विकिपीडिया hiwiki https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0 MediaWiki 1.47.0-wmf.24 first-letter मीडिया विशेष वार्ता सदस्य सदस्य वार्ता विकिपीडिया विकिपीडिया वार्ता चित्र चित्र वार्ता मीडियाविकि मीडियाविकि वार्ता साँचा साँचा वार्ता सहायता सहायता वार्ता श्रेणी श्रेणी वार्ता प्रवेशद्वार प्रवेशद्वार वार्ता TimedText TimedText talk मॉड्यूल मॉड्यूल वार्ता Package Package talk Event Event talk उदयपुर 0 2304 6630339 6616643 2026-10-17T04:19:25Z कुशल बोराणा 724772 सारा राजस्थान के सन्दर्भ में है| 6630339 wikitext text/x-wiki {{Infobox settlement | name = उदयपुर | other_name = Udaipur | image = {{Photomontage | photo1a = Evening view, City Palace, Udaipur.jpg | photo2a = 20191207 City Palace, Udaipur 1701 7325.jpg | photo2b = Monsoon Palace, Udaipur.jpg | photo3a = Taj Lake Palace Udaipur from City Palace.jpg | photo3b = View of Udaipur from City Palace.jpg | photo4a = Jag Mandir Palace, Udaipur.jpg | photo4b = Pgk udaipur.jpg | photo5a = Udaipur at Sundown (5580915131).jpg | size=270 | border = black | color = white | space = 4 }} | image_caption = ऊपर से नीचे: सांयकालीन दृश्य, [[सिटी पैलेस, उदयपुर|सिटी पैलेस]], [[मानसून भवन, उदयपुर|मानसून भवन]], उदयपुर दृश्य, [[जग मंदिर]], [[प्रताप गौरव केंद्र]], रात्रि में [[पिछोला झील]] | pushpin_label = उदयपुर | pushpin_map = India Rajasthan | coordinates = {{coord|24.58|73.69|display=inline, title}} | pushpin_map_caption = राजस्थान में स्थिति | subdivision_type = देश | subdivision_name = {{IND}} | subdivision_type1 = [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|प्रान्त]] | subdivision_name1 = [[राजस्थान]] | subdivision_type2 = [[भारत के ज़िले|ज़िला]] | subdivision_name2 = [[उदयपुर ज़िला]] | area_total_km2 = 64 | elevation_m = 423 | population_total = 451100 | population_metro = 474531 | population_as_of = 2011 | demographics_type1 = भाषा | demographics1_title1 = प्रचलित | demographics1_info1 = [[हिन्दी]], [[मेवाड़ी भाषा|मेवाड़ी]] | timezone1 = [[भारतीय मानक समय|भामस]] | utc_offset1 = +5:30 | postal_code_type = [[पिनकोड]] | postal_code = 313001- 313024 | area_code_type = दूरभाष कोड | area_code = +91-294 | registration_plate = RJ-27 | website = {{URL|www.udaipur.rajasthan.gov.in}} | named_for = [[उदयसिंह द्वितीय]] | founder = [[उदयसिंह द्वितीय]] | established_title = स्थापना | established_date = {{start date and age|1559}} }} '''उदयपुर''' (Udaipur) [[भारत]] के [[राजस्थान]] राज्य के [[उदयपुर ज़िले]] में स्थित एक नगर है। यह राजस्थान का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जो अपने इतिहास, संस्कृति और अपने आकर्षक स्थलों के लिये प्रसिद्ध है। इसे "पूर्व के वेनिस" के नाम से भी जाना जाता है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=0LU7DwAAQBAJ Lonely Planet Rajasthan, Delhi & Agra]," Michael Benanav, Abigail Blasi, Lindsay Brown, Lonely Planet, 2017, ISBN 9781787012332</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=9TuZDwAAQBAJ Berlitz Pocket Guide Rajasthan]," Insight Guides, Apa Publications (UK) Limited, 2019, ISBN 9781785731990</ref> == विवरण == उदयपुर में [[रेबारी]], [[डाँगी]], [[ब्राह्मण]], [[ राजपूत]] , [[ भील ]], [[मीणा]] के साथ अन्य कई जातियाँ निवास करती हैं। उदयपुर का प्रारंभिक इतिहास सिसोदिया राजवंश से जुड़ा है। एक मत के अनुसार सन् 1558 में महाराणा उदय सिंह - सिसोदिया राजपूत वंश - ने स्थापित किया था। अपनी झीलों के कारण यह शहर झीलों की नगरी के नाम से भी जाना जाता है। उदयपुर शहर [[सिसोदिया (राजपूत)|सिसोदिया राजवंश]] द्वारा ‌शासित [[मेवाड़]] की [[राजधानी]] रहा है। राजस्थान का यह सुन्दर शहर देश विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए एक सपना सा लगता है। यह शहर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अनुपम है।<ref>{{Cite web|url=http://www.tourism.rajasthan.gov.in/hi/udaipur.html|title=Welcome to Rajasthan - Official Website of Department of Tourism, Government of Rajasthan|website=www.tourism.rajasthan.gov.in|language=en-IN|access-date=2021-05-30}}</ref> किसी समय विलायती प्रशासक जेम्स टोड ने उदयपुर पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर "सबसे रुमानी" शहर कहा था <ref> [https://www.lonelyplanet.com/india/rajasthan/udaipur लोनली प्लैनेट]</ref> == इतिहास == [[मेवाड़]] की राजधानी उदयपुर की स्थापना 1559 में महाराणा उदयसिंह ने की। किन्तु तिथि को लेकर इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं। कुछ इतिहासकार हिन्दू कैलेंडर के अनुसार उदयपुर की स्थापना आखातीज के दिन मानते हैं तो कुछ का कहना है कि उदयपुर की स्थापना पंद्रह अप्रैल 1553 में ही हो गई थी। जिसके प्रमाण उदयपुर(राजस्थान) के मोतीमहल में मिलते हैं। जिसे उदयपुर का पहला महल माना जाता है जो अब खंडहर में तब्दील हो चुका है, जिसकी सुरक्षा मोतीमगरी ट्रस्ट कर रहा है। महाराणा उदय सिंह द्वितीय, जो महाराणा प्रताप के पिता थे, चित्तौडग़ढ़ दुर्ग से मेवाड़ का संचालन करते थे। उस समय चित्तौडग़ढ़ निरन्तर मुगलों के आक्रमण से घिरा हुआ था। इसी दौरान महाराणा उदयसिंह अपने पौत्र अमरसिंह के जन्म के उपलक्ष्य में मेवाड़ के शासक भगवान एकलिंगजी के दर्शन करने कैलाशपुरी आए थे। उन्होंने यहाँ आयड़ नदी के किनारे शिकार के लिए डेरे डलवाए थे। तब उनके दिमाग में चित्तौडग़ढ़ पर मुगल आतताइयों के आक्रमण को लेकर सुरक्षित जगह राजधानी बनाए जाने का मंथन चल रहा था। इसी दौरान उन्होंने एक शाम अपने सामंतों के समक्ष उदयपुर नगर बसाने का विचार रखा। जिसका सभी सामंत तथा मंत्रियों ने समर्थन किया। उदयपुर की स्थापना के लिए वह जगह तलाशने पहुँचे तब उन्होंने यहाँ पहला महल बनवाया, जिसका नाम मोती महल दिया, जो वर्तमान मोती मगरी पर खंडहर के रूप में मौजूद है। जिसको लेकर कई इतिहासकारों का मानना है कि मोतीमहल उदयपुर का पहला महल है और एक तरह से इस के निर्माण के साथ ही उदयपुर नगर की स्थापना शुरू हुई। स्थापना का दिन पंद्रह अप्रेल 1553 था और उस दिन आखातीज थी। बाकी इतिहासकार भी यह मानते हैं कि उदयपुर की स्थापना आखातीज के दिन हुई है, लेकिन यह तिथि पंद्रह अप्रैल 1553 है इसको लेकर कोई शिलालेख या प्रमाण मौजूद नहीं हैं। इतिहासकारों की मानें तो एक बार महाराणा उदयसिंह मोतीमहल में निवास कर रहे थे, तभी वह शिकार की भावना से खरगोश का पीछा करते हुए उस जगह पहुँचे जहाँ राजमहल मौजूद हैं। तब उदयुपर में फतहसागर नहीं था और वह एक सहायक नदी के रूप में था। वहाँ एक योगी साधू धूणी रमाए बैठे थे। साधू जगतगिरी से उनकी मुलाकात हुई और महाराणा के दिल का हाल जानकार साधू ने धूणी की जगह पर राज्य बसाने का सुझाव दिया, जिसे महाराणा ने मान लिया। यह बात सन 1559 की थी। जिस पहाड़ी की चोटी पर महल का निर्माण कराया गया, वह समूचे शहर से दिखाई देता है। जहाँ अलग-अलग काल में महाराणाओं ने राजमहल का निर्माण कराया। बाद में सरदार, राव, उमराव और ठिकानों के लोग भी राजमहल के पास बसाए गए। जिनकी हवेलियाँ भी राजमहल के इर्द-गिर्द मौजूद हैं। इतिहासकार जोगेंद्र राजपुरोहित बताते हैं कि पंद्रह अप्रेल को इस तरह उदयपुर शहर की स्थापना हुई।<ref>{{Cite web|url=https://www.jagran.com/rajasthan/jaipur-interesting-story-of-establishing-udaipur-19137747.html|title=इस तरह बसा उदयपुर, बाबाजी की धूणी पर बना राजमहल- उदयपुर के स्थापना की रोचक कहानी|website=Dainik Jagran|language=hi|access-date=2021-05-31}}</ref> === पांच हज़ार साल पुरानी सभ्यता === उदयपुर की स्थापना से पांच हजार साल पहले आयड़ नदी के किनारे सभ्यता मौजूद थी। विभिन्न उत्खनन के स्तरों से पता चलता है कि प्रारंभिक बसावट से लेकर अठारहवीं सदी तक यहाँ कई बार बस्तियाँ बसी और उजड़ी। आहड़ के आस-पास तांबे की उपलब्धता के चलते यहाँ के निवासी इस धातु के उपकरण बनाते थे। इसी की वजह से यह [[तांबावती नगरी]] के नाम से जाना जाता था। इसी तरह पिछोली गांव भी महाराणा लाखा (सन 1382-1421 )के काल का है। जब कुछ बंजारे यहाँ से गुजर रहे थे। छीतर नाम के बंजारे की बैलगाड़ी नमी वाली जगह धँस गई और वहाँ पानी का स्रोत जानकर खुदाई की और पिछोला झील का निर्माण हुआ था। तब यहाँ चारों तरफ पहाड़ी इलाके हुआ करते थे।<ref>{{Cite web|url=https://www.jagran.com/rajasthan/jaipur-interesting-story-of-establishing-udaipur-19137747.html|title=इस तरह बसा उदयपुर, बाबाजी की धूणी पर बना राजमहल- उदयपुर के स्थापना की रोचक कहानी|website=Dainik Jagran|language=hi|access-date=2021-05-31}}</ref> == मेवाड़ == 8वीं से 16वीं सदी तक बप्पा रावल के वंशजो ने अजेय शासन किया और तभी से यह राज्य [[मेवाड़|मेवाड]] के नाम से जाना जाता है। बुद्धि तथा सुन्दरता के लिये विख्यात [[पद्मिनी|महारानी पद्मिनी]] भी यहीं की थी। कहा जाता है कि उनकी एक झलक पाने के लिये सल्तनत दिल्ली के सुल्तान [[अलाउद्दीन खिलजी|अल्लाउदीन खिलजी]] ने इस किले पर आक्रमण किया। रानी ने अपने चेहरे की परछाई को लोटस कुण्ड में दिखाया। इसके बाद उसकी इच्छा रानी को ले जाने की हुई। पर यह संभव न हो सका। क्योंकि महारानी सभी रानियों और सभी महिलाओं सहित एक-एक कर जलती हुयी आग जिसे विख्यात [[जौहर]] के नाम से जानते हैं, में कूद गयी और अल्लाउदीन खिलजी की इच्छा पूरी न हो सकी। मुख्य शासकों में [[बप्पा रावल]] (1433-68), [[राणा सांगा]] (1509-27) जिनके शरीर पर 80 घाव होने, एक टांग न (अपंग) होने, एक हाथ न होने के बावजूद भी शासन सामान्य रूप से चलाते थे बल्कि [[बाबर]] के खिलाफ लडाई में भी भाग लिया। और सबसे प्रमुख [[महाराणा प्रताप]] (1572-92) हुए जिन्होने [[अकबर]] की अधीनता नहीं स्वीकार की और राजधाने के बिना राज्य किया। उदयपुर में एक तहसील मावली है जहां एक तालाब है जिसमें कई सारी मछलियां है जो खुशी से रहती है| मावली राजस्थान -313203 == दर्शनीय स्थल (शहर में) == {{main|उदयपुर के पर्यटन स्थल}} ;[[पिछोला झील]] पिछोला झील ऐतिहासिक है|ऐतिहासिक दृष्टि से इस झील के बारे में कहा जाता है कि महाराणा लाखा के काल में इस झील का निर्माण एक बंजारे द्वारा करवाया गया इस झील के बीचों बीच एक नटनी का चबूतरा बना हुआ है महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने इस शहर की खोज के बाद इस झील का विस्तार कराया था। झील में दो द्वीप हैं और दोनों पर महल बने हुए हैं। एक है जग निवास, जो अब लेक पैलेस होटल बन चुका है और दूसरा है जग मंदिर। दोनों ही महल राजस्थानी शिल्पकला के बेहतरीन उदाहरण हैं, बोट द्वारा जाकर इन्हें देखा जा सकता है।<ref>{{Cite web|url=http://rajasthansamvad.blogspot.com/2017/10/blog-post_59.html|title=Rajasthan general knowledge: पिछोला झील|date=2017-10-28|website=Rajasthan general knowledge|access-date=2021-05-31}}</ref> ;[[जग निवास द्वीप, उदयपुर]] पिछोला झील पर बने द्वीप पैलेस में से एक यह महल, जो अब एक सुविधाजनक होटल का रूप ले चुका है। कोर्टयार्ड, कमल के तालाब और आम के पेड़ों की छाँव में बना स्विमिंग-पूल मौज-मस्ती करने वालों के लिए एक आदर्श स्थान है। आप यहाँ आएं और यहाँ रहने तथा खाने का आनंद लें किंतु आप इसके भीतरी हिस्सों में नहीं जा सकते। ;[[जग मन्दिर, उदयपुर|जग मंदिर, उदयपुर]] पिछोला झील पर बना एक अन्य द्वीप पैलेस। यह महल महाराजा [[करण सिंह द्वितीय|करण सिंह]] द्वारा बनवाया गया था, किंतु महाराजा [[जगत सिंह]] ने इसका विस्तार कराया। महल से बहुत शानदार दृश्य दिखाई देते हैं, गोल्डन महल की सुंदरता दुर्लभ और भव्य है। ;[[सिटी पैलेस, उदयपुर]] प्रसिद्ध और शानदार [[सिटी पैलेस, उदयपुर|सिटी पैलेस]] उदयपुर के जीवन का अभिन्न अंग है। यह राजस्थान का सबसे बड़ा महल है। इस महल का निर्माण शहर के संस्थापक महाराणा उदय सिंह-द्वितीय ने करवाया था। उनके बाद आने वाले राजाओं ने इसमें विस्तार कार्य किए। तो भी इसके निर्माण में आश्चर्यजनक समानताएं हैं। महल में जाने के लिए उत्तरी ओर से बड़ीपोल से और त्रिपोलिया द्वार से प्रवेश किया जा सकता है।<ref>{{Cite web|url=https://m.bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A5%80_%E0%A4%AA%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%B8_%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF_%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0|title=सिटी पैलेस संग्रहालय उदयपुर {{!}} भारतकोश|website=m.bharatdiscovery.org|language=hi|access-date=2021-05-31}}</ref> [[चित्र:Evening view, City Palace, Udaipur.jpg|center|550px|thumb|नगर महल (सिटी पैलेस) का सायंकाल का दृश्य]] ;[[शिल्पग्राम, उदयपुर]] यह एक शिल्पग्राम है जहाँ गोवा, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के पारंपरिक घरों को दिखाया गया है। यहाँ इन राज्यों के [[शास्त्रीय संगीत]] और नृत्य भी प्रदर्शित किए जाते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://m-patrika-com.cdn.ampproject.org/v/s/m.patrika.com/amp-news/topic/shilpgram-udaipur-news/?amp_js_v=a6&amp_gsa=1&usqp=mq331AQFUAKwASA=#amp_ct=1622451565142&referrer=https://www.google.com&amp_tf=From%20%251$s&ampshare=https://www.patrika.com/topic/shilpgram-udaipur-news/|title=Shilpgram in Udaipur: Photos, Videos, History in Hindi, Visit Timings, Entry Fee|website=m-patrika-com.cdn.ampproject.org|access-date=2021-05-31|archive-date=2 जून 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210602213925/https://m-patrika-com.cdn.ampproject.org/v/s/m.patrika.com/amp-news/topic/shilpgram-udaipur-news/?amp_js_v=a6&amp_gsa=1&usqp=mq331AQFUAKwASA=#amp_ct=1622451565142&referrer=https://www.google.com&amp_tf=From%20%251$s&ampshare=https://www.patrika.com/topic/shilpgram-udaipur-news/|url-status=dead}}</ref> ;[[मानसून भवन, उदयपुर|सज्‍जनगढ़]] (मानसून पैलेस) उदयपुर शहर के दक्षिण में अरावली पर्वतमाला के एक पहाड़ का निर्माण महाराजा सज्जन सिंह ने करवाया था। यहाँ गर्मियों में भी अच्‍छी ठंडी हवा चलती है। सज्‍जनगढ़ से उदयपुर शहर और इसकी झीलों का सुंदर नज़ारा दिखता है। पहाड़ की तलहटी में अभयारण्‍य है। सायंकाल में यह महल रोशनी से जगमगा उठता है, जो देखने में बहुत सुंदर दिखाई पड़ता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/rajasthan/jaipur/news/360-view-image-of-sajjangarh-fort-or-mansoon-palace-at-udaipur-rajasthan-01400883.html|title=उदयपुर का सबसे ऊंचा मानसून पैलेस, 132 साल पहले बादलों को देखने के लिए बनवाया था|website=Dainik Bhaskar|language=hi|access-date=2021-05-31}}</ref> ;[[फतेह सागर]] महाराणा जय सिंह द्वारा निर्मित यह झील बाढ़ के कारण नष्ट हो गई थी, बाद में महाराणा फतेह सिंह ने इसका पुनर्निर्माण करवाया। झील के बीचों-बीच एक बगीचा नेहरु गार्डन, स्थित है। आप बोट अथवा ऑटो द्वारा झील तक पहुँच सकते हैं। ;[[मोती मगरी]] यहाँ सिसोदिया राजपूत वंश के विश्व प्रसिद्ध महाप्रतापी राजा [[महाराणा प्रताप]] की मूर्ति है। मोती मगरी फतेहसागर के पास की पहाड़ी पर स्थित है। मूर्ति तक जाने वाले रास्तों के आसपास सुंदर बगीचे हैं, विशेषकर जापानी रॉक गार्डन दर्शनीय हैं। ;बाहुबली हिल्स, उदयपुर बाहुबली हिल्स उदयपुर से १४ किलोमीटर दूर बड़ी तालाब के समीप की पहाड़ी पर स्थित है ये जगह युवाओ में लोकप्रिय है और उनका पसंदीदा स्थान बन चुकी है। [[File:Bahubali hill.jpg|Bahubali_hill|thumb|बाहुबली हिल्स का दृश्य ]]'''[[एकलिंगजी|एकलिंगजी मंदिर]]'''<ref>{{Cite web|url=https://www.sightseechannel.com/2023/05/top-10-places-to-visit-in-udaipur.html|title=उदयपुर में घूमने की जगह - Top 10 Places To Visit In Udaipur|website=Sightsee - Best India Travel Blog and Vlogger On YouTube|language=en|access-date=2023-06-12|archive-date=12 जून 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230612085218/https://www.sightseechannel.com/2023/05/top-10-places-to-visit-in-udaipur.html|url-status=dead}}</ref> एकलिंगजी मंदिर राजस्थान के सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक है और उदयपुर के उत्तर में 22 किमी की दूरी पर स्थित है। एकलिंगजी मंदिर हिंदू धर्म के भगवान शिव को समर्पित है और इसकी शानदार वास्तुकला हर साल यहाँ कई पर्यटकों को आकर्षित करती है। इसकी ऊंचाई लगभग 50 फीट है और इसके चार चेहरे भगवान शिव के चार रूपों को दर्शाते है। चाँदी के साँप की माला पहना हुआ शिवलिंग एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है। ;[[सहेलियों की बाड़ी]] सहेलियों की बाड़ी / दासियों के सम्मान में बना बाग एक सजा-धजा बाग है। इसमें कमल के तालाब, फव्वारे, संगमरमर के हाथी और कियोस्क बने हुए हैं। == दर्शनीय स्थल (आसपास) == * [[नाथद्वारा]] ४८ किलोमीटर दूर है उदयपुर से * [[कुम्भलगढ़ दुर्ग|कुंभलगढ]] ८० किलोमीटर * [[कांकरोली]] ७० किलोमीटर * [[ऋषभदेव तहसील|ऋषभदेव]] यह केसरिया जी के नाम से भी प्रसिद्ध है। *[[एकलिंगजी]] १३ किलोमीटर *[[हल्दीघाटी]] २६ मील की दूरी पर स्थित *[[जयसमंद]] झील *[[सांवरिया जी मंदिर|सांवरियाजी का मंदिर]] 80किलोमीटर *[[रणकपुर]] *[[चित्तौड़गढ़ दुर्ग|चित्तौडगढ]] *जगत निवास * मेनार ५२ किलोमीटर दूर हैंं उदयपुर से == यातायात == उदयपुर के सार्वजनिक यातायात के साधन मुख्यतः बस, ऑटोरिक्शा और रेल सेवा हैं। ;हवाई मार्ग सबसे नजदीकी हवाई अड्डा [[महाराणा प्रताप विमानक्षेत्र|उदयपुर हवाई अड्डा]] है। यह हवाई अड्डा उदयपुर से २० कि॰मी॰ दूर डबोक में है। [[जयपुर]], [[जोधपुर]], [[औरंगाबाद]], [[दिल्ली]] तथा [[मुम्बई|मुंबई]] से यहाँ नियमित उड़ानें उपलब्ध हैं। ;रेल मार्ग यहाँ [[उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन]] नामक रेलवे स्टेशन है। यह स्टे‍शन देश के अन्य शहरों से जुड़ा हुआ है। ;सड़क मार्ग यह शहर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 8 पर स्थित है। यह सड़क मार्ग से जयपुर से 9 घण्टे, दिल्ली से 14 घण्टे तथा मुंबई से 17 घण्टे की दूरी पर स्थित है। == समाचार पत्र == * [[दैनिक भास्कर]] * [[राजस्थान पत्रिका]] * उदयपुर दोपहर ==इन्हें भी देखें== * [[मेवाड़]] * [[जयपुर]] * [[जोधपुर]] * [[भरतपुर]] ==बाहरी कड़ियाँ== * [https://web.archive.org/web/20170515153840/http://ignca.nic.in/coilnet/rj066.htm मेवाद़ के दर्शनीय स्थल: उदयपुर] ==सन्दर्भ== {{Reflist}} {{उदयपुर}} [[श्रेणी:राजस्थान के शहर]] [[श्रेणी:उदयपुर ज़िला]] [[श्रेणी:उदयपुर ज़िले के नगर]] [[श्रेणी:उदयपुर|*]] jv87c3p9scqov8xg9b1dwuu6sub3rjx 6630341 6630339 2026-10-17T04:59:28Z चाहर धर्मेंद्र 703114 [[Special:Contributions/कुशल बोराणा|कुशल बोराणा]] ([[User talk:कुशल बोराणा|वार्ता]]) द्वारा किए गए बदलाव [[Special:Diff/6630339|6630339]] को पूर्ववत किया 6630341 wikitext text/x-wiki {{Infobox settlement | name = उदयपुर | other_name = Udaipur | image = {{Photomontage | photo1a = Evening view, City Palace, Udaipur.jpg | photo2a = 20191207 City Palace, Udaipur 1701 7325.jpg | photo2b = Monsoon Palace, Udaipur.jpg | photo3a = Taj Lake Palace Udaipur from City Palace.jpg | photo3b = View of Udaipur from City Palace.jpg | photo4a = Jag Mandir Palace, Udaipur.jpg | photo4b = Pgk udaipur.jpg | photo5a = Udaipur at Sundown (5580915131).jpg | size=270 | border = black | color = white | space = 4 }} | image_caption = ऊपर से नीचे: सांयकालीन दृश्य, [[सिटी पैलेस, उदयपुर|सिटी पैलेस]], [[मानसून भवन, उदयपुर|मानसून भवन]], उदयपुर दृश्य, [[जग मंदिर]], [[प्रताप गौरव केंद्र]], रात्रि में [[पिछोला झील]] | pushpin_label = उदयपुर | pushpin_map = India Rajasthan | coordinates = {{coord|24.58|73.69|display=inline, title}} | pushpin_map_caption = राजस्थान में स्थिति | subdivision_type = देश | subdivision_name = {{IND}} | subdivision_type1 = [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|प्रान्त]] | subdivision_name1 = [[राजस्थान]] | subdivision_type2 = [[भारत के ज़िले|ज़िला]] | subdivision_name2 = [[उदयपुर ज़िला]] | area_total_km2 = 64 | elevation_m = 423 | population_total = 451100 | population_metro = 474531 | population_as_of = 2011 | demographics_type1 = भाषा | demographics1_title1 = प्रचलित | demographics1_info1 = [[हिन्दी]], [[मेवाड़ी भाषा|मेवाड़ी]] | timezone1 = [[भारतीय मानक समय|भामस]] | utc_offset1 = +5:30 | postal_code_type = [[पिनकोड]] | postal_code = 313001- 313024 | area_code_type = दूरभाष कोड | area_code = +91-294 | registration_plate = RJ-27 | website = {{URL|www.udaipur.rajasthan.gov.in}} | named_for = [[उदयसिंह द्वितीय]] | founder = [[उदयसिंह द्वितीय]] | established_title = स्थापना | established_date = {{start date and age|1559}} }} '''उदयपुर''' (Udaipur) [[भारत]] के [[राजस्थान]] राज्य के [[उदयपुर ज़िले]] में स्थित एक नगर है। यह राजस्थान का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जो अपने इतिहास, संस्कृति और अपने आकर्षक स्थलों के लिये प्रसिद्ध है। इसे "पूर्व के वेनिस" के नाम से भी जाना जाता है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=0LU7DwAAQBAJ Lonely Planet Rajasthan, Delhi & Agra]," Michael Benanav, Abigail Blasi, Lindsay Brown, Lonely Planet, 2017, ISBN 9781787012332</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=9TuZDwAAQBAJ Berlitz Pocket Guide Rajasthan]," Insight Guides, Apa Publications (UK) Limited, 2019, ISBN 9781785731990</ref> == विवरण == उदयपुर में [[रेबारी]], [[डाँगी]], [[ब्राह्मण]], [[ राजपूत]] , [[ भील ]], [[मीणा]] के साथ अन्य कई जातियाँ निवास करती हैं। उदयपुर का प्रारंभिक इतिहास सिसोदिया राजवंश से जुड़ा है। एक मत के अनुसार सन् 1558 में महाराणा उदय सिंह - सिसोदिया राजपूत वंश - ने स्थापित किया था। अपनी झीलों के कारण यह शहर झीलों की नगरी के नाम से भी जाना जाता है। उदयपुर शहर [[सिसोदिया (राजपूत)|सिसोदिया राजवंश]] द्वारा ‌शासित [[मेवाड़]] की [[राजधानी]] रहा है। राजस्थान का यह सुन्दर शहर देश विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए एक सपना सा लगता है। यह शहर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अनुपम है।<ref>{{Cite web|url=http://www.tourism.rajasthan.gov.in/hi/udaipur.html|title=Welcome to Rajasthan - Official Website of Department of Tourism, Government of Rajasthan|website=www.tourism.rajasthan.gov.in|language=en-IN|access-date=2021-05-30}}</ref> किसी समय विलायती प्रशासक जेम्स टोड ने उदयपुर पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर "सबसे रुमानी" शहर कहा था <ref> [https://www.lonelyplanet.com/india/rajasthan/udaipur लोनली प्लैनेट]</ref> == इतिहास == [[मेवाड़]] की राजधानी उदयपुर की स्थापना 1559 में महाराणा उदयसिंह ने की। किन्तु तिथि को लेकर इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं। कुछ इतिहासकार हिन्दू कैलेंडर के अनुसार उदयपुर की स्थापना आखातीज के दिन मानते हैं तो कुछ का कहना है कि उदयपुर की स्थापना पंद्रह अप्रैल 1553 में ही हो गई थी। जिसके प्रमाण उदयपुर(राजस्थान) के मोतीमहल में मिलते हैं। जिसे उदयपुर का पहला महल माना जाता है जो अब खंडहर में तब्दील हो चुका है, जिसकी सुरक्षा मोतीमगरी ट्रस्ट कर रहा है। महाराणा उदय सिंह द्वितीय, जो महाराणा प्रताप के पिता थे, चित्तौडग़ढ़ दुर्ग से मेवाड़ का संचालन करते थे। उस समय चित्तौडग़ढ़ निरन्तर मुगलों के आक्रमण से घिरा हुआ था। इसी दौरान महाराणा उदयसिंह अपने पौत्र अमरसिंह के जन्म के उपलक्ष्य में मेवाड़ के शासक भगवान एकलिंगजी के दर्शन करने कैलाशपुरी आए थे। उन्होंने यहाँ आयड़ नदी के किनारे शिकार के लिए डेरे डलवाए थे। तब उनके दिमाग में चित्तौडग़ढ़ पर मुगल आतताइयों के आक्रमण को लेकर सुरक्षित जगह राजधानी बनाए जाने का मंथन चल रहा था। इसी दौरान उन्होंने एक शाम अपने सामंतों के समक्ष उदयपुर नगर बसाने का विचार रखा। जिसका सभी सामंत तथा मंत्रियों ने समर्थन किया। उदयपुर की स्थापना के लिए वह जगह तलाशने पहुँचे तब उन्होंने यहाँ पहला महल बनवाया, जिसका नाम मोती महल दिया, जो वर्तमान मोती मगरी पर खंडहर के रूप में मौजूद है। जिसको लेकर कई इतिहासकारों का मानना है कि मोतीमहल उदयपुर का पहला महल है और एक तरह से इस के निर्माण के साथ ही उदयपुर नगर की स्थापना शुरू हुई। स्थापना का दिन पंद्रह अप्रेल 1553 था और उस दिन आखातीज थी। बाकी इतिहासकार भी यह मानते हैं कि उदयपुर की स्थापना आखातीज के दिन हुई है, लेकिन यह तिथि पंद्रह अप्रैल 1553 है इसको लेकर कोई शिलालेख या प्रमाण मौजूद नहीं हैं। इतिहासकारों की मानें तो एक बार महाराणा उदयसिंह मोतीमहल में निवास कर रहे थे, तभी वह शिकार की भावना से खरगोश का पीछा करते हुए उस जगह पहुँचे जहाँ राजमहल मौजूद हैं। तब उदयुपर में फतहसागर नहीं था और वह एक सहायक नदी के रूप में था। वहाँ एक योगी साधू धूणी रमाए बैठे थे। साधू जगतगिरी से उनकी मुलाकात हुई और महाराणा के दिल का हाल जानकार साधू ने धूणी की जगह पर राज्य बसाने का सुझाव दिया, जिसे महाराणा ने मान लिया। यह बात सन 1559 की थी। जिस पहाड़ी की चोटी पर महल का निर्माण कराया गया, वह समूचे शहर से दिखाई देता है। जहाँ अलग-अलग काल में महाराणाओं ने राजमहल का निर्माण कराया। बाद में सरदार, राव, उमराव और ठिकानों के लोग भी राजमहल के पास बसाए गए। जिनकी हवेलियाँ भी राजमहल के इर्द-गिर्द मौजूद हैं। इतिहासकार जोगेंद्र राजपुरोहित बताते हैं कि पंद्रह अप्रेल को इस तरह उदयपुर शहर की स्थापना हुई।<ref>{{Cite web|url=https://www.jagran.com/rajasthan/jaipur-interesting-story-of-establishing-udaipur-19137747.html|title=इस तरह बसा उदयपुर, बाबाजी की धूणी पर बना राजमहल- उदयपुर के स्थापना की रोचक कहानी|website=Dainik Jagran|language=hi|access-date=2021-05-31}}</ref> === पांच हज़ार साल पुरानी सभ्यता === उदयपुर की स्थापना से पांच हजार साल पहले आयड़ नदी के किनारे सभ्यता मौजूद थी। विभिन्न उत्खनन के स्तरों से पता चलता है कि प्रारंभिक बसावट से लेकर अठारहवीं सदी तक यहाँ कई बार बस्तियाँ बसी और उजड़ी। आहड़ के आस-पास तांबे की उपलब्धता के चलते यहाँ के निवासी इस धातु के उपकरण बनाते थे। इसी की वजह से यह [[तांबावती नगरी]] के नाम से जाना जाता था। इसी तरह पिछोली गांव भी महाराणा लाखा (सन 1382-1421 )के काल का है। जब कुछ बंजारे यहाँ से गुजर रहे थे। छीतर नाम के बंजारे की बैलगाड़ी नमी वाली जगह धँस गई और वहाँ पानी का स्रोत जानकर खुदाई की और पिछोला झील का निर्माण हुआ था। तब यहाँ चारों तरफ पहाड़ी इलाके हुआ करते थे।<ref>{{Cite web|url=https://www.jagran.com/rajasthan/jaipur-interesting-story-of-establishing-udaipur-19137747.html|title=इस तरह बसा उदयपुर, बाबाजी की धूणी पर बना राजमहल- उदयपुर के स्थापना की रोचक कहानी|website=Dainik Jagran|language=hi|access-date=2021-05-31}}</ref> == मेवाड़ == 8वीं से 16वीं सदी तक बप्पा रावल के वंशजो ने अजेय शासन किया और तभी से यह राज्य [[मेवाड़|मेवाड]] के नाम से जाना जाता है। बुद्धि तथा सुन्दरता के लिये विख्यात [[पद्मिनी|महारानी पद्मिनी]] भी यहीं की थी। कहा जाता है कि उनकी एक झलक पाने के लिये सल्तनत दिल्ली के सुल्तान [[अलाउद्दीन खिलजी|अल्लाउदीन खिलजी]] ने इस किले पर आक्रमण किया। रानी ने अपने चेहरे की परछाई को लोटस कुण्ड में दिखाया। इसके बाद उसकी इच्छा रानी को ले जाने की हुई। पर यह संभव न हो सका। क्योंकि महारानी सभी रानियों और सभी महिलाओं सहित एक-एक कर जलती हुयी आग जिसे विख्यात [[जौहर]] के नाम से जानते हैं, में कूद गयी और अल्लाउदीन खिलजी की इच्छा पूरी न हो सकी। मुख्य शासकों में [[बप्पा रावल]] (1433-68), [[राणा सांगा]] (1509-27) जिनके शरीर पर 80 घाव होने, एक टांग न (अपंग) होने, एक हाथ न होने के बावजूद भी शासन सामान्य रूप से चलाते थे बल्कि [[बाबर]] के खिलाफ लडाई में भी भाग लिया। और सबसे प्रमुख [[महाराणा प्रताप]] (1572-92) हुए जिन्होने [[अकबर]] की अधीनता नहीं स्वीकार की और राजधाने के बिना राज्य किया। == दर्शनीय स्थल (शहर में) == {{main|उदयपुर के पर्यटन स्थल}} ;[[पिछोला झील]] ऐतिहासिक दृष्टि से इस झील के बारे में कहा जाता है कि महाराणा लाखा के काल में इस झील का निर्माण एक बंजारे द्वारा करवाया गया इस झील के बीचों बीच एक नटनी का चबूतरा बना हुआ है महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने इस शहर की खोज के बाद इस झील का विस्तार कराया था। झील में दो द्वीप हैं और दोनों पर महल बने हुए हैं। एक है जग निवास, जो अब लेक पैलेस होटल बन चुका है और दूसरा है जग मंदिर। दोनों ही महल राजस्थानी शिल्पकला के बेहतरीन उदाहरण हैं, बोट द्वारा जाकर इन्हें देखा जा सकता है।<ref>{{Cite web|url=http://rajasthansamvad.blogspot.com/2017/10/blog-post_59.html|title=Rajasthan general knowledge: पिछोला झील|date=2017-10-28|website=Rajasthan general knowledge|access-date=2021-05-31}}</ref> ;[[जग निवास द्वीप, उदयपुर]] पिछोला झील पर बने द्वीप पैलेस में से एक यह महल, जो अब एक सुविधाजनक होटल का रूप ले चुका है। कोर्टयार्ड, कमल के तालाब और आम के पेड़ों की छाँव में बना स्विमिंग-पूल मौज-मस्ती करने वालों के लिए एक आदर्श स्थान है। आप यहाँ आएं और यहाँ रहने तथा खाने का आनंद लें किंतु आप इसके भीतरी हिस्सों में नहीं जा सकते। ;[[जग मन्दिर, उदयपुर|जग मंदिर, उदयपुर]] पिछोला झील पर बना एक अन्य द्वीप पैलेस। यह महल महाराजा [[करण सिंह द्वितीय|करण सिंह]] द्वारा बनवाया गया था, किंतु महाराजा [[जगत सिंह]] ने इसका विस्तार कराया। महल से बहुत शानदार दृश्य दिखाई देते हैं, गोल्डन महल की सुंदरता दुर्लभ और भव्य है। ;[[सिटी पैलेस, उदयपुर]] प्रसिद्ध और शानदार [[सिटी पैलेस, उदयपुर|सिटी पैलेस]] उदयपुर के जीवन का अभिन्न अंग है। यह राजस्थान का सबसे बड़ा महल है। इस महल का निर्माण शहर के संस्थापक महाराणा उदय सिंह-द्वितीय ने करवाया था। उनके बाद आने वाले राजाओं ने इसमें विस्तार कार्य किए। तो भी इसके निर्माण में आश्चर्यजनक समानताएं हैं। महल में जाने के लिए उत्तरी ओर से बड़ीपोल से और त्रिपोलिया द्वार से प्रवेश किया जा सकता है।<ref>{{Cite web|url=https://m.bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A5%80_%E0%A4%AA%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%B8_%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF_%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0|title=सिटी पैलेस संग्रहालय उदयपुर {{!}} भारतकोश|website=m.bharatdiscovery.org|language=hi|access-date=2021-05-31}}</ref> [[चित्र:Evening view, City Palace, Udaipur.jpg|center|550px|thumb|नगर महल (सिटी पैलेस) का सायंकाल का दृश्य]] ;[[शिल्पग्राम, उदयपुर]] यह एक शिल्पग्राम है जहाँ गोवा, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के पारंपरिक घरों को दिखाया गया है। यहाँ इन राज्यों के [[शास्त्रीय संगीत]] और नृत्य भी प्रदर्शित किए जाते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://m-patrika-com.cdn.ampproject.org/v/s/m.patrika.com/amp-news/topic/shilpgram-udaipur-news/?amp_js_v=a6&amp_gsa=1&usqp=mq331AQFUAKwASA=#amp_ct=1622451565142&referrer=https://www.google.com&amp_tf=From%20%251$s&ampshare=https://www.patrika.com/topic/shilpgram-udaipur-news/|title=Shilpgram in Udaipur: Photos, Videos, History in Hindi, Visit Timings, Entry Fee|website=m-patrika-com.cdn.ampproject.org|access-date=2021-05-31|archive-date=2 जून 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210602213925/https://m-patrika-com.cdn.ampproject.org/v/s/m.patrika.com/amp-news/topic/shilpgram-udaipur-news/?amp_js_v=a6&amp_gsa=1&usqp=mq331AQFUAKwASA=#amp_ct=1622451565142&referrer=https://www.google.com&amp_tf=From%20%251$s&ampshare=https://www.patrika.com/topic/shilpgram-udaipur-news/|url-status=dead}}</ref> ;[[मानसून भवन, उदयपुर|सज्‍जनगढ़]] (मानसून पैलेस) उदयपुर शहर के दक्षिण में अरावली पर्वतमाला के एक पहाड़ का निर्माण महाराजा सज्जन सिंह ने करवाया था। यहाँ गर्मियों में भी अच्‍छी ठंडी हवा चलती है। सज्‍जनगढ़ से उदयपुर शहर और इसकी झीलों का सुंदर नज़ारा दिखता है। पहाड़ की तलहटी में अभयारण्‍य है। सायंकाल में यह महल रोशनी से जगमगा उठता है, जो देखने में बहुत सुंदर दिखाई पड़ता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/rajasthan/jaipur/news/360-view-image-of-sajjangarh-fort-or-mansoon-palace-at-udaipur-rajasthan-01400883.html|title=उदयपुर का सबसे ऊंचा मानसून पैलेस, 132 साल पहले बादलों को देखने के लिए बनवाया था|website=Dainik Bhaskar|language=hi|access-date=2021-05-31}}</ref> ;[[फतेह सागर]] महाराणा जय सिंह द्वारा निर्मित यह झील बाढ़ के कारण नष्ट हो गई थी, बाद में महाराणा फतेह सिंह ने इसका पुनर्निर्माण करवाया। झील के बीचों-बीच एक बगीचा नेहरु गार्डन, स्थित है। आप बोट अथवा ऑटो द्वारा झील तक पहुँच सकते हैं। ;[[मोती मगरी]] यहाँ सिसोदिया राजपूत वंश के विश्व प्रसिद्ध महाप्रतापी राजा [[महाराणा प्रताप]] की मूर्ति है। मोती मगरी फतेहसागर के पास की पहाड़ी पर स्थित है। मूर्ति तक जाने वाले रास्तों के आसपास सुंदर बगीचे हैं, विशेषकर जापानी रॉक गार्डन दर्शनीय हैं। ;बाहुबली हिल्स, उदयपुर बाहुबली हिल्स उदयपुर से १४ किलोमीटर दूर बड़ी तालाब के समीप की पहाड़ी पर स्थित है ये जगह युवाओ में लोकप्रिय है और उनका पसंदीदा स्थान बन चुकी है। [[File:Bahubali hill.jpg|Bahubali_hill|thumb|बाहुबली हिल्स का दृश्य ]]'''[[एकलिंगजी|एकलिंगजी मंदिर]]'''<ref>{{Cite web|url=https://www.sightseechannel.com/2023/05/top-10-places-to-visit-in-udaipur.html|title=उदयपुर में घूमने की जगह - Top 10 Places To Visit In Udaipur|website=Sightsee - Best India Travel Blog and Vlogger On YouTube|language=en|access-date=2023-06-12|archive-date=12 जून 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230612085218/https://www.sightseechannel.com/2023/05/top-10-places-to-visit-in-udaipur.html|url-status=dead}}</ref> एकलिंगजी मंदिर राजस्थान के सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक है और उदयपुर के उत्तर में 22 किमी की दूरी पर स्थित है। एकलिंगजी मंदिर हिंदू धर्म के भगवान शिव को समर्पित है और इसकी शानदार वास्तुकला हर साल यहाँ कई पर्यटकों को आकर्षित करती है। इसकी ऊंचाई लगभग 50 फीट है और इसके चार चेहरे भगवान शिव के चार रूपों को दर्शाते है। चाँदी के साँप की माला पहना हुआ शिवलिंग एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है। ;[[सहेलियों की बाड़ी]] सहेलियों की बाड़ी / दासियों के सम्मान में बना बाग एक सजा-धजा बाग है। इसमें कमल के तालाब, फव्वारे, संगमरमर के हाथी और कियोस्क बने हुए हैं। == दर्शनीय स्थल (आसपास) == * [[नाथद्वारा]] ४८ किलोमीटर दूर है उदयपुर से * [[कुम्भलगढ़ दुर्ग|कुंभलगढ]] ८० किलोमीटर * [[कांकरोली]] ७० किलोमीटर * [[ऋषभदेव तहसील|ऋषभदेव]] यह केसरिया जी के नाम से भी प्रसिद्ध है। *[[एकलिंगजी]] १३ किलोमीटर *[[हल्दीघाटी]] २६ मील की दूरी पर स्थित *[[जयसमंद]] झील *[[सांवरिया जी मंदिर|सांवरियाजी का मंदिर]] 80किलोमीटर *[[रणकपुर]] *[[चित्तौड़गढ़ दुर्ग|चित्तौडगढ]] *जगत निवास * मेनार ५२ किलोमीटर दूर हैंं उदयपुर से == यातायात == उदयपुर के सार्वजनिक यातायात के साधन मुख्यतः बस, ऑटोरिक्शा और रेल सेवा हैं। ;हवाई मार्ग सबसे नजदीकी हवाई अड्डा [[महाराणा प्रताप विमानक्षेत्र|उदयपुर हवाई अड्डा]] है। यह हवाई अड्डा उदयपुर से २० कि॰मी॰ दूर डबोक में है। [[जयपुर]], [[जोधपुर]], [[औरंगाबाद]], [[दिल्ली]] तथा [[मुम्बई|मुंबई]] से यहाँ नियमित उड़ानें उपलब्ध हैं। ;रेल मार्ग यहाँ [[उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन]] नामक रेलवे स्टेशन है। यह स्टे‍शन देश के अन्य शहरों से जुड़ा हुआ है। ;सड़क मार्ग यह शहर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 8 पर स्थित है। यह सड़क मार्ग से जयपुर से 9 घण्टे, दिल्ली से 14 घण्टे तथा मुंबई से 17 घण्टे की दूरी पर स्थित है। == समाचार पत्र == * [[दैनिक भास्कर]] * [[राजस्थान पत्रिका]] * उदयपुर दोपहर ==इन्हें भी देखें== * [[मेवाड़]] * [[जयपुर]] * [[जोधपुर]] * [[भरतपुर]] ==बाहरी कड़ियाँ== * [https://web.archive.org/web/20170515153840/http://ignca.nic.in/coilnet/rj066.htm मेवाद़ के दर्शनीय स्थल: उदयपुर] ==सन्दर्भ== {{Reflist}} {{उदयपुर}} [[श्रेणी:राजस्थान के शहर]] [[श्रेणी:उदयपुर ज़िला]] [[श्रेणी:उदयपुर ज़िले के नगर]] [[श्रेणी:उदयपुर|*]] ixjtm2wq6d9pqldhs36evesv26kv19d तुर्की 0 5614 6630387 6629115 2026-10-17T08:18:48Z अमर तिवारी 932885 शहरों के नाम ठीक किए 6630387 wikitext text/x-wiki {{Infobox country| | native_name = {{lang|tr|Türkiye Cumhuriyeti|italic=no}} | conventional_long_name = तुर्की गणराज्य | common_name = तुर्की | 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2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210324133453/https://stats.oecd.org/Index.aspx?DataSetCode=SURFACE_WATER|url-status=live}}</ref> | population_estimate = {{IncreaseNeutral}} 8,56,64,944<!-- Update all numbers using this source, including article body--><ref name="Population of Turkey">{{cite web |url=https://data.tuik.gov.tr/Bulten/Index?p=The-Results-of-Address-Based-Population-Registration-System-2024-53783&dil=2 |title=The Results of Address Based Population Registration System, 2024 |publisher=[[Turkish Statistical Institute]] |website=www.tuik.gov.tr |date=6 February 2025 |access-date=6 February 2025}}</ref> | population_estimate_year = 2024 | population_estimate_rank = 18वीं | GDP_PPP = {{increase}} $3.652 खरब<ref name="IMFWEO.TR">{{cite web |url=https://www.imf.org/en/Publications/WEO/weo-database/2025/April/weo-report?c=186,&s=NGDPD,PPPGDP,NGDPDPC,PPPPC,&sy=2022&ey=2029&ssm=0&scsm=1&scc=0&ssd=1&ssc=0&sic=0&sort=country&ds=.&br=1 |title=World Economic Outlook Database, April 2025 Edition. (Türkiye) |publisher=[[International Monetary Fund]] |website=www.imf.org |date=22 October 2024 |access-date=22 October 2024}}</ref> | GDP_PPP_year = 2025 | GDP_PPP_rank = 12वाँ | GDP_PPP_per_capita = {{increase}} $42,451<ref name="IMFWEO.TR" /> | GDP_PPP_per_capita_rank = 54वाँ | GDP_nominal = {{increase}} $1.437 खरब<ref name="IMFWEO.TR" /> | GDP_nominal_year = 2025 | GDP_nominal_rank = 16वाँ | GDP_nominal_per_capita = {{increase}} $16,709<ref name="IMFWEO.TR" /> | GDP_nominal_per_capita_rank = 63वाँ | Gini = 44.4 | Gini_year = 2021 | Gini_change = increase | Gini_ref = <ref name="Gini">{{cite web|url=https://data.worldbank.org/indicator/SI.POV.GINI?locations=TR|title=Gini index (World Bank estimate) – Turkey|year=2019|access-date=15 November 2021|publisher=World Bank|archive-date=17 May 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190517075906/https://data.worldbank.org/indicator/SI.POV.GINI%3Flocations%3DTR|url-status=live}}</ref> | HDI = 0.853 | HDI_year = 2023 | HDI_change = decrease | HDI_ref = <ref name="HDI">{{Cite web |date=6 May 2025 |title=Human Development Report 2025 |url=https://hdr.undp.org/system/files/documents/global-report-document/hdr2025reporten.pdf|url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20250506051232/https://hdr.undp.org/system/files/documents/global-report-document/hdr2025reporten.pdf |archive-date=6 May 2025 |access-date=6 May 2025 |publisher=[[United Nations Development Programme]]}}</ref> | HDI_rank = 51वाँ | currency = [[तुर्की लीरा]] (₺) | currency_code = TRY | time_zone = [[तुर्की समय|TRT]] | utc_offset = +3 | cctld = [[.tr]] | calling_code = +90 | footnotes = 1.&nbsp;Population & Density ranks based on 2005 figures.<br /> | leader_title3 = अध्यक्ष | leader_name3 = [[नुमान कुर्तुलमुश]] | legislature = [[तुर्की की ग्रैंड नेशनल असेंबली|ग्रैंड नेशनल असेंबली]] |coordinates={{Coord|39|55|N|32|51|E|type:city|display=inline}}|ethnic_groups={{unbulleted list | 70–75% [[तुर्की लोग|तुर्की]] | 19% [[कुर्द लोग|कुर्द]] | 6–11% अन्य }}|leader_title2=प्रधानमंत्री|leader_name2=[[जौदत यिलमाज़]]|leader_title4=मुख्य न्यायाधिपति|leader_name4=[[कदिर ओज़काया]]|established_date5=24 जुलाई 1923|established_event5=[[लोज़ान की संधि]]|established_event6=[[गणतंत्र दिवस (तुर्की)|गणराज्य की स्थापना]]|established_date6=29 अक्टूबर 1923|established_event7=वर्तमान संविधान|established_date7=9 नवंबर 1982<ref name="Constitution2019"/>|population_density_km2=111.4<ref>{{cite web |url=https://data.tuik.gov.tr/Bulten/Index?p=The-Results-of-Address-Based-Population-Registration-System-2024-53783&dil=2 |title=Table.3 – Population of province/district centers and towns/villages by province and sex and population density |publisher=[[Turkish Statistical Institute]] |website=www.tuik.gov.tr |date=6 February 2025 |access-date=6 February 2025}}</ref>}} '''तुर्की''' ({{Langx|tr|Türkiye|italic=no}}) [[यूरेशिया]] में स्थित एक देश है। इसकी राजधानी [[अंकारा|अंकारा]] है। इसकी मुख्य और राजभाषा [[तुर्कीयाई भाषा|तुर्की भाषा]] है। यह एक धर्मनिरपेक्ष देश है जहाँ अधिकांश लोगों का धर्म इस्लाम है। ये एक लोकतान्त्रिक गणराज्य है। इसके एशियाई भाग को [[आनातोलिया|अनातोलिया]] और यूरोपीय अंश को [[थ्रेस]] कहते हैं। '''स्थिति''' : 39 डिग्री उत्तरी अक्षांश तथा 36 डिग्री पूर्वी देशान्तर। इसका कुछ भाग [[यूरोप]] में तथा अधिकांश भाग [[एशिया]] में पड़ता है अत: इसे यूरोप एवं एशिया के बीच का 'पुल' कहा जाता है। इजीयन सागर (Aegean sea) के पतले जलखंड के बीच में आ जाने से इस पुल के दो भाग हो जाते हैं, जिन्हें साधारणतया यूरोपीय टर्की तथा एशियाई टर्की कहते हैं। टर्की के ये दोनों भाग बॉसपोरस के जलडमरूमध्य, मारमारा सागर तथा डारडनेल्ज द्वारा एक दूसरे से अलग होते हैं। टर्की गणतंत्र का कुल क्षेत्रफल 2,96,185 वर्ग मील है जिसमें यूरोपीय टर्की (पूर्वी थ्रैस) का क्षेत्रफल 9,068 वर्ग मील तथा एशियाई टर्की (ऐनाटोलिआ) का क्षेत्रफल 2,87,117 वर्ग मील है। इसके अंतर्गत 451 दलदली स्थल तथा 3,256 खारे पानी की झीलें हैं। पूर्व में [[रूस]] और [[ईरान]] ([[कुर्दिस्तान]]), दक्षिण की ओर [[इराक़|इराक]], [[सीरिया]] तथा [[भूमध्य सागर|भूमध्यसागर]], पश्चिम में [[यूनान|ग्रीस]] और [[बुल्गारिया]] और उत्तर में [[कालासागर]] इसकी राजनीतिक सीमा निर्धारित करते हैं। '''यूरोपीय टर्की''' - त्रिभुजाकर प्रायद्वीपी प्रदेश है जिसका शीर्षक पूर्व में [[बॉसपोरस]] के मुहाने पर है। उसके उत्तर तथा दक्षिण दोनों ओर पर्वतश्रेणियाँ फैली हुई हैं। मध्य में निचला मैदान मिलता है जिसमें होकर [[मारीत्सा]] और [[इरजिन]] नदियाँ बहती हैं। इसी भाग से होकर इस्तैस्म्यूल का संबंध पश्चिमी देशों से है। '''एशियाई टर्की''' - इसको हम तीन प्राकृतिक भागों में विभाजित कर सकते हैं: 1. उत्तर में काला सागर के तट पर पॉण्टस पर्वत, 2. मध्य में ऐनाटोलिया ओर आरमीनिया के निचले भाग, 3. दक्षिण में टॉरस एवं ऐंटिटॉरस पर्वत जो भूमध्यसागर के तट तक विस्तृत हैं। दोनों समुद्रों के तट पर मैदान की पतली पट्टियाँ मिलती हैं। पश्चिम में इजीयन तथा मारमारा सागरों के तट पर अपेक्षाकृत कम ऊँची पहाड़ियाँ मिलती हैं, जिससे मध्य के पठार तक आवागमन सुगम हो जाता है। उत्तर से दक्षिण की ओर आने पर काला सागर के तट पर सँकरा मैदान मिलता है जिससे एक से लेकर दो मील तक ऊँची पॉण्टस पर्वतश्रेणियाँ एकाएक उठती हुई दृष्टिगोचर होती हैं। इन पर्वतश्रेणियों को पार करने पर ऐनाटोलिया का विस्तृत पठार मिलता है। इसके दक्षिण टॉरस की ऊँची पर्वतश्रेणियाँ फैली हुई है और दक्षिण जाने पर भूमध्यसागरीय तट का निचला मैदान मिलता है। एनाटोलिया पठार में टर्की का एक तिहाई भाग सम्मिलित है। == भूगोल == === जलवायु एवं वनस्पति === जलवायु के विचार से टर्की दो प्रमुख भागों में विभाजित किया जा सकता है। 1. '''मैदानी भाग''' जहाँ की जलवायु भूमध्यसागरीय है और जहाँ जाड़े में करीब 20"" वर्षा होती है, 2. '''अर्धशुष्क पठारी भाग''' जिसकी अधिकतम वर्ष का औसत 10"" है। समुद्रतटीय भागों की जलवायु ग्रीस से मिलती जुलती है जहाँ गर्मी प्राय: शुष्क रहती है और शीतकाल में वर्षा होती है। जाड़े के दिनों में इस क्षेत्र में शीतलहरी भी चलती है काला सागर के तट पर सबसे अधिक वर्षा होती है। पूर्व की ओर तो करीब 100"" वर्षा होती है। अत: ऊँचाई के अनुसार विभिन्न वनस्पतियाँ मिलती हैं। निचले मैदानी भाग में प्राय: छोटे छोटे पेड़ तथा झाड़ियाँ मिलती है, पठारी ढालों पर शीत कटिबंधीय पर्णपाती वन (deciduous forest) तथा 6,000 फुट की ऊँचाई तक कोनिफरस (coniferous) वन तथा और ऊँचाई पर घास के मैदान मिलते हैं। ऐनाटोलिया के पठारी भाग की जलवायु दक्षिण पूर्वी रूस की जलवायु से मिलती जुलती है जहाँ जाड़े में उत्तर पूर्वी शीतल हवाएँ चलती हैं, जिनसे ताप कभी कभी शून्य अंश सेंटीग्रेड तक पहुँच जाता है। गर्मी में अधिक गर्मी पड़ती है तथा कभी कभी आँधी भी आती है। वर्षा 10"" से कम होती है। जाड़े में लगभग तीन महीनों तक बर्फ पड़ती रहती है। फलस्वरूप यह पेड़ों से रहित शुष्क घास का मैदान है। आरमीनिया का पहाड़ी भाग और भी ठंडा है जहाँ जाड़े की ऋतु छह महीनें की होती है। इसीलिए लोग इस भाग को "टर्की का साइवीरिया" कहते हैं। === मिट्टी === टर्की के अधिकांश भाग में मिट्टी की गहराई कम मिलती है। मिट्टी का अधिक भाग कटकर निकल गया है। घास के मैदानों में अधिक चरागाही के कारण मिट्टी का कटाव अधिक हुआ है। कुछ स्थलों पर जंगलों के कट जाने से भी मिट्टी का कटाव अधिक हुआ है। === उद्यम === एशियाई टर्की का मुख्य उद्यम कृषि एवं चरागाही हैं। गेहूँ मुख्य फसल है, जो कृष्य भूमि के 45 प्रतिशत भाग में उपजाया जाता है। इसके आधे भाग में जौ उपजाया जाता है। तीन प्रतिशत भाग में कपास तथा एक प्रतिशत भाग में तंबाकू की खेती होती है। यहाँ से निर्यात होनेवाली वस्तुओं में गेहूँ, ऊन, तंबाकू, अंजीर तथा किशमिश मुख्य हैं। यहाँ के मुख्य खनिज पदार्थ कोयला, लिग्नाइट, लोहा, ताँबा, मैंगनीज, सीसा, जस्ता, क्रोम तथा एमरी हैं; किंतु लिग्नाइट, लोहा तथा क्रोम का अत्यधिक उत्पादन होता है। === प्राकृतिक विभाग === टर्की को भौगोलिक दृष्टि से पाँच मुख्य भागों में विभाजित किया जा सकता है: *1. [[मारमारा]] का निचला भाग, *2. [[काला सागर]] का समुद्रतट, *3. [[भूमध्य सागर|भूमध्यसागर]] का तटीय भाग, *4. [[आनातोलिया|ऐनाटोलिया]] पठार और *5. आरमीनियन पर्वतीय भाग। ;मारमारा का निचला मैदान - पश्चिम में डारडनेल्ज और पूर्व से बाँसपोरस के जलडमरूमध्य के बीच में स्थित मारमारा समुद्र यूरोप और एशिया के बीच की सीमा निर्धारित करता है। उत्तर की ओर यूरोप में थ्रैस का मैदान तथा दक्षिण की ओर ट्रॉय, वरसा और विथुनिया के मैदान मिलते हैं। वार्षिक वर्ष 120"" के निकट है। गेहूँ, जौ, जई, जैतून, अंगूर तथा तंबाकू उपजाई जाती है। जैतून इस देश के लिये बहुत महत्वपूर्ण वस्तु है। इसका उपयोग मक्खन के अभाव में होता है। इस क्षेत्र में 750 फुट से निचले स्थलों में कृषि मुख्य उद्यम है। खेती करने कराने का ढंग बड़ा पुराना है, भारतीय देशी हल की भाँति के हल का उपयोग होता है, पर लोहे के हल का उपयोग बढ़ता जा रहा है। इस्तैम्बूल टर्की का सबसे बड़ा नगर है। यह बॉसपोरस जलडमरूमध्य के दक्षिण ओर एक पहाड़ी पर स्थित है। यहाँ की "गोल्डेन हार्न" नामक लंबी खाड़ी के कारण यह अच्छा बंदरगाह भी हो गया है। जलडमरूमध्य कहीं भी पाँच मील से अधिक चौड़ा नहीं है, कुछ स्थल पर इसकी चौड़ाई आधा मील ही है। ;कालासागर का समुद्रतट - यहाँ का समुद्रतट कम समतल है और पर्वतीय भाग दक्षिण की ओर एकाएक ऊपर उठते हैं। अत: यहाँ बंदरगाहों का निर्माण बहुत कम हो पाया है। बस्तियाँ इसी सँकरे भाग तक ही सीमित हैं। वर्षा की अधिकता के कारण जंगली क्षेत्र अधिक हैं, जिनमें चेस्टनट वृक्ष मुख्य हैं। लकड़ी का काम यहाँ का मुख्य उद्यम है। तंबाकू दूसरी निर्यात की वस्तु है। दक्षिण की ओर पॉण्टस का पहाड़ी भाग पूर्व से पश्चिम की ओर फैला हुआ है। इसका अधिकतर भाग जंगली तथा घास का मैदान है। भीतरी भाग में जहाँ की ऊँचाई 3,000 फुट से लेकर 6,000 फुट तक है, अर्धमरुस्थलीय वातावरण मिलता है। यहाँ जनसंख्या भी विरल है। पूर्व की ओर कुछ कोयला क्षेत्र है, जिसका प्रति वर्ष उत्पादन 30 लाख मीट्रिक टन है। ;भूमध्यसागरीय तट - टर्की का पूर्वी तथा पश्चिमी निचला मैदान कृषि के विचार से अधिक महत्वपूर्ण है। भूमध्यसागरीय जलवायु होने के कारण यहाँ तीन से लेकर छह महीने तक गर्मी की शुष्क ऋतु होती है और जाड़े में करीब 20"" वर्षा होती हैं। इजीयन सागर के तट पर बस्तियाँ बड़ी घनी हैं। अनेक धँसी हुई घाटियों में मिट्टी का पूर्णत: अथवा आंशिक जमाव हो गया है जिससे खेती के लिए उपजाऊ मैदान निर्मित हो गए हैं। यहाँ के तीन मैदानी भाग अधिक महत्वपूर्ण हैं। प्रथम पश्चिम में इजमिर के पीछे, मध्य में अंटालया के आसपास पंफीलियन का मैदान तथा उत्तर-पूर्व कें काने पर अदागा के पास सिलीसियन का मैदान है। यहीं पर एक बीहड़ दर्रे से होकर बगदाद रेलवे जाती है। [[गेहूँ]] तथा [[जौ]] मुख्य फसलें हैं। कपास हर एक मैदानी भाग में होती है, विशेषकर सिलीसियन के मैदान में। इजमिर के आसपास अंगूर, किचामिश, जैतून, अंजीर तथा अफीम अधिक होती है। टॉरस पर्वतमालाएँ जंगलों से ढकी हैं परंतु वृक्ष 8,500 फुट की ऊँचाई तक ही सीमित हैं। पहाड़ों पर बर्फ अधिक पड़ती है। ;[[एशिया माइनर का पठार|ऐनाटोलिया का पठार]] - इसकी ऊँचाई पश्चिम में 2,000 फुट तक और पूर्व में 4,000 फुट तक है। यह 10,000 फुट से भी अधिक ऊँचे टॉरस और पॉण्टस पर्वतमालाओं से घिरा हुआ है। टर्की का भीतरी भाग ऊँचे बेसिन की भाँति है। जहाँ तहाँ ऊँचे पहाड़ भी मिलते हैं। अधिकांश भाग का जलप्रवाह भीतर की ओर है और नदियाँ या तो झीलों में गिरती हैं अथवा नमकीन निचले दलदलों में लुप्त हो जाती हैं। परंतु कुछ नदियाँ पर्वतों को काटती और गुफाएँ निर्मित करती हुई बहती हैं। चारों तरु ऊँचे पर्वतों से घिरे रहने के कारण यह भाग जाड़े तथा गर्मी दोनों मौसमों में भापभरी हवाओं से साधारणतया वंचित रहने के कारण शुष्क रहता है, वार्षिक वर्ष का औसत लगभग 10"" है। जाड़े में भूमि कभी कभी बर्फ से ढक जाती है। गर्मी में गरम तथा तेज हवाएँ चलती हैं। अत: शुष्क प्रदेशों में मिट्टी हट गई है ओर मरुस्थलीय कंकड़ों का उभार हो गया है। इस अर्धशुष्क घास के मैदानों में भेड़ बकरियाँ पाली जाती हैं। दूध दही का समावेश यहाँ के भोजन में अधिक होता है। ऊन तथा ऊनी कंबल तैयार करना मुख्य पेशा है। अंगोरा से उनका निर्यात होता है। गर्मी के दिनों में गड़ेरिए अपने जानवरों के साथ पहाड़ों पर चले जाते हैं और अन्य मौसम में मैदानी भाग में उतर आते हैं। जहाँ सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं वहाँ गेहूँ की खेती होती है। इस पठार में टर्की की एक तिहाई जनसंख्या रहती है। ऐनाटोलिया का यह पठारी भाग तुर्क ो का मुख्य स्थान है। टर्की की राजधानी अंकारा इसी भाग में स्थित है। ;आरमीनिया का पहाड़ी भाग - टर्की के पूर्व में पॉण्टस तथा टॉरस पर्वतश्रेणियाँ मिलकर आरमीनिया के पहाड़ी भाग का निर्माण करती हैं। यहीं से दजला और फरात नदियाँ निकलती हैं। उत्तर और दक्षिण की ओर से पहाड़ी श्रेणियाँ मध्य के पठार को घेरती हैं। दक्षिण की ओर टॉरस की क्षेणी कुर्दिस्तान तथा उत्तर की ओर पॉण्टस की श्रेणी कारावाग, इस भाग को घेरे हुए हैं। ज्वालामुखी पर्वत तथा लाबा के विस्तार से धरातल और भी ऊँचा नीचा हो गया है। ऊँचाई के कारण यह भाग अधिक ठंडा रहता है और बहुत से दरें वर्ष में करीब आठ महीने तक बर्फ से ढके रहते हैं। पूर्व की ओर अरादार ज्वालामुखी पर्वत (19,916 फुट) टर्की, ईरान और रूस की सीमा पर स्थित है। कृषि की अपेक्षा चरागाही इस क्षेत्र में अधिक महत्वपूर्ण है। == निवासी एवं भाषा == टर्की के अधिकांश मनुष्य तुर्क जाति के हैं। इनके अतिरिक्त कॉकेशियन, आरमीनियन, जार्जियन, कुर्द, अरब तुर्कमान,और अरब अल अंसार जातियाँ भी टर्की में पाई जाती हैं। == इतिहास == {{मुख्य|तुर्की का इतिहास}} तुर्की एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ मानव-जातियों के स्थानान्तरण तथा संघर्ष की प्रंमुखता रही है। ईसा से पूर्व यूनानी ([[आर्य]]) जातियों का बसाव और फिर स्थानान्तरण तथा ईसा के बाद सन् 800-1400 तक [[तुर्क]] जाति का प्रादुर्भाव इस भौगोलिक क्षेत्र की इतिहास की प्रमुख लिखित घटना है। [[होमर]] के ओडिसी में वर्णित [[ट्राय की लड़ाई]] तुर्की के पश्चिमी तट पर ट्रॉय के वासियों तथा यूनानी द्वीपों पर बसे साम्राज्यों के बीच हुई थी। इसका काल सन् 1200 ईसा पूर्व के आसपास माना जाता है। इसके पूर्व यही तट हिट्टी तथा फिनिक साम्राज्यों का भी स्थान रहा था। सन् 530 ईसापूर्व में ईरान के [[फ़ारसी साम्राज्य]] के अंतर्गत आया जो कई सालों तक यूनानियों द्वारा संघर्ष के कारण ग्रीक और ईरानी साम्राज्यों में बंटा रहा। सन् 330 ईसापूर्व में सिकंदर जब पूर्व की ओर विजय अभियान पर निकला तो यह प्रदेश भी यूनानी (मेसीडोनी) साम्राज्य के अंदर आ गया। सन् 24 के बाद से यह [[रोमन साम्राज्य]] का अंग बना रहा। [[सासानी साम्राज्य|सासानी]] और बाद में तुर्क जातियों के संगठनों ने पूर्वी रोमन साम्राज्य पर हमला कर इसके कई क्षेत्रों पर अधिकार बना लिया। [[तुर्क लोग]] धीरे-धीरे नौवीं सदी में इस क्षेत्र में बसते गए। सासानी साम्राज्य के अंत (सन् 635) के बाद पूर्वी तथा दक्षिणी तुर्की में [[इस्लाम]] का प्रचार हुआ। [[औगुज]], [[सलजूक़ साम्राज्य|सल्जूक़]] और उस्मानी तुर्क [[सुन्नी इस्लाम|सुन्नी]] इस्लाम में परिवर्तित हो गए। === उस्मानी काल === {{मुख्य|उस्मान साम्राज्य}} उस्मानी तुर्कों ने रोमन राजधानी इस्तांबुल पर भी अधिकार करने के कई प्रयास किए। सन् 1453 में वे इस्तांबुल को स्थाई रूप से विजयी करने में कामयाब रहे। इसके बाद इस्तांबुल एक मजबूत तुर्क साम्राज्य का केन्द्र बना जो सोलहवीं सदी में हंगरी से लेकर अरब देशों तक फैल गया। इस साम्राज्य ने यूरोप तथा ईरान के सफ़वियों से कई लड़ाईयाँ लड़ी। ईरानी शासकों ने बारुद का प्रयोग तुर्कों से ही सीखा - जिसके बाद बाबर जैसे आक्रांता (सफ़वी मदद लेकर) भारत पर बारुदी तोपों से लैश सेना लेकर आक्रमण कर सका। उस्मानी शासकों ने सोलहवीं सदी में [[मक्का]] और [[मदीना]] पर भी अधिकार कर लिया जिसकी वजह से वो इस्लाम के [[ख़लीफ़ा]] (प्रमुख) भी बन गए। लेकिन उत्तर और पूर्व के रूसी तथा दक्षिण-पूर्व के सफ़वी (ईरानी, शिया) शासकों से उनकी लड़ाई होती रही। ईरानी शासकों को तो उन्होंने उत्तर में बढ़ने से रोक दिया पर रूसियों के साथ [[क्रीमिया का युद्ध|क्रीमिया के युद्ध]] में (1853-54) में उन्हें हार का मुँह देखना पड़ा। === आधुनिक काल === [[पहला विश्व युद्ध|प्रथम विश्वयुद्ध]] में उस्मानी तुर्क जर्मनों के साथ थे। जर्मनों की हार और अरब में अंग्रेजों द्वारा खदेड़ दिए जाने के बाद [[उस्मानी साम्राज्य]] का अंत हो गया। इसके बाद [[कमाल अतातुर्क|मुस्तफ़ा कमाल पाशा]] ने लोकतंत्र का प्रचार और धर्मनिरपेक्ष प्रणाली की वकालत की जिसके फलस्वरूप तुर्की एक धर्मनिरपेक्ष देश बना। [[अरबी लिपि]] को त्याग कर यूरोपीय रोमन आधारित लिपि को अपनाया गया और शासन को धर्म से अलग किया गया। ; एक दृष्टि में तुर्की का आधुनिक इतिहास * तुर्की को "यूरोप का मरीज" कहा जाता था। * [[युवा तुर्क आन्दोलन|युवा तुर्क आन्दोलन]] की शुरुआत [[अब्दुल हमीद द्वितीय]] के शासनकाल में 1908 ई. में हुई। पान इस्लामिज्म का नारा अब्दुल हमीद द्वितीय ने दिया था। * [[प्रथम विश्वयुद्ध]] के बाद 10 अगस्त, 1920 ई. को तुर्की के साथ भीषण अपमानजनक सेब्र की संधि की गयी। [[मुस्तफा कमाल पाशा]] ने इसे मानने से इनकार कर दिया। * आधुनिक तुर्की का निर्माता मुस्तफा कमाल पाशा को माना जाता है। इसे ‘अतातुर्क’ (तुर्की का पिता) के उपनाम से भी जाना जाता है। * तुर्की में एकता और प्रगति समिति का गठन 1889 ई. में हुआ । प्रारम्भ में कमाल पाशा एकता और प्रगति समिति के प्रभाव में आया। * एक सेनापति के रूप में कमाल पाशा ने गल्लीपोती युद्ध में शानदार सफलता हासिल की। इसके बाद 1919 ई. में कमाल पाशा ने सैनिक पद से इस्तीफा दे दिया। * 1919 ई. के अखिल तुर्क काँग्रेस के प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता मुस्तफा कमाल पाशा ने की। 1923 ई. में तुर्की एवं [[यूनान]] के बीच में लोजान की संधि हुई। * 23 अक्टूबर, 1923 ई. को तुर्की गणतंत्र की घोषणा हुई। * 20 अप्रैल, 1924 ई. को तुर्की में नये संविधान की घोषणा हुई। तुर्की के नये गणतंत्र का राष्ट्रपति मुस्तफा कमाल पाशा बने। मुस्तफा कमाल पाशा द्वारा किये गये महत्वपूर्ण कार्य निम्न हैं : :: 1924 ई. में तुर्की को धर्मनिरपेक्ष राज्य की घोषणा। :: कमाल पाशा ने तुर्की में 3 मार्च, 1924 ई. को [[खिलाफत]] को समाप्त कर दिया। :: ग्रेगोरियन कैलेडर का प्रचलन (26 दिसम्बर, 1925 ई. से लागू)। :: 25 नवम्बर, 1925 ई. को तुर्की में टोपी और औरतों को बुरका पहनने पर कानूनी प्रतिबंध लगाया गया। :: 1932 ई. में तुर्की भाषा परिषद की स्थापना। :: 1933 ई. में तुर्की में प्रथम पंचवर्षीय योजना का लागू होना। :: इस्ताम्बुल में एक मेडिकल कॉलेज की स्थापना। :: 1938 ई. में कमाल पाशा की मृत्यु हो गयी। == विभाग == {{मुख्य|तुर्की के प्रशासनिक उपविभाजन|तुर्की के प्रांत}} तुर्की की राजधानी और दूसरे सबसे बड़े शहर इस्तांबुल में है। सबसे बड़ा और सबसे अधिक भीड़ शहर इस्तांबुल जो दुनिया के दो अलग-अलग महाद्वीपों पर भूमि है, में केवल शहर है। तीसरा सबसे बड़ा शहर इस्तांबुल के तटीय शहर है जो देश के मुख्य बंदरगाह है। तुर्की में 81 प्रांतों में बांटा गया है। प्रत्येक प्रांत अपने खुद के छोटे सरकार है, लेकिन वे केवल छोटी-छोटी बातों के बारे में निर्णय लेने के लिए कर सकते हैं: अंकारा में सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों का फैसला किया। प्रांतों 7 क्षेत्रों में हैं। प्रत्येक प्रांत जिलों में बांटा गया है। वहाँ 923 जिलों को पूरी तरह से कर रहे हैं। तुर्की को 81 राज्यों में बांटा गया है। इनको व्यवस्था और ख़ासकर जनगणना में सहुलियत के लिए 7 प्रदेशों में बाँटा गया है। हालांकि इन प्रदेशों का प्रशासनिक तौर पर कोई महत्व नहीं है। {{Turkey Labelled Map}} {|class='wikitable' |- | <ol> ;एजियन क्षेत्र # [[अफ़योनकाराहिसार]] # [[अयदुन]] # [[देनिज़ली]] # [[इज़मिर]] # [[कुताह्या]] # [[मानिसा]] # [[मूला]] # [[उशाक]] <br> <br> <br> <br> <br> <br> <br> <br> <br> <br> <br> <br> | ;काला सागर क्षेत्र # [[अमास्या]] # [[अर्तविन]] # [[बायबुर्त]] # [[चोरुम]] # [[गिरेसुन]] # [[गुमुसहाने]] # [[ओर्दू]] # [[रिज़े]] # [[सामसुन]] # [[सिनोप]] # [[तोकात]] # [[त्राबज़ोन]] # [[बार्तुन]] # [[बोलू]] # [[दुज़जे]] # [[काराबुक]] # [[कास्तमोनू]] # [[ज़ोंगुलदाक]] <br> <br> | ;मध्य अनातोलियाई क्षेत्र # [[अकसराय]] # [[अंकारा]] # [[चांकुरु]] # [[एस्कीशेहिर]] # [[कारामान]] # [[कैसरी]] # [[कुरुककले]] # [[कुरशेहर]] # [[कोन्या]] # [[नेवशेहिर]] # [[नीदे]] # [[सिवास]] # [[योज़गात]] <br> <br> <br> <br> <br> <br> <br> | ;पूर्वी अनातोलिया # [[आरु]] # [[अर्दहान]] # [[बिंगोल]] # [[बितलिस]] # [[एलाज़ू]] # [[एर्ज़िंजान]] # [[एर्ज़ुरूम]] # [[हक्कारी]] # [[ऊदुर]] # [[कार्स]] # [[मालात्या]] # [[मुश]] # [[तुंजेली]] # [[वान]] <br> <br> <br> <br> <br> <br> | ;मरमरा क्षेत्र # [[बालुकेसिर]] # [[बिलेजिक]] # [[बुर्सा]] # [[चानाककले]] # [[एदिर्ने]] # [[इस्तांबुल]] # [[कुर्कलारेली]] # [[कोजाएली]] # [[साकार्या]] # [[तेकिरदा]] # [[यालोवा]] <br> <br> <br> <br> <br> <br> <br> <br> <br> | ;भूमध्य सागरीय क्षेत्र # [[अदाना]] # [[अन्ताल्या]] # [[बुर्दुर]] # [[हाताय]] ([[सीरिया]] के साथ विवदित) # [[उस्पार्ता]] # [[कहरमानमराश]] # [[मरसीन]] # [[ओस्मानिये]] # [[अदुयामान]] # [[बातमान]] # [[दियारबाकुर]] # [[गाज़ियांतेप]] # [[किलिस]] # [[मार्दीन]] # [[शानलूरफ़ा]] # [[सीर्त]] # [[शुरनाक]] <br> <br> <br> </ol> |} ==अर्थव्यवस्था== तुर्की ओईसीडी और जी -20 में है, और 20 सबसे अमीर देशों में से एक है। तुर्की की मुद्रा को लीरा मुद्रा कहा जाता है। सबसे पहले सिक्के तुर्की में इस्तेमाल किए गए थे। 1970 के दशक में, कई तुर्क, अन्य देशों में ले जाया जर्मनी की तरह, समय पर बुरा अर्थव्यवस्था से बचने के लिए और बेहतर रोजगार पाने के लिए। वे अक्सर अपनी गर्मी की छुट्टियों के लिए वापस सफर के लिए आते हैं। आज, लोग हैं, जो 1970 के दशक में छोड़ के कई सफर के लिए वापस ले जाना चाहते हैं। 1980 के दशक तक सरकार ज्यादातर कंपनियों के स्वामित्व में थी लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री तुर्गुत ओज़ाल उन्हें बेच दिया। इससे पहले, आमतौरपर विदेशियों कम्पनियों को, भूमि या संपत्ति खरीदने के लिए अनुमति नहीं थी। 1994, 1999, और 2001 में भूकंप के बाद तुर्की का आर्थिक विकास धीमा हो गया तुर्की ज्यादातर खरीदता है और [[यूरोपीय संघ]], [[संयुक्त राज्य अमेरिका]], [[रूस]] और [[जापान]] के साथ बेचता है। तुर्की और यूरोपीय संघ के लिए वे क्या खरीदने के लिए और एक-दूसरे को बेचने पर टैक्स का एक बहुत डाल करने के लिए सहमत नहीं। उसके बाद यह आसान तुर्की कारखानों यूरोपीय संघ के लिए और यूरोपीय संघ में व्यापार लोगों के लिए उत्पादों को बेचने के लिए तुर्की में कंपनियों को खरीदने के लिए किया गया था। 2010 में तुर्की का निर्यात 117 अरब अमेरिकी डालर था तुर्की में कोई [[शिलारस|पेट्रोलियम]] या [[प्राकृतिक गैस]] उत्पादन प्लांट नहीं है, इसलिए यह उसे रुस जैसे अन्य देशों से खरीदता है। 2010 में, तेल दियारबाकिर के तुर्की शहर में पाया गया था, लेकिन वहाँ पर्याप्त मात्रा में तेल निकालने के लिए नहीं था। तुर्की उत्तरी तुर्की साइप्रस में प्राकृतिक गैस की खोज कर रहा है। ==संस्कृति== ===भाषा=== {{मुख्य|तुर्की भाषा}} तुर्की में ज्यादातर लोग [[तुर्कीयाई भाषा|तुर्की भाषा]] बोलते हैं। यह तुर्की भाषा समूह है, जो भी कई अन्य ऐसे [[अजरबैजानी भाषा|अज़रबैजानी]] और तातारी के रूप में [[एशिया]] भर में बोली जाने वाली भाषाओं में शामिल हैं, के अंतर्गत आता है। तुर्की भाषा मध्य एशिया से आया है, लेकिन अब यह मध्य एशिया में बोली जाने वाली भाषाओं से थोड़ा अलग है। तुर्की में भी अल्पसंख्यकों जैसे [[अरबी]], [[कुर्द लोग|कुर्द]], [[अर्मेनियाई भाषा|अर्मेनियाई]], [[यूनानी]] या लादीनो, और कई दूसरों के रूप में जो भाषाओं में बात कर रहे हैं। युवा वयस्कों के कई लोग भी अंग्रेजी, जो मध्यम और [[उच्च विद्यालय]] के दौरान सिखाया जाता है बात कर सकते हैं। ===जीवन शैली=== तुर्की में एक आधुनिक संस्कृति है। तुर्क के जीवन शैली गोरों के समान है। तुर्की संस्कृति पश्चिमी देशों और आधुनिक इस्लामी संस्कृति के बीच एक अंतर है। तुर्की के विभिन्न भागों समान नहीं बल्कि वास्तव में एक ही जीवन शैली है। पश्चिम, दक्षिण पश्चिम और उत्तर पश्चिम में जीवन शैली और अधिक आधुनिक है। उस क्षेत्र में रहने वाले लोगों को आधुनिक लहजे है। दक्षिणी तुर्की में भी एक आधुनिक जीवन शैली है लेकिन तुर्क भूमध्य द्वारा रहने वाले पश्चिमी तुर्की से, दक्षिणी बहुत मोटा है, और अधिक मर्दाना लहजे है। उत्तरी, काला सागर से नरम लहजे और भी आधुनिक जीवन शैली है। पूर्वी और दक्षिण पूर्वी तुर्की ज्यादातर कुर्दों से बना है। वे आम तौर पर कम आधुनिक और अधिक इस्लामी जीवन शैली है। तुर्की में अमीर शहरों इस्तांबुल, [[इज़्मिर]], [[अंकारा|अंकारा]], [[इस्तांबुल]] (भी Icel रूप में जाना जाता है), और इस्तांबुल में शामिल हैं। ===बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक समाज=== तुर्की के बहुमत तुर्क से बना है। सबसे बड़ा अल्पसंख्यक [[कुर्द लोग]] है। कुर्दों दक्षिण पूर्वी और पूर्वी तुर्की में ज्यादातर रहते हैं और गरीब वित्तीय स्थितियों की है। दूसरा सबसे बड़ा अल्पसंख्यक अरामियोंको हैं। ==शिक्षा== मुख्य | [[तुर्की में शिक्षा]] तुर्की के [[साक्षरता]] दर वर्तमान में 95% है। तुर्की के लोगों में 12 साल के लिए स्कूल जाने के लिए आवश्यक हैं। [[इस्तांबुल विश्वविद्यालय]] तुर्की में पहला विश्वविद्यालय था। यह 1453. में स्थापित किया गया था [[अंकारा विश्वविद्यालय]] पहला विश्वविद्यालय है कि उसके बाद तुर्की एक गणतंत्र बन शुरू कर दिया गया था। यह 1946 में स्थापित किया गया था। वहाँ राष्ट्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार 2002 में तुर्की में 6065 उच्च विद्यालयों थे। 2011 की स्थिति अनुसार तुर्की में कुल 166 विश्वविद्यालयों थे <ref>[http://www.hurriyetdailynews.com/default.aspx?pageid=438&n=university-numbers-on-the-rise-in-turkey-2011-09-04 University numbers on the rise in Turkey] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160905210842/http://www.hurriyetdailynews.com/default.aspx?pageid=438&n=university-numbers-on-the-rise-in-turkey-2011-09-04 |date=5 सितंबर 2016 }} (Hürriyet Daily News, 4 September 2011)</ref> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} {{एशिया के देश}} {{यूरोप}} [[श्रेणी:यूरोप के देश]] [[श्रेणी:एशिया के देश]] gb97dzjzn23es07b8ufdm7isa1woupd वार्ता:ईरान 1 10442 6630416 2919642 2026-10-17T10:47:58Z Devdoingdev 954190 /* Conflicting value: GDP (nominal) per capita value and rank */ नया अनुभाग 6630416 wikitext text/x-wiki {{वार्ता शीर्षक}} == Conflicting value: GDP (nominal) per capita value and rank == The GDP (nominal) per capita value and rank differs between language editions of this article: * [[:en:Iran|English Wikipedia]] says '''$3,548 (139th)''' (citing [https://data.imf.org/en/Data-Explorer?datasetUrn=IMF.RES:WEO(9.0.0) data.imf.org]): "• Per capita: $3,548 (139th)" * [[ईरान|Hindi Wikipedia]] says '''$5,013 (120वाँ)''' (uncited): "• प्रति व्यक्ति: $5,013 (120वाँ)" Could someone check which value the sources support? Found with [https://factdiff.toolforge.org FactDiff]<nowiki>. ~~~~</nowiki> [[सदस्य:Devdoingdev|Devdoingdev]] ([[सदस्य वार्ता:Devdoingdev|वार्ता]]) 10:47, 17 अक्टूबर 2026 (UTC) nddzxbzagf2ujcf72k1vmbnx95x8d6i खर-दूषण 0 11830 6630350 6617474 2026-10-17T06:20:47Z Indradrohi 954139 /* */ 6630350 wikitext text/x-wiki {{स्रोतहीन|date=सितंबर 2026}} [[चित्र:Rama Fights the Demons.jpg|thumb|Seeing the plight of Shurpanakhi, the enraged demon army of Khara and Dushana came and attacked Rama. Single handedly, Rama destroyed the complete force of demons.]] '''खर-दूषण''' महाबलशाली राक्षस थे जो दण्डक वन में निवास करते थे। ये दोनों रावण के मौसेरे भाई भी थे। महाकाव्य रामायण के अनुसार श्रीराम ने अपने वनवास काल के दौरान इन दोनों का सेना सहित वध किया था। After the death of her husband, Vidyutjihva, at the hands of Ravana, Shurpanakha was sent to live in the Dandaka Forest alongside Khara and Dushana. Khara and Dushana governed the region on Ravana’s behalf and commanded a force of 14,000 warriors.<ref>Valmiki Ramayan Uttara Kanda, particularly 7.12.2 and 7.24 verses.</ref> {{Hindu-myth-stub}} {{श्री राम चरित मानस}} [[श्रेणी:रामायण के पात्र]] obuy94ytvbl35fhz6uovwnijb6a0jva 6630351 6630350 2026-10-17T06:25:54Z चाहर धर्मेंद्र 703114 [[Special:Contributions/Indradrohi|Indradrohi]] ([[User talk:Indradrohi|वार्ता]]) द्वारा किए गए बदलाव [[Special:Diff/6630350|6630350]] को पूर्ववत किया 6630351 wikitext text/x-wiki {{स्रोतहीन|date=सितंबर 2026}} [[चित्र:Rama Fights the Demons.jpg|thumb|Seeing the plight of Shurpanakhi, the enraged demon army of Khara and Dushana came and attacked Rama. Single handedly, Rama destroyed the complete force of demons.]] '''खर-दूषण''' महाबलशाली राक्षस थे जो दण्डक वन में निवास करते थे। ये दोनों रावण के मौसेरे भाई भी थे। महाकाव्य रामायण के अनुसार श्रीराम ने अपने वनवास काल के दौरान इन दोनों का सेना सहित वध किया था। {{Hindu-myth-stub}} {{श्री राम चरित मानस}} [[श्रेणी:रामायण के पात्र]] rpy4tzpxjid2dr82noyul1x3isayvxb 6630371 6630351 2026-10-17T07:20:13Z Anitya Gautam 916080 6630371 wikitext text/x-wiki {{स्रोतहीन|date=सितंबर 2026}} [[चित्र:Rama Fights the Demons.jpg|thumb|Seeing the plight of Shurpanakhi, the enraged demon army of Khara and Dushana came and attacked Rama. Single handedly, Rama destroyed the complete force of demons.]] '''खर-दूषण''' महाबलशाली राक्षस थे जो दण्डक वन में निवास करते थे। ये दोनों रावण के मौसेरे भाई भी थे। महाकाव्य रामायण के अनुसार श्रीराम ने अपने वनवास काल के दौरान इन दोनों का सेना सहित वध किया था। <ref name="l910">{{cite web | title=खर-दूषण | website=धर्म संसार | date=2019-12-10 | url=https://www.dharmsansar.com/2019/12/khar-dushan.html | language=hi | access-date=2026-10-17}}</ref> {{Hindu-myth-stub}} {{श्री राम चरित मानस}} [[श्रेणी:रामायण के पात्र]] ==सन्दर्भ== 83hm75f4vtru3tf924fs5moavkft69b 6630372 6630371 2026-10-17T07:22:54Z Anitya Gautam 916080 6630372 wikitext text/x-wiki {{स्रोतहीन|date=सितंबर 2026}} [[चित्र:Rama Fights the Demons.jpg|thumb|Seeing the plight of Shurpanakhi, the enraged demon army of Khara and Dushana came and attacked Rama. Single handedly, Rama destroyed the complete force of demons.]] '''खर-दूषण''' महाबलशाली राक्षस थे जो दण्डक वन में निवास करते थे। ये दोनों रावण के मौसेरे भाई भी थे। महाकाव्य रामायण के अनुसार श्रीराम ने अपने वनवास काल के दौरान इन दोनों का सेना सहित वध किया था। <ref name="l910">{{cite web | title=खर-दूषण | website=धर्म संसार | date=2019-12-10 | url=https://www.dharmsansar.com/2019/12/khar-dushan.html | language=hi | access-date=2026-10-17}}</ref> ==इतिहास == खर और दूषण का इतिहास महर्षि विश्रवा और राक्षसराज सुमाली की पुत्री राका से शुरू होता है, जिसके कारण वे लंकापति रावण, कुंभकर्ण और विभीषण के सौतेले भाई थे। रावण ने अपनी सल्तनत को फैलाने और दक्षिण भारत पर नियंत्रण मजबूत करने के लिए दण्डक वन के 'जनस्थान' (जो आज के नासिक के आसपास का क्षेत्र माना जाता है) की कमान खर और दूषण को सौंप रखी थी। जहाँ खर उस क्षेत्र का राजा और दूषण उसका मुख्य सेनापति था, वहीं वे अपने साथ चौदह हजार खूंखार राक्षसों की एक विशाल सेना रखते थे। इस पूरे क्षेत्र में उनका इतना खौफ था कि वहां रहने वाले ऋषि-मुनियों के यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों को वे बेरहमी से नष्ट कर देते थे और कोई भी देवी-देवता या राजा उनसे टकराने का साहस नहीं करता था। {{Hindu-myth-stub}} {{श्री राम चरित मानस}} [[श्रेणी:रामायण के पात्र]] ==सन्दर्भ== 59ixz47kqplfi65aezioimmit54zob6 6630373 6630372 2026-10-17T07:23:41Z Anitya Gautam 916080 6630373 wikitext text/x-wiki {{स्रोतहीन|date=सितंबर 2026}} [[चित्र:Rama Fights the Demons.jpg|thumb|Seeing the plight of Shurpanakhi, the enraged demon army of Khara and Dushana came and attacked Rama. Single handedly, Rama destroyed the complete force of demons.]] '''खर-दूषण''' महाबलशाली राक्षस थे जो दण्डक वन में निवास करते थे। ये दोनों रावण के मौसेरे भाई भी थे। महाकाव्य रामायण के अनुसार श्रीराम ने अपने वनवास काल के दौरान इन दोनों का सेना सहित वध किया था। <ref name="l910">{{cite web | title=खर-दूषण | website=धर्म संसार | date=2019-12-10 | url=https://www.dharmsansar.com/2019/12/khar-dushan.html | language=hi | access-date=2026-10-17}}</ref> ==इतिहास == खर और दूषण का इतिहास महर्षि विश्रवा और राक्षसराज सुमाली की पुत्री राका से शुरू होता है, जिसके कारण वे लंकापति रावण, कुंभकर्ण और विभीषण के सौतेले भाई थे। रावण ने अपनी सल्तनत को फैलाने और दक्षिण भारत पर नियंत्रण मजबूत करने के लिए दण्डक वन के 'जनस्थान' (जो आज के नासिक के आसपास का क्षेत्र माना जाता है) की कमान खर और दूषण को सौंप रखी थी। जहाँ खर उस क्षेत्र का राजा और दूषण उसका मुख्य सेनापति था, वहीं वे अपने साथ चौदह हजार खूंखार राक्षसों की एक विशाल सेना रखते थे। इस पूरे क्षेत्र में उनका इतना खौफ था कि वहां रहने वाले ऋषि-मुनियों के यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों को वे बेरहमी से नष्ट कर देते थे और कोई भी देवी-देवता या राजा उनसे टकराने का साहस नहीं करता था। इनका यह साम्राज्य तब तक अजय रहा जब तक वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी पंचवटी में निवास करने नहीं आए। जब लक्ष्मण जी ने रावण की बहन शूर्पणखा के नाक-कान काट दिए, तब वह अपमान का बदला लेने के लिए रोती हुई अपने भाई खर-दूषण के पास पहुंची। अपनी बहन के अपमान से क्रोधित होकर खर और दूषण अपनी पूरी चौदह हजार की सेना के साथ श्रीराम पर टूट पड़े, लेकिन पंचवटी के उस ऐतिहासिक और भीषण युद्ध में भगवान श्रीराम ने अकेले ही कुछ ही घड़ियों में उनकी पूरी सेना का संहार कर दिया और अंत में दूषण तथा खर दोनों का वध कर दण्डक वन को हमेशा के लिए भयमुक्त कर दिया। {{Hindu-myth-stub}} {{श्री राम चरित मानस}} [[श्रेणी:रामायण के पात्र]] ==सन्दर्भ== 0asr5eaqlafww9ydkbwrbs775gka2ji 6630375 6630373 2026-10-17T07:26:56Z Anitya Gautam 916080 6630375 wikitext text/x-wiki {{स्रोतहीन|date=सितंबर 2026}} [[चित्र:Rama Fights the Demons.jpg|thumb|Seeing the plight of Shurpanakhi, the enraged demon army of Khara and Dushana came and attacked Rama. Single handedly, Rama destroyed the complete force of demons.]] '''खर-दूषण''' महाबलशाली राक्षस थे जो दण्डक वन में निवास करते थे। ये दोनों रावण के मौसेरे भाई भी थे। महाकाव्य रामायण के अनुसार श्रीराम ने अपने वनवास काल के दौरान इन दोनों का सेना सहित वध किया था। <ref name="l910">{{cite web | title=खर-दूषण | website=धर्म संसार | date=2019-12-10 | url=https://www.dharmsansar.com/2019/12/khar-dushan.html | language=hi | access-date=2026-10-17}}</ref> ==इतिहास == खर और दूषण का इतिहास [[महर्षि विश्रवा]] और राक्षसराज सुमाली की पुत्री राका से शुरू होता है, जिसके कारण वे लंकापति [[रावण]], कुंभकर्ण और विभीषण के सौतेले भाई थे। रावण ने अपनी सल्तनत को फैलाने और दक्षिण भारत पर नियंत्रण मजबूत करने के लिए दण्डक वन के 'जनस्थान' (जो आज के नासिक के आसपास का क्षेत्र माना जाता है) की कमान खर और दूषण को सौंप रखी थी। जहाँ खर उस क्षेत्र का राजा और दूषण उसका मुख्य सेनापति था, वहीं वे अपने साथ चौदह हजार खूंखार राक्षसों की एक विशाल सेना रखते थे। इस पूरे क्षेत्र में उनका इतना खौफ था कि वहां रहने वाले ऋषि-मुनियों के यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों को वे बेरहमी से नष्ट कर देते थे और कोई भी देवी-देवता या राजा उनसे टकराने का साहस नहीं करता था। इनका यह साम्राज्य तब तक अजय रहा जब तक वनवास के दौरान [[भगवान श्रीराम]], [[माता सीता]] और [[लक्ष्मण]] जी पंचवटी में निवास करने नहीं आए। जब लक्ष्मण जी ने रावण की बहन शूर्पणखा के नाक-कान काट दिए, तब वह अपमान का बदला लेने के लिए रोती हुई अपने भाई खर-दूषण के पास पहुंची। अपनी बहन के अपमान से क्रोधित होकर खर और दूषण अपनी पूरी चौदह हजार की सेना के साथ श्रीराम पर टूट पड़े, लेकिन पंचवटी के उस ऐतिहासिक और भीषण युद्ध में भगवान श्रीराम ने अकेले ही कुछ ही घड़ियों में उनकी पूरी सेना का संहार कर दिया और अंत में दूषण तथा खर दोनों का वध कर दण्डक वन को हमेशा के लिए भयमुक्त कर दिया।<ref name="j342">{{cite | title=khar dushan kaun tha? खर-दूषण वध की पूरी 1 कहानी रामायण से | date=2026-06-17 | url=https://tellmestorydaddy.com/khar-dushan-kaun-tha/ | language=en-US | access-date=2026-10-17 | page=}}</ref> {{Hindu-myth-stub}} {{श्री राम चरित मानस}} [[श्रेणी:रामायण के पात्र]] ==सन्दर्भ== pce9ty23q1qwjfb6bt40gxh2uc3ia05 पाशुपत 0 11873 6630260 725539 2026-10-16T16:20:22Z SM7 89247 [[पाशुपत दर्शन]] को अनुप्रेषित 6630260 wikitext text/x-wiki #पुनर्प्रेषित [[पाशुपत दर्शन]] cgzrn9hhrpbi1jfic6ij96gjhdnqm5a मिथ्याभाषकी परोक्षक 0 15073 6630415 6198276 2026-10-17T10:47:43Z SAGAR SURYAVANSHI JAITHAL 938876 लेख के ऐतिहासिक संदर्भ को दर्शाने के लिए दार्शनिक एपिमेनाइड्स की प्रासंगिक छवि और हिंदी विवरण जोड़ा 6630415 wikitext text/x-wiki {{स्रोतहीन}} [[चित्र:Epimenides-poet.jpg|अंगूठाकार|पाठ=एक गोल सिक्के या पदक के आकार का रेखाचित्र जिसमें प्राचीन यूनानी दार्शनिक एपिमेनाइड्स का दाढ़ी वाला चेहरा पार्श्व दृश्य (profile view) में दिखाया गया है और उनके नाम का लैटिन पाठ अंकित है।|यूनानी दार्शनिक और कवि एपिमेनाइड्स, जिनके कथन से 'मिथ्याभाषी विरोधाभास' का इतिहास जुड़ा है।]] '''मिथ्याभाषकी परोक्षक''' यदि निरन्तर झूठ बोलने वाला कहे कि वह सत्य बोल रहा है तो यह तर्कशास्त्रीय [[परोक्षक]] हुआ। [[श्रेणी:तर्कशास्त्र]] {{आधार}} dw80twd9i1nfcvvgsgpf3pdcqx9fn05 जय सिंह द्वितीय 0 27000 6630380 6369338 2026-10-17T07:33:46Z Mundhalia746 934684 6630380 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति |birth_name = विजय सिंह (मूल जन्म नाम) बाद में महाराजा जय सिंह द्वितीय |birth_year = सन 1688ईस्वी |birth_place = आमेर |death_year = सन 1743ईस्वी |death_place = जयपुर |death_cause = वृद्धावस्था |residence = [[आमेर]], [[जयपुर]], [[दिल्ली]], [[औरंगाबाद]], [[अहमदनगर]], [[दौलताबाद]], [[उज्जैन]] आदि |nationality = |ethnicity = कछवाहा सूर्यवंशी |citizenship = |other_names = सवाई जयसिंहजी (द्वितीय) |known_for = नगर-नियोजन, कूटनीति, राजनीति, हिंदुत्व, परंपरा-अनुरक्षण, शासन-विस्तार, पुस्तक-प्रेम, विज्ञान-प्रेम |education = पारम्परिक पद्धति से |alma_mater = संस्कृत, फ़ारसी, अरबी, मराठी, ज्योतिष, खगोलशास्त्र, धर्मशास्त्र, वैदिक-कर्मकांड आदि |employer = आमेर के परंपरागत उनतीसवे राजा |occupation = महाराजा आमेर/जयपुर |years_active = सन 1699 से 1743 ईस्वी |home_town = आमेर/ सवाई जयनगर उर्फ़ जयपुर |title =सरामद-ए-राजा-ए-हिंदुस्तान श्री राजराजेश्वर राजराजेंद्र महाराजाधिराज |religion = [[हिन्दू]] (वैष्णव) |spouse = *रानी गौड़जी केसर श्योपुर-बड़ौदा *रानी खींचन सुख कँवर राघौगढ़ *रानी राणावत चँद्र कँवर उदयपुर-मेवाड़ *रानी सिसोदनी फूल कँवर बनेड़ा *रानी राठौड़ आनंद कँवर किशनगढ़ *रानी चूँडावत अमृत कँवर देवगढ़ *रानी जादौन इँद्र कँवर करौली *रानी हाड़ीजी उमेद कँवरजी बूंदी *रानी राठौड़ चंदन बांदनवाड़ा-अजमेर *रानी तंवर लाड लक्खासर-बीकानेर *रानी राठौड़ सूरज जोधपुर-मारवाड़ *रानी सोलंकिनी गुलाब अलीगढ़ टोंक *रानी राठौड़ बख्त अमझेरा-मालवा |children = पुत्र :- *युवराज शिव सिंह *महाराजा सवाई ईश्वरी सिंह *महाराजा सवाई माधो सिंह पुत्रियां :- बाईजी लाल विचित्र कँवरजी जोधपुर में विवाह बाईजी लाल किशन कँवरजी बूंदी में विवाह |father = [[बिशन सिंह]] |बहन= रानी अमर कँवर बूंदी के महाराव बुध सिंह की पटरानी}} ''सवाई जयसिंहजी''' या '''जयसिंह जी (द्वितीय) ''' (03 नवम्बर 1688 - 21 सितम्बर 1743)<ref>लेफ्टिनेंट कर्नल [[जेम्स टॉड]]:' [[राजस्थान]] का इतिहास' खंड-२ : प्रकाशक- 'साहित्यागार', जयपुर; अनुवाद: केशव ठाकुर : संस्करण २०१२</ref> अठारहवीं सदी में [[भारत]] में [[राजस्थान]] के [[आमेर|आमेर राज्य]] के कछवाहा राजवंश के सर्वाधिक प्रतापी शासक थे। सन [[१७२७]] में [[आमेर]] से दक्षिण छः मील दूर एक बेहद सुन्दर, सुव्यवस्थित, सुविधापूर्ण और [[शिल्पशास्त्र]] के सिद्धांतों के आधार पर आकल्पित नया शहर '[[जयपुर|सवाई जयनगर]]', बाद में ([[जयपुर]]) बसाने वाले नगर-नियोजक के बतौर उनकी ख्याति भारतीय-इतिहास में अमर है। [[File:1 Maharaja Sawai Jai Singh II ca 1725 Jaipur. British museum.jpg|thumb|ब्रिटिश संग्रहालय में महाराजा सवाई जयसिंह (द्वितीय) का चित्र]] [[वाराणसी|काशी]], [[दिल्ली]], [[उज्जैन]], [[मथुरा]] और [[जयपुर]] में, अतुलनीय और अपने समय की सर्वाधिक सटीक गणनाओं के लिए जानी गयी [[वेधशाला]]ओं के निर्माता, सवाई जयसिह एक नीति-कुशल [[महाराजा]] और वीर सेनापति ही नहीं, जाने-माने [[ब्रह्माण्ड|खगोल]] [[वैज्ञानिक]] और विद्याव्यसनी विद्वान भी थे।<ref>'भारत: एक खोज': [[जवाहरलाल नेहरू|जवाहर लाल नेहरु]] [ https://archive.org/details/DiscoveryOfIndia {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130530033424/http://archive.org/details/DiscoveryOfIndia |date=30 मई 2013 }}]</ref> उनका [[संस्कृत भाषा|संस्कृत ]], [[मराठी भाषा|मराठी]], [[तुर्की]], [[फ़ारसी भाषा|फ़ारसी]], [[अरबी]], आदि कई भाषाओं पर गंभीर अधिकार था। भारतीय ग्रंथों के अलावा [[गणित]], [[रेखागणित]], [[ब्रह्माण्ड|खगोल]] और [[ज्योतिष]] में उन्होंने अनेकानेक विदेशी ग्रंथों में वर्णित वैज्ञानिक पद्धतियों का विधिपूर्वक अध्ययन किया था और स्वयं परीक्षण के बाद, कुछ को अपनाया भी था। देश-विदेश से उन्होंने बड़े बड़े विद्वानों और खगोलशास्त्र के विषय-विशेषज्ञों को [[जयपुर]] बुलाया, सम्मानित किया और यहाँ सम्मान दे कर बसाया। <ref>डॉ॰ ज्ञान प्रकाश पिलानिया, 'Enlightened Government in Modern India: Heritage of Sawai Jai Singh' (हेरिटेज ऑफ़ सवाई जयसिंह) ISBN 8187359161, 9788187359166</ref> जयसिंह की गणित, वास्तुकला और खगोल विज्ञान में बहुत रुचि थी। उन्होंने अपनी राजधानी जयपुर सहित भारत के कई स्थानों पर जंतर मंतर वेधशालाओं का निर्माण किया। उनके पास यूक्लिड के "एलीमेंट्स ऑफ़ ज्योमेट्री" का संस्कृत में अनुवाद था <ref>Chandara, Bipan. History of Modern India. Orient Black Swan.</ref> <ref> Sarkar, Jadunath (1984, reprint 1994) A History of Jaipur, New Delhi: Orient Longman, ISBN 81-250-0333-9, p.157</ref> === सवाई की मौखिक-उपाधि === अपने पिता [[राजा विष्णुसिंह|महाराजा बिशन सिंह]] के असामयिक देहान्त के बाद २५ जनवरी [[१७००]] को ११ वर्ष की लगभग बाल्य-अवस्था में वे [[आमेर]] की गद्दी बैठे।<ref>'जयपुर प्रकाशक : प्रधान-सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978 :[पेज 203] प्रकाशक : जयपुर अढाई शती समारोह समिति, नगर विकास व्यास (अब जयपुर विकास प्राधिकरण) परिसर, भवानी सिंह मार्ग, [[जयपुर]]</ref> [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] ने उन्हें 'सवाई' की [मौखिक] उपाधि दी थी - जिसका प्रतीकात्मक-अर्थ यही है कि वे अपने समकालीनों से 'सवाया' (या सवा-गुना अधिक बुद्धिमान और वीर) थे। सुना जाता है जब [[दिल्ली]] बादशाह [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] के दरबार में युवा सवाई जयसिंह पहले-पहल हाजिर हुए, तो [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] ने एकाएक बालक जयसिंह के दोनों हाथ पकड़ लिए और पूछा "अब बताइये, आप क्या करेंगे?" इस पर प्रत्युत्पन्नमति जयसिंह होठों पर मुस्कान लिए निहायत शांत स्वर से बोले, "आलमपनाह ! हमारे यहां हिन्दुओं में विवाह पर एक परम्परा है। वर, वधू का एक हाथ अपने हाथ में लेकर इस बात की प्रतिज्ञा करता है कि वह उसका हाथ जिन्दगी भर नहीं छोड़ेगा, उम्र भर उसका साथ निबाहेगा! आज बादशाह सलामत खुद मेरा एक हाथ नहीं, मेरे दोनों ही हाथ जब अपने हाथ में ले चुके हैं, फ़िर मुझे किस बात की परवाह?" [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] को इस चतुराई भरे जबाब की उम्मीद न थी, लेकिन इस बुद्धिमत्तापूर्ण हाज़िरजवाबी से वह बहुत प्रसन्न हुआ।<ref>डॉ॰ ज्ञान प्रकाश पिलानिया, 'Enlightened Government in Modern India: Heritage of Sawai Jai Singh (हेरिटेज ऑफ़ सवाई जयसिंह)' ISBN 8187359161, ISBN 9788187359166</ref>,<ref>'राजस्थान का इतिहास' : गोपीनाथ शर्मा : शिवलाल अग्रवाल एंड कम्पनी, आगरा</ref>[[यदुनाथ सरकार]] ने अपने जयपुर इतिहास में इस 'उपाधि' के बारे में जो शब्द लिखे हैं-अविकल रूप से ये हैं-"{{Quotation|The new Rajah also gained the title of ''Sawai'', which means 'one and a quarter', because Aurangzeb was so pleased with this youthful prince's feats before Khelna that he cried out," You are more than a man, you are ''sawa''- ''i.e.,''a hundred and twenty five per cent hero'}}<ref>Jadunath Sarkar : 'A History of Jaipur' : Orient BlackSwan : Extracts from chapter ' Sawai Jai Singh's Early Career' Page 149</ref> कुछ दूसरे स्रोत बतलाते हैं 'सवाई' की उपाधि [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] द्वारा नहीं बल्कि बादशाह [[फ़र्रुख़ सियर|फर्रुख़ सियर]] द्वारा इन्हें दी गयी थी। <ref>'जयपुर-दर्शन' प्रकाशक : प्रधान-सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978 [पेज 203] प्रकाशक : जयपुर अढाई शती समारोह समिति, नगर विकास व्यास (अब [[जयपुर विकास प्राधिकरण]]) परिसर, [[भवानी सिंह]] मार्ग, जयपुर</ref> पर यह बात (जो शायद [[किंवदंती]] का रूप ले चुकी है) अधिकांश ग्रंथों में औरंगजेब के साथ जुडी मिलती है। == जन्म और माता-पिता== महाराजा सवाई जयसिंह जी द्वितीय का जन्म [[मार्गशीर्ष]] वदी 7 वि० सं० १७४५ ई० [दिनांक 4 [[नवम्बर]], [[१६८1|1688]]]<ref>Jadunath Sarkar : ' A History of Jaipur' page 149</ref> को [[राजा विष्णुसिंह|मिर्ज़ा राजा बिशन सिंह]] की रानी राठौड़,[[अजमेर]] में [[खरवा]] के जागीरदार राव केसरी सिंहजी की जेष्ठ पुत्री इँद्र‌ कँवर की कोख से हुआ। इनके छोटे भाई कुंवर विजय सिंह और बहन बाई लाल अमर कँवर थीं,जिनका विवाह पिता के मृत्युपरांत महाराजा सवाई जय सिंहजी द्वितीय ने बूंदी के महाराव बुद्ध सिंहजी के साथ उनकी पटरानी के रूप में सामोद (आमेर राज्य) में संपन्न करवाया। <ref>'जयपुर-दर्शन' प्रकाशक : प्रधान-सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978 [पृष्ठ 203] प्रकाशक : 'जयपुर अढाई शती समारोह समिति', जयपुर नगर विकास न्यास, (अब जयपुर विकास प्राधिकरण) परिसर, भवानी सिंह मार्ग, जयपुर Page 203</ref> &lt;&gt;[[File:Rajputana 1909.jpg|thumb|राजपूताना प्रान्त का एक पुराना मानचित्र]] <nowiki>== सवाई जयसिंह के शासन का सम्पूर्ण राजनैतिक इतिहास ==</nowiki> <nowiki>=== सत्ता का अधिग्रहण और नाम-परिवर्तन ===</nowiki> राजा विष्णुसिंह की <nowiki>[[काबुल]]</nowiki> में रविवार ३१ दिसम्बर <nowiki>[[१६९९]]</nowiki> (रजब १९, जुलुसी वर्ष ४३) को मृत्यु<nowiki><ref></nowiki>''Akhabarat'' : Jadunath Sarkar :'A History of Jaipur' : Page 147 :<nowiki></ref></nowiki> होने पर [[मार्गशीर्ष]] सुदी ७ वि० सं० १७५६, जनवरी २५, १७०० ई० को ये आमेर की गद्दी पर बैठे। मृत्यु के प्रायः डेढ़ माह बाद १८ फ़रवरी १७०० को महाराष्ट्र के शाही-शिविर में मिर्ज़ा राजा बिशन सिंहजी का [[काबुल]] में हुए निधन की खबर पहुँची, तो दो दिन बाद (अर्थात २० फरवरी,१७०० को) बादशाह औरंगजेब ने उनके सबसे बड़े पुत्र का नाम ''विजय सिंह'' से बदल कर ''जयसिंह'' करते हुए, उन्हें आमेर की गद्दी का वारिस स्वीकार किया। बादशाह ने जयसिंह के छोटे भाई ''चीमा जी'' का नाम ''विजयसिंह'' रखा। <ref>Jadunath Sarkar : Page 149</ref> यदुनाथ सरकार के अनुसार "...जुलाई १६९८ में दक्षिण से लौटने के बाद से जयसिंह आमेर में ही बने रहे, जब कि बादशाह ने इन्हें हाजिरी देने के लिए कई 'कड़े बुलावे' भी भेजे| इनके पिता के समय से ही दिल्ली-बादशाह इनको अपनी सैनिक 'सेवा' में लेने के लिए हेतु दक्षिण में बुलाना चाहते थे। परन्तु राजा बिशन सिंहजी अपने पुत्र को दक्षिण में नहीं भेजना चाहते थे। लेकिन बादशाह के ज्यादा दबाव देने पर ई० १६९८ में ये महाराष्ट्र (दक्षिण) गये। (''वहां पहली भेंट में बादशाह ने इनकी तीव्र बुद्धि देख कर इन को 'सवाई' कहा था। तभी से इनके नाम के पहले सवाई की उपाधि लग गई, जो अभी तक जयपुर के भूतपूर्व राजाओं के नाम के साथ जुड़ी हुई है''।) आठ महीने मुग़ल शिविर में रह कर ये वापस अपनी राजधानी [आमेर] लौट आये। ===औरंगजेब और जयसिंह === गद्दी पर बैठने के तुरंत बाद, जैसा ऊपर लिखा गया है, इन्हें नवम्बर १७०० में दक्षिण में अपनी सेना के साथ मुग़ल बादशाह की फ़ौज के रूप में लड़ने के लिए बुलाया गया था, पर किसी न किसी तरह जयसिंह बराबर टालमटोल करते रहे। वह जब कई शाही-आदेशों की अवहेलना कर चुके, तो अंततः इन्हें 'जबरन' ले आने को बादशाह ने कुछ हरकारे आमेर तक भी भेजे| इनकी अनुपस्थिति से नाराज़ बादशाह औरंगजेब ने इन से आमेर [[राजा]] का खिताब तो नहीं छीना, पर १३ सितम्बर १७०१ को इन्हें 'पदावनत' करते हुए मात्र ५०० जात, १०० सवार का मामूली [[मनसबदार]] बना दिया। कठिन मार्ग और वर्षा से अवरुद्ध रास्तों से जूझते बुरहानपुर में पड़ाव डाल कर अक्टूबर १७०१ में इनके दक्षिण में पहुँचने पर इन्हें औरंगजेब के पोते (सेना-अधिकारी और पुत्र आलम शाह के पुत्र) शाह बिदरबख्त के पास पन्हाला की सुरक्षा के लिए उनका सैन्य-सहयोगी नियुक्त किया गया।<ref>Jadunath Sarkar : IBID : Page 150</ref> === सवाई जयसिंह की आरंभिक सामरिक-सफलताएं और बादशाह औरंगजेब के पूर्वाग्रह === [[File:In-jaipu.gif|thumb|तत्कालीन आमेर का पंचरंगा ध्वज]] औरंगजेब के पोते शाह बिदरबख्त के नेतृत्व में बादशाही सेना ने 11 मई ई० 1702 को खिलना के किले पर भारी हमला किया। इसमें आमेर और मुग़ल संयुक्त-सेना की बहुत जनहानि हुई, पर दीवारों को तोड़ कर सबसे पहले जयसिंह की कछवाहा सेना ही खिलना-दुर्ग में प्रविष्ट हुई। उसकी बुर्ज पर आमेर का 'पंचरंगा झंडा' फहराया गया। (''इस समय जयसिंह की उम्र केवल १४ वर्ष थी)।'' खिलना-युद्ध में इनका वीर और भरोसेमंद दीवान बुद्धसिंह मारा गया। इस खिलना-विजय पर बादशाह औरंगजेब द्वारा इनका मनसब बढ़ा कर पहले एक हज़ार, फिर [[शाह बिदरबख्त]] के अनुरोध के बाद २००० (दो हजार जात) का कर दिया गया। बादशाह की छः साल की 'कठिन सेवा' का महज़ यह प्रतिदान जयसिंह को मिला! इसके बाद जब शाहजादा बिदरबख्त मालवे का सूबेदार हुआ, तब उसने जयसिंह की सेवाओं का सम्मान करते उन को वहाँ का [[नायब सूबेदार]] बना दिया, जिसे औरंगजेब ने तत्काल ही 'नामंजूर' कर दिया तथा एक फरमान लिखा कि ''आइन्दा किसी भी हिन्दू को मामूली फौजदार तक भी नहीं बनाया जाए''।'<ref>'अहकाम-ए- आलमगिरी' : इयानतुल्ला) सन्दर्भदाता : यदुनाथ सरकार : वही: पृष्ठ १५२</ref> विडम्बना हैरतंगेज़ है कि जिस औरंगजेब ने कभी इन्हें 'सवाई' कह कर सम्मान दिया वही बाद में वस्तुतः इनसे इस कदर नाराज़ और पूर्वाग्रहग्रस्त था कि उसने ये अपमानजनक आज्ञा जारी की- "''जयसिंह को मसनद पर आसन न दे कर, नीचे ज़मीन पर बिछी 'सुजनी' पर बैठने को कहा जाय!''"<ref>यदुनाथ सरकार : ''वही'' पृष्ठ १५२</ref> इसी बीच ई० 1704 में दो बादशाही फौजदारों ने स्थानीय मदद ले कर ठाकुर कुशल सिंहजी राजावत से सवाई माधोपुर में आज स्थित [[झिलाय]] ठिकाने की जागीर छीन कर १३ नवम्बर 1704 को जयसिंह (आमेर राज्य) को सौंप दी। दूसरे साल ई० 1705 में शाह बिदरबख्त ने अपनी तरफ से इनके पक्ष में फिर से कोशिश करके जयसिंह को मालवा का भी नायब सूबेदार बनवा दिया।<ref name="यदुनाथ सरकार : पृष्ठ १५३">यदुनाथ सरकार : पृष्ठ १५३</ref> पर जब तक औरंगजेब जीवित रहा, मुग़ल खेमे में इनका प्रभाव मद्धम सा ही रहा। === औरंगजेब की मृत्यु के बाद === ई० 1707 में 21 फ़रवरी को [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] के देहांत के बाद मुग़ल-गद्दी के लिए उसके बेटों में विकट-संघर्ष शुरू हो गया। शाह आजम ने आगरा व दिल्ली पर चढ़ाई की। उस समय तक उसने इनका मनसब 5000 जात 500 सवार का कर दिया था। 18 जून 1707 ई० को मौजम (मुअज्जिम) और आज़म की सेनाओं के बीच आगरा के 20 मील दक्षिण में [[जाजू का युद्ध]] हुआ। जयसिंह मौजम (मुअज्जिम) के साथ थे तथा इनके सगे छोटे भाई चीमाँ जी (विजयसिंह) आज़म की सेना की तरफ। इस युद्ध में मौजम और उनके पुत्र मारे गये। जाजू की लड़ाई में आज़म की विजय हुई। इसी युद्ध में जयसिंह तथा अखेसिंह टोरड़ी भी घायल हुए | इनके कई सरदार- बिहारीदास (दांतरी), केशरीसिंह (हरसोली), सूरसिंह (हरमाड़ा) आदि मारे गये। युद्ध के आखरी समय में जयसिंह बूंदी के राजा अपने बहनोई [[बुधसिंह हाडा|महाराव बुधसिंहजी हाड़ा]] के मारफत युद्ध में विजयी आज़म से जा मिले, परन्तु उसने इनका खास स्वागत नहीं किया।<ref name="यदुनाथ सरकार : पृष्ठ १५३"/>,<ref name="ignca.nic.in">{{Cite web |url=http://www.ignca.nic.in/coilnet/rj089.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=8 जुलाई 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140714115524/http://www.ignca.nic.in/coilnet/rj089.htm |archive-date=14 जुलाई 2014 |url-status=dead }}</ref> === आमेर पर हमले और अपमानित जयसिंह === जयसिंहजी के छोटे भाई विजयसिंहजी, बादशाह को खुश करने के लिए अपनी बहन बाईजीलाल अमर कँवरजी का विवाह बादशाह बहादुरशाह (प्रथम) से करवाना चाहते थे। उन्होंने इसकी खबर दिल्ली भेज दी तथा महाराव बुद्धसिंहजी हाड़ा को छुट्टी जाते समय जय सिंहजी ने रास्ते में रोक कर उनसे सामोद में यह विवाह करवा दिया। नये बादशाह बहादुरशाह (प्रथम) ने इसके बाद राजस्थान पर चढ़ाई की। जनवरी १७०८ ई० में वह आमेर पहुँचा और उसे [[ख़ालसा|खालसा]] कर लिया। जयसिंहजी से आमेर की जागीर जब्त करके बादशाह बहादुरशाह (प्रथम) द्वारा १० जनवरी १७०८ को उनके छोटे भाई विजयसिंहजी (चीमाजी) को अनेकानेक महंगे उपहारों सहित दे दी गयी। सवाई जयसिंहजी का राजनैतिक कद घटा कर एक मामूली 'मनसबदार' के रूप में कर दिया गया। <ref>यदुनाथ सरकार : पृष्ठ १५४</ref> बादशाह इसके बाद अजमेर होकर दक्षिण के लिए अपने भाई [[कामबक्श]] से मुकाबला करने को बढ़ा। [[आमेर]] और [[जोधपुर]] के दोनों राजा [[मंडलेश्वर]] के इलाके तक उसके साथ ही गये। जब उन्हें यह आशा नहीं रही कि बादशाह उनके इलाके उन्हें वापस लौटाएगा तो उन्होंने [[दुर्गादासजी राठौड़]] की राय से, जब बादशाह नर्बदा नदी पार करने को रवाना हुआ, २० अप्रैल १७०८ वैशाख सुदी १३ को बादशाही-शिविर छोड़ दिया और वे राजपूताना की ओर वापस रवाना होकर [[मेवाड़]] [[उदयपुर]] पहुँचे। यहाँ [[महाराणा प्रताप]] के पर-पर-पर-पर पौत्र और उस समय के [[राणा अमरसिंह|महाराणा अमरसिंहजी द्वितीय]] ने इनका स्वागत किया,इनकी सहायता हेतु एवं राजपूत संघ को पुनः जागृत करने के लिए अपनी पुत्री बाईजी लाल चँद्र कँवरजी जयसिंह को 25 मई सन् 1708 में ब्याही और यह वचन लिया की वो मुगल सत्ता से कोई संबंध नहीं रखेंगे खास कर कोई भी कन्या विवाह हेतु नहीं देंगे तथा मेवाड़ी रानी से उत्पन्न पुत्र को आमेर-जयपुर की राजगद्दी का उत्तराधिकारी बनाएंगे और एक जुट होकर राजपूत संघ का नवनिर्माण करेंगे। यहाँ से तीन राजाओं की ३० हजार सेना ने संयुक्त-रूप से जोधपुर पर हमला करके ८ जुलाई १७०८ ई० को उसे अपने अधिकार में कर लिया। राजा अजीत सिंहजी ने जोधपुर में जयसिंहजी का टीका किया। यहाँ से उन्होंने हिन्दुस्तान के अनेक राजाओं को मुगलों के विरुद्ध एकत्र होने संबंधी पत्र भी लिखे।<ref name="ignca.nic.in"/> [[जोधपुर]] से विजय सिंह शासित आमेर पर अधिकार करने को दो सेनाएँ भेजी गयीं। एक [[दुर्गादास राठौड़]] के नेतृत्व में, जिसका सैयदों से [[काला डेरा]] के पास युद्ध हुआ। दूसरी सेना में, महाराजा जयसिंह का दीवान रामचन्द्र और श्यामसिंह के अधीन २० हजार घुड़सवार थे। इनका [[रतनपुरा]] के पास [[आमेर]] के फौजदार हुसैन खाँ से युद्ध हुआ, जिसमें उन्होंने उसे परास्त करके आमेर पर अपना अधिकार कर लिया।<ref name="ignca.nic.in"/> इसके बाद इन दोनों राजाओं के विरुद्ध मेवात के फौजदार सैयद हुसेन खां, अहमद खां फौजदार बैराठ सिधाना और गारात खां फौजदार नारनोल को [[सांभर]] भेजा गया । दोनों राजाओं के इन फौजदारों से [[सांभर]] में ३ अक्टूबर ई० १७०८ को भीषण युद्ध हुआ, जिसमें मुगलों की विजय हुई। युद्ध के बाद विजय की खुशी में मुगलों की महफिल हो रही थी। इसी समय राव संग्रामसिंहजी [[उनियारा]] के नेतृत्व में नरुका लड़ाके वहाँ पहुँचे और एक रेत के टीबे पर चढ़े, जिसके नीचे सैयद आदि शराब की महफिल कर रहे थे। नरुकों ने उन पर एकाएक बन्दूकों और तीरों से भयानक हमला किया। उसमें सब मुग़ल फौजदार मारे गये तथा मुगलों की जीती हुई बाजी हाथ से निकल गई। फिर जयसिंह ने एक पत्र बादशाह के विरुद्ध दुर्गादास को लिखा कि "उदयपुर महाराणा से बात की जाए ...मराठों को मिला कर मुग़लों के विरुद्ध राजपूतों को वही करना चाहिए जो 'हिन्दुस्तान' के लिए गौरव की बात हो।"<ref name="ignca.nic.in"/> बादशाह बहादुरशाह जब दक्षिण से वापस लौटा, तो उसने यह जरुरी समझा कि किसी तरह [[जोधपुर]] और [[आमेर]] (जयपुर) दोनों राजाओं से समझौता किया जाए। इन्हें लाने के लिए उसने [[बुधसिंह हाड़ा]] राजा [[बूँदी जिला|बून्दी]] को भेजा, जिनके मारफत २१ जून ई० १७१० को ये [[अजमेर]] के पास बादशाह के सामने हाजिर हुए। बादशाह ने इनके जब्त किये राज्य वापस लौटा दिए और इन दोनों को ४००० जात ४००० सवार के मनसब भी दिये। उस समय तक भी राजपूतों का मुगलों पर बिल्कुल विश्वास नहीं था, इसलिए जब सवाई जयसिंह अजमेर में बादशाह के शिविर में गये तब अजमेर के तमाम पहाड़ तथा घाटियाँ राजपूत-सैनिकों से भरी हुई थीं। मनसब बढ़ने और इलाके वापस आने पर भी उन्हें बहादुरशाह की नीयत पर कभी भी पूर्ण विश्वास नहीं हुआ।<ref name="ignca.nic.in"/> === जयसिंह द्वारा छलपूर्वक अपने भाई विजयसिंह की गिरफ्तारी === जयसिंह के भाई विजयसिंह के साथ भी कुछ ऐसा हुआ कि (जन्म चैत सुदी ६ वि. १७४७) निराश होकर अन्त में मुगल दरबार छोड़ कर [[हिन्डौन]] आ गए। जयसिंह को भाई विजयसिंह की तरफ से सशस्त्र विद्रोह खतरा तो बना हुआ था ही। इन्होंने १७१३ ई० में विजयसिंह से समझौता करने और 'राजमाता से भेंट' करने के नाम पर अपने सशस्त्र सैनिकों एवं सरदारों समेत [[सांगानेर]] जा कर धोखे से उनको कैद करवा दिया<ref>लेफ्टिनेंट कर्नल जेम्स टॉड: 'राजस्थान का इतिहास' खंड-2 : प्रकाशक- 'साहित्यागार', जयपुर; अनुवाद: केशव ठाकुर : संस्करण 2012</ref> और जयगढ़ किले में भेज दिया। (वहीं वे अन्त में मारे भी गये।) विजयसिंह के इस 'हत्याकाण्ड' में श्यामसिंह खंगारोत विशेष सहायक रहा। [[बहादुर शाह (प्रथम)]] की मृत्यु के बाद उसके उत्तराधिकारी [[जहाँदरशाह]] ने [[आमेर]] और [[मारवाड़]] दोनों राजाओं को फिर अपने पक्ष में करना चाहा। उसने दोनों को ७००० जात व ७००० सवार का मनसब भी दिया, परन्तु इस बार इन्होंने मुग़ल-उत्तराधिकारी के आपसी संघर्ष में औरंगजेब के पुत्रों से दूर ही रहने का फैसला किया। [[फ़र्रुख सियर]] के मुग़ल बादशाह बनने के बाद हुसैन अली सैयद ने श्यामसिंह खंगारोत को बुलवाया तथा उनसे बात करके जयसिंह को बादशाह से ५००० जात ४५०० सवार का मनसब दिलवाया। जब अतसिंह का बादशाह के साथ मतभेद हो गया, तब बादशाह ने सैयद हुसैन अली को सेना लेकर [[अजमेर]] भेजा जहाँ अतसिंह ने कब्जा कर लिया था। उस समय जयसिंह भी हुसैन अली सैयद के साथ थे। अन्त में अतसिंह से सन्धि हुई।<ref name="ignca.nic.in"/> === मराठे और जयसिंह === अक्टूबर १७१३ ई० में इन्हें बादशाह [[फ़र्रुख सियर]] ने [[मालवा]] की सूबेदारी प्रदान की। इन्होंने वहाँ की अनेक बगावतें दबाई व मरहठों के उपद्रव भी कुचले। मरहठों की एक बड़ी सेना जब मालवे में घुसी तब इन्होंने [[पलसूद]] के पास उसे बड़ी करारी हार दी। मराठी सेना के लोग भाग कर पलसूद में ठहरे थे। जयसिंह ने रात में ही उन पर हमला कर दिया। इनकी सेना को देखते ही वे भाग निकले व [[नर्वदा]] नदी पार कर गये। उनकी लूट का सब माल वहीं रह गया। मालवा में [[महाराजा छत्रसाल|छत्रसाल बुन्देला]] भी इनके साथ थे। १७१५ ई० में इनको दिल्ली बुला लिया गया। तब इनकी अनुपस्थिति में इनके धाभाई रुपाराम को इन्होंने वहां नायब बना कर रखा। १७१७ तक ये मालवा के सूबेदार रहे। बादशाह [[फ़र्रुख सियर]] ने [[भीमसिंह हाडा]] राजा [[कोटा]] को [[बूँदी जिला|बून्दी]] की रियासत दे दी थी और उसने बून्दी पर कब्जा भी कर लिया था। जयसिंह ने प्रयास करके बादशाह से बून्दी वापस राजा बुधसिंह हाडा को दिलवायी।<ref name="ignca.nic.in"/> === भरतपुर में विफलता=== दिल्ली से बादशाह ने इनको [[भरतपुर]] के [[चूड़ामन|चूड़ामन जाट]] पर चढ़ाई करने की आज्ञा दी, जिसने [[आगरा]] के इलाके में लूटमार से बड़ा उपद्रव मचा रखा था। इनके साथ बून्दी के बुद्धसिंह, [[कोटा]] के भीमसिंह, नरवर के गजसिंह, [[दुर्गादास राठौड़]] व कई अन्य मनसबदार भी नियुक्त किये गये। १५ सितम्बर १७१६ को ये अपनी फौज ले कर [[मथुरा]] के लिए रवाना हुए। नवम्बर में [[चूड़ामन]] के प्रसिद्ध किले [[थूण का घेरा]] शुरू किया। वर अब्दुल्ला खां सैयद, जयसिंह के विरुद्ध था तथा चूड़ामन को मदद दे रहा था। इससे इन्हें इस अभियान में सफलता नहीं मिल पाई। वर अब्दुल्ला खां सैयद ने अन्त में बीच में पड़ कर थून का घेरा उठवा लिया। मई १७१८ में जयसिंह की वापसी [[दिल्ली]] हुई। चूडामन के इलाके में इस असफलता के बावजूद बादशाह ने इनका बड़ा सम्मान किया।<ref name="ignca.nic.in"/> सैयदों और बादशाहों के बीच तलवारें खिंच चुकी थी। जयसिंह ने बादशाह [[फ़र्रुख सियर]] को बहुत समझाया कि सैयदों से युद्ध करके उन्हें हमेशा के लिए साफ कर देना चाहिए। उस समय उनके पास २० हजार राजपूत सवार दिल्ली में मौजूद थे तथा बून्दी के बुद्धसिंह हाडा भी उन्हीं के साथ थे। परन्तु बादशाह की यह सैन्य कार्यवाई करने की हिम्मत नहीं हुई। वह सैयदों को किसी तरह खुश करने में लगा रहा। अन्त में सैयदों ने बादशाह से जयसिंह को दिल्ली से जाने को कहलवा दिया। जयसिंह ने बादशाह को सचेत किया कि उनके जाने से बादशाह की जान को खतरा हो जाएगा लेकिन यह सलाह बादशाह की समझ में नहीं आई। १३ फ़रवरी १७१९ ई० को जयसिंह दिल्ली से रवाना हुए। उसके कुछ ही घंटों बाद भींमसिंह कोटा राजा ने बुधसिंह बूंदी पर आक्रमण कर दिया। उनके स्वामिभक्त सरदार जैतसिंह ने बड़ी वीरता से कोटा की सेना को रोका तथा बुधसिंह को सुरक्षित वहाँ से निकाल दिया। वे भाग कर सवाई जयसिंह के पास पहुँचे। १७- १८ अप्रैल को सैयद भाइयों, अतसिंह जोधपुर और भीमसिंह कोटा ने मिल कर दिल्ली में बादशाह फर्रूखशियर को मार डाला।<ref name="ignca.nic.in"/> === सैयद और जयसिंह === जयसिंह ने [[इलाहाबाद]] के सूबेदार छबीला राम और निजाम से सैयदों के विरुद्ध भी पत्र-व्यवहार किया। वे चाहते थे कि सब मिल कर सैयदों को अपदस्थ कर दें। इन्होंने [[महाराजा छत्रसाल|छत्रसाल]] बुन्देला को भी युद्ध के लिए बुलाया। सैयदों ने कई सेनाएँ इनके विरुद्ध कई तरफ से घेरने के लिए भेजीं| वर अब्दुल्ला खां ने ५ जुलाई को नाममात्र के बादशाह रफीउदुल्ला को साथ लेकर जयसिंह पर चढ़ाई की और मथुरा होता हुआ वह आगरा पहुँचा, जहाँ सैयदों के विरुद्ध बगावत हो रही थी। जयसिंह ने भी सैयदों से पूरे तौर से मुकाबला करने की तैयारी कर ली थी पर युद्ध में रवाना होने के पहले उन्होंने ब्राह्मणों को बुलाकर आमेर राज्य दान में दे दिया और केसरिया बाना धारण करके वे सैयदों से लड़ाई के लिए रवाना हुए। ये आमेर से आगे बढ़ कर [[टोडा रायसिंह]] तक पहुँच गये थे। पर निजाम और छबीलाराम दोनों ही वायदे के अनुसार इनके पक्ष में कायम नहीं रहे।<ref name="ignca.nic.in"/> जयसिंह को निराशा हाथ लगी। === जोधपुर में विवाह === अन्त में राजा अजीत सिंहजी जयसिंहजी को अपने साथ जोधपुर ले गये जहाँ उन्होंने 20 मई सन् 1720 में अपनी पुत्री बाईजी लाल सूरज कँवरजी का शुभ विवाह जय सिंहजी के साथ करवा दिया। सैयदों ने जयसिंहजी को २० लाख रुपये दिये, जिससे वे आमेर वापस ब्राह्मणों से वापस खरीदें। उस समय भी जयसिंहजी को राजा अजीतसिंहजी जोधपुर पर विश्वास नहीं था इसलिए वे अपने विवाह में भी जिरहबख्तर पहन कर गये थे।<ref name="ignca.nic.in"/> === निज़ाम और जयसिंह === सैयदों की दो सेनाएँ जब दक्षिण में निजाम से परास्त हो गई, तब हुसैन अली खां सैयद, बादशाह मोहम्मद शाह को साथ ले कर, एक बड़ी सेना के साथ निजाम को दबाने के लिए रवाना हुआ। सितम्बर ८, १७२० ई० को [[टोडाभीम]] में उसने हुसैन अली को धोखे से मार डाला। अब बादशाह ने तैयारी करके सैयद अब्दुल्ला खां पर चढ़ाई की जो [[दिल्ली]] में था। इस युद्ध के लिए महाराणा ने जयसिंह से पूछा कि 'उसे क्या करना चाहिए?' जयसिंह ने उदैपुर के महाराणा को बादशाह की मदद करने के लिए पत्र लिखा तथा साथ में ही महाराणा के अलावा बीकानेर, कोटा और राव इन्द्रसिंह नागौर को भी बादशाह की मदद करने के लिए पत्र भेजे। सवाई जयसिंह ने खुद बादशाह मोहम्मद शाह की मदद के लिए राव जगराम के साथ एक अच्छी सेना भेजी। इस सेना में सवाई राम (नरुका), गढ़ी गजसिंह, नरुका जावली, जसवन्तसिंह, सवाईराम के पुत्र, प्रतापसिंह कल्यणोत, बुद्धसिंह कल्यणोत, गुलाब सिंह कल्यणोत, छीतरसिंह कल्यणोत, अमरसिंह राजावत, बहादुर सिंह खंगोरात और सरदारसिंह नरुका आदि सरदार थे। ३ और ४ नवम्बर १७२० को युद्ध हुआ जिसमें सैयद अब्दुल्ला खां पकड़ा गया। विजय के बाद बादशाह ने जयपुर के सरदारों को अपने हाथ से खिलअतें दीं।<ref name="ignca.nic.in"/> === मोहम्मद शाह और जयसिंह === मोहम्मद शाह ने दिल्ली पहुंचते ही जयसिंह को दिल्ली आने का फरमान भेजा जिसमें लिखा कि उनसे अनेक महत्वपूर्ण समस्याओं पर सलाह लेनी है। उसने दिल्ली पहुंचने पर बादशाह ने अपने नये वर मुहम्मद अमीन खां को उनके डेरे पर लेने भेजा। दरबार में आने पर बादशाह ने उनका बड़ा सत्कार किया और अनेक तोहफे दिए। उनके मनसब में ४००० सवार और बढ़ा दिए गए। इसी मौके पर इन्हें दो करोड़ रुपये इन्हें इनाम/ बख्शीश में दिये जिनको इन्होंने नम्रतापूर्वक लेने से मना कर दिया। पर बादशाह ने सवाई जयसिंह और राजा गिरधर बहादुर के अनुरोध पर हिदुओं पर लगाया जाने वाला कठिन [[जज़िया|जजिया कर]] माफ कर दिया। महाराणा मेवाड़ ने जजिया हटवा देने की सफलता पर सवाई जयसिंह को अपनी और से प्रसन्न हो कर लिखित बधाई भेजी।<ref name="ignca.nic.in"/> === जयसिंह के महत्त्व में वृद्धि === सैयदों के पतन के बाद जयसिंह का राजनैतिक महत्त्व तेज़ी से बढ़ने लगा। राजस्थान, मालवा और बुन्देलखण्ड के राजा हर मुसीबत में उनसे सहायता और सलाह चाहते थे। इन इलाकों में इनकी राय के बगैर कुछ भी नहीं होता था। १७३५ ई० के बाद तो मरहठे भी इनकी सलाह लेने तथा इनको आदर देने लग गए।<ref name="ignca.nic.in"/> इन्हें ''सवाई'' के अलावा मुग़ल बादशाहों ने जो अन्य उपाधियाँ समय समय पर दीं वे थीं - '''सरमदे –राजा-ए- हिन्द'/ 'राजराजेश्वर'/ 'श्रीराजाधिराज''' आदि। === दूसरा जाट युद्ध === सितम्बर १७२२ ई० में जयसिंह को [[आगरा]] का सूबेदार बना कर जाटों को दबाने को भेजा गया। इनके साथ ५० हजार सैनिकों की बड़ी फौज थी तथा अनेक मनसबदार भी इनके साथ थे। शाही तोपखाना भी इनके साथ था। [[चूड़ामन]] [[जाट]] का पुत्र [[मोहकमसिंह]] इस समय जाटों का नेता था। परन्तु चूड़ामन का भतीजा [[बदनसिंह]] जो उससे नाराज था, जयसिंह से आ कर मिला। इन्होंने उसका बड़ा स्वागत-सत्कार किया। एक बार फिर इन्होंने [[थून|थूण]] के किले पर घेरा डाला। अतसिंह जोघपुर ने एक सेना मोहकमसिंह की मदद के लिए भेजी, परन्तु वह [[जोबनेर]] से आगे नहीं बढ़ी। विभीषण की तरह बदनसिंह की सलाह से थूण के किले का विजय होना निश्चित दिख रहा था। तब मोहकमसिंह निराश होकर गुप्त मार्ग से किला छोड़ कर अतर सिंह के पास [[जोधपुर]] पहुँचा। किन्तु जाटों के थून स्थित किले पर सवाई जयसिंह का अधिकार हो गया। इन्होंने [[सूरज मल|सूरजमल]] के पिता बदनसिंह को भरतपुर की जागीर दी तथा राजा के रूप में उनके पगड़ी बाँधी। जून १९, १७२३ ई० को ठाकुर बदनसिंह जाट ने 'जयपुर दरबार की सेवा करने' व ८३ हजार रुपये बतौर सालाना पेशकश देना स्वीकार करके इस आशय की लिखावट पर दस्तखत किये। बदनसिंह जयपुर के दशहरा दरबार में हर साल आया करते थे। जयपुर में जहाँ जाट सेना सहित डीग के राजा का पड़ाव लगता था, वह स्थान अब भी ''बास बदनपुरा'' कहलाता है।<ref name="ignca.nic.in"/> महाराजा सवाई जयसिंह के कार्यकाल का संभवतः सबसे बड़ा और कीर्तिवान कार्य था - सन १७२७ में जयपुर नगर बसाना। इसकी नींव पौष वदी १ वि. सं. १७८४, ई० को रखी गई। राजगुरु सम्राट जगन्नाथ ने नए नगर की नींव रखने का मुहूर्त निकाला तथा भूमि पूजा करवाई थी। महाराजा की आज्ञा के अनुसार नए नगर का नक्शा दीवान [[विद्याधर]] ने बनाया जो बहुत प्रतिभाशाली बंगाली ब्राह्मण था और इनके लेखा-विभाग की सेवा में नायब-अंकेक्षक था। सन १७३३ ई० में यह नगर, जिसका नाम सवाई जयसिंह ने ' सवाई जयनगर' रखा बन कर तैयार हुआ।<ref name="ignca.nic.in"/> === मालवा की दूसरी बार सूबेदारी === जयसिंह को मुग़ल बादशाह द्वारा मालवा का दुबारा सूबेदार बनाया गया। वे २३ अक्टूबर १७२९ ई० को [[उज्जैन]] के लिए रवाना हुए। जयसिंह अपने राज्य की सुरक्षा के लिए विद्रोही मरहठों से समझौता करना चाहते थे। इनके इस समझौता-प्रस्ताव को बादशाह ने भी स्वीकार कर लिया था। इनकी इस विजय पर साहू से लिखा पढ़ी हुई। साहू इसके लिए तैयार हो गया था, किन्तु पेशवा लोग इस समझौते के ज्यादा पक्ष में नहीं था। इन्होंने दीपसिंह कुम्भाणी को साहू के पास [[सातारा|सतारा]] भेजा। लौटते समय दीपसिंह निजाम से भी मिला, परन्तु सितम्बर १७३० ई० में इनके मालवा की सूबेदारी से हट जाने से वह समझौता नहीं हो सका।<ref name="ignca.nic.in"/> === कुशत्तल पंचोलास का युद्ध === बुद्धसिंह बून्दी और उनकी कछवाही रानी के आपस में गंभीर मतभेद पैदा होने पर जयसिंह के सम्बन्ध भी बूंदी नरेश बुद्धसिंह से बहुत खराब हो गये। अन्त में सम्बन्ध इतने बिगड़े कि जयसिंह ने बादशाह को कह कर बुद्धसिंह के स्थान पर करवाड़ के सालिम सिंह हाडा के पुत्र दलेलसिंह को बून्दी का राजा बनवा दिया और बाद में अपनी पुत्री भी उसे ब्याह दी। इससे राजस्थान में जयपुर और बूंदी के बीच लम्बे समय तक बड़ा दु:खद संघर्ष चला। इस आपसी मनमुटाव से मरहठों को फिर राजस्थान में हस्तक्षेप करने का अवसर मिल गया। जयसिंह को १७३० ई० में मालवा में इत्तला मिली कि बुद्धसिंह फिर से बून्दी पर अधिकार करने जा रहे हैं। इन्होंने एक सेना दलेलसिंह की मदद को भेजी| ६ अप्रैल १७३० को ''कुशत्तल पंचोलास'' में बुधसिंह से जयपुर सेना का युद्ध हुआ जिसमें जयपुर के पांच राजावत सरदार फतहसिंह सारसोप (बरवाड़ा) खोजूराम (ईसरदा), सांवलदास (शिवाड), अचलसिंह (नानतोड़ी) और घासीराम अचरे मारे गए।। इस युद्ध में बुद्धसिंह को विजय नहीं मिली। मालवा से लौटते समय महाराजा सवाई जयसिंह कुशत्तल पांचोलास गये। उन्होंने वहाँ मारे गये सरदारों की मातमी करके उनके पुत्रों को सिरोपाव आदि दिये।<ref name="ignca.nic.in"/> === तीसरी बार मालवा की सूबेदारी === जयसिंह दिसम्बर १७३२ में तीसरी बार मालवा प्रान्त के सूबेदार बनकर उज्जैन गये। इस बार मालवा में भी मरहठों का उत्पात इतना बढ़ गया था कि मालवा से मरहठों को निकालने के इनके तमाम प्रयास विफल रहे। १७३४ ई० में खानदौरा एक बड़ी सेना लेकर राजपूताना होता हुआ मालवा में मैराथन के विरुद्ध आगे आया। जयसिंह, अभयसिंह (जोधपुर) आदि अनेक राजा उनके साथ थे। जब यह विशाल सेना रामपुरा पहुँची तो उसे मरहठा मिले। पर वे छुटपुट लड़ाइयों के बाद इन्हें छका कर पीछे से राजस्थान में घुस गये। वहाँ उनको रोकने वाला कोई नहीं था और वे मराठे जयपुर राज्य में साँभर तक लूटपाट करते चले गये। १७३५ ई० में पेशवा बाजीराव की माँ उत्तर में तीर्थ करने आई। महाराजा जयसिंह ने उसका बड़ा आदर-सत्कार किया तथा महाराणा से भी उसका सत्कार करवाया। आगरा में इनके नायब सूबेदार ने अपने दीवान आयामल के भाई नारायणदास को उसका स्वागत करने व पूना तक साथ जाने की आज्ञा भेजी। जनवरी १७३७ ई० को पेशवा उत्तर भारत में आया उसके साथ होलकर, सिन्धिया, पँवार आदि सभी थे। उदयपुर से आते समय पेशवा से २५ फ़रवरी को महाराजा जयसिंह मालपुरा क्षेत्र के झाड़ली गाँव में मिले। उन्होंने उनको अनेक वस्तुएँ भेंट दी। बाजीराव दिल्ली तक जाकर वापस लौट गया। बाजीराव पेशवा की मृत्यु से महाराजा जयसिंह को बड़ा दु:ख हुआ। नया पेशवा बालाराव बना। १७४१ ई० में जब नए मराठा पेशवा बाला राव उत्तर में चढ़ाई की उस समय जयसिंह आगरा के सूबेदार थे। इनकी और नये पेशवा बाला राव की धौलपुर में भेंट हुई। इनके प्रयास से बादशाह ने पेशवा को मालवा की नायब सूबेदारी दे दी।<ref name="ignca.nic.in"/> === नादिरशाह और सवाई जयसिंह === जब नादिरशाह भारत में आया तब सभी को बड़ी शंका खड़ी हो गई। पेशवा, महाराणा अन्य राजाओं व बुन्देलों को मिला कर जयसिंह, नादिरशाह का संगठित मुकाबला करना चाह रहा था। हालांकि 24 फरवरी 1739 को [[करनाल]] में वह (नादिरशाह) मुग़ल सेना को बुरी तरह पराजित कर चुका था। यह भी अफवाह थी कि नादिरशाह जयपुर होता हुआ अजमेर जाएगा। यह जयसिंह के लिए भी बड़ा खतरा था। सब चौकन्ने थे, लेकिन अन्त में वह [[मथुरा]] से ही वापस अपने देश लौट गया। "नादिरशाह ने जब [[भारत]] पर हमला (फरवरी-मार्च १७३९) किया तब [[दिल्ली]] की सहायतार्थ जयसिंह नहीं गए। इस का कारण यह था- तब निजाम और कमरुद्दीन उस समय साम्राज्य में उच्च पदों पर थे और नादिरशाह के हमले के लिए वे लोग इनके उत्तरदायी होने का शक कर सकते थे, किन्तु सम्राट बराबर इनमें विश्वास रख कर इनसे आवश्यक परामर्श करता रहा।"<ref name="ignca.nic.in"/> == साहित्य-रचना और यज्ञ-परंपरा== महाराजा सवाई जयसिंह के दरबार में संस्कृत और [[बृज भाषा|ब्रजभाषा]] [[साहित्य]], [[वास्तुकला|स्थापत्य]], [[धर्मशास्त्र]], [[ज्योतिष]], [[ब्रह्माण्ड|खगोल]], [[इतिहास]]-लेखन, आदि क्षेत्रों में अनेक मौलिक रचनाएं की गयीं और सम्पूर्ण भारतीय मनीषा की इस अकादमिक-योगदान से बड़ी उन्नति हुई। अनेक नए धर्मशास्त्र भी रचे गये क्यों कि इनकी [[कर्मकांड]] और [[धर्मशास्त्र]] में बड़ी रुचि व निष्ठा थी। इनके समय के सबसे प्रसिद्ध विद्वान पंडित [[जगन्नाथ सम्राट]], पंडित [[रत्नाकर पौण्डरीक|पुण्डरीक रत्नाकर]], [[विद्याधर चक्रवर्ती]], [[शिवानन्द गोस्वामी]], [[श्रीकृष्णभट्ट कविकलानिधि|श्रीकृष्ण भट्ट कविकलानिधि]](एवं दैवज्ञ भूषण स्वास्तिश्री राज ज्योतिषी श्री मंत नोपाराम भार्गव जो बारहं ठिकानों के राज ज्योतिषी थे ओर तंवरावाटी के बिहार ग्राम के रहने बाले थे अश्वमेध यज्ञ के दोरान श्री मंत नोपाराम भार्गव को दक्षिणा में बारहं ठिकानों का राज ज्योतिषी न्युक्त किया गया था इसके उपरांत श्रीमंत साहब बिहार गाँव छोडकर सन् 1640ई. में डाबला ग्राम में आकर रहने लगे ) <ref>कविशिरोमणि [[भट्ट मथुरानाथ शास्त्री]]: '[[जयपुर-वैभवम]]</ref> मूलतः आन्ध्र से आये तैलंग पूर्वजों के वंशज ब्रजनाथ भट्ट भी इनके समय के प्रसिद्ध कवि विद्वानों में से थे। इन्होंने 'ब्रह्मसूत्राणभाण्यवृत्ति' और 'पद्मतरंगिणी' की रचना की। [[श्रीकृष्णभट्ट कविकलानिधि|श्रीकृष्ण भट्ट कविकलानिधि]] ने इनके समय में अनेक ग्रन्थ लिखे जिनमें मुख्य '[[ईश्वर विलास]]<ref>कविशिरोमणि भट्ट मथुरानाथ शास्त्री: 'जयपुर-वैभवम</ref>- महाकाव्य भी है, जिसमें सवाई जयसिंह द्वारा '[[अश्वमेध यज्ञ]]' करवाने का 'आँखों देखा हाल' वर्णित है।<ref>संस्कृत के युग-पुरुष: मंजुनाथ': पृष्ठ 1 प्रकाशक: 'मंजुनाथ स्मृति संस्थान, सी-8, पृथ्वीराज रोड, जयपुर-302001</ref> जेम्स टॉड ने लिखा है " सवाई जयसिंह ने बहुत-सा धन खर्च कर के यज्ञशाला बनवाई थी और उसके स्तंभों और छत को चांदी के पत्तरों से मंडवाया था|<ref>'राजस्थान का इतिहास' भाग-२ : लेफ्टिनेंट कर्नल जेम्स टॉड, पृष्ठ ११९ 'साहित्यागार' प्रकाशन, जयपुर</ref> पुण्डरीक रत्नाकर (मृत्यु वि. १७७६ में) ने इनसे [[व्रात्यस्तोम यज्ञ]] चैत वदी ३ वि॰सं॰ १७७१ को क्षिप्रा नदी के तट पर उज्जैन में करवाया। इन्होंने और दूसरे यज्ञ-जैसे [[श्रौत यज्ञ]] आदि भी सम्पन्न करवाये थे। इनका रचा हुआ 'जयसिंह कल्पद्रुम' एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ है। रत्नाकर के पुत्र सुधाकर पौण्डरीक ने जयसिंह से [[पुरुषमेध यज्ञ]] करवाया था तथा 'साहित्यसार संग्रह' की रचना की। इन्होंने [[सम्राट यज्ञ]] भी कराया, जिसके पुरोहित इनके महाराष्ट्रीय ब्राह्मण गुरु, [[जगन्नाथ सम्राट]] थे। ''१७३४ ई० में जयसिंह ने जो पहला [[अश्वमेध यज्ञ]] किया''<ref>{{Cite web |url=http://msmsmuseum.com/pages.php?id=4 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 जुलाई 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140716190556/http://msmsmuseum.com/pages.php?id=4 |archive-date=16 जुलाई 2014 |url-status=dead }}</ref>, २९ मई १७३४ को सम्पूर्ण हुआ।