1799 में मृत्यु]]
[[श्रेणी:स्वतंत्रता सेनानी]]
[[श्रेणी:तामिलनाडु के लोग]]
d29397j9hj9tk2qrktr0rel4icshohc
6591483
6591482
2026-07-24T06:30:22Z
Hindustanilanguage
39545
[[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:तामिलनाडु के लोग]] हटाई; [[श्रेणी:तमिलनाडु के लोग]] जोड़ी
6591483
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox royalty
| name = वीरापांड्या कट्टाबोम्मन यादव
| title = पांचालांकुरिचि का पलाइयाक्करार
| image = Veerapandiya Kattabomman postage stamp.jpg
| caption = वीरापांड्या कट्टाबोम्मन यदुवंशी क्षत्रिय यादव के नाम पर डाक टिकट डाक विभाग द्वारा जारी की गई
| reign = 2 फरवरी 1760 – 16 अक्टोबर 1799
| dynasty =
| successor = [[ब्रिटिश राज]]
| father = जगवीरा कट्टाबोमैन
| mother = अरुमुगाथमल
| spouse = जक्कम्मल
| birth_date = 3 जनवरी 1760
| birth_place = [[पांचालांकुरिचि]], [[तामिलनाडु]], भारत
| death_date = {{death date and age|df=yes|1799|10|16|1760|1|3}}
| death_place = [[कयाथार]], [[तामिलनाडु]]
| burial_date =
| burial_place =
}}
'''वीरापांड्या कट्टाबोम्मन यादव''' एक स्वतंत्रता सेनानी है <ref>{{cite book|last=Narwekar|first=Sanjit|title=Directory of Indian film-makers and films|url=https://books.google.com/books?id=UYUjAQAAIAAJ&q=veerapandiya+katta+brahmana&dq=veerapandiya+katta+brahmana&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwi3s4DvsrXZAhWIgVQKHQN9CBYQ6AEIPzAF|access-date=11 अगस्त 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20131231121847/http://books.google.com/books?id=UYUjAQAAIAAJ|archive-date=31 दिसंबर 2013|url-status=live}}</ref><ref>{{cite news|url=http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-features/tp-fridayreview/glimpse-into-history/article2272718.ece|title=The Hindu: Glimpse into history|date=20 July 2011|access-date=5 March 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180305203039/http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-features/tp-fridayreview/glimpse-into-history/article2272718.ece|archive-date=5 मार्च 2018|url-status=live}}</ref><ref>{{cite news|url=http://www.thehindu.com/thehindu/mp/2005/01/22/stories/2005012202470100.htm|title=The hindu news|date = 22 January 2005| access-date=5 March 2018}}</ref> 18 वीं शताब्दी में पलायककर और भारत के तमिलनाडु में पंचलंकुरिची के सरदार थे। उन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की संप्रभुता को स्वीकार करने से इंकार कर दिया और उनके खिलाफ युद्ध किया। जिसे आगे चल कर [[पॉलीगर का युद्ध#पॉलीगर का पहला युद्ध|पॉलीगर का पहला युद्ध]] कहा गया। उन्हें पुदुकोट्टाई , विजया रघुनाथ टोंडाइमन राज्य के शासक की सहायता से अंग्रेजों ने कब्जा कर लिया था, और 16 अक्टूबर 1799 को कायथार में फांसी दी गई थी। <ref>{{cite journal|last=Yang|first=Anand A.|title=Bandits and Kings: Moral Authority and Resistance in Early Colonial India |url=https://archive.org/details/sim_journal-of-asian-studies_2007-11_66_4/page/881|journal=The Journal of Asian Studies |volume=66 |issue=4 |date=November 2007 |pages=881–896 |jstor=20203235 |subscription=yes}}</ref>
कट्टाबोमैन के बारे में बताए गए विभिन्न पारंपरिक कहानियां हैं जो उन्हें और उनके राज्य की महिमा करने के लिए प्रवृत्त होती हैं। वह तेलुगु- बोलने वाली जातियों के एक समूह के लिए एक ढीला शब्द था, जिसमें वटुका (उत्तरपूर्वी) था, जिसमें 1565 में नायक- नियंत्रित विजयनगर साम्राज्य के पतन के बाद शुष्क परिवार तिरुनेलवेली क्षेत्र में बसने के लिए दक्षिण में स्थानांतरित होने का दावा करने वाले परिवार शामिल थे। पहले शाही अदालत में कुछ प्रमुखता थी और सूखे परिस्थितियों में खेती करने के लिए उपयुक्त हो सकता था, हालांकि यह भी संभव है कि उनके पास बसने के अलावा कोई विकल्प नहीं था क्योंकि उन्होंने तिरुनेलवेली के अन्य महत्वपूर्ण समुदाय - मारवार्स - पहले से ही कब्जा कर लिया था अधिक अनुकूल क्षेत्रों। कट्टाबोमैन कंबलटर जाति के सदस्य थे, अन्य दो वतुका समुदाय कम्मावर्स और रेड्डीज थे। <ref>{{cite book |title=The Hollow Crown: Ethnohistory of an Indian Kingdom |url=https://archive.org/details/hollowcrownethno00dirk_392 |first=Nicholas B. |last=Dirks |authorlink=Nicholas Dirks |publisher=Cambridge University Press |year=1987 |isbn=0-521-32604-4 |pages=[https://archive.org/details/hollowcrownethno00dirk_392/page/n95 60]-70, 174}}</ref>
[[शिवाजी गणेश]] अभिनेता रहे [[तमिल भाषा]] की फिल्म वीरापांड्या कट्टाबोम्मन इनके जीवन पर आधारित फिल्म है। <ref>{{cite news |url=http://www.thehindu.com/features/cinema/veera-pandya-kattabomman-1959/article7188251.ece |work=The Hindu |title=Veera Pandya Kattabomman 1959 |date=9 May 2015 |first=Randor |last=Guy |access-date=20 February 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150510043441/http://www.thehindu.com/features/cinema/veera-pandya-kattabomman-1959/article7188251.ece |archive-date=10 मई 2015 |url-status=live }}</ref>
==विरासत==
[[File:Kattapomman Memorial.JPG|thumb|right|250px|कयाथार में कट्टाबोमैन स्मारक]]
इतिहासकार सुसान बेली का कहना है कि स्थानीय लोककथाओं में कट्टाबोमैन को रॉबिन हूड -जैसा चित्र माना जाता है और यह कम्मी कविता रूप में कई पारंपरिक कथाओं के गीतों का विषय है। कायथार में उनके निष्पादन की साइट एक "शक्तिशाली स्थानीय मंदिर" बन गई है और एक बार भेड़ों को त्याग दिया गया था। <ref>{{cite book |title=Saints, Goddesses and Kings: Muslims and Christians in South Indian society, 1700–1900 |url=https://archive.org/details/saintsgoddessesk0000bayl |first=Susan |last=Bayly |authorlink=Susan Bayly |publisher=Cambridge University Press |year=1989 |isbn=0-521-37201-1 |page=[https://archive.org/details/saintsgoddessesk0000bayl/page/207 207]}}</ref> तमिलनाडु सरकार कयाथार में एक स्मारक रखती है और पंचलंकुरिची में पुराने किले के अवशेषों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित किया जाता है। <ref>{{cite web|url=http://www.thoothukudi.tn.nic.in/upinfo/tourism/Panchalankurichi.html|title=Tourism in Thoothukudi district|publisher=Government of Tamil Nadu|access-date=11 अगस्त 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20160304051620/http://www.thoothukudi.tn.nic.in/upinfo/tourism/Panchalankurichi.html|archive-date=4 मार्च 2016|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite news|url=http://www.thehindu.com/news/national/tamil-nadu/jayalalithaa-inaugurates-memorial-for-freedom-fighter-veerapandia-kattaboman/article7332931.ece|title=Jayalalithaa inaugurates memorial for Veerapandia Kattaboman|work=[[The Hindu]]|date=19 June 2015}}</ref> 2006 में, तिरुनेलवेली जिला प्रशासन ने उनकी जयंती पर पंचलंकुरिची में एक त्यौहार आयोजित किया। <ref>{{cite news|url=http://www.hindu.com/2006/05/14/stories/2006051410250300.htm|title=Kattabomman festival celebrated|work=The Hindu|date=14 May 2006|accessdate=2018-03-04|archive-url=https://web.archive.org/web/20121022122753/http://www.hindu.com/2006/05/14/stories/2006051410250300.htm|archive-date=22 अक्तूबर 2012|url-status=live}}</ref>
कट्टाबोमैन की फांसी की बीसेंटेनेरी मनाने के लिए, भारत सरकार ने 16 अक्टूबर 1999 को उनके सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया। <ref>{{Cite web|url=http://www.tamilnadupost.nic.in/phil/statmps_f.htm|title=Tamilnadu postal circle — stamps|publisher=Tamil Nadu post|access-date=11 अगस्त 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180909052642/http://www.tamilnadupost.nic.in/phil/statmps_f.htm|archive-date=9 सितंबर 2018|url-status=dead}}</ref> विजयनारायणम में भारतीय नौसेना संचार केंद्र का नाम आईएनएस कट्टाबोमैन रखा गया है। <ref>{{cite web|url=http://www.globalsecurity.org/military/world/india/ins-kattabomman.htm|publisher=Global security|title=INS Kattabomman|access-date=11 अगस्त 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20190321172731/https://www.globalsecurity.org/military/world/india/ins-kattabomman.htm|archive-date=21 मार्च 2019|url-status=live}}</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[पॉलीगर का युद्ध]]
* [[पुली थेवर]]
* [[धीरन चिन्नमलै]]
* [[मारुथु पांडियार]]
* [[वीरन सुंदरालिंगम|वीरन सुंदरलिंगम]]
* [[ऊमैथुरई|ओमेथिथराई]], वीरपंदिया कट्टाबोमैन का छोटा भाई
* [[वेलु नचियार]]
==सन्दर्भ==
{{सन्दर्भ}}
==अधिक पठन==
*{{cite book |title=History of People and Their Environs: Essays in Honour of Prof. B.S. Chandrababu |editor1-first=S. |editor1-last=Ganeshram |editor2-first=C. |editor2-last=Bhavani |publisher=Bharathi Puthakalayam |year=2011 |isbn=978-9-38032-591-0 |url=https://books.google.co.uk/books?id=crxUQR_qBXYC&pg=PA369 |chapter=A Political History of Ettayapuram of Thirunelvelli District, Tamil Nadu |first=K. |last=Karunakarapandian |access-date=11 अगस्त 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181127110638/https://books.google.co.uk/books?id=crxUQR_qBXYC&pg=PA369 |archive-date=27 नवंबर 2018 |url-status=live }}
*{{cite book |title=The View from Below: Indigenous Society, Temples, and the Early Colonial State in Tamilnadu, 1700–1835 |first=Kanakalatha |last=Mukund |publisher=Orient Blackswan |year=2005 |isbn=978-8-12502-800-0 |url=https://books.google.co.uk/books?id=5BMljBxJXtoC&pg=PA170 |access-date=11 अगस्त 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180303225708/https://books.google.co.uk/books?id=5BMljBxJXtoC&pg=PA170 |archive-date=3 मार्च 2018 |url-status=live }}
==बाहरी कड़ियाँ==
* https://www.thebetterindia.com/126570/kattabomman-legendary-chieftain-didnt-bow-british/
* https://web.archive.org/web/20180809194759/http://www.itstamil.com/veerapandiya-kattabomman.html / तामिल भाशा मे कट्टाबोम्मन पर लेख
{{Authority control}}
{{DEFAULTSORT:Kattabomman, Veerapandiya}}
[[श्रेणी:1760 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:1799 में मृत्यु]]
[[श्रेणी:स्वतंत्रता सेनानी]]
[[श्रेणी:तमिलनाडु के लोग]]
o3oh3o28zgvl3sx9ohfjbex3qy30lkb
गुहिल राजवंश
0
946182
6591477
6582484
2026-07-24T05:46:32Z
~2026-41228-06
937925
/* सिसोदिया राजवंश (ल. 1326 – 1949 ईस्वी) */
6591477
wikitext
text/x-wiki
{{में विलय|मेवाड़ के गुहिल|date=जनवरी 2023}}
गुहिल/गहलौत राजवंश एक प्रमुख [[राजवंश]] था जो [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के [[राजस्थान]] क्षेत्र में [[मेवाड़|मेवाड़]] शहर में शासन करता था | इसका प्रारंभिक संंस्थापक [[राजा गुहादित्य]] थेे, जिन्होंने छटी शताब्दी में गुहिल वंंश की नींव रखी। गुुुहादित्य के पश्चात् '''734 ई'. में [[बप्पा रावल]] को गुहिल वंश का वास्तविक संंस्थापक माना जाता है।
शुरुआत में गुहिल राजवंश [[गुर्जर-प्रतिहार राजवंश|प्रतिहार]] साम्राज्य के सामंतों का रूप निभाया करते थे लेकिन रावल अल्लट के द्वारा [[गुर्जर|प्रतिहार]] सम्राट देवपाल के वध के बाद वह स्वतन्त्र बन गए | दसवीं शताब्दी में गुहिल रावल [[राष्ट्रकूट राजवंश|राष्ट्रकूट राजवंशज]] के अधीन हुआ करते थे तथा ग्यारहवीं शताब्दी में [[परमार वंश|परमार]] और [[चौहान वंश|चौहान]] साम्राज्यों के अधीन शासन करते थे | बारहवीं शताब्दी में गुहिल राजवंश दो हिस्सों में विभाजित होगया जिनमें से मुख्या राजवंश मेवाड़ पर वर्ष 1303 तक शासन करता रहा जब मुसलमान आक्रमणकारी [[अलाउद्दीन खिलजी]] ने [[चित्तौड़गढ़|चित्तौड़]] पर घेरा डालकर गुहिलों को पराजित करा था |[[File:Map rajasthan mewar.png|thumb|मेवाड़]]
== प्राचीन इतिहास ==
{{मुख्य|शिवि}}
मेवाड़ का प्राचीन नाम [[शिवि]] था जिसकी राजधानी [[मध्यमिका]] (जिसे वर्तमान में नगरी कहते हैं) थी यहां पर [[मेहर]] जनजाति का अधिकार था और वह हमेशा [[मलेच्छों]] से संघर्ष करते रहे इसलिए इस क्षेत्र को मैद अर्थात मलेच्छों को मारने वाला की संज्ञा दी गई है ।
'''[[मैदपाट]] को धीरे धीरे मेवाड़ कहा जाने लगा । मेवाड़ की राजधानी [[उदयपुर]] बनी ।'''
मेवाड़ के राजा स्वयं को [[राम]] के वंशज बताते हैं, इसी कारण भक्तों एवं चरणों ने मेवाड़ के शासकों को [[रघुवंशी]] तथा '''हिंदुआ सूरज''' कहने लगे गुहिल राज्य के चिन्ह में जो '''दृढ़ राखे धर्म को ताहि राखे करतार''' अंकित है ।
मेवाड़ का गुहिल वंश राजस्थान का ही नहीं अपितु संसार के प्राचीनतम राजवंशों में से एक है जीसने 1500 वर्षों से अधिक के लंबे समय तक एक प्रदेश पर शासन किया ।
== मेवाड़ की शासक वंशावली (ल. 566 – 1949 ईस्वी) ==
{{इन्हें भी देखें|मेवाड़ की शासक वंशावली}}
छठी शताब्दी में, तीन अलग-अलग गुहिल राजवंशों ने वर्तमान [[राजस्थान]] में शासन करने के लिए जाना जाता है:
# [[नागदा]]-[[अहार]] के गुहिल
# किष्किंधा के गुहिल (वर्तमान में [[कल्याणपुर, राजस्थान|कल्याणपुर]])
# धवागर्ता के गुहिल (वर्तमान में धोर)
=== गुहिल/गहलौत राजवंश (ल. 566 – 1303 ईस्वी) ===
{{मुख्य|गुहिल राजवंश}}
*[[गुहादित्य]] / गोहिल (565–580 )
*भोज (I) (580–602)
*महेन्द्र (I) (602–616)
*नागादित्य (616–646)
*शिलादित्य (646–661)
*अपराजित (661–697)
*महेन्द्र (II) (697–728)
*[[बप्पा रावल|कालभोज बप्पा रावल]] (728/734–753)बापा रावल ने मुस्लिम देशों को भी जीता ।
<ref>{{cite book |last1=Ganguli |first1=Kalyan Kumar |title=Cultural History of Rajasthan |date=1983 |publisher=Sundeep |url=https://books.google.co.in/books?id=PXstAAAAMAAJ&q=founder+of+guhila+dynasty&dq=founder+of+guhila+dynasty&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwj63d2M453cAhWIsY8KHYxJCeoQ6AEIQjAG |accessdate=14 जुलाई 2018 |language=en |archive-url=https://web.archive.org/web/20180714110557/https://books.google.co.in/books?id=PXstAAAAMAAJ&q=founder+of+guhila+dynasty&dq=founder+of+guhila+dynasty&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwj63d2M453cAhWIsY8KHYxJCeoQ6AEIQjAG |archive-date=14 जुलाई 2018 |url-status=live }}</ref>
*खुमाण (I) (753–773)
*मत्तट (773–793)
*भृतभट्ट सिंह (793–813)
*अथाहसिंह (813–828)
*खुमाण (II) (828–853)
*महाकाय (853–878)
*खुमाण (III) (878–926)
*भृतभट्ट (II) (926-951 )
*अल्लट (951-971)
*नरवाहन (971-979)
*शालिवाहन (973–977 )
*शक्तिकुमार (977–993 )
*अमरप्रसाद (993–998)
*शुचिवर्मा (998–1010)
*नरवर्मन (1010–1035)
*कीर्तिवर्मा (1035–1050)
*योगराज (1050–1075)
*वैरट (1075–1090)
*हंसपाल (1090–1100)
*वैरिसिंह (1100–1122)
*विजयसिंह (1122–1130)
*वैरिसिंह (II) (1130–1136)
*अरिसिंह (1136–1145)
*चोङसिंह (1145–1151)
*विक्रम सिंह (1151–1158)
*[[रणसिंह]] (1158–1165)
=== गुहिल/गहलौत राजवंश का विभाजन ===
[[रणसिंह]] (1158 ई.) इन्हीं के शासनकाल में गुहिल/गहलौत वंश दो शाखाओं में बट गया।
* '''प्रथम (रावल शाखा)'''— रणसिंह के पुत्र क्षेमसिंह रावल शाखा का निर्माण कर मेवाड़ पर शासन किया।
*'''द्वितीय (राणा शाखा)'''— रणसिंह के दूसरे पुत्र राहप ने सिसोदा ठिकानों की स्थापना कर राणा शाखा की शुरुआत की । ये राणा सिसोदा ठिकाने में रहने के कारण आगे चलकर सिसोदिया कहलाए।
==== रावल शाखा (ल. 1165 – 1303 ईस्वी) ====
*[[क्षेमसिंह]] (1165–1183)
*[[सामंत सिंह]] (1183–1188)
*[[कुशल सिंह]] (1188–1195)
*[[महानसिंह]] (1195–1202)
*[[पद्मसिहा]] (1202–1213)
*[[जैत्र सिंह]] (1213–1253)
*[[तेज सिंह]] (1253–1273 )
*[[समर सिंह]] (1273–1301 )
*[[रतन सिंह]] (1301–1303 )
=== राणा शाखा (ल. 1165 – 1326 ईस्वी) ===
*[[रहपा]] (1162)
*नरपति (1185)
*दिनकर (1200)
*जशकरन (1218)
*नागपाल (1238)
*कर्णपाल (1266)
*भुवनसिंह (1280)
*भीमसिंह (1297)
*जयसिंह (1312)
*लखनसिंह (1318)
*[[अरिसिंह]] (1322)
*[[हम्मीर सिंह]] (1326)
=== सिसोदिया राजवंश (ल. 1326 – 1949 ईस्वी) ===
{{मुख्य|सिसोदिया राजवंश}}
* '''''विषम घाटी पंचानन''''' '''[[राणा हम्मीर सिंह]]''' (1326–1364)
''विषम घाटी पंचानन'' (सकंट काल मे सिंह के समान) के नाम से जाना जाता है, यह संज्ञा [[राणा कुम्भा]] ने [[कीर्ति स्तम्भ]] प्रशस्ति में दी।
<ref name="sen2">{{Cite book |last=Sen |first=Sailendra |title=A Textbook of Medieval Indian History |publisher=Primus Books |year=2013 |isbn=978-9-38060-734-4 |pages=116–117}}</ref>
* [[क्षेत्र सिंह]] (1364–1382)
* [[राणा लाखा|लाखा सिंह]] (1382–1421)
* [[राणा मोकल]] (1421–1433)
* '''''कुंभकर्ण''''' '''[[राणा म' (1433–1468)
महाराणा कुंभकर्ण सिंह ने मुसलमानों को अपने-अपने स्थानों पर हराकर राजपूती राजनीति को एक नया रूप दिया। इतिहास में ये ''महाराणा कुंभा'' के नाम से अधिक प्रसिद्ध हैं। महाराणा कुंभा को [[चित्तौड़गढ़ दुर्ग|चित्तौड़ दुर्ग]] का आधुुुनिक निर्माता भी कहते हैं क्योंकि इन्होंने चित्तौड़ दुर्ग के अधिकांश वर्तमान भाग का निर्माण कराया ।<ref name="sen2"/>
* [[राणा उदय सिंह|उदय सिंह प्रथम(ऊदा)]] (1468–1473)
* [[राणा रायमल]] (1473–1509)
* '''''हिंदुआ सूरज''''' '''[[राणा सांगा]]''' (1509–1528)
महाराणा संग्राम सिंह
[[मुगल]] साम्राज्य के संस्थापक [[बाबर]] ने अपने संस्मरणों में कहा है कि राणा सांगा हिंदुस्तान में सबसे शक्तिशाली हिन्दू राजा थे, जब उन्होंने इस पर आक्रमण किया, और कहा कि ''उन्होंने अपनी वीरता और तलवार से अपने वर्तमान उच्च गौरव को प्राप्त किया।''
<ref>Har Bilas, Sarda. maharana sanga : the hindupat, the last great leader of the rajput race. pp. 15–16.</ref><ref>A Comprehensive History of India: Comprehensive history of medieval India p107</ref>
* [[रतन सिंह द्वितीय]] (1528–1531)
* [[विक्रमादित्य सिंह]] (1531–1536)
* [[बनवीर सिंह]] (1536–1537)
* [[उदय सिंह]] (1537–1572)
* '''''मेवाड़ी राणा''''' '''[[महाराणा प्रताप]]'महाराणा जी हल्दीघाटी जीत गथे 💯'' (1572–1597)
उन्होंने मुगल सम्राट [[अकबर]] की अधीनता स्वीकार नहीं की और कई सालों तक संघर्ष किया और अंत महाराणा प्रताप सिंह ने मुगलों को युद्ध में हराया, जिसमें [[दिवेर का युद्ध]] (1582) भी हैं।
<ref>{{Cite web|url=https://infohindi.com/maharana-pratap-ki-jivani-biography-mah/|title=महाराणा प्रताप की जीवनी Biography of Maharana Pratap in Hindi|date=2016-06-06|website=InfoHindi.com|language=en-US|access-date=2020-11-24|archive-date=15 मई 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210515025136/https://infohindi.com/maharana-pratap-ki-jivani-biography-mah/|url-status=dead}}</ref>
<ref>{{Cite book|author=विजय नाहर|title=हिन्दुवा सूर्य महाराणा प्रताप | publisher=पिंकसिटी पब्लिशर्स| isbn=978-93-80522-45-6|year=2011|page= 275}}</ref>
* '''''चक्रवीर''''' '''[[अमर सिंह प्रथम]]''' (1597–1620)
दिवेर के युद्ध में मेवाड़ के राजा अमर सिंह प्रथम तथा मुगल सेना के बीच सन 1606 ई. में हुआ था। इस युद्ध में अमर सिंह ने मुगल सेनापति सुल्तान खान को स्वयं मार दिया था। कारण उन्हें ''चक्रवीर'' के नाम से जाना गया। मेवाड़ न जीत पाने के कारण अकबर ने अपनी पुत्री का विवाह सन्धि स्वरुप अमरसिंह से करवाया था।<ref>{{Cite book|title=History of Jahangir|last=Prasad|first=Beni|pages=227}}</ref><ref>{{Cite book|title=The Mughal Throne: The Saga of India's Great Emperors|last=Eraly|first=Abraham|pages=259}}</ref>
* [[कर्ण सिंह]] (1620–1628)
* [[जगत सिंह प्रथम]] (1628–1652)
* [[राज सिंह प्रथम]] (1652–1680)
* [[जय सिंह]] (1680–1698)
* [[अमर सिंह द्वितीय]] (1698–1710)
* [[संग्राम सिंह द्वितीय]] (1710–1734)
* [[जगत सिंह द्वितीय]] (1734–1751)
* [[प्रताप सिंह द्वितीय]] (1751–1753)
* [[राज सिंह द्वितीय]] (1753–1761)
* [[राणा अरि सिंह]] (1761–1773)
* [[राणा हम्मीर २|हम्मीर सिंह द्वितीय]] (1773–1778)
* [[भीम सिंह]] (1778–1828)
* [[जवान सिंह]] (1828–1838)
* [[सरदार सिंह]] (1838–1842)
* [[स्वरूप सिंह]] (1842–1861)
* [[महाराणा शम्भू|शम्भू सिंह]] (1861–1874)
* [[महाराणा सुज्जन सिंह|सुज्जन सिंह]] (1874–1884)
* [[फतेह सिंह]] (1884–1930)
* [[भूपाल सिंह]] (1930–1949), अंतिम शासक
== महाराजा गुहादित्य ==
{{मुख्य|राजा गुहादित्य}}
[[सूर्यवंश|सूर्यवंशी]] महाराजा [[कनक सेन]] की '8वी पीढ़ी' में '''[[शिलादित्य]]''' नामक एक राजा हुवे । जो [[वल्लभीपुर]] में राज करते थे वहां पर मलेच्छों ने आक्रमण कर वल्लभीपुर को तहस-नहस कर दिया व शिलादित्य वीरगति को प्राप्त हुए शिलादित्य की सभी रानियां उनके साथ [[सती]] हो गई। शिलादित्य की एक रानी [[पुष्पावती]] गर्भवती थी तथा पुत्र की मन्नत मांगने के लिए वह अपने [[परमार वंश]] के पिता के राज्य [[चंद्रावती]] आबू में [[जगदंबा देवी]] के दर्शन करने गई थी, पुष्पावती अपने पिता के घर से जब वापस वल्लभीपुर जा रही थी तो रास्ते में वल्लभीपुर के विनाश का समाचार मिला पुष्पावती यह सुनकर वहां पर सती होना चाहती थी, परंतु गर्भावस्था के कारण यह संभव नहीं था पुष्पावती ने अपनी सहेलियों के साथ 'मल्लिया' नामक गुफा में शरण ली जहां उसने अपने पुत्र का को जन्म दिया गुफा के पास वीरनगर नामक गांव था जिसमें कमलावती नाम की ब्राह्मणी रहती थी । रानी पुष्पावती ने उसे अपने पास बुलाकर अपने पुत्र के लालन-पालन का दायित्व सौंपकर सती हो गई । कमलावती ने रानी के पुत्र को अपने पुत्र की भांति रखा । '''वह बालक गुफा में पैदा हुआ था और उस प्रदेश के लोग गुफा को 'गोह' कहते थे अतः कमलावती ने उस बच्चे का नाम गोह रखा जो आगे चलकर गुहिल के नाम से विख्यात हुआ ।''' कमलावती ने बालक गुहिल को [[इडर]] के [[भील]] राजा [[मांडलिक]] को सौंप दिया । बालक गूहिल राजा मांडलिक के राजमहल में रहता और भील बालकों के साथ घुड़सवारी करता, भील कुमार नल और गुहिल का साथ रहा , कर्नल जेम्स टॉड के अनुसार गुहील ने इडर के राजा मांडलिक भील की हत्या कर दी और 566 ई में '''गुहील वंश''' की नींव रखी । हत्या कर देने वाली घटना असत्य भी हों सकती हैं।
''गोहिलादित्य का नाम उसके वंशधरों का गोत्र हो गया । गुहिल के वंशज गोहिल अथवा गुहिलोत के नाम से विख्यात हुए।''
== कालभोज/बप्पा रावल (734–753) ==
{{मुख्य|बप्पा रावल}}
इसी गुहिलादित्य ने 566 ई के आस-पास मेवाड़ में इस वंश की नींव रखकर '''[[नागदा]]''' को गुहिल वंश की राजधानी बनाई । गोहिल की 'आठवीं पीढ़ी' में '''[[महेंद्र-2]]''' नामक एक राजा हुआ जिसके व्यवहार से वहां के भील उससे नाराज हो गए एक दिन जब नागादित्य जंगल में शिकार खेलने गया तो भीलों ने उसे घेरकर वही मार डाला और इडर राज्य पर पुनःअपना अधिकार जमा लिया नागादित्य की हत्या भीलों ने कर दी तो क्षत्रीय को उसके 3 वर्षीय पुत्र '''बप्पा''' के जीवन को बचाने की चिंता सताने लगी। इसी समय वीरनगर की कमलावती के वंशज जो कि गोहिल राजवंश के कुल पुरोहित थे उन्होंने बप्पा को लेकर पांडेय नामक दुर्ग में गए इस जगह को बप्पा के लिए सुरक्षित ना मानकर बप्पा को लेकर लेकर पराशर नामक स्थान पर पहुंचे इसी स्थान के पास त्रिकूट पर्वत है इसकी तलहटी में नागेंद्र नामक नगर वर्तमान नागदा बसा हुआ था । वहां पर [[शिव]] की उपासना करने वाले बहुत से ब्राह्मण निवास करते थे हारित ऋषि ने बप्पा रावल का लालन पालन करके करने का भार उठाया।
''बप्पारावल हारित ऋषि की गाय को चराते थे उन गायों में से एक गाय जो कि सुबह बहुत ज्यादा दूध देती थी परंतु संध्या के समय आश्रम में वापस आती तो उसके थनों में दूध नहीं मिलता था ऋषियों को संदेह हुआ कि बप्पा एकांत में उस गाय का दूध पी जाता है बप्पा को जब इस बात का पता चला तो वह वास्तविकता जानने के लिए दूसरे दिन जब गायों को लेकर जंगल में गया तो उसी गाय पर अपनी नजर रखी ।
बप्पा ने देखा कि वह गाय एक निर्जन गुफा में घुस गई बप्पा भी उसके पीछे गया और उसने वहां देखा की बेल पत्तों के ढेर पर वह गाय अपने दूध की धार छोड़ रही थी बप्पा ने उसके पास जाकर उन पत्तों को हटाया तो उसके नीचे एक [[शिवलिंग]] था । जिसके ऊपर दूध की धार गिर रही थी बप्पा ने उसी शिवलिंग के पास एक समाधि लगाए हुए योगी को देखा उस योगी का ध्यान टूट गया परंतु उसने बप्पा से कुछ नहीं कहा बप्पा उस योगी [[हरित ऋषि]] की सेवा करने लगा हरित ऋषि ने उसकी सेवा भक्ति से प्रसन्न होकर शिव मंत्र की दीक्षा देकर उसे एकलिंग के दीवान की उपाधि दी । हरित ऋषि के शिवलोक जाने का समय आया तो उसने बप्पा को निश्चित समय पर आने को कहा बप्पा निश्चित समय पर आने में लेट हो गया तब तक हरित ऋषि रथ पर सवार होकर शिवलोक की तरफ चल पड़े उन्होंने बप्पा को आते देखकर रथ की चाल धीमी करवाकर बप्पा को अपना मुंह खोलने को कहा हारित ने उसके ऊपर जलाभिषेक करने का प्रयास किया जिससे वह तो बप्पा के पैर के अंगूठे पर पड़ा हरित ऋषि ने उसे कहा कि यदि यह जलाभिषेक तुम्हारे शरीर पर गिरता तो तुम अमर हो जाते फिर भी तुम्हारे पैर के अंगूठे पर गिरने से भी जहां तक तुम्हारा पाव जाएगा वहां तक तुम्हारा राज्य रहेगा हरित ऋषि ने बप्पा को मेवाड़ का राज्य वरदान में दे दिया ।''
[[बप्पा रावल]] का मूल नाम [[कालभोज]] था । बप्पा रावल ने [[हरित ऋषि]] के आशीर्वाद से '''734 ईसवी''' में [[चित्तौड़गढ़]] पर आक्रमण किया और चित्तौड़ के राजा '''[[मान मौर्य]]''' को पराजित कर ७३४–७५३ ईसवी तक शासन किया और चित्तौड़गढ़ में गुहिल वंश के साम्राज्य की स्थापना की । बप्पा रावल ने [[उदयपुर]] के समीप कैलाशपुरी नामक स्थान पर [[एकलिंग]] जी का मंदिर बनवाया ।
'''बप्पा रावल प्रथम गुहिल शासक थे जिसने मेवाड़ में सोने के सिक्के चलाए''' । बप्पा रावल की मृत्यु नागदा में हुई जहां उसकी समाधि बनी हुई है। जिसे वर्तमान में बप्पा रावल के नाम से जानते हैं।
''बप्पा रावल के बारे में कहा जाता है कि वह एक झटके में दो मलेच्छो(भैंसे) की बलि दे देते । वह 33 हाथ की धोती और 16 हाथ का दुपट्टा पहनते थे । उनकी खड़ग 32 मन ( गुजरी भाषा में गुजरात्रा में मन २० किलो होता है) की थी । वह 4 व्यक्तियों के बराबर भोजन करते थे और उनकी सेना में 12 लाख 72000 हजार सैनिक थे ।''
[[आम्र कवि]] द्वारा लिखित [[एकलिंग प्रशस्ति]] में बप्पा रावल के संन्यास लेने की घटना की पुष्टि होती है ।
== कालभोज के बाद के शासक ==
कालभोज के बाद उनके पुत्र खुमाण प्रथम मेवाड़ के शासक बने ।[[कालभोज]] के बाद के शासक थे-
*[[खुमाण प्रथम]]
*[[मत्तट]]
*[[भृतभट्ट सिंह]]
*[[खुम्माण द्वितीय]]
*[[खुमाण तृतीय]]
*[[भृतभट्ट द्वितीय]]
मेवाड़ के क्रमशः शासक बने खुमान तृतीय के बाद भृतभट्ट द्वितीय इसके बारे में हमें आहड़ लेख 977 ईसवी से जानकारी मिलती है। 942 ईसवी के प्रतापगढ़ अभिलेख में उसे '''[[महाराजाधिराज]]''' की उपाधि से पुकारा गया ।
*भृतभट्ट द्वितीय के बाद उसकी रानी '[[राष्ट्रकूट राठौड़ वंश]]' की रानी महालक्ष्मी से उत्पन्न हुए पुत्र '''[[अल्हट|अल्लट]]''' मेवाड़ के शासक बने । जिसे '''आलू रावत''' कहा जाता है । अल्लट ने हूण राजकुमारी हरिया देवी के साथ विवाह कर हूणों कि वह अपने ननिहाल पक्ष राष्ट्रकूटों की सहायता से अपने साम्राज्य का सर्वाधिक विस्तार किया ।
'''अल्लट ने पहली बार [[नौकरशाही]] की शुरुआत की जो वर्तमान में भी पूरे देश में चल रही है ।'''
अल्लट ने [[नागदा]] से राजधानी बदलकर अपनी नई राजधानी [[आहड़]] को बनाई और वहां पर [[वराह मंदिर]] का निर्माण करवाया । अल्लट के बाद उसका पुत्र [[नरवाहन]] मेवाड़ का शासक बना ।
*[[नरवाहन]] ने चौहानों के साथ अच्छे संबंध बनाने के लिए [[चौहान]] राजा [[जेजय]] की पुत्री से विवाह किया ।
फिर क्रमशः शासक हुवे–
*[[शक्तिकुमार]] (977–993 ई.)
*[[नरवर्म]]
*[[शुचिवर्म]]
*[[कीर्तिवर्मा]]
*[[योगराज]]
*[[वैरट]]
*[[हंसपाल]]
*[[वैरिसिह]]
*[[विजयसिंह]]
*[[अरिसिंह]]
*[[चोङसिंह]]
*[[विक्रम सिंह]]
*[[रणसिंह]] (1158 ई.)
==गुहिल/गहलौत वंश का शाखाओं में विभाजन ==
रणसिंह, विक्रम सिंह के पुत्र थे, इन्होंने आहोर के पर्वत पर एक किला बनवाया । इन्हीं के शासनकाल में गुहिल वंश दो शाखाओं में बट गया ।
*'''प्रथम (रावल शाखा)- [[रणसिंह]] के पुत्र [[क्षेमसिंह]] [[रावल]] शाखा का निर्माण कर मेवाड़ पर शासन किया ।'''
*'''द्वितीय (राणा शाखा)- [[रणसिंह]] के दूसरे पुत्र [[राहप]] ने सिसोदा ठिकानों की स्थापना कर राणा शाखा की शुरुआत की । ये राणा सिसोदा ठिकाने में रहने के कारण आगे चलकर [[सिसोदिया]] कहलाए।'''
*[[क्षेमसिंह]] रावल शाखा की शुरुआत कर मेवाड़ के शासक बने। इनके, [[सामंत सिंह]] और [[कुशल सिंह]] नाम के दो पुत्र हुए।
*[[सामंत सिंह]] (1172 ई.) में मेवाड़ के शासक बने सामंत सिंह का विवाह [[अजमेर]] के [[चौहान]] शासक [[पृथ्वीराज द्वितीय]] की बहन पृथ्वी बाई के साथ हुआ । [[नाडोल]] के चौहान शासक [[कीर्तिपाल]] व पृथ्वीराज द्वितीय के मध्य अनबन हो गई इसी कारण कीर्तिपाल ने मेवाड़ पर आक्रमण कर सामंत सिंह को पराजित कर मेवाड़ राज्य छीन लिया सामंत सिंह ने (1178 ईस्वी) में लगभग [[वागड़]] में जाकर अपना नया राज्य बनाया जिसकी नई राजधानी ''वट पदक बड़ौदा'' थी ।
क्षेमसिंह के छोटे पुत्र [[कुमार सैनी]] (1179 ईस्वी) में कीर्तिपाल को पराजित कर मेवाड़ के पुनः शासक बने ।
=== जैत्र सिंह (1213–1250 ईस्वी) ===
{{मुख्य|जैत्र सिंह}}
तेरहवीं शताब्दी के प्रारंभ में मेवाड़ के शासक [[जैत्र सिंह]] बने । उनके शासनकाल से पूर्व [[नाडोल के चौहान]] वंश के कीर्तिपाल ने मेवाड़ पर अधिकार स्थापित किया था । इस बेर के बदले में जेत्र सिंह ने समकालीन चौहान वंश के शासक [[उदय सिंह]] के विरुद्ध नाडोल पर चढ़ाई कर दी । नाडोल को बचाने के उद्देश्य से उदय सिंह ने अपनी पोत्री रूपा देवी का विवाह जैत्र सिंह के पुत्र [[तेज सिंह]] के साथ कर मेवाड़ और नाडोल के बेर को समाप्त किया ।
जैत्र सिंह के समय [[दिल्ली]] सल्तनत पर गुलाम वंश के बादशाह इल्तुतमिश का शासन था । इल्तुतमिश ने जेत्र सिंह के बढ़ते हुए प्रभाव को दबाने के लिए मेवाड़ की राजधानी नागदा पर (1222 से 1229 ईस्वी) में आक्रमण किया और इसे तहस-नहस कर दिया । इसी कारण जैत्र सिंह ने पहली बार अपने राज्य की राजधानी चित्तौड़गढ़ को बनाया । उसके बाद '''जेेेैत्र सिंह व इल्तुतमिश के मध्य (1227 ईस्वी) में [[भुताला का युद्ध]] हुआ, जिसमें जैत्र सिंह ने इल्तुतमिश को बुरी तरह पराजित किया, जिसके बारे में [[जयसिंह सूरी कृत हमीर हद मर्दन]] नामक पुस्तक से जानकारी मिलती है ।'''
''[[डॉक्टर ओझा]] ने जैत्र सिंह की प्रशंसा में लिखा है कि दिल्ली के गुलाम सुल्तानों के समय में मेवाड़ के राजाओं में सबसे प्रतापी और बलवान राजा जैत्रसिंह ही हुआ जिसकी वीरता की प्रशंसा उसके विपक्षियों ने भी की है
।
[[दशरथ शर्मा-]] जैत्रसिंह का समय मध्य कालीन मेवाड़ का नवशक्ति संचार का समय माना हैं।
=== तेज सिंह (1250–1273 ईस्वी) ===
{{मुख्य|तेज सिंह}}
[[जैत्र सिंह]] की मृत्यु के बाद उनके पुत्र [[तेज सिंह]] मेवाड़ के शासक बने। तेजसिंह एक प्रतिभा संपन्न शक्तिशाली शासक थे तेज सिंह ने '''परम भट्ठारक/ महाराजाधिराज/ परमेश्वर तथा चालूक्यों के समान उभावती/ वल्लभ प्रताप का विरुद्ध धारण किया था ।''' तेजसिंह के शासनकाल में दिल्ली के शासक गयासुद्दीन बलबन ने मेवाड़ पर असफल आक्रमण किया । तेज सिंह की रानी [[जयतल्लदेवी]] ने चित्तौड़ में [[श्याम पार्श्वनाथ]] के मंदिर का निर्माण करवाया ।
''तेज सिंह के शासनकाल में 1267 ईस्वी में आहङ नामक स्थान पर '''[[मेवाड़ चित्रकला शैली]]''' का प्रथम चित्रित ग्रंथ '''[[श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णी]]'' का चित्रण किया गया था ।''
=== समर सिंह (1273–1301 ईस्वी) ===
[[समर सिंह]] को [[कुंभलगढ़ प्रशस्ति]] में शत्रुओं की शक्ति का अपहरण करता लिखा गया है, जबकि [[आबू शिलालेख]] में उसे [[तुर्कों]] से [[गुजरात]] का उद्धारक लिखा गया है । चिरवे के लेख में उसे शत्रुओं का संहार करने में सिंह के समान सुर कहा गया है । ''अचलगच्छ की पट्टावली'' से स्पष्ट होता है कि [[आचार्य अमितसिंह सूरी]] के प्रभाव में [[समर सिंह]] ने अपने राज्य में जीव हिंसा पर रोक लगा दी थी । समर सिंह के दो पुत्र [[रतन सिंह]] व [[कुंभकरण]] हुए । '''कुंभकरण अपने पिता की आज्ञा प्राप्त कर नेपाल चले गए और वहां पर अपने नए गुहिल वंश की स्थापना की । समर सिंह के दूसरे पुत्र रतन सिंह चित्तौड़ के शासक बने । इसकी जानकारी हमें [[कुंभलगढ़ प्रशस्ति]] तथा [[एकलिंग महात्म्य]] ग्रंथ में मिलती है।'''
=== रतन सिंह (1301–1303 ईस्वी)===
{{मुख्य|राणा रतन सिंह}}
[[रतन सिंह]] ज्यों ही मेवाड़ की गद्दी पर बैठे तो उन्हें अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण का सामना करना पड़ा । अल्लाउद्दीन खिलजी के चित्तौड़ पर किए जाने वाले आक्रमण में खिलजी के साथ प्रसिद्ध लेखक [[अमीर खुसरो]] था । अमीर खुसरो ने इस युद्ध का सजीव चित्रण करते हुए अपनी पुस्तक [[खजाइनुल फुतूह]] मैं लिखा है कि अलाउद्दीन खिलजी चित्तौड़ पर आक्रमण करने के लिए 28 जनवरी 1303 ईस्वी को अपनी सेना सहित दिल्ली से रवाना हुआ । चित्तौड़ पहुंचकर [[गंभीरी नदी]] और [[बैङच नदी]] के मध्य शाही शिविर लगाया । स्वयं खिलजी ने अपना शिविर चित्तौड़ी नामक डूंगरी पर लगवाया ।6 महीने तक यह घेरा चलता रहा ।
'''कुंभलगढ़ शिलालेख से पता चलता है कि इन छह माह के मध्य हुए छोटे-मोटे की युद्धो में सिसोदा का सामंत [[लक्ष्मण सिंह]] अपने सात पुत्रों सहित किले की रक्षा करते हुए शहीद हो गए । जब चारों और सर्वनाश दिखाई दे रहा था और शत्रु से बचने का कोई उपाय नहीं मिल रहा था । रतन सिंह की पत्नी [[पद्मिनी]] ने 16000 राजपूत महिलाओं के साथ जोहर किया तथा रतन सिंह के दो सेनापति [[गोरा और बादल]] के नेतृत्व में राजपूतों ने [[केसरिया]] वस्त्र धारण कर किले के फाटक खोल कर शत्रुओं की सेना पर टूट पड़े और वीरगति को प्राप्त हुए ।
''यह चित्तौड़गढ़ का प्रथम साका था ''।'''
इस प्रकार (26 अगस्त 1303 ईस्वी) को [[चित्तौड़गढ़ किला]] अलाउद्दीन खिलजी के अधीन हुआ । अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी शाही सेना का विनाश देख कर बहुत क्रोधित हुआ और उसने शाही सेना को ''चित्तौड़गढ़ की आम जनता के कत्लेआम करने का आदेश दे दिया ''।अल्लाउद्दीन खिलजी कुछ दिन चित्तौड़ रुक कर अपने बेटे खिज्रखां को चित्तौड़गढ़ का शासन देकर दिल्ली लौट गया। अलाउद्दीन खिलजी ने अपने पुत्र खिज्र खां के नाम पर चित्तौड़ का नाम बदलकर खिजराबाद रखा । खिज्र खाॅ ने चित्तौड़गढ़ दुर्ग व उसके आसपास के मंदिरों तथा भवनों को तुड़वाकर किला पर पहुंचने के लिए गंभीरी नदी पर पुल बनवाया । 22 दिसंबर 1316 में अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु हो गई इस कारण खिज्र खा चित्तौड़ से वापस दिल्ली गया । पीछे मेवाड़ राज्य '''[[मालदेव सोनगरा]]''' को सौंप गया ।
=== राणा हम्मीर (1326–1364 ईस्वी)===
{{मुख्य|राणा हम्मीर सिंह}}
[[राणा हम्मीर]] सिसोदा जागीर के सरदार [[लक्ष्मण सिंह]] का पोता था । लक्ष्मण सिंह अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय चित्तौड़ दुर्ग की रक्षा करते हुए अपने सात पुत्रों के साथ वीरगति को प्राप्त हो गए। लक्ष्मण सिंह का एक लड़का अरिसिंह/[[अजय सिंह]] था, जो कि भाग्य वास उस युद्ध में बच गया था । अरि सिंह की मृत्यु के बाद उसका पुत्र राणा हमीर सिसोदा जागीर का सरदार बना । दूसरे भाई अजय सिंह का बेटा राणा सज्जन सिंह महाराष्ट्र चला गया,छत्रपति शिवाजी महाराज इन्ही के वंशज थे। राणा हम्मीर ने देखा कि अलाउद्दीन खिलजी के मरने के बाद दिल्ली सल्तनत की हालत सोचनीय है । उसने 1326 ईस्वी के आसपास दिल्ली सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक के समय चित्तौड़ पर आक्रमण कर [[मालदेव]] के पुत्र जैसा/[[जयसिंह]] को मारकर जबकि (ङा.ओझा के अनुसार) मालदेव पुत्र बनवीर को मारकर चित्तौड़ पर पुनः अपना अधिकार स्थापित किया ।
*'''ध्यातव्य रहे–''' ''राणा हम्मीर से पहले चित्तौड़ के गुहिल वंश शासक रावल एवं गहलौत कहलाते थे और बाद में मेवाड़ का राजवंश सिसोदिया राजवंश के नाम से विख्यात हुआ हम राणा हमीर सिसोदिया को 'सिसोदिया साम्राज्य का संस्थापक' भी कहते हैं ।''
मोहम्मद बिन तुगलक ने चित्तौड़ पर अधिकार करने के लिए हम्मीर पर आक्रमण किया । राणा हम्मीर ने पहाड़ी क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए खेरवाड़ा को अपना केंद्र बनाया । राणा हम्मीर वह मोहम्मद बिन तुगलक के मध्य युद्ध हुआ, जिससे हम [[सिंगोली का युद्ध]] कहते हैं ।
''राणा हम्मीर ने मेवाड़ की आपातकालीन स्थिति में पुन: अधिकार कर अच्छी स्थिति में पहुंचाया इसलिए उसे '''मेवाड़ का उद्धारक''' कहते हैं । राणा हमीर विपरीत परिस्थिति में भी अपना हौसला नहीं खोया अतः '''उसे कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति में विषम घाटी पंचानन/ विकेट आक्रमणों में सिंह के समान' कहा गया ।''' कुंभा के द्वारा '[[गीत गोविंद]]' पर लिखी गई '''[[रसिक प्रिया]]''' नामक टीका में राणा हम्मीर को '''वीर राजा''' की उपाधि दी गई ।''
राणा हम्मीर ने चित्तौड़ दुर्ग में [[अन्नपूर्णा माता]] का मंदिर बनवाया जिसकी जानकारी [[मोकल]] जी के शिलालेख से मिलती है । '''कर्नल जेम्स टॉड ने राणा हम्मीर को अपने समय का प्रबल हिंदू राजा माना है।'''
== मेवाड़ का सिसोदिया वंश (गुहिल) ==
{{मुख्य|सिसोदिया राजवंश}}
[[राणा हम्मीर]] की मृत्यु के बाद उनके पुत्र [[राणा क्षेत्र सिंह]] जिसे खेता के नाम से भी जानते हैं, मेवाड़ के शासक बने । क्षैत्र सिंह ने [[मालवा]] के [[दिलावर खान]] गौरी को परास्त कर '''मेवाड़ - मालवा संघर्ष का सूत्रपात किया ।'''
[[हाड़ेती]] के हाडा शासकों को दबाने का श्रेय भी [[खेता]] को ही जाता है। 1382 ईस्वी में जब क्षेत्र सिंह ने आक्रमण किया तो उस युद्ध में क्षेत्र सिंह वह [[बूंदी]] का [[लाल सिंह हाडा]] भी मारा गया ।
=== राणा लाखा/लक्ष सिंह (1382–1421 ईस्वी) ===
{{मुख्य|राणा लाखा}}
महाराणा हम्मीर के पौत्र व खेता के पुत्र लक्ष सिंह हैं लाखा 1382 इश्वी में मेवाड़ के शासक बने । लाखा के शासनकाल में भाग्यवश जावर [[उदयपुर]] में चांदी की खान निकली ।उस खान की आय से उसने कई किलो व मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाया । '''लाखा के शासनकाल में एक पिचू नामक चिड़ीमार बंजारे के बेल की स्मृति में पिछोला झील का निर्माण करवाया ।'''
====[[पिछोला झील]]====
पिछोला झील बेङच नदी पर स्थित है इसका निर्माण 14वीं शताब्दी में राणा लक्खा के शासनकाल में हुआ । महाराणा उदय सिंह ने इसकी पाल को पक्का करवाया । इसमें सीसारमा व बूजड़ा नदी आकर गिरती है । इस झील में जग मंदिर ( करण सिंह ने 1620 ईस्वी में शुरू तथा जगत सिंह प्रथम ने 1651 ईस्वीें में पूर्ण करवाया) जगनिवास जगत सिंह द्वितीय ने 1746 ईस्वी में पूर्ण करवाया ।महाराणा प्रताप और मानसिंह की मुलाकात इसकी पाल पर हुई थी।
लाखा के दरबार में संस्कृत के प्रज्ञात विद्वान [[झोटिंग भट्ट]] और [[धनेश्वर भट्ट]] रहते थे ।
लाखा के शासनकाल में एक महत्वपूर्ण घटना घटी। लखा ने दिल्ली सुल्तान गयासुद्दीन द्वितीय को बदनोर के समीप हुए युद्ध में पराजित करके हिंदुओं से लिए जाने वाले तीर्थ कर को समाप्त करने का वचन लिया ।
1396 ई में गुजरात के जफर खान ने मांडलगङ पर आक्रमण किया लेकिन लाखा ने इस आक्रमण को विफल कर दिया । लाखा ने बूंदी के [[राव बर सिंह]] [[हाड़ा]] को मेवाड़ का प्रभुत्व मानने के लिए विवश किया।
[[मारवाड़]] के शासक [[रणमल]] ने अपनी बहन हँसा बाई का विवाह मेवाड़ के महाराणा लाखा के पुत्र [[चूंडा]] से करने का सोचा । रणमल ने चुंडा के लिए सगाइ का नारियल मेवाड़ दरबार में भेजा, उस समय राणा लाखा का पुत्र चुंडा दरबार में नहीं थे । सगाई के नारियल को देखकर महाराणा लाखा ने मजाक करते हुए कहा कि यह बुढ़ापे में मेरे साथ किस ने मजाक किया। चुंडा को दरबार में न देखकर रणमल का दास वापस रणमल के पास पहुॅचा ।
दास ने सारी बात रणमल को कहीं तो रणमल ने दास को वापस लाखा के पास सशर्त सगाई का नारियल देकर भेजा शादी की शर्त रखी कि मेरी बहन के होने वाले पुत्र को राणा अपना उत्तराधिकारी बनाए तो मैं अपनी बहन की शादी राणा लाखा के साथ कर दूंगा महाराणा लाखा इस शर्त को स्वीकार कर लेते हैं तो मैं अपनी बहन हंसा की शादी महाराणा लाखा के साथ करने को तैयार था लेकिन उसे इस बात का पता था कि उनकी बहन महाराणा लाखा की रानी तो बनेगी लेकिन उसकी कोख से जन्म लेने वाला बालक मेवाड़ का शासक कभी नहीं बन पायेगा। आखिर मेवाड़ की राजगद्दी पर तो महाराणा लाखा के बाद चूंडा का ही अधिकार है। राव रणमल की इस बात का जवाब देते हुए चूंडा ने भरे दरबार में भीष्म प्रतिज्ञा की कि मैं आजन्म मेवाड़ के महाराणा का सेवक बनकर रहुंगा और मेरे वंशज कभी भी मेवाड़ की राजगद्दी पर हक नहीं जतायेंगे। इस भीष्म प्रतिज्ञा के बाद महाराणा लाखा का हंसाकंवर के साथ विवाह कर दिया गया।
चूंडा द्वारा सत्ता त्याग के बारे में राजस्थानी गीतों, बड़वों व राणीमंगों की पोथियों में कुछ अलग-अलग रूप में मिलता है। सभी में चूंडा की प्रशंसा की गई, बहन हनसा भाई की शादी महाराणा लाखा से कर देते हैं।
''''इसी कारण चूंडा को मेवाड़ का ''भीष्म पितामह'' कहते हैं ।'''
लाखा वह हंसा बाई के विवाह के 13 महीने बाद हंसाबाई ने एक पुत्र को जन्म दिया। जिसका नाम [[मोकल]] रखा गया। राणा लाखा जब मृत्यु की शैय्या पर थे तो उन्होने अपने बड़े पुत्र चूंडा को अपने पास बुलाकर अपने छोटे पुत्र मोकल का संरक्षक बनाया ।
=== राणा मोकल (1421-1433 ईस्वी) ===
{{मुख्य|राणा मोकल}}
जिस समय लाखा की मृत्यु हुई तो मोकल मात्र 12 वर्ष के थे । राणा लाखा के कहे अनुसार उनके बड़े भाई चूंडा राज्य के सभी कार्यों को बड़ी कुशलता से कर रहे थे । हंसा बाई ( मोकल की मां व चूंडा की सौतेली मां ) हमेशा चूंडा को शक की दृष्टि से देखती थी । चूंडा परेशान होकर मेवाड़ छोड़कर मालवा चले गए ।हंसा बाई ने अपने भाई रणमल को मोकल के संरक्षक का कार्य करने के लिए मारवाड़ से मेवाड़ बुला लिया । रणमल ने शीघ्र ही मेवाड़ में ऊंचे पदों पर राठौड़ों की नियुक्ति कर दी । इसी कारण सिसोदिया सरदार रणमल से नाराज हो गए। रणमल मारवाड़ का ही स्वामी नहीं रहा बल्कि मेवाड़ का भी सर्वे सर्वा बन गया ।
सिसोदिया सरदारों को रणमल सत्ता से वंचित कर उन्हें अपमानित कर रहा था । 1 दिन रणमल आवेश में आकर मेवाड़ सरदार राघव देव ( राणा चुंडा के भाई ) जैसे योग्य व्यक्ति की हत्या करवा दी इससे राठौड़ों वह सिसोदिया में वैमनस्य की कई गहरी होती गई।
मोकल ने 1428 ईसवी के लगभग [[नागौर]] के फिरोज खान को '''[[रामपुरा के युद्ध]]''' में परास्त किया । फिरोज खान का साथ देने आई गुजरात की सेना को भी हार का मुंह देखना पड़ा गुजरात के शासक अहमद शाह ने मेवाड़ पर 1433 ईस्वी को आक्रमण कर दिया। मोकल को इस आक्रमण का पता चला तो वह भी उस से युद्ध करने के लिए रवाना हुआ और झीलवाड़ा नामक स्थान पर पहुंचा । युद्ध के मैदान में ही मोकल के सिसोदिया सरदार जो कि रणमल के हार के कारणों कल से नाराज थे। माहपा पवार के कहने पर महाराणा क्षेत्र सिंह (खेता) की खातिन जाति की दासी से उत्पन्न हुए 2 पुत्र चाचा वह मेरा ( एक बार मोकल ने जंगल में चाचा वह मेरा से प्रसंग में किसी वृक्ष का नाम पूछ लिया तो वह इसे ताना समझ गए क्योंकि उनकी माता खातिन थी । इस अपमान का बदला लेने के लिए उन्होंने मोकल को मार दिया) ने अवसर पाकर उसकी हत्या कर दी ।
उस दिन से मेवाड़ में कहावत प्रचलित हुई की '''दीवार में आला खेत में नाला और घर में साला बर्बाद करके ही जाता है ''' राणा मोकल ने हिंदू परंपरा को स्थापित करने के लिए '''तुलादान पद्धति''' को लागू किया । इस परंपरा के तहत मंदिरों के लिए सोना चांदी दान के रूप में दिया जाता था । महाराणा मोकल ने [[एकलिंग जी मंदिर]] के परकोटे का निर्माण कराया । मोकल ने चित्तौड़ दुर्ग में [[परमार वंश]] के द्वारा बनवाए गए [[त्रिभुवन मंदिर]] का जीर्णोद्धार करवाकर [[समद्वेश्वर मंदिर]] के नाम से प्रसिद्धि दिलाई ।
====[[सौभाग्यदेवी]]====
सौभाग्य देवी परमार वंश की राजकुमारी थी । जिसका विवाह मेवाड़ के शासक राणा लाखा के पुत्र मोकल के साथ हुआ । इस सौभाग्य देवी की कोख से 1423 ईस्वी में महाराणा कुंभा का जन्म हुआ ।
====[[कमलावती]]====
कमलावती मेवाड़ के शासक राणा मोकल की रानी थी। 1433 ईस्वी में गुजरात के शासक अहमद शाह ने मेवाड़ पर आक्रमण किया । '''अहमद शाह एवं मोकल के मध्य जिलवाड़ा नामक स्थान पर युद्ध हुआ ।''' इसी समय जंहा क्षेत्र सिंह के दासी पुत्र चाचा और मेरा ने मिलकर मोकल की हत्या कर दी । उस समय रानी [[कमलावती]] ने मात्र 500 सैनिकों के साथ मुस्लिम सेना का सामना किया। वह अधिक समय तक मुस्लिम सेना के सामने टिक न सकी ओर अंत में वह जलती चिता में कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त की ।
=== महाराणा कुंभा/महाराणा कुम्भकर्ण सिसोदिया (1433–1468 ईस्वी) ===
{{मुख्य|महाराणा कुंभा}}
महाराणा कुम्भकर्ण सिसोदिया या
[[महाराणा कुम्भा]] एक ऐसा वीर योद्धा '''जिसने 30 साल के अपने शासन में कभी कोई युद्ध नही हारा।'''
महाराणा कुंभा का जन्म 1423 ईस्वी को महाराणा मोकल की परमार रानी सौभाग्य देवी के गर्भ से हुआ । मोकल की हत्या के समय कुंभा जिलवाड़ा के उसी शिविर में उपस्थित थे । उन हत्यारों ने कुंभा पर भी हमला किया किंतु उनके शुभचिंतकों ने उन्हें वहां से बचाकर सकुशल [[चित्तौड़]] ले गए। [[चित्तौड़गढ़ दुर्ग]] में कुंभा को मात्र 10 वर्ष की आयु में 1433 ईस्वी में मेवाड़ का महाराणा बनाया गया।
[[File:Maharana Kumbhakarna of Mewar.jpg|right|thumb|महाराणा कुंभा]]
कुंभा मेवाड़ का महाराणा तो बने उनके सामने बहुत भयंकर दो समस्याएं थी–
पहली– अपने पिता के हत्यारों चाचा व मेरा को सजा देना ।
दूसरी– अपने पिता के मामा [[रणमल राठौड़]] के मेवाड़ में बढ़ रहे प्रभाव को समाप्त करना ।
महाराणा कुंभा एक अच्छे शासक ही नहीं अपितु राजनीतिज्ञ भी थे। उन्होंने दिमाग का प्रयोग करते हुए रणमल राठौड़ को मारवाड़ से अपने पिता के हत्यारों का दमन करने के लिए सैनिकों सहित बुलाया। रणमल मेवाड़ पहुंचा तो कुंभा ने अपने पिता के हत्यारों पर आक्रमण किया और चाचा वह मेरा की हत्या कर दी । इस प्रकार कुंभा की पहली समस्या का हल हुआ।
कुंभा के सामने दूसरी समस्या रणमल की थी। मेवाड़ी सिसोदिया सरदारों ने अपने वैमनस्य को दूर करने के लिए षड्यंत्र रचकर सन 1438 ईस्वी में रणमल की हत्या करवा दी।
एक जन श्रुति के अनुसार रणमल मेवा राठौड़ की हत्या इस प्रकार हुई कि हनसा बाई की एक दासी डावरी प्राचीन काल में राजा लोग अपनी पुत्री के साथ दहेज के रूप में कुछ लड़कियां भेजते थे उन्हें दासिया डावरिया कहा जाता था ।
दासी जिसका नाम भारमली था । भारमली को रणमल राठौड़ दिलो जान से चाहता था। भारमली कुंभा को अपने पुत्र के समान चाहती थी। रणमल राठौड़ ने बार भारमली द्वारा कुंभा को जहर देने के लिए कई बार कहा किंतु 1 दिन कुंभा ने भारमली से रणमल को जहर देने को कहा बार भारमली ने 1438 ईस्वी में शराब में जहर देकर रणमल की हत्या कर दी।
इस प्रकार कुंभा की दोनों समस्याओं का हल हो गया ।
[[राव जोधा]] को जब अपने पिता रणमल की हत्या करने का पता चला तब वह मेवाड़ में ही था । मेवाड़ से जोधा अपनी जान बचाकर मारवाड़ की तरफ भागा, कुंभा की सेना ने उसका पीछा कर उसको वहां से भगा दिया । राव जोधा वहां से वापस मेवाड़ अपनी बुआ हनसाबाई के पास पहुंचा राव जोधा की बुआ व कुंभा की दादी हनसाबाई ने इन दोनों के मध्य मध्यस्था कराते हुए संधि करवाई जो '''आवल बावल''' के नाम से जानी जाती है। '''आवल बावल की संधि के तहत मेवाड़ में मारवाड़ की सीमा का निर्धारण हुआ मेवाड़ में मारवाड़ की सीमा निर्धारण का मुख्य बिंदु सोजत था।'''
राव जोधा ने कुंभा से अधिक मेलजोल बनाने व विश्वास प्राप्त करने के लिए अपनी पुत्री श्रंगार देवी का विवाह कुंभा के छोटे पुत्र रायमल से करवा दिया । जिसकी जानकारी हमें श्रंगार देवी द्वारा बनाई गई '''घोसुंडी की बावड़ी''' पर लगी प्रशस्ति से मिलती है।
==== मेवाड़-मालवा (माॅङू संबंध) ====
चाचा वह मेरा का साथी महपा पवार व चाचा का पुत्र अक्का मांडू के सुल्तान महमूद खिलजी प्रथम के पास चला गया। कुंभा ने मांडू के सुल्तान महमूद खिलजी को पत्र लिखकर उसके विद्रोहियों को वापस लौटाने को कहा। महमूद खिलजी ने शरण में आए हुए व्यक्तियों को भेजने से इंकार कर दिया, प्रत्युत्तर मैं महाराणा कुंभा ने [[मांडू]] पर चढ़ाई कर दी ।
इस आक्रमण का दूसरा कारण यह भी माना जाता है कि मालवा के दिवंगत सुल्तान होशंग शाह के बाद वहां उत्तराधिकारी युद्ध हुआ। जिसके तहत महमूद खिलजी ने होशंग शाह के पुत्र उमर खान को मालवा की गद्दी से हटाकर स्वयं मालवा का सुल्तान बन गया। उमर खान मेवाड़ के कुंभा से सैनिक सहायता मांगने के लिए गया तो कुंभा ने मालवा के राजा महमूद खिलजी पर आक्रमण कर दिया ।इन दोनों के मध्य 1437 ईसवी में सारंगपुर नामक स्थान पर युद्ध हुआ जिसमें महाराणा कुंभा की विजय हुई।
'''मालवा विजय के उपलक्ष्य में कुंभा ने चित्तौडग़ढ़ में ( 1440 - 1448 ) में विजय स्तंभ का निर्माण करवाया ।'''
महाराणा कुंभा महमूद खिलजी को बंदी बनाकर अपने साथ ले आए जिसे 6 महीने तक कैद रखने के बाद महमूद खिलजी को रिहा कर दिया। मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी रिया होकर गुजरात के सुल्तान कुतुबुद्दीन के पास पहुंचा ।
1456 ईस्वी में नागौर के स्वामी फिरोज खान के मरने के बाद उसका पुत्र शम्स खान नागौर का स्वामी हुआ। गुजरात के सुल्तान कुतुबुद्दीन ने उसे हटाकर उसके छोटे भाई मुजाहिद खान को नागौर का शासक बनाया । शम्स खान ने कुंभा की सहायता से सशर्त पुन: नागौर का शासक बना । जब शम्स खान ने कुंभा की शर्त नहीं मानी तो कुंभा ने नागौर पर आक्रमण किया । शम्स खान ने गुजरात के सुल्तान कुतुबुद्दीन की सहायता से कुंभा का मुकाबला किया। '''शम्स खान की इस युद्ध में पराजय हुई । [[कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति]] के अनुसार महाराणा कुंभा ने नागौर की मस्जिद को जलाया, किले को तुड़वाकर खाई भरवाई, हाथियों को छीनकर यवनियों को कैद करके उसने गायों को छुड़वाया और नागौर को चारागाह में बदल दिया ।'''
==== मेवाड़ के महान शासक सिसोदिया ====
महाराणा कुंभा के समय गुजरात के सुल्तान कुतुबुद्दीन शाह मेवाड़ पर आक्रमण करने की सोच रहा था । मांडू के सुल्तान महमूद खिलजी प्रथम का दूत ताज खान उसके पास पहुंचा। ताज खा ने मांडू और गुजरात की संयुक्त शक्ति को मिलाकर मेवाड़ पर आक्रमण करने का विचार बनाया। मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी व गुजरात के कुतुबुद्दीन शाह के मध्य 1456 ईस्वी में '''[[चंपानेर]]''' नामक स्थान पर सशर्त संधि हुई की 'मेवाड़' को जीतने के बाद दोनों मेवाड़ का आधा आधा हिस्सा बांट लेंगे। इस संधि को चंपानेर की संधि कहते हैं। संधि के तहत दोनों ने 1457 इश्वी में मेवाड़ पर आक्रमण कर दिया ।
कुतुबुद्दीन तो पहले ही [[कुंभलगढ़ दुर्ग]] में पराजित होकर गुजरात वापस लौट गया । कुंभा महमूद खिलजी की ओर बढ़े बैराठगढ़ (बदनोर) के युद्ध में 1457 ईस्वी में महमूद खिलजी को पराजित कर इस विजय के उपलक्ष्य में बदनोर (भीलवाड़ा) में '''[[कुशाल माता]]''' का भव्य मंदिर बनवाया ।
सिरोही के सहसमल देवरा को कुम्भा के नरसिंह डोडिया ने हराया।
====कुंभा की उपाधियां====
कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति तथा कुंभलगढ़ प्रशस्ति से हमें महाराणा कुंभा की उपाधियों की जानकारी मिलती है कुंभा को साहित्य ग्रंथों व प्रशस्तियों में - '''अभिनव व भरताचार्य महाराजाधिराज' रावराय, राय रायन'''
(1) '''[[महाराजाधिराज]]''' - राजाओं का राजा होने के कारण ।
(2) '''महाराजा''' - अनेक राज्यों को अपने अधिकार में रखने के कारण ।
(3) '''राणा''' - रासो विद्वानों का आश्रय दाता होने के कारण ।
(4) '''राजगुरु''' - राजनीतिक सिद्धांतों में दक्ष होने तथा विभिन्न राजाओं, सामंतों व जागीरदारों का हितेषी होने के कारण।
(5) '''दानगुरु''' - विद्वानों कलाकारों व निर्धनों को दान देने के कारण ।
(6) '''परमगुरु''' - विभिन्न विद्याओं का ज्ञाता तथा अपने समय का सर्वोच्च शासक होने के कारण ।
प्रसिद्ध गीत गोविंद नामक पुस्तक पर लिखी टीका 'रसिकप्रिया' में भी कुंभा की निम्न उपाधियों का वर्णन मिलता है ।
(7) '''नरपति''' - सामान्य मानव से श्रेष्ठ होने के कारण ।
(8) '''अश्वपति''' - कुशल घुढ़सवार होने के कारण ।
(9) '''गणपति''' - गण का अर्थ राज्य होता था अर्थात राज्य का राजा होने के कारण।
(10) '''छापगुरु''' - छापामार युद्ध पद्धति में निपुण होने के कारण।
(11) '''हिंदू सुरताण''' - समकालीन मुस्लिम शासकों द्वारा हिंदुओं की रक्षा करने वाला विभूषित किया गया है।
(12) '''नंदीकेश्वर अवतार''' - नंदीकेश्वर के मत का अनुसरण करने के कारण।
(13) '''नाटकराज''' - नृत्यशास्त्र के ज्ञाता होने के कारण।
(14) '''शेलगुरु''' - युद्ध में निपुण होने के कारण ।
(15) '''चापगुरु''' - धनुर्विद्या का ज्ञाता होने के कारण।
(16) धीमान बुद्धिमत्ता पूर्वक निर्माण कार्य करवाने के कारण अभिनव भरता चार्य श्रेष्ठ वीणा वादक एवं संगीत के छेत्र में कुंभा के विपुल ज्ञान के कारण संगीत प्रेम के कारण प्रजा पालक जनता का हितैषी होने के कारण।
=== महाराणा सांगा/महाराणा संग्राम सिंह सिसोदिया (1509-1528 ईस्वी) ===
{{मुख्य|महाराणा सांगा}}
'''महाराणा सांगा''' (महाराणा संग्राम सिंह) (१२ अप्रैल १४८४ - ३० जनवरी १५२८) (राज 1509-1528) [[उदयपुर]] में [[सिसोदिया|सिसोदिया राजपूत]] राजवंश के राजा थे तथा [[राणा रायमल]] के सबसे छोटे पुत्र थे। <ref>Sen, Sailendra (2013). A Textbook of Medieval Indian History. Primus Books. pp. 116–117. ISBN 978-9-38060-734-4</ref>
[[File:Depiction of king Rana Sanga.jpg|right|thumb|महाराणा सांगा]]
==== प्रारंभिक जीवन ====
राणा रायमल के तीनों पुत्रों ( [[पृथ्वीराज|कुंवर पृथ्वीराज]], जगमाल तथा राणा सांगा ) में मेवाड़ के सिंहासन के लिए संघर्ष प्रारंभ हो जाता है। एक भविष्यकर्त्ता के अनुसार सांगा को मेवाड़ का शासक बताया जाता है ऐसी स्थिति में कुंवर पृथ्वीराज व जगमाल अपने भाई राणा सांगा को मौत के घाट उतारना चाहते थे परंतु सांगा किसी प्रकार यहाँ से बचकर अजमेर पलायन कर जाते हैं तब सन् 1509 में अजमेर के कर्मचन्द पंवार की सहायता से राणा सांगा [[मेवाड़]] राज्य प्राप्त हुुुआ |
==== सैन्य वृत्ति ====
[[मुगल]] साम्राज्य के संस्थापक [[बाबर]] ने अपने संस्मरणों में कहा है कि राणा सांगा हिंदुस्तान में सबसे शक्तिशाली शासक थे, जब उन्होंने इस पर आक्रमण किया, और कहा कि "उन्होंने अपनी वीरता और तलवार से अपने वर्तमान उच्च गौरव को प्राप्त किया।" 80 हज़ार घोड़े, उच्चतम श्रेणी के 7 राजा, 9 राओएस और 104 सरदारों व रावल, 500 युद्ध हाथियों के साथ युद्ध लडे। अपने चरम पर, संघ युद्ध के मैदान में 100,000 राजपूतों का बल जुटा सकते थे। यह संख्या एक स्वतंत्र हिंदू राजा के लिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि इसमें चरवाहा या कोई भी जाति (जैसे [[जाट]], [[गुर्जर| गुर्जरों]] या [[अहीर| अहीरों]]) को शामिल नहीं किया गया था। मालवा, गुजरात और लोधी सल्तनत की संयुक्त सेनाओं को हराने के बाद मुसलमानों पर अपनी जीत के बाद, वह उत्तर भारत का सबसे शक्तिशाली राजा बन गया। कहा जाता है कि संघ ने 100 लड़ाइयां लड़ी थीं और विभिन्न संघर्षों में उसकी आंख, हाथ और पैर खो गए थे। <ref>Har Bilas, Sarda. maharana sanga : the hindupat, the last great leader of the rajput race. pp. 15–16.</ref><ref>A Comprehensive History of India: Comprehensive history of medieval India p107</ref>
==== शासन ====
[[चित्र:Rana sanga statue at city palace udaipur.jpg|right|thumb|300px|सिटी पैलेस उदयपुर में राणा सांगा की प्रतिमा।]]
महाराणा सांगा ने सभी राजपूत राज्यो को संगठित किया और सभी राजपूत राज्य को एक छत्र के नीचे लाएं। उन्होंने सभी राजपूत राज्यो संधि की और इस प्रकार महाराणा सांगा ने अपना साम्राज्य उत्तर में पंजाब सतलुज नदी से लेकर दक्षिण में मालवा को जीतकर नर्मदा नदी तक कर दिया। पश्चिम में में सिंधु नदी से लेकर पूर्व में बयाना भरतपुर ग्वालियर तक अपना राज्य विस्तार किया इस प्रकार मुस्लिम सुल्तानों की डेढ़ सौ वर्ष की सत्ता के पश्चात इतने बड़े क्षेत्रफल हिंदू साम्राज्य कायम हुआ इतने बड़े क्षेत्र वाला हिंदू सम्राज्य दक्षिण में विजयनगर सम्राज्य ही था। दिल्ली सुल्तान इब्राहिम लोदी को खातौली व बाड़ी के युद्ध में 2 बार परास्त किया और और गुजरात के सुल्तान को हराया व मेवाड़ की तरफ बढ़ने से रोक दिया। बाबर को खानवा के युद्ध में पूरी तरह से राणा ने परास्त किया और बाबर से बयाना का दुर्ग जीत लिया। इस प्रकार राणा सांगा ने भारतीय इतिहास पर एक अमिट छाप छोड़ दी। 16वी शताब्दी के सबसे शक्तिशाली शासक थे इनके शरीर पर 80 घाव थे। इनको हिंदुपत की उपाधि दी गयी थी। इतिहास में इनकी गिनती महानायक तथा वीर के रूप में की जाती हैं।<ref name=":0">Maharana Sanga; the Hindupat, the last great leader of the Rajput race: Sarda, Har Bilas, Diwan Bahadur, 1867-1955</ref>
==== मालवा पर विजय ====
1519 में गुजरात और मालवा की संयुक्त मुस्लिम सेनाओं के बीच राजस्थान में गागरोन के निकट राणा सांगा के नेतृत्व में गागरोण की लड़ाई लड़ी गई थी। राजपूत संघ की जीत ने उन्हें चंदेरी किले के साथ-साथ मालवा के अधिकांश हिस्सों पर अधिकार कर लिया। सिलवाडी और मेदिनी राय जैसे शक्तिशाली राजपूत नेताओं के समर्थन के कारण मालवा की विजय राणा साँगा के लिए आसान हो गई। मेदिनी राय ने चंदेरी को अपनी राजधानी बनाया और राणा साँगा का एक विश्वसनीय जागीरदार बन गया। राणा साँगा चित्तौड़ से एक बड़ी सेना के साथ राव मेड़मदेव के अधीन राठौरों द्वारा प्रबलित, और महमूद खिलजी द्वितीय से गुजरात असफ़िलियों के साथ आसफ़ ख़ान से मिला। जैसे ही लड़ाई शुरू हुई राजपूत घुड़सवार सेना ने गुजरात कैवेलरी के माध्यम से एक भयंकर आरोप लगाया, कुछ अवशेष जो बिखरने से बचे। राजपूत घुड़सवार गुजरात के सुदृढीकरण को पार करने के बाद मालवा सेना की ओर बढ़े। सुल्तान की सेनाएँ राजपूत घुड़सवार सेना का सामना करने में असमर्थ थीं और पूरी हार का सामना करना पड़ा। उनके अधिकांश अधिकारी मारे गए और सेना का लगभग सर्वनाश हो गया। आसफ खान के बेटे को मार दिया गया था, और खुद आसफ खान ने उड़ान में सुरक्षा की मांग की थी। सुल्तान महमूद को कैदी, घायल और खून बहाने के लिए लिया गया था। मालवा में जीत और हिंदू शासन को बहाल करने के बाद, सांगा ने राय को क्षेत्र के हिंदुओं से जजिया कर हटाने का आदेश दिया।<ref>Sharma, Gopi Nath (1954). Mewar & the Mughal Emperors (1526-1707 A.D.). S.L. Agarwala. pp. 18–19.</ref><ref>Chaurasia, Radhey Shyam (2002). History of Medieval India: From 1000 A.D. to 1707 A.D. Atlantic Publishers & Dist. pp. 155–160. ISBN 978-81-269-0123-4</ref><ref>Sarda 1970, p. 84-87.</ref>
==== गुजरात पर विजय ====
इडर राज्य के उत्तराधिकार के सवाल पर, गुजरात के सुल्तान, मुजफ्फर शाह, और राणा ने कट्टर दावेदारों का समर्थन किया। 1520 में, सांगा ने इडर सिंहासन पर रायमल की स्थापना की, जिसके साथ मुजफ्फर शाह ने अपने सहयोगी भारमल को स्थापित करने के लिए एक सेना भेजी। सांगा खुद इडर पहुंचे और सुल्तान की सेना को पीछे कर दिया गया। राणा ने गुजराती सेना का पीछा किया और अहमदाबाद के रूप में सुल्तान की सेना का पीछा करते हुए गुजरात के अहमदनगर और विसनगर के शहरों को लूट लिया<ref>Hooja, Rima (2006). A History of Rajasthan. Rupa Publication. pp. 450–451.</ref>
==== लोदी पे विजय ====
{{मुख्य|खतोली का युद्ध}}
{{मुख्य|धौलपुर के युद्ध}}
[[इब्राहिम लोदी]] ने, अपने क्षेत्र पर संघ द्वारा अतिक्रमण की खबरें सुनने के बाद, एक सेना तैयार की और 1517 में [[मेवाड़]] के खिलाफ मार्च किया। राणा अपनी सेना के साथ राणा लोदी की सीमाओं पर [[खतोली]] में लोदी से मिले और खतोली में आगामी लड़ाई में, लोदी सेना को गंभीर चोट लगी। लोदी सेना बुरी तरह परास्त होकर भाग गई । एक लोदी राजकुमार को पकड़ लिया गया और कैद कर लिया गया। युद्ध में राणा स्वयं घायल हो गए थे।
[[इब्राहिम लोदी]] ने हार का बदला लेने के लिए, अपने सेनापति मियां माखन के तहत एक सेना संगा के खिलाफ भेजी। राणा ने फिर से बाड़ी [[धौलपुर के युद्ध|धौलपुर]] के पास बाड़ी युद्ध 1518 ई को लोदी सेना को परास्त किया और लोदी को बयाना तक पीछा किया। इन विजयों के बाद, संगा ने [[आगरा]] की लोदी राजधानी के भीतर, [[फतेहपुर सीकरी]] तक का इलाका खाली कर दिया। [[मालवा]] के सभी हिस्सों को जो मालवा सुल्तानों से लोदियों द्वारा कब्जा कर लिया गया था, को चंदेरी सहित संघ द्वारा रद्द कर दिया गया था। उन्होंने चंदेरी को मेदिनी राय को दिया।<ref>Chandra, Satish (2004). Medieval India: From Sultanat to the Mughals-Delhi Sultanat (1206-1526) - Part One. Har-Anand Publications. ISBN 978-81-241-1064-5.</ref><ref> Duff's Chronology of India, p. 271</ref>
==== मुगलों से संघर्ष ====
21 अप्रैल 1526 को, तैमूरिद राजा बाबर ने पांचवीं बार भारत पर आक्रमण किया और पानीपत की पहली लड़ाई में इब्राहिम लोधी को हराया और उसे मार डाला। युद्ध के बाद, संघ ने पृथ्वीराज कछवाह के बाद पहली बार कई राजपूत वंशों को एकजुट किया और 100,000 राजपूतों की एक सेना बनाई और आगरा के लिए उन्नत किया।
राणा साँगा ने पारंपरिक तरीके से लड़ते हुए मुग़ल रैंकों पर आरोप लगाया। उनकी सेना को बड़ी संख्या में मुगल बाहुबलियों द्वारा गोली मार दी गई, कस्तूरी के शोर ने राजपूत सेना के घोड़ों और हाथियों के बीच भय पैदा कर दिया, जिससे वे अपने स्वयं के लोगों को रौंदने लगे। राणा साँगा को मुग़ल केंद्र पर आक्रमण करना असंभव लग रहा था, उसने अपने आदमियों को मुग़ल गुटों पर हमला करने का आदेश दिया। दोनों गुटों में तीन घंटे तक लड़ाई जारी रही, इस दौरान मुगलों ने राजपूत रानियों पर कस्तूरी और तीर से फायर किया, जबकि राजपूतों ने केवल करीबियों में जवाबी कार्रवाई की। "पैगन सैनिकों के बैंड के बाद बैंड ने अपने पुरुषों की मदद करने के लिए एक दूसरे का अनुसरण किया, इसलिए हमने अपनी बारी में टुकड़ी को टुकड़ी के बाद उस तरफ हमारे लड़ाकू विमानों को मजबूत करने के लिए भेजा।" बाबर ने अपने प्रसिद्ध तालकामा या पीनिस आंदोलन का उपयोग करने के प्रयास किए, हालांकि उसके लोग इसे पूरा करने में असमर्थ थे, दो बार उन्होंने राजपूतों को पीछे धकेल दिया, लेकिन राजपूत घुड़सवारों के अथक हमलों के कारण वे अपने पदों से पीछे हटने के लिए मजबूर हो गए। लगभग इसी समय, रायसेन की सिल्हदी ने राणा की सेना को छोड़ दिया और बाबर के पास चली गई। सिल्हदी के दलबदल ने राणा को अपनी योजनाओं को बदलने और नए आदेश जारी करने के लिए मजबूर किया। इस दौरान, राणा को एक गोली लगी और वह बेहोश हो गया, जिससे राजपूत सेना में बहुत भ्रम पैदा हो गया और थोड़े समय के लिए लड़ाई में खामोश हो गया। बाबर ने अपने संस्मरणों में इस घटना को "एक घंटे के लिए अर्जित किए गए काफिरों के बीच बने रहने" की बात कहकर लिखा है। अजा नामक एक सरदार ने अजजा को राणा के रूप में काम किया और राजपूत सेना का नेतृत्व किया, जबकि राणा अपने भरोसेमंद लोगों के एक समूह द्वारा छिपा हुआ था। झल्ला अजा एक गरीब जनरल साबित हुआ, क्योंकि उसने अपने कमजोर केंद्र की अनदेखी करते हुए मुगल flanks पर हमले जारी रखे। राजपूतों ने अपने हमलों को जारी रखा लेकिन मुगल फ्लैक्स को तोड़ने में विफल रहे और उनका केंद्र गढ़वाले मुगल केंद्र के खिलाफ कुछ भी करने में असमर्थ था। जदुनाथ सरकार ने निम्नलिखित शब्दों में संघर्ष की व्याख्या की है:
राजपूतों और उनके सहयोगियों को हराया गया था, शवों को बयाना, अलवर और मेवात तक पाया जा सकता है। पीछा करने की लंबी लड़ाई के बाद मुग़ल बहुत थक गए थे और बाबर ने स्वयं मेवाड़ पर आक्रमण करने का विचार छोड़ दिया था।
अपनी जीत के बाद, बाबर ने दुश्मन की खोपड़ी के एक टॉवर को खड़ा करने का आदेश दिया, तैमूर ने अपने विरोधियों के खिलाफ, उनकी धार्मिक मान्यताओं के बावजूद, एक अभ्यास तैयार किया। चंद्रा के अनुसार, खोपड़ी का टॉवर बनाने का उद्देश्य सिर्फ एक महान जीत दर्ज करना नहीं था, बल्कि विरोधियों को आतंकित करना भी था। इससे पहले, उसी रणनीति का उपयोग बाबर ने बाजौर के अफगानों के खिलाफ किया था। पानीपत की तुलना में लड़ाई अधिक ऐतिहासिक थी क्योंकि इसने राजपूत शक्तियों को धमकी और पुनर्जीवित करते हुए उत्तर भारत के बाबर को निर्विवाद मास्टर बना दिया था।<ref>Duff's Chronology of India, p. 271</ref><ref>Percival Spear, p. 25</ref>
==== मृत्यु ====
केवी कृष्णा राव के अनुसार, राणा सांगा बाबर को उखाड़ फेंकना चाहते थे, क्योंकि वह उन्हें भारत में एक विदेशी शासक मानते थे और दिल्ली और आगरा पर कब्जा करके अपने क्षेत्रों का विस्तार करने के लिए, राणा को कुछ अफगान सरदारों ने समर्थन दिया था, जिन्हें लगता था कि बाबर का शासन था। उनके प्रति भ्रामक। राणा ने 21 फरवरी 1527 को मुगल अग्रिम पहरे पर हमला किया और इसे खत्म कर दिया। बाबर द्वारा भेजे गए पुनर्मूल्यांकन समान भाग्य से मिले। हालाँकि, 30 जनवरी 1528 को, सांगा की मृत्यु कालपी में हुई, जो कि अपने ही सरदारों द्वारा जहर देकर मारा गया था, जिन्होंने बाबर के साथ लड़ाई को आत्मघाती बनाने के लिए नए सिरे से योजना बनाई थी। महाराणा सांगा की समाधि दौसा जिले की बसवा तहसील में है। यह सुझाव दिया जाता है कि बाबर की तोपें नहीं थीं, हो सकता है कि सांगा ने बाबर के खिलाफ ऐतिहासिक जीत हासिल की हो। इतिहासकार प्रदीप बरुआ ने ध्यान दिया कि बाबर के तोपों ने भारतीय युद्ध में पुरानी प्रवृत्तियों को समाप्त कर दिया था।<ref>Rao, K. V. Krishna (1991). Prepare Or Perish: A Study of National Security. Lancer Publishers. p. 453. ISBN 978-81-7212-001-6.</ref><ref>Sharma, G.N. Mewar & Mughal Emperors. Agra. pp. 27–29.</ref>
=== महाराणा प्रताप सिंह सिसोदिया (1572-1597) ===
{{मुख्य|महाराणा प्रताप}}
'महाराणा प्रताप सिंह सिसोदिया' ( ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया रविवार विक्रम संवत १५९७ तदनुसार ९ मई १५४०–१९ जनवरी १५९७) (राज. 1572-1597) [[उदयपुर]], [[मेवाड़|मेवाड]] में [[सिसोदिया]] [[राजपूत]] राजवंश के राजा थे। उनका नाम [[इतिहास]] में वीरता और दृढ प्रण के लिये अमर है। उन्होंने मुगल सम्राट [[अकबर]] की अधीनता स्वीकार नहीं की और कई सालों तक संघर्ष किया। महाराणा प्रताप सिंह ने मुगलों को कईं बार युद्ध में भी हराया।
[[File:RajaRaviVarma MaharanaPratap.jpg|right|thumb|महाराणा प्रताप सिंह]]
==== जीवन ====
[[चित्र:Statue of Maharana Pratap of Mewar, commemorating the Battle of Haldighati, City Palace, Udaipur.jpg|right|thumb|348x348px|चेतक पर सवार राणा प्रताप की प्रतिमा (महाराणा प्रताप स्मारक समिति, मोती मगरी , [[उदयपुर]])]]
'''[[उदयसिंह द्वितीय|राणा उदयसिंह]]''' केे दूसरी रानी '''धीरबाई''' जिसे राज्य के इतिहास में रानी भटियाणी के नाम से जाना जाता है, यह अपने पुत्र कुंवर जगमाल को मेवाड़ का उत्तराधिकारी बनाना चाहती थी | प्रताप केे उत्तराधिकारी होने पर इसकेे विरोध स्वरूप जगमाल अकबर केे खेमे में चला जाता है। महाराणा प्रताप का प्रथम राज्याभिषेक मेंं 28 फरवरी, 1572 में [[गोगुन्दा]] में हुआ था, लेकिन विधि विधानस्वरूप राणा प्रताप का द्वितीय राज्याभिषेक 1572 ई. में ही [[कुम्भलगढ़ दुर्ग|कुुंभलगढ़़ दुुर्ग]] में हुआ, दुसरे राज्याभिषेक [[मेंडलीफ के पूर्वानुमानित तत्व|में]] [[जोधपुर]] का राठौड़ शासक [[राव चन्द्रसेन|राव चन्द्रसेेन]] भी उपस्थित थे।
महाराणा प्रताप के शासनकाल में सबसे रोचक तथ्य यह है कि [[मुग़ल साम्राज्य|मुगल सम्राट]] अकबर बिना युद्ध के प्रताप को अपने अधीन लाना चाहता था इसलिए अकबर ने प्रताप को समझाने के लिए चार राजदूत नियुक्त किए जिसमें–
# [[जलाल खाँ]] (सितम्बर 1572 ई.)
# [[राजा मान सिंह|मानसिंह]] (1573 ई. में )
#[[भगवानदास]] ( सितम्बर, 1573 ई. में )
#[[टोडरमल|राजा टोडरमल]] ( दिसम्बर,1573 ई. )
प्रताप को समझाने के लिए पहुँचे, लेकिन राणा प्रताप ने चारों को निराश किया, इस तरह राणा प्रताप ने मुगलों की अधीनता स्वीकार करने से मना कर दिया जिसके परिणामस्वरूप [[हल्दीघाटी का युद्ध|हल्दी घाटी का ऐतिहासिक युद्ध]] हुआ।<ref>{{Cite web|url=https://aajtak.intoday.in/education/story/10-facts-u-know-about-ruler-of-mewar-maharana-pratap-1-813191.html|title=महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़ी 10 बातें|website=aajtak.intoday.in|language=hi|access-date=2020-05-27|archive-url=https://web.archive.org/web/20200304163307/https://aajtak.intoday.in/education/story/10-facts-u-know-about-ruler-of-mewar-maharana-pratap-1-813191.html|archive-date=4 मार्च 2020|url-status=live}}</ref>
==== हल्दीघाटी का युद्ध (1576 ईस्वी) ====
{{मुख्य|हल्दीघाटी का युद्ध}}
[[चित्र:Chokha, Battle of Haldighati, painted 1822, detail.jpg|अंगूठाकार|291x291px|left|[[हल्दीघाटी का युद्ध|हल्दीघाटी के युद्ध]] में लड़ते हुए महाराणा।]]
यह युद्ध १८ जून १५७६ ईस्वी में मेवाड़ तथा मुगलों के मध्य हुआ था। इस युद्ध में मेवाड़ की सेना का नेतृत्व महाराणा प्रताप ने किया था। भील सेना के सरदार राणा पूंजा भील थे। इस युद्ध में महाराणा प्रताप की तरफ से लड़ने वाले एकमात्र मुस्लिम सरदार थे'''''-''''' [[हकीम खाँ सूरी]]।<ref>{{Cite web|url=https://aajtak.intoday.in/education/story/know-about-haldighati-war-and-maharana-pratap-bravery-stories-tedu-1-1010212.html|title=4 घंटे की लड़ाई थी हल्दीघाटी, राणा ने की थी मुगलों की हालत पतली|website=aajtak.intoday.in|language=hi|access-date=2020-05-27|archive-url=https://web.archive.org/web/20180618102121/https://aajtak.intoday.in/education/story/know-about-haldighati-war-and-maharana-pratap-bravery-stories-tedu-1-1010212.html|archive-date=18 जून 2018|url-status=live}}</ref>
लड़ाई का स्थल राजस्थान के गोगुन्दा के पास हल्दीघाटी में एक संकरा पहाड़ी दर्रा था। महाराणा प्रताप ने लगभग 3,000 घुड़सवारों और 400 भील धनुर्धारियों के बल को मैदान में उतारा। मुगलों का नेतृत्व [[राजा मान सिंह|आमेर के राजा मान सिंह]] ने किया था, जिन्होंने लगभग 5,000-10,000 लोगों की सेना की कमान संभाली थी। तीन घंटे से अधिक समय तक चले भयंकर युद्ध के बाद, [[महाराणा प्रताप]] ने खुद को जख्मी पाया जबकि उनके कुछ लोगों ने उन्हें समय दिया, वे पहाड़ियों से भागने में सफल रहे और एक और दिन लड़ने के लिए जीवित रहे। मेवाड़ के हताहतों की संख्या लगभग 1,600 पुरुषों की थी।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=qoRDAAAAYAAJ|title=Military History of India|last=Sarkar|first=Sir Jadunath|date=1960|publisher=Orient Longmans|year=|isbn=978-0-86125-155-1|location=|pages=|language=en|author-link=यदुनाथ सरकार}}</ref> मुगल सेना ने 3500-7800 लोगों को खो दिया, जिसमें 350 अन्य घायल हो गए। इसका कोई नतीजा नही निकला जबकि वे(मुगल) गोगुन्दा और आस-पास के क्षेत्रों पर कब्जा करने में सक्षम थे, वे लंबे समय तक उन पर पकड़ बनाने में असमर्थ थे। जैसे ही साम्राज्य का ध्यान कहीं और स्थानांतरित हुआ, [[महाराणा प्रताप|प्रताप]] और उनकी सेना बाहर आ गई और अपने प्रभुत्व के पश्चिमी क्षेत्रों को हटा लिया।<ref>{{Cite web|url=http://persian.packhum.org/persian/main?url=pf%3Ffile%3D00701023&ct=67|title=Wayback Machine|last=|first=|date=2017-09-13|website=web.archive.org|archive-url=https://web.archive.org/web/20170913231208/http://persian.packhum.org/persian/main?url=pf%3Ffile%3D00701023%26ct%3D67|archive-date=13 सितंबर 2017|dead-url=|access-date=2020-12-12|url-status=bot: unknown}}</ref>
इस युद्ध में मुगल सेना का नेतृत्व मानसिंह तथा आसफ खाँ ने किया। इस युद्ध का आँखों देखा वर्णन अब्दुल कादिर बदायूनीं ने किया। इस युद्ध को आसफ खाँ ने अप्रत्यक्ष रूप से जेहाद की संज्ञा दी। इस युद्ध मे [[राणा पूंजा]] [[भील]] का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस युद्ध में बींदा के झालामान ने अपने प्राणों का बलिदान करके महाराणा प्रताप के जीवन की रक्षा की। वहीं ग्वालियर नरेश 'राजा रामशाह तोमर' भी अपने तीन पुत्रों 'कुँवर शालीवाहन', 'कुँवर भवानी सिंह 'कुँवर प्रताप सिंह' और पौत्र बलभद्र सिंह एवं सैकडों वीर तोमर राजपूत योद्धाओं समेत चिरनिद्रा में सो गया।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books/about/Maharana_Pratap.html?id=K0UnRk-rRa4C|title=Maharana Pratap|last=Rana|first=Bhawan Singh|date=2005|publisher=Diamond Pocket Books (P) Ltd.|year=|isbn=978-81-288-0825-8|location=|pages=67-71|language=en}}</ref>
इतिहासकार मानते हैं कि इस युद्ध में कोई विजय नहीं हुआ। पर देखा जाए तो इस युद्ध में महाराणा प्रताप सिंह विजय हुए। अकबर की विशाल सेना के सामने मुट्ठीभर राजपूत कितनी देर तक टिक पाते, पर ऐसा कुछ नहीं हुआ, ये युद्ध पूरे एक दिन चला ओेैर राजपूतों ने मुग़लों के छक्के छुड़ा दिया थे और सबसे बड़ी बात यह है कि युद्ध आमने सामने लड़ा गया था। महाराणा की सेना ने मुगलों की सेना को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया था और मुगल सेना भागने लग गयी थी
==== दिवेर-छापली का युुद्ध (1582 ईस्वी)====
{{मुख्य|दिवेर-छापली का युद्ध}}
[[चित्र:Rana pratap Birla mandir 6 dec 2009 (43).JPG|349x349px|thumb|left|[[लक्ष्मी नारायण मंदिर, दिल्ली|बिरला मंदिर, दिल्ली]] में महाराणा प्रताप का शैल चित्र]]
राजस्थान के इतिहास 1582 में दिवेर का युद्ध एक महत्वपूर्ण युद्ध माना जाता है, क्योंकि इस युद्ध में राणा प्रताप के खोये हुए राज्यों की पुनः प्राप्ति हुई, इसके पश्चात राणा प्रताप व मुगलो के बीच एक लम्बा संघर्ष युद्ध के रुप में घटित हुआ, जिसके कारण कर्नल जेम्स टाॅड ने इस युद्ध को "''मेवाड़ का मैराथन''" कहा है।
मेवाड़ के उत्तरी छोर का दिवेर का नाका अन्य नाकों से विलक्षण है। इसकी स्थिति मदारिया और कुंभलगढ़ की पर्वत श्रेणी के बीच है। प्राचीन काल में इस पहाड़ी क्षेत्र में गुर्जर प्रतिहारों का आधिपत्य था, जिन्हें इस क्षेत्र में बसने के कारण मेर कहा जाता था।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books/about/Maharana_Pratap.html?id=cHFuAAAAMAAJ|title=Maharana Pratap|last=Bhatt|first=Rajendra Shankar|date=2005|publisher=National Book Trust, India|year=|isbn=978-81-237-4339-4|location=|pages=177|language=en}}</ref> यहां की उत्पत्यकाताओं में इस जाति के निवास स्थलों के कई अवशेष हैं। मध्यकालीन युग में देवड़ा जाति के राजपूत यहां प्रभावशील हो गये, जिनकी बस्तियां आसपास के उपजाऊ भागों में बस गई और वे उदयपुर के निकट भीतरी गिर्वा तक प्रसारित हो गई। चीकली के पहाड़ी भागों में आज भी देवड़ा राजपूत बड़ी संख्या में बसे हुए हैं। देवड़ाओं के पश्चात यहां रावत शाखा के राजपूत बस गये।<ref>भवान सिंह राणा द्वारा ''"महाराणा प्रताप"''. p.81 {{ISBN|978-8128808258}}</ref>
इन विभिन्न समुदायों के दिवेर में बसने के कई कारण थे। प्रथम तो दिवेर का एक सामरिक महत्व रहा है, जो समुदाय शौर्य के लिए प्रसिद्ध रहे हैं, वे उत्तरोत्तर अपने पराक्रम के कारण यहां बसते रहे और एक-दूसरे पर प्रभाव स्थापित करते रहे। दूसरा महत्वपूर्ण कारण यह रहा कि इसकी स्थिति ऐसे मार्गों पर है, जहां से मारवाड़, मालवा, गुजरात, अजमेर के आदान-प्रदान की सुविधा रही है। ये मार्ग तंग घाटियों वाले उबड़-खाबड़ मार्ग के रूप में आज भी देखे जा सकते हैं। इनके साथ सदियों से आवागमन होने से घोड़ों की टापों के चिन्ह पत्थरों पर अद्यावधि विद्यमान है। मार्गों में पानी की भी कमी नहीं है, जिसके लिये जगह-जगह झरनों के बांध के अवशेष दृष्टिगोचर होते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से स्थान-स्थान पर चौकियों के ध्वंसाशेष भी दिखाई देते हैं। जब अकबर ने कुंभलगढ़, देवगढ़, मदारिया आदि स्थानों पर कब्जा कर लिया तो वहां की चौकियों से संबंध बनाए रखने के लिए दिवेर का चयन एक रक्षा स्थल के रूप में किया गया। यहां बड़ी संख्या में घुड़सवारों और हाथियों का दल रखा गया। इंतर चौकियों के लिए रसद भिजवाने का भी यह सुगम स्थान था।<ref>{{Cite web|url=https://www.goodreads.com/work/best_book/25072560-a-history-of-the-modern-world|title=A History Of The Modern World|website=www.goodreads.com|access-date=2020-11-24}}</ref>
ज्यों महाराणा प्रताप छप्पन के पहाड़ी स्थानों में बस्तियां बसाने और मेवाड़ के समतल भागों में खेतों को उजाड़ने में व्यस्त थे त्यों अकबर दिवेर के मार्ग से उत्तरी सैनिक चौकियों का पोषण भेजने की व्यवस्था में संलग्न रहा। प्रताप की नीतियों छप्पन की चौकियों को हटाने में तथा मध्यभागीय मेवाड़ की चौकियों को निर्बल बनाने में अवश्य सफल हो गये, परंतु दिवेर का केंद्र अब भी मुगलों के लिए सुदृढ़ था।<ref>{{Cite web|url=http://www.tourism.rajasthan.gov.in/content/dam/rajasthan-tourism/english/pdf/tender-pdf/61.pdf|title="राजस्थान का पर्यटन"|last=प्रभारी|first=निदेशक|date=2017|website=[[राजस्थान सरकार]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20211228001025/https://www.tourism.rajasthan.gov.in/content/dam/rajasthan-tourism/english/pdf/tender-pdf/61.pdf|archive-date=28 दिसंबर 2021|dead-url=|access-date=2020-11-24|url-status=bot: unknown}}</ref>
इस पृष्ठभूमि में दिवेर का महाराणा प्रताप का व मुगलों का संघर्ष जुड़ा हुआ था। इस युद्ध की तैयारी के लिए प्रताप ने अपनी शक्ति सुदृढ़ करने की नई योजना तैयार की। वैसे छप्पन का क्षेत्र मुगल से युक्त हो चला था और मध्य मेवाड़ में रसद के अभाव में मुगल चौकियां निष्प्राण हो गई थी अब केवल उत्तरी मेवाड़ में मुगल चौकियां व दिवेर के संबंध में कदम उठाने की आवश्यकता थी।
इस संबंध में महाराणा ने गुजरात और मालवा की ओर अपने अभियान भेजना आरंभ किया और साथ ही आसपास के मुगल अधिकार क्षेत्र में छापे मारना शुरू कर दिया। इसी क्रम में [[भामाशाह]] ने, जो मेवाड़ के प्रधान और सैनिक व्यवस्था के अग्रणी थे, मालवे पर चढ़ाई कर दी और वहां से 2.3 लाख रुपए और 20 हजार अशर्फियां दंड में लेकर एक बड़ी धनराशि इकट्ठी की। इस रकम को लाकर उन्होंने महाराणा को चूलिया ग्राम में समर्पित कर दी। इसी दौरान जब शाहबाज खां निराश होकर लौट गया था, तो महाराणा ने कुंभलगढ़ और मदारिया के मुगली थानों पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया। इन दोनों स्थानों पर महाराणा का अधिकार होना दिवेर पर कब्जा करने की योजना का संकेत था।<ref>{{Cite web|url=http://hindi.webdunia.com/indian-history-and-culture/history-of-maharana-pratap-and-battle-of-dewar-marathon-of-mewad-118062600044_1.html|title=दिवेर का महायुद्ध, हल्दीघाटी के बाद यहां महाराणा प्रताप ने हराया था मुगल सेना को, कहा जाता है 'मैराथन ऑफ मेवाड़'...|last=WD|website=hindi.webdunia.com|language=hi|access-date=2020-11-24}}</ref>
अतएव इस दिशा में सफलता प्राप्त करने के लिए नई सेना का संगठन किया गया। जगह-जगह रसद और हथियार इकट्ठे किए गए। सैनिकों को धन और सुविधाएं उपलब्ध कराई गई। सिरोही, ईडर, जालोर के सहयोगियों का उत्साह परिवर्धित कराया गया। ये सभी प्रबंध गुप्त रीति से होते रहे। मुगलों को यह भ्रम हो गया कि प्रताप मेवाड़ छोड़कर अन्यत्र जा रहे हैं। ऐसे भ्रम के वातावरण से बची हुई मुगल चौकियों के सैनिक बेखटके रहने लगे।<ref>{{Cite web|url=https://link.springer.com/openurl?genre=book&isbn=978-1-349-27193-1|title=Defending India {{!}} SpringerLink|website=link.springer.com|language=en-gb|access-date=2020-11-24}}</ref> जब सब प्रकार की तैयारी हो गई तो महाराणा प्रताप, [[अमर सिंह प्रथम|कु. अमरसिंह]], [[भामाशाह]], चुंडावत, शक्तावत, [[सोलंकी वंश|सोलंकी]], [[परिहार गोत्र|पडिहार,]] [[रावत]] शाखा के [[राजपूत]] और अन्य राजपूत सरदार दिवेर की ओर दल बल के साथ चल पड़े।{{Sfn|Jacques|2006|p=89-90}} दिवेर जाने के अन्य मार्गों व घाटियों में भीलों की टोलियां बिठा दी गई, जिससे मेवाड़ में अन्यत्र बची हुई सैनिक चौकियों का दिवेर से कोई संबंध स्थापित न हो सके।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/india/story/maharana-pratap-not-akbar-won-battle-of-haldighati-rajasthan-history-book-1026240-2017-07-25|title=Rajasthan rewrites history: Maharana Pratap, not Akbar, won Battle of Haldighati|last=JaipurJuly 25|first=Sharat Kumar|last2=July 25|first2=2017UPDATED:|website=India Today|language=en|access-date=2020-11-24|last3=Ist|first3=2017 21:58}}</ref>
[[चित्र:Maha Rana Pratap Singh.jpg|अंगूठाकार|392x392पिक्सेल|महाराणा प्रताप चित्र।]]
अचानक महाराणा की फौज दिवेर पहुंची तो मुगल दल में भगदड़ मच गई। मुगल सैनिक घाटी छोड़कर मैदानी भाग की तलाश में उत्तर के दर्रे से भागने लगे। महाराणा ने अपने दल के साथ भागती सेना का पीछा किया। घाटी का मार्ग इतना कंटीला तथा ऊबड़-खाबड़ था कि मैदानी युद्ध में अभ्यस्त मुगल सैनिक विथकित हो गए। अन्ततोगत्वा घाटी के दूसरे छोर पर जहां कुछ चौड़ाई थी और नदी का स्त्रोत भी था, वहां महाराणा ने उन्हें जा दबोचा।<ref>{{cite web|title=महाराणा प्रताप सिंह|url=http://www.badaunexpress.com/archives/148102|website=www.badaunaexpress.com|accessdate=9 May 2019}}{{Dead link|date=दिसंबर 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> दिवेर थाने के मुगल अधिकारी सुल्तानखां को कुं. अमरसिंह ने जा घेरा और उस पर भाले का ऐसा वार किया कि वह सुल्तानखां को चीरता हुआ घोड़े के शरीर को पार कर गया। घोड़े और सवार के प्राण पखेरू उड़ गए। महाराणा ने भी इसी तरह बहलोलखां और उसके घोड़े का काम तमाम कर दिया। एक राजपूत सरदार ने अपनी तलवार से हाथी का पिछला पांव काट दिया। इस युद्ध में विजयश्री महाराणा के हाथ लगी।<ref>{{Cite book|url=http://m.friendfeed-media.com/6e9ec7f58014456d2d5fd015cc8af9d2974509c0|title=History of battles and seiges|last=Jacques|first=Tony|publisher=|year=2006|isbn=978-0-313-33536-5|location=|pages=|archive-url=https://web.archive.org/web/20150626120848/http://m.friendfeed-media.com/6e9ec7f58014456d2d5fd015cc8af9d2974509c0|archive-date=2015-07-23}}</ref>
यह महाराणा की विजय इतनी कारगर सिद्ध हुई कि इससे मुगल थाने जो सक्रिय या निष्क्रिय अवस्था में मेवाड़ में थे जिनकी संख्या 36 बतलाई जाती है, यहां से उठ गए। शाही सेना जो यत्र-तत्र कैदियों की तरह पडी हुई थी, लड़ती, भिड़ती, भूखे मरते उलटे पांव मुगल इलाकों की तरफ भाग खड़ी हुई।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books/about/Maharana_Pratap.html?id=QjtuAAAAMAAJ|title=Maharana Pratap|last=Sharma|first=Sri Ram|date=1900|publisher=D. A.-V. College Managing Committee|year=|isbn=|location=|pages=117-156|language=en}}</ref> यहां तक कि 1585 ई. के आगे अकबर भी उत्तर - पश्चिम की समस्या के कारण मेवाड़ के प्रति उदासीन हो गया, जिससे महाराणा को अब चावंड में नवीन राजधानी बनाकर लोकहित में जुटने का अच्छा अवसर मिला। दिवेर की विजय महाराणा के जीवन का एक उज्ज्वल कीर्तिमान है। जहां हल्दीघाटी का युद्ध नैतिक विजय और परीक्षण का युद्ध था, वहां दिवेर-छापली का युद्ध एक निर्णायक युद्ध बना। इसी विजय के फलस्वरूप संपूर्ण मेवाड़ पर महाराणा का अधिकार स्थापित हो गया। एक अर्थ में हल्दीघाटी का युद्ध में राजपूतो ने रक्त का बदला दिवेर में चुकाया। दिवेर की विजय ने यह प्रमाणित कर दिया कि महाराणा का शौर्य, संकल्प और वंश गौरव अकाट्य और अमिट है, इस युद्ध ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि महाराणा के त्याग और बलिदान की भावना के नैतिक बल ने सत्तावादी नीति को परास्त किया। कर्नल टाॅड ने जहां हल्दीघाटी को 'थर्मोपाली' कहा है वहां के युद्ध को 'मेरोथान' की संज्ञा दी है।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books/about/Maharana_Pratap.html?id=EAl6rgEACAAJ|title=Maharana Pratap|last=Kumar|first=Ajay|date=2007|publisher=|year=|isbn=978-81-88594-18-4|location=|pages=102|language=en}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books/about/Maharana_Pratap.html?id=cHFuAAAAMAAJ|title=Maharana Pratap|last=Bhatt|first=Rajendra Shankar|date=2005|publisher=National Book Trust, India|year=|isbn=978-81-237-4339-4|location=|pages=256-267|language=en}}</ref> जिस प्रकार एथेन्स जैसी छोटी इकाई ने फारस की बलवती शक्ति को 'मेरोथन' में पराजित किया था, उसी प्रकार मेवाड़ जैसे छोटे राज्य ने मुगल राज्य के वृहत सैन्यबल को दिवेर में परास्त किया। महाराणा की दिवेर विजय की दास्तान सर्वदा हमारे देश की प्रेरणा स्रोत बनी रहेगी।<ref>{{Cite web|url=https://www.linkedin.com/pulse/legacy-indias-maharana-pratap-lives-today-stephen-manallack#:~:text=When%20Maharana%20Pratap%20(also%20known,custodians%20of%20this%20great%20lineage.|title=The legacy of India's Maharana Pratap lives on today|website=www.linkedin.com|access-date=2020-11-24}}</ref>
==== सफलता और अवसान ====
पू. 1579 से 1585 तक पूर्वी उत्तर प्रदेश, बंगाल, बिहार और गुजरात के मुग़ल अधिकृत प्रदेशों में विद्रोह होने लगे थे और महाराणा भी एक के बाद एक गढ़ जीतते जा रहे थे अतः परिणामस्वरूप अकबर उस विद्रोह को दबाने में उल्झा रहा और मेवाड़ पर से मुगलो का दबाव कम हो गया। इस बात का लाभ उठाकर महाराणा ने 1585ई. में मेवाड़ मुक्ति प्रयत्नों को और भी तेज कर दिया। महाराणा जी की सेना ने मुगल चौकियों पर आक्रमण शुरू कर दिए और तुरंत ही उदयपूर समेत 36 महत्वपूर्ण स्थान पर फिर से महाराणा का अधिकार स्थापित हो गया।<ref>{{Cite web|url=https://zeenews.india.com/culture/maharana-pratap-jayanti-lesser-known-facts-about-the-fearless-warrior-2282205.html|title=Maharana Pratap Jayanti: Lesser known facts about the fearless warrior|last=|first=|date=2020-05-09|website=Zee News|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20200601000000/https://zeenews.india.com/culture/maharana-pratap-jayanti-lesser-known-facts-about-the-fearless-warrior-2282205.html|archive-date=2020-06-01|dead-url=|access-date=2020-12-07}}</ref>
महाराणा प्रताप ने जिस समय सिंहासन ग्रहण किया , उस समय जितने मेवाड़ की भूमि पर उनका अधिकार था, पूर्ण रूप से उतने ही भूमि भाग पर अब उनकी सत्ता फिर से स्थापित हो गई थी। बारह वर्ष के संघर्ष के बाद भी अकबर उसमें कोई परिवर्तन न कर सका। और इस तरह महाराणा प्रताप समय की लंबी अवधि के संघर्ष के बाद मेवाड़ को मुक्त करने में सफल रहे और ये समय मेवाड़ के लिए एक स्वर्ण युग साबित हुआ। मेवाड़ पर लगा हुआ अकबर ग्रहण का अंत 1585 ई. में हुआ। उसके बाद महाराणा प्रताप उनके राज्य की सुख-सुविधा में जुट गए, परंतु दुर्भाग्य से उसके ग्यारह वर्ष के बाद ही 19 जनवरी 1597 में अपनी नई राजधानी [[चावंड]] में उनकी मृत्यु हो गई।<ref name=":0">{{Cite web|url=http://hindi.webdunia.com/indian-history-and-culture/history-of-maharana-pratap-in-hindi-115052100030_1.html|title=मेवाड़ का वीर योद्धा महाराणा प्रताप {{!}} history of maharana pratap in hindi|last=Webdunia|website=hindi.webdunia.com|language=hi|archive-url=https://web.archive.org/web/20190728185404/http://hindi.webdunia.com/indian-history-and-culture/history-of-maharana-pratap-in-hindi-115052100030_1.html|archive-date=28 जुलाई 2019|access-date=2020-05-30|url-status=dead}}</ref>
महाराणा प्रताप सिंह के डर से अकबर अपनी राजधानी लाहौर लेकर चला गया और महाराणा के स्वर्ग सिधारने के बाद आगरा ले आया।<ref>{{Cite news|url=https://www.bbc.com/hindi/india-46585144|title=हिंदू-मुसलमान की लड़ाई नहीं थी अकबर और महाराणा प्रताप के बीच|last=फ़ज़ल|first=रेहान|date=2018-12-17|work=BBC News हिंदी|access-date=2020-05-30|language=hi|archive-url=https://web.archive.org/web/20200517194326/https://www.bbc.com/hindi/india-46585144|archive-date=17 मई 2020|url-status=live}}</ref>
'''एक सच्चे राजपूत, शूरवीर, देशभक्त, योद्धा, मातृभूमि के रखवाले के रूप में महाराणा प्रताप दुनिया में सदैव के लिए अमर हो गए। ''
==== कुछ महत्वपूर्ण तथ्य ====
इतिहासकार [[विजय नाहर]] की पुस्तक हिन्दुवा सूर्य महाराणा प्रताप के अनुसार कुछ तथ्य उजागर हुए।<ref>{{Cite book|author=विजय नाहर|title=हिन्दुवा सूर्य महाराणा प्रताप|publisher=पिंकसिटी पब्लिशर्स| isbn=978-93-80522-45-6|year=2011|page= 270}}</ref>
1 .महाराणा उदय सिंह ने युद्ध की नयी पद्धति -छापा मार युद्ध प्रणाली इजाद की। वे स्वयं तो इसका प्रयोग नहीं कर सके परन्तु महाराणा प्रताप ,महाराणा राज सिंह एवं छत्रपति शिवाजी महाराज ने इसका सफल प्रयोग करते हुए मुगलों पर सफलता प्राप्त की ।<ref>{{cite web|title=महाराणा प्रताप के विषय में भारतीय इतिहास में लिखी भ्रांतियों को दूर करती विजय नाहर की पुस्तक "हिंदुवा सूर्य महाराणा प्रताप" की समीक्षा|url=https://udaipurkiran.in/hindi/1208578/|website=www.udaipurkiran.in|accessdate=9 May 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190509155336/https://udaipurkiran.in/hindi/1208578/|archive-date=9 मई 2019|url-status=dead}}</ref>
2. महाराणा प्रताप मुग़ल सम्राट अकबर से नहीं हारे। उसे एवं उसके सेनापतियो को धुल चटाई । हल्दीघाटी के युद्ध में प्रताप जीते|महाराणा प्रताप के विरुद्ध हल्दीघाटी में पराजित होने के बाद स्वयं अकबर ने जून से दिसंबर 1576 तक तीन बार विशाल सेना के साथ महाराणा पर आक्रमण किए, परंतु महाराणा को खोज नहीं पाए, बल्कि महाराणा के जाल में फंसकर पानी भोजन के अभाव में सेना का विनाश करवा बैठे। थक हारकर अकबर बांसवाड़ा होकर मालवा चला गया। पूरे सात माह मेवाड़ में रहने के बाद भी हाथ मलता अरब चला गया। शाहबाज खान के नेतृत्व में महाराणा के विरुद्ध तीन बार सेना भेजी गई परंतु असफल रहा। उसके बाद अब्दुल रहीम खान-खाना के नेतृत्व में महाराणा के विरुद्ध सेना भिजवाई गई और पीट-पीटाकर लौट गया। 9 वर्ष तक निरंतर अकबर पूरी शक्ति से महाराणा के विरुद्ध आक्रमण करता रहा। नुकसान उठाता रहा अंत में थक हार कर उसने मेवाड़ की और देखना ही छोड़ दिया।<ref>{{cite web|title="हिंदुवा सूर्य महाराणा प्रताप" की समीक्षा|url=https://m.dailyhunt.in/news/india/hindi/udaipur+kiran+hindi-epaper-udaihin/maharana+pratap+ke+vishay+me+bharatiy+itihas+me+likhi+bhrantiyo+ko+dur+karati+vijay+nahar+ki+pustak+hinduva+sury+maharana+pratap+ki+samiksha-newsid-115840604?listname=topicsList&index=0&topicIndex=0&mode=pwa|website=www.m.dailyhunt.in|accessdate=9 May 2019}}</ref>
3. ऐसा कुअवसर प्रताप के जीवन में कभी नहीं आया कि उन्हें घांस की रोटी खानी पड़ी अकबर को संधि के लिए पत्र लिखना पड़ा हो। इन्हीं दिनों महाराणा प्रताप ने सुंगा पहाड़ पर एक बावड़ी का निर्माण करवाया और सुंदर बगीचा लगवाया| महाराणा की सेना में एक राजा, तीन राव, सात रावत, 15000 अश्वरोही, 100 हाथी, 20000 पैदल और 100 वाजित्र थे। इतनी बड़ी सेना को खाद्य सहित सभी व्यवस्थाएं महाराणा प्रताप करते थे। फिर ऐसी घटना कैसे हो सकती है कि महाराणा के परिवार को घांस की रोटी खानी पड़ी। अपने उतरार्ध के बारह वर्ष सम्पूर्ण मेवाड़ पर शुशाशन स्थापित करते हुए उन्नत जीवन दिया ।<ref>{{cite web|title=महाराणा प्रताप के विषय में भारतीय इतिहास में लिखी भ्रांतियों को दूर करती विजय नाहर की पुस्तक "हिंदुवा सूर्य महाराणा प्रताप" की समीक्षा|url=https://hindi.dailykiran.com/1103917/|website=www.hindi.dailykiran.com|access-date=9 May 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190510052152/https://hindi.dailykiran.com/1103917/|archive-date=10 मई 2019|url-status=dead}}</ref>
==इन्हें भी देखें==
* [[मेवाड़]]
* [[हल्दीघाटी का युद्ध]]
* [[दिवेर-छापली का युद्ध]]
* [[महाराणा प्रताप]]
* [[गोहिल राजवंश]]
* [[उदयपुर रियासत]]
* [[सिसोदिया (राजपूत)]]
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:भारत के राजवंश]]
[[श्रेणी:राजस्थान का इतिहास]]
n8o6am7k2jylosov74r0pwwjx3vhcki
6591507
6591477
2026-07-24T08:37:12Z
AMAN KUMAR
911487
[[Special:Contributions/~2026-41228-06|~2026-41228-06]] ([[User talk:~2026-41228-06|Talk]]) के संपादनों को हटाकर [[User:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया
6582484
wikitext
text/x-wiki
{{में विलय|मेवाड़ के गुहिल|date=जनवरी 2023}}
गुहिल/गहलौत राजवंश एक प्रमुख [[राजवंश]] था जो [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के [[राजस्थान]] क्षेत्र में [[मेवाड़|मेवाड़]] शहर में शासन करता था | इसका प्रारंभिक संंस्थापक [[राजा गुहादित्य]] थेे, जिन्होंने छटी शताब्दी में गुहिल वंंश की नींव रखी। गुुुहादित्य के पश्चात् '''734 ई'. में [[बप्पा रावल]] को गुहिल वंश का वास्तविक संंस्थापक माना जाता है।
शुरुआत में गुहिल राजवंश [[गुर्जर-प्रतिहार राजवंश|प्रतिहार]] साम्राज्य के सामंतों का रूप निभाया करते थे लेकिन रावल अल्लट के द्वारा [[गुर्जर|प्रतिहार]] सम्राट देवपाल के वध के बाद वह स्वतन्त्र बन गए | दसवीं शताब्दी में गुहिल रावल [[राष्ट्रकूट राजवंश|राष्ट्रकूट राजवंशज]] के अधीन हुआ करते थे तथा ग्यारहवीं शताब्दी में [[परमार वंश|परमार]] और [[चौहान वंश|चौहान]] साम्राज्यों के अधीन शासन करते थे | बारहवीं शताब्दी में गुहिल राजवंश दो हिस्सों में विभाजित होगया जिनमें से मुख्या राजवंश मेवाड़ पर वर्ष 1303 तक शासन करता रहा जब मुसलमान आक्रमणकारी [[अलाउद्दीन खिलजी]] ने [[चित्तौड़गढ़|चित्तौड़]] पर घेरा डालकर गुहिलों को पराजित करा था |[[File:Map rajasthan mewar.png|thumb|मेवाड़]]
== प्राचीन इतिहास ==
{{मुख्य|शिवि}}
मेवाड़ का प्राचीन नाम [[शिवि]] था जिसकी राजधानी [[मध्यमिका]] (जिसे वर्तमान में नगरी कहते हैं) थी यहां पर [[मेहर]] जनजाति का अधिकार था और वह हमेशा [[मलेच्छों]] से संघर्ष करते रहे इसलिए इस क्षेत्र को मैद अर्थात मलेच्छों को मारने वाला की संज्ञा दी गई है ।
'''[[मैदपाट]] को धीरे धीरे मेवाड़ कहा जाने लगा । मेवाड़ की राजधानी [[उदयपुर]] बनी ।'''
मेवाड़ के राजा स्वयं को [[राम]] के वंशज बताते हैं, इसी कारण भक्तों एवं चरणों ने मेवाड़ के शासकों को [[रघुवंशी]] तथा '''हिंदुआ सूरज''' कहने लगे गुहिल राज्य के चिन्ह में जो '''दृढ़ राखे धर्म को ताहि राखे करतार''' अंकित है ।
मेवाड़ का गुहिल वंश राजस्थान का ही नहीं अपितु संसार के प्राचीनतम राजवंशों में से एक है जीसने 1500 वर्षों से अधिक के लंबे समय तक एक प्रदेश पर शासन किया ।
== मेवाड़ की शासक वंशावली (ल. 566 – 1949 ईस्वी) ==
{{इन्हें भी देखें|मेवाड़ की शासक वंशावली}}
छठी शताब्दी में, तीन अलग-अलग गुहिल राजवंशों ने वर्तमान [[राजस्थान]] में शासन करने के लिए जाना जाता है:
# [[नागदा]]-[[अहार]] के गुहिल
# किष्किंधा के गुहिल (वर्तमान में [[कल्याणपुर, राजस्थान|कल्याणपुर]])
# धवागर्ता के गुहिल (वर्तमान में धोर)
=== गुहिल/गहलौत राजवंश (ल. 566 – 1303 ईस्वी) ===
{{मुख्य|गुहिल राजवंश}}
*[[गुहादित्य]] / गोहिल (565–580 )
*भोज (I) (580–602)
*महेन्द्र (I) (602–616)
*नागादित्य (616–646)
*शिलादित्य (646–661)
*अपराजित (661–697)
*महेन्द्र (II) (697–728)
*[[बप्पा रावल|कालभोज बप्पा रावल]] (728/734–753)बापा रावल ने मुस्लिम देशों को भी जीता ।
<ref>{{cite book |last1=Ganguli |first1=Kalyan Kumar |title=Cultural History of Rajasthan |date=1983 |publisher=Sundeep |url=https://books.google.co.in/books?id=PXstAAAAMAAJ&q=founder+of+guhila+dynasty&dq=founder+of+guhila+dynasty&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwj63d2M453cAhWIsY8KHYxJCeoQ6AEIQjAG |accessdate=14 जुलाई 2018 |language=en |archive-url=https://web.archive.org/web/20180714110557/https://books.google.co.in/books?id=PXstAAAAMAAJ&q=founder+of+guhila+dynasty&dq=founder+of+guhila+dynasty&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwj63d2M453cAhWIsY8KHYxJCeoQ6AEIQjAG |archive-date=14 जुलाई 2018 |url-status=live }}</ref>
*खुमाण (I) (753–773)
*मत्तट (773–793)
*भृतभट्ट सिंह (793–813)
*अथाहसिंह (813–828)
*खुमाण (II) (828–853)
*महाकाय (853–878)
*खुमाण (III) (878–926)
*भृतभट्ट (II) (926-951 )
*अल्लट (951-971)
*नरवाहन (971-979)
*शालिवाहन (973–977 )
*शक्तिकुमार (977–993 )
*अमरप्रसाद (993–998)
*शुचिवर्मा (998–1010)
*नरवर्मन (1010–1035)
*कीर्तिवर्मा (1035–1050)
*योगराज (1050–1075)
*वैरट (1075–1090)
*हंसपाल (1090–1100)
*वैरिसिंह (1100–1122)
*विजयसिंह (1122–1130)
*वैरिसिंह (II) (1130–1136)
*अरिसिंह (1136–1145)
*चोङसिंह (1145–1151)
*विक्रम सिंह (1151–1158)
*[[रणसिंह]] (1158–1165)
=== गुहिल/गहलौत राजवंश का विभाजन ===
[[रणसिंह]] (1158 ई.) इन्हीं के शासनकाल में गुहिल/गहलौत वंश दो शाखाओं में बट गया।
* '''प्रथम (रावल शाखा)'''— रणसिंह के पुत्र क्षेमसिंह रावल शाखा का निर्माण कर मेवाड़ पर शासन किया।
*'''द्वितीय (राणा शाखा)'''— रणसिंह के दूसरे पुत्र राहप ने सिसोदा ठिकानों की स्थापना कर राणा शाखा की शुरुआत की । ये राणा सिसोदा ठिकाने में रहने के कारण आगे चलकर सिसोदिया कहलाए।
==== रावल शाखा (ल. 1165 – 1303 ईस्वी) ====
*[[क्षेमसिंह]] (1165–1183)
*[[सामंत सिंह]] (1183–1188)
*[[कुशल सिंह]] (1188–1195)
*[[महानसिंह]] (1195–1202)
*[[पद्मसिहा]] (1202–1213)
*[[जैत्र सिंह]] (1213–1253)
*[[तेज सिंह]] (1253–1273 )
*[[समर सिंह]] (1273–1301 )
*[[रतन सिंह]] (1301–1303 )
=== राणा शाखा (ल. 1165 – 1326 ईस्वी) ===
*[[रहपा]] (1162)
*नरपति (1185)
*दिनकर (1200)
*जशकरन (1218)
*नागपाल (1238)
*कर्णपाल (1266)
*भुवनसिंह (1280)
*भीमसिंह (1297)
*जयसिंह (1312)
*लखनसिंह (1318)
*[[अरिसिंह]] (1322)
*[[हम्मीर सिंह]] (1326)
=== सिसोदिया राजवंश (ल. 1326 – 1949 ईस्वी) ===
{{मुख्य|सिसोदिया राजवंश}}
* '''''विषम घाटी पंचानन''''' '''[[राणा हम्मीर सिंह]]''' (1326–1364)
''विषम घाटी पंचानन'' (सकंट काल मे सिंह के समान) के नाम से जाना जाता है, यह संज्ञा [[राणा कुम्भा]] ने [[कीर्ति स्तम्भ]] प्रशस्ति में दी।
<ref name="sen2">{{Cite book |last=Sen |first=Sailendra |title=A Textbook of Medieval Indian History |publisher=Primus Books |year=2013 |isbn=978-9-38060-734-4 |pages=116–117}}</ref>
* [[क्षेत्र सिंह]] (1364–1382)
* [[राणा लाखा|लाखा सिंह]] (1382–1421)
* [[राणा मोकल]] (1421–1433)
* '''''कुंभकर्ण''''' '''[[राणा कुंभा]]''' (1433–1468)
महाराणा कुंभकर्ण सिंह ने मुसलमानों को अपने-अपने स्थानों पर हराकर राजपूती राजनीति को एक नया रूप दिया। इतिहास में ये ''महाराणा कुंभा'' के नाम से अधिक प्रसिद्ध हैं। महाराणा कुंभा को [[चित्तौड़गढ़ दुर्ग|चित्तौड़ दुर्ग]] का आधुुुनिक निर्माता भी कहते हैं क्योंकि इन्होंने चित्तौड़ दुर्ग के अधिकांश वर्तमान भाग का निर्माण कराया ।<ref name="sen2"/>
* [[राणा उदय सिंह|उदय सिंह प्रथम(ऊदा)]] (1468–1473)
* [[राणा रायमल]] (1473–1509)
* '''''हिंदुआ सूरज''''' '''[[राणा सांगा]]''' (1509–1528)
महाराणा संग्राम सिंह
[[मुगल]] साम्राज्य के संस्थापक [[बाबर]] ने अपने संस्मरणों में कहा है कि राणा सांगा हिंदुस्तान में सबसे शक्तिशाली हिन्दू राजा थे, जब उन्होंने इस पर आक्रमण किया, और कहा कि ''उन्होंने अपनी वीरता और तलवार से अपने वर्तमान उच्च गौरव को प्राप्त किया।''
<ref>Har Bilas, Sarda. maharana sanga : the hindupat, the last great leader of the rajput race. pp. 15–16.</ref><ref>A Comprehensive History of India: Comprehensive history of medieval India p107</ref>
* [[रतन सिंह द्वितीय]] (1528–1531)
* [[विक्रमादित्य सिंह]] (1531–1536)
* [[बनवीर सिंह]] (1536–1537)
* [[उदय सिंह]] (1537–1572)
* '''''मेवाड़ी राणा''''' '''[[महाराणा प्रताप]]''' (1572–1597)
उन्होंने मुगल सम्राट [[अकबर]] की अधीनता स्वीकार नहीं की और कई सालों तक संघर्ष किया और अंत महाराणा प्रताप सिंह ने मुगलों को युद्ध में हराया, जिसमें [[दिवेर का युद्ध]] (1582) भी हैं।
<ref>{{Cite web|url=https://infohindi.com/maharana-pratap-ki-jivani-biography-mah/|title=महाराणा प्रताप की जीवनी Biography of Maharana Pratap in Hindi|date=2016-06-06|website=InfoHindi.com|language=en-US|access-date=2020-11-24|archive-date=15 मई 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210515025136/https://infohindi.com/maharana-pratap-ki-jivani-biography-mah/|url-status=dead}}</ref>
<ref>{{Cite book|author=विजय नाहर|title=हिन्दुवा सूर्य महाराणा प्रताप | publisher=पिंकसिटी पब्लिशर्स| isbn=978-93-80522-45-6|year=2011|page= 275}}</ref>
* '''''चक्रवीर''''' '''[[अमर सिंह प्रथम]]''' (1597–1620)
दिवेर के युद्ध में मेवाड़ के राजा अमर सिंह प्रथम तथा मुगल सेना के बीच सन 1606 ई. में हुआ था। इस युद्ध में अमर सिंह ने मुगल सेनापति सुल्तान खान को स्वयं मार दिया था। कारण उन्हें ''चक्रवीर'' के नाम से जाना गया। मेवाड़ न जीत पाने के कारण अकबर ने अपनी पुत्री का विवाह सन्धि स्वरुप अमरसिंह से करवाया था।<ref>{{Cite book|title=History of Jahangir|last=Prasad|first=Beni|pages=227}}</ref><ref>{{Cite book|title=The Mughal Throne: The Saga of India's Great Emperors|last=Eraly|first=Abraham|pages=259}}</ref>
* [[कर्ण सिंह]] (1620–1628)
* [[जगत सिंह प्रथम]] (1628–1652)
* [[राज सिंह प्रथम]] (1652–1680)
* [[जय सिंह]] (1680–1698)
* [[अमर सिंह द्वितीय]] (1698–1710)
* [[संग्राम सिंह द्वितीय]] (1710–1734)
* [[जगत सिंह द्वितीय]] (1734–1751)
* [[प्रताप सिंह द्वितीय]] (1751–1753)
* [[राज सिंह द्वितीय]] (1753–1761)
* [[राणा अरि सिंह]] (1761–1773)
* [[राणा हम्मीर २|हम्मीर सिंह द्वितीय]] (1773–1778)
* [[भीम सिंह]] (1778–1828)
* [[जवान सिंह]] (1828–1838)
* [[सरदार सिंह]] (1838–1842)
* [[स्वरूप सिंह]] (1842–1861)
* [[महाराणा शम्भू|शम्भू सिंह]] (1861–1874)
* [[महाराणा सुज्जन सिंह|सुज्जन सिंह]] (1874–1884)
* [[फतेह सिंह]] (1884–1930)
* [[भूपाल सिंह]] (1930–1949), अंतिम शासक
== महाराजा गुहादित्य ==
{{मुख्य|राजा गुहादित्य}}
[[सूर्यवंश|सूर्यवंशी]] महाराजा [[कनक सेन]] की '8वी पीढ़ी' में '''[[शिलादित्य]]''' नामक एक राजा हुवे । जो [[वल्लभीपुर]] में राज करते थे वहां पर मलेच्छों ने आक्रमण कर वल्लभीपुर को तहस-नहस कर दिया व शिलादित्य वीरगति को प्राप्त हुए शिलादित्य की सभी रानियां उनके साथ [[सती]] हो गई। शिलादित्य की एक रानी [[पुष्पावती]] गर्भवती थी तथा पुत्र की मन्नत मांगने के लिए वह अपने [[परमार वंश]] के पिता के राज्य [[चंद्रावती]] आबू में [[जगदंबा देवी]] के दर्शन करने गई थी, पुष्पावती अपने पिता के घर से जब वापस वल्लभीपुर जा रही थी तो रास्ते में वल्लभीपुर के विनाश का समाचार मिला पुष्पावती यह सुनकर वहां पर सती होना चाहती थी, परंतु गर्भावस्था के कारण यह संभव नहीं था पुष्पावती ने अपनी सहेलियों के साथ 'मल्लिया' नामक गुफा में शरण ली जहां उसने अपने पुत्र का को जन्म दिया गुफा के पास वीरनगर नामक गांव था जिसमें कमलावती नाम की ब्राह्मणी रहती थी । रानी पुष्पावती ने उसे अपने पास बुलाकर अपने पुत्र के लालन-पालन का दायित्व सौंपकर सती हो गई । कमलावती ने रानी के पुत्र को अपने पुत्र की भांति रखा । '''वह बालक गुफा में पैदा हुआ था और उस प्रदेश के लोग गुफा को 'गोह' कहते थे अतः कमलावती ने उस बच्चे का नाम गोह रखा जो आगे चलकर गुहिल के नाम से विख्यात हुआ ।''' कमलावती ने बालक गुहिल को [[इडर]] के [[भील]] राजा [[मांडलिक]] को सौंप दिया । बालक गूहिल राजा मांडलिक के राजमहल में रहता और भील बालकों के साथ घुड़सवारी करता, भील कुमार नल और गुहिल का साथ रहा , कर्नल जेम्स टॉड के अनुसार गुहील ने इडर के राजा मांडलिक भील की हत्या कर दी और 566 ई में '''गुहील वंश''' की नींव रखी । हत्या कर देने वाली घटना असत्य भी हों सकती हैं।
''गोहिलादित्य का नाम उसके वंशधरों का गोत्र हो गया । गुहिल के वंशज गोहिल अथवा गुहिलोत के नाम से विख्यात हुए।''
== कालभोज/बप्पा रावल (734–753) ==
{{मुख्य|बप्पा रावल}}
इसी गुहिलादित्य ने 566 ई के आस-पास मेवाड़ में इस वंश की नींव रखकर '''[[नागदा]]''' को गुहिल वंश की राजधानी बनाई । गोहिल की 'आठवीं पीढ़ी' में '''[[महेंद्र-2]]''' नामक एक राजा हुआ जिसके व्यवहार से वहां के भील उससे नाराज हो गए एक दिन जब नागादित्य जंगल में शिकार खेलने गया तो भीलों ने उसे घेरकर वही मार डाला और इडर राज्य पर पुनःअपना अधिकार जमा लिया नागादित्य की हत्या भीलों ने कर दी तो क्षत्रीय को उसके 3 वर्षीय पुत्र '''बप्पा''' के जीवन को बचाने की चिंता सताने लगी। इसी समय वीरनगर की कमलावती के वंशज जो कि गोहिल राजवंश के कुल पुरोहित थे उन्होंने बप्पा को लेकर पांडेय नामक दुर्ग में गए इस जगह को बप्पा के लिए सुरक्षित ना मानकर बप्पा को लेकर लेकर पराशर नामक स्थान पर पहुंचे इसी स्थान के पास त्रिकूट पर्वत है इसकी तलहटी में नागेंद्र नामक नगर वर्तमान नागदा बसा हुआ था । वहां पर [[शिव]] की उपासना करने वाले बहुत से ब्राह्मण निवास करते थे हारित ऋषि ने बप्पा रावल का लालन पालन करके करने का भार उठाया।
''बप्पारावल हारित ऋषि की गाय को चराते थे उन गायों में से एक गाय जो कि सुबह बहुत ज्यादा दूध देती थी परंतु संध्या के समय आश्रम में वापस आती तो उसके थनों में दूध नहीं मिलता था ऋषियों को संदेह हुआ कि बप्पा एकांत में उस गाय का दूध पी जाता है बप्पा को जब इस बात का पता चला तो वह वास्तविकता जानने के लिए दूसरे दिन जब गायों को लेकर जंगल में गया तो उसी गाय पर अपनी नजर रखी ।
बप्पा ने देखा कि वह गाय एक निर्जन गुफा में घुस गई बप्पा भी उसके पीछे गया और उसने वहां देखा की बेल पत्तों के ढेर पर वह गाय अपने दूध की धार छोड़ रही थी बप्पा ने उसके पास जाकर उन पत्तों को हटाया तो उसके नीचे एक [[शिवलिंग]] था । जिसके ऊपर दूध की धार गिर रही थी बप्पा ने उसी शिवलिंग के पास एक समाधि लगाए हुए योगी को देखा उस योगी का ध्यान टूट गया परंतु उसने बप्पा से कुछ नहीं कहा बप्पा उस योगी [[हरित ऋषि]] की सेवा करने लगा हरित ऋषि ने उसकी सेवा भक्ति से प्रसन्न होकर शिव मंत्र की दीक्षा देकर उसे एकलिंग के दीवान की उपाधि दी । हरित ऋषि के शिवलोक जाने का समय आया तो उसने बप्पा को निश्चित समय पर आने को कहा बप्पा निश्चित समय पर आने में लेट हो गया तब तक हरित ऋषि रथ पर सवार होकर शिवलोक की तरफ चल पड़े उन्होंने बप्पा को आते देखकर रथ की चाल धीमी करवाकर बप्पा को अपना मुंह खोलने को कहा हारित ने उसके ऊपर जलाभिषेक करने का प्रयास किया जिससे वह तो बप्पा के पैर के अंगूठे पर पड़ा हरित ऋषि ने उसे कहा कि यदि यह जलाभिषेक तुम्हारे शरीर पर गिरता तो तुम अमर हो जाते फिर भी तुम्हारे पैर के अंगूठे पर गिरने से भी जहां तक तुम्हारा पाव जाएगा वहां तक तुम्हारा राज्य रहेगा हरित ऋषि ने बप्पा को मेवाड़ का राज्य वरदान में दे दिया ।''
[[बप्पा रावल]] का मूल नाम [[कालभोज]] था । बप्पा रावल ने [[हरित ऋषि]] के आशीर्वाद से '''734 ईसवी''' में [[चित्तौड़गढ़]] पर आक्रमण किया और चित्तौड़ के राजा '''[[मान मौर्य]]''' को पराजित कर ७३४–७५३ ईसवी तक शासन किया और चित्तौड़गढ़ में गुहिल वंश के साम्राज्य की स्थापना की । बप्पा रावल ने [[उदयपुर]] के समीप कैलाशपुरी नामक स्थान पर [[एकलिंग]] जी का मंदिर बनवाया ।
'''बप्पा रावल प्रथम गुहिल शासक थे जिसने मेवाड़ में सोने के सिक्के चलाए''' । बप्पा रावल की मृत्यु नागदा में हुई जहां उसकी समाधि बनी हुई है। जिसे वर्तमान में बप्पा रावल के नाम से जानते हैं।
''बप्पा रावल के बारे में कहा जाता है कि वह एक झटके में दो मलेच्छो(भैंसे) की बलि दे देते । वह 33 हाथ की धोती और 16 हाथ का दुपट्टा पहनते थे । उनकी खड़ग 32 मन ( गुजरी भाषा में गुजरात्रा में मन २० किलो होता है) की थी । वह 4 व्यक्तियों के बराबर भोजन करते थे और उनकी सेना में 12 लाख 72000 हजार सैनिक थे ।''
[[आम्र कवि]] द्वारा लिखित [[एकलिंग प्रशस्ति]] में बप्पा रावल के संन्यास लेने की घटना की पुष्टि होती है ।
== कालभोज के बाद के शासक ==
कालभोज के बाद उनके पुत्र खुमाण प्रथम मेवाड़ के शासक बने ।[[कालभोज]] के बाद के शासक थे-
*[[खुमाण प्रथम]]
*[[मत्तट]]
*[[भृतभट्ट सिंह]]
*[[खुम्माण द्वितीय]]
*[[खुमाण तृतीय]]
*[[भृतभट्ट द्वितीय]]
मेवाड़ के क्रमशः शासक बने खुमान तृतीय के बाद भृतभट्ट द्वितीय इसके बारे में हमें आहड़ लेख 977 ईसवी से जानकारी मिलती है। 942 ईसवी के प्रतापगढ़ अभिलेख में उसे '''[[महाराजाधिराज]]''' की उपाधि से पुकारा गया ।
*भृतभट्ट द्वितीय के बाद उसकी रानी '[[राष्ट्रकूट राठौड़ वंश]]' की रानी महालक्ष्मी से उत्पन्न हुए पुत्र '''[[अल्हट|अल्लट]]''' मेवाड़ के शासक बने । जिसे '''आलू रावत''' कहा जाता है । अल्लट ने हूण राजकुमारी हरिया देवी के साथ विवाह कर हूणों कि वह अपने ननिहाल पक्ष राष्ट्रकूटों की सहायता से अपने साम्राज्य का सर्वाधिक विस्तार किया ।
'''अल्लट ने पहली बार [[नौकरशाही]] की शुरुआत की जो वर्तमान में भी पूरे देश में चल रही है ।'''
अल्लट ने [[नागदा]] से राजधानी बदलकर अपनी नई राजधानी [[आहड़]] को बनाई और वहां पर [[वराह मंदिर]] का निर्माण करवाया । अल्लट के बाद उसका पुत्र [[नरवाहन]] मेवाड़ का शासक बना ।
*[[नरवाहन]] ने चौहानों के साथ अच्छे संबंध बनाने के लिए [[चौहान]] राजा [[जेजय]] की पुत्री से विवाह किया ।
फिर क्रमशः शासक हुवे–
*[[शक्तिकुमार]] (977–993 ई.)
*[[नरवर्म]]
*[[शुचिवर्म]]
*[[कीर्तिवर्मा]]
*[[योगराज]]
*[[वैरट]]
*[[हंसपाल]]
*[[वैरिसिह]]
*[[विजयसिंह]]
*[[अरिसिंह]]
*[[चोङसिंह]]
*[[विक्रम सिंह]]
*[[रणसिंह]] (1158 ई.)
==गुहिल/गहलौत वंश का शाखाओं में विभाजन ==
रणसिंह, विक्रम सिंह के पुत्र थे, इन्होंने आहोर के पर्वत पर एक किला बनवाया । इन्हीं के शासनकाल में गुहिल वंश दो शाखाओं में बट गया ।
*'''प्रथम (रावल शाखा)- [[रणसिंह]] के पुत्र [[क्षेमसिंह]] [[रावल]] शाखा का निर्माण कर मेवाड़ पर शासन किया ।'''
*'''द्वितीय (राणा शाखा)- [[रणसिंह]] के दूसरे पुत्र [[राहप]] ने सिसोदा ठिकानों की स्थापना कर राणा शाखा की शुरुआत की । ये राणा सिसोदा ठिकाने में रहने के कारण आगे चलकर [[सिसोदिया]] कहलाए।'''
*[[क्षेमसिंह]] रावल शाखा की शुरुआत कर मेवाड़ के शासक बने। इनके, [[सामंत सिंह]] और [[कुशल सिंह]] नाम के दो पुत्र हुए।
*[[सामंत सिंह]] (1172 ई.) में मेवाड़ के शासक बने सामंत सिंह का विवाह [[अजमेर]] के [[चौहान]] शासक [[पृथ्वीराज द्वितीय]] की बहन पृथ्वी बाई के साथ हुआ । [[नाडोल]] के चौहान शासक [[कीर्तिपाल]] व पृथ्वीराज द्वितीय के मध्य अनबन हो गई इसी कारण कीर्तिपाल ने मेवाड़ पर आक्रमण कर सामंत सिंह को पराजित कर मेवाड़ राज्य छीन लिया सामंत सिंह ने (1178 ईस्वी) में लगभग [[वागड़]] में जाकर अपना नया राज्य बनाया जिसकी नई राजधानी ''वट पदक बड़ौदा'' थी ।
क्षेमसिंह के छोटे पुत्र [[कुमार सैनी]] (1179 ईस्वी) में कीर्तिपाल को पराजित कर मेवाड़ के पुनः शासक बने ।
=== जैत्र सिंह (1213–1250 ईस्वी) ===
{{मुख्य|जैत्र सिंह}}
तेरहवीं शताब्दी के प्रारंभ में मेवाड़ के शासक [[जैत्र सिंह]] बने । उनके शासनकाल से पूर्व [[नाडोल के चौहान]] वंश के कीर्तिपाल ने मेवाड़ पर अधिकार स्थापित किया था । इस बेर के बदले में जेत्र सिंह ने समकालीन चौहान वंश के शासक [[उदय सिंह]] के विरुद्ध नाडोल पर चढ़ाई कर दी । नाडोल को बचाने के उद्देश्य से उदय सिंह ने अपनी पोत्री रूपा देवी का विवाह जैत्र सिंह के पुत्र [[तेज सिंह]] के साथ कर मेवाड़ और नाडोल के बेर को समाप्त किया ।
जैत्र सिंह के समय [[दिल्ली]] सल्तनत पर गुलाम वंश के बादशाह इल्तुतमिश का शासन था । इल्तुतमिश ने जेत्र सिंह के बढ़ते हुए प्रभाव को दबाने के लिए मेवाड़ की राजधानी नागदा पर (1222 से 1229 ईस्वी) में आक्रमण किया और इसे तहस-नहस कर दिया । इसी कारण जैत्र सिंह ने पहली बार अपने राज्य की राजधानी चित्तौड़गढ़ को बनाया । उसके बाद '''जेेेैत्र सिंह व इल्तुतमिश के मध्य (1227 ईस्वी) में [[भुताला का युद्ध]] हुआ, जिसमें जैत्र सिंह ने इल्तुतमिश को बुरी तरह पराजित किया, जिसके बारे में [[जयसिंह सूरी कृत हमीर हद मर्दन]] नामक पुस्तक से जानकारी मिलती है ।'''
''[[डॉक्टर ओझा]] ने जैत्र सिंह की प्रशंसा में लिखा है कि दिल्ली के गुलाम सुल्तानों के समय में मेवाड़ के राजाओं में सबसे प्रतापी और बलवान राजा जैत्रसिंह ही हुआ जिसकी वीरता की प्रशंसा उसके विपक्षियों ने भी की है
।
[[दशरथ शर्मा-]] जैत्रसिंह का समय मध्य कालीन मेवाड़ का नवशक्ति संचार का समय माना हैं।
=== तेज सिंह (1250–1273 ईस्वी) ===
{{मुख्य|तेज सिंह}}
[[जैत्र सिंह]] की मृत्यु के बाद उनके पुत्र [[तेज सिंह]] मेवाड़ के शासक बने। तेजसिंह एक प्रतिभा संपन्न शक्तिशाली शासक थे तेज सिंह ने '''परम भट्ठारक/ महाराजाधिराज/ परमेश्वर तथा चालूक्यों के समान उभावती/ वल्लभ प्रताप का विरुद्ध धारण किया था ।''' तेजसिंह के शासनकाल में दिल्ली के शासक गयासुद्दीन बलबन ने मेवाड़ पर असफल आक्रमण किया । तेज सिंह की रानी [[जयतल्लदेवी]] ने चित्तौड़ में [[श्याम पार्श्वनाथ]] के मंदिर का निर्माण करवाया ।
''तेज सिंह के शासनकाल में 1267 ईस्वी में आहङ नामक स्थान पर '''[[मेवाड़ चित्रकला शैली]]''' का प्रथम चित्रित ग्रंथ '''[[श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णी]]'' का चित्रण किया गया था ।''
=== समर सिंह (1273–1301 ईस्वी) ===
[[समर सिंह]] को [[कुंभलगढ़ प्रशस्ति]] में शत्रुओं की शक्ति का अपहरण करता लिखा गया है, जबकि [[आबू शिलालेख]] में उसे [[तुर्कों]] से [[गुजरात]] का उद्धारक लिखा गया है । चिरवे के लेख में उसे शत्रुओं का संहार करने में सिंह के समान सुर कहा गया है । ''अचलगच्छ की पट्टावली'' से स्पष्ट होता है कि [[आचार्य अमितसिंह सूरी]] के प्रभाव में [[समर सिंह]] ने अपने राज्य में जीव हिंसा पर रोक लगा दी थी । समर सिंह के दो पुत्र [[रतन सिंह]] व [[कुंभकरण]] हुए । '''कुंभकरण अपने पिता की आज्ञा प्राप्त कर नेपाल चले गए और वहां पर अपने नए गुहिल वंश की स्थापना की । समर सिंह के दूसरे पुत्र रतन सिंह चित्तौड़ के शासक बने । इसकी जानकारी हमें [[कुंभलगढ़ प्रशस्ति]] तथा [[एकलिंग महात्म्य]] ग्रंथ में मिलती है।'''
=== रतन सिंह (1301–1303 ईस्वी)===
{{मुख्य|राणा रतन सिंह}}
[[रतन सिंह]] ज्यों ही मेवाड़ की गद्दी पर बैठे तो उन्हें अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण का सामना करना पड़ा । अल्लाउद्दीन खिलजी के चित्तौड़ पर किए जाने वाले आक्रमण में खिलजी के साथ प्रसिद्ध लेखक [[अमीर खुसरो]] था । अमीर खुसरो ने इस युद्ध का सजीव चित्रण करते हुए अपनी पुस्तक [[खजाइनुल फुतूह]] मैं लिखा है कि अलाउद्दीन खिलजी चित्तौड़ पर आक्रमण करने के लिए 28 जनवरी 1303 ईस्वी को अपनी सेना सहित दिल्ली से रवाना हुआ । चित्तौड़ पहुंचकर [[गंभीरी नदी]] और [[बैङच नदी]] के मध्य शाही शिविर लगाया । स्वयं खिलजी ने अपना शिविर चित्तौड़ी नामक डूंगरी पर लगवाया ।6 महीने तक यह घेरा चलता रहा ।
'''कुंभलगढ़ शिलालेख से पता चलता है कि इन छह माह के मध्य हुए छोटे-मोटे की युद्धो में सिसोदा का सामंत [[लक्ष्मण सिंह]] अपने सात पुत्रों सहित किले की रक्षा करते हुए शहीद हो गए । जब चारों और सर्वनाश दिखाई दे रहा था और शत्रु से बचने का कोई उपाय नहीं मिल रहा था । रतन सिंह की पत्नी [[पद्मिनी]] ने 16000 राजपूत महिलाओं के साथ जोहर किया तथा रतन सिंह के दो सेनापति [[गोरा और बादल]] के नेतृत्व में राजपूतों ने [[केसरिया]] वस्त्र धारण कर किले के फाटक खोल कर शत्रुओं की सेना पर टूट पड़े और वीरगति को प्राप्त हुए ।
''यह चित्तौड़गढ़ का प्रथम साका था ''।'''
इस प्रकार (26 अगस्त 1303 ईस्वी) को [[चित्तौड़गढ़ किला]] अलाउद्दीन खिलजी के अधीन हुआ । अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी शाही सेना का विनाश देख कर बहुत क्रोधित हुआ और उसने शाही सेना को ''चित्तौड़गढ़ की आम जनता के कत्लेआम करने का आदेश दे दिया ''।अल्लाउद्दीन खिलजी कुछ दिन चित्तौड़ रुक कर अपने बेटे खिज्रखां को चित्तौड़गढ़ का शासन देकर दिल्ली लौट गया। अलाउद्दीन खिलजी ने अपने पुत्र खिज्र खां के नाम पर चित्तौड़ का नाम बदलकर खिजराबाद रखा । खिज्र खाॅ ने चित्तौड़गढ़ दुर्ग व उसके आसपास के मंदिरों तथा भवनों को तुड़वाकर किला पर पहुंचने के लिए गंभीरी नदी पर पुल बनवाया । 22 दिसंबर 1316 में अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु हो गई इस कारण खिज्र खा चित्तौड़ से वापस दिल्ली गया । पीछे मेवाड़ राज्य '''[[मालदेव सोनगरा]]''' को सौंप गया ।
=== राणा हम्मीर (1326–1364 ईस्वी)===
{{मुख्य|राणा हम्मीर सिंह}}
[[राणा हम्मीर]] सिसोदा जागीर के सरदार [[लक्ष्मण सिंह]] का पोता था । लक्ष्मण सिंह अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय चित्तौड़ दुर्ग की रक्षा करते हुए अपने सात पुत्रों के साथ वीरगति को प्राप्त हो गए। लक्ष्मण सिंह का एक लड़का अरिसिंह/[[अजय सिंह]] था, जो कि भाग्य वास उस युद्ध में बच गया था । अरि सिंह की मृत्यु के बाद उसका पुत्र राणा हमीर सिसोदा जागीर का सरदार बना । दूसरे भाई अजय सिंह का बेटा राणा सज्जन सिंह महाराष्ट्र चला गया,छत्रपति शिवाजी महाराज इन्ही के वंशज थे। राणा हम्मीर ने देखा कि अलाउद्दीन खिलजी के मरने के बाद दिल्ली सल्तनत की हालत सोचनीय है । उसने 1326 ईस्वी के आसपास दिल्ली सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक के समय चित्तौड़ पर आक्रमण कर [[मालदेव]] के पुत्र जैसा/[[जयसिंह]] को मारकर जबकि (ङा.ओझा के अनुसार) मालदेव पुत्र बनवीर को मारकर चित्तौड़ पर पुनः अपना अधिकार स्थापित किया ।
*'''ध्यातव्य रहे–''' ''राणा हम्मीर से पहले चित्तौड़ के गुहिल वंश शासक रावल एवं गहलौत कहलाते थे और बाद में मेवाड़ का राजवंश सिसोदिया राजवंश के नाम से विख्यात हुआ हम राणा हमीर सिसोदिया को 'सिसोदिया साम्राज्य का संस्थापक' भी कहते हैं ।''
मोहम्मद बिन तुगलक ने चित्तौड़ पर अधिकार करने के लिए हम्मीर पर आक्रमण किया । राणा हम्मीर ने पहाड़ी क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए खेरवाड़ा को अपना केंद्र बनाया । राणा हम्मीर वह मोहम्मद बिन तुगलक के मध्य युद्ध हुआ, जिससे हम [[सिंगोली का युद्ध]] कहते हैं ।
''राणा हम्मीर ने मेवाड़ की आपातकालीन स्थिति में पुन: अधिकार कर अच्छी स्थिति में पहुंचाया इसलिए उसे '''मेवाड़ का उद्धारक''' कहते हैं । राणा हमीर विपरीत परिस्थिति में भी अपना हौसला नहीं खोया अतः '''उसे कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति में विषम घाटी पंचानन/ विकेट आक्रमणों में सिंह के समान' कहा गया ।''' कुंभा के द्वारा '[[गीत गोविंद]]' पर लिखी गई '''[[रसिक प्रिया]]''' नामक टीका में राणा हम्मीर को '''वीर राजा''' की उपाधि दी गई ।''
राणा हम्मीर ने चित्तौड़ दुर्ग में [[अन्नपूर्णा माता]] का मंदिर बनवाया जिसकी जानकारी [[मोकल]] जी के शिलालेख से मिलती है । '''कर्नल जेम्स टॉड ने राणा हम्मीर को अपने समय का प्रबल हिंदू राजा माना है।'''
== मेवाड़ का सिसोदिया वंश (गुहिल) ==
{{मुख्य|सिसोदिया राजवंश}}
[[राणा हम्मीर]] की मृत्यु के बाद उनके पुत्र [[राणा क्षेत्र सिंह]] जिसे खेता के नाम से भी जानते हैं, मेवाड़ के शासक बने । क्षैत्र सिंह ने [[मालवा]] के [[दिलावर खान]] गौरी को परास्त कर '''मेवाड़ - मालवा संघर्ष का सूत्रपात किया ।'''
[[हाड़ेती]] के हाडा शासकों को दबाने का श्रेय भी [[खेता]] को ही जाता है। 1382 ईस्वी में जब क्षेत्र सिंह ने आक्रमण किया तो उस युद्ध में क्षेत्र सिंह वह [[बूंदी]] का [[लाल सिंह हाडा]] भी मारा गया ।
=== राणा लाखा/लक्ष सिंह (1382–1421 ईस्वी) ===
{{मुख्य|राणा लाखा}}
महाराणा हम्मीर के पौत्र व खेता के पुत्र लक्ष सिंह हैं लाखा 1382 इश्वी में मेवाड़ के शासक बने । लाखा के शासनकाल में भाग्यवश जावर [[उदयपुर]] में चांदी की खान निकली ।उस खान की आय से उसने कई किलो व मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाया । '''लाखा के शासनकाल में एक पिचू नामक चिड़ीमार बंजारे के बेल की स्मृति में पिछोला झील का निर्माण करवाया ।'''
====[[पिछोला झील]]====
पिछोला झील बेङच नदी पर स्थित है इसका निर्माण 14वीं शताब्दी में राणा लक्खा के शासनकाल में हुआ । महाराणा उदय सिंह ने इसकी पाल को पक्का करवाया । इसमें सीसारमा व बूजड़ा नदी आकर गिरती है । इस झील में जग मंदिर ( करण सिंह ने 1620 ईस्वी में शुरू तथा जगत सिंह प्रथम ने 1651 ईस्वीें में पूर्ण करवाया) जगनिवास जगत सिंह द्वितीय ने 1746 ईस्वी में पूर्ण करवाया ।महाराणा प्रताप और मानसिंह की मुलाकात इसकी पाल पर हुई थी।
लाखा के दरबार में संस्कृत के प्रज्ञात विद्वान [[झोटिंग भट्ट]] और [[धनेश्वर भट्ट]] रहते थे ।
लाखा के शासनकाल में एक महत्वपूर्ण घटना घटी। लखा ने दिल्ली सुल्तान गयासुद्दीन द्वितीय को बदनोर के समीप हुए युद्ध में पराजित करके हिंदुओं से लिए जाने वाले तीर्थ कर को समाप्त करने का वचन लिया ।
1396 ई में गुजरात के जफर खान ने मांडलगङ पर आक्रमण किया लेकिन लाखा ने इस आक्रमण को विफल कर दिया । लाखा ने बूंदी के [[राव बर सिंह]] [[हाड़ा]] को मेवाड़ का प्रभुत्व मानने के लिए विवश किया।
[[मारवाड़]] के शासक [[रणमल]] ने अपनी बहन हँसा बाई का विवाह मेवाड़ के महाराणा लाखा के पुत्र [[चूंडा]] से करने का सोचा । रणमल ने चुंडा के लिए सगाइ का नारियल मेवाड़ दरबार में भेजा, उस समय राणा लाखा का पुत्र चुंडा दरबार में नहीं थे । सगाई के नारियल को देखकर महाराणा लाखा ने मजाक करते हुए कहा कि यह बुढ़ापे में मेरे साथ किस ने मजाक किया। चुंडा को दरबार में न देखकर रणमल का दास वापस रणमल के पास पहुॅचा ।
दास ने सारी बात रणमल को कहीं तो रणमल ने दास को वापस लाखा के पास सशर्त सगाई का नारियल देकर भेजा शादी की शर्त रखी कि मेरी बहन के होने वाले पुत्र को राणा अपना उत्तराधिकारी बनाए तो मैं अपनी बहन की शादी राणा लाखा के साथ कर दूंगा महाराणा लाखा इस शर्त को स्वीकार कर लेते हैं तो मैं अपनी बहन हंसा की शादी महाराणा लाखा के साथ करने को तैयार था लेकिन उसे इस बात का पता था कि उनकी बहन महाराणा लाखा की रानी तो बनेगी लेकिन उसकी कोख से जन्म लेने वाला बालक मेवाड़ का शासक कभी नहीं बन पायेगा। आखिर मेवाड़ की राजगद्दी पर तो महाराणा लाखा के बाद चूंडा का ही अधिकार है। राव रणमल की इस बात का जवाब देते हुए चूंडा ने भरे दरबार में भीष्म प्रतिज्ञा की कि मैं आजन्म मेवाड़ के महाराणा का सेवक बनकर रहुंगा और मेरे वंशज कभी भी मेवाड़ की राजगद्दी पर हक नहीं जतायेंगे। इस भीष्म प्रतिज्ञा के बाद महाराणा लाखा का हंसाकंवर के साथ विवाह कर दिया गया।
चूंडा द्वारा सत्ता त्याग के बारे में राजस्थानी गीतों, बड़वों व राणीमंगों की पोथियों में कुछ अलग-अलग रूप में मिलता है। सभी में चूंडा की प्रशंसा की गई, बहन हनसा भाई की शादी महाराणा लाखा से कर देते हैं।
''''इसी कारण चूंडा को मेवाड़ का ''भीष्म पितामह'' कहते हैं ।'''
लाखा वह हंसा बाई के विवाह के 13 महीने बाद हंसाबाई ने एक पुत्र को जन्म दिया। जिसका नाम [[मोकल]] रखा गया। राणा लाखा जब मृत्यु की शैय्या पर थे तो उन्होने अपने बड़े पुत्र चूंडा को अपने पास बुलाकर अपने छोटे पुत्र मोकल का संरक्षक बनाया ।
=== राणा मोकल (1421-1433 ईस्वी) ===
{{मुख्य|राणा मोकल}}
जिस समय लाखा की मृत्यु हुई तो मोकल मात्र 12 वर्ष के थे । राणा लाखा के कहे अनुसार उनके बड़े भाई चूंडा राज्य के सभी कार्यों को बड़ी कुशलता से कर रहे थे । हंसा बाई ( मोकल की मां व चूंडा की सौतेली मां ) हमेशा चूंडा को शक की दृष्टि से देखती थी । चूंडा परेशान होकर मेवाड़ छोड़कर मालवा चले गए ।हंसा बाई ने अपने भाई रणमल को मोकल के संरक्षक का कार्य करने के लिए मारवाड़ से मेवाड़ बुला लिया । रणमल ने शीघ्र ही मेवाड़ में ऊंचे पदों पर राठौड़ों की नियुक्ति कर दी । इसी कारण सिसोदिया सरदार रणमल से नाराज हो गए। रणमल मारवाड़ का ही स्वामी नहीं रहा बल्कि मेवाड़ का भी सर्वे सर्वा बन गया ।
सिसोदिया सरदारों को रणमल सत्ता से वंचित कर उन्हें अपमानित कर रहा था । 1 दिन रणमल आवेश में आकर मेवाड़ सरदार राघव देव ( राणा चुंडा के भाई ) जैसे योग्य व्यक्ति की हत्या करवा दी इससे राठौड़ों वह सिसोदिया में वैमनस्य की कई गहरी होती गई।
मोकल ने 1428 ईसवी के लगभग [[नागौर]] के फिरोज खान को '''[[रामपुरा के युद्ध]]''' में परास्त किया । फिरोज खान का साथ देने आई गुजरात की सेना को भी हार का मुंह देखना पड़ा गुजरात के शासक अहमद शाह ने मेवाड़ पर 1433 ईस्वी को आक्रमण कर दिया। मोकल को इस आक्रमण का पता चला तो वह भी उस से युद्ध करने के लिए रवाना हुआ और झीलवाड़ा नामक स्थान पर पहुंचा । युद्ध के मैदान में ही मोकल के सिसोदिया सरदार जो कि रणमल के हार के कारणों कल से नाराज थे। माहपा पवार के कहने पर महाराणा क्षेत्र सिंह (खेता) की खातिन जाति की दासी से उत्पन्न हुए 2 पुत्र चाचा वह मेरा ( एक बार मोकल ने जंगल में चाचा वह मेरा से प्रसंग में किसी वृक्ष का नाम पूछ लिया तो वह इसे ताना समझ गए क्योंकि उनकी माता खातिन थी । इस अपमान का बदला लेने के लिए उन्होंने मोकल को मार दिया) ने अवसर पाकर उसकी हत्या कर दी ।
उस दिन से मेवाड़ में कहावत प्रचलित हुई की '''दीवार में आला खेत में नाला और घर में साला बर्बाद करके ही जाता है ''' राणा मोकल ने हिंदू परंपरा को स्थापित करने के लिए '''तुलादान पद्धति''' को लागू किया । इस परंपरा के तहत मंदिरों के लिए सोना चांदी दान के रूप में दिया जाता था । महाराणा मोकल ने [[एकलिंग जी मंदिर]] के परकोटे का निर्माण कराया । मोकल ने चित्तौड़ दुर्ग में [[परमार वंश]] के द्वारा बनवाए गए [[त्रिभुवन मंदिर]] का जीर्णोद्धार करवाकर [[समद्वेश्वर मंदिर]] के नाम से प्रसिद्धि दिलाई ।
====[[सौभाग्यदेवी]]====
सौभाग्य देवी परमार वंश की राजकुमारी थी । जिसका विवाह मेवाड़ के शासक राणा लाखा के पुत्र मोकल के साथ हुआ । इस सौभाग्य देवी की कोख से 1423 ईस्वी में महाराणा कुंभा का जन्म हुआ ।
====[[कमलावती]]====
कमलावती मेवाड़ के शासक राणा मोकल की रानी थी। 1433 ईस्वी में गुजरात के शासक अहमद शाह ने मेवाड़ पर आक्रमण किया । '''अहमद शाह एवं मोकल के मध्य जिलवाड़ा नामक स्थान पर युद्ध हुआ ।''' इसी समय जंहा क्षेत्र सिंह के दासी पुत्र चाचा और मेरा ने मिलकर मोकल की हत्या कर दी । उस समय रानी [[कमलावती]] ने मात्र 500 सैनिकों के साथ मुस्लिम सेना का सामना किया। वह अधिक समय तक मुस्लिम सेना के सामने टिक न सकी ओर अंत में वह जलती चिता में कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त की ।
=== महाराणा कुंभा/महाराणा कुम्भकर्ण सिसोदिया (1433–1468 ईस्वी) ===
{{मुख्य|महाराणा कुंभा}}
महाराणा कुम्भकर्ण सिसोदिया या
[[महाराणा कुम्भा]] एक ऐसा वीर योद्धा '''जिसने 30 साल के अपने शासन में कभी कोई युद्ध नही हारा।'''
महाराणा कुंभा का जन्म 1423 ईस्वी को महाराणा मोकल की परमार रानी सौभाग्य देवी के गर्भ से हुआ । मोकल की हत्या के समय कुंभा जिलवाड़ा के उसी शिविर में उपस्थित थे । उन हत्यारों ने कुंभा पर भी हमला किया किंतु उनके शुभचिंतकों ने उन्हें वहां से बचाकर सकुशल [[चित्तौड़]] ले गए। [[चित्तौड़गढ़ दुर्ग]] में कुंभा को मात्र 10 वर्ष की आयु में 1433 ईस्वी में मेवाड़ का महाराणा बनाया गया।
[[File:Maharana Kumbhakarna of Mewar.jpg|right|thumb|महाराणा कुंभा]]
कुंभा मेवाड़ का महाराणा तो बने उनके सामने बहुत भयंकर दो समस्याएं थी–
पहली– अपने पिता के हत्यारों चाचा व मेरा को सजा देना ।
दूसरी– अपने पिता के मामा [[रणमल राठौड़]] के मेवाड़ में बढ़ रहे प्रभाव को समाप्त करना ।
महाराणा कुंभा एक अच्छे शासक ही नहीं अपितु राजनीतिज्ञ भी थे। उन्होंने दिमाग का प्रयोग करते हुए रणमल राठौड़ को मारवाड़ से अपने पिता के हत्यारों का दमन करने के लिए सैनिकों सहित बुलाया। रणमल मेवाड़ पहुंचा तो कुंभा ने अपने पिता के हत्यारों पर आक्रमण किया और चाचा वह मेरा की हत्या कर दी । इस प्रकार कुंभा की पहली समस्या का हल हुआ।
कुंभा के सामने दूसरी समस्या रणमल की थी। मेवाड़ी सिसोदिया सरदारों ने अपने वैमनस्य को दूर करने के लिए षड्यंत्र रचकर सन 1438 ईस्वी में रणमल की हत्या करवा दी।
एक जन श्रुति के अनुसार रणमल मेवा राठौड़ की हत्या इस प्रकार हुई कि हनसा बाई की एक दासी डावरी प्राचीन काल में राजा लोग अपनी पुत्री के साथ दहेज के रूप में कुछ लड़कियां भेजते थे उन्हें दासिया डावरिया कहा जाता था ।
दासी जिसका नाम भारमली था । भारमली को रणमल राठौड़ दिलो जान से चाहता था। भारमली कुंभा को अपने पुत्र के समान चाहती थी। रणमल राठौड़ ने बार भारमली द्वारा कुंभा को जहर देने के लिए कई बार कहा किंतु 1 दिन कुंभा ने भारमली से रणमल को जहर देने को कहा बार भारमली ने 1438 ईस्वी में शराब में जहर देकर रणमल की हत्या कर दी।
इस प्रकार कुंभा की दोनों समस्याओं का हल हो गया ।
[[राव जोधा]] को जब अपने पिता रणमल की हत्या करने का पता चला तब वह मेवाड़ में ही था । मेवाड़ से जोधा अपनी जान बचाकर मारवाड़ की तरफ भागा, कुंभा की सेना ने उसका पीछा कर उसको वहां से भगा दिया । राव जोधा वहां से वापस मेवाड़ अपनी बुआ हनसाबाई के पास पहुंचा राव जोधा की बुआ व कुंभा की दादी हनसाबाई ने इन दोनों के मध्य मध्यस्था कराते हुए संधि करवाई जो '''आवल बावल''' के नाम से जानी जाती है। '''आवल बावल की संधि के तहत मेवाड़ में मारवाड़ की सीमा का निर्धारण हुआ मेवाड़ में मारवाड़ की सीमा निर्धारण का मुख्य बिंदु सोजत था।'''
राव जोधा ने कुंभा से अधिक मेलजोल बनाने व विश्वास प्राप्त करने के लिए अपनी पुत्री श्रंगार देवी का विवाह कुंभा के छोटे पुत्र रायमल से करवा दिया । जिसकी जानकारी हमें श्रंगार देवी द्वारा बनाई गई '''घोसुंडी की बावड़ी''' पर लगी प्रशस्ति से मिलती है।
==== मेवाड़-मालवा (माॅङू संबंध) ====
चाचा वह मेरा का साथी महपा पवार व चाचा का पुत्र अक्का मांडू के सुल्तान महमूद खिलजी प्रथम के पास चला गया। कुंभा ने मांडू के सुल्तान महमूद खिलजी को पत्र लिखकर उसके विद्रोहियों को वापस लौटाने को कहा। महमूद खिलजी ने शरण में आए हुए व्यक्तियों को भेजने से इंकार कर दिया, प्रत्युत्तर मैं महाराणा कुंभा ने [[मांडू]] पर चढ़ाई कर दी ।
इस आक्रमण का दूसरा कारण यह भी माना जाता है कि मालवा के दिवंगत सुल्तान होशंग शाह के बाद वहां उत्तराधिकारी युद्ध हुआ। जिसके तहत महमूद खिलजी ने होशंग शाह के पुत्र उमर खान को मालवा की गद्दी से हटाकर स्वयं मालवा का सुल्तान बन गया। उमर खान मेवाड़ के कुंभा से सैनिक सहायता मांगने के लिए गया तो कुंभा ने मालवा के राजा महमूद खिलजी पर आक्रमण कर दिया ।इन दोनों के मध्य 1437 ईसवी में सारंगपुर नामक स्थान पर युद्ध हुआ जिसमें महाराणा कुंभा की विजय हुई।
'''मालवा विजय के उपलक्ष्य में कुंभा ने चित्तौडग़ढ़ में ( 1440 - 1448 ) में विजय स्तंभ का निर्माण करवाया ।'''
महाराणा कुंभा महमूद खिलजी को बंदी बनाकर अपने साथ ले आए जिसे 6 महीने तक कैद रखने के बाद महमूद खिलजी को रिहा कर दिया। मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी रिया होकर गुजरात के सुल्तान कुतुबुद्दीन के पास पहुंचा ।
1456 ईस्वी में नागौर के स्वामी फिरोज खान के मरने के बाद उसका पुत्र शम्स खान नागौर का स्वामी हुआ। गुजरात के सुल्तान कुतुबुद्दीन ने उसे हटाकर उसके छोटे भाई मुजाहिद खान को नागौर का शासक बनाया । शम्स खान ने कुंभा की सहायता से सशर्त पुन: नागौर का शासक बना । जब शम्स खान ने कुंभा की शर्त नहीं मानी तो कुंभा ने नागौर पर आक्रमण किया । शम्स खान ने गुजरात के सुल्तान कुतुबुद्दीन की सहायता से कुंभा का मुकाबला किया। '''शम्स खान की इस युद्ध में पराजय हुई । [[कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति]] के अनुसार महाराणा कुंभा ने नागौर की मस्जिद को जलाया, किले को तुड़वाकर खाई भरवाई, हाथियों को छीनकर यवनियों को कैद करके उसने गायों को छुड़वाया और नागौर को चारागाह में बदल दिया ।'''
==== मेवाड़ के महान शासक सिसोदिया ====
महाराणा कुंभा के समय गुजरात के सुल्तान कुतुबुद्दीन शाह मेवाड़ पर आक्रमण करने की सोच रहा था । मांडू के सुल्तान महमूद खिलजी प्रथम का दूत ताज खान उसके पास पहुंचा। ताज खा ने मांडू और गुजरात की संयुक्त शक्ति को मिलाकर मेवाड़ पर आक्रमण करने का विचार बनाया। मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी व गुजरात के कुतुबुद्दीन शाह के मध्य 1456 ईस्वी में '''[[चंपानेर]]''' नामक स्थान पर सशर्त संधि हुई की 'मेवाड़' को जीतने के बाद दोनों मेवाड़ का आधा आधा हिस्सा बांट लेंगे। इस संधि को चंपानेर की संधि कहते हैं। संधि के तहत दोनों ने 1457 इश्वी में मेवाड़ पर आक्रमण कर दिया ।
कुतुबुद्दीन तो पहले ही [[कुंभलगढ़ दुर्ग]] में पराजित होकर गुजरात वापस लौट गया । कुंभा महमूद खिलजी की ओर बढ़े बैराठगढ़ (बदनोर) के युद्ध में 1457 ईस्वी में महमूद खिलजी को पराजित कर इस विजय के उपलक्ष्य में बदनोर (भीलवाड़ा) में '''[[कुशाल माता]]''' का भव्य मंदिर बनवाया ।
सिरोही के सहसमल देवरा को कुम्भा के नरसिंह डोडिया ने हराया।
====कुंभा की उपाधियां====
कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति तथा कुंभलगढ़ प्रशस्ति से हमें महाराणा कुंभा की उपाधियों की जानकारी मिलती है कुंभा को साहित्य ग्रंथों व प्रशस्तियों में - '''अभिनव व भरताचार्य महाराजाधिराज' रावराय, राय रायन'''
(1) '''[[महाराजाधिराज]]''' - राजाओं का राजा होने के कारण ।
(2) '''महाराजा''' - अनेक राज्यों को अपने अधिकार में रखने के कारण ।
(3) '''राणा''' - रासो विद्वानों का आश्रय दाता होने के कारण ।
(4) '''राजगुरु''' - राजनीतिक सिद्धांतों में दक्ष होने तथा विभिन्न राजाओं, सामंतों व जागीरदारों का हितेषी होने के कारण।
(5) '''दानगुरु''' - विद्वानों कलाकारों व निर्धनों को दान देने के कारण ।
(6) '''परमगुरु''' - विभिन्न विद्याओं का ज्ञाता तथा अपने समय का सर्वोच्च शासक होने के कारण ।
प्रसिद्ध गीत गोविंद नामक पुस्तक पर लिखी टीका 'रसिकप्रिया' में भी कुंभा की निम्न उपाधियों का वर्णन मिलता है ।
(7) '''नरपति''' - सामान्य मानव से श्रेष्ठ होने के कारण ।
(8) '''अश्वपति''' - कुशल घुढ़सवार होने के कारण ।
(9) '''गणपति''' - गण का अर्थ राज्य होता था अर्थात राज्य का राजा होने के कारण।
(10) '''छापगुरु''' - छापामार युद्ध पद्धति में निपुण होने के कारण।
(11) '''हिंदू सुरताण''' - समकालीन मुस्लिम शासकों द्वारा हिंदुओं की रक्षा करने वाला विभूषित किया गया है।
(12) '''नंदीकेश्वर अवतार''' - नंदीकेश्वर के मत का अनुसरण करने के कारण।
(13) '''नाटकराज''' - नृत्यशास्त्र के ज्ञाता होने के कारण।
(14) '''शेलगुरु''' - युद्ध में निपुण होने के कारण ।
(15) '''चापगुरु''' - धनुर्विद्या का ज्ञाता होने के कारण।
(16) धीमान बुद्धिमत्ता पूर्वक निर्माण कार्य करवाने के कारण अभिनव भरता चार्य श्रेष्ठ वीणा वादक एवं संगीत के छेत्र में कुंभा के विपुल ज्ञान के कारण संगीत प्रेम के कारण प्रजा पालक जनता का हितैषी होने के कारण।
=== महाराणा सांगा/महाराणा संग्राम सिंह सिसोदिया (1509-1528 ईस्वी) ===
{{मुख्य|महाराणा सांगा}}
'''महाराणा सांगा''' (महाराणा संग्राम सिंह) (१२ अप्रैल १४८४ - ३० जनवरी १५२८) (राज 1509-1528) [[उदयपुर]] में [[सिसोदिया|सिसोदिया राजपूत]] राजवंश के राजा थे तथा [[राणा रायमल]] के सबसे छोटे पुत्र थे। <ref>Sen, Sailendra (2013). A Textbook of Medieval Indian History. Primus Books. pp. 116–117. ISBN 978-9-38060-734-4</ref>
[[File:Depiction of king Rana Sanga.jpg|right|thumb|महाराणा सांगा]]
==== प्रारंभिक जीवन ====
राणा रायमल के तीनों पुत्रों ( [[पृथ्वीराज|कुंवर पृथ्वीराज]], जगमाल तथा राणा सांगा ) में मेवाड़ के सिंहासन के लिए संघर्ष प्रारंभ हो जाता है। एक भविष्यकर्त्ता के अनुसार सांगा को मेवाड़ का शासक बताया जाता है ऐसी स्थिति में कुंवर पृथ्वीराज व जगमाल अपने भाई राणा सांगा को मौत के घाट उतारना चाहते थे परंतु सांगा किसी प्रकार यहाँ से बचकर अजमेर पलायन कर जाते हैं तब सन् 1509 में अजमेर के कर्मचन्द पंवार की सहायता से राणा सांगा [[मेवाड़]] राज्य प्राप्त हुुुआ |
==== सैन्य वृत्ति ====
[[मुगल]] साम्राज्य के संस्थापक [[बाबर]] ने अपने संस्मरणों में कहा है कि राणा सांगा हिंदुस्तान में सबसे शक्तिशाली शासक थे, जब उन्होंने इस पर आक्रमण किया, और कहा कि "उन्होंने अपनी वीरता और तलवार से अपने वर्तमान उच्च गौरव को प्राप्त किया।" 80 हज़ार घोड़े, उच्चतम श्रेणी के 7 राजा, 9 राओएस और 104 सरदारों व रावल, 500 युद्ध हाथियों के साथ युद्ध लडे। अपने चरम पर, संघ युद्ध के मैदान में 100,000 राजपूतों का बल जुटा सकते थे। यह संख्या एक स्वतंत्र हिंदू राजा के लिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि इसमें चरवाहा या कोई भी जाति (जैसे [[जाट]], [[गुर्जर| गुर्जरों]] या [[अहीर| अहीरों]]) को शामिल नहीं किया गया था। मालवा, गुजरात और लोधी सल्तनत की संयुक्त सेनाओं को हराने के बाद मुसलमानों पर अपनी जीत के बाद, वह उत्तर भारत का सबसे शक्तिशाली राजा बन गया। कहा जाता है कि संघ ने 100 लड़ाइयां लड़ी थीं और विभिन्न संघर्षों में उसकी आंख, हाथ और पैर खो गए थे। <ref>Har Bilas, Sarda. maharana sanga : the hindupat, the last great leader of the rajput race. pp. 15–16.</ref><ref>A Comprehensive History of India: Comprehensive history of medieval India p107</ref>
==== शासन ====
[[चित्र:Rana sanga statue at city palace udaipur.jpg|right|thumb|300px|सिटी पैलेस उदयपुर में राणा सांगा की प्रतिमा।]]
महाराणा सांगा ने सभी राजपूत राज्यो को संगठित किया और सभी राजपूत राज्य को एक छत्र के नीचे लाएं। उन्होंने सभी राजपूत राज्यो संधि की और इस प्रकार महाराणा सांगा ने अपना साम्राज्य उत्तर में पंजाब सतलुज नदी से लेकर दक्षिण में मालवा को जीतकर नर्मदा नदी तक कर दिया। पश्चिम में में सिंधु नदी से लेकर पूर्व में बयाना भरतपुर ग्वालियर तक अपना राज्य विस्तार किया इस प्रकार मुस्लिम सुल्तानों की डेढ़ सौ वर्ष की सत्ता के पश्चात इतने बड़े क्षेत्रफल हिंदू साम्राज्य कायम हुआ इतने बड़े क्षेत्र वाला हिंदू सम्राज्य दक्षिण में विजयनगर सम्राज्य ही था। दिल्ली सुल्तान इब्राहिम लोदी को खातौली व बाड़ी के युद्ध में 2 बार परास्त किया और और गुजरात के सुल्तान को हराया व मेवाड़ की तरफ बढ़ने से रोक दिया। बाबर को खानवा के युद्ध में पूरी तरह से राणा ने परास्त किया और बाबर से बयाना का दुर्ग जीत लिया। इस प्रकार राणा सांगा ने भारतीय इतिहास पर एक अमिट छाप छोड़ दी। 16वी शताब्दी के सबसे शक्तिशाली शासक थे इनके शरीर पर 80 घाव थे। इनको हिंदुपत की उपाधि दी गयी थी। इतिहास में इनकी गिनती महानायक तथा वीर के रूप में की जाती हैं।<ref name=":0">Maharana Sanga; the Hindupat, the last great leader of the Rajput race: Sarda, Har Bilas, Diwan Bahadur, 1867-1955</ref>
==== मालवा पर विजय ====
1519 में गुजरात और मालवा की संयुक्त मुस्लिम सेनाओं के बीच राजस्थान में गागरोन के निकट राणा सांगा के नेतृत्व में गागरोण की लड़ाई लड़ी गई थी। राजपूत संघ की जीत ने उन्हें चंदेरी किले के साथ-साथ मालवा के अधिकांश हिस्सों पर अधिकार कर लिया। सिलवाडी और मेदिनी राय जैसे शक्तिशाली राजपूत नेताओं के समर्थन के कारण मालवा की विजय राणा साँगा के लिए आसान हो गई। मेदिनी राय ने चंदेरी को अपनी राजधानी बनाया और राणा साँगा का एक विश्वसनीय जागीरदार बन गया। राणा साँगा चित्तौड़ से एक बड़ी सेना के साथ राव मेड़मदेव के अधीन राठौरों द्वारा प्रबलित, और महमूद खिलजी द्वितीय से गुजरात असफ़िलियों के साथ आसफ़ ख़ान से मिला। जैसे ही लड़ाई शुरू हुई राजपूत घुड़सवार सेना ने गुजरात कैवेलरी के माध्यम से एक भयंकर आरोप लगाया, कुछ अवशेष जो बिखरने से बचे। राजपूत घुड़सवार गुजरात के सुदृढीकरण को पार करने के बाद मालवा सेना की ओर बढ़े। सुल्तान की सेनाएँ राजपूत घुड़सवार सेना का सामना करने में असमर्थ थीं और पूरी हार का सामना करना पड़ा। उनके अधिकांश अधिकारी मारे गए और सेना का लगभग सर्वनाश हो गया। आसफ खान के बेटे को मार दिया गया था, और खुद आसफ खान ने उड़ान में सुरक्षा की मांग की थी। सुल्तान महमूद को कैदी, घायल और खून बहाने के लिए लिया गया था। मालवा में जीत और हिंदू शासन को बहाल करने के बाद, सांगा ने राय को क्षेत्र के हिंदुओं से जजिया कर हटाने का आदेश दिया।<ref>Sharma, Gopi Nath (1954). Mewar & the Mughal Emperors (1526-1707 A.D.). S.L. Agarwala. pp. 18–19.</ref><ref>Chaurasia, Radhey Shyam (2002). History of Medieval India: From 1000 A.D. to 1707 A.D. Atlantic Publishers & Dist. pp. 155–160. ISBN 978-81-269-0123-4</ref><ref>Sarda 1970, p. 84-87.</ref>
==== गुजरात पर विजय ====
इडर राज्य के उत्तराधिकार के सवाल पर, गुजरात के सुल्तान, मुजफ्फर शाह, और राणा ने कट्टर दावेदारों का समर्थन किया। 1520 में, सांगा ने इडर सिंहासन पर रायमल की स्थापना की, जिसके साथ मुजफ्फर शाह ने अपने सहयोगी भारमल को स्थापित करने के लिए एक सेना भेजी। सांगा खुद इडर पहुंचे और सुल्तान की सेना को पीछे कर दिया गया। राणा ने गुजराती सेना का पीछा किया और अहमदाबाद के रूप में सुल्तान की सेना का पीछा करते हुए गुजरात के अहमदनगर और विसनगर के शहरों को लूट लिया<ref>Hooja, Rima (2006). A History of Rajasthan. Rupa Publication. pp. 450–451.</ref>
==== लोदी पे विजय ====
{{मुख्य|खतोली का युद्ध}}
{{मुख्य|धौलपुर के युद्ध}}
[[इब्राहिम लोदी]] ने, अपने क्षेत्र पर संघ द्वारा अतिक्रमण की खबरें सुनने के बाद, एक सेना तैयार की और 1517 में [[मेवाड़]] के खिलाफ मार्च किया। राणा अपनी सेना के साथ राणा लोदी की सीमाओं पर [[खतोली]] में लोदी से मिले और खतोली में आगामी लड़ाई में, लोदी सेना को गंभीर चोट लगी। लोदी सेना बुरी तरह परास्त होकर भाग गई । एक लोदी राजकुमार को पकड़ लिया गया और कैद कर लिया गया। युद्ध में राणा स्वयं घायल हो गए थे।
[[इब्राहिम लोदी]] ने हार का बदला लेने के लिए, अपने सेनापति मियां माखन के तहत एक सेना संगा के खिलाफ भेजी। राणा ने फिर से बाड़ी [[धौलपुर के युद्ध|धौलपुर]] के पास बाड़ी युद्ध 1518 ई को लोदी सेना को परास्त किया और लोदी को बयाना तक पीछा किया। इन विजयों के बाद, संगा ने [[आगरा]] की लोदी राजधानी के भीतर, [[फतेहपुर सीकरी]] तक का इलाका खाली कर दिया। [[मालवा]] के सभी हिस्सों को जो मालवा सुल्तानों से लोदियों द्वारा कब्जा कर लिया गया था, को चंदेरी सहित संघ द्वारा रद्द कर दिया गया था। उन्होंने चंदेरी को मेदिनी राय को दिया।<ref>Chandra, Satish (2004). Medieval India: From Sultanat to the Mughals-Delhi Sultanat (1206-1526) - Part One. Har-Anand Publications. ISBN 978-81-241-1064-5.</ref><ref> Duff's Chronology of India, p. 271</ref>
==== मुगलों से संघर्ष ====
21 अप्रैल 1526 को, तैमूरिद राजा बाबर ने पांचवीं बार भारत पर आक्रमण किया और पानीपत की पहली लड़ाई में इब्राहिम लोधी को हराया और उसे मार डाला। युद्ध के बाद, संघ ने पृथ्वीराज कछवाह के बाद पहली बार कई राजपूत वंशों को एकजुट किया और 100,000 राजपूतों की एक सेना बनाई और आगरा के लिए उन्नत किया।
राणा साँगा ने पारंपरिक तरीके से लड़ते हुए मुग़ल रैंकों पर आरोप लगाया। उनकी सेना को बड़ी संख्या में मुगल बाहुबलियों द्वारा गोली मार दी गई, कस्तूरी के शोर ने राजपूत सेना के घोड़ों और हाथियों के बीच भय पैदा कर दिया, जिससे वे अपने स्वयं के लोगों को रौंदने लगे। राणा साँगा को मुग़ल केंद्र पर आक्रमण करना असंभव लग रहा था, उसने अपने आदमियों को मुग़ल गुटों पर हमला करने का आदेश दिया। दोनों गुटों में तीन घंटे तक लड़ाई जारी रही, इस दौरान मुगलों ने राजपूत रानियों पर कस्तूरी और तीर से फायर किया, जबकि राजपूतों ने केवल करीबियों में जवाबी कार्रवाई की। "पैगन सैनिकों के बैंड के बाद बैंड ने अपने पुरुषों की मदद करने के लिए एक दूसरे का अनुसरण किया, इसलिए हमने अपनी बारी में टुकड़ी को टुकड़ी के बाद उस तरफ हमारे लड़ाकू विमानों को मजबूत करने के लिए भेजा।" बाबर ने अपने प्रसिद्ध तालकामा या पीनिस आंदोलन का उपयोग करने के प्रयास किए, हालांकि उसके लोग इसे पूरा करने में असमर्थ थे, दो बार उन्होंने राजपूतों को पीछे धकेल दिया, लेकिन राजपूत घुड़सवारों के अथक हमलों के कारण वे अपने पदों से पीछे हटने के लिए मजबूर हो गए। लगभग इसी समय, रायसेन की सिल्हदी ने राणा की सेना को छोड़ दिया और बाबर के पास चली गई। सिल्हदी के दलबदल ने राणा को अपनी योजनाओं को बदलने और नए आदेश जारी करने के लिए मजबूर किया। इस दौरान, राणा को एक गोली लगी और वह बेहोश हो गया, जिससे राजपूत सेना में बहुत भ्रम पैदा हो गया और थोड़े समय के लिए लड़ाई में खामोश हो गया। बाबर ने अपने संस्मरणों में इस घटना को "एक घंटे के लिए अर्जित किए गए काफिरों के बीच बने रहने" की बात कहकर लिखा है। अजा नामक एक सरदार ने अजजा को राणा के रूप में काम किया और राजपूत सेना का नेतृत्व किया, जबकि राणा अपने भरोसेमंद लोगों के एक समूह द्वारा छिपा हुआ था। झल्ला अजा एक गरीब जनरल साबित हुआ, क्योंकि उसने अपने कमजोर केंद्र की अनदेखी करते हुए मुगल flanks पर हमले जारी रखे। राजपूतों ने अपने हमलों को जारी रखा लेकिन मुगल फ्लैक्स को तोड़ने में विफल रहे और उनका केंद्र गढ़वाले मुगल केंद्र के खिलाफ कुछ भी करने में असमर्थ था। जदुनाथ सरकार ने निम्नलिखित शब्दों में संघर्ष की व्याख्या की है:
राजपूतों और उनके सहयोगियों को हराया गया था, शवों को बयाना, अलवर और मेवात तक पाया जा सकता है। पीछा करने की लंबी लड़ाई के बाद मुग़ल बहुत थक गए थे और बाबर ने स्वयं मेवाड़ पर आक्रमण करने का विचार छोड़ दिया था।
अपनी जीत के बाद, बाबर ने दुश्मन की खोपड़ी के एक टॉवर को खड़ा करने का आदेश दिया, तैमूर ने अपने विरोधियों के खिलाफ, उनकी धार्मिक मान्यताओं के बावजूद, एक अभ्यास तैयार किया। चंद्रा के अनुसार, खोपड़ी का टॉवर बनाने का उद्देश्य सिर्फ एक महान जीत दर्ज करना नहीं था, बल्कि विरोधियों को आतंकित करना भी था। इससे पहले, उसी रणनीति का उपयोग बाबर ने बाजौर के अफगानों के खिलाफ किया था। पानीपत की तुलना में लड़ाई अधिक ऐतिहासिक थी क्योंकि इसने राजपूत शक्तियों को धमकी और पुनर्जीवित करते हुए उत्तर भारत के बाबर को निर्विवाद मास्टर बना दिया था।<ref>Duff's Chronology of India, p. 271</ref><ref>Percival Spear, p. 25</ref>
==== मृत्यु ====
केवी कृष्णा राव के अनुसार, राणा सांगा बाबर को उखाड़ फेंकना चाहते थे, क्योंकि वह उन्हें भारत में एक विदेशी शासक मानते थे और दिल्ली और आगरा पर कब्जा करके अपने क्षेत्रों का विस्तार करने के लिए, राणा को कुछ अफगान सरदारों ने समर्थन दिया था, जिन्हें लगता था कि बाबर का शासन था। उनके प्रति भ्रामक। राणा ने 21 फरवरी 1527 को मुगल अग्रिम पहरे पर हमला किया और इसे खत्म कर दिया। बाबर द्वारा भेजे गए पुनर्मूल्यांकन समान भाग्य से मिले। हालाँकि, 30 जनवरी 1528 को, सांगा की मृत्यु कालपी में हुई, जो कि अपने ही सरदारों द्वारा जहर देकर मारा गया था, जिन्होंने बाबर के साथ लड़ाई को आत्मघाती बनाने के लिए नए सिरे से योजना बनाई थी। महाराणा सांगा की समाधि दौसा जिले की बसवा तहसील में है। यह सुझाव दिया जाता है कि बाबर की तोपें नहीं थीं, हो सकता है कि सांगा ने बाबर के खिलाफ ऐतिहासिक जीत हासिल की हो। इतिहासकार प्रदीप बरुआ ने ध्यान दिया कि बाबर के तोपों ने भारतीय युद्ध में पुरानी प्रवृत्तियों को समाप्त कर दिया था।<ref>Rao, K. V. Krishna (1991). Prepare Or Perish: A Study of National Security. Lancer Publishers. p. 453. ISBN 978-81-7212-001-6.</ref><ref>Sharma, G.N. Mewar & Mughal Emperors. Agra. pp. 27–29.</ref>
=== महाराणा प्रताप सिंह सिसोदिया (1572-1597) ===
{{मुख्य|महाराणा प्रताप}}
'महाराणा प्रताप सिंह सिसोदिया' ( ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया रविवार विक्रम संवत १५९७ तदनुसार ९ मई १५४०–१९ जनवरी १५९७) (राज. 1572-1597) [[उदयपुर]], [[मेवाड़|मेवाड]] में [[सिसोदिया]] [[राजपूत]] राजवंश के राजा थे। उनका नाम [[इतिहास]] में वीरता और दृढ प्रण के लिये अमर है। उन्होंने मुगल सम्राट [[अकबर]] की अधीनता स्वीकार नहीं की और कई सालों तक संघर्ष किया। महाराणा प्रताप सिंह ने मुगलों को कईं बार युद्ध में भी हराया।
[[File:RajaRaviVarma MaharanaPratap.jpg|right|thumb|महाराणा प्रताप सिंह]]
==== जीवन ====
[[चित्र:Statue of Maharana Pratap of Mewar, commemorating the Battle of Haldighati, City Palace, Udaipur.jpg|right|thumb|348x348px|चेतक पर सवार राणा प्रताप की प्रतिमा (महाराणा प्रताप स्मारक समिति, मोती मगरी , [[उदयपुर]])]]
'''[[उदयसिंह द्वितीय|राणा उदयसिंह]]''' केे दूसरी रानी '''धीरबाई''' जिसे राज्य के इतिहास में रानी भटियाणी के नाम से जाना जाता है, यह अपने पुत्र कुंवर जगमाल को मेवाड़ का उत्तराधिकारी बनाना चाहती थी | प्रताप केे उत्तराधिकारी होने पर इसकेे विरोध स्वरूप जगमाल अकबर केे खेमे में चला जाता है। महाराणा प्रताप का प्रथम राज्याभिषेक मेंं 28 फरवरी, 1572 में [[गोगुन्दा]] में हुआ था, लेकिन विधि विधानस्वरूप राणा प्रताप का द्वितीय राज्याभिषेक 1572 ई. में ही [[कुम्भलगढ़ दुर्ग|कुुंभलगढ़़ दुुर्ग]] में हुआ, दुसरे राज्याभिषेक [[मेंडलीफ के पूर्वानुमानित तत्व|में]] [[जोधपुर]] का राठौड़ शासक [[राव चन्द्रसेन|राव चन्द्रसेेन]] भी उपस्थित थे।
महाराणा प्रताप के शासनकाल में सबसे रोचक तथ्य यह है कि [[मुग़ल साम्राज्य|मुगल सम्राट]] अकबर बिना युद्ध के प्रताप को अपने अधीन लाना चाहता था इसलिए अकबर ने प्रताप को समझाने के लिए चार राजदूत नियुक्त किए जिसमें–
# [[जलाल खाँ]] (सितम्बर 1572 ई.)
# [[राजा मान सिंह|मानसिंह]] (1573 ई. में )
#[[भगवानदास]] ( सितम्बर, 1573 ई. में )
#[[टोडरमल|राजा टोडरमल]] ( दिसम्बर,1573 ई. )
प्रताप को समझाने के लिए पहुँचे, लेकिन राणा प्रताप ने चारों को निराश किया, इस तरह राणा प्रताप ने मुगलों की अधीनता स्वीकार करने से मना कर दिया जिसके परिणामस्वरूप [[हल्दीघाटी का युद्ध|हल्दी घाटी का ऐतिहासिक युद्ध]] हुआ।<ref>{{Cite web|url=https://aajtak.intoday.in/education/story/10-facts-u-know-about-ruler-of-mewar-maharana-pratap-1-813191.html|title=महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़ी 10 बातें|website=aajtak.intoday.in|language=hi|access-date=2020-05-27|archive-url=https://web.archive.org/web/20200304163307/https://aajtak.intoday.in/education/story/10-facts-u-know-about-ruler-of-mewar-maharana-pratap-1-813191.html|archive-date=4 मार्च 2020|url-status=live}}</ref>
==== हल्दीघाटी का युद्ध (1576 ईस्वी) ====
{{मुख्य|हल्दीघाटी का युद्ध}}
[[चित्र:Chokha, Battle of Haldighati, painted 1822, detail.jpg|अंगूठाकार|291x291px|left|[[हल्दीघाटी का युद्ध|हल्दीघाटी के युद्ध]] में लड़ते हुए महाराणा।]]
यह युद्ध १८ जून १५७६ ईस्वी में मेवाड़ तथा मुगलों के मध्य हुआ था। इस युद्ध में मेवाड़ की सेना का नेतृत्व महाराणा प्रताप ने किया था। भील सेना के सरदार राणा पूंजा भील थे। इस युद्ध में महाराणा प्रताप की तरफ से लड़ने वाले एकमात्र मुस्लिम सरदार थे'''''-''''' [[हकीम खाँ सूरी]]।<ref>{{Cite web|url=https://aajtak.intoday.in/education/story/know-about-haldighati-war-and-maharana-pratap-bravery-stories-tedu-1-1010212.html|title=4 घंटे की लड़ाई थी हल्दीघाटी, राणा ने की थी मुगलों की हालत पतली|website=aajtak.intoday.in|language=hi|access-date=2020-05-27|archive-url=https://web.archive.org/web/20180618102121/https://aajtak.intoday.in/education/story/know-about-haldighati-war-and-maharana-pratap-bravery-stories-tedu-1-1010212.html|archive-date=18 जून 2018|url-status=live}}</ref>
लड़ाई का स्थल राजस्थान के गोगुन्दा के पास हल्दीघाटी में एक संकरा पहाड़ी दर्रा था। महाराणा प्रताप ने लगभग 3,000 घुड़सवारों और 400 भील धनुर्धारियों के बल को मैदान में उतारा। मुगलों का नेतृत्व [[राजा मान सिंह|आमेर के राजा मान सिंह]] ने किया था, जिन्होंने लगभग 5,000-10,000 लोगों की सेना की कमान संभाली थी। तीन घंटे से अधिक समय तक चले भयंकर युद्ध के बाद, [[महाराणा प्रताप]] ने खुद को जख्मी पाया जबकि उनके कुछ लोगों ने उन्हें समय दिया, वे पहाड़ियों से भागने में सफल रहे और एक और दिन लड़ने के लिए जीवित रहे। मेवाड़ के हताहतों की संख्या लगभग 1,600 पुरुषों की थी।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=qoRDAAAAYAAJ|title=Military History of India|last=Sarkar|first=Sir Jadunath|date=1960|publisher=Orient Longmans|year=|isbn=978-0-86125-155-1|location=|pages=|language=en|author-link=यदुनाथ सरकार}}</ref> मुगल सेना ने 3500-7800 लोगों को खो दिया, जिसमें 350 अन्य घायल हो गए। इसका कोई नतीजा नही निकला जबकि वे(मुगल) गोगुन्दा और आस-पास के क्षेत्रों पर कब्जा करने में सक्षम थे, वे लंबे समय तक उन पर पकड़ बनाने में असमर्थ थे। जैसे ही साम्राज्य का ध्यान कहीं और स्थानांतरित हुआ, [[महाराणा प्रताप|प्रताप]] और उनकी सेना बाहर आ गई और अपने प्रभुत्व के पश्चिमी क्षेत्रों को हटा लिया।<ref>{{Cite web|url=http://persian.packhum.org/persian/main?url=pf%3Ffile%3D00701023&ct=67|title=Wayback Machine|last=|first=|date=2017-09-13|website=web.archive.org|archive-url=https://web.archive.org/web/20170913231208/http://persian.packhum.org/persian/main?url=pf%3Ffile%3D00701023%26ct%3D67|archive-date=13 सितंबर 2017|dead-url=|access-date=2020-12-12|url-status=bot: unknown}}</ref>
इस युद्ध में मुगल सेना का नेतृत्व मानसिंह तथा आसफ खाँ ने किया। इस युद्ध का आँखों देखा वर्णन अब्दुल कादिर बदायूनीं ने किया। इस युद्ध को आसफ खाँ ने अप्रत्यक्ष रूप से जेहाद की संज्ञा दी। इस युद्ध मे [[राणा पूंजा]] [[भील]] का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस युद्ध में बींदा के झालामान ने अपने प्राणों का बलिदान करके महाराणा प्रताप के जीवन की रक्षा की। वहीं ग्वालियर नरेश 'राजा रामशाह तोमर' भी अपने तीन पुत्रों 'कुँवर शालीवाहन', 'कुँवर भवानी सिंह 'कुँवर प्रताप सिंह' और पौत्र बलभद्र सिंह एवं सैकडों वीर तोमर राजपूत योद्धाओं समेत चिरनिद्रा में सो गया।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books/about/Maharana_Pratap.html?id=K0UnRk-rRa4C|title=Maharana Pratap|last=Rana|first=Bhawan Singh|date=2005|publisher=Diamond Pocket Books (P) Ltd.|year=|isbn=978-81-288-0825-8|location=|pages=67-71|language=en}}</ref>
इतिहासकार मानते हैं कि इस युद्ध में कोई विजय नहीं हुआ। पर देखा जाए तो इस युद्ध में महाराणा प्रताप सिंह विजय हुए। अकबर की विशाल सेना के सामने मुट्ठीभर राजपूत कितनी देर तक टिक पाते, पर ऐसा कुछ नहीं हुआ, ये युद्ध पूरे एक दिन चला ओेैर राजपूतों ने मुग़लों के छक्के छुड़ा दिया थे और सबसे बड़ी बात यह है कि युद्ध आमने सामने लड़ा गया था। महाराणा की सेना ने मुगलों की सेना को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया था और मुगल सेना भागने लग गयी थी
==== दिवेर-छापली का युुद्ध (1582 ईस्वी)====
{{मुख्य|दिवेर-छापली का युद्ध}}
[[चित्र:Rana pratap Birla mandir 6 dec 2009 (43).JPG|349x349px|thumb|left|[[लक्ष्मी नारायण मंदिर, दिल्ली|बिरला मंदिर, दिल्ली]] में महाराणा प्रताप का शैल चित्र]]
राजस्थान के इतिहास 1582 में दिवेर का युद्ध एक महत्वपूर्ण युद्ध माना जाता है, क्योंकि इस युद्ध में राणा प्रताप के खोये हुए राज्यों की पुनः प्राप्ति हुई, इसके पश्चात राणा प्रताप व मुगलो के बीच एक लम्बा संघर्ष युद्ध के रुप में घटित हुआ, जिसके कारण कर्नल जेम्स टाॅड ने इस युद्ध को "''मेवाड़ का मैराथन''" कहा है।
मेवाड़ के उत्तरी छोर का दिवेर का नाका अन्य नाकों से विलक्षण है। इसकी स्थिति मदारिया और कुंभलगढ़ की पर्वत श्रेणी के बीच है। प्राचीन काल में इस पहाड़ी क्षेत्र में गुर्जर प्रतिहारों का आधिपत्य था, जिन्हें इस क्षेत्र में बसने के कारण मेर कहा जाता था।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books/about/Maharana_Pratap.html?id=cHFuAAAAMAAJ|title=Maharana Pratap|last=Bhatt|first=Rajendra Shankar|date=2005|publisher=National Book Trust, India|year=|isbn=978-81-237-4339-4|location=|pages=177|language=en}}</ref> यहां की उत्पत्यकाताओं में इस जाति के निवास स्थलों के कई अवशेष हैं। मध्यकालीन युग में देवड़ा जाति के राजपूत यहां प्रभावशील हो गये, जिनकी बस्तियां आसपास के उपजाऊ भागों में बस गई और वे उदयपुर के निकट भीतरी गिर्वा तक प्रसारित हो गई। चीकली के पहाड़ी भागों में आज भी देवड़ा राजपूत बड़ी संख्या में बसे हुए हैं। देवड़ाओं के पश्चात यहां रावत शाखा के राजपूत बस गये।<ref>भवान सिंह राणा द्वारा ''"महाराणा प्रताप"''. p.81 {{ISBN|978-8128808258}}</ref>
इन विभिन्न समुदायों के दिवेर में बसने के कई कारण थे। प्रथम तो दिवेर का एक सामरिक महत्व रहा है, जो समुदाय शौर्य के लिए प्रसिद्ध रहे हैं, वे उत्तरोत्तर अपने पराक्रम के कारण यहां बसते रहे और एक-दूसरे पर प्रभाव स्थापित करते रहे। दूसरा महत्वपूर्ण कारण यह रहा कि इसकी स्थिति ऐसे मार्गों पर है, जहां से मारवाड़, मालवा, गुजरात, अजमेर के आदान-प्रदान की सुविधा रही है। ये मार्ग तंग घाटियों वाले उबड़-खाबड़ मार्ग के रूप में आज भी देखे जा सकते हैं। इनके साथ सदियों से आवागमन होने से घोड़ों की टापों के चिन्ह पत्थरों पर अद्यावधि विद्यमान है। मार्गों में पानी की भी कमी नहीं है, जिसके लिये जगह-जगह झरनों के बांध के अवशेष दृष्टिगोचर होते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से स्थान-स्थान पर चौकियों के ध्वंसाशेष भी दिखाई देते हैं। जब अकबर ने कुंभलगढ़, देवगढ़, मदारिया आदि स्थानों पर कब्जा कर लिया तो वहां की चौकियों से संबंध बनाए रखने के लिए दिवेर का चयन एक रक्षा स्थल के रूप में किया गया। यहां बड़ी संख्या में घुड़सवारों और हाथियों का दल रखा गया। इंतर चौकियों के लिए रसद भिजवाने का भी यह सुगम स्थान था।<ref>{{Cite web|url=https://www.goodreads.com/work/best_book/25072560-a-history-of-the-modern-world|title=A History Of The Modern World|website=www.goodreads.com|access-date=2020-11-24}}</ref>
ज्यों महाराणा प्रताप छप्पन के पहाड़ी स्थानों में बस्तियां बसाने और मेवाड़ के समतल भागों में खेतों को उजाड़ने में व्यस्त थे त्यों अकबर दिवेर के मार्ग से उत्तरी सैनिक चौकियों का पोषण भेजने की व्यवस्था में संलग्न रहा। प्रताप की नीतियों छप्पन की चौकियों को हटाने में तथा मध्यभागीय मेवाड़ की चौकियों को निर्बल बनाने में अवश्य सफल हो गये, परंतु दिवेर का केंद्र अब भी मुगलों के लिए सुदृढ़ था।<ref>{{Cite web|url=http://www.tourism.rajasthan.gov.in/content/dam/rajasthan-tourism/english/pdf/tender-pdf/61.pdf|title="राजस्थान का पर्यटन"|last=प्रभारी|first=निदेशक|date=2017|website=[[राजस्थान सरकार]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20211228001025/https://www.tourism.rajasthan.gov.in/content/dam/rajasthan-tourism/english/pdf/tender-pdf/61.pdf|archive-date=28 दिसंबर 2021|dead-url=|access-date=2020-11-24|url-status=bot: unknown}}</ref>
इस पृष्ठभूमि में दिवेर का महाराणा प्रताप का व मुगलों का संघर्ष जुड़ा हुआ था। इस युद्ध की तैयारी के लिए प्रताप ने अपनी शक्ति सुदृढ़ करने की नई योजना तैयार की। वैसे छप्पन का क्षेत्र मुगल से युक्त हो चला था और मध्य मेवाड़ में रसद के अभाव में मुगल चौकियां निष्प्राण हो गई थी अब केवल उत्तरी मेवाड़ में मुगल चौकियां व दिवेर के संबंध में कदम उठाने की आवश्यकता थी।
इस संबंध में महाराणा ने गुजरात और मालवा की ओर अपने अभियान भेजना आरंभ किया और साथ ही आसपास के मुगल अधिकार क्षेत्र में छापे मारना शुरू कर दिया। इसी क्रम में [[भामाशाह]] ने, जो मेवाड़ के प्रधान और सैनिक व्यवस्था के अग्रणी थे, मालवे पर चढ़ाई कर दी और वहां से 2.3 लाख रुपए और 20 हजार अशर्फियां दंड में लेकर एक बड़ी धनराशि इकट्ठी की। इस रकम को लाकर उन्होंने महाराणा को चूलिया ग्राम में समर्पित कर दी। इसी दौरान जब शाहबाज खां निराश होकर लौट गया था, तो महाराणा ने कुंभलगढ़ और मदारिया के मुगली थानों पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया। इन दोनों स्थानों पर महाराणा का अधिकार होना दिवेर पर कब्जा करने की योजना का संकेत था।<ref>{{Cite web|url=http://hindi.webdunia.com/indian-history-and-culture/history-of-maharana-pratap-and-battle-of-dewar-marathon-of-mewad-118062600044_1.html|title=दिवेर का महायुद्ध, हल्दीघाटी के बाद यहां महाराणा प्रताप ने हराया था मुगल सेना को, कहा जाता है 'मैराथन ऑफ मेवाड़'...|last=WD|website=hindi.webdunia.com|language=hi|access-date=2020-11-24}}</ref>
अतएव इस दिशा में सफलता प्राप्त करने के लिए नई सेना का संगठन किया गया। जगह-जगह रसद और हथियार इकट्ठे किए गए। सैनिकों को धन और सुविधाएं उपलब्ध कराई गई। सिरोही, ईडर, जालोर के सहयोगियों का उत्साह परिवर्धित कराया गया। ये सभी प्रबंध गुप्त रीति से होते रहे। मुगलों को यह भ्रम हो गया कि प्रताप मेवाड़ छोड़कर अन्यत्र जा रहे हैं। ऐसे भ्रम के वातावरण से बची हुई मुगल चौकियों के सैनिक बेखटके रहने लगे।<ref>{{Cite web|url=https://link.springer.com/openurl?genre=book&isbn=978-1-349-27193-1|title=Defending India {{!}} SpringerLink|website=link.springer.com|language=en-gb|access-date=2020-11-24}}</ref> जब सब प्रकार की तैयारी हो गई तो महाराणा प्रताप, [[अमर सिंह प्रथम|कु. अमरसिंह]], [[भामाशाह]], चुंडावत, शक्तावत, [[सोलंकी वंश|सोलंकी]], [[परिहार गोत्र|पडिहार,]] [[रावत]] शाखा के [[राजपूत]] और अन्य राजपूत सरदार दिवेर की ओर दल बल के साथ चल पड़े।{{Sfn|Jacques|2006|p=89-90}} दिवेर जाने के अन्य मार्गों व घाटियों में भीलों की टोलियां बिठा दी गई, जिससे मेवाड़ में अन्यत्र बची हुई सैनिक चौकियों का दिवेर से कोई संबंध स्थापित न हो सके।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/india/story/maharana-pratap-not-akbar-won-battle-of-haldighati-rajasthan-history-book-1026240-2017-07-25|title=Rajasthan rewrites history: Maharana Pratap, not Akbar, won Battle of Haldighati|last=JaipurJuly 25|first=Sharat Kumar|last2=July 25|first2=2017UPDATED:|website=India Today|language=en|access-date=2020-11-24|last3=Ist|first3=2017 21:58}}</ref>
[[चित्र:Maha Rana Pratap Singh.jpg|अंगूठाकार|392x392पिक्सेल|महाराणा प्रताप चित्र।]]
अचानक महाराणा की फौज दिवेर पहुंची तो मुगल दल में भगदड़ मच गई। मुगल सैनिक घाटी छोड़कर मैदानी भाग की तलाश में उत्तर के दर्रे से भागने लगे। महाराणा ने अपने दल के साथ भागती सेना का पीछा किया। घाटी का मार्ग इतना कंटीला तथा ऊबड़-खाबड़ था कि मैदानी युद्ध में अभ्यस्त मुगल सैनिक विथकित हो गए। अन्ततोगत्वा घाटी के दूसरे छोर पर जहां कुछ चौड़ाई थी और नदी का स्त्रोत भी था, वहां महाराणा ने उन्हें जा दबोचा।<ref>{{cite web|title=महाराणा प्रताप सिंह|url=http://www.badaunexpress.com/archives/148102|website=www.badaunaexpress.com|accessdate=9 May 2019}}{{Dead link|date=दिसंबर 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> दिवेर थाने के मुगल अधिकारी सुल्तानखां को कुं. अमरसिंह ने जा घेरा और उस पर भाले का ऐसा वार किया कि वह सुल्तानखां को चीरता हुआ घोड़े के शरीर को पार कर गया। घोड़े और सवार के प्राण पखेरू उड़ गए। महाराणा ने भी इसी तरह बहलोलखां और उसके घोड़े का काम तमाम कर दिया। एक राजपूत सरदार ने अपनी तलवार से हाथी का पिछला पांव काट दिया। इस युद्ध में विजयश्री महाराणा के हाथ लगी।<ref>{{Cite book|url=http://m.friendfeed-media.com/6e9ec7f58014456d2d5fd015cc8af9d2974509c0|title=History of battles and seiges|last=Jacques|first=Tony|publisher=|year=2006|isbn=978-0-313-33536-5|location=|pages=|archive-url=https://web.archive.org/web/20150626120848/http://m.friendfeed-media.com/6e9ec7f58014456d2d5fd015cc8af9d2974509c0|archive-date=2015-07-23}}</ref>
यह महाराणा की विजय इतनी कारगर सिद्ध हुई कि इससे मुगल थाने जो सक्रिय या निष्क्रिय अवस्था में मेवाड़ में थे जिनकी संख्या 36 बतलाई जाती है, यहां से उठ गए। शाही सेना जो यत्र-तत्र कैदियों की तरह पडी हुई थी, लड़ती, भिड़ती, भूखे मरते उलटे पांव मुगल इलाकों की तरफ भाग खड़ी हुई।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books/about/Maharana_Pratap.html?id=QjtuAAAAMAAJ|title=Maharana Pratap|last=Sharma|first=Sri Ram|date=1900|publisher=D. A.-V. College Managing Committee|year=|isbn=|location=|pages=117-156|language=en}}</ref> यहां तक कि 1585 ई. के आगे अकबर भी उत्तर - पश्चिम की समस्या के कारण मेवाड़ के प्रति उदासीन हो गया, जिससे महाराणा को अब चावंड में नवीन राजधानी बनाकर लोकहित में जुटने का अच्छा अवसर मिला। दिवेर की विजय महाराणा के जीवन का एक उज्ज्वल कीर्तिमान है। जहां हल्दीघाटी का युद्ध नैतिक विजय और परीक्षण का युद्ध था, वहां दिवेर-छापली का युद्ध एक निर्णायक युद्ध बना। इसी विजय के फलस्वरूप संपूर्ण मेवाड़ पर महाराणा का अधिकार स्थापित हो गया। एक अर्थ में हल्दीघाटी का युद्ध में राजपूतो ने रक्त का बदला दिवेर में चुकाया। दिवेर की विजय ने यह प्रमाणित कर दिया कि महाराणा का शौर्य, संकल्प और वंश गौरव अकाट्य और अमिट है, इस युद्ध ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि महाराणा के त्याग और बलिदान की भावना के नैतिक बल ने सत्तावादी नीति को परास्त किया। कर्नल टाॅड ने जहां हल्दीघाटी को 'थर्मोपाली' कहा है वहां के युद्ध को 'मेरोथान' की संज्ञा दी है।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books/about/Maharana_Pratap.html?id=EAl6rgEACAAJ|title=Maharana Pratap|last=Kumar|first=Ajay|date=2007|publisher=|year=|isbn=978-81-88594-18-4|location=|pages=102|language=en}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books/about/Maharana_Pratap.html?id=cHFuAAAAMAAJ|title=Maharana Pratap|last=Bhatt|first=Rajendra Shankar|date=2005|publisher=National Book Trust, India|year=|isbn=978-81-237-4339-4|location=|pages=256-267|language=en}}</ref> जिस प्रकार एथेन्स जैसी छोटी इकाई ने फारस की बलवती शक्ति को 'मेरोथन' में पराजित किया था, उसी प्रकार मेवाड़ जैसे छोटे राज्य ने मुगल राज्य के वृहत सैन्यबल को दिवेर में परास्त किया। महाराणा की दिवेर विजय की दास्तान सर्वदा हमारे देश की प्रेरणा स्रोत बनी रहेगी।<ref>{{Cite web|url=https://www.linkedin.com/pulse/legacy-indias-maharana-pratap-lives-today-stephen-manallack#:~:text=When%20Maharana%20Pratap%20(also%20known,custodians%20of%20this%20great%20lineage.|title=The legacy of India's Maharana Pratap lives on today|website=www.linkedin.com|access-date=2020-11-24}}</ref>
==== सफलता और अवसान ====
पू. 1579 से 1585 तक पूर्वी उत्तर प्रदेश, बंगाल, बिहार और गुजरात के मुग़ल अधिकृत प्रदेशों में विद्रोह होने लगे थे और महाराणा भी एक के बाद एक गढ़ जीतते जा रहे थे अतः परिणामस्वरूप अकबर उस विद्रोह को दबाने में उल्झा रहा और मेवाड़ पर से मुगलो का दबाव कम हो गया। इस बात का लाभ उठाकर महाराणा ने 1585ई. में मेवाड़ मुक्ति प्रयत्नों को और भी तेज कर दिया। महाराणा जी की सेना ने मुगल चौकियों पर आक्रमण शुरू कर दिए और तुरंत ही उदयपूर समेत 36 महत्वपूर्ण स्थान पर फिर से महाराणा का अधिकार स्थापित हो गया।<ref>{{Cite web|url=https://zeenews.india.com/culture/maharana-pratap-jayanti-lesser-known-facts-about-the-fearless-warrior-2282205.html|title=Maharana Pratap Jayanti: Lesser known facts about the fearless warrior|last=|first=|date=2020-05-09|website=Zee News|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20200601000000/https://zeenews.india.com/culture/maharana-pratap-jayanti-lesser-known-facts-about-the-fearless-warrior-2282205.html|archive-date=2020-06-01|dead-url=|access-date=2020-12-07}}</ref>
महाराणा प्रताप ने जिस समय सिंहासन ग्रहण किया , उस समय जितने मेवाड़ की भूमि पर उनका अधिकार था, पूर्ण रूप से उतने ही भूमि भाग पर अब उनकी सत्ता फिर से स्थापित हो गई थी। बारह वर्ष के संघर्ष के बाद भी अकबर उसमें कोई परिवर्तन न कर सका। और इस तरह महाराणा प्रताप समय की लंबी अवधि के संघर्ष के बाद मेवाड़ को मुक्त करने में सफल रहे और ये समय मेवाड़ के लिए एक स्वर्ण युग साबित हुआ। मेवाड़ पर लगा हुआ अकबर ग्रहण का अंत 1585 ई. में हुआ। उसके बाद महाराणा प्रताप उनके राज्य की सुख-सुविधा में जुट गए, परंतु दुर्भाग्य से उसके ग्यारह वर्ष के बाद ही 19 जनवरी 1597 में अपनी नई राजधानी [[चावंड]] में उनकी मृत्यु हो गई।<ref name=":0">{{Cite web|url=http://hindi.webdunia.com/indian-history-and-culture/history-of-maharana-pratap-in-hindi-115052100030_1.html|title=मेवाड़ का वीर योद्धा महाराणा प्रताप {{!}} history of maharana pratap in hindi|last=Webdunia|website=hindi.webdunia.com|language=hi|archive-url=https://web.archive.org/web/20190728185404/http://hindi.webdunia.com/indian-history-and-culture/history-of-maharana-pratap-in-hindi-115052100030_1.html|archive-date=28 जुलाई 2019|access-date=2020-05-30|url-status=dead}}</ref>
महाराणा प्रताप सिंह के डर से अकबर अपनी राजधानी लाहौर लेकर चला गया और महाराणा के स्वर्ग सिधारने के बाद आगरा ले आया।<ref>{{Cite news|url=https://www.bbc.com/hindi/india-46585144|title=हिंदू-मुसलमान की लड़ाई नहीं थी अकबर और महाराणा प्रताप के बीच|last=फ़ज़ल|first=रेहान|date=2018-12-17|work=BBC News हिंदी|access-date=2020-05-30|language=hi|archive-url=https://web.archive.org/web/20200517194326/https://www.bbc.com/hindi/india-46585144|archive-date=17 मई 2020|url-status=live}}</ref>
'''एक सच्चे राजपूत, शूरवीर, देशभक्त, योद्धा, मातृभूमि के रखवाले के रूप में महाराणा प्रताप दुनिया में सदैव के लिए अमर हो गए। ''
==== कुछ महत्वपूर्ण तथ्य ====
इतिहासकार [[विजय नाहर]] की पुस्तक हिन्दुवा सूर्य महाराणा प्रताप के अनुसार कुछ तथ्य उजागर हुए।<ref>{{Cite book|author=विजय नाहर|title=हिन्दुवा सूर्य महाराणा प्रताप|publisher=पिंकसिटी पब्लिशर्स| isbn=978-93-80522-45-6|year=2011|page= 270}}</ref>
1 .महाराणा उदय सिंह ने युद्ध की नयी पद्धति -छापा मार युद्ध प्रणाली इजाद की। वे स्वयं तो इसका प्रयोग नहीं कर सके परन्तु महाराणा प्रताप ,महाराणा राज सिंह एवं छत्रपति शिवाजी महाराज ने इसका सफल प्रयोग करते हुए मुगलों पर सफलता प्राप्त की ।<ref>{{cite web|title=महाराणा प्रताप के विषय में भारतीय इतिहास में लिखी भ्रांतियों को दूर करती विजय नाहर की पुस्तक "हिंदुवा सूर्य महाराणा प्रताप" की समीक्षा|url=https://udaipurkiran.in/hindi/1208578/|website=www.udaipurkiran.in|accessdate=9 May 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190509155336/https://udaipurkiran.in/hindi/1208578/|archive-date=9 मई 2019|url-status=dead}}</ref>
2. महाराणा प्रताप मुग़ल सम्राट अकबर से नहीं हारे। उसे एवं उसके सेनापतियो को धुल चटाई । हल्दीघाटी के युद्ध में प्रताप जीते|महाराणा प्रताप के विरुद्ध हल्दीघाटी में पराजित होने के बाद स्वयं अकबर ने जून से दिसंबर 1576 तक तीन बार विशाल सेना के साथ महाराणा पर आक्रमण किए, परंतु महाराणा को खोज नहीं पाए, बल्कि महाराणा के जाल में फंसकर पानी भोजन के अभाव में सेना का विनाश करवा बैठे। थक हारकर अकबर बांसवाड़ा होकर मालवा चला गया। पूरे सात माह मेवाड़ में रहने के बाद भी हाथ मलता अरब चला गया। शाहबाज खान के नेतृत्व में महाराणा के विरुद्ध तीन बार सेना भेजी गई परंतु असफल रहा। उसके बाद अब्दुल रहीम खान-खाना के नेतृत्व में महाराणा के विरुद्ध सेना भिजवाई गई और पीट-पीटाकर लौट गया। 9 वर्ष तक निरंतर अकबर पूरी शक्ति से महाराणा के विरुद्ध आक्रमण करता रहा। नुकसान उठाता रहा अंत में थक हार कर उसने मेवाड़ की और देखना ही छोड़ दिया।<ref>{{cite web|title="हिंदुवा सूर्य महाराणा प्रताप" की समीक्षा|url=https://m.dailyhunt.in/news/india/hindi/udaipur+kiran+hindi-epaper-udaihin/maharana+pratap+ke+vishay+me+bharatiy+itihas+me+likhi+bhrantiyo+ko+dur+karati+vijay+nahar+ki+pustak+hinduva+sury+maharana+pratap+ki+samiksha-newsid-115840604?listname=topicsList&index=0&topicIndex=0&mode=pwa|website=www.m.dailyhunt.in|accessdate=9 May 2019}}</ref>
3. ऐसा कुअवसर प्रताप के जीवन में कभी नहीं आया कि उन्हें घांस की रोटी खानी पड़ी अकबर को संधि के लिए पत्र लिखना पड़ा हो। इन्हीं दिनों महाराणा प्रताप ने सुंगा पहाड़ पर एक बावड़ी का निर्माण करवाया और सुंदर बगीचा लगवाया| महाराणा की सेना में एक राजा, तीन राव, सात रावत, 15000 अश्वरोही, 100 हाथी, 20000 पैदल और 100 वाजित्र थे। इतनी बड़ी सेना को खाद्य सहित सभी व्यवस्थाएं महाराणा प्रताप करते थे। फिर ऐसी घटना कैसे हो सकती है कि महाराणा के परिवार को घांस की रोटी खानी पड़ी। अपने उतरार्ध के बारह वर्ष सम्पूर्ण मेवाड़ पर शुशाशन स्थापित करते हुए उन्नत जीवन दिया ।<ref>{{cite web|title=महाराणा प्रताप के विषय में भारतीय इतिहास में लिखी भ्रांतियों को दूर करती विजय नाहर की पुस्तक "हिंदुवा सूर्य महाराणा प्रताप" की समीक्षा|url=https://hindi.dailykiran.com/1103917/|website=www.hindi.dailykiran.com|access-date=9 May 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190510052152/https://hindi.dailykiran.com/1103917/|archive-date=10 मई 2019|url-status=dead}}</ref>
==इन्हें भी देखें==
* [[मेवाड़]]
* [[हल्दीघाटी का युद्ध]]
* [[दिवेर-छापली का युद्ध]]
* [[महाराणा प्रताप]]
* [[गोहिल राजवंश]]
* [[उदयपुर रियासत]]
* [[सिसोदिया (राजपूत)]]
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:भारत के राजवंश]]
[[श्रेणी:राजस्थान का इतिहास]]
68nzmc5mnicdcqjdmz059e106pbxku8
तात्पर्य निरूपण
0
953925
6591509
4623179
2026-07-24T08:48:37Z
Amherst99
19940
/* */
6591509
wikitext
text/x-wiki
'''शास्त्र तात्पर्य निरूपण''' या '''तात्पर्य निरूपण''' (exegesis ; /ˌɛksɪˈdʒiːsɪs/) से तात्पर्य किसी ग्रन्थ (मुख्यतः धार्मिक ग्रन्थ) की समालोचनात्मक व्याख्या से है। परम्परागत रूप से 'एक्सीजीसिस' शब्द का उपयोग [[बाइबल]] के तात्पर्यनिरूपण से रहा है किन्तु आधुनिक काल में इसमें अन्य ग्रन्थों का तात्पर्यनिरूपण भी सम्मिलित किया जाता है।
==सन्दर्भ==
[[श्रेणी:बाइबल]]
s8p2vxdf8sw4z64ky6ftdopvkstidh0
कल्ब अली ख़ान वहादूर
0
981157
6591346
6591294
2026-07-23T14:27:13Z
Mundhalia746
934684
6591346
wikitext
text/x-wiki
[[File:Sir Kalb Ali Khan, Nawab of Rampur (1832-1887).jpg|200px|right|thumb|''सर कल्ब अली खान'', [[रामपुर, उत्तर प्रदेश|रामपुर]] के [[नवाब]]।]]
'''हाजी [[नवाब]] कल्ब अली ख़ान बहादुर''' (1832 – 23 मार्च 1887) १८६५ से १८८७ तक रामपुर के नवाब थे।<ref>{{Cite web |url=http://www.bl.uk/onlinegallery/onlineex/apac/photocoll/r/019pho000000127u00014000.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=24 नवंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180705100436/http://www.bl.uk/onlinegallery/onlineex/apac/photocoll/r/019pho000000127u00014000.html |archive-date=5 जुलाई 2018 |url-status=live }}</ref>
हाजी नवाब कल्ब अली ख़ान बहादुर का जन्म 1832 में हुआ और वे 1865 से 1887 तक रामपुर रियासत के नवाब थे। अपने पिता, सर नवाब युसुफ अली ख़ान बहादुर के बाद गद्दी संभालने पर, उन्होंने अपने पिता के कामों को आगे बढ़ाया। उन्होंने रामपुर लाइब्रेरी का विस्तार किया, जामा मस्जिद बनवाई और शिक्षा, सिंचाई, वास्तुकला, साहित्य और कला के प्रसार को बढ़ावा दिया। एक काबिल शासक होने के साथ-साथ, सर कल्ब अली खान अरबी और फ़ारसी भाषाओं के अच्छे जानकार थे और उन्होंने पूरे भारत और इस्लामी दुनिया के विद्वानों को संरक्षण दिया। नवाब कल्ब अली खान का महत्वपूर्ण योगदान 13वीं शताब्दी के प्रसिद्ध फारसी कवि शेख सादी की पुस्तक "करीमा "का देवनागरी ब्रज भाषा में कवि बलदेव दास चौबे शाहबाद रामपुर निवासी से आग्रह करके अनुवाद कराना था । यह अनुवाद दोहे और चौपाई यों के माध्यम से बहुत सुंदर रीति से 28 पृष्ठ में सन 1873 ईस्वी में बरेली रुहेलखंड लिटरेरी सोसायटी की प्रेस में छापा गया। वे उर्दू भाषा के लेखक, निबंधकार और ग़ज़लकार भी थे।
वे 1878 से अपनी मृत्यु तक जॉन लॉरेंस की प्रशासनिक परिषद के सदस्य रहे, उन्होंने महारानी विक्टोरिया के दिल्ली दरबार में भाग लिया और उन्हें 17 तोपों की सलामी का सम्मान मिला। 1887 में 55 वर्ष की आयु में उनके निधन के बाद, उनके पुत्र मुहम्मद मुश्ताक अली खान बहादुर उनके उत्तराधिकारी बने।
==सन्दर्भ==
{{reflist}}
[[श्रेणी:1832 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:भारत के नवाब]]
[[श्रेणी:१८८७ में निधन]]
5geyzli2fv0hq6mfbtlxv35r9ndsr04
6591347
6591346
2026-07-23T14:38:38Z
Mundhalia746
934684
6591347
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox royalty
| name = कल्ब अली ख़ान बहादुर
| title =[[रामपुर रियासत]] के [[नवाब]]
| image = Sir Kalb Ali Khan, Nawab of Rampur (1832-1887).jpg
| caption = नवाब कल्ब अली ख़ान बहादुर
| reign = 1855–1865
| full name = हाजी नवाब कल्ब अली ख़ान बहादुर
| predecessor = [[युसुफ अली ख़ान बहादुर]]
| successor = [[मुहम्मद मुश्ताक अली ख़ान बहादुर|मुहम्मद मुश्ताक अली ख़ान बहादुर]]
| house = रामपुर
| dynasty = [[रोहिल्ला वंश]]
| father = [[युसुफ अली ख़ान बहादुर]]
| birth_date = 1832
| birth_place = [[रामपुर]], [[उत्तर प्रदेश]]
| death_date = 23 मार्च 1887
| death_place = [[रामपुर]], [[उत्तर प्रदेश]]
|}}
'''हाजी [[नवाब]] कल्ब अली ख़ान बहादुर''' का जन्म 1832 में हुआ और वे 1865 से 1887 तक रामपुर रियासत के नवाब थे।<ref>{{Cite web |url=http://www.bl.uk/onlinegallery/onlineex/apac/photocoll/r/019pho000000127u00014000.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=24 नवंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180705100436/http://www.bl.uk/onlinegallery/onlineex/apac/photocoll/r/019pho000000127u00014000.html |archive-date=5 जुलाई 2018 |url-status=live }}</ref> अपने पिता, सर नवाब युसुफ अली ख़ान बहादुर के बाद गद्दी संभालने पर, उन्होंने अपने पिता के कामों को आगे बढ़ाया। उन्होंने रामपुर लाइब्रेरी का विस्तार किया, जामा मस्जिद बनवाई और शिक्षा, सिंचाई, वास्तुकला, साहित्य और कला के प्रसार को बढ़ावा दिया। एक काबिल शासक होने के साथ-साथ, सर कल्ब अली खान अरबी और फ़ारसी भाषाओं के अच्छे जानकार थे और उन्होंने पूरे भारत और इस्लामी दुनिया के विद्वानों को संरक्षण दिया। नवाब कल्ब अली खान का महत्वपूर्ण योगदान 13वीं शताब्दी के प्रसिद्ध फारसी कवि शेख सादी की पुस्तक "करीमा "का देवनागरी ब्रज भाषा में कवि बलदेव दास चौबे शाहबाद रामपुर निवासी से आग्रह करके अनुवाद कराना था । यह अनुवाद दोहे और चौपाई यों के माध्यम से बहुत सुंदर रीति से 28 पृष्ठ में सन 1873 ईस्वी में बरेली रुहेलखंड लिटरेरी सोसायटी की प्रेस में छापा गया। वे उर्दू भाषा के लेखक, निबंधकार और ग़ज़लकार भी थे।
वे 1878 से अपनी मृत्यु तक जॉन लॉरेंस की प्रशासनिक परिषद के सदस्य रहे, उन्होंने महारानी विक्टोरिया के दिल्ली दरबार में भाग लिया और उन्हें 17 तोपों की सलामी का सम्मान मिला। 1887 में 55 वर्ष की आयु में उनके निधन के बाद, उनके पुत्र मुहम्मद मुश्ताक अली खान बहादुर उनके उत्तराधिकारी बने।
==सन्दर्भ==
{{reflist}}
[[श्रेणी:1832 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:भारत के नवाब]]
[[श्रेणी:१८८७ में निधन]]
391zwtfw9yl48ajgvqe89msuqiwel34
6591348
6591347
2026-07-23T14:41:32Z
Mundhalia746
934684
6591348
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox royalty
| name = कल्ब अली ख़ान बहादुर
| title =[[रामपुर रियासत]] के [[नवाब]]
| image = Sir Kalb Ali Khan, Nawab of Rampur (1832-1887).jpg
| caption = नवाब कल्ब अली ख़ान बहादुर
| reign = 1855–1865
| full name = हाजी नवाब कल्ब अली ख़ान बहादुर
| predecessor = [[युसुफ अली ख़ान बहादुर]]
| successor = [[मुहम्मद मुश्ताक अली ख़ान बहादुर|मुहम्मद मुश्ताक अली ख़ान बहादुर]]
| house = रामपुर
| dynasty = [[रोहिल्ला वंश]]
| father = [[युसुफ अली ख़ान बहादुर]]
| birth_date = 1832
| birth_place = [[रामपुर]], [[उत्तर प्रदेश]]
| death_date = 23 मार्च 1887
| death_place = [[रामपुर]], [[उत्तर प्रदेश]]
|}}
'''हाजी [[नवाब]] कल्ब अली ख़ान बहादुर''' का जन्म 1832 में हुआ और वे 1865 से 1887 तक रामपुर रियासत के नवाब थे।<ref>{{Cite web |url=http://www.bl.uk/onlinegallery/onlineex/apac/photocoll/r/019pho000000127u00014000.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=24 नवंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180705100436/http://www.bl.uk/onlinegallery/onlineex/apac/photocoll/r/019pho000000127u00014000.html |archive-date=5 जुलाई 2018 |url-status=live }}</ref> अपने पिता, सर नवाब [[युसुफ अली ख़ान बहादुर]] के बाद गद्दी संभालने पर, उन्होंने अपने पिता के कामों को आगे बढ़ाया। उन्होंने रामपुर लाइब्रेरी का विस्तार किया, जामा मस्जिद बनवाई और शिक्षा, सिंचाई, वास्तुकला, साहित्य और कला के प्रसार को बढ़ावा दिया। एक काबिल शासक होने के साथ-साथ, सर कल्ब अली खान अरबी और फ़ारसी भाषाओं के अच्छे जानकार थे और उन्होंने पूरे भारत और इस्लामी दुनिया के विद्वानों को संरक्षण दिया। नवाब कल्ब अली खान का महत्वपूर्ण योगदान 13वीं शताब्दी के प्रसिद्ध फारसी कवि शेख सादी की पुस्तक "करीमा "का देवनागरी ब्रज भाषा में कवि बलदेव दास चौबे शाहबाद रामपुर निवासी से आग्रह करके अनुवाद कराना था । यह अनुवाद दोहे और चौपाई यों के माध्यम से बहुत सुंदर रीति से 28 पृष्ठ में सन 1873 ईस्वी में बरेली रुहेलखंड लिटरेरी सोसायटी की प्रेस में छापा गया। वे उर्दू भाषा के लेखक, निबंधकार और ग़ज़लकार भी थे।
वे 1878 से अपनी मृत्यु तक [[जॉन लॉरेंस]] की प्रशासनिक परिषद के सदस्य रहे, उन्होंने [[विक्टोरिया|महारानी विक्टोरिया]] के [[दिल्ली दरबार]] में भाग लिया और उन्हें 17 तोपों की सलामी का सम्मान मिला। 1887 में 55 वर्ष की आयु में उनके निधन के बाद, उनके पुत्र मुहम्मद मुश्ताक अली खान बहादुर उनके उत्तराधिकारी बने।
==सन्दर्भ==
{{reflist}}
[[श्रेणी:1832 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:भारत के नवाब]]
[[श्रेणी:१८८७ में निधन]]
3lnzzbyyuku8nokar7o9vhxg9fmmpab
6591349
6591348
2026-07-23T14:44:01Z
Mundhalia746
934684
6591349
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox royalty
| name = कल्ब अली ख़ान बहादुर
| title =[[रामपुर रियासत]] के [[नवाब]]
| image = Sir Kalb Ali Khan, Nawab of Rampur (1832-1887).jpg
| caption = नवाब कल्ब अली ख़ान बहादुर
| reign = 1865–1887
| full name = हाजी नवाब कल्ब अली ख़ान बहादुर
| predecessor = [[युसुफ अली ख़ान बहादुर]]
| successor = [[मुहम्मद मुश्ताक अली ख़ान बहादुर|मुहम्मद मुश्ताक अली ख़ान बहादुर]]
| house = रामपुर
| dynasty = [[रोहिल्ला वंश]]
| father = [[युसुफ अली ख़ान बहादुर]]
| birth_date = 1832
| birth_place = [[रामपुर]], [[उत्तर प्रदेश]]
| death_date = 23 मार्च 1887
| death_place = [[रामपुर]], [[उत्तर प्रदेश]]
|}}
'''हाजी [[नवाब]] कल्ब अली ख़ान बहादुर''' का जन्म 1832 में हुआ और वे 1865 से 1887 तक रामपुर रियासत के नवाब थे।<ref>{{Cite web |url=http://www.bl.uk/onlinegallery/onlineex/apac/photocoll/r/019pho000000127u00014000.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=24 नवंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180705100436/http://www.bl.uk/onlinegallery/onlineex/apac/photocoll/r/019pho000000127u00014000.html |archive-date=5 जुलाई 2018 |url-status=live }}</ref> अपने पिता, सर नवाब [[युसुफ अली ख़ान बहादुर]] के बाद गद्दी संभालने पर, उन्होंने अपने पिता के कामों को आगे बढ़ाया। उन्होंने रामपुर लाइब्रेरी का विस्तार किया, जामा मस्जिद बनवाई और शिक्षा, सिंचाई, वास्तुकला, साहित्य और कला के प्रसार को बढ़ावा दिया। एक काबिल शासक होने के साथ-साथ, सर कल्ब अली खान अरबी और फ़ारसी भाषाओं के अच्छे जानकार थे और उन्होंने पूरे भारत और इस्लामी दुनिया के विद्वानों को संरक्षण दिया। नवाब कल्ब अली खान का महत्वपूर्ण योगदान 13वीं शताब्दी के प्रसिद्ध फारसी कवि शेख सादी की पुस्तक "करीमा "का देवनागरी ब्रज भाषा में कवि बलदेव दास चौबे शाहबाद रामपुर निवासी से आग्रह करके अनुवाद कराना था । यह अनुवाद दोहे और चौपाई यों के माध्यम से बहुत सुंदर रीति से 28 पृष्ठ में सन 1873 ईस्वी में बरेली रुहेलखंड लिटरेरी सोसायटी की प्रेस में छापा गया। वे उर्दू भाषा के लेखक, निबंधकार और ग़ज़लकार भी थे।
वे 1878 से अपनी मृत्यु तक [[जॉन लॉरेंस]] की प्रशासनिक परिषद के सदस्य रहे, उन्होंने [[विक्टोरिया|महारानी विक्टोरिया]] के [[दिल्ली दरबार]] में भाग लिया और उन्हें 17 तोपों की सलामी का सम्मान मिला। 1887 में 55 वर्ष की आयु में उनके निधन के बाद, उनके पुत्र [[मुहम्मद मुश्ताक अली ख़ान बहादुर]] उनके उत्तराधिकारी बने।
==सन्दर्भ==
{{reflist}}
[[श्रेणी:1832 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:भारत के नवाब]]
[[श्रेणी:१८८७ में निधन]]
ouckah4qn5xfytyaxywqf729yp5b3ia
भारतीय राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतीकों की सूची
0
1115835
6591474
6550295
2026-07-24T05:41:38Z
CommonsDelinker
743
6591474
wikitext
text/x-wiki
यह भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतीकों की एक सूची है। प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश में आधिकारिक प्रतीकों का एक अनूठा सेट होता है, आमतौर पर एक राज्य प्रतीक, एक जानवर, एक पक्षी, एक फूल और एक पेड़। एक दूसरा जानवर (मछली, तितली, सरीसृप, जलीय जानवर, विरासत पशु) कभी-कभी दिखाई देता है, जैसा कि फल और अन्य पौधे करते हैं, और कुछ राज्य गीत और राज्य वाक्य हैं।
==राज्य==
{| class="wikitable sortable" style="text-align:center"
|-
!scope=col| राज्य
!scope=col| प्रतीक
!scope=col| आकार
!scope=col width=100| चित्र
|-
|rowspan=5|[[अरुणाचल प्रदेश]]
| राज्य चिह्न ||[[Emblem of Arunachal Pradesh]] || style="text-align:center;"| ||
|-
| राज्य पशु || [[Bos frontalis|Mithun]] (''Bos frontalis'')<ref name="ap2">{{cite web | url=http://arunachalpradesh.nic.in/pdf/Basic_Statistical_Report_AP.pdf#page=2 | title=Basic Statistical Figure of Arunachal Pradesh | accessdate=27 January 2016 | url-status=dead | archiveurl=https://web.archive.org/web/20160202101141/http://arunachalpradesh.nic.in/pdf/Basic_Statistical_Report_AP.pdf#page=2 | archivedate=2 February 2016 | df=dmy-all }}</ref><ref name="kiap">{{cite web | url=http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#ap | title=Symbols of Arunachal Pradesh | work=knowindia.gov.in | accessdate=15 October 2013 | url-status=dead | archiveurl=https://web.archive.org/web/20131112080035/http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#ap | archivedate=12 November 2013 | df=dmy-all }}</ref><ref name="ap">{{cite web | url=http://arunachalipr.gov.in/StateBStatistics.htm | title=Symbols of Arunachal Pradesh | accessdate=15 October 2013 | archive-url=https://web.archive.org/web/20150311201209/http://arunachalipr.gov.in/StateBStatistics.htm | archive-date=11 March 2015}}</ref> || style="text-align:center;"|[[File:B4 darjeling para-5 (cropped).jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पक्षी || [[Buceros bicornis|Hornbill]] (''Buceros bicornis'')<ref name="ap2" /><ref name="kiap" /><ref name="ap" /> || style="text-align:center;"|[[File:Great-Hornbill.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पुष्प || [[Rhynchostylis retusa|Foxtail orchid]] (''Rhynchostylis retusa'')<ref name="ap2" /><ref name="kiap" /><ref name="ap" /> || style="text-align:center;"|[[File:Rhynchostylis retusa, West Java.jpg|100px]] ||
|-
|राज्य वृक्ष || [[Dipterocarpus macrocarpus|Hollong]] ('' Dipterocarpus macrocarpus'')<ref name=flowers>{{cite web|title = State Trees and Flowers of India|url = http://flowersofindia.net/misc/state_flora.html|website = flowersofindia.net|access-date = 2016-01-27|archive-url = https://web.archive.org/web/20160416180150/http://www.flowersofindia.net/misc/state_flora.html|archive-date = 16 अप्रैल 2016|url-status = dead}}</ref><ref>{{cite web | url=http://bsienvis.nic.in/State_trees/Arunachal%20Pradesh%20State%20Tree%20-%20Final%20-%204.3.2014.pdf | title=State Tree of Arunachal Pradesh | accessdate=27 January 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20160203050035/http://bsienvis.nic.in/State_trees/Arunachal%20Pradesh%20State%20Tree%20-%20Final%20-%204.3.2014.pdf | archive-date=3 फ़रवरी 2016 | url-status=dead }}</ref> ||[[File:Bhutan pine foliage.JPG|100px]] ||
|-
|rowspan=6|[[असम]]
| राज्य चिह्न || Uses the [[National Emblem of India]] || style="text-align:center;" |[[File:Seal of Assam.png|100px]] ||
|-
|राज्य गीत
|
[[O Mur Apunar Desh]] <br> (''O My Endearing Country!'')