<ref>सवाई जयसिंह : राजेंद्र शंकर भट्ट: नेशनल बुक ट्रस्ट (अंग्रेज़ी अनुवाद: शैलेश कुमार झा) २००५ संस्करण</ref> इस अश्वमेध यज्ञ के समय, जो राजसी-घोड़ा छोड़ा गया था, उसे कुछ कुम्मणियों ने जलमहल से आगे, जयपुर के एक और प्रवेशद्वार (जिसका नाम बाद में जोरावर सिंह गेट रखा गया) के पास ही पकड़ लिया और अन्त में जयसिंह के अश्व के साथ जा रहे सरदार जोरावर सिंह घोड़ा पकड़ने वालों से युद्ध करके मारे गये।<ref>डॉ॰ ज्ञान प्रकाश पिलानिया, 'Enlightened Government in Modern India: Heritage of Sawai Jai Singh' ('हेरिटेज ऑफ़ सवाई जयसिंह') ISBN 8187359161, ISBN 9788187359166</ref> ''दूसरा अश्वमेध यज्ञ बड़े पैमाने पर जयसिंह ने वर्ष १७४२ ई० में करवाया''। इन यज्ञों के अलावा जयपुर में [[पुरुषमेध यज्ञ]], [[सर्वमेध यज्ञ]], [[सोम यज्ञ]] आदि भी किये गये। इन यज्ञों के कारण देश के पंडित-जगत में इनकी बड़ी ख्याति हुई तथा सम्पूर्ण हिन्दू-समाज ने इनकी इस सांस्कृतिक-पहल की प्रशंसा की।<ref>संस्कृत के युग-पुरुष: मंजुनाथ': प्रकाशक: 'मंजुनाथ स्मृति संस्थान, जयपुर-302001</ref> आसपास की राजनैतिक उथल-पुथल के बावजूद जयपुर नगर उस समय विभिन्न विद्याओं, साहित्य और भारतीय-[[संस्कृति]] का आगार बन गया था। इसी कारण इसे '''दूसरी काशी''' भी कहा गया | [[कर्नल]] [[जेम्स टॉड]] ने भी माना है कि "महाराज सवाई जयसिंह ने जयपुर को हिन्दूविद्याओं का शरणस्थल बना दिया था। इस तरह भारत में सदियों से यज्ञादि की जो परम्परा लगभग बन्द हो चुकी थी, उन्हें महाराजा सवाई जयसिंह ने जयपुर राज्य में फिर से प्रारम्भ किया।"<ref>'राजस्थान का इतिहास' : लेफ्टिनेंट कर्नल जेम्स टॉड, 'साहित्यागार' प्रकाशन, जयपुर</ref> == सवाई जयसिंह का स्थापत्य-कला को योगदान == === जयपुर : शिल्पशास्त्र के आधार पर नई राजधानी === महाराजा सवाई जयसिह ने एक नया [[राजधानी]]-नगर बसाने का विचार आमेर से [[दक्षिण]] में छ: मील दूर [[पौष]] वदी १ वि. सं. १७८४ तदनुसार नवम्बर २९ ई० १७२७ को पं० [[जगन्नाथ सम्राट]] के माध्यम से शिलान्यास करते हुए क्रियान्वित किया। सम्पूर्ण नगर-योजना दरबार के प्रमुख वास्तुविद [[विद्याधर चक्रवर्ती]] की तकनीकी सलाह से निर्मित हुई। नक्शा पहले कपड़े पर अमिट काली स्याही से तैयार किया गया। सवाई ने तालकटोरा तालाब बनवाया, मानसागर झील में '[[जल महल|जलमहल]]' निर्मित करवाया, प्राचीन कछावा किले [[जयगढ़ दुर्ग|जयगढ़]] का पुनरुद्धार किया, आमेर के जो महल-भाग [[मिर्जा राजा जयसिंह|जयसिंह (प्रथम)]] ने बनवाए थे, उन सब का विस्तार किया तथा सुदर्शनगढ़ का महल भी बनवाया जिसको आज नाहरगढ़ का किला भी कहते हैं। विविध कला-कौशल विकास हेतु '६४ कारखाने' अर्थात् अलग-अलग विभाग स्थापित किये, नगर के बाहर आगरा रोड पर इनके द्वारा अपनी सिसोदिया रानी के लिए एक ग्रीष्मकालीन बाग़ और महल बनवाया गया। शहर में [[कल्कि]] का मंदिर और यज्ञस्तम्भ के पास भगवान [[विष्णु]] का मंदिर भी इन्होनें बनवाया। [[मथुरा]] में [[सीता]][[राम]]जी का और [[गोवर्धन पर्वत|गोवर्धन]] में गोवर्धनधारी के मंदिर भी इन्होनें ही बनवाये।<ref>सवाई जयसिंह : राजेंद्र शंकर भट्ट: [[राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत|नेशनल बुक ट्रस्ट]] (अंग्रेज़ी अनुवाद: शैलेश कुमार झा) २००५ संस्करण</ref> [[File:आमेर महल का दीवाने-आम.JPG|thumb|आमेर महल का दीवाने-आम : छायाकार: हे.शे.]] === नगर का वास्तु-कौशल === नए नगर को ९ सामान क्षेत्रफल वाले खंडों (चौकड़ियों) में बांटा गया था, जिसके दो खण्ड मुख्य राजमहल 'चन्द्रमहल', विभिन्न राजकीय कारखानों, कुछ खास मंदिरों तथा वेधशाला के लिए आरक्षित रखे गये थे। सूरजपोल दरवाज़े से चांदपोल दरवाज़े तक सड़क की लम्बाई दो मील और चौड़ाई १२० फीट रखी गयी। इसी महामार्ग पर मध्य में तीन सुन्दर चौपड़ों का निर्माण भी प्रस्तावित किया गया जो यहाँ लगे हुए फव्वारों के लिए भूमिगत जलस्रोतों से जुड़े थे। शहर के चौतरफ बनाये गए परकोटे की दीवार २० से २५ फुट ऊंची तथा ९ फीट चौड़ी रखी गयी। इस परकोटे में (शहर में आने - जाने के लिए) सात सुन्दर प्रवेशद्वारों का निर्माण भी किया गया। रात को नगर-सुरक्षा हेतु इन्हें बंद कर दिया जाता था। सुन्दर राजसी राजमहल, भव्य-पाठशालाएं, बड़ी बड़ी, चौड़ी और एक दूसरे को समकोण पर विभाजित करती एकदम सीधी सड़कें, एक सी रूप-रचना के आकर्षक बाज़ार, जगह-जगह कलात्मक मंदिर, (राजा [[राम]] की [[अयोध्या]] के वास्तु से प्रभावित) आम-भवन-संरचनाएं, सड़कों के किनारे लगे घने छायादार पेड़, पीने के पानी का समुचित प्रबंध, व्यर्थ-जल-निकासी की उपयुक्त व्यवस्था, उद्यान, नागरिक-सुरक्षा, आदि इन सब बातों का पूर्व-नियोजन सवाई जयसिंह ने अपने नगर-कौशल में सफलतापूर्वक किया। === जयपुर पर केन्द्रित संस्कृत महाकाव्य === कविशिरोमणि [[भट्ट मथुरानाथ शास्त्री]] ने सन 1947 में 476 पृष्ठों में प्रकाशित अपना एक यशस्वी काव्य-ग्रन्थ [[जयपुर-वैभवम]] तो जयपुर के नगर-सौंदर्य, दर्शनीय स्थानों, देवालयों, मार्गों, यहाँ के सम्मानित नागरिकों, उत्सवों और त्योहारों आदि पर ही केन्द्रित किया था। <ref>{http://www.sanskrit.nic.in/DigitalBook/J/Jaipurvaibhavam.pdf {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131126095023/http://www.sanskrit.nic.in/DigitalBook/J/Jaipurvaibhavam.pdf |date=26 नवंबर 2013 }}</ref> === खगोलशास्त्र और सवाई जयसिंह === [[चित्र:Jai obs.jpg|Jai obs.jpg|right|thumb|300px|जयपुर वेधशाला का विहंगम दृश्य]] जयपुर के पुराने राजमहल' चन्द्र महल' के उत्तर में जयपुर नरेशों के आराध्य देव [[गोविंद देवजी का मंदिर|गोविन्ददेव जी]] का मन्दिर है, [[दुनिया]] भर में [[जंतर मंतर]] के नाम से मशहूर विशाल [[वेधशाला]] भी यहीं मौजूद है<ref>|https://hi.wikipedia.org/s/ecr</ref> पत्थर के विशाल [[यंत्र]] और ग्रह नक्षत्रों की गणना के लिए बने ''<ref>Michiel Schwarz, (1980) Observatoria : de astronomische instrumenten van Maharaja Sawai Jai Singh II in New Delhi, Jaipur, Ujjain en Benares, Amsterdam : Westland/Utrecht Hypotheekbank</ref>,<ref>"Sawai Jai Singh and His Astronomy," by Virendra Nath Sharma, Motilal Banarasi Dass Publishers, Delhi (1995)</ref> इन गणना-उपकरणों के निर्माता सवाई जयसिंह को बचपन से ही गणित और खगोल ज्योतिष में बड़ी गहरी दिलचस्पी थी<ref>http://www.google.co.in/search?tbo=p&tbm=bks&q=inauthor:%22Jai+Singh+II+(Maharaja+of+Jaipur)%22/पृष्ठ २</ref> किन्तु महाराजा जयसिंह को खगोलविद्या में 'दीक्षित' करने का बड़ा श्रेय पंडित [[जगन्नाथ सम्राट]] को है। राजा को [[वेद]] पढ़ाने के लिए नियुक्त [[मराठी भाषा|मराठी]] सम्मानित विद्वान भारतीय ज्योतिर्विज्ञान को योगदान देते हुए सम्राट जगन्नाथ ने 'सिद्धान्त कौस्तुभ' की रचना की तथा [[यूक्लिड]] के [[रेखागणित]] का [[अरबी]] से [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] में अनुवाद किया। सवाई जयसिंह ने अपने गुरु ही के अनुसरण में यह अनुभव किया कि [[न्यूटन (इकाई)|न्यूटन]] [Newton] और [[फ्लेमस्टीड]] []John Flamsteed]] FRS (19 August 1646 – 31 December 1719) आदि द्वारा उल्लेखित यूरोपीय वैज्ञानिकों के पीतल या धातु के खगोल-यंत्रों से मौसम, तापमान, घिसाई, आदि कई कारणों से गणना फलावट में अक्सर अन्तर आ जाया करता है, इसलिए इन्होंने सबसे पहले १७२४ ईस्वी में दिल्ली की वेधशाला में धातु को छोड़ कर चूने और तराशे गए पत्थर से बड़े-बड़े गणना यंत्र बनवाये। फिर इसी तरह इन्होंने जयपुर में १७३४ में और सन १७३२ से १७३४ के बीच [[मथुरा]], [[वाराणसी|बनारस]] और [[उज्जैन]] में भी अपने वास्तुविद [[विद्याधर]] के मार्गदर्शन में सम्राट जगन्नाथ द्वारा विकसित उन्नत यंत्रों- सम्राट-यन्त्र (लघु), नाडी-वलय-यन्त्र, कांति-वृक्ष-यन्त्र, यंत्रराज, दक्षिनोदक-भित्ति-यन्त्र, उन्नतांश-यन्त्र, जयप्रकाश-यन्त्र, सम्राट-यन्त्र (दीर्घ), शषतांश यंत्र, कपालीवलय यन्त्र, राशिवलय यन्त्र, चक्र यंत्र, राम यन्त्र, त्रिगंश यन्त्र आदि से युक्त नई वेधशालाएँ बनवाई।<ref>http://www.google.co.in/search?tbo=p&tbm=bks&q=inauthor:%22Jai+Singh+II+(Maharaja+of+Jaipur)%22</ref>,<ref>{{Cite web |url=http://www.indiavisitinformation.com/indian-culture/indian-monument/Jantar-Mantar-in-india.shtml |title=संग्रहीत प्रति |access-date=11 जुलाई 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130729213946/http://www.indiavisitinformation.com/indian-culture/indian-monument/Jantar-Mantar-in-india.shtml |archive-date=29 जुलाई 2013 |url-status=dead }}</ref> मथुरा की वेधशाला नष्ट हो चुकी, काशी और उज्जैन की वेधशालाएं नष्ट होने के कगार पर हैं; अब केवल जयपुर और थोड़ी बहुत दिल्ल्ली की वेधशाला इनके वैज्ञानिक-व्यक्तित्व का स्मरण कराती हैं। === जयपुर दरबार में विदेशी विद्वान=== जब इनको मालूम हुआ कि पश्चिम के ज्योतिषीगण द्वारा खासतौर पर पुर्तगाल में पिछले कुछ वर्षों में खगोलविद्या पर काफी काम हुआ है, इन्होंने गोवा के पुर्तगाली-गवर्नर के मार्फत पुर्तगाल के बादशाह को अनेक तोहफे भेजे तथा गवर्नर के मार्फत पुर्तगाल से खगोल विद्वान Padre Manoel Figueiredo को जयपुर बुलवाया।<ref>Sharma, Virendra Nath (1995), Sawai Jai Singh and His Astronomy, Motilal Banarsidass Publications</ref> जयसिंह ने १७२७ में उसे (Manoel Figueiredo को) योरोप में इस विषय की सारी उपलब्ध नवीनतम पुस्तकें / रचनाएँ तथा दूर्वीक्षण यंत्र (टेलीस्कोप) लाने भेजा। वह जब नवम्बर १७३० में वापस आया तो अपने साथ खगोलज्ञ जेवियर डीसिल्वा को और कुछ दूरबीनें साथ लाया। जेवियर डीसिल्वा Pere de la Hire (1640-1718) की सारणी 'Tabulae Astronomicae' लिस्बन से अपने साथ लाया था। इन्होंने अपने विद्वानों की सहायता से उन सारणियों का अध्ययन किया और व्यावहारिक उपयोग के बाद उनमें त्रुटियाँ पाईं| अंततः इन्होंने ''अपने यंत्रों की गणना से पुनः नई सारिणी'' बनाई, जिसका बादशाह के नाम पर नाम '''जिज़-ए-मुहम्मदशाही''' रखा गया।<ref>A B Umasankar Mitra (1995) "Astronomical Observatories of Maharaja Jai Singh". School Science (NCERT) 23 (4): 45–48</ref> इनके दरबार में चन्द्रनगर से आया फ्रांसीसी खगोलज्ञ क्लाड बोडियर था। इनके दरबार में जर्मनी से फादर ऐन्टोइन गेवेल्स परगुइर व आद्रें स्टोब्ल भी आये थे। एक और हिन्दुस्तानी विद्वान, इनके यहाँ केवलराम था, जो गुजरात से आया था। उसने खगोल सम्बन्धी आठ ग्रन्थ लिखे थे। उसको सवाई जयसिंह ने 'ज्योतिषराय' की उपाधि भी दी।<ref>A B Umasankar Mitra (1995). "Astronomical Observatories of Maharaja Jai Singh".School Science (NCERT) 23 (4): 45–48</ref> महाराजा सवाई जयसिंह ने युद्ध और राजनीति में उलझे रहने के बावजूद, नगर-निर्माण और खगोलशास्त्र में बड़ा काम किया। इन्होंने भारतीय खगोलविद्या के साथ यूनान, मध्य एशिया और योरोप में जो ग्रन्थ लिखे गये थे तथा जो यंत्र बने थे, उनको मंगवा कर उनका परीक्षण व उपयोग किया। ''282 साल पहले लकड़ी, चूने, पत्थर और धातु से निर्मित यंत्रों के माध्यम से आकाशीय घटनाओं के अध्ययन की भारतीय विद्या को 'अद्भुत' मानते हुए इस स्मारक को ''विश्व धरोहर सूची'' में शामिल किया गया है|'' इन्हीं यंत्रों के गणना के आधार पर आज भी जयपुर के स्थानीय पंचांग का प्रकाशन होता है और हर बरस आषाढ़ पूर्णिमा को खगोलशास्त्रियों द्वारा 'पवन धारणा' प्रक्रिया से आने वाली वर्षा की भविष्यवाणी की जाती है। भारत में जयसिंह से पूर्व, खगोलशास्त्र में अनेक दशकों यहाँ तक कि सदियों से कोई 'बड़ा' या उल्लेखनीय कार्य नहीं हुआ था, सवाई ने इस सांस्कृतिक-निर्वात की पूर्ति की। <ref>Sharma, Virendra Nath (1995), Sawai Jai Singh and His Astronomy, Motilal Banarsidass Publ., pp. 8–9, ISBN 81-208-1256-5</ref><ref>{{Cite web |url=http://www.uwfox.uwc.edu/users/vsharma/paper.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 जुलाई 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140714231624/http://www.uwfox.uwc.edu/users/vsharma/paper.html |archive-date=14 जुलाई 2014 |url-status=dead }}</ref> ==== कल्कि का प्राचीन मन्दिर ==== [[चित्र:Kalki1790s.jpg|right|thumb|350px|कल्कि का ताम्रचित्र (१८वीं शती में निर्मित)]] जयपुर (राजस्थान, भारत) की 'बड़ी चौपड़' से आमेर की ओर जाने वाली सड़क सिरेड्योढ़ी बाज़ार में [[हवामहल]] के लगभग सामने भगवान [[कल्कि]] का प्राचीन मन्दिर अवस्थित है। जयपुर के संस्थापक सवाई जयसिंह ने पुराणों में वर्णित कथा के आधार पर कल्कि के मन्दिर का निर्माण सन् 1739 ई. में दाक्षिणात-शिखर-शैली में कराया था। संस्कृत विद्वान आचार्य देवर्षि [[कलानाथ शास्त्री]] के अनुसार, "सवाई जयसिंह संसार के ऐसे पहले महाराजा रहे हैं, जिन्होंने जिस देवता का अभी तक अवतार हुआ नहीं, उसके बारे में कल्पना कर कल्कि की मूर्ति बनवाकर मन्दिर में स्थापित करायी।" सवाई जयसिंह के तत्काली दरबारी कवि [[श्रीकृष्णभट्ट कविकलानिधि|श्रीकृष्ण भट्ट कविकलानिधि]] ने अपने ”कल्कि-काव्य“ में मन्दिर के निर्माण और औचित्य का वर्णन किया है। तद्नुसार ऐसा उल्लेख है कि सवाई जयसिंह ने अपने पौत्र ”कल्कि प्रसाद“ (सवाई ईश्वरी सिंह के पुत्र) जिसकी असमय मृत्यु हो गई थी, उसकी स्मृति में यह मन्दिर स्थापित कराया। यहाँ श्वेत अश्व की प्रतिमा संगमरमर में उत्कीर्ण है जो बहुत सुन्दर, आकर्षक और सम्मोहक है। अश्व के चबूतरे पर लगे बोर्ड पर यह इबारत अंकित है- ”अश्व श्री कल्कि महाराज-मान्यता- अश्व के बाएँ पैर में जो गड्ढा सा (घाव) है, जो स्वतः भर रहा है, उसके भरने पर ही कल्कि भगवान प्रकट होगें।“<ref>'जयपुर-दर्शन' सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978</ref> ====[[जयगढ़ दुर्ग|जयगढ़]] का दुर्ग ==== अनेक स्थानों पर इस दुर्ग [[जयगढ़ दुर्ग|जयगढ़]] का वर्णन किया जा चुका है, अतः पुनरावृत्ति अनावश्यक होगी। [https://web.archive.org/web/20140311093126/http://www.cs.utah.edu/~noliver/india/Forts/Jaigarh-AmberFort/Jaigarh.html] === समाज-सुधारक के रूप में सवाई जयसिंह === सवाई जयसिंह ने सभी समाजों के लिए परंपरा संबंधी सुधार-कार्य किये। ब्राह्मण समाज में कई सुधार करते हुए वैरागी साधुओं में व्याप्त व्यभिचार मिटाने के लिए इन्होंने उनको पुनर्विवाह कर अपनी पत्नी साथ रखने (गृहस्थ आश्रम में प्रवेश) का विधान किया। बादशाह से फकीरों व सन्यासियों की मृत्यु के बाद, उनकी सम्पत्ति राज्य के पक्ष में जब्त नहीं करने की आज्ञा जारी करवाई, किन्तु सन्यासियों को 'निजी सम्पत्ति' रखने से रोका। बादशाह से अनुरोध के बाद हिन्दुओं पर लगाया गया पुराना भयंकर टैक्स [[जज़िया|जजिया कर]] समाप्त करवाया, ब्राह्मणों और राजपूतों के शादीब्याह आदि में हैसियत से बाहर जा कर दहेज़ देने और मृत्युभोज आदि सामाजिक अवसरों पर धन की बर्बादी रोकने की कोशिश भी की। जगह-जगह धर्मशालाएं, कई संस्कृत पाठशालाएं और विद्यालय खोले, विधवा-विवाह का पक्ष लिया, स्त्री-हत्या, कन्या-वध रोका, 'सर्वधर्म समभाव' की भावना को बढ़ावा दिया, विशेषतः जयपुर में [[जैन धर्म|जैन]] संप्रदाय को प्रोत्साहित किया, दिल्ली, आगरा, अन्य स्थानों से बड़े २ व्यापारियों को ला कर जयपुर में बसाया, देश में घूम-घूम कर विद्वानों की खोज की, उन्हें राज-सम्मान बक्शा, बड़ी २ जागीरें दीं और उत्तर भारत के समूचे हिन्दू-समाज को ऐसे कठिन वक़्त बाहरी आक्रान्ताओं से मुक्त रखा, जब राजनैतिक उठापटक, केंद्र में प्रशासनिक अराजकता और अनेक राजपूताना राज्यों के बीच सर-फुट्टवल अपने चरम पर थी। <ref>'जयपुर-दर्शन' सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978 [पेज 203] प्रकाशक : जयपुर अढाई शती समारोह समिति, नगर विकास व्यास (अब जयपुर विकास प्राधिकरण) परिसर, भवानी सिंह मार्ग, जयपुर</ref> === शासन-व्यवस्था=== दिन प्रतिदिन का शासन राजा की आज्ञा से उनके दीवान चलाते थे। दीवानों या मंत्रियों की संख्या राजा की मर्जी के मुताबिक परिवर्तनशील थी। सेना संबंधी सारा काम बख्शी के अधिकार-क्षेत्र में था। जब सवाई जयसिंह गद्दी पर बैठे तब उनके तीन दीवान रामचन्द्र, किशनदास और बिहारीदास थे। वि. सं. १७५७ में इन्होने एक दीवान और बढ़ा कर चार कर दिये थे। वि. सं. १७७३-७४ में आठ दीवान थे।<ref name="ignca.nic.in"/> पहले आमेर-दरबार के लेखा-विभाग में 'जूनियर ऑडिटर' का काम कर चुके महान वास्तुविद [[विद्याधर चक्रवर्ती]] इनके राजस्व मंत्री (या देश-दीवान) थे। [https://hi.wikipedia.org/s/7fp7] [[File:जयगढ़ किले में प्रदर्शित तोप जयबाण.JPG|thumb|जयगढ़ किले में ढाली गयी तोप जयबाण जिसका परीक्षण केवल एक बार हुआ और जिससे छोड़ा गया लोहे का गोला लगभग २२ किलोमीटर दूर [[चाकसू]] के आसपास जा कर गिरा था! : छायाकार: हे.शे. ]] कुंवर [[नटवर सिंह]] ने लिखा है-"यदि जाटों का अभ्युदय न हुआ होता, तो जयपुर का राज्य यमुना-नदी तक फैल गया होता।"<ref>नटवर सिंह : हिन्दी अनुवाद : राधाकृष्ण प्रकाशन, दिल्ली से 2006 में प्रकाशित चर्चित पुस्तक 'महाराजा सूरजमल'(प्रथम प्रकाशन : इंग्लेंड से मूलतः अंग्रेज़ी में)[http://www.amazon.com/Maharaja-Suraj-Mal-1707-63-Times/dp/0049230727/ref=la_B001ICOTJW_1_7?s=books&ie=UTF8&qid=1403930933&sr=1-7]</ref> === जयपुर के सेना के कुछ सेना-अधिकारी === जयसिंह के प्रमुख सेनापतियों में कुशलसिंह राजावत (झिलाय), कोजूरामती राजावत (ईसरदा), दलेलसिंह राजावत (धूला), रावल शेरसिंह नाथावत (सामोद), मोहनसिंह नाथावत (चौमू), बखतसिंह नाथावत (मोरीजा), पदमसिंह चतुरभुजोत (बगरु), श्यामसिंह खंगारोत (डिग्गी), केशरीसिंह नरुका (लदाणा), जोरावरसिंह नरुका (मानपुर-मांचेडी), संग्रामसिंह नरुका (उनियारा), गजसिंह नरुका (जावली), दीपसिंह शेखावत (कासली), शार्दूलसिंह शेखावत (झुंझुनूं), शिवसिंह शेखावत (सीकर), दीपसिंह कुम्भाणी (भांडारेज) जोरावरसिंह, श्योब्रह्मा (पोता) आदि थे। [https://web.archive.org/web/20140714115524/http://www.ignca.nic.in/coilnet/rj089.htm] सेना दो प्रकार की होती थी जागीरदारों की सेना, जिसके एकत्र होने पर सवार और प्यादा आदि के हिसाब से रोजाना का खर्च दिया जाता था। खुद राज्य की ऐसी सेना बहुत छोटी होती थी जिसको मासिक तनख्वाह दी जाती थी। फौज में घुड़सवार सेना भी अपेक्षकृत कम होती थी। मुख्य अंगरक्षक, 'रिसाला' ही होता था जिसमें एक हजार घुड़सवार होते थे। बाकी पैदल सेना अधिक थी। जयसिंह ने अपनी सेना में तोड़ेदार बंदूकें शामिल कर दी थी, जिससे उनकी सेना की मारक-शक्ति बहुत बढ़ गई थी। ''यदुनाथ सरकार'' के शब्दों में- "{{Quotation| Jai Singh's regular army did not exceed 40,000 men, which would have cost about 60 lakhs a year, but his strength lay in the large number of artillery and copious supply of munitions, which he was careful to maintain and his rule of arming his foot with matchlocks instead of the traditional Rajput sword and shield - He had the wisdom to recognize early the change which firearms had introduced in Indian warfare and to prepare for himself for the new war by raising the fire-power of his army to the maximum}} इनका तोपखाना भी बड़ा प्रभावी तथा शक्तिशाली था। जयगढ़ में ही तोपें निर्मित की जाती थीं। तोपें ढालने का वह 'यंत्र' और सांचे अभी भी जयगढ़ किले की फाउंड्री में मौजूद है। जयगढ़ में रखी जो बड़ी तोप 'जैबाण' है, उसके मुकाबले की देशज तोपें देश में बहुत कम है। (चित्र) सेना की भर्ती, वेतन, रसद आदि आवश्यक कार्यों के लिए बख्शी का (बहुत महत्वपूर्ण पद) होता था।<ref name="ignca.nic.in"/> [[File:जयपुर में सवाई जयसिंह स्मारक.JPG|thumb|जयपुर में सवाई जयसिंह स्मारक :छायाकार: हे.शे.]] == निधन == इनके समकालीन राजदरबार के कवि श्रीकृष्णभट्ट ने लिखा है कि 'यह अन्तिम दिनों में गोविन्ददेव के ध्यान में लीन रहने लग गए थे।'<ref name="ReferenceA">'ईश्वर विलास' महाकाव्य, राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर</ref> सवाई जयसिंह की मृत्यु जयपुर में में आश्विन सुदी १४ वि॰सं॰ १८००, सितम्बर २१, सन १७४३ ई० को वृद्धावस्था और बीमार रहने के बाद हुई। <ref>[[यदुनाथ सरकार]] : वही : पृष्ठ 192</ref> उन्हें गैटोर में अग्नि दी गयी। इनके सत्ताईस रानियां थी, जिनमें से तीन इनकी चिता के साथ सती हुईं | उन रानियों की छतरी जयपुर-आमेर मार्ग पर (जलमहल से पहले) है। <ref>{{Cite web |url=http://www.pinkcity.com/hi/places-to-visit/queens-canopies/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=12 जुलाई 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140714171027/http://www.pinkcity.com/hi/places-to-visit/queens-canopies/ |archive-date=14 जुलाई 2014 |url-status=dead }}</ref> जेम्स टॉड ने लिखा है- {{quotation|चवालीस साल तक राज्य करके संवत १७९९ (सन १७४३) में सवाई जयसिंह की जयपुर में मृत्यु हो गयी| उसकी तीन विवाहित रानियाँ और अनेक उप पत्नियाँ उसके शव के साथ जल कर सती हुईं| उसने जिस विज्ञान की अपने जीवन भर उन्नति की थी, उसकी मृत्यु के बाद वह (जयपुर से) एकाएक लोप हो गई|...जयसिंह की यज्ञशाला के रजत-पत्तरों को उसके वंशज जगतसिंह ने निकलवा कर, उनके स्थान पर साधारण चांदी के पत्तर लगवा दिए| जयसिंह ने जिन ग्रंथों का संग्रह करने में जीवन भर अत्यधिक परिश्रम और धन व्यय किया था, उसके दो हिस्से कर डाले गए| उनके पुस्तकालय का एक भाग किसी प्रकार जयपुर की एक साधारण वेश्या ''(रसकपूर)'' के अधिकार में पहुँच गया!}} <ref>'राजस्थान का इतिहास' भाग-2 : लेफ्टिनेंट कर्नल जेम्स टॉड, पृष्ठ 119 'साहित्यागार' प्रकाशन, जयपुर</ref> == स्मारक और स्मृति-चिन्ह == * सवाई जयसिंह का एक बेहद सुन्दर स्मारक इनके पुत्र ईश्वर सिंह ने जयपुर में ब्रह्मपुरी के गैटोर में बनवाया!<ref>सवाई जयसिंह : राजेंद्र शंकर भट्ट: नेशनल बुक ट्रस्ट (अंग्रेज़ी अनुवाद: शैलेश कुमार झा) 2005 संस्करण]</ref> * जयपुर के [[स्टैच्यू सर्किल|स्टेचू सर्किल]] पर बंगाली मूर्तिकार ''महेंद्र कुमार दास'' से संगमरमर में बनवा कर इनकी १२ फीट ऊंची एक आकर्षक प्रतिमा राजस्थान शासन ने जयपुर शहर की २५० वीं सालगिरह के अवसर पर 1978 में स्थापित की। <ref>https://hi.wikipedia.org/s/nrh{{Dead link|date=सितंबर 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>. [https://web.archive.org/web/20141104204834/http://www.jaipur.org.uk/forts-monuments/statue-circle.html] * सवाई जयसिंह की स्मृति में नई दिल्ली में एक प्रमुख सड़क है। [https://web.archive.org/web/20131210111840/http://newdelhiymca.in/ymca_map.php] *इसी तरह जयपुर के बनीपार्क क्षेत्र की एक प्रधान सड़क 'जयसिंह हाइवे' कहलाती है। [https://web.archive.org/web/20140714164552/http://timescity.com/jaipur/event/sawai-jai-singh-road-location/] *खगोलशास्त्र के योग्य विद्वानों को 'सवाई जयसिंह सम्मान' जयपुर का भूतपूर्व राजघराना प्रतिवर्ष देता है। [https://web.archive.org/web/20140714234756/http://msmsmuseum.com/pages.php?id=27] *भारत सरकार ने इनके निर्माण जंतर-मंतर को [[एशियाई खेल]]ों के 'प्रतीक-चिन्ह' के रूप में स्वीकार करते इस पर एक डाक टिकट 1984 में जारी किया था। [https://web.archive.org/web/20140714182138/http://www.indian-visit.com/monuments-of-india/jantar-mantar-delhi.html] . [https://web.archive.org/web/20130729213946/http://www.indiavisitinformation.com/indian-culture/indian-monument/Jantar-Mantar-in-india.shtml] === उत्तराधिकारी === इनसे इनके तीन पुत्र थे-सबसे बड़े, दो लड़कों के पिता (२२ वर्षीय) ''शिवसिंह'', मंझले ''ईश्वरसिंह'' और सब से छोटे ''माधोसिंह'' |<ref>'जयपुर-दर्शन'</ref> ==== पुत्र शिवसिंह की मृत्यु==== शिवसिंह की मृत्यु का कारण '[[वंश भास्कर ]]' के ख्यात-लेखक ने यह बताया है कि मंझले पुत्र ईश्वरसिंह के उकसाने पर सवाई जयसिंह ने ज़हर दे कर अपनी रानी के सहयोग से स्वयं अपने टीकाई पुत्र की हत्या कर दी थी, पर [[यदुनाथ सरकार]] जैसे इतिहासकार इसे 'गप्प' मानते हैं और स्वीकार नहीं करते| उनके अनुसार " (अपने पिता की अनुपस्थिति में बादशाह द्वारा बनाये गए आगरा के सूबेदार) शिवसिंह की हैजे (कॉलेरा) से मथुरा में अकाल-मृत्यु १७२४ ईस्वी में हुई थी, जहाँ वह फौजदार पद पर थे|"<ref name="ReferenceB">Jadunath Sarkar : 'A History of Jaipur' : Orient BlackSwan, Page 193</ref> जब कि १९ वीं सदी के अंत में लिखे ग्रन्थ [[वीर विनोद]] (जिसे उदयपुर राज्य के शासक महाराणा सज्जन सिंह ने मेवाड़ के प्रामाणिक इतिहास लेखन का उत्तरदायित्व [[कविराज श्यामलदास]] को सौंपा था) में यह लिखा गया है "माधोसिंह ने अपने बड़े भाई शिवसिंह को विष दे कर मार डाला था|"<ref name="ReferenceB"/> सवाई जयसिंह इन तीन पुत्रों के अलावा दो पुत्रियां भी थीं पहली - ''विचित्र कंवर'', जिनका विवाह अभयसिंह (जोधपुर) और छोटी ''किशन कंवर'', जिनका विवाह बून्दी के राजा दलेलसिंह के साथ हुआ।<ref name="ReferenceA"/> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} *[https://web.archive.org/web/20061207200908/http://uqconnect.net/~zzhsoszy/ips/j/jaipur.html] *[https://web.archive.org/web/20150325205204/https://en.wikipedia.org/wiki/List_of_Rajputs] *[https://web.archive.org/web/20130711224658/http://genealogy/ of the rulers of Jaipur] *[http ://books.google.co.in/books?isbn=8126718013] *'जयपुर-दर्शन' प्रकाशक : प्रधान-सम्पादक : डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य: वर्ष 1978 [पृष्ठ 210] प्रकाशक : 'जयपुर अढाई शती समारोह समिति', नगर विकास व्यास (अब जयपुर विकास प्राधिकरण) परिसर, [[भवानी सिंह]] मार्ग, जयपुर-4 *'संस्कृत-कल्पतरु' : संपादक : [[कलानाथ शास्त्री]] एवं घनश्याम गोस्वामी: '[[मंजुनाथ शोध संस्थान]]', सी-8, पृथ्वीराज रोड, सी-स्कीम, जयपुर-302001 *डॉ॰ ज्ञानप्रकाश पिलानिया, 'Enlightened Government in Modern [[भारत|India]]: Heritage of Sawai Jai Singh ('हेरिटेज ऑफ़ सवाई जयसिंह') ISBN 8187359161, 9788187359166 *[[यदुनाथ सरकार]] : A History of Jaipur : Orient BlackSwan : ISBN 978-81-250-3691-3 *डॉ॰[[असीम कुमार राय]] की पुस्तक : "the history of jaipur city" *कविशिरोमणि [[भट्ट मथुरानाथ शास्त्री]]: '[[जयपुर-वैभवम]]' *चार शहरनामे : पुस्तक : हेमन्त शेष : शब्दार्थ प्रकाशन, जयपुर 2018 *Sarkar, Jadunath (1984, reprint 1994) A History of [[जयपुर]], New Delhi: Orient Longman, ISBN 81-250-0333-9 *Bowker, John, The Oxford Dictionary of World Religions, New York, Oxford University Press, 1997, p.&nbsp;103 *A B Umashankar Mitra (1995). 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Oriental MSS., The British Library London, England. == इन्हें भी देखें== *[[जंतर मंतर|जन्तर मन्तर]] *[[जगन्नाथ सम्राट]]—महाराजा जयसिंह द्वितीय के दरबार के महान गणितज्ञ एवं खगोलविद == बाहरी कड़ियाँ== * सवाई जयसिंह : [[राजेन्द्र शंकर भट्ट]]: [[राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत|नेशनल बुक ट्रस्ट]] (अंग्रेज़ी अनुवाद: शैलेश कुमार झा) २००५ संस्करण *'राजस्थान का इतिहास' भाग-2 : लेफ्टिनेंट कर्नल जेम्स टॉड, पृष्ठ 119 : वर्ष २०११ : 'साहित्यागार' प्रकाशन, जयपुर *[https://web.archive.org/web/20160411150452/https://books.google.co.in/books?id=7F_MJcTjDOQC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false Building Jaipur: The Making of an Indian City] (गूगल पुस्तक ; By Vibhuti Sachdev, Giles Henry Rupert Tillotson) *[https://web.archive.org/web/20180402230216/http://www.electroniki.com/Visitor/Art.aspx?sMID=9&sSMID=0&sArtID=288 जयसिंह और उनकी वेधशालाएँ] (शुकदेव प्रसाद) *[https://web.archive.org/web/20150814012719/http://www.internetindia.com/ashowkase/jaisingh.htm] *[https://web.archive.org/web/20140714113824/http://www.new1.dli.ernet.in/data1/upload/insa/INSA_1/20005b5c_131.pdf] *[https://web.archive.org/web/20140714215818/http://www.new1.dli.ernet.in/data1/upload/insa/INSA_1/20005ac0_249.pdf] [[श्रेणी:राजस्थान का इतिहास]] [[श्रेणी:जयपुर के लोग]] [[श्रेणी:राजस्थान के महाराजा]] [[श्रेणी:जयपुर]] [[श्रेणी:इतिहास]] [[श्रेणी:भारतीय वैज्ञानिक]] [[श्रेणी:भारतीय गणितज्ञ]] [[श्रेणी:भारत]] [[श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना]] [[श्रेणी:जयपुर के महाराजा]] {{जयपुर के महाराजा}} p2zslvccf3z2wm0vdp60qdch6c51s45 6630391 6630380 2026-10-17T09:01:25Z Mundhalia746 934684 6630391 wikitext text/x-wiki {{Infobox royalty | succession = आमेर के राजा |image= [[File:1 Maharaja Sawai Jai Singh II ca 1725 Jaipur. British museum.jpg|250px|]] |caption = ब्रिटिश संग्रहालय में महाराजा सवाई जयसिंह (द्वितीय) का चित्र | reign = 5 मार्च 1699 – 18 नवंबर 1727 | dynasty = कछवाहा | predecessor =[[बिशन सिंह]] | successor = [[ईश्वरी सिंह]] | father = बिशन सिंह | mother = राठोरजी इंद्र कंवरजी | spouse = *रानी गौड़जी केसर श्योपुर-बड़ौदा *रानी खींचन सुख कँवर राघौगढ़ *रानी राणावत चँद्र उदयपुर-मेवाड़ *रानी सिसोदनी फूल कँवर बनेड़ा *रानी राठौड़ आनंद कँवर किशनगढ़ *रानी चूँडावत अमृत कँवर देवगढ़ *रानी जादौन इँद्र कँवर करौली *रानी हाड़ीजी उमेद कँवरजी बूंदी *रानी राठौड़ चंदन बांदनवाड़ा-अजमेर *रानी तंवर लाड लक्खासर-बीकानेर *रानी राठौड़ सूरज जोधपुर-मारवाड़ *रानी सोलंकिनी गुलाब अलीगढ़ टोंक *रानी राठौड़ बख्त अमझेरा-मालवा | issue = पुत्र :- *युवराज शिव सिंह *महाराजा सवाई ईश्वरी सिंह *महाराजा सवाई माधो सिंह पुत्रियां :- *बाईजी लाल विचित्र कँवरजी जोधपुर में विवाह *बाईजी लाल किशन कँवरजी बूंदी में विवाह | birth_date = 3 नवंबर1688 | birth_place = खरवा, अजमेर | death_date = 21 सितंबर 1743 | death_place = [[जयपुर]] }} {{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति |known_for = नगर-नियोजन, कूटनीति, राजनीति, हिंदुत्व, परंपरा-अनुरक्षण, शासन-विस्तार, पुस्तक-प्रेम, विज्ञान-प्रेम |alma_mater = संस्कृत, फ़ारसी, अरबी, मराठी, ज्योतिष, खगोलशास्त्र, धर्मशास्त्र, वैदिक-कर्मकांड आदि |title =सरामद-ए-राजा-ए-हिंदुस्तान श्री राजराजेश्वर राजराजेंद्र महाराजाधिराज }} ''सवाई जयसिंहजी''' या '''जयसिंह जी (द्वितीय) ''' (03 नवम्बर 1688 - 21 सितम्बर 1743)<ref>लेफ्टिनेंट कर्नल [[जेम्स टॉड]]:' [[राजस्थान]] का इतिहास' खंड-२ : प्रकाशक- 'साहित्यागार', जयपुर; अनुवाद: केशव ठाकुर : संस्करण २०१२</ref> अठारहवीं सदी में [[भारत]] में [[राजस्थान]] के [[आमेर|आमेर राज्य]] के कछवाहा राजवंश के सर्वाधिक प्रतापी शासक थे। सन [[१७२७]] में [[आमेर]] से दक्षिण छः मील दूर एक बेहद सुन्दर, सुव्यवस्थित, सुविधापूर्ण और [[शिल्पशास्त्र]] के सिद्धांतों के आधार पर आकल्पित नया शहर '[[जयपुर|सवाई जयनगर]]', बाद में ([[जयपुर]]) बसाने वाले नगर-नियोजक के बतौर उनकी ख्याति भारतीय-इतिहास में अमर है। [[वाराणसी|काशी]], [[दिल्ली]], [[उज्जैन]], [[मथुरा]] और [[जयपुर]] में, अतुलनीय और अपने समय की सर्वाधिक सटीक गणनाओं के लिए जानी गयी [[वेधशाला]]ओं के निर्माता, सवाई जयसिह एक नीति-कुशल [[महाराजा]] और वीर सेनापति ही नहीं, जाने-माने [[ब्रह्माण्ड|खगोल]] [[वैज्ञानिक]] और विद्याव्यसनी विद्वान भी थे।<ref>'भारत: एक खोज': [[जवाहरलाल नेहरू|जवाहर लाल नेहरु]] [ https://archive.org/details/DiscoveryOfIndia {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130530033424/http://archive.org/details/DiscoveryOfIndia |date=30 मई 2013 }}]</ref> उनका [[संस्कृत भाषा|संस्कृत ]], [[मराठी भाषा|मराठी]], [[तुर्की]], [[फ़ारसी भाषा|फ़ारसी]], [[अरबी]], आदि कई भाषाओं पर गंभीर अधिकार था। भारतीय ग्रंथों के अलावा [[गणित]], [[रेखागणित]], [[ब्रह्माण्ड|खगोल]] और [[ज्योतिष]] में उन्होंने अनेकानेक विदेशी ग्रंथों में वर्णित वैज्ञानिक पद्धतियों का विधिपूर्वक अध्ययन किया था और स्वयं परीक्षण के बाद, कुछ को अपनाया भी था। देश-विदेश से उन्होंने बड़े बड़े विद्वानों और खगोलशास्त्र के विषय-विशेषज्ञों को [[जयपुर]] बुलाया, सम्मानित किया और यहाँ सम्मान दे कर बसाया। <ref>डॉ॰ ज्ञान प्रकाश पिलानिया, 'Enlightened Government in Modern India: Heritage of Sawai Jai Singh' (हेरिटेज ऑफ़ सवाई जयसिंह) ISBN 8187359161, 9788187359166</ref> जयसिंह की गणित, वास्तुकला और खगोल विज्ञान में बहुत रुचि थी। उन्होंने अपनी राजधानी जयपुर सहित भारत के कई स्थानों पर जंतर मंतर वेधशालाओं का निर्माण किया। उनके पास यूक्लिड के "एलीमेंट्स ऑफ़ ज्योमेट्री" का संस्कृत में अनुवाद था <ref>Chandara, Bipan. History of Modern India. Orient Black Swan.</ref> <ref> Sarkar, Jadunath (1984, reprint 1994) A History of Jaipur, New Delhi: Orient Longman, ISBN 81-250-0333-9, p.157</ref> === सवाई की मौखिक-उपाधि === अपने पिता [[राजा विष्णुसिंह|महाराजा बिशन सिंह]] के असामयिक देहान्त के बाद २५ जनवरी [[१७००]] को ११ वर्ष की लगभग बाल्य-अवस्था में वे [[आमेर]] की गद्दी बैठे।<ref>'जयपुर प्रकाशक : प्रधान-सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978 :[पेज 203] प्रकाशक : जयपुर अढाई शती समारोह समिति, नगर विकास व्यास (अब जयपुर विकास प्राधिकरण) परिसर, भवानी सिंह मार्ग, [[जयपुर]]</ref> [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] ने उन्हें 'सवाई' की [मौखिक] उपाधि दी थी - जिसका प्रतीकात्मक-अर्थ यही है कि वे अपने समकालीनों से 'सवाया' (या सवा-गुना अधिक बुद्धिमान और वीर) थे। सुना जाता है जब [[दिल्ली]] बादशाह [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] के दरबार में युवा सवाई जयसिंह पहले-पहल हाजिर हुए, तो [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] ने एकाएक बालक जयसिंह के दोनों हाथ पकड़ लिए और पूछा "अब बताइये, आप क्या करेंगे?" इस पर प्रत्युत्पन्नमति जयसिंह होठों पर मुस्कान लिए निहायत शांत स्वर से बोले, "आलमपनाह ! हमारे यहां हिन्दुओं में विवाह पर एक परम्परा है। वर, वधू का एक हाथ अपने हाथ में लेकर इस बात की प्रतिज्ञा करता है कि वह उसका हाथ जिन्दगी भर नहीं छोड़ेगा, उम्र भर उसका साथ निबाहेगा! आज बादशाह सलामत खुद मेरा एक हाथ नहीं, मेरे दोनों ही हाथ जब अपने हाथ में ले चुके हैं, फ़िर मुझे किस बात की परवाह?" [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] को इस चतुराई भरे जबाब की उम्मीद न थी, लेकिन इस बुद्धिमत्तापूर्ण हाज़िरजवाबी से वह बहुत प्रसन्न हुआ।<ref>डॉ॰ ज्ञान प्रकाश पिलानिया, 'Enlightened Government in Modern India: Heritage of Sawai Jai Singh (हेरिटेज ऑफ़ सवाई जयसिंह)' ISBN 8187359161, ISBN 9788187359166</ref>,<ref>'राजस्थान का इतिहास' : गोपीनाथ शर्मा : शिवलाल अग्रवाल एंड कम्पनी, आगरा</ref>[[यदुनाथ सरकार]] ने अपने जयपुर इतिहास में इस 'उपाधि' के बारे में जो शब्द लिखे हैं-अविकल रूप से ये हैं-"{{Quotation|The new Rajah also gained the title of ''Sawai'', which means 'one and a quarter', because Aurangzeb was so pleased with this youthful prince's feats before Khelna that he cried out," You are more than a man, you are ''sawa''- ''i.e.,''a hundred and twenty five per cent hero'}}<ref>Jadunath Sarkar : 'A History of Jaipur' : Orient BlackSwan : Extracts from chapter ' Sawai Jai Singh's Early Career' Page 149</ref> कुछ दूसरे स्रोत बतलाते हैं 'सवाई' की उपाधि [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] द्वारा नहीं बल्कि बादशाह [[फ़र्रुख़ सियर|फर्रुख़ सियर]] द्वारा इन्हें दी गयी थी। <ref>'जयपुर-दर्शन' प्रकाशक : प्रधान-सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978 [पेज 203] प्रकाशक : जयपुर अढाई शती समारोह समिति, नगर विकास व्यास (अब [[जयपुर विकास प्राधिकरण]]) परिसर, [[भवानी सिंह]] मार्ग, जयपुर</ref> पर यह बात (जो शायद [[किंवदंती]] का रूप ले चुकी है) अधिकांश ग्रंथों में औरंगजेब के साथ जुडी मिलती है। == जन्म और माता-पिता== महाराजा सवाई जयसिंह जी द्वितीय का जन्म [[मार्गशीर्ष]] वदी 7 वि० सं० १७४५ ई० [दिनांक 4 [[नवम्बर]], [[१६८1|1688]]]<ref>Jadunath Sarkar : ' A History of Jaipur' page 149</ref> को [[राजा विष्णुसिंह|मिर्ज़ा राजा बिशन सिंह]] की रानी राठौड़,[[अजमेर]] में [[खरवा]] के जागीरदार राव केसरी सिंहजी की जेष्ठ पुत्री इँद्र‌ कँवर की कोख से हुआ। इनके छोटे भाई कुंवर विजय सिंह और बहन बाई लाल अमर कँवर थीं,जिनका विवाह पिता के मृत्युपरांत महाराजा सवाई जय सिंहजी द्वितीय ने बूंदी के महाराव बुद्ध सिंहजी के साथ उनकी पटरानी के रूप में सामोद (आमेर राज्य) में संपन्न करवाया। <ref>'जयपुर-दर्शन' प्रकाशक : प्रधान-सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978 [पृष्ठ 203] प्रकाशक : 'जयपुर अढाई शती समारोह समिति', जयपुर नगर विकास न्यास, (अब जयपुर विकास प्राधिकरण) परिसर, भवानी सिंह मार्ग, जयपुर Page 203</ref> [[File:Rajputana 1909.jpg|thumb|राजपूताना प्रान्त का एक पुराना मानचित्र]] == सवाई जयसिंह के शासन का सम्पूर्ण राजनैतिक इतिहास == === सत्ता का अधिग्रहण और नाम-परिवर्तन === राजा विष्णुसिंह की <nowiki>[[काबुल]]</nowiki> में रविवार ३१ दिसम्बर <nowiki>[[१६९९]]</nowiki> (रजब १९, जुलुसी वर्ष ४३) को मृत्यु<ref></nowiki>''Akhabarat'' : Jadunath Sarkar :'A History of Jaipur' : Page 147 :<nowiki></ref> होने पर [[मार्गशीर्ष]] सुदी ७ वि० सं० १७५६, जनवरी २५, १७०० ई० को ये आमेर की गद्दी पर बैठे। मृत्यु के प्रायः डेढ़ माह बाद १८ फ़रवरी १७०० को महाराष्ट्र के शाही-शिविर में मिर्ज़ा राजा बिशन सिंहजी का [[काबुल]] में हुए निधन की खबर पहुँची, तो दो दिन बाद (अर्थात २० फरवरी,१७०० को) बादशाह औरंगजेब ने उनके सबसे बड़े पुत्र का नाम ''विजय सिंह'' से बदल कर ''जयसिंह'' करते हुए, उन्हें आमेर की गद्दी का वारिस स्वीकार किया। बादशाह ने जयसिंह के छोटे भाई ''चीमा जी'' का नाम ''विजयसिंह'' रखा। <ref>Jadunath Sarkar : Page 149</ref> यदुनाथ सरकार के अनुसार "...जुलाई १६९८ में दक्षिण से लौटने के बाद से जयसिंह आमेर में ही बने रहे, जब कि बादशाह ने इन्हें हाजिरी देने के लिए कई 'कड़े बुलावे' भी भेजे| इनके पिता के समय से ही दिल्ली-बादशाह इनको अपनी सैनिक 'सेवा' में लेने के लिए हेतु दक्षिण में बुलाना चाहते थे। परन्तु राजा बिशन सिंहजी अपने पुत्र को दक्षिण में नहीं भेजना चाहते थे। लेकिन बादशाह के ज्यादा दबाव देने पर ई० १६९८ में ये महाराष्ट्र (दक्षिण) गये। (''वहां पहली भेंट में बादशाह ने इनकी तीव्र बुद्धि देख कर इन को 'सवाई' कहा था। तभी से इनके नाम के पहले सवाई की उपाधि लग गई, जो अभी तक जयपुर के भूतपूर्व राजाओं के नाम के साथ जुड़ी हुई है''।) आठ महीने मुग़ल शिविर में रह कर ये वापस अपनी राजधानी [आमेर] लौट आये। ===औरंगजेब और जयसिंह === गद्दी पर बैठने के तुरंत बाद, जैसा ऊपर लिखा गया है, इन्हें नवम्बर १७०० में दक्षिण में अपनी सेना के साथ मुग़ल बादशाह की फ़ौज के रूप में लड़ने के लिए बुलाया गया था, पर किसी न किसी तरह जयसिंह बराबर टालमटोल करते रहे। वह जब कई शाही-आदेशों की अवहेलना कर चुके, तो अंततः इन्हें 'जबरन' ले आने को बादशाह ने कुछ हरकारे आमेर तक भी भेजे| इनकी अनुपस्थिति से नाराज़ बादशाह औरंगजेब ने इन से आमेर [[राजा]] का खिताब तो नहीं छीना, पर १३ सितम्बर १७०१ को इन्हें 'पदावनत' करते हुए मात्र ५०० जात, १०० सवार का मामूली [[मनसबदार]] बना दिया। कठिन मार्ग और वर्षा से अवरुद्ध रास्तों से जूझते बुरहानपुर में पड़ाव डाल कर अक्टूबर १७०१ में इनके दक्षिण में पहुँचने पर इन्हें औरंगजेब के पोते (सेना-अधिकारी और पुत्र आलम शाह के पुत्र) शाह बिदरबख्त के पास पन्हाला की सुरक्षा के लिए उनका सैन्य-सहयोगी नियुक्त किया गया।<ref>Jadunath Sarkar : IBID : Page 150</ref> === सवाई जयसिंह की आरंभिक सामरिक-सफलताएं और बादशाह औरंगजेब के पूर्वाग्रह === [[File:In-jaipu.gif|thumb|तत्कालीन आमेर का पंचरंगा ध्वज]] औरंगजेब के पोते शाह बिदरबख्त के नेतृत्व में बादशाही सेना ने 11 मई ई० 1702 को खिलना के किले पर भारी हमला किया। इसमें आमेर और मुग़ल संयुक्त-सेना की बहुत जनहानि हुई, पर दीवारों को तोड़ कर सबसे पहले जयसिंह की कछवाहा सेना ही खिलना-दुर्ग में प्रविष्ट हुई। उसकी बुर्ज पर आमेर का 'पंचरंगा झंडा' फहराया गया। (''इस समय जयसिंह की उम्र केवल १४ वर्ष थी)।'' खिलना-युद्ध में इनका वीर और भरोसेमंद दीवान बुद्धसिंह मारा गया। इस खिलना-विजय पर बादशाह औरंगजेब द्वारा इनका मनसब बढ़ा कर पहले एक हज़ार, फिर [[शाह बिदरबख्त]] के अनुरोध के बाद २००० (दो हजार जात) का कर दिया गया। बादशाह की छः साल की 'कठिन सेवा' का महज़ यह प्रतिदान जयसिंह को मिला! इसके बाद जब शाहजादा बिदरबख्त मालवे का सूबेदार हुआ, तब उसने जयसिंह की सेवाओं का सम्मान करते उन को वहाँ का [[नायब सूबेदार]] बना दिया, जिसे औरंगजेब ने तत्काल ही 'नामंजूर' कर दिया तथा एक फरमान लिखा कि ''आइन्दा किसी भी हिन्दू को मामूली फौजदार तक भी नहीं बनाया जाए''।'<ref>'अहकाम-ए- आलमगिरी' : इयानतुल्ला) सन्दर्भदाता : यदुनाथ सरकार : वही: पृष्ठ १५२</ref> विडम्बना हैरतंगेज़ है कि जिस औरंगजेब ने कभी इन्हें 'सवाई' कह कर सम्मान दिया वही बाद में वस्तुतः इनसे इस कदर नाराज़ और पूर्वाग्रहग्रस्त था कि उसने ये अपमानजनक आज्ञा जारी की- "''जयसिंह को मसनद पर आसन न दे कर, नीचे ज़मीन पर बिछी 'सुजनी' पर बैठने को कहा जाय!''"<ref>यदुनाथ सरकार : ''वही'' पृष्ठ १५२</ref> इसी बीच ई० 1704 में दो बादशाही फौजदारों ने स्थानीय मदद ले कर ठाकुर कुशल सिंहजी राजावत से सवाई माधोपुर में आज स्थित [[झिलाय]] ठिकाने की जागीर छीन कर १३ नवम्बर 1704 को जयसिंह (आमेर राज्य) को सौंप दी। दूसरे साल ई० 1705 में शाह बिदरबख्त ने अपनी तरफ से इनके पक्ष में फिर से कोशिश करके जयसिंह को मालवा का भी नायब सूबेदार बनवा दिया।<ref name="यदुनाथ सरकार : पृष्ठ १५३">यदुनाथ सरकार : पृष्ठ १५३</ref> पर जब तक औरंगजेब जीवित रहा, मुग़ल खेमे में इनका प्रभाव मद्धम सा ही रहा। === औरंगजेब की मृत्यु के बाद === ई० 1707 में 21 फ़रवरी को [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] के देहांत के बाद मुग़ल-गद्दी के लिए उसके बेटों में विकट-संघर्ष शुरू हो गया। शाह आजम ने आगरा व दिल्ली पर चढ़ाई की। उस समय तक उसने इनका मनसब 5000 जात 500 सवार का कर दिया था। 18 जून 1707 ई० को मौजम (मुअज्जिम) और आज़म की सेनाओं के बीच आगरा के 20 मील दक्षिण में [[जाजू का युद्ध]] हुआ। जयसिंह मौजम (मुअज्जिम) के साथ थे तथा इनके सगे छोटे भाई चीमाँ जी (विजयसिंह) आज़म की सेना की तरफ। इस युद्ध में मौजम और उनके पुत्र मारे गये। जाजू की लड़ाई में आज़म की विजय हुई। इसी युद्ध में जयसिंह तथा अखेसिंह टोरड़ी भी घायल हुए | इनके कई सरदार- बिहारीदास (दांतरी), केशरीसिंह (हरसोली), सूरसिंह (हरमाड़ा) आदि मारे गये। युद्ध के आखरी समय में जयसिंह बूंदी के राजा अपने बहनोई [[बुधसिंह हाडा|महाराव बुधसिंहजी हाड़ा]] के मारफत युद्ध में विजयी आज़म से जा मिले, परन्तु उसने इनका खास स्वागत नहीं किया।<ref name="यदुनाथ सरकार : पृष्ठ १५३"/>,<ref name="ignca.nic.in">{{Cite web |url=http://www.ignca.nic.in/coilnet/rj089.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=8 जुलाई 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140714115524/http://www.ignca.nic.in/coilnet/rj089.htm |archive-date=14 जुलाई 2014 |url-status=dead }}</ref> === आमेर पर हमले और अपमानित जयसिंह === जयसिंहजी के छोटे भाई विजयसिंहजी, बादशाह को खुश करने के लिए अपनी बहन बाईजीलाल अमर कँवरजी का विवाह बादशाह बहादुरशाह (प्रथम) से करवाना चाहते थे। उन्होंने इसकी खबर दिल्ली भेज दी तथा महाराव बुद्धसिंहजी हाड़ा को छुट्टी जाते समय जय सिंहजी ने रास्ते में रोक कर उनसे सामोद में यह विवाह करवा दिया। नये बादशाह बहादुरशाह (प्रथम) ने इसके बाद राजस्थान पर चढ़ाई की। जनवरी १७०८ ई० में वह आमेर पहुँचा और उसे [[ख़ालसा|खालसा]] कर लिया। जयसिंहजी से आमेर की जागीर जब्त करके बादशाह बहादुरशाह (प्रथम) द्वारा १० जनवरी १७०८ को उनके छोटे भाई विजयसिंहजी (चीमाजी) को अनेकानेक महंगे उपहारों सहित दे दी गयी। सवाई जयसिंहजी का राजनैतिक कद घटा कर एक मामूली 'मनसबदार' के रूप में कर दिया गया। <ref>यदुनाथ सरकार : पृष्ठ १५४</ref> बादशाह इसके बाद अजमेर होकर दक्षिण के लिए अपने भाई [[कामबक्श]] से मुकाबला करने को बढ़ा। [[आमेर]] और [[जोधपुर]] के दोनों राजा [[मंडलेश्वर]] के इलाके तक उसके साथ ही गये। जब उन्हें यह आशा नहीं रही कि बादशाह उनके इलाके उन्हें वापस लौटाएगा तो उन्होंने [[दुर्गादासजी राठौड़]] की राय से, जब बादशाह नर्बदा नदी पार करने को रवाना हुआ, २० अप्रैल १७०८ वैशाख सुदी १३ को बादशाही-शिविर छोड़ दिया और वे राजपूताना की ओर वापस रवाना होकर [[मेवाड़]] [[उदयपुर]] पहुँचे। यहाँ [[महाराणा प्रताप]] के पर-पर-पर-पर पौत्र और उस समय के [[राणा अमरसिंह|महाराणा अमरसिंहजी द्वितीय]] ने इनका स्वागत किया,इनकी सहायता हेतु एवं राजपूत संघ को पुनः जागृत करने के लिए अपनी पुत्री बाईजी लाल चँद्र कँवरजी जयसिंह को 25 मई सन् 1708 में ब्याही और यह वचन लिया की वो मुगल सत्ता से कोई संबंध नहीं रखेंगे खास कर कोई भी कन्या विवाह हेतु नहीं देंगे तथा मेवाड़ी रानी से उत्पन्न पुत्र को आमेर-जयपुर की राजगद्दी का उत्तराधिकारी बनाएंगे और एक जुट होकर राजपूत संघ का नवनिर्माण करेंगे। यहाँ से तीन राजाओं की ३० हजार सेना ने संयुक्त-रूप से जोधपुर पर हमला करके ८ जुलाई १७०८ ई० को उसे अपने अधिकार में कर लिया। राजा अजीत सिंहजी ने जोधपुर में जयसिंहजी का टीका किया। यहाँ से उन्होंने हिन्दुस्तान के अनेक राजाओं को मुगलों के विरुद्ध एकत्र होने संबंधी पत्र भी लिखे।<ref name="ignca.nic.in"/> [[जोधपुर]] से विजय सिंह शासित आमेर पर अधिकार करने को दो सेनाएँ भेजी गयीं। एक [[दुर्गादास राठौड़]] के नेतृत्व में, जिसका सैयदों से [[काला डेरा]] के पास युद्ध हुआ। दूसरी सेना में, महाराजा जयसिंह का दीवान रामचन्द्र और श्यामसिंह के अधीन २० हजार घुड़सवार थे। इनका [[रतनपुरा]] के पास [[आमेर]] के फौजदार हुसैन खाँ से युद्ध हुआ, जिसमें उन्होंने उसे परास्त करके आमेर पर अपना अधिकार कर लिया।<ref name="ignca.nic.in"/> इसके बाद इन दोनों राजाओं के विरुद्ध मेवात के फौजदार सैयद हुसेन खां, अहमद खां फौजदार बैराठ सिधाना और गारात खां फौजदार नारनोल को [[सांभर]] भेजा गया । दोनों राजाओं के इन फौजदारों से [[सांभर]] में ३ अक्टूबर ई० १७०८ को भीषण युद्ध हुआ, जिसमें मुगलों की विजय हुई। युद्ध के बाद विजय की खुशी में मुगलों की महफिल हो रही थी। इसी समय राव संग्रामसिंहजी [[उनियारा]] के नेतृत्व में नरुका लड़ाके वहाँ पहुँचे और एक रेत के टीबे पर चढ़े, जिसके नीचे सैयद आदि शराब की महफिल कर रहे थे। नरुकों ने उन पर एकाएक बन्दूकों और तीरों से भयानक हमला किया। उसमें सब मुग़ल फौजदार मारे गये तथा मुगलों की जीती हुई बाजी हाथ से निकल गई। फिर जयसिंह ने एक पत्र बादशाह के विरुद्ध दुर्गादास को लिखा कि "उदयपुर महाराणा से बात की जाए ...मराठों को मिला कर मुग़लों के विरुद्ध राजपूतों को वही करना चाहिए जो 'हिन्दुस्तान' के लिए गौरव की बात हो।"<ref name="ignca.nic.in"/> बादशाह बहादुरशाह जब दक्षिण से वापस लौटा, तो उसने यह जरुरी समझा कि किसी तरह [[जोधपुर]] और [[आमेर]] (जयपुर) दोनों राजाओं से समझौता किया जाए। इन्हें लाने के लिए उसने [[बुधसिंह हाड़ा]] राजा [[बूँदी जिला|बून्दी]] को भेजा, जिनके मारफत २१ जून ई० १७१० को ये [[अजमेर]] के पास बादशाह के सामने हाजिर हुए। बादशाह ने इनके जब्त किये राज्य वापस लौटा दिए और इन दोनों को ४००० जात ४००० सवार के मनसब भी दिये। उस समय तक भी राजपूतों का मुगलों पर बिल्कुल विश्वास नहीं था, इसलिए जब सवाई जयसिंह अजमेर में बादशाह के शिविर में गये तब अजमेर के तमाम पहाड़ तथा घाटियाँ राजपूत-सैनिकों से भरी हुई थीं। मनसब बढ़ने और इलाके वापस आने पर भी उन्हें बहादुरशाह की नीयत पर कभी भी पूर्ण विश्वास नहीं हुआ।<ref name="ignca.nic.in"/> === जयसिंह द्वारा छलपूर्वक अपने भाई विजयसिंह की गिरफ्तारी === जयसिंह के भाई विजयसिंह के साथ भी कुछ ऐसा हुआ कि (जन्म चैत सुदी ६ वि. १७४७) निराश होकर अन्त में मुगल दरबार छोड़ कर [[हिन्डौन]] आ गए। जयसिंह को भाई विजयसिंह की तरफ से सशस्त्र विद्रोह खतरा तो बना हुआ था ही। इन्होंने १७१३ ई० में विजयसिंह से समझौता करने और 'राजमाता से भेंट' करने के नाम पर अपने सशस्त्र सैनिकों एवं सरदारों समेत [[सांगानेर]] जा कर धोखे से उनको कैद करवा दिया<ref>लेफ्टिनेंट कर्नल जेम्स टॉड: 'राजस्थान का इतिहास' खंड-2 : प्रकाशक- 'साहित्यागार', जयपुर; अनुवाद: केशव ठाकुर : संस्करण 2012</ref> और जयगढ़ किले में भेज दिया। (वहीं वे अन्त में मारे भी गये।) विजयसिंह के इस 'हत्याकाण्ड' में श्यामसिंह खंगारोत विशेष सहायक रहा। [[बहादुर शाह (प्रथम)]] की मृत्यु के बाद उसके उत्तराधिकारी [[जहाँदरशाह]] ने [[आमेर]] और [[मारवाड़]] दोनों राजाओं को फिर अपने पक्ष में करना चाहा। उसने दोनों को ७००० जात व ७००० सवार का मनसब भी दिया, परन्तु इस बार इन्होंने मुग़ल-उत्तराधिकारी के आपसी संघर्ष में औरंगजेब के पुत्रों से दूर ही रहने का फैसला किया। [[फ़र्रुख सियर]] के मुग़ल बादशाह बनने के बाद हुसैन अली सैयद ने श्यामसिंह खंगारोत को बुलवाया तथा उनसे बात करके जयसिंह को बादशाह से ५००० जात ४५०० सवार का मनसब दिलवाया। जब अतसिंह का बादशाह के साथ मतभेद हो गया, तब बादशाह ने सैयद हुसैन अली को सेना लेकर [[अजमेर]] भेजा जहाँ अतसिंह ने कब्जा कर लिया था। उस समय जयसिंह भी हुसैन अली सैयद के साथ थे। अन्त में अतसिंह से सन्धि हुई।<ref name="ignca.nic.in"/> === मराठे और जयसिंह === अक्टूबर १७१३ ई० में इन्हें बादशाह [[फ़र्रुख सियर]] ने [[मालवा]] की सूबेदारी प्रदान की। इन्होंने वहाँ की अनेक बगावतें दबाई व मरहठों के उपद्रव भी कुचले। मरहठों की एक बड़ी सेना जब मालवे में घुसी तब इन्होंने [[पलसूद]] के पास उसे बड़ी करारी हार दी। मराठी सेना के लोग भाग कर पलसूद में ठहरे थे। जयसिंह ने रात में ही उन पर हमला कर दिया। इनकी सेना को देखते ही वे भाग निकले व [[नर्वदा]] नदी पार कर गये। उनकी लूट का सब माल वहीं रह गया। मालवा में [[महाराजा छत्रसाल|छत्रसाल बुन्देला]] भी इनके साथ थे। १७१५ ई० में इनको दिल्ली बुला लिया गया। तब इनकी अनुपस्थिति में इनके धाभाई रुपाराम को इन्होंने वहां नायब बना कर रखा। १७१७ तक ये मालवा के सूबेदार रहे। बादशाह [[फ़र्रुख सियर]] ने [[भीमसिंह हाडा]] राजा [[कोटा]] को [[बूँदी जिला|बून्दी]] की रियासत दे दी थी और उसने बून्दी पर कब्जा भी कर लिया था। जयसिंह ने प्रयास करके बादशाह से बून्दी वापस राजा बुधसिंह हाडा को दिलवायी।<ref name="ignca.nic.in"/> === भरतपुर में विफलता=== दिल्ली से बादशाह ने इनको [[भरतपुर]] के [[चूड़ामन|चूड़ामन जाट]] पर चढ़ाई करने की आज्ञा दी, जिसने [[आगरा]] के इलाके में लूटमार से बड़ा उपद्रव मचा रखा था। इनके साथ बून्दी के बुद्धसिंह, [[कोटा]] के भीमसिंह, नरवर के गजसिंह, [[दुर्गादास राठौड़]] व कई अन्य मनसबदार भी नियुक्त किये गये। १५ सितम्बर १७१६ को ये अपनी फौज ले कर [[मथुरा]] के लिए रवाना हुए। नवम्बर में [[चूड़ामन]] के प्रसिद्ध किले [[थूण का घेरा]] शुरू किया। वर अब्दुल्ला खां सैयद, जयसिंह के विरुद्ध था तथा चूड़ामन को मदद दे रहा था। इससे इन्हें इस अभियान में सफलता नहीं मिल पाई। वर अब्दुल्ला खां सैयद ने अन्त में बीच में पड़ कर थून का घेरा उठवा लिया। मई १७१८ में जयसिंह की वापसी [[दिल्ली]] हुई। चूडामन के इलाके में इस असफलता के बावजूद बादशाह ने इनका बड़ा सम्मान किया।<ref name="ignca.nic.in"/> सैयदों और बादशाहों के बीच तलवारें खिंच चुकी थी। जयसिंह ने बादशाह [[फ़र्रुख सियर]] को बहुत समझाया कि सैयदों से युद्ध करके उन्हें हमेशा के लिए साफ कर देना चाहिए। उस समय उनके पास २० हजार राजपूत सवार दिल्ली में मौजूद थे तथा बून्दी के बुद्धसिंह हाडा भी उन्हीं के साथ थे। परन्तु बादशाह की यह सैन्य कार्यवाई करने की हिम्मत नहीं हुई। वह सैयदों को किसी तरह खुश करने में लगा रहा। अन्त में सैयदों ने बादशाह से जयसिंह को दिल्ली से जाने को कहलवा दिया। जयसिंह ने बादशाह को सचेत किया कि उनके जाने से बादशाह की जान को खतरा हो जाएगा लेकिन यह सलाह बादशाह की समझ में नहीं आई। १३ फ़रवरी १७१९ ई० को जयसिंह दिल्ली से रवाना हुए। उसके कुछ ही घंटों बाद भींमसिंह कोटा राजा ने बुधसिंह बूंदी पर आक्रमण कर दिया। उनके स्वामिभक्त सरदार जैतसिंह ने बड़ी वीरता से कोटा की सेना को रोका तथा बुधसिंह को सुरक्षित वहाँ से निकाल दिया। वे भाग कर सवाई जयसिंह के पास पहुँचे। १७- १८ अप्रैल को सैयद भाइयों, अतसिंह जोधपुर और भीमसिंह कोटा ने मिल कर दिल्ली में बादशाह फर्रूखशियर को मार डाला।<ref name="ignca.nic.in"/> === सैयद और जयसिंह === जयसिंह ने [[इलाहाबाद]] के सूबेदार छबीला राम और निजाम से सैयदों के विरुद्ध भी पत्र-व्यवहार किया। वे चाहते थे कि सब मिल कर सैयदों को अपदस्थ कर दें। इन्होंने [[महाराजा छत्रसाल|छत्रसाल]] बुन्देला को भी युद्ध के लिए बुलाया। सैयदों ने कई सेनाएँ इनके विरुद्ध कई तरफ से घेरने के लिए भेजीं| वर अब्दुल्ला खां ने ५ जुलाई को नाममात्र के बादशाह रफीउदुल्ला को साथ लेकर जयसिंह पर चढ़ाई की और मथुरा होता हुआ वह आगरा पहुँचा, जहाँ सैयदों के विरुद्ध बगावत हो रही थी। जयसिंह ने भी सैयदों से पूरे तौर से मुकाबला करने की तैयारी कर ली थी पर युद्ध में रवाना होने के पहले उन्होंने ब्राह्मणों को बुलाकर आमेर राज्य दान में दे दिया और केसरिया बाना धारण करके वे सैयदों से लड़ाई के लिए रवाना हुए। ये आमेर से आगे बढ़ कर [[टोडा रायसिंह]] तक पहुँच गये थे। पर निजाम और छबीलाराम दोनों ही वायदे के अनुसार इनके पक्ष में कायम नहीं रहे।<ref name="ignca.nic.in"/> जयसिंह को निराशा हाथ लगी। === जोधपुर में विवाह === अन्त में राजा अजीत सिंहजी जयसिंहजी को अपने साथ जोधपुर ले गये जहाँ उन्होंने 20 मई सन् 1720 में अपनी पुत्री बाईजी लाल सूरज कँवरजी का शुभ विवाह जय सिंहजी के साथ करवा दिया। सैयदों ने जयसिंहजी को २० लाख रुपये दिये, जिससे वे आमेर वापस ब्राह्मणों से वापस खरीदें। उस समय भी जयसिंहजी को राजा अजीतसिंहजी जोधपुर पर विश्वास नहीं था इसलिए वे अपने विवाह में भी जिरहबख्तर पहन कर गये थे।<ref name="ignca.nic.in"/> === निज़ाम और जयसिंह === सैयदों की दो सेनाएँ जब दक्षिण में निजाम से परास्त हो गई, तब हुसैन अली खां सैयद, बादशाह मोहम्मद शाह को साथ ले कर, एक बड़ी सेना के साथ निजाम को दबाने के लिए रवाना हुआ। सितम्बर ८, १७२० ई० को [[टोडाभीम]] में उसने हुसैन अली को धोखे से मार डाला। अब बादशाह ने तैयारी करके सैयद अब्दुल्ला खां पर चढ़ाई की जो [[दिल्ली]] में था। इस युद्ध के लिए महाराणा ने जयसिंह से पूछा कि 'उसे क्या करना चाहिए?' जयसिंह ने उदैपुर के महाराणा को बादशाह की मदद करने के लिए पत्र लिखा तथा साथ में ही महाराणा के अलावा बीकानेर, कोटा और राव इन्द्रसिंह नागौर को भी बादशाह की मदद करने के लिए पत्र भेजे। सवाई जयसिंह ने खुद बादशाह मोहम्मद शाह की मदद के लिए राव जगराम के साथ एक अच्छी सेना भेजी। इस सेना में सवाई राम (नरुका), गढ़ी गजसिंह, नरुका जावली, जसवन्तसिंह, सवाईराम के पुत्र, प्रतापसिंह कल्यणोत, बुद्धसिंह कल्यणोत, गुलाब सिंह कल्यणोत, छीतरसिंह कल्यणोत, अमरसिंह राजावत, बहादुर सिंह खंगोरात और सरदारसिंह नरुका आदि सरदार थे। ३ और ४ नवम्बर १७२० को युद्ध हुआ जिसमें सैयद अब्दुल्ला खां पकड़ा गया। विजय के बाद बादशाह ने जयपुर के सरदारों को अपने हाथ से खिलअतें दीं।<ref name="ignca.nic.in"/> === मोहम्मद शाह और जयसिंह === मोहम्मद शाह ने दिल्ली पहुंचते ही जयसिंह को दिल्ली आने का फरमान भेजा जिसमें लिखा कि उनसे अनेक महत्वपूर्ण समस्याओं पर सलाह लेनी है। उसने दिल्ली पहुंचने पर बादशाह ने अपने नये वर मुहम्मद अमीन खां को उनके डेरे पर लेने भेजा। दरबार में आने पर बादशाह ने उनका बड़ा सत्कार किया और अनेक तोहफे दिए। उनके मनसब में ४००० सवार और बढ़ा दिए गए। इसी मौके पर इन्हें दो करोड़ रुपये इन्हें इनाम/ बख्शीश में दिये जिनको इन्होंने नम्रतापूर्वक लेने से मना कर दिया। पर बादशाह ने सवाई जयसिंह और राजा गिरधर बहादुर के अनुरोध पर हिदुओं पर लगाया जाने वाला कठिन [[जज़िया|जजिया कर]] माफ कर दिया। महाराणा मेवाड़ ने जजिया हटवा देने की सफलता पर सवाई जयसिंह को अपनी और से प्रसन्न हो कर लिखित बधाई भेजी।<ref name="ignca.nic.in"/> === जयसिंह के महत्त्व में वृद्धि === सैयदों के पतन के बाद जयसिंह का राजनैतिक महत्त्व तेज़ी से बढ़ने लगा। राजस्थान, मालवा और बुन्देलखण्ड के राजा हर मुसीबत में उनसे सहायता और सलाह चाहते थे। इन इलाकों में इनकी राय के बगैर कुछ भी नहीं होता था। १७३५ ई० के बाद तो मरहठे भी इनकी सलाह लेने तथा इनको आदर देने लग गए।<ref name="ignca.nic.in"/> इन्हें ''सवाई'' के अलावा मुग़ल बादशाहों ने जो अन्य उपाधियाँ समय समय पर दीं वे थीं - '''सरमदे –राजा-ए- हिन्द'/ 'राजराजेश्वर'/ 'श्रीराजाधिराज''' आदि। === दूसरा जाट युद्ध === सितम्बर १७२२ ई० में जयसिंह को [[आगरा]] का सूबेदार बना कर जाटों को दबाने को भेजा गया। इनके साथ ५० हजार सैनिकों की बड़ी फौज थी तथा अनेक मनसबदार भी इनके साथ थे। शाही तोपखाना भी इनके साथ था। [[चूड़ामन]] [[जाट]] का पुत्र [[मोहकमसिंह]] इस समय जाटों का नेता था। परन्तु चूड़ामन का भतीजा [[बदनसिंह]] जो उससे नाराज था, जयसिंह से आ कर मिला। इन्होंने उसका बड़ा स्वागत-सत्कार किया। एक बार फिर इन्होंने [[थून|थूण]] के किले पर घेरा डाला। अतसिंह जोघपुर ने एक सेना मोहकमसिंह की मदद के लिए भेजी, परन्तु वह [[जोबनेर]] से आगे नहीं बढ़ी। विभीषण की तरह बदनसिंह की सलाह से थूण के किले का विजय होना निश्चित दिख रहा था। तब मोहकमसिंह निराश होकर गुप्त मार्ग से किला छोड़ कर अतर सिंह के पास [[जोधपुर]] पहुँचा। किन्तु जाटों के थून स्थित किले पर सवाई जयसिंह का अधिकार हो गया। इन्होंने [[सूरज मल|सूरजमल]] के पिता बदनसिंह को भरतपुर की जागीर दी तथा राजा के रूप में उनके पगड़ी बाँधी। जून १९, १७२३ ई० को ठाकुर बदनसिंह जाट ने 'जयपुर दरबार की सेवा करने' व ८३ हजार रुपये बतौर सालाना पेशकश देना स्वीकार करके इस आशय की लिखावट पर दस्तखत किये। बदनसिंह जयपुर के दशहरा दरबार में हर साल आया करते थे। जयपुर में जहाँ जाट सेना सहित डीग के राजा का पड़ाव लगता था, वह स्थान अब भी ''बास बदनपुरा'' कहलाता है।<ref name="ignca.nic.in"/> महाराजा सवाई जयसिंह के कार्यकाल का संभवतः सबसे बड़ा और कीर्तिवान कार्य था - सन १७२७ में जयपुर नगर बसाना। इसकी नींव पौष वदी १ वि. सं. १७८४, ई० को रखी गई। राजगुरु सम्राट जगन्नाथ ने नए नगर की नींव रखने का मुहूर्त निकाला तथा भूमि पूजा करवाई थी। महाराजा की आज्ञा के अनुसार नए नगर का नक्शा दीवान [[विद्याधर]] ने बनाया जो बहुत प्रतिभाशाली बंगाली ब्राह्मण था और इनके लेखा-विभाग की सेवा में नायब-अंकेक्षक था। सन १७३३ ई० में यह नगर, जिसका नाम सवाई जयसिंह ने ' सवाई जयनगर' रखा बन कर तैयार हुआ।<ref name="ignca.nic.in"/> === मालवा की दूसरी बार सूबेदारी === जयसिंह को मुग़ल बादशाह द्वारा मालवा का दुबारा सूबेदार बनाया गया। वे २३ अक्टूबर १७२९ ई० को [[उज्जैन]] के लिए रवाना हुए। जयसिंह अपने राज्य की सुरक्षा के लिए विद्रोही मरहठों से समझौता करना चाहते थे। इनके इस समझौता-प्रस्ताव को बादशाह ने भी स्वीकार कर लिया था। इनकी इस विजय पर साहू से लिखा पढ़ी हुई। साहू इसके लिए तैयार हो गया था, किन्तु पेशवा लोग इस समझौते के ज्यादा पक्ष में नहीं था। इन्होंने दीपसिंह कुम्भाणी को साहू के पास [[सातारा|सतारा]] भेजा। लौटते समय दीपसिंह निजाम से भी मिला, परन्तु सितम्बर १७३० ई० में इनके मालवा की सूबेदारी से हट जाने से वह समझौता नहीं हो सका।<ref name="ignca.nic.in"/> === कुशत्तल पंचोलास का युद्ध === बुद्धसिंह बून्दी और उनकी कछवाही रानी के आपस में गंभीर मतभेद पैदा होने पर जयसिंह के सम्बन्ध भी बूंदी नरेश बुद्धसिंह से बहुत खराब हो गये। अन्त में सम्बन्ध इतने बिगड़े कि जयसिंह ने बादशाह को कह कर बुद्धसिंह के स्थान पर करवाड़ के सालिम सिंह हाडा के पुत्र दलेलसिंह को बून्दी का राजा बनवा दिया और बाद में अपनी पुत्री भी उसे ब्याह दी। इससे राजस्थान में जयपुर और बूंदी के बीच लम्बे समय तक बड़ा दु:खद संघर्ष चला। इस आपसी मनमुटाव से मरहठों को फिर राजस्थान में हस्तक्षेप करने का अवसर मिल गया। जयसिंह को १७३० ई० में मालवा में इत्तला मिली कि बुद्धसिंह फिर से बून्दी पर अधिकार करने जा रहे हैं। इन्होंने एक सेना दलेलसिंह की मदद को भेजी| ६ अप्रैल १७३० को ''कुशत्तल पंचोलास'' में बुधसिंह से जयपुर सेना का युद्ध हुआ जिसमें जयपुर के पांच राजावत सरदार फतहसिंह सारसोप (बरवाड़ा) खोजूराम (ईसरदा), सांवलदास (शिवाड), अचलसिंह (नानतोड़ी) और घासीराम अचरे मारे गए।। इस युद्ध में बुद्धसिंह को विजय नहीं मिली। मालवा से लौटते समय महाराजा सवाई जयसिंह कुशत्तल पांचोलास गये। उन्होंने वहाँ मारे गये सरदारों की मातमी करके उनके पुत्रों को सिरोपाव आदि दिये।<ref name="ignca.nic.in"/> === तीसरी बार मालवा की सूबेदारी === जयसिंह दिसम्बर १७३२ में तीसरी बार मालवा प्रान्त के सूबेदार बनकर उज्जैन गये। इस बार मालवा में भी मरहठों का उत्पात इतना बढ़ गया था कि मालवा से मरहठों को निकालने के इनके तमाम प्रयास विफल रहे। १७३४ ई० में खानदौरा एक बड़ी सेना लेकर राजपूताना होता हुआ मालवा में मैराथन के विरुद्ध आगे आया। जयसिंह, अभयसिंह (जोधपुर) आदि अनेक राजा उनके साथ थे। जब यह विशाल सेना रामपुरा पहुँची तो उसे मरहठा मिले। पर वे छुटपुट लड़ाइयों के बाद इन्हें छका कर पीछे से राजस्थान में घुस गये। वहाँ उनको रोकने वाला कोई नहीं था और वे मराठे जयपुर राज्य में साँभर तक लूटपाट करते चले गये। १७३५ ई० में पेशवा बाजीराव की माँ उत्तर में तीर्थ करने आई। महाराजा जयसिंह ने उसका बड़ा आदर-सत्कार किया तथा महाराणा से भी उसका सत्कार करवाया। आगरा में इनके नायब सूबेदार ने अपने दीवान आयामल के भाई नारायणदास को उसका स्वागत करने व पूना तक साथ जाने की आज्ञा भेजी। जनवरी १७३७ ई० को पेशवा उत्तर भारत में आया उसके साथ होलकर, सिन्धिया, पँवार आदि सभी थे। उदयपुर से आते समय पेशवा से २५ फ़रवरी को महाराजा जयसिंह मालपुरा क्षेत्र के झाड़ली गाँव में मिले। उन्होंने उनको अनेक वस्तुएँ भेंट दी। बाजीराव दिल्ली तक जाकर वापस लौट गया। बाजीराव पेशवा की मृत्यु से महाराजा जयसिंह को बड़ा दु:ख हुआ। नया पेशवा बालाराव बना। १७४१ ई० में जब नए मराठा पेशवा बाला राव उत्तर में चढ़ाई की उस समय जयसिंह आगरा के सूबेदार थे। इनकी और नये पेशवा बाला राव की धौलपुर में भेंट हुई। इनके प्रयास से बादशाह ने पेशवा को मालवा की नायब सूबेदारी दे दी।<ref name="ignca.nic.in"/> === नादिरशाह और सवाई जयसिंह === जब नादिरशाह भारत में आया तब सभी को बड़ी शंका खड़ी हो गई। पेशवा, महाराणा अन्य राजाओं व बुन्देलों को मिला कर जयसिंह, नादिरशाह का संगठित मुकाबला करना चाह रहा था। हालांकि 24 फरवरी 1739 को [[करनाल]] में वह (नादिरशाह) मुग़ल सेना को बुरी तरह पराजित कर चुका था। यह भी अफवाह थी कि नादिरशाह जयपुर होता हुआ अजमेर जाएगा। यह जयसिंह के लिए भी बड़ा खतरा था। सब चौकन्ने थे, लेकिन अन्त में वह [[मथुरा]] से ही वापस अपने देश लौट गया। "नादिरशाह ने जब [[भारत]] पर हमला (फरवरी-मार्च १७३९) किया तब [[दिल्ली]] की सहायतार्थ जयसिंह नहीं गए। इस का कारण यह था- तब निजाम और कमरुद्दीन उस समय साम्राज्य में उच्च पदों पर थे और नादिरशाह के हमले के लिए वे लोग इनके उत्तरदायी होने का शक कर सकते थे, किन्तु सम्राट बराबर इनमें विश्वास रख कर इनसे आवश्यक परामर्श करता रहा।"<ref name="ignca.nic.in"/> == साहित्य-रचना और यज्ञ-परंपरा== महाराजा सवाई जयसिंह के दरबार में संस्कृत और [[बृज भाषा|ब्रजभाषा]] [[साहित्य]], [[वास्तुकला|स्थापत्य]], [[धर्मशास्त्र]], [[ज्योतिष]], [[ब्रह्माण्ड|खगोल]], [[इतिहास]]-लेखन, आदि क्षेत्रों में अनेक मौलिक रचनाएं की गयीं और सम्पूर्ण भारतीय मनीषा की इस अकादमिक-योगदान से बड़ी उन्नति हुई। अनेक नए धर्मशास्त्र भी रचे गये क्यों कि इनकी [[कर्मकांड]] और [[धर्मशास्त्र]] में बड़ी रुचि व निष्ठा थी। इनके समय के सबसे प्रसिद्ध विद्वान पंडित [[जगन्नाथ सम्राट]], पंडित [[रत्नाकर पौण्डरीक|पुण्डरीक रत्नाकर]], [[विद्याधर चक्रवर्ती]], [[शिवानन्द गोस्वामी]], [[श्रीकृष्णभट्ट कविकलानिधि|श्रीकृष्ण भट्ट कविकलानिधि]](एवं दैवज्ञ भूषण स्वास्तिश्री राज ज्योतिषी श्री मंत नोपाराम भार्गव जो बारहं ठिकानों के राज ज्योतिषी थे ओर तंवरावाटी के बिहार ग्राम के रहने बाले थे अश्वमेध यज्ञ के दोरान श्री मंत नोपाराम भार्गव को दक्षिणा में बारहं ठिकानों का राज ज्योतिषी न्युक्त किया गया था इसके उपरांत श्रीमंत साहब बिहार गाँव छोडकर सन् 1640ई. में डाबला ग्राम में आकर रहने लगे ) <ref>कविशिरोमणि [[भट्ट मथुरानाथ शास्त्री]]: '[[जयपुर-वैभवम]]</ref> मूलतः आन्ध्र से आये तैलंग पूर्वजों के वंशज ब्रजनाथ भट्ट भी इनके समय के प्रसिद्ध कवि विद्वानों में से थे। इन्होंने 'ब्रह्मसूत्राणभाण्यवृत्ति' और 'पद्मतरंगिणी' की रचना की। [[श्रीकृष्णभट्ट कविकलानिधि|श्रीकृष्ण भट्ट कविकलानिधि]] ने इनके समय में अनेक ग्रन्थ लिखे जिनमें मुख्य '[[ईश्वर विलास]]<ref>कविशिरोमणि भट्ट मथुरानाथ शास्त्री: 'जयपुर-वैभवम</ref>- महाकाव्य भी है, जिसमें सवाई जयसिंह द्वारा '[[अश्वमेध यज्ञ]]' करवाने का 'आँखों देखा हाल' वर्णित है।<ref>संस्कृत के युग-पुरुष: मंजुनाथ': पृष्ठ 1 प्रकाशक: 'मंजुनाथ स्मृति संस्थान, सी-8, पृथ्वीराज रोड, जयपुर-302001</ref> जेम्स टॉड ने लिखा है " सवाई जयसिंह ने बहुत-सा धन खर्च कर के यज्ञशाला बनवाई थी और उसके स्तंभों और छत को चांदी के पत्तरों से मंडवाया था|<ref>'राजस्थान का इतिहास' भाग-२ : लेफ्टिनेंट कर्नल जेम्स टॉड, पृष्ठ ११९ 'साहित्यागार' प्रकाशन, जयपुर</ref> पुण्डरीक रत्नाकर (मृत्यु वि. १७७६ में) ने इनसे [[व्रात्यस्तोम यज्ञ]] चैत वदी ३ वि॰सं॰ १७७१ को क्षिप्रा नदी के तट पर उज्जैन में करवाया। इन्होंने और दूसरे यज्ञ-जैसे [[श्रौत यज्ञ]] आदि भी सम्पन्न करवाये थे। इनका रचा हुआ 'जयसिंह कल्पद्रुम' एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ है। रत्नाकर के पुत्र सुधाकर पौण्डरीक ने जयसिंह से [[पुरुषमेध यज्ञ]] करवाया था तथा 'साहित्यसार संग्रह' की रचना की। इन्होंने [[सम्राट यज्ञ]] भी कराया, जिसके पुरोहित इनके महाराष्ट्रीय ब्राह्मण गुरु, [[जगन्नाथ सम्राट]] थे। ''१७३४ ई० में जयसिंह ने जो पहला [[अश्वमेध यज्ञ]] किया''<ref>{{Cite web |url=http://msmsmuseum.com/pages.php?id=4 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 जुलाई 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140716190556/http://msmsmuseum.com/pages.php?id=4 |archive-date=16 जुलाई 2014 |url-status=dead }}</ref>, २९ मई १७३४ को सम्पूर्ण हुआ।<ref>सवाई जयसिंह : राजेंद्र शंकर भट्ट: नेशनल बुक ट्रस्ट (अंग्रेज़ी अनुवाद: शैलेश कुमार झा) २००५ संस्करण</ref> इस अश्वमेध यज्ञ के समय, जो राजसी-घोड़ा छोड़ा गया था, उसे कुछ कुम्मणियों ने जलमहल से आगे, जयपुर के एक और प्रवेशद्वार (जिसका नाम बाद में जोरावर सिंह गेट रखा गया) के पास ही पकड़ लिया और अन्त में जयसिंह के अश्व के साथ जा रहे सरदार जोरावर सिंह घोड़ा पकड़ने वालों से युद्ध करके मारे गये।<ref>डॉ॰ ज्ञान प्रकाश पिलानिया, 'Enlightened Government in Modern India: Heritage of Sawai Jai Singh' ('हेरिटेज ऑफ़ सवाई जयसिंह') ISBN 8187359161, ISBN 9788187359166</ref> ''दूसरा अश्वमेध यज्ञ बड़े पैमाने पर जयसिंह ने वर्ष १७४२ ई० में करवाया''। इन यज्ञों के अलावा जयपुर में [[पुरुषमेध यज्ञ]], [[सर्वमेध यज्ञ]], [[सोम यज्ञ]] आदि भी किये गये। इन यज्ञों के कारण देश के पंडित-जगत में इनकी बड़ी ख्याति हुई तथा सम्पूर्ण हिन्दू-समाज ने इनकी इस सांस्कृतिक-पहल की प्रशंसा की।<ref>संस्कृत के युग-पुरुष: मंजुनाथ': प्रकाशक: 'मंजुनाथ स्मृति संस्थान, जयपुर-302001</ref> आसपास की राजनैतिक उथल-पुथल के बावजूद जयपुर नगर उस समय विभिन्न विद्याओं, साहित्य और भारतीय-[[संस्कृति]] का आगार बन गया था। इसी कारण इसे '''दूसरी काशी''' भी कहा गया | [[कर्नल]] [[जेम्स टॉड]] ने भी माना है कि "महाराज सवाई जयसिंह ने जयपुर को हिन्दूविद्याओं का शरणस्थल बना दिया था। इस तरह भारत में सदियों से यज्ञादि की जो परम्परा लगभग बन्द हो चुकी थी, उन्हें महाराजा सवाई जयसिंह ने जयपुर राज्य में फिर से प्रारम्भ किया।"<ref>'राजस्थान का इतिहास' : लेफ्टिनेंट कर्नल जेम्स टॉड, 'साहित्यागार' प्रकाशन, जयपुर</ref> == सवाई जयसिंह का स्थापत्य-कला को योगदान == === जयपुर : शिल्पशास्त्र के आधार पर नई राजधानी === महाराजा सवाई जयसिह ने एक नया [[राजधानी]]-नगर बसाने का विचार आमेर से [[दक्षिण]] में छ: मील दूर [[पौष]] वदी १ वि. सं. १७८४ तदनुसार नवम्बर २९ ई० १७२७ को पं० [[जगन्नाथ सम्राट]] के माध्यम से शिलान्यास करते हुए क्रियान्वित किया। सम्पूर्ण नगर-योजना दरबार के प्रमुख वास्तुविद [[विद्याधर चक्रवर्ती]] की तकनीकी सलाह से निर्मित हुई। नक्शा पहले कपड़े पर अमिट काली स्याही से तैयार किया गया। सवाई ने तालकटोरा तालाब बनवाया, मानसागर झील में '[[जल महल|जलमहल]]' निर्मित करवाया, प्राचीन कछावा किले [[जयगढ़ दुर्ग|जयगढ़]] का पुनरुद्धार किया, आमेर के जो महल-भाग [[मिर्जा राजा जयसिंह|जयसिंह (प्रथम)]] ने बनवाए थे, उन सब का विस्तार किया तथा सुदर्शनगढ़ का महल भी बनवाया जिसको आज नाहरगढ़ का किला भी कहते हैं। विविध कला-कौशल विकास हेतु '६४ कारखाने' अर्थात् अलग-अलग विभाग स्थापित किये, नगर के बाहर आगरा रोड पर इनके द्वारा अपनी सिसोदिया रानी के लिए एक ग्रीष्मकालीन बाग़ और महल बनवाया गया। शहर में [[कल्कि]] का मंदिर और यज्ञस्तम्भ के पास भगवान [[विष्णु]] का मंदिर भी इन्होनें बनवाया। [[मथुरा]] में [[सीता]][[राम]]जी का और [[गोवर्धन पर्वत|गोवर्धन]] में गोवर्धनधारी के मंदिर भी इन्होनें ही बनवाये।<ref>सवाई जयसिंह : राजेंद्र शंकर भट्ट: [[राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत|नेशनल बुक ट्रस्ट]] (अंग्रेज़ी अनुवाद: शैलेश कुमार झा) २००५ संस्करण</ref> [[File:आमेर महल का दीवाने-आम.JPG|thumb|आमेर महल का दीवाने-आम : छायाकार: हे.शे.]] === नगर का वास्तु-कौशल === नए नगर को ९ सामान क्षेत्रफल वाले खंडों (चौकड़ियों) में बांटा गया था, जिसके दो खण्ड मुख्य राजमहल 'चन्द्रमहल', विभिन्न राजकीय कारखानों, कुछ खास मंदिरों तथा वेधशाला के लिए आरक्षित रखे गये थे। सूरजपोल दरवाज़े से चांदपोल दरवाज़े तक सड़क की लम्बाई दो मील और चौड़ाई १२० फीट रखी गयी। इसी महामार्ग पर मध्य में तीन सुन्दर चौपड़ों का निर्माण भी प्रस्तावित किया गया जो यहाँ लगे हुए फव्वारों के लिए भूमिगत जलस्रोतों से जुड़े थे। शहर के चौतरफ बनाये गए परकोटे की दीवार २० से २५ फुट ऊंची तथा ९ फीट चौड़ी रखी गयी। इस परकोटे में (शहर में आने - जाने के लिए) सात सुन्दर प्रवेशद्वारों का निर्माण भी किया गया। रात को नगर-सुरक्षा हेतु इन्हें बंद कर दिया जाता था। सुन्दर राजसी राजमहल, भव्य-पाठशालाएं, बड़ी बड़ी, चौड़ी और एक दूसरे को समकोण पर विभाजित करती एकदम सीधी सड़कें, एक सी रूप-रचना के आकर्षक बाज़ार, जगह-जगह कलात्मक मंदिर, (राजा [[राम]] की [[अयोध्या]] के वास्तु से प्रभावित) आम-भवन-संरचनाएं, सड़कों के किनारे लगे घने छायादार पेड़, पीने के पानी का समुचित प्रबंध, व्यर्थ-जल-निकासी की उपयुक्त व्यवस्था, उद्यान, नागरिक-सुरक्षा, आदि इन सब बातों का पूर्व-नियोजन सवाई जयसिंह ने अपने नगर-कौशल में सफलतापूर्वक किया। === जयपुर पर केन्द्रित संस्कृत महाकाव्य === कविशिरोमणि [[भट्ट मथुरानाथ शास्त्री]] ने सन 1947 में 476 पृष्ठों में प्रकाशित अपना एक यशस्वी काव्य-ग्रन्थ [[जयपुर-वैभवम]] तो जयपुर के नगर-सौंदर्य, दर्शनीय स्थानों, देवालयों, मार्गों, यहाँ के सम्मानित नागरिकों, उत्सवों और त्योहारों आदि पर ही केन्द्रित किया था। <ref>{http://www.sanskrit.nic.in/DigitalBook/J/Jaipurvaibhavam.pdf {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131126095023/http://www.sanskrit.nic.in/DigitalBook/J/Jaipurvaibhavam.pdf |date=26 नवंबर 2013 }}</ref> === खगोलशास्त्र और सवाई जयसिंह === [[चित्र:Jai obs.jpg|Jai obs.jpg|right|thumb|300px|जयपुर वेधशाला का विहंगम दृश्य]] जयपुर के पुराने राजमहल' चन्द्र महल' के उत्तर में जयपुर नरेशों के आराध्य देव [[गोविंद देवजी का मंदिर|गोविन्ददेव जी]] का मन्दिर है, [[दुनिया]] भर में [[जंतर मंतर]] के नाम से मशहूर विशाल [[वेधशाला]] भी यहीं मौजूद है<ref>|https://hi.wikipedia.org/s/ecr</ref> पत्थर के विशाल [[यंत्र]] और ग्रह नक्षत्रों की गणना के लिए बने ''<ref>Michiel Schwarz, (1980) Observatoria : de astronomische instrumenten van Maharaja Sawai Jai Singh II in New Delhi, Jaipur, Ujjain en Benares, Amsterdam : Westland/Utrecht Hypotheekbank</ref>,<ref>"Sawai Jai Singh and His Astronomy," by Virendra Nath Sharma, Motilal Banarasi Dass Publishers, Delhi (1995)</ref> इन गणना-उपकरणों के निर्माता सवाई जयसिंह को बचपन से ही गणित और खगोल ज्योतिष में बड़ी गहरी दिलचस्पी थी<ref>http://www.google.co.in/search?tbo=p&tbm=bks&q=inauthor:%22Jai+Singh+II+(Maharaja+of+Jaipur)%22/पृष्ठ २</ref> किन्तु महाराजा जयसिंह को खगोलविद्या में 'दीक्षित' करने का बड़ा श्रेय पंडित [[जगन्नाथ सम्राट]] को है। राजा को [[वेद]] पढ़ाने के लिए नियुक्त [[मराठी भाषा|मराठी]] सम्मानित विद्वान भारतीय ज्योतिर्विज्ञान को योगदान देते हुए सम्राट जगन्नाथ ने 'सिद्धान्त कौस्तुभ' की रचना की तथा [[यूक्लिड]] के [[रेखागणित]] का [[अरबी]] से [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] में अनुवाद किया। सवाई जयसिंह ने अपने गुरु ही के अनुसरण में यह अनुभव किया कि [[न्यूटन (इकाई)|न्यूटन]] [Newton] और [[फ्लेमस्टीड]] []John Flamsteed]] FRS (19 August 1646 – 31 December 1719) आदि द्वारा उल्लेखित यूरोपीय वैज्ञानिकों के पीतल या धातु के खगोल-यंत्रों से मौसम, तापमान, घिसाई, आदि कई कारणों से गणना फलावट में अक्सर अन्तर आ जाया करता है, इसलिए इन्होंने सबसे पहले १७२४ ईस्वी में दिल्ली की वेधशाला में धातु को छोड़ कर चूने और तराशे गए पत्थर से बड़े-बड़े गणना यंत्र बनवाये। फिर इसी तरह इन्होंने जयपुर में १७३४ में और सन १७३२ से १७३४ के बीच [[मथुरा]], [[वाराणसी|बनारस]] और [[उज्जैन]] में भी अपने वास्तुविद [[विद्याधर]] के मार्गदर्शन में सम्राट जगन्नाथ द्वारा विकसित उन्नत यंत्रों- सम्राट-यन्त्र (लघु), नाडी-वलय-यन्त्र, कांति-वृक्ष-यन्त्र, यंत्रराज, दक्षिनोदक-भित्ति-यन्त्र, उन्नतांश-यन्त्र, जयप्रकाश-यन्त्र, सम्राट-यन्त्र (दीर्घ), शषतांश यंत्र, कपालीवलय यन्त्र, राशिवलय यन्त्र, चक्र यंत्र, राम यन्त्र, त्रिगंश यन्त्र आदि से युक्त नई वेधशालाएँ बनवाई।<ref>http://www.google.co.in/search?tbo=p&tbm=bks&q=inauthor:%22Jai+Singh+II+(Maharaja+of+Jaipur)%22</ref>,<ref>{{Cite web |url=http://www.indiavisitinformation.com/indian-culture/indian-monument/Jantar-Mantar-in-india.shtml |title=संग्रहीत प्रति |access-date=11 जुलाई 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130729213946/http://www.indiavisitinformation.com/indian-culture/indian-monument/Jantar-Mantar-in-india.shtml |archive-date=29 जुलाई 2013 |url-status=dead }}</ref> मथुरा की वेधशाला नष्ट हो चुकी, काशी और उज्जैन की वेधशालाएं नष्ट होने के कगार पर हैं; अब केवल जयपुर और थोड़ी बहुत दिल्ल्ली की वेधशाला इनके वैज्ञानिक-व्यक्तित्व का स्मरण कराती हैं। === जयपुर दरबार में विदेशी विद्वान=== जब इनको मालूम हुआ कि पश्चिम के ज्योतिषीगण द्वारा खासतौर पर पुर्तगाल में पिछले कुछ वर्षों में खगोलविद्या पर काफी काम हुआ है, इन्होंने गोवा के पुर्तगाली-गवर्नर के मार्फत पुर्तगाल के बादशाह को अनेक तोहफे भेजे तथा गवर्नर के मार्फत पुर्तगाल से खगोल विद्वान Padre Manoel Figueiredo को जयपुर बुलवाया।<ref>Sharma, Virendra Nath (1995), Sawai Jai Singh and His Astronomy, Motilal Banarsidass Publications</ref> जयसिंह ने १७२७ में उसे (Manoel Figueiredo को) योरोप में इस विषय की सारी उपलब्ध नवीनतम पुस्तकें / रचनाएँ तथा दूर्वीक्षण यंत्र (टेलीस्कोप) लाने भेजा। वह जब नवम्बर १७३० में वापस आया तो अपने साथ खगोलज्ञ जेवियर डीसिल्वा को और कुछ दूरबीनें साथ लाया। जेवियर डीसिल्वा Pere de la Hire (1640-1718) की सारणी 'Tabulae Astronomicae' लिस्बन से अपने साथ लाया था। इन्होंने अपने विद्वानों की सहायता से उन सारणियों का अध्ययन किया और व्यावहारिक उपयोग के बाद उनमें त्रुटियाँ पाईं| अंततः इन्होंने ''अपने यंत्रों की गणना से पुनः नई सारिणी'' बनाई, जिसका बादशाह के नाम पर नाम '''जिज़-ए-मुहम्मदशाही''' रखा गया।<ref>A B Umasankar Mitra (1995) "Astronomical Observatories of Maharaja Jai Singh". School Science (NCERT) 23 (4): 45–48</ref> इनके दरबार में चन्द्रनगर से आया फ्रांसीसी खगोलज्ञ क्लाड बोडियर था। इनके दरबार में जर्मनी से फादर ऐन्टोइन गेवेल्स परगुइर व आद्रें स्टोब्ल भी आये थे। एक और हिन्दुस्तानी विद्वान, इनके यहाँ केवलराम था, जो गुजरात से आया था। उसने खगोल सम्बन्धी आठ ग्रन्थ लिखे थे। उसको सवाई जयसिंह ने 'ज्योतिषराय' की उपाधि भी दी।<ref>A B Umasankar Mitra (1995). "Astronomical Observatories of Maharaja Jai Singh".School Science (NCERT) 23 (4): 45–48</ref> महाराजा सवाई जयसिंह ने युद्ध और राजनीति में उलझे रहने के बावजूद, नगर-निर्माण और खगोलशास्त्र में बड़ा काम किया। इन्होंने भारतीय खगोलविद्या के साथ यूनान, मध्य एशिया और योरोप में जो ग्रन्थ लिखे गये थे तथा जो यंत्र बने थे, उनको मंगवा कर उनका परीक्षण व उपयोग किया। ''282 साल पहले लकड़ी, चूने, पत्थर और धातु से निर्मित यंत्रों के माध्यम से आकाशीय घटनाओं के अध्ययन की भारतीय विद्या को 'अद्भुत' मानते हुए इस स्मारक को ''विश्व धरोहर सूची'' में शामिल किया गया है|'' इन्हीं यंत्रों के गणना के आधार पर आज भी जयपुर के स्थानीय पंचांग का प्रकाशन होता है और हर बरस आषाढ़ पूर्णिमा को खगोलशास्त्रियों द्वारा 'पवन धारणा' प्रक्रिया से आने वाली वर्षा की भविष्यवाणी की जाती है। भारत में जयसिंह से पूर्व, खगोलशास्त्र में अनेक दशकों यहाँ तक कि सदियों से कोई 'बड़ा' या उल्लेखनीय कार्य नहीं हुआ था, सवाई ने इस सांस्कृतिक-निर्वात की पूर्ति की। <ref>Sharma, Virendra Nath (1995), Sawai Jai Singh and His Astronomy, Motilal Banarsidass Publ., pp. 8–9, ISBN 81-208-1256-5</ref><ref>{{Cite web |url=http://www.uwfox.uwc.edu/users/vsharma/paper.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 जुलाई 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140714231624/http://www.uwfox.uwc.edu/users/vsharma/paper.html |archive-date=14 जुलाई 2014 |url-status=dead }}</ref> ==== कल्कि का प्राचीन मन्दिर ==== [[चित्र:Kalki1790s.jpg|right|thumb|350px|कल्कि का ताम्रचित्र (१८वीं शती में निर्मित)]] जयपुर (राजस्थान, भारत) की 'बड़ी चौपड़' से आमेर की ओर जाने वाली सड़क सिरेड्योढ़ी बाज़ार में [[हवामहल]] के लगभग सामने भगवान [[कल्कि]] का प्राचीन मन्दिर अवस्थित है। जयपुर के संस्थापक सवाई जयसिंह ने पुराणों में वर्णित कथा के आधार पर कल्कि के मन्दिर का निर्माण सन् 1739 ई. में दाक्षिणात-शिखर-शैली में कराया था। संस्कृत विद्वान आचार्य देवर्षि [[कलानाथ शास्त्री]] के अनुसार, "सवाई जयसिंह संसार के ऐसे पहले महाराजा रहे हैं, जिन्होंने जिस देवता का अभी तक अवतार हुआ नहीं, उसके बारे में कल्पना कर कल्कि की मूर्ति बनवाकर मन्दिर में स्थापित करायी।" सवाई जयसिंह के तत्काली दरबारी कवि [[श्रीकृष्णभट्ट कविकलानिधि|श्रीकृष्ण भट्ट कविकलानिधि]] ने अपने ”कल्कि-काव्य“ में मन्दिर के निर्माण और औचित्य का वर्णन किया है। तद्नुसार ऐसा उल्लेख है कि सवाई जयसिंह ने अपने पौत्र ”कल्कि प्रसाद“ (सवाई ईश्वरी सिंह के पुत्र) जिसकी असमय मृत्यु हो गई थी, उसकी स्मृति में यह मन्दिर स्थापित कराया। यहाँ श्वेत अश्व की प्रतिमा संगमरमर में उत्कीर्ण है जो बहुत सुन्दर, आकर्षक और सम्मोहक है। अश्व के चबूतरे पर लगे बोर्ड पर यह इबारत अंकित है- ”अश्व श्री कल्कि महाराज-मान्यता- अश्व के बाएँ पैर में जो गड्ढा सा (घाव) है, जो स्वतः भर रहा है, उसके भरने पर ही कल्कि भगवान प्रकट होगें।“<ref>'जयपुर-दर्शन' सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978</ref> ====[[जयगढ़ दुर्ग|जयगढ़]] का दुर्ग ==== अनेक स्थानों पर इस दुर्ग [[जयगढ़ दुर्ग|जयगढ़]] का वर्णन किया जा चुका है, अतः पुनरावृत्ति अनावश्यक होगी। [https://web.archive.org/web/20140311093126/http://www.cs.utah.edu/~noliver/india/Forts/Jaigarh-AmberFort/Jaigarh.html] === समाज-सुधारक के रूप में सवाई जयसिंह === सवाई जयसिंह ने सभी समाजों के लिए परंपरा संबंधी सुधार-कार्य किये। ब्राह्मण समाज में कई सुधार करते हुए वैरागी साधुओं में व्याप्त व्यभिचार मिटाने के लिए इन्होंने उनको पुनर्विवाह कर अपनी पत्नी साथ रखने (गृहस्थ आश्रम में प्रवेश) का विधान किया। बादशाह से फकीरों व सन्यासियों की मृत्यु के बाद, उनकी सम्पत्ति राज्य के पक्ष में जब्त नहीं करने की आज्ञा जारी करवाई, किन्तु सन्यासियों को 'निजी सम्पत्ति' रखने से रोका। बादशाह से अनुरोध के बाद हिन्दुओं पर लगाया गया पुराना भयंकर टैक्स [[जज़िया|जजिया कर]] समाप्त करवाया, ब्राह्मणों और राजपूतों के शादीब्याह आदि में हैसियत से बाहर जा कर दहेज़ देने और मृत्युभोज आदि सामाजिक अवसरों पर धन की बर्बादी रोकने की कोशिश भी की। जगह-जगह धर्मशालाएं, कई संस्कृत पाठशालाएं और विद्यालय खोले, विधवा-विवाह का पक्ष लिया, स्त्री-हत्या, कन्या-वध रोका, 'सर्वधर्म समभाव' की भावना को बढ़ावा दिया, विशेषतः जयपुर में [[जैन धर्म|जैन]] संप्रदाय को प्रोत्साहित किया, दिल्ली, आगरा, अन्य स्थानों से बड़े २ व्यापारियों को ला कर जयपुर में बसाया, देश में घूम-घूम कर विद्वानों की खोज की, उन्हें राज-सम्मान बक्शा, बड़ी २ जागीरें दीं और उत्तर भारत के समूचे हिन्दू-समाज को ऐसे कठिन वक़्त बाहरी आक्रान्ताओं से मुक्त रखा, जब राजनैतिक उठापटक, केंद्र में प्रशासनिक अराजकता और अनेक राजपूताना राज्यों के बीच सर-फुट्टवल अपने चरम पर थी। <ref>'जयपुर-दर्शन' सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978 [पेज 203] प्रकाशक : जयपुर अढाई शती समारोह समिति, नगर विकास व्यास (अब जयपुर विकास प्राधिकरण) परिसर, भवानी सिंह मार्ग, जयपुर</ref> === शासन-व्यवस्था=== दिन प्रतिदिन का शासन राजा की आज्ञा से उनके दीवान चलाते थे। दीवानों या मंत्रियों की संख्या राजा की मर्जी के मुताबिक परिवर्तनशील थी। सेना संबंधी सारा काम बख्शी के अधिकार-क्षेत्र में था। जब सवाई जयसिंह गद्दी पर बैठे तब उनके तीन दीवान रामचन्द्र, किशनदास और बिहारीदास थे। वि. सं. १७५७ में इन्होने एक दीवान और बढ़ा कर चार कर दिये थे। वि. सं. १७७३-७४ में आठ दीवान थे।<ref name="ignca.nic.in"/> पहले आमेर-दरबार के लेखा-विभाग में 'जूनियर ऑडिटर' का काम कर चुके महान वास्तुविद [[विद्याधर चक्रवर्ती]] इनके राजस्व मंत्री (या देश-दीवान) थे। [https://hi.wikipedia.org/s/7fp7] [[File:जयगढ़ किले में प्रदर्शित तोप जयबाण.JPG|thumb|जयगढ़ किले में ढाली गयी तोप जयबाण जिसका परीक्षण केवल एक बार हुआ और जिससे छोड़ा गया लोहे का गोला लगभग २२ किलोमीटर दूर [[चाकसू]] के आसपास जा कर गिरा था! : छायाकार: हे.शे. ]] कुंवर [[नटवर सिंह]] ने लिखा है-"यदि जाटों का अभ्युदय न हुआ होता, तो जयपुर का राज्य यमुना-नदी तक फैल गया होता।"<ref>नटवर सिंह : हिन्दी अनुवाद : राधाकृष्ण प्रकाशन, दिल्ली से 2006 में प्रकाशित चर्चित पुस्तक 'महाराजा सूरजमल'(प्रथम प्रकाशन : इंग्लेंड से मूलतः अंग्रेज़ी में)[http://www.amazon.com/Maharaja-Suraj-Mal-1707-63-Times/dp/0049230727/ref=la_B001ICOTJW_1_7?s=books&ie=UTF8&qid=1403930933&sr=1-7]</ref> === जयपुर के सेना के कुछ सेना-अधिकारी === जयसिंह के प्रमुख सेनापतियों में कुशलसिंह राजावत (झिलाय), कोजूरामती राजावत (ईसरदा), दलेलसिंह राजावत (धूला), रावल शेरसिंह नाथावत (सामोद), मोहनसिंह नाथावत (चौमू), बखतसिंह नाथावत (मोरीजा), पदमसिंह चतुरभुजोत (बगरु), श्यामसिंह खंगारोत (डिग्गी), केशरीसिंह नरुका (लदाणा), जोरावरसिंह नरुका (मानपुर-मांचेडी), संग्रामसिंह नरुका (उनियारा), गजसिंह नरुका (जावली), दीपसिंह शेखावत (कासली), शार्दूलसिंह शेखावत (झुंझुनूं), शिवसिंह शेखावत (सीकर), दीपसिंह कुम्भाणी (भांडारेज) जोरावरसिंह, श्योब्रह्मा (पोता) आदि थे। [https://web.archive.org/web/20140714115524/http://www.ignca.nic.in/coilnet/rj089.htm] सेना दो प्रकार की होती थी जागीरदारों की सेना, जिसके एकत्र होने पर सवार और प्यादा आदि के हिसाब से रोजाना का खर्च दिया जाता था। खुद राज्य की ऐसी सेना बहुत छोटी होती थी जिसको मासिक तनख्वाह दी जाती थी। फौज में घुड़सवार सेना भी अपेक्षकृत कम होती थी। मुख्य अंगरक्षक, 'रिसाला' ही होता था जिसमें एक हजार घुड़सवार होते थे। बाकी पैदल सेना अधिक थी। जयसिंह ने अपनी सेना में तोड़ेदार बंदूकें शामिल कर दी थी, जिससे उनकी सेना की मारक-शक्ति बहुत बढ़ गई थी। ''यदुनाथ सरकार'' के शब्दों में- "{{Quotation| Jai Singh's regular army did not exceed 40,000 men, which would have cost about 60 lakhs a year, but his strength lay in the large number of artillery and copious supply of munitions, which he was careful to maintain and his rule of arming his foot with matchlocks instead of the traditional Rajput sword and shield - He had the wisdom to recognize early the change which firearms had introduced in Indian warfare and to prepare for himself for the new war by raising the fire-power of his army to the maximum}} इनका तोपखाना भी बड़ा प्रभावी तथा शक्तिशाली था। जयगढ़ में ही तोपें निर्मित की जाती थीं। तोपें ढालने का वह 'यंत्र' और सांचे अभी भी जयगढ़ किले की फाउंड्री में मौजूद है। जयगढ़ में रखी जो बड़ी तोप 'जैबाण' है, उसके मुकाबले की देशज तोपें देश में बहुत कम है। (चित्र) सेना की भर्ती, वेतन, रसद आदि आवश्यक कार्यों के लिए बख्शी का (बहुत महत्वपूर्ण पद) होता था।<ref name="ignca.nic.in"/> [[File:जयपुर में सवाई जयसिंह स्मारक.JPG|thumb|जयपुर में सवाई जयसिंह स्मारक :छायाकार: हे.शे.]] == निधन == इनके समकालीन राजदरबार के कवि श्रीकृष्णभट्ट ने लिखा है कि 'यह अन्तिम दिनों में गोविन्ददेव के ध्यान में लीन रहने लग गए थे।'<ref name="ReferenceA">'ईश्वर विलास' महाकाव्य, राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर</ref> सवाई जयसिंह की मृत्यु जयपुर में में आश्विन सुदी १४ वि॰सं॰ १८००, सितम्बर २१, सन १७४३ ई० को वृद्धावस्था और बीमार रहने के बाद हुई। <ref>[[यदुनाथ सरकार]] : वही : पृष्ठ 192</ref> उन्हें गैटोर में अग्नि दी गयी। इनके सत्ताईस रानियां थी, जिनमें से तीन इनकी चिता के साथ सती हुईं | उन रानियों की छतरी जयपुर-आमेर मार्ग पर (जलमहल से पहले) है। <ref>{{Cite web |url=http://www.pinkcity.com/hi/places-to-visit/queens-canopies/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=12 जुलाई 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140714171027/http://www.pinkcity.com/hi/places-to-visit/queens-canopies/ |archive-date=14 जुलाई 2014 |url-status=dead }}</ref> जेम्स टॉड ने लिखा है- {{quotation|चवालीस साल तक राज्य करके संवत १७९९ (सन १७४३) में सवाई जयसिंह की जयपुर में मृत्यु हो गयी| उसकी तीन विवाहित रानियाँ और अनेक उप पत्नियाँ उसके शव के साथ जल कर सती हुईं| उसने जिस विज्ञान की अपने जीवन भर उन्नति की थी, उसकी मृत्यु के बाद वह (जयपुर से) एकाएक लोप हो गई|...जयसिंह की यज्ञशाला के रजत-पत्तरों को उसके वंशज जगतसिंह ने निकलवा कर, उनके स्थान पर साधारण चांदी के पत्तर लगवा दिए| जयसिंह ने जिन ग्रंथों का संग्रह करने में जीवन भर अत्यधिक परिश्रम और धन व्यय किया था, उसके दो हिस्से कर डाले गए| उनके पुस्तकालय का एक भाग किसी प्रकार जयपुर की एक साधारण वेश्या ''(रसकपूर)'' के अधिकार में पहुँच गया!}} <ref>'राजस्थान का इतिहास' भाग-2 : लेफ्टिनेंट कर्नल जेम्स टॉड, पृष्ठ 119 'साहित्यागार' प्रकाशन, जयपुर</ref> == स्मारक और स्मृति-चिन्ह == * सवाई जयसिंह का एक बेहद सुन्दर स्मारक इनके पुत्र ईश्वर सिंह ने जयपुर में ब्रह्मपुरी के गैटोर में बनवाया!<ref>सवाई जयसिंह : राजेंद्र शंकर भट्ट: नेशनल बुक ट्रस्ट (अंग्रेज़ी अनुवाद: शैलेश कुमार झा) 2005 संस्करण]</ref> * जयपुर के [[स्टैच्यू सर्किल|स्टेचू सर्किल]] पर बंगाली मूर्तिकार ''महेंद्र कुमार दास'' से संगमरमर में बनवा कर इनकी १२ फीट ऊंची एक आकर्षक प्रतिमा राजस्थान शासन ने जयपुर शहर की २५० वीं सालगिरह के अवसर पर 1978 में स्थापित की। <ref>https://hi.wikipedia.org/s/nrh{{Dead link|date=सितंबर 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>. [https://web.archive.org/web/20141104204834/http://www.jaipur.org.uk/forts-monuments/statue-circle.html] * सवाई जयसिंह की स्मृति में नई दिल्ली में एक प्रमुख सड़क है। [https://web.archive.org/web/20131210111840/http://newdelhiymca.in/ymca_map.php] *इसी तरह जयपुर के बनीपार्क क्षेत्र की एक प्रधान सड़क 'जयसिंह हाइवे' कहलाती है। [https://web.archive.org/web/20140714164552/http://timescity.com/jaipur/event/sawai-jai-singh-road-location/] *खगोलशास्त्र के योग्य विद्वानों को 'सवाई जयसिंह सम्मान' जयपुर का भूतपूर्व राजघराना प्रतिवर्ष देता है। [https://web.archive.org/web/20140714234756/http://msmsmuseum.com/pages.php?id=27] *भारत सरकार ने इनके निर्माण जंतर-मंतर को [[एशियाई खेल]]ों के 'प्रतीक-चिन्ह' के रूप में स्वीकार करते इस पर एक डाक टिकट 1984 में जारी किया था। [https://web.archive.org/web/20140714182138/http://www.indian-visit.com/monuments-of-india/jantar-mantar-delhi.html] . [https://web.archive.org/web/20130729213946/http://www.indiavisitinformation.com/indian-culture/indian-monument/Jantar-Mantar-in-india.shtml] === उत्तराधिकारी === इनसे इनके तीन पुत्र थे-सबसे बड़े, दो लड़कों के पिता (२२ वर्षीय) ''शिवसिंह'', मंझले ''ईश्वरसिंह'' और सब से छोटे ''माधोसिंह'' |<ref>'जयपुर-दर्शन'</ref> ==== पुत्र शिवसिंह की मृत्यु==== शिवसिंह की मृत्यु का कारण '[[वंश भास्कर ]]' के ख्यात-लेखक ने यह बताया है कि मंझले पुत्र ईश्वरसिंह के उकसाने पर सवाई जयसिंह ने ज़हर दे कर अपनी रानी के सहयोग से स्वयं अपने टीकाई पुत्र की हत्या कर दी थी, पर [[यदुनाथ सरकार]] जैसे इतिहासकार इसे 'गप्प' मानते हैं और स्वीकार नहीं करते| उनके अनुसार " (अपने पिता की अनुपस्थिति में बादशाह द्वारा बनाये गए आगरा के सूबेदार) शिवसिंह की हैजे (कॉलेरा) से मथुरा में अकाल-मृत्यु १७२४ ईस्वी में हुई थी, जहाँ वह फौजदार पद पर थे|"<ref name="ReferenceB">Jadunath Sarkar : 'A History of Jaipur' : Orient BlackSwan, Page 193</ref> जब कि १९ वीं सदी के अंत में लिखे ग्रन्थ [[वीर विनोद]] (जिसे उदयपुर राज्य के शासक महाराणा सज्जन सिंह ने मेवाड़ के प्रामाणिक इतिहास लेखन का उत्तरदायित्व [[कविराज श्यामलदास]] को सौंपा था) में यह लिखा गया है "माधोसिंह ने अपने बड़े भाई शिवसिंह को विष दे कर मार डाला था|"<ref name="ReferenceB"/> सवाई जयसिंह इन तीन पुत्रों के अलावा दो पुत्रियां भी थीं पहली - ''विचित्र कंवर'', जिनका विवाह अभयसिंह (जोधपुर) और छोटी ''किशन कंवर'', जिनका विवाह बून्दी के राजा दलेलसिंह के साथ हुआ।<ref name="ReferenceA"/> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} *[https://web.archive.org/web/20061207200908/http://uqconnect.net/~zzhsoszy/ips/j/jaipur.html] *[https://web.archive.org/web/20150325205204/https://en.wikipedia.org/wiki/List_of_Rajputs] *[https://web.archive.org/web/20130711224658/http://genealogy/ of the rulers of Jaipur] *[http ://books.google.co.in/books?isbn=8126718013] *'जयपुर-दर्शन' प्रकाशक : प्रधान-सम्पादक : डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य: वर्ष 1978 [पृष्ठ 210] प्रकाशक : 'जयपुर अढाई शती समारोह समिति', नगर विकास व्यास (अब जयपुर विकास प्राधिकरण) परिसर, [[भवानी सिंह]] मार्ग, जयपुर-4 *'संस्कृत-कल्पतरु' : संपादक : [[कलानाथ शास्त्री]] एवं घनश्याम गोस्वामी: '[[मंजुनाथ शोध संस्थान]]', सी-8, पृथ्वीराज रोड, सी-स्कीम, जयपुर-302001 *डॉ॰ ज्ञानप्रकाश पिलानिया, 'Enlightened Government in Modern [[भारत|India]]: Heritage of Sawai Jai Singh ('हेरिटेज ऑफ़ सवाई जयसिंह') ISBN 8187359161, 9788187359166 *[[यदुनाथ सरकार]] : A History of Jaipur : Orient BlackSwan : ISBN 978-81-250-3691-3 *डॉ॰[[असीम कुमार राय]] की पुस्तक : "the history of jaipur city" *कविशिरोमणि [[भट्ट मथुरानाथ शास्त्री]]: '[[जयपुर-वैभवम]]' *चार शहरनामे : पुस्तक : हेमन्त शेष : शब्दार्थ प्रकाशन, जयपुर 2018 *Sarkar, Jadunath (1984, reprint 1994) A History of [[जयपुर]], New Delhi: Orient Longman, ISBN 81-250-0333-9 *Bowker, John, The Oxford Dictionary of World Religions, New York, Oxford University Press, 1997, p.&nbsp;103 *A B Umashankar Mitra (1995). "Astronomical Observatories of Maharaja Jai Singh". School Science (NCERT) 23 (4): 45–48. *Sharma, Virendra Nath (1995), Sawai Jai Singh and His [[खगोल शास्त्र|Astronomy]], Motilal Banarsi Das Publ., pp.&nbsp;8–9, ISBN 81-208-1256-5 *Baber, Zaheer (1996), 'The Science of Empire: Scientific Knowledge, Civilization, and Colonial Rule in India', State University of New York Press, pp.&nbsp;82–90, ISBN 0-7914-2919-9 *Jyoti J. (2001) 'Royal Jaipur', Roli Books, ISBN 81-7436-166-9 *Tillotson G, (2006) 'Jaipur-Nama', Penguin books *Michiel Schwarz, (1980) 'Observatoria : de astronomische instrumenten van Maharaja Sawai Jai Singh II in New Delhi, Jaipur, Ujjain en Benares', Amsterdam : Westland/Utrecht Hypotheekbank *Brindaban, 'Safīnā-i Khusgo', r. 123, Khudabaksha Library., [[पटना]] *Dastur Kaumvār, 18, 19 & 20, Jaipur State, [[Rajasthan State Archives]], [[Bikaner]]. *De Bois, Joseph. 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Oriental MSS., The British Library London, England. == इन्हें भी देखें== *[[जंतर मंतर|जन्तर मन्तर]] *[[जगन्नाथ सम्राट]]—महाराजा जयसिंह द्वितीय के दरबार के महान गणितज्ञ एवं खगोलविद == बाहरी कड़ियाँ== * सवाई जयसिंह : [[राजेन्द्र शंकर भट्ट]]: [[राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत|नेशनल बुक ट्रस्ट]] (अंग्रेज़ी अनुवाद: शैलेश कुमार झा) २००५ संस्करण *'राजस्थान का इतिहास' भाग-2 : लेफ्टिनेंट कर्नल जेम्स टॉड, पृष्ठ 119 : वर्ष २०११ : 'साहित्यागार' प्रकाशन, जयपुर *[https://web.archive.org/web/20160411150452/https://books.google.co.in/books?id=7F_MJcTjDOQC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false Building Jaipur: The Making of an Indian City] (गूगल पुस्तक ; By Vibhuti Sachdev, Giles Henry Rupert Tillotson) *[https://web.archive.org/web/20180402230216/http://www.electroniki.com/Visitor/Art.aspx?sMID=9&sSMID=0&sArtID=288 जयसिंह और उनकी वेधशालाएँ] (शुकदेव प्रसाद) *[https://web.archive.org/web/20150814012719/http://www.internetindia.com/ashowkase/jaisingh.htm] *[https://web.archive.org/web/20140714113824/http://www.new1.dli.ernet.in/data1/upload/insa/INSA_1/20005b5c_131.pdf] *[https://web.archive.org/web/20140714215818/http://www.new1.dli.ernet.in/data1/upload/insa/INSA_1/20005ac0_249.pdf] [[श्रेणी:राजस्थान का इतिहास]] [[श्रेणी:जयपुर के लोग]] [[श्रेणी:राजस्थान के महाराजा]] [[श्रेणी:जयपुर]] [[श्रेणी:इतिहास]] [[श्रेणी:भारतीय वैज्ञानिक]] [[श्रेणी:भारतीय गणितज्ञ]] [[श्रेणी:भारत]] [[श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना]] [[श्रेणी:जयपुर के महाराजा]] {{जयपुर के महाराजा}} 1wj00al5fv815jsrew4o4ex0gdaweht 6630393 6630391 2026-10-17T09:20:44Z Mundhalia746 934684 6630393 wikitext text/x-wiki {{Infobox royalty | succession = आमेर के राजा |image= [[File:1 Maharaja Sawai Jai Singh II ca 1725 Jaipur. British museum.jpg|250px|]] |caption = ब्रिटिश संग्रहालय में महाराजा सवाई जयसिंह (द्वितीय) का चित्र | reign = 5 मार्च 1699 – 18 नवंबर 1727 | succession1 = जयपुर के पहले राजा | reign = 5 मार्च 1699 – 18 नवंबर 1727 | reign1 = 18 नवंबर 1727 – 21 सितंबर 1743 | coronation = | predecessor = [[Bishan Singh]] | predecessor1 = | successor = [[Ishwari Singh of Jaipur]] | successor1 = [[ईश्वरी सिंह]] | succession2 = सूबेदार मालवा | cor_type2 = | reign2 = 25 October 1732 &ndash; 24 December 1737 | coronation2 = | predecessor2 = मुहम्मद खान बंगाश | successor2 = [[निज़ाम-उल-मुल्क आसफजाह]] | dynasty = कछवाहा | predecessor =[[बिशन सिंह]] | successor = [[ईश्वरी सिंह]] | father = बिशन सिंह | mother = राठोरजी इंद्र कंवरजी | spouse = *रानी गौड़जी केसर श्योपुर-बड़ौदा *रानी खींचन सुख कँवर राघौगढ़ *रानी राणावत चँद्र उदयपुर-मेवाड़ *रानी सिसोदनी फूल कँवर बनेड़ा *रानी राठौड़ आनंद कँवर किशनगढ़ *रानी चूँडावत अमृत कँवर देवगढ़ *रानी जादौन इँद्र कँवर करौली *रानी हाड़ीजी उमेद कँवरजी बूंदी *रानी राठौड़ चंदन बांदनवाड़ा-अजमेर *रानी तंवर लाड लक्खासर-बीकानेर *रानी राठौड़ सूरज जोधपुर-मारवाड़ *रानी सोलंकिनी गुलाब अलीगढ़ टोंक *रानी राठौड़ बख्त अमझेरा-मालवा | issue = पुत्र :- *युवराज शिव सिंह *महाराजा सवाई ईश्वरी सिंह *महाराजा सवाई माधो सिंह पुत्रियां :- *बाईजी लाल विचित्र कँवरजी जोधपुर में विवाह *बाईजी लाल किशन कँवरजी बूंदी में विवाह | birth_date = 3 नवंबर1688 | birth_place = खरवा, अजमेर | death_date = 21 सितंबर 1743 | death_place = [[जयपुर]] }} {{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति |known_for = नगर-नियोजन, कूटनीति, राजनीति, हिंदुत्व, परंपरा-अनुरक्षण, शासन-विस्तार, पुस्तक-प्रेम, विज्ञान-प्रेम |alma_mater = संस्कृत, फ़ारसी, अरबी, मराठी, ज्योतिष, खगोलशास्त्र, धर्मशास्त्र, वैदिक-कर्मकांड आदि |title =सरामद-ए-राजा-ए-हिंदुस्तान श्री राजराजेश्वर राजराजेंद्र महाराजाधिराज }} ''सवाई जयसिंहजी''' या '''जयसिंह जी (द्वितीय) ''' (03 नवम्बर 1688 - 21 सितम्बर 1743)<ref>लेफ्टिनेंट कर्नल [[जेम्स टॉड]]:' [[राजस्थान]] का इतिहास' खंड-२ : प्रकाशक- 'साहित्यागार', जयपुर; अनुवाद: केशव ठाकुर : संस्करण २०१२</ref> अठारहवीं सदी में [[भारत]] में [[राजस्थान]] के [[आमेर|आमेर राज्य]] के कछवाहा राजवंश के सर्वाधिक प्रतापी शासक थे। सन [[१७२७]] में [[आमेर]] से दक्षिण छः मील दूर एक बेहद सुन्दर, सुव्यवस्थित, सुविधापूर्ण और [[शिल्पशास्त्र]] के सिद्धांतों के आधार पर आकल्पित नया शहर '[[जयपुर|सवाई जयनगर]]', बाद में ([[जयपुर]]) बसाने वाले नगर-नियोजक के बतौर उनकी ख्याति भारतीय-इतिहास में अमर है। [[वाराणसी|काशी]], [[दिल्ली]], [[उज्जैन]], [[मथुरा]] और [[जयपुर]] में, अतुलनीय और अपने समय की सर्वाधिक सटीक गणनाओं के लिए जानी गयी [[वेधशाला]]ओं के निर्माता, सवाई जयसिह एक नीति-कुशल [[महाराजा]] और वीर सेनापति ही नहीं, जाने-माने [[ब्रह्माण्ड|खगोल]] [[वैज्ञानिक]] और विद्याव्यसनी विद्वान भी थे।<ref>'भारत: एक खोज': [[जवाहरलाल नेहरू|जवाहर लाल नेहरु]] [ https://archive.org/details/DiscoveryOfIndia {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130530033424/http://archive.org/details/DiscoveryOfIndia |date=30 मई 2013 }}]</ref> उनका [[संस्कृत भाषा|संस्कृत ]], [[मराठी भाषा|मराठी]], [[तुर्की]], [[फ़ारसी भाषा|फ़ारसी]], [[अरबी]], आदि कई भाषाओं पर गंभीर अधिकार था। भारतीय ग्रंथों के अलावा [[गणित]], [[रेखागणित]], [[ब्रह्माण्ड|खगोल]] और [[ज्योतिष]] में उन्होंने अनेकानेक विदेशी ग्रंथों में वर्णित वैज्ञानिक पद्धतियों का विधिपूर्वक अध्ययन किया था और स्वयं परीक्षण के बाद, कुछ को अपनाया भी था। देश-विदेश से उन्होंने बड़े बड़े विद्वानों और खगोलशास्त्र के विषय-विशेषज्ञों को [[जयपुर]] बुलाया, सम्मानित किया और यहाँ सम्मान दे कर बसाया। <ref>डॉ॰ ज्ञान प्रकाश पिलानिया, 'Enlightened Government in Modern India: Heritage of Sawai Jai Singh' (हेरिटेज ऑफ़ सवाई जयसिंह) ISBN 8187359161, 9788187359166</ref> जयसिंह की गणित, वास्तुकला और खगोल विज्ञान में बहुत रुचि थी। उन्होंने अपनी राजधानी जयपुर सहित भारत के कई स्थानों पर जंतर मंतर वेधशालाओं का निर्माण किया। उनके पास यूक्लिड के "एलीमेंट्स ऑफ़ ज्योमेट्री" का संस्कृत में अनुवाद था <ref>Chandara, Bipan. History of Modern India. Orient Black Swan.</ref> <ref> Sarkar, Jadunath (1984, reprint 1994) A History of Jaipur, New Delhi: Orient Longman, ISBN 81-250-0333-9, p.157</ref> === सवाई की मौखिक-उपाधि === अपने पिता [[राजा विष्णुसिंह|महाराजा बिशन सिंह]] के असामयिक देहान्त के बाद २५ जनवरी [[१७००]] को ११ वर्ष की लगभग बाल्य-अवस्था में वे [[आमेर]] की गद्दी बैठे।<ref>'जयपुर प्रकाशक : प्रधान-सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978 :[पेज 203] प्रकाशक : जयपुर अढाई शती समारोह समिति, नगर विकास व्यास (अब जयपुर विकास प्राधिकरण) परिसर, भवानी सिंह मार्ग, [[जयपुर]]</ref> [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] ने उन्हें 'सवाई' की [मौखिक] उपाधि दी थी - जिसका प्रतीकात्मक-अर्थ यही है कि वे अपने समकालीनों से 'सवाया' (या सवा-गुना अधिक बुद्धिमान और वीर) थे। सुना जाता है जब [[दिल्ली]] बादशाह [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] के दरबार में युवा सवाई जयसिंह पहले-पहल हाजिर हुए, तो [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] ने एकाएक बालक जयसिंह के दोनों हाथ पकड़ लिए और पूछा "अब बताइये, आप क्या करेंगे?" इस पर प्रत्युत्पन्नमति जयसिंह होठों पर मुस्कान लिए निहायत शांत स्वर से बोले, "आलमपनाह ! हमारे यहां हिन्दुओं में विवाह पर एक परम्परा है। वर, वधू का एक हाथ अपने हाथ में लेकर इस बात की प्रतिज्ञा करता है कि वह उसका हाथ जिन्दगी भर नहीं छोड़ेगा, उम्र भर उसका साथ निबाहेगा! आज बादशाह सलामत खुद मेरा एक हाथ नहीं, मेरे दोनों ही हाथ जब अपने हाथ में ले चुके हैं, फ़िर मुझे किस बात की परवाह?" [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] को इस चतुराई भरे जबाब की उम्मीद न थी, लेकिन इस बुद्धिमत्तापूर्ण हाज़िरजवाबी से वह बहुत प्रसन्न हुआ।<ref>डॉ॰ ज्ञान प्रकाश पिलानिया, 'Enlightened Government in Modern India: Heritage of Sawai Jai Singh (हेरिटेज ऑफ़ सवाई जयसिंह)' ISBN 8187359161, ISBN 9788187359166</ref>,<ref>'राजस्थान का इतिहास' : गोपीनाथ शर्मा : शिवलाल अग्रवाल एंड कम्पनी, आगरा</ref>[[यदुनाथ सरकार]] ने अपने जयपुर इतिहास में इस 'उपाधि' के बारे में जो शब्द लिखे हैं-अविकल रूप से ये हैं-"{{Quotation|The new Rajah also gained the title of ''Sawai'', which means 'one and a quarter', because Aurangzeb was so pleased with this youthful prince's feats before Khelna that he cried out," You are more than a man, you are ''sawa''- ''i.e.,''a hundred and twenty five per cent hero'}}<ref>Jadunath Sarkar : 'A History of Jaipur' : Orient BlackSwan : Extracts from chapter ' Sawai Jai Singh's Early Career' Page 149</ref> कुछ दूसरे स्रोत बतलाते हैं 'सवाई' की उपाधि [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] द्वारा नहीं बल्कि बादशाह [[फ़र्रुख़ सियर|फर्रुख़ सियर]] द्वारा इन्हें दी गयी थी। <ref>'जयपुर-दर्शन' प्रकाशक : प्रधान-सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978 [पेज 203] प्रकाशक : जयपुर अढाई शती समारोह समिति, नगर विकास व्यास (अब [[जयपुर विकास प्राधिकरण]]) परिसर, [[भवानी सिंह]] मार्ग, जयपुर</ref> पर यह बात (जो शायद [[किंवदंती]] का रूप ले चुकी है) अधिकांश ग्रंथों में औरंगजेब के साथ जुडी मिलती है। == जन्म और माता-पिता== महाराजा सवाई जयसिंह जी द्वितीय का जन्म [[मार्गशीर्ष]] वदी 7 वि० सं० १७४५ ई० [दिनांक 4 [[नवम्बर]], [[१६८1|1688]]]<ref>Jadunath Sarkar : ' A History of Jaipur' page 149</ref> को [[राजा विष्णुसिंह|मिर्ज़ा राजा बिशन सिंह]] की रानी राठौड़,[[अजमेर]] में [[खरवा]] के जागीरदार राव केसरी सिंहजी की जेष्ठ पुत्री इँद्र‌ कँवर की कोख से हुआ। इनके छोटे भाई कुंवर विजय सिंह और बहन बाई लाल अमर कँवर थीं,जिनका विवाह पिता के मृत्युपरांत महाराजा सवाई जय सिंहजी द्वितीय ने बूंदी के महाराव बुद्ध सिंहजी के साथ उनकी पटरानी के रूप में सामोद (आमेर राज्य) में संपन्न करवाया। <ref>'जयपुर-दर्शन' प्रकाशक : प्रधान-सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978 [पृष्ठ 203] प्रकाशक : 'जयपुर अढाई शती समारोह समिति', जयपुर नगर विकास न्यास, (अब जयपुर विकास प्राधिकरण) परिसर, भवानी सिंह मार्ग, जयपुर Page 203</ref> [[File:Rajputana 1909.jpg|thumb|राजपूताना प्रान्त का एक पुराना मानचित्र]] == सवाई जयसिंह के शासन का सम्पूर्ण राजनैतिक इतिहास == === सत्ता का अधिग्रहण और नाम-परिवर्तन === राजा विष्णुसिंह की <nowiki>[[काबुल]]</nowiki> में रविवार ३१ दिसम्बर <nowiki>[[१६९९]]</nowiki> (रजब १९, जुलुसी वर्ष ४३) को मृत्यु<ref></nowiki>''Akhabarat'' : Jadunath Sarkar :'A History of Jaipur' : Page 147 :<nowiki></ref> होने पर [[मार्गशीर्ष]] सुदी ७ वि० सं० १७५६, जनवरी २५, १७०० ई० को ये आमेर की गद्दी पर बैठे। मृत्यु के प्रायः डेढ़ माह बाद १८ फ़रवरी १७०० को महाराष्ट्र के शाही-शिविर में मिर्ज़ा राजा बिशन सिंहजी का [[काबुल]] में हुए निधन की खबर पहुँची, तो दो दिन बाद (अर्थात २० फरवरी,१७०० को) बादशाह औरंगजेब ने उनके सबसे बड़े पुत्र का नाम ''विजय सिंह'' से बदल कर ''जयसिंह'' करते हुए, उन्हें आमेर की गद्दी का वारिस स्वीकार किया। बादशाह ने जयसिंह के छोटे भाई ''चीमा जी'' का नाम ''विजयसिंह'' रखा। <ref>Jadunath Sarkar : Page 149</ref> यदुनाथ सरकार के अनुसार "...जुलाई १६९८ में दक्षिण से लौटने के बाद से जयसिंह आमेर में ही बने रहे, जब कि बादशाह ने इन्हें हाजिरी देने के लिए कई 'कड़े बुलावे' भी भेजे| इनके पिता के समय से ही दिल्ली-बादशाह इनको अपनी सैनिक 'सेवा' में लेने के लिए हेतु दक्षिण में बुलाना चाहते थे। परन्तु राजा बिशन सिंहजी अपने पुत्र को दक्षिण में नहीं भेजना चाहते थे। लेकिन बादशाह के ज्यादा दबाव देने पर ई० १६९८ में ये महाराष्ट्र (दक्षिण) गये। (''वहां पहली भेंट में बादशाह ने इनकी तीव्र बुद्धि देख कर इन को 'सवाई' कहा था। तभी से इनके नाम के पहले सवाई की उपाधि लग गई, जो अभी तक जयपुर के भूतपूर्व राजाओं के नाम के साथ जुड़ी हुई है''।) आठ महीने मुग़ल शिविर में रह कर ये वापस अपनी राजधानी [आमेर] लौट आये। ===औरंगजेब और जयसिंह === गद्दी पर बैठने के तुरंत बाद, जैसा ऊपर लिखा गया है, इन्हें नवम्बर १७०० में दक्षिण में अपनी सेना के साथ मुग़ल बादशाह की फ़ौज के रूप में लड़ने के लिए बुलाया गया था, पर किसी न किसी तरह जयसिंह बराबर टालमटोल करते रहे। वह जब कई शाही-आदेशों की अवहेलना कर चुके, तो अंततः इन्हें 'जबरन' ले आने को बादशाह ने कुछ हरकारे आमेर तक भी भेजे| इनकी अनुपस्थिति से नाराज़ बादशाह औरंगजेब ने इन से आमेर [[राजा]] का खिताब तो नहीं छीना, पर १३ सितम्बर १७०१ को इन्हें 'पदावनत' करते हुए मात्र ५०० जात, १०० सवार का मामूली [[मनसबदार]] बना दिया। कठिन मार्ग और वर्षा से अवरुद्ध रास्तों से जूझते बुरहानपुर में पड़ाव डाल कर अक्टूबर १७०१ में इनके दक्षिण में पहुँचने पर इन्हें औरंगजेब के पोते (सेना-अधिकारी और पुत्र आलम शाह के पुत्र) शाह बिदरबख्त के पास पन्हाला की सुरक्षा के लिए उनका सैन्य-सहयोगी नियुक्त किया गया।<ref>Jadunath Sarkar : IBID : Page 150</ref> === सवाई जयसिंह की आरंभिक सामरिक-सफलताएं और बादशाह औरंगजेब के पूर्वाग्रह === [[File:In-jaipu.gif|thumb|तत्कालीन आमेर का पंचरंगा ध्वज]] औरंगजेब के पोते शाह बिदरबख्त के नेतृत्व में बादशाही सेना ने 11 मई ई० 1702 को खिलना के किले पर भारी हमला किया। इसमें आमेर और मुग़ल संयुक्त-सेना की बहुत जनहानि हुई, पर दीवारों को तोड़ कर सबसे पहले जयसिंह की कछवाहा सेना ही खिलना-दुर्ग में प्रविष्ट हुई। उसकी बुर्ज पर आमेर का 'पंचरंगा झंडा' फहराया गया। (''इस समय जयसिंह की उम्र केवल १४ वर्ष थी)।'' खिलना-युद्ध में इनका वीर और भरोसेमंद दीवान बुद्धसिंह मारा गया। इस खिलना-विजय पर बादशाह औरंगजेब द्वारा इनका मनसब बढ़ा कर पहले एक हज़ार, फिर [[शाह बिदरबख्त]] के अनुरोध के बाद २००० (दो हजार जात) का कर दिया गया। बादशाह की छः साल की 'कठिन सेवा' का महज़ यह प्रतिदान जयसिंह को मिला! इसके बाद जब शाहजादा बिदरबख्त मालवे का सूबेदार हुआ, तब उसने जयसिंह की सेवाओं का सम्मान करते उन को वहाँ का [[नायब सूबेदार]] बना दिया, जिसे औरंगजेब ने तत्काल ही 'नामंजूर' कर दिया तथा एक फरमान लिखा कि ''आइन्दा किसी भी हिन्दू को मामूली फौजदार तक भी नहीं बनाया जाए''।'<ref>'अहकाम-ए- आलमगिरी' : इयानतुल्ला) सन्दर्भदाता : यदुनाथ सरकार : वही: पृष्ठ १५२</ref> विडम्बना हैरतंगेज़ है कि जिस औरंगजेब ने कभी इन्हें 'सवाई' कह कर सम्मान दिया वही बाद में वस्तुतः इनसे इस कदर नाराज़ और पूर्वाग्रहग्रस्त था कि उसने ये अपमानजनक आज्ञा जारी की- "''जयसिंह को मसनद पर आसन न दे कर, नीचे ज़मीन पर बिछी 'सुजनी' पर बैठने को कहा जाय!''"<ref>यदुनाथ सरकार : ''वही'' पृष्ठ १५२</ref> इसी बीच ई० 1704 में दो बादशाही फौजदारों ने स्थानीय मदद ले कर ठाकुर कुशल सिंहजी राजावत से सवाई माधोपुर में आज स्थित [[झिलाय]] ठिकाने की जागीर छीन कर १३ नवम्बर 1704 को जयसिंह (आमेर राज्य) को सौंप दी। दूसरे साल ई० 1705 में शाह बिदरबख्त ने अपनी तरफ से इनके पक्ष में फिर से कोशिश करके जयसिंह को मालवा का भी नायब सूबेदार बनवा दिया।<ref name="यदुनाथ सरकार : पृष्ठ १५३">यदुनाथ सरकार : पृष्ठ १५३</ref> पर जब तक औरंगजेब जीवित रहा, मुग़ल खेमे में इनका प्रभाव मद्धम सा ही रहा। === औरंगजेब की मृत्यु के बाद === ई० 1707 में 21 फ़रवरी को [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] के देहांत के बाद मुग़ल-गद्दी के लिए उसके बेटों में विकट-संघर्ष शुरू हो गया। शाह आजम ने आगरा व दिल्ली पर चढ़ाई की। उस समय तक उसने इनका मनसब 5000 जात 500 सवार का कर दिया था। 18 जून 1707 ई० को मौजम (मुअज्जिम) और आज़म की सेनाओं के बीच आगरा के 20 मील दक्षिण में [[जाजू का युद्ध]] हुआ। जयसिंह मौजम (मुअज्जिम) के साथ थे तथा इनके सगे छोटे भाई चीमाँ जी (विजयसिंह) आज़म की सेना की तरफ। इस युद्ध में मौजम और उनके पुत्र मारे गये। जाजू की लड़ाई में आज़म की विजय हुई। इसी युद्ध में जयसिंह तथा अखेसिंह टोरड़ी भी घायल हुए | इनके कई सरदार- बिहारीदास (दांतरी), केशरीसिंह (हरसोली), सूरसिंह (हरमाड़ा) आदि मारे गये। युद्ध के आखरी समय में जयसिंह बूंदी के राजा अपने बहनोई [[बुधसिंह हाडा|महाराव बुधसिंहजी हाड़ा]] के मारफत युद्ध में विजयी आज़म से जा मिले, परन्तु उसने इनका खास स्वागत नहीं किया।<ref name="यदुनाथ सरकार : पृष्ठ १५३"/>,<ref name="ignca.nic.in">{{Cite web |url=http://www.ignca.nic.in/coilnet/rj089.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=8 जुलाई 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140714115524/http://www.ignca.nic.in/coilnet/rj089.htm |archive-date=14 जुलाई 2014 |url-status=dead }}</ref> === आमेर पर हमले और अपमानित जयसिंह === जयसिंहजी के छोटे भाई विजयसिंहजी, बादशाह को खुश करने के लिए अपनी बहन बाईजीलाल अमर कँवरजी का विवाह बादशाह बहादुरशाह (प्रथम) से करवाना चाहते थे। उन्होंने इसकी खबर दिल्ली भेज दी तथा महाराव बुद्धसिंहजी हाड़ा को छुट्टी जाते समय जय सिंहजी ने रास्ते में रोक कर उनसे सामोद में यह विवाह करवा दिया। नये बादशाह बहादुरशाह (प्रथम) ने इसके बाद राजस्थान पर चढ़ाई की। जनवरी १७०८ ई० में वह आमेर पहुँचा और उसे [[ख़ालसा|खालसा]] कर लिया। जयसिंहजी से आमेर की जागीर जब्त करके बादशाह बहादुरशाह (प्रथम) द्वारा १० जनवरी १७०८ को उनके छोटे भाई विजयसिंहजी (चीमाजी) को अनेकानेक महंगे उपहारों सहित दे दी गयी। सवाई जयसिंहजी का राजनैतिक कद घटा कर एक मामूली 'मनसबदार' के रूप में कर दिया गया। <ref>यदुनाथ सरकार : पृष्ठ १५४</ref> बादशाह इसके बाद अजमेर होकर दक्षिण के लिए अपने भाई [[कामबक्श]] से मुकाबला करने को बढ़ा। [[आमेर]] और [[जोधपुर]] के दोनों राजा [[मंडलेश्वर]] के इलाके तक उसके साथ ही गये। जब उन्हें यह आशा नहीं रही कि बादशाह उनके इलाके उन्हें वापस लौटाएगा तो उन्होंने [[दुर्गादासजी राठौड़]] की राय से, जब बादशाह नर्बदा नदी पार करने को रवाना हुआ, २० अप्रैल १७०८ वैशाख सुदी १३ को बादशाही-शिविर छोड़ दिया और वे राजपूताना की ओर वापस रवाना होकर [[मेवाड़]] [[उदयपुर]] पहुँचे। यहाँ [[महाराणा प्रताप]] के पर-पर-पर-पर पौत्र और उस समय के [[राणा अमरसिंह|महाराणा अमरसिंहजी द्वितीय]] ने इनका स्वागत किया,इनकी सहायता हेतु एवं राजपूत संघ को पुनः जागृत करने के लिए अपनी पुत्री बाईजी लाल चँद्र कँवरजी जयसिंह को 25 मई सन् 1708 में ब्याही और यह वचन लिया की वो मुगल सत्ता से कोई संबंध नहीं रखेंगे खास कर कोई भी कन्या विवाह हेतु नहीं देंगे तथा मेवाड़ी रानी से उत्पन्न पुत्र को आमेर-जयपुर की राजगद्दी का उत्तराधिकारी बनाएंगे और एक जुट होकर राजपूत संघ का नवनिर्माण करेंगे। यहाँ से तीन राजाओं की ३० हजार सेना ने संयुक्त-रूप से जोधपुर पर हमला करके ८ जुलाई १७०८ ई० को उसे अपने अधिकार में कर लिया। राजा अजीत सिंहजी ने जोधपुर में जयसिंहजी का टीका किया। यहाँ से उन्होंने हिन्दुस्तान के अनेक राजाओं को मुगलों के विरुद्ध एकत्र होने संबंधी पत्र भी लिखे।<ref name="ignca.nic.in"/> [[जोधपुर]] से विजय सिंह शासित आमेर पर अधिकार करने को दो सेनाएँ भेजी गयीं। एक [[दुर्गादास राठौड़]] के नेतृत्व में, जिसका सैयदों से [[काला डेरा]] के पास युद्ध हुआ। दूसरी सेना में, महाराजा जयसिंह का दीवान रामचन्द्र और श्यामसिंह के अधीन २० हजार घुड़सवार थे। इनका [[रतनपुरा]] के पास [[आमेर]] के फौजदार हुसैन खाँ से युद्ध हुआ, जिसमें उन्होंने उसे परास्त करके आमेर पर अपना अधिकार कर लिया।<ref name="ignca.nic.in"/> इसके बाद इन दोनों राजाओं के विरुद्ध मेवात के फौजदार सैयद हुसेन खां, अहमद खां फौजदार बैराठ सिधाना और गारात खां फौजदार नारनोल को [[सांभर]] भेजा गया । दोनों राजाओं के इन फौजदारों से [[सांभर]] में ३ अक्टूबर ई० १७०८ को भीषण युद्ध हुआ, जिसमें मुगलों की विजय हुई। युद्ध के बाद विजय की खुशी में मुगलों की महफिल हो रही थी। इसी समय राव संग्रामसिंहजी [[उनियारा]] के नेतृत्व में नरुका लड़ाके वहाँ पहुँचे और एक रेत के टीबे पर चढ़े, जिसके नीचे सैयद आदि शराब की महफिल कर रहे थे। नरुकों ने उन पर एकाएक बन्दूकों और तीरों से भयानक हमला किया। उसमें सब मुग़ल फौजदार मारे गये तथा मुगलों की जीती हुई बाजी हाथ से निकल गई। फिर जयसिंह ने एक पत्र बादशाह के विरुद्ध दुर्गादास को लिखा कि "उदयपुर महाराणा से बात की जाए ...मराठों को मिला कर मुग़लों के विरुद्ध राजपूतों को वही करना चाहिए जो 'हिन्दुस्तान' के लिए गौरव की बात हो।"<ref name="ignca.nic.in"/> बादशाह बहादुरशाह जब दक्षिण से वापस लौटा, तो उसने यह जरुरी समझा कि किसी तरह [[जोधपुर]] और [[आमेर]] (जयपुर) दोनों राजाओं से समझौता किया जाए। इन्हें लाने के लिए उसने [[बुधसिंह हाड़ा]] राजा [[बूँदी जिला|बून्दी]] को भेजा, जिनके मारफत २१ जून ई० १७१० को ये [[अजमेर]] के पास बादशाह के सामने हाजिर हुए। बादशाह ने इनके जब्त किये राज्य वापस लौटा दिए और इन दोनों को ४००० जात ४००० सवार के मनसब भी दिये। उस समय तक भी राजपूतों का मुगलों पर बिल्कुल विश्वास नहीं था, इसलिए जब सवाई जयसिंह अजमेर में बादशाह के शिविर में गये तब अजमेर के तमाम पहाड़ तथा घाटियाँ राजपूत-सैनिकों से भरी हुई थीं। मनसब बढ़ने और इलाके वापस आने पर भी उन्हें बहादुरशाह की नीयत पर कभी भी पूर्ण विश्वास नहीं हुआ।<ref name="ignca.nic.in"/> === जयसिंह द्वारा छलपूर्वक अपने भाई विजयसिंह की गिरफ्तारी === जयसिंह के भाई विजयसिंह के साथ भी कुछ ऐसा हुआ कि (जन्म चैत सुदी ६ वि. १७४७) निराश होकर अन्त में मुगल दरबार छोड़ कर [[हिन्डौन]] आ गए। जयसिंह को भाई विजयसिंह की तरफ से सशस्त्र विद्रोह खतरा तो बना हुआ था ही। इन्होंने १७१३ ई० में विजयसिंह से समझौता करने और 'राजमाता से भेंट' करने के नाम पर अपने सशस्त्र सैनिकों एवं सरदारों समेत [[सांगानेर]] जा कर धोखे से उनको कैद करवा दिया<ref>लेफ्टिनेंट कर्नल जेम्स टॉड: 'राजस्थान का इतिहास' खंड-2 : प्रकाशक- 'साहित्यागार', जयपुर; अनुवाद: केशव ठाकुर : संस्करण 2012</ref> और जयगढ़ किले में भेज दिया। (वहीं वे अन्त में मारे भी गये।) विजयसिंह के इस 'हत्याकाण्ड' में श्यामसिंह खंगारोत विशेष सहायक रहा। [[बहादुर शाह (प्रथम)]] की मृत्यु के बाद उसके उत्तराधिकारी [[जहाँदरशाह]] ने [[आमेर]] और [[मारवाड़]] दोनों राजाओं को फिर अपने पक्ष में करना चाहा। उसने दोनों को ७००० जात व ७००० सवार का मनसब भी दिया, परन्तु इस बार इन्होंने मुग़ल-उत्तराधिकारी के आपसी संघर्ष में औरंगजेब के पुत्रों से दूर ही रहने का फैसला किया। [[फ़र्रुख सियर]] के मुग़ल बादशाह बनने के बाद हुसैन अली सैयद ने श्यामसिंह खंगारोत को बुलवाया तथा उनसे बात करके जयसिंह को बादशाह से ५००० जात ४५०० सवार का मनसब दिलवाया। जब अतसिंह का बादशाह के साथ मतभेद हो गया, तब बादशाह ने सैयद हुसैन अली को सेना लेकर [[अजमेर]] भेजा जहाँ अतसिंह ने कब्जा कर लिया था। उस समय जयसिंह भी हुसैन अली सैयद के साथ थे। अन्त में अतसिंह से सन्धि हुई।