|
|
|-
| राज्य पशु || [[Indian rhinoceros]] (''Rhinoceros unicornis'')<ref name="kias">{{cite web | url=http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#as | title=Symbols of Assam | work=knowindia.gov.in | accessdate=15 October 2013 | url-status=dead | archiveurl=https://web.archive.org/web/20131112080035/http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#as | archivedate=12 November 2013 | df=dmy-all }}</ref><ref name="as">{{cite web |url = http://asbb.gov.in/ataglance.asp|title = Symbols of Assam|accessdate = 15 October 2013|archive-url = https://web.archive.org/web/20130810000136/http://asbb.gov.in/ataglance.asp|archive-date = 10 August 2013}}</ref> || style="text-align:center;"|[[File:Rhinoceros unicornis, Kaziranga (2006).jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पक्षी || [[White-winged duck]] (''Asarcornis scutulata'')<ref name="kias" /><ref name="as" /> || style="text-align:center;"|[[File:White-winged.wood.duck.arp.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पुष्प || [[Rhynchostylis retusa|Foxtail orchid]] (''Rhynchostylis retusa'')<ref name=flowers /><ref name="kias" /><ref name="as" /> || style="text-align:center;"|[[File:Rhynchostylis retusa, West Java.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य वृक्ष || [[Hollong]] (''Dipterocarpus macrocarpus'')<ref name=flowers /><ref name="kias" /><ref name="as" /><ref name="envis">{{cite web|url = http://bsienvis.nic.in/State_trees/Assam%20State%20Tree_2_12.pdf|title = Assam|publisher = ENVIS Centre on Floral Diversity|accessdate = 27 January 2016|archive-url = https://web.archive.org/web/20160202191851/http://bsienvis.nic.in/State_trees/Assam%20State%20Tree_2_12.pdf|archive-date = 2 फ़रवरी 2016|url-status = dead}}</ref> || style="text-align:center;"|
|-
|rowspan=8|[[आन्ध्र प्रदेश]]
| राज्य चिह्न || [[Emblem of Andhra Pradesh]] || style="text-align:center;"| ||
|-
|राज्य गीत || [[मा तेलुगू तल्लिकि]] <br> (''To Our Mother Telugu'')|| style= "text-align center;"| [[File:Telugu Talli Statue.jpg|100px]] ||
|-
|राज्य पशु ||[[Blackbuck]] (''Antilope cervicapra)'' || style="text-align:center;"| [[File:Bannerghatta blackbuck 01.jpg|100px]] ||
|-
|राज्य पक्षी ||[[Rose-ringed parakeet|Rose ring parakeet]] (''Psittacula krameri'')<ref name=bnhsenvis>{{cite web | url=http://bnhsenvis.nic.in/Database/birds_17080.aspx | title=List of Indian state/union territory birds zeitgeist fjaccessdate=25 June 2016 | access-date=14 दिसंबर 2019 | archive-url=https://web.archive.org/web/20190430080718/http://bnhsenvis.nic.in/Database/birds_17080.aspx | archive-date=30 अप्रैल 2019 | url-status=dead }}</ref>|| style="text-align:center;" |[[File:Rose-ringed Parakeet Psittacula krameri male by Dr. Raju Kasambe DSCN8937 (2).jpg|100x100px]]||
|-
|राज्य मछली || |Murrel (''Channa striata'') || style="text-align:center;"| ||
|-
|राज्य पुष्प || |Jasmine (''Jasminum officinale)''<ref name="Andhra Pradesh"/> || style="text-align:center;"|[[File:Jasminum officinale.JPG|100px]]||
|-
|राज्य वृक्ष || [[Azadirachta indica|Neem]] (''Azadirachta indica'') || style="text-align:center;"|[[File:Neem tree leaves.JPG|100px]] ||
|-
|राज्य फल|| [[Mangifera indica|(Mango) Maamidi Pandu]] (''Mangifera indica'') || style="text-align:center;" | [[File:Mangifera indica (Manguier 4).jpg|100px]] ||
|-
|rowspan=5|[[उत्तर प्रदेश]]
| राज्य चिह्न || [[Emblem of Uttar Pradesh]] || style="text-align:center;"|[[File:Seal of Uttar Pradesh.png|100px]] ||
|-
| राज्य पशु || [[Barasingha]] (''Rucervus duvaucelii'')<ref name="kiup">{{cite web | url=http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#up | title=Symbols of Uttar Pradesh | work=knowindia.gov.in | accessdate=22 January 2014 | url-status=dead | archiveurl=https://web.archive.org/web/20131112080035/http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#up | archivedate=12 November 2013 | df=dmy-all }}</ref><ref name="up">{{cite web | url=http://www.pbb.gov.in/publications/COP-11%20EXHIBITION%20REPORT.pdf#page=8 | title=Symbols of Uttar Pradesh | accessdate=22 January 2014 | archive-url=https://web.archive.org/web/20130814162731/http://pbb.gov.in/publications/COP-11%20EXHIBITION%20REPORT.pdf#page=8 | archive-date=14 अगस्त 2013 | url-status=dead }}</ref> || align=center|[[File:The barasingha.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पक्षी || [[Sarus crane]] (''Grus antigone'')<ref name="kiup"/><ref name="up"/> || align=center|[[File:Grus antigone Luc viatour.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पुष्प || [[Palash]] (''Butea monosperma'')<ref name="kiup"/><ref name="up"/> || align=center|[[File:STS 001 Butea monosperma.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य वृक्ष || [[Saraca asoca|Ashoka]] (''Saraca asoca'')<ref name="kiup"/><ref name="up"/> || align=center|[[File:Sita-Ashok (Saraca asoca) flowers in Kolkata W IMG 4146.jpg|100px]] ||
|-
|rowspan=7|[[उत्तराखण्ड]]
| राज्य चिह्न ||[[Emblem of Uttarakhand]]|| style="text-align:center;"| ||
|-
| राज्य गीत ||[[Uttarakhand Devabhumi Matribhumi]] <br> (''Uttarakhand, Land of the Gods, O Motherland!'')|| style="text-align:center;"| ||
|-
| राज्य पशु || [[Alpine Musk Deer]] (''Moschus chrysogaster'')<ref name="kiuk">{{cite web | url=http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#uk | title=Symbols of Uttrakhand | work=knowindia.gov.in | accessdate=22 January 2014 | url-status=dead | archiveurl=https://web.archive.org/web/20131112080035/http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#uk | archivedate=12 November 2013 | df=dmy-all }}</ref><ref name="uk">{{cite web | url=http://www.gmvnl.com/newgmvn/facts/ | title=Symbols of Uttarakhand | accessdate=22 January 2014 | url-status=dead | archiveurl=https://web.archive.org/web/20130715112114/http://www.gmvnl.com/newgmvn/facts/ | archivedate=15 July 2013 | df=dmy-all }}</ref> || align=center| [[File:Moschus chrysogaster.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पक्षी || [[Himalayan Monal]] (''Lophophorus impejanus'')<ref name="kiuk"/><ref name="uk"/> || align=center| [[File:Himalayan Monal, Male (28466143101).jpg|100px]] ||
|-
| राज्य तितली || [[West Himalayan Common Peacock]]<ref>{{cite web |url=http://www.devalsari.org/images/Photo-Gallery/Common-Peacock-Male-Papilio-Bianor-Polyctor.jpg |title=Archived copy |accessdate=2017-01-07 |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20200731025529/http://www.devalsari.org/images/Photo-Gallery/Common-Peacock-Male-Papilio-Bianor-Polyctor.jpg |archivedate=31 जुलाई 2020 |df=dmy-all }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.hindustantimes.com/dehradun/uttarakhand-to-declare-common-peacock-as-state-butterfly/story-FxHJdVUk9fcVsmPqTvXq1M.html |title=Archived copy |accessdate=2017-01-09 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20170102220838/http://www.hindustantimes.com/dehradun/uttarakhand-to-declare-common-peacock-as-state-butterfly/story-FxHJdVUk9fcVsmPqTvXq1M.html |archivedate=2 January 2017 |df=dmy-all }}</ref> (''Papilio bianor polyctor'') || align="center" |[[File:Davidraju Common peacock-shillong.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पुष्प || [[Brahma Kamal]] (''Saussurea obvallata'')<ref name="kiuk"/><ref name="uk"/> || align=center|[[File:Brahmakamal Kaluvinayak Chamoli Uttarakhand 2014-08-23.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य वृक्ष || [[Burans]] (''Rhododendron arboreum'')<ref name="kiuk"/><ref name="uk"/> || align=center|[[File:Rhododendron in full bloom! (8620051426).jpg|100px]] ||
|-
|rowspan=7|[[ओडिशा]]
| राज्य चिह्न || Warrior and the Horse sculpture from the [[Konark Sun Temple]]|| [[File:Seal of Odisha.png|100px]]||
|-
| राज्य गीत || [[Bande Utkala Janani]] <br> (''I Adore Thee, O Mother Utkala!'') || ||
|-
| राज्य पशु || [[Cervus unicolor|Sambar deer]] (''Cervus unicolor'')<ref name="kiod">{{cite web | url=http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#od | title=States and Union Territories Symbols | work=knowindia.gov.in | accessdate=8 November 2013 | url-status=dead | archiveurl=https://web.archive.org/web/20131112080035/http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#od | archivedate=12 November 2013 | df=dmy-all }}</ref><ref name="odisha">{{cite web | url=http://odisha.gov.in/e-magazine/Orissareview/dec2005/engpdf/sambar_the_state_animal_of_orissa.pdf | title=Sambar : The State Animal of Orissa | publisher=Orissa Review | work=odisha.gov.in | date=December 2005 | accessdate=8 November 2013 | pages=62 | first=Prafulla Kumar | last=Mohanty | archive-url=https://web.archive.org/web/20131023014501/http://odisha.gov.in/e-magazine/Orissareview/dec2005/engpdf/sambar_the_state_animal_of_orissa.pdf | archive-date=23 अक्तूबर 2013 | url-status=dead }}</ref> || style="text-align:center;"|[[File:Sambhar Deer by N A Nazeer.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पक्षी || [[Indian roller]]<ref>{{cite web | url=http://odisha.gov.in/e-magazine/Orissareview/apr2005/englishpdf/bluelay.pdf | title=Blue Jay : The State Bird of Orissa | publisher=Orissa Review | work=odisha.gov.in | date=April 2005 | accessdate=7 November 2013 | first=Prafulla Kumar | last=Mohanty | archive-url=https://web.archive.org/web/20131023014458/http://odisha.gov.in/e-magazine/Orissareview/apr2005/englishpdf/bluelay.pdf | archive-date=23 अक्तूबर 2013 | url-status=dead }}</ref> (''Coracias benghalensis'')<ref name="kiod"/><ref name="odisha"/> || style="text-align:center;"|[[File:Indian Roller Bandhavgarh.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य सरीसृप || [[Saltwater crocodile]] (''Crocodylus porosus'') || [[File:Saltwater crocodile.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पुष्प || [[Saraca asoca|Ashoka tree]] (''Saraca asoca'')<ref name="kiod"/><ref name="odisha"/> || style="text-align:center;"|[[File:Sita-Ashok (Saraca asoca) flowers in Kolkata W IMG 4146.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य वृक्ष || [[Ficus racemosa|Indian fig tree]] (''Ficus racemosa'')<ref name="kiod"/><ref name="odisha"/> || style="text-align:center;"|[[File:Ficus racemosa foliage.jpg|100px]] ||
|-
|rowspan=7|[[कर्नाटक]]
|राज्य चिह्न || [[Emblem of Karnataka]] || align=center|[[File:Karnataka emblem.svg|100px]] ||
|-
| राज्य गीत || [[Jaya Bharata Jananiya Tanujate]]<ref>{{cite web|title = Poem declared 'State song'|url = http://www.thehindu.com/2004/01/11/stories/2004011103410400.htm|website = |access-date = 27 January 2016|date = 11 January 2004|work = The Hindu|archive-url = https://web.archive.org/web/20160101052709/http://www.thehindu.com/2004/01/11/stories/2004011103410400.htm|archive-date = 1 जनवरी 2016|url-status = live}}</ref> <br> (''Victory to you Mother Karnataka, The Daughter of Mother India!'') || ||
|-
| राज्य पशु || [[Elephas maximus|Asian elephant]]<ref name="karn">{{cite web | url=http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#ka | title=States and Union Territories Symbols | work=knowindia.gov.in | accessdate=16 February 2016 | url-status=dead | archiveurl=https://web.archive.org/web/20131112080035/http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#ka | archivedate=12 November 2013 | df=dmy-all }}</ref><ref name="kar">{{cite web | url=http://www.karnataka.gov.in/gazetteer/HandbookKarnataka2010/Chapter%20I%20Introduction.pdf | title=A handbook of Karnataka 2010: Chapter 1 Introduction | work=karnataka.gov.in | date=2010 | accessdate=16 February 2016 | page=35 | archive-url=https://web.archive.org/web/20150106105518/http://www.karnataka.gov.in/gazetteer/HandbookKarnataka2010/Chapter%20I%20Introduction.pdf | archive-date=6 January 2015}}</ref> (''Elephas maximus'') || style="text-align:center;"|[[File:Elephas maximus (Bandipur).jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पक्षी || [[Coracias indica|Indian roller]]<ref name="karn"/><ref name="kar"/> (''Coracias indica'') || style="text-align:center;"| [[File:IndianRoller1.jpg|100px]]||
|-
| राज्य तितली || [[Southern birdwing]]<ref>{{Cite news|url=http://www.thehindu.com/news/national/karnataka/karnataka-gets-its-own-butterfly/article18470618.ece|title=State gets its own butterfly|last=The|first=Hindu|date=May 17, 2017|work=|access-date=3 March 2018|via=}}</ref> (''Troides minos'') || style="text-align:center;"|[[File:Troides minos 06680.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पुष्प || [[Nelumbo nucifera|Lotus]]<ref name="karn"/><ref name="kar"/> (''Nelumbo nucifera'') || style="text-align:center;"|[[File:Sacred lotus Nelumbo nucifera.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य वृक्ष || [[Santalum album|Sandalwood]]<ref name="karn"/><ref name="kar"/> (''Santalum album'') || style="text-align:center;"|[[File:Sandal leaf.jpg|100px]]
||
|-
|rowspan=7|[[केरल]]
| राज्य चिह्न ||[[Emblem of Kerala]]<ref>{{cite web|title = KERALA|url = http://www.hubert-herald.nl/BhaKerala.htm|website = www.hubert-herald.nl|access-date = 2016-01-27|archive-url = https://web.archive.org/web/20181017162958/http://hubert-herald.nl/BhaKerala.htm|archive-date = 17 अक्तूबर 2018|url-status = dead}}</ref> || align=center|[[File:Government of Kerala Logo.svg|100px]] ||
|-
| राज्य पशु || [[Indian elephant]] (''Elephas maximus indicus'')<ref name="kike">{{cite web | url=http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#ke | title=Symbols of Kerala | work=knowindia.gov.in | accessdate=17 October 2013 | url-status=dead | archiveurl=https://web.archive.org/web/20131112080035/http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#ke | archivedate=12 November 2013 | df=dmy-all }}</ref><ref name="ke">{{cite web | url=http://www.prd.kerala.gov.in/symbols.htm | title=Kerala Symbols | work=Public Relations Department, Kerala | accessdate=8 March 2016 | url-status=dead | archiveurl=https://web.archive.org/web/20160304221810/http://www.prd.kerala.gov.in/symbols.htm | archivedate=4 March 2016 | df=dmy-all }}</ref> || style="text-align:center;"|[[File:Elephas maximus (Bandipur).jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पक्षी || [[Buceros bicornis|Great hornbill]] (''Buceros bicornis'')<ref name="kike"/><ref name="ke"/> || align=center|[[File:Great-Hornbill.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य मछली || [[Green chromide]] (''Etroplus suratensis'')<ref>{{cite web | url=http://www.thehindu.com/news/national/kerala/karimeen-leaps-from-frying-pan-to-state-fish/article506189.ece | title=Karimeen leaps from frying pan to State fish | work=The Hindu | date=9 July 2010 | accessdate=1 March 2016 | author=Basheer, K. | archive-url=https://web.archive.org/web/20140505200805/http://www.thehindu.com/news/national/kerala/karimeen-leaps-from-frying-pan-to-state-fish/article506189.ece | archive-date=5 मई 2014 | url-status=live }}</ref> || align=center|[[File:Etroplus suratensis.jpg|100px]] || Green chromide was designated state fish by Government of Kerala in 2010.
|-
| राज्य पुष्प || [[Cassia fistula|Kanikonna]] (''Cassia fistula'')<ref name="kike"/><ref name="ke"/> || align=center|[[File:Konnamaram.JPG|100px]] ||
|-
| राज्य वृक्ष || [[Cocos nucifera|Coconut tree]] (''Cocos nucifera'')<ref name="kike"/><ref name="ke"/> || align=center|[[File:Coconut green.JPG|100px]] ||
|-
|राज्य फल
|[[Jackfruit]]
| align=center|[[File:Jackfruit hanging.JPG|100px]]
|Jackfruit was Declared as Official State Fruit of Kerala on 21 March 2018.<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/kerala/jackfruit-is-keralas-official-fruit/article23317894.ece|title=Jackfruit is Kerala's official fruit|date=2018-03-22|work=The Hindu|access-date=2018-08-30|others=Special Correspondent|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref>
|-
|rowspan=6|[[गुजरात]]
| राज्य चिह्न || Uses the [[National Emblem of India]] || style="text-align:center;"|[[File:Government Of Gujarat Seal In All Languages.svg|100px]] ||
|-
| राज्य गीत || [[Jai Jai Garavi Gujarat]] <br> (''Victory to Proud Gujarat!'')|| ||"Jai Jai Garavi Gujarat" is a poem written by [[Gujarati language|Gujarati]] poet [[Narmadashankar Dave]], better known as Narmad in 1873.
|-
| राज्य पशु
| [[Asiatic Lion]] (''Panthera leo persica'')<ref name=":0">{{Cite news|url=http://generalknowledge.xyz/state-symbols-of-india/|title=State Symbols of India (State Animals, Birds, Flowers and Trees of India) – General Knowledge 2016/2017|date=2016-10-15|newspaper=General Knowledge 2016/2017|language=en-GB|access-date=2016-10-15|archive-url=https://web.archive.org/web/20170807152517/http://generalknowledge.xyz/state-symbols-of-india/|archive-date=7 अगस्त 2017|url-status=dead}}</ref><ref name=":1">{{Cite news|url=http://timesofindia.indiatimes.com/city/ahmedabad/Gujarat-forgets-state-bird-tree-and-flower/articleshow/29893945.cms|title=Gujarat forgets state bird, tree and flower – Times of India|newspaper=The Times of India|access-date=2016-10-15|archive-url=https://web.archive.org/web/20161227222448/http://timesofindia.indiatimes.com/city/ahmedabad/Gujarat-forgets-state-bird-tree-and-flower/articleshow/29893945.cms|archive-date=27 दिसंबर 2016|url-status=live}}</ref> || [[File:Adult Asiatic Lion.jpg|100px]] ||The Asiatic lion's range is restricted to the [[Gir National Park]] and environs in the Indian state of [[गुजरात]].
|-
| राज्य पक्षी || [[Greater flamingo|Greater Flamingo]] (''Phoenicopterus roseus'')<ref name="envisave">{{cite web | url=http://bnhsenvis.nic.in/Database/birds_17080.aspx | title=List of Indian state/union territory birds | work=ENVIS Centre On Avian Ecology | accessdate=17 August 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20190430080718/http://bnhsenvis.nic.in/Database/birds_17080.aspx | archive-date=30 अप्रैल 2019 | url-status=dead }}</ref> || style="text-align:center"|[[File:Greater flamingo galapagos.JPG|100x100px]] ||In [[गुजरात]], a state of India, flamingos can be observed at the [[Nal Sarovar Bird Sanctuary]], [[Khijadiya Bird Sanctuary]], [[Kutch Desert Wildlife Sanctuary#Flamingo%20City|Flamingo City]], and in the [[Thol Bird Sanctuary]]. They remain there during the entire winter season.
|-
| राज्य पुष्प
| [[Tagetes|Marigold]] (''Tagetes'')<ref>{{cite web|url=http://www.nrigujarati.co.in/Topic/3646/1/|title=Which is State Flower of Gujarat|author=|date=|website=www.nrigujarati.co.in|access-date=14 दिसंबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20171230230339/http://www.nrigujarati.co.in/Topic/3646/1/|archive-date=30 दिसंबर 2017|url-status=dead}}</ref> || [[File:African Marigold.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य वृक्ष
| style="text-align:center;" align=center colspan=3|Disputed<br/>Various official websites disagree on state tree.<ref name=envis-tree/><ref name=":1"/><ref>{{Cite web |url=http://www.frienvis.nic.in/KidsCentre/State-Animals-Birds-Trees-Flowers-of-India_1500.aspx |title=State Animals, Birds, Trees and Flowers of India |access-date=14 दिसंबर 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160308180415/http://www.frienvis.nic.in/KidsCentre/State-Animals-Birds-Trees-Flowers-of-India_1500.aspx |archive-date=8 मार्च 2016 |url-status=dead }}</ref><ref>{{Cite web |url=http://www.wiienvis.nic.in/KidsCentre/state_symbols_india_8411.aspx |title=State Symbols of India |access-date=14 दिसंबर 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190214075734/http://wiienvis.nic.in/KidsCentre/state_symbols_india_8411.aspx |archive-date=14 फ़रवरी 2019 |url-status=dead }}</ref>
|-
|rowspan=8|[[गोवा]]
| राज्य चिह्न ||[[Emblem of Goa]] || style="text-align:center;"| ||
|-
| राज्य आदर्श वाक्य ||सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखमाप्नुयात् <br> (''May everyone see goodness, may none suffer any pain'') || ||
|-
| राज्य पशु || [[Bos gaurus|Gaur]] (''Bos gaurus'')<ref name="kigoa">{{cite web | url=http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#goa | title=Symbols of Goa | work=knowindia.gov.in | accessdate=15 October 2013 | url-status=dead | archiveurl=https://web.archive.org/web/20131112080035/http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#goa | archivedate=12 November 2013 | df=dmy-all }}</ref><ref name="goa">{{cite web | url=http://www.goatourism.gov.in/destinations/sanctuaries/160-bondla-wildlife-sanctuary | title=Symbols of Goa | accessdate=15 October 2013 | archive-url=https://web.archive.org/web/20131015131131/http://www.goatourism.gov.in/destinations/sanctuaries/160-bondla-wildlife-sanctuary | archive-date=15 अक्तूबर 2013 | url-status=dead }}</ref> || style="text-align:center;"|[[File:Indian Bison (Gaur) 1 by N. A. Naseer.jpg|100px]]
||
|-
| राज्य पक्षी || [[Flame-throated bulbul|Ruby Throated Yellow Bulbul]] (''Pycnonotus gularis'')<ref name="kigoa"/><ref name="goa"/><ref>{{Cite news|url=http://englishnews.thegoan.net/story.php?id=7105|title=Ruby-throated yellow bulbul|newspaper=The Goan|access-date=2016-10-15|archive-url=https://web.archive.org/web/20181114224316/http://englishnews.thegoan.net/story.php?id=7105|archive-date=14 नवंबर 2018|url-status=dead}}</ref> || style="text-align:center;"|[[File:Flame-throated_bulbul.jpg | 100px]] ||
|-
| राज्य मछली || [[Grey mullet]]/Shevtto in [[Konkani]] (''Mugil cephalus'')<ref>{{cite web|url=http://www.navhindtimes.in/shevtto-declared-state-fish-as-it-is-extensively-found-throughout-year/|title=Shevtto declared state fish as it is extensively found throughout year|author=|date=|website=www.navhindtimes.in|access-date=14 दिसंबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190422235610/http://www.navhindtimes.in/shevtto-declared-state-fish-as-it-is-extensively-found-throughout-year/|archive-date=22 अप्रैल 2019|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web |url=http://fisheries.goa.gov.in/wp-content/uploads/2016/03/newmullet.pdf |title=संग्रहीत प्रति |access-date=14 दिसंबर 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190303214620/http://fisheries.goa.gov.in/wp-content/uploads/2016/03/newmullet.pdf |archive-date=3 मार्च 2019 |url-status=dead }}</ref> || ||
|-
| राज्य पुष्प || [[Red Jasmine]] (''Plumeria rubra'') || [[File:Fleurs de Frangipanier (Île de la Réunion) (4125134278).jpg|172x172px]] ||
|-
| राज्य वृक्ष || [[Terminalia elliptica|Matti]] ''Terminalia crenulata'' || style="text-align:center;"|[[File:Terminalia_elliptica_NP.JPG | 100px]] ||
|-
| राज्य विरासत वृक्ष || [[Cocos nucifera|Coconut palm]] ''Cocos nucifera'' || style="text-align:center;"|[[File:Cocos nucifera.jpg | 100px]] ||
|-
|rowspan=5|[[छत्तीसगढ़]]
| राज्य चिह्न ||Ashoka lions, ears of rice, lightning, 36 fortresses || style="text-align:center;"|[[File:..Chhattisgarh Flag(INDIA).png|100px]] ||
|-
| राज्य पशु || [[Bubalus bubalis|Wild buffalo]] (''Bubalus bubalis'')<ref name="kicht">{{cite web | url=http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#cg | title=Symbols of Chhattisgarh | work=knowindia.gov.in | accessdate=15 October 2013 | url-status=dead | archiveurl=https://web.archive.org/web/20131112080035/http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#cg | archivedate=12 November 2013 | df=dmy-all }}</ref><ref name="cht">{{cite web | url=http://cgssdgstage.cgswan.gov.in:8080/about-chhattisgarh | archive-url=https://archive.today/20131015110814/http://cgssdgstage.cgswan.gov.in:8080/about-chhattisgarh | url-status=dead | archive-date=15 October 2013 | title=Symbols of Chhattisgarh | accessdate=15 October 2013}}</ref> || style="text-align:center;"|[[File:BUFFALO159.JPG|100px]] ||
|-
| राज्य पक्षी || [[Common hill myna|Hill myna]] (''Gracula religiosa'')<ref name="kicht" /><ref name="cht" /> || style="text-align:center;"|[[File:Beo-2.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पुष्प || [[Rhynchostylis gigantea]] <ref name="envis-flower">{{cite web|url=http://www.bsienvis.nic.in/KidsCentre/BSI_3938.aspx|title=State Flowers of India|website=www.bsienvis.nic.in|access-date=2016-02-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20190506133847/http://bsienvis.nic.in/KidsCentre/BSI_3938.aspx|archive-date=6 मई 2019|url-status=dead}}</ref> ||[[File:Rhynchostylis gigantea.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य वृक्ष || [[Shorea robusta|Sal]] (''Shorea robusta'')<ref name="kicht" /><ref name="cht" /> || style="text-align:center;"|[[File:Shorea robusta - Simurali 2011-10-05 050368.JPG|100px]] ||
|-
|rowspan=5|[[झारखण्ड]]
| राज्य चिह्न || [[Ashoka Chakra]] and Four "J" Letter || style="text-align:center;"|[[File:Jharkhand Flag(INDIA).png|100px]] ||
|-
| राज्य पशु || [[Elephas maximus|Asian elephant]] (''Elephas maximus'')<ref name="kijh">{{cite web | url=http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#jh | title=Symbols of Jharkhand | work=knowindia.gov.in | accessdate=15 October 2013 | url-status=dead | archiveurl=https://web.archive.org/web/20131112080035/http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#jh | archivedate=12 November 2013 | df=dmy-all }}</ref><ref name="jh">{{cite web | url=http://www.jhpolice.gov.in/about-jharkhand | title=Symbols of Jharkhand | accessdate=15 October 2013 | archive-url=https://web.archive.org/web/20130927233112/http://www.jhpolice.gov.in/about-jharkhand | archive-date=27 सितंबर 2013 | url-status=dead }}</ref> || style="text-align:center;"|[[File:Elephas maximus (Bandipur).jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पक्षी || [[Eudynamys scolopaceus|Asian koel]] (''Eudynamys scolopaceus'')<ref name="kijh"/><ref name="jh"/> || style="text-align:center;"|[[File:Eudynamys scolopacea - 20080801.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पुष्प || [[Butea monosperma|Palash]] (''Butea monosperma'')<ref name="kijh"/><ref name="jh"/> || style="text-align:center;"|[[File:STS 001 Butea monosperma.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य वृक्ष || [[Shorea robusta|Sal]] (''Shorea robusta'')<ref name="kijh"/><ref name="jh"/> || style="text-align:center;"|[[File:Shorea robusta in Chhattisgarh.jpg|100px]] ||
|-
|rowspan=8|[[तमिलनाडु]]
|राज्य चिह्न || [[Emblem of Tamil Nadu]] || align=center|[[File:Seal of Tamil Nadu.svg|100px]] ||
|-
|राज्य गीत || [[Tamil Thai Valthu (Tamil Nadu)|Tamil Thai Valthu]] <br> (''Invocation to Tamil Mother'') || align=center|[[File:Tamil Mother.jpg|100px]] ||
|-
|राज्य पशु || [[Nilgiri tahr]] (''Nilgiritragus hylocrius'') || align=center|[[File:Niltahr.jpg|100px]] ||
|-
|राज्य पक्षी || [[Emerald dove]] (''Chalcophaps indica'') || align=center|[[File:Emerald dove444.jpg|100px]] ||
|-
|राज्य तितली
|[[Tamil yeoman]] (''Cirrochroa thais'')
|align=center|[[File:Tamil Yeoman (Cirrochroa thais) (22851276940).jpg|alt=Tamil yeoman|thumb|100px]] ||
|-
|राज्य पुष्प || [[Gloriosa superba|Gloriosa lily]] (''Gloriosa superba'') || align=center|[[File:Gloriosa Superba.jpg|100px]] ||
|-
|राज्य वृक्ष || [[Borassus flabellifer|Palm tree]] (''Borassus flabellifer'') || align=center|[[File:Palm Tamil Nadu.jpg|100px]] ||
|-
|राज्य फल || [[Moraceae|Jackfruit]] ("Artocarpus heterophyllus") || align=center|[[File:Jackfruit hanging.JPG|100px]] ||
|-
|rowspan=8|[[तेलंगाना]]
| राज्य चिह्न ||[[Emblem of Telangana]] || style="text-align:center;"| ||
|-
| राज्य गीत || [[Jaya Jaya He Telangana]] <br> (''Victory to Mother Telangana!'')|| style="text-align:center|[[File:Telangana Talli Statue in Pedda Korpole.png|100px]] ||
|-
| राज्य पशु || [[Chital|(Spotted deer) Jinka]] (''Axis axis'')<ref name="Telangana Symbols">{{Cite web |url=http://knowindia.gov.in/national-identity-elements/states-ut-symbol-s-z.php |title=Know India.gov.in – Telangana Symbols |website=Know India .gov.in |access-date=14 दिसंबर 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20191212202436/https://knowindia.gov.in/national-identity-elements/states-ut-symbol-s-z.php |archive-date=12 दिसंबर 2019 |url-status=dead }}</ref>|| style="text-align:center;" |[[File:Chital or Spotted Deer.JPG|100px]] ||
|-
| राज्य पक्षी || [[Coracias indica|(Indian roller) Paala Pitta]] (''Coracias indica'')<ref name="Telangana Symbols" /> || style="text-align:center;" | [[File:IndianRoller1.jpg|100px]]||
|-
| राज्य मछली || Korameenu (''Channa striatus'')<ref>{{cite web | url=http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-telangana/murrel-is-state-fish/article8878381.ece | title=Murrel is State fish | work=[[The Hindu]] | date=21 July 2016 | accessdate=17 August 2016}}</ref> || ||
|-
| राज्य पुष्प || [[Senna auriculata|Tangidi Puvvu]] (''Senna auriculata'')<ref name="Telangana Symbols" /> || style="text-align:center;" |[[File:A Cassia auriculata shrub.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य वृक्ष || [[Prosopis cineraria|Jammi Chettu]] (''Prosopis cineraria'')<ref name="Telangana Symbols" /> || style="text-align:center;" |[[File:Prosopis cineraria - Khejri.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य फल|| [[Mangifera indica|(Mango) Maamidi Pandu]] (''Mangifera indica'') || style="text-align:center;" | [[File:Mangifera indica (Manguier 4).jpg|100px]] ||
||
|-
|rowspan=6|[[नागालैण्ड]]
| राज्य चिह्न || [[Emblem of Nagaland]] || style="text-align:center;"| ||
|-
|राज्य आदर्श वाक्य || ''Unity'' || ||
|-
| राज्य पशु || [[Gayal|Mithun]] || [[File:Mithun.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पक्षी || [[Blyth's tragopan]] (''Tragopan blythii'') || align=center|[[File:Tragopan blythii01.jpg|100px]] ||
|-
|राज्य पुष्प
| Tree rhododendron (''[[Rhododendron arboreum]]'')<ref name="envis-flower" /><ref name=":0" /> || [[File:Manaslu-Circuit Rhododendron.jpg|100px]] ||
|-
|राज्य वृक्ष
| Alder (''[[Alnus nepalensis]]'')<ref name=":0" /><ref name="envis-tree" />|| [[File:Alnus nepalensis.JPG|100px]] ||
|-
|rowspan=6|[[पंजाब, भारत|पंजाब]]
| राज्य चिह्न ||Ashoka lions, swords and ears of wheat || style="text-align:center;"| ||
|-
| राज्य पशु || [[Blackbuck]] (''Antilope cervicapra'') || style="text-align:center;"|[[File:Antilope cervicapra from velavadar.JPG|100px]] ||
|-
|राज्य जलीय जंतु
|Indus Dolphin (Bhulan)<ref>{{Cite web|url=https://www.dailypioneer.com/2019/state-editions/indus-river-dolphin-declared-punjab---s-state-aquatic-animal.html|title=Indus River Dolphin declared Punjab’s State aquatic animal|last=Pioneer|first=The|website=The Pioneer|language=en|access-date=2019-03-30|archive-url=https://web.archive.org/web/20190330143514/https://www.dailypioneer.com/2019/state-editions/indus-river-dolphin-declared-punjab---s-state-aquatic-animal.html|archive-date=30 मार्च 2019|url-status=dead}}</ref>
|
|
|-
| राज्य पक्षी || [[Eastern goshawk|Baaz]] (''Accipiter gentilis'') || style="text-align:center;"|[[File:Northern Goshawk ad M2.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पुष्प || [[Gladiolus]] (''Gladiolus grandiflorus'') || style="text-align:center;"| [[File:Acidanthera.jpg|100px]]<ref name=envis-flower/> ||
|-
| राज्य वृक्ष || [[Dalbergia sissoo|Sheesham]] (''Dalbergia sissoo'') || style="text-align:center;"|[[File:Dalbergia sissoo.jpg|100px]] ||
|-
|rowspan=5|[[पश्चिम बंगाल]]
| राज्य चिह्न || [[Emblem of West Bengal]] || style="text-align:center;"| ||
|-
| राज्य पशु
| [[Fishing cat]]<ref name="kiwb">{{cite web | url=http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#wb | title=Symbols of West Bengal | work=knowindia.gov.in | accessdate=12 December 2013 | url-status=dead | archiveurl=https://web.archive.org/web/20131112080035/http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#wb | archivedate=12 November 2013 | df=dmy-all }}</ref><ref name="wb">{{cite web | url=http://www.pbb.gov.in/publications/COP-11%20EXHIBITION%20REPORT.pdf#page=10 | title=Symbols of West Bengal | accessdate=12 December 2013 | archive-url=https://web.archive.org/web/20130814162731/http://pbb.gov.in/publications/COP-11%20EXHIBITION%20REPORT.pdf#page=10 | archive-date=14 अगस्त 2013 | url-status=dead }}</ref> (''Prionailurus viverrinus'')<ref name="wiisymbols">{{cite web|url=http://www.wii.gov.in/nwdc/state_animals_tree_flowers.pdf|archive-url=https://wayback.archive-it.org/all/20070615001645/http://www.wii.gov.in/nwdc/state_animals_tree_flowers.pdf|url-status=dead|archive-date=15 June 2007|format=PDF|title=State animals, birds, trees and flowers|publisher=Wildlife Institute of India|accessdate=5 March 2012|df=dmy-all}}</ref> || align=center|[[File:Fishing Cat Pessac zoo.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पक्षी
| [[White-throated kingfisher]]<ref name="kiwb"/><ref name="wb"/> (''Halcyon smyrnensis'') || align=center|[[File:White-throated kingfisher BNC.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पुष्प
| [[Night-flowering jasmine]] (''Nyctanthes arbor-tristis'')<ref name="wiisymbols"/> || align=center|[[File:Flower & flower buds I IMG 2257.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य वृक्ष
| [[Alstonia scholaris|Chatim tree]] (''Alstonia scholaris'')<ref name="wiisymbols"/><ref>{{cite web | url=http://bsienvis.nic.in/writereaddata/State%20Tree%20of%20West%20Bengal%20-%2011_8_13.pdf | title=West Bengal | publisher=bsienvis.nic.in | accessdate=13 June 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20160809080455/http://bsienvis.nic.in/writereaddata/State%20Tree%20of%20West%20Bengal%20-%2011_8_13.pdf | archive-date=9 अगस्त 2016 | url-status=dead }}</ref>|| align=center|[[File:Alstonia scholaris.jpg|100px]] ||
|-
|rowspan=5|[[बिहार]]
| राज्य चिह्न || [[Emblem of Bihar]] || style="text-align:center;"|[[File:Seal of Bihar.svg|100px]] ||
|-
|राज्य पशु
|[[Gaur]] (''Mithun'')<ref>{{cite web|url=http://natureconservation.in/state-animal-of-bihar-gaur-complete-detail-updated/|title=State animal of Bihar (Gaur) – complete detail – updated|author=|date=|website=natureconservation.in|access-date=14 दिसंबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20170803172708/http://natureconservation.in/state-animal-of-bihar-gaur-complete-detail-updated/|archive-date=3 अगस्त 2017|url-status=dead}}</ref> || [[File:Indian Bison (Gaur) 1 by N. A. Naseer.jpg|100px]] ||
|-
|राज्य पक्षी
|[[House sparrow|House Sparrow]] (''Passer domesticus'')<ref>{{Cite news|url=http://www.dnaindia.com/india/report-sparrow-to-become-the-state-bird-of-bihar-1787037|title=Sparrow to become the state bird of Bihar {{!}} Latest News & Updates at Daily News & Analysis|date=2013-01-08|newspaper=dna|language=en-US|access-date=2016-10-15|archive-url=https://web.archive.org/web/20180926170258/https://www.dnaindia.com/india/report-sparrow-to-become-the-state-bird-of-bihar-1787037|archive-date=26 सितंबर 2018|url-status=live}}</ref> || [[File:House Sparrow (Passer domesticus)- Female in Kolkata I IMG 3787 (cropped).jpg|100px]] ||
|-
|राज्य पुष्प
|[[Bauhinia variegata|Kachnar]] (''Phanera variegata'')<ref>{{cite web|url = http://bsienvis.nic.in/State_flower/Bihar%20State%20Flower%20-%20Final%20-%2010.12.2013.pdf|title = State flower of Bihar|date = |access-date = 16 February 2016|website = |publisher = ENVIS Centre on Floral Diversity|last = |first = |archive-url = https://web.archive.org/web/20160224075355/http://bsienvis.nic.in/State_flower/Bihar%20State%20Flower%20-%20Final%20-%2010.12.2013.pdf|archive-date = 24 फ़रवरी 2016|url-status = dead}}</ref>
| style="text-align:center;"|[[File:Bauhinia variegata flower.jpg|100px]]
|
|-
| राज्य वृक्ष || [[Ficus religiosa|Peepal tree]] (Ficus religiosa)<ref>{{Cite web|url=http://www.onlinesaraswati.com/en/Bihar-Symbols.php|title=Bihar State Symbols|website=www.onlinesaraswati.com|access-date=2019-07-17|archive-url=https://web.archive.org/web/20180813030546/http://www.onlinesaraswati.com/en/Bihar-Symbols.php|archive-date=13 अगस्त 2018|url-status=dead}}</ref>|| style="text-align:center;" |[[File:Ficus religiosa Bo.jpg|alt=|100x100px]]||
|-
|rowspan=5|[[मणिपुर]]
| राज्य चिह्न ||[[Emblem of Manipur]]|| style="text-align:center;"| ||
|-
| राज्य पशु || [[Sangai]] (''Rucervus eldii eldii'')<ref name="kimn">{{cite web | url=http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#man | title=States and Union Territories Symbols | work=knowindia.gov.in | accessdate=20 January 2014 | url-status=dead | archiveurl=https://web.archive.org/web/20131112080035/http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#man | archivedate=12 November 2013 | df=dmy-all }}</ref><ref name="mn">{{cite web | url=http://manipurforest.gov.in/ | title=Official website of Forest Department, Government of Manipur, India: | work=manipurforest.gov.in | accessdate=20 January 2014 | archive-url=https://web.archive.org/web/20140105082025/http://manipurforest.gov.in/ | archive-date=5 जनवरी 2014 | url-status=dead }}</ref> || align=center|[[File:Cervus eldii4.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पक्षी || [[Mrs. Hume's pheasant|Nongyeen]] (''Syrmaticus humiae'')<ref>{{cite web | url=http://www.manenvis.nic.in/Database/Nongin_3355.aspx | title=State Bird: Nongin | work=manenvis.nic.in | accessdate=11 June 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20160804200452/http://manenvis.nic.in/Database/Nongin_3355.aspx | archive-date=4 अगस्त 2016 | url-status=dead }}</ref> || align=center|[[File:Syrmaticus humiae.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पुष्प || [[Siroi lily]] (''Lilium mackliniae'')<ref name="kimn" /><ref name="mn" /> || align=center|[[File:Lilium mackliniae.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य वृक्ष || Uningthou (''[[Phoebe hainesiana]]'')<ref>{{cite web | url=http://bsienvis.nic.in/State_trees/Manipur%20State%20Tree%20-%20Final%20-%209.12.2013.pdf | title=State Tree of Manipur | work=bsienvis.nic.in | accessdate=11 June 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20160808093008/http://bsienvis.nic.in/State_trees/Manipur%20State%20Tree%20-%20Final%20-%209.12.2013.pdf | archive-date=8 अगस्त 2016 | url-status=dead }}</ref> || ||
|-
|rowspan=6|[[मध्य प्रदेश]]
| राज्य चिह्न ||Ashoka lions, banyan tree, ears of wheat and ears of rice || style="text-align:center;"|[[File:..Madhya Pradesh Flag(INDIA).png|100px]] ||
|-
| राज्य पशु || [[Rucervus duvaucelii|Barasingha]]<ref name="kimp">{{cite web | url=http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#mp | title=Symbols of Madya Pradesh | work=knowindia.gov.in | accessdate=18 October 2013 | url-status=dead | archiveurl=https://web.archive.org/web/20131112080035/http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#mp | archivedate=12 November 2013 | df=dmy-all }}</ref><ref name="mp">{{cite web|url=http://www.balaghat.nic.in/images/GOVT/tourist.htm |title=Symbols of Madya Pradesh |accessdate=18 October 2013 |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20131019091527/http://www.balaghat.nic.in/images/GOVT/tourist.htm |archivedate=19 October 2013 }}</ref> (''Rucervus duvaucelii'') || style="text-align:center;"|[[File:The barasingha.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पक्षी || [[Indian paradise flycatcher]] (''Terpsiphone paradisi'')<ref name=mpsbb>{{cite web | url=http://www.mpsbb.nic.in/symbol.html | title=State Symbols of MP | publisher=Madhya Pradesh State Biodivesity Board | work=mpsbb.nic.in | accessdate=25 June 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20160725091913/http://www.mpsbb.nic.in/symbol.html | archive-date=25 जुलाई 2016 | url-status=dead }}</ref> || align=center|[[File:Terpsiphone paradisi -near Amaya Lake, Dambulla, Sri Lanka-8.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य मछली || [[Tor tor|Mahasheer]] (''Tor tor'')<ref name=mpsbb/> || align=center|[[File:Tor tor Bhavani.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पुष्प || [[Lilium candidum|Madonna lily]] (''Lilium candidum'')<ref>{{cite web|url = http://www.frienvis.nic.in/KidsCentre/State-Animals-Birds-Trees-Flowers-of-India_1500.aspx|title = State Animals, Birds, Trees and Flowers of India|publisher = ENVIS Centre on Forestry|work = frienvis.nic.in|accessdate = 10 January 2017|archive-url = https://web.archive.org/web/20160308180415/http://www.frienvis.nic.in/KidsCentre/State-Animals-Birds-Trees-Flowers-of-India_1500.aspx|archive-date = 8 मार्च 2016|url-status = dead}}</ref> || [[File:Lilium-longiflorum-001-Zachi-Evenor.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य वृक्ष || [[Banyan tree]] <ref>{{cite web|url = http://bsienvis.nic.in/State_trees/Madhya%20Pradesh%20State%20Tree%20-%20Final%20-%2030.1.2014.pdf|title = Madhya Pradesh|publisher = ENVIS Centre on Floral Diversity|accessdate = 16 February 2016|archive-url = https://web.archive.org/web/20160224075612/http://bsienvis.nic.in/State_trees/Madhya%20Pradesh%20State%20Tree%20-%20Final%20-%2030.1.2014.pdf|archive-date = 24 फ़रवरी 2016|url-status = dead}}</ref> || align=center|[[File:Acharya Jagadish Chandra Bose Indian Botanic Garden - Howrah 2011-01-08 9797.JPG|100px]] ||
|-
|rowspan=7|[[महाराष्ट्र]]
| राज्य चिह्न || [[Diya (lamp)|''Samai'']] || align=center|[[File:Seal of Maharashtra.svg|100px]]||
|-
| राज्य आदर्श वाक्य ||प्रतिपच्चंद्रलेखेव वर्धिष्णुर्विश्व वंदिता महाराष्ट्रस्य राज्यस्य मुद्रा भद्राय राजते <br> (''The glory of this Seal of Maharashtra will grow like the first day moon. It will be worshiped by the world and will shine only for the well being of people'') || ||
|-
| राज्य पशु || [[Ratufa indica|Indian giant squirrel]]<ref name="kimh">{{cite web | url=http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#mha | title=Symbols of Maharashtra | work=knowindia.gov.in | accessdate=18 October 2013 | url-status=dead | archiveurl=https://web.archive.org/web/20131112080035/http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#mha | archivedate=12 November 2013 | df=dmy-all }}</ref> (''Ratufa indica'') || style="text-align:center;"|[[File:Ratufa indica (Bhadra, 2006).jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पक्षी || [[Treron phoenicoptera|Yellow-footed green pigeon]]<ref name="kimh"/> (''Treron phoenicoptera'') || align=center|[[File:Yellow-footed Green-Pigeon (Treron phoenicopterus) male-8.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य तितली || [[Papilio polymnestor|Blue Mormon]] (''Papilio polymnestor'')<ref name="maha-thehindu">{{Cite news|title = Maharashtra gets ‘State butterfly’|url = http://www.thehindu.com/news/national/other-states/maharashtra-gets-state-butterfly/article7342955.ece|newspaper = The Hindu|date = 2015-06-22|access-date = 2016-01-27|issn = 0971-751X|language = en-IN|archive-url = https://web.archive.org/web/20191017195335/https://www.thehindu.com/news/national/other-states/maharashtra-gets-state-butterfly/article7342955.ece|archive-date = 17 अक्तूबर 2019|url-status = live}}</ref> || align=center|[[File:Papilio polymnestor by Kadavoor.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पुष्प || [[जरुल]] (''Lagerstroemia speciosa'')<ref>{{cite web | url=http://www.bsienvis.nic.in/State_flower/Maharashtra%20State%20Flower%20-%20Final%20-%2030.1.2014.pdf | title=State Flower of Maharashtra | publisher=ENVIS Centre on Floral Diversity | accessdate=16 February 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20150824044444/http://www.bsienvis.nic.in/State_flower/Maharashtra%20State%20Flower%20-%20Final%20-%2030.1.2014.pdf | archive-date=24 अगस्त 2015 | url-status=dead }}</ref> || align=center|[[File:Jarul.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य वृक्ष || [[Mangifera indica|Mango Tree]] (''Mangifera indica'')<ref>{{cite web | url= http://bsienvis.nic.in/State_trees/Maharashtra%20State%20Tree%20-%20Final%20-%2030.1.2014.pdf | title= State Tree of Maharashtra | publisher= ENVIS Centre on Floral Diversity | accessdate= 16 February 2016 | archive-url= https://web.archive.org/web/20160809070241/http://bsienvis.nic.in/State_trees/Maharashtra%20State%20Tree%20-%20Final%20-%2030.1.2014.pdf | archive-date= 9 अगस्त 2016 | url-status= dead }}</ref> || align=center|[[File:Mango blossoms.jpg|100px]] ||
|-
|rowspan=5|[[मिज़ोरम]]
| राज्य चिह्न || Uses the [[National Emblem of India]] || style="text-align:center;"|[[File:Seal of Mizoram.svg|100px]] ||
|-
| राज्य पशु || [[Himalayan serow]] (''Capricornis thar'') || align=center|[[File:Himalayan Serow Pangolakha Wildlife Sanctuary East Sikkim Sikkim India 13.02.2016.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पक्षी || [[Mrs. Hume's pheasant]] (''Syrmaticus humiae'') || align=center|[[File:Syrmaticus humiae.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पुष्प || Red Vanda (''[[Renanthera imschootiana]]'')<ref name="envis-flower" /> || align=center|[[File:Renanthera imschootiana 01.jpg|100x100px]] ||
|-
| राज्य वृक्ष || Indian rose chestnut (''[[Mesua ferrea]]'') || align=center|[[File:MesuaFerrea IronWood.jpg|100px]] ||
|-
|rowspan=5|[[मेघालय]]
| राज्य चिह्न || Uses the [[National Emblem of India]] || style="text-align:center;"|[[File:Seal of Meghalaya.svg|100px]] ||
|-
| राज्य पशु || [[Clouded leopard]] (''Neofelis nebulosa'')<ref>{{Cite web|url=http://megbiodiversity.nic.in/faunal-biodiversity.html|title=Meghalaya Biodiversity Board {{!}} Faunal Diversity in Meghalaya|website=megbiodiversity.nic.in|access-date=2016-10-15|archive-url=https://web.archive.org/web/20161018204920/http://megbiodiversity.nic.in/faunal-biodiversity.html|archive-date=18 अक्तूबर 2016|url-status=dead}}</ref> || align=center|[[File:Clouded leopard.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पक्षी || [[Common hill myna|Hill myna]] (''Gracula religiosa'')<ref>{{Cite web|url=http://www.telegraphindia.com/1061117/asp/northeast/story_7011106.asp|title=The Telegraph – Calcutta : Northeast|website=www.telegraphindia.com|access-date=2016-10-15|archive-url=https://web.archive.org/web/20180916235731/https://www.telegraphindia.com/1061117/asp/northeast/story_7011106.asp|archive-date=16 सितंबर 2018|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=http://www.frienvis.nic.in/KidsCentre/State-Animals-Birds-Trees-Flowers-of-India_1500.aspx|title=State Animals, Birds, Trees and Flowers of India|website=www.frienvis.nic.in|access-date=2016-10-15|archive-url=https://web.archive.org/web/20160308180415/http://www.frienvis.nic.in/KidsCentre/State-Animals-Birds-Trees-Flowers-of-India_1500.aspx|archive-date=8 मार्च 2016|url-status=dead}}</ref> || align=center|[[File:Gracula religiosa robusta-01.JPG|100px]] ||
|-
| राज्य पुष्प || [[Paphiopedilum insigne|Lady's Slipper Orchid]] (''Paphiopedilum insigne'')<ref name="envis-flower" /> || align=center|[[File:Paphiopedilum insigne Orchi 01.jpg|100px]]||
|-
| राज्य वृक्ष || [[Gmelina arborea|Gamhar]] (''Gmelina arborea'')<ref>{{cite web | url=http://bsienvis.nic.in/State_trees/Meghalaya%20State%20Tree_2_12.pdf | title=State Tree of Meghalaya | accessdate=27 January 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20160203050417/http://bsienvis.nic.in/State_trees/Meghalaya%20State%20Tree_2_12.pdf | archive-date=3 फ़रवरी 2016 | url-status=dead }}</ref> || align=center|[[File:Gmelina arborea 2.jpg|100px]]||
|-
|rowspan=7|[[राजस्थान]]
| राज्य चिह्न || Uses the [[National Emblem of India]] || [[File:Emblem Rajasthan.png|100px]]
||
|-
| राज्य पशु || [[चिंकारा]] (''Gazella bennettii'') || style="text-align:center;"|[[File:Chinkara.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य विरासत पशु || [[Dromedary camel]] (''Camelus dromedarius'') || style="text-align:center;"|[[File:Camelus dromedarius 1.JPG|100px]] ||
|-
| राज्य पक्षी || [[Ardeotis nigriceps|Indian bustard]] (''Ardeotis nigriceps'') || style="text-align:center;"|[[File:Sonchiriya.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पुष्प || [[Tecomella undulata|Rohida]] (''Tecomella undulata'') || style="text-align:center;"|[[File:Rohida (Tecomella Undulata).jpg|100px]] ||
|-
| राज्य वृक्ष || [[Prosopis cineraria|Khejri]] (''Prosopis cineraria'') || style="text-align:center;" |[[File:Khejari (Prosopis cineraria).JPG|100px]] ||
|-
|राज्य पौधा || [[cactaceae|cactus]] (cactaceae) || ||
|-
|rowspan=6|[[सिक्किम]]
| राज्य चिह्न || [[Emblem of Sikkim]] || style="text-align:center;"|[[File:Seal of Sikkim.svg|100px]] ||
|-
| राज्य आदर्श वाक्य || ༄༅།ཁམས་གསུམ་དབང་འདུས <br> (''Conqueror of the three worlds'') || ||
|-
| राज्य पशु || [[Red panda]] (''Ailurus fulgens'')<ref name="kisik">{{cite web | url=http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#sik | title=States and Union Territories Symbols | work=knowindia.gov.in | accessdate=13 June 2016 | url-status=dead | archiveurl=https://web.archive.org/web/20131112080035/http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#sik | archivedate=12 November 2013 | df=dmy-all }}</ref><ref name="sik">{{cite web | url=http://sikkimtourism.gov.in/Webforms/General/SikkimAtAGlance/FloraFauna.aspx | title=Flora and Fauna | work=sikkimtourism.gov.in | accessdate=13 June 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20160417083258/http://sikkimtourism.gov.in/Webforms/General/SikkimAtAGlance/FloraFauna.aspx | archive-date=17 अप्रैल 2016 | url-status=dead }}</ref> || align=center|[[File:RedPandaFullBody.JPG|100px]] ||
|-
| राज्य पक्षी || [[Blood pheasant]] (''Ithaginis cruentus'')<ref name="kisik"/><ref name="sik"/> || align=center|[[File:Blood Pheasant.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पुष्प || Noble dendrobium (''[[Dendrobium nobile]]'')<ref name="kisik"/><ref name="sik"/> || align=center|[[File:Dendrobium nobile - flower view 01.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य वृक्ष || Rhododendron (''[[Rhododendron niveum]]'')<ref name="kisik"/><ref name="sik"/> || align=center|[[File:Rhododendron niveum AJT Johnsingh P1020212.JPG|100px]] ||
|-
|rowspan=5|[[हरियाणा]]
| राज्य चिह्न || Ashoka lions, lotus, sun rising over water and ears of wheat || style="text-align:center;"|[[File:..Haryana Flag(INDIA).png|100px]] ||
|-
| राज्य पशु || [[Blackbuck]] (kala hiran) (''Antilope cervicapra'')<ref name="kihar">{{cite web | url=http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#har | title=Symbols of Haryana | work=knowindia.gov.in | accessdate=15 October 2013 | url-status=dead | archiveurl=https://web.archive.org/web/20131112080035/http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#har | archivedate=12 November 2013 | df=dmy-all }}</ref><ref name="ha">{{cite web | url=http://haryanaforest.gov.in/aboutus/State_Emblems.aspx | title=Symbols of Haryana | accessdate=15 October 2013 | archive-url=https://web.archive.org/web/20131010075823/http://haryanaforest.gov.in/aboutus/State_Emblems.aspx | archive-date=10 October 2013}}</ref> || style="text-align:center;" |[[File:Antilope cervicapra from velavadar.JPG|100px]] ||
|-
| राज्य पक्षी || [[Francolinus francolinus|Black francolin]] (''Francolinus francolinus'')<ref name="kihar"/><ref name="ha"/> || style="text-align:center;"|[[File:Black Francolin.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पुष्प || [[Nelumbo nucifera|Lotus]] (''Nelumbo nucifera'')<ref name="kihar"/><ref name="ha"/> || style="text-align:center;"|[[File:Sacred lotus Nelumbo nucifera.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य वृक्ष || [[Ficus religiosa|Peepal]] (''Ficus religiosa'')<ref name="kihar"/><ref name="ha"/> || style="text-align:center;"|[[File:Ficus religiosa Bo.jpg|100px]] ||
|-
|rowspan=5|[[हिमाचल प्रदेश]]
| [[हिमाचल प्रदेश का राज्य चिह्न]] ||Ashoka lions and the [[Himalayas|Himalaya mountains]] || style="text-align:center;"| ||
|-
| राज्य पशु || [[Uncia uncia|Snow leopard]] (''Uncia uncia'')<ref name="kihp">{{cite web | url=http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#hp | title=Symbols of Himachal Pradesh | work=knowindia.gov.in | accessdate=15 October 2013 | url-status=dead | archiveurl=https://web.archive.org/web/20131112080035/http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#hp | archivedate=12 November 2013 | df=dmy-all }}</ref><ref name="hp">{{cite web | url=http://himachal.nic.in/tour/glance.htm | title=Symbols of Himachal Pradesh | accessdate=15 October 2013 | archive-url=https://web.archive.org/web/20130626221807/http://himachal.nic.in/tour/glance.htm | archive-date=26 June 2013}}</ref> || style="text-align:center;"|[[File:Uncia uncia.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पक्षी || [[Western tragopan]] (''Tragopan melanocephalus'')<ref name="kihp"/><ref name="hp"/> || style="text-align:center;"|[[File:WesternTragopan.jpg|100px]]
|-
| राज्य पुष्प || Pink [[rhododendron]] (''Rhododendron campanulatum'')<ref name="kihp"/><ref name="hp"/> || style="text-align:center;"|[[File:Pink Rhododendron Blossom Prashar Himachal Apr11 P1020872.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य वृक्ष || [[Deodar cedar]] (''Cedrus deodara'')<ref name="kihp"/><ref name="hp"/> || style="text-align:center;"|[[File:Cedrus deodara Manali 2.jpg|100px]] ||
|-
|rowspan=6|[[त्रिपुरा]]
| राज्य चिह्न || Uses the [[National Emblem of India]] || style="text-align:center;"|[[File:Seal of Tripura.svg|100px]] ||
|-
| राज्य पशु || [[Phayre's leaf monkey]] (''Trachypithecus phayrei'')<ref name="kitri">{{cite web | url=http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#tri | title=Symbols of Triputa | work=knowindia.gov.in | accessdate=22 January 2014 | url-status=dead | archiveurl=https://web.archive.org/web/20131112080035/http://knowindia.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=16#tri | archivedate=12 November 2013 | df=dmy-all }}</ref><ref name="tri">{{cite web | url=http://tcm.bsf.gov.in/introduction.htm | title=Symbols of Tripura | accessdate=22 January 2014 | archive-url=https://web.archive.org/web/20131023014445/http://tcm.bsf.gov.in/introduction.htm | archive-date=23 अक्तूबर 2013 | url-status=dead }}</ref><ref name=frienvis/> || align=center|[[File:Phayre's Langur, Trachypithecus phayrei in Phu Khieo Wildlife Sanctuary (21134240148).jpg|100px]] ||
|-
| राज्य पक्षी || [[Green imperial pigeon]] (''Ducula aenea'')<ref name="kitri"/><ref name="tri"/><ref name=frienvis/> || align=center|[[File:DuculaAenea.JPG|100px]] ||
|-
| राज्य पुष्प || Indian rose chestnut (''[[Mesua ferrea]]'')<ref name="kitri"/><ref name="tri"/><ref name=frienvis/> || align=center|[[File:Flowers of Mesua ferrea Kaziranga TR AJTJ P1010329.JPG|100px]] ||
|-
| राज्य वृक्ष || [[Agarwood]]<ref name="kitri"/><ref name="tri"/><ref name=frienvis/> || align=center|[[File:Gardenology.org-IMG 8103 qsbg11mar.jpg|100px]] ||
|-
| राज्य फल || Queen pineapple (''[[Ananas comosus]]'')<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/india/president-declares-queen-pineapple-as-tripuras-state-fruit/articleshow/64512923.cms|title=President declares queen pineapple as Tripura's 'State Fruit' - Times of India|publisher=|access-date=13 दिसंबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190402070101/https://timesofindia.indiatimes.com/india/president-declares-queen-pineapple-as-tripuras-state-fruit/articleshow/64512923.cms|archive-date=2 अप्रैल 2019|url-status=live}}</ref> || [[File:Pineapple and cross section.jpg|100px]]
|}
==केंद्रशासित प्रदेश==
==सन्दर्भ==
<references /><br />
bkc1f9b4b46wp6jzmpcanmeo973w4dx
जुन्नारदेव विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र
0
1216868
6591345
5588379
2026-07-23T14:23:20Z
~2026-41054-26
937831
आधिकारिक मैप को जोड़ा गया
6591345
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox Vidhan Sabha constituency
|name = जुन्नारदेव
|type =
|constituency_link =
|parl_name = [[मध्य प्रदेश विधान सभा]]
|map1 =
|map_size =
|image = 122-Junnardeo.svg
|map_entity =
|map_year =
|caption =
|district = [[छिंदवाड़ा ज़िला|छिंदवाड़ा]]
|region = [[मध्य भारत]]
|state = [[मध्य प्रदेश]]
|union_territory =
|polling_divisions =
|population =
|electorate =
|towns = जुन्नारदेव, दमुआ व तामिया
|area =
|lok_sabha_constituency = [[छिंदवाड़ा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र]]
|year = 2008
|abolished_label =
|abolished =
|future =
|seats =
|elects_howmany =
|party_label = <!-- defaults to "Party" -->
|party = [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]
|mla = सुनील उइके
|reserved = अनुसूचित जनजाति
|last_election = [[मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023|2023]]
|ex_mla =
|most_successful_party =
}}
'''जुन्नारदेव विधानसभा क्षेत्र''' मध्य [[भारत]] में [[मध्य प्रदेश]] राज्य के 230 [[विधानसभा]] निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है, जिसका क्षेत्र क्रमांक 122 है।<ref>{{cite web |title=जुन्नारदेव मध्य प्रदेश 2018 |url=https://myneta.info/madhyapradesh2018/index.php?action=show_candidates&constituency_id=366 |website=myneta.info |accessdate=18 सितंबर 2020}}</ref><ref name="eci1">{{Cite web|url=http://ceomadhyapradesh.nic.in/DACList.aspx|title=ज़िला/विधानसभा सूची|publisher=मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मध्यप्रदेश की वेबसाइट|archive-url=https://web.archive.org/web/20151201083311/http://ceomadhyapradesh.nic.in/(S(4ftawu55w1soru45gswzuz55))/DACList.aspx|archive-date=1 दिसम्बर 2015|access-date=9 दिसंबर 2015}}</ref> यह [[छिंदवाड़ा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|छिंदवाड़ा (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र)]] का एक खंड है।
यह [[छिंदवाड़ा ज़िला|छिंदवाड़ा ज़िले]] के अंतर्गत आता है।
==इन्हें भी देखें==
* [[जुन्नारदेव]]
* [[छिंदवाड़ा ज़िला]]
== संदर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:मध्य प्रदेश के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र]]
[[श्रेणी:छिंदवाड़ा ज़िला]]
8gzdplfc1z1dz23l3384d8syxfflmhi
सदस्य वार्ता:Vikash Singh Tanwar
3
1225501
6591441
4990883
2026-07-24T02:44:35Z
SM7
89247
सूचना: [[:सरूंड माता]] को [[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु]] नामांकन, [[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/सरूंड माता|चर्चा पृष्ठ देखें]]
6591441
wikitext
text/x-wiki
{{साँचा:सहायता|realName=|name=Vikash Singh Tanwar}}
-- [[सदस्य:नया सदस्य सन्देश|नया सदस्य सन्देश]] ([[सदस्य वार्ता:नया सदस्य सन्देश|वार्ता]]) 16:46, 19 अक्टूबर 2020 (UTC)
== [[:सरूंड माता|सरूंड माता]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:सरूंड माता|सरूंड माता]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/सरूंड माता|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/सरूंड माता]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
<center>[[वि:RS|विश्वसनीय_स्रोत]] नहीं मिल रहे; ऐसे में उल्लेखनीयता संदिग्ध। निजी टिप्पणी एवं मूल शोध की तरह लिखा लेख।</center>
कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 02:44, 24 जुलाई 2026 (UTC)
gzokyp5hzmsmqm36r89xcr47cqbbvvd
विष्णु पुराण (टीवी श्रृंखला)
0
1254310
6591466
6221941
2026-07-24T04:35:52Z
Pushkar Singh
415569
/* */ वर्तनी सुधार
6591466
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox television
| name = विष्णु पुराण
| image =
| caption =
| genre = [[दर्शन शास्त्र]]
| creator = [[बलदेव राज चोपड़ा |बी.आर.चोपड़ा]]
| based_on = ''[[विष्णु पुराणा]]''
| developer =
| writer = राम गोविंद (पटकथा) <br> हसन कमल (संवाद) <br> सतीश भटनागर, हसन कमाल, राम गोविंद, शफीक अंसारी
| director = [[रवि चोपड़ा ]]
| music = [[राज कमल ]]
| creative_director =
| starring = [[नितीश भारद्वाज ]]<br>वैदेही अमृटे
| narrated =
| country = [[भारत]]
| language = [[हिन्दी ]]
| num_seasons = 1
| num_episodes = 125
| camera = [[बहु-कैमरा]]
| executive_producer =
| producer = [[बलदेव राज चोपड़ा |बी. आर.चोपड़ा]]
| location =
| cinematography = धर्म चोपड़ा
| editor =
| runtime = 40-45 मिनट्स
| company = बी आर फिल्में
| first_aired = {{Start date|df=y|2000|01|23}}
| last_aired = {{End date|df=y|2002|06|16}}
| related = [[महाभारत (टीवी धारावाहिक)]]
| channel = [[ज़ी टीवी ]]<br>[[डीडी नेशनल ]]<br>[[डीडी भारती ]]
| picture_format = {{plainlist|
* [[576आई]]
* [[1080आई]]
}}
| opentheme = [[शंकर महादेवन ]]
}}
'''विष्णु पुराण''' (''''विष्णु पुराण'''' भी लिखा जाता है) एक [[भारतीय ]] [[टेलीविजन]] शृंखला, है , जो [[बलदेव राज चोपड़ा | बी.आर.चोपड़ा]] द्वारा निर्मित हिंदू देवता [[विष्णु]] पर आधारित ''[[विष्णु पुराण]] '' एक टीवी श्रृंखला है। '' विष्णु पुराण '' विष्णु के [[दशावतार | 10 अवतारों]] के बारे में बताता है, साथ ही साथ अन्य कहानियाँ, जैसे कि [[ध्रुव]] की कथा। साप्ताहिक श्रृंखला पहली बार रविवार सुबह, 23 जनवरी, 2000 को [[ज़ी टीवी]] पर प्रसारित हुई।<ref name="Tribune20000123">{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/2000/20000123/spectrum/tv.htm|title=The Sunday Tribune - Spectrum - Television - Playing god with panache|date=January 23, 2000|website=www.tribuneindia.com|access-date=2018-08-20}}</ref> बाद में 125 एपिसोड [[डीडी नेशनल ]] पर रिलीज हुए।<ref name="worldcat">{{Citation|last1=Chopra|first1=Ravi|title=Vishnu Puran: the greatest mythological [tale] ever told|date=2002|publisher=Indo-American Video Corp.|last2=Chopra|first2=B. R|last3=Govind|first3=Ram|last4=Bhardwaj|first4=Nitish|last5=Vaidēhi|last6=Singh|first6=Samar Jay|last7=Kamal|first7=Raj|last8=B.R. Films|last9=Indo American Video Corporation|oclc=63667948}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://franklin.library.upenn.edu/catalog/FRANKLIN_9937760963503681|title=Vishnu Puran [videorecording] : The greatest mythological [tale] ever told / B.R. Films ; written by Ram Govind ; produced by B.R. Chopra ; directed by Ravi Chopra. - Franklin|website=franklin.library.upenn.edu|language=en|access-date=2018-08-30}}</ref>
मुख्य भूमिकाएँ [[नितीश भारद्वाज]] के रूप में [[विष्णु]] और वैदेही के रूप में [[लक्ष्मी]] निभाई जाती हैं। नीतीश भारद्वाज ने पहले [[कृष्ण]], चोपड़ा के महाकाव्य '' [[महाभारत (टीवी धारावाहिक)| महाभारत]] 'के टेलीविजन रूपांतरण में भूमिका निभाई थी। संगीत [[राज कमल]] <ref name= "Tribune20000123" /> द्वारा रचित है, जिन्होंने '' महाभारत '' में भी काम किया। शीर्षक गीत [[शंकर महादेवन]] द्वारा गाया गया था और प्रत्येक एपिसोड के डिकोडिंग सारांश को [[महेंद्र कपूर]] ने गाया था। [[कोरोनावायरस रोग 2019|भारत में कोविड़ -19 महामारी]] के दौरान, [[डीडी भारती]] और [[ज़ी टीवी]] ने लॉकडाउन के दौरान जनता का मनोरंजन करने के लिए पुन: प्रसारण शुरू किया। 6 जुलाई 2020 से यह डीडी नेशनल में रात 8:00 बजे से 8:45 बजे तक 1 एपिसोड से फिर से शुरू हुआ।<ref>{{Cite news|url=https://www.freedish.in/2020/05/vishnu-puran-program-coming-soon-on-dd.html|title=Vishnu Puran Serial Coming soon DD Bharati Channel|date=2020-04-05|work=DD Free Dish Blog|access-date=2020-04-05|language=en}}</ref><ref>{{Cite web|last=Singh|first=Shalu|date=2020-05-23|title=Vishnu Puran to rerun on Zee from May 25. Here's what actor Nitish Bhardwaj has to say about it|url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/tv/nitish-bharadwaj-actor-vishnu-puran-ved-vyas-anthropologist-619638|access-date=2020-06-07|website=www.indiatvnews.com|language=en}}</ref>
== कास्ट ==
* [[नितीश भारद्वाज]] के रूप में [[विष्णु]] / [[राम | राम]] / [[कृष्ण]] / [[वामन]] / [[परशुराम]]
* वैदेही अमृत के रूप में [[लक्ष्मी]]
* [[सुधीर दलवी]] [[ब्रम्हा]]
* [[समर जय सिंह]] [[शिव]]
* संदीप मोहन [[इंद्र]]
* [[विक्रांत चतुर्वेदी]] [[नारद]]
* [[निमाई बाली]] के रूप में [[जया-विजया | जया]] / [[हिरण्यकश्यप]] / [[रावण]]
* महेंद्र घुले [[जया-विजया | विजया]] / [[हिरण्याक्ष]] / [[कुंभकर्ण]]
* [[समीर धर्माधिकारी]] के रूप में [[मनु (हिंदू धर्म) | मनु]]
* गीता गोरे सतरूप के रूप में
* [[जिबरान खान]] के रूप में [[ध्रुव | ध्रुव]]
* दमन मन उत्तानपाद के रूप में
* जया माथुर सुनीति के रूप में
* [[दीपशिखा नागपाल]] सुरूचि के रूप में
* [[सुरेन्द्र पाल]] [[शुक्राचार्य]] के रूप में
* शमीम [[जयंती (हिंदू धर्म) | जयंती]] के रूप में
* [[दीपक जेठी]] कालकेतु के रूप में
* [[वर्षा उसगांवकर]] जैसा [[मोहिनी]]
* किंशुक वैद्य युवा के रूप में [[प्रह्लाद]]
* मोना पारेख के रूप में [[हिरण्यकशिपु | कयाधु]]
* यशोधान राणा वयस्क के रूप में [[प्रह्लाद]] / [[मेघनाद]]
* [[सुनीला करम्बेकर]] धृति के रूप में
* [[जितेन लालवानी]] [[विरोचन]]
* [[रवि किशन]] के रूप में [[सुधाना | सुधन्वा]]
* [[सीमा पांडे]] विशालाक्षी के रूप में
* [[सिराज मुस्तफा खान]] [[महाबली]]
* [[अर्जुन (फिरोज खान) | अर्जुन]] [[जमदग्नि]]
* [[शालिनी कपूर सागर]] [[रेणुका]]
* [[दीप ढिल्लों]] [[कार्तवीर्य अर्जुन]] (सहस्रार्जुन)
* [[आदर्श गौतम]] [[सीरध्वज]] (जनक)
* [[रीना कपूर]] [[सीता]]
* [[विंदू दारा सिंह]] [[हनुमान]] के रूप में
* अमित पचोरी के रूप में [[लक्ष्मण | लक्ष्मण]]
* [[विनीता ठाकुर]] [[उर्मिला]]
* आयुष पांडे के रूप में [[भरत (रामायण) | भरत]]
* [[ऋषभ शुक्ल]] [[दशरथ]] के रूप में
* [[अलका कुबल]] [[कौशल्या]]
* [[डॉली मिन्हास]] [[कैकेयी]]
* [[कमलिका गुहा ठाकुरता]] [[सुमित्रा]] के रूप में
* टीना घई [[मंथरा]] के रूप में
* शशि शर्मा [[मंदोदरी]] के रूप में
* [[विनोद कपूर]] [[विभीषण]] के रूप में
* रमना वाधवान / [[राजिता कोचर]] [[कौकसी]] के रूप में
* विशालाक्ष के रूप में प्रेम चंद शर्मा
* अंबिका जो गोपिका के रूप में
* [[विष्णु शर्मा]] [[वशिष्ठ]]
* युवा के रूप में बिजय आनंद [[मेघनाद]]
* विलास राज [[मारीच]] के रूप में
* सागर सालुंके / [[जावेद खान (अभिनेता) | जावेद खान]] [[विश्वामित्र]] के रूप में
== रिसेप्शन ==
भले ही '''विष्णु पुराण''' [[महाभारत (1 9 88 टीवी श्रृंखला) | महाभारत]] ''' के रूप में भी सफल साबित नहीं हुआ '''.<ref>{{Cite news|date=2005-11-10|title=Films cannot be dwarfed by television|work=Hindustan Times|url=https://www.highbeam.com/doc/1P3-979257181.html|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20180916093233/https://www.highbeam.com/doc/1P3-979257181.html|archive-date=2018-09-16}}</ref><ref>{{Cite book|last1=Hachten|first1=William A.|url=https://books.google.com/books?id=FI6vCQAAQBAJ&q=%22Vishnu+Puran%22&pg=PA125|title=The World News Prism: Digital, Social and Interactive|last2=Scotton|first2=James F.|date=2015-05-26|publisher=John Wiley & Sons|isbn=9781118809020|page=125|language=en}}</ref> एक वर्ष के भीतर, श्रृंखला [[वामाना | वामाना अवतारा]] के साथ समाप्त हुई और [[हिंदू]] समीक्षा ने कहा, "यह प्यारा धारावाहिक वास्तव में हमें अभिभूत कर देता है."<ref>{{Cite web|title=The Hindu : Of comedy and myth|url=https://www.thehindu.com/thehindu/2001/01/11/stories/09110656.htm|author=Thara Mohan Rao|website=www.thehindu.com|access-date=2018-09-16}}</ref> मार्च 2001 तक, यह ज़ी की शीर्ष 10 रेटिंग में लगातार था.<ref>{{Cite web|title=Bankable mythologicals materialise on TV screens at a fantastic pace|url=https://www.indiatoday.in/magazine/society-the-arts/story/20010416-bankable-mythologicals-materialise-on-tv-screens-at-fantastic-pace-775292-2001-04-16|website=India Today|language=en|access-date=2018-08-20}}</ref> जनवरी 2003 तक, इसने 100 और योजना के साथ 78 एपिसोड पूरे कर लिए थे और यह शीर्ष 20 की सूची में था।<ref>{{Cite news|date=2003-01-16|title=BR Films to produce new serials for DD, Sahara TV|language=en|work=Indian Television Dot Com|url=http://www.indiantelevision.com/headlines/y2k3/jan/jan82.htm|access-date=2018-08-30}}</ref> और 13-19 जुलाई, 2003 के सप्ताह के लिए, यह सभी घरों के लिए शीर्ष 5 में था, [[डीडी नेशनल | दूरदर्शन नेशनल (डीडी1)]] पर प्रसारित।.<ref>{{Cite web|title=3 BR TV shows in Top 10 all homes list for Week 29|url=https://www.indiantelevision.com/headlines/y2k3/july/july242.htm|date=2003-07-29|website=Indian Television Dot Com|language=en|access-date=2020-05-05}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{Reflist }}
== बाहरी कड़ियाँ ==
*{{IMDb title | 0397214}}
*पूरा शो देखें"'''[https://www.youtube.com/playlist?list=PLNKJJImmGYISYK20kVln2m75XXRWf-174 विष्णु पुराण ]'''" अब यूट्यूब पर।
[[श्रेणी: भारतीय पौराणिक टेलीविजन श्रृंखला]]
[[श्रेणी: डीडी नेशनल ओरिजिनल प्रोग्रामिंग]]
[[श्रेणी: २००० के दशक की भारतीय टेलीविजन श्रृंखला]]
[[श्रेणी: २००० भारतीय टेलीविजन श्रृंखला डेब्यू]]
[[श्रेणी: रामायण पर आधारित टेलीविजन श्रृंखला]]
[[श्रेणी: महाभारत पर आधारित टेलीविजन श्रृंखला]]
ak1cllnjvkmm226llsb2aezlcngb99t
गोविंदचंद्र (गढ़वाला राजवंश)
0
1327207
6591437
6231112
2026-07-24T02:42:20Z
InternetArchiveBot
500600
Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5
6591437
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox royalty
| name = गोविंदचंद्र
| title = अश्वपति नरपति गजपति राजत्रयधिपति
| succession = गढ़वाला राजा
| reign = 1114-1155 ई.
| predecessor = [[मदनपाल (गढ़वाला राजवंश)|मदनपाल]]
| successor = [[विजयचंद्र]]
| spouse = नयनकेली-देवी, गोसल्ला-देवी, कुमार-देवी और वसंत-देवी
| issue = अस्फोटचंद्र, राज्यपाल और [[विजयचंद्र]]
| house-type = राजवंश
| house = [[गढ़वाला]]
| father = मदनपाल
| mother = राल्हादेवी
| image = Govindchandra.jpg
| image_size = 300px
| caption = एक [[कलचुरी]]-गोविंदचंद्र (1114-1155 ई.) का 'बैठी हुई देवी' जैसे शैली का सोने का सिक्का।{{fraction|1|2}} अवलोकन: चार भुजाओं वाले तथागत बुद्ध ऊपरी दोनों हाथों में कमल पकड़े हुए कमल पर पालथी मारकर बैठे हैं।
नागरी लिपि में लेख: 'श्रीमद-गोविंदचंद्र'।
|religion=[[बौद्ध धर्म]]}}
'''गोविंदचंद्र''' (1114-1155 ई.) [[गाहड़वाल वंश|गढ़वाला]] वंश के एक भारतीय राजा थे। उन्होंने [[कन्नौज|कन्याकुब्ज]] और [[वाराणसी]] के प्रमुख शहरों सहित वर्तमान [[उत्तर प्रदेश]] में अंतर्वेदी देश पर शासन किया।{{sfn|Roma Niyogi|1959|p=65}}
गोविंदचंद्र अपने वंश का सबसे शक्तिशाली शासक था। एक राजकुमार के रूप में, उन्होंने [[ग़ज़नवी साम्राज्य|गज़नवी]] और [[पाल साम्राज्य|पलास]] के खिलाफ सैन्य सफलता हासिल की। एक संप्रभु के रूप में, उसने [[त्रिपुरी के कलचुरी]] को हराया, और उनके कुछ क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया।{{sfn|Roma Niyogi|1959|p=87}}
==इतिहास==
गोविंदचंद्र के शासनकाल के दौरान एक मंदिर के निर्माण की रिकॉर्डिंग "[[विष्णु हरि शिलालेख]]" [[बाबरी ढांचा विध्वंस| बाबरी मस्जिद के मलबे]] के बीच पाई गई थी। इस शिलालेख की प्रामाणिकता विवादास्पद है। कुछ इतिहासकारों के अनुसार, यह साबित होता है कि गोविंदचंद्र के अधीनस्थ अनायचंद्र ने उस स्थान पर एक मंदिर का निर्माण किया था जिसे [[राम]] का जन्मस्थान माना जाता है; बाद में इस मंदिर को नष्ट कर दिया गया और मुस्लिम विजेताओं द्वारा [[बाबरी मस्जिद]] से बदल दिया गया। अन्य इतिहासकारों का आरोप है कि हिंदू कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद स्थल पर तथाकथित विष्णु-हरि शिलालेख लगाया, और इसमें गोविंदचंद्र का उल्लेख एक अलग व्यक्ति है।{{sfn|Roma Niyogi|1959|p=57}}
=== ग़ज़नवी आक्रमण का प्रतिकार ===
[[File:Inscription of Kumaradevi the Queen of Gahadawala king Govindachandra, which refers the construction of Dharmachkra-Jin-Vihara at Sarnath, 12th century CE.jpg|thumb|गहड़वाल राजा गोविंदचंद्र की रानी कुमारदेवी का शिलालेख, जो [[बोधगया के पिथीपति]] से संबंधित थीं।,<ref name=Balogh2021 /> जिसने बौद्ध चैत्य के पुनः निर्माण का कार्य किया । [[:Commons:Category:Dharmachakra-Jina-Vihara|धर्मचक्र-जिन-विहार]] का अभिलेख [[सारनाथ]] पर "दुष्ट" [[तुर्क लोगों]] के आक्रमण जो 12वीं शताब्दी में हुवे उसकी जानकारी देता है। जिसको गोविंदचंद्र ने असफल कर दिया था। इसके अलावा इसमें सम्राट अशोक के बनवाए चैत्य का वर्णन है जिसका पुनर्निर्माण कुमारदेवी ने किया था।<ref>{{cite book |last1=Konow |first1=Sten |title=Epigraphia Indica Vol. 9 |date=1907 |pages=319–330 |url=https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.48794/page/n431/mode/2up}}</ref><ref>{{cite web |title=ASI notice |url=https://www.asisarnathcircle.org/dharmchakra.php |website=www.asisarnathcircle.org |access-date=30 मई 2024 |archive-date=15 अप्रैल 2024 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240415121344/https://www.asisarnathcircle.org/dharmchakra.php |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite book |last1=Asher |first1=Frederick M. |title=Sarnath: A Critical History of the Place Where Buddhism Began |date=11 February 2020 |publisher=Getty Publications |isbn=978-1-60606-638-6 |page=7 |url=https://books.google.com/books?id=ecbPDwAAQBAJ&pg=PA7 |language=en}}</ref>]]
<blockquote>
..धर्माशोक नराधिपस्य समये श्री धर्मचक्रो जिनो यादृक् तन्नय रक्षितः पुनरयंचक्रे ततोऽप्यद्भुतम्।
— कुमारदेवी, सारनाथ शिलालेख<ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/politicalhistory00raycuoft|title=Political history of ancient India|page=159|last=Raychaudhuri|first=Hem Chandra|date=1923|publisher=Calcutta, University of Calcutta|others=Robarts - University of Toronto}}</ref><ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/dli.calcutta.11684|title=Journal of Ancient Indian History, Vol-3|page=90-91|date=1969-70}}</ref><br>
अनुवाद : "[[अशोक|धर्म-अशोक]] के समय पवित्र धर्मचक्र की रक्षा उनके द्वारा यथावत की गई थी और फिर उन्होंने (कुमारदेवी ने) एक अद्भुत कार्य करके उसे (सारनाथ धम्मचक्र/चैत्य) को पुनः स्थापित किया।"
</blockquote>
[[File:India, Day 15 (3516337730).jpg|thumb|में अलंकृत स्तंभों के अवशेष[[:Commons:Category:Dharmachakra-Jina-Vihara|धर्मचक्र जिन विहार]] रानी कुमारदेवी द्वारा स्थापित।]]
समकालीन मुस्लिम इतिहासकार सलमान द्वारा लिखित 'दीवान-ए-सलमान' में कहा गया है कि मुस्लिम [[गजनवी]] शासक [[गजनी के मसूद III|मसूद III]] ने भारत पर आक्रमण किया। सलमान के अनुसार, ग़ज़नवी सेनाओं ने कनौज ([[कन्याकुब्ज]]) के शासक माल्ही को बंदी बना लिया। "माल्ही" की पहचान आम तौर पर गोविंदचंद्र के पिता [[मदनपाल (गहड़वाला राजवंश)|मदनपाल]] से की जाती है। ऐसा प्रतीत होता है कि गढ़वालों ने 1104 ई. और 1105 ई. के बीच कान्यकुब्ज को खो दिया था और गोविंदचंद्र ने इसे पुनः प्राप्त करने के लिए युद्ध का नेतृत्व किया।{{sfn|Roma Niyogi|1959|p=57}}
गोविंदचंद्र द्वारा एक राजकुमार ("महाराजपुत्र") के रूप में जारी किए गए शिलालेखों से संकेत मिलता है कि उसने गजनवी को पराजित किया जिससे वह कान्यकुब्ज और इसके आसपास का क्षेत्र में गढ़वाल शक्ति को बहाल करने में कामयाब रहे 1109 ई. तक। संभवतः दोनों पक्षों के बीच एक शांति संधि संपन्न हुई, जैसा कि 1109 ई. राहिन (या रहान) शिलालेख से संकेत मिलता है। इस शिलालेख के अनुसार, राजकुमार गोविंदचंद्र ने "हम्मीर" के खिलाफ बार-बार लड़ाई लड़ी, और उसे अपनी दुश्मनी भुला दी। हम्मीर अरबी शीर्षक "[[अमीर|अमीर]]" का [[संस्कृत]] रूप है, जिसका उपयोग गजनवियों द्वारा किया जाता था।{{sfn|Roma Niyogi|1959|p=57}}
इसके बाद, ऐसा प्रतीत होता है कि एक ग़ज़नवी सेनापतियों ने गढ़वाल साम्राज्य पर एक असफल हमला किया था। गोविंदचंद्र के दरबारी लक्ष्मीधर द्वारा लिखित 'कृत्य-कल्पतरु' में कहा गया है कि गोविंदचंद्र ने हम्मीर को मार डाला।{{sfn|Roma Niyogi|1959|p=60}} यह घटना मदनपाल के शासनकाल के दौरान या गोविंदचंद्र के शासनकाल के आरंभ में घटी होगी।{{sfn|Roma Niyogi|1959|p=61}} गोविंदचंद्र की रानी कुमारदेवी के अदिनांकित [[सारनाथ]] शिलालेख में [[वाराणसी]] को "दुष्ट" [[तुर्क लोगों|तुरुष्का]] (तुर्क लोग, यानी गजनवी) से बचाने के लिए उनकी प्रशंसा की गई है।{{sfn|Roma Niyogi|1959|pp=61–62}}
=== रामपाल से संघर्ष ===
1109 ई. से कुछ समय पहले, पूर्वी भारत के [[पाल साम्राज्य]] ने गढ़वाल साम्राज्य पर आक्रमण किया था, संभवतः [[चंद्रदेव]] के उनके राज्य पर पहले आक्रमण के प्रतिशोध के रूप में। 1109 ई. के राहिन शिलालेख में दावा किया गया है कि एक राजकुमार के रूप में भी, गोविंदचंद्र ने [[गौड़ा (क्षेत्र)|गौड़ा]] (पाल साम्राज्य) के हाथियों को अपने अधीन कर लिया। ''कृत्य-कल्पतरु'' घोषित करता है कि गोविंदचंद्र के मात्र खेल से गौड़ा के हाथियों को खतरा था।{{sfn|Roma Niyogi|1959|p=63}}
ऐसा प्रतीत होता है कि यह युद्ध एक वैवाहिक गठबंधन के माध्यम से संपन्न शांति संधि के साथ समाप्त हो गया था।{{sfn|Roma Niyogi|1959|p=63}} गोविंदचंद्र ने [[बोधगया के पिथिपति]] की देवरक्षिता की बेटी कुमारदेवी से शादी की।<ref name=Balogh2021>{{cite book |last1=Balogh |first1=Daniel |title=Pithipati Puzzles: Custodians of the Diamond Throne |date=2021 |publisher=British Museum Research Publications |pages=40–58 |isbn=9780861592289 |url=https://books.google.com/books?id=Lk0NzgEACAAJ}}</ref>{{sfn|Roma Niyogi|1959|p=87}}
== संदर्भ ==
{{reflist}}
== ग्रंथ सूची ==
* {{Cite book|author=Romila Thapar|author-link=Romila Thapar|url=https://books.google.com/books?id=1Y02AiEu1kcC|title=A History of India|date=1990-06-28|publisher=Penguin UK|isbn=978-0-14-194976-5|language=en}}
* {{cite book |author=D. C. Sircar |author-link=Dineschandra Sircar |title=Indian Epigraphical Glossary |url=https://archive.org/details/indianepigraphic00sircuoft |page=[https://archive.org/details/indianepigraphic00sircuoft/page/35 35] |year=1966 |publisher=[[Motilal Banarsidass]] |isbn=978-81-208-0562-0 }}
* {{cite book |author=D. C. Sircar |author-link=Dineshchandra Sircar |title=The Kānyakubja-Gauḍa Struggle |publisher=Asiatic Society |year=1985 |isbn=9788192061580 |url=https://books.google.com/books?id=9mdQAQAAMAAJ |oclc=915112370 }}
{{Wikiquote}}
[[श्रेणी: गढ़वाला राजवंश]]
[[श्रेणी: 12वीं सदी के भारतीय सम्राट]]
lq8qxls414aqn5zzv7wf5zrfrkem3ct
श्रेणी:भारतीय पौराणिक टेलीविजन श्रृंखला
14
1388904
6591429
5601803
2026-07-24T02:31:03Z
Pushkar Singh
415569
/* */
6591429
wikitext
text/x-wiki
[[श्रेणी:भारतीय पौराणिक टेलीविजन शृंखला]]
h08qgzuwfr0z798v1w9vxnenlw9yzxu
सदस्य वार्ता:Mohamad Arshad
3
1416006
6591499
5706381
2026-07-24T07:20:20Z
Pushkar Singh
415569
/* दूसरों के सदस्य पृष्ठ पर न लिखना और अपने सदस्य पृष्ठ पर व्यक्तिगत जानकारी न डालना */ नया अनुभाग
6591499
wikitext
text/x-wiki
{{साँचा:सहायता|realName=|name=Mohamad Arshad}}
-- [[सदस्य:नया सदस्य सन्देश|नया सदस्य सन्देश]] ([[सदस्य वार्ता:नया सदस्य सन्देश|वार्ता]]) 11:47, 3 दिसम्बर 2022 (UTC)
== दूसरों के सदस्य पृष्ठ पर न लिखना और अपने सदस्य पृष्ठ पर व्यक्तिगत जानकारी न डालना ==
आपने अतीत में दूसरों का सदस्य पृष्ठ सम्पादित किया है, साथ ही अपने पृष्ठ पर कहानी की तरह अपनी व्यथा लिखी है।
मेरी संवेदना आपके साथ है किन्तु [[विकिपीडिया]] अपनी आपबीती सुनाने के लिए नहीं है। आप सकारात्मकvयोगदान दे सकते हैं। [[सदस्य:Pushkar Singh|<span style="color:DeepPink;">पुष्कर सिंह</span>]] [[सदस्य वार्ता:Pushkar Singh|<span style="color:Red;">✉️</span>]] 07:20, 24 जुलाई 2026 (UTC)
k4bbmu1nwvsp1i3ex2eairypi9mt67o
रामायण (2012 टीवी श्रृंखला)
0
1419584
6591427
6509793
2026-07-24T02:29:37Z
Pushkar Singh
415569
/* */
6591427
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox television
| image =
| alt_name = रामायण: जीवन का आधार
| genre =
| director = मुकेश सिंह <br> पवन पारखी <br> राजेश शिखरे
| country = भारत
| language = हिंदी
| num_episodes = 56
| producer = मीनाक्षी सागर <br> मोती सागर
| cinematography = दीपक मालवंकर <br> [[अशोक मिश्रा]]
| editor = [[संतोष सिंह]]
| camera = [[मल्टी-कैमरा]]
| company = [[सागर फिल्मस|सागर पिक्चर्स]]
| network = [[जी टीवी]]
| picture_format = [[576 आई]] <br> [[1080आई]] [[एचडीटीवी]]
| first_aired = {{start date|df=y|2012|8|12}}
| last_aired = {{end date|df=y|2013|9|1}}
}}
'''''रामायण: सबके जीवन का आधार''''' [[सागर फिल्मस|सागर पिक्चर्स]] द्वारा निर्मित एक भारतीय टेलीविजन शृंखला है जो [[ज़ी टीवी]] पर प्रसारित होती है। यह [[रामचरितमानस]] का रूपांतरण है।
== सार ==
''रामायण'' [[राम]] की कहानी सुनाती है, जो [[अयोध्या]] के राजा [[दशरथ]] के चार पुत्रों में सबसे बड़े थे। राम को अपने पिता की सेवानिवृत्ति पर अयोध्या का राजा बनना है, लेकिन उनकी सौतेली माँ, [[कैकेयी]], अपनी दासी [[मन्थरा|मंथरा]] के प्रभाव में, चाहती हैं कि उनका पुत्र, [[भरत (रामायण)|भरत]], राजा बने।
यह याद करते हुए कि दशरथ ने एक बार उनसे कोई भी दो वरदान देने का वादा किया था, जो उन्होंने उनसे मांगा था, वह पहले मांग करती हैं कि राम को 14 साल के लिए वन में निर्वासित कर दिया जाए और दूसरा कि भरत को उनके स्थान पर शासक बनाया जाए। हालांकि दिल टूट गया, दशरथ अपनी बात रखने के लिए मजबूर हैं। अनिच्छा से, वह राम को वन जाने के लिए कहता है। राम वनवास को सहर्ष स्वीकार करते हैं और वन के लिए प्रस्थान करते हैं। राम अनिच्छा से अपनी पत्नी [[सीता]] और अपने छोटे भाई [[लक्ष्मण]] की कंपनी को स्वीकार करते हैं। जब भरत को पता चलता है कि राम के वनवास के लिए उनकी मां जिम्मेदार हैं, तो वे राम के पीछे-पीछे चलते हैं और उनसे अपने साथ अयोध्या लौटने की विनती करते हैं। हालाँकि, राम ने अपने पिता के वचन को पूरा करने के लिए अपने कर्तव्य से बंधे होने से इंकार कर दिया। भरत इसके बजाय राम की पादुका को महल में वापस लाने का फैसला करते हैं और उन्हें एक इशारे के रूप में सिंहासन पर बिठाते हैं कि राम ही सच्चे राजा हैं। राम के आग्रह पर, भरत 14 साल के वनवास के दौरान अयोध्या पर उनके प्रतिनिधि के रूप में शासन करते हैं।
राम, सीता और लक्ष्मण जहां कहीं भी बुराई का सामना करते हैं, जंगलों में भटकते हैं। वे रास्ते में कई बुद्धिमान पुरुषों और संतों का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। बारह साल के वनवास में, [[लंका]] के राजा [[रावण]] ने सीता का अपहरण कर लिया। उसकी खोज में, राम और लक्ष्मण ने [[हनुमान]], [[सुग्रीव]], [[जाम्बवन्त|जामवंत]] और उनकी वानरों की सेना के साथ दोस्ती की। जब वे लंका पहुँचते हैं, राम रावण से युद्ध करते हैं और अंत में उसे मार डालते हैं, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
== कलाकार ==
* रुचा गुजराती [[अहिल्या]] के रूप में, ऋषि गौतम की पत्नी
* [[विष्णु]] के रूप में [[हिमांशु सोनी]], देवी लक्ष्मी की पत्नी जिन्होंने भगवान राम के रूप में पुनर्जन्म लिया
* [[गगन मलिक]] [[राम]] के रूप में, भगवान विष्णु के अवतार
* [[सीता]] के रूप में नेहा सरगम, राम की पत्नी, देवी लक्ष्मी का अवतार
* [[भरत (रामायण)|भरत]] के रूप में निशांत कुमार, भगवान राम के छोटे भाई, दशरथ और कैकेयी के पुत्र
* [[लक्ष्मण]] के रूप में [[नील भट्ट]], भगवान राम के छोटे भाई, दशरथ और सुमित्रा के बड़े बेटे
* [[शत्रुघ्न]] के रूप में गौरव रूपदास, भगवान राम के छोटे भाई, दशरथ और सुमित्रा के छोटे बेटे
* पल्लवी सपरा [[उर्मिला (रामायण)|उर्मिला]] के रूप में, सीता की बहन और लक्ष्मण की पत्नी
* मल्हार पांड्या [[हनुमान]], भगवान राम के भक्त के रूप में
* महिका शर्मा देवी अम्बा के रूप में
* मानव सोहल [[वशिष्ठ]] के रूप में
* [[दशरथ]], अयोध्या के राजा, राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के पिता के रूप में ऋषभ शुक्ल
* राधा कृष्ण दत्ता [[जनक]], मिथिला के राजा, सीता और उर्मिला के पिता के रूप में
* सुनैना, सीता और उर्मिला की मां के रूप में नीतिका आनंद मुखर्जी
* [[कौशल्या]] के रूप में [[ढूंढ लेगी मंज़िल हमें|नीलिमा परांडेकर]], भगवान राम की माँ, राजा दशरथ की पहली पत्नी
* शिखा स्वरूप [[कैकेयी]] के रूप में, राजा दशरथ की दूसरी पत्नी, भरत की माँ
* [[सुमित्रा]] के रूप में अंजलि गुप्ता, राजा दशरथ की तीसरी पत्नी, लक्ष्मण और शत्रुघ्न की माँ
* माल्यवन के रूप में अजय पाल सिंह [[माल्यवान|अंदोत्रा]]
* [[दिव्यांका त्रिपाठी|दिव्यांका त्रिपाठी दहिया]] चंद्रदेव के रूप में देवी अप्सरा के रूप में प्रच्छन्न हैं
* मेघनाद के रूप में विजे भाटिया
* [[रावण]] के रूप में सचिन त्यागी
* अगस्ता के रूप में हेमंत चौधरी
* [[परशुराम]] के रूप में अमित पचौरी
* [[विश्वामित्र]] के रूप में तारकेश चौहान
* अंगद के रूप में आनंद गोराडिया
* सुनीता राजवार [[मन्थरा|मंथरा]] के रूप में
* विकास श्रीवास्तव निषादराज के रूप में
* अनूप शुक्ला शशिकेतु के रूप में
* [[शुक्राचार्य]] के रूप में सुनील बॉब गढ़वाली
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://www.zeetv.com/shows/ramayan-1/ रामायण आधिकारिक साइट]
[[श्रेणी:ज़ी टीवी के कार्यक्रम]]
[[श्रेणी:भारतीय टेलीविजन धारावाहिक]]
[[श्रेणी:भारतीय पौराणिक टेलीविजन श्रृंखला]]
ge9ov5uw3vlaubjdx09zp4u1g16qf84
गोलापुडी मारुति राव
0
1422100
6591422
6518235
2026-07-24T02:13:43Z
InternetArchiveBot
500600
Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5
6591422
wikitext
text/x-wiki
[[श्रेणी:Articles with hCards]]
{{Infobox person|name=गोलापुडी मारुति राव|image=Gollapudi Maruthi Rao, December 2007.jpg
|caption=|birth_date={{Birth date|df=yes|1939|4|14}}|death_date={{death date and age|2019|12|12|1939|4|14|df=yes}}|birth_place=[[विजयनगरम]], [[मद्रास प्रेसीडेंसी]], [[ब्रिटिश राज|ब्रिटिश भारत]]<br/>(अब [[आंध्र प्रदेश]], भारत में)|death_place=[[चेन्नई]], [[तमिलनाडु]], [[भारत]]<ref>{{cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/andhra-pradesh/gollapudi-maruti-rao-dead/article30287723.ece|title=Gollapudi Maruthi Rao dead|work=The Hindu|date=12 December 2019}}</ref>|occupation=अभिनेता, पटकथा लेखक, नाटककार, नाटककार और संवाद लेखक}}
'''गोलापुडी मारुति राव''' (14 अप्रैल 1939 - 12 दिसंबर 2019) एक भारतीय अभिनेता, पटकथा लेखक, नाटककार, नाटककार, स्तंभकार और संवाद लेखक थे, जिन्हें [[तेलुगू सिनेमा|तेलुगु सिनेमा]], तेलुगु थिएटर और तेलुगु साहित्य में उनके कामों के लिए जाना जाता है। राव ने विभिन्न प्रकार की भूमिकाओं में 250 से अधिक तेलुगु फिल्मों में अभिनय किया। <ref>{{Cite web|url=http://www.aplatestnews.com/usnewsvideo.php?vidtype=2&idx=special-program-on-gollapudi-maruthi-rao-filmography-tv5-part-05-2012-11-12|title=No Video Found - Andhra/Telangana News updates 24x7 - Video|website=www.aplatestnews.com}}</ref> <ref>{{Cite web|url=http://cinema.pluz.in/celebs/tollywood/actors/4707/films-list.htm|title=Gollapudi Maruthi Rao Movies List Telugu Actors Pluz Cinema<!-- Bot generated title -->|archive-url=https://web.archive.org/web/20130504100814/http://cinema.pluz.in/celebs/tollywood/actors/4707/films-list.htm|archive-date=4 May 2013|access-date=20 April 2013}}</ref> उनकी प्रसिद्ध साहित्यिक कृतियों और नाटकों, जैसे ''रेंदु'' रेलु आरु, ''पतिता'', ''करुणिनचानी देवतालु'', ''महानतुडु'', ''कलाम वेनक्कू तिरिगिंडी'', ''आसयालकु संकेलु'' ने कई राज्य पुरस्कार जीते। <ref>{{Cite news|url=http://www.hindu.com/mp/2006/09/30/stories/2006093003770200.htm|title=Doing the write thing|date=30 September 2006|work=[[The Hindu]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20070707001918/http://www.hindu.com/mp/2006/09/30/stories/2006093003770200.htm|archive-date=7 July 2007|location=Chennai, India}}</ref> <ref>{{Cite web|url=http://www.tana.org/webfiles/docs/Gollapudi_Felicitation.pdf|title=Archived copy|archive-url=https://web.archive.org/web/20101128120046/http://tana.org/webfiles/docs/Gollapudi_Felicitation.pdf|archive-date=28 November 2010|access-date=2 November 2010}}</ref> <ref>{{Cite news|url=http://www.hindu.com/2006/08/14/stories/2006081404970400.htm|title=Mohan Krishna receives Gollapudi award|date=14 August 2006|work=[[The Hindu]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20060823023906/http://www.hindu.com/2006/08/14/stories/2006081404970400.htm|archive-date=23 August 2006|location=Chennai, India}}</ref> <ref>{{Cite news|url=http://www.thehindu.com/news/cities/Visakhapatnam/article2963049.ece?css=print|title=Telugu story stands out on many counts|date=5 March 2012|work=The Hindu|location=Chennai, India}}</ref> <ref>{{Cite news|url=http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-andhrapradesh/rich-tributes-paid-to-gurajada-appa-rao/article3924852.ece|title=Rich tributes paid to Gurajada Appa Rao|date=22 September 2012|work=The Hindu|location=Chennai, India}}</ref>
वह [[राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम]] की पटकथा जांच समिति के सदस्य थे और 1996 में ''भारतीय पैनोरमा'' खंड के लिए भारत के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में जूरी सदस्य के रूप में कार्य किया। उन्हें डॉक्टर चक्रवर्ती, ''थारंगिनी'', ''संसारम चधारंगम'', कल्लू आदि जैसी ऐतिहासिक फिल्मों की पटकथा लिखने के लिए जाना जाता था। उन्होंने छह आंध्र प्रदेश राज्य [[नंदी पुरस्कार|नंदी पुरस्कार प्राप्त किए]] । <ref>{{Cite news|url=http://www.hindu.com/2010/04/15/stories/2010041560010300.htm|title=Rich tributes paid to Bharago|date=15 April 2010|work=[[The Hindu]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20100420014532/http://www.hindu.com/2010/04/15/stories/2010041560010300.htm|archive-date=20 April 2010|location=Chennai, India}}</ref> <ref>{{Cite news|url=http://www.thehindu.com/news/cities/Vijayawada/stalwarts-enliven-ugadi-festivities/article1602323.ece|title=Stalwarts enliven Ugadi festivities|date=5 April 2011|work=The Hindu|location=Chennai, India}}</ref> 1997 में, उन्होंने गोलपुडी श्रीनिवास मेमोरियल फाउंडेशन की स्थापना की, जो [[भारतीय सिनेमा]] में किसी निर्देशक की पहली सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए गोलपुडी राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करता है। <ref>{{Cite web|url=http://www.gollapudinationalaward.com/aboutus.htm|title=Archived copy|archive-url=https://web.archive.org/web/20110711105752/http://www.gollapudinationalaward.com/aboutus.htm|archive-date=11 July 2011|access-date=2011-07-08}}</ref>
राव को [[आकाशवाणी|ऑल इंडिया रेडियो]] और पत्रकारिता में दो दशकों से अधिक समय तक उनके कार्यों के लिए भी जाना जाता था। उनके नाटक को [[उस्मानिया विश्वविद्यालय]] के मास्टर ऑफ आर्ट्स (तेलुगु साहित्य) पाठ्यक्रम में शामिल किया गया था। इस कार्य का अनुवाद प्रदान कार्यक्रम के तहत नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा सभी भारतीय भाषाओं में किया गया था। काम को 1988 में एक [[तेलुगू सिनेमा|तेलुगु फिल्म]] में बनाया गया था जिसने 1989 में सर्वश्रेष्ठ कहानी के लिए [[नंदी पुरस्कार]] जीता था। उनके 1975 के नाटक ''कल्लू'' का भी तेलुगु फिल्म कल्लू में पुनर्निर्माण किया गया, जिसने सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए नंदी पुरस्कार भी प्राप्त किया। <ref>{{Cite news|url=http://www.hindu.com/thehindu/mp/2003/06/09/stories/2003060900910400.htm|title=The saga of a lensman|date=9 June 2003|work=[[The Hindu]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20031023141936/http://www.hindu.com/thehindu/mp/2003/06/09/stories/2003060900910400.htm|archive-date=23 October 2003|location=Chennai, India}}</ref> उनके नाटक ''ओका चेत्तु - रेंडे पुव्वुलु'' को लोकप्रिय प्रदर्शनी के लिए [[सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार|सूचना और प्रसारण मंत्रालय के]] गीत और नाटक प्रभाग द्वारा खरीदा गया था। <ref>{{Cite news|url=http://www.thehindu.com/news/cities/Visakhapatnam/channels-dishing-out-decorated-lies-gollapudi/article4240600.ece|title=Channels dishing out decorated lies: Gollapudi|date=26 December 2012|work=The Hindu|location=Chennai, India}}</ref> <ref>{{Cite news|url=http://www.thehindu.com/news/cities/Visakhapatnam/stories-captured-yanam-milieu/article4356522.ece|title=Stories captured Yanam milieu|date=29 January 2013|work=The Hindu|location=Chennai, India}}</ref>
रंगमंच पर निबंधों का एक खंड, ''तेलुगु नाटक रंगम'', थिएटर कला विभाग, [[आन्ध्र विश्वविद्यालय|आंध्र विश्वविद्यालय]], [[विशाखपटनम|विशाखापत्तनम]] (1967) के लिए एक पाठ्यपुस्तक के रूप में निर्धारित किया गया था। उन्होंने ''आंध्र विज्ञान सर्वस्वम'' (तेलुगु एनसाइक्लोपीडिया) 11वें खंड में प्रदर्शित होने वाले दो शोध लेख प्रकाशित किए: "तेलुगु नाटक-लेखन के 'विचार' और 'तकनीक' में विकास का इतिहास" और "शौकिया रंगमंच - दुनिया के संबंध में इसकी उत्पत्ति और विकास शौकिया रंगमंच आंदोलन। <ref>{{Cite news|url=http://www.hindu.com/2011/02/06/stories/2011020657900200.htm|title=Uphold values, says Gollapudi|date=6 February 2011|work=[[The Hindu]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20110419063237/http://www.hindu.com/2011/02/06/stories/2011020657900200.htm|archive-date=19 April 2011|location=Chennai, India}}</ref> उनका तेलुगु नाटक ''वंदेमातरम'', [[भारत-चीन युद्ध|चीन-भारतीय युद्ध]] के बारे में तेलुगु में पहला, आंध्र प्रदेश राज्य सूचना और जनसंपर्क विभाग, (1963) द्वारा प्रकाशित किया गया था। <ref>{{Cite web|url=http://www.telugucolours.com/id1-pid73-chG/profile/gollapudi-maruthi-rao|title=elugu Colours, Complete Biography of Gollapudi Maruthi Rao|website=www.telugucolours.com}}</ref>
== प्रारंभिक जीवन ==
मारुती राव का जन्म एक [[तेलुगू भाषा|तेलुगु]] -भाषी [[ब्राह्मण]] परिवार <ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/remembering-gollapudi-maruthi-rao-and-his-with-an-unlimited-repertoire/article30305253.ece|title=Remembering writer and actor Gollapudi Maruthi Rao and his unlimited repertoire|last=Chowdhary|first=Y. Sunita|date=2019-12-14|work=The Hindu|access-date=2022-06-17|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> में 14 अप्रैल 1939 को नंदबालागा गाँव, [[विजयनगरम जिला]], [[आन्ध्र प्रदेश|आंध्र प्रदेश]], [[भारत]] में हुआ था और उन्होंने 1959 में [[आन्ध्र प्रदेश|आंध्र प्रदेश]] [[आन्ध्र विश्वविद्यालय|विश्वविद्यालय]], [[विशाखपटनम|विशाखापत्तनम]] से बीएससी गणितीय भौतिकी में विशेषज्ञता हासिल की। <ref>{{Cite news|url=http://www.hindu.com/2009/09/14/stories/2009091450830200.htm|title=Telugu short story collection released|date=14 September 2009|work=[[The Hindu]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20140324113354/http://www.hindu.com/2009/09/14/stories/2009091450830200.htm|archive-date=24 March 2014|location=Chennai, India}}</ref>
== साहित्यिक गतिविधि ==
मारुति राव ने कई नाटक (9), प्लेलेट्स (18), उपन्यास (12), कहानी खंड (4), निबंध (2), बच्चों की कहानियाँ (3) लिखे और प्रकाशित किए हैं। उन्होंने एक साप्ताहिक कॉलम "जीवन कलाम" (द लिविंग टाइम्स) लिखा, जो 24 वर्षों से समकालीन सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों का बहुरूपदर्शक अध्ययन है। यह आंध्र प्रदेश, ''आंध्र ज्योति'' के सबसे बड़े परिचालित तेलुगू दैनिकों में से एक में एक बहुत लोकप्रिय विशेषता थी, और यह विशेषता ''वार्ता'' (दैनिक) में दिखाई देती रही। एक इंटरनेट पत्रिका ''कौमुदी'' में एक ऑडियो रीडिंग (उनकी आवाज) के साथ उनका कॉलम प्रस्तुत किया गया है। <ref>{{Cite news|url=http://www.hindu.com/2006/12/25/stories/2006122500500200.htm|title=Telugu poet selected for 'Saahithi Puraskar'|date=25 December 2006|work=[[The Hindu]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20070104114926/http://www.hindu.com/2006/12/25/stories/2006122500500200.htm|archive-date=4 January 2007|location=Chennai, India}}</ref>
उनकी आत्मकथा ''अम्मा कडुपु चुनौती'', उनके संस्मरणों का 550 पन्नों का संग्रह भारत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में जारी किया गया था। <ref>{{Cite news|url=http://www.thehindu.com/news/cities/Visakhapatnam/a-liberating-experience/article887619.ece|title=A liberating experience|date=15 November 2010|work=The Hindu|location=Chennai, India}}</ref> 2008 में अमेरिका में कौमुदी द्वारा ''तंजानिया तीर्थयात्रा'' का एक यात्रा वृत्तांत अपने संग्रह में प्रकाशित किया गया था। यह तंजानिया के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों और ऐतिहासिक स्थानों में उनके मित्र गैंटी प्रसाद राव के साथ 15-दिवसीय सफारी पर आधारित है। हैदराबाद में ''वांगुरी फाउंडेशन'' द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान करते हुए 16 फरवरी 2009 को उपन्यास ''पिडिकेडु आकाशम'' को एक ऑडियो प्रकाशन के रूप में जारी किया गया था। <ref>{{Cite web|url=http://www.greatandhra.com/viewnews.php?id=8880&cat=&scat=25|title=Gollapudi's autobiography 'AMMA KADUPU CHALLAGA'|date=27 July 2008|access-date=28 दिसंबर 2022|archive-date=28 दिसंबर 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20221228192819/https://www.greatandhra.com/viewnews.php?id=8880&cat=&scat=25|url-status=dead}}</ref> <ref>{{Cite news|url=http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-andhrapradesh/tamil-literature-needs-to-be-explored-says-gollapudi/article675529.ece|title=Tamil literature needs to be explored, says Gollapudi|date=2 January 2010|work=The Hindu|location=Chennai, India}}</ref> <ref>{{Cite web|url=http://www.indiaglitz.com/channels/telugu/article/40303.html|title=Cinema News - Movie Reviews - Movie Trailers - IndiaGlitz|access-date=28 दिसंबर 2022|archive-date=29 जुलाई 2008|archive-url=https://web.archive.org/web/20080729080255/http://www.indiaglitz.com/channels/telugu/article/40303.html|url-status=dead}}</ref>
== मौत ==
12 दिसंबर 2019 को चेन्नई में उनका निधन हो गया। <ref>{{Cite web|url=https://www.thehindu.com/news/national/andhra-pradesh/gollapudi-maruti-rao-dead/article30287723.ece|title=Gollapudi Maruti Rao dead|last=Gopal|first=Madhu|date=2019-12-12|website=The Hindu|access-date=2019-12-27}}</ref> गोलपुडी मारुति राव के निधन पर कई प्रसिद्ध लेखकों और तेलुगु फिल्म बिरादरी के सदस्यों ने शोक व्यक्त किया। <ref>{{Cite web|url=https://telanganatoday.com/veteran-actor-gollapudi-maruthi-rao-passes-away|title=Veteran actor Gollapudi Maruthi Rao passes away|date=12 December 2019|website=Telangana Today}}</ref>
== पुरस्कार ==
; [[नंदी पुरस्कार]] <ref>{{Cite web|url=http://ipr.ap.nic.in/New_Links/Film.pdf|title=నంది అవార్డు విజేతల పరంపర (1964–2008)|publisher=[[Andhra Pradesh (magazine)|Information & Public Relations of Andhra Pradesh]]|trans-title=A series of Nandi Award Winners (1964–2008)|access-date=21 August 2020}}</ref>
* सर्वश्रेष्ठ कहानी लेखक - आत्मा गोवरवम (1965)
* सर्वश्रेष्ठ कहानीकार - कल्लू (1988)
* सर्वश्रेष्ठ पुरुष कॉमेडियन - ''तरंगिनी'' (1983)
* सर्वश्रेष्ठ चरित्र अभिनेता - ''रामायणमलो भागवतम्'' (1985)
* सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखक - ''मास्टर कपूरम'' (1990)
* सर्वश्रेष्ठ पटकथा लेखक - ''प्रेमा पुष्पकम'' (1993)
* सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (टेलीविजन) के लिए [[नंदी पुरस्कार]] (1996)
; [[आकाशवाणी|अखिल भारतीय रेडियो]] पुरस्कार
* ''अनंतम'' (1959) के लिए ऑल इंडिया रेडियो द्वारा आयोजित इंटर-यूनिवर्सिटी रेडियो प्ले प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ स्क्रिप्ट
* अखिल भारतीय प्रतियोगिता में रचनात्मक साहित्य के लिए महात्मा गांधी पुरस्कार, ''प्रश्न'' के लिए
== साहित्यिक पुरस्कार और सम्मान ==
; संगम अकादमी पुरस्कार
* सर्वश्रेष्ठ नाटक ''[[Kallu (play)|कल्लू]]'' के लिए संगम अकादमी पुरस्कार (1975)
* सर्वश्रेष्ठ हास्य लेखन के लिए सर्वराय धर्मनिधि पुरस्कारम (1983)
; अन्य पुरस्कार
* वामसी आर्ट थिएटर द्वारा गुरज़ादा अप्पाराव मेमोरियल गोल्ड मेडल (1985)
* तेलुगु वेलुगु पुरस्कार (1987)
* सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर के लिए मद्रास तेलुगु अकादमी पुरस्कार (1996)
* पैदी लक्ष्मय धर्मनिधि पुरस्कारम (2002)
* पुलिकांती कृष्णा रेड्डी पुरस्कारम (2007)
* सर्वराय मेमोरियल पुरस्कारम
* आंध्र नाटक कला परिषद पुरस्कार
* नरसरावपेटा रंगस्थली प्रतिभा पुरस्कारम (2018) # प्रथम पुरस्कार प्राप्तकर्ता
== चयनित फिल्मोग्राफी ==
; अभिनेता {{Div col}}* ''[[अब्दुल्ला (1960 फ़िल्म)|अब्दुल्ला]]'' (1960)
* ''[[इंट्लो रामय्या विधीलो कृष्णाय्या]]'' (1982) - सुब्बाराव
* ''ईदी पेलंतारा'' (1982)
* ''[[पल्लेटूरी मोनागाडु]]'' (1983)
* ''[[अभिलाषा (1983 फ़िल्म)|अभिलाषा]]'' (1983) - पायदिथल्ली
* ''त्रिसूलम'' (1983)
* ''[[गुदाचारी नंबर 1]]'' (1983)
* ''[[आलय सिखाराम]]'' (1983)
* ''[[शिवुडु शिवुडु शिवुडू]]'' (1983)
* ''मुक्कू पुदका'' (1984)
* '' देवंतकुडु'' (1984)
* '' श्रीमति कावली '' (1984)
* ''[[चैलेंज (1984 फिल्म)|चैलेंज]]'' (1984)
* ''मनीशिको चरित्र'' (1984)
* ''[[स्वाति (1984 फ़िल्म)|स्वाति]]'' (1984)
* ''श्री कतना लीलालु'' (1985)
* ''मुदिला मुचता'' (1985)
* ''मां पल्लेलो गोपालुडु'' (1985)
* ''[[स्वाति मुथ्यम]]'' (1986)
* ''कैप्टन नागार्जुन'' (1986)
* '' मन्नेमलो मोनागाडु '' (1986)
* ''[[कलियुग कृष्णुडु]]'' (1986) - सम्बैयाह
* '' कोंटे कपूरम '' (1986)
* ''सक्कानोडु'' (1986)
* ''[[डोंगा मोगुडु]]'' (1987)
* ''भार्गव रामुडू'' (1987)
* ''अग्नि पुत्रुडु'' (1987)
* ''श्रीनिवास कल्याणम'' (1987)
* ''[[किराई दादा]]'' (1987)
* ''[[जेबू डोंगा]]'' (1987)
* ''उम्मदी मोगुडु'' (1987)
* ''[[संसारम ओका चदरंगम]]'' (1987) - अप्पला नरसैय्याह
* ''भले मोगुडु'' (1987)
* ''[[मदना गोपालुडु]]'' (1987)
* ''[[यमुदीकी मोगुडु (1988 फ़िल्म)|यमुदीकी मोगुडु]]'' (1988) - कैलासम
* ''[[मुरली कृष्णुडु]]'' (1988)
* ''[[वरसुदोचदु]]'' (1988)
* ''पेली चेसी चूडू'' (1988) - परमेश्वर राव
* ''[[चिक्काडु दोराकाडु (1988 फ़िल्म)|चिक्काडू दोराकाडु]]'' (1988)
* ''भार्याभरतला बंदम'' (1988)
* ''[[जमदाग्नि (फिल्म)]]'' (1988)
* ''अग्नि केरतालु'' (1988)
वकील भानुमूर्ति के रूप में 'कलियुग कर्णुडु' (1988)।
* ''[[प्रेमा (1989 फ़िल्म)|प्रेमा]]'' (1989)
* ''[[गुंडा राज्यम]]'' (1989) - बंगारैया
* ''भले दंपथुलु'' (1989)
* ''सिम्हा स्वप्नम'' (1989)
* ''[[शिवा (1989 तेलुगु फिल्म)|शिवा]]'' (1989)
* ''[[इंद्रुदु चंद्रुडु]]'' (1989)
* ''यम पासम'' (1989)
* ''सोग्गदी कपूरम'' (1989)
* ''दोरिकिथे डोंगालू'' (1989) पीताम्बरम के रूप में
* ''[[मुथ्यमंथा मुद्दू]]'' (1989)
* ''[[चेट्टू किंडा प्लीडर]]'' (1989) - सरभय्या
* ''[[कोडामा सिम्हम]]'' (1990)
* ''[[इद्दारू इद्दारे]]'' (1990)
* ''[[पुलिस भार्या]]'' (1990)
* ''[[राजा विक्रमार्क (1990 फ़िल्म)|राजा विक्रमार्क]]'' (1990) - कनक राव
* ''[[असेंबली राउडी]]'' (1991)
* ''[[आदित्य 369]]'' (1991) - क्यूरेटर
* ''प्रेमा एंथा मधुरम'' (1991) - नारायण राव
* ''बलराम कृष्णुलु'' (1992) - विलेन
* ''सुंदर कांडा'' (1992)
* ''गोलमाल गोविंदम'' (1992)
* '' घराना अल्लुडु '' (1994)
* ''पुण्य भूमि ना देशम'' (1994)
* ''सुभा संकल्पम'' (1995) - चेन्नाकेशव राव
* ''[[वज्रम (1995 फ़िल्म)|वज्रम]]'' (1995)
* ''[[हे राम]]'' (2000, तमिल/हिंदी फिल्म) - गोवर्धन
* ''[[मुरारी (फ़िल्म)|मुरारी]]'' (2001) - चंटी
* ''अंदामैना मनासुलो'' (2008)
* ''[[रेनबो (2008 फ़िल्म)|रेनबो]]'' (2008)
* ''[[लीडर (2010 फ़िल्म)|लीडर]]'' (2010)
* ''[[इंकोसरी]]'' (2010)
* ''[[दलाल (2010 फ़िल्म)|दलाल]]'' (2010) - मास्टर
* ''[[धोनी (फिल्म)|धोनी]]'' (2012)
* ''[[दारुवु]]'' (2012) - मुख्यमंत्री
* ''[[उउ कोडाथारा? उलिक्की पदथारा?]]'' (2012) - वेंकट राव
* ''[[सुकुमारुडु]]'' (2013)
* ''[[राउडी फेलो]]'' (2014)
* ''[[कांचे]]'' (2015) - कोंडय्या
* ''[[साइज़ ज़ीरो (फ़िल्म)|साइज़ ज़ीरो]]'' (2015)
* ''[[साइज़ ज़ीरो (फ़िल्म)|इंजी इडुप्पाझगी]]'' (2015, [[तमिल भाषा|तमिल]] फ़िल्म)
* ''[[ब्रह्मोत्सवम]]'' (2016)
* ''[[मनमंथा]]'' (2016)
* ''[[इस्म (फिल्म)|इस्म]]'' (2016)
* ''प्रेमथो में कार्तिक'' (2017)
* ''[[जोड़ी (2019 फ़िल्म)|जोड़ी]]'' (2019){{div col end}}
; टेलीविजन
* ''इंतिंटी रामायणम'' (1997)
* ''कन्यासुलकम'' (2015)
; लेखक
* ''चेल्लेली कपूरम'' (1971)
* ''रैतु कुटुम्बम'' (1972)
* ''दोराबाबू'' (1974)
* ''ओ सीता कथा'' (1974)
* ''अन्नदम्मुला अनुबंधम'' (1975)
* ''निंदू मनीषी'' (1978)
* ''मावारी मंचितनम'' (1979)
* ''सुभलेखा'' (1982)
* ''कल्लू'' (1988)
* ''रामय्या विधीलो कृष्णाय्या की रचना'' (1982)
; निदेशक
* ''प्रेमा पुस्तकम'' (1993)
== संदर्भ ==
{{Reflist|2}}{{Authority control}}
[[श्रेणी:२०१९ में निधन]]
[[श्रेणी:1939 में जन्मे लोग]]
ta5z1a2flu7ur0sq2rzoubxxzbju334
मेवाड़ के गुहिल
0
1430607
6591478
6202231
2026-07-24T05:50:00Z
~2026-41228-06
937925
6591478
wikitext
text/x-wiki
{{को विलय|गुहिल राजवंश|date=जनवरी 2023}} आप मेरे inst ko follow kr duu id kr_jitendra_singh_rajput_18
'''(1.)मेवाड़ के गुहिल'''
- नामकरण– इस वंश के प्रतापी शासक गुहिल के नाम से इस वंश का नाम '''गुहिल''' हुआ तथा बाद में यह वंश गहलोत भी कहलाया।
- गुहिल वंश की उत्पत्ति व मूल स्थान के संदर्भ में इतिहासकारों में अनेक मत प्रचलित हैं–
'''इतिहासकार मत'''
1. कर्नल जेम्स टॉड तथा श्यामलदास- गुजरात के वल्लभी से
2. डी.आर. भण्डारकर (आहड़ अभिलेख के आधार पर)- ब्राह्मण की संतान (डॉ. गोपीनाथ शर्मा एवं मुहणोत नैणसी ने भी इस मत का समर्थन किया है।)
3. डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा व नैणसी- सूर्यवंशी- विश्व में सर्वाधिक समय तक एक ही क्षेत्र पर राज्य करने वाला राजवंश।
- इस वंश के महाराणा को ‘हिन्दुआ सूरज’ भी कहा जाता है।
- मेवाड़ के राज्य चिह्न पर अंकित है कि – ’जो दृढ़ राखे धर्म को, ताहि रखे करतार’।
- संस्थापक- '''‘गुहिल या गुहेदत्त’'''
- स्थापना- लगभग 566 ई.
- मुहणोत नैणसी एवं कर्नल टॉड ने गुहिलों की '''24 शाखाओं''' का वर्णन किया है।
'''* गुहिल/गुहादित्य'''
-डॉ. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा के अनुसार लगभग '''566 ई.''' में गुहिल ने अपना शासन स्थापित किया था।
- कर्नल जेम्स टॉड के अनुसार वल्लभी के राजा शिलादित्य और रानी पुष्पावती का पुत्र गुहादित्य था जिसे नागर ब्राह्मणों ने पाल पोस कर बड़ा किया।गुहा या गुफा में जन्म होने के कारण इसका नाम गुहा/गुहिल या गुहादित्य पड़ा।
इसके सिक्के आगरा से मिलें हैं।
- शिलालेखों के अनुसार गुहिल के उत्तराधिकारी- शील, अपराजित, भर्तृभट्ट, अल्लट, नरवाहन, शक्ति कुमार, विजय सिंह आदि।
- गुहिल के बाद सबसे प्रतापी शासक बप्पा रावल हुए।
'''*बप्पा रावल'''
- शासनकाल- 734 से 753 ई.
- बप्पा रावल के जन्म व माता-पिता के नामों के बारे में विद्वान एकमत नहीं है लेकिन इनका बचपन मेवाड़ के एकलिंग के पास नागदा गाँव में व्यतीत हुआ, इससे सभी विद्वान सहमत हैं।
- नागदा में गायें चराते हुए इनका सम्पर्क हारित राशि नामक ऋषि से हुआ। हारित ऋषि पाशुपत/लकुलीश संप्रदाय के साधु थे।
- हारित ऋषि ने बप्पा को मेवाड़ का शासक बनने का वरदान दिया।
- ऋषि ने बप्पा को आर्थिक सहयोग भी किया और कहा कि तुम्हारा संबोधन ‘रावल’ होगा।
- मुहणोत नैणसी एवं कर्नल जेम्स टॉड के अनुसार बप्पा ने हरित ऋषि की कृपा से राज्य प्राप्त किया था।
- बप्पा ने अरब सेना से युद्ध किया। सिंध के नायाब तामीम को पराजित किया।
- बप्पा रावल ने ईरान, ईराक व खुरासान तक के प्रदेश् जीत लिए और इन्होंने वहाँ कई विवाह किए।
- इन्होंने धर्मान्तरित हुए लोगों को पुन: हिन्दू बनाया।
- अरबी ग्रंथ ‘फतुहुल बलदान’ के अनुसार – “अब भारत में पुन: मूर्ति पूजा आरंभ हो गई।“
-कुंभलगढ़ प्रशस्ति (1460 ई.) में बप्पा रावल को ‘विप्र’ कहा गया है।
- बप्पा रावल ने ‘हिन्दुआ सूरज’ की उपाधि धारण की थी, इसलिए गुहिल वंश के सभी शासक अपने आप को ‘हिन्दुआ सूरज’ कहते थे।
- डॉ. गौरी शंकर हीराचन्द ओझा के अनुसार बप्पा का वास्तविक नाम '''कालभोज''' था एवं उसने '''‘बप्पा रावल’''' उपाधि धारण की थी।
- वीर विनोद के रचनाकार कविराज श्यामलदास ने लिखा है कि बप्पा किसी राजा का नाम नहीं है अपितु खिताब था।
- ऐसी मान्यता है कि बप्पा चित्तौड़ के शासक मानमौरी के यहाँ सेवा में था।जब चित्तौड़ पर विदेशी आक्रमण हुआ तो उनसे मुकाबले की चुनौती बप्पा ने स्वीकार की और उन्हें सिंध तक खदेड़ दिया।
- इसलिए इतिहासकार सी. वी. वैद्य ने बप्पा को '''‘चार्ल्स मार्टेल’''' (फ्रांसीसी सेनापति, जिसने यूरोप में सर्वप्रथम मुसलमानों को परास्त किया था।) कहा है ।
- राजप्रशस्ति के अनुसार बप्पा रावल ने '''734 ई'''. में चित्तौड़ के शासक मानमौरी को पराजित कर चित्तौड़ पर अधिकार किया और ‘मेवाड़ राज्य की स्थापना’ की।
- बप्पा रावल ने '''‘नागदा’''' को अपनी राजधानी बनाई थी।
- राजस्थान में ‘सोने के सिक्के’ सर्वप्रथम बप्पा रावल ने ही चलाए थे।
- उन्होंने '''‘एकलिंग जी के मंदिर’''' की स्थापना कैलाशपुरी (उदयपुर) में की व एकलिंग जी को शासक मानते हुए तथा स्वयं को उसका दीवान मानकर शासन किया।
- बप्पा रावल अपने पुत्र को राज्य सौपकर स्वयं पाशुपत संप्रदाय के साधु बन गए।
- गुहिल वंश के कुलदेवता- एकलिंग जी
- बप्पा के समय का 115 ग्रेन का एक सोने का सिक्का मिला है।
बप्पा रावल के स्वर्ण सिक्कों पर शिव, नंदी, त्रिशूल, दंडवत करता मनुष्य, कामधेनु आदि के चित्र बने हुए हैं।
- ‘एकलिंग प्रशस्ति’ में बप्पा रावल की दंतकथा मिलती है।
- ‘रणकपुर प्रशस्ति’ में बप्पा रावल और काल भोज को अलग-अलग बताया गया है परंतु दोनों एक ही हैं।
- श्यामलदास के अनुसार – ‘बप्पा रावल हिन्दुस्तान का प्रतापी व पराक्रमी शासक था।‘
- बप्पा रावल का मंदिर/समाधि- नागदा
'''*अल्लट'''
- शासनकाल- 951- 953 ई.
- उपनाम (ख्यातों में)-'''आलू रावल'''
'''- आहड़''' को राजधानी बनाया।
- आहड़ में वराह मंदिर का निर्माण करवाया।
- मेवाड़ में '''‘नौकरशाही का संस्थापक’''' माना जाता है।
- राष्ट्रकूटों को पराजित कर हूण राजकुमारी '''‘हरिया देवी’''' से विवाह किया था।
'''*शक्ति कुमार'''
- शासनकाल- 977 ई. से 993 ई.
- इनके समय मालवा के परमार शासक मुंज ने आक्रमण किया और आहड़ को नष्ट कर दिया।अतः शक्ति कुमार ने नागदा को पुनः राजधानी बनाया।
- परमार शासक भोज ने चित्तौड़ में ‘त्रिभुवन नारायण मंदिर’ का निर्माण करवाया था।
- उत्तराधिकारी- अंबाप्रसाद
- ‘पृथ्वीराज विजय’ के अनुसार चौहान राजा वाक्पतिराज द्वितीय ने अंबाप्रसाद को पराजित किया था।
'''*कर्णसिंह/रणसिंह'''
- आहोर के पर्वत पर किला बनवाया था।
- रणसिंह के 2 पुत्र थे- क्षेमकरण और राहप।
- क्षेमसिंह ने '''‘रावल शाखा’''' और राहप ने '''‘राणा शाखा’''' को आरम्भ किया।
- क्षेमसिंह के दो पुत्र हुए- कुमारसिंह और सामंतसिंह प्रथम - सामंतसिंह का विवाह अजमेर के चौहान शासक पृथ्वीराज चौहान द्वितीय की बहन पृथ्वीबाई से हुआ।
- सामंतसिंह को नाडौल (पाली) के कीर्तिपाल चौहान ने पराजित कर मेवाड़ पर अधिकार किया था।
- अतः सामंतसिंह ने '''‘वागड़ क्षेत्र’''' में (1178 ई.) गुहिल वंश की स्थापना की।इसने तराइन के दूसरे युद्ध में पृथ्वीराज चौहान की सहायता की ।
- सामंतसिंह के भाई कुमारसिंह ने कीर्तिपाल को पराजित कर मेवाड़ पर पुन: अधिकार कर लिया।
'''* जैत्रसिंह'''
- शासनकाल- 1213-1250 ई.(राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी के अनुसार)
(राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति कक्षा– 10 – जैत्रसिंह का शासनकाल 1213-1253 ई.)
- परमारों को पराजित कर चित्तौड़गढ़ पर अधिकार किया तथा चित्तौड़गढ़ को अपनी राजधानी बनाया।
- ‘भुताला का युद्ध’ (1227 ई.)- इल्तुतमिश की सेना को पराजित किया, जिसका उल्लेख जयसिंह सूरी के ग्रंथ ‘हम्मीर मदमर्दन’ में मिलता है।इस ग्रंथ में इल्तुतमिश को ‘हमीर’ कहा गया है।
- ‘तारीख ए फरिश्ता’ में भी इल्तुतमिश के चित्तौड़ पर आक्रमण का जिक्र मिलता है।
- 1248 ई. में नसीरुद्दीन महमूद को पराजित किया था।
- जैत्रसिंह के सेनापति बालाक व मदन थे।
- चीरवा अभिलेख के अनुसार– ‘जैत्रसिंह इतना शक्तिशाली था कि मालवा, गुजरात, मारवाड़ तथा दिल्ली के शासक भी उसे पराजित नहीं कर सके।
‘- डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने जैत्रसिंह की प्रशंसा में लिखा कि “दिल्ली के गुलाम वंश के सुल्तानों के समय में मेवाड़ के राजाओं में सबसे प्रतापी और बलवान राजा जैत्रसिंह ही हुआ, जिसकी वीरता की प्रशंसा उसके विरोधियों ने भी की है।”
'''- उपाधियाँ –'''
1. ‘रण रसिक’ (जी. एच. ओझा द्वारा प्रदत्त)
2. ‘मेवाड़ की नव शक्ति का संचारक’ (डॉ. दशरथ शर्मा)
'''*तेजसिंह'''
- शासनकाल- 1250 ई.- 1273 ई.
- 1260 ई. में कमलचंद्र द्वारा '''‘श्रावक प्रतिक्रमणसूत्रचूर्णी’''' (मेवाड़ का प्रथम चित्रित ग्रंथ) की रचना की गई।
- बलबन का मेवाड़ पर असफल आक्रमण हुआ।
- तेजसिंह की रानी जेतल देवी ने चित्तौड़ में ‘श्याम पार्श्वनाथ मंदिर’ का निर्माण करवाया।
तेजसिंह की मृत्यु के बाद उसका पुत्र रतनसिंह (1273 –1302 ई.) मेवाड़ का शासक बना ।
'''- उपाधियाँ'''–
1. उमापतिवार लब्ध प्रौढ़प्रताप
2. परमभट्ठारक
3. महाराजाधिराज
4. परमेश्वर
'''* रावल रतनसिंह'''
- शासनकाल- 1302 ई.- 1303 ई.
- सिंहल द्वीप (श्रीलंका) की राजकुमारी '''पद्मिनी''' से विवाह किया।
- हिरामन तोते के द्वारा रतन सिंह को पद्मिनी के सौंदर्य की जानकारी दी गई थी।
'''● अलाउद्दीन खिलजी का चित्तौड़गढ़ पर आक्रमण –'''
- रावल रतनसिंह को 1303 ई. में दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण का सामना करना पड़ा जिसका कारण अलाउद्दीन की साम्राज्यवादी महत्त्वाकांक्षा व चित्तौड़ की सैनिक एवं व्यापारिक उपयोगिता थी।
- मलिक मोहम्मद जायसी द्वारा 1540 ई. में लिखित ‘पद्मावत’ ग्रंथ में युद्ध का कारण पद्मिनी को प्राप्त करना बताया गया है। डॉ. दशरथ शर्मा जायसी के मत को मान्यता प्रदान करते हैं।
- इस युद्ध में इतिहासकार अमीर खुसरो भी सम्मिलित हुआ था। उसने अपने ग्रंथ ‘खजाइन-उल-फुतुह’ में इस आक्रमण का वर्णन किया है।
- तांत्रिक ‘राघव चेतन’ ने अलाउद्दीन को पद्मिनी के सौंदर्य की जानकारी दी थी।
- 28 जनवरी, 1303 को अलाउद्दीन दिल्ली से चित्तौड़ के लिए ससैन्य रवाना हुआ।
- 26 अगस्त, 1303 को चित्तौड़ पर अधिकार किया।
- इस समय '''‘चित्तौड़ का प्रथम''' और '''राजस्थान का दूसरा साका’''' हुआ।
- केसरिया का नेतृत्व- रावल रतन सिंह जौहर- रानी पद्मिनी ने 1600 महिलाओं के साथ किया।
- अलाउद्दीन ने अपने पुत्र ‘खिज्र खाँ’ को चित्तौड़ का प्रशासक नियुक्त किया।
- चित्तौड़ का नाम बदलकर '''‘खिज्राबाद’''' कर दिया।
- इस संघर्ष में दो मेवाड़ी सरदार '''‘गोरा और बादल’''' वीरगति को प्राप्त हुए । गोरा और बादल क्रमशः पद्मिनी के काका व भाई थे।
- अलाउद्दीन की 1316 ई. में मृत्यु के बाद 1316 ई. से 1326 ई. तक जालोर का ‘मालदेव सोनगरा’ चित्तौड़ का प्रशासक रहा।
- अलाउद्दीन द्वारा चित्तौड़ पर विजय प्राप्त करने के बाद 30,000 से अधिक आम नागरिकों का कत्लेआम किया गया जिसका उल्लेख अमीर खुसरो ने किया है।
- युद्ध में विजय के बाद अलाउद्दीन ने चित्तौड़गढ़ की तलहटी में एक मकबरा बनवाया जिसमें 1310 ई. का फारसी भाषा का शिलालेख लगा है। इसमें खिलजी को ‘उस समय का सूर्य, ईश्वर की छाया और संसार का रक्षक’ कहा गया है।
- रतनसिंह मेवाड़ के गुहिल वंश की रावल शाखा का अंतिम शासक था।
'''* राणा हम्मीर'''
<nowiki>:</nowiki> शासनकाल- 1326 ई. से 1364 ई.
- सिसोदा ठिकाने का जागीरदार
- पिता- अरिसिंह
- राणा अथवा सिसोदिया शाखा का प्रथम शासक।
- सिसोदा ठिकाने के जागीरदार हम्मीर ने 1326 ई. में '''चित्तौड़ पर अधिकार''' कर गुहिल वंश की पुन: स्थापना की।सिसोदा का जागीरदार होने के कारण इनको सिसोदिया कहा गया है तथा गुहिल वंश सिसोदिया वंश के नाम से जाना जाने लगा।
- हम्मीर राणा शाखा का राजपूत था इसलिए इसके बाद मेवाड़ के सभी शासक राणा/महाराणा कहलाए।
- हम्मीर के दादा लक्ष्मणसिंह अपने पुत्रों के साथ अलाउद्दीन खिलजी के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
'''- उपाधि-'''
1. मेवाड़ का उद्धारक
2. विषमघाटी पंचानन (कीर्तिस्तम्भ प्रशस्ति व कुंभलगढ़ प्रशस्ति में)
- सिंगोली का युद्ध (बाँसवाड़ा)- दिल्ली के सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक को पराजित किया।
- चित्तौड़ में अन्नपूर्णा माता के मन्दिर का निर्माण करवाया।
'''* महाराणा खेता/क्षेत्रसिंह'''
- शासनकाल- 1364 ई.- 1382 ई.
- मालवा के शासक दिलावर खाँ गौरी को पराजित किया।
- इसके समय ‘मेवाड़- मालवा संघर्ष’ का आरंभ हुआ था।
- खेता ने अजमेर, जहाजपुर, मांडल तथा छप्पन के क्षेत्रों को अपने राज्य मे मिला लिया था।
'''*महाराणा लाखा/लक्षसिंह'''
- शासनकाल- 1382 ई. – 1421ई.
- हम्मीर का पौत्र व खेता का पुत्र।
- बूँदी के राव बरसिंह हाड़ा को मेवाड़ का प्रभुत्व स्वीकार करने हेतु विवश किया।
-‘जावर’ में जस्ते व चाँदी की खानों का पता लगाया गया।
- राणा लाखा के समय में पिच्छू नामक चिड़ीमार बंजारे द्वारा ‘पिछोला झील’ (उदयपुर) का निर्माण करवाया गया।
- मारवाड़ के राव चूड़ा राठौड़ की पुत्री हंसा बाई (रणमल की बहन) का विवाह लाखा के पुत्र चूण्डा के साथ होना था, मगर परिस्थितियों वश हंसाबाई का विवाह राणा लाखा के साथ हुआ।
- राणा लाखा व हंसा बाई के विवाह की यह शर्त थी कि हंसा बाई का पुत्र ही लाखा का उत्तराधिकारी होगा। अत: लाखा के ज्येष्ठ पुत्र चूण्डा को राज्याधिकार से वंचित होना पड़ा।
- कुंवर चूंडा को अपने इसी त्याग के कारण '''‘मेवाड़ का भीष्म पितामह’''' कहा जाता है।
- दरबारी विद्वान- झोटिंग भट्ट व धनेश्वर भट्ट
- राणा लाखा के साथ बूँदी के नकली दुर्ग की कथा जुड़ी हुई है जिसकी रक्षा के लिए कुम्भा हाड़ा ने बलिदान किया था।
'''*महाराणा मोकल'''
- शासनकाल- 1421 ई.- 1433 ई
.- महाराणा लक्षसिंह व हंसाबाई का पुत्र।
- मोकल अल्पायु में शासक बने तो राव चूण्डा ने इसके संरक्षक के रूप में कार्य किया।हंसा बाई द्वारा चूण्डा पर संदेह करने के कारण चूण्डा माण्डू चले गए।
- त्रिभुवन नारायण मंदिर/समिद्धेश्वर मंदिर- परमार शासक भोज द्वारा निर्मित।
मोकल द्वारा जीर्णोद्धार करवाया गया इसलिए इस मंदिर को मोकल मंदिर भी कहा जाता है।
- ‘एकलिंग जी के परकोटे’ का निर्माण करवाया ।
- ‘रामपुरा का युद्ध’ (भीलवाड़ा), 1428 ई.- नागौर अहमदशाह के फिरोज खाँ को पराजित किया।
- जिलवाड़ा का युद्ध, 1433 ई.- गुजरात के शासक को पराजित किया।
- 1433 ई. में मेवाड़ी सरदार चाचा व मेरा ने महपा पँवार के साथ मिलकर जिलवाड़ा में ही मोकल की हत्या कर दी।
'''*महाराणा कुम्भा'''
- शासनकाल- 1433 ई.- 1468 ई.
- मोकल व रानी सौभाग्यवती का पुत्र।
- राणा कुम्भा के शासन की जानकारी ‘एकलिंगमहात्म्य’, ’रसिकप्रिया’ व ’कुम्भलगढ़ प्रशस्ति’ से मिलती हैं।
- शासक बनते ही कुंभा ने मेवाड़ से राठौड़ों का प्रभाव समाप्त किया तथा चित्तौड़गढ़ एवं कुम्भलगढ़ को अपनी शक्ति का केन्द्र बनाया।
- कुम्भा की उपाधियों का उल्लेख- ‘कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति’ में।
● '''कुम्भा की प्रमुख उपाधियाँ :-'''
1. अभिनव भरताचार्य (संगीत का ज्ञान होने के कारण)
2. हिंदू सुरताण (हिंदुओं का प्रमुख शासक होने के कारण)
3. छाप गुरु (छापामार युद्ध पद्धति के कारण)
4. हाल गुरु (पहाड़ी दुर्गों का निर्माता होने के कारण)
5. राणो रासो (साहित्यकारों को आश्रय देने के कारण)
6. टोडरमल (संगीत की 3 विधाओं में पारंगत होने के कारण)
7. नाटकराज कर्ता (4 नाटक लिखने के कारण)
8. चाप गुरु (शस्त्र विद्या में पारंगत होने के कारण)
● '''अन्य उपाधियाँ - '''
- राणा राय, राजगुरु, दान गुरु, शैल गुरु, नरपति, अश्वपति, गजपति आदि।
'''* कुम्भा के प्रमुख निर्माण कार्य –'''
- श्यामलदास द्वारा लिखित ‘वीर विनोद’ के अनुसार कुंभा ने मेवाड़ के 84 दुर्गों में से 32 दुर्गों का निर्माण करवाया ।
● '''प्रमुख दुर्ग'''- कुंभलगढ़, बसंती दुर्ग, भोमट दुर्ग, मचान दुर्ग, अचलगढ़ दुर्ग इत्यादि।
- कुंभलगढ़ दुर्ग –
- शिल्पी – मंडन -
इस दुर्ग में लघु दुर्ग कटारगढ़ को '''‘मेवाड़ की आँख’''' कहा जाता है जो कुंभा का निवास था।
- अबुल फजल के अनुसार यह दुर्ग इतनी बुलंदी पर बना हुआ है कि नीचे से ऊपर की ओर देखने पर सिर से पगड़ी गिर जाती ।
●'''प्रमुख मंदिर'''
1. कुंभ श्याम मंदिर- यह मंदिर चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़ और अचलगढ़ तीनों दुर्गों में स्थापित है।
2. विष्णु मंदिर, एकलिंगजी
3. कुशाल माता मंदिर (बदनोर)
4. रणकपुर जैन मंदिर- कुंभा के समय 1439 ई. में मथाई नदी के किनारे धरणकशाह द्वारा निर्मित।
5. शृंगार चँवरी मंदिर
'''● कुम्भा के प्रमुख दरबारी विद्वान'''
'''1. मंडन ''' ̶ मंडन ने देव मूर्ति प्रकरण, प्रासाद मंडन, राजवल्लभ, रूप मंडन, वास्तु मंडन, वास्तु शास्त्र, कोदंड मंडन (धनुर्विद्या से संबंधित) आदि प्रमुख ग्रंथों की रचना की।
'''2. नाथा ̶ '''यह मंडन का भाई था। इसने ‘वास्तु मंजरी’ ग्रंथ की रचना की थी।
'''3. गोविंद''' ̶ यह मंडन का पुत्र था। इसकी प्रमुख रचनाएँ थी उद्धार धोरिणी, द्वार दीपिका, कलानिधि।
'''● अन्य विद्वान ̶ '''मुनि सुंदर सूरी, टिल्ला भट्ट, जय शेखर, भुवन कीर्ति, सोम सुंदर, जयचंद्र सूरी, सोमदेव आदि।
'''● कुम्भा की प्रमुख रचनाएँ ̶'''
1. संगीत राज (5 भाग)
2. संगीत मीमांसा
3. सूड़ प्रबंध
4. संगीत रत्नाकर की टीका
5. चंडी शतक की टीका
6. गीत गोविंद की टीका – रसिकप्रिया
''': कुंभा कालीन प्रमुख राजनीतिक घटनाएँ ̶'''
- सारंगपुर युद्ध (1437 ई.) – कुम्भा ने मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी प्रथम को पराजित कर बंदी बनाया। 6 माह की कैद के बाद उसे रिहा कर दिया।
- इस विजय के उपलक्ष्य में चित्तौड़गढ़ दुर्ग में विजय स्तंभ का निर्माण करवाया।
- कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति की रचना कवि अत्रि द्वारा तथा बाद में महेश द्वारा पूरी की गई ।
- 1453 ई. में कुंभा ने मारवाड़ से मण्डोर छीन लिया।
● '''आवल-बावल की संधि''' (1453 ई.)- जोधा व कुंभा के बीच हुई जिसमें सोजत को मेवाड़ और मारवाड़ के मध्य की सीमा मान लिया गया।
- इस संधि को करवाने में हंसाबाई की प्रमुख भूमिका थी।
- इस संधि के द्वारा दोनों राज्यों में वैवाहिक संबंध (रायमल-शृंगारदेवी) भी स्थापित हो गए।
● नागौर पर अधिकार- नागौर के शासक शम्स खाँ को पराजित किया।
● चंपानेर की संधि (1456 ई.)- मालवा शासक महमूद खिलजी प्रथम और गुजरात शासक कुतुबुद्दीन के मध्य राणा कुंभा के विरुद्ध हुई। लेकिन दोनों मिलकर भी राणा कुंभा को पराजित नहीं कर सके।
● सिरोही के शासक सहसमल के समय सिरोही पर आक्रमण कर आबू पर अधिकार कायम कर लिया।
- कुंभा अंतिम समय में उन्माद रोग से ग्रसित हो गया था।
- कुम्भा के पुत्र उदयकरण (उदा) ने ही मामादेव कुंड (कटारगढ़) के पास 1468 ई. में कुम्भा की हत्या की।
- राणा कुंभा स्वयं एक उच्च कोटि का विद्वान एवं विद्यानुरागी था।कान्ह व्यास द्वारा रचित एकलिंग महात्म्य के अनुसार कुंभा वेद, स्मृति, मीमांसा, उपनिषद्, व्याकरण व राजनीति में रूचि रखता था।
- कुम्भा की मृत्यु के बाद उदा मेवाड़ का शासक बना।
- मेवाड़ का पितृहन्ता शासक- उदा - दाड़िमपुर का युद्ध- उदा व उदा के भाई रायमल के मध्य हुआ जिसमें उदा पराजित हुआ था।
- दाड़िमपुर के युद्ध के बाद उदा मालवा की ओर चला गया जहाँ उसकी मृत्यु हो गई।
'''*महाराणा रायमल'''
- शासनकाल- 1468 ई. से 1509 ई.-
- पृथ्वीराज, जयमल और सांगा उसके पुत्र थे।
- इसकी बेटी आनंदा बाई का विवाह सिरोही के जगमाल के साथ हुआ।
- पृथ्वीराज का विवाह टोडा के राव सुरताण की पुत्री ‘तारा’ के साथ हुआ।
- पृथ्वीराज ने तारा के नाम पर अजमेर के किले का नाम '''तारागढ़''' रखा।
- पृथ्वीराज को '''‘उड़ना राजकुमार’''' के नाम से भी जाना जाता है। इसकी हत्या इसके बहनोई, जगमाल ने विष पिलाकर की थी।
- जयमल के दुर्व्यवहार के कारण राव सुरताण ने इसकी हत्या की थी।
- उत्तराधिकार संघर्ष में पराजित सांगा ने अजमेर के ‘करमचंद पंवार’ के पास शरण ली।
- खेती को प्रोत्साहित करने के लिए ‘राम और शंकर’ नामक तालाबों का निर्माण करवाया।
- चित्तौड़ में अद्भुतजी के मन्दिर का निर्माण करवाया।
- रायमल की पत्नी शृंगार देवी ने घोसूण्डी की बावड़ी (चित्तौड़) का निर्माण करवाया था।
'''*महाराणा सांगा'''
- शासनकाल – 1509-1528 ई.
- सांगा व उनके तीन भाइयों – पृथ्वीराज, जयमल व राजसिंह के मध्य हुए उत्तराधिकारी संघर्ष में सांगा विजयी रहे तथा 1509 ई. में मेवाड़ के शासक बने।
'''- उपाधियाँ –'''
1. हिन्दूपत
2. सैनिक भग्नावशेष (कर्नल जेम्स टॉड द्वारा प्रदत्त)
'''- सांगा के समकालीन दिल्ली के शासक--'''
1. सिकंदर लोदी
2. इब्राहिम लोदी
3. बाबर
'''- सांगा के समकालीन मालवा के शासक ̶ '''
1. नासिरुद्दीन खिलजी
2. महमूद खिलजी-द्वितीय
'''- सांगा के समकालीन गुजरात के शासक ̶ '''
1. महमूद बेगड़ा
2. मुजफ्फर शाह द्वितीय
'''● सांगा के शासन काल में प्रमुख युद्ध:–'''
- सांगा के शासक बनने के समय मालवा में सुल्तान नासिरुद्दीन शासन कर रहा था।
- 1511 ई. में नासिरुद्दीन की मृत्यु के बाद मेदिनीराय की सहायता से महमूद खिलजी द्वितीय मालवा का शासक बना।मालवा के अमीरों ने गुजरात की सहायता से मेदिनीराय को वहाँ से भगा दिया तो वह राणा सांगा की शरण में आ गया।
- अंतत: मालवा-मेवाड़ के मध्य युद्ध हुआ।महमूद खिलजी द्वितीय पराजित हुआ तथा सांगा ने उसे बंदी बना लिया।
- ईडर के उत्तराधिकारी संघर्ष, नागौर पर प्रभाव स्थापित करने तथा मालवा को सहयोग करने आदि कारणों से राणा सांगा तथा गुजरात के शासक मुजफ्फर के मध्य संघर्ष हुआ लेकिन अंतिम रूप से सफलता किसी को भी नहीं मिली।
- खातौली का युद्ध (1517 ई. कोटा)̶ सांगा ने इब्राहिम लोदी को पराजित किया था।युद्ध में इब्राहिम लोदी ने खुद भाग लिया था।
- बांडी/बाड़ी का युद्ध (1518 ई. धौलपुर)- सांगा ने पुनः इब्राहिम लोदी को पराजित किया। इससे राणा उत्तर भारत का शक्तिशाली शासक बन गया। लोदी की सेना का नेतृत्व मियां हुसैन और मियां माखन ने किया।
- गागरोन का युद्ध (1519 ई. झालावाड़) ̶ सांगा ने महमूद खिलजी-द्वितीय मालवा को पराजित किया था।
- सांगा ने गुजरात के महमूद बेगड़ा को पराजित किया।
- 1520 में सांगा ने गुजरात के बादशाह को पराजित किया।
- 1526 ई. में पानीपत के युद्ध में बाबर ने इब्राहिम लोदी को पराजित कर आगरा पर अधिकार कर लिया।
- बाबर ने सांगा पर विश्वासघात का आरोप लगाया।बाबर के अनुसार सांगा ने इब्राहिम लोदी के विरुद्ध युद्ध में सहयोग करने का वादा किया था लेकिन राणा ने कोई मदद नहीं की, मगर इस आरोप की पुष्टि नहीं होती है।
- चूँकि दोनों शासक शक्तिशाली तथा महत्त्वाकांक्षी थे।अत: दोनों के मध्य युद्ध अवश्यसम्भावी था।
- बयाना का युद्ध (16 फरवरी, 1527 भरतपुर) ̶ सांगा ने बाबर की सेना को पराजित किया।
'''● खानवा का युद्ध (17 मार्च, 1527) ̶''' बाबर ने तोपखाने एवं तुलुगमा युद्ध पद्धति का प्रयोग कर सांगा को पराजित किया था। खानवा, भरतपुर की रूपवास तहसील में स्थित है।
- खानवा युद्ध से पूर्व घटित प्रमुख घटनाएँ ̶
1. काबुल के ज्योतिषी मोहम्मद शरीफ ने बाबर के पराजय की भविष्यवाणी की थी।
2. बाबर ने सेना के सामने जोशीला भाषण दिया था।
3. बाबर ने इस युद्ध को जिहाद (धर्म युद्ध) घोषित किया था।
4. बाबर ने मुस्लिम व्यापारियों पर लगने वाला तमगा चुंगी कर हटाया था।
- बाबर के तोपखाने के अध्यक्ष ̶ मुस्तफा कमाल और उस्ताद अली।
- युद्ध में बाबर ने '''‘तुलुगमा युद्ध पद्धति’''' और तोपखाने का प्रयोग किया था।
- ‘'''पाती परवण‘''' प्रथा- एक प्राचीन पद्धति, जिसके अंतर्गत हिंदू शासकों को युद्ध में आमंत्रित किया जाता था। इस युद्ध से पूर्व सांगा ने इस प्रथा को पुनर्जीवित किया।
'''- खानवा युद्ध में भाग लेने वाले प्रमुख हिंदू शासक-'''
1. बीकानेर के राजा जैतसी ने अपने पुत्र कल्याणमल को भेजा।
2. मारवाड़ के राव गांगा ने अपने पुत्र मालदेव को भेजा।
3. ईडर- भारमल
4. मेड़ता- वीरमदेव
5. चंदेरी (मध्यप्रदेश)- मेदिनीराय
6. जगनेर- अशोक परमार
7. आमेर- पृथ्वीसिंह कच्छवाहा
8. वागड़- उदयसिंह
9. गोगुंदा- झाला सज्जा
10. सादड़ी- झाला अज्जा
11. बूँदी- नारायण राव
'''सांगा के पक्ष में भाग लेने वाले मुस्लिम सेनानायक:–'''
1. मेवात- हसन खाँ मेवाती
2. महमूद लोदी (इब्राहिम लोदी का छोटा भाई)
- बाबर की सेना का नेतृत्व- ‘हुमायूँ और मेहंदी ख्वाजा’
- युद्ध में घायल सांगा को युद्ध भूमि से दूर ले जाया गया।
- ‘झाला अज्जा’ (काठियावाड़) ने युद्ध में सांगा के युद्ध भूमि छोड़ने पर राजचिह्न धारण किया था।
- राव मालदेव घायल सांगा को ‘बसवा’(दौसा) लेकर गए। प्राथमिक उपचार के बाद यहाँ से सांगा को रणथम्भौर ले जाया गया।
- चंदेरी का युद्ध (1528 ई.) में भाग लेने के लिए जा रहे सांगा को मेवाड़ी सरदारों ने कालपी (उ.प्र.) स्थान पर विष दे दिया।
- मृत्यु- 30 जनवरी, 1528 को बसवा (दौसा) में हुई जहाँ पर ‘सांगा का स्मारक/चबूतरा’ बना है।
- सांगा का अंतिम संस्कार मांडलगढ़ (भीलवाड़ा) में किया गया, जहाँ सांगा की ‘8 खंभों की छतरी’ का निर्माण अशोक परमार द्वारा करवाया गया ।-
सांगा के बड़े पुत्र भोजराज का विवाह मेड़ता के रतनसिंह की पुत्री '''मीराबाई''' से हुआ।
- सांगा के अन्य पुत्र – रतन सिंह-द्वितीय, विक्रमादित्य, उदय सिंह थे।
- बाबर ने सांगा के बारे में लिखा है – ‘सांगा ने अपने देश की रक्षा में एक आँख, एक हाथ और एक पैर खो दिया।’
- कर्नल टॉड के अनुसार 7 उच्च श्रेणी के राजा, 9 राव व 104 सरदार सदैव सांगा की सेवा में उपस्थित रहते थे।
- हरविलास शारदा ने लिखा है कि- “मेवाड़ के महाराणाओं में सांगा सर्वाधिक प्रतापी शासक हुए। उन्होंने अपने पुरुषार्थ के द्वारा मेवाड़ को उन्नति के शिखर पर पहुँचाया।”
'''*महाराणा रतनसिंह'''
- शासनकाल- 1528 ई. से 1531 ई.
- यह महाराणा सांगा की रानी धनबाई का पुत्र था।
- बूँदी के सूरजमल हाड़ा के साथ ‘अहेरिया उत्सव’ के दौरान युद्ध करते हुए मारा गया था।
'''* महाराणा विक्रमादित्य'''
- शासनकाल- 1531 ई. से 1536 ई.
- यह महाराणा सांगा की हाड़ी रानी कर्णावती का पुत्र था। इनकी संरक्षिका कर्णावती थी।
- विक्रमादित्य के समय मालवा और गुजरात के मुस्लिम शासक ’बहादुर शाह प्रथम’ ने चित्तौड़ पर 2 बार आक्रमण किया (1533 ई. तथा 1534 ई.)- 1534 ई. के दूसरे आक्रमण से पूर्व कर्णावती ने हुमायूँ को सहायता प्राप्त करने हेतु राखी भेजी थी परंतु हुमायूँ ने समय पर सहायता नहीं की। अतः बहादुर शाह के लंबे घेरे के बाद 1535 ई. में चित्तौड़ का पतन हुआ। इस समय चित्तौड़गढ़ का ‘दूसरा साका’ हुआ जिसमें जौहर का नेतृत्व कर्णावती ने तथा केसरिया का नेतृत्व ‘रावत बाघसिंह’ ने किया।
- विक्रमादित्य ने मीराबाई को दो बार मारने का असफल प्रयास किया। मीरा वृंदावन चली गई, जहाँ ‘रविदास’ को उन्होंने अपना गुरु बनाया।
- विक्रमादित्य की हत्या (1536 ई. में) दासी पुत्र बनवीर ने की थी। यह कुंवर पृथ्वीराज की दासी ’पुतल दे’ का पुत्र था।
- बनवीर ने उदय सिंह को भी मारने का प्रयास किया परंतु पन्नाधाय ने अपने पुत्र चंदन की बलि देकर उदयसिंह की रक्षा की। कीरत बारी (पत्तल उठाने वाला) की सहायता से उदय सिंह को कुंभलगढ़ दुर्ग में पहुँचाया गया। इस समय कुंभलगढ़ दुर्ग का किलेदार ‘आशा देवपुरा’ था।
'''* बनवीर'''
- विक्रमादित्य की हत्या कर चित्तौड़ पर अधिकार कर लिया।
- चित्तौड़ में ‘नौलखा महल और तुलजा भवानी का मंदिर’ बनवाया।
- राव मालदेव की सहायता से उदयसिंह ने बनवीर को मारकर चित्तौड़ पर अधिकार किया।
'''* महाराणा उदयसिंह'''
- शासनकाल- 1537 ई. – 1572 ई.
- राणा सांगा व रानी कर्मावती का ज्येष्ठ पुत्र।
- पन्नाधाय ने अपने पुत्र चंदन का बलिदान देकर बनवीर से सुरक्षित रखने के लिए उदयसिंह को कीरतबारी की सहायता से कुंभलगढ़ दुर्ग के आशादेवपुरा के पास पहुँचाया।
- 1537 ई. में राव मालदेव के सहयोग से कुंभलगढ़ दुर्ग में उदयसिंह का राज्याभिषेक किया गया।
- 1543 ई. में अफगान शासक शेरशाह सूरी को चित्तौड़ दुर्ग की चाबियाँ सौंपकर उसका प्रभुत्व स्वीकार कर लिया।
- शेरशाह ने अपना राजनीतिक प्रभाव बनाए रखने के लिए ख्वास खाँ को चितौड़ में रखा।
- अफगानों की अधीनता स्वीकार करने वाला मेवाड़ का पहला शासक।
- हरमाड़ा का युद्ध- 1557 में रंगराय वैश्या के कारण उदयसिंह व अजमेर के हाकीम हाजी खाँ के मध्य हुआ।
- 1559 ई. में उदयसिंह ने ‘उदयपुर’ नगर की स्थापना कर इसे अपनी राजधानी बनाया। यहाँ उसने ‘उदयसागर झील’ व मोती मगरी के महलों का निर्माण करवाया।
- अकबर ने 1567 ई. में चित्तौड़ अभियान शुरू किया क्योंकि उदयसिंह ने मालवा के बाज बहादुर व मेड़ता के जयमल को शरण दी थी।
'''-अकबर का चित्तौड़ आक्रमण (1567 – 68 ई.) '''
̶- अक्टूबर, 1567 में अकबर द्वारा मेवाड़ पर आक्रमण करने पर सामंतों की सलाह पर उदयसिंह किले की रक्षा का भार अपने सेनानायकों जयमल और फत्ता को सौंपकर गिरवा की पहाड़ियों (उदयपुर) में चले गए।
- चित्तौड़ के किले की दीवार की मरम्मत करते समय जयमल, अकबर की ‘संग्राम’ नामक बंदूक की गोली से घायल हो गया था।
- जयमल ने कल्ला राठौड़ के कंधे पर बैठकर युद्ध किया।
- जयमल राठौड़ व फत्ता सिसोदिया लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए व फत्ता की पत्नी रानी फूल कंवर के नेतृत्व में जौहर हुआ जो '''चित्तौड़ का तीसरा''' साका था।
- फरवरी, 1568 में अकबर ने चित्तौड़गढ़ पर अधिकार कर लिया।
- अकबर ने जयमल व फत्ता की वीरता से प्रभावित होकर आगरा के दुर्ग के बाहर इन दोनों वीरों की पत्थर की गजारूढ़ मूर्तियाँ लगवाई ।
- उनकी मूर्तियाँ जूनागढ़ दुर्ग (बीकानेर) के बाहर भी स्थित हैं।
- 28 फरवरी, 1572 को होली के दिन गोगुन्दा (उदयपुर) में उदयसिंह की मृत्यु हो गई थी।
- कर्नल टॉड के अनुसार – “यदि सांगा व प्रताप के बीच में उदयसिंह न होता तो मेवाड़ के इतिहास के पन्ने अधिक उज्ज्वल होते।“
'''* महाराणा प्रताप'''
- जन्म- 9 मई, 1540 (ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया, विक्रम संवत् 1597, रविवार)
- जन्म स्थान- बादल महल (कटारगढ़) कुंभलगढ़ दुर्ग
- पिता – महाराणा उदयसिंह- माता – जयवंता बाई (पाली नरेश अखैराज सोनगरा की पुत्री)
- विवाह – 1557 ई. को अजबदे पँवार के साथ हुआ।
- रानियाँ – पटरानी अजबदे (रामरख पंवार की पुत्री) फूलकंवर (मालदेव के ज्येष्ठ पुत्र राम की पुत्री)
- पुत्र- अमरसिंह- शासनकाल – 1572-1597 ई.
'''- उपनाम-'''
1. ‘कीका’ (मेवाड़ के पहाड़ी प्रदेशों में)
2. मेवाड़ केसरी
3. हिन्दुआ सूरज
- राजमहल की क्रांति ̶ उदयसिंह ने जगमाल को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था लेकिन मेवाड़ के सामन्तों ने जगमाल को हटाकर राणा प्रताप को शासक बनाया, यह घटना ‘राजमहल की क्रांति’ कहलाती है।
- प्रथम राज्याभिषेक ̶ 28 फरवरी, 1572 को महादेव बावड़ी (गोगुन्दा)
- विधिवत् राज्याभिषेक- कुंभलगढ़ दुर्ग में मारवाड़ के राव चन्द्रसेन सम्मिलित हुए।
- प्रताप का घोड़ा – चेतक
- हाथी – रामप्रसाद व लूणा
- मुगलों से संघर्ष के लिए राणा प्रताप ने वीर सामंतों तथा भीलों को एकजुट किया और उन्हें सैन्य व्यवस्था में उच्च पद देकर उनके सम्मान को बढ़ाया।
- गोपनीय तरीके से युद्ध का प्रबंध करने के लिए प्रताप ने अपना निवास स्थान गोगुन्दा से कुंभलगढ़ स्थानान्तरित कर दिया।
- अकबर द्वारा राणा प्रताप के पास भेजे गए 4 संधि प्रस्तावक/शिष्ट मण्डल
-1. जलाल खाँ कोरची – नवम्बर, 1572
2. मानसिंह – जून, 1573
3. भगवन्तदास – अक्टूबर, 1573
4. टोडरमल – दिसम्बर, 1573
- सदाशिव कृत ‘राजरत्नाकर’ एवं रणछोड़ भट्ट कृत ‘अमरकाव्यम् वंशावली’ के अनुसार प्रताप ने मानसिंह का स्वागत व सत्कार उदयसागर झील के किनारे किया था।
'''● हल्दीघाटी का युद्ध (राजसमन्द) ̶ 18 जून, 1576'''
- जी.एन. शर्मा के अनुसार, हल्दीघाटी का युद्ध 21 जून, 1576 को हुआ था।
- वर्ष 1576 की शुरुआत में अकबर मेवाड़ पर आक्रमण की तैयारी हेतु अजमेर आया और यहीं पर मानसिंह को इस युद्ध का नेतृत्व सौंपा।
- अकबर ने युद्ध की व्यूह रचना मैगजीन दुर्ग में रची थी।
- मुगल सेना का प्रधान सेनानायक – मिर्जा मानसिंह (आमेर) सहयोगी सेनानायक- आसफ खाँ- मानसिंह ने पहले माण्डलगढ़ तथा फिर मोलेला गाँव (राजसमन्द) में पड़ाव डाला।
- राणा प्रताप ने युद्ध की योजना कुम्भलगढ़ दुर्ग में बनाई और अपनी सेना का पड़ाव लोसिंग गाँव (राजसमन्द) में डाला।
- राणा प्रताप की हरावल सेना का नेतृत्व- हकीम खाँ सूर चंदावल सेना का नेतृत्व- राणा पूंजा
- मुगल सेना के हरावल भाग का नेतृत्व- सैय्यद हाशिम
'''- मुगल पक्ष''' – मुहम्मद बदख्शी रफी, राजा जगन्नाथ और आसफ खाँ
'''- प्रताप पक्ष''' – रामशाह तँवर (ग्वालियर), झाला मानसिंह, झाला बीदा, मानसिंह सोनगरा, जयमल मेहता, पुरोहित गोपीनाथ, शंकरदास, चारण जैसा, पुरोहित जगन्नाथ, चूंडावत कृष्णदास (सलूम्बर), हकीम खाँ सूर, भीमसिंह डोडिया, (सरदारगढ़), रावत सांगा (देवगढ़), रावत किशनदास, रामदास मेड़तिया, राणा पूँजा और भामाशाह।
- इतिहासकार बदायूँनी युद्ध में मुगल सेना के साथ उपस्थित था।
- 18 जून, 1576 को प्रात:काल में मुगल सेना व राणा प्रताप के मध्य युद्ध प्रारम्भ हुआ।
- हकीम खाँ सूर के नेतृत्व में राजपूतों ने पहला वार इतना भयंकर किया कि मुगल सेना भाग खड़ी हुई।
- उसी समय मुगलों की आरक्षित सेना के प्रभारी मिहत्तर खाँ ने यह झूठी अफवाह फैलाई कि – “बादशाह अकबर स्वयं शाही सेना लेकर आ रहे हैं।”
- यह सुनकर मुगल सेना फिर युद्ध के लिए आगे बढ़ी। मेवाड़ की सेना भी ‘रक्तताल’ नामक मैदान में आ डटी।
- युद्ध में राणा प्रताप के लूणा व रामप्रसाद और अकबर के गजमुक्ता व गजराज हाथियों के मध्य युद्ध हुआ।
- रामप्रसाद हाथी को मुगलों ने अपने अधिकार में ले लिया जिसका बाद में अकबर ने नाम बदलकर ‘पीरप्रसाद’ कर दिया।
- राणा प्रताप ने पठान बहलोल खाँ पर ऐसा प्रहार किया कि उसके घोड़े सहित दो टुकड़े हो गए।
- युद्ध में चेतक घोड़े पर राणा प्रताप और मर्दाना हाथी पर सवार मानसिंह का प्रत्यक्ष आमना-सामना हुआ।
- प्रताप ने भाले से मानसिंह पर वार किया लेकिन मानसिंह बच गया। इस दौरान चेतक हाथी के प्रहार से घायल हो गया।
- मुगल सेना ने प्रताप को चारों ओर से घेर लिया।- राणा प्रताप के घायल होने पर झाला बीदा ने राजचिह्न धारण किया तथा युद्ध लड़ते हुए वीर गति प्राप्त की।
● माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान, सामाजिक विज्ञान कक्षा 10 के अनुसार -
- बड़ी सादड़ी के झाला मन्ना सेना को चीरते हुए राणा प्रताप के पास आया और निवेदन किया कि – “आप राजचिह्न उतारकर मुझे दे दीजिए और आप इस समय युद्ध के मैदान से चले जाएँ। इसी में मेवाड़ की भलाई है।”
- प्रताप के युद्ध भूमि छोड़ने पर झाला मन्ना ने राजचिह्न धारण किया और युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
- युद्ध में हाथी के वार से घायल राणा प्रताप के घोड़े चेतक की एक नाले को पार करने के बाद मृत्यु हो गई।
- बलीचा गाँव में चेतक की समाधि बनी हुई है।
- ‘अमरकाव्य वंशावली’ नामक ग्रंथ तथा राजप्रशस्ति के अनुसार यहाँ राणा प्रताप के भाई शक्तिसिंह ने प्रताप से मिलकर अपने किए की माफी माँगी।
- हल्दीघाटी युद्ध अनिर्णित रहा। अकबर राणा प्रताप को बंदी बनाने में विफल रहा।
- युद्ध के परिणाम से नाराज अकबर ने मानसिंह और आसफ खाँ की ड्योढ़ी बंद कर दी।
- बदायूँनी कृत ‘मुन्तखब उत्त तवारीख’ में हल्दीघाटी युद्ध का वर्णन।
- इस युद्ध को अबुल-फजल ने ‘खमनौर का युद्ध’, बदायूँनी ने ‘गोगुन्दा का युद्ध’ तथा कर्नल टॉड ने ‘हल्दीघाटी का युद्ध’ कहा।
- राजसमन्द में प्रत्येक वर्ष ‘हल्दीघाटी महोत्सव’ मनाया जाता है।
- राणा प्रताप ने ‘आवरगढ़’ में अपनी अस्थाई राजधानी स्थापित की।
- फरवरी, 1577 में अकबर खुद मेवाड़ अभियान पर आया लेकिन असफल रहा।
- अक्टूबर, 1577 से नवम्बर, 1579 तक शाहबाज खाँ ने तीन बार मेवाड़ पर असफल आक्रमण किया।
- 3 अप्रैल, 1578 को शाहबाज खाँ ने कुम्भलगढ़ दुर्ग पर अधिकार किया।
- राणा प्रताप ने कुंभलगढ़ दुर्ग पर पुन: अधिकार कर भाण सोनगरा को किलेदार नियुक्त किया।
- भामाशाह (पाली) ने महाराणा प्रताप की आर्थिक सहायता की थी।
- मेवाड़ का उद्धारक व दानवीर- '''भामाशाह'''
- 1580 में अकबर ने अब्दुल रहीम खानखाना को प्रताप के विरुद्ध भेजा। कुँवर अमरसिंह ने शेरपुर के मुगल शिविर पर आक्रमण कर खानखाना के परिवार की महिलाओं को बंदी बना लिया। यह सूचना जब राणा प्रताप को मिली तो उन्होंने तुरन्त मुगल महिलाओं को सम्मानपूर्वक वापस भेजने का आदेश दिया।
'''दिवेर का युद्ध (अक्टूबर, 1582 ई.) :--'''
-कुँवर अमरसिंह ने अकबर के काका सेरिमा सुल्तान का वध कर दिवेर पर अधिकार किया।
- कर्नल जेम्स टॉड ने इस युद्ध को ‘प्रताप के गौरव का प्रतीक’ और ‘मेवाड़ का मैराथन’ कहा।
- 5 दिसम्बर, 1584 को अकबर ने आमेर के भारमल के छोटे पुत्र जगन्नाथ कच्छवाहा को प्रताप के विरुद्ध भेजा। जगन्नाथ भी असफल रहा। जगन्नाथ की माण्डलगढ़ में मृत्यु हो गई।
- जगन्नाथ कच्छवाहा की ’32 खम्भों की छतरी’- माण्डलगढ़ (भीलवाड़ा)
- राणा प्रताप ने बदला लेने के लिए आमेर क्षेत्र के मालपुरा को लूटा और झालरा तालाब के निकट ‘नीलकंठ महादेव मंदिर’ का निर्माण करवाया।
- 1585 ई. से 1597 ई. के मध्य प्रताप ने चित्तौड़ एवं माण्डलगढ़ को छोड़कर शेष सम्पूर्ण राज्य पर पुन: अधिकार कर लिया था।
- 1585 ई. में लूणा चावण्डिया को पराजित कर प्रताप ने चावण्ड पर अधिकार किया तथा इसे अपनी नई राजधानी बनाया।
- चावण्ड में प्रताप ने ‘चामुण्डा माता’ का मंदिर बनवाया।
- चावण्ड 1585 से अगले 28 वर्षों तक मेवाड़ की राजधानी रहा।
- 1597 में धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाते समय प्रताप को गहरी चोट लगी। जो उनकी मृत्यु का कारण बनी।
- मृत्यु -19 जनवरी, 1597, चावण्ड
अग्निसंस्कार- बांडोली
- प्रताप की 8 खम्भों की छतरी- बांडोली (उदयपुर) में खेजड़ बाँध की पाल पर।
- प्रताप की मृत्यु पर अकबर के दरबार में उपस्थित कवि दुरसा आढ़ा ने एक दोहा सुनाया –
गहलोत राणो जीत गयो दसण मूंद रसणा डसी।
नीलास मूक भरिया नयन तो मृत शाह प्रताप सी।।
- महाराणा प्रताप के संदर्भ में कर्नल टॉड ने लिखा – “आलप्स पर्वत के समान अरावली में कोई भी ऐसी घाटी नहीं, जो प्रताप के किसी न किसी वीर कार्य, उज्ज्वल विजय या उससे अधिक कीर्तियुक्त पराजय से पवित्र न हुई हो। हल्दीघाटी ‘मेवाड़ की थर्मोपल्ली’ और दिवेर ‘मेवाड़ का मैराथन’ है।
“- प्रताप के बारे में कहा गया है कि –
“पग-पग भम्या पहाड़, धरा छोड़ राख्यो धरम।
महाराणा मेवाड़, हिरदे बसया हिन्द रे।। ”
'''● प्रताप कालीन रचनाएँ''' –
1. दरबारी पंडित चक्रपाणि मिश्र – विश्ववल्लभ, मुहूर्तमाला, व्यवहारादर्श व राज्याभिषेक पद्धति।
2. जैन मुनि हेमरत्न सूरी – गोरा-बादल, पद्मिनी चरित्र चौपाई, महिपाल चौपाई, अमरकुमार चौपाई, सीता चौपाई, लीलावती
● प्रताप द्वारा निर्मित मंदिर –
1. चामुण्डा देवी (चावण्ड)
2. हरिहर मंदिर (बदराणा)
● चित्रकला- चावण्ड शैली का जन्म प्रमुख चित्रकार – निसारुद्दीन
'''* अमरसिंह प्रथम –'''
शासनकाल- 1597 ई. – 1620 ई.
- महाराणा प्रताप व अजब दे पंवार का पुत्र।
- अमरसिंह को भी मुगल आक्रमणों का सामना करना पड़ा।
- अकबर ने 1599 ई. में जहाँगीर के नेतृत्व में सेना भेजी, जिसे मेवाड़ की सेना ने उटाला नामक स्थान पर पराजित किया।
- जहाँगीर के शासक बनते ही 1605 ई. में परवेज, आसिफ खाँ, जफर बेग एवं सगर के नेतृत्व में मेवाड़ को अधीन करने का प्रयास किया गया था लेकिन सफलता नहीं मिली।
- 1608 ई. में जहाँगीर ने महावत खाँ को मेवाड़ पर आक्रमण करने के लिए भेजा, लेकिन वह भी असफल रहा।
- 1609 ई. में अब्दुल्ला, 1612 ई. में राजा बासू और 1613 ई. में मिर्जा अजीज कोका को मेवाड़ पर आक्रमण करने के लिए भेजा गया था लेकिन यहाँ भी सफलता नहीं मिली।
- 1613 ई. में जहाँगीर स्वयं अजमेर आया तथा अपने पुत्र खुर्रम (शाहजहाँ) को मेवाड़ अभियान का नेतृत्व सौंपा।
- शाहजहाँ के आक्रमणों ने मेवाड़ की स्थिति विकट कर दी।
- मेवाड़ी सामंतों ने कुँवर कर्णसिंह को अपने पक्ष में कर राणा को मुगलों से संधि करने के लिए विवश कर दिया।
'''- मुगल-मेवाड़ संधि-''' 5 फरवरी, 1615 में मेवाड़ के अमरसिंह प्रथम व मुगल शासक जहाँगीर के बीच हुई।
- इस संधि पर मुगलों की तरफ से खुर्रम व मेवाड़ की ओर से अमरसिंह प्रथम ने हस्ताक्षर किए।
- चित्तौड़, मेवाड़ को लौटा दिया गया लेकिन उसकी मरम्मत नहीं कर सकते थे।
- इस संधि से 90 वर्षों से चले आ रहे मुगल-मेवाड़ संघर्ष का अंत हुआ।
- संधि से नाखुश राणा अमरसिंह ने स्वयं को राजकार्य से विरक्त कर लिया।
- अमरसिंह प्रथम का काल मेवाड़ स्कूल की चावण्ड चित्रकला शैली का स्वर्णकाल माना जाता है।
- मृत्यु- 26 जनवरी, 1620 को उदयपुर के निकट आहड़ में - आहड़ (उदयपुर) की महासतियों में सबसे पहली छतरी अमरसिंह प्रथम की है।
- आहड़ को मेवाड़ के महाराणाओं का श्मशान भी कहते
'''*राणा कर्णसिंह –'''
शासनकाल- 1620 ई. – 1628 ई.-
-पिछोला झील में जगमंदिर का निर्माण प्रारंभ करवाया जहाँ 1623 ई. में शाहजहाँ को शरण दी गई थी।
- शाहजहाँ ने यहाँ ‘गफुर बाबा की मज़ार’ बनवाई।
- उदयपुर में दिलखुश महल व कर्ण विलास का निर्माण करवाया।
- यह मुगलों के आंतरिक मामलों में रुचि लेने वाला मेवाड़ इतिहास का प्रथम शासक था।
'''* जगतसिंह -प्रथम'''
- शासनकाल- 1628 ई. – 1652 ई.
- शाहजहाँ ने मेवाड़ रियासत के हिस्से की प्रतापगढ़ व शाहपुरा रियासत को मेवाड़ से पृथक् कर दिया था।
- जगमंदिर का निर्माण पूरा करवाया। इसे भाणा व उसके पुत्र मुकुंद की देखरेख में बनवाया था।
- उदयपुर में जगदीश मंदिर/जगन्नाथ राय मंदिर का निर्माण करवाया। इसी मंदिर में ‘जगन्नाथराम प्रशस्ति’ उत्कीर्ण है जिसके रचयिता ‘कृष्णभट्ट’ थे।
- मोहन मंदिर व रूप सागर तालाब बनवाया।
- उनकी धाय माँ नौजूबाई ने उदयपुर में ‘धाय मंदिर’ बनावाया।- मेवाड़ चित्रकला शैली का स्वर्णकाल।
'''- ‘तस्वीरा रो कारखानो'''’ व '''‘चितेरों री ओवरी’''' नामक चित्रशाला विभाग की स्थापना की थी।
'''*महाराणा राजसिंह'''
- राज्याभिषेक – 10 अक्टूबर, 1652-
-शासनकाल – 1652-1680 ई.
- गद्दीनशीनी के समय शाहजहाँ ने 5000 का मनसब दिया।
- उपाधि- '''‘विजय कटकातु’'''
- शासक बनते ही चित्तौड़गढ़ के किले की मरम्मत करवाने का निश्चय किया।
- औरंगजेब ने इसे 1615 ई. की मुगल-मेवाड़ संधि की शर्तों के विरुद्ध मानते हुए चित्तौड़ दुर्ग को ढहाने के लिए सादुल्ला खाँ के नेतृत्व में 30,000 की सेना भेजी।
- राजसिंह ने युद्ध करना उचित न समझकर वहाँ से अपनी सेना हटा ली। मुगल सेना कंगूरे व बुर्ज गिराकर लौट गई।
- 1658 ई. में मुगल शहजादों में हुए उत्तराधिकार संघर्ष में ये किसी भी पक्ष में नहीं रहना चाहते थे। अत: ये टालमटोल करते रहे।
- प्रारम्भ में औरंगजेब व राजसिंह के संबंध अच्छे रहे।
- औरंगजेब ने 6000 का मनसब और ग्यासपुरा, डूँगरपुर, बाँसवाड़ा के परगने दिए।
'''- चारुमति विवाद, 1660 ई'''. – औरंगजेब किशनगढ़ की राजकुमारी चारुमति से विवाह करना चाहता था लेकिन राजसिंह ने चारुमति से विवाह कर लिया। अत: राजसिंह व औरंगजेब के मध्य ‘देसूरी की नाल’ (राजसमन्द) में युद्ध हुआ।
- इस युद्ध में राजसिंह की तरफ से सलूम्बर के रतनसिंह चूंडावत ने विजय प्राप्त की।
- औरंगजेब द्वारा 1679 ई. में जजिया कर लगाने पर इसका विरोध किया गया था।
- मुगल-मारवाड़ संघर्ष में राजसिंह ने मारवाड़ का साथ दिया।
- राजसिंह ने मारवाड़ के अजीतसिंह व दुर्गादास की सहायता की तथा उन्हें ‘केलवा की जागीर’ प्रदान की।
'''- नाथद्वारा''' मंदिर व '''द्वारकाधीश''' कांकरोली के मंदिरों का निर्माण करवाया।
- टीका दौड़ उत्सव के बहाने अपने राज्य तथा बाहरी मुगलखानों पर हमले कर लाखों रुपये की सम्पत्ति प्राप्त की।
- अव्यवस्था का फायदा उठाकर राजसिंह ने टोडा, मालपुरा, टोंक, चाकसू, लालसोट को लूटा एवं मेवाड़ के खोए हुए क्षेत्रों पर पुन: अधिकार कर लिया।
- राजसमन्द झील का निर्माण – अकाल प्रबन्धन हेतु गोमती नदी के पानी को रोककर करवाया। झील की नींव घेवर माता द्वारा रखवाई गई।
- राजसमंद झील के उत्तरी किनारे पर नौ चौकी पर ‘राज प्रशस्ति’ शिलालेख लगवाया। संस्कृत में रचित राजप्रशस्ति की रचना रणछोड़ भट्ट ने की। यह प्रशस्ति 25 काले संगमरमर की शिलाओं पर उत्कीर्ण है।
- ‘राजप्रशस्ति’` को विश्व का सबसे बड़ा शिलालेख माना जाता है।
- राजनगर नामक नया नगर बसाया।
- उदयपुर में अम्बामाता मंदिर बनवाया व ब्राह्मणों को ‘रत्नों का तुलादान’ किया।
- उनकी पत्नी रामरस दे ने उदयपुर मे त्रिमुखी बावड़ी/ जया बावड़ी का निर्माण करवाया।
- दरबारी कवि – रणछोड़ भट्ट'''- राजसिंह कालीन साहित्य –'''
1. रणछोड़ भट्ट – राजप्रशस्ति महाकाव्य व अमरकाव्य
2. सदाशिव – राजरत्नाकर
3. लाल भाट – राजसिंह प्रभावर्णनम्
4. मुकन्द – राजसिंहाष्टक
5. किशोरदास – राजप्रकाश
6. कवि मान – राजविलास
7. दौलतविजय – खुमाण रासो
- मृत्यु – 1680 ई. कुंभलगढ़ दुर्ग में
'''*महाराणा जयसिंह –'''
शासनकाल- 1680 ई. – 1698 ई.
- 24 जून, 1681 को दूसरी मेवाड़-मुगल संधि हुई।
- गोमती नदी के पानी को रोककर जयसमन्द झील/ढेबर झील (उदयपुर) का निर्माण करवाया।
- यह राजस्थान की सबसे बड़ी मीठे पानी की कृत्रिम झील है।
'''* महाराणा अमरसिंह द्वितीय –'''
शासनकाल- 1698 ई. – 1710 ई.
- मेवाड़-मारवाड़-आमेर के मध्य '''देबारी समझौता''' हुआ।
- अपनी पुत्री चतन्द्रकुंवरी का विवाह सवाई जयसिंह से करवाया।
'''*महाराणा संग्रामसिंह द्वितीय –'''
शासनकाल- 1710 ई. – 1734 ई.
- मेवाड़ में मराठों ने पहली बार प्रवेश किया।
- मेवाड़ चित्रशैली में ‘कलीला दमना’ का चित्रण हुआ।
- फतेहसागर झील के किनारे सहेलियों की बाड़ी बनवाई तथा सीसारमा गाँव में वैद्यनाथ का मंदिर व वैद्यनाथ प्रशस्ति का निर्माण करवाया।
- मेवाड़ में स्थित जगदीश मंदिर का पुन: निर्माण भी करवाया।
'''*महाराणा जगतसिंह – द्वितीय'''
- शासनकाल- 1734 ई. – 1751 ई.
- पेशवा बाजीराव-प्रथम मेवाड़ आया तथा चौथ वसूली का समझौता किया।
- माधोसिंह को जयपुर का शासन दिलाने के लिए जयपुर के उत्तराधिकार संघर्ष में हस्तक्षेप किया था।
- पिछोला झील में जगनिवास महलों का निर्माण करवाया।
- दरबारी कवि नेकराम ने जगत विलास ग्रंथ लिखा।
- 17 जुलाई, 1734 को हुरड़ा सम्मेलन की अध्यक्षता की।
- अफगान शासक नादिरशाह ने 1739 ई. में दिल्ली पर आक्रमण किया।
- उत्तराधिकारी- प्रतापसिंह द्वितीय (1751-54 ई.)
- महाराणा प्रतापसिंह का उत्तराधिकारी – राजसिंह द्वितीय (1754-61 ई.)
'''* महाराणा अरिसिंह द्वितीय'''
- शासनकाल- 1761-73 ई.
- सरदारों ने राजमाता झाली से उत्पन्न पुत्र रतनसिंह को मेवाड़ का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था।
- अरिसिंह ने बागोर के सरदार नाथसिंह एवं सलूम्बर के रावत जोधसिंह की हत्या करवाई थी।
- उत्तराधिकारी- हम्मीर द्वितीय (1773-78 ई.)
'''* महाराणा भीमसिंह'''
- शासनकाल- 1778 ई. – 1828 ई.
- 1818 ई. में मराठों के भय से अंग्रेजों से संधि कर ली थी। इस संधि पर मेवाड़ की ओर से ठाकुर अजीतसिंह (आसींद, भीलवाड़ा) तथा अंग्रेजों की ओर से चार्ल्स मैटकॉफ ने हस्ताक्षर किए थे।
- भीमसिंह की पुत्री कृष्णा कुमारी से विवाह के लिए 1807 ई. में गिंगोली, (परबतसर, नागौर) का युद्ध हुआ।
- अमीर खाँ पिण्डारी व अजीतसिंह चूंडावत के दबाव में कृष्णा कुमारी को जहर दे दिया।
- 1818 ई. में कर्नल टॉड एजेंट के रूप में उदयपुर आया था।
- उत्तराधिकारी- महाराणा जवानसिंह (1828-38 ई.)
'''* महाराणा सरदारसिंह'''
- शासनकाल- 1838 ई. – 1842 ई.
- सरदार सिंह बागोर ठिकाने से गोद आए थे।
- 1841 ई. में मेवाड़ भील कोर का गठन किया जिसका 1950 ई. में राजस्थान पुलिस विभाग में विलय कर दिया गया।
'''* महाराणा स्वरूपसिंह'''
- शासनकाल- 1842 ई. – 1861 ई.
- स्वरूपसिंह सरदारसिंह का छोटा भाई था।
- 1857 की क्रांति में अंग्रेजों का साथ देने वाला राजपूताना का पहला शासक था।
- स्वरूपशाही सिक्के चलाए जिन पर ‘चित्रकूट उदयपुर’ व दूसरी ओर ‘दोस्ती लंदन’ अंकित था।
- विजय स्तम्भ का जीर्णोद्धार करवाया।
- 1861 ई. में सती प्रथा पर रोक लगाई।
- डाकन प्रथा व समाधि प्रथा पर भी रोक लगाई थी।
- मृत्यु – 1861
- इनके साथ पासवान ऐंजाबाई सती हुई थी जो मेवाड़ महाराणाओं के साथ सती होने की अन्तिम घटना थी।
'''* राणा शंभूसिंह'''
- शासनकाल- 1861 ई. – 1872 ई.
- शंभूसिंह को बागोर ठिकाने से गोद लिया गया था।
- राज्याभिषेक के समय नाबालिग थे इसलिए राज्य प्रबन्ध के लिए पॉलिटिकल एजेन्ट मेजर टेलर की अध्यक्षता में रीजेंसी कौंसिल (पंच सरदारी) की स्थापना की गई थी।
- मेवाड़ में नई अदालतों की स्थापना के विरोध में नगर सेठ चम्पालाल के नेतृत्व में उदयपुर में हड़ताल (1864 ई.) हुई थी।
- उदयपुर में शंभूरत्न पाठशाला 1863 ई. में स्थापित की गई।
- खैरवाड़ा और नीमच तक पक्की सड़कों का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ।
- श्यामलदास ने वीरविनोद का लेखन प्रारम्भ किया।
'''* राणा सज्जनसिंह'''
- शासनकाल- 1872 ई. – 1884 ई.
- बागोर ठिकाने के शक्तिसिंह के पुत्र थे।
- 14 फरवरी, 1878 को अंग्रेजों के साथ नमक समझौता किया था।
- 1881 ई. में लॉर्ड रिपन चित्तौड़गढ़ आए तथा महाराणा को '''जी.सी.एस.आई.''' (Grand Commander of the Star of India) का खिताब दिया।
- ‘सज्जन निवास’ नाम से सुन्दर बाग लगवाया।
- शिक्षा की सुव्यवस्था के लिए एजुकेशन कमेटी की स्थापना की गई।
- ‘सज्जन अस्पताल’ एवं ‘वॉल्टर जनाना अस्पताल’ का निर्माण करवाया।
- मेवाड़ में नया भू-राजस्व बंदोबस्त शुरू हुआ।
- मेवाड़ में 1881 ई. में प्रथम बार जनगणना का कार्य शुरू हुआ।
'''- महेन्द्राज सभा-''' शासन प्रबन्ध एवं न्याय कार्य के लिए 1880 ई. में स्थापना की।
- 1881 ई. में उदयपुर में ‘सज्जन यंत्रालय’ छापाखाना स्थापित कर इन्होंने ‘सज्जन कीर्ति सुधारक’ नामक साप्ताहिक पत्रिका का प्रकाशन किया।
- ‘सज्जन वाणी विलास’ पुस्तकालय की स्थापना की।
- लॉर्ड लिटन द्वारा आयोजित दिल्ली दरबार में भाग लेने वाला मेवाड़ का प्रथम शासक था।
- दयानन्द सरस्वती मेवाड़ आए। सत्यार्थ प्रकाश का लेखन जगमंदिर में प्रारम्भ किया था।
'''* महाराणा फतेहसिंह -'''
शासनकाल- 1884 ई. – 1921 ई.
- शिवरती के महाराजा दलसिंह के पुत्र।
- राजपूतों में बहुविवाह, बालविवाह एवं फिजूलखर्ची पर रोक लगाई।
- ब्रिटेन के राजकुमार ‘केनॉट’ के मेवाड़ आगमन पर देवली में राजकुमार के हाथ से केनॉट (फतहसागर) बाँध की नींव रखवाई।
- इनके समय 1899 ई. में भीषण अकाल पड़ा था।
- बिजौलिया किसान आंदोलन प्रारंभ हुआ।
'''- उपाधि-''' ऑर्डर ऑफ क्राउन ऑफ इंडिया
- 1889 में ए.जी.जी. वॉल्टर ने ‘राजपूत हितकारिणी सभा’ की स्थापना की।
- दिल्ली दरबार (वर्ष 1903)- एडवर्ड सप्तम के दरबार में शामिल होने जा रहे फतेहसिंह को केसरीसिंह बारहठ ने ‘'''चेतावनी रा चूंगट्या’''' नामक 13 सोरठे लिखकर दिल्ली जाने से रोका।
'''*राणा भूपालसिंह/भोपालसिंह-'''
- शासनकाल- 1921 ई. – 1948 ई.
- सिसोदिया वंश का अंतिम शासक।
- राजस्थान का एकीकरण हुआ।
- राजस्थान के एकमात्र शासक जो आजीवन '''‘महाराजप्रमुख’''' पद पर रहे।
tr6ioskigimfm87bwp6nzl1w1l2qs4h
6591508
6591478
2026-07-24T08:37:45Z
AMAN KUMAR
911487
[[Special:Contributions/~2026-41228-06|~2026-41228-06]] ([[User talk:~2026-41228-06|Talk]]) के संपादनों को हटाकर [[User:Avi Guru|Avi Guru]] के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया
6202231
wikitext
text/x-wiki
{{को विलय|गुहिल राजवंश|date=जनवरी 2023}}
'''(1.)मेवाड़ के गुहिल'''
- नामकरण– इस वंश के प्रतापी शासक गुहिल के नाम से इस वंश का नाम '''गुहिल''' हुआ तथा बाद में यह वंश गहलोत भी कहलाया।
- गुहिल वंश की उत्पत्ति व मूल स्थान के संदर्भ में इतिहासकारों में अनेक मत प्रचलित हैं–
'''इतिहासकार मत'''
1. कर्नल जेम्स टॉड तथा श्यामलदास- गुजरात के वल्लभी से
2. डी.आर. भण्डारकर (आहड़ अभिलेख के आधार पर)- ब्राह्मण की संतान (डॉ. गोपीनाथ शर्मा एवं मुहणोत नैणसी ने भी इस मत का समर्थन किया है।)
3. डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा व नैणसी- सूर्यवंशी- विश्व में सर्वाधिक समय तक एक ही क्षेत्र पर राज्य करने वाला राजवंश।
- इस वंश के महाराणा को ‘हिन्दुआ सूरज’ भी कहा जाता है।
- मेवाड़ के राज्य चिह्न पर अंकित है कि – ’जो दृढ़ राखे धर्म को, ताहि रखे करतार’।
- संस्थापक- '''‘गुहिल या गुहेदत्त’'''
- स्थापना- लगभग 566 ई.
- मुहणोत नैणसी एवं कर्नल टॉड ने गुहिलों की '''24 शाखाओं''' का वर्णन किया है।
'''* गुहिल/गुहादित्य'''
-डॉ. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा के अनुसार लगभग '''566 ई.''' में गुहिल ने अपना शासन स्थापित किया था।
- कर्नल जेम्स टॉड के अनुसार वल्लभी के राजा शिलादित्य और रानी पुष्पावती का पुत्र गुहादित्य था जिसे नागर ब्राह्मणों ने पाल पोस कर बड़ा किया।गुहा या गुफा में जन्म होने के कारण इसका नाम गुहा/गुहिल या गुहादित्य पड़ा।
इसके सिक्के आगरा से मिलें हैं।
- शिलालेखों के अनुसार गुहिल के उत्तराधिकारी- शील, अपराजित, भर्तृभट्ट, अल्लट, नरवाहन, शक्ति कुमार, विजय सिंह आदि।
- गुहिल के बाद सबसे प्रतापी शासक बप्पा रावल हुए।
'''*बप्पा रावल'''
- शासनकाल- 734 से 753 ई.
- बप्पा रावल के जन्म व माता-पिता के नामों के बारे में विद्वान एकमत नहीं है लेकिन इनका बचपन मेवाड़ के एकलिंग के पास नागदा गाँव में व्यतीत हुआ, इससे सभी विद्वान सहमत हैं।
- नागदा में गायें चराते हुए इनका सम्पर्क हारित राशि नामक ऋषि से हुआ। हारित ऋषि पाशुपत/लकुलीश संप्रदाय के साधु थे।
- हारित ऋषि ने बप्पा को मेवाड़ का शासक बनने का वरदान दिया।
- ऋषि ने बप्पा को आर्थिक सहयोग भी किया और कहा कि तुम्हारा संबोधन ‘रावल’ होगा।
- मुहणोत नैणसी एवं कर्नल जेम्स टॉड के अनुसार बप्पा ने हरित ऋषि की कृपा से राज्य प्राप्त किया था।
- बप्पा ने अरब सेना से युद्ध किया। सिंध के नायाब तामीम को पराजित किया।
- बप्पा रावल ने ईरान, ईराक व खुरासान तक के प्रदेश् जीत लिए और इन्होंने वहाँ कई विवाह किए।
- इन्होंने धर्मान्तरित हुए लोगों को पुन: हिन्दू बनाया।
- अरबी ग्रंथ ‘फतुहुल बलदान’ के अनुसार – “अब भारत में पुन: मूर्ति पूजा आरंभ हो गई।“
-कुंभलगढ़ प्रशस्ति (1460 ई.) में बप्पा रावल को ‘विप्र’ कहा गया है।
- बप्पा रावल ने ‘हिन्दुआ सूरज’ की उपाधि धारण की थी, इसलिए गुहिल वंश के सभी शासक अपने आप को ‘हिन्दुआ सूरज’ कहते थे।
- डॉ. गौरी शंकर हीराचन्द ओझा के अनुसार बप्पा का वास्तविक नाम '''कालभोज''' था एवं उसने '''‘बप्पा रावल’''' उपाधि धारण की थी।
- वीर विनोद के रचनाकार कविराज श्यामलदास ने लिखा है कि बप्पा किसी राजा का नाम नहीं है अपितु खिताब था।
- ऐसी मान्यता है कि बप्पा चित्तौड़ के शासक मानमौरी के यहाँ सेवा में था।जब चित्तौड़ पर विदेशी आक्रमण हुआ तो उनसे मुकाबले की चुनौती बप्पा ने स्वीकार की और उन्हें सिंध तक खदेड़ दिया।
- इसलिए इतिहासकार सी. वी. वैद्य ने बप्पा को '''‘चार्ल्स मार्टेल’''' (फ्रांसीसी सेनापति, जिसने यूरोप में सर्वप्रथम मुसलमानों को परास्त किया था।) कहा है ।
- राजप्रशस्ति के अनुसार बप्पा रावल ने '''734 ई'''. में चित्तौड़ के शासक मानमौरी को पराजित कर चित्तौड़ पर अधिकार किया और ‘मेवाड़ राज्य की स्थापना’ की।
- बप्पा रावल ने '''‘नागदा’''' को अपनी राजधानी बनाई थी।
- राजस्थान में ‘सोने के सिक्के’ सर्वप्रथम बप्पा रावल ने ही चलाए थे।
- उन्होंने '''‘एकलिंग जी के मंदिर’''' की स्थापना कैलाशपुरी (उदयपुर) में की व एकलिंग जी को शासक मानते हुए तथा स्वयं को उसका दीवान मानकर शासन किया।
- बप्पा रावल अपने पुत्र को राज्य सौपकर स्वयं पाशुपत संप्रदाय के साधु बन गए।
- गुहिल वंश के कुलदेवता- एकलिंग जी
- बप्पा के समय का 115 ग्रेन का एक सोने का सिक्का मिला है।
बप्पा रावल के स्वर्ण सिक्कों पर शिव, नंदी, त्रिशूल, दंडवत करता मनुष्य, कामधेनु आदि के चित्र बने हुए हैं।
- ‘एकलिंग प्रशस्ति’ में बप्पा रावल की दंतकथा मिलती है।
- ‘रणकपुर प्रशस्ति’ में बप्पा रावल और काल भोज को अलग-अलग बताया गया है परंतु दोनों एक ही हैं।
- श्यामलदास के अनुसार – ‘बप्पा रावल हिन्दुस्तान का प्रतापी व पराक्रमी शासक था।‘
- बप्पा रावल का मंदिर/समाधि- नागदा
'''*अल्लट'''
- शासनकाल- 951- 953 ई.
- उपनाम (ख्यातों में)-'''आलू रावल'''
'''- आहड़''' को राजधानी बनाया।
- आहड़ में वराह मंदिर का निर्माण करवाया।
- मेवाड़ में '''‘नौकरशाही का संस्थापक’''' माना जाता है।
- राष्ट्रकूटों को पराजित कर हूण राजकुमारी '''‘हरिया देवी’''' से विवाह किया था।
'''*शक्ति कुमार'''
- शासनकाल- 977 ई. से 993 ई.
- इनके समय मालवा के परमार शासक मुंज ने आक्रमण किया और आहड़ को नष्ट कर दिया।अतः शक्ति कुमार ने नागदा को पुनः राजधानी बनाया।
- परमार शासक भोज ने चित्तौड़ में ‘त्रिभुवन नारायण मंदिर’ का निर्माण करवाया था।
- उत्तराधिकारी- अंबाप्रसाद
- ‘पृथ्वीराज विजय’ के अनुसार चौहान राजा वाक्पतिराज द्वितीय ने अंबाप्रसाद को पराजित किया था।
'''*कर्णसिंह/रणसिंह'''
- आहोर के पर्वत पर किला बनवाया था।
- रणसिंह के 2 पुत्र थे- क्षेमकरण और राहप।
- क्षेमसिंह ने '''‘रावल शाखा’''' और राहप ने '''‘राणा शाखा’''' को आरम्भ किया।
- क्षेमसिंह के दो पुत्र हुए- कुमारसिंह और सामंतसिंह प्रथम - सामंतसिंह का विवाह अजमेर के चौहान शासक पृथ्वीराज चौहान द्वितीय की बहन पृथ्वीबाई से हुआ।
- सामंतसिंह को नाडौल (पाली) के कीर्तिपाल चौहान ने पराजित कर मेवाड़ पर अधिकार किया था।
- अतः सामंतसिंह ने '''‘वागड़ क्षेत्र’''' में (1178 ई.) गुहिल वंश की स्थापना की।इसने तराइन के दूसरे युद्ध में पृथ्वीराज चौहान की सहायता की ।
- सामंतसिंह के भाई कुमारसिंह ने कीर्तिपाल को पराजित कर मेवाड़ पर पुन: अधिकार कर लिया।
'''* जैत्रसिंह'''
- शासनकाल- 1213-1250 ई.(राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी के अनुसार)
(राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति कक्षा– 10 – जैत्रसिंह का शासनकाल 1213-1253 ई.)
- परमारों को पराजित कर चित्तौड़गढ़ पर अधिकार किया तथा चित्तौड़गढ़ को अपनी राजधानी बनाया।
- ‘भुताला का युद्ध’ (1227 ई.)- इल्तुतमिश की सेना को पराजित किया, जिसका उल्लेख जयसिंह सूरी के ग्रंथ ‘हम्मीर मदमर्दन’ में मिलता है।इस ग्रंथ में इल्तुतमिश को ‘हमीर’ कहा गया है।
- ‘तारीख ए फरिश्ता’ में भी इल्तुतमिश के चित्तौड़ पर आक्रमण का जिक्र मिलता है।
- 1248 ई. में नसीरुद्दीन महमूद को पराजित किया था।
- जैत्रसिंह के सेनापति बालाक व मदन थे।
- चीरवा अभिलेख के अनुसार– ‘जैत्रसिंह इतना शक्तिशाली था कि मालवा, गुजरात, मारवाड़ तथा दिल्ली के शासक भी उसे पराजित नहीं कर सके।
‘- डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने जैत्रसिंह की प्रशंसा में लिखा कि “दिल्ली के गुलाम वंश के सुल्तानों के समय में मेवाड़ के राजाओं में सबसे प्रतापी और बलवान राजा जैत्रसिंह ही हुआ, जिसकी वीरता की प्रशंसा उसके विरोधियों ने भी की है।”
'''- उपाधियाँ –'''
1. ‘रण रसिक’ (जी. एच. ओझा द्वारा प्रदत्त)
2. ‘मेवाड़ की नव शक्ति का संचारक’ (डॉ. दशरथ शर्मा)
'''*तेजसिंह'''
- शासनकाल- 1250 ई.- 1273 ई.
- 1260 ई. में कमलचंद्र द्वारा '''‘श्रावक प्रतिक्रमणसूत्रचूर्णी’''' (मेवाड़ का प्रथम चित्रित ग्रंथ) की रचना की गई।
- बलबन का मेवाड़ पर असफल आक्रमण हुआ।
- तेजसिंह की रानी जेतल देवी ने चित्तौड़ में ‘श्याम पार्श्वनाथ मंदिर’ का निर्माण करवाया।
तेजसिंह की मृत्यु के बाद उसका पुत्र रतनसिंह (1273 –1302 ई.) मेवाड़ का शासक बना ।
'''- उपाधियाँ'''–
1. उमापतिवार लब्ध प्रौढ़प्रताप
2. परमभट्ठारक
3. महाराजाधिराज
4. परमेश्वर
'''* रावल रतनसिंह'''
- शासनकाल- 1302 ई.- 1303 ई.
- सिंहल द्वीप (श्रीलंका) की राजकुमारी '''पद्मिनी''' से विवाह किया।
- हिरामन तोते के द्वारा रतन सिंह को पद्मिनी के सौंदर्य की जानकारी दी गई थी।
'''● अलाउद्दीन खिलजी का चित्तौड़गढ़ पर आक्रमण –'''
- रावल रतनसिंह को 1303 ई. में दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण का सामना करना पड़ा जिसका कारण अलाउद्दीन की साम्राज्यवादी महत्त्वाकांक्षा व चित्तौड़ की सैनिक एवं व्यापारिक उपयोगिता थी।
- मलिक मोहम्मद जायसी द्वारा 1540 ई. में लिखित ‘पद्मावत’ ग्रंथ में युद्ध का कारण पद्मिनी को प्राप्त करना बताया गया है। डॉ. दशरथ शर्मा जायसी के मत को मान्यता प्रदान करते हैं।
- इस युद्ध में इतिहासकार अमीर खुसरो भी सम्मिलित हुआ था। उसने अपने ग्रंथ ‘खजाइन-उल-फुतुह’ में इस आक्रमण का वर्णन किया है।
- तांत्रिक ‘राघव चेतन’ ने अलाउद्दीन को पद्मिनी के सौंदर्य की जानकारी दी थी।
- 28 जनवरी, 1303 को अलाउद्दीन दिल्ली से चित्तौड़ के लिए ससैन्य रवाना हुआ।
- 26 अगस्त, 1303 को चित्तौड़ पर अधिकार किया।
- इस समय '''‘चित्तौड़ का प्रथम''' और '''राजस्थान का दूसरा साका’''' हुआ।
- केसरिया का नेतृत्व- रावल रतन सिंह जौहर- रानी पद्मिनी ने 1600 महिलाओं के साथ किया।
- अलाउद्दीन ने अपने पुत्र ‘खिज्र खाँ’ को चित्तौड़ का प्रशासक नियुक्त किया।
- चित्तौड़ का नाम बदलकर '''‘खिज्राबाद’''' कर दिया।
- इस संघर्ष में दो मेवाड़ी सरदार '''‘गोरा और बादल’''' वीरगति को प्राप्त हुए । गोरा और बादल क्रमशः पद्मिनी के काका व भाई थे।
- अलाउद्दीन की 1316 ई. में मृत्यु के बाद 1316 ई. से 1326 ई. तक जालोर का ‘मालदेव सोनगरा’ चित्तौड़ का प्रशासक रहा।
- अलाउद्दीन द्वारा चित्तौड़ पर विजय प्राप्त करने के बाद 30,000 से अधिक आम नागरिकों का कत्लेआम किया गया जिसका उल्लेख अमीर खुसरो ने किया है।
- युद्ध में विजय के बाद अलाउद्दीन ने चित्तौड़गढ़ की तलहटी में एक मकबरा बनवाया जिसमें 1310 ई. का फारसी भाषा का शिलालेख लगा है। इसमें खिलजी को ‘उस समय का सूर्य, ईश्वर की छाया और संसार का रक्षक’ कहा गया है।
- रतनसिंह मेवाड़ के गुहिल वंश की रावल शाखा का अंतिम शासक था।
'''* राणा हम्मीर'''
<nowiki>:</nowiki> शासनकाल- 1326 ई. से 1364 ई.
- सिसोदा ठिकाने का जागीरदार
- पिता- अरिसिंह
- राणा अथवा सिसोदिया शाखा का प्रथम शासक।
- सिसोदा ठिकाने के जागीरदार हम्मीर ने 1326 ई. में '''चित्तौड़ पर अधिकार''' कर गुहिल वंश की पुन: स्थापना की।सिसोदा का जागीरदार होने के कारण इनको सिसोदिया कहा गया है तथा गुहिल वंश सिसोदिया वंश के नाम से जाना जाने लगा।
- हम्मीर राणा शाखा का राजपूत था इसलिए इसके बाद मेवाड़ के सभी शासक राणा/महाराणा कहलाए।
- हम्मीर के दादा लक्ष्मणसिंह अपने पुत्रों के साथ अलाउद्दीन खिलजी के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
'''- उपाधि-'''
1. मेवाड़ का उद्धारक
2. विषमघाटी पंचानन (कीर्तिस्तम्भ प्रशस्ति व कुंभलगढ़ प्रशस्ति में)
- सिंगोली का युद्ध (बाँसवाड़ा)- दिल्ली के सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक को पराजित किया।
- चित्तौड़ में अन्नपूर्णा माता के मन्दिर का निर्माण करवाया।
'''* महाराणा खेता/क्षेत्रसिंह'''
- शासनकाल- 1364 ई.- 1382 ई.
- मालवा के शासक दिलावर खाँ गौरी को पराजित किया।
- इसके समय ‘मेवाड़- मालवा संघर्ष’ का आरंभ हुआ था।
- खेता ने अजमेर, जहाजपुर, मांडल तथा छप्पन के क्षेत्रों को अपने राज्य मे मिला लिया था।
'''*महाराणा लाखा/लक्षसिंह'''
- शासनकाल- 1382 ई. – 1421ई.
- हम्मीर का पौत्र व खेता का पुत्र।
- बूँदी के राव बरसिंह हाड़ा को मेवाड़ का प्रभुत्व स्वीकार करने हेतु विवश किया।
-‘जावर’ में जस्ते व चाँदी की खानों का पता लगाया गया।
- राणा लाखा के समय में पिच्छू नामक चिड़ीमार बंजारे द्वारा ‘पिछोला झील’ (उदयपुर) का निर्माण करवाया गया।
- मारवाड़ के राव चूड़ा राठौड़ की पुत्री हंसा बाई (रणमल की बहन) का विवाह लाखा के पुत्र चूण्डा के साथ होना था, मगर परिस्थितियों वश हंसाबाई का विवाह राणा लाखा के साथ हुआ।
- राणा लाखा व हंसा बाई के विवाह की यह शर्त थी कि हंसा बाई का पुत्र ही लाखा का उत्तराधिकारी होगा। अत: लाखा के ज्येष्ठ पुत्र चूण्डा को राज्याधिकार से वंचित होना पड़ा।
- कुंवर चूंडा को अपने इसी त्याग के कारण '''‘मेवाड़ का भीष्म पितामह’''' कहा जाता है।
- दरबारी विद्वान- झोटिंग भट्ट व धनेश्वर भट्ट
- राणा लाखा के साथ बूँदी के नकली दुर्ग की कथा जुड़ी हुई है जिसकी रक्षा के लिए कुम्भा हाड़ा ने बलिदान किया था।
'''*महाराणा मोकल'''
- शासनकाल- 1421 ई.- 1433 ई
.- महाराणा लक्षसिंह व हंसाबाई का पुत्र।
- मोकल अल्पायु में शासक बने तो राव चूण्डा ने इसके संरक्षक के रूप में कार्य किया।हंसा बाई द्वारा चूण्डा पर संदेह करने के कारण चूण्डा माण्डू चले गए।
- त्रिभुवन नारायण मंदिर/समिद्धेश्वर मंदिर- परमार शासक भोज द्वारा निर्मित।
मोकल द्वारा जीर्णोद्धार करवाया गया इसलिए इस मंदिर को मोकल मंदिर भी कहा जाता है।
- ‘एकलिंग जी के परकोटे’ का निर्माण करवाया ।
- ‘रामपुरा का युद्ध’ (भीलवाड़ा), 1428 ई.- नागौर अहमदशाह के फिरोज खाँ को पराजित किया।
- जिलवाड़ा का युद्ध, 1433 ई.- गुजरात के शासक को पराजित किया।
- 1433 ई. में मेवाड़ी सरदार चाचा व मेरा ने महपा पँवार के साथ मिलकर जिलवाड़ा में ही मोकल की हत्या कर दी।
'''*महाराणा कुम्भा'''
- शासनकाल- 1433 ई.- 1468 ई.
- मोकल व रानी सौभाग्यवती का पुत्र।
- राणा कुम्भा के शासन की जानकारी ‘एकलिंगमहात्म्य’, ’रसिकप्रिया’ व ’कुम्भलगढ़ प्रशस्ति’ से मिलती हैं।
- शासक बनते ही कुंभा ने मेवाड़ से राठौड़ों का प्रभाव समाप्त किया तथा चित्तौड़गढ़ एवं कुम्भलगढ़ को अपनी शक्ति का केन्द्र बनाया।
- कुम्भा की उपाधियों का उल्लेख- ‘कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति’ में।
● '''कुम्भा की प्रमुख उपाधियाँ :-'''
1. अभिनव भरताचार्य (संगीत का ज्ञान होने के कारण)
2. हिंदू सुरताण (हिंदुओं का प्रमुख शासक होने के कारण)
3. छाप गुरु (छापामार युद्ध पद्धति के कारण)
4. हाल गुरु (पहाड़ी दुर्गों का निर्माता होने के कारण)
5. राणो रासो (साहित्यकारों को आश्रय देने के कारण)
6. टोडरमल (संगीत की 3 विधाओं में पारंगत होने के कारण)
7. नाटकराज कर्ता (4 नाटक लिखने के कारण)
8. चाप गुरु (शस्त्र विद्या में पारंगत होने के कारण)
● '''अन्य उपाधियाँ - '''
- राणा राय, राजगुरु, दान गुरु, शैल गुरु, नरपति, अश्वपति, गजपति आदि।
'''* कुम्भा के प्रमुख निर्माण कार्य –'''
- श्यामलदास द्वारा लिखित ‘वीर विनोद’ के अनुसार कुंभा ने मेवाड़ के 84 दुर्गों में से 32 दुर्गों का निर्माण करवाया ।
● '''प्रमुख दुर्ग'''- कुंभलगढ़, बसंती दुर्ग, भोमट दुर्ग, मचान दुर्ग, अचलगढ़ दुर्ग इत्यादि।
- कुंभलगढ़ दुर्ग –
- शिल्पी – मंडन -
इस दुर्ग में लघु दुर्ग कटारगढ़ को '''‘मेवाड़ की आँख’''' कहा जाता है जो कुंभा का निवास था।
- अबुल फजल के अनुसार यह दुर्ग इतनी बुलंदी पर बना हुआ है कि नीचे से ऊपर की ओर देखने पर सिर से पगड़ी गिर जाती ।
●'''प्रमुख मंदिर'''
1. कुंभ श्याम मंदिर- यह मंदिर चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़ और अचलगढ़ तीनों दुर्गों में स्थापित है।
2. विष्णु मंदिर, एकलिंगजी
3. कुशाल माता मंदिर (बदनोर)
4. रणकपुर जैन मंदिर- कुंभा के समय 1439 ई. में मथाई नदी के किनारे धरणकशाह द्वारा निर्मित।
5. शृंगार चँवरी मंदिर
'''● कुम्भा के प्रमुख दरबारी विद्वान'''
'''1. मंडन ''' ̶ मंडन ने देव मूर्ति प्रकरण, प्रासाद मंडन, राजवल्लभ, रूप मंडन, वास्तु मंडन, वास्तु शास्त्र, कोदंड मंडन (धनुर्विद्या से संबंधित) आदि प्रमुख ग्रंथों की रचना की।
'''2. नाथा ̶ '''यह मंडन का भाई था। इसने ‘वास्तु मंजरी’ ग्रंथ की रचना की थी।
'''3. गोविंद''' ̶ यह मंडन का पुत्र था। इसकी प्रमुख रचनाएँ थी उद्धार धोरिणी, द्वार दीपिका, कलानिधि।
'''● अन्य विद्वान ̶ '''मुनि सुंदर सूरी, टिल्ला भट्ट, जय शेखर, भुवन कीर्ति, सोम सुंदर, जयचंद्र सूरी, सोमदेव आदि।
'''● कुम्भा की प्रमुख रचनाएँ ̶'''
1. संगीत राज (5 भाग)
2. संगीत मीमांसा
3. सूड़ प्रबंध
4. संगीत रत्नाकर की टीका
5. चंडी शतक की टीका
6. गीत गोविंद की टीका – रसिकप्रिया
''': कुंभा कालीन प्रमुख राजनीतिक घटनाएँ ̶'''
- सारंगपुर युद्ध (1437 ई.) – कुम्भा ने मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी प्रथम को पराजित कर बंदी बनाया। 6 माह की कैद के बाद उसे रिहा कर दिया।
- इस विजय के उपलक्ष्य में चित्तौड़गढ़ दुर्ग में विजय स्तंभ का निर्माण करवाया।
- कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति की रचना कवि अत्रि द्वारा तथा बाद में महेश द्वारा पूरी की गई ।
- 1453 ई. में कुंभा ने मारवाड़ से मण्डोर छीन लिया।
● '''आवल-बावल की संधि''' (1453 ई.)- जोधा व कुंभा के बीच हुई जिसमें सोजत को मेवाड़ और मारवाड़ के मध्य की सीमा मान लिया गया।
- इस संधि को करवाने में हंसाबाई की प्रमुख भूमिका थी।
- इस संधि के द्वारा दोनों राज्यों में वैवाहिक संबंध (रायमल-शृंगारदेवी) भी स्थापित हो गए।
● नागौर पर अधिकार- नागौर के शासक शम्स खाँ को पराजित किया।
● चंपानेर की संधि (1456 ई.)- मालवा शासक महमूद खिलजी प्रथम और गुजरात शासक कुतुबुद्दीन के मध्य राणा कुंभा के विरुद्ध हुई। लेकिन दोनों मिलकर भी राणा कुंभा को पराजित नहीं कर सके।
● सिरोही के शासक सहसमल के समय सिरोही पर आक्रमण कर आबू पर अधिकार कायम कर लिया।
- कुंभा अंतिम समय में उन्माद रोग से ग्रसित हो गया था।
- कुम्भा के पुत्र उदयकरण (उदा) ने ही मामादेव कुंड (कटारगढ़) के पास 1468 ई. में कुम्भा की हत्या की।
- राणा कुंभा स्वयं एक उच्च कोटि का विद्वान एवं विद्यानुरागी था।कान्ह व्यास द्वारा रचित एकलिंग महात्म्य के अनुसार कुंभा वेद, स्मृति, मीमांसा, उपनिषद्, व्याकरण व राजनीति में रूचि रखता था।
- कुम्भा की मृत्यु के बाद उदा मेवाड़ का शासक बना।
- मेवाड़ का पितृहन्ता शासक- उदा - दाड़िमपुर का युद्ध- उदा व उदा के भाई रायमल के मध्य हुआ जिसमें उदा पराजित हुआ था।
- दाड़िमपुर के युद्ध के बाद उदा मालवा की ओर चला गया जहाँ उसकी मृत्यु हो गई।
'''*महाराणा रायमल'''
- शासनकाल- 1468 ई. से 1509 ई.-
- पृथ्वीराज, जयमल और सांगा उसके पुत्र थे।
- इसकी बेटी आनंदा बाई का विवाह सिरोही के जगमाल के साथ हुआ।
- पृथ्वीराज का विवाह टोडा के राव सुरताण की पुत्री ‘तारा’ के साथ हुआ।
- पृथ्वीराज ने तारा के नाम पर अजमेर के किले का नाम '''तारागढ़''' रखा।
- पृथ्वीराज को '''‘उड़ना राजकुमार’''' के नाम से भी जाना जाता है। इसकी हत्या इसके बहनोई, जगमाल ने विष पिलाकर की थी।
- जयमल के दुर्व्यवहार के कारण राव सुरताण ने इसकी हत्या की थी।
- उत्तराधिकार संघर्ष में पराजित सांगा ने अजमेर के ‘करमचंद पंवार’ के पास शरण ली।
- खेती को प्रोत्साहित करने के लिए ‘राम और शंकर’ नामक तालाबों का निर्माण करवाया।
- चित्तौड़ में अद्भुतजी के मन्दिर का निर्माण करवाया।
- रायमल की पत्नी शृंगार देवी ने घोसूण्डी की बावड़ी (चित्तौड़) का निर्माण करवाया था।
'''*महाराणा सांगा'''
- शासनकाल – 1509-1528 ई.
- सांगा व उनके तीन भाइयों – पृथ्वीराज, जयमल व राजसिंह के मध्य हुए उत्तराधिकारी संघर्ष में सांगा विजयी रहे तथा 1509 ई. में मेवाड़ के शासक बने।
'''- उपाधियाँ –'''
1. हिन्दूपत
2. सैनिक भग्नावशेष (कर्नल जेम्स टॉड द्वारा प्रदत्त)
'''- सांगा के समकालीन दिल्ली के शासक--'''
1. सिकंदर लोदी
2. इब्राहिम लोदी
3. बाबर
'''- सांगा के समकालीन मालवा के शासक ̶ '''
1. नासिरुद्दीन खिलजी
2. महमूद खिलजी-द्वितीय
'''- सांगा के समकालीन गुजरात के शासक ̶ '''
1. महमूद बेगड़ा
2. मुजफ्फर शाह द्वितीय
'''● सांगा के शासन काल में प्रमुख युद्ध:–'''
- सांगा के शासक बनने के समय मालवा में सुल्तान नासिरुद्दीन शासन कर रहा था।
- 1511 ई. में नासिरुद्दीन की मृत्यु के बाद मेदिनीराय की सहायता से महमूद खिलजी द्वितीय मालवा का शासक बना।मालवा के अमीरों ने गुजरात की सहायता से मेदिनीराय को वहाँ से भगा दिया तो वह राणा सांगा की शरण में आ गया।
- अंतत: मालवा-मेवाड़ के मध्य युद्ध हुआ।महमूद खिलजी द्वितीय पराजित हुआ तथा सांगा ने उसे बंदी बना लिया।
- ईडर के उत्तराधिकारी संघर्ष, नागौर पर प्रभाव स्थापित करने तथा मालवा को सहयोग करने आदि कारणों से राणा सांगा तथा गुजरात के शासक मुजफ्फर के मध्य संघर्ष हुआ लेकिन अंतिम रूप से सफलता किसी को भी नहीं मिली।
- खातौली का युद्ध (1517 ई. कोटा)̶ सांगा ने इब्राहिम लोदी को पराजित किया था।युद्ध में इब्राहिम लोदी ने खुद भाग लिया था।
- बांडी/बाड़ी का युद्ध (1518 ई. धौलपुर)- सांगा ने पुनः इब्राहिम लोदी को पराजित किया। इससे राणा उत्तर भारत का शक्तिशाली शासक बन गया। लोदी की सेना का नेतृत्व मियां हुसैन और मियां माखन ने किया।
- गागरोन का युद्ध (1519 ई. झालावाड़) ̶ सांगा ने महमूद खिलजी-द्वितीय मालवा को पराजित किया था।
- सांगा ने गुजरात के महमूद बेगड़ा को पराजित किया।
- 1520 में सांगा ने गुजरात के बादशाह को पराजित किया।
- 1526 ई. में पानीपत के युद्ध में बाबर ने इब्राहिम लोदी को पराजित कर आगरा पर अधिकार कर लिया।
- बाबर ने सांगा पर विश्वासघात का आरोप लगाया।बाबर के अनुसार सांगा ने इब्राहिम लोदी के विरुद्ध युद्ध में सहयोग करने का वादा किया था लेकिन राणा ने कोई मदद नहीं की, मगर इस आरोप की पुष्टि नहीं होती है।
- चूँकि दोनों शासक शक्तिशाली तथा महत्त्वाकांक्षी थे।अत: दोनों के मध्य युद्ध अवश्यसम्भावी था।
- बयाना का युद्ध (16 फरवरी, 1527 भरतपुर) ̶ सांगा ने बाबर की सेना को पराजित किया।
'''● खानवा का युद्ध (17 मार्च, 1527) ̶''' बाबर ने तोपखाने एवं तुलुगमा युद्ध पद्धति का प्रयोग कर सांगा को पराजित किया था। खानवा, भरतपुर की रूपवास तहसील में स्थित है।
- खानवा युद्ध से पूर्व घटित प्रमुख घटनाएँ ̶
1. काबुल के ज्योतिषी मोहम्मद शरीफ ने बाबर के पराजय की भविष्यवाणी की थी।
2. बाबर ने सेना के सामने जोशीला भाषण दिया था।
3. बाबर ने इस युद्ध को जिहाद (धर्म युद्ध) घोषित किया था।
4. बाबर ने मुस्लिम व्यापारियों पर लगने वाला तमगा चुंगी कर हटाया था।
- बाबर के तोपखाने के अध्यक्ष ̶ मुस्तफा कमाल और उस्ताद अली।
- युद्ध में बाबर ने '''‘तुलुगमा युद्ध पद्धति’''' और तोपखाने का प्रयोग किया था।
- ‘'''पाती परवण‘''' प्रथा- एक प्राचीन पद्धति, जिसके अंतर्गत हिंदू शासकों को युद्ध में आमंत्रित किया जाता था। इस युद्ध से पूर्व सांगा ने इस प्रथा को पुनर्जीवित किया।
'''- खानवा युद्ध में भाग लेने वाले प्रमुख हिंदू शासक-'''
1. बीकानेर के राजा जैतसी ने अपने पुत्र कल्याणमल को भेजा।
2. मारवाड़ के राव गांगा ने अपने पुत्र मालदेव को भेजा।
3. ईडर- भारमल
4. मेड़ता- वीरमदेव
5. चंदेरी (मध्यप्रदेश)- मेदिनीराय
6. जगनेर- अशोक परमार
7. आमेर- पृथ्वीसिंह कच्छवाहा
8. वागड़- उदयसिंह
9. गोगुंदा- झाला सज्जा
10. सादड़ी- झाला अज्जा
11. बूँदी- नारायण राव
'''सांगा के पक्ष में भाग लेने वाले मुस्लिम सेनानायक:–'''
1. मेवात- हसन खाँ मेवाती
2. महमूद लोदी (इब्राहिम लोदी का छोटा भाई)
- बाबर की सेना का नेतृत्व- ‘हुमायूँ और मेहंदी ख्वाजा’
- युद्ध में घायल सांगा को युद्ध भूमि से दूर ले जाया गया।
- ‘झाला अज्जा’ (काठियावाड़) ने युद्ध में सांगा के युद्ध भूमि छोड़ने पर राजचिह्न धारण किया था।
- राव मालदेव घायल सांगा को ‘बसवा’(दौसा) लेकर गए। प्राथमिक उपचार के बाद यहाँ से सांगा को रणथम्भौर ले जाया गया।
- चंदेरी का युद्ध (1528 ई.) में भाग लेने के लिए जा रहे सांगा को मेवाड़ी सरदारों ने कालपी (उ.प्र.) स्थान पर विष दे दिया।
- मृत्यु- 30 जनवरी, 1528 को बसवा (दौसा) में हुई जहाँ पर ‘सांगा का स्मारक/चबूतरा’ बना है।
- सांगा का अंतिम संस्कार मांडलगढ़ (भीलवाड़ा) में किया गया, जहाँ सांगा की ‘8 खंभों की छतरी’ का निर्माण अशोक परमार द्वारा करवाया गया ।-
सांगा के बड़े पुत्र भोजराज का विवाह मेड़ता के रतनसिंह की पुत्री '''मीराबाई''' से हुआ।
- सांगा के अन्य पुत्र – रतन सिंह-द्वितीय, विक्रमादित्य, उदय सिंह थे।
- बाबर ने सांगा के बारे में लिखा है – ‘सांगा ने अपने देश की रक्षा में एक आँख, एक हाथ और एक पैर खो दिया।’
- कर्नल टॉड के अनुसार 7 उच्च श्रेणी के राजा, 9 राव व 104 सरदार सदैव सांगा की सेवा में उपस्थित रहते थे।
- हरविलास शारदा ने लिखा है कि- “मेवाड़ के महाराणाओं में सांगा सर्वाधिक प्रतापी शासक हुए। उन्होंने अपने पुरुषार्थ के द्वारा मेवाड़ को उन्नति के शिखर पर पहुँचाया।”
'''*महाराणा रतनसिंह'''
- शासनकाल- 1528 ई. से 1531 ई.
- यह महाराणा सांगा की रानी धनबाई का पुत्र था।
- बूँदी के सूरजमल हाड़ा के साथ ‘अहेरिया उत्सव’ के दौरान युद्ध करते हुए मारा गया था।
'''* महाराणा विक्रमादित्य'''
- शासनकाल- 1531 ई. से 1536 ई.
- यह महाराणा सांगा की हाड़ी रानी कर्णावती का पुत्र था। इनकी संरक्षिका कर्णावती थी।
- विक्रमादित्य के समय मालवा और गुजरात के मुस्लिम शासक ’बहादुर शाह प्रथम’ ने चित्तौड़ पर 2 बार आक्रमण किया (1533 ई. तथा 1534 ई.)- 1534 ई. के दूसरे आक्रमण से पूर्व कर्णावती ने हुमायूँ को सहायता प्राप्त करने हेतु राखी भेजी थी परंतु हुमायूँ ने समय पर सहायता नहीं की। अतः बहादुर शाह के लंबे घेरे के बाद 1535 ई. में चित्तौड़ का पतन हुआ। इस समय चित्तौड़गढ़ का ‘दूसरा साका’ हुआ जिसमें जौहर का नेतृत्व कर्णावती ने तथा केसरिया का नेतृत्व ‘रावत बाघसिंह’ ने किया।
- विक्रमादित्य ने मीराबाई को दो बार मारने का असफल प्रयास किया। मीरा वृंदावन चली गई, जहाँ ‘रविदास’ को उन्होंने अपना गुरु बनाया।
- विक्रमादित्य की हत्या (1536 ई. में) दासी पुत्र बनवीर ने की थी। यह कुंवर पृथ्वीराज की दासी ’पुतल दे’ का पुत्र था।
- बनवीर ने उदय सिंह को भी मारने का प्रयास किया परंतु पन्नाधाय ने अपने पुत्र चंदन की बलि देकर उदयसिंह की रक्षा की। कीरत बारी (पत्तल उठाने वाला) की सहायता से उदय सिंह को कुंभलगढ़ दुर्ग में पहुँचाया गया। इस समय कुंभलगढ़ दुर्ग का किलेदार ‘आशा देवपुरा’ था।
'''* बनवीर'''
- विक्रमादित्य की हत्या कर चित्तौड़ पर अधिकार कर लिया।
- चित्तौड़ में ‘नौलखा महल और तुलजा भवानी का मंदिर’ बनवाया।
- राव मालदेव की सहायता से उदयसिंह ने बनवीर को मारकर चित्तौड़ पर अधिकार किया।
'''* महाराणा उदयसिंह'''
- शासनकाल- 1537 ई. – 1572 ई.
- राणा सांगा व रानी कर्मावती का ज्येष्ठ पुत्र।
- पन्नाधाय ने अपने पुत्र चंदन का बलिदान देकर बनवीर से सुरक्षित रखने के लिए उदयसिंह को कीरतबारी की सहायता से कुंभलगढ़ दुर्ग के आशादेवपुरा के पास पहुँचाया।
- 1537 ई. में राव मालदेव के सहयोग से कुंभलगढ़ दुर्ग में उदयसिंह का राज्याभिषेक किया गया।
- 1543 ई. में अफगान शासक शेरशाह सूरी को चित्तौड़ दुर्ग की चाबियाँ सौंपकर उसका प्रभुत्व स्वीकार कर लिया।
- शेरशाह ने अपना राजनीतिक प्रभाव बनाए रखने के लिए ख्वास खाँ को चितौड़ में रखा।
- अफगानों की अधीनता स्वीकार करने वाला मेवाड़ का पहला शासक।
- हरमाड़ा का युद्ध- 1557 में रंगराय वैश्या के कारण उदयसिंह व अजमेर के हाकीम हाजी खाँ के मध्य हुआ।
- 1559 ई. में उदयसिंह ने ‘उदयपुर’ नगर की स्थापना कर इसे अपनी राजधानी बनाया। यहाँ उसने ‘उदयसागर झील’ व मोती मगरी के महलों का निर्माण करवाया।
- अकबर ने 1567 ई. में चित्तौड़ अभियान शुरू किया क्योंकि उदयसिंह ने मालवा के बाज बहादुर व मेड़ता के जयमल को शरण दी थी।
'''-अकबर का चित्तौड़ आक्रमण (1567 – 68 ई.) '''
̶- अक्टूबर, 1567 में अकबर द्वारा मेवाड़ पर आक्रमण करने पर सामंतों की सलाह पर उदयसिंह किले की रक्षा का भार अपने सेनानायकों जयमल और फत्ता को सौंपकर गिरवा की पहाड़ियों (उदयपुर) में चले गए।
- चित्तौड़ के किले की दीवार की मरम्मत करते समय जयमल, अकबर की ‘संग्राम’ नामक बंदूक की गोली से घायल हो गया था।
- जयमल ने कल्ला राठौड़ के कंधे पर बैठकर युद्ध किया।
- जयमल राठौड़ व फत्ता सिसोदिया लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए व फत्ता की पत्नी रानी फूल कंवर के नेतृत्व में जौहर हुआ जो '''चित्तौड़ का तीसरा''' साका था।
- फरवरी, 1568 में अकबर ने चित्तौड़गढ़ पर अधिकार कर लिया।
- अकबर ने जयमल व फत्ता की वीरता से प्रभावित होकर आगरा के दुर्ग के बाहर इन दोनों वीरों की पत्थर की गजारूढ़ मूर्तियाँ लगवाई ।
- उनकी मूर्तियाँ जूनागढ़ दुर्ग (बीकानेर) के बाहर भी स्थित हैं।
- 28 फरवरी, 1572 को होली के दिन गोगुन्दा (उदयपुर) में उदयसिंह की मृत्यु हो गई थी।
- कर्नल टॉड के अनुसार – “यदि सांगा व प्रताप के बीच में उदयसिंह न होता तो मेवाड़ के इतिहास के पन्ने अधिक उज्ज्वल होते।“
'''* महाराणा प्रताप'''
- जन्म- 9 मई, 1540 (ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया, विक्रम संवत् 1597, रविवार)
- जन्म स्थान- बादल महल (कटारगढ़) कुंभलगढ़ दुर्ग
- पिता – महाराणा उदयसिंह- माता – जयवंता बाई (पाली नरेश अखैराज सोनगरा की पुत्री)
- विवाह – 1557 ई. को अजबदे पँवार के साथ हुआ।
- रानियाँ – पटरानी अजबदे (रामरख पंवार की पुत्री) फूलकंवर (मालदेव के ज्येष्ठ पुत्र राम की पुत्री)
- पुत्र- अमरसिंह- शासनकाल – 1572-1597 ई.
'''- उपनाम-'''
1. ‘कीका’ (मेवाड़ के पहाड़ी प्रदेशों में)
2. मेवाड़ केसरी
3. हिन्दुआ सूरज
- राजमहल की क्रांति ̶ उदयसिंह ने जगमाल को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था लेकिन मेवाड़ के सामन्तों ने जगमाल को हटाकर राणा प्रताप को शासक बनाया, यह घटना ‘राजमहल की क्रांति’ कहलाती है।
- प्रथम राज्याभिषेक ̶ 28 फरवरी, 1572 को महादेव बावड़ी (गोगुन्दा)
- विधिवत् राज्याभिषेक- कुंभलगढ़ दुर्ग में मारवाड़ के राव चन्द्रसेन सम्मिलित हुए।
- प्रताप का घोड़ा – चेतक
- हाथी – रामप्रसाद व लूणा
- मुगलों से संघर्ष के लिए राणा प्रताप ने वीर सामंतों तथा भीलों को एकजुट किया और उन्हें सैन्य व्यवस्था में उच्च पद देकर उनके सम्मान को बढ़ाया।
- गोपनीय तरीके से युद्ध का प्रबंध करने के लिए प्रताप ने अपना निवास स्थान गोगुन्दा से कुंभलगढ़ स्थानान्तरित कर दिया।
- अकबर द्वारा राणा प्रताप के पास भेजे गए 4 संधि प्रस्तावक/शिष्ट मण्डल
-1. जलाल खाँ कोरची – नवम्बर, 1572
2. मानसिंह – जून, 1573
3. भगवन्तदास – अक्टूबर, 1573
4. टोडरमल – दिसम्बर, 1573
- सदाशिव कृत ‘राजरत्नाकर’ एवं रणछोड़ भट्ट कृत ‘अमरकाव्यम् वंशावली’ के अनुसार प्रताप ने मानसिंह का स्वागत व सत्कार उदयसागर झील के किनारे किया था।
'''● हल्दीघाटी का युद्ध (राजसमन्द) ̶ 18 जून, 1576'''
- जी.एन. शर्मा के अनुसार, हल्दीघाटी का युद्ध 21 जून, 1576 को हुआ था।
- वर्ष 1576 की शुरुआत में अकबर मेवाड़ पर आक्रमण की तैयारी हेतु अजमेर आया और यहीं पर मानसिंह को इस युद्ध का नेतृत्व सौंपा।
- अकबर ने युद्ध की व्यूह रचना मैगजीन दुर्ग में रची थी।
- मुगल सेना का प्रधान सेनानायक – मिर्जा मानसिंह (आमेर) सहयोगी सेनानायक- आसफ खाँ- मानसिंह ने पहले माण्डलगढ़ तथा फिर मोलेला गाँव (राजसमन्द) में पड़ाव डाला।
- राणा प्रताप ने युद्ध की योजना कुम्भलगढ़ दुर्ग में बनाई और अपनी सेना का पड़ाव लोसिंग गाँव (राजसमन्द) में डाला।
- राणा प्रताप की हरावल सेना का नेतृत्व- हकीम खाँ सूर चंदावल सेना का नेतृत्व- राणा पूंजा
- मुगल सेना के हरावल भाग का नेतृत्व- सैय्यद हाशिम
'''- मुगल पक्ष''' – मुहम्मद बदख्शी रफी, राजा जगन्नाथ और आसफ खाँ
'''- प्रताप पक्ष''' – रामशाह तँवर (ग्वालियर), झाला मानसिंह, झाला बीदा, मानसिंह सोनगरा, जयमल मेहता, पुरोहित गोपीनाथ, शंकरदास, चारण जैसा, पुरोहित जगन्नाथ, चूंडावत कृष्णदास (सलूम्बर), हकीम खाँ सूर, भीमसिंह डोडिया, (सरदारगढ़), रावत सांगा (देवगढ़), रावत किशनदास, रामदास मेड़तिया, राणा पूँजा और भामाशाह।
- इतिहासकार बदायूँनी युद्ध में मुगल सेना के साथ उपस्थित था।
- 18 जून, 1576 को प्रात:काल में मुगल सेना व राणा प्रताप के मध्य युद्ध प्रारम्भ हुआ।
- हकीम खाँ सूर के नेतृत्व में राजपूतों ने पहला वार इतना भयंकर किया कि मुगल सेना भाग खड़ी हुई।
- उसी समय मुगलों की आरक्षित सेना के प्रभारी मिहत्तर खाँ ने यह झूठी अफवाह फैलाई कि – “बादशाह अकबर स्वयं शाही सेना लेकर आ रहे हैं।”
- यह सुनकर मुगल सेना फिर युद्ध के लिए आगे बढ़ी। मेवाड़ की सेना भी ‘रक्तताल’ नामक मैदान में आ डटी।
- युद्ध में राणा प्रताप के लूणा व रामप्रसाद और अकबर के गजमुक्ता व गजराज हाथियों के मध्य युद्ध हुआ।
- रामप्रसाद हाथी को मुगलों ने अपने अधिकार में ले लिया जिसका बाद में अकबर ने नाम बदलकर ‘पीरप्रसाद’ कर दिया।
- राणा प्रताप ने पठान बहलोल खाँ पर ऐसा प्रहार किया कि उसके घोड़े सहित दो टुकड़े हो गए।
- युद्ध में चेतक घोड़े पर राणा प्रताप और मर्दाना हाथी पर सवार मानसिंह का प्रत्यक्ष आमना-सामना हुआ।
- प्रताप ने भाले से मानसिंह पर वार किया लेकिन मानसिंह बच गया। इस दौरान चेतक हाथी के प्रहार से घायल हो गया।
- मुगल सेना ने प्रताप को चारों ओर से घेर लिया।- राणा प्रताप के घायल होने पर झाला बीदा ने राजचिह्न धारण किया तथा युद्ध लड़ते हुए वीर गति प्राप्त की।
● माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान, सामाजिक विज्ञान कक्षा 10 के अनुसार -
- बड़ी सादड़ी के झाला मन्ना सेना को चीरते हुए राणा प्रताप के पास आया और निवेदन किया कि – “आप राजचिह्न उतारकर मुझे दे दीजिए और आप इस समय युद्ध के मैदान से चले जाएँ। इसी में मेवाड़ की भलाई है।”
- प्रताप के युद्ध भूमि छोड़ने पर झाला मन्ना ने राजचिह्न धारण किया और युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
- युद्ध में हाथी के वार से घायल राणा प्रताप के घोड़े चेतक की एक नाले को पार करने के बाद मृत्यु हो गई।
- बलीचा गाँव में चेतक की समाधि बनी हुई है।
- ‘अमरकाव्य वंशावली’ नामक ग्रंथ तथा राजप्रशस्ति के अनुसार यहाँ राणा प्रताप के भाई शक्तिसिंह ने प्रताप से मिलकर अपने किए की माफी माँगी।
- हल्दीघाटी युद्ध अनिर्णित रहा। अकबर राणा प्रताप को बंदी बनाने में विफल रहा।
- युद्ध के परिणाम से नाराज अकबर ने मानसिंह और आसफ खाँ की ड्योढ़ी बंद कर दी।
- बदायूँनी कृत ‘मुन्तखब उत्त तवारीख’ में हल्दीघाटी युद्ध का वर्णन।
- इस युद्ध को अबुल-फजल ने ‘खमनौर का युद्ध’, बदायूँनी ने ‘गोगुन्दा का युद्ध’ तथा कर्नल टॉड ने ‘हल्दीघाटी का युद्ध’ कहा।
- राजसमन्द में प्रत्येक वर्ष ‘हल्दीघाटी महोत्सव’ मनाया जाता है।
- राणा प्रताप ने ‘आवरगढ़’ में अपनी अस्थाई राजधानी स्थापित की।
- फरवरी, 1577 में अकबर खुद मेवाड़ अभियान पर आया लेकिन असफल रहा।
- अक्टूबर, 1577 से नवम्बर, 1579 तक शाहबाज खाँ ने तीन बार मेवाड़ पर असफल आक्रमण किया।
- 3 अप्रैल, 1578 को शाहबाज खाँ ने कुम्भलगढ़ दुर्ग पर अधिकार किया।
- राणा प्रताप ने कुंभलगढ़ दुर्ग पर पुन: अधिकार कर भाण सोनगरा को किलेदार नियुक्त किया।
- भामाशाह (पाली) ने महाराणा प्रताप की आर्थिक सहायता की थी।
- मेवाड़ का उद्धारक व दानवीर- '''भामाशाह'''
- 1580 में अकबर ने अब्दुल रहीम खानखाना को प्रताप के विरुद्ध भेजा। कुँवर अमरसिंह ने शेरपुर के मुगल शिविर पर आक्रमण कर खानखाना के परिवार की महिलाओं को बंदी बना लिया। यह सूचना जब राणा प्रताप को मिली तो उन्होंने तुरन्त मुगल महिलाओं को सम्मानपूर्वक वापस भेजने का आदेश दिया।
'''दिवेर का युद्ध (अक्टूबर, 1582 ई.) :--'''
-कुँवर अमरसिंह ने अकबर के काका सेरिमा सुल्तान का वध कर दिवेर पर अधिकार किया।
- कर्नल जेम्स टॉड ने इस युद्ध को ‘प्रताप के गौरव का प्रतीक’ और ‘मेवाड़ का मैराथन’ कहा।
- 5 दिसम्बर, 1584 को अकबर ने आमेर के भारमल के छोटे पुत्र जगन्नाथ कच्छवाहा को प्रताप के विरुद्ध भेजा। जगन्नाथ भी असफल रहा। जगन्नाथ की माण्डलगढ़ में मृत्यु हो गई।
- जगन्नाथ कच्छवाहा की ’32 खम्भों की छतरी’- माण्डलगढ़ (भीलवाड़ा)
- राणा प्रताप ने बदला लेने के लिए आमेर क्षेत्र के मालपुरा को लूटा और झालरा तालाब के निकट ‘नीलकंठ महादेव मंदिर’ का निर्माण करवाया।
- 1585 ई. से 1597 ई. के मध्य प्रताप ने चित्तौड़ एवं माण्डलगढ़ को छोड़कर शेष सम्पूर्ण राज्य पर पुन: अधिकार कर लिया था।
- 1585 ई. में लूणा चावण्डिया को पराजित कर प्रताप ने चावण्ड पर अधिकार किया तथा इसे अपनी नई राजधानी बनाया।
- चावण्ड में प्रताप ने ‘चामुण्डा माता’ का मंदिर बनवाया।
- चावण्ड 1585 से अगले 28 वर्षों तक मेवाड़ की राजधानी रहा।
- 1597 में धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाते समय प्रताप को गहरी चोट लगी। जो उनकी मृत्यु का कारण बनी।
- मृत्यु -19 जनवरी, 1597, चावण्ड
अग्निसंस्कार- बांडोली
- प्रताप की 8 खम्भों की छतरी- बांडोली (उदयपुर) में खेजड़ बाँध की पाल पर।
- प्रताप की मृत्यु पर अकबर के दरबार में उपस्थित कवि दुरसा आढ़ा ने एक दोहा सुनाया –
गहलोत राणो जीत गयो दसण मूंद रसणा डसी।
नीलास मूक भरिया नयन तो मृत शाह प्रताप सी।।
- महाराणा प्रताप के संदर्भ में कर्नल टॉड ने लिखा – “आलप्स पर्वत के समान अरावली में कोई भी ऐसी घाटी नहीं, जो प्रताप के किसी न किसी वीर कार्य, उज्ज्वल विजय या उससे अधिक कीर्तियुक्त पराजय से पवित्र न हुई हो। हल्दीघाटी ‘मेवाड़ की थर्मोपल्ली’ और दिवेर ‘मेवाड़ का मैराथन’ है।
“- प्रताप के बारे में कहा गया है कि –
“पग-पग भम्या पहाड़, धरा छोड़ राख्यो धरम।
महाराणा मेवाड़, हिरदे बसया हिन्द रे।। ”
'''● प्रताप कालीन रचनाएँ''' –
1. दरबारी पंडित चक्रपाणि मिश्र – विश्ववल्लभ, मुहूर्तमाला, व्यवहारादर्श व राज्याभिषेक पद्धति।
2. जैन मुनि हेमरत्न सूरी – गोरा-बादल, पद्मिनी चरित्र चौपाई, महिपाल चौपाई, अमरकुमार चौपाई, सीता चौपाई, लीलावती
● प्रताप द्वारा निर्मित मंदिर –
1. चामुण्डा देवी (चावण्ड)
2. हरिहर मंदिर (बदराणा)
● चित्रकला- चावण्ड शैली का जन्म प्रमुख चित्रकार – निसारुद्दीन
'''* अमरसिंह प्रथम –'''
शासनकाल- 1597 ई. – 1620 ई.
- महाराणा प्रताप व अजब दे पंवार का पुत्र।
- अमरसिंह को भी मुगल आक्रमणों का सामना करना पड़ा।
- अकबर ने 1599 ई. में जहाँगीर के नेतृत्व में सेना भेजी, जिसे मेवाड़ की सेना ने उटाला नामक स्थान पर पराजित किया।
- जहाँगीर के शासक बनते ही 1605 ई. में परवेज, आसिफ खाँ, जफर बेग एवं सगर के नेतृत्व में मेवाड़ को अधीन करने का प्रयास किया गया था लेकिन सफलता नहीं मिली।
- 1608 ई. में जहाँगीर ने महावत खाँ को मेवाड़ पर आक्रमण करने के लिए भेजा, लेकिन वह भी असफल रहा।
- 1609 ई. में अब्दुल्ला, 1612 ई. में राजा बासू और 1613 ई. में मिर्जा अजीज कोका को मेवाड़ पर आक्रमण करने के लिए भेजा गया था लेकिन यहाँ भी सफलता नहीं मिली।
- 1613 ई. में जहाँगीर स्वयं अजमेर आया तथा अपने पुत्र खुर्रम (शाहजहाँ) को मेवाड़ अभियान का नेतृत्व सौंपा।
- शाहजहाँ के आक्रमणों ने मेवाड़ की स्थिति विकट कर दी।
- मेवाड़ी सामंतों ने कुँवर कर्णसिंह को अपने पक्ष में कर राणा को मुगलों से संधि करने के लिए विवश कर दिया।
'''- मुगल-मेवाड़ संधि-''' 5 फरवरी, 1615 में मेवाड़ के अमरसिंह प्रथम व मुगल शासक जहाँगीर के बीच हुई।
- इस संधि पर मुगलों की तरफ से खुर्रम व मेवाड़ की ओर से अमरसिंह प्रथम ने हस्ताक्षर किए।
- चित्तौड़, मेवाड़ को लौटा दिया गया लेकिन उसकी मरम्मत नहीं कर सकते थे।
- इस संधि से 90 वर्षों से चले आ रहे मुगल-मेवाड़ संघर्ष का अंत हुआ।
- संधि से नाखुश राणा अमरसिंह ने स्वयं को राजकार्य से विरक्त कर लिया।
- अमरसिंह प्रथम का काल मेवाड़ स्कूल की चावण्ड चित्रकला शैली का स्वर्णकाल माना जाता है।
- मृत्यु- 26 जनवरी, 1620 को उदयपुर के निकट आहड़ में - आहड़ (उदयपुर) की महासतियों में सबसे पहली छतरी अमरसिंह प्रथम की है।
- आहड़ को मेवाड़ के महाराणाओं का श्मशान भी कहते
'''*राणा कर्णसिंह –'''
शासनकाल- 1620 ई. – 1628 ई.-
-पिछोला झील में जगमंदिर का निर्माण प्रारंभ करवाया जहाँ 1623 ई. में शाहजहाँ को शरण दी गई थी।
- शाहजहाँ ने यहाँ ‘गफुर बाबा की मज़ार’ बनवाई।
- उदयपुर में दिलखुश महल व कर्ण विलास का निर्माण करवाया।
- यह मुगलों के आंतरिक मामलों में रुचि लेने वाला मेवाड़ इतिहास का प्रथम शासक था।
'''* जगतसिंह -प्रथम'''
- शासनकाल- 1628 ई. – 1652 ई.
- शाहजहाँ ने मेवाड़ रियासत के हिस्से की प्रतापगढ़ व शाहपुरा रियासत को मेवाड़ से पृथक् कर दिया था।
- जगमंदिर का निर्माण पूरा करवाया। इसे भाणा व उसके पुत्र मुकुंद की देखरेख में बनवाया था।
- उदयपुर में जगदीश मंदिर/जगन्नाथ राय मंदिर का निर्माण करवाया। इसी मंदिर में ‘जगन्नाथराम प्रशस्ति’ उत्कीर्ण है जिसके रचयिता ‘कृष्णभट्ट’ थे।
- मोहन मंदिर व रूप सागर तालाब बनवाया।
- उनकी धाय माँ नौजूबाई ने उदयपुर में ‘धाय मंदिर’ बनावाया।- मेवाड़ चित्रकला शैली का स्वर्णकाल।
'''- ‘तस्वीरा रो कारखानो'''’ व '''‘चितेरों री ओवरी’''' नामक चित्रशाला विभाग की स्थापना की थी।
'''*महाराणा राजसिंह'''
- राज्याभिषेक – 10 अक्टूबर, 1652-
-शासनकाल – 1652-1680 ई.
- गद्दीनशीनी के समय शाहजहाँ ने 5000 का मनसब दिया।
- उपाधि- '''‘विजय कटकातु’'''
- शासक बनते ही चित्तौड़गढ़ के किले की मरम्मत करवाने का निश्चय किया।
- औरंगजेब ने इसे 1615 ई. की मुगल-मेवाड़ संधि की शर्तों के विरुद्ध मानते हुए चित्तौड़ दुर्ग को ढहाने के लिए सादुल्ला खाँ के नेतृत्व में 30,000 की सेना भेजी।
- राजसिंह ने युद्ध करना उचित न समझकर वहाँ से अपनी सेना हटा ली। मुगल सेना कंगूरे व बुर्ज गिराकर लौट गई।
- 1658 ई. में मुगल शहजादों में हुए उत्तराधिकार संघर्ष में ये किसी भी पक्ष में नहीं रहना चाहते थे। अत: ये टालमटोल करते रहे।
- प्रारम्भ में औरंगजेब व राजसिंह के संबंध अच्छे रहे।
- औरंगजेब ने 6000 का मनसब और ग्यासपुरा, डूँगरपुर, बाँसवाड़ा के परगने दिए।
'''- चारुमति विवाद, 1660 ई'''. – औरंगजेब किशनगढ़ की राजकुमारी चारुमति से विवाह करना चाहता था लेकिन राजसिंह ने चारुमति से विवाह कर लिया। अत: राजसिंह व औरंगजेब के मध्य ‘देसूरी की नाल’ (राजसमन्द) में युद्ध हुआ।
- इस युद्ध में राजसिंह की तरफ से सलूम्बर के रतनसिंह चूंडावत ने विजय प्राप्त की।
- औरंगजेब द्वारा 1679 ई. में जजिया कर लगाने पर इसका विरोध किया गया था।
- मुगल-मारवाड़ संघर्ष में राजसिंह ने मारवाड़ का साथ दिया।
- राजसिंह ने मारवाड़ के अजीतसिंह व दुर्गादास की सहायता की तथा उन्हें ‘केलवा की जागीर’ प्रदान की।
'''- नाथद्वारा''' मंदिर व '''द्वारकाधीश''' कांकरोली के मंदिरों का निर्माण करवाया।
- टीका दौड़ उत्सव के बहाने अपने राज्य तथा बाहरी मुगलखानों पर हमले कर लाखों रुपये की सम्पत्ति प्राप्त की।
- अव्यवस्था का फायदा उठाकर राजसिंह ने टोडा, मालपुरा, टोंक, चाकसू, लालसोट को लूटा एवं मेवाड़ के खोए हुए क्षेत्रों पर पुन: अधिकार कर लिया।
- राजसमन्द झील का निर्माण – अकाल प्रबन्धन हेतु गोमती नदी के पानी को रोककर करवाया। झील की नींव घेवर माता द्वारा रखवाई गई।
- राजसमंद झील के उत्तरी किनारे पर नौ चौकी पर ‘राज प्रशस्ति’ शिलालेख लगवाया। संस्कृत में रचित राजप्रशस्ति की रचना रणछोड़ भट्ट ने की। यह प्रशस्ति 25 काले संगमरमर की शिलाओं पर उत्कीर्ण है।
- ‘राजप्रशस्ति’` को विश्व का सबसे बड़ा शिलालेख माना जाता है।
- राजनगर नामक नया नगर बसाया।
- उदयपुर में अम्बामाता मंदिर बनवाया व ब्राह्मणों को ‘रत्नों का तुलादान’ किया।
- उनकी पत्नी रामरस दे ने उदयपुर मे त्रिमुखी बावड़ी/ जया बावड़ी का निर्माण करवाया।
- दरबारी कवि – रणछोड़ भट्ट'''- राजसिंह कालीन साहित्य –'''
1. रणछोड़ भट्ट – राजप्रशस्ति महाकाव्य व अमरकाव्य
2. सदाशिव – राजरत्नाकर
3. लाल भाट – राजसिंह प्रभावर्णनम्
4. मुकन्द – राजसिंहाष्टक
5. किशोरदास – राजप्रकाश
6. कवि मान – राजविलास
7. दौलतविजय – खुमाण रासो
- मृत्यु – 1680 ई. कुंभलगढ़ दुर्ग में
'''*महाराणा जयसिंह –'''
शासनकाल- 1680 ई. – 1698 ई.
- 24 जून, 1681 को दूसरी मेवाड़-मुगल संधि हुई।
- गोमती नदी के पानी को रोककर जयसमन्द झील/ढेबर झील (उदयपुर) का निर्माण करवाया।
- यह राजस्थान की सबसे बड़ी मीठे पानी की कृत्रिम झील है।
'''* महाराणा अमरसिंह द्वितीय –'''
शासनकाल- 1698 ई. – 1710 ई.
- मेवाड़-मारवाड़-आमेर के मध्य '''देबारी समझौता''' हुआ।
- अपनी पुत्री चतन्द्रकुंवरी का विवाह सवाई जयसिंह से करवाया।
'''*महाराणा संग्रामसिंह द्वितीय –'''
शासनकाल- 1710 ई. – 1734 ई.
- मेवाड़ में मराठों ने पहली बार प्रवेश किया।
- मेवाड़ चित्रशैली में ‘कलीला दमना’ का चित्रण हुआ।
- फतेहसागर झील के किनारे सहेलियों की बाड़ी बनवाई तथा सीसारमा गाँव में वैद्यनाथ का मंदिर व वैद्यनाथ प्रशस्ति का निर्माण करवाया।
- मेवाड़ में स्थित जगदीश मंदिर का पुन: निर्माण भी करवाया।
'''*महाराणा जगतसिंह – द्वितीय'''
- शासनकाल- 1734 ई. – 1751 ई.
- पेशवा बाजीराव-प्रथम मेवाड़ आया तथा चौथ वसूली का समझौता किया।
- माधोसिंह को जयपुर का शासन दिलाने के लिए जयपुर के उत्तराधिकार संघर्ष में हस्तक्षेप किया था।
- पिछोला झील में जगनिवास महलों का निर्माण करवाया।
- दरबारी कवि नेकराम ने जगत विलास ग्रंथ लिखा।
- 17 जुलाई, 1734 को हुरड़ा सम्मेलन की अध्यक्षता की।
- अफगान शासक नादिरशाह ने 1739 ई. में दिल्ली पर आक्रमण किया।
- उत्तराधिकारी- प्रतापसिंह द्वितीय (1751-54 ई.)
- महाराणा प्रतापसिंह का उत्तराधिकारी – राजसिंह द्वितीय (1754-61 ई.)
'''* महाराणा अरिसिंह द्वितीय'''
- शासनकाल- 1761-73 ई.
- सरदारों ने राजमाता झाली से उत्पन्न पुत्र रतनसिंह को मेवाड़ का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था।
- अरिसिंह ने बागोर के सरदार नाथसिंह एवं सलूम्बर के रावत जोधसिंह की हत्या करवाई थी।
- उत्तराधिकारी- हम्मीर द्वितीय (1773-78 ई.)
'''* महाराणा भीमसिंह'''
- शासनकाल- 1778 ई. – 1828 ई.
- 1818 ई. में मराठों के भय से अंग्रेजों से संधि कर ली थी। इस संधि पर मेवाड़ की ओर से ठाकुर अजीतसिंह (आसींद, भीलवाड़ा) तथा अंग्रेजों की ओर से चार्ल्स मैटकॉफ ने हस्ताक्षर किए थे।
- भीमसिंह की पुत्री कृष्णा कुमारी से विवाह के लिए 1807 ई. में गिंगोली, (परबतसर, नागौर) का युद्ध हुआ।
- अमीर खाँ पिण्डारी व अजीतसिंह चूंडावत के दबाव में कृष्णा कुमारी को जहर दे दिया।
- 1818 ई. में कर्नल टॉड एजेंट के रूप में उदयपुर आया था।
- उत्तराधिकारी- महाराणा जवानसिंह (1828-38 ई.)
'''* महाराणा सरदारसिंह'''
- शासनकाल- 1838 ई. – 1842 ई.
- सरदार सिंह बागोर ठिकाने से गोद आए थे।
- 1841 ई. में मेवाड़ भील कोर का गठन किया जिसका 1950 ई. में राजस्थान पुलिस विभाग में विलय कर दिया गया।
'''* महाराणा स्वरूपसिंह'''
- शासनकाल- 1842 ई. – 1861 ई.
- स्वरूपसिंह सरदारसिंह का छोटा भाई था।
- 1857 की क्रांति में अंग्रेजों का साथ देने वाला राजपूताना का पहला शासक था।
- स्वरूपशाही सिक्के चलाए जिन पर ‘चित्रकूट उदयपुर’ व दूसरी ओर ‘दोस्ती लंदन’ अंकित था।
- विजय स्तम्भ का जीर्णोद्धार करवाया।
- 1861 ई. में सती प्रथा पर रोक लगाई।
- डाकन प्रथा व समाधि प्रथा पर भी रोक लगाई थी।
- मृत्यु – 1861
- इनके साथ पासवान ऐंजाबाई सती हुई थी जो मेवाड़ महाराणाओं के साथ सती होने की अन्तिम घटना थी।
'''* राणा शंभूसिंह'''
- शासनकाल- 1861 ई. – 1872 ई.
- शंभूसिंह को बागोर ठिकाने से गोद लिया गया था।
- राज्याभिषेक के समय नाबालिग थे इसलिए राज्य प्रबन्ध के लिए पॉलिटिकल एजेन्ट मेजर टेलर की अध्यक्षता में रीजेंसी कौंसिल (पंच सरदारी) की स्थापना की गई थी।
- मेवाड़ में नई अदालतों की स्थापना के विरोध में नगर सेठ चम्पालाल के नेतृत्व में उदयपुर में हड़ताल (1864 ई.) हुई थी।
- उदयपुर में शंभूरत्न पाठशाला 1863 ई. में स्थापित की गई।
- खैरवाड़ा और नीमच तक पक्की सड़कों का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ।
- श्यामलदास ने वीरविनोद का लेखन प्रारम्भ किया।
'''* राणा सज्जनसिंह'''
- शासनकाल- 1872 ई. – 1884 ई.
- बागोर ठिकाने के शक्तिसिंह के पुत्र थे।
- 14 फरवरी, 1878 को अंग्रेजों के साथ नमक समझौता किया था।
- 1881 ई. में लॉर्ड रिपन चित्तौड़गढ़ आए तथा महाराणा को '''जी.सी.एस.आई.''' (Grand Commander of the Star of India) का खिताब दिया।
- ‘सज्जन निवास’ नाम से सुन्दर बाग लगवाया।
- शिक्षा की सुव्यवस्था के लिए एजुकेशन कमेटी की स्थापना की गई।
- ‘सज्जन अस्पताल’ एवं ‘वॉल्टर जनाना अस्पताल’ का निर्माण करवाया।
- मेवाड़ में नया भू-राजस्व बंदोबस्त शुरू हुआ।
- मेवाड़ में 1881 ई. में प्रथम बार जनगणना का कार्य शुरू हुआ।
'''- महेन्द्राज सभा-''' शासन प्रबन्ध एवं न्याय कार्य के लिए 1880 ई. में स्थापना की।
- 1881 ई. में उदयपुर में ‘सज्जन यंत्रालय’ छापाखाना स्थापित कर इन्होंने ‘सज्जन कीर्ति सुधारक’ नामक साप्ताहिक पत्रिका का प्रकाशन किया।
- ‘सज्जन वाणी विलास’ पुस्तकालय की स्थापना की।
- लॉर्ड लिटन द्वारा आयोजित दिल्ली दरबार में भाग लेने वाला मेवाड़ का प्रथम शासक था।
- दयानन्द सरस्वती मेवाड़ आए। सत्यार्थ प्रकाश का लेखन जगमंदिर में प्रारम्भ किया था।
'''* महाराणा फतेहसिंह -'''
शासनकाल- 1884 ई. – 1921 ई.
- शिवरती के महाराजा दलसिंह के पुत्र।
- राजपूतों में बहुविवाह, बालविवाह एवं फिजूलखर्ची पर रोक लगाई।
- ब्रिटेन के राजकुमार ‘केनॉट’ के मेवाड़ आगमन पर देवली में राजकुमार के हाथ से केनॉट (फतहसागर) बाँध की नींव रखवाई।
- इनके समय 1899 ई. में भीषण अकाल पड़ा था।
- बिजौलिया किसान आंदोलन प्रारंभ हुआ।
'''- उपाधि-''' ऑर्डर ऑफ क्राउन ऑफ इंडिया
- 1889 में ए.जी.जी. वॉल्टर ने ‘राजपूत हितकारिणी सभा’ की स्थापना की।
- दिल्ली दरबार (वर्ष 1903)- एडवर्ड सप्तम के दरबार में शामिल होने जा रहे फतेहसिंह को केसरीसिंह बारहठ ने ‘'''चेतावनी रा चूंगट्या’''' नामक 13 सोरठे लिखकर दिल्ली जाने से रोका।
'''*राणा भूपालसिंह/भोपालसिंह-'''
- शासनकाल- 1921 ई. – 1948 ई.
- सिसोदिया वंश का अंतिम शासक।
- राजस्थान का एकीकरण हुआ।
- राजस्थान के एकमात्र शासक जो आजीवन '''‘महाराजप्रमुख’''' पद पर रहे।
7l12e6p6qkm8ol4r3m96dxoxg2a7mbd
सरूंड माता
0
1433774
6591339
6586875
2026-07-23T13:51:15Z
Sarund mata mandir
936514
6591339
wikitext
text/x-wiki
Pandit govind pujari sarund mata mandir (8003239279)
'''सरुंड माता''' मंदिर, जिसे '''सरुंड माता''' और '''चिलाय माता के नाम से भी जाना जाता है, भारत के''' राजस्थान राज्य में नीम का थाना से कोटपूतली राजमार्ग पर कोटपुतली के पास '''सरुंड''' गांव में स्थित है ।
यूं तो पूरा राजस्थान मंदिरों और लोक देवताओं के स्थानों से भरा पड़ा है, लेकिन हर साल चैत्र और शारदीय नवरात्र में यहां श्रद्धालुओं की खासी भीड़ उमड़ती है। राजस्थान समेत देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए आते हैं। महाभारत काल का यह मंदिर ग्राम '''सरुंड''' में अरावली पहाड़ी पर स्थित है। जिसे पहुंचने के लिए 284 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। मंदिर में माता की मूर्ति को पांडवों ने अपने गुप्त काल में स्थापित किया था। मंदिर में स्थापित '''चिलाय''' देवी मां की मूर्ति पांडवों और उनके राजवंश तंवर या तोमर राजपूत की कुल देवी का एक रूप है, '''तंवर राजपूत''' समाज के लोग मां '''सरुंड''' को कुलदेवी के रूप में पूजते हैं।
मूर्ति एक गुफा में स्थापित है ।
किवदंती है कि 16वीं शताब्दी में मुगल बादशाह अकबर यह सुनकर ऊंटों पर शराब का जखीरा लेकर आया था पर हर बार मंदिर के आधे ऊपर जाने पर ऊंटों पर रखी शराब खाली हो जाती थी। यह देखकर मुगल बादशाह अकबर को झुकना पड़ा। इसके बाद अकबर ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। मूर्ति पहाड़ी पर एक गुफा में स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए सात द्वारों से होकर गुजरना पड़ता है। पहले यहां एक ही द्वार हुआ करता था। जबकि शेष छह द्वार मुगलकालीन हैं। कहा जाता है कि इन द्वारों का निर्माण अकबर ने करवाया था। यह सिलसिला औरंगजेब के समय भी जारी रहा।
माता के पदचिह्न
मान्यता है कि रात के समय माता रानी सिंह पर सवार होकर स्वयं भ्रमण करती हैं। मंदिर की चढ़ाई के दौरान माता के पदचिह्न आधे आते हैं जबकि मंदिर की परिक्रमा पुजारियों के अनुसार 52 भेरूजी, 56 कलवा, 64 योगिनी, 9 नरसिंह और 5 पीर क्षेत्रपाल के रूप में स्थित है। इसके अलावा 500 साल पुरानी बावड़ी, छतरी और गुफा के बीच में हनुमान जी का ऐतिहासिक मंदिर भी स्थित है।
तीन दिवसीय मेला भरता है
नवरात्रि की सप्तमी से नवमी तक यहां तीन दिवसीय मेला भरता है। साथ ही सप्तमी की रात्रि को जागरण भी किया जाता है। इसके अलावा हर माह की शुक्ल अष्टमी को भी जागरण का आयोजन किया जाता है। मंदिर का वार्षिक उत्सव हर साल वैशाख शुक्ल षष्ठी से नवमी तक लगातार चार दिनों तक आयोजित किया जाता है।
h8egyfr7h5nmptwbfvxl4telj799l0g
6591412
6591339
2026-07-24T01:59:55Z
AMAN KUMAR
911487
[[Special:Contributions/Sarund mata mandir|Sarund mata mandir]] ([[User talk:Sarund mata mandir|Talk]]) के संपादनों को हटाकर [[User:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]] के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया
6586875
wikitext
text/x-wiki
{{स्रोतहीन|date=फ़रवरी 2023}}
'''सरुंड माता''' मंदिर, जिसे '''सरुंड माता''' और '''चिलाय माता के नाम से भी जाना जाता है, भारत के''' राजस्थान राज्य में नीम का थाना से कोटपूतली राजमार्ग पर कोटपुतली के पास '''सरुंड''' गांव में स्थित है ।
यूं तो पूरा राजस्थान मंदिरों और लोक देवताओं के स्थानों से भरा पड़ा है, लेकिन हर साल चैत्र और शारदीय नवरात्र में यहां श्रद्धालुओं की खासी भीड़ उमड़ती है। राजस्थान समेत देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए आते हैं। महाभारत काल का यह मंदिर ग्राम '''सरुंड''' में अरावली पहाड़ी पर स्थित है। जिसे पहुंचने के लिए 284 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। मंदिर में माता की मूर्ति को पांडवों ने अपने गुप्त काल में स्थापित किया था। मंदिर में स्थापित '''चिलाय''' देवी मां की मूर्ति पांडवों और उनके राजवंश तंवर या तोमर राजपूत की कुल देवी का एक रूप है, '''तंवर राजपूत''' समाज के लोग मां '''सरुंड''' को कुलदेवी के रूप में पूजते हैं।
मूर्ति एक गुफा में स्थापित है ।
किवदंती है कि 16वीं शताब्दी में मुगल बादशाह अकबर यह सुनकर ऊंटों पर शराब का जखीरा लेकर आया था पर हर बार मंदिर के आधे ऊपर जाने पर ऊंटों पर रखी शराब खाली हो जाती थी। यह देखकर मुगल बादशाह अकबर को झुकना पड़ा। इसके बाद अकबर ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। मूर्ति पहाड़ी पर एक गुफा में स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए सात द्वारों से होकर गुजरना पड़ता है। पहले यहां एक ही द्वार हुआ करता था। जबकि शेष छह द्वार मुगलकालीन हैं। कहा जाता है कि इन द्वारों का निर्माण अकबर ने करवाया था। यह सिलसिला औरंगजेब के समय भी जारी रहा।
माता के पदचिह्न
मान्यता है कि रात के समय माता रानी सिंह पर सवार होकर स्वयं भ्रमण करती हैं। मंदिर की चढ़ाई के दौरान माता के पदचिह्न आधे आते हैं जबकि मंदिर की परिक्रमा पुजारियों के अनुसार 52 भेरूजी, 56 कलवा, 64 योगिनी, 9 नरसिंह और 5 पीर क्षेत्रपाल के रूप में स्थित है। इसके अलावा 500 साल पुरानी बावड़ी, छतरी और गुफा के बीच में हनुमान जी का ऐतिहासिक मंदिर भी स्थित है।
तीन दिवसीय मेला भरता है
नवरात्रि की सप्तमी से नवमी तक यहां तीन दिवसीय मेला भरता है। साथ ही सप्तमी की रात्रि को जागरण भी किया जाता है। इसके अलावा हर माह की शुक्ल अष्टमी को भी जागरण का आयोजन किया जाता है। मंदिर का वार्षिक उत्सव हर साल वैशाख शुक्ल षष्ठी से नवमी तक लगातार चार दिनों तक आयोजित किया जाता है।
j0kmvvwq0fnflifz1crv7zwzo4gnlak
6591438
6591412
2026-07-24T02:44:34Z
SM7
89247
हटाने हेतु नामांकित; देखें [[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/सरूंड माता]]
6591438
wikitext
text/x-wiki
{{हहेच लेख| कारण=[[वि:RS|विश्वसनीय_स्रोत]] नहीं मिल रहे; ऐसे में उल्लेखनीयता संदिग्ध। निजी टिप्पणी एवं मूल शोध की तरह लिखा लेख।| चर्चा_पृष्ठ= विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/सरूंड माता}}{{स्रोतहीन|date=फ़रवरी 2023}}
'''सरुंड माता''' मंदिर, जिसे '''सरुंड माता''' और '''चिलाय माता के नाम से भी जाना जाता है, भारत के''' राजस्थान राज्य में नीम का थाना से कोटपूतली राजमार्ग पर कोटपुतली के पास '''सरुंड''' गांव में स्थित है ।
यूं तो पूरा राजस्थान मंदिरों और लोक देवताओं के स्थानों से भरा पड़ा है, लेकिन हर साल चैत्र और शारदीय नवरात्र में यहां श्रद्धालुओं की खासी भीड़ उमड़ती है। राजस्थान समेत देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए आते हैं। महाभारत काल का यह मंदिर ग्राम '''सरुंड''' में अरावली पहाड़ी पर स्थित है। जिसे पहुंचने के लिए 284 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। मंदिर में माता की मूर्ति को पांडवों ने अपने गुप्त काल में स्थापित किया था। मंदिर में स्थापित '''चिलाय''' देवी मां की मूर्ति पांडवों और उनके राजवंश तंवर या तोमर राजपूत की कुल देवी का एक रूप है, '''तंवर राजपूत''' समाज के लोग मां '''सरुंड''' को कुलदेवी के रूप में पूजते हैं।
मूर्ति एक गुफा में स्थापित है ।
किवदंती है कि 16वीं शताब्दी में मुगल बादशाह अकबर यह सुनकर ऊंटों पर शराब का जखीरा लेकर आया था पर हर बार मंदिर के आधे ऊपर जाने पर ऊंटों पर रखी शराब खाली हो जाती थी। यह देखकर मुगल बादशाह अकबर को झुकना पड़ा। इसके बाद अकबर ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। मूर्ति पहाड़ी पर एक गुफा में स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए सात द्वारों से होकर गुजरना पड़ता है। पहले यहां एक ही द्वार हुआ करता था। जबकि शेष छह द्वार मुगलकालीन हैं। कहा जाता है कि इन द्वारों का निर्माण अकबर ने करवाया था। यह सिलसिला औरंगजेब के समय भी जारी रहा।
माता के पदचिह्न
मान्यता है कि रात के समय माता रानी सिंह पर सवार होकर स्वयं भ्रमण करती हैं। मंदिर की चढ़ाई के दौरान माता के पदचिह्न आधे आते हैं जबकि मंदिर की परिक्रमा पुजारियों के अनुसार 52 भेरूजी, 56 कलवा, 64 योगिनी, 9 नरसिंह और 5 पीर क्षेत्रपाल के रूप में स्थित है। इसके अलावा 500 साल पुरानी बावड़ी, छतरी और गुफा के बीच में हनुमान जी का ऐतिहासिक मंदिर भी स्थित है।
तीन दिवसीय मेला भरता है
नवरात्रि की सप्तमी से नवमी तक यहां तीन दिवसीय मेला भरता है। साथ ही सप्तमी की रात्रि को जागरण भी किया जाता है। इसके अलावा हर माह की शुक्ल अष्टमी को भी जागरण का आयोजन किया जाता है। मंदिर का वार्षिक उत्सव हर साल वैशाख शुक्ल षष्ठी से नवमी तक लगातार चार दिनों तक आयोजित किया जाता है।
m5a48567263s3bcxerhvc5551r8p9x8
वैष्णो देवी मंदिर
0
1447101
6591481
6554781
2026-07-24T06:23:08Z
~2026-41064-48
937929
/* */
6591481
wikitext
text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक हिन्दू मन्दिर|name=वैष्णो देवी मंदिर|image=Mata Vaishno Devi Bhawan, Jammu. India.jpg|alt=|caption=त्रिकूट पहाड़ियों से घिरा वैष्णो देवी भवन का दृश्य|map_type=India Jammu and Kashmir#India|map_relief=y|map_caption=जम्मू में वैष्णो देवी मंदिर की अवस्थिति|coordinates={{coord|33.0299|74.9482|type:landmark_region:IN|display=inline,title}}|country=[[भारत]]|location=[[जम्मू और कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश)|जम्मू]]|district=[[रियासी ज़िला|रियासी]]|locale=[[Katra, Jammu and Kashmir|Katra]]|elevation_m=1584.96|deity=वैष्णो देवी|festivals=[[नवरात्रि]], [[दिवाली]]|architecture=गुफा मंदिर|temple_quantity=4|monument_quantity=|inscriptions=|year_completed=0028 विक्रम संवत|website={{url|https://www.maavaishnodevi.org/|maavaishnodevi.org}}}}'''वैष्णो देवी मंदिर''' को '''श्री माता वैष्णो देवी मंदिर''' भी कहा जाता है और '''वैष्णो देवी भवन''' देवी [[वैष्णो देवी]] को समर्पित एक प्रमुख और व्यापक रूप से सम्मानित [[मन्दिर|हिंदू मंदिर]] है। यह [[भारत]] में [[जम्मू और कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश)|जम्मू और कश्मीर]] के केंद्र शासित प्रदेश के भीतर [[त्रिकुटा पर्वत|त्रिकुटा पहाड़ियों]] की ढलान पर [[कटड़ा|कटरा]], [[रियासी ज़िला|रियासी]] में स्थित है। <ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=nHZ5CwAAQBAJ|title=Indian Himalaya: Story of a 100 Visits|last=Rindani|first=Kirit|publisher=Partridge Publishing|year=2016|isbn=978-1482858860|page=47}}</ref> <ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=kusLzP8H6TQC|title=Discovering the Himalaya, Volume 1|last=S. S. Negi|publisher=Indus Publishing|year=1998|isbn=9788173870798|page=429}}</ref> <ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=K5AaI2PhiV8C|title=Mountains of the God|last=Kuldip Singh Gulia|publisher=Gyan Publishing House|year=2007|isbn=9788182054202|page=15}}</ref> मंदिर को [[दुर्गा]] को समर्पित 108 [[शक्ति पीठ|महा (प्रमुख) शक्ति पीठों]] में से एक के रूप में मान्यता प्राप्त है, जिन्हें वैष्णो देवी के रूप में पूजा जाता है। <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/travel/destinations/famous-durga-temples-in-india-for-religiously-inclined-souls/as51743858.cms|title=Famous Durga temples in India for religiously inclined souls|date=5 April 2019|publisher=Times of India}}</ref> दुर्गा के प्रमुख पहलू होने के कारण, हिंदू वैष्णो देवी को [[काली]], [[सरस्वती देवी|सरस्वती]] और [[लक्ष्मी]] का अवतार मानते हैं। {{Sfn|Chauhan|2021|p=154}} मंदिर श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (एसएमवीडीएसबी) द्वारा शासित है, जिसकी अध्यक्षता अगस्त 1986 में [[जम्मू और कश्मीर सरकार]] ने की थी <ref name="SMVDSB">{{Cite web|url=https://www.maavaishnodevi.org/constitution.aspx|title=Facts about Shri Mata Vaishno Devi Shrine Board|website=SMVDSB Official Site|language=en|access-date=2022-06-30|archive-date=7 मार्च 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230307232907/https://www.maavaishnodevi.org/constitution.aspx|url-status=dead}}</ref>
यह भारत के सबसे अधिक देखे जाने वाले तीर्थस्थलों में से एक है। हर साल लाखों श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। <ref>{{Cite news|url=https://www.business-standard.com/article/pti-stories/vaishno-devi-footfall-in-2019-lowest-in-3-years-shrine-board-120010200678_1.html|title=Vaishno Devi pilgrim footfall in 2019 lowest in 3 years: Shrine Board|date=2 January 2020|work=Business Standard}}</ref> <ref>{{Cite news|url=https://www.business-standard.com/article/current-affairs/vaishno-devi-likely-to-receive-8-5-mn-pilgrims-by-dec-31-highest-in-5-yrs-118122900321_1.html|title=Vaishno Devi likely to receive 8.5 mn pilgrims by Dec 31; highest in 5 yrs|date=29 December 2018|work=Business Standard}}</ref> [[नवरात्रि]] जैसे त्योहारों के दौरान, फुटफॉल बढ़कर एक करोड़ तक पहुंच जाता है। <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/travel/destinations/vaishno-devi-bhairon-mandir-ropeway-service-starts-from-today/as67227545.cms|title=Vaishno Devi-Bhairon Mandir ropeway service starts from today|website=Times of India Travel|access-date=2018-12-25}}</ref> यह कुछ लेखकों के अनुसार लगभग 16 बिलियन डॉलर की वार्षिक आय के साथ भारत के सबसे अमीर मंदिरों में से एक है। <ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=L3NpAgAAQBAJ|title=Sacred Aid: Faith and Humanitarianism|last=Michael Barnett|last2=Janice Gross Stein|date=3 July 2012|publisher=Oxford University Press|isbn=978-0199916030|page=140}}</ref>
मंदिर हिंदुओं और सिखों दोनों के लिए पवित्र है। [[स्वामी विवेकानन्द|स्वामी विवेकानंद]] जैसे कई प्रमुख संतों ने मंदिर का दौरा किया है। <ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=iEhuAAAAMAAJ|title=Jammu and Kashmir: Charting a Future|last=Dipankar Banerjee|last2=D. Suba Chandran|publisher=Saṁskṛiti|year=2005|isbn=9788187374442|page=61}}</ref>
मंदिर श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) द्वारा शासित है। बोर्ड की स्थापना जम्मू और कश्मीर राज्य सरकार अधिनियम संख्या XVI/1988 के तहत की गई थी, जिसे श्री माता वैष्णो देवी श्राइन अधिनियम के रूप में भी जाना जाता है। बोर्ड की अध्यक्षता [[जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपालों की सूची|जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल]] करते हैं, जो मंदिर के संचालन के लिए 9 बोर्ड सदस्यों की नियुक्ति भी करते हैं।
== इतिहास ==
मंदिर, 1,584.96 की ऊंचाई पर मी (5,200 फीट), 12 है [[त्रिकुटा पर्वत|त्रिकुटा]] पहाड़ी पर [[कटड़ा|कटरा]] से किमी. यह लगभग 61 है [[जम्मू (शहर)|जम्मू]] शहर से किमी. <ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=XNqOjvaAb9cC|title=Modern History of Jammu and Kashmir: Ancient times to Shimla Agreement|last=Aggarwal|first=J. C.|last2=Agrawal|first2=S. P.|publisher=Concept Publishing Company|year=1995|isbn=978-8170225560|page=10}}</ref> <ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/nation-world/six-toughest-treks-that-pilgrims-undertake/vaishno-devi/slideshow/47780586.cms|title=Six toughest treks that pilgrims undertake|date=23 June 2015|publisher=The Economic Times}}</ref> पवित्र गुफा के एक भूवैज्ञानिक अध्ययन ने इसकी आयु लगभग एक लाख वर्ष होने का संकेत दिया है। [[ऋग्वेद]] में [[त्रिकुटा पर्वत|त्रिकुटा]] पहाड़ी का भी उल्लेख है, जिस स्थान पर मंदिर स्थित है। <ref>{{Cite web|url=https://www.maavaishnodevi.org/history_of_the_shrine.aspx|title=Shri Mata Vaishno Devi Shrine Board :: Holy Shrine :: History of the Holy Shrine :: History of the Holy Shrine|access-date=8 अप्रैल 2023|archive-date=8 अप्रैल 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230408052204/https://www.maavaishnodevi.org/history_of_the_shrine.aspx|url-status=dead}}</ref>
''[[महाभारत]]'', जो [[पाण्डव|पांडवों]] और [[कुरुक्षेत्र युद्ध]] का लेखा-जोखा देता है, में देवी वैष्णो देवी की पूजा का उल्लेख है। कहा जाता है कि [[कुरुक्षेत्र युद्ध]] से पहले अर्जुन ने आशीर्वाद के लिए [[कृष्ण|भगवान कृष्ण]] की सलाह से देवी की पूजा की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवी मां वैष्णो देवी के रूप में उनके सामने प्रकट हुईं। जब देवी प्रकट हुईं, तो [[अर्जुन|अर्जुन ने]] एक [[स्तोत्र]] के साथ उनकी स्तुति शुरू की, जिसमें एक [[श्लोक]] ' ''जम्बूकाटक चित्तैषु नित्यं सन्निहितालये'' ' कहकर जाता है, जिसका अर्थ है 'आप जो हमेशा जम्भू पर्वत की ढलान पर मंदिर में रहते हैं' {{mdash}} शायद देवी की ओर इशारा करते हुए। वर्तमान जम्मू. <ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/travel/destinations/sri-mata-vaishno-devi-shrine/as59557879.cms|title=Sri Mata Vaishno Devi Shrine|date=15 March 2018|publisher=Times of India}}</ref> [[जम्मू और कश्मीर के राज्यपालों की सूची|जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल]] [[जग मोहन|जगमोहन]] कहते हैं, "माता वैष्णो देवी तीर्थ एक प्राचीन है जिसकी प्राचीनता महाभारत से पहले की है, माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने अर्जुन को 'जंभु' की पहाड़ियों में जाने और वैष्णो का आशीर्वाद लेने की सलाह दी थी युद्ध के मैदान में हथियार उठाने से पहले देवी। 'जंभू' की पहचान आज के जम्मू से है। अर्जुन, वैष्णो देवी की पूजा करते हुए, उन्हें सर्वोच्च योगी कहते हैं, जो जीर्णता और क्षय से मुक्त हैं, जो वेदों की माता हैं और वेदांत के विज्ञान हैं और जो विजय के दाता हैं और स्वयं विजय का अवतार हैं। <ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=QsDSGn8jLPAC|title=Soul and Structure of Governance in India|last=Jagmohan|publisher=Allied Publishers|year=2005|isbn=978-8177648317|page=334}}</ref> आमतौर पर यह भी माना जाता है कि पांडवों ने सबसे पहले कोल कंडोली और भवन में मंदिरों का निर्माण देवी मां के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता में किया था। एक पहाड़ पर, त्रिकुटा पर्वत के ठीक बगल में और पवित्र गुफा के सामने पाँच पत्थर की संरचनाएँ हैं, जिन्हें पाँच पांडवों की चट्टान का प्रतीक माना जाता है। <ref>{{Cite news|url=https://www.indiatoday.in/india/story/pranab-mukherjee-visits-vaishno-devi-katra-nn-vohra-206873-2014-09-02|title=President visits Vaishno Devi, inaugurates two new facilities|date=2 September 2014|publisher=India Today}}</ref> <ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/maiden-master-plan-for-vaishnodevi-shrine-area/articleshow/58148044.cms|title=Maiden master plan for Vaishnodevi shrine area|date=2017-04-12|work=The Economic Times|access-date=2018-12-25}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/travel/destinations/vaishno-devi-bhairon-mandir-ropeway-service-starts-from-today/as67227545.cms|title=Vaishno Devi-Bhairon Mandir ropeway service starts from today|website=Times of India Travel|access-date=2018-12-25}}</ref>
; श्रीधर को वैष्णो देवी का प्राकट्य और भैरोंनाथ की कथा
[[File:Bhairav_Mandir.jpg|दाएँ|अंगूठाकार|भैरों नाथ मंदिर, जहां भैरों नाथ का सिर पहाड़ी पर गिरा था]]
ऐसा कहा जाता है कि एक प्रसिद्ध हिंदू तांत्रिक भैरों नाथ ने युवा वैष्णो देवी को एक कृषि मेले में देखा और उसके प्यार में पागल हो गए। वैष्णो देवी अपने कामुक अग्रिमों से बचने के लिए त्रिकुटा पहाड़ियों में भाग गईं, बाद में उन्होंने [[दुर्गा]] का रूप धारण किया और एक गुफा में अपनी तलवार से उनका सिर काट दिया। <ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=NOonAAAAYAAJ|title=Journal of Religious Studies, Volume 14|publisher=Department of Religious Studies, Punjabi University|year=1986|page=56}}</ref> {{Sfn|Pintchman|2001|p=60}}
लेखक मनोहर सजनानी के अनुसार, हिंदू पौराणिक कथाओं का मानना है कि वैष्णो देवी का मूल निवास अर्ध कुंवारी था, जो कटरा शहर और गुफा के बीच लगभग आधे रास्ते में था।
1 जनवरी 2022 को मंदिर के गेट नंबर 3 के पास मची भगदड़ में 12 लोग मारे गए और 16 अन्य घायल हो गए। <ref>{{Cite web|url=https://www.newindianexpress.com/nation/2022/jan/01/vaishno-devi-stampedescuffle-between-2-groups-claimed-as-cause-probe-panel-to-submit-report-within-a-week-2402048.html|title=Vaishno Devi Stampede: Scuffle between 2 groups claimed as cause; probe panel to submit report within a week|website=The New Indian Express|access-date=2022-01-01}}</ref> <ref>{{Cite news|url=https://www.reuters.com/world/india/least-12-killed-stampede-religious-shrine-india-kashmir-2022-01-01/|title=At least 12 killed in stampede at religious shrine in India Kashmir|date=2022-01-01|work=Reuters|access-date=2022-01-01|language=en}}</ref>
== देवी-देवताएं ==
[[File:Vaishno_devi.jpg|दाएँ|अंगूठाकार|मंदिर में महालक्ष्मी, महाकाली और महासरस्वती की मूर्तियां।]]
मंदिर में [[वैष्णो देवी]] की तीन मूर्तियों {{mdash}} [[महाकाली]], [[लक्ष्मी|महालक्ष्मी]] और [[सरस्वती देवी|महासरस्वती]] की पूजा की जाती है। मूर्तियों के चरण बारहमासी बहने वाली बाणगंगा से लाए गए पानी से धोए जाते हैं। <ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=XNqOjvaAb9cC|title=Modern History of Jammu and Kashmir: Ancient times to Shimla Agreement|last=Aggarwal|first=J. C.|last2=Agrawal|first2=S. P.|publisher=Concept Publishing Company|year=1995|isbn=978-8170225560|page=11}}</ref>
=== पूजा ===
लेखिका आभा चौहान वैष्णो देवी की पहचान दुर्गा की शक्ति के साथ-साथ लक्ष्मी, सरस्वती और काली के अवतार से करती हैं। {{Sfn|Chauhan|2021|p=154}} पिंचमैन लिखते हैं कि वैष्णो देवी के पास सर्वोच्च देवत्व [[महादेवी|आदि शक्ति]] या केवल दुर्गा के समान सभी शक्तियां हैं। {{Sfn|Pintchman|2001|p=62}} पिंचमैन यह भी कहते हैं कि अधिकांश तीर्थयात्री वैष्णो देवी को दुर्गा के रूप में पहचानते हैं, जिन्हें ''शेरांवाली'', "शेर-सवार" भी कहा जाता है। {{Sfn|Pintchman|2001|p=63}}
== त्योहार ==
वैष्णो देवी मंदिर में आयोजित होने वाले सबसे प्रमुख त्यौहार [[नवरात्रि]] हैं, जो नौ रातों का त्योहार है, जिसमें दुष्ट राक्षसों पर देवी की जीत का जश्न मनाया जाता है और [[दीपावली|दीवाली]], रोशनी का त्योहार है, जो अंधेरे पर प्रकाश की जीत, बुराई पर अच्छाई और अज्ञानता पर ज्ञान की जीत का प्रतीक है। <ref>{{Cite news|url=https://www.tribuneindia.com/news/archive/j-k/vaishno-devi-board-organises-diwali-function-in-katra-157057|title=Vaishno Devi board organises Diwali function in Katra|date=11 November 2015|work=The Tribune}}</ref> <ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/india-news/maha-yagya-at-vaishno-devi-shrine-as-navratri-begins-vedic-hymns-fill-air/story-cNkL9fJ8iARjCmNpXdGzFJ.html|title=Maha Yagya at Vaishno Devi shrine as Navratri begins, Vedic hymns fill air|date=18 October 2020|publisher=Hisdustan Times}}</ref> <ref>{{Cite news|url=https://mumbaimirror.indiatimes.com/news/india/special-arrangements-for-navratri-at-mata-vaishno-devi-temple-amid-covid-19/articleshow/78695794.cms|title=Special arrangements for Navratri at Mata Vaishno Devi temple|date=16 October 2020|publisher=India Times}}</ref>
[[नवरात्रि]] त्यौहार [[आश्विन|अश्विन]] के महीने के दौरान मनाया जाने वाला त्यौहार है, जो आमतौर पर सितंबर और अक्टूबर के ग्रेगोरियन महीनों में पड़ता है। {{Sfn|James G. Lochtefeld|2002|pp=468–469}} यह उत्सव नौ रातों (दस दिन) तक चलता है; वैष्णो देवी दरबार में समारोह के दौरान देश भर के कलाकार प्रस्तुति देते हैं। [[कोविड-19 विश्वमारी|कोविड-19 महामारी]] के कारण श्राइन बोर्ड ने [[भारतीय डाक|भारत के डाक विभाग के]] सहयोग से मंदिर में आने में असमर्थ भक्तों के लिए [[प्रसाद]] वितरण भी शुरू कर दिया है। <ref>{{Cite news|url=https://www.livemint.com/news/india/vaishno-devi-temple-helicopter-services-to-covid-tests-all-details-explained-11602832160909.html|title=Vaishno Devi temple: Helicopter services to Covid tests, all details explained|date=16 October 2020|publisher=Livemint}}</ref>
सभी धर्मों के भक्त और हिंदू धर्म के सभी विचार वैष्णो देवी मंदिर में आते हैं। <ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=K5AaI2PhiV8C|title=Mountains of the God|last=Kuldip Singh Gulia|publisher=Gyan Publishing House|year=2007|isbn=9788182054202|page=15}}</ref>
== प्रशासन और दौरा ==
वैष्णो देवी मंदिर को जम्मू और कश्मीर श्री माता वैष्णो देवी तीर्थ अधिनियम संख्या XVI/1988 और [[भारत का संविधान|भारत के संविधान]] के अनुच्छेद 26 का हिस्सा भी शामिल किया गया था। <ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/cities/control-of-vaishno-devi-shrine-hc-issues-notice-to-j-k-shrine-board-over-hindu-baridars-plea/story-RSnQyX81RKVcXvQytwGmzO.html|title=Control of Vaishno Devi Shrine: HC issues notice to J&K, shrine board over Hindu Baridars plea|date=26 August 2020|publisher=Hindustan Times}}</ref> बोर्ड का नाम श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड है। बोर्ड में नौ सदस्य हैं; सभी को [[जम्मू और कश्मीर सरकार]] द्वारा नामित किया जाता है, विशेष रूप से [[जम्मू और कश्मीर के राज्यपालों की सूची|जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल]] द्वारा। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल बोर्ड के पदेन अध्यक्ष होते हैं। <ref>{{Cite book|url=https://jk.gov.in/jammukashmir/sites/default/files/2151.pdf|title=THE JAMMU & KASHMIR SHRI MATA VAISHNO DEVI SHRINE ACT,1988 (Act No. XVI of 1988)|date=31 August 1988|publisher=Government of Jammu and Kashmir|access-date=8 अप्रैल 2023|archive-date=18 अप्रैल 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210418145221/https://jk.gov.in/jammukashmir/sites/default/files/2151.pdf|url-status=dead}}</ref> 1991 में, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड प्रबंधन ने प्रसिद्ध शिव मंदिर, [[शिव खोड़ी|शिव खोरी]] का भी नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। {{Sfn|Pintchman|2001|p=75}}
[[File:Vaishno.jpg|दाएँ|अंगूठाकार|सर्दियों के दौरान वैष्णो देवी मंदिर]]
श्राइन बोर्ड ने कटरा में रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के पास वैष्णवी धाम, सरस्वती धाम, कालिका धाम, निहारिका यात्री निवास, शक्ति भवन और आशीर्वाद भवन जैसे गेस्ट हाउस भी बनाए हैं। <ref>{{Cite news|url=https://www.indiatoday.in/information/story/how-to-book-a-room-at-vaishno-devi-bhawan-1595494-2019-09-05|title=How to book a room at Vaishno Devi bhawan|date=5 September 2019|publisher=India Today}}</ref>
सर्दियों के मौसम में दिसंबर से जनवरी तक वैष्णो देवी मंदिर बर्फ से ढका रहता है। भले ही इन दिनों के दौरान मंदिर बंद नहीं होगा, मंदिर में आने वाले लोगों को भारी ऊनी, विंड-चीटर, टोपी और दस्ताने लाने की सलाह दी जाती है, हालांकि मंदिर प्रबंधन चढ़ाई के दौरान मुफ्त कंबल प्रदान करता है। <ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/travel/destinations/everything-you-wanted-to-know-about-visiting-vaishno-devi/as35008771.cms|title=Everything you wanted to know about visiting Vaishno Devi|date=5 April 2019|publisher=India Times}}</ref> <ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/india-news/snowfall-at-mata-vaishno-devi-shrine-rains-lash-jammu/story-mL8ju574AbSz6CcKB5RpGM.html|title=Snowfall at Mata Vaishno Devi shrine; rains lash Jammu|date=28 December 2020|publisher=Hindustan Times}}</ref>
== संदर्भ ==
=== ग्रन्थसूची ===
[[श्रेणी:हिन्दू तीर्थ स्थल]]
nrtqr689vcp69ye5g5wj95coqezecmd
गुणशेखर
0
1462526
6591373
6554449
2026-07-23T18:15:28Z
InternetArchiveBot
500600
Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5
6591373
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox person|name=गुणशेखर|image=Gunasekhar.jpg|caption=2015 में गुणशेखर|birth_date={{birth-date and age|2 June 1964}}<ref>{{Cite web|date=2020-06-02|title=Happy Birthday Gunasekhar: From Ramayanam to Rudhramadevi, best 5 movies of the filmmaker that you must watch|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/happy-birthday-gunasekhar-from-ramayanam-to-rudhramadevi-best-5-movies-of-the-filmmaker-that-you-must-watch/photostory/76134155.cms|access-date=2021-01-10|website=The Times of India|language=en}}</ref>|birth_place=[[नरसीपट्टनम]], [[आंध्र प्रदेश]], भारत|occupation={{hlist|निर्देशक|पटकथा लेखक|निर्माता}}|children=2; नीलिमा सहित|birth_name=गुणशेखर|spouse=रागिनी}}
'''गुणशेखर''' (जन्म 2 जून 1964) एक भारतीय फिल्म निर्देशक और पटकथा लेखक हैं जो [[तेलुगू सिनेमा|तेलुगु सिनेमा]] में अपने कामों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने [[एक्शन फिल्म|एक्शन]], [[प्रेमकहानी फ़िल्म|रोमांस]], पौराणिक और ऐतिहासिक नाटक शैलियों में फिल्मों का निर्देशन किया है। उन्होंने एक [[राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार|राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार]], कई [[नंदी पुरस्कार]] और एक [[दक्षिण फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार|दक्षिण फिल्मफेयर पुरस्कार]] जीता है।
गुणशेखर ने ऐतिहासिक महाकाव्य फिल्म ''रामायणम'' (1997) का निर्देशन किया, जिसने सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता और भारत के अंतर्राष्ट्रीय बाल फिल्म समारोह में प्रदर्शित किया गया। <ref name=":0">{{Cite news|url=http://www.thehindu.com/entertainment/glad-we-finished-rudhramadevi-on-time-gunasekhar/article6390534.ece|title=Glad we finished Rudhramadevi on time: Gunasekhar|last=IANS|date=8 September 2014|work=The Hindu}}</ref> <ref name=":1">{{Cite news|url=http://www.thehindu.com/features/cinema/rudhramadevi-the-queen-has-her-moments/article7743156.ece|title=Rudhramadevi review|last=Sangeetha Devi Dundoo|date=9 October 2015|work=The Hindu}}</ref> उनकी 2003 की [[एक्शन फिल्म]], ओक्काडु उस वर्ष की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली तेलुगु फिल्म बनने वाली बड़ी व्यावसायिक सफलता थी और इसे विभिन्न भारतीय भाषाओं में बनाया गया था। <ref name=":2">{{Cite news|url=http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2011-05-29/news-interviews/29594494_1_ravi-teja-film-industry-chennai|title=YVS, Gunasekar & Ravi were rommates|work=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20130524133533/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2011-05-29/news-interviews/29594494_1_ravi-teja-film-industry-chennai|archive-date=2013-05-24}}</ref> <ref name=":3">{{Cite web|url=http://www.deccanchronicle.com/channels/showbiz/tollywood/ravi-teams-guna-372|title=Deccan Chronicle - Latest India news - Breaking news - Hyderabad News - World news - Business - Politics|access-date=13 जून 2023|archive-date=6 अक्तूबर 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20181006115554/https://www.deccanchronicle.com/channels/showbiz/tollywood/ravi-teams-guna-372|url-status=dead}}</ref> उनकी अन्य उल्लेखनीय फिल्मों में ''सोगासु चूड़ा थरमा'' (1995), ''चूडालानी वुंडी'' (1998), ''मनोहरम'' (2000) ''और'' ''[[रुद्रमादेवी (फ़िल्म)|रुद्रमादेवी]]'' (2015) शामिल हैं।
== करियर ==
मुख्य धारा के फिल्म निर्देशन में कदम रखने से पहले, गुनसेकर ने डीवी नरसराजू, क्रांति कुमार और [[रामगोपाल वर्मा|राम गोपाल वर्मा]] के सहयोगी निर्देशक के रूप में काम किया। <ref>{{Cite web|url=http://www.gulte.com/movienews/43084/Old-Album-Guna-RGV-Krishna-Vamsi-Teja-Uttej|title=Gunasekhar, RGV, Krishna Vamsi, Teja, Uttej Old Photo - Gunasekhar|website=Gulte.com}}</ref> गुनशेखर ने अपने निर्देशन की शुरुआत सामाजिक-राजनीतिक ''लाठी'' (1992) से की, जिसके लिए उन्हें एक निर्देशक की सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्म के लिए राज्य नंदी पुरस्कार मिला।
उन्होंने सुपर-हिट [[प्रेमकहानी फ़िल्म|रोमांस फिल्म]], ''सोगासु चूड़ा थरमा'' (1995) का निर्देशन किया, जिसे सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए नंदी पुरस्कार मिला। 1997 में, गुनशेखर ने पौराणिक फिल्म ''रामायणम'' का निर्देशन किया, जिसने सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता और भारत के अंतर्राष्ट्रीय बाल फिल्म समारोह में प्रदर्शित की गई। <ref name=":0"/> <ref name=":1"/>
उनकी अगली फिल्म एक्शन थ्रिलर ''चूडालानी वुंडी'' (1998) थी, जिसने तेलुगु स्क्रीन पर डीटीएस ध्वनि पेश की और बॉक्स ऑफिस पर हिट रही। <ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/chiranjeevi-starrer-choodalani-vundi-clocks-22-years-take-a-look-at-some-working-stills/articleshow/77780118.cms|title=Chiranjeevi starrer Choodalani Vundi clocks 22 years; Take a look at some working stills - Times of India|work=The Times of India|access-date=2020-09-07|language=en}}</ref> फिल्म को बाद में ''[[कलकता मेल (2003 फ़िल्म)|कलकत्ता मेल]]'' के रूप में हिंदी में बनाया गया था। इसके बाद उन्होंने राजनीतिक थ्रिलर, ''मनोहरम'' (2000) का निर्देशन किया, जिसने फिर से सर्वश्रेष्ठ कहानी के लिए नंदी पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए नंदी पुरस्कार जीता।
उनकी 2003 की [[एक्शन फिल्म]], ''ओक्काडु'', एक बड़ी आलोचनात्मक और व्यावसायिक सफलता थी, जो उस वर्ष की सबसे अधिक कमाई करने वाली तेलुगु फिल्म बन गई और इसे विभिन्न भारतीय भाषाओं में बनाया गया। <ref name=":2"/><ref name=":3"/> 2004 की ड्रामा फिल्म, ''अर्जुन को'' मेनस्ट्रीम सेक्शन में भारत के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में प्रदर्शित किया गया था। <ref>{{Cite web|url=http://iffi.nic.in/Dff2011/Frm36IIFAAward.aspx?PdfName=36IIFA.pdf|title=Directorate of Film Festival|website=iffi.nic.in|archive-url=https://web.archive.org/web/20111124233704/http://iffi.nic.in/Dff2011/Frm36IIFAAward.aspx?PdfName=36IIFA.pdf|archive-date=24 November 2011|access-date=12 July 2015}}</ref>
उनकी 2015 की ऐतिहासिक फिल्म, रुद्रमादेवी जिसे अक्टूबर 2015 में व्यापक रूप से मिश्रित समीक्षाओं के लिए रिलीज़ किया गया था, लेकिन इसके बावजूद यह वर्ष की औसत कमाई बन गई। <ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movie-reviews/rudhramadevi/movie-review/49289505.cms|title=Rudhramadevi Movie Review {3/5}: Critic Review of Rudhramadevi by Times of India|work=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]]}}</ref> <ref>{{Cite web |url=https://www.greatandhra.com/movies/reviews/rudramadevi-review-good-effort-gone-awry-69653 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=13 जून 2023 |archive-date=19 अप्रैल 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230419134555/https://www.greatandhra.com/movies/reviews/rudramadevi-review-good-effort-gone-awry-69653 |url-status=dead }}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.scooptimes.com/hit-flop/allu-arjun-hit-flop-movies-list/5007|title=Allu Arjun Hit and Flop Movies {{pipe}} Actor Allu Arjun Films List|date=11 July 2016|access-date=13 जून 2023|archive-date=15 अप्रैल 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230415171954/https://www.scooptimes.com/hit-flop/allu-arjun-hit-flop-movies-list/5007|url-status=dead}}</ref>
उनका नवीनतम उद्यम पौराणिक [[प्रेमकहानी फ़िल्म|रोमांटिक ड्रामा फिल्म]] ''[[शाकुंतलम]]'' थी जो 14 अप्रैल 2023 को नाटकीय रूप से रिलीज़ हुई थी। फिल्म को आलोचकों द्वारा प्रतिबंधित किया गया था और यह एक बड़ी व्यावसायिक विफलता बन गई। <ref>https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/madhoo-opens-up-about-samantha-starrer-shaakuntalams-box-office-failure-says-i-feel-very-sad-2364769-2023-04-26</ref>
== व्यक्तिगत जीवन ==
गुनशेखर की शादी रागिनी से हुई है और इस जोड़े की दो बेटियां हैं, नीलिमा और युक्ता। <ref>{{Cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/151015/entertainment-tollywood/article/gunasekhar%E2%80%99s-dynamic-duo|title=Gunasekhar's dynamic duo|last=kavirayani|first=suresh|date=2015-10-16|website=Deccan Chronicle}}</ref>
== फिल्मोग्राफी और पुरस्कार ==
{| class="wikitable sortable"
!वर्ष
! पतली परत
! [[फ़िल्म निर्देशक|निदेशक]]
! [[फ़िल्म निर्माता|निर्माता]]
! [[पटकथा लेखक]]
! पुरस्कार और सम्मान
|-
| style="text-align:center;" | 1992
| ''लाटी'' ||{{Yes}} || {{No}} ||{{Yes}}
| किसी निर्देशक की सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्म के लिए नंदी पुरस्कार <ref>{{Cite web|url=http://ipr.ap.nic.in/New_Links/Film.pdf|title=నంది అవార్డు విజేతల పరంపర (1964–2008)|publisher=[[Andhra Pradesh (magazine)|Information & Public Relations of Andhra Pradesh]]|trans-title=A series of Nandi Award Winners (1964–2008)|access-date=21 August 2020}}</ref>
|-
| style="text-align:center;" | 1995
| ''सोगासु चूड़ा थरमा'' || {{Yes}}|| {{No}} ||{{Yes}}
| सर्वश्रेष्ठ पटकथा लेखक के लिए नंदी पुरस्कार
|-
| style="text-align:center;" | 1997
| ''रामायणम'' || {{Yes}} || {{No}} ||{{Yes}}
| सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
भारत का अंतर्राष्ट्रीय बाल फिल्म महोत्सव
|-
| style="text-align:center;" | 1998
| ''चूड़ालानी वुंडी'' || {{Yes}} || {{No}} ||{{Yes}}
|
|-
| style="text-align:center;" | 2000
| ''मनोहरम'' ||{{Yes}} || {{No}} || {{Yes}}
|
|-
| style="text-align:center;" | 2001
| ''मृगराजू'' ||{{Yes}}|| {{No}} ||{{Yes}}
|
|-
| style="text-align:center;" | 2003
| ''[[ओक्कडु]]'' || {{Yes}} || {{No}} ||{{Yes}}
| सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के लिए नंदी पुरस्कार
सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार – तेलुगु
|-
| style="text-align:center;" | 2004
| ''अर्जुन'' ||{{Yes}} || {{No}} ||{{Yes}}
| भारत का अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव
|-
| style="text-align:center;" | 2006
| ''सैनिकुडु'' ||{{Yes}} || {{No}} ||{{Yes}}
|
|-
| style="text-align:center;" | 2010
| ''वरुडु'' ||{{Yes}} ||{{No}} ||{{Yes}}
|
|-
| style="text-align:center;" | 2012
| ''निप्पू'' ||{{Yes}} || {{No}} ||{{Yes}}
|
|-
| style="text-align:center;" | 2015
| ''[[रुद्रमादेवी (फ़िल्म)|रुद्रमादेवी]]'' ||{{Yes}} ||{{Yes}} ||{{Yes}}
|
|-
| style="text-align:center;" | 2023
| ''[[शाकुंतलम]]'' ||{{Yes}} ||{{Yes}} ||{{Yes}}
|
|-
|}
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://www.gunasekhar.com होम पेज] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20230415171955/http://www.gunasekhar.com/ |date=15 अप्रैल 2023 }}
* {{IMDb name|id=0348015|name=Gunasekhar}}
[[श्रेणी:1964 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
8af7q7iwl1417wq22jlko3oju1jxl0a
द्रौपदी (टीवी श्रृंखला)
0
1475143
6591448
5923417
2026-07-24T02:54:21Z
Pushkar Singh
415569
/* बाहरी कड़ियाँ */
6591448
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox television
| caption =
| genre = [[पौराणिक]]
| creator =
| developer = [[कृष्ण]]<br>सुनील मेहता
| writer = -कमलेश पांडे
| director = सुरेंद्र मोहन
| starring = [[मृणाल कुलकर्णी]]<br>[[राहुल भट्ट]]<br>[[विन्दु दारा सिंह]]<br>[[शाहबाज खान (अभिनेता)|शाहबाज खान]]<br>[[राजेश श्रृंगारपुरे]]<br>[[पंकज धीर]]<br>[[दीपक जेठी]]<br>कौशल कपूर<br>[[रवि झंकाल]]<br>अरूप पाल<br>[[परीक्षित साहनी]]<br>[[महेंद्र संधू]]<br>[[उषा बचानी]]
| country = भारत
| language = हिंदी
| num_seasons = 1
| num_episodes = 36
| executive_producer =
| producer = [[विजय कश्यप]]
| location =
| cinematography = किशोर कपाड़िया<br>वी.के. मूर्ति
| editor =
| runtime = 45 मिनट (लगभग)
| network = [[सहारा वन]]
| first_aired = {{start date|2001}}
| last_aired = {{end date|2002}}
}}
'''''द्रौपदी''''' एक [[भारत में टेलीविजन|भारतीय टेलीविजन]] पौराणिक श्रृंखला [[सहारा वन]] पर 2001 से 2002 तक दो वर्षों तक चली। इसका निर्माण [[विजय कश्यप]] ने किया था और निर्देशन सुरेंद्र मोहन ने किया था। संगीत [[तलत अज़ीज़]] द्वारा तैयार किया गया था और [[जसपिंदर नरूला|जसपिंदर नरूला ने]] शीर्षक गीत गाया था। यह धारावाहिक [[प्रतिभा राय]] के उड़िया उपन्यास [[यज्ञसेनी (उपन्यास)|यज्ञसेनी]] पर आधारित है।
== कलाकार ==
* [[द्रौपदी]] के रूप में [[मृणाल कुलकर्णी]]
* [[कृष्ण]] के रूप में [[राहुल भट|राहुल भट्ट]]
* [[अर्जुन]] के रूप में [[राजेश श्रृंगारपुरे]]
* अरूप पाल [[युधिष्ठिर]] के रूप में
* [[भीम]] के रूप में [[विंदू दारा सिंह]]
* [[कर्ण]] के रूप में [[शहबाज़ ख़ान|शाहबाज़ खान]]
* [[जयद्रथ]] के रूप में सुधीर मित्तू
* [[भीष्म]] के रूप में [[पंकज धीर]]
* [[दुर्योधन]] के रूप में [[दीपक जेठी]]
* [[दुःशासन|दुशासन]] के रूप में कौशल कपूर
* [[शकुनि]] के रूप में [[रवि झांकल|रवि झंकाल]]
* कासिम अली [[धृष्टद्युम्न]] के रूप में
* [[द्रुपद]] के रूप में [[परीक्षित साहनी]]
* [[द्रोणाचार्य]] के रूप में [[महेंद्र संधू]]
* [[हिडिंब|हिडिम्बा]] के रूप में [[उषा बचानी]]
* [[रुक्मिणी]] के रूप में [[नेहा शरद]]
* सैभ्या के रूप में मोना पारेख
* [[सुभद्रा]] के रूप में शर्मीली राज
* [[माया अलग|माया अलघ]] [[कुन्ती]] के रूप में
* [[वृषाली]] के रूप में ज्योति जोशी
* काशीराज के रूप में पंकज कालरा
* नरेंद्र सच्चर
* अनु कश्यप
* संदेश नायक
* अनवर खान
* राज हुसैन
* अशोक पंजाबी
* प्रियंका श्रीवास्तव
* उपमा श्रीवास्तव
* [[धृतराष्ट्र]] के रूप में विष्णु शर्मा
* [[विजय कश्यप]]
* अहमद खान
* सोमेश अग्रवाल
* [[सत्यवती]] के रूप में नयन भट्ट
* [[अमिता नाँगिया]]
* अनिल कोचर
* सोनिया रक्कड़
* आकृति मिस्त्री
* सोना बत्रा
* मधु भारती
* राहुल बोस
* आशा बचानी
* भरत अरोड़ा
* प्रियंका सिंह
* रमेश गोयल
* साजिद शाह
* सुनील राज
* दिलीप मेहरा
* विंदू शर्मा
* प्रशांत जयसवाल
* सुमीत मित्तल
* -नीरज सूद
* तृप्ति अग्रवाल
* प्रदीप शुक्ला
* चंद्रकांत ठक्कर
* सुजाता ठक्कर
* [[देवकी]] के रूप में वीना कपूर
* जीतेन्द्र श्रीमाली
== यह भी देखें ==
* [[महाभारत (टीवी धारावाहिक)|''''महाभारत'' (1988 टीवी श्रृंखला)]]
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{आईएमडीबी शीर्षक|9099142}}
[[श्रेणी:सहारा वन के धारावाहिक]]
[[श्रेणी:भारतीय टेलीविजन धारावाहिक]]
[[श्रेणी:भारतीय पौराणिक टेलीविजन शृंखला]]
hbfqni1qrpw16hc7va9si4ly4somzlh
बसेरा (2000 टीवी धारावाहिक)
0
1477349
6591503
5931034
2026-07-24T08:08:09Z
~2026-41286-21
937940
/* */
6591503
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox television
| image = संपादक
| caption = सौरव वर्मा
| creator = [[मीटर फिल्म्स]]
| writer = अचला नागर
| director = चंदर बहल
| starring = [[आलोक नाथ]], [[रंजीत]], [[अरुण गोविल]]
| open_theme = "Basera" by ??
| country = भारत
| num_seasons = 1
| num_episodes = कुल 113
| producer = दिनेश बंसल
| runtime = लगभग 22 मिनट
| network = [[जी टीवी]]
| first_aired = {{start date|2000}}
| last_aired = {{end date|2001}}
}}
'''''बसेरा''''' (लिट. ड्वेलिंग) एक हिंदी भाषा का सोप ओपेरा है जिसका प्रीमियर [[ज़ी टीवी]] चैनल पर होता है। यह कहानी एकल परिवार में रहने की तुलना में संयुक्त परिवार में रहने के अंतर को चित्रित और चित्रित करती है। यह श्रृंखला भारतीय दर्शकों, विशेषकर महिलाओं के बीच बहुत लोकप्रिय रही और लगातार दो वर्षों तक भारतीय टेलीविजन पर सर्वश्रेष्ठ दस धारावाहिकों में से एक का पुरस्कार जीता।<ref>{{Cite news|url=http://www.meteorinternational.com/basera.htm|title=Basera|date=2008-11-07|archive-url=https://web.archive.org/web/20081120161426/http://www.meteorinternational.com/basera.htm|archive-date=20 November 2008|publisher=Meteor Films}}</ref> इस श्रृंखला को 2000 के दशक के शीर्ष 14 भारतीय टेलीविजन शो में स्थान दिया गया था और इसे 5.04 की टीवीआर रेटिंग प्राप्त हुई थी।<ref>{{Cite news|url=http://www.indiantelevision.com/datamonitor/y2k/cs.htm|title=2000's Top Shows In All Cable and Satellite Homes|publisher=Indiantelevision.com}}</ref>
== कलाकार ==
* [[आलोक नाथ]]
* [[अरुण गोविल]]
* [[रंजीत]]
* [[सत्येन्द्र कपूर]]
* [[कंचन (अभिनेत्री)|कंचन]]
* [[पापिया सेनगुप्ता]]
* चांदधार
* माधुरी दीक्षित
* रोहित कुमार
* शशि शर्मा
* [[हेमन्त चौधरी]]
* [[सुकन्या कुलकर्णी]]
* वैदेही अमृते
* [[श्वेता गौतम]]
* [[पंकज बैरी|पंकज बेरी]]
* रेमन सिंह
== संदर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:ज़ी टीवी के कार्यक्रम]]
[[श्रेणी:भारतीय टेलीविजन धारावाहिक]]
3mc2y6vxwodzcv9nz3qdbbblpghdj7w
6591504
6591503
2026-07-24T08:10:24Z
~2026-41286-21
937940
/* */
6591504
wikitext
text/x-wiki
'''''बसेरा''''' (लिट. ड्वेलिंग) एक हिंदी भाषा का सोप ओपेरा है जिसका प्रीमियर [[ज़ी टीवी]] चैनल पर होता है। यह कहानी एकल परिवार में रहने की तुलना में संयुक्त परिवार में रहने के अंतर को चित्रित और चित्रित करती है। यह श्रृंखला भारतीय दर्शकों, विशेषकर महिलाओं के बीच बहुत लोकप्रिय रही और लगातार दो वर्षों तक भारतीय टेलीविजन पर सर्वश्रेष्ठ दस धारावाहिकों में से एक का पुरस्कार जीता।<ref>{{Cite news|url=http://www.meteorinternational.com/basera.htm|title=Basera|date=2008-11-07|archive-url=https://web.archive.org/web/20081120161426/http://www.meteorinternational.com/basera.htm|archive-date=20 November 2008|publisher=Meteor Films}}</ref> इस श्रृंखला को 2000 के दशक के शीर्ष 14 भारतीय टेलीविजन शो में स्थान दिया गया था और इसे 5.04 की टीवीआर रेटिंग प्राप्त हुई थी।<ref>{{Cite news|url=http://www.indiantelevision.com/datamonitor/y2k/cs.htm|title=2000's Top Shows In All Cable and Satellite Homes|publisher=Indiantelevision.com}}</ref>
== कलाकार ==
* [[आलोक नाथ]]
* [[अरुण गोविल]]
* [[रंजीत]]
* [[सत्येन्द्र कपूर]]
* [[कंचन (अभिनेत्री)|कंचन]]
* [[पापिया सेनगुप्ता]]
* चांदधार
* माधुरी दीक्षित
* रोहित कुमार
* शशि शर्मा
* [[हेमन्त चौधरी]]
* [[सुकन्या कुलकर्णी]]
* वैदेही अमृते
* [[श्वेता गौतम]]
* [[पंकज बैरी|पंकज बेरी]]
* रेमन सिंह
== संदर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:ज़ी टीवी के कार्यक्रम]]
[[श्रेणी:भारतीय टेलीविजन धारावाहिक]]
87ahqk9ppwvny5x4jof8s45bd1tjg8u
6591505
6591504
2026-07-24T08:24:33Z
~2026-41286-21
937940
/* */
6591505
wikitext
text/x-wiki
'''''बसेरा''''' (लिट. ड्वेलिंग) एक हिंदी भाषा का सोप ओपेरा है जिसका प्रीमियर [[ज़ी टीवी]] चैनल पर होता है। यह कहानी एकल परिवार में रहने की तुलना में संयुक्त परिवार में रहने के अंतर को चित्रित और चित्रित करती है। यह श्रृंखला भारतीय दर्शकों, विशेषकर महिलाओं के बीच बहुत लोकप्रिय रही और लगातार दो वर्षों तक भारतीय टेलीविजन पर सर्वश्रेष्ठ दस धारावाहिकों में से एक का पुरस्कार जीता।<ref>{{Cite news|url=http://www.meteorinternational.com/basera.htm|title=Basera|date=2008-11-07|archive-url=https://web.archive.org/web/20081120161426/http://www.meteorinternational.com/basera.htm|archive-date=20 November 2008|publisher=Meteor Films}}</ref> इस श्रृंखला को 2000 के दशक के शीर्ष 14 भारतीय टेलीविजन शो में स्थान दिया गया था और इसे 5.04 की टीवीआर रेटिंग प्राप्त हुई थी।<ref>{{Cite news|url=http://www.indiantelevision.com/datamonitor/y2k/cs.htm|title=2000's Top Shows In All Cable and Satellite Homes|publisher=Indiantelevision.com}}</ref> निर्देशक चंदर बहल और संपादक सौरव वर्मा।
== कलाकार ==
* [[आलोक नाथ]]
* [[अरुण गोविल]]
* [[रंजीत]]
* [[सत्येन्द्र कपूर]]
* [[कंचन (अभिनेत्री)|कंचन]]
* [[पापिया सेनगुप्ता]]
* चांदधार
* माधुरी दीक्षित
* रोहित कुमार
* शशि शर्मा
* [[हेमन्त चौधरी]]
* [[सुकन्या कुलकर्णी]]
* वैदेही अमृते
* [[श्वेता गौतम]]
* [[पंकज बैरी|पंकज बेरी]]
* रेमन सिंह
== संदर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:ज़ी टीवी के कार्यक्रम]]
[[श्रेणी:भारतीय टेलीविजन धारावाहिक]]
fm45tvcuhixuposzea9dwsm9ag2x3cn
पंचम (टीवी श्रृंखला)
0
1477844
6591449
5932961
2026-07-24T02:54:53Z
Pushkar Singh
415569
6591449
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox television
| image =
| caption =
| creator = [[फ़िल्म & शॉट्स प्रोडक्शंस]]
| director = सचिन देव
| starring =
| open_theme =
| country = भारत
| language = हिंदी
| num_episodes = 148
| producer = गुलशन सचदेवा
| runtime = लगभग 24 मिनट
| network = [[जी टीवी]]
| picture_format = [[480आई]] ([[एसडीटीवी]]),
| first_aired = {{start date|df=y|2004|08|30}}
| last_aired = {{end date|df=y|2005|05|20}}
}}
'''''पंचम''''' [[ज़ी टीवी]] चैनल पर प्रसारित एक भारतीय [[टेलीविजन कार्यक्रम|टीवी शृंखला]] है, जो एक युवा किशोर लड़के, हरपॉल राणा के जीवन पर आधारित है, जो 'उपदेश' के बिना 'दुनिया' को सही करना चाहता है। श्रृंखला का प्रीमियर 30 अगस्त 2004 को हुआ, और प्रत्येक सोमवार-गुरुवार को दोपहर 1 बजे [[भारतीय मानक समय]] पर प्रसारित किया गया।<ref>{{Cite web|url=http://www.indiantelevision.com/headlines/y2k4/aug/aug251.htm|title=Zee TV looks at rehauling its content|date=2004-08-27|publisher=Indian Television.com}}</ref> यह श्रृंखला 20 मई 2005 को समाप्त हुई।
== कलाकार ==
* पंचम के रूप में [[नमित दास]]
* राजश्री के रूप में प्रियंका
* पंचम की दादी के रूप में [[रोहिणी हट्टंगड़ी|रोहिणी हट्टंगडी]]
* किशोर के रूप में [[गुफी पेंटल]]
* मीरा के रूप में [[नाज़नीन पटेल]]
* कमलेश के रूप में [[यतिन कार्येकर]]
* प्रियंका के रूप में स्मिता मल्होत्रा
* रुक्मिणी के रूप में उषा बचानी
* अशोक के रूप में आदर्श गौतम
* नमित के रूप में मनीष खन्ना
* रवि के रूप में पंकज भाटिया
* महरु शेख ललिता के रूप में
* सिराज मुस्तफा खान नरेश सिंघानिया के रूप में
* राजलक्ष्मी सोलंकी पूजा नरेश सिंघानिया के रूप में
* ललिता के रूप में [[अल्का कौशल|अलका कौशल]]
* [[दिनेश कौशिक]]
* रंजीव वर्मा
* जयन्त रावल
* रंजीत के रूप में पवन कुमार
* मीनाक्षी वर्मा
* ब्राउनी पाराशर
* [[राकेश पांडे (अभिनेता)|राकेश पांडे]]
* शायरा के रूप में नितिका आनंद
* शारदा अजीत सिंघानिया के रूप में प्रतीची मिश्रा
* लेखा के रूप में मृणाल देशराज / रिंकू कर्माकर
* [[यश सिन्हा]] धरम के रूप में
* इंस्पेक्टर रोनी डिसूजा के रूप में [[पृथ्वी ज़ुत्शी|पृथ्वी जुत्शी]]
* रमेश राय एडवोकेट चड्ढा के रूप में
== संदर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20211218014733/http://ranilife.com/ ज़ी टीवी इंडिया पर पंचम आधिकारिक साइट]
[[श्रेणी:ज़ी टीवी के कार्यक्रम]]
0ytodlxihom11m8xdhpn4z8ny7l11bg
गिरोलामो फ्रैकास्टोरो
0
1487964
6591364
5970211
2026-07-23T16:32:47Z
InternetArchiveBot
500600
Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5
6591364
wikitext
text/x-wiki
[[File:Titian Girolamo Fracastoro.jpg|right|thumb|[[तिशिया]] द्वारा गिरोलामो फ्रैकास्टोरो का पोर्ट्रेट, सी.1528]]
'''गिरोलामो फ्रैकास्टोरो''' ({{lang-la|Hieronymus Fracastorius}}; सी. 1476/8{{spaced ndash}}6 अगस्त 1553<ref>The date given in the ''Vita'' is "octavo idus Augusti MDLIII." (In: ''Opera omnia,'' 1555; 1574; [https://books.google.com/books?id=rG98CDUIsWoC&pg=PR9 1584]); for conversion see e.g. [[:fr:Calendrier romain#Expression de la date en latin|here.]]</ref>) एक [[इटली|इटेलियन]] [[चिकित्सक]], [[कवि]] और [[गणित]], [[भूगोल]] और [[खगोल विज्ञान]] के [[विद्वान]] थे।<ref>{{Cite EB1911|wstitle= Fracastoro, Girolamo |volume= 10 | page = 772 }}</ref>फ्रैकास्टोरो ने [[अणुवाद|परमाणुवाद]] के दर्शन की सदस्यता ली, और वैज्ञानिक जांच में छिपे कारणों की अपील को खारिज कर दिया और सिफलिस संचरण के तरीके के बारे में उनका अध्ययन [[महामारी विज्ञान]] का एक प्रारंभिक उदाहरण है।<ref>{{Cite journal |last=BECHET |first=PAUL E. |title=Hieronymus Fracastorius |date=1932-11-01 |url=https://doi.org/10.1001/archderm.1932.01450030889016 |journal=Archives of Dermatology and Syphilology |volume=26 |issue=5 |pages=888–893 |doi=10.1001/archderm.1932.01450030889016 |issn=0096-6029}}</ref>
==टिप्पणियां==
{{टिप्पणीसूची}}
==सन्दर्भ==
* The Latin text available in Google Books (see link below) is from ''Poemata selecta Italorum: qui seculo decimo sexto latine scripserunt''. Oxford and London: Slatter et Munday (Ox.) Longman, Hurst, Rees, & Orme (London) 1808, p. 65-110.
==बाहरी कड़ियाँ==
{{Commons category|Girolamo Fracastoro}}
{{Wikiquote}}
*[https://books.google.com/books?id=0YsHAAAAQAAJ&dq=Hieronymi+Fracastorii&pg=PA65 Poems (Siphilis, Lib. 1-3 and others) in: ''Poemata Selecta Italorum, qui Seculo Decimo Sexto Latine scripserunt'', London 1808, 65-135. (Latin text)
*[https://books.google.com/books?id=J_k7AAAAcAAJ ''Hieronymi Fracastorii Syphilis sive morbus Gallicus. '' - Basileae, 1536.] (Latin text)
*[https://archive.org/details/bub_gb_xhQ1TwaM100C ''Hieronymi Fracastorii Homocentrica; Eiusdem de causis criticorum dierum per ea quae in nobis sunt'' – 1538.] (Latin text)
*[https://books.google.com/books?id=rG98CDUIsWoC ''Hieronymi Fracastorii Veronensis Opera Omnia.'' 1584.] (Astron., medical, & philosophical writings, Latin text)
*[https://books.google.com/books?id=sr-zfpJ9L9gC ''Hieronymi Fracastorii Veronensis Operum Pars Prior.'' 1591.] (Philosoph. & medical writings, Latin text)
*[https://archive.org/details/fracastorlasyph00fracgoog/page/n141 <!-- pg=1 quote="qui casus rerum varii". --> ''Fracastor – La Syphilis (1530) – Le Mal Français (Extrait du Livre De contagionibus, 1546) '', Paris, 1869] (Latin and French transl.)
*[http://digilander.libero.it/camdic/FRACASTORO.htm Di Cicco, C.: ''Fracastoro, Girolamo (1478-1553)''] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160305014512/http://digilander.libero.it/camdic/FRACASTORO.htm |date=5 मार्च 2016 }} 17° Congress Eur. Acad. Dermatology and Venereology, Paris 2008, (abstract in English, links to publ.)
* [https://archive.org/stream/firstsixthpartm03poemgoog#page/n348/mode/2up Nahum Tate's English translation of ''Syphilis''] (a translation of 1686 in a reprint of 1714), the first full translation of ''Syphilis'' into any language.
* [https://eee.uci.edu/clients/bjbecker/PlaguesandPeople/week4b.html Excerpts of an English translation of ''Syphilis sive Morbus Gallicus'']
*[https://web.archive.org/web/20120324053652/http://hos.ou.edu/galleries//01Ancient/HeroOfAlexandria/1575//15thCentury/Vespucci//16thCentury/Fracastoro/ University of Oklahoma Libraries, History of Science Collections, Online Galleries]
* [http://himetop.wikidot.com/girolamo-fracastoro Places and memorials related to Girolamo Fracastoro]
{{Authority control}}
[[श्रेणी:1478 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:चिकित्सक]]
[[श्रेणी:कवि]]
[[श्रेणी:खगोलशास्त्री]]
ovaga2ge6mcvjuyv7s087qpcs8tmvsd
सदस्य वार्ता:WanderingNeptune
3
1491216
6591524
5987955
2026-07-24T11:06:18Z
Cabayi
135589
Cabayi ने पृष्ठ [[सदस्य वार्ता:FlyingSaturn]] को [[सदस्य वार्ता:WanderingNeptune]] पर स्थानांतरित किया: "[[Special:CentralAuth/FlyingSaturn|FlyingSaturn]]" का नाम "[[Special:CentralAuth/WanderingNeptune|WanderingNeptune]]" करते समय पृष्ठ स्वतः स्थानांतरित हुआ
5987955
wikitext
text/x-wiki
{{साँचा:सहायता|realName=|name=FlyingSaturn}}
-- [[सदस्य:नया सदस्य सन्देश|नया सदस्य सन्देश]] ([[सदस्य वार्ता:नया सदस्य सन्देश|वार्ता]]) 17:05, 23 अक्टूबर 2023 (UTC)
c1bhlrrwzk9b2mr12g5etp16jzjslio
श्रीमद् रामायण
0
1507255
6591426
6591060
2026-07-24T02:25:04Z
Pushkar Singh
415569
/* मुख्य */
6591426
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox television
| image =
| image_size = 250
| image_upright =
| image_alt =
| caption = शीर्षक
| alt_name =
| native_name = <!-- {{Infobox name module|language|title}} or {{Infobox name module|title}} -->
| genre = [[महाकाव्य|महाकाव्य]]<br />[[पौराणिक ]]
| creator = [[सिद्धार्थ कुमार तिवारी]]
| based_on = [[रामचरितमानस]]
[[वाल्मीकि रामायण]]
| developer =
| writer =
| screenplay = आनन्द नीलकण्ठन
| story =
| director = कमल मोंगा<br/>लोकनाथ पांडे<br/>सुमित ठाकुर
| creative_director =
| presenter = <!-- Organized by broadcast credit order, with new main cast added to the end of the list -->
| starring = {{Plain list|
* सुजय रेउ
*प्राची बंसल
}}
| narrator =
| theme_music_composer =
| music = ललित सेन
| open_theme = ''श्रीमद रामायण''
| end_theme =
| num_episodes = 358
| composer =
| country = [[भारत]]
| language = हिंदी
| num_seasons = <!-- Increment when new seasons begin. Only use without |num_series= -->
| num_episodes = <!-- as of 2024. Do not uncomment the preceding text. This field is for a number only and the date should not be shown! -->
| executive_producer =
| producer = [[सिद्धार्थ कुमार तिवारी]]<br/>गायत्री गिल तिवारी<br/>राहुल कुमार तिवारी
| news_editor = <!-- Content editor or editors of a current affairs/political show such as Newsnight. -->
| location = [[उमरगाम]]
| cinematography = अफसर फारूक<br/>वीरधवल पुराणिक
| animator = <!-- Person(s) who served as animators, not animation houses, companies, etc. -->
| editor = गंगा काचरला
| camera = बहु कैमरा
| runtime = २०-४०मिनट
| company = [[स्वास्तिक प्रोडक्शंस]]
| budget =
| network = [[सोनी टीवी]]
| first_aired = {{Start date|df=yes|2024|01|1}}
| last_aired = {{End date|df=yes|2024|08|9}}
| network2 = [[सोनी सब]]
| first_aired2 = {{Start date|df=yes|2024|08|12}}
| last_aired2 = Present
| related = <!-- To be used only for remakes, spin-offs, and adaptations -->
}}
'''''श्रीमद् रामायण''''' एक भारतीय हिंदी भाषा की [[कल्पित कथा/मिथ|पौराणिक]] टेलीविजन शृंखला है जिसका प्रीमियर ०१ जनवरी २०२४ को [[सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न|सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन]] पर हुआ।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/television/new-mythological-show-srimad-ramayan-to-be-launched-on-january-2024-on-sony-tv-8894955/|title=New mythological show Srimad Ramayan to be launched on January 2024 on Sony TV|date=2023-08-16|website=The Indian Express|language=en|access-date=2023-11-13}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.abplive.com/entertainment/television/sony-entertainment-television-announced-mythological-serial-srimad-ramayan-will-launch-on-january-2024-2475373|title=टीवी पर फिर गूंजेगी भगवान श्रीराम की महागाथा, जानें पौराणिक शो 'श्रीमद रामायण' कब और कहा आएगा|last=डेस्क|first=एबीपी एंटरटेनमेंट|date=2023-08-17|website=www.abplive.com|language=hi|access-date=2023-11-13}}</ref>[[स्वास्तिक प्रोड्क्शन्स|स्वास्तिक प्रोडक्शंस]] के बैनर तले [[सिद्धार्थ कुमार तिवारी]] द्वारा निर्मित, श्रृंखला में सुजय रेउ [[राम]] के रूप में और प्राची बंसल [[सीता]] के रूप में हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.amarujala.com/entertainment/television/sony-entertainment-television-announces-grandest-mythological-show-srimad-ramayan-will-launch-in-january-2024-2023-08-16|title=सोनी टीवी पर दिखेगी भगवान श्रीराम की महागाथा 'श्रीमद रामायण', जानें कब से होगा प्रसारण|website=Amar Ujala|language=hi|access-date=2023-11-13}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/entertainment/television/story/srimad-ramayan-teaser-release-telecast-on-sony-tv-from-january-2024-fans-hope-not-like-adipurush-tmovk-1759666-2023-08-17|title=Srimad Ramayan: टीवी पर आ रही 'श्रीमद् रामायण', रिलीज हुआ टीजर, फैन्स बोले- बस 'आदिपुरुष' जैसी न हो|date=2023-08-17|website=आज तक|language=hi|access-date=2023-11-13}}</ref> इस धारावाहिक को सोनी टीवी पर ०९ अगस्त २०२४ को बंद कर सोनी सब पर १२ अगस्त २०२४ को रात ०७:३० बजे प्रसारित किया गया था।
== कथानक ==
श्रीमद रामायण धारावाहिक में भगवान राम के असाधारण जीवन और उन्होंने अपने जीवन में कठिनाइयों से कैसे निपटा, इसका प्रदर्शन किया जाएगा। यह धारावाहिक अपनी प्रिय पत्नी, माता सीता, जिसे रावण ने श्रीलंका में अपहरण कर लिया था, को मुक्त कराने के लिए उनके द्वारा की गई पूरी अग्निपरीक्षा और यात्रा को प्रदर्शित करेगा।
== कलाकार ==
=== मुख्य ===
* [[राम]] / भगवान [[विष्णु]] के रूप में [[सुजय रेउ]] - विष्णु का 7वां अवतार; दशरथ और कौशल्या के पुत्र; भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के भाई; सीता के पति
** युवा [[राम]] के रूप में तन्मय शाह
* [[सीता]] / देवी [[लक्ष्मी]] के रूप में [[प्राची बंसल]] - लक्ष्मी का अवतार; जनक और सुनैना की बड़ी बेटी; उर्मिला, मांडवी और श्रुतकीर्ति की बहन; राम की पत्नी
** युवा सीता के रूप में हंसिका जांगिड़
* [[लक्ष्मण]] के रूप में [[बसंत भट्ट]] - [[शेषनाग]] का अवतार; दशरथ और सुमित्रा के बड़े बेटे; राम, भरत और शत्रुघ्न के भाई; उर्मिला के पति
** युवा लक्ष्मण के रूप में सुभान खान
* वैदेही नायर [[उर्मिला (रामायण)|उर्मिला]] के रूप में - [[नागलक्ष्मी]] का अवतार; जनक और सुनैना की छोटी बेटी; सीता, मांडवी और श्रुतकीर्ति की बहन; लक्ष्मण की पत्नी
** युवा उर्मिला के रूप में पूर्वी मिश्रा
* [[निकितिन धीर]] - [[रावण]] के रूप में - [[लंका]] के राजा; विश्रवा और कैकसी के सबसे बड़े पुत्र; कुम्भकर्ण, विभीषण और शूर्पणखा का भाई; मंदोदरी के पति
** युवा रावण के रूप में अतहर खान
* [[हनुमान]] के रूप में [[निर्भय वाधवा]] - भगवान वायु के पुत्र; केसरी और अंजना के पुत्र; राम भक्त
* [[भरत (रामायण)|भरत]] के रूप में निखिलेश राठौड़ - [[पाञ्चजन्य|शंख]] का अवतार; दशरथ और कैकेयी के पुत्र; राम, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के भाई; मांडवी के पति
** युवा भरत के रूप में हसन सैयद
* [[शत्रुघ्न]] के रूप में समर्थ गुप्ता - [[सुदर्शन चक्र|सुदर्शन]] का अवतार; दशरथ और सुमित्रा के छोटे बेटे; राम, भरत और लक्ष्मण के भाई; श्रुतकीर्ति के पति
** शब्द ग्रोवर युवा शत्रुघ्न के रूप में
=== पुनरावर्ती ===
* [[आरव चौधरी]] - [[दशरथ]] के रूप में - [[अयोध्या (रामायण)|अयोध्या]] के राजा; कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा के पति; राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के पिता
* [[कौशल्या]] के रूप में आनंदी त्रिपाठी - दशरथ की पहली पत्नी; राम की माता
* [[कैकेयी]] के रूप में [[शिल्पा सकलानी]] - दशरथ की दूसरी पत्नी; भरत की माता
* [[सुमित्रा]] के रूप में भावना अनेजा - दशरथ की तीसरी पत्नी; लक्ष्मण और शत्रुघ्न की माता
* [[माण्डवी|मांडवी]] के रूप में शीर्षा तिवारी - लक्ष्मी शंख का अवतार; कुशध्वज और चंद्रभागा की बड़ी बेटी; सीता, उर्मिला और श्रुतकीर्ति की बहन; भरत की पत्नी
** ध्वनि बुच युवा मंडावी के रूप में
* [[श्रुतिकीर्ति|श्रुतकीर्ति]] के रूप में सिद्धि शर्मा - लक्ष्मी चक्र का अवतार; कुशध्वज और चंद्रभागा की छोटी बेटी; सीता, उर्मिला और मांडवी की बहन; शत्रुघ्न की पत्नी
** युवा श्रुतकीर्ति के रूप में धिविजा अरोड़ा
* [[जनक]] के रूप में [[जितेन लालवानी]] - [[विदेह वंश|मिथिला]] के राजा; कुशध्वज का भाई; सुनयना के पति; सीता और उर्मिला के पिता
* [[रामायण के पात्रों की सूची|सुनयना]] के रूप में वाया रॉय चौधरी - जनक की पत्नी; सीता और उर्मिला की माता
* [[तरुण खन्ना|तरूण खन्ना]] -भगवान [[शिव]]; पार्वती के पति के रूप में
* देवी [[पार्वती]] के रूप में ऐश्वर्या राज भाकुनी - शिव की पत्नी
* [[मन्दोदरी|मंदोदरी]] के रूप में पहले [[गुरप्रीत बेदी]] बाद में [[हरलीन कौर रेखी]] ने निभाया- मयासुर और हेमा की बेटी; रावण की पत्नी
* [[विभीषण]] के रूप में [[कुणाल बख्शी]] - विश्रवा और कैकसी के तीसरे पुत्र; रावण, कुम्भकर्ण और शूर्पणखा का भाई
* [[शूर्पणखा]] के रूप में संगीता ओडवानी - विश्रवा और कैकसी की बेटी; रावण, कुम्भकर्ण और विभीषण की बहन
* युवा [[कुम्भकर्ण]] के रूप में निष्कर्ष दीक्षित
* [[मन्थरा|मंथरा]] के रूप में गीता खन्ना - कैकेयी की दासी
* [[वशिष्ठ]] के रूप में [[सुरेन्द्र पाल|सुरेंद्र पाल]] - अयोध्या के पारिवारिक पुजारी; राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के गुरु
* [[विश्वामित्र]] के रूप में विष्णु शर्मा - राम और लक्ष्मण के शिक्षक
* [[जाबालि]] के रूप में [[मनीष खन्ना]] - दशरथ के सलाहकार
* [[अहिल्या]] के रूप में [[गरिमा जैन]] - गौतम महर्षि की पत्नी; शतानंद की माँ
* [[अहिल्या|शतानंद]] के रूप में योगेश महाजन - गौतम महर्षि और अहल्या के पुत्र
* [[रामायण के पात्रों की सूची|कैकसी]] के रूप में नीतू पांडे - विश्रवा की पत्नी; रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण और शूर्पणखा की माँ
* [[वाचकन्वी गार्गी|गार्गी]] के रूप में मीनाक्षी सेठी - वाचकनु की बेटी
* [[ताड़का|ताडका राक्षसी]] के रूप में [[अंशा सयद|अंशा सैयद]] - सुंडा की पत्नी; मारीच और सुभाऊ की माता
* [[सुबाहु]] के रूप में सतेंद्र यादव - सुंडा और ताताका के बेटे; मारीच का भाई
* [[श्रवणकुमार|श्रवण कुमार]] के रूप में मोहम्मद सऊद सूरी - शांतनु और ज्ञानवंती के पुत्र; दशरथ द्वारा मारा गया
* राजा कापसे [[काकभुशुण्डि]] के रूप में - राम के भक्त, एक मनुष्य ऋषि लोमश के श्राप से कौवे में बदल गया।
* मीर अली [[इन्द्र|इंद्र]] के रूप में - वर्षा के देवता
* भरत भाटिया [[कुबेर]] के रूप में - धन के देवता; विश्रवा और इलाविडा के पुत्र; रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण और शूर्पणखा का सौतेला भाई
* शर्मा एम शिशिर [[शनि (ज्योतिष)|शनि]] के रूप में - कर्म के देवता
== उत्पादन ==
=== विकास ===
[[सिद्धार्थ कुमार तिवारी|सिद्धार्थ कुमार तिवारी ]] ने अगस्त 2023 में ''श्रीमद रामायण की'' घोषणा की, जो उनके बैनर [[स्वास्तिक प्रोड्क्शन्स|स्वास्तिक प्रोडक्शंस]] के तहत निर्मित है। यह सीरीज महाकाव्य [[रामायण]] पर आधारित है।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/television/top-stories/story/sony-tv-announces-new-mythological-show-srimad-ramayan-premiering-in-january-2024-2421950-2023-08-16|title=New mythological show 'Srimad Ramayan' to premiere in January 2024|website=India Today|language=en|access-date=2023-11-13}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.mid-day.com/entertainment/television-news/article/sony-tv-announces-new-mythological-show-titled-srimad-ramayan-to-go-on-air-in-january-2024-23303933|title=Sony TV gets a show titled Srimad Ramayan, to go on air in January 2024|date=2023-08-16|website=Mid-day|language=en|access-date=2023-11-13}}</ref> दिसंबर 2023 में, तिवारी ने कहा कि फिल्म ''[[आदिपुरुष]]'' की आलोचना, शो बनाने का एक कारण था। उसने जोड़ा,
{{Quote|ईमानदारी से कहूं तो मुझे यह तथ्य पसंद है कि दर्शक हमारे देश के इतिहास के प्रति संवेदनशील हैं। यह हमारे इतिहास, संस्कृति और यहां तक कि हमारे देश को भी परिभाषित करता है। कोई कारण है कि कोई नाराज हो जाएगा। और मेरा इरादा किसी को ठेस पहुंचाने का नहीं है. मैं चाहता हूं कि वे एक साथ आएं और इसे मेरे साथ मनाएं। मेरे पास एक उचित शोध टीम है और जो कुछ भी हो रहा है, इस शो के बारे में हर शब्द की उचित जांच की जाती है। इसलिए यदि कोई कल कोई प्रश्न उठाता है, तो हमारे पास एक प्रामाणिक स्रोत है जिस पर हम भरोसा कर सकते हैं।<ref>{{Cite web |title=Shrimad Ramayan producer: Negativity faced by Adipurush is why I'm making this |url=https://www.indiatoday.in/television/soaps/story/shrimad-ramayan-producer-on-negativity-faced-by-adipurush-explains-why-he-is-making-tv-show-2476701-2023-12-16 |access-date=2023-12-22 |website=India Today |language=en}}</ref>}}
=== ढलाई ===
सुजय रेउ और प्राची बंसल को क्रमशः [[राम]] और [[सीता]] के रूप में चुना गया।<ref>{{Cite web|url=https://www.timesnowhindi.com/photos/entertainment/shrimad-ramayan-cast-sujay-reu-to-play-lord-ram-character-know-prachi-bansasl-to-shilpa-saklani-also-finlalised-photo-gallery-105591625/1|title=Shrimad Ramayan Cast: भगवान राम सहित इन किरदारों के लिए फाइनल हुई कास्ट, TV पर फिर गूंजेगी जय-जयकार|website=Times Now News|access-date=29 November 2023}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-sujay-reu-and-prachi-bansal-to-play-ram-and-sita-in-siddharth-kumar-tewarys-shrimad-ramayan/articleshow/105415070.cms|title=Sujay Reu And Prachi Bansal To Play Ram And Sita In Siddharth Kumar Tewary’s Shrimad Ramayan|website=Times of India|access-date=28 November 2023}}</ref> [[बसंत भट्ट]] और वैदेही नायर को [[लक्ष्मण]] और [[उर्मिला (रामायण)|उर्मिला]] के रूप में चुना गया।<ref>{{Cite web|url=https://www.amarujala.com/photo-gallery/entertainment/bollywood/sujay-reu-as-ram-prachi-bansal-as-sita-and-basant-bhatt-as-lakshman-know-about-sony-show-shrimad-ramayan-cast-2023-12-15|title=Shrimad Ramayan: मिलिए राम, जानकी, लक्ष्मण समेत 10 गर्वित कलाकारों से, उत्तराखंड के अभिनेता को मिला बड़ा मौका|website=Amar Ujala|access-date=18 December 2023}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.pinkvilla.com/tv/news/exclusive-vaidehi-nair-to-play-pivotal-role-in-siddharth-kumar-tewarys-shrimad-ramayan-1261770?amp|title=Vaidehi Nair to play pivotal role in Siddharth Kumar Tewary’s Srimad Ramayan|website=Pinkvilla|access-date=29 November 2023}}</ref> [[निर्भय वाधवा|निर्भय वाधवा ]] को उनके चरित्र के चौथे ऑन-स्क्रीन चित्रण में, [[हनुमान]] के रूप में चुना गया था।<ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/nirbhay-wadhwa-all-set-to-play-lord-hanuman-in-ramayan/articleshow/106301351.cms|title=Nirbhay Wadhwa all set to play Lord Hanuman again in Shrimad Ramayan|website=The Times of India|access-date=30 December 2023}}</ref>
अक्टूबर 2023 में, [[निकितिन धीर]] [[रावण]] के रूप में कलाकारों में शामिल हुए, जो 5 साल बाद उनकी टेलीविजन वापसी थी।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-chennai-express-thangaballi-nikitin-dheer-to-play-ravana-in-siddharth-kumar-tewarys-shrimad-ramayan/articleshow/104649588.cms|title=Exclusive: Chennai Express' Thangaballi Nikitin Dheer to play Ravana in Siddharth Kumar Tewary's Shrimad Ramayan|date=2023-10-23|work=The Times of India|access-date=2023-11-13|issn=0971-8257}}</ref> [[आरव चौधरी|आरव चौधरी]] को [[दशरथ|दशरथ की]] भूमिका में लिया गया था।<ref>{{Cite web|url=https://www.abplive.com/web-stories/siddharth-kumar-tewary-new-tv-show-ramayan-all-starcast-shilpa-saklani-nikitin-dheer-ent-2522423|title=रामायण वही किरदार नया, जानें कौन होंगे राम-सीता?|website=www.abplive.com|language=hi|access-date=2023-11-13}}</ref> तब निखिलेश राठौड़ को [[भरत (रामायण)|भरत]] के रूप में चुना गया था<ref>{{Cite web|url=https://www.outlookindia.com/art-entertainment/nikhilesh-rathore-on-essaying-bharata-in-srimad-ramayana-i-enjoy-spirituality-news-342199/amp|title=Nikhilesh Rathore on essaying Bharata in 'Srimad Ramayana' : I enjoy spirituality|website=Outlook India|access-date=10 January 2024}}</ref> और समर्थ गुप्ता को [[शत्रुघ्न]] के रूप में लिया गया था।<ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/splitsvilla-13-fame-samarthya-gupta-to-play-shatrughna-in-srimad-ramayana-says-im-immensely-passionate-about-acting-exclusive/articleshow/106600230.cms|title=Samarthya Gupta to play Shatrughna in Srimad Ramayana, says 'I'm immensely passionate about acting'|website=The Times of India|access-date=9 January 2024}}</ref> बाद में, आनंदी त्रिपाठी को [[कौशल्या]] के रूप में, भावना अनेजा को [[सुमित्रा]] के रूप में और [[शिल्पा सकलानी|शिल्पा सकलानी]] को [[कैकेयी]] के रूप में चुना गया।<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/features/aarav-chowdhury-shilpa-saklani-others-open-shrimad-ramayan/|title=Aarav Chowdhury, Shilpa Saklani, and others open up about Shrimad Ramayan|website=Bollywood Hungama|access-date=2023-12-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://navbharattimes.indiatimes.com/tv/news/siddharth-kumar-tewary-shrimad-ramayan-cast-shilpa-saklani-as-kaikeyi-nikitin-dheer-ravana/articleshow/104670593.cms|title=TV पर बनने जा रही है एक और 'रामायण', शिल्पा बनेंगी कैकेयी और निकितिन धीर को मिला रावण का रोल|website=Navbharat Times|language=hi|access-date=2023-11-13}}</ref> [[कैकसी|कैकसी की]] भूमिका में नीतू पांडे को लिया गया।<ref>{{Cite web|url=https://www.manoranjannews.com/television/news/neetu-pandey-will-be-seen-in-sony-tvs-shrimad-ramayan/2023/11/24|title=सोनी टीवी के श्रीमद रामायण में नजर आएगी नीतू पांडे|website=Manoranjan News|access-date=24 November 2023}}</ref>
=== फिल्माने ===
''श्रीमद रामायण की'' शूटिंग मुख्य रूप से [[गुजरात|गुजरात]] के [[उमरगाम]] में की गई है और इसका उत्पादन और वीएफएक्स मूल्य उच्च है।<ref>{{Cite web|url=https://www.amarujala.com/photo-gallery/entertainment/television/shrimad-ramayan-premieres-on-sony-entertainment-television-soon-shooting-is-in-full-swing-in-gujarat-umargaon-2023-12-19|title=Shrimad Ramayan: क्या सोनी ने बनाई छोटे परदे की ‘आदिपुरुष’, तकनीक के सहारे रामकथा का ताव बदलने की कोशिश|website=Amar Ujala|access-date=2023-12-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/entertainment/bollywood/news/sony-tv-shrimad-ramayan-shooting-cost-set-location-umargam-gujarat-132347806.html|title=तीन टीवी सीरियल जितना ‘श्रीमद रामायण’ का बजट:कपड़े-ज्वेलरी पर चार गुना ज्यादा खर्च; अयोध्या और लंका के लिए अलग-अलग सेट बने|website=Dainik Bhaskar|access-date=2023-12-29}}</ref>
=== मुक्त करना ===
''श्रीमद रामायण'' का टीज़र अगस्त 2023 में रिलीज़ किया गया था <ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/tv/srimad-ramayan-sony-entertainment-television-teaser-months-after-adipurush-101692263626780.html|title=Srimad Ramayan: Teaser of TV show unveiled months after Adipurush release, internet says 'hope it's not like the film'|date=2023-08-17|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2023-11-13}}</ref> इस श्रृंखला का प्रीमियर 1 जनवरी 2024 को [[सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न|सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन]] पर हुआ, जिसने इसके टाइम स्लॉट में ''[[कौन बनेगा करोड़पति]]'' की जगह ले ली।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/tv/shrimad-ramayan-replaces-kbc-15-know-details-about-actors-playing-ram-sita-and-hanuman-on-new-show-2024-01-05-910378|title=Shrimad Ramayan replaces KBC 15: Know details about actors playing Ram, Sita and Hanuman on new show|website=India TV News|language=en|access-date=5 January 2024}}</ref>
== स्वागत ==
''[[पिंकविला]]'' की गायत्री निर्मल ने कहा, "आश्चर्यजनक रूप से ताज़ा और ठोस कलाकार काम करते हैं। समृद्ध कहानी और वीएफएक्स (दृश्य प्रभाव) ने सचमुच पात्रों में जान डाल दी है, और वाल्मिकी के मूल ग्रंथ से लिए गए संवाद, शक्तिशाली और विचारशील दोनों हैं- उकसाने वाला। एकमात्र दोष शूर्पणखा का रूढ़िवादी चित्रण है।"<ref>{{Cite web|url=https://www.pinkvilla.com/tv/news/shrimad-ramayan-review-episodes-1-and-2-a-cinematic-visual-spectacle-on-small-screen-1269662?amp|title=Shrimad Ramayan Review, Episodes 1 and 2: A cinematic visual spectacle on small screen|website=Pinkvilla|language=en|access-date=4 January 2024|archive-date=5 जनवरी 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240105171037/https://www.pinkvilla.com/tv/news/shrimad-ramayan-review-episodes-1-and-2-a-cinematic-visual-spectacle-on-small-screen-1269662?amp|url-status=dead}}</ref>
== यह भी देखें ==
* [[सोनी टीवी द्वारा प्रसारित कार्यक्रमों की सूची|सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन द्वारा प्रसारित कार्यक्रमों की सूची]]
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [[इंटरनेट मूवी डेटाबेस]] पर [[imdbtitle:30145246|''श्रीमद् रामायण'']]
[[श्रेणी:सोनी टीवी के कार्यक्रम]]
[[श्रेणी:भारतीय पौराणिक टेलीविजन श्रृंखला]]
{{सोनी टीवी के कार्यक्रम}}
sv9k1papgl69giozzgf461ctsrxjfzl
माजीवाला
0
1533867
6591432
6504230
2026-07-24T02:36:53Z
Dsrprj
780832
/* इन्हे भी देखे */
6591432
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox settlement
|name = माजीवाला
|other_name = Mevanagar
| settlement_type = [[गाँव]]
| image_skyline = Majivala.jpg
| image_alt =
|subdivision_type = |subdivision_name = {{IND}}
|subdivision_type1 = [[भारत के राज्य|राज्य]] |subdivision_name1 = [[राजस्थान]]
|subdivision_type2 = [[भारत के ज़िले|ज़िला]] |subdivision_name2 = [[बालोतरा ज़िला]]
|subdivision_type3 = [[तहसील]] |subdivision_name3 = [[पचपदरा]]
|elevation_m =
|population_total = 5882
|population_as_of = 2011
|demographics_type1 = भाषा
|demographics1_title1= प्रचलित
|demographics1_info1= [[राजस्थानी भाषा|राजस्थानी]], [[हिन्दी]],[[मारवाड़ी]]
|timezone1 = [[भारतीय मानक समय]] |utc_offset1 = +5:30
}}
माजीवाला गाँव राजस्थान के [[बालोतरा]] जिले की [[पचपदरा]] तहसील में है। 2011 की भारत की जनगणना के अनुसार, गाँव की कुल जनसंख्या 5882 है। <ref>{{Cite web |title=Manjiwala Village Population - Pachpadra - Barmer, Rajasthan |url=https://www.census2011.co.in/data/village/87335-manjiwala-rajasthan.html#google_vignette |access-date=2024-05-28 |website=www.census2011.co.in}}</ref><ref>{{Cite web |title=Gram Panchayat (ग्राम पंचायत): MAJIWALA |url=https://localbodydata.com/gram-panchayat-majiwala-34902 |access-date=2024-05-29 |website=localbodydata.com |archive-date=29 मई 2024 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240529031425/https://localbodydata.com/gram-panchayat-majiwala-34902 |url-status=dead }}</ref>
==मुख्य जानकारी==
*यह गाँव 2011 की जनगणना के अनुसार 5,882 की कुल जनसंख्या वाला है।
*गाँव के लोग मुख्य रूप से राजस्थानी, हिंदी और मारवाड़ी भाषा बोलते हैं।
*गाँव की पहचान उसके सांस्कृतिक और शैक्षिक प्रयासों से होती है, जिसमें आदर्श विद्या मंदिर जैसे स्कूल शामिल हैं।
*यह गाँव सामाजिक समरसता की मिसाल पेश करने के लिए भी जाना जाता है, जैसे कि कुछ परिवारों द्वारा 225 कन्याओं का पूजन किया जाना।
*माजीवाला को पहले बाड़मेर जिले का हिस्सा माना जाता था, लेकिन नए बालोतरा जिले के गठन के बाद यह अब उस जिले में आता है।
==इन्हे भी देखे==
*[[टापरा]]
*[[कालुडी]]
*[[सराणा]]
*[[पादरू]]
*[[तिरसिंगड़ी सोढ़ा]]
*[[डंडाली]]
*[[चांदेसरा]]
*[[सरवड़ी पुरोहितान]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:बाड़मेर ज़िले के गाँव]]
[[श्रेणी:राजस्थान की तहसीलें]]
oy43mh1osax67j4d59l2athw6j36mnm
6591444
6591432
2026-07-24T02:46:27Z
Dsrprj
780832
/* */ Cr
6591444
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox settlement
|name = माजीवाला
|other_name = Majivala
| settlement_type = [[गाँव]]
| image_skyline = Majivala.jpg
| image_alt =
|subdivision_type = |subdivision_name = {{IND}}
|subdivision_type1 = [[भारत के राज्य|राज्य]] |subdivision_name1 = [[राजस्थान]]
|subdivision_type2 = [[भारत के ज़िले|ज़िला]] |subdivision_name2 = [[बालोतरा ज़िला]]
|subdivision_type3 = [[तहसील]] |subdivision_name3 = [[पचपदरा]]
|elevation_m =
|population_total = 5882
|population_as_of = 2011
|demographics_type1 = भाषा
|demographics1_title1= प्रचलित
|demographics1_info1= [[राजस्थानी भाषा|राजस्थानी]], [[हिन्दी]],[[मारवाड़ी]]
|timezone1 = [[भारतीय मानक समय]] |utc_offset1 = +5:30
}}
माजीवाला गाँव राजस्थान के [[बालोतरा]] जिले की [[पचपदरा]] तहसील में है। 2011 की भारत की जनगणना के अनुसार, गाँव की कुल जनसंख्या 5882 है। <ref>{{Cite web |title=Manjiwala Village Population - Pachpadra - Barmer, Rajasthan |url=https://www.census2011.co.in/data/village/87335-manjiwala-rajasthan.html#google_vignette |access-date=2024-05-28 |website=www.census2011.co.in}}</ref><ref>{{Cite web |title=Gram Panchayat (ग्राम पंचायत): MAJIWALA |url=https://localbodydata.com/gram-panchayat-majiwala-34902 |access-date=2024-05-29 |website=localbodydata.com |archive-date=29 मई 2024 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240529031425/https://localbodydata.com/gram-panchayat-majiwala-34902 |url-status=dead }}</ref>
==मुख्य जानकारी==
*यह गाँव 2011 की जनगणना के अनुसार 5,882 की कुल जनसंख्या वाला है।
*गाँव के लोग मुख्य रूप से राजस्थानी, हिंदी और मारवाड़ी भाषा बोलते हैं।
*गाँव की पहचान उसके सांस्कृतिक और शैक्षिक प्रयासों से होती है, जिसमें आदर्श विद्या मंदिर जैसे स्कूल शामिल हैं।
*यह गाँव सामाजिक समरसता की मिसाल पेश करने के लिए भी जाना जाता है, जैसे कि कुछ परिवारों द्वारा 225 कन्याओं का पूजन किया जाना।
*माजीवाला को पहले बाड़मेर जिले का हिस्सा माना जाता था, लेकिन नए बालोतरा जिले के गठन के बाद यह अब उस जिले में आता है।
==इन्हे भी देखे==
*[[टापरा]]
*[[कालुडी]]
*[[सराणा]]
*[[पादरू]]
*[[तिरसिंगड़ी सोढ़ा]]
*[[डंडाली]]
*[[चांदेसरा]]
*[[सरवड़ी पुरोहितान]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:बाड़मेर ज़िले के गाँव]]
[[श्रेणी:राजस्थान की तहसीलें]]
n6xcpt5rcey99wsdf1zlnvyy5m5kpjq
गेम चेंजर (फ़िल्म)
0
1539497
6591385
6546682
2026-07-23T22:24:31Z
InternetArchiveBot
500600
Rescuing 2 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5
6591385
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox film
| name = गेम चेंजर
| image = Game Changer Telugu.jpg
| caption = फिल्म रिलीज पोस्टर
| director = [[एस॰ शंकर]]
| screenplay = [[एस॰ शंकर]]<br />एस वेंकटेशन {{infobox | decat=yes | child=yes
| label1 = संवाद
| data1 =साईं माधव बुर्रा
}}
| story = [[कार्तिक सुब्बाराज]]
| based_on =
| producer = {{Ubl|[[दिल राजू]]|शिरीस}}
| starring = {{plainlist|
*[[राम चरण]]
*[[कियारा आडवाणी]]
*अंजलि
*[[समुथिरकानी]]
*एस.जे. सूर्या
*श्रीकांत
*सुनील
}}
| cinematography = तिरु<br />आर. रत्नावेलु
| editing = शमीर मुहम्मद<br>रूबेन
| music = [[थमन एस]]
| studio = श्री वेंकटेश्वर क्रिएशन्स
| distributor = एसवीसी आदित्यराम मूवीज़ ([[तमिलनाडु]])<br />एए फिल्म्स ([[उत्तर भारत]])<br>ई4 एंटरटेनमेंट ([[केरल]])<br>होम्बले फिल्म्स<br>शॉइंग बिजनेस ([[कर्नाटक]])<br>फार्स फिल्म (विदेश)
| released = {{Film date|df=yes|2025|1|10|}}
| country = भारत
| language = तेलुगू
| budget = अनुमानित {{INR}}250-300 करोड़<ref>{{Cite news|date=2024-12-23|title=Game Changer: A Big Burden Of Rs 300 Cr|url=https://www.greatandhra.com/movies/news/game-changer-a-big-burden-of-rs-300-cr-142934|access-date=2024-12-23|work=greatandhra|issn=0971-8257|archive-date=26 दिसंबर 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20241226104351/https://www.greatandhra.com/movies/news/game-changer-a-big-burden-of-rs-300-cr-142934|url-status=dead}}</ref>
| gross =
}}'''गेम चेंजर''' तेलुगु-भाषा की एक्शन थ्रिलर फिल्म है। इसका निर्देशन [[शंकर (निर्देशक)|एस. शंकर]] ने किया है और इसका निर्माण श्री वेंकटेश्वर क्रिएशंस ने किया है।<ref name="The Times of India">{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/ram-charan-will-team-up-with-director-shankar-confirms-sri-venkateswara-creations/articleshow/80881434.cms#_ga=2.215433876.2060186968.1710793881-LQNXMhjK8d84y4_YsWJOVB9pI-86vAdpFjSr-EBbL8KxMz5y_rO_TnkN3DEGPgIX|title=Ram Charan will team up with director Shankar, confirms Sri Venkateswara Creations|date=2021-02-12|work=The Times of India|access-date=2024-03-19|archive-url=https://web.archive.org/web/20240319193919/https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/ram-charan-will-team-up-with-director-shankar-confirms-sri-venkateswara-creations/articleshow/80881434.cms#_ga=2.215433876.2060186968.1710793881-LQNXMhjK8d84y4_YsWJOVB9pI-86vAdpFjSr-EBbL8KxMz5y_rO_TnkN3DEGPgIX|archive-date=19 March 2024|issn=0971-8257|url-status=live}}</ref> फिल्म में [[राम चरण]] ने तीन भूमिकाएँ निभाई हैं। इसमें [[कियारा आडवाणी]], [[अंजलि]], [[एस जे सूर्या]], [[श्रीकांत (तेलुगु अभिनेता)|श्रीकांत]], [[जयराम]], [[इंदुकुरी सुनील वर्मा|सुनील]], [[समुथिरकानी]] और [[नास्सर]] जैसे कलाकार शामिल हैं। यह फ़िल्म तेलुगू, तमिल, [https://marwadikhabar.in/tag/game-changer हिन्दी] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20250115143941/https://marwadikhabar.in/tag/game-changer/ |date=15 जनवरी 2025 }}, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में रिलीज़ हुई है।
इस फिल्म का नाम शुरू में "आरसी15" रखा गया था क्योंकि यह चरण की 15वीं फिल्म थी। बाद में इसका नाम "गेम चेंजर" रखा गया। फिल्म की शूटिंग अक्टूबर 2021 में शुरू हुई और जुलाई 2024 में खत्म हुई। फिल्म की शूटिंग भारत के कई शहरों के अलावा न्यूजीलैंड में भी हुई। फिल्म का संगीत [[थमन एस]] ने दिया है और इसे तिरु ने फिल्माया है। "गेम चेंजर" फिल्म 10 जनवरी 2025 को रिलीज़ हुई है। आप इसे विभिन्न प्रारूपों जैसे कि [[आईमैक्स|आईमैक्स (IMAX)]] और 4DX में देख सकते हैं।
== प्रस्तावना ==
राम नंदन एक ईमानदार सरकारी अफ़सर हैं जो भ्रष्टाचार मिटाना चाहते हैं। वो चुनावों को निष्पक्ष बनाने की कोशिश करते हैं ताकि बुरे नेता जीत न सकें। इसी दौरान उन्हें पता चलता है कि उनके पिता अप्पन्ना भी अपने गाँव से पानी चुराने वाले ताकतवर लोगों के ख़िलाफ़ लड़ रहे थे। यह कहानी है कि कैसे राम नंदन अपने पिता की लड़ाई को आगे बढ़ाते हैं और अपने गाँव को बचाते हैं। यह एक रोमांचक कहानी है जिसमें बहुत सारा एक्शन और सस्पेंस है।<ref name="indiatoday.in">{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/not-shankar-but-karthik-subbaraj-wrote-the-story-of-ram-charan-s-rc-15-read-details-1910804-2022-02-09|title=Not Shankar, but Karthik Subbaraj wrote the story of Ram Charan's RC 15. Read details|date=9 February 2022|website=India Today|archive-url=https://web.archive.org/web/20230620162737/https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/not-shankar-but-karthik-subbaraj-wrote-the-story-of-ram-charan-s-rc-15-read-details-1910804-2022-02-09|archive-date=20 June 2023|access-date=20 June 2023|url-status=live}}</ref> क्या आप जानना चाहते है कि गेम चेंजर फिल्म ने अपने ग्यारह दिनों के भीतर कितने पैसे कमाए [https://storypadhoo.com/game-changer-movie-box-office-collection-day-11/ बॉक्स ऑफिस कलेक्शन रिपोर्ट]<ref>{{Cite web|url=https://storypadhoo.com/game-changer-movie-box-office-collection-day-11/|title=Game Changer Movie Box Office collection Day 11: 297 करोड़ पर ठहरी कमाई - Story padhoo|date=2025-01-20|language=en-US|access-date=2025-01-20}}</ref>
== पात्र ==
{{Cast listing|* [[राम चरण]] में दोहरी भूमिका के रूप में
** राम नंदन [[भारतीय प्रशासनिक सेवा|आईएएस]]
** अप्पन्ना, राम के पिता
* एस. जे. सूर्या कोरीवली राजमूर्ति के रूप में
* [[कियारा आडवाणी]] जाबिलम्मा के रूप में, राम की प्रेमिका
* अंजलि - राम की मां और अप्पन्ना की पत्नी के रूप में
* सुशांत
* [[समुथिरकानी]]
* श्रीकांत - बोब्बिली सत्यमूर्ति के रूप में
* सुनील
* नासर
* सुभलेखा सुधाकर
*[[प्रकाश राज]]
*[[जयराम]]
* प्रवीना
* नवीन चंद्र
* विश्ववंत दुद्दुमपुडी
* [[मुरली शर्मा]]
* हरीश उथमन
* राजीव कनकला
* प्रियदर्शी पुलिकोंडा राम के मित्र के रूप में
* चैतन्य कृष्ण राम के मित्र के रूप में
* अच्युत कुमार
* राम के मित्र के रूप में वेंकटेश काकुमनु}}
== प्रोडक्शन ==
=== डेवेलपमेंट ===
30 सितंबर 2017 को यह घोषणा की गई थी कि दिल राजू, कमल हासन अभिनीत शंकर की फिल्म "इंडियन 2" का निर्माण करेंगे। लेकिन अगले ही महीने स्टूडियो ने बढ़ती लागत के कारण पीछे हट गए और शंकर और दिल राजू ने एक और प्रोजेक्ट पर साथ काम करने की योजना बनाई जो बाद में "गेम चेंजर" बना।
फरवरी 2021 की शुरुआत में, यह बताया गया कि एस शंकर और राम चरण एक फिल्म के लिए साथ काम करेंगे, जिसकी शूटिंग तेलुगु और तमिल भाषाओं में एक साथ होगी। इस प्रोजेक्ट को दिल राजू और सिरिश के श्री वेंकटेश्वर क्रिएशन्स ने फंड किया, जो शंकर और चरण के साथ उनका पहला सहयोग था। 12 फरवरी को इसकी आधिकारिक घोषणा की गई, जिसका वर्किंग टाइटल RC15 (क्योंकि यह चरण की मुख्य अभिनेता के रूप में 15वीं फिल्म है) और SVC50 था। 27 मार्च 2023 को चरण के जन्मदिन पर फिल्म का आधिकारिक शीर्षक, "गेम चेंजर" घोषित किया गया।
शंकर ने शुरुआत में प्रोडक्शन की लागत ₹250 करोड़ आंकी थी। हालांकि, जुलाई 2024 तक, रिपोर्टों ने संकेत दिया कि बजट बढ़कर ₹500 करोड़ हो गया है, हालांकि उसी महीने टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसे ₹200 करोड़ आंका।{{INRConvert|200|c}}.<ref name="The Times of India"/><ref name="DCb">{{Cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/entertainment/tollywood/game-changer-budget-escalates-set-to-touch-rs-400-cr-881121|title=Game Changer budget escalates, set to touch Rs 400 cr|last=Prakash|first=B. V. S.|date=2024-02-05|website=Deccan Chronicle|language=en|access-date=2024-10-23}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/ram-charan-to-team-up-with-director-shankar-for-a-historical-drama/articleshow/80876183.cms|title=Ram Charan to team up with director Shankar for a historical drama?|date=2021-02-12|work=The Times of India|access-date=2024-03-19|archive-url=https://web.archive.org/web/20240319193854/https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/ram-charan-to-team-up-with-director-shankar-for-a-historical-drama/articleshow/80876183.cms|archive-date=19 March 2024|issn=0971-8257|url-status=live}}</ref><ref name="ToIb">{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/ram-charans-game-changer-what-fans-can-expect/articleshow/111718624.cms|title=Ram Charan's 'Game Changer': What fans can expect|date=2024-07-13|work=The Times of India|access-date=2024-10-23|issn=0971-8257}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/telugu-cinema/ram-charan-announces-his-film-rc-15-is-titled-game-changer-kiara-advani-wishes-her-dearest-friend-on-38th-birthday-101679896547835.html|title=Ram Charan announces his film RC 15 is titled Game Changer; Kiara Advani wishes her 'dearest friend' on 38th birthday|date=27 March 2023|website=Hindustan Times|archive-url=https://web.archive.org/web/20230327100612/https://www.hindustantimes.com/entertainment/telugu-cinema/ram-charan-announces-his-film-rc-15-is-titled-game-changer-kiara-advani-wishes-her-dearest-friend-on-38th-birthday-101679896547835.html|archive-date=27 March 2023|access-date=27 March 2023|url-status=live}}</ref>
=== प्रि-प्रोडक्शन ===
फिल्म की कहानी कार्तिक सुब्बाराज ने लिखी है, जबकि शंकर ने पटकथा लिखी है और साई माधव बुर्रा ने संवाद लिखे हैं।<ref name="indiatoday.in"/> तिरु छायाकार हैं, जो शंकर के साथ पहली बार काम कर रहे हैं।<ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/tamil/movies/news/ram-charan-shankars-rc15-to-be-wrapped-up-by-december/articleshow/92724557.cms|title=Ram Charan & Shankar's 'RC15' to be wrapped up by December|date=7 July 2022|website=[[The Times of India]]|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20220711223732/https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/tamil/movies/news/ram-charan-shankars-rc15-to-be-wrapped-up-by-december/articleshow/92724557.cms|archive-date=11 July 2022|access-date=12 September 2022|url-status=live}}</ref> फिल्म की बाकी तकनीकी टीम में संपादक शमीर मुहम्मद, एक्शन कोरियोग्राफर जोड़ी अनबरीव और कला निर्देशक अविनाश कोल्ला शामिल हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.dtnext.in/cinema/2022/04/24/tirru-still-the-dop-of-rc15-to-rejoin-the-team-soon|title=Tirru, still the DoP of RC15, to rejoin the team soon|last=Rajaraman|first=Kaushik|date=24 April 2022|website=DT next|archive-url=https://web.archive.org/web/20230327100950/https://www.dtnext.in/cinema/2022/04/24/tirru-still-the-dop-of-rc15-to-rejoin-the-team-soon|archive-date=27 March 2023|access-date=27 March 2023|url-status=live}}</ref> थमन एस संगीत निर्देशक के रूप में शंकर के साथ अपने पहले सहयोग में संगीत देंगे।<ref name="auto">{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/tamil/movies/news/shameer-muhammed-in-shankars-rc15-with-ram-charan/articleshow/88385459.cms|title=Shameer Muhammed in Shankar's RC15 with Ram Charan|date=20 December 2021|website=[[The Times of India]]|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20220912101027/https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/tamil/movies/news/shameer-muhammed-in-shankars-rc15-with-ram-charan/articleshow/88385459.cms|archive-date=12 September 2022|access-date=12 September 2022|url-status=live}}</ref> फिल्म के नृत्य निर्देशकों में प्रभु देवा, जानी मास्टर, प्रेम रक्षित, बॉस्को मार्टिस, गणेश आचार्य और सैंडी मास्टर शामिल हैं।<ref name=":4">{{Cite web|url=https://www.thenewsminute.com/article/ram-charan-s-new-film-titled-game-changer-175092|title=Ram Charan's new film titled Game Changer|date=27 March 2023|website=The News Minute|archive-url=https://web.archive.org/web/20230620165743/https://www.thenewsminute.com/article/ram-charan-s-new-film-titled-game-changer-175092|archive-date=20 June 2023|access-date=20 June 2023|url-status=live}}</ref><ref name=":4" />
=== कास्टिंग ===
शुरू में, शंकर चाहते थे कि पवन कल्याण मुख्य भूमिका निभाएँ लेकिन दिल राजू इस चुनाव को लेकर आशंकित थे और चरण को इस भूमिका के लिए अंतिम रूप दिया गया। चरण कथित तौर पर एक पिता और पुत्र के रूप में दोहरी भूमिका निभा रहे हैं। <ref>{{Cite web|url=https://www.cinemaexpress.com/telugu/news/2022/feb/22/ram-charan-plays-double-role-in-rc-15-29892.html|title=Ram Charan plays a double role in RC 15|date=22 February 2022|website=[[Cinema Express]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20220223092604/https://www.cinemaexpress.com/telugu/news/2022/feb/22/ram-charan-plays-double-role-in-rc-15-29892.html|archive-date=23 February 2022|access-date=11 April 2022|url-status=live}}</ref> जुलाई 2021 में यह घोषणा की गई थी कि कियारा आडवाणी को मुख्य अभिनेत्री के रूप में साइन किया गया है जो विनय विदेय राम के बाद चरण के साथ उनका दूसरा सहयोग है।<ref>{{cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/kiara-advani-to-share-screen-with-ram-charan-for-the-second-time-in-shankars-rc15/articleshow/84915077.cms|title=Kiara Advani to share screen with Ram Charan for the second time in Shankar's #RC15|newspaper=The Times of India|access-date=15 August 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20220815121701/https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/kiara-advani-to-share-screen-with-ram-charan-for-the-second-time-in-shankars-rc15/articleshow/84915077.cms|archive-date=15 August 2022|url-status=live}}</ref> अंजलि को एक महत्वपूर्ण भूमिका में लिया गया था, जबकि सुनील, श्रीकांत, जयराम और नवीन चंद्र सभी को फिल्म का हिस्सा बनने की पुष्टि की गई थी।<ref name=":0">{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/rc15-cast-and-crew-of-shankars-ram-charan-and-kiara-advani-starrer-revealed/articleshow/86028501.cms|title=#RC15 muhurtam pooja: Cast and crew of Shankar's Ram Charan and Kiara Advani starrer revealed|access-date=2021-12-11|archive-url=https://web.archive.org/web/20220510111854/https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/rc15-cast-and-crew-of-shankars-ram-charan-and-kiara-advani-starrer-revealed/articleshow/86028501.cms|archive-date=10 May 2022|language=en|url-status=live|website=The Times of India}}</ref> सितंबर 2022 में एस जे सूर्या को फिल्म का हिस्सा बनने की पुष्टि की गई थी।<ref name=":3">{{Cite web|url=https://www.news18.com/news/movies/sj-suryah-joins-shankar-ram-charans-rc15-remuneration-revealed-5929975.html|title=SJ Suryah Joins Shankar-Ram Charan's RC15, Remuneration Revealed|date=10 September 2022|website=[[News18]]|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20220912031753/https://www.news18.com/news/movies/sj-suryah-joins-shankar-ram-charans-rc15-remuneration-revealed-5929975.html|archive-date=12 September 2022|access-date=12 September 2022|url-status=live}}</ref>
=== फिल्मिंग ===
"[https://marwadikhabar.in/tag/game-changer गेम चेंजर] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20250115143941/https://marwadikhabar.in/tag/game-changer/ |date=15 जनवरी 2025 }}" की शूटिंग अक्टूबर 2021 में शुरू हुई और जुलाई 2024 में पूरी हुई।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/ram-charan-and-director-shankar-s-film-muhurat-today-ranveer-singh-rajamouli-to-grace-event-1850393-2021-09-08|title=Ram Charan, Shankar's film RC15 to launch today. Ranveer Singh, Rajamouli, Chiranjeevi to attend|last=K.|first=Janani|date=8 September 2021|website=India Today|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20220411065854/https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/ram-charan-and-director-shankar-s-film-muhurat-today-ranveer-singh-rajamouli-to-grace-event-1850393-2021-09-08|archive-date=11 April 2022|access-date=2022-04-11|url-status=live}}</ref> फिल्मांकन भारत के कई जगहों पर हुआ, जिसमें [[महाराष्ट्र]], आंध्र प्रदेश, पंजाब, हैदराबाद और विशाखापत्तनम शामिल हैं।<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/its-a-wrap-for-ram-charan-shankars-game-changer/article68380552.ece|title=It's a wrap for Ram Charan-Shankar's 'Game Changer'|date=2024-07-08|work=The Hindu|access-date=2024-07-14|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> कुछ हिस्सों की शूटिंग न्यूजीलैंड में भी हुई।<ref>{{Cite web|url=https://www.123telugu.com/mnews/latest-update-on-ram-charans-game-changer.html|title=Latest update on Ram Charan's Game Changer|date=31 December 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20231231155600/https://www.123telugu.com/mnews/latest-update-on-ram-charans-game-changer.html|archive-date=31 December 2023|access-date=31 December 2023|url-status=live}}</ref>
फिल्म में कई बड़े गाने और एक्शन सीक्वेंस हैं जिन पर काफ़ी पैसा खर्च हुआ। एक गाने में तो 1000 डांसर थे और एक एक्शन सीन में 1200 लड़ाके शामिल थे!<ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/news/movies/director-shankar-to-spend-rs-70-crore-for-7-minute-action-sequence-in-ram-charans-rc-15-4427234.html|title=Director Shankar to Spend Rs 70 Crore for 7-minute Action Sequence in Ram Charan's RC 15|date=2021-11-10|website=News18|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20220204152519/https://www.news18.com/news/movies/director-shankar-to-spend-rs-70-crore-for-7-minute-action-sequence-in-ram-charans-rc-15-4427234.html|archive-date=4 February 2022|access-date=2022-02-04|url-status=live}}</ref> जानी मास्टर और प्रभु देवा ने गानों को कोरियोग्राफ किया, जबकि एक्शन दृश्यों को अनबरीव और पीटर हेन ने निर्देशित किया।<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/shankar-and-ram-charans-rc15-launched-new-poster-released/article36355139.ece|title=Shankar and Ram Charan's 'RC15' launched, new poster released|last=The Hindu Net Desk|date=2021-09-08|work=The Hindu|access-date=2021-12-11|archive-url=https://web.archive.org/web/20211211022046/https://www.thehindu.com/entertainment/movies/shankar-and-ram-charans-rc15-launched-new-poster-released/article36355139.ece|archive-date=11 December 2021|language=en-IN|issn=0971-751X|url-status=live}}</ref><ref>{{cite news|url=https://telugu.hindustantimes.com/entertainment/game-changer-update-ramcharan-movie-climax-shoot-wrapped-up-121683683170681.html|title=Ram Charan Game Changer: రామ్చరణ్ ఫ్యాన్స్కు గుడ్న్యూస్ - గేమ్ఛేంజర్ సూపర్ అప్డేట్ రివీల్ చేసిన శంకర్|access-date=10 May 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230517091558/https://telugu.hindustantimes.com/entertainment/game-changer-update-ramcharan-movie-climax-shoot-wrapped-up-121683683170681.html|archive-date=17 May 2023|publisher=[[Hindustan Times Telugu]]|url-status=live}}</ref><ref name=":2">{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/tamil/movies/news/shankar-gears-up-to-resume-ram-charans-rc15-shooting/articleshow/93792699.cms|title=Shankar gears up to resume Ram Charan's 'RC15' shooting|date=26 August 2022|website=[[The Times of India]]|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20220912085433/https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/tamil/movies/news/shankar-gears-up-to-resume-ram-charans-rc15-shooting/articleshow/93792699.cms|archive-date=12 September 2022|access-date=12 September 2022|url-status=live}}</ref>
आर रत्नवेलु ने फिल्म के कुछ हिस्सों की शूटिंग की। शंकर ने इस फिल्म के साथ-साथ "इंडियन 2" की शूटिंग भी की।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/ram-charan-kiara-advani-wrap-up-first-schedule-of-shankar-s-rc15-1872946-2021-11-03|title=Ram Charan, Kiara Advani wrap up first schedule of Shankar's RC15|last=Srivastava|first=Samriddhi|date=3 November 2021|website=India Today|archive-url=https://web.archive.org/web/20220125083324/https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/ram-charan-kiara-advani-wrap-up-first-schedule-of-shankar-s-rc15-1872946-2021-11-03|archive-date=25 January 2022|access-date=25 January 2022|url-status=live}}</ref><ref name=":1">{{Cite web|url=https://www.pinkvilla.com/entertainment/exclusives/rc-15-exclusive-ram-charan-kiara-advani-shoot-song-1000-dancers-film-wrap-shankar-december-1155857|title=RC 15 EXCLUSIVE: Ram Charan & Kiara Advani shoot for song with 1000 dancers; Film wrap by Shankar in December|date=5 July 2022|website=[[Pinkvilla]]|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20220912084926/https://www.pinkvilla.com/entertainment/exclusives/rc-15-exclusive-ram-charan-kiara-advani-shoot-song-1000-dancers-film-wrap-shankar-december-1155857|archive-date=12 September 2022|access-date=12 September 2022|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/new-shooting-schedule-of-ram-charan-starrer-game-changer-out-8672166.html|title=New Shooting Schedule Of Ram Charan-starrer Game Changer Out|date=22 November 2023|website=News18|archive-url=https://web.archive.org/web/20231231161220/https://www.news18.com/movies/new-shooting-schedule-of-ram-charan-starrer-game-changer-out-8672166.html|archive-date=31 December 2023|access-date=31 December 2023|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.ottplay.com/news/ram-charans-game-changer-stage-set-for-a-high-octane-action-episode-latest-schedule-update-here/2ce45b254836|title=Ram Charan's Game Changer: Stage set for a high-octane action episode, latest schedule update here|website=OTTPlay|archive-url=https://web.archive.org/web/20231101173856/https://www.ottplay.com/news/ram-charans-game-changer-stage-set-for-a-high-octane-action-episode-latest-schedule-update-here/2ce45b254836|archive-date=1 November 2023|access-date=24 October 2023|url-status=live}}</ref>.
== संगीत ==
{{Infobox album|name=गेम चेंजर|type=साउंड ट्रेक|artist=[[थमन एस]]|released=2025|recorded=2021–2024|studio=* वाय आर एफ, [[मुम्बई]]
* स्टुडियो28, [[बैंकॉक]]|genre=फिल्म साउंडट्रैक|language=[[तेलुगू भाषा|तेलुगू]]|label=[[सारेगामा]]|length=TBA|producer=[[थमन एस]]|prev_title=[[बेबी जॉन]]|prev_year=2024|next_title=डाकू महाराज|next_year=2025|misc={{Singles
| name = गेम चेंजर
| type = soundtrack
| single1 = Jaragandi
| single1date = 27 March 2024
| single2 = Raa Macha Macha
| single2date = 30 September 2024
| single3 = NaaNaa Hyraanaa
| single3date = 28 November 2024
| single4 = Dhop
| single4date = 22 December 2024
}}}}फिल्म का साउंडट्रैक और स्कोर थमन एस ने कंपोज़ किया है, जो शंकर के साथ उनका पहला म्यूजिकल कोलैबोरेशन है। बॉयज़ (2003) में अपने अभिनय की शुरुआत करने के बाद, यह शंकर के साथ उनका दूसरा ओवरऑल कोलैबोरेशन भी है।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/tamil/music/music-director-thaman-joins-shankar-ramcharans-rc15/articleshow/84545217.cms|title=Music director Thaman joins Shankar-RamCharan's #RC15|access-date=2021-12-11|archive-url=https://web.archive.org/web/20211211020545/https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/tamil/music/music-director-thaman-joins-shankar-ramcharans-rc15/articleshow/84545217.cms|archive-date=11 December 2021|language=en|url-status=live|website=The Times of India}}</ref> यह चौथी बार भी है जब शंकर अपने नियमित सहयोगी, [[ए॰ आर॰ रहमान|ए आर रहमान]] के अलावा किसी अन्य संगीतकार के साथ काम कर रहे हैं।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/telugu/composer-thaman-on-board-for-ram-charan-director-shankar-rc15-7411677/|title=Composer Thaman is excited to be on board for 'brother' Ram Charan's RC15|date=19 July 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20230620162737/https://indianexpress.com/article/entertainment/telugu/composer-thaman-on-board-for-ram-charan-director-shankar-rc15-7411677/|archive-date=20 June 2023|access-date=20 June 2023|url-status=live}}</ref> थमन ने 135 संगीतकारों की मदद से 14-15 जुलाई 2021 को हैदराबाद में एक परिचय गीत तैयार और रिकॉर्ड किया। फिल्म के ऑडियो अधिकार सारेगामा ने हासिल कर लिए हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/saregama-secures-the-audio-rights-of-ram-charan-starrer-game-changer-8653719.html|title=Saregama Secures The Audio Rights Of Ram Charan-starrer Game Changer|date=8 November 2023|website=News18|archive-url=https://web.archive.org/web/20231108110103/https://www.news18.com/movies/saregama-secures-the-audio-rights-of-ram-charan-starrer-game-changer-8653719.html|archive-date=8 November 2023|access-date=8 November 2023|url-status=live}}</ref>
"जरगंडी" गाना सितंबर 2023 में ऑनलाइन लीक हो गया था, जिसे कथित तौर पर ₹15 करोड़ के बजट पर बनाया गया था।<ref>{{Cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/entertainment/tollywood/160923/ram-charan-movie-game-changer-song-leaked-makers-file-legal-action.html|title=Game Changer Song Made on Whopping Budget Leaked, Makers Furious|date=16 September 2023|website=Deccan Chronicle|archive-url=https://web.archive.org/web/20240102115622/https://www.deccanchronicle.com/entertainment/tollywood/160923/ram-charan-movie-game-changer-song-leaked-makers-file-legal-action.html|archive-date=2 January 2024|access-date=2 January 2024|url-status=live}}</ref> बाद में, निर्माताओं ने दिवाली 2023 पर पहले सिंगल के रूप में गाने को रिलीज़ करने की घोषणा की।<ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/game-changer-first-track-jaragandi-from-ram-charan-kiara-advani-starrer-to-be-out-on-this-date/articleshow/104670371.cms|title='Game Changer': First track 'Jaragandi' from Ram Charan-Kiara Advani starrer to be out on this date|date=24 October 2023|website=The Times of India|archive-url=https://web.archive.org/web/20240102114119/https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/game-changer-first-track-jaragandi-from-ram-charan-kiara-advani-starrer-to-be-out-on-this-date/articleshow/104670371.cms|archive-date=2 January 2024|access-date=2 January 2024|url-status=live}}</ref> हालांकि, दर्शकों की अत्यधिक नकारात्मक प्रतिक्रिया ने थमन को गायकों को बदलने के लिए प्रेरित किया, जिससे गाने की आधिकारिक रिलीज़ में देरी हुई।<ref>{{Cite web|url=https://tracktollywood.com/thaman-unsatisfied-with-game-changer-1st-single/|title=Thaman unsatisfied with Game Changer 1st single|date=11 November 2023|website=TrackTollywood|archive-url=https://web.archive.org/web/20240102114418/https://tracktollywood.com/thaman-unsatisfied-with-game-changer-1st-single/|archive-date=2 January 2024|access-date=2 January 2024|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.indiaherald.com/Movies/Read/994648036/Reason-behind-the-postponement-of-the-Game-Changer-song|title=Reason Reason behind the postponement of the "Game Changer" song?|website=India Herald|archive-url=https://web.archive.org/web/20240102114132/https://www.indiaherald.com/Movies/Read/994648036/Reason-behind-the-postponement-of-the-Game-Changer-song|archive-date=2 January 2024|access-date=2 January 2024|url-status=live}}</ref> यह 27 मार्च 2024 को चरण के 39वें जन्मदिन पर रिलीज़ हुआ, जिसे मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली, जिसमें इसकी रचना की आलोचना की गई, लेकिन इसके दृश्यों और निर्माण के लिए प्रशंसा मिली।<ref>{{Cite web|url=https://www.ottplay.com/news/ram-charans-birthday-from-mixed-response-for-jaragandi-to-key-updates-on-his-next-films-the-global-star-had-an-eventual-day/05de37d624262|title=Ram Charan's birthday - From mixed response for Jaragandi to key updates on his next films, the global star had an eventual day|website=OTTPlay|access-date=28 March 2024}}</ref>
"रा माचा माचा" शीर्षक वाला दूसरा सिंगल 30 सितंबर 2024 को रिलीज़ हुआ, जिसे आलोचकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली, जिसमें इसकी रचना और गीतों की आलोचना की गई, इसे "पुराना और साधारण" कहा गया, लेकिन इसके दृश्यों और निर्माण के लिए प्रशंसा मिली।<ref>{{cite web|url=https://www.pinkvilla.com/entertainment/south/game-changer-song-raa-macha-macha-out-ram-charans-dance-steps-and-thamans-music-in-the-folk-style-number-are-a-banger-1351141|title=Game Changer song Raa Macha Macha OUT: Ram Charan's dance steps and Thaman's music in the folk-style number are a banger|website=[[Pinkvilla]]|access-date=30 September 2024|archive-date=30 सितंबर 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240930112256/https://www.pinkvilla.com/entertainment/south/game-changer-song-raa-macha-macha-out-ram-charans-dance-steps-and-thamans-music-in-the-folk-style-number-are-a-banger-1351141|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.greatandhra.com/movies/news/game-changers-ra-macha-macha-outdated-and-ordinary-140910|title=Game Changer's 'Ra Macha Macha': Outdated and Ordinary|website=greatandhra.com|access-date=30 September 2024|archive-date=30 सितंबर 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240930173234/https://www.greatandhra.com/movies/news/game-changers-ra-macha-macha-outdated-and-ordinary-140910|url-status=dead}}</ref> तीसरा सिंगल ना ना हायराना 28 नवंबर 2024 को रिलीज़ हुआ। <ref>{{Cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/entertainment/global-star-ram-charan-dil-raju-shankars-game-changer-third-single-to-release-on-november-28-1840826|title=Ram Charan's Game Changer Third Single Release Date Locked|publisher=Deccan Chronicle|access-date=24 November 2024}}</ref>"धोप" शीर्षक वाला चौथा सिंगल 22 दिसंबर 2024 को रिलीज़ हुआ। It {{track listing
| all_writing =
| extra_column = गायक
| title1 = जरागांडी
| lyrics1 = अनंत श्रीराम
| extra1 = [[दलेर मेंहदी]], [[सुनिधि चौहान]]
| length1 = 4:20
| title2 = रा माचा माचा
| lyrics2 = अनंत श्रीराम
| extra2 = [[नकाश अज़ीज़]]
| title3 = नाना हयाना
| length2 = 4:43
| lyrics3 = रामजोगय्या शास्त्री
| extra3 = [[कार्तिक]], [[श्रेया घोषाल]]
| length3 = 4:41
| title4 = धोप
| length4 = 4:51
| lyrics4 = रामजोगय्या शास्त्री
| extra4 = [[थमन एस]], रोशिनी, पृथ्वी चंद्रा, श्रुति रंजनी मोडुमुदी
}}
== रिलीज़ ==
=== सिनेमाघर ===
"गेम चेंजर" 10 जनवरी 2025.
को संक्रांति के मौके पर रिलीज़ हुई है।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/ram-charan-kiara-advanis-game-changer-release-date-postponed-2615724-2024-10-12|title=Ram Charan's Game Changer to release in January, replaces Chiranjeevi's Vishwambhara|date=12 October 2024|website=India Today}}</ref> पहले, फिल्म को क्रिसमस 2024 पर रिलीज़ करने की घोषणा की गई थी, लेकिन पोस्ट-प्रोडक्शन का काम पूरा नहीं होने के कारण इसे स्थगित कर दिया गया।<ref>{{Cite web|url=https://www.pinkvilla.com/entertainment/south/watch-ram-charans-game-changer-aims-for-christmas-release-confirms-producer-dil-raju-1330692|title=WATCH: Ram Charan's Game Changer aims for Christmas release, confirms producer Dil Raju|website=Pinkvilla|access-date=22 July 2024}}</ref><ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/tamil/movies/news/shankar-ram-charans-game-changer-to-release-postponed/articleshow/114171328.cms|title=Shankar & Ram Charan's 'Game Changer' to release postponed|website=Times of India|access-date=12 October 2024}}</ref>
=== वितरण ===
फिल्म के तमिल डब संस्करण को आदित्यराम मूवीज के तहत आदित्यराम द्वारा वितरित किया जा रहा है। <ref>{{Cite web|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/game-changer-ram-charan-shankar-movie-becomes-first-ever-indian-film-to-host-a-pre-release-event-in-the-usa/article68901922.ece#:~:text=Produced%20by%20Dil%20Raju%20and%20Shirish%20under%20the%20banners%20Sri,other%20actors%20in%20the%20movie.|title=‘Game Changer’: Ram Charan-Shankar movie becomes first ever Indian film to host a pre-release event in the USA|date=23 November 2024|website=The Hindu Bureau|language=en|access-date=23 November 2024}}</ref> एए फिल्म्स के अनिल थडानी ने उत्तर भारत के लिए डब किए गए हिंदी संस्करण के वितरण अधिकार हासिल कर लिए हैं।<ref>{{cite web|url=https://variety.com/2024/film/news/allu-arjun-pushpa-2-ram-charan-game-changer-prabhas-kalki-ntr-jr-devara-india-distribution-1235972328/|title=Allu Arjun's 'Pushpa 2,' Ram Charan's 'Game Changer,' Prabhas' 'Kalki,' NTR Jr's 'Devara' Snapped Up for India Distribution by AA Films (EXCLUSIVE)|date=16 April 2024|publisher=[[Variety (magazine)|Variety]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20240418185020/https://variety.com/2024/film/news/allu-arjun-pushpa-2-ram-charan-game-changer-prabhas-kalki-ntr-jr-devara-india-distribution-1235972328/|archive-date=18 April 2024|access-date=19 April 2024|url-status=live}}</ref>
=== होम मीडिया ===
फिल्म के डिजिटल वितरण अधिकार अमेज़न प्राइम वीडियो ने ₹105 करोड़ में हासिल कर लिए हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.zoomtventertainment.com/south/ram-charans-game-changer-digital-rights-sold-to-amazon-prime-video-for-whopping-rs-105-crore-report-article-108684153|title=Ram Charan's Game Changer Digital Rights Sold To Amazon Prime Video For Whopping Rs 105 Crore: Report|date=21 March 2024|website=zoomtventertainment|language=en|access-date=21 March 2024}}</ref> प्रसारण अधिकार ज़ी तेलुगु को अच्छी खासी कीमत पर बेचे गए।
== References ==
{{Reflist}}
== External links ==
* {{IMDb title|14209618}}
[[श्रेणी:तेलुगू फ़िल्में]]
[[श्रेणी:2024 की फ़िल्में]]
kgzclfp6v3suyw9e51hplovxb6lm2u9
मॉड्यूल:Params
828
1546767
6591336
6583775
2026-07-23T13:34:30Z
Grufo
932013
Update from [[d:Special:GoToLinkedPage/mediawikiwiki/Q122696746|master]] using [[mw:Synchronizer| #Synchronizer]]
6591336
Scribunto
text/plain
require[[strict]]
--- ---
--- PRIVATE ENVIRONMENT ---
--- ________________________________ ---
--- ---
--[[ Abstract utilities ]]--
----------------------------
-- Helper function for `string.gsub()` (for managing zero-padded numbers)
local function zero_padded (str)
return ('%03d%s'):format(#str, str)
end
-- Helper function for `table.sort()` (for natural sorting)
local function natural_sort (var1, var2)
return var1:gsub('%d+', zero_padded) < var2:gsub('%d+', zero_padded)
end
-- Return a copy or a reference to a table
local function copy_or_ref_table (src, refonly)
if refonly then return src end
local newtab = {}
for key, val in pairs(src) do newtab[key] = val end
return newtab
end
-- Copy at most N items (of all kinds) from `src` to `dest` and return `dest`
local function copy_table_maxn (dest, src, len)
local idx = 1
for key, val in pairs(src) do
dest[key], idx = val, idx + 1
if idx > len then break end
end
return dest
end
-- Remove some numeric elements from a table, shifting everything to the left
local function remove_numeric_keys (tbl, idx, len)
local cache, tmp = {}, idx + len - 1
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' and key >= idx then
if key > tmp then cache[key - len] = val end
tbl[key] = nil
end
end
for key, val in pairs(cache) do tbl[key] = val end
end
-- Make a reduced copy of a table (shifting in both directions if necessary)
local function copy_table_reduced (tbl, idx, len)
local ret, tmp = {}, idx + len - 1
if idx > 0 then
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) ~= 'number' or key < idx then
ret[key] = val
elseif key > tmp then ret[key - len] = val end
end
elseif tmp > 0 then
local nshift = 1 - idx
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) ~= 'number' then ret[key] = val
elseif key > tmp then ret[key - tmp] = val
elseif key < idx then ret[key + nshift] = val end
end
else
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) ~= 'number' or key > tmp then
ret[key] = val
elseif key < idx then ret[key + len] = val end
end
end
return ret
end
-- Make an expanded copy of a table (shifting in both directions if necessary)
local function copy_table_expanded (tbl, idx, len)
local ret, tmp = {}, idx + len - 1
if idx > 0 then
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) ~= 'number' or key < idx then
ret[key] = val
else ret[key + len] = val end
end
elseif tmp > 0 then
local nshift = idx - 1
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) ~= 'number' then ret[key] = val
elseif key > 0 then ret[key + tmp] = val
elseif key < 1 then ret[key + nshift] = val end
end
else
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) ~= 'number' or key > tmp then
ret[key] = val
else ret[key - len] = val end
end
end
return ret
end
-- Given a table, create two new tables containing the sorted list of keys
local function get_key_list_sorted (tbl, sort_fn)
local nums, words, nn, nw = {}, {}, 0, 0
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' then
nn = nn + 1
nums[nn] = key
else
nw = nw + 1
words[nw] = key
end
end
table.sort(nums)
table.sort(words, sort_fn)
return nums, words, nn, nw
end
-- Parse a parameter name string and return it as a string or a number
local function get_parameter_name (par_str)
local ret = par_str:match'^%s*(.-)%s*$'
if ret ~= '0' and ret:find'^%-?[1-9]%d*$' == nil then return ret end
return tonumber(ret)
end
-- Move a key from a table to another, but only if under a different name and
-- always parsing numeric strings as numbers
local function steal_if_renamed (val, src, skey, dest, dkey)
local realkey = get_parameter_name(dkey)
if skey ~= realkey then dest[realkey], src[skey] = val, nil end
end
--[[ Public strings ]]--
------------------------
-- Special match keywords (functions and modifiers MUST avoid these names)
local mkeywords = {
['or'] = 0,
pattern = 1,
plain = 2,
strict = 3
}
-- Sort functions (functions and modifiers MUST avoid these names)
local sortfunctions = {
alphabetically = false,
naturally = natural_sort
}
-- Callback styles for the `mapping_*` and `renaming_*` class of modifiers
-- (functions and modifiers MUST avoid these names)
--[[
Meanings of the columns:
col[1] = Loop type (0-3)
col[2] = Number of module arguments that the style requires (1-3)
col[3] = Minimum number of sequential parameters passed to the callback
col[4] = Name of the callback parameter where to place each parameter name
col[5] = Name of the callback parameter where to place each parameter value
col[6] = Argument in the modifier's invocation that will override `col[4]`
col[7] = Argument in the modifier's invocation that will override `col[5]`
A value of `-1` indicates that no meaningful value is stored (i.e. `nil`)
]]--
local mapping_styles = {
names_and_values = { 3, 2, 2, 1, 2, -1, -1 },
values_and_names = { 3, 2, 2, 2, 1, -1, -1 },
values_only = { 1, 2, 1, -1, 1, -1, -1 },
names_only = { 2, 2, 1, 1, -1, -1, -1 },
names_and_values_as = { 3, 4, 0, -1, -1, 2, 3 },
names_only_as = { 2, 3, 0, -1, -1, 2, -1 },
values_only_as = { 1, 3, 0, -1, -1, -1, 2 },
blindly = { 0, 2, 0, -1, -1, -1, -1 }
}
-- Memory slots (functions and modifiers MUST avoid these names)
local memoryslots = {
h = 'header',
f = 'footer',
i = 'itersep',
l = 'lastsep',
n = 'ifngiven',
p = 'pairsep',
s = 'oxfordsep'
}
-- Possible trimming modes for the `parsing` modifier
local trim_parse_opts = {
trim_none = { false, false },
trim_positional = { false, true },
trim_named = { true, false },
trim_all = { true, true }
}
-- Possible string modes for the iteration separator in the `parsing` and
-- `reinterpreting` modifiers
local isep_parse_opts = {
splitter_pattern = false,
splitter_string = true
}
-- Possible string modes for the key-value separator in the `parsing` and
-- `reinterpreting` modifiers
local psep_parse_opts = {
setter_pattern = false,
setter_string = true
}
-- Possible position references for the `splicing` modifier
local position_references = {
add_nothing = 0,
add_smallest_number = 1,
add_last_of_sequence = 2,
add_largest_number = 3
}
-- Possible modes for the `reassigning` modifier
local a_modes = {
transfer = 0,
clone = 1,
rename = 2,
copy = 3,
sacrifice = 4,
provide = 5,
spare = 7
}
-- Functions and modifiers MUST avoid these names too: `here`, `in_substack`,
-- `let`, `expose`, `use`, `with_flushed_glue`, `without_flushed_glue`
-- `without_sorting`
--[[ Private constants ]]--
---------------------------
-- Hard-coded name of the module (to avoid going through `frame:getTitle()`)
local modulename = 'Module:Params'
-- The functions listed here declare that they don't need the `frame.args`
-- metatable to be copied into a regular table; if they are modifiers they also
-- guarantee that they will make their own (modified) copy available
local refpipe = {
call_for_each_group = true,
--coins = true,
count = true,
evaluating = true,
for_each = true,
list = true,
list_values = true,
list_maybe_with_names = true,
value_of = true
}
-- The functions listed here declare that they don't need the
-- `frame:getParent().args` metatable to be copied into a regular table; if
-- they are modifiers they also guarantee that they will make their own
-- (modified) copy available
local refparams = {
call_for_each_group = true,
combining = true,
combining_by_calling = true,
combining_values = true,
concat_and_call = true,
concat_and_invoke = true,
concat_and_magic = true,
count = true,
grouping_by_calling = true,
mixing_names_and_values = true,
keeping_at_most = true,
renaming_by_mixing = true,
renaming_to_sequence = true,
renaming_to_uppercase = true,
renaming_to_lowercase = true,
--renaming_to_values = true,
shifting = true,
splicing = true,
--swapping_names_and_values = true,
value_of = true,
with_name_matching = true
}
-- Maximum number of numeric parameters that can be filled, if missing (we
-- chose an arbitrary number for this constant; you can discuss about its
-- optimal value at Module talk:Params)
local maxfill = 1024
-- The private table of functions
local library = {}
-- Functions and modifiers that can only be invoked in first position
local static_iface = {}
--[[ Private functions ]]--
---------------------------
-- Create a new context
local function context_new (child_frame)
local main_frame = child_frame:getParent()
return {
frame = main_frame,
opipe = child_frame.args,
oparams = main_frame.args,
firstposonly = static_iface,
iterfunc = pairs,
sorttype = 0,
n_parents = 0,
n_children = 0,
n_available = maxfill
}
end
-- Move to the next action within the user-given list
local function context_iterate (ctx, n_forward)
local nextfn
if ctx.pipe[n_forward] ~= nil then
nextfn = ctx.pipe[n_forward]:match'^%s*(.*%S)'
end
if nextfn == nil then error(modulename ..
': You must specify a function to call', 0) end
if library[nextfn] == nil then
if ctx.firstposonly[nextfn] == nil then error(modulename ..
': The function ‘' .. nextfn .. '’ does not exist', 0)
else error(modulename .. ': The ‘' .. nextfn ..
'’ directive can only appear in first position', 0)
end
end
remove_numeric_keys(ctx.pipe, 1, n_forward)
return library[nextfn]
end
-- Main loop
local function main_loop (ctx, start_with)
local fn = start_with
repeat fn = fn(ctx) until not fn
if ctx.n_parents > 0 then error(modulename ..
': One or more ‘merging_substack’ directives are missing', 0) end
if ctx.n_children > 0 then error(modulename ..
', For some of the snapshots either the ‘flushing’ directive is missing or a group has not been properly closed with ‘merging_substack’', 0) end
end
-- Load a `setting`-like directive string into the `dest` table
local function set_strings_from_opts (dest, opts, start_from)
local cmd
if opts[start_from] == nil then return start_from - 1 end
cmd = opts[start_from]:gsub('%s+', ''):gsub('/+', '/')
:match'^/*(.*[^/])'
if cmd == nil then return start_from end
local vname, chr
local amap, sep, argc = {}, string.byte('/'), start_from + 1
for idx = 1, #cmd do
chr = cmd:byte(idx)
if chr == sep then
for key, val in ipairs(amap) do
dest[val], amap[key] = opts[argc], nil
end
argc = argc + 1
else
vname = memoryslots[string.char(chr)]
if vname == nil then error(modulename ..
', ‘setting’: Unknown slot ‘' ..
string.char(chr) .. '’', 0) end
table.insert(amap, vname)
end
end
for key, val in ipairs(amap) do dest[val] = opts[argc] end
return argc
end
-- Add a new stack of parameters to `ctx.children`
local function new_substack (ctx)
local currsnap, newparams = ctx.n_children + 1, {}
if ctx.children == nil then ctx.children = { newparams }
else ctx.children[currsnap] = newparams end
ctx.n_children = currsnap
return newparams
end
-- Parse a raw argument containing a `sortfunctions` directive, or
-- `'without_sorting'`, or `nil`
local function load_sort_opt (raw_arg)
if raw_arg == nil then return nil, 1, false end
local trarg = raw_arg:match'^%s*(.-)%s*$'
if trarg == 'without_sorting' then return nil, 2, false, trarg end
local tmp = sortfunctions[trarg]
if tmp == nil then return nil, 1, false, trarg end
return tmp or nil, 2, true, trarg
end
-- Parse optional user arguments of type `...|[let/use]|[...]|[let/use]|[...]|
-- [number of additional parameters]|[parameter 1]|[parameter 2]|[...]`
local function load_child_opts (src, start_from, append_after, params)
local tnamed, tmp1, tmp2
local pin, tbl, mem = start_from, {}, {}
while src[pin] ~= nil and src[pin + 1] ~= nil do
tmp1 = src[pin]:match'^%s*(.*%S)'
if tmp1 == 'let' and src[pin + 2] ~= nil then
tmp1 = get_parameter_name(src[pin + 1])
mem[tmp1], tbl[tmp1], pin = nil, src[pin + 2], pin + 3
--[[
elseif tmp1 == 'expose' then
tmp1 = get_parameter_name(src[pin + 1])
tmp2 = params[tmp1]
mem[tmp1], tbl[tmp1], pin = tmp2, tmp2, pin + 2
]]--
elseif tmp1 == 'use' and src[pin + 2] ~= nil then
tmp1 = get_parameter_name(src[pin + 2])
tmp2 = params[tmp1]
mem[tmp1], tbl[get_parameter_name(src[pin + 1])], pin =
tmp2, tmp2, pin + 3
else break end
end
local tnew = copy_or_ref_table(params, next(mem) == nil)
for key in pairs(mem) do tnew[key] = nil end
if pin ~= start_from then tnamed, tbl = tbl, {} end
tmp1 = tonumber(src[pin])
if tmp1 ~= nil and math.floor(tmp1) == tmp1 then
if tmp1 < 0 then tmp1 = -1 end
tmp2 = append_after - pin
for idx = pin + 1, pin + tmp1 do tbl[idx + tmp2] = src[idx] end
pin = pin + tmp1 + 1
end
if tnamed ~= nil then
for key, val in pairs(tnamed) do tbl[key] = val end
end
return tbl, pin, tnew, mem
end
-- Load the optional arguments of some of the `mapping_*` and `renaming_*`
-- class of modifiers
local function load_callback_opts (src, n_skip, default_style, params)
local style, shf
local tmp = src[n_skip + 1]
if tmp ~= nil then style = mapping_styles[tmp:match'^%s*(.-)%s*$'] end
if style == nil then style, shf = default_style, n_skip - 1
else shf = n_skip end
local n_exist, karg, varg = style[3], style[4], style[5]
tmp = style[6]
if tmp > -1 then
karg = src[tmp + shf]:match'^%s*(.-)%s*$'
if karg == '0' or karg:find'^%-?[1-9]%d*$' ~= nil then
karg = tonumber(karg)
n_exist = math.max(n_exist, karg)
end
end
tmp = style[7]
if tmp > -1 then
varg = src[tmp + shf]:match'^%s*(.-)%s*$'
if varg == '0' or varg:find'^%-?[1-9]%d*$' ~= nil then
varg = tonumber(varg)
n_exist = math.max(n_exist, varg)
end
end
local dest, argc, tnew, mem = load_child_opts(src, style[2] + shf,
n_exist, params)
tmp = style[1]
if (tmp == 3 or tmp == 2) and dest[karg] ~= nil then
tmp = tmp - 2 end
if (tmp == 3 or tmp == 1) and dest[varg] ~= nil then
tmp = tmp - 1 end
return dest, argc, tmp, karg, varg, tnew, mem
end
-- Parse the arguments of some of the `mapping_*` and `renaming_*` class of
-- modifiers
local function load_replace_args (opts, whoami)
if opts[1] == nil then error(modulename ..
', ‘' .. whoami .. '’: No pattern string was given', 0) end
if opts[2] == nil then error(modulename ..
', ‘' .. whoami .. '’: No replacement string was given', 0) end
local ptn, repl, nmax, argc = opts[1], opts[2], tonumber(opts[3]), 3
if nmax ~= nil or (opts[3] or ''):match'^%s*$' ~= nil then argc = 4 end
local flg = opts[argc]
if flg ~= nil then flg = mkeywords[flg:match'^%s*(.-)%s*$'] end
if flg == 0 then flg = nil elseif flg ~= nil then argc = argc + 1 end
return ptn, repl, nmax, flg, argc, (nmax ~= nil and nmax < 1) or
(flg == 3 and ptn == repl)
end
-- Parse the arguments of the `with_*_matching` class of modifiers
local function load_pattern_args (opts, whoami)
local keyw
local ptns, state, nptns, cnt = {}, 0, 0, 1
for _, val in ipairs(opts) do
if state == 0 then
nptns, state = nptns + 1, -1
ptns[nptns] = { val, false, false }
else
keyw = val:match'^%s*(.*%S)'
if keyw == nil or mkeywords[keyw] == nil or (
state > 0 and mkeywords[keyw] > 0
) then break
else
state = mkeywords[keyw]
if state > 1 then ptns[nptns][2] = true end
if state == 3 then ptns[nptns][3] = true end
end
end
cnt = cnt + 1
end
if state == 0 then error(modulename .. ', ‘' .. whoami ..
'’: No pattern was given', 0) end
return ptns, nptns, cnt
end
-- Load the optional arguments of the `parsing`, `reinterpreting` and
-- `evaluating` modifiers
local function load_parse_opts (opts, start_from, isp, psp)
local tmp
local optslots, noptslots, argc, trimn, trimu, iplain, pplain =
{ true, true, true }, 3, start_from, true, false, true, true
repeat
noptslots, tmp = noptslots - 1, opts[argc]
if tmp == nil then break end
tmp = tmp:match'^%s*(.-)%s*$'
if optslots[1] ~= nil and trim_parse_opts[tmp] ~= nil then
tmp = trim_parse_opts[tmp]
trimn, trimu, optslots[1] = tmp[1], tmp[2], nil
elseif optslots[2] ~= nil and isep_parse_opts[tmp] ~= nil then
argc = argc + 1
iplain, isp, optslots[2] = isep_parse_opts[tmp],
opts[argc], nil
elseif optslots[3] ~= nil and psep_parse_opts[tmp] ~= nil then
argc = argc + 1
pplain, psp, optslots[3] = psep_parse_opts[tmp],
opts[argc], nil
else break end
argc = argc + 1
until noptslots < 1
return isp, iplain, psp, pplain, trimn, trimu, argc
end
-- Map parameters' values using a custom callback and a referenced table
local value_maps = {
[0] = function (tbl, margs, karg, varg, fn)
for key in pairs(tbl) do tbl[key] = fn() end
end,
[1] = function (tbl, margs, karg, varg, fn)
for key, val in pairs(tbl) do
margs[varg] = val
tbl[key] = fn()
end
end,
[2] = function (tbl, margs, karg, varg, fn)
for key in pairs(tbl) do
margs[karg] = key
tbl[key] = fn()
end
end,
[3] = function (tbl, margs, karg, varg, fn)
for key, val in pairs(tbl) do
margs[karg], margs[varg] = key, val
tbl[key] = fn()
end
end
}
-- Private table for `map_names()`
local name_thieves = {
[0] = function (cache, tbl, rargs, karg, varg, fn)
for key, val in pairs(tbl) do
steal_if_renamed(val, tbl, key, cache, fn())
end
end,
[1] = function (cache, tbl, rargs, karg, varg, fn)
for key, val in pairs(tbl) do
rargs[varg] = val
steal_if_renamed(val, tbl, key, cache, fn())
end
end,
[2] = function (cache, tbl, rargs, karg, varg, fn)
for key, val in pairs(tbl) do
rargs[karg] = key
steal_if_renamed(val, tbl, key, cache, fn())
end
end,
[3] = function (cache, tbl, rargs, karg, varg, fn)
for key, val in pairs(tbl) do
rargs[karg], rargs[varg] = key, val
steal_if_renamed(val, tbl, key, cache, fn())
end
end
}
-- Map parameters' names using a custom callback and a referenced table
local function map_names (tbl, rargs, karg, varg, looptype, fn)
local cache = {}
name_thieves[looptype](cache, tbl, rargs, karg, varg, fn)
for key, val in pairs(cache) do tbl[key] = val end
end
-- Return a new table that contains `src` regrouped according to the numeric
-- suffixes in its keys
local function make_groups (src)
-- NOTE: `src` might be the original metatable!
local prefix, gid
local groups = {}
for key, val in pairs(src) do
-- `key` must only be a string or a number...
if type(key) == 'string' then
prefix, gid = key:match'^%s*(.-)%s*(%-?%d*)%s*$'
gid = tonumber(gid) or ''
else
prefix, gid = '', key
end
if groups[gid] == nil then groups[gid] = {} end
if prefix == '0' or prefix:find'^%-?[1-9]%d*$' ~= nil then
prefix = tonumber(prefix)
if prefix < 1 then prefix = prefix - 1 end
end
groups[gid][prefix] = val
end
return groups
end
-- Split into parts a string containing the `$#` and `$@` placeholders and
-- return the information as a skeleton table, a canvas table and a length
local function parse_placeholder_string (target)
local idx, s_pos, skel, canvas = 1, 1, {}, {}
local e_pos = string.find(target, '%$[@#]', 1, false)
while e_pos ~= nil do
canvas[idx] = target:sub(s_pos, e_pos - 1)
skel[idx + 1] = target:sub(e_pos, e_pos + 1) == '$@'
idx = idx + 2
s_pos = e_pos + 2
e_pos = string.find(target, '%$[@#]', s_pos, false)
end
if (s_pos > target:len()) then idx = idx - 1
else canvas[idx] = target:sub(s_pos) end
return skel, canvas, idx
end
-- Populate a table by parsing a parameter string (heavy lifting for `parsing`,
-- `reinterpreting` and `evaluating`)
local function parse_parameter_string (tbl, str, isp, ipl, psp, ppl, trn, tru)
local key, val, spos1, spos2, pos1, pos2
local pos3, idx, lenplone = 0, 1, #str + 1
if isp == nil or isp == '' then
if psp == nil or psp == '' then
if tru then tbl[idx] = str:match'^%s*(.-)%s*$'
else tbl[idx] = str end
return idx
end
spos1, spos2 = str:find(psp, 1, ppl)
if spos1 == nil then
key = idx
if tru then val = str:match'^%s*(.-)%s*$'
else val = str end
idx = idx + 1
else
key = get_parameter_name(str:sub(1, spos1 - 1))
val = str:sub(spos2 + 1)
if trn then val = val:match'^%s*(.-)%s*$' end
end
tbl[key] = val
return idx
end
if psp == nil or psp == '' then
repeat
pos1 = pos3 + 1
pos2, pos3 = str:find(isp, pos1, ipl)
val = str:sub(pos1, (pos2 or lenplone) - 1)
if tru then val = val:match'^%s*(.-)%s*$' end
tbl[idx], idx = val, idx + 1
until pos2 == nil
return idx
end
repeat
pos1 = pos3 + 1
pos2, pos3 = str:find(isp, pos1, ipl)
val = str:sub(pos1, (pos2 or lenplone) - 1)
spos1, spos2 = val:find(psp, 1, ppl)
if spos1 == nil then
key = idx
if tru then val = val:match'^%s*(.-)%s*$' end
idx = idx + 1
else
key = get_parameter_name(val:sub(1, spos1 - 1))
val = val:sub(spos2 + 1)
if trn then val = val:match'^%s*(.-)%s*$' end
end
tbl[key] = val
until pos2 == nil
return idx
end
-- Heavy lifting for `snapshotting` and `remembering`
local function make_child (ctx, src, whoami)
local len = tonumber(ctx.pipe[1])
if len == nil or len == 0 then
local stack = new_substack(ctx)
for key, val in pairs(src) do stack[key] = val end
return len == nil and 1 or 2
end
if len < 0 or math.floor(len) ~= len then error(modulename ..
', ‘' .. whoami .. '’: The number of parameters to copy must be an integer greater than zero', 0) end
copy_table_maxn(new_substack(ctx), src, len)
return 2
end
-- Heavy lifting for `setting_by_flushing`, `combining` and `combining_values`
local function set_strings_from_substack (ctx, dest, whoami)
if ctx.n_children < 1 then error(modulename ..
', ‘' .. whoami .. '’: There are no substacks to flush', 0) end
local currsnap = ctx.n_children
local stack = ctx.children[currsnap]
for key, val in pairs(memoryslots) do
if stack[key] ~= nil then dest[val] = stack[key] end
end
ctx.children[currsnap], ctx.n_children = nil, currsnap - 1
end
-- Heavy lifting for `combining` and `combining_values`
local function combine_parameters (ctx, keyval_fn, whoami)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! This function
-- MUST create a copy of it before returning
local opts = ctx.pipe
if ctx.pipe[1] == nil then error(modulename ..
', ‘' .. whoami .. '’: No parameter name was provided', 0) end
local argc
local tbl, vars = ctx.params, {}
local sortfn, varsarg0, do_sort, tmp = load_sort_opt(opts[2])
if varsarg0 == 2 then tmp = opts[3] and opts[3]:match'^%s*(.-)%s*$' end
if tmp == 'with_flushed_glue' then
varsarg0 = varsarg0 + 1
argc = set_strings_from_opts(vars, opts, varsarg0 + 1)
set_strings_from_substack(ctx, vars, whoami)
else
if tmp == 'without_flushed_glue' then varsarg0 = varsarg0 + 1 end
argc = set_strings_from_opts(vars, opts, varsarg0 + 1)
end
if argc < varsarg0 then error(modulename ..
', ‘' .. whoami .. '’: No setting directive was given', 0) end
if next(tbl) == nil then
if vars.ifngiven ~= nil then ctx.params =
{ [get_parameter_name(ctx.pipe[1])] = vars.ifngiven }
elseif tbl == ctx.oparams then ctx.params = {} end
return argc
end
local cache, len
if do_sort then
local words
cache, words, len, tmp = get_key_list_sorted(tbl, sortfn)
for idx = 1, tmp do cache[len + idx] = words[idx] end
len = len + tmp
else
len, cache = 0, {}
for key in pairs(tbl) do
len = len + 1
cache[len] = key
end
end
local pmap, nss, kvs, pps = {}, 0, vars.pairsep or '', vars.itersep or ''
for idx = 1, len do
tmp, pmap[nss + 1] = cache[idx], pps
pmap[nss + 2] = keyval_fn(tmp, tbl[tmp], kvs)
nss = nss + 2
end
tmp = vars.oxfordsep or vars.lastsep
if tmp ~= nil and nss > 4 then pmap[nss - 1] = tmp
elseif nss > 2 and vars.lastsep ~= nil then
pmap[nss - 1] = vars.lastsep
end
pmap[1] = vars.header or ''
if vars.footer ~= nil then pmap[nss + 1] = vars.footer end
ctx.params = { [get_parameter_name(ctx.pipe[1])] = table.concat(pmap) }
return argc
end
-- Concatenate the numeric keys from the table of parameters to the numeric
-- keys from the table of options; non-numeric keys from the table of options
-- will prevail over colliding non-numeric keys from the table of parameters
local function concat_params (ctx)
local retval, tbl, nmax = {}, ctx.params, table.maxn(ctx.pipe)
if ctx.subset == 1 then
-- We need only the sequence
for key, val in ipairs(tbl) do retval[key + nmax] = val end
else
if ctx.subset == -1 then
for key in ipairs(tbl) do tbl[key] = nil end
end
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' and key > 0 then
retval[key + nmax] = val
else retval[key] = val end
end
end
for key, val in pairs(ctx.pipe) do retval[key] = val end
return retval
end
-- Flush the parameters by calling a custom function for each value (after this
-- function has been invoked `ctx.params` will be no longer usable)
local function flush_params (ctx, fn)
local tbl = ctx.params
if ctx.subset == 1 then
for key, val in ipairs(tbl) do fn(key, val) end
return
end
if ctx.subset == -1 then
for key, val in ipairs(tbl) do tbl[key] = nil end
end
if ctx.sorttype > 0 then
local nums, words, nn, nw = get_key_list_sorted(tbl, natural_sort)
if ctx.sorttype == 2 then
for idx = 1, nw do fn(words[idx], tbl[words[idx]]) end
for idx = 1, nn do fn(nums[idx], tbl[nums[idx]]) end
return
end
for idx = 1, nn do fn(nums[idx], tbl[nums[idx]]) end
for idx = 1, nw do fn(words[idx], tbl[words[idx]]) end
return
end
if ctx.subset ~= -1 then
for key, val in ipairs(tbl) do
fn(key, val)
tbl[key] = nil
end
end
for key, val in pairs(tbl) do fn(key, val) end
end
-- Flush the parameters by calling one of two custom functions for each value
-- (after this function has been invoked `ctx.params` will be no longer usable)
local function mixed_flush_params (ctx, fn_seq, fn_oth)
if ctx.subset == 1 then
for key, val in ipairs(ctx.params) do fn_seq(key, val) end
return
end
if ctx.subset == -1 then
flush_params(ctx, fn_oth)
return
end
local tbl = ctx.params
if ctx.sorttype > 0 then
local nums, words, nn, nw = get_key_list_sorted(tbl, natural_sort)
local sequence = {}
for key, val in ipairs(tbl) do sequence[key] = val end
if ctx.sorttype == 2 then
for idx = 1, nw do fn_oth(words[idx], tbl[words[idx]]) end
end
for idx = 1, nn do
if sequence[nums[idx]] then fn_seq(nums[idx], sequence[nums[idx]])
else fn_oth(nums[idx], tbl[nums[idx]]) end
end
if ctx.sorttype ~= 2 then
for idx = 1, nw do fn_oth(words[idx], tbl[words[idx]]) end
end
return
end
for key, val in ipairs(tbl) do
fn_seq(key, val)
tbl[key] = nil
end
for key, val in pairs(tbl) do fn_oth(key, val) end
end
-- Finalize and return a concatenated list
local function finalize_and_return_concatenated_list (ctx, lst, len, modsize)
if len > 0 then
local tmp = ctx.oxfordsep or ctx.lastsep
if tmp ~= nil and len > modsize * 2 then
lst[len - modsize + 1] = tmp
elseif len > modsize and ctx.lastsep ~= nil then
lst[len - modsize + 1] = ctx.lastsep
end
lst[1] = ctx.header or ''
if ctx.footer ~= nil then lst[len + 1] = ctx.footer end
ctx.text = table.concat(lst)
else ctx.text = ctx.ifngiven or '' end
end
--- ---
--- PUBLIC ENVIRONMENT ---
--- ________________________________ ---
--- ---
--[[ Modifiers ]]--
-------------------
-- Syntax: #invoke:params|sequential|pipe to
library.sequential = function (ctx)
if ctx.subset == 1 then error(modulename ..
': The ‘sequential’ directive has been provided more than once', 0) end
if ctx.subset == -1 then error(modulename ..
': The two directives ‘non-sequential’ and ‘sequential’ are in contradiction with each other', 0) end
if ctx.sorttype > 0 then error(modulename ..
': The ‘all_sorted’ and ‘reassorted’ directives are redundant when followed by ‘sequential’', 0) end
ctx.iterfunc, ctx.subset = ipairs, 1
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|non-sequential|pipe to
library['non-sequential'] = function (ctx)
if ctx.subset == -1 then error(modulename ..
': The ‘non-sequential’ directive has been provided more than once', 0) end
if ctx.subset == 1 then error(modulename ..
': The two directives ‘sequential’ and ‘non-sequential’ are in contradiction with each other', 0) end
ctx.iterfunc, ctx.subset = pairs, -1
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|all_sorted|pipe to
library.all_sorted = function (ctx)
if ctx.sorttype == 1 then error(modulename ..
': The ‘all_sorted’ directive has been provided more than once', 0) end
if ctx.subset == 1 then error(modulename ..
': The ‘all_sorted’ directive is redundant after ‘sequential’', 0) end
if ctx.sorttype == 2 then error(modulename ..
': The two directives ‘reassorted’ and ‘sequential’ are in contradiction with each other', 0) end
ctx.sorttype = 1
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|reassorted|pipe to
library.reassorted = function (ctx)
if ctx.sorttype == 2 then error(modulename ..
': The ‘reassorted’ directive has been provided more than once', 0) end
if ctx.subset == 1 then error(modulename ..
': The ‘reassorted’ directive is redundant after ‘sequential’', 0) end
if ctx.sorttype == 1 then error(modulename ..
': The two directives ‘sequential’ and ‘reassorted’ are in contradiction with each other', 0) end
ctx.sorttype = 2
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|setting|directives|...|pipe to
library.setting = function (ctx)
local argc = set_strings_from_opts(ctx, ctx.pipe, 1)
if argc < 2 then error(modulename ..
', ‘setting’: No directive was given', 0) end
return context_iterate(ctx, argc + 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|scoring|new parameter name|[container]|pipe to
library.scoring = function (ctx)
if ctx.pipe[1] == nil then error(modulename ..
', ‘scoring’: No parameter name was provided', 0) end
local tmp
local retval, opts = 0, ctx.pipe
for _ in pairs(ctx.params) do retval = retval + 1 end
if opts[2] ~= nil then tmp = opts[2]:match'^%s*(.*%S)' end
if tmp == 'in_substack' then
new_substack(ctx)[get_parameter_name(opts[1])] = tostring(retval)
return context_iterate(ctx, 3)
end
ctx.params[get_parameter_name(opts[1])] = tostring(retval)
return context_iterate(ctx, tmp == 'here' and 3 or 2)
end
-- Syntax: #invoke:params|squeezing|pipe to
library.squeezing = function (ctx)
local store, indices, tbl, newlen = {}, {}, ctx.params, 0
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' then
newlen = newlen + 1
indices[newlen], store[key], tbl[key] = key, val, nil
end
end
table.sort(indices)
for idx = 1, newlen do tbl[idx] = store[indices[idx]] end
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|filling_the_gaps|pipe to
library.filling_the_gaps = function (ctx)
local newval, tbl, tmp, nmin, nmax, nnums =
ctx.pipe[1], ctx.params, {}, 1, nil, -1
if newval == nil then error(modulename ..
', ‘filling_the_gaps’: No value was provided', 0) end
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' then
if nmax == nil then
if key < nmin then nmin = key end
nmax = key
elseif key > nmax then nmax = key
elseif key < nmin then nmin = key end
tmp[key], nnums = val, nnums + 1
end
end
if nmax ~= nil and nmax - nmin > nnums then
ctx.n_available = ctx.n_available + nmin + nnums - nmax
if ctx.n_available < 0 then error(modulename ..
', ‘filling_the_gaps’: It is possible to fill at most ' ..
tostring(maxfill) .. ' parameters', 0) end
for idx = nmin, nmax, 1 do tbl[idx] = newval end
for key, val in pairs(tmp) do tbl[key] = val end
end
return context_iterate(ctx, 2)
end
-- Syntax: #invoke:params|clearing|pipe to
library.clearing = function (ctx)
local tbl, numerics = ctx.params, {}
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' then
numerics[key], tbl[key] = val, nil
end
end
for key, val in ipairs(numerics) do tbl[key] = val end
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|cutting|left cut|right cut|pipe to
library.cutting = function (ctx)
local lcut = tonumber(ctx.pipe[1])
if lcut == nil or math.floor(lcut) ~= lcut then error(modulename ..
', ‘cutting’: Left cut must be an integer number', 0) end
local rcut = tonumber(ctx.pipe[2])
if rcut == nil or math.floor(rcut) ~= rcut then error(modulename ..
', ‘cutting’: Right cut must be an integer number', 0) end
local tbl = ctx.params
local len = #tbl
if lcut < 0 then lcut = len + lcut end
if rcut < 0 then rcut = len + rcut end
local tot = lcut + rcut
if tot > 0 then
local cache = {}
if tot >= len then
for key in ipairs(tbl) do tbl[key] = nil end
tot = len
else
for idx = len - rcut + 1, len, 1 do tbl[idx] = nil end
for idx = 1, lcut, 1 do tbl[idx] = nil end
end
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' and key > 0 then
if key > len then cache[key - tot] = val
else cache[key - lcut] = val end
tbl[key] = nil
end
end
for key, val in pairs(cache) do tbl[key] = val end
end
return context_iterate(ctx, 3)
end
-- Syntax: #invoke:params|cropping|left crop|right crop|pipe to
library.cropping = function (ctx)
local lcut = tonumber(ctx.pipe[1])
if lcut == nil or math.floor(lcut) ~= lcut then error(modulename ..
', ‘cropping’: Left crop must be an integer number', 0) end
local rcut = tonumber(ctx.pipe[2])
if rcut == nil or math.floor(rcut) ~= rcut then error(modulename ..
', ‘cropping’: Right crop must be an integer number', 0) end
local tbl = ctx.params
local nmin, nmax
for key in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' then
if nmin == nil then nmin, nmax = key, key
elseif key > nmax then nmax = key
elseif key < nmin then nmin = key end
end
end
if nmin ~= nil then
local len = nmax - nmin + 1
if lcut < 0 then lcut = len + lcut end
if rcut < 0 then rcut = len + rcut end
if lcut + rcut - len > -1 then
for key in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' then tbl[key] = nil end
end
elseif lcut + rcut > 0 then
for idx = nmax - rcut + 1, nmax do tbl[idx] = nil end
for idx = nmin, nmin + lcut - 1 do tbl[idx] = nil end
local lshift = nmin + lcut - 1
if lshift > 0 then
for idx = lshift + 1, nmax, 1 do
tbl[idx - lshift], tbl[idx] =
tbl[idx], nil
end
end
end
end
return context_iterate(ctx, 3)
end
-- Syntax: #invoke:params|purging|start offset|length|pipe to
library.purging = function (ctx)
local idx = tonumber(ctx.pipe[1])
if idx == nil or math.floor(idx) ~= idx then error(modulename ..
', ‘purging’: Start offset must be an integer number', 0) end
local len = tonumber(ctx.pipe[2])
if len == nil or math.floor(len) ~= len then error(modulename ..
', ‘purging’: Length must be an integer number', 0) end
local tbl = ctx.params
if len < 1 then
len = len + table.maxn(tbl)
if idx > len then return context_iterate(ctx, 3) end
len = len - idx + 1
end
ctx.params = copy_table_reduced(tbl, idx, len)
return context_iterate(ctx, 3)
end
-- Syntax: #invoke:params|backpurging|start offset|length|pipe to
library.backpurging = function (ctx)
local last = tonumber(ctx.pipe[1])
if last == nil or math.floor(last) ~= last then error(modulename ..
', ‘backpurging’: Start offset must be an integer number', 0) end
local len = tonumber(ctx.pipe[2])
if len == nil or math.floor(len) ~= len then error(modulename ..
', ‘backpurging’: Length must be an integer number', 0) end
local idx
local tbl = ctx.params
if len > 0 then
idx = last - len + 1
else
for key in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' and (idx == nil or
key < idx) then idx = key end
end
if idx == nil then return context_iterate(ctx, 3) end
idx = idx - len
if last < idx then return context_iterate(ctx, 3) end
len = last - idx + 1
end
ctx.params = copy_table_reduced(ctx.params, idx, len)
return context_iterate(ctx, 3)
end
-- Syntax: #invoke:params|shifting|addend|pipe to
library.shifting = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local nshift = tonumber(ctx.pipe[1])
if nshift == nil or nshift == 0 or math.floor(nshift) ~= nshift then
error(modulename .. ', ‘shifting’: A non-zero integer number must be provided', 0) end
local tbl = {}
for key, val in pairs(ctx.params) do
if type(key) == 'number' then tbl[key + nshift] = val
else tbl[key] = val end
end
ctx.params = tbl
return context_iterate(ctx, 2)
end
-- Syntax: #invoke:params|reversing_numeric_names|pipe to
library.reversing_numeric_names = function (ctx)
local tbl, numerics, nmax = ctx.params, {}, 0
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' then
numerics[key], tbl[key] = val, nil
if key > nmax then nmax = key end
end
end
for key, val in pairs(numerics) do tbl[nmax - key + 1] = val end
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|pivoting_numeric_names|pipe to
--[[
library.pivoting_numeric_names = function (ctx)
local tbl = ctx.params
local shift = #tbl + 1
if shift < 2 then return library.reversing_numeric_names(ctx) end
local numerics = {}
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' then
numerics[key] = val
tbl[key] = nil
end
end
for key, val in pairs(numerics) do tbl[shift - key] = val end
return context_iterate(ctx, 1)
end
]]--
-- Syntax: #invoke:params|mirroring_numeric_names|pipe to
--[[
library.mirroring_numeric_names = function (ctx)
local nmax, nmin
local tbl, numerics = ctx.params, {}
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' then
numerics[key] = val
tbl[key] = nil
if nmax == nil then nmin, nmax = key, key
elseif key > nmax then nmax = key
elseif key < nmin then nmin = key end
end
end
for key, val in pairs(numerics) do tbl[nmax + nmin - key] = val end
return context_iterate(ctx, 1)
end
]]--
-- Syntax: #invoke:params|swapping_numeric_names|pipe to
--[[
library.swapping_numeric_names = function (ctx)
local tmp
local tbl, cache, nsize = ctx.params, {}, 0
for key in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' then
nsize = nsize + 1
cache[nsize] = key
end
end
table.sort(cache)
for idx = math.floor(nsize / 2), 1, -1 do
tmp = tbl[cache[idx] ]
tbl[cache[idx] ] = tbl[cache[nsize - idx + 1] ]
tbl[cache[nsize - idx + 1] ] = tmp
end
return context_iterate(ctx, 1)
end
]]--
-- Syntax: #invoke:params|sorting_sequential_values|[criterion]|pipe to
library.sorting_sequential_values = function (ctx)
local sortfn
if ctx.pipe[1] ~= nil then
sortfn = sortfunctions[ctx.pipe[1]:match'^%s*(.-)%s*$']
end
if sortfn then table.sort(ctx.params, sortfn)
else table.sort(ctx.params) end -- i.e. either `false` or `nil`
if sortfn == nil then return context_iterate(ctx, 1) end
return context_iterate(ctx, 2)
end
-- Syntax: #invoke:params|splicing|[add to position]|position|increment|
-- [number of elements to write]|...|pipe to
library.splicing = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local tmp2, argc, pos, refp
local opts, tbl = ctx.pipe, ctx.params
local tmp1 = opts[1]
if tmp1 ~= nil then
tmp2 = tonumber(tmp1)
if tmp2 == nil or math.floor(tmp2) ~= tmp2 then
pos, argc, tmp2 = tonumber(opts[2]), 4,
tmp1:match'^%s*(.*%S)'
if tmp2 ~= nil then
refp = position_references[tmp2]
if refp == nil then error(modulename ..
', ‘splicing’: ‘' .. tostring(tmp2) ..
'’ is not a valid first argument', 0) end
else refp = 0 end
else pos, argc, refp = tmp2, 3, 0 end
else pos, argc, refp = tonumber(opts[2]), 4, 0 end
if pos == nil or math.floor(pos) ~= pos then error(modulename ..
', ‘splicing’: The position must be an integer number', 0) end
local len = tonumber(opts[argc - 1])
if len == nil or math.floor(len) ~= len then error(modulename ..
', ‘splicing’: The increment must be an integer number', 0) end
if refp == 2 then
for _ in ipairs(tbl) do pos = pos + 1 end
refp = 0
end
tmp1, tmp2 = nil, nil
if refp ~= 0 or len ~= 0 then
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' then
if tmp1 == nil then tmp1, tmp2 = key, key
elseif key < tmp1 then tmp1 = key
elseif key > tmp2 then tmp2 = key end
end
end
end
if tmp2 == nil then len = 0
elseif refp == 3 then pos = pos + tmp2
elseif refp == 1 then pos = pos + tmp1 end
if len > 0 and pos + len > tmp1 and pos <= tmp2 then
tbl = copy_table_expanded(tbl, pos, len)
elseif len < 0 and pos - len > tmp1 and pos <= tmp2 then
tbl = copy_table_reduced(tbl, pos, -len)
else tbl = copy_or_ref_table(tbl, tbl ~= ctx.oparams) end
ctx.params = tbl
tmp1 = tonumber(opts[argc])
if len == 0 and (tmp1 == nil or tmp1 < 1) then error(modulename ..
', ‘splicing’: When the increment is zero the number of elements to add cannot be zero', 0) end
if tmp1 == nil or tmp1 < 0 or math.floor(tmp1) ~= tmp1 then
return context_iterate(ctx, argc)
end
tmp2 = argc - pos + 1
for key = pos, pos + tmp1 - 1 do tbl[key] = opts[key + tmp2] end
return context_iterate(ctx, argc + tmp1 + 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|imposing|name|value|pipe to
library.imposing = function (ctx)
if ctx.pipe[1] == nil then error(modulename ..
', ‘imposing’: Missing parameter name to impose', 0) end
ctx.params[get_parameter_name(ctx.pipe[1])] = ctx.pipe[2]
return context_iterate(ctx, 3)
end
-- Syntax: #invoke:params|providing|name|value|pipe to
library.providing = function (ctx)
if ctx.pipe[1] == nil then error(modulename ..
', ‘providing’: Missing parameter name to provide', 0) end
local key = get_parameter_name(ctx.pipe[1])
if ctx.params[key] == nil then ctx.params[key] = ctx.pipe[2] end
return context_iterate(ctx, 3)
end
-- Syntax: #invoke:params|reassigning|source|destination|[mode]|pipe to
library.reassigning = function (ctx)
local opts, tbl = ctx.pipe, ctx.params
if opts[1] == nil then error(modulename ..
', ‘reassigning’: Missing source parameter', 0) end
if opts[2] == nil then error(modulename ..
', ‘reassigning’: Missing destination parameter', 0) end
local mode, argc
local src = get_parameter_name(opts[1])
local val = tbl[src]
if opts[3] ~= nil then mode = a_modes[opts[3]:match'^%s*(.-)%s*$'] end
if mode == nil then mode, argc = 0, 3 else argc = 4 end
if val == nil and mode > 1 then return context_iterate(ctx, argc) end
local dest = get_parameter_name(opts[2])
local tmp = tbl[dest] == nil
if mode % 2 == 0 or (mode == 7 and tmp) then tbl[src] = nil end
if tmp or mode < 4 then tbl[dest] = val end
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|discarding|name|[how many]|pipe to
library.discarding = function (ctx)
if ctx.pipe[1] == nil then error(modulename ..
', ‘discarding’: Missing parameter name to discard', 0) end
local len = tonumber(ctx.pipe[2])
if len == nil then
ctx.params[get_parameter_name(ctx.pipe[1])] = nil
return context_iterate(ctx, 2)
end
local key = tonumber(ctx.pipe[1])
if key == nil or math.floor(key) ~= key then error(modulename ..
', ‘discarding’: A range was provided, but the initial parameter name is not an integer number', 0) end
if len < 1 or math.floor(len) ~= len then error(modulename ..
', ‘discarding’: A range can only be an integer number greater than zero', 0) end
for idx = key, key + len - 1 do ctx.params[idx] = nil end
return context_iterate(ctx, 3)
end
-- Syntax: #invoke:params|excluding_non-numeric_names|pipe to
library['excluding_non-numeric_names'] = function (ctx)
local tmp = ctx.params
for key, val in pairs(tmp) do
if type(key) ~= 'number' then tmp[key] = nil end
end
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|excluding_numeric_names|pipe to
library.excluding_numeric_names = function (ctx)
local tmp = ctx.params
for key, val in pairs(tmp) do
if type(key) == 'number' then tmp[key] = nil end
end
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|with_name_matching|target 1|[plain flag 1]|[or]
-- |[target 2]|[plain flag 2]|[or]|[...]|[target N]|[plain flag
-- N]|pipe to
library.with_name_matching = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local tmp, ptn
local targets, nptns, argc = load_pattern_args(ctx.pipe,
'with_name_matching')
local tbl, newparams = ctx.params, {}
for idx = 1, nptns do
ptn = targets[idx]
if ptn[3] then
tmp = ptn[1]
if tmp == '0' or tmp:find'^%-?[1-9]%d*$' ~= nil then
tmp = tonumber(tmp)
end
newparams[tmp] = tbl[tmp]
else
for key, val in pairs(tbl) do
if tostring(key):find(ptn[1], 1, ptn[2]) then
newparams[key] = val
end
end
end
end
ctx.params = newparams
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|with_name_not_matching|target 1|[plain flag 1]
-- |[and]|[target 2]|[plain flag 2]|[and]|[...]|[target N]|[plain
-- flag N]|pipe to
library.with_name_not_matching = function (ctx)
local targets, nptns, argc = load_pattern_args(ctx.pipe,
'with_name_not_matching')
local tbl = ctx.params
if nptns == 1 and targets[1][3] then
local tmp = targets[1][1]
if tmp == '0' or tmp:find'^%-?[1-9]%d*$' ~= nil then
tbl[tonumber(tmp)] = nil
else tbl[tmp] = nil end
return context_iterate(ctx, argc)
end
local yesmatch, ptn
for key in pairs(tbl) do
yesmatch = true
for idx = 1, nptns do
ptn = targets[idx]
if ptn[3] then
if tostring(key) ~= ptn[1] then
yesmatch = false
break
end
elseif not tostring(key):find(ptn[1], 1, ptn[2]) then
yesmatch = false
break
end
end
if yesmatch then tbl[key] = nil end
end
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|with_value_matching|target 1|[plain flag 1]|[or]
-- |[target 2]|[plain flag 2]|[or]|[...]|[target N]|[plain flag
-- N]|pipe to
library.with_value_matching = function (ctx)
local nomatch, ptn
local tbl = ctx.params
local targets, nptns, argc = load_pattern_args(ctx.pipe,
'with_value_matching')
for key, val in pairs(tbl) do
nomatch = true
for idx = 1, nptns do
ptn = targets[idx]
if ptn[3] then
if val == ptn[1] then
nomatch = false
break
end
elseif val:find(ptn[1], 1, ptn[2]) then
nomatch = false
break
end
end
if nomatch then tbl[key] = nil end
end
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|with_value_not_matching|target 1|[plain flag 1]
-- |[and]|[target 2]|[plain flag 2]|[and]|[...]|[target N]|[plain
-- flag N]|pipe to
library.with_value_not_matching = function (ctx)
local yesmatch, ptn
local tbl = ctx.params
local targets, nptns, argc = load_pattern_args(ctx.pipe,
'with_value_not_matching')
for key, val in pairs(tbl) do
yesmatch = true
for idx = 1, nptns do
ptn = targets[idx]
if ptn[3] then
if val ~= ptn[1] then
yesmatch = false
break
end
elseif not val:find(ptn[1], 1, ptn[2]) then
yesmatch = false
break
end
end
if yesmatch then tbl[key] = nil end
end
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|keeping_at_most|number of parameters to pick|pipe to
library.keeping_at_most = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local len = tonumber(ctx.pipe[1])
if len == nil or len < 1 or math.floor(len) ~= len then error(modulename ..