<ref name="ignca.nic.in"/> === मराठे और जयसिंह === अक्टूबर १७१३ ई० में इन्हें बादशाह [[फ़र्रुख सियर]] ने [[मालवा]] की सूबेदारी प्रदान की। इन्होंने वहाँ की अनेक बगावतें दबाई व मरहठों के उपद्रव भी कुचले। मरहठों की एक बड़ी सेना जब मालवे में घुसी तब इन्होंने [[पलसूद]] के पास उसे बड़ी करारी हार दी। मराठी सेना के लोग भाग कर पलसूद में ठहरे थे। जयसिंह ने रात में ही उन पर हमला कर दिया। इनकी सेना को देखते ही वे भाग निकले व [[नर्वदा]] नदी पार कर गये। उनकी लूट का सब माल वहीं रह गया। मालवा में [[महाराजा छत्रसाल|छत्रसाल बुन्देला]] भी इनके साथ थे। १७१५ ई० में इनको दिल्ली बुला लिया गया। तब इनकी अनुपस्थिति में इनके धाभाई रुपाराम को इन्होंने वहां नायब बना कर रखा। १७१७ तक ये मालवा के सूबेदार रहे। बादशाह [[फ़र्रुख सियर]] ने [[भीमसिंह हाडा]] राजा [[कोटा]] को [[बूँदी जिला|बून्दी]] की रियासत दे दी थी और उसने बून्दी पर कब्जा भी कर लिया था। जयसिंह ने प्रयास करके बादशाह से बून्दी वापस राजा बुधसिंह हाडा को दिलवायी।<ref name="ignca.nic.in"/> === भरतपुर में विफलता=== दिल्ली से बादशाह ने इनको [[भरतपुर]] के [[चूड़ामन|चूड़ामन जाट]] पर चढ़ाई करने की आज्ञा दी, जिसने [[आगरा]] के इलाके में लूटमार से बड़ा उपद्रव मचा रखा था। इनके साथ बून्दी के बुद्धसिंह, [[कोटा]] के भीमसिंह, नरवर के गजसिंह, [[दुर्गादास राठौड़]] व कई अन्य मनसबदार भी नियुक्त किये गये। १५ सितम्बर १७१६ को ये अपनी फौज ले कर [[मथुरा]] के लिए रवाना हुए। नवम्बर में [[चूड़ामन]] के प्रसिद्ध किले [[थूण का घेरा]] शुरू किया। वर अब्दुल्ला खां सैयद, जयसिंह के विरुद्ध था तथा चूड़ामन को मदद दे रहा था। इससे इन्हें इस अभियान में सफलता नहीं मिल पाई। वर अब्दुल्ला खां सैयद ने अन्त में बीच में पड़ कर थून का घेरा उठवा लिया। मई १७१८ में जयसिंह की वापसी [[दिल्ली]] हुई। चूडामन के इलाके में इस असफलता के बावजूद बादशाह ने इनका बड़ा सम्मान किया।<ref name="ignca.nic.in"/> सैयदों और बादशाहों के बीच तलवारें खिंच चुकी थी। जयसिंह ने बादशाह [[फ़र्रुख सियर]] को बहुत समझाया कि सैयदों से युद्ध करके उन्हें हमेशा के लिए साफ कर देना चाहिए। उस समय उनके पास २० हजार राजपूत सवार दिल्ली में मौजूद थे तथा बून्दी के बुद्धसिंह हाडा भी उन्हीं के साथ थे। परन्तु बादशाह की यह सैन्य कार्यवाई करने की हिम्मत नहीं हुई। वह सैयदों को किसी तरह खुश करने में लगा रहा। अन्त में सैयदों ने बादशाह से जयसिंह को दिल्ली से जाने को कहलवा दिया। जयसिंह ने बादशाह को सचेत किया कि उनके जाने से बादशाह की जान को खतरा हो जाएगा लेकिन यह सलाह बादशाह की समझ में नहीं आई। १३ फ़रवरी १७१९ ई० को जयसिंह दिल्ली से रवाना हुए। उसके कुछ ही घंटों बाद भींमसिंह कोटा राजा ने बुधसिंह बूंदी पर आक्रमण कर दिया। उनके स्वामिभक्त सरदार जैतसिंह ने बड़ी वीरता से कोटा की सेना को रोका तथा बुधसिंह को सुरक्षित वहाँ से निकाल दिया। वे भाग कर सवाई जयसिंह के पास पहुँचे। १७- १८ अप्रैल को सैयद भाइयों, अतसिंह जोधपुर और भीमसिंह कोटा ने मिल कर दिल्ली में बादशाह फर्रूखशियर को मार डाला।<ref name="ignca.nic.in"/> === सैयद और जयसिंह === जयसिंह ने [[इलाहाबाद]] के सूबेदार छबीला राम और निजाम से सैयदों के विरुद्ध भी पत्र-व्यवहार किया। वे चाहते थे कि सब मिल कर सैयदों को अपदस्थ कर दें। इन्होंने [[महाराजा छत्रसाल|छत्रसाल]] बुन्देला को भी युद्ध के लिए बुलाया। सैयदों ने कई सेनाएँ इनके विरुद्ध कई तरफ से घेरने के लिए भेजीं| वर अब्दुल्ला खां ने ५ जुलाई को नाममात्र के बादशाह रफीउदुल्ला को साथ लेकर जयसिंह पर चढ़ाई की और मथुरा होता हुआ वह आगरा पहुँचा, जहाँ सैयदों के विरुद्ध बगावत हो रही थी। जयसिंह ने भी सैयदों से पूरे तौर से मुकाबला करने की तैयारी कर ली थी पर युद्ध में रवाना होने के पहले उन्होंने ब्राह्मणों को बुलाकर आमेर राज्य दान में दे दिया और केसरिया बाना धारण करके वे सैयदों से लड़ाई के लिए रवाना हुए। ये आमेर से आगे बढ़ कर [[टोडा रायसिंह]] तक पहुँच गये थे। पर निजाम और छबीलाराम दोनों ही वायदे के अनुसार इनके पक्ष में कायम नहीं रहे।<ref name="ignca.nic.in"/> जयसिंह को निराशा हाथ लगी। === जोधपुर में विवाह === अन्त में राजा अजीत सिंहजी जयसिंहजी को अपने साथ जोधपुर ले गये जहाँ उन्होंने 20 मई सन् 1720 में अपनी पुत्री बाईजी लाल सूरज कँवरजी का शुभ विवाह जय सिंहजी के साथ करवा दिया। सैयदों ने जयसिंहजी को २० लाख रुपये दिये, जिससे वे आमेर वापस ब्राह्मणों से वापस खरीदें। उस समय भी जयसिंहजी को राजा अजीतसिंहजी जोधपुर पर विश्वास नहीं था इसलिए वे अपने विवाह में भी जिरहबख्तर पहन कर गये थे।<ref name="ignca.nic.in"/> === निज़ाम और जयसिंह === सैयदों की दो सेनाएँ जब दक्षिण में निजाम से परास्त हो गई, तब हुसैन अली खां सैयद, बादशाह मोहम्मद शाह को साथ ले कर, एक बड़ी सेना के साथ निजाम को दबाने के लिए रवाना हुआ। सितम्बर ८, १७२० ई० को [[टोडाभीम]] में उसने हुसैन अली को धोखे से मार डाला। अब बादशाह ने तैयारी करके सैयद अब्दुल्ला खां पर चढ़ाई की जो [[दिल्ली]] में था। इस युद्ध के लिए महाराणा ने जयसिंह से पूछा कि 'उसे क्या करना चाहिए?' जयसिंह ने उदैपुर के महाराणा को बादशाह की मदद करने के लिए पत्र लिखा तथा साथ में ही महाराणा के अलावा बीकानेर, कोटा और राव इन्द्रसिंह नागौर को भी बादशाह की मदद करने के लिए पत्र भेजे। सवाई जयसिंह ने खुद बादशाह मोहम्मद शाह की मदद के लिए राव जगराम के साथ एक अच्छी सेना भेजी। इस सेना में सवाई राम (नरुका), गढ़ी गजसिंह, नरुका जावली, जसवन्तसिंह, सवाईराम के पुत्र, प्रतापसिंह कल्यणोत, बुद्धसिंह कल्यणोत, गुलाब सिंह कल्यणोत, छीतरसिंह कल्यणोत, अमरसिंह राजावत, बहादुर सिंह खंगोरात और सरदारसिंह नरुका आदि सरदार थे। ३ और ४ नवम्बर १७२० को युद्ध हुआ जिसमें सैयद अब्दुल्ला खां पकड़ा गया। विजय के बाद बादशाह ने जयपुर के सरदारों को अपने हाथ से खिलअतें दीं।<ref name="ignca.nic.in"/> === मोहम्मद शाह और जयसिंह === मोहम्मद शाह ने दिल्ली पहुंचते ही जयसिंह को दिल्ली आने का फरमान भेजा जिसमें लिखा कि उनसे अनेक महत्वपूर्ण समस्याओं पर सलाह लेनी है। उसने दिल्ली पहुंचने पर बादशाह ने अपने नये वर मुहम्मद अमीन खां को उनके डेरे पर लेने भेजा। दरबार में आने पर बादशाह ने उनका बड़ा सत्कार किया और अनेक तोहफे दिए। उनके मनसब में ४००० सवार और बढ़ा दिए गए। इसी मौके पर इन्हें दो करोड़ रुपये इन्हें इनाम/ बख्शीश में दिये जिनको इन्होंने नम्रतापूर्वक लेने से मना कर दिया। पर बादशाह ने सवाई जयसिंह और राजा गिरधर बहादुर के अनुरोध पर हिदुओं पर लगाया जाने वाला कठिन [[जज़िया|जजिया कर]] माफ कर दिया। महाराणा मेवाड़ ने जजिया हटवा देने की सफलता पर सवाई जयसिंह को अपनी और से प्रसन्न हो कर लिखित बधाई भेजी।<ref name="ignca.nic.in"/> === जयसिंह के महत्त्व में वृद्धि === सैयदों के पतन के बाद जयसिंह का राजनैतिक महत्त्व तेज़ी से बढ़ने लगा। राजस्थान, मालवा और बुन्देलखण्ड के राजा हर मुसीबत में उनसे सहायता और सलाह चाहते थे। इन इलाकों में इनकी राय के बगैर कुछ भी नहीं होता था। १७३५ ई० के बाद तो मरहठे भी इनकी सलाह लेने तथा इनको आदर देने लग गए।<ref name="ignca.nic.in"/> इन्हें ''सवाई'' के अलावा मुग़ल बादशाहों ने जो अन्य उपाधियाँ समय समय पर दीं वे थीं - '''सरमदे –राजा-ए- हिन्द'/ 'राजराजेश्वर'/ 'श्रीराजाधिराज''' आदि। === दूसरा जाट युद्ध === सितम्बर १७२२ ई० में जयसिंह को [[आगरा]] का सूबेदार बना कर जाटों को दबाने को भेजा गया। इनके साथ ५० हजार सैनिकों की बड़ी फौज थी तथा अनेक मनसबदार भी इनके साथ थे। शाही तोपखाना भी इनके साथ था। [[चूड़ामन]] [[जाट]] का पुत्र [[मोहकमसिंह]] इस समय जाटों का नेता था। परन्तु चूड़ामन का भतीजा [[बदनसिंह]] जो उससे नाराज था, जयसिंह से आ कर मिला। इन्होंने उसका बड़ा स्वागत-सत्कार किया। एक बार फिर इन्होंने [[थून|थूण]] के किले पर घेरा डाला। अतसिंह जोघपुर ने एक सेना मोहकमसिंह की मदद के लिए भेजी, परन्तु वह [[जोबनेर]] से आगे नहीं बढ़ी। विभीषण की तरह बदनसिंह की सलाह से थूण के किले का विजय होना निश्चित दिख रहा था। तब मोहकमसिंह निराश होकर गुप्त मार्ग से किला छोड़ कर अतर सिंह के पास [[जोधपुर]] पहुँचा। किन्तु जाटों के थून स्थित किले पर सवाई जयसिंह का अधिकार हो गया। इन्होंने [[सूरज मल|सूरजमल]] के पिता बदनसिंह को भरतपुर की जागीर दी तथा राजा के रूप में उनके पगड़ी बाँधी। जून १९, १७२३ ई० को ठाकुर बदनसिंह जाट ने 'जयपुर दरबार की सेवा करने' व ८३ हजार रुपये बतौर सालाना पेशकश देना स्वीकार करके इस आशय की लिखावट पर दस्तखत किये। बदनसिंह जयपुर के दशहरा दरबार में हर साल आया करते थे। जयपुर में जहाँ जाट सेना सहित डीग के राजा का पड़ाव लगता था, वह स्थान अब भी ''बास बदनपुरा'' कहलाता है।<ref name="ignca.nic.in"/> महाराजा सवाई जयसिंह के कार्यकाल का संभवतः सबसे बड़ा और कीर्तिवान कार्य था - सन १७२७ में जयपुर नगर बसाना। इसकी नींव पौष वदी १ वि. सं. १७८४, ई० को रखी गई। राजगुरु सम्राट जगन्नाथ ने नए नगर की नींव रखने का मुहूर्त निकाला तथा भूमि पूजा करवाई थी। महाराजा की आज्ञा के अनुसार नए नगर का नक्शा दीवान [[विद्याधर]] ने बनाया जो बहुत प्रतिभाशाली बंगाली ब्राह्मण था और इनके लेखा-विभाग की सेवा में नायब-अंकेक्षक था। सन १७३३ ई० में यह नगर, जिसका नाम सवाई जयसिंह ने ' सवाई जयनगर' रखा बन कर तैयार हुआ।<ref name="ignca.nic.in"/> === मालवा की दूसरी बार सूबेदारी === जयसिंह को मुग़ल बादशाह द्वारा मालवा का दुबारा सूबेदार बनाया गया। वे २३ अक्टूबर १७२९ ई० को [[उज्जैन]] के लिए रवाना हुए। जयसिंह अपने राज्य की सुरक्षा के लिए विद्रोही मरहठों से समझौता करना चाहते थे। इनके इस समझौता-प्रस्ताव को बादशाह ने भी स्वीकार कर लिया था। इनकी इस विजय पर साहू से लिखा पढ़ी हुई। साहू इसके लिए तैयार हो गया था, किन्तु पेशवा लोग इस समझौते के ज्यादा पक्ष में नहीं था। इन्होंने दीपसिंह कुम्भाणी को साहू के पास [[सातारा|सतारा]] भेजा। लौटते समय दीपसिंह निजाम से भी मिला, परन्तु सितम्बर १७३० ई० में इनके मालवा की सूबेदारी से हट जाने से वह समझौता नहीं हो सका।<ref name="ignca.nic.in"/> === कुशत्तल पंचोलास का युद्ध === बुद्धसिंह बून्दी और उनकी कछवाही रानी के आपस में गंभीर मतभेद पैदा होने पर जयसिंह के सम्बन्ध भी बूंदी नरेश बुद्धसिंह से बहुत खराब हो गये। अन्त में सम्बन्ध इतने बिगड़े कि जयसिंह ने बादशाह को कह कर बुद्धसिंह के स्थान पर करवाड़ के सालिम सिंह हाडा के पुत्र दलेलसिंह को बून्दी का राजा बनवा दिया और बाद में अपनी पुत्री भी उसे ब्याह दी। इससे राजस्थान में जयपुर और बूंदी के बीच लम्बे समय तक बड़ा दु:खद संघर्ष चला। इस आपसी मनमुटाव से मरहठों को फिर राजस्थान में हस्तक्षेप करने का अवसर मिल गया। जयसिंह को १७३० ई० में मालवा में इत्तला मिली कि बुद्धसिंह फिर से बून्दी पर अधिकार करने जा रहे हैं। इन्होंने एक सेना दलेलसिंह की मदद को भेजी| ६ अप्रैल १७३० को ''कुशत्तल पंचोलास'' में बुधसिंह से जयपुर सेना का युद्ध हुआ जिसमें जयपुर के पांच राजावत सरदार फतहसिंह सारसोप (बरवाड़ा) खोजूराम (ईसरदा), सांवलदास (शिवाड), अचलसिंह (नानतोड़ी) और घासीराम अचरे मारे गए।। इस युद्ध में बुद्धसिंह को विजय नहीं मिली। मालवा से लौटते समय महाराजा सवाई जयसिंह कुशत्तल पांचोलास गये। उन्होंने वहाँ मारे गये सरदारों की मातमी करके उनके पुत्रों को सिरोपाव आदि दिये।<ref name="ignca.nic.in"/> === तीसरी बार मालवा की सूबेदारी === जयसिंह दिसम्बर १७३२ में तीसरी बार मालवा प्रान्त के सूबेदार बनकर उज्जैन गये। इस बार मालवा में भी मरहठों का उत्पात इतना बढ़ गया था कि मालवा से मरहठों को निकालने के इनके तमाम प्रयास विफल रहे। १७३४ ई० में खानदौरा एक बड़ी सेना लेकर राजपूताना होता हुआ मालवा में मैराथन के विरुद्ध आगे आया। जयसिंह, अभयसिंह (जोधपुर) आदि अनेक राजा उनके साथ थे। जब यह विशाल सेना रामपुरा पहुँची तो उसे मरहठा मिले। पर वे छुटपुट लड़ाइयों के बाद इन्हें छका कर पीछे से राजस्थान में घुस गये। वहाँ उनको रोकने वाला कोई नहीं था और वे मराठे जयपुर राज्य में साँभर तक लूटपाट करते चले गये। १७३५ ई० में पेशवा बाजीराव की माँ उत्तर में तीर्थ करने आई। महाराजा जयसिंह ने उसका बड़ा आदर-सत्कार किया तथा महाराणा से भी उसका सत्कार करवाया। आगरा में इनके नायब सूबेदार ने अपने दीवान आयामल के भाई नारायणदास को उसका स्वागत करने व पूना तक साथ जाने की आज्ञा भेजी। जनवरी १७३७ ई० को पेशवा उत्तर भारत में आया उसके साथ होलकर, सिन्धिया, पँवार आदि सभी थे। उदयपुर से आते समय पेशवा से २५ फ़रवरी को महाराजा जयसिंह मालपुरा क्षेत्र के झाड़ली गाँव में मिले। उन्होंने उनको अनेक वस्तुएँ भेंट दी। बाजीराव दिल्ली तक जाकर वापस लौट गया। बाजीराव पेशवा की मृत्यु से महाराजा जयसिंह को बड़ा दु:ख हुआ। नया पेशवा बालाराव बना। १७४१ ई० में जब नए मराठा पेशवा बाला राव उत्तर में चढ़ाई की उस समय जयसिंह आगरा के सूबेदार थे। इनकी और नये पेशवा बाला राव की धौलपुर में भेंट हुई। इनके प्रयास से बादशाह ने पेशवा को मालवा की नायब सूबेदारी दे दी।<ref name="ignca.nic.in"/> === नादिरशाह और सवाई जयसिंह === जब नादिरशाह भारत में आया तब सभी को बड़ी शंका खड़ी हो गई। पेशवा, महाराणा अन्य राजाओं व बुन्देलों को मिला कर जयसिंह, नादिरशाह का संगठित मुकाबला करना चाह रहा था। हालांकि 24 फरवरी 1739 को [[करनाल]] में वह (नादिरशाह) मुग़ल सेना को बुरी तरह पराजित कर चुका था। यह भी अफवाह थी कि नादिरशाह जयपुर होता हुआ अजमेर जाएगा। यह जयसिंह के लिए भी बड़ा खतरा था। सब चौकन्ने थे, लेकिन अन्त में वह [[मथुरा]] से ही वापस अपने देश लौट गया। "नादिरशाह ने जब [[भारत]] पर हमला (फरवरी-मार्च १७३९) किया तब [[दिल्ली]] की सहायतार्थ जयसिंह नहीं गए। इस का कारण यह था- तब निजाम और कमरुद्दीन उस समय साम्राज्य में उच्च पदों पर थे और नादिरशाह के हमले के लिए वे लोग इनके उत्तरदायी होने का शक कर सकते थे, किन्तु सम्राट बराबर इनमें विश्वास रख कर इनसे आवश्यक परामर्श करता रहा।"<ref name="ignca.nic.in"/> == साहित्य-रचना और यज्ञ-परंपरा== महाराजा सवाई जयसिंह के दरबार में संस्कृत और [[बृज भाषा|ब्रजभाषा]] [[साहित्य]], [[वास्तुकला|स्थापत्य]], [[धर्मशास्त्र]], [[ज्योतिष]], [[ब्रह्माण्ड|खगोल]], [[इतिहास]]-लेखन, आदि क्षेत्रों में अनेक मौलिक रचनाएं की गयीं और सम्पूर्ण भारतीय मनीषा की इस अकादमिक-योगदान से बड़ी उन्नति हुई। अनेक नए धर्मशास्त्र भी रचे गये क्यों कि इनकी [[कर्मकांड]] और [[धर्मशास्त्र]] में बड़ी रुचि व निष्ठा थी। इनके समय के सबसे प्रसिद्ध विद्वान पंडित [[जगन्नाथ सम्राट]], पंडित [[रत्नाकर पौण्डरीक|पुण्डरीक रत्नाकर]], [[विद्याधर चक्रवर्ती]], [[शिवानन्द गोस्वामी]], [[श्रीकृष्णभट्ट कविकलानिधि|श्रीकृष्ण भट्ट कविकलानिधि]](एवं दैवज्ञ भूषण स्वास्तिश्री राज ज्योतिषी श्री मंत नोपाराम भार्गव जो बारहं ठिकानों के राज ज्योतिषी थे ओर तंवरावाटी के बिहार ग्राम के रहने बाले थे अश्वमेध यज्ञ के दोरान श्री मंत नोपाराम भार्गव को दक्षिणा में बारहं ठिकानों का राज ज्योतिषी न्युक्त किया गया था इसके उपरांत श्रीमंत साहब बिहार गाँव छोडकर सन् 1640ई. में डाबला ग्राम में आकर रहने लगे ) <ref>कविशिरोमणि [[भट्ट मथुरानाथ शास्त्री]]: '[[जयपुर-वैभवम]]</ref> मूलतः आन्ध्र से आये तैलंग पूर्वजों के वंशज ब्रजनाथ भट्ट भी इनके समय के प्रसिद्ध कवि विद्वानों में से थे। इन्होंने 'ब्रह्मसूत्राणभाण्यवृत्ति' और 'पद्मतरंगिणी' की रचना की। [[श्रीकृष्णभट्ट कविकलानिधि|श्रीकृष्ण भट्ट कविकलानिधि]] ने इनके समय में अनेक ग्रन्थ लिखे जिनमें मुख्य '[[ईश्वर विलास]]<ref>कविशिरोमणि भट्ट मथुरानाथ शास्त्री: 'जयपुर-वैभवम</ref>- महाकाव्य भी है, जिसमें सवाई जयसिंह द्वारा '[[अश्वमेध यज्ञ]]' करवाने का 'आँखों देखा हाल' वर्णित है।<ref>संस्कृत के युग-पुरुष: मंजुनाथ': पृष्ठ 1 प्रकाशक: 'मंजुनाथ स्मृति संस्थान, सी-8, पृथ्वीराज रोड, जयपुर-302001</ref> जेम्स टॉड ने लिखा है " सवाई जयसिंह ने बहुत-सा धन खर्च कर के यज्ञशाला बनवाई थी और उसके स्तंभों और छत को चांदी के पत्तरों से मंडवाया था|<ref>'राजस्थान का इतिहास' भाग-२ : लेफ्टिनेंट कर्नल जेम्स टॉड, पृष्ठ ११९ 'साहित्यागार' प्रकाशन, जयपुर</ref> पुण्डरीक रत्नाकर (मृत्यु वि. १७७६ में) ने इनसे [[व्रात्यस्तोम यज्ञ]] चैत वदी ३ वि॰सं॰ १७७१ को क्षिप्रा नदी के तट पर उज्जैन में करवाया। इन्होंने और दूसरे यज्ञ-जैसे [[श्रौत यज्ञ]] आदि भी सम्पन्न करवाये थे। इनका रचा हुआ 'जयसिंह कल्पद्रुम' एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ है। रत्नाकर के पुत्र सुधाकर पौण्डरीक ने जयसिंह से [[पुरुषमेध यज्ञ]] करवाया था तथा 'साहित्यसार संग्रह' की रचना की। इन्होंने [[सम्राट यज्ञ]] भी कराया, जिसके पुरोहित इनके महाराष्ट्रीय ब्राह्मण गुरु, [[जगन्नाथ सम्राट]] थे। ''१७३४ ई० में जयसिंह ने जो पहला [[अश्वमेध यज्ञ]] किया''<ref>{{Cite web |url=http://msmsmuseum.com/pages.php?id=4 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 जुलाई 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140716190556/http://msmsmuseum.com/pages.php?id=4 |archive-date=16 जुलाई 2014 |url-status=dead }}</ref>, २९ मई १७३४ को सम्पूर्ण हुआ।<ref>सवाई जयसिंह : राजेंद्र शंकर भट्ट: नेशनल बुक ट्रस्ट (अंग्रेज़ी अनुवाद: शैलेश कुमार झा) २००५ संस्करण</ref> इस अश्वमेध यज्ञ के समय, जो राजसी-घोड़ा छोड़ा गया था, उसे कुछ कुम्मणियों ने जलमहल से आगे, जयपुर के एक और प्रवेशद्वार (जिसका नाम बाद में जोरावर सिंह गेट रखा गया) के पास ही पकड़ लिया और अन्त में जयसिंह के अश्व के साथ जा रहे सरदार जोरावर सिंह घोड़ा पकड़ने वालों से युद्ध करके मारे गये।<ref>डॉ॰ ज्ञान प्रकाश पिलानिया, 'Enlightened Government in Modern India: Heritage of Sawai Jai Singh' ('हेरिटेज ऑफ़ सवाई जयसिंह') ISBN 8187359161, ISBN 9788187359166</ref> ''दूसरा अश्वमेध यज्ञ बड़े पैमाने पर जयसिंह ने वर्ष १७४२ ई० में करवाया''। इन यज्ञों के अलावा जयपुर में [[पुरुषमेध यज्ञ]], [[सर्वमेध यज्ञ]], [[सोम यज्ञ]] आदि भी किये गये। इन यज्ञों के कारण देश के पंडित-जगत में इनकी बड़ी ख्याति हुई तथा सम्पूर्ण हिन्दू-समाज ने इनकी इस सांस्कृतिक-पहल की प्रशंसा की।<ref>संस्कृत के युग-पुरुष: मंजुनाथ': प्रकाशक: 'मंजुनाथ स्मृति संस्थान, जयपुर-302001</ref> आसपास की राजनैतिक उथल-पुथल के बावजूद जयपुर नगर उस समय विभिन्न विद्याओं, साहित्य और भारतीय-[[संस्कृति]] का आगार बन गया था। इसी कारण इसे '''दूसरी काशी''' भी कहा गया | [[कर्नल]] [[जेम्स टॉड]] ने भी माना है कि "महाराज सवाई जयसिंह ने जयपुर को हिन्दूविद्याओं का शरणस्थल बना दिया था। इस तरह भारत में सदियों से यज्ञादि की जो परम्परा लगभग बन्द हो चुकी थी, उन्हें महाराजा सवाई जयसिंह ने जयपुर राज्य में फिर से प्रारम्भ किया।"<ref>'राजस्थान का इतिहास' : लेफ्टिनेंट कर्नल जेम्स टॉड, 'साहित्यागार' प्रकाशन, जयपुर</ref> == सवाई जयसिंह का स्थापत्य-कला को योगदान == === जयपुर : शिल्पशास्त्र के आधार पर नई राजधानी === महाराजा सवाई जयसिह ने एक नया [[राजधानी]]-नगर बसाने का विचार आमेर से [[दक्षिण]] में छ: मील दूर [[पौष]] वदी १ वि. सं. १७८४ तदनुसार नवम्बर २९ ई० १७२७ को पं० [[जगन्नाथ सम्राट]] के माध्यम से शिलान्यास करते हुए क्रियान्वित किया। सम्पूर्ण नगर-योजना दरबार के प्रमुख वास्तुविद [[विद्याधर चक्रवर्ती]] की तकनीकी सलाह से निर्मित हुई। नक्शा पहले कपड़े पर अमिट काली स्याही से तैयार किया गया। सवाई ने तालकटोरा तालाब बनवाया, मानसागर झील में '[[जल महल|जलमहल]]' निर्मित करवाया, प्राचीन कछावा किले [[जयगढ़ दुर्ग|जयगढ़]] का पुनरुद्धार किया, आमेर के जो महल-भाग [[मिर्जा राजा जयसिंह|जयसिंह (प्रथम)]] ने बनवाए थे, उन सब का विस्तार किया तथा सुदर्शनगढ़ का महल भी बनवाया जिसको आज नाहरगढ़ का किला भी कहते हैं। विविध कला-कौशल विकास हेतु '६४ कारखाने' अर्थात् अलग-अलग विभाग स्थापित किये, नगर के बाहर आगरा रोड पर इनके द्वारा अपनी सिसोदिया रानी के लिए एक ग्रीष्मकालीन बाग़ और महल बनवाया गया। शहर में [[कल्कि]] का मंदिर और यज्ञस्तम्भ के पास भगवान [[विष्णु]] का मंदिर भी इन्होनें बनवाया। [[मथुरा]] में [[सीता]][[राम]]जी का और [[गोवर्धन पर्वत|गोवर्धन]] में गोवर्धनधारी के मंदिर भी इन्होनें ही बनवाये।<ref>सवाई जयसिंह : राजेंद्र शंकर भट्ट: [[राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत|नेशनल बुक ट्रस्ट]] (अंग्रेज़ी अनुवाद: शैलेश कुमार झा) २००५ संस्करण</ref> [[File:आमेर महल का दीवाने-आम.JPG|thumb|आमेर महल का दीवाने-आम : छायाकार: हे.शे.]] === नगर का वास्तु-कौशल === नए नगर को ९ सामान क्षेत्रफल वाले खंडों (चौकड़ियों) में बांटा गया था, जिसके दो खण्ड मुख्य राजमहल 'चन्द्रमहल', विभिन्न राजकीय कारखानों, कुछ खास मंदिरों तथा वेधशाला के लिए आरक्षित रखे गये थे। सूरजपोल दरवाज़े से चांदपोल दरवाज़े तक सड़क की लम्बाई दो मील और चौड़ाई १२० फीट रखी गयी। इसी महामार्ग पर मध्य में तीन सुन्दर चौपड़ों का निर्माण भी प्रस्तावित किया गया जो यहाँ लगे हुए फव्वारों के लिए भूमिगत जलस्रोतों से जुड़े थे। शहर के चौतरफ बनाये गए परकोटे की दीवार २० से २५ फुट ऊंची तथा ९ फीट चौड़ी रखी गयी। इस परकोटे में (शहर में आने - जाने के लिए) सात सुन्दर प्रवेशद्वारों का निर्माण भी किया गया। रात को नगर-सुरक्षा हेतु इन्हें बंद कर दिया जाता था। सुन्दर राजसी राजमहल, भव्य-पाठशालाएं, बड़ी बड़ी, चौड़ी और एक दूसरे को समकोण पर विभाजित करती एकदम सीधी सड़कें, एक सी रूप-रचना के आकर्षक बाज़ार, जगह-जगह कलात्मक मंदिर, (राजा [[राम]] की [[अयोध्या]] के वास्तु से प्रभावित) आम-भवन-संरचनाएं, सड़कों के किनारे लगे घने छायादार पेड़, पीने के पानी का समुचित प्रबंध, व्यर्थ-जल-निकासी की उपयुक्त व्यवस्था, उद्यान, नागरिक-सुरक्षा, आदि इन सब बातों का पूर्व-नियोजन सवाई जयसिंह ने अपने नगर-कौशल में सफलतापूर्वक किया। === जयपुर पर केन्द्रित संस्कृत महाकाव्य === कविशिरोमणि [[भट्ट मथुरानाथ शास्त्री]] ने सन 1947 में 476 पृष्ठों में प्रकाशित अपना एक यशस्वी काव्य-ग्रन्थ [[जयपुर-वैभवम]] तो जयपुर के नगर-सौंदर्य, दर्शनीय स्थानों, देवालयों, मार्गों, यहाँ के सम्मानित नागरिकों, उत्सवों और त्योहारों आदि पर ही केन्द्रित किया था। <ref>{http://www.sanskrit.nic.in/DigitalBook/J/Jaipurvaibhavam.pdf {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131126095023/http://www.sanskrit.nic.in/DigitalBook/J/Jaipurvaibhavam.pdf |date=26 नवंबर 2013 }}</ref> === खगोलशास्त्र और सवाई जयसिंह === [[चित्र:Jai obs.jpg|Jai obs.jpg|right|thumb|300px|जयपुर वेधशाला का विहंगम दृश्य]] जयपुर के पुराने राजमहल' चन्द्र महल' के उत्तर में जयपुर नरेशों के आराध्य देव [[गोविंद देवजी का मंदिर|गोविन्ददेव जी]] का मन्दिर है, [[दुनिया]] भर में [[जंतर मंतर]] के नाम से मशहूर विशाल [[वेधशाला]] भी यहीं मौजूद है<ref>|https://hi.wikipedia.org/s/ecr</ref> पत्थर के विशाल [[यंत्र]] और ग्रह नक्षत्रों की गणना के लिए बने ''<ref>Michiel Schwarz, (1980) Observatoria : de astronomische instrumenten van Maharaja Sawai Jai Singh II in New Delhi, Jaipur, Ujjain en Benares, Amsterdam : Westland/Utrecht Hypotheekbank</ref>,<ref>"Sawai Jai Singh and His Astronomy," by Virendra Nath Sharma, Motilal Banarasi Dass Publishers, Delhi (1995)</ref> इन गणना-उपकरणों के निर्माता सवाई जयसिंह को बचपन से ही गणित और खगोल ज्योतिष में बड़ी गहरी दिलचस्पी थी<ref>http://www.google.co.in/search?tbo=p&tbm=bks&q=inauthor:%22Jai+Singh+II+(Maharaja+of+Jaipur)%22/पृष्ठ २</ref> किन्तु महाराजा जयसिंह को खगोलविद्या में 'दीक्षित' करने का बड़ा श्रेय पंडित [[जगन्नाथ सम्राट]] को है। राजा को [[वेद]] पढ़ाने के लिए नियुक्त [[मराठी भाषा|मराठी]] सम्मानित विद्वान भारतीय ज्योतिर्विज्ञान को योगदान देते हुए सम्राट जगन्नाथ ने 'सिद्धान्त कौस्तुभ' की रचना की तथा [[यूक्लिड]] के [[रेखागणित]] का [[अरबी]] से [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] में अनुवाद किया। सवाई जयसिंह ने अपने गुरु ही के अनुसरण में यह अनुभव किया कि [[न्यूटन (इकाई)|न्यूटन]] [Newton] और [[फ्लेमस्टीड]] []John Flamsteed]] FRS (19 August 1646 – 31 December 1719) आदि द्वारा उल्लेखित यूरोपीय वैज्ञानिकों के पीतल या धातु के खगोल-यंत्रों से मौसम, तापमान, घिसाई, आदि कई कारणों से गणना फलावट में अक्सर अन्तर आ जाया करता है, इसलिए इन्होंने सबसे पहले १७२४ ईस्वी में दिल्ली की वेधशाला में धातु को छोड़ कर चूने और तराशे गए पत्थर से बड़े-बड़े गणना यंत्र बनवाये। फिर इसी तरह इन्होंने जयपुर में १७३४ में और सन १७३२ से १७३४ के बीच [[मथुरा]], [[वाराणसी|बनारस]] और [[उज्जैन]] में भी अपने वास्तुविद [[विद्याधर]] के मार्गदर्शन में सम्राट जगन्नाथ द्वारा विकसित उन्नत यंत्रों- सम्राट-यन्त्र (लघु), नाडी-वलय-यन्त्र, कांति-वृक्ष-यन्त्र, यंत्रराज, दक्षिनोदक-भित्ति-यन्त्र, उन्नतांश-यन्त्र, जयप्रकाश-यन्त्र, सम्राट-यन्त्र (दीर्घ), शषतांश यंत्र, कपालीवलय यन्त्र, राशिवलय यन्त्र, चक्र यंत्र, राम यन्त्र, त्रिगंश यन्त्र आदि से युक्त नई वेधशालाएँ बनवाई।<ref>http://www.google.co.in/search?tbo=p&tbm=bks&q=inauthor:%22Jai+Singh+II+(Maharaja+of+Jaipur)%22</ref>,<ref>{{Cite web |url=http://www.indiavisitinformation.com/indian-culture/indian-monument/Jantar-Mantar-in-india.shtml |title=संग्रहीत प्रति |access-date=11 जुलाई 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130729213946/http://www.indiavisitinformation.com/indian-culture/indian-monument/Jantar-Mantar-in-india.shtml |archive-date=29 जुलाई 2013 |url-status=dead }}</ref> मथुरा की वेधशाला नष्ट हो चुकी, काशी और उज्जैन की वेधशालाएं नष्ट होने के कगार पर हैं; अब केवल जयपुर और थोड़ी बहुत दिल्ल्ली की वेधशाला इनके वैज्ञानिक-व्यक्तित्व का स्मरण कराती हैं। === जयपुर दरबार में विदेशी विद्वान=== जब इनको मालूम हुआ कि पश्चिम के ज्योतिषीगण द्वारा खासतौर पर पुर्तगाल में पिछले कुछ वर्षों में खगोलविद्या पर काफी काम हुआ है, इन्होंने गोवा के पुर्तगाली-गवर्नर के मार्फत पुर्तगाल के बादशाह को अनेक तोहफे भेजे तथा गवर्नर के मार्फत पुर्तगाल से खगोल विद्वान Padre Manoel Figueiredo को जयपुर बुलवाया।<ref>Sharma, Virendra Nath (1995), Sawai Jai Singh and His Astronomy, Motilal Banarsidass Publications</ref> जयसिंह ने १७२७ में उसे (Manoel Figueiredo को) योरोप में इस विषय की सारी उपलब्ध नवीनतम पुस्तकें / रचनाएँ तथा दूर्वीक्षण यंत्र (टेलीस्कोप) लाने भेजा। वह जब नवम्बर १७३० में वापस आया तो अपने साथ खगोलज्ञ जेवियर डीसिल्वा को और कुछ दूरबीनें साथ लाया। जेवियर डीसिल्वा Pere de la Hire (1640-1718) की सारणी 'Tabulae Astronomicae' लिस्बन से अपने साथ लाया था। इन्होंने अपने विद्वानों की सहायता से उन सारणियों का अध्ययन किया और व्यावहारिक उपयोग के बाद उनमें त्रुटियाँ पाईं| अंततः इन्होंने ''अपने यंत्रों की गणना से पुनः नई सारिणी'' बनाई, जिसका बादशाह के नाम पर नाम '''जिज़-ए-मुहम्मदशाही''' रखा गया।<ref>A B Umasankar Mitra (1995) "Astronomical Observatories of Maharaja Jai Singh". School Science (NCERT) 23 (4): 45–48</ref> इनके दरबार में चन्द्रनगर से आया फ्रांसीसी खगोलज्ञ क्लाड बोडियर था। इनके दरबार में जर्मनी से फादर ऐन्टोइन गेवेल्स परगुइर व आद्रें स्टोब्ल भी आये थे। एक और हिन्दुस्तानी विद्वान, इनके यहाँ केवलराम था, जो गुजरात से आया था। उसने खगोल सम्बन्धी आठ ग्रन्थ लिखे थे। उसको सवाई जयसिंह ने 'ज्योतिषराय' की उपाधि भी दी।<ref>A B Umasankar Mitra (1995). "Astronomical Observatories of Maharaja Jai Singh".School Science (NCERT) 23 (4): 45–48</ref> महाराजा सवाई जयसिंह ने युद्ध और राजनीति में उलझे रहने के बावजूद, नगर-निर्माण और खगोलशास्त्र में बड़ा काम किया। इन्होंने भारतीय खगोलविद्या के साथ यूनान, मध्य एशिया और योरोप में जो ग्रन्थ लिखे गये थे तथा जो यंत्र बने थे, उनको मंगवा कर उनका परीक्षण व उपयोग किया। ''282 साल पहले लकड़ी, चूने, पत्थर और धातु से निर्मित यंत्रों के माध्यम से आकाशीय घटनाओं के अध्ययन की भारतीय विद्या को 'अद्भुत' मानते हुए इस स्मारक को ''विश्व धरोहर सूची'' में शामिल किया गया है|'' इन्हीं यंत्रों के गणना के आधार पर आज भी जयपुर के स्थानीय पंचांग का प्रकाशन होता है और हर बरस आषाढ़ पूर्णिमा को खगोलशास्त्रियों द्वारा 'पवन धारणा' प्रक्रिया से आने वाली वर्षा की भविष्यवाणी की जाती है। भारत में जयसिंह से पूर्व, खगोलशास्त्र में अनेक दशकों यहाँ तक कि सदियों से कोई 'बड़ा' या उल्लेखनीय कार्य नहीं हुआ था, सवाई ने इस सांस्कृतिक-निर्वात की पूर्ति की। <ref>Sharma, Virendra Nath (1995), Sawai Jai Singh and His Astronomy, Motilal Banarsidass Publ., pp. 8–9, ISBN 81-208-1256-5</ref><ref>{{Cite web |url=http://www.uwfox.uwc.edu/users/vsharma/paper.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 जुलाई 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140714231624/http://www.uwfox.uwc.edu/users/vsharma/paper.html |archive-date=14 जुलाई 2014 |url-status=dead }}</ref> ==== कल्कि का प्राचीन मन्दिर ==== [[चित्र:Kalki1790s.jpg|right|thumb|350px|कल्कि का ताम्रचित्र (१८वीं शती में निर्मित)]] जयपुर (राजस्थान, भारत) की 'बड़ी चौपड़' से आमेर की ओर जाने वाली सड़क सिरेड्योढ़ी बाज़ार में [[हवामहल]] के लगभग सामने भगवान [[कल्कि]] का प्राचीन मन्दिर अवस्थित है। जयपुर के संस्थापक सवाई जयसिंह ने पुराणों में वर्णित कथा के आधार पर कल्कि के मन्दिर का निर्माण सन् 1739 ई. में दाक्षिणात-शिखर-शैली में कराया था। संस्कृत विद्वान आचार्य देवर्षि [[कलानाथ शास्त्री]] के अनुसार, "सवाई जयसिंह संसार के ऐसे पहले महाराजा रहे हैं, जिन्होंने जिस देवता का अभी तक अवतार हुआ नहीं, उसके बारे में कल्पना कर कल्कि की मूर्ति बनवाकर मन्दिर में स्थापित करायी।" सवाई जयसिंह के तत्काली दरबारी कवि [[श्रीकृष्णभट्ट कविकलानिधि|श्रीकृष्ण भट्ट कविकलानिधि]] ने अपने ”कल्कि-काव्य“ में मन्दिर के निर्माण और औचित्य का वर्णन किया है। तद्नुसार ऐसा उल्लेख है कि सवाई जयसिंह ने अपने पौत्र ”कल्कि प्रसाद“ (सवाई ईश्वरी सिंह के पुत्र) जिसकी असमय मृत्यु हो गई थी, उसकी स्मृति में यह मन्दिर स्थापित कराया। यहाँ श्वेत अश्व की प्रतिमा संगमरमर में उत्कीर्ण है जो बहुत सुन्दर, आकर्षक और सम्मोहक है। अश्व के चबूतरे पर लगे बोर्ड पर यह इबारत अंकित है- ”अश्व श्री कल्कि महाराज-मान्यता- अश्व के बाएँ पैर में जो गड्ढा सा (घाव) है, जो स्वतः भर रहा है, उसके भरने पर ही कल्कि भगवान प्रकट होगें।“<ref>'जयपुर-दर्शन' सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978</ref> ====[[जयगढ़ दुर्ग|जयगढ़]] का दुर्ग ==== अनेक स्थानों पर इस दुर्ग [[जयगढ़ दुर्ग|जयगढ़]] का वर्णन किया जा चुका है, अतः पुनरावृत्ति अनावश्यक होगी। [https://web.archive.org/web/20140311093126/http://www.cs.utah.edu/~noliver/india/Forts/Jaigarh-AmberFort/Jaigarh.html] === समाज-सुधारक के रूप में सवाई जयसिंह === सवाई जयसिंह ने सभी समाजों के लिए परंपरा संबंधी सुधार-कार्य किये। ब्राह्मण समाज में कई सुधार करते हुए वैरागी साधुओं में व्याप्त व्यभिचार मिटाने के लिए इन्होंने उनको पुनर्विवाह कर अपनी पत्नी साथ रखने (गृहस्थ आश्रम में प्रवेश) का विधान किया। बादशाह से फकीरों व सन्यासियों की मृत्यु के बाद, उनकी सम्पत्ति राज्य के पक्ष में जब्त नहीं करने की आज्ञा जारी करवाई, किन्तु सन्यासियों को 'निजी सम्पत्ति' रखने से रोका। बादशाह से अनुरोध के बाद हिन्दुओं पर लगाया गया पुराना भयंकर टैक्स [[जज़िया|जजिया कर]] समाप्त करवाया, ब्राह्मणों और राजपूतों के शादीब्याह आदि में हैसियत से बाहर जा कर दहेज़ देने और मृत्युभोज आदि सामाजिक अवसरों पर धन की बर्बादी रोकने की कोशिश भी की। जगह-जगह धर्मशालाएं, कई संस्कृत पाठशालाएं और विद्यालय खोले, विधवा-विवाह का पक्ष लिया, स्त्री-हत्या, कन्या-वध रोका, 'सर्वधर्म समभाव' की भावना को बढ़ावा दिया, विशेषतः जयपुर में [[जैन धर्म|जैन]] संप्रदाय को प्रोत्साहित किया, दिल्ली, आगरा, अन्य स्थानों से बड़े २ व्यापारियों को ला कर जयपुर में बसाया, देश में घूम-घूम कर विद्वानों की खोज की, उन्हें राज-सम्मान बक्शा, बड़ी २ जागीरें दीं और उत्तर भारत के समूचे हिन्दू-समाज को ऐसे कठिन वक़्त बाहरी आक्रान्ताओं से मुक्त रखा, जब राजनैतिक उठापटक, केंद्र में प्रशासनिक अराजकता और अनेक राजपूताना राज्यों के बीच सर-फुट्टवल अपने चरम पर थी। <ref>'जयपुर-दर्शन' सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978 [पेज 203] प्रकाशक : जयपुर अढाई शती समारोह समिति, नगर विकास व्यास (अब जयपुर विकास प्राधिकरण) परिसर, भवानी सिंह मार्ग, जयपुर</ref> === शासन-व्यवस्था=== दिन प्रतिदिन का शासन राजा की आज्ञा से उनके दीवान चलाते थे। दीवानों या मंत्रियों की संख्या राजा की मर्जी के मुताबिक परिवर्तनशील थी। सेना संबंधी सारा काम बख्शी के अधिकार-क्षेत्र में था। जब सवाई जयसिंह गद्दी पर बैठे तब उनके तीन दीवान रामचन्द्र, किशनदास और बिहारीदास थे। वि. सं. १७५७ में इन्होने एक दीवान और बढ़ा कर चार कर दिये थे। वि. सं. १७७३-७४ में आठ दीवान थे।<ref name="ignca.nic.in"/> पहले आमेर-दरबार के लेखा-विभाग में 'जूनियर ऑडिटर' का काम कर चुके महान वास्तुविद [[विद्याधर चक्रवर्ती]] इनके राजस्व मंत्री (या देश-दीवान) थे। [https://hi.wikipedia.org/s/7fp7] [[File:जयगढ़ किले में प्रदर्शित तोप जयबाण.JPG|thumb|जयगढ़ किले में ढाली गयी तोप जयबाण जिसका परीक्षण केवल एक बार हुआ और जिससे छोड़ा गया लोहे का गोला लगभग २२ किलोमीटर दूर [[चाकसू]] के आसपास जा कर गिरा था! : छायाकार: हे.शे. ]] कुंवर [[नटवर सिंह]] ने लिखा है-"यदि जाटों का अभ्युदय न हुआ होता, तो जयपुर का राज्य यमुना-नदी तक फैल गया होता।"<ref>नटवर सिंह : हिन्दी अनुवाद : राधाकृष्ण प्रकाशन, दिल्ली से 2006 में प्रकाशित चर्चित पुस्तक 'महाराजा सूरजमल'(प्रथम प्रकाशन : इंग्लेंड से मूलतः अंग्रेज़ी में)[http://www.amazon.com/Maharaja-Suraj-Mal-1707-63-Times/dp/0049230727/ref=la_B001ICOTJW_1_7?s=books&ie=UTF8&qid=1403930933&sr=1-7]</ref> === जयपुर के सेना के कुछ सेना-अधिकारी === जयसिंह के प्रमुख सेनापतियों में कुशलसिंह राजावत (झिलाय), कोजूरामती राजावत (ईसरदा), दलेलसिंह राजावत (धूला), रावल शेरसिंह नाथावत (सामोद), मोहनसिंह नाथावत (चौमू), बखतसिंह नाथावत (मोरीजा), पदमसिंह चतुरभुजोत (बगरु), श्यामसिंह खंगारोत (डिग्गी), केशरीसिंह नरुका (लदाणा), जोरावरसिंह नरुका (मानपुर-मांचेडी), संग्रामसिंह नरुका (उनियारा), गजसिंह नरुका (जावली), दीपसिंह शेखावत (कासली), शार्दूलसिंह शेखावत (झुंझुनूं), शिवसिंह शेखावत (सीकर), दीपसिंह कुम्भाणी (भांडारेज) जोरावरसिंह, श्योब्रह्मा (पोता) आदि थे। [https://web.archive.org/web/20140714115524/http://www.ignca.nic.in/coilnet/rj089.htm] सेना दो प्रकार की होती थी जागीरदारों की सेना, जिसके एकत्र होने पर सवार और प्यादा आदि के हिसाब से रोजाना का खर्च दिया जाता था। खुद राज्य की ऐसी सेना बहुत छोटी होती थी जिसको मासिक तनख्वाह दी जाती थी। फौज में घुड़सवार सेना भी अपेक्षकृत कम होती थी। मुख्य अंगरक्षक, 'रिसाला' ही होता था जिसमें एक हजार घुड़सवार होते थे। बाकी पैदल सेना अधिक थी। जयसिंह ने अपनी सेना में तोड़ेदार बंदूकें शामिल कर दी थी, जिससे उनकी सेना की मारक-शक्ति बहुत बढ़ गई थी। ''यदुनाथ सरकार'' के शब्दों में- "{{Quotation| Jai Singh's regular army did not exceed 40,000 men, which would have cost about 60 lakhs a year, but his strength lay in the large number of artillery and copious supply of munitions, which he was careful to maintain and his rule of arming his foot with matchlocks instead of the traditional Rajput sword and shield - He had the wisdom to recognize early the change which firearms had introduced in Indian warfare and to prepare for himself for the new war by raising the fire-power of his army to the maximum}} इनका तोपखाना भी बड़ा प्रभावी तथा शक्तिशाली था। जयगढ़ में ही तोपें निर्मित की जाती थीं। तोपें ढालने का वह 'यंत्र' और सांचे अभी भी जयगढ़ किले की फाउंड्री में मौजूद है। जयगढ़ में रखी जो बड़ी तोप 'जैबाण' है, उसके मुकाबले की देशज तोपें देश में बहुत कम है। (चित्र) सेना की भर्ती, वेतन, रसद आदि आवश्यक कार्यों के लिए बख्शी का (बहुत महत्वपूर्ण पद) होता था।<ref name="ignca.nic.in"/> [[File:जयपुर में सवाई जयसिंह स्मारक.JPG|thumb|जयपुर में सवाई जयसिंह स्मारक :छायाकार: हे.शे.]] == निधन == इनके समकालीन राजदरबार के कवि श्रीकृष्णभट्ट ने लिखा है कि 'यह अन्तिम दिनों में गोविन्ददेव के ध्यान में लीन रहने लग गए थे।'<ref name="ReferenceA">'ईश्वर विलास' महाकाव्य, राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर</ref> सवाई जयसिंह की मृत्यु जयपुर में में आश्विन सुदी १४ वि॰सं॰ १८००, सितम्बर २१, सन १७४३ ई० को वृद्धावस्था और बीमार रहने के बाद हुई। <ref>[[यदुनाथ सरकार]] : वही : पृष्ठ 192</ref> उन्हें गैटोर में अग्नि दी गयी। इनके सत्ताईस रानियां थी, जिनमें से तीन इनकी चिता के साथ सती हुईं | उन रानियों की छतरी जयपुर-आमेर मार्ग पर (जलमहल से पहले) है। <ref>{{Cite web |url=http://www.pinkcity.com/hi/places-to-visit/queens-canopies/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=12 जुलाई 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140714171027/http://www.pinkcity.com/hi/places-to-visit/queens-canopies/ |archive-date=14 जुलाई 2014 |url-status=dead }}</ref> जेम्स टॉड ने लिखा है- {{quotation|चवालीस साल तक राज्य करके संवत १७९९ (सन १७४३) में सवाई जयसिंह की जयपुर में मृत्यु हो गयी| उसकी तीन विवाहित रानियाँ और अनेक उप पत्नियाँ उसके शव के साथ जल कर सती हुईं| उसने जिस विज्ञान की अपने जीवन भर उन्नति की थी, उसकी मृत्यु के बाद वह (जयपुर से) एकाएक लोप हो गई|...जयसिंह की यज्ञशाला के रजत-पत्तरों को उसके वंशज जगतसिंह ने निकलवा कर, उनके स्थान पर साधारण चांदी के पत्तर लगवा दिए| जयसिंह ने जिन ग्रंथों का संग्रह करने में जीवन भर अत्यधिक परिश्रम और धन व्यय किया था, उसके दो हिस्से कर डाले गए| उनके पुस्तकालय का एक भाग किसी प्रकार जयपुर की एक साधारण वेश्या ''(रसकपूर)'' के अधिकार में पहुँच गया!}} <ref>'राजस्थान का इतिहास' भाग-2 : लेफ्टिनेंट कर्नल जेम्स टॉड, पृष्ठ 119 'साहित्यागार' प्रकाशन, जयपुर</ref> == स्मारक और स्मृति-चिन्ह == * सवाई जयसिंह का एक बेहद सुन्दर स्मारक इनके पुत्र ईश्वर सिंह ने जयपुर में ब्रह्मपुरी के गैटोर में बनवाया!<ref>सवाई जयसिंह : राजेंद्र शंकर भट्ट: नेशनल बुक ट्रस्ट (अंग्रेज़ी अनुवाद: शैलेश कुमार झा) 2005 संस्करण]</ref> * जयपुर के [[स्टैच्यू सर्किल|स्टेचू सर्किल]] पर बंगाली मूर्तिकार ''महेंद्र कुमार दास'' से संगमरमर में बनवा कर इनकी १२ फीट ऊंची एक आकर्षक प्रतिमा राजस्थान शासन ने जयपुर शहर की २५० वीं सालगिरह के अवसर पर 1978 में स्थापित की। <ref>https://hi.wikipedia.org/s/nrh{{Dead link|date=सितंबर 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>. [https://web.archive.org/web/20141104204834/http://www.jaipur.org.uk/forts-monuments/statue-circle.html] * सवाई जयसिंह की स्मृति में नई दिल्ली में एक प्रमुख सड़क है। [https://web.archive.org/web/20131210111840/http://newdelhiymca.in/ymca_map.php] *इसी तरह जयपुर के बनीपार्क क्षेत्र की एक प्रधान सड़क 'जयसिंह हाइवे' कहलाती है। [https://web.archive.org/web/20140714164552/http://timescity.com/jaipur/event/sawai-jai-singh-road-location/] *खगोलशास्त्र के योग्य विद्वानों को 'सवाई जयसिंह सम्मान' जयपुर का भूतपूर्व राजघराना प्रतिवर्ष देता है। [https://web.archive.org/web/20140714234756/http://msmsmuseum.com/pages.php?id=27] *भारत सरकार ने इनके निर्माण जंतर-मंतर को [[एशियाई खेल]]ों के 'प्रतीक-चिन्ह' के रूप में स्वीकार करते इस पर एक डाक टिकट 1984 में जारी किया था। [https://web.archive.org/web/20140714182138/http://www.indian-visit.com/monuments-of-india/jantar-mantar-delhi.html] . [https://web.archive.org/web/20130729213946/http://www.indiavisitinformation.com/indian-culture/indian-monument/Jantar-Mantar-in-india.shtml] === उत्तराधिकारी === इनसे इनके तीन पुत्र थे-सबसे बड़े, दो लड़कों के पिता (२२ वर्षीय) ''शिवसिंह'', मंझले ''ईश्वरसिंह'' और सब से छोटे ''माधोसिंह'' |<ref>'जयपुर-दर्शन'</ref> ==== पुत्र शिवसिंह की मृत्यु==== शिवसिंह की मृत्यु का कारण '[[वंश भास्कर ]]' के ख्यात-लेखक ने यह बताया है कि मंझले पुत्र ईश्वरसिंह के उकसाने पर सवाई जयसिंह ने ज़हर दे कर अपनी रानी के सहयोग से स्वयं अपने टीकाई पुत्र की हत्या कर दी थी, पर [[यदुनाथ सरकार]] जैसे इतिहासकार इसे 'गप्प' मानते हैं और स्वीकार नहीं करते| उनके अनुसार " (अपने पिता की अनुपस्थिति में बादशाह द्वारा बनाये गए आगरा के सूबेदार) शिवसिंह की हैजे (कॉलेरा) से मथुरा में अकाल-मृत्यु १७२४ ईस्वी में हुई थी, जहाँ वह फौजदार पद पर थे|"<ref name="ReferenceB">Jadunath Sarkar : 'A History of Jaipur' : Orient BlackSwan, Page 193</ref> जब कि १९ वीं सदी के अंत में लिखे ग्रन्थ [[वीर विनोद]] (जिसे उदयपुर राज्य के शासक महाराणा सज्जन सिंह ने मेवाड़ के प्रामाणिक इतिहास लेखन का उत्तरदायित्व [[कविराज श्यामलदास]] को सौंपा था) में यह लिखा गया है "माधोसिंह ने अपने बड़े भाई शिवसिंह को विष दे कर मार डाला था|"<ref name="ReferenceB"/> सवाई जयसिंह इन तीन पुत्रों के अलावा दो पुत्रियां भी थीं पहली - ''विचित्र कंवर'', जिनका विवाह अभयसिंह (जोधपुर) और छोटी ''किशन कंवर'', जिनका विवाह बून्दी के राजा दलेलसिंह के साथ हुआ।<ref name="ReferenceA"/> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} *[https://web.archive.org/web/20061207200908/http://uqconnect.net/~zzhsoszy/ips/j/jaipur.html] *[https://web.archive.org/web/20150325205204/https://en.wikipedia.org/wiki/List_of_Rajputs] *[https://web.archive.org/web/20130711224658/http://genealogy/ of the rulers of Jaipur] *[http ://books.google.co.in/books?isbn=8126718013] *'जयपुर-दर्शन' प्रकाशक : प्रधान-सम्पादक : डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य: वर्ष 1978 [पृष्ठ 210] प्रकाशक : 'जयपुर अढाई शती समारोह समिति', नगर विकास व्यास (अब जयपुर विकास प्राधिकरण) परिसर, [[भवानी सिंह]] मार्ग, जयपुर-4 *'संस्कृत-कल्पतरु' : संपादक : [[कलानाथ शास्त्री]] एवं घनश्याम गोस्वामी: '[[मंजुनाथ शोध संस्थान]]', सी-8, पृथ्वीराज रोड, सी-स्कीम, जयपुर-302001 *डॉ॰ ज्ञानप्रकाश पिलानिया, 'Enlightened Government in Modern [[भारत|India]]: Heritage of Sawai Jai Singh ('हेरिटेज ऑफ़ सवाई जयसिंह') ISBN 8187359161, 9788187359166 *[[यदुनाथ सरकार]] : A History of Jaipur : Orient BlackSwan : ISBN 978-81-250-3691-3 *डॉ॰[[असीम कुमार राय]] की पुस्तक : "the history of jaipur city" *कविशिरोमणि [[भट्ट मथुरानाथ शास्त्री]]: '[[जयपुर-वैभवम]]' *चार शहरनामे : पुस्तक : हेमन्त शेष : शब्दार्थ प्रकाशन, जयपुर 2018 *Sarkar, Jadunath (1984, reprint 1994) A History of [[जयपुर]], New Delhi: Orient Longman, ISBN 81-250-0333-9 *Bowker, John, The Oxford Dictionary of World Religions, New York, Oxford University Press, 1997, p.&nbsp;103 *A B Umashankar Mitra (1995). 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Oriental MSS., The British Library London, England. == इन्हें भी देखें== *[[जंतर मंतर|जन्तर मन्तर]] *[[जगन्नाथ सम्राट]]—महाराजा जयसिंह द्वितीय के दरबार के महान गणितज्ञ एवं खगोलविद == बाहरी कड़ियाँ== * सवाई जयसिंह : [[राजेन्द्र शंकर भट्ट]]: [[राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत|नेशनल बुक ट्रस्ट]] (अंग्रेज़ी अनुवाद: शैलेश कुमार झा) २००५ संस्करण *'राजस्थान का इतिहास' भाग-2 : लेफ्टिनेंट कर्नल जेम्स टॉड, पृष्ठ 119 : वर्ष २०११ : 'साहित्यागार' प्रकाशन, जयपुर *[https://web.archive.org/web/20160411150452/https://books.google.co.in/books?id=7F_MJcTjDOQC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false Building Jaipur: The Making of an Indian City] (गूगल पुस्तक ; By Vibhuti Sachdev, Giles Henry Rupert Tillotson) *[https://web.archive.org/web/20180402230216/http://www.electroniki.com/Visitor/Art.aspx?sMID=9&sSMID=0&sArtID=288 जयसिंह और उनकी वेधशालाएँ] (शुकदेव प्रसाद) *[https://web.archive.org/web/20150814012719/http://www.internetindia.com/ashowkase/jaisingh.htm] *[https://web.archive.org/web/20140714113824/http://www.new1.dli.ernet.in/data1/upload/insa/INSA_1/20005b5c_131.pdf] *[https://web.archive.org/web/20140714215818/http://www.new1.dli.ernet.in/data1/upload/insa/INSA_1/20005ac0_249.pdf] [[श्रेणी:राजस्थान का इतिहास]] [[श्रेणी:जयपुर के लोग]] [[श्रेणी:राजस्थान के महाराजा]] [[श्रेणी:जयपुर]] [[श्रेणी:इतिहास]] [[श्रेणी:भारतीय वैज्ञानिक]] [[श्रेणी:भारतीय गणितज्ञ]] [[श्रेणी:भारत]] [[श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना]] [[श्रेणी:जयपुर के महाराजा]] {{जयपुर के महाराजा}} pj45map27u0qcgtjp3wzanw7475a1ji 6630394 6630393 2026-10-17T09:22:01Z Mundhalia746 934684 6630394 wikitext text/x-wiki {{Infobox royalty | succession = आमेर के राजा |image= [[File:1 Maharaja Sawai Jai Singh II ca 1725 Jaipur. British museum.jpg|250px|]] |caption = ब्रिटिश संग्रहालय में महाराजा सवाई जयसिंह (द्वितीय) का चित्र | reign = 5 मार्च 1699 – 18 नवंबर 1727 | succession1 = जयपुर के पहले राजा | reign = 5 मार्च 1699 – 18 नवंबर 1727 | reign1 = 18 नवंबर 1727 – 21 सितंबर 1743 | coronation = | predecessor = [[Bishan Singh]] | predecessor1 = | successor = [[Ishwari Singh of Jaipur]] | successor1 = [[ईश्वरी सिंह]] | succession2 = सूबेदार मालवा | cor_type2 = | reign2 = 25 अक्टूबर 1732 &ndash; 24 दिसंबर 1737 | coronation2 = | predecessor2 = मुहम्मद खान बंगाश | successor2 = [[निज़ाम-उल-मुल्क आसफजाह]] | dynasty = कछवाहा | predecessor =[[बिशन सिंह]] | successor = [[ईश्वरी सिंह]] | father = बिशन सिंह | mother = राठोरजी इंद्र कंवरजी | spouse = *रानी गौड़जी केसर श्योपुर-बड़ौदा *रानी खींचन सुख कँवर राघौगढ़ *रानी राणावत चँद्र उदयपुर-मेवाड़ *रानी सिसोदनी फूल कँवर बनेड़ा *रानी राठौड़ आनंद कँवर किशनगढ़ *रानी चूँडावत अमृत कँवर देवगढ़ *रानी जादौन इँद्र कँवर करौली *रानी हाड़ीजी उमेद कँवरजी बूंदी *रानी राठौड़ चंदन बांदनवाड़ा-अजमेर *रानी तंवर लाड लक्खासर-बीकानेर *रानी राठौड़ सूरज जोधपुर-मारवाड़ *रानी सोलंकिनी गुलाब अलीगढ़ टोंक *रानी राठौड़ बख्त अमझेरा-मालवा | issue = पुत्र :- *युवराज शिव सिंह *महाराजा सवाई ईश्वरी सिंह *महाराजा सवाई माधो सिंह पुत्रियां :- *बाईजी लाल विचित्र कँवरजी जोधपुर में विवाह *बाईजी लाल किशन कँवरजी बूंदी में विवाह | birth_date = 3 नवंबर1688 | birth_place = खरवा, अजमेर | death_date = 21 सितंबर 1743 | death_place = [[जयपुर]] }} {{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति |known_for = नगर-नियोजन, कूटनीति, राजनीति, हिंदुत्व, परंपरा-अनुरक्षण, शासन-विस्तार, पुस्तक-प्रेम, विज्ञान-प्रेम |alma_mater = संस्कृत, फ़ारसी, अरबी, मराठी, ज्योतिष, खगोलशास्त्र, धर्मशास्त्र, वैदिक-कर्मकांड आदि |title =सरामद-ए-राजा-ए-हिंदुस्तान श्री राजराजेश्वर राजराजेंद्र महाराजाधिराज }} ''सवाई जयसिंहजी''' या '''जयसिंह जी (द्वितीय) ''' (03 नवम्बर 1688 - 21 सितम्बर 1743)<ref>लेफ्टिनेंट कर्नल [[जेम्स टॉड]]:' [[राजस्थान]] का इतिहास' खंड-२ : प्रकाशक- 'साहित्यागार', जयपुर; अनुवाद: केशव ठाकुर : संस्करण २०१२</ref> अठारहवीं सदी में [[भारत]] में [[राजस्थान]] के [[आमेर|आमेर राज्य]] के कछवाहा राजवंश के सर्वाधिक प्रतापी शासक थे। सन [[१७२७]] में [[आमेर]] से दक्षिण छः मील दूर एक बेहद सुन्दर, सुव्यवस्थित, सुविधापूर्ण और [[शिल्पशास्त्र]] के सिद्धांतों के आधार पर आकल्पित नया शहर '[[जयपुर|सवाई जयनगर]]', बाद में ([[जयपुर]]) बसाने वाले नगर-नियोजक के बतौर उनकी ख्याति भारतीय-इतिहास में अमर है। [[वाराणसी|काशी]], [[दिल्ली]], [[उज्जैन]], [[मथुरा]] और [[जयपुर]] में, अतुलनीय और अपने समय की सर्वाधिक सटीक गणनाओं के लिए जानी गयी [[वेधशाला]]ओं के निर्माता, सवाई जयसिह एक नीति-कुशल [[महाराजा]] और वीर सेनापति ही नहीं, जाने-माने [[ब्रह्माण्ड|खगोल]] [[वैज्ञानिक]] और विद्याव्यसनी विद्वान भी थे।<ref>'भारत: एक खोज': [[जवाहरलाल नेहरू|जवाहर लाल नेहरु]] [ https://archive.org/details/DiscoveryOfIndia {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130530033424/http://archive.org/details/DiscoveryOfIndia |date=30 मई 2013 }}]</ref> उनका [[संस्कृत भाषा|संस्कृत ]], [[मराठी भाषा|मराठी]], [[तुर्की]], [[फ़ारसी भाषा|फ़ारसी]], [[अरबी]], आदि कई भाषाओं पर गंभीर अधिकार था। भारतीय ग्रंथों के अलावा [[गणित]], [[रेखागणित]], [[ब्रह्माण्ड|खगोल]] और [[ज्योतिष]] में उन्होंने अनेकानेक विदेशी ग्रंथों में वर्णित वैज्ञानिक पद्धतियों का विधिपूर्वक अध्ययन किया था और स्वयं परीक्षण के बाद, कुछ को अपनाया भी था। देश-विदेश से उन्होंने बड़े बड़े विद्वानों और खगोलशास्त्र के विषय-विशेषज्ञों को [[जयपुर]] बुलाया, सम्मानित किया और यहाँ सम्मान दे कर बसाया। <ref>डॉ॰ ज्ञान प्रकाश पिलानिया, 'Enlightened Government in Modern India: Heritage of Sawai Jai Singh' (हेरिटेज ऑफ़ सवाई जयसिंह) ISBN 8187359161, 9788187359166</ref> जयसिंह की गणित, वास्तुकला और खगोल विज्ञान में बहुत रुचि थी। उन्होंने अपनी राजधानी जयपुर सहित भारत के कई स्थानों पर जंतर मंतर वेधशालाओं का निर्माण किया। उनके पास यूक्लिड के "एलीमेंट्स ऑफ़ ज्योमेट्री" का संस्कृत में अनुवाद था <ref>Chandara, Bipan. History of Modern India. Orient Black Swan.</ref> <ref> Sarkar, Jadunath (1984, reprint 1994) A History of Jaipur, New Delhi: Orient Longman, ISBN 81-250-0333-9, p.157</ref> === सवाई की मौखिक-उपाधि === अपने पिता [[राजा विष्णुसिंह|महाराजा बिशन सिंह]] के असामयिक देहान्त के बाद २५ जनवरी [[१७००]] को ११ वर्ष की लगभग बाल्य-अवस्था में वे [[आमेर]] की गद्दी बैठे।<ref>'जयपुर प्रकाशक : प्रधान-सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978 :[पेज 203] प्रकाशक : जयपुर अढाई शती समारोह समिति, नगर विकास व्यास (अब जयपुर विकास प्राधिकरण) परिसर, भवानी सिंह मार्ग, [[जयपुर]]</ref> [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] ने उन्हें 'सवाई' की [मौखिक] उपाधि दी थी - जिसका प्रतीकात्मक-अर्थ यही है कि वे अपने समकालीनों से 'सवाया' (या सवा-गुना अधिक बुद्धिमान और वीर) थे। सुना जाता है जब [[दिल्ली]] बादशाह [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] के दरबार में युवा सवाई जयसिंह पहले-पहल हाजिर हुए, तो [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] ने एकाएक बालक जयसिंह के दोनों हाथ पकड़ लिए और पूछा "अब बताइये, आप क्या करेंगे?" इस पर प्रत्युत्पन्नमति जयसिंह होठों पर मुस्कान लिए निहायत शांत स्वर से बोले, "आलमपनाह ! हमारे यहां हिन्दुओं में विवाह पर एक परम्परा है। वर, वधू का एक हाथ अपने हाथ में लेकर इस बात की प्रतिज्ञा करता है कि वह उसका हाथ जिन्दगी भर नहीं छोड़ेगा, उम्र भर उसका साथ निबाहेगा! आज बादशाह सलामत खुद मेरा एक हाथ नहीं, मेरे दोनों ही हाथ जब अपने हाथ में ले चुके हैं, फ़िर मुझे किस बात की परवाह?" [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] को इस चतुराई भरे जबाब की उम्मीद न थी, लेकिन इस बुद्धिमत्तापूर्ण हाज़िरजवाबी से वह बहुत प्रसन्न हुआ।<ref>डॉ॰ ज्ञान प्रकाश पिलानिया, 'Enlightened Government in Modern India: Heritage of Sawai Jai Singh (हेरिटेज ऑफ़ सवाई जयसिंह)' ISBN 8187359161, ISBN 9788187359166</ref>,<ref>'राजस्थान का इतिहास' : गोपीनाथ शर्मा : शिवलाल अग्रवाल एंड कम्पनी, आगरा</ref>[[यदुनाथ सरकार]] ने अपने जयपुर इतिहास में इस 'उपाधि' के बारे में जो शब्द लिखे हैं-अविकल रूप से ये हैं-"{{Quotation|The new Rajah also gained the title of ''Sawai'', which means 'one and a quarter', because Aurangzeb was so pleased with this youthful prince's feats before Khelna that he cried out," You are more than a man, you are ''sawa''- ''i.e.,''a hundred and twenty five per cent hero'}}<ref>Jadunath Sarkar : 'A History of Jaipur' : Orient BlackSwan : Extracts from chapter ' Sawai Jai Singh's Early Career' Page 149</ref> कुछ दूसरे स्रोत बतलाते हैं 'सवाई' की उपाधि [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] द्वारा नहीं बल्कि बादशाह [[फ़र्रुख़ सियर|फर्रुख़ सियर]] द्वारा इन्हें दी गयी थी। <ref>'जयपुर-दर्शन' प्रकाशक : प्रधान-सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978 [पेज 203] प्रकाशक : जयपुर अढाई शती समारोह समिति, नगर विकास व्यास (अब [[जयपुर विकास प्राधिकरण]]) परिसर, [[भवानी सिंह]] मार्ग, जयपुर</ref> पर यह बात (जो शायद [[किंवदंती]] का रूप ले चुकी है) अधिकांश ग्रंथों में औरंगजेब के साथ जुडी मिलती है। == जन्म और माता-पिता== महाराजा सवाई जयसिंह जी द्वितीय का जन्म [[मार्गशीर्ष]] वदी 7 वि० सं० १७४५ ई० [दिनांक 4 [[नवम्बर]], [[१६८1|1688]]]<ref>Jadunath Sarkar : ' A History of Jaipur' page 149</ref> को [[राजा विष्णुसिंह|मिर्ज़ा राजा बिशन सिंह]] की रानी राठौड़,[[अजमेर]] में [[खरवा]] के जागीरदार राव केसरी सिंहजी की जेष्ठ पुत्री इँद्र‌ कँवर की कोख से हुआ। इनके छोटे भाई कुंवर विजय सिंह और बहन बाई लाल अमर कँवर थीं,जिनका विवाह पिता के मृत्युपरांत महाराजा सवाई जय सिंहजी द्वितीय ने बूंदी के महाराव बुद्ध सिंहजी के साथ उनकी पटरानी के रूप में सामोद (आमेर राज्य) में संपन्न करवाया। <ref>'जयपुर-दर्शन' प्रकाशक : प्रधान-सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978 [पृष्ठ 203] प्रकाशक : 'जयपुर अढाई शती समारोह समिति', जयपुर नगर विकास न्यास, (अब जयपुर विकास प्राधिकरण) परिसर, भवानी सिंह मार्ग, जयपुर Page 203</ref> [[File:Rajputana 1909.jpg|thumb|राजपूताना प्रान्त का एक पुराना मानचित्र]] == सवाई जयसिंह के शासन का सम्पूर्ण राजनैतिक इतिहास == === सत्ता का अधिग्रहण और नाम-परिवर्तन === राजा विष्णुसिंह की <nowiki>[[काबुल]]</nowiki> में रविवार ३१ दिसम्बर <nowiki>[[१६९९]]</nowiki> (रजब १९, जुलुसी वर्ष ४३) को मृत्यु<ref></nowiki>''Akhabarat'' : Jadunath Sarkar :'A History of Jaipur' : Page 147 :<nowiki></ref> होने पर [[मार्गशीर्ष]] सुदी ७ वि० सं० १७५६, जनवरी २५, १७०० ई० को ये आमेर की गद्दी पर बैठे। मृत्यु के प्रायः डेढ़ माह बाद १८ फ़रवरी १७०० को महाराष्ट्र के शाही-शिविर में मिर्ज़ा राजा बिशन सिंहजी का [[काबुल]] में हुए निधन की खबर पहुँची, तो दो दिन बाद (अर्थात २० फरवरी,१७०० को) बादशाह औरंगजेब ने उनके सबसे बड़े पुत्र का नाम ''विजय सिंह'' से बदल कर ''जयसिंह'' करते हुए, उन्हें आमेर की गद्दी का वारिस स्वीकार किया। बादशाह ने जयसिंह के छोटे भाई ''चीमा जी'' का नाम ''विजयसिंह'' रखा। <ref>Jadunath Sarkar : Page 149</ref> यदुनाथ सरकार के अनुसार "...जुलाई १६९८ में दक्षिण से लौटने के बाद से जयसिंह आमेर में ही बने रहे, जब कि बादशाह ने इन्हें हाजिरी देने के लिए कई 'कड़े बुलावे' भी भेजे| इनके पिता के समय से ही दिल्ली-बादशाह इनको अपनी सैनिक 'सेवा' में लेने के लिए हेतु दक्षिण में बुलाना चाहते थे। परन्तु राजा बिशन सिंहजी अपने पुत्र को दक्षिण में नहीं भेजना चाहते थे। लेकिन बादशाह के ज्यादा दबाव देने पर ई० १६९८ में ये महाराष्ट्र (दक्षिण) गये। (''वहां पहली भेंट में बादशाह ने इनकी तीव्र बुद्धि देख कर इन को 'सवाई' कहा था। तभी से इनके नाम के पहले सवाई की उपाधि लग गई, जो अभी तक जयपुर के भूतपूर्व राजाओं के नाम के साथ जुड़ी हुई है''।) आठ महीने मुग़ल शिविर में रह कर ये वापस अपनी राजधानी [आमेर] लौट आये। ===औरंगजेब और जयसिंह === गद्दी पर बैठने के तुरंत बाद, जैसा ऊपर लिखा गया है, इन्हें नवम्बर १७०० में दक्षिण में अपनी सेना के साथ मुग़ल बादशाह की फ़ौज के रूप में लड़ने के लिए बुलाया गया था, पर किसी न किसी तरह जयसिंह बराबर टालमटोल करते रहे। वह जब कई शाही-आदेशों की अवहेलना कर चुके, तो अंततः इन्हें 'जबरन' ले आने को बादशाह ने कुछ हरकारे आमेर तक भी भेजे| इनकी अनुपस्थिति से नाराज़ बादशाह औरंगजेब ने इन से आमेर [[राजा]] का खिताब तो नहीं छीना, पर १३ सितम्बर १७०१ को इन्हें 'पदावनत' करते हुए मात्र ५०० जात, १०० सवार का मामूली [[मनसबदार]] बना दिया। कठिन मार्ग और वर्षा से अवरुद्ध रास्तों से जूझते बुरहानपुर में पड़ाव डाल कर अक्टूबर १७०१ में इनके दक्षिण में पहुँचने पर इन्हें औरंगजेब के पोते (सेना-अधिकारी और पुत्र आलम शाह के पुत्र) शाह बिदरबख्त के पास पन्हाला की सुरक्षा के लिए उनका सैन्य-सहयोगी नियुक्त किया गया।<ref>Jadunath Sarkar : IBID : Page 150</ref> === सवाई जयसिंह की आरंभिक सामरिक-सफलताएं और बादशाह औरंगजेब के पूर्वाग्रह === [[File:In-jaipu.gif|thumb|तत्कालीन आमेर का पंचरंगा ध्वज]] औरंगजेब के पोते शाह बिदरबख्त के नेतृत्व में बादशाही सेना ने 11 मई ई० 1702 को खिलना के किले पर भारी हमला किया। इसमें आमेर और मुग़ल संयुक्त-सेना की बहुत जनहानि हुई, पर दीवारों को तोड़ कर सबसे पहले जयसिंह की कछवाहा सेना ही खिलना-दुर्ग में प्रविष्ट हुई। उसकी बुर्ज पर आमेर का 'पंचरंगा झंडा' फहराया गया। (''इस समय जयसिंह की उम्र केवल १४ वर्ष थी)।'' खिलना-युद्ध में इनका वीर और भरोसेमंद दीवान बुद्धसिंह मारा गया। इस खिलना-विजय पर बादशाह औरंगजेब द्वारा इनका मनसब बढ़ा कर पहले एक हज़ार, फिर [[शाह बिदरबख्त]] के अनुरोध के बाद २००० (दो हजार जात) का कर दिया गया। बादशाह की छः साल की 'कठिन सेवा' का महज़ यह प्रतिदान जयसिंह को मिला! इसके बाद जब शाहजादा बिदरबख्त मालवे का सूबेदार हुआ, तब उसने जयसिंह की सेवाओं का सम्मान करते उन को वहाँ का [[नायब सूबेदार]] बना दिया, जिसे औरंगजेब ने तत्काल ही 'नामंजूर' कर दिया तथा एक फरमान लिखा कि ''आइन्दा किसी भी हिन्दू को मामूली फौजदार तक भी नहीं बनाया जाए''।'<ref>'अहकाम-ए- आलमगिरी' : इयानतुल्ला) सन्दर्भदाता : यदुनाथ सरकार : वही: पृष्ठ १५२</ref> विडम्बना हैरतंगेज़ है कि जिस औरंगजेब ने कभी इन्हें 'सवाई' कह कर सम्मान दिया वही बाद में वस्तुतः इनसे इस कदर नाराज़ और पूर्वाग्रहग्रस्त था कि उसने ये अपमानजनक आज्ञा जारी की- "''जयसिंह को मसनद पर आसन न दे कर, नीचे ज़मीन पर बिछी 'सुजनी' पर बैठने को कहा जाय!''"<ref>यदुनाथ सरकार : ''वही'' पृष्ठ १५२</ref> इसी बीच ई० 1704 में दो बादशाही फौजदारों ने स्थानीय मदद ले कर ठाकुर कुशल सिंहजी राजावत से सवाई माधोपुर में आज स्थित [[झिलाय]] ठिकाने की जागीर छीन कर १३ नवम्बर 1704 को जयसिंह (आमेर राज्य) को सौंप दी। दूसरे साल ई० 1705 में शाह बिदरबख्त ने अपनी तरफ से इनके पक्ष में फिर से कोशिश करके जयसिंह को मालवा का भी नायब सूबेदार बनवा दिया।<ref name="यदुनाथ सरकार : पृष्ठ १५३">यदुनाथ सरकार : पृष्ठ १५३</ref> पर जब तक औरंगजेब जीवित रहा, मुग़ल खेमे में इनका प्रभाव मद्धम सा ही रहा। === औरंगजेब की मृत्यु के बाद === ई० 1707 में 21 फ़रवरी को [[औरंगज़ेब|औरंगजेब]] के देहांत के बाद मुग़ल-गद्दी के लिए उसके बेटों में विकट-संघर्ष शुरू हो गया। शाह आजम ने आगरा व दिल्ली पर चढ़ाई की। उस समय तक उसने इनका मनसब 5000 जात 500 सवार का कर दिया था। 18 जून 1707 ई० को मौजम (मुअज्जिम) और आज़म की सेनाओं के बीच आगरा के 20 मील दक्षिण में [[जाजू का युद्ध]] हुआ। जयसिंह मौजम (मुअज्जिम) के साथ थे तथा इनके सगे छोटे भाई चीमाँ जी (विजयसिंह) आज़म की सेना की तरफ। इस युद्ध में मौजम और उनके पुत्र मारे गये। जाजू की लड़ाई में आज़म की विजय हुई। इसी युद्ध में जयसिंह तथा अखेसिंह टोरड़ी भी घायल हुए | इनके कई सरदार- बिहारीदास (दांतरी), केशरीसिंह (हरसोली), सूरसिंह (हरमाड़ा) आदि मारे गये। युद्ध के आखरी समय में जयसिंह बूंदी के राजा अपने बहनोई [[बुधसिंह हाडा|महाराव बुधसिंहजी हाड़ा]] के मारफत युद्ध में विजयी आज़म से जा मिले, परन्तु उसने इनका खास स्वागत नहीं किया।<ref name="यदुनाथ सरकार : पृष्ठ १५३"/>,<ref name="ignca.nic.in">{{Cite web |url=http://www.ignca.nic.in/coilnet/rj089.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=8 जुलाई 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140714115524/http://www.ignca.nic.in/coilnet/rj089.htm |archive-date=14 जुलाई 2014 |url-status=dead }}</ref> === आमेर पर हमले और अपमानित जयसिंह === जयसिंहजी के छोटे भाई विजयसिंहजी, बादशाह को खुश करने के लिए अपनी बहन बाईजीलाल अमर कँवरजी का विवाह बादशाह बहादुरशाह (प्रथम) से करवाना चाहते थे। उन्होंने इसकी खबर दिल्ली भेज दी तथा महाराव बुद्धसिंहजी हाड़ा को छुट्टी जाते समय जय सिंहजी ने रास्ते में रोक कर उनसे सामोद में यह विवाह करवा दिया। नये बादशाह बहादुरशाह (प्रथम) ने इसके बाद राजस्थान पर चढ़ाई की। जनवरी १७०८ ई० में वह आमेर पहुँचा और उसे [[ख़ालसा|खालसा]] कर लिया। जयसिंहजी से आमेर की जागीर जब्त करके बादशाह बहादुरशाह (प्रथम) द्वारा १० जनवरी १७०८ को उनके छोटे भाई विजयसिंहजी (चीमाजी) को अनेकानेक महंगे उपहारों सहित दे दी गयी। सवाई जयसिंहजी का राजनैतिक कद घटा कर एक मामूली 'मनसबदार' के रूप में कर दिया गया। <ref>यदुनाथ सरकार : पृष्ठ १५४</ref> बादशाह इसके बाद अजमेर होकर दक्षिण के लिए अपने भाई [[कामबक्श]] से मुकाबला करने को बढ़ा। [[आमेर]] और [[जोधपुर]] के दोनों राजा [[मंडलेश्वर]] के इलाके तक उसके साथ ही गये। जब उन्हें यह आशा नहीं रही कि बादशाह उनके इलाके उन्हें वापस लौटाएगा तो उन्होंने [[दुर्गादासजी राठौड़]] की राय से, जब बादशाह नर्बदा नदी पार करने को रवाना हुआ, २० अप्रैल १७०८ वैशाख सुदी १३ को बादशाही-शिविर छोड़ दिया और वे राजपूताना की ओर वापस रवाना होकर [[मेवाड़]] [[उदयपुर]] पहुँचे। यहाँ [[महाराणा प्रताप]] के पर-पर-पर-पर पौत्र और उस समय के [[राणा अमरसिंह|महाराणा अमरसिंहजी द्वितीय]] ने इनका स्वागत किया,इनकी सहायता हेतु एवं राजपूत संघ को पुनः जागृत करने के लिए अपनी पुत्री बाईजी लाल चँद्र कँवरजी जयसिंह को 25 मई सन् 1708 में ब्याही और यह वचन लिया की वो मुगल सत्ता से कोई संबंध नहीं रखेंगे खास कर कोई भी कन्या विवाह हेतु नहीं देंगे तथा मेवाड़ी रानी से उत्पन्न पुत्र को आमेर-जयपुर की राजगद्दी का उत्तराधिकारी बनाएंगे और एक जुट होकर राजपूत संघ का नवनिर्माण करेंगे। यहाँ से तीन राजाओं की ३० हजार सेना ने संयुक्त-रूप से जोधपुर पर हमला करके ८ जुलाई १७०८ ई० को उसे अपने अधिकार में कर लिया। राजा अजीत सिंहजी ने जोधपुर में जयसिंहजी का टीका किया। यहाँ से उन्होंने हिन्दुस्तान के अनेक राजाओं को मुगलों के विरुद्ध एकत्र होने संबंधी पत्र भी लिखे।<ref name="ignca.nic.in"/> [[जोधपुर]] से विजय सिंह शासित आमेर पर अधिकार करने को दो सेनाएँ भेजी गयीं। एक [[दुर्गादास राठौड़]] के नेतृत्व में, जिसका सैयदों से [[काला डेरा]] के पास युद्ध हुआ। दूसरी सेना में, महाराजा जयसिंह का दीवान रामचन्द्र और श्यामसिंह के अधीन २० हजार घुड़सवार थे। इनका [[रतनपुरा]] के पास [[आमेर]] के फौजदार हुसैन खाँ से युद्ध हुआ, जिसमें उन्होंने उसे परास्त करके आमेर पर अपना अधिकार कर लिया।<ref name="ignca.nic.in"/> इसके बाद इन दोनों राजाओं के विरुद्ध मेवात के फौजदार सैयद हुसेन खां, अहमद खां फौजदार बैराठ सिधाना और गारात खां फौजदार नारनोल को [[सांभर]] भेजा गया । दोनों राजाओं के इन फौजदारों से [[सांभर]] में ३ अक्टूबर ई० १७०८ को भीषण युद्ध हुआ, जिसमें मुगलों की विजय हुई। युद्ध के बाद विजय की खुशी में मुगलों की महफिल हो रही थी। इसी समय राव संग्रामसिंहजी [[उनियारा]] के नेतृत्व में नरुका लड़ाके वहाँ पहुँचे और एक रेत के टीबे पर चढ़े, जिसके नीचे सैयद आदि शराब की महफिल कर रहे थे। नरुकों ने उन पर एकाएक बन्दूकों और तीरों से भयानक हमला किया। उसमें सब मुग़ल फौजदार मारे गये तथा मुगलों की जीती हुई बाजी हाथ से निकल गई। फिर जयसिंह ने एक पत्र बादशाह के विरुद्ध दुर्गादास को लिखा कि "उदयपुर महाराणा से बात की जाए ...मराठों को मिला कर मुग़लों के विरुद्ध राजपूतों को वही करना चाहिए जो 'हिन्दुस्तान' के लिए गौरव की बात हो।"<ref name="ignca.nic.in"/> बादशाह बहादुरशाह जब दक्षिण से वापस लौटा, तो उसने यह जरुरी समझा कि किसी तरह [[जोधपुर]] और [[आमेर]] (जयपुर) दोनों राजाओं से समझौता किया जाए। इन्हें लाने के लिए उसने [[बुधसिंह हाड़ा]] राजा [[बूँदी जिला|बून्दी]] को भेजा, जिनके मारफत २१ जून ई० १७१० को ये [[अजमेर]] के पास बादशाह के सामने हाजिर हुए। बादशाह ने इनके जब्त किये राज्य वापस लौटा दिए और इन दोनों को ४००० जात ४००० सवार के मनसब भी दिये। उस समय तक भी राजपूतों का मुगलों पर बिल्कुल विश्वास नहीं था, इसलिए जब सवाई जयसिंह अजमेर में बादशाह के शिविर में गये तब अजमेर के तमाम पहाड़ तथा घाटियाँ राजपूत-सैनिकों से भरी हुई थीं। मनसब बढ़ने और इलाके वापस आने पर भी उन्हें बहादुरशाह की नीयत पर कभी भी पूर्ण विश्वास नहीं हुआ।<ref name="ignca.nic.in"/> === जयसिंह द्वारा छलपूर्वक अपने भाई विजयसिंह की गिरफ्तारी === जयसिंह के भाई विजयसिंह के साथ भी कुछ ऐसा हुआ कि (जन्म चैत सुदी ६ वि. १७४७) निराश होकर अन्त में मुगल दरबार छोड़ कर [[हिन्डौन]] आ गए। जयसिंह को भाई विजयसिंह की तरफ से सशस्त्र विद्रोह खतरा तो बना हुआ था ही। इन्होंने १७१३ ई० में विजयसिंह से समझौता करने और 'राजमाता से भेंट' करने के नाम पर अपने सशस्त्र सैनिकों एवं सरदारों समेत [[सांगानेर]] जा कर धोखे से उनको कैद करवा दिया<ref>लेफ्टिनेंट कर्नल जेम्स टॉड: 'राजस्थान का इतिहास' खंड-2 : प्रकाशक- 'साहित्यागार', जयपुर; अनुवाद: केशव ठाकुर : संस्करण 2012</ref> और जयगढ़ किले में भेज दिया। (वहीं वे अन्त में मारे भी गये।) विजयसिंह के इस 'हत्याकाण्ड' में श्यामसिंह खंगारोत विशेष सहायक रहा। [[बहादुर शाह (प्रथम)]] की मृत्यु के बाद उसके उत्तराधिकारी [[जहाँदरशाह]] ने [[आमेर]] और [[मारवाड़]] दोनों राजाओं को फिर अपने पक्ष में करना चाहा। उसने दोनों को ७००० जात व ७००० सवार का मनसब भी दिया, परन्तु इस बार इन्होंने मुग़ल-उत्तराधिकारी के आपसी संघर्ष में औरंगजेब के पुत्रों से दूर ही रहने का फैसला किया। [[फ़र्रुख सियर]] के मुग़ल बादशाह बनने के बाद हुसैन अली सैयद ने श्यामसिंह खंगारोत को बुलवाया तथा उनसे बात करके जयसिंह को बादशाह से ५००० जात ४५०० सवार का मनसब दिलवाया। जब अतसिंह का बादशाह के साथ मतभेद हो गया, तब बादशाह ने सैयद हुसैन अली को सेना लेकर [[अजमेर]] भेजा जहाँ अतसिंह ने कब्जा कर लिया था। उस समय जयसिंह भी हुसैन अली सैयद के साथ थे। अन्त में अतसिंह से सन्धि हुई।<ref name="ignca.nic.in"/> === मराठे और जयसिंह === अक्टूबर १७१३ ई० में इन्हें बादशाह [[फ़र्रुख सियर]] ने [[मालवा]] की सूबेदारी प्रदान की। इन्होंने वहाँ की अनेक बगावतें दबाई व मरहठों के उपद्रव भी कुचले। मरहठों की एक बड़ी सेना जब मालवे में घुसी तब इन्होंने [[पलसूद]] के पास उसे बड़ी करारी हार दी। मराठी सेना के लोग भाग कर पलसूद में ठहरे थे। जयसिंह ने रात में ही उन पर हमला कर दिया। इनकी सेना को देखते ही वे भाग निकले व [[नर्वदा]] नदी पार कर गये। उनकी लूट का सब माल वहीं रह गया। मालवा में [[महाराजा छत्रसाल|छत्रसाल बुन्देला]] भी इनके साथ थे। १७१५ ई० में इनको दिल्ली बुला लिया गया। तब इनकी अनुपस्थिति में इनके धाभाई रुपाराम को इन्होंने वहां नायब बना कर रखा। १७१७ तक ये मालवा के सूबेदार रहे। बादशाह [[फ़र्रुख सियर]] ने [[भीमसिंह हाडा]] राजा [[कोटा]] को [[बूँदी जिला|बून्दी]] की रियासत दे दी थी और उसने बून्दी पर कब्जा भी कर लिया था। जयसिंह ने प्रयास करके बादशाह से बून्दी वापस राजा बुधसिंह हाडा को दिलवायी।<ref name="ignca.nic.in"/> === भरतपुर में विफलता=== दिल्ली से बादशाह ने इनको [[भरतपुर]] के [[चूड़ामन|चूड़ामन जाट]] पर चढ़ाई करने की आज्ञा दी, जिसने [[आगरा]] के इलाके में लूटमार से बड़ा उपद्रव मचा रखा था। इनके साथ बून्दी के बुद्धसिंह, [[कोटा]] के भीमसिंह, नरवर के गजसिंह, [[दुर्गादास राठौड़]] व कई अन्य मनसबदार भी नियुक्त किये गये। १५ सितम्बर १७१६ को ये अपनी फौज ले कर [[मथुरा]] के लिए रवाना हुए। नवम्बर में [[चूड़ामन]] के प्रसिद्ध किले [[थूण का घेरा]] शुरू किया। वर अब्दुल्ला खां सैयद, जयसिंह के विरुद्ध था तथा चूड़ामन को मदद दे रहा था। इससे इन्हें इस अभियान में सफलता नहीं मिल पाई। वर अब्दुल्ला खां सैयद ने अन्त में बीच में पड़ कर थून का घेरा उठवा लिया। मई १७१८ में जयसिंह की वापसी [[दिल्ली]] हुई। चूडामन के इलाके में इस असफलता के बावजूद बादशाह ने इनका बड़ा सम्मान किया।<ref name="ignca.nic.in"/> सैयदों और बादशाहों के बीच तलवारें खिंच चुकी थी। जयसिंह ने बादशाह [[फ़र्रुख सियर]] को बहुत समझाया कि सैयदों से युद्ध करके उन्हें हमेशा के लिए साफ कर देना चाहिए। उस समय उनके पास २० हजार राजपूत सवार दिल्ली में मौजूद थे तथा बून्दी के बुद्धसिंह हाडा भी उन्हीं के साथ थे। परन्तु बादशाह की यह सैन्य कार्यवाई करने की हिम्मत नहीं हुई। वह सैयदों को किसी तरह खुश करने में लगा रहा। अन्त में सैयदों ने बादशाह से जयसिंह को दिल्ली से जाने को कहलवा दिया। जयसिंह ने बादशाह को सचेत किया कि उनके जाने से बादशाह की जान को खतरा हो जाएगा लेकिन यह सलाह बादशाह की समझ में नहीं आई। १३ फ़रवरी १७१९ ई० को जयसिंह दिल्ली से रवाना हुए। उसके कुछ ही घंटों बाद भींमसिंह कोटा राजा ने बुधसिंह बूंदी पर आक्रमण कर दिया। उनके स्वामिभक्त सरदार जैतसिंह ने बड़ी वीरता से कोटा की सेना को रोका तथा बुधसिंह को सुरक्षित वहाँ से निकाल दिया। वे भाग कर सवाई जयसिंह के पास पहुँचे। १७- १८ अप्रैल को सैयद भाइयों, अतसिंह जोधपुर और भीमसिंह कोटा ने मिल कर दिल्ली में बादशाह फर्रूखशियर को मार डाला।<ref name="ignca.nic.in"/> === सैयद और जयसिंह === जयसिंह ने [[इलाहाबाद]] के सूबेदार छबीला राम और निजाम से सैयदों के विरुद्ध भी पत्र-व्यवहार किया। वे चाहते थे कि सब मिल कर सैयदों को अपदस्थ कर दें। इन्होंने [[महाराजा छत्रसाल|छत्रसाल]] बुन्देला को भी युद्ध के लिए बुलाया। सैयदों ने कई सेनाएँ इनके विरुद्ध कई तरफ से घेरने के लिए भेजीं| वर अब्दुल्ला खां ने ५ जुलाई को नाममात्र के बादशाह रफीउदुल्ला को साथ लेकर जयसिंह पर चढ़ाई की और मथुरा होता हुआ वह आगरा पहुँचा, जहाँ सैयदों के विरुद्ध बगावत हो रही थी। जयसिंह ने भी सैयदों से पूरे तौर से मुकाबला करने की तैयारी कर ली थी पर युद्ध में रवाना होने के पहले उन्होंने ब्राह्मणों को बुलाकर आमेर राज्य दान में दे दिया और केसरिया बाना धारण करके वे सैयदों से लड़ाई के लिए रवाना हुए। ये आमेर से आगे बढ़ कर [[टोडा रायसिंह]] तक पहुँच गये थे। पर निजाम और छबीलाराम दोनों ही वायदे के अनुसार इनके पक्ष में कायम नहीं रहे।<ref name="ignca.nic.in"/> जयसिंह को निराशा हाथ लगी। === जोधपुर में विवाह === अन्त में राजा अजीत सिंहजी जयसिंहजी को अपने साथ जोधपुर ले गये जहाँ उन्होंने 20 मई सन् 1720 में अपनी पुत्री बाईजी लाल सूरज कँवरजी का शुभ विवाह जय सिंहजी के साथ करवा दिया। सैयदों ने जयसिंहजी को २० लाख रुपये दिये, जिससे वे आमेर वापस ब्राह्मणों से वापस खरीदें। उस समय भी जयसिंहजी को राजा अजीतसिंहजी जोधपुर पर विश्वास नहीं था इसलिए वे अपने विवाह में भी जिरहबख्तर पहन कर गये थे।<ref name="ignca.nic.in"/> === निज़ाम और जयसिंह === सैयदों की दो सेनाएँ जब दक्षिण में निजाम से परास्त हो गई, तब हुसैन अली खां सैयद, बादशाह मोहम्मद शाह को साथ ले कर, एक बड़ी सेना के साथ निजाम को दबाने के लिए रवाना हुआ। सितम्बर ८, १७२० ई० को [[टोडाभीम]] में उसने हुसैन अली को धोखे से मार डाला। अब बादशाह ने तैयारी करके सैयद अब्दुल्ला खां पर चढ़ाई की जो [[दिल्ली]] में था। इस युद्ध के लिए महाराणा ने जयसिंह से पूछा कि 'उसे क्या करना चाहिए?' जयसिंह ने उदैपुर के महाराणा को बादशाह की मदद करने के लिए पत्र लिखा तथा साथ में ही महाराणा के अलावा बीकानेर, कोटा और राव इन्द्रसिंह नागौर को भी बादशाह की मदद करने के लिए पत्र भेजे। सवाई जयसिंह ने खुद बादशाह मोहम्मद शाह की मदद के लिए राव जगराम के साथ एक अच्छी सेना भेजी। इस सेना में सवाई राम (नरुका), गढ़ी गजसिंह, नरुका जावली, जसवन्तसिंह, सवाईराम के पुत्र, प्रतापसिंह कल्यणोत, बुद्धसिंह कल्यणोत, गुलाब सिंह कल्यणोत, छीतरसिंह कल्यणोत, अमरसिंह राजावत, बहादुर सिंह खंगोरात और सरदारसिंह नरुका आदि सरदार थे। ३ और ४ नवम्बर १७२० को युद्ध हुआ जिसमें सैयद अब्दुल्ला खां पकड़ा गया। विजय के बाद बादशाह ने जयपुर के सरदारों को अपने हाथ से खिलअतें दीं।<ref name="ignca.nic.in"/> === मोहम्मद शाह और जयसिंह === मोहम्मद शाह ने दिल्ली पहुंचते ही जयसिंह को दिल्ली आने का फरमान भेजा जिसमें लिखा कि उनसे अनेक महत्वपूर्ण समस्याओं पर सलाह लेनी है। उसने दिल्ली पहुंचने पर बादशाह ने अपने नये वर मुहम्मद अमीन खां को उनके डेरे पर लेने भेजा। दरबार में आने पर बादशाह ने उनका बड़ा सत्कार किया और अनेक तोहफे दिए। उनके मनसब में ४००० सवार और बढ़ा दिए गए। इसी मौके पर इन्हें दो करोड़ रुपये इन्हें इनाम/ बख्शीश में दिये जिनको इन्होंने नम्रतापूर्वक लेने से मना कर दिया। पर बादशाह ने सवाई जयसिंह और राजा गिरधर बहादुर के अनुरोध पर हिदुओं पर लगाया जाने वाला कठिन [[जज़िया|जजिया कर]] माफ कर दिया। महाराणा मेवाड़ ने जजिया हटवा देने की सफलता पर सवाई जयसिंह को अपनी और से प्रसन्न हो कर लिखित बधाई भेजी।<ref name="ignca.nic.in"/> === जयसिंह के महत्त्व में वृद्धि === सैयदों के पतन के बाद जयसिंह का राजनैतिक महत्त्व तेज़ी से बढ़ने लगा। राजस्थान, मालवा और बुन्देलखण्ड के राजा हर मुसीबत में उनसे सहायता और सलाह चाहते थे। इन इलाकों में इनकी राय के बगैर कुछ भी नहीं होता था। १७३५ ई० के बाद तो मरहठे भी इनकी सलाह लेने तथा इनको आदर देने लग गए।<ref name="ignca.nic.in"/> इन्हें ''सवाई'' के अलावा मुग़ल बादशाहों ने जो अन्य उपाधियाँ समय समय पर दीं वे थीं - '''सरमदे –राजा-ए- हिन्द'/ 'राजराजेश्वर'/ 'श्रीराजाधिराज''' आदि। === दूसरा जाट युद्ध === सितम्बर १७२२ ई० में जयसिंह को [[आगरा]] का सूबेदार बना कर जाटों को दबाने को भेजा गया। इनके साथ ५० हजार सैनिकों की बड़ी फौज थी तथा अनेक मनसबदार भी इनके साथ थे। शाही तोपखाना भी इनके साथ था। [[चूड़ामन]] [[जाट]] का पुत्र [[मोहकमसिंह]] इस समय जाटों का नेता था। परन्तु चूड़ामन का भतीजा [[बदनसिंह]] जो उससे नाराज था, जयसिंह से आ कर मिला। इन्होंने उसका बड़ा स्वागत-सत्कार किया। एक बार फिर इन्होंने [[थून|थूण]] के किले पर घेरा डाला। अतसिंह जोघपुर ने एक सेना मोहकमसिंह की मदद के लिए भेजी, परन्तु वह [[जोबनेर]] से आगे नहीं बढ़ी। विभीषण की तरह बदनसिंह की सलाह से थूण के किले का विजय होना निश्चित दिख रहा था। तब मोहकमसिंह निराश होकर गुप्त मार्ग से किला छोड़ कर अतर सिंह के पास [[जोधपुर]] पहुँचा। किन्तु जाटों के थून स्थित किले पर सवाई जयसिंह का अधिकार हो गया। इन्होंने [[सूरज मल|सूरजमल]] के पिता बदनसिंह को भरतपुर की जागीर दी तथा राजा के रूप में उनके पगड़ी बाँधी। जून १९, १७२३ ई० को ठाकुर बदनसिंह जाट ने 'जयपुर दरबार की सेवा करने' व ८३ हजार रुपये बतौर सालाना पेशकश देना स्वीकार करके इस आशय की लिखावट पर दस्तखत किये। बदनसिंह जयपुर के दशहरा दरबार में हर साल आया करते थे। जयपुर में जहाँ जाट सेना सहित डीग के राजा का पड़ाव लगता था, वह स्थान अब भी ''बास बदनपुरा'' कहलाता है।<ref name="ignca.nic.in"/> महाराजा सवाई जयसिंह के कार्यकाल का संभवतः सबसे बड़ा और कीर्तिवान कार्य था - सन १७२७ में जयपुर नगर बसाना। इसकी नींव पौष वदी १ वि. सं. १७८४, ई० को रखी गई। राजगुरु सम्राट जगन्नाथ ने नए नगर की नींव रखने का मुहूर्त निकाला तथा भूमि पूजा करवाई थी। महाराजा की आज्ञा के अनुसार नए नगर का नक्शा दीवान [[विद्याधर]] ने बनाया जो बहुत प्रतिभाशाली बंगाली ब्राह्मण था और इनके लेखा-विभाग की सेवा में नायब-अंकेक्षक था। सन १७३३ ई० में यह नगर, जिसका नाम सवाई जयसिंह ने ' सवाई जयनगर' रखा बन कर तैयार हुआ।<ref name="ignca.nic.in"/> === मालवा की दूसरी बार सूबेदारी === जयसिंह को मुग़ल बादशाह द्वारा मालवा का दुबारा सूबेदार बनाया गया। वे २३ अक्टूबर १७२९ ई० को [[उज्जैन]] के लिए रवाना हुए। जयसिंह अपने राज्य की सुरक्षा के लिए विद्रोही मरहठों से समझौता करना चाहते थे। इनके इस समझौता-प्रस्ताव को बादशाह ने भी स्वीकार कर लिया था। इनकी इस विजय पर साहू से लिखा पढ़ी हुई। साहू इसके लिए तैयार हो गया था, किन्तु पेशवा लोग इस समझौते के ज्यादा पक्ष में नहीं था। इन्होंने दीपसिंह कुम्भाणी को साहू के पास [[सातारा|सतारा]] भेजा। लौटते समय दीपसिंह निजाम से भी मिला, परन्तु सितम्बर १७३० ई० में इनके मालवा की सूबेदारी से हट जाने से वह समझौता नहीं हो सका।<ref name="ignca.nic.in"/> === कुशत्तल पंचोलास का युद्ध === बुद्धसिंह बून्दी और उनकी कछवाही रानी के आपस में गंभीर मतभेद पैदा होने पर जयसिंह के सम्बन्ध भी बूंदी नरेश बुद्धसिंह से बहुत खराब हो गये। अन्त में सम्बन्ध इतने बिगड़े कि जयसिंह ने बादशाह को कह कर बुद्धसिंह के स्थान पर करवाड़ के सालिम सिंह हाडा के पुत्र दलेलसिंह को बून्दी का राजा बनवा दिया और बाद में अपनी पुत्री भी उसे ब्याह दी। इससे राजस्थान में जयपुर और बूंदी के बीच लम्बे समय तक बड़ा दु:खद संघर्ष चला। इस आपसी मनमुटाव से मरहठों को फिर राजस्थान में हस्तक्षेप करने का अवसर मिल गया। जयसिंह को १७३० ई० में मालवा में इत्तला मिली कि बुद्धसिंह फिर से बून्दी पर अधिकार करने जा रहे हैं। इन्होंने एक सेना दलेलसिंह की मदद को भेजी| ६ अप्रैल १७३० को ''कुशत्तल पंचोलास'' में बुधसिंह से जयपुर सेना का युद्ध हुआ जिसमें जयपुर के पांच राजावत सरदार फतहसिंह सारसोप (बरवाड़ा) खोजूराम (ईसरदा), सांवलदास (शिवाड), अचलसिंह (नानतोड़ी) और घासीराम अचरे मारे गए।। इस युद्ध में बुद्धसिंह को विजय नहीं मिली। मालवा से लौटते समय महाराजा सवाई जयसिंह कुशत्तल पांचोलास गये। उन्होंने वहाँ मारे गये सरदारों की मातमी करके उनके पुत्रों को सिरोपाव आदि दिये।<ref name="ignca.nic.in"/> === तीसरी बार मालवा की सूबेदारी === जयसिंह दिसम्बर १७३२ में तीसरी बार मालवा प्रान्त के सूबेदार बनकर उज्जैन गये। इस बार मालवा में भी मरहठों का उत्पात इतना बढ़ गया था कि मालवा से मरहठों को निकालने के इनके तमाम प्रयास विफल रहे। १७३४ ई० में खानदौरा एक बड़ी सेना लेकर राजपूताना होता हुआ मालवा में मैराथन के विरुद्ध आगे आया। जयसिंह, अभयसिंह (जोधपुर) आदि अनेक राजा उनके साथ थे। जब यह विशाल सेना रामपुरा पहुँची तो उसे मरहठा मिले। पर वे छुटपुट लड़ाइयों के बाद इन्हें छका कर पीछे से राजस्थान में घुस गये। वहाँ उनको रोकने वाला कोई नहीं था और वे मराठे जयपुर राज्य में साँभर तक लूटपाट करते चले गये। १७३५ ई० में पेशवा बाजीराव की माँ उत्तर में तीर्थ करने आई। महाराजा जयसिंह ने उसका बड़ा आदर-सत्कार किया तथा महाराणा से भी उसका सत्कार करवाया। आगरा में इनके नायब सूबेदार ने अपने दीवान आयामल के भाई नारायणदास को उसका स्वागत करने व पूना तक साथ जाने की आज्ञा भेजी। जनवरी १७३७ ई० को पेशवा उत्तर भारत में आया उसके साथ होलकर, सिन्धिया, पँवार आदि सभी थे। उदयपुर से आते समय पेशवा से २५ फ़रवरी को महाराजा जयसिंह मालपुरा क्षेत्र के झाड़ली गाँव में मिले। उन्होंने उनको अनेक वस्तुएँ भेंट दी। बाजीराव दिल्ली तक जाकर वापस लौट गया। बाजीराव पेशवा की मृत्यु से महाराजा जयसिंह को बड़ा दु:ख हुआ। नया पेशवा बालाराव बना। १७४१ ई० में जब नए मराठा पेशवा बाला राव उत्तर में चढ़ाई की उस समय जयसिंह आगरा के सूबेदार थे। इनकी और नये पेशवा बाला राव की धौलपुर में भेंट हुई। इनके प्रयास से बादशाह ने पेशवा को मालवा की नायब सूबेदारी दे दी।<ref name="ignca.nic.in"/> === नादिरशाह और सवाई जयसिंह === जब नादिरशाह भारत में आया तब सभी को बड़ी शंका खड़ी हो गई। पेशवा, महाराणा अन्य राजाओं व बुन्देलों को मिला कर जयसिंह, नादिरशाह का संगठित मुकाबला करना चाह रहा था। हालांकि 24 फरवरी 1739 को [[करनाल]] में वह (नादिरशाह) मुग़ल सेना को बुरी तरह पराजित कर चुका था। यह भी अफवाह थी कि नादिरशाह जयपुर होता हुआ अजमेर जाएगा। यह जयसिंह के लिए भी बड़ा खतरा था। सब चौकन्ने थे, लेकिन अन्त में वह [[मथुरा]] से ही वापस अपने देश लौट गया। "नादिरशाह ने जब [[भारत]] पर हमला (फरवरी-मार्च १७३९) किया तब [[दिल्ली]] की सहायतार्थ जयसिंह नहीं गए। इस का कारण यह था- तब निजाम और कमरुद्दीन उस समय साम्राज्य में उच्च पदों पर थे और नादिरशाह के हमले के लिए वे लोग इनके उत्तरदायी होने का शक कर सकते थे, किन्तु सम्राट बराबर इनमें विश्वास रख कर इनसे आवश्यक परामर्श करता रहा।"<ref name="ignca.nic.in"/> == साहित्य-रचना और यज्ञ-परंपरा== महाराजा सवाई जयसिंह के दरबार में संस्कृत और [[बृज भाषा|ब्रजभाषा]] [[साहित्य]], [[वास्तुकला|स्थापत्य]], [[धर्मशास्त्र]], [[ज्योतिष]], [[ब्रह्माण्ड|खगोल]], [[इतिहास]]-लेखन, आदि क्षेत्रों में अनेक मौलिक रचनाएं की गयीं और सम्पूर्ण भारतीय मनीषा की इस अकादमिक-योगदान से बड़ी उन्नति हुई। अनेक नए धर्मशास्त्र भी रचे गये क्यों कि इनकी [[कर्मकांड]] और [[धर्मशास्त्र]] में बड़ी रुचि व निष्ठा थी। इनके समय के सबसे प्रसिद्ध विद्वान पंडित [[जगन्नाथ सम्राट]], पंडित [[रत्नाकर पौण्डरीक|पुण्डरीक रत्नाकर]], [[विद्याधर चक्रवर्ती]], [[शिवानन्द गोस्वामी]], [[श्रीकृष्णभट्ट कविकलानिधि|श्रीकृष्ण भट्ट कविकलानिधि]](एवं दैवज्ञ भूषण स्वास्तिश्री राज ज्योतिषी श्री मंत नोपाराम भार्गव जो बारहं ठिकानों के राज ज्योतिषी थे ओर तंवरावाटी के बिहार ग्राम के रहने बाले थे अश्वमेध यज्ञ के दोरान श्री मंत नोपाराम भार्गव को दक्षिणा में बारहं ठिकानों का राज ज्योतिषी न्युक्त किया गया था इसके उपरांत श्रीमंत साहब बिहार गाँव छोडकर सन् 1640ई. में डाबला ग्राम में आकर रहने लगे ) <ref>कविशिरोमणि [[भट्ट मथुरानाथ शास्त्री]]: '[[जयपुर-वैभवम]]</ref> मूलतः आन्ध्र से आये तैलंग पूर्वजों के वंशज ब्रजनाथ भट्ट भी इनके समय के प्रसिद्ध कवि विद्वानों में से थे। इन्होंने 'ब्रह्मसूत्राणभाण्यवृत्ति' और 'पद्मतरंगिणी' की रचना की। [[श्रीकृष्णभट्ट कविकलानिधि|श्रीकृष्ण भट्ट कविकलानिधि]] ने इनके समय में अनेक ग्रन्थ लिखे जिनमें मुख्य '[[ईश्वर विलास]]<ref>कविशिरोमणि भट्ट मथुरानाथ शास्त्री: 'जयपुर-वैभवम</ref>- महाकाव्य भी है, जिसमें सवाई जयसिंह द्वारा '[[अश्वमेध यज्ञ]]' करवाने का 'आँखों देखा हाल' वर्णित है।<ref>संस्कृत के युग-पुरुष: मंजुनाथ': पृष्ठ 1 प्रकाशक: 'मंजुनाथ स्मृति संस्थान, सी-8, पृथ्वीराज रोड, जयपुर-302001</ref> जेम्स टॉड ने लिखा है " सवाई जयसिंह ने बहुत-सा धन खर्च कर के यज्ञशाला बनवाई थी और उसके स्तंभों और छत को चांदी के पत्तरों से मंडवाया था|<ref>'राजस्थान का इतिहास' भाग-२ : लेफ्टिनेंट कर्नल जेम्स टॉड, पृष्ठ ११९ 'साहित्यागार' प्रकाशन, जयपुर</ref> पुण्डरीक रत्नाकर (मृत्यु वि. १७७६ में) ने इनसे [[व्रात्यस्तोम यज्ञ]] चैत वदी ३ वि॰सं॰ १७७१ को क्षिप्रा नदी के तट पर उज्जैन में करवाया। इन्होंने और दूसरे यज्ञ-जैसे [[श्रौत यज्ञ]] आदि भी सम्पन्न करवाये थे। इनका रचा हुआ 'जयसिंह कल्पद्रुम' एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ है। रत्नाकर के पुत्र सुधाकर पौण्डरीक ने जयसिंह से [[पुरुषमेध यज्ञ]] करवाया था तथा 'साहित्यसार संग्रह' की रचना की। इन्होंने [[सम्राट यज्ञ]] भी कराया, जिसके पुरोहित इनके महाराष्ट्रीय ब्राह्मण गुरु, [[जगन्नाथ सम्राट]] थे। ''१७३४ ई० में जयसिंह ने जो पहला [[अश्वमेध यज्ञ]] किया''<ref>{{Cite web |url=http://msmsmuseum.com/pages.php?id=4 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 जुलाई 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140716190556/http://msmsmuseum.com/pages.php?id=4 |archive-date=16 जुलाई 2014 |url-status=dead }}</ref>, २९ मई १७३४ को सम्पूर्ण हुआ।<ref>सवाई जयसिंह : राजेंद्र शंकर भट्ट: नेशनल बुक ट्रस्ट (अंग्रेज़ी अनुवाद: शैलेश कुमार झा) २००५ संस्करण</ref> इस अश्वमेध यज्ञ के समय, जो राजसी-घोड़ा छोड़ा गया था, उसे कुछ कुम्मणियों ने जलमहल से आगे, जयपुर के एक और प्रवेशद्वार (जिसका नाम बाद में जोरावर सिंह गेट रखा गया) के पास ही पकड़ लिया और अन्त में जयसिंह के अश्व के साथ जा रहे सरदार जोरावर सिंह घोड़ा पकड़ने वालों से युद्ध करके मारे गये।<ref>डॉ॰ ज्ञान प्रकाश पिलानिया, 'Enlightened Government in Modern India: Heritage of Sawai Jai Singh' ('हेरिटेज ऑफ़ सवाई जयसिंह') ISBN 8187359161, ISBN 9788187359166</ref> ''दूसरा अश्वमेध यज्ञ बड़े पैमाने पर जयसिंह ने वर्ष १७४२ ई० में करवाया''। इन यज्ञों के अलावा जयपुर में [[पुरुषमेध यज्ञ]], [[सर्वमेध यज्ञ]], [[सोम यज्ञ]] आदि भी किये गये। इन यज्ञों के कारण देश के पंडित-जगत में इनकी बड़ी ख्याति हुई तथा सम्पूर्ण हिन्दू-समाज ने इनकी इस सांस्कृतिक-पहल की प्रशंसा की।<ref>संस्कृत के युग-पुरुष: मंजुनाथ': प्रकाशक: 'मंजुनाथ स्मृति संस्थान, जयपुर-302001</ref> आसपास की राजनैतिक उथल-पुथल के बावजूद जयपुर नगर उस समय विभिन्न विद्याओं, साहित्य और भारतीय-[[संस्कृति]] का आगार बन गया था। इसी कारण इसे '''दूसरी काशी''' भी कहा गया | [[कर्नल]] [[जेम्स टॉड]] ने भी माना है कि "महाराज सवाई जयसिंह ने जयपुर को हिन्दूविद्याओं का शरणस्थल बना दिया था। इस तरह भारत में सदियों से यज्ञादि की जो परम्परा लगभग बन्द हो चुकी थी, उन्हें महाराजा सवाई जयसिंह ने जयपुर राज्य में फिर से प्रारम्भ किया।"<ref>'राजस्थान का इतिहास' : लेफ्टिनेंट कर्नल जेम्स टॉड, 'साहित्यागार' प्रकाशन, जयपुर</ref> == सवाई जयसिंह का स्थापत्य-कला को योगदान == === जयपुर : शिल्पशास्त्र के आधार पर नई राजधानी === महाराजा सवाई जयसिह ने एक नया [[राजधानी]]-नगर बसाने का विचार आमेर से [[दक्षिण]] में छ: मील दूर [[पौष]] वदी १ वि. सं. १७८४ तदनुसार नवम्बर २९ ई० १७२७ को पं० [[जगन्नाथ सम्राट]] के माध्यम से शिलान्यास करते हुए क्रियान्वित किया। सम्पूर्ण नगर-योजना दरबार के प्रमुख वास्तुविद [[विद्याधर चक्रवर्ती]] की तकनीकी सलाह से निर्मित हुई। नक्शा पहले कपड़े पर अमिट काली स्याही से तैयार किया गया। सवाई ने तालकटोरा तालाब बनवाया, मानसागर झील में '[[जल महल|जलमहल]]' निर्मित करवाया, प्राचीन कछावा किले [[जयगढ़ दुर्ग|जयगढ़]] का पुनरुद्धार किया, आमेर के जो महल-भाग [[मिर्जा राजा जयसिंह|जयसिंह (प्रथम)]] ने बनवाए थे, उन सब का विस्तार किया तथा सुदर्शनगढ़ का महल भी बनवाया जिसको आज नाहरगढ़ का किला भी कहते हैं। विविध कला-कौशल विकास हेतु '६४ कारखाने' अर्थात् अलग-अलग विभाग स्थापित किये, नगर के बाहर आगरा रोड पर इनके द्वारा अपनी सिसोदिया रानी के लिए एक ग्रीष्मकालीन बाग़ और महल बनवाया गया। शहर में [[कल्कि]] का मंदिर और यज्ञस्तम्भ के पास भगवान [[विष्णु]] का मंदिर भी इन्होनें बनवाया। [[मथुरा]] में [[सीता]][[राम]]जी का और [[गोवर्धन पर्वत|गोवर्धन]] में गोवर्धनधारी के मंदिर भी इन्होनें ही बनवाये।<ref>सवाई जयसिंह : राजेंद्र शंकर भट्ट: [[राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत|नेशनल बुक ट्रस्ट]] (अंग्रेज़ी अनुवाद: शैलेश कुमार झा) २००५ संस्करण</ref> [[File:आमेर महल का दीवाने-आम.JPG|thumb|आमेर महल का दीवाने-आम : छायाकार: हे.शे.]] === नगर का वास्तु-कौशल === नए नगर को ९ सामान क्षेत्रफल वाले खंडों (चौकड़ियों) में बांटा गया था, जिसके दो खण्ड मुख्य राजमहल 'चन्द्रमहल', विभिन्न राजकीय कारखानों, कुछ खास मंदिरों तथा वेधशाला के लिए आरक्षित रखे गये थे। सूरजपोल दरवाज़े से चांदपोल दरवाज़े तक सड़क की लम्बाई दो मील और चौड़ाई १२० फीट रखी गयी। इसी महामार्ग पर मध्य में तीन सुन्दर चौपड़ों का निर्माण भी प्रस्तावित किया गया जो यहाँ लगे हुए फव्वारों के लिए भूमिगत जलस्रोतों से जुड़े थे। शहर के चौतरफ बनाये गए परकोटे की दीवार २० से २५ फुट ऊंची तथा ९ फीट चौड़ी रखी गयी। इस परकोटे में (शहर में आने - जाने के लिए) सात सुन्दर प्रवेशद्वारों का निर्माण भी किया गया। रात को नगर-सुरक्षा हेतु इन्हें बंद कर दिया जाता था। सुन्दर राजसी राजमहल, भव्य-पाठशालाएं, बड़ी बड़ी, चौड़ी और एक दूसरे को समकोण पर विभाजित करती एकदम सीधी सड़कें, एक सी रूप-रचना के आकर्षक बाज़ार, जगह-जगह कलात्मक मंदिर, (राजा [[राम]] की [[अयोध्या]] के वास्तु से प्रभावित) आम-भवन-संरचनाएं, सड़कों के किनारे लगे घने छायादार पेड़, पीने के पानी का समुचित प्रबंध, व्यर्थ-जल-निकासी की उपयुक्त व्यवस्था, उद्यान, नागरिक-सुरक्षा, आदि इन सब बातों का पूर्व-नियोजन सवाई जयसिंह ने अपने नगर-कौशल में सफलतापूर्वक किया। === जयपुर पर केन्द्रित संस्कृत महाकाव्य === कविशिरोमणि [[भट्ट मथुरानाथ शास्त्री]] ने सन 1947 में 476 पृष्ठों में प्रकाशित अपना एक यशस्वी काव्य-ग्रन्थ [[जयपुर-वैभवम]] तो जयपुर के नगर-सौंदर्य, दर्शनीय स्थानों, देवालयों, मार्गों, यहाँ के सम्मानित नागरिकों, उत्सवों और त्योहारों आदि पर ही केन्द्रित किया था। <ref>{http://www.sanskrit.nic.in/DigitalBook/J/Jaipurvaibhavam.pdf {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131126095023/http://www.sanskrit.nic.in/DigitalBook/J/Jaipurvaibhavam.pdf |date=26 नवंबर 2013 }}</ref> === खगोलशास्त्र और सवाई जयसिंह === [[चित्र:Jai obs.jpg|Jai obs.jpg|right|thumb|300px|जयपुर वेधशाला का विहंगम दृश्य]] जयपुर के पुराने राजमहल' चन्द्र महल' के उत्तर में जयपुर नरेशों के आराध्य देव [[गोविंद देवजी का मंदिर|गोविन्ददेव जी]] का मन्दिर है, [[दुनिया]] भर में [[जंतर मंतर]] के नाम से मशहूर विशाल [[वेधशाला]] भी यहीं मौजूद है<ref>|https://hi.wikipedia.org/s/ecr</ref> पत्थर के विशाल [[यंत्र]] और ग्रह नक्षत्रों की गणना के लिए बने ''<ref>Michiel Schwarz, (1980) Observatoria : de astronomische instrumenten van Maharaja Sawai Jai Singh II in New Delhi, Jaipur, Ujjain en Benares, Amsterdam : Westland/Utrecht Hypotheekbank</ref>,<ref>"Sawai Jai Singh and His Astronomy," by Virendra Nath Sharma, Motilal Banarasi Dass Publishers, Delhi (1995)</ref> इन गणना-उपकरणों के निर्माता सवाई जयसिंह को बचपन से ही गणित और खगोल ज्योतिष में बड़ी गहरी दिलचस्पी थी<ref>http://www.google.co.in/search?tbo=p&tbm=bks&q=inauthor:%22Jai+Singh+II+(Maharaja+of+Jaipur)%22/पृष्ठ २</ref> किन्तु महाराजा जयसिंह को खगोलविद्या में 'दीक्षित' करने का बड़ा श्रेय पंडित [[जगन्नाथ सम्राट]] को है। राजा को [[वेद]] पढ़ाने के लिए नियुक्त [[मराठी भाषा|मराठी]] सम्मानित विद्वान भारतीय ज्योतिर्विज्ञान को योगदान देते हुए सम्राट जगन्नाथ ने 'सिद्धान्त कौस्तुभ' की रचना की तथा [[यूक्लिड]] के [[रेखागणित]] का [[अरबी]] से [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] में अनुवाद किया। सवाई जयसिंह ने अपने गुरु ही के अनुसरण में यह अनुभव किया कि [[न्यूटन (इकाई)|न्यूटन]] [Newton] और [[फ्लेमस्टीड]] []John Flamsteed]] FRS (19 August 1646 – 31 December 1719) आदि द्वारा उल्लेखित यूरोपीय वैज्ञानिकों के पीतल या धातु के खगोल-यंत्रों से मौसम, तापमान, घिसाई, आदि कई कारणों से गणना फलावट में अक्सर अन्तर आ जाया करता है, इसलिए इन्होंने सबसे पहले १७२४ ईस्वी में दिल्ली की वेधशाला में धातु को छोड़ कर चूने और तराशे गए पत्थर से बड़े-बड़े गणना यंत्र बनवाये। फिर इसी तरह इन्होंने जयपुर में १७३४ में और सन १७३२ से १७३४ के बीच [[मथुरा]], [[वाराणसी|बनारस]] और [[उज्जैन]] में भी अपने वास्तुविद [[विद्याधर]] के मार्गदर्शन में सम्राट जगन्नाथ द्वारा विकसित उन्नत यंत्रों- सम्राट-यन्त्र (लघु), नाडी-वलय-यन्त्र, कांति-वृक्ष-यन्त्र, यंत्रराज, दक्षिनोदक-भित्ति-यन्त्र, उन्नतांश-यन्त्र, जयप्रकाश-यन्त्र, सम्राट-यन्त्र (दीर्घ), शषतांश यंत्र, कपालीवलय यन्त्र, राशिवलय यन्त्र, चक्र यंत्र, राम यन्त्र, त्रिगंश यन्त्र आदि से युक्त नई वेधशालाएँ बनवाई।<ref>http://www.google.co.in/search?tbo=p&tbm=bks&q=inauthor:%22Jai+Singh+II+(Maharaja+of+Jaipur)%22</ref>,<ref>{{Cite web |url=http://www.indiavisitinformation.com/indian-culture/indian-monument/Jantar-Mantar-in-india.shtml |title=संग्रहीत प्रति |access-date=11 जुलाई 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130729213946/http://www.indiavisitinformation.com/indian-culture/indian-monument/Jantar-Mantar-in-india.shtml |archive-date=29 जुलाई 2013 |url-status=dead }}</ref> मथुरा की वेधशाला नष्ट हो चुकी, काशी और उज्जैन की वेधशालाएं नष्ट होने के कगार पर हैं; अब केवल जयपुर और थोड़ी बहुत दिल्ल्ली की वेधशाला इनके वैज्ञानिक-व्यक्तित्व का स्मरण कराती हैं। === जयपुर दरबार में विदेशी विद्वान=== जब इनको मालूम हुआ कि पश्चिम के ज्योतिषीगण द्वारा खासतौर पर पुर्तगाल में पिछले कुछ वर्षों में खगोलविद्या पर काफी काम हुआ है, इन्होंने गोवा के पुर्तगाली-गवर्नर के मार्फत पुर्तगाल के बादशाह को अनेक तोहफे भेजे तथा गवर्नर के मार्फत पुर्तगाल से खगोल विद्वान Padre Manoel Figueiredo को जयपुर बुलवाया।<ref>Sharma, Virendra Nath (1995), Sawai Jai Singh and His Astronomy, Motilal Banarsidass Publications</ref> जयसिंह ने १७२७ में उसे (Manoel Figueiredo को) योरोप में इस विषय की सारी उपलब्ध नवीनतम पुस्तकें / रचनाएँ तथा दूर्वीक्षण यंत्र (टेलीस्कोप) लाने भेजा। वह जब नवम्बर १७३० में वापस आया तो अपने साथ खगोलज्ञ जेवियर डीसिल्वा को और कुछ दूरबीनें साथ लाया। जेवियर डीसिल्वा Pere de la Hire (1640-1718) की सारणी 'Tabulae Astronomicae' लिस्बन से अपने साथ लाया था। इन्होंने अपने विद्वानों की सहायता से उन सारणियों का अध्ययन किया और व्यावहारिक उपयोग के बाद उनमें त्रुटियाँ पाईं| अंततः इन्होंने ''अपने यंत्रों की गणना से पुनः नई सारिणी'' बनाई, जिसका बादशाह के नाम पर नाम '''जिज़-ए-मुहम्मदशाही''' रखा गया।<ref>A B Umasankar Mitra (1995) "Astronomical Observatories of Maharaja Jai Singh". School Science (NCERT) 23 (4): 45–48</ref> इनके दरबार में चन्द्रनगर से आया फ्रांसीसी खगोलज्ञ क्लाड बोडियर था। इनके दरबार में जर्मनी से फादर ऐन्टोइन गेवेल्स परगुइर व आद्रें स्टोब्ल भी आये थे। एक और हिन्दुस्तानी विद्वान, इनके यहाँ केवलराम था, जो गुजरात से आया था। उसने खगोल सम्बन्धी आठ ग्रन्थ लिखे थे। उसको सवाई जयसिंह ने 'ज्योतिषराय' की उपाधि भी दी।<ref>A B Umasankar Mitra (1995). "Astronomical Observatories of Maharaja Jai Singh".School Science (NCERT) 23 (4): 45–48</ref> महाराजा सवाई जयसिंह ने युद्ध और राजनीति में उलझे रहने के बावजूद, नगर-निर्माण और खगोलशास्त्र में बड़ा काम किया। इन्होंने भारतीय खगोलविद्या के साथ यूनान, मध्य एशिया और योरोप में जो ग्रन्थ लिखे गये थे तथा जो यंत्र बने थे, उनको मंगवा कर उनका परीक्षण व उपयोग किया। ''282 साल पहले लकड़ी, चूने, पत्थर और धातु से निर्मित यंत्रों के माध्यम से आकाशीय घटनाओं के अध्ययन की भारतीय विद्या को 'अद्भुत' मानते हुए इस स्मारक को ''विश्व धरोहर सूची'' में शामिल किया गया है|'' इन्हीं यंत्रों के गणना के आधार पर आज भी जयपुर के स्थानीय पंचांग का प्रकाशन होता है और हर बरस आषाढ़ पूर्णिमा को खगोलशास्त्रियों द्वारा 'पवन धारणा' प्रक्रिया से आने वाली वर्षा की भविष्यवाणी की जाती है। भारत में जयसिंह से पूर्व, खगोलशास्त्र में अनेक दशकों यहाँ तक कि सदियों से कोई 'बड़ा' या उल्लेखनीय कार्य नहीं हुआ था, सवाई ने इस सांस्कृतिक-निर्वात की पूर्ति की। <ref>Sharma, Virendra Nath (1995), Sawai Jai Singh and His Astronomy, Motilal Banarsidass Publ., pp. 8–9, ISBN 81-208-1256-5</ref><ref>{{Cite web |url=http://www.uwfox.uwc.edu/users/vsharma/paper.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 जुलाई 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140714231624/http://www.uwfox.uwc.edu/users/vsharma/paper.html |archive-date=14 जुलाई 2014 |url-status=dead }}</ref> ==== कल्कि का प्राचीन मन्दिर ==== [[चित्र:Kalki1790s.jpg|right|thumb|350px|कल्कि का ताम्रचित्र (१८वीं शती में निर्मित)]] जयपुर (राजस्थान, भारत) की 'बड़ी चौपड़' से आमेर की ओर जाने वाली सड़क सिरेड्योढ़ी बाज़ार में [[हवामहल]] के लगभग सामने भगवान [[कल्कि]] का प्राचीन मन्दिर अवस्थित है। जयपुर के संस्थापक सवाई जयसिंह ने पुराणों में वर्णित कथा के आधार पर कल्कि के मन्दिर का निर्माण सन् 1739 ई. में दाक्षिणात-शिखर-शैली में कराया था। संस्कृत विद्वान आचार्य देवर्षि [[कलानाथ शास्त्री]] के अनुसार, "सवाई जयसिंह संसार के ऐसे पहले महाराजा रहे हैं, जिन्होंने जिस देवता का अभी तक अवतार हुआ नहीं, उसके बारे में कल्पना कर कल्कि की मूर्ति बनवाकर मन्दिर में स्थापित करायी।" सवाई जयसिंह के तत्काली दरबारी कवि [[श्रीकृष्णभट्ट कविकलानिधि|श्रीकृष्ण भट्ट कविकलानिधि]] ने अपने ”कल्कि-काव्य“ में मन्दिर के निर्माण और औचित्य का वर्णन किया है। तद्नुसार ऐसा उल्लेख है कि सवाई जयसिंह ने अपने पौत्र ”कल्कि प्रसाद“ (सवाई ईश्वरी सिंह के पुत्र) जिसकी असमय मृत्यु हो गई थी, उसकी स्मृति में यह मन्दिर स्थापित कराया। यहाँ श्वेत अश्व की प्रतिमा संगमरमर में उत्कीर्ण है जो बहुत सुन्दर, आकर्षक और सम्मोहक है। अश्व के चबूतरे पर लगे बोर्ड पर यह इबारत अंकित है- ”अश्व श्री कल्कि महाराज-मान्यता- अश्व के बाएँ पैर में जो गड्ढा सा (घाव) है, जो स्वतः भर रहा है, उसके भरने पर ही कल्कि भगवान प्रकट होगें।“<ref>'जयपुर-दर्शन' सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978</ref> ====[[जयगढ़ दुर्ग|जयगढ़]] का दुर्ग ==== अनेक स्थानों पर इस दुर्ग [[जयगढ़ दुर्ग|जयगढ़]] का वर्णन किया जा चुका है, अतः पुनरावृत्ति अनावश्यक होगी। [https://web.archive.org/web/20140311093126/http://www.cs.utah.edu/~noliver/india/Forts/Jaigarh-AmberFort/Jaigarh.html] === समाज-सुधारक के रूप में सवाई जयसिंह === सवाई जयसिंह ने सभी समाजों के लिए परंपरा संबंधी सुधार-कार्य किये। ब्राह्मण समाज में कई सुधार करते हुए वैरागी साधुओं में व्याप्त व्यभिचार मिटाने के लिए इन्होंने उनको पुनर्विवाह कर अपनी पत्नी साथ रखने (गृहस्थ आश्रम में प्रवेश) का विधान किया। बादशाह से फकीरों व सन्यासियों की मृत्यु के बाद, उनकी सम्पत्ति राज्य के पक्ष में जब्त नहीं करने की आज्ञा जारी करवाई, किन्तु सन्यासियों को 'निजी सम्पत्ति' रखने से रोका। बादशाह से अनुरोध के बाद हिन्दुओं पर लगाया गया पुराना भयंकर टैक्स [[जज़िया|जजिया कर]] समाप्त करवाया, ब्राह्मणों और राजपूतों के शादीब्याह आदि में हैसियत से बाहर जा कर दहेज़ देने और मृत्युभोज आदि सामाजिक अवसरों पर धन की बर्बादी रोकने की कोशिश भी की। जगह-जगह धर्मशालाएं, कई संस्कृत पाठशालाएं और विद्यालय खोले, विधवा-विवाह का पक्ष लिया, स्त्री-हत्या, कन्या-वध रोका, 'सर्वधर्म समभाव' की भावना को बढ़ावा दिया, विशेषतः जयपुर में [[जैन धर्म|जैन]] संप्रदाय को प्रोत्साहित किया, दिल्ली, आगरा, अन्य स्थानों से बड़े २ व्यापारियों को ला कर जयपुर में बसाया, देश में घूम-घूम कर विद्वानों की खोज की, उन्हें राज-सम्मान बक्शा, बड़ी २ जागीरें दीं और उत्तर भारत के समूचे हिन्दू-समाज को ऐसे कठिन वक़्त बाहरी आक्रान्ताओं से मुक्त रखा, जब राजनैतिक उठापटक, केंद्र में प्रशासनिक अराजकता और अनेक राजपूताना राज्यों के बीच सर-फुट्टवल अपने चरम पर थी। <ref>'जयपुर-दर्शन' सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978 [पेज 203] प्रकाशक : जयपुर अढाई शती समारोह समिति, नगर विकास व्यास (अब जयपुर विकास प्राधिकरण) परिसर, भवानी सिंह मार्ग, जयपुर</ref> === शासन-व्यवस्था=== दिन प्रतिदिन का शासन राजा की आज्ञा से उनके दीवान चलाते थे। दीवानों या मंत्रियों की संख्या राजा की मर्जी के मुताबिक परिवर्तनशील थी। सेना संबंधी सारा काम बख्शी के अधिकार-क्षेत्र में था। जब सवाई जयसिंह गद्दी पर बैठे तब उनके तीन दीवान रामचन्द्र, किशनदास और बिहारीदास थे। वि. सं. १७५७ में इन्होने एक दीवान और बढ़ा कर चार कर दिये थे। वि. सं. १७७३-७४ में आठ दीवान थे।<ref name="ignca.nic.in"/> पहले आमेर-दरबार के लेखा-विभाग में 'जूनियर ऑडिटर' का काम कर चुके महान वास्तुविद [[विद्याधर चक्रवर्ती]] इनके राजस्व मंत्री (या देश-दीवान) थे। [https://hi.wikipedia.org/s/7fp7] [[File:जयगढ़ किले में प्रदर्शित तोप जयबाण.JPG|thumb|जयगढ़ किले में ढाली गयी तोप जयबाण जिसका परीक्षण केवल एक बार हुआ और जिससे छोड़ा गया लोहे का गोला लगभग २२ किलोमीटर दूर [[चाकसू]] के आसपास जा कर गिरा था! : छायाकार: हे.शे. ]] कुंवर [[नटवर सिंह]] ने लिखा है-"यदि जाटों का अभ्युदय न हुआ होता, तो जयपुर का राज्य यमुना-नदी तक फैल गया होता।"<ref>नटवर सिंह : हिन्दी अनुवाद : राधाकृष्ण प्रकाशन, दिल्ली से 2006 में प्रकाशित चर्चित पुस्तक 'महाराजा सूरजमल'(प्रथम प्रकाशन : इंग्लेंड से मूलतः अंग्रेज़ी में)[http://www.amazon.com/Maharaja-Suraj-Mal-1707-63-Times/dp/0049230727/ref=la_B001ICOTJW_1_7?s=books&ie=UTF8&qid=1403930933&sr=1-7]</ref> === जयपुर के सेना के कुछ सेना-अधिकारी === जयसिंह के प्रमुख सेनापतियों में कुशलसिंह राजावत (झिलाय), कोजूरामती राजावत (ईसरदा), दलेलसिंह राजावत (धूला), रावल शेरसिंह नाथावत (सामोद), मोहनसिंह नाथावत (चौमू), बखतसिंह नाथावत (मोरीजा), पदमसिंह चतुरभुजोत (बगरु), श्यामसिंह खंगारोत (डिग्गी), केशरीसिंह नरुका (लदाणा), जोरावरसिंह नरुका (मानपुर-मांचेडी), संग्रामसिंह नरुका (उनियारा), गजसिंह नरुका (जावली), दीपसिंह शेखावत (कासली), शार्दूलसिंह शेखावत (झुंझुनूं), शिवसिंह शेखावत (सीकर), दीपसिंह कुम्भाणी (भांडारेज) जोरावरसिंह, श्योब्रह्मा (पोता) आदि थे। [https://web.archive.org/web/20140714115524/http://www.ignca.nic.in/coilnet/rj089.htm] सेना दो प्रकार की होती थी जागीरदारों की सेना, जिसके एकत्र होने पर सवार और प्यादा आदि के हिसाब से रोजाना का खर्च दिया जाता था। खुद राज्य की ऐसी सेना बहुत छोटी होती थी जिसको मासिक तनख्वाह दी जाती थी। फौज में घुड़सवार सेना भी अपेक्षकृत कम होती थी। मुख्य अंगरक्षक, 'रिसाला' ही होता था जिसमें एक हजार घुड़सवार होते थे। बाकी पैदल सेना अधिक थी। जयसिंह ने अपनी सेना में तोड़ेदार बंदूकें शामिल कर दी थी, जिससे उनकी सेना की मारक-शक्ति बहुत बढ़ गई थी। ''यदुनाथ सरकार'' के शब्दों में- "{{Quotation| Jai Singh's regular army did not exceed 40,000 men, which would have cost about 60 lakhs a year, but his strength lay in the large number of artillery and copious supply of munitions, which he was careful to maintain and his rule of arming his foot with matchlocks instead of the traditional Rajput sword and shield - He had the wisdom to recognize early the change which firearms had introduced in Indian warfare and to prepare for himself for the new war by raising the fire-power of his army to the maximum}} इनका तोपखाना भी बड़ा प्रभावी तथा शक्तिशाली था। जयगढ़ में ही तोपें निर्मित की जाती थीं। तोपें ढालने का वह 'यंत्र' और सांचे अभी भी जयगढ़ किले की फाउंड्री में मौजूद है। जयगढ़ में रखी जो बड़ी तोप 'जैबाण' है, उसके मुकाबले की देशज तोपें देश में बहुत कम है। (चित्र) सेना की भर्ती, वेतन, रसद आदि आवश्यक कार्यों के लिए बख्शी का (बहुत महत्वपूर्ण पद) होता था।<ref name="ignca.nic.in"/> [[File:जयपुर में सवाई जयसिंह स्मारक.JPG|thumb|जयपुर में सवाई जयसिंह स्मारक :छायाकार: हे.शे.]] == निधन == इनके समकालीन राजदरबार के कवि श्रीकृष्णभट्ट ने लिखा है कि 'यह अन्तिम दिनों में गोविन्ददेव के ध्यान में लीन रहने लग गए थे।'<ref name="ReferenceA">'ईश्वर विलास' महाकाव्य, राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर</ref> सवाई जयसिंह की मृत्यु जयपुर में में आश्विन सुदी १४ वि॰सं॰ १८००, सितम्बर २१, सन १७४३ ई० को वृद्धावस्था और बीमार रहने के बाद हुई। <ref>[[यदुनाथ सरकार]] : वही : पृष्ठ 192</ref> उन्हें गैटोर में अग्नि दी गयी। इनके सत्ताईस रानियां थी, जिनमें से तीन इनकी चिता के साथ सती हुईं | उन रानियों की छतरी जयपुर-आमेर मार्ग पर (जलमहल से पहले) है। <ref>{{Cite web |url=http://www.pinkcity.com/hi/places-to-visit/queens-canopies/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=12 जुलाई 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140714171027/http://www.pinkcity.com/hi/places-to-visit/queens-canopies/ |archive-date=14 जुलाई 2014 |url-status=dead }}</ref> जेम्स टॉड ने लिखा है- {{quotation|चवालीस साल तक राज्य करके संवत १७९९ (सन १७४३) में सवाई जयसिंह की जयपुर में मृत्यु हो गयी| उसकी तीन विवाहित रानियाँ और अनेक उप पत्नियाँ उसके शव के साथ जल कर सती हुईं| उसने जिस विज्ञान की अपने जीवन भर उन्नति की थी, उसकी मृत्यु के बाद वह (जयपुर से) एकाएक लोप हो गई|...जयसिंह की यज्ञशाला के रजत-पत्तरों को उसके वंशज जगतसिंह ने निकलवा कर, उनके स्थान पर साधारण चांदी के पत्तर लगवा दिए| जयसिंह ने जिन ग्रंथों का संग्रह करने में जीवन भर अत्यधिक परिश्रम और धन व्यय किया था, उसके दो हिस्से कर डाले गए| उनके पुस्तकालय का एक भाग किसी प्रकार जयपुर की एक साधारण वेश्या ''(रसकपूर)'' के अधिकार में पहुँच गया!}} <ref>'राजस्थान का इतिहास' भाग-2 : लेफ्टिनेंट कर्नल जेम्स टॉड, पृष्ठ 119 'साहित्यागार' प्रकाशन, जयपुर</ref> == स्मारक और स्मृति-चिन्ह == * सवाई जयसिंह का एक बेहद सुन्दर स्मारक इनके पुत्र ईश्वर सिंह ने जयपुर में ब्रह्मपुरी के गैटोर में बनवाया!<ref>सवाई जयसिंह : राजेंद्र शंकर भट्ट: नेशनल बुक ट्रस्ट (अंग्रेज़ी अनुवाद: शैलेश कुमार झा) 2005 संस्करण]</ref> * जयपुर के [[स्टैच्यू सर्किल|स्टेचू सर्किल]] पर बंगाली मूर्तिकार ''महेंद्र कुमार दास'' से संगमरमर में बनवा कर इनकी १२ फीट ऊंची एक आकर्षक प्रतिमा राजस्थान शासन ने जयपुर शहर की २५० वीं सालगिरह के अवसर पर 1978 में स्थापित की। <ref>https://hi.wikipedia.org/s/nrh{{Dead link|date=सितंबर 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>. [https://web.archive.org/web/20141104204834/http://www.jaipur.org.uk/forts-monuments/statue-circle.html] * सवाई जयसिंह की स्मृति में नई दिल्ली में एक प्रमुख सड़क है। [https://web.archive.org/web/20131210111840/http://newdelhiymca.in/ymca_map.php] *इसी तरह जयपुर के बनीपार्क क्षेत्र की एक प्रधान सड़क 'जयसिंह हाइवे' कहलाती है। [https://web.archive.org/web/20140714164552/http://timescity.com/jaipur/event/sawai-jai-singh-road-location/] *खगोलशास्त्र के योग्य विद्वानों को 'सवाई जयसिंह सम्मान' जयपुर का भूतपूर्व राजघराना प्रतिवर्ष देता है। [https://web.archive.org/web/20140714234756/http://msmsmuseum.com/pages.php?id=27] *भारत सरकार ने इनके निर्माण जंतर-मंतर को [[एशियाई खेल]]ों के 'प्रतीक-चिन्ह' के रूप में स्वीकार करते इस पर एक डाक टिकट 1984 में जारी किया था। [https://web.archive.org/web/20140714182138/http://www.indian-visit.com/monuments-of-india/jantar-mantar-delhi.html] . [https://web.archive.org/web/20130729213946/http://www.indiavisitinformation.com/indian-culture/indian-monument/Jantar-Mantar-in-india.shtml] === उत्तराधिकारी === इनसे इनके तीन पुत्र थे-सबसे बड़े, दो लड़कों के पिता (२२ वर्षीय) ''शिवसिंह'', मंझले ''ईश्वरसिंह'' और सब से छोटे ''माधोसिंह'' |<ref>'जयपुर-दर्शन'</ref> ==== पुत्र शिवसिंह की मृत्यु==== शिवसिंह की मृत्यु का कारण '[[वंश भास्कर ]]' के ख्यात-लेखक ने यह बताया है कि मंझले पुत्र ईश्वरसिंह के उकसाने पर सवाई जयसिंह ने ज़हर दे कर अपनी रानी के सहयोग से स्वयं अपने टीकाई पुत्र की हत्या कर दी थी, पर [[यदुनाथ सरकार]] जैसे इतिहासकार इसे 'गप्प' मानते हैं और स्वीकार नहीं करते| उनके अनुसार " (अपने पिता की अनुपस्थिति में बादशाह द्वारा बनाये गए आगरा के सूबेदार) शिवसिंह की हैजे (कॉलेरा) से मथुरा में अकाल-मृत्यु १७२४ ईस्वी में हुई थी, जहाँ वह फौजदार पद पर थे|"<ref name="ReferenceB">Jadunath Sarkar : 'A History of Jaipur' : Orient BlackSwan, Page 193</ref> जब कि १९ वीं सदी के अंत में लिखे ग्रन्थ [[वीर विनोद]] (जिसे उदयपुर राज्य के शासक महाराणा सज्जन सिंह ने मेवाड़ के प्रामाणिक इतिहास लेखन का उत्तरदायित्व [[कविराज श्यामलदास]] को सौंपा था) में यह लिखा गया है "माधोसिंह ने अपने बड़े भाई शिवसिंह को विष दे कर मार डाला था|"<ref name="ReferenceB"/> सवाई जयसिंह इन तीन पुत्रों के अलावा दो पुत्रियां भी थीं पहली - ''विचित्र कंवर'', जिनका विवाह अभयसिंह (जोधपुर) और छोटी ''किशन कंवर'', जिनका विवाह बून्दी के राजा दलेलसिंह के साथ हुआ।<ref name="ReferenceA"/> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} *[https://web.archive.org/web/20061207200908/http://uqconnect.net/~zzhsoszy/ips/j/jaipur.html] *[https://web.archive.org/web/20150325205204/https://en.wikipedia.org/wiki/List_of_Rajputs] *[https://web.archive.org/web/20130711224658/http://genealogy/ of the rulers of Jaipur] *[http ://books.google.co.in/books?isbn=8126718013] *'जयपुर-दर्शन' प्रकाशक : प्रधान-सम्पादक : डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य: वर्ष 1978 [पृष्ठ 210] प्रकाशक : 'जयपुर अढाई शती समारोह समिति', नगर विकास व्यास (अब जयपुर विकास प्राधिकरण) परिसर, [[भवानी सिंह]] मार्ग, जयपुर-4 *'संस्कृत-कल्पतरु' : संपादक : [[कलानाथ शास्त्री]] एवं घनश्याम गोस्वामी: '[[मंजुनाथ शोध संस्थान]]', सी-8, पृथ्वीराज रोड, सी-स्कीम, जयपुर-302001 *डॉ॰ ज्ञानप्रकाश पिलानिया, 'Enlightened Government in Modern [[भारत|India]]: Heritage of Sawai Jai Singh ('हेरिटेज ऑफ़ सवाई जयसिंह') ISBN 8187359161, 9788187359166 *[[यदुनाथ सरकार]] : A History of Jaipur : Orient BlackSwan : ISBN 978-81-250-3691-3 *डॉ॰[[असीम कुमार राय]] की पुस्तक : "the history of jaipur city" *कविशिरोमणि [[भट्ट मथुरानाथ शास्त्री]]: '[[जयपुर-वैभवम]]' *चार शहरनामे : पुस्तक : हेमन्त शेष : शब्दार्थ प्रकाशन, जयपुर 2018 *Sarkar, Jadunath (1984, reprint 1994) A History of [[जयपुर]], New Delhi: Orient Longman, ISBN 81-250-0333-9 *Bowker, John, The Oxford Dictionary of World Religions, New York, Oxford University Press, 1997, p.&nbsp;103 *A B Umashankar Mitra (1995). 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Oriental MSS., The British Library London, England. == इन्हें भी देखें== *[[जंतर मंतर|जन्तर मन्तर]] *[[जगन्नाथ सम्राट]]—महाराजा जयसिंह द्वितीय के दरबार के महान गणितज्ञ एवं खगोलविद == बाहरी कड़ियाँ== * सवाई जयसिंह : [[राजेन्द्र शंकर भट्ट]]: [[राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत|नेशनल बुक ट्रस्ट]] (अंग्रेज़ी अनुवाद: शैलेश कुमार झा) २००५ संस्करण *'राजस्थान का इतिहास' भाग-2 : लेफ्टिनेंट कर्नल जेम्स टॉड, पृष्ठ 119 : वर्ष २०११ : 'साहित्यागार' प्रकाशन, जयपुर *[https://web.archive.org/web/20160411150452/https://books.google.co.in/books?id=7F_MJcTjDOQC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false Building Jaipur: The Making of an Indian City] (गूगल पुस्तक ; By Vibhuti Sachdev, Giles Henry Rupert Tillotson) *[https://web.archive.org/web/20180402230216/http://www.electroniki.com/Visitor/Art.aspx?sMID=9&sSMID=0&sArtID=288 जयसिंह और उनकी वेधशालाएँ] (शुकदेव प्रसाद) *[https://web.archive.org/web/20150814012719/http://www.internetindia.com/ashowkase/jaisingh.htm] *[https://web.archive.org/web/20140714113824/http://www.new1.dli.ernet.in/data1/upload/insa/INSA_1/20005b5c_131.pdf] *[https://web.archive.org/web/20140714215818/http://www.new1.dli.ernet.in/data1/upload/insa/INSA_1/20005ac0_249.pdf] [[श्रेणी:राजस्थान का इतिहास]] [[श्रेणी:जयपुर के लोग]] [[श्रेणी:राजस्थान के महाराजा]] [[श्रेणी:जयपुर]] [[श्रेणी:इतिहास]] [[श्रेणी:भारतीय वैज्ञानिक]] [[श्रेणी:भारतीय गणितज्ञ]] [[श्रेणी:भारत]] [[श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना]] [[श्रेणी:जयपुर के महाराजा]] {{जयपुर के महाराजा}} 678oyw3432exn7flzfxpf69uzvfh3mg भारतीय दण्ड संहिता 0 27111 6630412 6578106 2026-10-17T10:38:47Z SAGAR SURYAVANSHI JAITHAL 938876 छोटा सा सुधार किया। 6630412 wikitext text/x-wiki {{Infobox legislation | short_title = भारतीय दण्ड संहिता, 1860 | legislature = | image = Star of the Order of the Star of India (gold).svg | imagesize = 200 | imagelink = | imagealt = | caption = | long_title = भारत के लिए एक सामान्य दण्ड संहिता प्रदान करने के लिए एक अधिनियम | citation = [https://archive.org/details/indianpenalcode00macpgoog Act No. 45 of 1860] | territorial_extent = {{flag|भारत}} | enacted_by = शाही विधान परिषद | date_enacted = 6 अक्टूबर 1860 | date_assented = 6 अक्टूबर 1860 | date_commenced = 1 जनवरी 1862 | bill = | bill_citation = | bill_date = | introduced_by = | 1st_reading = | 2nd_reading = | 3rd_reading = | white_paper = | committee_report = [[भारतीय विधि आयोग|प्रथम विधि आयोग]] | amendments = ''देखें'' [[भारतीय दण्ड संहिता#संशोधन | संशोधन]] | repeals = | related_legislation = [[दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (भारत)]] | summary = | keywords = | status = amended }} '''भारतीय दण्ड संहिता''' [[भारत]] के अन्दर भारत के किसी भी नागरिक द्वारा किये गये कुछ [[अपराध|अपराधों]] की परिभाषा व [[दण्ड]] का प्रावधान करती है। किन्तु यह संहिता [[भारतीय सशस्‍त्र सेनाएँ|भारत की सेना]] पर लागू नहीं होती। भारतीय दण्ड संहिता ब्रिटिश काल में सन् [[१८६०|1860]] में लागू हुई। इसके बाद इसमे समय-समय पर संशोधन होते रहे (विशेषकर [[भारत की स्वतन्त्रता|भारत के स्वतन्त्र]] होने के बाद)। [[पाकिस्तान]] और [[बांग्लादेश]] ने भी भारतीय दण्ड संहिता को ही लागू किया। लगभग इसी रूप में यह विधान तत्कालीन अन्य ब्रिटिश [[उपनिवेश|उपनिवेशों]] ([[म्यान्मार|बर्मा]], [[श्रीलंका]], [[मलेशिया]], [[सिंगापुर]], [[ब्रुनेई]] आदि) में भी लागू की गयी थी। लेकिन इसमें अब तक बहुत से संशोधन किये जा चुके है। [[भारतीय न्याय संहिता]] 2023 ने इसे विस्थापित कर दिया। ==अध्याय 1== === उद्देशिका === # '''धारा 1''' [[संहिता]] का नाम और उसके प्रर्वतन का विस्तार। यह अधिनियम भारतीय दण्ड संहिता (IPC) कहलायेगा, और इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर होगा। * [[धारा ३७०|अनुच्छेद 370]] के हटाए जाने पर भारतीय दण्ड संहिता संपूर्ण भारत पर लागू होगा जिसमे केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर भी शामिल है |<ref>{{cite news |title=IPC और CrPC सहित 37 केंद्रीय कानून जम्मू-कश्मीर में लागू |url=https://ndtv.in/india-news/37-act-including-ipc-and-crpc-implemented-in-jammu-kashmir-2187225 |accessdate=17 नवम्बर 2021 |work=NDTVIndia |archive-date=17 नवंबर 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20211117150343/https://ndtv.in/india-news/37-act-including-ipc-and-crpc-implemented-in-jammu-kashmir-2187225 |url-status=dead }}</ref> संविधान के अनुसूची 5 के तहत 109 कानून अब जम्मू और कश्मीर पर भी लागू होंगे जिसमें भारतीय दण्ड संहिता के साथ-साथ [[हिन्दू विवाह अधिनियम]] भी सम्मिलित हैं। * '''धारा 2''' भारत के भीतर किए गये अपराधों का दण्ड हर व्यक्ति इस संहिता के उपबन्धों के प्रतिकूल हर कार्य या लोप के लिए जिसका वह भारत के भीतर दोषी होगा, इसी संहिता के अधीन दण्डनीय होगा अन्यथा नहीं । * '''धारा 3''' भारत से परे किए गये किन्तु उसके भीतर विधि के अनुसार विचारणीय अपराधों का दण्ड भारत से परे किए गए अपराध के लिए जो कोई व्यक्ति किसी भारतीय विधि के अनुसार विचारण का पात्र हो, भारत से परे किए गए किसी कार्य के लिए उससे इस संहिता के उपबन्धों के अनुसार ऐसा बरता जाएगा, मानो वह कार्य भारत के भीतर किया गया था । * '''धारा 4''' राज्य-क्षेत्रातीत अपराधों पर संहिता का विस्तार इस संहिता के उपबन्ध - (1) भारत के बाहर और परे किसी स्थान में भारत के किसी नागरिक द्वारा ; (2) भारत में पञ्जीकृत किसी पोत या विमान पर, चाहे वह कहीं भी हो किसी व्यक्ति द्वारा, किए गए किसी अपराध को भी लागू है स्पष्टीकरण - इस धारा में “अपराध” शब्द के अन्तर्गत भारत से बाहर किया गया ऐसा हर कार्य आता है, जो यदि भारत में किया जाता तो, इस संहिता के अधीन दण्डनीय होता । ;दृष्टान्त क. जो भारत का नागरिक है उगाण्डा में हत्या करता है । वह भारत के किसी स्थान में, जहाँ वह पाया जाए, हत्या के लिए विचारित और दोषसिद्ध किया जा सकता है । * '''धारा 5''' कुछ विधियों पर इस अधिनियम द्वारा प्रभाव न डाला जाना इस अधिनियम में की कोई बात भारत सरकार की सेवा के ऑफिसरों, सैनिकों, नौसैनिकों या वायु सैनिकों द्वारा विद्रोह और अभित्यजन को दण्डित करने वाले किसी अधिनियम के उपबन्धों, या किसी विशेष या स्थानीय विधि के उपबन्धों, पर प्रभाव नहीं डालेगी । ==अध्याय 2== ;साधारण स्पष्टीकरणI * '''धारा 6''' संहिता में की परिभाषाओं का अपवादों के अध्यधीन समझा जाना इस संहिता में सर्वत्र, अपराध की हर परिभाषा, हर दण्ड उपबन्ध और हर ऐसी परिभाषा या दण्ड उपबन्ध का हर दृष्टान्त, “साधारण अपवाद” शीर्षक वाले अध्याय में अन्तर्विष्ट अपवादों के अध्यधीन समझा जाएगा, चाहे उन अपवादों को ऐसी परिभाषा, दण्ड उपबन्ध या दृष्टान्त में दुहराया न गया हो । दृष्टांत : (क) इस संहिता की वे धाराएँ, जिनमें अपराधों की परिभाषाएँ अन्तर्विष्ट हैं, यह अभिव्यक्त नहीं करती कि सात वर्ष से कम आयु का शिशु ऐसे अपराध नहीं कर सकता, किन्तु परिभाषाएँ उस साधारण अपवाद के अध्यधीन समझी जानी हैं जिसमें यह उपबन्धित है कि कोई बात, जो सात वर्ष से कम आयु के शिशु द्वारा की जाती है, अपराध नहीं है । (ख) 'क' , एक पुलिस ऑफिसर, वारण्ट के बिना, 'य' को, जिसने हत्या की है, पकड़ लेता है । यहाँ 'क' सदोष परिरोध के अपराध का दोषी नहीं है, क्योंकि वह 'य' को पकड़ने के लिए विधि द्वारा आबद्ध था, और इसलिए यह मामला उस साधारण अपवाद के अन्तर्गत आ जाता है, जिसमें यह उपबन्धित है कि “कोई बात अपराध नहीं है जो किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाए जो उसे करने के लिए विधि द्वारा आबद्ध हो । * '''धारा 7''' एक बार स्पष्टीकृत पद का भाव हर पद, जिसका स्पष्टीकरण इस संहिता के किसी भाग में किया गया है, इस संहिता के हर भाग में उस स्पष्टीकरण के अनुरूप ही प्रयोग किया गया है । * '''धारा 8''' लिंग पुलिंग वाचक शब्द जहाँ प्रयोग किए गए हैं, वे हर व्यक्ति के बारे में लागू हैं, चाहे नर हो या नारी । * '''धारा 9''' वचन जब तक कि संदर्भ से तत्प्रतिकूल प्रतीत न हो, एकवचन द्योतक शब्दों के अन्तर्गत बहुवचन आता है, और बहुवचन द्योतक शब्दों के अन्तर्गत एकवचन आता है । * '''धारा 10''' पुरूष, स्त्री “पुरुष” शब्द किसी भी आयु के मानव नर का द्योतक है ; “स्त्री” शब्द किसी भी आयु की मानव नारी का द्योतक है । * '''धारा 11''' व्यक्ति कोई भी कम्पनी या संगम, या व्यक्ति निकाय चाहे वह निगमित हो या नहीं, “व्यक्ति” शब्द के अन्तर्गत आता है । * '''धारा 12''' लोक लोक का कोई भी वर्ग या कोई भी समुदाय “लोक” शब्द के अन्तर्गत आता है । * '''धारा 13''' निरसित “क्वीन” की परिभाषा विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा निरसित । * '''धारा 14''' सरकार का सेवक "सरकार का सेवक" शब्द सरकार के प्राधिकार के द्वारा या अधीन, भारत के भीतर उस रूप में बने रहने दिए गए, नियुक्त किए गए, या नियोजित किए गए किसी भी ऑफिसर या सेवक के द्योतक हैं । * '''धारा 15''' निरसित ब्रिटिश इण्डिया” की परिभाषा विधि अनुकूलन आदेश, 1937 द्वारा निरसित । * '''धारा 16''' निरसित “गवर्नमेंट आफ इण्डिया” की परिभाषा भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937 द्वारा निरसित । * '''धारा 17''' सरकार “सरकार” केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य की सरकार का द्योतक है । * '''धारा 18 भारत''' “भारत” से भारत का राज्यक्षेत्र अभिप्रेत है । * '''धारा 19''' न्यायाधीश “न्यायाधीश” शब्द न केवल हर ऐसे व्यक्ति का द्योतक है, जो पद रूप से न्यायाधीश अभिहित हो, किन्तु उस हर व्यक्ति का भी द्योतक है, जो किसी विधि कार्यवाही में, चाहे वह सिविल हो या दाण्डिक, अन्तिम निर्णय या ऐसा निर्णय, जो उसके विरुद्ध अपील न होने पर अन्तिम हो जाए या ऐसा निर्णय, जो किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा पुष्ट किए जाने पर अन्तिम हो जाए, देने के लिए विधि द्वारा सशक्त किया गया हो, अथवा जो उस व्यक्ति निकाय में से एक हो, जो व्यक्ति निकाय ऐसा निर्णय देने के लिए विधि द्वारा सशक्त किया गया हो । दृष्टान्त (क) सन् 1859 के अधिनियम 10 के अधीन किसी वाद में अधिकारिता का प्रयोग करने वाला कलक्टर न्यायाधीश है । (ख) किसी आरोप के सम्बन्ध में, जिसके लिए उसे जुर्माना या कारावास का दण्ड देने की शक्ति प्राप्त है, चाहे उसकी अपील होती हो या न होती हो, अधिकारिता का प्रयोग करने वाला मजिस्ट्रेट न्यायाधीश है । (ग) मद्रास संहिता के सन् 1816 के विनियम 7 के अधीन वादों का विचारण करने की और अवधारण करने की शक्ति रखने वाली पंचायत का सदस्य न्यायाधीश है । (घ) किसी आरोप के सम्बन्ध में, जिनके लिए उसे केवल अन्य न्यायालय को विचारणार्थ सुपुर्द करने की शक्ति प्राप्त है, अधिकारिता का प्रयोग करने वाला मजिस्ट्रेट न्यायाधीश नहीं है । * '''धारा 20 न्यायालय''' “न्यायालय” शब्द उस न्यायाधीश का, जिसे अकेले ही को न्यायिकत: कार्य करने के लिए विधि द्वारा सशक्त किया गया हो, या उस न्यायाधीश-निकाय का, जिसे एक निकाय के रूप में न्यायिकत: कार्य करने के लिए विधि द्वारा सशक्त किया गया हो, जबकि ऐसा न्यायाधीश या न्यायाधीश-निकाय न्यायिकत: कार्य कर रहा हो, द्योतक है । :दृष्टान्त : मद्रास संहिता के सन् 1816 के विनियम 7 के अधीन कार्य करने वाली पंचायत[5], जिसे वादों का विचारण करने और अवधारण करने की शक्ति प्राप्त है, न्यायालय है । * '''धारा 21''' लोक सेवक “लोक सेवक” शब्द उस व्यक्ति के द्योतक है जो एतस्मिन् पश्चात् निम्नगत वर्णनों में से किसी में आता है, अर्थात् : '''01''' - पहले खण्ड का आलोप किया गया। '''02''' - भारत की सेना, नौ सेना या वायु सेना का हर आयुक्त ऑफिसर ; '''03''' - हर न्यायाधीश जिसके अन्तर्गत ऐसे कोई भी व्यक्ति आता है जो किन्हीं न्यायनिर्णयिक कॄत्यों का चाहे स्वयं या व्यक्तियों के किसी निकाय के सदस्य के रूप में निर्वहन करने के लिए विधि द्वारा सशक्त किया गया हो ;] '''04''' - न्यायालय का हर ऑफिसर (जिसके अन्तर्गत समापक, रिसीवर या कमिश्नर आता है) जिसका ऐसे ऑफिसर के नाते यह कर्तव्य हो कि वह विधि या तथ्य के किसी मामले में अन्वेषण या रिपोर्ट करे, या कोई दस्तावेज बनाए, अधिप्रमाणीकॄत करे, या रखे, या किसी सम्पत्ति का भार सम्भाले या उस सम्पत्ति का व्ययन करे, या किसी न्यायिक आदेशिका का निष्पादन करे, या कोई शपथ ग्रहण कराए या निर्वचन करे, या न्यायालय में व्यवस्था बनाए रखे और हर व्यक्ति, जिसे ऐसे कर्तव्यों में से किन्हीं का पालन करने का प्राधिकार न्यायालय द्वारा विशेष रूप से दिया गया हो ; '''05''' - किसी न्यायालय या लोक सेवक की सहायता करने वाला हर जूरी-सदस्य, असेसर या पंचायत का सदस्य ; '''06''' - हर मध्यस्थ या अन्य व्यक्ति, जिसको किसी न्यायालय द्वारा, या किसी अन्य सक्षम लोक प्राधिकारी द्वारा, कोई मामला या विषय, विनिश्चित या रिपोर्ट के लिए निर्देशित किया गया हो ; '''07''' - हर व्यक्ति जो किसी ऐसे पद को धारण कर्ता हो, जिसके आधार से वह किसी व्यक्ति को परिरोध में करने या रखने के लिए सशक्त हो ; '''08''' - सरकार का हर ऑफिसर जिसका ऐसे ऑफिसर के नाते यह कर्तव्य हो कि वह अपराधों का निवारण करे, अपराधों की इत्तिला दे, अप्राधियों को न्याय के लिए उपस्थित करे, या लोक के स्वास्थ्य, क्षेम या सुविधा की संरक्षा करे ; '''09''' - हर ऑफिसर जिसका ऐसे ऑफिसर के नाते यह कर्तव्य हो कि वह सरकार की ओर से किसी सम्पत्ति को ग्रहण करे, प्राप्त करे, रखे, व्यय करे, या सरकार की ओर से कोई सर्वेक्षण, निर्धारण या संविदा करे, या किसी राजस्व आदेशिका का निष्पादन करे, या 8[सरकार] के धन-सम्बन्धी हितों पर प्रभाव डालने वाले किसी मामले में अन्वेषण या रिपोर्ट करे या 8[सरकार] के धन सम्बन्धी हितों से सम्बन्धित किसी दस्तावेज को बनाए, अधिप्रमाणीकॄत करे या रखे, या 8[सरकार] 3।।। धन-सम्बन्धी हितों की संरक्षा के लिए किसी विधि के व्यतिक्रम को रोके ; '''10''' - हर ऑफिसर, जिसका ऐसे ऑफिसर के नाते यह कर्तव्य हो कि वह किसी ग्राम, नगर या जिले के किसी धर्मनिरपेक्ष सामान्य प्रयोजन के लिए किसी सम्पत्ति को ग्रहण करे, प्राप्त करे, रखे या व्यय करे, कोई सर्वेक्षण या निर्धारण करे, या कोई रेट या कर उद्गॄहीत करे, या किसी ग्राम, नगर या जिले के लोगों के अधिकारों के अभिनिश्चयन के लिए कोई दस्तावेज बनाए, अधिप्रमाणीकॄत करे या रखे ; '''11''' - हर व्यक्ति जो कोई ऐसे पद धारण कर्ता हो जिसके आधार से वह निर्वाचक नामावली तैयार करने, प्रकाशित करने, बनाए रखने, या पुनरीक्षित करने के लिए या निर्वाचन या निर्वाचन के लिए भाग को संचालित करने के लिए सशक्त हो ; 12 - हर व्यक्ति, जो - (क) सरकार की सेवा या वेतन में हो, या किसी लोक कर्तव्य के पालन के लिए सरकार से फीस या कमीशन के रूप में पारिश्रमिक पाता हो ; (ख) स्थानीय प्राधिकारी की, अथवा केन्द्र, प्रान्त या राज्य के अधिनियम के द्वारा या अधीन स्थापित निगम की अथवा कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 में यथा परिभाषित सरकारी कम्पनी की, सेवा या वेतन में हो । :दृष्टांत : नगरपालिका आयुक्त लोक सेवक है । स्पष्टीकरण 1 - ऊपर के वर्णनों में से किसी में आने वाले व्यक्ति लोक सेवक हैं, चाहे वे सरकार द्वारा नियुक्त किए गए हों या नहीं । स्पष्टीकरण 2 - जहाँ कहीं “लोक सेवक” शब्द आएँ हैं, वे उस हर व्यक्ति के सम्बन्ध में समझे जाएँगे जो लोक सेवक के पद को वास्तव में धारण किए हुए हों, चाहे उस पद को धारण करने के उसके अधिकार में कैसी ही विधिक त्रुटि हो । स्पष्टीकरण 3 - “निर्वाचन” शब्द ऐसे किसी विधायी, नगरपालिक या अन्य लोक प्राधिकारी के नाते, चाहे वह कैसे ही स्वरूप का हो, सदस्यों के वरणार्थ निर्वाचन का द्योतक है जिसके लिए वरण करने की पद्धति किसी विधि के द्वारा या अधीन निर्वाचन के रूप में विहित की गई हो । * '''धारा 22''' जंगम सम्पत्ति “जंगम सम्पत्ति” शब्दों से यह आशयित है कि इनके अन्तर्गत हर भाँति की मूर्त सम्पत्ति आती है, किन्तु भूमि और वे चीजें, जो भू-बद्ध हों या भू-बद्ध किसी चीज से स्थायी रूप से जकड़ी हुई हों, इनके अन्तर्गत नहीं आता । * '''धारा 23''' सदोष अभिलाभ * सदोष अभिलाभ * सदोष हानि * सदोष अभिलाभ प्राप्त करना/सदोष हानि उठाना * '''धारा 24''' बेईमानी से * '''धारा 25''' कपटपूर्वक * '''धारा 26''' विश्वास करने का कारण * '''धारा 27''' पत्नी, लिपिक या सेवक के कब्जे में सम्पत्ति * '''धारा 28''' कूटकरण * '''धारा 29''' दस्तावेज * '''धारा 29''' क इलेक्ट्रानिक अभिलेख * '''धारा 30''' मूल्यवान प्रतिभूति * '''धारा 31''' बिल * '''धारा 32''' कार्यों का निर्देश करने वाले शब्दों के अन्तर्गत अवैध लोप आता है * '''धारा 33''' कार्य, लोप * '''धारा 34''' सामान्य आशय को अग्रसर करने में कई व्यक्तियों द्वारा किये गये कार्य * '''धारा 35''' जब कि ऐसा कार्य इस कारण अपराधित है कि वह अपराध्कि ज्ञान या आशय से किया गया है * '''धारा 36''' अंशत: कार्य द्वारा और अंशत: लोप द्वारा कारित परिणाम * '''धारा 37''' किसी अपराध को गठित करने वाले कई कार्यों में से किसी एक को करके सहयोग करना * '''धारा 38''' अपराधिक कार्य में संपृक्त व्यक्ति विभिन्न अपराधों के दोषी हो सकेंगे * '''धारा 39''' स्वेच्छया * '''धारा 40''' अपराध * '''धारा 41''' विशेष विधि * '''धारा 42''' स्थानीय विधि * '''धारा 43''' अवैध, करने के लिये वैध रूप से आबद्ध * '''धारा 44''' क्षति * '''धारा 45''' जीवन * '''धारा 46''' मृत्यु * '''धारा 47''' जीव जन्तु * '''धारा 48''' जलयान * '''धारा 49''' वर्ष, मास * '''धारा 50''' धारा * '''धारा 51''' शपथ * '''धारा 52''' सद्भावनापूर्वक * '''धारा 52''' क संश्रय ==अध्याय 3== ;दण्डों के विषय में * '''धारा 53''' दण्ड * '''धारा 53''' क निर्वसन के प्रति निर्देश का अर्थ लगाना * '''धारा 54''' लघु दण्डादेश का लघुकरण * '''धारा 55''' आजीवन कारावास के दण्डादेश का लघुकरण * '''धारा 55''' क समुचित सरकार की परिभाषा * '''धारा 56''' निरसित * '''धारा 57''' दण्ड अवधियों की भिन्ने * '''धारा 58''' निरसित * '''धारा 59''' निरसित * '''धारा 60''' दण्डादिष्ट कारावास के कतिपय मामलों में संपूर्ण कारावास या उसका कोई भाग कठिन या सादा हो सकेगा * '''धारा 61''' निरसित * '''धारा 62''' निरसित * '''धारा 63''' जुर्माने की रकम * '''धारा 64''' जुर्माना न देने पर कारावास का दण्डादेश * '''धारा 65''' जबकि कारावास और जुर्माना दोनों आदिष्ट किये जा सकते हैं, तब जुर्माना न देने पर कारावास, जबकि अपराध केवल जुर्माने से दण्डनीय हो * '''धारा 66''' जुर्माना न देने पर किस भाॅंति का कारावास दिया जाय * '''धारा 67''' जुर्माना न देने पर कारावास, जबकि अपराध केवल जुर्माने से दण्डनीय हो * '''धारा 68''' जुर्माना देने पर कारावास का पर्यवसान हो जाना * '''धारा 69''' जुर्माने के आनुपातिक भाग के दे दिये जाने की दशा में कारावास का पर्यवसान * '''धारा 70''' जुर्माने का छः वर्ष के भीतर या कारावास के दौरान में उदग्रहणीय होना * '''धारा 71''' कई अपराधों से मिलकर बने अपराध के लिये दण्ड की अवधि * '''धारा 72''' कई अपराधों में से एक के दोषी व्यक्ति के लिये दण्ड जबकि निर्णय में यह कथित है कि यह संदेह है कि वह किस अपराध का दोषी है * '''धारा 73''' एकांत परिरोध * '''धारा 74''' एकांत परिरोध की अवधि * '''धारा 75''' पूर्व दोषसिद्धि के पश्च्यात अध्याय १२ या अध्याय १७ के अधीन कतिपय अपराधों के लिये वर्धित दण्ड ==अध्याय 4== ;साधारण अपवाद * '''धारा 76''' विधि द्वारा आबद्ध या तथ्य की भूल के कारण अपने आप को विधि द्वारा आबद्ध होने का विश्वास करने वाले व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य * '''धारा 77''' न्यायिकत: कार्य करने हेतु न्यायाधीश का कार्य * '''धारा 78''' न्यायालय के निर्णय या आदेश के अनुसरण में किया गया कार्य * '''धारा 79''' विधि द्वारा न्यायानुमत या तथ्य की भूल से अपने को विधि द्वारा न्यायानुमत होने का विश्वास करने वाले व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य * '''धारा 80''' विधिपूर्ण कार्य करने में दुर्घटना * '''धारा 81''' कार्य जिससे अपहानि कारित होना संभाव्य है, किन्तु जो आपराधिक आशय के बिना और अन्य अपहानि के निवारण के लिये किया गया है * '''धारा 82''' सात वर्ष से कम आयु के शिशु का कार्य * '''धारा 83''' सात वर्ष से ऊपर किन्तु बारह वर्ष से कम आयु अपरिपक्व समझ के शिशु का कार्य * '''धारा 84''' विकृतिचित्त व्यक्ति का कार्य * '''धारा 85''' ऐसे व्यक्ति का कार्य जो अपनी इच्छा के विरूद्ध मत्तता में होने के कारण निर्णय पर पहुंचने में असमर्थ है * '''धारा 86''' किसी व्यक्ति द्वारा, जो मत्तता में है, किया गया अपराध जिसमें विशेष आशय या ज्ञान का होना अपेक्षित है * '''धारा 87''' सम्मति से किया गया कार्य जिसमें मृत्यु या घोर उपहति कारित करने का आशय हो और न उसकी सम्भव्यता का ज्ञान हो * '''धारा 88''' किसी व्यक्ति के फायदे के लिये सम्मति से सदभवनापूर्वक किया गया कार्य जिससे मृत्यु कारित करने का आशय नहीं है * '''धारा 89''' संरक्षक द्वारा या उसकी सम्मति से शिशु या उन्मत्त व्यक्ति के फायदे के लिये सद्भावनापूर्वक किया गया कार्य * '''धारा 90''' सम्मति ** उन्मत्त व्यक्ति की सम्मति ** शिशु की सम्मति * '''धारा 91''' एसे कार्यों का अपवर्णन जो कारित अपहानि के बिना भी स्वतः अपराध है * '''धारा 92''' सम्मति के बिना किसी ब्यक्ति के फायदे के लिये सदभावना पूर्वक किया गया कार्य * '''धारा 93''' सदभावनापूर्वक दी गयी संसूचना * '''धारा 94''' वह कार्य जिसको करने के लिये कोई ब्यक्ति धमकियों द्वारा विवश किया गया है * '''धारा 95''' तुच्छ अपहानि कारित करने वाला कार्य ;निजी प्रतिरक्षा के अधिकार के विषय में * '''धारा 96''' निजी प्रतिरक्षा में दी गयी बातें * '''धारा 97''' शरीर तथा सम्पत्ति पर निजी प्रतिरक्षा का अधिकार * '''धारा 98''' ऐसे ब्यक्ति का कार्य के विरूद्ध निजी प्रतिरक्षा का अधिकार जो विकृत आदि हो * '''धारा 99''' कार्य, जिनके विरूद्ध निजी प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं है इस अधिकार के प्रयोग का विस्तार * '''धारा 100''' शरीर की निजी प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने पर कब होता है * '''धारा 101''' कब ऐसे अधिकार का विस्तार मृत्यु से भिन्न कोई अपहानि कारित करने तक का होता है * '''धारा 102''' शरीर की निजी प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बने रहना * '''धारा 103''' कब सम्पत्ति की निजी प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने तक का होता है * '''धारा 104''' ऐसे अधिकार का विस्तार मृत्यु से भिन्न कोई अपहानि कारित करने तक का कब होता है * '''धारा 105''' सम्पत्ति की निजी प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बने रहना * '''धारा 106''' घातक हमले के विरूद्ध निजी प्रतिरक्षा के अधिकार जबकि निर्दोश व्यक्ति को अपहानि होने की जोखिम है ==अध्याय 5== ;दुष्प्रेरण के विषय में * '''धारा 107''' किसी बात का दुष्प्रेरण * '''धारा 108''' दुष्प्रेरक * '''धारा 108 क''' भारत से बाहर के अपराधों का भारत में दुष्प्रेरण * '''धारा 109''' दुष्प्रेरण का दण्ड, यदि दुष्प्रेरित कार्य उसके परिणामस्वरूप किया जाए और जहां तक कि उसके दण्ड के लिये कोई अभिव्यक्त उपबंध नहीं है * '''धारा 110''' दुष्प्रेरण का दण्ड, यदि दुष्प्रेरित व्यक्ति दुष्प्रेरक के आशय से भिन्न आशय से कार्य करता है * '''धारा 111''' दुष्प्रेरक का दायित्व जब एक कार्य का दुष्प्रेरण किया गया है और उससे भिन्न कार्य किया गया है * '''धारा 112''' दुष्प्रेरक कब दुष्प्रेरित कार्य के लिये और किये गये कार्य के लिए आकलित दण्ड से दण्डनीय है * '''धारा 113''' दुष्प्रेरित कार्य से कारित उस प्रभाव के लिए दुष्प्रेरक का दायित्व जो दुष्प्रेरक दवारा आशयित से भिन्न हो * '''धारा 114''' अपराध किए जाते समय दुष्प्रेरक की उपस्थिति * '''धारा 115''' मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध का दुष्प्रेरण यदि अपराध नहीं किया जाता यदि अपहानि करने वाला कार्य परिणामस्वरूप किया जाता है * '''धारा 116''' कारावास से दण्डनीय अपराध का दुष्प्रेरण आदि अपराध न किया जाए यदि दुष्प्रेरक या दुष्प्रेरित व्यक्ति ऐसा लोक सेवक है, जिसका कर्तव्य अपराध निवारित करना हो * '''धारा 117''' लोक साधारण दवारा या दस से अधिक व्यक्तियों दवारा अपराध किये जाने का दुष्प्रेरण * '''धारा 118''' मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना यदि अपराध कर दिया जाए - यदि अपराध नहीं किया जाए * '''धारा 119''' किसी ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना का लोक सेवक दवारा छिपाया जाना, जिसका निवारण करना उसका कर्तव्य है ** यदि अपराध कर दिया जाय ** यदि अपराध मृत्यु, आदि से दण्डनीय है ** यदि अपराध नहीं किया जाय * '''धारा 120''' कारावास से दण्डनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना ** यदि अपराध कर दिया जाए - यदि अपराध नहीं किया जाए ==अध्याय 5 क== ;आपराधिक षडयन्त्र * '''धारा 120 क''' आपराधिक षडयंत्र की परिभाषा * '''धारा 120 ख''' आपराधिक षडयंत्र का दण्ड ==अध्याय 6== ;राज्य के विरूद्ध अपराधों के विषय में * '''धारा 121''' भारत सरकार के विरूद्ध युद्ध करना या युद्ध करने का प्रयत्न करना या युद्ध करने का दुष्प्रेरण करना * '''धारा 121 क''' धारा 121 दवारा दण्डनीय अपराधों को करने का षडयंत्र * '''धारा 122''' भारत सरकार के विरूद्ध युद्ध करने के आशय से आयुध आदि संग्रह करना * '''धारा 123''' युद्ध करने की परिकल्पना को सफल बनाने के आशय से छुपाना * '''धारा 124''' किसी विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग करने के लिए विवश करने या उसका प्रयोग अवरोपित करने के आशय से राट्रपति, राज्यपाल आदि पर हमला करना * '''धारा 124 क''' राजद्रोह * '''धारा 125''' भारत सरकार से मैत्री सम्बंध रखने वाली किसी एशियाई शक्ति के विरूद्ध युद्ध करना * '''धारा 126''' भारत सरकार के साथ शान्ति का संबंध रखने वाली शक्ति के राज्य क्षेत्र में लूटपाट करना * '''धारा 127''' धारा 125 व 126 में वर्णित युद्ध या लूटपाट दवारा ली गयी सम्पत्ति प्राप्त करना * '''धारा 128''' लोक सेवक का स्व ईच्छा राजकैदी या युद्धकैदी को निकल भागने देना * '''धारा 129''' उपेक्षा से लोक सेवक का ऐसे कैदी का निकल भागना सहन करना * '''धारा 130''' ऐसे कैदी के निकल भागने में सहायता देना, उसे छुडाना या संश्रय देना ==अध्याय 7== ;सेना, नौसेना और वायुसेना से सम्बन्धित अपराधें के विषय में * '''धारा 131''' विद्रोह का दुष्प्रेरण का किसी सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक को कर्तव्य से विचलित करने का प्रयत्न करना * '''धारा 132''' विद्रोह का दुष्प्रेरण, यदि उसके परिणामस्वरूप विद्रोह हो जाए। * '''धारा 133''' सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अपने वरिष्ठ अधिकारी, जब कि वह अधिकारी अपने पद-निष्पादन में हो, पर हमले का दुष्प्रेरण। * '''धारा 134''' हमले का दुष्प्रेरण जिसके परिणामस्वरूप हमला किया जाए। * '''धारा 135''' सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा परित्याग का दुष्प्रेरण। * '''धारा 136''' अभित्याजक को संश्रय देना * '''धारा 137''' मास्टर की उपेक्षा से किसी वाणिज्यिक जलयान पर छुपा हुआ अभित्याजक * '''धारा 138''' सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अनधीनता के कार्य का दुष्प्रेरण। * '''धारा 138 क''' पूर्वोक्त धाराओं का भारतीय सामुद्रिक सेवा को लागू होना * '''धारा 139''' कुछ अधिनियमों के अध्यधीन व्यक्ति। * '''धारा 140''' सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली पोशाक पहनना या प्रतीक चिह्न धारण करना। ==अध्याय 8== ;सार्वजनिक शान्ति के विरुद्ध अपराध * '''धारा 141''' विधिविरुद्ध जनसमूह। * '''धारा 142''' विधिविरुद्ध जनसमूह का सदस्य होना। * '''धारा 143''' गैरकानूनी जनसमूह का सदस्य होने के नाते दंड * '''धारा 144''' घातक आयुध से सज्जित होकर विधिविरुद्ध जनसमूह में सम्मिलित होना। * '''धारा 145''' किसी विधिविरुद्ध जनसमूह, जिसे बिखर जाने का समादेश दिया गया है, में जानबूझकर शामिल होना या बने रहना। * '''धारा 146''' उपद्रव करना * '''धारा 147''' बल्वा करने के लिए दण्ड * '''धारा 148''' घातक आयुध से सज्जित होकर उपद्रव करना। * '''धारा 149''' विधिविरुद्ध जनसमूह का हर सदस्य, समान लक्ष्य का अभियोजन करने में किए गए अपराध का दोषी। * '''धारा 150''' विधिविरुद्ध जनसमूह में सम्मिलित करने के लिए व्यक्तियों का भाड़े पर लेना या भाड़े पर लेने के लिए बढ़ावा देना। * '''धारा 151''' पांच या अधिक व्यक्तियों के जनसमूह जिसे बिखर जाने का समादेश दिए जाने के पश्चात् जानबूझकर शामिल होना या बने रहना * '''धारा 152''' लोक सेवक के उपद्रव / दंगे आदि को दबाने के प्रयास में हमला करना या बाधा डालना। * '''धारा 153''' उपद्रव कराने के आशय से बेहूदगी से प्रकोपित करना * '''धारा 153 क''' धर्म, मूलवंश, भाषा, जन्म-स्थान, निवास-स्थान, इत्यादि के आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता का संप्रवर्तन और सौहार्द्र बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कार्य करना। * '''धारा 153 ख''' राष्ट्रीय अखण्डता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले लांछन, प्राख्यान * '''धारा 154''' उस भूमि का स्वामी या अधिवासी, जिस पर गैरकानूनी जनसमूह एकत्रित हो * '''धारा 155''' व्यक्ति जिसके फायदे के लिए उपद्रव किया गया हो का दायित्व * '''धारा 156/3''' उस स्वामी या अधिवासी के अभिकर्ता का दायित्व, जिसके फायदे के लिए उपद्रव किया जाता है * '''धारा 157''' विधिविरुद्ध जनसमूह के लिए भाड़े पर लाए गए व्यक्तियों को संश्रय देना। * '''धारा 158''' विधिविरुद्ध जमाव या बल्वे में भाग लेने के लिए भाड़े पर जाना * '''धारा 159''' दंगा * '''धारा 160''' उपद्रव करने के लिए दण्ड। ==अध्याय 9== ;लोकसेवकों द्वारा या उनसे सम्बन्धित अपराध * '''धारा 161 से 164''' लोक सेवकों द्वारा या उनसे संबंधित अपराधों के विषय में * '''धारा 166''' लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति को क्षति पहुँचाने के आशय से विधि की अवज्ञा करना। * '''धारा 166 क''' कानून के तहत महीने दिशा अवहेलना लोक सेवक * '''धारा 166 ख''' अस्पताल द्वारा शिकार की गैर उपचार * '''धारा 167''' लोक सेवक, जो क्षति कारित करने के आशय से अशुद्ध दस्तावेज रचता है। * '''धारा 168''' लोक सेवक, जो विधिविरुद्ध रूप से व्यापार में लगता है * '''धारा 169''' लोक सेवक, जो विधिविरुद्ध रूप से संपत्ति क्रय करता है या उसके लिए बोली लगाता है। * '''धारा 170''' लोक सेवक का प्रतिरूपण। * '''धारा 171''' कपटपूर्ण आशय से लोक सेवक के उपयोग की पोशाक पहनना या निशानी को धारण करना। ==अध्याय 9 A== ;चुनाव सम्बन्धी अपराध * '''धारा 171 A''' अभ्यर्थी, निर्वाचन अधिकार परिभाषित * '''धारा 171 B''' रिश्वत * '''धारा 171 C''' निर्वाचनों में असम्यक् असर डालना * '''धारा 171 D''' निर्वाचनों में प्रतिरूपण * '''धारा 171 E''' रिश्वत के लिए दण्ड * '''धारा 171 F''' निर्वाचनों में असम्यक् असर डालने या प्रतिरूपण के लिए दण्ड * '''धारा 171 G''' निर्वाचन के सिलसिले में मिथ्या कथन * '''धारा 171 H''' निर्वाचन के सिलसिले में अवैध संदाय * '''धारा 171 I''' निर्वाचन लेखा रखने में असफलता ==अध्याय 10 == ;लोकसेवकों के विधिपूर्ण प्राधिकार के विरुद्ध अवमानना * '''धारा 172''' समनों की तामील या अन्य कार्यवाही से बचने के लिए फरार हो जाना * '''धारा 173''' समन की तामील का या अन्य कार्यवाही का या उसके प्रकाशन का निवारण करना। * '''धारा 174''' लोक सेवक का आदेश न मानकर गैर-हाजिर रहना * '''धारा 175''' दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख पेश करने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति का लोक सेवक को १[दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख] पेश करने का लोप * '''धारा 176''' सूचना या इत्तिला देने के लिए कानूनी तौर पर आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को सूचना या इत्तिला देने का लोप। * '''धारा 177''' झूठी सूचना देना। * '''धारा 178''' शपथ या प्रतिज्ञान से इंकार करना, जबकि लोक सेवक द्वारा वह वैसा करने के लिए सम्यक् रूप से अपेक्षित किया जाए * '''धारा 179''' प्रश्न करने के लिए प्राधिकॄत लोक सेवक को उत्तर देने से इंकार करना। * '''धारा 180''' कथन पर हस्ताक्षर करने से इंकार * '''धारा 181''' शपथ दिलाने या अभिपुष्टि कराने के लिए प्राधिकॄत लोक सेवक के, या व्यक्ति के समक्ष शपथ या अभिपुष्टि पर झूठा बयान। * '''धारा 182''' लोक सेवक को अपनी विधिपूर्ण शक्ति का उपयोग दूसरे व्यक्ति की क्षति करने के आशय से झूठी सूचना देना * '''धारा 183''' लोक सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा संपत्ति लिए जाने का प्रतिरोध * '''धारा १८४''' लोक सेवक के प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिए प्रस्थापित की गई संपत्ति के विक्रय में बाधा डालना। * '''धारा १८५''' लोक सेवक के प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिए प्रस्थापित की गई संपत्ति का अवैध क्रय या उसके लिए अवैध बोली लगाना। * '''धारा १८६''' लोक सेवक के लोक कॄत्यों के निर्वहन में बाधा डालना। * '''धारा १८७''' लोक सेवक की सहायता करने का लोप, जबकि सहायता देने के लिए विधि द्वारा आबद्ध हो * '''धारा १८८''' लोक सेवक द्वारा विधिवत रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा। * '''धारा १८९''' लोक सेवक को क्षति करने की धमकी * '''धारा १९०''' लोक सेवक से संरक्षा के लिए आवेदन करने से रोकने हेतु किसी व्यक्ति को उत्प्रेरित करने के लिए क्षति की धमकी। ==अध्याय 11== ;झूठा साक्ष्य तथा लोकन्याय के विरुद्ध अपराध * '''धार 191''' झूठा साक्ष्य देना। * '''धारा 192''' झूठा साक्ष्य गढ़ना। * '''धारा 193''' मिथ्या साक्ष्य के लिए दंड * '''धारा 194''' मॄत्यु से दण्डनीय अपराध के लिए दोषसिद्धि कराने के आशय से झूठा साक्ष्य देना या गढ़ना। * '''धारा 195''' आजीवन कारावास या कारावास से दण्डनीय अपराध के लिए दोषसिद्धि प्राप्त करने के आशय से झूठा साक्ष्य देना या गढ़ना * '''धारा 196''' उस साक्ष्य को काम में लाना जिसका मिथ्या होना ज्ञात है * '''धारा 197''' मिथ्या प्रमाणपत्र जारी करना या हस्ताक्षरित करना * '''धारा 198''' प्रमाणपत्र जिसका नकली होना ज्ञात है, असली के रूप में प्रयोग करना। * '''धारा 199''' विधि द्वारा साक्ष्य के रूप में लिये जाने योग्य घोषणा में किया गया मिथ्या कथन। * '''धारा 200''' ऐसी घोषणा का मिथ्या होना जानते हुए सच्ची के रूप में प्रयोग करना। * '''धारा 201''' अपराध के साक्ष्य का विलोपन, या अपराधी को प्रतिच्छादित करने के लिए झूठी जानकारी देना। * '''धारा 202''' सूचना देने के लिए आबद्ध व्यक्ति द्वारा अपराध की सूचना देने का साशय लोप। * '''धारा 203''' किए गए अपराध के विषय में मिथ्या इत्तिला देना * '''धारा 204''' साक्ष्य के रूप में किसी ३[दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख] का पेश किया जाना निवारित करने के लिए उसको नष्ट करना * '''धारा 205''' वाद या अभियोजन में किसी कार्य या कार्यवाही के प्रयोजन से मिथ्या प्रतिरूपण * '''धारा 206''' संपत्ति को समपहरण किए जाने में या निष्पादन में अभिगॄहीत किए जाने से निवारित करने के लिए उसे कपटपूर्वक हटाना या छिपाना * '''धारा 207''' संपत्ति पर उसके जब्त किए जाने या निष्पादन में अभिगॄहीत किए जाने से बचाने के लिए कपटपूर्वक दावा। * '''धारा 208''' ऐसी राशि के लिए जो शोध्य न हो कपटपूर्वक डिक्री होने देना सहन करना * '''धारा 209''' बेईमानी से न्यायालय में मिथ्या दावा करना * '''धारा 210''' ऐसी राशि के लिए जो शोध्य नहीं है कपटपूर्वक डिक्री अभिप्राप्त करना * '''धारा 211''' क्षति करने के आशय से अपराध का झूठा आरोप। * '''धारा 212''' अपराधी को संश्रय देना। * '''धारा 213''' अपराधी को दंड से प्रतिच्छादित करने के लिए उपहार आदि लेना * '''धारा 214''' अपराधी के प्रतिच्छादन के प्रतिफलस्वरूप उपहार की प्रस्थापना या संपत्ति का प्रत्यावर्तन * '''धारा 215''' चोरी की संपत्ति इत्यादि के वापस लेने में सहायता करने के लिए उपहार लेना * '''धारा 216''' ऐसे अपराधी को संश्रय देना, जो अभिरक्षा से निकल भागा है या जिसको पकड़ने का आदेश दिया जा चुका है। * '''धारा 216क''' लुटेरों या डाकुओं को संश्रय देने के लिए शास्ति * '''धारा 216ख''' धारा २१२, धारा २१६ और धारा २१६क में संश्रय की परिभाषा * '''धारा 217''' लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति के समपहरण से बचाने के आशय से विधि के निदेश की अवज्ञा * '''धारा 218''' किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति को समपहरण से बचाने के आशय से लोक सेवक द्वारा अशुद्ध अभिलेख या लेख की रचना * '''धारा 219''' न्यायिक कार्यवाही में विधि के प्रतिकूल रिपोर्ट आदि का लोक सेवक द्वारा भ्रष्टतापूर्वक किया जाना * '''धारा 220''' प्राधिकार वाले व्यक्ति द्वारा जो यह जानता है कि वह विधि के प्रतिकूल कार्य कर रहा है, विचारण के लिए या परिरोध करने के लिए सुपुर्दगी * '''धारा 221''' पकड़ने के लिए आबद्ध लोक सेवक द्वारा पकड़ने का साशय लोप * '''धारा 222''' दंडादेश के अधीन या विधिपूर्वक सुपुर्द किए गए व्यक्ति को पकड़ने के लिए आबद्ध लोक सेवक द्वारा पकड़ने का साशय लोप * '''धारा 223''' लोक सेवक द्वारा उपेक्षा से परिरोध या अभिरक्षा में से निकल भागना सहन करना। * '''धारा 224''' किसी व्यक्ति द्वारा विधि के अनुसार अपने पकड़े जाने में प्रतिरोध या बाधा। * '''धारा 225''' किसी अन्य व्यक्ति के विधि के अनुसार पकड़े जाने में प्रतिरोध या बाधा * '''धारा 225 क''' उन दशाओं में जिनके लिए अन्यथा उपबंध नहीं है लोक सेवक द्वारा पकड़ने का लोप या निकल भागना सहन करना * '''धारा 225 ख''' अन्यथा अनुपबंधित दशाओं में विधिपूर्वक पकड़ने में प्रतिरोध या बाधा या निकल भागना या छुड़ाना * '''धारा 226''' निर्वासन से विधिविरुद्ध वापसी। * '''धारा 227''' दंड के परिहार की शर्त का अतिक्रमण * '''धारा 228''' न्यायिक कार्यवाही में बैठे हुए लोक सेवक का साशय अपमान या उसके कार्य में विघ्न * '''धारा 229क''' कतिपय अपराधों आदि से पीड़ित व्यक्ति की पहचान का प्रकटीकरण * '''धारा 229b''' जूरी सदस्य या आंकलन कर्ता का प्रतिरूपण। ==अध्याय 12== ;सिक्के तथा सरकारी स्टाम्प से सम्बन्धित अपराध * '''धारा 230''' सिक्का की परिभाषा * '''धारा 231''' सिक्के का कूटकरण * '''धारा 232''' भारतीय सिक्के का कूटकरण * '''धारा 233''' सिक्के के कूटकरण के लिए उपकरण बनाना या बेचना * '''धारा 234''' भारतीय सिक्के के कूटकरण के लिए उपकरण बनाना या बेचना * '''धारा 235''' सिक्के के कूटकरण के लिए उपकरण या सामग्री उपयोग में लाने के प्रयोजन से उसे कब्जे में रखना * '''धारा 236''' भारत से बाहर सिक्के के कूटकरण का भारत में दुष्प्रेरण * '''धारा 237''' कूटकॄत सिक्के का आयात या निर्यात * '''धारा 238''' भारतीय सिक्के की कूटकॄतियों का आयात या निर्यात * '''धारा 239''' सिक्के का परिदान जिसका कूटकॄत होना कब्जे में आने के समय ज्ञात था * '''धारा 240''' उस भारतीय सिक्के का परिदान जिसका कूटकॄत होना कब्जे में आने के समय ज्ञात था * '''धारा 241''' किसी सिक्के का असली सिक्के के रूप में परिदान, जिसका परिदान करने वाला उस समय जब वह उसके कब्जे में पहली बार आया था, कूटकॄत होना नहीं जानता था * '''धारा 242''' कूटकॄत सिक्के पर ऐसे व्यक्ति का कब्जा जो उस समय उसका कूटकॄत होना जानता था जब वह उसके कब्जे में आया था * '''धारा 243''' भारतीय सिक्के पर ऐसे व्यक्ति का कब्जा जो उसका कूटकॄत होना उस समय जानता था जब वह उसके कब्जे में आया था * '''धारा 244''' टकसाल में नियोजित व्यक्ति द्वारा सिक्के को उस वजन या मिश्रण से भिन्न कारित किया जाना जो विधि द्वारा नियत है * '''धारा 245''' टकसाल से सिक्का बनाने का उपकरण विधिविरुद्ध रूप से लेना * '''धारा 246''' कपटपूर्वक या बेईमानी से सिक्के का वजन कम करना या मिश्रण परिवर्तित करना * '''धारा 247''' कपटपूर्वक या बेईमानी से भारतीय सिक्के का वजन कम करना या मिश्रण परिवर्तित करना * '''धारा 248''' इस आशय से किसी सिक्के का रूप परिवर्तित करना कि वह भिन्न प्रकार के सिक्के के रूप में चल जाए * '''धारा 249''' इस आशय से भारतीय सिक्के का रूप परिवर्तित करना कि वह भिन्न प्रकार के सिक्के के रूप में चल जाए * '''धारा 250''' ऐसे सिक्के का परिदान जो इस ज्ञान के साथ कब्जे में आया हो कि उसे परिवर्तित किया गया है * '''धारा 251''' भारतीय सिक्के का परिदान जो इस ज्ञान के साथ कब्जे में आया हो कि उसे परिवर्तित किया गया है * '''धारा 252''' ऐसे व्यक्ति द्वारा सिक्के पर कब्जा जो उसका परिवर्तित होना उस समय जानता था जब वह उसके कब्जे में आया * '''धारा 253''' ऐसे व्यक्ति द्वारा भारतीय सिक्के पर कब्जा जो उसका परिवर्तित होना उस समय जानता था जब वह उसके कब्जे में आया * '''धारा 254''' सिक्के का असली सिक्के के रूप में परिदान जिसका परिदान करने वाला उस समय जब वह उसके कब्जे में पहली बार आया था, परिवर्तित होना नहीं जानता था * '''धारा 255''' सरकारी स्टाम्प का कूटकरण * '''धारा 256''' सरकारी स्टाम्प के कूटकरण के लिए उपकरण या सामग्री कब्जे में रखना * '''धारा 257''' सरकारी स्टाम्प के कूटकरण के लिए उपकरण बनाना या बेचना * '''धारा 258''' कूटकॄत सरकारी स्टाम्प का विक्रय * '''धारा 259''' सरकारी कूटकॄत स्टाम्प को कब्जे में रखना * '''धारा 260''' किसी सरकारी स्टाम्प को, कूटकॄत जानते हुए उसे असली स्टाम्प के रूप में उपयोग में लाना * '''धारा 271''' इस आशय से कि सरकार को हानि कारित हो, उस पदार्थ पर से, जिस पर सरकारी स्टाम्प लगा हुआ है, लेख मिटाना या दस्तावेज से वह स्टाम्प हटाना जो उसके लिए उपयोग में लाया गया है * '''धारा 272''' ऐसे सरकारी स्टाम्प का उपयोग जिसके बारे में ज्ञात है कि उसका पहले उपयोग हो चुका है * '''धारा 273''' स्टाम्प के उपयोग किए जा चुकने के द्योतक चिन्ह का छीलकर मिटाना * '''धारा 273क''' बनावटी स्टाम्पों का प्रतिषेघ ==अध्याय 13== ;माप और तौल से सम्बन्धित अपराध * '''धारा 274''' तोलने के लिए खोटे उपकरणों का कपटपूर्वक उपयोग * '''धारा 275''' खोटे बाट या माप का कपटपूर्वक उपयोग * '''धारा 276''' खोटे बाट या माप को कब्जे में रखना * '''धारा 277''' खोटे बाट या माप का बनाना या बेचना ==अध्याय 14== ;लोक स्वास्थ्य, सुरक्षा, सुविधा आदि से सम्बन्धित अपराध * '''धारा 278''' लोक न्यूसेन्स * '''धारा 279''' उपेक्षापूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रमण फैलना संभाव्य हो * '''धारा 280''' परिद्वेषपूर्ण कार्य, जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रम फैलना संभाव्य हो * '''धारा 281''' करन्तीन के नियम की अवज्ञा * '''धारा 282''' विक्रय के लिए आशयित खाद्य या पेय वस्तु का अपमिश्रण। * '''धारा 283''' अपायकर खाद्य या पेय का विक्रय * '''धारा 284''' औषधियों का अपमिश्रण * '''धारा 285''' अपमिश्रित ओषधियों का विक्रय * '''धारा 286''' ओषधि का भिन्न औषधि या निर्मिति के तौर पर विक्रय * '''धारा 287''' '''लोक जल-स्रोत या जलाशय का जल कलुषित करना''' * '''धारा 288''' वायुमण्डल को स्वास्थ्य के लिए अपायकर बनाना * '''धारा 289''' सार्वजनिक मार्ग पर उतावलेपन से वाहन चलाना या हांकना * '''धारा 290''' जलयान का उतावलेपन से चलाना * '''धारा 291''' भ्रामक प्रकाश, चिन्ह या बोये का प्रदर्शन * '''धारा 292''' अक्षमकर या अति लदे हुए जलयान में भाड़े के लिए जलमार्ग से किसी व्यक्ति का प्रवहण * '''धारा 293''' लोक मार्ग या पथ-प्रदर्शन मार्ग में संकट या बाधा कारित करना। * '''धारा 294''' विषैले पदार्थ के संबंध में उपेक्षापूर्ण आचरण * '''धारा 295''' अग्नि या ज्वलनशील पदार्थ के सम्बन्ध में उपेक्षापूर्ण आचरण। * '''धारा 296''' विस्फोटक पदार्थ के बारे में उपेक्षापूर्ण आचरण * '''धारा 297''' मशीनरी के सम्बन्ध में उपेक्षापूर्ण आचरण * '''धारा 298''' किसी निर्माण को गिराने या उसकी मरम्मत करने के संबंध में उपेक्षापूर्ण आचरण * '''धारा 299''' जीवजन्तु के संबंध में उपेक्षापूर्ण आचरण। * '''धारा 300''' अन्यथा अनुपबन्धित मामलों में लोक बाधा के लिए दण्ड। * '''धारा 301''' न्यूसेन्स बन्द करने के व्यादेश के पश्चात् उसका चालू रखना * '''धारा 302''' '''अश्लील पुस्तकों आदि का विक्रय आदि।''' * '''धारा 302 क''' '''ब्लैकमेल करने के उद्देश्य से अश्लील सामग्री प्रिन्ट करना''' * '''धारा 303''' तरुण व्यक्ति को अश्लील वस्तुओ का विक्रय आदि * '''धारा 304''' अश्लील कार्य और गाने * '''धारा 304 क''' लाटरी कार्यालय रखना ==अध्याय 15== ;धर्म से सम्बन्धित अपराध * '''धारा २९५''' किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के आशय से उपासना के स्थान को क्षति करना या अपवित्र करना। * '''धारा २९६''' धार्मिक जमाव में विघ्न करना * '''धारा २९७''' कब्रिस्तानों आदि में अतिचार करना * '''धारा २९८''' धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के सविचार आशय से शब्द उच्चारित करना आदि। ==अध्याय 16== ;मानव शरीर को प्रभावित करने वाले अपराध * '''धारा 299''' आपराधिक मानव वध * '''धारा 300''' हत्या * '''धारा 301''' जिस व्यक्ति की मॄत्यु कारित करने का आशय था उससे भिन्न व्यक्ति की मॄत्यु करके आपराधिक मानव वध करना। * '''धारा 302''' हत्या के लिए दण्ड * '''धारा 303''' आजीवन कारावास से दण्डित व्यक्ति द्वारा हत्या के लिए दण्ड। * '''धारा 304''' हत्या की श्रेणी में न आने वाली गैर इरादतन हत्या के लिए दण्ड * '''धारा 304 क''' उपेक्षा द्वारा मॄत्यु कारित करना * '''धारा 304 ख''' दहेज मॄत्यु * '''धारा 305''' शिशु या उन्मत्त व्यक्ति की आत्महत्या का दुष्प्रेरण। * '''धारा 306''' आत्महत्या का दुष्प्रेरण * '''धारा 307''' हत्या करने का प्रयत्न * '''धारा 308''' गैर इरादतन हत्या करने का प्रयास * '''धारा 309''' '''आत्महत्या करने का प्रयत्न।''' * '''धारा 310''' ठग। * '''धारा 311''' ठगी के लिए दण्ड। * '''धारा 312''' गर्भपात कारित करना। * '''धारा 313''' स्त्री की सहमति के बिना गर्भपात कारित करना। * '''धारा 314''' गर्भपात कारित करने के आशय से किए गए कार्यों द्वारा कारित मॄत्यु। * '''धारा 315''' शिशु का जीवित पैदा होना रोकने या जन्म के पश्चात् उसकी मॄत्यु कारित करने के आशय से किया गया कार्य। * '''धारा 316''' ऐसे कार्य द्वारा जो गैर-इरादतन हत्या की कोटि में आता है, किसी सजीव अजात शिशु की मॄत्यु कारित करना। * '''धारा 317''' शिशु के पिता या माता या उसकी देखरेख रखने वाले व्यक्ति द्वारा बारह वर्ष से कम आयु के शिशु का परित्याग और अरक्षित डाल दिया जाना। * '''धारा 318''' मॄत शरीर के गुप्त व्ययन द्वारा जन्म छिपाना * '''धारा 319''' क्षति पहुँचाना। * '''धारा 320''' घोर आघात। * '''धारा 321''' स्वेच्छया उपहति कारित करना * '''धारा 322''' स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना * '''धारा 323''' जानबूझ कर स्वेच्छा से किसी को चोट पहुँचाने के लिए दण्ड, [https://mantriseva.in/section-323-ipc-in-hindi/ यह एक असंज्ञेय अपराध है तथा पुलिस द्वारा जमानतीय है] । * '''धारा 324''' खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया उपहति कारित करना * '''धारा 325''' स्वेच्छापूर्वक किसी को गंभीर चोट पहुचाने के लिए दण्ड * '''धारा 326''' खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छापूर्वक घोर उपहति कारित करना। * '''धारा 326 क''' एसिड हमले * '''धारा 326 ख''' एसिड हमला करने का प्रयास * '''धारा 327''' संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति की जबरन वसूली करने के लिए या अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छापूर्वक चोट पहुँचाना। * '''धारा 328''' अपराध करने के आशय से विष इत्यादि द्वारा क्षति कारित करना। * '''धारा 329''' सम्पत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना * '''धारा 330''' संस्वीकॄति जबरन वसूली करने या विवश करके संपत्ति का प्रत्यावर्तन कराने के लिए स्वेच्छया क्षति कारित करना। * '''धारा 331''' संस्वीकॄति उद्दापित करने के लिए या विवश करके सम्पत्ति का प्रत्यावर्तन कराने के लिए स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना * '''धारा 332''' लोक सेवक अपने कर्तव्य से भयोपरत करने के लिए स्वेच्छा से चोट पहुँचाना * '''धारा 333''' लोक सेवक को अपने कर्तव्यों से भयोपरत करने के लिए स्वेच्छया घोर क्षति कारित करना। * '''धारा 334''' प्रकोपन पर स्वेच्छया क्षति करना * '''धारा 335''' प्रकोपन पर स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना * '''धारा 336''' दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को ख़तरा पहुँचाने वाला कार्य। * '''धारा 337''' किसी कार्य द्वारा, जिससे मानव जीवन या किसी की व्यक्तिगत सुरक्षा को ख़तरा हो, चोट पहुँचाना कारित करना * '''धारा 338''' किसी कार्य द्वारा, जिससे मानव जीवन या किसी की व्यक्तिगत सुरक्षा को ख़तरा हो, गंभीर चोट पहुँचाना कारित करना * '''धारा 339''' सदोष अवरोध। * '''धारा 340''' सदोष परिरोध या गलत तरीके से प्रतिबंधित करना। * '''धारा 341''' सदोष अवरोध के लिए दण्ड * '''धारा 342''' ग़लत तरीके से प्रतिबंधित करने के लिए दण्ड। * '''धारा 343''' तीन या अधिक दिनों के लिए सदोष परिरोध। * '''धारा 344''' दस या अधिक दिनों के लिए सदोष परिरोध। * '''धारा 345''' ऐसे व्यक्ति का सदोष परिरोध जिसके छोड़ने के लिए रिट निकल चुका है * '''धारा 346''' गुप्त स्थान में सदोष परिरोध। * '''धारा 347''' सम्पत्ति की जबरन वसूली करने के लिए या अवैध कार्य करने के लिए मजबूर करने के लिए सदोष परिरोध। * '''धारा 348''' संस्वीकॄति उद्दापित करने के लिए या विवश करके सम्पत्ति का प्रत्यावर्तन करने के लिए सदोष परिरोध * '''धारा 349''' बल। * '''धारा 350''' आपराधिक बल * '''धारा 351''' हमला। * '''धारा 352''' गम्भीर प्रकोपन के बिना हमला करने या आपराधिक बल का प्रयोग करने के लिए दण्ड * '''धारा 353''' लोक सेवक को अपने कर्तव्य के निर्वहन से भयोपरत करने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग * '''धारा 354''' स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग * '''धारा 354 क''' यौन उत्पीड़न * '''धारा 354 ख''' एक औरत नंगा करने के इरादे के साथ कार्य * '''धारा 354 ग''' '''छिप कर देखना''' * '''धारा 354 घ''' पीछा * '''धारा 355''' गम्भीर प्रकोपन होने से अन्यथा किसी व्यक्ति का अनादर करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग * '''धारा 356''' हमला या आपराधिक बल प्रयोग द्वारा किसी व्यक्ति द्वारा ले जाई जाने वाली संपत्ति की चोरी का प्रयास। * '''धारा 357''' किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध करने के प्रयत्नों में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग। * '''धारा 358''' गम्भीर प्रकोपन मिलने पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग * '''धारा 359''' व्यपहरण * '''धारा 360''' भारत में से व्यपहरण। * '''धारा 361''' विधिपूर्ण संरक्षकता में से व्यपहरण * '''धारा 362''' अपहरण। * '''धारा 363''' व्यपहरण के लिए दण्ड * '''धारा 363 क''' भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए अप्राप्तवय का व्यपहरण का विकलांगीकरण * '''धारा 364''' हत्या करने के लिए व्यपहरण या अपहरण करना। * '''धारा 364क''' फिरौती, आदि के लिए व्यपहरण। * '''धारा 365''' किसी व्यक्ति का गुप्त और अनुचित रूप से सीमित / क़ैद करने के आशय से व्यपहरण या अपहरण। * '''धारा 366''' विवाह आदि के करने को विवश करने के लिए किसी स्त्री को व्यपहृत करना, अपहृत करना या उत्प्रेरित करना। * '''धारा 366 क''' अप्राप्तवय लड़की का उपापन * '''धारा 366 ख''' विदेश से लड़की का आयात करना * '''धारा 367''' व्यक्ति को घोर उपहति, दासत्व, आदि का विषय बनाने के उद्देश्य से व्यपहरण या अपहरण। * '''धारा 368''' व्यपहृत या अपहृत व्यक्ति को गलत तरीके से छिपाना या क़ैद करना। * '''धारा 369''' दस वर्ष से कम आयु के शिशु के शरीर पर से चोरी करने के आशय से उसका व्यपहरण या अपहरण * '''धारा 370''' मानव तस्करी''' दास के रूप में किसी व्यक्ति को खरीदना या बेचना। * '''धारा 371''' दासों का आभ्यासिक व्यवहार करना। * '''धारा 372''' '''वेश्यावॄत्ति आदि के प्रयोजन के लिए नाबालिग को बेचना'''। * '''धारा 373''' वेश्यावॄत्ति '''आदि के प्रयोजन के लिए नाबालिग को खरीदना'''। * '''धारा 374''' विधिविरुद्ध बलपूर्वक श्रम। * '''धारा 375''' बलात्संग * '''धारा 376''' बलात्कार के लिए दण्ड * '''धारा 376 क''' पॄथक् कर दिए जाने के दौरान किसी पुरुष द्वारा अपनी पत्नी के साथ संभोग्र * '''धारा 376 ख''' लोक सेवक द्वारा अपनी अभिरक्षा में की किसी स्त्री के साथ संभोग * '''धारा 376 ग''' जेल, प्रतिप्रेषण गॄह आदि के अधीक्षक द्वारा संभोग * '''धारा 376 घ''' अस्पताल के प्रबन्ध या कर्मचारिवॄन्द आदि के''' किसी सदस्य द्वारा उस अस्पताल में किसी स्त्री के साथ संभोग''' *''धारा 376 (E) '' पुनरावृति अपराधियों के लिए सजा की व्यवस्था * '''धारा 377''' प्रकॄति विरुद्ध अपराध * ==अध्याय १७== ;सम्पत्ति के विरुद्ध अपराध # '''धारा ३७८''' चोरी # '''धारा ३७९''' चोरी के लिए दंड # '''धारा ३८०''' निवास-गॄह आदि में चोरी # '''धारा ३८१''' लिपिक या सेवक द्वारा स्वामी के कब्जे में संपत्ति की चोरी। # '''धारा ३८२''' चोरी करने के लिए मॄत्यु, क्षति या अवरोध कारित करने की तैयारी के पश्चात् चोरी करना। # '''धारा ३८३''' उद्दापन / जबरन वसूली # '''धारा ३८४''' ज़बरदस्ती वसूली करने के लिए दण्ड। # '''धारा ३८५''' ज़बरदस्ती वसूली के लिए किसी व्यक्ति को क्षति के भय में डालना। # '''धारा ३८६''' किसी व्यक्ति को मॄत्यु या गंभीर आघात के भय में डालकर ज़बरदस्ती वसूली करना। # '''धारा ३८७''' ज़बरदस्ती वसूली करने के लिए किसी व्यक्ति को मॄत्यु या घोर आघात के भय में डालना। # '''धारा ३८८''' मॄत्यु या आजीवन कारावास, आदि से दंडनीय अपराध का अभियोग लगाने की धमकी देकर उद्दापन # '''धारा ३८९''' जबरन वसूली करने के लिए किसी व्यक्ति को अपराध का आरोप लगाने के भय में डालना। # '''धारा ३९०''' लूट # '''धारा ३९१''' डकैती # '''धारा ३९२''' लूट के लिए दण्ड # '''धारा ३९३''' लूट करने का प्रयत्न # '''धारा ३९४''' लूट करने में स्वेच्छापूर्वक किसी को चोट पहुँचाना # '''धारा ३९५''' डकैती के लिए दण्ड # '''धारा ३९६''' हत्या सहित डकैती। # '''धारा ३९७''' मॄत्यु या घोर आघात कारित करने के प्रयत्न के साथ लूट या डकैती। # '''धारा ३९८''' घातक आयुध से सज्जित होकर लूट या डकैती करने का प्रयत्न। # '''धारा ३९९''' डकैती करने के लिए तैयारी करना। # '''धारा ४००''' डाकुओं की टोली का होने के लिए दण्ड # '''धारा ४०१''' चोरों के गिरोह का होने के लिए दण्ड। # '''धारा ४०२''' डकैती करने के प्रयोजन से एकत्रित होना। # '''धारा ४०३''' सम्पत्ति का बेईमानी से गबन / दुरुपयोग। # '''धारा ४०४''' मॄत व्यक्ति की मॄत्यु के समय उसके कब्जे में सम्पत्ति का बेईमानी से गबन / दुरुपयोग। # '''धारा ४०५''' आपराधिक विश्वासघात। # '''धारा ४०६''' विश्वास का आपराधिक हनन # '''धारा ४०७''' कार्यवाहक, आदि द्वारा आपराधिक विश्वासघात। # '''धारा ४०८''' लिपिक या सेवक द्वारा विश्वास का आपराधिक हनन # '''धारा ४०९''' लोक सेवक या बैंक कर्मचारी, व्यापारी या अभिकर्ता द्वारा विश्वास का आपराधिक हनन # '''धारा ४१०''' चुराई हुई संपत्ति # '''धारा ४११''' चुराई हुई संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना # '''धारा ४१२''' ऐसी संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना जो डकैती करने में चुराई गई है। # '''धारा ४१३''' '''चुराई हुई संपत्ति का अभ्यासतः''' व्यापार करना। # '''धारा ४१४''' चुराई हुई संपत्ति छिपाने में सहायता करना। # '''धारा ४१५''' छल # '''धारा ४१६''' प्रतिरूपण द्वारा छल # '''धारा ४१७''' छल के लिए दण्ड। # '''धारा ४१८''' इस ज्ञान के साथ छल करना कि उस व्यक्ति को सदोष हानि हो सकती है जिसका हित संरक्षित रखने के लिए अपराधी आबद्ध है # '''धारा ४१९''' प्रतिरूपण द्वारा छल के लिए दण्ड। # '''धारा ४२०''' छल करना और बेईमानी से बहुमूल्य वस्तु / संपत्ति देने के लिए प्रेरित करना # '''धारा ४२१''' लेनदारों में वितरण निवारित करने के लिए संपत्ति का बेईमानी से या कपटपूर्वक अपसारण या छिपाना # '''धारा ४२२''' त्रऐंण को लेनदारों के लिए उपलब्ध होने से बेईमानी से या कपटपूर्वक निवारित करना # '''धारा ४२३''' अन्तरण के ऐसे विलेख का, जिसमें प्रतिफल के संबंध में मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट है, बेईमानी से या कपटपूर्वक निष्पादन # '''धारा ४२४''' सम्पत्ति का बेईमानी से या कपटपूर्वक अपसारण या छिपाया जाना # '''धारा ४२५''' रिष्टि / कुचेष्टा। # '''धारा ४२६''' रिष्टि के लिए दण्ड # '''धारा ४२७''' कुचेष्टा जिससे पचास रुपए का नुकसान होता है # '''धारा ४२८''' दस रुपए के मूल्य के जीवजन्तु को वध करने या उसे विकलांग करने द्वारा रिष्टि # '''धारा ४२९''' किसी मूल्य के ढोर, आदि को या पचास रुपए के मूल्य के किसी जीवजन्तु का वध करने या उसे विकलांग करने आदि द्वारा कुचेष्टा। # '''धारा ४३०''' सिंचन संकर्म को क्षति करने या जल को दोषपूर्वक मोड़ने द्वारा रिष्टि # '''धारा ४३१''' लोक सड़क, पुल, नदी या जलसरणी को क्षति पहुंचाकर रिष्टि # '''धारा ४३२''' लोक जल निकास में नुकसानप्रद जलप्लावन या बाधा कारित करने द्वारा रिष्टि # '''धारा ४३३''' किसी दीपगॄह या समुद्री-चिह्न को नष्ट करके, हटाकर या कम उपयोगी बनाकर रिष्टि # '''धारा ४३४''' लोक प्राधिकारी द्वारा लगाए गए भूमि चिह्न के नष्ट करने या हटाने आदि द्वारा रिष्टि # '''धारा ४३५''' सौ रुपए का या (कॄषि उपज की दशा में) दस रुपए का नुकसान कारित करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा कुचेष्टा। # '''धारा ४३६''' गॄह आदि को नष्ट करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा कुचेष्टा। # '''धारा ४३७''' किसी तल्लायुक्त या बीस टन बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या असुरक्षित बनाने के आशय से कुचेष्टा। # '''धारा ४३८''' धारा ४३७ में वर्णित अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा की गई कुचेष्टा के लिए दण्ड। # '''धारा ४३९''' चोरी, आदि करने के आशय से जलयान को साशय भूमि या किनारे पर चढ़ा देने के लिए दण्ड। # '''धारा ४४०''' मॄत्यु या उपहति कारित करने की तैयारी के पश्चात् की गई रिष्टि # '''धारा ४४१''' आपराधिक अतिचार। # '''धारा ४४२''' गॄह-अतिचार # '''धारा ४४३''' प्रच्छन्न गॄह-अतिचार # '''धारा ४४४''' रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार # '''धारा ४४५''' गॄह-भेदन। # '''धारा ४४६''' रात्रौ गॄह-भेदन # '''धारा ४४७''' आपराधिक अतिचार के लिए दण्ड। # '''धारा ४४८''' गॄह-अतिचार के लिए दण्ड। # '''धारा ४४९''' मॄत्यु से दंडनीय अपराध को रोकने के लिए गॄह-अतिचार # '''धारा ४५०''' अपजीवन कारावास से दंडनीय अपराध को करने के लिए गॄह-अतिचार # '''धारा ४५१''' कारावास से दण्डनीय अपराध को करने के लिए गॄह-अतिचार। # '''धारा ४५२''' बिना अनुमति घर में घुसना, चोट पहुंचाने के लिए हमले की तैयारी, हमला या गलत तरीके से दबाव बनाना # '''धारा ४५३''' प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन के लिए दंड # '''धारा ४५४''' कारावास से दण्डनीय अपराध करने के लिए छिप कर गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन करना। # '''धारा ४५५''' उपहति, हमले या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन '''धारा ४५६''' रात में छिप कर गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन के लिए दण्ड। *'''धारा ४५७''' कारावास से दण्डनीय अपराध करने के लिए रात में छिप कर गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन करना। *'''धारा ४५८''' क्षति, हमला या सदोष अवरोध की तैयारी के करके रात में गॄह-अतिचार। *'''धारा ४५९''' प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन करते समय घोर उपहति कारित हो *'''धारा ४६०''' रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या रात्रौ गॄह-भेदन में संयुक्ततः सम्पॄक्त समस्त व्यक्ति दंडनीय हैं, जबकि उनमें से एक द्वारा मॄत्यु या घोर उपहति कारित हो *'''धारा ४६१''' ऐसे पात्र को, जिसमें संपत्ति है, बेईमानी से तोड़कर खोलना *'''धारा ४६२''' उसी अपराध के लिए दंड, जब कि वह ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया है जिसे अभिरक्षा न्यस्त की गई है। ==अध्याय 18== ;दस्तावेज तथा सम्पत्ति-चिह्नों से सम्बन्धित अपराध * '''धारा ४६३''' कूटरचना * '''धारा ४६४''' '''मिथ्या दस्तावेज रचना''' * '''धारा ४६५''' कूटरचना के लिए दण्ड। * '''धारा ४६६''' न्यायालय के अभिलेख की या लोक रजिस्टर आदि की कूटरचना * '''धारा ४६७''' मूल्यवान प्रतिभूति, वसीयत, इत्यादि की कूटरचना * '''धारा ४६८''' छल के प्रयोजन से कूटरचना * '''धारा ४६९''' ख्याति को अपहानि पहुंचाने के आशय से कूटरचन्न * '''धारा ४७०''' कूटरचित २[दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेखट * '''धारा ४७१''' कूटरचित दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख का असली के रूप में उपयोग में लाना * '''धारा ४७२''' धारा ४६७ के अधीन दण्डनीय कूटरचना करने के आशय से कूटकॄत मुद्रा, आदि का बनाना या कब्जे में रखना * '''धारा ४७३''' अन्यथा दण्डनीय कूटरचना करने के आशय से कूटकॄत मुद्रा, आदि का बनाना या कब्जे में रखना * '''धारा ४७४''' धारा ४६६ या ४६७ में वर्णित दस्तावेज को, उसे कूटरचित जानते हुए और उसे असली के रूप में उपयोग में लाने का आशय रखते हुए, कब्जे में रखना * '''धारा ४७५''' धारा ४६७ में वर्णित दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिए उपयोग में लाई जाने वाली अभिलक्षणा या चिह्न की कूटकॄति बनाना या कूटकॄत चिह्नयुक्त पदार्थ को कब्जे में रखना * '''धारा ४७६''' धारा ४६७ में वर्णित दस्तावेजों से भिन्न दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिए उपयोग में लाई जाने वाली अभिलक्षणा या चिह्न की कूटकॄति बनाना या कूटकॄत चिह्नयुक्त पदार्थ को कब्जे में रखना * '''धारा ४७७''' विल, दत्तकग्रहण प्राधिकार-पत्र या मूल्यवान प्रतिभूति को कपटपूर्वक रदद्, नष्ट, आदि करना * '''धारा ४७७ क''' लेखा का मिथ्याकरण * '''धारा ४७८''' व्यापार चिह्न * '''धारा ४७९''' सम्पत्ति-चिह्न * '''धारा ४८०''' मिथ्या व्यापार चिह्न का प्रयोग किया जाना * '''धारा ४८१''' मिथ्या सम्पत्ति-चिह्न को उपयोग में लाना * '''धारा ४८२''' मिथ्या सम्पत्ति-चिह्न को उपयोग करने के लिए दण्ड। * '''धारा ४८३''' अन्य व्यक्ति द्वारा उपयोग में लाए गए सम्पत्ति चिह्न का कूटकरण * '''धारा ४८४''' लोक सेवक द्वारा उपयोग में लाए गए चिह्न का कूटकरण * '''धारा ४८५''' सम्पत्ति-चिह्न के कूटकरण के लिए कोई उपकरण बनाना या उस पर कब्जा * '''धारा ४८६''' कूटकॄत सम्पत्ति-चिह्न से चिन्हित माल का विक्रय * '''धारा ४८७''' किसी ऐसे पात्र के ऊपर मिथ्या चिह्न बनाना जिसमें माल रखा है। * '''धारा ४८८''' किसी ऐसे मिथ्या चिह्न को उपयोग में लाने के लिए दण्ड * '''धारा ४८९''' क्षति कारित करने के आशय से सम्पत्ति-चिह्न को बिगाड़ना * '''धारा ४८९ क''' करेन्सी नोटों या बैंक नोटों का कूटकरण * '''धारा ४८९ ख''' कूटरचित या कूटकॄत करेंसी नोटों या बैंक नोटों को असली के रूप में उपयोग में लाना * '''धारा ४८९ ग''' कूटरचित या कूटकॄत करेन्सी नोटों या बैंक नोटों को कब्जे में रखना * '''धारा ४८९ घ''' करेन्सी नोटों या बैंक नोटों की कूटरचना या कूटकरण के लिए उपकरण या सामग्री बनाना या कब्जे में रखना * '''धारा ४८९ ङ''' करेन्सी नोटों या बैंक नोटों से सदृश्य रखने वाली दस्तावेजों की रचना या उपयोग ==अध्याय १९== ;सेवा-संविदा का आपराधिक भंजन * '''धारा ४९०''' समुद्र यात्रा या यात्रा के दौरान सेवा भंग * '''धारा ४९१''' असहाय व्यक्ति की परिचर्या करने की और उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति करने की संविदा का भंग * '''धारा ४९२''' दूर वाले स्थान पर सेवा करने का संविदा भंग जहां सेवक को मालिक के खर्चे पर ले जाया जाता है। ==अध्याय २०== ;विवाह से सम्बन्धित अपराध * '''धारा ४९३''' विधिपूर्ण विवाह का धोखे से विश्वास उत्प्रेरित करने वाले पुरुष द्वारा कारित सहवास। * '''धारा ४९४''' पति या पत्नी के जीवनकाल में पुनः विवाह करना * '''धारा ४९५''' वही अपराध पूर्ववर्ती विवाह को उस व्यक्ति से छिपाकर जिसके साथ आगामी विवाह किया जाता है। * '''धारा ४९६''' विधिपूर्ण विवाह के बिना कपटपूर्वक विवाह कर्म पूरा करना। * '''धारा ४९७''' व्यभिचार * '''धारा ४९८''' विवाहित स्त्री को आपराधिक आशय से फुसलाकर ले जाना, या निरुद्ध रखना ==अध्याय २० क== ;पति या पति के सम्बन्धियों द्वारा निर्दयता * '''धारा 498 क''' '''किसी स्त्री के पति या पति के नातेदार द्वारा उसके''' प्रति क्रूरता करना ==अध्याय 21== ;[[मानहानि]] * '''धारा 499''' मानहानि * '''धारा 500''' मानहानि के लिए दण्ड। * '''धारा 501''' मानहानिकारक जानी हुई बात को मुद्रित या उत्कीर्ण करना। * '''धारा 502''' मानहानिकारक विषय रखने वाले मुद्रित या उत्कीर्ण सामग्री का बेचना। ==अध्याय 22== आपराधिक अभित्रास, अपमान एवं रिष्टिकरण * '''धारा 503''' आपराधिक अभित्रास। * '''धारा 504''' शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना * '''धारा 505''' लोक रिष्टिकारक वक्तव्य। * '''धारा 506''' '''धमकाना, [https://mantriseva.in/section-506-ipc-in-hindi-aaparaadhik-dhamakee-ke-lie-saja-jamaanat-bachaav/ आईपीसी की धारा 506 में अपना बचाव कैसे करें?]''' * '''धारा 507''' अनाम संसूचना द्वारा आपराधिक अभित्रास। * '''धारा 508''' व्यक्ति को यह विश्वास करने के लिए उत्प्रेरित करके कि वह दैवी अप्रसाद का भाजन होगा कराया गया कार्य * '''धारा 509''' शब्द, अंगविक्षेप या कार्य जो किसी स्त्री की लज्जा का अनादर करने के लिए आशयित है * '''धारा 510''' '''शराबी व्यक्ति द्वारा लोक स्थान में दुराचार'''। ==अध्याय २३== ;अपराध करने के प्रयत्न * '''धारा ५११''' आजीवन कारावास या अन्य कारावास से दण्डनीय अपराधों को करने का प्रयत्न करने के लिए दण्ड == संशोधन == इस संहिता में अनेकों बार संशोधन हुए हैं।<ref name=IPC>{{cite web|author1=Parliament of India|title=The Indian Penal Code|url=https://www.childlineindia.org.in/CP-CR-Downloads/Indian%20penal%20code%201860.pdf|website=childlineindia.org.in|accessdate=7 June 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150616075157/http://www.childlineindia.org.in/CP-CR-Downloads/Indian%20penal%20code%201860.pdf|archive-date=16 जून 2015|url-status=dead}} {{PD-notice}}</ref><ref>{{cite book|title=The Indian Penal Code, 1860|date=7 May 2015|publisher=Current Publications|url=https://books.google.co.in/books?id=DYj9CAAAQBAJ&printsec=frontcover&source=gbs_vpt_reviews#v=onepage&q&f=false|accessdate=8 June 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20160303234839/https://books.google.co.in/books?id=DYj9CAAAQBAJ&printsec=frontcover&source=gbs_vpt_reviews#v=onepage&q&f=false|archive-date=3 मार्च 2016|url-status=live}}</ref> {| class="wikitable" !क्रमांक !संशोधित कानून का लघु शीर्षक !संख्या !वर्ष |- |1 |The Repealing Act, 1870 |14 |1870 |- |2 |The Indian Penal Code Amendment Act, 1870 |27 |1870 |- |3 |The Indian Penal Code Amendment Act, 1872 |19 |1872 |- |4 |The Indian Oaths Act, 1873 |10 |1873 |- |5 |The Indian Penal Code Amendment Act, 1882 |8 |1882 |- |6 |The Code of Criminal Procedure, 1882 |10 |1882 |- |7 |The Indian Criminal Law Amendment Act, 1886 |10 |1886 |- |8 |The Indian Marine Act, 1887 |14 |1887 |- |9 |The Metal Tokens Act, 1889 |1 |1889 |- |10 |The Indian Merchandise Marks Act, 1889 |4 |1889 |- |11 |The Cantonments Act, 1889 |13 | |- |12 |The Indian Railways Act, 1890 |9 | |- |13 |The Indian Criminal Law Amendment Act, 1891 |10 | |- |14 |The Amending Act, 1891 |12 | |- |15 |The Indian Criminal Law Amendment Act, 1894 |3 | |- |16 |The Indian Criminal Law Amendment Act, 1895 |3 | |- |17 |The Indian Penal Code Amendment Act, 1896 |6 |1896 |- |18 |The Indian Penal Code Amendment Act, 1898 |4 |1898 |- |19 |The Currency-Notes Forgery Act, 1899 |12 |1899 |- |20 |The Indian Penal Code Amendment Act, 1910 |3 |1910 |- |21 |The Indian Criminal Law Amendment Act, 1913 |8 |1913 |- |22 |The Indian Elections Offences and Inquiries Act, 1920 |39 |1920 |- |23 |The Indian Penal Code (Amendment) Act, 1921 |16 | |- |24 |The Indian Penal Code (Amendment) Act, 1923 |20 | |- |25 |The Indian Penal Code (Amendment) Act, 1924 |5 | |- |26 |The Indian Criminal Law Amendment Act, 1924 |18 | |- |27 |The Workmen's Breach of Contract (Repealing) Act, 1925 |3 | |- |29 |The Obscene Publications Act, 1925 |8 | |- |29 |The Indian Penal Code (Amendment) Act, 1925 |29 | |- |30 |The Repealing and Amending Act, 1927 |10 | |- |31 | आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम, 1927 |25 | |- |32 |The Repealing and Amending Act, 1930 |8 | |- |33 |The Indian Air Force Act, 1932 |14 | |- |34 |The Amending Act, 1934 |35 | |- |35 |The Government of India (Adaptation of Indian Laws) Order, 1937 |{{n/a}} |1937 |- |36 | आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम, 1939 |22 | |- |37 |The Offences on Ships and Aircraft Act, 1940 |4 | |- |38 |The Indian Merchandise Marks (Amendment) Act, 1941 |2 | |- |39 |The Indian Penal Code (Amendment) Act, 1942 |8 | |- |40 |The Indian Penal Code (Amendment) Act, 1943 |6 | |- |41 |The Indian Independence (Adaptation of Central Acts and Ordinances) Order, 1948 |{{n/a}} |1948 |- |42 | आपराधिक कानून (नस्लीय भेदभाव हटाना) अधिनियम, 1949 |17 | |- |43 |The Indian Penal Code and the Code of Criminal Procedure (Amendment) Act, 1949 |42 |1949 |- |44 |The Adaptation of Laws Order, 1950 |{{n/a}} |1950 |- |45 |The Repealing and Amending Act, 1950 |35 | |- |46 |The Part B States (Laws) Act, 1951 |3 | |- |47 | आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम, 1952 |46 | |- |48 |The Repealing and Amending Act, 1952 |48 | |- |49 |The Repealing and Amending Act, 1953 |42 | |- |50 |The Code of Criminal Procedure (Amendment) Act, 1955 |26 | |- |51 |The Adaptation of Laws (No.2) Order, 1956 |{{n/a}} |1956 |- |52 |The Repealing and Amending Act, 1957 |36 | |- |53 | आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम, 1958 |2 | |- |54 |The Trade and Merchandise Marks Act, 1958 |43 | |- |55 |The Indian Penal Code (Amendment) Act, 1959 |52 | |- |56 |The Indian Penal Code (Amendment) Act, 1961 |41 | |- |57 |The Anti-Corruption Laws (Amendment) Act, 1964 |40 | |- |58 |The Criminal and Election Laws Amendment Act, 1969 |35 | |- |59 |The Indian Penal Code (Amendment) Act, 1969 |36 | |- |60 | आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 1972 |31 | |- |61 |The Employees' Provident Funds and Family Pension Fund (Amendment) Act, 1973 |40 | |- |62 |The Employees' State Insurance (Amendment) Act, 1975 |38 | |- |63 |The Election Laws (Amendment) Act, 1975 |40 | |- |64 | आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 1983 |43 | |- |65 |आपराधिक कानून (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 1983 |46 | |- |66 |The Dowry Prohibition (Amendment) Act, 1986 |43 | |- |67 |The Employees' Provident Funds and Miscellaneous Provisions (Amendment) Act, 1988 |33 | |- |68 |The [[Prevention of Corruption Act, 1988]] |49 | |- |69 |आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 1993 |42 | |- |70 |The Indian Penal Code (Amendment) Act, 1995 |24 | |- |71 | [[सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000|सूचना तकनीक अधिनियम, 2000]] |21 |2000 |- |72 |The Election Laws (Amendment) Act, 2003 |24 |2003 |- |73 |The Code of Criminal Procedure (Amendment) Act, 2005 |25 |2005 |- |74 | आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2005 |2 |2006 |- |75 | सूचना तकनीक अधिनियम, 2008 |10 |2009 |- |76 | [[आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2013]] |13 |2013 |} ==भारतीय दण्ड संहिता की विभिन्न धाराओं में देय दण्ड == {|class='wikitable' |- !धाराओं के नाम !! अपराध !! दण्ड (सजा) |- | | | |- |13 || जुआ खेलना/सट्टा लगाना || 1 वर्ष की सजा और 1000 रूपये जुर्माना |- |34 || सामान आशय || – |- |99 से 106 || व्यक्तिगत प्रतिरक्षा के लिए बल प्रयोग का अधिकार || – |- |110 || दुष्प्रेरण का दण्ड, यदि दुष्प्रेरित व्यक्ति दुष्प्रेरक के आशय से भिन्न आशय से कार्य करता है || तीन वर्ष |- |120 || षडयंत्र रचना || – |- |141 || विधिविरुद्ध जमाव || आजीवन कारावास या जुर्माना |- |147 || बलवा करना || 2 वर्ष की सजा/जुर्माना या दोनों |- |156 (3) || स्वामी या अधिवासी जिसके फायदे के लिए उपद्रव किया गया हो के अभिकर्ता का उपद्रव के निवारण के लिए क़ानूनी साधनों का उपयोग न करना। || आर्थिक दंड |- |156 || स्वामी या अधिवासी जिसके फायदे के लिए उपद्रव किया गया हो के अभिकर्ता का उपद्रव के निवारण के लिए क़ानूनी साधनों का उपयोग न करना। || आर्थिक दंड |- |161 || रिश्वत लेना/देना || 3 वर्ष की सजा/जुर्माना या दोनों |- |171 || चुनाव में घूस लेना/देना || 1 वर्ष की सजा/500 रुपये जुर्माना |- |177 || सरकारी कर्मचारी/पुलिस को गलत सूचना देना || 6 माह की सजा/1000 रूपये जुर्माना |- |186 || सरकारी काम में बाधा पहुँचाना || 3 माह की सजा/500 रूपये जुर्माना |- |191 || झूठे सबूत देना || 7 साल तक की सजा व जुर्माने का प्रावधान |- |193 || न्यायालयीन प्रकरणों में झूठी गवाही || 3/ 7 वर्ष की सजा और जुर्माना |- |201 || साक्ष्य मिटाना || – |- |217 || लोक सेवक होते हुए भी झूठे सबूत देना || 2 साल तक की सजा व जुर्माने का प्रावधान |- |216 || लुटेरे/डाकुओं को आश्रय देने के लिए दंड || 3 साल की सजा |- |224/25 || विधिपूर्वक अभिरक्षा से छुड़ाना || 2 वर्ष की सजा/जुर्माना/दोनों |- |231/32 || जाली सिक्के बनाना || 7 वर्ष की सजा और जुर्माना |- |255 || सरकारी स्टाम्प का कूटकरण || 10 वर्ष या आजीवन कारावास की सजा |- |264 || गलत तौल के बांटों का प्रयोग || 1 वर्ष की सजा/जुर्माना या दोनों |- |267 || औषधि में मिलावट करना || 6 माह की सजा |- |272 || खाने/पीने की चीजों में मिलावट || 6 महीने की सजा/1000 रूपये जुर्माना |- |274 /75 || मिलावट की हुई औषधियां बेचना || – |- |279 || सड़क पर उतावलेपन/उपेक्षा से वाहन चलाना || 6 माह की सजा या 1000 रूपये का जुर्माना |- |292 || अश्लील पुस्तकों का बेचना || 2 वर्ष की सजा और 2000 रूपये जुर्माना |- |294 || किसी धर्म/धार्मिक स्थान का अपमान || 2 वर्ष की सजा |- |297 || कब्रिस्तानों आदि में अतिचार करना || 1 साल की सजा और जुर्माना दोनो |- |298 || किसी दूसरे इंसान की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना || 1 साल की सजा या जुर्माना या दोनों |- |299 || मानव वध || – |- |302 || हत्या/कत्ल || आजीवन कारावास/मौत की सजा |- |306 || आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण || 10 वर्ष की सजा और जुर्माना |- |308 || गैर-इरादतन हत्या की कोशिश || 7 वर्ष की सजा और जुर्माना |- |309 || आत्महत्या करने की चेष्टा करना || 1 वर्ष की सजा/जुर्माना/दोनों |- |310 || ठगी करना || आजीवन कारावास और जुर्माना |- |312 || गर्भपात करना || – |- |313 || महिला की बिना सहमति के गर्भपात कराना || – |- |323 || जानबूझ कर चोट पहुँचाना || – |- |326 || चोट पहुँचाना || – |- |351 || हमला करना || – |- |354 || किसी स्त्री का लज्जा भंग करना || 2 वर्ष का कारावास/जुर्माना/दोनों |- |362 || अपहरण || – |- |363 || किसी स्त्री को ले भागना || 7 वर्ष का कारावास और जुर्माना |- |366 || नाबालिग लड़की को ले भागना || – |- |376 || बलात्कार करना || 10 वर्ष/आजीवन कारावास |- |377 || अप्राकृतिक कृत्य अपराध || 5 वर्ष की सजा और जुर्माना |- |379 || चोरी (सम्पत्ति) करना || 3 वर्ष का कारावास /जुर्माना/दोनों |- |392 || लूट || 10 वर्ष की सजा |- |395 || डकैती || 10 वर्ष या आजीवन कारावास |- |396 || डकैती के दौरान हत्या || - |- |406 || विश्वास का आपराधिक हनन || 3 वर्ष कारावास/जुर्माना/दोनों |- |415 || छल करना || – |- |417 || छल/दगा करना || 1 वर्ष की सजा/जुर्माना/दोनों |- |420 || छल/बेईमानी से सम्पत्ति अर्जित करना || 7 वर्ष की सजा और जुर्माना |- |445 || गृहभेदन || – |- |446 || रात में नकबजनी करना || – |- |426 || किसी से शरारत करना || 3 माह की सजा/जुर्माना/दोनों |- |463 || कूट-रचना/जालसाजी || – |- |477(क) || झूठा हिसाब करना || – |- |489 || जाली नोट बनाना/चलाना || 10 वर्ष की सजा/आजीवन कारावास |- |493 || धोखे से शादी करना || 10 वर्षों की सजा और जुर्माना |- |494 || पति/पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करना || 7 वर्ष की सजा और जुर्माना |- |495 || पति/पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करना और दोनों रिश्तें चलाना || 10 साल की सजा और जुर्माना |- |496 || बगैर रजामंदी के शादी करना या जबरदस्ती विवाह करना || 07 साल की सजा और जुर्माना |- |497 || जारकर्म करना || 5 वर्ष की सजा और जुर्माना |- |498 || विवाहित स्त्री को भगाकर ले जाना या धोखे से ले जाना || 2 साल का कारावास या जुर्माना अथवा दोनों |- |499 || मानहानि || – |- |500 || मान हानि || 2 वर्ष की सजा और जुर्माना |- |506 || आपराधिक धमकी देना || – |- |509 || स्त्री को अपशब्द कहना/अंगविक्षेप करना || सादा कारावास या जुर्माना |- |511 || आजीवन कारावास से दंडनीय अपराधों को करने के प्रयत्न के लिए दंड || – |- | | | |} ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} <ref>{{cite news |title=राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तीन नए अपराधिक विधेयक 2023 को दी स्वीकृति |url=https://suragbureau.com/2890 |date=2023}}</ref> [https://suragbureau.com/2890 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तीन नए अपराधिक विधेयक 2023 को दी स्वीकृति] == इन्हें भी देखें == * [[दण्ड प्रक्रिया संहिता, १९७३ (भारत)]] * [[भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872]] * [[रणबीर दंड संहिता]] ==बाहरी कड़ियाँ== * [https://apps.apple.com/in/app/indian-penal-code-1860-hindi/id1316081169 भारतीय दंड संहिता हिंदी iPhone एप] * [https://web.archive.org/web/20140328213330/http://books.google.co.in/books?id=cw9iwsgUQwcC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false भारतीय दण्ड संहिता, १८६०] (गूगल पुस्तक ; उपकार प्रकाशन) * [https://web.archive.org/web/20121215070827/http://books.google.co.in/books?id=wmWs4eBKlPAC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता] (गूगल पुस्तक ; उपकार प्रकाशन) * [https://web.archive.org/web/20090419071525/http://nrcw.nic.in/shared/sublinkimages/59.pdf भारतीय दण्ड संहिता (अंग्रेजी में)] * [https://web.archive.org/web/20150223171017/http://indiacode.nic.in/coiweb/welcome.html भारत का संविधान (हिन्दी और अंगरेजी में)] *[https://web.archive.org/web/20130819141428/http://https/://thelawadviser.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%a6%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%a1-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%be-1860-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9/.html भारतीय दण्ड संहिता 1860 क्या है?] {{भारतीय विधि}} [[श्रेणी:भारतीय दण्ड संहिता की धाराएँ]] [[श्रेणी:निर्वाचित वर्षगाँठ से जुड़े लेख]] 9pss9cfini6p8vod1d29rssxsyd3cgb त्रिपिटक 0 31987 6630418 6571969 2026-10-17T11:05:42Z SAGAR SURYAVANSHI JAITHAL 938876 प्रासंगिक छवि और हिंदी विवरण जोड़ा 6630418 wikitext text/x-wiki {{त्रिपिटक}} [[चित्र:Mahamakuta_Tripiṭaka.jpg|अंगूठाकार|पाठ=बौद्ध धार्मिक ग्रंथ 'त्रिपिटक' की पुस्तकों की एक श्रृंखला।|बौद्ध धर्म के पवित्र ग्रंथ 'त्रिपिटक' के विभिन्न खंडों का एक पूर्ण संकलन।]] '''त्रिपिटक''' ([[पालि भाषा|पाली]]:तिपिटक; शाब्दिक अर्थ: तीन पिटारी) बौद्ध धर्म का प्रमुख ग्रंथ है जिसे सभी बौद्ध सम्प्रदाय (महायान, थेरवाद, वज्रयान, मूलसर्वास्तिवाद आदि) मानते हैं। यह बौद्ध धर्म का प्राचीनतम ग्रंथ है जिसमें भगवान बुद्ध के उपदेश संगृहीत है।<ref name="pustak.org">{{Cite web |url=http://pustak.org/bs/home.php?bookid=1239 |title=प्राचीन भारत की श्रेष्ठ कहानियाँ, लेखकः जगदीश चन्द्र जैन, प्रकाशक:भारतीय ज्ञानपीठ, प्रकाशित : मई ०९, २००३ |access-date=7 सितंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071023080248/http://pustak.org/bs/home.php?bookid=1239 |archive-date=23 अक्तूबर 2007 |url-status=dead }}</ref> यह ग्रंथ [[पालि भाषा]] में लिखा गया है और विभिन्न भाषाओं में अनुवादित है। इस ग्रंथ में भगवान बुद्ध द्वारा बुद्धत्त्व प्राप्त करने के समय से [[महापरिनिर्वाण]] तक दिए हुए प्रवचनों को संग्रहित किया गया है<ref>पृष्ठ ९, पुस्तकःबुद्धवचन त्रिपिटकया न्हापांगु निकाय ग्रन्थ दीघनिकाय, वीरपूर्ण स्मृति ग्रन्थमाला भाग-३, अनुवादक:दुण्डबहादुर बज्राचार्य, भाषा:नेपालभाषा, मुद्रकःनेपाल प्रेस</ref>। त्रिपिटक का रचनाकाल या निर्माणकाल पहली सदी ईसवी से तीसरी सदी ईसवी तक है। और सभी त्रिपिटक सिहल देश यानी की श्री लंका में लिखा गया और उनकी भाषा में लिखा गया। नोट- त्रिपिटक बौद्ध ग्रंथ बौद्ध कालीन भाषा (पाली भाषा) से अनुवादित है जिसके कुछ शब्द संस्कृत भाषा से मेल खाते है, अतः अनुवाद का अर्थ विभिन्न भी हो सकता है == ग्रंथ-विभाजन == {{बौद्ध धर्म}} त्रिपिटक को तीन भागों में विभाजित किया गया है, विनयपिटक, सुत्तपिटक और अभिधम्म पिटक। इसका विस्तार इस प्रकार है<ref name="pustak.org"/>- त्रिपिटक में १७ ग्रंथो का समावेश है। *'''(१) [[विनयपिटक]]''' ** [[सुत्तविभंग]] (पाराजिक, पाचित्तिय) ** खन्धक ([[महावग्ग]], [[चुल्लवग्ग]]) ** परिवार ** पातिमोक्ख *'''(२) [[सुत्तपिटक]]''' ** [[दीघनिकाय]] ** [[मज्झिमनिकाय]] ** [[संयुत्तनिकाय]] ** [[अंगुत्तरनिकाय]] ** [[खुद्दकनिकाय ]] *** खुद्दक पाठ *** धम्मपद *** उदान *** इतिवुत्तक *** [[सुत्तनिपात]] *** विमानवत्थु *** पेतवत्थु *** थेरगाथा *** थेरीगाथा *** [[जातक]] *** निद्देस *** पटिसंभिदामग्ग *** अपदान *** बुद्धवंस *** चरियापिटक *'''(३) [[अभिधम्मपिटक]]''' ** धम्मसंगणि ** विभंग ** धातुकथा ** पुग्गलपंञति ** कथावत्थु ** यमक ** पट्ठान। == परिचय == बौद्ध-परम्परा के अनुसार त्रिपिटक तीन [[बौद्ध संगीति|संगीतियों]] से स्थिर हुआ। कहा जाता है कि बुद्ध के परिनिर्वाण के बाद सुभद्र नामक भिक्षु ने अपने साथियों से कहा- ‘‘आवुसो, शोक मत करो, रुदन मत करो ! हम लोगों को महाश्रमण से छुटकारा मिल गया है। वे हमेशा कहते रहते थे- ‘यह करो, यह मत करो’। लेकिन अब हम जो चाहेंगे करेंगे। जो नहीं चाहेंगे, नहीं करेंगे।’’ सुभद्र भिक्षु के ये वचन सुनकर महाकाश्यप स्थविर को भय हुआ कि कहीं सद्धर्म का नाश न हो जाए। अतएव उन्होंने विनय और धर्म के संस्थापन के लिए [[राजगृह]] में 500 भिक्षुओं की एक संगीति बुलवायी। बौद्ध भिक्षुओं की दूसरी संगीति बुद्ध-परिनिर्वाण के 100 वर्ष बाद [[वैशाली]] में बुलाई गयी। बुद्ध-परिनिर्वाण के 236 वर्ष बाद [[पाटलिपुत्र]] में [[सम्राट अशोक]] के समय तिस्स मोग्गलिपुत्त ने तीसरी संगीति बुलायी, जिसमें [[थेरवाद]] का उद्धार किया गया। वर्तमान त्रिपिटक वही त्रिपिटक है जो [[सिंहल]] के राजा [[वट्टगामणी]] के समय प्रथम शताब्दी के अन्तिम रूप से स्थिर हुआ माना जाता है। == महत्व == बौद्ध त्रिपिटक अनेक दृष्टियों से बहुत महत्त्व का है। इसमें बुद्धकालीन भारत की राजनीति, अर्थनीति, सामाजिक व्यवस्था, शिल्पकला, संगीत, वस्त्र-आभूषण, वेष-भूषा, रीति-रिवाज तथा ऐतिहासिक, भौगोलिक, व्यापारिक आदि अनेक महत्त्वपूर्ण विषयों का विस्तार से प्रतिपादन है। उदाहरण के लिए, विनयपिटक में बौद्ध भिक्षु-भिक्षुणियों के आचार-व्यवहार सम्बन्धी नियमों का विस्तृत वर्णन है। ‘महावग्ग’ में तत्कालीन जूते, आसन, सवारी, ओषधि, वस्त्र, छतरी, पंखे आदि का उल्लेख है। ‘चुल्लवग्ग’ में भिक्षुणियों की प्रव्रज्या आदि का वर्णन है। यहाँ भिक्षुओं के लिए जो शलाका-ग्रहण की पद्धति बताई गयी है। वह तत्कालीन लिच्छवि गणतंत्र के ‘वोट’ (छन्द) लेने के रिवाज की नकल है। उस समय के गणतन्त्र शासन में कोई प्रस्ताव पेश करने के बाद, प्रस्ताव को दुहराते हुए उसके विषय में तीन बार तक बोलने का अवसर दिया जाता था। तब कहीं जाकर निर्णय सुनाया जाता था। यही पद्धति भिक्षु संघ में स्वीकार की गयी थी। ‘सूत्रपिटक’ ([[सुत्तपिटक]]) के अन्तर्गत दीर्घनिकाय में पूरणकस्सप, मक्खलि गोसाल, अजित केसकम्बल, पकुध कच्चायन, निगंठ नातपुत्त और संजय वेलट्ठिपुत्त नामक छह यशस्वी तीर्थकरों का मत-प्रतिपादन, लिच्छवियों की गण-व्यवस्था, अहिंसामय यज्ञ, जात-पाँत का खण्डन आदि अनेक महत्त्वपूर्ण विषयों का उल्लेख है। ‘मज्झिमनिकाय’ में बुद्ध की चारिका, नातपुत्त-मत-खण्डन, अनात्मवाद, वर्ण-व्यवस्था-विरोध, मांसभक्षण-विचार आदि विषयों का प्रतिपादन है। ‘संयुत्तनिकाय’ में कोसल के राजा पसेनदि और मगध के राजा अजातशत्रु के युद्ध का वर्णन है। ‘अंगुत्तरनिकाय’ में सोलह जनपद आदि का उल्लेख है। ‘खुद्दकनिकाय’ के अन्तर्गत ‘धम्मपद’ और सुत्तनिपात’ बहुत प्राचीन माने जाते हैं जिनका बौद्ध साहित्य में ऊँचा स्थान है। ‘सुत्तनिपात’ में सच्चा ब्राह्मण कौन है ? वास्तविक मांस-त्याग किसे कहते हैं ? आदि विषयों का मार्मिक वर्णन है। ‘थेरगाथा’ और ‘थेरीगाथा’ में अनेक भिक्षु-भिक्षुणियों की जीवनचर्या दी गई है, जिन्होंने बड़े-बड़े प्रलोभनों को जीतकर निर्वाण पदवी पायी। जातकों में बुद्ध के पूर्वभवों की कथाएँ हैं, जिनके अनेक दृश्य [[साँची]], [[भरहुत]] आदि के स्तूपों पर अंकित हैं। ये 150 ईसवी सन् पूर्व के आसपास के माने जाते हैं। ये कथाएँ विश्व-साहित्य की दृष्टि से बहुत महत्त्व की हैं और विश्व के प्रायः हरेक कोने में पहुँची हैं। ‘अभिधम्मपिटक’ में बौद्धधर्म में मान्य पदार्थ और उनके भेद-प्रभेदों का विस्तार से वर्णन है। बौद्धधर्म के इतिहास की दृष्टि से यह महत्त्व का ग्रन्थ है। इसकी रचना सम्राट् अशोक के समय तिस्समोग्गलिपुत्त ने की थी। बौद्ध विद्वानों ने उक्त त्रिपिटक की अनेक व्याख्याएँ आदि लिखी हैं, जिन्हें [[अट्ठकथा]] (अर्थकथा) के नाम से जाना जाता है। अट्ठकथाएँ भी [[पालि भाषा]] में हैं। कहते हैं जब महेन्द्र स्थविर बुद्ध शासन की स्थापना करने के लिए सिंहल गये तो वे त्रिपिटक के साथ-साथ उनकी अट्ठकथाएँ भी लेते गये। तत्पश्चात् आचार्य बुद्धघोष ने ईसवी सन की 5वीं शताब्दी में इन सिंहल अट्ठकथाओं का पालि में रूपान्तर किया। अट्ठकथाएँ ये हैं- :1. समन्तपासादिका (विनय-अट्ठकथा) :2. सुमंगलविलासिनी (दीघनिकाय-अट्ठकथा) :3. पपंचसूदनी (मज्झिमनिकाय-अट्ठकथा) :4. सारत्थपकासिनी (संयुत्तनिकाय-अट्ठकथा) :5. मनोरथपूरणी (अंगुत्तरनिकाय-अट्ठकथा) :6. अभिधम्मपिटक की भिन्न-भिन्न अट्ठकथाएँ इन सब अट्ठकथाओं का प्रणेता प्रायः [[बुद्धघोष]] को माना जाता है। इसके अतिरिक्त ‘[[खुद्दकनिकाय]]’ के ग्रन्थों पर भी भिन्न-भिन्न अट्ठकथाएँ हैं, जिनमें जातक-अट्ठकथा और धम्मपद-अट्ठकथा विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। जातक में केवल बुद्ध भगवान के पूर्वजन्म से सम्बन्ध रखनेवाली गाथाएँ हैं, जो बिना जातक-अट्ठकथा के समझ में नहीं आ सकतीं। ये सब अट्ठकथाएँ भारत की प्राचीन संस्कृति का भण्डार हैं जिनमें इतिहास की विपुल सामग्री भरी पड़ी है। == इन्हें भी देखें == * [[त्रिपिटक कोरिया]] * [[बौद्ध धम्म की पालि साहित्य परंपरा]] * [[अनुपिटक]] == बाहरी कड़ियाँ== *[https://web.archive.org/web/20140621102454/http://www.tipitaka.org/deva/ त्रिपिटक] (देवनागरी में) == टीका == {{reflist|}} {{बौद्ध धर्म विषयावली}} [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:त्रिपिटक]] [[श्रेणी:बौद्ध ग्रंथ]] 3s9y3jmzg360njndxynwp6abqrolxr6 कालरात्रि 0 47365 6630297 6479655 2026-10-16T19:15:03Z Star pallabi 954078 Help the reader with view of video reference 6630297 wikitext text/x-wiki {{Infobox deity| type = Hindu | image = Kalaratri.jpg ‎ | caption =[[कालरात्रि]]- नवदुर्गाओं में सप्तम् | name = [[कालरात्रि]] | Devanagari = कालरात्रि | Tamil_script = | affiliation = [[हिन्दू देवी]] | deity_of = सिद्धियां | abode = | mantra = | weapon = [[तलवार]] | consort = [[शिव]] | mount = [[गधा]] | planet = }} माँ [[दुर्गा]] की सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती हैं।<ref>{{cite web|url=https://blogs.timesofindia.indiatimes.com/the-photo-blog/9-days-9-avatars-be-ferocious-like-goddess-kaalratri/|title=9 days, 9 avatars: Be ferocious like Goddess Kaalratri|access-date=27 सितंबर 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170615104643/http://blogs.timesofindia.indiatimes.com/the-photo-blog/9-days-9-avatars-be-ferocious-like-goddess-kaalratri/|archive-date=15 जून 2017|url-status=dead}}</ref> [[दुर्गा पूजा]] के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना का विधान है। इस दिन साधक का मन 'सहस्रार' चक्र में स्थित रहता है। इसके लिए ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है। देवी कालरात्रि को व्यापक रूप से माता देवी - काली, महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, मृत्यू-रुद्राणी, चामुंडा, चंडी और दुर्गा के कई विनाशकारी रूपों में से एक माना जाता है। रौद्री , धूम्रवर्णा कालरात्रि मां के अन्य कम प्रसिद्ध नामों में हैं | यह ध्यान रखना जरूरी है कि मां काली और कालरात्रि का उपयोग एक दूसरे के परिपूरक है, हालांकि इन दो देवीओं को कुछ लोगों द्वारा अलग-अलग सत्ताओं के रूप में माना गया है। डेविड किन्स्ले के मुताबिक, काली का उल्लेख हिंदू धर्म में लगभग ६०० ईसा के आसपास एक अलग देवी के रूप में किया गया है। कालानुक्रमिक रूप से, कालरात्रि महाभारत में वर्णित(लगभग 3200) ईसा पूर्व वर्तमान काली का ही वर्णन है |<ref>&nbsp;&nbsp;&nbsp;मिश्रा, पी.के. (१९८९-०१-०१ ) संस्कृति, जनजातीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन: डॉ। एन.के. साहू स्मारक वॉल्यूम अगम कला प्रकाशन</ref> माना जाता है कि देवी के इस रूप में सभी राक्षस,भूत, प्रेत, पिशाच और नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश होता है, जो उनके आगमन से पलायन करते हैं | शिल्प प्रकाश में संदर्भित एक प्राचीन तांत्रिक पाठ, सौधिकागम, देवी कालरात्रि का वर्णन रात्रि के नियंत्रा रूप में किया गया है। सहस्रार चक्र में स्थित साधक का मन पूर्णतः माँ कालरात्रि के स्वरूप में अवस्थित रहता है। उनके साक्षात्कार से मिलने वाले पुण्य (सिद्धियों और निधियों विशेष रूप से ज्ञान, शक्ति और धन) का वह भागी हो जाता है। उसके समस्त पापों-विघ्नों का नाश हो जाता है और अक्षय पुण्य-लोकों की प्राप्ति होती है। == श्लोक == एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता | लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी || वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा | वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयन्करि || == वर्णन == इनके शरीर का रंग घने अंधकार की तरह एकदम काला है। सिर के बाल बिखरे हुए हैं। गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है। इनके तीन नेत्र हैं। ये तीनों नेत्र ब्रह्मांड के सदृश गोल हैं। इनसे विद्युत के समान चमकीली किरणें निःसृत होती रहती हैं। [[File:Kali drink blood at pandavas camp.jpg|thumb| कालरात्रि का रक्तपान]] माँ की नासिका के श्वास-प्रश्वास से अग्नि की भयंकर ज्वालाएँ निकलती रहती हैं । अपने पर्वत के समान दोनों स्तन से असुरोको धक्का देकर अन्त करती हैं। इनका वाहन गर्दभ (गदहा) है। ये ऊपर उठे हुए दाहिने हाथ की वरमुद्रा से सभी को वर प्रदान करती हैं। दाहिनी तरफ का नीचे वाला हाथ अभयमुद्रा में है। बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का काँटा तथा नीचे वाले हाथ में खड्ग (कटार) है। == महिमा == माँ कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, लेकिन ये सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं। इसी कारण इनका एक नाम 'शुभंकारी' भी है। अतः इनसे भक्तों को किसी प्रकार भी भयभीत अथवा आतंकित होने की आवश्यकता नहीं है। माँ कालरात्रि दुष्टों का विनाश करने वाली हैं। दानव, दैत्य, राक्षस, भूत, प्रेत आदि इनके स्मरण मात्र से ही भयभीत होकर भाग जाते हैं। ये ग्रह-बाधाओं को भी दूर करने वाली हैं। इनके उपासकों को अग्नि-भय, जल-भय, जंतु-भय, शत्रु-भय, रात्रि-भय आदि कभी नहीं होते। इनकी कृपा से वह सर्वथा भय-मुक्त हो जाता है। माँ कालरात्रि के स्वरूप-विग्रह को अपने हृदय में अवस्थित करके मनुष्य को एकनिष्ठ भाव से उपासना करनी चाहिए। यम, नियम, संयम का उसे पूर्ण पालन करना चाहिए। मन, वचन, काया की पवित्रता रखनी चाहिए। वे शुभंकारी देवी हैं। उनकी उपासना से होने वाले शुभों की गणना नहीं की जा सकती। हमें निरंतर उनका स्मरण, ध्यान और पूजा करना चाहिए। जय माता दी ।। ==नवरात्रि दिवस == [[चित्र:Kaalratri Temple Dumri Buzurg Nayagaon Saran Bihar.jpg|thumb|right|मां कालरात्रि मंदिर, [[नयागांव, सारण (बिहार)]], डुमरी बुजुर्ग गांव]] नवरात्रि की सप्तमी के दिन माँ कालरात्रि की आराधना का विधान है। इनकी पूजा-अर्चना करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है व दुश्मनों का नाश होता है, तेज बढ़ता है। प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में सातवें दिन इसका जाप करना चाहिए। ==मंदिर== * कालरात्रि मंदिर, डुमरी बुजुर्ग गांव ,[[नयागांव, सारण (बिहार)]]<ref>{{cite web|url=http://www.jagran.com/news/state-the-annual-pugnotsv-kalratri-temple-tue-text-14612396.html?src=RN_detail-page|title=वार्षिक पूजनोत्सव को लेकर कालरात्रि मंदिर में मंगल पाठ|access-date=21 अगस्त 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170821171900/http://www.jagran.com/news/state-the-annual-pugnotsv-kalratri-temple-tue-text-14612396.html?src=RN_detail-page|archive-date=21 अगस्त 2017|url-status=live}}</ref> * कालरात्रि-[[वाराणसी]] मंदिर, डी 8/17, कालिक गाली, जो कि अन्नपूर्णा के समानांतर लेनिन - विश्वनाथ == मंत्र == माँ कालरात्रि के कुछ महत्वपूर्ण मंत्र या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। अर्थ : हे माँ! सर्वत्र विराजमान और कालरात्रि के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ। हे माँ, मुझे पाप से मुक्ति प्रदान कर। ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्रै नमः&nbsp;| ॐ ऐं ह्रीं क्लीं श्री कालरात्रि सर्व वश्यं कुरु कुरु वीर्य देहि देहि गणैश्वर्यै नम:। With the help of above mantras one youTube video is available [https://youtube.com/shorts/nCE66yStdHY?si=JI5wH7wkOeeU_J6Q click] to watch<ref>{{Cite web|url=https://bhagwatgeeta.co.in/kaalratri-mata-mantra/|title=मां कालरात्रि का मंत्र|last=Jain|first=Swarn|date=03/11/2024|website=Bhagwat Geeta|access-date=19/11/2024}}</ref> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची|25em}} {{नवदुर्गा}} {{हिन्दू देवी देवता}} [[श्रेणी:नवदुर्गा]] d9n9pi029qdsf5kic0mn7ge03hv718p 6630324 6630297 2026-10-17T02:52:57Z विक्रम प्रताप 911487 [[Special:Contributions/Star pallabi|Star pallabi]] ([[User talk:Star pallabi|Talk]]) के संपादनों को हटाकर [[User:~2025-26961-01|~2025-26961-01]] के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया 6479655 wikitext text/x-wiki {{Infobox deity| type = Hindu | image = Kalaratri.jpg ‎ | caption =[[कालरात्रि]]- नवदुर्गाओं में सप्तम् | name = [[कालरात्रि]] | Devanagari = कालरात्रि | Tamil_script = | affiliation = [[हिन्दू देवी]] | deity_of = सिद्धियां | abode = | mantra = | weapon = [[तलवार]] | consort = [[शिव]] | mount = [[गधा]] | planet = }} माँ [[दुर्गा]] की सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती हैं।<ref>{{cite web|url=https://blogs.timesofindia.indiatimes.com/the-photo-blog/9-days-9-avatars-be-ferocious-like-goddess-kaalratri/|title=9 days, 9 avatars: Be ferocious like Goddess Kaalratri|access-date=27 सितंबर 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170615104643/http://blogs.timesofindia.indiatimes.com/the-photo-blog/9-days-9-avatars-be-ferocious-like-goddess-kaalratri/|archive-date=15 जून 2017|url-status=dead}}</ref> [[दुर्गा पूजा]] के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना का विधान है। इस दिन साधक का मन 'सहस्रार' चक्र में स्थित रहता है। इसके लिए ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है। देवी कालरात्रि को व्यापक रूप से माता देवी - काली, महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, मृत्यू-रुद्राणी, चामुंडा, चंडी और दुर्गा के कई विनाशकारी रूपों में से एक माना जाता है। रौद्री , धूम्रवर्णा कालरात्रि मां के अन्य कम प्रसिद्ध नामों में हैं | यह ध्यान रखना जरूरी है कि मां काली और कालरात्रि का उपयोग एक दूसरे के परिपूरक है, हालांकि इन दो देवीओं को कुछ लोगों द्वारा अलग-अलग सत्ताओं के रूप में माना गया है। डेविड किन्स्ले के मुताबिक, काली का उल्लेख हिंदू धर्म में लगभग ६०० ईसा के आसपास एक अलग देवी के रूप में किया गया है। कालानुक्रमिक रूप से, कालरात्रि महाभारत में वर्णित(लगभग 3200) ईसा पूर्व वर्तमान काली का ही वर्णन है |<ref>&nbsp;&nbsp;&nbsp;मिश्रा, पी.के. (१९८९-०१-०१ ) संस्कृति, जनजातीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन: डॉ। एन.के. साहू स्मारक वॉल्यूम अगम कला प्रकाशन</ref> माना जाता है कि देवी के इस रूप में सभी राक्षस,भूत, प्रेत, पिशाच और नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश होता है, जो उनके आगमन से पलायन करते हैं | शिल्प प्रकाश में संदर्भित एक प्राचीन तांत्रिक पाठ, सौधिकागम, देवी कालरात्रि का वर्णन रात्रि के नियंत्रा रूप में किया गया है। सहस्रार चक्र में स्थित साधक का मन पूर्णतः माँ कालरात्रि के स्वरूप में अवस्थित रहता है। उनके साक्षात्कार से मिलने वाले पुण्य (सिद्धियों और निधियों विशेष रूप से ज्ञान, शक्ति और धन) का वह भागी हो जाता है। उसके समस्त पापों-विघ्नों का नाश हो जाता है और अक्षय पुण्य-लोकों की प्राप्ति होती है। == श्लोक == एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता | लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी || वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा | वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयन्करि || == वर्णन == इनके शरीर का रंग घने अंधकार की तरह एकदम काला है। सिर के बाल बिखरे हुए हैं। गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है। इनके तीन नेत्र हैं। ये तीनों नेत्र ब्रह्मांड के सदृश गोल हैं। इनसे विद्युत के समान चमकीली किरणें निःसृत होती रहती हैं। [[File:Kali drink blood at pandavas camp.jpg|thumb| कालरात्रि का रक्तपान]] माँ की नासिका के श्वास-प्रश्वास से अग्नि की भयंकर ज्वालाएँ निकलती रहती हैं । अपने पर्वत के समान दोनों स्तन से असुरोको धक्का देकर अन्त करती हैं। इनका वाहन गर्दभ (गदहा) है। ये ऊपर उठे हुए दाहिने हाथ की वरमुद्रा से सभी को वर प्रदान करती हैं। दाहिनी तरफ का नीचे वाला हाथ अभयमुद्रा में है। बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का काँटा तथा नीचे वाले हाथ में खड्ग (कटार) है। == महिमा == माँ कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, लेकिन ये सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं। इसी कारण इनका एक नाम 'शुभंकारी' भी है। अतः इनसे भक्तों को किसी प्रकार भी भयभीत अथवा आतंकित होने की आवश्यकता नहीं है। माँ कालरात्रि दुष्टों का विनाश करने वाली हैं। दानव, दैत्य, राक्षस, भूत, प्रेत आदि इनके स्मरण मात्र से ही भयभीत होकर भाग जाते हैं। ये ग्रह-बाधाओं को भी दूर करने वाली हैं। इनके उपासकों को अग्नि-भय, जल-भय, जंतु-भय, शत्रु-भय, रात्रि-भय आदि कभी नहीं होते। इनकी कृपा से वह सर्वथा भय-मुक्त हो जाता है। माँ कालरात्रि के स्वरूप-विग्रह को अपने हृदय में अवस्थित करके मनुष्य को एकनिष्ठ भाव से उपासना करनी चाहिए। यम, नियम, संयम का उसे पूर्ण पालन करना चाहिए। मन, वचन, काया की पवित्रता रखनी चाहिए। वे शुभंकारी देवी हैं। उनकी उपासना से होने वाले शुभों की गणना नहीं की जा सकती। हमें निरंतर उनका स्मरण, ध्यान और पूजा करना चाहिए। जय माता दी ।। ==नवरात्रि दिवस == [[चित्र:Kaalratri Temple Dumri Buzurg Nayagaon Saran Bihar.jpg|thumb|right|मां कालरात्रि मंदिर, [[नयागांव, सारण (बिहार)]], डुमरी बुजुर्ग गांव]] नवरात्रि की सप्तमी के दिन माँ कालरात्रि की आराधना का विधान है। इनकी पूजा-अर्चना करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है व दुश्मनों का नाश होता है, तेज बढ़ता है। प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में सातवें दिन इसका जाप करना चाहिए। ==मंदिर== * कालरात्रि मंदिर, डुमरी बुजुर्ग गांव ,[[नयागांव, सारण (बिहार)]]<ref>{{cite web|url=http://www.jagran.com/news/state-the-annual-pugnotsv-kalratri-temple-tue-text-14612396.html?src=RN_detail-page|title=वार्षिक पूजनोत्सव को लेकर कालरात्रि मंदिर में मंगल पाठ|access-date=21 अगस्त 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170821171900/http://www.jagran.com/news/state-the-annual-pugnotsv-kalratri-temple-tue-text-14612396.html?src=RN_detail-page|archive-date=21 अगस्त 2017|url-status=live}}</ref> * कालरात्रि-[[वाराणसी]] मंदिर, डी 8/17, कालिक गाली, जो कि अन्नपूर्णा के समानांतर लेनिन - विश्वनाथ == मंत्र == माँ कालरात्रि के कुछ महत्वपूर्ण मंत्र या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। अर्थ : हे माँ! सर्वत्र विराजमान और कालरात्रि के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूँ। हे माँ, मुझे पाप से मुक्ति प्रदान कर। ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्रै नमः&nbsp;| ॐ ऐं ह्रीं क्लीं श्री कालरात्रि सर्व वश्यं कुरु कुरु वीर्य देहि देहि गणैश्वर्यै नम:।<ref>{{Cite web|url=https://bhagwatgeeta.co.in/kaalratri-mata-mantra/|title=मां कालरात्रि का मंत्र|last=Jain|first=Swarn|date=03/11/2024|website=Bhagwat Geeta|access-date=19/11/2024}}</ref> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची|25em}} {{नवदुर्गा}} {{हिन्दू देवी देवता}} [[श्रेणी:नवदुर्गा]] f9hb63nhp99lmz1ia8uinz3c9bps35f कालीबंगा 0 49012 6630243 6610909 2026-10-16T14:35:02Z ~2026-55543-54 954023 /* स्थिति */ 6630243 wikitext text/x-wiki {{Infobox ancient site |name = कालीबंगा |alternate_name = |image = Westernmound.jpg |alt = |caption = कालीबंगा की पश्चिमी ढेरी, जिसे "दुर्ग" टीला कहा जाता है |map_type = India Rajasthan |map_alt = |map_size = 270 |relief =yes |coordinates = {{Coord|29|28|27|N|74|7|49|E|type:landmark_region:IN|display=inline,title}} |location = [[राजस्थान]], [[भारत]] |region = [[थर मरुभूमि]] |type = बस्ती |part_of = |length = |width = |area = |height = |builder = |material = |built = |abandoned = २०वीं या १९वीं शताब्दी ईसापूर्व |epochs = [[:en:Periodization of the Indus Valley Civilization|हड़प्पा १ से हड़प्पा ३सी]] |cultures = [[सिन्धु घाटी सभ्यता]] |dependency_of = |occupants = |event = |excavations = |archaeologists = |condition = |ownership = |management = |public_access = |website = <!-- {{URL|example.com}} --> |notes = यहां पर खेती के प्रमाण मिले है तथा लकड़ी की नालियों के साक्ष्य प्राप्त हुए है }} [[चित्र:Kalibanga.jpg|thumb|right|280px|कालीबंगा के अवशेष]] '''कालीबंगा''' [[राजस्थान]] के [[हनुमानगढ़ ज़िले]] का एक प्राचीन एवं [[इतिहास|ऐतिहासिक]] स्थल है। यहाँ [[सिंधु घाटी सभ्यता]] के महत्वपूर्ण अवशेष मिले हैं। कालीबंगा एक छोटा नगर था। यहाँ एक [[दुर्ग]] मिला है। प्राचीन द्रषद्वती और सरस्वती नदी घाटी वर्तमान में [[घग्गर नदी]] का क्षेत्र में [[सिंधु घाटी सभ्यता|सैन्धव सभ्यता]] से भी प्राचीन कालीबंगा की सभ्यता पल्लवित और पुष्पित हुई। कालीबंगा 4000 ईसा पूर्व से भी अधिक प्राचीन मानी जाती है। सर्वप्रथम 1952 ई में [[अमलानन्द घोष]] ने इसकी खोज की। बी.के थापर व बी.बी लाल ने 1961-69 में यहाँ उत्खनन का कार्य किया। यहाँ विश्व का सर्वप्रथम जोता हुआ खेत मिला है और 2900 ईसापूर्व तक यहाँ एक विकसित नगर था।<ref>{{cite web | publisher = Encyclopædia Britannica | url = http://www.britannica.com/EBchecked/topic/285248/India | accessdate = 2008-12-31 | last = Calkins | first = PB |author2=Alam M | title = India }}</ref><ref>{{cite book | last = Lal | first = BB | title = Purātattva | publisher = Indian Archaeological Society | year = 2002 | chapter = The Homeland of Indo-European Languages and Culture: Some Thoughts | pages = 1–5}}</ref><ref>{{cite book|title= History of India |first= Herman |last= Kulke |publisher= Routledge |year=2004 |page=25 |url=https://www.google.com/books/edition/A_History_of_India/RoW9GuFJ9GIC?hl=en&gbpv=1&dq=india++history&printsec=frontcover}}</ref> == स्थिति== पुरातात्विक स्थल कालीबंगा, राजस्थान के [[हनुमानगढ़ जिला|हनुमानगढ़ जिले]] में स्थित है। हनुमानगढ़ से कालीबंगा की दूरी 30 किलोमीटर है। बीकानेर या हनुमानगढ़ से आने वालों के लिए [[पीलीबंगा]] से होकर जाना होगा। कालीबंगा, पीलीबंगा से मात्र पांच किलोमीटर दूर है। पीलीबंगा एक छोटा सा कस्बा है। पीलीबंगा में बीकानेर तथा हनुमानगढ़ से सीधी रेलसेवा उपलब्ध है। सड़कमार्ग भी है। bahut dur h == इतिहास == कालीबंगा सिंधु भाषा का शब्द है जो काली+बंगा (काले रंग की चूड़ियां) से बना है। काली का अर्थ काले रंग से तथा बंगा का अर्थ चूड़ीयों से है। ==परिचय== [[चित्र:Kalibangan pre-Harappan structures.jpg|280px|thumb|right|हड़प्पा सभ्यता से भी पहले निर्मित संरचनाएँ]] [[राजस्थान]] के [[हनुमानगढ़]] जिले के दक्षिण-पश्चिम में स्थित कालीबंगा स्थान पर उखनन द्वारा (1961 ई. के मध्य किए गए) 26 फुट ऊँची पश्चिमी थेड़ी (टीले) से प्राप्त अवशेषों से विदित होता है कि लगभग ४५०० वर्ष पूर्व यहाँ सरस्वती नदी के किनारे हड़प्पा कालीन सभ्यता फल-फूल रही थी। कालीबंगा, हनुमानगढ़ जिले में पीलीबंगा के निकट स्थित है। यह स्थान प्राचीन काल की नदी सरस्वती (जो कालांतर में सूख कर लुप्त हो गई थी) के तट पर स्थित था। यह नदी अब घग्घर नदी के रूप में है। सतलज उत्तरी राजस्थान में समाहित होती थी। सूरतगढ़ के निकट नोहर-भादरा क्षेत्र में सरस्वती व दृषद्वती का संगम स्थल था। स्वंय सिंधु नदी अपनी विशालता के कारण वर्षा ॠतु में समुद्र जैसा रूप धारण कर लेती थी जो उसके नामकरण से स्पष्ट है। हमारे देश भारत में "सिंधु सभ्यता" का मूलत: उद्भव विकास एवं प्रसार "सप्तसिन्धव" प्रदेश में हुआ तथा सरस्वती उपत्यका का उसमें विशिष्ट योगदान है। सरस्वती उपत्यका (घाटी) सरस्वती एवं दृषद्वती के मध्य स्थित "ब्रह्मवर्त" का पवित्र प्रदेश था जो मनु के अनुसार "देवनिर्मित" था। धनधान्य से परिपूर्ण इस क्षेत्र में वैदिक ऋचाओं का उद्बोधन भी हुआ। सरस्वती (वर्तमान में घग्घर) नदियों में उत्तम थी तथा गिरि से समुद्र में प्रवेश करती थी। ॠग्वेद (सप्तम मण्डल, 2/95) में कहा गया है-"एकाचतत् सरस्वती नदी नाम शुचिर्यतौ। गिरभ्य: आसमुद्रात।।" सतलज उत्तरी राजस्थान में सरस्वती में समाहित होती थी। सी.एफ. ओल्डन (C.F. OLDEN) ने ऐतिहासिक और भौगोलिक तथ्यों के आधार पर बताया कि घग्घर (पाकिस्तान में हकरा) नदी के घाट पर ॠग्वेद में बहने वाली नदी सरस्वती 'दृषद्वती' थी। तब सतलज व यमुना नदियाँ अपने वर्तमान पाटों में प्रवाहित न होकर घग्घर व हकरा के पाटों में बहती थीं। [[महाभारत]] काल तक सरस्वती लुप्त हो चुकी थी और 13 वीं सदी तक सतलज, व्यास में मिल गई थी। पानी की मात्रा कम होने से सरस्वती रेतीले भाग में सूख गई थी। ओल्डन महोदय के अनुसार सतलज और यमुना के बीच कई छोटी-बड़ी नदियाँ निकलती हैं। इनमें चौतंग, मारकंडा, सरस्वती आदि थी। ये नदियाँ आज भी वर्षा ॠतु में प्रवाहित होती हैं। राजस्थान के निकट ये नदियाँ निकल कर एक बड़ी नदी घग्घर का रूप ले लेती हैं। आगे चलकर यह नदी पाकिस्तान में हकरा, वाहिद, नारा नामों से जानी जाती है। ये नदियाँ आज सूखी हुई हैं - किन्तु इनका मार्ग राजस्थान से लेकर करांची और पूर्व कच्छ की खाड़ी तक देखा जा सकता है। [[वाकणकर]] महाशय के अनुसार सरस्वती नदी के तट पर 2०० से अधिक नगर बसे थे, जो हड़प्पाकालीन हैं। इस कारण इसे 'सिंधुघाटी की सभ्यता' के स्थान पर 'सरस्वती नदी की सभ्यता' कहना चाहिए। मूलत: घग्घर-हकरा ही प्राचीन सरस्वती नदी थी जो सतलज और यमुना के संयुक्त गुजरात तक बहती थी जिसका पाट (चौड़ाई) ब्रह्मपुत्र नदी से बढ़कर 8 कि॰मी॰ था। वाकणकर के अनुसार सरस्वती नदी 2 लाख 5० हजार वर्ष पूर्व नागौर, लूनासर, ओसियाँ, डीडवाना होते हुए लूणी से मिलती थी जहाँ से वह पूर्व में कच्छ का रण में नानूरण जल सरोवर होकर लोथल के निकट संभात की काढ़ी में गिरती थी, किंतु 4०,००० वर्ष पूर्व पहले भूचाल आया जिसके कारण सरस्वती नदी मार्ग परिवर्तन कर घग्घर नदी के मार्ग से होते हुए हनुमानगढ़ और सूरतगढ़ के बहावलपुर क्षेत्र में सिंधु नदी के समानान्तर बहती हुई कच्छ के मैदान में समुद्र से मिल जाती थी। महाभारत काल में कौरव-पाण्डव युद्ध इसी के तट पर लड़ा गया। इसी काल में सरस्वती के विलुप्त होने पर यमुना गंगा में मिलने लगी। == पुरातात्विक सामग्रियाँ == १९२२ ई. में [[राखालदास बनर्जी|राखलदास बनर्जी]] एवं [[दयाराम साहनी]] के नेतृत्व में [[मोहन जोदड़ो|मोहन-जोदड़ो]] एवं [[हड़प्पा]] (अब [[पाकिस्तान]] में लरकाना जिले में स्थित) के उत्खनन द्वारा हड़प्पा या सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेष मिले थे जिनसे ४५०० वर्ष पूर्व की प्राचीन सभ्यता का पता चला था। बाद में इस सभ्यता के लगभग १०० केन्द्रों का पता चला जिनमें राजस्थान का कालीबंगा क्षेत्र अत्यन्त महत्वपूर्ण है।मोहन-जोदड़ो व हड़प्पा के बाद हड़प्पा संस्कृति का कालीबंगा तीसरा बड़ा नगर सिद्ध हुआ है। जिसके एक टीले के उत्खनन द्वारा निम्नांकित अवशेष स्रोत के रूप में मिले हैं जिनकी विशेषताएँ भारतीय सभ्यता के विकास में उनका योगदान स्पष्ट करती हैं - === ताँबे के औजार व मूर्तियाँ === [[काली गंगा (१९९० चलचित्र)|कालीबंगा]] में उत्खन्न से प्राप्त अवशेषों में ताँबे (धातु) से निर्मित औज़ार, हथियार व मूर्तियाँ मिली हैं, जो यह प्रकट करती है कि मानव प्रस्तर युग से ताम्रयुग में प्रवेश कर चुका था। इसमें मिली तांबे की काली चूड़ियों की वजह से ही इसे कालीबंगा कहा गया। ध्यातव्य है कि पंजाबी में 'बंगा' का अर्थ चूड़ी होता है, इसलिए कालीबंगा अर्थात काली चूड़ियाँ। === अंकित मुहरें === [[चित्र:Kalibangan Harappan seals.jpg|right|thumb|280px|कालीबंगा से प्राप्त मुहरें]] कालीबंगा से सिंधु घाटी (हड़प्पा) सभ्यता की मिट्टी पर बनी मुहरें मिली हैं, जिन पर वृषभ व अन्य पशुओं के चित्र व र्तृधव लिपि में अंकित लेख है जिन्हें अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है। वह लिपि दाएँ से बाएँ लिखी जाती थी। === ताँबे या मिट्टी की बनी मूर्तियाँ, पशु-पक्षी व मानव कृतियाँ === यहां से मिली मूर्तियां व अन्य कृतियां जो मोहनजोदाड़ो व हड़प्पा के समान हैं। पशुओं में बैल, बंदर व पक्षियों की मूर्तियाँ मिली हैं जो पशु-पालन, व कृषि में बैल का उपयोग किया जाना प्रकट करता है। === तोलने के बाट === पत्थर से बने तोलने के बाट का उपयोग करना मानव सीख गया था। जिसे तराजू के माध्यम से उपयोग में लाया जाता था। === बर्तन === मिट्टी के विभिन्न प्रकार के छोटे-बड़े बर्तन भी प्राप्त हुए हैं जिन पर चित्रांकन भी किया हुआ है। यह प्रकट करता है कि बर्तन बनाने हेतु 'चारु' का प्रयोग होने लगा था तथा चित्रांकन से कलात्मक प्रवृत्ति व्यक्त करता है। === आभूषण === अनेक प्रकार के स्री व पुरुषों द्वारा प्रयुक्त होने वाले काँच, सीप, शंख, घोंघों आदि से निर्मित आभूषण भी मिलें हैं जैसे कंगन, चूड़ियाँ आदि। === नगर नियोजन === मोहन-जोदड़ो व हड़प्पा की भाँति कालीबंगा में भी सूर्य से तपी हुई ईटों से बने मकान, दरवाज़े, पांच से साढ़े पांच मीटर चौड़ी एवं समकोण पर काटती सड़कें, कुएँ, नालियाँ आदि पूर्व योजना के अनुसार निर्मित हैं जो तत्कालीन मानव की नगर-नियोजन, सफ़ाई-व्यवस्था, पेयजल व्यवस्था आदि पर प्रकाश डालते हैं। मोहनजोदाड़ो के विपरीत कालीबगाँ के घर कच्ची ईंटो के बने थे। === कृषि-कार्य संबंधी अवशेष === कपास की खेती के अवशेष मिले है। साथ ही मिक्षित खेती (गेंहू और चना) के साक्ष्य मिले है। कालीबंगा से प्राप्त हल से अंकित रेखाएँ भी प्राप्त हुई हैं जो यह सिद्ध करती हैं कि यहाँ का मानव कृषि कार्य भी करता था। इसकी पुष्टि बैल व अन्य पालतू पशुओं की मूर्तियों से भी होती हैं। बैल व बारहसिंघ की अस्थियों भी प्राप्त हुई हैं। बैलगाड़ी के खिलौने भी मिले हैं। === खिलौने === लकड़ी,धातु व मिट्टी आदि के खिलौने भी मोहनजोदाड़ो व हड़प्पा की भाँति यहाँ से प्राप्त हुए हैं जो बच्चों के मनोरंजन के प्रति आकर्षण प्रकट करते हैं। === धर्म संबंधी अवशेष === मोहजोदड़ो व हड़प्पा की भाँति कालीबंगा से मातृदेवी की मूर्ति नहीं मिली है। इसके स्थान पर आयाताकार वर्तुलाकार व अंडाकार अग्निवेदियाँ तथा बैल, बारहसिंघे की हड्डियाँ यह प्रकट करती है कि यहाँ का मानव यज्ञ में पशु-बली भी देता था। === दुर्ग (किला) === सिंधु घाटी सभ्यता के अन्य केन्द्रो से भिन्न कालीबंगा में एक विशाल दुर्ग के अवशेष भी मिले हैं जो यहाँ के मानव द्वारा अपनाए गए सुरक्षात्मक उपायों का प्रमाण है। उपर्युक्त अवशेषों के स्रोतों के रूप में कालीबंगा व [[सिंधु घाटी सभ्यता|सिंधु-घाटी सभ्यता]] में अपना विशिष्ट स्थान है। कुछ पुरातत्वेत्ता तो सरस्वती तट पर बसे होने के कारण कालीबंगा सभ्यता को 'सरस्वती घाटी सभ्यता' कहना अधिक उपयुक्त समझते हैं क्योंकि यहाँ का मानव प्रागैतिहासिक काल में हड़प्पा सभ्यता से भी कई दृष्टि से उन्नत था। खेती करने का ज्ञान होना, दुर्ग बना कर सुरक्षा करना, यज्ञ करना आदि इसी उन्नत दशा के सूचक हैं। वस्तुत: कालीबंगा का प्रागैतिहासिक सभ्यता एवं संस्कृति के विकास में यथेष्ट योगदान रहा है। दुर्ग के साथ साथ यहां निचले नगर के अवशेष सुनियोजित अवस्था में मिले। == चित्रदीर्घा == सन 1961-69 में [[भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण]] द्वारा की गई खुदाई में निकले ध्वंसावशेष<gallery> |Kalibangan NW corner Bastions |पक्की ईटों से बनी नालियाँ |house blocks on the northern half of the citadel |Kalibangan NW corner Bastions |northern flank of the gateway on the western side of the 'Lower city' looking north west |gateway showing entrance passage , and the guard room looking south east |fortification wall on the western periphery of the 'Lower city' </gallery> == इन्हें भी देखें == * [[हनुमानगढ़ ज़िला]] * [[सिन्धु घाटी सभ्यता]] ==बाहरी कड़ियाँ== * [https://web.archive.org/web/20150219101707/http://www.pressnote.in/profile---rajasthan_95157.html कालीबंगा का सांस्कृतिक महत्व] (प्रेसनोट) * [https://web.archive.org/web/20190428105557/https://hindi.nativeplanet.com/travel-guide/ancient-site-kalibangan-002565.html इस प्राचीन स्थल पर कभी लगता था पत्थर की चूड़ियों का बाजार] * [https://www.jankariweb.in/2022/12/kali-banga-kahan-sthit-hai.html कालीबंगा कहाँ पर स्थित है और किस नदी के पास स्थित है पूरी जानकारी] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20221209023416/https://www.jankariweb.in/2022/12/kali-banga-kahan-sthit-hai.html |date=9 दिसंबर 2022 }} == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:राजस्थान का इतिहास]] [[श्रेणी:सिन्धु घाटी सभ्यता पुरातत्व स्थल]] [[श्रेणी:सिन्धु घाटी सभ्यता पूर्व स्थल]] [[श्रेणी:हनुमानगढ़ ज़िला]] [[श्रेणी:राजस्थान में पुरातत्व स्थल]] [[श्रेणी:सिन्धु घाटी सभ्यता]] 8xgow1fmmc9r2m470r2bwv8rcic51p0 6630280 6630243 2026-10-16T17:40:19Z चाहर धर्मेंद्र 703114 [[Special:Contributions/~2026-55543-54|~2026-55543-54]] ([[User talk:~2026-55543-54|वार्ता]]) द्वारा किए गए बदलाव [[Special:Diff/6630243|6630243]] को पूर्ववत किया 6630280 wikitext text/x-wiki {{Infobox ancient site |name = कालीबंगा |alternate_name = |image = Westernmound.jpg |alt = |caption = कालीबंगा की पश्चिमी ढेरी, जिसे "दुर्ग" टीला कहा जाता है |map_type = India Rajasthan |map_alt = |map_size = 270 |relief =yes |coordinates = {{Coord|29|28|27|N|74|7|49|E|type:landmark_region:IN|display=inline,title}} |location = [[राजस्थान]], [[भारत]] |region = [[थर मरुभूमि]] |type = बस्ती |part_of = |length = |width = |area = |height = |builder = |material = |built = |abandoned = २०वीं या १९वीं शताब्दी ईसापूर्व |epochs = [[:en:Periodization of the Indus Valley Civilization|हड़प्पा १ से हड़प्पा ३सी]] |cultures = [[सिन्धु घाटी सभ्यता]] |dependency_of = |occupants = |event = |excavations = |archaeologists = |condition = |ownership = |management = |public_access = |website = <!-- {{URL|example.com}} --> |notes = यहां पर खेती के प्रमाण मिले है तथा लकड़ी की नालियों के साक्ष्य प्राप्त हुए है }} [[चित्र:Kalibanga.jpg|thumb|right|280px|कालीबंगा के अवशेष]] '''कालीबंगा''' [[राजस्थान]] के [[हनुमानगढ़ ज़िले]] का एक प्राचीन एवं [[इतिहास|ऐतिहासिक]] स्थल है। यहाँ [[सिंधु घाटी सभ्यता]] के महत्वपूर्ण अवशेष मिले हैं। कालीबंगा एक छोटा नगर था। यहाँ एक [[दुर्ग]] मिला है। प्राचीन द्रषद्वती और सरस्वती नदी घाटी वर्तमान में [[घग्गर नदी]] का क्षेत्र में [[सिंधु घाटी सभ्यता|सैन्धव सभ्यता]] से भी प्राचीन कालीबंगा की सभ्यता पल्लवित और पुष्पित हुई। कालीबंगा 4000 ईसा पूर्व से भी अधिक प्राचीन मानी जाती है। सर्वप्रथम 1952 ई में [[अमलानन्द घोष]] ने इसकी खोज की। बी.के थापर व बी.बी लाल ने 1961-69 में यहाँ उत्खनन का कार्य किया। यहाँ विश्व का सर्वप्रथम जोता हुआ खेत मिला है और 2900 ईसापूर्व तक यहाँ एक विकसित नगर था।<ref>{{cite web | publisher = Encyclopædia Britannica | url = http://www.britannica.com/EBchecked/topic/285248/India | accessdate = 2008-12-31 | last = Calkins | first = PB |author2=Alam M | title = India }}</ref><ref>{{cite book | last = Lal | first = BB | title = Purātattva | publisher = Indian Archaeological Society | year = 2002 | chapter = The Homeland of Indo-European Languages and Culture: Some Thoughts | pages = 1–5}}</ref><ref>{{cite book|title= History of India |first= Herman |last= Kulke |publisher= Routledge |year=2004 |page=25 |url=https://www.google.com/books/edition/A_History_of_India/RoW9GuFJ9GIC?hl=en&gbpv=1&dq=india++history&printsec=frontcover}}</ref> == स्थिति== पुरातात्विक स्थल कालीबंगा, राजस्थान के [[हनुमानगढ़ जिला|हनुमानगढ़ जिले]] में स्थित है। हनुमानगढ़ से कालीबंगा की दूरी 30 किलोमीटर है। बीकानेर या हनुमानगढ़ से आने वालों के लिए [[पीलीबंगा]] से होकर जाना होगा। कालीबंगा, पीलीबंगा से मात्र पांच किलोमीटर दूर है। पीलीबंगा एक छोटा सा कस्बा है। पीलीबंगा में बीकानेर तथा हनुमानगढ़ से सीधी रेलसेवा उपलब्ध है। सड़कमार्ग भी है। == इतिहास == कालीबंगा सिंधु भाषा का शब्द है जो काली+बंगा (काले रंग की चूड़ियां) से बना है। काली का अर्थ काले रंग से तथा बंगा का अर्थ चूड़ीयों से है। ==परिचय== [[चित्र:Kalibangan pre-Harappan structures.jpg|280px|thumb|right|हड़प्पा सभ्यता से भी पहले निर्मित संरचनाएँ]] [[राजस्थान]] के [[हनुमानगढ़]] जिले के दक्षिण-पश्चिम में स्थित कालीबंगा स्थान पर उखनन द्वारा (1961 ई. के मध्य किए गए) 26 फुट ऊँची पश्चिमी थेड़ी (टीले) से प्राप्त अवशेषों से विदित होता है कि लगभग ४५०० वर्ष पूर्व यहाँ सरस्वती नदी के किनारे हड़प्पा कालीन सभ्यता फल-फूल रही थी। कालीबंगा, हनुमानगढ़ जिले में पीलीबंगा के निकट स्थित है। यह स्थान प्राचीन काल की नदी सरस्वती (जो कालांतर में सूख कर लुप्त हो गई थी) के तट पर स्थित था। यह नदी अब घग्घर नदी के रूप में है। सतलज उत्तरी राजस्थान में समाहित होती थी। सूरतगढ़ के निकट नोहर-भादरा क्षेत्र में सरस्वती व दृषद्वती का संगम स्थल था। स्वंय सिंधु नदी अपनी विशालता के कारण वर्षा ॠतु में समुद्र जैसा रूप धारण कर लेती थी जो उसके नामकरण से स्पष्ट है। हमारे देश भारत में "सिंधु सभ्यता" का मूलत: उद्भव विकास एवं प्रसार "सप्तसिन्धव" प्रदेश में हुआ तथा सरस्वती उपत्यका का उसमें विशिष्ट योगदान है। सरस्वती उपत्यका (घाटी) सरस्वती एवं दृषद्वती के मध्य स्थित "ब्रह्मवर्त" का पवित्र प्रदेश था जो मनु के अनुसार "देवनिर्मित" था। धनधान्य से परिपूर्ण इस क्षेत्र में वैदिक ऋचाओं का उद्बोधन भी हुआ। सरस्वती (वर्तमान में घग्घर) नदियों में उत्तम थी तथा गिरि से समुद्र में प्रवेश करती थी। ॠग्वेद (सप्तम मण्डल, 2/95) में कहा गया है-"एकाचतत् सरस्वती नदी नाम शुचिर्यतौ। गिरभ्य: आसमुद्रात।।" सतलज उत्तरी राजस्थान में सरस्वती में समाहित होती थी। सी.