', ‘keeping_at_most’: The number of parameters to keep must be an integer greater than zero', 0) end
ctx.params = copy_table_maxn({}, ctx.params, len)
return context_iterate(ctx, 2)
end
-- Syntax: #invoke:params|trimming_values|pipe to
library.trimming_values = function (ctx)
local tbl = ctx.params
for key, val in pairs(tbl) do tbl[key] = val:match'^%s*(.-)%s*$' end
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|mapping_to_lowercase|pipe to
library.mapping_to_lowercase = function (ctx)
local tbl = ctx.params
for key, val in pairs(tbl) do tbl[key] = val:lower() end
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|mapping_to_uppercase|pipe to
library.mapping_to_uppercase = function (ctx)
local tbl = ctx.params
for key, val in pairs(tbl) do tbl[key] = val:upper() end
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|mapping_by_calling|template name|[call
-- style]|[let/use]|[...]|[let/use]|[...]|[number of additional
-- parameters]|[parameter 1]|[parameter 2]|[...]|[parameter N]|pipe to
library.mapping_by_calling = function (ctx)
local tname
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then tname = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if tname == nil then error(modulename ..
', ‘mapping_by_calling’: No template name was provided', 0) end
local margs, argc, looptype, karg, varg, tbl, mem =
load_callback_opts(opts, 1, mapping_styles.values_only, ctx.params)
local model = { title = tname, args = margs }
value_maps[looptype](tbl, margs, karg, varg, function ()
return ctx.frame:expandTemplate(model)
end)
for key, val in pairs(mem) do tbl[key] = val end
ctx.params = tbl
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|mapping_by_invoking|module name|function name|[call
-- style]|[let/use]|[...]|[let/use]|[...]|[number of additional
-- arguments]|[argument 1]|[argument 2]|[...]|[argument N]|pipe to
library.mapping_by_invoking = function (ctx)
local mname, fname
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then mname = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if mname == nil then error(modulename ..
', ‘mapping_by_invoking’: No module name was provided', 0) end
if opts[2] ~= nil then fname = opts[2]:match'^%s*(.*%S)' end
if fname == nil then error(modulename ..
', ‘mapping_by_invoking’: No function name was provided', 0) end
local margs, argc, looptype, karg, varg, tbl, mem =
load_callback_opts(opts, 2, mapping_styles.values_only, ctx.params)
local model = { title = 'Module:' .. mname, args = margs }
local mfunc = require(model.title)[fname]
if mfunc == nil then error(modulename ..
', ‘mapping_by_invoking’: The function ‘' .. fname ..
'’ does not exist', 0) end
value_maps[looptype](tbl, margs, karg, varg, function ()
return tostring(mfunc(ctx.frame:newChild(model)))
end)
for key, val in pairs(mem) do tbl[key] = val end
ctx.params = tbl
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|mapping_by_magic|parser function|[call
-- style]|[let/use]|[...]|[let/use]|[...]|[number of additional
-- arguments]|[argument 1]|[argument 2]|[...]|[argument N]|pipe to
library.mapping_by_magic = function (ctx)
local magic
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then magic = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if magic == nil then error(modulename ..
', ‘mapping_by_magic’: No parser function was provided', 0) end
local margs, argc, looptype, karg, varg, tbl, mem =
load_callback_opts(opts, 1, mapping_styles.values_only, ctx.params)
value_maps[looptype](tbl, margs, karg, varg, function ()
return ctx.frame:callParserFunction(magic, margs)
end)
for key, val in pairs(mem) do tbl[key] = val end
ctx.params = tbl
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|mapping_by_replacing|target|replace|[count]|[plain
-- flag]|pipe to
library.mapping_by_replacing = function (ctx)
local ptn, repl, nmax, flg, argc, die =
load_replace_args(ctx.pipe, 'mapping_by_replacing')
if die then return context_iterate(ctx, argc) end
local tbl = ctx.params
if flg == 3 then
for key, val in pairs(tbl) do
if val == ptn then tbl[key] = repl end
end
else
if flg == 2 then
-- Copied from Module:String's `str._escapePattern()`
ptn = ptn:gsub('[%(%)%.%%%+%-%*%?%[%^%$%]]', '%%%0')
end
for key, val in pairs(tbl) do
tbl[key] = val:gsub(ptn, repl, nmax)
end
end
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|mapping_by_mixing|mixing string|pipe to
library.mapping_by_mixing = function (ctx)
if ctx.pipe[1] == nil then error(modulename ..
', ‘mapping_by_mixing’: No mixing string was provided', 0) end
local tbl, mix = ctx.params, ctx.pipe[1]
if mix == '$#' then
for key in pairs(tbl) do tbl[key] = tostring(key) end
return context_iterate(ctx, 2)
end
local skel, cnv, n_parts = parse_placeholder_string(mix)
for key, val in pairs(tbl) do
for idx = 2, n_parts, 2 do
if skel[idx] then cnv[idx] = val
else cnv[idx] = tostring(key) end
end
tbl[key] = table.concat(cnv)
end
return context_iterate(ctx, 2)
end
-- Syntax: #invoke:params|mapping_to_names|pipe to
--[[
library.mapping_to_names = function (ctx)
local tbl = ctx.params
for key in pairs(tbl) do tbl[key] = tostring(key) end
return context_iterate(ctx, 1)
end
]]--
-- Syntax: #invoke:params|renaming_to_lowercase|pipe to
library.renaming_to_lowercase = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local cache = {}
for key, val in pairs(ctx.params) do
if type(key) == 'string' then cache[key:lower()] = val else
cache[key] = val end
end
ctx.params = cache
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|renaming_to_uppercase|pipe to
library.renaming_to_uppercase = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local cache = {}
for key, val in pairs(ctx.params) do
if type(key) == 'string' then cache[key:upper()] = val else
cache[key] = val end
end
ctx.params = cache
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|renaming_to_sequence|[sort order]|pipe to
library.renaming_to_sequence = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local cache, len
local tbl = ctx.params
local sortfn, argc, do_sort = load_sort_opt(ctx.pipe[1])
if do_sort then
local words, wl
cache, words, len, wl = get_key_list_sorted(tbl, sortfn)
for idx = 1, len do cache[idx] = tbl[cache[idx]] end
for idx = 1, wl do cache[len + idx] = tbl[words[idx]] end
else
len, cache = 0, {}
for _, val in pairs(tbl) do
len = len + 1
cache[len] = val
end
end
ctx.params = cache
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|renaming_by_calling|template name|[call
-- style]|[let/use]|[...]|[let/use]|[...]|[number of additional
-- parameters]|[parameter 1]|[parameter 2]|[...]|[parameter N]|pipe to
library.renaming_by_calling = function (ctx)
local tname
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then tname = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if tname == nil then error(modulename ..
', ‘renaming_by_calling’: No template name was provided', 0) end
local rargs, argc, looptype, karg, varg, tbl, mem =
load_callback_opts(opts, 1, mapping_styles.names_only, ctx.params)
local model = { title = tname, args = rargs }
map_names(tbl, rargs, karg, varg, looptype, function ()
return ctx.frame:expandTemplate(model)
end)
for key, val in pairs(mem) do tbl[key] = val end
ctx.params = tbl
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|renaming_by_invoking|module name|function
-- name|[call style]|[let/use]|[...]|[let/use]|[...]|[number of
-- additional arguments]|[argument 1]|[argument 2]|[...]|[argument
-- N]|pipe to
library.renaming_by_invoking = function (ctx)
local mname, fname
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then mname = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if mname == nil then error(modulename ..
', ‘renaming_by_invoking’: No module name was provided', 0) end
if opts[2] ~= nil then fname = opts[2]:match'^%s*(.*%S)' end
if fname == nil then error(modulename ..
', ‘renaming_by_invoking’: No function name was provided', 0) end
local rargs, argc, looptype, karg, varg, tbl, mem =
load_callback_opts(opts, 2, mapping_styles.names_only, ctx.params)
local model = { title = 'Module:' .. mname, args = rargs }
local mfunc = require(model.title)[fname]
if mfunc == nil then error(modulename ..
', ‘renaming_by_invoking’: The function ‘' .. fname ..
'’ does not exist', 0) end
map_names(tbl, rargs, karg, varg, looptype, function ()
return tostring(mfunc(ctx.frame:newChild(model)))
end)
for key, val in pairs(mem) do tbl[key] = val end
ctx.params = tbl
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|renaming_by_magic|parser function|[call
-- style]|[let/use]|[...]|[let/use]|[...]|[number of additional
-- arguments]|[argument 1]|[argument 2]|[...]|[argument N]|pipe to
library.renaming_by_magic = function (ctx)
local opts = ctx.pipe
local magic
if opts[1] ~= nil then magic = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if magic == nil then error(modulename ..
', ‘renaming_by_magic’: No parser function was provided', 0) end
local rargs, argc, looptype, karg, varg, tbl, mem =
load_callback_opts(opts, 1, mapping_styles.names_only, ctx.params)
map_names(tbl, rargs, karg, varg, looptype, function ()
return ctx.frame:callParserFunction(magic, rargs)
end)
for key, val in pairs(mem) do tbl[key] = val end
ctx.params = tbl
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|renaming_by_replacing|target|replace|[count]|[plain
-- flag]|pipe to
library.renaming_by_replacing = function (ctx)
local ptn, repl, nmax, flg, argc, die =
load_replace_args(ctx.pipe, 'renaming_by_replacing')
if die then return context_iterate(ctx, argc) end
local tbl = ctx.params
if flg == 3 then
ptn = get_parameter_name(ptn)
local val = tbl[ptn]
if val ~= nil then
tbl[ptn], tbl[get_parameter_name(repl)] = nil, val
end
else
if flg == 2 then
-- Copied from Module:String's `str._escapePattern()`
ptn = ptn:gsub('[%(%)%.%%%+%-%*%?%[%^%$%]]', '%%%0')
end
local cache = {}
for key, val in pairs(tbl) do
steal_if_renamed(val, tbl, key, cache,
tostring(key):gsub(ptn, repl, nmax))
end
for key, val in pairs(cache) do tbl[key] = val end
end
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|renaming_by_mixing|mixing string|pipe to
library.renaming_by_mixing = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
if ctx.pipe[1] == nil then error(modulename ..
', ‘renaming_by_mixing’: No mixing string was provided', 0) end
local mix = ctx.pipe[1]:match'^%s*(.-)%s*$'
local cache = {}
if mix == '$@' then
for _, val in pairs(ctx.params) do
cache[get_parameter_name(val)] = val
end
else
local skel, canvas, n_parts = parse_placeholder_string(mix)
for key, val in pairs(ctx.params) do
for idx = 2, n_parts, 2 do
if skel[idx] then canvas[idx] = val
else canvas[idx] = tostring(key) end
end
cache[get_parameter_name(table.concat(canvas))] = val
end
end
ctx.params = cache
return context_iterate(ctx, 2)
end
-- Syntax: #invoke:params|renaming_to_values|pipe to
--[[
library.renaming_to_values = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local cache = {}
for _, val in pairs(ctx.params) do cache[val] = val end
ctx.params = cache
return context_iterate(ctx, 1)
end
]]--
-- Syntax: #invoke:params|grouping_by_calling|template
-- name|[let/use]|[...]|[let/use]|[...]|[number of additional
-- arguments]|[argument 1]|[argument 2]|[...]|[argument N]|pipe to
library.grouping_by_calling = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local tmp, argc, tbl, mem = load_child_opts(ctx.pipe, 2, 0, ctx.params)
local gargs = {}
for key, val in pairs(tmp) do
if type(key) == 'number' and key < 1 then gargs[key - 1] = val
else gargs[key] = val end
end
tmp = ctx.pipe[1]
if tmp ~= nil then tmp = tmp:match'^%s*(.*%S)' end
if tmp == nil then error(modulename ..
', ‘grouping_by_calling’: No template name was provided', 0) end
local model = { title = tmp }
local groups = make_groups(tbl)
for gid, group in pairs(groups) do
for key, val in pairs(gargs) do group[key] = val end
group[0], model.args = gid, group
groups[gid] = ctx.frame:expandTemplate(model)
end
for key, val in pairs(mem) do groups[key] = val end
ctx.params = groups
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|parsing|string to parse|[trim flag]|[iteration
-- delimiter setter]|[...]|[key-value delimiter setter]|[...]|pipe to
library.parsing = function (ctx)
local opts = ctx.pipe
if opts[1] == nil then error(modulename ..
', ‘parsing’: No string to parse was provided', 0) end
local isep, iplain, psep, pplain, trimnamed, trimunnamed, argc =
load_parse_opts(opts, 2, '|', '=')
parse_parameter_string(ctx.params, opts[1], isep, iplain, psep, pplain,
trimnamed, trimunnamed)
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|reinterpreting|parameter to reinterpret|[trim
-- flag]|[iteration delimiter setter]|[...]|[key-value delimiter
-- setter]|[...]|pipe to
library.reinterpreting = function (ctx)
local opts = ctx.pipe
if opts[1] == nil then error(modulename ..
', ‘reinterpreting’: No parameter to reinterpret was provided', 0) end
local isep, iplain, psep, pplain, trimnamed, trimunnamed, argc =
load_parse_opts(opts, 2, '|', '=')
local tbl, tmp = ctx.params, get_parameter_name(opts[1])
local str = tbl[tmp]
if str ~= nil then
tbl[tmp] = nil
parse_parameter_string(tbl, str, isep, iplain, psep, pplain,
trimnamed, trimunnamed)
end
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|evaluating|string to parse|[trim flag]|[iteration
-- delimiter setter]|[...]|[key-value delimiter setter]|[...]|pipe to
library.evaluating = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.pipe` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local opts = ctx.pipe
if opts[1] == nil then error(modulename ..
', ‘evaluating’: No string to parse was provided', 0) end
local isep, iplain, psep, pplain, trimnamed, trimunnamed, argc =
load_parse_opts(opts, 2, '!', ':')
if opts[1]:match'^%s*(.*%S)' == nil then
ctx.pipe = copy_or_ref_table(opts, opts ~= ctx.opipe)
return context_iterate(ctx, argc)
end
local new_opts, cache = {}, {}
local shift = parse_parameter_string(cache, opts[1], isep, iplain,
psep, pplain, trimnamed, trimunnamed) - argc
for key, val in pairs(opts) do
if type(key) ~= 'number' or key < 1 then new_opts[key] = val
elseif key >= argc then new_opts[key + shift] = val end
end
for key, val in pairs(cache) do new_opts[key] = val end
ctx.pipe = new_opts
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|mixing_names_and_values|mixing string|pipe to
library.mixing_names_and_values = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
if ctx.pipe[1] == nil then error(modulename ..
', ‘mixing_names_and_values’: No mixing string was provided for parameter names', 0) end
if ctx.pipe[2] == nil then error(modulename ..
', ‘mixing_names_and_values’: No mixing string was provided for parameter values', 0) end
local tmp
local mix_k = ctx.pipe[1]:match'^%s*(.-)%s*$'
local cache, mix_v = {}, ctx.pipe[2]
if mix_k == '$@' and mix_v == '$@' then
for _, val in pairs(ctx.params) do
cache[get_parameter_name(val)] = val
end
elseif mix_k == '$@' and mix_v == '$#' then
for key, val in pairs(ctx.params) do
cache[get_parameter_name(val)] = tostring(key)
end
elseif mix_k == '$#' and mix_v == '$#' then
for key in pairs(ctx.params) do cache[key] = tostring(key) end
else
local skel_k, cnv_k, n_parts_k = parse_placeholder_string(mix_k)
local skel_v, cnv_v, n_parts_v = parse_placeholder_string(mix_v)
for key, val in pairs(ctx.params) do
tmp = tostring(key)
for idx = 2, n_parts_k, 2 do
if skel_k[idx] then cnv_k[idx] = val else cnv_k[idx] = tmp end
end
for idx = 2, n_parts_v, 2 do
if skel_v[idx] then cnv_v[idx] = val else cnv_v[idx] = tmp end
end
cache[get_parameter_name(table.concat(cnv_k))] =
table.concat(cnv_v)
end
end
ctx.params = cache
return context_iterate(ctx, 3)
end
-- Syntax: #invoke:params|swapping_names_and_values|pipe to
--[[
library.swapping_names_and_values = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local cache = {}
for key, val in pairs(ctx.params) do cache[val] = key end
ctx.params = cache
return context_iterate(ctx, 1)
end
]]--
-- Syntax: #invoke:params|combining|new parameter name|[sort
-- order]|[with/without flushed glue]|setting directives|...|pipe to
library.combining = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
return context_iterate(ctx, combine_parameters(
ctx,
function (key, val, kvs) return key .. kvs .. val end,
'combining'
) + 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|combining_values|new parameter name|[sort
-- order]|[with/without flushed glue]|setting directives|...|pipe to
library.combining_values = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
return context_iterate(ctx, combine_parameters(
ctx,
function (key, val, kvs) return val end,
'combining_values'
) + 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|combining_by_calling|template name|new parameter
-- name|pipe to
library.combining_by_calling = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local tname = ctx.pipe[1]
if tname ~= nil then tname = tname:match'^%s*(.*%S)'
else error(modulename ..
', ‘combining_by_calling’: No template name was provided', 0) end
if ctx.pipe[2] == nil then error(modulename ..
', ‘combining_by_calling’: No parameter name was provided', 0) end
ctx.params = {
[get_parameter_name(ctx.pipe[2])] = ctx.frame:expandTemplate{
title = tname,
args = ctx.params
}
}
return context_iterate(ctx, 3)
end
-- Syntax: #invoke:params|combining_by_invoking|module name|function name|new
-- parameter name|pipe to
library.combining_by_invoking = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local mname = ctx.pipe[1]
if mname ~= nil then mname = mname:match'^%s*(.*%S)'
else error(modulename ..
', ‘combining_by_invoking’: No module name was provided', 0) end
local fname = ctx.pipe[2]
if fname ~= nil then fname = fname:match'^%s*(.*%S)'
else error(modulename ..
', ‘combining_by_invoking’: No function name was provided', 0) end
if ctx.pipe[3] == nil then error(modulename ..
', ‘combining_by_invoking’: No parameter name was provided', 0) end
local model = { title = 'Module:' .. mname, args = ctx.params }
local mfunc = require(model.title)[fname]
if mfunc == nil then error(modulename ..
', ‘mapping_by_invoking’: The function ‘' .. fname ..
'’ does not exist', 0) end
ctx.params = {
[get_parameter_name(ctx.pipe[3])] =
tostring(mfunc(ctx.frame:newChild(model)))
}
return context_iterate(ctx, 4)
end
-- Syntax: #invoke:params|combining_by_magic|parser function|new parameter
-- name|pipe to
library.combining_by_magic = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local magic = ctx.pipe[1]
if magic ~= nil then magic = magic:match'^%s*(.*%S)'
else error(modulename ..
', ‘combining_by_magic’: No parser function was provided', 0) end
if ctx.pipe[2] == nil then error(modulename ..
', ‘combining_by_magic’: No parameter name was provided', 0) end
ctx.params = {
[get_parameter_name(ctx.pipe[2])] =
ctx.frame:callParserFunction(magic, ctx.params)
}
return context_iterate(ctx, 3)
end
-- Syntax: #invoke:params|snapshotting|[maximum number]|pipe to
library.snapshotting = function (ctx)
return context_iterate(ctx, make_child(ctx, ctx.params, 'snapshotting'))
end
-- Syntax: #invoke:params|remembering|[maximum number]|pipe to
library.remembering = function (ctx)
return context_iterate(ctx, make_child(ctx, ctx.oparams, 'remembering'))
end
-- Syntax: #invoke:params|entering_substack|[new]|pipe to
library.entering_substack = function (ctx)
local tbl, ncurrparent = ctx.params, ctx.n_parents + 1
if ctx.parents == nil then ctx.parents = { tbl }
else ctx.parents[ncurrparent] = tbl end
ctx.n_parents = ncurrparent
if ctx.pipe[1] ~= nil and ctx.pipe[1]:match'^%s*new%s*$' then
ctx.params = {}
return context_iterate(ctx, 2)
end
local currsnap = ctx.n_children
if currsnap > 0 then
ctx.params, ctx.children[currsnap], ctx.n_children =
ctx.children[currsnap], nil, currsnap - 1
else
local newparams = {}
for key, val in pairs(tbl) do newparams[key] = val end
ctx.params = newparams
end
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|pulling|parameter name|pipe to
library.pulling = function (ctx)
local opts = ctx.pipe
if opts[1] == nil then error(modulename ..
', ‘pulling’: No parameter to pull was provided', 0) end
local tmp = ctx.n_parents
local parent = tmp < 1 and ctx.oparams or ctx.parents[tmp]
tmp = get_parameter_name(opts[1])
if parent[tmp] ~= nil then ctx.params[tmp] = parent[tmp] end
return context_iterate(ctx, 2)
end
-- Syntax: #invoke:params|recalling|parameter name|pipe to
library.recalling = function (ctx)
local opts = ctx.pipe
if opts[1] == nil then error(modulename ..
', ‘recalling’: No parameter to recall was provided', 0) end
local arg = get_parameter_name(opts[1])
if ctx.oparams[arg] ~= nil then ctx.params[arg] = ctx.oparams[arg] end
return context_iterate(ctx, 2)
end
-- Syntax: #invoke:params|finding|parameter name|pipe to
--[[
library.finding = function (ctx)
local opts = ctx.pipe
if opts[1] == nil then error(modulename ..
', ‘finding’: No parameter to find was provided', 0) end
local arg = get_parameter_name(opts[1])
local parent
for idx = ctx.n_parents, 1, -1 do
parent = ctx.parents[idx]
if parent[arg] ~= nil then
ctx.params[arg] = parent[arg]
return context_iterate(ctx, 2)
end
end
if ctx.oparams[arg] ~= nil then ctx.params[arg] = ctx.oparams[arg] end
return context_iterate(ctx, 2)
end
]]--
-- Syntax: #invoke:params|picking|number of parameters to pick|pipe to
--[[
library.picking = function (ctx)
local len = tonumber(ctx.pipe[1])
if len == nil or len < 1 or math.floor(len) ~= len then error(modulename ..
', ‘picking’: The number of parameters to pick must be an integer greater than zero', 0) end
if ctx.n_parents < 1 then copy_table_maxn(ctx.params, ctx.oparams, len)
else copy_table_maxn(ctx.params, ctx.parents[ctx.n_parents], len) end
return context_iterate(ctx, 2)
end
]]--
-- Syntax: #invoke:params|detaching_substack|pipe to
library.detaching_substack = function (ctx)
local ncurrparent = ctx.n_parents
if ncurrparent < 1 then error(modulename ..
', ‘detaching_substack’: No substack has been created', 0) end
local parent = ctx.parents[ncurrparent]
for key in pairs(ctx.params) do parent[key] = nil end
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|dropping_substack|pipe to
library.dropping_substack = function (ctx)
local ncurrparent = ctx.n_parents
if ncurrparent < 1 then error(modulename ..
', ‘dropping_substack’: No substack has been created', 0) end
ctx.params, ctx.parents[ncurrparent], ctx.n_parents =
ctx.parents[ncurrparent], nil, ncurrparent - 1
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|leaving_substack|pipe to
library.leaving_substack = function (ctx)
local ncurrparent = ctx.n_parents
if ncurrparent < 1 then error(modulename ..
', ‘leaving_substack’: No substack has been created', 0) end
local currsnap = ctx.n_children + 1
if ctx.children == nil then ctx.children = { ctx.params }
else ctx.children[currsnap] = ctx.params end
ctx.params, ctx.parents[ncurrparent], ctx.n_parents, ctx.n_children =
ctx.parents[ncurrparent], nil, ncurrparent - 1, currsnap
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|merging_substack|pipe to
library.merging_substack = function (ctx)
local ncurrparent = ctx.n_parents
if ncurrparent < 1 then error(modulename ..
', ‘merging_substack’: No substack has been created', 0) end
local parent, child = ctx.parents[ncurrparent], ctx.params
ctx.params, ctx.parents[ncurrparent], ctx.n_parents = parent, nil,
ncurrparent - 1
for key, val in pairs(child) do parent[key] = val end
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|flushing|pipe to
library.flushing = function (ctx)
if ctx.n_children < 1 then error(modulename ..
', ‘flushing’: There are no substacks to flush', 0) end
local parent, currsnap = ctx.params, ctx.n_children
for key, val in pairs(ctx.children[currsnap]) do parent[key] = val end
ctx.children[currsnap], ctx.n_children = nil, currsnap - 1
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|setting_by_flushing|pipe to
library.setting_by_flushing = function (ctx)
set_strings_from_substack(ctx, ctx, 'setting_by_flushing')
return context_iterate(ctx, 1)
end
--[[ Functions ]]--
-----------------------------
-- Syntax: #invoke:params|count
library.count = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.pipe` and `ctx.params` might be the original metatables!
local retval = 0
for _ in ctx.iterfunc(ctx.params) do retval = retval + 1 end
if ctx.subset == -1 then retval = retval - #ctx.params end
ctx.text = retval
return false
end
-- Syntax: #invoke:args|concat_and_call|template name|[prepend 1]|[prepend 2]
-- |[...]|[item n]|[named item 1=value 1]|[...]|[named item n=value
-- n]|[...]
library.concat_and_call = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable!
local tname
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then tname = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if tname == nil then error(modulename ..
', ‘concat_and_call’: No template name was provided', 0) end
remove_numeric_keys(opts, 1, 1)
ctx.text = ctx.frame:expandTemplate{
title = tname,
args = concat_params(ctx)
}
return false
end
-- Syntax: #invoke:args|concat_and_invoke|module name|function name|[prepend
-- 1]|[prepend 2]|[...]|[item n]|[named item 1=value 1]|[...]|[named
-- item n=value n]|[...]
library.concat_and_invoke = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable!
local mname, fname
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then mname = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if mname == nil then error(modulename ..
', ‘concat_and_invoke’: No module name was provided', 0) end
if opts[2] ~= nil then fname = opts[2]:match'^%s*(.*%S)' end
if fname == nil then error(modulename ..
', ‘concat_and_invoke’: No function name was provided', 0) end
remove_numeric_keys(opts, 1, 2)
local mfunc = require('Module:' .. mname)[fname]
if mfunc == nil then error(modulename ..
', ‘concat_and_invoke’: The function ‘' .. fname ..
'’ does not exist', 0) end
ctx.text = mfunc(ctx.frame:newChild{
title = 'Module:' .. mname,
args = concat_params(ctx)
})
return false
end
-- Syntax: #invoke:args|concat_and_magic|parser function|[prepend 1]|[prepend
-- 2]|[...]|[item n]|[named item 1=value 1]|[...]|[named item n=
-- value n]|[...]
library.concat_and_magic = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable!
local magic
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then magic = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if magic == nil then error(modulename ..
', ‘concat_and_magic’: No parser function was provided', 0) end
remove_numeric_keys(opts, 1, 1)
ctx.text = ctx.frame:callParserFunction(magic, concat_params(ctx))
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|value_of|parameter name
library.value_of = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.pipe` and `ctx.params` might be the original metatables!
local opts = ctx.pipe
if opts[1] == nil then error(modulename ..
', ‘value_of’: No parameter name was provided', 0) end
local val
local key = opts[1]:match'^%s*(.-)%s*$'
if key == '0' or key:find'^%-?[1-9]%d*$' ~= nil then
key = tonumber(key)
val = ctx.params[key]
-- No worries: #ctx.params is unused when the modifier is in
-- first position (and therefore `ctx.params` is a metatable)
if val ~= nil and (
ctx.subset ~= -1 or key > #ctx.params or key < 1
) and (
ctx.subset ~= 1 or (key <= #ctx.params and key > 0)
) then
ctx.text = (ctx.header or '') .. val .. (ctx.footer or '')
else ctx.text = ctx.ifngiven or '' end
else
val = ctx.params[key]
if ctx.subset ~= 1 and val ~= nil then ctx.text = (ctx.header
or '') .. val .. (ctx.footer or '')
else ctx.text = ctx.ifngiven or '' end
end
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|list
library.list = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.pipe` might be the original metatable!
local ret, nss, kvs, pps = {}, 0, ctx.pairsep or '', ctx.itersep or ''
flush_params(ctx, function (key, val)
ret[nss + 1], ret[nss + 2], ret[nss + 3], ret[nss + 4], nss =
pps, key, kvs, val, nss + 4
end)
finalize_and_return_concatenated_list(ctx, ret, nss, 4)
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|list_values
library.list_values = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.pipe` might be the original metatable!
-- NOTE: `library.coins()` and `library.unique_coins()` rely on us
local ret, nss, pps = {}, 0, ctx.itersep or ''
flush_params(ctx, function (key, val)
ret[nss + 1], ret[nss + 2], nss = pps, val, nss + 2
end)
finalize_and_return_concatenated_list(ctx, ret, nss, 2)
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|list_maybe_with_names
library.list_maybe_with_names = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.pipe` might be the original metatable!
local ret, nss, kvs, pps = {}, 0, ctx.pairsep or '', ctx.itersep or ''
mixed_flush_params(
ctx,
function (key, val)
ret[nss + 1], ret[nss + 2], ret[nss + 3],
ret[nss + 4], nss = pps, '', '', val, nss + 4
end,
function (key, val)
ret[nss + 1], ret[nss + 2], ret[nss + 3],
ret[nss + 4], nss = pps, key, kvs, val, nss + 4
end
)
finalize_and_return_concatenated_list(ctx, ret, nss, 4)
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|coins|[first coin = value 1]|[second coin = value
-- 2]|[...]|[last coin = value N]
--[[
library.coins = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.pipe` might be the original metatable!
local opts, tbl = ctx.pipe, ctx.params
for key, val in pairs(tbl) do tbl[key] = opts[get_parameter_name(val)] end
return library.list_values(ctx)
end
]]--
-- Syntax: #invoke:params|unique_coins|[first coin = value 1]|[second coin =
-- value 2]|[...]|[last coin = value N]
--[[
library.unique_coins = function (ctx)
local tmp
local opts, tbl = ctx.pipe, ctx.params
for key, val in pairs(tbl) do
tmp = get_parameter_name(val)
tbl[key], opts[tmp] = opts[tmp], nil
end
return library.list_values(ctx)
end
]]
-- Syntax: #invoke:params|for_each|wikitext
library.for_each = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.pipe` might be the original metatable!
local ret, nss, pps, txt = {}, 0, ctx.itersep or '', ctx.pipe[1] or ''
local skel, cnv, n_parts = parse_placeholder_string(txt)
flush_params(ctx, function (key, val)
for idx = 2, n_parts, 2 do
if skel[idx] then cnv[idx] = val
else cnv[idx] = tostring(key) end
end
ret[nss + 1], nss = pps, nss + 2
ret[nss] = table.concat(cnv)
end)
finalize_and_return_concatenated_list(ctx, ret, nss, 2)
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|call_for_each|template name|[append 1]|[append 2]
-- |[...]|[append n]|[named param 1=value 1]|[...]|[named param
-- n=value n]|[...]
library.call_for_each = function (ctx)
local tname
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then tname = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if tname == nil then error(modulename ..
', ‘call_for_each’: No template name was provided', 0) end
local model = { title = tname, args = opts }
local ret, nss, ccs = {}, 0, ctx.itersep or ''
table.insert(opts, 1, true)
flush_params(ctx, function (key, val)
opts[1], opts[2], ret[nss + 1], nss = key, val, ccs, nss + 2
ret[nss] = ctx.frame:expandTemplate(model)
end)
finalize_and_return_concatenated_list(ctx, ret, nss, 2)
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|invoke_for_each|module name|module function|[append
-- 1]|[append 2]|[...]|[append n]|[named param 1=value 1]|[...]
-- |[named param n=value n]|[...]
library.invoke_for_each = function (ctx)
local mname, fname
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then mname = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if mname == nil then error(modulename ..
', ‘invoke_for_each’: No module name was provided', 0) end
if opts[2] ~= nil then fname = opts[2]:match'^%s*(.*%S)' end
if fname == nil then error(modulename ..
', ‘invoke_for_each’: No function name was provided', 0) end
local model = { title = 'Module:' .. mname, args = opts }
local mfunc = require(model.title)[fname]
local ret, nss, ccs = {}, 0, ctx.itersep or ''
flush_params(ctx, function (key, val)
opts[1], opts[2], ret[nss + 1], nss = key, val, ccs, nss + 2
ret[nss] = mfunc(ctx.frame:newChild(model))
end)
finalize_and_return_concatenated_list(ctx, ret, nss, 2)
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|magic_for_each|parser function|[append 1]|[append 2]
-- |[...]|[append n]|[named param 1=value 1]|[...]|[named param
-- n=value n]|[...]
library.magic_for_each = function (ctx)
local magic
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then magic = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if magic == nil then error(modulename ..
', ‘magic_for_each’: No parser function was provided', 0) end
local ret, nss, ccs = {}, 0, ctx.itersep or ''
table.insert(opts, 1, true)
flush_params(ctx, function (key, val)
opts[1], opts[2], ret[nss + 1], nss = key, val, ccs, nss + 2
ret[nss] = ctx.frame:callParserFunction(magic, opts)
end)
finalize_and_return_concatenated_list(ctx, ret, nss, 2)
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|call_for_each_value|template name|[append 1]|[append
-- 2]|[...]|[append n]|[named param 1=value 1]|[...]|[named param
-- n=value n]|[...]
library.call_for_each_value = function (ctx)
local tname
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then tname = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if tname == nil then error(modulename ..
', ‘call_for_each_value’: No template name was provided', 0) end
local model = { title = tname, args = opts }
local ret, nss, ccs = {}, 0, ctx.itersep or ''
flush_params(ctx, function (key, val)
opts[1], ret[nss + 1], nss = val, ccs, nss + 2
ret[nss] = ctx.frame:expandTemplate(model)
end)
finalize_and_return_concatenated_list(ctx, ret, nss, 2)
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|invoke_for_each_value|module name|[append 1]|[append
-- 2]|[...]|[append n]|[named param 1=value 1]|[...]|[named param
-- n=value n]|[...]
library.invoke_for_each_value = function (ctx)
local opts = ctx.pipe
local mname, fname
if opts[1] ~= nil then mname = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if mname == nil then error(modulename ..
', ‘invoke_for_each_value’: No module name was provided', 0) end
if opts[2] ~= nil then fname = opts[2]:match'^%s*(.*%S)' end
if fname == nil then error(modulename ..
', ‘invoke_for_each_value’: No function name was provided', 0) end
local model = { title = 'Module:' .. mname, args = opts }
local mfunc = require(model.title)[fname]
local ret, nss, ccs = {}, 0, ctx.itersep or ''
remove_numeric_keys(opts, 1, 1)
flush_params(ctx, function (key, val)
opts[1], ret[nss + 1], nss = val, ccs, nss + 2
ret[nss] = mfunc(ctx.frame:newChild(model))
end)
finalize_and_return_concatenated_list(ctx, ret, nss, 2)
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|magic_for_each_value|parser function|[append 1]
-- |[append 2]|[...]|[append n]|[named param 1=value 1]|[...]|[named
-- param n=value n]|[...]
library.magic_for_each_value = function (ctx)
local opts = ctx.pipe
local magic
if opts[1] ~= nil then magic = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if magic == nil then error(modulename ..
', ‘magic_for_each_value’: No parser function was provided', 0) end
local ret, nss, ccs = {}, 0, ctx.itersep or ''
flush_params(ctx, function (key, val)
opts[1], ret[nss + 1], nss = val, ccs, nss + 2
ret[nss] = ctx.frame:callParserFunction(magic, opts)
end)
finalize_and_return_concatenated_list(ctx, ret, nss, 2)
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|call_for_each_group|template name|[append 1]|[append
-- 2]|[...]|[append n]|[named param 1=value 1]|[...]|[named param
-- n=value n]|[...]
library.call_for_each_group = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.pipe` and `ctx.params` might be the original metatables!
local tmp
if ctx.pipe[1] ~= nil then tmp = ctx.pipe[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if tmp == nil then error(modulename ..
', ‘call_for_each_group’: No template name was provided', 0) end
local model = { title = tmp }
local opts, ret, nss, ccs = {}, {}, 0, ctx.itersep or ''
for key, val in pairs(ctx.pipe) do
if type(key) == 'number' then opts[key - 1] = val
else opts[key] = val end
end
ctx.pipe = opts
ctx.params = make_groups(ctx.params)
flush_params(ctx, function (gid, group)
for key, val in pairs(opts) do group[key] = val end
group[0], model.args, ret[nss + 1], nss = gid, group, ccs,
nss + 2
ret[nss] = ctx.frame:expandTemplate(model)
end)
finalize_and_return_concatenated_list(ctx, ret, nss, 2)
return false
end
--[[ First-position-only modifiers ]]--
---------------------------------------
-- Syntax: #invoke:params|new|pipe to
static_iface.new = function (child_frame)
local ctx = context_new(child_frame)
ctx.pipe = copy_or_ref_table(ctx.opipe, false)
ctx.params = {}
main_loop(ctx, context_iterate(ctx, 1))
return ctx.text
end
--[[ First-position-only functions ]]--
---------------------------------------
-- Syntax: #invoke:params|self
static_iface.self = function (frame)
return frame:getParent():getTitle()
end
--[[ Public metatable of functions ]]--
---------------------------------------
return setmetatable({}, {
__index = function (_, query)
local fname = query:match'^%s*(.*%S)'
if fname == nil then error(modulename ..
': You must specify a function to call', 0) end
local func = static_iface[fname]
if func ~= nil then return func end
func = library[fname]
if func == nil then error(modulename ..
': The function ‘' .. fname .. '’ does not exist', 0) end
return function (child_frame)
local ctx = context_new(child_frame)
ctx.pipe = copy_or_ref_table(ctx.opipe, refpipe[fname])
ctx.params = copy_or_ref_table(ctx.oparams, refparams[fname])
main_loop(ctx, func)
return ctx.text
end
end
})
s0wwht3ty2l3u443tnfm9mh3z5pmpgj
6591463
6591336
2026-07-24T03:48:36Z
Grufo
932013
Update from [[d:Special:GoToLinkedPage/mediawikiwiki/Q122696746|master]] using [[mw:Synchronizer| #Synchronizer]]
6591463
Scribunto
text/plain
require[[strict]]
--- ---
--- PRIVATE ENVIRONMENT ---
--- ________________________________ ---
--- ---
--[[ Abstract utilities ]]--
----------------------------
-- Helper function for `string.gsub()` (for managing zero-padded numbers)
local function zero_padded (str)
return ('%03d%s'):format(#str, str)
end
-- Helper function for `table.sort()` (for natural sorting)
local function natural_sort (var1, var2)
return var1:gsub('%d+', zero_padded) < var2:gsub('%d+', zero_padded)
end
-- Return a copy or a reference to a table
local function copy_or_ref_table (src, refonly)
if refonly then return src end
local newtab = {}
for key, val in pairs(src) do newtab[key] = val end
return newtab
end
-- Copy at most N items (of all kinds) from `src` to `dest` and return `dest`
local function copy_table_maxn (dest, src, len)
local idx = 1
for key, val in pairs(src) do
dest[key], idx = val, idx + 1
if idx > len then break end
end
return dest
end
-- Remove some numeric elements from a table, shifting everything to the left
local function remove_numeric_keys (tbl, idx, len)
local cache, tmp = {}, idx + len - 1
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' and key >= idx then
if key > tmp then cache[key - len] = val end
tbl[key] = nil
end
end
for key, val in pairs(cache) do tbl[key] = val end
end
-- Make a reduced copy of a table (shifting in both directions if necessary)
local function copy_table_reduced (tbl, idx, len)
local ret, tmp = {}, idx + len - 1
if idx > 0 then
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) ~= 'number' or key < idx then
ret[key] = val
elseif key > tmp then ret[key - len] = val end
end
elseif tmp > 0 then
local nshift = 1 - idx
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) ~= 'number' then ret[key] = val
elseif key > tmp then ret[key - tmp] = val
elseif key < idx then ret[key + nshift] = val end
end
else
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) ~= 'number' or key > tmp then
ret[key] = val
elseif key < idx then ret[key + len] = val end
end
end
return ret
end
-- Make an expanded copy of a table (shifting in both directions if necessary)
local function copy_table_expanded (tbl, idx, len)
local ret, tmp = {}, idx + len - 1
if idx > 0 then
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) ~= 'number' or key < idx then
ret[key] = val
else ret[key + len] = val end
end
elseif tmp > 0 then
local nshift = idx - 1
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) ~= 'number' then ret[key] = val
elseif key > 0 then ret[key + tmp] = val
elseif key < 1 then ret[key + nshift] = val end
end
else
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) ~= 'number' or key > tmp then
ret[key] = val
else ret[key - len] = val end
end
end
return ret
end
-- Given a table, create two new tables containing the sorted list of keys
local function get_key_list_sorted (tbl, sort_fn)
local nums, words, nn, nw = {}, {}, 0, 0
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' then
nn = nn + 1
nums[nn] = key
else
nw = nw + 1
words[nw] = key
end
end
table.sort(nums)
table.sort(words, sort_fn)
return nums, words, nn, nw
end
-- Parse a parameter name string and return it as a string or a number
local function get_parameter_name (par_str)
local ret = par_str:match'^%s*(.-)%s*$'
if ret ~= '0' and ret:find'^%-?[1-9]%d*$' == nil then return ret end
return tonumber(ret)
end
-- Move a key from a table to another, but only if under a different name and
-- always parsing numeric strings as numbers
local function steal_if_renamed (val, src, skey, dest, dkey)
local realkey = get_parameter_name(dkey)
if skey ~= realkey then dest[realkey], src[skey] = val, nil end
end
--[[ Public strings ]]--
------------------------
-- Special match keywords (functions and modifiers MUST avoid these names)
local mkeywords = {
['or'] = 0,
pattern = 1,
plain = 2,
strict = 3
}
-- Sort functions (functions and modifiers MUST avoid these names)
local sortfunctions = {
alphabetically = false,
naturally = natural_sort
}
-- Callback styles for the `mapping_*` and `renaming_*` class of modifiers
-- (functions and modifiers MUST avoid these names)
--[[
Meanings of the columns:
col[1] = Loop type (0-3)
col[2] = Number of module arguments that the style requires (1-3)
col[3] = Minimum number of sequential parameters passed to the callback
col[4] = Name of the callback parameter where to place each parameter name
col[5] = Name of the callback parameter where to place each parameter value
col[6] = Argument in the modifier's invocation that will override `col[4]`
col[7] = Argument in the modifier's invocation that will override `col[5]`
A value of `-1` indicates that no meaningful value is stored (i.e. `nil`)
]]--
local mapping_styles = {
names_and_values = { 3, 2, 2, 1, 2, -1, -1 },
values_and_names = { 3, 2, 2, 2, 1, -1, -1 },
values_only = { 1, 2, 1, -1, 1, -1, -1 },
names_only = { 2, 2, 1, 1, -1, -1, -1 },
names_and_values_as = { 3, 4, 0, -1, -1, 2, 3 },
names_only_as = { 2, 3, 0, -1, -1, 2, -1 },
values_only_as = { 1, 3, 0, -1, -1, -1, 2 },
blindly = { 0, 2, 0, -1, -1, -1, -1 }
}
-- Memory slots (functions and modifiers MUST avoid these names)
local memoryslots = {
h = 'header',
f = 'footer',
i = 'itersep',
l = 'lastsep',
n = 'ifngiven',
p = 'pairsep',
s = 'oxfordsep'
}
-- Possible trimming modes for the `parsing` modifier
local trim_parse_opts = {
trim_none = { false, false },
trim_positional = { false, true },
trim_named = { true, false },
trim_all = { true, true }
}
-- Possible string modes for the iteration separator in the `parsing` and
-- `reinterpreting` modifiers
local isep_parse_opts = {
splitter_pattern = false,
splitter_string = true
}
-- Possible string modes for the key-value separator in the `parsing` and
-- `reinterpreting` modifiers
local psep_parse_opts = {
setter_pattern = false,
setter_string = true
}
-- Possible position references for the `splicing` modifier
local position_references = {
add_nothing = 0,
add_smallest_number = 1,
add_last_of_sequence = 2,
add_largest_number = 3
}
-- Possible modes for the `reassigning` modifier
local a_modes = {
transfer = 0,
clone = 1,
rename = 2,
copy = 3,
sacrifice = 4,
provide = 5,
spare = 7
}
-- Functions and modifiers MUST avoid these names too: `here`, `in_substack`,
-- `let`, `expose`, `use`, `with_flushed_glue`, `without_flushed_glue`
-- `without_sorting`
--[[ Private constants ]]--
---------------------------
-- Hard-coded name of the module (to avoid going through `frame:getTitle()`)
local modulename = 'Module:Params'
-- The functions listed here declare that they don't need the `frame.args`
-- metatable to be copied into a regular table; if they are modifiers they also
-- guarantee that they will make their own (modified) copy available
local refpipe = {
call_for_each_group = true,
--coins = true,
count = true,
evaluating = true,
for_each = true,
list = true,
list_values = true,
list_maybe_with_names = true,
value_of = true
}
-- The functions listed here declare that they don't need the
-- `frame:getParent().args` metatable to be copied into a regular table; if
-- they are modifiers they also guarantee that they will make their own
-- (modified) copy available
local refparams = {
call_for_each_group = true,
combining = true,
combining_by_calling = true,
combining_values = true,
concat_and_call = true,
concat_and_invoke = true,
concat_and_magic = true,
count = true,
grouping_by_calling = true,
mixing_names_and_values = true,
keeping_at_most = true,
renaming_by_mixing = true,
renaming_to_sequence = true,
renaming_to_uppercase = true,
renaming_to_lowercase = true,
--renaming_to_values = true,
shifting = true,
splicing = true,
--swapping_names_and_values = true,
value_of = true,
with_name_matching = true
}
-- Maximum number of numeric parameters that can be filled, if missing (we
-- chose an arbitrary number for this constant; you can discuss about its
-- optimal value at Module talk:Params)
local maxfill = 1024
-- The private table of functions
local library = {}
-- Functions and modifiers that can only be invoked in first position
local static_iface = {}
--[[ Private functions ]]--
---------------------------
-- Create a new context
local function context_new (child_frame)
local main_frame = child_frame:getParent()
return {
frame = main_frame,
opipe = child_frame.args,
oparams = main_frame.args,
firstposonly = static_iface,
iterfunc = pairs,
sorttype = 0,
n_parents = 0,
n_children = 0,
n_available = maxfill
}
end
-- Move to the next action within the user-given list
local function context_iterate (ctx, n_forward)
local nextfn
if ctx.pipe[n_forward] ~= nil then
nextfn = ctx.pipe[n_forward]:match'^%s*(.*%S)'
end
if nextfn == nil then error(modulename ..
': You must specify a function to call', 0) end
if library[nextfn] == nil then
if ctx.firstposonly[nextfn] == nil then error(modulename ..
': The function ‘' .. nextfn .. '’ does not exist', 0)
else error(modulename .. ': The ‘' .. nextfn ..
'’ directive can only appear in first position', 0)
end
end
remove_numeric_keys(ctx.pipe, 1, n_forward)
return library[nextfn]
end
-- Main loop
local function main_loop (ctx, start_with)
local fn = start_with
repeat fn = fn(ctx) until not fn
if ctx.n_parents > 0 then error(modulename ..
': One or more ‘merging_substack’ directives are missing', 0) end
if ctx.n_children > 0 then error(modulename ..
', For some of the snapshots either the ‘flushing’ directive is missing or a group has not been properly closed with ‘merging_substack’', 0) end
end
-- Load a `setting`-like directive string into the `dest` table
local function set_strings_from_opts (dest, opts, start_from)
local cmd
if opts[start_from] == nil then return start_from - 1 end
cmd = opts[start_from]:gsub('%s+', ''):gsub('/+', '/')
:match'^/*(.*[^/])'
if cmd == nil then return start_from end
local vname, chr
local amap, sep, argc = {}, string.byte('/'), start_from + 1
for idx = 1, #cmd do
chr = cmd:byte(idx)
if chr == sep then
for key, val in ipairs(amap) do
dest[val], amap[key] = opts[argc], nil
end
argc = argc + 1
else
vname = memoryslots[string.char(chr)]
if vname == nil then error(modulename ..
', ‘setting’: Unknown slot ‘' ..
string.char(chr) .. '’', 0) end
table.insert(amap, vname)
end
end
for key, val in ipairs(amap) do dest[val] = opts[argc] end
return argc
end
-- Add a new stack of parameters to `ctx.children`
local function new_substack (ctx)
local currsnap, newparams = ctx.n_children + 1, {}
if ctx.children == nil then ctx.children = { newparams }
else ctx.children[currsnap] = newparams end
ctx.n_children = currsnap
return newparams
end
-- Parse a raw argument containing a `sortfunctions` directive, or
-- `'without_sorting'`, or `nil`
local function load_sort_opt (raw_arg)
if raw_arg == nil then return nil, 1, false end
local trarg = raw_arg:match'^%s*(.-)%s*$'
if trarg == 'without_sorting' then return nil, 2, false, trarg end
local tmp = sortfunctions[trarg]
if tmp == nil then return nil, 1, false, trarg end
return tmp or nil, 2, true, trarg
end
-- Parse optional user arguments of type `...|[let/use]|[...]|[let/use]|[...]|
-- [number of additional parameters]|[parameter 1]|[parameter 2]|[...]`
local function load_child_opts (src, start_from, append_after, params)
local tnamed, tmp1, tmp2
local pin, tbl, mem = start_from, {}, {}
while src[pin] ~= nil and src[pin + 1] ~= nil do
tmp1 = src[pin]:match'^%s*(.*%S)'
if tmp1 == 'let' and src[pin + 2] ~= nil then
tmp1 = get_parameter_name(src[pin + 1])
mem[tmp1], tbl[tmp1], pin = nil, src[pin + 2], pin + 3
--[[
elseif tmp1 == 'expose' then
tmp1 = get_parameter_name(src[pin + 1])
tmp2 = params[tmp1]
mem[tmp1], tbl[tmp1], pin = tmp2, tmp2, pin + 2
]]--
elseif tmp1 == 'use' and src[pin + 2] ~= nil then
tmp1 = get_parameter_name(src[pin + 2])
tmp2 = params[tmp1]
mem[tmp1], tbl[get_parameter_name(src[pin + 1])], pin =
tmp2, tmp2, pin + 3
else break end
end
local tnew = copy_or_ref_table(params, next(mem) == nil)
for key in pairs(mem) do tnew[key] = nil end
if pin ~= start_from then tnamed, tbl = tbl, {} end
tmp1 = tonumber(src[pin])
if tmp1 ~= nil and math.floor(tmp1) == tmp1 then
if tmp1 < 0 then tmp1 = -1 end
tmp2 = append_after - pin
for idx = pin + 1, pin + tmp1 do tbl[idx + tmp2] = src[idx] end
pin = pin + tmp1 + 1
end
if tnamed ~= nil then
for key, val in pairs(tnamed) do tbl[key] = val end
end
return tbl, pin, tnew, mem
end
-- Load the optional arguments of some of the `mapping_*` and `renaming_*`
-- class of modifiers
local function load_callback_opts (src, n_skip, default_style, params)
local style, shf
local tmp = src[n_skip + 1]
if tmp ~= nil then style = mapping_styles[tmp:match'^%s*(.-)%s*$'] end
if style == nil then style, shf = default_style, n_skip - 1
else shf = n_skip end
local n_exist, karg, varg = style[3], style[4], style[5]
tmp = style[6]
if tmp > -1 then
karg = src[tmp + shf]:match'^%s*(.-)%s*$'
if karg == '0' or karg:find'^%-?[1-9]%d*$' ~= nil then
karg = tonumber(karg)
n_exist = math.max(n_exist, karg)
end
end
tmp = style[7]
if tmp > -1 then
varg = src[tmp + shf]:match'^%s*(.-)%s*$'
if varg == '0' or varg:find'^%-?[1-9]%d*$' ~= nil then
varg = tonumber(varg)
n_exist = math.max(n_exist, varg)
end
end
local dest, argc, tnew, mem = load_child_opts(src, style[2] + shf,
n_exist, params)
tmp = style[1]
if (tmp == 3 or tmp == 2) and dest[karg] ~= nil then
tmp = tmp - 2 end
if (tmp == 3 or tmp == 1) and dest[varg] ~= nil then
tmp = tmp - 1 end
return dest, argc, tmp, karg, varg, tnew, mem
end
-- Parse the arguments of some of the `mapping_*` and `renaming_*` class of
-- modifiers
local function load_replace_args (opts, whoami)
if opts[1] == nil then error(modulename ..
', ‘' .. whoami .. '’: No pattern string was given', 0) end
if opts[2] == nil then error(modulename ..
', ‘' .. whoami .. '’: No replacement string was given', 0) end
local ptn, repl, nmax, argc = opts[1], opts[2], tonumber(opts[3]), 3
if nmax ~= nil or (opts[3] or ''):match'^%s*$' ~= nil then argc = 4 end
local flg = opts[argc]
if flg ~= nil then flg = mkeywords[flg:match'^%s*(.-)%s*$'] end
if flg == 0 then flg = nil elseif flg ~= nil then argc = argc + 1 end
return ptn, repl, nmax, flg, argc, (nmax ~= nil and nmax < 1) or
(flg == 3 and ptn == repl)
end
-- Parse the arguments of the `with_*_matching` class of modifiers
local function load_pattern_args (opts, whoami)
local keyw
local ptns, state, nptns, cnt = {}, 0, 0, 1
for _, val in ipairs(opts) do
if state == 0 then
nptns, state = nptns + 1, -1
ptns[nptns] = { val, false, false }
else
keyw = val:match'^%s*(.*%S)'
if keyw == nil or mkeywords[keyw] == nil or (
state > 0 and mkeywords[keyw] > 0
) then break
else
state = mkeywords[keyw]
if state > 1 then ptns[nptns][2] = true end
if state == 3 then ptns[nptns][3] = true end
end
end
cnt = cnt + 1
end
if state == 0 then error(modulename .. ', ‘' .. whoami ..
'’: No pattern was given', 0) end
return ptns, nptns, cnt
end
-- Load the optional arguments of the `parsing`, `reinterpreting` and
-- `evaluating` modifiers
local function load_parse_opts (opts, start_from, isp, psp)
local tmp
local optslots, noptslots, argc, trimn, trimu, iplain, pplain =
{ true, true, true }, 3, start_from, true, false, true, true
repeat
noptslots, tmp = noptslots - 1, opts[argc]
if tmp == nil then break end
tmp = tmp:match'^%s*(.-)%s*$'
if optslots[1] ~= nil and trim_parse_opts[tmp] ~= nil then
tmp = trim_parse_opts[tmp]
trimn, trimu, optslots[1] = tmp[1], tmp[2], nil
elseif optslots[2] ~= nil and isep_parse_opts[tmp] ~= nil then
argc = argc + 1
iplain, isp, optslots[2] = isep_parse_opts[tmp],
opts[argc], nil
elseif optslots[3] ~= nil and psep_parse_opts[tmp] ~= nil then
argc = argc + 1
pplain, psp, optslots[3] = psep_parse_opts[tmp],
opts[argc], nil
else break end
argc = argc + 1
until noptslots < 1
return isp, iplain, psp, pplain, trimn, trimu, argc
end
-- Map parameters' values using a custom callback and a referenced table
local value_maps = {
[0] = function (tbl, margs, karg, varg, fn)
for key in pairs(tbl) do tbl[key] = fn() end
end,
[1] = function (tbl, margs, karg, varg, fn)
for key, val in pairs(tbl) do
margs[varg] = val
tbl[key] = fn()
end
end,
[2] = function (tbl, margs, karg, varg, fn)
for key in pairs(tbl) do
margs[karg] = key
tbl[key] = fn()
end
end,
[3] = function (tbl, margs, karg, varg, fn)
for key, val in pairs(tbl) do
margs[karg], margs[varg] = key, val
tbl[key] = fn()
end
end
}
-- Private table for `map_names()`
local name_thieves = {
[0] = function (cache, tbl, rargs, karg, varg, fn)
for key, val in pairs(tbl) do
steal_if_renamed(val, tbl, key, cache, fn())
end
end,
[1] = function (cache, tbl, rargs, karg, varg, fn)
for key, val in pairs(tbl) do
rargs[varg] = val
steal_if_renamed(val, tbl, key, cache, fn())
end
end,
[2] = function (cache, tbl, rargs, karg, varg, fn)
for key, val in pairs(tbl) do
rargs[karg] = key
steal_if_renamed(val, tbl, key, cache, fn())
end
end,
[3] = function (cache, tbl, rargs, karg, varg, fn)
for key, val in pairs(tbl) do
rargs[karg], rargs[varg] = key, val
steal_if_renamed(val, tbl, key, cache, fn())
end
end
}
-- Map parameters' names using a custom callback and a referenced table
local function map_names (tbl, rargs, karg, varg, looptype, fn)
local cache = {}
name_thieves[looptype](cache, tbl, rargs, karg, varg, fn)
for key, val in pairs(cache) do tbl[key] = val end
end
-- Return a new table that contains `src` regrouped according to the numeric
-- suffixes in its keys
local function make_groups (src)
-- NOTE: `src` might be the original metatable!
local prefix, gid
local groups = {}
for key, val in pairs(src) do
-- `key` must only be a string or a number...
if type(key) == 'string' then
prefix, gid = key:match'^%s*(.-)%s*(%-?%d*)%s*$'
gid = tonumber(gid) or ''
else
prefix, gid = '', key
end
if groups[gid] == nil then groups[gid] = {} end
if prefix == '0' or prefix:find'^%-?[1-9]%d*$' ~= nil then
prefix = tonumber(prefix)
if prefix < 1 then prefix = prefix - 1 end
end
groups[gid][prefix] = val
end
return groups
end
-- Split into parts a string containing the `$#` and `$@` placeholders and
-- return the information as a skeleton table, a canvas table and a length
local function parse_placeholder_string (target)
local idx, s_pos, skel, canvas = 1, 1, {}, {}
local e_pos = string.find(target, '%$[@#]', 1, false)
while e_pos ~= nil do
canvas[idx] = target:sub(s_pos, e_pos - 1)
skel[idx + 1] = target:sub(e_pos, e_pos + 1) == '$@'
idx = idx + 2
s_pos = e_pos + 2
e_pos = string.find(target, '%$[@#]', s_pos, false)
end
if (s_pos > target:len()) then idx = idx - 1
else canvas[idx] = target:sub(s_pos) end
return skel, canvas, idx
end
-- Populate a table by parsing a parameter string (heavy lifting for `parsing`,
-- `reinterpreting` and `evaluating`)
local function parse_parameter_string (tbl, str, isp, ipl, psp, ppl, trn, tru)
local key, val, spos1, spos2, pos1, pos2
local pos3, idx, lenplone = 0, 1, #str + 1
if isp == nil or isp == '' then
if psp == nil or psp == '' then
if tru then tbl[idx] = str:match'^%s*(.-)%s*$'
else tbl[idx] = str end
return idx
end
spos1, spos2 = str:find(psp, 1, ppl)
if spos1 == nil then
key = idx
if tru then val = str:match'^%s*(.-)%s*$'
else val = str end
idx = idx + 1
else
key = get_parameter_name(str:sub(1, spos1 - 1))
val = str:sub(spos2 + 1)
if trn then val = val:match'^%s*(.-)%s*$' end
end
tbl[key] = val
return idx
end
if psp == nil or psp == '' then
repeat
pos1 = pos3 + 1
pos2, pos3 = str:find(isp, pos1, ipl)
val = str:sub(pos1, (pos2 or lenplone) - 1)
if tru then val = val:match'^%s*(.-)%s*$' end
tbl[idx], idx = val, idx + 1
until pos2 == nil
return idx
end
repeat
pos1 = pos3 + 1
pos2, pos3 = str:find(isp, pos1, ipl)
val = str:sub(pos1, (pos2 or lenplone) - 1)
spos1, spos2 = val:find(psp, 1, ppl)
if spos1 == nil then
key = idx
if tru then val = val:match'^%s*(.-)%s*$' end
idx = idx + 1
else
key = get_parameter_name(val:sub(1, spos1 - 1))
val = val:sub(spos2 + 1)
if trn then val = val:match'^%s*(.-)%s*$' end
end
tbl[key] = val
until pos2 == nil
return idx
end
-- Heavy lifting for `snapshotting` and `remembering`
local function make_child (ctx, src, whoami)
local len = tonumber(ctx.pipe[1])
if len == nil or len == 0 then
local stack = new_substack(ctx)
for key, val in pairs(src) do stack[key] = val end
return len == nil and 1 or 2
end
if len < 0 or math.floor(len) ~= len then error(modulename ..
', ‘' .. whoami .. '’: The number of parameters to copy must be an integer greater than zero', 0) end
copy_table_maxn(new_substack(ctx), src, len)
return 2
end
-- Heavy lifting for `setting_by_flushing`, `combining` and `combining_values`
local function set_strings_from_substack (ctx, dest, whoami)
if ctx.n_children < 1 then error(modulename ..
', ‘' .. whoami .. '’: There are no substacks to flush', 0) end
local currsnap = ctx.n_children
local stack = ctx.children[currsnap]
for key, val in pairs(memoryslots) do
if stack[key] ~= nil then dest[val] = stack[key] end
end
ctx.children[currsnap], ctx.n_children = nil, currsnap - 1
end
-- Heavy lifting for `combining` and `combining_values`
local function combine_parameters (ctx, keyval_fn, whoami)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! This function
-- MUST create a copy of it before returning
local opts = ctx.pipe
if ctx.pipe[1] == nil then error(modulename ..
', ‘' .. whoami .. '’: No parameter name was provided', 0) end
local argc
local tbl, vars = ctx.params, {}
local sortfn, varsarg0, do_sort, tmp = load_sort_opt(opts[2])
if varsarg0 == 2 then tmp = opts[3] and opts[3]:match'^%s*(.-)%s*$' end
if tmp == 'with_flushed_glue' then
varsarg0 = varsarg0 + 1
argc = set_strings_from_opts(vars, opts, varsarg0 + 1)
set_strings_from_substack(ctx, vars, whoami)
else
if tmp == 'without_flushed_glue' then varsarg0 = varsarg0 + 1 end
argc = set_strings_from_opts(vars, opts, varsarg0 + 1)
end
if argc < varsarg0 then error(modulename ..
', ‘' .. whoami .. '’: No setting directive was given', 0) end
if next(tbl) == nil then
if vars.ifngiven ~= nil then ctx.params =
{ [get_parameter_name(ctx.pipe[1])] = vars.ifngiven }
elseif tbl == ctx.oparams then ctx.params = {} end
return argc
end
local cache, len
if do_sort then
local words
cache, words, len, tmp = get_key_list_sorted(tbl, sortfn)
for idx = 1, tmp do cache[len + idx] = words[idx] end
len = len + tmp
else
len, cache = 0, {}
for key in pairs(tbl) do
len = len + 1
cache[len] = key
end
end
local pmap, nss, kvs, pps = {}, 0, vars.pairsep or '', vars.itersep or ''
for idx = 1, len do
tmp, pmap[nss + 1] = cache[idx], pps
pmap[nss + 2] = keyval_fn(tmp, tbl[tmp], kvs)
nss = nss + 2
end
tmp = vars.oxfordsep or vars.lastsep
if tmp ~= nil and nss > 4 then pmap[nss - 1] = tmp
elseif nss > 2 and vars.lastsep ~= nil then
pmap[nss - 1] = vars.lastsep
end
pmap[1] = vars.header or ''
if vars.footer ~= nil then pmap[nss + 1] = vars.footer end
ctx.params = { [get_parameter_name(ctx.pipe[1])] = table.concat(pmap) }
return argc
end
-- Concatenate the numeric keys from the table of parameters to the numeric
-- keys from the table of options; non-numeric keys from the table of options
-- will prevail over colliding non-numeric keys from the table of parameters
local function concat_params (ctx)
local retval, tbl, nmax = {}, ctx.params, table.maxn(ctx.pipe)
if ctx.subset == 1 then
-- We need only the sequence
for key, val in ipairs(tbl) do retval[key + nmax] = val end
else
if ctx.subset == -1 then
for key in ipairs(tbl) do tbl[key] = nil end
end
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' and key > 0 then
retval[key + nmax] = val
else retval[key] = val end
end
end
for key, val in pairs(ctx.pipe) do retval[key] = val end
return retval
end
-- Flush the parameters by calling a custom function for each value (after this
-- function has been invoked `ctx.params` will be no longer usable)
local function flush_params (ctx, fn)
local tbl = ctx.params
if ctx.subset == 1 then
for key, val in ipairs(tbl) do fn(key, val) end
return
end
if ctx.subset == -1 then
for key, val in ipairs(tbl) do tbl[key] = nil end
end
if ctx.sorttype > 0 then
local nums, words, nn, nw = get_key_list_sorted(tbl, natural_sort)
if ctx.sorttype == 2 then
for idx = 1, nw do fn(words[idx], tbl[words[idx]]) end
for idx = 1, nn do fn(nums[idx], tbl[nums[idx]]) end
return
end
for idx = 1, nn do fn(nums[idx], tbl[nums[idx]]) end
for idx = 1, nw do fn(words[idx], tbl[words[idx]]) end
return
end
if ctx.subset ~= -1 then
for key, val in ipairs(tbl) do
fn(key, val)
tbl[key] = nil
end
end
for key, val in pairs(tbl) do fn(key, val) end
end
-- Flush the parameters by calling one of two custom functions for each value
-- (after this function has been invoked `ctx.params` will be no longer usable)
local function mixed_flush_params (ctx, fn_seq, fn_oth)
if ctx.subset == 1 then
for key, val in ipairs(ctx.params) do fn_seq(key, val) end
return
end
if ctx.subset == -1 then
flush_params(ctx, fn_oth)
return
end
local tbl = ctx.params
if ctx.sorttype > 0 then
local nums, words, nn, nw = get_key_list_sorted(tbl, natural_sort)
local sequence = {}
for key, val in ipairs(tbl) do sequence[key] = val end
if ctx.sorttype == 2 then
for idx = 1, nw do fn_oth(words[idx], tbl[words[idx]]) end
end
for idx = 1, nn do
if sequence[nums[idx]] then fn_seq(nums[idx], sequence[nums[idx]])
else fn_oth(nums[idx], tbl[nums[idx]]) end
end
if ctx.sorttype ~= 2 then
for idx = 1, nw do fn_oth(words[idx], tbl[words[idx]]) end
end
return
end
for key, val in ipairs(tbl) do
fn_seq(key, val)
tbl[key] = nil
end
for key, val in pairs(tbl) do fn_oth(key, val) end
end
-- Finalize and return a concatenated list
local function finalize_and_return_concatenated_list (ctx, lst, len, modsize)
if len > 0 then
local tmp = ctx.oxfordsep or ctx.lastsep
if tmp ~= nil and len > modsize * 2 then
lst[len - modsize + 1] = tmp
elseif len > modsize and ctx.lastsep ~= nil then
lst[len - modsize + 1] = ctx.lastsep
end
lst[1] = ctx.header or ''
if ctx.footer ~= nil then lst[len + 1] = ctx.footer end
ctx.text = table.concat(lst)
else ctx.text = ctx.ifngiven or '' end
end
--- ---
--- PUBLIC ENVIRONMENT ---
--- ________________________________ ---
--- ---
--[[ Modifiers ]]--
-------------------
-- Syntax: #invoke:params|sequential|pipe to
library.sequential = function (ctx)
if ctx.subset == 1 then error(modulename ..
': The ‘sequential’ directive has been provided more than once', 0) end
if ctx.subset == -1 then error(modulename ..
': The two directives ‘non-sequential’ and ‘sequential’ are in contradiction with each other', 0) end
if ctx.sorttype > 0 then error(modulename ..
': The ‘all_sorted’ and ‘reassorted’ directives are redundant when followed by ‘sequential’', 0) end
ctx.iterfunc, ctx.subset = ipairs, 1
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|non-sequential|pipe to
library['non-sequential'] = function (ctx)
if ctx.subset == -1 then error(modulename ..
': The ‘non-sequential’ directive has been provided more than once', 0) end
if ctx.subset == 1 then error(modulename ..
': The two directives ‘sequential’ and ‘non-sequential’ are in contradiction with each other', 0) end
ctx.iterfunc, ctx.subset = pairs, -1
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|all_sorted|pipe to
library.all_sorted = function (ctx)
if ctx.sorttype == 1 then error(modulename ..
': The ‘all_sorted’ directive has been provided more than once', 0) end
if ctx.subset == 1 then error(modulename ..
': The ‘all_sorted’ directive is redundant after ‘sequential’', 0) end
if ctx.sorttype == 2 then error(modulename ..
': The two directives ‘reassorted’ and ‘sequential’ are in contradiction with each other', 0) end
ctx.sorttype = 1
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|reassorted|pipe to
library.reassorted = function (ctx)
if ctx.sorttype == 2 then error(modulename ..
': The ‘reassorted’ directive has been provided more than once', 0) end
if ctx.subset == 1 then error(modulename ..
': The ‘reassorted’ directive is redundant after ‘sequential’', 0) end
if ctx.sorttype == 1 then error(modulename ..
': The two directives ‘sequential’ and ‘reassorted’ are in contradiction with each other', 0) end
ctx.sorttype = 2
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|setting|directives|...|pipe to
library.setting = function (ctx)
local argc = set_strings_from_opts(ctx, ctx.pipe, 1)
if argc < 2 then error(modulename ..
', ‘setting’: No directive was given', 0) end
return context_iterate(ctx, argc + 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|scoring|new parameter name|[container]|pipe to
library.scoring = function (ctx)
if ctx.pipe[1] == nil then error(modulename ..
', ‘scoring’: No parameter name was provided', 0) end
local tmp
local retval, opts = 0, ctx.pipe
for _ in pairs(ctx.params) do retval = retval + 1 end
if opts[2] ~= nil then tmp = opts[2]:match'^%s*(.*%S)' end
if tmp == 'in_substack' then
new_substack(ctx)[get_parameter_name(opts[1])] = tostring(retval)
return context_iterate(ctx, 3)
end
ctx.params[get_parameter_name(opts[1])] = tostring(retval)
return context_iterate(ctx, tmp == 'here' and 3 or 2)
end
-- Syntax: #invoke:params|squeezing|pipe to
library.squeezing = function (ctx)
local store, indices, tbl, newlen = {}, {}, ctx.params, 0
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' then
newlen = newlen + 1
indices[newlen], store[key], tbl[key] = key, val, nil
end
end
table.sort(indices)
for idx = 1, newlen do tbl[idx] = store[indices[idx]] end
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|filling_the_gaps|pipe to
library.filling_the_gaps = function (ctx)
local newval, tbl, tmp, nmin, nmax, nnums =
ctx.pipe[1], ctx.params, {}, 1, nil, -1
if newval == nil then error(modulename ..
', ‘filling_the_gaps’: No value was provided', 0) end
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' then
if nmax == nil then
if key < nmin then nmin = key end
nmax = key
elseif key > nmax then nmax = key
elseif key < nmin then nmin = key end
tmp[key], nnums = val, nnums + 1
end
end
if nmax ~= nil and nmax - nmin > nnums then
ctx.n_available = ctx.n_available + nmin + nnums - nmax
if ctx.n_available < 0 then error(modulename ..
', ‘filling_the_gaps’: It is possible to fill at most ' ..
tostring(maxfill) .. ' parameters', 0) end
for idx = nmin, nmax, 1 do tbl[idx] = newval end
for key, val in pairs(tmp) do tbl[key] = val end
end
return context_iterate(ctx, 2)
end
-- Syntax: #invoke:params|clearing|pipe to
library.clearing = function (ctx)
local tbl, numerics = ctx.params, {}
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' then
numerics[key], tbl[key] = val, nil
end
end
for key, val in ipairs(numerics) do tbl[key] = val end
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|cutting|left cut|right cut|pipe to
library.cutting = function (ctx)
local lcut = tonumber(ctx.pipe[1])
if lcut == nil or math.floor(lcut) ~= lcut then error(modulename ..
', ‘cutting’: Left cut must be an integer number', 0) end
local rcut = tonumber(ctx.pipe[2])
if rcut == nil or math.floor(rcut) ~= rcut then error(modulename ..
', ‘cutting’: Right cut must be an integer number', 0) end
local tbl = ctx.params
local len = #tbl
if lcut < 0 then lcut = len + lcut end
if rcut < 0 then rcut = len + rcut end
local tot = lcut + rcut
if tot > 0 then
local cache = {}
if tot >= len then
for key in ipairs(tbl) do tbl[key] = nil end
tot = len
else
for idx = len - rcut + 1, len, 1 do tbl[idx] = nil end
for idx = 1, lcut, 1 do tbl[idx] = nil end
end
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' and key > 0 then
if key > len then cache[key - tot] = val
else cache[key - lcut] = val end
tbl[key] = nil
end
end
for key, val in pairs(cache) do tbl[key] = val end
end
return context_iterate(ctx, 3)
end
-- Syntax: #invoke:params|cropping|left crop|right crop|pipe to
library.cropping = function (ctx)
local lcut = tonumber(ctx.pipe[1])
if lcut == nil or math.floor(lcut) ~= lcut then error(modulename ..
', ‘cropping’: Left crop must be an integer number', 0) end
local rcut = tonumber(ctx.pipe[2])
if rcut == nil or math.floor(rcut) ~= rcut then error(modulename ..
', ‘cropping’: Right crop must be an integer number', 0) end
local tbl = ctx.params
local nmin, nmax
for key in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' then
if nmin == nil then nmin, nmax = key, key
elseif key > nmax then nmax = key
elseif key < nmin then nmin = key end
end
end
if nmin ~= nil then
local len = nmax - nmin + 1
if lcut < 0 then lcut = len + lcut end
if rcut < 0 then rcut = len + rcut end
if lcut + rcut - len > -1 then
for key in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' then tbl[key] = nil end
end
elseif lcut + rcut > 0 then
for idx = nmax - rcut + 1, nmax do tbl[idx] = nil end
for idx = nmin, nmin + lcut - 1 do tbl[idx] = nil end
local lshift = nmin + lcut - 1
if lshift > 0 then
for idx = lshift + 1, nmax, 1 do
tbl[idx - lshift], tbl[idx] =
tbl[idx], nil
end
end
end
end
return context_iterate(ctx, 3)
end
-- Syntax: #invoke:params|purging|start offset|length|pipe to
library.purging = function (ctx)
local idx = tonumber(ctx.pipe[1])
if idx == nil or math.floor(idx) ~= idx then error(modulename ..
', ‘purging’: Start offset must be an integer number', 0) end
local len = tonumber(ctx.pipe[2])
if len == nil or math.floor(len) ~= len then error(modulename ..
', ‘purging’: Length must be an integer number', 0) end
local tbl = ctx.params
if len < 1 then
len = len + table.maxn(tbl)
if idx > len then return context_iterate(ctx, 3) end
len = len - idx + 1
end
ctx.params = copy_table_reduced(tbl, idx, len)
return context_iterate(ctx, 3)
end
-- Syntax: #invoke:params|backpurging|start offset|length|pipe to
library.backpurging = function (ctx)
local last = tonumber(ctx.pipe[1])
if last == nil or math.floor(last) ~= last then error(modulename ..
', ‘backpurging’: Start offset must be an integer number', 0) end
local len = tonumber(ctx.pipe[2])
if len == nil or math.floor(len) ~= len then error(modulename ..
', ‘backpurging’: Length must be an integer number', 0) end
local idx
local tbl = ctx.params
if len > 0 then
idx = last - len + 1
else
for key in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' and (idx == nil or
key < idx) then idx = key end
end
if idx == nil then return context_iterate(ctx, 3) end
idx = idx - len
if last < idx then return context_iterate(ctx, 3) end
len = last - idx + 1
end
ctx.params = copy_table_reduced(ctx.params, idx, len)
return context_iterate(ctx, 3)
end
-- Syntax: #invoke:params|shifting|addend|pipe to
library.shifting = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local nshift = tonumber(ctx.pipe[1])
if nshift == nil or nshift == 0 or math.floor(nshift) ~= nshift then
error(modulename .. ', ‘shifting’: A non-zero integer number must be provided', 0) end
local tbl = {}
for key, val in pairs(ctx.params) do
if type(key) == 'number' then tbl[key + nshift] = val
else tbl[key] = val end
end
ctx.params = tbl
return context_iterate(ctx, 2)
end
-- Syntax: #invoke:params|reversing_numeric_names|pipe to
library.reversing_numeric_names = function (ctx)
local tbl, numerics, nmax = ctx.params, {}, 0
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' then
numerics[key], tbl[key] = val, nil
if key > nmax then nmax = key end
end
end
for key, val in pairs(numerics) do tbl[nmax - key + 1] = val end
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|pivoting_numeric_names|pipe to
--[[
library.pivoting_numeric_names = function (ctx)
local tbl = ctx.params
local shift = #tbl + 1
if shift < 2 then return library.reversing_numeric_names(ctx) end
local numerics = {}
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' then
numerics[key] = val
tbl[key] = nil
end
end
for key, val in pairs(numerics) do tbl[shift - key] = val end
return context_iterate(ctx, 1)
end
]]--
-- Syntax: #invoke:params|mirroring_numeric_names|pipe to
--[[
library.mirroring_numeric_names = function (ctx)
local nmax, nmin
local tbl, numerics = ctx.params, {}
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' then
numerics[key] = val
tbl[key] = nil
if nmax == nil then nmin, nmax = key, key
elseif key > nmax then nmax = key
elseif key < nmin then nmin = key end
end
end
for key, val in pairs(numerics) do tbl[nmax + nmin - key] = val end
return context_iterate(ctx, 1)
end
]]--
-- Syntax: #invoke:params|swapping_numeric_names|pipe to
--[[
library.swapping_numeric_names = function (ctx)
local tmp
local tbl, cache, nsize = ctx.params, {}, 0
for key in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' then
nsize = nsize + 1
cache[nsize] = key
end
end
table.sort(cache)
for idx = math.floor(nsize / 2), 1, -1 do
tmp = tbl[cache[idx] ]
tbl[cache[idx] ] = tbl[cache[nsize - idx + 1] ]
tbl[cache[nsize - idx + 1] ] = tmp
end
return context_iterate(ctx, 1)
end
]]--
-- Syntax: #invoke:params|sorting_sequential_values|[criterion]|pipe to
library.sorting_sequential_values = function (ctx)
local sortfn
if ctx.pipe[1] ~= nil then
sortfn = sortfunctions[ctx.pipe[1]:match'^%s*(.-)%s*$']
end
if sortfn then table.sort(ctx.params, sortfn)
else table.sort(ctx.params) end -- i.e. either `false` or `nil`
if sortfn == nil then return context_iterate(ctx, 1) end
return context_iterate(ctx, 2)
end
-- Syntax: #invoke:params|splicing|[add to position]|position|increment|
-- [number of elements to write]|...|pipe to
library.splicing = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local tmp2, argc, pos, refp
local opts, tbl = ctx.pipe, ctx.params
local tmp1 = opts[1]
if tmp1 ~= nil then
tmp2 = tonumber(tmp1)
if tmp2 == nil or math.floor(tmp2) ~= tmp2 then
pos, argc, tmp2 = tonumber(opts[2]), 4,
tmp1:match'^%s*(.*%S)'
if tmp2 ~= nil then
refp = position_references[tmp2]
if refp == nil then error(modulename ..
', ‘splicing’: ‘' .. tostring(tmp2) ..
'’ is not a valid first argument', 0) end
else refp = 0 end
else pos, argc, refp = tmp2, 3, 0 end
else pos, argc, refp = tonumber(opts[2]), 4, 0 end
if pos == nil or math.floor(pos) ~= pos then error(modulename ..
', ‘splicing’: The position must be an integer number', 0) end
local len = tonumber(opts[argc - 1])
if len == nil or math.floor(len) ~= len then error(modulename ..
', ‘splicing’: The increment must be an integer number', 0) end
local insn = tonumber(opts[argc])
if len == 0 and (insn == nil or insn < 1) then error(modulename ..
', ‘splicing’: When the increment is zero the number of elements to write cannot be zero', 0) end
if refp == 2 then
for _ in ipairs(tbl) do pos = pos + 1 end
refp = 0
end
tmp1, tmp2 = nil, nil
if refp ~= 0 or len ~= 0 then
for key, val in pairs(tbl) do
if type(key) == 'number' then
if tmp1 == nil then tmp1, tmp2 = key, key
elseif key < tmp1 then tmp1 = key
elseif key > tmp2 then tmp2 = key end
end
end
end
if tmp2 == nil then len = 0
elseif refp == 3 then pos = pos + tmp2
elseif refp == 1 then pos = pos + tmp1 end
if len > 0 and pos + len > tmp1 and pos <= tmp2 then
tbl = copy_table_expanded(tbl, pos, len)
elseif len < 0 and pos - len > tmp1 and pos <= tmp2 then
tbl = copy_table_reduced(tbl, pos, -len)
else tbl = copy_or_ref_table(tbl, tbl ~= ctx.oparams) end
ctx.params = tbl
if insn == nil or insn < 0 or math.floor(insn) ~= insn then
return context_iterate(ctx, argc)
end
tmp1 = argc - pos + 1
for key = pos, pos + insn - 1 do tbl[key] = opts[key + tmp1] end
return context_iterate(ctx, argc + insn + 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|imposing|name|value|pipe to
library.imposing = function (ctx)
if ctx.pipe[1] == nil then error(modulename ..
', ‘imposing’: Missing parameter name to impose', 0) end
ctx.params[get_parameter_name(ctx.pipe[1])] = ctx.pipe[2]
return context_iterate(ctx, 3)
end
-- Syntax: #invoke:params|providing|name|value|pipe to
library.providing = function (ctx)
if ctx.pipe[1] == nil then error(modulename ..
', ‘providing’: Missing parameter name to provide', 0) end
local key = get_parameter_name(ctx.pipe[1])
if ctx.params[key] == nil then ctx.params[key] = ctx.pipe[2] end
return context_iterate(ctx, 3)
end
-- Syntax: #invoke:params|reassigning|source|destination|[mode]|pipe to
library.reassigning = function (ctx)
local opts, tbl = ctx.pipe, ctx.params
if opts[1] == nil then error(modulename ..
', ‘reassigning’: Missing source parameter', 0) end
if opts[2] == nil then error(modulename ..
', ‘reassigning’: Missing destination parameter', 0) end
local mode, argc
local src = get_parameter_name(opts[1])
local val = tbl[src]
if opts[3] ~= nil then mode = a_modes[opts[3]:match'^%s*(.-)%s*$'] end
if mode == nil then mode, argc = 0, 3 else argc = 4 end
if val == nil and mode > 1 then return context_iterate(ctx, argc) end
local dest = get_parameter_name(opts[2])
local tmp = tbl[dest] == nil
if mode % 2 == 0 or (mode == 7 and tmp) then tbl[src] = nil end
if tmp or mode < 4 then tbl[dest] = val end
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|discarding|name|[how many]|pipe to
library.discarding = function (ctx)
if ctx.pipe[1] == nil then error(modulename ..
', ‘discarding’: Missing parameter name to discard', 0) end
local len = tonumber(ctx.pipe[2])
if len == nil then
ctx.params[get_parameter_name(ctx.pipe[1])] = nil
return context_iterate(ctx, 2)
end
local key = tonumber(ctx.pipe[1])
if key == nil or math.floor(key) ~= key then error(modulename ..
', ‘discarding’: A range was provided, but the initial parameter name is not an integer number', 0) end
if len < 1 or math.floor(len) ~= len then error(modulename ..
', ‘discarding’: A range can only be an integer number greater than zero', 0) end
for idx = key, key + len - 1 do ctx.params[idx] = nil end
return context_iterate(ctx, 3)
end
-- Syntax: #invoke:params|excluding_non-numeric_names|pipe to
library['excluding_non-numeric_names'] = function (ctx)
local tmp = ctx.params
for key, val in pairs(tmp) do
if type(key) ~= 'number' then tmp[key] = nil end
end
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|excluding_numeric_names|pipe to
library.excluding_numeric_names = function (ctx)
local tmp = ctx.params
for key, val in pairs(tmp) do
if type(key) == 'number' then tmp[key] = nil end
end
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|with_name_matching|target 1|[plain flag 1]|[or]
-- |[target 2]|[plain flag 2]|[or]|[...]|[target N]|[plain flag
-- N]|pipe to
library.with_name_matching = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local tmp, ptn
local targets, nptns, argc = load_pattern_args(ctx.pipe,
'with_name_matching')
local tbl, newparams = ctx.params, {}
for idx = 1, nptns do
ptn = targets[idx]
if ptn[3] then
tmp = ptn[1]
if tmp == '0' or tmp:find'^%-?[1-9]%d*$' ~= nil then
tmp = tonumber(tmp)
end
newparams[tmp] = tbl[tmp]
else
for key, val in pairs(tbl) do
if tostring(key):find(ptn[1], 1, ptn[2]) then
newparams[key] = val
end
end
end
end
ctx.params = newparams
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|with_name_not_matching|target 1|[plain flag 1]
-- |[and]|[target 2]|[plain flag 2]|[and]|[...]|[target N]|[plain
-- flag N]|pipe to
library.with_name_not_matching = function (ctx)
local targets, nptns, argc = load_pattern_args(ctx.pipe,
'with_name_not_matching')
local tbl = ctx.params
if nptns == 1 and targets[1][3] then
local tmp = targets[1][1]
if tmp == '0' or tmp:find'^%-?[1-9]%d*$' ~= nil then
tbl[tonumber(tmp)] = nil
else tbl[tmp] = nil end
return context_iterate(ctx, argc)
end
local yesmatch, ptn
for key in pairs(tbl) do
yesmatch = true
for idx = 1, nptns do
ptn = targets[idx]
if ptn[3] then
if tostring(key) ~= ptn[1] then
yesmatch = false
break
end
elseif not tostring(key):find(ptn[1], 1, ptn[2]) then
yesmatch = false
break
end
end
if yesmatch then tbl[key] = nil end
end
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|with_value_matching|target 1|[plain flag 1]|[or]
-- |[target 2]|[plain flag 2]|[or]|[...]|[target N]|[plain flag
-- N]|pipe to
library.with_value_matching = function (ctx)
local nomatch, ptn
local tbl = ctx.params
local targets, nptns, argc = load_pattern_args(ctx.pipe,
'with_value_matching')
for key, val in pairs(tbl) do
nomatch = true
for idx = 1, nptns do
ptn = targets[idx]
if ptn[3] then
if val == ptn[1] then
nomatch = false
break
end
elseif val:find(ptn[1], 1, ptn[2]) then
nomatch = false
break
end
end
if nomatch then tbl[key] = nil end
end
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|with_value_not_matching|target 1|[plain flag 1]
-- |[and]|[target 2]|[plain flag 2]|[and]|[...]|[target N]|[plain
-- flag N]|pipe to
library.with_value_not_matching = function (ctx)
local yesmatch, ptn
local tbl = ctx.params
local targets, nptns, argc = load_pattern_args(ctx.pipe,
'with_value_not_matching')
for key, val in pairs(tbl) do
yesmatch = true
for idx = 1, nptns do
ptn = targets[idx]
if ptn[3] then
if val ~= ptn[1] then
yesmatch = false
break
end
elseif not val:find(ptn[1], 1, ptn[2]) then
yesmatch = false
break
end
end
if yesmatch then tbl[key] = nil end
end
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|keeping_at_most|number of parameters to pick|pipe to
library.keeping_at_most = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local len = tonumber(ctx.pipe[1])
if len == nil or len < 1 or math.floor(len) ~= len then error(modulename ..
', ‘keeping_at_most’: The number of parameters to keep must be an integer greater than zero', 0) end
ctx.params = copy_table_maxn({}, ctx.params, len)
return context_iterate(ctx, 2)
end
-- Syntax: #invoke:params|trimming_values|pipe to
library.trimming_values = function (ctx)
local tbl = ctx.params
for key, val in pairs(tbl) do tbl[key] = val:match'^%s*(.-)%s*$' end
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|mapping_to_lowercase|pipe to
library.mapping_to_lowercase = function (ctx)
local tbl = ctx.params
for key, val in pairs(tbl) do tbl[key] = val:lower() end
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|mapping_to_uppercase|pipe to
library.mapping_to_uppercase = function (ctx)
local tbl = ctx.params
for key, val in pairs(tbl) do tbl[key] = val:upper() end
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|mapping_by_calling|template name|[call
-- style]|[let/use]|[...]|[let/use]|[...]|[number of additional
-- parameters]|[parameter 1]|[parameter 2]|[...]|[parameter N]|pipe to
library.mapping_by_calling = function (ctx)
local tname
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then tname = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if tname == nil then error(modulename ..
', ‘mapping_by_calling’: No template name was provided', 0) end
local margs, argc, looptype, karg, varg, tbl, mem =
load_callback_opts(opts, 1, mapping_styles.values_only, ctx.params)
local model = { title = tname, args = margs }
value_maps[looptype](tbl, margs, karg, varg, function ()
return ctx.frame:expandTemplate(model)
end)
for key, val in pairs(mem) do tbl[key] = val end
ctx.params = tbl
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|mapping_by_invoking|module name|function name|[call
-- style]|[let/use]|[...]|[let/use]|[...]|[number of additional
-- arguments]|[argument 1]|[argument 2]|[...]|[argument N]|pipe to
library.mapping_by_invoking = function (ctx)
local mname, fname
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then mname = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if mname == nil then error(modulename ..
', ‘mapping_by_invoking’: No module name was provided', 0) end
if opts[2] ~= nil then fname = opts[2]:match'^%s*(.*%S)' end
if fname == nil then error(modulename ..
', ‘mapping_by_invoking’: No function name was provided', 0) end
local margs, argc, looptype, karg, varg, tbl, mem =
load_callback_opts(opts, 2, mapping_styles.values_only, ctx.params)
local model = { title = 'Module:' .. mname, args = margs }
local mfunc = require(model.title)[fname]
if mfunc == nil then error(modulename ..
', ‘mapping_by_invoking’: The function ‘' .. fname ..
'’ does not exist', 0) end
value_maps[looptype](tbl, margs, karg, varg, function ()
return tostring(mfunc(ctx.frame:newChild(model)))
end)
for key, val in pairs(mem) do tbl[key] = val end
ctx.params = tbl
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|mapping_by_magic|parser function|[call
-- style]|[let/use]|[...]|[let/use]|[...]|[number of additional
-- arguments]|[argument 1]|[argument 2]|[...]|[argument N]|pipe to
library.mapping_by_magic = function (ctx)
local magic
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then magic = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if magic == nil then error(modulename ..
', ‘mapping_by_magic’: No parser function was provided', 0) end
local margs, argc, looptype, karg, varg, tbl, mem =
load_callback_opts(opts, 1, mapping_styles.values_only, ctx.params)
value_maps[looptype](tbl, margs, karg, varg, function ()
return ctx.frame:callParserFunction(magic, margs)
end)
for key, val in pairs(mem) do tbl[key] = val end
ctx.params = tbl
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|mapping_by_replacing|target|replace|[count]|[plain
-- flag]|pipe to
library.mapping_by_replacing = function (ctx)
local ptn, repl, nmax, flg, argc, die =
load_replace_args(ctx.pipe, 'mapping_by_replacing')
if die then return context_iterate(ctx, argc) end
local tbl = ctx.params
if flg == 3 then
for key, val in pairs(tbl) do
if val == ptn then tbl[key] = repl end
end
else
if flg == 2 then
-- Copied from Module:String's `str._escapePattern()`
ptn = ptn:gsub('[%(%)%.%%%+%-%*%?%[%^%$%]]', '%%%0')
end
for key, val in pairs(tbl) do
tbl[key] = val:gsub(ptn, repl, nmax)
end
end
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|mapping_by_mixing|mixing string|pipe to
library.mapping_by_mixing = function (ctx)
if ctx.pipe[1] == nil then error(modulename ..
', ‘mapping_by_mixing’: No mixing string was provided', 0) end
local tbl, mix = ctx.params, ctx.pipe[1]
if mix == '$#' then
for key in pairs(tbl) do tbl[key] = tostring(key) end
return context_iterate(ctx, 2)
end
local skel, cnv, n_parts = parse_placeholder_string(mix)
for key, val in pairs(tbl) do
for idx = 2, n_parts, 2 do
if skel[idx] then cnv[idx] = val
else cnv[idx] = tostring(key) end
end
tbl[key] = table.concat(cnv)
end
return context_iterate(ctx, 2)
end
-- Syntax: #invoke:params|mapping_to_names|pipe to
--[[
library.mapping_to_names = function (ctx)
local tbl = ctx.params
for key in pairs(tbl) do tbl[key] = tostring(key) end
return context_iterate(ctx, 1)
end
]]--
-- Syntax: #invoke:params|renaming_to_lowercase|pipe to
library.renaming_to_lowercase = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local cache = {}
for key, val in pairs(ctx.params) do
if type(key) == 'string' then cache[key:lower()] = val else
cache[key] = val end
end
ctx.params = cache
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|renaming_to_uppercase|pipe to
library.renaming_to_uppercase = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local cache = {}
for key, val in pairs(ctx.params) do
if type(key) == 'string' then cache[key:upper()] = val else
cache[key] = val end
end
ctx.params = cache
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|renaming_to_sequence|[sort order]|pipe to
library.renaming_to_sequence = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local cache, len
local tbl = ctx.params
local sortfn, argc, do_sort = load_sort_opt(ctx.pipe[1])
if do_sort then
local words, wl
cache, words, len, wl = get_key_list_sorted(tbl, sortfn)
for idx = 1, len do cache[idx] = tbl[cache[idx]] end
for idx = 1, wl do cache[len + idx] = tbl[words[idx]] end
else
len, cache = 0, {}
for _, val in pairs(tbl) do
len = len + 1
cache[len] = val
end
end
ctx.params = cache
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|renaming_by_calling|template name|[call
-- style]|[let/use]|[...]|[let/use]|[...]|[number of additional
-- parameters]|[parameter 1]|[parameter 2]|[...]|[parameter N]|pipe to
library.renaming_by_calling = function (ctx)
local tname
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then tname = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if tname == nil then error(modulename ..
', ‘renaming_by_calling’: No template name was provided', 0) end
local rargs, argc, looptype, karg, varg, tbl, mem =
load_callback_opts(opts, 1, mapping_styles.names_only, ctx.params)
local model = { title = tname, args = rargs }
map_names(tbl, rargs, karg, varg, looptype, function ()
return ctx.frame:expandTemplate(model)
end)
for key, val in pairs(mem) do tbl[key] = val end
ctx.params = tbl
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|renaming_by_invoking|module name|function
-- name|[call style]|[let/use]|[...]|[let/use]|[...]|[number of
-- additional arguments]|[argument 1]|[argument 2]|[...]|[argument
-- N]|pipe to
library.renaming_by_invoking = function (ctx)
local mname, fname
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then mname = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if mname == nil then error(modulename ..
', ‘renaming_by_invoking’: No module name was provided', 0) end
if opts[2] ~= nil then fname = opts[2]:match'^%s*(.*%S)' end
if fname == nil then error(modulename ..
', ‘renaming_by_invoking’: No function name was provided', 0) end
local rargs, argc, looptype, karg, varg, tbl, mem =
load_callback_opts(opts, 2, mapping_styles.names_only, ctx.params)
local model = { title = 'Module:' .. mname, args = rargs }
local mfunc = require(model.title)[fname]
if mfunc == nil then error(modulename ..
', ‘renaming_by_invoking’: The function ‘' .. fname ..
'’ does not exist', 0) end
map_names(tbl, rargs, karg, varg, looptype, function ()
return tostring(mfunc(ctx.frame:newChild(model)))
end)
for key, val in pairs(mem) do tbl[key] = val end
ctx.params = tbl
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|renaming_by_magic|parser function|[call
-- style]|[let/use]|[...]|[let/use]|[...]|[number of additional
-- arguments]|[argument 1]|[argument 2]|[...]|[argument N]|pipe to
library.renaming_by_magic = function (ctx)
local opts = ctx.pipe
local magic
if opts[1] ~= nil then magic = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if magic == nil then error(modulename ..
', ‘renaming_by_magic’: No parser function was provided', 0) end
local rargs, argc, looptype, karg, varg, tbl, mem =
load_callback_opts(opts, 1, mapping_styles.names_only, ctx.params)
map_names(tbl, rargs, karg, varg, looptype, function ()
return ctx.frame:callParserFunction(magic, rargs)
end)
for key, val in pairs(mem) do tbl[key] = val end
ctx.params = tbl
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|renaming_by_replacing|target|replace|[count]|[plain
-- flag]|pipe to
library.renaming_by_replacing = function (ctx)
local ptn, repl, nmax, flg, argc, die =
load_replace_args(ctx.pipe, 'renaming_by_replacing')
if die then return context_iterate(ctx, argc) end
local tbl = ctx.params
if flg == 3 then
ptn = get_parameter_name(ptn)
local val = tbl[ptn]
if val ~= nil then
tbl[ptn], tbl[get_parameter_name(repl)] = nil, val
end
else
if flg == 2 then
-- Copied from Module:String's `str._escapePattern()`
ptn = ptn:gsub('[%(%)%.%%%+%-%*%?%[%^%$%]]', '%%%0')
end
local cache = {}
for key, val in pairs(tbl) do
steal_if_renamed(val, tbl, key, cache,
tostring(key):gsub(ptn, repl, nmax))
end
for key, val in pairs(cache) do tbl[key] = val end
end
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|renaming_by_mixing|mixing string|pipe to
library.renaming_by_mixing = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
if ctx.pipe[1] == nil then error(modulename ..
', ‘renaming_by_mixing’: No mixing string was provided', 0) end
local mix = ctx.pipe[1]:match'^%s*(.-)%s*$'
local cache = {}
if mix == '$@' then
for _, val in pairs(ctx.params) do
cache[get_parameter_name(val)] = val
end
else
local skel, canvas, n_parts = parse_placeholder_string(mix)
for key, val in pairs(ctx.params) do
for idx = 2, n_parts, 2 do
if skel[idx] then canvas[idx] = val
else canvas[idx] = tostring(key) end
end
cache[get_parameter_name(table.concat(canvas))] = val
end
end
ctx.params = cache
return context_iterate(ctx, 2)
end
-- Syntax: #invoke:params|renaming_to_values|pipe to
--[[
library.renaming_to_values = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local cache = {}
for _, val in pairs(ctx.params) do cache[val] = val end
ctx.params = cache
return context_iterate(ctx, 1)
end
]]--
-- Syntax: #invoke:params|grouping_by_calling|template
-- name|[let/use]|[...]|[let/use]|[...]|[number of additional
-- arguments]|[argument 1]|[argument 2]|[...]|[argument N]|pipe to
library.grouping_by_calling = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local tmp, argc, tbl, mem = load_child_opts(ctx.pipe, 2, 0, ctx.params)
local gargs = {}
for key, val in pairs(tmp) do
if type(key) == 'number' and key < 1 then gargs[key - 1] = val
else gargs[key] = val end
end
tmp = ctx.pipe[1]
if tmp ~= nil then tmp = tmp:match'^%s*(.*%S)' end
if tmp == nil then error(modulename ..
', ‘grouping_by_calling’: No template name was provided', 0) end
local model = { title = tmp }
local groups = make_groups(tbl)
for gid, group in pairs(groups) do
for key, val in pairs(gargs) do group[key] = val end
group[0], model.args = gid, group
groups[gid] = ctx.frame:expandTemplate(model)
end
for key, val in pairs(mem) do groups[key] = val end
ctx.params = groups
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|parsing|string to parse|[trim flag]|[iteration
-- delimiter setter]|[...]|[key-value delimiter setter]|[...]|pipe to
library.parsing = function (ctx)
local opts = ctx.pipe
if opts[1] == nil then error(modulename ..
', ‘parsing’: No string to parse was provided', 0) end
local isep, iplain, psep, pplain, trimnamed, trimunnamed, argc =
load_parse_opts(opts, 2, '|', '=')
parse_parameter_string(ctx.params, opts[1], isep, iplain, psep, pplain,
trimnamed, trimunnamed)
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|reinterpreting|parameter to reinterpret|[trim
-- flag]|[iteration delimiter setter]|[...]|[key-value delimiter
-- setter]|[...]|pipe to
library.reinterpreting = function (ctx)
local opts = ctx.pipe
if opts[1] == nil then error(modulename ..
', ‘reinterpreting’: No parameter to reinterpret was provided', 0) end
local isep, iplain, psep, pplain, trimnamed, trimunnamed, argc =
load_parse_opts(opts, 2, '|', '=')
local tbl, tmp = ctx.params, get_parameter_name(opts[1])
local str = tbl[tmp]
if str ~= nil then
tbl[tmp] = nil
parse_parameter_string(tbl, str, isep, iplain, psep, pplain,
trimnamed, trimunnamed)
end
return context_iterate(ctx, argc)
end
-- Syntax: #invoke:params|evaluating|string to parse|[trim flag]|[iteration
-- delimiter setter]|[...]|[key-value delimiter setter]|[...]|pipe to
library.evaluating = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.pipe` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local opts = ctx.pipe
if opts[1] == nil then error(modulename ..
', ‘evaluating’: No string to parse was provided', 0) end
local isep, iplain, psep, pplain, trimnamed, trimunnamed, argc =
load_parse_opts(opts, 2, '!', ':')
if opts[1]:match'^%s*(.*%S)' == nil then
ctx.pipe = copy_or_ref_table(opts, opts ~= ctx.opipe)
return context_iterate(ctx, argc)
end
local new_opts, cache = {}, {}
local shift = parse_parameter_string(cache, opts[1], isep, iplain,
psep, pplain, trimnamed, trimunnamed) - argc
for key, val in pairs(opts) do
if type(key) ~= 'number' or key < 1 then new_opts[key] = val
elseif key >= argc then new_opts[key + shift] = val end
end
for key, val in pairs(cache) do new_opts[key] = val end
ctx.pipe = new_opts
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|mixing_names_and_values|mixing string|pipe to
library.mixing_names_and_values = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
if ctx.pipe[1] == nil then error(modulename ..
', ‘mixing_names_and_values’: No mixing string was provided for parameter names', 0) end
if ctx.pipe[2] == nil then error(modulename ..
', ‘mixing_names_and_values’: No mixing string was provided for parameter values', 0) end
local tmp
local mix_k = ctx.pipe[1]:match'^%s*(.-)%s*$'
local cache, mix_v = {}, ctx.pipe[2]
if mix_k == '$@' and mix_v == '$@' then
for _, val in pairs(ctx.params) do
cache[get_parameter_name(val)] = val
end
elseif mix_k == '$@' and mix_v == '$#' then
for key, val in pairs(ctx.params) do
cache[get_parameter_name(val)] = tostring(key)
end
elseif mix_k == '$#' and mix_v == '$#' then
for key in pairs(ctx.params) do cache[key] = tostring(key) end
else
local skel_k, cnv_k, n_parts_k = parse_placeholder_string(mix_k)
local skel_v, cnv_v, n_parts_v = parse_placeholder_string(mix_v)
for key, val in pairs(ctx.params) do
tmp = tostring(key)
for idx = 2, n_parts_k, 2 do
if skel_k[idx] then cnv_k[idx] = val else cnv_k[idx] = tmp end
end
for idx = 2, n_parts_v, 2 do
if skel_v[idx] then cnv_v[idx] = val else cnv_v[idx] = tmp end
end
cache[get_parameter_name(table.concat(cnv_k))] =
table.concat(cnv_v)
end
end
ctx.params = cache
return context_iterate(ctx, 3)
end
-- Syntax: #invoke:params|swapping_names_and_values|pipe to
--[[
library.swapping_names_and_values = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local cache = {}
for key, val in pairs(ctx.params) do cache[val] = key end
ctx.params = cache
return context_iterate(ctx, 1)
end
]]--
-- Syntax: #invoke:params|combining|new parameter name|[sort
-- order]|[with/without flushed glue]|setting directives|...|pipe to
library.combining = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
return context_iterate(ctx, combine_parameters(
ctx,
function (key, val, kvs) return key .. kvs .. val end,
'combining'
) + 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|combining_values|new parameter name|[sort
-- order]|[with/without flushed glue]|setting directives|...|pipe to
library.combining_values = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
return context_iterate(ctx, combine_parameters(
ctx,
function (key, val, kvs) return val end,
'combining_values'
) + 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|combining_by_calling|template name|new parameter
-- name|pipe to
library.combining_by_calling = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local tname = ctx.pipe[1]
if tname ~= nil then tname = tname:match'^%s*(.*%S)'
else error(modulename ..
', ‘combining_by_calling’: No template name was provided', 0) end
if ctx.pipe[2] == nil then error(modulename ..
', ‘combining_by_calling’: No parameter name was provided', 0) end
ctx.params = {
[get_parameter_name(ctx.pipe[2])] = ctx.frame:expandTemplate{
title = tname,
args = ctx.params
}
}
return context_iterate(ctx, 3)
end
-- Syntax: #invoke:params|combining_by_invoking|module name|function name|new
-- parameter name|pipe to
library.combining_by_invoking = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local mname = ctx.pipe[1]
if mname ~= nil then mname = mname:match'^%s*(.*%S)'
else error(modulename ..
', ‘combining_by_invoking’: No module name was provided', 0) end
local fname = ctx.pipe[2]
if fname ~= nil then fname = fname:match'^%s*(.*%S)'
else error(modulename ..
', ‘combining_by_invoking’: No function name was provided', 0) end
if ctx.pipe[3] == nil then error(modulename ..
', ‘combining_by_invoking’: No parameter name was provided', 0) end
local model = { title = 'Module:' .. mname, args = ctx.params }
local mfunc = require(model.title)[fname]
if mfunc == nil then error(modulename ..
', ‘mapping_by_invoking’: The function ‘' .. fname ..
'’ does not exist', 0) end
ctx.params = {
[get_parameter_name(ctx.pipe[3])] =
tostring(mfunc(ctx.frame:newChild(model)))
}
return context_iterate(ctx, 4)
end
-- Syntax: #invoke:params|combining_by_magic|parser function|new parameter
-- name|pipe to
library.combining_by_magic = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable! As a modifier,
-- this function MUST create a copy of it before returning
local magic = ctx.pipe[1]
if magic ~= nil then magic = magic:match'^%s*(.*%S)'
else error(modulename ..
', ‘combining_by_magic’: No parser function was provided', 0) end
if ctx.pipe[2] == nil then error(modulename ..
', ‘combining_by_magic’: No parameter name was provided', 0) end
ctx.params = {
[get_parameter_name(ctx.pipe[2])] =
ctx.frame:callParserFunction(magic, ctx.params)
}
return context_iterate(ctx, 3)
end
-- Syntax: #invoke:params|snapshotting|[maximum number]|pipe to
library.snapshotting = function (ctx)
return context_iterate(ctx, make_child(ctx, ctx.params, 'snapshotting'))
end
-- Syntax: #invoke:params|remembering|[maximum number]|pipe to
library.remembering = function (ctx)
return context_iterate(ctx, make_child(ctx, ctx.oparams, 'remembering'))
end
-- Syntax: #invoke:params|entering_substack|[new]|pipe to
library.entering_substack = function (ctx)
local tbl, ncurrparent = ctx.params, ctx.n_parents + 1
if ctx.parents == nil then ctx.parents = { tbl }
else ctx.parents[ncurrparent] = tbl end
ctx.n_parents = ncurrparent
if ctx.pipe[1] ~= nil and ctx.pipe[1]:match'^%s*new%s*$' then
ctx.params = {}
return context_iterate(ctx, 2)
end
local currsnap = ctx.n_children
if currsnap > 0 then
ctx.params, ctx.children[currsnap], ctx.n_children =
ctx.children[currsnap], nil, currsnap - 1
else
local newparams = {}
for key, val in pairs(tbl) do newparams[key] = val end
ctx.params = newparams
end
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|pulling|parameter name|pipe to
library.pulling = function (ctx)
local opts = ctx.pipe
if opts[1] == nil then error(modulename ..
', ‘pulling’: No parameter to pull was provided', 0) end
local tmp = ctx.n_parents
local parent = tmp < 1 and ctx.oparams or ctx.parents[tmp]
tmp = get_parameter_name(opts[1])
if parent[tmp] ~= nil then ctx.params[tmp] = parent[tmp] end
return context_iterate(ctx, 2)
end
-- Syntax: #invoke:params|recalling|parameter name|pipe to
library.recalling = function (ctx)
local opts = ctx.pipe
if opts[1] == nil then error(modulename ..
', ‘recalling’: No parameter to recall was provided', 0) end
local arg = get_parameter_name(opts[1])
if ctx.oparams[arg] ~= nil then ctx.params[arg] = ctx.oparams[arg] end
return context_iterate(ctx, 2)
end
-- Syntax: #invoke:params|finding|parameter name|pipe to
--[[
library.finding = function (ctx)
local opts = ctx.pipe
if opts[1] == nil then error(modulename ..
', ‘finding’: No parameter to find was provided', 0) end
local arg = get_parameter_name(opts[1])
local parent
for idx = ctx.n_parents, 1, -1 do
parent = ctx.parents[idx]
if parent[arg] ~= nil then
ctx.params[arg] = parent[arg]
return context_iterate(ctx, 2)
end
end
if ctx.oparams[arg] ~= nil then ctx.params[arg] = ctx.oparams[arg] end
return context_iterate(ctx, 2)
end
]]--
-- Syntax: #invoke:params|picking|number of parameters to pick|pipe to
--[[
library.picking = function (ctx)
local len = tonumber(ctx.pipe[1])
if len == nil or len < 1 or math.floor(len) ~= len then error(modulename ..
', ‘picking’: The number of parameters to pick must be an integer greater than zero', 0) end
if ctx.n_parents < 1 then copy_table_maxn(ctx.params, ctx.oparams, len)
else copy_table_maxn(ctx.params, ctx.parents[ctx.n_parents], len) end
return context_iterate(ctx, 2)
end
]]--
-- Syntax: #invoke:params|detaching_substack|pipe to
library.detaching_substack = function (ctx)
local ncurrparent = ctx.n_parents
if ncurrparent < 1 then error(modulename ..
', ‘detaching_substack’: No substack has been created', 0) end
local parent = ctx.parents[ncurrparent]
for key in pairs(ctx.params) do parent[key] = nil end
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|dropping_substack|pipe to
library.dropping_substack = function (ctx)
local ncurrparent = ctx.n_parents
if ncurrparent < 1 then error(modulename ..
', ‘dropping_substack’: No substack has been created', 0) end
ctx.params, ctx.parents[ncurrparent], ctx.n_parents =
ctx.parents[ncurrparent], nil, ncurrparent - 1
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|leaving_substack|pipe to
library.leaving_substack = function (ctx)
local ncurrparent = ctx.n_parents
if ncurrparent < 1 then error(modulename ..
', ‘leaving_substack’: No substack has been created', 0) end
local currsnap = ctx.n_children + 1
if ctx.children == nil then ctx.children = { ctx.params }
else ctx.children[currsnap] = ctx.params end
ctx.params, ctx.parents[ncurrparent], ctx.n_parents, ctx.n_children =
ctx.parents[ncurrparent], nil, ncurrparent - 1, currsnap
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|merging_substack|pipe to
library.merging_substack = function (ctx)
local ncurrparent = ctx.n_parents
if ncurrparent < 1 then error(modulename ..
', ‘merging_substack’: No substack has been created', 0) end
local parent, child = ctx.parents[ncurrparent], ctx.params
ctx.params, ctx.parents[ncurrparent], ctx.n_parents = parent, nil,
ncurrparent - 1
for key, val in pairs(child) do parent[key] = val end
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|flushing|pipe to
library.flushing = function (ctx)
if ctx.n_children < 1 then error(modulename ..
', ‘flushing’: There are no substacks to flush', 0) end
local parent, currsnap = ctx.params, ctx.n_children
for key, val in pairs(ctx.children[currsnap]) do parent[key] = val end
ctx.children[currsnap], ctx.n_children = nil, currsnap - 1
return context_iterate(ctx, 1)
end
-- Syntax: #invoke:params|setting_by_flushing|pipe to
library.setting_by_flushing = function (ctx)
set_strings_from_substack(ctx, ctx, 'setting_by_flushing')
return context_iterate(ctx, 1)
end
--[[ Functions ]]--
-----------------------------
-- Syntax: #invoke:params|count
library.count = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.pipe` and `ctx.params` might be the original metatables!
local retval = 0
for _ in ctx.iterfunc(ctx.params) do retval = retval + 1 end
if ctx.subset == -1 then retval = retval - #ctx.params end
ctx.text = retval
return false
end
-- Syntax: #invoke:args|concat_and_call|template name|[prepend 1]|[prepend 2]
-- |[...]|[item n]|[named item 1=value 1]|[...]|[named item n=value
-- n]|[...]
library.concat_and_call = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable!
local tname
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then tname = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if tname == nil then error(modulename ..
', ‘concat_and_call’: No template name was provided', 0) end
remove_numeric_keys(opts, 1, 1)
ctx.text = ctx.frame:expandTemplate{
title = tname,
args = concat_params(ctx)
}
return false
end
-- Syntax: #invoke:args|concat_and_invoke|module name|function name|[prepend
-- 1]|[prepend 2]|[...]|[item n]|[named item 1=value 1]|[...]|[named
-- item n=value n]|[...]
library.concat_and_invoke = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable!
local mname, fname
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then mname = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if mname == nil then error(modulename ..
', ‘concat_and_invoke’: No module name was provided', 0) end
if opts[2] ~= nil then fname = opts[2]:match'^%s*(.*%S)' end
if fname == nil then error(modulename ..
', ‘concat_and_invoke’: No function name was provided', 0) end
remove_numeric_keys(opts, 1, 2)
local mfunc = require('Module:' .. mname)[fname]
if mfunc == nil then error(modulename ..
', ‘concat_and_invoke’: The function ‘' .. fname ..
'’ does not exist', 0) end
ctx.text = mfunc(ctx.frame:newChild{
title = 'Module:' .. mname,
args = concat_params(ctx)
})
return false
end
-- Syntax: #invoke:args|concat_and_magic|parser function|[prepend 1]|[prepend
-- 2]|[...]|[item n]|[named item 1=value 1]|[...]|[named item n=
-- value n]|[...]
library.concat_and_magic = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.params` might be the original metatable!
local magic
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then magic = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if magic == nil then error(modulename ..
', ‘concat_and_magic’: No parser function was provided', 0) end
remove_numeric_keys(opts, 1, 1)
ctx.text = ctx.frame:callParserFunction(magic, concat_params(ctx))
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|value_of|parameter name
library.value_of = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.pipe` and `ctx.params` might be the original metatables!
local opts = ctx.pipe
if opts[1] == nil then error(modulename ..
', ‘value_of’: No parameter name was provided', 0) end
local val
local key = opts[1]:match'^%s*(.-)%s*$'
if key == '0' or key:find'^%-?[1-9]%d*$' ~= nil then
key = tonumber(key)
val = ctx.params[key]
-- No worries: #ctx.params is unused when the modifier is in
-- first position (and therefore `ctx.params` is a metatable)
if val ~= nil and (
ctx.subset ~= -1 or key > #ctx.params or key < 1
) and (
ctx.subset ~= 1 or (key <= #ctx.params and key > 0)
) then
ctx.text = (ctx.header or '') .. val .. (ctx.footer or '')
else ctx.text = ctx.ifngiven or '' end
else
val = ctx.params[key]
if ctx.subset ~= 1 and val ~= nil then ctx.text = (ctx.header
or '') .. val .. (ctx.footer or '')
else ctx.text = ctx.ifngiven or '' end
end
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|list
library.list = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.pipe` might be the original metatable!
local ret, nss, kvs, pps = {}, 0, ctx.pairsep or '', ctx.itersep or ''
flush_params(ctx, function (key, val)
ret[nss + 1], ret[nss + 2], ret[nss + 3], ret[nss + 4], nss =
pps, key, kvs, val, nss + 4
end)
finalize_and_return_concatenated_list(ctx, ret, nss, 4)
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|list_values
library.list_values = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.pipe` might be the original metatable!
-- NOTE: `library.coins()` and `library.unique_coins()` rely on us
local ret, nss, pps = {}, 0, ctx.itersep or ''
flush_params(ctx, function (key, val)
ret[nss + 1], ret[nss + 2], nss = pps, val, nss + 2
end)
finalize_and_return_concatenated_list(ctx, ret, nss, 2)
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|list_maybe_with_names
library.list_maybe_with_names = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.pipe` might be the original metatable!
local ret, nss, kvs, pps = {}, 0, ctx.pairsep or '', ctx.itersep or ''
mixed_flush_params(
ctx,
function (key, val)
ret[nss + 1], ret[nss + 2], ret[nss + 3],
ret[nss + 4], nss = pps, '', '', val, nss + 4
end,
function (key, val)
ret[nss + 1], ret[nss + 2], ret[nss + 3],
ret[nss + 4], nss = pps, key, kvs, val, nss + 4
end
)
finalize_and_return_concatenated_list(ctx, ret, nss, 4)
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|coins|[first coin = value 1]|[second coin = value
-- 2]|[...]|[last coin = value N]
--[[
library.coins = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.pipe` might be the original metatable!
local opts, tbl = ctx.pipe, ctx.params
for key, val in pairs(tbl) do tbl[key] = opts[get_parameter_name(val)] end
return library.list_values(ctx)
end
]]--
-- Syntax: #invoke:params|unique_coins|[first coin = value 1]|[second coin =
-- value 2]|[...]|[last coin = value N]
--[[
library.unique_coins = function (ctx)
local tmp
local opts, tbl = ctx.pipe, ctx.params
for key, val in pairs(tbl) do
tmp = get_parameter_name(val)
tbl[key], opts[tmp] = opts[tmp], nil
end
return library.list_values(ctx)
end
]]
-- Syntax: #invoke:params|for_each|wikitext
library.for_each = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.pipe` might be the original metatable!
local ret, nss, pps, txt = {}, 0, ctx.itersep or '', ctx.pipe[1] or ''
local skel, cnv, n_parts = parse_placeholder_string(txt)
flush_params(ctx, function (key, val)
for idx = 2, n_parts, 2 do
if skel[idx] then cnv[idx] = val
else cnv[idx] = tostring(key) end
end
ret[nss + 1], nss = pps, nss + 2
ret[nss] = table.concat(cnv)
end)
finalize_and_return_concatenated_list(ctx, ret, nss, 2)
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|call_for_each|template name|[append 1]|[append 2]
-- |[...]|[append n]|[named param 1=value 1]|[...]|[named param
-- n=value n]|[...]
library.call_for_each = function (ctx)
local tname
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then tname = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if tname == nil then error(modulename ..
', ‘call_for_each’: No template name was provided', 0) end
local model = { title = tname, args = opts }
local ret, nss, ccs = {}, 0, ctx.itersep or ''
table.insert(opts, 1, true)
flush_params(ctx, function (key, val)
opts[1], opts[2], ret[nss + 1], nss = key, val, ccs, nss + 2
ret[nss] = ctx.frame:expandTemplate(model)
end)
finalize_and_return_concatenated_list(ctx, ret, nss, 2)
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|invoke_for_each|module name|module function|[append
-- 1]|[append 2]|[...]|[append n]|[named param 1=value 1]|[...]
-- |[named param n=value n]|[...]
library.invoke_for_each = function (ctx)
local mname, fname
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then mname = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if mname == nil then error(modulename ..
', ‘invoke_for_each’: No module name was provided', 0) end
if opts[2] ~= nil then fname = opts[2]:match'^%s*(.*%S)' end
if fname == nil then error(modulename ..
', ‘invoke_for_each’: No function name was provided', 0) end
local model = { title = 'Module:' .. mname, args = opts }
local mfunc = require(model.title)[fname]
local ret, nss, ccs = {}, 0, ctx.itersep or ''
flush_params(ctx, function (key, val)
opts[1], opts[2], ret[nss + 1], nss = key, val, ccs, nss + 2
ret[nss] = mfunc(ctx.frame:newChild(model))
end)
finalize_and_return_concatenated_list(ctx, ret, nss, 2)
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|magic_for_each|parser function|[append 1]|[append 2]
-- |[...]|[append n]|[named param 1=value 1]|[...]|[named param
-- n=value n]|[...]
library.magic_for_each = function (ctx)
local magic
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then magic = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if magic == nil then error(modulename ..
', ‘magic_for_each’: No parser function was provided', 0) end
local ret, nss, ccs = {}, 0, ctx.itersep or ''
table.insert(opts, 1, true)
flush_params(ctx, function (key, val)
opts[1], opts[2], ret[nss + 1], nss = key, val, ccs, nss + 2
ret[nss] = ctx.frame:callParserFunction(magic, opts)
end)
finalize_and_return_concatenated_list(ctx, ret, nss, 2)
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|call_for_each_value|template name|[append 1]|[append
-- 2]|[...]|[append n]|[named param 1=value 1]|[...]|[named param
-- n=value n]|[...]
library.call_for_each_value = function (ctx)
local tname
local opts = ctx.pipe
if opts[1] ~= nil then tname = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if tname == nil then error(modulename ..
', ‘call_for_each_value’: No template name was provided', 0) end
local model = { title = tname, args = opts }
local ret, nss, ccs = {}, 0, ctx.itersep or ''
flush_params(ctx, function (key, val)
opts[1], ret[nss + 1], nss = val, ccs, nss + 2
ret[nss] = ctx.frame:expandTemplate(model)
end)
finalize_and_return_concatenated_list(ctx, ret, nss, 2)
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|invoke_for_each_value|module name|[append 1]|[append
-- 2]|[...]|[append n]|[named param 1=value 1]|[...]|[named param
-- n=value n]|[...]
library.invoke_for_each_value = function (ctx)
local opts = ctx.pipe
local mname, fname
if opts[1] ~= nil then mname = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if mname == nil then error(modulename ..
', ‘invoke_for_each_value’: No module name was provided', 0) end
if opts[2] ~= nil then fname = opts[2]:match'^%s*(.*%S)' end
if fname == nil then error(modulename ..
', ‘invoke_for_each_value’: No function name was provided', 0) end
local model = { title = 'Module:' .. mname, args = opts }
local mfunc = require(model.title)[fname]
local ret, nss, ccs = {}, 0, ctx.itersep or ''
remove_numeric_keys(opts, 1, 1)
flush_params(ctx, function (key, val)
opts[1], ret[nss + 1], nss = val, ccs, nss + 2
ret[nss] = mfunc(ctx.frame:newChild(model))
end)
finalize_and_return_concatenated_list(ctx, ret, nss, 2)
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|magic_for_each_value|parser function|[append 1]
-- |[append 2]|[...]|[append n]|[named param 1=value 1]|[...]|[named
-- param n=value n]|[...]
library.magic_for_each_value = function (ctx)
local opts = ctx.pipe
local magic
if opts[1] ~= nil then magic = opts[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if magic == nil then error(modulename ..
', ‘magic_for_each_value’: No parser function was provided', 0) end
local ret, nss, ccs = {}, 0, ctx.itersep or ''
flush_params(ctx, function (key, val)
opts[1], ret[nss + 1], nss = val, ccs, nss + 2
ret[nss] = ctx.frame:callParserFunction(magic, opts)
end)
finalize_and_return_concatenated_list(ctx, ret, nss, 2)
return false
end
-- Syntax: #invoke:params|call_for_each_group|template name|[append 1]|[append
-- 2]|[...]|[append n]|[named param 1=value 1]|[...]|[named param
-- n=value n]|[...]
library.call_for_each_group = function (ctx)
-- NOTE: `ctx.pipe` and `ctx.params` might be the original metatables!
local tmp
if ctx.pipe[1] ~= nil then tmp = ctx.pipe[1]:match'^%s*(.*%S)' end
if tmp == nil then error(modulename ..
', ‘call_for_each_group’: No template name was provided', 0) end
local model = { title = tmp }
local opts, ret, nss, ccs = {}, {}, 0, ctx.itersep or ''
for key, val in pairs(ctx.pipe) do
if type(key) == 'number' then opts[key - 1] = val
else opts[key] = val end
end
ctx.pipe = opts
ctx.params = make_groups(ctx.params)
flush_params(ctx, function (gid, group)
for key, val in pairs(opts) do group[key] = val end
group[0], model.args, ret[nss + 1], nss = gid, group, ccs,
nss + 2
ret[nss] = ctx.frame:expandTemplate(model)
end)
finalize_and_return_concatenated_list(ctx, ret, nss, 2)
return false
end
--[[ First-position-only modifiers ]]--
---------------------------------------
-- Syntax: #invoke:params|new|pipe to
static_iface.new = function (child_frame)
local ctx = context_new(child_frame)
ctx.pipe = copy_or_ref_table(ctx.opipe, false)
ctx.params = {}
main_loop(ctx, context_iterate(ctx, 1))
return ctx.text
end
--[[ First-position-only functions ]]--
---------------------------------------
-- Syntax: #invoke:params|self
static_iface.self = function (frame)
return frame:getParent():getTitle()
end
--[[ Public metatable of functions ]]--
---------------------------------------
return setmetatable({}, {
__index = function (_, query)
local fname = query:match'^%s*(.*%S)'
if fname == nil then error(modulename ..
': You must specify a function to call', 0) end
local func = static_iface[fname]
if func ~= nil then return func end
func = library[fname]
if func == nil then error(modulename ..
': The function ‘' .. fname .. '’ does not exist', 0) end
return function (child_frame)
local ctx = context_new(child_frame)
ctx.pipe = copy_or_ref_table(ctx.opipe, refpipe[fname])
ctx.params = copy_or_ref_table(ctx.oparams, refparams[fname])
main_loop(ctx, func)
return ctx.text
end
end
})
9ko1dij40e2ajwgg59fvqm72uoivi2f
2028 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में क्रिकेट
0
1564569
6591377
6465572
2026-07-23T18:54:08Z
Rudraaac
922192
6591377
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox Olympic event
| event = [[क्रिकेट]]
| games = 2028 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक
| image = [[File:Cricket pictogram.svg|150px|class=skin-invert]]
| venue = [[नाइट राइडर्स क्रिकेट ग्राउंड]], [[फेयरप्लेक्स]], [[पोमोना]], कैलिफोर्निया, संयुक्त राष्ट्र अमेरिका
| dates = १२-२९ जुलाई २०२८
| competitors =
| nations =
|num_events = 2 (1 पुरुष, 1 महिला)
| prev = [[1900 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में क्रिकेट|1900]]
| next = [[2032 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में क्रिकेट|2032]]
}}
'''[[लॉस एंजिल्स]], [[संयुक्त राज्य अमेरिका]]''' में '''[[2028 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक]]''' में '''[[क्रिकेट]]''' को फिर से पेश किया जाएगा। यह ओलंपिक क्रिकेट टूर्नामेंट का दूसरा संस्करण होगा। क्रिकेट आखिरी बार 1900 में [[ग्रीष्मकालीन ओलंपिक]] में खेला गया था। इसके पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए [[ट्वेंटी20]] टूर्नामेंट होने की उम्मीद है।<ref>{{Cite web |url=https://www.bbc.co.uk/sport/olympics/67120460 |title=2028 Los Angeles Olympics: Cricket's inclusion voted through by IOC members |work=BBC Sport |date=2023-10-16 |accessdate=2024-06-25 |archive-date=June 25, 2024 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240625190505/https://www.bbc.co.uk/sport/olympics/67120460 |url-status=live }}</ref>
==पृष्ठभूमि==
प्रारंभिक ओलंपिक में क्रिकेट का इतिहास रहा है। 1896 में [[एथेंस]] में [[1896 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक|पहले आधुनिक ओलंपिक]] में यह योजना बनाई गई थी कि क्रिकेट को एक पदक खेल के रूप में खेला जाएगा, लेकिन प्रविष्टियों की कमी के कारण, नियोजित कार्यक्रम नहीं हो सका।<ref name=espn>{{Cite web |url=https://www.espncricinfo.com/story/the-ignorant-olympians-134962 |title=The Ignorant Olympians |work=ESPN |accessdate=2024-06-25 |archive-date=October 25, 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20211025160618/https://www.espncricinfo.com/story/the-ignorant-olympians-134962 |url-status=live }}</ref> [[1900 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक|1900]] में [[पेरिस]] में, चार टीमों ने प्रवेश किया: [[ग्रेट ब्रिटेन]] (इसका विज्ञापन करने वाले पोस्टरों में [[इंग्लैंड क्रिकेट टीम|इंग्लैंड]] के रूप में सूचीबद्ध और डेवोन और समरसेट वांडरर्स द्वारा प्रतिनिधित्व किया गया),<ref name=espn /> [[फ्रांस]], [[बेल्जियम]] और [[नीदरलैंड]]। हालाँकि, ग्रेट ब्रिटेन और फ्रांस के बीच केवल एक मैच खेला गया था, जिसमें ग्रेट ब्रिटेन ने दो दिवसीय मैच जीता था। 1912 में जब तक इसे पूर्वव्यापी रूप से मान्यता नहीं दी गई तब तक खिलाड़ियों को यह एहसास नहीं था कि यह एक ओलंपिक आयोजन था।<ref name=espn /> [[1904 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक|1904 खेल]] में क्रिकेट को ओलंपिक से हटा दिया गया था और बाद के दशकों में इसे शामिल करने पर विचार नहीं किया गया।<ref name=espn />
कई वर्षों से, [[भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड]] (बीसीसीआई) और [[इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड]] (ईसीबी) सहित क्रिकेट के कई शासी निकाय लंबे समय से ओलंपिक की वापसी का विरोध कर रहे थे।<ref>{{cite web |last1=Kalra |first1=Gaurav |title=BCCI's opposition to Olympics cricket 'disappointing' |url=https://www.espncricinfo.com/story/bcci-s-opposition-olympics-cricket-disappointing-755009 |website=ESPN Cricinfo |access-date=17 October 2023 |date=23 June 2014 |archive-date=August 13, 2024 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240813173532/https://www.espncricinfo.com/story/bcci-s-opposition-olympics-cricket-disappointing-755009 |url-status=live }}</ref> ईसीबी ने 2015 में अपना विरोध वापस ले लिया,<ref>{{cite web |last1=Gibson |first1=Owen |title=ECB drops opposition to T20 cricket being in Olympics, says MCC |url=https://www.theguardian.com/sport/2015/jul/14/ecb-drop-opposition-t20-cricket-olympics-2024-mcc-world-cricket-committee |website=The Guardian |access-date=17 October 2023 |date=14 July 2015 |archive-date=August 13, 2024 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240813173534/https://www.theguardian.com/sport/2015/jul/14/ecb-drop-opposition-t20-cricket-olympics-2024-mcc-world-cricket-committee |url-status=live }}</ref> और मार्च 2017 में यह बताया गया कि [[अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद]] प्रमुख डेव रिचर्डसन ने सोचा कि ओलंपिक क्रिकेट के लिए "समय सही है"।<ref name="Guardian July 2017">{{cite news | url=https://www.theguardian.com/sport/2017/jul/25/cricket-on-verge-making-application-olympic-inclusion | title=Cricket is on the verge of making its application for Olympic inclusion | date=25 July 2017 | last=Wigmore | first=Tom | work=[[The Guardian]] | access-date=November 11, 2023 | archive-date=November 7, 2018 | archive-url=https://web.archive.org/web/20181107010119/https://www.theguardian.com/sport/2017/jul/25/cricket-on-verge-making-application-olympic-inclusion | url-status=live }}</ref> यह भी खबर आई कि बीसीसीआई का विरोध नरम पड़ गया है।<ref>{{cite news | url=https://www.theguardian.com/sport/2017/jul/24/womens-world-cup-cricket-olympic-games-2024 | title=Women's World Cup success moves cricket closer to Olympic return in 2024 | date=24 July 2017 | last=Wigmore | first=Tom | work=[[The Guardian]] | access-date=November 11, 2023 | archive-date=November 6, 2018 | archive-url=https://web.archive.org/web/20181106210802/https://www.theguardian.com/sport/2017/jul/24/womens-world-cup-cricket-olympic-games-2024 | url-status=live }}</ref>
अक्टूबर 2020 में, यूएसए क्रिकेट ने कहा कि उसने लॉस एंजिल्स में [[2028 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक]] कार्यक्रम में क्रिकेट को दीर्घकालिक लक्ष्य के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव रखा है।<ref>{{Cite web|date=2020-10-16|title=USA Cricket plan to make country leading nation in the sport|url=https://www.insidethegames.biz/articles/1099662/usa-cricket-plan-leading-nation-in-sport|access-date=2020-10-17|website=Inside the Games|archive-date=October 22, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20231022074847/https://www.insidethegames.biz/articles/1099662/usa-cricket-plan-leading-nation-in-sport|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|date=2020-10-16|title=USA Cricket targets ICC full member status by 2030|url=https://www.sportspromedia.com/news/usa-cricket-icc-full-member-status-t20-league-la-2028-olympics|access-date=2020-10-17|website=SportsPro Media|archive-date=October 26, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20231026213751/https://www.sportspromedia.com/news/usa-cricket-icc-full-member-status-t20-league-la-2028-olympics/|url-status=live}}</ref> 2020 में, बीसीसीआई ने अपनी वार्षिक आम बैठक में [[अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति]] से कुछ स्पष्टीकरण प्राप्त करने के बाद 2028 में [[ट्वेंटी20|टी20]] क्रिकेट को शामिल करने के लिए आईसीसी की बोली का समर्थन करने का फैसला किया।<ref>{{cite web|url=https://www.forbes.com/sites/tristanlavalette/2021/04/19/with-powerful-indias-support-cricket-moves-closer-to-2028-los-angeles-games-inclusion/?sh=4e0fe85b38ee|title=With Powerful India's Support, Cricket Moves Closer To 2028 Los Angeles Olympics Inclusion|work=Forbes|access-date=2021-07-28|archive-date=October 22, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20231022073319/https://www.forbes.com/sites/tristanlavalette/2021/04/19/with-powerful-indias-support-cricket-moves-closer-to-2028-los-angeles-games-inclusion/?sh=4e0fe85b38ee|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|date=24 December 2020|title=IPL 2022 teams: BBCI okays 10 team IPL from 2022, backs inclusion of cricket in the Olympics|url=https://timesofindia.indiatimes.com/sports/cricket/news/bcci-okays-10-team-ipl-from-2022-backs-inclusion-of-cricket-in-the-olympics/articleshow/79940068.cms|access-date=2020-12-24|website=The Times of India|language=en|archive-date=August 13, 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240813173543/https://timesofindia.indiatimes.com/sports/cricket/news/bcci-okays-10-team-ipl-from-2022-backs-inclusion-of-cricket-in-the-olympics/articleshow/79940068.cms|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|title=BCCI Clears 10-Team IPL From 2022, Backs Cricket's Inclusion In Olympics {{!}} Cricket News|url=https://sports.ndtv.com/cricket/cricket-board-approves-10-team-indian-premier-league-from-2022-edition-2343071|access-date=2020-12-24|website=NDTVSports.com|language=en|archive-date=October 22, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20231022074810/https://sports.ndtv.com/cricket/cricket-board-approves-10-team-indian-premier-league-from-2022-edition-2343071|url-status=live}}</ref> अगस्त 2021 में, [[आईसीसी]] ने 2028 और [[2032 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक|2032 खेलों]] से शुरू करके ओलंपिक में क्रिकेट को शामिल करने के लिए बोली लगाने की अपनी योजना की पुष्टि की।<ref>{{cite web |url=https://www.icc-cricket.com/media-releases/2211545 |title=ICC confirms cricket's Olympic ambition |work=International Cricket Council |access-date=10 August 2021 |archive-date=September 10, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220910051954/https://www.icc-cricket.com/media-releases/2211545 |url-status=live }}</ref>
9 अक्टूबर, 2023 को, 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक आयोजन समिति ने घोषणा की कि क्रिकेट उन खेलों की सूची में है, जिन्हें वे शुरू करना चाहते हैं।<ref>{{cite news |last1=Wharton |first1=David |title=L.A. names coveted five provisional sports it wants to add for 2028 Olympics |url=https://www.latimes.com/sports/olympics/story/2023-10-09/los-angeles-2028-olympics-provisional-sports |access-date=10 October 2023 |work=Los Angeles Times |date=9 October 2023 |archive-date=November 11, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20231111161447/https://www.latimes.com/sports/olympics/story/2023-10-09/los-angeles-2028-olympics-provisional-sports |url-status=live }}</ref> 13 अक्टूबर, 2023 को, आईओसी ने घोषणा की कि बोली स्वीकार कर ली गई है और 14 से 16 अक्टूबर, 2023 के बीच [[मुंबई]] में 141वें आईओसी सत्र के दौरान 2028 में इसे शामिल करने को अंतिम रूप देने के लिए मतदान के तहत रखा गया है। 16 अक्टूबर, 2023 को इसकी पुष्टि की गई कि क्रिकेट को 2028 ओलंपिक में शामिल किया जाएगा क्योंकि केवल दो खिलाड़ियों ने इसे शामिल करने के खिलाफ मतदान किया, जिसमें पुरुष और महिला दोनों टी20 टूर्नामेंट शामिल थे।<ref name="final_inclusion_voting">{{Cite web |date=2023-10-16 |title=T20 cricket confirmed as one of five new sports at LA28 |url=https://www.espncricinfo.com/story/cricket-at-la28-cricket-confirmed-as-one-of-five-new-sports-at-la28-1403570 |access-date=2023-10-16 |website=ESPNcricinfo |language=en |archive-date=October 23, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20231023032901/https://www.espncricinfo.com/story/cricket-at-la28-cricket-confirmed-as-one-of-five-new-sports-at-la28-1403570 |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |date=2023-10-13 |title=IOC accepts recommendation to include T20 cricket in 2028 Los Angeles Olympics |url=https://www.espncricinfo.com/story/ioc-accepts-recommendation-to-include-t20-cricket-in-2028-los-angeles-olympics-1402864 |access-date=2023-10-16 |website=ESPNcricinfo |language=en |archive-date=October 22, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20231022075012/https://www.espncricinfo.com/story/ioc-accepts-recommendation-to-include-t20-cricket-in-2028-los-angeles-olympics-1402864 |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |title=Cricket officially confirmed for LA Olympics 2028 {{!}} Cricbuzz.com |url=https://www.cricbuzz.com/cricket-news/128104/cricket-officially-confirmed-for-la-olympics-2028-cricbuzzcom |access-date=2023-10-16 |website=Cricbuzz |date=16 October 2023 |language=en |archive-date=October 27, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20231027000128/https://www.cricbuzz.com/cricket-news/128104/cricket-officially-confirmed-for-la-olympics-2028-cricbuzzcom |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |title=Cricket going for gold as Olympic Games inclusion confirmed for 2028 |url=https://www.icc-cricket.com/news/3738863 |access-date=2023-10-16 |website=www.icc-cricket.com |language=en |archive-date=October 26, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20231026234948/https://www.icc-cricket.com/news/3738863 |url-status=live }}</ref>
== योग्यता ==
अप्रैल 2025 में IOC ने पुष्टि की कि पुरुष और महिला दोनों ही प्रतियोगिताओं में छह टीमें होंगी। क्रिकेट के लिए प्रत्येक लिंग के 90 एथलीट आवंटित किए जाने के बाद प्रत्येक राष्ट्र की टीम में 15 खिलाड़ी होंगे।<ref>{{cite news |last1=Abraham |first1=Timothy |title=LA 2028: IOC says cricket's Olympic return will be as six-team T20 tournament for men and women |url=https://www.bbc.co.uk/sport/cricket/articles/cvg9dl0vnp7o |access-date=11 April 2025 |work=BBC Sport |date=10 April 2025}}</ref>
===योग्यता सारांश===
{|class="wikitable sortable" width=370 style="text-align:center; font-size:90%"
|-
! राष्ट्र ||पुरुष ||महिला ||width=55|एथलीट
|-
|style="text-align:left;" |{{flagIOC|USA|2024 ग्रीष्मकालीन}} || {{ya}} || {{ya}} ||'''30'''
|-
!कुल: 1 NOC(s) !! 90 !! 90 !! 180
|}
== संदर्भ ==
{{reflist}}
[[श्रेणी:ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक]]
[[श्रेणी:2028 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक]]
[[श्रेणी:2028 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में खेले गए खेल]]
hwom5plk15o0wro7b615lj1k2ltnx1o
6591379
6591377
2026-07-23T18:55:19Z
Rudraaac
922192
6591379
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox Olympic event
| event = [[क्रिकेट]]
| games = 2028 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक
| image = [[File:Cricket pictogram.svg|150px|class=skin-invert]]
| venue = [[नाइट राइडर्स क्रिकेट ग्राउंड]], [[फेयरप्लेक्स]], [[पोमोना]], [[कैलिफोर्निया]], संयुक्त राष्ट्र अमेरिका
| dates = १२-२९ जुलाई २०२८
| competitors =
| nations =
|num_events = 2 (1 पुरुष, 1 महिला)
| prev = [[1900 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में क्रिकेट|1900]]
| next = [[2032 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में क्रिकेट|2032]]
}}
'''[[लॉस एंजिल्स]], [[संयुक्त राज्य अमेरिका]]''' में '''[[2028 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक]]''' में '''[[क्रिकेट]]''' को फिर से पेश किया जाएगा। यह ओलंपिक क्रिकेट टूर्नामेंट का दूसरा संस्करण होगा। क्रिकेट आखिरी बार 1900 में [[ग्रीष्मकालीन ओलंपिक]] में खेला गया था। इसके पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए [[ट्वेंटी20]] टूर्नामेंट होने की उम्मीद है।<ref>{{Cite web |url=https://www.bbc.co.uk/sport/olympics/67120460 |title=2028 Los Angeles Olympics: Cricket's inclusion voted through by IOC members |work=BBC Sport |date=2023-10-16 |accessdate=2024-06-25 |archive-date=June 25, 2024 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240625190505/https://www.bbc.co.uk/sport/olympics/67120460 |url-status=live }}</ref>
==पृष्ठभूमि==
प्रारंभिक ओलंपिक में क्रिकेट का इतिहास रहा है। 1896 में [[एथेंस]] में [[1896 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक|पहले आधुनिक ओलंपिक]] में यह योजना बनाई गई थी कि क्रिकेट को एक पदक खेल के रूप में खेला जाएगा, लेकिन प्रविष्टियों की कमी के कारण, नियोजित कार्यक्रम नहीं हो सका।<ref name=espn>{{Cite web |url=https://www.espncricinfo.com/story/the-ignorant-olympians-134962 |title=The Ignorant Olympians |work=ESPN |accessdate=2024-06-25 |archive-date=October 25, 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20211025160618/https://www.espncricinfo.com/story/the-ignorant-olympians-134962 |url-status=live }}</ref> [[1900 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक|1900]] में [[पेरिस]] में, चार टीमों ने प्रवेश किया: [[ग्रेट ब्रिटेन]] (इसका विज्ञापन करने वाले पोस्टरों में [[इंग्लैंड क्रिकेट टीम|इंग्लैंड]] के रूप में सूचीबद्ध और डेवोन और समरसेट वांडरर्स द्वारा प्रतिनिधित्व किया गया),<ref name=espn /> [[फ्रांस]], [[बेल्जियम]] और [[नीदरलैंड]]। हालाँकि, ग्रेट ब्रिटेन और फ्रांस के बीच केवल एक मैच खेला गया था, जिसमें ग्रेट ब्रिटेन ने दो दिवसीय मैच जीता था। 1912 में जब तक इसे पूर्वव्यापी रूप से मान्यता नहीं दी गई तब तक खिलाड़ियों को यह एहसास नहीं था कि यह एक ओलंपिक आयोजन था।<ref name=espn /> [[1904 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक|1904 खेल]] में क्रिकेट को ओलंपिक से हटा दिया गया था और बाद के दशकों में इसे शामिल करने पर विचार नहीं किया गया।<ref name=espn />
कई वर्षों से, [[भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड]] (बीसीसीआई) और [[इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड]] (ईसीबी) सहित क्रिकेट के कई शासी निकाय लंबे समय से ओलंपिक की वापसी का विरोध कर रहे थे।<ref>{{cite web |last1=Kalra |first1=Gaurav |title=BCCI's opposition to Olympics cricket 'disappointing' |url=https://www.espncricinfo.com/story/bcci-s-opposition-olympics-cricket-disappointing-755009 |website=ESPN Cricinfo |access-date=17 October 2023 |date=23 June 2014 |archive-date=August 13, 2024 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240813173532/https://www.espncricinfo.com/story/bcci-s-opposition-olympics-cricket-disappointing-755009 |url-status=live }}</ref> ईसीबी ने 2015 में अपना विरोध वापस ले लिया,<ref>{{cite web |last1=Gibson |first1=Owen |title=ECB drops opposition to T20 cricket being in Olympics, says MCC |url=https://www.theguardian.com/sport/2015/jul/14/ecb-drop-opposition-t20-cricket-olympics-2024-mcc-world-cricket-committee |website=The Guardian |access-date=17 October 2023 |date=14 July 2015 |archive-date=August 13, 2024 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240813173534/https://www.theguardian.com/sport/2015/jul/14/ecb-drop-opposition-t20-cricket-olympics-2024-mcc-world-cricket-committee |url-status=live }}</ref> और मार्च 2017 में यह बताया गया कि [[अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद]] प्रमुख डेव रिचर्डसन ने सोचा कि ओलंपिक क्रिकेट के लिए "समय सही है"।<ref name="Guardian July 2017">{{cite news | url=https://www.theguardian.com/sport/2017/jul/25/cricket-on-verge-making-application-olympic-inclusion | title=Cricket is on the verge of making its application for Olympic inclusion | date=25 July 2017 | last=Wigmore | first=Tom | work=[[The Guardian]] | access-date=November 11, 2023 | archive-date=November 7, 2018 | archive-url=https://web.archive.org/web/20181107010119/https://www.theguardian.com/sport/2017/jul/25/cricket-on-verge-making-application-olympic-inclusion | url-status=live }}</ref> यह भी खबर आई कि बीसीसीआई का विरोध नरम पड़ गया है।<ref>{{cite news | url=https://www.theguardian.com/sport/2017/jul/24/womens-world-cup-cricket-olympic-games-2024 | title=Women's World Cup success moves cricket closer to Olympic return in 2024 | date=24 July 2017 | last=Wigmore | first=Tom | work=[[The Guardian]] | access-date=November 11, 2023 | archive-date=November 6, 2018 | archive-url=https://web.archive.org/web/20181106210802/https://www.theguardian.com/sport/2017/jul/24/womens-world-cup-cricket-olympic-games-2024 | url-status=live }}</ref>
अक्टूबर 2020 में, यूएसए क्रिकेट ने कहा कि उसने लॉस एंजिल्स में [[2028 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक]] कार्यक्रम में क्रिकेट को दीर्घकालिक लक्ष्य के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव रखा है।<ref>{{Cite web|date=2020-10-16|title=USA Cricket plan to make country leading nation in the sport|url=https://www.insidethegames.biz/articles/1099662/usa-cricket-plan-leading-nation-in-sport|access-date=2020-10-17|website=Inside the Games|archive-date=October 22, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20231022074847/https://www.insidethegames.biz/articles/1099662/usa-cricket-plan-leading-nation-in-sport|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|date=2020-10-16|title=USA Cricket targets ICC full member status by 2030|url=https://www.sportspromedia.com/news/usa-cricket-icc-full-member-status-t20-league-la-2028-olympics|access-date=2020-10-17|website=SportsPro Media|archive-date=October 26, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20231026213751/https://www.sportspromedia.com/news/usa-cricket-icc-full-member-status-t20-league-la-2028-olympics/|url-status=live}}</ref> 2020 में, बीसीसीआई ने अपनी वार्षिक आम बैठक में [[अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति]] से कुछ स्पष्टीकरण प्राप्त करने के बाद 2028 में [[ट्वेंटी20|टी20]] क्रिकेट को शामिल करने के लिए आईसीसी की बोली का समर्थन करने का फैसला किया।<ref>{{cite web|url=https://www.forbes.com/sites/tristanlavalette/2021/04/19/with-powerful-indias-support-cricket-moves-closer-to-2028-los-angeles-games-inclusion/?sh=4e0fe85b38ee|title=With Powerful India's Support, Cricket Moves Closer To 2028 Los Angeles Olympics Inclusion|work=Forbes|access-date=2021-07-28|archive-date=October 22, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20231022073319/https://www.forbes.com/sites/tristanlavalette/2021/04/19/with-powerful-indias-support-cricket-moves-closer-to-2028-los-angeles-games-inclusion/?sh=4e0fe85b38ee|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|date=24 December 2020|title=IPL 2022 teams: BBCI okays 10 team IPL from 2022, backs inclusion of cricket in the Olympics|url=https://timesofindia.indiatimes.com/sports/cricket/news/bcci-okays-10-team-ipl-from-2022-backs-inclusion-of-cricket-in-the-olympics/articleshow/79940068.cms|access-date=2020-12-24|website=The Times of India|language=en|archive-date=August 13, 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240813173543/https://timesofindia.indiatimes.com/sports/cricket/news/bcci-okays-10-team-ipl-from-2022-backs-inclusion-of-cricket-in-the-olympics/articleshow/79940068.cms|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|title=BCCI Clears 10-Team IPL From 2022, Backs Cricket's Inclusion In Olympics {{!}} Cricket News|url=https://sports.ndtv.com/cricket/cricket-board-approves-10-team-indian-premier-league-from-2022-edition-2343071|access-date=2020-12-24|website=NDTVSports.com|language=en|archive-date=October 22, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20231022074810/https://sports.ndtv.com/cricket/cricket-board-approves-10-team-indian-premier-league-from-2022-edition-2343071|url-status=live}}</ref> अगस्त 2021 में, [[आईसीसी]] ने 2028 और [[2032 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक|2032 खेलों]] से शुरू करके ओलंपिक में क्रिकेट को शामिल करने के लिए बोली लगाने की अपनी योजना की पुष्टि की।<ref>{{cite web |url=https://www.icc-cricket.com/media-releases/2211545 |title=ICC confirms cricket's Olympic ambition |work=International Cricket Council |access-date=10 August 2021 |archive-date=September 10, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220910051954/https://www.icc-cricket.com/media-releases/2211545 |url-status=live }}</ref>
9 अक्टूबर, 2023 को, 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक आयोजन समिति ने घोषणा की कि क्रिकेट उन खेलों की सूची में है, जिन्हें वे शुरू करना चाहते हैं।<ref>{{cite news |last1=Wharton |first1=David |title=L.A. names coveted five provisional sports it wants to add for 2028 Olympics |url=https://www.latimes.com/sports/olympics/story/2023-10-09/los-angeles-2028-olympics-provisional-sports |access-date=10 October 2023 |work=Los Angeles Times |date=9 October 2023 |archive-date=November 11, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20231111161447/https://www.latimes.com/sports/olympics/story/2023-10-09/los-angeles-2028-olympics-provisional-sports |url-status=live }}</ref> 13 अक्टूबर, 2023 को, आईओसी ने घोषणा की कि बोली स्वीकार कर ली गई है और 14 से 16 अक्टूबर, 2023 के बीच [[मुंबई]] में 141वें आईओसी सत्र के दौरान 2028 में इसे शामिल करने को अंतिम रूप देने के लिए मतदान के तहत रखा गया है। 16 अक्टूबर, 2023 को इसकी पुष्टि की गई कि क्रिकेट को 2028 ओलंपिक में शामिल किया जाएगा क्योंकि केवल दो खिलाड़ियों ने इसे शामिल करने के खिलाफ मतदान किया, जिसमें पुरुष और महिला दोनों टी20 टूर्नामेंट शामिल थे।<ref name="final_inclusion_voting">{{Cite web |date=2023-10-16 |title=T20 cricket confirmed as one of five new sports at LA28 |url=https://www.espncricinfo.com/story/cricket-at-la28-cricket-confirmed-as-one-of-five-new-sports-at-la28-1403570 |access-date=2023-10-16 |website=ESPNcricinfo |language=en |archive-date=October 23, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20231023032901/https://www.espncricinfo.com/story/cricket-at-la28-cricket-confirmed-as-one-of-five-new-sports-at-la28-1403570 |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |date=2023-10-13 |title=IOC accepts recommendation to include T20 cricket in 2028 Los Angeles Olympics |url=https://www.espncricinfo.com/story/ioc-accepts-recommendation-to-include-t20-cricket-in-2028-los-angeles-olympics-1402864 |access-date=2023-10-16 |website=ESPNcricinfo |language=en |archive-date=October 22, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20231022075012/https://www.espncricinfo.com/story/ioc-accepts-recommendation-to-include-t20-cricket-in-2028-los-angeles-olympics-1402864 |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |title=Cricket officially confirmed for LA Olympics 2028 {{!}} Cricbuzz.com |url=https://www.cricbuzz.com/cricket-news/128104/cricket-officially-confirmed-for-la-olympics-2028-cricbuzzcom |access-date=2023-10-16 |website=Cricbuzz |date=16 October 2023 |language=en |archive-date=October 27, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20231027000128/https://www.cricbuzz.com/cricket-news/128104/cricket-officially-confirmed-for-la-olympics-2028-cricbuzzcom |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |title=Cricket going for gold as Olympic Games inclusion confirmed for 2028 |url=https://www.icc-cricket.com/news/3738863 |access-date=2023-10-16 |website=www.icc-cricket.com |language=en |archive-date=October 26, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20231026234948/https://www.icc-cricket.com/news/3738863 |url-status=live }}</ref>
== योग्यता ==
अप्रैल 2025 में IOC ने पुष्टि की कि पुरुष और महिला दोनों ही प्रतियोगिताओं में छह टीमें होंगी। क्रिकेट के लिए प्रत्येक लिंग के 90 एथलीट आवंटित किए जाने के बाद प्रत्येक राष्ट्र की टीम में 15 खिलाड़ी होंगे।<ref>{{cite news |last1=Abraham |first1=Timothy |title=LA 2028: IOC says cricket's Olympic return will be as six-team T20 tournament for men and women |url=https://www.bbc.co.uk/sport/cricket/articles/cvg9dl0vnp7o |access-date=11 April 2025 |work=BBC Sport |date=10 April 2025}}</ref>
===योग्यता सारांश===
{|class="wikitable sortable" width=370 style="text-align:center; font-size:90%"
|-
! राष्ट्र ||पुरुष ||महिला ||width=55|एथलीट
|-
|style="text-align:left;" |{{flagIOC|USA|2024 ग्रीष्मकालीन}} || {{ya}} || {{ya}} ||'''30'''
|-
!कुल: 1 NOC(s) !! 90 !! 90 !! 180
|}
== संदर्भ ==
{{reflist}}
[[श्रेणी:ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक]]
[[श्रेणी:2028 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक]]
[[श्रेणी:2028 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में खेले गए खेल]]
m1sx9oivg2w3vy2xka4qqgf9v11s2dh
गैब्रिएला इसलर
0
1585271
6591386
6505426
2026-07-23T22:57:07Z
InternetArchiveBot
500600
Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5
6591386
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox pageant titleholder
|name = गैब्रिएला इसलर
|image = María Gabriela Isler cropped.jpg
|caption = 2013 में इसलर
|birth_date = {{birth date and age|1988|3|21|df=y}}
|birth_place = वालेंसिया, कैराबोबो, वेनेज़ुएला
|occupation = मिस वेनेजुएला की निदेशक (2018-वर्तमान)
|birth_name = मारिया गैब्रिएला डी जेसुएस इसलर मोरालेस
|height = 5 फीट 10 इंच<ref>{{cite web|url=https://www.missuniverse.com/titleholder/657674|title=Gabriela Isler, Miss Universe 2013|date=10 October 2020|publisher=Miss Universe|archive-url=https://web.archive.org/web/20170716114100/https://www.missuniverse.com/titleholder/657674|archive-date=July 16, 2017}}</ref>
|hair_color =
|eye_color =
|title = {{Unbulleted list|मिस वेनेजुएला 2012|मिस यूनिवर्स 2013}}
|competitions = {{Unbulleted list|मिस वेनेजुएला 2012|(विजेता)|मिस यूनिवर्स 2013|(विजेता)}}
}}
'''मारिया गैब्रिएला दे जीसस इसलर मोरालेस''' ({{IPA|es|ɡaˈβɾjela isˈleɾ}} जन्म 21 मार्च 1988)<ref>{{cite web |url=https://www.telemundo.com/shows/miss-universo/las-mujeres-latinas-que-han-sido-coronadas-en-miss-universo-rcna176803 |title=Las mujeres latinas que han sido coronadas en Miss Universo |publisher=Telemundo |language=es |date=12 November 2024 }}</ref> एक वेनेज़ुएलन [[मॉडल (व्यक्ति)|मॉडल]], प्रस्तोता (होस्ट) और पूर्व [[सौंदर्य प्रतियोगिता]] विजेता हैं, जिन्होंने मिस वेनेज़ुएला 2012 और [[मिस यूनीवर्स 2013]] का खिताब जीतकर अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की।
उन्होंने 2015 की शुरुआत में [[मिस यूनिवर्स]] का ताज अगली विजेता को सौंप दिया। अपने कार्यकाल के बाद, गैब्रिएला इसलर ने [[डोनाल्ड ट्रंप]] का प्रस्ताव स्वीकार करते हुए मिस यूनिवर्स ऑर्गनाइज़ेशन के साथ दो साल तक बिज़नेस और एक्सपोर्ट मैनेजर के रूप में काम किया।<ref>{{cite web |url=http://missuniversusa.com/gabriela-isler-seguira-trabajando-con-la-organizacion-miss-universo/ |title=Gabriela Isler seguira trabajando con la Organizacion Miss Universo |work=Miss Universe |publisher=Miss Univers USA |language=es |date=9 February 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150210070116/http://missuniversusa.com/gabriela-isler-seguira-trabajando-con-la-organizacion-miss-universo/ |archive-date=10 February 2015 }}</ref>
==प्रारंभिक जीवन==
इसलर का जन्म वेनेजुएला के [[वेलेंसिया, वेनेजुएला|वेलेंसिया]] शहर में हुआ था। उनकी माँ वेनेजुएली थीं और पिता स्विस मूल के जर्मन वंशज थे।<ref>{{cite web |url=https://www.youtube.com/watch?v=6Wth5lvhFN8&t=154s |title=10 Things You Didn't Know About Gabriela Isler |date=18 December 2013 |time=2:34|author=[[Miss Universe]]|via=YouTube|quote=I'm not 100% Venezuelan. [I'm] a quarter-Swiss and a quarter-German.}}</ref><ref>{{Cite web |last=Fenner |first=James |date=2013-11-10 |title=Miss Universe 2013: 5 Facts About the Venezuelan and Post-Competition Reactions |url=https://guardianlv.com/2013/11/miss-universe-2013-5-facts-about-the-venezuelan-beauty-and-her-post-competition-reaction/ |access-date=2022-12-19 |website=Guardian Liberty Voice |language=en-US}}</ref> बचपन में वह मराकाय शहर में रहने चली गईं।<ref name="tdg.ch">{{cite news|publisher=tdg.ch|title=La Miss Univers 2013 a aussi la nationalité suisse|url=http://www.tdg.ch/people/La-Miss-Univers-2013-a-aussi-la-nationalite-suisse/story/14150390|work=Tribune de Genève|access-date=November 11, 2013|date=October 11, 2013}}</ref> जब वह 14 साल की थीं, तब उन्होंने मॉडलिंग शुरू की, ताकि अपनी माँ और दादी को अपनी मौसी की मृत्यु के बाद खुश कर सकें।<ref name=gbtimes.com>{{cite web|publisher=gbtimes.com|title=Gabriela Isler: the woman behind the Miss Universe 2013 title|url=http://gbtimes.com/life/gabriela-isler-woman-behind-miss-universe-2013-title|access-date=November 26, 2013|archive-date=November 29, 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20131129083438/http://gbtimes.com/life/gabriela-isler-woman-behind-miss-universe-2013-title|url-status=dead}}</ref>
उन्होंने यूनिवर्सिदाद टेक्नोलोजिका डेल सेंत्रो से मार्केटिंग मैनेजमेंट में [[कला स्नातक]] की डिग्री प्राप्त की है।<ref>{{cite web |url=https://www.informador.mx/Entretenimiento/Gabriela-Isler-veterana-en-concursos-de-belleza-20131109-0042.html |title=Gabriela Isler, veterana en concursos de belleza |publisher=El Informador |language=es |date=9 November 2013 }}</ref>
==करियर==
मिस वेनेजुएला 2012 के रूप में, इसलर ने गुआरीको राज्य का प्रतिनिधित्व किया और वहां खिताब जीता।<ref>{{cite web |url=http://www.noticierovenevision.net/estrenos-y-estrellas/2012/agosto/31/38319=maria-gabriela-isler-fue-coronada-como-miss-venezuela-2012 |title=María Gabriela Isler fue coronada como Miss Venezuela 2012 |publisher=Noticias Venevisión |language=es |date=31 August 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121003071234/http://www.noticierovenevision.net/estrenos-y-estrellas/2012/agosto/31/38319=maria-gabriela-isler-fue-coronada-como-miss-venezuela-2012 |archive-date=3 October 2012 }}</ref><ref>{{Cite web |date=2012-09-01 |title=María Gabriela Isler, Miss Venezuela 2012 |url=https://www.eluniversal.com.co/sociales/2012/09/01/maria-gabriela-isler-miss-venezuela-2012/ |access-date=2024-08-18 |website=www.eluniversal.com.co |language=es}}</ref> इसके बाद उन्होंने [[रूस]] के [[मॉस्को]] में आयोजित मिस यूनिवर्स 2013 प्रतियोगिता में वेनेजुएला का प्रतिनिधित्व किया, जहाँ वह मिस यूनिवर्स का ताज जीतने वाली सातवीं वेनेजुएलाई बन गईं।<ref>{{Cite web |last=Shaw |first=Gabbi |title=The winner of Miss Universe the year you were born |url=https://www.businessinsider.com/miss-universe-winners-through-history-photos#2013-miss-venezuela-gabriela-isler-60 |access-date=2024-08-18 |website=Business Insider |language=en-US}}</ref><ref>{{cite web |url=https://abcnews.go.com/Social_Climber/social-climber-meet-gabriela-isler-miss-universe-2013/story?id=20842878 |title=Gabriela Isler is Your Miss Universe 2013, Scott Baio Reunites with 'Happy Days' Legend |publisher=ABC News |date=10 November 2013 }}</ref> अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कई देशों की यात्रा की और अनेक चैरिटी व प्रचार कार्यक्रमों में भाग लिया।<ref>{{cite web |last=Maye |first=Errin Taylor |url=https://bodemagazine.com/lifestyle/stories/stories/the-queen-of-the-world-one-on-one-with-miss-universe-gabriela-isler |title=The Queen of the World: One-on-One with Miss Universe Gabriela Isler |publisher=BODE Magazine |date=6 December 2023 |access-date=13 अप्रैल 2025 |archive-date=14 जून 2025 |archive-url=https://web.archive.org/web/20250614030431/https://bodemagazine.com/lifestyle/stories/stories/the-queen-of-the-world-one-on-one-with-miss-universe-gabriela-isler |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=https://www.independent.com.mt/articles/2015-01-17/world-news/AP-Interview-Miss-Universe-reflects-as-her-reign-winds-down-6736128884 |title=AP Interview: Miss Universe reflects as her reign winds down |publisher=The Malta Independent |date=17 January 2015 }}</ref>
अपने सौंदर्य प्रतियोगिता करियर के अलावा, इसलर ने मीडिया में भी काम किया है। उन्होंने मिस वेनेजुएला 2014 प्रतियोगिता की मेज़बानी की और कई सामाजिक अभियानों की प्रवक्ता के रूप में भी सेवा दी है।<ref>{{cite web |url=http://eltiempo.com.ve/tiempo-libre/sociedad/maria-gabriela-isler-llego-hoy-a-venezuela/157183 |title=María Gabriela Isler llegó hoy a Venezuela |publisher=El Tiempo |date=7 October 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141019042429/http://eltiempo.com.ve/tiempo-libre/sociedad/maria-gabriela-isler-llego-hoy-a-venezuela/157183 |archive-date=19 October 2014 }}</ref>
इसलर ने "यूनिवर्स ऑफ ब्लेसिंग्स फंड" नामक एक चैरिटी संगठन की स्थापना की, जो वेनेजुएला में किशोरों की शिक्षा में मदद करने के लिए समर्पित है।<ref>{{cite web |title=The Universe of Blessings Fund |url=http://www.genfkd.org/former-miss-universe-now-helping-educate-adolescents-venezuela |website=GenFKD |access-date=1 December 2018 |date=December 15, 2017 |archive-date=December 2, 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181202024607/http://www.genfkd.org/former-miss-universe-now-helping-educate-adolescents-venezuela |url-status=dead }}</ref>
==व्यक्तिगत जीवन==
उन्होंने वर्ष 2018 में वेनेजुएलन व्यवसायी अल्बर्टो फिगुएरोआ से शादी की थी। इस जोड़े का एक बेटा जोआक्विन फिगुएरोआ इसलर है जिसका जन्म 2021 में हुआ था।<ref>{{cite web |url=https://www.missuniverse.com/the-legacy/ |title=The Legacy |publisher=Miss Universe }}</ref>
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|30em}}
==बाहरी कड़ियाँ==
{{S-start}}
{{S-ach}}
{{S-bef|before={{flagicon|United States}} [[ओलिविया कल्पो]]}}
{{s-ttl|title=[[मिस यूनिवर्स]]
|years=[[मिस यूनीवर्स 2013|2013]]}}
{{s-aft|after={{flagicon|Colombia}} पॉलिना वेगा}}
{{S-bef|before= आइरीन एस्सर, सुक्रे}}
{{s-ttl|title=Miss Venezuela
|years=2012}}
{{s-aft|after=मिगबेलिस कैस्टेलानोस, ज़ुलिया}}
{{S-bef|before=ब्लैंका अल्जीबेस}}
{{s-ttl|title=मिस गुआरिको
|years=2012}}
{{s-aft|after=मिशेल बर्टोलीनी}}
{{S-end}}
{{Authority control}}
{{सुन्दरता प्रतियोगिता}} {{मिस यूनीवर्स}}
[[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:सुन्दरता प्रतियोगिता]] [[श्रेणी:मिस यूनीवर्स]] [[श्रेणी:अंतर्राष्ट्रीय सुन्दरता प्रतियोगिता]] [[श्रेणी:1988 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:विश्व सुन्दरी विजेता]] [[श्रेणी:विश्व सुन्दरी]] [[श्रेणी:मिस यूनिवर्स विजेता]]
ifsknssir98bgf6dp88rmam8mf7idyk
गोडसेज़ चिल्ड्रनः हिंदुत्व टेरर इन इंडिया
0
1587875
6591393
6409160
2026-07-24T00:31:05Z
InternetArchiveBot
500600
Rescuing 2 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5
6591393
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox book|image=File:Godse's Children, Hindutva Terror in India.png|editors=सुभाष गटाडे|country=India|language=English|publisher=Pharos Media & Publishing|pub_date=2011|isbn=978-8172210526}}
'''गोडसेज़ चिल्ड्रनः हिंदुत्व टेरर इन इंडिया''': भारतीय पत्रकार सुभाष गटाडे की 2011 की भारतीय राजनीतिक इतिहास की पुस्तक है जो [[भगवा आतंकवाद|हिंदुत्व आतंकवाद]] की घटना पर केंद्रित है।<ref name=>{{Cite journal|last=Hensman|first=R.|date=2012|title=The Spectre of Fascism [Review of Godse's Children: Hindutva Terror in India; The Saffron Condition: Politics of Repression and Exclusion in Neoliberal India, by S. Gatade]|url=http://www.jstor.org/stable/23214471|journal=Economic and Political Weekly|volume=47|issue=9|pages=34–36|jstor=23214471}}</ref>
== कथात्मक ==
2011 की पुस्तक में, जिसे "विवादास्पद" करार दिया गया है, गटाडे ने [[नाथूराम गोडसे]] को "स्वतंत्र भारत में पहला आतंकवादी और गांधी की हत्या को पहली आतंकवादी गतिविधि के रूप में" प्रस्तुत किया है।<ref name=/> गटाडे के काम की 2012 की समीक्षा में, समीक्षक रोहिणी हेंसमैन ने सहमति व्यक्त की कि यदि आतंकवाद को एक राजनीतिक लक्ष्य की खोज में हिंसा के रूप में परिभाषित किया जाता है, तो गांधी की हत्या को "वास्तव में एक आतंकवादी कार्य के रूप में देखा जा सकता है"।<ref name="Hensman">{{Cite journal|last=Hensman|first=R.|date=2012|title=The Spectre of Fascism [Review of Godse's Children: Hindutva Terror in India; The Saffron Condition: Politics of Repression and Exclusion in Neoliberal India, by S. Gatade]|url=http://www.jstor.org/stable/23214471|journal=Economic and Political Weekly|volume=47|issue=9|pages=34–36|jstor=23214471}}</ref>
गाटाडे ने गोडसे को न तो "केवल हिंदुत्व ताकतों के प्रतिनिधि के रूप में चित्रित किया है, जिनके हाथों में वह केवल एक प्यादा था", और गोडसे द्वारा हत्या पर ध्यान केंद्रित नहीं किया, "आतंकवाद का प्रतीक, हिंदू प्रभुत्व की व्यापक राजनीति की प्रस्तावना, भारत में हिंदुत्व आतंकवाद का अग्रदूत"।<ref name=/>
पुस्तक में, गटाडे ने यह भी बताया कि कैसे भारत में 2006 के मुंबई ट्रेन बम विस्फोटों की जांच ने "[[इन्दौर|इंदौर]] पर केंद्रित, साजिशकर्ताओं के एक एकीकृत या समन्वित नेटवर्क का उत्तरोत्तर खुलासा किया था, जो सभी आरएसएस से जुड़े थे"।<ref name="Banaji">{{cite speech|last=Banaji|first=J.|title=Trajectories of Fascism: Extreme-Right Movements in India and Elsewhere|series=The Fifth Walter Sisulu Memorial Lecture|work=[[Jamia Millia Islamia]]|date=18 March 2013|url=https://eprints.soas.ac.uk/16825/1/Jamia%20lecture%20(fascism).pdf}} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20240629163850/https://eprints.soas.ac.uk/16825/1/Jamia%20lecture%20(fascism).pdf |date=29 जून 2024 }}{{cite speech|last=Banaji|first=J.|title=Trajectories of Fascism: Extreme-Right Movements in India and Elsewhere|series=The Fifth Walter Sisulu Memorial Lecture|work=[[Jamia Millia Islamia]]|date=18 March 2013|url=https://eprints.soas.ac.uk/16825/1/Jamia%20lecture%20(fascism).pdf}} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20240629163850/https://eprints.soas.ac.uk/16825/1/Jamia%20lecture%20(fascism).pdf |date=29 जून 2024 }}</ref> उनका कहना है कि आरएसएस की तनाव को दूर करने की रणनीति है, जबकि सार्वजनिक रूप से इसे अस्वीकार कर दिया गया है, लेकिन यह कि यह छल "स्वयं गोडसे को अस्वीकार करने से अधिक विश्वसनीय नहीं है"।<ref name="Banaji" />
इस काम का एक और जोर भारत की कानून प्रवर्तन एजेंसियों में कमियों के बारे में है, जो कि गटाडे "मुसलमानों के खिलाफ संस्थागत पूर्वाग्रह का मनोरंजन करते हैं", "निर्दोष मुस्लिम युवाओं को फंसाने में आने वाले" और "सांप्रदायिक विच-शिकार और अतिरिक्त न्यायिक हत्याओं में शामिल" हैं।{{Sfn|Gatade|2013|p=285}}<ref name="Ansari">{{Cite thesis}}{{cite thesis|last=Ansari|first=K.|date=2016|title=Hindu Nationalism in Theory and Practice|work=[[Duke University]]|url=https://dukespace.lib.duke.edu/dspace/bitstream/handle/10161/12020/Khalid%20Ansari%20-%20Hindu%20Nationalism%20V2.1.pdf}}</ref> भारतीय मीडिया को "मुस्लिम आतंकवादी कथा को आगे बढ़ाने" और घटनाओं को विकृत करने के लिए भी दंडित किया जाता है, जिसमें उन कहानियों पर बहुत कम ध्यान देना शामिल है जहां गलत गिरफ्तारी के निर्दोष पीड़ितों को अदालतों द्वारा बरी कर दिया गया है।<ref name="Ansari" />
गटाडे का कहना है कि "जहां [[संघ परिवार]] के संरक्षण से पूर्ण फासीवाद हो सकता है", अन्य दलों का नरम सांप्रदायिकता, जैसे कि धार्मिक परिवर्तन के प्रति उनकी शत्रुता, भी उग्रवाद को पोषित करती है।<ref name=""/>
== आलोचनात्मक स्वागत ==
लेखक की प्रस्तुति पर अपनी टिप्पणी में, हेन्समैन ने नोट किया कि "गटाडे वामपंथी लेखकों और कार्यकर्ताओं के छोटे वर्ग से संबंधित हैं जो भारत में फासीवाद के विकास का मुकाबला करने के कार्य को गंभीरता से लेते हैं"।<ref name=""/>
==इन्हें भी देखें==
*[[एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक विवाद]]
== संदर्भ ==
<references responsive="1"></references>
==बाहरी कड़ियाँ==
=== स्रोत ===
* {{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=eSjumAEACAAJ|title=Godse's Children: Hindutva Terror in India, 2nd edition|last=Gatade|first=Subhash|date=2013|work=Pharos Media & Publishing|publisher=Pharos Media &|isbn=9788172210557|page=41}}
[[श्रेणी:हिन्दुत्व]]
[[श्रेणी:महात्मा गांधी की हत्या]]
[[श्रेणी:इस्लामोफ़ोबिया भारत में]]
[[श्रेणी:साहित्य में धार्मिक विवाद]]
[[श्रेणी:पुस्तकें]]
2fam0amve10io64opzjbd4bd6m54g08
सदस्य वार्ता:WAHEED SEVA KENDRA UTTAR PRADESH
3
1591628
6591450
6422925
2026-07-24T03:00:31Z
~2026-41187-04
937901
6591450
wikitext
text/x-wiki
== वाहीद सेवा केंद्र के बारे में ==
वाहीद सेवा केंद्र में आपका स्वागत है, लखनऊ में आपका विश्वसनीय डिजिटल साथी और सरकारी सेवा सुविधा केंद्र। हुसैनाबाद के केंद्र में स्थित, हम एक ही छत के नीचे त्वरित, विश्वसनीय और सुलभ नागरिक-केंद्रित सेवाएं प्रदान करके नागरिकों और डिजिटल शासन के बीच की दूरी को कम करने के लिए समर्पित हैं।
== About Waheed Seva Kendra ==
Welcome to Waheed Seva Kendra, your trusted digital partner and government service facilitation center in Lucknow. Located in the heart of Husainabad, we are dedicated to bridging the gap between citizens and digital governance by providing fast, reliable, and accessible citizen-centric services under one roof.
iwa24hvxa54wx8wj90h07wld8jo4e02
रामायणम् (2026 फिल्म)
0
1595395
6591512
6591051
2026-07-24T09:16:22Z
~2026-41087-25
937953
/* */
6591512
wikitext
text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक फ़िल्म
| name = रामायणम्<br>{{small|Ramayana}}
| image = Ramayana (2026 film).jpeg
| caption = आधिकारिक टीज़र पोस्टर
| director = [[नितेश तिवारी]]
| writer = [[:en:Shridhar Raghavan & Kumar Vishwas|श्रीधर राघवन तथा कुमार विश्वास]]<!--यहाँ 'लेखक' शब्द का तात्पर्य फ़िल्म के कहानी-लेखक से है, न कि उस मूल स्रोत सामग्री के वास्तविक लेखक से जिस पर फ़िल्म की कहानी आधारित है।-->
| based_on = {{Based on|[[रामायण]]|ऋषि [[वाल्मीकि]]}}
| producer = {{plainlist|
* [[नमित मल्होत्रा]] <!--यहां केवल निर्माताओं के नाम होने चाहिए, सह-निर्माताओं के नाम नहीं।-->
}}
| starring = {{plainlist|<!-- आधिकारिक टीज़र पोस्टर पर उल्लिखित क्रेडिट क्रम के अनुसार व्यवस्थित -->
* [[रणबीर कपूर]]
* [[रवि दुबे]]
* [[साई पल्लवी]]
* [[सनी देओल]]
* [[यश]]
}}
| narrator = [[अमिताभ बच्चन]]{{उद्धरण आवश्यक}}
| cinematography = {{plainlist|
* पंकज कुमार
* महेश लिमये
}}
| editing =
| music = '''पृष्ठभूमि''':<br />[[:en:Hans Zimmer, Rishabh Sharma|हाँस ज़िमर]]<br />'''गीत''':<br />[[ए. आर. रहमान]]
| studio = {{plainlist|
* प्राइम फोकस स्टूडियोज़
* मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स
* [[डीएनईजी]]
}}
| distributor = [[धर्मा प्रोडक्शन्स]] (भारत)
| released = {{film date|2026|11|6|df=y}}
| country = भारत (India)
| language = [[हिंदी]]<br />[[:en:English language|अंग्रेज़ी]]
| budget = ₹1800 -₹2200{{small|करोड़}} (US$180-$230 {{small|मिलियन}}) दोनो फिल्म <ref>{{cite web |title=रणबीर कपूर–यश की 'रामायण' बनी भारत की सबसे महंगी फ़िल्म – बजट ₹1600 करोड़ |publisher=News18 |date=15 जुलाई 2025 |url=https://www.news18.com/movies/bollywood/ranbir-kapoor-yashs-ramayana-becomes-indias-costliest-film-at-rs-4000-crore-ws-l-9440783.html |access-date=15 जुलाई 2025}}</ref>
}}'''''रामायण''''' एक आगामी भारतीय महाकाव्य फिल्म है, जिसके निर्माता नमित मलहोत्रा हैं और जिसका निर्देशन [[नितेश तिवारी]] ने किया है और जिसका पटकथा लेखन [[:en:Shridhar Raghavan|श्रीधर राघवन]] ने किया है। यह फिल्म [[हिन्दू धर्म|हिंदू धर्म]] के सबसे महत्वपूर्ण महाकाव्यों में से एक [[प्राचीन भारत|प्राचीन भारतीय]] [[हिन्दू धर्मग्रन्थ|ग्रंथ]] ''[[रामायण]]'' पर आधारित है। यह फिल्म एक नियोजित दो-भागीय श्रृंखला की पहली किस्त है।<ref>{{Cite web|url=https://www.forbes.com/sites/sindhyavalloppillil/2025/06/17/ai-content-creation-is-the-foundation-of-dneg-ceo-namit-malhotras-disruption/|title=How Namit Malhotra Is Building the Future of AI Content Creation|last=वल्लोप्पिलिल|first=सिंध्या|website=फोर्ब्स|language=en|access-date=2025-06-19}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2024/film/news/yash-kgf-ramayana-prime-focus-nitesh-tiwari-dangal-1235967679/|title='K.G.F.' Star Yash's Monster Mind, Namit Malhotra's Prime Focus Team on 'Dangal' Filmmaker Nitesh Tiwari's Epic 'Ramayana' (EXCLUSIVE)|last=नमन रामचन्द्रन|date=2024-04-11|website=वैराइटी|access-date=2024-11-19}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.awn.com/news/prime-focus-studios-announces-ramayana-co-production|title=Prime Focus Studios Announces 'Ramayana' Co-Production|date=30 अप्रैल 2024|website=एनिमेशन वर्ल्ड नेटवर्क|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref>
इसमें <!-- आधिकारिक टीज़र पोस्टर पर उल्लिखित क्रेडिट क्रम के अनुसार व्यवस्थित -->[[रणबीर कपूर]] (राम {{small|के रूप में}}), [[रवि दुबे]] (लक्ष्मण {{small|के रूप में}}), [[साई पल्लवी]] (सीता {{small|के रूप में}}), [[सनी देओल]] (हनुमान {{small|के रूप में}}) और [[यश (अभिनेता)|यश]] (रावण {{small|के रूप में}}) मुख्य भूमिकाएँ निभा रहे हैं। अन्य कलाकारों में [[अरुण गोविल]], [[लारा दत्ता]], [[विवेक ओबेरॉय]], [[काजल अग्रवाल]], [[रकुल प्रीत सिंह]], [[कुणाल कपूर]], [[अनुपम खेर]], [[शीबा चड्ढा]], [[:en:Indira Krishnan|इंदिरा कृष्णन]] और [[शोभना]] शामिल हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/ranbir-kapoor-sai-pallavi-ramayana-officially-announced-release-in-2-parts-2628896-2024-11-06|title=Ranbir, Sai Pallavi and Yash's Ramayana officially announced, to release in 2 parts|date=2024-11-06|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/ranbir-kapoors-ramayana-to-be-backed-by-namit-malhotra/articleshow/108459580.cms|title=Ranbir Kapoor's Ramayana rights acquired by Namit Malhotra|date=2024-03-13|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2025-02-18|issn=0971-8257}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hollyreview.com/2026/02/ramayana-part-1-2026.html|title=Ramayana: Part 1 (2026)|date=2026-02-05|website=Holly Review|language=en|access-date=2026-02-07}}</ref>
यह फिल्म ₹2600-4000 करोड़ के अब तक के सबसे बड़े भारतीय फिल्म बजट पर बनी है। इसका निर्माण [[नमित मल्होत्रा]] के प्राइम फोकस स्टूडियो, यश के मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स और [[चार्ल्स रोवन|चार्ल्स रोवन]] के अमेरिकी स्टूडियो [[एटलस एंटरटेनमेंट]] ने किया है, लेकिन इसकी पूरी शूटिंग और संपादन भारत में हुआ है। इसके विजुअल इफेक्ट्स (वीएफएक्स) का काम ब्रिटिश-भारतीय स्टूडियो [[डीएनईजी]] ने संभाला है।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-sai-pallavi-ramayana-most-expensive-indian-film-rs-835-crore-budget-report-9327597/|title=Ranbir Kapoor, Sai Pallavi's Ramayana to be the most expensive Indian film with Rs 835 crore budget: report|date=2024-05-14|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.gqindia.com/content/ramayana-part-1-this-veteran-actor-with-a-net-worth-of-rs-1600-crore-is-likely-to-join-ranbir-kapoor-and-sam-pallavis-historical-drama-thats-been-made-on-a-staggering-budget-of-rs-835-crore|title=Ramayana Part 1: This veteran actor, with a net worth of Rs 1,600 Crore, is likely to join Ranbir Kapoor and Sai Pallavi's historical drama that's been made on a staggering budget of Rs 835 Crore|last=Shetty|first=Karishma|date=2024-11-06|website=GQ India|language=en-IN|access-date=2025-03-14}}</ref> यह फिल्म 6 नवंबर 2026 में [[दीपावली]] के अवसर पर भारत में रिलीज़ होने वाली है।<ref name="SIA">{{Cite web|url=https://www.siasat.com/oscar-winner-hans-zimmer-joins-for-ramayana-with-a-r-rahman-3004241/|title=Oscar winner Hans Zimmer joins for Ramayana with A.R. Rahman|last=Mouli|first=Chandra|date=2024-04-05|website=द सियासत डैली|language=en|access-date=2025-03-18}}</ref>
फिल्म का संगीत [[:en:List_of_awards_and_nominations_received_by_Hans_Zimmer|विश्व-प्रसिद्ध]] [[:en:Germans|जर्मन]] संगीतकार, [[:en:Hans Zimmer|हाँस ज़िमर]] ({{small|जो अपनी पहली भारतीय परियोजना में काम कर रहे हैं}}), और [[ए. आर. रहमान]] ने मिलकर तैयार किया है।
== कलाकार ==
<!-- मुख्य कलाकार - आधिकारिक टीज़र पोस्टर पर उल्लिखित क्रेडिट क्रम के अनुसार व्यवस्थित -->
{| class="wikitable"
! कलाकार !! भूमिका !! सन्दर्भ
|-
| [[रणबीर कपूर]] || [[राम]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/ranbir-kapoor-is-best-choice-for-lord-ram-mukesh-chhabra-breaks-silence-on-casting-for-nitesh-tiwari-ramayana-2585545-2024-08-21|title=Ranbir Kapoor is best choice for Lord Ram: Mukesh Chhabra on Nitesh Tiwari's 'Ramayana'|date=21 अगस्त 2024|website=इंडिया टुडे|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/htcity/cinema/ramayana-ranbir-kapoor-to-portray-two-avatars-of-lord-vishnu-amitabh-bachchan-roped-in-for-this-role-101725884855689.html|title=Ramayana: Ranbir Kapoor to portray two avatars of Lord Vishnu; Amitabh Bachchan roped in for THIS role|last=महिमा पाण्डेय|date=9 सितम्बर 2024|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=28 नवम्बर 2024}}</ref>
|-
| [[रवि दुबे]] || [[लक्ष्मण]] || <ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-is-the-only-commercially-viable-artist-of-this-generation-ravi-dubey-confirms-hes-playing-lakshman-in-nitesh-tiwaris-ramayana-9707324/|title='Ranbir Kapoor is the only commercially viable artiste of this generation': Ravi Dubey confirms he's playing Lakshman in Nitesh Tiwari's Ramayana|date=2024-12-05|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref>
|-
| [[साई पल्लवी]] || [[सीता]] || <ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ramayana-ranbir-kapoor-yash-sai-pallavi-films-release-date-out-makers-of-nitesh-tiwaris-epic-confirm-two-parts-9655800/|title=Ramayana: Ranbir Kapoor-Yash-Sai Pallavi film's release date out, makers of Nitesh Tiwari's epic confirm two parts|date=2024-11-06|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.gqindia.com/content/heres-how-many-crores-south-superstar-yash-will-earn-for-his-role-as-ravana-in-the-ramayana-starring-ranbir-kapoor-and-sai-pallavi-thats-made-on-a-massive-rs-800-crore-budget|title=Here's how many Crores South superstar Yash will earn for his role as Ravana in Ramayana, starring Ranbir Kapoor and Sai Pallavi, that's made on a massive Rs 800 Crore budget|last=Sonavane|first=Gaurav|date=2024-10-23|website=GQ India|language=en-IN|access-date=2025-03-14}}</ref>
|-
| [[सनी देओल]] || [[हनुमान]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/sunny-deol-confirmed-as-hanuman-in-ranbir-kapoor-starrer-ramayana-details-about-role-revealed-8756715.html|title=Sunny Deol CONFIRMED As Hanuman In Ranbir Kapoor Starrer Ramayana; Details About Role Revealed|date=27 जनवरी 2024|website=न्यूज़18|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/sunny-deol-hanuman-standalone-film-in-nitesh-tiwari-ramayan-trilogy-2613915-2024-10-09|title=Sunny Deol's Hanuman to get standalone film in Ramayan trilogy - Exclusive|date=2024-10-09|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2024-10-09}}</ref>
|-
| [[यश (अभिनेता)|यश]] || [[रावण|रावण]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/yash-confirms-he-is-playing-ravan-in-ranbir-kapoor-starrer-ramayana-toxic-set-to-get-new-release-date/article68785635.ece#:~:text=The%20magnum%20opus%20is%20directed%20by%20Nitesh%20Tiwari&text=Kannada%20superstar%20Yash%20has%20confirmed,and%20Sai%20Pallavi%20as%20Sita.|title=Yash confirms he is playing Ravan in Ranbir Kapoor starrer 'Ramayana'; 'Toxic' set to get new release date|date=23 अक्टूबर 2024|website=द हिन्दू|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref>
|-
| [[अनुपम खेर]]|| [[जटायु]] ||
|-
| [[लारा दत्ता]] || [[कैकेयी]] || <ref name=":1">{{Cite web|url=https://www.zoomtventertainment.com/bollywood/arun-govil-as-dashrath-lara-dutta-as-kaikeyi-and-more-spotted-on-ranbir-kapoors-ramayana-sets-exclusive-pics-article-109041503|title=Arun Govil As Dashrath, Lara Dutta As Kaikeyi And More SPOTTED On Ranbir Kapoor's Ramayana Sets - Exclusive PICS|website=Zoom TV|language=en|access-date=2024-11-27}}</ref>
|-
| [[अरुण गोविल]] || [[दशरथ]] || <ref name=":1" />
|-
| [[:en:Indira Krishnan|इंदिरा कृष्णन]] || [[कौशल्या]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/indira-krishnan-showers-praise-on-ramayan-co-star-ranbir-kapoor-i-cant-see-another-actor-playing-ram/articleshow/114736761.cms|title=Indira Krishnan showers praise on 'Ramayan' co-star Ranbir Kapoor: 'I can't see another actor playing Ram'|date=अक्टूबर 29, 2024|website=टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=नवम्बर 26, 2024}}</ref>
|-
| [[कुणाल कपूर]] || [[इन्द्र|इंद्र]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/kunal-kapoor-to-play-indra-dev-in-nitesh-tiwaris-ramayana/articleshow/112230254.cms|title=Kunal Kapoor to play Indra Dev in Nitesh Tiwari's 'Ramayana'|date=अगस्त 2, 2024|website=टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=नवम्बर 27, 2024}}</ref>
|-
| [[काजल अग्रवाल]] || [[:en:Mandodari|मंदोदरी]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/kajal-aggarwal-cast-as-mandodari-in-yashs-upcoming-ramayana-adaptation/articleshow/121192838.cms|title=Yash's Ravana finds his Mandodari in Kajal Aggarwal|date=2025-05-16|website=टाइम्स ऑफ़ इंडिया|language=en}}</ref>
|-
| [[रकुल प्रीत सिंह]] || [[शूर्पणखा|शूर्पनखा]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.pinkvilla.com/entertainment/exclusives/exclusive-rakul-preet-singh-in-talks-to-come-on-board-nitesh-tiwaris-ramayana-to-play-shurpanakha-1277611|title=EXCLUSIVE: Rakul Preet Singh in talks to come on board Nitesh Tiwari's Ramayana; To play Shurpanakha|date=2024-02-10|website=पिंकविला|language=en|access-date=2024-11-27}}</ref>
|-
| [[विवेक ओबेरॉय]] || [[शूर्पणखा#विद्युतजिह्वा से विवाह|विद्युत्जिवा]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/bollywood/vivek-oberoi-joins-nitesh-tiwaris-ramayana-take-a-look-at-full-cast-ws-l-9373870.html|title=Vivek Oberoi Joins Nitesh Tiwari’s Ramayana: Take A Look At Full Cast|website=न्यूज़18|access-date=7 जून 2025}}</ref>
|-
| [[:en:Adinath Kothare|आदिनाथ कोठारे]] || [[भरत (रामायण)|भरत]] || <ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/etimes-exclusive-this-actor-comes-on-board-for-nitesh-tiwari-ranbir-kapoors-ramayana-to-play-rams-beloved-brother-bharat/articleshow/108842263.cms|title=ETimes Exclusive! THIS actor comes on board for Nitesh Tiwari-Ranbir Kapoor's Ramayana; to play Ram's beloved brother Bharat|date=2024-03-28|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2024-11-27|issn=0971-8257}}</ref>
|-
| [[शीबा चड्ढा]] || [[मंथरा]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/sheeba-chadha-to-play-the-role-of-manthara-in-nitesh-tiwaris-ramayana/articleshow/108950314.cms|title=Sheeba Chadha to play the role of Manthara in Nitesh Tiwari's Ramayana|date=2024-04-01|website=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2024-11-25}}</ref>
|-
| [[शिशिर शर्मा]] || [[वसिष्ठ]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/ranbir-kapoors-ramayana-co-star-shishir-sharma-calls-the-film-huge-and-larger-than-life-spills-the-beans-on-his-character-vasishtha/articleshow/111384095.cms|title=Ranbir Kapoor's 'Ramayana' co-star Shishir Sharma calls the film 'huge and larger-than-life'; spills the beans on his character Vasishtha|date=जून 30, 2024|website=टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=नवम्बर 26, 2024}}</ref>
|-
| [[:en:Ajinkya Deo|अजिंक्या देओ]] || [[विश्वामित्र]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/ranbir-kapoor-smiles-in-new-photo-from-ramayana-sets-poses-with-vishwamitra-check-here-8875502.html|title=Ranbir Kapoor Smiles In New Photo From Ramayana Sets, Poses With 'Vishwamitra' {{!}} Check Here|website=न्यूज़18|language=en|access-date=2024-11-27}}</ref>
|-
| [[:en:Sonia Balani|सोनिया बलानी]] || [[उर्मिला (रामायण)|उर्मिला]] || <ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/the-kerala-story-actress-sonia-balani-will-play-urmilas-character-in-nitesh-tiwaris-ramayana-exclusive/articleshow/110181471.cms|title='The Kerala Story' actress Sonia Balani will play Urmila's character in Nitesh Tiwari's Ramayana- Exclusive!|date=2024-05-16|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2024-11-27|issn=0971-8257}}</ref>
|-
| [[मोहित रैना]] || [[शिव|शिवा]]|| <ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/bollywood/mohit-raina-to-return-as-mahadev-lord-shiva-in-ranbir-kapoors-ramayana-ws-l-9361070.html|title=Mohit Raina To Return As 'Mahadev' Lord Shiva In Ranbir Kapoor's Ramayana?|date=2025-05-31|website= बॉलीवुड न्यूज़|language=en|access-date=2025-05-31}}</ref>
|-
| कियारा सध || बालिका सीता || <ref>{{Cite web|url=https://www.pinkvilla.com/tv/news/ramayana-exclusive-pandya-stores-kiara-sadh-to-essay-young-sita-aka-sai-pallavis-role-in-nitesh-tiwaris-directorial-1298369|title=EXCLUSIVE: THIS Pandya Store child actor to play young Sita in Nitesh Tiwari's Ramayana|date=2024-04-23|website=पिंकविला|language=en|access-date=2024-11-28}}</ref>
|-
|हरीश उथमन
|[[विभीषण]]
|
|-
|[[राघव जुयाल]]
|[[मेघनाद]]
|
|-
|फैसल मलिक
|[[कुम्भकर्ण]]
|
|-
|सौरभ सचदेवा
|मारीच
|
|}
{{Multiple image|image1=Nitesh Tiwari at the ‘Khidkiyaan’ movie festival launch (cropped).jpg|image2=Namit Malhotra.jpg|total_width=300|footer=''रामायण'' नमित मल्होत्रा के साथ [[नितेश तिवारी]] की पहली सहयोगात्मक फिल्म है।}}
== उत्पादन ==
=== उत्पत्ति ===
मई 2017 में, निर्माता अल्लू अरविंद, नमित मल्होत्रा और मधु मंतेना ने हिंदू संस्कृत महाकाव्य रामायण को एक लाइव-एक्शन फीचर फिल्म त्रयी के रूप में ढालने के लिए सहयोग की घोषणा की। उन्होंने बताया कि पटकथा का विकास लगभग एक साल से चल रहा था। इस परियोजना को हिंदी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, बंगाली, मराठी, पंजाबी, उड़िया, सिंहली और अंग्रेजी भाषाओं में एक बहुभाषी प्रस्तुति के रूप में देखा गया, और इसे 3डी में शूट करने की योजना बनाई गई थी।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/ramayana-to-be-made-into-a-movie-of-rs-500-crore-budget/articleshow/58611990.cms|title='Ramayana' to be made into a movie of Rs 500 crore budget|date=2017-05-10|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2025-02-17|issn=0971-8257}}</ref>अल्लू अरविंद ने अपनी महत्वाकांक्षा व्यक्त की कि वह रामायण को "सबसे शानदार तरीके से" बड़े पर्दे पर लाना चाहते हैं, जबकि उन्होंने इस महाकाव्य को त्रयी में ढालने की जिम्मेदारी को भी स्वीकार किया। नमित मल्होत्रा, जिनकी कंपनी प्राइम फोकस ने हॉलीवुड फिल्मों जैसे 'स्टार वार्स', 'ट्रांसफॉर्मर', 'एक्स-मेन: एपोकैलिप्स' और 'द मार्टियन' में विजुअल इफेक्ट्स का योगदान दिया था, उन्होंने इस त्रयी में भारतीय सिनेमा के लिए नए वैश्विक मानक स्थापित करने की क्षमता देखी।फरवरी 2018 में, मधु मंतेना ने बताया कि फिल्म श्रृंखला बनाने की प्रेरणा उन्हें प्रसिद्ध भारतीय कॉमिक बुक लेखक अनंत पई के जीवन और कार्य से मिली, जिन्होंने अमर चित्र कथा कॉमिक्स बनाई थी। उन्होंने कहा कि यह फिल्म श्रृंखला नई पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति को नवीनतम तकनीक और विजुअल इफेक्ट्स की मदद से "सभी संभावित ऑडियो विजुअल महिमा" में फिर से बताने का उनका सामूहिक प्रयास है।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ramayana-500-crore-film-mou-up-govt-5075106/|title=Makers of Rs 500 crore Ramayana film sign MoU with UP government|date=2018-02-23|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/lucknow/up-investors-summit-in-inaugural-session-industry-leaders-pledge-over-rs-88-000-cr-investment/story-LQE3NDTWVnFRyI2PRlmIgK.html|title=MoUs worth Rs 4.28 lakh-crore signed on first day of UP Investors Summit 2018|date=2018-02-21|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20230330010105/https://www.hindustantimes.com/lucknow/up-investors-summit-in-inaugural-session-industry-leaders-pledge-over-rs-88-000-cr-investment/story-LQE3NDTWVnFRyI2PRlmIgK.html|archive-date=30 मार्च 2023|language=en-us|url-status=live}}</ref> पिछली व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त रामायण की रूपांतरण टेलीविजन श्रृंखलाओं, विशेष रूप से रामानंद सागर की 'रामायण' (1987-88) के रूप में थे, लेकिन इस बार निर्माता रामायण को बड़े पर्दे के लिए एक सिनेमाई तमाशे के रूप में लाना चाहते थे।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/baahubali-2-the-conclusion-ramayana-film-500-crore-976236-2017-05-10|title=Baahubali 2's success makes way for Rs 500-crore Ramayana film|date=2017-05-10|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.thequint.com/entertainment/cinema/500-crore-ramayana-film-in-3-languages#read-more|title=Now Gear up for a Rs 500-Crore 3D 'Ramayana' on the Big Screen|last=Hingorani|first=Karishma|date=2017-05-10|website=द क्विंट|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref>
=== विकास ===
जुलाई 2019 में, नीतेश तिवारी और रवि उद्यावर ने त्रयी के सह-निर्देशन के लिए हाथ मिलाया, जबकि श्रीधर राघवन को पटकथा लिखने के लिए नियुक्त किया गया।<ref>{{Cite web|url=https://www.firstpost.com/entertainment/ramayanas-trilingual-live-action-trilogy-to-be-helmed-by-dangal-director-nitesh-tiwari-ravi-udyawar-6953121.html|title=Ramayana's trilingual live-action trilogy to be helmed by Dangal director Nitesh Tiwari, Ravi Udyawar|date=2019-07-08|website=फर्स्टपोस्ट|language=en-us|access-date=2025-02-17}}</ref> नीतेश तिवारी ने 1987-88 की रामायण टेलीविजन श्रृंखला के बाद से विजुअल इफेक्ट्स में हुए महत्वपूर्ण उन्नयन को इस परियोजना को हाथ में लेने का एक प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि "हमारी सबसे पुरानी, या शुरुआती यादें (महाकाव्य की), अभी भी 30 साल पुरानी हैं। हमने वास्तव में रामायण को उस रूप में नहीं देखा है जिस रूप में इसे बताया जाना चाहिए।" तकनीकी संभावनाओं के अलावा, उन्हें टीम में शामिल होने के लिए कहानी ने भी प्रेरित किया, जिसमें उनके अनुसार भारतीय संस्कृति में "शानदार विश्वास" था, और यह तथ्य कि उनके निर्माता इसे "बहुत दिलचस्प तरीके से" निष्पादित करने के लिए पूरी तरह से तैयार थे।
उद्यावर ने भी बताया कि इस परियोजना में शामिल होने का उनका निर्णय अपने बच्चों के प्रति उसी जिम्मेदारी की भावना से प्रेरित था। उन्होंने याद किया कि जब उन्होंने अपने बेटे को बताया कि वह और उनकी टीम क्या कर रहे हैं, तो उनका बेटा यह सोचकर "पूरा दिन कूदता रहा" कि रावण और कुंभकर्ण कैसे दिखेंगे। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ा रोमांच तब था जब उनके बेटे ने उनसे कहा कि "हनुमान सुपरमैन से ज्यादा कूल हैं।"
तिवारी ने कहा कि महाकाव्य का आकर्षण उसके पात्रों के समूह में निहित है, विशेष रूप से राम के चरित्र में, "एक आदर्श नेता, पति, पिता और पुत्र"। वहीं, उद्यावर को लगा कि महाकाव्य का जादू उसके आकार बदलने वाले राक्षसों में है, जो उनके विचार में एक छोटे बच्चे को भी पसंद आएगा। तिवारी ने पुष्टि की कि फिल्मों में जो कुछ भी कहा और दिखाया जाएगा, उसमें प्रामाणिकता की मुहर होगी। उन्होंने कहा कि राम और रावण से परे, हर चरित्र—चाहे वह सीता, लक्ष्मण, या हनुमान हो—का कुछ न कुछ सार्थक संदेश है, जिससे रामायण को त्रयी में ढालना आवश्यक हो जाता है।
निर्माण टीम ने फिल्मों के सेटिंग, वेशभूषा, कलाकारों और एक्शन के लिए संदर्भ के रूप में पूरे भारत के कलाकारों से जटिल चित्र बनवाए। इस परियोजना का उद्देश्य हिंदी, कन्नड, तमिल, तेलुगु, मराठी, गुजराती और पंजाबी सिनेमा के अभिनेताओं को शामिल करना था, जो एक व्यापक रणनीति का हिस्सा था ताकि अखिल भारतीय और वैश्विक दर्शकों दोनों को आकर्षित किया जा सके।<ref>{{Cite news|url=https://mumbaimirror.indiatimes.com/entertainment/bollywood/nitesh-tiwari-ravi-udyawar-reviving-ramayana-with-a-live-action-multilingual-trilogy/articleshow/70119460.cms|title=Nitesh Tiwari, Ravi Udyawar reviving Ramayana with a live-action, multilingual trilogy|author=Roshmila Bhattacharya|date=जुलाई 8, 2019|newspaper=Mumbai Mirror|access-date=2025-02-17|language=en}}</ref> फिल्म श्रृंखला को शुरू में 500 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट पर बनाने की बात थी। निर्माण टीम ने 2020 तक फिल्मांकन शुरू करने की योजना बनाई थी, जिसमें पहली किस्त 2021 में रिलीज होने वाली थी। फिल्म निर्माताओं का इरादा कहानी की निरंतरता बनाए रखने के लिए त्रयी के प्रत्येक भाग के बीच अपेक्षाकृत कम अंतर रखने का था।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ramayana-live-action-nitesh-tiwari-ravi-udyawar-to-direct-5820177/|title=Nitesh Tiwari, Ravi Udyawar to helm multilingual live-action version of Ramayana|date=2019-07-08|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/magazines/panache/nitesh-tiwari-ravi-udyawar-to-bring-ramayana-to-life-at-a-rs-500-crore-budget/articleshow/70126241.cms?from=mdr|title=Nitesh Tiwari, Ravi Udyawar to bring 'Ramayana' to life at a Rs 500 crore budget|date=2019-07-08|work=द इकोनोमिक टाइम्स|access-date=2025-02-17|issn=0013-0389}}</ref>
=== पूर्व-निर्माण (प्री-प्रोडक्शन) ===
==== लेखन और दृश्य विकास ====
नवंबर 2019 में, तिवारी ने कहा कि राघवन पिछले तीन सालों से पटकथा लिख रहे थे, जिसमें कई विद्वानों और पंडितों का मार्गदर्शन था, जिन्हें शास्त्र का व्यापक ज्ञान था, ताकि महाकाव्य को समकालीन दर्शकों के लिए प्रासंगिक बनाया जा सके।<ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/bollywood/i-m-happy-not-following-the-formula-of-making-a-hit-film-nitesh-tiwari/story-X7ojYtj4L7MBKe5PMoMleP.html|title=I'm happy not following the formula of making a hit film: Nitesh Tiwari|date=2019-11-20|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-15|archive-url=https://web.archive.org/web/20240725202209/https://www.hindustantimes.com/bollywood/i-m-happy-not-following-the-formula-of-making-a-hit-film-nitesh-tiwari/story-X7ojYtj4L7MBKe5PMoMleP.html|archive-date=25 जुलाई 2024|language=en-us|url-status=live}}</ref> अप्रैल 2020 में, उन्होंने कहा कि वे कहानी के संवेदनशील पहलुओं की सावधानीपूर्वक पहचान कर रहे थे, जिन्हें अछूता रहना चाहिए, ताकि उनसे जुड़ी संभावित सार्वजनिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे, जबकि उन क्षेत्रों का निर्धारण भी किया जा रहा था जहां वे फिल्म के समग्र देखने के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए सीमित सिनेमाई स्वतंत्रता ले सकते थे।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/massive-responsibility-to-do-a-project-like-ramayana-nitesh-tiwari-6066033/|title=Massive responsibility to do a project like Ramayana: Nitesh Tiwari|date=2019-10-12|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref>तिवारी ने समझाया कि वह और उनकी टीम कहानी को इस तरह से प्रस्तुत करना चाहते थे ताकि उनके बच्चों जैसे युवा दर्शकों को, जो "एवेंजर्स के प्रशंसक" हैं, यह रोमांचक लगे, जबकि साथ ही उनकी सास जैसे पुराने दर्शकों का विश्वास भी बनाए रखा जा सके, ताकि उन्हें यह "इतना आकर्षक लगे कि वे कहें कि मैंने रामायण को इस रूप में नहीं देखा है"।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/challenging-to-make-ramayana-appealing-for-all-generations-nitesh-tiwari-6300240/|title=Challenging to make Ramayana appealing for all generations: Nitesh Tiwari|date=2020-03-05|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref> उन्होंने फिल्म को तकनीकी रूप से भारी तैयारी वाली बताया, क्योंकि महाकाव्य के जादुई गुण, जैसे उसमें वर्णित बात करने वाले जानवर या मंत्रमुग्ध वन, उन्हें स्क्रीन पर एक ऐसी दुनिया को खूबसूरती से प्रस्तुत करने का अवसर देते थे,<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/nitesh-tiwari-on-ramayana-making-it-exciting-for-both-children-and-old-people-is-challenging-1652718-2020-03-05|title=Nitesh Tiwari on Ramayana: Making it exciting for both children and old people is challenging|date=2020-03-05|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref> जो उनके विचार में पहले कभी नहीं देखी गई थी।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/amid-the-lockdown-nitesh-tiwari-works-on-ramayanas-script-over-group-calls/articleshow/74919720.cms|title=Amid the lockdown, Nitesh Tiwari works on Ramayana's script over group calls|date=2020-03-31|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2025-02-17|issn=0971-8257}}</ref>
जून 2021 में, मंतेना ने बताया कि वह और उनकी टीम रामायण को एक परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि "एक उद्देश्य, दुनिया को उसकी पूरी महिमा में रामायण बताने का उद्देश्य" के रूप में देख रहे थे। उन्होंने जोर दिया कि वह त्रयी को "दुनिया में किसी भी अन्य चीज़ की तरह अच्छी तरह से" बनाना चाहते थे, और बताया कि उनकी टीम "हर चीज़ के छोटे से छोटे विवरण" पर ध्यान दे रही थी। उन्होंने खुलासा किया कि वे वही प्रक्रिया अपना रहे थे जो जेम्स कैमरून ने अवतार के लिए इस्तेमाल की थी, और दुनिया भर के 200 से अधिक कलाकार दो साल से फिल्म पर काम कर रहे थे, जिनमें कुछ अकादमी पुरस्कार विजेता भी शामिल थे।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/bollywood/madhu-mantena-opens-up-on-ramayana-and-says-expect-the-biggest-cast-in-history-of-indian-cinema-693416|title=Madhu Mantena Opens Up On Ramayana And Says, 'Expect The Biggest Cast In History Of Indian Cinema'|last=Hymavati|first=Ravali|date=2021-06-30|website=द हंस इंडिया|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref> जुलाई में, मंतेना ने त्रयी के लिए अपनी दृष्टि पर विस्तार से बताया, इसे वाल्मीकि के दृष्टिकोण से रामायण का एक रेखीय पुनर्कथन बताया, जिसमें महाकाव्य की उप-कहानियां भी शामिल थीं, जबकि "राक्षसों, असुरों, गरुड़ आदि जैसे शानदार प्राणियों से भरी एक गहन और सुंदर दुनिया" का वादा किया। सितंबर 2021 में, मंतेना ने कहा कि वे राजा रवि वर्मा जैसे कलाकारों के कार्यों पर विचार कर रहे थे, जिन्होंने उनके अनुसार महाकाव्य को "अपने सुंदर तरीकों से" व्याख्या किया था। उन्होंने कहा कि वे वाल्मीकि की रामायण और उसके वर्णनों का पालन कर रहे थे ताकि एक सटीक प्रस्तुति सुनिश्चित हो सके।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/celebrities/ramayana-trilogy-for-a-global-audience-but-rooted-in-india-says-producer-madhu-mantena-716208|title='Ramayana' trilogy for a global audience but rooted in India, says producer Madhu Mantena|last1=भसीन|first1=श्रिया|last2=|first2=|date=2021-07-02|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-03-15}}</ref>
=== कलाकार चयन ===
{{Multiple image|image1=Ranbir at Besharam launch.jpg|image2=Ravi Dubey.jpg|image3=Sai Pallavi at Mca-pre-release-event.jpg|image4=Sunny Deol at Dev's Anand's autobiography release.jpg|image5=Yash at the ‘KGF’ Press Meet In Chennai (cropped).jpg|total_width=500|direction=horizontal|align=right|footer=[[रणबीर कपूर]], [[रवि दुबे]], [[साई पल्लवी]], [[सनी देओल]] और [[यश (अभिनेता)|यश]], क्रमशः राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान और रावण के रूप में}}
जुलाई 2021 में, मधु ने कहा कि वह उस साल दिवाली तक कलाकारों की घोषणा करने वाले थे, जिसमें उन्होंने "भारतीय सिनेमा के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी कास्ट" का वादा किया, जिसमें प्रदर्शन के मामले में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता शामिल होंगे। उन्होंने राम, हनुमान, रावण, सीता और लक्ष्मण के पात्रों को "जीवन से बड़ा" बताते हुए जोर दिया कि वह देश भर के कलाकारों को कास्ट करेंगे। इस निर्णय का कारण बताते हुए, उन्होंने विस्तार से कहा कि "यह (रामायण) उत्तर और दक्षिण के बारे में नहीं है, यह देश को एकजुट करने के बारे में है। हम इसे भारत के रूप में कर रहे हैं।"<ref>{{Cite web|url=https://www.pinkvilla.com/entertainment/exclusives/exclusive-madhu-mantena-ramayana-nitesh-tiwari-expect-biggest-cast-history-indian-cinema-795001|title=EXCLUSIVE: Madhu Mantena on Ramayana with Nitesh Tiwari: Expect the biggest cast in history of Indian cinema|date=2021-06-30|website=पिंकविला|language=en|access-date=2025-04-27}}</ref>
रणबीर कपूर, रवि दुबे, साई पल्लवी, सनी देओल और यश को क्रमशः राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान और रावण के रूप में चुना गया है।
=== चलचित्रण ===
फिल्म की मुख्य फोटोग्राफी अप्रैल 2024 में शुरू हुई।<ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/ranbir-kapoor-ramayana-shoot-begins-first-video-of-grand-ayodhya-set-goes-viral-8840316.html|title=Ranbir Kapoor's Ramayana Shoot Begins, FIRST Video of Grand Ayodhya Set Goes Viral|date=5 अप्रैल 2024|website=न्यूज़18|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref> 5 अप्रैल को, फिल्म के सेट से तस्वीरें लीक हो गईं, जिसमें अरुण गोविल, लारा दत्ता और शीबा चड्ढा अपनी-अपनी भूमिकाओं में और नीतेश तिवारी फिल्म का निर्देशन करते हुए दिखाई दिए।<ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/ranbir-kapoor-fans-angry-lara-dutta-arun-govil-photos-from-ramayana-sets-leaked-8840620.html|title=Ranbir Kapoor Fans ANGRY As Lara Dutta, Arun Govil's Photos From Ramayana Sets LEAKED|website=न्यूज़18|language=en|access-date=2025-02-19}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.ndtv.com/entertainment/crazy-viral-pics-of-lara-dutta-and-arjun-govil-from-the-sets-of-nitesh-tiwaris-ramayana-5379317|title=Crazy Viral Pics Of Lara Dutta And Arun Govil From The Sets Of Nitesh Tiwari's Ramayana|website=एनडीटीवी|language=en|access-date=2025-02-19}}</ref> इसके बाद, निर्माताओं ने फिल्म के सेट पर एक सख्त नो-फोन पॉलिसी लागू की।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/nitesh-tiwari-no-phone-policy-ramayana-set-ranbir-kapoor-look-ram-2523698-2024-04-05|title=Exclusive: 'Ramayana' director Nitesh Tiwari imposes no-phone policy on set|date=2024-04-05|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-02-19}}</ref> 27 अप्रैल को, फिल्म के सेट से फिर से तस्वीरें लीक हो गईं, इस बार रणबीर कपूर और साई पल्लवी अपनी-अपनी भूमिकाओं में दिखाई दिए, जिससे सोशल मीडिया पर यह अनुमान लगाया जाने लगा कि क्या तस्वीरें खुद निर्माताओं द्वारा प्रचार उत्पन्न करने और वेशभूषा पर सार्वजनिक राय जानने के लिए लीक की जा रही थीं।<ref>{{Cite web|url=https://www.ndtv.com/entertainment/crazy-viral-pics-of-ranbir-kapoor-and-sai-pallavi-from-the-sets-of-nitesh-tiwaris-ramayana-5535127|title=Crazy Viral Pics Of Ranbir Kapoor And Sai Pallavi From The Sets Of Nitesh Tiwari's Ramayana|website=एनडीटीवी|language=en|access-date=2025-03-16}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/magazines/panache/ramayana-ranbir-kapoor-sai-pallavis-looks-get-leaked-fans-gush-about-regal-appearance/articleshow/109644786.cms?from=mdr&from=mdr|title='Ramayana': Ranbir Kapoor- Sai Pallavi's looks get leaked, fans gush about regal appearance|date=2024-04-27|work=द इकोनोमिक टाइम्स|access-date=2025-03-16|issn=0013-0389}}</ref> मई में, फिल्म का कार्य शीर्षक "गॉड पावर" बताया गया।<ref>{{Cite web|url=https://www.business-standard.com/entertainment/ramayana-s-working-title-revealed-ranbir-to-also-shoot-for-love-and-war-124051700626_1.html|title=Ramayana's working title revealed, Ranbir to also shoot for 'Love And War'|last=Singh Rawat|first=Sudeep|website=बिजनेस स्टैण्डर्ड|language=en-US|archive-url=https://web.archive.org/web/20241109080145/https://www.business-standard.com/entertainment/ramayana-s-working-title-revealed-ranbir-to-also-shoot-for-love-and-war-124051700626_1.html|archive-date=9 नवंबर 2024|access-date=2025-03-16|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-ramayana-title-revealed-leaked-pics-avoid-makers-tightens-surveillance-on-set-101715910807771.html|title=Ranbir Kapoor-starrer Ramayana's working title revealed; makers tightens surveillance on set to avoid leaked pics|date=2024-05-17|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20240526194229/https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-ramayana-title-revealed-leaked-pics-avoid-makers-tightens-surveillance-on-set-101715910807771.html|archive-date=26 मई 2024|language=en-us|url-status=live}}</ref> अगस्त में, एक सोशल मीडिया वीडियो वायरल हुआ जिसमें प्रशंसित अमेरिकी आंदोलन कोच टेरी नोटरी थे, जिन्होंने पुष्टि की कि वह फिल्म श्रृंखला में एक्शन निर्देशक के रूप में काम कर रहे थे। फिल्मांकन नवंबर 2024 में पूरा होने की घोषणा की गई थी।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/avatar-avengers-endgame-veteran-terry-notary-working-on-ranbir-kapoors-ramayana-as-action-director-9528803/|title=Avatar, Avengers Endgame veteran Terry Notary working on Ranbir Kapoor's Ramayana as action director|date=2024-08-23|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-03-16}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/ramayana-avengers-endgame-stunt-coordinator-terry-notary-confirms-working-on-the-ranbir-kapoor-starrer-watch-video/articleshow/112740067.cms|title='Ramayana': Avengers Endgame stunt coordinator Terry Notary CONFIRMS working on the Ranbir Kapoor starrer - WATCH video|date=2024-08-23|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2025-03-16|issn=0971-8257}}</ref> पार्ट 2 का फिल्मांकन 19 जनवरी 2025 को शुरू हुआ।
मई 2025 में, यह बताया गया कि प्रशंसित हॉलीवुड स्टंट निर्देशक गाय नॉरिस, जिन्होंने पहले 'फ्यूरियोसा: ए मैड मैक्स सागा', 'मैड मैक्स: फ्यूरी रोड' और 'द सुसाइड स्क्वाड' जैसी फिल्मों पर काम किया था, को फिल्म के लिए एक्शन दृश्यों को कोरियोग्राफ करने के लिए जोड़ा गया था और वह यश के साथ मिलकर काम कर रहे थे।<ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2025/film/news/yash-mad-max-guy-norris-ramayana-1236411803/|title=Yash Teams With ‘Mad Max’ Stunt Maestro Guy Norris for Epic ‘Ramayana’ Action Sequences (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2025-05-29|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-06-19}}</ref> जून 2025 में, यह बताया गया कि अकादमी पुरस्कार विजेता हॉलीवुड निर्माता चार्ल्स रोवेन, जो एटलस एंटरटेनमेंट के संस्थापक भी हैं, मल्होत्रा और यश के साथ फिल्म में निर्माता के रूप में भी शामिल हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.forbes.com/sites/sindhyavalloppillil/2025/06/17/ai-content-creation-is-the-foundation-of-dneg-ceo-namit-malhotras-disruption/|title=How Namit Malhotra Is Building the Future of AI Content Creation|last=Valloppillil|first=Sindhya|website=फोर्ब्स|language=en|access-date=2025-06-19}}</ref>
=== पश्च-निर्माण (पोस्ट-प्रोडक्शन) ===
बताया गया है कि फिल्म 600 दिनों तक पोस्ट-प्रोडक्शन में रहेगी, जिससे यह इतनी व्यापक पोस्ट-प्रोडक्शन समय-सीमा की आवश्यकता वाली कुछ वैश्विक फिल्मों में से एक बन जाएगी।<ref>{{Cite web|url=https://www.siasat.com/sai-pallavi-ranbirs-ramayana-release-date-budget-more-3073419/|title=Sai Pallavi, Ranbir's Ramayana: Release date, budget & more|last=Mouli|first=Chandra|date=2024-08-04|website=द सियासत डैली|language=en|access-date=2025-03-14}}</ref>
== संगीत ==
फिल्म के [[:en:Film score|पृष्ठभूमि]] [[:en:Soundtrack|साउंडट्रैक]] को [[:en:Hans Zimmer|हाँस ज़िमर]] द्वारा [[:en:Musical composition|संगीतबद्ध]] किया जा रहा है। कई [[:en:Hans Zimmer discography|प्रसिद्ध हॉलीवुड फिल्मों]] का संगीत तैयार करने के बाद, संगीतकार ज़िमर इस फिल्म से भारतीय सिनेमा में मूल स्कोर संगीतकार के रूप में पदार्पण कर रहे हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-ramayana-hans-zimmer-india-debut-ar-rahman-report-sai-pallavi-yash-101712296514599.html|title=Ranbir Kapoor-starrer Ramayana to mark Hans Zimmer's debut in Bollywood with AR Rahman: Report|date=5 अप्रैल 2024|website=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref> फिल्म के [[:en:Songs|गानो]] की धुने [[ए. आर. रहमान]] द्वारा संगीतबद्ध की जा रही है और गानो के बोल [[कुमार विश्वास]] ने लिखे हैं।
== विपणन (मार्केटिंग) ==
6 नवंबर 2024 को, मल्होत्रा ने आधिकारिक तौर पर 'रामायण' की घोषणा एक पोस्टर के माध्यम से की, साथ ही दोनों फिल्मों की रिलीज की तारीखें भी बताईं।<ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoors-ramayana-part-1-and-2-officially-announced-see-first-poster-check-release-date-details-101730869129007.html|title=Ranbir Kapoor's Ramayana Part 1 and 2 officially announced: See first poster, check release date details|date=2024-11-06|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20250312170029/https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoors-ramayana-part-1-and-2-officially-announced-see-first-poster-check-release-date-details-101730869129007.html|archive-date=12 मार्च 2025|language=en-us|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/ranbir-kapoor-yash-and-sai-pallavis-ramayana-part-1-and-2-officially-announced-first-poster-out/article68835920.ece|title=Ranbir Kapoor, Yash and Sai Pallavi's 'Ramayana Part 1 and 2' officially announced; first poster out|last=|first=|date=2024-11-06|work=द हिन्दू|access-date=2025-03-16|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> मल्होत्रा ने बार-बार फिल्म को एक वैश्विक फिल्म के रूप में प्रचारित किया है, जिसमें एक भारतीय विषय को दुनिया के लिए प्रस्तुत किया गया है।<ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/ramayanas-producer-namit-malhotra-says-its-massive-responsibility-to-present-the-film-at-global-stage-aa-9245773.html|title=Ramayana's Producer Namit Malhotra Says Its 'Massive Responsibility' To Present The Film At Global Stage|website=न्यूज़18|language=en|access-date=2025-03-16}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ramayana-producer-namit-malhotra-wants-ranbir-kapoor-film-to-be-celebrated-like-oppenheimer-forrest-gump-sai-pallavi-101740730843828.html#:~:text=Namit%20says%20that%20the%20effort,don't%20like%20Hollywood%20films.|title=Ramayana producer Namit Malhotra wants Ranbir Kapoor film to be celebrated globally like Oppenheimer, Forrest Gump|date=2025-03-01|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20250302085950/https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ramayana-producer-namit-malhotra-wants-ranbir-kapoor-film-to-be-celebrated-like-oppenheimer-forrest-gump-sai-pallavi-101740730843828.html#:~:text=Namit%20says%20that%20the%20effort,don't%20like%20Hollywood%20films.|archive-date=2 मार्च 2025|language=en-us|url-status=live}}</ref> उन्होंने कई मौकों पर फिल्म के लिए अपनी दृष्टि व्यक्त की है, जिसमें उन्होंने इसे 'ड्यून्स' या 'अवतार' जैसी दुनिया की सबसे बड़ी प्रस्तुतियों के "कंधे से कंधा मिलाकर" खड़े होने की अपनी महत्वाकांक्षा व्यक्त की है।<ref>{{Cite web|url=https://www.business-standard.com/companies/interviews/i-tell-filmmakers-that-if-you-can-dream-it-storytelling-we-can-do-it-124072100468_1.html|title='I tell filmmakers that if you can dream it (storytelling), we can do it'|last=Kohli-Khandeka|first=Vanita|website=बिजनेस स्टैण्डर्ड|language=en-US|archive-url=https://web.archive.org/web/20241202132258/https://www.business-standard.com/companies/interviews/i-tell-filmmakers-that-if-you-can-dream-it-storytelling-we-can-do-it-124072100468_1.html|archive-date=2 दिसंबर 2024|access-date=2025-03-16|url-status=live}}</ref> उन्होंने यह भी दावा किया है कि वह बजट या तकनीकी विशेषज्ञता में सीमाओं के बारे में कोई बहाना नहीं बनाएंगे—जो कारक ऐतिहासिक रूप से बड़े पैमाने पर भारतीय प्रस्तुतियों को दृश्य रूप से ऊपर उठने से रोकते रहे हैं—जबकि आत्मविश्वास से कुछ "पहले कभी न देखे गए" दृश्यों का वादा किया है।<ref>{{Cite web|url=https://www.hollywoodreporterindia.com/features/interviews/namit-malhotra-the-ramayana-belongs-to-the-worldno-one-person-or-entity-owns-it|title=Namit Malhotra: 'The Ramayana' Belongs to The World—No One Person or Entity Owns It|website=द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया|language=en|access-date=2025-03-16}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ramayana-first-glimpse-ranbir-kapoor-yash-explode-on-screen-as-lord-ram-ravana-hollywood-level-vfx-wows-fans-101751526412324.html|title=Ramayana first glimpse: Ranbir Kapoor, Yash explode on screen as Lord Ram, Ravana; 'Hollywood-level' VFX wows fans|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=3 जुलाई 2025}}</ref>
== प्रदर्शन ==
फिल्म को 2026 में दिवाली पर सिनेमाघरों में रिलीज किया जाएगा।<ref>{{Cite web|url=https://www.ndtv.com/entertainment/ramayana-ranbir-kapoor-sai-pallavi-s-film-gets-release-date-bonus-new-poster-6955155|title=Ranbir Kapoor And Sai Pallavi's Ramayana Part 1 and 2 Get Official Release Dates|date=6 नवम्बर 2024|website=एनडीटीवी|access-date=30 अक्टूबर 2024}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
[[श्रेणी:2026 की फ़िल्में]]
[[श्रेणी:भारतीय फ़िल्में]]
[[श्रेणी:हिंदी भाषा की फिल्में]]
[[श्रेणी:हिंदी-भाषा फिल्म]]
[[श्रेणी:रामायण]]
[[श्रेणी:राम]]
[[श्रेणी:हनुमान]]
[[श्रेणी:रावण]]
[[श्रेणी:भारतीय एक्शन एडवेंचर फ़िल्में]]
[[श्रेणी:भारतीय एक्शन ड्रामा फ़िल्में]]
[[श्रेणी:आगामी भारतीय फिल्में]]
[[श्रेणी:दीपावली]]
[[श्रेणी:परशुराम]]
[[श्रेणी:इन्द्र]]
[[श्रेणी:शिव]]
[[श्रेणी:३डी फ़िल्म]]
qhke8sm2dq6fh4iezv4qob0qdx1n3qt
विकिपीडिया वार्ता:खाता क्यों बनाएँ?
5
1599438
6591353
6532776
2026-07-23T15:32:32Z
~2026-41326-45
937845
/* History */ नया अनुभाग
6591353
wikitext
text/x-wiki
{{वार्ता पृष्ठ}}
== History ==
History of Late Raja Arjun Singh Banarasi
Lineage and Birth:
Late Raja Arjun Singh Ji was born in a village named Sabhaipur, located north of Shivpur Bazar in Banaras district, in the Kushwaha Kshatriya community. Many families of Kushwaha Kshatriyas (Koiri) caste lived there.
His grandfather's name was Shri Chittar Singh. Chittar Singh Ji had two sons - Shri Ganga Singh and Shri Durga Singh. Due to some domestic discord, Chittar Singh Ji left his birthplace and came towards Banaras city and started living in Sarsauli village near Bhojubeer Bazar.
Raja Arjun Singh Ji was the son of the younger son Shri Durga Singh. At a very young age, being deprived of his mother, father and elder brother, he was living a miserable life with his grandfather.
He was born in Vikram Samvat 1870 in Sabhaipur itself. His parents had died and there was no proper arrangement for residence. He could not even gain knowledge of a single letter. His grandfather Chittar Singh Ji was the head of the gardens of the Nawab of Lucknow.
Entry into the Court of the Nawab of Lucknow:
It is a matter of Samvat 1886 that one day the Nawab Saheb went to the Yakutab Bagh. Chittar Singh was getting work done from the gardeners at that time and 16-year-old boy Arjun Singh was taking a bath. Seeing the extremely handsome and healthy boy, the Nawab was very impressed.
On asking, it was found that he was the grandson of Chittar Singh. The Nawab happily said - "He should not be kept hidden, send him to our court."
Thus the first door of Shri Arjun Singh's fortune opened. He started going to the Nawab's court daily. The Nawab handed him over to Gunak Lalla.
Impressed by his honesty, love for justice and nature, the Nawab gave him the work of producing new miraculous results in the varieties of plants and flowers in the gardens. Being happy, the Nawab gave him rewards many times.
The Nawab of Lucknow, Wajid Ali Shah, was a great builder. He ordered the construction of a Baradari in Qaisar Bagh, which three big contractors could not build even after spending a lot of money. Later, its construction was entrusted to Arjun Singh Ji. The Baradari built by Arjun Singh was very much liked by the Nawab and it cost much less than the contracted amount.
The Nawab began to feel indebted to him due to his multifaceted talent, truthfulness, loyalty to the state and dutifulness.
Title of Raja:
As a result, around 1850 AD, a big court was held in which many kings, talukdars, jagirdars and other prestigious dignitaries were invited. Nawab Wajid Ali Shah, praising him profusely, conferred upon him the title of Raja. From that very day Shri Arjun Singh became famous as Raja Arjun Singh Banarasi. In confirmation of this truth, a royal decree (Farman) bearing the signature of the Nawab, his seal and the signatures of fifty other contemporary kings and talukdars was given to him by the ruling authority.
The Shah did confer the title of Raja, but a Raja without an estate remained incomplete.
Acquisition of the Estate:
At that time, the government revenue of the villages of Taluka Bhilwal of two big Muslim contractors located in Tehsil Haidergarh, District Barabanki, was not paid. Several years of arrears had accumulated and several lakhs of rupees of the State had accumulated against them. The Nawab ordered that Taluka Bhilwal be auctioned to recover the dues.
Gradually, several lakhs of rupees became a debt on the state of Raja Arjun Singh Ji. By the order of the Shah, Taluka Bhilwal was snatched from the Bhilki contractors and was written in the name of Raja Arjun Singh Banarasi in the auction and some was given to the Raja Saheb as an honour from the state.
At that time there were 39 villages and at that time income of lakhs of rupees was generated from it. This prosperity of Raja Saheb happened in Vikram Samvat 1907 when he was 37 years old. This prosperity of Raja Saheb lasted only till Samvat 1913. There was wealth, kingdom, estate, elephants, horses, soldiers, army, everything. Seven more mauzas like Chhachauli, Khanpur, Makanpur etc. were purchased in Tehsil Haidergarh. A house was built in Narhi Mahal in Lucknow. Arjun Singh Mahal was named after him. Near Chirai village in Varanasi, he purchased Shankarpur village. For residence, a pucca Kothi was built in Sarsauli village.
North of Adanti Bazar, in Talpur Mahal, on the Panchkroshi route, he built a large temple of Lord Mahadev and a well, garden etc. Many fields were purchased in Sarsauli, Narayanpur villages. Near Bhojubeer, inside a large garden, a bungalow was built in which Nawab Tonk Saheb came and lived on rent after he vacated his residence. Similarly, in major pilgrimage places like Gaya, Prayag, Ayodhya, Mathura etc., temples, gardens and wells were constructed.
The Freedom Struggle of 1857 and Conflict with the British:
In 1856, the British removed Nawab Wajid Ali Shah of Awadh from the throne and fixed a pension of one lakh rupees per month and sent him to Calcutta where he started living in Matiya Burj like a detainee of the British.
Being extremely dear, Raja Arjun Singh Banarasi also went with him to Calcutta to see him off.
Here in Lucknow city, rebellion started. The Nawab's army and every class of people who considered the British as enemies took up arms against the British. Among the revolutionaries, mainly the state's army and the dignitaries of the Murav caste were included. In the freedom struggle of 1857, the Murav battalion bravely faced the English army in Lucknow.
After reaching Calcutta, Raja Arjun Singh with his entire force left for Lucknow. On the way was Tehsil Haidergarh of Barabanki and his area was taken in auction. They made an open attack on Raja Saheb.
The British soldiers were killed or fled. The British imprisoned Raja Saheb in a room from where somehow he escaped, and on learning from the fugitive companions of Janab Tonk Saheb, and on pressure from respectable influential persons, they released Raja Saheb.
The British again caught Raja Saheb and asked him to go to Banaras but he went to Lucknow. There his friends told him to hide and run away because the British had levelled big accusations against him. The British became suspicious of him and his enemies confirmed it. Then what, he started being counted among the rebels. A warrant of arrest was issued, and wherever he had residences, the British government posted guards.
Raja Saheb fled to Banaras, there also his house was guarded by the British, the Sarsauli Kothi was also guarded. He started living a fugitive life disguised as a beggar. Most of his 2 years of fugitive life was spent in a group of prostitutes located in Ishwar Ganji and in the houses of Biprans around Chirai village. In the meantime, the countrywide mutiny of 1857 also took place.
During this interval, two events mainly happened, one of which was in favour of Raja Saheb, that is, the British became convinced that Raja Saheb had not conspired against them. They withdrew the arrest warrant and removed the guard. Second, the enemy contractors colluded with the British and forced them to return their old papers so that they could reoccupy the auctioned area and Raja Saheb's managers could not reach Lucknow and take appropriate action.
On the way, these same contractors caught Raja Saheb's managers, snatched all the evidence papers from them and beat them badly and forced them to go to Banaras. As a result of this conspiracy, Raja Saheb lost all that area, he got only a few villages. After becoming Swami, this sorrow made Raja Saheb's life extremely miserable, but he remained firm on truth and tried his best to get whatever he had by fighting a lawsuit. Correspondence was done up to Lucknow Court, William, Calcutta, England, but at that time there was no proper arrangement for justice.
In the end, only 3 villages - Erauli, Khanpur and Makhanpur - remained, which were later sold by the successors of Raja Saheb. At the time of his death, Raja Saheb left the Sarsauli Kothi and went to the Mahavir Temple of Jafar Pur because there was a Panchkoshi halt there and there he left this world with his most beloved Ram Janaki. This incident is of Samvat 1940, it is estimated to have happened in some year 41-42 when Raja Saheb must have been about 70 years old.
Descendants:
Raja Saheb's vast group was in Jaraula village located near the village. Today his descendants are residing in Sarsauli. They are trustworthy all around.
Pride of Kushwaha Kshatriya Samaj: This history is proof that Kushwaha society is not just a farming society but has also been a ruler, warrior and builder. Raja Arjun Singh Ji, with his intelligence, honesty and cleverness, travelled from an ordinary family to the title of Raja.
The stone inscription given in the book is of Samvat 1913 in which on the stone pillar of the well built by Raja Saheb north of Ardali Bazar and on the Panchkosi road, the name 'Chittar Singh' is engraved. [[विशेष:योगदान/~2026-41326-45|~2026-41326-45]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-41326-45|वार्ता]]) 15:32, 23 जुलाई 2026 (UTC)
mifnmp40169q4vrlwq3xrol5hb2rpfj
6591405
6591353
2026-07-24T01:53:40Z
AMAN KUMAR
911487
[[Special:Contributions/~2026-41326-45|~2026-41326-45]] ([[User talk:~2026-41326-45|Talk]]) के संपादनों को हटाकर [[User:Cptabhiimanyuseven|Cptabhiimanyuseven]] के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया
6532776
wikitext
text/x-wiki
{{वार्ता पृष्ठ}}
1zv08dp3125ummbjv0z9kdo9lu1hdsa
सदस्य वार्ता:स्वर्ण
3
1601141
6591424
6587488
2026-07-24T02:15:12Z
SM7
89247
सूचना: [[:धमाल 4]] को शीघ्र हटाने का नामांकन
6591424
wikitext
text/x-wiki
{{साँचा:सहायता|name=स्वर्ण}} [[सदस्य:Sanjeev bot|Sanjeev bot]] ([[सदस्य वार्ता:Sanjeev bot|वार्ता]]) 01:27, 25 अगस्त 2025 (UTC)
== [[:न्यायज्ञ|न्यायज्ञ]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:न्यायज्ञ|न्यायज्ञ]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल5|मापदंड ल5]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये [[सदस्य:Sanjeev bot]] द्वारा नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल5|ल5]]{{*}} खराब मशीनी अनुवाद'''</center>
इस मापदंड के अंतर्गत वे लेख आते हैं जो किसी अन्य भाषा के लेख का अत्यधिक खराब मशीनी अनुवाद हैं जिन्हें सुधारने की तुलना में दुबारा शुरू से लिखना अधिक उचित होगा।
यदि आपने यह लेख किसी अन्य भाषा के विकिपीडिया से अनूदित कर के यहाँ डाला है और आप इसका अनुवाद सुधारना चाहते हैं तो कृपया अनुवाद सुधार सम्पूर्ण होने से पहले लेख को मुख्य नामस्थान में ना डालें, बलकी अपने सदस्य उप-पृष्ठ की तरह उसका अनुवाद करें। अनुवाद सम्पूर्ण होने पर आप उसे मुख्य नामस्थान में [[वि:स्थानांतरण|स्थानांतरित]] कर सकते हैं।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं। [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 18:26, 31 अगस्त 2025 (UTC)
== Last Few Days: WikiConference India 2026 Scholarship Applications ==
<div lang="en" dir="ltr" class="mw-content-ltr">
''{{int:please-translate}}''
Dear Wikimedian,
We're happy to share that scholarship applications for '''WikiConference India 2026''' are currently open and the deadline is just around the corner.