एफ. ओल्डन (C.F. OLDEN) ने ऐतिहासिक और भौगोलिक तथ्यों के आधार पर बताया कि घग्घर (पाकिस्तान में हकरा) नदी के घाट पर ॠग्वेद में बहने वाली नदी सरस्वती 'दृषद्वती' थी। तब सतलज व यमुना नदियाँ अपने वर्तमान पाटों में प्रवाहित न होकर घग्घर व हकरा के पाटों में बहती थीं। [[महाभारत]] काल तक सरस्वती लुप्त हो चुकी थी और 13 वीं सदी तक सतलज, व्यास में मिल गई थी। पानी की मात्रा कम होने से सरस्वती रेतीले भाग में सूख गई थी। ओल्डन महोदय के अनुसार सतलज और यमुना के बीच कई छोटी-बड़ी नदियाँ निकलती हैं। इनमें चौतंग, मारकंडा, सरस्वती आदि थी। ये नदियाँ आज भी वर्षा ॠतु में प्रवाहित होती हैं। राजस्थान के निकट ये नदियाँ निकल कर एक बड़ी नदी घग्घर का रूप ले लेती हैं। आगे चलकर यह नदी पाकिस्तान में हकरा, वाहिद, नारा नामों से जानी जाती है। ये नदियाँ आज सूखी हुई हैं - किन्तु इनका मार्ग राजस्थान से लेकर करांची और पूर्व कच्छ की खाड़ी तक देखा जा सकता है। [[वाकणकर]] महाशय के अनुसार सरस्वती नदी के तट पर 2०० से अधिक नगर बसे थे, जो हड़प्पाकालीन हैं। इस कारण इसे 'सिंधुघाटी की सभ्यता' के स्थान पर 'सरस्वती नदी की सभ्यता' कहना चाहिए। मूलत: घग्घर-हकरा ही प्राचीन सरस्वती नदी थी जो सतलज और यमुना के संयुक्त गुजरात तक बहती थी जिसका पाट (चौड़ाई) ब्रह्मपुत्र नदी से बढ़कर 8 कि॰मी॰ था। वाकणकर के अनुसार सरस्वती नदी 2 लाख 5० हजार वर्ष पूर्व नागौर, लूनासर, ओसियाँ, डीडवाना होते हुए लूणी से मिलती थी जहाँ से वह पूर्व में कच्छ का रण में नानूरण जल सरोवर होकर लोथल के निकट संभात की काढ़ी में गिरती थी, किंतु 4०,००० वर्ष पूर्व पहले भूचाल आया जिसके कारण सरस्वती नदी मार्ग परिवर्तन कर घग्घर नदी के मार्ग से होते हुए हनुमानगढ़ और सूरतगढ़ के बहावलपुर क्षेत्र में सिंधु नदी के समानान्तर बहती हुई कच्छ के मैदान में समुद्र से मिल जाती थी। महाभारत काल में कौरव-पाण्डव युद्ध इसी के तट पर लड़ा गया। इसी काल में सरस्वती के विलुप्त होने पर यमुना गंगा में मिलने लगी। == पुरातात्विक सामग्रियाँ == १९२२ ई. में [[राखालदास बनर्जी|राखलदास बनर्जी]] एवं [[दयाराम साहनी]] के नेतृत्व में [[मोहन जोदड़ो|मोहन-जोदड़ो]] एवं [[हड़प्पा]] (अब [[पाकिस्तान]] में लरकाना जिले में स्थित) के उत्खनन द्वारा हड़प्पा या सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेष मिले थे जिनसे ४५०० वर्ष पूर्व की प्राचीन सभ्यता का पता चला था। बाद में इस सभ्यता के लगभग १०० केन्द्रों का पता चला जिनमें राजस्थान का कालीबंगा क्षेत्र अत्यन्त महत्वपूर्ण है।मोहन-जोदड़ो व हड़प्पा के बाद हड़प्पा संस्कृति का कालीबंगा तीसरा बड़ा नगर सिद्ध हुआ है। जिसके एक टीले के उत्खनन द्वारा निम्नांकित अवशेष स्रोत के रूप में मिले हैं जिनकी विशेषताएँ भारतीय सभ्यता के विकास में उनका योगदान स्पष्ट करती हैं - === ताँबे के औजार व मूर्तियाँ === [[काली गंगा (१९९० चलचित्र)|कालीबंगा]] में उत्खन्न से प्राप्त अवशेषों में ताँबे (धातु) से निर्मित औज़ार, हथियार व मूर्तियाँ मिली हैं, जो यह प्रकट करती है कि मानव प्रस्तर युग से ताम्रयुग में प्रवेश कर चुका था। इसमें मिली तांबे की काली चूड़ियों की वजह से ही इसे कालीबंगा कहा गया। ध्यातव्य है कि पंजाबी में 'बंगा' का अर्थ चूड़ी होता है, इसलिए कालीबंगा अर्थात काली चूड़ियाँ। === अंकित मुहरें === [[चित्र:Kalibangan Harappan seals.jpg|right|thumb|280px|कालीबंगा से प्राप्त मुहरें]] कालीबंगा से सिंधु घाटी (हड़प्पा) सभ्यता की मिट्टी पर बनी मुहरें मिली हैं, जिन पर वृषभ व अन्य पशुओं के चित्र व र्तृधव लिपि में अंकित लेख है जिन्हें अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है। वह लिपि दाएँ से बाएँ लिखी जाती थी। === ताँबे या मिट्टी की बनी मूर्तियाँ, पशु-पक्षी व मानव कृतियाँ === यहां से मिली मूर्तियां व अन्य कृतियां जो मोहनजोदाड़ो व हड़प्पा के समान हैं। पशुओं में बैल, बंदर व पक्षियों की मूर्तियाँ मिली हैं जो पशु-पालन, व कृषि में बैल का उपयोग किया जाना प्रकट करता है। === तोलने के बाट === पत्थर से बने तोलने के बाट का उपयोग करना मानव सीख गया था। जिसे तराजू के माध्यम से उपयोग में लाया जाता था। === बर्तन === मिट्टी के विभिन्न प्रकार के छोटे-बड़े बर्तन भी प्राप्त हुए हैं जिन पर चित्रांकन भी किया हुआ है। यह प्रकट करता है कि बर्तन बनाने हेतु 'चारु' का प्रयोग होने लगा था तथा चित्रांकन से कलात्मक प्रवृत्ति व्यक्त करता है। === आभूषण === अनेक प्रकार के स्री व पुरुषों द्वारा प्रयुक्त होने वाले काँच, सीप, शंख, घोंघों आदि से निर्मित आभूषण भी मिलें हैं जैसे कंगन, चूड़ियाँ आदि। === नगर नियोजन === मोहन-जोदड़ो व हड़प्पा की भाँति कालीबंगा में भी सूर्य से तपी हुई ईटों से बने मकान, दरवाज़े, पांच से साढ़े पांच मीटर चौड़ी एवं समकोण पर काटती सड़कें, कुएँ, नालियाँ आदि पूर्व योजना के अनुसार निर्मित हैं जो तत्कालीन मानव की नगर-नियोजन, सफ़ाई-व्यवस्था, पेयजल व्यवस्था आदि पर प्रकाश डालते हैं। मोहनजोदाड़ो के विपरीत कालीबगाँ के घर कच्ची ईंटो के बने थे। === कृषि-कार्य संबंधी अवशेष === कपास की खेती के अवशेष मिले है। साथ ही मिक्षित खेती (गेंहू और चना) के साक्ष्य मिले है। कालीबंगा से प्राप्त हल से अंकित रेखाएँ भी प्राप्त हुई हैं जो यह सिद्ध करती हैं कि यहाँ का मानव कृषि कार्य भी करता था। इसकी पुष्टि बैल व अन्य पालतू पशुओं की मूर्तियों से भी होती हैं। बैल व बारहसिंघ की अस्थियों भी प्राप्त हुई हैं। बैलगाड़ी के खिलौने भी मिले हैं। === खिलौने === लकड़ी,धातु व मिट्टी आदि के खिलौने भी मोहनजोदाड़ो व हड़प्पा की भाँति यहाँ से प्राप्त हुए हैं जो बच्चों के मनोरंजन के प्रति आकर्षण प्रकट करते हैं। === धर्म संबंधी अवशेष === मोहजोदड़ो व हड़प्पा की भाँति कालीबंगा से मातृदेवी की मूर्ति नहीं मिली है। इसके स्थान पर आयाताकार वर्तुलाकार व अंडाकार अग्निवेदियाँ तथा बैल, बारहसिंघे की हड्डियाँ यह प्रकट करती है कि यहाँ का मानव यज्ञ में पशु-बली भी देता था। === दुर्ग (किला) === सिंधु घाटी सभ्यता के अन्य केन्द्रो से भिन्न कालीबंगा में एक विशाल दुर्ग के अवशेष भी मिले हैं जो यहाँ के मानव द्वारा अपनाए गए सुरक्षात्मक उपायों का प्रमाण है। उपर्युक्त अवशेषों के स्रोतों के रूप में कालीबंगा व [[सिंधु घाटी सभ्यता|सिंधु-घाटी सभ्यता]] में अपना विशिष्ट स्थान है। कुछ पुरातत्वेत्ता तो सरस्वती तट पर बसे होने के कारण कालीबंगा सभ्यता को 'सरस्वती घाटी सभ्यता' कहना अधिक उपयुक्त समझते हैं क्योंकि यहाँ का मानव प्रागैतिहासिक काल में हड़प्पा सभ्यता से भी कई दृष्टि से उन्नत था। खेती करने का ज्ञान होना, दुर्ग बना कर सुरक्षा करना, यज्ञ करना आदि इसी उन्नत दशा के सूचक हैं। वस्तुत: कालीबंगा का प्रागैतिहासिक सभ्यता एवं संस्कृति के विकास में यथेष्ट योगदान रहा है। दुर्ग के साथ साथ यहां निचले नगर के अवशेष सुनियोजित अवस्था में मिले। == चित्रदीर्घा == सन 1961-69 में [[भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण]] द्वारा की गई खुदाई में निकले ध्वंसावशेष<gallery> |Kalibangan NW corner Bastions |पक्की ईटों से बनी नालियाँ |house blocks on the northern half of the citadel |Kalibangan NW corner Bastions |northern flank of the gateway on the western side of the 'Lower city' looking north west |gateway showing entrance passage , and the guard room looking south east |fortification wall on the western periphery of the 'Lower city' </gallery> == इन्हें भी देखें == * [[हनुमानगढ़ ज़िला]] * [[सिन्धु घाटी सभ्यता]] ==बाहरी कड़ियाँ== * [https://web.archive.org/web/20150219101707/http://www.pressnote.in/profile---rajasthan_95157.html कालीबंगा का सांस्कृतिक महत्व] (प्रेसनोट) * [https://web.archive.org/web/20190428105557/https://hindi.nativeplanet.com/travel-guide/ancient-site-kalibangan-002565.html इस प्राचीन स्थल पर कभी लगता था पत्थर की चूड़ियों का बाजार] * [https://www.jankariweb.in/2022/12/kali-banga-kahan-sthit-hai.html कालीबंगा कहाँ पर स्थित है और किस नदी के पास स्थित है पूरी जानकारी] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20221209023416/https://www.jankariweb.in/2022/12/kali-banga-kahan-sthit-hai.html |date=9 दिसंबर 2022 }} == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:राजस्थान का इतिहास]] [[श्रेणी:सिन्धु घाटी सभ्यता पुरातत्व स्थल]] [[श्रेणी:सिन्धु घाटी सभ्यता पूर्व स्थल]] [[श्रेणी:हनुमानगढ़ ज़िला]] [[श्रेणी:राजस्थान में पुरातत्व स्थल]] [[श्रेणी:सिन्धु घाटी सभ्यता]] neiod0le5jep9ig83uhjt8bg8z5yvj2 निम्बार्क कोट 0 49744 6630252 6624865 2026-10-16T15:46:14Z Aniruddha025 580663 6630252 wikitext text/x-wiki [[चित्र:निम्बार्क कोट, वृंदावन का मुख्य दरवाजा.jpg|अंगूठाकार|300px|निम्बार्क कोट का मुख्य द्वार]] '''निम्बार्क कोट''' [[उत्तर प्रदेश]] के [[वृन्दावन]] में स्थित [[निम्बार्क सम्प्रदाय]] का एक प्रमुख [[मंदिर]] है। यद्यपि आकार में यह एक सामान्य इमारत जैसा है, लेकिन वृन्दावन की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में इसका एक विशिष्ट स्थान है। 'निम्बार्क कोट' शब्द में 'निम्बार्क' संप्रदाय के मुख्य आचार्य को दर्शाता है, जबकि 'कोट' का अर्थ किला या वह स्थान है जहाँ आचार्य विराजमान हों। यह मंदिर विशेष रूप से 'निम्बार्क जयन्ती' के अवसर पर आयोजित होने वाले एक मासीय समारोह के लिए जाना जाता है, जो यहाँ सन् 1924 से मनाया जा रहा है।<ref>{{Cite web |url=https://archive.org/details/shri-nimbarka-vratotsav-nirnaya-2080/page/n9/mode/1up |title=निम्बार्क पीठ के व्रतोत्सव निर्णय में कार्तिक-मार्गशीष मास |publisher=Archive.org |language=hi}}</ref><ref>{{Cite web |url=https://www.nimbarksocialwelfare.com/index.php/saints/ |title=संत सेक्शन में निम्बार्क कोट का उल्लेख |website=Nimbark Social Welfare |access-date=17 मार्च 2026 |archive-date=27 मई 2025 |archive-url=https://web.archive.org/web/20250527163451/https://www.nimbarksocialwelfare.com/index.php/saints/ |url-status=dead }}</ref> सन् 1923 तक यह उत्सव प्रेम गली स्थित 'उत्सव कुंज' में मनाया जाता था। वर्ष 2025 में इस उत्सव का 182वाँ आयोजन किया गया। इस उत्सव का एक प्रमुख आकर्षण वैष्णव संगीत शैली का 'समाज गायन' है। निम्बार्क सम्प्रदाय, वैष्णव धर्म के चार प्रमुख सम्प्रदायों में से एक है, जिसे 'सनकादिक' या 'कुमार सम्प्रदाय' भी कहा जाता है। वैष्णव वे हैं जो विष्णु या उनके अवतारों (विशेषकर राम और कृष्ण) की अपने इष्ट के रूप में उपासना करते हैं। (अन्य तीन प्रमुख [[वैष्णव सम्प्रदाय]] हैं: श्री सम्प्रदाय, ब्रह्म या गौड़ीय सम्प्रदाय, और रुद्र या विष्णुस्वामी सम्प्रदाय)। ब्रज की परंपरा में निम्बार्क संप्रदाय के तीन प्रमुख आचार्य माने जाते हैं: आद्याचार्य (हंस एवं सनकादिक), प्रवर्तकाचार्य (निम्बार्क) और रसिकोपासनाचार्य (हरिव्यास देवाचार्य)। निम्बार्क संप्रदाय में 12 'द्वारे' (शाखाएँ) हैं, जिनमें से निम्बार्क कोट मंदिर 'स्वयंभूराम देवाचार्य द्वारे' की परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। हरिव्यास देवाचार्य के 12 प्रमुख शिष्यों में स्वयंभूराम देवाचार्य सबसे वरिष्ठ माने जाते हैं। संप्रदाय की मुख्य पीठ राजस्थान के किशनगढ़ स्थित सलेमाबाद (निम्बार्क तीर्थ) में है। स्वयं निम्बार्काचार्य राधा सर्वेश्वर शरण देवाचार्य (श्रीजी महाराज) निम्बार्क कोट तीन बार आए थे। अपने एक प्रवास के दौरान उन्होंने उल्लेख किया था कि उन्होंने पुराना बजाजा के ऋषि बाल्मीकि स्कूल से प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की थी और वे अक्सर निम्बार्क कोट के प्रांगण में खेला करते थे। सुदामा कुटी की स्थापना करने वाले बाबा सुदामा दास जब रामानंदाचार्य जयंती के लिए मधुकरी (भिक्षा) लेने आते थे, तो वे विश्राम के लिए निम्बार्क कोट के जगमोहन में ही रुकते थे। गीता के मर्मज्ञ संत स्वामी रामसुखदास अपने प्रवचनों में उल्लेख किया करते थे कि यदि वे एकादशी के दिन वृंदावन में होते, तो मधुकरी के लिए निम्बार्क कोट ही जाते क्योंकि वहाँ फलाहारी मधुकरी उपलब्ध होती थी। मंदिर प्रशासन के अनुसार, यहाँ गोस्वामी तुलसीदास द्वारा उपयोग किया गया एक ऐतिहासिक लोटा भी संरक्षित है, जिसमें संतों का चरणामृत रखा जाता है, जिसकी श्रद्धालुओं में अपार महिमा है।<ref>{{Cite AV media |url=https://www.facebook.com/groups/surshyamofficial/posts/2281732275629854/ |title=बाबा राजेंद्र दास जी महाराज निम्बार्क कोट में मौजूद तुलसीदास जी के लोटे का प्रसंग |medium=Video |publisher=Facebook}}</ref> वर्तमान निम्बार्काचार्य श्यामा शरण देवाचार्य भी निम्बार्क कोट पधार चुके हैं। 2025 की [[अक्षय तृतीया]] (29 अप्रैल) से 2026 की अक्षय तृतीया (20 अप्रैल) तक निम्बार्क कोट में एक वर्ष का शताब्दी वर्ष महोत्सव मनाया गया। हर महीने एक भागवत कथा हुई, वर्ष भर के दौरान भागवत के 100 मूल पाठ हुए, 50 दिन समाज गायन हुआ, रासलीला हुई, 21 भंडारे हुए, शोभायात्रा निकली, फूल बंगला बना, भगवान के श्रीविग्रह का सर्वांग अभिषेक दर्शन हुआ जिसमें वृंदावन के संतों, महंतों व ब्रजवासियों ने हिस्सा लिया।<ref> निम्बार्क कोट शताब्दी वर्ष समारोह संपन्न:अक्षय तृतीया पर सर्वांग अभिषेक हुआ, फूलबंगले में विराजे राधारमण लाल,एक वर्ष से चल रहा था शताब्दी वर्ष महोत्सव, 20 अप्रैल, 2026 को दैनिक भास्कर न्यूज पोर्टल पर प्रकाशित https://www.bhaskar.com/local/uttar-pradesh/mathura/news/vrindavan-nimbark-kot-shatabdi-mahotsav-sampann-akshay-tritiya-utsav-137745038.html </ref> ''नोट: निम्बार्क कोट नाम का एक अन्य मंदिर अजमेर (राजस्थान) में पृथ्वीराज रोड पर भी स्थित है। वृंदावन के इतिहास में 'हरि' नाम वाले तीन प्रमुख आचार्य हुए हैं, जिन्हें 'हरित्रयी' कहा जाता है—स्वामी हरिदास (बांके बिहारी के प्राकट्यकर्ता), हित हरिवंश (राधाबल्लभ के प्राकट्यकर्ता) और हरिराम व्यास (जुगल किशोर के प्राकट्यकर्ता)।'' ====== दशश्लोकी की प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपि ====== निम्बार्क संप्रदाय के सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथों में से एक दशश्लोकी की प्राचीन हस्तलिखित प्रति निम्बार्क कोट का पांडुलिपि संग्रह में उपलब्ध है। वृंदावन शोध संस्थान से प्रकाशित कमलेश पारीक की पुस्तक दशश्लोकी के पेज-4 पर इसका उल्लेख है कि दशश्लोकी की विक्रम संवत् 1917 की प्रति श्रीजी मंदिर के संग्रहालय में है, पडरौना वाली कुंज और निम्बार्क कोट में भी इसकी प्रतियां मौजूद है। <ref>{{Cite web|url=https://www.nimbarksocialwelfare.com/nimbark-books/Dashashloki-DR-Shimati-Kamlesh-Parik3.pdf|title=दशश्लोकी|last=कमलेश पारीक|first=|website=Vrindavan Research Institute, Vrindavan}}</ref> == ब्रज के साहित्य में निम्बार्क कोट == सन् 1968 में प्रकाशित प्रभुदयाल मीतल की पुस्तक ''ब्रज के धर्म संप्रदायों का इतिहास'' (पृष्ठ 550) में निम्बार्क कोट का उल्लेख करते हुए लिखा गया है: "निम्बार्क कोट—यह देवस्थल वृंदावन की छीपी गली में है। इसका निर्माण आचार्य स्वयंभूराम जी की शिष्य परंपरा के बालगोविंद दास जी ने कराया था। उन्होंने सर्वप्रथम आचार्य पंचायतन की स्थापना वृंदावन में की थी। यहाँ निम्बार्कोत्सव बड़े समारोह पूर्वक होता है।"<ref>{{Cite book |title=ब्रज के धर्म संप्रदायों का इतिहास |author=प्रभुदायल मीतल |year=1968 |page=550 |url=https://ia601509.us.archive.org/13/items/in.ernet.dli.2015.401809/2015.401809.Brij-Ke.pdf}}</ref><ref>{{Cite book |title=ब्रजमंडल परिक्रमा |author=अनुरागी महाराज |year=2009 |pages=278-279}}</ref> इसी पुस्तक के पृष्ठ 539 व 540 पर गोपाल दास, हंसदास और बालगोविंद दास का परिचय दिया गया है: * '''गोपालदास ‘उत्सवी’:''' इनका जन्म संवत 1872 (कुछ स्रोतों में 1868) के आसपास एक गौड़ ब्राह्मण परिवार में हुआ था। चार धाम की यात्रा के बाद वे कामवन के गोपाल मंदिर में रहे और बाद में वृंदावन आ गए। उन्होंने निम्बार्क संप्रदाय के आचार्यों की जयंती मनाना और बड़े स्तर पर रास और भागवत-कथा का आयोजन प्रारंभ किया। उनके शिष्यों में हंसदास और ब्रह्मचारी राधेश्याम प्रमुख थे। संवत 1952 में उनका निधन हुआ। गोपालदास भक्तमाल की कथा अत्यंत सरसता से करते थे। भक्तमाल की कथा की जो वर्तमान शैली है, उसका सूत्रपात इन्होंने ही किया था। * '''हंसदास:''' संवत 1916 में लखनऊ के काकोरी में जन्मे हंसदास, महात्मा गोपालदास के शिष्य थे। वे भागवत के प्रसिद्ध वक्ता थे। सन् 1937 में वृंदावन के निम्बार्क कोट परिसर में उनका देहावसान हुआ।<ref>{{Cite AV media |title=श्री हंसदास जी एवं गोपाली बाई जी का चरित्र - भक्तमाल कथा |url=https://www.youtube.com/watch?v=gmBMH3140kw&t=5s |publisher=YouTube}}</ref> उन्होंने 'सिद्धांत रत्नांजलि', 'कृष्ण सिद्धांत सार', 'राधा रहस्य प्रकाशिका',<ref>{{Cite book |title=राधा रहस्य प्रकाशिका |author=बाबा हंसदास |url=https://archive.org/details/ShriRadhaRahashyaPrakashika}}</ref> 'निम्बार्क प्रभा',<ref>{{Cite book |title=निम्बार्क प्रभा |author=बाबा हंसदास |url=https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.343527/page/n1/mode/2up}}</ref> और 'गोदनावारी लीला' जैसे ग्रंथ लिखे। 'गोदनावारी लीला' निम्बार्क कोट के सालाना महोत्सव में अनिवार्य रूप से प्रदर्शित होती है। उन्होंने केशव काश्मीरी भट्‌ट देवाचार्य का उत्सव भी शुरू किया। * '''बालगोविंददास:''' ये हंसदास के विरक्त शिष्य थे। उन्होंने ही वृंदावन की नाज मंडी में मंदिर बनवाकर आचार्य पंचायतन की प्रतिष्ठा की और निम्बार्क कोट का निर्माण कराया था।<ref>{{Cite book |title=निम्बार्क संप्रदाय और उसके कृष्ण भक्त हिंदी कवि |author=नारायण दत्त शर्मा |year=1964}}</ref> उनके द्वारा कथा-कीर्तन और उत्सव नियमित रूप से किए जाते थे। सन् 1940 में प्रकाशित पुस्तक निम्बार्क माधुरी में बाबा गोपालदास जी और बाबा हंसदास जी महाराज के बारे में कथाएं वर्णित हैं । <ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/shri-nimbarka-madhuri|title=Shree Nimbarka Madhuri|last=Nimbarka Sampradaya}}</ref> सन् 1981 में अवध बिहारी लाल कपूर द्वारा लिखित पुस्तक ''ब्रज के भक्त'' (भाग-2, पृष्ठ 13 व 86) में भी इन संतों का विस्तृत वर्णन मिलता है।<ref>{{Cite book |title=ब्रज के भक्त (भाग-2) |author=अवध बिहारी लाल कपूर |url=https://dn790006.ca.archive.org/0/items/HindiBook-brijKeBhaktaByA.b.l.kapoorpart-2/HindiBook-brijKeBhaktaByA.b.l.kapoorpart-2.pdf}}</ref> सन् 1986 में श्रीजी मंदिर की पत्रिका श्रीसर्वेश्वर के वृंदावनांक (ब्रजबल्लभ शरण और प्रो. गोविंद शर्मा के संपादकत्व में प्रकाशित) के पेज-349-350 पर गोपालदास जी, हंसदास जी और बालगोविंद दास जी की कथा है, फिर पेज-401 पर निम्बार्क कोट मंदिर और पेज-414 पर निम्बार्क जयंती उत्सव का उल्लेख है। 1992 में दिल्ली के अभिनव प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘कृष्ण द लिविंग गॉड ऑफ ब्रज’ (लेखक- डी. आनंद) में पेज-108-109 पर ब्रॉडस्प्रेड में मंदिर के गर्भगृह का चित्र विवरण के साथ प्रकाशित हुआ। <ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=EsvSwdUgQYcC&printsec=frontcover&source=gbs_ge_summary_r&cad=0#v=onepage&q&f=false|title=Krishna: The Living God of Braj|last=Anand|first=D.|date=1992|publisher=Abhinav Publications|isbn=978-81-7017-280-2|language=en}}</ref> 2011 में वृंदावन के हरिनाम प्रेस से प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका श्री हरिनाम का 465वां अंक जो जनवरी, 2011 में प्रकाशित हुआ, इसमें निम्बार्क कोट को कवर स्टोरी के रूप में शामिल किया गया और कवर पेज पर मंदिर में विराजमान ठाकुर श्री राधारमण लालजी की तस्वीर प्रकाशित हुई। इस मंदिर की परंपराओं पर अमर उजाला (2014), [[दैनिक जागरण]] (2014) और इंडिया टुडे (2015) में भी लेख प्रकाशित हो चुके हैं।<ref>{{Cite web |title=निम्बार्क संप्रदाय का मूक साक्षी है वृंदावन का निम्बार्क कोट मंदिर |url=http://nimbarkkoat.blogspot.com/2016/05/blog-post.html |publisher=Blogspot Archives}}</ref> 2016 की नोटबंदी के दौरान इस उत्सव पर पड़े प्रभाव को '[[द इंडियन एक्सप्रेस|इंडियन एक्सप्रेस]]' ने भी कवर किया था।<ref>{{Cite news |title=Demonetisation: Donations dry up at temples, dargahs |url=https://indianexpress.com/article/india/india-news-india/demonetisation-uttar-pradesh-donations-dry-up-at-temples-dargahs-anger-over-media-lies-4397392/ |newspaper=The Indian Express |date=2016}}</ref> == मंदिर का विवरण == [[चित्र:राधारमण लालजी.jpg|अंगूठाकार|राधारमण लालजी]] मंदिर के गर्भगृह के मध्य सिंहासन पर श्रीराधारमणलालजी का विग्रह विराजमान है। युगल सरकार के दोनों ओर निम्बार्क आचार्य पंचायतन स्थित हैं। दाहिनी ओर आद्य आचार्य हंस भगवान, उनके मानस पुत्र (सनक, सनंदन, सनातन व सनतकुमार) और शिष्य नारद जी की प्रतिमाएँ हैं। बाईं ओर निम्बार्क भगवान व उनके शिष्य निवासाचार्य प्रतिष्ठित हैं। [[चित्र:निम्बार्क कोट मंदिर का आंगन.jpg|अंगूठाकार|निम्बार्क कोट मंदिर का आंगन]] गर्भगृह के आगे जगमोहन और एक खुला प्रांगण है, जिनका फर्श काले-सफेद संगमरमर का बना है। जगमोहन में मंदिर के संस्थापक बाल गोविंद दास व उनके छोटे भाई हरिदास श्रृंगारी के चित्रपट स्थापित हैं। गर्भगृह के बाहर चरणपादुकाएं बनी हैं, जहाँ गोपालदास और हंसदास के चित्र हैं। मंदिर में कई प्राचीन चित्र भी मौजूद हैं, जिनमें निम्बार्क भगवान का सर्वेश्वर भगवान की आराधना करते हुए रंगीन चित्र विशेष है। गर्भगृह में राधारमण लाल जी के ठीक पीछे दो सौ साल पुरानी चित्र श्रृंखलाएं हैं, जिनमें निम्बार्क भगवान के विभिन्न रूपों का चित्रण है। [[चित्र:निम्बार्क कोट.jpg|अंगूठाकार|निम्बार्क कोट का आंगन]] वास्तुशिल्प की दृष्टि से गर्भगृह में सिंहासन, दीवारें व फर्श संगमरमर के हैं। जगमोहन में इटेलियन टाइल्स का प्रयोग हुआ है। प्रांगण के तीनों ओर बरामदे हैं और राजस्थानी पत्थर के नक्काशीदार खंभे लगे हैं। पश्चिमी ओर एक अतिरिक्त प्रांगण है जहाँ मंदिर का रसोईघर स्थित है। ''विशेष: वृंदावन के तीन प्रमुख मंदिरों में राधारमण लालजी विराजमान हैं—सप्तदेवालयों में से एक राधारमण मंदिर, शाहजी मंदिर, और निम्बार्क कोट।'' == मंदिर में मनाए जाने वाले प्रमुख उत्सव == === श्री निम्बार्क आचार्य वृंद जयंती महोत्सव === यह मंदिर का सबसे बड़ा वार्षिक उत्सव है, जो कार्तिक कृष्ण पंचमी से मार्गशीर्ष (अगहन) कृष्ण पंचमी तक पूरे एक महीने चलता है। इस दौरान संप्रदाय के कई प्रमुख आचार्यों की जयंती मनाई जाती है: बालगोविंद दास की जयंती (कार्तिक कृष्ण पंचमी), महावाणीकार हरिव्यास देवाचार्य जयंती (कार्तिक कृष्ण द्वादशी), स्वयंभूराम देवाचार्य जयंती ([[कार्तिक शुक्ल अष्टमी]]), हंस भगवान व सनकादिक भगवान जयंती ([[अक्षय नवमी]]), माधव भट्‌टाचार्य जयंती (देवउठनी एकादशी), और निम्बार्क भगवान की जयंती (पूर्णिमा)। इस उत्सव में दीपावली, अन्नकूट और गोपाष्टमी जैसे पर्व भी शामिल होते हैं। प्रतिदिन शाम को आचार्यों की चरित्र कथा होती है, समाज गायन किया जाता है और नित्य रासलीलाएं आयोजित होती हैं। पूर्णिमा के दिन निम्बार्क भगवान का पंचामृत अभिषेक होता है और एक विशाल शोभायात्रा निकाली जाती है। हर दिन मंदिर के जगमोहन में एक सिंहासन पर गोपालदास के सेव्य गोपालजी (जिन्हें महंतजी पुकारा जाता है) और निम्बार्क भगवान के चित्रपट विराजमान होते हैं。<ref>{{Cite web |url=https://vrindavantoday.in/nimbark-temples-of-chhipi-gali-nimbark-kot-ajab-manohar-lal/ |title=छीपी गली का निम्बार्क कोट मंदिर |website=Vrindavan Today}}</ref> समाज गायन में 'चलसखी', 'सहज सुख सजनी', 'हेली' जैसे पद गाए जाते हैं और अंत में "सेवों श्री राधारमण उदार" तथा "जय जय श्री राधारमण विराजैं" का गायन होता है। रासलीला में सबसे विशेष 'गोदनावारी लीला' है। भंडारे में द्वादशी को बूंदी, नवमी को मोहनथार, एकादशी को समा की खीर और निम्बार्क भगवान के छठी उत्सव में लड्डू का भोग लगता है। भंडारे की विशेष 'गड्‌ड सब्जी' (मिली-जुली) और लड्डू स्थानीय स्तर पर काफी प्रसिद्ध हैं।<ref>{{Cite book |title=IAVRI Bulletin, Issue 1-12 |publisher=International Association of the Vrindavan Research Institute |year=1975}}</ref> === कार्तिक उत्सव की रासलीलाओं का क्रम === * कार्तिक कृष्ण द्वादशी (धनतेरस): वंशी चोरी लीला * कार्तिक कृष्ण चौदस: केवट लीला * कार्तिक अमावस (दीपावली): चौसर लीला<ref>{{Cite AV media |title=निम्बार्क कोट में दीपावली को होने वाली चौसर लीला |url=https://www.youtube.com/watch?v=ZOQ3fmJZlBE |publisher=YouTube}}</ref> * कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा: मूदरी चोरी लीला * कार्तिक शुक्ल द्वितीया: पनघट लीला * कार्तिक शुक्ल तृतीया: ब्रह्मचारी लीला * [[कार्तिक शुक्ल चतुर्थी]]: विदुषी लीला * कार्तिक शुक्ल पंचमी: शंकर लीला * कार्तिक शुक्ल छठी: पांडे लीला * [[कार्तिक शुक्ल सप्तमी]]: राधा प्राकटय लीला * कार्तिक शुक्ल अष्टमी (गोपाष्टमी): गोचारण लीला * कार्तिक शुक्ल नवमी (अक्षय नवमी): जोगन लीला * कार्तिक शुक्ल दशमी: श्याम सगाई लीला * कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी): वरुण लीला * कार्तिक शुक्ल द्वादशी: मान लीला * कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी: माखन चोरी लीला * कार्तिक शुक्ल चर्तुदशी: गोदनावारी लीला * कार्तिक पूर्णिमा: सहज सुख के साथ केवल स्वरूप दर्शन * अग्रहायण कृष्ण प्रतिपदा: शोभायात्रा * अग्रहायण कृष्ण द्वितीया: राजदान लीला किसी वर्ष तिथि बढ़ने पर चंद खिलौना, मणि खंभ और सुदामा लीला भी की जाती हैं। पिछले 30 वर्ष से स्वामी अमीचंद शर्मा की मंडली रासलीला करती है। अतीत में दामोदरजी, उदय राम, कन्हैयालाल, शिवदयाल-गिर्राज की मंडलियों ने भी यहाँ रासलीलाएं की हैं।<ref>{{Cite web |title=Nimbarka Acharya-Vrinda Jayanti Mahotsava |url=https://a108.net/blogs/entry/1690-nimbarka-acharya-vrinda-jayanti-mahotsava-to-commence-from-monday/ |publisher=A108.net International Vaishnavas Portal |access-date=17 मार्च 2026 |archive-date=14 अप्रैल 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20210414040304/https://www.a108.net/blogs/entry/1690-nimbarka-acharya-vrinda-jayanti-mahotsava-to-commence-from-monday/ |url-status=dead }}</ref> === भंडारे में कीर्तन व जयकारे === बड़े भंडारे के दिन जब ठाकुरजी को भोग लगता है तब समाजी मंदिर में भोग के पद गाते हैं (जैसे 'भोजन कुंज में आए दोउ')। पंगत बैठने और परोसगारी के दौरान साधु-संतों द्वारा निम्नलिखित कीर्तन किए जाते हैं: <blockquote> सीता राम सीता राम सीता राम जय सियावर राम। राधे श्याम राधे श्याम राधे श्याम जय श्यामा श्याम।<br> सिया हरिनारायण गोविंदे, भज रामा कृष्ण गोविंदे। बोलो संतो हरि हरि, मुख पर मुरली अधर धरी।<br> गोविंद गोविंद गाओगे, प्रेम पदारथ पाओगे। गोविंद नाम बिसारोगे, जीती बाजी हारोगे।<br> राम राम भज बारंबारा, चक्र सुदर्शन है रखवारा।<br> जय जय गोपी जय जय ग्वाल, जय जय सदा बिहारी लाल। गले में तुलसी, मुख में राम, हृदय विराजत शालिगराम। </blockquote> जब पंगत पर पूर्ण भोजन आ जाता है, तब एक विस्तृत जयकारा लगाया जाता है: <blockquote> राम कृष्णदेव की जय, राधासर्वेश्वर की जय, राधामाधव की जय, राधा रमण लालजी की जय, आनंद मनोहर की जय, रूप मनोहर की जय, वृंदावनचंद्र की जय, गोवर्धन चंद्र की जय, गोविंद देव की जय, मदनमोहन की जय, गोपीनाथ की जय, गोकुल चंद्रमा की जय, बांके बिहारी लाल की जय, वृंदावन बिहारी लाल की जय, राधाबल्लभ लाल की जय, जुगल किशोर की जय, रसिक बिहारी की जय, बिहारी बिहारिन की जय, कुंज बिहारी लाल की जय, गिरिराज धरण की जय, राधा श्याम सुंदर की जय, राधा दामोदर की जय, लाड़ली लाल की जय, रास बिहारी लाल की जय, यशोदा नंदन की जय, नंद नंदन की जय, नंदगांव बरसाना की जय, विलासगढ़ की जय, नीम गांव की जय, मानसी गंगा की जय, वृंदावन धाम की जय, मधुपुरी अवधपुरी की जय, काशी प्रयाग की जय, गंगा-जमुना की जय, चारों धाम की जय, चार संप्रदाय की जय, हंस भगवान की जय, सनकादिक भगवान की जय, नारद भगवान की जय, निम्बार्क भगवान की जय, निवासाचार्य की जय, द्वादश आचार्यन की जय (विश्वाचार्य, पुरुषोत्तामाचार्य, विलासाचार्य, स्वरूपाचार्य, माधवाचार्य, बलभद्राचार्य, पद्माचार्य, श्यामाचार्य, गोपालाचार्य, कृपाचार्य, देवाचार्य), अष्टादश भट्‌ट आचार्यन की जय (सुंदर भट्ट, पद्मनाभ भट्ट, उपेंद्र भट्ट, रामचंद्र भट्ट, वामन भट्ट, कृष्णभट्ट, पद्माकर भट्ट, वाण भट्ट, भूरि भट्ट, माधव भट्ट, श्याम भट्ट, गोपाल भट्ट, बलभद्र भट्ट, गोपीनाथ भट्ट, केशव भट्ट, गांगल भट्ट, केशव कश्मीरी भट्ट, श्रीभट्ट, हरिव्यास देवाचार्य, स्वयंभूराम देवाचार्य, कर्णहर देव, नारायण देव, हरिदेव, श्याम देव, श्याम दामोदर देव, श्रुति देव, सहजराम देव, रामदेव, ज्ञानदेव, वृंदावन देव, रामशरण देव, धर्म देव, सेवादास जी), महंत गोपाल दास जी की जय, बाबा हंसदास जी की जय, बाबा बालगोविंद दास जी की जय, श्रृंगारी जी की जय, मैया जी श्यामप्यारी की जय, भैया बांके बिहारी की जय, अनंत कोटि वैष्णवन की जय, स्थान पुरुष की जय, रसोइया पुजारी की जय, कोठारी भंडारी की जय, सब सती सेवकन की जय, उनके माता पिता की जय, उनके बाल गोपाल की जय, उनके समस्त परिकर की जय, अपने-अपने गुरु गोविंद की जय। </blockquote> अंत में सभी एक साथ दोहा पढ़ते हैं: <blockquote>बोलना हरे...राम कहें सुख ऊपजे, कृष्ण कहें दुःख जाय। महिमा महाप्रसाद की, पावो प्रीति लगाय।</blockquote> पंगत के मध्य और अंत में "जय जय श्री राधे श्याम" का जयकारा लगाया जाता है।<ref>{{Cite AV media |title=पंगत की धुन सुनाते बाबा राजेंद्र दास |url=https://www.youtube.com/watch?v=8lwyyGVEd8I |publisher=YouTube}}</ref> === शोभायात्रा === निम्बार्क कोट की शोभायात्रा विगत 180 वर्षों से निकलने वाली वृंदावन की सबसे पुरानी शोभायात्राओं में से एक है। इसमें मुख्यरूप से दो डोले होते हैं: एक रासबिहारी के स्वरूप का और दूसरा गोपालजी व निम्बार्क भगवान के चित्रपट का। शोभायात्रा में वृंदावन के सभी अखाड़ों के निशान, कीर्तन मंडली, बैंडबाजे और ताशे शामिल होते हैं। यह छीपी गली से शुरू होकर किशोरपुरा, बिहारीजी, अठखंभा, लोई बाजार, निधिवन, केशीघाट, वंशीवट होते हुए सुदामाकुटी पहुँचती है और फिर ज्ञानगूदड़ी, गोपीनाथ बाजार, चुंगी चौराहा और बाजाजा होते हुए वापस मंदिर लौटती है। इस यात्रा में करीब 6 घंटे लगते हैं। === अन्य उत्सव === मंदिर में नारद जयंती, निवासाचार्य जयंती (बसंत पंचमी), केशवकाश्मीरी भट्‌टदेवाचार्य जयंती, हंसदास जी जयंती, होली, रामनवमी, जन्माष्टमी, राधाष्टमी, हरिदास श्रृंगारी जी जयंती, [[गुरु पूर्णिमा]], सावन झूला उत्सव, शरदोत्सव और अक्षय तृतीया का पाटोत्सव भी विशेष रूप से मनाया जाता है। मंदिर में नियमित रूप से गोपाल सहस्रनाम, विष्णु सहस्रनाम, महावाणी, युगल शतक, रामचरित मानस व वाल्मीकि रामायण का पाठ तथा श्रीमद्भागवत व भक्तमाल की कथाएँ आयोजित होती हैं। === वार्षिक उत्सव कलैंडर === {| class="wikitable" |- ! तिथि !! उत्सव |- | चैत्र शुक्ल प्रतिपदा || संवत्सर (नव वर्ष) |- | चैत्र शुक्ल नवमी || रामनवमी |- | वैशाख शुक्ल तृतीया || अक्षय तृतीया (श्री राधारमणलालजी का पाटोत्सव) |- | वैशाख शुक्ल चतुर्दशी || नृसिंह जयंती चतुर्दशी उत्सव |- | ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्थी || श्रीकेशव काश्मीरी भट्‌टाचार्य पाटोत्सव |- | आषाढ़ कृष्ण तीज || श्री हंसदास जी का निकुंज प्राप्ति उत्सव |- | आषाढ़ पूर्णिमा || गुरु पूर्णिमा उत्सव |- | श्रावण शुक्ल तीज || हरियाली तीज |- | श्रावण शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा || झूला उत्सव |- | भाद्रपद कृष्ण अष्टमी || ठाकुरजी का जन्मोत्सव |- | भाद्रपद कृष्ण नवमी || नंदोत्सव |- | भाद्रपद शुक्ल अष्टमी || श्रीजी (राधा) का जन्मोत्सव |- | भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी || अनंत चतुर्दशी (गुरु महाराज जी का निकुंज प्राप्ति उत्सव) |- | आश्विन कृष्ण त्रयोदशी || मैयाजी का निकुंज प्राप्ति उत्सव |- | आश्विन पूर्णिमा || शरद पूर्णिमा |- | कार्तिक कृष्ण पंचमी || गुरु महाराज जयंती, निम्बार्क महोत्सव का शुभारंभ |- | कार्तिक कृष्ण द्वादशी || श्रीहरिव्यास देवाचार्य जयंती (कथा, समाज व रासलीला आरंभ) |- | कार्तिक अमावस्या || दीपावली उत्सव |- | कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा || गोवर्धन पूजा, अन्नकूट |- | कार्तिक शुक्ल अष्टमी || गोपाष्टमी, स्वयंभूराम देवाचार्य जयंती |- | कार्तिक शुक्ल नवमी || अक्षय नवमी (हंस व सनकादिक भगवान जयंती) |- | कार्तिक पूर्णिमा || निम्बार्क भगवान जयंती |- | मार्गशीर्ष (अगहन) कृष्ण प्रतिपदा || निम्बार्क भगवान की शोभायात्रा |- | मार्गशीर्ष कृष्ण पंचमी || छठी उत्सव, वैष्णव साधु सेवा बड़ा भंडारा |- | मार्गशीर्ष शुक्ल द्वादशी || नारद भगवान जयंती |- | पौष पूर्णिमा || श्रृंगारीजी का उत्सव |- | माघ शुक्ल पंचमी || वसंत पंचमी, निवासाचार्य जयंती |- | फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा || होली उत्सव |} == एकादशी की परिपाटी == निम्बार्क कोट में एकादशी व अन्य व्रत निम्बार्की सिद्धांत ‘कपालवेध’ के आधार पर मनाए जाते हैं। निम्बार्क संप्रदाय में व्रत-उपवास के लिए 'उदयव्यापिनी तिथि' को स्वीकार किया गया है, अर्थात् जिस तिथि में सूर्योदय होगा, पूरे दिन वही तिथि मानी जाएगी। दिनभर में 60 घटी (घड़ी) होते हैं। यदि दशमी तिथि मध्य रात्रि के बाद 45 घटी तक रहे और उसके बाद एकादशी आए, तो उस दिन एकादशी का स्पर्श (स्पर्श वेध) माना जाता है। ऐसी स्थिति में एकादशी छोड़कर अगले दिन द्वादशी को व्रत करने का विधान है। रात्रि के अर्धभाग के इस वेध को मानने के कारण ही इसे 'कपालवेध सिद्धांत' कहा जाता है। जब एकादशी पूर्व तिथि (दशमी) से जुड़ी हो तो उसे 'विद्धा' और जब अगली तिथि (द्वादशी) से जुड़ी हो तो उसे 'शुद्धा एकादशी' कहते हैं। आचार्यों का निर्देश विद्धा को त्यागकर शुद्धा एकादशी का व्रत करने का है। विशेष योग होने पर महाद्वादशी का व्रत किया जाता है। नारद पुराण के अनुसार त्रिस्पृशा, उन्मीलनी, वंजुलिनी, पक्षवर्धिनी, जया, विजया, जयंती और अपराजिता महाद्वादशी प्रमुख हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार कुछ विशेष ग्रह स्थितियों में शुद्धा एकादशी छोड़कर भी द्वादशी का ही व्रत किया जाता है। === एकादशी का व्रत विधान === वैष्णवों की सगुणोपासना में एकादशी के दिन ठाकुरजी को फलाहारी अर्पण किया जाता है। इस दिन पूर्ण निराहार रहने की बाध्यता नहीं है, किंतु भोजन में अन्न (गेहूं, मक्का, ज्वार, बाजरा, दाल, चावल) वर्जित है। फलाहार में फल (केला, सेब, अनार आदि) और कंद (आलू, शकरकंद) लिए जा सकते हैं। तरबूज, गाजर, पालक, मटर, गोभी आदि वर्जित हैं। वैष्णवों के लिए प्याज-लहसुन पूर्णतः निषिद्ध है। दूध, दही, पनीर, काजू, बादाम, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा और समा के चावल उपयोग किए जा सकते हैं। साधारण नमक के स्थान पर सेंधा नमक और लाल मिर्च के स्थान पर काली मिर्च का उपयोग होता है। हल्दी, हींग, राई और सरसों का तेल इस दिन वर्जित माने जाते हैं। == मंदिर की स्थिति == [[चित्र:निम्बार्क कोट का दक्षिणी दरवाजा.jpg|अंगूठाकार|निम्बार्क कोट का दक्षिणी दरवाजा]] वृन्दावन में निम्बार्क कोट पहुँचना अत्यंत सुगम है। बनखंडी चौराहे से पूर्व दिशा में जाने वाली गली में दाहिनी ओर पाँचवाँ दरवाजा इसी मंदिर का उत्तरी द्वार है। मंदिर का एक दक्षिणी द्वार पुराना बजाजा में है, जो ऋषि बाल्मीकि स्कूल और सब-स्टेशन नं 3 के ठीक सामने है। नेशनल हाइवे 2 (दिल्ली-आगरा) से छटीकरा मोड होते हुए या यमुना एक्सप्रेसवे से वृंदावन कट के जरिए यहाँ पहुँचा जा सकता है। == मंदिर का पास-पड़ोस और अन्य महत्वपूर्ण देवस्थल == निम्बार्क कोट की लोकेशन वृंदावन में सर्वोत्तम स्थान पर है। यहां से वृंदावन के किसी भी महत्वपूर्ण देवस्थल, मंदिर व दर्शनीय स्थान पर जाने के लिए करीब-करीब एक समान दूरी ही चलनी पड़ती है। वृंदावन में निम्बार्क आचार्य पीठ का प्रमुख स्थान श्रीजी मंदिर जो रेतिया (प्रताप) बाजार में है, इसे बड़ी कुंज और श्रीनिकुंज भी कहते हैं, ये निम्बार्क कोट से 200 मीटर पर है। श्रीजी कुंज से आगे बढ़ें तो शाह बिहारी मंदिर, निधिवन और राधारमण जी मंदिर हैं। यहां से केशी घाट, जुगल किशोर मंदिर और फिर गोपीनाथ जी होते हुए गोपेश्वर महादेव पहुंच सकते हैं। फिर वंशीवट (यहां महाप्रभुजी की बैठक भी है), सुदामा कुटी, खाक चौक होते हुए ज्ञान गूदड़ी जा सकते हैं, यहां टिकारी रानी मंदिर, जगन्नाथ जी मंदिर और तुलसी राम दर्शन स्थल भी है। यहां अखाड़े भी हैं। ज्ञान गूदड़ी से राम बाग होते हुए टटिया स्थान जा सकते हैं। टटिया स्थान से लौटते समय कात्यायनी केश पीठ जा सकते हैं। यहां से रंगजी और फिर ब्रह्म कुंड, लाला बाबू, गोदा विहार और ब्रह्मचारी मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। यहां से गोविंद जी मंदिर (वृंदा देवी मंदिर भी इसी परिसर में है) का दर्शन करते हुए सिंहपौर हनुमान व पत्थरपुरा होते हुए गोविंद घाट के पास मीराबाई मंदिर आ सकते हैं, यहां से बाहर निकलने पर रासमंडल होते हुए श्रृंगारवट, फिर राधा दामोदर मंदिर, फिर राधा श्याम सुंदर मंदिर, सवामन शालिग्राम के दर्शन करके रिक्शा सरीखे वाहन से मदन मोहन जी मंदिर और अष्टसखी मंदिर होते हुए सीधे रमणरेती जा सकते हैं, जहां कृष्ण बलराम (इस्कॉन अंग्रेज) मंदिर है। इस्कॉन के पहले दावानल कुंड की ओर आनंद वृंदावन यानी अखंडानंद आश्रम भी जा सकते हैं, साधुबेला (कदंब छाया), हरि निकुंज व हरिमिलाप भी रास्ते में हैं। वृंदावन की परिक्रमा मार्ग से बाहर प्रेम मंदिर, प्रियाकांत जू मंदिर, चंद्रोदय मंदिर, वैष्णो देवी मंदिर सहित कई नए मंदिर हैं। वहां से वाहन से लौटकर सीधे अटल्ला चुंगी आ सकते हैं, यहां से पागल बाबा मंदिर देख सकते हैं, फिर लौटकर नीम करोली आश्रम है, गोरे दाऊजी, गोलोक धाम जा सकते हैं। यहां से बस अड्‌डे जाने वाली सड़क पर अनेक मंदिर हैं लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है राधा माधव (जयपुर) मंदिर और इसके सामने गली में तराश वाला मंदिर है। आगे बढ़ने पर मुंगेर मंदिर और उसके सामने गुरुकुल मार्ग पर काठियाबाबा आश्रम है। फिर से निम्बार्क कोट के सामने होते हुए बनखंडी महादेव, रसिक बिहारी मंदिर, मोटा गणेश, गंगा मंदिर, सत्यनारायण मंदिर होते हुए बांके बिहारीजी का दर्शन कर सकते हैं। इसी के करीब है राधा बल्लभजी का मंदिर। राधा बल्लभ जी मंदिर से बाहर निकलने सामने भट्‌ट गली में मधु निकुंज है, युगल घाट की तरफ बढ़ने पर यशोदानंदन मंदिर है, फिर टोपीवाली कुंज, यहां से दान-मान गली (रुप-सनातन गौड़िया मठ) होते हुए सेवा कुंज और इमली तला जा सकते हैं। व्यास घेरा में युगल बिहारी मंदिर और सामने प्रेम गली में गोरेलाल जी कुंज होते हुए वापस निम्बार्क कोट आ सकते हैं। वृंदावन में सभी वैष्णव संप्रदायों के अलावा महादेव, देवी, गणेश के मंदिर हैं, सर्वाधिक निम्बार्क संप्रदाय के हैं, फिर गौड़िया, हरिदासी, राधा बल्लभी, रामानंदी, रामानुजी व बल्लभकुल के हैं। == मंदिर की दिनचर्या और स्तुति == दैनिक रूप से मंदिर में तीन प्रमुख आरतियाँ होती हैं—सुबह मंगला आरती, श्रृंगार आरती और शाम को संध्या आरती। दिन में भोग और रात्रि में शयन के समय धूप आरती होती है। आरतियों में विजय घंट बजाए जाते हैं। श्रृंगार आरती में संक्षिप्त और संध्या आरती में संपूर्ण निम्बार्क स्तुति गाई जाती है। आरती पीतल, तांबे या चांदी की हो सकती है, आरती में घी की भीगी हुई रुई की बाती जलाएं। बाती विषम संख्या यानी 3, 5, 7 या अधिक हो सकती हैं। आरती को बांयीं ओर से शुरू करके दायीं ओर घुमाते हैं यानी घड़ी की दिशा में। बाएं हाथ से गरुड़ घंट बजाते रहते हैं और दाएं हाथ से आरती की जाती है। आरती मंत्रोच्चार के साथ होनी चाहिए और गरुण घंटी बजाकर प्रतीकात्मक रूप से माना जाता है कि मंत्रोच्चार हो रहा है। आरती करते समय सबसे पहले ठाकुर जी के चरणों में 4 बार दीपक घुमाते हैं। फिर उनकी नाभि के सामने 2 बार घुमाते हैं। इसके बाद उनके मुखमंडल के सामने 1 बार घुमाते हैं और अंत में प्रभु के संपूर्ण श्रीअंगों पर 7 बार आरती घुमाएं (इस प्रकार कुल 14 बार दीपक घुमाया जाता है)। === मंदिर की संध्याकालीन आरती की स्तुति === <poem> श्री हंस च सनत्कुमारप्रभ्रतीन वीणाधरम नारदं। निम्बादित्यगुरुं च द्वादश गुरुं श्री निवासादिकान॥ वन्दे सुन्दर भट्ट देशिक मुखान्वस्विंदु संख्या युतान। श्री व्यासाद्धरिमध्यगा च परितः सर्वान्गुरुन्सादरम॥ हे निम्बार्क दयानिधे गुणनिधे हे भक्त चिंतामने। हे आचार्य शिरोमने मुनि गणेराम्रग्यपादाम्बुजम॥ हे सृष्टिस्थितिपालनप्रभवन हे नाथ मायाधिपे। हे गोवर्धन कन्दरालयविभो मां पाहि सर्वेश्वर। कस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्षः स्थले कौस्तुभं। नासाग्रे वर मौक्तिकं करतले वेणु करे कंकणं॥ सर्वांगे हरीचन्दनं सुललितं कंठे च मक्तावली। गोपस्त्रीपरिवेष्ठितो विजयते गोपालचूरामणि॥ फुल्लेंदीवर कान्ति मिंदुवदनं वर्हावतंसन प्रियं। श्री वत्सांगमुदार कौस्तुभधरं पीताम्बर सुन्दरम॥ गोपीनां नयनोत्पलार्ची त तनुं गोगोपसंघाव्रतम। गोविन्दं कलवेणु वादनपरं दिव्यांगभुषम भजे॥ हे राधे वृष भानु भूपतनये हे पूर्ण चंद्रानने। हे कांते कमनीय कोकिलरवे ब्रन्दावनाधीश्वरी॥ हे मत्प्रानपरायने च रसिके हे सर्वयुथेश्वरी। आगत्य त्वरितं प्रतप्त मणिशं मां दीनमानन्दय॥ हे राधे वृषभानुभूपतनये सर्वेश्वरी राधिके। हे कृष्णानन पंकजभ्रमरिके कृष्ण प्रिये माधवी॥ हे वृन्दावननागरी गुणगुरो दामोदरप्रेयसी। हे हे श्री मलललितादिक प्रियसखी प्रनाधिके पाहि माम॥ शिन्जनू पुरपादपदमयुगलामा हंसीं गतिं विभ्रतीम। चंचतखंजनमंजुलोचनयुगां पोनोल्लसत्कंधराम॥ शोभित कांचनकंकनद्युति मिलतपानौ चलच्चामरम। कुरवाणाम हिरराधिकोपरि सदा श्री रंगदेवीं भजे॥ श्री रंगादिसुदेविका च ललिता वैशाखिका चम्पिका। चित्र तंग सुखिंदुलेखकपरा चाष्टो प्रधानाप्रिया॥ चान्या सन्ति प्रियात्प्रिया लघुतमानित्ये च नैमित्तके। वन्दे त्वच चरणारविन्दनितरां दासा वयं श्रद्धया॥ स्वभावतोपास्तसमस्तदोष मशेष कल्याण गुनेकराशिम। व्यूहांगिनं ब्रह्म परंवरेण्यम ध्यायेम कृष्णं कमलेक्षण हरिम॥ अंगे तुवामे ब्रिषभानुजा मुदाविराजमानामनुरूपसौभागाम। सखी सह्त्रै परिसेविताम सदा स्मरेम देवीं सकलेष्टकामदाम॥ नान्यागति कृष्णपदारबिन्दात संद्रेश्यते ब्रह्मशिवादिवंदितात। भक्तेछ्योपत्सुचिन्त्त्यविग्रहादचिन्त्यशक्तेरविचिन्त्यशासनात॥ लोकत्रये यान्यसदीहितानी तान्येव सर्वाणि मया कृतानि। तदीय पाकावसरम विसोढुमसक्नुवन देवमुपैमी नाथ॥ वशीकृतिं यान्ति न हीन्द्रियानी बुद्धिर्नशुद्धिम समुपैति तस्मात्। न साधनं मेस्ती तव प्रसादे दयालुभावेन बिना हरे ते॥ न धर्मनिष्ठोस्मी नचात्मवेदी न भक्तित्मा स्त्वच्चारानार्विंदे। अकिन्चनोनन्यगति शरण्यं त्वत्पादमूलं शरणं प्रपद्ये॥ त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव। त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव त्वमेव सर्वं मम देव देव॥ </poem> === कीर्तन === <poem> '''दोहा''' पराभक्ति रति वर्द्धनी, स्याम सब सुख दैनि। रसिक मुकुटमनि राधिके, जै नव नीरज नैन।। '''स्तोत्र''' जयति जय राधा रसिकमनि मुकुट मन-हरनी त्रिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 1 ।। जयति गोरी नव किसोरी सकल सुख सीमा श्रिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 2 ।। जयति रति रस वर्द्धनी अति अद्भुता सदया हिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 3 ।। जयति आनंद कंदनी जगबंदनी बर बदनिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 4 ।। जयति स्यामा अमित नामा वेद बिधि निर्वाचिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 5 ।। जयति रास-बिलासिनी कल कला कोटि प्रकाशिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 6 ।। जयति बिबिध बिहार कवनी रसिक रवनी सुभ धिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 7 ।। जयति चंचल चारु लोचनि दिव्य दुकुला भरनिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 8 ।। जयति प्रेमा प्रेम सीमा कोकिला कल बैनिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 9 ।। जयति कंचन दिव्य अंगी नवल नीरज नैनिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 10 ।। जयति बल्लभ बल्लभा आनंद कलभा तरुनिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 11 ।। जयति नागरि गुन उजागरि प्रान धन मन हरनिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 12 ।। जयति नौतन नित्य लीला नित्य धाम निवासिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 13 ।। जयति गुण माधूर्य भूपा सिद्धि रूपा शक्तिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 14 ।। जयति सुद्ध स्वभाव सीला स्यामला सुकुमारिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 15 ।। जयति जस जग प्रचुर परिकर हरिप्रिया जीवनि जिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 16 ।। '''दोहा''' नव-नव रंगि त्रिभंगि जै, स्याम सुअंगी स्याम। जै राधे जै हरिप्रिये, श्री राधे सुख धाम।। '''स्तोत्र''' जै राधे जै राधे राधे जै राधे जै श्री राधे। जै कृष्ण जै कृष्ण कृष्ण जै कृष्ण जै श्री कृष्ण। 1 । स्याम गोरी नित्य किसोरी प्रीतम जोरी श्री राधे। रसिक रसीलो छैल छबीलो गुन गरबीलो श्री कृष्ण। 2 । रासविहारनि रसबिसतारनि पिय उर धारनि श्री राधे। नव-नव रंगी नवल त्रिभंगी स्याम सुअंगी श्री कृष्ण। 3 । प्रान पियारी रूप उज्यारी अति सुकुंमारी श्री राधे। मैंन मनोहर महा मोदकर सुंदर बर तर श्री कृष्ण। 4 । सोभा सेंनी मोहा मेंनी कोकिल बेंनी श्री राधे। कीरतिवंता कामिनिकंता श्री भगवंता श्री कृष्ण। 5 । चंदा-वदनी कुंदा रदनी सोभा सदनी श्री राधे। परम उदारा प्रभा अपारा अति सुकुंवारा श्री कृष्ण। 6 । हंसागवनी राजति रवनी क्रीड़ा कवनी श्री राधे। रूपा रसाला नैंन बिसाला परम कृपाला श्री कृष्ण। 7 । कंचनबेली रति रस रेली अति अलबेली श्री राधे। सब सुख सागर सब गुन आगर रूप उजागर श्री कृष्ण। 8 । रवनी रम्या तर तर तम्या गुण आगम्या श्री राधे। धाम निवासी प्रभा प्रकासी सहज सुहासी श्री कृष्ण। 9 । शक्तयाह्लादनि अति प्रियवादनि उर उन्मादनि श्री राधे। अंग अंग टोना सरस सलोना सुभग सुठोना श्री कृष्ण। 10 । राधा नामिनि गुण अभिरामिनि हरिप्रिया स्वामिनि श्री राधे। हरे हरे हरि हरे हरे हरि हरे हरे हरि श्री कृष्ण। 11 । अंत में: गोविंद जय जय गोपाल जय जय, राधारमण हरि गोविंद जय जय। </poem> == निम्बार्की हरिव्यासी परंपरा में विशेष == * '''इष्टदेव:''' सर्वेश्वर भगवान श्री कृष्ण * '''कुलदेव:''' रुक्मिणी माता * '''शाखा:''' हंस * '''आचार्य:''' सनकादि * '''मुनि:''' नारद * '''वेद:''' सामवेद * '''आहार:''' हरिनाम * '''अखाड़ा:''' निर्मोही * '''देवता:''' गरुड़ * '''धाम:''' बद्रिकाश्रम * '''माला:''' तुलसी * '''तिलक:''' हरि मंदिर श्याम बिंदी * '''द्वारा:''' स्वयंभूराम (शोभूराम) * '''गोत्र:''' अच्युत * '''गोपाल मंत्र:''' क्लीं कृष्णाय गोविंदाय गोपीजन बल्लभाय स्वाहा: * '''संकीर्तन:''' राधे कृष्ण राधे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण राधे राधे, राधे श्याम राधे श्याम, श्याम श्याम राधे राधे। == मंदिर की उपासना व दीक्षा पद्धति == निम्बार्क संप्रदाय में अकेले श्रीकृष्ण की उपसना नहीं होती बल्कि राधा-कृष्ण की युगल उपासना होती है। निम्बार्क संप्रदाय में पंच संस्कार का विधान है-गोपीचंदन का मस्तक पर ऊर्ध्वपुंड्र तिलक, भुजाओं पर शंख-चक्र, गुरुदेव द्वारा भगवत संबंधी नामकरण, गले में तुलसी की कंठी और मंत्रोपदेश। इन पांच संस्कारों से व्यक्ति में वैष्णवत्व आता है। पहला संस्कार- तिलक लगाने का विधान: गोपीचंदन (यदि भेंट द्वारिका के पास गोपी तालाब से उपलब्ध है तो सर्वोत्तम) को हथेली में जल के साथ घिसकर मस्तक (ललाट) पर ऊर्ध्वपुंड्र तिलक लगाने का विधान है। भस्म से तिलक लगाना निषेध है लेकिन ब्रज रज का इस्तेमाल कर सकते हैं। नासिका के तीन भाग में से दो भाग छोड़कर तीसरे भाग से तिलक शुरू करें और ललाट के अंत में केशों तक ले जाएं, दो रेखाओं के बीच में एक अंगुल से कम स्थान न हो बल्कि कुछ ज्यादा हो और ऊपर की ओर चौड़ाई लगातार बढ़ती जाए। रेखाएं चावल की मोटाई जितनी हों। तिलक की आकृति हरिचरणारविंद के समान हो। निम्बार्की तिलक हरिपादाकृति कहलाता है। इसे हरि मंदिर भी कहते हैं। तिलक के बीच दोनों भोहों के मध्य में श्यामश्री (यदि जगन्नाथपुरी के पास कज्जलगिरी या गोवर्धन की तलहटी में राधाकुंड का श्यामश्री उपलब्ध हो तो उत्तम) से एक छोटा सा गोल श्यामबिंदु (काला बिंदी) लगाएं। शरीर पर द्वादश तिलक लगाने का विधान है, ये स्थान हैं- ललाट, पेट, वक्षस्थल, कंठ, दक्षिणी कांख, दक्षिणी भुजा, दक्षिणी कंधा, बांयीं कांख, बांयी भुजा, बांया कंधा, पीठ व कमर पर। <ref>{{Cite web|url=https://www.nimbarksocialwelfare.com/nimbark-books/BHAGAVANNIMBARKACHARYA-siddhant-upasan-aacharya-parampara.pdf|title=भगवन्निम्बार्काचार्य : सिद्धांत, उपासना एवं आचार्य-परंपरा|last=(डॉ) प्रभाकर शास्त्री|first=प्रो.|date=2002|website=NimbarkSocialWelfare}}</ref> दूसरा संस्कार- भुजाओं पर शंख-चक्र: भगवान के आयुध चिह्नों को भी गोपीचंदन से अंकित करें। दक्षिणी बाहु पर चक्र और वाम बाहु में शंख धारण करना चाहिए। इन दिनों कुछ वैष्णव अपनी बांहों पर शंख-चक्र के स्थायी गोदना गुदवाने लगे हैं। तीसरा संस्कार- कंठी माला: आचार्य (गुरुदेव) से प्राप्त कंठी माला भगवान का दासत्व स्वीकार करने का प्रतीक है। शास्त्रों में वैष्णवों द्वारा कंठी धारण न करना अपराध की श्रेणी में गिना गया है। कंठी को गले से किसी भी परिस्थिति (अशौच व अनाचार अवस्था) में नहीं उतरना चाहिए। निम्बार्क संप्रदाय में युगलोपासना है, इसलिए कंठी को दोहरा (दो लड़ियां) पहनने की परंपरा है। कंठी उपास्य विग्रह के श्रीअंग से स्पर्श करके और गुरुदेव आचार्य से अभिमंत्रित ही पहननी चाहिए। चौथा संस्कार- गुरु द्वारा नामकरण: यदि पूर्व नाम यानी मौजूदा नाम भगवत संबंधी नहीं है तो गुरुदेव नया नामकरण करते हैं। नए नाम में भगवान के विविध नामों के साथ दास, शरण, प्रपन्न (किशोरी जी के अनन्य उपासकों के नामों में दासी, सखी व आली) आदि जोड़े जाते हैं। पांचवां संस्कार- मंत्रोपदेश: गुरुदीक्षा पंच संस्कारों में सर्वोपरि महत्ता का संस्कार है। संप्रदाय में दो मंत्र देने की परंपरा है, पहला शरणागति मंत्र और दूसरा श्रीगोपाल मंत्र। पहला मंत्र नारद पांचरात्र से है, दूसरा अष्टादशाक्षर मंत्र अथर्ववेद के पिप्पलाद शाखा के गोपाल तापिनी उपनिषद का है। <ref>{{Cite book|title=भगवन्निम्बार्काचार्य : सिद्धांत, उपासना एवं आचार्य परंपरा|last=शास्त्री|first=प्रो. (डॉ) प्रभाकर|publisher=रचना प्रकाशन, जयपुर|year=2002|isbn=81-86116-96-6|location=भारत|pages=पेज-142 से 160}}</ref> == वैष्णव समाज गायन == कार्तिक मास में निम्बार्क कोट में हर शाम होने वाला समाज गायन महोत्सव का विशेष आकर्षण है। निम्बार्क संप्रदाय में समाज गायन की परंपरा 15वीं-16वीं सदी से मानी जाती है। निम्बार्क कोट में यह परंपरा लगभग 180 वर्ष पुरानी है। यहाँ इसकी शुरुआत स्वामी गोपाल दास ने 1843 ई. में की थी।<ref>{{Cite web |title=डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की बदौलत हो रहा ब्रज संगीत का सुखद पुनरुद्धार |url=https://www.devdiscourse.com/article/arts/278282-braj-sangeet-witnessing-happy-revival-thanks-to-digital-platforms |website=Devdiscourse}}</ref> समाज गायन प्राचीन भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक वैष्णवी शैली है, जिसमें संत समूह आचार्यों की रचित वाणी पदों का गायन करते हैं। [[चित्र:समाज गायन.jpg|अंगूठाकार|निम्बार्क कोट में समाज गायन]] समाज गायन के समय साधु-संत दो दलों (मुखिया दल और झेला दल) में विभक्त होकर आमने-सामने बैठते हैं। मुखिया दल दाईं ओर और झेला दल बाईं ओर होता है। बीच में ऊँची चौकी पर वाणी (समाज शृंखला) रखी जाती है। गायन की शुरुआत मंगलाचरण (बड़ा मंगल व छोटा मंगल) से होती है, जिसमें सूहा विलावल राग का प्रयोग होता है। इसके उपरांत श्रीभट्ट की रचना 'युगल शतक'<ref>{{Cite book |title=युगल शतक |publisher=श्रीजी कुंज |url=https://archive.org/details/LfFC_yugal-shatak-by-bhatta-devacharya-sarveshvar-press/page/n11/mode/1up}}</ref> और हरिव्यास देवाचार्य की 'महावाणी'<ref>{{Cite book |title=महावाणी |url=https://archive.org/details/MahaVaani}}</ref> के पदों का गायन होता है। बधाइयाँ 'हंसवंश यश सागर'<ref>{{Cite book |title=हंसवंश यश सागर |url=https://www.nimbarksocialwelfare.com/nimbark-books/Shri-Hansha-Vansha-Yasha-Sagar.pdf}}</ref> से गाई जाती हैं। निम्बार्क समाज गायन में सूहा विलावल, यमन कल्याण, देव गंधार, काफी, मल्हार, बिहाग, भूपाली आदि अनेक रागों और चौताल, झप, कहरवा, दादरा आदि तालों का प्रयोग होता है।<ref>{{Cite book |title=मध्ययुगीन वैष्णव संप्रदायों में संगीत |author=विजयेंद्र स्नातक, राकेशबाला सक्सेना |year=1990}}</ref> निम्बार्क कोट घराने की समाज गायन में 'दंडक गायन' (झप ताल में लंबे कवित्त) की एक विशेष शैली है, जो कार्तिक शुक्ल दशमी और एकादशी को गाई जाती है। वृंदावन की समाज गायन परंपरा पुस्तक में डॉ. गंगा प्रिया ने वृंदावन में समाज गायन के विशिष्ट स्थलों में निम्बार्क कोट का जिक्र किया है। इस पुस्तक में वृंदावन के मंदिरों में समाज गायन श्रृंखला का विवरण है। <ref>{{Cite web|url=https://www.exoticindiaart.com/book/details/community-singing-tradition-of-vrindavan-ba2604/|title=वृन्दावन की समाज गायन परंपरा|last=डॉ. गंगा प्रिया|website=वृंदावन शोध संस्थान, वृंदावन}}</ref> === महावाणी की हस्तलिखित प्रति === निम्बार्क कोट में 'महावाणी' की एक हस्तलिखित प्रति उपलब्ध है, जो संवत 1824 में रूपनगर में जोशी मोतीराम द्वारा लिखी गई थी। यह वृंदावन में प्राप्त महावाणी की सबसे पुरानी प्रतियों में से एक है।<ref>{{Cite book |title=हरिव्यास देवाचार्य एवं महावाणी |author=राजेंद्र प्रसाद गौतम |year=1974 |pages=80-81 |url=https://www.google.co.in/books/edition/Śrīharivyāsadevācārya_aura_Mahāvā/ZLNichRlNJEC}}</ref> == निम्बार्क कोट मंदिर की आचार्य परंपरा == # '''हंस भगवान व सनकादिक:''' हंस भगवान निम्बार्क संप्रदाय के आद्य आचार्य हैं, जो विष्णु के अवतार माने जाते हैं। धार्मिक कथाओं के अनुसार, ब्रह्मा के मानस पुत्रों (सनकादिकों-सनक, सनंदन, सनातन व सनत कुमार) को सृष्टि से विरक्त कर भगवत चिंतन की ओर मोड़ने के लिए भगवान ने हंस रूप धारण किया था। # '''नारद भगवान:''' पौराणिक कथाओं में नारद को अनेक युग पुरुषों (ध्रुव, प्रह्लाद, वेदव्यास, निम्बार्काचार्य) का गुरु माना गया है। # '''निम्बार्काचार्य:''' राधाकृष्ण की युगलोपासना के प्रणेता। इनका जन्म मूंगी पैठण (महाराष्ट्र) में हुआ था। इन्होंने ब्रह्मसूत्र पर 'वेदांत पारिजात सौरभ' टीका लिखी और 'द्वैताद्वैत' या 'भेदाभेद' दर्शन प्रस्तुत किया। उनकी रचनाओं में वेदांत कामधेनु, दशश्लोकी, गीता वाक्यार्थ, मंत्र रहस्य षोडशी, प्रपन्न कल्प वल्ली, प्रपत्ति चिंतामणि, कृष्ण स्तवराज, श्रीराधाष्टक, सदाचार प्रकाश और प्रात: स्मरण स्तोत्र शामिल हैं। संप्रदाय की मान्यताओं के अनुसार इन्हें सुदर्शन चक्र का अवतार माना जाता है। अनुयायी ऐसा मानते हैं कि निम्बार्क भगवान सुदर्शन चक्र सहित 8 रुपों में विराजमान हैं-भगवान विष्णु के चार आयुधों में से एक सुदर्शन चक्र के रूप में, कृष्णावतार के चतुर्व्यूह में अनिरुद्ध के रूप में, कृष्ण सखाओं में तोष के रूप में, श्रीराधा की अष्टसखियों में रंगदेवी सखी के रूप में, कलियुग में निम्बार्काचार्य के रूप में, गोलोक के श्रीवृंदावन नित्यनिकुंज में प्रिया-प्रीतम की अंगकांति के रूप में, गोचारण के दौरान ठाकुरजी द्वारा इस्तेमाल की गई लकुटी के रूप में और कृष्ण की गउओं में धूसर गाय के रूप में। # '''निवासाचार्य:''' निम्बार्काचार्य के पट्‌ट शिष्य, जिन्हें पांचजन्य शंख का अवतार माना जाता है। इन्होंने 'वेदांत कौस्तुभ' की रचना की। # '''विश्वाचार्य:''' निवासाचार्य के शिष्य। किंवदंतियों के अनुसार, निवासाचार्य ने इनसे 11 दार्शनिक प्रश्न किए थे, जिनके उत्तर के बाद वे उनके शिष्य बन गए। # '''पुरुषोत्तामाचार्य''' # '''विलासाचार्य''' # '''स्वरूपाचार्य''' # '''माधवाचार्य''' # '''बलभद्राचार्य''' # '''पद्माचार्य''' # '''श्यामाचार्य''' # '''गोपालाचार्य''' # '''कृपाचार्य''' # '''देवाचार्य :''' आपने वेदांत सिद्धांत जाह्नवी की रचना की। # '''सुंदर भट्ट :''' आपने सिद्धांत सेतुका की रचना की। # '''पद्मनाभ भट्ट देवाचार्य''' # '''उपेंद्र भट्ट देवाचार्य''' # '''रामचंद्र भट्ट देवाचार्य''' # '''वामन भट्ट देवाचार्य''' # '''कृष्णभट्ट देवाचार्य''' # '''पद्माकर भट्ट देवाचार्य''' # '''वाण भट्ट देवाचार्य''' # '''भूरि भट्ट देवाचार्य''' # '''माधव भट्ट देवाचार्य''' # '''श्याम भट्ट देवाचार्य''' # '''गोपाल भट्ट देवाचार्य''' # '''बलभद्र भट्ट देवाचार्य''' # '''गोपीनाथ भट्ट देवाचार्य''' # '''केशव भट्ट देवाचार्य''' # '''गांगल भट्ट देवाचार्य''' # '''केशव काश्मीरी भट्‌टाचार्य:''' निम्बार्क परंपरा में 30वें आचार्य। इन्होंने कश्मीर में 'कौस्तुभ प्रभा' और 'क्रम दीपिका' जैसे ग्रंथ लिखे। # '''श्रीभट्ट देवाचार्य:''' 'युगल शतक' के रचयिता। # '''हरिव्यास देवाचार्य:''' 'महावाणी' के प्रणेता। # '''स्वयंभूराम देवाचार्य:''' निम्बार्क कोट के द्वाराचार्य। हरिव्यास देवाचार्य के 12 प्रधान शिष्यों में सबसे वरिष्ठ। # '''कर्णहर देव''' # '''नारायण देव''' # '''हरिदेव''' # '''श्याम देव''' # '''श्याम दामोदर देव''' # '''श्रुति देव''' # '''सहजराम देव''' # '''रामदेव''' # '''ज्ञानदेव''' # '''वृंदावन देव''' # '''रामशरण देव''' # '''धर्म देव''' # '''सेवादास''' # '''बाबा गोपालदास महाराज:''' सेवादास के शिष्य, जिन्होंने 1843 में वृंदावन में निम्बार्क महोत्सव प्रारंभ किया और 'उत्सवी बाबा' के नाम से विख्यात हुए।<ref>{{Cite AV media |title=मेरो वृंदावन चैनल पर निम्बार्क कोट के दर्शन |url=https://www.facebook.com/reel/2063201144459760 |publisher=Facebook}}</ref> # '''बाबा हंसदास:''' गोपालदास के शिष्य। 1895 से 1937 तक निम्बार्क जयंती उत्सव का संचालन किया। # '''बाबा बाल गोविंद दास:''' हंसदास के विरक्त शिष्य, जिन्होंने निम्बार्क कोट का निर्माण कराया। # '''हरिदास श्रृंगारी:''' बालगोविंद दास के छोटे भाई, जो 18 वर्ष की आयु में वृंदावन आ गए थे। राधारमण लालजी की अष्टयाम सेवा में समर्पित रहे। # '''माता श्याम प्यारी:''' हरिदास श्रृंगारी की धर्मपत्नी। 1950 से 1983 तक निम्बार्क कोट का संचालन किया। # '''वृंदावन बिहारी:''' हरिदास श्रृंगारी के पुत्र। वर्तमान में निम्बार्क कोट के सेवायत। === वृंदावन बिहारी === श्री वृंदावन बिहारी शर्मा (आयु 88 वर्ष) वर्तमान में निम्बार्क कोट के व्यवस्थापक और सेवायत हैं। वे 14-15 वर्ष की आयु से ही मंदिर की परंपराओं का संचालन कर रहे हैं। समाज गायन, नित्य रासलीला और हस्तलिखित साहित्य के संरक्षण में उनका विशेष योगदान रहा है। उन्होंने अपने पैतृक मंदिर में एक मासीय निम्बार्क जयंती आयोजन में समाज गायन की प्राचीन शैली और रासलीलाओं के क्रम को व्यवस्थित किया। 1970 के दशक से 2020 में उन्होंने वृंदावन शोध संस्थान में ब्रज की हस्तलिखित पांडुलिपियों (संस्कृत, हिंदी, बंगाली, गुजराती, मराठी, उर्दू) की विस्तृत कैटलॉगिंग का कार्य किया। उनके संपादित व संकलित तीन कैटलॉग प्रकाशित हुए। संस्थान में आए देश-विदेश के अनेक लेखक व शोधकर्ताओं की अकादमिक मदद की। अमेरिका की वाशिंगटन यूनीवर्सिटी और नीदरलैंड के ग्रोनिंगन यूनीवर्सिटी के प्रोफेसर व ब्रिटिश लेखक एलन डब्ल्यू. एंटविस्टल ने अपनी दो पुस्तक ‘वैष्णव तिलक : सेक्टेरियन मार्क्स वॉर्न बाय वरशिपर्स ऑफ विष्णु’ (1982) और ‘ब्रज : सेंटर ऑफ कृष्ण पिलग्रिमेज’ (1987) में निम्बार्क कोट व वृंदावन बिहारी का जिक्र किया है। <ref>{{Cite web|url=https://www.exoticindiaart.com/book/details/vaisnava-tilakas-sectarian-marks-worn-by-worshippers-of-visnu-vishnu-ide441/|title=Vaisnava Tilakas Sectarian marks worn by worshippers of Vishnu|last=Alan W Entwistle|website=Vrindavan Research Institute, Vrindavan}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://archive.org/details/entwistles-braj-center-of-krsna-pilgramage/page/n8/mode/1up|title=Braj Centre of Krsna Pilgramage|last=Alan W. Entwistle|website=Vrindavan Research Institute, Vrindavan}}</ref> 1985 में वृंदावन बिहारी के संपादन में ‘ए कैटलॉग ऑफ संस्कृत मैनुस्क्रिप्ट्स इन वृंदावन रिसर्च इंस्टीट्यूट’ का पार्ट-4 (708 पेज) प्रकाशित हुआ। <ref>{{Cite web|url=https://www.exoticindiaart.com/book/details/catalogue-of-sanskrit-manuscripts-in-vrindaban-research-institute-part-4-old-and-rare-book-ubc069/|title=कैटलॉग ऑफ संस्कृत मैनुस्क्रिप्ट्स इन वृंदावन रिसर्च इंस्टीट्यूट|last=वी.बी. गोस्वामी|website=वृंदावन शोध संस्थान, वृंदावन}}</ref> 1991 में वृंदावन बिहारी ने ए कैटलॉग ऑफ संस्कृत मैनुस्क्रिप्ट्स इन वृंदावन रिसर्च इंस्टीट्यूट के पार्ट-5 (718 पेज) का संपादन किया। <ref>{{Cite web|url=https://www.exoticindiaart.com/book/details/catalogue-of-sanskrit-manuscripts-in-vrindaban-research-institute-part-5-old-and-rare-book-ubc068/|title=कैटलॉग ऑफ संस्कृत मैनुस्क्रिप्ट्स इन वृंदावन रिसर्च इंस्टीट्यूट पार्ट-5|last=V.B. Goswami|website=Vrindavan Research Institute, Vrindavan}}</ref> 2010 में वृंदावन बिहारी ने ए कैटलॉग ऑफ संस्कृत मैनुस्क्रिप्ट्स इन वृंदावन रिसर्च इंस्टीट्यूट के पार्ट-6 (676 पेज) का संकलन किया। <ref>{{Cite web|url=https://www.exoticindiaart.com/book/details/catalogue-of-sanskrit-manuscripts-in-vrindaban-research-institute-part-6-ubc067/|title=कैटलॉग ऑफ संस्कृत मैनुस्क्रिप्ट्स इन वृंदावन रिसर्च इंस्टीट्यूट पार्ट-6|last=Vrindaban Bihari|website=Vrindavan Research Institute, Vrindavan}}</ref> वृंदावन शोध संस्थान द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘भारत भाव रूप श्री कृष्ण’ के खंड-1 में शामिल पांच लेखों में वृंदावन बिहारी का लिखा लेख ‘महामानव के परिप्रेक्ष्य में महाभारत के श्रीकृष्ण’ भी है। इस खंड के अन्य लेखकों में डॉ. विद्यानिवास मिश्र, डॉ. प्रभुदयाल मीतल व डॉ. रघुवीर शास्त्री शामिल हैं, अन्य खंडों के लेखक समूह में डॉ. विजयेंद्र स्नातक, आचार्य डॉ. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी, प्रो. कृष्ण दत्त वाजपेयी, डॉ. प्रभाकर माचवे, डॉ. कैलाश चंद्र भाटिया, डॉ. प्रेम नारायण श्रीवास्तव,  नरेश बंसल, बसंत जामदग्नि जैसे दिग्गजों का नाम उल्लेखनीय है।<ref>{{Cite web|url=https://www.exoticindiaart.com/book/details/bharat-bhava-rupa-shri-krishna-aze003/|title=भारत भाव रूप श्रीकृष्ण|last=भवानी शंकर शुक्ला एवं हरिमोहन मालवीय|website=वृंदावन शोध संस्थान, वृंदावन}}</ref> उन्होंने यमुना के संरक्षण पर शोधपरक पुस्तक ‘यमुना एवं यमुनाष्टक’<ref>{{Cite book |title=यमुना एवं यमुनाष्टक |author=वृंदावन बिहारी |year=1990 |url=https://www.google.co.in/books/edition/Yamun%C4%81_eva%E1%B9%83_yamun%C4%81sh%E1%B9%ADaka/mY8XAAAAIAAJ}}</ref><ref>{{Cite web |title=वृंदावन शोध संस्थान की प्रकाशन सूची |url=https://vribharat.org/hi/prakashan/}}</ref> लिखी है। 2015 में यमुना एवं यमुनाष्टक का पुनर्प्रकाशन हुआ। वृंदावन बिहारी ने अपनी ही पुस्तक का इंग्लिश अनुवाद भी किया जो ‘यमुना : द एटर्नल स्ट्रीम ऑफ यमुना’ (1923) के रूप में उपलब्ध है। <ref>{{Cite web|url=https://www.exoticindiaart.com/book/details/yamuna-eternal-stream-of-culture-ba2605/|title=यमुना एटर्नल स्ट्रीम ऑफ कल्चर|last=Vrindaban Bihari|website=Vrindavan Research Institute, Vrindavan}}</ref> वृंदावन शोध संस्थान से प्रकाशित हरिमोहन मालवीय की पुस्तक ‘रागमाला ऑफ तानसेन’ के अंग्रेजी संस्करण के संपादन भी वृंदावन बिहारी ने किया। <ref>{{Cite web|url=https://www.exoticindiaart.com/book/details/ragamala-of-tansen-published-with-grant-from-ministry-of-culture-government-of-india-bab470/|title=Ragamala of Tansen|last=harimohan Malviya Vrindavan Bihari|website=Vrindavan Research Institute, Vrindavan}}</ref> उनके लिखे गए दो पद आज भी समाज गायन के अंत में गाए जाते हैं: <poem> '''पहला पद:''' सेवों श्री राधा रमण उदार। जिन श्री गोपाल दास जू सेव्यो, गोपाल रूप उर धार। श्री हंस दास जू सेवत मानसी, युगल रूप उर सार। तिनकी कृपा श्री गोविंद बाल जू, दिए सिंहासन बैठार।। '''दूसरा पद:''' जै जै श्री राधा रमण विराजै। निज लावण्य रूप निधि संग लिए, कोटि काम छवि लाजैं। कुंज कुंज मिल बिलसत हुलसत, सेवत सहचरि संग समाजैं। श्री वृंदावन श्री हितु श्री हरिप्रिया, चोज मनोजन काजैं।। </poem> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:मन्दिर]] [[श्रेणी:वृन्दावन के मन्दिर]] [[श्रेणी:निम्बार्क सम्प्रदाय]] [[श्रेणी:हिन्दू मन्दिर]] [[श्रेणी:निम्बार्क संप्रदाय के प्रमुख मंदिर]] 5m8hqgijpg8t30inqt3r1qxeuknaotv भारतीय जीवन बीमा निगम 0 49887 6630269 6595634 2026-10-16T16:42:06Z Vikiraj1 954054 /* */ 6630269 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक कम्पनी | name = भारतीय जीवन बीमा निगम | image = Lic india.jpg | image_caption = भारतीय जीवन बीमा निगम | logo = | logo_size = 200px | logo_caption = '' योगक्षेमं वहाम्यहम् '' | प्रकार = [[सरकार के स्वामित्व वाली निगम | सांविधिक निगम संसद# के एक अधिनियम द्वारा स्थापित- <br> एलआईसी अधिनियम 1956]] <br>> | key_people = R. Doraiswamy <br><small>(अध्यक्ष)</small> | industry = [[वित्तीय सेवाएँ|वित्तीय सेवाएं]] | products = {{unbulleted list |[[जीवन बीमा]], |[[स्वास्थ्य बीमा]], |[[निवेश प्रबंधन]], |[[म्यूचुअल फंड]]}} | revenue = {{decrease}} US$ 88.400 बिलियन (2015) | आपरेटिंग_इनकम = | net_income = {{increase}} US$ 9.257 बिलियन (2015) | assets = {{increase}} {{INRConvert|3111847|c}} (2019) | equity = | owner = [[भारत सरकार]] | num_employees = 111979 (मार्च 2019) <ref name="licindia.in">https://www.licindia.in/getattachment/Bottom-Links/annual-report/LIC-Annual-Report-2015-16-16.pdf.aspx</ref> | subsid = [[आईडीबीआई बैंक]], [[एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस]], एलआईसी पेंशन फंड लिमिटेड, एलआईसी इंटरनेशनल, एलआईसी कार्ड सेवा और एलआईसी म्यूचुअल फंड | फुटनोट्स = | homepage = {{URL|http://www.licindia.in/}} | foundation = 1 सितंबर 1956 | location = [[मुम्बई|मुंबई]], [[भारत]] }} '''भारतीय जीवन बीमा निगम''' या '''एलआईसी''', [[भारत]] की सबसे बड़ी सरकारी जीवन बीमा कंपनी है और देश की सबसे बड़ी निवेशक कंपनी भी है। यह पूरी तरह से [[भारत सरकार]] के स्वामित्व में है। इसकी स्थापना सन् १९५६ में हुई। इसका मुख्यालय [[भारत]] की वित्तीय राजधानी [[मुम्बई|मुंबई]] में है। भारतीय जीवन बीमा निगम के ८ आंचलिक [[कार्यालय]] और १०१ संभागीय [[कार्यालय]] [[भारत]] के विभिन्न भागों में स्थित हैं। इसके लगभग २०४८ कार्यालय देश के कई शहरों में स्थित हैं और इसके १० लाख से ज्यादा एजेंट [[भारत]] भर में फैले हैं। अन्य बीमा कंपनियां जो स्वतंत्रता के पहले गठित हुईं - * भारत बीमा कंपनी - १८९६ * यूनाइटेड कंपनी - १९०६ * नेशनल इंडियन - १९०६ * नेशनल इंश्योरेंस - १९०६ * कोऑपरेटिव अस्युरंस - १९०६ * हिंदुस्तान कोऑपरेटिव - १९०७ * इंडियन मर्केंटाइल * जनरल अस्युरंस * स्वदेशी लाइफ == राष्ट्रीयकरण == भारतीय [[भारतीय संसद|संसद]] ने १९ जून १९५६ को भारतीय जीवन बीमा विधेयक पारित किया। जिसके तहत ०१ सितम्बर १९५६ को भारतीय जीवन बीमा निगम अस्तित्व में आया। भारतीय जीवन बीमा व्यापार का [[राष्ट्रीयकरण]] ''औद्योगिक नीति संकल्प १९५६'' का परिणाम है। == इन्हें भी देखें == * [[बीमा]] * [[जीवन बीमा]] ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} {{प्रमुख भारतीय कंपनियाँ}} [[श्रेणी:भारतीय कंपनियाँ]] 2wxm6hm4llq3p66vynasmw10vg05bcz 6630278 6630269 2026-10-16T17:37:04Z चाहर धर्मेंद्र 703114 सही जानकारी 6630278 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक कम्पनी | name = भारतीय जीवन बीमा निगम | image = Lic india.jpg | image_caption = भारतीय जीवन बीमा निगम | logo = | logo_size = 200px | logo_caption = '' योगक्षेमं वहाम्यहम् '' | प्रकार = [[सरकार के स्वामित्व वाली निगम | सांविधिक निगम संसद# के एक अधिनियम द्वारा स्थापित- <br> एलआईसी अधिनियम 1956]] <br>> | key_people = आर. डोरायस्वामी (अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक)<br> रत्नाकर पटनायक (प्रबंध निदेशक)<br> दिनेश पंत (प्रबंध निदेशक) | industry = [[वित्तीय सेवाएँ|वित्तीय सेवाएं]] | products = {{unbulleted list |[[जीवन बीमा]], |[[स्वास्थ्य बीमा]], |[[निवेश प्रबंधन]], |[[म्यूचुअल फंड]]}} | revenue = {{decrease}} US$ 88.400 बिलियन (2015) | आपरेटिंग_इनकम = | net_income = {{increase}} US$ 9.257 बिलियन (2015) | assets = {{increase}} {{INRConvert|3111847|c}} (2019) | equity = | owner = [[भारत सरकार]] | num_employees = 111979 (मार्च 2019) <ref name="licindia.in">https://www.licindia.in/getattachment/Bottom-Links/annual-report/LIC-Annual-Report-2015-16-16.pdf.aspx</ref> | subsid = [[आईडीबीआई बैंक]], [[एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस]], एलआईसी पेंशन फंड लिमिटेड, एलआईसी इंटरनेशनल, एलआईसी कार्ड सेवा और एलआईसी म्यूचुअल फंड | फुटनोट्स = | homepage = {{URL|http://www.licindia.in/}} | foundation = 1 सितंबर 1956 | location = [[मुम्बई|मुंबई]], [[भारत]] }} '''भारतीय जीवन बीमा निगम''' या '''एलआईसी''', [[भारत]] की सबसे बड़ी सरकारी जीवन बीमा कंपनी है और देश की सबसे बड़ी निवेशक कंपनी भी है। यह पूरी तरह से [[भारत सरकार]] के स्वामित्व में है। इसकी स्थापना सन् १९५६ में हुई। इसका मुख्यालय [[भारत]] की वित्तीय राजधानी [[मुम्बई|मुंबई]] में है। भारतीय जीवन बीमा निगम के ८ आंचलिक [[कार्यालय]] और १०१ संभागीय [[कार्यालय]] [[भारत]] के विभिन्न भागों में स्थित हैं। इसके लगभग २०४८ कार्यालय देश के कई शहरों में स्थित हैं और इसके १० लाख से ज्यादा एजेंट [[भारत]] भर में फैले हैं। अन्य बीमा कंपनियां जो स्वतंत्रता के पहले गठित हुईं - * भारत बीमा कंपनी - १८९६ * यूनाइटेड कंपनी - १९०६ * नेशनल इंडियन - १९०६ * नेशनल इंश्योरेंस - १९०६ * कोऑपरेटिव अस्युरंस - १९०६ * हिंदुस्तान कोऑपरेटिव - १९०७ * इंडियन मर्केंटाइल * जनरल अस्युरंस * स्वदेशी लाइफ == राष्ट्रीयकरण == भारतीय [[भारतीय संसद|संसद]] ने १९ जून १९५६ को भारतीय जीवन बीमा विधेयक पारित किया। जिसके तहत ०१ सितम्बर १९५६ को भारतीय जीवन बीमा निगम अस्तित्व में आया। भारतीय जीवन बीमा व्यापार का [[राष्ट्रीयकरण]] ''औद्योगिक नीति संकल्प १९५६'' का परिणाम है। == इन्हें भी देखें == * [[बीमा]] * [[जीवन बीमा]] ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} {{प्रमुख भारतीय कंपनियाँ}} [[श्रेणी:भारतीय कंपनियाँ]] 92y8fqxdnlel42ywvmxs3bpk8vvapay गिरेसुन 0 50708 6630384 4839214 2026-10-17T08:07:56Z अमर तिवारी 932885 लेख का विस्तार किया 6630384 wikitext text/x-wiki {{Infobox Turkey place | type = municipality | name = गिरेसुन | native_name = Giresun | image = {{multiple image|total_width = 300px|perrow = 1/1|border = infobox|caption_align = center | image1 = Giresun Kalesinden Giresun-Doğu Tarafı.jpg | image2 = Giresun Kalesinden Giresun (Batı Tarafı).jpg | footer = [[गिरेसुन क़िला]] }} | image_logo = Giresun Belediyesi logo.png | coordinates = {{coord|40|54|55|N|38|23|22|E|format=dms|display=inline,title}} | province = Giresun | district = Giresun | leader_party = CHP | leader_name = फ़ुआद कोसे | area_footnotes = | area_total_km2 = | elevation_m = 50 | population_footnotes = <ref name=tuik/> | population_total = 125682 | population_as_of = 2022 | postal_code = 28610 | area_code = 0454 | website = {{URL|https://www.giresun.bel.tr/}} | custom_label1_sec1 = [कोपेन जलवायु वर्गीकरण|जलवायु]] | custom_data1_sec1 = [[आर्द्र अर्ध-कटिबन्धीय जलवायु|Cfa]] }} '''गिरेसुन''' ({{langx|tr|Giresun|italic=no}}) [[काला सागर|काले सागर]] के निकट स्थित [[तुर्की]] का एक शहर है। यह [[गिरेसुन प्रांत]] की राजधानी है।<ref name=il>[https://www.e-icisleri.gov.tr/Anasayfa/MulkiIdariBolumleri.aspx İl Belediyesi] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20150706215822/https://www.e-icisleri.gov.tr/Anasayfa/MulkiIdariBolumleri.aspx |date=2015-07-06 }}, Turkey Civil Administration Departments Inventory. Retrieved 1 March 2023.</ref> 2022 को इसकी जनसंख्या 1,25,682 थी।<ref name=tuik>{{Cite web |title=Address-based population registration system (ADNKS) results dated 31 December 2022, Favorite Reports|url=https://biruni.tuik.gov.tr/medas/?kn=95&locale=en |access-date=13 March 2023|publisher=[[TÜİK]]|language=en|format=XLS}}</ref> == संदर्भ == {{reflist}} 1dmsy2s1uimj637ao0yqmaa3ga4vndx 6630423 6630384 2026-10-17T11:26:23Z अमर तिवारी 932885 /* */ 6630423 wikitext text/x-wiki {{Infobox Turkey place | type = municipality | name = गिरेसुन | native_name = Giresun | image = {{multiple image|total_width = 300px|perrow = 1/1|border = infobox|caption_align = center | image1 = Giresun Kalesinden Giresun-Doğu Tarafı.jpg | image2 = Giresun Kalesinden Giresun (Batı Tarafı).jpg | footer = [[गिरेसुन क़िला]] }} | image_logo = Giresun Belediyesi logo.png | coordinates = {{coord|40|54|55|N|38|23|22|E|format=dms|display=inline}} | province = Giresun | district = Giresun | leader_party = CHP | leader_name = फ़ुआद कोसे | area_footnotes = | area_total_km2 = | elevation_m = 50 | population_footnotes = <ref name=tuik/> | population_total = 125682 | population_as_of = 2022 | postal_code = 28610 | area_code = 0454 | website = {{URL|https://www.giresun.bel.tr/}} | custom_label1_sec1 = [कोपेन जलवायु वर्गीकरण|जलवायु]] | custom_data1_sec1 = [[आर्द्र अर्ध-कटिबन्धीय जलवायु|Cfa]] }} '''गिरेसुन''' ({{langx|tr|Giresun|italic=no}}) [[काला सागर|काले सागर]] के निकट स्थित [[तुर्की]] का एक शहर है। यह [[गिरेसुन प्रांत]] की राजधानी है।<ref name=il>[https://www.e-icisleri.gov.tr/Anasayfa/MulkiIdariBolumleri.aspx İl Belediyesi] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20150706215822/https://www.e-icisleri.gov.tr/Anasayfa/MulkiIdariBolumleri.aspx |date=2015-07-06 }}, Turkey Civil Administration Departments Inventory. Retrieved 1 March 2023.</ref> 2022 को इसकी जनसंख्या 1,25,682 थी।<ref name=tuik>{{Cite web |title=Address-based population registration system (ADNKS) results dated 31 December 2022, Favorite Reports|url=https://biruni.tuik.gov.tr/medas/?kn=95&locale=en |access-date=13 March 2023|publisher=[[TÜİK]]|language=en|format=XLS}}</ref> == संदर्भ == {{reflist}} bgekuseunkjqspkzj9aa7e8txyhcrn5 6630425 6630423 2026-10-17T11:29:13Z अमर तिवारी 932885 /* */ 6630425 wikitext text/x-wiki {{Infobox Turkey place | type = municipality | name = गिरेसुन | native_name = Giresun | image = {{multiple image|total_width = 300px|perrow = 1/1|border = infobox|caption_align = center | image1 = Giresun Kalesinden Giresun-Doğu Tarafı.jpg | image2 = Giresun Kalesinden Giresun (Batı Tarafı).jpg | footer = [[गिरेसुन क़िला]] }} | image_logo = Giresun Belediyesi logo.png | coordinates = {{coord|40|54|55|N|38|23|22|E|format=dms|display=inline}} | province = गिरेसुन | district = गिरेसुन | leader_party = CHP | leader_name = फ़ुआद कोसे | area_footnotes = | area_total_km2 = | elevation_m = 50 | population_footnotes = <ref name=tuik/> | population_total = 125682 | population_as_of = 2022 | postal_code = 28610 | area_code = 0454 | website = {{URL|https://www.giresun.bel.tr/}} | custom_label1_sec1 = [कोपेन जलवायु वर्गीकरण|जलवायु]] | custom_data1_sec1 = [[आर्द्र अर्ध-कटिबन्धीय जलवायु|Cfa]] }} '''गिरेसुन''' ({{langx|tr|Giresun|italic=no}}) [[काला सागर|काले सागर]] के निकट स्थित [[तुर्की]] का एक शहर है। यह [[गिरेसुन प्रांत]] की राजधानी है।<ref name=il>[https://www.e-icisleri.gov.tr/Anasayfa/MulkiIdariBolumleri.aspx İl Belediyesi] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20150706215822/https://www.e-icisleri.gov.tr/Anasayfa/MulkiIdariBolumleri.aspx |date=2015-07-06 }}, Turkey Civil Administration Departments Inventory. Retrieved 1 March 2023.</ref> 2022 को इसकी जनसंख्या 1,25,682 थी।<ref name=tuik>{{Cite web |title=Address-based population registration system (ADNKS) results dated 31 December 2022, Favorite Reports|url=https://biruni.tuik.gov.tr/medas/?kn=95&locale=en |access-date=13 March 2023|publisher=[[TÜİK]]|language=en|format=XLS}}</ref> == संदर्भ == {{reflist}} 7eh261e4tj4y9ljf169ivo1a2lmmmnn कोन्या 0 50725 6630231 6533492 2026-10-16T13:16:00Z अमर तिवारी 932885 6630231 wikitext text/x-wiki {{Infobox settlement | settlement_type = [[महानगर]] | name = कोन्या | native_name = Konya | native_name_lang = tr | image_skyline = {{multiple image|total_width=270px|perrow=1/2/2/2|border=infobox | image1 = Konyaaltincarsi.jpg | alt1 = कोन्या शहर का दृश्य | image2 = Maulana Jelaledin Muhammad Rumi in konya.jpg | alt2 = मेवलाना संग्रहालय | image3 = Selimiye Mosque Konya.jpg | alt3 = सेलिमीये मस्जिद | image4 = Konyatropicalbutterflygarden.jpg | alt4 = कोन्या ट्रॉपिकल बटरफ्लाई गार्डन | image5 = Aziziye Mosque, 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Statistics, Charts and Map}}</ref> | population_total = 2330024 | population_urban = 1433861 | population_density_km2 = auto | population_density_urban_km2 = auto | population_demonym = Konyalı (तुर्की भाषा) | demographics_type2 = सकल घरेलू उत्पाद (GDP) | demographics2_footnotes = <ref>{{Cite web |title=Statistics by Theme > National Accounts > Regional Accounts |url=https://biruni.tuik.gov.tr/ilgosterge/?locale=tr |access-date=11 May 2023 |website=www.turkstat.gov.tr}}</ref> | demographics2_title1 = महानगर पालिका (2021) | demographics2_info1 = 149.229 अरब [[तुर्की लीरा|TRY]]<br />16.616 अरब [[US$]] | demographics2_title2 = प्रति व्यक्ति | demographics2_info2 = 65,928 [[तुर्की लीरा|TRY]]7,341 [[US$]] (2021) | elevation_m = 1016 | pushpin_map = Turkey | pushpin_relief = 1 | pushpin_label_position = right | pushpin_map_caption = तुर्की में कोन्या की स्थिति | coordinates = {{coord|37|52|28|N|32|29|35|E|region:TR|display=inline,title}} | timezone = [[तुर्की का समय|TRT]] | utc_offset = +3 | 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था, जहाँ से सुल्तान अनातोलिया पर शासन करते थे। वर्ष 2024 तक, महानगर प्रांत की कुल जनसंख्या 2,330,024 थी। इनमें से 1,433,861 लोग तीन शहरी जिलों (कराताय, सेलकुक्लू और मेरम) में निवास करते हैं। यह तुर्की का छठा सबसे अधिक आबादी वाला शहर है और अंकारा के बाद मध्य अनातोलिया क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। कोन्या इस्तांबुल, अंकारा और करमन से 'टीसीडीडी हाई-स्पीड ट्रेन' (YHT) सेवा द्वारा जुड़ा हुआ है। स्थानीय हवाई अड्डा (कोन्या हवलीमानी - KYA) [[इस्तांबुल]] से नियमित उड़ानों और इज़मिर से साप्ताहिक उड़ानों के माध्यम से सेवा प्रदान करता है। माना जाता है कि कोन्या का नाम हित्ती अभिलेखों में वर्णित कांस्य युग के स्थान 'इक्कुवानिया' से संबंधित है। शास्त्रीय प्राचीनता और मध्यकाल के दौरान इसे [[ग्रीक]] में 'इकोनियन' (Ἰκόνιον) और लैटिन में 'इकोनियम' कहा जाता था। एक लोक मान्यता के अनुसार, 'इकोनियन' नाम ग्रीक शब्द 'आइकन' (εἰκών) से लिया गया है, जो एक प्राचीन कथा को संदर्भित करता है जिसमें नायक पर्सियस ने "मेडुसा के सिर" की छवि (आइकन) का उपयोग करके यहाँ की मूल आबादी को पराजित किया था। सेल्जुक शासन के दौरान कोन्या को 'दारुलमुल्क' के नाम से भी जाना जाता था। == प्रशासन == कोन्या में प्रथम स्थानीय प्रशासन की स्थापना 1830 में हुई थी और 1876 में इसे नगर पालिका में बदल दिया गया। मार्च 1989 में, यह एक 'महानगरीय नगर पालिका' (Metropolitan Municipality) बना। वर्तमान में कोन्या में तीन केंद्रीय जिला नगर पालिकाएँ (मेरम, सेलचुकलू और कराताय) और एक मुख्य महानगरीय नगर पालिका कार्यरत है। == अर्थव्यवस्था == कोन्या कई औद्योगिक पार्कों का घर है और इसे 'अनातोलियाई टाइगर्स' (आर्थिक रूप से तेजी से बढ़ते शहर) में गिना जाता है। वर्ष 2012 तक कोन्या का निर्यात 130 देशों तक पहुँच गया था। 'बेरा होल्डिंग' (पूर्व में कोम्बासन) जैसे कई बड़े तुर्की औद्योगिक समूहों का मुख्यालय कोन्या में स्थित है। यहाँ कृषि-आधारित उद्योगों के साथ-साथ ऑटोमोटिव कलपुर्जा निर्माण, मशीनरी निर्माण, कृषि उपकरण, कास्टिंग, प्लास्टिक, रसायन, निर्माण सामग्री, कागज, पैकेजिंग, प्रसंस्कृत खाद्य, कपड़ा और चमड़ा उद्योग का व्यापक विकास हुआ है। तुर्की का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा फार्म शहर से 20 मील पूर्व में करापिनार के पास स्थित है। == संस्कृति == [[File:Mevlana Cultural Center, Konya.jpg|thumb|मेवलाना सांस्कृतिक केंद्र, कोन्या]] कोन्या को तुर्की के धार्मिक रूप से अधिक रूढ़िवादी महानगरों में से एक माना जाता है। यह प्रसिद्ध सूफी संत और कवि रूमी (मेवलाना) का अंतिम निवास स्थान था। यहाँ स्थित उनका फिरोज़ा (Turquoise) गुंबद वाला मकबरा शहर का मुख्य पर्यटक आकर्षण है। वर्ष 1273 में रूमी के अनुयायियों ने 'मेवलेवी सूफी सिलसिले' की स्थापना की थी, जिन्हें 'भंवर दरवेश' (Whirling Dervishes) के नाम से जाना जाता है। [[File:Konya - Valilik - panoramio.jpg|thumb|कोन्या - प्रांतीय भवन (Valilik)]] प्रत्येक शनिवार को 'मेवलाना सांस्कृतिक केंद्र' में भंवर दरवेशों का आध्यात्मिक प्रदर्शन (सेमा) होता है। इस्तांबुल जैसे शहरों में होने वाले व्यावसायिक प्रदर्शनों के विपरीत, यहाँ के सत्र पूरी तरह आध्यात्मिक होते हैं।<ref name="a956">{{cite web | title=Small Ruminant Congress | website=kucukbas2014.com | date=25 October 2013 | url=http://kucukbas2014.com/EN/Icerik.aspx?ID=27 | archive-url=https://web.archive.org/web/20141018012849/http://kucukbas2014.com/EN/Icerik.aspx?ID=27 | archive-date=18 October 2014 | url-status=dead | access-date=20 December 2025}}</ref> पुनर्जागरण काल के दौरान, कोन्या में बने मूल्यवान और समृद्ध पैटर्न वाले कालीनों का यूरोप में निर्यात किया जाता था। ये कालीन उस समय धन और प्रतिष्ठा का प्रतीक माने जाते थे और अक्सर तत्कालीन तेल चित्रों (Oil Paintings) में अभिजात वर्ग के वैभव के रूप में चित्रित किए जाते थे। ==जलवायु== कोन्या में [[कोपेन वर्गीकरण]] के तहत ठंडी अर्ध-शुष्क जलवायु (बीएसके) और ट्रेवार्थ वर्गीकरण के तहत समशीतोष्ण महाद्वीपीय (डीसी) जलवायु है।<ref name="l265">{{cite web | title= | url=https://www.hydrol-earth-syst-sci-discuss.net/4/439/2007/hessd-4-439-2007.pdf | access-date=20 December 2025}}</ref> गर्मी के दिनों में दिन का औसत तापमान 30 डिग्री सेल्सियस (86 डिग्री फारेनहाइट) रहता है, हालांकि रातें ठंडी होती हैं। कोन्या में अब तक का सबसे अधिक तापमान 14 अगस्त 2023 को 40.9 डिग्री सेल्सियस (106 डिग्री फारेनहाइट) दर्ज किया गया था, जो 30 जुलाई 2000 के पिछले रिकॉर्ड 40.6 डिग्री सेल्सियस (105 डिग्री फारेनहाइट) के करीब था। सर्दियों में औसत तापमान -4.2 डिग्री सेल्सियस (24 डिग्री फारेनहाइट) रहता है, और अब तक का सबसे कम तापमान 6 फरवरी 1972 को -26.5 डिग्री सेल्सियस (-16 डिग्री फारेनहाइट) दर्ज किया गया था। वर्षा का स्तर कम होता है और यह मुख्य रूप से सर्दियों (ज्यादातर बर्फ के रूप में), वसंत और शरद ऋतु में होती है। {{Weather box |location = Konya (1991–2020, extremes 1929–2023) |metric first = Yes |single line = Yes |Jan record high C = 19.3 |Feb record high C = 23.8 |Mar record high C = 28.9 |Apr record high C = 34.6 |May record high C = 34.4 |Jun record high C = 36.7 |Jul record high C = 40.6 |Aug record high C = 40.9 |Sep record high C = 38.8 |Oct record high C = 32.3 |Nov record high C = 25.4 |Dec record high C = 21.8 |year record high C = |Jan high C = 4.6 |Feb high C = 6.9 |Mar high C = 12.5 |Apr high C = 17.6 |May high C = 22.8 |Jun high C = 27.4 |Jul high C = 31.0 |Aug high C = 30.9 |Sep high C = 26.7 |Oct high C = 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Konya | format = CSV | publisher = [[NCEI|National Centers for Environmental Information]] | access-date = 2 August 2023}}</ref> }} == सन्दर्भ == {{reflist}} {{तुर्की के प्रान्त}} [[श्रेणी:तुर्की के प्रान्त]] he7396len3zgs9v0clygts8i5bqzq1n 6630232 6630231 2026-10-16T13:16:35Z अमर तिवारी 932885 6630232 wikitext text/x-wiki {{Infobox settlement | settlement_type = [[महानगर]] | name = कोन्या | native_name = Konya | native_name_lang = tr | image_skyline = {{multiple image|total_width=270px|perrow=1/2/2/2|border=infobox | image1 = Konyaaltincarsi.jpg | alt1 = कोन्या शहर का दृश्य | image2 = Maulana Jelaledin Muhammad Rumi in konya.jpg | alt2 = मेवलाना संग्रहालय | image3 = Selimiye Mosque Konya.jpg | alt3 = सेलिमीये मस्जिद | image4 = Konyatropicalbutterflygarden.jpg | alt4 = कोन्या ट्रॉपिकल बटरफ्लाई गार्डन | image5 = Aziziye Mosque, Konya (cropped).JPG | alt5 = अजीज़ीये मस्जिद }} | image_alt = कोन्या के विभिन्न दृश्य | image_caption = '''ऊपर से घड़ी की दिशा में''': कोन्या शहर का दृश्य; [[सेलिमीये मस्जिद, कोन्या|सेलिमीये मस्जिद]]; [[अजीज़ीये मस्जिद, कोन्या|अजीज़ीये मस्जिद]]; [[कोन्या ट्रॉपिकल बटरफ्लाई गार्डन]]; और [[मेवलाना संग्रहालय]] | imagesize = 250px | image_blank_emblem = Konya city emblem.png | blank_emblem_type = कोन्या महानगर पालिका का प्रतीक | subdivision_type = देश | subdivision_name = {{flag|Turkey}} | subdivision_type1 = [[तुर्की के क्षेत्र|क्षेत्र]] | subdivision_name1 = [[मध्य अनातोलिया क्षेत्र|मध्य अनातोलिया]] | subdivision_type2 = [[तुर्की के प्रांत|प्रांत]] | subdivision_name2 = [[कोन्या प्रांत|कोन्या]] | area_total_km2 = 38873 | area_urban_km2 = 6600 | area_metro_km2 = 6600 | population_as_of = 2024 (TÜIK आधिकारिक डेटा) | population_footnotes = <ref>{{Cite web|url=https://www.citypopulation.de/en/turkey/admin/|title = Turkey: Administrative Division (Provinces and Districts) - Population Statistics, Charts and Map}}</ref> | population_total = 2330024 | population_urban = 1433861 | population_density_km2 = auto | population_density_urban_km2 = auto | population_demonym = Konyalı (तुर्की भाषा) | demographics_type2 = सकल घरेलू उत्पाद (GDP) | demographics2_footnotes = <ref>{{Cite web |title=Statistics by Theme > National Accounts > Regional Accounts |url=https://biruni.tuik.gov.tr/ilgosterge/?locale=tr |access-date=11 May 2023 |website=www.turkstat.gov.tr}}</ref> | demographics2_title1 = महानगर पालिका (2021) | demographics2_info1 = 149.229 अरब [[तुर्की लीरा|TRY]]<br />16.616 अरब [[US$]] | demographics2_title2 = प्रति व्यक्ति | demographics2_info2 = 65,928 [[तुर्की लीरा|TRY]]7,341 [[US$]] (2021) | elevation_m = 1016 | pushpin_map = Turkey | pushpin_relief = 1 | pushpin_label_position = right | pushpin_map_caption = तुर्की में कोन्या की स्थिति | coordinates = {{coord|37|52|28|N|32|29|35|E|region:TR|display=inline,title}} | timezone = [[तुर्की का समय|TRT]] | utc_offset = +3 | postal_code_type = [[डाक सूचक संख्या|पिन कोड]] | postal_code = 42XXX | blank_info = 42 | blank_name = [[तुर्की कार नंबर प्लेट|लाइसेंस प्लेट]] | area_code = (+90) 332 | leader_title = [[महापौर]] | leader_name = उगुर इब्राहिम अल्ताय ([[न्याय और विकास पार्टी (तुर्की)|AKP]]) | website = {{URL|http://www.konya.bel.tr/}} }} '''कोन्या''' ({{langx|tr|Konya|italic=no}}) [[तुर्की]]<ref name="o144">{{cite web | title=Turkey: Administrative Division (Provinces and Districts) | website=Population Statistics, Charts and Map | date=31 December 2023 | url=https://www.citypopulation.de/en/turkey/admin/ | access-date=20 December 2025}}</ref> मध्य तुर्की का एक प्रमुख शहर है, जो मध्य अनातोलियाई पठार के दक्षिण-पश्चिमी किनारे पर स्थित है और कोन्या प्रांत की राजधानी है। प्राचीन काल और सेल्जुक साम्राज्य के समय में इसे 'इकोनियम' के रूप में जाना जाता था। 19वीं सदी के अंग्रेजी विवरणों में आमतौर पर इसका नाम 'कोनिया' या 'कोनियाह' लिखा मिलता है। मध्यकाल के अंत में, कोन्या सेल्जुक तुर्कों की 'रम सल्तनत' की राजधानी था, जहाँ से सुल्तान अनातोलिया पर शासन करते थे। वर्ष 2024 तक, महानगर प्रांत की कुल जनसंख्या 2,330,024 थी। इनमें से 1,433,861 लोग तीन शहरी जिलों (कराताय, सेलकुक्लू और मेरम) में निवास करते हैं। यह तुर्की का छठा सबसे अधिक आबादी वाला शहर है और अंकारा के बाद मध्य अनातोलिया क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। कोन्या इस्तांबुल, अंकारा और करमन से 'टीसीडीडी हाई-स्पीड ट्रेन' (YHT) सेवा द्वारा जुड़ा हुआ है। स्थानीय हवाई अड्डा (कोन्या हवलीमानी - KYA) [[इस्तांबुल]] से नियमित उड़ानों और इज़मिर से साप्ताहिक उड़ानों के माध्यम से सेवा प्रदान करता है। माना जाता है कि कोन्या का नाम हित्ती अभिलेखों में वर्णित कांस्य युग के स्थान 'इक्कुवानिया' से संबंधित है। शास्त्रीय प्राचीनता और मध्यकाल के दौरान इसे [[ग्रीक]] में 'इकोनियन' (Ἰκόνιον) और लैटिन में 'इकोनियम' कहा जाता था। एक लोक मान्यता के अनुसार, 'इकोनियन' नाम ग्रीक शब्द 'आइकन' (εἰκών) से लिया गया है, जो एक प्राचीन कथा को संदर्भित करता है जिसमें नायक पर्सियस ने "मेडुसा के सिर" की छवि (आइकन) का उपयोग करके यहाँ की मूल आबादी को पराजित किया था। सेल्जुक शासन के दौरान कोन्या को 'दारुलमुल्क' के नाम से भी जाना जाता था। == प्रशासन == कोन्या में प्रथम स्थानीय प्रशासन की स्थापना 1830 में हुई थी और 1876 में इसे नगर पालिका में बदल दिया गया। मार्च 1989 में, यह एक 'महानगरीय नगर पालिका' (Metropolitan Municipality) बना। वर्तमान में कोन्या में तीन केंद्रीय जिला नगर पालिकाएँ (मेरम, सेलचुकलू और कराताय) और एक मुख्य महानगरीय नगर पालिका कार्यरत है। == अर्थव्यवस्था == कोन्या कई औद्योगिक पार्कों का घर है और इसे 'अनातोलियाई टाइगर्स' (आर्थिक रूप से तेजी से बढ़ते शहर) में गिना जाता है। वर्ष 2012 तक कोन्या का निर्यात 130 देशों तक पहुँच गया था। 'बेरा होल्डिंग' (पूर्व में कोम्बासन) जैसे कई बड़े तुर्की औद्योगिक समूहों का मुख्यालय कोन्या में स्थित है। यहाँ कृषि-आधारित उद्योगों के साथ-साथ ऑटोमोटिव कलपुर्जा निर्माण, मशीनरी निर्माण, कृषि उपकरण, कास्टिंग, प्लास्टिक, रसायन, निर्माण सामग्री, कागज, पैकेजिंग, प्रसंस्कृत खाद्य, कपड़ा और चमड़ा उद्योग का व्यापक विकास हुआ है। तुर्की का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा फार्म शहर से 20 मील पूर्व में करापिनार के पास स्थित है। == संस्कृति == [[File:Mevlana Cultural Center, Konya.jpg|thumb|मेवलाना सांस्कृतिक केंद्र, कोन्या]] कोन्या को तुर्की के धार्मिक रूप से अधिक रूढ़िवादी महानगरों में से एक माना जाता है। यह प्रसिद्ध सूफी संत और कवि रूमी (मेवलाना) का अंतिम निवास स्थान था। यहाँ स्थित उनका फिरोज़ा (Turquoise) गुंबद वाला मकबरा शहर का मुख्य पर्यटक आकर्षण है। वर्ष 1273 में रूमी के अनुयायियों ने 'मेवलेवी सूफी सिलसिले' की स्थापना की थी, जिन्हें 'भंवर दरवेश' (Whirling Dervishes) के नाम से जाना जाता है। [[File:Konya - Valilik - panoramio.jpg|thumb|कोन्या - प्रांतीय भवन (Valilik)]] प्रत्येक शनिवार को 'मेवलाना सांस्कृतिक केंद्र' में भंवर दरवेशों का आध्यात्मिक प्रदर्शन (सेमा) होता है। इस्तांबुल जैसे शहरों में होने वाले व्यावसायिक प्रदर्शनों के विपरीत, यहाँ के सत्र पूरी तरह आध्यात्मिक होते हैं।<ref name="a956">{{cite web | title=Small Ruminant Congress | website=kucukbas2014.com | date=25 October 2013 | url=http://kucukbas2014.com/EN/Icerik.aspx?ID=27 | archive-url=https://web.archive.org/web/20141018012849/http://kucukbas2014.com/EN/Icerik.aspx?ID=27 | archive-date=18 October 2014 | url-status=dead | access-date=20 December 2025}}</ref> पुनर्जागरण काल के दौरान, कोन्या में बने मूल्यवान और समृद्ध पैटर्न वाले कालीनों का यूरोप में निर्यात किया जाता था। ये कालीन उस समय धन और प्रतिष्ठा का प्रतीक माने जाते थे और अक्सर तत्कालीन तेल चित्रों (Oil Paintings) में अभिजात वर्ग के वैभव के रूप में चित्रित किए जाते थे। ==जलवायु== कोन्या में [[कोपेन वर्गीकरण]] के तहत ठंडी अर्ध-शुष्क जलवायु (बीएसके) और ट्रेवार्थ वर्गीकरण के तहत समशीतोष्ण महाद्वीपीय (डीसी) जलवायु है।<ref name="l265">{{cite web | title= | url=https://www.hydrol-earth-syst-sci-discuss.net/4/439/2007/hessd-4-439-2007.pdf | access-date=20 December 2025}}</ref> गर्मी के दिनों में दिन का औसत तापमान 30 डिग्री सेल्सियस (86 डिग्री फारेनहाइट) रहता है, हालांकि रातें ठंडी होती हैं। कोन्या में अब तक का सबसे अधिक तापमान 14 अगस्त 2023 को 40.9 डिग्री सेल्सियस (106 डिग्री फारेनहाइट) दर्ज किया गया था, जो 30 जुलाई 2000 के पिछले रिकॉर्ड 40.6 डिग्री सेल्सियस (105 डिग्री फारेनहाइट) के करीब था। सर्दियों में औसत तापमान -4.2 डिग्री सेल्सियस (24 डिग्री फारेनहाइट) रहता है, और अब तक का सबसे कम तापमान 6 फरवरी 1972 को -26.5 डिग्री सेल्सियस (-16 डिग्री फारेनहाइट) दर्ज किया गया था। वर्षा का स्तर कम होता है और यह मुख्य रूप से सर्दियों (ज्यादातर बर्फ के रूप में), वसंत और शरद ऋतु में होती है। {{Weather box |location = Konya (1991–2020, extremes 1929–2023) |metric first = Yes |single line = Yes |Jan record high C = 19.3 |Feb record high C = 23.8 |Mar record high C = 28.9 |Apr record high C = 34.6 |May record high C = 34.4 |Jun record high C = 36.7 |Jul record high C = 40.6 |Aug record high C = 40.9 |Sep record high C = 38.8 |Oct record high C = 32.3 |Nov record high C = 25.4 |Dec record high C = 21.8 |year record high C = |Jan high C = 4.6 |Feb high C = 6.9 |Mar high C = 12.5 |Apr high C = 17.6 |May high C = 22.8 |Jun high C = 27.4 |Jul high C = 31.0 |Aug high C = 30.9 |Sep high C = 26.7 |Oct high C = 20.4 |Nov high C = 12.7 |Dec high C = 6.3 |year high C = 18.3 |Jan mean C = -0.3 |Feb mean C = 1.3 |Mar mean C = 6.0 |Apr mean C = 10.9 |May mean C = 15.9 |Jun mean C = 20.5 |Jul mean C = 24.1 |Aug mean C = 24.0 |Sep mean C = 19.4 |Oct mean C = 13.4 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तिवारी 932885 लेख का विस्तार किया 6630378 wikitext text/x-wiki {{Infobox Turkey place | type = metro province | name = तेकिरदा प्रांत | native_name = Tekirdağ ili | image = Dut Limanı Koyu.jpg | caption = दुत खाड़ी | image_logo = Tekirdağ Büyükşehir Belediyesi logo.svg | image_map = Tekirdag in Turkey.svg | map_caption = तेकिरदा प्रांत (लाल) | coordinates = {{Coord|41|05|11|N|27|21|28|E|region:TR-59_type:adm1st|display=title}} | seat = [[तेकिरदा]] | leader_name1 = रजब सोयतुर्क | leader_party = CHP | leader_name = जानदान युजेर | area_footnotes = | area_total_km2 = 6190 | elevation_m = | population_footnotes = <ref name=tuik/> | population_total = 1208441 | population_as_of = 2025 | area_code = 0282 | iso_code = TR-59 | website = {{url|http://www.tekirdag.bel.tr/}}<br>{{url|http://www.tekirdag.gov.tr/}} }} '''तेकिरदा प्रांत''' ({{langx|tr|Tekirdağ ili|italic=no}}) [[तुर्की]] का एक [[तुर्की के प्रांत|प्रांत]] है। इसकी राजधानी [[तेकिरदा]] है। इसका क्षेत्रफल 6,190&nbsp;km<sup>2</sup>,<ref>{{cite web|url=https://www.harita.gov.tr/uploads/files-folder/il_ilce_alanlari.xlsx|title=İl ve İlçe Yüz ölçümleri|publisher=General Directorate of Mapping|access-date=19 September 2023}}</ref> और जनसंख्या 11,42,451 (2022) है।<ref name=tuik>{{Cite web |title=Address-based population registration system (ADNKS) results dated 31 December 2022, Favorite Reports|url=https://biruni.tuik.gov.tr/medas/?kn=95&locale=en |access-date=19 September 2023|publisher=[[TÜİK]]|language=en|format=XLS}}</ref> यह [[पूर्वी थ्रेस]] में स्थित, जो तुर्की का यूरोपीय भाग है। तेकिरदा प्रांत की सीमाएँ पूर्व में [[इस्तांबुल प्रांत]], उत्तर में [[कुर्कलारेली प्रांत]], पश्चिम में [[एदिर्ने प्रांत]], और दक्षिण में [[चानाककले प्रांत]] से लगी हुई हैं। == संदर्भ == {{reflist}} {{तुर्की के प्रान्त}} [[श्रेणी:तुर्की के प्रान्त]] 5acnb4q8metconw6pf0kcfqir2f1u31 प्रागैतिहासिक बुंदेली समाज और संस्कृति 0 51334 6630247 4548913 2026-10-16T14:56:46Z Kacitakoli 954029 /* growthexperiments-addlink-summary-summary:2|0|1 */ 6630247 wikitext text/x-wiki {{विकिफ़ाइ}} {{स्रोत}} [[बुन्देलखण्ड|बुंदेलखंड]] नर्मदा, चंबल, बेतवा और केन आदि नदियों से घिरा हुआ है और प्राचीन काल में प्रसिद्ध मध्यप्रदेश का एक अंग था। बुंदेलखंड के आदिम निवासियों #ौर उनकी संस्कृति का स्वरुप निर्णय करने में तीन प्रकार की सामग्री मिलती है। पुरातात्विक चित्र और औज़ार तथा वैदिक एवं पौरामिक साहित्य में आये उल्लेख। भित्ति चित्रों और औज़ारों के आधार पर नृवंशीय एवं समाजशास्रीय उपलब्धियों हुई हैं तथा पौराणिक साहित्य के आदिम समाज की धार्मिक उपलब्धियों का प्रमाणीकरण हो जाता है। एतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से बुंदेली समाज का मिला-जुला रूप इस प्रकार आता ह। ऐतिहासिक युग से बहुत पहले बुंदेलखंड की आदिम संस्कृति को दर्शाने वाले वे शिलागृह हैं जिनका पता बीसवीं शताब्दी के छठे दशक में लगा है। आदिम निवासी प्राय: पर्वत की गुफाओं में रहते थे। बुंदेलखंड के सागर, पन्ना, होशंगाबाद, छतरपुर, रायसेन आदि स्थानों के समीप अनेक भित्ती चित्र प्राप्त हुए हैं। इन चित्रों का निर्माण पं० कृष्णदत्त वाजपेयी के मतानुसार कम से कम ६००० ई० पू० से प्रचलित हो गया था। उन्होंने मध्यप्रदेश में पाये जाने वाली भित्ति-चित्र की गुफाओं का वैज्ञानिक ढंग से आकलन करके निर्णय दिया है कि प्राचीन गुफा-चित्रों से वहां निवास करने वालों की जीवन-चर्चा तथा रुचि का पता चलता है। मुख्यतया जो दृश्य इन चित्रों में मिलते हैं - विविध आयुधों से पशु पक्षियों का शिकार, जानवरों की लड़ाई, मानवों में पारंपरिक युद्ध, पशुओं पर सवाली, गीत, नृत्य, पूजन, मधु-संचय था घरेलू जीवन-संबंधी अनेक दृश्य। लोगों के जीवन-निर्वाह का मुख्य साधन शिकार था। शिकार किये जाने वाले जानवर बाघ, हिरन, भैंसा, हाथी, गैंडा और शूकर विशेष हैं। भित्ति चित्र दो प्रकार के हैं - एक वे जिनमें शिकार और रक्षा के लिये विविध आयुधों का प्रयोग है, दूसरे वे, जिनमें युद्ध के दृश्य चित्रित है। इनमें घोड़ों पर सवार सरदार अपने सिर के ऊपर छत लगाये जा रहे हैं। कई जगह शिकारियों और योद्धाओं के विचित् पहनावे मिले हैं। बरौदा गाँव (जिला सागर) के समीप के गुफा चित्र में एक योद्धा ऊँची टोपी और लम्बा कोट पहने दिखाया गया है। अनेक चित्रों में हाथी पर सवार लोग दिखाए गए हैं। [[सागर ज़िला|सागर जिले]] के बरथावली नामक स्थान में एक रोचक गुहा-चित्र है, जिसमें नदी का खेल प्रदर्शित है। एक व्यक्ति का सिर नीचे और पैर ऊपर किये हुए दिखाया गया है। किन्हीं किन्हीं चित्रों में घरेलू जीवन, खान-पान, नृत्य, गायन आदि के चित्रण हैं। विद्वानों के मत से भित्ति-चित्रों के माध्यम से हमें जिस आध समाज का अनुमान लगता है। वह अत्यंत परवर्ती समाज है। मोहन-जोदड़ो और हड़प्पा की सभ्यता से बहुत पहले इस भू-भाग पर नर्मदा और चम्बल की प्राचीन सभ्यताएं प्रचलित थीं जिनका समय प्राप्त प्राचीनतम पत्थरों के औज़ारों के आधार पर लगभग पाँच लाख ई० पू० माना गया है। (क) पूर्व [[पाषाण युग]] - पुरातत्व सामग्री के आधार पर इस युग का समय ५ लाख वर्ष पूर्व माना गया है। नर्मदा घाटी के अवशेष होशंगाबाद, नरसिंहपुर के बीच भुतरा, सागर, दमोह, रीवा तथा बुंदेलखंड के क्षेत्रो में मिले हैं जिन्हें बी. रंगाचार्य ने उपयोग की दृष्टि से बने औज़ार इस बात के प्रमाण हैं कि मनुष्यों की प्रथम बस्तियां यहाँ थी। श्री एच० डी० सांकलिया ने भी इसी का समर्थन किया है कि मनुष्यों की बस्तियों में बिल्लौर-पत्थर, बलुआ पत्थर तता सोपानाश्म (ट्रप) तीनों प्रकार के हथियार प्रयुक्त होते थे। इस के युग के मानव, नदी या झरनों के करीब कन्दराओं में वास करते थे। उसका मुख्य कार्य मृगया ही था। खेती का सूत्रपात इस समय तक नहीं हुआ था। (ख) मध्य पाषाण युग - इस युग (७००० ई० पू०) की पुरातात्त्विक सामग्री के क्षेत्र नर्मदा घाटी, विन्ध्याचल के क्षेत्र के सिवा हैदराबाद, काठियावाड़ और पंजाब तक फैले हैं। पं हरिहरनिवास द्विवेदी के अनुसार आकृति की दृष्टि से इस काल के औज़ार और शस्र चौकोर फल, पीछे की ओर से भोंथरे किए कए, अर्द्धचन्द्रकार फल कुरेदने के औज़ार, शलाकाकर फल के रूप में है। उनका उपयोग बिना मुठिया के नहीं होता था। मनुष्यों के अस्थि पं और अन्य जीवों के अस्थि पं के आधार पर निष्कर्ष निकलता है कि इस युग के मनुष्य नृवंश की दृष्टि से नीग्रो थे। श्री श्यामचरण राय की विचार है कि ये लोग उन लोगों में से हो सकते हैं जिन्हें आजकल "आस्ट्रेलाइड' कहते हैं और जिनकी संतान की गौंड, भील, मुंडा आदि है। बुंदेलखंड में गौड़, भील, कोल, कीरात, शबर और कोटक् की स्थिती का प्रमाण परवर्ती पौराणिक साहित्य में भी मिलता है। शिकार के सिवा इन लोगों ने कृषि का भी सूत्रपात किया था। ये पहाड़ी भूमि को छोटे-छोटे समतलों में विभाजित करके कृषि करते थे। ये लोग मरणोत्तर जीवन की भी कल्पना करते थे। विद्वानों का मानना है कि इस समय के लोग संगीत, नृत्य में प्रवीण थे। सांस्कृतिक तत्वों के रूप में बट पूजा, बिल्वा और का भी संकेत मिलता है। खेती में उर्वरता लाने के लिए ये प्रेत पूजा भी करते थे। (ग) उत्तर पाषाण काल (४००० ई० पू०) - इस काल के अवशेषों में कुल्हाड़ी, चिमनाने के पत्थर, पत्थर के हथौड़े, कुदाली, मूसल, हड्डी के सूजे, चूल्हे तथा मिट्टी के आदिकालीन बर्तन प्रमुख हैं। मध्यप्रदेश की सीमाओं में हमीरपुर, बाँदा, छत्तरपुर, पन्ना में ये अवशेष प्राप्त हुए हैं। इस युग के संस्कृति के निर्माता भारतवर्ष में "आग्नेय दिशा' से आए। इनकी आकृति भारत में निषादों से मिलने के कारण इन्हें "आग्नेय निषाद' की संज्ञा दी गई। आर्यों के मध्यप्रदेश तक सारे भारत में ये फैल गये थे। वैदिक साहित्य तथा बौद्ध जातकों में इन लोगों का बार बार स्मरण किया गया है। इनकी भाषा को चांडाल भाषा कहा गया है। ऐसा पं० द्विवेदी ने अपनी पुस्तक मध्यभारत का इतिहास में भी माना है। डॉ॰ सांकलिया ने निषादों को अन्न उत्पन्न करने वाला, एक स्थान पर रुककर रहने वाला तथा अग्नि का उपयोग जानने तथा पशु पालने वाला माना है। वे चाक (चक्र) पर रखकर मिट्टी के बर्तन बनाते थे, गाड़ी के पहियों का अविष्कार इन्होंने कर लिया था। झोंपड़े बनाकर रहने की प्रकृति इनकी थी। ग्रामों की सभ्यता का विकास इन्होंने कर लिया था। ""प्रकृतिगत विभिन्नता, स्थान भेद और जीवनयापन के भेद के कारण इसी काल में भारतवर्ष में विशेष कार्य करने वालों की श्रेणियों के रूप में जाति संस्था का उदय हुआ, जो आर्यों की वर्ण व्यवस्था से बहुत पहले की आदिम सामाजिक संस्था है।'' इनमें निभेद और समता की भावना है तथा श्रुतिस्मृति के विधानों का कोई हस्तक्षेप नही है इसे डॉ॰ राजबाली पाण्डेय ने भी स्वीकार किया है। वस्तुत: इस युग में स्थिर जीवन की कल्पना के साथ मृतकों को गाड़कर था उनके भस्मावशेषों को मिट्टी के बर्तन में रखकर और मिट्टी में दबाकर उन पर स्मृति चिन्हों के रूप में पत्थर खड़े किए गए। बौद्ध स्तूपों की विशाल कल्पना भी इसी भावना का परिणाम है इसका पं० हरिहरनिवास द्विवेदी ने भी समर्थन किया है। उत्तर पाषाण युग के विकसित औज़ार, मिट्टी के बर्तन, तरकस में लौटकर आने वाले बाण, बाँस की नली से फूंक कर (उत्पन्न शक्ति से चलने वाले अस्र, कुदाली, खेती की नवीनता आदि इस काल की विशेषताएँ हैं। गेहूँ, कन्दली, नारिकेल, ताम्बूल, वातिगण, अलाबू, निम्बूक, जम्बू, कपास, कपंट, शान्मील, ककवाक आदि का प्रचलन इस काल में हो गया था। आग्नेय (निषादों) की देन में मत्स्यगंधा की कल्पना, अनगढ़ पत्थर में देवत्व की स्थापना, देवताओं पर रक्तलेप करना और मांग भरना (बाद में इसे सिंदूर से स्थानापन्न किया गया।) उत्तर पाषाण युग के उपरान्त चंबल घाटी और बेतवा घाटी की सभ्यतायें है जिनकी पृथक अस्तित्व नहीं माना गया है। वैदिक साहित्य में "अयस' धातु का उल्लेख हुआ है। विद्वानों का विचार है कि चम्बल के क्षेत्र में (मध्यभारत, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश के चम्बल वाले भाग, द्रविड़ों की संस्कृति दिव्य थी। ये मानव सभ्यता के क्षेत्र में उच्चमान स्थापित करने में समर्थ हो गए थे। [[श्रेणी:बुंदेलखंड]] fvxqzaxck7ntpc0bl3wbyklwcede2um सदस्य वार्ता:Gunjan verma81 3 56358 6630234 6257724 2026-10-16T13:22:22Z अमर तिवारी 932885 6630234 wikitext text/x-wiki {{प्रबन्धकगण}}{{Archives|archivelist=सदस्य वार्ता:Gunjan verma81/पुरालेख}} {{TOC}}{{-}} :लीजिए आपका पुरालेख सहित वार्ता पृष्ठ तैयार है। और कोई सेवा?--<small><span style="border:1px solid #0000ff;padding:1px;">[[User:आशीष भटनागर|<b>आशीष भटनागर</b>]][[User_talk:आशीष भटनागर|<font style="color:#FF4F00;background:#4B0082;"> &nbsp;वार्ता&nbsp;</font>]] </span></small> ०९:०६, १० अगस्त २००९ (UTC) ::अब यार इस बात के लिए भी थैंक्स दोगे? वार्ता सदस्य के नाम पर भले हो, होती तो उन लोगों के लिए है, जो वहां संदेश देते हैं। तब वे लोग थैंक्स करेंगे ना। हां चेन्नई में कुछ करना हो तो बताओ। असल में मैंने ही चेन्नई आरंभ किया और घर में कुछ मेहमानों के कारण व्यस्त रहा और कुछ खास कर नहीं पाया। केवल प्रस्तावना और जनसांख्यिकी की। बाद में आधा भूगोल किया किंतु तब तक तुमने पूरा ही ड्ल दिया था। तो अब कुछ करना हो तो बताओ।--<small><span style="border:1px solid #0000ff;padding:1px;">[[User:आशीष भटनागर|<b>आशीष भटनागर</b>]][[User_talk:आशीष भटनागर|<font style="color:#FF4F00;background:#4B0082;"> &nbsp;वार्ता&nbsp;</font>]] </span></small> ०९:२६, १० अगस्त २००९ (UTC) :::जब कोई अनुभाग अनुवाद करो तब उसके संदर्भ में टाइटल, तिथि(एक्सेस डेट) स्रोत/पब्लिशर आदि को भी अनुवाद कर दिया करो, जिससे कि संदर्भ हिन्दी में दिखे।--<small><span style="border:1px solid #0000ff;padding:1px;">[[User:आशीष भटनागर|<b>आशीष भटनागर</b>]][[User_talk:आशीष भटनागर|<font style="color:#FF4F00;background:#4B0082;"> &nbsp;वार्ता&nbsp;</font>]] </span></small> ०९:३१, १० अगस्त २००९ (UTC) == [[साँचा:भारतीय खाना]] == क्या हाल चाल हैं? ऑफिस में व्यस्त हो? हां तुमने व्यंजनों लेख तो बनाये, किंतु उन्हें सांचे में नहीं लगाया। तभी वो सांचा इतने दिनों से खाली पड़ा हुआ है।--<small><span style="border:1px solid #0000ff;padding:1px;">[[User:आशीष भटनागर|<b>आशीष भटनागर</b>]][[User_talk:आशीष भटनागर|<font style="color:#FF4F00;background:#4B0082;"> &nbsp;वार्ता&nbsp;</font>]] </span></small> ०५:२७, १९ अगस्त २००९ (UTC) : अब {{tl|भारतीय खाना}} में छत्तीसगढ़ और मराठी व्यंजन तो तुम्हें ही लगाने होंगे न। ढूंढो और लगाओ। हां उनके लेख बाद में बनते रहेंगे।--<small><span style="border:1px solid #0000ff;padding:1px;">[[User:आशीष भटनागर|<b>आशीष भटनागर</b>]][[User_talk:आशीष भटनागर|<font style="color:#FF4F00;background:#4B0082;"> &nbsp;वार्ता&nbsp;</font>]] </span></small> १३:२२, १९ अगस्त २००९ (UTC) == सम्मान == {| style="border: 1px solid gray; background-color: #fdffe7;" |rowspan="2" valign="top" | [[Image:Barnstar_of_Reversion2.png|100px|विध्वंस-रोधक बार्न-स्टार]] |rowspan="2" | |style="font-size: x-large; padding: 0; vertical-align: bottom; height: 1.1em;" | '''विध्वंस-रोधक बार्न-स्टार''' |- |style="vertical-align: top; border-top: 1px solid gray;" | आपको [[विकिपीडिया:बर्बरता|विध्वंस्कारी गतिविधियों]] पर [[हिन्दी विकिपीडिया]] के हित में ध्यान देकर यथासंभव पुनर्स्थापन और यथासमय प्रबंधकों को उचित संदेश देकर सूचित करने के लिए प्रदान किया जाता है।<small><span style="border:1px solid #0000ff;padding:1px;">[[User:आशीष भटनागर|<b>आशीष भटनागर</b>]][[User_talk:आशीष भटनागर|<font style="color:#FF4F00;background:#4B0082;"> &nbsp;वार्ता&nbsp;</font>]] </span></small> १३:११, १९ अगस्त २००९ (UTC) |} ==Translation of a short story== Hi my friend! I would like to request something from you. Yes, translation. I hope, it's not a bad thing for you. Some years ago I wrote a (really) short story about a lonely man (actually symbolized the Saami nation). I translated into some languages and I thought, it would be great to have it more, like also in ःHindi:) I made [[:hu:Szerkesztő:Eino81/Novellám számiul|this page]], the English translation is somewhere there. You can put the Hindi translation there. Thank you again! Sorry for my disturb... :( - [[:hu:User:Eino81]] == [[प्रकाश उत्सर्जक डायोड]] == उपरिक्त लेख देख लो। अभी विकसित किया है। कोई लिंक, संदर्भ या जानकारी और डाल सको, इसे आलेख के लिए डाल रहा हूं।--<small><span style="border:1px solid #0000ff;padding:1px;">[[User:आशीष भटनागर|<b>आशीष भटनागर</b>]][[User_talk:आशीष भटनागर|<font style="color:#FF4F00;background:#4B0082;"> &nbsp;वार्ता&nbsp;</font>]] </span></small> ०६:०२, २५ अगस्त २००९ (UTC) == बाट == नमस्कार जी,<br />मेरा पूर्ण समर्थन है जी पर समस्या यह है कि मैं बॉट के बारे में तकनीकी कुछ मदद कर नहीं सकुंगी हां मेरे समर्थनन की जहाँ जरूरत होगी मैं हूँ।--<b>[[User:Munita Prasad|<font color="green">Munita Prasad</font>]]</b><sup>[[सदस्य वार्ता:Munita Prasad|<font color="blue">वार्ता</font>]]</sup> ०२:१३, २६ अगस्त २००९ (UTC) :हाँ ठीक है।--<b>[[User:Munita Prasad|<font color="green">Munita Prasad</font>]]</b><sup>[[सदस्य वार्ता:Munita Prasad|<font color="blue">वार्ता</font>]]</sup> ०२:२३, २६ अगस्त २००९ (UTC) ==bots== Dear Gunjan, My technical knowledge is limited in this respect. You may cantact [[:mr:सदस्य:अभय नातू|अभय नातू]]'s talk page at Marathi [[:mr:सदस्य चर्चा:अभय नातू|चर्चा]] or [[:mr:सांगकाम्या|marathi background bots list]] for more info. following are some of usefull links for you. Regards [[योजकः:Mahitgar|Mahitgar]] १५:४३, ३ आषाढश्रावणे २००९ (UTC) *[[:en:Wikipedia:WikiProject India/Automation|Indian Bots]] *[[:en:Wikipedia:Bot requests|Wikipedia:Bot requests]] *[[:en:Aspell]] *[[:en:Freedict]] *[http://packages.debian.org/testing/text/dict-freedict-eng-hin here] *[http://ftp.gnu.org/gnu/aspell/dict/hi/ Hindi wordlist] *[http://meta.wikimedia.org/wiki/Using_the_python_wikipediabot Using_the_python_wikipediabot] *[http://sourceforge.net/projects/pywikipediabot/ Python Wikipedia Robot Framework] *[[:en:Wikipedia:AutoWikiBrowser|Wikipedia:AutoWikiBrowser]] *[[:en:Wikipedia:Tools|Wikipedia:Tools]] *[[:en:User:The_Transhumanist/Tools|The_Transhumanist's recomonded user tools]] *[[:en:Help:Contents/Technical_information|Help:Contents/Technical_information]] *[[:en:Wikipedia:Notice board for India-related topics/It's new|It's new]] If any bot does not have user page and talk page then we need to ask them to do so.Wikipedia like sanskrit where local policy is not made by local users bots can get centralised aproval from meta. On technical side to some extent you are right. Basically these are user conrolled codes doing specific tasks.Tasks can be any thing from inter language wiki page linking(That is majior percentage).But one can use bots for including/excluding/correcting words or wiki language aspects even one can create new pages (Usualy creation of new pages with bot is restricted to wictionaries). You can use bots for opening pages one after other for editing etc. If you are using a home PC it is more feasible .Usualy a little tech background is beneficial but not necessary.For writing a bot you can request assistance from another reliable bot. ==be in touch== I am intrested in getting created a local wikimedia chapter at Pune , So please keep in touch so we can get together so time.[[सदस्य:Mahitgar|Mahitgar]] ०९:४९, २६ अगस्त २००९ (UTC) ==धन्यवाद, गलती बताने के लिये== वर्मा जी, आपने बहुत महत्वपूर्ण गलती बतायी। मुझे भी यह सामग्री कहीं से मिल गयी थी। मै इस महानुभाव के बारे में बिल्कुल नहीं जानता था। मुझे बहुत आश्चर्य हुआ कि ऐसे व्यक्ति के बारे में मैं कैसे अनजान रह गया। और आपके कारण मुझे 'इग्नोबल पुरस्कार' के बारे में जानकारी हुई, उसके लिये विशेष धन्यवाद। [[सदस्य:अनुनाद सिंह|अनुनाद सिंह]] १२:१६, १ सितंबर २००९ (UTC) ==मेरे लेख यादृच्छ (रैण्डम) क्यों होते हैं?== मैं कोशिश करता हूँ कि विज्ञान और तकनीकी विषयों पर कुछ लिखूँ। उसमें भी जो महत्वपूर्ण विषय लगते हैं उन पर ही पहले लिखना है क्योंकि कहने की जरूरत नहीं कि समय की कमी सबको है। इसी तारतम्य में अक्सर 'सर्च' करते समय या नेट-भ्रमण करते समय कोई अच्ची चीज हाथ लग जाती है या कोई नया टॉपिक दिख जाता है तो उस पर चार-पाँच लाइन लिख देता हूँ। मेरे खयाल से एक साँचा पकड़कर लिखना हिन्दी विकि के लिये ठीक नहीं है। वैसे भी विकिपिडिया की सबसे बड़ी खूबी उसका 'नॉन-लिनियर' होना है। यह नान-लिनियारिटी 'रैण्डमनेस' ही तो है!! [[सदस्य:अनुनाद सिंह|अनुनाद सिंह]] १३:४५, १ सितंबर २००९ (UTC) == अनुवाद == जानकारी के लिए धन्यवाद। ([[सदस्य:आलोक|आलोक]] ११:२०, २ सितंबर २००९ (UTC)) == अनुवाद के बाद छवि का प्रदर्शित न होना == यह बताइए कि आपको कैसे पता चलता है कि अनुवाद के बाद छवि प्रदर्शित नहीं हो रही तो उसका नाम बदलने से प्रदर्शित होने लगेगी? और, छवि का नाम बदल के क्या करना है यह कैसे पता चलता है? :धन्यवाद! तस्वीरों के बारे में खुलासे के लिए। नए साँचे कैसे बनाते/सँजोते हैं? --([[सदस्य:आलोक|आलोक]] ११:२०, २ सितंबर २००९ (UTC)) ::साँचों के बारे में पढ़ रहा हूँ। एक सवाल और, हिंदी विकि पर भी फ़ाइल चढ़ाने की कड़ी है। तो, यह विकिमीडिया कामंस से अलग जगह पर जाएगी न? ऐसे स्थिति में, अगर हिंदी विकिपीडिया से एक फ़ाइल चढ़ाएँ, और विकिमीडिया कामंस में भी उसी नाम से फ़ाइल चढ़ाएँ, तो विकि को पता कैसे चलेगा कि कौन सी तस्वीर दिखानी है? ::: बढ़िया। यानी यथासंभव कामंस पर ही तस्वीर चढ़ाई जाए, ताकि औरों को भी सुविधा हो? शायद पहले कामंस था नहीं इसीलिए दो जगह का टंटा है। neurone का हिन्दी तंत्रिका कोशिका है। nerve का तंत्रिका तंतु--<b>[[User:Munita Prasad|<font color="green">Munita Prasad</font>]]</b><sup>[[सदस्य वार्ता:Munita Prasad|<font color="blue">वार्ता</font>]]</sup> ११:५२, २ सितंबर २००९ (UTC) == चौपाल == हां, अभी तो होटल तैयार हो रहा है, फिर सब थकने के बाद मिल कर बैठेंगे यहां। हां ये मुख्य मंत्रियों पर नज़र लगायी, कि एक उड़ा ही दिया.....