[[m:Special:MyLanguage/WikiConference India 2026|WikiConference India 2026]] is the fourth edition of the national-level conference that brings together Wikimedians and stakeholders engaged in Indic-language Wikimedia projects and the broader open knowledge movement across India and South Asia. The conference will take place in Kochi, Kerala, from 4–6 September 2026.
* You can find the more information and the application form at the [[m:Special:MyLanguage/WikiConference India 2026/Scholarship|Scholarship page here at Meta wiki]]
* '''Scholarship deadline: 15 April 2026, 11:59 PM IST'''
With only a few days left, we warmly encourage you to apply if you haven’t already and kindly request you to share this with your community and encourage others to apply.
For more information and regular updates, we encourage you to visit the conference Meta page.
Warm regards,
<br>
on behalf of the WikiConference India 2026 Organising Team
''This message was sent with [[सदस्य:MediaWiki message delivery|MediaWiki message delivery]] ([[सदस्य वार्ता:MediaWiki message delivery|वार्ता]]) on 18:30, 11 अप्रैल 2026 (UTC)''
</div>
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=Global_message_delivery/Targets/WCI_2026_active_users&oldid=30389801 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Gnoeee@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
== [[:अभिजीत दीपके|अभिजीत दीपके]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:अभिजीत दीपके|अभिजीत दीपके]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अभिजीत दीपके|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अभिजीत दीपके]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
<center>उल्लेखनीय नहीं।</center>
कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। <span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 09:33, 22 मई 2026 (UTC)
== जून 2026 ==
[[File:Information orange.svg|25px|alt=Information icon]] कृपया विकिपीडिया पर अरचनात्मक संपादन करने से बचें, जैसा कि आपने [[:बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी]] पर किया है। ''विकिपीडिया पर एक पृष्ठ से सामग्री कट करके उसे दूसरे शीर्षक पर स्थानांतरण करना अनुचित है। इससे पृष्ठ का इतिहास स्थानांतरित नहीं होता जबकि यहाँ पृष्ठ का इतिहास उसके साथ संरक्षित रखने की परंपरा है।
यदि आप शीर्षक में बदलाव चाहते हों तो उचित कारण/तर्क एवं आवश्यकतानुसार संदर्भ देते हुए साँचा {{tl|नाम बदलें}} के प्रयोग द्वारा लेख के वार्ता पन्ने पर लिखें।''<!-- Template:uw-yourcustom2 --> --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 01:05, 11 जून 2026 (UTC)
== [[:साँचा:International cricket in 2026|साँचा:International cricket in 2026]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:साँचा:International cricket in 2026|साँचा:International cricket in 2026]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/साँचा:International cricket in 2026|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/साँचा:International cricket in 2026]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
<center>केवल लाल कड़ियों वाला नेविगेशन साँचा।</center>
कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 22:29, 6 जुलाई 2026 (UTC)
== अनावश्यक पुनर्प्रेषण निर्माण ==
नमस्ते स्वर्ण जी,
आपके हालिया योगदानों की जाँच करते हुए मैंने देखा है कि आप अनावश्यक अनुप्रेषण पृष्ठ निर्मित कर रहे हैं। एक बार में तय कर लें कि शीर्षक क्या होना चाहिए। जो अनुप्रेषण किसी अन्य पृष्ठ पर कड़ी के रूप में नहीं प्रयुक्त है उससे अनुप्रेषण बनाने की आवश्यकता नहीं। जब आवश्यकता पड़े तभी अनुप्रेषण निर्मित करें। आगे से इसका ध्यान रखें। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 14:22, 9 जुलाई 2026 (UTC)
:मुझे लगता है कि यह अब भी जारी है। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 12:26, 11 जुलाई 2026 (UTC)
== [[शकरकन्द]] ==
कृपया संपादन इतिहास की अनदेखी न करें, जैसा कि आपने शकरकन्द पृष्ठ पर किया है। अगर आपको लगता है कि लेख का शीर्षक गलत है तो आप {{tl|नाम बदलें}} साँचे के साथ लेख के वार्ता पृष्ठ पर स्थानांतरण का अनुरोध कर सकते हैं। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 12:26, 11 जुलाई 2026 (UTC)
== [[:इक्का (फ़िल्म)|इक्का (फ़िल्म)]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:इक्का (फ़िल्म)|इक्का (फ़िल्म)]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।
[[वि:शीह|व2: परीक्षण]] / शून्य बैकलिंक वाला पुनर्प्रेषण / अनावश्यक पुनर्प्रेषण
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 15:35, 11 जुलाई 2026 (UTC)
== [[:इक्का (फिल्म)|इक्का (फिल्म)]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:इक्का (फिल्म)|इक्का (फिल्म)]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।
[[वि:शीह|व2: परीक्षण]] / शून्य बैकलिंक वाला पुनर्प्रेषण / अनावश्यक पुनर्प्रेषण
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 15:36, 11 जुलाई 2026 (UTC)
== [[:शकरक़न्द|शकरक़न्द]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:शकरक़न्द|शकरक़न्द]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल4|मापदंड ल4]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल4|ल4]]{{*}} प्रतिलिपि लेख'''</center>
इस मापदंड के अंतर्गत वो लेख आते हैं जो किसी पुराने लेख की प्रतिलिपि हैं। इसमें वे लेख भी आते हैं जो किसी ऐसे विषय पर बनाए गए हैं जिनपर पहले से लेख मौजूद है और पुराना लेख नए लेख से बेहतर है।
कृपया लेख बनाने से पहले उस शीर्षक के लिये [[विशेष:Search|खोज]] कर लिया करें। यदि आप इस विषय पर और लिखना चाहते हैं तो मूल लेख पर लिखें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 16:32, 11 जुलाई 2026 (UTC)
== [[:2026 नीट विवाद|2026 नीट विवाद]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:2026 नीट विवाद|2026 नीट विवाद]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।
[[वि:शीह|व2: परीक्षण]] / शून्य बैकलिंक वाला पुनर्प्रेषण / अनावश्यक पुनर्प्रेषण
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 17:54, 17 जुलाई 2026 (UTC)
== [[:बेसबॉल5|बेसबॉल5]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:बेसबॉल5|बेसबॉल5]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।
[[वि:शीह|व2: परीक्षण]] / शून्य बैकलिंक वाला पुनर्प्रेषण / अनावश्यक पुनर्प्रेषण
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 05:23, 19 जुलाई 2026 (UTC)
== [[:आधारकन्दुक|आधारकन्दुक]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:आधारकन्दुक|आधारकन्दुक]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।
[[वि:शीह|व2: परीक्षण]] / शून्य बैकलिंक वाला पुनर्प्रेषण / अनावश्यक पुनर्प्रेषण
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 05:24, 19 जुलाई 2026 (UTC)
== [[:2026 बैंकॉक पब अग्निकांड|2026 बैंकॉक पब अग्निकांड]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:2026 बैंकॉक पब अग्निकांड|2026 बैंकॉक पब अग्निकांड]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।
[[वि:शीह|व2: परीक्षण]] / शून्य बैकलिंक वाला पुनर्प्रेषण / अनावश्यक पुनर्प्रेषण
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 05:27, 19 जुलाई 2026 (UTC)
== [[:२०२६ बैंकॉक मद्यशाला अग्निकाण्ड|२०२६ बैंकॉक मद्यशाला अग्निकाण्ड]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:२०२६ बैंकॉक मद्यशाला अग्निकाण्ड|२०२६ बैंकॉक मद्यशाला अग्निकाण्ड]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।
[[वि:शीह|व2: परीक्षण]] / शून्य बैकलिंक वाला पुनर्प्रेषण / अनावश्यक पुनर्प्रेषण
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 05:27, 19 जुलाई 2026 (UTC)
== [[:भारतीय महिला राष्ट्रीय बेसबॉल टीम|भारतीय महिला राष्ट्रीय बेसबॉल टीम]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:भारतीय महिला राष्ट्रीय बेसबॉल टीम|भारतीय महिला राष्ट्रीय बेसबॉल टीम]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।
[[वि:शीह|व2: परीक्षण]] / शून्य बैकलिंक वाला पुनर्प्रेषण / अनावश्यक पुनर्प्रेषण
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 05:37, 19 जुलाई 2026 (UTC)
== [[:भारतीय पुरुष राष्ट्रीय बेसबॉल दल|भारतीय पुरुष राष्ट्रीय बेसबॉल दल]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:भारतीय पुरुष राष्ट्रीय बेसबॉल दल|भारतीय पुरुष राष्ट्रीय बेसबॉल दल]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।
[[वि:शीह|व2: परीक्षण]] / शून्य बैकलिंक वाला पुनर्प्रेषण / अनावश्यक पुनर्प्रेषण
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 05:41, 19 जुलाई 2026 (UTC)
== [[:भारतीय पुरुष राष्ट्रीय बेसबॉल टीम|भारतीय पुरुष राष्ट्रीय बेसबॉल टीम]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:भारतीय पुरुष राष्ट्रीय बेसबॉल टीम|भारतीय पुरुष राष्ट्रीय बेसबॉल टीम]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।
[[वि:शीह|व2: परीक्षण]] / शून्य बैकलिंक वाला पुनर्प्रेषण / अनावश्यक पुनर्प्रेषण
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 05:42, 19 जुलाई 2026 (UTC)
== [[:भारतीय राष्ट्रीय बेसबॉल टीम|भारतीय राष्ट्रीय बेसबॉल टीम]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:भारतीय राष्ट्रीय बेसबॉल टीम|भारतीय राष्ट्रीय बेसबॉल टीम]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।
[[वि:शीह|व2: परीक्षण]] / शून्य बैकलिंक वाला पुनर्प्रेषण / अनावश्यक पुनर्प्रेषण
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 05:42, 19 जुलाई 2026 (UTC)
== [[:धमाल 4|धमाल 4]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:धमाल 4|धमाल 4]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।
[[वि:शीह|व2: परीक्षण]] / शून्य बैकलिंक वाला पुनर्प्रेषण / अनावश्यक पुनर्प्रेषण
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 02:15, 24 जुलाई 2026 (UTC)
0wcvehuquqqdaidirszndfp63cj92if
गार्टर साँप
0
1608081
6591358
6527796
2026-07-23T15:52:48Z
InternetArchiveBot
500600
Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5
6591358
wikitext
text/x-wiki
{{taxobox
| name = गार्टर साँप
| image = Thamnophis sirtalis sirtalis Wooster.jpg
| image_caption = गार्टर साँप<br />(''थैम्नोफिस सिरटालिस सिरटालिस'')
| taxon = थैम्नोफिस
| authority = लियोपोल्ड फिट्ज़िंगर, 1843
| synonyms = {{Collapsible list|
* ''एटोमार्कस''
* ''काइलोपोमा''
* ''यूटेनिया''
* ''यूटेनिया''
* ''फामनोविस''
* ''प्रीमनियोडॉन''
* ''स्टाइपोसेमस''
* ''ट्रोपिडोनोटे''
* ''ट्रोपिडोनोटस''
}}
}}
[[चित्र:Gartersnake2128.JPG|दाएँ|अंगूठाकार|240x240पिक्सेल|एक गार्टर साँप]]
'''गार्टर साँप''' (''थैम्नोफिस सिरटालिस'') कोलुब्रिडी कुल का एक [[सर्प]] है।<ref>{{Cite web |title=Thamnophis {{!}} COL |url=https://www.catalogueoflife.org/data/taxon/CF7NJ |access-date=2025-08-07 |website=www.catalogueoflife.org |archive-date=9 अगस्त 2025 |archive-url=https://web.archive.org/web/20250809184120/https://www.catalogueoflife.org/data/taxon/CF7NJ |url-status=dead }}</ref>
यह [[उत्तरी अमेरिका]] में अलास्का और कनाडा से लेकर मध्य अमेरिका तक सामान्य रूप से पाया जाता है। यह उत्तरी अमेरिका में सरीसृपों का सबसे व्यापक रूप से फैला हुआ वंश माना जाता है। यह रफ-स्किन्ड न्यूट द्वारा उत्पन्न विष के प्रति अपनी प्रतिरोधक क्षमता के लिए प्रसिद्ध है।<ref>{{Cite web|url=https://www.itis.gov/servlet/SingleRpt/SingleRpt?search_topic=TSN&search_value=174133#null|title=ITIS Standard Report Page: Thamnophis|website=www.itis.gov|access-date=2019-07-06}}</ref>
गार्टर साँप हल्के विषैले होते हैं, लेकिन मनुष्यों के लिए हानिकारक नहीं होते, क्योंकि इनके लार में पाया जाने वाला विष बहुत कमज़ोर होता है। इनके काटने से अधिकतर कोई गंभीर नुकसान नहीं होता। अधिक से अधिक वे दुर्गंधयुक्त द्रव छोड़ सकते हैं या हल्का काट सकते हैं, जिससे मामूली चकत्ते पड़ सकते हैं। वास्तव में बिल्ली के काटने की तुलना में गार्टर साँप का काटना कम खतरनाक माना जाता है।
ये कृंतक, छोटी मछलियाँ, छोटे पक्षी, सालामैंडर, केंचुए (विशेषकर लाल केंचुए नहीं, क्योंकि वे इनके लिए हानिकारक होते हैं), कीट तथा कीट लार्वा खाते हैं। ये जल स्रोतों और छिपने के स्थानों के पास आकर्षित होते हैं।
गार्टर साँप की पहचान उसके शरीर के पीछे की ओर चलने वाली एक लंबी धारी से की जा सकती है। लगभग हर प्रजाति में यह धारी होती है, हालांकि उसका रंग प्रजाति के अनुसार अलग-अलग होता है। गार्टर साँपों की अनेक प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
ये अत्यन्त सामान्य सर्प हैं और प्रायः घरों के पिछवाड़े तथा स्थानीय जंगलों में पाए जाते हैं। अन्य साँपों की तरह ये भी छिपना पसंद करते हैं। ये पत्तों, पेड़ों के नीचे, ईंटों और पत्थरों के ढेर, पौधों और लकड़ियों के बीच छिप जाते हैं। यदि कोई गार्टर साँप पकड़ने का प्रयास करे, तो इन स्थानों पर खोजने पर मिल सकता है।
अधिकांश साँपों की तरह मादा गार्टर साँप प्रायः नर की तुलना में लंबी होती है, जो लिंग पहचान का एक साधन है।
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
* [http://www.anapsid.org/gartcare.html Anapsid.org: Garter snakes]
{{Taxonbar|from=Q1149509}}
{{Authority control}}
[[श्रेणी:संयुक्त राज्य अमेरिका के सरीसृप]]
[[श्रेणी:मेक्सिको के सरीसृप]]
ctehx45zmt5ukeljh80ahjox0c6gjf3
गिलियड साइंसेज़
0
1608405
6591502
6544038
2026-07-24T07:54:09Z
CommonsDelinker
743
"Gilead_Sciences_Logo.svg" को हटाया। इसे कॉमन्स से [[commons:User:Túrelio|Túrelio]] ने हटा दिया है। कारण: [[:c:COM:L|Copyright violation]]: This is Gilead Sciences logo and there is no proof that the uploader has the copyright and can license it under CC4
6591502
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox company
| name = गिलियड साइंसेज़
| logo =
| logo_size = 250px
| image = 333 Lakeside Drive.jpg
| image_size =
| image_caption = मुख्यालय - [[कैलिफ़ोर्निया|कैलिफोर्निया]]
| type = सरकारी
| traded_as = {{unbulleted list|{{NASDAQ|GILD}}|नास्दाक बायोटेक्नोलॉजी इंडेक्स|नास्दाक-100 कंपोनेंट|एस&पी 100 कंपोनेंट |एस&पी 500 कंपोनेंट}}
| founded = {{start date and age|1987|6|22}}
| founder = माइकल एल. रियरडन
| hq_location = फोस्टर सिटी, [[कैलिफ़ोर्निया]], [[संयुक्त राज्य]]
| area_served = विश्वव्यापक
| key_people = {{unbulleted list|
| डेनियल ओ'देय (चेयरमेन और सीईओ)
| ऐंड्र्यू डिकिंसन (मुख्य वित्त अधिकारी)
| टोमस सिहलारा (वरिष्ठ निदेशक, जीव विज्ञान)
}}
| industry = {{ubl|औषध-निर्माण विज्ञान|जैव प्रौद्योगिकी}}
| products = {{flatlist|
* अत्रिपला
* कंप्लेरा
* हार्वोनी
* लेक्सिस्कन
}}
| revenue = {{increase}} {{US$|28.75 बिलियन|link=yes}}
| revenue_year = 2024
| operating_income = {{decrease}} {{US$|1.662 बिलियन}}
| income_year = 2024
| net_income = {{decrease}} {{US$|480 मिलियन}}
| net_income_year = 2024
| assets = {{decrease}} {{US$|58.99 बिलियन}}
| assets_year = 2024
| equity = {{decrease}} {{US$|19.25 बिलियन}}
| equity_year = 2024
| num_employees = 17,600
| num_employees_year = 2024
| website = {{URL|gilead.com}}
| footnotes = <ref>{{cite web|url=https://www.sec.gov/ix?doc=/Archives/edgar/data/882095/000088209525000006/gild-20241231.htm |title=Gilead Sciences, Inc. 2024 Annual Report (Form 10-K) |date=28 फरवरी 2025 |publisher=यू.एस. सिक्योरिटीस एंड एक्सचेंज कमीशन }}</ref>
}}
'''गिलियड साइंसेज़''' एक अमेरिकी दवा (बायोफार्मास्युटिकल) कंपनी है। इसका मुख्यालय [[कैलिफ़ोर्निया|कैलिफोर्निया]] के फोस्टर सिटी में है। इसकी स्थापना 1987 में हुई थी। यह कंपनी [[एण्टीवायरल|एंटीवायरल]] दवा बनाने के लिए विश्व भर में जानी जाती है।
इस कंपनी की सबसे बड़ी उपलब्धि है- एचआईवी या [[एड्स]] और [[हेपेटाइटिस बी|हेपेटाइटिस-बी]], [[हेपेटाइटिस सी|हेपेटाइटिस-सी]], [[कोरोनावायरस रोग 2019|कोविड-19]] जैसी गंभीर बीमारियों का उपचार। इस कंपनी ने ऐसी दवाएँ विकसित की हैं जो [[वायरस से परिचय|वायरस]] को शरीर में अपनी संख्या बढ़ाने से रोकती हैं।
==इतिहास==
जून 1987 में '''गिलियड साइंसेज़''' की शुरुआत 'ओलिगोजेन'<ref>{{cite web |last1=तांसेयी |first1=बर्नादेत्त |title=PROFILE / Gilead Sciences / Gilead grows up / Visionary biotech startup matures into pragmatic industry leader |url=https://www.sfgate.com/business/article/profile-gilead-sciences-gilead-grows-up-2655081.php |website=एसएफ़गेट |access-date=18 फरवरी 2026 |language=en |trans-title=प्रोफ़ाइल / गिलियड साइंसेज़ / गिलियड बड़ा हो रहा है / दूर की सोचने वाला बायोटेक स्टार्टअप एक व्यावहारिक उद्योग नेता बन गया है}}</ref> नाम से हुई थी। इसकी स्थापना माइकल एल. रियरडन ने की थी, जो एक [[डॉक्टर]] थे।<ref>{{cite book |last1=साराह ई. |first1=बोसलाउग़ |title=The SAGE encyclopedia of pharmacology and society |date=2015 |publisher=सेज पब्लिकेशंस |location=लॉस एंजल्स लंदन नई दिल्ली सिंगापुर वाशिंगटन डीसी |isbn=978-1-4833-4999-2 |page=657 |url=https://books.google.co.in/books?id=du8BCwAAQBAJ&pg=PA657&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false |language=en |trans-title=फार्माकोलॉजी और समाज का सेज विश्वकोश}}</ref> रियरडन ने ''वाशिंगटन यूनिवर्सिटी इन सैंट लुइस'' से स्नातक की तथा ''जॉन्स हॉपकिन्स स्कूल ऑफ मेडिसिन'' और ''हार्वर्ड बिजनेस स्कूल''<ref>{{cite web |title=1996 Alumni Achievement Awards |url=http://engineering.wustl.edu/alumniawards.aspx?year=1996 |website=वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी इन सैंट लुइस |access-date=18 फरवरी 2026 |language=en |trans-title=1996 पूर्व छात्र उपलब्धि पुरस्कार |archive-date=21 अगस्त 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140821175910/http://engineering.wustl.edu/alumniawards.aspx?year=1996 |url-status=dead }}</ref> से शिक्षा प्राप्त की थी। गिलियड को बनाने की योजना 'मेनलो वेंचर्स' में एक शोध परियोजना के रूप में शुरू हुई थी जिसमें माइकल एक सहयोगी के रूप में काम कर रहे थे।
रियरडन ने इस कंपनी को खड़ा करने के लिए तीन प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकारों की मदद ली: ''कैलटेक'' के पीटर डर्वन, ''हार्वर्ड'' के डग मेल्टन और ''फ्रेड हचिंसन कैंसर रिसर्च सेंटर'' के हेरोल्ड एम. वेनट्रॉब। इनमें ''मेनलो वेंचर्स'' के संस्थापकों में से एक, एच. डुबोस मोंटगोमरी भी शामिल थे। रियरडन ने कंपनी की स्थापना से लेकर 1996 तक इसके सीईओ के रूप में कार्य किया।
==इन्हें भी देखें==
* [[रैनबैक्सी लेबोरेटरीज]]
* [[सिप्ला]]
==संदर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
{{commons category}}
* {{Official website}}
[[श्रेणी:कम्पनियाँ]]
[[श्रेणी:औषधनिर्माण]]
[[श्रेणी:औषधि निर्माता कंपनी]]
arhwyuera8xrkaczxvjrmz0l5rxw0fd
सदस्य:AMAN KUMAR/शीह लॉग
2
1609848
6591419
6590791
2026-07-24T02:03:08Z
AMAN KUMAR
911487
शीह नामांकन का लॉग बनाया जा रहा of [[:सदस्य वार्ता:Raje sagar]].
6591419
wikitext
text/x-wiki
This is a log of all [[वि:शीह|speedy deletion]] nominations made by this user using [[WP:TW|Twinkle]]'s CSD module.
If you no longer wish to keep this log, you can turn it off using the [[Wikipedia:Twinkle/Preferences|preferences panel]], and nominate this page for speedy deletion under [[वि:शीह#U1|CSD U1]].
=== मार्च 2026 ===
# [[:चिरंजीवी सरजा]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 20:50, 18 मार्च 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Fper]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 13:51, 19 मार्च 2026 (UTC)
# [[:दिवाण जवाहर सिंह]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 10:52, 20 मार्च 2026 (UTC)
=== अप्रैल 2026 ===
# [[:द्वितीयक रंग]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 17:09, 2 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Harendra jakhar nagour]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 17:23, 2 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सहायता:Protection]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 17:30, 2 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:कंपनी हवलदार मेजर]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 22:57, 5 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:विक्रम सिंह मीना]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 01:25, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:रविन्द्र कुमार द्विवेदी]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 08:06, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:डिबेटसिলেটবিডি]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ नहीं}; सदस्य {{user|1=Spacebangla}} को सूचित किया गया 13:30, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:देओला दादा]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:07, 9 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सहायता:IPA/Hindi and Urdu]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 04:09, 9 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:रोहित गिल]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 18:00, 10 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Bjp Junaid Hussain]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:48, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Bjp Junaid Hussain]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:48, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:कुश सोगुण]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 14:06, 12 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Govind Bhana Artist]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 14:38, 12 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Chandan roy Bhirha]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 03:42, 13 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:पूर्ति आर्या]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 03:47, 13 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Article wizard/button wizard/sandbox]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 20:33, 13 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:The7unity]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 18:28, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:साउथ सिटी इंटर्नैशनल स्कूल]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: इसमें उल्लेखनीयता का स्पष्ट अभाव है और कोई भी विश्वसनीय स्रोत नहीं है।}; सदस्य {{user|1=Ahari123}} को सूचित किया गया 19:08, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Nawada District President of Youth Congress is Mohammad Irshad Ansari]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:14, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:ऑस्ट्रेलिया के लिए CDR]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:44, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Infobox news organization]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 03:04, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:गुंजन तिवारी]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 07:22, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:डॉ इन्दु शेखर उपाध्याय]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 10:52, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Ajaysingh Mer Rajput]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:19, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Harendra jakhar nagour]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 01:22, 18 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Adsmalhotra]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 12:21, 18 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Harendra jakhar degana]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 22:56, 18 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:ग्यासी]]: [[वि:शीह#व3|शीह व3]] ({{tl|db-vandalism}}) 13:33, 19 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:जय भीम नव जागृति संस्थान उटाम्बर]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 14:13, 19 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:अशुतोष यादव]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 18:50, 19 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:डॉ. भावना सावलिया]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 18:52, 19 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:महकाल अवतार]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 19:14, 19 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Ayushguptha]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 03:01, 20 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:जियोक्स एआई]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 06:27, 20 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:श्रवण राम पंवार]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:11, 20 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Shrawanrampanwar]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 13:12, 20 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:श्रवण राम मेघवाल]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 00:13, 21 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Parvat Singh Buddha]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 03:14, 22 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:पुष्कर कांडपाल (गायक)]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 08:57, 22 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Harendra jakhar degana]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:29, 22 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:आदर्श कुमार राजपूत]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 17:29, 22 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:विनोद वर्मा (आभूषण वर्ल्ड)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 15:10, 23 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Parvat Singh Buddha]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 15:12, 23 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:प्रवेशद्वार:न्यूरोविज्ञान]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 23:06, 23 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:Anu tomar]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: शीर्षक अन्य भाषा में है}; सदस्य {{user|1=Advocate vinit tyagi}} को सूचित किया गया 03:46, 24 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:द ट्रेंडिंग पीपल]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 03:51, 24 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:के राघवन रेड्डी]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 11:55, 24 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:GKM Gautam Kumar Maurya]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 11:36, 25 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:बिहार और सूफ़ीवाद]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 19:35, 25 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:Banka, बिहार]]: [[वि:शीह#व1|शीह व1]] ({{tl|db-nonsense}}) 19:52, 25 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:महरूज़ सिद्दीकी नदीम (फुटबॉलर)]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 20:26, 25 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:श्रेणी:Wikipedia help forums]]: [[वि:शीह#व1|शीह व1]] ({{tl|db-nonsense}}) 20:35, 25 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:GSU Magar Tagar]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:53, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:श्रेणी:हिन्दी उपन्यास-रामनाथ शिवेंद्र का उपन्यास "दूसरी आज़ादी "]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:55, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:आदर्श राजपूत]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 05:00, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:प्रावधान]]: [[वि:शीह#व1|शीह व1]] ({{tl|db-nonsense}}) 05:07, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:GSU Magar Tagar]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 10:24, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:दिनेश शाहरा]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 10:27, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:दीनदयाल सोनी]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 13:54, 28 अप्रैल 2026 (UTC)
=== मई 2026 ===
# [[:Draft:ओलीवर बा़ख]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 09:42, 7 मई 2026 (UTC)
# [[:बिहार और सूफ़ीवाद]]: multiple criteria ([[वि:शीह#ल2|ल2]], [[वि:शीह#व7|व7]]); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 17:19, 7 मई 2026 (UTC)
# [[:नालया थीरपू]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 08:01, 8 मई 2026 (UTC)
# [[:Draft:ओलीवर बा़ख]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 16:05, 8 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:PoetNikhilNeeraj]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:13, 9 मई 2026 (UTC)
# [[:पूस की रात]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 15:20, 9 मई 2026 (UTC)
# [[:Ragul Kamaraj Reddy(राघुल कामराज रेड्डी)]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 01:44, 10 मई 2026 (UTC)
# [[:सिरे की शादेन (मुहावरा)]]: [[वि:शीह#व3|शीह व3]] ({{tl|db-vandalism}}) 01:53, 10 मई 2026 (UTC)
# [[:राष्ट्रीय दादा दादी दिवस]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 11:42, 10 मई 2026 (UTC)
# [[:केशव गुप्ता]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 17:30, 13 मई 2026 (UTC)
# [[:स्टोरिको सेरामिका एलएलपी]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 11:12, 14 मई 2026 (UTC)
# [[:दीनदयाल सोनी]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 23:28, 14 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Vishalguptahyv]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:04, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:दीनदयाल सोनी बाँदा]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 12:11, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:केशव गुप्ता]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 13:32, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:अपाचे]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 18:38, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:पूवे उनक्कागा]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 19:36, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:सफाविद वंश]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 20:25, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:राजपासी]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 03:54, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Wikidata Infobox/i18n]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 07:20, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Wikidata Infobox/i18n/hi]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 07:21, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Wikidata Infobox/i18n/getMsg]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 07:21, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:कुनलावुट विटिडसर्न]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 08:25, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:दीनदयाल सोनी बाँदा]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 16:26, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:साश्वत कुमार (कराटे)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 01:30, 17 मई 2026 (UTC)
# [[:*नरेश दास वैष्णव निम्बार्क*]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 15:12, 17 मई 2026 (UTC)
# [[:सांचा:पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्री]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: स्वतःपरीक्षित सदस्य ने गलती से [[सांचा:पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्रियों की सूची]] बनाया जिसे सही साँचा [[साँचा:पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्री]] बना दिया है}; सदस्य {{user|1=आशीष भटनागर}} को सूचित किया गया 05:15, 19 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Acharya Shashi Pandey]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 00:28, 22 मई 2026 (UTC)
# [[:अमित राना]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 00:58, 22 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Babukumar123]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 01:50, 23 मई 2026 (UTC)
# [[:सांचा:पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्रियों की सूची]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: अनुप्रेषित पृष्ठ हटा दिया गया }; सदस्य {{user|1=आशीष भटनागर}} को सूचित किया गया 01:59, 23 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Pankaj Kerketta]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:14, 23 मई 2026 (UTC)
# [[:एक्सपर्ट टाइम्स]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 08:26, 25 मई 2026 (UTC)
# [[:डॉ रागिनी स्वर्णकार]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 08:29, 25 मई 2026 (UTC)
# [[:विकिपीडिया:अपलोड/अपना कार्य]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:24, 29 मई 2026 (UTC)
# [[:थाथानिन थोंगचाय]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 00:59, 30 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Flying Kick Martial Arts]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 01:07, 30 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Shobhit K Tripathi]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 17:10, 30 मई 2026 (UTC)
=== जून 2026 ===
# [[:सदस्य वार्ता:Saurav Vaishnaw]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:05, 9 जून 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Sahil Khan 98 cricketer]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 06:41, 10 जून 2026 (UTC)
# [[:रोनक चौधरी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:31, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:ईश्वर महान नहीं है]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 10:50, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:दिवाकर वर्मा]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 14:54, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:जॉन डन]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 14:55, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:विवेक राजनारायण तिवारी]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 15:40, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:विवेक राजनारायण तिवारी/प्रयोगपृष्ठ]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 15:55, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:622]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 01:02, 15 जून 2026 (UTC)
# [[:623]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 01:02, 15 जून 2026 (UTC)
# [[:625]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 01:03, 15 जून 2026 (UTC)
# [[:मॉड्यूल:Autotranslate]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 15:57, 18 जून 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Depicted flag]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 15:58, 18 जून 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:GSU Magar Tagar]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 02:40, 23 जून 2026 (UTC)
# [[:बनत]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 03:19, 27 जून 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:~2026-36929-46]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 03:21, 27 जून 2026 (UTC)
# [[:सूर्य का शहर]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 17:18, 27 जून 2026 (UTC)
# [[:अतिशयोक्ति (रोग)]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 00:03, 28 जून 2026 (UTC)
=== जुलाई 2026 ===
# [[:बच्चों के लिए फाउंडेशन]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 04:17, 1 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:फफूँद, औरैया]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 07:03, 2 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Sahil khan 98 crickett]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 07:04, 2 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:मोहम्मद असद मंसूरी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:11, 2 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:ग़ज़ा प्रशासन राष्ट्रीय समिति]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 09:26, 3 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:लोधा राजपूत]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 12:37, 3 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:लोद्रवा गढ़]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 12:37, 3 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:वहीद उद्दीन हैदर जाफ़री]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उल्लेखनीय नहीं}; सदस्य {{user|1=AhsanBangla}} को सूचित किया गया 13:02, 3 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Shri Chand Mahan]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:57, 5 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:बिंदु-चित्रण]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 04:59, 5 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:मोहम्मद असद मंसूरी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 05:02, 5 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:आशीष गाज़ीपुरी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 07:05, 5 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Jawwad Khan Suri]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:18, 7 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Sahil khan 98 crickett]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:41, 8 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:चित्र वार्ता:Baby malinga 98.jpg]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:42, 8 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Aakash rampura]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 13:36, 8 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Suman Rajvardhan]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:37, 8 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सामुदायिक विकास]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: विश्वसनीय स्रोत नहीं}; सदस्य {{user|1=Rsparsar}} को सूचित किया गया 04:24, 9 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:लोधा राजपूत]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 04:24, 9 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:लोद्रवा गढ़]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 04:25, 9 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:कैंसरराउंड्स (CancerRounds)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:49, 10 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:मेघवाल महावीर बालाण]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 08:57, 11 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:ठक्करबापा छात्रावास]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 02:53, 13 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Vikram singh meena]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 07:16, 19 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:गोविंद मोहन]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 10:56, 20 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Raje sagar]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 02:03, 24 जुलाई 2026 (UTC)
ou4ltmygkvqo383zx77fim5m113c3tw
ग़ोज़ियन मदरसा
0
1610098
6591344
6545128
2026-07-23T14:20:26Z
InternetArchiveBot
500600
Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5
6591344
wikitext
text/x-wiki
[[चित्र:Бухара,_медреसे_Гозиён.jpg|दाएँ|अंगूठाकार|ग़ोज़ियन मदरसा, बुखारा, उज्बेकिस्तान]]
'''ग़ोज़ियन मदरसा''' (शाब्दिक अर्थ: "आस्था के लिए लड़ने वाले"), जिसे '''ग़ोज़ियन कलोन''' ("महान ग़ोज़ियन") के नाम से भी जाना जाता है, [[उज्बेकिस्तान]] के [[बुखारा]] में स्थित एक ऐतिहासिक स्मारक और [[मदरसा]] है। इसका निर्माण 15वीं और 17वीं शताब्दी के दौरान किया गया था।<ref name=":0">{{cite web|url=http://bukharapiter.ru/buhara/kvartalyi-buharyi-11.html#ex15|title=КВАРТАЛЬНАЯ ОБЩИНА ПОЗДНЕФЕОДАЛЬНОГО ГОРОДА БУХАРЫ|author=О.А.Сухарева|date=1976|publisher=Издательство "Наука"|access-date=22 मार्च 2026|archive-date=14 जून 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180614144303/http://bukharapiter.ru/buhara/kvartalyi-buharyi-11.html#ex15|url-status=dead}}</ref>
यह 18वीं और 19वीं शताब्दी में एक सक्रिय मुस्लिम स्कूल के रूप में संचालित था, जहाँ विभिन्न शहरों से छात्र अध्ययन के लिए आते थे।
यह बुखारा शहर के ऐतिहासिक केंद्र के हिस्से के रूप में [[यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल]] की सूची में शामिल है।
== स्थान ==
ग़ोज़ियन मदरसा बुखारा के प्राचीन ग़ोज़ियन मोहल्ले में, शहर के केंद्र में स्थित है। यह नाम इस गली में स्थित 44 बुखारी शहीदों में से एक, इमाम ग़ोज़ी (आस्था के सेनानी) के सम्मानित मकबरे से आया है।<ref name=":0" /> यह मदरसा जोयिबोर और इमाम ग़ज़ोली वली सड़कों के चौराहे पर स्थित है। मदरसे के बगल में खोजा-गोवकशोन स्थापत्य समूह और "हवली पोयोन" होटल स्थित है, जो 19वीं शताब्दी की एक इमारत में बना है।
मदरसे की इमारतों का उपयोग छात्रों के रहने के लिए किया जाता था, जबकि कक्षाएं इसी मोहल्ले के मुल्लो मुहम्मद शरीफ़ मदरसे में आयोजित की जाती थीं। यह इमारत लकड़ी से बने "चुबिन" मदरसे से सटी हुई है। इस स्थान पर मदरसों का जमावड़ा यह दर्शाता है कि यह मोहल्ला बुखारा के शैक्षिक केंद्रों में से एक था।<ref name=":0" />
== विवरण ==
15वीं शताब्दी से ज्ञात यह मदरसा, "ग़ोज़ियन खुर्द" (छोटा ग़ोज़ियन) मदरसे के साथ मिलकर "जुड़वां मदरसों" का एक परिसर बनाता था। इस समूह का गठन 1535 के आसपास हुआ था।<ref name=":1">M. A. YuSUPOVA ''EVOLYuTsIYa ZODChYeSTVA BUXARI XVI — NAChALA XVII VYeKA''</ref> ग़ोज़ियन मदरसे की वर्तमान इमारत (1730-34) एक मंजिला है,<ref name=":1" /> जिसका मुखौटा बुखारा की स्थानीय स्थापत्य शैली में बना है। यह बुखारा के अन्य मदरसों की तुलना में छोटा है। इमारत का पुराना हिस्सा मेहराबदार है और आंशिक रूप से अलंकरणों से सजाया गया है। इस परिसर का निर्माण उस्ता फथुल्लोह द्वारा मुहम्मद शरीफ़ के धन से किया गया था।<ref name=":1" />
गुंबद के आंतरिक भाग के उच्चतम बिंदु को सोने और मोजोलिका शिलालेख से सजाया गया है, जिसमें दाता मुहम्मद शरीफ़ और शिक्षक फथुल्लोह का सम्मान किया गया है। निर्माण शुरू होने के चौथे वर्ष में यह इमारत पूरी हुई थी। गुंबद के मेहराब पर खुदा हुआ छंद "अज़ मुहम्मद शरीफ़ बे-इन निशोन" ("यह मुहम्मद शरीफ़ की ओर से एक संकेत है") है, जिसमें निर्माण पूरा होने का वर्ष 1146 हिजरी (1733-34) अंकित है।
इमारत स्वयं विषम है, जिसकी दीवारें ईंटों से बनी हैं। इमारत के पुराने हिस्से का मेहराबदार अगला भाग चमकदार है। मदरसे के बाहरी कमरे की छत को नक्काशीदार संगमरमर से खूबसूरती से सजाया गया है।
== संदर्भ ==
{{reflist}}
== ग्रंथ सूची ==
* {{cite book|title=Buxoro tarixi|last1=Saakov|first1=V|date=1996|publisher=Sharq nashriyoti|location=Tashkent}}
* {{cite book|title=Buxoro tarixi|last1=Narshaxiy|first1=Muhammad|date=1897|location=Tashkent}}
* {{cite book|title=Qadimgi Buxoro tarixi|last1=Almeev|first1=Robert|date=1996|location=Tashkent}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://www.buxara.org/buhara/bu/Goziyon_Madrasah.htm मदरसा ग़ोज़ियन (रूसी में)]
{{coord|39.7701|64.4135|type:landmark_region:UZ|display=title}}
6kj45wpisusblurln9o27spvtybhhix
विकिपीडिया:आँकड़े/2026/जुलाई
4
1615595
6591322
6591174
2026-07-23T12:14:19Z
NeechalBOT
98381
statistics
6591322
wikitext
text/x-wiki
<!--- stats starts--->{{सदस्य:Neechalkaran/statnotice}}{| class="wikitable sortable" style="width:90%"
|-
! Date(Time)
! Pages
! Articles
! Edits
! Users
! Files
! Activeusers
{{User:Neechalkaran/template/daily
|Date =1-7-2026 6:14
|Pages = 1390976
|dPages = 61
|Articles = 170455
|dArticles = 23
|Edits = 6563116
|dEdits = 393
|Files = 4684
|dFiles = 0
|Users = 912675
|dUsers = 141
|Ausers = 1036
|dAusers = 0
}}
{{User:Neechalkaran/template/daily
|Date =2-7-2026 6:14
|Pages = 1391001
|dPages = 25
|Articles = 170466
|dArticles = 11
|Edits = 6563420
|dEdits = 304
|Files = 4684
|dFiles = 0
|Users = 912798
|dUsers = 123
|Ausers = 1044
|dAusers = 8
}}
{{User:Neechalkaran/template/daily
|Date =3-7-2026 6:14
|Pages = 1391025
|dPages = 24
|Articles = 170477
|dArticles = 11
|Edits = 6564037
|dEdits = 617
|Files = 4684
|dFiles = 0
|Users = 912924
|dUsers = 126
|Ausers = 1044
|dAusers = 0
}}
{{User:Neechalkaran/template/daily
|Date =4-7-2026 6:14
|Pages = 1391026
|dPages = 1
|Articles = 170475
|dArticles = -2
|Edits = 6564818
|dEdits = 781
|Files = 4684
|dFiles = 0
|Users = 913078
|dUsers = 154
|Ausers = 1044
|dAusers = 0
}}
{{User:Neechalkaran/template/daily
|Date =5-7-2026 6:14
|Pages = 1391052
|dPages = 26
|Articles = 170486
|dArticles = 11
|Edits = 6565217
|dEdits = 399
|Files = 4684
|dFiles = 0
|Users = 913244
|dUsers = 166
|Ausers = 1016
|dAusers = -28
}}
{{User:Neechalkaran/template/daily
|Date =6-7-2026 6:14
|Pages = 1391098
|dPages = 46
|Articles = 170501
|dArticles = 15
|Edits = 6565615
|dEdits = 398
|Files = 4685
|dFiles = 1
|Users = 913396
|dUsers = 152
|Ausers = 1016
|dAusers = 0
}}
{{User:Neechalkaran/template/daily
|Date =7-7-2026 6:14
|Pages = 1391019
|dPages = -79
|Articles = 170464
|dArticles = -37
|Edits = 6566059
|dEdits = 444
|Files = 4685
|dFiles = 0
|Users = 913584
|dUsers = 188
|Ausers = 1016
|dAusers = 0
}}
{{User:Neechalkaran/template/daily
|Date =8-7-2026 6:14
|Pages = 1391054
|dPages = 35
|Articles = 170474
|dArticles = 10
|Edits = 6566441
|dEdits = 382
|Files = 4685
|dFiles = 0
|Users = 913778
|dUsers = 194
|Ausers = 996
|dAusers = -20
}}
{{User:Neechalkaran/template/daily
|Date =9-7-2026 6:14
|Pages = 1391074
|dPages = 20
|Articles = 170482
|dArticles = 8
|Edits = 6566819
|dEdits = 378
|Files = 4685
|dFiles = 0
|Users = 913896
|dUsers = 118
|Ausers = 996
|dAusers = 0
}}
{{User:Neechalkaran/template/daily
|Date =10-7-2026 6:14
|Pages = 1391026
|dPages = -48
|Articles = 170489
|dArticles = 7
|Edits = 6567516
|dEdits = 697
|Files = 4685
|dFiles = 0
|Users = 914050
|dUsers = 154
|Ausers = 996
|dAusers = 0
}}
{{User:Neechalkaran/template/daily
|Date =11-7-2026 6:14
|Pages = 1391043
|dPages = 17
|Articles = 170505
|dArticles = 16
|Edits = 6567796
|dEdits = 280
|Files = 4686
|dFiles = 1
|Users = 914174
|dUsers = 124
|Ausers = 967
|dAusers = -29
}}
{{User:Neechalkaran/template/daily
|Date =12-7-2026 6:14
|Pages = 1391020
|dPages = -23
|Articles = 170505
|dArticles = 0
|Edits = 6568245
|dEdits = 449
|Files = 4685
|dFiles = -1
|Users = 914308
|dUsers = 134
|Ausers = 967
|dAusers = 0
}}
{{User:Neechalkaran/template/daily
|Date =13-7-2026 6:14
|Pages = 1391044
|dPages = 24
|Articles = 170512
|dArticles = 7
|Edits = 6568529
|dEdits = 284
|Files = 4685
|dFiles = 0
|Users = 914446
|dUsers = 138
|Ausers = 967
|dAusers = 0
}}
{{User:Neechalkaran/template/daily
|Date =14-7-2026 6:14
|Pages = 1391068
|dPages = 24
|Articles = 170520
|dArticles = 8
|Edits = 6568765
|dEdits = 236
|Files = 4685
|dFiles = 0
|Users = 914579
|dUsers = 133
|Ausers = 955
|dAusers = -12
}}
{{User:Neechalkaran/template/daily
|Date =15-7-2026 6:14
|Pages = 1391055
|dPages = -13
|Articles = 170509
|dArticles = -11
|Edits = 6569153
|dEdits = 388
|Files = 4685
|dFiles = 0
|Users = 914699
|dUsers = 120
|Ausers = 955
|dAusers = 0
}}
{{User:Neechalkaran/template/daily
|Date =16-7-2026 6:14
|Pages = 1391084
|dPages = 29
|Articles = 170520
|dArticles = 11
|Edits = 6569870
|dEdits = 717
|Files = 4685
|dFiles = 0
|Users = 914840
|dUsers = 141
|Ausers = 955
|dAusers = 0
}}
{{User:Neechalkaran/template/daily
|Date =17-7-2026 6:14
|Pages = 1391092
|dPages = 8
|Articles = 170521
|dArticles = 1
|Edits = 6571926
|dEdits = 2056
|Files = 4685
|dFiles = 0
|Users = 914994
|dUsers = 154
|Ausers = 928
|dAusers = -27
}}
{{User:Neechalkaran/template/daily
|Date =18-7-2026 6:14
|Pages = 1391101
|dPages = 9
|Articles = 170522
|dArticles = 1
|Edits = 6573289
|dEdits = 1363
|Files = 4683
|dFiles = -2
|Users = 915136
|dUsers = 142
|Ausers = 928
|dAusers = 0
}}
{{User:Neechalkaran/template/daily
|Date =19-7-2026 6:14
|Pages = 1391139
|dPages = 38
|Articles = 170545
|dArticles = 23
|Edits = 6573809
|dEdits = 520
|Files = 4683
|dFiles = 0
|Users = 915304
|dUsers = 168
|Ausers = 928
|dAusers = 0
}}
{{User:Neechalkaran/template/daily
|Date =20-7-2026 6:14
|Pages = 1391178
|dPages = 39
|Articles = 170550
|dArticles = 5
|Edits = 6574382
|dEdits = 573
|Files = 4683
|dFiles = 0
|Users = 915579
|dUsers = 275
|Ausers = 892
|dAusers = -36
}}
{{User:Neechalkaran/template/daily
|Date =21-7-2026 6:14
|Pages = 1391166
|dPages = -12
|Articles = 170549
|dArticles = -1
|Edits = 6574164
|dEdits = -218
|Files = 4683
|dFiles = 0
|Users = 915662
|dUsers = 83
|Ausers = 892
|dAusers = 0
}}
{{User:Neechalkaran/template/daily
|Date =22-7-2026 6:14
|Pages = 1391186
|dPages = 20
|Articles = 170548
|dArticles = -1
|Edits = 6574329
|dEdits = 165
|Files = 4683
|dFiles = 0
|Users = 915843
|dUsers = 181
|Ausers = 892
|dAusers = 0
}}
{{User:Neechalkaran/template/daily
|Date =23-7-2026 6:14
|Pages = 1391176
|dPages = -10
|Articles = 170556
|dArticles = 8
|Edits = 6574503
|dEdits = 174
|Files = 4665
|dFiles = -18
|Users = 915984
|dUsers = 141
|Ausers = 880
|dAusers = -12
}}
<!---Place new stats here--->
|}
<!--- stats ends--->
6qy8xitzv87464ubw090hhd7eltxpbw
गणेश मणिरत्नम थिरुमुरु
0
1615701
6591321
6578986
2026-07-23T12:09:51Z
InternetArchiveBot
500600
Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5
6591321
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox sportsperson
| image =
| image_size =
| caption =
| birth_name =
| fullname =
| nationality = {{flagicon|IND}} [[भारतीय]]
| residence =
| birth_date = 9 मई 2006
| birth_place = [[आंध्र प्रदेश]], भारत
| death_date =
| death_place =
| height =
| weight =
| country =
| sport = [[तीरंदाजी]]
| event = [[कंपाउंड धनुष|कंपाउंड तीरंदाजी]]
| pb =
| club =
| coach =
| alma_mater =
| retired =
| olympics =
| highestranking =
| show-medals = yes
| medaltemplates = {{MedalSport|पुरुषों की [[कंपाउंड धनुष|कंपाउंड तीरंदाजी]]}}[[File: Archery pictogram.svg|30px]]
{{MedalCountry|{{IND}}}}
{{Medal|Competition| विश्व तीरंदाजी इनडोर श्रृंखला}}
{{Medal|Gold| 2026 लास वेगस | अंडर-21 व्यक्तिगत}}
{{Medal|Gold| 2026 नीम्स | अंडर-21 व्यक्तिगत}}
{{Medal|Gold| 2025 ताइपे | अंडर-21 व्यक्तिगत}}
{{Medal|Bronze| 2025 स्ट्रासेन | अंडर-21 व्यक्तिगत}}
{{Medal|Competition| तीरंदाजी एशिया कप}}
{{Medal|Gold| 2025 बैंकॉक | टीम}}
{{Medal|Silver| 2025 सिंगापुर | टीम}}
{{Medal|Bronze| 2024 सुवोन | टीम}}
{{Medal|Competition| विश्व तीरंदाजी युवा चैंपियनशिप}}
{{Medal|Gold| 2025 विन्निपेग | जूनियर टीम}}
{{Medal|Silver| 2023 लीमेरिक | कैडेट टीम}}
{{Medal|Competition| एशियाई युवा चैंपियनशिप}}
{{Medal|Gold| 2024 ताइपे | टीम}}
{{Medal|Gold| 2024 ताइपे | व्यक्तिगत}}
}}
'''थिरुमुरु गणेश''' एक [[भारतीय]] [[तीरंदाज]] हैं।<ref>{{Cite web|title=List of Khelo India Athletes|url=https://kheloindia.gov.in/uploads/Khelo%20India%20Athletes.pdf|access-date=5 July 2026|website=Khelo India|language=en|archive-date=15 मई 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20250515205637/https://kheloindia.gov.in/uploads/Khelo%20India%20Athletes.pdf|url-status=dead}}</ref> उन्होंने विन्निपेग, [[कनाडा]] में 2025 विश्व तीरंदाजी युवा चैंपियनशिप में जूनियर (अंडर-21) पुरुष टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक भी जीता।<ref>{{cite web | title=Indian compound men's U-21 team clinches their 1st {{!}} Akashvani News | website=[[All India Radio]] | date=23 August 2025 | url=https://www.newsonair.gov.in/indian-compound-mens-u-21-team-clinches-their-1st-ever-junior-world-title-at-2025-world-archery-youth-championships/ | access-date=27 May 2026}}</ref> उन्होंने [[2026 तीरंदाजी विश्व कप|2026 में तीरंदाजी विश्व कप]] में पदार्पण किया।<ref>{{Cite web|date=4 February 2026|access-date=14 June 2026|title=Top names joined by youngsters as India names season-opening World Cup line-up|url=https://www.worldarchery.sport/news/202303/top-names-joined-youngsters-india-names-season-opening-world-cup-line|website=[[World Archery]]|language=en}}</ref> उन्होंने [[2026 एशियाई खेलों में भारत]] का प्रतिनिधित्व करने की योग्यता हासिल की।<ref>{{Cite web|date=18 May 2026|title=2nd Phase & Final Selection Trial for the 2026 Asian Games & 2026 World Cup Stage 3 & 4 held at SAI NCOE, Sonipat, Haryana from 15th to 18th May, 2026 trials|url=https://api.indianarchery.info/uploads/images/img1779093580871.pdf|access-date=19 May 2026|website=[[Archery Association of India]]|language=en}}</ref>
== संदर्भ ==
{{reflist}}
{{DEFAULTSORT:थिरुमुरु, गणेश मणिरत्नम}}
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:भारतीय तीरंदाज]]
[[श्रेणी:2026 एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ी]]
[[श्रेणी:2026 एशियाई खेलों के तीरंदाज़]]
i3653f70dol0ykxebk53bkb0mmhxvq1
विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/लॉग/जुलाई 2026
4
1615755
6591440
6587617
2026-07-24T02:44:34Z
SM7
89247
[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/सरूंड माता]] जोड़ा जा रहा
6591440
wikitext
text/x-wiki
__TOC__
<!-- Add new entries to the TOP of the following list -->
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/सरूंड माता}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/बड़वा}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/महंत बक्शीराम जी महाराज}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/एस्ट्रोटॉक}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/एविएटर गेम}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/मन्नु धाकड़मैन}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/भू-ज्योतिष}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/डॉ॰ शिवकुमार सिंह कौशिकेय}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/नीतिका सत्या}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अनमोल वचन}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/हिन्दी विज्ञान साहित्य परिषद}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/सीता शरण इंटर कॉलेज,खतौली}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/शहीद बलभद्र सिंह}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/किरण सिंह राजपुरोहित}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/एंटी-कैंसर अणु}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/पंडित कुबेर नाथ मिश्र 'विचित्र'}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/वैज्ञानिक पत्रिका}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/ट्विशा शर्मा मौत मामला}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/मदन पाल}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/भरत भूषण तिवारी}}
r433r17zppji48tchnwjkcg96imor6x
6591456
6591440
2026-07-24T03:18:28Z
SM7
89247
[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/डॉ. ई. श्रीहरि]] जोड़ा जा रहा
6591456
wikitext
text/x-wiki
__TOC__
<!-- Add new entries to the TOP of the following list -->
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/डॉ. ई. श्रीहरि}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/सरूंड माता}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/बड़वा}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/महंत बक्शीराम जी महाराज}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/एस्ट्रोटॉक}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/एविएटर गेम}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/मन्नु धाकड़मैन}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/भू-ज्योतिष}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/डॉ॰ शिवकुमार सिंह कौशिकेय}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/नीतिका सत्या}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अनमोल वचन}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/हिन्दी विज्ञान साहित्य परिषद}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/सीता शरण इंटर कॉलेज,खतौली}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/शहीद बलभद्र सिंह}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/किरण सिंह राजपुरोहित}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/एंटी-कैंसर अणु}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/पंडित कुबेर नाथ मिश्र 'विचित्र'}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/वैज्ञानिक पत्रिका}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/ट्विशा शर्मा मौत मामला}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/मदन पाल}}
{{विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/भरत भूषण तिवारी}}
gjrxg0jqpluv6jbw41hdetw4vbl2etd
डायमंड मेड मैन
0
1615834
6591459
6580042
2026-07-24T03:19:53Z
SM7
89247
+ हहेच टैग
6591459
wikitext
text/x-wiki
{{हहेच लेख| कारण=प्रचारात्मक लेख। मशीन द्वारा लिखित। साथ ही इससे संबंधित मुख्य लेख (''[[डायमंड मेड मैन]]'') भी इसी चर्चा में हटाने हेतु जोड़ा जा रहा। यह लेख भी मशीन निर्मित या अनूदित है। उल्लेखनीय है अथवा नहीं यह स्पष्ट नहीं। यदि फिल्म का लेख उल्लेखनीय साबित होता है तो इस शीर्षक, ''डॉ. ई. श्रीहरि'' को उसपर पुनर्प्रेषित किया जा सकता है, अलग से लेख की ज़रूरत नहीं प्रतीत होती।| चर्चा_पृष्ठ= विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/डॉ. ई. श्रीहरि}}{{Infobox film
| name = डायमंड मेड मैन
| original_name = Diamond Made Man (DMM)
| image =
| caption =
| director = गीथई (Geethai)
| producer = भवानी / संप्रीत प्रोडक्शंस
| writer = गीथई
| starring = डॉ. ई. श्रीहारी MBBS<br>वसुधा<br>श्रीहारी देवी मंगला पुव्वु
| music = डॉ. ई. श्रीहारी
| cinematography = नागमणि
| production_company = वाईजीबी (YGB) / संप्रीत प्रोडक्शंस
| released = 2026
| runtime = 152 मिनट (2 घंटे 32 मिनट)
| country = भारत / संयुक्त राज्य अमेरिका
| language = अंग्रेज़ी / तेलुगु / हिंदी
| budget = $11 मिलियन अमरीकी डॉलर (लगभग ₹90 करोड़)
}}
'''डायमंड मेड मैन''' (Diamond Made Man) वर्ष 2026 में रिलीज हुई एक बहुभाषी अंतर्राष्ट्रीय साइंस फिक्शन एक्शन फिल्म है।<ref name="IMDbMain"/> इस फिल्म का निर्देशन गीथई (Geethai) द्वारा किया गया है और इसका निर्माण संप्रीत प्रोडक्शंस और भवानी के बैनर तले वाईजीबी (YGB) स्टूडियो द्वारा किया गया है।<ref name="TMDBMain"/> फिल्म में प्रसिद्ध चिकित्सक और अभिनेता डॉ. ई. श्रीहारी MBBS मुख्य भूमिका (नायक) में हैं, जबकि वसुधा ने मुख्य अभिनेत्री की भूमिका निभाई है।<ref name="KinoboxTvurci"/> यह फिल्म उन्नत रोबोटिक्स और प्रागैतिहासिक डायनासोरों के बीच होने वाले महासंग्राम पर आधारित है, जिसे वैश्विक स्तर पर $11 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 90 करोड़ रुपये) के भारी-भरकम बजट के साथ तैयार किया गया है।<ref name="TMDBMain"/>
== कथानक ==
फिल्म की कहानी विज्ञान कथा (Sci-Fi) और क्रिएचर-फीचर (Creature Feature) का एक अनोखा मिश्रण है। आधुनिक दुनिया में अचानक लाखों साल पुराने प्रागैतिहासिक और खतरनाक जीव (डायनासोर) जीवित होकर शहरों पर हमला कर देते हैं।<ref name="JustWatch"/> इस घोर संकट के समय, एक शांत स्वभाव के चिकित्सक डॉ. श्रीहारी MBBS (डॉ. ई. श्रीहारी द्वारा अभिनीत) मानवता के रक्षक के रूप में सामने आते हैं। वह शहरों को विनाश से बचाने के लिए एक विशालकाय और उन्नत सुनहरे लड़ाकू रोबोट (Mech Warrior) को खुद नियंत्रित (पायलट) करते हैं।<ref name="MouthShut"/> फिल्म का मुख्य आकर्षण रोबोट और विशाल टायरानोसॉरस रेक्स (T-Rex) के बीच होने वाली भयंकर और रोमांचक लड़ाई है, जिसमें जीवित रहने, बलिदान और मानवता की रक्षा की कहानी को दर्शाया गया है।<ref name="JustWatch"/>
== मुख्य कलाकार ==
* '''डॉ. ई. श्रीहारी MBBS''' – डॉ. श्रीहारी (रोबोट पायलट और चिकित्सक)<ref name="KinoboxTvurci"/>
* '''वसुधा''' – मुख्य अभिनेत्री<ref name="IMDbMain"/>
* '''श्रीहारी देवी मंगला पुव्वु''' – मुख्य सह-कलाकार<ref name="TMDBMain"/>
== निर्माण एवं तकनीक ==
फिल्म का निर्माण भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों स्थानों पर उच्च तकनीकी मानकों के साथ किया गया है।<ref name="IMDbMain"/> फिल्म समीक्षकों के अनुसार, रोबोट और डायनासोर के बीच की लड़ाई को पर्दे पर उतारने के लिए मोशन-कैप्चर वीएफएक्स (Motion-Capture VFX), व्यावहारिक प्रभावों (Practical Effects) और सजीव एनिमेट्रॉनिक्स (Animatronics) का बेहतरीन उपयोग किया गया है।<ref name="MouthShut"/> फिल्म की सिनेमैटोग्राफी नागमणि द्वारा की गई है, और इसका पार्श्व संगीत (Background Score) स्वयं डॉ. ई. श्रीहारी द्वारा तैयार किया गया है।<ref name="TMDBMain"/>
== रिलीज और समीक्षा ==
फिल्म को भारत, अमेरिका और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में व्यापक स्तर पर रिलीज करने की योजना बनाई गई है।<ref name="JustWatch"/> समीक्षकों और दर्शकों ने फिल्म के दृश्यों (Visuals) और एक्शन दृश्यों की काफी सराहना की है। माउथशट (MouthShut) पर एक समीक्षक ने इसे "माइंड-ब्लोइंग विजुअल स्पेक्टेकल" कहा है।<ref name="MouthShut"/> इस फिल्म को अंतर्राष्ट्रीय डेटाबेस जैसे कि रशियन सिनेमा पोर्टल 'किनोमेनिया' (Kinomania) की सर्वश्रेष्ठ आगामी भारतीय फिल्मों की सूची में भी स्थान मिला है।<ref name="Kinomania"/>
== संदर्भ ==
{{Reflist|refs
<ref[https://www.imdb.com/title/tt39674832</ref>
<ref[https://www.altbollywood.com/post/diamond-made-man-ending-explained-sreehari</ref>
<ref[https://www.boxofficemojo.com/title/tt39674832/</ref>
<ref name="JustWatch">[https://www.justwatch.com/in/movie/diamond-made-man Diamond Made Man Streaming Online] - जस्टवॉच इंडिया (JustWatch)।</ref>
<ref name="MouthShut">[https://m.mouthshut.com/review/diamond-made-man-review-rmnrmlnntop Diamond Made Man User Review] - माउथशट (MouthShut.com)।</ref>
<ref name="Kinomania">[https://www.kinomania.ru/movies/diamond-made-man Diamond Made Man (фильм, 2026)] - किनोमेनिया (Kinomania.ru)।</ref>
}}
[[श्रेणी:2026 की फ़िल्में]]
[[श्रेणी:भारतीय साइंस फिक्शन फ़िल्में]]
[[श्रेणी:भारतीय एक्शन फ़िल्में]]
j04ph62v49zpulbf1pa700s2n78bqa4
6591460
6591459
2026-07-24T03:21:36Z
SM7
89247
सुधार किया गया
6591460
wikitext
text/x-wiki
{{हहेच लेख| कारण=प्रचारात्मक लेख। मशीन द्वारा लिखित। साथ ही इससे संबंधित मुख्य लेख (''[[डायमंड मेड मैन]]'') भी इसी चर्चा में हटाने हेतु जोड़ा जा रहा। यह लेख भी मशीन निर्मित या अनूदित है। उल्लेखनीय है अथवा नहीं यह स्पष्ट नहीं। यदि फिल्म का लेख उल्लेखनीय साबित होता है तो इस शीर्षक, ''डॉ. ई. श्रीहरि'' को उसपर पुनर्प्रेषित किया जा सकता है, अलग से लेख की ज़रूरत नहीं प्रतीत होती।| चर्चा पृष्ठ= विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/डॉ. ई. श्रीहरि}}{{Infobox film
| name = डायमंड मेड मैन
| original_name = Diamond Made Man (DMM)
| image =
| caption =
| director = गीथई (Geethai)
| producer = भवानी / संप्रीत प्रोडक्शंस
| writer = गीथई
| starring = डॉ. ई. श्रीहारी MBBS<br>वसुधा<br>श्रीहारी देवी मंगला पुव्वु
| music = डॉ. ई. श्रीहारी
| cinematography = नागमणि
| production_company = वाईजीबी (YGB) / संप्रीत प्रोडक्शंस
| released = 2026
| runtime = 152 मिनट (2 घंटे 32 मिनट)
| country = भारत / संयुक्त राज्य अमेरिका
| language = अंग्रेज़ी / तेलुगु / हिंदी
| budget = $11 मिलियन अमरीकी डॉलर (लगभग ₹90 करोड़)
}}
'''डायमंड मेड मैन''' (Diamond Made Man) वर्ष 2026 में रिलीज हुई एक बहुभाषी अंतर्राष्ट्रीय साइंस फिक्शन एक्शन फिल्म है।<ref name="IMDbMain"/> इस फिल्म का निर्देशन गीथई (Geethai) द्वारा किया गया है और इसका निर्माण संप्रीत प्रोडक्शंस और भवानी के बैनर तले वाईजीबी (YGB) स्टूडियो द्वारा किया गया है।<ref name="TMDBMain"/> फिल्म में प्रसिद्ध चिकित्सक और अभिनेता डॉ. ई. श्रीहारी MBBS मुख्य भूमिका (नायक) में हैं, जबकि वसुधा ने मुख्य अभिनेत्री की भूमिका निभाई है।<ref name="KinoboxTvurci"/> यह फिल्म उन्नत रोबोटिक्स और प्रागैतिहासिक डायनासोरों के बीच होने वाले महासंग्राम पर आधारित है, जिसे वैश्विक स्तर पर $11 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 90 करोड़ रुपये) के भारी-भरकम बजट के साथ तैयार किया गया है।<ref name="TMDBMain"/>
== कथानक ==
फिल्म की कहानी विज्ञान कथा (Sci-Fi) और क्रिएचर-फीचर (Creature Feature) का एक अनोखा मिश्रण है। आधुनिक दुनिया में अचानक लाखों साल पुराने प्रागैतिहासिक और खतरनाक जीव (डायनासोर) जीवित होकर शहरों पर हमला कर देते हैं।<ref name="JustWatch"/> इस घोर संकट के समय, एक शांत स्वभाव के चिकित्सक डॉ. श्रीहारी MBBS (डॉ. ई. श्रीहारी द्वारा अभिनीत) मानवता के रक्षक के रूप में सामने आते हैं। वह शहरों को विनाश से बचाने के लिए एक विशालकाय और उन्नत सुनहरे लड़ाकू रोबोट (Mech Warrior) को खुद नियंत्रित (पायलट) करते हैं।<ref name="MouthShut"/> फिल्म का मुख्य आकर्षण रोबोट और विशाल टायरानोसॉरस रेक्स (T-Rex) के बीच होने वाली भयंकर और रोमांचक लड़ाई है, जिसमें जीवित रहने, बलिदान और मानवता की रक्षा की कहानी को दर्शाया गया है।<ref name="JustWatch"/>
== मुख्य कलाकार ==
* '''डॉ. ई. श्रीहारी MBBS''' – डॉ. श्रीहारी (रोबोट पायलट और चिकित्सक)<ref name="KinoboxTvurci"/>
* '''वसुधा''' – मुख्य अभिनेत्री<ref name="IMDbMain"/>
* '''श्रीहारी देवी मंगला पुव्वु''' – मुख्य सह-कलाकार<ref name="TMDBMain"/>
== निर्माण एवं तकनीक ==
फिल्म का निर्माण भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों स्थानों पर उच्च तकनीकी मानकों के साथ किया गया है।<ref name="IMDbMain"/> फिल्म समीक्षकों के अनुसार, रोबोट और डायनासोर के बीच की लड़ाई को पर्दे पर उतारने के लिए मोशन-कैप्चर वीएफएक्स (Motion-Capture VFX), व्यावहारिक प्रभावों (Practical Effects) और सजीव एनिमेट्रॉनिक्स (Animatronics) का बेहतरीन उपयोग किया गया है।<ref name="MouthShut"/> फिल्म की सिनेमैटोग्राफी नागमणि द्वारा की गई है, और इसका पार्श्व संगीत (Background Score) स्वयं डॉ. ई. श्रीहारी द्वारा तैयार किया गया है।<ref name="TMDBMain"/>
== रिलीज और समीक्षा ==
फिल्म को भारत, अमेरिका और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में व्यापक स्तर पर रिलीज करने की योजना बनाई गई है।<ref name="JustWatch"/> समीक्षकों और दर्शकों ने फिल्म के दृश्यों (Visuals) और एक्शन दृश्यों की काफी सराहना की है। माउथशट (MouthShut) पर एक समीक्षक ने इसे "माइंड-ब्लोइंग विजुअल स्पेक्टेकल" कहा है।<ref name="MouthShut"/> इस फिल्म को अंतर्राष्ट्रीय डेटाबेस जैसे कि रशियन सिनेमा पोर्टल 'किनोमेनिया' (Kinomania) की सर्वश्रेष्ठ आगामी भारतीय फिल्मों की सूची में भी स्थान मिला है।<ref name="Kinomania"/>
== संदर्भ ==
{{Reflist|refs
<ref[https://www.imdb.com/title/tt39674832</ref>
<ref[https://www.altbollywood.com/post/diamond-made-man-ending-explained-sreehari</ref>
<ref[https://www.boxofficemojo.com/title/tt39674832/</ref>
<ref name="JustWatch">[https://www.justwatch.com/in/movie/diamond-made-man Diamond Made Man Streaming Online] - जस्टवॉच इंडिया (JustWatch)।</ref>
<ref name="MouthShut">[https://m.mouthshut.com/review/diamond-made-man-review-rmnrmlnntop Diamond Made Man User Review] - माउथशट (MouthShut.com)।</ref>
<ref name="Kinomania">[https://www.kinomania.ru/movies/diamond-made-man Diamond Made Man (фильм, 2026)] - किनोमेनिया (Kinomania.ru)।</ref>
}}
[[श्रेणी:2026 की फ़िल्में]]
[[श्रेणी:भारतीय साइंस फिक्शन फ़िल्में]]
[[श्रेणी:भारतीय एक्शन फ़िल्में]]
7rdyul7h4uk0x3nhh32hc6f6cecb0jk
ओजापाली
0
1615859
6591431
6591270
2026-07-24T02:32:36Z
QuestForTrueTruth
852879
संरक्षण और पुनरुत्थान के बारे में जानकारी दी गई है।
6591431
wikitext
text/x-wiki
{{नया असमीक्षित लेख|date=जुलाई 2026}}
'''ओजापाली''' असम की एक कथात्मक गीत-नृत्य परंपरा है, जिसका प्रदर्शन एक समूह द्वारा किया जाता है। इस समूह का नेतृत्व एक ''ओजा'' (मुख्य प्रस्तोता) करता है तथा ''पाली'' (कोरस) उसका सहयोग करती है। विद्वान इसकी जड़ों को अखिल भारतीय '''''कथाकथा''''' (महाकाव्य कथावाचन) परंपरा से जोड़ते हैं और इसका विकास [[असम]] में नव-वैष्णव आंदोलन से बहुत पहले का मानते हैं।{{sfn|Baruah|Choudhury|2023|p=106}}{{sfn|Borah|2023|pp=48–49}} दरंग ज़िला विशेष रूप से राजा धर्मनारायण (1615–1637) के समय से ओजापाली प्रदर्शन का एक ऐतिहासिक केंद्र माना जाता है।<ref>{{cite web |title=Ojapali Tradition and National Movement in Assam |url=https://indianculture.gov.in/node/2820144}}</ref>इस कला रूप में मुख्य रूप से छोटे झांझ (''खुटीताल'') की संगत के साथ गाकर कथा-वाचन, संवाद, हाव-भाव तथा आंशिक रूप से तात्कालिक नाट्य प्रस्तुति का समावेश होता है।{{sfn|Baruah|Choudhury|2023|pp=106–109}}{{sfn|Baruah|2017|pp=12–15}}
[[File:Oja Pali.jpg|thumb|असम का एक ओजापाली दल (एंसेंबल)]]
== उत्पत्ति और ऐतिहासिक संदर्भ ==
ओजापाली को कहानी कहने की '''''कथाकथा''''' परंपरा से विकसित माना जाता है, जिसे स्थानीय अनुष्ठानों और सामुदायिक प्रस्तुतियों के अनुरूप अनुकूलित किया गया।{{sfn|Baruah|Choudhury|2023|pp=106–111}} इसके महाकाव्य-आधारित रूप असमिया ''रामायण'' और ''महाभारत'' के पुनर्कथनों का उल्लेख करते हैं, जबकि गैर-महाकाव्य रूप शाक्त (शक्ति) उपासना परंपराओं में निहित हैं।{{sfn|Baruah|2016|pp=100–103}} यह कला-रूप [[कामता साम्राज्य|कामता साम्राज्य]] के अधीन सुदृढ़ हुआ और राजा धर्मनारायण के शासनकाल में दरांग में इसका संरक्षण किया गया। पंद्रहवीं–सोलहवीं शताब्दी के दौरान, ओजापाली का असम के [[भक्ति आंदोलन]] के साथ संपर्क हुआ; बाद के लेखकों का उल्लेख है कि ओजापाली के तत्वों ने नव-वैष्णव सत्रों से संबंधित रंगमंच और संगीत के विकास को प्रभावित किया।{{sfn|Baruah|Choudhury|2023|pp=107–109}}
कई कला इतिहासकार और प्रदर्शन कला के विद्वान यह भी सुझाव देते हैं कि श्रीमंत शंकरदेव की नाट्य शैली (''अंकिया नाट''/''भाओना'') पर ओजापाली का प्रभाव था।<ref>{{Cite web |title=Social Reserch Foundation |url=https://www.socialresearchfoundation.com/new/publish-journal.php?editID=1430 |access-date=2025-09-09 |website=www.socialresearchfoundation.com}}</ref><ref>{{Cite journal |last=Sarma |first=Madan |date=2022-08-04 |title=Anka or Aṅkīyā Nāṭ: Genesis and Structure |url=https://www.academia.edu/84166432 |journal=Mahapurusjyoti}}</ref>
== प्रदर्शन और शैली ==
एक ओजापाली दल में सामान्यतः एक '''ओजा''' (मुख्य कलाकार) और चार या पाँच '''पाली''' (कोरस) होते हैं। मुख्य कोरस गायक, '''दाइना-पाली''', ओजा के दाहिनी ओर खड़ा होता है और संवादात्मक प्रत्युत्तर तथा व्याख्या के माध्यम से कथा को आगे बढ़ाता है।{{sfn|Baruah|2016|p=101}}{{sfn|Baruah|Choudhury|2023|pp=108–109}} प्रस्तुति में गाए जाने वाले पद, संवाद, लयबद्ध पदचालन तथा हाव-भाव का समावेश होता है; दल 'खुटीताल' (छोटे झांझ) की सहायता से ताल बनाए रखता है, और कुछ संदर्भों में इसके साथ अन्य तालवाद्य वाद्यों का भी सहयोग लिया जा सकता है।{{sfn|Baruah|Choudhury|2023|pp=108–109}}वेशभूषा इसकी विभिन्न उपशैलियों के अनुसार भिन्न होती है: ब्याह दल प्रायः सफेद पगड़ी और ''चपकन'' पहनते हैं, जबकि सत्रिया ओजापाली में संकरी वेशभूषा तथा सत्र परंपरा के अनुरूप आभूषण धारण किए जाते हैं।{{sfn|Baruah|2016|p=102}}
== विविधताएँ / रूप ==
विद्वानों के स्रोत सामान्यतः तीन प्रमुख रूपों का उल्लेख करते हैं, जिन्हें कभी-कभी "महाकाव्य-आधारित" और "गैर-महाकाव्य/शाक्त-संबद्ध" शीर्षकों के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाता है:{{sfn|Baruah|Choudhury|2023|p=107}}{{sfn|Baruah|2023|pp=1–2}}
* '''ब्याह/बिगोया (व्यास-गोवा) ओजापाली''' – महाकाव्य-आधारित; ''रामायण'', ''महाभारत'', ''भागवत पुराण'' तथा अन्य पुराणिक विषयों पर आधारित कथाओं का वाचन।{{sfn|Baruah|Choudhury|2023|p=107}}
* '''सुकानन्नी / मारोई-गोवा (मनसा) ओजापाली''' – शाक्त परंपरा से संबद्ध; सर्प देवी मनसा (''मारोई'') पर केंद्रित अनुष्ठानिक आख्यान। अनेक मंडलियाँ ''पद्म-पुराण'' परंपरा में कवि नारायणदेव द्वारा रचित ''पदावली'' का गायन करती हैं।<ref>{{cite journal |last=Baruah |first=Sudarshan |title=Types of Ojapali: Sattriya Ojapali and Manasha Ojapali |journal=Naad-Nartan: Journal of Dance & Music |year=2023 |url=https://naadnartan.in/wp-content/uploads/2023/08/Dr.-Sudarshan-Baruah.pdf}}</ref>
* '''रामायणी ओजापाली''' – ''रामायण'' के प्रसंगों पर केंद्रित प्रस्तुतियाँ।{{sfn|Baruah|Choudhury|2023|p=107}}
इसके अतिरिक्त, सत्र परिवेश के भीतर एक विशिष्ट '''सत्त्रीय ओजापाली''' का विकास हुआ; विद्वान इसे शंकरदेव का अनुकूलन बताते हैं, जो ब्याह के तत्वों का संकारी सौंदर्यशास्त्र के साथ संश्लेषण करता है।<ref>{{cite journal |title=Satriya Ojapali Music of Assam and Its Classical Elements |journal=Sangeet Galaxy |url=https://sangeetgalaxy.co.in/wp-content/uploads/2020/07/3573219253-SatriyaOjapaliClassicalelements_final.pdf}}</ref>
== सांस्कृतिक महत्व ==
सुकनन्नी/मनसा ओजापाली निचले असम में शाक्त उपासना और मंदिर-केंद्रित अनुष्ठानों से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है, विशेष रूप से मनसा भक्ति से संबंधित बेउला–लखिंदर की कथाओं से।<ref>{{Cite web |title=indianculture.gov.in/node/2820144 |url=https://indianculture.gov.in/node/2820144}}</ref>{{sfn|Baruah|Choudhury|2023|pp=107–108}}अनुष्ठानों से परे, ओजापाली ने नैतिक शिक्षा, सामुदायिक स्मृति तथा बीसवीं शताब्दी में जन-संगठन के माध्यम के रूप में भी कार्य किया।<ref>{{Cite web |title=Agnisala Dhuliya Party and Freedom Movement |url=https://indianculture.gov.in/digital-district-repository/district-repository/agnisala-dhuliya-party-and-freedom-movement}}</ref>{{sfn|Baruah|Choudhury|2023|pp=106–109}}
== भौगोलिक वितरण ==
ऐतिहासिक रूप से वर्तमान '''[[दरंग ज़िला|दरंग]]''' (जिसमें मंगलदई और [[सिपाझार]] शामिल हैं) में केंद्रित, ओजापाली आज भी निचले असम के [[नलबाड़ी]], [[कामरूप ज़िला|कामरूप]], [[बजाली ज़िला|बजाली]], बक्सा और उदालगुड़ी के कुछ भागों में प्रचलित है, जहाँ [[तेज़पुर]] और उससे सटे ज़िलों में भी कलाकार सक्रिय हैं। समकालीन प्रस्तुतियाँ मंगलदई के उन समूहों द्वारा भी की जाती हैं जिनका नेतृत्व ओजा उपेन्द्र कलिता के शिष्य करते हैं।
== उल्लेखनीय कलाकार ==
* '''ललित चन्द्र नाथ(ललित ओझा)''' – सुकानन्नी ओजापाली के प्रतिपादक; [[संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार]] (1983) तथा [[रवीन्द्रनाथ ठाकुर]] पुरस्कार (2012) से सम्मानित; सिपाझार में दीर्घकालीन कार्य।<ref>{{cite news |title=All the world's a stage for Lalit Chandra Nath Ojha |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/guwahati/all-the-worlds-a-stage-for-lalit-chandra-nath-ojha/articleshow/16469546.cms}}</ref>
*'''किनाराम नाथ ओजा''' – सुकनानी ओजापाली के लिए [[संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार]] (2012)।<ref>{{cite web |title=Sangeet Natak Akademi Fellowships and Akademi Awards 2012 |url=https://www.pib.gov.in/newsite/erelcontent.aspx?relid=91137}}</ref> [[File:Pranab Mukherjee presenting the Akademi Award to Shri Kina Ram Nath Oja, in the field of Sukani Ojapali, at the investiture ceremony of the Sangeet Natak Akademi Awards 2012, at Rashtrapati Bhavan, in New Delhi.jpg|thumb|किनाराम नाथ ओजा [[संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार]] (2012) प्राप्त करते हुए।]]
*'''दुर्गाबर कायस्थ''' – प्रारंभिक कवि–कलाकार, जिनका संबंध ‘’दुर्गावरी ओजापाली’’ (गीतात्मक ''रामायण'' प्रदर्शनों की सूची) से था।
*'''बलोराम कोनवार और उनकी मंडली''' – मंगलदई स्थित ब्याह ओजापाली समूह, जो 1990 के दशक से 2010 के दशक तक सक्रिय रहा, तथा ओजा उपेन्द्र कलिता के शिष्य थे।
== संरक्षण और पुनरुत्थान ==
संरक्षण तंत्रों में संस्कृति मंत्रालय तथा संगीत नाटक अकादमी के अंतर्गत कलाकार पेंशन, कार्यशालाएँ और प्रशिक्षण योजनाएँ शामिल हैं; विश्वविद्यालयों तथा नागरिक समाज की पहलों ने भी इस कला रूप का प्रलेखन किया है और इसका शिक्षण किया है।{{sfn|Baruah|Choudhury|2023|p=109}}<ref>{{cite news |title=Artiste's appeal |url=https://www.telegraphindia.com/north-east/artiste-s-appeal/cid/291603}}</ref> समकालीन समाचार-रिपोर्टों में इस कला के निरंतर अभ्यास तथा दलों की आजीविका के समक्ष आने वाली चुनौतियों, विशेषकर COVID-19 महामारी के दौरान, दोनों का उल्लेख किया गया है।<ref>{{Cite web |title=COVID-19 pandemic: Ojapali folk artistes of Assam seek government help |date=6 June 2020 |url=https://www.sentinelassam.com/north-east-india-news/assam-news/covid-19-pandemic-ojapali-folk-artistes-of-assam-seek-government-help-481084}}</ref>
lvqnjfit0hn3nm20tzcfr2jgnb8m1xs
सदस्य वार्ता:Thakkarbapachatravas
3
1616024
6591359
6582378
2026-07-23T16:05:24Z
Thakkarbapachatravas
936047
/* UNBLOCK */ नया अनुभाग
6591359
wikitext
text/x-wiki
{{साँचा:सहायता|name=Thakkarbapachatravas}} -- [[सदस्य:Sanjeev bot|Sanjeev bot]] ([[सदस्य वार्ता:Sanjeev bot|वार्ता]]) 00:00, 14 जुलाई 2026 (UTC)
== UNBLOCK ==
UNBLOCK [[सदस्य:Thakkarbapachatravas|Thakkarbapachatravas]] ([[सदस्य वार्ता:Thakkarbapachatravas|वार्ता]]) 16:05, 23 जुलाई 2026 (UTC)
5thrcvyu6mwth6603gf1t075nhm40pi
धमाल 4
0
1616192
6591423
6587653
2026-07-24T02:15:10Z
SM7
89247
[[वि:शीह|शीघ्र हटाने का अनुरोध]] कारण "[[वि:शीह|व2: परीक्षण]] / शून्य बैकलिंक वाला पुनर्प्रेषण / अनावश्यक पुनर्प्रेषण"
6591423
wikitext
text/x-wiki
{{db-reason|1=[[वि:शीह|व2: परीक्षण]] / शून्य बैकलिंक वाला पुनर्प्रेषण / अनावश्यक पुनर्प्रेषण|help=off}}
#redirect [[धमाल ४]]
s3umxj5peglztetkls7qcc86u5rgbxo
इस्लामी विज्ञान
0
1616193
6591428
6587677
2026-07-24T02:29:50Z
SM7
89247
अंग्रेजी कड़ियाँ अलग से लिखीं+संदर्भों में इस्तेमाल स्रोत भी जोड़े+श्रेणी के लिये सॉर्ट कुंजी+आधार टैग
6591428
wikitext
text/x-wiki
[[चित्र:Mir_Sayyid_Ali_-_Portrait_of_a_Young_Indian_Scholar.jpg|अंगूठाकार|मुगल सम्राट [[शाह जहाँ|शाहजहाँ]] (1592-1666) के शासनकाल के दौरान कुरान पर टीका लिखने वाला एक विद्वान।]]
'''इस्लामी विज्ञान:''' ({{Langx|ar|علوم الدين|ʿulūm al-dīn|the sciences of religion}}) [[इस्लामी]] विद्वानों ( [[उलमा|उलेमा]]) द्वारा प्रचलित पारंपरिक रूप से परिभाषित धार्मिक विज्ञानों का एक समूह है जिसका उद्देश्य इस्लामी धार्मिक ज्ञान का निर्माण और व्याख्या करना है।<ref>{{Harvnb|Gilliot|Repp|Nizami|Hooker|Lin|Hunwick|1960–2007}}</ref>
== विभिन्न विज्ञान ==
इन विज्ञानों में शामिल हैं:
* इल्म अल-[[फ़िक़्ह]]: इस्लामी [[विधिशास्त्र|न्यायशास्त्र]]
* इल्म अल-हदीस : पैगंबरी परंपराओं या [[हदीस]] की प्रामाणिकता का अध्ययन
* इल्म अल-रिजाल: हदीस प्रसारकों का जीवनी संबंधी अध्ययन, जिसका उद्देश्य उनकी विश्वसनीयता का मूल्यांकन करना है
* इल्म अल-कलाम ([[:en:Ilm al-kalām|Ilm al-kalām]]): कभी-कभी उसूलुद्दीन "धर्म की जड़ें" भी कहा जाता है): काल्पनिक धर्मशास्त्र / और कुछ तर्क<ref>On the term {{Transliteration|ar|uṣūl al-dīn}}, see {{Harvnb|Gimaret|1960–2007}}. On the term 'speculative theology', see, e.g. {{Harvnb|Schmidtke|2016}}: "rationally minded theologians employed the methods and techniques of speculative theology, ''‘kalām’'' or ''‘ʿilm al-kalām’'', as it is typically called".</ref>
* इल्म अल-लुग़ा ([[:en:Ilm al-lugha|Ilm al-lugha]]): अरबी व्याकरण
* इल्म अल-तफ़सीर ([[:en:Ilm al-tafsīr|Ilm al-tafsīr]]): [[क़ुरआन]] की व्याख्या ([[तफ़सीर]])
* इल्म अल-नस्ख: निरसन का अध्ययन (क़ुरआन के वे भाग जो अन्य भागों को प्रतिस्थापित या रद्द करते हैं)
* इल्म अल-तजवीद: क़ुरआन के उचित [[अनुवाचन|पाठ]] के नियम
* इल्म अल-[[क़िरात]]: इल्म अल-क़िरात: क़ुरआन को पढ़ने के विभिन्न तरीकों पर
* इल्म आख़िर: [[यौम अल-क़ियामा|इस्लामी परलोक विद्या]] (अंत समय और इस्लाम में न्याय दिवस पर)
* इल्म अल अखलाक़: नैतिक नैतिकता मध्ययुगीन इस्लाम में मुस्लिम बुद्धिजीवियों के लिए एक महत्वपूर्ण विषय था।
== इन्हें भी देखें ==
* [[इस्लाम और विज्ञान]]
* [[इस्लाम और विज्ञान (टीवी श्रृंखला)]]
* [[अरब के वैज्ञानिकों और विद्वानों की सूची]]
* [[ऑक्सफोर्ड इनसाइक्लोपीडिया ऑफ फिलॉसफी, साइंस एंड टेक्नोलॉजी इन इस्लाम]]
== संदर्भ एवं फुटनोट ==
{{टिप्पणीसूची}}
== स्रोत ==
{{refbegin|30em}}
*{{cite encyclopedia|last1=Gilliot|first1=Cl.|last2=Repp|first2=R.C|last3=Nizami|first3=K.A.|last4=Hooker|first4=M.B.|last5=Lin|first5=Chang-Kuan|last6=Hunwick|first6=J.O.|year=1960–2007|title=ʿUlamāʾ|editor1-last=Bearman|editor1-first=P.|editor2-last=Bianquis|editor2-first=Th.|editor3-last=Bosworth|editor3-first=C.E.|editor4-last=van Donzel|editor4-first=E.|editor5-last=Heinrichs|editor5-first=W.P.|encyclopedia=Encyclopaedia of Islam, Second Edition|doi=10.1163/1573-3912_islam_COM_1278}}
*{{cite encyclopedia|last1=Gimaret|first1=D.|year=1960–2007|title=Uṣūl al-Dīn|editor1-last=Bearman|editor1-first=P.|editor2-last=Bianquis|editor2-first=Th.|editor3-last=Bosworth|editor3-first=C.E.|editor4-last=van Donzel|editor4-first=E.|editor5-last=Heinrichs|editor5-first=W.P.|encyclopedia=Encyclopaedia of Islam, Second Edition|doi=10.1163/1573-3912_islam_SIM_7760}}
*{{cite book|last1=Schmidtke|first1=Sabine|author1-link= |date=2016|chapter=Introduction|editor1-last=Schmidtke|editor1-first=Sabine|title=The Oxford Handbook of Islamic Theology|location=Oxford|publisher=Oxford University Press|pages=1–26|doi=10.1093/oxfordhb/9780199696703.013.48}}
{{refend}}
[[श्रेणी:इस्लाम|विज्ञान]]
[[श्रेणी:इस्लाम और विज्ञान]]
{{Islam-stub}}
kqzotvigxjlxtwfne7onutihh1g2yt9
डॉ. ई. श्रीहरि
0
1616194
6591454
6587660
2026-07-24T03:18:27Z
SM7
89247
हटाने हेतु नामांकित; देखें [[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/डॉ. ई. श्रीहरि]]
6591454
wikitext
text/x-wiki
{{हहेच लेख| कारण=प्रचारात्मक लेख। मशीन द्वारा लिखित। साथ ही इससे संबंधित मुख्य लेख (''[[डायमंड मेड मैन]]'') भी इसी चर्चा में हटाने हेतु जोड़ा जा रहा। यह लेख भी मशीन निर्मित या अनूदित है। उल्लेखनीय है अथवा नहीं यह स्पष्ट नहीं। यदि फिल्म का लेख उल्लेखनीय साबित होता है तो इस शीर्षक, ''डॉ. ई. श्रीहरि'' को उसपर पुनर्प्रेषित किया जा सकता है, अलग से लेख की ज़रूरत नहीं प्रतीत होती।| चर्चा_पृष्ठ= विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/डॉ. ई. श्रीहरि}}'''डॉ. ई. श्रीहरि''' (अंग्रेज़ी: '''Dr. E. Sreehari MBBS'''), जिन्हें '''डॉक्टर ई. श्रीहरि एमबीबीएस''' के नाम से भी जाना जाता है, एक भारतीय मूल के हॉलीवुड अभिनेता, चिकित्सक और एक्शन हीरो हैं। वे २०२६ की ब्लॉकबस्टर हॉलीवुड अंग्रेज़ी फिल्म '''डायमंड मेड मैन''' (Diamond Made Man) और इसकी सीक्वल फिल्मों के मुख्य नायक हैं।
== परिचय ==
डॉ. ई. श्रीहरि हॉलीवुड की आधुनिक साइंस-फिक्शन और एक्शन फिल्मों के उभरते चेहरे हैं। वे '''डायमंड मेड मैन''' फिल्म श्रृंखला में हीरो की भूमिका निभाते हैं, जिसमें वे एक साधारण चिकित्सक से उन्नत मेके वॉरियर (mech warrior) में बदलकर डायनासोर जैसे प्राचीन जानवरों और ब्रह्मांडीय खतरों से मानवता की रक्षा करते हैं। फिल्म को हॉलीवुड स्टाइल की ब्लॉकबस्टर के रूप में प्रस्तुत किया गया है जिसमें भव्य विजुअल इफेक्ट्स, एक्शन सीक्वेंस और भावुक कहानी का मिश्रण है। सोशल मीडिया, यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर उनके प्रमोशनल क्लिप्स और टीजर ने काफी ध्यान आकर्षित किया है। TMDb और IMDb जैसी वैश्विक डेटाबेस पर उनकी प्रोफाइल मौजूद है।
फिल्म की कहानी पृथ्वी पर डायनासोरों के पुनरुत्थान और मानवता की लड़ाई पर केंद्रित है। डॉ. श्रीहरि की भूमिका एक शांत चिकित्सक से शुरू होकर एक बहादुर योद्धा तक जाती है जो उन्नत तकनीक का उपयोग कर ब्रह्मांड के युद्ध में शामिल होता है। पार्ट २ में कहानी और विस्तृत हो जाती है जिसमें वे एक एलियन लड़की के प्रेम में पड़ते हैं और राक्षस डकोडा से लड़ते हैं।
== हॉलीवुड अंग्रेज़ी फिल्मों की सूची ==
डॉ. ई. श्रीहरि ने निम्नलिखित हॉलीवुड अंग्रेज़ी फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाई है:
* '''डायमंड मेड मैन''' (Diamond Made Man, २०२६) – मुख्य फिल्म जिसमें वे डॉक्टर-टर्न्ड-मेके पायलट की भूमिका में हैं।
* '''डायमंड मेड मैन पार्ट १''' – फिल्म का प्रथम भाग।
* '''डायमंड मेड मैन पार्ट २''' (Diamond Made Man Part 2, २०२६) – सीक्वल जिसमें डॉ. श्रीहरि गोल्डन मेके रोबोट पायलट करते हैं, एलियन प्रेम कहानी और एस्टेरॉइड पर राक्षस डकोडा से युद्ध।
* '''ए मैन मेड ऑफ डायमंड्स''' (A Man Made of Diamonds) – वैकल्पिक/संबंधित शीर्षक।
ये फिल्में एक्शन, एडवेंचर, साइंस-फिक्शन और क्रिएचर-फीचर विधाओं में आती हैं।
== कई देशों और भाषाओं में रिलीज हुई फिल्में ==
'''डायमंड मेड मैन''' श्रृंखला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिलीज और उपलब्धता के लिए सूचीबद्ध किया गया है। JustWatch पर भारत, अमेरिका, चेक गणराज्य, फ्रांस आदि देशों के पेज मौजूद हैं। Reelgood (UK सहित), Plex, TMDb, Box Office Mojo, Kinobox.cz, Kinoafisha.info, Kino-teatr.ru (रूसी), MyMovies.dk, Simkl, ArchivTV.cz, Kinomania.ru और कई अन्य यूरोपीय व एशियाई साइट्स पर फिल्म की जानकारी उपलब्ध है।
IMDb, BoxOfficeMojo और TMDb पर वैश्विक रिलीज डेटा, क्रेडिट्स और तकनीकी जानकारी दी गई है। फिल्म को अंग्रेज़ी में हॉलीवुड स्टाइल में बनाया गया है, लेकिन विभिन्न देशों के डेटाबेस और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर इसकी उपलब्धता दिखाती है कि यह मल्टी-कंट्री डिस्ट्रीब्यूशन वाला प्रोजेक्ट है।
== योग्यता : एमबीबीएस ==
डॉ. ई. श्रीहरि एक योग्य चिकित्सक हैं जिन्होंने '''एमबीबीएस''' की डिग्री प्राप्त की है। उन्हें प्रचार सामग्री और सोशल मीडिया पोस्ट्स में '''डॉक्टर ई. श्रीहरि एमबीबीएस''' के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। वे एक डॉक्टर से अभिनेता और एक्शन हीरो बनने की अनूठी यात्रा के प्रतीक हैं।
== परिवार ==
डॉ. ई. श्रीहरि के परिवार के बारे में उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनके '''पिता''' एक वकील और प्रसिद्ध राजनेता हैं। उनकी '''माता''' एक गृहिणी हैं। उनके '''भाई राजा शेखर''' एक फिल्म निर्देशक हैं।
== अन्य जानकारी ==
गूगल सर्च और विभिन्न डेटाबेस से प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉ. ई. श्रीहरि की फिल्में Sampreeth Productions के तहत बन रही हैं। यूट्यूब चैनल S CP और इंस्टाग्राम/फेसबुक अकाउंट्स पर उनके एक्शन क्लिप्स, टीजर और प्रमोशनल वीडियो उपलब्ध हैं। TMDb पर उनकी पर्सन पेज मौजूद है। IMDb पर टाइटल tt39674832 और tt43438442 के तहत पूर्ण क्रेडिट्स, प्लॉट समरी, रिलीज इन्फो और टेक्निकल स्पेसिफिकेशंस उपलब्ध हैं।
अन्य साइट्स जैसे AltBollywood.com, Dresreehari Substack, Trailer.best, ScreenDollars, Kinomania.ru, MovieFone, Trakt.tv, Letterboxd और कई अन्य एग्रीगेटर्स पर फिल्म की लिस्टिंग है। फिल्म को २०२६ की प्रमुख रिलीज के रूप में देखा जा रहा है।
== सन्दर्भ ==
<references>
<ref name="imdb1">[https://www.imdb.com/title/tt39674832/ IMDb - Diamond Made Man]</ref>
<ref name="imdb2">[https://www.imdb.com/title/tt43438442/ IMDb - Diamond Made Man Part 2]</ref>
<ref name="tmdb">[https://www.themoviedb.org/person/6269057 Dr E.Sreehari - TMDb]</ref>
<ref name="justwatch">[https://www.justwatch.com/in/movie/diamond-made-man JustWatch - Diamond Made Man]</ref>
<ref name="boxoffice">[https://www.boxofficemojo.com/title/tt39674832/ Box Office Mojo]</ref>
<ref name="youtube1">[https://www.youtube.com/watch?v=FzwfHsgjth0 YouTube Promo - Dr E.Sreehari MBBS]</ref>
<ref name="letterboxd">[https://letterboxd.com/film/diamond-made-man-part-2/ Letterboxd - Part 2]</ref>
<ref name="plex">[https://watch.plex.tv/movie/diamond-made-man-part-2 Plex]</ref>
<ref name="altbollywood">[https://www.altbollywood.com/post/diamond-made-man-ending-explained-sreehari AltBollywood]</ref>
<ref name="substack">[https://dresreehari.substack.com/p/hollywood-english-movie-diamond-made Substack - Dr E.Sreehari]</ref>
</references>
<!-- अतिरिक्त स्रोत (५०+ कुल) -->
* [https://www.imdb.com/title/tt39674832/fullcredits/ IMDb Full Credits]
* [https://www.imdb.com/title/tt39674832/plotsummary/ IMDb Plot Summary]
* [https://www.themoviedb.org/movie/1241355-diamond-made-man TMDb Movie Page]
* [https://www.justwatch.com/us/movie/diamond-made-man-part-2 JustWatch Part 2 (US)]
* [https://reelgood.com/movie/diamond-made-man Reelgood]
* [https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movie-details/diamond-made-man/movieshow/128876648.cms Times of India]
* [https://www.kinobox.cz/film/5520390-diamond-made-man Kinobox]
* [https://www.kinoafisha.info/en/movies/8385795/ Kinoafisha]
* [https://www.trailer.best/movie/diamond-made-man-2026/ Trailer.best]
* [https://screendollars.com/movies/2026/ ScreenDollars]
* [https://www.kinomania.ru/movies/diamond-made-man Kinomania]
* [https://app.trakt.tv/movies/diamond-made-man-2026 Trakt]
* [https://www.moviefone.com/movie/diamond-made-man/UNjhqFmzALgjT1obd4nM51/main/ Moviefone]
* [https://filmfan.pl/film/diamond-made-man-2026 Filmfan]
* [https://flickfocus.com/movies/diamond-made-man FlickFocus]
* [https://www.moviebox.com/diamond-made-man/ Moviebox]
* [https://www.moviemeter.com/movies/action/diamond-made-man Moviemeter]
* और ३५+ अन्य स्रोत (JustWatch CZ/FR, Kino-teatr.ru, MyMovies.dk, Simkl, ArchivTV.cz, Mouthshut, Comicbasics, TV-API, Kinobaza, Acmodasi, Moviepilot, Cub.red, New-alphamovie, Midloop, Movie-power, Shadowsonthewall, Kurdcinama, IA Archive, Reddit, Bestmoviesguide आदि)।
[[श्रेणी:हॉलीवुड अभिनेता]]
[[श्रेणी:भारतीय अभिनेता]]
[[श्रेणी:साइंस फिक्शन फिल्म अभिनेता]]
[[श्रेणी:२०२६ की फिल्में]]
k85m9xil33084pnqwhj3t457ly6iwm5
वार्ता:श्यामाकांत तिवारी
1
1616221
6591470
6590824
2026-07-24T05:22:01Z
Great people stories
900088
/* शीघ्र हटाने पर चर्चा */ नया अनुभाग
6591470
wikitext
text/x-wiki
== शीघ्र हटाने पर चर्चा ==
इस पृष्ठ को शीघ्र नहीं हटाया जाना चाहिये क्योंकि... (ये पृष्ठ पहले भी था लेकिन किसी कारणवश हट गया था और ये व्यक्ति एक मशहूर चेहरा है) --[[सदस्य:Great people stories|Great people stories]] ([[सदस्य वार्ता:Great people stories|वार्ता]]) 13:24, 20 जुलाई 2026 (UTC)
== शीघ्र हटाने पर चर्चा ==
इस पृष्ठ को शीघ्र नहीं हटाया जाना चाहिये क्योंकि... (ये पृष्ठ एक नामी व्यक्ति पे आधारित है) --[[सदस्य:Great people stories|Great people stories]] ([[सदस्य वार्ता:Great people stories|वार्ता]]) 05:22, 24 जुलाई 2026 (UTC)
ji35y2oyn2qhq1b1h4gwykf40gv5053
सदस्य वार्ता:Bharat Gautam Shivam
3
1616230
6591461
6590969
2026-07-24T03:23:10Z
SM7
89247
शीघ्र हटाने का अनुरोध ( मापदंड:[[वि:शीह#स3|शीह स3]])
6591461
wikitext
text/x-wiki
{{db-notwebhost}}
== भारत सरकार द्वारा भ्रष्टाचार ==
राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक डायरेक्टर
शिवम् मिश्रा राष्ट्र भारत [[विशेष:योगदान/~2026-40590-00|~2026-40590-00]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-40590-00|वार्ता]]) 06:46, 21 जुलाई 2026 (UTC)
== भ्रष्टाचार के खिलाफ सभी को एकजुट होकर लड़ना होगा ==
"भ्रष्टाचार केवल धन की चोरी नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य की चोरी है।"
भ्रष्टाचार वह ज़हर है जो किसी भी राष्ट्र की आत्मा को भीतर से खोखला कर देता है। यह केवल रिश्वत लेने या देने तक सीमित नहीं है, बल्कि ईमानदारी, न्याय और नैतिकता का हनन भी है। जब किसी योग्य व्यक्ति का अधिकार धन या सिफारिश के बल पर छीन लिया जाता है, तब केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे समाज का विश्वास टूटता है।
जिस देश में भ्रष्टाचार बढ़ता है, वहाँ प्रतिभा दम तोड़ देती है, न्याय बिकने लगता है, विकास रुक जाता है और आम नागरिक का शासन से विश्वास समाप्त होने लगता है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और न्याय जैसी मूलभूत व्यवस्थाएँ भी इसकी चपेट में आ जाती हैं।
भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। यदि हम स्वयं ईमानदारी अपनाएँ, रिश्वत देने से इनकार करें, गलत कार्यों का विरोध करें और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें, तो समाज में बड़ा परिवर्तन संभव है।
याद रखिए—
"ईमानदार व्यक्ति अकेला हो सकता है, पर पराजित नहीं।
भ्रष्ट व्यक्ति शक्तिशाली दिख सकता है, पर सम्मानित कभी नहीं।"
आइए, हम संकल्प लें—
"न रिश्वत देंगे, न रिश्वत लेंगे।
न अन्याय सहेंगे, न अन्याय होने देंगे।
ईमानदारी को अपनी पहचान बनाएँगे और भारत को भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने में अपना योगदान देंगे।"
"जब चरित्र मजबूत होगा, तभी राष्ट्र मजबूत होगा;
और जब भ्रष्टाचार समाप्त होगा, तभी सच्चे अर्थों में भारत का स्वर्णिम भविष्य निर्मित होगा।" [[विशेष:योगदान/~2026-40590-00|~2026-40590-00]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-40590-00|वार्ता]]) 07:02, 21 जुलाई 2026 (UTC)
36pueml70b35wzf5ly6evvmiurzdhdc
सदस्य वार्ता:Xndrag
3
1616243
6591457
6591072
2026-07-24T03:18:28Z
SM7
89247
सूचना: [[:डॉ. ई. श्रीहरि]] को [[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु]] नामांकन, [[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/डॉ. ई. श्रीहरि|चर्चा पृष्ठ देखें]]
6591457
wikitext
text/x-wiki
{{साँचा:सहायता|name=Xndrag}} -- [[सदस्य:Sanjeev bot|Sanjeev bot]] ([[सदस्य वार्ता:Sanjeev bot|वार्ता]]) 00:00, 22 जुलाई 2026 (UTC)
== [[:डॉ. ई. श्रीहरि|डॉ. ई. श्रीहरि]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:डॉ. ई. श्रीहरि|डॉ. ई. श्रीहरि]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/डॉ. ई. श्रीहरि|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/डॉ. ई. श्रीहरि]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
<center>प्रचारात्मक लेख। मशीन द्वारा लिखित। साथ ही इससे संबंधित मुख्य लेख (''[[डायमंड मेड मैन]]'') भी इसी चर्चा में हटाने हेतु जोड़ा जा रहा। यह लेख भी मशीन निर्मित या अनूदित है। उल्लेखनीय है अथवा नहीं यह स्पष्ट नहीं। यदि फिल्म का लेख उल्लेखनीय साबित होता है तो इस शीर्षक, ''डॉ. ई. श्रीहरि'' को उसपर पुनर्प्रेषित किया जा सकता है, अलग से लेख की ज़रूरत नहीं प्रतीत होती।</center>
कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 03:18, 24 जुलाई 2026 (UTC)
bu6p50mdsn4mq7ziucjxcvyl1alc9t9
युसुफ अली ख़ान बहादुर
0
1616277
6591342
6591319
2026-07-23T14:16:22Z
Mundhalia746
934684
6591342
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox royalty
| name = यूसुफ़ अली ख़ान
| title =[[रामपुर रियासत]] के [[नवाब]]
| image = The procession of Yusef Ali Khan.jpg
| caption = यूसुफ़ अली ख़ान
| reign = 1855–1865
| full name = मुहम्मद यूसुफ़ अली ख़ान बहादुर
| predecessor = [[मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर]]
| successor = [[कल्ब अली ख़ान वहादूर|कल्ब अली ख़ान बहादुर]]
| house = रामपुर
| dynasty = [[रोहिल्ला वंश]]
| father = [[मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर]]
| birth_date = {{birth date|1816|03|05|df=yes}}
| birth_place = [[रामपुर]], [[उत्तर प्रदेश]]
| death_date = {{death date and age|1865|04|21|1816|03|05|df=yes}}
| death_place = [[रामपुर]], [[उत्तर प्रदेश]]
| burial_place = [[रामपुर]]
|}}
नवाब मुहम्मद यूसुफ़ अली ख़ान बहादुर, जिनका जन्म 1816 में हुआ था , 1855 से 1865 तक [[रामपुर रियासत]] के नवाब थे। 1857 के भारतीय विद्रोह के दौरान उन्होंने ब्रिटिश सेना की मदद की , कई अंग्रेज़ों को बचाया और [[मुरादाबाद]] नगर की सुरक्षा सुनिश्चित करके [[ईस्ट इण्डिया कम्पनी|ईस्ट इंडिया कंपनी]] को अनेक महत्वपूर्ण सेवाएँ प्रदान कीं।
उनकी सेवाओं के पुरस्कारस्वरूप भारत के वायसराय [[लॉर्ड कैनिंग]] ने उन्हें [[बरेली जिला|बरेली]] में जागीरें दी । 1861 में उन्हें नाइट की उपाधि से सम्मानित किया गया तथा "हिज़ हाइनेस" की उपाधि के साथ 13 तोपों की सलामी प्रदान की गई। 1861 में नवाब यूसुफ़ अली ख़ान बहादुर को महामहिम स्वर्गीय [[विक्टोरिया|महारानी विक्टोरिया]] द्वारा 'द मोस्ट एमिनेंट ऑर्डर ऑफ़ द स्टार ऑफ़ इंडिया' का 'नाइट कमांडर' बनाया गया, और अगले वर्ष उन्हें वाइसरॉय लॉर्ड एल्गिन की परिषद के अतिरिक्त सदस्य के रूप में भी नियुक्त किया गया।<ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/dli.ministry.08773|title=Uttar Pradesh District Gazetteers: Rampur|last=Amar Singh Baghel|date=1975|publisher=Lucknow, Department of District Gazetteers}}</ref>
नवाब यूसुफ़ ने [[मुग़ल साम्राज्य|मुग़ल]] कला परंपरा को बनाए रखा और [[बहादुर शाह ज़फ़र|बहादुर शाह ज़फ़र द्वितीय]] के दरबार के संगीतकारों, विद्वानों और कलाकारों—जिनमें महान शायर [[मिर्ज़ा ग़ालिब|ग़ालिब]] भी शामिल थे—को [[रामपुर, उत्तर प्रदेश|रामपुर]] में बसने के लिए आमंत्रित किया । उनका बेटा [[कल्ब अली ख़ान वहादूर|कल्ब अली ख़ान बहादुर]] उनका उत्तराधिकारी बना।
== सन्दर्भ ==
<references />
dfcokt9yfrg5piukwoiu1t2v1h5csme
निकाह मुताह
0
1616279
6591479
6591320
2026-07-24T06:00:51Z
Umarkairanvi
13754
सफाई
6591479
wikitext
text/x-wiki
{{फ़िक़ह|family}}'''''निकाह मुताह''''': एक निजी और मौखिक अस्थायी [[विवाह]] अनुबंध है जो [[द्वादशी शिया|द्वादशी शिया इस्लाम]] (इस्ना अशरिया: बारह इमामों को मानने वाले शिया) <ref>{{Cite news|url=https://www.bbc.com/news/uk-22354201|title=I do, for now anyway|last=Mahmood|first=Shabnam|date=13 May 2013|work=BBC News|last2=Nye|first2=Catrin}}</ref> में प्रचलित है जिसमें विवाह की अवधि और ''[[महर|महर को]]'' पहले से निर्दिष्ट और सहमत होना चाहिए। {{Rp|242}}<ref name=>Pohl F. [https://books.google.com/books?id=n4Eye4ilLVkC&dq=Mutah&pg=PA50 "Muslim world: modern muslim societies."] Marshall Cavendish, 2010. {{ISBN|0761479279}}, 1780761479277 Accessed at Google Books 15 March 2014.</ref> {{Rp|47–53}}यह मौखिक या लिखित रूप में किया गया एक निजी अनुबंध है। [[निकाह|इस्लाम में विवाह]] के अन्य रूपों की तरह ही विवाह करने के इरादे की घोषणा और शर्तों की स्वीकृति आवश्यक है। <ref>{{Cite news|url=https://www.bbc.com/news/uk-22354201|title=I do... for now. UK Muslims revive temporary marriages|date=13 May 2013|work=BBC News|access-date=21 July 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180722123210/https://www.bbc.com/news/uk-22354201|archive-date=22 July 2018}}</ref> [[ज़ैदी|जैदी]] शिया ''मुताह'' विवाह को अस्वीकार करते हैं।<ref name="OxfordIslamDictionary">Esposito J. [https://books.google.com/books?id=6VeCWQfVNjkC&dq=Mutah&pg=PA221 "The Oxford Dictionary of Islam."] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20151125222714/https://books.google.com/books?id=6VeCWQfVNjkC&pg=PA221&dq=Mutah&hl=en&sa=X&ei=QVhdUaPxDcjRrQeW54AY&ved=0CEoQ6AEwBjge#v=onepage&q=Mutah&f=false|date=25 November 2015}} Oxford University Press 2003 p221 Accessed 15 March 2014.</ref> <ref>{{Cite news|url=https://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2007/01/19/AR2007011901850.html|title=Temporary 'Enjoyment Marriages' in Vogue Again with Some Iraqis|work=[[The Washington Post]]|access-date=6 September 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170303015306/http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2007/01/19/AR2007011901850.html|archive-date=3 March 2017}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.hindwi.org/hindi-dictionary/meaning-of-mutaah|title=मुताह के हिंदी अर्थ {{!}} mutaah meaning in Hindi {{!}} हिन्दवी|website=Hindwi|language=hi|access-date=2026-07-23}}</ref>
अस्थायी विवाह की अवधि भिन्न-भिन्न होती है और यह एक घंटे जितनी कम या निन्यानवे वर्ष जितनी लंबी हो सकती है। परंपरागत रूप से, अस्थायी विवाह में गवाहों या पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होती है हालांकि गवाहों को लेना अनुशंसित है। <ref>{{Cite web|url=https://iranicaonline.org/articles/mota|title=Welcome to Encyclopaedia Iranica}}</ref> ''[[ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ऑफ इस्लाम]]'' इंगित करता है कि विवाह की न्यूनतम अवधि विवादास्पद है और कम से कम तीन दिन<ref>{{Cite web|url=https://hadeethenc.com/hi/browse/hadith/58075|title=हदीस: अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने औतास युद्ध के साल तीन दिनों के लिए मुतआ़ की अनुमति दी और फिर उससे मना कर दिया।)|website=नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की अनुवादित हदीसों का विश्वकोश|language=hi|access-date=2026-07-23}}</ref>, तीन महीने या एक वर्ष की अवधि का सुझाव दिया गया है। <ref name=>Esposito J. [https://books.google.com/books?id=6VeCWQfVNjkC&dq=Mutah&pg=PA221 "The Oxford Dictionary of Islam."] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20151125222714/https://books.google.com/books?id=6VeCWQfVNjkC&pg=PA221&dq=Mutah&hl=en&sa=X&ei=QVhdUaPxDcjRrQeW54AY&ved=0CEoQ6AEwBjge#v=onepage&q=Mutah&f=false|date=25 November 2015}} Oxford University Press 2003 p221 Accessed 15 March 2014.</ref>
कुछ लोग इस रिश्ते को पश्चिम में पुरुषों और महिलाओं के बीच मुक्त संबंध की तुलना में एक अधिक नियमित प्रकार के परीक्षण विवाह के रूप में प्रस्तुत करते हैं। <ref>{{Cite web|url=https://iranicaonline.org/articles/mota|title=Welcome to Encyclopaedia Iranica}}</ref>
[[सुन्नी इस्लाम|सुन्नी]] और [[शिया इस्लाम|शिया]] इस बात पर सहमत हैं कि यह विवाह [[इस्लाम से पहले का अरब|इस्लाम-पूर्व अरबी]] परंपरा है और [[कुरआन]] द्वारा निषिद्ध नहीं है। शियाओं के अनुसार, इस परंपरा को [[मुहम्मद]] ने स्वीकृति दी थी और उनके जीवनकाल में मुसलमानों में यह जारी रही। सुन्नियों के अनुसार, यद्यपि इस प्रथा को शुरुआत में मुहम्मद ने स्वीकृति दी थी बाद में उन्होंने इसे प्रतिबंधित कर दिया था। दोनों पक्ष इस प्रतिबंध में [[उमर|खलीफा उमर]] की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हैं। इस विषय पर संदर्भित कुरआन 4:24<ref>{{Cite web|url=https://tanzil.net/#trans/hi.farooq/4:24|title=Tanzil - Quran Navigator {{!}} القرآن الكريم|website=tanzil.net|access-date=2026-07-23}}</ref> के अनुवाद अलग-अलग व्याख्याओं को उजागर करते हैं। (देखें: मुताह और इमरान इब्न हुसैन की हदीस )
कुछ मुस्लिम और [[पश्चिमी विश्व|पश्चिमी]] विद्वानों ने कहा है कि निकाह मुताह <ref name=>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=LaV-IGZ8VKIC&q=mutah%2520prostitution&pg=PA647|title=Medieval Islamic Civilization: L-Z, index|last=Meri|first=Josef W.|last2=Bacharach|first2=Jere L.|date=1 January 2006|publisher=Taylor & Francis|isbn=9780415966924|language=en}}</ref> और निकाह मिस्यार <ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=n4Eye4ilLVkC&pg=PA52|title=Muslim World: Modern Muslim Societies|last=Pohl, Florian|date=1 September 2010|publisher=Marshall Cavendish|isbn=9780761479277|pages=52–53|access-date=5 April 2013}}</ref> दोनों ही इस्लामी तौर पर अमान्य प्रयास हैं जो [[वेश्यावृत्ति|वेश्यावृत्ति को]] धार्मिक मान्यता देने के लिए किए जाते हैं जबकि अन्यथा यह निषिद्ध है। <ref>{{Cite book|title=Islam: Islam, gender and family|last=Turner|first=Bryan S.|date=1 January 2003|publisher=Taylor & Francis US|isbn=9780415123501|pages=157|language=en}}</ref>
== पृष्ठभूमि ==
ऐतिहासिक रूप से पूर्ण विवाह के विपरीत, विभिन्न उद्देश्यों के लिए कई प्रकार के विवाह प्रचलित थे; ''मुताह'' में पति-पत्नी के कुछ अधिकार निहित होते हैं। इसका उपयोग मुख्य रूप से उन लोगों द्वारा किया जाता था जो अपनी पत्नी के साथ घर पर नहीं रह सकते थे और बहुत यात्रा करते थे। उदाहरण के लिए, एक व्यापारी किसी शहर में आकर कुछ महीनों तक रह सकता है इस दौरान वह किसी तलाकशुदा या विधवा महिला से विवाह कर सकता है और वे एक-दूसरे की देखभाल कर सकते हैं। जब उसे अगले शहर के लिए रवाना होना पड़ता है तो विवाह समाप्त हो जाता है और वह अपने अगले स्थान पर मुताह अनुबंध पर हस्ताक्षर कर सकता है। आधुनिक समय में, तेज़ यात्रा की उपलब्धता के कारण ऐसी प्रथा अप्रचलित मानी जाती है और मुख्य रूप से [[ईरान]] और [[शिया इस्लाम|शिया]] क्षेत्रों में यौन सुख के लिए [[हलाल]] डेटिंग के साधन के रूप में प्रचलित है। <ref>{{Cite news|url=https://www.theguardian.com/world/2007/jun/04/iran.roberttait|title=Iranian minister backs temporary marriage to relieve lust of youth|last=Tait|first=Robert|date=2007-06-04|work=The Guardian|access-date=2020-01-16|language=en-GB|issn=0261-3077}}</ref>
''मुताह'' जिसका शाब्दिक अर्थ ''आनंद'' है, एक ऐसी स्थिति है जिसमें [[इस्लाम]] के नियमों में ढील दी जाती है। यह विवाह ( ''निकाह मुताह'' ) या ''[[हज]]'' (अनिवार्य [[तीर्थ|तीर्थयात्रा]] ) ( ''हज का मुताह'' ) पर लागू हो सकता है। मुताह की वैधता पर अधिकांश [[सुन्नी इस्लाम|सुन्नी]] विद्वानों में विवाद है, जो तर्क देते हैं कि मुहम्मद ने इस प्रथा को प्रतिबंधित कर दिया था। दूसरी ओर, [[द्वादशी शिया|बारह पैगंबरों के अनुयायी शिया]] विद्वान दावा करते हैं कि मुताह को मुहम्मद द्वारा मान्यता दी गई थी, लेकिन दूसरे [[उमर|खलीफा उमर]] ने इसे प्रतिबंधित कर दिया था। उमर द्वारा इसे समाप्त करने को कई विद्वान हलकों में स्वीकार नहीं किया गया और इमरान बिन हुसैन, [[इब्न अब्बास]], साथ ही उमर के बेटे [[अब्दुल्ला इब्न उमर|अब्दुल्ला बिन उमर]] जैसे प्रमुख [[सहाबा|साथियों ने]] इसका कड़ा विरोध किया। <ref name=>Berg H. [https://books.google.com/books?id=SxPyHsFzNMIC&q=Mutah+of+marriage&pg=PA165 "Method and theory in the study of Islamic origins"]. Brill 2003 {{ISBN|9004126023}}[[ISBN (identifier)|ISBN]] [[Special:BookSources/9004126023|<bdi>9004126023</bdi>]]. Accessed at Google Books 15 March 2014. pp. 167-171,176</ref> शिया और सुन्नी दोनों इस बात पर सहमत हैं कि शुरुआत में या इस्लाम के आरंभ के निकट, निकाह मुताह एक कानूनी अनुबंध था। <ref name=>Pohl F. [https://books.google.com/books?id=n4Eye4ilLVkC&dq=Mutah&pg=PA50 "Muslim world: modern muslim societies."] Marshall Cavendish, 2010. {{ISBN|0761479279}}[[ISBN (identifier)|ISBN]] [[Special:BookSources/0761479279|<bdi>0761479279</bdi>]], 1780761479277 Accessed at Google Books 15 March 2014.</ref>
प्रमुख साथी और [[ख़िलाफ़त|खलीफा]] [[अब्दुल्ला इब्न अल-ज़ुबैर|अब्द अल्लाह इब्न अल-जुबैर का]] जन्म [[ज़ुबैर इब्न अल-अवाम|जुबैर इब्न अल-अव्वम]] और अस्मा बिन्त अबी बक्र के बीच निकाह मुताह से हुआ था। <ref>{{Cite book|title=Sharh Ibn Abi al-Hadid|volume=4|pages=489–490}}</ref> <ref name=>{{Cite book|title=al-Muhadhiraat|last=Al-Raghib al-Isfahani|volume=2|page=96|author-link=Al-Raghib al-Isfahani}}</ref> <ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=3JUXAAAAIAAJ|title=The Shia Origin and Faith|last=al-Ghiṭā|first=Muḥammad al-Ḥusayn Āl Kāshif|date=1982|publisher=Islamic Seminary|pages=210–211|language=en}}</ref> अल-रागिब अल-इस्फ़हानी के अनुसार, अबू दाऊद अल-तयालिसी, और क़ाज़ी सनाउल्लाह पानीपति, ''मुताह'' से पैदा हुए प्रमुख विद्वान व्यक्तित्व थे।
== धार्मिक दृष्टिकोण ==
=== ट्वेल्वर शिया ===
[[द्वादशी शिया]] '''कानून''' के अनुसार, मुताह के लिए कुछ शर्तें हैं: दुल्हन शादीशुदा नहीं होनी चाहिए; अगर उसकी पहले कभी शादी नहीं हुई है तो उसे अपने 'वली' (इस्लामिक कानूनी संरक्षक) से इजाज़त लेनी होगी; उसे मुस्लिम या 'अहल-अल-किताब' (किताब वाले लोग, जैसे ईसाई या यहूदी) से होना चाहिए; उसे पवित्र (चरित्रवान) होना चाहिए और वह व्यभिचारी (बदचलन) नहीं होनी चाहिए; और वह ऐसा तभी अकेले कर सकती है जब वह इस्लामी नज़रिए से 'गैर-कुंवारी' (पहले शादीशुदा) हो या उसका कोई 'वली' न हो। [स्रोत की ज़रूरत है] कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने पर शादी भी खत्म हो जाती है और पत्नी को 'इद्दत' का पालन करना होता है, जो शादी (और इसलिए, यौन संबंध) से दूर रहने की अवधि है। 'इद्दत' का मकसद यह पक्का करना है कि अगर अस्थायी शादी के कॉन्ट्रैक्ट के दौरान पत्नी गर्भवती हो जाती है, तो बच्चे के पिता के बारे में कोई शक न रहे। [1][2] ट्वेल्वर शिया मुताह पर अपने पक्ष के समर्थन में कुरान, हदीस (धार्मिक बयान), इतिहास और नैतिक आधारों पर तर्क देते हैं। [3]
=== सुन्नी ===
सहीह मुस्लिम 1407 में पाई जाने वाली प्रामाणिक हदीस में, [[अली इब्न अबी तालिब|अली]] ने स्वयं [[इब्न अब्बास|इब्न अब्बास को]] निकाह मुतअह के संबंध में सही किया है कि पैगंबर मुहम्मद ने खैबर के दिन इसे हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया था।
{{Quote|text='अली (अल्लाह उनसे खुश हो) ने सुना कि इब्न अब्बास (अल्लाह उनसे खुश हो) ने अस्थायी शादी (मुतआ) के मामले में कुछ ढील दी है, तो उन्होंने कहा:
इब्न अब्बास, (अपने धार्मिक फ़ैसले में) जल्दबाज़ी न करें, क्योंकि अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने खैबर के दिन इसे हमेशा के लिए मना कर दिया था - साथ ही घरेलू गधों का मांस खाने को भी।|author=[[सहीह मुस्लिम]] 1407}}
अली ने [[सहीह अल-बुख़ारी|सहीह अल-बुखारी]] 4216 में यह भी बयान किया है कि पैगंबर मुहम्मद ने खैबर में इसे मना किया था।
{{Quote|text=अली बिन अबी तालिब ने बताया:
खैबर के दिन, अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने मुतआ (यानी कुछ समय के लिए शादी) और गधे का मांस खाने से मना किया।|author=सहीह अल-बुखारी 4216}}
इन कथनों (और इसे मना करने वाले कई अन्य कथनों) के कारण, सभी सुन्नी विद्वान इसे क़यामत के दिन तक निषिद्ध मानते हैं, और जो कोई इसे निषिद्ध नहीं मानता है, उसने या तो इस विषय पर प्रामाणिक हदीस नहीं सुनी है या वह अपनी इच्छाओं और लालसाओं का पालन कर रहा है और [[क़ुरआन|कुरआन]] की व्याख्याओं को तोड़-मरोड़ रहा है। <ref name=>{{Cite web|url=https://islamqa.info/en/answers/20738/is-mutah-marriage-allowed|title=Is Mutah Marriage Allowed? - Islam Question & Answer|website=islamqa.info|language=en|access-date=12 September 2024}}</ref>
कुरआन की आयत 4:24 के संबंध में, [[सुन्नी इस्लाम|सुन्नी]] कहते हैं कि यह [[आयत (क़ुरआन)|आयत]] मुतअह विवाह के संदर्भ में नहीं है और यह एक गलत व्याख्या है (जानबूझकर या अनजाने में)। बल्कि यह केवल एक सामान्य, वैध निकाह के लिए शर्तें निर्धारित करती है। उनका प्रमाण यह है कि [[महर]] के लिए वही शब्द, अल-अज्र, कुरआन की एक अन्य आयत: [[अल-अहज़ाब]] 33:50 में प्रयोग किया गया है जो फिर से यह निर्धारित करता है कि महर एक वैध सामान्य विवाह अनुबंध के लिए एक शर्त है। <ref name="">{{Cite web|url=https://islamqa.info/en/answers/20738/is-mutah-marriage-allowed|title=Is Mutah Marriage Allowed? - Islam Question & Answer|website=islamqa.info|language=en|access-date=12 September 2024}}</ref> यदि शिया सही भी हों, तो तर्क के लिए, सूरत [[अन-निसा|अल-निसा]]' की आयत मुतअह विवाहों को इंगित करती है फिर भी इसे पैगंबर मुहम्मद द्वारा निरस्त कर दिया गया है जैसा कि इमाम अली ने स्वयं इब्न अब्बास को सुधारते समय बताया था।
सोलहवीं शताब्दी में [[मुग़ल साम्राज्य|मुगल साम्राज्य]] के तीसरे सम्राट [[अकबर]] के शासनकाल के दौरान, जिन्होंने [[दीन-ए-इलाही]] धर्म की शुरुआत की धार्मिक मामलों पर हर गुरुवार को साप्ताहिक बहस होती थी। ''निकाह मुताह'' पर चर्चा के दौरान, [[शिया इस्लाम|शिया]] धर्मशास्त्रियों ने तर्क दिया कि ऐतिहासिक सुन्नी विद्वान [[मालिक इब्न अनस|मलिक इब्न अनस ने]] इस प्रथा का समर्थन किया था। <ref name="ReligionScience">
Müller F. [https://books.google.com/books?id=GWMVhTxN1T0C&dq=Mutah&pg=PA223 "Introduction to the science of religion."] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20151018024217/https://books.google.com/books?id=GWMVhTxN1T0C&pg=PA223&dq=Mutah&hl=en&sa=X&ei=QVhdUaPxDcjRrQeW54AY&ved=0CDYQ6AEwAjge#v=onepage&q=Mutah&f=false|date=18 October 2015}} Kessinger Publishing 1882 p? reprint 1 December 2004.
{{ISBN|141797401X}}, 9781417974016
</ref> हालांकि मलिक की ''[[मुवत्ता इमाम मालिक]]'' (धार्मिक न्यायशास्त्र की पुस्तिका) से इसका कोई प्रमाण नहीं मिला। शिया धर्मशास्त्रियों का तर्क दृढ़ रहा और अकबर के शासनकाल में [[द्वादशी शिया|बारह ईश्वर मानने वाले शियाओं]] के लिए ''निकाह मुताह को'' वैध घोषित कर दिया गया।
[[जॉर्डन]] के सुन्नी अरब न्यायक्षेत्र के अनुसार; यदि ''निकाह मुताह'' अन्य सभी आवश्यकताओं को पूरा करता है तो इसे स्थायी विवाह की तरह माना जाता है (अर्थात अस्थायी शर्तें अमान्य और शून्य हैं)। <ref name="Pohl (2010)">Pohl F. [https://books.google.com/books?id=n4Eye4ilLVkC&dq=Mutah&pg=PA50 "Muslim world: modern muslim societies."] Marshall Cavendish, 2010. {{ISBN|0761479279}}[[ISBN (identifier)|ISBN]] [[Special:BookSources/0761479279|<bdi>0761479279</bdi>]], 1780761479277 Accessed at Google Books 15 March 2014.</ref><blockquote>''[[उम्मत|उम्माह]]'' में कई महान विद्वान हैं जो ''मुताह'' को निरस्त मानते हैं, जबकि अन्य कहते हैं कि ''मुताह'' अभी भी मौजूद है।</blockquote>
== इन्हें भी देखें ==
* [[आसुर विवाह]]
* [[राक्षस विवाह]]
* [[हज की मुताह]]
* [[निकाह हलाला]]
== संदर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:इस्लामी शब्दावली]]
[[श्रेणी:अरबी शब्द]]
[[श्रेणी:अरबी शब्द और वाक्यांश]]
[[श्रेणी:इस्लाम]]
[[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]]
[[श्रेणी:फ़िक़ह]]
hva3e37z6xodoythzen4fgyzvh6q9a8
मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर
0
1616281
6591329
2026-07-23T12:54:39Z
Mundhalia746
934684
नया पृष्ठ: {{Infobox royalty | name = यूसुफ़ अली ख़ान | title =[[रामपुर रियासत]] के [[नवाब]] | image = | caption = सैद ख़ान बहादुर | reign = 1840–1855 | full name = मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर | predecessor = [[अहमद अली खान बहादुर]] | successor = युसुफ अली ख़ा...
6591329
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox royalty
| name = यूसुफ़ अली ख़ान
| title =[[रामपुर रियासत]] के [[नवाब]]
| image =
| caption = सैद ख़ान बहादुर
| reign = 1840–1855
| full name = मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर
| predecessor = [[अहमद अली खान बहादुर]]
| successor = [[युसुफ अली ख़ान बहादुर]]
| house = रामपुर
| dynasty = [[रोहिल्ला वंश]]
| father = [[मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर]]
| birth_date = {{birth date|1786|05|19|df=yes}}
| birth_place = [[रामपुर]], [[उत्तर प्रदेश]]
| death_date = {{death date and age|1855|04|01|1786|05|19|df=yes}}
| death_place = [[रामपुर]], [[उत्तर प्रदेश]]
| burial_place = [[रामपुर]]
|}}
नवाब मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर का जन्म 1786 में हुआ था और वे अपने चचेरे भाई अहमद अली खान बहादुर के बाद 1840 से 1855 तक रामपुर के नवाब रहे। गुलाम मुहम्मद खान बहादुर के बेटे, मुहम्मद सईद ने अपनी शुरुआती ज़िंदगी ईस्ट इंडिया कंपनी की सेवा में बिताई और बाद में डुडैन के डिप्टी कलेक्टर के पद तक पहुँचे। मुहम्मद सईद एक दयालु और प्रगतिशील शासक साबित हुए। उन्होंने सिंचाई के काम करवाए और अदालतों और एक आधुनिक कानूनी व्यवस्था की शुरुआत की। मुहम्मद सईद का निधन 1 अप्रैल 1855 को 69 साल की उम्र में हुआ और उन्हें रामपुर में दफ़नाया गया। उनके बाद उनके सबसे बड़े बेटे, यूसुफ़ अली खान बहादुर ने शासन संभाला।
== सन्दर्भ ==
<references />
d0cskg7tqcml5a1bf049cyaet81ko0o
6591330
6591329
2026-07-23T12:56:25Z
Mundhalia746
934684
6591330
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox royalty
| name = यूसुफ़ अली ख़ान
| title =[[रामपुर रियासत]] के [[नवाब]]
| image =
| caption = सैद ख़ान बहादुर
| reign = 1840–1855
| full name = मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर
| predecessor = [[अहमद अली खान बहादुर]]
| successor = [[युसुफ अली ख़ान बहादुर]]
| house = रामपुर
| dynasty = [[रोहिल्ला वंश]]
| father = [[मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर]]
| birth_date = {{birth date|1786|05|19|df=yes}}
| birth_place = [[रामपुर]], [[उत्तर प्रदेश]]
| death_date = {{death date and age|1855|04|01|1786|05|19|df=yes}}
| death_place = [[रामपुर]], [[उत्तर प्रदेश]]
| burial_place = [[रामपुर]]
|}}
नवाब मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर का जन्म 1786 में हुआ था और वे अपने चचेरे भाई अहमद अली खान बहादुर के बाद 1840 से 1855 तक रामपुर के नवाब रहे। गुलाम मुहम्मद खान बहादुर के बेटे, मुहम्मद सईद ने अपनी शुरुआती ज़िंदगी ईस्ट इंडिया कंपनी की सेवा में बिताई और बाद में डुडैन के डिप्टी कलेक्टर के पद तक पहुँचे। मुहम्मद सईद एक दयालु और प्रगतिशील शासक साबित हुए। उन्होंने सिंचाई के काम करवाए और अदालतों और एक आधुनिक कानूनी व्यवस्था की शुरुआत की। मुहम्मद सईद का निधन 1 अप्रैल 1855 को 69 साल की उम्र में हुआ और उन्हें रामपुर में दफ़नाया गया। उनके बाद उनके सबसे बड़े बेटे, यूसुफ़ अली खान बहादुर ने शासन संभाला।<ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/dli.ministry.08773|title=Uttar Pradesh District Gazetteers: Rampur|last=Amar Singh Baghel|date=1975|publisher=Lucknow, Department of District Gazetteers}}</ref>
== सन्दर्भ ==
<references />
hmf6isu5gg5ps13zltmajr59yg8oxtn
6591331
6591330
2026-07-23T12:58:48Z
Mundhalia746
934684
6591331
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox royalty
| name = यूसुफ़ अली ख़ान
| title =[[रामपुर रियासत]] के [[नवाब]]
| image =
| caption = सैद ख़ान बहादुर
| reign = 1840–1855
| full name = मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर
| predecessor = [[अहमद अली खान बहादुर]]
| successor = [[युसुफ अली ख़ान बहादुर]]
| house = रामपुर
| dynasty = [[रोहिल्ला वंश]]
| father = [[मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर]]
| birth_date = {{birth date|1786|05|19|df=yes}}
| birth_place = [[रामपुर]], [[उत्तर प्रदेश]]
| death_date = {{death date and age|1855|04|01|1786|05|19|df=yes}}
| death_place = [[रामपुर]], [[उत्तर प्रदेश]]
| burial_place = [[रामपुर]]
|}}
नवाब मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर का जन्म 1786 में हुआ था और वे अपने चचेरे भाई अहमद अली खान बहादुर के बाद 1840 से 1855 तक [[रामपुर रियासत|रामपुर]] के नवाब रहे। गुलाम मुहम्मद खान बहादुर के बेटे, मुहम्मद सईद ने अपनी शुरुआती ज़िंदगी [[ईस्ट इण्डिया कम्पनी|ईस्ट इंडिया कंपनी]] की सेवा में बिताई और बाद में डुडैन के डिप्टी कलेक्टर के पद तक पहुँचे। मुहम्मद सईद एक दयालु और प्रगतिशील शासक साबित हुए। उन्होंने सिंचाई के काम करवाए और अदालतों और एक आधुनिक कानूनी व्यवस्था की शुरुआत की। मुहम्मद सईद का निधन 1 अप्रैल 1855 को 69 साल की उम्र में हुआ और उन्हें रामपुर में दफ़नाया गया। उनके बाद उनके सबसे बड़े बेटे, यूसुफ़ अली खान बहादुर ने शासन संभाला।<ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/dli.ministry.08773|title=Uttar Pradesh District Gazetteers: Rampur|last=Amar Singh Baghel|date=1975|publisher=Lucknow, Department of District Gazetteers}}</ref>
== सन्दर्भ ==
<references />
2bq49f0jl6o4c0z9lkxqp847usiu292
6591332
6591331
2026-07-23T13:01:45Z
Mundhalia746
934684
6591332
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox royalty
| name = यूसुफ़ अली ख़ान
| title =[[रामपुर रियासत]] के [[नवाब]]
| image =
| caption = सैद ख़ान बहादुर
| reign = 1840–1855
| full name = मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर
| predecessor = [[अहमद अली ख़ान बहादुर]]
| successor = [[युसुफ अली ख़ान बहादुर]]
| house = रामपुर
| dynasty = [[रोहिल्ला वंश]]
| father = [[मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर]]
| birth_date = {{birth date|1786|05|19|df=yes}}
| birth_place = [[रामपुर]], [[उत्तर प्रदेश]]
| death_date = {{death date and age|1855|04|01|1786|05|19|df=yes}}
| death_place = [[रामपुर]], [[उत्तर प्रदेश]]
| burial_place = [[रामपुर]]
|}}
नवाब मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर का जन्म 1786 में हुआ था और वे अपने चचेरे भाई [[अहमद अली ख़ान बहादुर]] के बाद 1840 से 1855 तक [[रामपुर रियासत|रामपुर]] के नवाब रहे। गुलाम मुहम्मद खान बहादुर के बेटे, मुहम्मद सईद ने अपनी शुरुआती ज़िंदगी [[ईस्ट इण्डिया कम्पनी|ईस्ट इंडिया कंपनी]] की सेवा में बिताई और बाद में डुडैन के डिप्टी कलेक्टर के पद तक पहुँचे। मुहम्मद सईद एक दयालु और प्रगतिशील शासक साबित हुए। उन्होंने सिंचाई के काम करवाए और अदालतों और एक आधुनिक कानूनी व्यवस्था की शुरुआत की। मुहम्मद सईद का निधन 1 अप्रैल 1855 को 69 साल की उम्र में हुआ और उन्हें रामपुर में दफ़नाया गया। उनके बाद उनके सबसे बड़े बेटे, [[युसुफ अली ख़ान बहादुर]] ने शासन संभाला।<ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/dli.ministry.08773|title=Uttar Pradesh District Gazetteers: Rampur|last=Amar Singh Baghel|date=1975|publisher=Lucknow, Department of District Gazetteers}}</ref>
== सन्दर्भ ==
<references />
o2psecvzil89lrip93ngs0ur9hp0rkv
6591343
6591332
2026-07-23T14:17:10Z
Mundhalia746
934684
6591343
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox royalty
| name = यूसुफ़ अली ख़ान
| title =[[रामपुर रियासत]] के [[नवाब]]
| image = Nawab Sayyid Muhammad Saeed Khan of Rampur.png
| caption = सैद ख़ान बहादुर
| reign = 1840–1855
| full name = मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर
| predecessor = [[अहमद अली ख़ान बहादुर]]
| successor = [[युसुफ अली ख़ान बहादुर]]
| house = रामपुर
| dynasty = [[रोहिल्ला वंश]]
| father = [[मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर]]
| birth_date = {{birth date|1786|05|19|df=yes}}
| birth_place = [[रामपुर]], [[उत्तर प्रदेश]]
| death_date = {{death date and age|1855|04|01|1786|05|19|df=yes}}
| death_place = [[रामपुर]], [[उत्तर प्रदेश]]
| burial_place = [[रामपुर]]
|}}
नवाब मुहम्मद सैद ख़ान बहादुर का जन्म 1786 में हुआ था और वे अपने चचेरे भाई [[अहमद अली ख़ान बहादुर]] के बाद 1840 से 1855 तक [[रामपुर रियासत|रामपुर]] के नवाब रहे। गुलाम मुहम्मद खान बहादुर के बेटे, मुहम्मद सईद ने अपनी शुरुआती ज़िंदगी [[ईस्ट इण्डिया कम्पनी|ईस्ट इंडिया कंपनी]] की सेवा में बिताई और बाद में डुडैन के डिप्टी कलेक्टर के पद तक पहुँचे। मुहम्मद सईद एक दयालु और प्रगतिशील शासक साबित हुए। उन्होंने सिंचाई के काम करवाए और अदालतों और एक आधुनिक कानूनी व्यवस्था की शुरुआत की। मुहम्मद सईद का निधन 1 अप्रैल 1855 को 69 साल की उम्र में हुआ और उन्हें रामपुर में दफ़नाया गया। उनके बाद उनके सबसे बड़े बेटे, [[युसुफ अली ख़ान बहादुर]] ने शासन संभाला।<ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/dli.ministry.08773|title=Uttar Pradesh District Gazetteers: Rampur|last=Amar Singh Baghel|date=1975|publisher=Lucknow, Department of District Gazetteers}}</ref>
== सन्दर्भ ==
<references />
92ybcfo88666xcc5j68ekewj38ajjw6
एसओएस हरमन माइनर स्कूल, फरीदाबाद
0
1616282
6591333
2026-07-23T13:21:05Z
EditorKelly
937817
नया लेख: एसओएस हरमन माइनर स्कूल, फरीदाबाद - अंग्रेजी विकिपीडिया से अनुवाद
6591333
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox school
| image = Sos_hermann_gmeiner.jpg
| caption = एसओएस हरमन माइनर स्कूल (सेक्टर-29)
| established = 1986
| type = निजी विद्यालय
| address = एसओएस एन्क्लेव, सेक्टर 29
| city = [[फरीदाबाद]]
| state = [[हरियाणा]]
| country = भारत
| coordinates = {{Coord|28.437|77.322|type:edu|display=inline,title}}
| faculty = पूर्णकालिक
| area = 8 एकड़
| colors = नीला
| affiliation = [[केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड]]
| website = {{URL|http://www.hgsfaridabad.org}}
}}
'''एसओएस हरमन माइनर स्कूल, फरीदाबाद''' [[हरियाणा]] के [[फरीदाबाद]] शहर में स्थित एक निजी सह-शिक्षा विद्यालय है। इसकी स्थापना 1986 में श्री जे.एन. कौल द्वारा की गई थी, जो उस समय [[एसओएस चिल्ड्रन्स विलेज]] (ऑस्ट्रिया स्थित एक संस्था) के अध्यक्ष थे।<ref>{{Cite web |title=Hermann Gmeiner School, Faridabad |url=https://www.pathtoschools.com/schdetail.php?id=30 |access-date=2025-06-11 |website=www.pathtoschools.com}}</ref><ref>{{Cite web |date=2024 |title=Education World - Search for Schools |url=https://www.educationworld.in/herman-gmeiner-school-faridabad/ |access-date=2025-06-11 |website=www.educationworld.in}}</ref> यह शहर के सबसे पुराने विद्यालयों में से एक है। इसका परिसर सेक्टर 29 में जिला पुलिस लाइन के पास स्थित है और इसे एक जर्मन वास्तुकार द्वारा डिज़ाइन किया गया था।<ref>{{Cite web |date=2024 |title=SOS Children's villages |url=https://www.soschildrensvillages.in/sos-childrens-village-faridabad/ |access-date=2025-06-11 |website=www.soschildrensvillages.in}}</ref>
यह विद्यालय [[केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड]] (सीबीएसई) से संबद्ध है और शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी है। एसओएस हरमन माइनर स्कूल की शाखाएँ भारत के लगभग सभी राज्यों और लगभग 180 देशों में हैं तथा अनाथ बच्चों को निःशुल्क शिक्षा और आवास प्रदान करती हैं। विद्यालय में व्यावसायिक शिक्षा और औद्योगिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है।
नवंबर 2021 में, एसओएस चिल्ड्रन्स विलेज इंटरनेशनल के अध्यक्ष ने विद्यालय का दौरा किया।<ref>{{Cite web |date=1 December 2021 |title=Endeavour to develop scientific temperament |url=https://toistudent.timesofindia.indiatimes.com/news/school-is-cool/endeavour-to-develop-scientific-temperament/71015.html |access-date=11 June 2025 |website=ToI Student - Times of India}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://www.hgsfaridabad.org आधिकारिक वेबसाइट]
[[श्रेणी:फरीदाबाद के विद्यालय]]
[[श्रेणी:हरियाणा के विद्यालय]]
[[श्रेणी:केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालय]]
[[श्रेणी:एसओएस चिल्ड्रन्स विलेज]]
{{हरियाणा-विद्यालय-आधार}}
he5is6sqt8wuxu4yjex8hwct3b63zm7
एसओएस हरमन माइनर स्कूल, भीमताल
0
1616283
6591334
2026-07-23T13:29:50Z
EditorKelly
937817
एसओएस हरमन माइनर स्कूल, भीमताल
6591334
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox school
| image =
| established = 1 जून 1984
| type = निजी आवासीय-सह-दिवसीय विद्यालय
| address = एसओएस चिल्ड्रन्स विलेज, भीमताल
| city = [[भीमताल]]
| state = [[उत्तराखण्ड]]
| country = भारत
| campus_size = 42 एकड़
| affiliation = [[केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड]]
| website = {{URL|http://hermanngmeinerschoolbhimtal.org}}
}}
'''एसओएस हरमन माइनर स्कूल, भीमताल''' [[उत्तराखण्ड]] के [[नैनीताल जिला|नैनीताल जिले]] के [[भीमताल]] में स्थित एक निजी सह-शिक्षा आवासीय-सह-दिवसीय विद्यालय है। इसकी स्थापना 1 जून 1984 को [[एसओएस चिल्ड्रन्स विलेज]] इंडिया द्वारा की गई थी।<ref>{{cite web |title=SOS Children's Village Bhimtal |url=https://www.soschildrensvillages.ca/india/sos-childrens-village-bhimtal |publisher=SOS Children's Villages Canada}}</ref><ref>{{cite web |title=SOS Children's Village Bhimtal |url=https://www.soschildrensvillages.in/sos-children-s-village-bhimtal/ |publisher=SOS Children's Villages India}}</ref><ref>{{cite web |title=Bhimtal village profile |url=https://www.sos-childrensvillages.org/where-we-help/asia/india/bhimtal |publisher=SOS Children's Villages International}}</ref> यह [[केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड]] (सीबीएसई) से संबद्ध है और प्राथमिक से वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक शिक्षा प्रदान करता है।
== इतिहास ==
विद्यालय की स्थापना 1 जून 1984 को एसओएस चिल्ड्रन्स विलेज इंडिया द्वारा की गई थी। 1994 में एक अलग प्राथमिक विद्यालय भवन जोड़ा गया, जो पूरे भारत से एसओएस चिल्ड्रन्स विलेज के सहकर्मियों के लिए प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी कार्य करता है।<ref>{{cite web |title=SOS Children's Village Bhimtal |url=https://www.soschildrensvillages.ca/india/sos-childrens-village-bhimtal |publisher=SOS Children's Villages Canada}}</ref> उत्तराखण्ड के राज्यपाल ने विद्यालय और एसओएस चिल्ड्रन्स विलेज का दौरा किया है।<ref>{{cite web |title=Governor interacts warmly with children of SOS Children's Village Bhimtal |url=https://governoruk.gov.in/02-06-2026governor-interacts-warmly-with-children-of-sos-childrens-village-bhimtal/ |publisher=Governor of Uttarakhand}}</ref>
== परिसर ==
विद्यालय एसओएस चिल्ड्रन्स विलेज भीमताल परिसर के भीतर स्थित है, जो भीमताल झील के ऊपर बसा है। परिसर लगभग 42 एकड़ में फैला है। यह एक आवासीय परिसर है जिसमें छात्रावास की सुविधा है। परिसर में एक एसओएस किंडरगार्टन भी है जो स्थानीय समुदाय के बच्चों के लिए खुला है। सुविधाओं में पुस्तकालय, विज्ञान प्रयोगशालाएँ, कंप्यूटर प्रयोगशालाएँ, भाषा प्रयोगशाला, संगीत कक्ष, नृत्य कक्ष, चित्रकला कक्ष, कार्यशालाएँ, व्यायामशाला और खेल सुविधाएँ शामिल हैं।<ref>{{cite web |title=SOS Children's Village Bhimtal |url=https://www.soschildrensvillages.ca/india/sos-childrens-village-bhimtal |publisher=SOS Children's Villages Canada}}</ref>
== शिक्षा ==
विद्यालय सीबीएसई पाठ्यक्रम का पालन करता है और शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी है। यह प्राथमिक से कक्षा 12 तक की शिक्षा प्रदान करता है तथा दिवसीय और आवासीय दोनों छात्रों के लिए खुला है।
== सुविधाएँ ==
विद्यालय में [[नीति आयोग]] की पहल के तहत एक [[अटल टिंकरिंग लैब]] स्थापित की गई है। इसे 2016-17 के राष्ट्रीय विस्तार के भाग के रूप में चुना गया था।<ref>{{cite web |title=Final 200 schools for Atal Tinkering Lab 2016-17 |url=https://aim.gov.in/pdf/Final-200-School-for-ATL-2016-17.pdf |publisher=NITI Aayog}}</ref> एसओएस चिल्ड्रन्स विलेज इंडिया ने उत्तराखण्ड सरकार के साथ राज्य भर में बाल कल्याण कार्यक्रमों को मजबूत करने के लिए साझेदारी की है।<ref>{{cite web |title=SOS Children's Villages India partners with Uttarakhand govt to strengthen child welfare programmes |url=https://thecsruniverse.com/articles/sos-children-s-villages-india-partners-with-uttarakhand-govt-to-strengthen-child-welfare-programmes |publisher=The CSR Universe}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://hermanngmeinerschoolbhimtal.org आधिकारिक वेबसाइट]
* [https://hermanngmeinereducationalinstitutions.org हरमन माइनर शैक्षिक संस्थान]
* [https://www.soschildrensvillages.in/sos-children-s-village-bhimtal/ एसओएस चिल्ड्रन्स विलेज भीमताल]
[[श्रेणी:उत्तराखण्ड के विद्यालय]]
[[श्रेणी:केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालय]]
[[श्रेणी:नैनीताल जिले में शिक्षा]]
[[श्रेणी:एसओएस चिल्ड्रन्स विलेज]]
[[श्रेणी:1984 में स्थापित शैक्षणिक संस्थान]]
[[श्रेणी:उत्तराखण्ड के आवासीय विद्यालय]]
{{उत्तराखण्ड-विद्यालय-आधार}}
qntx04at5fprih0ppw9gg9185etq35x
मोतीराम बाबूराम राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हल्द्वानी
0
1616284
6591341
2026-07-23T14:13:41Z
EditorKelly
937817
नया पृष्ठ: {{Infobox university | name = मोतीराम बाबूराम राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय | native_name = एमबीजीपीजी कॉलेज | image = | image_size = | caption = | established = {{start date|1960|07}} | type = सार्वजनिक / सरकारी | academic_affiliations = [[कुमाऊँ विश्वविद्यालय]] | principal = ड...
6591341
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox university
| name = मोतीराम बाबूराम राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय
| native_name = एमबीजीपीजी कॉलेज
| image =
| image_size =
| caption =
| established = {{start date|1960|07}}
| type = सार्वजनिक / सरकारी
| academic_affiliations = [[कुमाऊँ विश्वविद्यालय]]
| principal = डॉ. एन. एस. बनकोटी
| location = [[हल्द्वानी]], [[नैनीताल जिला|नैनीताल]], [[उत्तराखण्ड]], भारत
| campus = शहरी, 5 एकड़
| website = {{URL|https://mbgpgcollege.org/}}
| coordinates =
| students = 11,750–14,000
| faculty =
| staff =
| language =
| logo =
}}
'''मोतीराम बाबूराम राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हल्द्वानी''' (जिसे आमतौर पर '''एमबीजीपीजी कॉलेज''' या '''एमबीपीजी कॉलेज''' के नाम से जाना जाता है) [[उत्तराखण्ड]] के [[नैनीताल जिला|नैनीताल जिले]] में [[हल्द्वानी]] में स्थित एक राज्य-वित्तपोषित, सह-शिक्षा उच्च शिक्षण संस्थान है।<ref>[https://www.euttaranchal.com/colleges/mb-govt-pg-degree-college-haldwani.php Motiram Baburam Govt. Post Graduate College in Haldwani, Uttarakhand - eUttaranchal]</ref> शिवालिक तलहटी में स्थित यह संस्थान राज्य के सबसे बड़े शैक्षिक क्षेत्र की सेवा करता है, जो [[कुमाऊँ]] क्षेत्र के पचास से अधिक इंटरमीडिएट कॉलेजों से स्नातकों को आकर्षित करता है। [[नैनीताल]] के [[कुमाऊँ विश्वविद्यालय]] से संबद्ध और [[विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (भारत)|विश्वविद्यालय अनुदान आयोग]] (यूजीसी) द्वारा 1956 के यूजीसी अधिनियम की धारा 2(f) और 12(b) के तहत मान्यता प्राप्त, यह महाविद्यालय उत्तराखण्ड में स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट अध्ययन के लिए एक केंद्रीय केंद्र है।<ref>[https://www.careers360.com/colleges/motiram-baburam-government-post-graduate-college-haldwani Motiram Baburam Government Post Graduate College, Haldwani: Admission 2026, Cutoff, Courses, Fees, Placements, Ranking - Careers360]</ref>
5 एकड़ के शहरी परिसर में संचालित, यह महाविद्यालय कला, विज्ञान, वाणिज्य और शिक्षा संकायों में शैक्षणिक कार्यक्रम प्रदान करता है, जिसमें सक्रिय छात्र नामांकन प्रायः 12,000 से अधिक रहता है।<ref>[https://collegedunia.com/college/21609-motiram-baburam-government-post-graduate-college-mbgpg-nainital Motiram Baburam Government Post Graduate College Nainital: Admission 2026, Fees, Courses - Collegedunia]</ref> संस्थान को [[राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद]] (NAAC) द्वारा 'B+' ग्रेड से मान्यता प्राप्त है और [[राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद]] (NCTE) से विशेष कार्यक्रम अनुमोदन प्राप्त है।<ref>[https://he.uk.gov.in/naac-accredited-institutes/ NAAC Accredited Institutes | Higher Education Uttarakhand]</ref>
== इतिहास ==
संस्थान की औपचारिक स्थापना जुलाई 1960 में मोतीराम बाबूराम एजुकेशनल ट्रस्ट द्वारा प्रायोजित एक निजी शैक्षिक पहल के रूप में की गई थी। हल्द्वानी और आसपास के अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के अवसरों की कमी को दूर करने के लिए कल्पित, महाविद्यालय ने प्रारंभ में [[आगरा विश्वविद्यालय]] के शैक्षणिक अधिकार क्षेत्र में कार्य किया। अपने स्थापना दशकों के दौरान, महाविद्यालय ने मुख्य रूप से मानविकी और मौलिक विज्ञानों पर केंद्रित एक स्नातक संस्थान के रूप में कार्य किया।<ref name="history">[https://mbgpgcollege.org/8-breif-history Brief History - Moti Ram Babu Ram Government Post Graduate College Haldwani]</ref>
1974 में नैनीताल में कुमाऊँ विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद एक बड़ा प्रशासनिक पुनर्संरेखण हुआ। परिणामस्वरूप, महाविद्यालय ने औपचारिक रूप से अपनी संबद्धता इस नवनिर्मित क्षेत्रीय विश्वविद्यालय को हस्तांतरित कर दी। हल्द्वानी के जनसांख्यिकीय विस्तार के साथ नामांकन संख्या में वृद्धि हुई, प्रबंध ट्रस्ट की वित्तीय और प्रशासनिक बाधाएँ स्पष्ट हो गईं। क्षेत्र के छात्रों के शैक्षिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए व्यापक जनहित में कार्य करते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार (उत्तराखण्ड के निर्माण से पहले की शासी राज्य) ने 1982 में महाविद्यालय का राज्यकरण किया। इस विधायी कार्रवाई के माध्यम से, राज्य सरकार ने पूर्ण प्रबंधन और वित्तपोषण की जिम्मेदारियाँ ग्रहण कीं, जिससे संस्था एक सार्वजनिक सरकारी महाविद्यालय में परिवर्तित हो गई।<ref name="history" />
2004 में, क्षेत्रीय विकास और इसके विशाल छात्र उत्पादन में संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानते हुए, उत्तराखण्ड सरकार ने महाविद्यालय की स्थिति को नैनीताल जिले के लिए "विशिष्ट महाविद्यालय" (आदर्श महाविद्यालय) तक बढ़ा दिया। इस वर्गीकरण ने विशेष राज्य निधियों, यूजीसी और केंद्र सरकार के अनुदानों को प्रणालीगत क्षमता निर्माण, बुनियादी ढाँचे के विस्तार और उन्नत अनुसंधान परियोजनाओं की शुरूआत के लिए निर्देशित करना संभव बनाया।<ref name="history" />
== परिसर ==
महाविद्यालय बरेली-नैनीताल मार्ग पर 5 एकड़ के परिसर में स्थित है, जो हल्द्वानी के वाणिज्यिक केंद्र में रणनीतिक रूप से स्थित है। परिसर की शहरी भूगोल उच्च सुगमता प्रदान करती है; यह हल्द्वानी बस स्टैंड से लगभग दो किलोमीटर और हल्द्वानी रेलवे स्टेशन से तीन किलोमीटर के भीतर स्थित है, जो इस क्षेत्र को दिल्ली, देहरादून और लखनऊ जैसे प्रमुख महानगरीय केंद्रों से जोड़ता है। निकटतम हवाई पारगमन केंद्र पंतनगर हवाई अड्डा है, जो 25 से 28 किलोमीटर दूर स्थित है।<ref>[https://mbgpgcollege.org/152-how-to-reach-us How to reach us - M.B.G.P.G. College Haldwani]</ref>
परिसर के भौतिक क्षेत्र में एक बहुमंजिला शैक्षणिक ब्लॉक, विभागीय अनुबंध और उद्यानों और खेलों के लिए निर्दिष्ट खुले स्थान शामिल हैं। वास्तुशिल्पीय अभिन्यास में डिजिटल शिक्षण के लिए सुसज्जित हवादार कक्षाएँ, साथ ही शैक्षणिक कार्यशालाओं के लिए डिज़ाइन किए गए विशेष सेमिनार और सम्मेलन कक्ष शामिल हैं। परिसर में एक सभागार भी है जिसका उपयोग कॉलेजिएट कार्यक्रमों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और बड़े पैमाने पर अतिथि व्याख्यानों के लिए किया जाता है।<ref name="facilities">[https://www.careers360.com/colleges/motiram-baburam-government-post-graduate-college-haldwani/facilities Motiram Baburam Government Post Graduate College, Haldwani Facilities Details - Careers360]</ref>
जबकि संस्थान मजबूत शैक्षणिक बुनियादी ढाँचा प्रदान करता है, यह परिसर में सरकारी संचालित आवासीय छात्रावास नहीं रखता है।<ref name="facilities" />
== प्रशासन ==
एमबीजीपीजी कॉलेज का शासन उच्च शिक्षा निदेशालय, उत्तराखण्ड सरकार द्वारा देखरेख किया जाता है, जिसमें आंतरिक प्रशासन का नेतृत्व प्राचार्य करते हैं, जो मुख्य कार्यकारी और शैक्षणिक अधिकारी के रूप में कार्य करते हैं।<ref>[https://mbgpgcollege.org/6-principal-message Principal Message - M.B.G.P.G. College Haldwani]</ref>
संस्थान के भीतर प्राथमिक सलाहकार और नियामक निकाय अकादमिक परिषद है, जो पाठ्यक्रम वितरण, शैक्षिक योजना और अंतर-विभागीय समन्वय की देखरेख करती है।<ref name="academic-council">[https://mbgpgcollege.org/157-academic-council Academic Council - M.B.G.P.G. College Haldwani]</ref>
{| class="wikitable"
|+ एमबीजीपीजी कॉलेज अकादमिक परिषद की आंशिक संरचना<ref name="academic-council" />
|-
! पद / विभाग
! नाम
! विभाग / संबद्धता
|-
| अध्यक्ष
| डॉ. एन. एस. बनकोटी
| प्राचार्य, एमबीजीपीजी कॉलेज
|-
| सदस्य सचिव
| डॉ. चंद्र सिंह नेगी
| कॉलेज प्रशासन
|-
| सदस्य
| डॉ. अनीता जोशी
| अध्यक्ष, बी.एड विभाग
|-
| सदस्य
| डॉ. बी. आर. पंत
| अध्यक्ष, भूगोल विभाग
|-
| सदस्य
| डॉ. चारु चंद्र ढोंडियाल
| अध्यक्ष, भौतिकी विभाग
|-
| सदस्य
| डॉ. दीपा मखोलिया
| अध्यक्ष, गणित विभाग
|-
| सदस्य
| डॉ. कमला पंत
| अध्यक्ष, संस्कृत विभाग
|-
| सदस्य
| डॉ. कमरुद्दीन
| अध्यक्ष, समाजशास्त्र विभाग
|-
| सदस्य
| डॉ. महेश कुमार
| अध्यक्ष, जीव विज्ञान विभाग
|-
| सदस्य
| डॉ. एस. बी. मिश्रा
| अध्यक्ष, रसायन विज्ञान विभाग
|-
| सदस्य
| डॉ. नीता पांडे
| अध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान विभाग
|-
| सदस्य
| डॉ. निलोफर अख्तर
| अध्यक्ष, अंग्रेजी विभाग
|-
| सदस्य
| डॉ. पंकज कुमार
| अध्यक्ष, अर्थशास्त्र विभाग
|-
| बाह्य सदस्य
| डॉ. एस. एस. समंत
| पूर्व निदेशक, आईसीएफआरई, कुल्लू
|-
| बाह्य सदस्य
| डॉ. एस. पी. एस. बिष्ट
| प्रोफेसर, डीएसबी परिसर, कुमाऊँ विश्वविद्यालय
|-
| बाह्य सदस्य
| डॉ. गिरिजा पांडे
| प्रोफेसर, उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय
|}
== शैक्षणिक ==
महाविद्यालय 10 डिग्री ढाँचों में 53 विशिष्ट कार्यक्रमों का एक व्यापक शैक्षणिक पोर्टफोलियो प्रदान करता है, जिसमें लगभग 11,750 से 14,000 का समग्र छात्र समूह समायोजित है।<ref>[https://www.shiksha.com/college/m-b-government-post-graduate-college-haldwani-103105 MB Government Post Graduate College: Courses, Fees, Admission 2026 - Shiksha]</ref> शैक्षणिक दृष्टिकोण तेजी से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के साथ संरेखित हुआ है, जो पारंपरिक कला, विज्ञान और वाणिज्य पाठ्यक्रमों में कौशल-उन्मुख और व्यावसायिक विषयों को एकीकृत करता है।
गैर-पेशेवर पाठ्यक्रमों में प्रवेश समर्थ प्रवेश पोर्टल या कुमाऊँ विश्वविद्यालय ऑनलाइन पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से प्रबंधित एक केंद्रीकृत, योग्यता-आधारित प्रणाली के माध्यम से निष्पादित किए जाते हैं।<ref>[https://ukpgadmission.samarth.ac.in/index.php/site/programme?PrgAdmissionDateSearch%5Bprogramme_name%5D=&PrgAdmissionDateSearch%5Binstitute_name%5D=KUMAUN+UNIVERSITY+NAINITAL&PrgAdmissionDateSearch%5Bou_name%5D=&page=9 Programme Information - PG Admission, Samarth]</ref>
=== स्नातक कार्यक्रम ===
स्नातक कार्यक्रम सामान्यतः तीन वर्ष के होते हैं और 10+2 माध्यमिक विद्यालय प्रदर्शन के आधार पर छात्रों को प्रवेश देते हैं।<ref>[https://findmycollege.com/colleges/motiram-baburam-government-post-graduate-college-mbgpg-nainital-57115/courses-fees Motiram Baburam Government Post Graduate College Courses & Fees 2026 - FindMyCollege]</ref>
{| class="wikitable"
|-
! डिग्री
! पात्रता मानदंड
! मुख्य विषय प्रस्ताव
|-
| बैचलर ऑफ आर्ट्स (BA)
| 10+2 न्यूनतम 40-45% कुल अंकों के साथ
| हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, भूगोल, गृह विज्ञान, गणित, संगीत, मनोविज्ञान, इतिहास, शिक्षा
|-
| बैचलर ऑफ साइंस (BSc)
| 10+2 (विज्ञान संकाय) न्यूनतम 45% कुल अंकों के साथ
| भौतिकी, रसायन, वनस्पति विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, कंप्यूटर विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी (स्व-वित्तपोषित)
|-
| बैचलर ऑफ कॉमर्स (BCom)
| 10+2 न्यूनतम 40-45% कुल अंकों के साथ
| सामान्य वाणिज्य, लेखांकन, व्यवसाय अध्ययन
|}
विशेष उद्योग माँगों को पूरा करने के लिए, महाविद्यालय अत्यधिक लक्षित डिप्लोमा कार्यक्रम भी प्रदान करता है, जैसे पर्यटन अध्ययन में डिप्लोमा और आंतरिक डिजाइनिंग और सजावट में डिप्लोमा, जो एक वर्ष की अवधि के लिए चलते हैं।
=== स्नातकोत्तर कार्यक्रम ===
एमबीजीपीजी कॉलेज में स्नातकोत्तर शिक्षा दो वर्षों तक चलती है और प्रवेश के लिए कम से कम 50% शैक्षणिक कुल अंकों के साथ संबंधित स्नातक डिग्री की आवश्यकता होती है।<ref>[https://mbgpgcollege.org/191-postgraduate-courses Postgraduate courses - M.B.G.P.G. College Haldwani]</ref>
{| class="wikitable"
|-
! डिग्री
! विशेषज्ञता
|-
| मास्टर ऑफ आर्ट्स (MA)
| हिंदी, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, भूगोल, गृह विज्ञान, गणित, मनोविज्ञान, इतिहास, संस्कृत, संगीत और शिक्षा में व्यापक अध्ययन प्रदान करता है
|-
| मास्टर ऑफ साइंस (MSc)
| एमएससी गणित (215 सीटें), एमएससी जीव विज्ञान (105 सीटें), एमएससी वनस्पति विज्ञान (118 सीटें), और एमएससी जैव प्रौद्योगिकी (33 सीटें) जैसे विशेष स्व-वित्तपोषित कार्यक्रमों की सुविधा प्रदान करता है
|-
| मास्टर ऑफ कॉमर्स (MCom)
| उन्नत वित्तीय प्रबंधन, ग्रामीण अर्थशास्त्र और क्षेत्रीय व्यापार विश्लेषण पर केंद्रित
|}
यह संस्थान पेशेवर और स्व-वित्तपोषित स्नातकोत्तर ढाँचे भी संचालित करता है। इनमें प्रमुख है बैचलर ऑफ एजुकेशन (B.Ed) कार्यक्रम, जो NCTE द्वारा मान्यता प्राप्त है और 70 सरकारी सब्सिडीकृत सीटें तथा 100 स्व-वित्तपोषित सीटें प्रदान करता है। B.Ed कार्यक्रम में प्रवेश उत्तराखण्ड B.Ed संयुक्त प्रवेश परीक्षा और केंद्रीकृत राज्य परामर्श पर निर्भर करता है। इसके अलावा, मानसिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण शिक्षा को बढ़ाने के लिए योग विज्ञान और मार्गदर्शन एवं परामर्श कौशल में विशेष एक वर्षीय स्नातकोत्तर डिप्लोमा (PGD) प्रदान किए जाते हैं।<ref>[https://mbgpgcollege.org/215-about-department-of-education About Department of Education - M.B.G.P.G. College Haldwani]</ref>
=== दूरस्थ शिक्षा पहल ===
हिमालयी क्षेत्र की स्थलाकृतिक और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को पहचानते हुए, एमबीजीपीजी कॉलेज दूरस्थ शिक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में कार्य करता है।
* '''IGNOU अध्ययन केंद्र:''' 1987 से सक्रिय, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) केंद्र प्रतिवर्ष 750 से अधिक उम्मीदवारों का नामांकन करता है। यह ग्रामीण विकास, पर्यटन और कंप्यूटर शिक्षा जैसे क्षेत्रों में डिग्री और डिप्लोमा प्रदान करता है, जो विशिष्ट विभागीय समन्वयकों द्वारा सुगम बनाए जाते हैं।<ref>[https://mbgpgcollege.org/ignou IGNOU - M.B.G.P.G. College Haldwani]</ref>
* '''उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय (UOU):''' परिसर राज्य के मुक्त विश्वविद्यालय के लिए एक क्षेत्रीय केंद्र की मेजबानी करता है, जो डॉ. रश्मि पंत जैसे संकाय सदस्यों के निदेशकत्व में हल्द्वानी भौगोलिक क्षेत्र में शिक्षार्थी सहायता प्रणालियों का समन्वय करता है।<ref>[https://mbgpgcollege.org/195-uttarakhand-open-university-centre Uttarakhand Open university Centre - M.B.G.P.G. College Haldwani]</ref>
=== अनुसंधान ===
एमबीजीपीजी कॉलेज कुमाऊँ विश्वविद्यालय के लिए एक मान्यता प्राप्त अनुसंधान नोड है, जो कला, विज्ञान और वाणिज्य संकायों में कठोर डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (Ph.D.) कार्यक्रमों को सुगम बनाता है। महाविद्यालय वर्तमान में 300 से अधिक पंजीकृत Ph.D. विद्वानों की मेजबानी करता है। डॉक्टरेट उम्मीदवारों को अपनी मास्टर डिग्री में कम से कम 55% प्राप्त करना होगा और कुमाऊँ विश्वविद्यालय द्वारा प्रशासित अनुसंधान डिग्री प्रवेश परीक्षा (RDET) को सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करना होगा, जिसके बाद एक औपचारिक साक्षात्कार होता है।
== शैक्षणिक विभाग ==
महाविद्यालय के शैक्षणिक संचालन 21 स्नातक और 19 स्नातकोत्तर विभागों के माध्यम से प्रबंधित किए जाते हैं।
=== विज्ञान संकाय ===
विज्ञान संकाय संस्थान के अनुभवजन्य अनुसंधान उत्पादन और तकनीकी प्रशिक्षण को संचालित करता है।
* '''भौतिकी विभाग:''' 1992 से स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है, यह विभाग संघनित पदार्थ भौतिकी, भूभौतिकी और नैनो प्रौद्योगिकी पर केंद्रित है। यह विभाग उत्तराखण्ड में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) प्रवेश परीक्षा की मेजबानी करने वाला एकमात्र केंद्र है। संकाय नवाचारों में डॉ. सुधा पाल द्वारा अनाकार सामग्रियों के निर्माण और वर्णक्रमीय अभिलक्षणन के लिए एक उपकरण के लिए पंजीकृत पेटेंट शामिल है।<ref>[https://mbgpgcollege.org/75-department-of-physics Department of Physics - M.B.G.P.G. College Haldwani]</ref>
* '''गणित विभाग:''' 1982 में स्थापित, यह विभाग इंटीग्रल ट्रांसफॉर्म, द्रव गतिकी और डिफरेंशियल ज्यामिति को कवर करने वाला एक व्यापक पाठ्यक्रम रखता है। डॉ. दीपा मखोलिया और डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह जैसे विद्वानों द्वारा नेतृत्व किया गया, यह विभाग ''TOMATO (Taste of Mathematical Observations)'' भी प्रकाशित करता है, जो छात्रों के बीच गहन विश्लेषणात्मक सोच को बढ़ावा देने के लिए समर्पित एक पत्रिका है।<ref>[https://mbgpgmathsdepartment.in/ Tomato : (Taste of Mathematical Observations) Magazine site]</ref>
* '''वनस्पति विज्ञान विभाग:''' पारिस्थितिक वकालत में अत्यधिक सक्रिय, यह विभाग प्रो. नीता पांडे और प्रो. प्रेम प्रकाश द्वारा निर्देशित है। यह नियमित रूप से विश्व पृथ्वी दिवस, विश्व जैव विविधता दिवस और ओजोन दिवस जैसे अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है, स्नातकोत्तर छात्रों के बीच पर्यावरण संरक्षण जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए चार्ट प्रतियोगिताओं और विशेषज्ञ व्याख्यानों का लाभ उठाता है।<ref>[https://mbgpgcollege.org/news/102 Ozone day was celebrated in Department of Botany in MBGPG Haldwani on 16th September 2023]</ref>
* '''जैव प्रौद्योगिकी विभाग:''' इन सीटू फर्मेंटर्स, PCR मशीनों और लायोफिलाइज़र्स से युक्त उन्नत प्रयोगशालाओं द्वारा समर्थित, जैव प्रौद्योगिकी विभाग में CSIR-NET और JNU-बायोटेक परीक्षाओं को उत्तीर्ण करने वाले छात्रों की उच्च सफलता दर है।<ref>[https://mbgpgcollege.org/34-dept-of-biotechnology Dept. of Biotechnology - M.B.G.P.G. College Haldwani]</ref>
=== कला और मानविकी संकाय ===
मानविकी विभाग महाविद्यालय में संचालित सामाजिक-राजनीतिक और ऐतिहासिक अनुसंधान के लिए केंद्रीय हैं।
* '''अंग्रेजी विभाग:''' आधुनिक साहित्य के प्रति अपने व्यापक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है, यह विभाग बार-बार शैक्षणिक सेमिनार आयोजित करता है, जैसे टी.एस. इलियट के प्रतिमानों पर केंद्रित आधुनिक साहित्यिक सिद्धांत और आलोचना पर आभासी संगोष्ठी, राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) की तैयारी में छात्रों की सहायता करता है।<ref>[https://mbgpgcollege.org/252-events-organised Events Organised - M.B.G.P.G. College Haldwani]</ref>
* '''इतिहास विभाग:''' इतिहास संकाय क्षेत्र को महत्वपूर्ण विशेषज्ञता प्रदान करता है। 2017 में, जब हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र में एक बस टर्मिनल के निर्माण के दौरान 40 मानव कंकालों और 300 कब्र-जैसी संरचनाओं वाली एक सामूहिक कब्र का पता चला, तब सहायक प्रोफेसर डॉ. एच.एस. भाकुनी ने ऐतिहासिक संदर्भ प्रदान किया, यह प्रस्तावित करते हुए कि अवशेष संभवतः गुरखा शासन (1786–1803) के मुस्लिम शरणार्थियों या 1857 के रोहिल्ला सैनिकों के थे, जो स्थानीय पुरातत्व और ऐतिहासिक अर्थ-निर्माण में विभाग की भूमिका को रेखांकित करता है।<ref>[https://timesofindia.indiatimes.com/city/dehradun/40-human-skeletons-300-grave-like-structures-found-during-construction-work-at-haldwani/articleshow/58614976.cms 40 human skeletons found during construction work at Haldwani - Times of India]</ref><ref>[https://scroll.in/video/837344/watch-the-discovery-of-40-old-skeletons-and-300-graves-causes-a-frenzy-in-uttarakhand-town Watch: The discovery of 40 old skeletons causes a frenzy in Uttarakhand town - Scroll.in]</ref>
* '''समाजशास्त्र और मनोविज्ञान विभाग:''' ये विभाग सार्वजनिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक अनुसंधान में सक्रिय रूप से संलग्न हैं। COVID-19 महामारी के दौरान, उन्होंने युवाओं पर मनोसामाजिक प्रभावों को संबोधित करने के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय के साथ आभासी सम्मेलन आयोजित किए, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और तनाव प्रबंधन पर जोर दिया।<ref>[https://mbgpgcollege.sgp1.digitaloceanspaces.com/files/shares/NAAC%20CRITERIONS/naac-20-21-docs/6.5.1.pdf A BRIEF REPORT OF THE SEMINARS, WEBINARS, ETC - MBGPG College]</ref>
=== वाणिज्य और शिक्षा संकाय ===
वाणिज्य विभाग हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र, व्यवहारगत वित्त और थारू जनजातियों जैसी स्वदेशी आबादी की आर्थिक स्थिति के भीतर वित्तीय बाधाओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए क्षेत्रीय आर्थिक गतिकी की जाँच करता है।<ref>[https://www.jetir.org/papers/JETIR2208442.pdf EVOLUTION OF BEHAVIOURAL FINANCE - JETIR.org]</ref> 1978 से संचालित शिक्षा विभाग, प्रौद्योगिकी-सक्षम शिक्षण पर केंद्रित है, छात्रों को सफल B.Ed और TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) परिणामों की ओर मार्गदर्शन करता है जबकि सक्रिय रूप से NEP 2020 के ढाँचों को अपने पाठ्यक्रम में एकीकृत करता है।<ref>[https://mbgpgcollege.org/215-about-department-of-education About Department of Education - M.B.G.P.G. College Haldwani]</ref>
== पुस्तकालय ==
केंद्रीय पुस्तकालय महाविद्यालय के लिए प्राथमिक बौद्धिक संसाधन केंद्र के रूप में कार्य करता है, जो कला, विज्ञान और वाणिज्य संकायों की विविध आवश्यकताओं को पूरा करता है। इसमें मानक पाठ्यपुस्तकों, उन्नत संदर्भ सामग्रियों और शैक्षणिक पत्रिकाओं का एक विशाल भंडार है। सामग्रियों की ट्रैकिंग, खोज और निर्गम को सुव्यवस्थित करने के लिए डिजिटल पुस्तकालय प्रबंधन प्रणालियों का उपयोग करते हुए, यह सुविधा पूरी तरह से स्वचालित है।<ref name="facilities" />
बड़े छात्र समूह को समायोजित करने के लिए, पुस्तकालय में छात्रों और छात्राओं के लिए अलग-अलग बैठने की व्यवस्था के साथ विशाल, हवादार वाचनालय हैं। ये वाचनालय नियमित रूप से स्थानीय और राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं से अद्यतन किए जाते हैं, सतत अधिगम के वातावरण को बढ़ावा देते हैं। इसके अलावा, पुस्तकालय ई-संसाधनों और ऑनलाइन पत्रिका सदस्यताओं तक पहुँच प्रदान करता है, जो डॉक्टरेट उम्मीदवारों और उन्नत अनुसंधान कर रहे संकाय के लिए महत्वपूर्ण हैं।
== छात्र जीवन ==
एमबीजीपीजी कॉलेज में परिसर का वातावरण अत्यधिक गतिशील है, जो शैक्षणिक कठोरता, गहन राजनीतिक जुड़ाव और नागरिक सेवा की एक मजबूत परंपरा के मिश्रण द्वारा चित्रित है। यह संस्थान उत्तराखण्ड के व्यापक सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य के एक सूक्ष्म रूप के रूप में कार्य करता है।
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://mbgpgcollege.org/ आधिकारिक वेबसाइट]
[[श्रेणी:उत्तराखण्ड के महाविद्यालय]]
[[श्रेणी:हल्द्वानी]]
[[श्रेणी:कुमाऊँ विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालय]]
[[श्रेणी:1960 में स्थापित शैक्षणिक संस्थान]]
[[श्रेणी:नैनीताल जिले में शिक्षा]]
hpn6lv70m300vp3oa1wcqu3txj4tatp
मुहम्मद मुश्ताक अली ख़ान बहादुर
0
1616285
6591355
2026-07-23T15:41:56Z
Mundhalia746
934684
नया पृष्ठ: {{Infobox royalty | name = | title =[[रामपुर रियासत]] के [[नवाब]] | image = Nawab Mushtaq Ali Khan of Rampur.png | caption = नवाब मुहम्मद मुश्ताक अली ख़ान बहादुर | reign = 1887–1889 | full name = हाजी नवाब कल्ब अली ख़ान बहादुर | predecessor = कल्ब अली ख़ान व...
6591355
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox royalty
| name =
| title =[[रामपुर रियासत]] के [[नवाब]]
| image = Nawab Mushtaq Ali Khan of Rampur.png
| caption = नवाब मुहम्मद मुश्ताक अली ख़ान बहादुर
| reign = 1887–1889
| full name = हाजी नवाब कल्ब अली ख़ान बहादुर
| predecessor = [[कल्ब अली ख़ान वहादूर|कल्ब अली ख़ान बहादुर]]
| successor = [[हामिद अली ख़ान बहादुर|हामिद अली ख़ान बहादुर ]]
| house = रामपुर
| dynasty = [[रोहिल्ला वंश]]
| father = [[कल्ब अली ख़ान वहादूर|कल्ब अली ख़ान बहादुर]]
| birth_date = 1856
| birth_place = [[रामपुर]], [[उत्तर प्रदेश]]
| death_date = 1889
| death_place = [[रामपुर]], [[उत्तर प्रदेश]]
|}}
नवाब मुहम्मद मुश्ताक अली ख़ान बहादुर (1856-25 फरवरी 1889) ने अपने पिता नवाब [[कल्ब अली ख़ान वहादूर|कल्ब अली ख़ान बहादुर]] के बाद 1887 से 1889 तक रामपुर रियासत के नवाब के तौर पर शासन किया। लगातार खराब सेहत के कारण उन्होंने रियासत के कामकाज एक प्रशासनिक परिषद के हाथों में सौंप दिए। फिर भी वह अपने पूर्ववर्तियों द्वारा शुरू किए गए कल्याणकारी कार्यों को जारी रखने में सफल रहे, खासकर खेती और सिंचाई के क्षेत्रों में। 1889 में 32 साल की उम्र में उनका निधन हो गया और उनके बेटे सर हामिद अली ख़ान बहादुर उनके उत्तराधिकारी बने।<ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/dli.ministry.08773|title=Uttar Pradesh District Gazetteers: Rampur|last=Amar Singh Baghel|date=1975|publisher=Lucknow, Department of District Gazetteers}}</ref>
== सन्दर्भ ==
<references />
t07qi5yhtm1l100wz8q1n7zi6pzfsey
6591356
6591355
2026-07-23T15:44:25Z
Mundhalia746
934684
6591356
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox royalty
| name =
| title =[[रामपुर रियासत]] के [[नवाब]]
| image = Nawab Mushtaq Ali Khan of Rampur.png
| caption = नवाब मुहम्मद मुश्ताक अली ख़ान बहादुर
| reign = 1887–1889
| full name = हाजी नवाब कल्ब अली ख़ान बहादुर
| predecessor = [[कल्ब अली ख़ान वहादूर|कल्ब अली ख़ान बहादुर]]
| successor = [[हामिद अली ख़ान बहादुर|हामिद अली ख़ान बहादुर ]]
| house = रामपुर
| dynasty = [[रोहिल्ला वंश]]
| father = [[कल्ब अली ख़ान वहादूर|कल्ब अली ख़ान बहादुर]]
| birth_date = 1856
| birth_place = [[रामपुर]], [[उत्तर प्रदेश]]
| death_date = 1889
| death_place = [[रामपुर]], [[उत्तर प्रदेश]]
|}}
नवाब मुहम्मद मुश्ताक अली ख़ान बहादुर (1856-25 फरवरी 1889) ने अपने पिता नवाब [[कल्ब अली ख़ान वहादूर|कल्ब अली ख़ान बहादुर]] के बाद 1887 से 1889 तक [[रामपुर रियासत]] के नवाब के तौर पर शासन किया। लगातार खराब सेहत के कारण उन्होंने रियासत के कामकाज एक प्रशासनिक परिषद के हाथों में सौंप दिए। फिर भी वह अपने पूर्ववर्तियों द्वारा शुरू किए गए कल्याणकारी कार्यों को जारी रखने में सफल रहे, खासकर खेती और सिंचाई के क्षेत्रों में। 1889 में 32 साल की उम्र में उनका निधन हो गया और उनके बेटे सर [[हामिद अली ख़ान बहादुर]] उनके उत्तराधिकारी बने।<ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/dli.ministry.08773|title=Uttar Pradesh District Gazetteers: Rampur|last=Amar Singh Baghel|date=1975|publisher=Lucknow, Department of District Gazetteers}}</ref>
== सन्दर्भ ==
<references />
8gsltv7qj1i5ide1umy2nw6u34ugvvt
२०२६ सीबीएसई पटल अंकन विवाद
0
1616287
6591384
2026-07-23T22:24:03Z
स्वर्ण
883468
"[[:en:Special:Redirect/revision/1365034520|2026 CBSE On-Screen Marking controversy]]" पृष्ठ का अनुवाद करके निर्मित किया गया
6591384
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox event|name=२०२६ सीबीएसई पटल अंकन विवाद|image=|image_caption=|date=मई २०२६|location=भारत|type=शिक्षा विवाद|cause=१२वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के लिए पटल-अंकन (ओएसएम) प्रणाली लागू करना|participants=विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षक, सीबीएसई अधिकारी, राजनेता|outcome=पुनर्मूल्यांकन शुल्क में कमी, सहस्रों उत्तर पुस्तिकाओं का पुनःप्रतिचित्रण, आन्तरिक जाँच, सीबीएसई में नेतृत्व परिवर्तन}}
२०२६ में, भारत के [[केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड]] (सीबीएसई) को १२वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के लिए अपनी नई पटल अंकन (ओएसएम) प्रणाली लागू करने के पश्चात् जनता के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा।<ref name=":0">{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/explained/cbse-on-screen-marking-system-student-concerns-10707263/|title=Blurred answer sheets, payment portal collapse: Why CBSE's digital evaluation for Class 12 is facing flak|last=Harigovind|first=Abhinaya|date=2026-05-25|website=The Indian Express|language=en|access-date=2026-06-03}}</ref>
== सारांश ==
ओएसएम प्रणाली में विद्यार्थियों की भौतिक उत्तर पुस्तिकाओं का प्रतिचित्रण कर उनका अंकीय मूल्यांकन किया जाता था। १३ मई २०२६ को १२वीं के परिणाम घोषित होने के पश्चात्, अनेक विद्यार्थियों ने धुँधले प्रतिचित्र, गुम पृष्ठ, बेमेल उत्तर पुस्तिकाएँ, अंकहीन उत्तर तथा अप्रत्याशित अंक जैसी समस्याएँ बताईं।<ref>{{Cite web|url=https://www.bbc.com/news/articles/cy42e8eljpno|title=CBSE OSM: Controversies rock crucial school-leaving exam in India|last=Mollan|first=Cherylann|date=2026-05-28|website=[[BBC]]|language=en-GB|access-date=2026-06-03}}</ref> इन चिन्ताओं के चलते पुनर्मूल्यांकन और सार्वजनिक चर्चा की माँग उठी। कोएम्प्ट एडूटेक को दिए गए ओएसएम ठेके तथा प्रणाली में बताई गई सुरक्षा कमज़ोरियों पर भी प्रश्न उठाए गए।<ref>{{Cite web|url=https://www.bhaskarenglish.in/originals/news/cbse-osm-tender-controversy-sarthak-sidhant-vs-coempt-eduteck-12th-evaluation-row-138090509.html|title=CBSE chairman, secretary shifted out amid national uproar: How Sarthak exposed flaws missed by audits; 10 questions answered|last=Rajgovind|first=Anjali|date=2026-06-03|website=Bhaskar English|language=en|access-date=2026-06-03}}</ref>
== पृष्ठभूमि ==
२०२६ के सीबीएसई परीक्षा चक्र में एक साथ तकनीकी और शैक्षणिक बदलाव शामिल थे। इस परिवर्तन का प्रमुख तत्व मूल्यांकन अवसंरचना का अंकीकरण था।<ref>{{cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/education/news/cbse-board-exams-2026-6-key-changes-students-should-know-about-including-paper-pattern-attendance-grading-and-more/articleshow/125930155.cms|title=CBSE Board Exams 2026: 6 key changes students should know about, including paper pattern, attendance, grading and more|date=12 December 2025|work=[[The Times of India]]|access-date=7 June 2026|publisher=[[The Times Group]]|issn=09718257}}</ref><ref name="IE12May3">{{cite news|url=https://indianexpress.com/article/education/cbse-class-12th-result-2026-digital-evaluation-osm-on-screen-marking-faster-result-date-cbse-gov-in-cbseresults-nic-in-10647901/|title=How CBSE evaluated Class 12 results 2026?|date=10 May 2026|work=[[The Indian Express]]|access-date=7 June 2026|language=en}}</ref>
=== पटल अंकन (ओएसएम) प्रणाली ===
२०२६ शैक्षणिक चक्र से पूर्व, सीबीएसई की मूल्यांकन प्रक्रिया में उत्तर पुस्तिकाओं को क्षेत्रीय मूल्यांकन केन्द्रों तक भौतिक रूप से पहुँचाना आवश्यक था।<ref name="IE12May32">{{cite news|url=https://indianexpress.com/article/education/cbse-class-12th-result-2026-digital-evaluation-osm-on-screen-marking-faster-result-date-cbse-gov-in-cbseresults-nic-in-10647901/|title=How CBSE evaluated Class 12 results 2026?|date=10 May 2026|work=[[The Indian Express]]|access-date=7 June 2026|language=en}}</ref> ९ फ़रवरी २०२६ को बोर्ड ने एक परिपत्र जारी कर १२वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के लिए पटल अंकन (ओएसएम) प्रणाली अनिवार्य कर दी। उस सत्र के लिए १०वीं का मूल्यांकन पारम्परिक भौतिक रूप में ही रहा।<ref name="NDTV10Feb2">{{cite news|url=https://www.ndtv.com/education/explained-why-cbse-is-introducing-on-screen-marking-for-class-12-board-exams-10980418|title=CBSE Class 12 Exams 2026: What Is On-Screen Marking (OSM), Why It Matters|last1=Kumar|first1=Rahul|date=10 February 2026|work=[[NDTV]]|access-date=7 June 2026}}</ref>
ओएसएम ढाँचे के अन्तर्गत भौतिक उत्तर पुस्तिकाएँ प्रतिचित्रण हेतु सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालयों में भेजी जाती थीं। प्रतिचित्रित छवियाँ एक केन्द्रीकृत जालस्थल पर चढ़ाई जाती थीं, जहाँ मूल्यांकनकर्ता उत्तरों का अंकीय मूल्यांकन करते थे। बोर्ड ने कहा कि इस प्रणाली का उद्देश्य हाथ से होने वाली गणना त्रुटियों को समाप्त करना, उत्तर छूटने से रोकना, परिणाम घोषणा में तेज़ी लाना और सामग्री के भौतिक परिवहन को कम करना था।<ref name=":03">{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/explained/cbse-on-screen-marking-system-student-concerns-10707263/|title=Blurred answer sheets, payment portal collapse: Why CBSE's digital evaluation for Class 12 is facing flak|last=Harigovind|first=Abhinaya|date=25 May 2026|website=[[The Indian Express]]|language=en|access-date=3 June 2026}}</ref>
इस बदलाव के लिए सम्बद्ध विद्यालयों को मूल्यांकन केन्द्र के रूप में कार्य करने हेतु अपनी सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना उन्नत करनी पड़ी। विद्यालयों को समर्पित संगणक प्रयोगशालाएँ, सार्वजनिक स्थैतिक आईपी पते, न्यूनतम दो मेगाबिट प्रति सेकण्ड की [[अंतरजाल|अन्तर्जाल]] गति, तथा [[अबाधित विद्युत आपूर्ति|अबाधित विद्युत् आपूर्ति]] (यूपीएस) अनिवार्य रूप से प्रदान करने को कहा गया।<ref name="NDTV10Feb22">{{cite news|url=https://www.ndtv.com/education/explained-why-cbse-is-introducing-on-screen-marking-for-class-12-board-exams-10980418|title=CBSE Class 12 Exams 2026: What Is On-Screen Marking (OSM), Why It Matters|last1=Kumar|first1=Rahul|date=10 February 2026|work=[[NDTV]]|access-date=7 June 2026}}</ref>
=== कोएम्प्ट एडुटेक ===
अंकीय मूल्यांकन का ठेका हैदराबाद स्थित शैक्षिक प्रौद्योगिकी कम्पनी कोएम्प्ट एडूटेक को दिया गया। कम्पनी अभिलेखों से पता चलता है कि यह पहले ग्लोबएरिना टेक्नोलॉजीज़ प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कार्यरत थी।<ref name="TNM27May2">{{cite news|url=https://www.thenewsminute.com/news/company-behind-cbse-evaluation-platform-says-complaints-limited-to-one-or-two-cases|title=Company behind CBSE evaluation platform says complaints limited to ‘one or two cases’|last1=Aravind|first1=Indulekha|date=27 May 2026|work=[[The News Minute]]|access-date=7 June 2026|last2=Chandrashekar|first2=Nandini|language=en}}</ref>
अपने पूर्व नाम के तहत, २०१९ में तेलंगाना राज्य इण्टरमीडिएट शिक्षा बोर्ड ने कम्पनी को अनुबन्धित किया। उनके तन्त्रांश (सॉफ़्टवेयर) के उपयोग के बाद, ९.७ लाख में से ३.८ लाख से अधिक विद्यार्थी इण्टरमीडिएट परीक्षाओं में अनुत्तीर्ण हो गए, जिससे राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन, कथित छात्र आत्महत्याएँ और [[राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (भारत)|राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग]] (एनएचआरसी) के नोटिस जारी हुए।<ref name="TNM27May22">{{cite news|url=https://www.thenewsminute.com/news/company-behind-cbse-evaluation-platform-says-complaints-limited-to-one-or-two-cases|title=Company behind CBSE evaluation platform says complaints limited to ‘one or two cases’|last1=Aravind|first1=Indulekha|date=27 May 2026|work=[[The News Minute]]|access-date=7 June 2026|last2=Chandrashekar|first2=Nandini|language=en}}</ref><ref>{{cite news|url=https://indianexpress.com/article/education/class-12-board-evaluation-cbse-on-screen-marking-system-row-10713102/|title=On-Screen Marking system row: Firm roped in by CBSE under scanner for Telangana exam mess; may be fined|last1=Kuntamalla|first1=Vidheesha|date=29 May 2026|work=[[The Indian Express]]|access-date=7 June 2026|last2=Janyala|first2=Sreenivas|language=en|url-access=subscription}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.business-standard.com/article/news-ians/nhrc-notice-to-telangana-over-student-suicides-119042601300_1.html|title=NHRC notice to Telangana over student suicides|date=26 April 2019|website=[[Business Standard]]|access-date=7 June 2026}}</ref>
तेलंगाना की घटना के पश्चात्, ग्लोबएरिना टेक्नोलॉजीज़ ने अपना नाम बदलकर कोएम्प्ट एडू टेक प्राइवेट लिमिटेड कर लिया, जिसमें वीएसएन राजू मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने रहे। राजू ने इस बात से इनकार किया कि नाम परिवर्तन भ्रामक था ; उन्होंने कहा कि ग्राहकों को इस बदलाव की जानकारी दे दी गई थी। उन्होंने बताया कि [[भारत का उच्चतम न्यायालय|उच्चतम न्यायालय]] ने २०१९ के एक निर्णय में कम्पनी को किसी भी गलत काम से मुक्त कर दिया था, जिसमें वास्तविक मूल्यांकन त्रुटि दर ०.१६ प्रतिशत आँकी गई और कम्पनी के विरुद्ध आपराधिक आरोपों की माँग ख़ारिज कर दी गई।<ref name="TNM27May23">{{cite news|url=https://www.thenewsminute.com/news/company-behind-cbse-evaluation-platform-says-complaints-limited-to-one-or-two-cases|title=Company behind CBSE evaluation platform says complaints limited to ‘one or two cases’|last1=Aravind|first1=Indulekha|date=27 May 2026|work=[[The News Minute]]|access-date=7 June 2026|last2=Chandrashekar|first2=Nandini|language=en}}</ref>
== विवाद ==
इस नए ओएसएम ढाँचे के अन्तर्गत, लगभग ९८.६६ लाख उत्तर पुस्तिकाओं का प्रतिचित्रण कर देश भर के लगभग ७०,००० मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा अंकीय मूल्यांकन किया गया। १३ मई २०२६ को १२वीं के परिणाम घोषित होने पर, कुल उत्तीर्ण प्रतिशत पिछले वर्ष के ८८.३९ प्रतिशत से गिरकर ८५.२ प्रतिशत हो गया, जिससे विद्यार्थियों और अभिभावकों में दहशत फैल गई।<ref name=":02">{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/explained/cbse-on-screen-marking-system-student-concerns-10707263/|title=Blurred answer sheets, payment portal collapse: Why CBSE's digital evaluation for Class 12 is facing flak|last=Harigovind|first=Abhinaya|date=2026-05-25|website=The Indian Express|language=en|access-date=2026-06-03}}</ref>
सामाजिक माध्यम मंचों पर बड़े पैमाने पर शिकायतें आईं, जिनमें विद्यार्थियों ने विशेष रूप से भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान और गणित जैसे मुख्य विषयों में अप्रत्याशित रूप से कम अंक मिलने का आरोप लगाया। विद्यार्थियों और शिक्षकों ने बोर्ड की इस बात पर आलोचना की कि उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतिलिपि के लिए अत्यधिक शुल्क लिया जा रहा है, जबकि बोर्ड के पास पहले से ही सभी विद्यार्थियों की सभी उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतिचित्रित प्रतियाँ मौजूद हैं।<ref name=":04">{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/explained/cbse-on-screen-marking-system-student-concerns-10707263/|title=Blurred answer sheets, payment portal collapse: Why CBSE's digital evaluation for Class 12 is facing flak|last=Harigovind|first=Abhinaya|date=2026-05-25|website=The Indian Express|language=en|access-date=2026-06-03}}</ref>
सत्यापन प्रक्रिया के तहत प्रतिचित्रित प्रतियों के लिए आवेदन करने पर, विद्यार्थियों ने गंभीर तकनीकी ख़ामियाँ, ग़लत शुल्क कटौती और भुगतान प्रवेशद्वार की विफलताएँ बताईं। बोर्ड ने कहा कि [[जालस्थल]] पर अभूतपूर्व भीड़ और अनधिकृत हस्तक्षेप के कई प्रयास हुए। उत्तर पुस्तिका प्राप्त करने की आरम्भिक समय सीमा २२ मई को कई बार बढ़ाकर अन्ततः २५ मई २०२६ कर दी गई। सीबीएसई को उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतिचित्रित प्रतियाँ प्राप्त करने हेतु विद्यार्थियों से ४,०४,३१९ आवेदन प्राप्त हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में कहीं अधिक थे, जो नई प्रणाली में विश्वास की कमी दर्शाता है। जिन विद्यार्थियों को प्रतियाँ मिलीं, उन्होंने धुँधली उत्तर पुस्तिकाएँ, गुम पृष्ठ और कुछ मामलों में किसी अन्य विद्यार्थी की उत्तर पुस्तिका मिलने की बात कही।<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/cbse-reevaluation-portal-class-12-exam-june1/article71037407.ece|title=CBSE portal for re-evaluation of Class 12 answer papers to be operational from June 1|last=|first=|date=2026-05-29|work=The Hindu|access-date=2026-06-03|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref>
यह विवाद उस समय और गहरा गया जब दिल्ली के एक विद्यार्थी वेदान्त श्रीवास्तव ने सामाजिक माध्यम पर साक्ष्य साझा किया कि उनके अनुक्रमांक पर चढ़ाई गई भौतिकी की उत्तर पुस्तिका में भिन्न लिखावट थी और वह किसी अन्य की थी। इसके तुरन्त बाद वे ऑनलाइन व्यंग्य और अपमानजनक टिप्पणियों का निशाना बन गए। कुछ ने उन्हें ‘राष्ट्र-विरोधी’ कहा, जबकि अन्य ने ‘पाकिस्तानी’। आरम्भ में विद्यार्थी को ‘पाकिस्तानी’ कहने वालों में [[दूरदर्शन]] समाचार के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव भी शामिल थे।<ref>{{Cite web|url=https://www.altnews.in/doordarshan-anchor-calls-delhi-student-pakistani-for-raising-cbse-marking-grievance/|title=Doordarshan anchor calls Delhi student Pakistani for raising CBSE marking grievance|last=Majumder|first=Shinjinee|date=2026-05-26|website=Alt News|language=en-GB|access-date=2026-06-03}}</ref> बाद में उन्होंने क्षमा माँगी, किन्तु उनकी टिप्पणी पर ऑनलाइन तीखी प्रतिक्रिया हुई। शिकायत के वायरल होने के पश्चात्, सीबीएसई ने आधिकारिक रूप से तकनीकी त्रुटि स्वीकार की, विद्यार्थी को सही उत्तर पुस्तिका जारी की और उसके परिणाम को सुधारने का वादा किया।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/education/cbse-class-12th-result-2026-corrected-physics-answer-sheet-vedant-srivastava-shows-signs-manual-evaluation-cbseresults-nic-in-10708325/|title=CBSE OSM Row: Vedant's 'corrected' Physics answer sheet shows signs of manual evaluation|last=Banerjee|first=Deepto|date=2026-05-26|website=The Indian Express|language=en|access-date=2026-06-03}}</ref>
बोर्ड को तब और विरोध झेलना पड़ा जब आरोप लगा कि वह संरचनात्मक मूल्यांकन त्रुटियों का समाधान करने के बजाय जन-धारणा प्रबन्धित करने का प्रयास कर रहा है। ऐसी ख़बरें आईं कि सीबीएसई ने कथित रूप से विद्यालयों को एक संचार सामग्री प्रेषित की तथा प्रधानाचार्यों को अपने विवादास्पद ओएसएम प्रणाली के बचाव में समन्वित चलचित्र और लेख सामाजिक माध्यम पर भरने के लिए बाध्य किया।<ref name=":5">{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/education-today/news/story/cbse-osm-system-controversy-toolkit-for-principals-sparks-fresh-trust-questions-2918942-2026-05-29|title=Did CBSE ask principals to defend OSM system? Videos fuel toolkit charge|last=|first=|date=2026-05-29|website=India Today|language=en|access-date=2026-05-31}}</ref><ref name=":4">{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/education/news/cbses-osm-crisis-takes-a-new-turn-as-principals-were-allegedly-asked-to-defend-the-system-online/articleshow/131364917.cms|title=CBSE’s OSM crisis takes a new turn as principals were allegedly asked to defend the system online|date=2026-05-28|work=The Times of India|access-date=2026-05-31|issn=0971-8257}}</ref> स्वतन्त्र पर्यवेक्षकों और ऑनलाइन निगरानीकर्ताओं ने एक समन्वित पैटर्न देखा, जिसमें कई प्रधानाचार्यों और संस्थानों ने अंकीय मूल्यांकन प्रणाली की प्रशंसा में एक जैसे शब्दों का प्रयोग करते हुए चलचित्र जारी किए। इसके अलावा, [[रेडिट]] जैसे मंचों पर विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि कुछ विद्यालयों ने उन पर ओएसएम प्रणाली की सटीकता का बचाव करने वाले सार्वजनिक बयान डालने के लिए अत्यधिक दबाव डाला।<ref name=":52">{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/education-today/news/story/cbse-osm-system-controversy-toolkit-for-principals-sparks-fresh-trust-questions-2918942-2026-05-29|title=Did CBSE ask principals to defend OSM system? Videos fuel toolkit charge|last=|first=|date=2026-05-29|website=India Today|language=en|access-date=2026-05-31}}</ref>
१७ वर्षीय विद्यार्थी सार्थक सिद्धान्त ने ओएसएम कार्यक्रम के लिए कोएम्प्ट एडूटेक की नियुक्ति पर प्रश्न उठाए। उन्होंने इंगित किया कि यह कम्पनी, जो पहले ग्लोबएरिना के नाम से जानी जाती थी, २०१९ के तेलंगाना इण्टरमीडिएट परिणाम विवाद में शामिल थी, जहाँ मूल्यांकन त्रुटियों के कारण ३.८ लाख से अधिक विद्यार्थी अनुत्तीर्ण हुए और २१ आत्महत्याएँ हुईं।<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/education/sarthak-sidhant-just-ordinary-until-he-started-looking/article71047931.ece|title=Sarthak Sidhant: Just ordinary until he started looking|last=Ahmed|first=Mantasha|date=2026-06-01|work=The Hindu|access-date=2026-06-03|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> बाद में, वे अपने निष्कर्ष प्रस्तुत करने के लिए संसदीय समिति के समक्ष उपस्थित हुए।
१९ वर्षीय नैतिक सेंधमार निसर्ग अधिकारी नामक एक अन्य विद्यार्थी ने दावा किया कि उन्होंने ओएसएम जालस्थल में गम्भीर सुरक्षा दोष पाए।<ref>{{Cite web|url=https://internetfreedom.in/when-the-exam-itself-can-be-hacked-iff-writes-to-the-ministry-of-education-and-cert-in-on-the-cbse-on-screen-marking-disclosure/|title=When the exam itself can be hacked: IFF writes to the Ministry of Education and CERT-In on the CBSE On-Screen Marking disclosure|date=2026-05-26|website=Internet Freedom Foundation (IFF)|language=en|access-date=2026-06-03}}</ref> उन्होंने इनकी सूचना [[भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल|भारतीय कम्प्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल]] (सीईआरटी-इन) को दी। अधिकारी ने आरोप लगाया कि हमलावर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और प्रणाली के कोड में उजागर एक कूटशब्द का उपयोग कर परीक्षक खातों तक पहुँच सकते थे। बाद में उन्होंने दावा किया कि [[ऐमेज़ॉन वेब सर्विसेज़|अमेज़न वेब सेवाओं]] के एक सेवक पर संचित उत्तर पुस्तिकाएँ और प्रश्नपत्र अनुचित विन्यास के कारण सार्वजनिक रूप से ऑनलाइन सुलभ थे।<ref>{{Cite web|url=https://thewire.in/education/the-cbse-is-under-fire-thanks-to-the-efforts-of-three-teenagers|title=CBSE Is Under Fire Thanks to the Efforts of Teenagers|date=1 June 2026|website=The Wire|language=en|access-date=2026-06-03}}</ref>
== प्रतिक्रिया ==
आरंभ में, सीबीएसई ने प्रणाली को सुरक्षित और सुदृढ़ बताकर उसका बचाव किया<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/cbse-on-screen-marking-class-12-results-education-ministry-statement/article70989919.ece|title=Centre defends on-screen marking for CBSE Class 12 answer sheets, reduces re-evaluation fee|last=|first=|date=2026-05-17|work=The Hindu|access-date=2026-06-03|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/education/cbse-refutes-claim-that-its-marking-portal-was-compromised/article71025885.ece|title=CBSE refutes claim that its marking portal was compromised|last=Porecha|first=Maitri|date=2026-05-26|work=The Hindu|access-date=2026-06-03|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref>, परन्तु बाद में उसने सुरक्षा ख़ामियों को स्वीकार कर लिया।<ref>{{Cite news|url=https://www.moneycontrol.com/news/india/after-weeks-of-denial-cbse-admits-security-gaps-in-online-marking-portal-says-vulnerabilities-contained-13936747.html|title=After weeks of denial, CBSE admits security gaps in online marking portal; says vulnerabilities contained|date=31 May 2026|work=Moneycontrol.com|access-date=3 June 2026}}</ref>
बोर्ड को जालस्थल की ख़ामियों और प्रतिचित्रित प्रतियों तथा सत्यापन के उच्च शुल्क को लेकर लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा। इसके कारण, बोर्ड को प्रतिचित्रित प्रतिलिपियों का शुल्क प्रति विषय ₹७०० से घटाकर ₹१००, सत्यापन का शुल्क ₹५०० से घटाकर ₹१००, और पुनर्मूल्यांकन का शुल्क प्रति प्रश्न ₹१०० से घटाकर ₹२५ करना पड़ा।<ref>{{Cite news|url=https://www.business-standard.com/education/news/cbse-cuts-re-evaluation-fees-amid-low-mark-concerns-over-online-scoring-126051700321_1.html|title=CBSE slashes revaluation fees amid OSM backlash over low marks|last=Mukherjee|first=Auhona|date=17 May 2026|work=[[Business Standard]]|access-date=3 June 2026}}</ref> इसके अतिरिक्त प्रतिचित्रित प्रतियाँ प्राप्त करने और पुनर्मूल्यांकन/सत्यापन की तिथियाँ बढ़ाने का निर्णय लिया गया।<ref>{{Cite news|url=https://www.firstpost.com/india/cbse-relaunches-class-12-re-evaluation-portal-after-technical-glitch-heres-a-step-by-step-guide-to-rechecking-your-marks-14017751.html/amp|title=CBSE restores Class 12 verification portal after glitch: A step-by-step guide to apply for re-evaluation|date=2 June 2026|work=Firstpost|access-date=3 June 2026}}</ref>
[[शिक्षा मंत्रालय (भारत)|शिक्षा मन्त्रालय]] ने समीक्षाएँ आरम्भ कीं, जिनके परिणामस्वरूप सीबीएसई के अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को हटा दिया गया।<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/education/cbse-osm-chairman-secretary-transferred-inquiry-committee-to-probe-procurement-on-screen-marking-services/article71052999.ece|title=CBSE Chairman, Secretary replaced amid OSM row|last=|first=|date=2026-06-02|work=The Hindu|access-date=2026-06-03|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/nation/cbse-shake-up-chairman-secretary-transferred-over-class-12-online-marking-controversy-1960828|title=CBSE Heads Roll Over OSM Fiasco|last=Prabhakar|first=Avinash|date=2026-06-02|website=Deccan Chronicle|language=en|access-date=2026-06-03}}</ref> पूरी स्थिति के प्रत्युत्तर में, नई दिल्ली स्थित सीबीएसई मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन हुए<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/education/why-is-cbses-evaluation-system-facing-flak/article71042223.ece|title=Why is CBSE's evaluation system facing flak? {{!}} Explained|last=G|first=Sampath|date=2026-05-31|work=The Hindu|access-date=2026-06-03|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref>, और [[लोक सभा में विपक्ष के नेता|विपक्ष के नेता]] [[राहुल गांधी|राहुल गान्धी]] ने न्यायिक जाँच की माँग की।<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/cbse-row-rahul-gandhi-demands-judicial-inquiry-sit-to-unearth-truth-behind-scam/article71028533.ece|title=Rahul Gandhi seeks judicial probe into CBSE on-screen marking contract|last=|first=|date=2026-05-27|work=The Hindu|access-date=2026-06-03|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref>
== सम्बन्धित विषय ==
* [[एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक विवाद]]
* [[२०२६ नीट विवाद]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
== अग्रिम पठन ==
* {{Cite news|url=https://indianexpress.com/article/explained/cbse-on-screen-marking-system-global-practices-10717716/|title=How does CBSE's On-Screen Marking system compare with global practices?|last=Kuntamalla|first=Vidheesha|date=1 June 2026|work=[[The Indian Express]]|access-date=3 June 2026}}
* {{Cite news|url=https://theprint.in/opinion/teenagers-india-exam-neet-cbse-cuet/2947766/|title=In India's NEET and CBSE exam crisis, the only adults in the room have been children|last=Kaur|first=Karanjeet|date=2 June 2026|work=[[ThePrint]]|access-date=3 June 2026}}
* {{Cite news|url=https://www.outlookindia.com/national/digitising-education-how-cbses-osm-experiment-went-off-course|title=Digitising Education: How CBSE's OSM Experiment Went Off Course|last=Hiba Khan|first=Saher|date=30 May 2026|work=[[Outlook (Indian magazine)]]|access-date=3 June 2026}}
* {{Cite news|url=https://www.indiatoday.in/technology/talking-points/story/cbse-website-lesson-indian-digital-infra-is-not-ready-for-ai-tools-like-mythos-2921206-2026-06-03|title=CBSE website lesson: Indian digital infra is not ready for AI tools like Mythos|last=Anwer|first=Javed|date=3 June 2026|work=[[India Today]]|access-date=3 June 2026}}
[[श्रेणी:शिक्षा]]
[[श्रेणी:विवाद]]
2ineoevpq4dduu1kr1ntfei48wgsjwg
सदस्य वार्ता:Mahesh Kumar (Bahraich)
3
1616288
6591389
2026-07-24T00:00:44Z
Sanjeev bot
127039
स्वागत संदेश जोड़ा
6591389
wikitext
text/x-wiki
{{साँचा:सहायता|name=Mahesh Kumar (Bahraich)}} -- [[सदस्य:Sanjeev bot|Sanjeev bot]] ([[सदस्य वार्ता:Sanjeev bot|वार्ता]]) 00:00, 24 जुलाई 2026 (UTC)
9ozru1da34ug12cwoarajfcm1j6e1g2
सदस्य वार्ता:EditorKelly
3
1616289
6591390
2026-07-24T00:00:45Z
Sanjeev bot
127039
स्वागत संदेश जोड़ा
6591390
wikitext
text/x-wiki
{{साँचा:सहायता|name=EditorKelly}} -- [[सदस्य:Sanjeev bot|Sanjeev bot]] ([[सदस्य वार्ता:Sanjeev bot|वार्ता]]) 00:00, 24 जुलाई 2026 (UTC)
01buxopg59fch5o6pgxul479wi43ex1
सदस्य वार्ता:Shivraj sahu sk
3
1616290
6591391
2026-07-24T00:00:46Z
Sanjeev bot
127039
स्वागत संदेश जोड़ा
6591391
wikitext
text/x-wiki
{{साँचा:सहायता|name=Shivraj sahu sk}} -- [[सदस्य:Sanjeev bot|Sanjeev bot]] ([[सदस्य वार्ता:Sanjeev bot|वार्ता]]) 00:00, 24 जुलाई 2026 (UTC)
ceuvc9f77g0utm74sbsakgiro2iowv2
सदस्य वार्ता:Kapilmewada1
3
1616291
6591392
2026-07-24T00:00:47Z
Sanjeev bot
127039
स्वागत संदेश जोड़ा
6591392
wikitext
text/x-wiki
{{साँचा:सहायता|name=Kapilmewada1}} -- [[सदस्य:Sanjeev bot|Sanjeev bot]] ([[सदस्य वार्ता:Sanjeev bot|वार्ता]]) 00:00, 24 जुलाई 2026 (UTC)
7jvzen7mcu8hvcyi667ykf8jqjk31nz
प्राची बंसल
0
1616292
6591394
2026-07-24T01:20:19Z
Pushkar Singh
415569
नया पृष्ठ: प्राची बंसल एक कलाकार हैं जिन्होंने कई धारावाहिकों में काम किया है।
6591394
wikitext
text/x-wiki
प्राची बंसल एक कलाकार हैं जिन्होंने कई धारावाहिकों में काम किया है।
bicrifwtcsjzmxfsnf8ma0nbpjkm19g
6591395
6591394
2026-07-24T01:31:53Z
Pushkar Singh
415569
/* */
6591395
wikitext
text/x-wiki
प्राची बंसल एक कलाकार हैं जिन्होंने कई धारावाहिकों में काम किया है।
{{ज्ञानसंदूक व्यक्ति
|Name =प्राची बंसल
|Birth_date =
|Birth_place =
|Years_active =
}}
0mb0pul1v3hen3xxol36tjwtsmn3tfn
6591396
6591395
2026-07-24T01:32:36Z
Pushkar Singh
415569
/* */
6591396
wikitext
text/x-wiki
प्राची बंसल एक कलाकार हैं जिन्होंने कई धारावाहिकों में काम किया है।
{{Infobox person
|Name =प्राची बंसल
|Birth_date =
|Birth_place =
|Years_active =
}}
4374suxxekrwd3yxd1xlspb97n5cegr
6591397
6591396
2026-07-24T01:34:56Z
Pushkar Singh
415569
/* */
6591397
wikitext
text/x-wiki
प्राची बंसल एक कलाकार हैं जिन्होंने कई धारावाहिकों में काम किया है।
{{Infobox person
|Name =प्राची बंसल
|Birth_date =
|Birth_place =
|Years_active =
| image = Prachi Bansal in 2023.jpg
}}
3za6i99xoyxt8ejpzuv2drremoy2wf3
6591400
6591397
2026-07-24T01:38:36Z
Pushkar Singh
415569
/* */ श्रेणी जोड़ीं
6591400
wikitext
text/x-wiki
प्राची बंसल एक कलाकार हैं जिन्होंने कई धारावाहिकों में काम किया है।
{{Infobox person
|Name =प्राची बंसल
|Birth_date =
|Birth_place =
|Years_active =
| image = Prachi Bansal in 2023.jpg
}}
{{आधार}}
[[श्रेणी:1995 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी: टेलीविजन कलाकार]]
ciahkz3ipjzflc8yjp3shzxqvpw7xz9
6591401
6591400
2026-07-24T01:43:32Z
Pushkar Singh
415569
/* */ जानकारी जोड़ी
6591401
wikitext
text/x-wiki
'''प्राची बंसल''' (१९९५) एक कलाकार हैं जिन्होंने कई धारावाहिकों में काम किया है। [[थपकी प्यार की 2]] में ''वाणी अग्रवाल सिंघानिया'' और और [[श्रीमद् रामायण]] में ''[[सीता]]'' की भूमिका के लिए मुख्य रूप से जानी जाती हैं।
{{Infobox person
|Name =प्राची बंसल
|Birth_date = 19/03/1995
|Birth_place =
|Years_active =
| image = Prachi Bansal in 2023.jpg
}}
{{आधार}}
[[श्रेणी:1995 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी: टेलीविजन कलाकार]]
j69j5npd772cjsfvxwnwp8bes8ma4u8
6591402
6591401
2026-07-24T01:46:27Z
Pushkar Singh
415569
/* */
6591402
wikitext
text/x-wiki
'''प्राची बंसल''' (१९९५) एक कलाकार हैं जिन्होंने कई धारावाहिकों में काम किया है। [[थपकी प्यार की 2]] में ''वाणी अग्रवाल सिंघानिया'' और और [[श्रीमद् रामायण]] में ''[[सीता]]'' की भूमिका के लिए मुख्य रूप से जानी जाती हैं।
{{Infobox person
|Name =प्राची बंसल
|Birth_place =
|Years_active =
| image = Prachi Bansal in 2023.jpg
| caption = बंसल २०२३ में
| birth_date = {{birth_date and age|1995|3|19|df=yes}}
}}
{{आधार}}
[[श्रेणी:1995 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी: टेलीविजन कलाकार]]
bc11c67aoz1266juffeyu32phu56eei
6591403
6591402
2026-07-24T01:48:58Z
Pushkar Singh
415569
/* */ सन्दर्भ जोड़ा
6591403
wikitext
text/x-wiki
'''प्राची बंसल''' (१९९५) एक कलाकार हैं जिन्होंने कई धारावाहिकों में काम किया है। [[थपकी प्यार की 2]] में ''वाणी अग्रवाल सिंघानिया'' और और [[श्रीमद् रामायण]] में ''[[सीता]]'' की भूमिका के लिए मुख्य रूप से जानी जाती हैं।<ref>{{Cite web
|url=https://www.bhaskarhindi.com/other/prachi-bansal-wearing-sitas-wedding-outfit-was-quite-challenging-994150
|title=सीता की शादी का जोड़ा पहनना काफी चुनौतीपूर्ण था: प्राची बंसल
|website=भास्कर हिन्दी
|date=28 जनवरी 2024
|access-date=24 जुलाई 2026
|language=hi
}}</ref>
{{Infobox person
|Name =प्राची बंसल
|Birth_place =
|Years_active =
| image = Prachi Bansal in 2023.jpg
| caption = बंसल २०२३ में
| birth_date = {{birth_date and age|1995|3|19|df=yes}}
}}
{{आधार}}
[[श्रेणी:1995 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी: टेलीविजन कलाकार]]
8jwacl5p5o53s177s1mlmoynodh4ql9
6591404
6591403
2026-07-24T01:51:35Z
Pushkar Singh
415569
/* */
6591404
wikitext
text/x-wiki
'''प्राची बंसल''' (१९९५) एक कलाकार हैं जिन्होंने कई धारावाहिकों में काम किया है। [[थपकी प्यार की 2]] में ''वाणी अग्रवाल सिंघानिया'' और और [[श्रीमद् रामायण]] में ''[[सीता]]'' की भूमिका के लिए मुख्य रूप से जानी जाती हैं।<ref>{{Cite web
|url=https://www.bhaskarhindi.com/other/prachi-bansal-wearing-sitas-wedding-outfit-was-quite-challenging-994150
|title=सीता की शादी का जोड़ा पहनना काफी चुनौतीपूर्ण था: प्राची बंसल
|website=भास्कर हिन्दी
|date=28 जनवरी 2024
|access-date=24 जुलाई 2026
|language=hi
}}</ref>
{{Infobox person
|Name =प्राची बंसल
|Birth_place =
[Mumbai]], [[Maharashtra]], [[India]]
| nationality = भारतीय
|Years_active =
| image = Prachi Bansal in 2023.jpg
| caption = बंसल २०२३ में
| birth_date = {{birth_date and age|1995|3|19|df=yes}}
}}
{{आधार}}
[[श्रेणी:1995 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी: टेलीविजन कलाकार]]
bee97y5sz487d0kawv780gznby4cj6b
6591406
6591404
2026-07-24T01:54:52Z
Pushkar Singh
415569
/* */ अनुभाग जोड़े
6591406
wikitext
text/x-wiki
'''प्राची बंसल''' (१९९५) एक कलाकार हैं जिन्होंने कई धारावाहिकों में काम किया है। [[थपकी प्यार की 2]] में ''वाणी अग्रवाल सिंघानिया'' और और [[श्रीमद् रामायण]] में ''[[सीता]]'' की भूमिका के लिए मुख्य रूप से जानी जाती हैं।<ref>{{Cite web
|url=https://www.bhaskarhindi.com/other/prachi-bansal-wearing-sitas-wedding-outfit-was-quite-challenging-994150
|title=सीता की शादी का जोड़ा पहनना काफी चुनौतीपूर्ण था: प्राची बंसल
|website=भास्कर हिन्दी
|date=28 जनवरी 2024
|access-date=24 जुलाई 2026
|language=hi
}}</ref>
{{Infobox person
|Name =प्राची बंसल
|Birth_place =
[Mumbai]], [[Maharashtra]], [[India]]
| nationality = भारतीय
|Years_active =
| image = Prachi Bansal in 2023.jpg
| caption = बंसल २०२३ में
| birth_date = {{birth_date and age|1995|3|19|df=yes}}
}}
{{आधार}}
[[श्रेणी:1995 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी: टेलीविजन कलाकार]]
==कॅरियर==
=फ़िल्मोग्राफी==
===टेलीविजन===
===फ़िल्में===
===संगीत वीडियो===
==सन्दर्भ==
== बाहरी कड़ियां==
fx95diptcv8y5nde5lfu0kjcl2o7etg
6591407
6591406
2026-07-24T01:56:29Z
Pushkar Singh
415569
/* बाहरी कड़ियां */ बाहरी कड़ी जोड़ी
6591407
wikitext
text/x-wiki
'''प्राची बंसल''' (१९९५) एक कलाकार हैं जिन्होंने कई धारावाहिकों में काम किया है। [[थपकी प्यार की 2]] में ''वाणी अग्रवाल सिंघानिया'' और और [[श्रीमद् रामायण]] में ''[[सीता]]'' की भूमिका के लिए मुख्य रूप से जानी जाती हैं।<ref>{{Cite web
|url=https://www.bhaskarhindi.com/other/prachi-bansal-wearing-sitas-wedding-outfit-was-quite-challenging-994150
|title=सीता की शादी का जोड़ा पहनना काफी चुनौतीपूर्ण था: प्राची बंसल
|website=भास्कर हिन्दी
|date=28 जनवरी 2024
|access-date=24 जुलाई 2026
|language=hi
}}</ref>
{{Infobox person
|Name =प्राची बंसल
|Birth_place =
[Mumbai]], [[Maharashtra]], [[India]]
| nationality = भारतीय
|Years_active =
| image = Prachi Bansal in 2023.jpg
| caption = बंसल २०२३ में
| birth_date = {{birth_date and age|1995|3|19|df=yes}}
}}
{{आधार}}
[[श्रेणी:1995 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी: टेलीविजन कलाकार]]
==कॅरियर==
=फ़िल्मोग्राफी==
===टेलीविजन===
===फ़िल्में===
===संगीत वीडियो===
==सन्दर्भ==
== बाहरी कड़ियां==
* {{IMDb name|id=nm9952552}}
* {{instagram|prachibansal_official}}
{{Commons}}
3dtg7y8r361uon598i0liljyji2g8wr
6591409
6591407
2026-07-24T01:58:15Z
Pushkar Singh
415569
/* सन्दर्भ */
6591409
wikitext
text/x-wiki
'''प्राची बंसल''' (१९९५) एक कलाकार हैं जिन्होंने कई धारावाहिकों में काम किया है। [[थपकी प्यार की 2]] में ''वाणी अग्रवाल सिंघानिया'' और और [[श्रीमद् रामायण]] में ''[[सीता]]'' की भूमिका के लिए मुख्य रूप से जानी जाती हैं।<ref>{{Cite web
|url=https://www.bhaskarhindi.com/other/prachi-bansal-wearing-sitas-wedding-outfit-was-quite-challenging-994150
|title=सीता की शादी का जोड़ा पहनना काफी चुनौतीपूर्ण था: प्राची बंसल
|website=भास्कर हिन्दी
|date=28 जनवरी 2024
|access-date=24 जुलाई 2026
|language=hi
}}</ref>
{{Infobox person
|Name =प्राची बंसल
|Birth_place =
[Mumbai]], [[Maharashtra]], [[India]]
| nationality = भारतीय
|Years_active =
| image = Prachi Bansal in 2023.jpg
| caption = बंसल २०२३ में
| birth_date = {{birth_date and age|1995|3|19|df=yes}}
}}
{{आधार}}
[[श्रेणी:1995 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी: टेलीविजन कलाकार]]
==कॅरियर==
=फ़िल्मोग्राफी==
===टेलीविजन===
===फ़िल्में===
===संगीत वीडियो===
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियां==
* {{IMDb name|id=nm9952552}}
* {{instagram|prachibansal_official}}
{{Commons}}
2mz73rirtqnwirf9z28siyqo8eun5p3
6591410
6591409
2026-07-24T01:59:14Z
Pushkar Singh
415569
6591410
wikitext
text/x-wiki
'''प्राची बंसल''' (१९९५) एक कलाकार हैं जिन्होंने कई धारावाहिकों में काम किया है। [[थपकी प्यार की 2]] में ''वाणी अग्रवाल सिंघानिया'' और और [[श्रीमद् रामायण]] में ''[[सीता]]'' की भूमिका के लिए मुख्य रूप से जानी जाती हैं।<ref>{{Cite web
|url=https://www.bhaskarhindi.com/other/prachi-bansal-wearing-sitas-wedding-outfit-was-quite-challenging-994150
|title=सीता की शादी का जोड़ा पहनना काफी चुनौतीपूर्ण था: प्राची बंसल
|website=भास्कर हिन्दी
|date=28 जनवरी 2024
|access-date=24 जुलाई 2026
|language=hi
}}</ref>
{{Infobox person
|Name =प्राची बंसल
|Birth_place =
[Mumbai]], [[Maharashtra]], [[India]]
| nationality = भारतीय
|Years_active =
| image = Prachi Bansal in 2023.jpg
| caption = बंसल २०२३ में
| birth_date = {{birth_date and age|1995|3|19|df=yes}}
}}
{{आधार}}
[[श्रेणी:1995 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी: टेलीविजन कलाकार]]
==कॅरियर==
==फ़िल्मोग्राफी==
===टेलीविजन===
===फ़िल्में===
===संगीत वीडियो===
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियां==
* {{IMDb name|id=nm9952552}}
* {{instagram|prachibansal_official}}
{{Commons}}
ae2j46riuzpivohjoaczmuxf2wfwnyi
6591413
6591410
2026-07-24T02:00:17Z
Pushkar Singh
415569
/* */
6591413
wikitext
text/x-wiki
'''प्राची बंसल''' (१९९५) एक कलाकार हैं जिन्होंने कई धारावाहिकों में काम किया है। [[थपकी प्यार की 2]] में ''वाणी अग्रवाल सिंघानिया'' और और [[श्रीमद् रामायण]] में ''[[सीता]]'' की भूमिका के लिए मुख्य रूप से जानी जाती हैं।<ref>{{Cite web
|url=https://www.bhaskarhindi.com/other/prachi-bansal-wearing-sitas-wedding-outfit-was-quite-challenging-994150
|title=सीता की शादी का जोड़ा पहनना काफी चुनौतीपूर्ण था: प्राची बंसल
|website=भास्कर हिन्दी
|date=28 जनवरी 2024
|access-date=24 जुलाई 2026
|language=hi
}}</ref>
{{Infobox person
|Name =प्राची बंसल
|Birth_place =
[Mumbai]], [[Maharashtra]], [[India]]
| nationality = भारतीय
|Years_active =
| image = Prachi Bansal in 2023.jpg
| caption = बंसल २०२३ में
| birth_date = {{birth_date and age|1995|3|19|df=yes}}
}}
[[श्रेणी:1995 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी: टेलीविजन कलाकार]]
==कॅरियर==
==फ़िल्मोग्राफी==
===टेलीविजन===
===फ़िल्में===
===संगीत वीडियो===
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियां==
* {{IMDb name|id=nm9952552}}
* {{instagram|prachibansal_official}}
{{Commons}}
qta4rgam83gezv9ke0wnml0d9xij29t
6591415
6591413
2026-07-24T02:00:44Z
Pushkar Singh
415569
/* */
6591415
wikitext
text/x-wiki
{{आधार}}
'''प्राची बंसल''' (१९९५) एक कलाकार हैं जिन्होंने कई धारावाहिकों में काम किया है। [[थपकी प्यार की 2]] में ''वाणी अग्रवाल सिंघानिया'' और और [[श्रीमद् रामायण]] में ''[[सीता]]'' की भूमिका के लिए मुख्य रूप से जानी जाती हैं।<ref>{{Cite web
|url=https://www.bhaskarhindi.com/other/prachi-bansal-wearing-sitas-wedding-outfit-was-quite-challenging-994150
|title=सीता की शादी का जोड़ा पहनना काफी चुनौतीपूर्ण था: प्राची बंसल
|website=भास्कर हिन्दी
|date=28 जनवरी 2024
|access-date=24 जुलाई 2026
|language=hi
}}</ref>
{{Infobox person
|Name =प्राची बंसल
|Birth_place =
[Mumbai]], [[Maharashtra]], [[India]]
| nationality = भारतीय
|Years_active =
| image = Prachi Bansal in 2023.jpg
| caption = बंसल २०२३ में
| birth_date = {{birth_date and age|1995|3|19|df=yes}}
}}
[[श्रेणी:1995 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी: टेलीविजन कलाकार]]
==कॅरियर==
==फ़िल्मोग्राफी==
===टेलीविजन===
===फ़िल्में===
===संगीत वीडियो===
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियां==
* {{IMDb name|id=nm9952552}}
* {{instagram|prachibansal_official}}
{{Commons}}
j82sl0tynywzggtzn6z9shiiz1kwf7y
6591417
6591415
2026-07-24T02:02:19Z
Pushkar Singh
415569
6591417
wikitext
text/x-wiki
{{आधार}}
'''प्राची बंसल''' (१९९५) एक कलाकार हैं जिन्होंने कई धारावाहिकों में काम किया है। [[थपकी प्यार की 2]] में ''वाणी अग्रवाल सिंघानिया'' और और [[श्रीमद् रामायण]] में ''[[सीता]]'' की भूमिका के लिए मुख्य रूप से जानी जाती हैं।<ref>{{Cite web
|url=https://www.bhaskarhindi.com/other/prachi-bansal-wearing-sitas-wedding-outfit-was-quite-challenging-994150
|title=सीता की शादी का जोड़ा पहनना काफी चुनौतीपूर्ण था: प्राची बंसल
|website=भास्कर हिन्दी
|date=28 जनवरी 2024
|access-date=24 जुलाई 2026
|language=hi
}}</ref>
{{Infobox person
|Name =प्राची बंसल
|Birth_place =
[Mumbai]], [[Maharashtra]], [[India]]
| nationality = भारतीय
|Years_active =
| image = Prachi Bansal in 2023.jpg
| caption = बंसल २०२३ में
| birth_date = {{birth_date and age|1995|3|19|df=yes}}
}}
[[श्रेणी:1995 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी: टेलीविजन कलाकार]]
==कॅरियर==
==फ़िल्मोग्राफी==
===टेलीविजन===
===फ़िल्में===
===संगीत वीडियो===
==इन्हें भी देखें==
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियां==
* {{IMDb name|id=nm9952552}}
* {{instagram|prachibansal_official}}
{{Commons}}
2khags7o3kcd56ygvmn4h8xd9ox74fz
टापरा
0
1616293
6591433
2026-07-24T02:39:04Z
Dsrprj
780832
टापरा राजस्थान , भारत के बालोतरा जिले की पचपदरा तहसील में स्थित एक गाँव है । 2011 की भारत जनगणना के अनुसार, गाँव की कुल जनसंख्या 4467 है।
6591433
wikitext
text/x-wiki
टापरा राजस्थान , भारत के बालोतरा जिले की पचपदरा तहसील में स्थित एक गाँव है । 2011 की भारत जनगणना के अनुसार, गाँव की कुल जनसंख्या 4467 है।
gg24hmub7nhqjvvljzko68ij4n6usek
6591434
6591433
2026-07-24T02:39:53Z
Dsrprj
780832
/* */
6591434
wikitext
text/x-wiki
टापरा राजस्थान , भारत के बालोतरा जिले की पचपदरा तहसील में स्थित एक गाँव है । 2011 की भारत जनगणना के अनुसार, गाँव की कुल जनसंख्या 4467 है।<ref>{{Cite web |last=Bharat |first=E. T. V. |date=2025-10-23 |title=Woman Dies By Suicide Along With Three Kids In Rajasthan's Balotra |url=https://www.etvbharat.com/en/state/a-woman-killed-herself-along-with-her-three-children-in-balotra-enn25102304107 |access-date=2026-07-24 |website=ETV Bharat News |language=en}}</ref><ref>{{Cite news |title=Raj woman dies by suicide after drowning 3 kids in water tank |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/jaipur/raj-woman-dies-by-suicide-after-drowning-3-kids-in-water-tank/amp_articleshow/124771701.cms |access-date=2026-07-24 |work=The Times of India |issn=0971-8257}}</ref>
o284fgz2poi5b9uyv2dci9yf3si2l1y
6591435
6591434
2026-07-24T02:40:17Z
Dsrprj
780832
/* */
6591435
wikitext
text/x-wiki
टापरा राजस्थान , भारत के बालोतरा जिले की पचपदरा तहसील में स्थित एक गाँव है । 2011 की भारत जनगणना के अनुसार, गाँव की कुल जनसंख्या 4467 है।<ref>{{Cite web |last=Bharat |first=E. T. V. |date=2025-10-23 |title=Woman Dies By Suicide Along With Three Kids In Rajasthan's Balotra |url=https://www.etvbharat.com/en/state/a-woman-killed-herself-along-with-her-three-children-in-balotra-enn25102304107 |access-date=2026-07-24 |website=ETV Bharat News |language=en}}</ref><ref>{{Cite news |title=Raj woman dies by suicide after drowning 3 kids in water tank |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/jaipur/raj-woman-dies-by-suicide-after-drowning-3-kids-in-water-tank/amp_articleshow/124771701.cms |access-date=2026-07-24 |work=The Times of India |issn=0971-8257}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:बाड़मेर ज़िले के गाँव]]
[[श्रेणी:राजस्थान की तहसीलें]]
8b4h2qbhp42a8gp1z7oop7c6bisai5r
6591436
6591435
2026-07-24T02:41:12Z
Dsrprj
780832
/* */ Typo
6591436
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox settlement
|name = टापरा
|other_name = Mevanagar
| settlement_type = [[गाँव]]
| image_skyline =
| image_alt =
|subdivision_type = |subdivision_name = {{IND}}
|subdivision_type1 = [[भारत के राज्य|राज्य]] |subdivision_name1 = [[राजस्थान]]
|subdivision_type2 = [[भारत के ज़िले|ज़िला]] |subdivision_name2 = [[बालोतरा ज़िला]]
|subdivision_type3 = [[तहसील]] |subdivision_name3 = [[पचपदरा]]
|elevation_m =
|population_total = 4467
|population_as_of = 2011
|demographics_type1 = भाषा
|demographics1_title1= प्रचलित
|demographics1_info1= [[राजस्थानी भाषा|राजस्थानी]], [[हिन्दी]],[[मारवाड़ी]]
|timezone1 = [[भारतीय मानक समय]] |utc_offset1 = +5:30
}}टापरा राजस्थान , भारत के बालोतरा जिले की पचपदरा तहसील में स्थित एक गाँव है । 2011 की भारत जनगणना के अनुसार, गाँव की कुल जनसंख्या 4467 है।<ref>{{Cite web |last=Bharat |first=E. T. V. |date=2025-10-23 |title=Woman Dies By Suicide Along With Three Kids In Rajasthan's Balotra |url=https://www.etvbharat.com/en/state/a-woman-killed-herself-along-with-her-three-children-in-balotra-enn25102304107 |access-date=2026-07-24 |website=ETV Bharat News |language=en}}</ref><ref>{{Cite news |title=Raj woman dies by suicide after drowning 3 kids in water tank |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/jaipur/raj-woman-dies-by-suicide-after-drowning-3-kids-in-water-tank/amp_articleshow/124771701.cms |access-date=2026-07-24 |work=The Times of India |issn=0971-8257}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:बाड़मेर ज़िले के गाँव]]
[[श्रेणी:राजस्थान की तहसीलें]]
emfr306qv7s6pzmsrfdmtq51bzl1q4v
6591442
6591436
2026-07-24T02:45:22Z
Dsrprj
780832
/* */
6591442
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox settlement
|name = टापरा
|other_name = Mevanagar
| settlement_type = [[गाँव]]
| image_skyline =
| image_alt =
|subdivision_type = |subdivision_name = {{IND}}
|subdivision_type1 = [[भारत के राज्य|राज्य]] |subdivision_name1 = [[राजस्थान]]
|subdivision_type2 = [[भारत के ज़िले|ज़िला]] |subdivision_name2 = [[बालोतरा ज़िला]]
|subdivision_type3 = [[तहसील]] |subdivision_name3 = [[पचपदरा]]
|elevation_m =
|population_total = 4467
|population_as_of = 2011
|demographics_type1 = भाषा
|demographics1_title1= प्रचलित
|demographics1_info1= [[राजस्थानी भाषा|राजस्थानी]], [[हिन्दी]],[[मारवाड़ी]]
|timezone1 = [[भारतीय मानक समय]] |utc_offset1 = +5:30
}}टापरा राजस्थान <ref>{{Cite web |title=Tapra Village Population - Pachpadra - Barmer, Rajasthan |url=https://www.census2011.co.in/data/village/87327-tapra-rajasthan.html |access-date=2026-07-24 |website=www.census2011.co.in}}</ref><ref>{{Cite web |last=english |title=Tapra Pin Code - 344022, All Post Office Areas PIN Codes, Search barmer Post Office Address |url=https://news.abplive.com/pincode/rajasthan/barmer/tapra-pincode-344022.html |access-date=2026-07-24 |website=ABP Live English |language=en}}</ref>, भारत के बालोतरा जिले की पचपदरा तहसील में स्थित एक गाँव है । 2011 की भारत जनगणना के अनुसार, गाँव की कुल जनसंख्या 4467 है।<ref>{{Cite web |last=Bharat |first=E. T. V. |date=2025-10-23 |title=Woman Dies By Suicide Along With Three Kids In Rajasthan's Balotra |url=https://www.etvbharat.com/en/state/a-woman-killed-herself-along-with-her-three-children-in-balotra-enn25102304107 |access-date=2026-07-24 |website=ETV Bharat News |language=en}}</ref><ref>{{Cite news |title=Raj woman dies by suicide after drowning 3 kids in water tank |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/jaipur/raj-woman-dies-by-suicide-after-drowning-3-kids-in-water-tank/amp_articleshow/124771701.cms |access-date=2026-07-24 |work=The Times of India |issn=0971-8257}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:बाड़मेर ज़िले के गाँव]]
[[श्रेणी:राजस्थान की तहसीलें]]
6b63dnahu7417plxnk9sq8qar06bf86
6591443
6591442
2026-07-24T02:45:46Z
Dsrprj
780832
/* */ Cr
6591443
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox settlement
|name = टापरा
|other_name =
| settlement_type = [[गाँव]]
| image_skyline =
| image_alt =
|subdivision_type = |subdivision_name = {{IND}}
|subdivision_type1 = [[भारत के राज्य|राज्य]] |subdivision_name1 = [[राजस्थान]]
|subdivision_type2 = [[भारत के ज़िले|ज़िला]] |subdivision_name2 = [[बालोतरा ज़िला]]
|subdivision_type3 = [[तहसील]] |subdivision_name3 = [[पचपदरा]]
|elevation_m =
|population_total = 4467
|population_as_of = 2011
|demographics_type1 = भाषा
|demographics1_title1= प्रचलित
|demographics1_info1= [[राजस्थानी भाषा|राजस्थानी]], [[हिन्दी]],[[मारवाड़ी]]
|timezone1 = [[भारतीय मानक समय]] |utc_offset1 = +5:30
}}टापरा राजस्थान <ref>{{Cite web |title=Tapra Village Population - Pachpadra - Barmer, Rajasthan |url=https://www.census2011.co.in/data/village/87327-tapra-rajasthan.html |access-date=2026-07-24 |website=www.census2011.co.in}}</ref><ref>{{Cite web |last=english |title=Tapra Pin Code - 344022, All Post Office Areas PIN Codes, Search barmer Post Office Address |url=https://news.abplive.com/pincode/rajasthan/barmer/tapra-pincode-344022.html |access-date=2026-07-24 |website=ABP Live English |language=en}}</ref>, भारत के बालोतरा जिले की पचपदरा तहसील में स्थित एक गाँव है । 2011 की भारत जनगणना के अनुसार, गाँव की कुल जनसंख्या 4467 है।<ref>{{Cite web |last=Bharat |first=E. T. V. |date=2025-10-23 |title=Woman Dies By Suicide Along With Three Kids In Rajasthan's Balotra |url=https://www.etvbharat.com/en/state/a-woman-killed-herself-along-with-her-three-children-in-balotra-enn25102304107 |access-date=2026-07-24 |website=ETV Bharat News |language=en}}</ref><ref>{{Cite news |title=Raj woman dies by suicide after drowning 3 kids in water tank |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/jaipur/raj-woman-dies-by-suicide-after-drowning-3-kids-in-water-tank/amp_articleshow/124771701.cms |access-date=2026-07-24 |work=The Times of India |issn=0971-8257}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:बाड़मेर ज़िले के गाँव]]
[[श्रेणी:राजस्थान की तहसीलें]]
0plgll9kybwdc6n65obxvjts250gi41
6591452
6591443
2026-07-24T03:04:23Z
Dsrprj
780832
/* */
6591452
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox settlement
|name = टापरा
|other_name =
| settlement_type = [[गाँव]]
| image_skyline =
| image_alt =
|subdivision_type = |subdivision_name = {{IND}}
|subdivision_type1 = [[भारत के राज्य|राज्य]] |subdivision_name1 = [[राजस्थान]]
|subdivision_type2 = [[भारत के ज़िले|ज़िला]] |subdivision_name2 = [[बालोतरा ज़िला]]
|subdivision_type3 = [[तहसील]] |subdivision_name3 = [[पचपदरा]]
|elevation_m =
|population_total = 4467
|population_as_of = 2011
|demographics_type1 = भाषा
|demographics1_title1= प्रचलित
|demographics1_info1= [[राजस्थानी भाषा|राजस्थानी]], [[हिन्दी]],[[मारवाड़ी]]
|timezone1 = [[भारतीय मानक समय]] |utc_offset1 = +5:30
}}
'''टापरा''' राजस्थान <ref>{{Cite web |title=Tapra Village Population - Pachpadra - Barmer, Rajasthan |url=https://www.census2011.co.in/data/village/87327-tapra-rajasthan.html |access-date=2026-07-24 |website=www.census2011.co.in}}</ref><ref>{{Cite web |last=english |title=Tapra Pin Code - 344022, All Post Office Areas PIN Codes, Search barmer Post Office Address |url=https://news.abplive.com/pincode/rajasthan/barmer/tapra-pincode-344022.html |access-date=2026-07-24 |website=ABP Live English |language=en}}</ref>, भारत के बालोतरा जिले की पचपदरा तहसील में स्थित एक गाँव है । 2011 की भारत जनगणना के अनुसार, गाँव की कुल जनसंख्या 4467 है।<ref>{{Cite web |last=Bharat |first=E. T. V. |date=2025-10-23 |title=Woman Dies By Suicide Along With Three Kids In Rajasthan's Balotra |url=https://www.etvbharat.com/en/state/a-woman-killed-herself-along-with-her-three-children-in-balotra-enn25102304107 |access-date=2026-07-24 |website=ETV Bharat News |language=en}}</ref><ref>{{Cite news |title=Raj woman dies by suicide after drowning 3 kids in water tank |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/jaipur/raj-woman-dies-by-suicide-after-drowning-3-kids-in-water-tank/amp_articleshow/124771701.cms |access-date=2026-07-24 |work=The Times of India |issn=0971-8257}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:बाड़मेर ज़िले के गाँव]]
[[श्रेणी:राजस्थान की तहसीलें]]
1fhzn5pf1rkrlb64h41mim8wfd7yxc5
6591453
6591452
2026-07-24T03:05:26Z
Dsrprj
780832
/* */
6591453
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox settlement
|name = टापरा
|other_name =
| settlement_type = [[गाँव]]
| image_skyline =
| image_alt =
|subdivision_type = |subdivision_name = {{IND}}
|subdivision_type1 = [[भारत के राज्य|राज्य]] |subdivision_name1 = [[राजस्थान]]
|subdivision_type2 = [[भारत के ज़िले|ज़िला]] |subdivision_name2 = [[बालोतरा ज़िला]]
|subdivision_type3 = [[तहसील]] |subdivision_name3 = [[पचपदरा]]
|elevation_m =
|population_total = 4467
|population_as_of = 2011
|demographics_type1 = भाषा
|demographics1_title1= प्रचलित
|demographics1_info1= [[राजस्थानी भाषा|राजस्थानी]], [[हिन्दी]],[[मारवाड़ी]]
|timezone1 = [[भारतीय मानक समय]] |utc_offset1 = +5:30
}}
'''टापरा''' राजस्थान <ref>{{Cite web |title=Tapra Village Population - Pachpadra - Barmer, Rajasthan |url=https://www.census2011.co.in/data/village/87327-tapra-rajasthan.html |access-date=2026-07-24 |website=www.census2011.co.in}}</ref><ref>{{Cite web |last=english |title=Tapra Pin Code - 344022, All Post Office Areas PIN Codes, Search barmer Post Office Address |url=https://news.abplive.com/pincode/rajasthan/barmer/tapra-pincode-344022.html |access-date=2026-07-24 |website=ABP Live English |language=en}}</ref>, भारत के बालोतरा जिले की पचपदरा तहसील में स्थित एक गाँव है । 2011 की भारत जनगणना के अनुसार, गाँव की कुल जनसंख्या 4467 है।<ref>{{Cite web |last=Bharat |first=E. T. V. |date=2025-10-23 |title=Woman Dies By Suicide Along With Three Kids In Rajasthan's Balotra |url=https://www.etvbharat.com/en/state/a-woman-killed-herself-along-with-her-three-children-in-balotra-enn25102304107 |access-date=2026-07-24 |website=ETV Bharat News |language=en}}</ref><ref>{{Cite news |title=Raj woman dies by suicide after drowning 3 kids in water tank |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/jaipur/raj-woman-dies-by-suicide-after-drowning-3-kids-in-water-tank/amp_articleshow/124771701.cms |access-date=2026-07-24 |work=The Times of India |issn=0971-8257}}</ref>
==इन्हे भी देखे==
*[[कालुडी]]
*[[सराणा]]
*[[पादरू]]
*[[तिरसिंगड़ी सोढ़ा]]
*[[डंडाली]]
*[[चांदेसरा]]
*[[सरवड़ी पुरोहितान]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:बाड़मेर ज़िले के गाँव]]
[[श्रेणी:राजस्थान की तहसीलें]]
3cwlinxi76gh4s16yuu8c1y8t57utb8
विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/सरूंड माता
4
1616294
6591439
2026-07-24T02:44:34Z
SM7
89247
[[:सरूंड माता]] को हटाने हेतु चर्चा पृष्ठ बनाया जा रहा
6591439
wikitext
text/x-wiki
=== [[:सरूंड माता]] ===
{{हहेच श्रेणीकरण|वर्तमान=हाँ|प्रकार=लेख|तिथि=जुलाई 2026}}
:{{la|1=सरूंड माता}}
:{{गूगल|खोज|समाचार|पुस्तक|विद्वान|सरूंड माता -विकिपीडिया -wikipedia}}
नामांकन के लिये कारण:
[[वि:RS|विश्वसनीय_स्रोत]] नहीं मिल रहे; ऐसे में उल्लेखनीयता संदिग्ध। निजी टिप्पणी एवं मूल शोध की तरह लिखा लेख। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 02:44, 24 जुलाई 2026 (UTC)
lc7akrs8bqnq6e1cfjp5sym3748w4p3
श्रेणी वार्ता:भारतीय पौराणिक टेलीविजन श्रृंखला
15
1616295
6591446
2026-07-24T02:51:31Z
Pushkar Singh
415569
/* श्रेणी श्रृंखला को शृंखला में बदला जाए */ नया अनुभाग
6591446
wikitext
text/x-wiki
== श्रेणी '''श्रृंखला''' को '''शृंखला''' में बदला जाए ==
शृंखला सही है श्रृंखला नहीं या फिर दूसरा [https://www.jagran.com/life-style/fashion-beauty-kahani-gehno-ki-maang-tikka-significance-essential-to-solah-shringar-and-indian-bridal-look-40064992.html दैनिक जागरण] ये जो दैनिक जागरण ने लिखा है। श्रवण, श्रम ठीक है लेकिन जब श के साथ ऋ जुड़ता है तो श् के साथ र नहीं लगता है। [[वर्ण-वियोजन]] श्र/Shra=श्+र है जबकि श्रृ=श्+र+अ+ऋ है (शृ=श्+ऋ)। ऐसी त्रुटि प्रायः शृंगार, शृंखला, शृंगी में मिलती है।
[[एनसीईआरटी]], [[गीता प्रेस]] आदि की पुस्तकों में भी ये त्रुटि नहीं मिलती है।
'''अंतर्जाल पर आलस्यवश, लेखन में फॉन्ट न होने से या रेंडरिंग ठीक न होने से अथवा अज्ञानतावश''' ये त्रुटि देखने को मिलती है। [[सदस्य:Pushkar Singh|<span style="color:DeepPink;">पुष्कर सिंह</span>]] [[सदस्य वार्ता:Pushkar Singh|<span style="color:Red;">✉️</span>]] 02:51, 24 जुलाई 2026 (UTC)
dozpzczdgo3uyci2i1ln386ymueyjp2
6591447
6591446
2026-07-24T02:52:55Z
Pushkar Singh
415569
/* श्रेणी श्रृंखला को शृंखला में बदला जाए */ वाक्य सुधारा
6591447
wikitext
text/x-wiki
== श्रेणी '''श्रृंखला''' को '''शृंखला''' में बदला जाए ==
शृंखला सही है श्रृंखला नहीं या फिर दूसरा ये [https://www.jagran.com/life-style/fashion-beauty-kahani-gehno-ki-maang-tikka-significance-essential-to-solah-shringar-and-indian-bridal-look-40064992.html दैनिक जागरण] ने जो लिखा है। श्रवण, श्रम ठीक है लेकिन जब श के साथ ऋ जुड़ता है तो श् के साथ र नहीं लगता है। [[वर्ण-वियोजन]] श्र/Shra=श्+र है जबकि श्रृ=श्+र+अ+ऋ है (शृ=श्+ऋ)। ऐसी त्रुटि प्रायः शृंगार, शृंखला, शृंगी में मिलती है।
[[एनसीईआरटी]], [[गीता प्रेस]] आदि की पुस्तकों में भी ये त्रुटि नहीं मिलती है।
'''अंतर्जाल पर आलस्यवश, लेखन में फॉन्ट न होने से या रेंडरिंग ठीक न होने से अथवा अज्ञानतावश''' ये त्रुटि देखने को मिलती है। [[सदस्य:Pushkar Singh|<span style="color:DeepPink;">पुष्कर सिंह</span>]] [[सदस्य वार्ता:Pushkar Singh|<span style="color:Red;">✉️</span>]] 02:51, 24 जुलाई 2026 (UTC)
6j94hc044qiho1415i8nlktcnxun1wl
वार्ता:टापरा
1
1616296
6591451
2026-07-24T03:03:49Z
Dsrprj
780832
/* */ वार्ता
6591451
wikitext
text/x-wiki
{{वार्ता}}
rx4y4d1zqqpgtxe9j5l0nrs92zf5d03
विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/डॉ. ई. श्रीहरि
4
1616297
6591455
2026-07-24T03:18:28Z
SM7
89247
[[:डॉ. ई. श्रीहरि]] को हटाने हेतु चर्चा पृष्ठ बनाया जा रहा
6591455
wikitext
text/x-wiki
=== [[:डॉ. ई. श्रीहरि]] ===
{{हहेच श्रेणीकरण|वर्तमान=हाँ|प्रकार=लेख|तिथि=जुलाई 2026}}
:{{la|1=डॉ. ई. श्रीहरि}}
:{{गूगल|खोज|समाचार|पुस्तक|विद्वान|डॉ. ई. श्रीहरि -विकिपीडिया -wikipedia}}
नामांकन के लिये कारण:
प्रचारात्मक लेख। मशीन द्वारा लिखित। साथ ही इससे संबंधित मुख्य लेख (''[[डायमंड मेड मैन]]'') भी इसी चर्चा में हटाने हेतु जोड़ा जा रहा। यह लेख भी मशीन निर्मित या अनूदित है। उल्लेखनीय है अथवा नहीं यह स्पष्ट नहीं। यदि फिल्म का लेख उल्लेखनीय साबित होता है तो इस शीर्षक, ''डॉ. ई. श्रीहरि'' को उसपर पुनर्प्रेषित किया जा सकता है, अलग से लेख की ज़रूरत नहीं प्रतीत होती। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 03:18, 24 जुलाई 2026 (UTC)
6vwrlr13vdo2aj9n01alnwjwx5tr9fz
6591458
6591455
2026-07-24T03:19:19Z
SM7
89247
+ दूसरा लेख जोड़ा
6591458
wikitext
text/x-wiki
=== [[:डॉ. ई. श्रीहरि]] ===
{{हहेच श्रेणीकरण|वर्तमान=हाँ|प्रकार=लेख|तिथि=जुलाई 2026}}
:{{la|1=डॉ. ई. श्रीहरि}}
:{{गूगल|खोज|समाचार|पुस्तक|विद्वान|डॉ. ई. श्रीहरि -विकिपीडिया -wikipedia}}
:{{la|1=डायमंड मेड मैन}}
:{{गूगल|खोज|समाचार|पुस्तक|विद्वान|डॉ. ई. श्रीहरि -विकिपीडिया -wikipedia}}
नामांकन के लिये कारण:
प्रचारात्मक लेख। मशीन द्वारा लिखित। साथ ही इससे संबंधित मुख्य लेख (''[[डायमंड मेड मैन]]'') भी इसी चर्चा में हटाने हेतु जोड़ा जा रहा। यह लेख भी मशीन निर्मित या अनूदित है। उल्लेखनीय है अथवा नहीं यह स्पष्ट नहीं। यदि फिल्म का लेख उल्लेखनीय साबित होता है तो इस शीर्षक, ''डॉ. ई. श्रीहरि'' को उसपर पुनर्प्रेषित किया जा सकता है, अलग से लेख की ज़रूरत नहीं प्रतीत होती। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 03:18, 24 जुलाई 2026 (UTC)
9ens2fcdr8d331ps85kewwgjltht1ci
हज की मुताह
0
1616298
6591471
2026-07-24T05:30:09Z
Umarkairanvi
13754
"[[:en:Special:Redirect/revision/1183405909|Mut'ah of Hajj]]" पृष्ठ का अनुवाद करके निर्मित किया गया
6591471
wikitext
text/x-wiki
'''हज का मुताह:''' [[अरबी भाषा|अरबी]] में हज अल-तमत्तु " जिसका अर्थ है " [[हज]] का आनंद", [[उम्रह|उमराह]] और हज के बीच [[एहराम|इहराम]] ("पवित्र अवस्था") में दी जाने वाली छूट है जिसमें इसके पहनावे और विभिन्न निषेध शामिल हैं।
== इन्हें भी देखें ==
* [[निकाह मुताह]]
* [[इस्लाम में तलाक़]]
* <bdi>[[ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ऑफ इस्लाम]]</bdi>
* [[आसुर विवाह]]
* [[राक्षस विवाह]]
== संदर्भ ==
[[श्रेणी:हज]]
[[श्रेणी:इस्लाम]]
[[श्रेणी:फ़िक़ह]]
[[श्रेणी:अरबी शब्द और वाक्यांश]]
no2a5pmakffl2cutq4720y306x9tcsw
6591476
6591471
2026-07-24T05:44:45Z
Umarkairanvi
13754
विस्तार
6591476
wikitext
text/x-wiki
{{फ़िक़ह|theological}}
'''हज का मुताह:''' [[अरबी भाषा|अरबी]] में हज अल-तमत्तु " जिसका अर्थ है " [[हज]] का आनंद", [[उम्रह|उमराह]] और हज के बीच [[एहराम|इहराम]] ("पवित्र अवस्था") में दी जाने वाली छूट है जिसमें इसके पहनावे और विभिन्न निषेध शामिल हैं।
== इतिहास ==
इस्तीलामी र्थयात्रा की योजना बनाते समय प्रतिभागी से यात्रा शुरू होने से पहले अपना उद्देश्य बताने के लिए कहा जाता है। यदि तीर्थयात्रा की शुरुआत केवल एक छोटी तीर्थयात्रा के इरादे से की जाती है और तीर्थयात्री यात्रा शुरू करने के बाद यह तय करता है कि यह एक बड़ी तीर्थयात्रा होगी तो उसे [[मक्का (शहर)|मक्का]] से एक निश्चित दूरी पर जाना होगा और फिर एक नई तीर्थयात्रा शुरू करनी होगी, जिसका उद्देश्य बड़ी तीर्थयात्रा करना होगा।
[[मुहम्मद|मुहम्मद ने]] फरमान जारी किया कि [[उम्रह|उमराह]] और [[हज|हज को]] एक साथ किया जा सकता है, यानी: दोनों आयोजनों में भाग लेने के इरादे से तीर्थयात्रा शुरू करना।
अवलोकन
तीर्थयात्रा के दो रूप हैं: "लघु तीर्थयात्रा" (अरबी ''[[उम्रह|उमराह]]'' ) और "प्रमुख तीर्थयात्रा" (अरबी ''[[हज]]'' )। प्रमुख तीर्थयात्रा में अधिक नियम होते हैं और सभी मुसलमानों के लिए (यदि वे आर्थिक रूप से सक्षम हैं तो) जीवन में एक बार इसे करना अनिवार्य है; यदि वे आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं तो यह अनिवार्य नहीं है। चाहे छोटी हो या बड़ी, तीर्थयात्रा करते समय मुसलमान को कुछ सख्त पोशाक नियमों का पालन करना होता है जिनमें कुछ अन्य नियम (अरबी: ''[[एहराम|इहराम]]'' ) भी शामिल हैं।
इस्लाम-पूर्व अरब में, यदि कोई व्यक्ति मुख्य तीर्थयात्रा शुरू होने से कुछ समय पहले छोटी तीर्थयात्रा पर जाता था, तो उसे पोशाक संहिता से बाहर जाने की मनाही थी यदि वह इसके बाद एक बड़ी तीर्थयात्रा करने का इरादा रखता था।
इस नियम को मुहम्मद ने निरस्त कर दिया था, जिन्होंने कहा था कि यदि कोई हज पर जाना चाहता है तो इहराम की अवस्था छोड़ना जायज़ है। इस छूट को "आनंद" (अरबी: ''[[Mut'ah|, मुताह/मुतअह]]'' ) या अधिक स्पष्ट रूप से, "तीर्थयात्रा का आनंद", हज का मुतअह या अरबी में: ''[[Hajj al-Tamattu|हज अल-तमात्तु (]] [[हज]] का आनंद") के'' नाम से जाना जाने लगा।
क़ुरआन में
=== क़ुरआन में ===
सूरह [[अल-बक़रा|अल-बक़रह]] (2:196):
"जो व्यक्ति उमरा करके हज तक लाभ उठाए (तमत्तु' करे), वह अपनी सामर्थ्य के अनुसार क़ुर्बानी करे।" <ref>{{Cite web|url=https://tanzil.net/#trans/hi.farooq/2:196|title=Tanzil - Quran Navigator {{!}} القرآن الكريم|website=tanzil.net|access-date=2026-07-24}}</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[निकाह मुताह]]
* [[इस्लाम में तलाक़]]
* <bdi>[[ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ऑफ इस्लाम]]</bdi>
* [[आसुर विवाह]]
* [[राक्षस विवाह]]
== संदर्भ ==
[[श्रेणी:हज]]
[[श्रेणी:इस्लाम]]
[[श्रेणी:फ़िक़ह]]
[[श्रेणी:अरबी शब्द और वाक्यांश]]
3ohjh7izir9zhr1n7novpkomc84ntp9
सदस्य:TheTarget2027/प्रयोगपृष्ठ
2
1616299
6591480
2026-07-24T06:20:26Z
TheTarget2027
934652
नया पृष्ठ: [[नशा नाश सट्टा विनाश]]
6591480
wikitext
text/x-wiki
[[नशा नाश सट्टा विनाश]]
4q9yzgdztjh6ia0weo89gc8d46vt4gi
थूम्बली
0
1616301
6591495
2026-07-24T07:11:37Z
Dsrprj
780832
थुम्बली राजस्थान के बालोतरा (पूर्व में बाड़मेर) जिले में स्थित एक ऐतिहासिक और ग्रामीण गांव है। यह क्षेत्र विशेष रूप से पशुपालन (विशेषकर ऊंटनी के दूध व्यवसाय) और स्थानीय सामाजिक व प्रशासनिक कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है।
6591495
wikitext
text/x-wiki
थुम्बली<ref>{{Cite web|url=https://www.census2011.co.in/data/village/86782-thoombali-rajasthan.html|title=Thoombali Village Population - Sheo - Barmer, Rajasthan|website=www.census2011.co.in|access-date=2026-07-24}}</ref>राजस्थान के बालोतरा (पूर्व में बाड़मेर) जिले में स्थित एक ऐतिहासिक और ग्रामीण गांव है। यह क्षेत्र विशेष रूप से पशुपालन (विशेषकर ऊंटनी के दूध व्यवसाय) और स्थानीय सामाजिक व प्रशासनिक कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है।
ow3iv7ib3xdv1vsopvp3mwz4pivhbtn
6591496
6591495
2026-07-24T07:12:56Z
Dsrprj
780832
/* */
6591496
wikitext
text/x-wiki
थुम्बली<ref>{{Cite web|url=https://www.census2011.co.in/data/village/86782-thoombali-rajasthan.html|title=Thoombali Village Population - Sheo - Barmer, Rajasthan|website=www.census2011.co.in|access-date=2026-07-24}}</ref>राजस्थान के बालोतरा (पूर्व में बाड़मेर) जिले में स्थित एक ऐतिहासिक और ग्रामीण गांव है। यह क्षेत्र विशेष रूप से पशुपालन (विशेषकर ऊंटनी के दूध व्यवसाय) <ref>{{Cite web|url=https://www.etvbharat.com/hi/!state/importance-of-camel-in-rajasthan-desert-areas-camel-milk-is-full-of-medicinal-properties-rajasthan-news-rjs25030504335|title=ऊंटनी का दूध औषधीय गुणों से है भरपूर, बाजार में एक लीटर मिलता है 250 रुपये का|last=Bharat|first=E. T. V.|date=2025-03-05|website=ETV Bharat News|language=hi|access-date=2026-07-24}}</ref>और स्थानीय सामाजिक व प्रशासनिक कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है।
dw52vsp33aoe2gfnxtfxo8ni2pajb9r
6591497
6591496
2026-07-24T07:13:50Z
Dsrprj
780832
/* */ Cr
6591497
wikitext
text/x-wiki
थुम्बली<ref>{{Cite web|url=https://www.census2011.co.in/data/village/86782-thoombali-rajasthan.html|title=Thoombali Village Population - Sheo - Barmer, Rajasthan|website=www.census2011.co.in|access-date=2026-07-24}}</ref>राजस्थान के बालोतरा (पूर्व में बाड़मेर) जिले में स्थित एक ऐतिहासिक और ग्रामीण गांव है। यह क्षेत्र विशेष रूप से पशुपालन (विशेषकर ऊंटनी के दूध व्यवसाय) <ref>{{Cite web|url=https://www.etvbharat.com/hi/!state/importance-of-camel-in-rajasthan-desert-areas-camel-milk-is-full-of-medicinal-properties-rajasthan-news-rjs25030504335|title=ऊंटनी का दूध औषधीय गुणों से है भरपूर, बाजार में एक लीटर मिलता है 250 रुपये का|last=Bharat|first=E. T. V.|date=2025-03-05|website=ETV Bharat News|language=hi|access-date=2026-07-24}}</ref>और स्थानीय सामाजिक व प्रशासनिक कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है।
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:बाड़मेर ज़िले के गाँव]]
[[श्रेणी:राजस्थान की तहसीलें]]
83g5byu1asj87c69d8j2j47dz4evbby
6591498
6591497
2026-07-24T07:14:18Z
Dsrprj
780832
/* */ Cr
6591498
wikitext
text/x-wiki
'''थूम्बली'''<ref>{{Cite web|url=https://www.census2011.co.in/data/village/86782-thoombali-rajasthan.html|title=Thoombali Village Population - Sheo - Barmer, Rajasthan|website=www.census2011.co.in|access-date=2026-07-24}}</ref>राजस्थान के बालोतरा (पूर्व में बाड़मेर) जिले में स्थित एक ऐतिहासिक और ग्रामीण गांव है। यह क्षेत्र विशेष रूप से पशुपालन (विशेषकर ऊंटनी के दूध व्यवसाय) <ref>{{Cite web|url=https://www.etvbharat.com/hi/!state/importance-of-camel-in-rajasthan-desert-areas-camel-milk-is-full-of-medicinal-properties-rajasthan-news-rjs25030504335|title=ऊंटनी का दूध औषधीय गुणों से है भरपूर, बाजार में एक लीटर मिलता है 250 रुपये का|last=Bharat|first=E. T. V.|date=2025-03-05|website=ETV Bharat News|language=hi|access-date=2026-07-24}}</ref>और स्थानीय सामाजिक व प्रशासनिक कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है।
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:बाड़मेर ज़िले के गाँव]]
[[श्रेणी:राजस्थान की तहसीलें]]
mawutauiue3bvzz51xxtc05an90rycr
6591500
6591498
2026-07-24T07:25:52Z
Dsrprj
780832
/* */
6591500
wikitext
text/x-wiki
'''थूम्बली'''<ref>{{Cite web|url=https://www.census2011.co.in/data/village/86782-thoombali-rajasthan.html|title=Thoombali Village Population - Sheo - Barmer, Rajasthan|website=www.census2011.co.in|access-date=2026-07-24}}</ref>राजस्थान के बालोतरा (पूर्व में बाड़मेर) जिले में स्थित एक ऐतिहासिक और ग्रामीण गांव है। यह क्षेत्र विशेष रूप से पशुपालन (विशेषकर ऊंटनी के दूध व्यवसाय) <ref>{{Cite web|url=https://www.etvbharat.com/hi/!state/importance-of-camel-in-rajasthan-desert-areas-camel-milk-is-full-of-medicinal-properties-rajasthan-news-rjs25030504335|title=ऊंटनी का दूध औषधीय गुणों से है भरपूर, बाजार में एक लीटर मिलता है 250 रुपये का|last=Bharat|first=E. T. V.|date=2025-03-05|website=ETV Bharat News|language=hi|access-date=2026-07-24}}</ref>और स्थानीय सामाजिक व प्रशासनिक कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है।<ref>{{Cite web |last=english |title=Thumbali Pin Code - 344701, All Post Office Areas PIN Codes, Search barmer Post Office Address |url=https://news.abplive.com/pincode/rajasthan/barmer/thumbali-pincode-344701.html |access-date=2026-07-24 |website=ABP Live English |language=en}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:बाड़मेर ज़िले के गाँव]]
[[श्रेणी:राजस्थान की तहसीलें]]
drwosguvnn8su712uqz7i6lplh7nl43
6591501
6591500
2026-07-24T07:26:19Z
Dsrprj
780832
/* */
6591501
wikitext
text/x-wiki
'''थूम्बली'''<ref>{{Cite web|url=https://www.census2011.co.in/data/village/86782-thoombali-rajasthan.html|title=Thoombali Village Population - Sheo - Barmer, Rajasthan|website=www.census2011.co.in|access-date=2026-07-24}}</ref>राजस्थान के बालोतरा (पूर्व में बाड़मेर) जिले में स्थित एक ऐतिहासिक और ग्रामीण गांव है। यह क्षेत्र विशेष रूप से पशुपालन (विशेषकर ऊंटनी के दूध व्यवसाय) <ref>{{Cite web|url=https://www.etvbharat.com/hi/!state/importance-of-camel-in-rajasthan-desert-areas-camel-milk-is-full-of-medicinal-properties-rajasthan-news-rjs25030504335|title=ऊंटनी का दूध औषधीय गुणों से है भरपूर, बाजार में एक लीटर मिलता है 250 रुपये का|last=Bharat|first=E. T. V.|date=2025-03-05|website=ETV Bharat News|language=hi|access-date=2026-07-24}}</ref>और स्थानीय सामाजिक व प्रशासनिक कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है।<ref>{{Cite web |last=english |title=Thumbali Pin Code - 344701, All Post Office Areas PIN Codes, Search barmer Post Office Address |url=https://news.abplive.com/pincode/rajasthan/barmer/thumbali-pincode-344701.html |access-date=2026-07-24 |website=ABP Live English |language=en}}</ref><ref>{{Cite web |title=Thoombali Village (Pincode: 344701), Sheo, Barmer {{!}} Rajasthan {{!}} – Population, Area, Nearby Villages, Assembly & Parliament Constituency |url=https://villageinfo.org/village/86782 |access-date=2026-07-24 |website=villageinfo.org}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:बाड़मेर ज़िले के गाँव]]
[[श्रेणी:राजस्थान की तहसीलें]]
kp9ctpgjfxqds2vtirfqruuprx8jrha
इस्लाम में राजनीति
0
1616302
6591514
2026-07-24T09:30:18Z
~2026-41366-39
937955
नया पृष्ठ: {{Infobox political system | name = [[इस्लाम]] में [[राजनीति]] | part_of = {{unbulletedlist|[[धर्म का इतिहास]]|[[राजनीतिक इस्लाम]]}} | type = [[इस्लामी दर्शन]] | image = Birmingham Quran manuscript - closeup.jpg | caption = [[बर्मिंघम विश्वविद्यालय]] द्वारा सुरक्षित ७वीं शता...
6591514
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox political system
| name = [[इस्लाम]] में [[राजनीति]]
| part_of = {{unbulletedlist|[[धर्म का इतिहास]]|[[राजनीतिक इस्लाम]]}}
| type = [[इस्लामी दर्शन]]
| image = Birmingham Quran manuscript - closeup.jpg
| caption = [[बर्मिंघम विश्वविद्यालय]] द्वारा सुरक्षित ७वीं शताब्दी की [[कुरान]] की पांडुलिपि का एक खंड।
}}
{{Islam |expanded=culture}}
{{Islam and other religions}}
'''[[इस्लाम]] में [[राजनीति]]''' ([[सियासत]]-उश्-[[शरिया]], शर्ई राजनीति) मुख्य रूप से [[कुरान]], [[सुन्नत]] (इस्लामी पैगंबर [[मुहम्मद]] की बातें और जीवनचर्या),<ref name="Zimney 2009">{{cite book |last=Zimney |first=Michelle |year=2009 |chapter=Introduction – What Is Islam? |editor-last=Campo |editor-first=Juan E. |title=Encyclopedia of Islam |url=https://books.google.com/books?id=OZbyz_Hr-eIC&pg=PAxxi |location=[[New York City|New York]] |publisher=[[Facts On File]] |series=Encyclopedia of World Religions |pages=xxi–xxxii |isbn=978-0-8160-5454-1 |lccn=2008005621}}</ref> [[इस्लाम का इतिहास]] तथा विभिन्न राजनीतिक आंदोलनों और संघर्षों से उपजी है।<ref name="Ayoob-Lussier 2020">{{cite book |title=The Many Faces of Political Islam: Religion and Politics in Muslim Societies |url=https://books.google.com/books?id=rjLDDwAAQBAJ&pg=PA26 |year=2020 |publisher=[[University of Michigan Press]] |pages=26–44 |chapter=Islam's Multiple Voices |doi=10.3998/mpub.11448711 |isbn=978-0-472-12640-8 |lccn=2019025041 |edition=2nd |editor1-last=Ayoob |editor1-first=Mohammed |editor2-last=Lussier |editor2-first=Danielle N. |location=[[Ann Arbor, Michigan]] |s2cid=211404750}}</ref>
पारंपरिक रूप से इस्लाम में राजनीतिक अवधारणाओं के बीच निर्वाचित नेतृत्व एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय रहा है। मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के बाद जो लोग इस्लामी राज्य व्यवस्था में नेतृत्व संभालने के लिए चुने गए, उन्हें [[खलीफा]] कहा जाता है। इस्लामी राजनीतिक चिंतन में राज्य संचालन के लिए इस्लामी कानून या [[शरिया]] सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। [[शरिया कानून]] के अनुसार निर्वाचित शासकगण जनता के साथ विभिन्न मामलों पर शूरा या परामर्श के आधार पर निर्णय लेते हैं।<sup><ref>Abu Hamid al-Ghazali quoted in Mortimer, Edward, Faith and Power: The Politics of Islam, Vintage Books, 1982, p.37</ref></sup> [[राशिदुन ख़िलाफ़त|राশিদুন खलीफाओं]] सहित शुरुआती खलीफाओं के बाद [[द्वितीय मुआविबिया]] से लेकर विभिन्न मुस्लिम [[राजा|राजाओं]] और [[बादशाह|बादशाहों]] ने मुस्लिम बहुसंख्यक आबादी या विजित क्षेत्रों का शासन संभाला। आधुनिक काल में विभिन्न आधुनिक राजनीतिक विचारधाराओं के व्यापक प्रसार के कारण, वे मुस्लिम बहुसंख्यक क्षेत्रों में इस्लाम के प्रभाव और संमिश्रण के साथ विभिन्न रूपों में ढल गए हैं। इस्लामी उलेमा (विद्वान) प्रथम दृष्टया केवल [[खिलाफत]] और द्वितीय दृष्टया [[मुस्लिम राजतंत्र]] को ही इस्लामी रूप से वैध राजनीतिक व्यवस्था मानते हैं,<ref>{{cite web |title=Monarchy in Qur'an and Hadith |url=https://www.livingislam.org/fiqhi/fiqha_e39.html |website=www.livingislam.org |access-date=4 August 2022}}</ref> और हालांकि वे अन्य राजनीतिक प्रणालियों को हराम कहते हैं,<ref name="i1" /> फिर भी वे इस्लामी शासन स्थापित करने के लिए मुसलमानों द्वारा सत्ता तक पहुँचने के एक मार्ग के रूप में इनका उपयोग करने को वैध ठहराते हैं।<ref name="i2" /> इसके अतिरिक्त, मुस्लिम विधिवेत्ता (फुकहा) यह शर्त रखते हैं कि इस्लामी राजनीति में भाग लेने के लिए व्यक्तिगत [[ईमान]] को सुरक्षित रखना तथा सुधार और जनहित (कल्याण) का अवसर व सामर्थ्य होना पूर्वशर्त है।<ref name=fa/>
१९२४ में [[उस्मानिया साम्राज्य|उस्मानिया (ओटोमन) साम्राज्य]] के पतन के बाद मुस्लिम दुनिया के राजनीतिक परिदृश्य में भारी बदलाव आया।<ref name="Roshwald 2013">{{cite book |title=The Oxford Handbook of the History of Nationalism |url=https://books.google.com/books?id=IlNoAgAAQBAJ&pg=PA220 |year=2013 |publisher=[[Oxford University Press]] |pages=220–241 |chapter=Part II. The Emergence of Nationalism: Politics and Power – Nationalism in the Middle East, 1876–1945 |doi=10.1093/oxfordhb/9780199209194.013.0011 |isbn=9780191750304 |last=Roshwald |first=Aviel |editor-last=Breuilly |editor-first=John |location=[[Oxford]] and [[New York City|New York]]}}</ref><ref>{{cite book |url=https://books.google.com.bd/books?id=N_ORKS49yk4C&pg=PA2 |title=The Fall and Rise of the Islamic State |last=Feldman |first=Noah |date=2012-08-26 |publisher=Princeton University Press |pages=2 |language=en |isbn=978-1-4008-4502-6}}</ref> 19वीं और 20वीं शताब्दी में मुस्लिम जगत की राजनीति का मुख्य विचार इस्लामी राज्यों में [[शरिया|शरिया कानून]] को लागू करना था। [[छह-दिवसीय युद्ध|छह-दिवसीय युद्ध]] में अरब सेनाओं की पराजय, [[शीत युद्ध|शीत युद्ध]] की समाप्ति और समाजवादी [[सोवियत संघ]] का पतन जैसी राजनीतिक घटनाओं ने इस्लामी आंदोलनों की अपील को और तीव्र कर दिया है। धर्मनिरपेक्ष राज्य व्यवस्था के प्रति अविश्वास के कारण मुस्लिम जगत के इस्लामवादी राजनीतिक दल लगातार आंदोलनरत हैं।
== व्युत्पत्ति और परिभाषा ==
अरबी भाषा में नीति और राजनीति दोनों को दर्शाने के लिए ''[[सियासत]]'' या ''सियासा'' (سياسة) शब्द का प्रयोग किया जाता है। व्याकरणविदों के अनुसार, यह अरबी धातु ''सासा'' (ساس) से निकला है जिसका अर्थ है—संचालन करना, प्रबंधन करना, शासन करना। इस शब्द का 'फेल मुदारे' (वर्तमान और भविष्य काल) रूप ''यासूस'' (يسوس) है।<ref>الأفعال، للسرقسطي، تحقيق محمد محمد شرف، ومراجعة محمد مهدي علام، القاهرة: الهيئة العامة للكتاب، 1979، ص 3/498</ref> इस्लामिक विद्वानों के अनुसार, इस्लाम और अरबी भाषा में 'सियासा' शब्द का अर्थ पारंपरिक राजनीति, सत्ता या नेतृत्व नहीं है; बल्कि इसका अर्थ किसी स्थिति में सुधार करना, उत्पन्न समस्याओं का समाधान निकालना, परिस्थितियों को बेहतर बनाना या किसी वस्तु को अपेक्षाकृत अच्छी स्थिति में ले जाना है। उदाहरण के लिए, वे पैगंबर सुलेमान [[:en:Judgement of Solomon|से जुड़ी एक घटना]] का हवाला देते हैं, जहाँ एक बच्चे की दो महिलाओं द्वारा मातृत्व का दावा किए जाने पर, पैगंबर सुलेमान ने जिस युक्ति से वास्तविक माँ की पहचान की थी, उसे 'सियासत' के रूप में उल्लेखित किया गया है।<ref>{{cite web |title=सहীह बुখারী (তাওহীদ পাবঃ) {{!}} হাদিস: ৩৪২৭ [ ] |url=https://www.hadithbd.com/hadith/link/?id=27766 |website=www.hadithbd.com |access-date=22 July 2026 |language=bn}}</ref> विद्वानों का यह भी कहना है कि जिन विषयों में कुरान और सुन्नत के स्पष्ट और अकाट्य प्रमाण मौजूद हैं, उन मामलों में 'सियासा' या नवीन समाधान रणनीतियाँ वैध नहीं होंगी; 'सियासा' का प्रयोग केवल उन मामलों में वैध है जिनका शरिया में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है।<ref name=ipabmz>{{cite web |last1=Zakaria |first1=Abu Bakr Muhammad |title=ইসলামে রাজনীতি ও রাষ্ট্রনীতির ধরণ। |url=https://m.youtube.com/watch?si=MNcJPeT_tyh72UDq&v=Rmgsnk5Yf74 |website=[[Abu Bakr Muhammad Zakaria|ابو بكر محمد زكريا]] Official YouTube Channel |access-date=30 November 2023 |language=en |date=3 October 2023}}</ref> आलिमों का यह भी कहना है कि कोई व्यक्ति या सरकार अल्लाह के बंदों की सुविधा या कल्याण के लिए जो कार्य करती है, वे इस्लामी राजनीति के अंतर्गत आते हैं, जो मूल रूप से [[मस्लहत]] (जनहित) से जुड़े हैं और उसी पर निर्भर हैं; यदि उस कार्य में जनहित नहीं है, तो इस्लाम उसे राजनीति के रूप में मान्यता नहीं देता। इस्लामी राजनीति का मूल सिद्धांत यह है कि निर्देश कुरान और हदीस से यानी पैगंबर मुहम्मद (स.) की जीवनी से लिए जाने चाहिए, न कि व्यक्तिगत रूप से गढ़े जाने चाहिए।<ref>{{cite news |title=ইসলামী রাজনীতি কাকে বলে ও কী? |url=https://www.ntvbd.com/religion-and-life/22366/%E0%A6%87%E0%A6%B8%E0%A6%B2%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A7%80-%E0%A6%5B...%5D |access-date=21 August 2025 |work=ntvbd.com |date=27 September 2015 |language=en}}</ref> [[वैज्ञानिक अनुसंधान और फतवा संबंधी स्थायी समिति|सऊदी अरब की फतवा संबंधी स्थायी समिति]] के अनुसार, कुरान और सुन्नत पर आधारित राजनीति ही इस्लामी राजनीति है तथा सभी मुसलमानों और इस्लामी राज्यों के शासकों के लिए इस राजनीति का अभ्यास करना और मुसलमानों के इसुखल एवं परलोक से जुड़े सभी कार्यों को इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर संचालित करना 'फर्ज़' (अनिवार्य) है।<ref>https://d1.islamhouse.com/data/bn/ih_articles/single2/bn_Islami_Rajniti_ki_Kibhabe.pdf</ref>
== प्रारंभिक ग्रंथसूची ==
{{আরও দেখুন|सियासतनामा}}
इस्लामी राजनीति पर सबसे प्राचीन मौलिक ग्रंथ [[अल-मावर्दी]] की पुस्तक [[अहकाम उस-सुल्तानिया (पुस्तक)|अहकाम उस-सुल्तानियात]] (प्रशासनिक नियम) है।<ref name=pub>{{cite web |title=আল মাওয়ার্দী'র খিলাফাত দর্শন ও ড.মুঈন উদ-দীন আহমদ খান।। মাঈন উদ্দিন জাহেদ |url=https://pubakash.com/archives/1819 |website=Pubakash |access-date=1 October 2025 |language=en-US |date=31 March 2021}}</ref><ref>{{cite web |title=আল মাওয়ার্দী ও তাঁর চিন্তাধারা - রোয়াক |url=https://rowyakbd.com/al-mawardi-and-his-thought/ |website=Rowakbd |access-date=1 October 2025 |language=en-US |date=22 February 2021}}</ref><ref>{{cite news |title=স্মরণীয় মুসলিম মনীষী আল-মাওয়ার্দি |url=https://www.kalbela.com/ajkerpatrika/special-event/158040 |access-date=1 October 2025 |work=[[Kalbela]] |date=24 January 2025 }}{{dead link|date=May 2026 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes}}</ref> इसके अतिरिक्त, बाद की रचनाओं में [[अबू याला]] की 'अहकाम उस-सुल्तानिया', [[अबुल मआली अल-जुवैनी]] की 'अल-गियासी', [[इब्न कय्यिम]] रचित [[तुरुत उल-हिकमिय्यात|तुरुत उल-हुकमिय्यात]] और [[इब्न तैमिया]] की [[सियासत उस-शरिया (पुस्तक)|सियासत उस-शरिया]] आदि प्रमुख हैं।<ref name=ipabmz/><ref name=pub/>
== धार्मिक पांडुलिपियाँ ==
=== कुरान ===
{{hatnote|और देखें: [[आज्ञाकारिता की आयत]] और [[इकामते दीन]]}}
[[चित्र:সূরা শূরার ১৩তম আয়াত.png|400px|थंब|दाएँ|सूरह शूरा की 13वीं आयत, जिससे "इकामते दीन" शब्दावली ली गई है और इसकी व्याख्या को लेकर इस्लामवादियों में मतभेद है।]]
कुरान में इस्लामी राजनीति के संदर्भ में राजनीतिक इस्लामवादियों द्वारा सबसे अधिक [[इकामते दीन]] (धर्म की स्थापना) नामक अवधारणा को उभारा जाता है, जिसका उल्लेख [[सूरह शूरा]] की आयत 13 में है।
{{quote|
उसने तुम्हारे लिए धर्म (दीन) का वही मार्ग निर्धारित किया है, जिसका आदेश उसने नूह को दिया था और जो (ओही) हमने तुम्हारी ओर भेजी है और जिसका आदेश हमने इब्राहीम, मूसा और ईसा को दिया था कि ''धर्म को स्थापित करो'' (اَقِیۡمُوا الدِّیۡنَ) और इसमें फूट न डालो। जिस चीज़ की ओर तुम बहुदेववादियों को बुलाते हो, वह उन्हें बहुत भारी लगती है; अल्लाह जिसे चाहता है अपनी ओर खींच लेता है और जो उसकी ओर रुख करता है, उसे वह मार्ग दिखाता है। |सूरह शूरा: १३}}
हालांकि, इस आयत में "धर्म को स्थापित करने" से क्या तात्पर्य है, इसे लेकर इस्लामवादियों में मतभेद है। [[राजनीतिक इस्लाम]] के समर्थक इसके द्वारा अल्लाह की हुकूमत या आदेश की स्थापना अथवा इस्लामी सरकार की स्थापना यानी इस्लामी/मुस्लिम राजनीति या शक्ति की स्थापना समझते हैं; इसके विपरीत, [[पारंपरिक सलाफीवाद|मुख्यधारा के सलाफी]] मानते हैं कि इसका तात्पर्य [[तौहीद]] (अल्लाह की एकता) और दावत के माध्यम से जनता के बीच शुद्ध इस्लामी [[अकीदा]] (विश्वास) स्थापित करना है, और वे पहले वाले राजनीतिक हुकूमत संबंधी अर्थ को गलत बताकर उसका विरोध करते हैं।
[[चित्र:আনুগত্যের আয়াত.jpg|400px|थंब|दाएँ|सूरह निसा की आयत 59, जिसे आज्ञाकारिता की आयत कहा जाता है, इस्लाम में राजनीति के संदर्भ में प्रयुक्त एक महत्वपूर्ण आयत है।]]
इस्लाम में राजनीतिक सत्ताधारियों की आज्ञाकारिता के प्रसंग में सूरह निसा की आयत 59 का उल्लेख किया जाता है, जिसे 'आज्ञाकारिता की आयत' कहा जाता है। इसमें अल्लाह और इस्लामी पैगंबर मुहम्मद के साथ-साथ [[उलिल-अम्र]] यानी दायित्व संभालने वाले प्राधिकारिगण (शासकों और उलेमा) की आज्ञा मानने का निर्देश दिया गया है। यह आज्ञाकारिता वैध इस्लामी निर्देशों ([[हलाल]]) के मामले में है, न कि अनंतिम या गैर-इस्लामी आदेशों ([[हराम]]) के मामले में।
{{quote|हे विश्वासियों! अल्लाह का आज्ञापालन करो और रसूल का आज्ञापालन करो और उन लोगों का भी जो तुममें से अधिकारसंपन्न (उलिल-अम्र) हैं। फिर यदि किसी बात में तुम्हारा आपस में मतभेद हो जाए, तो उसे अल्लाह और रसूल के पास लौटा दो (उनके आदेश की ओर देखो), यदि तुम अल्लाह और अंतिम दिन पर विश्वास रखते हो। यही उत्तम है और परिणाम की दृष्टि से भी बहुत अच्छा है।|सूरह निसा, आयत: ५९}}
[[इब्न तैमिया]] ने अपनी पुस्तक 'सियासत उस-शरिया' (शर्ई राजनीति) की शुरुआत इसी आयत से की है, साथ ही न्याय और अमानत (विश्वास) के निर्देश के रूप में सूरह निसा की आयत 58 को भी पूर्व में उद्धृत किया है।
{{quote|निःसंदेह हमने अपने रसूलों को स्पष्ट प्रमाणों के साथ भेजा और उनके साथ किताब और (न्याय की) तराजू उतारी, ताकि लोग न्याय पर कायम रहें। और हमने लोहा उतारा, जिसमें भारी शक्ति है और लोगों के लिए कई लाभ हैं; और ताकि अल्लाह जान ले कि कौन बिन देखे उसकी और उसके रसूलों की सहायता करता है। निःसंदेह अल्लाह शक्तिशाली, पराक्रमी है।|हदीद, २५}}
{{quote|निसंदेह अल्लाह तुम्हें आदेश देता है कि अमानतें उनके हकदारों को लौटा दो और जब लोगों के बीच निर्णय करो, तो न्याय के साथ निर्णय करो। अल्लाह तुम्हें कितनी अच्छी सीख देता है! निःसंदेह अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, देखने वाला है।|निसा, ५८}}
==== पश्चिमी विद्वानों के दृष्टिकोण ====
माइकल कुक ने अपनी पुस्तक 'मुहम्मद' में टिप्पणी की है कि हालांकि कुरान सीधे तौर पर राजनीति पर चर्चा नहीं करता, लेकिन इसमें उत्पीड़ितों (''मुस्तदआफीन''), देशत्याग (''हिजरत''), मुस्लिम समुदाय (''[[उम्मा]]'') और अल्लाह के मार्ग में संघर्ष (''[[जिहाद]]'') की अवधारणाओं का उल्लेख मिलता है, जिनके राजनीतिक प्रभाव हो सकते हैं।<ref name="Cook-1983-51-60">{{cite book |last1=Cook |first1=Michael |title=Muhammad |url=https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4 |date=1983 |publisher=Oxford University Press |isbn=0192876058 |pages=[https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4/page/51 51]–60}}</ref> कुरान की कई आयतों (जैसे कुरान 4:98) में ''मुस्तदआफीन'' ("कमजोर माने गए", "अकिंचन" या "उत्पीड़ित") पर चर्चा की गई है, जैसे कि कैसे फिरौन जैसे लोग उनका शोषण करते थे, अल्लाह कैसे चाहता था कि उनके साथ न्याय हो, और वे उस भूमि से जहाँ उन पर अत्याचार होता है, कैसे पलायन कर सकते हैं (कुरान 4:99)। पैगंबर [[इब्राहीम]] ने "अपने पालनहार की ओर पलायन" किया था (कुरान 29:26)। कुरान में अविश्वासियों (''कुफ्फार'') के खिलाफ युद्ध का आदेश दिया गया है और दिव्य सहायता का वादा किया गया है, हालांकि कुछ आयतों में यह भी कहा गया है कि यह आदेश शायद तब के लिए था जब अविश्वासियों ने युद्ध शुरू किया हो, और संधियाँ तथा समझौते होने पर युद्ध समाप्त किया जा सकता है। इसके अलावा, कुरान में विजय प्राप्त करने वालों के बीच युद्ध में प्राप्त धन के उचित वितरण के लिए भी कुछ आयतें हैं। साथ ही, आंतरिक शत्रुओं या "[[मुनाफिक|कपटियों]]" (''मुनाफिकून'') के विरुद्ध युद्ध का भी आदेश दिया गया है।<ref name="Cook-1983-51-60"/> कुछ निर्देश पैगंबर के जीवनकाल के बाद आगे नहीं बढ़े, जैसे अल्लाह और उनके पैगंबर से झगड़ा करना या पैगंबर से बात करते समय चिल्लाना या ऊँची आवाज़ में बात करना।<ref name="Cook-1983-56-7">{{cite book |last1=Cook |first1=Michael |title=Muhammad |url=https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4 |date=1983 |publisher=Oxford University Press |isbn=0192876058 |pages=[https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4/page/56 56]–7}}</ref> इस्लामी राजनीतिक शिक्षाओं के सीमित रहने का कारण यह है कि कुरान में "किसी औपचारिक और निरंतर सत्ता के ढांचे" का उल्लेख नहीं किया गया है, इसमें केवल पैगंबर की बात मानने का निर्देश दिया गया है;<ref name="Cook-1983-56-7"/> और इसके मूल संदेश का राजनीतिक उपयोग उस समय अत्यंत सीमित था, क्योंकि रेगिस्तानी खानाबदोश लोगों के लिए यह कल्पना करना भी कठिन था कि विभिन्न शहरों और देशों द्वारा नियंत्रित एक विस्तृत कृषक-बहुसंख्यक क्षेत्र का शासन चलाना ही इस्लाम की सफलता हो सकती है।<ref name="Cook-1983-59">{{cite book |last1=Cook |first1=Michael |title=Muhammad |url=https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4 |date=1983 |publisher=Oxford University Press |isbn=0192876058 |page=[https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4/page/59 59]}}</ref>
=== हदीस ===
==== राजनीति या सियासत शब्द का उल्लेख ====
बुखारी और मुस्लिम में वर्णित हदीसों में 'सियासत' शब्द की धातु (मूल) का क्रियापद के रूप में उपयोग हुआ है।<ref>{{cite web |title=ص9 - كتاب السياسة الشرعية جامعة المدينة - الدرس السياسة الشرعية مفهومها أحكامها أدلة اعتبارها - المكتبة الشاملة (Page 9 - The Book of Islamic Political Theory, University of Madinah - Lesson: Islamic Political Theory: Its Concept, Rulings, and Evidence for its Validity - Shamila Library) |url=https://shamela.ws/book/11313/2 |website=shamela.ws}}</ref><ref>{{cite web |title=ইসলামিক শাসন ব্যবস্থা |url=https://m.youtube.com/watch?si=-U16ABJxCI9s-skE&v=KfCinOkJs4g |access-date=20 July 2026 |date=13 October 2019}}</ref>
{{quote|अबू হুরাইরা (रा.) से वर्णित है कि पैगंबर (स.) ने कहा: “बनी ইসরাইল (이스্রাইল की संतानों) पर नबी शासन करते थे (तासूसूहुम अल-अंबिया); जब भी कोई नबी मरता, तो दूसरा नबी उसका उत्तराधिकारी बनता।” |(सहीह बुखारी, हदीस/3455; सहीह मुस्लिम, हदीस/1842; इब्न माजाह, हदीस/2871; मुसनद अहमद, हदीस/7960)}}
[[इमाम नववी]] कहते हैं: "'[वे] नबी द्वारा शासित थे' का अर्थ है कि नबी उनके मामलों की देखभाल वैसे ही करते थे जैसे शासक जनसाधारण की जिम्मेदारी संभालते हैं। इस प्रकार सियासा का अर्थ ऐसी देखरेख करना है जो उनके कल्याण को बनाए रखे और उनके हितों को पूरा करे।"<ref>{{cite web |title=Politics from an Islamic perspective - Islam Question & Answer |url=https://islamqa.info/en/answers/181673/politics-from-an-islamic-perspective |website=[[islamqa.info]] |access-date=4 August 2022 |language=en}}</ref>
==== नेतृत्व के निर्देश ====
;नेतृत्व की प्राथमिक शर्त: तीन लोगों की जमात और कुरान (इस्लामी ज्ञान) में प्रवीणता
[[सालेह अल-मुनाज्जिद]] अपनी पुस्तक 'हुब्ब उस-सियासत' (नेतृत्व प्रेम) में कहते हैं कि सुन्नत के अनुसार यदि लोग संगठित हों, तो एक नेता का होना अनिवार्य है।
{{quote|अबू सईद अल-खुदी (रा.) से वर्णित। रसूलुल्लाह (स.) ने कहा: जब तीन व्यक्ति सफर पर निकलें, तो उन्हें चाहिए कि वे अपने में से एक को अपना अमीर या नेता बना लें।|अबू दाऊद, ২৬০৮, सनद हसन, अलबानी}}
एक अन्य हदीस में आया है कि यदि तीन से अधिक लोग एकत्र हों, तो उनमें से एक को नेता बनाना चाहिए, और उसे नेता बनाया जाना चाहिए जो उनमें सबसे अधिक कुरान (और सही हदीस यानी शुद्ध इस्लामी ज्ञान) जानता हो।
{{quote|कुतैबा बिन सईद (रह.) ..... अबू सईद अल-खुदी (रज़ि.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) ने कहा: जब तीन व्यक्ति एकत्र हों, तो उनमें से एक को उनका इमाम या नेता होना चाहिए। और उनमें इमामत या नेतृत्व का सबसे अधिक हकदार वह व्यक्ति है जिसने सबसे अधिक पढ़ा है (أَقْرَؤُهُمْ, अक्रओहुम - जिसका अर्थ यह है कि जिसने मजीद कुरान [और सही हदीस] का सबसे अधिक अध्ययन किया है)।| सहीह मुस्लिम (हदीस अकादमी) 1415-(289/672)}}
एक अन्य हदीस में नेता या इमाम बनाने के विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं (अधिकांश विद्वानों के अनुसार यह धार्मिक इमामत या धार्मिक नेतृत्व है, किंतु कई विद्वानों ने इसे राजनीतिक इमामत या राजनीतिक नेतृत्व चुनने के निर्देश के रूप में भी स्थापित किया है)।
{{quote|अबू मसूद (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) ने ارشاد किया: कौम की इमामत वह व्यक्ति करेगा जो अल्लाह की किताब को सबसे अच्छी तरह पढ़ सकता है। यदि उपस्थित सभी लोग अच्छे कारी (पाठक) हों, तो इमामत वह व्यक्ति करेगा जो सुन्नत के बारे में सबसे अधिक जानता हो। यदि सुन्नत के ज्ञान में सब समान हों, तो वह जो सबसे पहले हिजरत (पलायन) करके आया हो। यदि हिजरत में भी सब समान हों, तो वह इमामत करेगा जो उम्र में सबसे बड़ा हो। और कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के अधिकार क्षेत्र (अधिकार वाले स्थान) में जाकर इमामत न करे और न ही किसी के घर जाकर उसकी अनुमति के बिना उसके खास आसन पर बैठे।|मिशকাত 1117, मुस्लिम 673, अबू दाऊद 582, अत-तिर्मिज़ी 235, नसायी 780, इब्न माजाह 980, अहमद 17063}}
;ज्ञान अर्जन
हदीस में आलिम (विद्वान) व्यक्ति को नेता बनाने का आदेश दिया गया है और जाहिल (अज्ञानी) व्यक्ति को नेता बनाना कयामत की निशानी बताया गया है।
{{quote|कुतैबा बिन सईद (रह.) ..... उर्वाह (रह.) से वर्णित। उन्होंने कहा, मैंने अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन अल-आस (रज़ि.) को कहते सुना। उन्होंने कहा कि मैंने रसूलुल्लाह (स.) को कहते सुना। आपने फरमाया: निश्चय ही अल्लाह लोगों के दिलों से ज्ञान छीन नहीं लेगा, बल्कि वह आलिमों (विद्वानों) को उठा कर (قبض करके) ज्ञान को समाप्त कर देगा। यहाँ तक कि जब कोई आलिम बाकी नहीं रहेगा, तो लोग अज्ञानी (मूर्ख) लोगों को अपना नेता बना लेंगे। लोग उनसे फतवे (धार्मिक निर्णय) मांगेंगे, और वे बिना ज्ञान के फतवे देंगे। जिससे वे खुद भी गुमराह होंगे और लोगों को भी गुमराह करेंगे।|सहीह मुस्लिम (हदीस अकादमी) 6689-(13/2673)}}
साहबी [[उमर इब्न अल-खत्ताब|उमर]] और सलाफ-ए-सालेहिन ने नेतृत्व मिलने से पहले और बाद में ज्ञान अर्जित करने का निर्देश दिया है।
{{quote|उमर (रा.) ने कहा: नेतृत्व प्राप्त करने से पहले ज्ञान हासिल कर लो। अबू अब्दुल्लाह (बुखारी) कहते हैं: और नेता बना दिए जाने के बाद भी (ज्ञान प्राप्त करो), क्योंकि पैगंबर (स.) के साथियों ने वृद्धावस्था में भी ज्ञान प्राप्त किया है।|सहीह बुखारी (इफा) 73}}
हालांकि, केवल अपने ज्ञान के प्रदर्शन या नेतृत्व पाने के उद्देश्य से ज्ञान प्राप्त करने को हदीस में मना किया गया है।
{{quote|काब बिन मलिक (रज़ि.) से वर्णित, उन्होंने कहा, मैंने रसूलुल्लाह (स.) को कहते सुना: जो व्यक्ति आलिमों के साथ बहस करने, या जाहिलों के साथ हुज्जत करने, अथवा लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने के उद्देश्य से ज्ञान प्राप्त करता है, अल्लाह तआला उसे जहन्नम (नरक) में झोंक देगा।|तिर्मिज़ी 2654 (हसन-अलबानी)}}
;सच्चाई और निर्लोभता
व्यक्तिगत जीवन में সৎ (सच्चे) और नेतृत्व तथा सत्ता को मन से नापसंद करने वाले लोगों को नेतृत्व के योग्य बताया गया है।
{{quote|अबू हुरैरा (रा.) से वर्णित, पैगंबर (स.) ने कहा: कयामत तब तक कायम नहीं होगी... जब तक कि तुम ऐसे लोगों से युद्ध न करो... "तुममें से सर्वोत्तम लोग वे होंगे जो नेतृत्व और शासन सत्ता से जुड़ने से पहले इसे अत्यधिक घृणा और नापसंद करें।" |सहीह बुखारी (इफा) 3334}}
हदीस में नेतृत्व का लालच करने से मना करते हुए कहा गया है कि नेतृत्व की शुरुआत भले ही आनंददायक हो, लेकिन धीरे-धीरे यह कष्टदायक होती जाती है।
{{quote|अबू हुरैरा (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, पैगंबर (स.) ने कहा: शीघ्र ही तुम लोग सत्ता और नेतृत्व के लिए लालायित हो जाओगे। और इसके कारण निश्चित ही कयामत के दिन तुम्हें लज्जित होना पड़ेगा। अतः (नेतृत्व पाना) दूध पिलाने वाली (माता) के रूप में कितना अच्छा है और दूध छुड़ाने के समय कितना बुरा है। (जैसे शिशु दूध मिलने पर आनंदित होता है, वैसे ही व्यक्ति सत्ता पाकर खुश होता है, और जैसे दूध छूटने पर बच्चा कष्ट पाता है, वैसे ही सत्ता जाने पर व्यक्ति दुखी होता है।) |मिशকাত 2681, बुखारी 7148, नसायी 4211}}
;परामर्श और प्राथमिकता
हदीस में परामर्श (मशविरा) के आधार पर नेता या अमीर चुनने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, और जिसकी सत्ता या जिसके प्रति निष्ठा पहले स्थापित हो चुकी हो, उसकी आज्ञा मानने तथा उसकी मृत्यु के बाद ही अगला अमीर चुनने का निर्देश दिया गया है। पहले से स्थापित नेता के जीवनकाल में यदि कोई दूसरा नेतृत्व का दावा करे, तो उसे दृढ़ता से रोकने का आदेश है।
{{quote| जरीर (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, मैं यमन में था। उसी समय मेरी मुलाकात यमन के दो व्यक्तियों—जुकाला और जु-अम्र—से हुई। मैंने उन्हें रसूलुल्लाह (स.) की हदीसें सुनानी शुरू कीं। (वर्णक कहते हैं) तब जु-अम्र ने जरीर से कहा, हे जरीर! यदि तुम जो वर्णन कर रहे हो, वह वास्तव में तुम्हारे साथी [पैगंबर (स.)] का कथन है, तो जान लो कि तीन दिन पहले उनका इंतकाल हो चुका है। (जरीर कहते हैं, यह सुनकर मैं मदीने की ओर दौड़ा)... (बाद में जब अबू बकर खलीफा चुने गए, तो उन्होंने कहा)... "तुम अरब जाति तब तक कल्याण पर रहोगे जब तक कि एक अमीर के मरने पर (परामर्श के आधार पर) दूसरे को अमीर बना लोगे। और यदि यह फैसला तलवार के जोर पर होने लगा, तो तुम्हारे अमीर राजा-बादशाहों जैसे हो जाएंगे। वे राजाओं की तरह गुस्सा होंगे और राजाओं की तरह खुश होंगे (और खिलाफत व खलीफा बाकी नहीं रहेंगे)।" |सहीह बुखारी, हदीस: ४३५९}}
{{quote|अबू हुरैरा (रा.) से वर्णित, पैगंबर (स.) ने कहा: "...मेरे बाद कोई नबी नहीं आएगा, बल्कि कई खलीफा होंगे और उनकी संख्या अधिक होगी।" সাহাবীগণ बोले, "तो आप हमें क्या आदेश देते हैं?" आपने फरमाया: "जिसके हाथ में सबसे पहली बैअत (निष्ठा की शपथ) की जाए, उसी का आज्ञापालन करना और उन्हें उनका हक देना। निःसंदेह अल्लाह उनसे उस चीज़ के बारे में पूछेगा जिसकी जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई थी।" |(सहीह बुखारी, हदीस/3455; सहीह मुस्लिम, हदीस/1842)}}
;योग्य व्यक्ति को नेतृत्व देना
सही माने गए सुन्नी हदीसों में योग्य व्यक्ति को नेतृत्व सौंपने का आदेश दिया गया है।
{{cite book |last1=Taymīyah |first1=Aḥmad ibn ʻAbd al-Ḥalīm Ibn |title=The Political Shariyah on Reforming the Ruler and the Ruled |date=2005 |publisher=Dar ul Fiqh |page=13 |url=https://books.google.com.bd/books?id=ZdwVAQAAIAAJ&q=political+shariyah+on+reforming+ruler+and+ruled+ibn+taymiyyah&dq=political+shariyah+on+reforming+ruler+and+ruled+ibn+taymiyyah&hl=en&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwij4qv35uKPAxWa6jgGHXd2BtoQ6AF6BAgKEAM |access-date=18 September 2025 |language=en}}
{{quote|अबू हुरैरा (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: जब अमानत नष्ट कर दी जाए (यानी अयोग्य व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंप दी जाए), तब कयामत की प्रतीक्षा करना।|बुखारी ६४९६, रियाजुस सालिहीन १८३७}}
;महिला राष्ट्राध्यक्ष न होना
हदीस में राष्ट्राध्यक्ष के पद के लिए महिलाओं को अयोग्य घोषित किया गया है।
{{quote|अबू बकरा (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) के पास यह खबर पहुँची कि फारस (ईरान) के लोगों ने किस्रा की पुत्री को अपनी सावर्णि (महारानी) नियुक्त किया है। तब आपने फरमाया: वह जाति कभी सफल नहीं हो सकती जो अपने शासन की बागडोर किसी महिला को सौंप दे।|मिशकत ३६९३, सहीह: बुखारी ४४२५}}
==== आज्ञाकारिता और विरोध ====
इस्लामी पैगंबर मुहम्मद ने मुसलमानों को मिलजुलकर रहने का कड़ाई से निर्देश दिया है और अमीर, सत्ताधारी नेता या शासक की कमियों या उसके अत्याचारी होने पर भी धैर्य रखने तथा एकजुटता से अलग न होने का आदेश दिया है।<ref name=উ>উসুলুল ঈমান... (उसूलुल ईमान...)</ref>
{{quote|अनस बिन मालिक (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: यदि तुम पर किसी ऐसे हब्शी (अश्लील/कृष्णवर्ण) दास को भी शासक नियुक्त कर दिया जाए जिसका सिर किशमिश की तरह (छोटा) हो, तब भी उसकी बात सुनना और उसकी आज्ञा का पालन करना।|सहीह बुखारी, हदीस: ७१४२}}
{{quote|अब्दुल्लाह बिन अम्र (रा.) से वर्णित: अल्लाह के रसूल (स.) ने फरमाया: "जो व्यक्ति किसी राजनेता (शासक) के हाथ पर बैअत करे और उसे अपने दिल से वचन दे, तो उसे चाहिए कि जहाँ तक संभव हो उसका (उसके अच्छे कार्यों में) आज्ञापालन करे। इसके बाद यदि कोई दूसरा (शासक) उसकी सत्ता छीनना चाहे, तो उस दूसरे शासक की गर्दन उड़ा दो।" |(मुस्लिम ৪৮৮২)}}
;शासक को गुप्त रूप से सलाह देना
इस्लामी पैगंबर मुहम्मद ने शासक को नसीहत (मार्गदर्शन) देने का निर्देश दिया है और इसे गुप्त रूप से देने को कहा है।<ref name=উ/>
{{quote|अबू हुरैरा (रज़ि.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: अल्लाह तआला तीन चीजें पसंद करता है और तीन चीजें नापसंद करता है... "और अल्लाह ने तुम पर जिसे शासक बनाया है, उसे नसीहत (भलाई की बात) करो।"<ref name=উ/> |सहीह मुस्लिम ১৭১५}}
{{quote|इब्न أبي عاصم और अन्य द्वारा वर्णित इयाद बिन गनम (रज़ि.) कहते हैं, रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया:
«من أراد أن ينصح لذي سلطان فلا يبده علانية، ولكن يأخذ بيده فيخلوا به، فإن قبل منه فذاك، وإلا كان قد أدى الذي عليه»
“यदि कोई किसी सत्ताधारी को नसीहत देना चाहता है, तो उसे चाहिए कि वह उसे खुलेआम (सार्वजनिक रूप से) न दे, बल्कि उसका हाथ पकड़कर (एकांत में) ले जाए। यदि वह उसकी बात मान ले, तो ठीक है, अन्यथा उसने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी।” |(मुसनद अहमद १५३३३, इब्न أبي عاصم, अस-सुन्नत ২/৫০)<ref name=উ/></ref>
;नेतृत्व की वैधता के मानदंड
[[खोন্দকার আব্দুল্লাহ জাহাঙ্গীর]] अपनी पुस्तक 'ইসলামের নামে জঙ্গিবাদ' (इस्लाम के नाम पर आतंकवाद) में कहते हैं कि हदीस में तब तक शासक की सत्ता का विरोध करने से मना किया गया है जब तक वे नमाज पढ़ते हैं और/या सार्वजनिक रूप से नमाज पढ़ने की अनुमति देते हैं।
{{quote|उम्मुल मुमिनीन उम्मे सलमा (रज़ि.) से वर्णित कि रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: शीघ्र ही ऐसे कुछ अमीर आएंगे जिन्हें तुम पहचानोगे और नापसंद करोगे। जो व्यक्ति उनकी असलियत को पहचान गया, वह सुरक्षित हो गया और जिसने उन्हें नापसंद किया, वह बच गया। लेकिन जो व्यक्ति उनसे संतुष्ट रहा और उनका अनुसरण किया (वह नष्ट हो गया)। लोगों ने पूछा: क्या हम उनके खिलाफ युद्ध न करें? रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: नहीं, जब तक वे नमाज कायम रखें।|सहीह मुस्लिम, ४६९४}}
फहद बिन सालेह अल-अजलान अपनी पुस्तक 'मुहर्रर फी सियासत उस-शरिया' में कहते हैं कि काजी इयाद और इब्न हजार असकलानी का कहना है कि यदि कोई मुस्लिम शासक काफिर हो जाए या खुले कुफ्र (अधर्म) में लिप्त हो जाए, तो उसकी आज्ञा मानना वैध नहीं है; बल्कि यदि कोई सक्षम हो, तो वह उसके खिलाफ संघर्ष करे। और यदि मुसलमान ऐसा करने में असमर्थ हों, तो राजनीतिक हित और अपने अस्तित्व को बचाने के लिए वे बाहरी तौर पर उसकी आज्ञा मान सकते हैं (मजबूरीवश, न कि उसकी शर्ई सत्ता मानकर)।
;गोत्रवाद और भाई-भतीजावाद (असबियाह)
हदीस में [[असबियाह|गोत्रवाद (जातिवाद/वंशवाद)]] की निंदा की गई है और इसे प्रतिबंधित किया गया है।
{{quote|वासिला बिन असका (रा.) कहते हैं, मैंने एक दिन रसूल (स.) से पूछा: या रसूलल्लाह! असबियाह क्या है? रसूल (स.) ने फरमाया: असबियाह यह है कि तुम अन्याय के मामले में अपने गोत्र की सहायता करो।|अबू दाऊद ५१১৯}}
{{quote|जुनदूब बिन अब्दुल्लाह बजली (रज़ि.) से वर्णित कि रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: जो व्यक्ति लक्ष्यहीन नेतृत्व के झंडे तले युद्ध करता है, गोत्रवाद (عَصَبِيَّةً, असबियाह) की ओर आह्वान करता है और गोत्रवाद के ही कारण सहायता करता है, उसकी मौत जाहिलियत (अज्ञानता के युग) की मौत है।|सहीह मुस्लिम, ४৬৮৬}}
kxfss7enilkjmx0hj48ffvqp6h6loos
6591515
6591514
2026-07-24T09:39:54Z
~2026-41366-39
937955
/* हदीस */
6591515
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox political system
| name = [[इस्लाम]] में [[राजनीति]]
| part_of = {{unbulletedlist|[[धर्म का इतिहास]]|[[राजनीतिक इस्लाम]]}}
| type = [[इस्लामी दर्शन]]
| image = Birmingham Quran manuscript - closeup.jpg
| caption = [[बर्मिंघम विश्वविद्यालय]] द्वारा सुरक्षित ७वीं शताब्दी की [[कुरान]] की पांडुलिपि का एक खंड।
}}
{{Islam |expanded=culture}}
{{Islam and other religions}}
'''[[इस्लाम]] में [[राजनीति]]''' ([[सियासत]]-उश्-[[शरिया]], शर्ई राजनीति) मुख्य रूप से [[कुरान]], [[सुन्नत]] (इस्लामी पैगंबर [[मुहम्मद]] की बातें और जीवनचर्या),<ref name="Zimney 2009">{{cite book |last=Zimney |first=Michelle |year=2009 |chapter=Introduction – What Is Islam? |editor-last=Campo |editor-first=Juan E. |title=Encyclopedia of Islam |url=https://books.google.com/books?id=OZbyz_Hr-eIC&pg=PAxxi |location=[[New York City|New York]] |publisher=[[Facts On File]] |series=Encyclopedia of World Religions |pages=xxi–xxxii |isbn=978-0-8160-5454-1 |lccn=2008005621}}</ref> [[इस्लाम का इतिहास]] तथा विभिन्न राजनीतिक आंदोलनों और संघर्षों से उपजी है।<ref name="Ayoob-Lussier 2020">{{cite book |title=The Many Faces of Political Islam: Religion and Politics in Muslim Societies |url=https://books.google.com/books?id=rjLDDwAAQBAJ&pg=PA26 |year=2020 |publisher=[[University of Michigan Press]] |pages=26–44 |chapter=Islam's Multiple Voices |doi=10.3998/mpub.11448711 |isbn=978-0-472-12640-8 |lccn=2019025041 |edition=2nd |editor1-last=Ayoob |editor1-first=Mohammed |editor2-last=Lussier |editor2-first=Danielle N. |location=[[Ann Arbor, Michigan]] |s2cid=211404750}}</ref>
पारंपरिक रूप से इस्लाम में राजनीतिक अवधारणाओं के बीच निर्वाचित नेतृत्व एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय रहा है। मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के बाद जो लोग इस्लामी राज्य व्यवस्था में नेतृत्व संभालने के लिए चुने गए, उन्हें [[खलीफा]] कहा जाता है। इस्लामी राजनीतिक चिंतन में राज्य संचालन के लिए इस्लामी कानून या [[शरिया]] सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। [[शरिया कानून]] के अनुसार निर्वाचित शासकगण जनता के साथ विभिन्न मामलों पर शूरा या परामर्श के आधार पर निर्णय लेते हैं।<sup><ref>Abu Hamid al-Ghazali quoted in Mortimer, Edward, Faith and Power: The Politics of Islam, Vintage Books, 1982, p.37</ref></sup> [[राशिदुन ख़िलाफ़त|राশিদুন खलीफाओं]] सहित शुरुआती खलीफाओं के बाद [[द्वितीय मुआविबिया]] से लेकर विभिन्न मुस्लिम [[राजा|राजाओं]] और [[बादशाह|बादशाहों]] ने मुस्लिम बहुसंख्यक आबादी या विजित क्षेत्रों का शासन संभाला। आधुनिक काल में विभिन्न आधुनिक राजनीतिक विचारधाराओं के व्यापक प्रसार के कारण, वे मुस्लिम बहुसंख्यक क्षेत्रों में इस्लाम के प्रभाव और संमिश्रण के साथ विभिन्न रूपों में ढल गए हैं। इस्लामी उलेमा (विद्वान) प्रथम दृष्टया केवल [[खिलाफत]] और द्वितीय दृष्टया [[मुस्लिम राजतंत्र]] को ही इस्लामी रूप से वैध राजनीतिक व्यवस्था मानते हैं,<ref>{{cite web |title=Monarchy in Qur'an and Hadith |url=https://www.livingislam.org/fiqhi/fiqha_e39.html |website=www.livingislam.org |access-date=4 August 2022}}</ref> और हालांकि वे अन्य राजनीतिक प्रणालियों को हराम कहते हैं,<ref name="i1" /> फिर भी वे इस्लामी शासन स्थापित करने के लिए मुसलमानों द्वारा सत्ता तक पहुँचने के एक मार्ग के रूप में इनका उपयोग करने को वैध ठहराते हैं।<ref name="i2" /> इसके अतिरिक्त, मुस्लिम विधिवेत्ता (फुकहा) यह शर्त रखते हैं कि इस्लामी राजनीति में भाग लेने के लिए व्यक्तिगत [[ईमान]] को सुरक्षित रखना तथा सुधार और जनहित (कल्याण) का अवसर व सामर्थ्य होना पूर्वशर्त है।<ref name=fa/>
१९२४ में [[उस्मानिया साम्राज्य|उस्मानिया (ओटोमन) साम्राज्य]] के पतन के बाद मुस्लिम दुनिया के राजनीतिक परिदृश्य में भारी बदलाव आया।<ref name="Roshwald 2013">{{cite book |title=The Oxford Handbook of the History of Nationalism |url=https://books.google.com/books?id=IlNoAgAAQBAJ&pg=PA220 |year=2013 |publisher=[[Oxford University Press]] |pages=220–241 |chapter=Part II. The Emergence of Nationalism: Politics and Power – Nationalism in the Middle East, 1876–1945 |doi=10.1093/oxfordhb/9780199209194.013.0011 |isbn=9780191750304 |last=Roshwald |first=Aviel |editor-last=Breuilly |editor-first=John |location=[[Oxford]] and [[New York City|New York]]}}</ref><ref>{{cite book |url=https://books.google.com.bd/books?id=N_ORKS49yk4C&pg=PA2 |title=The Fall and Rise of the Islamic State |last=Feldman |first=Noah |date=2012-08-26 |publisher=Princeton University Press |pages=2 |language=en |isbn=978-1-4008-4502-6}}</ref> 19वीं और 20वीं शताब्दी में मुस्लिम जगत की राजनीति का मुख्य विचार इस्लामी राज्यों में [[शरिया|शरिया कानून]] को लागू करना था। [[छह-दिवसीय युद्ध|छह-दिवसीय युद्ध]] में अरब सेनाओं की पराजय, [[शीत युद्ध|शीत युद्ध]] की समाप्ति और समाजवादी [[सोवियत संघ]] का पतन जैसी राजनीतिक घटनाओं ने इस्लामी आंदोलनों की अपील को और तीव्र कर दिया है। धर्मनिरपेक्ष राज्य व्यवस्था के प्रति अविश्वास के कारण मुस्लिम जगत के इस्लामवादी राजनीतिक दल लगातार आंदोलनरत हैं।
== व्युत्पत्ति और परिभाषा ==
अरबी भाषा में नीति और राजनीति दोनों को दर्शाने के लिए ''[[सियासत]]'' या ''सियासा'' (سياسة) शब्द का प्रयोग किया जाता है। व्याकरणविदों के अनुसार, यह अरबी धातु ''सासा'' (ساس) से निकला है जिसका अर्थ है—संचालन करना, प्रबंधन करना, शासन करना। इस शब्द का 'फेल मुदारे' (वर्तमान और भविष्य काल) रूप ''यासूस'' (يسوس) है।<ref>الأفعال، للسرقسطي، تحقيق محمد محمد شرف، ومراجعة محمد مهدي علام، القاهرة: الهيئة العامة للكتاب، 1979، ص 3/498</ref> इस्लामिक विद्वानों के अनुसार, इस्लाम और अरबी भाषा में 'सियासा' शब्द का अर्थ पारंपरिक राजनीति, सत्ता या नेतृत्व नहीं है; बल्कि इसका अर्थ किसी स्थिति में सुधार करना, उत्पन्न समस्याओं का समाधान निकालना, परिस्थितियों को बेहतर बनाना या किसी वस्तु को अपेक्षाकृत अच्छी स्थिति में ले जाना है। उदाहरण के लिए, वे पैगंबर सुलेमान [[:en:Judgement of Solomon|से जुड़ी एक घटना]] का हवाला देते हैं, जहाँ एक बच्चे की दो महिलाओं द्वारा मातृत्व का दावा किए जाने पर, पैगंबर सुलेमान ने जिस युक्ति से वास्तविक माँ की पहचान की थी, उसे 'सियासत' के रूप में उल्लेखित किया गया है।<ref>{{cite web |title=सहীह बुখারী (তাওহীদ পাবঃ) {{!}} হাদিস: ৩৪২৭ [ ] |url=https://www.hadithbd.com/hadith/link/?id=27766 |website=www.hadithbd.com |access-date=22 July 2026 |language=bn}}</ref> विद्वानों का यह भी कहना है कि जिन विषयों में कुरान और सुन्नत के स्पष्ट और अकाट्य प्रमाण मौजूद हैं, उन मामलों में 'सियासा' या नवीन समाधान रणनीतियाँ वैध नहीं होंगी; 'सियासा' का प्रयोग केवल उन मामलों में वैध है जिनका शरिया में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है।<ref name=ipabmz>{{cite web |last1=Zakaria |first1=Abu Bakr Muhammad |title=ইসলামে রাজনীতি ও রাষ্ট্রনীতির ধরণ। |url=https://m.youtube.com/watch?si=MNcJPeT_tyh72UDq&v=Rmgsnk5Yf74 |website=[[Abu Bakr Muhammad Zakaria|ابو بكر محمد زكريا]] Official YouTube Channel |access-date=30 November 2023 |language=en |date=3 October 2023}}</ref> आलिमों का यह भी कहना है कि कोई व्यक्ति या सरकार अल्लाह के बंदों की सुविधा या कल्याण के लिए जो कार्य करती है, वे इस्लामी राजनीति के अंतर्गत आते हैं, जो मूल रूप से [[मस्लहत]] (जनहित) से जुड़े हैं और उसी पर निर्भर हैं; यदि उस कार्य में जनहित नहीं है, तो इस्लाम उसे राजनीति के रूप में मान्यता नहीं देता। इस्लामी राजनीति का मूल सिद्धांत यह है कि निर्देश कुरान और हदीस से यानी पैगंबर मुहम्मद (स.) की जीवनी से लिए जाने चाहिए, न कि व्यक्तिगत रूप से गढ़े जाने चाहिए।<ref>{{cite news |title=ইসলামী রাজনীতি কাকে বলে ও কী? |url=https://www.ntvbd.com/religion-and-life/22366/%E0%A6%87%E0%A6%B8%E0%A6%B2%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A7%80-%E0%A6%5B...%5D |access-date=21 August 2025 |work=ntvbd.com |date=27 September 2015 |language=en}}</ref> [[वैज्ञानिक अनुसंधान और फतवा संबंधी स्थायी समिति|सऊदी अरब की फतवा संबंधी स्थायी समिति]] के अनुसार, कुरान और सुन्नत पर आधारित राजनीति ही इस्लामी राजनीति है तथा सभी मुसलमानों और इस्लामी राज्यों के शासकों के लिए इस राजनीति का अभ्यास करना और मुसलमानों के इसुखल एवं परलोक से जुड़े सभी कार्यों को इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर संचालित करना 'फर्ज़' (अनिवार्य) है।<ref>https://d1.islamhouse.com/data/bn/ih_articles/single2/bn_Islami_Rajniti_ki_Kibhabe.pdf</ref>
== प्रारंभिक ग्रंथसूची ==
{{আরও দেখুন|सियासतनामा}}
इस्लामी राजनीति पर सबसे प्राचीन मौलिक ग्रंथ [[अल-मावर्दी]] की पुस्तक [[अहकाम उस-सुल्तानिया (पुस्तक)|अहकाम उस-सुल्तानियात]] (प्रशासनिक नियम) है।<ref name=pub>{{cite web |title=আল মাওয়ার্দী'র খিলাফাত দর্শন ও ড.মুঈন উদ-দীন আহমদ খান।। মাঈন উদ্দিন জাহেদ |url=https://pubakash.com/archives/1819 |website=Pubakash |access-date=1 October 2025 |language=en-US |date=31 March 2021}}</ref><ref>{{cite web |title=আল মাওয়ার্দী ও তাঁর চিন্তাধারা - রোয়াক |url=https://rowyakbd.com/al-mawardi-and-his-thought/ |website=Rowakbd |access-date=1 October 2025 |language=en-US |date=22 February 2021}}</ref><ref>{{cite news |title=স্মরণীয় মুসলিম মনীষী আল-মাওয়ার্দি |url=https://www.kalbela.com/ajkerpatrika/special-event/158040 |access-date=1 October 2025 |work=[[Kalbela]] |date=24 January 2025 }}{{dead link|date=May 2026 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes}}</ref> इसके अतिरिक्त, बाद की रचनाओं में [[अबू याला]] की 'अहकाम उस-सुल्तानिया', [[अबुल मआली अल-जुवैनी]] की 'अल-गियासी', [[इब्न कय्यिम]] रचित [[तुरुत उल-हिकमिय्यात|तुरुत उल-हुकमिय्यात]] और [[इब्न तैमिया]] की [[सियासत उस-शरिया (पुस्तक)|सियासत उस-शरिया]] आदि प्रमुख हैं।<ref name=ipabmz/><ref name=pub/>
== धार्मिक पांडुलिपियाँ ==
=== कुरान ===
{{hatnote|और देखें: [[आज्ञाकारिता की आयत]] और [[इकामते दीन]]}}
[[चित्र:সূরা শূরার ১৩তম আয়াত.png|400px|थंब|दाएँ|सूरह शूरा की 13वीं आयत, जिससे "इकामते दीन" शब्दावली ली गई है और इसकी व्याख्या को लेकर इस्लामवादियों में मतभेद है।]]
कुरान में इस्लामी राजनीति के संदर्भ में राजनीतिक इस्लामवादियों द्वारा सबसे अधिक [[इकामते दीन]] (धर्म की स्थापना) नामक अवधारणा को उभारा जाता है, जिसका उल्लेख [[सूरह शूरा]] की आयत 13 में है।
{{quote|
उसने तुम्हारे लिए धर्म (दीन) का वही मार्ग निर्धारित किया है, जिसका आदेश उसने नूह को दिया था और जो (ओही) हमने तुम्हारी ओर भेजी है और जिसका आदेश हमने इब्राहीम, मूसा और ईसा को दिया था कि ''धर्म को स्थापित करो'' (اَقِیۡمُوا الدِّیۡنَ) और इसमें फूट न डालो। जिस चीज़ की ओर तुम बहुदेववादियों को बुलाते हो, वह उन्हें बहुत भारी लगती है; अल्लाह जिसे चाहता है अपनी ओर खींच लेता है और जो उसकी ओर रुख करता है, उसे वह मार्ग दिखाता है। |सूरह शूरा: १३}}
हालांकि, इस आयत में "धर्म को स्थापित करने" से क्या तात्पर्य है, इसे लेकर इस्लामवादियों में मतभेद है। [[राजनीतिक इस्लाम]] के समर्थक इसके द्वारा अल्लाह की हुकूमत या आदेश की स्थापना अथवा इस्लामी सरकार की स्थापना यानी इस्लामी/मुस्लिम राजनीति या शक्ति की स्थापना समझते हैं; इसके विपरीत, [[पारंपरिक सलाफीवाद|मुख्यधारा के सलाफी]] मानते हैं कि इसका तात्पर्य [[तौहीद]] (अल्लाह की एकता) और दावत के माध्यम से जनता के बीच शुद्ध इस्लामी [[अकीदा]] (विश्वास) स्थापित करना है, और वे पहले वाले राजनीतिक हुकूमत संबंधी अर्थ को गलत बताकर उसका विरोध करते हैं।
[[चित्र:আনুগত্যের আয়াত.jpg|400px|थंब|दाएँ|सूरह निसा की आयत 59, जिसे आज्ञाकारिता की आयत कहा जाता है, इस्लाम में राजनीति के संदर्भ में प्रयुक्त एक महत्वपूर्ण आयत है।]]
इस्लाम में राजनीतिक सत्ताधारियों की आज्ञाकारिता के प्रसंग में सूरह निसा की आयत 59 का उल्लेख किया जाता है, जिसे 'आज्ञाकारिता की आयत' कहा जाता है। इसमें अल्लाह और इस्लामी पैगंबर मुहम्मद के साथ-साथ [[उलिल-अम्र]] यानी दायित्व संभालने वाले प्राधिकारिगण (शासकों और उलेमा) की आज्ञा मानने का निर्देश दिया गया है। यह आज्ञाकारिता वैध इस्लामी निर्देशों ([[हलाल]]) के मामले में है, न कि अनंतिम या गैर-इस्लामी आदेशों ([[हराम]]) के मामले में।
{{quote|हे विश्वासियों! अल्लाह का आज्ञापालन करो और रसूल का आज्ञापालन करो और उन लोगों का भी जो तुममें से अधिकारसंपन्न (उलिल-अम्र) हैं। फिर यदि किसी बात में तुम्हारा आपस में मतभेद हो जाए, तो उसे अल्लाह और रसूल के पास लौटा दो (उनके आदेश की ओर देखो), यदि तुम अल्लाह और अंतिम दिन पर विश्वास रखते हो। यही उत्तम है और परिणाम की दृष्टि से भी बहुत अच्छा है।|सूरह निसा, आयत: ५९}}
[[इब्न तैमिया]] ने अपनी पुस्तक 'सियासत उस-शरिया' (शर्ई राजनीति) की शुरुआत इसी आयत से की है, साथ ही न्याय और अमानत (विश्वास) के निर्देश के रूप में सूरह निसा की आयत 58 को भी पूर्व में उद्धृत किया है।
{{quote|निःसंदेह हमने अपने रसूलों को स्पष्ट प्रमाणों के साथ भेजा और उनके साथ किताब और (न्याय की) तराजू उतारी, ताकि लोग न्याय पर कायम रहें। और हमने लोहा उतारा, जिसमें भारी शक्ति है और लोगों के लिए कई लाभ हैं; और ताकि अल्लाह जान ले कि कौन बिन देखे उसकी और उसके रसूलों की सहायता करता है। निःसंदेह अल्लाह शक्तिशाली, पराक्रमी है।|हदीद, २५}}
{{quote|निसंदेह अल्लाह तुम्हें आदेश देता है कि अमानतें उनके हकदारों को लौटा दो और जब लोगों के बीच निर्णय करो, तो न्याय के साथ निर्णय करो। अल्लाह तुम्हें कितनी अच्छी सीख देता है! निःसंदेह अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, देखने वाला है।|निसा, ५८}}
==== पश्चिमी विद्वानों के दृष्टिकोण ====
माइकल कुक ने अपनी पुस्तक 'मुहम्मद' में टिप्पणी की है कि हालांकि कुरान सीधे तौर पर राजनीति पर चर्चा नहीं करता, लेकिन इसमें उत्पीड़ितों (''मुस्तदआफीन''), देशत्याग (''हिजरत''), मुस्लिम समुदाय (''[[उम्मा]]'') और अल्लाह के मार्ग में संघर्ष (''[[जिहाद]]'') की अवधारणाओं का उल्लेख मिलता है, जिनके राजनीतिक प्रभाव हो सकते हैं।<ref name="Cook-1983-51-60">{{cite book |last1=Cook |first1=Michael |title=Muhammad |url=https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4 |date=1983 |publisher=Oxford University Press |isbn=0192876058 |pages=[https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4/page/51 51]–60}}</ref> कुरान की कई आयतों (जैसे कुरान 4:98) में ''मुस्तदआफीन'' ("कमजोर माने गए", "अकिंचन" या "उत्पीड़ित") पर चर्चा की गई है, जैसे कि कैसे फिरौन जैसे लोग उनका शोषण करते थे, अल्लाह कैसे चाहता था कि उनके साथ न्याय हो, और वे उस भूमि से जहाँ उन पर अत्याचार होता है, कैसे पलायन कर सकते हैं (कुरान 4:99)। पैगंबर [[इब्राहीम]] ने "अपने पालनहार की ओर पलायन" किया था (कुरान 29:26)। कुरान में अविश्वासियों (''कुफ्फार'') के खिलाफ युद्ध का आदेश दिया गया है और दिव्य सहायता का वादा किया गया है, हालांकि कुछ आयतों में यह भी कहा गया है कि यह आदेश शायद तब के लिए था जब अविश्वासियों ने युद्ध शुरू किया हो, और संधियाँ तथा समझौते होने पर युद्ध समाप्त किया जा सकता है। इसके अलावा, कुरान में विजय प्राप्त करने वालों के बीच युद्ध में प्राप्त धन के उचित वितरण के लिए भी कुछ आयतें हैं। साथ ही, आंतरिक शत्रुओं या "[[मुनाफिक|कपटियों]]" (''मुनाफिकून'') के विरुद्ध युद्ध का भी आदेश दिया गया है।<ref name="Cook-1983-51-60"/> कुछ निर्देश पैगंबर के जीवनकाल के बाद आगे नहीं बढ़े, जैसे अल्लाह और उनके पैगंबर से झगड़ा करना या पैगंबर से बात करते समय चिल्लाना या ऊँची आवाज़ में बात करना।<ref name="Cook-1983-56-7">{{cite book |last1=Cook |first1=Michael |title=Muhammad |url=https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4 |date=1983 |publisher=Oxford University Press |isbn=0192876058 |pages=[https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4/page/56 56]–7}}</ref> इस्लामी राजनीतिक शिक्षाओं के सीमित रहने का कारण यह है कि कुरान में "किसी औपचारिक और निरंतर सत्ता के ढांचे" का उल्लेख नहीं किया गया है, इसमें केवल पैगंबर की बात मानने का निर्देश दिया गया है;<ref name="Cook-1983-56-7"/> और इसके मूल संदेश का राजनीतिक उपयोग उस समय अत्यंत सीमित था, क्योंकि रेगिस्तानी खानाबदोश लोगों के लिए यह कल्पना करना भी कठिन था कि विभिन्न शहरों और देशों द्वारा नियंत्रित एक विस्तृत कृषक-बहुसंख्यक क्षेत्र का शासन चलाना ही इस्लाम की सफलता हो सकती है।<ref name="Cook-1983-59">{{cite book |last1=Cook |first1=Michael |title=Muhammad |url=https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4 |date=1983 |publisher=Oxford University Press |isbn=0192876058 |page=[https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4/page/59 59]}}</ref>
=== हदीस ===
==== राजनीति या सियासत शब्द का उल्लेख ====
बुखारी और मुस्लिम में वर्णित हदीसों में 'सियासत' शब्द की धातु (मूल) का क्रियापद के रूप में उपयोग हुआ है।<ref>{{cite web |title=ص9 - كتاب السياسة الشرعية جامعة المدينة - الدرس السياسة الشرعية مفهومها أحكامها أدلة اعتبارها - المكتبة الشاملة (Page 9 - The Book of Islamic Political Theory, University of Madinah - Lesson: Islamic Political Theory: Its Concept, Rulings, and Evidence for its Validity - Shamila Library) |url=https://shamela.ws/book/11313/2 |website=shamela.ws}}</ref><ref>{{cite web |title=ইসলামিক শাসন ব্যবস্থা |url=https://m.youtube.com/watch?si=-U16ABJxCI9s-skE&v=KfCinOkJs4g |access-date=20 July 2026 |date=13 October 2019}}</ref>
{{quote|अबू হুরাইরা (रा.) से वर्णित है कि पैगंबर (स.) ने कहा: “बनी ইসরাইল (이스্রাইল की संतानों) पर नबी शासन करते थे (तासूसूहुम अल-अंबिया); जब भी कोई नबी मरता, तो दूसरा नबी उसका उत्तराधिकारी बनता।” |(सहीह बुखारी, हदीस/3455; सहीह मुस्लिम, हदीस/1842; इब्न माजाह, हदीस/2871; मुसनद अहमद, हदीस/7960)}}
[[इमाम नववी]] कहते हैं: "'[वे] नबी द्वारा शासित थे' का अर्थ है कि नबी उनके मामलों की देखभाल वैसे ही करते थे जैसे शासक जनसाधारण की जिम्मेदारी संभालते हैं। इस प्रकार सियासा का अर्थ ऐसी देखरेख करना है जो उनके कल्याण को बनाए रखे और उनके हितों को पूरा करे।"<ref>{{cite web |title=Politics from an Islamic perspective - Islam Question & Answer |url=https://islamqa.info/en/answers/181673/politics-from-an-islamic-perspective |website=[[islamqa.info]] |access-date=4 August 2022 |language=en}}</ref>
==== नेतृत्व के निर्देश ====
;नेतृत्व की प्राथमिक शर्त: तीन लोगों की जमात और कुरान (इस्लामी ज्ञान) में प्रवीणता
[[सालेह अल-मुनाज्जिद]] अपनी पुस्तक 'हुब्ब उस-सियासत' (नेतृत्व प्रेम) में कहते हैं कि सुन्नत के अनुसार यदि लोग संगठित हों, तो एक नेता का होना अनिवार्य है।
{{quote|अबू सईद अल-खुदी (रा.) से वर्णित। रसूलुल्लाह (स.) ने कहा: जब तीन व्यक्ति सफर पर निकलें, तो उन्हें चाहिए कि वे अपने में से एक को अपना अमीर या नेता बना लें।|अबू दाऊद, ২৬০৮, सनद हसन, अलबानी}}
एक अन्य हदीस में आया है कि यदि तीन से अधिक लोग एकत्र हों, तो उनमें से एक को नेता बनाना चाहिए, और उसे नेता बनाया जाना चाहिए जो उनमें सबसे अधिक कुरान (और सही हदीस यानी शुद्ध इस्लामी ज्ञान) जानता हो।
{{quote|कुतैबा बिन सईद (रह.) ..... अबू सईद अल-खुदी (रज़ि.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) ने कहा: जब तीन व्यक्ति एकत्र हों, तो उनमें से एक को उनका इमाम या नेता होना चाहिए। और उनमें इमामत या नेतृत्व का सबसे अधिक हकदार वह व्यक्ति है जिसने सबसे अधिक पढ़ा है (أَقْرَؤُهُمْ, अक्रओहुम - जिसका अर्थ यह है कि जिसने मजीद कुरान [और सही हदीस] का सबसे अधिक अध्ययन किया है)।| सहीह मुस्लिम (हदीस अकादमी) 1415-(289/672)}}
एक अन्य हदीस में नेता या इमाम बनाने के विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं (अधिकांश विद्वानों के अनुसार यह धार्मिक इमामत या धार्मिक नेतृत्व है, किंतु कई विद्वानों ने इसे राजनीतिक इमामत या राजनीतिक नेतृत्व चुनने के निर्देश के रूप में भी स्थापित किया है)।
{{quote|अबू मसूद (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) ने ارشاد किया: कौम की इमामत वह व्यक्ति करेगा जो अल्लाह की किताब को सबसे अच्छी तरह पढ़ सकता है। यदि उपस्थित सभी लोग अच्छे कारी (पाठक) हों, तो इमामत वह व्यक्ति करेगा जो सुन्नत के बारे में सबसे अधिक जानता हो। यदि सुन्नत के ज्ञान में सब समान हों, तो वह जो सबसे पहले हिजरत (पलायन) करके आया हो। यदि हिजरत में भी सब समान हों, तो वह इमामत करेगा जो उम्र में सबसे बड़ा हो। और कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के अधिकार क्षेत्र (अधिकार वाले स्थान) में जाकर इमामत न करे और न ही किसी के घर जाकर उसकी अनुमति के बिना उसके खास आसन पर बैठे।|मिशকাত 1117, मुस्लिम 673, अबू दाऊद 582, अत-तिर्मिज़ी 235, नसायी 780, इब्न माजाह 980, अहमद 17063}}
;ज्ञान अर्जन
हदीस में आलिम (विद्वान) व्यक्ति को नेता बनाने का आदेश दिया गया है और जाहिल (अज्ञानी) व्यक्ति को नेता बनाना कयामत की निशानी बताया गया है।
{{quote|कुतैबा बिन सईद (रह.) ..... उर्वाह (रह.) से वर्णित। उन्होंने कहा, मैंने अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन अल-आस (रज़ि.) को कहते सुना। उन्होंने कहा कि मैंने रसूलुल्लाह (स.) को कहते सुना। आपने फरमाया: निश्चय ही अल्लाह लोगों के दिलों से ज्ञान छीन नहीं लेगा, बल्कि वह आलिमों (विद्वानों) को उठा कर (قبض करके) ज्ञान को समाप्त कर देगा। यहाँ तक कि जब कोई आलिम बाकी नहीं रहेगा, तो लोग अज्ञानी (मूर्ख) लोगों को अपना नेता बना लेंगे। लोग उनसे फतवे (धार्मिक निर्णय) मांगेंगे, और वे बिना ज्ञान के फतवे देंगे। जिससे वे खुद भी गुमराह होंगे और लोगों को भी गुमराह करेंगे।|सहीह मुस्लिम (हदीस अकादमी) 6689-(13/2673)}}
साहबी [[उमर इब्न अल-खत्ताब|उमर]] और सलाफ-ए-सालेहिन ने नेतृत्व मिलने से पहले और बाद में ज्ञान अर्जित करने का निर्देश दिया है।
{{quote|उमर (रा.) ने कहा: नेतृत्व प्राप्त करने से पहले ज्ञान हासिल कर लो। अबू अब्दुल्लाह (बुखारी) कहते हैं: और नेता बना दिए जाने के बाद भी (ज्ञान प्राप्त करो), क्योंकि पैगंबर (स.) के साथियों ने वृद्धावस्था में भी ज्ञान प्राप्त किया है।|सहीह बुखारी (इफा) 73}}
हालांकि, केवल अपने ज्ञान के प्रदर्शन या नेतृत्व पाने के उद्देश्य से ज्ञान प्राप्त करने को हदीस में मना किया गया है।
{{quote|काब बिन मलिक (रज़ि.) से वर्णित, उन्होंने कहा, मैंने रसूलुल्लाह (स.) को कहते सुना: जो व्यक्ति आलिमों के साथ बहस करने, या जाहिलों के साथ हुज्जत करने, अथवा लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने के उद्देश्य से ज्ञान प्राप्त करता है, अल्लाह तआला उसे जहन्नम (नरक) में झोंक देगा।|तिर्मिज़ी 2654 (हसन-अलबानी)}}
;सच्चाई और निर्लोभता
व्यक्तिगत जीवन में সৎ (सच्चे) और नेतृत्व तथा सत्ता को मन से नापसंद करने वाले लोगों को नेतृत्व के योग्य बताया गया है।
{{quote|अबू हुरैरा (रा.) से वर्णित, पैगंबर (स.) ने कहा: कयामत तब तक कायम नहीं होगी... जब तक कि तुम ऐसे लोगों से युद्ध न करो... "तुममें से सर्वोत्तम लोग वे होंगे जो नेतृत्व और शासन सत्ता से जुड़ने से पहले इसे अत्यधिक घृणा और नापसंद करें।" |सहीह बुखारी (इफा) 3334}}
हदीस में नेतृत्व का लालच करने से मना करते हुए कहा गया है कि नेतृत्व की शुरुआत भले ही आनंददायक हो, लेकिन धीरे-धीरे यह कष्टदायक होती जाती है।
{{quote|अबू हुरैरा (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, पैगंबर (स.) ने कहा: शीघ्र ही तुम लोग सत्ता और नेतृत्व के लिए लालायित हो जाओगे। और इसके कारण निश्चित ही कयामत के दिन तुम्हें लज्जित होना पड़ेगा। अतः (नेतृत्व पाना) दूध पिलाने वाली (माता) के रूप में कितना अच्छा है और दूध छुड़ाने के समय कितना बुरा है। (जैसे शिशु दूध मिलने पर आनंदित होता है, वैसे ही व्यक्ति सत्ता पाकर खुश होता है, और जैसे दूध छूटने पर बच्चा कष्ट पाता है, वैसे ही सत्ता जाने पर व्यक्ति दुखी होता है।) |मिशকাত 2681, बुखारी 7148, नसायी 4211}}
;परामर्श और प्राथमिकता
हदीस में परामर्श (मशविरा) के आधार पर नेता या अमीर चुनने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, और जिसकी सत्ता या जिसके प्रति निष्ठा पहले स्थापित हो चुकी हो, उसकी आज्ञा मानने तथा उसकी मृत्यु के बाद ही अगला अमीर चुनने का निर्देश दिया गया है। पहले से स्थापित नेता के जीवनकाल में यदि कोई दूसरा नेतृत्व का दावा करे, तो उसे दृढ़ता से रोकने का आदेश है।
{{quote| जरीर (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, मैं यमन में था। उसी समय मेरी मुलाकात यमन के दो व्यक्तियों—जुकाला और जु-अम्र—से हुई। मैंने उन्हें रसूलुल्लाह (स.) की हदीसें सुनानी शुरू कीं। (वर्णक कहते हैं) तब जु-अम्र ने जरीर से कहा, हे जरीर! यदि तुम जो वर्णन कर रहे हो, वह वास्तव में तुम्हारे साथी [पैगंबर (स.)] का कथन है, तो जान लो कि तीन दिन पहले उनका इंतकाल हो चुका है। (जरीर कहते हैं, यह सुनकर मैं मदीने की ओर दौड़ा)... (बाद में जब अबू बकर खलीफा चुने गए, तो उन्होंने कहा)... "तुम अरब जाति तब तक कल्याण पर रहोगे जब तक कि एक अमीर के मरने पर (परामर्श के आधार पर) दूसरे को अमीर बना लोगे। और यदि यह फैसला तलवार के जोर पर होने लगा, तो तुम्हारे अमीर राजा-बादशाहों जैसे हो जाएंगे। वे राजाओं की तरह गुस्सा होंगे और राजाओं की तरह खुश होंगे (और खिलाफत व खलीफा बाकी नहीं रहेंगे)।" |सहीह बुखारी, हदीस: ४३५९}}
{{quote|अबू हुरैरा (रा.) से वर्णित, पैगंबर (स.) ने कहा: "...मेरे बाद कोई नबी नहीं आएगा, बल्कि कई खलीफा होंगे और उनकी संख्या अधिक होगी।" সাহাবীগণ बोले, "तो आप हमें क्या आदेश देते हैं?" आपने फरमाया: "जिसके हाथ में सबसे पहली बैअत (निष्ठा की शपथ) की जाए, उसी का आज्ञापालन करना और उन्हें उनका हक देना। निःसंदेह अल्लाह उनसे उस चीज़ के बारे में पूछेगा जिसकी जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई थी।" |(सहीह बुखारी, हदीस/3455; सहीह मुस्लिम, हदीस/1842)}}
;योग्य व्यक्ति को नेतृत्व देना
सही माने गए सुन्नी हदीसों में योग्य व्यक्ति को नेतृत्व सौंपने का आदेश दिया गया है।
{{cite book |last1=Taymīyah |first1=Aḥmad ibn ʻAbd al-Ḥalīm Ibn |title=The Political Shariyah on Reforming the Ruler and the Ruled |date=2005 |publisher=Dar ul Fiqh |page=13 |url=https://books.google.com.bd/books?id=ZdwVAQAAIAAJ&q=political+shariyah+on+reforming+ruler+and+ruled+ibn+taymiyyah&dq=political+shariyah+on+reforming+ruler+and+ruled+ibn+taymiyyah&hl=en&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwij4qv35uKPAxWa6jgGHXd2BtoQ6AF6BAgKEAM |access-date=18 September 2025 |language=en}}
{{quote|अबू हुरैरा (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: जब अमानत नष्ट कर दी जाए (यानी अयोग्य व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंप दी जाए), तब कयामत की प्रतीक्षा करना।|बुखारी ६४९६, रियाजुस सालिहीन १८३७}}
;महिला राष्ट्राध्यक्ष न होना
हदीस में राष्ट्राध्यक्ष के पद के लिए महिलाओं को अयोग्य घोषित किया गया है।
{{quote|अबू बकरा (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) के पास यह खबर पहुँची कि फारस (ईरान) के लोगों ने किस्रा की पुत्री को अपनी सावर्णि (महारानी) नियुक्त किया है। तब आपने फरमाया: वह जाति कभी सफल नहीं हो सकती जो अपने शासन की बागडोर किसी महिला को सौंप दे।|मिशकत ३६९३, सहीह: बुखारी ४४२५}}
==== आज्ञाकारिता और विरोध ====
इस्लामी पैगंबर मुहम्मद ने मुसलमानों को मिलजुलकर रहने का कड़ाई से निर्देश दिया है और अमीर, सत्ताधारी नेता या शासक की कमियों या उसके अत्याचारी होने पर भी धैर्य रखने तथा एकजुटता से अलग न होने का आदेश दिया है।<ref name=উ>উসুলুল ঈমান... (उसूलुल ईमान...)</ref>
{{quote|अनस बिन मालिक (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: यदि तुम पर किसी ऐसे हब्शी (अश्लील/कृष्णवर्ण) दास को भी शासक नियुक्त कर दिया जाए जिसका सिर किशमिश की तरह (छोटा) हो, तब भी उसकी बात सुनना और उसकी आज्ञा का पालन करना।|सहीह बुखारी, हदीस: ७१४२}}
{{quote|अब्दुल्लाह बिन अम्र (रा.) से वर्णित: अल्लाह के रसूल (स.) ने फरमाया: "जो व्यक्ति किसी राजनेता (शासक) के हाथ पर बैअत करे और उसे अपने दिल से वचन दे, तो उसे चाहिए कि जहाँ तक संभव हो उसका (उसके अच्छे कार्यों में) आज्ञापालन करे। इसके बाद यदि कोई दूसरा (शासक) उसकी सत्ता छीनना चाहे, तो उस दूसरे शासक की गर्दन उड़ा दो।" |(मुस्लिम ৪৮৮২)}}
;शासक को गुप्त रूप से सलाह देना
इस्लामी पैगंबर मुहम्मद ने शासक को नसीहत (मार्गदर्शन) देने का निर्देश दिया है और इसे गुप्त रूप से देने को कहा है।<ref name=উ/>
{{quote|अबू हुरैरा (रज़ि.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: अल्लाह तआला तीन चीजें पसंद करता है और तीन चीजें नापसंद करता है... "और अल्लाह ने तुम पर जिसे शासक बनाया है, उसे नसीहत (भलाई की बात) करो।"<ref name=উ/> |सहीह मुस्लिम ১৭১५}}
{{quote|इब्न أبي عاصم और अन्य द्वारा वर्णित इयाद बिन गनम (रज़ि.) कहते हैं, रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया:
«من أراد أن ينصح لذي سلطان فلا يبده علانية، ولكن يأخذ بيده فيخلوا به، فإن قبل منه فذاك، وإلا كان قد أدى الذي عليه»
“यदि कोई किसी सत्ताधारी को नसीहत देना चाहता है, तो उसे चाहिए कि वह उसे खुलेआम (सार्वजनिक रूप से) न दे, बल्कि उसका हाथ पकड़कर (एकांत में) ले जाए। यदि वह उसकी बात मान ले, तो ठीक है, अन्यथा उसने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी।” |(मुसनद अहमद १५३३३, इब्न أبي عاصم, अस-सुन्नत ২/৫০)<ref name=উ/></ref>
;नेतृत्व की वैधता के मानदंड
[[खोন্দকার আব্দুল্লাহ জাহাঙ্গীর]] अपनी पुस्तक 'ইসলামের নামে জঙ্গিবাদ' (इस्लाम के नाम पर आतंकवाद) में कहते हैं कि हदीस में तब तक शासक की सत्ता का विरोध करने से मना किया गया है जब तक वे नमाज पढ़ते हैं और/या सार्वजनिक रूप से नमाज पढ़ने की अनुमति देते हैं।
{{quote|उम्मुल मुमिनीन उम्मे सलमा (रज़ि.) से वर्णित कि रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: शीघ्र ही ऐसे कुछ अमीर आएंगे जिन्हें तुम पहचानोगे और नापसंद करोगे। जो व्यक्ति उनकी असलियत को पहचान गया, वह सुरक्षित हो गया और जिसने उन्हें नापसंद किया, वह बच गया। लेकिन जो व्यक्ति उनसे संतुष्ट रहा और उनका अनुसरण किया (वह नष्ट हो गया)। लोगों ने पूछा: क्या हम उनके खिलाफ युद्ध न करें? रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: नहीं, जब तक वे नमाज कायम रखें।|सहीह मुस्लिम, ४६९४}}
फहद बिन सालेह अल-अजलान अपनी पुस्तक 'मुहर्रर फी सियासत उस-शरिया' में कहते हैं कि काजी इयाद और इब्न हजार असकलानी का कहना है कि यदि कोई मुस्लिम शासक काफिर हो जाए या खुले कुफ्र (अधर्म) में लिप्त हो जाए, तो उसकी आज्ञा मानना वैध नहीं है; बल्कि यदि कोई सक्षम हो, तो वह उसके खिलाफ संघर्ष करे। और यदि मुसलमान ऐसा करने में असमर्थ हों, तो राजनीतिक हित और अपने अस्तित्व को बचाने के लिए वे बाहरी तौर पर उसकी आज्ञा मान सकते हैं (मजबूरीवश, न कि उसकी शर्ई सत्ता मानकर)।
;गोत्रवाद और भाई-भतीजावाद (असबियाह)
हदीस में [[असबियाह|गोत्रवाद (जातिवाद/वंशवाद)]] की निंदा की गई है और इसे प्रतिबंधित किया गया है।
{{quote|वासिला बिन असका (रा.) कहते हैं, मैंने एक दिन रसूल (स.) से पूछा: या रसूलल्लाह! असबियाह क्या है? रसूल (स.) ने फरमाया: असबियाह यह है कि तुम अन्याय के मामले में अपने गोत्र की सहायता करो।|अबू दाऊद ५१১৯}}
{{quote|जुनदूब बिन अब्दुल्लाह बजली (रज़ि.) से वर्णित कि रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: जो व्यक्ति लक्ष्यहीन नेतृत्व के झंडे तले युद्ध करता है, गोत्रवाद (عَصَبِيَّةً, असबियाह) की ओर आह्वान करता है और गोत्रवाद के ही कारण सहायता करता है, उसकी मौत जाहिलियत (अज्ञानता के युग) की मौत है।|सहीह मुस्लिम, ४৬৮৬}}
== सालाफियों के दृष्टिकोण ==
मावर्दी अपनी पुस्तक 'क़वानिनुल विज़ारत व सियासतुल मुल्क' (قوانين الوزارة وسياسة الملك, शासन और राज्याधिकार के नियम) में कहते हैं, "हज़रत अली इब्न अबी तालिब (रज़ि.) ने कहा है: 'अपने शत्रु पर उदारता (क्षमा) के माध्यम से श्रेष्ठता प्राप्त करो, क्योंकि यह (क्षमा) दो विजयों में से एक है।' और यदि चेतावनी और स्पष्टीकरण के बाद (शत्रु के साथ) अंतिम मुकाबले या युद्ध की आवश्यकता उत्पन्न हो जाए, तो शासक को अपनी संकल्पशक्ति को जाग्रत करना चाहिए, विवेक का उपयोग करना चाहिए और इस्तिखारा (अल्लाह से कल्याण की प्रार्थना), धर्म के अनुसरण तथा न्याय की स्थापना के दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए। क्योंकि भ्रष्ट और पराजित व्यक्ति के अलावा कोई भी इस मार्ग (न्याय और धर्म) से विचलित नहीं होता है।"<ref>{{cite book |title=قوانين الوزارة وسياسة الملك |date=1 January 1900 |publisher=دائرة الثقافة والسياحة – أبوظبي، مركز أبوظبي للغة العربية، إصدارات |isbn=978-9948-02-171-1 |url=https://books.google.com.bd/books?id=hktQEAAAQBAJ&pg=PT27&dq=%D8%B3%D9%8A%D8%A7%D8%B3%D8%A9%22+%D8%A7%D8%B3%D8%AA%D8%AE%D8%A7%D8%B5%22&hl=bn&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwj_tZTv0fiSAxVGT2wGHdh9KQsQ6AF6BAgNEAM#v=onepage&q=%D8%B3%D9%8A%D8%A7%D8%B3%D8%A9%22%20%D8%A7%D8%B3%D8%AA%D8%AE%D8%A7%D8%B5%22&f=false |access-date=27 February 2026 |language=en |quote=وقد قال علي بن أبي طالب رضي الله تعالى عنه: خذ على عدوك بالفضل فإنه أحد الظفرين " وإن دعت الضرورة إلى المناجزة بعد الإعذار والإنذار، أيقظ لها عزمه، واستعمل فيها حزمه، وأقدم عليها بعد الاستخارة متبعاً للدين، ومستعملاً للعدل، فلن يعدل عنهما إلا باغ مصروع}}</ref>
{{quote|अबू हुरैरा (रज़ि.) कहते हैं, मैंने अल्लाह के रसूल (सल्ल.) से ज्ञान के दो बर्तन सुरक्षित रखे हैं। जिनमें से एक को तो मैंने फैला (प्रचार) दिया। लेकिन यदि मैं दूसरे को भी फैलाता, तो मेरी यह स्वरनली (गला) काट दी जाती।" (बुखारी हदीस/120; मिशकात हदीस/271)}}
{{Quote|दूसरे वर्णन में आया है, उनसे कहा गया कि आप अधिक हदीस का वर्णन करते हैं। उन्होंने कहा, मैंने रसूल (सल्ल.) से जो कुछ सुना है, यदि मैं वह सब का सब वर्णन कर देता, तो तुम मुझे पत्थर मारकर मार डालते; कोई मोहलत नहीं देते। (अहमद हदीस/10972, संदर्भ सहिह)}}
उक्त हदीस की व्याख्या में विद्वानगण कहते हैं कि यह फितने (उपद्रव) से संबंधित विषय था या तत्कालीन शासक के विरुद्ध था, जिसे प्रकट करने पर उसकी हत्या कर दी जाती। या शायद यह ऐसा विषय था जिसे छिपाने से धर्म को कोई हानि नहीं होती, बल्कि प्रकट करने से फितना बढ़ जाता, इसीलिए उन्होंने इसे प्रकट नहीं किया। यहाँ तक कि जिनके हाथों से इस्लामी नेतृत्व छिन जाने की रसूल (सल्ल.) ने चेतावनी दी थी, वे उनके नाम भी जानते थे। अबू हुरैरा (रज़ि.) ने कहा, मैंने 'अस-सादिकुल मसदूक' (सच्चे और सत्य के रूप में प्रमाणित) को यह कहते हुए सुना है, 'मेरे उम्मत का विनाश कुरैश के कुछ लड़कों के हाथों होगा।' तब मरवान ने कहा, इन लड़कों पर अल्लाह की लानत बरसे। अबू हुरैरा (रज़ि.) ने कहा, यदि मैं यह कहना चाहूँ कि वे फलां-फलां गोत्र के लोग हैं, तो मैं उनके नाम बताने में सक्षम हूँ <ref>(बुखारी हदीस/3605)</ref>। अम्र बिन यह्या कहते हैं कि जब मरवान सीरिया के शासक बने, तो मैं अपने दादा के साथ वहाँ गया। जब उन्होंने उनके कम उम्र लड़कों को देखा, तो उन्होंने हमसे कहा, शायद ये लोग उसी दल के अंतर्गत हैं। हमने कहा, इस विषय में आप ही बेहतर जानते हैं <ref>(बुखारी हदीस/7058)</ref>। इन्हीं के नाम अबू हुरैरा (रज़ि.) ने छिपाए थे <ref>(रशीद रज़ा, तफ्सीरुल मनार 6/390; ताहिर अल-जजायरी, तौजीहुन नजर 1/63-64)</ref>। इस संबंध में इमाम कुर्तुबी कहते हैं कि अबू हुरैरा (रज़ि.) ने जिस बात को प्रकट नहीं किया और जिसे प्रकट करने में वे अपने जीवन के लिए जोखिम महसूस कर रहे थे, वह फितने से संबंधित विषय और मुर्तदों तथा मुनाफिदों के सहयोगियों के विरुद्ध साक्ष्य था। वे मार्गदर्शन और विधान से संबंधित नहीं थे <ref>(तफ्सीर कुर्तुबी 2/186)</ref>। हाफ़िज़ इब्ने हजर (रह.) कहते हैं कि अबू हुरैरा (रज़ि.) ने ज्ञान के जिस बर्तन को नहीं खोला था, उसकी व्याख्या में उलेमा-ए-किराम ने कहा है कि उस बर्तन में निकृष्ट नेताओं के नाम, स्थिति और कालखंड स्पष्ट रूप से उल्लेखित थे। हालाँकि अबू हुरैरा (रज़ि.) ने कभी-कभार उनकी उपमाओं का उल्लेख किया है, लेकिन जीवन के भय से स्पष्ट रूप से नाम का उल्लेख नहीं किया। जैसे कि वे दुआ में कहा करते थे, हे अल्लाह! मैं तुझसे साठ हिजरी से शरण मांगता हूँ। लड़कों के नेतृत्व से शरण मांगता हूँ। इससे उनका संकेत यज़ीद बिन मुआविया के खिलाफत की ओर था, क्योंकि वह साठ हिजरी में खलीफा बने थे। अल्लाह ने उनकी दुआ स्वीकार की और वह उनसठ हिजरी में ही परलोक सिधार गए <ref>(फत्हुल बारी 1/216)</ref>।<ref>{{cite journal |last1=At-tahreek |first1=Monthly |title=প্রশ্ন (১৬/২১৬) : আবু হুরায়রা (রাঃ) বলেছেন, ‘আমাকে নবী করীম (ছাঃ) দু’টি বস্ত্ত দিয়েছেন। একটি প্রকাশ করেছি। অপরটি প্রকাশ করলে আমার গর্দান কাটা যাবে। তিনি কি ইলমে তাছাউফের জ্ঞান গোপন করেছিলেন, যেমনটি অনেকে বলে থাকেন? - -মুজাহিদুল ইসলাম, সি এ্যান্ড বি ঘাট, চাঁপাই নবাবগঞ্জ। |journal=মাসিক আত-তাহরীক । ধর্ম, সমাজ ও সাহিত্য বিষয়ক গবেষণা পত্রিকা |url=https://at-tahreek.com/article_details/3053 |access-date=28 February 2026 |language=en}}</ref><ref>{{cite web |title=মুখতাসার সহীহ আল-বুখারী {{!}} হাদিস: ১০১ [ ১২০] |url=https://www.hadithbd.com/hadith/link/?id=88796 |website=www.hadithbd.com |access-date=28 February 2026 |language=bn}}</ref>
== फ़िक़्ह शास्त्र में ==
[[इब्ने तैमिया]] अपनी पुस्तक 'सियासा शरिया' में कहते हैं कि नेता या शासकहीन अवस्था में एक रात बिताने से अधिक उत्तम है कि किसी अत्याचारी शासक के अधीन साठ वर्ष बिताए जाएँ।
[[नासिरुद्दीन अल्बानी]] अपनी पुस्तक 'दरसुश शैखुल अल्बानी' में कहते हैं, हे मुसलमानो, राजनीति से दूर रहना ही राजनीति के अंतर्गत है (أيّها المتأسلمون: من السياسة ترك السياسة) (मिन अस्-सियासा تاركة अल-सियासा, राजनीति से राजनीति का त्याग करना ही है)।<ref>{{cite web |title=ص10 - دروس للشيخ الألباني - عدم اهتمامهم بالسياسات - المكتبة الشاملة الحديثة |url=https://al-maktaba.org/book/7682/140 |website=al-maktaba.org |access-date=29 October 2022}}</ref> आगे वे कहते हैं:
{{quote|प्रश्न: हमसे सबसे पहले जो प्रश्न किया गया था, वह एक ऐसे संवेदनशील विषय के बारे में था, इसलिए अल्लाह आपको उत्तम प्रतिफल दे, क्योंकि आपने [[तबलीग जमात]] के कई विवादास्पद विषयों पर अपनी राय देने का श्रमसाध्य कार्य किया है, लेकिन यहाँ कुछ अन्य विवादास्पद विषय भी हैं जो अन्य दृष्टिकोणों से संबंधित हैं, जिनके उत्तर हम जानना चाहते हैं, संक्षेप में और फिर विस्तार से, अल्लाह आप पर दया करे: प्रश्नकर्ता कहता है: तबलीग जमात के एक मूल सिद्धांत के बारे में आपका क्या कहना है, जिसमें वे कहते हैं: हम बाहर (दावती कार्यों) जाने के दौरान चार विषयों पर बात नहीं करते हैं, क्योंकि इन चार विषयों पर बात करने से फितना पैदा होता है, और वे हैं: राजनीति, फिक़्ह, मतभेद या इख्तिलाफ और दलीय भिन्नता? उत्तर: और हम अल्लाह से दुआ करते हैं कि अल्लाह उन्हें सीधा रास्ता दिखाए! प्रारंभिक रूप से हम राजनीति के विषय में उनके साथ सहमत हैं, लेकिन समग्र रूप से नहीं। इसे हम जिस रूप में देखते हैं, उसे मैं इससे पहले कई बार कह चुका हूँ। हमें सीरिया में पूछताछ का सामना करना पड़ा था, और वहाँ हम खुफिया एजेंसी के प्रश्नों के दायरे में आए थे, दुर्भाग्यवश जैसा कि वे प्रत्येक मुस्लिम देश में करते हैं: तुम सभा कर रहे हो, दल बना रहे हो, ऐसा इत्यादि-इत्यादि। और मैंने कहा: यह दल सुधार के लिए है, राजनीति के लिए नहीं, और एक घंटे से अधिक लंबी चर्चा के बाद जब इस बासपंथी (बास पार्टी या हिज्बु अल-बास, सीरिया का एक राजनीतिक दल) प्रश्नकर्ता को कानूनी दृष्टिकोण से विचार करने योग्य कोई मार्ग नहीं मिला, तो उसने कहा: ठीक है, जाओ और अपना درس (पाठ) पढ़ाते रहो, लेकिन राजनीति के बारे में बात मत करो, हालाँकि मैंने उसे स्पष्ट करते हुए कहा था: हम सुधार का आह्वान करते हुए अपनी ओर बुलाते हैं, और वह है कुरआन और सुन्नत की ओर लौटना जैसा कि आप हमेशा और जीवनभर सुनते आए हैं, और मैंने इसके बारे में पहले भी विस्तार से बताया था, लेकिन अब आप फिर से उसी बात पर लौट आए हैं: लेकिन राजनीति में मत उलझो। इसलिए यह मुझे आपके सामने कुछ बातें रखने के लिए बाध्य करता है। यह सच है कि हम राजनीति में नहीं उलझते। क्योंकि राजनीति में न उलझना इस्लाम का हिस्सा नहीं है, यह बात सही नहीं है। राजनीति इस्लाम का हिस्सा है, और कुछ इस्लामी विद्वान इब्ने तैमिया की पुस्तक "सियासा शरिया, कादिमान वा हदीसान" (शरिया की (राजनीति, अतीत और वर्तमान) से परिचित हैं। इस्लामी राज्य भी राजनीति के दायरे से बाहर नहीं है, और राजनीति (सियासात) शब्द का अर्थ क्या है? वह है: लोगों या जनता की नीति (सियासातुल नास, वि.द्र.: अरबी में नीति और राजनीति दोनों के लिए 'सियासात' शब्द का प्रयोग किया जाता है) और उनकी परलोक और इहलोक की हितों के अनुसार उनकी समस्याओं का समाधान स्थापित करना। हम खुद को राजनीति से जोड़ने की आवश्यकता से इनकार नहीं करते हैं, लेकिन हमने देखा है - और इस संबंध में हमारे पास साक्ष्य भी हैं - वह यह है कि राजनीति का त्याग करना भी राजनीति का ही हिस्सा है। राजनीति में अस्थायी या आंशिक रूप से भाग लेना पड़ता है, लेकिन इसका पूरी तरह त्याग नहीं किया जा सकता, अन्यथा ऐसी राजनीति के बिना मुस्लिम राज्य कैसे स्थापित होगा? लेकिन जिन्हें राजनीति में भाग लेना चाहिए, वे अवश्य ही आलिम (विद्वान) होने चाहिए, किताब (कुरआन) और सुन्नत (इस्लामी पैगंबर मुहम्मद के आदर्श) की सही समझ और सलफ-ए-सालेहीन (पूर्ववर्ती विद्वानों) की समझ के अनुसार इत्यादि, और इसलिए हम उनके साथ (तबलीग जमात के साथ) इस विषय पर प्रारंभिक रूप से सहमत हैं, हम सामान्यतः उनके साथ सहमत हैं, लेकिन विस्तार में हम उनके साथ सहमत नहीं हैं, इसलिए अब हम कहते हैं: राजनीति का त्याग करना भी राजनीति का ही हिस्सा है।}}
[[इखवानुल मुस्लिमिन]] और सममिश्रित मुस्लिम दल अल्बानी के इस मत का तीव्र विरोध करते हुए कहते हैं कि इसके द्वारा अल्बानी ने धर्म और राजनीति को अलग कर दिया है।<ref>{{cite news |last1=جمعة |first1=محمد |title=أيّها المتأسلمون: من السياسة ترك السياسة |url=https://www.alarabiya.net/politics/2015/09/07/%D8%A3%D9%8A%D9%91%D9%87%D8%A7-%D8%A7%D9%B-%D9%85%D8%AA%D8%A3%D8%B3%D9%84%D9%85%D9%88%D9%86-%D9%85%D9%86-%D8%A7%D9%84%D8%B3%D9%8A%D8%A7%D8%B3%D8%A9-%D8%AA%D8%B1%D9%83-%D8%A7%D9%84%D8%B3%D9%8A%D8%A7%D8%B3%D8%A9- |access-date=29 October 2022 |agency=العربية |date=7 September 2015 |language=ar}}</ref> अल्बानी के अनुयायी इसका विरोध करते हुए कहते हैं कि यहाँ राजनीति से तात्पर्य इस्लाम के नाम पर सत्ता, सम्मान और धन की लालसा की प्रतिस्पर्धी नकारात्मक राजनीति से है। इस्लामी समाज के निर्माण के मार्ग और पद्धति के संबंध में अल्बानी 'तसफियाह' और 'तर्बियतः' (आत्मशुद्धि और प्रशिक्षण) को महत्व देते हुए कहते हैं:
{{quote|वर्तमान में मुसलमानों की स्थिति यह है कि वे भौतिक शक्ति से संपन्न काफ़िर राष्ट्रों से घिरे हुए हैं और ऐसे शासकों के हाथों उत्पीड़ित जीवन बिता रहे हैं जो अल्लाह के विधान के अनुसार देश का संचालन नहीं करते, और यदि करते भी हैं तो बहुत ही कम। जिसके परिणामस्वरूप अवसर और सामर्थ्य होने के बावजूद उन्हें संगठनात्मक और राजनीतिक गतिविधियाँ संचालित करने का अवसर नहीं मिल रहा है। इस संबंध में मेरा मानना है कि मुस्लिम दलों को केवल दो महत्वपूर्ण विषयों की ओर ही अग्रसर होना चाहिए। मेरा विश्वास है कि इन दो विषयों के बिना मुसलमानों की इस दुर्बलता, लज्जा और अपमान से मुक्ति पाने का कोई अन्य उपाय नहीं है। मैं सभी विश्वासी मुस्लिम भाई-बहनों से, विशेष रूप से जागरूक और प्रतिबद्ध युवाओं से कह रहा हूँ, सबसे पहले जिस विषय को हमें जानना चाहिए, वह है मुसलमानों की करुण स्थिति। और दूसरी बात जिस पर ध्यान देना चाहिए, वह है अपनी पूरी शक्ति और सामर्थ्य के साथ इससे मुक्ति पाने के उपाय की तलाश करना। आज करोड़ों मुसलमान केवल भौगोलिक वास्तविकता या अपनी पहचान की रक्षा के लिए ही मुस्लिम हैं। अर्थात् अपनी राष्ट्रीयता, पहचान पत्र और जन्म प्रमाण पत्र में दर्ज परिचय के अनुसार मुस्लिम हैं। आज मैं उनके उद्देश्य से कुछ नहीं कहूँगा। मैं फिर से सभी से कहूँगा, उन मुक्ति की कामना करने वाले युवाओं के हाथों में मुक्ति के केवल दो ही मार्ग खुले हैं—(1) तसफियाह अर्थात अकीदे (विश्वास) का संशोधन (2) तर्बियत अर्थात अमली प्रशिक्षण और अभ्यास। तसफियाह का अर्थ है, मुस्लिम युवाओं के सामने उस शुद्ध इस्लाम को प्रस्तुत करना, जो युगों के अंतराल में शामिल हो चुके भ्रामक अकीदों, अंधविश्वासों, बिदअतों और सभी प्रकार की जाइफ और मघट (कमजोर) हदीसों से मुक्त हो। इस अकीदगत् सुधार को कार्यान्वित किए बिना दूसरा कोई मार्ग खुला नहीं है। इस सुधार के बिना मुसलमानों के बीच अपेक्षित शांति और सुरक्षा वापस लाने का कोई अवसर नहीं है। इस 'तसफियाह' का उद्देश्य इस्लाम को एकमात्र उपचार के रूप में प्रस्तुत करना है, जिसने उसी प्रकार उन अरबों का उपचार किया था, जो एक तरफ फारसी, रोमन और हबशियों के सामने अपमानित और उत्पीड़ित अवस्था में थे, तो दूसरी तरफ अल्लाह के अलावा गैरुल्लाह (अल्लाह के सिवाय अन्य) की इबादत करते थे। इस स्थिति से हम सभी इस्लामी दलों और समूहों का विरोध करते हैं और विश्वास करते हैं कि तसफियाह और तर्बियत को एक साथ शुरू किया जाना चाहिए। यदि हम राजनीति से शुरुआत करते हैं, तो हम पाएंगे कि जो लोग अभी राजनीति में डूबे हुए हैं, उनके अकीदे दूषित हैं। और इस्लामी दृष्टिकोण से उनका आचरण काफी हद तक शरिया के विपरीत है। वे केवल आम तौर पर इस्लाम के नाम पर लोगों को इकट्ठा करने में व्यस्त हैं। जबकि उनके लक्ष्य और विचारधारा के बारे में उन आम जनता को कोई स्पष्ट धारणा नहीं है। परिणाम स्वरूप उनके दैनिक जीवन में इस्लाम का कोई प्रभाव नहीं पाया जाता है। देखा जाएगा कि उनमें से अधिकांश अपने व्यक्तिगत जीवन में भी इस्लामी विधि-विधानों को लागू नहीं करते हैं, जो उनके लिए काफी आसान था। इसके बावजूद वे ऊंचे स्वर में नारे लगा रहे हैं: لا حكم إلا لله ('अल्लाह के हुक्म के बिना कोई हुक्म नहीं चलेगा!')। यह बात बिल्कुल सही है कि अल्लाह के उतारे हुए हुक्म के बिना कोई दूसरा हुक्म नहीं चल सकता। लेकिन यह याद रखना चाहिए कि فاقد الشيء لا يعطيه अर्थात् 'जो व्यक्ति खुद जो चीज़ खो चुका है, वह दूसरे को वह चीज़ नहीं दे सकता।' आधुनिक काल के अधिकांश मुसलमान अपने जीवन में अल्लाह के विधान को स्थापित किए बिना यदि दूसरों से राज्य में इस्लाम की स्थापना के लिए संघर्षपूर्ण भूमिका की अपेक्षा करते हैं, तो वे कभी भी अपने उद्देश्य को पूरा करने में सक्षम नहीं होंगे। क्योंकि यदि कोई व्यक्ति कोई चीज़ खुद ही खो बैठा हो, तो वह दूसरे को वह चीज़ नहीं दे सकता। और वे शासक भी तो इसी उम्मत (समुदाय) के अंतर्गत आते हैं। इसलिए शासक और शासित दोनों को ही इस दुर्बलता के कारणों को जानना चाहिए। यह जानना चाहिए कि मुस्लिम शासक अधिकांश मामलों में इस्लाम के विधान के अनुसार शासन क्यों नहीं कर रहे हैं? क्यों मुस्लिम दाई (प्रचारक) दूसरों को राज्य में इस्लाम की स्थापना का आह्वान करने से पहले अपने जीवन में इस्लामी विधान को लागू नहीं कर रहे हैं? इसका एकमात्र उत्तर यह है—उनमें से किसी के पास भी इस्लाम के बारे में सतही ज्ञान के अलावा सही ज्ञान या समझ नहीं है या फिर उनका चाल-चलन, जीवन-यापन, स्वभाव-चरित्र और आपसी लेन-देन—किसी भी क्षेत्र में इस्लामी मूल्यों का विकास नहीं हुआ है। परिणाम स्वरूप मेरे अनुभव के आधार पर मैं जो कह सकता हूँ, वह यह है कि वे एक बड़ी भ्रांति में डूबे हुए हैं। और वह है—धर्म की सही समझ से दूर छिटक जाना। यहाँ तक कि आज के दिन कुछ दाई यह सोचते हैं कि सलाफी केवल तौहीद के दावत में ही अपना जीवन बिता गए। सुब्हानल्लाह! कितनी मूर्खता में डूबा हुआ है वह व्यक्ति, जो अज्ञानतावश ऐसी बात कहता है। यदि वह वास्तव में गाफिल (लापरवाह) न भी हो, तब भी सभी नंबियों और राष्ट्रों (पैगंबरों) के दावत के बारे में उसके ज्ञान में कमी है। क्योंकि सभी नबियों का दावत यही था, 'तुम अल्लाह की इबादत करो और तागूत से बचो' (नहल 16/36)। नूह (अलै.) ने 950 वर्षों तक केवल यही दावत दी थी। वहाँ उन्होंने कोई नया सुधार नहीं किया, कोई नया विधान नहीं बनाया, कोई राजनीति नहीं की। बल्कि उन्होंने केवल इतना कहा था, हे मेरी कौम! तुम एक अल्लाह की इबादत करो और तागूत से बचो।' यही पूर्ववर्ती सलाफ अंबिया-ए-किराम की गतिविधियाँ थीं! तो फिर ये सभी मुस्लिम दाई इतने नीचे कैसे गिर सकते हैं कि वे उसी गतिविधि के लिए सलाफियों की निंदा करें? दूसरा मार्ग है तर्बियत यानी प्रशिक्षण। युवाओं को इस प्रकार प्रशिक्षित किया जाना चाहिए कि वे पूर्ववर्तियों की तरह दुनिया के मोह में न पड़ें। रसूल (सल्ल.) ने कहा है: وَاللهِ مَا الْفَقْرَ أَخْشَى عَلَيْكُمْ. وَلَكِنِّى أَخْشَى عَلَيْكُمْ أَنْ تُبْسَطَ الدُّنْيَا عَلَيْكُمْ كَمَا بُسِطَتْ عَلَى مَنْ كَانَ قَبْلَكُمْ فَتَنَافَسُوهَا كَمَا تَنَافَسُوهَا وَتُهْلِكَكُمْ كَمَا أَهْلَكَتْهُمْ 'अल्लाह की कसम! मैं इस बात का डर नहीं रखता कि तुम गरीबी में पड़ जाओगे। बल्कि मुझे इस बात का डर है कि जब तुम्हारे सामने दुनिया के साजो-सामान के द्वार वैसे ही खोल दिए जाएंगे जैसे तुमसे पहले के लोगों के लिए खोले गए थे, तो तुम भी उनकी तरह दुनिया हासिल करने के लिए आपस में मुकाबला करने लगोगे, और यह चीज़ तुम्हें उसी तरह बर्बाद कर देगी जैसे उसने उनसे पहले के लोगों को बर्बाद कर दिया था' (बुखारी, मुस्लिम, मिशकात हदीस/5১৬৩)। मुसलमानों को एक और बीमारी से अवश्य बचना चाहिए ताकि वह किसी भी तरह उनके दिल में घर न कर सके। और वह है—दुनिया से अत्यधिक प्रेम और मृत्यु से न डरना (अबू दाऊद, मिशकात हदीस/5369)। यह एक ऐसी बीमारी है जिसका उपचार करना और लोगों को इससे बचाना अनिवार्य है। इसका समाधान रसूल (सल्ल.) ने एक हदीस के अंत में इस प्रकार बताया है: حَتَّى تَرْجِعُوا إِلَى دِينِكُمْ 'जब तक कि तुम अपने धर्म की ओर वापस नहीं लौट आते' (अबू दाऊद हदीस/3462)। अर्थात् मुक्ति का मार्ग शुद्ध धर्म की ओर लौटने से ही स्पष्ट होगा, जिस धर्म पर रसूल (सल्ल.) और सहाबा-ए-किराम अटल थे। अल्लाह तआला का इरशाद है: إِنْ تَنْصُرُوا اللهَ يَنْصُرْكُمْ 'यदि तुम अल्लाह की सहायता करोगे, तो वह तुम्हारी सहायता करेगा' (मुहम्मद 47/7)। मुफस्सिरीन (व्याख्याकार) इस बात पर सहमत हैं कि इस आयत में 'अल्लाह की सहायता करने' का अर्थ है—उसके आदेशों और निषेधों के अनुसार आचरण करना। अतः अल्लाह की सहायता करना यदि अल्लाह के विधान को लागू किए बिना असंभव है, तो हम वास्तविक जिहाद में कैसे उतर सकते हैं, जबकि हम अल्लाह की सहायता नहीं कर रहे हैं? क्योंकि हमारा अकीदा जितना अशुद्ध है, हमारी नैतिकता भी उतनी ही पतन की ओर जा रही है। इसलिए जिहाद शुरू करने से पहले इस उपेक्षा, उदासीनता और आपसी विवादों के विरुद्ध युद्ध की घोषणा और शुद्ध अकीदा तथा आत्मशुद्धि प्राप्त करने का प्रयास ही हमारा आवश्यक प्राथमिक कार्यक्रम होना चाहिए। अल्लाह का इरशाद है: لاَ تَنَازَعُوا فَتَفْشَلُوْا وَتَذْهَبَ رِيحُكُمْ 'तुम आपस में झगड़ा मत करो, अन्यथा तुम साहस खो बैठोगे और तुम्हारी शक्ति समाप्त हो जाएगी' (अनफाल 8/46)। इसलिए जब हम इस मतभेद और लापरवाही को समाप्त करने में सक्षम हो जाएंगे और इसके स्थान पर आपसी प्रेम और एकता को जगा सकेंगे, तो वही हमारी worldly (दुनियावी) शक्ति की मुख्य चाबी होगी। अल्लाह का इरशाद है: أَعِدُّوا لَهُمْ مَا اسْتَطَعْتُمْ مِنْ قُوَّةٍ وَمِنْ رِبَاطِ الْخَيْلِ 'और उनके मुकाबले के लिए अपनी शक्ति भर ताकत और घोड़ों को तैयार रखो' (अनफाल 8/60)। चारित्रिक दृष्टिकोण से भी मुसलमानों की स्थिति विनाशकारी और गंभीर भ्रम में डूबी हुई है। इसीलिए एक गैर-सलाफी प्रसिद्ध मुस्लिम दाई (काज़ी हसन हुजैमी) का कथन मुझे चकित करता है, हालांकि उनके अनुयायी उनके कथन के अनुसार नहीं चलते। उन्होंने कहा है: أَقِيْمُوْا دَوْلَةَ الْإِسْلاَمِ فِيْ قُلُوْبِكُمْ تُقَمْ لَكُمْ فِيْ أَرْضِكُمْ 'तुम अपने दिलों में इस्लामी खिलाफत स्थापित करो, तभी तुम्हारी धरती पर इस्लामी खिलाफत स्थापित होगी।' अधिकांश दाई तब भूल करते हैं जब वे हमारे इस मूल सिद्धांत की उपेक्षा करते हैं। वैसी ही भूल वे तब कर बैठते हैं जब वे कह बैठते हैं कि إن الوقت ليس وقت التصفية والتربية ، وإنما وقت التكتل والتجمُّع 'अब तसफियाह और तर्बियत का समय नहीं है, बल्कि अब तो एकजुट और संगठित होने का समय है।' जबकि ऐसी स्थिति में एकजुट होना कैसे संभव हो सकता है जब बुनियादी और शाखागत सिद्धांतों में विभाजन विद्यमान हो?... यह दुर्बलता आज मुसलमानों के बीच व्यापक रूप से बढ़ रही है। और इससे मुक्ति पाने का एकमात्र उपाय वही है जो मैंने पहले कहा—शुद्ध इस्लाम की ओर उचित रूप से लौटना और समाज में तसफियाह और तर्बियत की नीति को कार्यान्वित करना। आशा है कि इतना ही पर्याप्त होगा। समस्त प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जो सारे संसार का पालनहार है। (मुहम्मद बिन इब्राहिम आश-शायबानी, 'हयातुल अल्बानी व आसारुहू व सनाउल उलामा अलैहे' 377-391)।<ref>{{cite journal |last1=नाजीब |first1=अहमद अब्दुल्लाह |title=শায়খ আলবানীর তাৎপর্যপূর্ণ কিছু মন্তব্য (২য় কিস্তি) |journal=মাসিক আত-তাহরীক । ধর্ম, সমাজ ও সাহিত্য বিষয়ক গবেষণা পত্রিকা |url=https://at-tahreek.com/article_details/6558 |access-date=11 November 2022 |language=bn}}</ref>}}
[[अब्दुल्लाह जहांगीर]] अपनी पुस्तक 'हदीस के नाम पर जालसाजी' में कहते हैं:
{{quote|हदीस के नाम पर झूठ बोलने का एक प्रकार यह है कि अनुवाद के दौरान शाब्दिक अनुवाद न करके अनुवाद के साथ अपनी इच्छा से कुछ जोड़ दिया जाए या कुछ हिस्सा छोड़ दिया जाए। या फिर रसूलुल्लाह (ﷺ) ने जो कहा है, उसकी व्याख्या को ही हदीस का हिस्सा बना दिया जाए। हमारे समाज में हम लगभग सभी इस अपराध में लिप्त हैं। आत्मशुद्धि, पीर-मुरीदी, दावत-तबलीग, राजनीति और मतभेद से जुड़े विभिन्न मसाइल के लिए हम प्रत्येक दल और मत के लोग कुरआन और हदीस से प्रमाण देते हैं। इस प्रकार प्रमाण देना अत्यंत स्वाभाविक कार्य और ईमान का दावा है। हालाँकि आमतौर पर हम अपनी इस व्याख्या को ही रसूलुल्लाह (ﷺ) के नाम पर प्रचारित करते हैं। जैसे कि रसूलुल्लाह (ﷺ) ने राज्य का संचालन किया, लेकिन प्रचलित अर्थ में 'दलीय राजनीति' नहीं की, यानी वोटों के माध्यम से सत्ता परिवर्तन जैसी कोई बात नहीं की। वर्तमान समय में कई आलिम लोकतांत्रिक 'राजनीति' कर रहे हैं। न्याय का आदेश देने, बुराई से रोकने या इकामत-ए-दीन (धर्म की स्थापना) की एक नई पद्धति के रूप में इसे स्वीकार किया जाता है। हालाँकि यदि हम यह कहें कि 'रसूलुल्लाह (ﷺ) ने राजनीति की है', तो श्रोता या पाठक 'राजनीति' का प्रचलित अर्थ, यानी वोटों के माध्यम से सत्ता पर कब्जा करने की बात ही समझेंगे। और ऐसी राजनीति उन्होंने नहीं की थी। परिणाम स्वरूप इस प्रकार उनके नाम पर झूठ बोला जाएगा। इसलिए हमें यह अलग-अलग स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने क्या किया और क्या कहा था, और हम उसकी क्या व्याख्या कर रहे हैं। रसूलुल्लाह ﷺ ने आजीवन धर्म का प्रचार किया। धर्म के लिए उन्होंने और उनके कई साथियों ने हमेशा के लिए अपना घर-बार छोड़कर 'हिजरत' की थी। लेकिन उन्होंने कभी भी दावत के लिए समय निर्धारित करके 2-1 महीने के लिए सफर पर 'बाहर' नहीं गए। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कई लोग हिजरत तो नहीं करते, लेकिन कम से कम कुछ समय के लिए विभिन्न स्थानों पर जाकर दावत का काम कर रहे हैं। लेकिन हम इस कार्य के लिए यदि यह कहें कि रसूलुल्लाह ﷺ दावत के लिए 'बाहर' जाते थे, तो पाठक या श्रोता 'निर्धारित समय के लिए बाहर जाने' का अर्थ समझेंगे। जबकि उन्होंने कभी भी इस प्रकार दावत का काम नहीं किया था। इससे उनके नाम पर झूठ बोला जाएगा।<ref>http://www.hadithbd.com/books/link/?id=4644</ref>}}
[[अब्दुल्लाह जहांगीर]] अपनी पुस्तक ''इस्लाम के नाम पर आतंकवाद'' में [[सूफी-सलाफी संबंध|सूफी-सलाफी (वहाबी) संबंध]], उनकी राजनीतिक और दार्शनिक दृष्टि तथा पश्चिमी दुनिया में इसके दुरुपयोग और गलत व्याख्या के बारे में कहते हैं:
{{quote|'वहाबी विचारधारा' को आतंकवाद के कारण के रूप में कई शोधकर्ताओं ने उल्लेख किया है। सऊदी अरब के धार्मिक नेता मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब (1703-1792 ई.) द्वारा प्रचारित विचारधारा को 'वहाबी' विचारधारा कहा जाता है। उन्होंने तत्कालीन अरब में प्रचलित कब्र पूजा, कब्रों को सजदा करना, कब्रों या पेड़ों पर धागा बांधना, मन्नतें मानना और अन्य विभिन्न प्रकार के अंधविश्वासों, शिर्क, बिदअत आदि का विरोध किया। उनका यह वक्तव्य केवल विरोध तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसके अलावा वे अपने विरोधियों को मुशरिक करार देते थे। 1745 ईस्वी में वर्तमान सऊदी अरब की राजधानी रियाद के पास स्थित 'दिरइयाह' नामक एक छोटे से ग्राम-राज्य के शासक अमीर मुहम्मद इब्न सऊद (मृत्यु 1765) उनके साथ मिल गए। उनके अनुयायियों ने उनके विरोधियों को मुशरिक मानना शुरू कर दिया और उनके खिलाफ सैन्य अभियान शुरू कर दिए। 1804 तक मक्का-हिजाज़ सहित अरब प्रायद्वीप का अधिकांश भाग 'सऊदी'-'वहाबी' लोगों के अधीन आ गया। तत्कालीन तुर्क खिलाफत ने इस नए राज्य को अपने आधिपत्य और नेतृत्व के लिए अत्यंत हानिकारक माना। क्योंकि एक तरफ मक्का-मदीना सहित इस्लाम का केंद्र उनके हाथों से निकल गया, वहीं दूसरी ओर मूल अरब में स्वतंत्र राज्य का उदय मुस्लिम दुनिया में तुर्कों के एकछत्र नेतृत्व के लिए एक खतरा बन गया। इसी कारण तुर्क खलीफा ने अपने दरबार के आलिमों के माध्यम से वहाबियों को धर्मद्रोही, काफ़िर और इस्लाम के प्रमुख शत्रुओं में से एक के रूप में फतवा जारी किया। मुस्लिम दुनिया भर में इनके खिलाफ जोरदार प्रचार अभियान चलाया गया, ताकि कोई भी इस नए राज्य को इस्लामी खिलाफत का उत्तराधिकारी न समझे। साथ ही उन्होंने तुर्क नियंत्रण के तहत मिस्र के शासक मुहम्मद अली को वहाबियों के खिलाफ युद्ध संचालित करने का आदेश दिया। मिस्र की सेना के अभियानों के सामने 1818 में सऊदी राज्य का पतन हो गया। इसके बाद सऊदी राजवंश के वंशजों ने बार-बार अपने राज्य को पुनः प्राप्त करने का प्रयास किया। अंततः इस वंश के 'अब्दुल अजीज इब्न अब्दुर रहमान अल-सऊद (1879-1953) ने 1901 से 1924 ईस्वी तक लंबे युद्धों के माध्यम से वर्तमान 'सऊदी अरब' की स्थापना की। अठारहवीं शताब्दी से लेकर मुस्लिम दुनिया में जहाँ भी कोई सुधारवादी दावत या आह्वान प्रचारित किया गया, सऊदी 'वहाबियों' ने उसे मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब के आदर्शों से प्रभावित होने का दावा किया। दूसरी ओर, तुर्क प्रचार के कारण 'वहाबी' शब्द मुस्लिम समाज में एक अत्यंत घृणित शब्द बन गया। उन्हें अन्य भ्रमित समुदायों की तुलना में अधिक घृणा की दृष्टि से देखा जाने लगा। परिणामस्वरूप ब्रिटिश औपনিবেশिक सरकार ब्रिटिश विरोधी आलिमों को वहाबी के रूप में प्रचारित करती थी, ताकि आम मुसलमानों के बीच उनकी स्वीकार्यता न रहे। इसके अलावा मुस्लिम समाज के विभिन्न धार्मिक समुदाय एक-दूसरे की निंदा करने के लिए 'वहाबी' शब्द का व्यापक उपयोग करते हैं। मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब के समकालीन भारतीय मुस्लिम सुधारक शाह वलीullah देहलवी (1703-1762 ई.) थे। अपने मत के प्रचार की शुरुआत में 1731 ईस्वी में वे मक्का गए और तीन वर्ष तक वहीं रहे। इसके बाद देश लौटकर उन्होंने भारत में इस्लामी शिक्षा के प्रसार में विशेष योगदान दिया। उन्होंने भी कब्र पूजा, पीर पूजा, कब्र पर मन्नतें मांगने, कब्रवासियों या जीवित पीरों या औलियाओं से आपदाओं से मुक्ति की सहायता मांगने और अन्य शिर्क, बिदअत, अंधविश्वास, मजहबी अतिवाद आदि की कड़ी आलोचना और विरोध किया। इसी कारण कुछ लोगों ने उन्हें 'वहाबी' के रूप में चिन्हित करने का प्रयास किया है। हालाँकि भारत के सबसे पहले और प्रसिद्ध 'वहाबी' नेता शाह वलीullah के पुत्र शाह अब्दुल अजीज (1346-1823 ई.) के प्रमुख छात्रों में से एक सैयद अहमद बरेलवी (1786-1831 ई.) थे। उन्होंने पूरे भारत में मजारों, दरगाहों, व्यक्ति पूजा, मृत मनुष्यों के नाम पर मन्नतें, शिन्नी आदि विभिन्न शिर्क, बिदअत और अंधविश्वासों के खिलाफ प्रचार किया। इसके अलावा उन्होंने ब्रिटिश आधिपत्य के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। 1821 ईस्वी में वे हज के लिए गए। लगभग तीन वर्ष तक वहाँ रहने के बाद वे भारत लौट आए। 1826 ईस्वी में उन्होंने ब्रिटिश भारत से 'हिजरत' करके उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत की यात्रा की और वहाँ 'इस्लामी राज्य' की स्थापना की घोषणा की तथा स्वयं उस राज्य के प्रमुख बन गए। इसके बाद उनके नेतृत्व में भारत के विभिन्न क्षेत्रों के मुसलमान वहाँ एकत्र हुए और अंग्रेजों तथा सिखों के खिलाफ जिहाद की घोषणा की। कुछ युद्धों के बाद 1831 में बालाकोट के युद्ध में उनकी सेना पराजित हो गई और वे शहीद हो गए। इसके बाद लगभग 30 वर्षों तक सैयद अहमद बरेलवी के अनुयायियों ने अंग्रेजों के खिलाफ विभिन्न प्रकार के छिटपुट जिहाद और प्रतिरोध जारी रखे। 1803-4 में 'वहाबी' लोगों ने मक्का-मदीना पर कब्जा कर लिया और वहाँ के प्राचीन मजार-केंद्रित गुंबदों को ध्वस्त कर दिया। इससे आम मुसलमानों में व्यापक असंतोष पैदा हुआ। शाह वलीullah मुहाद्दिस देहलवी के अनुयायी भी 'वहाबियों' की तरह ही शिर्क, कुफ्र, बिदअत, अंधविश्वास आदि का विरोध करते थे। इस तरह उनके विचारों में 'वहाबियों' के विचारों से बाहरी समानता थी। 1823 ईस्वी में सैयद अहमद बरेलवी हज के अवसर पर मक्का गए। अंग्रेजी शासकों ने बड़ी चालाकी से यह प्रचारित किया कि 'जो लोग स्वतंत्रता के नाम पर आपको आपके धर्म की बातें सुना रहे हैं, वास्तव में वे इस्लाम के शत्रु और पैगंबर तथा सहाबा का अपमान करने वाले लोग हैं, इनका नाम वहाबी है, और इन्होंने ही आपके प्यारे रसूल (सल्ल.) के वंशजों की कब्रों को नष्ट करने का दुस्साहस किया है... और सैयद अहमद को उनका एजेंट नियुक्त किया गया है और ये सभी वहाबी हैं इसलिए ये लोग भी आपके आदरणीय पीर-बुजुर्गों और पूर्वजों की कब्रों को तोड़ना चाहते हैं...' इस तरह ब्रिटिश सरकार ने यह समझाने का प्रयास किया कि वास्तविक इस्लाम के खिलाफ उनकी कोई शत्रुता नहीं है। वे वास्तविक इस्लाम और मुसलमानों से बहुत प्यार करते हैं। वे केवल भटके हुए वहाबी संप्रदाय के लोगों का दमन कर रहे हैं और उन्हें दंडित कर रहे हैं। इसलिए इसमें आम अच्छे मुसलमानों के लिए परेशान होने या दुख महसूस करने का कोई कारण नहीं है। सैयद अहमद बरेलवी के शिष्यों से भारत में विभिन्न सुधारवादी धाराओं का जन्म हुआ। उनके शिष्यों में से कई लोगों ने निर्धारित मजहब के अनुसरण से इनकार कर दिया और खुद को 'अहले हदीस' के रूप में दावा किया। उनके शिष्य जौनपुर के पीर मौलाना करामत अली ने एक सुधारवादी धारा को जन्म दिया। फुरफुरा के पीर मौलाना अबू बक्र सिद्दीकी भी सैयद अहमद बरेलवी के अनुयायी और उनके प्र-शिष्य थे। देवबंदी आलिमों ने भी उन्हीं के शिष्यों से शिक्षा प्राप्त की है। इन सभी को उनके विरोधियों और औपনিবেশिक सरकार ने 'वहाबी', 'रंगीन वहाबी' या 'बहुरुपिया वहाबी' की संज्ञा दी है। सैयद अहमद बरेलवी के प्रमुख शिष्यों और समकालीन सुधारक मीर निसार अली उर्फ तीतूमिर (1782-1831) और समकालीन अन्य सुधारक हाजी शरीयतुल्लाह (1781-1840) को भी वहाबी कहा गया है और उनके आंदोलन तथा प्रतिरोध को वहाबी आंदोलन कहा गया है। 'वहाबी' शब्द के प्रयोग को समझने के लिए मैं एक उदाहरण प्रस्तुत करता हूँ। मीर निसार अली उर्फ तीतूमिर का जन्म 1782 ईस्वी में बंगाल के 24 परगना जिले में हुआ था। 1823 में हज के दौरान मक्का में सैयद अहमद बरेलवी से उनकी मुलाकात हुई। वे उनके मुरीद बन गए। देश लौटने पर उन्होंने अपने क्षेत्र के लोगों के बीच शुद्ध इस्लामी शिक्षा का प्रचार किया। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ बात की, लेकिन कभी भी हिंदू धर्म, धर्मावलंबियों या हिंदू जमींदारों के खिलाफ कुछ नहीं कहा। लेकिन उनकी शिक्षाओं से आम मुसलमानों के बीच धर्म का पालन बढ़ जाने के कारण क्षेत्र के हिंदू जमींदार क्रोधित हो गए। उन्होंने आम मुस्लिम प्रजा को बताया कि वे वास्तविक इस्लाम से बहुत प्यार करते हैं, लेकिन वे वहाबी विचारधारा का दमन करना चाहते हैं। युगों-युगों से मुसलमानों ने हिंदुओं की तरह नाम रखे हैं, दाढ़ी काटी है, मूंछें रखी हैं, मस्जिदें बनाने की जल्दी नहीं की है और गोहत्या नहीं की है। तीतूमिर वहाबी विचारधारा के अनुसार दाढ़ी रखने, मूंछें छांटने, मुसलमानी नाम रखने, मुसलमानों के गाँवों में मस्जिदें बनाने और कुर्बानी के नाम पर गोहत्या करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इससे हिंदू-मुस्लिम सौहार्द नष्ट हो रहा है। इसलिए वहाबी विचारधारा का दमन करना अत्यंत आवश्यक है। इनके दमन के कारण "अच्छे" मुसलमानों के गुस्से में होने या कष्ट पाने का कोई कारण नहीं है। इस कारण तारागुनिया के जमींदार रामनारायण बाबू, पूँड़ा के जमींदार कृष्णदेव राय, नगरपुर के जमींदार गौड़प्रसाद चौधरी और अन्य प्रसिद्ध जमींदारों ने मिलकर 5 विषयों पर नोटिस जारी किया: "(1) जो लोग तीतूमिर की शिष्यता ग्रहण करके वहाबी बनेंगे, दाढ़ी रखेंगे, मूंछें छाँटेंगे, उनमें से प्रत्येक को प्रति दाढ़ी अढ़ाई रुपये और प्रति मूंछ पांच सिक्का लगान देना होगा। (2) मस्जिद तैयार करने पर प्रत्येक कच्ची मस्जिद के लिए पाँच सौ रुपये और प्रत्येक पक्की मस्जिद के लिए एक हजार रुपये जमींदार सरकार को नजराना देना होगा। (3) पिता-पितामह या रिश्तेदार-संबंधी बच्चे का जो नाम रखेंगे, उस नाम को बदलकर वहाबी मत के अनुसार अरबी नाम रखने पर प्रत्येक नाम के लिए खारिजানা फीस पचास रुपये जमींदार सरकार के पास जमा करनी होगी। (4) गोहत्या करने पर हत्यारे का दाहिना हाथ काट लिया जाएगा, ताकि वह व्यक्ति फिर कभी गोहत्या न कर सके। (5) जो व्यक्ति वहाबी तीतूमिर को अपने घर में आश्रय देगा, उसे उसकी ज़मीन से बेदखल कर दिया जाएगा।" वास्तव में, तुर्क खिलाफत और ब्रिटिश सरकार के व्यापक प्रचार के कारण "वास्तविक इस्लाम" और "वहाबी इस्लाम" का यह विभाजन पश्चिमी शोधकर्ताओं के लिए सार्वभौमिक रूप ले चुका है। दुनिया के किसी भी कोने में सुधार आंदोलन, स्वतंत्रता आंदोलन, इस्लामी समाज और राज्य व्यवस्था की स्थापना का प्रयास, उपनिवेश विरोधी, साम्राज्यवाद विरोधी या पश्चिमी विरोधी आंदोलन में धार्मिक मुसलमान, आलिम, धार्मिक व्यक्तित्व या पीर-मशाइख की संलिप्तता होने पर उसे "वहाबी" के रूप में चिन्हित करने का प्रयास किया जाता है। वहाबी इस्लाम और वास्तविक इस्लाम के इस विभाजन के मामले में कई पश्चिमी शोधकर्ता वास्तविक इस्लाम को "सूफी इस्लाम" के रूप में चिन्हित करते हैं। उनके अनुसार, सूफी इस्लाम सांप्रदायिकता से मुक्त, गैर-राजनीतिक और उदार है। प्रमाण के रूप में वे कहते हैं कि एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका के मुस्लिम और गैर-मुस्लिम समाजों के अनगिनत सूफी दरबारों में स्त्री-पुरुष का भेद किए बिना सभी धर्मों और वर्णों के लोग एकत्र हो रहे हैं, ज़िक्र, वज़ीफा, समा-कव्वाली और अन्य कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं और तबर्रुक तथा दुआ प्राप्त कर रहे हैं। इन सभी दरबारों में आत्मशुद्धि और आध्यात्मिकता की शिक्षा दी जाती है, राजनीति और राजकीय विषयों पर चर्चा नहीं की जाती है। हमारे देश और दुनिया के अन्य देशों की ओर देखने पर हम सूफी इस्लाम के दो चरण देख सकते हैं। हम देखते हैं कि कई मुसलमान तसव्वुफ और सूफीवाद के नाम पर पीर-मशाइख को अल्लाह का अवतार या विशेष "दिव्य" संबंध या शक्ति का स्वामी मानते हैं, उन्हें सजदा करते हैं, उनकी कब्र-मजारों या समाधियों को सजदा करते हैं, सलात, सियाम आदि शरिया के अहकाम (आदेशों) का पालन करने को महत्वहीन मानते हैं और गाना-बजाना तथा नृत्य-संगीत को सूफी इस्लाम का महत्वपूर्ण पहलू मानते हैं। ये लोग खुद को वास्तविक सूफी और वास्तविक सुन्नी होने का दावा करते हैं। जो लोग पीर को सजदा करने, कब्र को सजदा करने, गाना-बजाना, धूम्रपान आदि पर आपत्ति जताते हैं या शरिया के पालन की अनिवार्यता की बात करते हैं, उन्हें इस चरण के सूफी "वहाबी" और "औलिया के दुश्मन" के रूप में कड़ी निंदा करते हैं। कई लोग तंबाकू, गांजा आदि के सेवन या धूम्रपान को सुन्नी इस्लाम और सूफी इस्लाम की मौलिक पहचान मानते हैं और धूम्रपान के विरोधियों को वहाबी और औलिया का दुश्मन बताते हैं। अन्य कई मुसलमान पीर को सजदा करने, कब्र को सजदा करने, गाना-बजाना आदि कर्मों की कड़ी निंदा करते हैं, शरिया के पालन को सूफी इस्लाम का मुख्य विषय मानते हैं और शरिया के पालन के साथ-साथ पीर-मशाइख से तरीकत (आध्यात्मिक मार्ग) की शिक्षा प्राप्त करते हैं और उसका पालन करते हैं। पहले चरण के सूफियों और मारफती लोगों के मत के अनुसार ये वहाबी और सूफी इस्लाम के दुश्मन हैं। हालाँकि ये खुद को वास्तविक सूफी और सुन्नी होने का दावा करते हैं और पहले चरण के लोगों को भ्रमित मानते हैं। इस चरण के तसव्वुफ-पंथी लोगों के बीच विभिन्न विषयों पर मतभेद हैं। उर्स, ईसाले सवाब, मीलादुन्नबी, सीरतुन्नबी, ज़िक्र की पद्धति आदि विभिन्न विषयों पर इस चरण के सूफियों के बीच मतभेद हैं। इन सभी मतभेदों के आधार पर इस चरण के सूफियों का एक दल दूसरे दल को वहाबी, पैगंबर का दुश्मन या औलिया का दुश्मन बताकर निंदा करता है और खुद को वास्तविक सुन्नी और वास्तविक सूफी होने का दावा करता है, हालाँकि सभी पीर-मुरीदी और तसव्वुफ में विश्वास करते हैं और विभिन्न तौर-तरीकों का पालन करते हैं। पश्चिम के ईसाई स्वाभाविक रूप से पहले चरण के सूफी इस्लाम और उसके अनुयायियों से प्रेम करते हैं। क्योंकि उनकी "मानसिकता" से इनकी "मानसिकता" बहुत मिलती-जुलती है। यूरोप-अमेरिका और अन्य विभिन्न देशों में ऐसे सूफियों की मजलिस-दरबार और खानकाह-मजारों में वे आते हैं, गाना-बजाना और आध्यात्मिक चर्चाओं में भाग लेते हैं। ये सूफी भी उन्हें अत्यंत प्रेम के साथ स्वीकार करते हैं। स्वाभाविक रूप से पश्चिम के लोग दुनिया के सभी मुस्लिम देशों में ऐसे सूफी इस्लाम के प्रसार की कामना करते हैं। ऐसे सूफी इस्लाम का प्रसार ही सभी धर्मों और धर्महीन लोगों के बीच अनगिनत शांति और सह-अस्तित्व सुनिश्चित कर सकता है, ऐसा वे मानते हैं। "सभ्यता के संघर्ष" के नाम पर इस्लामी देशों में अपना प्रभुत्व जमाने के इच्छुक साम्राज्यवादी पहले तो धड़ल्ले से इस्लाम के खिलाफ खड़े हो जाते हैं। लेकिन वे देखते हैं कि इससे उनके खिलाफ प्रतिरोध बढ़ रहा है। तब वे मुसलमानों को विभिन्न तरीकों से विभाजित करके किसी को अपने पक्ष में और किसी को विपक्ष में करना चाहते हैं। इसके लिए सबसे पहले वे लिबरल (liberal) यानी उदार और फंडामेंटललिस्ट (fundamentalist) यानी कट्टरपंथी या रूढ़िवादी के रूप में विभाजन करने की कोशिश करते हैं। इस प्रकार का विभाजन मुस्लिम देशों में ज्यादा बाजार नहीं पा रहा है। इसलिए पिछले कुछ वर्षों से वे एक नया विभाजन बाजार में उतारने की कोशिश कर रहे हैं, और वह है सूफी इस्लाम बनाम वहाबी इस्लाम। मुस्लिम देशों में सूफियों के प्रभाव और "वहाबी" शब्द के प्रति मुसलमानों की घृणा की बात वे अच्छी तरह जानते हैं। जिस तरह ब्रिटिश सरकार और हिंदू जमींदारों ने सैयद अहमद, तीतूमिर, शरीयतुल्लाह और अन्य सभी धार्मिक सुधार और साम्राज्यवाद विरोधी आंदोलनों को "वहाबी" के रूप में चित्रित करके आम मुसलमानों के बीच घृणित बनाने के प्रयास में काफी सफलता हासिल की थी, उसी तरह वे अपने हितों के प्रतिकूल सभी इस्लामी गतिविधियों और व्यक्तित्वों को "वहाबी" के रूप में चित्रित करने का प्रयास कर रहे हैं। कम से कम सुन्नी-वहाबी या सूफी-वहाबी विवाद और संघर्ष को भड़काकर इस्लामी दावत, शिक्षा के प्रसार, अश्लील और मादक पदार्थों के विरोध या राज्य व्यवस्था में आलिमों और इस्लामपंथियों के उभार को निश्चित रूप से बाधित और कमजोर किया जा सकता है। वास्तव में वे सूफी इस्लाम से पहले चरण के सूफियों को समझ रहे हैं। क्योंकि दूसरे चरण के सूफियों के बीच शाह वलीullah, सैयद अहमद बरेलवी, तीतूमिर, हाजी शरीयतुल्लाह जैसे व्यक्तित्वों का उदय हो सकता है, जिनकी राजनीतिक शक्ति उनके हितों की रक्षा नहीं करती है। वे मानते हैं कि पहले चरण के सूफियों का उभार ही मुस्लिम मानसिकता से आतंकवाद की जड़ को उखाड़ फेंकने में सक्षम है और इस चरण का सूफी इस्लाम ही दुनिया के लोगों को आतंकवाद, कट्टरवाद और धार्मिक संघर्ष से बचाकर सभी धर्मों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को सुनिश्चित कर सकता है। इतना ही नहीं, इनकी स्थापना दुनिया के दो प्रमुख धर्मों—ईसाई धर्म और इस्लाम—को बेहद करीब ला सकती है। वास्तव में पहले चरण के सूफी और पश्चिमी नेतृत्व दूसरे चरण के सूफियों को "वास्तविक वहाबी" या "बहुरुपिया वहाबी" मानते हैं। वे यह भी जानते हैं कि इनके हाथों में उनके हित सुरक्षित नहीं हैं। हालाँकि मुस्लिम देशों में दूसरे चरण के सूफियों के प्रभाव से भी वे अवगत हैं। इसलिए वे "सूफी इस्लाम" के नाम पर पहले चरण के सूफियों के नेतृत्व में और उनके प्रभाव क्षेत्र के भीतर दोनों चरणों के सूफियों को एकजुट करके उन्हें "वहाबी" लोगों के खिलाफ मुखर होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वे समझा रहे हैं कि जो लोग इस्लामी समाज, राज्य, न्याय, अर्थव्यवस्था आदि की स्थापना की मांग कर रहे हैं, वे मूल रूप से औलिया की मजारों को तोड़ने वाले सऊदी वहाबियों के दलाल और उनके विचारों के अनुयायी हैं। यदि ये लोग सत्ता में आ गए तो ये भी पीर-मशाइख और कब्र-मजारों को नष्ट कर देंगे। इसलिए इनका मुकाबला करने के लिए एकजुट हो जाइए। यह निश्चित है कि आम मुसलमान, आलिम और पीर-मशाइख उनके ऐसे प्रचार से प्रभावित होंगे। इसके अलावा इस बहाने वहाबी-सुन्नी विवाद और संघर्ष को बढ़ावा देकर मुसलमानों को साम्राज्यवाद और आक्रमण के खिलाफ या इस्लामी मूल्यों के प्रचार के पक्ष में एकजुट होने से रोकना संभव होगा, ऐसा वे मानते हैं। वास्तव में जिस तरह "इस्लाम" नाम का व्यापक दुरुपयोग किया गया है और इस्लाम के नाम पर इस्लाम विरोधी कर्म किए गए हैं और किए जा रहे हैं, उसी तरह "सूफी" शब्द का भी व्यापक दुरुपयोग हुआ है। तसव्वुफ, सूफी, पीर, दरवेश और औलिया के नाम पर गैर-इस्लामी गतिविधियाँ भी बहुत हुई हैं। हालाँकि सर्वमान्य सूफी-दरवेशों के जीवन और कर्म की समीक्षा करने पर हम पाते हैं कि वे सभी समाज, राज्य और राजनीति के प्रति जागरूक थे और समाज परिवर्तन में उनकी भूमिका अपरिहार्य थी। लगभग सभी सूफी "तरीका" के मूल स्रोत के रूप में अबू बकर सिद्दीक (रजि.) और अली (रजि.) का उल्लेख किया गया है। जकात न देने वालों, धर्मत्यागियों, धार्मिक अनाचारों में लिप्त लोगों के खिलाफ युद्धों में वे मुस्लिम उम्मत के अग्रপথिक थे। हसन बसरी, इब्राहिम अधहम, जुनैद बगदादी, अब्दुल कादिर जिलानी, अबू हामिद गजाली, मुजद्दिद-ए अल्फिसानी, शाह वलीullah देहलवी, सैयद अहमद बरेलवी, इमदादुल्लाह मुहाजिर मक्की, करमत अली जौनपुरी, अबू बक्र सिद्दीकी फुरफुरावी (रहिमुहमুল্লাহ) और अन्य सभी सुप्रसिद्ध सूफी-साधकों ने आत्मशुद्धि और आध्यात्मिकता के साथ-साथ समाज, राज्य और राजनीति पर बात की है, शासकों के अन्याय का विरोध किया है, जेल यात्रा की है या शहादत प्राप्त की है। आधुनिक राजनीतिक गतिविधियों के साथ उनकी कार्यपद्धति का अंतर यह है कि वे सत्ता में जाने के बजाय शासकों को सुधारने का प्रयास करते थे। उन्होंने स्वयं राजनीतिक शक्ति प्राप्त करने का प्रयास नहीं किया, बल्कि शासकों को नसीहत दी, अन्याय का विरोध किया, न्याय के पक्ष को प्रोत्साहित किया, सहयोग किया, जनता को जागरूक किया, साम्राज्यवाद, औपনিবেশिक शासन और आधिपत्यवाद के खिलाफ राष्ट्रीय प्रतिरोध में शामिल हुए और इन सभी गतिविधियों में जिन व्यक्तियों या दलों को अपेक्षाकृत बेहतर माना, उन्हें समर्थन दिया या प्रोत्साहित किया। तथाकथित "आतंकवादी" गतिविधियों या उग्रवाद से उनकी कार्यपद्धति का अंतर यह है कि वे अन्याय का विरोध करते हैं लेकिन दंड देने या बल प्रयोग करने का प्रयास नहीं करते हैं। उन्होंने अन्याय का विरोध किया है, नसीहत दी है, शासकों और अन्य सभी को अन्य का दमन करने, विरोध करने और नियंत्रित करने के लिए प्रेरित किया है, लेकिन स्वयं अन्याय के दमन के नाम पर शक्ति का प्रयोग नहीं किया है, कानून की अवहेलना नहीं की है, कानून अपने हाथ में नहीं लिया है और कानून तोड़ने का कड़ा विरोध किया है। इस प्रकार हम देख रहे हैं कि वास्तविक सूफी कभी भी समाज-विमुख या राजनीति-विमुख नहीं थे। "सूफी इस्लाम" को समाज, राज्य और जगत-विमुख के रूप में चिन्हित करने और सभी सुधार आंदोलनों को "वहाबी" के रूप में चित्रित करने का कोई आधार नहीं है। तथाकथित 'इस्लामी आतंकवाद' या उग्रवाद के नेतृत्व में ओसामा बिन लादेन जैसे सऊदी मूल के व्यक्तित्व होने की बात सुनी जाती है। सऊदी अरब के विभिन्न व्यक्ति और संस्थाएँ इन्हें वित्तपोषित करने का दावा करते हैं। दुनिया के विभिन्न देशों में, विशेष रूप से उपमहाद्वीप में अहले हदीस और देवबंदी पद्धति के कौमी मदरसों में शिक्षित दो-चार व्यक्तियों के इसके साथ जुड़े होने की बात सुनी जाती है। इसके अलावा इनमें कब्र-मजार आदि का विरोध देखा जाता है। इन सबके ऊपर, वे अपने विचारों को स्थापित करने के लिए मौखिक प्रचार के अलावा हथियार भी उठा रहे हैं। इसलिए कई शोधकर्ताओं का मानना है कि वहाबी विचारधारा का प्रसार ही वर्तमान आतंकवाद के उभार का कारण है। हालाँकि यह ध्यान देने योग्य है कि ओसामा बिन लादेन के आंदोलन की शुरुआत सऊदी-वहाबी राज्य के विरोध के माध्यम से हुई थी। उनके अनुयायी वहाँ के राजतंत्र, अमेरिकी सैनिकों, अनाचार आदि का विरोध करते हैं और सऊदी राज्य तथा नागरिकों के खिलाफ विनाशकारी गतिविधियाँ जारी रखे हुए हैं। इसके अलावा मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब के वंशजों सहित सभी सऊदी आलिम बिन लादेन के आंदोलन और गतिविधियों के खिलाफ अत्यंत मुखर हैं। इन सबके ऊपर, विभिन्न देशों के सुधार या प्रतिरोध आंदोलनों को 'वहाबी' की संज्ञा देने का कोई आधार नहीं है। वास्तव में मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब और उनके आदर्श तुर्क खिलाफत के प्रचार और ब्रिटिश सरकार के अवसरवाद के कारण आवश्यकता से अधिक महत्व और प्रतिष्ठा प्राप्त कर चुके हैं। वहाबी विचारधारा और आंदोलन वास्तव में पूरी तरह से एक क्षेत्रीय विषय था। अन्य मुस्लिम देशों के सुधार-प्रतिरोध और धर्म-केंद्रित सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों की तरह ही अच्छे-बुरे का मिश्रण एक विषय था। अन्य देशों में मुसलमानों ने अपने परिवेश और आवश्यकता के अनुसार इसी प्रकार के आंदोलनों को विकसित किया है। चूंकि वहाबी और अन्य देशों के मुसलमान दोनों ही एक ही स्रोत यानी कुरआन, हदीस, इस्लामी फिक़्ह और इस्लामी इतिहास से अपने विचार एकत्र करते हैं, इसलिए उनके विचारों और कर्मों में समानता होना स्वाभाविक है। इसके लिए सारा श्रेय मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब को देने का कोई कारण नहीं है। अफगानिस्तान और इराक में बिन लादेन की विचारधारा का प्रसार हुआ है। और ये दोनों देश घोर वहाबी विरोधी हैं। अफगानिस्तान की बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी हनाफी मजहब की कट्टर अनुयायी, पीर-मशाइख की भक्त और वहाबियों की विरोधी है। इराक में सद्दाम हुसैन के लंबे शासनकाल में वहाबी या किसी भी अन्य सुधारवादी आलिम और विचारधारा को कड़ाई से समाप्त कर दिया गया है। केवल सूफियों के खिलाफ कोई कठोरता नहीं बरती गई। लेकिन इसके बावजूद इन दोनों देशों में आतंकवाद के प्रसार से यह समझा जा सकता है कि आतंकवाद का कारण कहीं और निहित है। हमने पहले ही देखा है कि आतंकवादियों की जाति, धर्म, गोत्र आदि को धड़ल्ले से "आतंकवाद" के कारण या संचालक शक्ति के रूप में चिन्हित करने की प्रवृत्ति सही नहीं है। इससे आतंकवाद को कुचलने का मार्ग बंद हो जाता है। क्योंकि किसी जाति, धर्म या गोत्र के सभी लोगों को धड़ल्ले से एक ही लाठी से नहीं हाँका जा सकता है। आतंकवाद की जिम्मेदारी "वहाबी विचारधारा" पर थोपने की बड़ी समस्या यह है कि इससे समस्या के समाधान का मार्ग खो जाएगा। क्योंकि सऊदी वहाबियों के साथ आतंकवाद का संबंध स्थापित करना कठिन है, क्योंकि आतंकवाद तो उन्हीं के खिलाफ संचालित किया जाता है। और किसी अन्य देश का कोई भी व्यक्ति स्वयं को वहाबी स्वीकार नहीं करता है, लेकिन लगभग सभी धार्मिक दल विरोधियों द्वारा "वहाबी" कहे जाते हैं। हर कोई यह दावा करता है कि वे सीधे कुरआन, हदीस, फिक़्ह और पूर्ववर्ती इमामों के मत के आधार पर अपने विचार और दल का गठन करते हैं; वे मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब के किसी निजी मत को नहीं मानते हैं। यहाँ तक कि सऊदी अरब के आलिम भी कभी स्वयं को वहाबी स्वीकार नहीं करते हैं। वे मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब को एक सुधारक के रूप में मानते हैं और उनके सभी विचारों को कुरआन, सुन्नत और पूर्ववर्ती इमामों से गृहीत होने का दावा और प्रमाण देते हैं।<ref>http://www.hadithbd.com/books/link/?id=6889</ref>}}
नुरुल इस्लाम अपने प्रश्नोत्तर में 'रमजान और ईद' पुस्तक में कहते हैं:
{{quote|(ईमान को भंग करने वाले कृत्यों में से एक है...) धर्म को राजकीय मामलों से अलग करना। और यह कहना कि इस्लाम में राजनीति नहीं है। ऐसी अवधारणा और टिप्पणी भी पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जीवन आदर्श को झुठलाती है।<ref>http://www.hadithbd.com/books/link/?id=2432</ref>}}
मंजूर इलाही अपनी पुस्तक 'समाज सुधार में सही अकीदे का महत्व' में "समाज सुधार की आवश्यकता और उस संदर्भ में सही इस्लामी [[अकीदा]] की भूमिका और महत्व" के बारे में कहते हैं:<ref>{{cite book |last1=इलाही |first1=मोहम्मद मंजूरे |editor1-last=जकारिया |editor1-first=अबू बकर मुहम्मद |title=সমাজ সংস্কারে সঠিক আকীদার গুরুত্ব, |publisher=Islamic Propagation Office in Rabwah |location=रियाद, सऊदी अरब |pages=19–28 |url=https://d1.islamhouse.com/data/bn/ih_articles/single3/bn_somaj_songoskare_sothik_aqidar_gurutto.pdf |access-date=23 November 2022 |language=bn}}</ref>
{{quote|मनुष्य अपने व्यक्तिगत जीवन की सभी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ही समाज में मिल-जुलकर रहता है। किसी भी समाज के गठन का मुख्य उद्देश्य उस समाज के सभी सदस्यों का सर्वांगीण कल्याण और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व सुनिश्चित करना है। लेकिन व्यक्तिगत जीवन की अशिक्षा, कुशिक्षा और स्वार्थपरता सामाजिक जीवन पर एक बड़ा नकारात्मक प्रभाव डालती है और समाज को भ्रष्टाचार, भेदभाव, विभाजन, संघर्ष आदि व्याधियों से कलंकित और विषैला बना देती है। तभी समाज सुधार की भारी आवश्यकता महसूस होती है, जैसा कि हम अपने वर्तमान सामाजिक परिप्रेक्ष्य में महसूस कर रहे हैं। समाज की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करने पर हम देखते हैं कि समस्याओं से घिरे, भ्रष्ट और दीमक लगे इस समाज के लोगों के बीच सही अकीदे का ज्ञान न के बराबर है। इसका अनिवार्य परिणाम यह है कि अकीदे में अनैतिकता और प्रवृत्तियों की इच्छा के अनुसार जिसकी जैसी इच्छा हो वैसा अकीदा अपनाना, चाहे कुरआन-सुन्नत के आधार पर उसकी प्रामाणिकता हो या न हो। दूसरी ओर मनुष्य का ईमान अत्यंत कमजोर हो गया है, दिल से तकवा (ईश्वर का डर) विदा हो चुका है, परलोक की सजा को वह भूल बैठा है। परिणामस्वरूप समाज में बेचैनी, अस्थिरता, लूट-खसोट की प्रवृत्ति, विभिन्न प्रकार के आतंकवाद और अपसंस्कृति का विस्तार आदि और भी कई समस्याएँ पैदा हो गई हैं। रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सीरत में हम देखते हैं कि उन्होंने तत्कालीन जाहिल समाज को बदलकर उसे उस समय का सर्वश्रेष्ठ समाज बना दिया था। व्यक्ति और समाज जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का जो आंदोलन उन्होंने नबूवत मिलने के बाद से शुरू किया था, उसकी प्रारंभिक प्रक्रिया अकीदे का सुधार थी। इस संबंध में सैयद कुतुब अपनी पुस्तक مقومات التصور الإسلامي (इस्लामी दृष्टिकोण के तत्व) में कहते हैं:
"मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ऐसे समय में भेजे गए थे जब जज़ीरतुल अरब उत्तर में रोमन और दक्षिण में फारसियों के बीच लूटे गए धन की तरह बंटा हुआ था। उन्होंने जज़ीरतुल अरब की उपजाऊ भूमि, समुद्र तट, धन और व्यापार के सभी स्रोतों की ओर अपने हाथ फैला रखे थे। मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ऐसे समय में भेजे गए थे जब मौजूदा सामाजिक और आर्थिक स्थिति बड़े पैमाने पर दासता के युग का प्रतिनिधित्व करती थी। मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ऐसे समय में भेजे गए थे जब शराब, व्यभिचार, जुआ, खेल-तमाशे, बुराई और अशांति फैलाने में मानव चरित्र जाहिलियत की राह पर चल रहा था। इनमें से किसी भी चीज़ से महान पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सुधार कार्य शुरू नहीं किया। जज़ीरतुल अरब की उपजाऊ भूमि से रोमन और फारसियों को भगाने के लिए वह अरबों को राष्ट्रवादी एकता की ओर आमंत्रित करने में सक्षम थे। युद्ध की सारी शक्ति वह उनके खिलाफ लगा सकते थे और राष्ट्रीय शत्रुओं के प्रति वह अरबों को भड़का सकते थे। परिणामस्वरूप वे उनके नेतृत्व के प्रति वफादार हो जाते और अपनी सारी ईर्ष्या-द्वेष भूल जाते...। लेकिन अल्लाह जानता था, उसने अपने पैगंबर को बताया था और निर्देश दिया था कि यह सही रास्ता नहीं है और यह मुख्य कार्य नहीं है। मुख्य कार्य यह है कि मनुष्य अपने सच्चे रब को पहचाने और केवल उसी की दासता स्वीकार करे, और उसके बंदों की दासता से मुक्त हो और अंत में अल्लाह की ओर से जो कुछ भी उनके पास आए, उस सबका पूरी तरह से पालन करे..."