च.च.च.च.च.--<small><span style="border:1px solid #0000ff;padding:1px;">[[User:आशीष भटनागर|<b>आशीष भटनागर</b>]][[User_talk:आशीष भटनागर|<font style="color:#FF4F00;background:#4B0082;"> &nbsp;वार्ता&nbsp;</font>]] </span></small> ११:४६, ३ सितंबर २००९ (UTC)(डोंट माइन्ड) :{{tl|विकि प्रगति}} देख लो। सही लगे तो प्रयोग कर लेना। उसमें लेख संख्या भी डाली है। कितने हुए जी?--<b>[[User:Munita Prasad|<font color="green">Munita Prasad</font>]]</b><sup>[[सदस्य वार्ता:Munita Prasad|<font color="blue">वार्ता</font>]]</sup> १२:२६, ३ सितंबर २००९ (UTC) ==[[विकिपीडिया:चौपाल#Hits_per_page| हिट्स पर पेज]]== आपके इस विषय पर मैने टिप्पणी दी है--<b>[[User:sumit sinha|<font color="orange">सुमित सिन्हा</font>]]</b><sup>[[सदस्य वार्ता:sumit sinha|<font color="blue">वार्ता</font>]]</sup> १७:४१, ३ सितंबर २००९ (UTC) ==[[विकिपीडिया:चौपाल#यह कैसी त्रुटि है?]]== कृपया इस विषय को देखें--<b>[[User:sumit sinha|<font color="orange">सुमित सिन्हा</font>]]</b><sup>[[सदस्य वार्ता:sumit sinha|<font color="blue">वार्ता</font>]]</sup> १३:००, ४ सितंबर २००९ (UTC) ==साधुवाद== आज जब कुछ लोगों के योगदान के कारण हिन्दी विकी ४४,००० को पार करने पर है, तब मुझे लगा कि उन लोगों को अवश्य याद करना चाहिये, जो इसके पीछे जी-जान से लगे हुए हैं। जिन्हें इसकी इतनी चिंता है, कि बस........शब्द नहीं मिल रहे.... अब मैं पूर्णिमा जी तो हूं नहीं साहित्य स्वयं मेरे बगल में बैठ कर शब्द सुझाव देता रहे। हम तो छोटे से विकि/हिन्दी के सेवक है। खैर तुम्हारे (आपके नहीं लिखूंगा) योगदान सराहना के योग्य तो हैं किन्तु प्रशंसा से ऊपर हैं। खासकर मैं अपने को इस दौड़ से अलग करता हूं--वाली बात सीधे कह देना। वैसे मैं ये नहीं कहूंगा कि अलग ही कर दो। हां उस दौड़ में आंखें खोल कर दौड़ो। तब दिखेगा, कि कहां कितना वेटेज देना है। गिनती भी महत्त्वपूर्ण है, किन्तु गुणवत्ता की कीमत पर नहीं। तो अबकी बार कोई बर्न स्टार नहीं दे रहा हूं। अभी १४ सितंबर का स्वागत करने में जुट जाओ।--<small><span style="border:1px solid #0000ff;padding:1px;">[[User:आशीष भटनागर|<b>आशीष भटनागर</b>]][[User_talk:आशीष भटनागर|<font style="color:#FF4F00;background:#4B0082;"> &nbsp;वार्ता&nbsp;</font>]] </span></small> ०९:२७, ८ सितंबर २००९ (UTC) ==महावीर शरण जैन== संदेश के लिए धन्यवाद गुंजन, बहुत से हिंदी के विद्वान ये नहीं जानते हैं कि विकि में कैसे लिखना चाहिए। मैं महावीर जी का लेख व्यवस्थित कर दूँगी। उनका काम महत्त्वपूर्ण है। वे हिंदी के ऐसे विद्वान हैं जिन्होंने पछले कई वर्षों से तथ्यों के आधार पर यह सिद्ध किया है कि हिंदी विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। इससे संबंधित उनके लेख हिंदी की महत्त्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। वे हिंदी व्याकरण के विद्वान हैं और अनेक हिंदी पुस्तकों और हिंदी डायरेक्टरियों के प्रकाशक भी हैं। विदेशों में हिंदी के प्रोफेसर भी रह चुके हैं साथ ही वे कवि, लेखक और हिंदी के विकास के अनेक कार्यक्रमों से जुड़े व्यक्ति हैं। वे हिंदी विकि की गहराई बढ़ाने में बहुत उपयोगी हो सकते हैं। मैं उनको इस प्रकार संदेश देती हूँ कि उनको बुरा न लगे और विकि को उनका सहयोग मिलता रहे।--[[सदस्य:पूर्णिमा वर्मन|पूर्णिमा वर्मन]] ०७:२१, ९ सितंबर २००९ (UTC) :गुंजन मेरा डॉ॰जैन से पत्र व्यवहार हुआ है और उन्होंने कहा है कि हम विकि के अनुसार संपादन कर सकते हैं। उनके नाम से पेस्ट किया गया काफी मैटर उपयोगी भी है जैसे दिनकर का काव्य इत्यादि। हालाँकि वह विकि के अनुसार नहीं पर मैं उसको धीरे धीरि विकिफाई कर दूँगी। जैन धर्म और महावीर पर पेस्ट किए गए उनके मैटर को भी विकिफाई कर के लाभ उठाया जा सकता है। इतना मैटर खुद इकट्ठा करना और टाइप करना काफी मुश्किल है। बिना विकिफाइ किए गए मैटर को इसका नियंत्रित करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि उनके योगदान में जाकर उस पर निगाह रखें। काफ़ी टेक्स्ट पेस्ट हो रहा है तो उसको किस तरह विकि के काम में लाया जा सकता है उसको समझकर ठीक से व्यवस्थित कर दिया जाय। जो पन्ने विकि की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं हैं उन उनको बाद में हटा दिया जाएगा।--[[सदस्य:पूर्णिमा वर्मन|पूर्णिमा वर्मन]] ०६:०६, १३ सितंबर २००९ (UTC) ==हिन्दी विकि पर ५०००० लेख== नमस्कार, हिन्दी विकि पर ५०००० लेख होने में बस २०० लेख ही बचे हैं। आज इसे पूरा करने में मदद करें। -- [[सदस्य: Sbharti |सौरभ भारती]] ([[सदस्य वार्ता:Sbharti |वार्ता]]) ०७:४८, १४ सितंबर २००९ (UTC) ==वार्ता साँचे== आपने कहा था की स्मैकबॉट अपने आप ही हाल में बने लेखों पर वार्ता साँचे लगा देता है लेकिन पिछले कुछ दिनों में जो ग्रामीणबॉट ने लेख बनाए है उनपर साँचे अभी तक नहीं लगे हैं। इस कारण हिन्दी विकी की गहराई बहुत कम हो गई है। कृपया इस विषय में शीघ्र कुछ कीजिए। धन्यवाद। [[सदस्य:रोहित रावत|रोहित रावत]] १५:३६, १५ सितंबर २००९ (UTC) == [[भूमंडलीय ऊष्मीकरण का प्रभाव]] == लेख आपका बनाया हुआ है इसके अंग्रेजी के शब्दों को मात्र यदि हटा देंगें तो लेख काम का हो जाएगा। वैसे यह हिन्दी विकि के सबसे लम्बे लेखों में से एक है। धन्यवाद--<b>[[User:Munita Prasad|<font color="green">Munita Prasad</font>]]</b><sup>[[सदस्य वार्ता:Munita Prasad|<font color="blue">वार्ता</font>]]</sup> १७:५१, १५ सितंबर २००९ (UTC) == [[सिंह (पशु)]] == गुंजन जी इस लेख को सुधारने में जो मेहनत होगी उससे कम मेहनत में निर्वाचन स्तर का नया लेख तैयार हो सकता है। शायद इसको गुगल अनुवाद से तैयार किया गया है। इसके सारे संदर्भ भी अंग्रेजी में हैं। बेकार की लाल कड़ियाँ भरी पड़ी हैं। भाषा भी अच्छी नहीं है। अच्छी बात सिर्फ एक है कि लेख लम्बा है और कुछ नहीं।--<b>[[User:Munita Prasad|<font color="green">Munita Prasad</font>]]</b><sup>[[सदस्य वार्ता:Munita Prasad|<font color="blue">वार्ता</font>]]</sup> १६:३१, १७ सितंबर २००९ (UTC) :मेरे विचार से हम दो काम कर सकते हैं: :*अपनी भारत के शहर परियोजना पुनः आरंभ करें- बंगलुरु के संग। :*अगले निर्वाचित लेख के लिए परख से कोई लेख उठायें। :राय दो कोई निर्वाचित लेख के लिए, लखनऊ कैसा रहेगा?--<small><span style="border:1px solid #0000ff;padding:1px;">[[User:आशीष भटनागर|<b>आशीष भटनागर</b>]][[User_talk:आशीष भटनागर|<font style="color:#FF4F00;background:#4B0082;"> &nbsp;वार्ता&nbsp;</font>]] </span></small> १८:५२, १७ सितंबर २००९ (UTC) == जैविक तंत्रिका तंत्र == गुंजन जी नमस्कार, आपके लिखे जैविक तंत्रिका तंत्र लेख के बारे में थोड़ी सी दुविधा है। मैंने आज तन्त्रिका तंत्र बनाया है जिसमें कुछ संपादन आपने भी किए हैं। पर ये जैविक तंत्रिका तंत्र क्या है? क्या इसको तंत्रिका तंत्र में मर्ज करना है या कि यह एक अलग लेख है कृपया थोड़ा स्पष्ट कीजिए।--<b>[[User:Munita Prasad|<font color="green">Munita Prasad</font>]]</b><sup>[[सदस्य वार्ता:Munita Prasad|<font color="blue">वार्ता</font>]]</sup> १४:३८, २१ सितंबर २००९ (UTC) ==आलेख== कार्ब्युरेटर तो पहले ही लग चुका था। [[आलेख प्रत्याशी]] में देखते। और [[भारतीय नौसेना पोत विराट]]को सुधारा तो है, और ज्ञानसन्दूक भी लगाया है। किंतु उसके नीचे वाले सांचे को या तो अनुवाद करो, और चाहे तो १-२ वाक्यों के लेख बना डालो, या लेख नहीं तो हिन्दी तो हो। नहीं तो हटाना होगा। ऐसे तो अच्छी लुक नहीं देगा।--<small><span style="border:1px solid #0000ff;padding:1px;">[[User:आशीष भटनागर|<b>आशीष भटनागर</b>]][[User_talk:आशीष भटनागर|<font style="color:#FF4F00;background:#4B0082;"> &nbsp;वार्ता&nbsp;</font>]] </span></small> १८:०१, २१ सितंबर २००९ (UTC) :कृत्रिम तंत्रिका तंत्र तो ठीक है पर जैविक तंत्रिका तंत्र न करके उसको सिर्फ तन्त्रिका तन्त्र कहना ही ठीक होगा। इसलिए जैविक तंत्रिका तंत्र को तंत्रिका तंत्र पर redirect करना ठीक होगा शायद।--<b>[[User:Munita Prasad|<font color="green">Munita Prasad</font>]]</b><sup>[[सदस्य वार्ता:Munita Prasad|<font color="blue">वार्ता</font>]]</sup> ०३:५०, २२ सितंबर २००९ (UTC) ::गुंजन जी आपने जो कहा वह दूसरा लेख है तंत्रिका तंत्र लेख का अंग्रेजी होगा [[:en:Nervous system]], तंत्रिका तंत्र का अंग्रेजी nervous system होता है, biological neural network नहीं होता है। और तंत्रिका तंत्र तो प्राणियों में ही पाया जाता है। यदि कोई कृत्रिम इस प्रकार की चीज का आविष्कार होता है तो वह कृत्रिम नाम से परिचित होगी पर जो प्राकृतिक है उसके नाम के सामने प्राकृतिक देने की जरूरत नहीं है। --<b>[[User:Munita Prasad|<font color="green">Munita Prasad</font>]]</b><sup>[[सदस्य वार्ता:Munita Prasad|<font color="blue">वार्ता</font>]]</sup> ०४:१४, २२ सितंबर २००९ (UTC) == [[भारतीय नौसेना पोत विराट]] == {{आप्का लेख|{{CURRENTDAY}} {{CURRENTMONTHNAME}}|{{CURRENTYEAR}}|भारतीय नौसेना पोत विराट}} ==[[लखनऊ]] का निर्वाचन== [[लखनऊ]] लेख को अगले निर्वाचित लेख बनाने के लिए परखने हेतु [[विकिपीडिया:निर्वाचित लेख परख#लखनऊ]] पर रखा है। कृपया सुझाव/सुधार आदि दें। --<small><span style="border:1px solid #0000ff;padding:1px;">[[User:आशीष भटनागर|<b>आशीष भटनागर</b>]][[User_talk:आशीष भटनागर|<font style="color:#FF4F00;background:#4B0082;"> &nbsp;वार्ता&nbsp;</font>]] </span></small> १८:४८, ४ नवंबर २००९ (UTC) == जानकारी वाला बॉक्स का कोड पूरे पन्ने को बिगाड़ रहा है == गुंजन वर्मा जी, अच्छा लगा की आपने मेरे द्बारा किये गए बदलाव को जाचा, पर मोहदय अगर आप पुराने लेख पर गोर करे तो पाएंगे की उसका जानकारी वाला बॉक्स का जो कोड है वोह पूरे पन्ने को ही बिगाड़ रहा है. वहा पर सिस्टम द्बारा दिए जा रहे लाल ऐरर कोड भी आ रहे है. इसी कारणवश मैंने उस पर से सारा लेख हटा दिया था. अगर आप को कष्ट हुआ तो शमा चाहता हूँ. आप उसे सही कर पूर्वत स्थति में ला सकते है. धन्यवाद --[[सदस्य:Wikisidd|सिद्धार्थ गौड़ ]] १५:१०, ५ नवंबर २००९ (UTC) नमस्कार गुंजन जी, क्यों की में यहाँ नया हूँ इसलिए कई बातो में दिक्कत महसूस होती है, जैसे की चित्र वाली. और आपका आभार की आपने इतनी सरल सी बात बताकर उल्जन दूर कर दी. इसी के साथ मुझे अच्छा लगा की आप श्रीलंका वाले पन्ने पर मेरे द्बारा किये गए बदलावों को समझ पाये और उस दिक्कत को चोपाल पर उठाया. मेरे पास दो, एक जर्मन शेफर्ड व एक रोत्त्विलर नसल के श्वान है, इसी कारण में उनसे वह इस विषय से बड़ा जुडाव महसूस करता हूँ. आपकी मदद के लिए शुक्रिया, उम्मीद है आप से सहयोग व मार्गदर्शन मिलता रहेगा. --[[सदस्य:Wikisidd|सिद्धार्थ गौड़ ]] १०:४७, ६ नवंबर २००९ (UTC) == Check request for [[Şalom]]. == Could you check the article [[Şalom]]. There is already an article about Şalom, a Jewish weekly newspaper in Turkey, in Hindi, but could you check it, and if necessary translate it from the other Wikipedia language sites, if you have the time and patience to do so. The reason is that the newspaper Şalom is written (alas one page only) in a highly endangered language called Ladino or Judeo-Spanish, the Spanish of the 15th century. Perhaps this might gain your interest and sympathy. Thank you. == [[भारत]] == गुजंन जी, नमस्कार, समय मिले तो जरा भारत के संदर्भों को हिन्दी में कर दीजिए तो, संदर्भ पूरा ही लगभग अंग्रेजी में हैं।--<b>[[User:Munita Prasad|<font color="green">Munita Prasad</font>]]</b><sup>[[सदस्य वार्ता:Munita Prasad|<font color="blue">वार्ता</font>]]</sup> १७:०५, १४ दिसंबर २००९ (UTC) ==निर्वाचित चित्र== तुम्हारे प्रस्तावित चित्र बहुत अच्छॆ लगे। इन्हें प्रयोग तो कर दिया गया है, किन्तु यथा संभव उन्हें कहीं किसी लेख में प्रयोग भी कर लो, और हो सके तो उस लेख का नाम परिचय वाक्य में भी समाविष्ट कर दो।--<small><span style="border:1px solid #0000ff;padding:1px;">'''प्र:'''[[User:आशीष भटनागर|<b>आशीष भटनागर</b>]][[User_talk:आशीष भटनागर|<font style="color:#FF4F00;background:#4B0082;"> &nbsp;वार्ता&nbsp;</font>]] </span></small> १०:३९, २४ दिसंबर २००९ (UTC) ==[[म्यूज़िक का महा मुक़ाबला]]== नमस्ते, अब म्यूज़िक का महा मुक़ाबला का पन्ना कैसा है? धन्यवाद [[सदस्य:Kutchkutch|Kutchkutch]] २३:०७, १५ फ़रवरी २०१० (UTC) == स्वागत == स्वागत है। बहुत दिन बाद दिखे। खैर यहां तो सदा ही राह देखते रहे हैं हम गुणी योगदानकर्त्ताओं की। चलो देखकर अच्छा लगा और कुछ सहारा मिला।--<small><span style="border:1px solid #0000ff;padding:1px;">'''प्र:'''[[User:आशीष भटनागर|<b>आशीष भटनागर</b>]][[User_talk:आशीष भटनागर|<font style="color:#FF4F00;background:#4B0082;"> &nbsp;वार्ता&nbsp;</font>]] </span></small> ०८:४२, १७ मई २०१० (UTC) :शायद मैं जो समझ ही रहा हूं, वही वरीयता है, जो अभी प्राथमिकता पर है। तब तो शुभकामनाएं। इससे अधिक लिखना शायद उचित न हो, फिर भी आशा और प्रार्थना है, कि हिन्दी विकी पर जल्दी ही पहले की तरह लौटो। हम सदा प्रतीक्षारत हैं।--<small><span style="border:1px solid #0000ff;padding:1px;">'''प्र:'''[[User:आशीष भटनागर|<b>आशीष भटनागर</b>]][[User_talk:आशीष भटनागर|<font style="color:#FF4F00;background:#4B0082;"> &nbsp;वार्ता&nbsp;</font>]] </span></small> ११:३२, १७ मई २०१० (UTC) == [[फ्लाइट रिकॉर्डर]] == इस उपकरण को फ्लाइट यानि उड़ान के लिये प्रयोग किया जाता है। उड़ान के डाटा को इसमें रिकॉर्ड यानि अभिलेख करते हैं, अतः इसे उड़ान अभिलेखक कहा जा सकता है। मैंने अंग्रेज़ी के पृष्ठ को हिन्दी नाम पर पुनर्निर्देशित कर दिया है। उसे बड़ा कर लेख बना लो, या दो-३ वाक्यों का एक पृष्ठ बना कर लिंक रूप में प्रयोग कर सकते हो।--<small><span style="border:1px solid #0000ff;padding:1px;">'''प्र:'''[[User:आशीष भटनागर|<b>आशीष भटनागर</b>]][[User_talk:आशीष भटनागर|<font style="color:#FF4F00;background:#4B0082;"> &nbsp;वार्ता&nbsp;</font>]] </span></small> ०५:४४, २६ मई २०१० (UTC) {{tb|वार्ता:अन्तर्दहन इंजन|हिन्दीकरण 1}}-- <span style="background:#F0DC82;" >[[User:Mayurkumar |'''<font color="#FF4500">मयुर</font> <font color="#00FF00">कुमार</font>''']] | <small>[[सदस्य वार्ता:Mayurkumar |<font color="blue">वार्ता</font>]]</small>&nbsp;</span> ०६:५२, १२ जून २०१० (UTC) {{tb|वार्ता:अन्तर्दहन इंजन|हिन्दीकरण 1|ts=११:३८, १२ जून २०१० (UTC)}}-- <span style="background:#F0DC82;" >[[User:Mayurkumar |'''<font color="#FF4500">मयुर</font> <font color="#00FF00">कुमार</font>''']] | <small>[[सदस्य वार्ता:Mayurkumar |<font color="blue">वार्ता</font>]]</small>&nbsp;</span> १२:०८, १२ जून २०१० (UTC) ==बर्बरता== गुंजन जी नमस्कार! कृप्या चौपाल पर बर्बरता संबंधित नीतियों पर अपना सुझाव दे, आप जैसे अत्यंत अनुभवी सदस्य के सुझाव या आदेश की अत्यंत आवश्यकता है-- <span style="background:#F0DC82;" >[[User:Mayurkumar |'''<font color="#FF4500">मयुर</font> <font color="#00FF00">कुमार</font>''']] | <small>[[सदस्य वार्ता:Mayurkumar |<font color="blue">वार्ता</font>]]</small>&nbsp;</span> ०५:०३, १५ जून २०१० (UTC) ==विशेषाधिकार के लिये नामांकन== मैनें आपको कुछ सदस्य विशेषाधिकारों के लिये नामांकित किया है यदि आपको यह प्रस्ताव स्वीकार्य है तो कृपया [[विकिपीडिया:विशेषाधिकार निवेदन|यहां]] इसे स्वीकार करे-- <span style="background:#F0DC82; border:1px solid #FFD700;">[[चित्र:Admin logo.gif|30px|यह सदस्य हिन्दी विकिपीडीया के प्रबंधक है।]]<small>[[User:Mayurkumar |'''<font color="#FF4500">मयुर</font> <font color="#008000">कुमार</font>''']]</small> | <small>[[सदस्य वार्ता:Mayurkumar |<font color="#1C39BB">वार्ता</font>]]</small>&nbsp;</span> ०५:२८, २१ जुलाई २०१० (UTC) बधाई एवं धन्यवाद! आपको रोलबैकर्स, स्वतःपरीक्षित सदस्य ,पुनरीक्षक सदस्यताएं दी गयी। आशा है यह अधिकार आपके कार्यो में सहायक सिद्ध होगें-- <span style="background:#F0DC82; border:1px solid #FFD700;">[[चित्र:Admin logo.gif|30px|यह सदस्य हिन्दी विकिपीडीया के प्रबंधक है।]]<small>[[User:Mayurkumar |'''<font color="#FF4500">मयुर</font> <font color="#008000">कुमार</font>''']]</small> | <small>[[सदस्य वार्ता:Mayurkumar |<font color="#1C39BB">वार्ता</font>]]</small>&nbsp;</span> ०६:१३, २२ जुलाई २०१० (UTC) ==विशिष्ट सदस्य== गुंजन जी मैने विशिष्ट सदस्यता के लिये आपको नामांकित किया है अगर आप को यह प्रस्ताव मंजुर है तो इसे स्वीकार करे, दरसल इस सदस्यता के इन्सटालेशन में देरी हुई इसके लिये क्षमा चाहूँगा-- <span style="background:#F0DC82; border:1px solid #FFD700;">[[चित्र:Admin logo.gif|30px|यह सदस्य हिन्दी विकिपीडीया के प्रबंधक है।]]<small>[[User:Mayurkumar |'''<font color="#FF4500">मयुर</font> <font color="#008000">कुमार</font>''']]</small> | <small>[[सदस्य वार्ता:Mayurkumar |<font color="#1C39BB">वार्ता</font>]]</small>&nbsp;</span> १०:०४, २३ जुलाई २०१० (UTC) बधाई हो आप विशिष्ट सदस्य बनाये गये, आशा है आप इन से जुड़े दायित्वों को निभाकर हमेशा विकि को लाभान्वित करते रहेंगे, मेरी तरफ से आपको शुभकामनाएँ-- <span style="background:#F0DC82; border:1px solid #FFD700;">[[चित्र:Admin logo.gif|30px|यह सदस्य हिन्दी विकिपीडीया के प्रबंधक है।]]<small>[[User:Mayurkumar |'''<font color="#FF4500">मयुर</font> <font color="#008000">कुमार</font>''']]</small> | <small>[[सदस्य वार्ता:Mayurkumar |<font color="#1C39BB">वार्ता</font>]]</small>&nbsp;</span> १८:४८, २६ जुलाई २०१० (UTC) ==मन्दाकिनी== जी हाँ मैंने इस नाम का लेख हटाया था। दरसल मन्दाकिनी नाम के तीन लेख बनाए जा सकते थे, जो अब [[मन्दाकिनी]] पर देखे जा सकते हैं। मैंने भूल से मन्दाकिनी लेख का नाम मन्दाकिनी नदी कर दिया। फिर लेख पढ़कर देखा तो मन्दाकिनी अभिनेत्री पर बना था। फिर नाम दोबारा बदल कर मन्दाकिनी (अभिनेत्री) किया और पुनर्निर्देशन मन्दाकिनी पर रहने दिया। इसलिए यदि अब मन्दाकिनी शब्द का उपयोग नदी के सन्दर्भ में करना होता तो तब भी निर्देशन मन्दाकिनी (अभिनेत्री) पर होता इसलिए मन्दाकिनी नाम का लेख हटाना पड़ा। लेकिन अब सब ठीक है। सारे लेख बन गए हैं और उपयुक्त निर्देशन भी है। किसी कष्ट हेतु क्षमाप्राथी हूँ। [[सदस्य:रोहित रावत|रोहित रावत]] ०७:१७, २८ जुलाई २०१० (UTC) {{tb|Mayurkumar|बहु सम्पादन (Multi Edits)}}-- <span style="background:#F0DC82; border:1px solid #FFD700;">[[चित्र:Admin logo.gif|30px|यह सदस्य हिन्दी विकिपीडीया के प्रबंधक है।]]<small>[[User:Mayurkumar |'''<font color="#FF4500">मयुर</font> <font color="#008000">कुमार</font>''']]</small> | <small>[[सदस्य वार्ता:Mayurkumar |<font color="#1C39BB">वार्ता</font>]]</small>&nbsp;</span> १२:३०, २८ जुलाई २०१० (UTC) == कृपया विशेष सदस्यता हेतु वोट करें == गुंजन जी, मैंने [[विकिपीडिया:विशेषाधिकार निवेदन#सदस्यता निवेदन#श्रीश पण्डित (स्व-नामांकन)|विशिष्ट सदस्यता हेतु आवेदन]] किया है, कृपया आपको जैसा भी उचित लगे वोट करें।--<small><span style="border:1px solid #999999;padding:1px;">[[User:Shrish|&nbsp;श्रीश e-पण्डित&nbsp;]][[User_talk:Shrish|<font style="color:#ffffff;background:#0099ff;">&nbsp;वार्ता&nbsp;</font>]] </span></small> १२:०५, १५ अगस्त २०१० (UTC) Gunjan verma81 जी नमस्कार! हिन्दी विकि को साफ्ट्वेयर एवं टुल्स स्तर पर और अधिक उन्नत बनाने एवं आने वाली बीटा थीम को भी पूरी तरह से कार्यशील बनाने हेतु मैनें अपना प्रशासक पद हेतु नामांकन किया है कृपया अपना मत [[विकिपीडिया:प्रबन्धक पद के लिये निवेदन]] पर अपना मत दें--<span style="background:#F0DC82; border:1px solid #FFD700;">[[चित्र:Admin logo.gif|30px|यह सदस्य हिन्दी विकिपीडीया के प्रबंधक है।]][[User:Mayur |'''<font color="#FF4500">Ma</font><font color="#008000">yur</font>''']][[सदस्य वार्ता:Mayur |<font color="#1C39BB">(Talk</font>]]•[[special:EmailUser/mayur |<font color="#1C39BB">Email)</font>]]&nbsp;</span> ==[[उत्तराखण्ड]] निर्वाचन== कृपया [[उत्तराखण्ड]] लेख को देखें और [[विकिपीडिया:निर्वाचित लेख उम्मीदवार]] पृष्ठ पर अपने प्रस्ताव दें। समर्थन मिलने पर ये लेख निर्वाचित किया जायेगा। समयाभाव के कारण पहले ही काफ़ी देर हो चुकी है, अतः यथासंभव शीघ्रातिशीघ्र समर्थन/सुधार/सुझाव दें। धन्यवाद सहित: --[[चित्र:Plume pen w.gif|30px|ये सदस्य हिन्दी विकिपीडिया के प्रबंधक है।]]<span style="background:#7FFFD4;" >[[User:आशीष भटनागर|<b>प्रशा:''आशीष भटनागर''</b>]][[User_talk:आशीष भटनागर|<font style="color:#00FFFF;background:#008080;"> &nbsp;''वार्ता''&nbsp;</font>]]</small> १४:२३, ९ सितंबर २०१० (UTC) == [[विकिपीडिया:प्रबन्धक पद हेतु निवेदन|प्रबन्धक के अस्थायी पद हेतु आवेदन]] == गुंजन जी नमस्कार, मैंने प्रबन्धक के अस्थायी पद हेतु आवेदन किया है। कृपया आपको जैसा उचित लगे वोट करें।--<small><span style="border:1px solid #999999;padding:1px;">[[User:Shrish|&nbsp;श्रीश e-पण्डित&nbsp;]][[User_talk:Shrish|<font style="color:#ffffff;background:#0099ff;">&nbsp;वार्ता&nbsp;</font>]] </span></small> १७:५४, १२ सितंबर २०१० (UTC) ==विभिन्न सदस्यताओं हेतु नीतियाँ== गुंजन जी नमस्कार, अन्य सभी विकि प्रोजेक्ट्स की तरह हिन्दी विकि प‍र भी स्वयं की बनायी नीतियाँ होनी चाहिये, इसके लिये मैने यह कार्य शुरु कर दिया है। इस संदर्भ में मैंने पहले विभिन्न सदस्यताओं हेतु [[विकिपीडिया:प्रबन्धक पद हेतु निवेदन|उनके आवेदन पृष्ठ]] पर नीतियाँ बनायी है जो मूलत: कुछ भारतीय एवं अन्य भाषाओं के विकिस से ली गयी है। इन नीतियों में कई संशोधन किये जा सकते है अतः आप को यदि इसमें कुछ संशोधन करना है तो अवश्य करे क्योंकि समस्त अति सक्रिय सदस्यों के समर्थन के बाद ही यह नीतियाँ लागु की जा सकती है। आशा है आप से इस संदर्भ में विकि एवं मुझे दोनों को सहयोग मिलेगा--<span style="background:#F0DC82; border:1px solid #FFD700;">[[चित्र:Admin logo.gif|30px|यह सदस्य हिन्दी विकिपीडीया के प्रबंधक है।]][[User:Mayur |'''<font color="#FF4500">Ma</font><font color="#008000">yur</font>''']][[सदस्य वार्ता:Mayur |<font color="#1C39BB">(Talk</font>]]•[[special:EmailUser/mayur |<font color="#1C39BB">Email)</font>]]&nbsp;</span> १६:००, १३ सितंबर २०१० (UTC) गुंजन जी क्या अपराधिक दिमाग लेख को हटाना उचित है क्योंकि यह लेख अंग्रेजी विकि पर भी हैं--<span style="background:#F0DC82; border:1px solid #FFD700;">[[चित्र:Admin logo.gif|30px|यह सदस्य हिन्दी विकिपीडीया के प्रबंधक है।]][[User:Mayur |'''<font color="#FF4500">Ma</font><font color="#008000">yur</font>''']][[सदस्य वार्ता:Mayur |<font color="#1C39BB">(Talk</font>]]•[[special:EmailUser/mayur |<font color="#1C39BB">Email)</font>]]&nbsp;</span> १६:३५, २३ सितंबर २०१० (UTC) ==[http://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A3%E0%A5%80:%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%81 विकिनीतियाँ]== गुंजन जी नमस्कार, समस्त विकियों की तरह हिन्दी विकि पर भी कुछ नीतियाँ होनी चाहिये ताँकि विकि के समस्त कार्य निर्विवादित एवं सुचारु तरीके से चलते रहे। इसके लिये [http://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A3%E0%A5%80:%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%81 विकिनीतियाँ] पर कुछ नीतियों का निर्माण किया गया है। कृपया इनको लागु करने के लिये अपना समर्थन [[विकिपीडिया वार्ता:प्रबन्धन अधिकार हेतु निवेदन| यहाँ]] देंवे--<span style="background:#F0DC82; border:1px solid #FFD700;">[[चित्र:Admin logo.gif|30px|यह सदस्य हिन्दी विकिपीडीया के प्रबंधक है।]][[User:Mayur |'''<font color="#FF4500">Ma</font><font color="#008000">yur</font>''']][[सदस्य वार्ता:Mayur |<font color="#1C39BB">(Talk</font>]]•[[special:EmailUser/mayur |<font color="#1C39BB">Email)</font>]]&nbsp;</span> ०६:४६, ३ अक्तूबर २०१० (UTC) गुंजन जी विकिनीतियों और खासकर प्रबंधक हटाने वाली नीतियों के संदर्भ में अपना सुझाव दें, ये नीतिया अन्य सदस्य के सुझावों पर निरंतर बदली जा रही है। आपको यहाँ के वातावरण एवं कार्यों का काफि अनुभव है। अतः आपका सुझाव विकि के लिये अत्यंत मूल्यवान हैं। कृपया इस संदर्भ में मार्गदर्शन करे--<span style="background:#F0DC82; border:1px solid #FFD700;">[[चित्र:Admin logo.gif|30px|यह सदस्य हिन्दी विकिपीडीया के प्रबंधक है।]][[User:Mayur |'''<font color="#FF4500">Ma</font><font color="#008000">yur</font>''']][[सदस्य वार्ता:Mayur |<font color="#1C39BB">(Talk</font>]]•[[special:EmailUser/mayur |<font color="#1C39BB">Email)</font>]]&nbsp;</span> ०९:१८, ८ अक्तूबर २०१० (UTC) ::गुंजन जी अब आप कृपया पृष्ठों पर हटाये का टैग मत लगाया करे क्योंकि हिन्दी विकि पर एक नये सदस्य ग्रुप उत्पात नियंत्रक बनाया गया है जिसके सदस्य किसी पृष्ठ को हटा पायेंगे। मैंने आपको भी इस ग्रुप की सदस्यता में रखा है क्योंकि आप इस संदर्भ में अत्यंत अनुभवी है। आशा है इससे हमारे विकि को तेजी मिलेगीं, धन्यवाद--<span style="background:#F0DC82; border:1px solid #FFD700;">[[चित्र:Admin logo.gif|30px|यह सदस्य हिन्दी विकिपीडीया के प्रबंधक है।]][[User:Mayur |'''<font color="#FF4500">Ma</font><font color="#008000">yur</font>''']][[सदस्य वार्ता:Mayur |<font color="#1C39BB">(Talk</font>]]•[[special:EmailUser/mayur |<font color="#1C39BB">Email)</font>]]&nbsp;</span> १३:४६, ६ दिसंबर २०१० (UTC) == Please Comment == Please comment on [[:sa:विकिपीडियासम्भाषणम्:प्रशासकानां निर्वाचनम्#REMOVAL OF HPN 2|this]] [[सदस्य:Vibhijain|Vibhijain]] १४:३१, ३० मई २०११ (UTC) == A barnstar for you! == {| style="background-color: #fdffe7; border: 1px solid #fceb92;" |rowspan="2" style="vertical-align: middle; padding: 5px;" | [[File:Writers Barnstar Hires.png|100px]] |style="font-size: x-large; padding: 3px 3px 0 3px; height: 1.5em;" | '''The Writer's Barnstar''' |- |style="vertical-align: middle; padding: 3px;" | हिन्दी विकिपीडिया के विकास में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए वैभव जैन की ओर से भेट। [[User:Vibhijain|<span style="color:#B57EDC">♛♚★Vaibhav Jain★♚♛</span>]] [[User talk:Vibhijain|<sup><span style="color:red"><small>Talk</small></span></sup>]] [[विशेष:विपत्रयोजक/Vibhijain|<sup><span style="color:blue"><small>Email</small></span></sup>]] 12:19, 19 जुलाई 2011 (UTC) |} ==विकिसम्मेलन-२०११, भारत== <div style="margin: 0.5em; border: 2px black solid; padding: 1em;background-color:#E3F0F4" > {| style="border:1px black solid; padding:2em; border-collapse:collapse; width:100%;" |- [[File:WCI_banner.png|800px|center|link=:meta:WikiConference_India_2011]]<br/> |- ! style="background-color:#FAFAFA; color:#1C2069; padding-left:2em; padding-top:.5em;" align=left |नमस्कार {{BASEPAGENAME}}, <span class="plainlinks"> प्रथम भारतीय विकि सम्मेलन इस वर्ष मुम्बई में १८ -२० नवम्बर २०११ के मध्य आयोजित हो रहा है।<br>किसी प्रकार की सूचना एवं सहायता हेतु आप हमारी [http://meta.wikimedia.org/wiki/WikiConference_India_2011 अधिकारिक वेबसाईट], [http://www.facebook.com/event.php?eid=183138458406482 फेसबुक वृत्तांत] और [https://spreadsheets.google.com/spreadsheet/viewform?hl=en_US&formkey=dGNxSzAxUndoOHRGamdDSTFMVGNrd3c6MA#gid=0 छात्रवृति प्रपत्र] देख सकते है। (छात्रवृति आवेदन की अन्तिम तिथि १५ अगस्त २०११ है।) [http://meta.wikimedia.org/wiki/WikiConference_India_2011/Wiki_Outreach 100 day long WikiOutreach] के साथ ही अब समस्त गतिविधियाँ शुरु हो रही है। '''सम्मेलन में भाग लेने हेतु आमन्त्रण''' अब शुरु हो गये है, कृपया अपनी प्रविष्टियों को '''[[m:WikiConference India 2011/Call for Participation|यहाँ]]''' जमा करे।(प्रविष्टियां जमा करने की अन्तिम तिथि ३० अगस्त २०११) है। </span><br> <br> क्योंकि आप हमारे [http://wikimedia.in/ Wikimedia India community] के भाग है इसलिये हम आपको इस सम्मेलन में भाग लेने एवं अपने अनुभव बाँटने हेतु आमन्त्रित करते है। आपके [[Special:Contributions/{{ {{{|safesubst:}}}PAGENAME}}|आपके योगदान]] हेतु धन्यवाद। हमें आशा है कि आप १८-२० नबम्बर २०११ के मध्य आयोजित इस सम्मेलन में अवश्य भाग लेंगे। |}</div> == [[विकिपीडिया:सुरक्षित पन्ने]] == कृपया इस विकी नीति में परिवर्तन हेतु [[विकिपीडिया वार्ता:सुरक्षित पन्ने#प्रस्ताव]] पर अपने विचार प्रकट करें। धन्यवाद।--[[User:Siddhartha Ghai|सिद्धार्थ घई]] ([[User talk:Siddhartha Ghai|वार्ता]]) 14:06, 21 अगस्त 2011 (UTC) == आपकी एक या अधिक फ़ाइलों को शीघ्र हटाए जाने के लिए नामांकित किया गया है == नमस्कार! आपके द्वारा अपलोड कि गई एक या अधिक फाइलें मेरे या किसी अन्य सदस्य द्वारा शीघ्र हटाए जाने के लिए नामांकित की गईं हैं और [[:श्रेणी:शीघ्र हटाने योग्य पृष्ठ]] में श्रेणीबद्ध हैं। संभवतः क्योंकि फ़ाइल अप्रयुक्त है और उसके साथ कोई वैध लाइसेंस नही है। आप चित्रों की जाँच करके मदद कर सकते हैं। कृपया सुनिश्चित करें कि चित्र का एक उचित स्रोत दिया हो (उदाहरण के लिए "स्वयं का कार्य", वेबपृष्ठ के लिए लिंक या पुरानी किताब का संदर्भ), रचयिता (फोटोग्राफर) का नाम(अथवा सदस्य नाम) दिया हो, फ़ाइल का उचित वर्णन हो और फ़ाइल एक वैध लाइसेंस के अंतर्गत हो। आप इस जानकारी को जोड़ने के लिये [[साँचा:Information]] का प्रयोग कर सकते हैं। हिन्दी विकिपीडिया पर उपलब्ध कॉपीराइट साँचे आपको [[:श्रेणी:कॉपीराइट साँचे]] एवं [[:श्रेणी:चित्र कॉपीराइट साँचे]] में मिल जाएँगे। यदि फ़ाइल उचित उपयोग(fair use) के अंतर्गत अपलोड की गयी है तो उसपर उचित उपयोग औचित्य(fair use rationale) अवश्य लगाएँ। यदि इन फ़ाइलों पर 15 दिन तक लाइसेंस नहीं लगाया गया तो इन फ़ाइलों को [[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने की नीति|हटाने की नीति]] के अनुसार हटाया जाएगा। यह फ़ाइल आपकी नहीं है? कृपया मुझे ज्ञात कराएँ या मूल अपलोडर को सूचित करें। फ़ाइलें जो शीघ्र हटाए जाने के लिए नामांकित हैं: # [[:File:Kempty_fall.jpg]] कृपया अपने द्वारा अपलोड की [[विशेष:ListFiles/{{PAGENAME}}|अन्य फ़ाइलों]] को भी जाँचें और सुनिश्चित करें कि उनपर ये सब जानकारी उपलब्ध हो। धन्यवाद--[[User:MGA73|MGA73]] ([[User talk:MGA73|वार्ता]]) 21:44, 5 नवम्बर 2011 (UTC) ==सन्देश== {{सन्देश|विकिपीडिया:चौपाल|लेख मुल्यांकन|ts=13:42, 12 दिसम्बर 2011 (UTC)}} [[User:Siddhartha Ghai|सिद्धार्थ घई]] ([[User talk:Siddhartha Ghai|वार्ता]]) 13:42, 12 दिसम्बर 2011 (UTC) ==सन्देश== {{सन्देश|विकिपीडिया:चौपाल|नया मुखपृष्ठ|ts=19:07, 19 दिसम्बर 2011 (UTC)}} [[User:Mayur|<font face="Rage Italic" size="4.5" style="color:#000000;color:#FF4500"><i>Ma</i></font><font face="Rage Italic" size="5" style="color:#000000;color:#008000"><i>yur</i></font>]] <sup><span style="font-family:Italic;color:black">[[user_talk:Mayur|(talk]]•[[special:EmailUser/mayur|Email)]]</span></sup> 19:07, 19 दिसम्बर 2011 (UTC) == चौपाल पर नया प्रस्ताव == नमस्कार, चौपाल पर अन्य विकिमीडिया परियोजनाओं से ली सामग्री के संबंध में [[वि:चौपाल#en:Wikipedia:Copying within Wikipedia|कुछ समय पहले हुई चर्चा]] के निष्कर्षों के आधार पर चौपाल पर आम सहमति की प्राप्ति हेतु [[वि:चौपाल#उत्तम कार्यशैली प्रस्ताव|एक नया प्रस्ताव]] रखा है। आपसे निवेदन है कि इसमें अपने विचार एवं सुझाव दें ताकि इस प्रस्ताव के उपयोग से हिन्दी विकिपीडिया को अधिक बेहतर बनाया जा सके। धन्यवाद --[[User:Siddhartha Ghai|सिद्धार्थ घई]] ([[User talk:Siddhartha Ghai|वार्ता]]) 19:07, 4 जनवरी 2012 (UTC) ==सन्देश== {{सन्देश|विकिपीडिया:चौपाल|लेख मुल्यांकन|ts=02:45, 8 जनवरी 2012 (UTC)}} [[User:Siddhartha Ghai|सिद्धार्थ घई]] ([[User talk:Siddhartha Ghai|वार्ता]]) 02:45, 8 जनवरी 2012 (UTC) ==चर्चा हेतु कुछ विषय== {{सन्देश|विकिपीडिया:चौपाल|चर्चा हेतु कुछ विषय|ts=08:28, 30 जनवरी 2012 (UTC)}}-- [[सदस्य: Sbharti |सौरभ भारती]] ([[सदस्य वार्ता:Sbharti |वार्ता]]) 08:28, 30 जनवरी 2012 (UTC) ==सन्देश== {{सन्देश|विकिपीडिया:चौपाल|हिंग्लिशबॉट|ts=03:25, 31 जनवरी 2012 (UTC)}} अति-आवश्यक चर्चा, कृपया शीघ्र अतिशीघ्र देखें। [[User:Siddhartha Ghai|सिद्धार्थ घई]] ([[User talk:Siddhartha Ghai|वार्ता]]) 03:25, 31 जनवरी 2012 (UTC) == मुखपृष्ठ में परिवर्तन == कृपया मुखपृष्ठ में प्रस्तावित परिवर्तनों पर अपनी टिप्पणी/समर्थन/विरोध [[विकिपीडिया:चौपाल#मुखपृष्ठ के पेज व्यूज में उछाल]] पर व्यक्त करें। धन्यवाद --[[User:Siddhartha Ghai|सिद्धार्थ घई]] ([[User talk:Siddhartha Ghai|वार्ता]]) 19:49, 4 फ़रवरी 2012 (UTC) ==File copyright problem with चित्र:Ravishankar Shukla taking oath.jpg== [[File:Copyright-problem.svg|64px|left|alt=|link=]] Thank you for uploading [[:चित्र:Ravishankar Shukla taking oath.jpg]]. However, it currently is missing information on its '''copyright''' and '''licensing''' status. Wikipedia takes [[Wikipedia:Copyrights|copyright]] very seriously. It may be deleted soon, unless we can verify that it has an acceptable license status and a verifiable source. Please add this information by editing the [[:चित्र:Ravishankar Shukla taking oath.jpg|image description page]]. You may refer to the '''[[WP:IUP#Adding images|image use policy]]''' to learn what files you can or cannot upload on Wikipedia. The page on '''[[Wikipedia:Image copyright tags|copyright tags]]''' may help you to find the correct tag to use for your file. If the file is already gone, you can still make a [[Wikipedia:Requests for undeletion|request for undeletion]] and ask for a chance to fix the problem.<!-- Template:You can request undeletion --> Please also check any other files you may have uploaded to make sure they are correctly tagged. Here is [{{fullurl:Special:Log|type=upload&user=Gunjan_verma81}} a list of your uploads]. If you have any questions, please feel free to ask them at the [[Wikipedia:Media copyright questions|media copyright questions page]]. Thanks again for your cooperation.<!-- Template:Di-no license-notice --> [[User:Lovysinghal|लवी सिंघल]] ([[User talk:Lovysinghal|वार्ता]]) 08:57, 8 फ़रवरी 2012 (UTC) == Congratulations on becoming an admin == Hello, following the conclusion and results of the Request for Comments on meta on the situation here on hiwiki, see [[m:Requests for comment/Userrights on Hindi Wikipedia]], several userrights have been removed and you have been made a temporary sysop/admin here till the 20th of September this year. If you're active on [[m:IRC|IRC]], you can request access to the global admin channel [irc://irc.freenode.net/wikimedia-admin #wikimedia-admin] by contacting any user from the list on [[m:IRC/wikimedia-admin]]. Please do not hesitate to contact me or any steward if you have any questions, either on our [[m:|meta]] talk pages or by dropping by our channel at [irc://irc.freenode.net/wikimedia-stewards #wikimedia-stewards] [http://webchat.freenode.net/?channels=#wikimedia-admin (connect)]. Regards, <i><b>[[User:Snowolf|<font color = "darkmagenta">Snowolf</font>]] <sup><small>[[m:User:Snowolf|<font color = "darkmagenta">How can I help?</font>]]</small></sup></b></i> 17:13, 20 मार्च 2012 (UTC) == Narayam == नमस्कार गुंजन जी। हाल ही में मीडियाविकी अपडेट होने के बाद से वर्तमान टंकण प्रणाली में कुछ समस्याएँ आ रही हैं जिनकी व्याख्या रोहित जी ने चौपाल पर करी है। इन समस्याओं को दूर करने के लिये वर्तमान प्रणाली के नए रूप [[:mw:Extension:Narayam|Narayam extension]] को हिन्दी विकिपीडिया पर सुधारों सहित सक्षम करने का प्रस्ताव [[वि:चौपाल/Narayam]] पर रखा गया है। कृपया इसे अपना समर्थन प्रदान करें। धन्यवाद।--[[User:Siddhartha Ghai|सिद्धार्थ घई]] ([[User talk:Siddhartha Ghai|वार्ता]]) 18:42, 24 मार्च 2012 (UTC) {{subst:CFDNote|1=श्रेणी:उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री}} [[User:Lovysinghal|लवी सिंघल]] ([[User talk:Lovysinghal|वार्ता]]) 18:24, 9 अप्रैल 2012 (UTC) == [[:चित्र:Nehru signing Indian Constitution.jpg|चित्र:Nehru signing Indian Constitution.jpg]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[Image:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:चित्र:Nehru signing Indian Constitution.jpg|चित्र:Nehru signing Indian Constitution.jpg]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#फ़4|मापदंड फ़4]] के&nbsp;अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#फ़4|फ़4]]{{*}} ग़ैर मुक्त उचित उपयोग उपयोग फ़ाइल जिसपर कोई उचित उपयोग औचित्य न दिया हो'''</center> ऐसी कॉपीराइट सुरक्षित फ़ाइलें जिनपर 7 दिन तक कोई उचित उपयोग औचित्य न दिया हो, उन्हें इस मापदंड के अंतर्गत हटाया जा सकता है। यदि आपने इस फ़ाइल को किसी लेख में प्रयोग करने हेतु अपलोड किया था तो कृपया उस लेख में उपयोग उचित उपयोग (fair use) में क्यों आता है, इसके लिये एक औचित्य (fair use rationale) फ़ाइल पृष्ठ पर लिखें। विकिपीडिया पर कॉपीराइट सुरक्षित फ़ाइलों को तभी रखा जा सकता है यदि उनका उपयोग "उचित उपयोग" (fair use) के अंतर्गत आता हो और उनपर एक उचित उपयोग औचित्य (fair use rationale) दिया हो। यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है। [[User:Siddhartha Ghai|सिद्धार्थ घई]] ([[User talk:Siddhartha Ghai|वार्ता]]) 18:52, 23 अप्रैल 2012 (UTC) == नामांकन == Gunjan जी,नमस्कार मैंने स्वयं को हिन्दी विकिपीडिया के प्रबन्धक अधिकार हेतु नामांकित किया है। आप से निवेदन है कि [[विकिपीडिया:प्रबन्धन_अधिकार_हेतु_निवेदन|विकिपीडिया]] पर आकर अपना मत दे। यदि आपको मुझ मैं कोई कमी लगे तो ईमेल से भी बता सकते है। उस कमी को दुर करने का मैं पुर्ण प्रयत्न करुगा। धन्यवाद<br> [[User:AnandVivekSatpathi|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;"><font color="green"><sup></sup> आनन्द विवेक सतपथी</font></span>]]<sup>[[User talk:AnandVivekSatpathi|<font color="#000000"> सन्देश</font>]]</sup> 11:25, 3 मई 2012 (UTC) == विशेष पृष्ठ अनुवाद == नमस्कार गुंजन जी। ट्रांसलेटविकि पर अब विशेष पृष्ठों के नामों के अनुवाद की सुविधा उपलब्ध है। परंतु ये अनुवाद हिन्दी के लिये अब तक नहीं किये गए हैं। चूँकि ये अनुवाद सभी के लिये लागू होते हैं, अतः ट्रांसलेटविकि के प्रबंधकों के अनुसार ये सर्वसम्मति से ही किये जाने चाहियें। अतः मैंने [[विकिपीडिया:चौपाल/विशेष पृष्ठ अनुवाद]] पर इनके अनुवाद के लिये कुछ विकल्प रखे हैं। कृपया इनपर टिप्पणी करें ताकि इन्हें तय कर के उपयुक्त अनुवादों को सर्वसम्मति से ट्रांसलेटविकि पर डाला जा सके और अंग्रेज़ी नामों के प्रयोग की अनिवार्यता समाप्त की जा सके। आभारी--[[User:Siddhartha Ghai|सिद्धार्थ घई]] ([[User talk:Siddhartha Ghai|वार्ता]]) 16:24, 6 मई 2012 (UTC) ---- नमस्कार गुंजन जी। अनेक सदस्यों की सहायता से ये अनुवाद पूर्ण हो गए हैं। अतः इनकी समीक्षा हेतु (कि ये सर्वसम्मति प्राप्त करते हैं या नहीं) [[विकिपीडिया:चौपाल/विशेष_पृष्ठ_अनुवाद#मत]] पर मत रखा गया है। कृपया इसमें अपने विचार रखें। यदि कोई आपत्ति हो तो अवश्य बताएँ। धन्यवाद--[[User:Siddhartha Ghai|सिद्धार्थ घई]] ([[User talk:Siddhartha Ghai|वार्ता]]) 12:17, 13 मई 2012 (UTC) == [[:चित्र:Tirathgarh.jpg|चित्र:Tirathgarh.jpg]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[Image:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:चित्र:Tirathgarh.jpg|चित्र:Tirathgarh.jpg]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#फ़1|मापदंड फ़1]] के&nbsp;अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#फ़1|फ़1]]{{*}} 14 दिन(2 सप्ताह) से अधिक समय तक कोई लाइसेंस न होना'''</center> इसमें वे सभी फाइलें आती हैं जिनमें अपलोड होने से दो सप्ताह के बाद तक भी कोई लाइसेंस नहीं दिया गया है। ऐसा होने पर यदि फ़ाइल पुरानी होने के कारण सार्वजनिक क्षेत्र(पब्लिक डोमेन) में नहीं होगी, तो उसे शीघ्र हटा दिया जाएगा। ध्यान रखें कि विकिपीडिया पर केवल मुक्त फ़ाइलें ही रखी जा सकती हैं। यह फ़ाइल तभी रखी जा सकती है यदि इसका कॉपीराइट धारक इसे किसी मुक्त लाइसेंस के अंतर्गत विमोचित करे। यदि ऐसा न हो तो इसे विकिपीडिया पर नहीं रखा जा सकता। यदि इस फ़ाइल के कॉपीराइट की जानकारी आपको नहीं है तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर सहायता माँग सकते हैं। सहायता माँगते समय कृपया इसका स्रोत (जहाँ से आपको यह फ़ाइल मिली) अवश्य बताएँ। यदि आपको इसके कॉपीराइट की जानकारी है तो कृपया [[:श्रेणी:कॉपीराइट साँचे]] में से कोई उपयुक्त साँचा फ़ाइल पर लगा दें। यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है। [[User:Siddhartha Ghai|सिद्धार्थ घई]] ([[User talk:Siddhartha Ghai|वार्ता]]) 18:23, 17 मई 2012 (UTC) == [[:चित्र:Tikona fort.jpg|चित्र:Tikona fort.jpg]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[Image:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:चित्र:Tikona fort.jpg|चित्र:Tikona fort.jpg]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#फ़1|मापदंड फ़1]] के&nbsp;अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#फ़1|फ़1]]{{*}} 14 दिन(2 सप्ताह) से अधिक समय तक कोई लाइसेंस न होना'''</center> इसमें वे सभी फाइलें आती हैं जिनमें अपलोड होने से दो सप्ताह के बाद तक भी कोई लाइसेंस नहीं दिया गया है। ऐसा होने पर यदि फ़ाइल पुरानी होने के कारण सार्वजनिक क्षेत्र(पब्लिक डोमेन) में नहीं होगी, तो उसे शीघ्र हटा दिया जाएगा। ध्यान रखें कि विकिपीडिया पर केवल मुक्त फ़ाइलें ही रखी जा सकती हैं। यह फ़ाइल तभी रखी जा सकती है यदि इसका कॉपीराइट धारक इसे किसी मुक्त लाइसेंस के अंतर्गत विमोचित करे। यदि ऐसा न हो तो इसे विकिपीडिया पर नहीं रखा जा सकता। यदि इस फ़ाइल के कॉपीराइट की जानकारी आपको नहीं है तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर सहायता माँग सकते हैं। सहायता माँगते समय कृपया इसका स्रोत (जहाँ से आपको यह फ़ाइल मिली) अवश्य बताएँ। यदि आपको इसके कॉपीराइट की जानकारी है तो कृपया [[:श्रेणी:कॉपीराइट साँचे]] में से कोई उपयुक्त साँचा फ़ाइल पर लगा दें। यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है। [[User:Siddhartha Ghai|सिद्धार्थ घई]] ([[User talk:Siddhartha Ghai|वार्ता]]) 18:26, 17 मई 2012 (UTC) == [[:चित्र:Sulabh.JPG|चित्र:Sulabh.JPG]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[Image:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:चित्र:Sulabh.JPG|चित्र:Sulabh.JPG]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#फ़1|मापदंड फ़1]] के&nbsp;अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#फ़1|फ़1]]{{*}} 14 दिन(2 सप्ताह) से अधिक समय तक कोई लाइसेंस न होना'''</center> इसमें वे सभी फाइलें आती हैं जिनमें अपलोड होने से दो सप्ताह के बाद तक भी कोई लाइसेंस नहीं दिया गया है। ऐसा होने पर यदि फ़ाइल पुरानी होने के कारण सार्वजनिक क्षेत्र(पब्लिक डोमेन) में नहीं होगी, तो उसे शीघ्र हटा दिया जाएगा। ध्यान रखें कि विकिपीडिया पर केवल मुक्त फ़ाइलें ही रखी जा सकती हैं। यह फ़ाइल तभी रखी जा सकती है यदि इसका कॉपीराइट धारक इसे किसी मुक्त लाइसेंस के अंतर्गत विमोचित करे। यदि ऐसा न हो तो इसे विकिपीडिया पर नहीं रखा जा सकता। यदि इस फ़ाइल के कॉपीराइट की जानकारी आपको नहीं है तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर सहायता माँग सकते हैं। सहायता माँगते समय कृपया इसका स्रोत (जहाँ से आपको यह फ़ाइल मिली) अवश्य बताएँ। यदि आपको इसके कॉपीराइट की जानकारी है तो कृपया [[:श्रेणी:कॉपीराइट साँचे]] में से कोई उपयुक्त साँचा फ़ाइल पर लगा दें। यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है। [[User:Siddhartha Ghai|सिद्धार्थ घई]] ([[User talk:Siddhartha Ghai|वार्ता]]) 18:28, 17 मई 2012 (UTC) == [[:चित्र:Vinod dua.jpg|चित्र:Vinod dua.jpg]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[Image:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:चित्र:Vinod dua.jpg|चित्र:Vinod dua.jpg]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व6फ़|मापदंड व6फ़]] के&nbsp;अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व6फ़|व6फ़]]{{*}} साफ़ कॉपीराइट उल्लंघन - फ़ाइलें'''</center> इस मापदंड में वे सभी फ़ाइलें आती हैं जो साफ़ तौर पर कॉपीराइट उल्लंघन हैं और जिनके इतिहास में उल्लंघन से मुक्त कोई भी अवतरण नहीं है। इसमें वे सभी फ़ाइलें भी आती हैं जो अंतरजाल पर किसी ऐसी वेबसाइट से लिये गए हैं जो साफ़-साफ़ फ़ाइल को मुक्त लाइसेंस के अंतर्गत नहीं देती है। इसमें वे सभी फ़ाइलें भी आती हैं जिनपर साफ़-साफ़ गलत लाइसेंस का प्रयोग किया गया है। इसमें वे फ़ाइलें भी आती हैं जिनका कॉपीराइट स्वयं अपलोड करने वाले सदस्य के पास है और सदस्य ने उसका पहला प्रकाशन किसी मुक्त लाइसेंस के अंतर्गत नहीं किया है (यदि कॉपीराइट आपके ही पास है और आप इसे पहले कहीं प्रकाशित कर चुके हैं तो कृपया [[:m:OTRS|ओ॰टी॰आर॰एस]] से संपर्क करें)। यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है। [[User:Lovysinghal|लवी सिंघल]] ([[User talk:Lovysinghal|वार्ता]]) 07:23, 10 जून 2012 (UTC) ==सन्देश== {{सन्देश|विकिपीडिया:चौपाल|Sysop Gunjan verma81|ts=07:25, 10 जून 2012 (UTC)}} I humbly request you not to take it otherwise. [[User:Lovysinghal|लवी सिंघल]] ([[User talk:Lovysinghal|वार्ता]]) 07:25, 10 जून 2012 (UTC) == आपके लिये एक सम्मान == {| style="background-color: #fdffe7; border: 1px solid #fceb92;" |rowspan="2" style="vertical-align: middle; padding: 5px;" | [[File:Special Barnstar Hires.png|100px]] |style="font-size: x-large; padding: 3px 3px 0 3px; height: 1.5em;" | '''विशेष बार्नस्टार''' |- |style="vertical-align: middle; padding: 3px;" | For being a sport and taking policy decisions in the right spirit :) Hi.wiki community is grateful for your contributions. [[User:Lovysinghal|लवी सिंघल]] ([[User talk:Lovysinghal|वार्ता]]) 15:56, 12 जून 2012 (UTC) |} == [[:चित्र:Chitradhara.jpg|चित्र:Chitradhara.jpg]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[Image:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:चित्र:Chitradhara.jpg|चित्र:Chitradhara.jpg]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है। released only for use on wikipedia by author http://www.flickr.com/photos/roopesh_kohad/846199931/#preview hence the license is not appropriate per wikipedia policy. यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है। यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं।[[User:Siddhartha Ghai|सिद्धार्थ घई]] ([[User talk:Siddhartha Ghai|वार्ता]]) 06:33, 18 अक्टूबर 2012 (UTC) :Hello Gunjan, :The problem with this upload is that its use is only allowed on wikipedia and nowhere else. However, wikipedia policy dictates that media content should be reusable by others (including commercial use and making of derivative works). :The uploader has, on the above-linked url, allowed you to use it on wikipedia; but he has not allowed reuse. In order that this image be acceptable on wikipedia, this kind of use has to be allowed. The easiest way is that the uploader release it at flickr under CC-BY-SA and this should be reflected in the copyright tag at the page (which can be seen in the right column to currently read ''© All Rights Reserved''). This should be CC-BY-SA or other free license. Then this (beautiful) image will be acceptable for wikipedia (and wikimedia commons). PS:note that CC-BY-NC-ND, CC-BY-NC, CC-BY-ND are not acceptable. And this image won't qualify for fair use. Hope this answers your question. Regards--[[User:Siddhartha Ghai|सिद्धार्थ घई]] ([[User talk:Siddhartha Ghai|वार्ता]]) 13:31, 18 अक्टूबर 2012 (UTC) == [[:श्रेणी:भारत की राजधानियां|श्रेणी:भारत की राजधानियां]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[Image:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:श्रेणी:भारत की राजधानियां|श्रेणी:भारत की राजधानियां]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के निम्न मापदंडों के&nbsp;अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है। * '''[[वि:हटाना#व1|व1]]. अर्थहीन नाम अथवा सम्पूर्णतया अर्थहीन सामग्री वाले पृष्ठ''' * '''[[वि:हटाना#व5|व5]]. ख़ाली पृष्ठ''' यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<font color="orange">☎</font>[[u:Manojkhurana|<u><b><font color="green">मनोज खुराना</font></b></u>]] <sup> [[user talk:Manojkhurana| <b><font color="orange">वार्ता </font> </b>]] </sup> 15:14, 14 नवम्बर 2013 (UTC) == [[:कुली ( फिल्म )|कुली ( फिल्म )]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[Image:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:कुली ( फिल्म )|कुली ( फिल्म )]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व1|मापदंड व1]] के&nbsp;अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व1|व1]]{{*}} अर्थहीन नाम अथवा सम्पूर्णतया अर्थहीन सामग्री वाले पृष्ठ'''</center> इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिनका नाम अर्थहीन है, उदाहरण:"स्द्ग्फ्द्ग"; अथवा जिनमें सामग्री अर्थहीन है, चाहे उसका नाम अर्थहीन न हो, उदाहरण:लेख जिसमें सामग्री है:"ध्ब्द्फ्ह्फ़" यदि आपने यह पृष्ठ परीक्षण के लिये बनाया था तो उसके लिये [[वि:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का उपयोग करें। यदि आप विकिपीडिया पर हिन्दी टाइप करना सीखना चाहते हैं तो [[विकिपीडिया:देवनागरी में कैसे टंकण करें?|देवनागरी में कैसे टाइप करें]] पृष्ठ देखें। यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है। यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं।{{#if:|<span style="background-color:☆★;color:green;"></span>|<span style="color:green;">☆★</span>}}[[u:संजीव कुमार|<u><b>{{#if:|<span style="background-color:संजीव कुमार;color:Magenta;"></span>|<span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span>}}</b></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|{{#if:|<span style="background-color:✉✉;color:blue;"></span>|<span style="color:blue;">✉✉</span>}}]]) 16:05, 26 नवम्बर 2013 (UTC) == [[:विद्युदणु ढांचा|विद्युदणु ढांचा]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन == नमस्कार, [[:विद्युदणु ढांचा|विद्युदणु ढांचा]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/विद्युदणु ढांचा|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/विद्युदणु ढांचा]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है। नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है: <center>पूर्णतः अन्य भाषा में लिखा लेख। विद्युदणु पर पहले भी चर्चा हुई थी जिसके अनुसार इलेक्ट्रॉन के स्थान पर विद्युदणु शब्द प्रयुक्त करना सही नहीं है।</center> कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें। चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ।<span style="color:green;">☆★</span>[[u:संजीव कुमार|<u>'''<span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span>'''</u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 04:06, 1 नवम्बर 2014 (UTC) == [[:सिद्धार्थ आनंद की अगली फ़िल्म|सिद्धार्थ आनंद की अगली फ़िल्म]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन == नमस्कार, [[:सिद्धार्थ आनंद की अगली फ़िल्म|सिद्धार्थ आनंद की अगली फ़िल्म]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/सिद्धार्थ आनंद की अगली फ़िल्म|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/सिद्धार्थ आनंद की अगली फ़िल्म]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है। नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है: <center>मैं इस पुनर्निर्देश पृष्ठ को हटाने के लिये नामांकित करता हूँ। "सिद्धार्थ आनंद की अगली फ़िल्म" ऐसा नाम रखना ठीक नहीं है।</center> कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें। चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ।<b>[[User:हिंदुस्थान वासी|<font color="sky blue">पीयूष</font>]]</b><sup>[[User talk:हिंदुस्थान वासी|<font color="kesari">वार्ता</font>]]</sup> 09:16, 1 नवम्बर 2014 (UTC) == [[:कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह|कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[Image:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह|कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व6ल|मापदंड व6ल]] के&nbsp;अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व6ल|व6ल]]{{*}} साफ़ कॉपीराइट उल्लंघन - लेख'''</center> इस मापदंड में वे सभी लेख आते हैं जो साफ़ तौर पर कॉपीराइट उल्लंघन हैं और जिनके इतिहास में उल्लंघन से मुक्त कोई भी अवतरण नहीं है। इसमें वे लेख भी आते हैं जिनपर डाली गई सामग्री का कॉपीराइट स्वयं उसी सदस्य के पास है और सदस्य ने उसका पहला प्रकाशन किसी मुक्त लाइसेंस के अंतर्गत नहीं किया है। इसमें वे लेख भी आते हैं जिन्हें किसी अन्य वेबसाइट अथवा ब्लॉग से ज्यों-का-त्यों अथवा बहुत कम बदलावों के साथ कॉपी-पेस्ट कर के बनाया गया है। यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है। [[User:हिंदुस्थान वासी|पीयूष]] ([[User talk:हिंदुस्थान वासी|वार्ता]])<sup>''[[विशेष:योगदान/हिंदुस्थान_वासी|योगदान]]''</sup> 13:56, 24 फ़रवरी 2015 (UTC) == [[:अफ्रीका के द्वीपों की सूची|अफ्रीका के द्वीपों की सूची]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:अफ्रीका के द्वीपों की सूची|अफ्रीका के द्वीपों की सूची]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल1|मापदंड ल1]] के&nbsp;अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल1|ल1]]{{*}} पूर्णतया अन्य भाषा में लिखे लेख'''</center> इसमें वे लेख आते हैं जो पूर्णतया हिन्दी के अलावा किसी और भाषा में लिखे हुए हैं, चाहे उनका नाम हिन्दी में हो या किसी और भाषा में। हिन्दी विकिपीडिया पर हिन्दी के अतिरिक्त किसी अन्य भाषा में लेख बनाना मना है। यदि आप किसी अन्य भाषा में लेख बनाना चाहते हैं तो कृपया [[:m:List of Wikipedias|विकिपीडियाओं की पूर्ण सूची]] देखें और उपयुक्त भाषा वाले विकिपीडिया में यह लेख बनाएँ। यदि आपने यह लेख किसी अन्य भाषा के विकिपीडिया से कॉपी कर के यहाँ डाला है और आप इसका हिन्दी अनुवाद करना चाहते हैं तो कृपया पहले [[विकिपीडिया:अन्य विकिमीडिया परियोजनाओं से सामग्री लेना]] को एक बार पढ़ लें। इसके अतिरिक्त, अनुवाद सम्पूर्ण होने से पहले लेख को मुख्य नामस्थान में ना डालें, बलकी अपने सदस्य उप-पृष्ठ की तरह उसका अनुवाद करें। अनुवाद सम्पूर्ण होने पर आप उसे मुख्य नामस्थान में [[वि:स्थानांतरण|स्थानांतरित]] कर सकते हैं। यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है। यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं।<span style="background:#444;padding:2px;font-size:12px">[[User:Jayprakash12345|<span style="color:#fff">जयप्रकाश</span>]]<span style="color:#FC0;letter-spacing:-2px"> >>> </span>[[User talk:Jayprakash12345|<span style="color:#fff">वार्ता</span>]]</span> 20:43, 20 जनवरी 2017 (UTC) == [[:साँचा:भारत की मस्जिदें|साँचा:भारत की मस्जिदें]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन == नमस्कार, [[:साँचा:भारत की मस्जिदें|साँचा:भारत की मस्जिदें]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/साँचे/भारत की मस्जिदें|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/साँचे/भारत की मस्जिदें]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है। नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है: <center>[[साँचा:भारत में मस्जिदें]] एसा हि तो हैं।</center> कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें। चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ।[[सदस्य:Dharmadhyaksha|Dharmadhyaksha]] ([[सदस्य वार्ता:Dharmadhyaksha|वार्ता]]) 05:29, 24 अगस्त 2017 (UTC) == [[:चित्र:DLF IPL logo.png|चित्र:DLF IPL logo.png]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:चित्र:DLF IPL logo.png|चित्र:DLF IPL logo.png]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#फ़3|मापदंड फ़3]] के&nbsp;अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#फ़3|फ़3]]{{*}} अप्रयुक्त ग़ैर मुक्त उचित उपयोग फ़ाइल'''</center> इस मापदंड के अंतर्गत वे फ़ाइलें आती हैं जो कॉपीराइट सुरक्षित हैं और उचित उपयोग हेतु विकिपीडिया पर डाली गई हैं, परंतु जिनका कोई उपयोग न किया जा रहा है और न ही होने की संभावना है। जो चित्र किसी ऐसे लेख के लिये अपलोड किये गए हैं जो बनाया जाना है, उन्हें इस मापदंड के अंतर्गत तभी हटाया जा सकता है यदि उनके अपलोड होने के 7 दिन पश्चात तक वो लेख न बने। ध्यान रखें कि विकिपीडिया पर कॉपीराइट सुरक्षित सामग्री तभी रखी जा सकती है यदि उनका उपयोग "उचित उपयोग" (fair use) में गिना जाता हो। यदि इस फ़ाइल का उपयोग कहीं भी इसके अंतर्गत नहीं किया जा सकता तो इसे हटा दिया जाएगा। यदि आपने इस फ़ाइल का उपयोग कहीं किया था और इसे वहाँ से किसी ने हटाया है तो आप उस लेख की जानकारी इसके वार्ता पृष्ठ पर दे सकते हैं। यदि इस फ़ाइल पर उचित उपयोग औचित्य (fair use rationale) नहीं दिया हुआ है तो एक उचित उपयोग औचित्य लगा दें। यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> [[User:CptViraj|<font color="black">'''केप्टनविराज'''</font>]] ([[User talk:CptViraj|📧]]) 13:47, 28 मार्च 2020 (UTC) == [[:चित्र:Talakona.jpg|चित्र:Talakona.jpg]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:चित्र:Talakona.jpg|चित्र:Talakona.jpg]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#फ़1|मापदंड फ़1]] के&nbsp;अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#फ़1|फ़1]]{{*}} 14 दिन(2 सप्ताह) से अधिक समय तक कोई लाइसेंस न होना'''</center> इसमें वे सभी फाइलें आती हैं जिनमें अपलोड होने से दो सप्ताह के बाद तक भी कोई लाइसेंस नहीं दिया गया है। ऐसा होने पर यदि फ़ाइल पुरानी होने के कारण सार्वजनिक क्षेत्र(पब्लिक डोमेन) में नहीं होगी, तो उसे शीघ्र हटा दिया जाएगा। ध्यान रखें कि विकिपीडिया पर केवल मुक्त फ़ाइलें ही रखी जा सकती हैं। यह फ़ाइल तभी रखी जा सकती है यदि इसका कॉपीराइट धारक इसे किसी मुक्त लाइसेंस के अंतर्गत विमोचित करे। यदि ऐसा न हो तो इसे विकिपीडिया पर नहीं रखा जा सकता। यदि इस फ़ाइल के कॉपीराइट की जानकारी आपको नहीं है तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर सहायता माँग सकते हैं। सहायता माँगते समय कृपया इसका स्रोत (जहाँ से आपको यह फ़ाइल मिली) अवश्य बताएँ। यदि आपको इसके कॉपीराइट की जानकारी है तो कृपया [[:श्रेणी:कॉपीराइट साँचे]] में से कोई उपयुक्त साँचा फ़ाइल पर लगा दें। यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> [[User:CptViraj|<b style="color:black">केप्टनविराज</b>]] ([[File:Emoji u1f4e7.svg|18px|link=User talk:CptViraj]]) 03:57, 30 अप्रैल 2020 (UTC) == [[:चित्र:Farakka map.jpg|चित्र:Farakka map.jpg]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:चित्र:Farakka map.jpg|चित्र:Farakka map.jpg]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#फ़1|मापदंड फ़1]] के&nbsp;अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#फ़1|फ़1]]{{*}} 14 दिन(2 सप्ताह) से अधिक समय तक कोई लाइसेंस न होना'''</center> इसमें वे सभी फाइलें आती हैं जिनमें अपलोड होने से दो सप्ताह के बाद तक भी कोई लाइसेंस नहीं दिया गया है। ऐसा होने पर यदि फ़ाइल पुरानी होने के कारण सार्वजनिक क्षेत्र(पब्लिक डोमेन) में नहीं होगी, तो उसे शीघ्र हटा दिया जाएगा। ध्यान रखें कि विकिपीडिया पर केवल मुक्त फ़ाइलें ही रखी जा सकती हैं। यह फ़ाइल तभी रखी जा सकती है यदि इसका कॉपीराइट धारक इसे किसी मुक्त लाइसेंस के अंतर्गत विमोचित करे। यदि ऐसा न हो तो इसे विकिपीडिया पर नहीं रखा जा सकता। यदि इस फ़ाइल के कॉपीराइट की जानकारी आपको नहीं है तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर सहायता माँग सकते हैं। सहायता माँगते समय कृपया इसका स्रोत (जहाँ से आपको यह फ़ाइल मिली) अवश्य बताएँ। यदि आपको इसके कॉपीराइट की जानकारी है तो कृपया [[:श्रेणी:कॉपीराइट साँचे]] में से कोई उपयुक्त साँचा फ़ाइल पर लगा दें। यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> [[User:CptViraj|<b style="color:black">केप्टनविराज</b>]] ([[File:Emoji u1f4e7.svg|18px|link=User talk:CptViraj]]) 04:20, 30 अप्रैल 2020 (UTC) == [[:चित्र:नया रायपुर.jpg|चित्र:नया रायपुर.jpg]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:चित्र:नया रायपुर.jpg|चित्र:नया रायपुर.jpg]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#फ़1|मापदंड फ़1]] के&nbsp;अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#फ़1|फ़1]]{{*}} 14 दिन(2 सप्ताह) से अधिक समय तक कोई लाइसेंस न होना'''</center> इसमें वे सभी फाइलें आती हैं जिनमें अपलोड होने से दो सप्ताह के बाद तक भी कोई लाइसेंस नहीं दिया गया है। ऐसा होने पर यदि फ़ाइल पुरानी होने के कारण सार्वजनिक क्षेत्र(पब्लिक डोमेन) में नहीं होगी, तो उसे शीघ्र हटा दिया जाएगा। ध्यान रखें कि विकिपीडिया पर केवल मुक्त फ़ाइलें ही रखी जा सकती हैं। यह फ़ाइल तभी रखी जा सकती है यदि इसका कॉपीराइट धारक इसे किसी मुक्त लाइसेंस के अंतर्गत विमोचित करे। यदि ऐसा न हो तो इसे विकिपीडिया पर नहीं रखा जा सकता। यदि इस फ़ाइल के कॉपीराइट की जानकारी आपको नहीं है तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर सहायता माँग सकते हैं। सहायता माँगते समय कृपया इसका स्रोत (जहाँ से आपको यह फ़ाइल मिली) अवश्य बताएँ। यदि आपको इसके कॉपीराइट की जानकारी है तो कृपया [[:श्रेणी:कॉपीराइट साँचे]] में से कोई उपयुक्त साँचा फ़ाइल पर लगा दें। यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> [[सदस्य:MGA73|MGA73]] ([[सदस्य वार्ता:MGA73|वार्ता]]) 14:18, 2 जुलाई 2020 (UTC) સ્વાગત છે. == 2021 Wikimedia Foundation Board elections: Eligibility requirements for voters == Greetings, The eligibility requirements for voters to participate in the 2021 Board of Trustees elections have been published. You can check the requirements on [[:m:Wikimedia_Foundation_elections/2021#Eligibility_requirements_for_voters|this page]]. You can also verify your eligibility using the [https://meta.toolforge.org/accounteligibility/56 AccountEligiblity tool]. [[सदस्य:MediaWiki message delivery|MediaWiki message delivery]] ([[सदस्य वार्ता:MediaWiki message delivery|वार्ता]]) 16:30, 30 जून 2021 (UTC) <small>''Note: You are receiving this message as part of outreach efforts to create awareness among the voters.''</small> <!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=User:KCVelaga_(WMF)/Targets/Temp&oldid=21669859 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:KCVelaga (WMF)@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश --> == आपका लेख [[विमानक्षेत्रों की सूची ICAO कोड अनुसार: C]]== [[File:Information.svg|25px|alt=Information icon]] स्वागत है, और आपके द्वारा हिंदी विकिपीडिया पर [[:विमानक्षेत्रों की सूची ICAO कोड अनुसार: C]] पृष्ठ पर किये गए [[Special:Contributions/Gunjan verma81|योगदान]] के लिये धन्यवाद। आपने हिंदी विकिपीडिया पर पृष्ठ में सामग्री जोड़ी है जबकि यह हिंदी में नहीं है। यदि आप किसी अन्य भाषा में योगदान करना चाहते हैं तो [[:en:list of Wikipedias|संबंधित भाषा के विकिपीडिया]] पर करें। नहीं तो यहाँ हिंदी में अनुवाद करके योगदान करें। <!-- It has been listed 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[[विशेष:Search|खोज]] कर लिया करें। यदि आप इस विषय पर और लिखना चाहते हैं तो मूल लेख पर लिखें। यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> [[सदस्य:Sk5505|Sk5505]] ([[सदस्य वार्ता:Sk5505|वार्ता]]) 13:21, 12 नवम्बर 2022 (UTC) == [[:विमानक्षेत्रों की सूची ICAO कोड अनुसार: C|विमानक्षेत्रों की सूची ICAO कोड अनुसार: C]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:विमानक्षेत्रों की सूची ICAO कोड अनुसार: C|विमानक्षेत्रों की सूची ICAO कोड अनुसार: C]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल1|मापदंड ल1]] के&nbsp;अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल1|ल1]]{{*}} पूर्णतया अन्य भाषा में लिखे लेख'''</center> इसमें वे लेख आते हैं जो पूर्णतया हिन्दी के अलावा किसी और भाषा में लिखे हुए हैं, चाहे उनका नाम हिन्दी में हो या किसी और भाषा में। हिन्दी विकिपीडिया पर हिन्दी के अतिरिक्त किसी अन्य भाषा में लेख बनाना मना है। यदि आप किसी अन्य भाषा में लेख बनाना चाहते हैं तो कृपया [[:m:List of Wikipedias|विकिपीडियाओं की पूर्ण सूची]] देखें और उपयुक्त भाषा वाले विकिपीडिया में यह लेख बनाएँ। यदि आपने यह लेख किसी अन्य भाषा के विकिपीडिया से कॉपी कर के यहाँ डाला है और आप इसका हिन्दी अनुवाद करना चाहते हैं तो कृपया पहले [[विकिपीडिया:अन्य विकिमीडिया परियोजनाओं से सामग्री लेना]] को एक बार पढ़ लें। इसके अतिरिक्त, अनुवाद सम्पूर्ण होने से पहले लेख को मुख्य नामस्थान में ना डालें, बलकी अपने सदस्य उप-पृष्ठ की तरह उसका अनुवाद करें। अनुवाद सम्पूर्ण होने पर आप उसे मुख्य नामस्थान में [[वि:स्थानांतरण|स्थानांतरित]] कर सकते हैं। यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं।<!-- Template:Db-csd-notice-custom --> [[सदस्य:सौरभ तिवारी 05|सौरभ तिवारी 05]] ([[सदस्य वार्ता:सौरभ तिवारी 05|वार्ता]]) 07:31, 15 सितंबर 2024 (UTC) == [[:विमानक्षेत्रों की सूची ICAO कोड अनुसार: L|विमानक्षेत्रों की सूची ICAO कोड अनुसार: L]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:विमानक्षेत्रों की सूची ICAO कोड अनुसार: L|विमानक्षेत्रों की सूची ICAO कोड अनुसार: L]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल1|मापदंड ल1]] के&nbsp;अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल1|ल1]]{{*}} पूर्णतया अन्य भाषा में लिखे लेख'''</center> इसमें वे लेख आते हैं जो पूर्णतया हिन्दी के अलावा किसी और भाषा में लिखे हुए हैं, चाहे उनका नाम हिन्दी में हो या किसी और भाषा में। हिन्दी विकिपीडिया पर हिन्दी के अतिरिक्त किसी अन्य भाषा में लेख बनाना मना है। यदि आप किसी अन्य भाषा में लेख बनाना चाहते हैं तो कृपया [[:m:List of Wikipedias|विकिपीडियाओं की पूर्ण सूची]] देखें और उपयुक्त भाषा वाले विकिपीडिया में यह लेख बनाएँ। यदि आपने यह लेख किसी अन्य भाषा के विकिपीडिया से कॉपी कर के यहाँ डाला है और आप इसका हिन्दी अनुवाद करना चाहते हैं तो कृपया पहले [[विकिपीडिया:अन्य विकिमीडिया परियोजनाओं से सामग्री लेना]] को एक बार पढ़ लें। इसके अतिरिक्त, अनुवाद सम्पूर्ण होने से पहले लेख को मुख्य नामस्थान में ना डालें, बलकी अपने सदस्य उप-पृष्ठ की तरह उसका अनुवाद करें। अनुवाद सम्पूर्ण होने पर आप उसे मुख्य नामस्थान में [[वि:स्थानांतरण|स्थानांतरित]] कर सकते हैं। यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं।[[सदस्य:अमर तिवारी|अमर तिवारी]] ([[सदस्य वार्ता:अमर तिवारी|वार्ता]]) 13:22, 16 अक्टूबर 2026 (UTC) m43mly0p98s7evmee7piy1kbfpwos0o तानसेन 0 60812 6630356 6621517 2026-10-17T06:47:18Z कुशल बोराणा 724772 /* मृत्यु */ 6630356 wikitext text/x-wiki {{स्रोतहीन|date=जून 2019}} {{Infobox musical artist | name = तानसेन | image = Tansen of Gwalior. (11.8x6.7cm) Mughal. 1585-90. National Museum, New Delhi..jpg | caption = तानसेन | birth_name = रामतनु | Alias = | birth_date = [[१५००|1493]] | death_date = [[१५८६|6 मई 1586]] | Origin = | genre = [[हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत]] | occupation = एकल गायक | years_active = | landscape = yes }} [[चित्र:Fatehpur Sikri anup-talao-crp.jpg|thumb|left|[[फ़तेहपुर सीकरी|फतेहपुर सिकरी]] में गायन मण्डप]] ''' तानसेन''' या '''रामतनु ''' हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के एक महान ज्ञाता थे।<ref name="Wade1998p108">{{cite book|author=Bonnie C. Wade|title=Imaging Sound: An Ethnomusicological Study of Music, Art, and Culture in Mughal India|url=https://archive.org/details/imagingsoundethn0000wade|url-access=registration|year=1998|publisher=University of Chicago Press|isbn=978-0-226-86841-7|pages=[https://archive.org/details/imagingsoundethn0000wade/page/108 108]–110}}</ref> उन्हे सम्राट [[अकबर]] के नवरत्नों में भी गिना जाता है। संगीत सम्राट तानसेन की नगरी [[ग्वालियर]] के लिए कहावत प्रसिद्ध है कि यहाँ बच्चे रोते हैं, तो सुर में और पत्थर लुढ़कते हैं तो ताल में। इस नगरी ने पुरातन काल से आज तक एक से बढ़कर एक संगीत प्रतिभाएं संसार को दी हैं और संगीतकार सूर्य तानसेन इनमें सर्वोपरि हैं।<ref>{{cite book|author1=Stuart Cary Welch|author2=Metropolitan Museum of Art|title=India: Art and culture, 1300-1900|url=https://books.google.com/books?id=MEvZaVmBQtgC&pg=PA171|year=1985|publisher=Metropolitan Museum of Art|isbn=978-0-03-006114-1|pages=171–172|access-date=4 जुलाई 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20191213095218/https://books.google.com/books?id=MEvZaVmBQtgC&pg=PA171|archive-date=13 दिसंबर 2019|url-status=live}}</ref> तानसेन के बारे में तथ्यों और कल्पना को मिलाकर अनेक किंवदंतियाँ लिखी गई हैं और इन कहानियों की ऐतिहासिकता संदिग्ध है।<ref name=nazir19>{{cite book|author=Nazir Ali Jairazbhoy|author-link=Nazir Ali Jairazbhoy|title=The Rāgs of North Indian Music: Their Structure and Evolution|url=https://books.google.com/books?id=hGLRqLscf78C&pg=PA19|year=1995|publisher=Popular Prakashan|isbn=978-81-7154-395-3|pages=19–20}}</ref> अकबर ने उन्हें नवरत्नों के नौ मंत्रियों (नौ रत्नों) में से एक माना और उन्हें मियां की उपाधि दी, जो एक सम्मानजनक, जिसका अर्थ विद्वान व्यक्ति था।<ref name="davar">{{cite book|last=Davar|first=Ashok|title=Tansen – The Magical Musician|year=1987|publisher=National book trust|location=India}}</ref> तानसेन एक संगीतकार, संगीतज्ञ और गायक थे, जिनकी भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी क्षेत्रों में कई रचनाओं का श्रेय दिया जाता है। वह एक वाद्ययंत्र वादक भी थे जिन्होंने संगीत वाद्ययंत्रों को लोकप्रिय बनाया और उनमें सुधार किया। वह [[शास्त्रीय संगीत|भारतीय शास्त्रीय संगीत]] की उत्तर भारतीय परंपरा, जिसे [[हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत|हिंदुस्तानी]] कहा जाता है, के सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्वों में से एक हैं। संगीत और रचनाओं में उनके 16वीं सदी के अध्ययन ने कई लोगों को प्रेरित किया, और कई उत्तर भारतीय घराने (क्षेत्रीय संगीत विद्यालय) उन्हें अपने वंश का संस्थापक मानते हैं।<ref name=stanton125>{{cite book|author1=Andrea L. Stanton|author2=Edward Ramsamy|author3=Peter J. Seybolt |display-authors=etal |title=Cultural Sociology of the Middle East, Asia, and Africa: An Encyclopedia|url=https://books.google.com/books?id=nVN2AwAAQBAJ |year=2012|publisher=SAGE Publications|isbn=978-1-4522-6662-6|page=125}}</ref><ref>{{cite book|author1=Bruno Nettl|author2=Ruth M. Stone|author3=James Porter |display-authors=etal |title=The Garland Encyclopedia of World Music: South Asia : the Indian subcontinent|url=https://books.google.com/books?id=ZOlNv8MAXIEC |year=1998|publisher=Taylor & Francis|isbn=978-0-8240-4946-1|pages=376–377}}</ref> तानसेन को उनकी महाकाव्य ध्रुपद रचनाओं, कई नए [[रागों की सूची|रागों]] के निर्माण के साथ-साथ संगीत पर दो क्लासिक किताबें, श्री गणेश स्तोत्र और संगीत सारा लिखने के लिए याद किया जाता है।<ref>{{cite book|author=Bonnie C. Wade|title=Imaging Sound: An Ethnomusicological Study of Music, Art, and Culture in Mughal India|url=https://archive.org/details/imagingsoundethn0000wade|url-access=registration|year=1998|publisher=University of Chicago Press|isbn=978-0-226-86841-7|page=[https://archive.org/details/imagingsoundethn0000wade/page/117 117]}}</ref> <!-- तानसेन ने [[स्वामी हरिदास|हरिदास]] के साथ वृन्दावन संगीत की शिक्षा ग्रहण की। तानसेन ने [[राजा मान सिंह|मानसिंह]] की विधवा पत्नी [[मृगनयनी]] से संगीत की शिक्षा प्राप्त की। प्रारम्भ से ही तानसेन मे दूसरों की नकल करने की अपूर्व क्षमता थी। बालक तानसेन पशु-पक्षियों की तरह-तरह की बोलियों की सच्ची नकल करता था और हिंसक पशुओं की बोली से लोगों को डराया करता था। इसी बीच [[स्वामी हरिदास]] से उनकी भेंट हो गयी । उनसे मिलने की भी एक मनोरंजक घटना है। उनकी अलग-अलग बोलियों को बोलने की प्रतिभा को देखकर वे काफी प्रभावित हुए। स्वामी जी ने उन्हें उनके पिता से संगीत सिखाने के लिए माँग लिया। इस तरह तानसेन को संगीत का ज्ञान हुआ। 1586 में तानसेन की मृत्यु आगरा में हो गई। और संगीतकार तानसेन की इच्छा अनुसार मोहम्मद गौस के मकबरे के समीप तानसेन का मकबरा बनाया गया जो ग्वालियर में हैं। --> ==प्रारंभिक जीवन== तानसेन की जन्मतिथि और जन्म स्थान स्पष्ट नहीं है, लेकिन अधिकांश स्रोत उनका जन्म लगभग 1493 ई.के आस-पास बताते हैं। उनकी जीवनी भी अस्पष्ट है और कुछ सामान्य तत्वों के साथ कई परस्पर विरोधी विवरण मौजूद हैं। तानसेन के बारे में व्यापक और विरोधाभासी किंवदंतियों से उनके बारे में ऐतिहासिक तथ्य निकालना मुश्किल है।<ref name=wade114>{{cite book|author=Bonnie C. Wade|title=Imaging Sound: An Ethnomusicological Study of Music, Art, and Culture in Mughal India|url=https://archive.org/details/imagingsoundethn00wade|url-access=registration|year=1998|publisher=University of Chicago Press|isbn=978-0-226-86841-7|pages=[https://archive.org/details/imagingsoundethn00wade/page/113 113]–114}}</ref> विभिन्न कहानियों में सामान्य तत्वों के अनुसार, बचपन में तानसेन का नाम रामतनु था। उनके पिता मुकुंद राम (जिन्हें मुकुंद गौड़ या मुकुंद चंद के नाम से भी जाना जाता है) ग्वालियर के एक धनी कवि और कुशल संगीतकार थे, जो कुछ समय के लिए वाराणसी में एक हिंदू मंदिर के पुजारी थे। कहानी के कुछ संस्करणों के अनुसार यह माना जाता है कि तानसेन पैदाइशी मूक थे और 5 साल की उम्र तक बोलते नहीं थे।<ref name=dawn>{{cite news |title =Profile: Tansen — the mesmerizing maestro |author=Maryam Juzer Kherulla |publisher=[[:en:Dawn (newspaper)|Dawn]] |url=http://dawn.com/weekly/yworld/archive/021012/yworld5.htm |date=12 October 2002 |access-date=2 October 2007 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20071121000709/http://dawn.com/weekly/yworld/archive/021012/yworld5.htm |archive-date =21 November 2007 |df=dmy-all}}</ref> तानसेन ने आधुनिक [[मध्य प्रदेश]] के [[ग्वालियर]] के आसपास के क्षेत्र में अपनी कला सीखी और उसमें निपुणता हासिल की। उन्होंने अपना करियर शुरू किया और अपना अधिकांश वयस्क जीवन [[रीवा]] के हिंदू राजा, राजा रामचंद्र सिंह के दरबार और संरक्षण में बिताया, जहां तानसेन की संगीत क्षमताओं और अध्ययन ने उन्हें व्यापक प्रसिद्धि और अनुयायी प्राप्त कराए।<ref name="Wade1998p108"/> वह राजा रामचन्द्र सिंह के करीबी विश्वासपात्र थे और वे मिलकर संगीत बनाते थे। तानसेन की प्रतिष्ठा ने उन्हें मुगल सम्राट अकबर का ध्यान आकर्षित किया, जिन्होंने राजा रामचन्द्र सिंह के पास दूत भेजकर तानसेन को मुगल दरबार में संगीतकारों के साथ शामिल होने का अनुरोध किया। तानसेन ने शुरू में जाने से इनकार कर दिया और एकांत में चले जाना चाहा, लेकिन राजा रामचन्द्र सिंह ने उन्हें अकबर के दरबार में भेज दिया। 1562 में, लगभग साठ वर्ष की आयु में, तानसेन, जो अभी भी एक [[वैष्णव सम्प्रदाय|वैष्णव]] संगीतकार थे, पहली बार अकबर के दरबार में आये।<ref name="Babineau1979p54">{{cite book|author=Edmour J. Babineau|title=Love of God and Social Duty in the Rāmcaritmānas|url=https://archive.org/details/loveofgodsociald0000babi|url-access=registration|year=1979|publisher=Motilal Banarsidass |isbn=978-0-89684-050-8|page=[https://archive.org/details/loveofgodsociald0000babi/page/54 54]}}</ref> जैसा कि हम आज जानते हैं, हिंदुस्तानी शास्त्रीय लोकाचार के निर्माण में तानसेन का प्रभाव केंद्रीय था। कई वंशज और शिष्य उन्हें अपने वंश का संस्थापक मानते हैं। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के कई [[घराना-संगीत|घराने]] उनके वंश से कुछ संबंध होने का दावा करते हैं। इन घरानों के लिए, तानसेन हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के संस्थापक हैं।<ref>{{cite book|author=Bruno Nettl|title=Heartland Excursions: Ethnomusicological Reflections on Schools of Music|url=https://books.google.com/books?id=wZZ1_pQJnKEC&pg=PA68 |year=1995|publisher=University of Illinois Press|isbn=978-0-252-06468-5|page=68}}</ref> ==वैवाहिक जीवन== तानसेन ने एक हुसैनी से शादी की, इस शादी से उनके चार बेटे और एक बेटी हुई: सूरत सेन, शरत सेन, तरंग खान, बिलास खान और सरस्वती। सभी पांचों अपने आप में कुशल संगीतकार बन गए, और सरस्वती ने सिंघलगढ़ के मिश्रा सिंह से शादी की, जो एक प्रसिद्ध वीणा-वादक थे।<ref>{{cite journal|last=Haldar|first=Amal|title=Miya Tansen|url=https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.506796/page/n153/mode/2up|journal=The Modern Review|volume=CXV|issue=2|date=February 1964|page=131}}</ref> एक किंवदंती में कहा गया है कि तानसेन की शादी अकबर की मेहरुनिसा नाम की बेटी से भी हुई थी।<ref name="Dhar1989">{{cite book|last=Dhar|first=Sunita|title=Senia Gharana, Its Contribution to Indian Classical Music|url=https://books.google.com/books?id=ZbgHAQAAMAAJ|year=1989|publisher=Reliance Publishing House|isbn=978-81-85047-49-2|page=24}}</ref> ==शिक्षा दीक्षा== तानसेन के प्रारंभिक जीवन और स्कूली शिक्षा के बारे में पौराणिक मौखिक संस्करण विशेष रूप से इस बात पर निर्भर करते हैं कि कहानी की उत्पत्ति हिंदू किंवदंतियों ([[वैष्णव सम्प्रदाय|वैष्णववाद]]) या मुस्लिम किंवदंतियों ([[सूफ़ीवाद|सूफीवाद]]) में हुई है।<ref name="wade114" /> हिंदू संस्करणों में, हिंदू भक्ति संत और कवि-संगीतकार [[स्वामी हरिदास]] का तानसेन पर प्रमुख प्रभाव था। इस्लामिक जीवनियों में कहा जाता है कि [[मुहम्मद गौस]] नामक सूफी मुस्लिम फकीर ने तानसेन को प्रभावित किया था। बोनी वेड, दक्षिण एशिया अध्ययन में विशेषज्ञता वाले संगीत के प्रोफेसर, के अनुसार स्वामी हरिदास को तानसेन के शिक्षक के रूप में व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है, और यह स्पष्ट है कि तानसेन मुहम्मद गौस से भी जुड़े थे, लेकिन सबूत बताते हैं कि तानसेन किसी भी धर्म से कम, संगीत के साथ अधिक संबद्ध थे।<ref name="wade114" /> तानसेन ने 6 साल की उम्र से ही संगीत प्रतिभा दिखाना शुरू कर दिया। वह कुछ समय के लिए [[स्वामी हरिदास]] के शिष्य रहे, जो कि वृन्दावन के प्रसिद्ध संगीतकार और [[मान सिंह तोमर|राजा मान सिंह तोमर]] (1486-1516 ईस्वी) के शानदार [[ग्वालियर]] दरबार के सदस्य थे, जो गायन की [[ध्रुपद]] शैली में विशेषज्ञता रखते थे। उनकी प्रतिभा को पहले ही पहचान लिया गया था और ग्वालियर के शासक ने ही उस्ताद को सम्मानजनक उपाधि 'तानसेन' से सम्मानित किया था। हरिदास उस समय के एक महान शिक्षक माने जाते थे। ऐसा कहा जाता है कि तानसेन का अपने गुरु के अलावा कोई समकक्ष नहीं था। हरिदास से तानसेन को न केवल ध्रुपद के प्रति प्रेम बल्कि स्थानीय भाषा की रचनाओं में भी रुचि प्राप्त हुई। यह वह समय था जब [[भक्ति काल|भक्ति]] परंपरा संस्कृत से स्थानीय मुहावरे ([[ब्रजभाषा साहित्य|ब्रजभाषा]] और [[हिन्दी|हिंदी]]) की ओर बदलाव को बढ़ावा दे रही थी, और तानसेन की रचनाओं ने भी इस प्रवृत्ति को उजागर किया था। उनकी प्रशिक्षुता के दौरान, तानसेन के पिता की मृत्यु हो गई, और वह घर लौट आए, जहां ऐसा कहा जाता है कि वह एक स्थानीय [[शिव]] मंदिर में गाते थे।{{citation needed|date=December 2016}} जीवनी में उल्लेख है कि तानसेन की मुलाकात सूफी फकीर [[मुहम्मद गौस]] से हुई थी। गौस के साथ बातचीत ने तानसेन पर एक मजबूत सूफी प्रभाव डाला।<ref>{{cite book | author=Wade, Bonnie C. | title=Imaging Sound : An Ethnomusicological Study of Music, Art, and Culture in Mughal India | publisher=University of Chicago Press | year=1998 | isbn=0-226-86840-0 | pages=[https://archive.org/details/imagingsoundethn00wade/page/113 113–114] }}</ref> बाद में अपने जीवन में, उन्होंने [[कृष्ण]] और [[शिव]] जैसे पारंपरिक रूपांकनों का आह्वान करते हुए [[ब्रजभाषा]] में रचना करना जारी रखा।<ref>{{cite book | author=Wade, Bonnie C. | title=Imaging Sound : An Ethnomusicological Study of Music, Art, and Culture in Mughal India | publisher=University of Chicago Press | year=1998 | isbn=0-226-86840-0 | pages=[https://archive.org/details/imagingsoundethn00wade/page/114 114–115] }}</ref> अकबर के दरबार में तानसेन जैसे संगीतकारों की उपस्थिति मुगल साम्राज्य के भीतर हिंदू और मुस्लिम परंपराओं को स्वीकार करने और एकीकृत करने का एक प्रयास था।<ref>{{cite book | author=Wade, Bonnie C. | title=Imaging Sound : An Ethnomusicological Study of Music, Art, and Culture in Mughal India | url=https://archive.org/details/imagingsoundethn0000wade | publisher=University of Chicago Press | year=1998 | isbn=0-226-86840-0}}</ref> तानसेन अकबर के दरबार के बहुमूल्य नवरत्नों (शाब्दिक नव=नौ, रत्न=रत्न) में से एक बन गए। उन्हें वहां सम्मानजनक उपाधि मियां और मियां तानसेन नाम मिला। [[File:Akbar, Todarmal, Tansen and Abul Fazal, Faizi and Abdur Rahim Khan-i-Khana in a court scene (16th Century A.D.).jpg|center|thumb|520x520px|[[टोडरमल]], [[अबुल फजल]], [[फ़ैज़ी|फैजी]] और [[रहीम|अब्दुर रहीम खान-ए-खाना]] के साथ [[अकबर|सम्राट अकबर]] के दरबार में ''तानसेन'', लगभग 16वीं शताब्दी]] ==रचनायें== {{citation needed|February 2024}} तानसेन के नाम के संबंध में मतैक्य नहीं है। कुछ का कहना है कि 'तानसेन' उनका नाम नहीं, उनकों मिली उपाधि थी। तानसेन मौलिक कलाकार थे। वे स्वर-ताल में गीतों की रचना भी करते थे। तानसेन के तीन ग्रन्थों का उल्लेख मिलता है- 1. 'संगीतसार', GURUDEV Satapathy 2. 'रागमाला' 3. 'श्रीगणेश स्तोत्र'। भारतीय संगीत के इतिहास में ध्रुपदकार के रूप में तानसेन का नाम सदैव अमर रहेगा। इसके साथ ही ब्रजभाषा के पद साहित्य का संगीत के साथ जो अटूट सम्बन्ध रहा है, उसके सन्दर्भ में भी तानसेन चिरस्मरणीय रहेंगे। संगीत सम्राट तानसेन अकबर के अनमोल नवरत्नों में से एक थे। अपनी संगीत कला के रत्न थे। इस कारण उनका बड़ा सम्मान था। संगीत गायन के बिना ‍अकबर का दरबार सूना रहता था। तानसेन के ताऊ बाबा रामदास उच्च कोटि के संगीतकार थे। वह वृंदावन के स्वामी हरिदास के शिष्य थे। उन्हीं की प्रेरणा से बालक तानसेन ने बचपन से ही संगीत की शिक्षा पाई। स्वामी हरिदास के पास तानसेन ने बारह वर्ष की आयु तक संगीत की शिक्षा पाई। वहीं उन्होंने साहित्य एवं संगीत शास्त्र की शिक्षा प्राप्त की। संगीत की शिक्षा प्राप्त करके तानसेन देश यात्रा पर निकल पड़े। उन्होंने अनेक स्थानों की यात्रा की और वहाँ उन्हें संगीत-कला की प्रस्तुति पर बहुत प्रसिद्धि तो मिली, लेकिन गुजारे लायक धन की उपलब्धि नहीं हुई। एक बार वह रीवा (मध्यप्रदेश) के राजा रामचंद्र के दरबार में गाने आए। उन्होंने तानसेन का नाम तो सुना था पर गायन नहीं सुना था। उस दिन तानसेन का गायन सुनकर राजा रामचंद्र मुग्ध हो गए। उसी दिन से तानसेन रीवा में ही रहने लगे और उन्हें राज गायक के रूप में हर तरह की आर्थिक सुविधा के साथ सामाजिक और राजनीतिक सम्मान दिया गया। तानसेन पचास वर्ष की आयु तक रीवा में रहे। इस अवधि में उन्होंने अपनी संगीत-साधना को मोहक और लालित्यपूर्ण बना लिया। हर ओर उनकी गायकी की प्रशंसा होने लगी। अकबर के ही सलाहकार और नवरत्नों में से एक अब्दुल फजल ने तानसेन की संगीत की प्रशंसा में अकबर को चिट्ठीु लिखी और सुझाव दिया कि तानसेन को अकबरी-दरबार का नवरत्न होना चाहिए। अकबर तो कला-पारखी थे ही। ऐसे महान संगीतकार को रखकर अपने दरबार की शोभा बढ़ाने के लिए बेचैन हो उठे। उन्होंने तानसेन को बुलावा भेजा और राजा रामचंद्र को पत्र लिखा। किंतु राजा रामचंद्र अपने दरबार के ऐसे कलारत्न को भेजने के लिए तैयार न हुए। बात बढ़ी और युद्ध तक पहुँच गई। और बहुत मान मनब्बल के बाद भी राजा रामचंद्र नहीं माने तो अकबर ने मुगलिया सल्तनत की एक छोटी से टुकड़ी तानसेन को जबरजस्ती लाने के लिए भेज दिया पर राजा राम चंद्र जूदेव और अकबर के सैनिको के बीच युद्ध हुआ और अकबर के सभी सैनिक मारे गए, इसमें रीवा राजा के भी कई सैनिक मारे गए &nbsp;! इससे अकबर क्रुद्ध होकर एक बड़ी सैनिक टुकड़ी भेजी &nbsp;और रीवा के राजा फिर से युद्ध के लिए तैयार हुए तब तानसेन रीवा के राजा के पास पहुंचे और युद्ध न करने की अपील किया , पर राजा बहुत जिद्दी थे नहीं माने ! और अकबर के दरबार में संदेस भेज दिया की <nowiki>''</nowiki>यदि बादशाह याचना पात्र भेजे तो मैं तानसेन को भेज दूंगा<nowiki>''</nowiki> अकबर भी छोटी-छोटी सी बात पर राजपूतो से युद्ध नहीं करना चाहते थे ! तब अकबर ने याचना पात्र भेज दिया तब राजा रामचंद्र जूदेव ने सहर्ष, ससम्मान &nbsp;तानसेन को दिल्ली भेज दिया और एक बड़ा युद्ध टल गया ! अकबर के दरबार में आकर तानसेन पहले तो खुश न थे लेकिन धीरे-धीरे अकबर के प्रेम ने तानसेन को अपने निकट ला दिया। चाँद खाँ और सूरज खाँ स्वयं न गा सकें। आखिर मुकाबला शुरू हुआ। उसे सुनने वालों ने कहा 'यह गलत राग है।' तब तानसेन ने शास्त्रीय आधार पर उस राग की शुद्धता सिद्ध कर दी। शत्रु वर्ग शांत हो गया। संगीत सम्राट तानसेन अकबर के अनमोल नवरत्नों में से एक थे। तानसेन को अपने दरबार में लाने के लिए अकबर की सेना और रीवा के बाघेला राजपूतो के बीच में भयानक युद्ध हुआ था ! अकबर के दरबार में तानसेन को नवरत्न की ख्यायति मिलने लगी थी। इस कारण उनके शत्रुओं की संख्यार भी बढ़ रही थी। कुछ दिनों बाद तानसेन का ठाकुर सन्मुख सिंह बीनकार से मुकाबला हुआ। वे बहुत ही मधुर बीन बजाते थे। दोनों में मुकाबला हुआ, किंतु सन्मुख सिंह बाजी हार गए। तानसेन ने भारतीय संगीत को बड़ा आदर दिलाया। उन्होंने कई राग-रागिनियों की भी रचना की। 'मियाँ की मल्हार' 'दरबारी कान्हड़ा' 'गूजरी टोड़ी' या 'मियाँ की टोड़ी' तानसेन की ही देन है। तानसेन कवि भी थे। उनकी काव्य कृतियों के नाम थे - 'रागमाला', 'संगीतसार' और 'गणेश स्रोत्र'। 'रागमाला' के आरंभ में दोहे दिए गए हैं। ''सुर मुनि को परनायकरि, सुगम करौ संगीत।'' ''तानसेन वाणी सरस जान गान की प्रीत।'' ==लोकप्रिय संस्कृति== तानसेन के जीवन पर कई हिंदी फ़िल्में बनी हैं, जिनमें अधिकतर कहानियाँ हैं। उनमें से कुछ हैं [[:en:Tansen (film)|तानसेन]] (1943), [[:en:Ranjit Studios|रंजीत मूवीटोन]] द्वारा निर्मित एक संगीतमय हिट, जिसमें [[कुन्दन लाल सहगल]] और [[:en:Khursheed Bano|खुर्शीद बानो]] ने अभिनय किया था।<ref name="NettlArnold2000">{{cite book|last1=Nettl|first1=Bruno|last2=Arnold|first2=Alison|title=The Garland Encyclopedia of World Music: South Asia : the Indian subcontinent|url=https://books.google.com/books?id=ZOlNv8MAXIEC&pg=PA525|year=2000|publisher=Taylor & Francis|isbn=978-0-8240-4946-1|page=525}}</ref> तानसेन (1958) और संगीत सम्राट तानसेन (1962)। ऐतिहासिक संगीतमय [[बैजू बावरा (1952 फ़िल्म)|बैजू बावरा]] (1952) में तानसेन भी एक केंद्रीय पात्र हैं, हालांकि ज्यादातर पृष्ठभूमि में रहते हैं, जो उनके ही समकालीन के जीवन पर आधारित है।{{citation needed|date=December 2016}} <gallery> File:Mia Tansen by Lala Deo Lal.jpg|तानसेन की आधुनिक कलाकार छाप File:Photo Mian Tansen 1580.jpg|तानसेन की मुगल चित्रकला 1580 ईस्वी File:Tansen Tomb - panoramio.jpg|[[ग्वालियर]] में तानसेन की कब्र, उनके [[सूफ़ीवाद|सूफी]] गुरु [[मुहम्मद गौस]] की कब्र के पास File:Tansen's tomb (16290416076).jpg|तानसेन की कब्र के अंदर File:Fatehpur Sikri anup-talao-crp.jpg|[[फ़तेहपुर सीकरी]] दर्शक कक्ष, बाईं ओर अनूप तलाव के साथ File:Tansen mughal.jpg|तानसेन का 20वीं सदी का चित्रण </gallery> ==चरित्र-चित्रण== तानसेन के पुराने चित्रों से उनके रूप-रंग की जानकारी मिलती है। तानसेन का रंग सांवला था। मूँछें पतली थीं। वह सफेद पगड़ी बाँधते थे। सफेद चोला पहनते थे। कमर में फेंटा बाँधते थे। ध्रुपद गाने में तानसेन की कोई बराबरी नहीं कर सकता था। तानसेन का देहावसान अस्सी वर्ष की आयु में हुआ। उनकी इच्छा थी कि उन्हें उनके गुरु मुहम्मद गौस खाँ की समाधि के पास दफनाया जाए। वहाँ आज उनकी समाधि पर हर साल तानसेन संगीत समारोह आयोजित होता है। ==परंपरा== [[File:Stamp of India - 1986 - Colnect 167172 - Miyan Tansen.jpeg|thumb|तानसेन को चित्रित करने वाला भारत का टिकट]] ===तानसेन सम्मान=== उनकी स्मृति के सम्मान में बेहट में तानसेन की कब्र के पास हर साल दिसंबर में एक राष्ट्रीय संगीत समारोह आयोजित किया जाता है, जिसे [[तानसेन समारोह]] के नाम से जाना जाता है। [[तानसेन सम्मान]] [[हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत|हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत]] के प्रतिपादकों को दिया जाता है। ===इमारतें=== [[फ़तेहपुर सीकरी]] का किला अकबर के दरबार में तानसेन के कार्यकाल से दृढ़ता से जुड़ा हुआ है। सम्राट के कक्षों के पास, बीच में एक छोटे से द्वीप पर एक तालाब बनाया गया था, जहाँ संगीतमय प्रस्तुतियाँ दी जाती थीं। आज, यह टैंक, जिसे अनूप तलाओ कहा जाता है, सार्वजनिक दर्शक कक्ष [[दीवान-ए-आम]] के पास देखा जा सकता है - एक केंद्रीय मंच जहां चार फुटब्रिज के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। ऐसा कहा जाता है कि तानसेन दिन के अलग-अलग समय पर अलग-अलग रागों का प्रदर्शन करते थे और सम्राट और उनके चुनिंदा श्रोता उन्हें सिक्कों से सम्मानित करते थे। तानसेन का कथित निवास भी पास में ही है। ===क्रेटर=== [[बुध (ग्रह)|बुध ग्रह]] पर एक [[:en:Tansen (crater)|क्रेटर]] का नाम तानसेन के सम्मान में रखा गया है।<ref>{{cite web |url = https://planetarynames.wr.usgs.gov/Feature/5858|title = Tansen |publisher = [[:en:IAU|IAU]]/[[:en:USGS|USGS]]/[[:en:NASA|NASA]] |work = Gazetteer of Planetary Nomenclature |access-date = 12 May 2022}}</ref> ==चमत्कार और किंवदंतियाँ== अकबर दरबार के इतिहासकारों के लेखों और घराने के साहित्य में तानसेन की अधिकांश जीवनी असंगत और चमत्कारी किंवदंतियों से भरी हुई है।<ref name="davar"/> तानसेन के बारे में किंवदंतियों में राग मेघ मल्हार के साथ बारिश लाने और राग दीपक का प्रदर्शन करके दीपक जलाने की कहानियां हैं।<ref>{{cite book|author1=George Ruckert|author2=Ali Akbar Khan|title=The Classical Music of North India: The first years study|url=https://books.google.com/books?id=uWIJAQAAMAAJ|year=1998|publisher=Munshiram Manoharlal|isbn=978-81-215-0872-8|page=270}}</ref><ref>{{cite book|last=Deva|first=Bigamudre|title=Indian Music|year=1995|publisher=Taylor & Francis|location=India}}</ref> [[राग मेघमल्लार|राग मेघ मल्हार]] अभी भी मुख्यधारा के प्रदर्शनों की सूची में है, लेकिन राग दीपक अब ज्ञात नहीं है; [[बिलावल ठाट]], [[पूर्वी थाट]] और [[खमाज ठाट]] में तीन अलग-अलग प्रकार मौजूद हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि कौन सा, यदि कोई हो, तानसेन के समय के दीपक से मेल खाता है। अन्य किंवदंतियाँ जंगली जानवरों को ध्यान से सुनने (या उनकी भाषा में बात करने) की उनकी क्षमता के बारे में बताती हैं। एक बार, एक जंगली सफेद हाथी को पकड़ लिया गया, लेकिन वह भयंकर था और उसे वश में नहीं किया जा सका। अंत में, तानसेन ने हाथी के लिए गाना गाया, जो शांत हो गया और सम्राट उस पर सवारी करने में सक्षम हो गए।{{citation needed|date=December 2016}} ===राग दीपक=== एक दिन जलने वालों ने तानसेन के विनाश की योजना बना डाली। इन सबने बादशाह अकबर से तानसेन से 'दीपक' राग गवाए जाने की प्रार्थना की। अकबर को बताया गया कि इस राग को तानसेन के अलावा और कोई ठीक-ठीक नहीं गा सकता। बादशाह राज़ी हो गए, और तानसेन को दीपक राग गाने की आज्ञा दी। तानसेन ने इस राग का अनिष्टकारक परिणाम बताए बिना ही राग गाने से मना कर दिया, फिर भी अकबर का राजहठ नहीं टला, और तानसेन को दीपक राग गाना ही पड़ा। दीपक राग गाने से जब तानसेन के अंदर अग्नि राग भी शुरू हुआ, गर्मी बढ़ी व धीरे-धीरे वायुमंडल अग्निमय हो गया। सुनने वाले अपने-अपने प्राण बचाने को इधर-उधर छिप गए, किंतु तानसेन का शरीर अग्नि की ज्वाला से दहक उठा। ऐसी हालत में तानसेन वडनगर पहुंचे, वहाँ भक्त कवि नरसिह मेहता कि बेटि कुवरबाई कि बेटि शर्मिष्ठा कि बेटियों ताना-रिरि ने मल्हार राग गाकर उनके जीवन की रक्षा की। इस घटना के कई महीनों बाद तानसेन का शरीर स्वस्थ हुआ। शरीर के अंदर ज्वर बैठ गया था। आखिरकार वह ज्वर फिर उभर आया, और फ़रवरी, 1586 में इसी ज्वर ने उनकी जान ले ली।{{citation needed|date=February 2024}} ===अकबर और स्वामी हरिदास=== एक बार अकबर ने उनसे कहा कि वो उनके गुरु का संगीत सुनना चाहते हैं। [[स्वामी हरिदास|गुरु हरिदास]] तो अकबर के दरबार में आ नहीं सकते थे। लिहाजा इसी निधि वन में अकबर हरिदास का संगीत सुनने आए। हरिदास ने उन्हें कृष्ण भक्ति के कुछ भजन सुनाए थे। अकबर हरिदास से इतने प्रभावित हुए कि वापस जाकर उन्होंने तानसेन से अकेले में कहा कि आप तो अपने गुरु की तुलना में कहीं आस-पास भी नहीं है। फिर तानसेन ने जवाब दिया, "जहांपनाह! हम इस ज़मीन के बादशाह के लिए गाते हैं और हमारे गुरु इस ब्रह्मांड के बादशाह के लिए गाते हैं तो फर्क तो होगा न।"{{citation needed|date=February 2024}} ==मृत्यु== तानसेन की मृत्यु का वर्ष, उनकी अधिकांश जीवनी की तरह, अस्पष्ट है। इस्लामी इतिहासकारों द्वारा लिखित एक संस्करण के अनुसार, तानसेन की मृत्यु 1586 में दिल्ली में हुई थी, तानसेन का सन्धि विच्छेद तान+सेन है और सेन एक समाज भी है|अकबर और उनके दरबार के अधिकांश लोग अंतिम संस्कार जुलूस में शामिल हुए थे, जो मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार पूरा हुआ था।<ref name=dawn/><ref>{{cite book|author=Stephen F. Dale|title=The Muslim Empires of the Ottomans, Safavids, and Mughals|url=https://books.google.com/books?id=vNmaBAAAQBAJ&pg=PT160 |year=2009| publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-316-18439-4|page=160}}</ref> हिंदू इतिहासकारों द्वारा लिखे गए अन्य संस्करणों के साथ-साथ अबुल फज़ल द्वारा लिखित अकबरनामा में उनकी मृत्यु की तारीख 26 अप्रैल 1589 बताई गई है और कहा गया है कि उनके अंतिम संस्कार में ज्यादातर हिंदू रीति-रिवाजों का पालन किया गया था।<ref>{{cite book|author=Bonnie C. Wade|title=Imaging Sound: An Ethnomusicological Study of Music, Art, and Culture in Mughal India|url=https://archive.org/details/imagingsoundethn00wade|url-access=registration|year=1998|publisher=University of Chicago Press|isbn=978-0-226-86840-0|page=[https://archive.org/details/imagingsoundethn00wade/page/115 115]}}</ref><ref>{{Cite book|last=Fazl|first=Abul|title=Akbarnama|publisher=Asiatic Society of Bengal|pages=816|translator-last=Beveridge|translator-first=Henry}}</ref> तानसेन के अवशेषों को ग्वालियर में उनके सूफी गुरु शेख मुहम्मद गौस के मकबरे परिसर में दफनाया गया था। हर साल दिसंबर में, तानसेन को मनाने के लिए ग्वालियर में एक वार्षिक उत्सव, तानसेन समारोह आयोजित किया जाता है।<ref>{{cite news|url = http://www.hindu.com/mag/2004/01/11/stories/2004011100040100.htm |archive-url = https://web.archive.org/web/20040930093656/http://www.hindu.com/mag/2004/01/11/stories/2004011100040100.htm |url-status = dead |archive-date = 30 September 2004 |work = The Hindu |title= Strains of a raga ... iun Gwalior|date = 11 January 2004}}</ref> {{अकबर के नवरत्न}} == सन्दर्भ == {{reflist}} == देखें == * [[हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत]] * [[स्वामी हरिदास]] ==सहायक ग्रन्थ== १ संगीतसम्राट तानसेन (जीवनी और रचनाएँ): प्रभुदयाल मीतल, साहित्य संस्थान, मथुरा; २ हिन्दी साहित्य का इतिहास: पं॰ रामचन्द्र शुक्ल: ३ अकबरी दरबार के हिन्दी कबि: डा॰ सरयू प्रसाद अग्रवाल।) [[श्रेणी:मुग़ल उच्चाधिकारी]] [[श्रेणी:अकबर के नवरत्न]] [[श्रेणी:१४९० जन्म]] [[श्रेणी:१५८० मृत्यु]] [[श्रेणी:मुग़ल साम्राज्य]] [[श्रेणी:भारतीय संगीतज्ञ]] [[श्रेणी:ग्वालियर के लोग]] [[श्रेणी:भारतीय मुस्लिम]] [[श्रेणी:आगरा के लोग]] [[श्रेणी:हिन्दू धर्म से इस्लाम में धर्मान्तरित]] 6fcn6x1muuxybpxf4zxden9abesv16e 6630366 6630356 2026-10-17T07:07:41Z Anitya Gautam 916080 6630366 wikitext text/x-wiki {{स्रोतहीन|date=जून 2019}} {{Infobox musical artist | name = तानसेन | image = Tansen of [[Gwalior]]. (11.8x6.7cm) Mughal. 1585-90. National Museum, New Delhi..jpg | caption = तानसेन | birth_name = रामतनु | Alias = | birth_date = [[१५००|1493]] | death_date = [[१५८६|6 मई 1586]] | Origin = | genre = [[हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत]] | occupation = एकल गायक | years_active = | landscape = yes }} [[चित्र:Fatehpur Sikri anup-talao-crp.jpg|thumb|left|[[फ़तेहपुर सीकरी|फतेहपुर सिकरी]] में गायन मण्डप]] ''' तानसेन''' या '''रामतनु ''' हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के एक महान ज्ञाता थे।<ref name="Wade1998p108">{{cite book|author=Bonnie C. Wade|title=Imaging Sound: An Ethnomusicological Study of Music, Art, and Culture in Mughal India|url=https://archive.org/details/imagingsoundethn0000wade|url-access=registration|year=1998|publisher=University of Chicago Press|isbn=978-0-226-86841-7|pages=[https://archive.org/details/imagingsoundethn0000wade/page/108 108]–110}}</ref> उन्हे सम्राट [[अकबर]] के नवरत्नों में भी गिना जाता है। संगीत सम्राट तानसेन की नगरी [[ग्वालियर]] के लिए कहावत प्रसिद्ध है कि यहाँ बच्चे रोते हैं, तो सुर में और पत्थर लुढ़कते हैं तो ताल में। इस नगरी ने पुरातन काल से आज तक एक से बढ़कर एक संगीत प्रतिभाएं संसार को दी हैं और संगीतकार सूर्य तानसेन इनमें सर्वोपरि हैं।<ref>{{cite book|author1=Stuart Cary Welch|author2=Metropolitan Museum of Art|title=India: Art and culture, 1300-1900|url=https://books.google.com/books?id=MEvZaVmBQtgC&pg=PA171|year=1985|publisher=Metropolitan Museum of Art|isbn=978-0-03-006114-1|pages=171–172|access-date=4 जुलाई 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20191213095218/https://books.google.com/books?id=MEvZaVmBQtgC&pg=PA171|archive-date=13 दिसंबर 2019|url-status=live}}</ref> तानसेन के बारे में तथ्यों और कल्पना को मिलाकर अनेक किंवदंतियाँ लिखी गई हैं और इन कहानियों की ऐतिहासिकता संदिग्ध है।<ref name=nazir19>{{cite book|author=Nazir Ali Jairazbhoy|author-link=Nazir Ali Jairazbhoy|title=The Rāgs of North Indian Music: Their Structure and Evolution|url=https://books.google.com/books?id=hGLRqLscf78C&pg=PA19|year=1995|publisher=Popular Prakashan|isbn=978-81-7154-395-3|pages=19–20}}</ref> अकबर ने उन्हें नवरत्नों के नौ मंत्रियों (नौ रत्नों) में से एक माना और उन्हें मियां की उपाधि दी, जो एक सम्मानजनक, जिसका अर्थ विद्वान व्यक्ति था।<ref name="davar">{{cite book|last=Davar|first=Ashok|title=Tansen – The Magical Musician|year=1987|publisher=National book trust|location=India}}</ref> तानसेन एक संगीतकार, संगीतज्ञ और गायक थे, जिनकी भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी क्षेत्रों में कई रचनाओं का श्रेय दिया जाता है। वह एक वाद्ययंत्र वादक भी थे जिन्होंने संगीत वाद्ययंत्रों को लोकप्रिय बनाया और उनमें सुधार किया। वह [[शास्त्रीय संगीत|भारतीय शास्त्रीय संगीत]] की उत्तर भारतीय परंपरा, जिसे [[हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत|हिंदुस्तानी]] कहा जाता है, के सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्वों में से एक हैं। संगीत और रचनाओं में उनके 16वीं सदी के अध्ययन ने कई लोगों को प्रेरित किया, और कई उत्तर भारतीय घराने (क्षेत्रीय संगीत विद्यालय) उन्हें अपने वंश का संस्थापक मानते हैं।<ref name=stanton125>{{cite book|author1=Andrea L. Stanton|author2=Edward Ramsamy|author3=Peter J. Seybolt |display-authors=etal |title=Cultural Sociology of the Middle East, Asia, and Africa: An Encyclopedia|url=https://books.google.com/books?id=nVN2AwAAQBAJ |year=2012|publisher=SAGE Publications|isbn=978-1-4522-6662-6|page=125}}</ref><ref>{{cite book|author1=Bruno Nettl|author2=Ruth M. Stone|author3=James Porter |display-authors=etal |title=The Garland Encyclopedia of World Music: South Asia : the Indian subcontinent|url=https://books.google.com/books?id=ZOlNv8MAXIEC |year=1998|publisher=Taylor & Francis|isbn=978-0-8240-4946-1|pages=376–377}}</ref> तानसेन को उनकी महाकाव्य ध्रुपद रचनाओं, कई नए [[रागों की सूची|रागों]] के निर्माण के साथ-साथ संगीत पर दो क्लासिक किताबें, श्री गणेश स्तोत्र और संगीत सारा लिखने के लिए याद किया जाता है।<ref>{{cite book|author=Bonnie C. Wade|title=Imaging Sound: An Ethnomusicological Study of Music, Art, and Culture in Mughal India|url=https://archive.org/details/imagingsoundethn0000wade|url-access=registration|year=1998|publisher=University of Chicago Press|isbn=978-0-226-86841-7|page=[https://archive.org/details/imagingsoundethn0000wade/page/117 117]}}</ref> <!-- तानसेन ने [[स्वामी हरिदास|हरिदास]] के साथ वृन्दावन संगीत की शिक्षा ग्रहण की। तानसेन ने [[राजा मान सिंह|मानसिंह]] की विधवा पत्नी [[मृगनयनी]] से संगीत की शिक्षा प्राप्त की। प्रारम्भ से ही तानसेन मे दूसरों की नकल करने की अपूर्व क्षमता थी। बालक तानसेन पशु-पक्षियों की तरह-तरह की बोलियों की सच्ची नकल करता था और हिंसक पशुओं की बोली से लोगों को डराया करता था। इसी बीच [[स्वामी हरिदास]] से उनकी भेंट हो गयी । उनसे मिलने की भी एक मनोरंजक घटना है। उनकी अलग-अलग बोलियों को बोलने की प्रतिभा को देखकर वे काफी प्रभावित हुए। स्वामी जी ने उन्हें उनके पिता से संगीत सिखाने के लिए माँग लिया। इस तरह तानसेन को संगीत का ज्ञान हुआ। 1586 में तानसेन की मृत्यु आगरा में हो गई। और संगीतकार तानसेन की इच्छा अनुसार मोहम्मद गौस के मकबरे के समीप तानसेन का मकबरा बनाया गया जो ग्वालियर में हैं। --> ==प्रारंभिक जीवन== तानसेन की जन्मतिथि और जन्म स्थान स्पष्ट नहीं है, लेकिन अधिकांश स्रोत उनका जन्म लगभग 1493 ई.के आस-पास बताते हैं। उनकी जीवनी भी अस्पष्ट है और कुछ सामान्य तत्वों के साथ कई परस्पर विरोधी विवरण मौजूद हैं। तानसेन के बारे में व्यापक और विरोधाभासी किंवदंतियों से उनके बारे में ऐतिहासिक तथ्य निकालना मुश्किल है।<ref name=wade114>{{cite book|author=Bonnie C. Wade|title=Imaging Sound: An Ethnomusicological Study of Music, Art, and Culture in Mughal India|url=https://archive.org/details/imagingsoundethn00wade|url-access=registration|year=1998|publisher=University of Chicago Press|isbn=978-0-226-86841-7|pages=[https://archive.org/details/imagingsoundethn00wade/page/113 113]–114}}</ref> विभिन्न कहानियों में सामान्य तत्वों के अनुसार, बचपन में तानसेन का नाम रामतनु था। उनके पिता मुकुंद राम (जिन्हें मुकुंद गौड़ या मुकुंद चंद के नाम से भी जाना जाता है) ग्वालियर के एक धनी कवि और कुशल संगीतकार थे, जो कुछ समय के लिए वाराणसी में एक हिंदू मंदिर के पुजारी थे। कहानी के कुछ संस्करणों के अनुसार यह माना जाता है कि तानसेन पैदाइशी मूक थे और 5 साल की उम्र तक बोलते नहीं थे।<ref name=dawn>{{cite news |title =Profile: Tansen — the mesmerizing maestro |author=Maryam Juzer Kherulla |publisher=[[:en:Dawn (newspaper)|Dawn]] |url=http://dawn.com/weekly/yworld/archive/021012/yworld5.htm |date=12 October 2002 |access-date=2 October 2007 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20071121000709/http://dawn.com/weekly/yworld/archive/021012/yworld5.htm |archive-date =21 November 2007 |df=dmy-all}}</ref> तानसेन ने आधुनिक [[मध्य प्रदेश]] के [[ग्वालियर]] के आसपास के क्षेत्र में अपनी कला सीखी और उसमें निपुणता हासिल की। उन्होंने अपना करियर शुरू किया और अपना अधिकांश वयस्क जीवन [[रीवा]] के हिंदू राजा, राजा रामचंद्र सिंह के दरबार और संरक्षण में बिताया, जहां तानसेन की संगीत क्षमताओं और अध्ययन ने उन्हें व्यापक प्रसिद्धि और अनुयायी प्राप्त कराए।<ref name="Wade1998p108"/> वह राजा रामचन्द्र सिंह के करीबी विश्वासपात्र थे और वे मिलकर संगीत बनाते थे। तानसेन की प्रतिष्ठा ने उन्हें मुगल सम्राट अकबर का ध्यान आकर्षित किया, जिन्होंने राजा रामचन्द्र सिंह के पास दूत भेजकर तानसेन को मुगल दरबार में संगीतकारों के साथ शामिल होने का अनुरोध किया। तानसेन ने शुरू में जाने से इनकार कर दिया और एकांत में चले जाना चाहा, लेकिन राजा रामचन्द्र सिंह ने उन्हें अकबर के दरबार में भेज दिया। 1562 में, लगभग साठ वर्ष की आयु में, तानसेन, जो अभी भी एक [[वैष्णव सम्प्रदाय|वैष्णव]] संगीतकार थे, पहली बार अकबर के दरबार में आये।<ref name="Babineau1979p54">{{cite book|author=Edmour J. Babineau|title=Love of God and Social Duty in the Rāmcaritmānas|url=https://archive.org/details/loveofgodsociald0000babi|url-access=registration|year=1979|publisher=Motilal Banarsidass |isbn=978-0-89684-050-8|page=[https://archive.org/details/loveofgodsociald0000babi/page/54 54]}}</ref> जैसा कि हम आज जानते हैं, हिंदुस्तानी शास्त्रीय लोकाचार के निर्माण में तानसेन का प्रभाव केंद्रीय था। कई वंशज और शिष्य उन्हें अपने वंश का संस्थापक मानते हैं। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के कई [[घराना-संगीत|घराने]] उनके वंश से कुछ संबंध होने का दावा करते हैं। इन घरानों के लिए, तानसेन हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के संस्थापक हैं।<ref>{{cite book|author=Bruno Nettl|title=Heartland Excursions: Ethnomusicological Reflections on Schools of Music|url=https://books.google.com/books?id=wZZ1_pQJnKEC&pg=PA68 |year=1995|publisher=University of Illinois Press|isbn=978-0-252-06468-5|page=68}}</ref> ==वैवाहिक जीवन== तानसेन ने एक हुसैनी से शादी की, इस शादी से उनके चार बेटे और एक बेटी हुई: सूरत सेन, शरत सेन, तरंग खान, बिलास खान और सरस्वती। सभी पांचों अपने आप में कुशल संगीतकार बन गए, और सरस्वती ने सिंघलगढ़ के मिश्रा सिंह से शादी की, जो एक प्रसिद्ध वीणा-वादक थे।<ref>{{cite journal|last=Haldar|first=Amal|title=Miya Tansen|url=https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.506796/page/n153/mode/2up|journal=The Modern Review|volume=CXV|issue=2|date=February 1964|page=131}}</ref> एक किंवदंती में कहा गया है कि तानसेन की शादी अकबर की मेहरुनिसा नाम की बेटी से भी हुई थी।<ref name="Dhar1989">{{cite book|last=Dhar|first=Sunita|title=Senia Gharana, Its Contribution to Indian Classical Music|url=https://books.google.com/books?id=ZbgHAQAAMAAJ|year=1989|publisher=Reliance Publishing House|isbn=978-81-85047-49-2|page=24}}</ref> ==शिक्षा दीक्षा== तानसेन के प्रारंभिक जीवन और स्कूली शिक्षा के बारे में पौराणिक मौखिक संस्करण विशेष रूप से इस बात पर निर्भर करते हैं कि कहानी की उत्पत्ति हिंदू किंवदंतियों ([[वैष्णव सम्प्रदाय|वैष्णववाद]]) या मुस्लिम किंवदंतियों ([[सूफ़ीवाद|सूफीवाद]]) में हुई है।<ref name="wade114" /> हिंदू संस्करणों में, हिंदू भक्ति संत और कवि-संगीतकार [[स्वामी हरिदास]] का तानसेन पर प्रमुख प्रभाव था। इस्लामिक जीवनियों में कहा जाता है कि [[मुहम्मद गौस]] नामक सूफी मुस्लिम फकीर ने तानसेन को प्रभावित किया था। बोनी वेड, दक्षिण एशिया अध्ययन में विशेषज्ञता वाले संगीत के प्रोफेसर, के अनुसार स्वामी हरिदास को तानसेन के शिक्षक के रूप में व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है, और यह स्पष्ट है कि तानसेन मुहम्मद गौस से भी जुड़े थे, लेकिन सबूत बताते हैं कि तानसेन किसी भी धर्म से कम, संगीत के साथ अधिक संबद्ध थे।<ref name="wade114" /> तानसेन ने 6 साल की उम्र से ही संगीत प्रतिभा दिखाना शुरू कर दिया। वह कुछ समय के लिए [[स्वामी हरिदास]] के शिष्य रहे, जो कि वृन्दावन के प्रसिद्ध संगीतकार और [[मान सिंह तोमर|राजा मान सिंह तोमर]] (1486-1516 ईस्वी) के शानदार [[ग्वालियर]] दरबार के सदस्य थे, जो गायन की [[ध्रुपद]] शैली में विशेषज्ञता रखते थे। उनकी प्रतिभा को पहले ही पहचान लिया गया था और ग्वालियर के शासक ने ही उस्ताद को सम्मानजनक उपाधि 'तानसेन' से सम्मानित किया था। हरिदास उस समय के एक महान शिक्षक माने जाते थे। ऐसा कहा जाता है कि तानसेन का अपने गुरु के अलावा कोई समकक्ष नहीं था। हरिदास से तानसेन को न केवल ध्रुपद के प्रति प्रेम बल्कि स्थानीय भाषा की रचनाओं में भी रुचि प्राप्त हुई। यह वह समय था जब [[भक्ति काल|भक्ति]] परंपरा संस्कृत से स्थानीय मुहावरे ([[ब्रजभाषा साहित्य|ब्रजभाषा]] और [[हिन्दी|हिंदी]]) की ओर बदलाव को बढ़ावा दे रही थी, और तानसेन की रचनाओं ने भी इस प्रवृत्ति को उजागर किया था। उनकी प्रशिक्षुता के दौरान, तानसेन के पिता की मृत्यु हो गई, और वह घर लौट आए, जहां ऐसा कहा जाता है कि वह एक स्थानीय [[शिव]] मंदिर में गाते थे।{{citation needed|date=December 2016}} जीवनी में उल्लेख है कि तानसेन की मुलाकात सूफी फकीर [[मुहम्मद गौस]] से हुई थी। गौस के साथ बातचीत ने तानसेन पर एक मजबूत सूफी प्रभाव डाला।<ref>{{cite book | author=Wade, Bonnie C. | title=Imaging Sound : An Ethnomusicological Study of Music, Art, and Culture in Mughal India | publisher=University of Chicago Press | year=1998 | isbn=0-226-86840-0 | pages=[https://archive.org/details/imagingsoundethn00wade/page/113 113–114] }}</ref> बाद में अपने जीवन में, उन्होंने [[कृष्ण]] और [[शिव]] जैसे पारंपरिक रूपांकनों का आह्वान करते हुए [[ब्रजभाषा]] में रचना करना जारी रखा।<ref>{{cite book | author=Wade, Bonnie C. | title=Imaging Sound : An Ethnomusicological Study of Music, Art, and Culture in Mughal India | publisher=University of Chicago Press | year=1998 | isbn=0-226-86840-0 | pages=[https://archive.org/details/imagingsoundethn00wade/page/114 114–115] }}</ref> अकबर के दरबार में तानसेन जैसे संगीतकारों की उपस्थिति मुगल साम्राज्य के भीतर हिंदू और मुस्लिम परंपराओं को स्वीकार करने और एकीकृत करने का एक प्रयास था।<ref>{{cite book | author=Wade, Bonnie C. | title=Imaging Sound : An Ethnomusicological Study of Music, Art, and Culture in Mughal India | url=https://archive.org/details/imagingsoundethn0000wade | publisher=University of Chicago Press | year=1998 | isbn=0-226-86840-0}}</ref> तानसेन अकबर के दरबार के बहुमूल्य नवरत्नों (शाब्दिक नव=नौ, रत्न=रत्न) में से एक बन गए। उन्हें वहां सम्मानजनक उपाधि मियां और मियां तानसेन नाम मिला। [[File:Akbar, Todarmal, Tansen and Abul Fazal, Faizi and Abdur Rahim Khan-i-Khana in a court scene (16th Century A.D.).jpg|center|thumb|520x520px|[[टोडरमल]], [[अबुल फजल]], [[फ़ैज़ी|फैजी]] और [[रहीम|अब्दुर रहीम खान-ए-खाना]] के साथ [[अकबर|सम्राट अकबर]] के दरबार में ''तानसेन'', लगभग 16वीं शताब्दी]] ==रचनायें== {{citation needed|February 2024}} तानसेन के नाम के संबंध में मतैक्य नहीं है। कुछ का कहना है कि 'तानसेन' उनका नाम नहीं, उनकों मिली उपाधि थी। तानसेन मौलिक कलाकार थे। वे स्वर-ताल में गीतों की रचना भी करते थे। तानसेन के तीन ग्रन्थों का उल्लेख मिलता है- 1. 'संगीतसार', GURUDEV Satapathy 2. 'रागमाला' 3. 