...ध्यान देने योग्य बात है कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने नबूवत के बाद मक्की जीवन के 13 वर्षों में अकीदे से संबंधित ज्ञान के प्रचार को सबसे अधिक महत्व दिया था। केवल पैगंबर साहब ने ही नहीं, बल्कि सभी नबियों और पैगंबरों का पहला काम समाज के सभी स्तरों के लोगों को सही अकीदे की ओर आमंत्रित करना था। अल-कुरआन की भाषा में उनका वह आह्वान था: "हे मेरी जाति, तुम अल्लाह की इबादत करो। उसके सिवा तुम्हारा कोई सच्चा इलाह नहीं है।" [अल-आराफ: 58] इसका कारण केवल एक था—अकीदा शुद्ध न हो तो व्यक्तिगत जीवन शुद्ध नहीं होता, और व्यक्ति शुद्ध न हो तो समाज भी शुद्ध नहीं होता।
...(1) वृहद राष्ट्रीय एकता स्थापित करने में सही अकीदे की भूमिका: सही अकीदे पर सहमत हुए बिना वृहद एकता स्थापित करना जितना संभव नहीं है, उतना ही पूरी दुनिया की मुस्लिम उम्मत के लिए भी एकजुट होना दूर की कौड़ी है। इस संदर्भ में (डॉ.) उमर सुलेमान अल-अश्कर कहते हैं: "जब तक एक ही अकीदा मुसलमानों को एकजुट नहीं करेगा, तब तक मुस्लिम एकता का साकार होना संभव नहीं है।" वास्तव में अकीदे का भ्रम ही समाज में अनैक्यता के बीज बोता है। समाज विभिन्न दलों और उपदलों में विभाजित हो जाता है। यदि यह प्रश्न उठे कि हर कोई अपने-अपने अकीदे और विश्वास को सही मानता है, तो ऐसी स्थिति में किसी विशिष्ट अकीदे को सही मानकर एक होना संभव नहीं होगा। क्योंकि हर दल अपने मत के प्रति आश्वस्त होता है। इस प्रश्न के उत्तर में (डॉ.) उमर सुलेमान अल-अश्कर कहते हैं: "शुद्ध इस्लामी अकीदे के संबंध में कुरआन और सुन्नत में स्पष्ट बयान मौजूद हैं। इस अकीदे के प्रत्येक मौलिक और सूक्ष्म विषय पर प्रमाण प्रस्तुत करना संभव है। और सलाफ-ए-सालेheen सत्य इस्लामी अकीदे पर ही प्रतिष्ठित थे। उन्होंने इस अकीदे को इतनी अच्छी तरह से लिपिबद्ध किया है कि वह फिरकापरस्त और भ्रमित लोगों के अकीदे से पूरी तरह अलग है। इन महान व्यक्तित्वों में अल्लामा तहवी शामिल हैं, जिन्होंने एक अकीदा ग्रंथ लिखा है जो उनके अपने नाम से प्रसिद्ध है। इस ग्रंथ की व्याख्या मुहम्मद इब्न अबिल इज़ अल-हनाफी ने लिखी है। बात यहीं नहीं रुकी, बल्कि सहिह अकीदे पर कई आलिमों ने इससे पहले और बाद में लिखा है। उनमें इमाम अहमद, इब्न तैमिया, शौकानी और सफारिनी आदि प्रमुख हैं।"
(2) भ्रष्टाचार, डकैती, ज़ुल्म-उत्पीड़न मुक्त सुसभ्य समाज के गठन में सही अकीदा एक ऐसी मजबूत नींव तैयार करता है, जिसके आधार पर समाज के सभी कार्य और आपसी लेन-देन संचालित होते हैं। अतः अकीदा यदि विकृत, भ्रमित और झूठ पर आधारित हो, तो सामाजिक जीवन संकटग्रस्त, अस्त-व्यस्त और विनाश के कगार पर पहुँच जाएगा। आज हमारा समाज जिस स्थिति में आ खड़ा हुआ है, उसका कारण मुख्य रूप से यही है। इसलिए समाज को विकृति, तबाही और विनाश से बचाने के लिए हमें सही अकीदे की ओर ही लौटना होगा।
(3) समाज में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व सुनिश्चित करने के मामले में सही अकीदे का महत्व: एक मुस्लिम व्यक्ति के अकीदे का एक अनिवार्य हिस्सा यह है कि वह अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के आदेश के अनुसार जीवन चलाना अनिवार्य मानता है और उनके आदेश की अवज्ञा करना अवैध मानता है। अल्लाह का इरशाद है: "और अल्लाह और उसके रसूल जब कोई फैसला कर दें, तो किसी मोमिन पुरुष या मोमिन स्त्री को अपने मामले में कोई अधिकार नहीं रहता।" [अल-अहजाब: 36]
समाज में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अल्लाह तआला जब मुसलमानों को आपस में भाई कहता है, किसी व्यक्ति की जान और माल पर हमला करने को गंभीर अपराध बताता है, अनुबंधित सभी गैर-मुसलमानों के साथ किए गए समझौते का पालन करने का आदेश देता है, तो वह बिना किसी हिचकिचाहट के उस आदेश को मान लेता है, क्योंकि इस तरह मानना उसके अकीदे का ही हिस्सा है। अल्लाह का इरशाद है: "अतः तुम्हारे रब की कसम, वे मोमिन नहीं हो सकते जब तक कि वे अपने बीच के आपसी विवादों में तुम्हें फैसला करने वाला न मान लें, फिर जो फैसला तुम करो, उससे अपने दिलों में कोई तंगी न महसूस करें और उसे पूरी तरह से स्वीकार कर लें।" [अन-निसा: 65]
(4) राजनीतिक स्थिरता लाने में सही अकीदे का महत्व: इस्लामी अकीदे का एक अनिवार्य मौलिक विषय यह है कि इस बात पर दृढ़ विश्वास रखा जाए कि अल्लाह जिस तरह इस ब्रह्मांड का रचयिता है, उसी तरह वह इसके शासन-अधिकार और आदेश का भी मालिक है। अल्लाह का इरशाद है: "जान लो, सृजन और आदेश उसी का है।" [अल-आराफ: 54]
"कह दो, निश्चित रूप से सभी मामले अल्लाह के हैं।" [आले इमरान: 154]
"शासन तो केवल अल्लाह का ही है।" [अल-अनआम: 57]
इसके अलावा अल्लाह ही सभी संप्रभुता का मालिक और एकमात्र कानून निर्माता तथा विधानदाता है। यह उसे रब के रूप में मानने का ही एक मुख्य अर्थ है। हमारे समाज में राजनीतिक स्थिरता तभी लौट सकती है जब राजनीतिक नेतृत्व का इस अकीदे पर दृढ़ विश्वास हो। मूल रूप से मानव रचित कानूनों से किसी भी मुस्लिम समाज में शांति, अनुशासन और स्थिरता नहीं आ सकती। शायद वास्तविकता ही इसका सबसे बड़ा प्रमाण और साक्षी है।
(5) अपसंस्कृति को रोकने में सही अकीदे का महत्व: विदेशी और भिन्न धर्मों के अंधानुकरण में हमारे बांग्लादेशी समाज में संस्कृति के नाम पर वर्तमान में जिन चीज़ों का अभ्यास किया जा रहा है, उन्हें अपसंस्कृति कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। क्योंकि ये संस्कृतियाँ न तो हमारी स्वदेशी सोच-विचार और परंपरा का प्रतिनिधित्व करती हैं, और न ही वे मुस्लिम अकीदे के अनुकूल हैं। यह याद रखना चाहिए कि हमारा यह देश एक मुस्लिम बहुल देश है। इसलिए यदि हम अपने सभी सांस्कृतिक और सामाजिक अनुष्ठानों को सही इस्लामी अकीदे के आलोक में व्यवस्थित करें, तो देश को एक सुंदर, शालीन और स्वस्थ संस्कृति मिल सकती है।
(6) चिंतन के क्षेत्र में अराजकता और भ्रम तथा शिर्क और बिदअत से समाज को मुक्त करने के मामले में सही अकीदे का महत्व: सही इस्लामी अकीदे का ज्ञान ही समाज के बुद्धिजीवी वर्ग की वैचारिक दुनिया को आलोकित कर सकता है जिससे वे राष्ट्र को सत्य मार्ग की दिशा दे सकें। आज एक श्रेणी के बुद्धिजीवियों के चिंतन के क्षेत्र में जो अराजकता और भ्रम हम देख रहे हैं, मुस्लिम नामधारी होने के बावजूद इस्लाम के खिलाफ वे जो वैचारिक युद्ध चला रहे हैं, उसका सबसे बड़ा कारण शायद यह है कि उन्होंने इस्लाम को विकृत रूप में जाना है, उन्हें सही इस्लामी अकीदे को प्राप्त करने का सौभाग्य नहीं मिला है। यही बात उन सभी शिक्षित और अशिक्षित मुसलमानों पर भी लागू होती है जो इसे इबादत समझकर शिर्क और बिदअत में डूबे हुए हैं। कुरआन और सुन्नत के आलोक में उन्होंने शिर्क और बिदअत को नहीं पहचाना है। शिर्क और बिदअत को पहचानने के जो मूल सिद्धांत हैं, वे उनसे पूरी तरह अनजान हैं। सही अकीदे के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ अकीदे का ज्ञान प्राप्त करना ही समाज के सभी लोगों को इन भ्रमों और शिर्क तथा बिदअत से मुक्त करने की गारंटी दे सकता है।
अतः सहिह इस्लामी अकीदे का ज्ञान प्राप्त करना ही अल्लाह का सच्चा मोमिन और मुस्लिम बंदा बनकर खुद को विकसित करने का एकमात्र मार्ग है। इसी प्रकार किसी समाज को एक पूर्ण इस्लामी समाज के रूप में विकसित करना हो, तो समाज के सभी लोगों को सहिह अकीदे के ज्ञान से समृद्ध करने का कोई विकल्प नहीं है। इस मामले में सामाजिक और सांस्कृतिक इस्लामी संगठनों को बड़ी जिम्मेदारी निभानी होगी। जो लोग इस्लामी शरिया और स्टडीज में कुशल हैं, वे सहिह अकीदा विषय पर प्रामाणिक ग्रंथ लिखकर बांग्ला भाषा में लिखित पुस्तकों की जो कमी है, उसे दूर कर सकते हैं। इस मामले में मस्जिदों के इमामों, खतीबों और मदरसों के शिक्षकों की मदद भी ली जा सकती है। हालाँकि उससे पहले उन्हें सहिह अकीदे के ज्ञान से समृद्ध होना होगा। सहिह अकीदे के प्रसार के प्रयासों के माध्यम से इस प्रकार हमारा समाज शिर्क और बिदअत से मुक्त एक सुंदर सुसभ्य समाज के रूप में विकसित हो सकता है।}}
मुश्ताक अहमद करीमी इस्लाम की दृष्टि से बैंक के ब्याज के साथ राजनीति के संबंध के बारे में कहते हैं:
{{quote|बैंक और इसी तरह की कोई भी संस्था केवल धन-पूजा, व्यापार के क्षेत्र में एकाधिकार, सुविधाओं का उपभोग और धन का शोषण करने के इरादे से स्थापित की गई है। इन संस्थाओं का उद्देश्य यह होता है कि ब्याज का प्रलोभन देकर जनता और राष्ट्र का धन जितना अधिक हो सके, अपने कब्जे में लाया जाए और इस पद्धति से बड़ी चालाकी से पूरी जाति पर अपनी सत्ता और शासन चलाया जाए। जहाँ चाहे अकाल लाया जा सकता है और जहाँ चाहे भुखमरी पैदा करके तबाही लाई जा सकती है। जहाँ चाहे अपनी पसंद का शासन और राजनीति लागू की जा सकती है। जब चाहे मुद्रास्फीति पैदा करना संभव है और जब चाहे मुद्रा के मूल्य को बढ़ाकर बाजार में बड़े पैमाने पर मंदी फैलाई जा सकती है। जिसे चाहे गद्दी से उतारना और जिसे चाहे गद्दी पर बिठाना आसान होगा।<ref>http://www.hadithbd.com/books/link/?id=4556</ref>}}
फहद बिन सालेह अल अजलान अपनी पुस्तक 'मुहर्रर फी सियासातुल शरिया' में कहते हैं कि इस्लामी राजनीति में भाग लेने का विधान यह है कि व्यक्ति अपने व्यक्तिगत ईमान को दुरुस्त रखने के बाद यदि अतिरिक्त रूप से अपनी क्षमता के अनुसार राजनीतिक सुधार की क्षमता रखता है, तो ऐसे मामले में इसे प्रोत्साहित किया गया है, अन्यथा इसमें भाग लेना हराम माना जाएगा। और ऐसे मामलों में सुधार करना चाहिए जो पहले से मौजूद हैं, जिसमें सुधार और मसलेहत (कल्याण) की गुंजाइश है, लेकिन मसलेहत के नाम पर कोई नया हराम या बिदअत नहीं बनाई जानी चाहिए; और ऐसे विषयों में भाग नहीं लिया जाना चाहिए जो पूरी तरह से हराम हैं, जैसे ब्याज, नशीले पदार्थों का उत्पादन आदि।<ref name=fa>{{cite book |last1=العجلان |first1=فهد صالح |title=المحرر في السياسة الشرعية |date=1 June 2022 |publisher=آفاق المعرفة للنشر |url=https://books.google.com.bd/books/about/%D8%A7%D9%84%D9%B-%D9%85%D8%AD%D8%B1%D8%B1_%D9%81%D9%8A_%D8%A7%D9%84%D8%B3%D9%8A%D8%A7%D8%B3%D8%A9_%D8%A7%D9%84%D8%B4.html?id=_vt7EAAAQBAJ&redir_esc=y |access-date=13 September 2025 |language=ar}}</ref>
कुरआन और हदीस में स्पष्ट समाधान न मिलने वाले ([[मसलेहत]]) ऐसे इस्लामी राजनीतिक निर्णय लेने के लिए [[इस्तिखारा]] करने की सलाह दी गई है।<ref>{{cite web |title=حكم الاستخارة في مسائل شرعية لا يُدرَى وجه الصواب فيها |url=https://www.islamweb.net/ar/fatwa/239518/%D8%AD%D9%83%D9%85-%D8%A7%D9%B-%D8%A7%D9%84%D8%A7%D8%B3%D8%AA%D8%ခာرة-%D9%81%D9%8A-%D9%85%D8%ဘাসائِل-%D8%b4%D8%b1%D8%b9%D9%8a%D8%a9-%D9%84%D8%a7-%D9%8a%D9%8f%D8%af%D8%b1%D9%8e%D9%89-%D9%88%D8%ac%D9%B-%D8%a7%D9%84%ပိတ္ဆေား-%D9%81%D9%8a%D9%87%D8%a7 |website=www.islamweb.net |access-date=3 August 2025 |language=ar}}</ref> [[ताहिर इब्न हुसैन]] ने अपने बेटे [[अब्दुल्लाह इब्न ताहिर अल-खुरासानी|अब्दुल्लाह इब्न ताहिर]] को [[दियारे रबीआ]] का गवर्नर बनने पर सलाह दी थी:
{{Quote|जब भी तुम्हारे सामने कोई महत्वपूर्ण विषय आए, तो अल्लाह से इस्तिखारा करो और उससे डरकर सहायता की प्रार्थना करो... और अपने सभी मामलों में प्रचुर मात्रा में इस्तिखारा करो।<ref>{{cite book |last1=Ansa |first1=Muhammad |title=Istikhara - In The Light Of The Sunnah |date=1 January 2014 |publisher=Turath Publishing |isbn=978-1-906949-27-3 |url=https://books.google.com/books?id=uxCsEAAAQBAJ |access-date=8 August 2025 |language=en}}</ref><ref>{{cite web |title=كتاب : تاريخ الرسل والملوك 29 |url=https://www.islamicbook.ws/tarekh/tarikh-alrsl-029.html |website=www.islamicbook.ws |access-date=8 August 2025}}</ref>}}
=== शासक और शासित के एक-दूसरे के प्रति दायित्व और कर्तव्य ===
;नेतृत्व के पद पर नियुक्त व्यक्ति के कर्तव्य
शासक पर जो सभी दायित्व निभाना अनिवार्य है, उनका उल्लेख करते हुए इमाम मावर्दी ने उन्हें दस मौलिक दायित्वों में सीमित किया है। जैसे:
उम्मत के सलाफ यानी पूर्ववर्ती इमामों द्वारा धर्म के जिन मूल सिद्धांतों पर सहमति व्यक्त की गई है, उनकी रक्षा करके धर्म की रक्षा करना।
मतभेद और संघर्ष में लिप्त पक्षों के बीच सुलह कराना और निर्णय देना।
आक्रमण से सुरक्षा प्रदान करके जनसुरक्षा सुनिश्चित करना।
शरिया के दंड (हद्द) को लागू करना।
सीमाओं पर पहरेदारी को मजबूत करना।
दावत देने के बाद भी जो लोग इस्लाम स्वीकार करने से इनकार करें, उनके खिलाफ जिहाद करना।
फ़ैय और सदक़ा एकत्र करना।
बैतुल माल से भत्ते की राशि निर्धारित करना।
विश्वस्त और कल्याण चाहने वाले व्यक्तियों को पदों पर नियुक्त करना।
अपनी देखरेख में सब कुछ संचालित करना और प्रजा की देखभाल करना।
;नेतृत्व के पद पर नियुक्त व्यक्ति के अधिकार
प्रजा पर शासक के कुछ अधिकार हैं। उनमें से सबसे महत्वपूर्ण निम्नलिखित हैं:
अच्छे कार्यों में शासक की आज्ञाकारिता।
शासक के लिए दुआ।
शासक के प्रति नसीहत या हितैषी होना।
शासक को अच्छे कार्यों में सहायता प्रदान करना।<ref>{{cite book |last1=अल अजलान |first1=फहद इब्न सालेह |last2=मजूमदार |first2=अब्दुल्लाह |last3=जकारिया |last3=अबू बकर मुहम्मद |title=শারঈ রাজনীতি |date=September 2025 |publisher=বিলিভার্স ভিশন |location=ঢাকা |pages=306, 307 |edition=1st |access-date=23 February 2026}}</ref>
7dnjsa284578tkko1ns8e5qg2hefn4l
6591516
6591515
2026-07-24T10:01:35Z
~2026-41366-39
937955
/* शासक और शासित के एक-दूसरे के प्रति दायित्व और कर्तव्य */
6591516
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox political system
| name = [[इस्लाम]] में [[राजनीति]]
| part_of = {{unbulletedlist|[[धर्म का इतिहास]]|[[राजनीतिक इस्लाम]]}}
| type = [[इस्लामी दर्शन]]
| image = Birmingham Quran manuscript - closeup.jpg
| caption = [[बर्मिंघम विश्वविद्यालय]] द्वारा सुरक्षित ७वीं शताब्दी की [[कुरान]] की पांडुलिपि का एक खंड।
}}
{{Islam |expanded=culture}}
{{Islam and other religions}}
'''[[इस्लाम]] में [[राजनीति]]''' ([[सियासत]]-उश्-[[शरिया]], शर्ई राजनीति) मुख्य रूप से [[कुरान]], [[सुन्नत]] (इस्लामी पैगंबर [[मुहम्मद]] की बातें और जीवनचर्या),<ref name="Zimney 2009">{{cite book |last=Zimney |first=Michelle |year=2009 |chapter=Introduction – What Is Islam? |editor-last=Campo |editor-first=Juan E. |title=Encyclopedia of Islam |url=https://books.google.com/books?id=OZbyz_Hr-eIC&pg=PAxxi |location=[[New York City|New York]] |publisher=[[Facts On File]] |series=Encyclopedia of World Religions |pages=xxi–xxxii |isbn=978-0-8160-5454-1 |lccn=2008005621}}</ref> [[इस्लाम का इतिहास]] तथा विभिन्न राजनीतिक आंदोलनों और संघर्षों से उपजी है।<ref name="Ayoob-Lussier 2020">{{cite book |title=The Many Faces of Political Islam: Religion and Politics in Muslim Societies |url=https://books.google.com/books?id=rjLDDwAAQBAJ&pg=PA26 |year=2020 |publisher=[[University of Michigan Press]] |pages=26–44 |chapter=Islam's Multiple Voices |doi=10.3998/mpub.11448711 |isbn=978-0-472-12640-8 |lccn=2019025041 |edition=2nd |editor1-last=Ayoob |editor1-first=Mohammed |editor2-last=Lussier |editor2-first=Danielle N. |location=[[Ann Arbor, Michigan]] |s2cid=211404750}}</ref>
पारंपरिक रूप से इस्लाम में राजनीतिक अवधारणाओं के बीच निर्वाचित नेतृत्व एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय रहा है। मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के बाद जो लोग इस्लामी राज्य व्यवस्था में नेतृत्व संभालने के लिए चुने गए, उन्हें [[खलीफा]] कहा जाता है। इस्लामी राजनीतिक चिंतन में राज्य संचालन के लिए इस्लामी कानून या [[शरिया]] सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। [[शरिया कानून]] के अनुसार निर्वाचित शासकगण जनता के साथ विभिन्न मामलों पर शूरा या परामर्श के आधार पर निर्णय लेते हैं।<sup><ref>Abu Hamid al-Ghazali quoted in Mortimer, Edward, Faith and Power: The Politics of Islam, Vintage Books, 1982, p.37</ref></sup> [[राशिदुन ख़िलाफ़त|राশিদুন खलीफाओं]] सहित शुरुआती खलीफाओं के बाद [[द्वितीय मुआविबिया]] से लेकर विभिन्न मुस्लिम [[राजा|राजाओं]] और [[बादशाह|बादशाहों]] ने मुस्लिम बहुसंख्यक आबादी या विजित क्षेत्रों का शासन संभाला। आधुनिक काल में विभिन्न आधुनिक राजनीतिक विचारधाराओं के व्यापक प्रसार के कारण, वे मुस्लिम बहुसंख्यक क्षेत्रों में इस्लाम के प्रभाव और संमिश्रण के साथ विभिन्न रूपों में ढल गए हैं। इस्लामी उलेमा (विद्वान) प्रथम दृष्टया केवल [[खिलाफत]] और द्वितीय दृष्टया [[मुस्लिम राजतंत्र]] को ही इस्लामी रूप से वैध राजनीतिक व्यवस्था मानते हैं,<ref>{{cite web |title=Monarchy in Qur'an and Hadith |url=https://www.livingislam.org/fiqhi/fiqha_e39.html |website=www.livingislam.org |access-date=4 August 2022}}</ref> और हालांकि वे अन्य राजनीतिक प्रणालियों को हराम कहते हैं,<ref name="i1" /> फिर भी वे इस्लामी शासन स्थापित करने के लिए मुसलमानों द्वारा सत्ता तक पहुँचने के एक मार्ग के रूप में इनका उपयोग करने को वैध ठहराते हैं।<ref name="i2" /> इसके अतिरिक्त, मुस्लिम विधिवेत्ता (फुकहा) यह शर्त रखते हैं कि इस्लामी राजनीति में भाग लेने के लिए व्यक्तिगत [[ईमान]] को सुरक्षित रखना तथा सुधार और जनहित (कल्याण) का अवसर व सामर्थ्य होना पूर्वशर्त है।<ref name=fa/>
१९२४ में [[उस्मानिया साम्राज्य|उस्मानिया (ओटोमन) साम्राज्य]] के पतन के बाद मुस्लिम दुनिया के राजनीतिक परिदृश्य में भारी बदलाव आया।<ref name="Roshwald 2013">{{cite book |title=The Oxford Handbook of the History of Nationalism |url=https://books.google.com/books?id=IlNoAgAAQBAJ&pg=PA220 |year=2013 |publisher=[[Oxford University Press]] |pages=220–241 |chapter=Part II. The Emergence of Nationalism: Politics and Power – Nationalism in the Middle East, 1876–1945 |doi=10.1093/oxfordhb/9780199209194.013.0011 |isbn=9780191750304 |last=Roshwald |first=Aviel |editor-last=Breuilly |editor-first=John |location=[[Oxford]] and [[New York City|New York]]}}</ref><ref>{{cite book |url=https://books.google.com.bd/books?id=N_ORKS49yk4C&pg=PA2 |title=The Fall and Rise of the Islamic State |last=Feldman |first=Noah |date=2012-08-26 |publisher=Princeton University Press |pages=2 |language=en |isbn=978-1-4008-4502-6}}</ref> 19वीं और 20वीं शताब्दी में मुस्लिम जगत की राजनीति का मुख्य विचार इस्लामी राज्यों में [[शरिया|शरिया कानून]] को लागू करना था। [[छह-दिवसीय युद्ध|छह-दिवसीय युद्ध]] में अरब सेनाओं की पराजय, [[शीत युद्ध|शीत युद्ध]] की समाप्ति और समाजवादी [[सोवियत संघ]] का पतन जैसी राजनीतिक घटनाओं ने इस्लामी आंदोलनों की अपील को और तीव्र कर दिया है। धर्मनिरपेक्ष राज्य व्यवस्था के प्रति अविश्वास के कारण मुस्लिम जगत के इस्लामवादी राजनीतिक दल लगातार आंदोलनरत हैं।
== व्युत्पत्ति और परिभाषा ==
अरबी भाषा में नीति और राजनीति दोनों को दर्शाने के लिए ''[[सियासत]]'' या ''सियासा'' (سياسة) शब्द का प्रयोग किया जाता है। व्याकरणविदों के अनुसार, यह अरबी धातु ''सासा'' (ساس) से निकला है जिसका अर्थ है—संचालन करना, प्रबंधन करना, शासन करना। इस शब्द का 'फेल मुदारे' (वर्तमान और भविष्य काल) रूप ''यासूस'' (يسوس) है।<ref>الأفعال، للسرقسطي، تحقيق محمد محمد شرف، ومراجعة محمد مهدي علام، القاهرة: الهيئة العامة للكتاب، 1979، ص 3/498</ref> इस्लामिक विद्वानों के अनुसार, इस्लाम और अरबी भाषा में 'सियासा' शब्द का अर्थ पारंपरिक राजनीति, सत्ता या नेतृत्व नहीं है; बल्कि इसका अर्थ किसी स्थिति में सुधार करना, उत्पन्न समस्याओं का समाधान निकालना, परिस्थितियों को बेहतर बनाना या किसी वस्तु को अपेक्षाकृत अच्छी स्थिति में ले जाना है। उदाहरण के लिए, वे पैगंबर सुलेमान [[:en:Judgement of Solomon|से जुड़ी एक घटना]] का हवाला देते हैं, जहाँ एक बच्चे की दो महिलाओं द्वारा मातृत्व का दावा किए जाने पर, पैगंबर सुलेमान ने जिस युक्ति से वास्तविक माँ की पहचान की थी, उसे 'सियासत' के रूप में उल्लेखित किया गया है।<ref>{{cite web |title=सहীह बुখারী (তাওহীদ পাবঃ) {{!}} হাদিস: ৩৪২৭ [ ] |url=https://www.hadithbd.com/hadith/link/?id=27766 |website=www.hadithbd.com |access-date=22 July 2026 |language=bn}}</ref> विद्वानों का यह भी कहना है कि जिन विषयों में कुरान और सुन्नत के स्पष्ट और अकाट्य प्रमाण मौजूद हैं, उन मामलों में 'सियासा' या नवीन समाधान रणनीतियाँ वैध नहीं होंगी; 'सियासा' का प्रयोग केवल उन मामलों में वैध है जिनका शरिया में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है।<ref name=ipabmz>{{cite web |last1=Zakaria |first1=Abu Bakr Muhammad |title=ইসলামে রাজনীতি ও রাষ্ট্রনীতির ধরণ। |url=https://m.youtube.com/watch?si=MNcJPeT_tyh72UDq&v=Rmgsnk5Yf74 |website=[[Abu Bakr Muhammad Zakaria|ابو بكر محمد زكريا]] Official YouTube Channel |access-date=30 November 2023 |language=en |date=3 October 2023}}</ref> आलिमों का यह भी कहना है कि कोई व्यक्ति या सरकार अल्लाह के बंदों की सुविधा या कल्याण के लिए जो कार्य करती है, वे इस्लामी राजनीति के अंतर्गत आते हैं, जो मूल रूप से [[मस्लहत]] (जनहित) से जुड़े हैं और उसी पर निर्भर हैं; यदि उस कार्य में जनहित नहीं है, तो इस्लाम उसे राजनीति के रूप में मान्यता नहीं देता। इस्लामी राजनीति का मूल सिद्धांत यह है कि निर्देश कुरान और हदीस से यानी पैगंबर मुहम्मद (स.) की जीवनी से लिए जाने चाहिए, न कि व्यक्तिगत रूप से गढ़े जाने चाहिए।<ref>{{cite news |title=ইসলামী রাজনীতি কাকে বলে ও কী? |url=https://www.ntvbd.com/religion-and-life/22366/%E0%A6%87%E0%A6%B8%E0%A6%B2%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A7%80-%E0%A6%5B...%5D |access-date=21 August 2025 |work=ntvbd.com |date=27 September 2015 |language=en}}</ref> [[वैज्ञानिक अनुसंधान और फतवा संबंधी स्थायी समिति|सऊदी अरब की फतवा संबंधी स्थायी समिति]] के अनुसार, कुरान और सुन्नत पर आधारित राजनीति ही इस्लामी राजनीति है तथा सभी मुसलमानों और इस्लामी राज्यों के शासकों के लिए इस राजनीति का अभ्यास करना और मुसलमानों के इसुखल एवं परलोक से जुड़े सभी कार्यों को इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर संचालित करना 'फर्ज़' (अनिवार्य) है।<ref>https://d1.islamhouse.com/data/bn/ih_articles/single2/bn_Islami_Rajniti_ki_Kibhabe.pdf</ref>
== प्रारंभिक ग्रंथसूची ==
{{আরও দেখুন|सियासतनामा}}
इस्लामी राजनीति पर सबसे प्राचीन मौलिक ग्रंथ [[अल-मावर्दी]] की पुस्तक [[अहकाम उस-सुल्तानिया (पुस्तक)|अहकाम उस-सुल्तानियात]] (प्रशासनिक नियम) है।<ref name=pub>{{cite web |title=আল মাওয়ার্দী'র খিলাফাত দর্শন ও ড.মুঈন উদ-দীন আহমদ খান।। মাঈন উদ্দিন জাহেদ |url=https://pubakash.com/archives/1819 |website=Pubakash |access-date=1 October 2025 |language=en-US |date=31 March 2021}}</ref><ref>{{cite web |title=আল মাওয়ার্দী ও তাঁর চিন্তাধারা - রোয়াক |url=https://rowyakbd.com/al-mawardi-and-his-thought/ |website=Rowakbd |access-date=1 October 2025 |language=en-US |date=22 February 2021}}</ref><ref>{{cite news |title=স্মরণীয় মুসলিম মনীষী আল-মাওয়ার্দি |url=https://www.kalbela.com/ajkerpatrika/special-event/158040 |access-date=1 October 2025 |work=[[Kalbela]] |date=24 January 2025 }}{{dead link|date=May 2026 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes}}</ref> इसके अतिरिक्त, बाद की रचनाओं में [[अबू याला]] की 'अहकाम उस-सुल्तानिया', [[अबुल मआली अल-जुवैनी]] की 'अल-गियासी', [[इब्न कय्यिम]] रचित [[तुरुत उल-हिकमिय्यात|तुरुत उल-हुकमिय्यात]] और [[इब्न तैमिया]] की [[सियासत उस-शरिया (पुस्तक)|सियासत उस-शरिया]] आदि प्रमुख हैं।<ref name=ipabmz/><ref name=pub/>
== धार्मिक पांडुलिपियाँ ==
=== कुरान ===
{{hatnote|और देखें: [[आज्ञाकारिता की आयत]] और [[इकामते दीन]]}}
[[चित्र:সূরা শূরার ১৩তম আয়াত.png|400px|थंब|दाएँ|सूरह शूरा की 13वीं आयत, जिससे "इकामते दीन" शब्दावली ली गई है और इसकी व्याख्या को लेकर इस्लामवादियों में मतभेद है।]]
कुरान में इस्लामी राजनीति के संदर्भ में राजनीतिक इस्लामवादियों द्वारा सबसे अधिक [[इकामते दीन]] (धर्म की स्थापना) नामक अवधारणा को उभारा जाता है, जिसका उल्लेख [[सूरह शूरा]] की आयत 13 में है।
{{quote|
उसने तुम्हारे लिए धर्म (दीन) का वही मार्ग निर्धारित किया है, जिसका आदेश उसने नूह को दिया था और जो (ओही) हमने तुम्हारी ओर भेजी है और जिसका आदेश हमने इब्राहीम, मूसा और ईसा को दिया था कि ''धर्म को स्थापित करो'' (اَقِیۡمُوا الدِّیۡنَ) और इसमें फूट न डालो। जिस चीज़ की ओर तुम बहुदेववादियों को बुलाते हो, वह उन्हें बहुत भारी लगती है; अल्लाह जिसे चाहता है अपनी ओर खींच लेता है और जो उसकी ओर रुख करता है, उसे वह मार्ग दिखाता है। |सूरह शूरा: १३}}
हालांकि, इस आयत में "धर्म को स्थापित करने" से क्या तात्पर्य है, इसे लेकर इस्लामवादियों में मतभेद है। [[राजनीतिक इस्लाम]] के समर्थक इसके द्वारा अल्लाह की हुकूमत या आदेश की स्थापना अथवा इस्लामी सरकार की स्थापना यानी इस्लामी/मुस्लिम राजनीति या शक्ति की स्थापना समझते हैं; इसके विपरीत, [[पारंपरिक सलाफीवाद|मुख्यधारा के सलाफी]] मानते हैं कि इसका तात्पर्य [[तौहीद]] (अल्लाह की एकता) और दावत के माध्यम से जनता के बीच शुद्ध इस्लामी [[अकीदा]] (विश्वास) स्थापित करना है, और वे पहले वाले राजनीतिक हुकूमत संबंधी अर्थ को गलत बताकर उसका विरोध करते हैं।
[[चित्र:আনুগত্যের আয়াত.jpg|400px|थंब|दाएँ|सूरह निसा की आयत 59, जिसे आज्ञाकारिता की आयत कहा जाता है, इस्लाम में राजनीति के संदर्भ में प्रयुक्त एक महत्वपूर्ण आयत है।]]
इस्लाम में राजनीतिक सत्ताधारियों की आज्ञाकारिता के प्रसंग में सूरह निसा की आयत 59 का उल्लेख किया जाता है, जिसे 'आज्ञाकारिता की आयत' कहा जाता है। इसमें अल्लाह और इस्लामी पैगंबर मुहम्मद के साथ-साथ [[उलिल-अम्र]] यानी दायित्व संभालने वाले प्राधिकारिगण (शासकों और उलेमा) की आज्ञा मानने का निर्देश दिया गया है। यह आज्ञाकारिता वैध इस्लामी निर्देशों ([[हलाल]]) के मामले में है, न कि अनंतिम या गैर-इस्लामी आदेशों ([[हराम]]) के मामले में।
{{quote|हे विश्वासियों! अल्लाह का आज्ञापालन करो और रसूल का आज्ञापालन करो और उन लोगों का भी जो तुममें से अधिकारसंपन्न (उलिल-अम्र) हैं। फिर यदि किसी बात में तुम्हारा आपस में मतभेद हो जाए, तो उसे अल्लाह और रसूल के पास लौटा दो (उनके आदेश की ओर देखो), यदि तुम अल्लाह और अंतिम दिन पर विश्वास रखते हो। यही उत्तम है और परिणाम की दृष्टि से भी बहुत अच्छा है।|सूरह निसा, आयत: ५९}}
[[इब्न तैमिया]] ने अपनी पुस्तक 'सियासत उस-शरिया' (शर्ई राजनीति) की शुरुआत इसी आयत से की है, साथ ही न्याय और अमानत (विश्वास) के निर्देश के रूप में सूरह निसा की आयत 58 को भी पूर्व में उद्धृत किया है।
{{quote|निःसंदेह हमने अपने रसूलों को स्पष्ट प्रमाणों के साथ भेजा और उनके साथ किताब और (न्याय की) तराजू उतारी, ताकि लोग न्याय पर कायम रहें। और हमने लोहा उतारा, जिसमें भारी शक्ति है और लोगों के लिए कई लाभ हैं; और ताकि अल्लाह जान ले कि कौन बिन देखे उसकी और उसके रसूलों की सहायता करता है। निःसंदेह अल्लाह शक्तिशाली, पराक्रमी है।|हदीद, २५}}
{{quote|निसंदेह अल्लाह तुम्हें आदेश देता है कि अमानतें उनके हकदारों को लौटा दो और जब लोगों के बीच निर्णय करो, तो न्याय के साथ निर्णय करो। अल्लाह तुम्हें कितनी अच्छी सीख देता है! निःसंदेह अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, देखने वाला है।|निसा, ५८}}
==== पश्चिमी विद्वानों के दृष्टिकोण ====
माइकल कुक ने अपनी पुस्तक 'मुहम्मद' में टिप्पणी की है कि हालांकि कुरान सीधे तौर पर राजनीति पर चर्चा नहीं करता, लेकिन इसमें उत्पीड़ितों (''मुस्तदआफीन''), देशत्याग (''हिजरत''), मुस्लिम समुदाय (''[[उम्मा]]'') और अल्लाह के मार्ग में संघर्ष (''[[जिहाद]]'') की अवधारणाओं का उल्लेख मिलता है, जिनके राजनीतिक प्रभाव हो सकते हैं।<ref name="Cook-1983-51-60">{{cite book |last1=Cook |first1=Michael |title=Muhammad |url=https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4 |date=1983 |publisher=Oxford University Press |isbn=0192876058 |pages=[https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4/page/51 51]–60}}</ref> कुरान की कई आयतों (जैसे कुरान 4:98) में ''मुस्तदआफीन'' ("कमजोर माने गए", "अकिंचन" या "उत्पीड़ित") पर चर्चा की गई है, जैसे कि कैसे फिरौन जैसे लोग उनका शोषण करते थे, अल्लाह कैसे चाहता था कि उनके साथ न्याय हो, और वे उस भूमि से जहाँ उन पर अत्याचार होता है, कैसे पलायन कर सकते हैं (कुरान 4:99)। पैगंबर [[इब्राहीम]] ने "अपने पालनहार की ओर पलायन" किया था (कुरान 29:26)। कुरान में अविश्वासियों (''कुफ्फार'') के खिलाफ युद्ध का आदेश दिया गया है और दिव्य सहायता का वादा किया गया है, हालांकि कुछ आयतों में यह भी कहा गया है कि यह आदेश शायद तब के लिए था जब अविश्वासियों ने युद्ध शुरू किया हो, और संधियाँ तथा समझौते होने पर युद्ध समाप्त किया जा सकता है। इसके अलावा, कुरान में विजय प्राप्त करने वालों के बीच युद्ध में प्राप्त धन के उचित वितरण के लिए भी कुछ आयतें हैं। साथ ही, आंतरिक शत्रुओं या "[[मुनाफिक|कपटियों]]" (''मुनाफिकून'') के विरुद्ध युद्ध का भी आदेश दिया गया है।<ref name="Cook-1983-51-60"/> कुछ निर्देश पैगंबर के जीवनकाल के बाद आगे नहीं बढ़े, जैसे अल्लाह और उनके पैगंबर से झगड़ा करना या पैगंबर से बात करते समय चिल्लाना या ऊँची आवाज़ में बात करना।<ref name="Cook-1983-56-7">{{cite book |last1=Cook |first1=Michael |title=Muhammad |url=https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4 |date=1983 |publisher=Oxford University Press |isbn=0192876058 |pages=[https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4/page/56 56]–7}}</ref> इस्लामी राजनीतिक शिक्षाओं के सीमित रहने का कारण यह है कि कुरान में "किसी औपचारिक और निरंतर सत्ता के ढांचे" का उल्लेख नहीं किया गया है, इसमें केवल पैगंबर की बात मानने का निर्देश दिया गया है;<ref name="Cook-1983-56-7"/> और इसके मूल संदेश का राजनीतिक उपयोग उस समय अत्यंत सीमित था, क्योंकि रेगिस्तानी खानाबदोश लोगों के लिए यह कल्पना करना भी कठिन था कि विभिन्न शहरों और देशों द्वारा नियंत्रित एक विस्तृत कृषक-बहुसंख्यक क्षेत्र का शासन चलाना ही इस्लाम की सफलता हो सकती है।<ref name="Cook-1983-59">{{cite book |last1=Cook |first1=Michael |title=Muhammad |url=https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4 |date=1983 |publisher=Oxford University Press |isbn=0192876058 |page=[https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4/page/59 59]}}</ref>
=== हदीस ===
==== राजनीति या सियासत शब्द का उल्लेख ====
बुखारी और मुस्लिम में वर्णित हदीसों में 'सियासत' शब्द की धातु (मूल) का क्रियापद के रूप में उपयोग हुआ है।<ref>{{cite web |title=ص9 - كتاب السياسة الشرعية جامعة المدينة - الدرس السياسة الشرعية مفهومها أحكامها أدلة اعتبارها - المكتبة الشاملة (Page 9 - The Book of Islamic Political Theory, University of Madinah - Lesson: Islamic Political Theory: Its Concept, Rulings, and Evidence for its Validity - Shamila Library) |url=https://shamela.ws/book/11313/2 |website=shamela.ws}}</ref><ref>{{cite web |title=ইসলামিক শাসন ব্যবস্থা |url=https://m.youtube.com/watch?si=-U16ABJxCI9s-skE&v=KfCinOkJs4g |access-date=20 July 2026 |date=13 October 2019}}</ref>
{{quote|अबू হুরাইরা (रा.) से वर्णित है कि पैगंबर (स.) ने कहा: “बनी ইসরাইল (이스্রাইল की संतानों) पर नबी शासन करते थे (तासूसूहुम अल-अंबिया); जब भी कोई नबी मरता, तो दूसरा नबी उसका उत्तराधिकारी बनता।” |(सहीह बुखारी, हदीस/3455; सहीह मुस्लिम, हदीस/1842; इब्न माजाह, हदीस/2871; मुसनद अहमद, हदीस/7960)}}
[[इमाम नववी]] कहते हैं: "'[वे] नबी द्वारा शासित थे' का अर्थ है कि नबी उनके मामलों की देखभाल वैसे ही करते थे जैसे शासक जनसाधारण की जिम्मेदारी संभालते हैं। इस प्रकार सियासा का अर्थ ऐसी देखरेख करना है जो उनके कल्याण को बनाए रखे और उनके हितों को पूरा करे।"<ref>{{cite web |title=Politics from an Islamic perspective - Islam Question & Answer |url=https://islamqa.info/en/answers/181673/politics-from-an-islamic-perspective |website=[[islamqa.info]] |access-date=4 August 2022 |language=en}}</ref>
==== नेतृत्व के निर्देश ====
;नेतृत्व की प्राथमिक शर्त: तीन लोगों की जमात और कुरान (इस्लामी ज्ञान) में प्रवीणता
[[सालेह अल-मुनाज्जिद]] अपनी पुस्तक 'हुब्ब उस-सियासत' (नेतृत्व प्रेम) में कहते हैं कि सुन्नत के अनुसार यदि लोग संगठित हों, तो एक नेता का होना अनिवार्य है।
{{quote|अबू सईद अल-खुदी (रा.) से वर्णित। रसूलुल्लाह (स.) ने कहा: जब तीन व्यक्ति सफर पर निकलें, तो उन्हें चाहिए कि वे अपने में से एक को अपना अमीर या नेता बना लें।|अबू दाऊद, ২৬০৮, सनद हसन, अलबानी}}
एक अन्य हदीस में आया है कि यदि तीन से अधिक लोग एकत्र हों, तो उनमें से एक को नेता बनाना चाहिए, और उसे नेता बनाया जाना चाहिए जो उनमें सबसे अधिक कुरान (और सही हदीस यानी शुद्ध इस्लामी ज्ञान) जानता हो।
{{quote|कुतैबा बिन सईद (रह.) ..... अबू सईद अल-खुदी (रज़ि.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) ने कहा: जब तीन व्यक्ति एकत्र हों, तो उनमें से एक को उनका इमाम या नेता होना चाहिए। और उनमें इमामत या नेतृत्व का सबसे अधिक हकदार वह व्यक्ति है जिसने सबसे अधिक पढ़ा है (أَقْرَؤُهُمْ, अक्रओहुम - जिसका अर्थ यह है कि जिसने मजीद कुरान [और सही हदीस] का सबसे अधिक अध्ययन किया है)।| सहीह मुस्लिम (हदीस अकादमी) 1415-(289/672)}}
एक अन्य हदीस में नेता या इमाम बनाने के विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं (अधिकांश विद्वानों के अनुसार यह धार्मिक इमामत या धार्मिक नेतृत्व है, किंतु कई विद्वानों ने इसे राजनीतिक इमामत या राजनीतिक नेतृत्व चुनने के निर्देश के रूप में भी स्थापित किया है)।
{{quote|अबू मसूद (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) ने ارشاد किया: कौम की इमामत वह व्यक्ति करेगा जो अल्लाह की किताब को सबसे अच्छी तरह पढ़ सकता है। यदि उपस्थित सभी लोग अच्छे कारी (पाठक) हों, तो इमामत वह व्यक्ति करेगा जो सुन्नत के बारे में सबसे अधिक जानता हो। यदि सुन्नत के ज्ञान में सब समान हों, तो वह जो सबसे पहले हिजरत (पलायन) करके आया हो। यदि हिजरत में भी सब समान हों, तो वह इमामत करेगा जो उम्र में सबसे बड़ा हो। और कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के अधिकार क्षेत्र (अधिकार वाले स्थान) में जाकर इमामत न करे और न ही किसी के घर जाकर उसकी अनुमति के बिना उसके खास आसन पर बैठे।|मिशকাত 1117, मुस्लिम 673, अबू दाऊद 582, अत-तिर्मिज़ी 235, नसायी 780, इब्न माजाह 980, अहमद 17063}}
;ज्ञान अर्जन
हदीस में आलिम (विद्वान) व्यक्ति को नेता बनाने का आदेश दिया गया है और जाहिल (अज्ञानी) व्यक्ति को नेता बनाना कयामत की निशानी बताया गया है।
{{quote|कुतैबा बिन सईद (रह.) ..... उर्वाह (रह.) से वर्णित। उन्होंने कहा, मैंने अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन अल-आस (रज़ि.) को कहते सुना। उन्होंने कहा कि मैंने रसूलुल्लाह (स.) को कहते सुना। आपने फरमाया: निश्चय ही अल्लाह लोगों के दिलों से ज्ञान छीन नहीं लेगा, बल्कि वह आलिमों (विद्वानों) को उठा कर (قبض करके) ज्ञान को समाप्त कर देगा। यहाँ तक कि जब कोई आलिम बाकी नहीं रहेगा, तो लोग अज्ञानी (मूर्ख) लोगों को अपना नेता बना लेंगे। लोग उनसे फतवे (धार्मिक निर्णय) मांगेंगे, और वे बिना ज्ञान के फतवे देंगे। जिससे वे खुद भी गुमराह होंगे और लोगों को भी गुमराह करेंगे।|सहीह मुस्लिम (हदीस अकादमी) 6689-(13/2673)}}
साहबी [[उमर इब्न अल-खत्ताब|उमर]] और सलाफ-ए-सालेहिन ने नेतृत्व मिलने से पहले और बाद में ज्ञान अर्जित करने का निर्देश दिया है।
{{quote|उमर (रा.) ने कहा: नेतृत्व प्राप्त करने से पहले ज्ञान हासिल कर लो। अबू अब्दुल्लाह (बुखारी) कहते हैं: और नेता बना दिए जाने के बाद भी (ज्ञान प्राप्त करो), क्योंकि पैगंबर (स.) के साथियों ने वृद्धावस्था में भी ज्ञान प्राप्त किया है।|सहीह बुखारी (इफा) 73}}
हालांकि, केवल अपने ज्ञान के प्रदर्शन या नेतृत्व पाने के उद्देश्य से ज्ञान प्राप्त करने को हदीस में मना किया गया है।
{{quote|काब बिन मलिक (रज़ि.) से वर्णित, उन्होंने कहा, मैंने रसूलुल्लाह (स.) को कहते सुना: जो व्यक्ति आलिमों के साथ बहस करने, या जाहिलों के साथ हुज्जत करने, अथवा लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने के उद्देश्य से ज्ञान प्राप्त करता है, अल्लाह तआला उसे जहन्नम (नरक) में झोंक देगा।|तिर्मिज़ी 2654 (हसन-अलबानी)}}
;सच्चाई और निर्लोभता
व्यक्तिगत जीवन में সৎ (सच्चे) और नेतृत्व तथा सत्ता को मन से नापसंद करने वाले लोगों को नेतृत्व के योग्य बताया गया है।
{{quote|अबू हुरैरा (रा.) से वर्णित, पैगंबर (स.) ने कहा: कयामत तब तक कायम नहीं होगी... जब तक कि तुम ऐसे लोगों से युद्ध न करो... "तुममें से सर्वोत्तम लोग वे होंगे जो नेतृत्व और शासन सत्ता से जुड़ने से पहले इसे अत्यधिक घृणा और नापसंद करें।" |सहीह बुखारी (इफा) 3334}}
हदीस में नेतृत्व का लालच करने से मना करते हुए कहा गया है कि नेतृत्व की शुरुआत भले ही आनंददायक हो, लेकिन धीरे-धीरे यह कष्टदायक होती जाती है।
{{quote|अबू हुरैरा (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, पैगंबर (स.) ने कहा: शीघ्र ही तुम लोग सत्ता और नेतृत्व के लिए लालायित हो जाओगे। और इसके कारण निश्चित ही कयामत के दिन तुम्हें लज्जित होना पड़ेगा। अतः (नेतृत्व पाना) दूध पिलाने वाली (माता) के रूप में कितना अच्छा है और दूध छुड़ाने के समय कितना बुरा है। (जैसे शिशु दूध मिलने पर आनंदित होता है, वैसे ही व्यक्ति सत्ता पाकर खुश होता है, और जैसे दूध छूटने पर बच्चा कष्ट पाता है, वैसे ही सत्ता जाने पर व्यक्ति दुखी होता है।) |मिशকাত 2681, बुखारी 7148, नसायी 4211}}
;परामर्श और प्राथमिकता
हदीस में परामर्श (मशविरा) के आधार पर नेता या अमीर चुनने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, और जिसकी सत्ता या जिसके प्रति निष्ठा पहले स्थापित हो चुकी हो, उसकी आज्ञा मानने तथा उसकी मृत्यु के बाद ही अगला अमीर चुनने का निर्देश दिया गया है। पहले से स्थापित नेता के जीवनकाल में यदि कोई दूसरा नेतृत्व का दावा करे, तो उसे दृढ़ता से रोकने का आदेश है।
{{quote| जरीर (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, मैं यमन में था। उसी समय मेरी मुलाकात यमन के दो व्यक्तियों—जुकाला और जु-अम्र—से हुई। मैंने उन्हें रसूलुल्लाह (स.) की हदीसें सुनानी शुरू कीं। (वर्णक कहते हैं) तब जु-अम्र ने जरीर से कहा, हे जरीर! यदि तुम जो वर्णन कर रहे हो, वह वास्तव में तुम्हारे साथी [पैगंबर (स.)] का कथन है, तो जान लो कि तीन दिन पहले उनका इंतकाल हो चुका है। (जरीर कहते हैं, यह सुनकर मैं मदीने की ओर दौड़ा)... (बाद में जब अबू बकर खलीफा चुने गए, तो उन्होंने कहा)... "तुम अरब जाति तब तक कल्याण पर रहोगे जब तक कि एक अमीर के मरने पर (परामर्श के आधार पर) दूसरे को अमीर बना लोगे। और यदि यह फैसला तलवार के जोर पर होने लगा, तो तुम्हारे अमीर राजा-बादशाहों जैसे हो जाएंगे। वे राजाओं की तरह गुस्सा होंगे और राजाओं की तरह खुश होंगे (और खिलाफत व खलीफा बाकी नहीं रहेंगे)।" |सहीह बुखारी, हदीस: ४३५९}}
{{quote|अबू हुरैरा (रा.) से वर्णित, पैगंबर (स.) ने कहा: "...मेरे बाद कोई नबी नहीं आएगा, बल्कि कई खलीफा होंगे और उनकी संख्या अधिक होगी।" সাহাবীগণ बोले, "तो आप हमें क्या आदेश देते हैं?" आपने फरमाया: "जिसके हाथ में सबसे पहली बैअत (निष्ठा की शपथ) की जाए, उसी का आज्ञापालन करना और उन्हें उनका हक देना। निःसंदेह अल्लाह उनसे उस चीज़ के बारे में पूछेगा जिसकी जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई थी।" |(सहीह बुखारी, हदीस/3455; सहीह मुस्लिम, हदीस/1842)}}
;योग्य व्यक्ति को नेतृत्व देना
सही माने गए सुन्नी हदीसों में योग्य व्यक्ति को नेतृत्व सौंपने का आदेश दिया गया है।
{{cite book |last1=Taymīyah |first1=Aḥmad ibn ʻAbd al-Ḥalīm Ibn |title=The Political Shariyah on Reforming the Ruler and the Ruled |date=2005 |publisher=Dar ul Fiqh |page=13 |url=https://books.google.com.bd/books?id=ZdwVAQAAIAAJ&q=political+shariyah+on+reforming+ruler+and+ruled+ibn+taymiyyah&dq=political+shariyah+on+reforming+ruler+and+ruled+ibn+taymiyyah&hl=en&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwij4qv35uKPAxWa6jgGHXd2BtoQ6AF6BAgKEAM |access-date=18 September 2025 |language=en}}
{{quote|अबू हुरैरा (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: जब अमानत नष्ट कर दी जाए (यानी अयोग्य व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंप दी जाए), तब कयामत की प्रतीक्षा करना।|बुखारी ६४९६, रियाजुस सालिहीन १८३७}}
;महिला राष्ट्राध्यक्ष न होना
हदीस में राष्ट्राध्यक्ष के पद के लिए महिलाओं को अयोग्य घोषित किया गया है।
{{quote|अबू बकरा (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) के पास यह खबर पहुँची कि फारस (ईरान) के लोगों ने किस्रा की पुत्री को अपनी सावर्णि (महारानी) नियुक्त किया है। तब आपने फरमाया: वह जाति कभी सफल नहीं हो सकती जो अपने शासन की बागडोर किसी महिला को सौंप दे।|मिशकत ३६९३, सहीह: बुखारी ४४२५}}
==== आज्ञाकारिता और विरोध ====
इस्लामी पैगंबर मुहम्मद ने मुसलमानों को मिलजुलकर रहने का कड़ाई से निर्देश दिया है और अमीर, सत्ताधारी नेता या शासक की कमियों या उसके अत्याचारी होने पर भी धैर्य रखने तथा एकजुटता से अलग न होने का आदेश दिया है।<ref name=উ>উসুলুল ঈমান... (उसूलुल ईमान...)</ref>
{{quote|अनस बिन मालिक (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: यदि तुम पर किसी ऐसे हब्शी (अश्लील/कृष्णवर्ण) दास को भी शासक नियुक्त कर दिया जाए जिसका सिर किशमिश की तरह (छोटा) हो, तब भी उसकी बात सुनना और उसकी आज्ञा का पालन करना।|सहीह बुखारी, हदीस: ७१४२}}
{{quote|अब्दुल्लाह बिन अम्र (रा.) से वर्णित: अल्लाह के रसूल (स.) ने फरमाया: "जो व्यक्ति किसी राजनेता (शासक) के हाथ पर बैअत करे और उसे अपने दिल से वचन दे, तो उसे चाहिए कि जहाँ तक संभव हो उसका (उसके अच्छे कार्यों में) आज्ञापालन करे। इसके बाद यदि कोई दूसरा (शासक) उसकी सत्ता छीनना चाहे, तो उस दूसरे शासक की गर्दन उड़ा दो।" |(मुस्लिम ৪৮৮২)}}
;शासक को गुप्त रूप से सलाह देना
इस्लामी पैगंबर मुहम्मद ने शासक को नसीहत (मार्गदर्शन) देने का निर्देश दिया है और इसे गुप्त रूप से देने को कहा है।<ref name=উ/>
{{quote|अबू हुरैरा (रज़ि.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: अल्लाह तआला तीन चीजें पसंद करता है और तीन चीजें नापसंद करता है... "और अल्लाह ने तुम पर जिसे शासक बनाया है, उसे नसीहत (भलाई की बात) करो।"<ref name=উ/> |सहीह मुस्लिम ১৭১५}}
{{quote|इब्न أبي عاصم और अन्य द्वारा वर्णित इयाद बिन गनम (रज़ि.) कहते हैं, रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया:
«من أراد أن ينصح لذي سلطان فلا يبده علانية، ولكن يأخذ بيده فيخلوا به، فإن قبل منه فذاك، وإلا كان قد أدى الذي عليه»
“यदि कोई किसी सत्ताधारी को नसीहत देना चाहता है, तो उसे चाहिए कि वह उसे खुलेआम (सार्वजनिक रूप से) न दे, बल्कि उसका हाथ पकड़कर (एकांत में) ले जाए। यदि वह उसकी बात मान ले, तो ठीक है, अन्यथा उसने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी।” |(मुसनद अहमद १५३३३, इब्न أبي عاصم, अस-सुन्नत ২/৫০)<ref name=উ/></ref>
;नेतृत्व की वैधता के मानदंड
[[खोন্দকার আব্দুল্লাহ জাহাঙ্গীর]] अपनी पुस्तक 'ইসলামের নামে জঙ্গিবাদ' (इस्लाम के नाम पर आतंकवाद) में कहते हैं कि हदीस में तब तक शासक की सत्ता का विरोध करने से मना किया गया है जब तक वे नमाज पढ़ते हैं और/या सार्वजनिक रूप से नमाज पढ़ने की अनुमति देते हैं।
{{quote|उम्मुल मुमिनीन उम्मे सलमा (रज़ि.) से वर्णित कि रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: शीघ्र ही ऐसे कुछ अमीर आएंगे जिन्हें तुम पहचानोगे और नापसंद करोगे। जो व्यक्ति उनकी असलियत को पहचान गया, वह सुरक्षित हो गया और जिसने उन्हें नापसंद किया, वह बच गया। लेकिन जो व्यक्ति उनसे संतुष्ट रहा और उनका अनुसरण किया (वह नष्ट हो गया)। लोगों ने पूछा: क्या हम उनके खिलाफ युद्ध न करें? रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: नहीं, जब तक वे नमाज कायम रखें।|सहीह मुस्लिम, ४६९४}}
फहद बिन सालेह अल-अजलान अपनी पुस्तक 'मुहर्रर फी सियासत उस-शरिया' में कहते हैं कि काजी इयाद और इब्न हजार असकलानी का कहना है कि यदि कोई मुस्लिम शासक काफिर हो जाए या खुले कुफ्र (अधर्म) में लिप्त हो जाए, तो उसकी आज्ञा मानना वैध नहीं है; बल्कि यदि कोई सक्षम हो, तो वह उसके खिलाफ संघर्ष करे। और यदि मुसलमान ऐसा करने में असमर्थ हों, तो राजनीतिक हित और अपने अस्तित्व को बचाने के लिए वे बाहरी तौर पर उसकी आज्ञा मान सकते हैं (मजबूरीवश, न कि उसकी शर्ई सत्ता मानकर)।
;गोत्रवाद और भाई-भतीजावाद (असबियाह)
हदीस में [[असबियाह|गोत्रवाद (जातिवाद/वंशवाद)]] की निंदा की गई है और इसे प्रतिबंधित किया गया है।
{{quote|वासिला बिन असका (रा.) कहते हैं, मैंने एक दिन रसूल (स.) से पूछा: या रसूलल्लाह! असबियाह क्या है? रसूल (स.) ने फरमाया: असबियाह यह है कि तुम अन्याय के मामले में अपने गोत्र की सहायता करो।|अबू दाऊद ५१১৯}}
{{quote|जुनदूब बिन अब्दुल्लाह बजली (रज़ि.) से वर्णित कि रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: जो व्यक्ति लक्ष्यहीन नेतृत्व के झंडे तले युद्ध करता है, गोत्रवाद (عَصَبِيَّةً, असबियाह) की ओर आह्वान करता है और गोत्रवाद के ही कारण सहायता करता है, उसकी मौत जाहिलियत (अज्ञानता के युग) की मौत है।|सहीह मुस्लिम, ४৬৮৬}}
== सालाफियों के दृष्टिकोण ==
मावर्दी अपनी पुस्तक 'क़वानिनुल विज़ारत व सियासतुल मुल्क' (قوانين الوزارة وسياسة الملك, शासन और राज्याधिकार के नियम) में कहते हैं, "हज़रत अली इब्न अबी तालिब (रज़ि.) ने कहा है: 'अपने शत्रु पर उदारता (क्षमा) के माध्यम से श्रेष्ठता प्राप्त करो, क्योंकि यह (क्षमा) दो विजयों में से एक है।' और यदि चेतावनी और स्पष्टीकरण के बाद (शत्रु के साथ) अंतिम मुकाबले या युद्ध की आवश्यकता उत्पन्न हो जाए, तो शासक को अपनी संकल्पशक्ति को जाग्रत करना चाहिए, विवेक का उपयोग करना चाहिए और इस्तिखारा (अल्लाह से कल्याण की प्रार्थना), धर्म के अनुसरण तथा न्याय की स्थापना के दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए। क्योंकि भ्रष्ट और पराजित व्यक्ति के अलावा कोई भी इस मार्ग (न्याय और धर्म) से विचलित नहीं होता है।"<ref>{{cite book |title=قوانين الوزارة وسياسة الملك |date=1 January 1900 |publisher=دائرة الثقافة والسياحة – أبوظبي، مركز أبوظبي للغة العربية، إصدارات |isbn=978-9948-02-171-1 |url=https://books.google.com.bd/books?id=hktQEAAAQBAJ&pg=PT27&dq=%D8%B3%D9%8A%D8%A7%D8%B3%D8%A9%22+%D8%A7%D8%B3%D8%AA%D8%AE%D8%A7%D8%B5%22&hl=bn&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwj_tZTv0fiSAxVGT2wGHdh9KQsQ6AF6BAgNEAM#v=onepage&q=%D8%B3%D9%8A%D8%A7%D8%B3%D8%A9%22%20%D8%A7%D8%B3%D8%AA%D8%AE%D8%A7%D8%B5%22&f=false |access-date=27 February 2026 |language=en |quote=وقد قال علي بن أبي طالب رضي الله تعالى عنه: خذ على عدوك بالفضل فإنه أحد الظفرين " وإن دعت الضرورة إلى المناجزة بعد الإعذار والإنذار، أيقظ لها عزمه، واستعمل فيها حزمه، وأقدم عليها بعد الاستخارة متبعاً للدين، ومستعملاً للعدل، فلن يعدل عنهما إلا باغ مصروع}}</ref>
{{quote|अबू हुरैरा (रज़ि.) कहते हैं, मैंने अल्लाह के रसूल (सल्ल.) से ज्ञान के दो बर्तन सुरक्षित रखे हैं। जिनमें से एक को तो मैंने फैला (प्रचार) दिया। लेकिन यदि मैं दूसरे को भी फैलाता, तो मेरी यह स्वरनली (गला) काट दी जाती।" (बुखारी हदीस/120; मिशकात हदीस/271)}}
{{Quote|दूसरे वर्णन में आया है, उनसे कहा गया कि आप अधिक हदीस का वर्णन करते हैं। उन्होंने कहा, मैंने रसूल (सल्ल.) से जो कुछ सुना है, यदि मैं वह सब का सब वर्णन कर देता, तो तुम मुझे पत्थर मारकर मार डालते; कोई मोहलत नहीं देते। (अहमद हदीस/10972, संदर्भ सहिह)}}
उक्त हदीस की व्याख्या में विद्वानगण कहते हैं कि यह फितने (उपद्रव) से संबंधित विषय था या तत्कालीन शासक के विरुद्ध था, जिसे प्रकट करने पर उसकी हत्या कर दी जाती। या शायद यह ऐसा विषय था जिसे छिपाने से धर्म को कोई हानि नहीं होती, बल्कि प्रकट करने से फितना बढ़ जाता, इसीलिए उन्होंने इसे प्रकट नहीं किया। यहाँ तक कि जिनके हाथों से इस्लामी नेतृत्व छिन जाने की रसूल (सल्ल.) ने चेतावनी दी थी, वे उनके नाम भी जानते थे। अबू हुरैरा (रज़ि.) ने कहा, मैंने 'अस-सादिकुल मसदूक' (सच्चे और सत्य के रूप में प्रमाणित) को यह कहते हुए सुना है, 'मेरे उम्मत का विनाश कुरैश के कुछ लड़कों के हाथों होगा।' तब मरवान ने कहा, इन लड़कों पर अल्लाह की लानत बरसे। अबू हुरैरा (रज़ि.) ने कहा, यदि मैं यह कहना चाहूँ कि वे फलां-फलां गोत्र के लोग हैं, तो मैं उनके नाम बताने में सक्षम हूँ <ref>(बुखारी हदीस/3605)</ref>। अम्र बिन यह्या कहते हैं कि जब मरवान सीरिया के शासक बने, तो मैं अपने दादा के साथ वहाँ गया। जब उन्होंने उनके कम उम्र लड़कों को देखा, तो उन्होंने हमसे कहा, शायद ये लोग उसी दल के अंतर्गत हैं। हमने कहा, इस विषय में आप ही बेहतर जानते हैं <ref>(बुखारी हदीस/7058)</ref>। इन्हीं के नाम अबू हुरैरा (रज़ि.) ने छिपाए थे <ref>(रशीद रज़ा, तफ्सीरुल मनार 6/390; ताहिर अल-जजायरी, तौजीहुन नजर 1/63-64)</ref>। इस संबंध में इमाम कुर्तुबी कहते हैं कि अबू हुरैरा (रज़ि.) ने जिस बात को प्रकट नहीं किया और जिसे प्रकट करने में वे अपने जीवन के लिए जोखिम महसूस कर रहे थे, वह फितने से संबंधित विषय और मुर्तदों तथा मुनाफिदों के सहयोगियों के विरुद्ध साक्ष्य था। वे मार्गदर्शन और विधान से संबंधित नहीं थे <ref>(तफ्सीर कुर्तुबी 2/186)</ref>। हाफ़िज़ इब्ने हजर (रह.) कहते हैं कि अबू हुरैरा (रज़ि.) ने ज्ञान के जिस बर्तन को नहीं खोला था, उसकी व्याख्या में उलेमा-ए-किराम ने कहा है कि उस बर्तन में निकृष्ट नेताओं के नाम, स्थिति और कालखंड स्पष्ट रूप से उल्लेखित थे। हालाँकि अबू हुरैरा (रज़ि.) ने कभी-कभार उनकी उपमाओं का उल्लेख किया है, लेकिन जीवन के भय से स्पष्ट रूप से नाम का उल्लेख नहीं किया। जैसे कि वे दुआ में कहा करते थे, हे अल्लाह! मैं तुझसे साठ हिजरी से शरण मांगता हूँ। लड़कों के नेतृत्व से शरण मांगता हूँ। इससे उनका संकेत यज़ीद बिन मुआविया के खिलाफत की ओर था, क्योंकि वह साठ हिजरी में खलीफा बने थे। अल्लाह ने उनकी दुआ स्वीकार की और वह उनसठ हिजरी में ही परलोक सिधार गए <ref>(फत्हुल बारी 1/216)</ref>।<ref>{{cite journal |last1=At-tahreek |first1=Monthly |title=প্রশ্ন (১৬/২১৬) : আবু হুরায়রা (রাঃ) বলেছেন, ‘আমাকে নবী করীম (ছাঃ) দু’টি বস্ত্ত দিয়েছেন। একটি প্রকাশ করেছি। অপরটি প্রকাশ করলে আমার গর্দান কাটা যাবে। তিনি কি ইলমে তাছাউফের জ্ঞান গোপন করেছিলেন, যেমনটি অনেকে বলে থাকেন? - -মুজাহিদুল ইসলাম, সি এ্যান্ড বি ঘাট, চাঁপাই নবাবগঞ্জ। |journal=মাসিক আত-তাহরীক । ধর্ম, সমাজ ও সাহিত্য বিষয়ক গবেষণা পত্রিকা |url=https://at-tahreek.com/article_details/3053 |access-date=28 February 2026 |language=en}}</ref><ref>{{cite web |title=মুখতাসার সহীহ আল-বুখারী {{!}} হাদিস: ১০১ [ ১২০] |url=https://www.hadithbd.com/hadith/link/?id=88796 |website=www.hadithbd.com |access-date=28 February 2026 |language=bn}}</ref>
== फ़िक़्ह शास्त्र में ==
[[इब्ने तैमिया]] अपनी पुस्तक 'सियासा शरिया' में कहते हैं कि नेता या शासकहीन अवस्था में एक रात बिताने से अधिक उत्तम है कि किसी अत्याचारी शासक के अधीन साठ वर्ष बिताए जाएँ।
[[नासिरुद्दीन अल्बानी]] अपनी पुस्तक 'दरसुश शैखुल अल्बानी' में कहते हैं, हे मुसलमानो, राजनीति से दूर रहना ही राजनीति के अंतर्गत है (أيّها المتأسلمون: من السياسة ترك السياسة) (मिन अस्-सियासा تاركة अल-सियासा, राजनीति से राजनीति का त्याग करना ही है)।<ref>{{cite web |title=ص10 - دروس للشيخ الألباني - عدم اهتمامهم بالسياسات - المكتبة الشاملة الحديثة |url=https://al-maktaba.org/book/7682/140 |website=al-maktaba.org |access-date=29 October 2022}}</ref> आगे वे कहते हैं:
{{quote|प्रश्न: हमसे सबसे पहले जो प्रश्न किया गया था, वह एक ऐसे संवेदनशील विषय के बारे में था, इसलिए अल्लाह आपको उत्तम प्रतिफल दे, क्योंकि आपने [[तबलीग जमात]] के कई विवादास्पद विषयों पर अपनी राय देने का श्रमसाध्य कार्य किया है, लेकिन यहाँ कुछ अन्य विवादास्पद विषय भी हैं जो अन्य दृष्टिकोणों से संबंधित हैं, जिनके उत्तर हम जानना चाहते हैं, संक्षेप में और फिर विस्तार से, अल्लाह आप पर दया करे: प्रश्नकर्ता कहता है: तबलीग जमात के एक मूल सिद्धांत के बारे में आपका क्या कहना है, जिसमें वे कहते हैं: हम बाहर (दावती कार्यों) जाने के दौरान चार विषयों पर बात नहीं करते हैं, क्योंकि इन चार विषयों पर बात करने से फितना पैदा होता है, और वे हैं: राजनीति, फिक़्ह, मतभेद या इख्तिलाफ और दलीय भिन्नता? उत्तर: और हम अल्लाह से दुआ करते हैं कि अल्लाह उन्हें सीधा रास्ता दिखाए! प्रारंभिक रूप से हम राजनीति के विषय में उनके साथ सहमत हैं, लेकिन समग्र रूप से नहीं। इसे हम जिस रूप में देखते हैं, उसे मैं इससे पहले कई बार कह चुका हूँ। हमें सीरिया में पूछताछ का सामना करना पड़ा था, और वहाँ हम खुफिया एजेंसी के प्रश्नों के दायरे में आए थे, दुर्भाग्यवश जैसा कि वे प्रत्येक मुस्लिम देश में करते हैं: तुम सभा कर रहे हो, दल बना रहे हो, ऐसा इत्यादि-इत्यादि। और मैंने कहा: यह दल सुधार के लिए है, राजनीति के लिए नहीं, और एक घंटे से अधिक लंबी चर्चा के बाद जब इस बासपंथी (बास पार्टी या हिज्बु अल-बास, सीरिया का एक राजनीतिक दल) प्रश्नकर्ता को कानूनी दृष्टिकोण से विचार करने योग्य कोई मार्ग नहीं मिला, तो उसने कहा: ठीक है, जाओ और अपना درس (पाठ) पढ़ाते रहो, लेकिन राजनीति के बारे में बात मत करो, हालाँकि मैंने उसे स्पष्ट करते हुए कहा था: हम सुधार का आह्वान करते हुए अपनी ओर बुलाते हैं, और वह है कुरआन और सुन्नत की ओर लौटना जैसा कि आप हमेशा और जीवनभर सुनते आए हैं, और मैंने इसके बारे में पहले भी विस्तार से बताया था, लेकिन अब आप फिर से उसी बात पर लौट आए हैं: लेकिन राजनीति में मत उलझो। इसलिए यह मुझे आपके सामने कुछ बातें रखने के लिए बाध्य करता है। यह सच है कि हम राजनीति में नहीं उलझते। क्योंकि राजनीति में न उलझना इस्लाम का हिस्सा नहीं है, यह बात सही नहीं है। राजनीति इस्लाम का हिस्सा है, और कुछ इस्लामी विद्वान इब्ने तैमिया की पुस्तक "सियासा शरिया, कादिमान वा हदीसान" (शरिया की (राजनीति, अतीत और वर्तमान) से परिचित हैं। इस्लामी राज्य भी राजनीति के दायरे से बाहर नहीं है, और राजनीति (सियासात) शब्द का अर्थ क्या है? वह है: लोगों या जनता की नीति (सियासातुल नास, वि.द्र.: अरबी में नीति और राजनीति दोनों के लिए 'सियासात' शब्द का प्रयोग किया जाता है) और उनकी परलोक और इहलोक की हितों के अनुसार उनकी समस्याओं का समाधान स्थापित करना। हम खुद को राजनीति से जोड़ने की आवश्यकता से इनकार नहीं करते हैं, लेकिन हमने देखा है - और इस संबंध में हमारे पास साक्ष्य भी हैं - वह यह है कि राजनीति का त्याग करना भी राजनीति का ही हिस्सा है। राजनीति में अस्थायी या आंशिक रूप से भाग लेना पड़ता है, लेकिन इसका पूरी तरह त्याग नहीं किया जा सकता, अन्यथा ऐसी राजनीति के बिना मुस्लिम राज्य कैसे स्थापित होगा? लेकिन जिन्हें राजनीति में भाग लेना चाहिए, वे अवश्य ही आलिम (विद्वान) होने चाहिए, किताब (कुरआन) और सुन्नत (इस्लामी पैगंबर मुहम्मद के आदर्श) की सही समझ और सलफ-ए-सालेहीन (पूर्ववर्ती विद्वानों) की समझ के अनुसार इत्यादि, और इसलिए हम उनके साथ (तबलीग जमात के साथ) इस विषय पर प्रारंभिक रूप से सहमत हैं, हम सामान्यतः उनके साथ सहमत हैं, लेकिन विस्तार में हम उनके साथ सहमत नहीं हैं, इसलिए अब हम कहते हैं: राजनीति का त्याग करना भी राजनीति का ही हिस्सा है।}}
[[इखवानुल मुस्लिमिन]] और सममिश्रित मुस्लिम दल अल्बानी के इस मत का तीव्र विरोध करते हुए कहते हैं कि इसके द्वारा अल्बानी ने धर्म और राजनीति को अलग कर दिया है।<ref>{{cite news |last1=جمعة |first1=محمد |title=أيّها المتأسلمون: من السياسة ترك السياسة |url=https://www.alarabiya.net/politics/2015/09/07/%D8%A3%D9%8A%D9%91%D9%87%D8%A7-%D8%A7%D9%B-%D9%85%D8%AA%D8%A3%D8%B3%D9%84%D9%85%D9%88%D9%86-%D9%85%D9%86-%D8%A7%D9%84%D8%B3%D9%8A%D8%A7%D8%B3%D8%A9-%D8%AA%D8%B1%D9%83-%D8%A7%D9%84%D8%B3%D9%8A%D8%A7%D8%B3%D8%A9- |access-date=29 October 2022 |agency=العربية |date=7 September 2015 |language=ar}}</ref> अल्बानी के अनुयायी इसका विरोध करते हुए कहते हैं कि यहाँ राजनीति से तात्पर्य इस्लाम के नाम पर सत्ता, सम्मान और धन की लालसा की प्रतिस्पर्धी नकारात्मक राजनीति से है। इस्लामी समाज के निर्माण के मार्ग और पद्धति के संबंध में अल्बानी 'तसफियाह' और 'तर्बियतः' (आत्मशुद्धि और प्रशिक्षण) को महत्व देते हुए कहते हैं:
{{quote|वर्तमान में मुसलमानों की स्थिति यह है कि वे भौतिक शक्ति से संपन्न काफ़िर राष्ट्रों से घिरे हुए हैं और ऐसे शासकों के हाथों उत्पीड़ित जीवन बिता रहे हैं जो अल्लाह के विधान के अनुसार देश का संचालन नहीं करते, और यदि करते भी हैं तो बहुत ही कम। जिसके परिणामस्वरूप अवसर और सामर्थ्य होने के बावजूद उन्हें संगठनात्मक और राजनीतिक गतिविधियाँ संचालित करने का अवसर नहीं मिल रहा है। इस संबंध में मेरा मानना है कि मुस्लिम दलों को केवल दो महत्वपूर्ण विषयों की ओर ही अग्रसर होना चाहिए। मेरा विश्वास है कि इन दो विषयों के बिना मुसलमानों की इस दुर्बलता, लज्जा और अपमान से मुक्ति पाने का कोई अन्य उपाय नहीं है। मैं सभी विश्वासी मुस्लिम भाई-बहनों से, विशेष रूप से जागरूक और प्रतिबद्ध युवाओं से कह रहा हूँ, सबसे पहले जिस विषय को हमें जानना चाहिए, वह है मुसलमानों की करुण स्थिति। और दूसरी बात जिस पर ध्यान देना चाहिए, वह है अपनी पूरी शक्ति और सामर्थ्य के साथ इससे मुक्ति पाने के उपाय की तलाश करना। आज करोड़ों मुसलमान केवल भौगोलिक वास्तविकता या अपनी पहचान की रक्षा के लिए ही मुस्लिम हैं। अर्थात् अपनी राष्ट्रीयता, पहचान पत्र और जन्म प्रमाण पत्र में दर्ज परिचय के अनुसार मुस्लिम हैं। आज मैं उनके उद्देश्य से कुछ नहीं कहूँगा। मैं फिर से सभी से कहूँगा, उन मुक्ति की कामना करने वाले युवाओं के हाथों में मुक्ति के केवल दो ही मार्ग खुले हैं—(1) तसफियाह अर्थात अकीदे (विश्वास) का संशोधन (2) तर्बियत अर्थात अमली प्रशिक्षण और अभ्यास। तसफियाह का अर्थ है, मुस्लिम युवाओं के सामने उस शुद्ध इस्लाम को प्रस्तुत करना, जो युगों के अंतराल में शामिल हो चुके भ्रामक अकीदों, अंधविश्वासों, बिदअतों और सभी प्रकार की जाइफ और मघट (कमजोर) हदीसों से मुक्त हो। इस अकीदगत् सुधार को कार्यान्वित किए बिना दूसरा कोई मार्ग खुला नहीं है। इस सुधार के बिना मुसलमानों के बीच अपेक्षित शांति और सुरक्षा वापस लाने का कोई अवसर नहीं है। इस 'तसफियाह' का उद्देश्य इस्लाम को एकमात्र उपचार के रूप में प्रस्तुत करना है, जिसने उसी प्रकार उन अरबों का उपचार किया था, जो एक तरफ फारसी, रोमन और हबशियों के सामने अपमानित और उत्पीड़ित अवस्था में थे, तो दूसरी तरफ अल्लाह के अलावा गैरुल्लाह (अल्लाह के सिवाय अन्य) की इबादत करते थे। इस स्थिति से हम सभी इस्लामी दलों और समूहों का विरोध करते हैं और विश्वास करते हैं कि तसफियाह और तर्बियत को एक साथ शुरू किया जाना चाहिए। यदि हम राजनीति से शुरुआत करते हैं, तो हम पाएंगे कि जो लोग अभी राजनीति में डूबे हुए हैं, उनके अकीदे दूषित हैं। और इस्लामी दृष्टिकोण से उनका आचरण काफी हद तक शरिया के विपरीत है। वे केवल आम तौर पर इस्लाम के नाम पर लोगों को इकट्ठा करने में व्यस्त हैं। जबकि उनके लक्ष्य और विचारधारा के बारे में उन आम जनता को कोई स्पष्ट धारणा नहीं है। परिणाम स्वरूप उनके दैनिक जीवन में इस्लाम का कोई प्रभाव नहीं पाया जाता है। देखा जाएगा कि उनमें से अधिकांश अपने व्यक्तिगत जीवन में भी इस्लामी विधि-विधानों को लागू नहीं करते हैं, जो उनके लिए काफी आसान था। इसके बावजूद वे ऊंचे स्वर में नारे लगा रहे हैं: لا حكم إلا لله ('अल्लाह के हुक्म के बिना कोई हुक्म नहीं चलेगा!')। यह बात बिल्कुल सही है कि अल्लाह के उतारे हुए हुक्म के बिना कोई दूसरा हुक्म नहीं चल सकता। लेकिन यह याद रखना चाहिए कि فاقد الشيء لا يعطيه अर्थात् 'जो व्यक्ति खुद जो चीज़ खो चुका है, वह दूसरे को वह चीज़ नहीं दे सकता।' आधुनिक काल के अधिकांश मुसलमान अपने जीवन में अल्लाह के विधान को स्थापित किए बिना यदि दूसरों से राज्य में इस्लाम की स्थापना के लिए संघर्षपूर्ण भूमिका की अपेक्षा करते हैं, तो वे कभी भी अपने उद्देश्य को पूरा करने में सक्षम नहीं होंगे। क्योंकि यदि कोई व्यक्ति कोई चीज़ खुद ही खो बैठा हो, तो वह दूसरे को वह चीज़ नहीं दे सकता। और वे शासक भी तो इसी उम्मत (समुदाय) के अंतर्गत आते हैं। इसलिए शासक और शासित दोनों को ही इस दुर्बलता के कारणों को जानना चाहिए। यह जानना चाहिए कि मुस्लिम शासक अधिकांश मामलों में इस्लाम के विधान के अनुसार शासन क्यों नहीं कर रहे हैं? क्यों मुस्लिम दाई (प्रचारक) दूसरों को राज्य में इस्लाम की स्थापना का आह्वान करने से पहले अपने जीवन में इस्लामी विधान को लागू नहीं कर रहे हैं? इसका एकमात्र उत्तर यह है—उनमें से किसी के पास भी इस्लाम के बारे में सतही ज्ञान के अलावा सही ज्ञान या समझ नहीं है या फिर उनका चाल-चलन, जीवन-यापन, स्वभाव-चरित्र और आपसी लेन-देन—किसी भी क्षेत्र में इस्लामी मूल्यों का विकास नहीं हुआ है। परिणाम स्वरूप मेरे अनुभव के आधार पर मैं जो कह सकता हूँ, वह यह है कि वे एक बड़ी भ्रांति में डूबे हुए हैं। और वह है—धर्म की सही समझ से दूर छिटक जाना। यहाँ तक कि आज के दिन कुछ दाई यह सोचते हैं कि सलाफी केवल तौहीद के दावत में ही अपना जीवन बिता गए। सुब्हानल्लाह! कितनी मूर्खता में डूबा हुआ है वह व्यक्ति, जो अज्ञानतावश ऐसी बात कहता है। यदि वह वास्तव में गाफिल (लापरवाह) न भी हो, तब भी सभी नंबियों और राष्ट्रों (पैगंबरों) के दावत के बारे में उसके ज्ञान में कमी है। क्योंकि सभी नबियों का दावत यही था, 'तुम अल्लाह की इबादत करो और तागूत से बचो' (नहल 16/36)। नूह (अलै.) ने 950 वर्षों तक केवल यही दावत दी थी। वहाँ उन्होंने कोई नया सुधार नहीं किया, कोई नया विधान नहीं बनाया, कोई राजनीति नहीं की। बल्कि उन्होंने केवल इतना कहा था, हे मेरी कौम! तुम एक अल्लाह की इबादत करो और तागूत से बचो।' यही पूर्ववर्ती सलाफ अंबिया-ए-किराम की गतिविधियाँ थीं! तो फिर ये सभी मुस्लिम दाई इतने नीचे कैसे गिर सकते हैं कि वे उसी गतिविधि के लिए सलाफियों की निंदा करें? दूसरा मार्ग है तर्बियत यानी प्रशिक्षण। युवाओं को इस प्रकार प्रशिक्षित किया जाना चाहिए कि वे पूर्ववर्तियों की तरह दुनिया के मोह में न पड़ें। रसूल (सल्ल.) ने कहा है: وَاللهِ مَا الْفَقْرَ أَخْشَى عَلَيْكُمْ. وَلَكِنِّى أَخْشَى عَلَيْكُمْ أَنْ تُبْسَطَ الدُّنْيَا عَلَيْكُمْ كَمَا بُسِطَتْ عَلَى مَنْ كَانَ قَبْلَكُمْ فَتَنَافَسُوهَا كَمَا تَنَافَسُوهَا وَتُهْلِكَكُمْ كَمَا أَهْلَكَتْهُمْ 'अल्लाह की कसम! मैं इस बात का डर नहीं रखता कि तुम गरीबी में पड़ जाओगे। बल्कि मुझे इस बात का डर है कि जब तुम्हारे सामने दुनिया के साजो-सामान के द्वार वैसे ही खोल दिए जाएंगे जैसे तुमसे पहले के लोगों के लिए खोले गए थे, तो तुम भी उनकी तरह दुनिया हासिल करने के लिए आपस में मुकाबला करने लगोगे, और यह चीज़ तुम्हें उसी तरह बर्बाद कर देगी जैसे उसने उनसे पहले के लोगों को बर्बाद कर दिया था' (बुखारी, मुस्लिम, मिशकात हदीस/5১৬৩)। मुसलमानों को एक और बीमारी से अवश्य बचना चाहिए ताकि वह किसी भी तरह उनके दिल में घर न कर सके। और वह है—दुनिया से अत्यधिक प्रेम और मृत्यु से न डरना (अबू दाऊद, मिशकात हदीस/5369)। यह एक ऐसी बीमारी है जिसका उपचार करना और लोगों को इससे बचाना अनिवार्य है। इसका समाधान रसूल (सल्ल.) ने एक हदीस के अंत में इस प्रकार बताया है: حَتَّى تَرْجِعُوا إِلَى دِينِكُمْ 'जब तक कि तुम अपने धर्म की ओर वापस नहीं लौट आते' (अबू दाऊद हदीस/3462)। अर्थात् मुक्ति का मार्ग शुद्ध धर्म की ओर लौटने से ही स्पष्ट होगा, जिस धर्म पर रसूल (सल्ल.) और सहाबा-ए-किराम अटल थे। अल्लाह तआला का इरशाद है: إِنْ تَنْصُرُوا اللهَ يَنْصُرْكُمْ 'यदि तुम अल्लाह की सहायता करोगे, तो वह तुम्हारी सहायता करेगा' (मुहम्मद 47/7)। मुफस्सिरीन (व्याख्याकार) इस बात पर सहमत हैं कि इस आयत में 'अल्लाह की सहायता करने' का अर्थ है—उसके आदेशों और निषेधों के अनुसार आचरण करना। अतः अल्लाह की सहायता करना यदि अल्लाह के विधान को लागू किए बिना असंभव है, तो हम वास्तविक जिहाद में कैसे उतर सकते हैं, जबकि हम अल्लाह की सहायता नहीं कर रहे हैं? क्योंकि हमारा अकीदा जितना अशुद्ध है, हमारी नैतिकता भी उतनी ही पतन की ओर जा रही है। इसलिए जिहाद शुरू करने से पहले इस उपेक्षा, उदासीनता और आपसी विवादों के विरुद्ध युद्ध की घोषणा और शुद्ध अकीदा तथा आत्मशुद्धि प्राप्त करने का प्रयास ही हमारा आवश्यक प्राथमिक कार्यक्रम होना चाहिए। अल्लाह का इरशाद है: لاَ تَنَازَعُوا فَتَفْشَلُوْا وَتَذْهَبَ رِيحُكُمْ 'तुम आपस में झगड़ा मत करो, अन्यथा तुम साहस खो बैठोगे और तुम्हारी शक्ति समाप्त हो जाएगी' (अनफाल 8/46)। इसलिए जब हम इस मतभेद और लापरवाही को समाप्त करने में सक्षम हो जाएंगे और इसके स्थान पर आपसी प्रेम और एकता को जगा सकेंगे, तो वही हमारी worldly (दुनियावी) शक्ति की मुख्य चाबी होगी। अल्लाह का इरशाद है: أَعِدُّوا لَهُمْ مَا اسْتَطَعْتُمْ مِنْ قُوَّةٍ وَمِنْ رِبَاطِ الْخَيْلِ 'और उनके मुकाबले के लिए अपनी शक्ति भर ताकत और घोड़ों को तैयार रखो' (अनफाल 8/60)। चारित्रिक दृष्टिकोण से भी मुसलमानों की स्थिति विनाशकारी और गंभीर भ्रम में डूबी हुई है। इसीलिए एक गैर-सलाफी प्रसिद्ध मुस्लिम दाई (काज़ी हसन हुजैमी) का कथन मुझे चकित करता है, हालांकि उनके अनुयायी उनके कथन के अनुसार नहीं चलते। उन्होंने कहा है: أَقِيْمُوْا دَوْلَةَ الْإِسْلاَمِ فِيْ قُلُوْبِكُمْ تُقَمْ لَكُمْ فِيْ أَرْضِكُمْ 'तुम अपने दिलों में इस्लामी खिलाफत स्थापित करो, तभी तुम्हारी धरती पर इस्लामी खिलाफत स्थापित होगी।' अधिकांश दाई तब भूल करते हैं जब वे हमारे इस मूल सिद्धांत की उपेक्षा करते हैं। वैसी ही भूल वे तब कर बैठते हैं जब वे कह बैठते हैं कि إن الوقت ليس وقت التصفية والتربية ، وإنما وقت التكتل والتجمُّع 'अब तसफियाह और तर्बियत का समय नहीं है, बल्कि अब तो एकजुट और संगठित होने का समय है।' जबकि ऐसी स्थिति में एकजुट होना कैसे संभव हो सकता है जब बुनियादी और शाखागत सिद्धांतों में विभाजन विद्यमान हो?... यह दुर्बलता आज मुसलमानों के बीच व्यापक रूप से बढ़ रही है। और इससे मुक्ति पाने का एकमात्र उपाय वही है जो मैंने पहले कहा—शुद्ध इस्लाम की ओर उचित रूप से लौटना और समाज में तसफियाह और तर्बियत की नीति को कार्यान्वित करना। आशा है कि इतना ही पर्याप्त होगा। समस्त प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जो सारे संसार का पालनहार है। (मुहम्मद बिन इब्राहिम आश-शायबानी, 'हयातुल अल्बानी व आसारुहू व सनाउल उलामा अलैहे' 377-391)।<ref>{{cite journal |last1=नाजीब |first1=अहमद अब्दुल्लाह |title=শায়খ আলবানীর তাৎপর্যপূর্ণ কিছু মন্তব্য (২য় কিস্তি) |journal=মাসিক আত-তাহরীক । ধর্ম, সমাজ ও সাহিত্য বিষয়ক গবেষণা পত্রিকা |url=https://at-tahreek.com/article_details/6558 |access-date=11 November 2022 |language=bn}}</ref>}}
[[अब्दुल्लाह जहांगीर]] अपनी पुस्तक 'हदीस के नाम पर जालसाजी' में कहते हैं:
{{quote|हदीस के नाम पर झूठ बोलने का एक प्रकार यह है कि अनुवाद के दौरान शाब्दिक अनुवाद न करके अनुवाद के साथ अपनी इच्छा से कुछ जोड़ दिया जाए या कुछ हिस्सा छोड़ दिया जाए। या फिर रसूलुल्लाह (ﷺ) ने जो कहा है, उसकी व्याख्या को ही हदीस का हिस्सा बना दिया जाए। हमारे समाज में हम लगभग सभी इस अपराध में लिप्त हैं। आत्मशुद्धि, पीर-मुरीदी, दावत-तबलीग, राजनीति और मतभेद से जुड़े विभिन्न मसाइल के लिए हम प्रत्येक दल और मत के लोग कुरआन और हदीस से प्रमाण देते हैं। इस प्रकार प्रमाण देना अत्यंत स्वाभाविक कार्य और ईमान का दावा है। हालाँकि आमतौर पर हम अपनी इस व्याख्या को ही रसूलुल्लाह (ﷺ) के नाम पर प्रचारित करते हैं। जैसे कि रसूलुल्लाह (ﷺ) ने राज्य का संचालन किया, लेकिन प्रचलित अर्थ में 'दलीय राजनीति' नहीं की, यानी वोटों के माध्यम से सत्ता परिवर्तन जैसी कोई बात नहीं की। वर्तमान समय में कई आलिम लोकतांत्रिक 'राजनीति' कर रहे हैं। न्याय का आदेश देने, बुराई से रोकने या इकामत-ए-दीन (धर्म की स्थापना) की एक नई पद्धति के रूप में इसे स्वीकार किया जाता है। हालाँकि यदि हम यह कहें कि 'रसूलुल्लाह (ﷺ) ने राजनीति की है', तो श्रोता या पाठक 'राजनीति' का प्रचलित अर्थ, यानी वोटों के माध्यम से सत्ता पर कब्जा करने की बात ही समझेंगे। और ऐसी राजनीति उन्होंने नहीं की थी। परिणाम स्वरूप इस प्रकार उनके नाम पर झूठ बोला जाएगा। इसलिए हमें यह अलग-अलग स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने क्या किया और क्या कहा था, और हम उसकी क्या व्याख्या कर रहे हैं। रसूलुल्लाह ﷺ ने आजीवन धर्म का प्रचार किया। धर्म के लिए उन्होंने और उनके कई साथियों ने हमेशा के लिए अपना घर-बार छोड़कर 'हिजरत' की थी। लेकिन उन्होंने कभी भी दावत के लिए समय निर्धारित करके 2-1 महीने के लिए सफर पर 'बाहर' नहीं गए। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कई लोग हिजरत तो नहीं करते, लेकिन कम से कम कुछ समय के लिए विभिन्न स्थानों पर जाकर दावत का काम कर रहे हैं। लेकिन हम इस कार्य के लिए यदि यह कहें कि रसूलुल्लाह ﷺ दावत के लिए 'बाहर' जाते थे, तो पाठक या श्रोता 'निर्धारित समय के लिए बाहर जाने' का अर्थ समझेंगे। जबकि उन्होंने कभी भी इस प्रकार दावत का काम नहीं किया था। इससे उनके नाम पर झूठ बोला जाएगा।<ref>http://www.hadithbd.com/books/link/?id=4644</ref>}}
[[अब्दुल्लाह जहांगीर]] अपनी पुस्तक ''इस्लाम के नाम पर आतंकवाद'' में [[सूफी-सलाफी संबंध|सूफी-सलाफी (वहाबी) संबंध]], उनकी राजनीतिक और दार्शनिक दृष्टि तथा पश्चिमी दुनिया में इसके दुरुपयोग और गलत व्याख्या के बारे में कहते हैं:
{{quote|'वहाबी विचारधारा' को आतंकवाद के कारण के रूप में कई शोधकर्ताओं ने उल्लेख किया है। सऊदी अरब के धार्मिक नेता मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब (1703-1792 ई.) द्वारा प्रचारित विचारधारा को 'वहाबी' विचारधारा कहा जाता है। उन्होंने तत्कालीन अरब में प्रचलित कब्र पूजा, कब्रों को सजदा करना, कब्रों या पेड़ों पर धागा बांधना, मन्नतें मानना और अन्य विभिन्न प्रकार के अंधविश्वासों, शिर्क, बिदअत आदि का विरोध किया। उनका यह वक्तव्य केवल विरोध तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसके अलावा वे अपने विरोधियों को मुशरिक करार देते थे। 1745 ईस्वी में वर्तमान सऊदी अरब की राजधानी रियाद के पास स्थित 'दिरइयाह' नामक एक छोटे से ग्राम-राज्य के शासक अमीर मुहम्मद इब्न सऊद (मृत्यु 1765) उनके साथ मिल गए। उनके अनुयायियों ने उनके विरोधियों को मुशरिक मानना शुरू कर दिया और उनके खिलाफ सैन्य अभियान शुरू कर दिए। 1804 तक मक्का-हिजाज़ सहित अरब प्रायद्वीप का अधिकांश भाग 'सऊदी'-'वहाबी' लोगों के अधीन आ गया। तत्कालीन तुर्क खिलाफत ने इस नए राज्य को अपने आधिपत्य और नेतृत्व के लिए अत्यंत हानिकारक माना। क्योंकि एक तरफ मक्का-मदीना सहित इस्लाम का केंद्र उनके हाथों से निकल गया, वहीं दूसरी ओर मूल अरब में स्वतंत्र राज्य का उदय मुस्लिम दुनिया में तुर्कों के एकछत्र नेतृत्व के लिए एक खतरा बन गया। इसी कारण तुर्क खलीफा ने अपने दरबार के आलिमों के माध्यम से वहाबियों को धर्मद्रोही, काफ़िर और इस्लाम के प्रमुख शत्रुओं में से एक के रूप में फतवा जारी किया। मुस्लिम दुनिया भर में इनके खिलाफ जोरदार प्रचार अभियान चलाया गया, ताकि कोई भी इस नए राज्य को इस्लामी खिलाफत का उत्तराधिकारी न समझे। साथ ही उन्होंने तुर्क नियंत्रण के तहत मिस्र के शासक मुहम्मद अली को वहाबियों के खिलाफ युद्ध संचालित करने का आदेश दिया। मिस्र की सेना के अभियानों के सामने 1818 में सऊदी राज्य का पतन हो गया। इसके बाद सऊदी राजवंश के वंशजों ने बार-बार अपने राज्य को पुनः प्राप्त करने का प्रयास किया। अंततः इस वंश के 'अब्दुल अजीज इब्न अब्दुर रहमान अल-सऊद (1879-1953) ने 1901 से 1924 ईस्वी तक लंबे युद्धों के माध्यम से वर्तमान 'सऊदी अरब' की स्थापना की। अठारहवीं शताब्दी से लेकर मुस्लिम दुनिया में जहाँ भी कोई सुधारवादी दावत या आह्वान प्रचारित किया गया, सऊदी 'वहाबियों' ने उसे मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब के आदर्शों से प्रभावित होने का दावा किया। दूसरी ओर, तुर्क प्रचार के कारण 'वहाबी' शब्द मुस्लिम समाज में एक अत्यंत घृणित शब्द बन गया। उन्हें अन्य भ्रमित समुदायों की तुलना में अधिक घृणा की दृष्टि से देखा जाने लगा। परिणामस्वरूप ब्रिटिश औपনিবেশिक सरकार ब्रिटिश विरोधी आलिमों को वहाबी के रूप में प्रचारित करती थी, ताकि आम मुसलमानों के बीच उनकी स्वीकार्यता न रहे। इसके अलावा मुस्लिम समाज के विभिन्न धार्मिक समुदाय एक-दूसरे की निंदा करने के लिए 'वहाबी' शब्द का व्यापक उपयोग करते हैं। मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब के समकालीन भारतीय मुस्लिम सुधारक शाह वलीullah देहलवी (1703-1762 ई.) थे। अपने मत के प्रचार की शुरुआत में 1731 ईस्वी में वे मक्का गए और तीन वर्ष तक वहीं रहे। इसके बाद देश लौटकर उन्होंने भारत में इस्लामी शिक्षा के प्रसार में विशेष योगदान दिया। उन्होंने भी कब्र पूजा, पीर पूजा, कब्र पर मन्नतें मांगने, कब्रवासियों या जीवित पीरों या औलियाओं से आपदाओं से मुक्ति की सहायता मांगने और अन्य शिर्क, बिदअत, अंधविश्वास, मजहबी अतिवाद आदि की कड़ी आलोचना और विरोध किया। इसी कारण कुछ लोगों ने उन्हें 'वहाबी' के रूप में चिन्हित करने का प्रयास किया है। हालाँकि भारत के सबसे पहले और प्रसिद्ध 'वहाबी' नेता शाह वलीullah के पुत्र शाह अब्दुल अजीज (1346-1823 ई.) के प्रमुख छात्रों में से एक सैयद अहमद बरेलवी (1786-1831 ई.) थे। उन्होंने पूरे भारत में मजारों, दरगाहों, व्यक्ति पूजा, मृत मनुष्यों के नाम पर मन्नतें, शिन्नी आदि विभिन्न शिर्क, बिदअत और अंधविश्वासों के खिलाफ प्रचार किया। इसके अलावा उन्होंने ब्रिटिश आधिपत्य के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। 1821 ईस्वी में वे हज के लिए गए। लगभग तीन वर्ष तक वहाँ रहने के बाद वे भारत लौट आए। 1826 ईस्वी में उन्होंने ब्रिटिश भारत से 'हिजरत' करके उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत की यात्रा की और वहाँ 'इस्लामी राज्य' की स्थापना की घोषणा की तथा स्वयं उस राज्य के प्रमुख बन गए। इसके बाद उनके नेतृत्व में भारत के विभिन्न क्षेत्रों के मुसलमान वहाँ एकत्र हुए और अंग्रेजों तथा सिखों के खिलाफ जिहाद की घोषणा की। कुछ युद्धों के बाद 1831 में बालाकोट के युद्ध में उनकी सेना पराजित हो गई और वे शहीद हो गए। इसके बाद लगभग 30 वर्षों तक सैयद अहमद बरेलवी के अनुयायियों ने अंग्रेजों के खिलाफ विभिन्न प्रकार के छिटपुट जिहाद और प्रतिरोध जारी रखे। 1803-4 में 'वहाबी' लोगों ने मक्का-मदीना पर कब्जा कर लिया और वहाँ के प्राचीन मजार-केंद्रित गुंबदों को ध्वस्त कर दिया। इससे आम मुसलमानों में व्यापक असंतोष पैदा हुआ। शाह वलीullah मुहाद्दिस देहलवी के अनुयायी भी 'वहाबियों' की तरह ही शिर्क, कुफ्र, बिदअत, अंधविश्वास आदि का विरोध करते थे। इस तरह उनके विचारों में 'वहाबियों' के विचारों से बाहरी समानता थी। 1823 ईस्वी में सैयद अहमद बरेलवी हज के अवसर पर मक्का गए। अंग्रेजी शासकों ने बड़ी चालाकी से यह प्रचारित किया कि 'जो लोग स्वतंत्रता के नाम पर आपको आपके धर्म की बातें सुना रहे हैं, वास्तव में वे इस्लाम के शत्रु और पैगंबर तथा सहाबा का अपमान करने वाले लोग हैं, इनका नाम वहाबी है, और इन्होंने ही आपके प्यारे रसूल (सल्ल.) के वंशजों की कब्रों को नष्ट करने का दुस्साहस किया है... और सैयद अहमद को उनका एजेंट नियुक्त किया गया है और ये सभी वहाबी हैं इसलिए ये लोग भी आपके आदरणीय पीर-बुजुर्गों और पूर्वजों की कब्रों को तोड़ना चाहते हैं...' इस तरह ब्रिटिश सरकार ने यह समझाने का प्रयास किया कि वास्तविक इस्लाम के खिलाफ उनकी कोई शत्रुता नहीं है। वे वास्तविक इस्लाम और मुसलमानों से बहुत प्यार करते हैं। वे केवल भटके हुए वहाबी संप्रदाय के लोगों का दमन कर रहे हैं और उन्हें दंडित कर रहे हैं। इसलिए इसमें आम अच्छे मुसलमानों के लिए परेशान होने या दुख महसूस करने का कोई कारण नहीं है। सैयद अहमद बरेलवी के शिष्यों से भारत में विभिन्न सुधारवादी धाराओं का जन्म हुआ। उनके शिष्यों में से कई लोगों ने निर्धारित मजहब के अनुसरण से इनकार कर दिया और खुद को 'अहले हदीस' के रूप में दावा किया। उनके शिष्य जौनपुर के पीर मौलाना करामत अली ने एक सुधारवादी धारा को जन्म दिया। फुरफुरा के पीर मौलाना अबू बक्र सिद्दीकी भी सैयद अहमद बरेलवी के अनुयायी और उनके प्र-शिष्य थे। देवबंदी आलिमों ने भी उन्हीं के शिष्यों से शिक्षा प्राप्त की है। इन सभी को उनके विरोधियों और औपনিবেশिक सरकार ने 'वहाबी', 'रंगीन वहाबी' या 'बहुरुपिया वहाबी' की संज्ञा दी है। सैयद अहमद बरेलवी के प्रमुख शिष्यों और समकालीन सुधारक मीर निसार अली उर्फ तीतूमिर (1782-1831) और समकालीन अन्य सुधारक हाजी शरीयतुल्लाह (1781-1840) को भी वहाबी कहा गया है और उनके आंदोलन तथा प्रतिरोध को वहाबी आंदोलन कहा गया है। 'वहाबी' शब्द के प्रयोग को समझने के लिए मैं एक उदाहरण प्रस्तुत करता हूँ। मीर निसार अली उर्फ तीतूमिर का जन्म 1782 ईस्वी में बंगाल के 24 परगना जिले में हुआ था। 1823 में हज के दौरान मक्का में सैयद अहमद बरेलवी से उनकी मुलाकात हुई। वे उनके मुरीद बन गए। देश लौटने पर उन्होंने अपने क्षेत्र के लोगों के बीच शुद्ध इस्लामी शिक्षा का प्रचार किया। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ बात की, लेकिन कभी भी हिंदू धर्म, धर्मावलंबियों या हिंदू जमींदारों के खिलाफ कुछ नहीं कहा। लेकिन उनकी शिक्षाओं से आम मुसलमानों के बीच धर्म का पालन बढ़ जाने के कारण क्षेत्र के हिंदू जमींदार क्रोधित हो गए। उन्होंने आम मुस्लिम प्रजा को बताया कि वे वास्तविक इस्लाम से बहुत प्यार करते हैं, लेकिन वे वहाबी विचारधारा का दमन करना चाहते हैं। युगों-युगों से मुसलमानों ने हिंदुओं की तरह नाम रखे हैं, दाढ़ी काटी है, मूंछें रखी हैं, मस्जिदें बनाने की जल्दी नहीं की है और गोहत्या नहीं की है। तीतूमिर वहाबी विचारधारा के अनुसार दाढ़ी रखने, मूंछें छांटने, मुसलमानी नाम रखने, मुसलमानों के गाँवों में मस्जिदें बनाने और कुर्बानी के नाम पर गोहत्या करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इससे हिंदू-मुस्लिम सौहार्द नष्ट हो रहा है। इसलिए वहाबी विचारधारा का दमन करना अत्यंत आवश्यक है। इनके दमन के कारण "अच्छे" मुसलमानों के गुस्से में होने या कष्ट पाने का कोई कारण नहीं है। इस कारण तारागुनिया के जमींदार रामनारायण बाबू, पूँड़ा के जमींदार कृष्णदेव राय, नगरपुर के जमींदार गौड़प्रसाद चौधरी और अन्य प्रसिद्ध जमींदारों ने मिलकर 5 विषयों पर नोटिस जारी किया: "(1) जो लोग तीतूमिर की शिष्यता ग्रहण करके वहाबी बनेंगे, दाढ़ी रखेंगे, मूंछें छाँटेंगे, उनमें से प्रत्येक को प्रति दाढ़ी अढ़ाई रुपये और प्रति मूंछ पांच सिक्का लगान देना होगा। (2) मस्जिद तैयार करने पर प्रत्येक कच्ची मस्जिद के लिए पाँच सौ रुपये और प्रत्येक पक्की मस्जिद के लिए एक हजार रुपये जमींदार सरकार को नजराना देना होगा। (3) पिता-पितामह या रिश्तेदार-संबंधी बच्चे का जो नाम रखेंगे, उस नाम को बदलकर वहाबी मत के अनुसार अरबी नाम रखने पर प्रत्येक नाम के लिए खारिजানা फीस पचास रुपये जमींदार सरकार के पास जमा करनी होगी। (4) गोहत्या करने पर हत्यारे का दाहिना हाथ काट लिया जाएगा, ताकि वह व्यक्ति फिर कभी गोहत्या न कर सके। (5) जो व्यक्ति वहाबी तीतूमिर को अपने घर में आश्रय देगा, उसे उसकी ज़मीन से बेदखल कर दिया जाएगा।" वास्तव में, तुर्क खिलाफत और ब्रिटिश सरकार के व्यापक प्रचार के कारण "वास्तविक इस्लाम" और "वहाबी इस्लाम" का यह विभाजन पश्चिमी शोधकर्ताओं के लिए सार्वभौमिक रूप ले चुका है। दुनिया के किसी भी कोने में सुधार आंदोलन, स्वतंत्रता आंदोलन, इस्लामी समाज और राज्य व्यवस्था की स्थापना का प्रयास, उपनिवेश विरोधी, साम्राज्यवाद विरोधी या पश्चिमी विरोधी आंदोलन में धार्मिक मुसलमान, आलिम, धार्मिक व्यक्तित्व या पीर-मशाइख की संलिप्तता होने पर उसे "वहाबी" के रूप में चिन्हित करने का प्रयास किया जाता है। वहाबी इस्लाम और वास्तविक इस्लाम के इस विभाजन के मामले में कई पश्चिमी शोधकर्ता वास्तविक इस्लाम को "सूफी इस्लाम" के रूप में चिन्हित करते हैं। उनके अनुसार, सूफी इस्लाम सांप्रदायिकता से मुक्त, गैर-राजनीतिक और उदार है। प्रमाण के रूप में वे कहते हैं कि एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका के मुस्लिम और गैर-मुस्लिम समाजों के अनगिनत सूफी दरबारों में स्त्री-पुरुष का भेद किए बिना सभी धर्मों और वर्णों के लोग एकत्र हो रहे हैं, ज़िक्र, वज़ीफा, समा-कव्वाली और अन्य कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं और तबर्रुक तथा दुआ प्राप्त कर रहे हैं। इन सभी दरबारों में आत्मशुद्धि और आध्यात्मिकता की शिक्षा दी जाती है, राजनीति और राजकीय विषयों पर चर्चा नहीं की जाती है। हमारे देश और दुनिया के अन्य देशों की ओर देखने पर हम सूफी इस्लाम के दो चरण देख सकते हैं। हम देखते हैं कि कई मुसलमान तसव्वुफ और सूफीवाद के नाम पर पीर-मशाइख को अल्लाह का अवतार या विशेष "दिव्य" संबंध या शक्ति का स्वामी मानते हैं, उन्हें सजदा करते हैं, उनकी कब्र-मजारों या समाधियों को सजदा करते हैं, सलात, सियाम आदि शरिया के अहकाम (आदेशों) का पालन करने को महत्वहीन मानते हैं और गाना-बजाना तथा नृत्य-संगीत को सूफी इस्लाम का महत्वपूर्ण पहलू मानते हैं। ये लोग खुद को वास्तविक सूफी और वास्तविक सुन्नी होने का दावा करते हैं। जो लोग पीर को सजदा करने, कब्र को सजदा करने, गाना-बजाना, धूम्रपान आदि पर आपत्ति जताते हैं या शरिया के पालन की अनिवार्यता की बात करते हैं, उन्हें इस चरण के सूफी "वहाबी" और "औलिया के दुश्मन" के रूप में कड़ी निंदा करते हैं। कई लोग तंबाकू, गांजा आदि के सेवन या धूम्रपान को सुन्नी इस्लाम और सूफी इस्लाम की मौलिक पहचान मानते हैं और धूम्रपान के विरोधियों को वहाबी और औलिया का दुश्मन बताते हैं। अन्य कई मुसलमान पीर को सजदा करने, कब्र को सजदा करने, गाना-बजाना आदि कर्मों की कड़ी निंदा करते हैं, शरिया के पालन को सूफी इस्लाम का मुख्य विषय मानते हैं और शरिया के पालन के साथ-साथ पीर-मशाइख से तरीकत (आध्यात्मिक मार्ग) की शिक्षा प्राप्त करते हैं और उसका पालन करते हैं। पहले चरण के सूफियों और मारफती लोगों के मत के अनुसार ये वहाबी और सूफी इस्लाम के दुश्मन हैं। हालाँकि ये खुद को वास्तविक सूफी और सुन्नी होने का दावा करते हैं और पहले चरण के लोगों को भ्रमित मानते हैं। इस चरण के तसव्वुफ-पंथी लोगों के बीच विभिन्न विषयों पर मतभेद हैं। उर्स, ईसाले सवाब, मीलादुन्नबी, सीरतुन्नबी, ज़िक्र की पद्धति आदि विभिन्न विषयों पर इस चरण के सूफियों के बीच मतभेद हैं। इन सभी मतभेदों के आधार पर इस चरण के सूफियों का एक दल दूसरे दल को वहाबी, पैगंबर का दुश्मन या औलिया का दुश्मन बताकर निंदा करता है और खुद को वास्तविक सुन्नी और वास्तविक सूफी होने का दावा करता है, हालाँकि सभी पीर-मुरीदी और तसव्वुफ में विश्वास करते हैं और विभिन्न तौर-तरीकों का पालन करते हैं। पश्चिम के ईसाई स्वाभाविक रूप से पहले चरण के सूफी इस्लाम और उसके अनुयायियों से प्रेम करते हैं। क्योंकि उनकी "मानसिकता" से इनकी "मानसिकता" बहुत मिलती-जुलती है। यूरोप-अमेरिका और अन्य विभिन्न देशों में ऐसे सूफियों की मजलिस-दरबार और खानकाह-मजारों में वे आते हैं, गाना-बजाना और आध्यात्मिक चर्चाओं में भाग लेते हैं। ये सूफी भी उन्हें अत्यंत प्रेम के साथ स्वीकार करते हैं। स्वाभाविक रूप से पश्चिम के लोग दुनिया के सभी मुस्लिम देशों में ऐसे सूफी इस्लाम के प्रसार की कामना करते हैं। ऐसे सूफी इस्लाम का प्रसार ही सभी धर्मों और धर्महीन लोगों के बीच अनगिनत शांति और सह-अस्तित्व सुनिश्चित कर सकता है, ऐसा वे मानते हैं। "सभ्यता के संघर्ष" के नाम पर इस्लामी देशों में अपना प्रभुत्व जमाने के इच्छुक साम्राज्यवादी पहले तो धड़ल्ले से इस्लाम के खिलाफ खड़े हो जाते हैं। लेकिन वे देखते हैं कि इससे उनके खिलाफ प्रतिरोध बढ़ रहा है। तब वे मुसलमानों को विभिन्न तरीकों से विभाजित करके किसी को अपने पक्ष में और किसी को विपक्ष में करना चाहते हैं। इसके लिए सबसे पहले वे लिबरल (liberal) यानी उदार और फंडामेंटललिस्ट (fundamentalist) यानी कट्टरपंथी या रूढ़िवादी के रूप में विभाजन करने की कोशिश करते हैं। इस प्रकार का विभाजन मुस्लिम देशों में ज्यादा बाजार नहीं पा रहा है। इसलिए पिछले कुछ वर्षों से वे एक नया विभाजन बाजार में उतारने की कोशिश कर रहे हैं, और वह है सूफी इस्लाम बनाम वहाबी इस्लाम। मुस्लिम देशों में सूफियों के प्रभाव और "वहाबी" शब्द के प्रति मुसलमानों की घृणा की बात वे अच्छी तरह जानते हैं। जिस तरह ब्रिटिश सरकार और हिंदू जमींदारों ने सैयद अहमद, तीतूमिर, शरीयतुल्लाह और अन्य सभी धार्मिक सुधार और साम्राज्यवाद विरोधी आंदोलनों को "वहाबी" के रूप में चित्रित करके आम मुसलमानों के बीच घृणित बनाने के प्रयास में काफी सफलता हासिल की थी, उसी तरह वे अपने हितों के प्रतिकूल सभी इस्लामी गतिविधियों और व्यक्तित्वों को "वहाबी" के रूप में चित्रित करने का प्रयास कर रहे हैं। कम से कम सुन्नी-वहाबी या सूफी-वहाबी विवाद और संघर्ष को भड़काकर इस्लामी दावत, शिक्षा के प्रसार, अश्लील और मादक पदार्थों के विरोध या राज्य व्यवस्था में आलिमों और इस्लामपंथियों के उभार को निश्चित रूप से बाधित और कमजोर किया जा सकता है। वास्तव में वे सूफी इस्लाम से पहले चरण के सूफियों को समझ रहे हैं। क्योंकि दूसरे चरण के सूफियों के बीच शाह वलीullah, सैयद अहमद बरेलवी, तीतूमिर, हाजी शरीयतुल्लाह जैसे व्यक्तित्वों का उदय हो सकता है, जिनकी राजनीतिक शक्ति उनके हितों की रक्षा नहीं करती है। वे मानते हैं कि पहले चरण के सूफियों का उभार ही मुस्लिम मानसिकता से आतंकवाद की जड़ को उखाड़ फेंकने में सक्षम है और इस चरण का सूफी इस्लाम ही दुनिया के लोगों को आतंकवाद, कट्टरवाद और धार्मिक संघर्ष से बचाकर सभी धर्मों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को सुनिश्चित कर सकता है। इतना ही नहीं, इनकी स्थापना दुनिया के दो प्रमुख धर्मों—ईसाई धर्म और इस्लाम—को बेहद करीब ला सकती है। वास्तव में पहले चरण के सूफी और पश्चिमी नेतृत्व दूसरे चरण के सूफियों को "वास्तविक वहाबी" या "बहुरुपिया वहाबी" मानते हैं। वे यह भी जानते हैं कि इनके हाथों में उनके हित सुरक्षित नहीं हैं। हालाँकि मुस्लिम देशों में दूसरे चरण के सूफियों के प्रभाव से भी वे अवगत हैं। इसलिए वे "सूफी इस्लाम" के नाम पर पहले चरण के सूफियों के नेतृत्व में और उनके प्रभाव क्षेत्र के भीतर दोनों चरणों के सूफियों को एकजुट करके उन्हें "वहाबी" लोगों के खिलाफ मुखर होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वे समझा रहे हैं कि जो लोग इस्लामी समाज, राज्य, न्याय, अर्थव्यवस्था आदि की स्थापना की मांग कर रहे हैं, वे मूल रूप से औलिया की मजारों को तोड़ने वाले सऊदी वहाबियों के दलाल और उनके विचारों के अनुयायी हैं। यदि ये लोग सत्ता में आ गए तो ये भी पीर-मशाइख और कब्र-मजारों को नष्ट कर देंगे। इसलिए इनका मुकाबला करने के लिए एकजुट हो जाइए। यह निश्चित है कि आम मुसलमान, आलिम और पीर-मशाइख उनके ऐसे प्रचार से प्रभावित होंगे। इसके अलावा इस बहाने वहाबी-सुन्नी विवाद और संघर्ष को बढ़ावा देकर मुसलमानों को साम्राज्यवाद और आक्रमण के खिलाफ या इस्लामी मूल्यों के प्रचार के पक्ष में एकजुट होने से रोकना संभव होगा, ऐसा वे मानते हैं। वास्तव में जिस तरह "इस्लाम" नाम का व्यापक दुरुपयोग किया गया है और इस्लाम के नाम पर इस्लाम विरोधी कर्म किए गए हैं और किए जा रहे हैं, उसी तरह "सूफी" शब्द का भी व्यापक दुरुपयोग हुआ है। तसव्वुफ, सूफी, पीर, दरवेश और औलिया के नाम पर गैर-इस्लामी गतिविधियाँ भी बहुत हुई हैं। हालाँकि सर्वमान्य सूफी-दरवेशों के जीवन और कर्म की समीक्षा करने पर हम पाते हैं कि वे सभी समाज, राज्य और राजनीति के प्रति जागरूक थे और समाज परिवर्तन में उनकी भूमिका अपरिहार्य थी। लगभग सभी सूफी "तरीका" के मूल स्रोत के रूप में अबू बकर सिद्दीक (रजि.) और अली (रजि.) का उल्लेख किया गया है। जकात न देने वालों, धर्मत्यागियों, धार्मिक अनाचारों में लिप्त लोगों के खिलाफ युद्धों में वे मुस्लिम उम्मत के अग्रপথिक थे। हसन बसरी, इब्राहिम अधहम, जुनैद बगदादी, अब्दुल कादिर जिलानी, अबू हामिद गजाली, मुजद्दिद-ए अल्फिसानी, शाह वलीullah देहलवी, सैयद अहमद बरेलवी, इमदादुल्लाह मुहाजिर मक्की, करमत अली जौनपुरी, अबू बक्र सिद्दीकी फुरफुरावी (रहिमुहमুল্লাহ) और अन्य सभी सुप्रसिद्ध सूफी-साधकों ने आत्मशुद्धि और आध्यात्मिकता के साथ-साथ समाज, राज्य और राजनीति पर बात की है, शासकों के अन्याय का विरोध किया है, जेल यात्रा की है या शहादत प्राप्त की है। आधुनिक राजनीतिक गतिविधियों के साथ उनकी कार्यपद्धति का अंतर यह है कि वे सत्ता में जाने के बजाय शासकों को सुधारने का प्रयास करते थे। उन्होंने स्वयं राजनीतिक शक्ति प्राप्त करने का प्रयास नहीं किया, बल्कि शासकों को नसीहत दी, अन्याय का विरोध किया, न्याय के पक्ष को प्रोत्साहित किया, सहयोग किया, जनता को जागरूक किया, साम्राज्यवाद, औपনিবেশिक शासन और आधिपत्यवाद के खिलाफ राष्ट्रीय प्रतिरोध में शामिल हुए और इन सभी गतिविधियों में जिन व्यक्तियों या दलों को अपेक्षाकृत बेहतर माना, उन्हें समर्थन दिया या प्रोत्साहित किया। तथाकथित "आतंकवादी" गतिविधियों या उग्रवाद से उनकी कार्यपद्धति का अंतर यह है कि वे अन्याय का विरोध करते हैं लेकिन दंड देने या बल प्रयोग करने का प्रयास नहीं करते हैं। उन्होंने अन्याय का विरोध किया है, नसीहत दी है, शासकों और अन्य सभी को अन्य का दमन करने, विरोध करने और नियंत्रित करने के लिए प्रेरित किया है, लेकिन स्वयं अन्याय के दमन के नाम पर शक्ति का प्रयोग नहीं किया है, कानून की अवहेलना नहीं की है, कानून अपने हाथ में नहीं लिया है और कानून तोड़ने का कड़ा विरोध किया है। इस प्रकार हम देख रहे हैं कि वास्तविक सूफी कभी भी समाज-विमुख या राजनीति-विमुख नहीं थे। "सूफी इस्लाम" को समाज, राज्य और जगत-विमुख के रूप में चिन्हित करने और सभी सुधार आंदोलनों को "वहाबी" के रूप में चित्रित करने का कोई आधार नहीं है। तथाकथित 'इस्लामी आतंकवाद' या उग्रवाद के नेतृत्व में ओसामा बिन लादेन जैसे सऊदी मूल के व्यक्तित्व होने की बात सुनी जाती है। सऊदी अरब के विभिन्न व्यक्ति और संस्थाएँ इन्हें वित्तपोषित करने का दावा करते हैं। दुनिया के विभिन्न देशों में, विशेष रूप से उपमहाद्वीप में अहले हदीस और देवबंदी पद्धति के कौमी मदरसों में शिक्षित दो-चार व्यक्तियों के इसके साथ जुड़े होने की बात सुनी जाती है। इसके अलावा इनमें कब्र-मजार आदि का विरोध देखा जाता है। इन सबके ऊपर, वे अपने विचारों को स्थापित करने के लिए मौखिक प्रचार के अलावा हथियार भी उठा रहे हैं। इसलिए कई शोधकर्ताओं का मानना है कि वहाबी विचारधारा का प्रसार ही वर्तमान आतंकवाद के उभार का कारण है। हालाँकि यह ध्यान देने योग्य है कि ओसामा बिन लादेन के आंदोलन की शुरुआत सऊदी-वहाबी राज्य के विरोध के माध्यम से हुई थी। उनके अनुयायी वहाँ के राजतंत्र, अमेरिकी सैनिकों, अनाचार आदि का विरोध करते हैं और सऊदी राज्य तथा नागरिकों के खिलाफ विनाशकारी गतिविधियाँ जारी रखे हुए हैं। इसके अलावा मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब के वंशजों सहित सभी सऊदी आलिम बिन लादेन के आंदोलन और गतिविधियों के खिलाफ अत्यंत मुखर हैं। इन सबके ऊपर, विभिन्न देशों के सुधार या प्रतिरोध आंदोलनों को 'वहाबी' की संज्ञा देने का कोई आधार नहीं है। वास्तव में मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब और उनके आदर्श तुर्क खिलाफत के प्रचार और ब्रिटिश सरकार के अवसरवाद के कारण आवश्यकता से अधिक महत्व और प्रतिष्ठा प्राप्त कर चुके हैं। वहाबी विचारधारा और आंदोलन वास्तव में पूरी तरह से एक क्षेत्रीय विषय था। अन्य मुस्लिम देशों के सुधार-प्रतिरोध और धर्म-केंद्रित सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों की तरह ही अच्छे-बुरे का मिश्रण एक विषय था। अन्य देशों में मुसलमानों ने अपने परिवेश और आवश्यकता के अनुसार इसी प्रकार के आंदोलनों को विकसित किया है। चूंकि वहाबी और अन्य देशों के मुसलमान दोनों ही एक ही स्रोत यानी कुरआन, हदीस, इस्लामी फिक़्ह और इस्लामी इतिहास से अपने विचार एकत्र करते हैं, इसलिए उनके विचारों और कर्मों में समानता होना स्वाभाविक है। इसके लिए सारा श्रेय मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब को देने का कोई कारण नहीं है। अफगानिस्तान और इराक में बिन लादेन की विचारधारा का प्रसार हुआ है। और ये दोनों देश घोर वहाबी विरोधी हैं। अफगानिस्तान की बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी हनाफी मजहब की कट्टर अनुयायी, पीर-मशाइख की भक्त और वहाबियों की विरोधी है। इराक में सद्दाम हुसैन के लंबे शासनकाल में वहाबी या किसी भी अन्य सुधारवादी आलिम और विचारधारा को कड़ाई से समाप्त कर दिया गया है। केवल सूफियों के खिलाफ कोई कठोरता नहीं बरती गई। लेकिन इसके बावजूद इन दोनों देशों में आतंकवाद के प्रसार से यह समझा जा सकता है कि आतंकवाद का कारण कहीं और निहित है। हमने पहले ही देखा है कि आतंकवादियों की जाति, धर्म, गोत्र आदि को धड़ल्ले से "आतंकवाद" के कारण या संचालक शक्ति के रूप में चिन्हित करने की प्रवृत्ति सही नहीं है। इससे आतंकवाद को कुचलने का मार्ग बंद हो जाता है। क्योंकि किसी जाति, धर्म या गोत्र के सभी लोगों को धड़ल्ले से एक ही लाठी से नहीं हाँका जा सकता है। आतंकवाद की जिम्मेदारी "वहाबी विचारधारा" पर थोपने की बड़ी समस्या यह है कि इससे समस्या के समाधान का मार्ग खो जाएगा। क्योंकि सऊदी वहाबियों के साथ आतंकवाद का संबंध स्थापित करना कठिन है, क्योंकि आतंकवाद तो उन्हीं के खिलाफ संचालित किया जाता है। और किसी अन्य देश का कोई भी व्यक्ति स्वयं को वहाबी स्वीकार नहीं करता है, लेकिन लगभग सभी धार्मिक दल विरोधियों द्वारा "वहाबी" कहे जाते हैं। हर कोई यह दावा करता है कि वे सीधे कुरआन, हदीस, फिक़्ह और पूर्ववर्ती इमामों के मत के आधार पर अपने विचार और दल का गठन करते हैं; वे मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब के किसी निजी मत को नहीं मानते हैं। यहाँ तक कि सऊदी अरब के आलिम भी कभी स्वयं को वहाबी स्वीकार नहीं करते हैं। वे मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब को एक सुधारक के रूप में मानते हैं और उनके सभी विचारों को कुरआन, सुन्नत और पूर्ववर्ती इमामों से गृहीत होने का दावा और प्रमाण देते हैं।<ref>http://www.hadithbd.com/books/link/?id=6889</ref>}}
नुरुल इस्लाम अपने प्रश्नोत्तर में 'रमजान और ईद' पुस्तक में कहते हैं:
{{quote|(ईमान को भंग करने वाले कृत्यों में से एक है...) धर्म को राजकीय मामलों से अलग करना। और यह कहना कि इस्लाम में राजनीति नहीं है। ऐसी अवधारणा और टिप्पणी भी पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जीवन आदर्श को झुठलाती है।<ref>http://www.hadithbd.com/books/link/?id=2432</ref>}}
मंजूर इलाही अपनी पुस्तक 'समाज सुधार में सही अकीदे का महत्व' में "समाज सुधार की आवश्यकता और उस संदर्भ में सही इस्लामी [[अकीदा]] की भूमिका और महत्व" के बारे में कहते हैं:<ref>{{cite book |last1=इलाही |first1=मोहम्मद मंजूरे |editor1-last=जकारिया |editor1-first=अबू बकर मुहम्मद |title=সমাজ সংস্কারে সঠিক আকীদার গুরুত্ব, |publisher=Islamic Propagation Office in Rabwah |location=रियाद, सऊदी अरब |pages=19–28 |url=https://d1.islamhouse.com/data/bn/ih_articles/single3/bn_somaj_songoskare_sothik_aqidar_gurutto.pdf |access-date=23 November 2022 |language=bn}}</ref>
{{quote|मनुष्य अपने व्यक्तिगत जीवन की सभी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ही समाज में मिल-जुलकर रहता है। किसी भी समाज के गठन का मुख्य उद्देश्य उस समाज के सभी सदस्यों का सर्वांगीण कल्याण और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व सुनिश्चित करना है। लेकिन व्यक्तिगत जीवन की अशिक्षा, कुशिक्षा और स्वार्थपरता सामाजिक जीवन पर एक बड़ा नकारात्मक प्रभाव डालती है और समाज को भ्रष्टाचार, भेदभाव, विभाजन, संघर्ष आदि व्याधियों से कलंकित और विषैला बना देती है। तभी समाज सुधार की भारी आवश्यकता महसूस होती है, जैसा कि हम अपने वर्तमान सामाजिक परिप्रेक्ष्य में महसूस कर रहे हैं। समाज की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करने पर हम देखते हैं कि समस्याओं से घिरे, भ्रष्ट और दीमक लगे इस समाज के लोगों के बीच सही अकीदे का ज्ञान न के बराबर है। इसका अनिवार्य परिणाम यह है कि अकीदे में अनैतिकता और प्रवृत्तियों की इच्छा के अनुसार जिसकी जैसी इच्छा हो वैसा अकीदा अपनाना, चाहे कुरआन-सुन्नत के आधार पर उसकी प्रामाणिकता हो या न हो। दूसरी ओर मनुष्य का ईमान अत्यंत कमजोर हो गया है, दिल से तकवा (ईश्वर का डर) विदा हो चुका है, परलोक की सजा को वह भूल बैठा है। परिणामस्वरूप समाज में बेचैनी, अस्थिरता, लूट-खसोट की प्रवृत्ति, विभिन्न प्रकार के आतंकवाद और अपसंस्कृति का विस्तार आदि और भी कई समस्याएँ पैदा हो गई हैं। रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सीरत में हम देखते हैं कि उन्होंने तत्कालीन जाहिल समाज को बदलकर उसे उस समय का सर्वश्रेष्ठ समाज बना दिया था। व्यक्ति और समाज जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का जो आंदोलन उन्होंने नबूवत मिलने के बाद से शुरू किया था, उसकी प्रारंभिक प्रक्रिया अकीदे का सुधार थी। इस संबंध में सैयद कुतुब अपनी पुस्तक مقومات التصور الإسلامي (इस्लामी दृष्टिकोण के तत्व) में कहते हैं:
"मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ऐसे समय में भेजे गए थे जब जज़ीरतुल अरब उत्तर में रोमन और दक्षिण में फारसियों के बीच लूटे गए धन की तरह बंटा हुआ था। उन्होंने जज़ीरतुल अरब की उपजाऊ भूमि, समुद्र तट, धन और व्यापार के सभी स्रोतों की ओर अपने हाथ फैला रखे थे। मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ऐसे समय में भेजे गए थे जब मौजूदा सामाजिक और आर्थिक स्थिति बड़े पैमाने पर दासता के युग का प्रतिनिधित्व करती थी। मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ऐसे समय में भेजे गए थे जब शराब, व्यभिचार, जुआ, खेल-तमाशे, बुराई और अशांति फैलाने में मानव चरित्र जाहिलियत की राह पर चल रहा था। इनमें से किसी भी चीज़ से महान पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सुधार कार्य शुरू नहीं किया। जज़ीरतुल अरब की उपजाऊ भूमि से रोमन और फारसियों को भगाने के लिए वह अरबों को राष्ट्रवादी एकता की ओर आमंत्रित करने में सक्षम थे। युद्ध की सारी शक्ति वह उनके खिलाफ लगा सकते थे और राष्ट्रीय शत्रुओं के प्रति वह अरबों को भड़का सकते थे। परिणामस्वरूप वे उनके नेतृत्व के प्रति वफादार हो जाते और अपनी सारी ईर्ष्या-द्वेष भूल जाते...। लेकिन अल्लाह जानता था, उसने अपने पैगंबर को बताया था और निर्देश दिया था कि यह सही रास्ता नहीं है और यह मुख्य कार्य नहीं है। मुख्य कार्य यह है कि मनुष्य अपने सच्चे रब को पहचाने और केवल उसी की दासता स्वीकार करे, और उसके बंदों की दासता से मुक्त हो और अंत में अल्लाह की ओर से जो कुछ भी उनके पास आए, उस सबका पूरी तरह से पालन करे..."
...ध्यान देने योग्य बात है कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने नबूवत के बाद मक्की जीवन के 13 वर्षों में अकीदे से संबंधित ज्ञान के प्रचार को सबसे अधिक महत्व दिया था। केवल पैगंबर साहब ने ही नहीं, बल्कि सभी नबियों और पैगंबरों का पहला काम समाज के सभी स्तरों के लोगों को सही अकीदे की ओर आमंत्रित करना था। अल-कुरआन की भाषा में उनका वह आह्वान था: "हे मेरी जाति, तुम अल्लाह की इबादत करो। उसके सिवा तुम्हारा कोई सच्चा इलाह नहीं है।" [अल-आराफ: 58] इसका कारण केवल एक था—अकीदा शुद्ध न हो तो व्यक्तिगत जीवन शुद्ध नहीं होता, और व्यक्ति शुद्ध न हो तो समाज भी शुद्ध नहीं होता।
...(1) वृहद राष्ट्रीय एकता स्थापित करने में सही अकीदे की भूमिका: सही अकीदे पर सहमत हुए बिना वृहद एकता स्थापित करना जितना संभव नहीं है, उतना ही पूरी दुनिया की मुस्लिम उम्मत के लिए भी एकजुट होना दूर की कौड़ी है। इस संदर्भ में (डॉ.) उमर सुलेमान अल-अश्कर कहते हैं: "जब तक एक ही अकीदा मुसलमानों को एकजुट नहीं करेगा, तब तक मुस्लिम एकता का साकार होना संभव नहीं है।" वास्तव में अकीदे का भ्रम ही समाज में अनैक्यता के बीज बोता है। समाज विभिन्न दलों और उपदलों में विभाजित हो जाता है। यदि यह प्रश्न उठे कि हर कोई अपने-अपने अकीदे और विश्वास को सही मानता है, तो ऐसी स्थिति में किसी विशिष्ट अकीदे को सही मानकर एक होना संभव नहीं होगा। क्योंकि हर दल अपने मत के प्रति आश्वस्त होता है। इस प्रश्न के उत्तर में (डॉ.) उमर सुलेमान अल-अश्कर कहते हैं: "शुद्ध इस्लामी अकीदे के संबंध में कुरआन और सुन्नत में स्पष्ट बयान मौजूद हैं। इस अकीदे के प्रत्येक मौलिक और सूक्ष्म विषय पर प्रमाण प्रस्तुत करना संभव है। और सलाफ-ए-सालेheen सत्य इस्लामी अकीदे पर ही प्रतिष्ठित थे। उन्होंने इस अकीदे को इतनी अच्छी तरह से लिपिबद्ध किया है कि वह फिरकापरस्त और भ्रमित लोगों के अकीदे से पूरी तरह अलग है। इन महान व्यक्तित्वों में अल्लामा तहवी शामिल हैं, जिन्होंने एक अकीदा ग्रंथ लिखा है जो उनके अपने नाम से प्रसिद्ध है। इस ग्रंथ की व्याख्या मुहम्मद इब्न अबिल इज़ अल-हनाफी ने लिखी है। बात यहीं नहीं रुकी, बल्कि सहिह अकीदे पर कई आलिमों ने इससे पहले और बाद में लिखा है। उनमें इमाम अहमद, इब्न तैमिया, शौकानी और सफारिनी आदि प्रमुख हैं।"
(2) भ्रष्टाचार, डकैती, ज़ुल्म-उत्पीड़न मुक्त सुसभ्य समाज के गठन में सही अकीदा एक ऐसी मजबूत नींव तैयार करता है, जिसके आधार पर समाज के सभी कार्य और आपसी लेन-देन संचालित होते हैं। अतः अकीदा यदि विकृत, भ्रमित और झूठ पर आधारित हो, तो सामाजिक जीवन संकटग्रस्त, अस्त-व्यस्त और विनाश के कगार पर पहुँच जाएगा। आज हमारा समाज जिस स्थिति में आ खड़ा हुआ है, उसका कारण मुख्य रूप से यही है। इसलिए समाज को विकृति, तबाही और विनाश से बचाने के लिए हमें सही अकीदे की ओर ही लौटना होगा।
(3) समाज में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व सुनिश्चित करने के मामले में सही अकीदे का महत्व: एक मुस्लिम व्यक्ति के अकीदे का एक अनिवार्य हिस्सा यह है कि वह अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के आदेश के अनुसार जीवन चलाना अनिवार्य मानता है और उनके आदेश की अवज्ञा करना अवैध मानता है। अल्लाह का इरशाद है: "और अल्लाह और उसके रसूल जब कोई फैसला कर दें, तो किसी मोमिन पुरुष या मोमिन स्त्री को अपने मामले में कोई अधिकार नहीं रहता।" [अल-अहजाब: 36]
समाज में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अल्लाह तआला जब मुसलमानों को आपस में भाई कहता है, किसी व्यक्ति की जान और माल पर हमला करने को गंभीर अपराध बताता है, अनुबंधित सभी गैर-मुसलमानों के साथ किए गए समझौते का पालन करने का आदेश देता है, तो वह बिना किसी हिचकिचाहट के उस आदेश को मान लेता है, क्योंकि इस तरह मानना उसके अकीदे का ही हिस्सा है। अल्लाह का इरशाद है: "अतः तुम्हारे रब की कसम, वे मोमिन नहीं हो सकते जब तक कि वे अपने बीच के आपसी विवादों में तुम्हें फैसला करने वाला न मान लें, फिर जो फैसला तुम करो, उससे अपने दिलों में कोई तंगी न महसूस करें और उसे पूरी तरह से स्वीकार कर लें।" [अन-निसा: 65]
(4) राजनीतिक स्थिरता लाने में सही अकीदे का महत्व: इस्लामी अकीदे का एक अनिवार्य मौलिक विषय यह है कि इस बात पर दृढ़ विश्वास रखा जाए कि अल्लाह जिस तरह इस ब्रह्मांड का रचयिता है, उसी तरह वह इसके शासन-अधिकार और आदेश का भी मालिक है। अल्लाह का इरशाद है: "जान लो, सृजन और आदेश उसी का है।" [अल-आराफ: 54]
"कह दो, निश्चित रूप से सभी मामले अल्लाह के हैं।" [आले इमरान: 154]
"शासन तो केवल अल्लाह का ही है।" [अल-अनआम: 57]
इसके अलावा अल्लाह ही सभी संप्रभुता का मालिक और एकमात्र कानून निर्माता तथा विधानदाता है। यह उसे रब के रूप में मानने का ही एक मुख्य अर्थ है। हमारे समाज में राजनीतिक स्थिरता तभी लौट सकती है जब राजनीतिक नेतृत्व का इस अकीदे पर दृढ़ विश्वास हो। मूल रूप से मानव रचित कानूनों से किसी भी मुस्लिम समाज में शांति, अनुशासन और स्थिरता नहीं आ सकती। शायद वास्तविकता ही इसका सबसे बड़ा प्रमाण और साक्षी है।
(5) अपसंस्कृति को रोकने में सही अकीदे का महत्व: विदेशी और भिन्न धर्मों के अंधानुकरण में हमारे बांग्लादेशी समाज में संस्कृति के नाम पर वर्तमान में जिन चीज़ों का अभ्यास किया जा रहा है, उन्हें अपसंस्कृति कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। क्योंकि ये संस्कृतियाँ न तो हमारी स्वदेशी सोच-विचार और परंपरा का प्रतिनिधित्व करती हैं, और न ही वे मुस्लिम अकीदे के अनुकूल हैं। यह याद रखना चाहिए कि हमारा यह देश एक मुस्लिम बहुल देश है। इसलिए यदि हम अपने सभी सांस्कृतिक और सामाजिक अनुष्ठानों को सही इस्लामी अकीदे के आलोक में व्यवस्थित करें, तो देश को एक सुंदर, शालीन और स्वस्थ संस्कृति मिल सकती है।
(6) चिंतन के क्षेत्र में अराजकता और भ्रम तथा शिर्क और बिदअत से समाज को मुक्त करने के मामले में सही अकीदे का महत्व: सही इस्लामी अकीदे का ज्ञान ही समाज के बुद्धिजीवी वर्ग की वैचारिक दुनिया को आलोकित कर सकता है जिससे वे राष्ट्र को सत्य मार्ग की दिशा दे सकें। आज एक श्रेणी के बुद्धिजीवियों के चिंतन के क्षेत्र में जो अराजकता और भ्रम हम देख रहे हैं, मुस्लिम नामधारी होने के बावजूद इस्लाम के खिलाफ वे जो वैचारिक युद्ध चला रहे हैं, उसका सबसे बड़ा कारण शायद यह है कि उन्होंने इस्लाम को विकृत रूप में जाना है, उन्हें सही इस्लामी अकीदे को प्राप्त करने का सौभाग्य नहीं मिला है। यही बात उन सभी शिक्षित और अशिक्षित मुसलमानों पर भी लागू होती है जो इसे इबादत समझकर शिर्क और बिदअत में डूबे हुए हैं। कुरआन और सुन्नत के आलोक में उन्होंने शिर्क और बिदअत को नहीं पहचाना है। शिर्क और बिदअत को पहचानने के जो मूल सिद्धांत हैं, वे उनसे पूरी तरह अनजान हैं। सही अकीदे के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ अकीदे का ज्ञान प्राप्त करना ही समाज के सभी लोगों को इन भ्रमों और शिर्क तथा बिदअत से मुक्त करने की गारंटी दे सकता है।
अतः सहिह इस्लामी अकीदे का ज्ञान प्राप्त करना ही अल्लाह का सच्चा मोमिन और मुस्लिम बंदा बनकर खुद को विकसित करने का एकमात्र मार्ग है। इसी प्रकार किसी समाज को एक पूर्ण इस्लामी समाज के रूप में विकसित करना हो, तो समाज के सभी लोगों को सहिह अकीदे के ज्ञान से समृद्ध करने का कोई विकल्प नहीं है। इस मामले में सामाजिक और सांस्कृतिक इस्लामी संगठनों को बड़ी जिम्मेदारी निभानी होगी। जो लोग इस्लामी शरिया और स्टडीज में कुशल हैं, वे सहिह अकीदा विषय पर प्रामाणिक ग्रंथ लिखकर बांग्ला भाषा में लिखित पुस्तकों की जो कमी है, उसे दूर कर सकते हैं। इस मामले में मस्जिदों के इमामों, खतीबों और मदरसों के शिक्षकों की मदद भी ली जा सकती है। हालाँकि उससे पहले उन्हें सहिह अकीदे के ज्ञान से समृद्ध होना होगा। सहिह अकीदे के प्रसार के प्रयासों के माध्यम से इस प्रकार हमारा समाज शिर्क और बिदअत से मुक्त एक सुंदर सुसभ्य समाज के रूप में विकसित हो सकता है।}}
मुश्ताक अहमद करीमी इस्लाम की दृष्टि से बैंक के ब्याज के साथ राजनीति के संबंध के बारे में कहते हैं:
{{quote|बैंक और इसी तरह की कोई भी संस्था केवल धन-पूजा, व्यापार के क्षेत्र में एकाधिकार, सुविधाओं का उपभोग और धन का शोषण करने के इरादे से स्थापित की गई है। इन संस्थाओं का उद्देश्य यह होता है कि ब्याज का प्रलोभन देकर जनता और राष्ट्र का धन जितना अधिक हो सके, अपने कब्जे में लाया जाए और इस पद्धति से बड़ी चालाकी से पूरी जाति पर अपनी सत्ता और शासन चलाया जाए। जहाँ चाहे अकाल लाया जा सकता है और जहाँ चाहे भुखमरी पैदा करके तबाही लाई जा सकती है। जहाँ चाहे अपनी पसंद का शासन और राजनीति लागू की जा सकती है। जब चाहे मुद्रास्फीति पैदा करना संभव है और जब चाहे मुद्रा के मूल्य को बढ़ाकर बाजार में बड़े पैमाने पर मंदी फैलाई जा सकती है। जिसे चाहे गद्दी से उतारना और जिसे चाहे गद्दी पर बिठाना आसान होगा।<ref>http://www.hadithbd.com/books/link/?id=4556</ref>}}
फहद बिन सालेह अल अजलान अपनी पुस्तक 'मुहर्रर फी सियासातुल शरिया' में कहते हैं कि इस्लामी राजनीति में भाग लेने का विधान यह है कि व्यक्ति अपने व्यक्तिगत ईमान को दुरुस्त रखने के बाद यदि अतिरिक्त रूप से अपनी क्षमता के अनुसार राजनीतिक सुधार की क्षमता रखता है, तो ऐसे मामले में इसे प्रोत्साहित किया गया है, अन्यथा इसमें भाग लेना हराम माना जाएगा। और ऐसे मामलों में सुधार करना चाहिए जो पहले से मौजूद हैं, जिसमें सुधार और मसलेहत (कल्याण) की गुंजाइश है, लेकिन मसलेहत के नाम पर कोई नया हराम या बिदअत नहीं बनाई जानी चाहिए; और ऐसे विषयों में भाग नहीं लिया जाना चाहिए जो पूरी तरह से हराम हैं, जैसे ब्याज, नशीले पदार्थों का उत्पादन आदि।<ref name=fa>{{cite book |last1=العجلان |first1=فهد صالح |title=المحرر في السياسة الشرعية |date=1 June 2022 |publisher=آفاق المعرفة للنشر |url=https://books.google.com.bd/books/about/%D8%A7%D9%84%D9%B-%D9%85%D8%AD%D8%B1%D8%B1_%D9%81%D9%8A_%D8%A7%D9%84%D8%B3%D9%8A%D8%A7%D8%B3%D8%A9_%D8%A7%D9%84%D8%B4.html?id=_vt7EAAAQBAJ&redir_esc=y |access-date=13 September 2025 |language=ar}}</ref>
कुरआन और हदीस में स्पष्ट समाधान न मिलने वाले ([[मसलेहत]]) ऐसे इस्लामी राजनीतिक निर्णय लेने के लिए [[इस्तिखारा]] करने की सलाह दी गई है।<ref>{{cite web |title=حكم الاستخارة في مسائل شرعية لا يُدرَى وجه الصواب فيها |url=https://www.islamweb.net/ar/fatwa/239518/%D8%AD%D9%83%D9%85-%D8%A7%D9%B-%D8%A7%D9%84%D8%A7%D8%B3%D8%AA%D8%ခာرة-%D9%81%D9%8A-%D9%85%D8%ဘাসائِل-%D8%b4%D8%b1%D8%b9%D9%8a%D8%a9-%D9%84%D8%a7-%D9%8a%D9%8f%D8%af%D8%b1%D9%8e%D9%89-%D9%88%D8%ac%D9%B-%D8%a7%D9%84%ပိတ္ဆေား-%D9%81%D9%8a%D9%87%D8%a7 |website=www.islamweb.net |access-date=3 August 2025 |language=ar}}</ref> [[ताहिर इब्न हुसैन]] ने अपने बेटे [[अब्दुल्लाह इब्न ताहिर अल-खुरासानी|अब्दुल्लाह इब्न ताहिर]] को [[दियारे रबीआ]] का गवर्नर बनने पर सलाह दी थी:
{{Quote|जब भी तुम्हारे सामने कोई महत्वपूर्ण विषय आए, तो अल्लाह से इस्तिखारा करो और उससे डरकर सहायता की प्रार्थना करो... और अपने सभी मामलों में प्रचुर मात्रा में इस्तिखारा करो।<ref>{{cite book |last1=Ansa |first1=Muhammad |title=Istikhara - In The Light Of The Sunnah |date=1 January 2014 |publisher=Turath Publishing |isbn=978-1-906949-27-3 |url=https://books.google.com/books?id=uxCsEAAAQBAJ |access-date=8 August 2025 |language=en}}</ref><ref>{{cite web |title=كتاب : تاريخ الرسل والملوك 29 |url=https://www.islamicbook.ws/tarekh/tarikh-alrsl-029.html |website=www.islamicbook.ws |access-date=8 August 2025}}</ref>}}
=== शासक और शासित के एक-दूसरे के प्रति दायित्व और कर्तव्य ===
;नेतृत्व के पद पर नियुक्त व्यक्ति के कर्तव्य
शासक पर जो सभी दायित्व निभाना अनिवार्य है, उनका उल्लेख करते हुए इमाम मावर्दी ने उन्हें दस मौलिक दायित्वों में सीमित किया है। जैसे:
उम्मत के सलाफ यानी पूर्ववर्ती इमामों द्वारा धर्म के जिन मूल सिद्धांतों पर सहमति व्यक्त की गई है, उनकी रक्षा करके धर्म की रक्षा करना।
मतभेद और संघर्ष में लिप्त पक्षों के बीच सुलह कराना और निर्णय देना।
आक्रमण से सुरक्षा प्रदान करके जनसुरक्षा सुनिश्चित करना।
शरिया के दंड (हद्द) को लागू करना।
सीमाओं पर पहरेदारी को मजबूत करना।
दावत देने के बाद भी जो लोग इस्लाम स्वीकार करने से इनकार करें, उनके खिलाफ जिहाद करना।
फ़ैय और सदक़ा एकत्र करना।
बैतुल माल से भत्ते की राशि निर्धारित करना।
विश्वस्त और कल्याण चाहने वाले व्यक्तियों को पदों पर नियुक्त करना।
अपनी देखरेख में सब कुछ संचालित करना और प्रजा की देखभाल करना।
;नेतृत्व के पद पर नियुक्त व्यक्ति के अधिकार
प्रजा पर शासक के कुछ अधिकार हैं। उनमें से सबसे महत्वपूर्ण निम्नलिखित हैं:
अच्छे कार्यों में शासक की आज्ञाकारिता।
शासक के लिए दुआ।
शासक के प्रति नसीहत या हितैषी होना।
शासक को अच्छे कार्यों में सहायता प्रदान करना।<ref>{{cite book |last1=अल अजलान |first1=फहद इब्न सालेह |last2=मजूमदार |first2=अब्दुल्लाह |last3=जकारिया |last3=अबू बकर मुहम्मद |title=শারঈ রাজনীতি |date=September 2025 |publisher=বিলিভার্স ভিশন |location=ঢাকা |pages=306, 307 |edition=1st |access-date=23 February 2026}}</ref>
== इतिहास ==
=== प्रारंभिक इतिहास ===
{{मुख्य|इस्लाम का प्रारंभिक इतिहास|प्रारंभिक मुस्लिम विजय|कुरान का इतिहास|मुहम्मद का इतिहास}}
राजनीतिक आंदोलन के रूप में इस्लाम की उत्पत्ति [[इस्लामी पैगंबर]] [[मुहम्मद]] और उनके उत्तराधिकारियों के जीवन और काल में हुई थी। 622 ईस्वी में, पैगंबर होने के उनके दावे को मान्यता देते हुए, मुहम्मद को [[मदीना]] शहर पर शासन करने के लिए आमंत्रित किया गया था। उस समय, इस शहर पर स्थानीय अरब जनजातियों [[बनू औस|औस]] और [[बनू खज़रज|खज़रज]] का वर्चस्व था, जो निरंतर संघर्ष में फंसे हुए थे। मदीना के निवासियों ने मुहम्मद में एक ऐसे निष्पक्ष बाहरी व्यक्ति को देखा जो संघर्ष को हल कर सकता था। इस प्रकार मुहम्मद और उनके अनुयायी मदीना चले गए, जहाँ मुहम्मद ने [[मदीना का संविधान]] तैयार किया। इस दस्तावेज़ ने [[मुहम्मद]] को शासक बनाया और उन्हें [[अल्लाह]] के पैगंबर के रूप में मान्यता दी। अपने शासनकाल के दौरान, मुहम्मद ने [[कुरान]] और अपने स्वयं के कार्यों के आधार पर कानून स्थापित किए, जिन्हें मुसलमान ''[[शरिया]]'' या इस्लामी कानून मानते हैं, और जिसे आज के इस्लामी आंदोलन स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। मुहम्मद ने व्यापक अनुयायी और सेना प्राप्त की, और कूटनीति तथा सैन्य विजय के संयोजन के माध्यम से, उनका शासन [[इस्लाम का प्रसार|फैला]], पहले [[मक्का]] शहर में और फिर पूरे [[अरब प्रायद्वीप]] में।
आज, मुस्लिम बहुतायत वाले लगभग हर लोकतांत्रिक राज्य में कई बहुसंख्यक [[इस्लामवाद|इस्लामी]] या [[इस्लामी लोकतांत्रिक राजनीतिक दलों की सूची|इस्लामी लोकतांत्रिक दल]] मौजूद हैं। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कई [[जिहादी इस्लामी समूह]] भी सक्रिय हैं। इसके अलावा, कुछ [[गैर-मुसलमान|गैर-मुस्लिम]] व्यक्तियों और संस्थानों ने कुछ उग्रवादी इस्लामी समूहों के राजनीतिक और धार्मिक दर्शन का वर्णन करने के लिए "इस्लामी कट्टरपंथ" (Islamic fundamentalism) विवादास्पद शब्द गढ़ा है। ये दोनों शब्द ([[इस्लामी लोकतंत्र]] और [[इस्लामी कट्टरपंथ]]) अलग-अलग इतिहास, विचारधाराओं और दृष्टिकोणों के साथ अलग-अलग गुटों और उप-गुटों के एक विशाल समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं।
==== मदीना का इस्लामी राज्य ====
{{See also|इस्लामी राजनीतिक ढांचा}}
इस्लामी पैगंबर मुहम्मद ने मदीना का संविधान तैयार किया था। इसने मुहम्मद और याथ्रिब (बाद में मदीना के रूप में जाना गया) के सभी महत्वपूर्ण जनजातियों और परिवारों के बीच एक औपचारिक समझौते को संहिताबद्ध किया, जिसमें मुस्लिम, यहूदी, ईसाई<ref>R. B. Serjeant, "Sunnah Jāmi'ah, pacts with the Yathrib Jews, and the Tahrīm of Yathrib: analysis and translation of the documents comprised in the so-called 'Constitution of Medina'", ''Bulletin of the School of Oriental and African Studies'' (1978), 41: 1-42, [[कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस]].</ref> और मूर्तिपूजक शामिल थे।<ref>देखें:
* Reuven Firestone, ''Jihād: the origin of holy war in Islam'' (1999) p. 118;
* "Muhammad", ''Encyclopedia of Islam Online''</ref><ref>Watt, William Montgomery. ''Muhammad at Medina''</ref><ref>R. B. Serjeant. "The Constitution of Medina." ''Islamic Quarterly'' 8 (1964) p.4.</ref> इस संविधान ने पहले इस्लामी राज्य का आधार बनाया। यह दस्तावेज़ मदीना की औस और खज़रज जनजातियों के बीच कड़वे अंतर-जनजातीय संघर्ष को एक आशाजनक अंत लाने के एक खुले प्रयास में लिखा गया था। मदीना के मुस्लिम, यहूदी, ईसाई और मूर्तिपूजक समुदायों के अधिकारों और कर्तव्यों की रूपरेखा तैयार करके, इसने उन्हें [[उम्माh|उम्मा]] के रूप में जाने जाने वाले एक एकल समुदाय के तहत लाया।<ref>Serjeant (1978), पृष्ठ 4.</ref>
यद्यपि मदीना के संविधान की रचना की सटीक तिथि विवादास्पद बनी हुई है, विद्वान आमतौर पर इस बात से सहमत हैं कि इसे हिजरत (622) के तुरंत बाद लिखा गया था।
{{#tag:ref|डब्ल्यू. एम. वाट का तर्क है कि प्रारंभिक समझौता हिजरत के तुरंत बाद हुआ था और दस्तावेज़ को बाद की तारीख में संशोधित किया गया था, विशेष रूप से बद्र की लड़ाई (एएच [एनो हिगेरिया] 2, = 624 ईस्वी) के बाद।<ref>Watt, William Montgomery. ''Muhammad at Medina''. pp. 227-228</ref>|group=Note}}
{{#tag:ref|आर. बी. सर्जेंट का तर्क है कि संविधान वास्तव में आठ अलग-अलग संधियाँ हैं जिन्हें मदीना में हुई घटनाओं के अनुसार दिनांकित किया जा सकता है, जिसमें पहली संधि मुहम्मद के आगमन के तुरंत बाद लिखी गई थी। <ref>R. B. Serjeant. "The Sunnah Jāmi'ah, Pacts with the Yathrib Jews, and the Tahrīm of Yathrib: Analysis and Translation of the Documents Comprised in the So-Called 'Constitution of Medina'." ''The Life of Muhammad: The Formation of the Classical Islamic World'': Vol. IV. Ed. Uri Rubin. Brookfield: Ashgate, 1998, p. 151</ref> <ref>देखें वही लेख ''Bulletin of the School of Oriental and African Studies'' 41 (1978): 18 ff. यह भी देखें Caetani. ''Annali dell'Islam, Vol. I''. Milano: Hoepli, 1905, p. 393.</ref> |group=Note}}
{{#tag:ref|जूलियस वेलहाउसन का तर्क है कि दस्तावेज़ एक एकल संधि है जिस पर हिजरत के तुरंत बाद सहमति व्यक्त की गई थी, और यह 2/624 में बद्र की लड़ाई से पहले मदीना में मुहम्मद के निवास के पहले वर्ष से संबंधित है। वेलहाउसन इस निर्णय को तीन विचारों पर आधारित करते हैं: पहला, मुहम्मद अपनी स्थिति के संबंध में बहुत अलग हैं, वह उम्मा के भीतर मूर्तिपूजक जनजातियों को स्वीकार करते हैं, और यहूदी समूहों को अंसार के ग्राहकों के रूप में बनाए रखते हैं।|group=Note}}
{{#tag:ref|मोशे गिल, जो इस्लामी इतिहास के संशयवादी हैं, का तर्क है कि इसे मदीना में मुहम्मद के आगमन के पाँच महीनों के भीतर लिखा गया था।<ref>Moshe Gil. "The Constitution of Medina: A Reconsideration." ''Israel Oriental Studies'' 4 (1974): p. 45.</ref>|group=Note}}
इसने प्रभावी रूप से पहले इस्लामी राज्य की स्थापना की। संविधान ने स्थापित किया: समुदाय की सुरक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता, [[हरम]] या पवित्र स्थान के रूप में मदीना की भूमिका (सभी प्रकार की हिंसा और हथियारों पर प्रतिबंध), महिलाओं की सुरक्षा, मदीना के भीतर स्थिर जनजातीय संबंध, संघर्ष के समय समुदाय का समर्थन करने के लिए कर प्रणाली, बाहरी राजनीतिक गठबंधनों के लिए सीमाएँ, व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान करने की प्रणाली, विवाद समाधान के लिए एक न्याय प्रणाली, और इसने [[ब्लड मनी (इस्लामी कानून)|ब्लड मनी]] (प्रतिशोध के सिद्धांत / [[जैसे को तैसा|लेक्स टैलियोनिस]] के बजाय किसी व्यक्ति की हत्या के लिए परिवार या जनजाति को किया जाने वाला भुगतान) के भुगतान को भी विनियमित किया।{{citation needed|date=July 2017}}
==== प्रारंभिक खलीफत और राजनीतिक आदर्श ====
{{See also|खिलाफत|इस्लामी राजशाही|इस्लामी नैतिकता}}
मुहम्मद की मृत्यु के बाद, उनके समुदाय को एक नए नेता की नियुक्ति करने की आवश्यकता थी, जिससे [[खलीफा]] (Caliph) की उपाधि का उदय हुआ, जिसका अर्थ "उत्तराधिकारी" है। इस कारण से, बाद के इस्लामी साम्राज्यों को [[खलीफत]] (Caliphates) के रूप में जाना गया। [[उमय्यद]] साम्राज्य के विकास के दौरान इस्लाम के भीतर सबसे बड़ा राजनीतिक विकास [[सुन्नी]] और [[शैया|शिया]] मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक विभाजन था; यह विभाजन खलीफत के उत्तराधिकार पर विवाद के कारण शुरू हुआ था। सुन्नी मुसलमानों का मानना था कि खलीफत चुनाव द्वारा होना चाहिए और योग्यता के आधार पर चुनाव के माध्यम से कोई भी [[मुसलमान]] इस उपाधि को धारण कर सकता है। दूसरी ओर, शियाओं का मानना था कि खलीफा पैगंबर के वंशजों में से होने चाहिए, और इस कारण से, उनकी दृष्टि में, [[अली]] के अलावा अन्य सभी खलीफा खलीफत की उपाधि के अवैध usurpers (हड़पने वाले) थे।<ref>Lewis, Bernard, ''The Middle East : a Brief History of the last 2000 Years,'' Touchstone, (1995), p.139</ref> हालांकि, सुन्नी समुदाय मुस्लिम दुनिया के अधिकांश हिस्सों में विजयी हुआ, और इसी तरह, अधिकांश आधुनिक इस्लामी राजनीतिक आंदोलन ([[ईरान]] को छोड़कर) सुन्नी विचार पर आधारित हैं।
मुहम्मद के सबसे करीबी साथियों, उनके बाद के चार "[[राशिदुन|सही मार्गदर्शक]]" खलीफाओं ने राज्य के विस्तार को [[यरुशलम]], [[टेसिफोन]] और [[दमिश्क]] तक जारी रखा, और [[सिंधु नदी|सिंध]] तक सेना भेजी।<ref>[http://alcor.concordia.ca/~shannon/201Lec02images_files/image004.jpg] {{webarchive |url=https://web.archive.org/web/20050930020401/http://alcor.concordia.ca/~shannon/201Lec02images_files/image004.jpg |date=September 30, 2005 }}</ref> उमय्यद खलीफत या उमय्यद राजवंश के शासनकाल के दौरान, इस्लामी साम्राज्य अल-अंदालुस (मुस्लिम स्पेन) से पंजाब क्षेत्र तक फैल गया था।
शासन की संरचना के संबंध में एक महत्वपूर्ण इस्लामी अवधारणा शूरा (Shura) है, यानी अपने मामलों के संबंध में लोगों से परामर्श करना, जिसका उल्लेख कुरान की दो आयतों (3:159 और 42:38) में शासकों के कर्तव्य के रूप में किया गया है।<ref>Lewis, ''The Middle East'', (1995), p.143</ref>
इख्वानी दृष्टिकोण के अनुसार, एक प्रकार का शासक जो इस्लामी आदर्श का हिस्सा नहीं था, वह एक राजा था, जिसकी कुरान में फ़िरौन (Pharaoh) का उल्लेख "अन्यायी और अत्याचारी शासक के archetypes" (18:70, 79) और अन्य जगहों (28:34) के रूप में करके निंदा की गई है।<ref>Lewis, ''The Middle East'', (1995), p.141</ref> सलाफी दृष्टिकोण के अनुसार, कुरान और हदीस खलीफत के बाद एक धर्मी राजशाही को एक वैध इस्लामी राजनीतिक प्रणाली के रूप में मान्य करते हैं, और इसे खलीफत की तुलना में हीन लेकिन अत्याचार से बेहतर बताते हैं।<ref>मुसनद में अल-जैन द्वारा बताए गए अनुसार एक मजबूत श्रृंखला के साथ अहमद द्वारा हुदायफा से वर्णित (14:163 #18319) और जैसा कि अल-हैथामी (5:188-189) द्वारा संकेत दिया गया है:</ref>
===== चुनाव या प्रत्यक्ष नियुक्ति =====
{{See also|इस्लामिक लोकतंत्र|अहल अल-हाल वाल-अक़्द}}
[[शफ़ीई]] स्कूल के मुस्लिम न्यायविद्, [[अल-मावर्दी]] ने लिखा कि खलीफा [[कुरैश]] जनजाति से होना चाहिए। अश्अरी इस्लामी विद्वान और [[मालिकी]] न्यायविद्, [[अल-बाक़िल्लानी|अबू बक्र अल-बाक़िल्लानी]] ने लिखा कि मुसलमानों का नेता केवल बहुमत से होना चाहिए। सुन्नी [[हनाफ़ी]] फ़िक़्ह के संस्थापक, [[अबू हनीफ़ा|अबू हनीफा अल-नुमान]] ने लिखा कि नेता बहुमत से होना चाहिए।<ref name=2muslims>[http://www.2muslims.com/directory/Detailed/225505.shtml Process of Choosing the Leader (Caliph) of the Muslims: The Muslim Khilafa: by Gharm Allah Al-Ghamdy] {{webarchive |url=https://web.archive.org/web/20110707062249/http://www.2muslims.com/directory/Detailed/225505.shtml |date=2011-07-07 }}</ref>
इस्लाम के पश्चिमी विद्वान, [[फ्रेड डोनर]],<ref>''The Early Islamic Conquests'' (1981)</ref> का तर्क है कि प्रारंभिक खलीफत युग के दौरान प्रचलित अरब प्रथा यह थी कि किसी नेता की मृत्यु पर, किसी कुल या जनजाति के प्रमुख व्यक्ति अपने में से किसी एक नेता का चयन करने के लिए इकट्ठा होते थे, हालांकि इस [[शूरा]] या परामर्श परिषद के लिए कोई निर्दिष्ट प्रक्रिया नहीं थी। उम्मीदवार आमतौर पर मृत नेता के ही वंश के होते थे, लेकिन वे जरूरी नहीं कि उसके बेटे ही हों। सक्षम व्यक्तियों को जो अच्छी तरह से नेतृत्व कर सकें, एक प्रभावरहित प्रत्यक्ष उत्तराधिकारी की तुलना में प्राथमिकता दी जाती थी, क्योंकि अधिकांश सुन्नी इस विचार के लिए कोई आधार नहीं पाते हैं कि राज्य के प्रमुख या शासक को केवल वंश के आधार पर चुना जाना चाहिए।
===== ''मजलिस अश-शूरा'' =====
{{See also|शूरा}}
[[खलीफत]] की विधायिका, विशेष रूप से [[राशिदुन खलीफत]] की, आधुनिक अर्थों में लोकतांत्रिक नहीं थी; निर्णय लेने की शक्ति [[मुहम्मद]] के प्रतिष्ठित और भरोसेमंद साथियों (सहाबा) और विभिन्न जनजातियों के प्रतिनिधियों (जिनमें से अधिकांश अपनी-अपनी जनजातियों से चुने गए या चयनित व्यक्ति थे) से बनी एक परिषद में निहित थी।<ref>Sohaib N. Sultan, [http://www.islamonline.net/English/introducingislam/politics/Politics/article04.shtml Forming an Islamic Democracy] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20041001023746/http://www.islamonline.net/English/introducingislam/politics/Politics/article04.shtml |date=2004-10-01 }}</ref>
पारंपरिक सुन्नी इस्लामी न्यायविद् इस बात से सहमत हैं कि 'शूरा', जिसे मोटे तौर पर 'लोगों का परामर्श' कहा जाता है, खलीफत का एक कार्य है। [[मजलिस-अश-शूरा|मजलिस अश-शूरा]] खलीफा को सलाह देती है। इसका महत्व कुरान की निम्नलिखित आयतों से स्थापित होता है:
<blockquote>{{cite quran|42|38|expand=no|quote=...और जो अपने रब की बात मानते हैं और नमाज कायम करते हैं और जिनका हर काम आपस के परामर्श से होता है, [वे अल्लाह को प्यारे हैं]।}}</blockquote>
</blockquote>
<blockquote>{{cite quran|3|159|expand=no|quote=...और मामलों में उनसे परामर्श करो। फिर जब तुम निर्णय ले लो, तो अल्लाह पर भरोसा करो।}}</blockquote>
मजलिस एक नया खलीफा चुनने का एक साधन भी है। अल-मावर्दी ने लिखा कि मजलिस के सदस्यों को तीन शर्तों को पूरा करना चाहिए: उन्हें न्यायप्रिय होना चाहिए, एक अच्छे खलीफा और एक बुरे खलीफा के बीच अंतर करने के लिए पर्याप्त ज्ञान होना चाहिए, और सर्वश्रेष्ठ खलीफा का चयन करने के लिए पर्याप्त ज्ञान और निर्णय होना चाहिए। अल-मावर्दी ने आगे कहा कि आपात स्थिति में जब कोई खलीफत या मजलिस नहीं होती है, तो लोग खुद एक मजलिस बनाएंगे, खलीफा के लिए उम्मीदवारों की एक सूची का चयन करेंगे, और फिर मजलिस उस सूची में से चयन करेगी। मजलिस अश-शूरा की भूमिका की कुछ आधुनिक व्याख्याओं में Islamist लेखक सैयद कुतुब और तकीउद्दीन अल-नभानी (खलीफत की पुनरुत्थान के लिए समर्पित एक अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक आंदोलन के संस्थापक) शामिल हैं। कुरान के शूरा अध्याय के विश्लेषण में, कुतुब का तर्क है कि इस्लाम केवल यह मांग करता है कि शासक को ईश्वर द्वारा बनाए गए कानूनों के सामान्य संदर्भ में शासित लोगों (आमतौर पर अभिजात वर्ग) के कम से कम कुछ हिस्से से परामर्श करना चाहिए, जिसे शासक को निष्पादित करना होगा। तकीउद्दीन अल-नभानी ने लिखा कि शूरा इस्लामी खलीफत की "शासन संरचना" का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, "लेकिन इसके स्तंभों में से एक नहीं है," और इसे खलीफत के शासन के गैर-इस्लामी बने बिना नजरअंदाज किया जा सकता है। हालाँकि, शूरा की ये व्याख्याएँ (कुतुब और अल-नभानी द्वारा) सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत नहीं हैं, और इस्लामी लोकतंत्रवादी शूरा को इस्लामी राजनीतिक प्रणाली का एक अभिन्न हिस्सा और महत्वपूर्ण स्तंभ मानते हैं।{{citation needed|date=April 2019}}
===== शक्तियों का पृथक्करण =====
{{See also|उलेमा|इस्लामिक नैतिकता|इस्लाम और सेक्युलरिज़्म}}
प्रारंभिक [[खलीफत|इस्लामी खलीफतों]] में, [[खलीफा]] का पद मुहम्मद के राजनीतिक अधिकार के उत्तराधिकारी के रूप में राज्य के प्रमुख के रूप में विकसित हुआ, जो [[सुन्नी इस्लाम|सुन्नियों]] के अनुसार, आदर्श रूप से लोगों या उनके प्रतिनिधियों द्वारा चुना गया था,<ref>''Encyclopedia of जैसा कि [[अबू बक्र का चुनाव|अबू बक्र के चुनाव]] में, [[उस्मान का चुनाव|उस्मान के चुनाव]] में, और खलीफा के रूप में [[अली के चुनाव|अली]] के मामले में था। बाद में, राशिदुन खलीफाओं के बाद [[इस्लामी स्वर्ण युग]] के खलीफाओं के दौरान, लोकतांत्रिक भागीदारी की मात्रा बहुत कम थी; लेकिन चूंकि इस्लाम में "कोई भी व्यक्ति किसी अन्य से श्रेष्ठ नहीं है सिवाय धार्मिकता और सदाचार के आधार पर", और मुहम्मद का आदर्श लोगों से परामर्श करना था, बाद के इस्लामी शासकों ने अक्सर अपने राज्य के मामलों के संबंध में लोगों से परामर्श किया।<ref>{{cite book|title=Justice Without Frontiers|first=Christopher G.|last=Judge Weeramantry|year=1997|publisher=[[ब्रिज पब्लिशर्स]]|isbn=90-411-0241-8|pages=135}}</ref>
खलीफा (या बाद में, सुल्तान) की विधायी शक्ति हमेशा विद्वान वर्ग यानी 'उलेमा' द्वारा प्रतिबंधित थी, जिन्हें इस्लामी कानून का संरक्षक माना जाता था। चूंकि कानून न्यायविदों से आया था, इसलिए इसने खलीफा को कानूनी परिणामों को निर्देशित करने से रोका। शरिया के फैसले न्यायविदों के 'इज्मा' (आम सहमति) के आधार पर आधिकारिक के रूप में स्थापित किए गए थे, जिन्होंने सैद्धांतिक रूप से 'उम्मा' (मुस्लिम समुदाय) के प्रतिनिधियों के रूप में काम किया था। 11वीं और 12वीं शताब्दी के बाद से जब कानून कॉलेज (''[[मदरसा|मदरसा]]'') व्यापक हो गए, तो एक छात्र को अक्सर कानूनी फैसले देने के लिए एक ''[[इजाजत|इजाजत अल-तद्रीस वा-अल-इफ्ता]]'' ("शिक्षण और कानूनी राय जारी करने का लाइसेंस") प्राप्त करना पड़ता था।<ref>{{cite journal |last=Makdisi |first=George |date=April–June 1989 |title=Scholasticism and Humanism in Classical Islam and the Christian West |journal=Journal of the American Oriental Society |volume=109 |issue=2 |pages=175–182 [175–77] |doi=10.2307/604423|jstor=604423 }}</ref> कई मायनों में, शास्त्रीय इस्लामी कानून ने संवैधानिक कानून की तरह काम किया।<ref name=Feldman2008/>
व्यवहार में, राशिदुन खलीफत के बाद सैकड़ों वर्षों तक और 20वीं शताब्दी तक, इस्लामी राज्यों ने शरिया के नियमों का पालन करने वाले सुल्तानों और उलेमाओं के सह-अस्तित्व के आधार पर एक शासन प्रणाली का पालन किया। यह प्रणाली कुछ पश्चिमी सरकारों से मिलती-जुलती थी, क्योंकि दोनों के पास एक अनिखित संविधान (यूके की तरह) और सरकार की अलग, परस्पर विरोधी शाखाएँ (यूएस की तरह) थीं—शासन में शक्तियों के पृथक्करण को सुनिश्चित करना। जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका (और कुछ अन्य शासन प्रणालियों) में सरकार की तीन शाखाएँ हैं—कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका—इस्लामी राजतंत्रों में दो शाखाएँ थीं—सुल्तान और उलेमा।<ref name=feldman-fall-6>Feldman, Noah, ''Fall and Rise of the Islamic State'', प्रिंसटन यूनिवर्सिटी प्रेस, 2008, p.6</ref>
प्रोफेसर ओलिविए रॉय (Olivier Roy) के अनुसार, सुल्तानों और अमीरों की राजनीतिक शक्ति और खलीफा की धार्मिक शक्ति के बीच इस "वास्तविक अलगाव" को हिजरत की पहली शताब्दी के अंत तक "बनाया और संस्थागत" किया गया था। संप्रभु शासक का धार्मिक कार्य मुस्लिम समुदाय को दुश्मनों से बचाना, शरिया स्थापित करना और जन कल्याण (''मस्लहा'') सुनिश्चित करना था। राज्य मुसलमानों को अच्छे मुसलमानों के रूप में जीने में सक्षम बनाने का एक साधन था, और यदि सुल्तान ने ऐसा किया, तो मुसलमान उसका पालन करने के लिए बाध्य थे। शासक की वैधता के प्रतीक "सिक्के ढालने का अधिकार और शुक्रवार की प्रार्थना (''[[जुमा]] [[खुत्बा]]'') को उसके नाम पर दिया जाना" थे।<ref>Roy, Olivier, ''The Failure of Political Islam'' by Olivier Roy, translated by Carol Volk, Harvard University Press, 1994, p.14-15</ref>
सदाकत कादरी का तर्क है कि उलेमाओं द्वारा खलीफत के प्रति भारी मात्रा में "सम्मान" दिखाया गया था, और यह कम से कम कुछ मामलों में "प्रतिकूल" था। "यद्यपि न्यायविदों ने खलीफा को अयोग्य घोषित करने के लिए मानसिक विकलांगता से लेकर अंधेपन तक की स्थितियों की पहचान की, लेकिन किसी ने भी खलीफत की शक्तियों को सटीक रूप से संस्थागत रूप से परिभाषित करने की हिम्मत नहीं की।" अब्बासियों की खलीफत के दौरान:
<blockquote>जब खलीफा अल-मुतावक्किल को 861 में मार डाला गया था, तो न्यायविदों ने पूर्वव्यापी रूप से एक फतवा के साथ उसकी हत्या को वैध बना दिया था। आठ साल बाद, उन्होंने एक उत्तराधिकारी के वैध त्याग को देखा जिसे शौचालय से घसीटा गया था, बेहोश होने तक पीटा गया था, और मरने के लिए एक तिजोरी में छोड़ दिया गया था। 10वीं शताब्दी के मध्य में, न्यायाधीशों ने औपचारिक रूप से पुष्टि की कि अंधापन एक खलीफा के लिए अयोग्य घोषित करने का एक कारण था, इस बात का कोई जिक्र किए बिना कि उन्हें अभी-अभी उसकी आँखें फोड़ने के दृश्य को देखने के लिए इकट्ठा किया गया था।<ref name=kadri-120-1>{{cite book|last1=Kadri|first1=Sadakat|title=Heaven on Earth: A Journey Through Shari'a Law from the Deserts of Ancient Arabia ...|date=2012|publisher=Macmillan|isbn=9780099523277|pages=120–1|url=https://books.google.com/books?id=ztCRZOhJ10wC&pg=PT127}}</ref>
</blockquote>
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के कानून के प्रोफेसर नूह फेल्डमैन के अनुसार, 19वीं शताब्दी की शुरुआत में [[उमय्यद साम्राज्य|उमय्यद साम्राज्य]] (यहाँ मूल पाठ में Ottoman Empire है, जो तुर्क साम्राज्य है) द्वारा शरिया के संकलन ने न्यायविदों और कानूनी विद्वानों को इस्लामी कानून पर अपना नियंत्रण खो दिया।<ref name=Feldman-why>{{Cite web|author=Noah Feldman|title=Why Shariah?|work=[[न्यू यॉर्क टाइम्स]]|date=March 16, 2008|url=https://www.nytimes.com/2008/03/16/magazine/16Shariah-t.html?ei=5070&em=&en=5c1b8de536ce606f&ex=1205812800&pagewanted=all|accessdate=2008-10-05}}</ref>
{{quote|विद्वानों ने कानून के रखवालों के रूप में अपनी exalted status कैसे खो दी, यह एक जटिल कहानी है, लेकिन इसे इस कहावत द्वारा संक्षेपित किया जा सकता है कि आंशिक सुधार कभी-कभी बिल्कुल भी सुधार न होने से भी बदतर होता है। 19वीं शताब्दी की शुरुआत में, उस्मानी साम्राज्य (Ottoman Empire) ने सैन्य आपदाओं के जवाब में एक आंतरिक सुधार आंदोलन शुरू किया। सबसे महत्वपूर्ण सुधार शरिया को संहिताबद्ध करने का प्रयास था। पश्चिमीकरण की इस प्रक्रिया ने, जो इस्लामी कानूनी परंपरा से अपरिचित थी, शरिया को विद्वानों के मानवीय प्रयासों के माध्यम से खोजी जाने वाली सिद्धान्तों और सिद्धांतों के निकाय से नियमों के एक ऐसे सेट में बदलने का लक्ष्य रखा जिसे एक किताब में देखा जा सके। [...] लेकिन एक बार जब कानून संहिताबद्ध रूप में मौजूद हो गया, तो कानून ने खुद को अधिकार के स्रोत के रूप में विद्वानों को प्रतिस्थापित करने में सक्षम बना दिया। संकलन ने विद्वानों को कानून की सामग्री पर अंतिम बात कहने के अपने महत्वपूर्ण दावे से वंचित कर दिया और उस शक्ति को राज्य को स्थानांतरित कर दिया।}}
==== राजशाही ====
{{Main|Islamic monarchy}}
एक इस्लामी राजशाही एक [[राजशाही]] है जो [[इस्लाम]] का पालन करती है। ऐतिहासिक रूप से विभिन्न नामों से जानी जाती है, जैसे कि ''[[मलिक|ममलिकत]]'' ("राज्य"), खलीफत, सल्तनत, या अमीरात, समकालीन इस्लामी राजतंत्रों में शामिल हैं:
* [[बहरीन|बहरीन साम्राज्य]]
* [[ब्रूनई|ब्रूनई दारुस्सलाम]]
* [[जॉर्डन|जॉर्डन का हाशमी साम्राज्य]]
* [[कुवैत|कुवैत राज्य]]
* [[मलेशिया]]
* [[मोरक्को|मोरक्को साम्राज्य]]
* [[ओमान|ओमान सल्तनत]]
* [[कतर|कतर राज्य]]
* [[सऊदी अरब|सऊदी अरब साम्राज्य]]
* [[संयुक्त अरब अमीरात]]
==== आज्ञाकारिता और विरोध ====
{{Main|Ulil-Amr|Verse of Obedience}}
विद्वान मोजन मोमेन के अनुसार, "कुरान के केंद्रीय विषयों में से एक जिसका बहुत विश्लेषण किया गया है" कि जिम्मेदारी कहाँ होनी चाहिए, निम्नलिखित आयत पर आधारित है:
<blockquote>
"हे उन लोगों जो विश्वास करते हो! अल्लाह की आज्ञा मानो और पैगंबर की आज्ञा मानो और उन लोगों की जो तुम में से अधिकार दिए गए हैं (''उलू अल-अम्र'')" (कुरान 4:59)।
</blockquote>
सुन्नियों के लिए, ''उलू अल-अम्र'' शासक (खलीफा और राजा) हैं, लेकिन शियाओं के लिए, यह वाक्यांश इमामों को संदर्भित करता है।<ref>Momen, Moojan, ''Introduction to Shi'i Islam'', Yale University Press, 1985 p.192</ref>
[[मदीना इस्लामिक विश्वविद्यालय]] के कई विद्वान, पुस्तक ''उसूल अल-ईमान'' में, यह कहते हैं कि कुरान और सुन्नत से प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार, पापी कृत्यों को छोड़कर सभी मामलों में इमामों और शासकों की आज्ञाकारिता का आदेश दिया गया है, जिसका सारांश इस प्रकार है:<ref>[https://d1.islamhouse.com/data/bn/ih_books/single2/bn_The_Foundations_of_Faith_in_the_Light_of_the_Quran_and_the_Sunnah.pdf The Foundations of Faith in the Light of the Quran and the Sunnah, Authors: Several Scholars of Madinah University, Translators: Abu Bakr Muhammad Zakaria and Manzur-e-Ilahi, Published by: King Fahd Printing Press, Saudi Arabia. p. 383]</ref>
पाप के मामलों को छोड़कर सभी परिस्थितियों में सुनना और आज्ञा मानना अनिवार्य है।
भले ही शासक सलाह स्वीकार न करें, लेकिन उनके खिलाफ विद्रोह नहीं करना चाहिए।
जो कोई भी शासकों को सलाह देता है और शरिया द्वारा समर्थित तरीके से उनके कार्यों की आलोचना करता है, वह पाप से मुक्त हो जाता है।
फ़ितना (अशांति) और अराजकता पैदा करना वर्जित है, और इसी तरह, कुछ भी करना वर्जित है जो फ़ितना या अशांति का कारण बन सकता है।
सत्ता में बैठे लोगों के खिलाफ विद्रोह तब तक अनुमति नहीं है जब तक कि उनके द्वारा ऐसा स्पष्ट कुफ्र प्रकट नहीं किया जाता है, जिसके बारे में इसके कुफ्र होने के बारे में बिल्कुल भी असहमति नहीं है।
शब्दों, कार्यों और मान्यताओं में कुरान और सुन्नत के आदर्शों द्वारा निर्देशित मुसलमानों की जमात (समुदाय) से चिपके रहना अनिवार्य है; किसी को उनके साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखना चाहिए, उनके मार्ग पर चलना चाहिए, और सच्चाई और न्याय के मार्ग पर उनके शब्दों को एकजुट रखने के लिए उत्सुक होना चाहिए। किसी को उनसे अलग नहीं होना चाहिए या उनके बीच विभाजन पैदा नहीं करना चाहिए।
===== पापी शासक को बदलने का सिद्धांत =====
{{See also|खारिजाइट|बागी (इस्लाम)}}
इस सवाल पर कि क्या किसी अत्याचारी और पापी शासक के खिलाफ विद्रोह और विरोध जायज है, सालेह अल-मुनज्जिद कहते हैं: "इस्लामी शरिया के सिद्धांतों में से एक है—'बुराई का मुकाबला बड़ी बुराई से नहीं किया जा सकता है। बल्कि, बुराई का मुकाबला उस चीज़ से किया जाना चाहिए जो इसे मिटा दे या इसे कम कर दे।' इसलिए, यदि जो लोग ऐसे शासक को पदच्युत करना चाहते हैं जो स्पष्ट कुफ्र में शामिल है, तो उनके पास उसे पदच्युत करने और उसे एक अच्छे और धर्मी शासक के साथ बदलने की क्षमता है, और यदि इससे मुसलमानों के बीच बड़ी अराजकता नहीं होती है या उन्हें इस शासक की बुराई से बड़ी बुराई के अधीन नहीं किया जाता है—तो इसमें कोई बाधा नहीं है। इसके विपरीत, यदि यह विद्रोह एक बड़ी अराजकता का कारण बनता है, सुरक्षा से समझौता करता है, या निर्दोष लोगों को उत्पीड़न और गुप्त हत्याओं का शिकार बनाता है... आदि, तब विद्रोह अनुमत नहीं होगा। बल्कि, किसी को धैर्य रखना चाहिए, शासक के अच्छे आदेशों का पालन करना चाहिए, उसे सलाह देनी चाहिए, और उसे भलाई करने की ओर बुलाना चाहिए। किसी को बुराई को कम करने और अच्छाई को बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए। यही सीधा रास्ता है; वह रास्ता जिसका पालन किया जाना चाहिए। क्योंकि इस रास्ते में मुसलमानों के लिए सामान्य कल्याण निहित है; नुकसान का पहलू कम है और इस रास्ते में लाभ का पहलू अधिक है; और इस रास्ते में और भी बड़ी बुराइयों से मुसलमानों की सुरक्षा निहित है।"<ref>{{cite web |title=Ruling on rebelling against a ruler - Islam Question & Answer |url=https://islamqa.info/bn/answers/9911 |website=islamqa.info |access-date=September 2, 2022 |language=bn}}</ref>
उन प्रश्नों के उत्तर में जहाँ शासक के कार्य इस्लाम विरोधी हैं, अबू बक्र मुहम्मद जकारिया ने मुहम्मद बाज़मौल द्वारा लिखित पुस्तक "लैसा मिन मनहाजिस-सलाफ़" (यह सलफ का मनहाज नहीं है) के अनुवाद में अपनी जोड़ी गई व्याख्याओं और टिप्पणियों में कहा है कि कई परिदृश्य हो सकते हैं:
#. इस्लाम के प्रति उनका विरोध उस स्तर तक नहीं पहुँचा है जो सीधे उन्हें कुफ्र में डुबो देता है। इस स्थिति में, जब तक वे नमाज कायम करते हैं और अदा करते हैं, उनके संबंध में कुछ चीजें की जा सकती हैं:
उसके मार्गदर्शन के लिए अल्लाह से प्रार्थना करना। यही सलफ किया करते थे।
सत्य का वचन उसके सामने प्रस्तुत करना। यह भी कुछ सलफ का मनहाज था, लेकिन व्यक्ति को ऐसे कद का होना चाहिए जिसकी बातों को शासक ध्यान में रखे।
उसे गुप्त रूप से सलाह देना। यहाँ भी सलाहकार और सलाह प्राप्तकर्ता की क्षमता का ठीक से पालन किया जाना चाहिए।
यदि वह काम नहीं करता है, तो अल्लाह के उसकी स्थिति को बदलने की प्रतीक्षा करना। जैसे विद्वानों ने अल-हज्जाज के खिलाफ प्रतीक्षा की थी।
#. और यदि इस्लाम का विरोध उस स्तर तक पहुँच जाता है जिसमें वह सीधे तौर पर कुफ़्र में शामिल हो जाता है, जिसके लिए हमारे पास स्पष्ट प्रमाण हैं, तो निम्नलिखित दो स्थितियाँ हो सकती हैं:
शर्तें पूरी नहीं हुई हैं और बाधाएँ दूर नहीं की गई हैं, तब क्या करने की आवश्यकता है:
उसके खिलाफ कुफ़्र के संबंध में प्रमाण स्थापित करना।
संदेहों को दूर करने के प्रयास किए जाने चाहिए।
जाँच करें कि क्या उसके पास कोई स्वीकार्य बहाउपयुक्त बहाना है या नहीं।
उपर्युक्त प्रथम परिदृश्य के सभी कार्यों को अंजाम दिया जाना चाहिए।
यदि शर्तों की पूर्ति और बाधाओं को दूर करना पूरा हो चुका है और इससे संबंधित सब कुछ अंतिम रूप दे दिया गया है:
शासक को बदलने के प्रयास किए जाने चाहिए। हालांकि, इसके लिए कई शर्तों को पूरा किया जाना चाहिए:
इसके लिए क्षमता मौजूद होनी चाहिए। प्रचलित राय एक बेहतर प्रशासन लाने की ओर झुकी होनी चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई बदतर स्थिति उत्पन्न न हो।
यदि वह संभव नहीं है, तो,
व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार दीन के काम में लगा रहेगा।
जनता उन्मुख कार्य जारी रखा जाना चाहिए।
जनता को धीरे-धीरे जागरूक किया जाना चाहिए, और फिर पूर्व शर्तों को पूरा करने और बाधाओं को दूर करने के बाद बदलाव लाया जाना चाहिए।
इस तरह, जब उनमें ईमान और अच्छे कर्म पाए जाते हैं, तो अल्लाह का वादा वहाँ पूरा होगा और वह अपने पसंदीदा लोगों को सत्ता में बिठाएगा।<ref>{{cite book |last1=Bazmool |first1=Muhammad ibn Umar ibn Salim |last2=bin Tofazzal |first2=Habib |last3=Zakaria |first3=Abu Bakr Muhammad |title=This is Not the Manhaj of the Salaf |date=November, 2021 |publisher=Believers Vision |location=Dhaka |isbn=978-984-35-0960-4 |pages=35, 36, 37 |access-date=February 4, 2026}}</ref>
इस सवाल पर कि क्या समकालीन लोकतांत्रिक पार्टी की स्थिति का उपयोग परिवर्तन के एक तरीके के रूप में किया जा सकता है, अबू बक्र मुहम्मद जकारिया ने मुहम्मद बाज़मौल द्वारा लिखित पुस्तक "लैसा मिन मनहाजिस-सलाफ़" के अनुवाद में अपनी जोड़ी गई व्याख्याओं और टिप्पणियों में कहा है: "यह मामला पहले मौजूद नहीं था। पिछले युग में, कोई बदलाव के लिए खड़ा होता, उसके अनुयायी युद्ध की तैयारी करते, स्थिति के आधार पर लोग उससे जुड़ते, और वह एक क्षेत्र पर कब्जा कर लेता और उसके शासक को पदच्युत कर देता। इनमें, अधिकांश सलफ की कोई भागीदारी नहीं थी। बल्कि, बाद के प्रमुख सलफ ने न केवल हतोत्साहित किया बल्कि कड़ाई से मना किया। क्योंकि इतिहास में यह एक सिद्ध सत्य रहा है कि जब भी लोगों ने एक मुस्लिम शासक के खिलाफ मैदान संभाला, तो परिणाम इस्लाम और मुसलमानों के लिए सुखद नहीं था। और परिवर्तन की नीति लोकतांत्रिक रूप से भी लागू नहीं होती है क्योंकि यह मुसलमानों के बीच विभाजन और गुटबंदी पैदा करती है, उदारता के नाम पर हलाल को हराम और हराम को हलाल बनाती है, दीन को छोटा करती है, इस्लाम के अलावा किसी अन्य चीज़ के लिए प्यार और दुश्मनी पैदा करती है, और आपसी लड़ाई और संघर्ष को बढ़ाती है। इस स्थिति में, सलफ-ए-सालेह की नीति से चिपके रहना सबसे अच्छा है, जो सभी पार्टी के बैनरों, मंचों और गठबंधनों से खुद को बचाना है। इसके संबंध में, अल-उसैमीन कहते हैं कि दावत समूहों के माध्यम से मजबूत नहीं होती है, बल्कि कुरान और सुन्नत से चिपके रहने से मजबूत होती है।"<ref>{{cite book |last1=Bazmool |first1=Muhammad ibn Umar ibn Salim |last2=bin Tofazzal |first2=Habib |last3=Zakaria |first3=Abu Bakr Muhammad |title=This is Not the Manhaj of the Salaf |date=November, 2021 |publisher=Believers Vision |location=Dhaka |isbn=978-984-35-0960-4 |pages=37, 38, 39 |access-date=February 4, 2026}}</ref>
विद्वान बर्नार्ड लुईस के अनुसार, इस कुरान की आयत को मुहम्मद को जिम्मेदार ठहराए गए कई कथनों में विस्तृत किया गया है:
<blockquote>लेकिन ऐसे भी कथन हैं जो आज्ञाकारिता के कर्तव्य को कड़ाई से सीमित करते हैं। पैगंबर को जिम्मेदार ठहराए जाने वाले और प्रामाणिक के रूप में सार्वभौमिक रूप से स्वीकार किए जाने वाले दो कथन निर्देशिका हैं। एक कहता है, "पाप में कोई आज्ञाकारिता नहीं है"; दूसरे शब्दों में, यदि शासक दिव्य कानून के विपरीत किसी चीज़ का आदेश देता है, तो न केवल आज्ञाकारिता का कोई कर्तव्य नहीं है, बल्कि अवज्ञा का कर्तव्य है। यह पश्चिमी राजनीतिक विचार में दिखाई देने वाले [[क्रांति का अधिकार]] से कहीं अधिक है। यह क्रांति का कर्तव्य है, या कम से कम प्राधिकरण के खिलाफ अवज्ञा और विरोध का है। दूसरा उच्चारण, "अपने निर्माता के खिलाफ किसी प्राणी की आज्ञा नहीं मानो," फिर से शासक के अधिकार को स्पष्ट रूप से सीमित करता है, चाहे शासक कोई भी रूप ले।<ref>{{Cite web |url=http://www.foreignaffairs.org/20050501faessay84305/bernard-lewis/freedom-and-justice-in-the-modern-middle-east.html?mode=print |title=Freedom and Justice in the Middle East |access-date=2008-11-05 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071230195152/http://www.foreignaffairs.org/20050501faessay84305/bernard-lewis/freedom-and-justice-in-the-modern-middle-east.html?mode=print |archive-date=2007-12-30 |url-status=dead }}</ref></blockquote>
हालांकि, इब्न तैमियाह, जो 14वीं शताब्दी के हनबली मध्हब के एक महत्वपूर्ण विद्वान हैं, इस आयत के संबंध में अपने 'तफ़सीर' में कहते हैं, "पाप में कोई आज्ञाकारिता नहीं है"; जिसका अर्थ है कि यदि शासक का आदेश दिव्य कानून के विपरीत है, तो इसे नजरअंदाज किया जाना चाहिए, लेकिन इसका उपयोग क्रांति के बहाने के रूप में नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे मुसलमानों का खून बहेगा। इब्न तैमियाह के अनुसार, यह कहावत—'एक सुल्तान के बिना एक रात की तुलना में एक अन्यायी इमाम के तहत साठ साल बेहतर हैं'—अनुभव द्वारा सिद्ध है।<ref name=Lambton>{{cite book|last1=Lambton|first1=Ann K. S.|title=State and Government in Medieval Islam|date=2002|publisher=Routledge|page=145|url=https://books.google.com/?id=DVvYAQAAQBAJ&pg=PA144&dq=siyasa+ibn+taymiyyah#v=onepage&q=siyasa%20ibn%20taymiyyah&f=false|accessdate=19 September 2015|isbn=9781136605208}}</ref> उनका मानना था कि "[[अच्छाई का आदेश देना और बुराई से रोकना|अच्छाई का आदेश दें और बुराई से मना करें]]" (''अल-अम्र बि-ल-मारूफ़ वा-न-नह्य 'अनि-ल-मुनकर'', जो {{cite quran|3|104|s=ns}} और {{cite quran|3|110|s=ns}} और अन्य आयतों में पाया जाता है) के लिए कुरान का निर्देश अन्य मुसलमानों पर अधिकार रखने वाले प्रत्येक राज्य के अधिकारी का कर्तव्य था, जिसमें खलीफा से लेकर "बच्चों की लिखावट का मूल्यांकन करने के प्रभारी स्कूलमास्टर" तक शामिल थे।<ref>Ibn Taymiyya, ''Le traite de droit public d'ibn Taimiya.'' Translated by Henri Laoust. Beirut, 1948, p.12</ref><ref name=kadri-139>{{cite book|last1=Kadri|first1=Sadakat|title=Heaven on Earth: A Journey Through Shari'a Law from the Deserts of Ancient Arabia ...|date=2012|publisher=macmillan|isbn=9780099523277|page=139|url=https://books.google.com/?id=ztCRZOhJ10wC&printsec=frontcover&dq=Heaven+on+Earth:+A+Journey+Through+Shari%27a+Law#v=onepage&q=Heaven%20on%20Earth%3A%20A%20Journey%20Through%20Shari'a%20Law&f=false}}</ref>
==== शरिया और शासन (''सियासा'') ====
{{Main|Siyasa}}
मध्य युग के अंत से, सुन्नी फ़िक़्ह ने सियासा शरिया (Siyasa Shar'iyya) के सिद्धांत को विस्तृत करना शुरू किया, जिसका शाब्दिक अर्थ [[शरिया]] के अनुसार शासन है और इसे कभी-कभी इस्लामी कानून के राजनीतिक आयाम के रूप में संदर्भित किया जाता है। इसका लक्ष्य इस्लामी कानून के साथ राज्य शासन की व्यावहारिक जरूरतों को समेकित करना था।<ref>{{cite encyclopedia|author1=Bosworth, C.E.|author2=Netton, I.R. |author3=Vogel, F.E.|title=Siyāsa|year=2012|encyclopedia=Encyclopaedia of Islam|edition=2nd|publisher=Brill |editor1=P. Bearman|editor2= Th. Bianquis|editor3= C.E. Bosworth|editor4= E. van Donzel|editor5= W.P. Heinrichs|doi=10.1163/1573-3912_islam_COM_1096 }}{{subscription required}}</ref> इस सिद्धांत ने राजनीतिक अधिकार के धार्मिक उद्देश्य पर जोर दिया और सुविधा और उपयोगिता विचारों द्वारा आवश्यक इस्लामी कानून के व्यावहारिक अनुप्रयोग की वकालत की। यह शुरू में इस्लामी कानून की सख्त प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं के कारण होने वाली कठिनाइयों के जवाब में उभरा। इस कानून ने परिस्थितिजन्य साक्ष्य को खारिज कर दिया और गवाहों की गवाही पर जोर दिया, जिससे 'काजी' (शरिया न्यायाधीश) संचालित अदालतों में आपराधिक दोषसिद्धि प्राप्त करना मुश्किल हो गया। इसके जवाब में, इस्लामी न्यायविदों ने सीमित परिस्थितियों में अधिक प्रक्रियात्मक स्वतंत्रता की अनुमति दी, जैसे कि शासक की परिषद द्वारा आयोजित 'मजालिम' अदालतों में राज्य के अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों की सुनवाई करना और मामूली अपराधों के लिए 'ताजीर' (विवेकानंद दंड) लागू करना। हालांकि, ममलुक सल्तनत के तहत, गैर-काजी अदालतों ने वाणिज्यिक और पारिवारिक कानून में अपना अधिकार क्षेत्र बढ़ाया, शरिया अदालतों के समानांतर संचालन किया और फ़िक़्ह द्वारा निर्धारित कुछ औपचारिकता से छूट दी। इस सिद्धांत के बाद के विकास ने राज्यकला और न्यायशास्त्र के बीच इस तनाव को हल करने का प्रयास किया। बाद में, इस सिद्धांत का उपयोग सार्वजनिक हित में राज्य द्वारा अपनाए गए कानूनी संशोधनों को सही ठहराने के लिए किया गया है, जब तक कि उन्हें शरिया के विपरीत नहीं माना गया था। उदाहरण के लिए, इसे उस्मानी शासकों द्वारा लागू किया गया था, जिन्होंने प्रशासनिक, आपराधिक और आर्थिक कानूनों का एक संकलन अधिनियमित किया जिसे 'कानून' (Kanun) के रूप में जाना जाता है।<ref>{{cite encyclopedia|author=Yossef Rapoport|title=Political Dimension (Siyāsa Sharʿiyya) of Islamic Law|encyclopedia=The Oxford International Encyclopedia of Legal History|publisher=Oxford University Press|location=Oxford|year=2009|url=http://www.oxfordreference.com/view/10.1093/acref/9780195134056.001.0001/acref-9780195134056-e-635|editor=Stanley N. Katz|ref=harv}}{{subscription required}}</ref>
==== शिया परंपरा ====
शिया इस्लाम में, शासकों के प्रति तीन दृष्टिकोण प्रमुख रहे हैं—शासक के साथ राजनीतिक सहयोग, शासक को चुनौती देने के लिए राजनीतिक सक्रियता, और राजनीति से अलगाव—"समय के साथ शिया उलेमाओं के लेखन" में "इन तीनों दृष्टिकोणों के सभी घटक" प्रदर्शित हुए हैं।<ref>Momen, Moojan, ''Introduction to Shi'i Islam'', Yale University Press, 1985 p.194</ref>
==== खरिजी परंपरा ====
{{Main|Kharijite}}
{{See also|Baghī (Islam)}}
कुछ मुस्लिम लेखकों के अनुसार, इस्लाम के भीतर अतिवाद की शुरुआत 7वीं शताब्दी में [[खवारिज|खवारिजियों]] (Kharijites) से हुई थी। मुख्य रूप से अपने राजनीतिक पदों से, उन्होंने कट्टर सिद्धांतों विकसित किए जो उन्हें मुख्यधारा के सुन्नी और शिया दोनों मुसलमानों से अलग करते थे। खवारिजी विशेष रूप से [[तकफिर]] के प्रति अतिवाद अपनाने के लिए कुख्यात थे, जिसके द्वारा उन्होंने अन्य मुसलमानों को अविश्वासी घोषित कर दिया और इसलिए उन्हें मौत के घाट उतारना उचित माना।<ref>{{cite web|url=https://www.theglobeandmail.com/globe-debate/another-battle-with-islams-true-believers/article20802390/|title=Another battle with Islam's 'true believers'|work=The Globe and Mail}}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.quilliamfoundation.org/wp/wp-content/uploads/publications/free/the-balance-of-islam-in-challenging-extremism.pdf |title=Archived copy |access-date=2015-11-17 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20140802045255/http://www.quilliamfoundation.org/wp/wp-content/uploads/publications/free/the-balance-of-islam-in-challenging-extremism.pdf |archive-date=2014-08-02 }}</ref><ref>{{cite web|url=https://ottawacitizen.com/news/national/fruits-of-the-tree-of-extremism|title=Imam Mohamad Jebara: Fruits of the tree of extremism|author=Mohamad Jebara More Mohamad Jebara|work=Ottawa Citizen}}</ref>
विद्वान अक्सर खवारिजियों के उद्भव के संबंध में इस्लामी पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) की एक हदीस का हवाला देते हैं।
{{quote|अबू सईद अल-खुद्री (रजि.) ने वर्णन किया: अली (रजि.) ने यमन से धूल से ढका हुआ कुछ सोना भेजा। उन्होंने उस सोने को 4 नव-मुस्लिम अरब नेताओं के बीच वितरित किया। उस समय, धंसे हुए आँखों, ऊँची गाल की हड्डियों, एक प्रमुख माथे और मुड़े हुए सिर वाले एक व्यक्ति ने, जिसका नाम जुल-खुवैसिराह था, खड़े होकर कहा: हे अल्लाह के रसूल, अल्लाह से डरो, तुमने अन्याय किया है! उन्होंने उत्तर दिया, तुम पर अफसोस! क्या मेरे पास अल्लाह से डरने का पृथ्वी पर सबसे बड़ा अधिकार नहीं है? यदि मैं अल्लाह की अवज्ञा करता हूँ या अन्याय करता हूँ, तो अल्लाह की आज्ञा का पालन कौन करेगा और न्यायसंगत रूप से कार्य करेगा? अल्लाह ने मुझे पृथ्वी के निवासियों के संबंध में भरोसेमंद माना, और तुम मेरे भरोसे पर भरोसा नहीं कर सकते! तब वह व्यक्ति चला गया। खालिद बिन अल-वलिड (रजि.) ने तब कहा, हे अल्लाह के रसूल, क्या मैं उस व्यक्ति को (पैगंबर के प्रति अविश्वास व्यक्त करके apostasy और Kufr करने के लिए) निष्पादित न करूँ? उन्होंने कहा, नहीं। शायद वह व्यक्ति प्रार्थना करता है। खालिद (रजि.) ने कहा, कितने ही लोग जो प्रार्थना करते हैं, अपने मुँह से वह कहते हैं जो उनके दिलों में नहीं है। तब अल्लाह के रसूल (सल्ल.) ने कहा, मुझे लोगों के दिलों की खोज करने या उनके पेट को चीरने का आदेश नहीं दिया गया है। फिर उन्होंने जाने वाले व्यक्ति को देखा और कहा, इस व्यक्ति की संतान से, लोगों का एक समूह उभरेगा जो कुरान को खूबसूरती से और मार्मिक रूप से पढ़ेंगे, फिर भी कुरान उनके गले से आगे नहीं जाएगी। वे इस्लाम से वैसे ही गुजरेंगे जैसे एक तीर शिकार से गुजरता है। वे इस्लाम के अनुयायियों को मार डालेंगे और मूर्तियों और पत्थरों के अनुयायियों को अकेला छोड़ देंगे। यदि मैं उन तक पहुँचता, तो मैं उन्हें वैसे ही काट डालता जैसे समूद के लोगों को काट डाला गया था।|बुखारी अस-सहीह 3/1219, 1321, 4/1581, 1714, 5/2281, 6/2540, 2801; मुस्लिम, अस-सहीह 2/741-744.}}
[[खंडोकर अब्दुल्ला जहांगीर]], अपनी पुस्तक इस्लाम के नाम पर उग्रवाद में, उपर्युक्त हदीस का हवाला देते हुए कहते हैं:<ref>{{cite web |last1=Jahangir |first1=Khondoker Abdullah |title=2. 2. Kharijite Sect |publisher=HadithBD.com|url=http://www.hadithbd.com/books/link/?id=6896 |website=www.hadithbd.com |access-date=November 12, 2022 |language=bn}}</ref>
{{quote|हम इस्लामी इतिहास में उग्रवाद और आतंकवाद की पहली घटनाओं को खवारिज संप्रदाय के कार्यों के माध्यम से देखते हैं। 35 हिजरी (656 ईस्वी) में, इस्लामी राज्य के प्रमुख, खलीफा उस्मान इब्न अफ्फान (रजि.) को विद्रोहियों के एक समूह द्वारा बेरहमी से शहीद कर दिया गया था। विद्रोहियों के बीच, राज्य की सत्ता हथियाने या राज्य का प्रमुख बनने में सक्षम कोई नहीं था। उन्होंने राजधानी मदीना में सहाबा पर दबाव डालना शुरू कर दिया। एक बिंदु पर, अली (रजि.) ने खलीफत की जिम्मेदारी स्वीकार कर ली। मुस्लिम राज्य के कमांडरों और राज्यपालों ने अली के प्रति निष्ठा की शपथ ली। हालाँकि, उस्मान (रजि.) द्वारा नियुक्त सीरिया के गवर्नर मुआविया (रजि.) ने अली की निष्ठा स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने मांग की कि खलीफा उस्मान के हत्यारों को पहले न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए। अली (रजि.) ने तर्क दिया कि राज्य व्यवस्था को बहाल करने के लिए एकजुट होने से पहले विद्रोहियों के मुकदमे को शुरू करने से अराजकता बढ़ सकती है, इसलिए हमें पहले एकजुट होना चाहिए। धीरे-धीरे, यह मुद्दा एक गृहयुद्ध में बदल गया। सिफीन की लड़ाई में दोनों पक्षों में हताहतों की संख्या बढ़ गई। एक बिंदु पर, दोनों पक्षों ने चर्चा के माध्यम से मुद्दे को हल करने के लिए एक मध्यस्थता परिषद बनाई। इस स्तर पर, अली (रजि.) के अनुयायियों में से कई हजार लोग उनका पक्ष छोड़कर चले गए। उन्हें 'खरिजी' कहा जाता है, जिसका अर्थ है दगाबाज या विद्रोही। वे इस्लाम की दूसरी पीढ़ी के लोग थे, जिन्होंने अल्लाह के रसूल (सल्ल.) के गुजर जाने के बाद इस्लाम स्वीकार किया था। उनमें से लगभग सभी युवा थे। वे अत्यधिक धार्मिक, समर्पित और भावनात्मक मुसलमान थे। पूरी रात तहजुद बिताने और पूरे दिन जिक्र और कुरान पाठ करने के कारण, उन्हें 'कुर्रा' या 'कुरान-पाठ समूह' के रूप में अच्छी तरह से जाना जाता था। उन्होंने मांग की कि कुरान के कानून और अल्लाह के आदेश के अलावा कुछ भी शासन नहीं करेगा। अल्लाह का निर्देश अवज्ञाकारियों के खिलाफ लड़ना है। अल्लाह ने कहा: (وَإِنْ طَائِفَتَانِ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ اقْتَتَلُوا فَأَصْلِحُوا بَيْنَهُمَا فَإِن بَغَتْ إِحْدَاهُمَا عَلَى الْأُخْرَىٰ فَقَاتِلُوا الَّتِي تَبْغِي حَتَّىٰ تَفِيءَ إِلَىٰ أَمْرِ اللَّهِ) "और यदि विश्वास करने वालों में से दो गुट आपस में लड़ें, तो उनके बीच सुलह कराओ। लेकिन अगर उनमें से एक दूसरे पर अत्याचार करता है, तो अत्याचार करने वाले के खिलाफ तब तक लड़ो जब तक कि वह अल्लाह के आदेश पर वापस न आ जाए।" यहाँ, अल्लाह स्पष्ट निर्देश देता है कि अतिक्रमण करने वाले समूह के खिलाफ युद्ध तब तक जारी रखा जाना चाहिए जब तक कि वे वापस न आ जाएं। मुआविया (रजि.) का गुट अतिक्रमण करने वाला है, इसलिए युद्ध तब तक जारी रखा जाना चाहिए जब तक वे आत्मसमर्पण न कर दें। समर्पण से पहले युद्ध रोकना या इस मामले में मनुष्यों को मध्यस्थ बनाना अल्लाह द्वारा प्रकट किए गए कानून के विपरीत कानून बनाना है। इसके अलावा, अल्लाह ने कहा: (إِنِ الْحُكْمُ إِلَّا لِلَّهِ) "कानून बनाना केवल अल्लाह का है।" इसलिए, मनुष्यों को निर्णय लेने की जिम्मेदारी सौंपना कुरान के निर्देश का स्पष्ट उल्लंघन है। अल्लाह ने यह भी कहा: (وَمَنْ لَمْ يَحْكُمْ بِمَا أَنْزَلَ اللَّهُ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْكَافِرُونَ) "और जो कोई भी उस चीज़ से न्याय नहीं करता जो अल्लाह ने प्रकट किया है - तो वे ही अविश्वासी हैं।" चूंकि अली और उनके अनुयायियों ने अल्लाह के प्रकट कानून के अनुसार मुआविया के साथ युद्ध जारी नहीं रखा और मध्यस्थता के शासन को चुना, वे अविश्वासी बन गए हैं। उन्होंने दावा किया कि अली (रजि.), मुआविया (रजि.), और उनके सभी अनुयायी कुरान के कानून की अवहेलना करके अविश्वासी बन गए हैं। इसलिए, उन्हें तौबा (पश्चाताप) करना चाहिए। जब उन्होंने अपने कार्यों को एक अपराध के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया, तो उन्होंने उनके खिलाफ युद्ध शुरू कर दिया। खरिजी अपनी राय के पक्ष में कुरान की विभिन्न आयतों का हवाला देते रहे। अब्दुल्ला इब्न अब्बास (रजि.) और अन्य सहाबा ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि सहाबा, अल्लाह के रसूल (सल्ल.) के आजीवन साथी, कुरान और हदीस को समझने में सबसे कुशल थे। कुरान और हदीस का जो अर्थ आपने समझा है वह सही नहीं है; बल्कि, सहाबा की व्याख्या सही है। हालांकि कुछ लोगों ने इसके कारण उग्रवाद छोड़ दिया, बाकी लोगों ने अपनी राय को सही होने का दावा किया। वे सहाबा को एजेंट, समझौतावादी, अन्याय के सह-साक्षी आदि मानते थे, और उनके खिलाफ लड़कर इस्लाम स्थापित करने के लिए अपना संघर्ष जारी रखा। चूंकि मध्यस्थता प्रणाली अली (रजि.) और मुआविया (रजि.) के बीच विवाद को निपटाने में विफल रही, इसलिए उनके दावे और प्रचार मजबूत हो गए। वे भावनात्मक युवाओं को यह समझाते रहे कि सच्चाई कभी भी समझौते के माध्यम से स्थापित नहीं की जा सकती है। इसलिए, दीन को स्थापित करने के परिणामस्वरूप, एक साल के भीतर, उनकी संख्या 3-4 हजार से बढ़कर लगभग 25-30 हजार हो गई। 37 हिजरी में, अली (रजि.) के गुट को केवल 3-4 हजार लोगों ने छोड़ा था। फिर भी, 38 हिजरी में, नहरवान की लड़ाई में अली की सेना के खिलाफ खरिजी सेना में लगभग 25 हजार सैनिक मौजूद थे। उनका मानना था कि चूंकि अली (रजि.) और मुआविया (रजि.) ने मुस्लिम उम्मा को नास्तिकता में डुबो दिया था, इसलिए उनकी हत्या करना राष्ट्र को इस दलदल से बचाएगा। इस कारण से, अब्द अल-رحمن इब्न मुल्जाम नामक एक व्यक्ति ने 40 हिजरी में रमजान के महीने की 21 तारीख को फज्र की नमाज से पहले अपने घर से निकलते समय अली को एक जहरीली तलवार से मारा। अली (रजि.) की शहादत के बाद, जब उत्तेजित सैनिकों ने अब्द अल-رحمن के हाथ और पैर काट दिए, तो उसने दर्द का कोई संकेत नहीं दिखाया; बल्कि, उसने खुशी व्यक्त की। लेकिन जब वे उसकी जीभ काटना चाहते थे, तो उसने कड़ी आपत्ति और पीड़ा व्यक्त की। कारण पूछने पर उसने कहा, मैं अल्लाह के जिक्र को करते हुए शहीद के रूप में मरना चाहता हूँ! इस हत्यारे की प्रशंसा करते हुए, उनके एक कवि, इमरान इब्न हित्तन (84 हिजरी) ने कहा: "कितना महान था वह धर्मी, ईश्वर से डरने वाला व्यक्ति जिसने वह शानदार झटका मारा! उस झटके से, उसने सिंहासन के भगवान की प्रसन्नता के अलावा कुछ नहीं चाहा। मुझे अक्सर उसकी याद आती है और मैं उसे अल्लाह के सामने सबसे बड़ा इनाम रखने वाला मानता हूँ।"
अली (रजि.) और अन्य सहाबा ने उनकी भक्ति और धार्मिकता के कारण उनके प्रति गहरी सहानुभूति महसूस की। उन्होंने उन्हें उग्रवाद के मार्ग से मोड़ने के कई प्रयास किए। लेकिन सभी प्रयास विफल रहे। उन्होंने इस्लाम के अपने 'ब्रांड' या इस्लाम के अपने विचारों और व्याख्याओं को छोड़ने से इनकार कर दिया। अली से पूछा गया: क्या वे अविश्वासी हैं? उन्होंने कहा, वे कुफ्र से बचने के लिए भाग रहे हैं। कहा गया, तो क्या वे पाखंडी हैं? उन्होंने कहा, पाखंडी अल्लाह को बहुत कम याद करते हैं, जबकि ये लोग दिन-रात अल्लाह के जिक्र में लगे रहते हैं। कहा गया, तो वे क्या हैं? उन्होंने कहा, वे गुमराह और आत्म-पूजा के फितना में पड़ गए हैं, अंधे और बहरे बन गए हैं। इस्लाम स्थापित करने के लिए उनका संघर्ष बेहद ईमानदार था। अरबी साहित्य में, उनकी कविता इस्लामी उत्साह और जिहादी प्रेरणा का एक अतुलनीय खजाना है। उनकी धार्मिकता और ईमानदारी बेजोड़ थी। दिन-रात नफ्ल नमाज में लंबे समय तक सजदे में गिरने के कारण उनके माथे पर गट्टे (calluses) पड़ गए थे। यदि कोई उनके शिविरों से गुजरता, तो केवल कुरान पाठ की आवाज सुनाई देती थी। वे कुरान को पढ़कर या सुनकर रोते हुए बेहोश हो जाते थे। इसके साथ ही, उनकी क्रूरता और आतंकवाद भयानक था। 37 हिजरी से शुरू होकर, उनका आतंकवाद, हत्याएं और युद्ध अगले कई शताब्दियों तक जारी रहे। लगभग 64-70 हिजरी में, उन्होंने उसके और उमय्यद राजवंश के शासकों के बीच युद्ध में अब्दुल्ला इब्न अल-जुबैर का समर्थन किया। क्योंकि उनके अनुसार, वही थे जिन्होंने सच्चा इस्लामी शासन स्थापित किया था। लेकिन जब उन्होंने उस्मान (रजि.) और अली (रजि.) को अविश्वासी घोषित करने से इनकार कर दिया, और इसके अलावा उनकी प्रशंसा की, तो उन्होंने उनका विरोध करना शुरू कर दिया। लगभग 99-100 हिजरी में, उमय्यद खलीफा उमर इब्न अब्दुल अजीज ने उनकी धार्मिकता और भक्ति के कारण उन्हें सही रास्ते पर लाने की कोशिश की। वे उनकी ईमानदारी, न्याय और इस्लाम के पूर्ण पालन से सहमत थे। हालांकि, उनकी मांग थी कि उस्मान (रजि.) और अली (रजि.) को अविश्वासी घोषित किया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने अल्लाह के निर्देशों के विपरीत फैसले दिए। इसके अलावा, मुआविया (रजि.) और बाद के उमय्यद शासकों को भी अविश्वासी घोषित किया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने अल्लाह के विधान को छोड़ दिया और शासकों द्वारा गढ़े गए कानूनों के साथ देश पर शासन किया। उदाहरण के लिए, एक राजशाही स्थापित करना, शासक को अपनी मर्जी से खजाने के संसाधनों का उपयोग करने की शक्ति देना आदि। चूंकि उमर इब्न अब्दुल अजीज ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया, इसलिए शांति प्रयास विफल हो गए। अपने स्वयं के प्रशासन को इस्लाम के अनुसार स्वीकार करने के बावजूद, वे ऐसे अविश्वासियों के खिलाफ युद्ध जारी रखने के अपने निर्णय पर अडिग रहे। उनका मानना था कि एक मुस्लिम व्यक्ति इस्लामी व्यवस्था के उल्लंघन पर अविश्वासी में बदल जाता है। उन्होंने ऐसे अविश्वासियों के खिलाफ अपनी अवधारणा के अनुसार 'इस्लाम' स्थापित करने या इस्लामी व्यवस्था को "पूरी तरह से" लागू करने के लिए राज्य के नेतृत्व के बाहर समूहों में युद्ध किए। इसके अलावा, वे आम गैर-लड़ाकू पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को मारते रहे जो अली को अविश्वासी नहीं मानते थे। [14] यह उल्लेखनीय है कि अधिकांश सहाबा ने अली (रजि.) और मुआविया (रजि.) के बीच राजनीतिक असहमति और युद्ध में भाग लेने से परहेज किया। प्रसिद्ध ताबिई इब्न सिरिन (110 हिजरी) ने कहा, "जब फितना शुरू हुआ, तो हजारों सहाबा जीवित थे। उनमें से 100 सहाबा ने भी इसमें हिस्सा नहीं लिया। बल्कि, इसमें भाग लेने वाले सहाबा की संख्या 30 से कम थी।" इन सहाबा और अन्य सहाबा-ताबिईन ने नैतिक रूप से अली (रजि.) के कार्यों का समर्थन किया। वे कभी भी उन्हें पापी या इस्लाम का उल्लंघन करने वाला कहने के लिए सहमत नहीं होंगे। खरिजी उन्हें भी मार डालते थे, उन्हें अविश्वासी कहकर ब्रांड करते थे। एक नमूना देखें! सहाबी खब्बाब इब्न अल-अरत्त के बेटे अब्दुल्ला अपनी पत्नी और परिवार के साथ सड़क पर चल रहे थे। खरिजी ने उनसे उस्मान (रजि.) और अली (रजि.) के बारे में पूछताछ की। उन्होंने उनके बारे में अनुकूल टिप्पणी की और आतंकवाद और हत्या के भयानक परिणामों के बारे में एक हदीस सुनाई। फिर वे उसे नदी के किनारे ले गए, उसका गला काट दिया, और उसकी गर्भवती पत्नी और अन्य महिलाओं और बच्चों को मार डाला। इस समय, वे एक जगह पर आराम करने के लिए बैठ गए। वहाँ, एक खजूर के पेड़ से एक खजूर गिरा, और एक खरिजी ने उसे उठाया और अपने मुंह में डाल लिया। तब दूसरे ने कहा, तुमने बिना कीमत चुकाए किसी और की संपत्ति का उपभोग किया? उस व्यक्ति ने तुरंत खजूर थूक दिया। एक अन्य खरिजी ने एक सुअर को देखा और अपनी तलवार से उसके शरीर पर वार किया। तुरंत उसके दोस्तों ने यह कहते हुए विरोध किया, यह अन्याय है, तुम इस तरह अल्लाह की धरती पर अराजकता फैला रहे हो और किसी और की संपत्ति नष्ट कर रहे हो! फिर उन्होंने सुअर के गैर-मुस्लिम मालिक को ढूंढा, उसे पैसे दिए, और माफी मांगी। इस प्रकार, वे गैर-मुसलमानों के संबंध में इस्लाम की नरमी को स्वीकार कर रहे हैं, एक खजूर पर एक नौकर के अधिकार का उल्लंघन करने से डर रहे हैं, फिर भी वे इस्लाम के नाम पर विभिन्न बहानों पर एक साथी मुस्लिम को अविश्वासी कहकर मार रहे हैं और निहत्थी महिलाओं और बच्चों को भी मार रहे हैं।}}
अब्दुल्लाह जहांगीर खवारिज की प्राथमिक विशेषताओं के बारे में बताते हैं:
(1) इस्लाम के मार्गदर्शन या कुरान को समझने के मामले में अपनी समझ को अंतिम मानना। इस संबंध में सहाबा की राय के महत्व को नकारना।
(2) हदीस को स्वीकार करते हुए, चर्चा और विवादित मामलों में अल्लाह के रसूल (सल्ल.) के व्यावहारिक कार्यों और पद्धतियों के महत्व को नकारना।
(3) पाप के कारण किसी मुसलमान को अविश्वासी कहना।
(4) अजीवित अविश्वासियों को मारने के लिए थोक वैधता का दावा करना।
(5) राज्य की निष्ठा के शरिया महत्व को नकारना।
(6) राज्य के प्रमुख और राज्य प्रशासन के पापों के कारण राज्य को कुफ़्र का राज्य मानना।
(7) ऐसे राज्य प्रमुख का पालन करने वाले नागरिकों को अविश्वासी कहना।
(8) कुफ़्र के ऐसे राज्य और उसके नागरिकों के खिलाफ हथियार उठाना जायज समझना।
(9) जिहाद को फर्द ऐन (व्यक्तिगत दायित्व), सबसे बड़ा दायित्व और दीन का एक स्तंभ दावा करना।
(10) भलाई का आदेश देने और बुराई से रोकने के नाम पर सजा देना।
(11) उनकी राय का विरोध करने वाले सभी विद्वानों की उपेक्षा करना।
=== आधुनिक युग ===
{{Islamism sidebar |expanded=Concepts}}
==== यूरोपीय उपनिवेशवाद की प्रतिक्रिया ====
19वीं शताब्दी की अवधि के दौरान, मुस्लिम दुनिया के [[यूरोपीय उपनिवेशीकरण]] के साथ-साथ, [[अल्जीरिया पर फ्रांसीसी विजय]] (1830), [[भारत]] में [[दिल्ली की घेराबंदी|मुगल साम्राज्य का पतन]] (1857), [[कोकेशियान युद्ध|काकेशस में रूसी घुसपैठ]] (1828), और [[द ग्रेट गेम|मध्य एशिया]] (1830-1895) हुए, जो अंततः 20वीं शताब्दी (1908-1922) में [[उस्मानी साम्राज्य का पतन और विघटन|उस्मानी साम्राज्य के पतन और विघटन]] में समाप्त हुए।
यूरोपीय उपनिवेशीकरण के खिलाफ पहली मुस्लिम प्रतिक्रिया "किसानों और धर्म" के आसपास केंद्रित थी, शहरी क्षेत्रों में नहीं। "करिश्माई नेता", जो आमतौर पर "उलेमा" या धार्मिक समुदायों के सदस्य थे, ने "जिहाद" का आह्वान किया और जनजातीय गठबंधन बनाए। जनजातियों को एकजुट करने के लिए, स्थानीय प्रथागत कानूनों की उपेक्षा की गई और "शरिया" लागू किया गया। उदाहरणों में अल्जीरिया में अब्देलकाडर, सूडान में मुहम्मद अहमद, काकेशस में इमाम शामिल, लीबिया और चाड में सनूसी, अफगानिस्तान में मुल्ला-ई लैंग, भारत में स्वात के अखुंद, और बाद में मोरक्को में अब्देल-करीम शामिल हैं। 1842 में अफगानिस्तान में ब्रिटिश सेना के नरसंहार और 1885 में खartoum पर कब्जा जैसी शानदार जीत के बावजूद, इन सभी आंदोलनों अंततः विफल रहे।<ref>Roy, Olivier, ''The Failure of Political Islam'' by Olivier Roy, translated by Carol Volk, Harvard University Press, 1994, p.32</ref>
शती के बाद के हिस्से में और 20वीं शताब्दी की शुरुआत में यूरोपीय कब्जे के प्रति दूसरी मुस्लिम प्रतिक्रिया हिंसक प्रतिरोध नहीं थी, बल्कि कुछ पश्चिमी राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और तकनीकी साधनों को अपनाना था। शहरी कुलीन वर्ग के सदस्यों, विशेष रूप से [[मिस्र]], [[ईरान]] और [[तुर्की]] में, ने "पश्चिमीकरण" की वकालत की और उसका अभ्यास किया।<ref name=Feldman/>
राजनीतिक पश्चिमीकरण के प्रयासों की विफलता, कुछ के अनुसार, उस्मानी शासकों के [[तंज़ीमात]] पुनर्गठन द्वारा उदाहरण दी गई थी। शरिया को कानून में शामिल किया गया था ([[मजेल्ला]] के रूप में जाना जाता है) और कानूनों को अधिनियमित करने के लिए एक निर्वाचित विधायिका की स्थापना की गई थी। इन कदमों ने "[[उलेमा]]" को कानून की "खोज" करने की उनकी भूमिका से वंचित कर दिया, और पहले से शक्तिशाली विद्वान वर्ग कमजोर हो गया और धार्मिक कर्मचारियों में सिकुड़ गया, जबकि विधायिका को उसके उद्घाटन के एक साल से भी कम समय के भीतर निलंबित कर दिया गया था और कभी बहाल नहीं किया गया था, जिससे [[शक्तियों का पृथक्करण|शक्तियों का पृथक्करण]] समाप्त हो गया जहाँ उलेमा पहले सरकार की एक अलग "शाखा" के रूप में काम करते थे। p.71-76</ref> "या तो उलेमा के शरिया या एक निर्वाचित विधायिका के लोकप्रिय अधिकार द्वारा अनियंत्रित कार्यकारी का प्रतिमान बीसवीं शताब्दी के अधिकांश समय के लिए सुन्नी मुस्लिम दुनिया के अधिकांश हिस्से का प्रमुख प्रतिमान बन गया।"<ref name=feldman-fall-79>Feldman, Noah, ''Fall and Rise of the Islamic State'', Princeton University Press, 2008, p.79</ref>
==== इस्लामी राज्य की आधुनिक राजनीतिक विचारधारा ====
{{See also|Islamism|Islamic state|Islamization|Quietism in Islam}}
मध्ययुगीन विद्वानों की राय द्वारा प्रदान की गई वैधता के अलावा, सफल इस्लामी साम्राज्यों के दिनों के लिए पुरानी यादों को बाद में पश्चिमी उपनिवेशवाद के तहत उजागर किया गया था। इस पुरानी यादों ने इस्लामी राज्य की इस्लामी राजनीतिक विचारधारा में एक प्रमुख भूमिका निभाई है, एक ऐसा राज्य जहाँ इस्लामी कानूनसर्वोच्च है।<ref>{{citation|title=Liberal Democracy and Political Islam: the Search for Common Ground|last=Benhenda|first=M.|ssrn=1475928}}</ref> Islamist राजनीतिक कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य मौजूदा मुस्लिम राज्यों की सरकारों को पुनर्गठित करना है; लेकिन ऐसा करने के साधन विभिन्न आंदोलनों और संदर्भों में व्यापक रूप से भिन्न होते हैं। कई लोकतांत्रिक Islamist आंदोलन, जैसे जमात-ए-इस्लामी और मुस्लिम ब्रदरहुड, ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का उपयोग किया है और अन्य राजनीतिक दलों के साथ मतदान करने और गठबंधन बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है। तालिबान और अल-कायदा जैसे कट्टरपंथी इस्लामी आंदोलन जिहादवाद या उग्रवादी इस्लामी विचारधारा को गले लगाते हैं, और वे 1980 के दशक में अफगानिस्तान में सोवियत विरोधी प्रतिरोध में भाग लेने के लिए जाने जाते थे। उपर्युक्त दोनों उग्रवादी इस्लामी समूहों ने 11 सितंबर, 2001 के आतंकवादी हमलों में भूमिका निभाई और क्रमशः क्षेत्रीय सरकारों और संयुक्त राज्य अमेरिका को अपने "निकट" और "दूर" दुश्मनों के रूप में फंसाया।<ref name=":0">{{Cite book|title=The World Transformed, 1945 to the Present|last=Hunt|first=Michael|publisher=Oxford|year=2014|isbn=978-0-19-937102-0|location=New York City|pages=495}}</ref>
==== लोकतंत्र के साथ संगतता ====
{{Main|Islamic democracy}}
===== सामान्य मुस्लिम दृष्टिकोण =====
* लोकतांत्रिक सिद्धांतों के लिए समर्थन, जहाँ अधिकांश मामलों में यह माना जाता है कि वे इस्लाम के साथ संगत हैं, जो एक लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत जन कल्याण की भूमिका निभा सकता है, उदाहरण के लिए, [[अरब वसंत]] के विद्रोह में भाग लेने वाले कई कार्यकर्ता;
* शरिया के साथ असंगत माने जाने वाले पश्चिमी लोकतंत्र के कुछ पहलुओं के लिए धार्मिक और नैतिक आपत्तियों के साथ-साथ चुनावों जैसे लोकतांत्रिक तरीकों के लिए समर्थन, उदाहरण के लिए, [[युसूफ अल-करादवी]] जैसे इस्लामी विद्वान;
* पश्चिमी आयात के रूप में लोकतंत्र की अस्वीकृति और पारंपरिक इस्लामी संस्थानों के लिए समर्थन, जैसे कि ''[[शूरा]]'' (परामर्श परिषद) और ''[[इज्मा]]'' (आम सहमति), उदाहरण के लिए, निरंकुश राजतंत्रों और कट्टरपंथी इस्लामी आंदोलनों के समर्थक;
* यह विश्वास कि लोकतंत्र के लिए, धर्म को निजी जीवन तक सीमित रखा जाना चाहिए, मुस्लिम दुनिया में एक अल्पसंख्यक द्वारा आयोजित एक दृष्टिकोण।
मुस्लिम बहुसंख्यक देशों में गैलप और प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा किए गए सर्वेक्षण से पता चलता है कि अधिकांश मुसलमान लोकतांत्रिक मूल्यों और धार्मिक सिद्धांतों के बीच कोई संघर्ष नहीं देखते हैं। वे न तो धर्मतंत्र चाहते हैं और न ही एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र, बल्कि एक ऐसी राजनीतिक मॉडल चाहते हैं जहाँ लोकतांत्रिक संस्थान और मूल्य 'शरिया' के मूल्यों और सिद्धांतों के साथ सह-अस्तित्व में रह सकें।<ref>{{cite book|first1=John L.|last1=Esposito|first2=Natana J.|last2=DeLong-Bas|title=Shariah: What Everyone Needs to Know|url=https://archive.org/details/shariahwhatevery0000espo|publisher=Oxford University Press|year=2018|page=[https://archive.org/details/shariahwhatevery0000espo/page/145 145]}}</ref><ref>{{cite web|website=Pew Research Center|title=Most Muslims Want Democracy, Personal Freedoms, and Islam in Political Life|date=July 10, 2012|url=https://www.pewglobal.org/2012/07/10/most-muslims-want-democracy-personal-freedoms-and-islam-in-political-life/}}</ref><ref>{{cite web|website=Gallup|title=Majorities See Religion and Democracy as Compatible|date=Oct 3, 2017|author1=Magali Rheault|author2=Dalia Mogahed|url=https://news.gallup.com/poll/28762/majorities-muslims-americans-see-religion-law-compatible.aspx}}</ref>
===== सलाफी दृष्टिकोण =====
[[सलाफी]] विद्वान लोकतंत्र को हराम (निषिद्ध) मानते हैं,<ref name=i1>{{cite web |title=Democracy from the perspective of Islam - Islam Question & Answer |url=https://www.islamqa.info/bn/answers/98134 |website=[[IslamQA.info]] |access-date=August 2, 2022 |language=bn |date=January 22, 2015}}</ref> लेकिन इस्लामी शासन स्थापित करने के लिए लोकतंत्र का उपयोग करके मतदान करने और सत्ता में आने के अवसर को मान्य करते हैं,<ref name=i2>{{cite web |title=The ruling on democracy and elections and participating in the democratic process - Islam Question & Answer |url=https://islamqa.info/bn/answers/107166/%E0%A6%97%E0%A6%A3%E0%A6%A4%E0%A6%B0-%E0%A6%93-%E0%A6%A8%E0%A6%B0%E0%A6%AC%E0%A6%9A%E0%A6%A8%E0%A6%B0-%E0%A6%B9%E0%A6%95%E0%A6%AE-%E0%A6%8F%E0%A6%BC%E0%A6%AC-%E0%A6%97%E0%A6%A3%E0%A6%A4%E0%A6%B0%E0%A6%95-%E0%A6%AA%E0%A6%B0%E0%A6%95%E0%A7%9F%E0%A7%9F-%E0%A6%85%E0%A6%B6-%E0%A6%97%E0%A6%B0%E0%A6%B9%E0%A6%A3-%E0%A6%95%E0%A6%B0 |website=[[IslamQA.info]] |access-date=August 2, 2022 |language=bn}}</ref> और दो बुराइयों में से कम को चुनने के लिए मतदान को प्रोत्साहित करते हैं। इन विद्वानों में Shaykh [[अब्दुल अजीज बिन बाज]], Shaykh [[मुहम्मद इब्न अल-उसैमीन]], [[अब्दुल्लाह अल-घुदैयान]], अब्दुल्ला कुऊद, अब्द अर-रज्जाक अफ़ीफ़ी, और [[सऊदी अरब]] के वरिष्ठ विद्वान शामिल हैं: [[ग्रैंड मुफ्ती]] [[Shaykh]] [[अब्दुल-अजिल बिन अब्दुल्ला अल शेलख|अब्दुल-अजीज अल शेलख]], Shaykh अब्दुल मुहसिन अल-अब्बाद्, Shaykh वसीउल्लाह अब्बास, और सऊदी अरब के सबसे वरिष्ठ विद्वानों का फतवा पैनल, "[[स्थায়ী समिति के लिए इस्लामी अनुसंधान और फतवे जारी करने]]" (Permanent Committee for Islamic Research and Issuing Fatwas), ये सभी मुसलमानों को वोट देने के लिए प्रोत्साहित करने वाले समान कॉल गूंजते हैं।<ref>{{cite journal |first1=Shoaib |title=Scholstars Urge Western Muslims to Vote: Saudi Arabia |journal=Muslim World Journal |date=May 5, 2015 |url=https://www.muslimworldjournal.com/scholars-urge-western-muslims-to-vote-saudi-arabia/ |access-date=August 2, 2022 |archive-date=October 10, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20221010190359/https://www.muslimworldjournal.com/scholars-urge-western-muslims-to-vote-saudi-arabia/ |url-status=dead }}</ref>
फहद बिन सालेह अजलन अपनी पुस्तक अल-मुहर्रर फी सियासातश शरियाह में बताते हैं कि चुनाव पद्धति इस्लाम में वैध है लेकिन पारंपरिक लोकतांत्रिक व्यवस्था के माध्यम से नहीं; इसमें, राजनीतिक उम्मीदवारों को मुस्लिम और पुरुष होना चाहिए, और मतदाताओं को भी मुस्लिम और पुरुष होना चाहिए; महिलाएं और गैर-मुस्लिम शूरा में भाग ले सकते हैं लेकिन वोट नहीं दे सकते हैं; राज्य के प्रमुख की शक्ति की समय सीमा भी तय की जा सकती है, हालांकि यह फर्द (अनिवार्य) नहीं है, बल्कि जाइज (अनुमत) है।<ref name=fa/>
===== इस्लामी राजनीतिक सिद्धांत =====
मुस्लिह और ब्राउअर्स ने प्रमुख मुस्लिम विचारकों के बीच लोकतंत्र पर तीन मुख्य दृष्टिकोणों की पहचान की है जो इस्लामी मूल्यों और कानून के अनुकूल सामाजिक-राजनीतिक संगठन के आधुनिक, अलग इस्लामी सिद्धांतों को विकसित करने की मांग कर रहे हैं:<ref>{{cite encyclopedia|last1=Muslih|first1=Muhammad|last2=Browers|first2=Michaelle|title=Democracy|encyclopedia=The Oxford Encyclopedia of the Islamic World|editor=John L. Esposito|publisher=Oxford University Press|location=Oxford|year=2009|url=http://www.oxfordislamicstudies.com/print/opr/t236/e0185|access-date=November 1, 2020|archive-date=June 11, 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170611235451/http://www.oxfordislamicstudies.com/print/opr/t236/e0185|url-status=dead}}</ref>
* एक अस्वीकृतिवादी इस्लामी दृष्टिकोण, जिसे [[सैयद कुतुब]] और [[अबुल अला मौदूदी]] द्वारा प्रतिपादित किया गया है।
* एक मध्यम इस्लामी दृष्टिकोण, जो ''[[मस्लहा]]'' (सार्वजनिक विचार), ''[[अद्ल]]'' (न्याय) और शूरा पर जोर देता है। इस दृष्टिकोण को [[हसन अल-तुराबी]], [[रशीद घन्नौची]] और [[युसुफ अल-करादवी]] द्वारा अलग-अलग तरीकों से प्रचारित किया जाता है।
* [[मुहम्मद अब्दुह]] द्वारा धर्म को समझने में कारण की भूमिका पर जोर देने से प्रभावित एक उदार इस्लामी दृष्टिकोण। यह बहुलवाद और विचार की स्वतंत्रता पर आधारित लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर जोर देता है। फहमी हुवैदी और तारिक अल-बिश्री जैसे लेखकों ने शुरुआती इस्लामी ग्रंथों पर ड्राइंग करके एक इस्लामी राज्य में गैर-मुसलमानों की पूर्ण नागरिकता के लिए इस्लामी औचित्य तैयार किया है। अन्य, जैसे कि [[मोहम्मद अर्कून]] और [[नसर हामिद अबू जैद]], ने पाठ की व्याख्या के लिए गैर-पाठवादी दृष्टिकोण के माध्यम से बहुलवाद और स्वतंत्रता को उचित ठहराया है। [[अब्दोलकरिम सोरूश]] ने धार्मिक विचार के आधार पर एक "धार्मिक लोकतंत्र" के लिए तर्क दिया है जो लोकतांत्रिक, सहिष्णु और न्यायसंगत है। इस्लामी उदारवादी धार्मिक समझ की निरंतर पुन: परीक्षा की आवश्यकता के लिए तर्क देते हैं, जो केवल एक लोकतांत्रिक संदर्भ के भीतर किया जा सकता है।
==== 20वीं और 21वीं शताब्दी ====
{{Main|1973 oil crisis|War in Afghanistan (1978–present)|Arab Cold War|Arab–Iranian conflict|Arab–Israeli conflict|Arab Spring|Arab Winter|War on terror}}
{{seealso|Antisemitism in the Arab world|Anti-Zionism|History of Egypt under Gamal Abdel Nasser|International propagation of Salafism and Wahhabism|Iran–Saudi Arabia proxy conflict|Petro-Islam|Relations between Nazi Germany and the Arab world|Grand Mosque seizure|Six-Day War|Yom Kippur War|War of Attrition}}
प्रथम विश्व युद्ध के बाद, उस्मानी साम्राज्य के पतन और विघटन, और तुर्की के संस्थापक मुस्तफा केमल अतातुर्क द्वारा खलीफत के बाद के उन्मूलन के बाद, कई मुसलमानों को एहसास हुआ कि उनके धर्म की राजनीतिक शक्ति कम हो रही है। मुस्लिम समाजों में पश्चिमी विचारों और प्रभाव के प्रसार के बारे में भी चिंता थी। इससे यूरोपीय शक्तियों के प्रभाव के खिलाफ व्यापक नाराजगी पैदा हुई। अंग्रेजों का विरोध करने और परेशान करने के लिए मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड का गठन किया गया था।
1960 के दशक में, अरब दुनिया में प्रमुख विचारधारा पैन-अरबवाद थी, जिसने धर्म को हाशिए पर धकेल दिया और इस्लाम के बजाय अरब राष्ट्रवाद के आधार पर समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष राज्यों के गठन को प्रोत्साहित किया (देखें, उदाहरण के लिए, बाथवाद और तुर्की में धर्मनिरपेक्षता)। हालांकि, अरब राष्ट्रवाद पर बनी सरकारों को आर्थिक स्थिरता और अराजकता का सामना करना पड़ा। तेजी से, इन राज्यों की सीमाओं को कृत्रिम औपनिवेशिक कृतियों के रूप में देखा जा रहा था - जो कि वे वास्तव में थे, क्योंकि वे शाब्दिक रूप से यूरोपीय औपनिवेशिक शक्तियों द्वारा मानचित्र पर खींचे गए थे।
==== समकालीन आंदोलन ====
इस्लाम में कुछ सामान्य राजनीतिक धाराओं में शामिल हैं:
* [[सुन्नी इस्लाम|सुन्नी]] [[पारंपरिक धर्मशास्त्र (इस्लाम)|पारंपरिक सिद्धांत]], जो कुरान, हदीस और सुन्नत की पारंपरिक टिप्पणियों को स्वीकार करता है, और चार मध्हबों (शफ़ीई, मालिकी, हनाफ़ी, हनबली) में से किसी एक का पालन करते हुए, ताक्लिद (अनुकरण) को अपना मूल सिद्धांत मानता है, और इसमें सूफीवाद भी शामिल हो सकता है। सूफी पारंपरिकता का एक उदाहरण पाकिस्तान में बरेलवी मध्हब है।<ref>Olivier Roy, The Failure of Political Islam, (1994) pp. 30-31</ref>
* [[इस्लामी कट्टरपंथ|कट्टरपंथी सुधारवाद]] या [[इस्लामी पुनरुत्थान|पुनरुत्थानवाद]], जो इस्लामी धर्मशास्त्र, तफ़सीर, मुस्लिम संतों के तीर्थस्थलों और कब्रों पर जाने और उनकी पूजा करने जैसी लोकप्रिय धार्मिक प्रथाओं, और कथित विचलनों और अंधविश्वासों की आलोचना करता है; इसका लक्ष्य इस्लाम के संस्थापक शास्त्रों पर लौटना है। यह कट्टरपंथी सुधारवाद आमतौर पर एक कथित बाहरी खतरे (उदाहरण के लिए, हिंदू-इस्लामी संबंधों) के जवाब में विकसित हुआ। 18वीं शताब्दी के उदाहरणों में ब्रिटिश भारत में शाह वलीउल्लाह देहलवी और अरब प्रायद्वीप में मुहम्मद इब्न अब्द-अल-वहाब (वहाबीवाद के संस्थापक) शामिल हैं।<ref>Olivier Roy, Failure of Political Islam, (1994) p. 31</ref> सलाफी आंदोलन, भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में देवबन्दी धारा, और दक्षिण एशिया में तबलीगी जमात कट्टरपंथी सुधारवाद और पुनरुत्थानवाद के आधुनिक उदाहरण हैं।
* [[इस्लामवाद]] या [[राजनीतिक इस्लाम]], 'शरिया' या इस्लामी कानून पर लौटने को गले लगाता है, लेकिन 'क्रांति', 'विचारधारा', 'राजनीति' और 'लोकतंत्र' जैसी पश्चिमी शर्तों को अपनाता है, और 'जिहाद' और 'महिला अधिकारों' जैसे विषयों के प्रति अधिक उदार रवैया रखता है।<ref>Olivier Roy, The Failure of Political Islam. (1994) pp. 35-37</ref> समकालीन उदाहरणों में जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान, मुस्लिम ब्रदरहुड, ईरानी इस्लामी क्रांति, मस्युमी पार्टी, यूनाइटेड मलय नेशनल ऑर्गनाइजेशन, पैन-मलेशियन इस्लामिक पार्टी, और जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (तुर्की) शामिल हैं।
* [[इस्लाम के भीतर उदारवादी आंदोलन|इस्लाम के तहत उदारवादी आंदोलन]], आमतौर पर खुद को इस्लामी राजनीतिक आंदोलनों के विरोध में परिभाषित करते हैं, लेकिन अक्सर इसके कई साम्राज्यवाद-विरोधी और इस्लाम-प्रेरित उदारवादी सुधारवादी तत्वों को अपनाते हैं।
===== सुन्नियों और शियाओं के बीच अंतर =====
{{Main|Shia–Sunni relations}}
विद्वान वली नस्र के अनुसार, सुन्नी और शिया इस्लामी विचारधाराओं की राजनीतिक प्रवृत्तियाँ भिन्न हैं। पाकिस्तान और अरब दुनिया के अधिकांश हिस्सों में सुन्नी इस्लामी पुनरुत्थानवाद राजनीतिक रूप से क्रांतिकारी नहीं है, जबकि शिया राजनीतिक इस्लाम रूहुल्लाह खुमैनी और गरीबों के उत्पीड़न और वर्ग संघर्ष के संबंध में उनकी बयानबाजी से भारी प्रभावित है। सुन्नी पुनरुत्थानवाद की जड़ें रूढ़िवादी धार्मिक प्रेरणाओं और बाजार में हैं, जहाँ धार्मिक मूल्य वाणिज्यिक हितों के साथ विलीन हो जाते हैं। ... खुमैनी के इस्लामवाद ने गरीबों को शामिल किया और वर्ग संघर्ष की बात की।
<blockquote>पुनरुत्थानवाद के रूप में कट्टरपंथ और क्रांति के रूप में कट्टरपंथ के बीच यह विभाजन गहरा था, और लंबे समय तक इसने सुन्नियों के बीच सांप्रदायिक विभाजन से कड़ाई से मेल खाया—मुस्लिम दुनिया में पारंपरिक 'धनी' समूह, जो रूढ़िवादी धार्मिकता में अधिक रुचि रखते हैं—और शिया—लंबे समय से बाहरी लोग, जो 'कट्टरपंथी सपनों और साजिशों' की ओर अधिक आकर्षित होते हैं।<ref>''The Shia Revival: How Conflicts within Islam will shape the future'' by Vali Nasr, Norton, 2006, p.148-9</ref></blockquote>
ग्राहम फुलर यह भी नोट करते हैं कि उन्होंने "किसी भी मुख्यधारा के इस्लामी संगठन (शिया ईरान को छोड़कर) को नहीं पाया है जिसका सामाजिक प्रणाली के प्रति क्रांतिकारी दृष्टिकोण हो या कानूनी निर्णय थोपने के अलावा कट्टर सामाजिक विचार हों।"<ref>Fuller, Graham E., ''The Future of Political Islam'', Palgrave MacMillan, (2003), p.26</ref>
9blb7tw69j3k79hz87bmecs02aokbz3
6591518
6591516
2026-07-24T10:06:41Z
~2026-41366-39
937955
/* सुन्नियों और शियाओं के बीच अंतर */
6591518
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox political system
| name = [[इस्लाम]] में [[राजनीति]]
| part_of = {{unbulletedlist|[[धर्म का इतिहास]]|[[राजनीतिक इस्लाम]]}}
| type = [[इस्लामी दर्शन]]
| image = Birmingham Quran manuscript - closeup.jpg
| caption = [[बर्मिंघम विश्वविद्यालय]] द्वारा सुरक्षित ७वीं शताब्दी की [[कुरान]] की पांडुलिपि का एक खंड।
}}
{{Islam |expanded=culture}}
{{Islam and other religions}}
'''[[इस्लाम]] में [[राजनीति]]''' ([[सियासत]]-उश्-[[शरिया]], शर्ई राजनीति) मुख्य रूप से [[कुरान]], [[सुन्नत]] (इस्लामी पैगंबर [[मुहम्मद]] की बातें और जीवनचर्या),<ref name="Zimney 2009">{{cite book |last=Zimney |first=Michelle |year=2009 |chapter=Introduction – What Is Islam? |editor-last=Campo |editor-first=Juan E. |title=Encyclopedia of Islam |url=https://books.google.com/books?id=OZbyz_Hr-eIC&pg=PAxxi |location=[[New York City|New York]] |publisher=[[Facts On File]] |series=Encyclopedia of World Religions |pages=xxi–xxxii |isbn=978-0-8160-5454-1 |lccn=2008005621}}</ref> [[इस्लाम का इतिहास]] तथा विभिन्न राजनीतिक आंदोलनों और संघर्षों से उपजी है।<ref name="Ayoob-Lussier 2020">{{cite book |title=The Many Faces of Political Islam: Religion and Politics in Muslim Societies |url=https://books.google.com/books?id=rjLDDwAAQBAJ&pg=PA26 |year=2020 |publisher=[[University of Michigan Press]] |pages=26–44 |chapter=Islam's Multiple Voices |doi=10.3998/mpub.11448711 |isbn=978-0-472-12640-8 |lccn=2019025041 |edition=2nd |editor1-last=Ayoob |editor1-first=Mohammed |editor2-last=Lussier |editor2-first=Danielle N. |location=[[Ann Arbor, Michigan]] |s2cid=211404750}}</ref>
पारंपरिक रूप से इस्लाम में राजनीतिक अवधारणाओं के बीच निर्वाचित नेतृत्व एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय रहा है। मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के बाद जो लोग इस्लामी राज्य व्यवस्था में नेतृत्व संभालने के लिए चुने गए, उन्हें [[खलीफा]] कहा जाता है। इस्लामी राजनीतिक चिंतन में राज्य संचालन के लिए इस्लामी कानून या [[शरिया]] सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। [[शरिया कानून]] के अनुसार निर्वाचित शासकगण जनता के साथ विभिन्न मामलों पर शूरा या परामर्श के आधार पर निर्णय लेते हैं।<sup><ref>Abu Hamid al-Ghazali quoted in Mortimer, Edward, Faith and Power: The Politics of Islam, Vintage Books, 1982, p.37</ref></sup> [[राशिदुन ख़िलाफ़त|राশিদুন खलीफाओं]] सहित शुरुआती खलीफाओं के बाद [[द्वितीय मुआविबिया]] से लेकर विभिन्न मुस्लिम [[राजा|राजाओं]] और [[बादशाह|बादशाहों]] ने मुस्लिम बहुसंख्यक आबादी या विजित क्षेत्रों का शासन संभाला। आधुनिक काल में विभिन्न आधुनिक राजनीतिक विचारधाराओं के व्यापक प्रसार के कारण, वे मुस्लिम बहुसंख्यक क्षेत्रों में इस्लाम के प्रभाव और संमिश्रण के साथ विभिन्न रूपों में ढल गए हैं। इस्लामी उलेमा (विद्वान) प्रथम दृष्टया केवल [[खिलाफत]] और द्वितीय दृष्टया [[मुस्लिम राजतंत्र]] को ही इस्लामी रूप से वैध राजनीतिक व्यवस्था मानते हैं,<ref>{{cite web |title=Monarchy in Qur'an and Hadith |url=https://www.livingislam.org/fiqhi/fiqha_e39.html |website=www.livingislam.org |access-date=4 August 2022}}</ref> और हालांकि वे अन्य राजनीतिक प्रणालियों को हराम कहते हैं,<ref name="i1" /> फिर भी वे इस्लामी शासन स्थापित करने के लिए मुसलमानों द्वारा सत्ता तक पहुँचने के एक मार्ग के रूप में इनका उपयोग करने को वैध ठहराते हैं।<ref name="i2" /> इसके अतिरिक्त, मुस्लिम विधिवेत्ता (फुकहा) यह शर्त रखते हैं कि इस्लामी राजनीति में भाग लेने के लिए व्यक्तिगत [[ईमान]] को सुरक्षित रखना तथा सुधार और जनहित (कल्याण) का अवसर व सामर्थ्य होना पूर्वशर्त है।<ref name=fa/>
१९२४ में [[उस्मानिया साम्राज्य|उस्मानिया (ओटोमन) साम्राज्य]] के पतन के बाद मुस्लिम दुनिया के राजनीतिक परिदृश्य में भारी बदलाव आया।<ref name="Roshwald 2013">{{cite book |title=The Oxford Handbook of the History of Nationalism |url=https://books.google.com/books?id=IlNoAgAAQBAJ&pg=PA220 |year=2013 |publisher=[[Oxford University Press]] |pages=220–241 |chapter=Part II. The Emergence of Nationalism: Politics and Power – Nationalism in the Middle East, 1876–1945 |doi=10.1093/oxfordhb/9780199209194.013.0011 |isbn=9780191750304 |last=Roshwald |first=Aviel |editor-last=Breuilly |editor-first=John |location=[[Oxford]] and [[New York City|New York]]}}</ref><ref>{{cite book |url=https://books.google.com.bd/books?id=N_ORKS49yk4C&pg=PA2 |title=The Fall and Rise of the Islamic State |last=Feldman |first=Noah |date=2012-08-26 |publisher=Princeton University Press |pages=2 |language=en |isbn=978-1-4008-4502-6}}</ref> 19वीं और 20वीं शताब्दी में मुस्लिम जगत की राजनीति का मुख्य विचार इस्लामी राज्यों में [[शरिया|शरिया कानून]] को लागू करना था। [[छह-दिवसीय युद्ध|छह-दिवसीय युद्ध]] में अरब सेनाओं की पराजय, [[शीत युद्ध|शीत युद्ध]] की समाप्ति और समाजवादी [[सोवियत संघ]] का पतन जैसी राजनीतिक घटनाओं ने इस्लामी आंदोलनों की अपील को और तीव्र कर दिया है। धर्मनिरपेक्ष राज्य व्यवस्था के प्रति अविश्वास के कारण मुस्लिम जगत के इस्लामवादी राजनीतिक दल लगातार आंदोलनरत हैं।
== व्युत्पत्ति और परिभाषा ==
अरबी भाषा में नीति और राजनीति दोनों को दर्शाने के लिए ''[[सियासत]]'' या ''सियासा'' (سياسة) शब्द का प्रयोग किया जाता है। व्याकरणविदों के अनुसार, यह अरबी धातु ''सासा'' (ساس) से निकला है जिसका अर्थ है—संचालन करना, प्रबंधन करना, शासन करना। इस शब्द का 'फेल मुदारे' (वर्तमान और भविष्य काल) रूप ''यासूस'' (يسوس) है।<ref>الأفعال، للسرقسطي، تحقيق محمد محمد شرف، ومراجعة محمد مهدي علام، القاهرة: الهيئة العامة للكتاب، 1979، ص 3/498</ref> इस्लामिक विद्वानों के अनुसार, इस्लाम और अरबी भाषा में 'सियासा' शब्द का अर्थ पारंपरिक राजनीति, सत्ता या नेतृत्व नहीं है; बल्कि इसका अर्थ किसी स्थिति में सुधार करना, उत्पन्न समस्याओं का समाधान निकालना, परिस्थितियों को बेहतर बनाना या किसी वस्तु को अपेक्षाकृत अच्छी स्थिति में ले जाना है। उदाहरण के लिए, वे पैगंबर सुलेमान [[:en:Judgement of Solomon|से जुड़ी एक घटना]] का हवाला देते हैं, जहाँ एक बच्चे की दो महिलाओं द्वारा मातृत्व का दावा किए जाने पर, पैगंबर सुलेमान ने जिस युक्ति से वास्तविक माँ की पहचान की थी, उसे 'सियासत' के रूप में उल्लेखित किया गया है।<ref>{{cite web |title=सहীह बुখারী (তাওহীদ পাবঃ) {{!}} হাদিস: ৩৪২৭ [ ] |url=https://www.hadithbd.com/hadith/link/?id=27766 |website=www.hadithbd.com |access-date=22 July 2026 |language=bn}}</ref> विद्वानों का यह भी कहना है कि जिन विषयों में कुरान और सुन्नत के स्पष्ट और अकाट्य प्रमाण मौजूद हैं, उन मामलों में 'सियासा' या नवीन समाधान रणनीतियाँ वैध नहीं होंगी; 'सियासा' का प्रयोग केवल उन मामलों में वैध है जिनका शरिया में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है।<ref name=ipabmz>{{cite web |last1=Zakaria |first1=Abu Bakr Muhammad |title=ইসলামে রাজনীতি ও রাষ্ট্রনীতির ধরণ। |url=https://m.youtube.com/watch?si=MNcJPeT_tyh72UDq&v=Rmgsnk5Yf74 |website=[[Abu Bakr Muhammad Zakaria|ابو بكر محمد زكريا]] Official YouTube Channel |access-date=30 November 2023 |language=en |date=3 October 2023}}</ref> आलिमों का यह भी कहना है कि कोई व्यक्ति या सरकार अल्लाह के बंदों की सुविधा या कल्याण के लिए जो कार्य करती है, वे इस्लामी राजनीति के अंतर्गत आते हैं, जो मूल रूप से [[मस्लहत]] (जनहित) से जुड़े हैं और उसी पर निर्भर हैं; यदि उस कार्य में जनहित नहीं है, तो इस्लाम उसे राजनीति के रूप में मान्यता नहीं देता। इस्लामी राजनीति का मूल सिद्धांत यह है कि निर्देश कुरान और हदीस से यानी पैगंबर मुहम्मद (स.) की जीवनी से लिए जाने चाहिए, न कि व्यक्तिगत रूप से गढ़े जाने चाहिए।<ref>{{cite news |title=ইসলামী রাজনীতি কাকে বলে ও কী? |url=https://www.ntvbd.com/religion-and-life/22366/%E0%A6%87%E0%A6%B8%E0%A6%B2%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A7%80-%E0%A6%5B...%5D |access-date=21 August 2025 |work=ntvbd.com |date=27 September 2015 |language=en}}</ref> [[वैज्ञानिक अनुसंधान और फतवा संबंधी स्थायी समिति|सऊदी अरब की फतवा संबंधी स्थायी समिति]] के अनुसार, कुरान और सुन्नत पर आधारित राजनीति ही इस्लामी राजनीति है तथा सभी मुसलमानों और इस्लामी राज्यों के शासकों के लिए इस राजनीति का अभ्यास करना और मुसलमानों के इसुखल एवं परलोक से जुड़े सभी कार्यों को इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर संचालित करना 'फर्ज़' (अनिवार्य) है।<ref>https://d1.islamhouse.com/data/bn/ih_articles/single2/bn_Islami_Rajniti_ki_Kibhabe.pdf</ref>
== प्रारंभिक ग्रंथसूची ==
{{আরও দেখুন|सियासतनामा}}
इस्लामी राजनीति पर सबसे प्राचीन मौलिक ग्रंथ [[अल-मावर्दी]] की पुस्तक [[अहकाम उस-सुल्तानिया (पुस्तक)|अहकाम उस-सुल्तानियात]] (प्रशासनिक नियम) है।<ref name=pub>{{cite web |title=আল মাওয়ার্দী'র খিলাফাত দর্শন ও ড.মুঈন উদ-দীন আহমদ খান।। মাঈন উদ্দিন জাহেদ |url=https://pubakash.com/archives/1819 |website=Pubakash |access-date=1 October 2025 |language=en-US |date=31 March 2021}}</ref><ref>{{cite web |title=আল মাওয়ার্দী ও তাঁর চিন্তাধারা - রোয়াক |url=https://rowyakbd.com/al-mawardi-and-his-thought/ |website=Rowakbd |access-date=1 October 2025 |language=en-US |date=22 February 2021}}</ref><ref>{{cite news |title=স্মরণীয় মুসলিম মনীষী আল-মাওয়ার্দি |url=https://www.kalbela.com/ajkerpatrika/special-event/158040 |access-date=1 October 2025 |work=[[Kalbela]] |date=24 January 2025 }}{{dead link|date=May 2026 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes}}</ref> इसके अतिरिक्त, बाद की रचनाओं में [[अबू याला]] की 'अहकाम उस-सुल्तानिया', [[अबुल मआली अल-जुवैनी]] की 'अल-गियासी', [[इब्न कय्यिम]] रचित [[तुरुत उल-हिकमिय्यात|तुरुत उल-हुकमिय्यात]] और [[इब्न तैमिया]] की [[सियासत उस-शरिया (पुस्तक)|सियासत उस-शरिया]] आदि प्रमुख हैं।<ref name=ipabmz/><ref name=pub/>
== धार्मिक पांडुलिपियाँ ==
=== कुरान ===
{{hatnote|और देखें: [[आज्ञाकारिता की आयत]] और [[इकामते दीन]]}}
[[चित्र:সূরা শূরার ১৩তম আয়াত.png|400px|थंब|दाएँ|सूरह शूरा की 13वीं आयत, जिससे "इकामते दीन" शब्दावली ली गई है और इसकी व्याख्या को लेकर इस्लामवादियों में मतभेद है।]]
कुरान में इस्लामी राजनीति के संदर्भ में राजनीतिक इस्लामवादियों द्वारा सबसे अधिक [[इकामते दीन]] (धर्म की स्थापना) नामक अवधारणा को उभारा जाता है, जिसका उल्लेख [[सूरह शूरा]] की आयत 13 में है।
{{quote|
उसने तुम्हारे लिए धर्म (दीन) का वही मार्ग निर्धारित किया है, जिसका आदेश उसने नूह को दिया था और जो (ओही) हमने तुम्हारी ओर भेजी है और जिसका आदेश हमने इब्राहीम, मूसा और ईसा को दिया था कि ''धर्म को स्थापित करो'' (اَقِیۡمُوا الدِّیۡنَ) और इसमें फूट न डालो। जिस चीज़ की ओर तुम बहुदेववादियों को बुलाते हो, वह उन्हें बहुत भारी लगती है; अल्लाह जिसे चाहता है अपनी ओर खींच लेता है और जो उसकी ओर रुख करता है, उसे वह मार्ग दिखाता है। |सूरह शूरा: १३}}
हालांकि, इस आयत में "धर्म को स्थापित करने" से क्या तात्पर्य है, इसे लेकर इस्लामवादियों में मतभेद है। [[राजनीतिक इस्लाम]] के समर्थक इसके द्वारा अल्लाह की हुकूमत या आदेश की स्थापना अथवा इस्लामी सरकार की स्थापना यानी इस्लामी/मुस्लिम राजनीति या शक्ति की स्थापना समझते हैं; इसके विपरीत, [[पारंपरिक सलाफीवाद|मुख्यधारा के सलाफी]] मानते हैं कि इसका तात्पर्य [[तौहीद]] (अल्लाह की एकता) और दावत के माध्यम से जनता के बीच शुद्ध इस्लामी [[अकीदा]] (विश्वास) स्थापित करना है, और वे पहले वाले राजनीतिक हुकूमत संबंधी अर्थ को गलत बताकर उसका विरोध करते हैं।
[[चित्र:আনুগত্যের আয়াত.jpg|400px|थंब|दाएँ|सूरह निसा की आयत 59, जिसे आज्ञाकारिता की आयत कहा जाता है, इस्लाम में राजनीति के संदर्भ में प्रयुक्त एक महत्वपूर्ण आयत है।]]
इस्लाम में राजनीतिक सत्ताधारियों की आज्ञाकारिता के प्रसंग में सूरह निसा की आयत 59 का उल्लेख किया जाता है, जिसे 'आज्ञाकारिता की आयत' कहा जाता है। इसमें अल्लाह और इस्लामी पैगंबर मुहम्मद के साथ-साथ [[उलिल-अम्र]] यानी दायित्व संभालने वाले प्राधिकारिगण (शासकों और उलेमा) की आज्ञा मानने का निर्देश दिया गया है। यह आज्ञाकारिता वैध इस्लामी निर्देशों ([[हलाल]]) के मामले में है, न कि अनंतिम या गैर-इस्लामी आदेशों ([[हराम]]) के मामले में।
{{quote|हे विश्वासियों! अल्लाह का आज्ञापालन करो और रसूल का आज्ञापालन करो और उन लोगों का भी जो तुममें से अधिकारसंपन्न (उलिल-अम्र) हैं। फिर यदि किसी बात में तुम्हारा आपस में मतभेद हो जाए, तो उसे अल्लाह और रसूल के पास लौटा दो (उनके आदेश की ओर देखो), यदि तुम अल्लाह और अंतिम दिन पर विश्वास रखते हो। यही उत्तम है और परिणाम की दृष्टि से भी बहुत अच्छा है।|सूरह निसा, आयत: ५९}}
[[इब्न तैमिया]] ने अपनी पुस्तक 'सियासत उस-शरिया' (शर्ई राजनीति) की शुरुआत इसी आयत से की है, साथ ही न्याय और अमानत (विश्वास) के निर्देश के रूप में सूरह निसा की आयत 58 को भी पूर्व में उद्धृत किया है।
{{quote|निःसंदेह हमने अपने रसूलों को स्पष्ट प्रमाणों के साथ भेजा और उनके साथ किताब और (न्याय की) तराजू उतारी, ताकि लोग न्याय पर कायम रहें। और हमने लोहा उतारा, जिसमें भारी शक्ति है और लोगों के लिए कई लाभ हैं; और ताकि अल्लाह जान ले कि कौन बिन देखे उसकी और उसके रसूलों की सहायता करता है। निःसंदेह अल्लाह शक्तिशाली, पराक्रमी है।|हदीद, २५}}
{{quote|निसंदेह अल्लाह तुम्हें आदेश देता है कि अमानतें उनके हकदारों को लौटा दो और जब लोगों के बीच निर्णय करो, तो न्याय के साथ निर्णय करो। अल्लाह तुम्हें कितनी अच्छी सीख देता है! निःसंदेह अल्लाह सब कुछ सुनने वाला, देखने वाला है।|निसा, ५८}}
==== पश्चिमी विद्वानों के दृष्टिकोण ====
माइकल कुक ने अपनी पुस्तक 'मुहम्मद' में टिप्पणी की है कि हालांकि कुरान सीधे तौर पर राजनीति पर चर्चा नहीं करता, लेकिन इसमें उत्पीड़ितों (''मुस्तदआफीन''), देशत्याग (''हिजरत''), मुस्लिम समुदाय (''[[उम्मा]]'') और अल्लाह के मार्ग में संघर्ष (''[[जिहाद]]'') की अवधारणाओं का उल्लेख मिलता है, जिनके राजनीतिक प्रभाव हो सकते हैं।<ref name="Cook-1983-51-60">{{cite book |last1=Cook |first1=Michael |title=Muhammad |url=https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4 |date=1983 |publisher=Oxford University Press |isbn=0192876058 |pages=[https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4/page/51 51]–60}}</ref> कुरान की कई आयतों (जैसे कुरान 4:98) में ''मुस्तदआफीन'' ("कमजोर माने गए", "अकिंचन" या "उत्पीड़ित") पर चर्चा की गई है, जैसे कि कैसे फिरौन जैसे लोग उनका शोषण करते थे, अल्लाह कैसे चाहता था कि उनके साथ न्याय हो, और वे उस भूमि से जहाँ उन पर अत्याचार होता है, कैसे पलायन कर सकते हैं (कुरान 4:99)। पैगंबर [[इब्राहीम]] ने "अपने पालनहार की ओर पलायन" किया था (कुरान 29:26)। कुरान में अविश्वासियों (''कुफ्फार'') के खिलाफ युद्ध का आदेश दिया गया है और दिव्य सहायता का वादा किया गया है, हालांकि कुछ आयतों में यह भी कहा गया है कि यह आदेश शायद तब के लिए था जब अविश्वासियों ने युद्ध शुरू किया हो, और संधियाँ तथा समझौते होने पर युद्ध समाप्त किया जा सकता है। इसके अलावा, कुरान में विजय प्राप्त करने वालों के बीच युद्ध में प्राप्त धन के उचित वितरण के लिए भी कुछ आयतें हैं। साथ ही, आंतरिक शत्रुओं या "[[मुनाफिक|कपटियों]]" (''मुनाफिकून'') के विरुद्ध युद्ध का भी आदेश दिया गया है।<ref name="Cook-1983-51-60"/> कुछ निर्देश पैगंबर के जीवनकाल के बाद आगे नहीं बढ़े, जैसे अल्लाह और उनके पैगंबर से झगड़ा करना या पैगंबर से बात करते समय चिल्लाना या ऊँची आवाज़ में बात करना।<ref name="Cook-1983-56-7">{{cite book |last1=Cook |first1=Michael |title=Muhammad |url=https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4 |date=1983 |publisher=Oxford University Press |isbn=0192876058 |pages=[https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4/page/56 56]–7}}</ref> इस्लामी राजनीतिक शिक्षाओं के सीमित रहने का कारण यह है कि कुरान में "किसी औपचारिक और निरंतर सत्ता के ढांचे" का उल्लेख नहीं किया गया है, इसमें केवल पैगंबर की बात मानने का निर्देश दिया गया है;<ref name="Cook-1983-56-7"/> और इसके मूल संदेश का राजनीतिक उपयोग उस समय अत्यंत सीमित था, क्योंकि रेगिस्तानी खानाबदोश लोगों के लिए यह कल्पना करना भी कठिन था कि विभिन्न शहरों और देशों द्वारा नियंत्रित एक विस्तृत कृषक-बहुसंख्यक क्षेत्र का शासन चलाना ही इस्लाम की सफलता हो सकती है।<ref name="Cook-1983-59">{{cite book |last1=Cook |first1=Michael |title=Muhammad |url=https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4 |date=1983 |publisher=Oxford University Press |isbn=0192876058 |page=[https://archive.org/details/muhammad0000cook_h0b4/page/59 59]}}</ref>
=== हदीस ===
==== राजनीति या सियासत शब्द का उल्लेख ====
बुखारी और मुस्लिम में वर्णित हदीसों में 'सियासत' शब्द की धातु (मूल) का क्रियापद के रूप में उपयोग हुआ है।<ref>{{cite web |title=ص9 - كتاب السياسة الشرعية جامعة المدينة - الدرس السياسة الشرعية مفهومها أحكامها أدلة اعتبارها - المكتبة الشاملة (Page 9 - The Book of Islamic Political Theory, University of Madinah - Lesson: Islamic Political Theory: Its Concept, Rulings, and Evidence for its Validity - Shamila Library) |url=https://shamela.ws/book/11313/2 |website=shamela.ws}}</ref><ref>{{cite web |title=ইসলামিক শাসন ব্যবস্থা |url=https://m.youtube.com/watch?si=-U16ABJxCI9s-skE&v=KfCinOkJs4g |access-date=20 July 2026 |date=13 October 2019}}</ref>
{{quote|अबू হুরাইরা (रा.) से वर्णित है कि पैगंबर (स.) ने कहा: “बनी ইসরাইল (이스্রাইল की संतानों) पर नबी शासन करते थे (तासूसूहुम अल-अंबिया); जब भी कोई नबी मरता, तो दूसरा नबी उसका उत्तराधिकारी बनता।” |(सहीह बुखारी, हदीस/3455; सहीह मुस्लिम, हदीस/1842; इब्न माजाह, हदीस/2871; मुसनद अहमद, हदीस/7960)}}
[[इमाम नववी]] कहते हैं: "'[वे] नबी द्वारा शासित थे' का अर्थ है कि नबी उनके मामलों की देखभाल वैसे ही करते थे जैसे शासक जनसाधारण की जिम्मेदारी संभालते हैं। इस प्रकार सियासा का अर्थ ऐसी देखरेख करना है जो उनके कल्याण को बनाए रखे और उनके हितों को पूरा करे।"<ref>{{cite web |title=Politics from an Islamic perspective - Islam Question & Answer |url=https://islamqa.info/en/answers/181673/politics-from-an-islamic-perspective |website=[[islamqa.info]] |access-date=4 August 2022 |language=en}}</ref>
==== नेतृत्व के निर्देश ====
;नेतृत्व की प्राथमिक शर्त: तीन लोगों की जमात और कुरान (इस्लामी ज्ञान) में प्रवीणता
[[सालेह अल-मुनाज्जिद]] अपनी पुस्तक 'हुब्ब उस-सियासत' (नेतृत्व प्रेम) में कहते हैं कि सुन्नत के अनुसार यदि लोग संगठित हों, तो एक नेता का होना अनिवार्य है।
{{quote|अबू सईद अल-खुदी (रा.) से वर्णित। रसूलुल्लाह (स.) ने कहा: जब तीन व्यक्ति सफर पर निकलें, तो उन्हें चाहिए कि वे अपने में से एक को अपना अमीर या नेता बना लें।|अबू दाऊद, ২৬০৮, सनद हसन, अलबानी}}
एक अन्य हदीस में आया है कि यदि तीन से अधिक लोग एकत्र हों, तो उनमें से एक को नेता बनाना चाहिए, और उसे नेता बनाया जाना चाहिए जो उनमें सबसे अधिक कुरान (और सही हदीस यानी शुद्ध इस्लामी ज्ञान) जानता हो।
{{quote|कुतैबा बिन सईद (रह.) ..... अबू सईद अल-खुदी (रज़ि.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) ने कहा: जब तीन व्यक्ति एकत्र हों, तो उनमें से एक को उनका इमाम या नेता होना चाहिए। और उनमें इमामत या नेतृत्व का सबसे अधिक हकदार वह व्यक्ति है जिसने सबसे अधिक पढ़ा है (أَقْرَؤُهُمْ, अक्रओहुम - जिसका अर्थ यह है कि जिसने मजीद कुरान [और सही हदीस] का सबसे अधिक अध्ययन किया है)।| सहीह मुस्लिम (हदीस अकादमी) 1415-(289/672)}}
एक अन्य हदीस में नेता या इमाम बनाने के विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं (अधिकांश विद्वानों के अनुसार यह धार्मिक इमामत या धार्मिक नेतृत्व है, किंतु कई विद्वानों ने इसे राजनीतिक इमामत या राजनीतिक नेतृत्व चुनने के निर्देश के रूप में भी स्थापित किया है)।
{{quote|अबू मसूद (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) ने ارشاد किया: कौम की इमामत वह व्यक्ति करेगा जो अल्लाह की किताब को सबसे अच्छी तरह पढ़ सकता है। यदि उपस्थित सभी लोग अच्छे कारी (पाठक) हों, तो इमामत वह व्यक्ति करेगा जो सुन्नत के बारे में सबसे अधिक जानता हो। यदि सुन्नत के ज्ञान में सब समान हों, तो वह जो सबसे पहले हिजरत (पलायन) करके आया हो। यदि हिजरत में भी सब समान हों, तो वह इमामत करेगा जो उम्र में सबसे बड़ा हो। और कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के अधिकार क्षेत्र (अधिकार वाले स्थान) में जाकर इमामत न करे और न ही किसी के घर जाकर उसकी अनुमति के बिना उसके खास आसन पर बैठे।|मिशকাত 1117, मुस्लिम 673, अबू दाऊद 582, अत-तिर्मिज़ी 235, नसायी 780, इब्न माजाह 980, अहमद 17063}}
;ज्ञान अर्जन
हदीस में आलिम (विद्वान) व्यक्ति को नेता बनाने का आदेश दिया गया है और जाहिल (अज्ञानी) व्यक्ति को नेता बनाना कयामत की निशानी बताया गया है।
{{quote|कुतैबा बिन सईद (रह.) ..... उर्वाह (रह.) से वर्णित। उन्होंने कहा, मैंने अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन अल-आस (रज़ि.) को कहते सुना। उन्होंने कहा कि मैंने रसूलुल्लाह (स.) को कहते सुना। आपने फरमाया: निश्चय ही अल्लाह लोगों के दिलों से ज्ञान छीन नहीं लेगा, बल्कि वह आलिमों (विद्वानों) को उठा कर (قبض करके) ज्ञान को समाप्त कर देगा। यहाँ तक कि जब कोई आलिम बाकी नहीं रहेगा, तो लोग अज्ञानी (मूर्ख) लोगों को अपना नेता बना लेंगे। लोग उनसे फतवे (धार्मिक निर्णय) मांगेंगे, और वे बिना ज्ञान के फतवे देंगे। जिससे वे खुद भी गुमराह होंगे और लोगों को भी गुमराह करेंगे।|सहीह मुस्लिम (हदीस अकादमी) 6689-(13/2673)}}
साहबी [[उमर इब्न अल-खत्ताब|उमर]] और सलाफ-ए-सालेहिन ने नेतृत्व मिलने से पहले और बाद में ज्ञान अर्जित करने का निर्देश दिया है।
{{quote|उमर (रा.) ने कहा: नेतृत्व प्राप्त करने से पहले ज्ञान हासिल कर लो। अबू अब्दुल्लाह (बुखारी) कहते हैं: और नेता बना दिए जाने के बाद भी (ज्ञान प्राप्त करो), क्योंकि पैगंबर (स.) के साथियों ने वृद्धावस्था में भी ज्ञान प्राप्त किया है।|सहीह बुखारी (इफा) 73}}
हालांकि, केवल अपने ज्ञान के प्रदर्शन या नेतृत्व पाने के उद्देश्य से ज्ञान प्राप्त करने को हदीस में मना किया गया है।
{{quote|काब बिन मलिक (रज़ि.) से वर्णित, उन्होंने कहा, मैंने रसूलुल्लाह (स.) को कहते सुना: जो व्यक्ति आलिमों के साथ बहस करने, या जाहिलों के साथ हुज्जत करने, अथवा लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने के उद्देश्य से ज्ञान प्राप्त करता है, अल्लाह तआला उसे जहन्नम (नरक) में झोंक देगा।|तिर्मिज़ी 2654 (हसन-अलबानी)}}
;सच्चाई और निर्लोभता
व्यक्तिगत जीवन में সৎ (सच्चे) और नेतृत्व तथा सत्ता को मन से नापसंद करने वाले लोगों को नेतृत्व के योग्य बताया गया है।
{{quote|अबू हुरैरा (रा.) से वर्णित, पैगंबर (स.) ने कहा: कयामत तब तक कायम नहीं होगी... जब तक कि तुम ऐसे लोगों से युद्ध न करो... "तुममें से सर्वोत्तम लोग वे होंगे जो नेतृत्व और शासन सत्ता से जुड़ने से पहले इसे अत्यधिक घृणा और नापसंद करें।" |सहीह बुखारी (इफा) 3334}}
हदीस में नेतृत्व का लालच करने से मना करते हुए कहा गया है कि नेतृत्व की शुरुआत भले ही आनंददायक हो, लेकिन धीरे-धीरे यह कष्टदायक होती जाती है।
{{quote|अबू हुरैरा (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, पैगंबर (स.) ने कहा: शीघ्र ही तुम लोग सत्ता और नेतृत्व के लिए लालायित हो जाओगे। और इसके कारण निश्चित ही कयामत के दिन तुम्हें लज्जित होना पड़ेगा। अतः (नेतृत्व पाना) दूध पिलाने वाली (माता) के रूप में कितना अच्छा है और दूध छुड़ाने के समय कितना बुरा है। (जैसे शिशु दूध मिलने पर आनंदित होता है, वैसे ही व्यक्ति सत्ता पाकर खुश होता है, और जैसे दूध छूटने पर बच्चा कष्ट पाता है, वैसे ही सत्ता जाने पर व्यक्ति दुखी होता है।) |मिशকাত 2681, बुखारी 7148, नसायी 4211}}
;परामर्श और प्राथमिकता
हदीस में परामर्श (मशविरा) के आधार पर नेता या अमीर चुनने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, और जिसकी सत्ता या जिसके प्रति निष्ठा पहले स्थापित हो चुकी हो, उसकी आज्ञा मानने तथा उसकी मृत्यु के बाद ही अगला अमीर चुनने का निर्देश दिया गया है। पहले से स्थापित नेता के जीवनकाल में यदि कोई दूसरा नेतृत्व का दावा करे, तो उसे दृढ़ता से रोकने का आदेश है।
{{quote| जरीर (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, मैं यमन में था। उसी समय मेरी मुलाकात यमन के दो व्यक्तियों—जुकाला और जु-अम्र—से हुई। मैंने उन्हें रसूलुल्लाह (स.) की हदीसें सुनानी शुरू कीं। (वर्णक कहते हैं) तब जु-अम्र ने जरीर से कहा, हे जरीर! यदि तुम जो वर्णन कर रहे हो, वह वास्तव में तुम्हारे साथी [पैगंबर (स.)] का कथन है, तो जान लो कि तीन दिन पहले उनका इंतकाल हो चुका है। (जरीर कहते हैं, यह सुनकर मैं मदीने की ओर दौड़ा)... (बाद में जब अबू बकर खलीफा चुने गए, तो उन्होंने कहा)... "तुम अरब जाति तब तक कल्याण पर रहोगे जब तक कि एक अमीर के मरने पर (परामर्श के आधार पर) दूसरे को अमीर बना लोगे। और यदि यह फैसला तलवार के जोर पर होने लगा, तो तुम्हारे अमीर राजा-बादशाहों जैसे हो जाएंगे। वे राजाओं की तरह गुस्सा होंगे और राजाओं की तरह खुश होंगे (और खिलाफत व खलीफा बाकी नहीं रहेंगे)।" |सहीह बुखारी, हदीस: ४३५९}}
{{quote|अबू हुरैरा (रा.) से वर्णित, पैगंबर (स.) ने कहा: "...मेरे बाद कोई नबी नहीं आएगा, बल्कि कई खलीफा होंगे और उनकी संख्या अधिक होगी।" সাহাবীগণ बोले, "तो आप हमें क्या आदेश देते हैं?" आपने फरमाया: "जिसके हाथ में सबसे पहली बैअत (निष्ठा की शपथ) की जाए, उसी का आज्ञापालन करना और उन्हें उनका हक देना। निःसंदेह अल्लाह उनसे उस चीज़ के बारे में पूछेगा जिसकी जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई थी।" |(सहीह बुखारी, हदीस/3455; सहीह मुस्लिम, हदीस/1842)}}
;योग्य व्यक्ति को नेतृत्व देना
सही माने गए सुन्नी हदीसों में योग्य व्यक्ति को नेतृत्व सौंपने का आदेश दिया गया है।
{{cite book |last1=Taymīyah |first1=Aḥmad ibn ʻAbd al-Ḥalīm Ibn |title=The Political Shariyah on Reforming the Ruler and the Ruled |date=2005 |publisher=Dar ul Fiqh |page=13 |url=https://books.google.com.bd/books?id=ZdwVAQAAIAAJ&q=political+shariyah+on+reforming+ruler+and+ruled+ibn+taymiyyah&dq=political+shariyah+on+reforming+ruler+and+ruled+ibn+taymiyyah&hl=en&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwij4qv35uKPAxWa6jgGHXd2BtoQ6AF6BAgKEAM |access-date=18 September 2025 |language=en}}
{{quote|अबू हुरैरा (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: जब अमानत नष्ट कर दी जाए (यानी अयोग्य व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंप दी जाए), तब कयामत की प्रतीक्षा करना।|बुखारी ६४९६, रियाजुस सालिहीन १८३७}}
;महिला राष्ट्राध्यक्ष न होना
हदीस में राष्ट्राध्यक्ष के पद के लिए महिलाओं को अयोग्य घोषित किया गया है।
{{quote|अबू बकरा (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) के पास यह खबर पहुँची कि फारस (ईरान) के लोगों ने किस्रा की पुत्री को अपनी सावर्णि (महारानी) नियुक्त किया है। तब आपने फरमाया: वह जाति कभी सफल नहीं हो सकती जो अपने शासन की बागडोर किसी महिला को सौंप दे।|मिशकत ३६९३, सहीह: बुखारी ४४२५}}
==== आज्ञाकारिता और विरोध ====
इस्लामी पैगंबर मुहम्मद ने मुसलमानों को मिलजुलकर रहने का कड़ाई से निर्देश दिया है और अमीर, सत्ताधारी नेता या शासक की कमियों या उसके अत्याचारी होने पर भी धैर्य रखने तथा एकजुटता से अलग न होने का आदेश दिया है।<ref name=উ>উসুলুল ঈমান... (उसूलुल ईमान...)</ref>
{{quote|अनस बिन मालिक (रा.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: यदि तुम पर किसी ऐसे हब्शी (अश्लील/कृष्णवर्ण) दास को भी शासक नियुक्त कर दिया जाए जिसका सिर किशमिश की तरह (छोटा) हो, तब भी उसकी बात सुनना और उसकी आज्ञा का पालन करना।|सहीह बुखारी, हदीस: ७१४२}}
{{quote|अब्दुल्लाह बिन अम्र (रा.) से वर्णित: अल्लाह के रसूल (स.) ने फरमाया: "जो व्यक्ति किसी राजनेता (शासक) के हाथ पर बैअत करे और उसे अपने दिल से वचन दे, तो उसे चाहिए कि जहाँ तक संभव हो उसका (उसके अच्छे कार्यों में) आज्ञापालन करे। इसके बाद यदि कोई दूसरा (शासक) उसकी सत्ता छीनना चाहे, तो उस दूसरे शासक की गर्दन उड़ा दो।" |(मुस्लिम ৪৮৮২)}}
;शासक को गुप्त रूप से सलाह देना
इस्लामी पैगंबर मुहम्मद ने शासक को नसीहत (मार्गदर्शन) देने का निर्देश दिया है और इसे गुप्त रूप से देने को कहा है।<ref name=উ/>
{{quote|अबू हुरैरा (रज़ि.) से वर्णित। उन्होंने कहा, रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: अल्लाह तआला तीन चीजें पसंद करता है और तीन चीजें नापसंद करता है... "और अल्लाह ने तुम पर जिसे शासक बनाया है, उसे नसीहत (भलाई की बात) करो।"<ref name=উ/> |सहीह मुस्लिम ১৭১५}}
{{quote|इब्न أبي عاصم और अन्य द्वारा वर्णित इयाद बिन गनम (रज़ि.) कहते हैं, रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया:
«من أراد أن ينصح لذي سلطان فلا يبده علانية، ولكن يأخذ بيده فيخلوا به، فإن قبل منه فذاك، وإلا كان قد أدى الذي عليه»
“यदि कोई किसी सत्ताधारी को नसीहत देना चाहता है, तो उसे चाहिए कि वह उसे खुलेआम (सार्वजनिक रूप से) न दे, बल्कि उसका हाथ पकड़कर (एकांत में) ले जाए। यदि वह उसकी बात मान ले, तो ठीक है, अन्यथा उसने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी।” |(मुसनद अहमद १५३३३, इब्न أبي عاصم, अस-सुन्नत ২/৫০)<ref name=উ/></ref>
;नेतृत्व की वैधता के मानदंड
[[खोন্দকার আব্দুল্লাহ জাহাঙ্গীর]] अपनी पुस्तक 'ইসলামের নামে জঙ্গিবাদ' (इस्लाम के नाम पर आतंकवाद) में कहते हैं कि हदीस में तब तक शासक की सत्ता का विरोध करने से मना किया गया है जब तक वे नमाज पढ़ते हैं और/या सार्वजनिक रूप से नमाज पढ़ने की अनुमति देते हैं।
{{quote|उम्मुल मुमिनीन उम्मे सलमा (रज़ि.) से वर्णित कि रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: शीघ्र ही ऐसे कुछ अमीर आएंगे जिन्हें तुम पहचानोगे और नापसंद करोगे। जो व्यक्ति उनकी असलियत को पहचान गया, वह सुरक्षित हो गया और जिसने उन्हें नापसंद किया, वह बच गया। लेकिन जो व्यक्ति उनसे संतुष्ट रहा और उनका अनुसरण किया (वह नष्ट हो गया)। लोगों ने पूछा: क्या हम उनके खिलाफ युद्ध न करें? रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: नहीं, जब तक वे नमाज कायम रखें।|सहीह मुस्लिम, ४६९४}}
फहद बिन सालेह अल-अजलान अपनी पुस्तक 'मुहर्रर फी सियासत उस-शरिया' में कहते हैं कि काजी इयाद और इब्न हजार असकलानी का कहना है कि यदि कोई मुस्लिम शासक काफिर हो जाए या खुले कुफ्र (अधर्म) में लिप्त हो जाए, तो उसकी आज्ञा मानना वैध नहीं है; बल्कि यदि कोई सक्षम हो, तो वह उसके खिलाफ संघर्ष करे। और यदि मुसलमान ऐसा करने में असमर्थ हों, तो राजनीतिक हित और अपने अस्तित्व को बचाने के लिए वे बाहरी तौर पर उसकी आज्ञा मान सकते हैं (मजबूरीवश, न कि उसकी शर्ई सत्ता मानकर)।
;गोत्रवाद और भाई-भतीजावाद (असबियाह)
हदीस में [[असबियाह|गोत्रवाद (जातिवाद/वंशवाद)]] की निंदा की गई है और इसे प्रतिबंधित किया गया है।
{{quote|वासिला बिन असका (रा.) कहते हैं, मैंने एक दिन रसूल (स.) से पूछा: या रसूलल्लाह! असबियाह क्या है? रसूल (स.) ने फरमाया: असबियाह यह है कि तुम अन्याय के मामले में अपने गोत्र की सहायता करो।|अबू दाऊद ५१১৯}}
{{quote|जुनदूब बिन अब्दुल्लाह बजली (रज़ि.) से वर्णित कि रसूलुल्लाह (स.) ने फरमाया: जो व्यक्ति लक्ष्यहीन नेतृत्व के झंडे तले युद्ध करता है, गोत्रवाद (عَصَبِيَّةً, असबियाह) की ओर आह्वान करता है और गोत्रवाद के ही कारण सहायता करता है, उसकी मौत जाहिलियत (अज्ञानता के युग) की मौत है।|सहीह मुस्लिम, ४৬৮৬}}
== सालाफियों के दृष्टिकोण ==
मावर्दी अपनी पुस्तक 'क़वानिनुल विज़ारत व सियासतुल मुल्क' (قوانين الوزارة وسياسة الملك, शासन और राज्याधिकार के नियम) में कहते हैं, "हज़रत अली इब्न अबी तालिब (रज़ि.) ने कहा है: 'अपने शत्रु पर उदारता (क्षमा) के माध्यम से श्रेष्ठता प्राप्त करो, क्योंकि यह (क्षमा) दो विजयों में से एक है।' और यदि चेतावनी और स्पष्टीकरण के बाद (शत्रु के साथ) अंतिम मुकाबले या युद्ध की आवश्यकता उत्पन्न हो जाए, तो शासक को अपनी संकल्पशक्ति को जाग्रत करना चाहिए, विवेक का उपयोग करना चाहिए और इस्तिखारा (अल्लाह से कल्याण की प्रार्थना), धर्म के अनुसरण तथा न्याय की स्थापना के दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए। क्योंकि भ्रष्ट और पराजित व्यक्ति के अलावा कोई भी इस मार्ग (न्याय और धर्म) से विचलित नहीं होता है।"<ref>{{cite book |title=قوانين الوزارة وسياسة الملك |date=1 January 1900 |publisher=دائرة الثقافة والسياحة – أبوظبي، مركز أبوظبي للغة العربية، إصدارات |isbn=978-9948-02-171-1 |url=https://books.google.com.bd/books?id=hktQEAAAQBAJ&pg=PT27&dq=%D8%B3%D9%8A%D8%A7%D8%B3%D8%A9%22+%D8%A7%D8%B3%D8%AA%D8%AE%D8%A7%D8%B5%22&hl=bn&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwj_tZTv0fiSAxVGT2wGHdh9KQsQ6AF6BAgNEAM#v=onepage&q=%D8%B3%D9%8A%D8%A7%D8%B3%D8%A9%22%20%D8%A7%D8%B3%D8%AA%D8%AE%D8%A7%D8%B5%22&f=false |access-date=27 February 2026 |language=en |quote=وقد قال علي بن أبي طالب رضي الله تعالى عنه: خذ على عدوك بالفضل فإنه أحد الظفرين " وإن دعت الضرورة إلى المناجزة بعد الإعذار والإنذار، أيقظ لها عزمه، واستعمل فيها حزمه، وأقدم عليها بعد الاستخارة متبعاً للدين، ومستعملاً للعدل، فلن يعدل عنهما إلا باغ مصروع}}</ref>
{{quote|अबू हुरैरा (रज़ि.) कहते हैं, मैंने अल्लाह के रसूल (सल्ल.) से ज्ञान के दो बर्तन सुरक्षित रखे हैं। जिनमें से एक को तो मैंने फैला (प्रचार) दिया। लेकिन यदि मैं दूसरे को भी फैलाता, तो मेरी यह स्वरनली (गला) काट दी जाती।" (बुखारी हदीस/120; मिशकात हदीस/271)}}
{{Quote|दूसरे वर्णन में आया है, उनसे कहा गया कि आप अधिक हदीस का वर्णन करते हैं। उन्होंने कहा, मैंने रसूल (सल्ल.) से जो कुछ सुना है, यदि मैं वह सब का सब वर्णन कर देता, तो तुम मुझे पत्थर मारकर मार डालते; कोई मोहलत नहीं देते। (अहमद हदीस/10972, संदर्भ सहिह)}}
उक्त हदीस की व्याख्या में विद्वानगण कहते हैं कि यह फितने (उपद्रव) से संबंधित विषय था या तत्कालीन शासक के विरुद्ध था, जिसे प्रकट करने पर उसकी हत्या कर दी जाती। या शायद यह ऐसा विषय था जिसे छिपाने से धर्म को कोई हानि नहीं होती, बल्कि प्रकट करने से फितना बढ़ जाता, इसीलिए उन्होंने इसे प्रकट नहीं किया। यहाँ तक कि जिनके हाथों से इस्लामी नेतृत्व छिन जाने की रसूल (सल्ल.) ने चेतावनी दी थी, वे उनके नाम भी जानते थे। अबू हुरैरा (रज़ि.) ने कहा, मैंने 'अस-सादिकुल मसदूक' (सच्चे और सत्य के रूप में प्रमाणित) को यह कहते हुए सुना है, 'मेरे उम्मत का विनाश कुरैश के कुछ लड़कों के हाथों होगा।' तब मरवान ने कहा, इन लड़कों पर अल्लाह की लानत बरसे। अबू हुरैरा (रज़ि.) ने कहा, यदि मैं यह कहना चाहूँ कि वे फलां-फलां गोत्र के लोग हैं, तो मैं उनके नाम बताने में सक्षम हूँ <ref>(बुखारी हदीस/3605)</ref>। अम्र बिन यह्या कहते हैं कि जब मरवान सीरिया के शासक बने, तो मैं अपने दादा के साथ वहाँ गया। जब उन्होंने उनके कम उम्र लड़कों को देखा, तो उन्होंने हमसे कहा, शायद ये लोग उसी दल के अंतर्गत हैं। हमने कहा, इस विषय में आप ही बेहतर जानते हैं <ref>(बुखारी हदीस/7058)</ref>। इन्हीं के नाम अबू हुरैरा (रज़ि.) ने छिपाए थे <ref>(रशीद रज़ा, तफ्सीरुल मनार 6/390; ताहिर अल-जजायरी, तौजीहुन नजर 1/63-64)</ref>। इस संबंध में इमाम कुर्तुबी कहते हैं कि अबू हुरैरा (रज़ि.) ने जिस बात को प्रकट नहीं किया और जिसे प्रकट करने में वे अपने जीवन के लिए जोखिम महसूस कर रहे थे, वह फितने से संबंधित विषय और मुर्तदों तथा मुनाफिदों के सहयोगियों के विरुद्ध साक्ष्य था। वे मार्गदर्शन और विधान से संबंधित नहीं थे <ref>(तफ्सीर कुर्तुबी 2/186)</ref>। हाफ़िज़ इब्ने हजर (रह.) कहते हैं कि अबू हुरैरा (रज़ि.) ने ज्ञान के जिस बर्तन को नहीं खोला था, उसकी व्याख्या में उलेमा-ए-किराम ने कहा है कि उस बर्तन में निकृष्ट नेताओं के नाम, स्थिति और कालखंड स्पष्ट रूप से उल्लेखित थे। हालाँकि अबू हुरैरा (रज़ि.) ने कभी-कभार उनकी उपमाओं का उल्लेख किया है, लेकिन जीवन के भय से स्पष्ट रूप से नाम का उल्लेख नहीं किया। जैसे कि वे दुआ में कहा करते थे, हे अल्लाह! मैं तुझसे साठ हिजरी से शरण मांगता हूँ। लड़कों के नेतृत्व से शरण मांगता हूँ। इससे उनका संकेत यज़ीद बिन मुआविया के खिलाफत की ओर था, क्योंकि वह साठ हिजरी में खलीफा बने थे। अल्लाह ने उनकी दुआ स्वीकार की और वह उनसठ हिजरी में ही परलोक सिधार गए <ref>(फत्हुल बारी 1/216)</ref>।<ref>{{cite journal |last1=At-tahreek |first1=Monthly |title=প্রশ্ন (১৬/২১৬) : আবু হুরায়রা (রাঃ) বলেছেন, ‘আমাকে নবী করীম (ছাঃ) দু’টি বস্ত্ত দিয়েছেন। একটি প্রকাশ করেছি। অপরটি প্রকাশ করলে আমার গর্দান কাটা যাবে। তিনি কি ইলমে তাছাউফের জ্ঞান গোপন করেছিলেন, যেমনটি অনেকে বলে থাকেন? - -মুজাহিদুল ইসলাম, সি এ্যান্ড বি ঘাট, চাঁপাই নবাবগঞ্জ। |journal=মাসিক আত-তাহরীক । ধর্ম, সমাজ ও সাহিত্য বিষয়ক গবেষণা পত্রিকা |url=https://at-tahreek.com/article_details/3053 |access-date=28 February 2026 |language=en}}</ref><ref>{{cite web |title=মুখতাসার সহীহ আল-বুখারী {{!}} হাদিস: ১০১ [ ১২০] |url=https://www.hadithbd.com/hadith/link/?id=88796 |website=www.hadithbd.com |access-date=28 February 2026 |language=bn}}</ref>
== फ़िक़्ह शास्त्र में ==
[[इब्ने तैमिया]] अपनी पुस्तक 'सियासा शरिया' में कहते हैं कि नेता या शासकहीन अवस्था में एक रात बिताने से अधिक उत्तम है कि किसी अत्याचारी शासक के अधीन साठ वर्ष बिताए जाएँ।
[[नासिरुद्दीन अल्बानी]] अपनी पुस्तक 'दरसुश शैखुल अल्बानी' में कहते हैं, हे मुसलमानो, राजनीति से दूर रहना ही राजनीति के अंतर्गत है (أيّها المتأسلمون: من السياسة ترك السياسة) (मिन अस्-सियासा تاركة अल-सियासा, राजनीति से राजनीति का त्याग करना ही है)।<ref>{{cite web |title=ص10 - دروس للشيخ الألباني - عدم اهتمامهم بالسياسات - المكتبة الشاملة الحديثة |url=https://al-maktaba.org/book/7682/140 |website=al-maktaba.org |access-date=29 October 2022}}</ref> आगे वे कहते हैं:
{{quote|प्रश्न: हमसे सबसे पहले जो प्रश्न किया गया था, वह एक ऐसे संवेदनशील विषय के बारे में था, इसलिए अल्लाह आपको उत्तम प्रतिफल दे, क्योंकि आपने [[तबलीग जमात]] के कई विवादास्पद विषयों पर अपनी राय देने का श्रमसाध्य कार्य किया है, लेकिन यहाँ कुछ अन्य विवादास्पद विषय भी हैं जो अन्य दृष्टिकोणों से संबंधित हैं, जिनके उत्तर हम जानना चाहते हैं, संक्षेप में और फिर विस्तार से, अल्लाह आप पर दया करे: प्रश्नकर्ता कहता है: तबलीग जमात के एक मूल सिद्धांत के बारे में आपका क्या कहना है, जिसमें वे कहते हैं: हम बाहर (दावती कार्यों) जाने के दौरान चार विषयों पर बात नहीं करते हैं, क्योंकि इन चार विषयों पर बात करने से फितना पैदा होता है, और वे हैं: राजनीति, फिक़्ह, मतभेद या इख्तिलाफ और दलीय भिन्नता? उत्तर: और हम अल्लाह से दुआ करते हैं कि अल्लाह उन्हें सीधा रास्ता दिखाए! प्रारंभिक रूप से हम राजनीति के विषय में उनके साथ सहमत हैं, लेकिन समग्र रूप से नहीं। इसे हम जिस रूप में देखते हैं, उसे मैं इससे पहले कई बार कह चुका हूँ। हमें सीरिया में पूछताछ का सामना करना पड़ा था, और वहाँ हम खुफिया एजेंसी के प्रश्नों के दायरे में आए थे, दुर्भाग्यवश जैसा कि वे प्रत्येक मुस्लिम देश में करते हैं: तुम सभा कर रहे हो, दल बना रहे हो, ऐसा इत्यादि-इत्यादि। और मैंने कहा: यह दल सुधार के लिए है, राजनीति के लिए नहीं, और एक घंटे से अधिक लंबी चर्चा के बाद जब इस बासपंथी (बास पार्टी या हिज्बु अल-बास, सीरिया का एक राजनीतिक दल) प्रश्नकर्ता को कानूनी दृष्टिकोण से विचार करने योग्य कोई मार्ग नहीं मिला, तो उसने कहा: ठीक है, जाओ और अपना درس (पाठ) पढ़ाते रहो, लेकिन राजनीति के बारे में बात मत करो, हालाँकि मैंने उसे स्पष्ट करते हुए कहा था: हम सुधार का आह्वान करते हुए अपनी ओर बुलाते हैं, और वह है कुरआन और सुन्नत की ओर लौटना जैसा कि आप हमेशा और जीवनभर सुनते आए हैं, और मैंने इसके बारे में पहले भी विस्तार से बताया था, लेकिन अब आप फिर से उसी बात पर लौट आए हैं: लेकिन राजनीति में मत उलझो। इसलिए यह मुझे आपके सामने कुछ बातें रखने के लिए बाध्य करता है। यह सच है कि हम राजनीति में नहीं उलझते। क्योंकि राजनीति में न उलझना इस्लाम का हिस्सा नहीं है, यह बात सही नहीं है। राजनीति इस्लाम का हिस्सा है, और कुछ इस्लामी विद्वान इब्ने तैमिया की पुस्तक "सियासा शरिया, कादिमान वा हदीसान" (शरिया की (राजनीति, अतीत और वर्तमान) से परिचित हैं। इस्लामी राज्य भी राजनीति के दायरे से बाहर नहीं है, और राजनीति (सियासात) शब्द का अर्थ क्या है? वह है: लोगों या जनता की नीति (सियासातुल नास, वि.द्र.: अरबी में नीति और राजनीति दोनों के लिए 'सियासात' शब्द का प्रयोग किया जाता है) और उनकी परलोक और इहलोक की हितों के अनुसार उनकी समस्याओं का समाधान स्थापित करना। हम खुद को राजनीति से जोड़ने की आवश्यकता से इनकार नहीं करते हैं, लेकिन हमने देखा है - और इस संबंध में हमारे पास साक्ष्य भी हैं - वह यह है कि राजनीति का त्याग करना भी राजनीति का ही हिस्सा है। राजनीति में अस्थायी या आंशिक रूप से भाग लेना पड़ता है, लेकिन इसका पूरी तरह त्याग नहीं किया जा सकता, अन्यथा ऐसी राजनीति के बिना मुस्लिम राज्य कैसे स्थापित होगा? लेकिन जिन्हें राजनीति में भाग लेना चाहिए, वे अवश्य ही आलिम (विद्वान) होने चाहिए, किताब (कुरआन) और सुन्नत (इस्लामी पैगंबर मुहम्मद के आदर्श) की सही समझ और सलफ-ए-सालेहीन (पूर्ववर्ती विद्वानों) की समझ के अनुसार इत्यादि, और इसलिए हम उनके साथ (तबलीग जमात के साथ) इस विषय पर प्रारंभिक रूप से सहमत हैं, हम सामान्यतः उनके साथ सहमत हैं, लेकिन विस्तार में हम उनके साथ सहमत नहीं हैं, इसलिए अब हम कहते हैं: राजनीति का त्याग करना भी राजनीति का ही हिस्सा है।}}
[[इखवानुल मुस्लिमिन]] और सममिश्रित मुस्लिम दल अल्बानी के इस मत का तीव्र विरोध करते हुए कहते हैं कि इसके द्वारा अल्बानी ने धर्म और राजनीति को अलग कर दिया है।<ref>{{cite news |last1=جمعة |first1=محمد |title=أيّها المتأسلمون: من السياسة ترك السياسة |url=https://www.alarabiya.net/politics/2015/09/07/%D8%A3%D9%8A%D9%91%D9%87%D8%A7-%D8%A7%D9%B-%D9%85%D8%AA%D8%A3%D8%B3%D9%84%D9%85%D9%88%D9%86-%D9%85%D9%86-%D8%A7%D9%84%D8%B3%D9%8A%D8%A7%D8%B3%D8%A9-%D8%AA%D8%B1%D9%83-%D8%A7%D9%84%D8%B3%D9%8A%D8%A7%D8%B3%D8%A9- |access-date=29 October 2022 |agency=العربية |date=7 September 2015 |language=ar}}</ref> अल्बानी के अनुयायी इसका विरोध करते हुए कहते हैं कि यहाँ राजनीति से तात्पर्य इस्लाम के नाम पर सत्ता, सम्मान और धन की लालसा की प्रतिस्पर्धी नकारात्मक राजनीति से है। इस्लामी समाज के निर्माण के मार्ग और पद्धति के संबंध में अल्बानी 'तसफियाह' और 'तर्बियतः' (आत्मशुद्धि और प्रशिक्षण) को महत्व देते हुए कहते हैं:
{{quote|वर्तमान में मुसलमानों की स्थिति यह है कि वे भौतिक शक्ति से संपन्न काफ़िर राष्ट्रों से घिरे हुए हैं और ऐसे शासकों के हाथों उत्पीड़ित जीवन बिता रहे हैं जो अल्लाह के विधान के अनुसार देश का संचालन नहीं करते, और यदि करते भी हैं तो बहुत ही कम। जिसके परिणामस्वरूप अवसर और सामर्थ्य होने के बावजूद उन्हें संगठनात्मक और राजनीतिक गतिविधियाँ संचालित करने का अवसर नहीं मिल रहा है। इस संबंध में मेरा मानना है कि मुस्लिम दलों को केवल दो महत्वपूर्ण विषयों की ओर ही अग्रसर होना चाहिए। मेरा विश्वास है कि इन दो विषयों के बिना मुसलमानों की इस दुर्बलता, लज्जा और अपमान से मुक्ति पाने का कोई अन्य उपाय नहीं है। मैं सभी विश्वासी मुस्लिम भाई-बहनों से, विशेष रूप से जागरूक और प्रतिबद्ध युवाओं से कह रहा हूँ, सबसे पहले जिस विषय को हमें जानना चाहिए, वह है मुसलमानों की करुण स्थिति। और दूसरी बात जिस पर ध्यान देना चाहिए, वह है अपनी पूरी शक्ति और सामर्थ्य के साथ इससे मुक्ति पाने के उपाय की तलाश करना। आज करोड़ों मुसलमान केवल भौगोलिक वास्तविकता या अपनी पहचान की रक्षा के लिए ही मुस्लिम हैं। अर्थात् अपनी राष्ट्रीयता, पहचान पत्र और जन्म प्रमाण पत्र में दर्ज परिचय के अनुसार मुस्लिम हैं। आज मैं उनके उद्देश्य से कुछ नहीं कहूँगा। मैं फिर से सभी से कहूँगा, उन मुक्ति की कामना करने वाले युवाओं के हाथों में मुक्ति के केवल दो ही मार्ग खुले हैं—(1) तसफियाह अर्थात अकीदे (विश्वास) का संशोधन (2) तर्बियत अर्थात अमली प्रशिक्षण और अभ्यास। तसफियाह का अर्थ है, मुस्लिम युवाओं के सामने उस शुद्ध इस्लाम को प्रस्तुत करना, जो युगों के अंतराल में शामिल हो चुके भ्रामक अकीदों, अंधविश्वासों, बिदअतों और सभी प्रकार की जाइफ और मघट (कमजोर) हदीसों से मुक्त हो। इस अकीदगत् सुधार को कार्यान्वित किए बिना दूसरा कोई मार्ग खुला नहीं है। इस सुधार के बिना मुसलमानों के बीच अपेक्षित शांति और सुरक्षा वापस लाने का कोई अवसर नहीं है। इस 'तसफियाह' का उद्देश्य इस्लाम को एकमात्र उपचार के रूप में प्रस्तुत करना है, जिसने उसी प्रकार उन अरबों का उपचार किया था, जो एक तरफ फारसी, रोमन और हबशियों के सामने अपमानित और उत्पीड़ित अवस्था में थे, तो दूसरी तरफ अल्लाह के अलावा गैरुल्लाह (अल्लाह के सिवाय अन्य) की इबादत करते थे। इस स्थिति से हम सभी इस्लामी दलों और समूहों का विरोध करते हैं और विश्वास करते हैं कि तसफियाह और तर्बियत को एक साथ शुरू किया जाना चाहिए। यदि हम राजनीति से शुरुआत करते हैं, तो हम पाएंगे कि जो लोग अभी राजनीति में डूबे हुए हैं, उनके अकीदे दूषित हैं। और इस्लामी दृष्टिकोण से उनका आचरण काफी हद तक शरिया के विपरीत है। वे केवल आम तौर पर इस्लाम के नाम पर लोगों को इकट्ठा करने में व्यस्त हैं। जबकि उनके लक्ष्य और विचारधारा के बारे में उन आम जनता को कोई स्पष्ट धारणा नहीं है। परिणाम स्वरूप उनके दैनिक जीवन में इस्लाम का कोई प्रभाव नहीं पाया जाता है। देखा जाएगा कि उनमें से अधिकांश अपने व्यक्तिगत जीवन में भी इस्लामी विधि-विधानों को लागू नहीं करते हैं, जो उनके लिए काफी आसान था। इसके बावजूद वे ऊंचे स्वर में नारे लगा रहे हैं: لا حكم إلا لله ('अल्लाह के हुक्म के बिना कोई हुक्म नहीं चलेगा!')। यह बात बिल्कुल सही है कि अल्लाह के उतारे हुए हुक्म के बिना कोई दूसरा हुक्म नहीं चल सकता। लेकिन यह याद रखना चाहिए कि فاقد الشيء لا يعطيه अर्थात् 'जो व्यक्ति खुद जो चीज़ खो चुका है, वह दूसरे को वह चीज़ नहीं दे सकता।' आधुनिक काल के अधिकांश मुसलमान अपने जीवन में अल्लाह के विधान को स्थापित किए बिना यदि दूसरों से राज्य में इस्लाम की स्थापना के लिए संघर्षपूर्ण भूमिका की अपेक्षा करते हैं, तो वे कभी भी अपने उद्देश्य को पूरा करने में सक्षम नहीं होंगे। क्योंकि यदि कोई व्यक्ति कोई चीज़ खुद ही खो बैठा हो, तो वह दूसरे को वह चीज़ नहीं दे सकता। और वे शासक भी तो इसी उम्मत (समुदाय) के अंतर्गत आते हैं। इसलिए शासक और शासित दोनों को ही इस दुर्बलता के कारणों को जानना चाहिए। यह जानना चाहिए कि मुस्लिम शासक अधिकांश मामलों में इस्लाम के विधान के अनुसार शासन क्यों नहीं कर रहे हैं? क्यों मुस्लिम दाई (प्रचारक) दूसरों को राज्य में इस्लाम की स्थापना का आह्वान करने से पहले अपने जीवन में इस्लामी विधान को लागू नहीं कर रहे हैं? इसका एकमात्र उत्तर यह है—उनमें से किसी के पास भी इस्लाम के बारे में सतही ज्ञान के अलावा सही ज्ञान या समझ नहीं है या फिर उनका चाल-चलन, जीवन-यापन, स्वभाव-चरित्र और आपसी लेन-देन—किसी भी क्षेत्र में इस्लामी मूल्यों का विकास नहीं हुआ है। परिणाम स्वरूप मेरे अनुभव के आधार पर मैं जो कह सकता हूँ, वह यह है कि वे एक बड़ी भ्रांति में डूबे हुए हैं। और वह है—धर्म की सही समझ से दूर छिटक जाना। यहाँ तक कि आज के दिन कुछ दाई यह सोचते हैं कि सलाफी केवल तौहीद के दावत में ही अपना जीवन बिता गए। सुब्हानल्लाह! कितनी मूर्खता में डूबा हुआ है वह व्यक्ति, जो अज्ञानतावश ऐसी बात कहता है। यदि वह वास्तव में गाफिल (लापरवाह) न भी हो, तब भी सभी नंबियों और राष्ट्रों (पैगंबरों) के दावत के बारे में उसके ज्ञान में कमी है। क्योंकि सभी नबियों का दावत यही था, 'तुम अल्लाह की इबादत करो और तागूत से बचो' (नहल 16/36)। नूह (अलै.) ने 950 वर्षों तक केवल यही दावत दी थी। वहाँ उन्होंने कोई नया सुधार नहीं किया, कोई नया विधान नहीं बनाया, कोई राजनीति नहीं की। बल्कि उन्होंने केवल इतना कहा था, हे मेरी कौम! तुम एक अल्लाह की इबादत करो और तागूत से बचो।' यही पूर्ववर्ती सलाफ अंबिया-ए-किराम की गतिविधियाँ थीं! तो फिर ये सभी मुस्लिम दाई इतने नीचे कैसे गिर सकते हैं कि वे उसी गतिविधि के लिए सलाफियों की निंदा करें? दूसरा मार्ग है तर्बियत यानी प्रशिक्षण। युवाओं को इस प्रकार प्रशिक्षित किया जाना चाहिए कि वे पूर्ववर्तियों की तरह दुनिया के मोह में न पड़ें। रसूल (सल्ल.) ने कहा है: وَاللهِ مَا الْفَقْرَ أَخْشَى عَلَيْكُمْ. وَلَكِنِّى أَخْشَى عَلَيْكُمْ أَنْ تُبْسَطَ الدُّنْيَا عَلَيْكُمْ كَمَا بُسِطَتْ عَلَى مَنْ كَانَ قَبْلَكُمْ فَتَنَافَسُوهَا كَمَا تَنَافَسُوهَا وَتُهْلِكَكُمْ كَمَا أَهْلَكَتْهُمْ 'अल्लाह की कसम! मैं इस बात का डर नहीं रखता कि तुम गरीबी में पड़ जाओगे। बल्कि मुझे इस बात का डर है कि जब तुम्हारे सामने दुनिया के साजो-सामान के द्वार वैसे ही खोल दिए जाएंगे जैसे तुमसे पहले के लोगों के लिए खोले गए थे, तो तुम भी उनकी तरह दुनिया हासिल करने के लिए आपस में मुकाबला करने लगोगे, और यह चीज़ तुम्हें उसी तरह बर्बाद कर देगी जैसे उसने उनसे पहले के लोगों को बर्बाद कर दिया था' (बुखारी, मुस्लिम, मिशकात हदीस/5১৬৩)। मुसलमानों को एक और बीमारी से अवश्य बचना चाहिए ताकि वह किसी भी तरह उनके दिल में घर न कर सके। और वह है—दुनिया से अत्यधिक प्रेम और मृत्यु से न डरना (अबू दाऊद, मिशकात हदीस/5369)। यह एक ऐसी बीमारी है जिसका उपचार करना और लोगों को इससे बचाना अनिवार्य है। इसका समाधान रसूल (सल्ल.) ने एक हदीस के अंत में इस प्रकार बताया है: حَتَّى تَرْجِعُوا إِلَى دِينِكُمْ 'जब तक कि तुम अपने धर्म की ओर वापस नहीं लौट आते' (अबू दाऊद हदीस/3462)। अर्थात् मुक्ति का मार्ग शुद्ध धर्म की ओर लौटने से ही स्पष्ट होगा, जिस धर्म पर रसूल (सल्ल.) और सहाबा-ए-किराम अटल थे। अल्लाह तआला का इरशाद है: إِنْ تَنْصُرُوا اللهَ يَنْصُرْكُمْ 'यदि तुम अल्लाह की सहायता करोगे, तो वह तुम्हारी सहायता करेगा' (मुहम्मद 47/7)। मुफस्सिरीन (व्याख्याकार) इस बात पर सहमत हैं कि इस आयत में 'अल्लाह की सहायता करने' का अर्थ है—उसके आदेशों और निषेधों के अनुसार आचरण करना। अतः अल्लाह की सहायता करना यदि अल्लाह के विधान को लागू किए बिना असंभव है, तो हम वास्तविक जिहाद में कैसे उतर सकते हैं, जबकि हम अल्लाह की सहायता नहीं कर रहे हैं? क्योंकि हमारा अकीदा जितना अशुद्ध है, हमारी नैतिकता भी उतनी ही पतन की ओर जा रही है। इसलिए जिहाद शुरू करने से पहले इस उपेक्षा, उदासीनता और आपसी विवादों के विरुद्ध युद्ध की घोषणा और शुद्ध अकीदा तथा आत्मशुद्धि प्राप्त करने का प्रयास ही हमारा आवश्यक प्राथमिक कार्यक्रम होना चाहिए। अल्लाह का इरशाद है: لاَ تَنَازَعُوا فَتَفْشَلُوْا وَتَذْهَبَ رِيحُكُمْ 'तुम आपस में झगड़ा मत करो, अन्यथा तुम साहस खो बैठोगे और तुम्हारी शक्ति समाप्त हो जाएगी' (अनफाल 8/46)। इसलिए जब हम इस मतभेद और लापरवाही को समाप्त करने में सक्षम हो जाएंगे और इसके स्थान पर आपसी प्रेम और एकता को जगा सकेंगे, तो वही हमारी worldly (दुनियावी) शक्ति की मुख्य चाबी होगी। अल्लाह का इरशाद है: أَعِدُّوا لَهُمْ مَا اسْتَطَعْتُمْ مِنْ قُوَّةٍ وَمِنْ رِبَاطِ الْخَيْلِ 'और उनके मुकाबले के लिए अपनी शक्ति भर ताकत और घोड़ों को तैयार रखो' (अनफाल 8/60)। चारित्रिक दृष्टिकोण से भी मुसलमानों की स्थिति विनाशकारी और गंभीर भ्रम में डूबी हुई है। इसीलिए एक गैर-सलाफी प्रसिद्ध मुस्लिम दाई (काज़ी हसन हुजैमी) का कथन मुझे चकित करता है, हालांकि उनके अनुयायी उनके कथन के अनुसार नहीं चलते। उन्होंने कहा है: أَقِيْمُوْا دَوْلَةَ الْإِسْلاَمِ فِيْ قُلُوْبِكُمْ تُقَمْ لَكُمْ فِيْ أَرْضِكُمْ 'तुम अपने दिलों में इस्लामी खिलाफत स्थापित करो, तभी तुम्हारी धरती पर इस्लामी खिलाफत स्थापित होगी।' अधिकांश दाई तब भूल करते हैं जब वे हमारे इस मूल सिद्धांत की उपेक्षा करते हैं। वैसी ही भूल वे तब कर बैठते हैं जब वे कह बैठते हैं कि إن الوقت ليس وقت التصفية والتربية ، وإنما وقت التكتل والتجمُّع 'अब तसफियाह और तर्बियत का समय नहीं है, बल्कि अब तो एकजुट और संगठित होने का समय है।' जबकि ऐसी स्थिति में एकजुट होना कैसे संभव हो सकता है जब बुनियादी और शाखागत सिद्धांतों में विभाजन विद्यमान हो?... यह दुर्बलता आज मुसलमानों के बीच व्यापक रूप से बढ़ रही है। और इससे मुक्ति पाने का एकमात्र उपाय वही है जो मैंने पहले कहा—शुद्ध इस्लाम की ओर उचित रूप से लौटना और समाज में तसफियाह और तर्बियत की नीति को कार्यान्वित करना। आशा है कि इतना ही पर्याप्त होगा। समस्त प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जो सारे संसार का पालनहार है। (मुहम्मद बिन इब्राहिम आश-शायबानी, 'हयातुल अल्बानी व आसारुहू व सनाउल उलामा अलैहे' 377-391)।<ref>{{cite journal |last1=नाजीब |first1=अहमद अब्दुल्लाह |title=শায়খ আলবানীর তাৎপর্যপূর্ণ কিছু মন্তব্য (২য় কিস্তি) |journal=মাসিক আত-তাহরীক । ধর্ম, সমাজ ও সাহিত্য বিষয়ক গবেষণা পত্রিকা |url=https://at-tahreek.com/article_details/6558 |access-date=11 November 2022 |language=bn}}</ref>}}
[[अब्दुल्लाह जहांगीर]] अपनी पुस्तक 'हदीस के नाम पर जालसाजी' में कहते हैं:
{{quote|हदीस के नाम पर झूठ बोलने का एक प्रकार यह है कि अनुवाद के दौरान शाब्दिक अनुवाद न करके अनुवाद के साथ अपनी इच्छा से कुछ जोड़ दिया जाए या कुछ हिस्सा छोड़ दिया जाए। या फिर रसूलुल्लाह (ﷺ) ने जो कहा है, उसकी व्याख्या को ही हदीस का हिस्सा बना दिया जाए। हमारे समाज में हम लगभग सभी इस अपराध में लिप्त हैं। आत्मशुद्धि, पीर-मुरीदी, दावत-तबलीग, राजनीति और मतभेद से जुड़े विभिन्न मसाइल के लिए हम प्रत्येक दल और मत के लोग कुरआन और हदीस से प्रमाण देते हैं। इस प्रकार प्रमाण देना अत्यंत स्वाभाविक कार्य और ईमान का दावा है। हालाँकि आमतौर पर हम अपनी इस व्याख्या को ही रसूलुल्लाह (ﷺ) के नाम पर प्रचारित करते हैं। जैसे कि रसूलुल्लाह (ﷺ) ने राज्य का संचालन किया, लेकिन प्रचलित अर्थ में 'दलीय राजनीति' नहीं की, यानी वोटों के माध्यम से सत्ता परिवर्तन जैसी कोई बात नहीं की। वर्तमान समय में कई आलिम लोकतांत्रिक 'राजनीति' कर रहे हैं। न्याय का आदेश देने, बुराई से रोकने या इकामत-ए-दीन (धर्म की स्थापना) की एक नई पद्धति के रूप में इसे स्वीकार किया जाता है। हालाँकि यदि हम यह कहें कि 'रसूलुल्लाह (ﷺ) ने राजनीति की है', तो श्रोता या पाठक 'राजनीति' का प्रचलित अर्थ, यानी वोटों के माध्यम से सत्ता पर कब्जा करने की बात ही समझेंगे। और ऐसी राजनीति उन्होंने नहीं की थी। परिणाम स्वरूप इस प्रकार उनके नाम पर झूठ बोला जाएगा। इसलिए हमें यह अलग-अलग स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने क्या किया और क्या कहा था, और हम उसकी क्या व्याख्या कर रहे हैं। रसूलुल्लाह ﷺ ने आजीवन धर्म का प्रचार किया। धर्म के लिए उन्होंने और उनके कई साथियों ने हमेशा के लिए अपना घर-बार छोड़कर 'हिजरत' की थी। लेकिन उन्होंने कभी भी दावत के लिए समय निर्धारित करके 2-1 महीने के लिए सफर पर 'बाहर' नहीं गए। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कई लोग हिजरत तो नहीं करते, लेकिन कम से कम कुछ समय के लिए विभिन्न स्थानों पर जाकर दावत का काम कर रहे हैं। लेकिन हम इस कार्य के लिए यदि यह कहें कि रसूलुल्लाह ﷺ दावत के लिए 'बाहर' जाते थे, तो पाठक या श्रोता 'निर्धारित समय के लिए बाहर जाने' का अर्थ समझेंगे। जबकि उन्होंने कभी भी इस प्रकार दावत का काम नहीं किया था। इससे उनके नाम पर झूठ बोला जाएगा।<ref>http://www.hadithbd.com/books/link/?id=4644</ref>}}
[[अब्दुल्लाह जहांगीर]] अपनी पुस्तक ''इस्लाम के नाम पर आतंकवाद'' में [[सूफी-सलाफी संबंध|सूफी-सलाफी (वहाबी) संबंध]], उनकी राजनीतिक और दार्शनिक दृष्टि तथा पश्चिमी दुनिया में इसके दुरुपयोग और गलत व्याख्या के बारे में कहते हैं:
{{quote|'वहाबी विचारधारा' को आतंकवाद के कारण के रूप में कई शोधकर्ताओं ने उल्लेख किया है। सऊदी अरब के धार्मिक नेता मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब (1703-1792 ई.) द्वारा प्रचारित विचारधारा को 'वहाबी' विचारधारा कहा जाता है। उन्होंने तत्कालीन अरब में प्रचलित कब्र पूजा, कब्रों को सजदा करना, कब्रों या पेड़ों पर धागा बांधना, मन्नतें मानना और अन्य विभिन्न प्रकार के अंधविश्वासों, शिर्क, बिदअत आदि का विरोध किया। उनका यह वक्तव्य केवल विरोध तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसके अलावा वे अपने विरोधियों को मुशरिक करार देते थे। 1745 ईस्वी में वर्तमान सऊदी अरब की राजधानी रियाद के पास स्थित 'दिरइयाह' नामक एक छोटे से ग्राम-राज्य के शासक अमीर मुहम्मद इब्न सऊद (मृत्यु 1765) उनके साथ मिल गए। उनके अनुयायियों ने उनके विरोधियों को मुशरिक मानना शुरू कर दिया और उनके खिलाफ सैन्य अभियान शुरू कर दिए। 1804 तक मक्का-हिजाज़ सहित अरब प्रायद्वीप का अधिकांश भाग 'सऊदी'-'वहाबी' लोगों के अधीन आ गया। तत्कालीन तुर्क खिलाफत ने इस नए राज्य को अपने आधिपत्य और नेतृत्व के लिए अत्यंत हानिकारक माना। क्योंकि एक तरफ मक्का-मदीना सहित इस्लाम का केंद्र उनके हाथों से निकल गया, वहीं दूसरी ओर मूल अरब में स्वतंत्र राज्य का उदय मुस्लिम दुनिया में तुर्कों के एकछत्र नेतृत्व के लिए एक खतरा बन गया। इसी कारण तुर्क खलीफा ने अपने दरबार के आलिमों के माध्यम से वहाबियों को धर्मद्रोही, काफ़िर और इस्लाम के प्रमुख शत्रुओं में से एक के रूप में फतवा जारी किया। मुस्लिम दुनिया भर में इनके खिलाफ जोरदार प्रचार अभियान चलाया गया, ताकि कोई भी इस नए राज्य को इस्लामी खिलाफत का उत्तराधिकारी न समझे। साथ ही उन्होंने तुर्क नियंत्रण के तहत मिस्र के शासक मुहम्मद अली को वहाबियों के खिलाफ युद्ध संचालित करने का आदेश दिया। मिस्र की सेना के अभियानों के सामने 1818 में सऊदी राज्य का पतन हो गया। इसके बाद सऊदी राजवंश के वंशजों ने बार-बार अपने राज्य को पुनः प्राप्त करने का प्रयास किया। अंततः इस वंश के 'अब्दुल अजीज इब्न अब्दुर रहमान अल-सऊद (1879-1953) ने 1901 से 1924 ईस्वी तक लंबे युद्धों के माध्यम से वर्तमान 'सऊदी अरब' की स्थापना की। अठारहवीं शताब्दी से लेकर मुस्लिम दुनिया में जहाँ भी कोई सुधारवादी दावत या आह्वान प्रचारित किया गया, सऊदी 'वहाबियों' ने उसे मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब के आदर्शों से प्रभावित होने का दावा किया। दूसरी ओर, तुर्क प्रचार के कारण 'वहाबी' शब्द मुस्लिम समाज में एक अत्यंत घृणित शब्द बन गया। उन्हें अन्य भ्रमित समुदायों की तुलना में अधिक घृणा की दृष्टि से देखा जाने लगा। परिणामस्वरूप ब्रिटिश औपনিবেশिक सरकार ब्रिटिश विरोधी आलिमों को वहाबी के रूप में प्रचारित करती थी, ताकि आम मुसलमानों के बीच उनकी स्वीकार्यता न रहे। इसके अलावा मुस्लिम समाज के विभिन्न धार्मिक समुदाय एक-दूसरे की निंदा करने के लिए 'वहाबी' शब्द का व्यापक उपयोग करते हैं। मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब के समकालीन भारतीय मुस्लिम सुधारक शाह वलीullah देहलवी (1703-1762 ई.) थे। अपने मत के प्रचार की शुरुआत में 1731 ईस्वी में वे मक्का गए और तीन वर्ष तक वहीं रहे। इसके बाद देश लौटकर उन्होंने भारत में इस्लामी शिक्षा के प्रसार में विशेष योगदान दिया। उन्होंने भी कब्र पूजा, पीर पूजा, कब्र पर मन्नतें मांगने, कब्रवासियों या जीवित पीरों या औलियाओं से आपदाओं से मुक्ति की सहायता मांगने और अन्य शिर्क, बिदअत, अंधविश्वास, मजहबी अतिवाद आदि की कड़ी आलोचना और विरोध किया। इसी कारण कुछ लोगों ने उन्हें 'वहाबी' के रूप में चिन्हित करने का प्रयास किया है। हालाँकि भारत के सबसे पहले और प्रसिद्ध 'वहाबी' नेता शाह वलीullah के पुत्र शाह अब्दुल अजीज (1346-1823 ई.) के प्रमुख छात्रों में से एक सैयद अहमद बरेलवी (1786-1831 ई.) थे। उन्होंने पूरे भारत में मजारों, दरगाहों, व्यक्ति पूजा, मृत मनुष्यों के नाम पर मन्नतें, शिन्नी आदि विभिन्न शिर्क, बिदअत और अंधविश्वासों के खिलाफ प्रचार किया। इसके अलावा उन्होंने ब्रिटिश आधिपत्य के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। 1821 ईस्वी में वे हज के लिए गए। लगभग तीन वर्ष तक वहाँ रहने के बाद वे भारत लौट आए। 1826 ईस्वी में उन्होंने ब्रिटिश भारत से 'हिजरत' करके उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत की यात्रा की और वहाँ 'इस्लामी राज्य' की स्थापना की घोषणा की तथा स्वयं उस राज्य के प्रमुख बन गए। इसके बाद उनके नेतृत्व में भारत के विभिन्न क्षेत्रों के मुसलमान वहाँ एकत्र हुए और अंग्रेजों तथा सिखों के खिलाफ जिहाद की घोषणा की। कुछ युद्धों के बाद 1831 में बालाकोट के युद्ध में उनकी सेना पराजित हो गई और वे शहीद हो गए। इसके बाद लगभग 30 वर्षों तक सैयद अहमद बरेलवी के अनुयायियों ने अंग्रेजों के खिलाफ विभिन्न प्रकार के छिटपुट जिहाद और प्रतिरोध जारी रखे। 1803-4 में 'वहाबी' लोगों ने मक्का-मदीना पर कब्जा कर लिया और वहाँ के प्राचीन मजार-केंद्रित गुंबदों को ध्वस्त कर दिया। इससे आम मुसलमानों में व्यापक असंतोष पैदा हुआ। शाह वलीullah मुहाद्दिस देहलवी के अनुयायी भी 'वहाबियों' की तरह ही शिर्क, कुफ्र, बिदअत, अंधविश्वास आदि का विरोध करते थे। इस तरह उनके विचारों में 'वहाबियों' के विचारों से बाहरी समानता थी। 1823 ईस्वी में सैयद अहमद बरेलवी हज के अवसर पर मक्का गए। अंग्रेजी शासकों ने बड़ी चालाकी से यह प्रचारित किया कि 'जो लोग स्वतंत्रता के नाम पर आपको आपके धर्म की बातें सुना रहे हैं, वास्तव में वे इस्लाम के शत्रु और पैगंबर तथा सहाबा का अपमान करने वाले लोग हैं, इनका नाम वहाबी है, और इन्होंने ही आपके प्यारे रसूल (सल्ल.) के वंशजों की कब्रों को नष्ट करने का दुस्साहस किया है... और सैयद अहमद को उनका एजेंट नियुक्त किया गया है और ये सभी वहाबी हैं इसलिए ये लोग भी आपके आदरणीय पीर-बुजुर्गों और पूर्वजों की कब्रों को तोड़ना चाहते हैं...' इस तरह ब्रिटिश सरकार ने यह समझाने का प्रयास किया कि वास्तविक इस्लाम के खिलाफ उनकी कोई शत्रुता नहीं है। वे वास्तविक इस्लाम और मुसलमानों से बहुत प्यार करते हैं। वे केवल भटके हुए वहाबी संप्रदाय के लोगों का दमन कर रहे हैं और उन्हें दंडित कर रहे हैं। इसलिए इसमें आम अच्छे मुसलमानों के लिए परेशान होने या दुख महसूस करने का कोई कारण नहीं है। सैयद अहमद बरेलवी के शिष्यों से भारत में विभिन्न सुधारवादी धाराओं का जन्म हुआ। उनके शिष्यों में से कई लोगों ने निर्धारित मजहब के अनुसरण से इनकार कर दिया और खुद को 'अहले हदीस' के रूप में दावा किया। उनके शिष्य जौनपुर के पीर मौलाना करामत अली ने एक सुधारवादी धारा को जन्म दिया। फुरफुरा के पीर मौलाना अबू बक्र सिद्दीकी भी सैयद अहमद बरेलवी के अनुयायी और उनके प्र-शिष्य थे। देवबंदी आलिमों ने भी उन्हीं के शिष्यों से शिक्षा प्राप्त की है। इन सभी को उनके विरोधियों और औपনিবেশिक सरकार ने 'वहाबी', 'रंगीन वहाबी' या 'बहुरुपिया वहाबी' की संज्ञा दी है। सैयद अहमद बरेलवी के प्रमुख शिष्यों और समकालीन सुधारक मीर निसार अली उर्फ तीतूमिर (1782-1831) और समकालीन अन्य सुधारक हाजी शरीयतुल्लाह (1781-1840) को भी वहाबी कहा गया है और उनके आंदोलन तथा प्रतिरोध को वहाबी आंदोलन कहा गया है। 'वहाबी' शब्द के प्रयोग को समझने के लिए मैं एक उदाहरण प्रस्तुत करता हूँ। मीर निसार अली उर्फ तीतूमिर का जन्म 1782 ईस्वी में बंगाल के 24 परगना जिले में हुआ था। 1823 में हज के दौरान मक्का में सैयद अहमद बरेलवी से उनकी मुलाकात हुई। वे उनके मुरीद बन गए। देश लौटने पर उन्होंने अपने क्षेत्र के लोगों के बीच शुद्ध इस्लामी शिक्षा का प्रचार किया। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ बात की, लेकिन कभी भी हिंदू धर्म, धर्मावलंबियों या हिंदू जमींदारों के खिलाफ कुछ नहीं कहा। लेकिन उनकी शिक्षाओं से आम मुसलमानों के बीच धर्म का पालन बढ़ जाने के कारण क्षेत्र के हिंदू जमींदार क्रोधित हो गए। उन्होंने आम मुस्लिम प्रजा को बताया कि वे वास्तविक इस्लाम से बहुत प्यार करते हैं, लेकिन वे वहाबी विचारधारा का दमन करना चाहते हैं। युगों-युगों से मुसलमानों ने हिंदुओं की तरह नाम रखे हैं, दाढ़ी काटी है, मूंछें रखी हैं, मस्जिदें बनाने की जल्दी नहीं की है और गोहत्या नहीं की है। तीतूमिर वहाबी विचारधारा के अनुसार दाढ़ी रखने, मूंछें छांटने, मुसलमानी नाम रखने, मुसलमानों के गाँवों में मस्जिदें बनाने और कुर्बानी के नाम पर गोहत्या करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इससे हिंदू-मुस्लिम सौहार्द नष्ट हो रहा है। इसलिए वहाबी विचारधारा का दमन करना अत्यंत आवश्यक है। इनके दमन के कारण "अच्छे" मुसलमानों के गुस्से में होने या कष्ट पाने का कोई कारण नहीं है। इस कारण तारागुनिया के जमींदार रामनारायण बाबू, पूँड़ा के जमींदार कृष्णदेव राय, नगरपुर के जमींदार गौड़प्रसाद चौधरी और अन्य प्रसिद्ध जमींदारों ने मिलकर 5 विषयों पर नोटिस जारी किया: "(1) जो लोग तीतूमिर की शिष्यता ग्रहण करके वहाबी बनेंगे, दाढ़ी रखेंगे, मूंछें छाँटेंगे, उनमें से प्रत्येक को प्रति दाढ़ी अढ़ाई रुपये और प्रति मूंछ पांच सिक्का लगान देना होगा। (2) मस्जिद तैयार करने पर प्रत्येक कच्ची मस्जिद के लिए पाँच सौ रुपये और प्रत्येक पक्की मस्जिद के लिए एक हजार रुपये जमींदार सरकार को नजराना देना होगा। (3) पिता-पितामह या रिश्तेदार-संबंधी बच्चे का जो नाम रखेंगे, उस नाम को बदलकर वहाबी मत के अनुसार अरबी नाम रखने पर प्रत्येक नाम के लिए खारिजানা फीस पचास रुपये जमींदार सरकार के पास जमा करनी होगी। (4) गोहत्या करने पर हत्यारे का दाहिना हाथ काट लिया जाएगा, ताकि वह व्यक्ति फिर कभी गोहत्या न कर सके। (5) जो व्यक्ति वहाबी तीतूमिर को अपने घर में आश्रय देगा, उसे उसकी ज़मीन से बेदखल कर दिया जाएगा।" वास्तव में, तुर्क खिलाफत और ब्रिटिश सरकार के व्यापक प्रचार के कारण "वास्तविक इस्लाम" और "वहाबी इस्लाम" का यह विभाजन पश्चिमी शोधकर्ताओं के लिए सार्वभौमिक रूप ले चुका है। दुनिया के किसी भी कोने में सुधार आंदोलन, स्वतंत्रता आंदोलन, इस्लामी समाज और राज्य व्यवस्था की स्थापना का प्रयास, उपनिवेश विरोधी, साम्राज्यवाद विरोधी या पश्चिमी विरोधी आंदोलन में धार्मिक मुसलमान, आलिम, धार्मिक व्यक्तित्व या पीर-मशाइख की संलिप्तता होने पर उसे "वहाबी" के रूप में चिन्हित करने का प्रयास किया जाता है। वहाबी इस्लाम और वास्तविक इस्लाम के इस विभाजन के मामले में कई पश्चिमी शोधकर्ता वास्तविक इस्लाम को "सूफी इस्लाम" के रूप में चिन्हित करते हैं। उनके अनुसार, सूफी इस्लाम सांप्रदायिकता से मुक्त, गैर-राजनीतिक और उदार है। प्रमाण के रूप में वे कहते हैं कि एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका के मुस्लिम और गैर-मुस्लिम समाजों के अनगिनत सूफी दरबारों में स्त्री-पुरुष का भेद किए बिना सभी धर्मों और वर्णों के लोग एकत्र हो रहे हैं, ज़िक्र, वज़ीफा, समा-कव्वाली और अन्य कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं और तबर्रुक तथा दुआ प्राप्त कर रहे हैं। इन सभी दरबारों में आत्मशुद्धि और आध्यात्मिकता की शिक्षा दी जाती है, राजनीति और राजकीय विषयों पर चर्चा नहीं की जाती है। हमारे देश और दुनिया के अन्य देशों की ओर देखने पर हम सूफी इस्लाम के दो चरण देख सकते हैं। हम देखते हैं कि कई मुसलमान तसव्वुफ और सूफीवाद के नाम पर पीर-मशाइख को अल्लाह का अवतार या विशेष "दिव्य" संबंध या शक्ति का स्वामी मानते हैं, उन्हें सजदा करते हैं, उनकी कब्र-मजारों या समाधियों को सजदा करते हैं, सलात, सियाम आदि शरिया के अहकाम (आदेशों) का पालन करने को महत्वहीन मानते हैं और गाना-बजाना तथा नृत्य-संगीत को सूफी इस्लाम का महत्वपूर्ण पहलू मानते हैं। ये लोग खुद को वास्तविक सूफी और वास्तविक सुन्नी होने का दावा करते हैं। जो लोग पीर को सजदा करने, कब्र को सजदा करने, गाना-बजाना, धूम्रपान आदि पर आपत्ति जताते हैं या शरिया के पालन की अनिवार्यता की बात करते हैं, उन्हें इस चरण के सूफी "वहाबी" और "औलिया के दुश्मन" के रूप में कड़ी निंदा करते हैं। कई लोग तंबाकू, गांजा आदि के सेवन या धूम्रपान को सुन्नी इस्लाम और सूफी इस्लाम की मौलिक पहचान मानते हैं और धूम्रपान के विरोधियों को वहाबी और औलिया का दुश्मन बताते हैं। अन्य कई मुसलमान पीर को सजदा करने, कब्र को सजदा करने, गाना-बजाना आदि कर्मों की कड़ी निंदा करते हैं, शरिया के पालन को सूफी इस्लाम का मुख्य विषय मानते हैं और शरिया के पालन के साथ-साथ पीर-मशाइख से तरीकत (आध्यात्मिक मार्ग) की शिक्षा प्राप्त करते हैं और उसका पालन करते हैं। पहले चरण के सूफियों और मारफती लोगों के मत के अनुसार ये वहाबी और सूफी इस्लाम के दुश्मन हैं। हालाँकि ये खुद को वास्तविक सूफी और सुन्नी होने का दावा करते हैं और पहले चरण के लोगों को भ्रमित मानते हैं। इस चरण के तसव्वुफ-पंथी लोगों के बीच विभिन्न विषयों पर मतभेद हैं। उर्स, ईसाले सवाब, मीलादुन्नबी, सीरतुन्नबी, ज़िक्र की पद्धति आदि विभिन्न विषयों पर इस चरण के सूफियों के बीच मतभेद हैं। इन सभी मतभेदों के आधार पर इस चरण के सूफियों का एक दल दूसरे दल को वहाबी, पैगंबर का दुश्मन या औलिया का दुश्मन बताकर निंदा करता है और खुद को वास्तविक सुन्नी और वास्तविक सूफी होने का दावा करता है, हालाँकि सभी पीर-मुरीदी और तसव्वुफ में विश्वास करते हैं और विभिन्न तौर-तरीकों का पालन करते हैं। पश्चिम के ईसाई स्वाभाविक रूप से पहले चरण के सूफी इस्लाम और उसके अनुयायियों से प्रेम करते हैं। क्योंकि उनकी "मानसिकता" से इनकी "मानसिकता" बहुत मिलती-जुलती है। यूरोप-अमेरिका और अन्य विभिन्न देशों में ऐसे सूफियों की मजलिस-दरबार और खानकाह-मजारों में वे आते हैं, गाना-बजाना और आध्यात्मिक चर्चाओं में भाग लेते हैं। ये सूफी भी उन्हें अत्यंत प्रेम के साथ स्वीकार करते हैं। स्वाभाविक रूप से पश्चिम के लोग दुनिया के सभी मुस्लिम देशों में ऐसे सूफी इस्लाम के प्रसार की कामना करते हैं। ऐसे सूफी इस्लाम का प्रसार ही सभी धर्मों और धर्महीन लोगों के बीच अनगिनत शांति और सह-अस्तित्व सुनिश्चित कर सकता है, ऐसा वे मानते हैं। "सभ्यता के संघर्ष" के नाम पर इस्लामी देशों में अपना प्रभुत्व जमाने के इच्छुक साम्राज्यवादी पहले तो धड़ल्ले से इस्लाम के खिलाफ खड़े हो जाते हैं। लेकिन वे देखते हैं कि इससे उनके खिलाफ प्रतिरोध बढ़ रहा है। तब वे मुसलमानों को विभिन्न तरीकों से विभाजित करके किसी को अपने पक्ष में और किसी को विपक्ष में करना चाहते हैं। इसके लिए सबसे पहले वे लिबरल (liberal) यानी उदार और फंडामेंटललिस्ट (fundamentalist) यानी कट्टरपंथी या रूढ़िवादी के रूप में विभाजन करने की कोशिश करते हैं। इस प्रकार का विभाजन मुस्लिम देशों में ज्यादा बाजार नहीं पा रहा है। इसलिए पिछले कुछ वर्षों से वे एक नया विभाजन बाजार में उतारने की कोशिश कर रहे हैं, और वह है सूफी इस्लाम बनाम वहाबी इस्लाम। मुस्लिम देशों में सूफियों के प्रभाव और "वहाबी" शब्द के प्रति मुसलमानों की घृणा की बात वे अच्छी तरह जानते हैं। जिस तरह ब्रिटिश सरकार और हिंदू जमींदारों ने सैयद अहमद, तीतूमिर, शरीयतुल्लाह और अन्य सभी धार्मिक सुधार और साम्राज्यवाद विरोधी आंदोलनों को "वहाबी" के रूप में चित्रित करके आम मुसलमानों के बीच घृणित बनाने के प्रयास में काफी सफलता हासिल की थी, उसी तरह वे अपने हितों के प्रतिकूल सभी इस्लामी गतिविधियों और व्यक्तित्वों को "वहाबी" के रूप में चित्रित करने का प्रयास कर रहे हैं। कम से कम सुन्नी-वहाबी या सूफी-वहाबी विवाद और संघर्ष को भड़काकर इस्लामी दावत, शिक्षा के प्रसार, अश्लील और मादक पदार्थों के विरोध या राज्य व्यवस्था में आलिमों और इस्लामपंथियों के उभार को निश्चित रूप से बाधित और कमजोर किया जा सकता है। वास्तव में वे सूफी इस्लाम से पहले चरण के सूफियों को समझ रहे हैं। क्योंकि दूसरे चरण के सूफियों के बीच शाह वलीullah, सैयद अहमद बरेलवी, तीतूमिर, हाजी शरीयतुल्लाह जैसे व्यक्तित्वों का उदय हो सकता है, जिनकी राजनीतिक शक्ति उनके हितों की रक्षा नहीं करती है। वे मानते हैं कि पहले चरण के सूफियों का उभार ही मुस्लिम मानसिकता से आतंकवाद की जड़ को उखाड़ फेंकने में सक्षम है और इस चरण का सूफी इस्लाम ही दुनिया के लोगों को आतंकवाद, कट्टरवाद और धार्मिक संघर्ष से बचाकर सभी धर्मों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को सुनिश्चित कर सकता है। इतना ही नहीं, इनकी स्थापना दुनिया के दो प्रमुख धर्मों—ईसाई धर्म और इस्लाम—को बेहद करीब ला सकती है। वास्तव में पहले चरण के सूफी और पश्चिमी नेतृत्व दूसरे चरण के सूफियों को "वास्तविक वहाबी" या "बहुरुपिया वहाबी" मानते हैं। वे यह भी जानते हैं कि इनके हाथों में उनके हित सुरक्षित नहीं हैं। हालाँकि मुस्लिम देशों में दूसरे चरण के सूफियों के प्रभाव से भी वे अवगत हैं। इसलिए वे "सूफी इस्लाम" के नाम पर पहले चरण के सूफियों के नेतृत्व में और उनके प्रभाव क्षेत्र के भीतर दोनों चरणों के सूफियों को एकजुट करके उन्हें "वहाबी" लोगों के खिलाफ मुखर होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वे समझा रहे हैं कि जो लोग इस्लामी समाज, राज्य, न्याय, अर्थव्यवस्था आदि की स्थापना की मांग कर रहे हैं, वे मूल रूप से औलिया की मजारों को तोड़ने वाले सऊदी वहाबियों के दलाल और उनके विचारों के अनुयायी हैं। यदि ये लोग सत्ता में आ गए तो ये भी पीर-मशाइख और कब्र-मजारों को नष्ट कर देंगे। इसलिए इनका मुकाबला करने के लिए एकजुट हो जाइए। यह निश्चित है कि आम मुसलमान, आलिम और पीर-मशाइख उनके ऐसे प्रचार से प्रभावित होंगे। इसके अलावा इस बहाने वहाबी-सुन्नी विवाद और संघर्ष को बढ़ावा देकर मुसलमानों को साम्राज्यवाद और आक्रमण के खिलाफ या इस्लामी मूल्यों के प्रचार के पक्ष में एकजुट होने से रोकना संभव होगा, ऐसा वे मानते हैं। वास्तव में जिस तरह "इस्लाम" नाम का व्यापक दुरुपयोग किया गया है और इस्लाम के नाम पर इस्लाम विरोधी कर्म किए गए हैं और किए जा रहे हैं, उसी तरह "सूफी" शब्द का भी व्यापक दुरुपयोग हुआ है। तसव्वुफ, सूफी, पीर, दरवेश और औलिया के नाम पर गैर-इस्लामी गतिविधियाँ भी बहुत हुई हैं। हालाँकि सर्वमान्य सूफी-दरवेशों के जीवन और कर्म की समीक्षा करने पर हम पाते हैं कि वे सभी समाज, राज्य और राजनीति के प्रति जागरूक थे और समाज परिवर्तन में उनकी भूमिका अपरिहार्य थी। लगभग सभी सूफी "तरीका" के मूल स्रोत के रूप में अबू बकर सिद्दीक (रजि.) और अली (रजि.) का उल्लेख किया गया है। जकात न देने वालों, धर्मत्यागियों, धार्मिक अनाचारों में लिप्त लोगों के खिलाफ युद्धों में वे मुस्लिम उम्मत के अग्रপথिक थे। हसन बसरी, इब्राहिम अधहम, जुनैद बगदादी, अब्दुल कादिर जिलानी, अबू हामिद गजाली, मुजद्दिद-ए अल्फिसानी, शाह वलीullah देहलवी, सैयद अहमद बरेलवी, इमदादुल्लाह मुहाजिर मक्की, करमत अली जौनपुरी, अबू बक्र सिद्दीकी फुरफुरावी (रहिमुहमুল্লাহ) और अन्य सभी सुप्रसिद्ध सूफी-साधकों ने आत्मशुद्धि और आध्यात्मिकता के साथ-साथ समाज, राज्य और राजनीति पर बात की है, शासकों के अन्याय का विरोध किया है, जेल यात्रा की है या शहादत प्राप्त की है। आधुनिक राजनीतिक गतिविधियों के साथ उनकी कार्यपद्धति का अंतर यह है कि वे सत्ता में जाने के बजाय शासकों को सुधारने का प्रयास करते थे। उन्होंने स्वयं राजनीतिक शक्ति प्राप्त करने का प्रयास नहीं किया, बल्कि शासकों को नसीहत दी, अन्याय का विरोध किया, न्याय के पक्ष को प्रोत्साहित किया, सहयोग किया, जनता को जागरूक किया, साम्राज्यवाद, औपনিবেশिक शासन और आधिपत्यवाद के खिलाफ राष्ट्रीय प्रतिरोध में शामिल हुए और इन सभी गतिविधियों में जिन व्यक्तियों या दलों को अपेक्षाकृत बेहतर माना, उन्हें समर्थन दिया या प्रोत्साहित किया। तथाकथित "आतंकवादी" गतिविधियों या उग्रवाद से उनकी कार्यपद्धति का अंतर यह है कि वे अन्याय का विरोध करते हैं लेकिन दंड देने या बल प्रयोग करने का प्रयास नहीं करते हैं। उन्होंने अन्याय का विरोध किया है, नसीहत दी है, शासकों और अन्य सभी को अन्य का दमन करने, विरोध करने और नियंत्रित करने के लिए प्रेरित किया है, लेकिन स्वयं अन्याय के दमन के नाम पर शक्ति का प्रयोग नहीं किया है, कानून की अवहेलना नहीं की है, कानून अपने हाथ में नहीं लिया है और कानून तोड़ने का कड़ा विरोध किया है। इस प्रकार हम देख रहे हैं कि वास्तविक सूफी कभी भी समाज-विमुख या राजनीति-विमुख नहीं थे। "सूफी इस्लाम" को समाज, राज्य और जगत-विमुख के रूप में चिन्हित करने और सभी सुधार आंदोलनों को "वहाबी" के रूप में चित्रित करने का कोई आधार नहीं है। तथाकथित 'इस्लामी आतंकवाद' या उग्रवाद के नेतृत्व में ओसामा बिन लादेन जैसे सऊदी मूल के व्यक्तित्व होने की बात सुनी जाती है। सऊदी अरब के विभिन्न व्यक्ति और संस्थाएँ इन्हें वित्तपोषित करने का दावा करते हैं। दुनिया के विभिन्न देशों में, विशेष रूप से उपमहाद्वीप में अहले हदीस और देवबंदी पद्धति के कौमी मदरसों में शिक्षित दो-चार व्यक्तियों के इसके साथ जुड़े होने की बात सुनी जाती है। इसके अलावा इनमें कब्र-मजार आदि का विरोध देखा जाता है। इन सबके ऊपर, वे अपने विचारों को स्थापित करने के लिए मौखिक प्रचार के अलावा हथियार भी उठा रहे हैं। इसलिए कई शोधकर्ताओं का मानना है कि वहाबी विचारधारा का प्रसार ही वर्तमान आतंकवाद के उभार का कारण है। हालाँकि यह ध्यान देने योग्य है कि ओसामा बिन लादेन के आंदोलन की शुरुआत सऊदी-वहाबी राज्य के विरोध के माध्यम से हुई थी। उनके अनुयायी वहाँ के राजतंत्र, अमेरिकी सैनिकों, अनाचार आदि का विरोध करते हैं और सऊदी राज्य तथा नागरिकों के खिलाफ विनाशकारी गतिविधियाँ जारी रखे हुए हैं। इसके अलावा मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब के वंशजों सहित सभी सऊदी आलिम बिन लादेन के आंदोलन और गतिविधियों के खिलाफ अत्यंत मुखर हैं। इन सबके ऊपर, विभिन्न देशों के सुधार या प्रतिरोध आंदोलनों को 'वहाबी' की संज्ञा देने का कोई आधार नहीं है। वास्तव में मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब और उनके आदर्श तुर्क खिलाफत के प्रचार और ब्रिटिश सरकार के अवसरवाद के कारण आवश्यकता से अधिक महत्व और प्रतिष्ठा प्राप्त कर चुके हैं। वहाबी विचारधारा और आंदोलन वास्तव में पूरी तरह से एक क्षेत्रीय विषय था। अन्य मुस्लिम देशों के सुधार-प्रतिरोध और धर्म-केंद्रित सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों की तरह ही अच्छे-बुरे का मिश्रण एक विषय था। अन्य देशों में मुसलमानों ने अपने परिवेश और आवश्यकता के अनुसार इसी प्रकार के आंदोलनों को विकसित किया है। चूंकि वहाबी और अन्य देशों के मुसलमान दोनों ही एक ही स्रोत यानी कुरआन, हदीस, इस्लामी फिक़्ह और इस्लामी इतिहास से अपने विचार एकत्र करते हैं, इसलिए उनके विचारों और कर्मों में समानता होना स्वाभाविक है। इसके लिए सारा श्रेय मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब को देने का कोई कारण नहीं है। अफगानिस्तान और इराक में बिन लादेन की विचारधारा का प्रसार हुआ है। और ये दोनों देश घोर वहाबी विरोधी हैं। अफगानिस्तान की बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी हनाफी मजहब की कट्टर अनुयायी, पीर-मशाइख की भक्त और वहाबियों की विरोधी है। इराक में सद्दाम हुसैन के लंबे शासनकाल में वहाबी या किसी भी अन्य सुधारवादी आलिम और विचारधारा को कड़ाई से समाप्त कर दिया गया है। केवल सूफियों के खिलाफ कोई कठोरता नहीं बरती गई। लेकिन इसके बावजूद इन दोनों देशों में आतंकवाद के प्रसार से यह समझा जा सकता है कि आतंकवाद का कारण कहीं और निहित है। हमने पहले ही देखा है कि आतंकवादियों की जाति, धर्म, गोत्र आदि को धड़ल्ले से "आतंकवाद" के कारण या संचालक शक्ति के रूप में चिन्हित करने की प्रवृत्ति सही नहीं है। इससे आतंकवाद को कुचलने का मार्ग बंद हो जाता है। क्योंकि किसी जाति, धर्म या गोत्र के सभी लोगों को धड़ल्ले से एक ही लाठी से नहीं हाँका जा सकता है। आतंकवाद की जिम्मेदारी "वहाबी विचारधारा" पर थोपने की बड़ी समस्या यह है कि इससे समस्या के समाधान का मार्ग खो जाएगा। क्योंकि सऊदी वहाबियों के साथ आतंकवाद का संबंध स्थापित करना कठिन है, क्योंकि आतंकवाद तो उन्हीं के खिलाफ संचालित किया जाता है। और किसी अन्य देश का कोई भी व्यक्ति स्वयं को वहाबी स्वीकार नहीं करता है, लेकिन लगभग सभी धार्मिक दल विरोधियों द्वारा "वहाबी" कहे जाते हैं। हर कोई यह दावा करता है कि वे सीधे कुरआन, हदीस, फिक़्ह और पूर्ववर्ती इमामों के मत के आधार पर अपने विचार और दल का गठन करते हैं; वे मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब के किसी निजी मत को नहीं मानते हैं। यहाँ तक कि सऊदी अरब के आलिम भी कभी स्वयं को वहाबी स्वीकार नहीं करते हैं। वे मुहम्मद इब्न अब्दुल वहाब को एक सुधारक के रूप में मानते हैं और उनके सभी विचारों को कुरआन, सुन्नत और पूर्ववर्ती इमामों से गृहीत होने का दावा और प्रमाण देते हैं।<ref>http://www.hadithbd.com/books/link/?id=6889</ref>}}
नुरुल इस्लाम अपने प्रश्नोत्तर में 'रमजान और ईद' पुस्तक में कहते हैं:
{{quote|(ईमान को भंग करने वाले कृत्यों में से एक है...) धर्म को राजकीय मामलों से अलग करना। और यह कहना कि इस्लाम में राजनीति नहीं है। ऐसी अवधारणा और टिप्पणी भी पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जीवन आदर्श को झुठलाती है।<ref>http://www.hadithbd.com/books/link/?id=2432</ref>}}
मंजूर इलाही अपनी पुस्तक 'समाज सुधार में सही अकीदे का महत्व' में "समाज सुधार की आवश्यकता और उस संदर्भ में सही इस्लामी [[अकीदा]] की भूमिका और महत्व" के बारे में कहते हैं:<ref>{{cite book |last1=इलाही |first1=मोहम्मद मंजूरे |editor1-last=जकारिया |editor1-first=अबू बकर मुहम्मद |title=সমাজ সংস্কারে সঠিক আকীদার গুরুত্ব, |publisher=Islamic Propagation Office in Rabwah |location=रियाद, सऊदी अरब |pages=19–28 |url=https://d1.islamhouse.com/data/bn/ih_articles/single3/bn_somaj_songoskare_sothik_aqidar_gurutto.pdf |access-date=23 November 2022 |language=bn}}</ref>
{{quote|मनुष्य अपने व्यक्तिगत जीवन की सभी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ही समाज में मिल-जुलकर रहता है। किसी भी समाज के गठन का मुख्य उद्देश्य उस समाज के सभी सदस्यों का सर्वांगीण कल्याण और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व सुनिश्चित करना है। लेकिन व्यक्तिगत जीवन की अशिक्षा, कुशिक्षा और स्वार्थपरता सामाजिक जीवन पर एक बड़ा नकारात्मक प्रभाव डालती है और समाज को भ्रष्टाचार, भेदभाव, विभाजन, संघर्ष आदि व्याधियों से कलंकित और विषैला बना देती है। तभी समाज सुधार की भारी आवश्यकता महसूस होती है, जैसा कि हम अपने वर्तमान सामाजिक परिप्रेक्ष्य में महसूस कर रहे हैं। समाज की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करने पर हम देखते हैं कि समस्याओं से घिरे, भ्रष्ट और दीमक लगे इस समाज के लोगों के बीच सही अकीदे का ज्ञान न के बराबर है। इसका अनिवार्य परिणाम यह है कि अकीदे में अनैतिकता और प्रवृत्तियों की इच्छा के अनुसार जिसकी जैसी इच्छा हो वैसा अकीदा अपनाना, चाहे कुरआन-सुन्नत के आधार पर उसकी प्रामाणिकता हो या न हो। दूसरी ओर मनुष्य का ईमान अत्यंत कमजोर हो गया है, दिल से तकवा (ईश्वर का डर) विदा हो चुका है, परलोक की सजा को वह भूल बैठा है। परिणामस्वरूप समाज में बेचैनी, अस्थिरता, लूट-खसोट की प्रवृत्ति, विभिन्न प्रकार के आतंकवाद और अपसंस्कृति का विस्तार आदि और भी कई समस्याएँ पैदा हो गई हैं। रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सीरत में हम देखते हैं कि उन्होंने तत्कालीन जाहिल समाज को बदलकर उसे उस समय का सर्वश्रेष्ठ समाज बना दिया था। व्यक्ति और समाज जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का जो आंदोलन उन्होंने नबूवत मिलने के बाद से शुरू किया था, उसकी प्रारंभिक प्रक्रिया अकीदे का सुधार थी। इस संबंध में सैयद कुतुब अपनी पुस्तक مقومات التصور الإسلامي (इस्लामी दृष्टिकोण के तत्व) में कहते हैं:
"मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ऐसे समय में भेजे गए थे जब जज़ीरतुल अरब उत्तर में रोमन और दक्षिण में फारसियों के बीच लूटे गए धन की तरह बंटा हुआ था। उन्होंने जज़ीरतुल अरब की उपजाऊ भूमि, समुद्र तट, धन और व्यापार के सभी स्रोतों की ओर अपने हाथ फैला रखे थे। मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ऐसे समय में भेजे गए थे जब मौजूदा सामाजिक और आर्थिक स्थिति बड़े पैमाने पर दासता के युग का प्रतिनिधित्व करती थी। मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ऐसे समय में भेजे गए थे जब शराब, व्यभिचार, जुआ, खेल-तमाशे, बुराई और अशांति फैलाने में मानव चरित्र जाहिलियत की राह पर चल रहा था। इनमें से किसी भी चीज़ से महान पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सुधार कार्य शुरू नहीं किया। जज़ीरतुल अरब की उपजाऊ भूमि से रोमन और फारसियों को भगाने के लिए वह अरबों को राष्ट्रवादी एकता की ओर आमंत्रित करने में सक्षम थे। युद्ध की सारी शक्ति वह उनके खिलाफ लगा सकते थे और राष्ट्रीय शत्रुओं के प्रति वह अरबों को भड़का सकते थे। परिणामस्वरूप वे उनके नेतृत्व के प्रति वफादार हो जाते और अपनी सारी ईर्ष्या-द्वेष भूल जाते...। लेकिन अल्लाह जानता था, उसने अपने पैगंबर को बताया था और निर्देश दिया था कि यह सही रास्ता नहीं है और यह मुख्य कार्य नहीं है। मुख्य कार्य यह है कि मनुष्य अपने सच्चे रब को पहचाने और केवल उसी की दासता स्वीकार करे, और उसके बंदों की दासता से मुक्त हो और अंत में अल्लाह की ओर से जो कुछ भी उनके पास आए, उस सबका पूरी तरह से पालन करे..."
...ध्यान देने योग्य बात है कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने नबूवत के बाद मक्की जीवन के 13 वर्षों में अकीदे से संबंधित ज्ञान के प्रचार को सबसे अधिक महत्व दिया था। केवल पैगंबर साहब ने ही नहीं, बल्कि सभी नबियों और पैगंबरों का पहला काम समाज के सभी स्तरों के लोगों को सही अकीदे की ओर आमंत्रित करना था। अल-कुरआन की भाषा में उनका वह आह्वान था: "हे मेरी जाति, तुम अल्लाह की इबादत करो। उसके सिवा तुम्हारा कोई सच्चा इलाह नहीं है।" [अल-आराफ: 58] इसका कारण केवल एक था—अकीदा शुद्ध न हो तो व्यक्तिगत जीवन शुद्ध नहीं होता, और व्यक्ति शुद्ध न हो तो समाज भी शुद्ध नहीं होता।
...(1) वृहद राष्ट्रीय एकता स्थापित करने में सही अकीदे की भूमिका: सही अकीदे पर सहमत हुए बिना वृहद एकता स्थापित करना जितना संभव नहीं है, उतना ही पूरी दुनिया की मुस्लिम उम्मत के लिए भी एकजुट होना दूर की कौड़ी है। इस संदर्भ में (डॉ.) उमर सुलेमान अल-अश्कर कहते हैं: "जब तक एक ही अकीदा मुसलमानों को एकजुट नहीं करेगा, तब तक मुस्लिम एकता का साकार होना संभव नहीं है।" वास्तव में अकीदे का भ्रम ही समाज में अनैक्यता के बीज बोता है। समाज विभिन्न दलों और उपदलों में विभाजित हो जाता है। यदि यह प्रश्न उठे कि हर कोई अपने-अपने अकीदे और विश्वास को सही मानता है, तो ऐसी स्थिति में किसी विशिष्ट अकीदे को सही मानकर एक होना संभव नहीं होगा। क्योंकि हर दल अपने मत के प्रति आश्वस्त होता है। इस प्रश्न के उत्तर में (डॉ.) उमर सुलेमान अल-अश्कर कहते हैं: "शुद्ध इस्लामी अकीदे के संबंध में कुरआन और सुन्नत में स्पष्ट बयान मौजूद हैं। इस अकीदे के प्रत्येक मौलिक और सूक्ष्म विषय पर प्रमाण प्रस्तुत करना संभव है। और सलाफ-ए-सालेheen सत्य इस्लामी अकीदे पर ही प्रतिष्ठित थे। उन्होंने इस अकीदे को इतनी अच्छी तरह से लिपिबद्ध किया है कि वह फिरकापरस्त और भ्रमित लोगों के अकीदे से पूरी तरह अलग है। इन महान व्यक्तित्वों में अल्लामा तहवी शामिल हैं, जिन्होंने एक अकीदा ग्रंथ लिखा है जो उनके अपने नाम से प्रसिद्ध है। इस ग्रंथ की व्याख्या मुहम्मद इब्न अबिल इज़ अल-हनाफी ने लिखी है। बात यहीं नहीं रुकी, बल्कि सहिह अकीदे पर कई आलिमों ने इससे पहले और बाद में लिखा है। उनमें इमाम अहमद, इब्न तैमिया, शौकानी और सफारिनी आदि प्रमुख हैं।"
(2) भ्रष्टाचार, डकैती, ज़ुल्म-उत्पीड़न मुक्त सुसभ्य समाज के गठन में सही अकीदा एक ऐसी मजबूत नींव तैयार करता है, जिसके आधार पर समाज के सभी कार्य और आपसी लेन-देन संचालित होते हैं। अतः अकीदा यदि विकृत, भ्रमित और झूठ पर आधारित हो, तो सामाजिक जीवन संकटग्रस्त, अस्त-व्यस्त और विनाश के कगार पर पहुँच जाएगा। आज हमारा समाज जिस स्थिति में आ खड़ा हुआ है, उसका कारण मुख्य रूप से यही है। इसलिए समाज को विकृति, तबाही और विनाश से बचाने के लिए हमें सही अकीदे की ओर ही लौटना होगा।
(3) समाज में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व सुनिश्चित करने के मामले में सही अकीदे का महत्व: एक मुस्लिम व्यक्ति के अकीदे का एक अनिवार्य हिस्सा यह है कि वह अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के आदेश के अनुसार जीवन चलाना अनिवार्य मानता है और उनके आदेश की अवज्ञा करना अवैध मानता है। अल्लाह का इरशाद है: "और अल्लाह और उसके रसूल जब कोई फैसला कर दें, तो किसी मोमिन पुरुष या मोमिन स्त्री को अपने मामले में कोई अधिकार नहीं रहता।" [अल-अहजाब: 36]
समाज में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अल्लाह तआला जब मुसलमानों को आपस में भाई कहता है, किसी व्यक्ति की जान और माल पर हमला करने को गंभीर अपराध बताता है, अनुबंधित सभी गैर-मुसलमानों के साथ किए गए समझौते का पालन करने का आदेश देता है, तो वह बिना किसी हिचकिचाहट के उस आदेश को मान लेता है, क्योंकि इस तरह मानना उसके अकीदे का ही हिस्सा है। अल्लाह का इरशाद है: "अतः तुम्हारे रब की कसम, वे मोमिन नहीं हो सकते जब तक कि वे अपने बीच के आपसी विवादों में तुम्हें फैसला करने वाला न मान लें, फिर जो फैसला तुम करो, उससे अपने दिलों में कोई तंगी न महसूस करें और उसे पूरी तरह से स्वीकार कर लें।" [अन-निसा: 65]
(4) राजनीतिक स्थिरता लाने में सही अकीदे का महत्व: इस्लामी अकीदे का एक अनिवार्य मौलिक विषय यह है कि इस बात पर दृढ़ विश्वास रखा जाए कि अल्लाह जिस तरह इस ब्रह्मांड का रचयिता है, उसी तरह वह इसके शासन-अधिकार और आदेश का भी मालिक है। अल्लाह का इरशाद है: "जान लो, सृजन और आदेश उसी का है।" [अल-आराफ: 54]
"कह दो, निश्चित रूप से सभी मामले अल्लाह के हैं।" [आले इमरान: 154]
"शासन तो केवल अल्लाह का ही है।" [अल-अनआम: 57]
इसके अलावा अल्लाह ही सभी संप्रभुता का मालिक और एकमात्र कानून निर्माता तथा विधानदाता है। यह उसे रब के रूप में मानने का ही एक मुख्य अर्थ है। हमारे समाज में राजनीतिक स्थिरता तभी लौट सकती है जब राजनीतिक नेतृत्व का इस अकीदे पर दृढ़ विश्वास हो। मूल रूप से मानव रचित कानूनों से किसी भी मुस्लिम समाज में शांति, अनुशासन और स्थिरता नहीं आ सकती। शायद वास्तविकता ही इसका सबसे बड़ा प्रमाण और साक्षी है।
(5) अपसंस्कृति को रोकने में सही अकीदे का महत्व: विदेशी और भिन्न धर्मों के अंधानुकरण में हमारे बांग्लादेशी समाज में संस्कृति के नाम पर वर्तमान में जिन चीज़ों का अभ्यास किया जा रहा है, उन्हें अपसंस्कृति कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। क्योंकि ये संस्कृतियाँ न तो हमारी स्वदेशी सोच-विचार और परंपरा का प्रतिनिधित्व करती हैं, और न ही वे मुस्लिम अकीदे के अनुकूल हैं। यह याद रखना चाहिए कि हमारा यह देश एक मुस्लिम बहुल देश है। इसलिए यदि हम अपने सभी सांस्कृतिक और सामाजिक अनुष्ठानों को सही इस्लामी अकीदे के आलोक में व्यवस्थित करें, तो देश को एक सुंदर, शालीन और स्वस्थ संस्कृति मिल सकती है।
(6) चिंतन के क्षेत्र में अराजकता और भ्रम तथा शिर्क और बिदअत से समाज को मुक्त करने के मामले में सही अकीदे का महत्व: सही इस्लामी अकीदे का ज्ञान ही समाज के बुद्धिजीवी वर्ग की वैचारिक दुनिया को आलोकित कर सकता है जिससे वे राष्ट्र को सत्य मार्ग की दिशा दे सकें। आज एक श्रेणी के बुद्धिजीवियों के चिंतन के क्षेत्र में जो अराजकता और भ्रम हम देख रहे हैं, मुस्लिम नामधारी होने के बावजूद इस्लाम के खिलाफ वे जो वैचारिक युद्ध चला रहे हैं, उसका सबसे बड़ा कारण शायद यह है कि उन्होंने इस्लाम को विकृत रूप में जाना है, उन्हें सही इस्लामी अकीदे को प्राप्त करने का सौभाग्य नहीं मिला है। यही बात उन सभी शिक्षित और अशिक्षित मुसलमानों पर भी लागू होती है जो इसे इबादत समझकर शिर्क और बिदअत में डूबे हुए हैं। कुरआन और सुन्नत के आलोक में उन्होंने शिर्क और बिदअत को नहीं पहचाना है। शिर्क और बिदअत को पहचानने के जो मूल सिद्धांत हैं, वे उनसे पूरी तरह अनजान हैं। सही अकीदे के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ अकीदे का ज्ञान प्राप्त करना ही समाज के सभी लोगों को इन भ्रमों और शिर्क तथा बिदअत से मुक्त करने की गारंटी दे सकता है।
अतः सहिह इस्लामी अकीदे का ज्ञान प्राप्त करना ही अल्लाह का सच्चा मोमिन और मुस्लिम बंदा बनकर खुद को विकसित करने का एकमात्र मार्ग है। इसी प्रकार किसी समाज को एक पूर्ण इस्लामी समाज के रूप में विकसित करना हो, तो समाज के सभी लोगों को सहिह अकीदे के ज्ञान से समृद्ध करने का कोई विकल्प नहीं है। इस मामले में सामाजिक और सांस्कृतिक इस्लामी संगठनों को बड़ी जिम्मेदारी निभानी होगी। जो लोग इस्लामी शरिया और स्टडीज में कुशल हैं, वे सहिह अकीदा विषय पर प्रामाणिक ग्रंथ लिखकर बांग्ला भाषा में लिखित पुस्तकों की जो कमी है, उसे दूर कर सकते हैं। इस मामले में मस्जिदों के इमामों, खतीबों और मदरसों के शिक्षकों की मदद भी ली जा सकती है। हालाँकि उससे पहले उन्हें सहिह अकीदे के ज्ञान से समृद्ध होना होगा। सहिह अकीदे के प्रसार के प्रयासों के माध्यम से इस प्रकार हमारा समाज शिर्क और बिदअत से मुक्त एक सुंदर सुसभ्य समाज के रूप में विकसित हो सकता है।}}
मुश्ताक अहमद करीमी इस्लाम की दृष्टि से बैंक के ब्याज के साथ राजनीति के संबंध के बारे में कहते हैं:
{{quote|बैंक और इसी तरह की कोई भी संस्था केवल धन-पूजा, व्यापार के क्षेत्र में एकाधिकार, सुविधाओं का उपभोग और धन का शोषण करने के इरादे से स्थापित की गई है। इन संस्थाओं का उद्देश्य यह होता है कि ब्याज का प्रलोभन देकर जनता और राष्ट्र का धन जितना अधिक हो सके, अपने कब्जे में लाया जाए और इस पद्धति से बड़ी चालाकी से पूरी जाति पर अपनी सत्ता और शासन चलाया जाए। जहाँ चाहे अकाल लाया जा सकता है और जहाँ चाहे भुखमरी पैदा करके तबाही लाई जा सकती है। जहाँ चाहे अपनी पसंद का शासन और राजनीति लागू की जा सकती है। जब चाहे मुद्रास्फीति पैदा करना संभव है और जब चाहे मुद्रा के मूल्य को बढ़ाकर बाजार में बड़े पैमाने पर मंदी फैलाई जा सकती है। जिसे चाहे गद्दी से उतारना और जिसे चाहे गद्दी पर बिठाना आसान होगा।<ref>http://www.hadithbd.com/books/link/?id=4556</ref>}}
फहद बिन सालेह अल अजलान अपनी पुस्तक 'मुहर्रर फी सियासातुल शरिया' में कहते हैं कि इस्लामी राजनीति में भाग लेने का विधान यह है कि व्यक्ति अपने व्यक्तिगत ईमान को दुरुस्त रखने के बाद यदि अतिरिक्त रूप से अपनी क्षमता के अनुसार राजनीतिक सुधार की क्षमता रखता है, तो ऐसे मामले में इसे प्रोत्साहित किया गया है, अन्यथा इसमें भाग लेना हराम माना जाएगा। और ऐसे मामलों में सुधार करना चाहिए जो पहले से मौजूद हैं, जिसमें सुधार और मसलेहत (कल्याण) की गुंजाइश है, लेकिन मसलेहत के नाम पर कोई नया हराम या बिदअत नहीं बनाई जानी चाहिए; और ऐसे विषयों में भाग नहीं लिया जाना चाहिए जो पूरी तरह से हराम हैं, जैसे ब्याज, नशीले पदार्थों का उत्पादन आदि।<ref name=fa>{{cite book |last1=العجلان |first1=فهد صالح |title=المحرر في السياسة الشرعية |date=1 June 2022 |publisher=آفاق المعرفة للنشر |url=https://books.google.com.bd/books/about/%D8%A7%D9%84%D9%B-%D9%85%D8%AD%D8%B1%D8%B1_%D9%81%D9%8A_%D8%A7%D9%84%D8%B3%D9%8A%D8%A7%D8%B3%D8%A9_%D8%A7%D9%84%D8%B4.html?id=_vt7EAAAQBAJ&redir_esc=y |access-date=13 September 2025 |language=ar}}</ref>
कुरआन और हदीस में स्पष्ट समाधान न मिलने वाले ([[मसलेहत]]) ऐसे इस्लामी राजनीतिक निर्णय लेने के लिए [[इस्तिखारा]] करने की सलाह दी गई है।<ref>{{cite web |title=حكم الاستخارة في مسائل شرعية لا يُدرَى وجه الصواب فيها |url=https://www.islamweb.net/ar/fatwa/239518/%D8%AD%D9%83%D9%85-%D8%A7%D9%B-%D8%A7%D9%84%D8%A7%D8%B3%D8%AA%D8%ခာرة-%D9%81%D9%8A-%D9%85%D8%ဘাসائِل-%D8%b4%D8%b1%D8%b9%D9%8a%D8%a9-%D9%84%D8%a7-%D9%8a%D9%8f%D8%af%D8%b1%D9%8e%D9%89-%D9%88%D8%ac%D9%B-%D8%a7%D9%84%ပိတ္ဆေား-%D9%81%D9%8a%D9%87%D8%a7 |website=www.islamweb.net |access-date=3 August 2025 |language=ar}}</ref> [[ताहिर इब्न हुसैन]] ने अपने बेटे [[अब्दुल्लाह इब्न ताहिर अल-खुरासानी|अब्दुल्लाह इब्न ताहिर]] को [[दियारे रबीआ]] का गवर्नर बनने पर सलाह दी थी:
{{Quote|जब भी तुम्हारे सामने कोई महत्वपूर्ण विषय आए, तो अल्लाह से इस्तिखारा करो और उससे डरकर सहायता की प्रार्थना करो... और अपने सभी मामलों में प्रचुर मात्रा में इस्तिखारा करो।<ref>{{cite book |last1=Ansa |first1=Muhammad |title=Istikhara - In The Light Of The Sunnah |date=1 January 2014 |publisher=Turath Publishing |isbn=978-1-906949-27-3 |url=https://books.google.com/books?id=uxCsEAAAQBAJ |access-date=8 August 2025 |language=en}}</ref><ref>{{cite web |title=كتاب : تاريخ الرسل والملوك 29 |url=https://www.islamicbook.ws/tarekh/tarikh-alrsl-029.html |website=www.islamicbook.ws |access-date=8 August 2025}}</ref>}}
=== शासक और शासित के एक-दूसरे के प्रति दायित्व और कर्तव्य ===
;नेतृत्व के पद पर नियुक्त व्यक्ति के कर्तव्य
शासक पर जो सभी दायित्व निभाना अनिवार्य है, उनका उल्लेख करते हुए इमाम मावर्दी ने उन्हें दस मौलिक दायित्वों में सीमित किया है। जैसे:
उम्मत के सलाफ यानी पूर्ववर्ती इमामों द्वारा धर्म के जिन मूल सिद्धांतों पर सहमति व्यक्त की गई है, उनकी रक्षा करके धर्म की रक्षा करना।
मतभेद और संघर्ष में लिप्त पक्षों के बीच सुलह कराना और निर्णय देना।
आक्रमण से सुरक्षा प्रदान करके जनसुरक्षा सुनिश्चित करना।
शरिया के दंड (हद्द) को लागू करना।
सीमाओं पर पहरेदारी को मजबूत करना।
दावत देने के बाद भी जो लोग इस्लाम स्वीकार करने से इनकार करें, उनके खिलाफ जिहाद करना।
फ़ैय और सदक़ा एकत्र करना।
बैतुल माल से भत्ते की राशि निर्धारित करना।
विश्वस्त और कल्याण चाहने वाले व्यक्तियों को पदों पर नियुक्त करना।
अपनी देखरेख में सब कुछ संचालित करना और प्रजा की देखभाल करना।
;नेतृत्व के पद पर नियुक्त व्यक्ति के अधिकार
प्रजा पर शासक के कुछ अधिकार हैं। उनमें से सबसे महत्वपूर्ण निम्नलिखित हैं:
अच्छे कार्यों में शासक की आज्ञाकारिता।
शासक के लिए दुआ।
शासक के प्रति नसीहत या हितैषी होना।
शासक को अच्छे कार्यों में सहायता प्रदान करना।<ref>{{cite book |last1=अल अजलान |first1=फहद इब्न सालेह |last2=मजूमदार |first2=अब्दुल्लाह |last3=जकारिया |last3=अबू बकर मुहम्मद |title=শারঈ রাজনীতি |date=September 2025 |publisher=বিলিভার্স ভিশন |location=ঢাকা |pages=306, 307 |edition=1st |access-date=23 February 2026}}</ref>
== इतिहास ==
=== प्रारंभिक इतिहास ===
{{मुख्य|इस्लाम का प्रारंभिक इतिहास|प्रारंभिक मुस्लिम विजय|कुरान का इतिहास|मुहम्मद का इतिहास}}
राजनीतिक आंदोलन के रूप में इस्लाम की उत्पत्ति [[इस्लामी पैगंबर]] [[मुहम्मद]] और उनके उत्तराधिकारियों के जीवन और काल में हुई थी। 622 ईस्वी में, पैगंबर होने के उनके दावे को मान्यता देते हुए, मुहम्मद को [[मदीना]] शहर पर शासन करने के लिए आमंत्रित किया गया था। उस समय, इस शहर पर स्थानीय अरब जनजातियों [[बनू औस|औस]] और [[बनू खज़रज|खज़रज]] का वर्चस्व था, जो निरंतर संघर्ष में फंसे हुए थे। मदीना के निवासियों ने मुहम्मद में एक ऐसे निष्पक्ष बाहरी व्यक्ति को देखा जो संघर्ष को हल कर सकता था। इस प्रकार मुहम्मद और उनके अनुयायी मदीना चले गए, जहाँ मुहम्मद ने [[मदीना का संविधान]] तैयार किया। इस दस्तावेज़ ने [[मुहम्मद]] को शासक बनाया और उन्हें [[अल्लाह]] के पैगंबर के रूप में मान्यता दी। अपने शासनकाल के दौरान, मुहम्मद ने [[कुरान]] और अपने स्वयं के कार्यों के आधार पर कानून स्थापित किए, जिन्हें मुसलमान ''[[शरिया]]'' या इस्लामी कानून मानते हैं, और जिसे आज के इस्लामी आंदोलन स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। मुहम्मद ने व्यापक अनुयायी और सेना प्राप्त की, और कूटनीति तथा सैन्य विजय के संयोजन के माध्यम से, उनका शासन [[इस्लाम का प्रसार|फैला]], पहले [[मक्का]] शहर में और फिर पूरे [[अरब प्रायद्वीप]] में।
आज, मुस्लिम बहुतायत वाले लगभग हर लोकतांत्रिक राज्य में कई बहुसंख्यक [[इस्लामवाद|इस्लामी]] या [[इस्लामी लोकतांत्रिक राजनीतिक दलों की सूची|इस्लामी लोकतांत्रिक दल]] मौजूद हैं। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कई [[जिहादी इस्लामी समूह]] भी सक्रिय हैं। इसके अलावा, कुछ [[गैर-मुसलमान|गैर-मुस्लिम]] व्यक्तियों और संस्थानों ने कुछ उग्रवादी इस्लामी समूहों के राजनीतिक और धार्मिक दर्शन का वर्णन करने के लिए "इस्लामी कट्टरपंथ" (Islamic fundamentalism) विवादास्पद शब्द गढ़ा है। ये दोनों शब्द ([[इस्लामी लोकतंत्र]] और [[इस्लामी कट्टरपंथ]]) अलग-अलग इतिहास, विचारधाराओं और दृष्टिकोणों के साथ अलग-अलग गुटों और उप-गुटों के एक विशाल समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं।
==== मदीना का इस्लामी राज्य ====
{{See also|इस्लामी राजनीतिक ढांचा}}
इस्लामी पैगंबर मुहम्मद ने मदीना का संविधान तैयार किया था। इसने मुहम्मद और याथ्रिब (बाद में मदीना के रूप में जाना गया) के सभी महत्वपूर्ण जनजातियों और परिवारों के बीच एक औपचारिक समझौते को संहिताबद्ध किया, जिसमें मुस्लिम, यहूदी, ईसाई<ref>R. B. Serjeant, "Sunnah Jāmi'ah, pacts with the Yathrib Jews, and the Tahrīm of Yathrib: analysis and translation of the documents comprised in the so-called 'Constitution of Medina'", ''Bulletin of the School of Oriental and African Studies'' (1978), 41: 1-42, [[कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस]].</ref> और मूर्तिपूजक शामिल थे।<ref>देखें:
* Reuven Firestone, ''Jihād: the origin of holy war in Islam'' (1999) p. 118;
* "Muhammad", ''Encyclopedia of Islam Online''</ref><ref>Watt, William Montgomery. ''Muhammad at Medina''</ref><ref>R. B. Serjeant. "The Constitution of Medina." ''Islamic Quarterly'' 8 (1964) p.4.</ref> इस संविधान ने पहले इस्लामी राज्य का आधार बनाया। यह दस्तावेज़ मदीना की औस और खज़रज जनजातियों के बीच कड़वे अंतर-जनजातीय संघर्ष को एक आशाजनक अंत लाने के एक खुले प्रयास में लिखा गया था। मदीना के मुस्लिम, यहूदी, ईसाई और मूर्तिपूजक समुदायों के अधिकारों और कर्तव्यों की रूपरेखा तैयार करके, इसने उन्हें [[उम्माh|उम्मा]] के रूप में जाने जाने वाले एक एकल समुदाय के तहत लाया।<ref>Serjeant (1978), पृष्ठ 4.</ref>
यद्यपि मदीना के संविधान की रचना की सटीक तिथि विवादास्पद बनी हुई है, विद्वान आमतौर पर इस बात से सहमत हैं कि इसे हिजरत (622) के तुरंत बाद लिखा गया था।
{{#tag:ref|डब्ल्यू. एम. वाट का तर्क है कि प्रारंभिक समझौता हिजरत के तुरंत बाद हुआ था और दस्तावेज़ को बाद की तारीख में संशोधित किया गया था, विशेष रूप से बद्र की लड़ाई (एएच [एनो हिगेरिया] 2, = 624 ईस्वी) के बाद।<ref>Watt, William Montgomery. ''Muhammad at Medina''. pp. 227-228</ref>|group=Note}}
{{#tag:ref|आर. बी. सर्जेंट का तर्क है कि संविधान वास्तव में आठ अलग-अलग संधियाँ हैं जिन्हें मदीना में हुई घटनाओं के अनुसार दिनांकित किया जा सकता है, जिसमें पहली संधि मुहम्मद के आगमन के तुरंत बाद लिखी गई थी। <ref>R. B. Serjeant. "The Sunnah Jāmi'ah, Pacts with the Yathrib Jews, and the Tahrīm of Yathrib: Analysis and Translation of the Documents Comprised in the So-Called 'Constitution of Medina'." ''The Life of Muhammad: The Formation of the Classical Islamic World'': Vol. IV. Ed. Uri Rubin. Brookfield: Ashgate, 1998, p. 151</ref> <ref>देखें वही लेख ''Bulletin of the School of Oriental and African Studies'' 41 (1978): 18 ff. यह भी देखें Caetani. ''Annali dell'Islam, Vol. I''. Milano: Hoepli, 1905, p. 393.</ref> |group=Note}}
{{#tag:ref|जूलियस वेलहाउसन का तर्क है कि दस्तावेज़ एक एकल संधि है जिस पर हिजरत के तुरंत बाद सहमति व्यक्त की गई थी, और यह 2/624 में बद्र की लड़ाई से पहले मदीना में मुहम्मद के निवास के पहले वर्ष से संबंधित है। वेलहाउसन इस निर्णय को तीन विचारों पर आधारित करते हैं: पहला, मुहम्मद अपनी स्थिति के संबंध में बहुत अलग हैं, वह उम्मा के भीतर मूर्तिपूजक जनजातियों को स्वीकार करते हैं, और यहूदी समूहों को अंसार के ग्राहकों के रूप में बनाए रखते हैं।|group=Note}}
{{#tag:ref|मोशे गिल, जो इस्लामी इतिहास के संशयवादी हैं, का तर्क है कि इसे मदीना में मुहम्मद के आगमन के पाँच महीनों के भीतर लिखा गया था।<ref>Moshe Gil. "The Constitution of Medina: A Reconsideration." ''Israel Oriental Studies'' 4 (1974): p. 45.</ref>|group=Note}}
इसने प्रभावी रूप से पहले इस्लामी राज्य की स्थापना की। संविधान ने स्थापित किया: समुदाय की सुरक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता, [[हरम]] या पवित्र स्थान के रूप में मदीना की भूमिका (सभी प्रकार की हिंसा और हथियारों पर प्रतिबंध), महिलाओं की सुरक्षा, मदीना के भीतर स्थिर जनजातीय संबंध, संघर्ष के समय समुदाय का समर्थन करने के लिए कर प्रणाली, बाहरी राजनीतिक गठबंधनों के लिए सीमाएँ, व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान करने की प्रणाली, विवाद समाधान के लिए एक न्याय प्रणाली, और इसने [[ब्लड मनी (इस्लामी कानून)|ब्लड मनी]] (प्रतिशोध के सिद्धांत / [[जैसे को तैसा|लेक्स टैलियोनिस]] के बजाय किसी व्यक्ति की हत्या के लिए परिवार या जनजाति को किया जाने वाला भुगतान) के भुगतान को भी विनियमित किया।{{citation needed|date=July 2017}}
==== प्रारंभिक खलीफत और राजनीतिक आदर्श ====
{{See also|खिलाफत|इस्लामी राजशाही|इस्लामी नैतिकता}}
मुहम्मद की मृत्यु के बाद, उनके समुदाय को एक नए नेता की नियुक्ति करने की आवश्यकता थी, जिससे [[खलीफा]] (Caliph) की उपाधि का उदय हुआ, जिसका अर्थ "उत्तराधिकारी" है। इस कारण से, बाद के इस्लामी साम्राज्यों को [[खलीफत]] (Caliphates) के रूप में जाना गया। [[उमय्यद]] साम्राज्य के विकास के दौरान इस्लाम के भीतर सबसे बड़ा राजनीतिक विकास [[सुन्नी]] और [[शैया|शिया]] मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक विभाजन था; यह विभाजन खलीफत के उत्तराधिकार पर विवाद के कारण शुरू हुआ था। सुन्नी मुसलमानों का मानना था कि खलीफत चुनाव द्वारा होना चाहिए और योग्यता के आधार पर चुनाव के माध्यम से कोई भी [[मुसलमान]] इस उपाधि को धारण कर सकता है। दूसरी ओर, शियाओं का मानना था कि खलीफा पैगंबर के वंशजों में से होने चाहिए, और इस कारण से, उनकी दृष्टि में, [[अली]] के अलावा अन्य सभी खलीफा खलीफत की उपाधि के अवैध usurpers (हड़पने वाले) थे।<ref>Lewis, Bernard, ''The Middle East : a Brief History of the last 2000 Years,'' Touchstone, (1995), p.139</ref> हालांकि, सुन्नी समुदाय मुस्लिम दुनिया के अधिकांश हिस्सों में विजयी हुआ, और इसी तरह, अधिकांश आधुनिक इस्लामी राजनीतिक आंदोलन ([[ईरान]] को छोड़कर) सुन्नी विचार पर आधारित हैं।
मुहम्मद के सबसे करीबी साथियों, उनके बाद के चार "[[राशिदुन|सही मार्गदर्शक]]" खलीफाओं ने राज्य के विस्तार को [[यरुशलम]], [[टेसिफोन]] और [[दमिश्क]] तक जारी रखा, और [[सिंधु नदी|सिंध]] तक सेना भेजी।<ref>[http://alcor.concordia.ca/~shannon/201Lec02images_files/image004.jpg] {{webarchive |url=https://web.archive.org/web/20050930020401/http://alcor.concordia.ca/~shannon/201Lec02images_files/image004.jpg |date=September 30, 2005 }}</ref> उमय्यद खलीफत या उमय्यद राजवंश के शासनकाल के दौरान, इस्लामी साम्राज्य अल-अंदालुस (मुस्लिम स्पेन) से पंजाब क्षेत्र तक फैल गया था।
शासन की संरचना के संबंध में एक महत्वपूर्ण इस्लामी अवधारणा शूरा (Shura) है, यानी अपने मामलों के संबंध में लोगों से परामर्श करना, जिसका उल्लेख कुरान की दो आयतों (3:159 और 42:38) में शासकों के कर्तव्य के रूप में किया गया है।<ref>Lewis, ''The Middle East'', (1995), p.143</ref>
इख्वानी दृष्टिकोण के अनुसार, एक प्रकार का शासक जो इस्लामी आदर्श का हिस्सा नहीं था, वह एक राजा था, जिसकी कुरान में फ़िरौन (Pharaoh) का उल्लेख "अन्यायी और अत्याचारी शासक के archetypes" (18:70, 79) और अन्य जगहों (28:34) के रूप में करके निंदा की गई है।<ref>Lewis, ''The Middle East'', (1995), p.141</ref> सलाफी दृष्टिकोण के अनुसार, कुरान और हदीस खलीफत के बाद एक धर्मी राजशाही को एक वैध इस्लामी राजनीतिक प्रणाली के रूप में मान्य करते हैं, और इसे खलीफत की तुलना में हीन लेकिन अत्याचार से बेहतर बताते हैं।<ref>मुसनद में अल-जैन द्वारा बताए गए अनुसार एक मजबूत श्रृंखला के साथ अहमद द्वारा हुदायफा से वर्णित (14:163 #18319) और जैसा कि अल-हैथामी (5:188-189) द्वारा संकेत दिया गया है:</ref>
===== चुनाव या प्रत्यक्ष नियुक्ति =====
{{See also|इस्लामिक लोकतंत्र|अहल अल-हाल वाल-अक़्द}}
[[शफ़ीई]] स्कूल के मुस्लिम न्यायविद्, [[अल-मावर्दी]] ने लिखा कि खलीफा [[कुरैश]] जनजाति से होना चाहिए। अश्अरी इस्लामी विद्वान और [[मालिकी]] न्यायविद्, [[अल-बाक़िल्लानी|अबू बक्र अल-बाक़िल्लानी]] ने लिखा कि मुसलमानों का नेता केवल बहुमत से होना चाहिए। सुन्नी [[हनाफ़ी]] फ़िक़्ह के संस्थापक, [[अबू हनीफ़ा|अबू हनीफा अल-नुमान]] ने लिखा कि नेता बहुमत से होना चाहिए।<ref name=2muslims>[http://www.2muslims.com/directory/Detailed/225505.shtml Process of Choosing the Leader (Caliph) of the Muslims: The Muslim Khilafa: by Gharm Allah Al-Ghamdy] {{webarchive |url=https://web.archive.org/web/20110707062249/http://www.2muslims.com/directory/Detailed/225505.shtml |date=2011-07-07 }}</ref>
इस्लाम के पश्चिमी विद्वान, [[फ्रेड डोनर]],<ref>''The Early Islamic Conquests'' (1981)</ref> का तर्क है कि प्रारंभिक खलीफत युग के दौरान प्रचलित अरब प्रथा यह थी कि किसी नेता की मृत्यु पर, किसी कुल या जनजाति के प्रमुख व्यक्ति अपने में से किसी एक नेता का चयन करने के लिए इकट्ठा होते थे, हालांकि इस [[शूरा]] या परामर्श परिषद के लिए कोई निर्दिष्ट प्रक्रिया नहीं थी। उम्मीदवार आमतौर पर मृत नेता के ही वंश के होते थे, लेकिन वे जरूरी नहीं कि उसके बेटे ही हों। सक्षम व्यक्तियों को जो अच्छी तरह से नेतृत्व कर सकें, एक प्रभावरहित प्रत्यक्ष उत्तराधिकारी की तुलना में प्राथमिकता दी जाती थी, क्योंकि अधिकांश सुन्नी इस विचार के लिए कोई आधार नहीं पाते हैं कि राज्य के प्रमुख या शासक को केवल वंश के आधार पर चुना जाना चाहिए।
===== ''मजलिस अश-शूरा'' =====
{{See also|शूरा}}
[[खलीफत]] की विधायिका, विशेष रूप से [[राशिदुन खलीफत]] की, आधुनिक अर्थों में लोकतांत्रिक नहीं थी; निर्णय लेने की शक्ति [[मुहम्मद]] के प्रतिष्ठित और भरोसेमंद साथियों (सहाबा) और विभिन्न जनजातियों के प्रतिनिधियों (जिनमें से अधिकांश अपनी-अपनी जनजातियों से चुने गए या चयनित व्यक्ति थे) से बनी एक परिषद में निहित थी।<ref>Sohaib N. Sultan, [http://www.islamonline.net/English/introducingislam/politics/Politics/article04.shtml Forming an Islamic Democracy] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20041001023746/http://www.islamonline.net/English/introducingislam/politics/Politics/article04.shtml |date=2004-10-01 }}</ref>
पारंपरिक सुन्नी इस्लामी न्यायविद् इस बात से सहमत हैं कि 'शूरा', जिसे मोटे तौर पर 'लोगों का परामर्श' कहा जाता है, खलीफत का एक कार्य है। [[मजलिस-अश-शूरा|मजलिस अश-शूरा]] खलीफा को सलाह देती है। इसका महत्व कुरान की निम्नलिखित आयतों से स्थापित होता है:
<blockquote>{{cite quran|42|38|expand=no|quote=...और जो अपने रब की बात मानते हैं और नमाज कायम करते हैं और जिनका हर काम आपस के परामर्श से होता है, [वे अल्लाह को प्यारे हैं]।}}</blockquote>
</blockquote>
<blockquote>{{cite quran|3|159|expand=no|quote=...और मामलों में उनसे परामर्श करो। फिर जब तुम निर्णय ले लो, तो अल्लाह पर भरोसा करो।}}</blockquote>
मजलिस एक नया खलीफा चुनने का एक साधन भी है। अल-मावर्दी ने लिखा कि मजलिस के सदस्यों को तीन शर्तों को पूरा करना चाहिए: उन्हें न्यायप्रिय होना चाहिए, एक अच्छे खलीफा और एक बुरे खलीफा के बीच अंतर करने के लिए पर्याप्त ज्ञान होना चाहिए, और सर्वश्रेष्ठ खलीफा का चयन करने के लिए पर्याप्त ज्ञान और निर्णय होना चाहिए। अल-मावर्दी ने आगे कहा कि आपात स्थिति में जब कोई खलीफत या मजलिस नहीं होती है, तो लोग खुद एक मजलिस बनाएंगे, खलीफा के लिए उम्मीदवारों की एक सूची का चयन करेंगे, और फिर मजलिस उस सूची में से चयन करेगी। मजलिस अश-शूरा की भूमिका की कुछ आधुनिक व्याख्याओं में Islamist लेखक सैयद कुतुब और तकीउद्दीन अल-नभानी (खलीफत की पुनरुत्थान के लिए समर्पित एक अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक आंदोलन के संस्थापक) शामिल हैं। कुरान के शूरा अध्याय के विश्लेषण में, कुतुब का तर्क है कि इस्लाम केवल यह मांग करता है कि शासक को ईश्वर द्वारा बनाए गए कानूनों के सामान्य संदर्भ में शासित लोगों (आमतौर पर अभिजात वर्ग) के कम से कम कुछ हिस्से से परामर्श करना चाहिए, जिसे शासक को निष्पादित करना होगा। तकीउद्दीन अल-नभानी ने लिखा कि शूरा इस्लामी खलीफत की "शासन संरचना" का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, "लेकिन इसके स्तंभों में से एक नहीं है," और इसे खलीफत के शासन के गैर-इस्लामी बने बिना नजरअंदाज किया जा सकता है। हालाँकि, शूरा की ये व्याख्याएँ (कुतुब और अल-नभानी द्वारा) सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत नहीं हैं, और इस्लामी लोकतंत्रवादी शूरा को इस्लामी राजनीतिक प्रणाली का एक अभिन्न हिस्सा और महत्वपूर्ण स्तंभ मानते हैं।{{citation needed|date=April 2019}}
===== शक्तियों का पृथक्करण =====
{{See also|उलेमा|इस्लामिक नैतिकता|इस्लाम और सेक्युलरिज़्म}}
प्रारंभिक [[खलीफत|इस्लामी खलीफतों]] में, [[खलीफा]] का पद मुहम्मद के राजनीतिक अधिकार के उत्तराधिकारी के रूप में राज्य के प्रमुख के रूप में विकसित हुआ, जो [[सुन्नी इस्लाम|सुन्नियों]] के अनुसार, आदर्श रूप से लोगों या उनके प्रतिनिधियों द्वारा चुना गया था,<ref>''Encyclopedia of जैसा कि [[अबू बक्र का चुनाव|अबू बक्र के चुनाव]] में, [[उस्मान का चुनाव|उस्मान के चुनाव]] में, और खलीफा के रूप में [[अली के चुनाव|अली]] के मामले में था। बाद में, राशिदुन खलीफाओं के बाद [[इस्लामी स्वर्ण युग]] के खलीफाओं के दौरान, लोकतांत्रिक भागीदारी की मात्रा बहुत कम थी; लेकिन चूंकि इस्लाम में "कोई भी व्यक्ति किसी अन्य से श्रेष्ठ नहीं है सिवाय धार्मिकता और सदाचार के आधार पर", और मुहम्मद का आदर्श लोगों से परामर्श करना था, बाद के इस्लामी शासकों ने अक्सर अपने राज्य के मामलों के संबंध में लोगों से परामर्श किया।<ref>{{cite book|title=Justice Without Frontiers|first=Christopher G.|last=Judge Weeramantry|year=1997|publisher=[[ब्रिज पब्लिशर्स]]|isbn=90-411-0241-8|pages=135}}</ref>
खलीफा (या बाद में, सुल्तान) की विधायी शक्ति हमेशा विद्वान वर्ग यानी 'उलेमा' द्वारा प्रतिबंधित थी, जिन्हें इस्लामी कानून का संरक्षक माना जाता था। चूंकि कानून न्यायविदों से आया था, इसलिए इसने खलीफा को कानूनी परिणामों को निर्देशित करने से रोका। शरिया के फैसले न्यायविदों के 'इज्मा' (आम सहमति) के आधार पर आधिकारिक के रूप में स्थापित किए गए थे, जिन्होंने सैद्धांतिक रूप से 'उम्मा' (मुस्लिम समुदाय) के प्रतिनिधियों के रूप में काम किया था। 11वीं और 12वीं शताब्दी के बाद से जब कानून कॉलेज (''[[मदरसा|मदरसा]]'') व्यापक हो गए, तो एक छात्र को अक्सर कानूनी फैसले देने के लिए एक ''[[इजाजत|इजाजत अल-तद्रीस वा-अल-इफ्ता]]'' ("शिक्षण और कानूनी राय जारी करने का लाइसेंस") प्राप्त करना पड़ता था।<ref>{{cite journal |last=Makdisi |first=George |date=April–June 1989 |title=Scholasticism and Humanism in Classical Islam and the Christian West |journal=Journal of the American Oriental Society |volume=109 |issue=2 |pages=175–182 [175–77] |doi=10.2307/604423|jstor=604423 }}</ref> कई मायनों में, शास्त्रीय इस्लामी कानून ने संवैधानिक कानून की तरह काम किया।<ref name=Feldman2008/>
व्यवहार में, राशिदुन खलीफत के बाद सैकड़ों वर्षों तक और 20वीं शताब्दी तक, इस्लामी राज्यों ने शरिया के नियमों का पालन करने वाले सुल्तानों और उलेमाओं के सह-अस्तित्व के आधार पर एक शासन प्रणाली का पालन किया। यह प्रणाली कुछ पश्चिमी सरकारों से मिलती-जुलती थी, क्योंकि दोनों के पास एक अनिखित संविधान (यूके की तरह) और सरकार की अलग, परस्पर विरोधी शाखाएँ (यूएस की तरह) थीं—शासन में शक्तियों के पृथक्करण को सुनिश्चित करना। जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका (और कुछ अन्य शासन प्रणालियों) में सरकार की तीन शाखाएँ हैं—कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका—इस्लामी राजतंत्रों में दो शाखाएँ थीं—सुल्तान और उलेमा।<ref name=feldman-fall-6>Feldman, Noah, ''Fall and Rise of the Islamic State'', प्रिंसटन यूनिवर्सिटी प्रेस, 2008, p.6</ref>
प्रोफेसर ओलिविए रॉय (Olivier Roy) के अनुसार, सुल्तानों और अमीरों की राजनीतिक शक्ति और खलीफा की धार्मिक शक्ति के बीच इस "वास्तविक अलगाव" को हिजरत की पहली शताब्दी के अंत तक "बनाया और संस्थागत" किया गया था। संप्रभु शासक का धार्मिक कार्य मुस्लिम समुदाय को दुश्मनों से बचाना, शरिया स्थापित करना और जन कल्याण (''मस्लहा'') सुनिश्चित करना था। राज्य मुसलमानों को अच्छे मुसलमानों के रूप में जीने में सक्षम बनाने का एक साधन था, और यदि सुल्तान ने ऐसा किया, तो मुसलमान उसका पालन करने के लिए बाध्य थे। शासक की वैधता के प्रतीक "सिक्के ढालने का अधिकार और शुक्रवार की प्रार्थना (''[[जुमा]] [[खुत्बा]]'') को उसके नाम पर दिया जाना" थे।<ref>Roy, Olivier, ''The Failure of Political Islam'' by Olivier Roy, translated by Carol Volk, Harvard University Press, 1994, p.14-15</ref>
सदाकत कादरी का तर्क है कि उलेमाओं द्वारा खलीफत के प्रति भारी मात्रा में "सम्मान" दिखाया गया था, और यह कम से कम कुछ मामलों में "प्रतिकूल" था। "यद्यपि न्यायविदों ने खलीफा को अयोग्य घोषित करने के लिए मानसिक विकलांगता से लेकर अंधेपन तक की स्थितियों की पहचान की, लेकिन किसी ने भी खलीफत की शक्तियों को सटीक रूप से संस्थागत रूप से परिभाषित करने की हिम्मत नहीं की।" अब्बासियों की खलीफत के दौरान:
<blockquote>जब खलीफा अल-मुतावक्किल को 861 में मार डाला गया था, तो न्यायविदों ने पूर्वव्यापी रूप से एक फतवा के साथ उसकी हत्या को वैध बना दिया था। आठ साल बाद, उन्होंने एक उत्तराधिकारी के वैध त्याग को देखा जिसे शौचालय से घसीटा गया था, बेहोश होने तक पीटा गया था, और मरने के लिए एक तिजोरी में छोड़ दिया गया था। 10वीं शताब्दी के मध्य में, न्यायाधीशों ने औपचारिक रूप से पुष्टि की कि अंधापन एक खलीफा के लिए अयोग्य घोषित करने का एक कारण था, इस बात का कोई जिक्र किए बिना कि उन्हें अभी-अभी उसकी आँखें फोड़ने के दृश्य को देखने के लिए इकट्ठा किया गया था।<ref name=kadri-120-1>{{cite book|last1=Kadri|first1=Sadakat|title=Heaven on Earth: A Journey Through Shari'a Law from the Deserts of Ancient Arabia ...|date=2012|publisher=Macmillan|isbn=9780099523277|pages=120–1|url=https://books.google.com/books?id=ztCRZOhJ10wC&pg=PT127}}</ref>
</blockquote>
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के कानून के प्रोफेसर नूह फेल्डमैन के अनुसार, 19वीं शताब्दी की शुरुआत में [[उमय्यद साम्राज्य|उमय्यद साम्राज्य]] (यहाँ मूल पाठ में Ottoman Empire है, जो तुर्क साम्राज्य है) द्वारा शरिया के संकलन ने न्यायविदों और कानूनी विद्वानों को इस्लामी कानून पर अपना नियंत्रण खो दिया।<ref name=Feldman-why>{{Cite web|author=Noah Feldman|title=Why Shariah?|work=[[न्यू यॉर्क टाइम्स]]|date=March 16, 2008|url=https://www.nytimes.com/2008/03/16/magazine/16Shariah-t.html?ei=5070&em=&en=5c1b8de536ce606f&ex=1205812800&pagewanted=all|accessdate=2008-10-05}}</ref>
{{quote|विद्वानों ने कानून के रखवालों के रूप में अपनी exalted status कैसे खो दी, यह एक जटिल कहानी है, लेकिन इसे इस कहावत द्वारा संक्षेपित किया जा सकता है कि आंशिक सुधार कभी-कभी बिल्कुल भी सुधार न होने से भी बदतर होता है। 19वीं शताब्दी की शुरुआत में, उस्मानी साम्राज्य (Ottoman Empire) ने सैन्य आपदाओं के जवाब में एक आंतरिक सुधार आंदोलन शुरू किया। सबसे महत्वपूर्ण सुधार शरिया को संहिताबद्ध करने का प्रयास था। पश्चिमीकरण की इस प्रक्रिया ने, जो इस्लामी कानूनी परंपरा से अपरिचित थी, शरिया को विद्वानों के मानवीय प्रयासों के माध्यम से खोजी जाने वाली सिद्धान्तों और सिद्धांतों के निकाय से नियमों के एक ऐसे सेट में बदलने का लक्ष्य रखा जिसे एक किताब में देखा जा सके। [...] लेकिन एक बार जब कानून संहिताबद्ध रूप में मौजूद हो गया, तो कानून ने खुद को अधिकार के स्रोत के रूप में विद्वानों को प्रतिस्थापित करने में सक्षम बना दिया। संकलन ने विद्वानों को कानून की सामग्री पर अंतिम बात कहने के अपने महत्वपूर्ण दावे से वंचित कर दिया और उस शक्ति को राज्य को स्थानांतरित कर दिया।}}
==== राजशाही ====
{{Main|Islamic monarchy}}
एक इस्लामी राजशाही एक [[राजशाही]] है जो [[इस्लाम]] का पालन करती है। ऐतिहासिक रूप से विभिन्न नामों से जानी जाती है, जैसे कि ''[[मलिक|ममलिकत]]'' ("राज्य"), खलीफत, सल्तनत, या अमीरात, समकालीन इस्लामी राजतंत्रों में शामिल हैं:
* [[बहरीन|बहरीन साम्राज्य]]
* [[ब्रूनई|ब्रूनई दारुस्सलाम]]
* [[जॉर्डन|जॉर्डन का हाशमी साम्राज्य]]
* [[कुवैत|कुवैत राज्य]]
* [[मलेशिया]]
* [[मोरक्को|मोरक्को साम्राज्य]]
* [[ओमान|ओमान सल्तनत]]
* [[कतर|कतर राज्य]]
* [[सऊदी अरब|सऊदी अरब साम्राज्य]]
* [[संयुक्त अरब अमीरात]]
==== आज्ञाकारिता और विरोध ====
{{Main|Ulil-Amr|Verse of Obedience}}
विद्वान मोजन मोमेन के अनुसार, "कुरान के केंद्रीय विषयों में से एक जिसका बहुत विश्लेषण किया गया है" कि जिम्मेदारी कहाँ होनी चाहिए, निम्नलिखित आयत पर आधारित है:
<blockquote>
"हे उन लोगों जो विश्वास करते हो! अल्लाह की आज्ञा मानो और पैगंबर की आज्ञा मानो और उन लोगों की जो तुम में से अधिकार दिए गए हैं (''उलू अल-अम्र'')" (कुरान 4:59)।
</blockquote>
सुन्नियों के लिए, ''उलू अल-अम्र'' शासक (खलीफा और राजा) हैं, लेकिन शियाओं के लिए, यह वाक्यांश इमामों को संदर्भित करता है।<ref>Momen, Moojan, ''Introduction to Shi'i Islam'', Yale University Press, 1985 p.192</ref>
[[मदीना इस्लामिक विश्वविद्यालय]] के कई विद्वान, पुस्तक ''उसूल अल-ईमान'' में, यह कहते हैं कि कुरान और सुन्नत से प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार, पापी कृत्यों को छोड़कर सभी मामलों में इमामों और शासकों की आज्ञाकारिता का आदेश दिया गया है, जिसका सारांश इस प्रकार है:<ref>[https://d1.islamhouse.com/data/bn/ih_books/single2/bn_The_Foundations_of_Faith_in_the_Light_of_the_Quran_and_the_Sunnah.pdf The Foundations of Faith in the Light of the Quran and the Sunnah, Authors: Several Scholars of Madinah University, Translators: Abu Bakr Muhammad Zakaria and Manzur-e-Ilahi, Published by: King Fahd Printing Press, Saudi Arabia. p. 383]</ref>
पाप के मामलों को छोड़कर सभी परिस्थितियों में सुनना और आज्ञा मानना अनिवार्य है।
भले ही शासक सलाह स्वीकार न करें, लेकिन उनके खिलाफ विद्रोह नहीं करना चाहिए।
जो कोई भी शासकों को सलाह देता है और शरिया द्वारा समर्थित तरीके से उनके कार्यों की आलोचना करता है, वह पाप से मुक्त हो जाता है।
फ़ितना (अशांति) और अराजकता पैदा करना वर्जित है, और इसी तरह, कुछ भी करना वर्जित है जो फ़ितना या अशांति का कारण बन सकता है।
सत्ता में बैठे लोगों के खिलाफ विद्रोह तब तक अनुमति नहीं है जब तक कि उनके द्वारा ऐसा स्पष्ट कुफ्र प्रकट नहीं किया जाता है, जिसके बारे में इसके कुफ्र होने के बारे में बिल्कुल भी असहमति नहीं है।
शब्दों, कार्यों और मान्यताओं में कुरान और सुन्नत के आदर्शों द्वारा निर्देशित मुसलमानों की जमात (समुदाय) से चिपके रहना अनिवार्य है; किसी को उनके साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखना चाहिए, उनके मार्ग पर चलना चाहिए, और सच्चाई और न्याय के मार्ग पर उनके शब्दों को एकजुट रखने के लिए उत्सुक होना चाहिए। किसी को उनसे अलग नहीं होना चाहिए या उनके बीच विभाजन पैदा नहीं करना चाहिए।
===== पापी शासक को बदलने का सिद्धांत =====
{{See also|खारिजाइट|बागी (इस्लाम)}}
इस सवाल पर कि क्या किसी अत्याचारी और पापी शासक के खिलाफ विद्रोह और विरोध जायज है, सालेह अल-मुनज्जिद कहते हैं: "इस्लामी शरिया के सिद्धांतों में से एक है—'बुराई का मुकाबला बड़ी बुराई से नहीं किया जा सकता है। बल्कि, बुराई का मुकाबला उस चीज़ से किया जाना चाहिए जो इसे मिटा दे या इसे कम कर दे।' इसलिए, यदि जो लोग ऐसे शासक को पदच्युत करना चाहते हैं जो स्पष्ट कुफ्र में शामिल है, तो उनके पास उसे पदच्युत करने और उसे एक अच्छे और धर्मी शासक के साथ बदलने की क्षमता है, और यदि इससे मुसलमानों के बीच बड़ी अराजकता नहीं होती है या उन्हें इस शासक की बुराई से बड़ी बुराई के अधीन नहीं किया जाता है—तो इसमें कोई बाधा नहीं है। इसके विपरीत, यदि यह विद्रोह एक बड़ी अराजकता का कारण बनता है, सुरक्षा से समझौता करता है, या निर्दोष लोगों को उत्पीड़न और गुप्त हत्याओं का शिकार बनाता है... आदि, तब विद्रोह अनुमत नहीं होगा। बल्कि, किसी को धैर्य रखना चाहिए, शासक के अच्छे आदेशों का पालन करना चाहिए, उसे सलाह देनी चाहिए, और उसे भलाई करने की ओर बुलाना चाहिए। किसी को बुराई को कम करने और अच्छाई को बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए। यही सीधा रास्ता है; वह रास्ता जिसका पालन किया जाना चाहिए। क्योंकि इस रास्ते में मुसलमानों के लिए सामान्य कल्याण निहित है; नुकसान का पहलू कम है और इस रास्ते में लाभ का पहलू अधिक है; और इस रास्ते में और भी बड़ी बुराइयों से मुसलमानों की सुरक्षा निहित है।"<ref>{{cite web |title=Ruling on rebelling against a ruler - Islam Question & Answer |url=https://islamqa.info/bn/answers/9911 |website=islamqa.info |access-date=September 2, 2022 |language=bn}}</ref>
उन प्रश्नों के उत्तर में जहाँ शासक के कार्य इस्लाम विरोधी हैं, अबू बक्र मुहम्मद जकारिया ने मुहम्मद बाज़मौल द्वारा लिखित पुस्तक "लैसा मिन मनहाजिस-सलाफ़" (यह सलफ का मनहाज नहीं है) के अनुवाद में अपनी जोड़ी गई व्याख्याओं और टिप्पणियों में कहा है कि कई परिदृश्य हो सकते हैं:
#. इस्लाम के प्रति उनका विरोध उस स्तर तक नहीं पहुँचा है जो सीधे उन्हें कुफ्र में डुबो देता है। इस स्थिति में, जब तक वे नमाज कायम करते हैं और अदा करते हैं, उनके संबंध में कुछ चीजें की जा सकती हैं:
उसके मार्गदर्शन के लिए अल्लाह से प्रार्थना करना। यही सलफ किया करते थे।
सत्य का वचन उसके सामने प्रस्तुत करना। यह भी कुछ सलफ का मनहाज था, लेकिन व्यक्ति को ऐसे कद का होना चाहिए जिसकी बातों को शासक ध्यान में रखे।
उसे गुप्त रूप से सलाह देना। यहाँ भी सलाहकार और सलाह प्राप्तकर्ता की क्षमता का ठीक से पालन किया जाना चाहिए।
यदि वह काम नहीं करता है, तो अल्लाह के उसकी स्थिति को बदलने की प्रतीक्षा करना। जैसे विद्वानों ने अल-हज्जाज के खिलाफ प्रतीक्षा की थी।
#. और यदि इस्लाम का विरोध उस स्तर तक पहुँच जाता है जिसमें वह सीधे तौर पर कुफ़्र में शामिल हो जाता है, जिसके लिए हमारे पास स्पष्ट प्रमाण हैं, तो निम्नलिखित दो स्थितियाँ हो सकती हैं:
शर्तें पूरी नहीं हुई हैं और बाधाएँ दूर नहीं की गई हैं, तब क्या करने की आवश्यकता है:
उसके खिलाफ कुफ़्र के संबंध में प्रमाण स्थापित करना।
संदेहों को दूर करने के प्रयास किए जाने चाहिए।
जाँच करें कि क्या उसके पास कोई स्वीकार्य बहाउपयुक्त बहाना है या नहीं।
उपर्युक्त प्रथम परिदृश्य के सभी कार्यों को अंजाम दिया जाना चाहिए।
यदि शर्तों की पूर्ति और बाधाओं को दूर करना पूरा हो चुका है और इससे संबंधित सब कुछ अंतिम रूप दे दिया गया है:
शासक को बदलने के प्रयास किए जाने चाहिए। हालांकि, इसके लिए कई शर्तों को पूरा किया जाना चाहिए:
इसके लिए क्षमता मौजूद होनी चाहिए। प्रचलित राय एक बेहतर प्रशासन लाने की ओर झुकी होनी चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई बदतर स्थिति उत्पन्न न हो।
यदि वह संभव नहीं है, तो,
व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार दीन के काम में लगा रहेगा।
जनता उन्मुख कार्य जारी रखा जाना चाहिए।
जनता को धीरे-धीरे जागरूक किया जाना चाहिए, और फिर पूर्व शर्तों को पूरा करने और बाधाओं को दूर करने के बाद बदलाव लाया जाना चाहिए।
इस तरह, जब उनमें ईमान और अच्छे कर्म पाए जाते हैं, तो अल्लाह का वादा वहाँ पूरा होगा और वह अपने पसंदीदा लोगों को सत्ता में बिठाएगा।<ref>{{cite book |last1=Bazmool |first1=Muhammad ibn Umar ibn Salim |last2=bin Tofazzal |first2=Habib |last3=Zakaria |first3=Abu Bakr Muhammad |title=This is Not the Manhaj of the Salaf |date=November, 2021 |publisher=Believers Vision |location=Dhaka |isbn=978-984-35-0960-4 |pages=35, 36, 37 |access-date=February 4, 2026}}</ref>
इस सवाल पर कि क्या समकालीन लोकतांत्रिक पार्टी की स्थिति का उपयोग परिवर्तन के एक तरीके के रूप में किया जा सकता है, अबू बक्र मुहम्मद जकारिया ने मुहम्मद बाज़मौल द्वारा लिखित पुस्तक "लैसा मिन मनहाजिस-सलाफ़" के अनुवाद में अपनी जोड़ी गई व्याख्याओं और टिप्पणियों में कहा है: "यह मामला पहले मौजूद नहीं था। पिछले युग में, कोई बदलाव के लिए खड़ा होता, उसके अनुयायी युद्ध की तैयारी करते, स्थिति के आधार पर लोग उससे जुड़ते, और वह एक क्षेत्र पर कब्जा कर लेता और उसके शासक को पदच्युत कर देता। इनमें, अधिकांश सलफ की कोई भागीदारी नहीं थी। बल्कि, बाद के प्रमुख सलफ ने न केवल हतोत्साहित किया बल्कि कड़ाई से मना किया। क्योंकि इतिहास में यह एक सिद्ध सत्य रहा है कि जब भी लोगों ने एक मुस्लिम शासक के खिलाफ मैदान संभाला, तो परिणाम इस्लाम और मुसलमानों के लिए सुखद नहीं था। और परिवर्तन की नीति लोकतांत्रिक रूप से भी लागू नहीं होती है क्योंकि यह मुसलमानों के बीच विभाजन और गुटबंदी पैदा करती है, उदारता के नाम पर हलाल को हराम और हराम को हलाल बनाती है, दीन को छोटा करती है, इस्लाम के अलावा किसी अन्य चीज़ के लिए प्यार और दुश्मनी पैदा करती है, और आपसी लड़ाई और संघर्ष को बढ़ाती है। इस स्थिति में, सलफ-ए-सालेह की नीति से चिपके रहना सबसे अच्छा है, जो सभी पार्टी के बैनरों, मंचों और गठबंधनों से खुद को बचाना है। इसके संबंध में, अल-उसैमीन कहते हैं कि दावत समूहों के माध्यम से मजबूत नहीं होती है, बल्कि कुरान और सुन्नत से चिपके रहने से मजबूत होती है।"<ref>{{cite book |last1=Bazmool |first1=Muhammad ibn Umar ibn Salim |last2=bin Tofazzal |first2=Habib |last3=Zakaria |first3=Abu Bakr Muhammad |title=This is Not the Manhaj of the Salaf |date=November, 2021 |publisher=Believers Vision |location=Dhaka |isbn=978-984-35-0960-4 |pages=37, 38, 39 |access-date=February 4, 2026}}</ref>
विद्वान बर्नार्ड लुईस के अनुसार, इस कुरान की आयत को मुहम्मद को जिम्मेदार ठहराए गए कई कथनों में विस्तृत किया गया है:
<blockquote>लेकिन ऐसे भी कथन हैं जो आज्ञाकारिता के कर्तव्य को कड़ाई से सीमित करते हैं। पैगंबर को जिम्मेदार ठहराए जाने वाले और प्रामाणिक के रूप में सार्वभौमिक रूप से स्वीकार किए जाने वाले दो कथन निर्देशिका हैं। एक कहता है, "पाप में कोई आज्ञाकारिता नहीं है"; दूसरे शब्दों में, यदि शासक दिव्य कानून के विपरीत किसी चीज़ का आदेश देता है, तो न केवल आज्ञाकारिता का कोई कर्तव्य नहीं है, बल्कि अवज्ञा का कर्तव्य है। यह पश्चिमी राजनीतिक विचार में दिखाई देने वाले [[क्रांति का अधिकार]] से कहीं अधिक है। यह क्रांति का कर्तव्य है, या कम से कम प्राधिकरण के खिलाफ अवज्ञा और विरोध का है। दूसरा उच्चारण, "अपने निर्माता के खिलाफ किसी प्राणी की आज्ञा नहीं मानो," फिर से शासक के अधिकार को स्पष्ट रूप से सीमित करता है, चाहे शासक कोई भी रूप ले।<ref>{{Cite web |url=http://www.foreignaffairs.org/20050501faessay84305/bernard-lewis/freedom-and-justice-in-the-modern-middle-east.html?mode=print |title=Freedom and Justice in the Middle East |access-date=2008-11-05 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071230195152/http://www.foreignaffairs.org/20050501faessay84305/bernard-lewis/freedom-and-justice-in-the-modern-middle-east.html?mode=print |archive-date=2007-12-30 |url-status=dead }}</ref></blockquote>
हालांकि, इब्न तैमियाह, जो 14वीं शताब्दी के हनबली मध्हब के एक महत्वपूर्ण विद्वान हैं, इस आयत के संबंध में अपने 'तफ़सीर' में कहते हैं, "पाप में कोई आज्ञाकारिता नहीं है"; जिसका अर्थ है कि यदि शासक का आदेश दिव्य कानून के विपरीत है, तो इसे नजरअंदाज किया जाना चाहिए, लेकिन इसका उपयोग क्रांति के बहाने के रूप में नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे मुसलमानों का खून बहेगा। इब्न तैमियाह के अनुसार, यह कहावत—'एक सुल्तान के बिना एक रात की तुलना में एक अन्यायी इमाम के तहत साठ साल बेहतर हैं'—अनुभव द्वारा सिद्ध है।<ref name=Lambton>{{cite book|last1=Lambton|first1=Ann K. S.|title=State and Government in Medieval Islam|date=2002|publisher=Routledge|page=145|url=https://books.google.com/?id=DVvYAQAAQBAJ&pg=PA144&dq=siyasa+ibn+taymiyyah#v=onepage&q=siyasa%20ibn%20taymiyyah&f=false|accessdate=19 September 2015|isbn=9781136605208}}</ref> उनका मानना था कि "[[अच्छाई का आदेश देना और बुराई से रोकना|अच्छाई का आदेश दें और बुराई से मना करें]]" (''अल-अम्र बि-ल-मारूफ़ वा-न-नह्य 'अनि-ल-मुनकर'', जो {{cite quran|3|104|s=ns}} और {{cite quran|3|110|s=ns}} और अन्य आयतों में पाया जाता है) के लिए कुरान का निर्देश अन्य मुसलमानों पर अधिकार रखने वाले प्रत्येक राज्य के अधिकारी का कर्तव्य था, जिसमें खलीफा से लेकर "बच्चों की लिखावट का मूल्यांकन करने के प्रभारी स्कूलमास्टर" तक शामिल थे।<ref>Ibn Taymiyya, ''Le traite de droit public d'ibn Taimiya.'' Translated by Henri Laoust. Beirut, 1948, p.12</ref><ref name=kadri-139>{{cite book|last1=Kadri|first1=Sadakat|title=Heaven on Earth: A Journey Through Shari'a Law from the Deserts of Ancient Arabia ...|date=2012|publisher=macmillan|isbn=9780099523277|page=139|url=https://books.google.com/?id=ztCRZOhJ10wC&printsec=frontcover&dq=Heaven+on+Earth:+A+Journey+Through+Shari%27a+Law#v=onepage&q=Heaven%20on%20Earth%3A%20A%20Journey%20Through%20Shari'a%20Law&f=false}}</ref>
==== शरिया और शासन (''सियासा'') ====
{{Main|Siyasa}}
मध्य युग के अंत से, सुन्नी फ़िक़्ह ने सियासा शरिया (Siyasa Shar'iyya) के सिद्धांत को विस्तृत करना शुरू किया, जिसका शाब्दिक अर्थ [[शरिया]] के अनुसार शासन है और इसे कभी-कभी इस्लामी कानून के राजनीतिक आयाम के रूप में संदर्भित किया जाता है। इसका लक्ष्य इस्लामी कानून के साथ राज्य शासन की व्यावहारिक जरूरतों को समेकित करना था।<ref>{{cite encyclopedia|author1=Bosworth, C.E.|author2=Netton, I.R. |author3=Vogel, F.E.|title=Siyāsa|year=2012|encyclopedia=Encyclopaedia of Islam|edition=2nd|publisher=Brill |editor1=P. Bearman|editor2= Th. Bianquis|editor3= C.E. Bosworth|editor4= E. van Donzel|editor5= W.P. Heinrichs|doi=10.1163/1573-3912_islam_COM_1096 }}{{subscription required}}</ref> इस सिद्धांत ने राजनीतिक अधिकार के धार्मिक उद्देश्य पर जोर दिया और सुविधा और उपयोगिता विचारों द्वारा आवश्यक इस्लामी कानून के व्यावहारिक अनुप्रयोग की वकालत की। यह शुरू में इस्लामी कानून की सख्त प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं के कारण होने वाली कठिनाइयों के जवाब में उभरा। इस कानून ने परिस्थितिजन्य साक्ष्य को खारिज कर दिया और गवाहों की गवाही पर जोर दिया, जिससे 'काजी' (शरिया न्यायाधीश) संचालित अदालतों में आपराधिक दोषसिद्धि प्राप्त करना मुश्किल हो गया। इसके जवाब में, इस्लामी न्यायविदों ने सीमित परिस्थितियों में अधिक प्रक्रियात्मक स्वतंत्रता की अनुमति दी, जैसे कि शासक की परिषद द्वारा आयोजित 'मजालिम' अदालतों में राज्य के अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों की सुनवाई करना और मामूली अपराधों के लिए 'ताजीर' (विवेकानंद दंड) लागू करना। हालांकि, ममलुक सल्तनत के तहत, गैर-काजी अदालतों ने वाणिज्यिक और पारिवारिक कानून में अपना अधिकार क्षेत्र बढ़ाया, शरिया अदालतों के समानांतर संचालन किया और फ़िक़्ह द्वारा निर्धारित कुछ औपचारिकता से छूट दी। इस सिद्धांत के बाद के विकास ने राज्यकला और न्यायशास्त्र के बीच इस तनाव को हल करने का प्रयास किया। बाद में, इस सिद्धांत का उपयोग सार्वजनिक हित में राज्य द्वारा अपनाए गए कानूनी संशोधनों को सही ठहराने के लिए किया गया है, जब तक कि उन्हें शरिया के विपरीत नहीं माना गया था। उदाहरण के लिए, इसे उस्मानी शासकों द्वारा लागू किया गया था, जिन्होंने प्रशासनिक, आपराधिक और आर्थिक कानूनों का एक संकलन अधिनियमित किया जिसे 'कानून' (Kanun) के रूप में जाना जाता है।<ref>{{cite encyclopedia|author=Yossef Rapoport|title=Political Dimension (Siyāsa Sharʿiyya) of Islamic Law|encyclopedia=The Oxford International Encyclopedia of Legal History|publisher=Oxford University Press|location=Oxford|year=2009|url=http://www.oxfordreference.com/view/10.1093/acref/9780195134056.001.0001/acref-9780195134056-e-635|editor=Stanley N. Katz|ref=harv}}{{subscription required}}</ref>
==== शिया परंपरा ====
शिया इस्लाम में, शासकों के प्रति तीन दृष्टिकोण प्रमुख रहे हैं—शासक के साथ राजनीतिक सहयोग, शासक को चुनौती देने के लिए राजनीतिक सक्रियता, और राजनीति से अलगाव—"समय के साथ शिया उलेमाओं के लेखन" में "इन तीनों दृष्टिकोणों के सभी घटक" प्रदर्शित हुए हैं।<ref>Momen, Moojan, ''Introduction to Shi'i Islam'', Yale University Press, 1985 p.194</ref>
==== खरिजी परंपरा ====
{{Main|Kharijite}}
{{See also|Baghī (Islam)}}
कुछ मुस्लिम लेखकों के अनुसार, इस्लाम के भीतर अतिवाद की शुरुआत 7वीं शताब्दी में [[खवारिज|खवारिजियों]] (Kharijites) से हुई थी। मुख्य रूप से अपने राजनीतिक पदों से, उन्होंने कट्टर सिद्धांतों विकसित किए जो उन्हें मुख्यधारा के सुन्नी और शिया दोनों मुसलमानों से अलग करते थे। खवारिजी विशेष रूप से [[तकफिर]] के प्रति अतिवाद अपनाने के लिए कुख्यात थे, जिसके द्वारा उन्होंने अन्य मुसलमानों को अविश्वासी घोषित कर दिया और इसलिए उन्हें मौत के घाट उतारना उचित माना।<ref>{{cite web|url=https://www.theglobeandmail.com/globe-debate/another-battle-with-islams-true-believers/article20802390/|title=Another battle with Islam's 'true believers'|work=The Globe and Mail}}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.quilliamfoundation.org/wp/wp-content/uploads/publications/free/the-balance-of-islam-in-challenging-extremism.pdf |title=Archived copy |access-date=2015-11-17 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20140802045255/http://www.quilliamfoundation.org/wp/wp-content/uploads/publications/free/the-balance-of-islam-in-challenging-extremism.pdf |archive-date=2014-08-02 }}</ref><ref>{{cite web|url=https://ottawacitizen.com/news/national/fruits-of-the-tree-of-extremism|title=Imam Mohamad Jebara: Fruits of the tree of extremism|author=Mohamad Jebara More Mohamad Jebara|work=Ottawa Citizen}}</ref>
विद्वान अक्सर खवारिजियों के उद्भव के संबंध में इस्लामी पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) की एक हदीस का हवाला देते हैं।
{{quote|अबू सईद अल-खुद्री (रजि.) ने वर्णन किया: अली (रजि.) ने यमन से धूल से ढका हुआ कुछ सोना भेजा। उन्होंने उस सोने को 4 नव-मुस्लिम अरब नेताओं के बीच वितरित किया। उस समय, धंसे हुए आँखों, ऊँची गाल की हड्डियों, एक प्रमुख माथे और मुड़े हुए सिर वाले एक व्यक्ति ने, जिसका नाम जुल-खुवैसिराह था, खड़े होकर कहा: हे अल्लाह के रसूल, अल्लाह से डरो, तुमने अन्याय किया है! उन्होंने उत्तर दिया, तुम पर अफसोस! क्या मेरे पास अल्लाह से डरने का पृथ्वी पर सबसे बड़ा अधिकार नहीं है? यदि मैं अल्लाह की अवज्ञा करता हूँ या अन्याय करता हूँ, तो अल्लाह की आज्ञा का पालन कौन करेगा और न्यायसंगत रूप से कार्य करेगा? अल्लाह ने मुझे पृथ्वी के निवासियों के संबंध में भरोसेमंद माना, और तुम मेरे भरोसे पर भरोसा नहीं कर सकते! तब वह व्यक्ति चला गया। खालिद बिन अल-वलिड (रजि.) ने तब कहा, हे अल्लाह के रसूल, क्या मैं उस व्यक्ति को (पैगंबर के प्रति अविश्वास व्यक्त करके apostasy और Kufr करने के लिए) निष्पादित न करूँ? उन्होंने कहा, नहीं। शायद वह व्यक्ति प्रार्थना करता है। खालिद (रजि.) ने कहा, कितने ही लोग जो प्रार्थना करते हैं, अपने मुँह से वह कहते हैं जो उनके दिलों में नहीं है। तब अल्लाह के रसूल (सल्ल.) ने कहा, मुझे लोगों के दिलों की खोज करने या उनके पेट को चीरने का आदेश नहीं दिया गया है। फिर उन्होंने जाने वाले व्यक्ति को देखा और कहा, इस व्यक्ति की संतान से, लोगों का एक समूह उभरेगा जो कुरान को खूबसूरती से और मार्मिक रूप से पढ़ेंगे, फिर भी कुरान उनके गले से आगे नहीं जाएगी। वे इस्लाम से वैसे ही गुजरेंगे जैसे एक तीर शिकार से गुजरता है। वे इस्लाम के अनुयायियों को मार डालेंगे और मूर्तियों और पत्थरों के अनुयायियों को अकेला छोड़ देंगे। यदि मैं उन तक पहुँचता, तो मैं उन्हें वैसे ही काट डालता जैसे समूद के लोगों को काट डाला गया था।|बुखारी अस-सहीह 3/1219, 1321, 4/1581, 1714, 5/2281, 6/2540, 2801; मुस्लिम, अस-सहीह 2/741-744.}}
[[खंडोकर अब्दुल्ला जहांगीर]], अपनी पुस्तक इस्लाम के नाम पर उग्रवाद में, उपर्युक्त हदीस का हवाला देते हुए कहते हैं:<ref>{{cite web |last1=Jahangir |first1=Khondoker Abdullah |title=2. 2. Kharijite Sect |publisher=HadithBD.com|url=http://www.hadithbd.com/books/link/?id=6896 |website=www.hadithbd.com |access-date=November 12, 2022 |language=bn}}</ref>
{{quote|हम इस्लामी इतिहास में उग्रवाद और आतंकवाद की पहली घटनाओं को खवारिज संप्रदाय के कार्यों के माध्यम से देखते हैं। 35 हिजरी (656 ईस्वी) में, इस्लामी राज्य के प्रमुख, खलीफा उस्मान इब्न अफ्फान (रजि.) को विद्रोहियों के एक समूह द्वारा बेरहमी से शहीद कर दिया गया था। विद्रोहियों के बीच, राज्य की सत्ता हथियाने या राज्य का प्रमुख बनने में सक्षम कोई नहीं था। उन्होंने राजधानी मदीना में सहाबा पर दबाव डालना शुरू कर दिया। एक बिंदु पर, अली (रजि.) ने खलीफत की जिम्मेदारी स्वीकार कर ली। मुस्लिम राज्य के कमांडरों और राज्यपालों ने अली के प्रति निष्ठा की शपथ ली। हालाँकि, उस्मान (रजि.) द्वारा नियुक्त सीरिया के गवर्नर मुआविया (रजि.) ने अली की निष्ठा स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने मांग की कि खलीफा उस्मान के हत्यारों को पहले न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए। अली (रजि.) ने तर्क दिया कि राज्य व्यवस्था को बहाल करने के लिए एकजुट होने से पहले विद्रोहियों के मुकदमे को शुरू करने से अराजकता बढ़ सकती है, इसलिए हमें पहले एकजुट होना चाहिए। धीरे-धीरे, यह मुद्दा एक गृहयुद्ध में बदल गया। सिफीन की लड़ाई में दोनों पक्षों में हताहतों की संख्या बढ़ गई। एक बिंदु पर, दोनों पक्षों ने चर्चा के माध्यम से मुद्दे को हल करने के लिए एक मध्यस्थता परिषद बनाई। इस स्तर पर, अली (रजि.) के अनुयायियों में से कई हजार लोग उनका पक्ष छोड़कर चले गए। उन्हें 'खरिजी' कहा जाता है, जिसका अर्थ है दगाबाज या विद्रोही। वे इस्लाम की दूसरी पीढ़ी के लोग थे, जिन्होंने अल्लाह के रसूल (सल्ल.) के गुजर जाने के बाद इस्लाम स्वीकार किया था। उनमें से लगभग सभी युवा थे। वे अत्यधिक धार्मिक, समर्पित और भावनात्मक मुसलमान थे। पूरी रात तहजुद बिताने और पूरे दिन जिक्र और कुरान पाठ करने के कारण, उन्हें 'कुर्रा' या 'कुरान-पाठ समूह' के रूप में अच्छी तरह से जाना जाता था। उन्होंने मांग की कि कुरान के कानून और अल्लाह के आदेश के अलावा कुछ भी शासन नहीं करेगा। अल्लाह का निर्देश अवज्ञाकारियों के खिलाफ लड़ना है। अल्लाह ने कहा: (وَإِنْ طَائِفَتَانِ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ اقْتَتَلُوا فَأَصْلِحُوا بَيْنَهُمَا فَإِن بَغَتْ إِحْدَاهُمَا عَلَى الْأُخْرَىٰ فَقَاتِلُوا الَّتِي تَبْغِي حَتَّىٰ تَفِيءَ إِلَىٰ أَمْرِ اللَّهِ) "और यदि विश्वास करने वालों में से दो गुट आपस में लड़ें, तो उनके बीच सुलह कराओ। लेकिन अगर उनमें से एक दूसरे पर अत्याचार करता है, तो अत्याचार करने वाले के खिलाफ तब तक लड़ो जब तक कि वह अल्लाह के आदेश पर वापस न आ जाए।" यहाँ, अल्लाह स्पष्ट निर्देश देता है कि अतिक्रमण करने वाले समूह के खिलाफ युद्ध तब तक जारी रखा जाना चाहिए जब तक कि वे वापस न आ जाएं। मुआविया (रजि.) का गुट अतिक्रमण करने वाला है, इसलिए युद्ध तब तक जारी रखा जाना चाहिए जब तक वे आत्मसमर्पण न कर दें। समर्पण से पहले युद्ध रोकना या इस मामले में मनुष्यों को मध्यस्थ बनाना अल्लाह द्वारा प्रकट किए गए कानून के विपरीत कानून बनाना है। इसके अलावा, अल्लाह ने कहा: (إِنِ الْحُكْمُ إِلَّا لِلَّهِ) "कानून बनाना केवल अल्लाह का है।" इसलिए, मनुष्यों को निर्णय लेने की जिम्मेदारी सौंपना कुरान के निर्देश का स्पष्ट उल्लंघन है। अल्लाह ने यह भी कहा: (وَمَنْ لَمْ يَحْكُمْ بِمَا أَنْزَلَ اللَّهُ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْكَافِرُونَ) "और जो कोई भी उस चीज़ से न्याय नहीं करता जो अल्लाह ने प्रकट किया है - तो वे ही अविश्वासी हैं।" चूंकि अली और उनके अनुयायियों ने अल्लाह के प्रकट कानून के अनुसार मुआविया के साथ युद्ध जारी नहीं रखा और मध्यस्थता के शासन को चुना, वे अविश्वासी बन गए हैं। उन्होंने दावा किया कि अली (रजि.), मुआविया (रजि.), और उनके सभी अनुयायी कुरान के कानून की अवहेलना करके अविश्वासी बन गए हैं। इसलिए, उन्हें तौबा (पश्चाताप) करना चाहिए। जब उन्होंने अपने कार्यों को एक अपराध के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया, तो उन्होंने उनके खिलाफ युद्ध शुरू कर दिया। खरिजी अपनी राय के पक्ष में कुरान की विभिन्न आयतों का हवाला देते रहे। अब्दुल्ला इब्न अब्बास (रजि.) और अन्य सहाबा ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि सहाबा, अल्लाह के रसूल (सल्ल.) के आजीवन साथी, कुरान और हदीस को समझने में सबसे कुशल थे। कुरान और हदीस का जो अर्थ आपने समझा है वह सही नहीं है; बल्कि, सहाबा की व्याख्या सही है। हालांकि कुछ लोगों ने इसके कारण उग्रवाद छोड़ दिया, बाकी लोगों ने अपनी राय को सही होने का दावा किया। वे सहाबा को एजेंट, समझौतावादी, अन्याय के सह-साक्षी आदि मानते थे, और उनके खिलाफ लड़कर इस्लाम स्थापित करने के लिए अपना संघर्ष जारी रखा। चूंकि मध्यस्थता प्रणाली अली (रजि.) और मुआविया (रजि.) के बीच विवाद को निपटाने में विफल रही, इसलिए उनके दावे और प्रचार मजबूत हो गए। वे भावनात्मक युवाओं को यह समझाते रहे कि सच्चाई कभी भी समझौते के माध्यम से स्थापित नहीं की जा सकती है। इसलिए, दीन को स्थापित करने के परिणामस्वरूप, एक साल के भीतर, उनकी संख्या 3-4 हजार से बढ़कर लगभग 25-30 हजार हो गई। 37 हिजरी में, अली (रजि.) के गुट को केवल 3-4 हजार लोगों ने छोड़ा था। फिर भी, 38 हिजरी में, नहरवान की लड़ाई में अली की सेना के खिलाफ खरिजी सेना में लगभग 25 हजार सैनिक मौजूद थे। उनका मानना था कि चूंकि अली (रजि.) और मुआविया (रजि.) ने मुस्लिम उम्मा को नास्तिकता में डुबो दिया था, इसलिए उनकी हत्या करना राष्ट्र को इस दलदल से बचाएगा। इस कारण से, अब्द अल-رحمن इब्न मुल्जाम नामक एक व्यक्ति ने 40 हिजरी में रमजान के महीने की 21 तारीख को फज्र की नमाज से पहले अपने घर से निकलते समय अली को एक जहरीली तलवार से मारा। अली (रजि.) की शहादत के बाद, जब उत्तेजित सैनिकों ने अब्द अल-رحمن के हाथ और पैर काट दिए, तो उसने दर्द का कोई संकेत नहीं दिखाया; बल्कि, उसने खुशी व्यक्त की। लेकिन जब वे उसकी जीभ काटना चाहते थे, तो उसने कड़ी आपत्ति और पीड़ा व्यक्त की। कारण पूछने पर उसने कहा, मैं अल्लाह के जिक्र को करते हुए शहीद के रूप में मरना चाहता हूँ! इस हत्यारे की प्रशंसा करते हुए, उनके एक कवि, इमरान इब्न हित्तन (84 हिजरी) ने कहा: "कितना महान था वह धर्मी, ईश्वर से डरने वाला व्यक्ति जिसने वह शानदार झटका मारा! उस झटके से, उसने सिंहासन के भगवान की प्रसन्नता के अलावा कुछ नहीं चाहा। मुझे अक्सर उसकी याद आती है और मैं उसे अल्लाह के सामने सबसे बड़ा इनाम रखने वाला मानता हूँ।"
अली (रजि.) और अन्य सहाबा ने उनकी भक्ति और धार्मिकता के कारण उनके प्रति गहरी सहानुभूति महसूस की। उन्होंने उन्हें उग्रवाद के मार्ग से मोड़ने के कई प्रयास किए। लेकिन सभी प्रयास विफल रहे। उन्होंने इस्लाम के अपने 'ब्रांड' या इस्लाम के अपने विचारों और व्याख्याओं को छोड़ने से इनकार कर दिया। अली से पूछा गया: क्या वे अविश्वासी हैं? उन्होंने कहा, वे कुफ्र से बचने के लिए भाग रहे हैं। कहा गया, तो क्या वे पाखंडी हैं? उन्होंने कहा, पाखंडी अल्लाह को बहुत कम याद करते हैं, जबकि ये लोग दिन-रात अल्लाह के जिक्र में लगे रहते हैं। कहा गया, तो वे क्या हैं? उन्होंने कहा, वे गुमराह और आत्म-पूजा के फितना में पड़ गए हैं, अंधे और बहरे बन गए हैं। इस्लाम स्थापित करने के लिए उनका संघर्ष बेहद ईमानदार था। अरबी साहित्य में, उनकी कविता इस्लामी उत्साह और जिहादी प्रेरणा का एक अतुलनीय खजाना है। उनकी धार्मिकता और ईमानदारी बेजोड़ थी। दिन-रात नफ्ल नमाज में लंबे समय तक सजदे में गिरने के कारण उनके माथे पर गट्टे (calluses) पड़ गए थे। यदि कोई उनके शिविरों से गुजरता, तो केवल कुरान पाठ की आवाज सुनाई देती थी। वे कुरान को पढ़कर या सुनकर रोते हुए बेहोश हो जाते थे। इसके साथ ही, उनकी क्रूरता और आतंकवाद भयानक था। 37 हिजरी से शुरू होकर, उनका आतंकवाद, हत्याएं और युद्ध अगले कई शताब्दियों तक जारी रहे। लगभग 64-70 हिजरी में, उन्होंने उसके और उमय्यद राजवंश के शासकों के बीच युद्ध में अब्दुल्ला इब्न अल-जुबैर का समर्थन किया। क्योंकि उनके अनुसार, वही थे जिन्होंने सच्चा इस्लामी शासन स्थापित किया था। लेकिन जब उन्होंने उस्मान (रजि.) और अली (रजि.) को अविश्वासी घोषित करने से इनकार कर दिया, और इसके अलावा उनकी प्रशंसा की, तो उन्होंने उनका विरोध करना शुरू कर दिया। लगभग 99-100 हिजरी में, उमय्यद खलीफा उमर इब्न अब्दुल अजीज ने उनकी धार्मिकता और भक्ति के कारण उन्हें सही रास्ते पर लाने की कोशिश की। वे उनकी ईमानदारी, न्याय और इस्लाम के पूर्ण पालन से सहमत थे। हालांकि, उनकी मांग थी कि उस्मान (रजि.) और अली (रजि.) को अविश्वासी घोषित किया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने अल्लाह के निर्देशों के विपरीत फैसले दिए। इसके अलावा, मुआविया (रजि.) और बाद के उमय्यद शासकों को भी अविश्वासी घोषित किया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने अल्लाह के विधान को छोड़ दिया और शासकों द्वारा गढ़े गए कानूनों के साथ देश पर शासन किया। उदाहरण के लिए, एक राजशाही स्थापित करना, शासक को अपनी मर्जी से खजाने के संसाधनों का उपयोग करने की शक्ति देना आदि। चूंकि उमर इब्न अब्दुल अजीज ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया, इसलिए शांति प्रयास विफल हो गए। अपने स्वयं के प्रशासन को इस्लाम के अनुसार स्वीकार करने के बावजूद, वे ऐसे अविश्वासियों के खिलाफ युद्ध जारी रखने के अपने निर्णय पर अडिग रहे। उनका मानना था कि एक मुस्लिम व्यक्ति इस्लामी व्यवस्था के उल्लंघन पर अविश्वासी में बदल जाता है। उन्होंने ऐसे अविश्वासियों के खिलाफ अपनी अवधारणा के अनुसार 'इस्लाम' स्थापित करने या इस्लामी व्यवस्था को "पूरी तरह से" लागू करने के लिए राज्य के नेतृत्व के बाहर समूहों में युद्ध किए। इसके अलावा, वे आम गैर-लड़ाकू पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को मारते रहे जो अली को अविश्वासी नहीं मानते थे। [14] यह उल्लेखनीय है कि अधिकांश सहाबा ने अली (रजि.) और मुआविया (रजि.) के बीच राजनीतिक असहमति और युद्ध में भाग लेने से परहेज किया। प्रसिद्ध ताबिई इब्न सिरिन (110 हिजरी) ने कहा, "जब फितना शुरू हुआ, तो हजारों सहाबा जीवित थे। उनमें से 100 सहाबा ने भी इसमें हिस्सा नहीं लिया। बल्कि, इसमें भाग लेने वाले सहाबा की संख्या 30 से कम थी।" इन सहाबा और अन्य सहाबा-ताबिईन ने नैतिक रूप से अली (रजि.) के कार्यों का समर्थन किया। वे कभी भी उन्हें पापी या इस्लाम का उल्लंघन करने वाला कहने के लिए सहमत नहीं होंगे। खरिजी उन्हें भी मार डालते थे, उन्हें अविश्वासी कहकर ब्रांड करते थे। एक नमूना देखें! सहाबी खब्बाब इब्न अल-अरत्त के बेटे अब्दुल्ला अपनी पत्नी और परिवार के साथ सड़क पर चल रहे थे। खरिजी ने उनसे उस्मान (रजि.) और अली (रजि.) के बारे में पूछताछ की। उन्होंने उनके बारे में अनुकूल टिप्पणी की और आतंकवाद और हत्या के भयानक परिणामों के बारे में एक हदीस सुनाई। फिर वे उसे नदी के किनारे ले गए, उसका गला काट दिया, और उसकी गर्भवती पत्नी और अन्य महिलाओं और बच्चों को मार डाला। इस समय, वे एक जगह पर आराम करने के लिए बैठ गए। वहाँ, एक खजूर के पेड़ से एक खजूर गिरा, और एक खरिजी ने उसे उठाया और अपने मुंह में डाल लिया। तब दूसरे ने कहा, तुमने बिना कीमत चुकाए किसी और की संपत्ति का उपभोग किया? उस व्यक्ति ने तुरंत खजूर थूक दिया। एक अन्य खरिजी ने एक सुअर को देखा और अपनी तलवार से उसके शरीर पर वार किया। तुरंत उसके दोस्तों ने यह कहते हुए विरोध किया, यह अन्याय है, तुम इस तरह अल्लाह की धरती पर अराजकता फैला रहे हो और किसी और की संपत्ति नष्ट कर रहे हो! फिर उन्होंने सुअर के गैर-मुस्लिम मालिक को ढूंढा, उसे पैसे दिए, और माफी मांगी। इस प्रकार, वे गैर-मुसलमानों के संबंध में इस्लाम की नरमी को स्वीकार कर रहे हैं, एक खजूर पर एक नौकर के अधिकार का उल्लंघन करने से डर रहे हैं, फिर भी वे इस्लाम के नाम पर विभिन्न बहानों पर एक साथी मुस्लिम को अविश्वासी कहकर मार रहे हैं और निहत्थी महिलाओं और बच्चों को भी मार रहे हैं।}}
अब्दुल्लाह जहांगीर खवारिज की प्राथमिक विशेषताओं के बारे में बताते हैं:
(1) इस्लाम के मार्गदर्शन या कुरान को समझने के मामले में अपनी समझ को अंतिम मानना। इस संबंध में सहाबा की राय के महत्व को नकारना।
(2) हदीस को स्वीकार करते हुए, चर्चा और विवादित मामलों में अल्लाह के रसूल (सल्ल.) के व्यावहारिक कार्यों और पद्धतियों के महत्व को नकारना।
(3) पाप के कारण किसी मुसलमान को अविश्वासी कहना।
(4) अजीवित अविश्वासियों को मारने के लिए थोक वैधता का दावा करना।
(5) राज्य की निष्ठा के शरिया महत्व को नकारना।
(6) राज्य के प्रमुख और राज्य प्रशासन के पापों के कारण राज्य को कुफ़्र का राज्य मानना।
(7) ऐसे राज्य प्रमुख का पालन करने वाले नागरिकों को अविश्वासी कहना।
(8) कुफ़्र के ऐसे राज्य और उसके नागरिकों के खिलाफ हथियार उठाना जायज समझना।
(9) जिहाद को फर्द ऐन (व्यक्तिगत दायित्व), सबसे बड़ा दायित्व और दीन का एक स्तंभ दावा करना।
(10) भलाई का आदेश देने और बुराई से रोकने के नाम पर सजा देना।
(11) उनकी राय का विरोध करने वाले सभी विद्वानों की उपेक्षा करना।
=== आधुनिक युग ===
{{Islamism sidebar |expanded=Concepts}}
==== यूरोपीय उपनिवेशवाद की प्रतिक्रिया ====
19वीं शताब्दी की अवधि के दौरान, मुस्लिम दुनिया के [[यूरोपीय उपनिवेशीकरण]] के साथ-साथ, [[अल्जीरिया पर फ्रांसीसी विजय]] (1830), [[भारत]] में [[दिल्ली की घेराबंदी|मुगल साम्राज्य का पतन]] (1857), [[कोकेशियान युद्ध|काकेशस में रूसी घुसपैठ]] (1828), और [[द ग्रेट गेम|मध्य एशिया]] (1830-1895) हुए, जो अंततः 20वीं शताब्दी (1908-1922) में [[उस्मानी साम्राज्य का पतन और विघटन|उस्मानी साम्राज्य के पतन और विघटन]] में समाप्त हुए।
यूरोपीय उपनिवेशीकरण के खिलाफ पहली मुस्लिम प्रतिक्रिया "किसानों और धर्म" के आसपास केंद्रित थी, शहरी क्षेत्रों में नहीं। "करिश्माई नेता", जो आमतौर पर "उलेमा" या धार्मिक समुदायों के सदस्य थे, ने "जिहाद" का आह्वान किया और जनजातीय गठबंधन बनाए। जनजातियों को एकजुट करने के लिए, स्थानीय प्रथागत कानूनों की उपेक्षा की गई और "शरिया" लागू किया गया। उदाहरणों में अल्जीरिया में अब्देलकाडर, सूडान में मुहम्मद अहमद, काकेशस में इमाम शामिल, लीबिया और चाड में सनूसी, अफगानिस्तान में मुल्ला-ई लैंग, भारत में स्वात के अखुंद, और बाद में मोरक्को में अब्देल-करीम शामिल हैं। 1842 में अफगानिस्तान में ब्रिटिश सेना के नरसंहार और 1885 में खartoum पर कब्जा जैसी शानदार जीत के बावजूद, इन सभी आंदोलनों अंततः विफल रहे।<ref>Roy, Olivier, ''The Failure of Political Islam'' by Olivier Roy, translated by Carol Volk, Harvard University Press, 1994, p.32</ref>
शती के बाद के हिस्से में और 20वीं शताब्दी की शुरुआत में यूरोपीय कब्जे के प्रति दूसरी मुस्लिम प्रतिक्रिया हिंसक प्रतिरोध नहीं थी, बल्कि कुछ पश्चिमी राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और तकनीकी साधनों को अपनाना था। शहरी कुलीन वर्ग के सदस्यों, विशेष रूप से [[मिस्र]], [[ईरान]] और [[तुर्की]] में, ने "पश्चिमीकरण" की वकालत की और उसका अभ्यास किया।<ref name=Feldman/>
राजनीतिक पश्चिमीकरण के प्रयासों की विफलता, कुछ के अनुसार, उस्मानी शासकों के [[तंज़ीमात]] पुनर्गठन द्वारा उदाहरण दी गई थी। शरिया को कानून में शामिल किया गया था ([[मजेल्ला]] के रूप में जाना जाता है) और कानूनों को अधिनियमित करने के लिए एक निर्वाचित विधायिका की स्थापना की गई थी। इन कदमों ने "[[उलेमा]]" को कानून की "खोज" करने की उनकी भूमिका से वंचित कर दिया, और पहले से शक्तिशाली विद्वान वर्ग कमजोर हो गया और धार्मिक कर्मचारियों में सिकुड़ गया, जबकि विधायिका को उसके उद्घाटन के एक साल से भी कम समय के भीतर निलंबित कर दिया गया था और कभी बहाल नहीं किया गया था, जिससे [[शक्तियों का पृथक्करण|शक्तियों का पृथक्करण]] समाप्त हो गया जहाँ उलेमा पहले सरकार की एक अलग "शाखा" के रूप में काम करते थे। p.71-76</ref> "या तो उलेमा के शरिया या एक निर्वाचित विधायिका के लोकप्रिय अधिकार द्वारा अनियंत्रित कार्यकारी का प्रतिमान बीसवीं शताब्दी के अधिकांश समय के लिए सुन्नी मुस्लिम दुनिया के अधिकांश हिस्से का प्रमुख प्रतिमान बन गया।"<ref name=feldman-fall-79>Feldman, Noah, ''Fall and Rise of the Islamic State'', Princeton University Press, 2008, p.79</ref>
==== इस्लामी राज्य की आधुनिक राजनीतिक विचारधारा ====
{{See also|Islamism|Islamic state|Islamization|Quietism in Islam}}
मध्ययुगीन विद्वानों की राय द्वारा प्रदान की गई वैधता के अलावा, सफल इस्लामी साम्राज्यों के दिनों के लिए पुरानी यादों को बाद में पश्चिमी उपनिवेशवाद के तहत उजागर किया गया था। इस पुरानी यादों ने इस्लामी राज्य की इस्लामी राजनीतिक विचारधारा में एक प्रमुख भूमिका निभाई है, एक ऐसा राज्य जहाँ इस्लामी कानूनसर्वोच्च है।<ref>{{citation|title=Liberal Democracy and Political Islam: the Search for Common Ground|last=Benhenda|first=M.|ssrn=1475928}}</ref> Islamist राजनीतिक कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य मौजूदा मुस्लिम राज्यों की सरकारों को पुनर्गठित करना है; लेकिन ऐसा करने के साधन विभिन्न आंदोलनों और संदर्भों में व्यापक रूप से भिन्न होते हैं। कई लोकतांत्रिक Islamist आंदोलन, जैसे जमात-ए-इस्लामी और मुस्लिम ब्रदरहुड, ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का उपयोग किया है और अन्य राजनीतिक दलों के साथ मतदान करने और गठबंधन बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है। तालिबान और अल-कायदा जैसे कट्टरपंथी इस्लामी आंदोलन जिहादवाद या उग्रवादी इस्लामी विचारधारा को गले लगाते हैं, और वे 1980 के दशक में अफगानिस्तान में सोवियत विरोधी प्रतिरोध में भाग लेने के लिए जाने जाते थे। उपर्युक्त दोनों उग्रवादी इस्लामी समूहों ने 11 सितंबर, 2001 के आतंकवादी हमलों में भूमिका निभाई और क्रमशः क्षेत्रीय सरकारों और संयुक्त राज्य अमेरिका को अपने "निकट" और "दूर" दुश्मनों के रूप में फंसाया।<ref name=":0">{{Cite book|title=The World Transformed, 1945 to the Present|last=Hunt|first=Michael|publisher=Oxford|year=2014|isbn=978-0-19-937102-0|location=New York City|pages=495}}</ref>
==== लोकतंत्र के साथ संगतता ====
{{Main|Islamic democracy}}
===== सामान्य मुस्लिम दृष्टिकोण =====
* लोकतांत्रिक सिद्धांतों के लिए समर्थन, जहाँ अधिकांश मामलों में यह माना जाता है कि वे इस्लाम के साथ संगत हैं, जो एक लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत जन कल्याण की भूमिका निभा सकता है, उदाहरण के लिए, [[अरब वसंत]] के विद्रोह में भाग लेने वाले कई कार्यकर्ता;
* शरिया के साथ असंगत माने जाने वाले पश्चिमी लोकतंत्र के कुछ पहलुओं के लिए धार्मिक और नैतिक आपत्तियों के साथ-साथ चुनावों जैसे लोकतांत्रिक तरीकों के लिए समर्थन, उदाहरण के लिए, [[युसूफ अल-करादवी]] जैसे इस्लामी विद्वान;
* पश्चिमी आयात के रूप में लोकतंत्र की अस्वीकृति और पारंपरिक इस्लामी संस्थानों के लिए समर्थन, जैसे कि ''[[शूरा]]'' (परामर्श परिषद) और ''[[इज्मा]]'' (आम सहमति), उदाहरण के लिए, निरंकुश राजतंत्रों और कट्टरपंथी इस्लामी आंदोलनों के समर्थक;
* यह विश्वास कि लोकतंत्र के लिए, धर्म को निजी जीवन तक सीमित रखा जाना चाहिए, मुस्लिम दुनिया में एक अल्पसंख्यक द्वारा आयोजित एक दृष्टिकोण।
मुस्लिम बहुसंख्यक देशों में गैलप और प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा किए गए सर्वेक्षण से पता चलता है कि अधिकांश मुसलमान लोकतांत्रिक मूल्यों और धार्मिक सिद्धांतों के बीच कोई संघर्ष नहीं देखते हैं। वे न तो धर्मतंत्र चाहते हैं और न ही एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र, बल्कि एक ऐसी राजनीतिक मॉडल चाहते हैं जहाँ लोकतांत्रिक संस्थान और मूल्य 'शरिया' के मूल्यों और सिद्धांतों के साथ सह-अस्तित्व में रह सकें।<ref>{{cite book|first1=John L.|last1=Esposito|first2=Natana J.|last2=DeLong-Bas|title=Shariah: What Everyone Needs to Know|url=https://archive.org/details/shariahwhatevery0000espo|publisher=Oxford University Press|year=2018|page=[https://archive.org/details/shariahwhatevery0000espo/page/145 145]}}</ref><ref>{{cite web|website=Pew Research Center|title=Most Muslims Want Democracy, Personal Freedoms, and Islam in Political Life|date=July 10, 2012|url=https://www.pewglobal.org/2012/07/10/most-muslims-want-democracy-personal-freedoms-and-islam-in-political-life/}}</ref><ref>{{cite web|website=Gallup|title=Majorities See Religion and Democracy as Compatible|date=Oct 3, 2017|author1=Magali Rheault|author2=Dalia Mogahed|url=https://news.gallup.com/poll/28762/majorities-muslims-americans-see-religion-law-compatible.aspx}}</ref>
===== सलाफी दृष्टिकोण =====
[[सलाफी]] विद्वान लोकतंत्र को हराम (निषिद्ध) मानते हैं,<ref name=i1>{{cite web |title=Democracy from the perspective of Islam - Islam Question & Answer |url=https://www.islamqa.info/bn/answers/98134 |website=[[IslamQA.info]] |access-date=August 2, 2022 |language=bn |date=January 22, 2015}}</ref> लेकिन इस्लामी शासन स्थापित करने के लिए लोकतंत्र का उपयोग करके मतदान करने और सत्ता में आने के अवसर को मान्य करते हैं,<ref name=i2>{{cite web |title=The ruling on democracy and elections and participating in the democratic process - Islam Question & Answer |url=https://islamqa.info/bn/answers/107166/%E0%A6%97%E0%A6%A3%E0%A6%A4%E0%A6%B0-%E0%A6%93-%E0%A6%A8%E0%A6%B0%E0%A6%AC%E0%A6%9A%E0%A6%A8%E0%A6%B0-%E0%A6%B9%E0%A6%95%E0%A6%AE-%E0%A6%8F%E0%A6%BC%E0%A6%AC-%E0%A6%97%E0%A6%A3%E0%A6%A4%E0%A6%B0%E0%A6%95-%E0%A6%AA%E0%A6%B0%E0%A6%95%E0%A7%9F%E0%A7%9F-%E0%A6%85%E0%A6%B6-%E0%A6%97%E0%A6%B0%E0%A6%B9%E0%A6%A3-%E0%A6%95%E0%A6%B0 |website=[[IslamQA.info]] |access-date=August 2, 2022 |language=bn}}</ref> और दो बुराइयों में से कम को चुनने के लिए मतदान को प्रोत्साहित करते हैं। इन विद्वानों में Shaykh [[अब्दुल अजीज बिन बाज]], Shaykh [[मुहम्मद इब्न अल-उसैमीन]], [[अब्दुल्लाह अल-घुदैयान]], अब्दुल्ला कुऊद, अब्द अर-रज्जाक अफ़ीफ़ी, और [[सऊदी अरब]] के वरिष्ठ विद्वान शामिल हैं: [[ग्रैंड मुफ्ती]] [[Shaykh]] [[अब्दुल-अजिल बिन अब्दुल्ला अल शेलख|अब्दुल-अजीज अल शेलख]], Shaykh अब्दुल मुहसिन अल-अब्बाद्, Shaykh वसीउल्लाह अब्बास, और सऊदी अरब के सबसे वरिष्ठ विद्वानों का फतवा पैनल, "[[स्थায়ী समिति के लिए इस्लामी अनुसंधान और फतवे जारी करने]]" (Permanent Committee for Islamic Research and Issuing Fatwas), ये सभी मुसलमानों को वोट देने के लिए प्रोत्साहित करने वाले समान कॉल गूंजते हैं।<ref>{{cite journal |first1=Shoaib |title=Scholstars Urge Western Muslims to Vote: Saudi Arabia |journal=Muslim World Journal |date=May 5, 2015 |url=https://www.muslimworldjournal.com/scholars-urge-western-muslims-to-vote-saudi-arabia/ |access-date=August 2, 2022 |archive-date=October 10, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20221010190359/https://www.muslimworldjournal.com/scholars-urge-western-muslims-to-vote-saudi-arabia/ |url-status=dead }}</ref>
फहद बिन सालेह अजलन अपनी पुस्तक अल-मुहर्रर फी सियासातश शरियाह में बताते हैं कि चुनाव पद्धति इस्लाम में वैध है लेकिन पारंपरिक लोकतांत्रिक व्यवस्था के माध्यम से नहीं; इसमें, राजनीतिक उम्मीदवारों को मुस्लिम और पुरुष होना चाहिए, और मतदाताओं को भी मुस्लिम और पुरुष होना चाहिए; महिलाएं और गैर-मुस्लिम शूरा में भाग ले सकते हैं लेकिन वोट नहीं दे सकते हैं; राज्य के प्रमुख की शक्ति की समय सीमा भी तय की जा सकती है, हालांकि यह फर्द (अनिवार्य) नहीं है, बल्कि जाइज (अनुमत) है।<ref name=fa/>
===== इस्लामी राजनीतिक सिद्धांत =====
मुस्लिह और ब्राउअर्स ने प्रमुख मुस्लिम विचारकों के बीच लोकतंत्र पर तीन मुख्य दृष्टिकोणों की पहचान की है जो इस्लामी मूल्यों और कानून के अनुकूल सामाजिक-राजनीतिक संगठन के आधुनिक, अलग इस्लामी सिद्धांतों को विकसित करने की मांग कर रहे हैं:<ref>{{cite encyclopedia|last1=Muslih|first1=Muhammad|last2=Browers|first2=Michaelle|title=Democracy|encyclopedia=The Oxford Encyclopedia of the Islamic World|editor=John L. Esposito|publisher=Oxford University Press|location=Oxford|year=2009|url=http://www.oxfordislamicstudies.com/print/opr/t236/e0185|access-date=November 1, 2020|archive-date=June 11, 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170611235451/http://www.oxfordislamicstudies.com/print/opr/t236/e0185|url-status=dead}}</ref>
* एक अस्वीकृतिवादी इस्लामी दृष्टिकोण, जिसे [[सैयद कुतुब]] और [[अबुल अला मौदूदी]] द्वारा प्रतिपादित किया गया है।
* एक मध्यम इस्लामी दृष्टिकोण, जो ''[[मस्लहा]]'' (सार्वजनिक विचार), ''[[अद्ल]]'' (न्याय) और शूरा पर जोर देता है। इस दृष्टिकोण को [[हसन अल-तुराबी]], [[रशीद घन्नौची]] और [[युसुफ अल-करादवी]] द्वारा अलग-अलग तरीकों से प्रचारित किया जाता है।
* [[मुहम्मद अब्दुह]] द्वारा धर्म को समझने में कारण की भूमिका पर जोर देने से प्रभावित एक उदार इस्लामी दृष्टिकोण। यह बहुलवाद और विचार की स्वतंत्रता पर आधारित लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर जोर देता है। फहमी हुवैदी और तारिक अल-बिश्री जैसे लेखकों ने शुरुआती इस्लामी ग्रंथों पर ड्राइंग करके एक इस्लामी राज्य में गैर-मुसलमानों की पूर्ण नागरिकता के लिए इस्लामी औचित्य तैयार किया है। अन्य, जैसे कि [[मोहम्मद अर्कून]] और [[नसर हामिद अबू जैद]], ने पाठ की व्याख्या के लिए गैर-पाठवादी दृष्टिकोण के माध्यम से बहुलवाद और स्वतंत्रता को उचित ठहराया है। [[अब्दोलकरिम सोरूश]] ने धार्मिक विचार के आधार पर एक "धार्मिक लोकतंत्र" के लिए तर्क दिया है जो लोकतांत्रिक, सहिष्णु और न्यायसंगत है। इस्लामी उदारवादी धार्मिक समझ की निरंतर पुन: परीक्षा की आवश्यकता के लिए तर्क देते हैं, जो केवल एक लोकतांत्रिक संदर्भ के भीतर किया जा सकता है।
==== 20वीं और 21वीं शताब्दी ====
{{Main|1973 oil crisis|War in Afghanistan (1978–present)|Arab Cold War|Arab–Iranian conflict|Arab–Israeli conflict|Arab Spring|Arab Winter|War on terror}}
{{seealso|Antisemitism in the Arab world|Anti-Zionism|History of Egypt under Gamal Abdel Nasser|International propagation of Salafism and Wahhabism|Iran–Saudi Arabia proxy conflict|Petro-Islam|Relations between Nazi Germany and the Arab world|Grand Mosque seizure|Six-Day War|Yom Kippur War|War of Attrition}}
प्रथम विश्व युद्ध के बाद, उस्मानी साम्राज्य के पतन और विघटन, और तुर्की के संस्थापक मुस्तफा केमल अतातुर्क द्वारा खलीफत के बाद के उन्मूलन के बाद, कई मुसलमानों को एहसास हुआ कि उनके धर्म की राजनीतिक शक्ति कम हो रही है। मुस्लिम समाजों में पश्चिमी विचारों और प्रभाव के प्रसार के बारे में भी चिंता थी। इससे यूरोपीय शक्तियों के प्रभाव के खिलाफ व्यापक नाराजगी पैदा हुई। अंग्रेजों का विरोध करने और परेशान करने के लिए मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड का गठन किया गया था।
1960 के दशक में, अरब दुनिया में प्रमुख विचारधारा पैन-अरबवाद थी, जिसने धर्म को हाशिए पर धकेल दिया और इस्लाम के बजाय अरब राष्ट्रवाद के आधार पर समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष राज्यों के गठन को प्रोत्साहित किया (देखें, उदाहरण के लिए, बाथवाद और तुर्की में धर्मनिरपेक्षता)। हालांकि, अरब राष्ट्रवाद पर बनी सरकारों को आर्थिक स्थिरता और अराजकता का सामना करना पड़ा। तेजी से, इन राज्यों की सीमाओं को कृत्रिम औपनिवेशिक कृतियों के रूप में देखा जा रहा था - जो कि वे वास्तव में थे, क्योंकि वे शाब्दिक रूप से यूरोपीय औपनिवेशिक शक्तियों द्वारा मानचित्र पर खींचे गए थे।
==== समकालीन आंदोलन ====
इस्लाम में कुछ सामान्य राजनीतिक धाराओं में शामिल हैं:
* [[सुन्नी इस्लाम|सुन्नी]] [[पारंपरिक धर्मशास्त्र (इस्लाम)|पारंपरिक सिद्धांत]], जो कुरान, हदीस और सुन्नत की पारंपरिक टिप्पणियों को स्वीकार करता है, और चार मध्हबों (शफ़ीई, मालिकी, हनाफ़ी, हनबली) में से किसी एक का पालन करते हुए, ताक्लिद (अनुकरण) को अपना मूल सिद्धांत मानता है, और इसमें सूफीवाद भी शामिल हो सकता है। सूफी पारंपरिकता का एक उदाहरण पाकिस्तान में बरेलवी मध्हब है।<ref>Olivier Roy, The Failure of Political Islam, (1994) pp. 30-31</ref>
* [[इस्लामी कट्टरपंथ|कट्टरपंथी सुधारवाद]] या [[इस्लामी पुनरुत्थान|पुनरुत्थानवाद]], जो इस्लामी धर्मशास्त्र, तफ़सीर, मुस्लिम संतों के तीर्थस्थलों और कब्रों पर जाने और उनकी पूजा करने जैसी लोकप्रिय धार्मिक प्रथाओं, और कथित विचलनों और अंधविश्वासों की आलोचना करता है; इसका लक्ष्य इस्लाम के संस्थापक शास्त्रों पर लौटना है। यह कट्टरपंथी सुधारवाद आमतौर पर एक कथित बाहरी खतरे (उदाहरण के लिए, हिंदू-इस्लामी संबंधों) के जवाब में विकसित हुआ। 18वीं शताब्दी के उदाहरणों में ब्रिटिश भारत में शाह वलीउल्लाह देहलवी और अरब प्रायद्वीप में मुहम्मद इब्न अब्द-अल-वहाब (वहाबीवाद के संस्थापक) शामिल हैं।<ref>Olivier Roy, Failure of Political Islam, (1994) p. 31</ref> सलाफी आंदोलन, भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में देवबन्दी धारा, और दक्षिण एशिया में तबलीगी जमात कट्टरपंथी सुधारवाद और पुनरुत्थानवाद के आधुनिक उदाहरण हैं।
* [[इस्लामवाद]] या [[राजनीतिक इस्लाम]], 'शरिया' या इस्लामी कानून पर लौटने को गले लगाता है, लेकिन 'क्रांति', 'विचारधारा', 'राजनीति' और 'लोकतंत्र' जैसी पश्चिमी शर्तों को अपनाता है, और 'जिहाद' और 'महिला अधिकारों' जैसे विषयों के प्रति अधिक उदार रवैया रखता है।<ref>Olivier Roy, The Failure of Political Islam. (1994) pp. 35-37</ref> समकालीन उदाहरणों में जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान, मुस्लिम ब्रदरहुड, ईरानी इस्लामी क्रांति, मस्युमी पार्टी, यूनाइटेड मलय नेशनल ऑर्गनाइजेशन, पैन-मलेशियन इस्लामिक पार्टी, और जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (तुर्की) शामिल हैं।
* [[इस्लाम के भीतर उदारवादी आंदोलन|इस्लाम के तहत उदारवादी आंदोलन]], आमतौर पर खुद को इस्लामी राजनीतिक आंदोलनों के विरोध में परिभाषित करते हैं, लेकिन अक्सर इसके कई साम्राज्यवाद-विरोधी और इस्लाम-प्रेरित उदारवादी सुधारवादी तत्वों को अपनाते हैं।
===== सुन्नियों और शियाओं के बीच अंतर =====
{{Main|Shia–Sunni relations}}
विद्वान वली नस्र के अनुसार, सुन्नी और शिया इस्लामी विचारधाराओं की राजनीतिक प्रवृत्तियाँ भिन्न हैं। पाकिस्तान और अरब दुनिया के अधिकांश हिस्सों में सुन्नी इस्लामी पुनरुत्थानवाद राजनीतिक रूप से क्रांतिकारी नहीं है, जबकि शिया राजनीतिक इस्लाम रूहुल्लाह खुमैनी और गरीबों के उत्पीड़न और वर्ग संघर्ष के संबंध में उनकी बयानबाजी से भारी प्रभावित है। सुन्नी पुनरुत्थानवाद की जड़ें रूढ़िवादी धार्मिक प्रेरणाओं और बाजार में हैं, जहाँ धार्मिक मूल्य वाणिज्यिक हितों के साथ विलीन हो जाते हैं। ... खुमैनी के इस्लामवाद ने गरीबों को शामिल किया और वर्ग संघर्ष की बात की।
<blockquote>पुनरुत्थानवाद के रूप में कट्टरपंथ और क्रांति के रूप में कट्टरपंथ के बीच यह विभाजन गहरा था, और लंबे समय तक इसने सुन्नियों के बीच सांप्रदायिक विभाजन से कड़ाई से मेल खाया—मुस्लिम दुनिया में पारंपरिक 'धनी' समूह, जो रूढ़िवादी धार्मिकता में अधिक रुचि रखते हैं—और शिया—लंबे समय से बाहरी लोग, जो 'कट्टरपंथी सपनों और साजिशों' की ओर अधिक आकर्षित होते हैं।<ref>''The Shia Revival: How Conflicts within Islam will shape the future'' by Vali Nasr, Norton, 2006, p.148-9</ref></blockquote>
ग्राहम फुलर यह भी नोट करते हैं कि उन्होंने "किसी भी मुख्यधारा के इस्लामी संगठन (शिया ईरान को छोड़कर) को नहीं पाया है जिसका सामाजिक प्रणाली के प्रति क्रांतिकारी दृष्टिकोण हो या कानूनी निर्णय थोपने के अलावा कट्टर सामाजिक विचार हों।"<ref>Fuller, Graham E., ''The Future of Political Islam'', Palgrave MacMillan, (2003), p.26</ref>
== टिप्पणियाँ ==
{{reflist|group=Note}}
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
== और पढ़ें ==
* [https://xeroxtree.com/pdf/shoriyoti_rastro_bebostha.pdf शरियती राज्य व्यवस्था - इब्न तैमियाह (सियासत अल-शरिया पुस्तक का बंगाली अनुवाद)] (PDF)
* [https://www.kalamullah.com/Books/Al-Ahkam%20as-Sultaniyyah.pdf अल-अहकाम अस-सुलतानियाह - अल-मावर्दी (अंग्रेजी अनुवाद)] (PDF)
* शरिया राजनीति ([https://h1.nu/1vSve पुस्तक 'अल-मुहर्रर फी सियासातश शरिय्यह' (शरिया राजनीति पर लेख) का अनुवाद (2022) - मूल: फहद बिन सालेह अल-अजलन] - अनुवादक: अब्दुल्ला मजुमदार - 2025 [https://archive.org/download/20240606_20240606_1949/%D8%A7%D9%84%D9%85%D8%AD%D8%B1%D8%B1%20%D9%81%D9%8A%20%D8%A7%D9%84%D8%B3%D9%8A%D8%A7%D8%B3%D8%A9%20%D8%A7%D9%84%D8%B4%D8%B1%D8%B9%D9%8A%D8%A9%20%D8%B7%D1%A2.pdf (मूल अरबी)]
* {{cite book|last1=बाज़मौल|first1=मुहम्मद इब्न उमर इब्न सालिम|last2=बिन तोफज्जाल|first2=हबीब|last3=जकारिया|first3=अबू बक्र मुहम्मद|title=दिस इज़ नॉट द मनहाज ऑफ़ द सलाफ|date=नवंबर 2021|publisher=बिलीवर्स विजन|location=ढाका|isbn=978-984-35-0960-4}}
* [https://repository.library.georgetown.edu/handle/10822/552601 इस्लाम और राजनीति] - [https://repository.library.georgetown.edu/handle/10822/552494 डीन पीटर क्रोग फॉरेन अफेयर्स डिजिटल आर्काइव्स] से
* [https://ssrn.com/abstract=1475928 उदार लोकतंत्र और राजनीतिक इस्लाम: सामान्य आधार की खोज]
* [https://web.archive.org/web/20080216024026/http://www.salafimanhaj.com/pdf/SalafiManhaj_Terrorism_In_KSA.pdf सऊदी अरब में आतंकवाद और हिंसा की विचारधारा: उत्पत्ति, कारण और समाधान]
* [http://www.washington-report.org/backissues/0994/9409021.htm इस्लामी आंदोलन का मूल्यांकन] - ग्रेग नोक्स द्वारा, एक अमेरिकी मुस्लिम जो ''वाशिंगटन रिपोर्ट'' में काम करते हैं।
* [http://www.washington-report.org/backissues/0695/9506017.htm मुस्लिम विद्वान कट्टरपंथ का सामना करते हैं] - [[आइचा लेम्सिन]] द्वारा, एक अल्जीरियाई पत्रकार और लेखिका।
* [http://cdm164001.cdmhost.com/krogh/item_viewer.php?CISOROOT=/p164001coll21&CISOPTR=195&CISOBOX=1&REC=2 पीटर क्रोग जॉन एल. एस्पोसिटो और मैरी जेन डीब के साथ इस्लाम और राजनीति पर चर्चा करते हैं] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110813071517/http://cdm164001.cdmhost.com/krogh/item_viewer.php?CISOROOT=%2Fp164001coll21&CISOPTR=195&CISOBOX=1&REC=2 |date=13 अगस्त 2011 }} ''ग्रेट डिसीजंस'' (1994) पर।
* [https://d1.islamhouse.com/data/bn/ih_articles/single3/bn_somaj_songoskare_sothik_aqidar_gurutto.pdf सामाजिक सुधार में सही अकीदे का महत्व, लेखक: मोहम्मद मंजूर इलाही, संपादक: अबू बक्र मुहम्मद जकारिया, प्रकाशक: रबुवाह में इस्लामिक प्रोपेगेशन ऑफिस, (रियाद, सऊदी अरब)]
* [https://ahlehadeethbd.org/books_pdf/58.netritter_moh_by_Muhammad_Saleh_Al_-Munajjid.pdf नेतृत्व की चाह, मूल: सालेह अल-मुनज्जिद, अनुवादक: अब्दुल मालेक - हदीस फाउंडेशन बांग्लादेश] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20230405002813/https://ahlehadeethbd.org/books_pdf/58.netritter_moh_by_Muhammad_Saleh_Al_-Munajjid.pdf |date=5 अप्रैल 2023 }}
* [https://d1.islamhouse.com/data/bn/ih_articles/single3/bn_netritto_ak_mohan_dayitto.pdf नेतृत्व एक महान दायित्व है - लेखक: कमाल उद्दिन मोल्ला - संपादक: अबू बक्र मुहम्मद जकारिया]
* {{cite book|last1=जकारिया|first1=डॉ. अबू बक्र मुहम्मद|title=इस्लामी कानून की अवहेलना का حکم (शासन)|date=1 जनवरी 2020|publisher=उसौल सेंटर|url=https://books.google.com.bd/books/about/%E0%A6%87%E0%A6%B8%E0%A6%B2%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A7%80_%E0%A6%86%E0%A6%87%E0%A6%A8_%E0%A6%A8%E0%A6%BE_%E0%A6%AE.html?id=VyD5DwAAQBAJ&redir_esc=y|language=ar}}
* {{cite book|last1=बाज|first1=अब्दुल अजीज इब्न अब्दुल्ला इब्न|title=इस्लाम और वास्तविकता के आलोक में अरब राष्ट्रवाद|url=https://islamhouse.com/bn/books/364813/|language=bn}}
* [http://ahlehadeethbd.org/books_pdf/34.islami_andolone_bijoyer_shorup_by_prof._dr._muhammad_asadullah_al-ghalib.pdf इस्लामी आंदोलन में विजय का वास्तविक स्वरूप - नासिर बिन सुलेमान अल-ओमार - अनुवादक: अब्दुल मालेक - हदीस फाउंडेशन बांग्लादेश] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20220911014609/http://ahlehadeethbd.org/books_pdf/34.islami_andolone_bijoyer_shorup_by_prof._dr._muhammad_asadullah_al-ghalib.pdf |date=11 सितंबर 2022 }}
* [http://ahlehadeethbd.org/books_pdf/shariater_aloke_jamatboddho_prochesta_by_muhammad_abdul_malak.pdf शरिया के आलोक में संगठित प्रयास - अब्दुर रहमान बिन अब्दुल खालेक - अनुवादक: अब्दुल मालेक - हदीस फाउंडेशन बांग्लादेश] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20230415163341/https://ahlehadeethbd.org/books_pdf/shariater_aloke_jamatboddho_prochesta_by_muhammad_abdul_malak.pdf |date=15 अप्रैल 2023 }}
* [https://ahlehadeethbd.org/books_pdf/67.jamatboddho_jibon_japon_dr.%20hafej_bin_muhammad_al-hakami.pdf समाज में संगठित जीवन जीने की आवश्यकता - हाफेज बिन मुहम्मद अल-हकामी - अनुवादक: मुहम्मद अब्दुर रहीम - हदीस फाउंडेशन बांग्लादेश] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20230405045610/https://ahlehadeethbd.org/books_pdf/67.jamatboddho_jibon_japon_dr.%20hafej_bin_muhammad_al-hakami.pdf |date=5 अप्रैल 2023 }}
* [http://ahlehadeethbd.org/books_pdf/14.iqamate-din-poth-o-podhoti_by_prof._dr._muhammad_asadullah_al-ghalib.pdf इकामत-ए-दीन (धर्म की स्थापना): मार्ग और पद्धति - मुहम्मद असदुल्लाह अल-गालिब - हदीस फाउंडेशन बांग्लादेश] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20230405002812/http://ahlehadeethbd.org/books_pdf/14.iqamate-din-poth-o-podhoti_by_prof._dr._muhammad_asadullah_al-ghalib.pdf |date=5 अप्रैल 2023 }}
* [https://archive.org/download/20200422_20200422_0912/%E0%A6%AD%E0%A7%8D%E0%A6%B0%E0%A6%BE%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%A4%E0%A6%BF%E0%A6%B0_%E0%A6%AC%E0%A7%80%E0%A6%A1%E0%A6%BC%E0%A6%BE%E0%A6%9C%E0%A6%BE%E0%A6%B2%E0%A7%80_%E0%A6%87%E0%A6%95%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A6%A4%E0%A7%80_%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%CC%E0%A6%A8_%E0%A6%AE%E0%A7%81%E0%A6%9C%E0%A6%BE%E0%A6%AB%E0%A6%AB%E0%A6%B0_%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%An_%E0%A6%AE%E0%A6%B9%E0%A6%B8%E0%A6%BF%E0%A6%A8.pdf भ्रान्तियों के जाल में इकामत-ए-दीन - मुजफ्फर बिन मोहसिन - बांग्लादेश अहलेहदीस यूथ एसोसिएशन]
* [https://www.hadithbd.com/books/section/?book=50 इस्लाम के नाम पर उग्रवाद - खोंदोकर अब्दुल्ला जहांगीर - अस-सुन्नत पब्लिकेशन्स]
* [https://cwibd.com/wp-content/uploads/2025/04/bn_allahor_pothe_dawat.pdf अल्लाह की राह की ओर दावत - खोंदोकर अब्दुल्ला जहांगीर - संपादित: अबू बक्र मुहम्मद जकारिया]
* [https://ahlehadeethbd.org/books_pdf/islami_khelafot_o_netritto_nirbachon_by_prof._dr._muhammad_asadullah_al-ghalib.pdf इस्लामी खिलाफत और नेतृत्व का चयन - असदुल्लाह अल-गालिब - हदीस फाउंडेशन बांग्लादेश]
* [https://library.hadeethfoundationbd.com/books_pdf/03.dawat_o_Jihad_by_prof._dr._muhammad_asadullah_al-ghalib.pdf दावत और जिहाद - असदुल्लाह अल-गालिब - हदीस फाउंडेशन बांग्लादेश]
* [https://ahlehadeethbd.org/books_pdf/27.jihad_o_qital_by%2520prof.%2520dr.%2520muhammad%2520asadullah%2520al-ghalib.pdf जिहाद और किताल - असदुल्लाह अल-गालिब - हदीस फाउंडेशन बांग्लादेश] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20260210190854/https://ahlehadeethbd.org/books_pdf/27.jihad_o_qital_by%20prof.%20dr.%20muhammad%20asadullah%20al-ghalib.pdf |date=2026-02-10 }}
* [https://library.hadeethfoundationbd.com/books_pdf/18.tinti_motobad_by_prof._dr._muhammad_asadullah_al-ghalib_HFB.pdf तीन विचारधाराएं - असदुल्लाह अल-गालिब - हदीस फाउंडेशन बांग्लादेश]
* [https://archive.org/download/20200417_20200417_0801/%E0%A6%95%E0%A7%85%20%E0%A6%AC%E0%A7%Validity%20%E0%A6%B2%E0%A6%BE%E0%A6%AD%E0%A6%BE%E0%A6%A8_%E0%A6%86%E0%A6%AC%E0%A7%8D%E0%A6%A6%E0%A7%81%E0%A6%B0_%E0%A6%B0%E0%A6%BE%E0%A6%9得意%E0%A7%8D%E0%A6%9C%E0%A6%BE%E0%A6%9%20%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%An_%E0%A6%89%E0%A6%B8%E0%A7%81%E0%A6%AB.pdf सबसे अधिक लाभ पाने वाला कौन है - अब्दुर रज्जाक बिन यूसुफ - अल-मरकजुल इस्लामी अस्सलाफी - दिसंबर 2011]
* {{cite book|url=https://h1.nu/1qucx|last1=सलाम|first1=अक्रामउज्जमान बिन अब्दुस|title=इस्लाम की दृष्टि में अतिवाद, उग्रवाद और आतंकवाद|date=2022|publisher=इह्या-उस सुन्नत फाउंडेशन|isbn=978-984-99665-5-5|location=ढाका}}
* {{cite book|last1=सैफुल्लाह|first1=मुहम्मद|title=आतंकवाद, उग्रवाद और अतिवाद: इस्लामी परिप्रेक्ष्य (निबंध संग्रह)|date=नवंबर 2016|publisher=इंटरनेशनल इस्लामिक इंस्टीट्यूट फॉर एजुकेशन एंड रिसर्च|location=ढाका|url=https://h1.nu/1vSwf}}
[[Category:राजकीय राजनीति]]
[[Category:इस्लाम]]
[[Category:इस्लाम और राजनीति]]
{{stub}}
5as5szhg5agrm8naerp1yr6foto8lyo
वार्ता:थूम्बली
1
1616304
6591520
2026-07-24T10:12:25Z
Dsrprj
780832
/* */ वार्ता
6591520
wikitext
text/x-wiki
{{वार्ता}}
rx4y4d1zqqpgtxe9j5l0nrs92zf5d03
सदस्य वार्ता:FlyingSaturn
3
1616306
6591525
2026-07-24T11:06:18Z
Cabayi
135589
Cabayi ने पृष्ठ [[सदस्य वार्ता:FlyingSaturn]] को [[सदस्य वार्ता:WanderingNeptune]] पर स्थानांतरित किया: "[[Special:CentralAuth/FlyingSaturn|FlyingSaturn]]" का नाम "[[Special:CentralAuth/WanderingNeptune|WanderingNeptune]]" करते समय पृष्ठ स्वतः स्थानांतरित हुआ
6591525
wikitext
text/x-wiki
#पुनर्प्रेषित [[सदस्य वार्ता:WanderingNeptune]]
6c7ncvb006hlfkxpr8axlzlbrlij1n3
उम्मुल वलद
0
1616307
6591527
2026-07-24T11:49:22Z
Umarkairanvi
13754
"[[:en:Special:Redirect/revision/1355395164|Umm al-walad]]" पृष्ठ का अनुवाद करके निर्मित किया गया
6591527
wikitext
text/x-wiki
[[चित्र:Khourrem.jpg|दाएँ|अंगूठाकार| क्रीमिया के दास व्यापार की शिकार [[ख़ुर्रम सुल्तान|रोक्सेलाना]], उस समय एक ''उम अल-वलाद'' बन गई जब उसने एक ऐसे बच्चे को जन्म दिया जिसे उसके दास बनाने वाले सुल्तान [[सुलेमान प्रथम|सुलेमान द मैग्निफिसेंट]] ने स्वीकार किया था।]]
'''उम्मुल वलद''' या '''''उम्म अल-वलद''''' ''':''' [[इस्लामी दुनिया]] में [[फ़िक़्ह]] के अनुसार एक दासी (ग़ुलाम) को दिया गया क विशेष कानूनी शब्द था जिसने बच्चे को जन्म दिया था जिसे उसके स्वामी ने अपना मान लिया था। {{Sfn|Gordon|Hain|2017|p=301}} इन महिलाओं को संपत्ति माना जाता था और उनके मालिकों द्वारा बेचा जा सकता था, एक ऐसी प्रथा जो पैगंबर [[मुहम्मद]] के नियमों के तहत उस समय अनुमत थी। {{Sfn|Gordon|Hain|2017|pp=312, 314}}
मुहम्मद की मृत्यु के बाद [[उमर|उमर ने]] अपने खलीफा काल के दौरान एक नीति को अधिकृत किया, जिसमें मालिकों को अपनी ''उम्म अल-वलद को'' बेचने या उपहार में देने से प्रतिबंधित किया गया था और उनके मालिकों की मृत्यु पर उन्हें स्वतंत्रता प्रदान की जाएगी। {{Sfn|Gordon|Hain|2017|p=308}} {{Sfn|Nagel|2020|p=174}} [[अली इब्न अबी तालिब|अली]] जो मुहम्मद के चचेरे भाई और दामाद थे ने शुरू में उमर के फैसले से सहमति जताई थी। हालाँकि उमर की मृत्यु और [[उस्मान बिन अफ़्फ़ान|उस्मान]] की मृत्यु के बाद जिन्होंने इस नीति को बनाए रखा अली ने अपने [[खिलाफत]] के बाद के काल में इसे उलट दिया, यह घोषणा करते हुए कि मालिक के बच्चे को जन्म देने के बावजूद भी ''उम्म अल-वलाद'' अभी भी बिक्री योग्य है। {{Sfn|Gordon|Hain|2017|pp=298, 314–5}} {{Sfn|Zysow|2014|p=138}}
== इन्हें भी देखें ==
* [[इस्लामिक यौन न्यायशास्त्र|इस्लामी यौन न्यायशास्त्र]]
* [[गुलामी पर इस्लाम के विचार|दासता पर इस्लामी दृष्टिकोण]] ([[गुलामी पर इस्लाम के विचार]])
* [[ख़ातून|हातुन]]
== संदर्भ ==
<templatestyles src="Reflist/styles.css" />
[[श्रेणी:फ़िक़ह]]
[[श्रेणी:अरबी शब्द]]
[[श्रेणी:अरबी शब्द और वाक्यांश]]
1p30c0cx7oj4d7xld3skozjj4y9hkkq
6591528
6591527
2026-07-24T11:51:54Z
Umarkairanvi
13754
विस्तार
6591528
wikitext
text/x-wiki
[[चित्र:Khourrem.jpg|दाएँ|अंगूठाकार| क्रीमिया के दास व्यापार की शिकार [[ख़ुर्रम सुल्तान|रोक्सेलाना]], उस समय एक ''उम अल-वलाद'' बन गई जब उसने एक ऐसे बच्चे को जन्म दिया जिसे उसके दास बनाने वाले सुल्तान [[सुलेमान प्रथम|सुलेमान द मैग्निफिसेंट]] ने स्वीकार किया था।]]
'''उम्मुल वलद''' या '''''उम्म अल-वलद''''' ''':''' [[इस्लामी दुनिया]] में [[फ़िक़्ह]] के अनुसार एक दासी (ग़ुलाम) को दिया गया क विशेष कानूनी शब्द था जिसने बच्चे को जन्म दिया था जिसे उसके स्वामी ने अपना मान लिया था। {{Sfn|Gordon|Hain|2017|p=301}} इन महिलाओं को संपत्ति माना जाता था और उनके मालिकों द्वारा बेचा जा सकता था, एक ऐसी प्रथा जो पैगंबर [[मुहम्मद]] के नियमों के तहत उस समय अनुमत थी। {{Sfn|Gordon|Hain|2017|pp=312, 314}}
मुहम्मद की मृत्यु के बाद [[उमर|उमर ने]] अपने खलीफा काल के दौरान एक नीति को अधिकृत किया, जिसमें मालिकों को अपनी ''उम्म अल-वलद को'' बेचने या उपहार में देने से प्रतिबंधित किया गया था और उनके मालिकों की मृत्यु पर उन्हें स्वतंत्रता प्रदान की जाएगी। {{Sfn|Gordon|Hain|2017|p=308}} {{Sfn|Nagel|2020|p=174}} [[अली इब्न अबी तालिब|अली]] जो मुहम्मद के चचेरे भाई और दामाद थे ने शुरू में उमर के फैसले से सहमति जताई थी। हालाँकि उमर की मृत्यु और [[उस्मान बिन अफ़्फ़ान|उस्मान]] की मृत्यु के बाद जिन्होंने इस नीति को बनाए रखा अली ने अपने [[खिलाफत]] के बाद के काल में इसे उलट दिया, यह घोषणा करते हुए कि मालिक के बच्चे को जन्म देने के बावजूद भी ''उम्म अल-वलाद'' अभी भी बिक्री योग्य है। {{Sfn|Gordon|Hain|2017|pp=298, 314–5}} {{Sfn|Zysow|2014|p=138}}
अली के दृष्टिकोण को अंततः [[शिया इस्लाम|शिया धर्म]] में शामिल कर लिया गया साथ ही [[निकाह मुताह|अस्थायी विवाहों]] (निकाह मुताह) की स्वीकृति भी मिल गई। दूसरी ओर [[सुन्नी इस्लाम|सुन्नी]] न्यायशास्त्र के सभी प्रमुख कानूनी स्कूल उमर के इस दृष्टिकोण को अपनाते हैं कि ''उम्म अल-वलद को'' बेचा नहीं जाना चाहिए और उसके स्वामी की मृत्यु के बाद उसे स्वतंत्रता दी जानी चाहिए। {{Sfn|Gordon|Hain|2017|p=315}} ''उम्म अल-वलद'' से उसके स्वामी से पैदा हुए बच्चे स्वतंत्र और वैध माने जाते थे, और उनके साथ अक्सर स्वामी की स्वतंत्र पत्नियों से पैदा हुए अन्य बच्चों के समान व्यवहार किया जाता था। {{Sfn|Gordon|Hain|2017|p=229, 327}} 740 मेंज़ैद इब्न अली द्वारा खिलाफत के लिए किया गया असफल प्रयास गुलाम मातृ मूल के नेताओं के पक्ष में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ और 744 में [[यज़ीद तृतीय]] के उदय के साथ यह अपने चरम पर पहुंच गया जो एक गुलाम मां वाला पहला उमय्यद खलीफा था। इसके बाद, [[उमय्यद ख़िलाफ़त|उमय्यद के]] अंतिम तीन खलीफा और [[अब्बासी ख़िलाफ़त|अब्बासिद]] खलीफाओं में से अधिकांश गुलाम महिलाओं से पैदा हुए थे। {{Sfn|Gordon|Hain|2017|p=228}}
उनकी माताओं से संबंधित बयानबाजी ने सत्ता में उनके उदय को घेर लिया जिसने या तो खिलाफत में उनके आरोहण का महिमामंडन किया या उसकी आलोचना की। एक अलंकारिक रणनीति में गुलाम माताओं को प्रतिष्ठित पारिवारिक पृष्ठभूमि वाली विदेशी राजकुमारियों के रूप में चित्रित करना शामिल था, जिससे उनकी सामाजिक स्थिति को ऊंचा उठाया जा सके। इसका एक उदाहरण [[यज़ीद तृतीय]] है जिसने गर्व से घोषणा की कि उसकी माँ प्रतिष्ठित [[सासानी राजवंश|सस्सानीद राजवंश]] की एक [[फ़ारसी लोग|फारसी]] राजकुमारी थी जिससे उसके कुलीन वंश पर जोर दिया गया। उसने अपनी दोहरी विरासत पर गर्व जताया और खुद को [[जुलियस सीसर|सीज़र]] और [[ख़ागान|खगन]] दोनों से जोड़ा। इसके विपरीत उनके विरोधियों ने उनकी पितृत्व पर संदेह जताते हुए और यह संकेत देते हुए कि गुलाम महिलाओं का इस्तेमाल करके बच्चे पैदा करने से महत्वपूर्ण सामाजिक-राजनीतिक अशांति पैदा होगी, एक विपरीत बयानबाजी का दृष्टिकोण अपनाया। उदाहरण के लिए, [[मरवान द्वितीय]] के विरोधियों ने दावा किया कि वह वास्तव में उमय्यद राजकुमार [[Muhammad ibn Marwan|मुहम्मद इब्न मरवान]] का पुत्र नहीं था यह सुझाव देते हुए कि उसकी दासी माँ पहले से ही गर्भवती थी जब उसे दुश्मन शिविर से पकड़ा गया था। {{Sfn|Gordon|Hain|2017|p=230}}
ऐतिहासिक रूप से इस्लामी राजवंशों के कई शासकों ने स्वतंत्र कानूनी पत्नियों के बजाय अपने [[हरम]] की दास रखेलों से उत्तराधिकारियों को जन्म देने की विधि का उपयोग किया है। एक कानूनी पत्नी का एक पारिवारिक कबीला होता था जो शासक से रिश्तेदारी बनाकर प्रभाव डाल सकता था, जबकि एक दासी रखैल का कोई परिवार नहीं होता था जो हस्तक्षेप कर सके। उत्तराधिकारियों को जन्म देने के लिए रखैल रखने की प्रथा 20वीं शताब्दी में दास प्रथा के उन्मूलन तक इस्लामी राजवंशों द्वारा नियमित रूप से अपनाई जाती थी। एक उदाहरण [[उस्मानी राजवंश|ओटोमन राजवंश]] है, जिसके सुल्तानों ने 1453 में कॉन्स्टेंटिनोपल की विजय के बाद [[Slavery in the Ottoman Empire|ओटोमन साम्राज्य में गुलामी]] के धीरे-धीरे खत्म होने तक शायद ही कभी शादी की, इसके बजाय अपने उत्तराधिकारियों को पैदा करने के लिए रखैल का इस्तेमाल किया। <ref>Peirce, Leslie (1993). The Imperial Harem: Women and Sovereignty in the Ottoman Empire. Oxford University Press. <nowiki>ISBN 978-0-1950-8677-5</nowiki>.</ref>
यह घटना [[मुसलमानी विश्व में गुलामी का इतिहास|मुस्लिम जगत में गुलामी के इतिहास]] जितनी ही पुरानी है, जिसे कानूनी रूप से 20वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ही समाप्त किया गया था, और 21वीं शताब्दी तक इसे सार्वभौमिक रूप से लागू नहीं किया गया था हालांकि अपवाद अभी भी मौजूद हैं। उदाहरण के लिए, बरका अल यमानिया (मृत्यु 22 अगस्त 2018) [[अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद|सऊदी अरब के राजा अब्दुलअज़ीज़]] (शासनकाल 1932-1953) की [[Concubinage in Islam|रखैल]] और [[Muqrin bin Abdulaziz|मुक़रिन बिन अब्दुलअज़ीज़]] (जन्म 1945) की माँ थीं, जो 2015 में [[सऊदी अरब के शासकों की सूची|सऊदी अरब के युवराज]] थे। <ref>{{Cite news|url=http://www.saudigazette.com.sa/index.cfm?method=home.regcon&contentid=20130202151557|title=Proud of trust reposed in me by King: Muqrin|last=Abdullah Al Harthi|date=2 February 2013|work=Saudi Gazette|access-date=2 February 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20131102140125/http://www.saudigazette.com.sa/index.cfm?method=home.regcon&contentid=20130202151557|archive-date=2 November 2013|last2=Khaled Al Faris|location=Jeddah and Riyadh}}</ref> <ref>{{Cite news|url=https://www.washingtoninstitute.org/policy-analysis/view/who-will-be-the-next-king-of-saudi-arabia|title=Who Will Be the Next King of Saudi Arabia?|last=Simon Henderson|date=13 February 2013|work=The Washington Institute|access-date=2 April 2013}}</ref> <ref>{{Cite news|url=https://www.thedailybeast.com/articles/2013/02/03/with-prince-muqrin-s-appointment-saudi-succession-crisis-looms|title=With Prince Muqrin's Appointment, Saudi Succession Crisis Looms|last=Riedel|first=Bruce|date=2013-02-03|work=The Daily Beast|access-date=2023-04-09|language=en}}</ref>
किसी पुरुष दास मालिक के लिए अपनी दासी से हुए बच्चे के पितृत्व को स्वीकार करना वैकल्पिक था। एक मुस्लिम पुरुष को कानून द्वारा अपनी महिला दासी के साथ यौन संबंध बनाने की अनुमति थी, जब तक कि वह कानूनी रूप से उसकी पत्नी की संपत्ति न हो। <ref>Erdem, Y. Hakan. Slavery in the Ottoman Empire and its Demise, 1800–1909. London: Macmillan Press, 1996.</ref> एक गुलाम का बच्चा गुलाम ही पैदा होता था, जब तक कि पुरुष गुलाम मालिक अपनी महिला गुलाम के बच्चे को अपना न मान ले, ऐसी स्थिति में बच्चा कानून द्वारा स्वतः ही स्वतंत्र हो जाता था। <ref>Erdem, Y. Hakan. Slavery in the Ottoman Empire and its Demise, 1800–1909. London: Macmillan Press, 1996.</ref> अगर किसी अविवाहित दासी ने बच्चे को जन्म दिया और दास मालिक ने पितृत्व को स्वीकार नहीं किया, तो दासी को [[जिना|ज़िना के]] आरोपों का सामना करना पड़ा। <ref name=":0">{{Cite journal|last=De la Puente|first=Cristina|date=2013|title=Free fathers, slave mothers and their children: a contribution to the study of family structures in Al-Andalus|url=https://www.torrossa.com/en/resources/an/3097698|journal=Free Fathers, Slave Mothers and Their Children: A Contribution to the Study of Family Structures in Al-Andalus|pages=27–44}}</ref>
==इन्हें भी देखें==
* [[इस्लामिक यौन न्यायशास्त्र|इस्लामी यौन न्यायशास्त्र]]
* [[गुलामी पर इस्लाम के विचार|दासता पर इस्लामी दृष्टिकोण]] ([[गुलामी पर इस्लाम के विचार]])
* [[ख़ातून|हातुन]]
== संदर्भ ==
<templatestyles src="Reflist/styles.css" />
[[श्रेणी:फ़िक़ह]]
[[श्रेणी:अरबी शब्द]]
[[श्रेणी:अरबी शब्द और वाक्यांश]]
gbr605gwyedkipnoc69kme82u9oraxt