'श्रीगणेश स्तोत्र'। भारतीय संगीत के इतिहास में ध्रुपदकार के रूप में तानसेन का नाम सदैव अमर रहेगा। इसके साथ ही ब्रजभाषा के पद साहित्य का संगीत के साथ जो अटूट सम्बन्ध रहा है, उसके सन्दर्भ में भी तानसेन चिरस्मरणीय रहेंगे। संगीत सम्राट तानसेन अकबर के अनमोल नवरत्नों में से एक थे। अपनी संगीत कला के रत्न थे। इस कारण उनका बड़ा सम्मान था। संगीत गायन के बिना ‍अकबर का दरबार सूना रहता था। तानसेन के ताऊ बाबा रामदास उच्च कोटि के संगीतकार थे। वह वृंदावन के स्वामी हरिदास के शिष्य थे। उन्हीं की प्रेरणा से बालक तानसेन ने बचपन से ही संगीत की शिक्षा पाई। स्वामी हरिदास के पास तानसेन ने बारह वर्ष की आयु तक संगीत की शिक्षा पाई। वहीं उन्होंने साहित्य एवं संगीत शास्त्र की शिक्षा प्राप्त की। संगीत की शिक्षा प्राप्त करके तानसेन देश यात्रा पर निकल पड़े। उन्होंने अनेक स्थानों की यात्रा की और वहाँ उन्हें संगीत-कला की प्रस्तुति पर बहुत प्रसिद्धि तो मिली, लेकिन गुजारे लायक धन की उपलब्धि नहीं हुई। एक बार वह रीवा (मध्यप्रदेश) के राजा रामचंद्र के दरबार में गाने आए। उन्होंने तानसेन का नाम तो सुना था पर गायन नहीं सुना था। उस दिन तानसेन का गायन सुनकर राजा रामचंद्र मुग्ध हो गए। उसी दिन से तानसेन रीवा में ही रहने लगे और उन्हें राज गायक के रूप में हर तरह की आर्थिक सुविधा के साथ सामाजिक और राजनीतिक सम्मान दिया गया। तानसेन पचास वर्ष की आयु तक रीवा में रहे। इस अवधि में उन्होंने अपनी संगीत-साधना को मोहक और लालित्यपूर्ण बना लिया। हर ओर उनकी गायकी की प्रशंसा होने लगी। अकबर के ही सलाहकार और नवरत्नों में से एक अब्दुल फजल ने तानसेन की संगीत की प्रशंसा में अकबर को चिट्ठीु लिखी और सुझाव दिया कि तानसेन को अकबरी-दरबार का नवरत्न होना चाहिए। अकबर तो कला-पारखी थे ही। ऐसे महान संगीतकार को रखकर अपने दरबार की शोभा बढ़ाने के लिए बेचैन हो उठे। उन्होंने तानसेन को बुलावा भेजा और राजा रामचंद्र को पत्र लिखा। किंतु राजा रामचंद्र अपने दरबार के ऐसे कलारत्न को भेजने के लिए तैयार न हुए। बात बढ़ी और युद्ध तक पहुँच गई। और बहुत मान मनब्बल के बाद भी राजा रामचंद्र नहीं माने तो अकबर ने मुगलिया सल्तनत की एक छोटी से टुकड़ी तानसेन को जबरजस्ती लाने के लिए भेज दिया पर राजा राम चंद्र जूदेव और अकबर के सैनिको के बीच युद्ध हुआ और अकबर के सभी सैनिक मारे गए, इसमें रीवा राजा के भी कई सैनिक मारे गए &nbsp;! इससे अकबर क्रुद्ध होकर एक बड़ी सैनिक टुकड़ी भेजी &nbsp;और रीवा के राजा फिर से युद्ध के लिए तैयार हुए तब तानसेन रीवा के राजा के पास पहुंचे और युद्ध न करने की अपील किया , पर राजा बहुत जिद्दी थे नहीं माने ! और अकबर के दरबार में संदेस भेज दिया की <nowiki>''</nowiki>यदि बादशाह याचना पात्र भेजे तो मैं तानसेन को भेज दूंगा<nowiki>''</nowiki> अकबर भी छोटी-छोटी सी बात पर राजपूतो से युद्ध नहीं करना चाहते थे ! तब अकबर ने याचना पात्र भेज दिया तब राजा रामचंद्र जूदेव ने सहर्ष, ससम्मान &nbsp;तानसेन को दिल्ली भेज दिया और एक बड़ा युद्ध टल गया ! अकबर के दरबार में आकर तानसेन पहले तो खुश न थे लेकिन धीरे-धीरे अकबर के प्रेम ने तानसेन को अपने निकट ला दिया। चाँद खाँ और सूरज खाँ स्वयं न गा सकें। आखिर मुकाबला शुरू हुआ। उसे सुनने वालों ने कहा 'यह गलत राग है।' तब तानसेन ने शास्त्रीय आधार पर उस राग की शुद्धता सिद्ध कर दी। शत्रु वर्ग शांत हो गया। संगीत सम्राट तानसेन अकबर के अनमोल नवरत्नों में से एक थे। तानसेन को अपने दरबार में लाने के लिए अकबर की सेना और रीवा के बाघेला राजपूतो के बीच में भयानक युद्ध हुआ था ! अकबर के दरबार में तानसेन को नवरत्न की ख्यायति मिलने लगी थी। इस कारण उनके शत्रुओं की संख्यार भी बढ़ रही थी। कुछ दिनों बाद तानसेन का ठाकुर सन्मुख सिंह बीनकार से मुकाबला हुआ। वे बहुत ही मधुर बीन बजाते थे। दोनों में मुकाबला हुआ, किंतु सन्मुख सिंह बाजी हार गए। तानसेन ने भारतीय संगीत को बड़ा आदर दिलाया। उन्होंने कई राग-रागिनियों की भी रचना की। 'मियाँ की मल्हार' 'दरबारी कान्हड़ा' 'गूजरी टोड़ी' या 'मियाँ की टोड़ी' तानसेन की ही देन है। तानसेन कवि भी थे। उनकी काव्य कृतियों के नाम थे - 'रागमाला', 'संगीतसार' और 'गणेश स्रोत्र'। 'रागमाला' के आरंभ में दोहे दिए गए हैं। ''सुर मुनि को परनायकरि, सुगम करौ संगीत।'' ''तानसेन वाणी सरस जान गान की प्रीत।'' ==लोकप्रिय संस्कृति== तानसेन के जीवन पर कई हिंदी फ़िल्में बनी हैं, जिनमें अधिकतर कहानियाँ हैं। उनमें से कुछ हैं [[:en:Tansen (film)|तानसेन]] (1943), [[:en:Ranjit Studios|रंजीत मूवीटोन]] द्वारा निर्मित एक संगीतमय हिट, जिसमें [[कुन्दन लाल सहगल]] और [[:en:Khursheed Bano|खुर्शीद बानो]] ने अभिनय किया था।<ref name="NettlArnold2000">{{cite book|last1=Nettl|first1=Bruno|last2=Arnold|first2=Alison|title=The Garland Encyclopedia of World Music: South Asia : the Indian subcontinent|url=https://books.google.com/books?id=ZOlNv8MAXIEC&pg=PA525|year=2000|publisher=Taylor & Francis|isbn=978-0-8240-4946-1|page=525}}</ref> तानसेन (1958) और संगीत सम्राट तानसेन (1962)। ऐतिहासिक संगीतमय [[बैजू बावरा (1952 फ़िल्म)|बैजू बावरा]] (1952) में तानसेन भी एक केंद्रीय पात्र हैं, हालांकि ज्यादातर पृष्ठभूमि में रहते हैं, जो उनके ही समकालीन के जीवन पर आधारित है।{{citation needed|date=December 2016}} <gallery> File:Mia Tansen by Lala Deo Lal.jpg|तानसेन की आधुनिक कलाकार छाप File:Photo Mian Tansen 1580.jpg|तानसेन की मुगल चित्रकला 1580 ईस्वी File:Tansen Tomb - panoramio.jpg|[[ग्वालियर]] में तानसेन की कब्र, उनके [[सूफ़ीवाद|सूफी]] गुरु [[मुहम्मद गौस]] की कब्र के पास File:Tansen's tomb (16290416076).jpg|तानसेन की कब्र के अंदर File:Fatehpur Sikri anup-talao-crp.jpg|[[फ़तेहपुर सीकरी]] दर्शक कक्ष, बाईं ओर अनूप तलाव के साथ File:Tansen mughal.jpg|तानसेन का 20वीं सदी का चित्रण </gallery> ==चरित्र-चित्रण== तानसेन के पुराने चित्रों से उनके रूप-रंग की जानकारी मिलती है। तानसेन का रंग सांवला था। मूँछें पतली थीं। वह सफेद पगड़ी बाँधते थे। सफेद चोला पहनते थे। कमर में फेंटा बाँधते थे। ध्रुपद गाने में तानसेन की कोई बराबरी नहीं कर सकता था। तानसेन का देहावसान अस्सी वर्ष की आयु में हुआ। उनकी इच्छा थी कि उन्हें उनके गुरु मुहम्मद गौस खाँ की समाधि के पास दफनाया जाए। वहाँ आज उनकी समाधि पर हर साल तानसेन संगीत समारोह आयोजित होता है। ==परंपरा== [[File:Stamp of India - 1986 - Colnect 167172 - Miyan Tansen.jpeg|thumb|तानसेन को चित्रित करने वाला भारत का टिकट]] ===तानसेन सम्मान=== उनकी स्मृति के सम्मान में बेहट में तानसेन की कब्र के पास हर साल दिसंबर में एक राष्ट्रीय संगीत समारोह आयोजित किया जाता है, जिसे [[तानसेन समारोह]] के नाम से जाना जाता है। [[तानसेन सम्मान]] [[हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत|हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत]] के प्रतिपादकों को दिया जाता है। ===इमारतें=== [[फ़तेहपुर सीकरी]] का किला अकबर के दरबार में तानसेन के कार्यकाल से दृढ़ता से जुड़ा हुआ है। सम्राट के कक्षों के पास, बीच में एक छोटे से द्वीप पर एक तालाब बनाया गया था, जहाँ संगीतमय प्रस्तुतियाँ दी जाती थीं। आज, यह टैंक, जिसे अनूप तलाओ कहा जाता है, सार्वजनिक दर्शक कक्ष [[दीवान-ए-आम]] के पास देखा जा सकता है - एक केंद्रीय मंच जहां चार फुटब्रिज के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। ऐसा कहा जाता है कि तानसेन दिन के अलग-अलग समय पर अलग-अलग रागों का प्रदर्शन करते थे और सम्राट और उनके चुनिंदा श्रोता उन्हें सिक्कों से सम्मानित करते थे। तानसेन का कथित निवास भी पास में ही है। ===क्रेटर=== [[बुध (ग्रह)|बुध ग्रह]] पर एक [[:en:Tansen (crater)|क्रेटर]] का नाम तानसेन के सम्मान में रखा गया है।<ref>{{cite web |url = https://planetarynames.wr.usgs.gov/Feature/5858|title = Tansen |publisher = [[:en:IAU|IAU]]/[[:en:USGS|USGS]]/[[:en:NASA|NASA]] |work = Gazetteer of Planetary Nomenclature |access-date = 12 May 2022}}</ref> ==चमत्कार और किंवदंतियाँ== अकबर दरबार के इतिहासकारों के लेखों और घराने के साहित्य में तानसेन की अधिकांश जीवनी असंगत और चमत्कारी किंवदंतियों से भरी हुई है।<ref name="davar"/> तानसेन के बारे में किंवदंतियों में राग मेघ मल्हार के साथ बारिश लाने और राग दीपक का प्रदर्शन करके दीपक जलाने की कहानियां हैं।<ref>{{cite book|author1=George Ruckert|author2=Ali Akbar Khan|title=The Classical Music of North India: The first years study|url=https://books.google.com/books?id=uWIJAQAAMAAJ|year=1998|publisher=Munshiram Manoharlal|isbn=978-81-215-0872-8|page=270}}</ref><ref>{{cite book|last=Deva|first=Bigamudre|title=Indian Music|year=1995|publisher=Taylor & Francis|location=India}}</ref> [[राग मेघमल्लार|राग मेघ मल्हार]] अभी भी मुख्यधारा के प्रदर्शनों की सूची में है, लेकिन राग दीपक अब ज्ञात नहीं है; [[बिलावल ठाट]], [[पूर्वी थाट]] और [[खमाज ठाट]] में तीन अलग-अलग प्रकार मौजूद हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि कौन सा, यदि कोई हो, तानसेन के समय के दीपक से मेल खाता है। अन्य किंवदंतियाँ जंगली जानवरों को ध्यान से सुनने (या उनकी भाषा में बात करने) की उनकी क्षमता के बारे में बताती हैं। एक बार, एक जंगली सफेद हाथी को पकड़ लिया गया, लेकिन वह भयंकर था और उसे वश में नहीं किया जा सका। अंत में, तानसेन ने हाथी के लिए गाना गाया, जो शांत हो गया और सम्राट उस पर सवारी करने में सक्षम हो गए।{{citation needed|date=December 2016}} ===राग दीपक=== एक दिन जलने वालों ने तानसेन के विनाश की योजना बना डाली। इन सबने बादशाह अकबर से तानसेन से 'दीपक' राग गवाए जाने की प्रार्थना की। अकबर को बताया गया कि इस राग को तानसेन के अलावा और कोई ठीक-ठीक नहीं गा सकता। बादशाह राज़ी हो गए, और तानसेन को दीपक राग गाने की आज्ञा दी। तानसेन ने इस राग का अनिष्टकारक परिणाम बताए बिना ही राग गाने से मना कर दिया, फिर भी अकबर का राजहठ नहीं टला, और तानसेन को दीपक राग गाना ही पड़ा। दीपक राग गाने से जब तानसेन के अंदर अग्नि राग भी शुरू हुआ, गर्मी बढ़ी व धीरे-धीरे वायुमंडल अग्निमय हो गया। सुनने वाले अपने-अपने प्राण बचाने को इधर-उधर छिप गए, किंतु तानसेन का शरीर अग्नि की ज्वाला से दहक उठा। ऐसी हालत में तानसेन वडनगर पहुंचे, वहाँ भक्त कवि नरसिह मेहता कि बेटि कुवरबाई कि बेटि शर्मिष्ठा कि बेटियों ताना-रिरि ने मल्हार राग गाकर उनके जीवन की रक्षा की। इस घटना के कई महीनों बाद तानसेन का शरीर स्वस्थ हुआ। शरीर के अंदर ज्वर बैठ गया था। आखिरकार वह ज्वर फिर उभर आया, और फ़रवरी, 1586 में इसी ज्वर ने उनकी जान ले ली।{{citation needed|date=February 2024}} ===अकबर और स्वामी हरिदास=== एक बार अकबर ने उनसे कहा कि वो उनके गुरु का संगीत सुनना चाहते हैं। [[स्वामी हरिदास|गुरु हरिदास]] तो अकबर के दरबार में आ नहीं सकते थे। लिहाजा इसी निधि वन में अकबर हरिदास का संगीत सुनने आए। हरिदास ने उन्हें कृष्ण भक्ति के कुछ भजन सुनाए थे। अकबर हरिदास से इतने प्रभावित हुए कि वापस जाकर उन्होंने तानसेन से अकेले में कहा कि आप तो अपने गुरु की तुलना में कहीं आस-पास भी नहीं है। फिर तानसेन ने जवाब दिया, "जहांपनाह! हम इस ज़मीन के बादशाह के लिए गाते हैं और हमारे गुरु इस ब्रह्मांड के बादशाह के लिए गाते हैं तो फर्क तो होगा न।"{{citation needed|date=February 2024}} ==मृत्यु== तानसेन की मृत्यु का वर्ष, उनकी अधिकांश जीवनी की तरह, अस्पष्ट है। इस्लामी इतिहासकारों द्वारा लिखित एक संस्करण के अनुसार, तानसेन की मृत्यु 1586 में दिल्ली में हुई थी, तानसेन का सन्धि विच्छेद तान+सेन है और सेन एक समाज भी है|अकबर और उनके दरबार के अधिकांश लोग अंतिम संस्कार जुलूस में शामिल हुए थे, जो मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार पूरा हुआ था।<ref name=dawn/><ref>{{cite book|author=Stephen F. Dale|title=The Muslim Empires of the Ottomans, Safavids, and Mughals|url=https://books.google.com/books?id=vNmaBAAAQBAJ&pg=PT160 |year=2009| publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-316-18439-4|page=160}}</ref> हिंदू इतिहासकारों द्वारा लिखे गए अन्य संस्करणों के साथ-साथ अबुल फज़ल द्वारा लिखित अकबरनामा में उनकी मृत्यु की तारीख 26 अप्रैल 1589 बताई गई है और कहा गया है कि उनके अंतिम संस्कार में ज्यादातर हिंदू रीति-रिवाजों का पालन किया गया था।<ref>{{cite book|author=Bonnie C. Wade|title=Imaging Sound: An Ethnomusicological Study of Music, Art, and Culture in Mughal India|url=https://archive.org/details/imagingsoundethn00wade|url-access=registration|year=1998|publisher=University of Chicago Press|isbn=978-0-226-86840-0|page=[https://archive.org/details/imagingsoundethn00wade/page/115 115]}}</ref><ref>{{Cite book|last=Fazl|first=Abul|title=Akbarnama|publisher=Asiatic Society of Bengal|pages=816|translator-last=Beveridge|translator-first=Henry}}</ref> तानसेन के अवशेषों को ग्वालियर में उनके सूफी गुरु शेख मुहम्मद गौस के मकबरे परिसर में दफनाया गया था। हर साल दिसंबर में, तानसेन को मनाने के लिए ग्वालियर में एक वार्षिक उत्सव, तानसेन समारोह आयोजित किया जाता है।<ref>{{cite news|url = http://www.hindu.com/mag/2004/01/11/stories/2004011100040100.htm |archive-url = https://web.archive.org/web/20040930093656/http://www.hindu.com/mag/2004/01/11/stories/2004011100040100.htm |url-status = dead |archive-date = 30 September 2004 |work = The Hindu |title= Strains of a raga ... iun Gwalior|date = 11 January 2004}}</ref> {{अकबर के नवरत्न}} == सन्दर्भ == {{reflist}} == देखें == * [[हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत]] * [[स्वामी हरिदास]] ==सहायक ग्रन्थ== १ संगीतसम्राट तानसेन (जीवनी और रचनाएँ): प्रभुदयाल मीतल, साहित्य संस्थान, मथुरा; २ हिन्दी साहित्य का इतिहास: पं॰ रामचन्द्र शुक्ल: ३ अकबरी दरबार के हिन्दी कबि: डा॰ सरयू प्रसाद अग्रवाल।) [[श्रेणी:मुग़ल उच्चाधिकारी]] [[श्रेणी:अकबर के नवरत्न]] [[श्रेणी:१४९० जन्म]] [[श्रेणी:१५८० मृत्यु]] [[श्रेणी:मुग़ल साम्राज्य]] [[श्रेणी:भारतीय संगीतज्ञ]] [[श्रेणी:ग्वालियर के लोग]] [[श्रेणी:भारतीय मुस्लिम]] [[श्रेणी:आगरा के लोग]] [[श्रेणी:हिन्दू धर्म से इस्लाम में धर्मान्तरित]] p7cceuih83vgvdj9kxre3p07ztj24n3 6630367 6630366 2026-10-17T07:08:44Z Anitya Gautam 916080 6630367 wikitext text/x-wiki {{स्रोतहीन|date=जून 2019}} {{Infobox musical artist | name = तानसेन | image = Tansen of [[Gwalior]]. (11.8x6.7cm) Mughal. 1585-90. National Museum, New Delhi..jpg | caption = तानसेन | birth_name = रामतनु | Alias = | birth_date = [[१५००|1493]] | death_date = [[१५८६|6 मई 1586]] | Origin = | genre = [[हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत]] | occupation = एकल गायक | years_active = | landscape = yes }} [[चित्र:Fatehpur Sikri anup-talao-crp.jpg|thumb|left|[[फ़तेहपुर सीकरी|फतेहपुर सिकरी]] में गायन मण्डप]] ''' तानसेन''' या '''रामतनु ''' हिन्दुस्तानी शास्त्रीय [[संगीत]] के एक महान ज्ञाता थे।<ref name="Wade1998p108">{{cite book|author=Bonnie C. Wade|title=Imaging Sound: An Ethnomusicological Study of Music, Art, and Culture in Mughal India|url=https://archive.org/details/imagingsoundethn0000wade|url-access=registration|year=1998|publisher=University of Chicago Press|isbn=978-0-226-86841-7|pages=[https://archive.org/details/imagingsoundethn0000wade/page/108 108]–110}}</ref> उन्हे सम्राट [[अकबर]] के नवरत्नों में भी गिना जाता है। संगीत सम्राट तानसेन की नगरी [[ग्वालियर]] के लिए कहावत प्रसिद्ध है कि यहाँ बच्चे रोते हैं, तो सुर में और पत्थर लुढ़कते हैं तो ताल में। इस नगरी ने पुरातन काल से आज तक एक से बढ़कर एक संगीत प्रतिभाएं संसार को दी हैं और संगीतकार सूर्य तानसेन इनमें सर्वोपरि हैं।<ref>{{cite book|author1=Stuart Cary Welch|author2=Metropolitan Museum of Art|title=India: Art and culture, 1300-1900|url=https://books.google.com/books?id=MEvZaVmBQtgC&pg=PA171|year=1985|publisher=Metropolitan Museum of Art|isbn=978-0-03-006114-1|pages=171–172|access-date=4 जुलाई 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20191213095218/https://books.google.com/books?id=MEvZaVmBQtgC&pg=PA171|archive-date=13 दिसंबर 2019|url-status=live}}</ref> तानसेन के बारे में तथ्यों और कल्पना को मिलाकर अनेक किंवदंतियाँ लिखी गई हैं और इन कहानियों की ऐतिहासिकता संदिग्ध है।<ref name=nazir19>{{cite book|author=Nazir Ali Jairazbhoy|author-link=Nazir Ali Jairazbhoy|title=The Rāgs of North Indian Music: Their Structure and Evolution|url=https://books.google.com/books?id=hGLRqLscf78C&pg=PA19|year=1995|publisher=Popular Prakashan|isbn=978-81-7154-395-3|pages=19–20}}</ref> अकबर ने उन्हें नवरत्नों के नौ मंत्रियों (नौ रत्नों) में से एक माना और उन्हें मियां की उपाधि दी, जो एक सम्मानजनक, जिसका अर्थ विद्वान व्यक्ति था।<ref name="davar">{{cite book|last=Davar|first=Ashok|title=Tansen – The Magical Musician|year=1987|publisher=National book trust|location=India}}</ref> तानसेन एक संगीतकार, संगीतज्ञ और गायक थे, जिनकी भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी क्षेत्रों में कई रचनाओं का श्रेय दिया जाता है। वह एक वाद्ययंत्र वादक भी थे जिन्होंने संगीत वाद्ययंत्रों को लोकप्रिय बनाया और उनमें सुधार किया। वह [[शास्त्रीय संगीत|भारतीय शास्त्रीय संगीत]] की उत्तर भारतीय परंपरा, जिसे [[हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत|हिंदुस्तानी]] कहा जाता है, के सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्वों में से एक हैं। संगीत और रचनाओं में उनके 16वीं सदी के अध्ययन ने कई लोगों को प्रेरित किया, और कई उत्तर भारतीय घराने (क्षेत्रीय संगीत विद्यालय) उन्हें अपने वंश का संस्थापक मानते हैं।<ref name=stanton125>{{cite book|author1=Andrea L. Stanton|author2=Edward Ramsamy|author3=Peter J. Seybolt |display-authors=etal |title=Cultural Sociology of the Middle East, Asia, and Africa: An Encyclopedia|url=https://books.google.com/books?id=nVN2AwAAQBAJ |year=2012|publisher=SAGE Publications|isbn=978-1-4522-6662-6|page=125}}</ref><ref>{{cite book|author1=Bruno Nettl|author2=Ruth M. Stone|author3=James Porter |display-authors=etal |title=The Garland Encyclopedia of World Music: South Asia : the Indian subcontinent|url=https://books.google.com/books?id=ZOlNv8MAXIEC |year=1998|publisher=Taylor & Francis|isbn=978-0-8240-4946-1|pages=376–377}}</ref> तानसेन को उनकी महाकाव्य ध्रुपद रचनाओं, कई नए [[रागों की सूची|रागों]] के निर्माण के साथ-साथ संगीत पर दो क्लासिक किताबें, श्री गणेश स्तोत्र और संगीत सारा लिखने के लिए याद किया जाता है।<ref>{{cite book|author=Bonnie C. Wade|title=Imaging Sound: An Ethnomusicological Study of Music, Art, and Culture in Mughal India|url=https://archive.org/details/imagingsoundethn0000wade|url-access=registration|year=1998|publisher=University of Chicago Press|isbn=978-0-226-86841-7|page=[https://archive.org/details/imagingsoundethn0000wade/page/117 117]}}</ref> <!-- तानसेन ने [[स्वामी हरिदास|हरिदास]] के साथ वृन्दावन संगीत की शिक्षा ग्रहण की। तानसेन ने [[राजा मान सिंह|मानसिंह]] की विधवा पत्नी [[मृगनयनी]] से संगीत की शिक्षा प्राप्त की। प्रारम्भ से ही तानसेन मे दूसरों की नकल करने की अपूर्व क्षमता थी। बालक तानसेन पशु-पक्षियों की तरह-तरह की बोलियों की सच्ची नकल करता था और हिंसक पशुओं की बोली से लोगों को डराया करता था। इसी बीच [[स्वामी हरिदास]] से उनकी भेंट हो गयी । उनसे मिलने की भी एक मनोरंजक घटना है। उनकी अलग-अलग बोलियों को बोलने की प्रतिभा को देखकर वे काफी प्रभावित हुए। स्वामी जी ने उन्हें उनके पिता से संगीत सिखाने के लिए माँग लिया। इस तरह तानसेन को संगीत का ज्ञान हुआ। 1586 में तानसेन की मृत्यु आगरा में हो गई। और संगीतकार तानसेन की इच्छा अनुसार मोहम्मद गौस के मकबरे के समीप तानसेन का मकबरा बनाया गया जो ग्वालियर में हैं। --> ==प्रारंभिक जीवन== तानसेन की जन्मतिथि और जन्म स्थान स्पष्ट नहीं है, लेकिन अधिकांश स्रोत उनका जन्म लगभग 1493 ई.के आस-पास बताते हैं। उनकी जीवनी भी अस्पष्ट है और कुछ सामान्य तत्वों के साथ कई परस्पर विरोधी विवरण मौजूद हैं। तानसेन के बारे में व्यापक और विरोधाभासी किंवदंतियों से उनके बारे में ऐतिहासिक तथ्य निकालना मुश्किल है।<ref name=wade114>{{cite book|author=Bonnie C. Wade|title=Imaging Sound: An Ethnomusicological Study of Music, Art, and Culture in Mughal India|url=https://archive.org/details/imagingsoundethn00wade|url-access=registration|year=1998|publisher=University of Chicago Press|isbn=978-0-226-86841-7|pages=[https://archive.org/details/imagingsoundethn00wade/page/113 113]–114}}</ref> विभिन्न कहानियों में सामान्य तत्वों के अनुसार, बचपन में तानसेन का नाम रामतनु था। उनके पिता मुकुंद राम (जिन्हें मुकुंद गौड़ या मुकुंद चंद के नाम से भी जाना जाता है) ग्वालियर के एक धनी कवि और कुशल संगीतकार थे, जो कुछ समय के लिए वाराणसी में एक हिंदू मंदिर के पुजारी थे। कहानी के कुछ संस्करणों के अनुसार यह माना जाता है कि तानसेन पैदाइशी मूक थे और 5 साल की उम्र तक बोलते नहीं थे।<ref name=dawn>{{cite news |title =Profile: Tansen — the mesmerizing maestro |author=Maryam Juzer Kherulla |publisher=[[:en:Dawn (newspaper)|Dawn]] |url=http://dawn.com/weekly/yworld/archive/021012/yworld5.htm |date=12 October 2002 |access-date=2 October 2007 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20071121000709/http://dawn.com/weekly/yworld/archive/021012/yworld5.htm |archive-date =21 November 2007 |df=dmy-all}}</ref> तानसेन ने आधुनिक [[मध्य प्रदेश]] के [[ग्वालियर]] के आसपास के क्षेत्र में अपनी कला सीखी और उसमें निपुणता हासिल की। उन्होंने अपना करियर शुरू किया और अपना अधिकांश वयस्क जीवन [[रीवा]] के हिंदू राजा, राजा रामचंद्र सिंह के दरबार और संरक्षण में बिताया, जहां तानसेन की संगीत क्षमताओं और अध्ययन ने उन्हें व्यापक प्रसिद्धि और अनुयायी प्राप्त कराए।<ref name="Wade1998p108"/> वह राजा रामचन्द्र सिंह के करीबी विश्वासपात्र थे और वे मिलकर संगीत बनाते थे। तानसेन की प्रतिष्ठा ने उन्हें मुगल सम्राट अकबर का ध्यान आकर्षित किया, जिन्होंने राजा रामचन्द्र सिंह के पास दूत भेजकर तानसेन को मुगल दरबार में संगीतकारों के साथ शामिल होने का अनुरोध किया। तानसेन ने शुरू में जाने से इनकार कर दिया और एकांत में चले जाना चाहा, लेकिन राजा रामचन्द्र सिंह ने उन्हें अकबर के दरबार में भेज दिया। 1562 में, लगभग साठ वर्ष की आयु में, तानसेन, जो अभी भी एक [[वैष्णव सम्प्रदाय|वैष्णव]] संगीतकार थे, पहली बार अकबर के दरबार में आये।<ref name="Babineau1979p54">{{cite book|author=Edmour J. Babineau|title=Love of God and Social Duty in the Rāmcaritmānas|url=https://archive.org/details/loveofgodsociald0000babi|url-access=registration|year=1979|publisher=Motilal Banarsidass |isbn=978-0-89684-050-8|page=[https://archive.org/details/loveofgodsociald0000babi/page/54 54]}}</ref> जैसा कि हम आज जानते हैं, हिंदुस्तानी शास्त्रीय लोकाचार के निर्माण में तानसेन का प्रभाव केंद्रीय था। कई वंशज और शिष्य उन्हें अपने वंश का संस्थापक मानते हैं। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के कई [[घराना-संगीत|घराने]] उनके वंश से कुछ संबंध होने का दावा करते हैं। इन घरानों के लिए, तानसेन हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के संस्थापक हैं।<ref>{{cite book|author=Bruno Nettl|title=Heartland Excursions: Ethnomusicological Reflections on Schools of Music|url=https://books.google.com/books?id=wZZ1_pQJnKEC&pg=PA68 |year=1995|publisher=University of Illinois Press|isbn=978-0-252-06468-5|page=68}}</ref> ==वैवाहिक जीवन== तानसेन ने एक हुसैनी से शादी की, इस शादी से उनके चार बेटे और एक बेटी हुई: सूरत सेन, शरत सेन, तरंग खान, बिलास खान और सरस्वती। सभी पांचों अपने आप में कुशल संगीतकार बन गए, और सरस्वती ने सिंघलगढ़ के मिश्रा सिंह से शादी की, जो एक प्रसिद्ध वीणा-वादक थे।<ref>{{cite journal|last=Haldar|first=Amal|title=Miya Tansen|url=https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.506796/page/n153/mode/2up|journal=The Modern Review|volume=CXV|issue=2|date=February 1964|page=131}}</ref> एक किंवदंती में कहा गया है कि तानसेन की शादी अकबर की मेहरुनिसा नाम की बेटी से भी हुई थी।<ref name="Dhar1989">{{cite book|last=Dhar|first=Sunita|title=Senia Gharana, Its Contribution to Indian Classical Music|url=https://books.google.com/books?id=ZbgHAQAAMAAJ|year=1989|publisher=Reliance Publishing House|isbn=978-81-85047-49-2|page=24}}</ref> ==शिक्षा दीक्षा== तानसेन के प्रारंभिक जीवन और स्कूली शिक्षा के बारे में पौराणिक मौखिक संस्करण विशेष रूप से इस बात पर निर्भर करते हैं कि कहानी की उत्पत्ति हिंदू किंवदंतियों ([[वैष्णव सम्प्रदाय|वैष्णववाद]]) या मुस्लिम किंवदंतियों ([[सूफ़ीवाद|सूफीवाद]]) में हुई है।<ref name="wade114" /> हिंदू संस्करणों में, हिंदू भक्ति संत और कवि-संगीतकार [[स्वामी हरिदास]] का तानसेन पर प्रमुख प्रभाव था। इस्लामिक जीवनियों में कहा जाता है कि [[मुहम्मद गौस]] नामक सूफी मुस्लिम फकीर ने तानसेन को प्रभावित किया था। बोनी वेड, दक्षिण एशिया अध्ययन में विशेषज्ञता वाले संगीत के प्रोफेसर, के अनुसार स्वामी हरिदास को तानसेन के शिक्षक के रूप में व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है, और यह स्पष्ट है कि तानसेन मुहम्मद गौस से भी जुड़े थे, लेकिन सबूत बताते हैं कि तानसेन किसी भी धर्म से कम, संगीत के साथ अधिक संबद्ध थे।<ref name="wade114" /> तानसेन ने 6 साल की उम्र से ही संगीत प्रतिभा दिखाना शुरू कर दिया। वह कुछ समय के लिए [[स्वामी हरिदास]] के शिष्य रहे, जो कि वृन्दावन के प्रसिद्ध संगीतकार और [[मान सिंह तोमर|राजा मान सिंह तोमर]] (1486-1516 ईस्वी) के शानदार [[ग्वालियर]] दरबार के सदस्य थे, जो गायन की [[ध्रुपद]] शैली में विशेषज्ञता रखते थे। उनकी प्रतिभा को पहले ही पहचान लिया गया था और ग्वालियर के शासक ने ही उस्ताद को सम्मानजनक उपाधि 'तानसेन' से सम्मानित किया था। हरिदास उस समय के एक महान शिक्षक माने जाते थे। ऐसा कहा जाता है कि तानसेन का अपने गुरु के अलावा कोई समकक्ष नहीं था। हरिदास से तानसेन को न केवल ध्रुपद के प्रति प्रेम बल्कि स्थानीय भाषा की रचनाओं में भी रुचि प्राप्त हुई। यह वह समय था जब [[भक्ति काल|भक्ति]] परंपरा संस्कृत से स्थानीय मुहावरे ([[ब्रजभाषा साहित्य|ब्रजभाषा]] और [[हिन्दी|हिंदी]]) की ओर बदलाव को बढ़ावा दे रही थी, और तानसेन की रचनाओं ने भी इस प्रवृत्ति को उजागर किया था। उनकी प्रशिक्षुता के दौरान, तानसेन के पिता की मृत्यु हो गई, और वह घर लौट आए, जहां ऐसा कहा जाता है कि वह एक स्थानीय [[शिव]] मंदिर में गाते थे।{{citation needed|date=December 2016}} जीवनी में उल्लेख है कि तानसेन की मुलाकात सूफी फकीर [[मुहम्मद गौस]] से हुई थी। गौस के साथ बातचीत ने तानसेन पर एक मजबूत सूफी प्रभाव डाला।<ref>{{cite book | author=Wade, Bonnie C. | title=Imaging Sound : An Ethnomusicological Study of Music, Art, and Culture in Mughal India | publisher=University of Chicago Press | year=1998 | isbn=0-226-86840-0 | pages=[https://archive.org/details/imagingsoundethn00wade/page/113 113–114] }}</ref> बाद में अपने जीवन में, उन्होंने [[कृष्ण]] और [[शिव]] जैसे पारंपरिक रूपांकनों का आह्वान करते हुए [[ब्रजभाषा]] में रचना करना जारी रखा।<ref>{{cite book | author=Wade, Bonnie C. | title=Imaging Sound : An Ethnomusicological Study of Music, Art, and Culture in Mughal India | publisher=University of Chicago Press | year=1998 | isbn=0-226-86840-0 | pages=[https://archive.org/details/imagingsoundethn00wade/page/114 114–115] }}</ref> अकबर के दरबार में तानसेन जैसे संगीतकारों की उपस्थिति मुगल साम्राज्य के भीतर हिंदू और मुस्लिम परंपराओं को स्वीकार करने और एकीकृत करने का एक प्रयास था।<ref>{{cite book | author=Wade, Bonnie C. | title=Imaging Sound : An Ethnomusicological Study of Music, Art, and Culture in Mughal India | url=https://archive.org/details/imagingsoundethn0000wade | publisher=University of Chicago Press | year=1998 | isbn=0-226-86840-0}}</ref> तानसेन अकबर के दरबार के बहुमूल्य नवरत्नों (शाब्दिक नव=नौ, रत्न=रत्न) में से एक बन गए। उन्हें वहां सम्मानजनक उपाधि मियां और मियां तानसेन नाम मिला। [[File:Akbar, Todarmal, Tansen and Abul Fazal, Faizi and Abdur Rahim Khan-i-Khana in a court scene (16th Century A.D.).jpg|center|thumb|520x520px|[[टोडरमल]], [[अबुल फजल]], [[फ़ैज़ी|फैजी]] और [[रहीम|अब्दुर रहीम खान-ए-खाना]] के साथ [[अकबर|सम्राट अकबर]] के दरबार में ''तानसेन'', लगभग 16वीं शताब्दी]] ==रचनायें== {{citation needed|February 2024}} तानसेन के नाम के संबंध में मतैक्य नहीं है। कुछ का कहना है कि 'तानसेन' उनका नाम नहीं, उनकों मिली उपाधि थी। तानसेन मौलिक कलाकार थे। वे स्वर-ताल में गीतों की रचना भी करते थे। तानसेन के तीन ग्रन्थों का उल्लेख मिलता है- 1. 'संगीतसार', GURUDEV Satapathy 2. 'रागमाला' 3. 'श्रीगणेश स्तोत्र'। भारतीय संगीत के इतिहास में ध्रुपदकार के रूप में तानसेन का नाम सदैव अमर रहेगा। इसके साथ ही ब्रजभाषा के पद साहित्य का संगीत के साथ जो अटूट सम्बन्ध रहा है, उसके सन्दर्भ में भी तानसेन चिरस्मरणीय रहेंगे। संगीत सम्राट तानसेन अकबर के अनमोल नवरत्नों में से एक थे। अपनी संगीत कला के रत्न थे। इस कारण उनका बड़ा सम्मान था। संगीत गायन के बिना ‍अकबर का दरबार सूना रहता था। तानसेन के ताऊ बाबा रामदास उच्च कोटि के संगीतकार थे। वह वृंदावन के स्वामी हरिदास के शिष्य थे। उन्हीं की प्रेरणा से बालक तानसेन ने बचपन से ही संगीत की शिक्षा पाई। स्वामी हरिदास के पास तानसेन ने बारह वर्ष की आयु तक संगीत की शिक्षा पाई। वहीं उन्होंने साहित्य एवं संगीत शास्त्र की शिक्षा प्राप्त की। संगीत की शिक्षा प्राप्त करके तानसेन देश यात्रा पर निकल पड़े। उन्होंने अनेक स्थानों की यात्रा की और वहाँ उन्हें संगीत-कला की प्रस्तुति पर बहुत प्रसिद्धि तो मिली, लेकिन गुजारे लायक धन की उपलब्धि नहीं हुई। एक बार वह रीवा (मध्यप्रदेश) के राजा रामचंद्र के दरबार में गाने आए। उन्होंने तानसेन का नाम तो सुना था पर गायन नहीं सुना था। उस दिन तानसेन का गायन सुनकर राजा रामचंद्र मुग्ध हो गए। उसी दिन से तानसेन रीवा में ही रहने लगे और उन्हें राज गायक के रूप में हर तरह की आर्थिक सुविधा के साथ सामाजिक और राजनीतिक सम्मान दिया गया। तानसेन पचास वर्ष की आयु तक रीवा में रहे। इस अवधि में उन्होंने अपनी संगीत-साधना को मोहक और लालित्यपूर्ण बना लिया। हर ओर उनकी गायकी की प्रशंसा होने लगी। अकबर के ही सलाहकार और नवरत्नों में से एक अब्दुल फजल ने तानसेन की संगीत की प्रशंसा में अकबर को चिट्ठीु लिखी और सुझाव दिया कि तानसेन को अकबरी-दरबार का नवरत्न होना चाहिए। अकबर तो कला-पारखी थे ही। ऐसे महान संगीतकार को रखकर अपने दरबार की शोभा बढ़ाने के लिए बेचैन हो उठे। उन्होंने तानसेन को बुलावा भेजा और राजा रामचंद्र को पत्र लिखा। किंतु राजा रामचंद्र अपने दरबार के ऐसे कलारत्न को भेजने के लिए तैयार न हुए। बात बढ़ी और युद्ध तक पहुँच गई। और बहुत मान मनब्बल के बाद भी राजा रामचंद्र नहीं माने तो अकबर ने मुगलिया सल्तनत की एक छोटी से टुकड़ी तानसेन को जबरजस्ती लाने के लिए भेज दिया पर राजा राम चंद्र जूदेव और अकबर के सैनिको के बीच युद्ध हुआ और अकबर के सभी सैनिक मारे गए, इसमें रीवा राजा के भी कई सैनिक मारे गए &nbsp;! इससे अकबर क्रुद्ध होकर एक बड़ी सैनिक टुकड़ी भेजी &nbsp;और रीवा के राजा फिर से युद्ध के लिए तैयार हुए तब तानसेन रीवा के राजा के पास पहुंचे और युद्ध न करने की अपील किया , पर राजा बहुत जिद्दी थे नहीं माने ! और अकबर के दरबार में संदेस भेज दिया की <nowiki>''</nowiki>यदि बादशाह याचना पात्र भेजे तो मैं तानसेन को भेज दूंगा<nowiki>''</nowiki> अकबर भी छोटी-छोटी सी बात पर राजपूतो से युद्ध नहीं करना चाहते थे ! तब अकबर ने याचना पात्र भेज दिया तब राजा रामचंद्र जूदेव ने सहर्ष, ससम्मान &nbsp;तानसेन को दिल्ली भेज दिया और एक बड़ा युद्ध टल गया ! अकबर के दरबार में आकर तानसेन पहले तो खुश न थे लेकिन धीरे-धीरे अकबर के प्रेम ने तानसेन को अपने निकट ला दिया। चाँद खाँ और सूरज खाँ स्वयं न गा सकें। आखिर मुकाबला शुरू हुआ। उसे सुनने वालों ने कहा 'यह गलत राग है।' तब तानसेन ने शास्त्रीय आधार पर उस राग की शुद्धता सिद्ध कर दी। शत्रु वर्ग शांत हो गया। संगीत सम्राट तानसेन अकबर के अनमोल नवरत्नों में से एक थे। तानसेन को अपने दरबार में लाने के लिए अकबर की सेना और रीवा के बाघेला राजपूतो के बीच में भयानक युद्ध हुआ था ! अकबर के दरबार में तानसेन को नवरत्न की ख्यायति मिलने लगी थी। इस कारण उनके शत्रुओं की संख्यार भी बढ़ रही थी। कुछ दिनों बाद तानसेन का ठाकुर सन्मुख सिंह बीनकार से मुकाबला हुआ। वे बहुत ही मधुर बीन बजाते थे। दोनों में मुकाबला हुआ, किंतु सन्मुख सिंह बाजी हार गए। तानसेन ने भारतीय संगीत को बड़ा आदर दिलाया। उन्होंने कई राग-रागिनियों की भी रचना की। 'मियाँ की मल्हार' 'दरबारी कान्हड़ा' 'गूजरी टोड़ी' या 'मियाँ की टोड़ी' तानसेन की ही देन है। तानसेन कवि भी थे। उनकी काव्य कृतियों के नाम थे - 'रागमाला', 'संगीतसार' और 'गणेश स्रोत्र'। 'रागमाला' के आरंभ में दोहे दिए गए हैं। ''सुर मुनि को परनायकरि, सुगम करौ संगीत।'' ''तानसेन वाणी सरस जान गान की प्रीत।'' ==लोकप्रिय संस्कृति== तानसेन के जीवन पर कई हिंदी फ़िल्में बनी हैं, जिनमें अधिकतर कहानियाँ हैं। उनमें से कुछ हैं [[:en:Tansen (film)|तानसेन]] (1943), [[:en:Ranjit Studios|रंजीत मूवीटोन]] द्वारा निर्मित एक संगीतमय हिट, जिसमें [[कुन्दन लाल सहगल]] और [[:en:Khursheed Bano|खुर्शीद बानो]] ने अभिनय किया था।<ref name="NettlArnold2000">{{cite book|last1=Nettl|first1=Bruno|last2=Arnold|first2=Alison|title=The Garland Encyclopedia of World Music: South Asia : the Indian subcontinent|url=https://books.google.com/books?id=ZOlNv8MAXIEC&pg=PA525|year=2000|publisher=Taylor & Francis|isbn=978-0-8240-4946-1|page=525}}</ref> तानसेन (1958) और संगीत सम्राट तानसेन (1962)। ऐतिहासिक संगीतमय [[बैजू बावरा (1952 फ़िल्म)|बैजू बावरा]] (1952) में तानसेन भी एक केंद्रीय पात्र हैं, हालांकि ज्यादातर पृष्ठभूमि में रहते हैं, जो उनके ही समकालीन के जीवन पर आधारित है।{{citation needed|date=December 2016}} <gallery> File:Mia Tansen by Lala Deo Lal.jpg|तानसेन की आधुनिक कलाकार छाप File:Photo Mian Tansen 1580.jpg|तानसेन की मुगल चित्रकला 1580 ईस्वी File:Tansen Tomb - panoramio.jpg|[[ग्वालियर]] में तानसेन की कब्र, उनके [[सूफ़ीवाद|सूफी]] गुरु [[मुहम्मद गौस]] की कब्र के पास File:Tansen's tomb (16290416076).jpg|तानसेन की कब्र के अंदर File:Fatehpur Sikri anup-talao-crp.jpg|[[फ़तेहपुर सीकरी]] दर्शक कक्ष, बाईं ओर अनूप तलाव के साथ File:Tansen mughal.jpg|तानसेन का 20वीं सदी का चित्रण </gallery> ==चरित्र-चित्रण== तानसेन के पुराने चित्रों से उनके रूप-रंग की जानकारी मिलती है। तानसेन का रंग सांवला था। मूँछें पतली थीं। वह सफेद पगड़ी बाँधते थे। सफेद चोला पहनते थे। कमर में फेंटा बाँधते थे। ध्रुपद गाने में तानसेन की कोई बराबरी नहीं कर सकता था। तानसेन का देहावसान अस्सी वर्ष की आयु में हुआ। उनकी इच्छा थी कि उन्हें उनके गुरु मुहम्मद गौस खाँ की समाधि के पास दफनाया जाए। वहाँ आज उनकी समाधि पर हर साल तानसेन संगीत समारोह आयोजित होता है। ==परंपरा== [[File:Stamp of India - 1986 - Colnect 167172 - Miyan Tansen.jpeg|thumb|तानसेन को चित्रित करने वाला भारत का टिकट]] ===तानसेन सम्मान=== उनकी स्मृति के सम्मान में बेहट में तानसेन की कब्र के पास हर साल दिसंबर में एक राष्ट्रीय संगीत समारोह आयोजित किया जाता है, जिसे [[तानसेन समारोह]] के नाम से जाना जाता है। [[तानसेन सम्मान]] [[हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत|हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत]] के प्रतिपादकों को दिया जाता है। ===इमारतें=== [[फ़तेहपुर सीकरी]] का किला अकबर के दरबार में तानसेन के कार्यकाल से दृढ़ता से जुड़ा हुआ है। सम्राट के कक्षों के पास, बीच में एक छोटे से द्वीप पर एक तालाब बनाया गया था, जहाँ संगीतमय प्रस्तुतियाँ दी जाती थीं। आज, यह टैंक, जिसे अनूप तलाओ कहा जाता है, सार्वजनिक दर्शक कक्ष [[दीवान-ए-आम]] के पास देखा जा सकता है - एक केंद्रीय मंच जहां चार फुटब्रिज के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। ऐसा कहा जाता है कि तानसेन दिन के अलग-अलग समय पर अलग-अलग रागों का प्रदर्शन करते थे और सम्राट और उनके चुनिंदा श्रोता उन्हें सिक्कों से सम्मानित करते थे। तानसेन का कथित निवास भी पास में ही है। ===क्रेटर=== [[बुध (ग्रह)|बुध ग्रह]] पर एक [[:en:Tansen (crater)|क्रेटर]] का नाम तानसेन के सम्मान में रखा गया है।<ref>{{cite web |url = https://planetarynames.wr.usgs.gov/Feature/5858|title = Tansen |publisher = [[:en:IAU|IAU]]/[[:en:USGS|USGS]]/[[:en:NASA|NASA]] |work = Gazetteer of Planetary Nomenclature |access-date = 12 May 2022}}</ref> ==चमत्कार और किंवदंतियाँ== अकबर दरबार के इतिहासकारों के लेखों और घराने के साहित्य में तानसेन की अधिकांश जीवनी असंगत और चमत्कारी किंवदंतियों से भरी हुई है।<ref name="davar"/> तानसेन के बारे में किंवदंतियों में राग मेघ मल्हार के साथ बारिश लाने और राग दीपक का प्रदर्शन करके दीपक जलाने की कहानियां हैं।<ref>{{cite book|author1=George Ruckert|author2=Ali Akbar Khan|title=The Classical Music of North India: The first years study|url=https://books.google.com/books?id=uWIJAQAAMAAJ|year=1998|publisher=Munshiram Manoharlal|isbn=978-81-215-0872-8|page=270}}</ref><ref>{{cite book|last=Deva|first=Bigamudre|title=Indian Music|year=1995|publisher=Taylor & Francis|location=India}}</ref> [[राग मेघमल्लार|राग मेघ मल्हार]] अभी भी मुख्यधारा के प्रदर्शनों की सूची में है, लेकिन राग दीपक अब ज्ञात नहीं है; [[बिलावल ठाट]], [[पूर्वी थाट]] और [[खमाज ठाट]] में तीन अलग-अलग प्रकार मौजूद हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि कौन सा, यदि कोई हो, तानसेन के समय के दीपक से मेल खाता है। अन्य किंवदंतियाँ जंगली जानवरों को ध्यान से सुनने (या उनकी भाषा में बात करने) की उनकी क्षमता के बारे में बताती हैं। एक बार, एक जंगली सफेद हाथी को पकड़ लिया गया, लेकिन वह भयंकर था और उसे वश में नहीं किया जा सका। अंत में, तानसेन ने हाथी के लिए गाना गाया, जो शांत हो गया और सम्राट उस पर सवारी करने में सक्षम हो गए।{{citation needed|date=December 2016}} ===राग दीपक=== एक दिन जलने वालों ने तानसेन के विनाश की योजना बना डाली। इन सबने बादशाह अकबर से तानसेन से 'दीपक' राग गवाए जाने की प्रार्थना की। अकबर को बताया गया कि इस राग को तानसेन के अलावा और कोई ठीक-ठीक नहीं गा सकता। बादशाह राज़ी हो गए, और तानसेन को दीपक राग गाने की आज्ञा दी। तानसेन ने इस राग का अनिष्टकारक परिणाम बताए बिना ही राग गाने से मना कर दिया, फिर भी अकबर का राजहठ नहीं टला, और तानसेन को दीपक राग गाना ही पड़ा। दीपक राग गाने से जब तानसेन के अंदर अग्नि राग भी शुरू हुआ, गर्मी बढ़ी व धीरे-धीरे वायुमंडल अग्निमय हो गया। सुनने वाले अपने-अपने प्राण बचाने को इधर-उधर छिप गए, किंतु तानसेन का शरीर अग्नि की ज्वाला से दहक उठा। ऐसी हालत में तानसेन वडनगर पहुंचे, वहाँ भक्त कवि नरसिह मेहता कि बेटि कुवरबाई कि बेटि शर्मिष्ठा कि बेटियों ताना-रिरि ने मल्हार राग गाकर उनके जीवन की रक्षा की। इस घटना के कई महीनों बाद तानसेन का शरीर स्वस्थ हुआ। शरीर के अंदर ज्वर बैठ गया था। आखिरकार वह ज्वर फिर उभर आया, और फ़रवरी, 1586 में इसी ज्वर ने उनकी जान ले ली।{{citation needed|date=February 2024}} ===अकबर और स्वामी हरिदास=== एक बार अकबर ने उनसे कहा कि वो उनके गुरु का संगीत सुनना चाहते हैं। [[स्वामी हरिदास|गुरु हरिदास]] तो अकबर के दरबार में आ नहीं सकते थे। लिहाजा इसी निधि वन में अकबर हरिदास का संगीत सुनने आए। हरिदास ने उन्हें कृष्ण भक्ति के कुछ भजन सुनाए थे। अकबर हरिदास से इतने प्रभावित हुए कि वापस जाकर उन्होंने तानसेन से अकेले में कहा कि आप तो अपने गुरु की तुलना में कहीं आस-पास भी नहीं है। फिर तानसेन ने जवाब दिया, "जहांपनाह! हम इस ज़मीन के बादशाह के लिए गाते हैं और हमारे गुरु इस ब्रह्मांड के बादशाह के लिए गाते हैं तो फर्क तो होगा न।"{{citation needed|date=February 2024}} ==मृत्यु== तानसेन की मृत्यु का वर्ष, उनकी अधिकांश जीवनी की तरह, अस्पष्ट है। इस्लामी इतिहासकारों द्वारा लिखित एक संस्करण के अनुसार, तानसेन की मृत्यु 1586 में दिल्ली में हुई थी, तानसेन का सन्धि विच्छेद तान+सेन है और सेन एक समाज भी है|अकबर और उनके दरबार के अधिकांश लोग अंतिम संस्कार जुलूस में शामिल हुए थे, जो मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार पूरा हुआ था।<ref name=dawn/><ref>{{cite book|author=Stephen F. Dale|title=The Muslim Empires of the Ottomans, Safavids, and Mughals|url=https://books.google.com/books?id=vNmaBAAAQBAJ&pg=PT160 |year=2009| publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-316-18439-4|page=160}}</ref> हिंदू इतिहासकारों द्वारा लिखे गए अन्य संस्करणों के साथ-साथ अबुल फज़ल द्वारा लिखित अकबरनामा में उनकी मृत्यु की तारीख 26 अप्रैल 1589 बताई गई है और कहा गया है कि उनके अंतिम संस्कार में ज्यादातर हिंदू रीति-रिवाजों का पालन किया गया था।<ref>{{cite book|author=Bonnie C. Wade|title=Imaging Sound: An Ethnomusicological Study of Music, Art, and Culture in Mughal India|url=https://archive.org/details/imagingsoundethn00wade|url-access=registration|year=1998|publisher=University of Chicago Press|isbn=978-0-226-86840-0|page=[https://archive.org/details/imagingsoundethn00wade/page/115 115]}}</ref><ref>{{Cite book|last=Fazl|first=Abul|title=Akbarnama|publisher=Asiatic Society of Bengal|pages=816|translator-last=Beveridge|translator-first=Henry}}</ref> तानसेन के अवशेषों को ग्वालियर में उनके सूफी गुरु शेख मुहम्मद गौस के मकबरे परिसर में दफनाया गया था। हर साल दिसंबर में, तानसेन को मनाने के लिए ग्वालियर में एक वार्षिक उत्सव, तानसेन समारोह आयोजित किया जाता है।<ref>{{cite news|url = http://www.hindu.com/mag/2004/01/11/stories/2004011100040100.htm |archive-url = https://web.archive.org/web/20040930093656/http://www.hindu.com/mag/2004/01/11/stories/2004011100040100.htm |url-status = dead |archive-date = 30 September 2004 |work = The Hindu |title= Strains of a raga ... iun Gwalior|date = 11 January 2004}}</ref> {{अकबर के नवरत्न}} == सन्दर्भ == {{reflist}} == देखें == * [[हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत]] * [[स्वामी हरिदास]] ==सहायक ग्रन्थ== १ संगीतसम्राट तानसेन (जीवनी और रचनाएँ): प्रभुदयाल मीतल, साहित्य संस्थान, मथुरा; २ हिन्दी साहित्य का इतिहास: पं॰ रामचन्द्र शुक्ल: ३ अकबरी दरबार के हिन्दी कबि: डा॰ सरयू प्रसाद अग्रवाल।) [[श्रेणी:मुग़ल उच्चाधिकारी]] [[श्रेणी:अकबर के नवरत्न]] [[श्रेणी:१४९० जन्म]] [[श्रेणी:१५८० मृत्यु]] [[श्रेणी:मुग़ल साम्राज्य]] [[श्रेणी:भारतीय संगीतज्ञ]] [[श्रेणी:ग्वालियर के लोग]] [[श्रेणी:भारतीय मुस्लिम]] [[श्रेणी:आगरा के लोग]] [[श्रेणी:हिन्दू धर्म से इस्लाम में धर्मान्तरित]] l6y24qxbm6urh3gofy6uja369ahmdyf डायनोसेब 0 63899 6630414 3273345 2026-10-17T10:45:28Z SAGAR SURYAVANSHI JAITHAL 938876 डायनोसेब लेख में इसकी रासायनिक संरचना को दर्शाता हुआ 2D संरचनात्मक आरेख और हिंदी कैप्शन जोड़ा 6630414 wikitext text/x-wiki [[चित्र:Dinoseb.png|अंगूठाकार|पाठ=एक रासायनिक आरेख (chemical diagram) जो बेंजीन रिंग, हाइड्रॉक्सिल समूह और दो नाइट्रो समूहों को दर्शाते हुए डायनोसेब की आणविक संरचना प्रदर्शित करता है।|डायनोसेब कार्बनिक यौगिक की रासायनिक संरचना।]] '''डायनोसेब''' एक [[कार्बनिक यौगिक]] है। [[श्रेणी:कार्बनिक यौगिक]] {{Organic-compound-stub}} ko4tdohi0ba9nrdvd2xnypxvyo87tn3 साँचा:तुर्की के प्रान्त 10 70013 6630382 4911764 2026-10-17T07:59:06Z अमर तिवारी 932885 नाम ठीक किए 6630382 wikitext text/x-wiki {{Navbox |name = तुर्की के प्रांत |title = [[तुर्की के प्रांत]] | basestyle = background-color:paleturquoise |state = {{{state|autocollapse}}} |listclass = hlist |list1 = * '''[[अदाना प्रांत|अदाना]]''' * [[अदुयामान प्रांत|अदुयामान]] * [[अफ़योनकाराहिसार प्रांत|अफ़योनकाराहिसार]] * [[आरु प्रांत|आरु]] * [[अकसराय प्रांत|अकसराय]] * [[अमास्या प्रांत|अमास्या]] * '''[[अंकारा प्रांत|अंकारा]]''' * '''[[अंताल्या प्रांत|अंताल्या]]''' * [[अर्दाहान प्रांत|अर्दाहान]] * [[अर्तविन प्रांत|अर्तविन]] * '''[[अयदुन प्रांत|अयदुन]]''' * '''[[बालुकेसिर प्रांत|बालुकेसिर]]''' * [[बार्तुन प्रांत|बार्तुन]] * [[बातमान प्रांत|बातमान]] * [[बायबुर्त प्रांत|बायबुर्त]] 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[[ज़ोंगुलदाक प्रांत|ज़ोंगुलदाक]] |below=महानगरपालिकाएँ बड़े अक्षरों में है। }}<noinclude> {{navbox documentation}} [[Category:प्रान्त साँचे|तुर्की]] </noinclude> ic6ur44x4pffb5tmvisz6hfgszfp8i6 6630388 6630382 2026-10-17T08:20:08Z अमर तिवारी 932885 6630388 wikitext text/x-wiki {{Navbox |name = तुर्की के प्रान्त |title = [[तुर्की के प्रांत]] | basestyle = background-color:paleturquoise |state = {{{state|autocollapse}}} |listclass = hlist |list1 = * '''[[अदाना प्रांत|अदाना]]''' * [[अदुयामान प्रांत|अदुयामान]] * [[अफ़योनकाराहिसार प्रांत|अफ़योनकाराहिसार]] * [[आरु प्रांत|आरु]] * [[अकसराय प्रांत|अकसराय]] * [[अमास्या प्रांत|अमास्या]] * '''[[अंकारा प्रांत|अंकारा]]''' * '''[[अंताल्या प्रांत|अंताल्या]]''' * [[अर्दाहान प्रांत|अर्दाहान]] * [[अर्तविन प्रांत|अर्तविन]] * '''[[अयदुन प्रांत|अयदुन]]''' * '''[[बालुकेसिर प्रांत|बालुकेसिर]]''' * [[बार्तुन प्रांत|बार्तुन]] * [[बातमान प्रांत|बातमान]] * [[बायबुर्त प्रांत|बायबुर्त]] * [[बिलेजिक प्रांत|बिलेजिक]] * [[बिंगोल प्रांत|बिंगोल]] * [[बित्लिस 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है। }}<noinclude> {{navbox documentation}} [[Category:प्रान्त साँचे|तुर्की]] </noinclude> ezr1qruyqf8gd32dk9jx1os1553h4yd विमानक्षेत्रों की सूची ICAO कोड अनुसार: L 0 70951 6630233 6242242 2026-10-16T13:21:32Z अमर तिवारी 932885 शीघ्र हटाने के लिए नामांकित किया 6630233 wikitext text/x-wiki {{शीह-ल1}} {{विमानक्षेत्रों की सूची}} Format of entries is: * '''ICAO''' (IATA) – Airport Name – Airport Location == LA - [[Albania]] == {{Airport-list|Albania}} * '''LA10''' – [[Gjirokastër Airport]] – [[Gjirokastër]] * '''LAFK''' – [[Tirana Mil Hel Airport]] – [[Tirana]] * '''LAGJ''' – [[Gjader Airport]] – [[Gjader]] * '''LAKO''' – [[Korçë Northwest Airport]] – [[Korçë]] * '''LAKU''' – [[Kukes Airport]] – [[Kukës]] * '''LAKV''' – [[Kuçovë Airport]] – [[Kuçovë]] * '''LASK''' – [[Shkodër Airport]] – [[Shkodër]] (Shkodra) * '''LASR''' – [[Sarandë Airport]] – [[Sarandë]] (Saranda) * '''LATI''' (TIA) – [[Rinas Mother Teresa Airport]] – [[Tirana]] * '''LAVL''' – [[Vlorë Airport]] – [[Vlorë]] (Vlora) == LB 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'''LFAM''' – [[Berck-sur-Mer Airport]] – [[Berck-sur-Mer]] * '''LFAO''' – [[Bagnoles-de-l'Orne Airport]] – [[Bagnoles-de-l'Orne]] * '''LFAP''' – [[Rethel - Perthes Airport]] – [[Rethel]] * '''LFAQ''' – [[Albert-Picardie Airport]] – [[Albert, Somme|Albert]] * '''LFAR''' – [[Montdidier Airport]] – [[Montdidier]] * '''LFAS''' – [[Falaise - Monts d'Eraines Airport]] – [[Falaise]] * '''LFAT''' (LTQ) – [[Le Touquet-Paris-Plage Airport]] – [[Le Touquet-Paris-Plage]] * '''LFAU''' – [[Vauville Airport]] – [[Vauville]] * '''LFAV''' (XVS) – [[Valenciennes - Denain Airport]] – [[Valenciennes]] * '''LFAW''' – [[Villerupt Airport]] – [[Villerupt]] * '''LFAX''' – [[Mortagne-au-Perche Airport]] – [[Mortagne-au-Perche]] * '''LFAY''' (QAM) – [[Amiens - Glisy Airport]] – [[Amiens]] * '''LFAZ''' (SBK) – [[Saint-Brieuc Airport]] – [[Saint-Brieuc]] * '''LFBA''' (AGF) – [[Agen - La Garenne Airport]] – [[Agen]] * '''LFBD''' (BOD) – [[Bordeaux - Merignac Airport]] – [[Bordeaux]] * '''LFBE''' (EGC) – [[Bergerac 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'''LFCK''' (DCM) – [[Castres-Mazamet Airport]] – [[Castres]], [[Mazamet]] * '''LFCL''' – [[Toulouse-Lasbordes Airpor]] – [[Toulouse]] * '''LFCM''' – [[Millau Larzac Airport]] – [[Millau]] * '''LFCN''' – [[Nogaro Airport]] – [[Nogaro]] * '''LFCO''' – [[Oloron Herere Airport]] – [[Oloron]] * '''LFCP''' – [[Pons Avy Airport]] – [[Pons, Charente-Maritime|Pons]] * '''LFCQ''' – [[Graulhet Montdragon Airport]] – [[Graulhet]] * '''LFCR''' (RDZ) – [[Rodez Marcillac Airport]] – [[Rodez]] * '''LFCS''' – [[Bordeaux Leognan saucats Airport]] – [[Bordeaux]] * '''LFCT''' – [[Thouars Airport]] – [[Thouars]] * '''LFCU''' – [[Ussel Thalamy Airport]] – [[Ussel, Corrèze|Ussel]], [[Thalamy]] * '''LFCV''' – [[Villefranche-de-Rouergue Airport]] – [[Villefranche-de-Rouergue]] * '''LFCW''' – [[Villeneuve-sur-Lot Airport]] – [[Villeneuve-sur-Lot]] * '''LFCX''' – [[Castelsarrazin Moissac Airport]] – [[Castelsarrasin]] * '''LFCY''' (RYN) – [[Royan Medis Airport]] – [[Royan]] * '''LFCZ''' – [[Mimizan Airport]] – 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[[Perpignan Rivesaltes Airport]] – [[Perpignan]] * '''LFMQ''' (CTT) – [[Le Castellet Airport]] – [[Le Castellet]] * '''LFMR''' (BAE) – [[Barcelonnette Saint-Pons Airport]] – [[Barcelonnette]] * '''LFMS''' (XAS) – [[Alès Deaux Airport]] – [[Alès]] * '''LFMT''' (MPL) – [[Montpellier-Méditerranée Airport]] – [[Montpellier]] * '''LFMU''' (BZR) – [[Béziers-Agde-Vias Airport]] – [[Béziers]] * '''LFMV''' (AVN) – [[Avignon Caumont Airport]] – [[Avignon]] * '''LFMW''' – [[Castelnaudary Villeneuve Airport]] – [[Castelnaudary]] * '''LFMX''' – [[Château-Arnoux Saint-Auban Airport]] – [[Château-Arnoux]] * '''LFMZ''' – [[Lezignan Corbieres Airport]] – [[Lezignan]] * '''LFNA''' (GAT) – [[Gap Tallard Airport]] – [[Gap, Hautes-Alpes|Gap]] * '''LFNB''' (MEN) – [[Mende Brenoux Airport]] – [[Mende, Lozère|Mende]] * '''LFNC''' – [[Mont-Dauphin Saint-Crepin Airport]] – [[Mont-Dauphin]] * '''LFND''' – [[Pont-Saint-Esprit Airport]] – [[Pont-Saint-Esprit]] * '''LFNE''' – [[Salon Eyguieres Airport]] – 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== LG - Greece == {{Airport-list|Greece}} * '''LGAG''' (AGQ) - [[Agrinion Airport]] - [[Agrinion]] * '''LGAL''' (AXD) – [[Alexandroupolis International Airport]], "Dimokritos" (Democritus) – [[Alexandroupolis]] * '''LGAD''' (PYR) – [[Andravida Airport]] – [[Andravida]] * <s>'''LGAT''' (ATH) – [[Ellinikon International Airport]]</s> (closed in 2001) – [[Athens]] * '''LGAV''' (ATH) – [[Athens International Airport, "Eleftherios Venizelos"]] – [[Athens]] (Athina) * '''LGBL''' (VOL) – [[International Airport of Central Greece]] – [[Nea Anchialos]]/[[Volos]] * '''LGHI''' (JKH) – [[Chios Island National Airport]] – [[Chios]] * '''LGHL''' (PKH) - [[Porto Cheli Airport]] - [[Porto Cheli]], [[Argolis]] * '''LGIK''' (JIK) – [[Ikaria Island National Airport]] – [[Ikaria]] * '''LGIO''' (IOA) – [[Ioannina National Airport]] – [[Ioannina]] * '''LGIR''' (HER) – [[Heraklion International Airport, "Nikos Kazantzakis"]] – [[Heraklion]] (Iraklion), [[Crete]] * '''LGKA''' (KSO) – [[Kastoria National 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Ra´jah Ma´n Singh, son of Bhagwán Dás - Biography] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20161007092053/http://persian.packhum.org/persian/main?url=pf%3Ffile%3D00702051%26ct%3D237%26rqs%3D302%26rqs%3D309%26rqs%3D310|date=7 October 2016}} [[Ain-i-Akbari]], Vol. I.</ref><ref>[http://www.mapsofindia.com/who-is-who/history/raja-man-singh.html Raja Man Singh Biography] India's who's who, www.mapsofindia.com.</ref> महान इतिहासकार कर्नल [[जेम्स टॉड]] ने लिखा है- " राजा भगवंतदास जी के उत्तराधिकारी राजा मान सिंहजी को मुगल सम्राट अकबर के दरबार में श्रेष्ठ स्थान मिला था। मान सिंहजी ने उडीसा को बादशाह के अधीन कर दिया था | राजा मानसिंह से भयभीत हो कर काबुल को भी अकबर की अधीनता स्वीकार करनी पडी थी। अपने इन कार्यों के फलस्वरूप मानसिंह बंगाल, बिहार, दक्षिण और काबुल का शासक नियुक्त हुआ था।"<ref>[http://persian.packhum.org/persian/main?url=pf%3Ffile%3D00702051%26ct%3D237%26rqs%3D302%26rqs%3D309%26rqs%3D310 30. Ra´jah Ma´n Singh, son of Bhagwán Dás - Biography] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20161007092053/http://persian.packhum.org/persian/main?url=pf%3Ffile%3D00702051%26ct%3D237%26rqs%3D302%26rqs%3D309%26rqs%3D310|date=7 अक्तूबर 2016}} [[Ain-i-Akbari]], Vol. I.</ref><ref>[http://www.mapsofindia.com/who-is-who/history/raja-man-singh.html Raja Man Singh Biography] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190409172211/https://www.mapsofindia.com/who-is-who/history/raja-man-singh.html |date=9 अप्रैल 2019 }} India's who's who, www.mapsofindia.com.</ref><ref>1.राजस्थान का इतिहास : कर्नल जेम्स टॉड, साहित्यागार प्रकाशन, जयपुर</ref> राजा मान सिंह आमेर (आम्बेर) के कच्छवाहा राजपूत राजा थे। उन्हें 'मान सिंह प्रथम' के नाम से भी जाना जाता है। राजा भगवन्त दास इनके पिता थे। वह अकबर की सेना के प्रधान सेनापति, थे। उन्होने आमेर के मुख्य महल के निर्माण कराया। ] महाराजा मानसिंह और महाराणा प्रताप संपादित करें जब अकबर के सेनापति मानसिंह शोलापुर महाराष्ट्र विजय करके लौट रहे थे, तो मानसिंह ने प्रताप से मिलने का विचार किया। प्रताप उस वक़्त कुम्भलगढ़ में थे। अपनी राज्यसीमा मेवाड़ के भीतर से गुजरने पर महाराणा प्रताप को उनके स्वागत का प्रबंध उदयपुर के उदयसागर की पाल पर करना पड़ा. स्वागत-सत्कार एवं परस्पर बातचीत के बाद भोजन का समय भी आया। महाराजा मानसिंह भोजन के लिए आये किन्तु महाराणा को न देख कर आश्चर्य में पड़ गये| उन्होंने महाराणा के पुत्र अमरसिंह से इसका कारण पूछा तो उसने बताया कि वे भोजन पर आपका साथ देने में में असमर्थ हैं।' कुछ इतिहासकारों के अनुसार यही घटना हल्दी घाटी के युद्ध का कारण भी बनी। अकबर को राणा प्रताप के इस व्यवहार के कारण मेवाड़ पर आक्रमण करने का एक और मौका मिल गया। सन 1576 ई. में 'महाराणा प्रतापसिंह को दण्ड देने' के अभियान पर नियत हुए। मुगलों की विशाल सेना तरह मेवाड़ की ओर उमड पड़ी। उसमें मुगल, राजपूत और पठान योद्धाओं के साथ अकबर का जबरदस्त तोपखाना भी था। अकबर के प्रसिद्ध सेनापति महावत खाँ, आसफ खाँ और महाराजा मानसिंह के साथ अकबर का शाहजादा सलीम उस मुगल सेना का संचालन कर रहे थे, जिसकी संख्या इतिहासकार ८० हजार से १ लाख तक बताते हैं। मानसिंह और रक्तरंजित हल्दी घाटी संपादित करें उस विशाल मुगल सेना का कड़ा मुकाबला राणा प्रताप ने अपने मुट्ठी भर (सिर्फ बाईस हजार) सैनिकों के साथ किया। हल्दी घाटी की पीली भूमि रक्तरंजित हो उठी। सन् 1576 ई. के 21 जून को गोगून्दा के पास हल्दी घाटी में प्रताप और मुग़ल सेना के बीच एक दिन के इस भयंकर संग्राम में सत्रह हज़ार सैनिक मारे गए। यहीं राणा प्रताप और मानसिंह का आमना-सामना होने पर दोनों के बीच विकट युद्ध हुआ की पीठ पर सवार प्रताप ने अकबर के सेनापति मानसिंह के हाथी के मस्तक पर काले-नीले रंग के, अरबी नस्ल के अश्व चेतक के पाँव जमा दिए और अपने भाले से सीधा राजा मानसिंह पर एक प्रलयंकारी वार किया, पर तत्काल अपने हाथी के मज़बूत हौदे में नीचे बैठ जाने से इस युद्ध में उनकी जान बच गयी- हौदा प्रताप के दुर्घर्ष वार से बुरी तरह मुड़ गया। बाद में जब गंभीर घायल होने पर राणा प्रताप जब हल्दीघाटी की युद्धभूमि से दूर चले गए, तब राजा मानसिंह ने प्रताप के प्रसिद्ध हाथियों में से एक हाथी रामप्रसाद को आगरा-दरबार भेजा। परन्तु मानसिंह ने चित्तौडगढ के नगर को लूटने की आज्ञा नहीं दी थी, यह जान कर बादशाह अकबर इन पर काफी कुपित हुआ और कुछ वक़्त के लिए दरबार में इनके आने पर प्रतिबन्ध तक लगा दिया.[2] जेम्स टॉड के शब्दों में- "जिन दिनों में अकबर भयानक रूप से बीमार हो कर अपने मरने की आशंका कर रहा था, राजा मानसिंह खुसरो को मुग़ल सिंहासन पर बिठाने के लिए षड्यंत्रों का जाल बिछा दिया था। यह जहाँगीर को ज्ञात हो गयी और वह बंगाल का शासक बना कर भेज दिया गया। उसके चले जाने के बाद खुसरो को कैद करके कारागार में रखा गया। मानसिंह चतुर और दूरदर्शी था। वह छिपे तौर पर खुसरो का समर्थन करता रहा. राजा मानसिंह के अधिकार में बीस हज़ार राजपूतों की सेना थी। इसलिए बादशाह प्रकट रूप में उसके साथ शत्रुता नहीं की. कुछ इतिहासकारों ने लिखा है- "अकबर ने दस करोड़ रुपये दे कर मानसिंह को अपने अनुकूल बना लिया था।"[3] काबुल का शासक नियुक्त संपादित करें अकबर शासन में जब राजा भगवंतदास पंजाब के सूबेदार नियत हुए, तब सिंध के पार सीमांत प्रान्त का शासन उनके कुँवर मानसिंह को दिया गया। जब 30वें वर्ष में अकबर के सौतेले भाई मिर्ज़ा मुहम्मद हक़ीम की (जो कि काबुल का शासनकर्ता था) मानसिंह ने आज्ञानुसार फुर्ती से काबुल पहुँच कर वहाँ के निवासियों को शासक के बाद उत्पन्न लूटपाट से निजात दिलवाई और उसके पुत्र मिर्ज़ा अफ़रासियाब और मिर्ज़ा कँकुवाद को राज्य के अन्य सरदारों के साथ ले कर वे दरबार में आए। अकबर ने सिंध नदी पर कुछ दिन ठहर कर कुँवर मानसिंह को काबुल का शासनकर्ता नियुक्त किया। इन्होंने बड़ी बहादुरी के साथ रूशानी लुटेरों को, जो विद्रोहपूर्वक खैबर के दर्रे को रोके हुए थे, का सफाया किया। जब राजा बीरबल स्वाद प्रान्त में यूसुफ़जई के युद्ध में मारे गए और जैनख़ाँ कोका और हक़ीम अबुल फ़तह दरबार में बुला लिए गए, तब यह कार्य मानसिंह को सौंपा गया। अफगानिस्तान में जाबुलिस्तान के शासन पर पहले पिता भगवंतदास नियुक्त हुए और बाद में उनके कुँअर मानसिंह ने अफ़ग़ानिस्तान के पांच कबीलों को हराकर आमेर राज्य के झंडे को कंचन धार से बदल कर पचृँगा कर दिया था ( पांच रंगो का झंडा) | मानसिंह काल में आमेर की उन्नति संपादित करें राजा भगवानदास की मृत्यु हो जाने पर राजा मानसिंह जयपुर के सिंहासन पर बैठा. कर्नल जेम्स टॉड ने लिखा है- "मानसिंह के शासनकाल में आमेर राज्य ने बड़ी उन्नति की. मुग़ल दरबार में सम्मानित हो कर मानसिंह ने अपने राज्य का विस्तार किया उसने अनेक अफगानी राज्यों पर आक्रमण कर के जो अपरिमित संपत्ति लूटी थी, उसके द्वारा आमेर राज्य को शक्तिशाली बना दिया और ग्यारह या बारह किलोमीटर लम्बी दिवार सुरक्षा के लीये बनाई ।. राजा धौलाराय के बाद आमेर, जो एक मामूली राज्य समझा जाता था, मानसिंह के समय वही एक शक्तिशाली और विस्तृत राज्य हो गया था। भारतवर्ष के इतिहास में कछवाहों को वीर नहीं माना गया पर राजा पज्वं देव व राजा पृथ्वीराज के अधंभ्य शाहस के लिय ( पृथ्वीराशो ) में परसन्सा हुई है | राजा भगवान दास और राजा मानसिंह के समय कछवाहा राजपूतो ने उतर से लेकर दक्षिण दिशा व समुद्र तक अपने बल, पराक्रम, और वैभव की प्रतिष्ठा की थी। राजा भारमल यों अकबर की शंधि में ज़रूर था, पर राजा मानसिंह के साथ वाली राजपूत सेना, अकबर की सेना से कहीं अधिक शक्तिशाली समझी जाती थी"।[4] कर्नल जेम्स टॉड की इस बात से दूसरे कुछ इतिहासकार सहमत नहीं. उनका कथन है मानसिंह भगवान दास का गोद लिया पुत्र नहीं था, बल्कि वह तो भगवंत दास का लड़का था। भगवानदास और भगवंत दास दोनों भाई थे।[5] मुग़ल-इतिहास की किताबों से ज़ाहिर होता है कि अकबर के आदेश पर उसके अनुभवी अधिकारी महाराजा मानसिंह, स्थानीय सूबेदार कुतुबुद्दीन खान और आमेर के राजा भगवंत दास ने गोगून्दा और मेवाड़ के जंगलों में महाराणा प्रताप को पकड़ने के लिए बहुत खोजबीन की पर अंततः वे असफल रहे तो अकबर बड़ा क्रुद्ध हुआ- यहाँ तक सन १५७७ में तो उन दोनों (कुतुबुद्दीन खान और राजा मान सिंह) की 'ड्योढी तक बंद' कर दी गयी!"[6] निधन संपादित करें "मुस्लिम इतिहासकारों ने लिखा है हिजरी १०२४ सन १६१५ ईस्वी में मानसिंह की बंगाल में मृत्यु हुई, था।...मानसिंह के देहांत के बाद उसका बेटा कुंवर भावसिंह गद्दी पर बैठा."[7] == काबुल का शासक नियुक्त == अकबर शासन में जब राजा भगवंतदास पंजाब के सूबेदार नियत हुए, तब सिंध के पार सीमांत प्रान्त का शासन उनके कुँवर मानसिंह को दिया गया। जब 30वें वर्ष में अकबर के सौतेले भाई मिर्ज़ा मुहम्मद हक़ीम की (जो कि काबुल का शासनकर्ता था) मृत्यु हो गई, तब मानसिंह ने आज्ञानुसार फुर्ती से काबुल पहुँच कर वहाँ के निवासियों को शासक के निधन के बाद उत्पन्न लूटपाट से निजात दिलवाई और उसके पुत्र मिर्ज़ा अफ़रासियाब और मिर्ज़ा कँकुवाद को राज्य के अन्य सरदारों के साथ ले कर वे दरबार में आए। अकबर ने सिंध नदी पर कुछ दिन ठहर कर कुँवर मानसिंह को काबुल का शासनकर्ता नियुक्त किया। इन्होंने बड़ी बहादुरी के साथ रूशानी लुटेरों को, जो विद्रोहपूर्वक खैबर के दर्रे को रोके हुए थे, का सफाया किया। जब राजा बीरबल स्वाद प्रान्त में यूसुफ़जई के युद्ध में मारे गए और जैनख़ाँ कोका और हक़ीम अबुल फ़तह दरबार में बुला लिए गए, तब यह कार्य मानसिंह को सौंपा गया। अफगानिस्तान में जाबुलिस्तान के शासन पर पहले पिता भगवंतदास नियुक्त हुए और बाद में पर उनके कुँअर मानसिंह। == मानसिंह काल में आमेर की उन्नति == [[चित्र:AMER Palace.jpg|thumb|[[आमेर दुर्ग|आमेर का महल]]]] ''राजा भगवानदास'' की मृत्यु हो जाने पर राजा मानसिंह जयपुर के सिंहासन पर बैठे. कर्नल [[जेम्स टॉड]] ने लिखा है- "''मानसिंह के शासनकाल में आमेर राज्य ने बड़ी उन्नति की। मुग़ल दरबार में सम्मानित हो कर मानसिंह ने अपने राज्य का विस्तार किया उसने अनेक राज्यों पर आक्रमण कर के जो अपरिमित संपत्ति मिली थी, उसके द्वारा आमेर राज्य को शक्तिशाली बना दिया। ''धौलाराय'' के बाद आमेर, जो एक मामूली राज्य समझा जाता था, मानसिंह के समय वही एक शक्तिशाली और विस्तृत राज्य हो गया था।भारत के इतिहास में कछवाहो का महत्वपूर्ण स्थान आता है मानसिंह के समय कछवाहो ने खुतन से समुद्र तक अपने बल, पराक्रम और वैभव की प्रतिष्ठा की थी। मानसिंह यों अकबर की अधीनता में ज़रूर थे, पर उनके साथ काम करने वाली राजपूत सेना, बादशाह की सेना से कहीं अधिक शक्तिशाली समझी जाती ,हिन्दू धर्म के सच्चे संरक्षक के रूप में कछवाहों ने कार्य किया और कट्टर इस्लामीकरण से भारत और उसकी जनता को बचाए रखा ,कट्टर औरंगज़ेब के समय कछवाहो और मुगलों के सम्बन्ध खराब हो गए थे और औरगज़ेब के आखिरी समय मै कछवाहो ने मुगलों से दूरी बना ली थी <ref>5.'''राजस्थान का इतिहास''' : कर्नल [[जेम्स टॉड]], साहित्यागार प्रकाशन, जयपुर</ref> कर्नल [[जेम्स टॉड]] की इस बात से दूसरे कुछ इतिहासकार सहमत नहीं. उनका कथन है ''मानसिंह भगवान दास का गोद लिया पुत्र नहीं था, बल्कि वह तो भगवंत दास का लड़का था। भगवानदास और भगवंत दास दोनों भाई थे।''<ref>6.'''राजस्थान का इतिहास''' : कर्नल [[जेम्स टॉड]], साहित्यागार प्रकाशन, जयपुर</ref> मुग़ल-इतिहास की किताबों से ज़ाहिर होता है कि अकबर के आदेश पर उसके अनुभवी अधिकारी महाराजा मानसिंह, स्थानीय सूबेदार कुतुबुद्दीन खान और आमेर के राजा भगवंत दास ने गोगून्दा और मेवाड़ के जंगलों में महाराणा प्रताप को पकड़ने के लिए बहुत खोजबीन की पर अंततः वे असफल रहे तो अकबर बड़ा क्रुद्ध हुआ- यहाँ तक सन १५७७ में तो उन दोनों (कुतुबुद्दीन खान और राजा भगवंत दास) की 'ड्योढी तक बंद' कर दी गयी!"<ref>7.'''राजस्थान का इतिहास''' : कर्नल [[जेम्स टॉड]], साहित्यागार प्रकाशन, जयपुर</ref> ==हिन्दू धर्म को योगदान== मानसिंह के कारण ही आज जगन्नाथ पुरी का मंदिर मस्जिद नही बना । उड़ीसा के पठान सुल्तान ने जगन्नाथ पुरी के मंदिर को ध्वस्त करके मस्जिद बनाने का प्रयास किया था, जब इसकी सूचना राजा मानसिंह को मिली, तब उन्होंने अपनी सेना का एक बड़ा दल उड़ीसा भेजे, लेकिन विशाल सेना के कारण सभी वीरगति को प्राप्त हुए । उसके बाद राजा मानसिंह खुद उड़ीसा गए, ओर वहां दो पठान भाई थे और राजा मानसिंह ने दोनों का सर काट दिया ओर उनके सहयोगी हिन्दू राजाओ को कुचलकर रख दिया । जगन्नाथ मंदिर की रक्षा हिन्दू इतिहास का सबसे स्वर्णिम इतिहास है । यह हिंदुओ के सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक है। राजा मानसिंह महान कृष्ण भक्त थे, उन्होंने वृंदावन में सात मंजिला कृष्णजी ( गोविन्ददेव जी ) का मंदिर और आमेर में जगत शिरोमणि मंदिर बनवाया । बनारस के घाट, पटना के घाट, ओर हरिद्वार के घाटों का निर्माण आमेर नरेश मानसिंह ने ही करवाया था । जितने मंदिर मध्यकाल से पूर्व धर्मान्ध मुसलमानो ने तोड़े थे, वह सारे मंदिर मानसिंहजी ने बना दिये थे, लेकिन औरंगजेब के समय मुगलो का अत्याचार बढ़ गया था और हिन्दू मंदिरों का भारी नुकसान हो गया ।<ref>Rajasthan Through the Ages Vol III, By R.K. Gupta, S.R. Bakshi pg.4-6</ref> == हल्दीघाटी में हार == जब अकबर के सेनापति मानसिंह [[सोलापुर जिला|शोलापुर]] [[महाराष्ट्र|म]] विजय करके लौट रहे थे, तो मानसिंह ने प्रताप से मिलने का विचार किया। प्रताप उस वक़्त कुम्भलगढ़ में थे। अपनी राज्यसीमा मेवाड़ के भीतर से गुजरने पर (किंचित अनिच्छापूर्वक) [[महाराणा प्रताप]] को उनके स्वागत का प्रबंध [[उदयपुर]] के उदयसागर की पाल पर करना पड़ा. स्वागत-सत्कार एवं परस्पर बातचीत के बाद भोजन का समय भी आया। महाराजा मानसिंह भोजन के लिए आये किन्तु महाराणा को न देख कर आश्चर्य में पड़ गये। उन्होंने महाराणा के पुत्र [[अमरसिंह]] से इसका कारण पूछा तो उसने बताया कि 'महाराणा साहब के सिर में दर्द है, अतः वे भोजन पर आपका साथ देने में में असमर्थ हैं।' कुछ इतिहासकारों के अनुसार यही घटना [[हल्दीघाटी|हल्दी घाटी]] के युद्ध का कारण भी बनी। [[अकबर]] को [[महाराणा प्रताप]] के इस व्यवहार के कारण [[मेवाड़]] पर आक्रमण करने का एक और मौका मिल गया। सन 1576 ई. में 'राणा प्रताप को दण्ड देने' के अभियान पर नियत हुए। मुगल सेना मेवाड़ की ओर उमड पड़ी। उसमें मुगल, राजपूत और पठान योद्धाओं के साथ अकबर का जबरदस्त तोपखाना भी था हालाकि पहाड़ी इलाकों में तोप काम ना आ सकी और युद्ध में तोपो की कोई भूमिका नहीं थी। अकबर के प्रसिद्ध सेनापति महावत खान, आसफ खान और महाराजा मानसिंह के साथ अकबर का शाहजादा सलीम उस मुगल सेना का संचालन कर रहे थे, जिसकी संख्या 5,000 से 80,000 के बीच थी। चार घंटे के युद्ध के बाद मुगलो की आधी फौज मारी जा चुकी थी किन्तु महाराणा भी मैदान में घायल हो गये तब उनके सेनापति झाला मन्ना ने उन्हें युद्धभूमि से सुरक्षित बाहर भेजने में सफलता मिली पर मानसिंह प्रताप के भय से पेहले ही रणभूमी छोड गये थे, इसलिए सेनापति न होने के कारण हल्दीघाटी मे सिर्फ सैनिक ही एक दूसरे से युद्ध करते रहे । अखिर मे मुगलों को पीछे हटना पडा और प्रताप की हल्दीघाटी का युद्ध अनिर्णीत रहा। == मानसिंह और रक्तरंजित हल्दी घाटी == उस विशाल मुगल सेना का कड़ा मुकाबला राणा प्रताप ने अपने मुट्ठी भर सैनिको के साथ किया। हल्दी घाटी की पीली भूमि रक्तरंजित हो उठी। सन् 1576 ई. के 21 जून को गोगून्दा के पास [[हल्दीघाटी|हल्दी घाटी]] में प्रताप और मुग़ल सेना के बीच एक दिन के इस भयंकर संग्राम में 17 हज़ार सैनिक मारे गए। यहीं राणा प्रताप और मानसिंह का आमना-सामना होने पर दोनों के बीच विकट युद्ध हुआ (जैसा इस पृष्ठ में अंकित भारतीय पुरातत्व विभाग के शिलालेख से प्रकट है)- [[चेतक]] की पीठ पर सवार प्रताप ने अकबर के सेनापति मानसिंह के हाथी के मस्तक पर काले-नीले रंग के, अरबी नस्ल के अश्व [[चेतक]] के पाँव जमा दिए और अपने भाले से सीधा राजा मानसिंह पर एक प्रलयंकारी वार किया, पर तत्काल अपने हाथी के मज़बूत हौदे में चिपक कर नीचे बैठ जाने से इस युद्ध में उनकी जान बच गयी- हौदा प्रताप के दुर्घर्ष वार से बुरी तरह मुड़ गया। बाद में जब गंभीर घायल होने पर राणा प्रताप जब हल्दीघाटी की युद्धभूमि से दूर चले गए, तब राजा मानसिंह ने उनके महलों में पहुँच कर प्रताप के प्रसिद्ध हाथियों में से एक हाथी रामप्रसाद को दूसरी लूट के सामान के साथ आगरा-दरबार भेजा। ''परन्तु मानसिंह ने चित्तौडगढ के नगर को लूटने की आज्ञा नहीं दी थी, यह जान कर बादशाह अकबर इन पर काफी कुपित हुआ और कुछ वक़्त के लिए दरबार में इनके आने पर प्रतिबन्ध तक लगा दिया.''<ref>3. '''राजस्थान का इतिहास''' : कर्नल [[जेम्स टॉड]], साहित्यागार प्रकाशन, जयपुर</ref> '''जेम्स टॉड''' के शब्दों में- "जिन दिनों में अकबर भयानक रूप से बीमार हो कर अपने मरने की आशंका कर रहा था, मानसिंह खुसरो को मुग़ल सिंहासन पर बिठाने के लिए षड्यंत्रों का जाल बिछा दिया था।..उसकी यह चेष्टा दरबार में सब को ज्ञात हो गयी और वह बंगाल का शासक बना कर भेज दिया गया। उसके चले जाने के बाद खुसरो को कैद करके कारागार में रखा गया। मानसिंह चतुर और दूरदर्शी था। वह छिपे तौर पर खुसरो का समर्थन करता रहा. मानसिंह के अधिकार में बीस हज़ार राजपूतों की सेना थी। इसलिए बादशाह प्रकट रूप में उसके साथ शत्रुता नहीं की. कुछ इतिहासकारों ने लिखा है- "अकबर ने दस करोड़ रुपये दे कर मानसिंह को अपने अनुकूल बना लिया था।"<ref>4.'''राजस्थान का इतिहास''' : कर्नल [[जेम्स टॉड]], // /// Lalitcharan thoat ////// साहित्यागार प्रकाशन, जयपुर</ref> जापान की तरह मेहनत (क्रोो) करोआज की बात करो और निरंतर प्रयास करें आगे बढ़ाने का अपने देश को teknology का विस्तार करो कचरा प्रबंधन करो आज जो कुछ हमारे सामने है उन पर विचार करो (जय भारत जय हिन्द) ''' '''''हेमंत शेष ने अपनी पुस्तक 'चार शहरनामे'(शब्दार्थ प्रकाशन, जयपुर २०१९) में इनके बारे में निम्नांकित जानकारी दी है''''''-'' किम्वदंती ही रही होगी कि राजा मानसिंह (1589-1614 ई.) दिखने में सुदर्शन न थे। उनका रंग संभवतः गहरा सांवला था। पहली बार अकबर ने उन्हें जब देखा तो शायद मज़ाक के मूड में पूछा- “जब रूप-रंग बंट रहा था तो आप थे कहाँ?’ हाजिरजवाब मानसिंह इस टिप्पणी से अविचलित, बोले- जहाँपनाह, तब ? तब मैं बुद्धिमानी और बहादुरी लेने चला गया था ! एक पंक्ति के इस सटीक जवाब ने ज़रूर अकबर जैसे को भी आमेर के इस राजपुरुष की ‘काउंटर विट’ का मुरीद बना दिया होगा। खैर... लुब्बे-लुबाब ये कि मुग़ल सेनापति के रूप में अनेक सफलताओं ने राजा मानसिंह को आजीवन प्रचुर यश और धन दिया। अगर मानसिंह प्रथम असफल रहे तो बस महज़ मेवाड़ के मोर्चे पर ही, अन्यथा इस विलक्षण योद्धा ने अकबर के साम्राज्य के विस्तार के लिए क्या नहीं जीता? अपने पितामह भारमल और पिता भगवान दास के साथ युवावस्था से अनेक युद्धों में भाग लेने का अनुभव इनके खाते में था ही। पूर्वोत्तर भारत में, जहाँ सुदूर बंगाल उड़ीसा और आसाम तक का इलाका मूलतः इसी सेनानायक के कारण, मुग़ल-सल्तनत में आ सका, वहीं पश्चिम में, पंजाब और अफगानिस्तान, उत्तर में कश्मीर, दक्षिण-पूर्व में उड़ीसा- सब जगह मानसिंह भेजे गए और मुख्य सेनापति के बतौर इन सब प्रान्तों के छोटे-बड़े विद्रोहियों को दबा कर मुग़ल परचम फहराने में सफल रहे। राजा मानसिंह के चरित्र का एक और पहलू, इनकी अपनी संस्कृति और धर्म के प्रति एकनिष्ठ प्रतिबद्धता है। हिन्दू-धर्म के कुछ अप्रतिम प्रतीक-चिन्हों और विग्रहों को सुरक्षित ला कर आमेर में स्थापित करने में मानसिंह प्रथम सदा उत्सुक रहे। जयपुर वाले इस ‘झाड़साई’ लोकगीत से सुपरिचित हैं- ''“सांगानेर को सांगो बाबो, जैपर को हडमान, आमेर की सल्ला देबी ल्यायो राजा मान!” '' विद्याधर पर अपनी टिप्पणी में इस बात की जानकारी दे दी गयी है कि कैसे पूर्वी बंगाल के जैसोर से राजा मानसिंह कंस की शिला को आमेर लाये थे जिस से शिलादेवी (काली) का विग्रह उत्कीर्ण हुआ। आमेर के 'जगत शिरोमणि मंदिर' में स्वयं मीराँ द्वारा सेव्य कृष्ण-मूर्ति ही स्थापित है। इस राजा मानसिंह की धर्मपरायणता पर बात करते हुए याद कर लें कि तब शासक केवल अपने लिए किले और महल ही नहीं बनवाते थे, बल्कि जनसामान्य के लिए मंदिरों, तालाबों, बावड़ियों, धर्मशालाओं, पाठशालाओं आदि सार्वजनिक उपयोग की संपत्तियों के बनाने पर भी ध्यान देते थे। राजसमन्द से सांसद और भूतपूर्व जयपुर राजघराने की सदस्य दिव्या कुमारी ने कहीं लिखा है- “राजा मानसिंह का युग हिंदुत्व और सनातन धर्म के लिए एक चुनौती था। मन्दिर तोड़े जा रहे थे; भारत में धर्मांतरण हो रहा था। हिंदू राजा कमजोर होते जा रहे थे, साथ ही अपने राज्य बचाने के लालच में अपना धर्म तक बदल रहे थे। राजा मानसिंह ने न केवल हिंदुओं को मुस्लिम धर्म अपनाने से रोका, बल्कि उन्होंने मुगल दरबार में अपनी शक्ति भी बढ़ा ली । इस वजह से मुगल शासकों ने हिंदुओं के खिलाफ कोई आदेश नहीं दिया। उन्होंने वाराणसी, वृंदावन, बंगाल, बिहार, काबुल, कंधार, आमेर, जयपुर सहित पूरे भारत में मंदिरों का निर्माण और जीर्णोद्धार किया। इनमें आमेर की शिलादेवी, सांगानेर के सांगा बाबा, चांदपोल में हनुमान मंदिर, हर की पौड़ी (हरिद्वार) में मां गंगा मंदिर शामिल हैं। मां गंगा मंदिर को मान छत्री के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने वाराणसी दशाश्वमेध घाट और विश्वनाथ भगवान शिव के महान मंदिर का पुनः निर्माण कराया, जहाँ के मान मंदिर और मान घाट द्वारा दुनिया भर में जाने गए हैं । जहाँगीर ने अपनी आत्मकथा में भी इस मंदिर का उल्लेख इस प्रकार किया है- “मेरे पिता (अकबर) ने मंदिर निर्माण के लिए मुगल खजाने से 10 लाख रुपये खर्च किए थे और एक लाख रुपये खुद राजा मानसिंह ने दिए थे।“ जगन्नाथ पुरी को उन्होंने अफगानों से मुक्त कराया गया और उसका पुनरुद्धार किया । उन्होंने आमेर किले की तर्ज पर दक्षिण बिहार में रोहतास का किला भी बनवाया। 1590 से 1592 तक ओडिशा में संघर्ष चला। मानसिंह, ने खुर्दा के राजा रामचंद्र के आत्मसमर्पण के बाद, उन्हें जगन्नाथ मंदिर के रखरखाव और अन्य व्यवस्थाओं के लिए अधीक्षक नियुक्त किया। “Jagannaath jee ne fir vidhu vidhaan so sthaapana kina. paachho samudra mai jaay khaando paakhalyo”! जब राजा मानसिंह रघुनाथ भट्ट के संपर्क में आए, तो उनके आदेश पर वृंदावन में गोविंद देवजी का एक बड़ा मंदिर बनाया गया। मंदिर का निर्माण 1535 में शुरू हुआ और 1590 ई. में पूरा हुआ। यह 16वीं सदी का सबसे बड़ा मंदिर था। जयपुर शहर की नींव के समय, सूर्य महल में आराध्य गोविंद देवजी की स्थापना की गई । “ हिंदी-समीक्षक माधव हाड़ा ने मीराँ के जीवन और समाज पर जो जानकारीपूर्ण किताब लिखी है- “पचरंग चोला पहर सखी री” उस में भी राजा मानसिंह का उल्लेख कई जगह आया है। उनके अनुसार –“आम्बेर का जगत् शिरोमणि मंदिर मानसिंह के पुत्र जगतसिंह की स्मृति में बनवाया गया। जगतसिंह की मृत्यु अकबर के चित्तौड़-अभियान में हुई। इस अभियान में भगवानदास और मानसिंह भी शामिल थे। कहते हैं कि मानसिंह इस अभियान के दौरान ही मीराँ सेवित प्रतिमा अपने साथ ले गया और उसने अपने पुत्र की स्मृति में बनाए गए मंदिर में इसकी प्रतिष्ठा की।” यह उल्लेख ‘आर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया’ की प्रोग्रेस-रिपोर्ट के अलावा मीराँ के कई विद्वान अध्येताओं ने किया है। 1. प्राच्यविद् हरिनाराण पुरोहित के अनुसार “सबसे बड़ी दृढ़ प्रमाणों से यह बात प्राप्त हो गई है कि मीराँबाई की एक पूज्य मूर्ति चित्तौड़गढ़ से आंबेर आई और यह प्रसिद्ध मंदिर श्रीजगतशिरोमणि में महाराजा मानसिंह द्वारा स्थापित की गई।” ‘परंपरा’ पत्रिका -63-64 ( ‘राजस्थानी शोध संस्थान’, चौपासनी, जोधपुर 1982 ), पृ.87 2, जर्मन भारतविद् हरमन गोएट्जे ने भी इसकी पुष्टि अपनी पुस्तक ‘मीराँबाई: हर लाइफ़ एंड टाइम्स’ (भारतीय विद्या भवन, मुम्बई, 1966), पृ.37 में की है। 3. मीराँ के एक ओर अध्येता डॉ. हुकमसिंह भाटी भी ‘आर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया’ की ‘प्रोग्रेस रिपोर्ट’ के हवाले से इसकी पुष्टि करते हैं- अलबत्ता वे यह न जाने कैसे नहीं मानते कि मानसिंह अकबर के ‘चित्तौड़ अभियान’ में शामिल था। वे लिखते हैं कि “संभवतः चित्तौड़-विजय के बाद (भगवानदास) कोई मूर्ति आमेर लाया होगा। “(‘मीराँबाई ऐतिहासिक-सामाजिक विवेचन’(रतन प्रकाशन, जोधपुर,1986, पृ.22) '''मानसिंह की भेंट संत कुम्भनदास से''' राजा मानसिंह के बारे में 'इम्पीरियल गज़ेटियर ऑफ इण्डिया' में लिखा गया था – “भगवान दास के दत्तक पुत्र, मानसिंह, शाही सेनापतियों में सबसे विशिष्ट थे। मानसिंह ने उड़ीसा, बंगाल और असम में युद्ध लड़े; और एक अवधि में बड़ी कठिनाइयों के बावजूद, उन्होंने काबुल के प्रशासक के रूप में अपना अधिकार बनाए रखा। उन्हें बंगाल, बिहार और दक्कन की सूबेदारी दे कर पुरस्कृत किया गया था। " पर एक सेनानायक की सारी सैन्यशक्ति, उसकी अब तक की उपलब्धियां, उसकी अथाह धन-दौलत और दिगदिगान्तर में फैले उसके प्रचंड राजनैतिक-वर्चस्व का प्रभामंडल एक निस्पृह, किन्तु सिद्ध-संत के बस एक ही वाक्य के सामने कितना तुच्छ, कितना महत्वहीन और कितना निस्सार पड़ गया, इस बात को साबित करने के लिए कुम्भनदास और मानसिंह की भेंट की वह प्राचीन कथा/ किम्वदंती या मिथक ही काफी है ! कहानी कहती है- संत कुम्भनदास ब्रजवास किया करते थे- संत कवि के रूप में जिनकी ख्याति सुन कर अकबर के सेनानायक भी भक्तिभाव से उनकी कुटिया में आ पहुंचे। तब स्नान कर कुम्भनदास भीतर आये ही थे और मस्तक पर तिलक लगाने के लिए आसपास कोई दर्पण खोजते थे। न मिलने पर मानसिंह ने अपने असबाब से हीरे-जवाहरात जड़ा एक अत्यधिक मूल्यवान दर्पण उन्हें भेंटस्वरूप दिया, जिसे विनम्रतापूर्वक संत ने अस्वीकार करते हुए पास पड़ी कठौती के जल में अपने चेहरे का प्रतिबिम्ब देखा और पुष्टिमार्गीय तिलक लगा लिया। बाद में संत के सुमधुर कृष्ण-पद सुन कर जब राजा ने स्वर्ण मुद्राओं से भरी एक भारी थैली उनकी नज़र की तब कुम्भनदास ने वह संपदा उन्हें लौटते हुए हाथ जोड़ कर उनसे कहा- “इसकी एवज क्या मैं राजा साहब से कुछ और मांग सकता हूँ?” मानसिंह बोले- ‘आप जो कहेंगे उसकी पालना होगी- संत शिरोमणि! आप कह कर तो देखिये!” कुम्भनदास ने बदले में सिर्फ एक वाक्य कहा- “ठीक है, अगर आप मेरी बात मानें तो भविष्य में कृपया फिर यहाँ कभी भी न आयें !” पाठक को ये याद दिलाना ज़रूरी कहाँ है- अष्टछाप कवियों में अग्रगण्य ये वही कुम्भनदास हैं, जिन्होंने कहा था- “संतन कहा सीकरी सों काम...जाको मुख देखे दुःख उपजत...” आदि। == निधन == मुस्लिम इतिहासकारों ने लिखा है "हिजरी १०२४ सन १६१५ ईस्वी में महाराजा मानसिंह की बंगाल में मृत्यु हुई", ==लोकप्रिय संस्कृति में छवि== ===फ़िल्में और टेलीविज़न=== * 2018-2019 भारतीय ऐतिहासिक टेलीविजन श्रृंखला [[दास्तान-ए-मोहब्बत: सलीम अनारकली]] में उनकी भूमिका [[करन शर्मा]] ने निभाई है<ref>{{Cite web|url=https://nettv4u.com/about/hindi/tv-serials/dastaan-e-mohabbat-salim-anarkali/all-cast-and-crew|title=Hindi Tv Serial Dastaan E Mohabbat Salim Anarkali - Full Cast and Crew|website=nettv4u|language=en|access-date=2026-10-14}}</ref> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} {{बंगाल सूबा के मुगल सूबेदार (1574–1717)}} {{जयपुर के महाराजा}}{{अकबर के नवरत्न}} [[श्रेणी:मुग़ल उच्चाधिकारी]] [[श्रेणी:अकबर के नवरत्न]] [[श्रेणी:राजस्थान का इतिहास]] [[श्रेणी:जयपुर के लोग]] [[श्रेणी:जयपुर के महाराजा]] 9ml5thc4yhmznp59bkp6u2vijbntk9s गैलापागोस कछुआ 0 98073 6630288 5441348 2026-10-16T18:16:41Z ~2026-55524-84 954072 6630288 wikitext text/x-wiki {{Taxobox | name = गैलापागोस कछुआ | status = VU | status_system = iucn2.3 | status_ref = <ref name=iucn>{{IUCN2006|assessors=Tortoise & Freshwater Turtle Specialist Group|year=1996|id=9011|title=Geochelone nigra|downloaded=11 मई 2006}} Listed as Vulnerable (VU A2c, B1+2c v2.3)</ref><ref>http://www.iucnredlist.org/details/9011</ref> | image = Galapagos giant tortoise Geochelone elephantopus.jpg | image_width = 200px | regnum = [[प्राणी|जंतु]] | phylum = [[कशेरुकी प्राणी|कशेरुकी]] | classis = [[Reptile|Sauropsida]] | ordo = [[Testudines]] | subordo = [[Cryptodira]] | familia = [[Testudinidae]] | genus = ''[[Geochelone]]'' | species = '''''G. nigra''''' | binomial = ''Geochelone nigra'' | binomial_authority = ([[Jean René Constant Quoy|Quoy]] & [[Joseph Paul Gaimard|Gaimard]], 1824) | synonyms = <div style="text-align: center;"> * ''Galápago'' * ''Geochelone elephantopus'' ([[Richard Harlan|Harlan]], 1827)</div> }} [[गैलापागोस द्वीपसमूह]] के सात द्वीपों पर पाया जाने वाला '''गैलापागोस कछुआ''' या '''गैलापागोस विशाल कछुआ''' (''Geochelone nigra'') विश्व का सबसे बड़ा कछुआ है। पूर्ण विकसित वयस्क कछुए का का भार 300 किलोग्राम और माप 1.2 मीटर तक हो सकता है। यह लंबे समय तक जीवित रहते हैं और एक अनुमान के अनुसार जंगल में इनकी [[जीवन प्रत्याशा]] 100-150 साल तक होती है। सत्रहवीं सदी के बाद से मनुष्य द्वारा शिकार किए जाने और शिकारी और पालतू जानवरों को इन द्वीपों पर लाए जाने की वजह से इनकी आबादी में नाटकीय रूप से गिरावट दर्ज की गयी है। अब मूल बारह प्राजातियों में से केवल दस ही जंगल में बची हैं। हालाँकि, गैलापागोस राष्ट्रीय उद्यान और चार्ल्स डार्विन फाउंडेशन की स्थापना के बाद से इनके संरक्षण के प्रयासों में सफलता मिली है और सैकड़ों-बाल कछुओं को वापस उनके मातृद्वीपों पर छोड़ा गया है। यह गैलापागोस द्वीप समूह के सबसे प्रतीकात्मक जीव हैं। == गैलापागोस कछुआ == <gallery> File:Gigantic Turtle on the Island of Santa Cruz in the Galapagos.JPG| File:Side angle shot of a gigantic galapagos turtle on the island of santa cruz.JPG| File:A gigantic galapagos tortuga on the island of santa cruz.JPG| File:Gigantic galapagos turtle on the island of santa cruz.JPG| File:Galápagos tortoise - Chelonoidis nigra on the Santa Cruz Island - Galapagos.jpeg| File:The Galápagos tortoise or Galápagos giant tortoise (Chelonoidis nigra) - Santa Cruz Island.jpeg| </gallery> == सन्दर्भ == {{reflist}} [[श्रेणी:गैलापागोस द्वीप]] 8lmxatcf0razdoi0qscs5w0epqlac5k वार्ता:रेडियो 1 141576 6630323 6415866 2026-10-16T23:46:55Z ~2026-55535-11 954094 /* Radio varta */ नया अनुभाग 6630323 wikitext text/x-wiki {{वार्ता शीर्षक}} == Radio varta == radio varta [[विशेष:योगदान/~2026-55535-11|~2026-55535-11]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-55535-11|वार्ता]]) 23:46, 16 अक्टूबर 2026 (UTC) hpiyhug4p3xwfrgdssm3j380sl3v18r 6630334 6630323 2026-10-17T03:42:08Z विक्रम प्रताप 911487 Reset talk page with [[:w:simple:User:DannyS712/Reset talk|reset talk]] (version 1.1) 6630334 wikitext text/x-wiki {{Talk header}} 6ujz0t3lkt6jsf7d1r360l6l7wj3njb खजनी (गोरखपुर) 0 145407 6630396 6605070 2026-10-17T09:27:50Z ~2026-55571-71 954180 /* */ 6630396 wikitext text/x-wiki {{स्रोतहीन|date=}} '''खजनी''', [[गोरखपुर]] की एक तहसील है। यह [[राजेसुल्तानपुर|राजेसुल्तानपुर-गोरखपुर मार्ग]] पर स्थित है और गोरखपुर जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थिति है international wrestler VIJAY CHAURASIYA KHAJNI ke hiii niwashi hai ==सरकारी सुविधाएँ== * तहशील खजनी * थाना खजनी * प्राथमिक चिकित्सालय खजनी ‎ ==विद्यालय और महाविद्यालय== *जूनियर हाईस्कूल खजनी *गणेश पाण्डेय इंटर कॉलेज कटघर *द्रौपदी देवी त्रिपाठी डिग्री कॉलेज *आदर्श इंटर कॉलेज हरदिचक *सरस्वती शिशु /विद्या मंदिर,रुद्रपुर खजनी गोरखपुर ==दर्शनीय स्थल== * भरोहिया का प्राचीन शिव मंदिर * कोटही माता मंदिर [[श्रेणी:गोरखपुर की तहसीलें]] 62eguhmq1freq7k2a1wmdemp7n69yw0 6630397 6630396 2026-10-17T09:50:45Z विक्रम प्रताप 911487 [[Special:Contributions/~2026-55571-71|~2026-55571-71]] ([[User talk:~2026-55571-71|Talk]]) के संपादनों को हटाकर [[User:विक्रम प्रताप|विक्रम प्रताप]] के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया 6527680 wikitext text/x-wiki {{स्रोतहीन|date=}} '''खजनी''', [[गोरखपुर]] की एक तहसील है। यह [[राजेसुल्तानपुर|राजेसुल्तानपुर-गोरखपुर मार्ग]] पर स्थित है और गोरखपुर जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थिति है। ==सरकारी सुविधाएँ== * तहशील खजनी * थाना खजनी * प्राथमिक चिकित्सालय खजनी ‎ ==विद्यालय और महाविद्यालय== *जूनियर हाईस्कूल खजनी *गणेश पाण्डेय इंटर कॉलेज कटघर *द्रौपदी देवी त्रिपाठी डिग्री कॉलेज *आदर्श इंटर कॉलेज हरदिचक *सरस्वती शिशु /विद्या मंदिर,रुद्रपुर खजनी गोरखपुर ==दर्शनीय स्थल== * भरोहिया का प्राचीन शिव मंदिर * कोटही माता मंदिर [[श्रेणी:गोरखपुर की तहसीलें]] mk7yxlw6akd4fgjyi308ve6kmxqhh0r 6630400 6630397 2026-10-17T10:06:42Z ~2026-55669-78 954183 /* */ 6630400 wikitext text/x-wiki {{स्रोतहीन|date=}} '''खजनी''', [[गोरखपुर]] की एक तहसील है। यह [[राजेसुल्तानपुर|राजेसुल्तानपुर-गोरखपुर मार्ग]] पर स्थित है और गोरखपुर जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थिति है। International पहलवान विजय कुमार जो गोरखपुर केशरी पूर्वांचल केशरी भारत कुमार अफताब हिंद के खिताब के विजेता है और इनके भाई जयकुमार चौरसिया जो national पहलवान इनके पास गोरखपुर केशरी का खिताब है । खजनी के ही निवासी हैं। ==सरकारी सुविधाएँ== * तहशील खजनी * थाना खजनी * प्राथमिक चिकित्सालय खजनी ‎ ==विद्यालय और महाविद्यालय== *जूनियर हाईस्कूल खजनी *गणेश पाण्डेय इंटर कॉलेज कटघर *द्रौपदी देवी त्रिपाठी डिग्री कॉलेज *आदर्श इंटर कॉलेज हरदिचक *सरस्वती शिशु /विद्या मंदिर,रुद्रपुर खजनी गोरखपुर ==दर्शनीय स्थल== * भरोहिया का प्राचीन शिव मंदिर * कोटही माता मंदिर [[श्रेणी:गोरखपुर की तहसीलें]] smx2ouylf6iwb0vs66quvhu32mot3f5 6630408 6630400 2026-10-17T10:14:18Z ~2026-55669-78 954183 6630408 wikitext text/x-wiki {{स्रोतहीन|date=}} '''खजनी''', [[गोरखपुर]] की एक तहसील है। यह [[राजेसुल्तानपुर|राजेसुल्तानपुर-गोरखपुर मार्ग]] पर स्थित है और गोरखपुर जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थिति है। International पहलवान विजय कुमार जो गोरखपुर केशरी पूर्वांचल केशरी भारत कुमार अफताब हिंद के खिताब के विजेता है और इनके भाई जयकुमार चौरसिया जो national पहलवान इनके पास गोरखपुर केशरी का खिताब है । खजनी के ही निवासी हैं। जो लिखा हुआ मिटा रहें हैं वो पहले पहलवानों के बारे में पता करे फिर मिटाएं। ==सरकारी सुविधाएँ== * तहशील खजनी * थाना खजनी * प्राथमिक चिकित्सालय खजनी ‎ ==विद्यालय और महाविद्यालय== *जूनियर हाईस्कूल खजनी *गणेश पाण्डेय इंटर कॉलेज कटघर *द्रौपदी देवी त्रिपाठी डिग्री कॉलेज *आदर्श इंटर कॉलेज हरदिचक *सरस्वती शिशु /विद्या मंदिर,रुद्रपुर खजनी गोरखपुर ==दर्शनीय स्थल== * भरोहिया का प्राचीन शिव मंदिर * कोटही माता मंदिर [[श्रेणी:गोरखपुर की तहसीलें]] onjfl30uda8ha5id4o9hqhjyhjidqpo सांताक्रूज़ (गैलापागोस) 0 180062 6630357 6224717 2026-10-17T06:49:22Z ~2026-55524-84 954072 6630357 wikitext text/x-wiki [[चित्र:Galapagos Island Names hindi.png|thumb|right|250px|गैलापागोस द्वीपसमूह का मानचित्र]] '''सांताक्रूज़ द्वीप''' [[गैलापागोस द्वीप समूह]] का सबसे अधिक जनसंख्या वाला द्वीप है। द्वीप का नाम [[स्पेनिश भाषा]] में पवित्र सलीब (क्रॉस) के नाम पर रखा गया है, [[अंग्रेजी]] में इसे ब्रिटिश पोत एचएमएस इंडिफैटिगेबल के नाम पर इंडिफैटिगेबल पुकारते हैं। द्वीप का क्षेत्रफल 986 वर्ग किलोमीटर है (381 वर्ग मील) और इसकी अधिकतम ऊंचाई 864 मीटर (2834 फुट) है। सांताक्रूज़ द्वीप समूह का सबसे अधिक जनसंख्या वाला द्वीप है और द्वीप की अधिकतर जनसंख्या द्वीप के नगर [[प्यूर्टो अयोरा]] में निवास करती है। [[चार्ल्स डार्विन अनुसंधान केन्द्र]] और गैलापागोस नेशनल पार्क सर्विस के मुख्यालय यहाँ स्थित हैं। चार्ल्स डार्विन अनुसंधान केन्द्र और गैलापागोस नेशनल पार्क सर्विस यहाँ एक कछुआ प्रजनन केंद्र चलाते हैं, जहां नन्हे कछुओं को अंडों से निकलने के बाद पाला जाता है और उन्हें उनके प्राकृतिक निवास स्थान पर छोड़ने के लिए तैयार किया जाता है। सांताक्रूज़ की उच्चभूमि घनी वनस्पति से आच्छादित हैं और यह स्थान लावा सुरंगों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहाँ कछुओं की घनी आबादी पाई जाती है। काला कछुआ लघुनिवेशिका सदाबहार मैंग्रोव जंगलों से घिरी है जिसका प्रयोग समुद्री कछुए, [[शंकुश]] (रे) और छोटी [[हाँगर]] (शार्क) कभी कभी प्रजनन क्षेत्र के रूप में करते हैं। यहाँ सेरो ड्रैगन, जिसे इसके राजहंस अनूप के लिए जाना जाता है, भी स्थित है, साथ ही यहाँ पगडंडी पर चलते हुए स्थलीय गोह को चारा ढूंढते हुए देखा जा सकता है। == पर्यटक स्थल == [[चित्र:Charles Darwin Research Station.jpg|250px|right|thumb|[[प्यूर्टो अयोरा]] में [[चार्ल्स डार्विन अनुसंधान केन्द्र]] ]] * [[चार्ल्स डार्विन अनुसंधान केन्द्र]] * [[गैलापागोस राष्ट्रीय उद्यान सेवा]] का मुख्यालय * [[लावा]] सुरंग * विशाल कछुआ संरक्षण स्थल * [[ब्लैक टरटल कोव]] * [[सेरो ड्रैगन]] * [[टोर्टुगा खाड़ी]] * [[लोस जेमलोस]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == बाहरी कड़ियाँ == {{Commonscat-inline|Santa Cruz (Galápagos)|सांताक्रूज़ (गैलापागोस)}} [[श्रेणी:गैलापागोस द्वीप]] [[श्रेणी:पर्यटन आकर्षण]] {{भूगोल-आधार}} mvc3d3e2s6ypoedkkqnr5dajpqbyadx 6630358 6630357 2026-10-17T06:50:12Z ~2026-55524-84 954072 6630358 wikitext text/x-wiki [[चित्र:Galapagos Island Names hindi.png|thumb|right|250px|गैलापागोस द्वीपसमूह का मानचित्र]] '''सांताक्रूज़ द्वीप''' [[गैलापागोस द्वीप समूह]] का सबसे अधिक जनसंख्या वाला द्वीप है। द्वीप का नाम [[स्पेनिश भाषा]] में पवित्र सलीब (क्रॉस) के नाम पर रखा गया है, [[अंग्रेजी]] में इसे ब्रिटिश पोत एचएमएस इंडिफैटिगेबल के नाम पर इंडिफैटिगेबल पुकारते हैं। द्वीप का क्षेत्रफल 986 वर्ग किलोमीटर है और इसकी अधिकतम ऊंचाई 864 मीटर है। सांताक्रूज़ द्वीप समूह का सबसे अधिक जनसंख्या वाला द्वीप है और द्वीप की अधिकतर जनसंख्या द्वीप के नगर [[प्यूर्टो अयोरा]] में निवास करती है। [[चार्ल्स डार्विन अनुसंधान केन्द्र]] और गैलापागोस नेशनल पार्क सर्विस के मुख्यालय यहाँ स्थित हैं। चार्ल्स डार्विन अनुसंधान केन्द्र और गैलापागोस नेशनल पार्क सर्विस यहाँ एक कछुआ प्रजनन केंद्र चलाते हैं, जहां नन्हे कछुओं को अंडों से निकलने के बाद पाला जाता है और उन्हें उनके प्राकृतिक निवास स्थान पर छोड़ने के लिए तैयार किया जाता है। सांताक्रूज़ की उच्चभूमि घनी वनस्पति से आच्छादित हैं और यह स्थान लावा सुरंगों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहाँ कछुओं की घनी आबादी पाई जाती है। काला कछुआ लघुनिवेशिका सदाबहार मैंग्रोव जंगलों से घिरी है जिसका प्रयोग समुद्री कछुए, [[शंकुश]] (रे) और छोटी [[हाँगर]] (शार्क) कभी कभी प्रजनन क्षेत्र के रूप में करते हैं। यहाँ सेरो ड्रैगन, जिसे इसके राजहंस अनूप के लिए जाना जाता है, भी स्थित है, साथ ही यहाँ पगडंडी पर चलते हुए स्थलीय गोह को चारा ढूंढते हुए देखा जा सकता है। == पर्यटक स्थल == [[चित्र:Charles Darwin Research Station.jpg|250px|right|thumb|[[प्यूर्टो अयोरा]] में [[चार्ल्स डार्विन अनुसंधान केन्द्र]] ]] * [[चार्ल्स डार्विन अनुसंधान केन्द्र]] * [[गैलापागोस राष्ट्रीय उद्यान सेवा]] का मुख्यालय * [[लावा]] सुरंग * विशाल कछुआ संरक्षण स्थल * [[ब्लैक टरटल कोव]] * [[सेरो ड्रैगन]] * [[टोर्टुगा खाड़ी]] * [[लोस जेमलोस]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == बाहरी कड़ियाँ == {{Commonscat-inline|Santa Cruz (Galápagos)|सांताक्रूज़ (गैलापागोस)}} [[श्रेणी:गैलापागोस द्वीप]] [[श्रेणी:पर्यटन आकर्षण]] {{भूगोल-आधार}} blrvov5z5axyn693iq7hkvei2jg7gw8 6630360 6630358 2026-10-17T07:01:26Z Anitya Gautam 916080 6630360 wikitext text/x-wiki [[चित्र:Galapagos Island Names hindi.png|thumb|right|250px|गैलापागोस द्वीपसमूह का मानचित्र]] '''सांताक्रूज़ द्वीप''' [[गैलापागोस द्वीप समूह]] का सबसे अधिक जनसंख्या वाला द्वीप है। द्वीप का नाम [[स्पेनिश भाषा]] में पवित्र सलीब (क्रॉस) के नाम पर रखा गया है<ref name="r840">{{cite web | title=Map, Galapagos, & Facts | website=Encyclopedia Britannica | date=1999-05-04 | url=https://www.britannica.com/place/Santa-Cruz-Island | access-date=2026-10-17}}</ref>, [[अंग्रेजी]] में इसे ब्रिटिश पोत एचएमएस इंडिफैटिगेबल के नाम पर इंडिफैटिगेबल पुकारते हैं। द्वीप का क्षेत्रफल 986 वर्ग किलोमीटर है और इसकी अधिकतम ऊंचाई 864 मीटर है। सांताक्रूज़ द्वीप समूह का सबसे अधिक जनसंख्या वाला द्वीप है और द्वीप की अधिकतर जनसंख्या द्वीप के नगर [[प्यूर्टो अयोरा]] में निवास करती है। [[चार्ल्स डार्विन अनुसंधान केन्द्र]] और गैलापागोस नेशनल पार्क सर्विस के मुख्यालय यहाँ स्थित हैं। चार्ल्स डार्विन अनुसंधान केन्द्र और गैलापागोस नेशनल पार्क सर्विस यहाँ एक कछुआ प्रजनन केंद्र चलाते हैं, जहां नन्हे कछुओं को अंडों से निकलने के बाद पाला जाता है और उन्हें उनके प्राकृतिक निवास स्थान पर छोड़ने के लिए तैयार किया जाता है। सांताक्रूज़ की उच्चभूमि घनी वनस्पति से आच्छादित हैं और यह स्थान लावा सुरंगों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहाँ कछुओं की घनी आबादी पाई जाती है। काला कछुआ लघुनिवेशिका सदाबहार मैंग्रोव जंगलों से घिरी है जिसका प्रयोग समुद्री कछुए, [[शंकुश]] (रे) और छोटी [[हाँगर]] (शार्क) कभी कभी प्रजनन क्षेत्र के रूप में करते हैं। यहाँ सेरो ड्रैगन, जिसे इसके राजहंस अनूप के लिए जाना जाता है, भी स्थित है, साथ ही यहाँ पगडंडी पर चलते हुए स्थलीय गोह को चारा ढूंढते हुए देखा जा सकता है। == पर्यटक स्थल == [[चित्र:Charles Darwin Research Station.jpg|250px|right|thumb|[[प्यूर्टो अयोरा]] में [[चार्ल्स डार्विन अनुसंधान केन्द्र]] ]] * [[चार्ल्स डार्विन अनुसंधान केन्द्र]] * [[गैलापागोस राष्ट्रीय उद्यान सेवा]] का मुख्यालय * [[लावा]] सुरंग * विशाल कछुआ संरक्षण स्थल * [[ब्लैक टरटल कोव]] * [[सेरो ड्रैगन]] * [[टोर्टुगा खाड़ी]] * [[लोस जेमलोस]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == बाहरी कड़ियाँ == {{Commonscat-inline|Santa Cruz (Galápagos)|सांताक्रूज़ (गैलापागोस)}} [[श्रेणी:गैलापागोस द्वीप]] [[श्रेणी:पर्यटन आकर्षण]] {{भूगोल-आधार}} m1vf2xbhmq8f9tjx18fngpqjxtp7keb बाल्ट्रा (गैलापागोस) 0 180877 6630321 6630095 2026-10-16T23:05:42Z ~2026-55524-84 954072 6630321 wikitext text/x-wiki [[चित्र:Galapagos Island Names hindi.png|thumb|right|250px|गैलापागोस द्वीपसमूह का मानचित्र]] [[चित्र:Alvaro Sevilla Design Isla Santa Cruz Galapagos foto tomada desde el avión.jpg|thumb|right|250px|द्वीप का नज़ारा]] '''बाल्ट्रा''' द्वीप को दक्षिणी सेयमोर के नाम से भी जाना जाता है। बाल्ट्रा [[गैलापागोस द्वीपसमूह]] के केन्द्र के निकट स्थित एक छोटा सा सपाट द्वीप है। इसकी रचना भू उत्थान के द्वारा हुई है। यह द्वीप बहुत ही शुष्क है और वनस्पतियों की झाड़ियाँ, काँटेदार नाशपाती कैक्टस और पैलो सेंटो पेड़ शामिल है। 1940 के दशक मे वैज्ञानिकों ने एक प्रयोग तौर पर 70 बाल्ट्रा स्थलीय गोहों को पड़ोसी उत्तर सेयमोर द्वीप पर ले जाने का फैसला किया था। इस कदम के अप्रत्याशित परिणाम निकले और द्वितीय विश्व के दौरान बाल्ट्रा पर हुये सेना के कब्जे के बाद द्वीप के मूल गोह विलुप्त हो गये। 1980 के दशक के दौरान चलाई गयी एक प्रजनन और पुनर्निवेशन परियोजना के अंतर्गत उत्तर सेयमोर से गोहों को [[चार्ल्स डार्विन अनुसंधान केन्द्र]] लाया गया और 1990 के दशक में स्थलीय गोहों को पुनः बाल्ट्रा में छोड़ा गया। 1997 में वैज्ञानिकों की गणना के अनुसार द्वीप पर स्थलीय गोहों की कुल संख्या 97 थी, जिनमें से 13 इसी द्वीप पर पैदा हुई थीं। == हवाई अड्डा == <gallery> चित्र:US Army Airfield on Baltra.jpg|द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बना एयरबेस चित्र:BALTRA-2b.jpg|हवाई दृश्य </gallery> सन 986 तक पूरे गैलापागोस द्वीपसमूह में सिर्फ बाल्ट्रा हवाई अड्डा ही सेवारत था, अब एक दूसरा हवाई अड्डा सैन क्रिस्टोबाल द्वीप पर भी शुरु हो गया है, हालाँकि, गैलापागोस जाने वाले निजी विमानों को अनिवार्य रूप से बाल्ट्रा हवाई अड्डे को प्रयोग करना पड़ता है क्योंकि यहाँ पर रात में भी उड़ान भरने की सुविधा उपलब्ध है। बाल्ट्रा आने के बाद सभी आगंतुकों को तुरंत बस के द्वारा द्वीप की दो गोदियों मे से किसी एक को भेजा जाता है। पहली गोदी एक छोटी सी खाड़ी में स्थित है जहाँ नावें यात्रियों का इंतजार करती हैं। दूसरी गोदी एक नौका गोदी है जो बाल्ट्रा द्वीप को सांताक्रूज़ द्वीप से जोड़ती है। 2007 और 2008 में बाल्ट्रा हवाई अड्डे का अतिरिक्त रेस्तराओं और दुकानों को शामिल करने और एक बेहतर आगंतुक क्षेत्र विकसित करने के उद्देश्य से पुनर्निर्माण किया गया है। == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == चित्र दीर्घा == {{Commonscat-inline|Baltra|बाल्ट्रा (गैलापागोस)}} [[श्रेणी:गैलापागोस द्वीप]] [[श्रेणी:पर्यटन आकर्षण]] {{भूगोल-आधार}} q72kn0s27vx24d5bk0h9z3w3ittt2lt 6630359 6630321 2026-10-17T06:58:48Z ~2026-55524-84 954072 6630359 wikitext text/x-wiki {{स्रोत हीन|date=अक्टूबर 2026}} [[चित्र:Galapagos Island Names hindi.png|thumb|right|250px|गैलापागोस द्वीपसमूह का मानचित्र]] [[चित्र:Alvaro Sevilla Design Isla Santa Cruz Galapagos foto tomada desde el avión.jpg|thumb|right|250px|द्वीप का नज़ारा]] '''बाल्ट्रा''' द्वीप को दक्षिणी सेयमोर के नाम से भी जाना जाता है। बाल्ट्रा [[गैलापागोस द्वीपसमूह]] के केन्द्र के निकट स्थित एक छोटा सा सपाट द्वीप है। इसकी रचना भू उत्थान के द्वारा हुई है। यह द्वीप बहुत ही शुष्क है और वनस्पतियों की झाड़ियाँ, काँटेदार नाशपाती कैक्टस और पैलो सेंटो पेड़ शामिल है। 1940 के दशक मे वैज्ञानिकों ने एक प्रयोग तौर पर 70 बाल्ट्रा स्थलीय गोहों को पड़ोसी उत्तर सेयमोर द्वीप पर ले जाने का फैसला किया था। इस कदम के अप्रत्याशित परिणाम निकले और द्वितीय विश्व के दौरान बाल्ट्रा पर हुये सेना के कब्जे के बाद द्वीप के मूल गोह विलुप्त हो गये। 1980 के दशक के दौरान चलाई गयी एक प्रजनन और पुनर्निवेशन परियोजना के अंतर्गत उत्तर सेयमोर से गोहों को [[चार्ल्स डार्विन अनुसंधान केन्द्र]] लाया गया और 1990 के दशक में स्थलीय गोहों को पुनः बाल्ट्रा में छोड़ा गया। 1997 में वैज्ञानिकों की गणना के अनुसार द्वीप पर स्थलीय गोहों की कुल संख्या 97 थी, जिनमें से 13 इसी द्वीप पर पैदा हुई थीं। == हवाई अड्डा == <gallery> चित्र:US Army Airfield on Baltra.jpg|द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बना एयरबेस चित्र:BALTRA-2b.jpg|हवाई दृश्य </gallery> सन 986 तक पूरे गैलापागोस द्वीपसमूह में सिर्फ बाल्ट्रा हवाई अड्डा ही सेवारत था, अब एक दूसरा हवाई अड्डा सैन क्रिस्टोबाल द्वीप पर भी शुरु हो गया है, हालाँकि, गैलापागोस जाने वाले निजी विमानों को अनिवार्य रूप से बाल्ट्रा हवाई अड्डे को प्रयोग करना पड़ता है क्योंकि यहाँ पर रात में भी उड़ान भरने की सुविधा उपलब्ध है। बाल्ट्रा आने के बाद सभी आगंतुकों को तुरंत बस के द्वारा द्वीप की दो गोदियों मे से किसी एक को भेजा जाता है। पहली गोदी एक छोटी सी खाड़ी में स्थित है जहाँ नावें यात्रियों का इंतजार करती हैं। दूसरी गोदी एक नौका गोदी है जो बाल्ट्रा द्वीप को सांताक्रूज़ द्वीप से जोड़ती है। 2007 और 2008 में बाल्ट्रा हवाई अड्डे का अतिरिक्त रेस्तराओं और दुकानों को शामिल करने और एक बेहतर आगंतुक क्षेत्र विकसित करने के उद्देश्य से पुनर्निर्माण किया गया है। == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == चित्र दीर्घा == {{Commonscat-inline|Baltra|बाल्ट्रा (गैलापागोस)}} [[श्रेणी:गैलापागोस द्वीप]] [[श्रेणी:पर्यटन आकर्षण]] {{भूगोल-आधार}} d2m8yukz49425pa2t7nl850dv214dyf 6630364 6630359 2026-10-17T07:03:48Z Anitya Gautam 916080 6630364 wikitext text/x-wiki {{स्रोत हीन|date=अक्टूबर 2026}} [[चित्र:Galapagos Island Names hindi.png|thumb|right|250px|गैलापागोस द्वीपसमूह का मानचित्र]] [[चित्र:Alvaro Sevilla Design Isla Santa Cruz Galapagos foto tomada desde el avión.jpg|thumb|right|250px|द्वीप का नज़ारा]] '''बाल्ट्रा''' द्वीप को दक्षिणी सेयमोर के नाम से भी जाना जाता है। बाल्ट्रा [[गैलापागोस द्वीपसमूह]] के केन्द्र के निकट स्थित एक छोटा सा सपाट द्वीप है। इसकी रचना भू उत्थान के द्वारा हुई है। यह द्वीप बहुत ही शुष्क है और वनस्पतियों की झाड़ियाँ, काँटेदार नाशपाती कैक्टस और पैलो सेंटो पेड़ शामिल है। 1940 के दशक मे वैज्ञानिकों ने एक प्रयोग तौर पर 70 बाल्ट्रा स्थलीय गोहों को पड़ोसी उत्तर सेयमोर द्वीप पर ले जाने का फैसला किया था। इस कदम के अप्रत्याशित परिणाम निकले और द्वितीय विश्व के दौरान बाल्ट्रा पर हुये सेना के कब्जे के बाद द्वीप के मूल गोह विलुप्त हो गये। 1980 के दशक के दौरान चलाई गयी एक प्रजनन और पुनर्निवेशन परियोजना के अंतर्गत उत्तर सेयमोर से गोहों को [[चार्ल्स डार्विन अनुसंधान केन्द्र]] लाया गया और 1990 के दशक में स्थलीय गोहों को पुनः बाल्ट्रा में छोड़ा गया। 1997 में वैज्ञानिकों की गणना के अनुसार द्वीप पर स्थलीय गोहों की कुल संख्या 97 थी, जिनमें से 13 इसी द्वीप पर पैदा हुई थीं।<ref name="t627">{{cite web | title=Baltra Island Map and History | website=GalapagosIslands.com | url=https://www.galapagosislands.com/baltra/ | access-date=2026-10-17}}</ref> == हवाई अड्डा == <gallery> चित्र:US Army Airfield on Baltra.jpg|द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बना एयरबेस चित्र:BALTRA-2b.jpg|हवाई दृश्य </gallery> सन 986 तक पूरे गैलापागोस द्वीपसमूह में सिर्फ बाल्ट्रा हवाई अड्डा ही सेवारत था, अब एक दूसरा हवाई अड्डा सैन क्रिस्टोबाल द्वीप पर भी शुरु हो गया है, हालाँकि, गैलापागोस जाने वाले निजी विमानों को अनिवार्य रूप से बाल्ट्रा हवाई अड्डे को प्रयोग करना पड़ता है क्योंकि यहाँ पर रात में भी उड़ान भरने की सुविधा उपलब्ध है। बाल्ट्रा आने के बाद सभी आगंतुकों को तुरंत बस के द्वारा द्वीप की दो गोदियों मे से किसी एक को भेजा जाता है। पहली गोदी एक छोटी सी खाड़ी में स्थित है जहाँ नावें यात्रियों का इंतजार करती हैं। दूसरी गोदी एक नौका गोदी है जो बाल्ट्रा द्वीप को सांताक्रूज़ द्वीप से जोड़ती है। 2007 और 2008 में बाल्ट्रा हवाई अड्डे का अतिरिक्त रेस्तराओं और दुकानों को शामिल करने और एक बेहतर आगंतुक क्षेत्र विकसित करने के उद्देश्य से पुनर्निर्माण किया गया है। == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == चित्र दीर्घा == {{Commonscat-inline|Baltra|बाल्ट्रा (गैलापागोस)}} [[श्रेणी:गैलापागोस द्वीप]] [[श्रेणी:पर्यटन आकर्षण]] {{भूगोल-आधार}} pkgwdtyq7ox9fq7ool99sg8tqeaj81g 6630365 6630364 2026-10-17T07:05:31Z Anitya Gautam 916080 6630365 wikitext text/x-wiki {{स्रोत हीन|date=अक्टूबर 2026}} [[चित्र:Galapagos Island Names hindi.png|thumb|right|250px|गैलापागोस द्वीपसमूह का मानचित्र]] [[चित्र:Alvaro Sevilla Design Isla Santa Cruz Galapagos foto tomada desde el avión.jpg|thumb|right|250px|द्वीप का नज़ारा]] '''बाल्ट्रा''' द्वीप को दक्षिणी सेयमोर के नाम से भी जाना जाता है। बाल्ट्रा [[गैलापागोस द्वीपसमूह]] के केन्द्र के निकट स्थित एक छोटा सा सपाट द्वीप है। इसकी रचना भू उत्थान के द्वारा हुई है। यह द्वीप बहुत ही शुष्क है और वनस्पतियों की झाड़ियाँ, काँटेदार नाशपाती कैक्टस और पैलो सेंटो पेड़ शामिल है। 1940 के दशक मे वैज्ञानिकों ने एक प्रयोग तौर पर 70 बाल्ट्रा स्थलीय गोहों को पड़ोसी उत्तर सेयमोर द्वीप पर ले जाने का फैसला किया था। इस कदम के अप्रत्याशित परिणाम निकले और द्वितीय विश्व के दौरान बाल्ट्रा पर हुये सेना के कब्जे के बाद द्वीप के मूल गोह विलुप्त हो गये। 1980 के दशक के दौरान चलाई गयी एक प्रजनन और पुनर्निवेशन परियोजना के अंतर्गत उत्तर सेयमोर से गोहों को [[चार्ल्स डार्विन अनुसंधान केन्द्र]] लाया गया और 1990 के दशक में स्थलीय गोहों को पुनः बाल्ट्रा में छोड़ा गया। 1997 में वैज्ञानिकों की गणना के अनुसार द्वीप पर स्थलीय गोहों की कुल संख्या 97 थी, जिनमें से 13 इसी द्वीप पर पैदा हुई थीं।<ref name="t627">{{cite web | title=Baltra Island Map and History | website=GalapagosIslands.com | url=https://www.galapagosislands.com/baltra/ | access-date=2026-10-17}}</ref> == हवाई अड्डा == <gallery> चित्र:US Army Airfield on Baltra.jpg|द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बना एयरबेस चित्र:BALTRA-2b.jpg|हवाई दृश्य </gallery> सन 986 तक पूरे गैलापागोस द्वीपसमूह में सिर्फ बाल्ट्रा हवाई अड्डा ही सेवारत था, अब एक दूसरा हवाई अड्डा सैन क्रिस्टोबाल द्वीप पर भी शुरु हो गया है, हालाँकि, गैलापागोस जाने वाले निजी विमानों को अनिवार्य रूप से बाल्ट्रा हवाई अड्डे को प्रयोग करना पड़ता है क्योंकि यहाँ पर रात में भी उड़ान भरने की सुविधा उपलब्ध है। बाल्ट्रा आने के बाद सभी आगंतुकों को तुरंत बस के द्वारा द्वीप की दो गोदियों मे से किसी एक को भेजा जाता है। पहली गोदी एक छोटी सी खाड़ी में स्थित है जहाँ नावें यात्रियों का इंतजार करती हैं। दूसरी गोदी एक नौका गोदी है जो बाल्ट्रा द्वीप को सांताक्रूज़ द्वीप से जोड़ती है। 2007 और 2008 में बाल्ट्रा हवाई अड्डे का अतिरिक्त रेस्तराओं और दुकानों को शामिल करने और एक बेहतर आगंतुक क्षेत्र विकसित करने के उद्देश्य से पुनर्निर्माण किया गया है।<ref name="x998">{{cite web | title=Baltra Island | website=Galápagos Conservancy | date=2022-05-30 | url=https://www.galapagos.org/about_galapagos/the-islands/baltra-island/ | access-date=2026-10-17}}</ref> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == चित्र दीर्घा == {{Commonscat-inline|Baltra|बाल्ट्रा (गैलापागोस)}} [[श्रेणी:गैलापागोस द्वीप]] [[श्रेणी:पर्यटन आकर्षण]] {{भूगोल-आधार}} ko125voskh5zr8k9ms0nofcpqzgvh46 बार्टोलोम (गैलापागोस) 0 180878 6630353 6630104 2026-10-17T06:42:24Z ~2026-55524-84 954072 6630353 wikitext text/x-wiki {{स्रोत हीन|date=अक्टूबर 2026}} [[चित्र:Galapagos Island Names hindi.png|thumb|right|250px|गैलापागोस द्वीपसमूह का मानचित्र]] [[गैलापागोस द्वीपसमूह]] का एक भाग '''बार्टोलोम''' (पूर्व नाम '''बार्थोलोम्यू''') द्वीप सैंटियागो द्वीप के पूर्वी तट से थोड़ी दूर स्थित एक ज्वालामुखी द्वीप है। यह गैलापागोस के नवीन द्वीपों में से एक है। इस द्वीप और सैंटियागो द्वीप की सुलिवान खाड़ी का नाम प्रकृतिवादी और चार्ल्स डार्विन के मित्र, सर बार्थोलोम्यू जेम्स सुलिवान, जो एचएमएस बीगल पर एक लेफ्टिनेंट थे के नाम पर रखा गया है। == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == चित्र दीर्घा == {{Commonscat-inline|Baltra|बाल्ट्रा (गैलापागोस)}} [[श्रेणी:गैलापागोस द्वीप]] [[श्रेणी:पर्यटन आकर्षण]] {{भूगोल-आधार}} 0kt5mi4ljq4t7ced5ju5y2s0g0wx6ye 6630354 6630353 2026-10-17T06:43:45Z ~2026-55524-84 954072 6630354 wikitext text/x-wiki {{स्रोत हीन|date=अक्टूबर 2026}} [[चित्र:Galapagos Island Names hindi.png|thumb|right|250px|गैलापागोस द्वीपसमूह का मानचित्र]] [[गैलापागोस द्वीपसमूह]] का एक भाग '''बार्टोलोम''' (पूर्व नाम '''बार्थोलोम्यू''') द्वीप सैंटियागो द्वीप के पूर्वी तट से थोड़ी दूर स्थित एक ज्वालामुखी द्वीप है। यह गैलापागोस के नवीन द्वीपों में से एक है। इस द्वीप और सैंटियागो द्वीप की सुलिवान खाड़ी का नाम प्रकृतिवादी और चार्ल्स डार्विन के मित्र, सर बार्थोलोम्यू जेम्स सुलिवान, जो एचएमएस बीगल पर एक लेफ्टिनेंट थे के नाम पर रखा गया है। == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == चित्र दीर्घा == {{Commonscat-inline|Bartolomé Island|बार्टोलोम (गैलापागोस)}} [[श्रेणी:गैलापागोस द्वीप]] [[श्रेणी:पर्यटन आकर्षण]] {{भूगोल-आधार}} 4fiu5k7i2w92ohzn7vj8pm6mx2xr6mi 6630369 6630354 2026-10-17T07:16:29Z Anitya Gautam 916080 6630369 wikitext text/x-wiki {{स्रोत हीन|date=अक्टूबर 2026}} [[चित्र:Galapagos Island Names hindi.png|thumb|right|250px|गैलापागोस द्वीपसमूह का मानचित्र]] [[गैलापागोस द्वीपसमूह]] का एक भाग '''बार्टोलोम''' (पूर्व नाम '''बार्थोलोम्यू''') द्वीप सैंटियागो द्वीप के पूर्वी तट से थोड़ी दूर स्थित एक ज्वालामुखी द्वीप है।<ref name="h240">{{cite web | title=Bartolome Island | website=Top Galapagos Stop in 2026 | url=https://gogalapagos.com/islands/bartolome/ | access-date=2026-10-17}}</ref> यह गैलापागोस के नवीन द्वीपों में से एक है। इस द्वीप और सैंटियागो द्वीप की सुलिवान खाड़ी का नाम प्रकृतिवादी और चार्ल्स डार्विन के मित्र, सर बार्थोलोम्यू जेम्स सुलिवान, जो एचएमएस बीगल पर एक लेफ्टिनेंट थे के नाम पर रखा गया है।<ref name="n775">{{cite web | title=Full-day Tour | website=Nature Galapagos &amp; Ecuador | date=2024-11-20 | url=https://naturegalapagos.com/galapagos-day-trips/bartolome-galapagos-day-tours/ | access-date=2026-10-17}}</ref> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == चित्र दीर्घा == {{Commonscat-inline|Bartolomé Island|बार्टोलोम (गैलापागोस)}} [[श्रेणी:गैलापागोस द्वीप]] [[श्रेणी:पर्यटन आकर्षण]] {{भूगोल-आधार}} 5wb26culs24wp2h1gfmq7gsds7e5avz एस्पानॉला (गैलापागोस) 0 180879 6630290 6205388 2026-10-16T18:24:59Z ~2026-55524-84 954072 6630290 wikitext text/x-wiki {{स्रोत हीन|date=अक्टूबर 2026}} [[चित्र:Galapagos Island Names hindi.png|thumb|right|250px|गैलापागोस द्वीपसमूह का मानचित्र]] [[चित्र:gardnerbay.jpg|thumb|right|250px|गार्डनर खाड़ी]]'''एस्पानॉला द्वीप''' का यह नाम स्पेन के सम्मान में रखा गया था। इसको विस्काउंट सैमुएल हुड के नाम पर''' हुड''' नाम से भी जाना जाता है। इसका क्षेत्रफल 60 वर्ग किलोमीटर अधिकतम ऊंचाई 206 मीटर है। एस्पानॉला [[गैलापागोस द्वीपसमूह]] का सबसे पुराना द्वीप है जो लगभग 35 लाख वर्ष पुराना है और समूह के सबसे दक्षिण में स्थित है। इस द्वीप के दूरस्थ स्थानों में स्थानीय वनस्पति प्रचुर संख्या में पाई जाती है। अन्य द्वीपों से अलग होने के कारण एस्पानॉला पर वन्यजीव द्वीप के पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के अनुसार अनुकूलित हो गये हैं। एस्पानॉला के समुद्री गोह ही द्वीपसमूह के ऐसे गोह हैं जो प्रजननकाल के दौरान अपने शरीर का रंग परिवर्तित कर सकते हैं। एस्पानॉला पर दो आगंतुक क्षेत्र हैं। गार्डनर खाड़ी और पुंटा सुआरेज़। जहाँ गार्डनर खाड़ी एक बेहतरीन समुद्रतट है जहाँ पर्यटक तैराकी कर सकते हैं वहीं पुंटा सुआरेज़ में विभिन्न वन्य जीव जैसे लहरदार एल्बाट्रॉस, समुद्री गोह, एस्पानॉला लावा छिपकली, हुड मॉकिंगबर्ड, अबाबील-पुच्छ गल, नीले और लाल पैरों वाले बूबी पक्षी, नाज़्का बूबी पक्षी, गैलापागोस बाज़ आदि देखे जा सकते हैं। == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:गैलापागोस द्वीप]] [[श्रेणी:पर्यटन आकर्षण]] {{भूगोल-आधार}} db9905l334lp63tpqnj4qogmu7i2qh3 वुल्फ (गैलापागोस) 0 181220 6630320 6630099 2026-10-16T22:14:13Z ~2026-55524-84 954072 6630320 wikitext text/x-wiki {{स्रोत हीन|date=अक्टूबर 2026}} [[चित्र:Galapagos Island Names hindi.png|thumb|right|250px|गैलापागोस द्वीपसमूह का मानचित्र]] [[गैलापागोस द्वीपसमूह]] के द्वीप '''वुल्फ''' (पूर्व नाम '''वेनमैन''') का नाम जर्मन भूविज्ञानी [[थियोडोर वुल्फ]] के नाम पर रखा गया था। द्वीप का क्षेत्रफल 1.3 वर्ग किलोमीटर अधिकतम ऊंचाई 253 मीटर है। यहाँ फर सील, फ्रिगेट पक्षी, नकाबपोश और लाल पैरों वाला बूबी पक्षी, हाँगर, समुद्री गोह, व्हेल, डॉल्फिन और अबाबील-पुच्छ गल को देखा जा सकता है। यहाँ का सबसे प्रसिद्ध निवासी पिशाच तूती है जो केवल इस द्वीप पर पाया जाता है। पिशाच तूती का आहार आंशिक रूप से अन्य पक्षियों रक्त है जिसे वो इन पक्षियों को अपनी चोंच से प्रहार से घायल करके पीता है। == चित्र दीर्घा == {{Commonscat-inline|Wolf Island (Galápagos)|वुल्फ (गैलापागोस)}} == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:गैलापागोस द्वीप]] [[श्रेणी:पर्यटन आकर्षण]] {{भूगोल-आधार}} d0yihs1tn04xmf3s43tuey4ac8kswh0 6630355 6630320 2026-10-17T06:46:01Z ~2026-55524-84 954072 6630355 wikitext text/x-wiki {{स्रोत हीन|date=अक्टूबर 2026}} [[चित्र:Galapagos Island Names hindi.png|thumb|right|250px|गैलापागोस द्वीपसमूह का मानचित्र]] [[गैलापागोस द्वीपसमूह]] के द्वीप '''वुल्फ''' (पूर्व नाम '''वेनमैन''') का नाम जर्मन भूविज्ञानी [[थियोडोर वुल्फ]] के नाम पर रखा गया था। द्वीप का क्षेत्रफल 1.3 वर्ग किलोमीटर अधिकतम ऊंचाई 253 मीटर है। यहाँ फर सील, फ्रिगेट पक्षी, नकाबपोश और लाल पैरों वाला बूबी पक्षी, हाँगर, समुद्री गोह, व्हेल, डॉल्फिन और अबाबील-पुच्छ गल को देखा जा सकता है। यहाँ का सबसे प्रसिद्ध निवासी पिशाच तूती है जो केवल इस द्वीप पर पाया जाता है। पिशाच तूती का आहार आंशिक रूप से अन्य पक्षियों रक्त है जिसे वो इन पक्षियों को अपनी चोंच से प्रहार से घायल करके पीता है। == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == चित्र दीर्घा == {{Commonscat-inline|Wolf Island (Galápagos)|वुल्फ (गैलापागोस)}} [[श्रेणी:गैलापागोस द्वीप]] [[श्रेणी:पर्यटन आकर्षण]] {{भूगोल-आधार}} 9xp8k2ucq1mk8x9l37c4i66d0vnvskm 6630368 6630355 2026-10-17T07:10:34Z Anitya Gautam 916080 6630368 wikitext text/x-wiki {{स्रोत हीन|date=अक्टूबर 2026}} [[चित्र:Galapagos Island Names hindi.png|thumb|right|250px|गैलापागोस द्वीपसमूह का मानचित्र]] [[गैलापागोस द्वीपसमूह]] के द्वीप '''वुल्फ''' (पूर्व नाम '''वेनमैन''') का नाम जर्मन भूविज्ञानी [[थियोडोर वुल्फ]] के नाम पर रखा गया था। द्वीप का क्षेत्रफल 1.3 वर्ग किलोमीटर अधिकतम ऊंचाई 253 मीटर है। यहाँ फर सील, फ्रिगेट पक्षी, नकाबपोश और लाल पैरों वाला बूबी पक्षी, हाँगर, समुद्री गोह, व्हेल, डॉल्फिन और अबाबील-पुच्छ गल को देखा जा सकता है। यहाँ का सबसे प्रसिद्ध निवासी पिशाच तूती है जो केवल इस द्वीप पर पाया जाता है। पिशाच तूती का आहार आंशिक रूप से अन्य पक्षियों रक्त है जिसे वो इन पक्षियों को अपनी चोंच से प्रहार से घायल करके पीता है।<ref name="c039">{{cite web | last=Centre | first=UNESCO World Heritage | title=Gal&aacute;pagos Islands | website=UNESCO World Heritage Centre | date=2024-03-13 | url=https://whc.unesco.org/en/list/1/ | access-date=2026-10-17}}</ref> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == चित्र दीर्घा == {{Commonscat-inline|Wolf Island (Galápagos)|वुल्फ (गैलापागोस)}} [[श्रेणी:गैलापागोस द्वीप]] [[श्रेणी:पर्यटन आकर्षण]] {{भूगोल-आधार}} jkjgcht3oifw2wihi7fr6c0rm6sffiz उत्तरी सेयमोर (गैलापागोस) 0 181907 6630289 5930870 2026-10-16T18:20:16Z ~2026-55524-84 954072 6630289 wikitext text/x-wiki {{स्रोत हीन|date=अक्टूबर 2026}} {{Databox}} [[चित्र:Galapagos Island Names hindi.png|thumb|right|250px|गैलापागोस द्वीपसमूह का मानचित्र]] अंग्रेज सज्जन '''लॉर्ड ह्यूग सेयमोर ''' के नाम पर आधारित [[गैलापागोस द्वीपसमूह]] के उत्तरी सेयमोर द्वीप का उद्भव ज्वालामुखीय गतिविधियों से होने के बजाय भूकंपीय उत्थान के परिणाम स्वरूप हुआ है। द्वीप का क्षेत्रफल 1.9 वर्ग किलोमीटर और अधिकतम ऊंचाई 28 मीटर है। द्वीप का अधिकतर क्षेत्र सपाट है सिर्फ तटरेखा के आस पास ही कुछ मीटर ऊँचाई की चट्टाने उपस्थित हैं। बाल्ट्रा हवाई अड्डे के उत्तर में स्थित उत्तरी सेयमोर एक छोटा सा टापू है। इस द्वीप पर नीले पैरों वाले बूबी पक्षी, अबाबील-पुच्छ गल और फ्रिगेट पक्षियों की एक बड़ी आबादी निवास करती है।[[चित्र:Noseyiguana.jpg|right|200px|उत्तरी सेयमोर की स्थलीय गोह]]द्वीप पर रूपहले-धूसर रंग वाले पैलो सैंटो वृक्षों का एक छोटा सा वन है, जो आमतौर पर पर्ण विहीन होते है और बहार के लिए वर्षा का इंतज़ार करते हैं। द्वीप जीवन से ओत-प्रोत है। द्वीप की यात्रा के दौरान हो सकता है कि आपको किसी जलसिंह या समुद्री गोह को रास्ता देना पड़े। अबाबील-पुच्छ गल और पेलिकन के झुंड भोजन के लिए सागर में गोता लगाते हैं, कभी कभार नकाबदार बूबी पक्षी के दर्शन भी हो जाते हैं। उत्तरी सेयमोर पक्षियों के प्रजनन के लिए एक असाधारण स्थान है और द्वीप पर बड़ी संख्या में नीले पैरों वाले बूबी पक्षी और शानदार फ्रिगेट पक्षी अपने घोंसले बनाते हैं। नीले पैरों वाले बूबी पक्षियों को विभिन्न प्रणय मुद्राओं में यहां देखा जा सकता है। <gallery> North Seymour Island in the Galapagos about to land on shore photo by Alvaro Sevilla Design.JPG| North Seymour Island in the Galapagos.JPG| The beach at North Seymour Island in the Galapagos.jpeg| A Galapagos Land Iguana on the North Seymour Island in the Galapagos photo by Alvaro Sevilla Design.JPG| Blue footed Booby on North Seymour Island Galapagos photo by Alvaro Sevilla Design.JPG| At the beach in North Seymour Island Galapagos photo by Alvaro Sevilla Design.JPG| </gallery> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:गैलापागोस द्वीप]] [[श्रेणी:पर्यटन आकर्षण]] {{भूगोल-आधार}} 768atxp8cgb1rj4v5agcqrsiwtvxf76 6630311 6630289 2026-10-16T20:35:49Z ~2026-55524-84 954072 6630311 wikitext text/x-wiki {{स्रोत हीन|date=अक्टूबर 2026}} {{Databox}} [[चित्र:Galapagos Island Names hindi.png|thumb|right|250px|गैलापागोस द्वीपसमूह का मानचित्र]] अंग्रेज सज्जन '''लॉर्ड ह्यूग सेयमोर ''' के नाम पर आधारित [[गैलापागोस द्वीपसमूह]] के उत्तरी सेयमोर द्वीप का उद्भव ज्वालामुखीय गतिविधियों से होने के बजाय भूकंपीय उत्थान के परिणाम स्वरूप हुआ है। द्वीप का क्षेत्रफल 1.9 वर्ग किलोमीटर और अधिकतम ऊंचाई 28 मीटर है। द्वीप का अधिकतर क्षेत्र सपाट है सिर्फ तटरेखा के आस पास ही कुछ मीटर ऊँचाई की चट्टाने उपस्थित हैं। बाल्ट्रा हवाई अड्डे के उत्तर में स्थित उत्तरी सेयमोर एक छोटा सा टापू है। इस द्वीप पर नीले पैरों वाले बूबी पक्षी, अबाबील-पुच्छ गल और फ्रिगेट पक्षियों की एक बड़ी आबादी निवास करती है। उत्तरी सेयमोर की स्थलीय गोह]]द्वीप पर रूपहले-धूसर रंग वाले पैलो सैंटो वृक्षों का एक छोटा सा वन है, जो आमतौर पर पर्ण विहीन होते है और बहार के लिए वर्षा का इंतज़ार करते हैं। द्वीप जीवन से ओत-प्रोत है। द्वीप की यात्रा के दौरान हो सकता है कि आपको किसी जलसिंह या समुद्री गोह को रास्ता देना पड़े। अबाबील-पुच्छ गल और पेलिकन के झुंड भोजन के लिए सागर में गोता लगाते हैं, कभी कभार नकाबदार बूबी पक्षी के दर्शन भी हो जाते हैं। उत्तरी सेयमोर पक्षियों के प्रजनन के लिए एक असाधारण स्थान है और द्वीप पर बड़ी संख्या में नीले पैरों वाले बूबी पक्षी और शानदार फ्रिगेट पक्षी अपने घोंसले बनाते हैं। नीले पैरों वाले बूबी पक्षियों को विभिन्न प्रणय मुद्राओं में यहां देखा जा सकता है। <gallery> North Seymour Island in the Galapagos about to land on shore photo by Alvaro Sevilla Design.JPG| North Seymour Island in the Galapagos.JPG| The beach at North Seymour Island in the Galapagos.jpeg| A Galapagos Land Iguana on the North Seymour Island in the Galapagos photo by Alvaro Sevilla Design.JPG| Blue footed Booby on North Seymour Island Galapagos photo by Alvaro Sevilla Design.JPG| At the beach in North Seymour Island Galapagos photo by Alvaro Sevilla Design.JPG| Noseyiguana.jpg|उत्तरी सेयमोर की स्थलीय गोह </gallery> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:गैलापागोस द्वीप]] [[श्रेणी:पर्यटन आकर्षण]] {{भूगोल-आधार}} 1n9iybsrdadrw46g0raboxweoz9yd4c 6630317 6630311 2026-10-16T21:59:21Z ~2026-55524-84 954072 6630317 wikitext text/x-wiki {{स्रोत हीन|date=अक्टूबर 2026}} {{Databox}} [[चित्र:Galapagos Island Names hindi.png|thumb|right|250px|गैलापागोस द्वीपसमूह का मानचित्र]] अंग्रेज सज्जन '''लॉर्ड ह्यूग सेयमोर ''' के नाम पर आधारित [[गैलापागोस द्वीपसमूह]] के उत्तरी सेयमोर द्वीप का उद्भव ज्वालामुखीय गतिविधियों से होने के बजाय भूकंपीय उत्थान के परिणाम स्वरूप हुआ है। द्वीप का क्षेत्रफल 1.9 वर्ग किलोमीटर और अधिकतम ऊंचाई 28 मीटर है। द्वीप का अधिकतर क्षेत्र सपाट है सिर्फ तटरेखा के आस पास ही कुछ मीटर ऊँचाई की चट्टाने उपस्थित हैं। बाल्ट्रा हवाई अड्डे के उत्तर में स्थित उत्तरी सेयमोर एक छोटा सा टापू है। इस द्वीप पर नीले पैरों वाले बूबी पक्षी, अबाबील-पुच्छ गल और फ्रिगेट पक्षियों की एक बड़ी आबादी निवास करती है। उत्तरी सेयमोर की स्थलीय गोह]]द्वीप पर रूपहले-धूसर रंग वाले पैलो सैंटो वृक्षों का एक छोटा सा वन है, जो आमतौर पर पर्ण विहीन होते है और बहार के लिए वर्षा का इंतज़ार करते हैं। द्वीप जीवन से ओत-प्रोत है। द्वीप की यात्रा के दौरान हो सकता है कि आपको किसी जलसिंह या समुद्री गोह को रास्ता देना पड़े। अबाबील-पुच्छ गल और पेलिकन के झुंड भोजन के लिए सागर में गोता लगाते हैं, कभी कभार नकाबदार बूबी पक्षी के दर्शन भी हो जाते हैं। उत्तरी सेयमोर पक्षियों के प्रजनन के लिए एक असाधारण स्थान है और द्वीप पर बड़ी संख्या में नीले पैरों वाले बूबी पक्षी और शानदार फ्रिगेट पक्षी अपने घोंसले बनाते हैं। नीले पैरों वाले बूबी पक्षियों को विभिन्न प्रणय मुद्राओं में यहां देखा जा सकता है। == चित्र दीर्घा == <gallery> North Seymour Island in the Galapagos about to land on shore photo by Alvaro Sevilla Design.JPG| North Seymour Island in the Galapagos.JPG| The beach at North Seymour Island in the Galapagos.jpeg| A Galapagos Land Iguana on the North Seymour Island in the Galapagos photo by Alvaro Sevilla Design.JPG| Blue footed Booby on North Seymour Island Galapagos photo by Alvaro Sevilla Design.JPG| At the beach in North Seymour Island Galapagos photo by Alvaro Sevilla Design.JPG| Noseyiguana.jpg|उत्तरी सेयमोर की स्थलीय गोह </gallery> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:गैलापागोस द्वीप]] [[श्रेणी:पर्यटन आकर्षण]] {{भूगोल-आधार}} t29mgytif1psbwutolevk664zp4dtbx सैन क्रिस्टोबाल (गैलापागोस) 0 181986 6630362 5726848 2026-10-17T07:02:29Z ~2026-55524-84 954072 6630362 wikitext text/x-wiki {{स्रोत हीन|date=अक्टूबर 2026}} [[चित्र:Galapagos Island Names hindi.png|thumb|right|250px|गैलापागोस द्वीपसमूह का मानचित्र]] [[चित्र:Galapagos2007--39--08-22-07.JPG|thumb|right|250px|सैन क्रिस्टोबाल की मुख्य सड़क]]'''सैन क्रिस्टोबाल''' ('''चैथम''') द्वीप का नाम नाविकों के [[संरक्षक संत]] "सेंट क्रिस्टोफर" के नाम पर रखा गया है। द्वीप का अंग्रेजी नाम चैथम, विलियम पिट, चैथम के पहले अर्ल के नाम पर रखा गया है। 558 वर्ग किलोमीटर (215 वर्ग मील) के क्षेत्रफल वाले सैन क्रिस्टोबाल का उच्चतम बिंदु है 730 मीटर (2395 फीट) ऊँचा है। [[गैलापागोस द्वीपसमूह]] के सभी द्वीपों में सैन क्रिस्टोबाल वो पहला द्वीप था जिस पर [[चार्ल्स डार्विन]] ने अपनी बीगल की यात्रा के दौरान उतरा था। इस द्वीप पर फ्रिगेट पक्षी, जलसिंह, विशाल कछुए, नीले और लाल पैरों वाले बूबी पक्षी, रेखीयपक्षी, समुद्री गोह, डॉल्फिन, अबाबील-पुच्छ गल पाये जाते हैं। इसकी वनस्पति में मेंकैलेंड्रिनिया गैलापागोस (Calandrinia galapagos), लैकोकार्पस डर्विनी (Lecocarpus darwinii) और लिग्नम वाईटी (Lignum vitae) शामिल हैं। द्वीप समूह की ताजे पानी की सबसे बड़ी झील लैगूना ई1 जंको सैन क्रिस्टोबाल की उच्चभूमि में स्थित है। [[गैलापागोस प्रांत]] की राजधानी, प्यूर्टो बैक्यूरिज़ो मोरेनो द्वीप के दक्षिणी सिरे पर स्थित है। == चित्र दीर्घा == <gallery perrow="4"> श्रेणी:Galapagos2007--53--08-23-07.JPG|प्यूर्तो बैक्वेरीजो़ मोरेनो श्रेणी:Galapagos2007--49--08-22-07.JPG| श्रेणी:Galapagos2007--39--08-22-07.JPG|मुख्य सड़क श्रेणी:Galapagos2007--37--08-23-07.JPG|हवाई अड्डा श्रेणी:Galapagos2007--32--08-22-07.JPG|गिरिजाघर के सामने सड़क के बीचोंबीच एक पेड़ श्रेणी:Galapagos2007--31--08-22-07.JPG| श्रेणी:Galapagos2007--27--08-23-07.JPG| श्रेणी:Galapagos2007--01--07-13-07.JPG|पर्यटक सागरतट पर जलसिंहों के साथ श्रेणी:Galapagos2007--16--08-22-07.JPG| श्रेणी:Galapagos2007--23--08-22-07.JPG| </gallery> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:गैलापागोस द्वीप]] [[श्रेणी:पर्यटन आकर्षण]] {{भूगोल-आधार}} 2x0qswmzsla44yh8wwgkwkrfpggyly8 6630363 6630362 2026-10-17T07:03:41Z ~2026-55524-84 954072 6630363 wikitext text/x-wiki {{स्रोत हीन|date=अक्टूबर 2026}} [[चित्र:Galapagos Island Names hindi.png|thumb|right|250px|गैलापागोस द्वीपसमूह का मानचित्र]] [[चित्र:Galapagos2007--39--08-22-07.JPG|thumb|right|250px|सैन क्रिस्टोबाल की मुख्य सड़क]]'''सैन क्रिस्टोबाल''' (पूर्व नाम '''चैथम''') द्वीप का नाम नाविकों के [[संरक्षक संत]] "सेंट क्रिस्टोफर" के नाम पर रखा गया है। द्वीप का अंग्रेजी नाम चैथम, विलियम पिट, चैथम के पहले अर्ल के नाम पर रखा गया है। 558 वर्ग किलोमीटर (215 वर्ग मील) के क्षेत्रफल वाले सैन क्रिस्टोबाल का उच्चतम बिंदु है 730 मीटर (2395 फीट) ऊँचा है। [[गैलापागोस द्वीपसमूह]] के सभी द्वीपों में सैन क्रिस्टोबाल वो पहला द्वीप था जिस पर [[चार्ल्स डार्विन]] ने अपनी बीगल की यात्रा के दौरान उतरा था। इस द्वीप पर फ्रिगेट पक्षी, जलसिंह, विशाल कछुए, नीले और लाल पैरों वाले बूबी पक्षी, रेखीयपक्षी, समुद्री गोह, डॉल्फिन, अबाबील-पुच्छ गल पाये जाते हैं। इसकी वनस्पति में मेंकैलेंड्रिनिया गैलापागोस (Calandrinia galapagos), लैकोकार्पस डर्विनी (Lecocarpus darwinii) और लिग्नम वाईटी (Lignum vitae) शामिल हैं। द्वीप समूह की ताजे पानी की सबसे बड़ी झील लैगूना ई1 जंको सैन क्रिस्टोबाल की उच्चभूमि में स्थित है। [[गैलापागोस प्रांत]] की राजधानी, प्यूर्टो बैक्यूरिज़ो मोरेनो द्वीप के दक्षिणी सिरे पर स्थित है। == चित्र दीर्घा == <gallery perrow="4"> श्रेणी:Galapagos2007--53--08-23-07.JPG|प्यूर्तो बैक्वेरीजो़ मोरेनो श्रेणी:Galapagos2007--49--08-22-07.JPG| श्रेणी:Galapagos2007--39--08-22-07.JPG|मुख्य सड़क श्रेणी:Galapagos2007--37--08-23-07.JPG|हवाई अड्डा श्रेणी:Galapagos2007--32--08-22-07.JPG|गिरिजाघर के सामने सड़क के बीचोंबीच एक पेड़ श्रेणी:Galapagos2007--31--08-22-07.JPG| श्रेणी:Galapagos2007--27--08-23-07.JPG| श्रेणी:Galapagos2007--01--07-13-07.JPG|पर्यटक सागरतट पर जलसिंहों के साथ श्रेणी:Galapagos2007--16--08-22-07.JPG| श्रेणी:Galapagos2007--23--08-22-07.JPG| </gallery> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:गैलापागोस द्वीप]] [[श्रेणी:पर्यटन आकर्षण]] {{भूगोल-आधार}} rf6zotufsrg6q0zzxnu4rjzeqbau6kn सैंटियागो (गैलापागोस) 0 181987 6630319 6630090 2026-10-16T22:11:14Z ~2026-55524-84 954072 6630319 wikitext text/x-wiki {{coord|00|15|S|090|42|W|region:EC_type:isle_source:dewiki|display=title}} [[चित्र:Galapagos Island Names hindi.png|thumb|right|250px|गैलापागोस द्वीपसमूह का मानचित्र]] [[चित्र:Santiagofromsea.jpg|thumb|right|250px|दक्षिण से सैंटियागो द्वीप का एक दृश्य]]'''सैंटियागो द्वीप''' जिसका [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]] नाम जेम्स है [[गैलापागोस द्वीपसमूह]] का एक द्वीप है। इसे '''सैन साल्वाडोर''' के नाम से भी जाना जाता है और यह नाम कैरेबियन सागर में कोलंबस द्वारा भोजे गये पहले द्वीप के नाम पर आधारित है। द्वीप का क्षेत्रफल 585 वर्ग किलोमीटर अधिकतम ऊंचाई 907 मीटर है। समुद्री गोह, जलसिंह, फर सील, स्थलीय और समुद्री कछुए, राजहंस, डॉल्फिन और हाँगर यहाँ पाये जाते हैं।<ref>Kricher, John (February 13, 2006). Galápagos: A Natural History. Princeton University Press. p. 210. ISBN 978-0691126333.</ref> मनुष्यों द्वारा द्वीप पर लये गये [[सूअर]] और [[बकरी]] वो दो जीव है जिन्होने द्वीप की स्थानिक प्रजातियों को अपूरणीय क्षति पहुँचाई है, हालाँकि बाद में चलाये गये उन्मूलन अभियान से 2002 में सूअरों को पूरी तरह द्वीप से उन्मूलित कर दिया गया जबकि बकरी उन्मूलन अपने अंतिम चरण में है। डार्विन फिन्चेस और गैलापागोस बाज़ यहाँ आम तौर पर देखे जाने वाले पक्षी हैं वहीं यहाँ फर [[सील]]ों की एक बस्ती भी है। सुलिवान खाड़ी में एक हाल का (करीब 100 साल पहले) का लावा प्रवाह देखा जा सकता है। == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == चित्र दीर्घा == {{Commonscat-inline|Santiago (Galápagos)|सैंटियागो (गैलापागोस)}} [[श्रेणी:गैलापागोस द्वीप]] [[श्रेणी:पर्यटन आकर्षण]] {{भूगोल-आधार}} 08jshrk7y0gpkga9zjda6qhfn40w445 साँचा:User bh-N 10 189935 6630265 804617 2026-10-16T16:25:19Z Shaan Sengupta 775249 /* */ Fixed 6630265 wikitext text/x-wiki <div style="float:left;border:solid #6EF7A7 1px;margin:1px"> <table cellspacing="0" style="width:238px;background:#C6FCDC"><tr> <td style="width:45px;height:45px;background:#6EF7A7;text-align:center;font-size:14pt">'''bh'''</td>''' <td style="font-size:8pt;padding:4pt;line-height:1.25em;">ई प्रयोगकर्ता के मातृभाषा '''[[:Category:User bh|भोजपुरी]]''' ह।<br/> [[Category:User bh|{{PAGENAME}}]][[Category:User bh|{{PAGENAME}}]]</td> </tr></table></div> 01dzpm7bwuvyz62kzlytfd1zff1veig 6630266 6630265 2026-10-16T16:25:53Z Shaan Sengupta 775249 /* */ Minor 6630266 wikitext text/x-wiki <div style="float:left;border:solid #6EF7A7 1px;margin:1px"> <table cellspacing="0" style="width:238px;background:#C6FCDC"><tr> <td style="width:45px;height:45px;background:#6EF7A7;text-align:center;font-size:14pt">'''bh'''</td>''' <td style="font-size:8pt;padding:4pt;line-height:1.25em">ई प्रयोगकर्ता के मातृभाषा '''[[:Category:User bh|भोजपुरी]]''' ह।<br/> [[Category:User bh|{{PAGENAME}}]][[Category:User bh|{{PAGENAME}}]]</td> </tr></table></div> ec3fvy7k41t0pxikcub77g8jraq2a6j कालडी 0 190239 6630398 5466700 2026-10-17T10:00:04Z ~2026-55646-80 954184 പ്രൊഫസർ പ്രേം രാജ്‌ പുഷ്പാകരന്‍, എൻ.ഐ.റ്റി. കാലിക്കറ്റ് ♡ Professor P̂rém ráj P̂üshp̂ákárán, NIT Calicut 🪷🌷🪻🌼🌻🌺🌹🌸🏵️💮 6630398 wikitext text/x-wiki {{Infobox settlement |name = कालडी |other_name = Kalady<br />കാലടി |native_name_lang = ml |settlement_type = [[उपनगर]] |image = Raja Ravi Varma - Sankaracharya.jpg |image_caption = <small>[[आदि शंकराचार्य]] और उनके शिष्य, सन् 1904 में राजा रवि वर्मा द्वारा बनाया चित्र</small> |pushpin_label = कालडी |pushpin_map = India Kerala |coordinates = {{coord|10.169|76.446|display=inline, title}} |pushpin_map_caption = केरल में स्थिति |subdivision_type = [[भारत के ज़िले|ज़िला]] |subdivision_name = [[एर्नाकुलम ज़िला]] |subdivision_type2 = [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|प्रान्त]] |subdivision_name2 = [[केरल]] |subdivision_type3 = देश |subdivision_name3= {{IND}} |population_total = 20380 |population_as_of = 2011 |demographics_type1 = भाषाएँ |demographics1_title1= प्रचलित |demographics1_info1= [[मलयालम भाषा|मलयालम]] 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'''कालडी'''({{lang-ml|കാലടി}})({{langx|en|Kalady}}) या कलाड़ी(Kaladi) [[भारत]] के [[केरल]] (या केरलम) राज्य के [[एर्नाकुलम ज़िले]] में स्थित एक नगर है। यह [[पेरियार नदी]] के पूर्व में स्थित है। यहाँ [[आदि शंकराचार्य]] का जन्म हुआ था इसलिये यह एक प्रसिद्ध तीर्थ भी है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=psw6DwAAQBAJ Lonely Planet South India & Kerala]," Isabella Noble et al, Lonely Planet, 2017, ISBN 9781787012394</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=1Hs0DwAAQBAJ The Rough Guide to South India and Kerala]," Rough Guides UK, 2017, ISBN 9780241332894</ref> कलाड़ी 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में श्रृंगेरी के तत्कालीन शंकराचार्य द्वारा पुन: खोज और 1910 में एक आदि शंकर मंदिर के अभिषेक के बाद कलाड़ी को एक विशेष रूप से प्रमुखता मिली। कलाड़ी की शताब्दी मई 2010 में मनाई गई थी और इसकी इसकी पुन: खोज की कहानी खोज की कहानी को श्रृंगेरी शारदा पेथम की एक फिल्म में सौ साल पहले प्रलेखित किया गया है। मलयालम भाषा में 'कालडी' का अर्थ "पदचिह्न" होता है। प्राचीन काल में इस गाँव का नाम शासलम था। लोककथाओं के अनुसार, बालक शंकर ([[आदि शंकराचार्य]]) की माता आर्याम्बा प्रतिदिन स्नान के लिए [[पेरियार नदी]] तक जाने में अत्यधिक शारीरिक रूप से अक्षम और अशक्त हो जाती थीं। अपनी माता की पीड़ा को देखकर बालक शंकर ने भगवान श्री [[कृष्ण]] से प्रार्थना की। इसके फलस्वरूप, पेरियार नदी ने अपना मार्ग बदल लिया और बालक शंकर के पदचिह्नों का अनुसरण करते हुए उनके घर के समीप से बहने लगी। तभी से इस स्थान का नाम 'कालडी' (पदचिह्न) पड़ा। भाषाविदों के अनुसार, केरल के कई स्थानों के नाम मानव शरीर के अंगों के आधार पर रखे गए हैं (जैसे 'कैवज़ी' हाथ से, 'तलश्शेरी' सिर से)। इसी प्रकार, 'काल' (पैर/सीमा) और 'आदि' (निम्न क्षेत्र) के संयोजन से भी नदी तट के निचले मैदानी इलाकों को यह नाम मिलने का वैज्ञानिक तर्क दिया जाता है। यहाँ की मृदा मुख्य रूप से [[जलोढ़क]] और [[लैटेराइट मृदा]] प्रकार की है, जो पेरियार नदी के प्रवाह और जमाव के कारण अत्यधिक उपजाऊ है। पेरियार केरल की सबसे लंबी नदी है, जो पश्चिमी घाट की शिवगिरि पहाड़ियों से निकलती है। कालडी के पास नदी का मार्ग एक विशिष्ट घुमाव बनाता है, जो भू-आकृतिक रूप से बाढ़ के मैदानों और प्राकृतिक तटबंधों का निर्माण करता है। ८वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य के जन्म के बाद यह स्थान अद्वैत दर्शन का मुख्य केंद्र बना। ऐतिहासिक रूप से, इस क्षेत्र पर 'थेक्के मडम' मठ का प्रशासनिक और राजशाही अधिकार (शंकर संकेथम) था। मध्यकाल में यह स्थान घने जंगलों में तब्दील हो गया था। १९वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में शृंगेरी शारदा पीठम के ३३वें जगद्गुरु श्री सच्चिदानंद शिवाभिनव नृसिंह भारती महास्वामीजी ने अनुसंधान करके आदि शंकराचार्य के वास्तविक जन्मस्थान की खोज की और १९१० में यहाँ पुनः मंदिरों की स्थापना की। यह क्षेत्र सनातन वैदिक परंपरा, दर्शनशास्त्र और संस्कृत विद्वत्ता का एक वैश्विक केंद्र माना जाता है। पेरियार नदी के तट पर बने प्राचीन घाट यहाँ की सांस्कृतिक भूगोल की रीढ़ हैं: कालडी कडावु या आराट्टु कडावु : यह वह ऐतिहासिक स्थान है जहाँ पेरियार नदी ने अपना मार्ग बदला था। आज भी यहाँ भगवान कृष्ण (तिरु कालडी अप्पन) का पवित्र नदी स्नान (आराट्टु) उत्सव संपन्न होता है। [[मगरमच्छ]] [[घाट]]: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इसी घाट पर एक मगरमच्छ ने बालक शंकर का पैर पकड़ लिया था। संन्यास ग्रहण करने की आंतरिक इच्छा और माता द्वारा इसकी अनुमति दिए जाने के तुरंत बाद मगरमच्छ ने उन्हें मुक्त कर दिया था। माता आर्याम्बा का अंतिम संस्कार घाट: यह वह पवित्र स्थान है जहाँ आदि शंकराचार्य ने अपनी माता आर्याम्बा का अंतिम संस्कार (अंतिम क्रियाएँ) किया था, जो उनके द्वारा सन्यासी होने के बावजूद माता को दिए गए वचन का पालन था। मंदिर और मठ - [[शृंगेरी]] शंखराचार्य मठ परिसर : पेरियार के उत्तरी तट पर स्थित इस परिसर में दो मुख्य मंदिर हैं—एक जगद्गुरु आदि शंकराचार्य (दक्षिणामूर्ति रूप) को समर्पित है और दूसरा देवी शारदाम्बा को। श्री आदि शंकराचार्य कीर्ति स्तंभ मंडपम: [[कांची कामकोटि पीठ]] द्वारा निर्मित यह ४५ मीटर (१४८ फीट) ऊँचा ८ मंजिला अष्टकोणीय स्मारक है। इसके गर्भगृह में गुरु की चांदी की पादुकाएँ हैं और दीवारों पर अद्वैत दर्शन व शंकराचार्य के जीवन वृत्त को चित्रों के माध्यम से उकेरा गया है। रामकृष्ण [[अद्वैत आश्रम]] : वर्ष १९३६ में स्थापित यह आश्रम रामकृष्ण मिशन का एक प्रमुख केंद्र है, जहाँ एक विशाल प्रार्थना हॉल और आध्यात्मिक अध्ययन केंद्र स्थित है। श्री कृष्ण स्वामी मंदिर : शृंगेरी मठ के पश्चिम में स्थित यह प्राचीन मंदिर आदि शंकराचार्य के कुलदेवता (तिरु कालडी अप्पन) को समर्पित है। माणिकमंगलम कार्थियायनी मंदिर: कालडी के उत्तर में स्थित यह प्राचीन दुर्गा मंदिर है। मान्यता है कि शंकराचार्य के पिता यहाँ मुख्य पुजारी थे और यहाँ देवी ने बालक शंकर को साक्षात दर्शन देकर दूध पिलाया था। मत्तूर तिरु वेलमन थुल्ली शिव मंदिर: यह एक ऐतिहासिक शिव मंदिर है जो अपनी अनूठी वास्तुकला और तांत्रिक अनुष्ठानों के लिए जाना जाता है। नयथोडु शंकरा नारायण [[मन्दिर]] : भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित यह मन्दिर शैव और वैष्णव एकता का एक अद्भुत प्रतीक है, जहाँ शिव और [[विष्णु]] दोनों एक ही गर्भगृह में पूजे जाते हैं। मंजापरा कार्प्पिल्ली कावु शिव मन्दिर: एक और ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व का शिव मंदिर जो स्थानीय संस्कृति का एक मुख्य केंद्र है। थेक्के मडम: त्रिशूर के शंकराचार्य मठ द्वारा स्थापित यह ऐतिहासिक प्रशासनिक परिसर है, जिसके पास पूर्व में इस क्षेत्र के भू-राजस्व के अधिकार थे। आर्यादेवी समाधि मंडपम: आदि शंकराचार्य की माता आर्याम्बा का समाधि स्थल, जहाँ निरंतर दीपक प्रज्ज्वलित रहता प्रमुख त्यौहार- शंकर जयंती: प्रत्येक वर्ष अप्रैल-मई (मेष मास) में ५ दिनों तक अत्यंत भव्य स्तर पर मनाई जाती है, जिसमें राष्ट्रीय स्तर के विद्वान शास्त्रार्थ और कनकधारा यज्ञ में भाग लेते हैं। [[नवरात्र]]: सितंबर-अक्टूबर में शृंगेरी मठ में संगीत उत्सव और रथोत्सव के साथ ९ दिनों तक धूमधाम से मनाई जाती है। तिरु कालडी अप्पन उत्सव: भगवान कृष्ण मंदिर का वार्षिक उत्सव जो प्रतिवर्ष ६ जनवरी को पेरियार नदी में 'आराट्टु' (पवित्र स्नान) के साथ संपन्न होता है। शैक्षणिक संस्थान -कालडी केरल में उच्च शिक्षा और प्राच्य विद्या का एक बहुत बड़ा संकुल है: [[श्री शङ्कराचार्य संस्कृत सर्वकलाशाला]] : संस्कृत, दर्शनशास्त्र, इंडोलॉजी और कला के क्षेत्र में अनुसंधान का एक अग्रणी वैश्विक विश्वविद्यालय। श्री शंकरा कॉलेज : कला, विज्ञान और वाणिज्य में उच्च शिक्षा प्रदान करने वाला एक प्रतिष्ठित संस्थान। आदि शंकरा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी: तकनीकी और उन्नत इंजीनियरिंग शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र। प्रमुख विद्यालय: श्री कांची शंकरा पब्लिक स्कूल, ब्रह्मानंदोदयम हायर सेकेंडरी स्कूल, श्री शारदा विद्यालय, एस.एन. हायर सेकेंडरी स्कूल (ओक्कल), और एस.एन.डी.पी. हायर सेकेंडरी स्कूल (नीलेश्वरम)। अवसंरचना, गतिशीलता और कनेक्टिविटी - वायु मार्ग : [[कोचीन अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र]] यहाँ से मात्र ७ से ८ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जो इसे वैश्विक कनेक्टिविटी प्रदान करता है। रेल मार्ग: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन अंगमाली है जो लगभग ८ किमी की दूरी पर मुख्य रेल कॉरिडोर पर स्थित है। दूसरा बड़ा स्टेशन [[अलुवा]] १६ किमी दूर है। मेट्रो: [[कोच्चि मेट्रो]] का निकटतम स्टेशन आलुवा मेट्रो स्टेशन है, जहाँ से कैब या बस द्वारा सीधे कालडी पहुँचा जा सकता है। सड़क मार्ग: कालडी मुख्य मध्यवर्ती सड़क पर स्थित है। यह [[राष्ट्रीय राजमार्ग ५४४ (भारत) | (NH-544)]] से भी बेहद नजदीकी से जुड़ा हुआ है। सार्वजनिक परिवहन: केरल राज्य सड़क परिवहन निगम और निजी बसें इसे कोच्चि, [[त्रिस्सूर]] अंगमाली और [[पेरुम्बावूर]] से २४ घंटे जोड़ती हैं। अर्थव्यवस्था, व्यवसाय और कृषि - [[कृषि]]: पेरियार नदी की जलोढ़ मिट्टी के कारण यह क्षेत्र [[धान]], [[रबड़]], [[जायफल]] और [[नारियल]] की खेती के लिए प्रसिद्ध है। रसद और व्यवसाय: हवाई अड्डे और राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट होने के कारण यहाँ आधुनिक लॉजिस्टिक्स हब विकसित हो रहे हैं। कालडी राइस मिल्स केरल में [[चावल]] प्रसंस्करण का सबसे बड़ा औद्योगिक क्लस्टर है। औद्योगिक क्षेत्र: पास ही में स्थित ओक्कल और अंगमाली के औद्योगिक क्षेत्रों में लघु और मध्यम विनिर्माण इकाइयाँ क्रियाशील हैं। चिकित्सा अवसंरचना एवं भविष्य के विकास- चिकित्सा: क्षेत्र में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के लिए मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल, आयुर्वेदिक हीलिंग सेंटर्स और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उपलब्ध हैं। भविष्य के घटनाक्रम: शंकारिया हेरिटेज टूरिज्म सर्किट: [[भारत सरकार]] और केरल पर्यटन विभाग द्वारा इसे 'प्रसाद' योजना के तहत एक अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में और अधिक उन्नत किया जा रहा है। पेरियार नदी संरक्षण योजना: नदी के तटीय भू-भाग को भू-क्षरण से बचाने और [[जल मार्ग]] को पुनर्जीवित करने के लिए वैज्ञानिक परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। <ref>{{cite web |url=http://www.kaladyfilm.com|title=A DVD titled "Kalady - The Triumph of Faith over Time"}}</ref> == इन्हें भी देखें == * [[आदि शंकराचार्य]] * [[श्री शङ्कराचार्य संस्कृत सर्वकलाशाला|श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय]], कालडी * [[एर्नाकुलम ज़िला]] == बाहरी कड़ियाँ == * [http://mallar.wordpress.com/2010/04/25/आदि-शंकराचार्य-जी-की-जन्म/#comment-2840 आदि शंकराचार्य जी की जन्मस्थली – कालड़ी] (पा.ना. सुब्रमणियन के हिन्दी ब्लॉग पर) == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} {{केरल}} [[श्रेणी:एर्नाकुलम ज़िला]] [[श्रेणी:केरल के शहर]] [[श्रेणी:एर्नाकुलम ज़िले के नगर]] [[श्रेणी:कोच्चि में मुहल्ले]] [[श्रेणी:हिन्दू धर्म]] 5wr7n72ir6w2u2otu41vrx1751tfad9 श्रीमद्भगवद्गीता 0 194789 6630348 6624866 2026-10-17T06:09:16Z Om Anandmay Om Shantimay 883487 /* */ Made addition of two shloka's essence of Geeta in the right place to make it more clear to readers 6630348 wikitext text/x-wiki {{Infobox religious text | name = श्रीमद्भगवद्गीता | image = BhagavadGita-19th-century-Illustrated-Sanskrit-Chapter 1.20.21.jpg | alt = १९वीं शताब्दी की चित्रित संस्कृत भगवद्गीता पाण्डुलिपि | caption = १९वीं शताब्दी की चित्रित संस्कृत पाण्डुलिपि से भगवद्गीता, अध्याय १.२०–२१ | religion = [[सनातन धर्म]] | verses = ७०० | period = परम्परागत: [[द्वापर युग]] / [[महाभारत]] काल; ऐतिहासिक: प्रायः ईसा पूर्व उत्तरार्ध से ईसा की प्रारम्भिक शताब्दियाँ | author = [[वेदव्यास]] (परम्परागत) | language = [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] | chapters = १८ }} '''श्रीमद्भगवद्गीता''' (संस्कृत: श्रीमद्भगवद्गीता) या केवल '''गीता''', [[महाभारत]] महाकाव्य के [[भीष्मपर्व]] के भीतर आने वाला एक दार्शनिक-आध्यात्मिक संवाद है।<ref name="Brockington">John Brockington, ''The Sanskrit Epics'', Brill, 1998, पृ॰ १५६.</ref> इसमें [[कृष्ण]] और [[अर्जुन]] के बीच युद्ध आरम्भ होने से ठीक पहले का संवाद है। परम्परा के अनुसार इसमें १८ अध्याय और ७०० श्लोक हैं।<ref name="Zaehner">R. C. Zaehner, ''The Bhagavad-Gita'', Oxford University Press, 1969, पृ॰ १.</ref> गीता को [[उपनिषद्|उपनिषदों]] और [[ब्रह्मसूत्र]] के साथ [[प्रस्थानत्रयी]] में गिना जाता है।<ref name="Flood">Gavin Flood, ''An Introduction to Hinduism'', Cambridge University Press, 1996, पृ॰ १२४.</ref> गीता केवल युद्ध-विषयक उपदेश नहीं है; इसमें [[कर्मयोग]], [[ज्ञानयोग]], [[भक्तियोग]], [[ध्यान योग|ध्यान]], स्वधर्म, आत्मा की अमरता, निष्काम कर्म, समत्व और मोक्ष जैसे विषयों पर चर्चा है।<ref name="Radhakrishnan">S. Radhakrishnan, ''The Bhagavadgita'', HarperCollins, 1948, पृ॰ १२.</ref> परम्परा में इसे “उपनिषदों का दुग्ध” कहा गया है। गीता के १८ अध्यायों में ७०० श्लोक हैं, जिनमें श्रीकृष्ण ने ५७४, अर्जुन ने ८५, संजय ने ४० और धृतराष्ट्र ने १ श्लोक कहा है।<ref name="Sharma">गिरिधर शर्मा चतुर्वेदी, ''गीता प्रवचन भाष्य'', पृ॰ २३.</ref> === कर्म और शरणागति (श्लोक 18.57–18.58) === श्रीमद्भगवद्गीता के 18वें अध्याय (मोक्षसंन्यासयोग) के 57वें और 58वें श्लोक में 'चेतसा' (बुद्धि योग द्वारा कर्मों का अर्पण) और 'मत्परः' (परमात्मा को ही परम गति मानना) की अवधारणाओं को विस्तार से समझाया गया है।<ref>''श्रीमद्भगवद्गीता (तत्वविवेचनी टीका)'', गीता प्रेस, गोरखपुर।</ref> ये श्लोक हिंदू धर्मशास्त्र और वेदांत दर्शन के अंतर्गत 'शरणागति' (पूर्ण समर्पण) के सिद्धांत के मुख्य आधार माने जाते हैं।<ref>स्वामी गंभीरानंद (अनुवादक), ''भगवद गीता: शंकराचार्य के भाष्य सहित'', अद्वैत आश्रम।</ref> * '''दैवीय कृपा (प्रसाद) की भूमिका:''' इन श्लोकों में 'मत्प्रसादात्' (मेरी कृपा से) पर विशेष बल दिया गया है, जो यह दर्शाता है कि जीवन के सभी बंधनों और सांसारिक बाधाओं को पार करने के लिए व्यक्तिगत पुरुषार्थ के साथ-साथ आध्यात्मिक समर्पण भी आवश्यक है। * '''अहंकार (अहंभाव) का निषेध:''' यह दर्शन परमात्मा पर आश्रित होने और अहंकार से प्रेरित होकर कर्म करने के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है। दार्शनिक दृष्टिकोण के अनुसार, व्यक्ति का अहंकार ही उसकी आंतरिक शांति और मोक्ष (परम मुक्ति) के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है। {{TOC limit|3}} == नामकरण और व्युत्पत्ति == ‘गीता’ शब्द [[संस्कृत]] धातु ‘गै’ (गाना) से बना है, जिसका अर्थ है—गाई गई या कही गई। ‘भगवद्गीता’ का अर्थ है—भगवान का गीत। ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ में ‘श्रीमत्’ आदरसूचक शब्द है। इस प्रकार श्रीमद्भगवद्गीता का शाब्दिक अर्थ है—श्री भगवान का पवित्र गीत।<ref name="Apte">V. S. Apte, ''The Practical Sanskrit-English Dictionary'', 1890.</ref> गीता को ‘गीतोपनिषद’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह उपनिषदों के सार का प्रतिपादन करती है। इसके अतिरिक्त इसे ‘ब्रह्मविद्या’, ‘योगशास्त्र’, ‘अध्यात्म विद्या’ और ‘मोक्षशास्त्र’ जैसे नामों से भी जाना जाता है।<ref name="Goyandka">जयदयाल गोयन्दका, ''श्रीमद्भगवद्गीता तत्वविवेचनी'', गीताप्रेस, गोरखपुर, पृ॰ १५.</ref> गीता विश्व का एकमात्र धार्मिक ग्रन्थ है जिसकी जयंती मनाई जाती है -'''गीता जयंती'''। == महाभारत में स्थान और पृष्ठभूमि == महाभारत में जब कौरव और पांडव सेनाएँ युद्ध के लिए आमने-सामने होती हैं, तब अर्जुन रथ पर सवार होकर दोनों सेनाओं को देखते हैं। अपने संबंधियों, गुरुओं और मित्रों को युद्धभूमि में देखकर अर्जुन मोह और विषाद से भर जाते हैं। वे धनुष रख देते हैं और युद्ध न करने का निर्णय लेते हैं।<ref name="Mahabharata">महाभारत, भीष्मपर्व, अध्याय २५–४२.</ref> इसी स्थिति में कृष्ण अर्जुन को कर्तव्य, धर्म, आत्मा, कर्म और भक्ति का उपदेश देते हैं। यही उपदेश भगवद्गीता के रूप में प्रसिद्ध है। गीता का आरम्भ अर्जुन के विषाद से होता है और अंत आत्मज्ञान तथा शरणागति के संदेश पर। परम्परा के अनुसार यह संवाद [[मार्गशीर्ष]] शुक्ल [[एकादशी]] को [[कुरुक्षेत्र]] के युद्धस्थल में दोनों सेनाओं के मध्य हुआ था। इस तिथि को '''गीता जयंती''' के रूप में मनाया जाता है।<ref name="GitaJayanti">[https://www.amarujala.com/photo-gallery/spirituality/religion/important-message-of-bhagavad-gita-in-our-day-to-day-life-in-hindi अमर उजाला, गीता जयंती विशेष]</ref> === संवाद की संरचना === गीता का संवाद तीन स्तरों पर चलता है: # '''धृतराष्ट्र और संजय का संवाद''' — धृतराष्ट्र का एकमात्र श्लोक और संजय का ४० श्लोकों में वर्णन। # '''अर्जुन और कृष्ण का संवाद''' — मुख्य संवाद जिसमें ५७४ श्लोक कृष्ण के और ८५ अर्जुन के हैं। # '''भगवान का उपदेश''' — जो कर्म, ज्ञान, भक्ति और ध्यान के रूप में प्रकट होता है। == रचनाकाल, भाषा और पाठ-परम्परा == * '''भाषा:''' [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]]; महाभारत की प्राचीन भारतीय संस्कृत के निकट। * '''रचनाकाल:''' परम्परा इसे महाभारत काल या [[द्वापर युग]] से जोड़ती है। आधुनिक विद्वानों में मतभेद है; अधिकांश इसे महाभारत की परवर्ती परत के रूप में ईसा पूर्व उत्तरार्ध से ईसा की प्रारम्भिक शताब्दियों के बीच रखते हैं।<ref name="Brockington" /> * '''रचनाकार:''' परम्परा के अनुसार [[वेदव्यास]]। आधुनिक शोध में इसे कई परतों में संकलित और विस्तृत हुआ ग्रंथ माना जाता है। * '''श्लोक-संख्या:''' सामान्यतः ७००; कुछ पाण्डुलिपियों में ७४५ श्लोक भी मिलते हैं।<ref name="Sharma" /> * '''छन्द:''' अधिकांश श्लोक [[अनुष्टुप]] छन्द में हैं; कुछ श्लोक [[त्रिष्टुप]] में भी हैं। == गीता के १८ अध्याय == श्रीमद्भगवद्गीता के सभी १८ अध्यायों का संक्षिप्त परिचय क्रमशः निम्नलिखित है: {| class="wikitable" style="margin:auto; text-align:center;" ! अध्याय !! नाम !! श्लोक संख्या !! विषय |- | १ || अर्जुनविषादयोग || ४७ || अर्जुन का विषाद |- | २ || सांख्ययोग || ७२ || गीता का सार, आत्मा और देह का विवेक |- | ३ || कर्मयोग || ४३ || निष्काम कर्म |- | ४ || ज्ञानकर्मसंन्यासयोग || ४२ || ज्ञान, कर्म और अवतार |- | ५ || कर्मसंन्यासयोग || २९ || कर्म और संन्यास का समन्वय |- | ६ || आत्मसंयमयोग || ४७ || ध्यान और मनोनिग्रह |- | ७ || ज्ञानविज्ञानयोग || ३० || परा और अपरा प्रकृति |- | ८ || अक्षरब्रह्मयोग || २८ || अक्षर ब्रह्म और प्रयाणकाल |- | ९ || राजविद्याराजगुह्ययोग || ३४ || परम गुह्य ज्ञान |- | १० || विभूतियोग || ४२ || भगवान की विभूतियाँ |- | ११ || विश्वरूपदर्शनयोग || ५५ || विराट रूप का दर्शन |- | १२ || भक्तियोग || २० || भक्ति का मार्ग |- | १३ || क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग || ३४ || क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ |- | १४ || गुणत्रयविभागयोग || २७ || सत्व, रज, तम |- | १५ || पुरुषोत्तमयोग || २० || अश्वत्थ रूप संसार और पुरुषोत्तम |- | १६ || दैवासुरसम्पद्विभागयोग || २४ || दैवी और आसुरी स्वभाव |- | १७ || श्रद्धात्रयविभागयोग || २८ || श्रद्धा के तीन प्रकार |- | १८ || मोक्षसंन्यासयोग || ७८ || उपसंहार और मोक्ष |} === प्रथम अध्याय: अर्जुनविषादयोग === प्रथम अध्याय का नाम '''अर्जुनविषादयोग''' है। यह गीता के उपदेश का विलक्षण रंगमंच प्रस्तुत करता है, जिसमें श्रोता और वक्ता दोनों ही कुतूहल या [[शांति]] के लिए नहीं, वरन् [[जीवन]] की प्रगाढ़ समस्या के समाधान के लिए प्रवृत्त होते हैं। शौर्य, [[धैर्य]], साहस और बल—इन चारों गुणों की प्रभूत मात्रा से [[अर्जुन]] का व्यक्तित्व बना था, और इन चारों के ऊपर दो गुण और थे—एक [[क्षमा]], दूसरी प्रज्ञा।<ref name="Tilak">बाल गंगाधर तिलक, ''गीता रहस्य'', १९१५, पृ॰ ४५.</ref> बलप्रधान क्षात्रधर्म से प्राप्त होने वाली स्थिति में पहुँचकर सहसा [[अर्जुन]] के चित्त पर एक दूसरे ही प्रकार के मनोभाव का आक्रमण हुआ—कार्पण्य का। एक विचित्र प्रकार की करुणा उसके मन में भर गई और उसका [[क्षत्रिय|क्षात्र स्वभाव]] लुप्त हो गया। जिस [[कर्तव्य]] के लिए वह कटिबद्ध हुआ था, उससे वह विमुख हो गया। ऊपर से देखने पर इस स्थिति के पक्ष में उसके तर्क धर्मयुक्त जान पड़ते हैं, किंतु उसने स्वयं ही उसे कार्पण्य दोष कहा है और यही माना है कि [[मन]] की इस कायरता के कारण उसका जन्मसिद्ध स्वभाव उपहत या नष्ट हो गया था। वह निर्णय नहीं कर पा रहा था कि युद्ध करे अथवा वैराग्य ले ले। इस मनोभाव की चरम स्थिति में पहुँचकर उसने धनुष-बाण एक ओर डाल दिया। [[कृष्ण]] ने [[अर्जुन]] की वह स्थिति देखकर जान लिया कि अर्जुन का [[शरीर]] ठीक है, किंतु युद्ध आरम्भ होने से पहले ही उस अद्भुत [[क्षत्रिय]] का मनोबल टूट चुका है। बिना [[मन]] के यह शरीर खड़ा नहीं रह सकता। अतः कृष्ण के सामने एक गुरु का [[कर्तव्य]] आ गया। अतः तर्क से, बुद्धि से, [[ज्ञान]] से, कर्म की चर्चा से, [[विश्व]] के स्वभाव से, उसमें [[जीवन]] की स्थिति से, दोनों के नियामक अव्यय पुरुष के परिचय से और उस सर्वोपरि परम सत्तावान [[ब्रह्म]] के साक्षात [[दर्शन]] से [[अर्जुन]] के [[मन]] का उद्धार करना—यही उनका लक्ष्य हुआ। इसी तत्वचर्चा का विषय गीता है। '''प्रमुख बिंदु:''' * प्रथम अध्याय में दोनों सेनाओं का वर्णन किया जाता है। * शंख बजाने के पश्चात [[अर्जुन]] सेना को देखने के लिए रथ को सेनाओं के मध्य ले जाने के लिए [[कृष्ण]] से कहते हैं। * तब मोहयुक्त होकर [[अर्जुन]] कायरता तथा शोकयुक्त वचन कहते हैं। === द्वितीय अध्याय: सांख्ययोग === दूसरे अध्याय का नाम [[सांख्य दर्शन|सांख्ययोग]] है। इसमें जीवन की दो प्राचीन सम्मानित [[परम्परा|परम्पराओं]] का तर्कों द्वारा वर्णन आया है। अर्जुन को उस कृपण स्थिति में रोते देखकर कृष्ण ने उनका [[ध्यान]] दिलाया कि इस प्रकार का क्लैव्य और हृदय की क्षुद्र दुर्बलता अर्जुन जैसे वीर के लिए उचित नहीं। कृष्ण ने अर्जुन की अब तक दी हुई सब युक्तियों को प्रज्ञावाद का झूठा रूप कहा। उनकी युक्ति यह है कि प्रज्ञादर्शन काल, कर्म और स्वभाव से होने वाले संसार की सब घटनाओं और स्थितियों को अनिवार्य रूप से स्वीकार करता है। जीना और मरना, जन्म लेना और बढ़ना, विषयों का आना और जाना, सुख और दुःख का अनुभव—ये तो संसार में होते ही हैं।<ref name="Shankara">आदि शंकराचार्य, ''गीताभाष्य'', अध्याय २.</ref> ऊपर के दृष्टिकोण का एक आवश्यक अंग जीवन की नित्यता और शरीर की अनित्यता था। नित्य जीव के लिए शोक करना उतना ही व्यर्थ है जितना अनित्य शरीर को बचाने की चिंता। ये दोनों अपरिहार्य हैं। जन्म और मृत्यु बारी-बारी से होते ही हैं; ऐसा समझकर शोक करना उचित नहीं है। फिर एक दूसरा दृष्टिकोण स्वधर्म का है। जन्म से ही प्रकृति ने सबके लिए एक धर्म नियत कर दिया है। उसमें जीवन का मार्ग, इच्छाओं की परिधि, कर्म की शक्ति—सभी कुछ आ जाता है। इससे निकलकर नहीं भागा जा सकता। इस प्रकार काल का परिवर्तन या परिमाण, जीव की नित्यता और अपना स्वधर्म या स्वभाव—जिन युक्तियों से भगवान ने अर्जुन को समझाया है, उसे उन्होंने सांख्य की बुद्धि कहा है। इससे आगे अर्जुन के प्रश्न न करने पर भी उन्होंने योगमार्ग की बुद्धि का भी वर्णन किया। यह बुद्धि [[कर्म]] या प्रवृत्ति मार्ग के आग्रह की बुद्धि है; इसमें कर्म करते हुए कर्म के फल की [[आसक्ति]] से अपने को बचाना आवश्यक है। अर्जुन को संदेह हुआ कि क्या इस प्रकार की बुद्धि प्राप्त करना संभव है। उसने पूछा कि इस प्रकार का दृढ़ प्रज्ञावाला व्यक्ति जीवन का व्यवहार कैसे करता है? कृष्ण ने कितने ही प्रकार के बाह्य इंद्रियों की अपेक्षा मन के संयम की व्याख्या की है। [[काम]], [[क्रोध]], [[भय]], [[राग]], द्वेष के द्वारा मन का सौम्यभाव बिगड़ जाता है और इंद्रियाँ वश में नहीं रहतीं। इंद्रियजय ही सबसे बड़ी आत्मजय है। '''प्रमुख बिंदु:''' * अर्जुन की कायरता के विषय में अर्जुन-कृष्ण संवाद * सांख्य योग * कर्मयोग * स्थिर बुद्धि वाले व्यक्ति के गुण {{quote|'''कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।'''<br />'''मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ २.४७॥'''}} '''अर्थ:''' तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल में नहीं। फल की आसक्ति छोड़ो, पर कर्म से विमुख मत हो। === तृतीय अध्याय: कर्मयोग === इस प्रकार सांख्य की व्याख्या का उत्तर सुनकर [[कर्म योग|कर्मयोग]] नामक '''तीसरे अध्याय''' में अर्जुन ने इस विषय में और गहरा उतरने के लिए स्पष्ट प्रश्न किया कि सांख्य और योग—इन दोनों मार्गों में आप किसे अच्छा समझते हैं? इस पर कृष्ण ने उत्तर दिया कि लोक में दो निष्ठाएँ हैं—सांख्यवादियों के लिए ज्ञानयोग और कर्ममार्गियों के लिए कर्मयोग। यहाँ कोई व्यक्ति कर्म छोड़ ही नहीं सकता। प्रकृति तीनों गुणों के प्रभाव से व्यक्ति को कर्म करने के लिए बाध्य करती है।<ref name="Ramanuja">रामानुजाचार्य, ''गीताभाष्य'', अध्याय ३.</ref> कर्म से बचने वालों के प्रति एक बड़ी शंका है—वह यह कि वे ऊपर से तो कर्म छोड़ बैठते हैं, पर मन ही मन उसमें डूबे रहते हैं। यह स्थिति असह्य है और इसे कृष्ण ने गीता में मिथ्याचार कहा है। मन में कर्मेंद्रियों को रोककर कर्म करना ही सरल मानवीय मार्ग है। कृष्ण ने चुनौती के रूप में यहाँ तक कह दिया कि कर्म के बिना तो खाने के लिए अन्न भी नहीं मिल सकता। फिर कृष्ण ने कर्म के विधान को चक्र के रूप में उपस्थित किया। न केवल सामाजिक धरातल पर भिन्न व्यक्तियों के कर्मचक्र अरों की तरह आपस में पिरोए हुए हैं, बल्कि पृथ्वी के मनुष्य और स्वर्ग के देवता—दोनों का संबंध भी कर्मचक्र पर आश्रित है। अन्न और पर्जन्य—दोनों कर्म से उत्पन्न होते हैं।<ref name="Goyandka" /> फिर कर्म के पक्ष में लोकसंग्रह की युक्ति दी गई है। जो लोक के नेता हैं, जनक जैसे ज्ञानी हैं, वे भी कर्म में प्रवृत्ति रखते हैं। कृष्ण ने स्वयं अपना ही दृष्टांत देकर कहा कि मैं [[नारायण]] का रूप हूँ, मेरे लिए कुछ कर्म शेष नहीं है; फिर भी तंद्रारहित होकर कर्म करता हूँ और अन्य लोग मेरे मार्ग पर चलते हैं। '''प्रमुख बिंदु:''' * नित्य कर्म करने वाले की श्रेष्ठता * यज्ञादि कर्मों की आवश्यकता * अज्ञानी और ज्ञानी के लक्षण * काम के निरोध का विषय === चतुर्थ अध्याय: ज्ञानकर्मसंन्यासयोग === चौथे अध्याय में, जिसका नाम ज्ञानकर्मसंन्यासयोग है, यह बताया गया है कि ज्ञान प्राप्त करके कर्म करते हुए भी कर्मसंन्यास का फल किस उपाय से प्राप्त किया जा सकता है। यहीं गीता का वह प्रसिद्ध आश्वासन है कि जब-जब [[धर्म]] की ग्लानि होती है, तब-तब मनुष्यों के बीच [[भगवान]] का अवतार होता है।<ref name="Aurobindo">श्री अरविन्द, ''Essays on the Gita'', १९२२, पृ॰ १८९.</ref> यहीं पर एक वाक्य विशेष [[ध्यान]] देने योग्य है—क्षिप्रं हि मानुषे लोके सिद्धिर्भवति कर्मजा (४.१२)। ‘[[कर्म]] से [[सिद्धि]]’—इससे बड़ा प्रभावशाली जयसूत्र गीतादर्शन में नहीं है। किंतु गीतातत्व इस सूत्र में इतना सुधार और करता है कि वह [[कर्म]] असंग भाव से, अर्थात् फलासक्ति से बचकर करना चाहिए। भगवान बताते हैं कि सबसे पहले मैंने यह ज्ञान भगवान सूर्य को दिया था। सूर्य के पश्चात गुरु परंपरा द्वारा यह आगे बढ़ा। किंतु अब यह लुप्तप्राय हो गया है। अब वही ज्ञान मैं तुम्हें बताने जा रहा हूँ। अर्जुन कहते हैं कि आपका तो जन्म हाल में ही हुआ है, तो आपने यह सूर्य से कैसे कहा? तब श्रीभगवान ने कहा कि तुम्हारे और मेरे अनेक जन्म हुए हैं, लेकिन तुम्हें याद नहीं, पर मुझे याद है। {{quote|'''यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।'''<br />'''अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ ४.७॥'''}} '''श्रीकृष्ण कहते हैं कि जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं अपने स्वरूप की रचना करता हूँ। (४.७)''' {{quote|'''परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।'''<br />'''धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥ ४.८॥'''}} '''साधुओं की रक्षा के लिए, दुष्कर्मियों का विनाश करने के लिए और धर्म की स्थापना के लिए मैं युग-युग में मानव के रूप में अवतार लेता हूँ। (४.८)''' '''प्रमुख बिंदु:''' * कर्म, अकर्म और विकर्म का वर्णन * यज्ञों के स्वरूप * ज्ञानयज्ञ का वर्णन === पाँचवाँ अध्याय: कर्मसंन्यासयोग === पाँचवें अध्याय में, जिसका नाम कर्मसंन्यासयोग है, फिर वे ही युक्तियाँ और दृढ़ रूप में कही गई हैं। इसमें [[कर्म]] के साथ जो मन का संबंध है, उसके [[संस्कार]] पर या उसे विशुद्ध करने पर विशेष ध्यान दिलाया गया है। यह भी कहा गया है कि ऊँचे धरातल पर पहुँचकर सांख्य और योग में कोई भेद नहीं रह जाता।<ref name="Madhva">मध्वाचार्य, ''गीताभाष्य'', अध्याय ५.</ref> जीवन के जितने कर्म हैं, सबको समर्पण कर देने से व्यक्ति एकदम शांति के ध्रुव बिंदु पर पहुँच जाता है और जल में खिले कमल के समान कर्म रूपी जल से लिप्त नहीं होता। भगवान श्रीकृष्ण इस अध्याय में कर्मयोग और साधु पुरुष का वर्णन करते हैं तथा बताते हैं कि मैं सृष्टि के हर जीव में समान रूप से रहता हूँ, अतः प्राणी को समदर्शी होना चाहिए। {{quote|'''विद्याविनयसंपन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि।'''<br />'''शुनि चैव श्वपाके च पंडिताः समदर्शिनः॥ ५.१८॥'''}} '''“ज्ञानी महापुरुष विद्या-विनययुक्त ब्राह्मण में और चाण्डाल में तथा गाय, हाथी एवं कुत्ते में भी समरूप परमात्मा को देखने वाले होते हैं।”''' इस पद का अर्थ है कि ज्ञानी भक्त को सभी जीवों में समानता देखनी चाहिए। ईश्वर केवल मनुष्य में ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों के भीतर भी एक ही चेतना के रूप में विद्यमान है। === छठा अध्याय: आत्मसंयमयोग === छठा अध्याय आत्मसंयमयोग है, जिसका विषय नाम से ही प्रकट है। जितने विषय हैं, उन सबसे इंद्रियों का संयम—यही कर्म और ज्ञान का निचोड़ है। सुख में और दुःख में मन की समान स्थिति—इसे ही योग कहते हैं।<ref name="Vivekananda">स्वामी विवेकानन्द, ''वेदान्त'', रामकृष्ण मठ, नागपुर.</ref> इस अध्याय में ध्यान की विधि, मन की चंचलता और उसके नियंत्रण का विस्तृत वर्णन है। कृष्ण कहते हैं कि योगी वह है जो मन को वश में करके आत्मा में स्थित होता है। इस अध्याय में यह भी कहा गया है कि योग न तो अधिक खाने वाले का सिद्ध होता है और न ही बिल्कुल न खाने वाले का। === सातवाँ अध्याय: ज्ञानविज्ञानयोग === सातवें अध्याय की संज्ञा ज्ञानविज्ञानयोग है। ये प्राचीन भारतीय दर्शन की दो परिभाषाएँ हैं। उनमें भी ‘विज्ञान’ शब्द वैदिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण था। सृष्टि के नानात्व का ज्ञान विज्ञान है और नानात्व से एकत्व की ओर प्रगति ज्ञान है।<ref name="Radhakrishnan" /> इस प्रसंग में विज्ञान की दृष्टि से अपरा और परा प्रकृति के इन दो रूपों की जो सुनिश्चित व्याख्या यहाँ गीता ने दी है, वह अवश्य ध्यान देने योग्य है। अपरा प्रकृति में आठ तत्व हैं—पंचभूत, मन, बुद्धि और अहंकार। इसमें ईश्वर की चेष्टा के संपर्क से जो चेतना आती है, उसे परा प्रकृति कहते हैं; वही जीव है। आठ तत्वों के साथ मिलकर जीवन नवाँ तत्व हो जाता है। इस अध्याय में भगवान के अनेक रूपों का उल्लेख किया गया है, जिनका और विस्तार विभूतियोग नामक दसवें अध्याय में आता है। यहीं विशेष भगवती दृष्टि का भी उल्लेख है, जिसका सूत्र है—वासुदेवः सर्वम्। पंचतत्व, मन, बुद्धि भी मैं हूँ। मैं ही संसार की उत्पत्ति करता हूँ और विनाश भी मैं ही करता हूँ। मेरे भक्त चाहे जिस प्रकार भजें, परन्तु अंततः मुझे ही प्राप्त होते हैं। मैं योगमाया से अप्रकट रहता हूँ और मूर्ख मुझे केवल साधारण मनुष्य ही समझते हैं। {{quote|'''यो यो यां यां तनुं भक्तः श्रद्धयार्चितुमिच्छति।'''<br />'''तस्य तस्याचलां श्रद्धां तामेव विदधाम्यहम्॥ ७.२१॥'''}} {{quote|'''वेदाहं समतीतानि वर्तमानानि चार्जुन।'''<br />'''भविष्याणि च भूतानि मां तु वेद न कश्चन॥ ७.२६॥'''}} === आठवाँ अध्याय: अक्षरब्रह्मयोग === आठवें अध्याय की संज्ञा अक्षरब्रह्मयोग है। उपनिषदों में अक्षर विद्या का विस्तार हुआ। गीता में उस अक्षरविद्या का सार कह दिया गया है—अक्षर ब्रह्म परमम्, अर्थात् परब्रह्म की संज्ञा अक्षर है।<ref name="Goyandka" /> मनुष्य, अर्थात् जीव और शरीर की संयुक्त रचना का ही नाम अध्यात्म है। जीवसंयुक्त भौतिक देह की संज्ञा क्षर है और केवल शक्तितत्व की संज्ञा आधिदैविक है। देह के भीतर जीव, ईश्वर तथा भूत—ये तीन शक्तियाँ मिलकर जिस प्रकार कार्य करती हैं, उसे अधियज्ञ कहते हैं। गीताकार ने दो श्लोकों में (८.३–४) इन छह पारिभाषाओं का स्वरूप बाँध दिया है। गीता के शब्दों में ॐ एकाक्षर ब्रह्म है (८.१३)। === नवम अध्याय: राजविद्याराजगुह्ययोग === नवें अध्याय को राजगुह्ययोग कहा गया है, अर्थात् यह अध्यात्म विद्या विद्याराज्ञी है और यह गुह्य ज्ञान सबमें श्रेष्ठ है। ‘राजा’ शब्द का एक अर्थ मन भी था। अतः मन की दिव्य शक्तियों को किस प्रकार ब्रह्ममय बनाया जाए, इसकी युक्ति ही राजविद्या है।<ref name="Tilak" /> इस क्षेत्र में ब्रह्मतत्व का निरूपण ही प्रधान है; उसी से व्यक्त जगत का बारंबार निर्माण होता है। वेद का समस्त कर्मकांड, यज्ञ, अमृत और मृत्यु, संत और असंत, और जितने भी देवी-देवता हैं—सबका पर्यवसान ब्रह्म में है। लोक में जो अनेक प्रकार की देवपूजा प्रचलित है, वह भी अपने-अपने स्थान में ठीक है; समन्वय की यह दृष्टि भागवत आचार्यों को मान्य थी। इसी दृष्टिकोण का विचार या व्याख्या '''दसवें अध्याय''' में पाई जाती है। === दसवाँ अध्याय: विभूतियोग === दसवें अध्याय का नाम [[विभूतियोग]] है। इसका सार यह है कि लोक में जितने देवता हैं, सब एक ही भगवान की विभूतियाँ हैं; मनुष्य के समस्त गुण और अवगुण भगवान की शक्ति के ही रूप हैं।<ref name="Aurobindo" /> बुद्धि से इन छुटभैये देवताओं की व्याख्या चाहे न हो सके, किंतु लोक में तो वे हैं ही। कोई पीपल को पूज रहा है, कोई पहाड़ को, कोई नदी या समुद्र को। यों कितने देवता हैं, इसका कोई अंत नहीं। विश्व के इतिहास में देवताओं की यह भरमार सर्वत्र पाई जाती है। भागवतों ने इनकी सत्ता को स्वीकारते हुए सबको विष्णु का रूप मानकर समन्वय की एक नई दृष्टि प्रदान की। इसी का नाम विभूतियोग है। जो सत्व जीव बलयुक्त अथवा चमत्कारयुक्त है, वह सब भगवान का रूप है। इतना मान लेने से चित्त निर्विरोध स्थिति में पहुँच जाता है। {{quote|'''सर्वभूतानि कौन्तेय प्रकृतिं यान्ति मामिकाम्।'''<br />'''कल्पक्षये पुनस्तानि कल्पादौ विसृजाम्यहम्॥ १०.७॥'''}} === ग्यारहवाँ अध्याय: विश्वरूपदर्शनयोग === ग्यारहवें अध्याय का नाम विश्वरूपदर्शनयोग है। इसमें अर्जुन ने भगवान का विश्वरूप देखा। विराट रूप का अर्थ है—मानवीय धरातल और परिधि के ऊपर जो अनंत विश्व का प्राणवंत रचनाविधान है, उसका साक्षात दर्शन। विष्णु का जो चतुर्भुज रूप है, वह मानवीय धरातल पर सौम्य रूप है।<ref name="Zaehner" /> जब अर्जुन ने भगवान का विराट रूप देखा, तो उसके मस्तक का विस्फोटन होने लगा। ‘दिशो न जाने न लभे च शर्म’—ये ही घबराहट के वाक्य उनके मुख से निकले और उसने प्रार्थना की कि मानव के लिए जो स्वाभाविक स्थिति ईश्वर ने रखी है, वही पर्याप्त है। === बारहवाँ अध्याय: भक्तियोग === बारहवें अध्याय का नाम भक्तियोग है। {{quote|'''एवं सततयुक्ता ये भक्तास्त्वां पर्युपासते।'''<br />'''ये चाप्यक्षरमव्यक्तं तेषां के योगवित्तमाः॥ १२.१॥'''}} '''अर्जुन ने पूछा—जो आपकी सेवा में सदैव तत्पर रहते हैं, अथवा जो अव्यक्त निर्विशेष ब्रह्म की पूजा करते हैं, इन दोनों में से किसे अधिक पूर्ण (सिद्ध) माना जाए?''' तात्पर्य: अब तक कृष्ण साकार, निराकार एवं सर्वव्यापकत्व को समझा चुके हैं और सभी प्रकार के भक्तों तथा योगियों का भी वर्णन कर चुके हैं। सामान्यतः अध्यात्मवादियों को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है—निर्विशेषवादी तथा सगुणवादी। सगुणवादी भक्त अपनी सारी शक्ति से परमेश्वर की सेवा करता है। तात्पर्य: जो लोग भगवान कृष्ण की प्रत्यक्ष पूजा न करके अप्रत्यक्ष विधि से उसी उद्देश्य को प्राप्त करने का प्रयत्न करते हैं, वे भी अंततः श्रीकृष्ण को प्राप्त होते हैं। “अनेक जन्मों के बाद बुद्धिमान व्यक्ति वासुदेव को ही सब कुछ जानते हुए मेरी शरण में आता है।” === तेरहवाँ अध्याय: क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग === तेरहवें अध्याय में एक सीधा विषय क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का विचार है। यह शरीर क्षेत्र है, उसका जाननेवाला जीवात्मा क्षेत्रज्ञ है। इस अध्याय में प्रकृति और पुरुष के विवेक का विस्तृत वर्णन है।<ref name="Flood" /> === चौदहवाँ अध्याय: गुणत्रयविभागयोग === चौदहवें अध्याय का नाम गुणत्रयविभागयोग है। यह विषय समस्त वैदिक, दार्शनिक और पौराणिक तत्वचिंतन का निचोड़ है—सत्व, रज, तम नामक तीन गुण। त्रिको की अनेक व्याख्याएँ हैं। गुणों की साम्यावस्था का नाम प्रधान या प्रकृति है। गुणों के वैषम्य से ही वैकृत सृष्टि का जन्म होता है।<ref name="Shankara" /> अकेला सत्व शांत स्वभाव से निर्मल प्रकाश की तरह स्थिर रहता है और अकेला तम भी जड़वत निश्चेष्ट रहता है। किंतु दोनों के बीच में छाया हुआ रजोगुण उन्हें चेष्टा के धरातल पर खींच लाता है। गति तत्व का नाम ही रजस है। === पन्द्रहवाँ अध्याय: पुरुषोत्तमयोग === पन्द्रहवें अध्याय का नाम पुरुषोत्तमयोग है। इसमें विश्व का अश्वत्थ के रूप में वर्णन किया गया है। यह अश्वत्थ रूपी संसार महान विस्तारवाला है। देश और काल में इसका कोई अंत नहीं है। किंतु इसका जो मूल या केंद्र है, जिसे ऊर्ध्व कहते हैं, वह ब्रह्म ही है।<ref name="Goyandka" /> नर या पुरुष तीन हैं—क्षर, अक्षर और अव्यय। पंचभूतों का नाम क्षर है, प्राण का नाम अक्षर है और मनस्तत्व या चेतना की संज्ञा अव्यय है। इन्हीं तीन नरों की एकत्र स्थिति से मानवी चेतना का जन्म होता है; उसे ही ऋषियों ने वैश्वानर अग्नि कहा है। === सोलहवाँ अध्याय: दैवासुरसम्पद्विभागयोग === सोलहवें अध्याय में देवासुर संपत्ति का विभाग बताया गया है। आरंभ से ही ऋग्वेद में सृष्टि की कल्पना दैवी और आसुरी शक्तियों के रूप में की गई है। यह सृष्टि के द्विविरुद्ध रूप की कल्पना है—एक अच्छा और दूसरा बुरा; एक प्रकाश में, दूसरा अंधकार में; एक अमृत, दूसरा मर्त्य; एक सत्य, दूसरा अनृत।<ref name="Radhakrishnan" /> === सत्रहवाँ अध्याय: श्रद्धात्रयविभागयोग === सत्रहवें अध्याय की संज्ञा '''श्रद्धात्रयविभागयोग''' है। इसका संबंध सत, रज और तम—इन तीन गुणों से ही है, अर्थात् जिसमें जिस गुण का प्रादुर्भाव होता है, उसकी श्रद्धा या जीवन की निष्ठा वैसी ही बन जाती है। यज्ञ, तप, दान, कर्म—ये सब तीन प्रकार की श्रद्धा से संचालित होते हैं। यहाँ तक कि आहार भी तीन प्रकार का है। उनके भेद और लक्षण गीता ने यहाँ बताए हैं। === अट्ठारहवाँ अध्याय: मोक्षसंन्यासयोग === अट्ठारहवें अध्याय की संज्ञा '''मोक्षसंन्यासयोग''' है। इसमें गीता के समस्त उपदेशों का सार एवं उपसंहार है। यहाँ पुनः बलपूर्वक मानव जीवन के लिए तीन गुणों का महत्व कहा गया है। पृथ्वी के मनुष्यों में और स्वर्ग के देवताओं में कोई भी ऐसा नहीं, जो प्रकृति के चलाए हुए इन तीन गुणों से बचा हो।<ref name="Tilak" /> मनुष्य को बहुत देख-भालकर चलना आवश्यक है, जिससे वह अपनी बुद्धि और वृत्ति को बुराई से बचा सके और यह पहचान सके कि क्या कार्य है और क्या अकार्य। धर्म और अधर्म को, बंध और मोक्ष को, वृत्ति और निवृत्ति को जो बुद्धि ठीक से पहचानती है, वही सात्विकी बुद्धि है और वही मानव की सच्ची उपलब्धि है। इस प्रकार भगवान ने जीवन के लिए व्यावहारिक मार्ग का उपदेश देकर अंत में यह कहा है कि मनुष्य को चाहिए कि संसार के सब व्यवहारों का सच्चाई से पालन करते हुए, जो अखंड चैतन्य तत्व है, जिसे ईश्वर कहते हैं, जो प्रत्येक प्राणी के हृदयदेश या केंद्र में विराजमान है, उसमें विश्वास रखे, उसका अनुभव करे। वही जीव की सत्ता है, वही चेतना है और वही सर्वोपरि आनन्द का स्रोत है। {{quote|'''सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।'''<br />'''अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥ १८.६६॥'''}} '''अर्थ:''' सब धर्मों को छोड़कर केवल मेरी शरण में आओ। मैं तुम्हें सब पापों से मुक्त कर दूँगा, शोक मत करो। == मुख्य दार्शनिक विषय == गीता में अनेक दार्शनिक विषयों का समन्वय किया गया है। इसे ‘समन्वय शास्त्र’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें ज्ञान, कर्म, भक्ति और ध्यान—चारों योगों का समावेश है।<ref name="Radhakrishnan" /> === कर्मयोग === कर्मयोग गीता का केंद्रीय संदेश है। इसके अनुसार कर्म करने में अधिकार है, फल में नहीं। फल की आसक्ति छोड़कर कर्तव्य करना ही कर्मयोग है। कर्मयोगी को फल की चिंता नहीं करनी चाहिए, बल्कि कर्म को यज्ञ भावना से करना चाहिए।<ref name="Tilak" /> === ज्ञानयोग === ज्ञानयोग आत्मा और ब्रह्म के ज्ञान पर आधारित है। इसके अनुसार आत्मा अजर, अमर और नित्य है। शरीर नश्वर है। इस विवेक से मनुष्य मोह से मुक्त होता है। ज्ञानयोग में ‘क्षेत्र’ और ‘क्षेत्रज्ञ’ का विवेक महत्वपूर्ण है।<ref name="Shankara" /> === भक्तियोग === भक्तियोग भगवान की शरणागति, प्रेम और समर्पण पर आधारित है। गीता में कहा गया है कि जो भक्त अनन्य भाव से भगवान को भजता है, वह उन्हें प्राप्त होता है। भक्तियोग को गीता में सर्वश्रेष्ठ योग बताया गया है।<ref name="Ramanuja" /> === ध्यानयोग === ध्यानयोग मन के नियंत्रण और आत्मसाक्षात्कार पर आधारित है। गीता के छठे अध्याय में ध्यान की विधि का विस्तृत वर्णन है। ध्यानयोगी मन को वश में करके आत्मा में स्थित होता है।<ref name="Vivekananda" /> === समत्व योग === समत्व योग गीता का मूल आदर्श है। सुख-दुःख, लाभ-हानि, मान-अपमान, शत्रु-मित्र में सम रहना ही समत्व है। कृष्ण कहते हैं—समत्वं योग उच्यते (२.४८)।<ref name="Goyandka" /> === अवतारवाद === गीता में अवतारवाद का प्रसिद्ध सिद्धांत दिया गया है—यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्। धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश के लिए भगवान का अवतरण होता है।<ref name="Aurobindo" /> === स्वधर्म === स्वधर्म का अर्थ है—अपने स्वभाव और कर्तव्य के अनुसार धर्म का पालन। गीता में कहा गया है कि श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात् (३.३५)—दूसरे के धर्म का अच्छी तरह पालन करने से अपने धर्म का अल्प पालन श्रेयस्कर है। === आत्मा की अमरता === गीता में आत्मा को अजर, अमर और नित्य बताया गया है। नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः (२.२३)—आत्मा को शस्त्र नहीं काट सकते, अग्नि नहीं जला सकती। आत्मा का नाश नहीं होता, केवल शरीर का परिवर्तन होता है।<ref name="Zaehner" /> == प्रमुख श्लोक == गीता में अनेक प्रसिद्ध श्लोक हैं, जिनका उल्लेख विद्वानों और संतों ने बार-बार किया है। यहाँ कुछ प्रमुख श्लोक दिए गए हैं: {{quote|'''कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।'''<br />'''मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ २.४७॥'''}} '''अर्थ:''' तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल में नहीं। फल की आसक्ति छोड़ो, पर कर्म से विमुख मत हो। {{quote|'''यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।'''<br />'''अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ ४.७॥'''}} '''अर्थ:''' जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं स्वयं को प्रकट करता हूँ। {{quote|'''परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।'''<br />'''धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥ ४.८॥'''}} '''अर्थ:''' साधुओं की रक्षा, दुष्कर्मियों का विनाश और धर्म की स्थापना के लिए मैं युग-युग में अवतार लेता हूँ। {{quote|'''विद्याविनयसंपन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि।'''<br />'''शुनि चैव श्वपाके च पंडिताः समदर्शिनः॥ ५.१८॥'''}} '''अर्थ:''' ज्ञानी महापुरुष विद्या-विनययुक्त ब्राह्मण, गाय, हाथी, कुत्ते और चाण्डाल में समान दृष्टि रखते हैं। {{quote|'''सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।'''<br />'''अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥ १८.६६॥'''}} '''अर्थ:''' सब धर्मों को छोड़कर केवल मेरी शरण में आओ। मैं तुम्हें सब पापों से मुक्त कर दूँगा, शोक मत करो। == गीता जयंती == ब्रह्मपुराण के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का बहुत बड़ा महत्व है। [[द्वापर युग]] में भगवान [[श्रीकृष्ण]] ने इसी दिन [[अर्जुन]] को भगवद्गीता का उपदेश दिया था। इसीलिए यह तिथि '''गीता जयंती''' के नाम से भी प्रसिद्ध है और इस एकादशी को '''मोक्षदा एकादशी''' कहते हैं।<ref name="GitaJayanti" /> भगवान ने अर्जुन को निमित्त बनाकर विश्व के मानवमात्र को गीता के ज्ञान द्वारा जीवनाभिमुख बनाने का चिरन्तन प्रयास किया है। गीता जयंती पर देशभर में गीता पाठ, प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। [[कुरुक्षेत्र]] में तो विशेष आयोजन होते हैं। == गीता पर भाष्य == [[संस्कृत]] साहित्य की परम्परा में उन ग्रन्थों को भाष्य (शाब्दिक अर्थ—व्याख्या के योग्य) कहते हैं, जो दूसरे ग्रन्थों के अर्थ की वृहद् व्याख्या या टीका प्रस्तुत करते हैं। भारतीय दार्शनिक परंपरा में किसी भी नए दर्शन को या किसी दर्शन के नए स्वरूप को जड़ जमाने के लिए जिन तीन ग्रन्थों पर अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करना पड़ता था (अर्थात् भाष्य लिखकर), उनमें भगवद्गीता भी एक है (अन्य दो हैं—[[उपनिषद्]] तथा [[ब्रह्मसूत्र]])।<ref name="Vivekananda" /> गीता पर अनेक आचार्यों एवं विद्वानों ने टीकाएँ की हैं। संप्रदायों के अनुसार उनकी संक्षिप्त सूची इस प्रकार है: * (अ) '''[[अद्वैत]]''' — शांकरभाष्य, श्रीधरकृत सुबोधिनी, मधुसूदन सरस्वतीकृत गूढ़ार्थदीपिका। * (आ) '''[[विशिष्टाद्वैत]]''' — ** (१) [[यामुनाचार्य]] कृत गीतार्थसंग्रह, जिसपर [[वेदांतदेशिक]] कृत गीतार्थसंग्रहरक्षा टीका है। ** (२) [[रामानुजाचार्य]] कृत गीताभाष्य, जिसपर वेदांतदेशिक कृत तात्पर्यचंद्रिका टीका है। * (इ) '''[[द्वैत]]''' — [[मध्वाचार्य]] कृत गीताभाष्य, जिसपर [[जयतीर्थ]] कृत प्रमेयदीपिका टीका है; मध्वाचार्य कृत गीतातात्पर्यनिर्णय। * (ई) '''[[शुद्धाद्वैत]]''' — [[वल्लभाचार्य]] कृत तत्वदीपिका, जिसपर पुरुषोत्तम कृत अमृततरंगिणी टीका है। * (उ) '''कश्मीरी टीकाएँ''' — १. अभिनवगुप्त कृत गीतार्थसंग्रह। २. आनंदवर्धन कृत ज्ञानकर्मसमुच्चय। इनके अतिरिक्त महाराष्ट्र संत [[ज्ञानदेव]] या [[ज्ञानेश्वर]] कृत [[भावार्थदीपिका]] नाम की टीका (१२९०) प्रसिद्ध है, जो गीता के ज्ञान को भावात्मक काव्यशैली में प्रकट करती है। महाराष्ट्र में महानुभाव संप्रदाय के संस्थापक चक्रधर स्वामी के महानुभाव तत्वज्ञान पर आधारित मुरलीधर शास्त्री आराध्ये ने ‘रहस्यार्थचंद्रिका’ नाम की गीता टीका लिखी है।<ref name="Sharma" /> वर्तमान युग में लोकमान्य [[बाल गंगाधर तिलक]] कृत गीतारहस्य टीका, जो अत्यंत विस्तृत भूमिका तथा विवेचन के साथ पहली बार १९१५ ई. में [[पूना]] से प्रकाशित हुई थी, गीता साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।<ref name="Tilak" /> उसने गीता के मूल अर्थों को विद्वानों तक पहुँचाने में ऐसा मोड़ दिया है, जो शंकराचार्य के बाद आज तक संभव नहीं हुआ था। वस्तुतः शंकराचार्य का भाष्य गीता का मुख्य अर्थ ज्ञानपरक करता है, जबकि तिलक ने गीता को कर्म का प्रतिपादक शस्त्र सिद्ध किया है। === प्रमुख भाष्यों की सूची === * [[गीताभाष्य]] — [[आदि शंकराचार्य]] * [[गीताभाष्य]] — [[रामानुज]] * गूढ़ार्थदीपिका टीका — [[मधुसूदन सरस्वती]] * सुबोधिनी टीका — श्रीधर स्वामी * [[ज्ञानेश्वरी]] — [[संत ज्ञानेश्वर]] * [[गीतारहस्य]] — [[बालगंगाधर तिलक]] * [[अनासक्ति योग]] — [[महात्मा गांधी]] * Essays on Gita — [[अरविन्द घोष]] * ईश्वरार्जुन संवाद — [[परमहंस योगानन्द]] * गीता-प्रवचन — [[विनोबा भावे]] * गीता तत्व विवेचनी टीका — [[जयदयाल गोयन्दका]] * भगवद्गीता का सार — स्वामी क्रियानन्द * गीता साधक संजीवनी — स्वामी रामसुखदास * गीता हृदय — यति राज दण्डी स्वामी सहजानंद सरस्वती * श्रीमद्भगवद्गीता (आध्यात्मिक गीता) — [[श्यामाचरण लाहिड़ी]], [[भूपेंद्रनाथ सान्याल]] और [[गोपीनाथ कविराज]]<ref name="Sanyal">{{cite book |last1=श्री भूपेंद्रनाथ |first1=सान्याल |title=श्रीमद्भगवद्गीता |date=2005 |publisher=गुरुधाम प्रकाशन समिति |location=भागलपुर, बिहार |edition=प्रथम}}</ref> भगवद्गीता पर उपलब्ध सभी भाष्यों में श्री जयदयाल गोयन्दका की तत्वविवेचनी सर्वाधिक लोकप्रिय तथा जनसुलभ है। इसका प्रकाशन गीताप्रेस द्वारा किया जाता है। आजतक इसकी १० करोड़ प्रतियाँ बिक चुकी हैं।<ref name="Goyandka" /> == गीता नाम के अन्य ग्रन्थ == गीता के नाम पर अनेक अन्य ग्रन्थ भी प्रचलित हैं, जो विभिन्न विषयों पर आधारित हैं: * [[अष्टावक्र गीता]] — अष्टावक्र और जनक का संवाद * [[अवधूत गीता]] — दत्तात्रेय का उपदेश * [[कपिल गीता]] — कपिल मुनि का सांख्य दर्शन * [[श्रीराम गीता]] — राम और लक्ष्मण का संवाद * [[श्रुति गीता]] * [[उद्धव गीता]] — कृष्ण और उद्धव का संवाद * [[वैष्णव गीता]] * [[कृषि गीता]] * [[गुरु गीता]] — शिव और पार्वती का संवाद == आधुनिक जनजीवन में == [[चित्र:Hitopadesha.jpg|right|thumb|300px|[[अर्जुन]] को [[गीता]] उपदेश देते हुए श्रीकृष्ण की कांस्य प्रतिमा]] श्रीमद्भगवद्गीता बदलते सामाजिक परिदृश्यों में अपनी महत्ता को बनाए हुए है और इसी कारण तकनीकी विकास ने इसकी उपलब्धता को बढ़ाया है तथा अधिक बोधगम्य बनाने का प्रयास किया है। दूरदर्शन पर प्रसारित धारावाहिक [[महाभारत]] में भगवद्गीता विशेष आकर्षण रही, वहीं धारावाहिक '''[[कृष्णा (टीवी धारावाहिक)|कृष्णा]]''' में भगवद्गीता पर अत्यधिक विशद शोध करके उसे कई कड़ियों की एक शृंखला के रूप में दिखाया गया।<ref name="Doordarshan">दूरदर्शन धारावाहिक 'कृष्णा', १९९३.</ref> इसके अलावा नीतीश भारद्वाज कृत धारावाहिक '''गीता-रहस्य''' तो पूर्णतया गीता के ही विभिन्न आयामों पर केंद्रित रहा। इंटरनेट पर भी आज अनेकानेक वेबसाइटें इस विषय पर बहुमाध्यमों के द्वारा विशद जानकारी देती हैं। श्रीमद्भगवद्गीता वर्तमान में धर्म से ज्यादा जीवन के प्रति अपने दार्शनिक दृष्टिकोण को लेकर भारत में ही नहीं, विदेशों में भी लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही है। निष्काम कर्म का गीता का संदेश प्रबंधन गुरुओं को भी लुभा रहा है। यह विश्व के सभी धर्मों की सबसे प्रसिद्ध पुस्तकों में शामिल है।<ref name="Flood" /> [[गीता प्रेस]] गोरखपुर जैसे धार्मिक साहित्य की पुस्तकों को काफी कम मूल्य पर उपलब्ध कराने वाले प्रकाशन ने भी कई आकारों में अर्थ और भाष्य के साथ श्रीमद्भगवद्गीता के प्रकाशन द्वारा इसे आम जनता तक पहुँचाने में काफी योगदान दिया है। == पाश्चात्य विद्वानों की दृष्टि == पाश्चात्य विद्वानों ने भी गीता की प्रशंसा की है। [[अमेरिका]] के प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी [[अल्बर्ट आइंस्टीन]] ने गीता के बारे में कहा था कि यह जीवन के बारे में एक महान दार्शनिक ग्रंथ है। [[हेनरी डेविड थोरो]] ने गीता की तुलना विश्व के सर्वश्रेष्ठ ग्रंथों से की थी।<ref name="Western">Eric Sharpe, ''The Universal Gita'', Open Court, 1985.</ref> [[राल्फ वाल्डो इमर्सन]] ने गीता को ‘विश्व साहित्य का सर्वोच्च ग्रंथ’ कहा था। १७८५ में [[चार्ल्स विल्किंस]] द्वारा इसका पहला अंग्रेजी अनुवाद प्रकाशित हुआ, जिसने पश्चिमी दुनिया में गीता की लोकप्रियता को बढ़ाया।<ref name="Wilkins">Charles Wilkins, ''The Bhagvat-Geeta'', 1785.</ref> == विवाद और विद्वानों की दृष्टि == कुछ विद्वान गीता को महाभारत की मूल परत का हिस्सा मानते हैं, जबकि कुछ इसे बाद में जोड़ा गया दार्शनिक प्रक्षेप मानते हैं। गीता की व्याख्या में कर्म, अहिंसा, युद्ध, वर्ण और स्वधर्म को लेकर भी अलग-अलग दृष्टिकोण रहे हैं।<ref name="Brockington" /> इसलिए गीता को एक ही अर्थ में सीमित न करके उसकी बहुविध भाष्य-परम्परा के साथ समझना उचित है। शंकराचार्य से लेकर तिलक तक, और गांधी से लेकर अरविन्द तक—सबने गीता को अपने-अपने ढंग से समझा और उसका प्रचार किया। == गीता का सार == गीता का सार यह है कि मनुष्य को अपने कर्तव्य का पालन करते हुए फल की आसक्ति छोड़ देनी चाहिए। इससे वह कर्मबंधन से मुक्त हो जाता है और मोक्ष प्राप्त करता है। गीता यह भी सिखाती है कि संसार में रहते हुए भी संसार से अनासक्त रहा जा सकता है—जैसे कमल जल में रहता है, पर जल से लिप्त नहीं होता। गीता का निचोड़ है—बुद्धि को हमेशा सूक्ष्म करते हुए महाबुद्धि आत्मा में लगाए रखो तथा संसार के कर्म अपने स्वभाव के अनुसार सरल रूप से करते रहो।<ref name="Goyandka" /> {{quote|'''समत्वं योग उच्यते।''' — गीता २.४८}} '''अर्थ:''' समत्व ही योग है। सुख-दुःख में सम रहना ही योग है। == इन्हें भी देखें == * [[महाभारत]] * [[उपनिषद्]] * [[ब्रह्मसूत्र]] * [[कृष्ण]] * [[अर्जुन]] * [[कुरुक्षेत्र]] == सन्दर्भ == {{reflist}} == संदर्भ ग्रन्थ == * शंकराचार्य: गीताभाष्य * लोकमान्य तिलक: गीता रहस्य * मधुसूदन ओझा: श्रीमद्भगवद्गीतायाः विज्ञानभाष्यम्, कांडचतुष्टयात्मकम् * मोतीलाल शास्त्री: गीताभाष्य भूमिका * गिरिधर शर्मा चतुर्वेदी: गीता प्रवचन भाष्य * S. Radhakrishnan, ''The Bhagavadgita'', HarperCollins, 1948 * R. C. Zaehner, ''The Bhagavad-Gita'', Oxford University Press, 1969 * Gavin Flood, ''An Introduction to Hinduism'', Cambridge University Press, 1996 * John Brockington, ''The Sanskrit Epics'', Brill, 1998 * श्री अरविन्द, ''Essays on the Gita'', 1922 == बाहरी कड़ियाँ == * [https://web.archive.org/web/20180929191026/https://www.gitasupersite.iitk.ac.in/srimad?language=dv&field_chapter_value=1&field_nsutra_value=1 गीता सुपरसाइट] — मूल श्लोक, अनुवाद और भाष्य सहित * [[:s:sa:भगवद्गीता|संस्कृत विकिस्रोत पर भगवद्गीता]] * [https://web.archive.org/web/20100525193821/http://www.bhagawad-geeta.com/ श्रीमद्भगवद्गीता] — संस्कृत मूल पाठ, विभिन्न प्रारूपों में * [https://web.archive.org/web/20190515211300/https://bhagavadgita.io/ भगवद्गीता] — संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी में * [https://upasanayoga-org.translate.goog/AKAruna/docs/BhG-Dic.htm?_x_tr_sl=en&_x_tr_tl=hi&_x_tr_hl=hi&_x_tr_pto=tc भगवद्गीता शब्दकोश] {{wikisource|Geeta}} {{महाभारत}} [[श्रेणी:गीता]] [[श्रेणी:वैदिक साहित्य]] [[श्रेणी:संस्कृत ग्रन्थ]] [[श्रेणी:हिन्दू धर्म]] [[श्रेणी:महाभारत]] srn2hb5q0fe8poko0mmw5t1tb82j2wx राम सिंह प्रथम 0 217713 6630376 6627570 2026-10-17T07:27:44Z Mundhalia746 934684 6630376 wikitext text/x-wiki {{जीवनी स्रोतहीन|date=जनवरी 2017}} {{Infobox royalty |image = [[चित्र:Ramsinghi.JPG]] |name = मिर्ज़ा राजा राम सिंहजी प्रथम |title = मिर्ज़ा राजा |full name = मिर्ज़ा राजा राम सिंहजी बहादुर प्रथम |coronation = १० सितंबर १६६७ | birth_date = | birth_place = [[आमेर]], [[राजपूताना]] | death_date = अप्रैल, १६८८ | death_place = [[कोहाट]] |reign = १६६७&ndash;१६८८ |predecessor= [[जय सिंह प्रथम]] |successor = [[मिर्ज़ा राजा बिशन सिंहजी]] |issue = युवराज किशन सिंहजी |dynasty =[[कछवाहा]] |religion =[[हिन्दू]] |Consort=रानी राठौड़जी राम कँवरजी पुत्री राजा केसरी सिंहजी पीसांगन पौत्री कुंवर माधो सिंहजी एवं प्रपौत्री मोटा राजा उदय सिंहजी रानी रानी चौहानजी अनूप कँवरजी पुत्री राजा श्याम सिंहजी निमराना रानी बाघेलिजी (सोलंकिनीजी) श्याम कँवरजी पुत्री महाराजा बांधवेश अनूप सिंह जूदेव जी रीवा|spouse=राठौड़जी राम कँवरजी पुत्री राजा केसरी सिंहजी पीसांगन पौत्री कुंवर माधो सिंहजी एवं प्रपौत्री मोटा राजा उदय सिंहजी जोधपुर रानी चौहानजी अनूप कँवरजी पुत्री राजा श्याम सिंहजी निमराना रानी बाघेलीजी (सोलंकिनीजी) श्याम कँवरजी पुत्री महाराजा बांधवेश अनूप सिंह जूदेव जी रीवा|mother=रानी जादौनजी आनंद कँवरजी पुत्री राजा मुकुंद पाल देव जी करौली|father=मिर्ज़ा राजा जय सिंहजी प्रथम}} '''मिर्ज़ा राजा राम सिंहजी प्रथम''' [[आमेर]] के सत्ताईसवे शसक और बड़े जय सिंहजी अर्थात [[मेवाड़ के जय सिंह|मिर्ज़ा राजा जयसिंहजी प्रथम]] के पुत्र और उत्तराधिकारी थे। ये [[कछवाहा]] [[राजपूत]] (सूर्यवंश) के १६६७ से १६८८ तक प्रमुख रहे। * * * * * * * == सन्दर्भ == {{Reflist}} # Sarkar Jadunath (1984, reprint 1994). ''A History of Jaipur'', New Delhi: Orient Longman, ISBN 81-250-0333-9. [[श्रेणी:१६८८ में निधन]] [[श्रेणी:जयपुर के महाराजा]] [[श्रेणी:जयपुर के लोग]] {{जयपुर के महाराजा}} 7ikigvrzo8b60cbweu5p6sjenp98w0f मीडियाविकि:Gadgets-definition 8 396301 6630251 6617122 2026-10-16T15:18:10Z Maintenance script 167660 Remove deprecated targets option (Operator: Ladsgroup) 6630251 wikitext text/x-wiki == editing-gadgets == * ProveIt|ProveIt.js * ProveIt-classic[dependencies=jquery.ui,jquery.textSelection,mediawiki.util]|ProveIt-classic.css|ProveIt-classic.js * edittop[dependencies=user.options,mediawiki.util]|edittop.js|edittop.css * Twinkle[dependencies=ext.gadget.morebits,ext.gadget.select2,mediawiki.api,mediawiki.language|rights=autoconfirmed|type=general|peers=Twinkle-pagestyles]|Twinkle.js|Twinkle.css|twinklewarn.js|twinkleblock.js|twinklespeedy.js|twinklexfd.js|twinkleprotect.js|friendlytag.js|twinklediff.js|twinkleunlink.js|twinklefluff.js|twinklebatchdelete.js|twinklebatchprotect.js|twinklebatchundelete.js|twinkleconfig.js * 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{{Infobox royalty | succession = आमेर के राजा |image= [[File:Raja bharmal painting.jpg|250px|]] |caption = | reign = 1 जून 1548<br>27 जनवरी 1574 | dynasty = कछवाहा | predecessor =आसकरण | successor = [[भगवानदास|भगवन्त दास]] | birth_date = 1498 | birth_place = [[आमेर]] | death_date = 27 जनवरी 1574 | death_place = [[आगरा]] }} '''भारमल''' (शासन: 1 जून 1548 - 27 जनवरी 1574) राजा पृथ्वीराज कछवाहा के पुत्र थे।<ref>{{cite book|title=राजस्थान के महाराणा और राज्यों का जीवन चरित्र |url = http://books.google.be/books?id=egBCAAAAIAAJ |author=मनोहर सिंह राणावत |publisher= राजस्थानी ग्रंथागार |year=1985 |page=100}}</ref> इतिहासकार 'टॉड' ने इन्हें 'बिहारीमल' लिखा है। ये [[आमेर]] के शासक थे। [[अकबर]] की अधीनता स्वीकार करने वाले तथा [[अकबर]] की शाही मनसबदारी मे प्रवेश करने वाले पहले राजपूत शासक थे। इन्होंने हाजी खाँ विद्रोही के विरुद्ध मजनूँ खाँ की सहायता की थी, इसलिये मजनूँ खाँ ने [[अकबर|मुगल सम्राट् अकबर]] से इन्हें दरबार में बुलवाने की प्रार्थना की ये फतेहपुर सीकरी मे मिलने गये और पहली भेंट में ही इनका बादशाह पर अच्छा प्रभाव पड़ा और इन्हें [[अकबर]] की सेवा का अवसर मिला। बाद में इनका भाई रूपसी भी मुगल सम्राट् की सेवा में उपस्थित हुआ। इन्होंने अपनी पुत्री भारमली/हरखाबाई का विवाह [[अकबर|सम्राट् अकबर]] से कर दिया। इनके पुत्र भगवान्‌दास और पौत्र [[राजा मानसिंह]] भी बाद में [[अकबर]] के दरबार में पहुँच गए। सन्‌ 1574 के लगभग भारमल की मृत्यु हुई। == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} {{जयपुर के महाराजा}} [[श्रेणी:भारतीय राजा]] [[श्रेणी:भारत का इतिहास]] [[श्रेणी:1491 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:१५७४ में निधन]] [[श्रेणी:जयपुर के महाराजा]] [[श्रेणी:जयपुर के लोग]] ocmb1ldea2yi4n2hn1nb26zubbost4r महाराजा ईश्वरीसिंह 0 571866 6630392 5951366 2026-10-17T09:03:38Z Mundhalia746 934684 6630392 wikitext text/x-wiki === जन्म === '''सरमाद-ए-राजा-ए-हिंदुस्तान राज-राजेश्वर राज-राजेंद्र महाराजधिराज महाराजा सवाई ईश्वरीसिंहजी''' [[जयपुर|जयपुर राज्य]] के [[इतिहास]] में सबसे कम अवधि के शासन (1743-'50) के वावजूद, कई युद्धों का सामना करने वाले, [[संगीत]], [[साहित्य]], [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]], [[ललित कला]] और [[तन्त्र|तंत्र]] [[शास्त्र]] के गहरे अनुरागी राजा थे| वह जयपुर के संस्थापक [[महाराजा]] ''[[जय सिंह द्वितीय|सवाई जयसिंहजी]]'' के दुसरे बड़े पुत्र, तथा ''[[राजा मान सिंह|राजा बिशन सिंहजी]]'' के [[पौत्र]] थे। इनका जन्म [[फाल्गुन]] सुदी [[अष्टमी]] [[विक्रम संवत]] 1778 (1721 ईस्वी) को [[जयपुर|दिल्ली के जयसिंहपुरा]] में उनके पिता की प्रियतम रानी खींचनजी (चौहानजी) सुख कँवरजी पुत्री राजा धीरज सिंहजी खींची राघौगढ़ (मालवा) की कुषी से हुआ था। === मृत्यु === इनकी असामयिक मृत्यु मात्र ३० साल की उम्र में दिनांक 12.12.[[१७५०|1750]] को हुई।<ref>'The History of Jaipur': Jadunath Sarkar : Orient BlackSwan,2009 : Page 228</ref> === ईश्वरी सिंह और जयपुर की गद्दी के लिए [[गृहयुद्ध]]=== सर ''[[यदुनाथ सरकार]]'' के 'जयपुर के [[इतिहास]]' के अध्याय "ईश्वरी सिंह" में ऐसा वर्णित है कि [[१७४३|1743]] में [[जय सिंह द्वितीय|महाराजा सवाई जयसिंह]] की मृत्यु के बाद, उनके ज्येष्ठ पुत्र ईश्वरीसिंह ने शासन संभाला, जिसे [[दिल्ली]] के [[बादशाह]] ''[[मुहम्मद शाह]]'' ने भी अपनी मान्यता दे दी।<ref>1. 'The History of Jaipur': Jadunath Sarkar : Orient BlackSwan,2009 : Page 228</ref> वह स्थानीय सरदारों की सहमति से (आषोज सुदी [[पूर्णिमा]] [[विक्रम संवत]] [[१८००|1800]] दिनांक 23.9.[[१७४३|1743]] को गद्दी पर बैठे थे, लेकिन उनका सौतेला भाई [[माधो सिंह]] जयपुर का शासन चाहता था, क्योंकि उसके भी पिता [[जय सिंह द्वितीय|सवाई जयसिंह]] ने सन [[१७०८]] में [[मेवाड़]] की राजकुमारी से अपने एक विवाह के वक़्त वहां के [[महाराणा]] को यह वचन दे दिया था कि उनके बाद (ईश्वरी नहीं) [[मेवाड़]] की रानी से जन्मा बेटा ही [[जयपुर]] के राज-आसन पर बैठेगा।<ref>2.http://msmsmuseum.com/index.php</ref> [[मेवाड़]] की रानी से जन्मा बेटा माधोसिंह था। पर जब ईश्वर सिंह ने उसके मंसूबे पूरे होने से पहले ही जयपुर का शासक बनने की घोषणा कर डाली तो नाराज़ माधोसिंह ने अपने मामा, [[उदयपुर]] के [[महाराणा]] और [[कोटा]] व [[बूँदी जिला|बूंदी]] नरेशों के साथ मिल कर [[१७४४|1744]] में जयपुर पर हमला कर दिया। लेकिन ईश्वरी सिंह के [[प्रधानमन्त्री|प्रधानमंत्री]] ''[[राजामल खत्री]]'' और ''[[धूला]] ठिकाने के राव.......'' ने इस संयुक्त आक्रमण का करारा जवाब देते हुए [[राजमहल]] ([[टोंक]]) के पास, जहाँ आज [[बीसलपुर]] बाँध बनाया गया है, हमला विफल कर दिया। "[[भरतपुर]] के [[सूरज मल|महाराजा सूरजमल]] जयसिंह के वारिस के तौर पर बड़े बेटे, ईश्वरी सिंह के पक्ष में थे, जबकि [[उदयपुर]] के महाराणा ''[[जगतसिंह]]'' ''[[माधो सिंह]] (प्रथम)'' के पक्ष में।" एक बार फिर [[भीलवाड़ा]] के कस्बे [[जहाज़पुर|जहाजपुर]] के पास दोनों भाइयों में युद्ध हुआ और [[मार्च]] [[१७४७|1747]] में ईश्वरी सिंह की ही जीत हुई। इसके एक साल बाद [[मई]] [[१७४८|1748]] में माधोसिंह के समर्थक पेशवाओं ने ईश्वरीसिंह पर दबाव डाला कि वह माधोसिंह को चार/पांच (?) परगने सौंप दे। इनकार किये जाने पर सन [[१७४८|1748]] में माधोसिंह ने [[उदयपुर]] के महाराणा, ''[[मल्हारराव होलकर ]]'' व [[कोटा]], [[बूँदी जिला|बूंदी]], [[जोधपुर]] और [[शाहपुरा, भीलवाड़ा|शाहपुरा]] के नरेशों के साथ मिल कर फिर जयपुर पर हमला बोला।<ref>3.The History of Jaipur: Jadunath Sarkar : Orient BlackSwan, 2009 :page 228</ref>[[सूरज मल|महाराजा सूरजमल]] भी दस हजार सैनिकों के साथ ईश्वरीसिंह की मदद के लिये जयपुर पहुंचे और अगस्त [[१७४८|1748]] में जयपुर से 20 मील दूर [[बगरू]] में सेनापति ''[[हरगोविंद नाटाणी]]'' के नेतृत्व में युद्ध में एक बार फिर जयपुर की जीत हुई।"<ref>4.[https://hi.wikipedia.org/s/12t2]</ref> ईश्वरी सिंह का, अपने अन्य मंत्री ''[[केशवदास खत्री]]'' पर बड़ा विश्वास था, किन्तु [[हरगोविंद नाटाणी]] को वह फूटी आँख न सुहाता था। केशवदास खत्री का चूंकि मराठों में भी सम्मान था और [[मल्हार राव होलकर]] भी उसकी बात माना करता था, [[राजमहल]] के युद्ध के बाद हरगोविंद नाटाणी ने राजा को बहकाया कि केशवदास खत्री भीतर से मराठों से मिला हुआ है और जयपुर पर हमले 'उसी की शह पर' होते आ रहे हैं, ईश्वरीसिंह ने नाटाणी की इस बात पर बिना पुष्टि यकीन करते हुए एक दिन केशवदास खत्री को विष दिलवा कर मरवा डाला। केशवदास के बाद हरगोविंद नाटानी को ही 'प्रमुख मंत्री' का पद मिलना था, वह मिला|<ref>5.'जयपुर-दर्शन': (''जिसमें जयपुर-शहर के [[इतिहास]], [[पुरातत्वशास्त्र|पुरातत्व]], [[राजनीति]], [[समाज]], [[संस्कृति]], [[परम्परा]], [[पर्यटन]]-स्थल, आदि अनेक विषयों पर आलेख संग्रहीत हैं)'': प्रकाशक : प्रधान-सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978 [पेज १०, ] प्रकाशक : जयपुर अढाई शती समारोह समिति, नगर विकास न्यास (अब [[जयपुर विकास प्राधिकरण]]) परिसर, भवानी सिंह मार्ग, जयपुर</ref> जयपुर के पुराने लोगों को यह कहावत अब भी याद है " ''मंत्री-मोटो मारियो जब स्यूं केसबदास, तब स्यूं ईसर छोड़ दी राज करण री आस'' " === जयपुर में निर्माण-योगदान === अठारहवीं सदी में निर्मित जयपुर शहर की सबसे ऊंची मीनार '[[ईसरलाट]]' उर्फ़ 'सरगासूली' का निर्माण महाराजा ईश्वरी सिंह ने जयपुर के गृहयुद्धों में अपनी तीन विजयों की स्मृति में करवाया था। विरोधी सात दुश्मनों पर [[बगरू]] में प्राप्त इस जीत के उपलक्ष्य में ([[कृष्ण|गोविंददेवजी]] के भक्त) राजा ईश्वरीसिंह ने 1749 में सात खण्डों की एक भव्य मीनार का निर्माण कराया। 'गणगौरी बाज़ार' के निकट स्थानीय 'चौगान-मैदान' में राजसी स्त्रियों के '[[गणगौर]]' की सवारी के पूजन और [[श्रावण]]ी [[तृतीया|तीज]]/ [[चैत्र]] [[शुक्ल]] [[तृतीया]] को हर वर्ष आयोज्य गणगौर मेले के अवलोकन के लिए एक कलात्मक छतरी '''मोती-बुर्ज''' भी इन्होंने बनवाई थी।<ref>6.http://msmsmuseum.com/index.php</ref> ==== ईसरलाट उर्फ़ सरगासूली ==== इस मीनार का निर्माण चूंकि महाराजा ईश्वरीसिंह ने कराया था, इसीलिए इसका नाम '[[ईसरलाट]]' रखा गया ; पर '[[स्वर्ग लोक|स्वर्ग]] को छूती हुई सी मीनार' प्रतीत होने के कारण स्थानीय भाषा में इसे '[[सरगासूली]]' के नाम से अधिक जाना जाता है। 'त्रिपोलिया बाजार' में दिखने वाली यह मीनार वास्तव में त्रिपोलिया में न हो कर, इसके पीछे स्थित '[[आतिश]]बाज़ार' की दुकानों के ऊपर बनी है। [[परकोटा]] इलाके में त्रिपोलिया बाजार से दिखाई देती इस सात मंजिला अष्टकोणीय मीनार को वर्ष [[१७४९|1749]] में राजा ईश्वरीसिंह ने दरबार के एक ''राजशिल्पी [[गणेश खोवान]]'' के नक़्शे के अनुरूप बनवाया था। 'ईसरलाट' के छोटे प्रवेश-द्वार में प्रविष्ट होने के बाद, संकरी गोलाकार सीढियां क्रमशः घूमती हुई ऊपर की ओर बढ़ती है। स्तम्भ की हर मंजिल पर एक द्वार बना है, जो मीनार की बालकनी में खुलता है। सात खण्डों में बनी इस इमारत की निर्माण-शैली [[राजपूत]] और [[मुग़ल साम्राज्य|मुगल-]][[वास्तुकला|वास्तु-शैलियों]] का सम्मिश्रण है। [[मुग़ल साम्राज्य|मुगल]] शैली में मस्जिदों के चार कोनों पर बनने वाली मीनारों से मिलती जुलती यह वास्तुरचना, शीर्षभाग पर एक गोलाकार छतरी लिए हुए है। 'गुलाबी-नगर' में (यानि परकोटा इलाके के बीच स्थित होते हुए भी) इसका रंग गहरा 'पीला' है। अनेक दशकों तक इसमें जनता का प्रवेश वर्जित था- पर [[पर्यटन]] विकास के लिए अब इसे टिकट लगा कर आम दर्शक के लिए खोल दिया गया है, क्यों कि लाट के शिखर पर जो गोलाकार, अष्टकोणीय छतरी है, वहां से पुराने जयपुर शहर का नयनाभिराम नजारा दिखाई देता है। ''कविशिरोमणि [[भट्ट मथुरानाथ शास्त्री]]'' ने ''[[जयपुर-वैभवम|जयपुर वैभवम]]'' में इस स्मारक के बारे में ''[[अतिशयोक्ति अलंकार]]'' का उपयोग करते अपनी एक प्रशंसात्मक [[काव्य|कविता]] में ये भाव व्यक्त किये हैं-" सोने के कलश वाली जिसकी ऊपरी गुम्बज ऊँचाई के कारण आकाश का जैसे आलिंगन कर रही है, देवताओं के साथ जैसे ईश्वर मंत्रणा करते हैं, मानो देवताओं से बातचीत के लिए, ईश्वरीसिंह जी ने जिसे इतना ऊंचा बनवाया है कि [[सूर्य]]-किरण तक जिस पर बमुश्किल पहुँच पाती है"....."<ref>7.'[[जयपुर-वैभवम|जयपुर वैभवम]] : [[भट्ट मथुरानाथ शास्त्री]]: पृष्ठ ४९/८१ : 'नगरवीथी' : सन [[१९४७]]</ref> [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] और [[बृज भाषा|ब्रजभाषा]] के महाकवि ''[[श्रीकृष्णभट्ट कविकलानिधि]]'' ने भी अपने [[जयपुर]] पर लिखे [[इतिहास]]-काव्यग्रंथ [[ईश्वर विलास|ईश्वरविलास]] महाकाव्य में अन्य राजपुरुषों के अलावा ईश्वरीसिंह के भी 'जीवन-चरित्र' का वर्णन किया है।<ref>8.http://|www.sanskrit.nic.in/DigitalBook/J/Jaipurvaibhavam.pdf</ref> ==== सरगासूली और कुछ किंवदंतियाँ==== जयपुर के[[इतिहास]] से जुड़े साहित्य में इस मीनार 'ईसरलाट' से संबंधित कुछ रोचक [[किंवदंती|किंवदंतियां]] हैं। स्थानीय लोगों में ये धारणा आमफहम है कि 'महाराजा यहां बैठ कर पास की हवेली की किसी सुन्दरी को एकटक देखा करते थे।' लेकिन यह शायद सत्य नहीं। दरअसल बूंदी, जयपुर से युद्धों में पराजित राज्यों में से एक था। वहां के ख्यातनाम [[चारण (जाति)|चारण]] राजकवि थे ''[[सूर्यमल्ल|सूर्यमल्ल मिश्रण]]''। [[सूर्यमल्ल]] ने अपने [[पिङ्गल|पिंगल]] भाषा के काव्यग्रन्थ [[वंश भास्कर]] में जयपुर की बूंदी पर जीत से 'अप्रसन्न' जिस कविता की रचना की, उसमें यह बात लिख दी कि "राजा ईश्वरीसिंह ने सरगासूली का निर्माण अपने सेनापति ''हरगोविंद नाटाणी'' की बहुत सुन्दर बेटी को ‘देखने’ के लिए कराया है।" हालांकि जयपुर-इतिहास के अनजाने पृष्ठ पढ़ कर यह जानकारी ज़रूर होती है कि 'राजा अपने सेनापति हरगोविंद की अनिंद्य रूपसी कन्या पर अनुरक्त थे।'<ref>'9.'जयपुर-दर्शन' पुस्तक १९७८ में लिखे ''प्रकाशचन्द्र मिश्रा'' के लेख 'जयपुर के नीतिकुशल दीवान' : पृष्ठ १० के आधार पर उद्धृत (और यह भी कि 'नाटाणी की बदनामी' भी जयपुर में इसी कारण हुई थी)</ref> === ईश्वरीसिंह के सिक्के === ईश्वरीसिंह की [[चाँदी|रजत-और]] [[कांसा|कांस्य]] मुद्राओं १७४३ ई. पर एक ओर ''मुबारक बादशाह गाजी [[मुहम्मद शाह]] ११५६'' व दूसरी तरफ ''जर्ब सवाई जयपुर सन् २९ जुसूस मैननत मानसू'' अंकित रहता था। इसका वज़न १७५ ग्रेन था<ref>10.[www.ignca.nic.in/coilnet/rj009.htm</ref> === ईश्वरीसिंह पर अपने बड़े भाई की हत्या का आरोप === ईश्वरीसिंह से बड़े भाई का नाम शिवसिंह था। २२ वर्ष की अवस्था में इनकी असामयिक मृत्यु [[मथुरा]] में हुई। शिवसिंह की मृत्यु का कारण 'वंश भास्कर ' के ख्यात-लेखक ने यह बताया है कि मंझले पुत्र "ईश्वरसिंह के उकसाने पर [[जय सिंह द्वितीय|सवाई जयसिंह]] ने ज़हर दे कर अपनी रानी के सहयोग से स्वयं अपने पुत्र की हत्या कर दी थी", पर [[यदुनाथ सरकार]] जैसे इतिहासकार इसे 'गप्प' मानते हैं और स्वीकार नहीं करते।<ref>Jadunath Sarkar : 'A History of Jaipur' : Orient BlackSwan, Page 193</ref> === आत्महत्या === 'जयपुर-दर्शन': प्रधान-सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978 के अनुसार- "(३० बरस के युवा) महाराजा ईश्वरीसिंह जब यह पता लगा कि [[मल्हारराव होलकर]] और ''[[गंगाधर तांत्या]]'' के नेतृत्व में मराठे-आक्रमणकारी फ़ौज समेत (संभवतया केशवदास खत्री की 'हत्या का बदला लेने'(?) जयपुर से कुछ मील की दूरी पर [[निवाई]] तक आ पहुंचे हैं, तो उन्होंने अपने सबसे विश्वस्त कहे जाने वाले सेनानायक नाटाणी से इस संकट पर मंत्रणा की। सेनापति ने उन्हें आश्वस्त किया कि 'वह फ़िक्र न करें!' कुछ वक़्त बाद, कहते हैं-जिस समय होलकर ने मोती डूंगरी के पास फ़ौज ले कर आक्रमण के उद्देश्य से पड़ाव तक डाल दिया, सेनापति नाटाणी ने राजा को एक बार पुनः झूठे ही आश्वस्त किया कि वह बिलकुल चिंता न करें- " मराठों से लड़ने को एक लाख कछवाहा सैनिक मेरी जेब में हैं " (''एक लाख कच्छवाहा म्हारा खींसा में छै'') पर कुछ ही देर बाद उन्होंने ईश्वरसिंह से अचानक यह भी कह दिया-" ''काईं करूं अन्नदाता, म्हारो तो खींसो ही फाटग्यो'' (" क्या करूं महाराज, मेरी तो जेब ही फट गई।..)" और ये अहसास होने पर कि ये दुर्भाग्यपूर्ण दिन निकट दरबारियों की मराठों से मिली-भगत से देखना पड़ रहा है, ईश्वरीसिंह ने (अपने मंत्री हरगोविंद नाटाणी के इस अकल्पनीय विश्वासघात से बुरी तरह व्यथित हो कर) "[[पौष]] द्वादषी [[विक्रम संवत]] 1807 ("दिनांक 12.12.1750) को अपनी तीन प्रधान रानियों और एक खास सेविका (पड़दायत) सहित सर्पदंश और विषपान से मध्यरात्रि में आत्महत्या कर ली। एकाध के अलावा महाराजा की आत्महत्या का सुराग राजमहल या शहर जयपुर में देर तक किसी को न लगा।" "सूर्योदय के तीन घंटे बाद ''[[खांडेराव होलकर]]'' और ''[[गंगाधर तांत्या]]'' 'सवाई-जयपुर' के परकोटे के सामने पहुँच चुके थे, जब [[मल्हारराव होलकर]] छः मील दूर अपनी फ़ौज समेत झालाना-कुंड पर युद्ध का बिगुल सुनने के इंतज़ार में मुस्तैद खड़ा था। जब इन मराठा लोगों के आगमन पर भी महलों से आक्रमण या 'बचाव' की कोई हलचल ही नज़र न आयी, तो देर दुपहर बाद, उन्होंने राजसी निवास- 'चन्द्रमहल' में कदम रखा, जहाँ पंहुच कर उन्हें ये सूचना मिली कि ईश्वरीसिंह, जयपुर-राज के युवा राजा, तो अब संसार में ही नहीं रहे हैं। मृत्यु के कोई १८ घंटे बाद राजा का संस्कार हुआ। रनिवास की १२१ स्त्रियाँ उनकी आत्महत्या के बाद सती हुईं।"..."<ref>11. Jadunath Sarkar : page 229 (ibid)</ref> ईश्वरीसिंह के अलावा सभी जयपुर नरेशों की अंत्येष्टि ([[पितृमेध|दाह संस्कार]]) गैटोर की छतरियों (ब्रह्मपुरी स्थित परम्परागत राजसी श्मशान) में होती रही थी, पर "उन्हें गुपचुप महल परिसर के आसपास ही [[अग्नि]] दे दी गयी।" (उद्धरण : यदुनाथ सरकार; पुस्तक उपर्युक्त उल्लेखित : पृष्ठ : २२९) महाराजा ईश्वरी सिंहजी की नौ रानियां थीं जिनमें से रानी सिसोदीनीजी अजब कँवरजी पुत्री राजा सूर्तन सिंहजी बनेड़ा से एक पुत्र कुंवर कल्कि प्रसाद (बाल्यकाल में ही मृत्यु हुई) और बाईजीलाल दीप कँवरजी उत्पन्न हुए जिनका विवाह महाराजा की मृत्यु उपरांत जोधपुर के महाराजा राम सिंहजी महाराजा अभय सिंहजी के पुत्र एवं उत्तराधिकारी के साथ बाईजीलाल के काका महाराजा माधो सिंहजी प्रथम ने संपन्न करवाया l === ईश्वरी सिंह की छतरी (cenotaph)=== जिस जगह उनका [[पितृमेध|दाह संस्कार]] हुआ, वहां आज जयपुर में ताल-कटोरा तालाब के सामने स्थित महाराजा सवाई ईश्वरी सिंह की छतरी, गोल गुम्बजनुमाकार, ऊपर आठ व नीचे चार कोणों में बनी चार स्तभों पर खड़ी हुई है, जिसके भीतरी हिस्से में कलात्मक बेल-बूटे एवं आठ [[भित्ति चित्र]] बने हुए हैं| देशज रंगों से बने सात भित्ति चित्र [[रामायण]] के प्रसंगों से सम्बंधित हैं और एक चित्र [[महाभारत]] से।<ref>12.'जयपुर की चित्रांकन परम्‍परा' : ''डॉ॰ रीता प्रताप'', प्रकाशक: [[राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी]], जयपुर</ref>, जिस में स्वयं महाराजा ईश्वरीसिंह को भी चित्रित किया गया है। इन भित्तिचित्रों के नीचे चारों स्तंभों के कोनों पर पंख फैला कर उड़ती हुई चार परियां भी उत्कीर्ण की गयी हैं। छतरी के निर्माण के समय से ही इसमें [[अखंड ज्योति|अखण्ड ज्योति]] जलती आ रही है और भले ही इतिहासकार उनके शासन को कमजोर, प्रभावहीन और अनुल्लेखनीय मानते हों, स्थानीय लोगों में, 'मनोकामना पूर्ण करने वाले स्थान के रूप में' इस स्थल की मान्यता है।[https://web.archive.org/web/20130322153647/http://www.999rajasthan.com/main_desc.aspx?id=120S53] === बाहरी कड़ियाँ=== [https://hi.wikipedia.org/s/12t2] [https://web.archive.org/web/20140111072521/http://www.fusioncreation.com/msmsm-html/images-awards/Award-10-MaharajaSawaiIshwarisingh.jpg] [https://web.archive.org/web/20140618044524/http://www.indianetzone.com/22/history_rajasthan.htm] [https://web.archive.org/web/20140929040932/http://www.msmsmuseum.com/index.php] [https://web.archive.org/web/20140517132422/http://jaipurlove.com/] [https://web.archive.org/web/20111109001252/http://www.geni.com/#name=Maharaja Ishwari Singh] [http://books.google.co.in/books?id=O0oPIo9TXKcC&pg=PA230&lpg=PA230&dq=ishwari+singh+jaipur&source=bl&ots=yDavQJSZJr&sig=Jk5GVUCU2b1kRp5ePh01p4Ke4AY&hl=en&sa=X&ei=kiquU9T5D9OKuATQmICwBw&ved=0CJgBEOgBMBQ] [http://books.google.co.in/books?id=kmfxexeX3pIC&pg=PA45&lpg=PA45&dq=ishwari+singh+jaipur&source=bl&ots=Xoj24fSc9c&sig=i0wE_7QIynWloaiYEz9PRcMuPZg&hl=en&sa=X&ei=kiquU9T5D9OKuATQmICwBw&ved=0CJsBEOgBMBU] [http://books.google.co.in/books?id=gKOqA9lgtbwC&pg=PA139&lpg=PA139&dq=ishwari+singh+jaipur&source=bl&ots=vwSPSuJxpX&sig=sejBaL-R0P9COamzbwdJCrNbSVI&hl=en&sa=X&ei=kiquU9T5D9OKuATQmICwBw&ved=0CJ4BEOgBMBY] [http://books.google.co.in/books?id=lZw5RUWqvs4C&pg=PA1748&lpg=PA1748&dq=ishwari+singh+jaipur&source=bl&ots=fJsn4hbXXp&sig=s-9T8FIo9--dv-6vVqvmhqK9FDM&hl=en&sa=X&ei=kiquU9T5D9OKuATQmICwBw&ved=0CLEBEOgBMBk] [https://www.google.co.in/urlsa=t&rct=j&q=&esrc=s&source=web&cd=27&cad=rja&uact=8&ved=0CLQBEBYwGg&url=http%3A%2F%2Fdistrictcourts.nic.in%2Fecourts%2FRajasthan%2FJaipur%2520Metro%2Fdocs%2FHistory.htm&ei=kiquU9T5D9OKuATQmICwBw&usg=AFQjCNGUtzdzfxe0LdnZVwu3rPLU_0mBRA&sig2=uSKq-nivY3Rtp0LoeG7_7A]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }} === सन्दर्भ === {{टिप्पणीसूची}} {{श्रेणी: राजस्थान का इतिहास}} {{जयपुर के महाराजा}} [[श्रेणी:जयपुर के लोग]] [[श्रेणी:राजस्थान के महाराजा]] h0rj7r0i3zutwuido6702r641bktut2 वित्तीय लेखांकन 0 575608 6630419 6194560 2026-10-17T11:09:02Z SAGAR SURYAVANSHI JAITHAL 938876 वित्तीय लेखांकन लेख में इसके मुख्य घटक को प्रदर्शित करती एक प्रासंगिक तुलन पत्र की छवि और हिंदी विवरण जोड़ा 6630419 wikitext text/x-wiki {{लेखा}} [[चित्र:DWBA_DBS.jpg|अंगूठाकार|पाठ=लेखांकन के मानकों के अनुसार संपत्ति (Assets) और देनदारियों (Liabilities) को दर्शाने वाली एक विस्तृत बैलेंस शीट तालिका दिखाई दे रही है।|वित्तीय लेखांकन के अंतर्गत तैयार किए जाने वाले एक वित्तीय विवरण (तुलन पत्र या बैलेंस शीट) का वास्तविक उदाहरण।]] '''लेखाकन को वित्तीय सूचना को पहचानना मापना लिखना और सवलन करना कहा जा सकता है वित्तीय लेखांकन''' ({{lang-en|financial accounting}}) या '''वित्तीय लेखाकर्म''' ({{lang-en|financial accountancy}}) [[लेखाकरण|लेखांकन]] का वह क्षेत्र है जो निर्णय लेने वाले विभिन्न लोगों की सहायता के लिये [[वित्तीय विवरण]] तैयार करने से सम्बन्धित है। अंशधारक, आपूर्तिकर्ता, बैंक, कर्मचारी, सरकारी एजेंसियाँ उद्योग-स्वामी आदि के लिये यह उपयोगी होता है। == इन्हें भी देखें== *[[लागत लेखांकन]] [[श्रेणी:लेखांकन]] [[श्रेणी:वित्तीय लेखांकन|*]] {{आधार}} qanrm07xw6hzau6a6w8vikxw4aqnu87 गंध 0 610138 6630263 6398321 2026-10-16T16:23:22Z SM7 89247 [[गन्ध]] को अनुप्रेषित 6630263 wikitext text/x-wiki #पुनर्प्रेषित [[गन्ध]] mt8ps7g9rgv2jlse8u35bttgxcdfpre मेजर लीग सॉकर 0 610350 6630271 6514843 2026-10-16T16:58:32Z CommonsDelinker 743 "Major_League_Soccer_logo.svg" को हटाया। इसे कॉमन्स से [[commons:User:The Squirrel Conspiracy|The Squirrel Conspiracy]] ने हटा दिया है। कारण: Per https://www.copyright.gov/rulings-filings/review-board/docs/Major-League-Soccer-2014-Crest.pdf 6630271 wikitext text/x-wiki {{Infobox football league | name = मेजर लीग सॉकर | logo = | pixels = 200px | country = {{flagicon|USA}} [[संयुक्त राज्य अमेरिका]]<ref name=fraser/> <br /> {{flagicon|CAN}} [[कनाडा]]<ref name=fraser/> | confed = [[कोन्काकाफ]] | founded = १७ दिसंबर १९९३<ref>{{cite web |author=Simon Borg |url=http://www.mlssoccer.com/news/article/mls-celebrates-17th-anniversary-formal-debut |title=MLS celebrates 17th anniversary of formal debut |publisher=MLSsoccer.com |date=December 17, 2010 |accessdate=September 14, 2013 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अक्तूबर 2014|url-status=dead}}</ref> | mlscupchamps = [[लॉस एंजिल्स गैलेक्सी]] (५ ख़िताब) | mlscupseason = २०१४ | shieldchamps = [[सिएटल साउंडर्स एफसी]] (१) | shieldseason = २०१४ | most_mlscups = [[लॉस एंजिल्स गैलेक्सी]] (५ ख़िताब) | most_shields = [[डी.सी. यूनाइटेड]] &<br />[[लॉस एंजिल्स गैलेक्सी]] (४ ख़िताब) | website = {{URL|http://www.mlssoccer.com}} }} '''मेजर लीग सॉकर''', यह एक लोकप्रिय [[फुटबॉल]] लीग है।<ref name=philly-espnfs1mls>{{cite web|title=NBC to end MLS deal in 2015; ESPN, Fox pay $70 million per year for new rights package|url=http://www.philly.com/philly/blogs/thegoalkeeper/NBC-to-lose-MLS-rights-in-2015-ESPN-Fox-likely-to-share-new-deal.html|work=The Goalkeeper|publisher=Philly.com|accessdate=February 3, 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140114221044/http://www.philly.com/philly/blogs/thegoalkeeper/NBC-to-lose-MLS-rights-in-2015-ESPN-Fox-likely-to-share-new-deal.html|archive-date=14 जनवरी 2014|url-status=live}}</ref><ref name="John">{{cite news|title=Here’s more evidence that Americans are growing fond of soccer|url=http://qz.com/208672/heres-more-evidence-that-americans-are-growing-fond-of-soccer/#/h/68308,1/|accessdate=May 18, 2014|newspaper=Quartz|date=May 12, 2014|author=John McDuling|archive-url=https://web.archive.org/web/20140517021121/http://qz.com/208672/heres-more-evidence-that-americans-are-growing-fond-of-soccer/#/h/68308,1/|archive-date=17 मई 2014|url-status=live}}</ref><ref name="John" /><ref name=sbj-bigplay>{{cite web|title=MLS’s big play|url=http://www.sportsbusinessdaily.com/Journal/Issues/2014/05/12/Media/MLS-TV.aspx?_ga=1.45967076.1328930521.1404086578|website=''Sports Business Journal''|accessdate=June 30, 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140715015235/http://www.sportsbusinessdaily.com/Journal/Issues/2014/05/12/Media/MLS-TV.aspx?_ga=1.45967076.1328930521.1404086578|archive-date=15 जुलाई 2014|url-status=live}}</ref><ref name=nyt-newcontract>{{cite news|title=M.L.S. and TV Networks Reach Deal to Set Weekly Slots for Games|url=http://www.nytimes.com/2014/05/13/sports/soccer/mls-and-tv-networks-reach-deal-to-set-weekly-slots-for-games.html?_r=0|work=New York Times|accessdate=May 13, 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20141219044404/http://www.nytimes.com/2014/05/13/sports/soccer/mls-and-tv-networks-reach-deal-to-set-weekly-slots-for-games.html?_r=0|archive-date=19 दिसंबर 2014|url-status=live}}</ref><ref name=mls-newdeal2015>{{cite web|title=ESPN, Fox and Univision promise new emphasis to domestic game, MLS in landmark eight-year TV deal|url=http://www.mlssoccer.com/news/article/2014/05/12/espn-fox-and-univision-promise-new-emphasis-domestic-game-mls-landmark-eight|work=MLSsoccer.com|accessdate=May 13, 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140513163155/http://www.mlssoccer.com/news/article/2014/05/12/espn-fox-and-univision-promise-new-emphasis-domestic-game-mls-landmark-eight|archive-date=13 मई 2014|url-status=live}}</ref> यह कुल २० टीमों की लीग है, १७ [[संयुक्त राज्य अमेरिका]] में और ३ [[कनाडा]] मे।<ref name=fraser>{{cite court |litigants=Fraser v. Major League Soccer |vol=01 |reporter=F.3d |opinion=1296 |court=1st Cir. |date=2002 |url=http://caselaw.findlaw.com/us-1st-circuit/1441684.html}}</ref> ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} ==बाहरी कड़ियाँ== {{कॉमन्स|Major League Soccer|मेजर लीग सॉकर}} *{{Official website}} [[श्रेणी:फुटबॉल]] {{Sports-stub}} qcq9lbpb7k1ivctan4fn458rd3zw4sn कृषिक समाज 0 612343 6630413 6217157 2026-10-17T10:43:11Z SAGAR SURYAVANSHI JAITHAL 938876 कृषिक समाज के लेख में पारंपरिक कृषि परिदृश्य को दर्शाती प्रासंगिक छवि और हिंदी कैप्शन जोड़ा 6630413 wikitext text/x-wiki [[चित्र:Cambodia_buffaloes_in_paddy_fields.jpg|अंगूठाकार|पाठ=एक ग्रामीण परिदृश्य जहाँ एक किसान पानी से भरे धान के खेत में हल चलाने के लिए दो पानी वाली भैंसों का उपयोग कर रहा है, और पृष्ठभूमि में घने पेड़ दिखाई दे रहे हैं।|कंबोडिया के अंकोर क्षेत्र में धान के खेत की जुताई करते पारंपरिक किसान और भैंस।]] एक '''कृषि समाज''', कोई भी समुदाय है जिसकी [[अर्थव्यवस्था]] [[फ़सल|फसलों]] और [[खेत|कृषि भूमि]] के उत्पादन और रखरखाव पर आधारित है। एक कृषि प्रधान समाज को परिभाषित करने का एक अन्य तरीका यह देखना है कि देश का कुल उत्पादन [[कृषि]] में कितना है। एक कृषि प्रधान समाज में, भूमि पर खेती करना [[धन]] का प्राथमिक स्रोत है। ऐसा समाज आजीविका के अन्य साधनों और काम की आदतों को स्वीकार कर सकता है लेकिन कृषि और खेती के महत्व पर जोर देता है। 10,000 साल पहले तक कृषि समाज दुनिया के विभिन्न हिस्सों में मौजूद थे और आज भी मौजूद हैं। अधिकांश दर्ज मानव इतिहास के लिए वे [[सामाजिक आर्थिक स्थिति|सामाजिक-आर्थिक]] संगठन का सबसे सामान्य रूप रहे हैं। == इतिहास == कृषि समाज से पहले [[शिकारी-फ़रमर|शिकारी और संग्राहक]] और [[उद्यान विज्ञान|बागवानी समाज]] और [[औद्योगिक समाज]] में संक्रमण हुआ था। नवपाषाण क्रांति कहे जाने वाले कृषि में परिवर्तन स्वतंत्र रूप से कई बार हुआ है। [[मध्य पूर्व]] के [[उर्वर अर्धचंद्र|उर्वर वर्धमान क्षेत्र]] में 10,000 और 8,000 साल पहले मनुष्यों के बीच बागवानी और कृषि का विकास हुआ।<ref>जॉनसन, ए.डब्ल्यू. 2000. मानव समाज का विकास, 15-16।</ref>कृषि के विकास के कारणों पर बहस हुई है लेकिन इसमें [[जलवायु परिवर्तन]] और प्रतिस्पर्धात्मक [[उपहार|उपहार देने]] के लिए खाद्य अधिशेष का संचय शामिल हो सकता है।<ref>ब्राउन, डी.ई. 1988. पदानुक्रम, इतिहास और मानव प्रकृति, 27।</ref> निश्चित रूप से एक लंबी अवधि के बाद शिकारी-संग्रहकर्ता से कृषि अर्थव्यवस्थाओं में एक क्रमिक संक्रमण हुआ था जब कुछ फसलों को जानबूझकर लगाया गया था और अन्य खाद्य पदार्थों को जंगली से इकट्ठा किया गया था। उपजाऊ वर्धमान में खेती के उद्भव के अलावा, कृषि दिखाई दी: [[पूर्वी एशिया]] ([[चावल]]) में कम से कम 6,800 ईसा पूर्व और बाद में, मध्य और दक्षिण अमेरिका ([[मक्का (अनाज)|मक्का]] और [[स्क्वैश (पौधा)|स्क्वैश]]) में। भारत (चावल) और दक्षिण पूर्व एशिया ([[अरबी सब्जी|तारो]]) में शुरुआती नवपाषाण संदर्भों में छोटे पैमाने की कृषि भी स्वतंत्र रूप से उत्पन्न हुई।<ref>जॉनसन, ए.डब्ल्यू. 2000. द एवोल्यूशन ऑफ ह्यूमन सोसाइटीज, 53।</ref> हालांकि, घरेलू फसलों और जानवरों पर पूर्ण निर्भरता, जब वन्य संसाधनों ने आहार में पोषक रूप से महत्वहीन घटक का योगदान दिया, [[कांस्य युग]] तक नहीं हुआ। कृषि [[जनसंख्या घनत्व|आबादी के बहुत अधिक घनत्व]] की अनुमति देती है, जो शिकार और एकत्रीकरण द्वारा समर्थित हो सकती है और सर्दियों के उपयोग के लिए या लाभ के लिए बेचने के लिए अतिरिक्त उत्पाद के संचय की अनुमति देती है। बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को खिलाने की किसानों की क्षमता, जिनकी गतिविधियों का भौतिक उत्पादन से कोई लेना-देना नहीं है, अधिशेष, विशेषज्ञता, उन्नत तकनीक, [[पदानुक्रम|पदानुक्रमित]] सामाजिक संरचनाओं, असमानता और स्थायी सेनाओं के उदय में महत्वपूर्ण कारक थे। कृषि समाज इस प्रकार एक अधिक जटिल [[सामाजिक संरचना]] के उद्भव का समर्थन करते हैं। कृषक समाजों में, सामाजिक जटिलता और पर्यावरण के बीच कुछ सरल संबंध गायब होने लगते हैं। एक विचार यह है कि इस तकनीक के साथ मानव ने अपने पर्यावरण को नियंत्रित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है, उन पर कम निर्भर हैं, और इसलिए पर्यावरण और प्रौद्योगिकी से संबंधित गुणों के बीच कम संबंध दिखाते हैं।<ref>लैंग्लॉइस, एस. 2001. ट्रेडिशन्स: सोशल, 15831.</ref> एक अलग दृष्टिकोण यह है कि जैसे-जैसे समाज बड़ा होता जाता है और माल और लोगों की आवाजाही सस्ती होती जाती है, वे अपनी सीमाओं और व्यापार प्रणाली के भीतर पर्यावरणीय भिन्नता की बढ़ती हुई सीमा को शामिल करते हैं।<ref>थॉम्पसन, पॉल बी। 2010। द एग्रेरियन विजन, 10।</ref> लेकिन पर्यावरणीय कारक अभी भी चर के रूप में एक मजबूत भूमिका निभा सकते हैं जो आंतरिक संरचना और समाज के इतिहास को जटिल तरीकों से प्रभावित करते हैं। उदाहरण के लिए, कृषि प्रधान राज्यों का औसत आकार परिवहन की आसानी पर निर्भर करेगा, प्रमुख शहर व्यापार स्थलों पर स्थित होंगे, और किसी समाज का जनसांख्यिकीय इतिहास रोग प्रकरणों पर निर्भर हो सकता है। हाल के दशकों तक, खेती में संक्रमण को स्वाभाविक रूप से प्रगतिशील के रूप में देखा गया था: लोगों ने सीखा कि बीज बोने से फसलें बढ़ती हैं, और इस नए बेहतर खाद्य स्रोत के कारण बड़ी आबादी, गतिहीन खेत और शहर का जीवन, अधिक अवकाश का समय और इसलिए विशेषज्ञता प्राप्त हुई , लेखन, तकनीकी विकास और [[सभ्यता]]। अब यह स्पष्ट हो गया है कि उस जीवन शैली के कुछ नुकसानों के बावजूद कृषि को अपनाया गया था। पुरातत्व अध्ययनों से पता चलता है कि [[अनाज]] की कृषि को अपनाने वाली आबादी में स्वास्थ्य बिगड़ गया, केवल आधुनिक समय में पूर्व-कृषि स्तर पर लौट आया। यह भीड़-भाड़ वाले शहरों में [[संक्रमण]] के प्रसार के कारण आंशिक रूप से है, लेकिन मोटे तौर पर आहार की गुणवत्ता में गिरावट के कारण है जो गहन अनाज की खेती के साथ है।<ref>कोहेन, एम.एन. 1989. स्वास्थ्य और सभ्यता का उदय, 67-75।</ref> दुनिया के कई हिस्सों में लोग अभी हाल तक शिकारी-संग्रहकर्ता बने रहे; हालाँकि वे कृषि के अस्तित्व और तरीकों से काफी परिचित थे, फिर भी उन्होंने इसे करने से मना कर दिया। कई स्पष्टीकरण पेश किए गए हैं, आमतौर पर एक विशेष कारक के आसपास केंद्रित होते हैं जो कृषि को अपनाने के लिए मजबूर करते हैं, जैसे कि पर्यावरण या जनसंख्या का दबाव। आय का मुख्य स्रोत खेती और किसानी थी। == आधुनिक दुनिया में == कृषि समाज [[औद्योगिक समाज|औद्योगिक समाजों]] में परिवर्तित हो जाते हैं जब उनकी आधी से कम आबादी सीधे कृषि उत्पादन में लगी होती है। इस तरह के समाज [[वाणिज्यिक क्रांति|वाणिज्यिक]] और [[औद्योगिक क्रांति]] के कारण दिखाई देने लगे, जिसे [[भूमध्यसागरीय]] [[नगर-राज्य|शहर-राज्यों]] में 1000 से 1500 CE तक देखा जा सकता है।<ref>रेनफ्रू, सी. (एड.) 1993. द एक्सप्लेनेशन ऑफ कल्चर चेंज, 80-93।</ref> जैसा कि [[मध्ययुग|मध्य युग]] के दौरान यूरोपीय समाजों का विकास हुआ, शास्त्रीय ज्ञान को बिखरे हुए स्रोतों से पुनः प्राप्त किया गया, और समुद्री वाणिज्यिक समाजों की एक नई श्रृंखला यूरोप में फिर से विकसित हुई। प्रारंभिक विकास उत्तरी इटली में, [[वेनिस]], [[फ़्लोरेन्स|फ्लोरेंस]], [[मिलान]] और [[जेनोआ]] के शहर-राज्यों में केंद्रित थे। लगभग 1500 तक इनमें से कुछ शहर-राज्यों ने संभवतः अपनी आधी आबादी को गैर-कृषि गतिविधियों में संलग्न होने की आवश्यकताओं को पूरा किया और वाणिज्यिक समाज बन गए। ये छोटे राज्य अत्यधिक शहरीकृत थे, बहुत अधिक भोजन का आयात करते थे, और विशिष्ट कृषि समाजों के विपरीत एक हद तक व्यापार और निर्माण के केंद्र थे। चरम विकास, अभी भी प्रगति पर था, औद्योगिक प्रौद्योगिकी का विकास था, उत्पादन समस्याओं की बढ़ती संख्या के लिए ऊर्जा के यांत्रिक स्रोतों का अनुप्रयोग। लगभग 1800 तक, ब्रिटेन की कृषि आबादी कुल का लगभग एक तिहाई हो गई थी।<ref>प्रायर, एफ.एल., 2006, द एडॉप्शन ऑफ एग्रीकल्चर, 879-97।</ref> 19वीं शताब्दी के मध्य तक, [[पश्चिमी यूरोप]] के सभी देशों, साथ ही [[संयुक्त राज्य अमेरिका]] में उनकी आधी से अधिक आबादी गैर-कृषि व्यवसायों में थी।<ref>जॉनसन, एडब्ल्यू 2000। द एवोल्यूशन ऑफ ह्यूमन सोसाइटीज, 187।</ref> आज भी, औद्योगिक क्रांति पूरी तरह से कृषिवाद को उद्योगवाद से बदलने से दूर है। दुनिया की आबादी का केवल एक अल्पसंख्यक आज औद्योगिक समाजों में रहता है, हालांकि ज्यादातर मुख्य रूप से कृषि समाजों में एक महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र है। [[पादप प्रजनन|फसल प्रजनन]] के उपयोग, मिट्टी के पोषक तत्वों के बेहतर प्रबंधन और बेहतर खरपतवार नियंत्रण से प्रति इकाई क्षेत्र में पैदावार में काफी वृद्धि हुई है। साथ ही [[मशीनीकरण]] के प्रयोग से श्रम लागत में कमी आई है। विकासशील दुनिया आम तौर पर कम पैदावार पैदा करती है, जिसमें नवीनतम विज्ञान, पूंजी और प्रौद्योगिकी का आधार कम होता है। दुनिया में अधिक लोग किसी अन्य गतिविधि की तुलना में अपनी प्राथमिक आर्थिक गतिविधि के रूप में कृषि में शामिल हैं, फिर भी यह दुनिया के [[सकल घरेलू उत्पाद]] का केवल चार प्रतिशत है।<ref>थॉम्पसन, पॉल बी। 2010। द एग्रेरियन विजन, 23।</ref> 20वीं शताब्दी में मशीनीकरण के तेजी से विकास, विशेष रूप से [[ट्रैक्टर]] के रूप में, ने [[बुआई|बुवाई]], [[कटाई]] और [[मड़ाई|थ्रेशिंग]] के मांगलिक कार्यों को करने वाले मनुष्यों की आवश्यकता को कम कर दिया। मशीनीकरण के साथ, इन कार्यों को तेजी से और बड़े पैमाने पर किया जा सकता है जिसकी पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। इन अग्रिमों के परिणामस्वरूप कृषि तकनीकों की उपज में पर्याप्त वृद्धि हुई है, जिसने विकसित देशों में आबादी के प्रतिशत में गिरावट का भी अनुवाद किया है, जो कि बाकी आबादी को खिलाने के लिए कृषि में काम करने के लिए आवश्यक हैं। == जनसांख्यिकी == कृषि प्रौद्योगिकी के मुख्य जनसांख्यिकीय परिणाम उच्च जनसंख्या घनत्व और बड़ी बस्तियों की ओर रुझान की निरंतरता थे। उत्तरार्द्ध शायद पूर्व की तुलना में कृषि प्रौद्योगिकी का अधिक सुरक्षित परिणाम है। सिद्धांत रूप में [[पशुधन]] भोजन के लिए मनुष्यों के साथ प्रतिस्पर्धा करता है और कुछ वातावरणों में, कृषि तकनीकों की तुलना में उन्नत बागवानी तकनीकें प्रति वर्ग किलोमीटर अधिक लोगों का समर्थन कर सकती हैं।<ref>प्रायर, एफ. एल., 2006, द एडॉप्शन ऑफ एग्रीकल्चर, 896।</ref> औसत घनत्व के अलावा, कृषि प्रौद्योगिकी ने दो कारणों से बागवानी के तहत आबादी के शहरीकरण की तुलना में अधिक हद तक अनुमति दी। सबसे पहले, कृषि प्रौद्योगिकी के साथ बस्तियों का आकार बढ़ा क्योंकि अधिक उत्पादक किसानों ने शहरी विशिष्ट व्यवसायों के लिए अधिक लोगों को मुक्त किया। दूसरा, भूमि और समुद्री परिवहन सुधारों ने 1,000,000 के बड़े शहरों, साथ ही [[रोम]], [[बग़दाद|बगदाद]] और चीनी राजधानी शहरों जैसे निवासियों को आपूर्ति करना संभव बना दिया। उदाहरण के लिए, रोम [[सिसिली]], [[उत्तर अफ़्रीका|उत्तरी अफ्रीका]], [[मिस्र]] और दक्षिणी फ्रांस से अनाज और अन्य थोक कच्चे माल प्राप्त कर सकता था, ताकि आधुनिक मानकों के हिसाब से भी बड़ी आबादी को बनाए रखा जा सके। इसके लिए [[भूमध्य सागर]] पर समुद्री परिवहन की आवश्यकता थी।<ref>बार्थ, एफ. 2001. एग्रेरियनिज्म के तहत व्यक्ति और समाज की विशेषताएं, 53-54, 57।</ref> यह श्रम की प्रति इकाई उत्पादकता और कृषि प्रौद्योगिकी की परिवहन दक्षता में सुधार है जिसका कृषि समाजों की अधिक परिधीय संस्कृति मूल विशेषताओं पर व्यापक प्रभाव पड़ा। [[अकाल]], रोग महामारी और राजनीतिक व्यवधान के कारण कृषि समाजों की आबादी धीरे-धीरे बढ़ती प्रवृत्ति रेखा के आसपास ऐतिहासिक रूप से उतार-चढ़ाव करती रही है। कम से कम उच्च बिंदुओं पर, जनसंख्या घनत्व अक्सर उस स्तर से अधिक प्रतीत होता है जिस पर सभी को प्रौद्योगिकी के वर्तमान स्तरों पर उत्पादक रूप से नियोजित किया जा सकता है।<ref>प्रायर, एफ.एल., 2006, द एडॉप्शन ऑफ एग्रीकल्चर, 879-97।</ref> ==इन्हें भी देखें== *[[औद्योगिक समाज]] *[[पश्च-औद्योगिक समाज]] *[[टेक्नोट्रॉनिक समाज]] *[[ज्ञान समाज]] [[श्रेणी:समाज]] qnf6sc1lr3owqo3g0fra7zb3i84gzq4 जुबिन गर्ग 0 646033 6630241 6596291 2026-10-16T14:07:29Z ~2026-55392-45 954018 /* */ 6630241 wikitext text/x-wiki {{Infobox musical artist | bgcolour = lightgray | name = जुबिन गर्ग | image = File:Zubin Garg Live performance (cropped).jpg | caption = २०२५ में जुबिन गर्ग | image_size = 300px | birth_date = {{Birth date|1972|11|18}} | background = solo_singer | birth_name = जुबिन बरठाकुर | alias = {{hlist|गोल्डी<ref>{{cite web|last=Goswami|first=Darshana|title=The wonder boy called Goldie|website=Thumbprint 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[[राजबंशी भाषा|राजबंशी]] (कमतापुरी/गोलपारिया), चाय बागानी भाषा, हाजोंग, मिशिंग, [[कार्बी भाषा|कार्बी]], [[गारो भाषा|गारो]], राभा, डिमासा, आहोम, देउरी, [[नेपाली]], [[भोजपुरी]], विष्णुप्रिया मणिपुरी, [[ककबरक]], [[उड़िया]], [[तमिल]], [[तेलुगु]], [[कन्नड़]], [[अंग्रेजी]], [[मलयालम]], [[मराठी]], [[संस्कृत]], [[सिन्धी]], [[उर्दू]] आदि अनेक भाषाओं में गीत गाए।<ref name="onlinesivasagar" /> १९९२ में जुबिन का पहला एल्बम ''अनामिका'' प्रकाशित हुआ,<ref name="futuresounds1">{{cite web | url=http://www.futuresounds.in/store/anamika/ | title=About Zubeen's debut album Anamika at futuresounds.com | publisher=futuresounds.com | accessdate= 4 September 2015}}</ref> जिसके बाद वे पेशेवर संगीत जगत से जुड़ गए।<ref name="onlinesivasagar">{{cite web | url=http://onlinesivasagar.com/music/zubeen-garg.html | title=About Zubeen Garg in Onlinesivasagar.com | publisher=onlinesivasagar.com | work=Abhijit Borah | accessdate=19 January 2013 | archive-date=7 जून 2009 | archive-url=https://web.archive.org/web/20090607014040/http://onlinesivasagar.com/music/zubeen-garg.html | url-status=dead }}</ref> बंगाली फिल्म ''शुधु तुमि'' के लिए उन्होंने 2005 में श्रेष्ठ संगीत निर्देशक का पुरस्कार जीता।<ref name="onlinesivasagar" /> [[हिन्दी फिल्म]] ''गैंगस्टर'' के गीत ''या अली'' के लिए उन्हें 2006 में ''ग्लोबल इंडियन फिल्म अवार्ड (GIFA)'' तथा ''स्टारडस्ट अवार्ड'' में ''श्रेष्ठ पार्श्व गायक (पुरुष)'' का पुरस्कार मिला। इसके अलावा ''Echoes of Silence'' (अंग्रेज़ी-खासी) फिल्म के लिए उन्हें [[राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार|राष्ट्रीय पुरस्कार (रजत कमल)]] से सम्मानित किया गया।<ref name="gomolo">{{cite web | url=http://www.gomolo.com/awards-won-by-zubeen-garg/6236 | title=Awards won by Zubeen Garg | publisher=gomolo.com | accessdate=4 September 2015 | archivedate=8 October 2015 | archiveurl=https://web.archive.org/web/20151008042606/http://www.gomolo.com/awards-won-by-zubeen-garg/6236 | deadurl=yes }}</ref> आधुनिक असमिया संगीत में नई धारा लाने के लिए 2014 में उन्हें रेनेसां असम पुरस्कार प्रदान किया गया।<ref name="amarasom">{{cite web | title=जुबिन गर्ग को रेनेसां असम पुरस्कार | publisher=आमार असम | date=13 March 2015 | accessdate=14 March 2015}}</ref> 27 मई 2024 को [[मेघालय]] विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने उन्हें मानद (डी.लिट.) की उपाधि दी। 2025 में बेलतला बोहागी उत्सव समिति ने उन्हें आजीवन साधना हेतु [[भूपेन हजारिका]] पुरस्कार प्रदान किया। जुबिन गर्ग एक बहु-वाद्य वादक भी थे। वे [[ढोल]], दोतारा, [[गिटार]], हारमोनिका, [[हारमोनियम]], मैंडोलिन, [[कीबोर्ड]], [[तबला]] और अन्य पर्कशन वाद्य बजाते थे।<ref>{{cite news|url=http://www.assamspider.com/resources/2469-Profile-Zubin-Garg-Singer-Music-composer.aspx|title=Profile of Zubeen Garg – Singer, Music composer of Assam|work=assamspider.com|access-date=30 April 2017|archive-date=4 July 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170704073945/http://www.assamspider.com/resources/2469-Profile-Zubin-Garg-Singer-Music-composer.aspx|url-status=dead}}</ref> वे असम के सर्वाधिक पारिश्रमिक प्राप्त करने वाले गायकों में से एक थे।<ref>{{Cite web|date=16 April 2017|title=Barred from singing in Hindi, Assam singer leaves Bihu stage|url=https://indianexpress.com/article/cities/guwahati/zubeen-garg-noonmati-bihu-sanmilan-stopped-from-singing-hindi-song-assam-top-singer-quits-bihu-stage-with-an-abuse-4614435/|url-access=limited|access-date=19 December 2020|website=The Indian Express|language=en}}</ref><ref>{{Cite web|date=19 September 2025|title=Zubeen Garg, Assamese superstar and voice of a generation, dies in Singapore scuba diving accident|url=https://indianexpress.com/article/india/zubeen-garg-assamese-singer-dies-in-singapore-during-seizure-while-swimming-accident-10259381/|access-date=19 September 2025|website=The Indian Express|language=en}}{{Dead link|date=October 2025 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref> लगभग 33 वर्षों के करियर में उन्होंने 40 भाषाओं में 38,000 से अधिक गीत रिकॉर्ड किए।<ref>{{cite news|title=Thousands of fans bid adieu to Zubeen at Guwahati stadium|url=https://www.thehindu.com/entertainment/music/singer-zubeen-gargs-body-arrives-at-guwahati-airport-thousands-gather-to-get-last-glimpse/article70076293.ece|access-date=23 September 2025|work=[[The Hindu]]|date=21 September 2025|language=en-IN}}</ref><ref>{{cite news|last1=Deb|first1=Abhijit|title=From 'Anamika' to 'Ya Ali': Zubeen Garg, a man of many emotions, bids farewell|url=https://www.thestatesman.com/entertainment/from-anamika-to-ya-ali-zubeen-garg-a-man-of-many-emotions-bids-farewell-1503488612.html|access-date=23 September 2025|work=[[The Statesman (India)|The Statesman]]|date=19 September 2025|language=en}}</ref> २० सितंबर २०२५ को सिंगापुर में जुबिन गर्ग का निधन हो गया। ==निजी जीवन== गर्ग का जन्म असमिया ब्राह्मण परिवार में तुरा, मेघालय में मोहिनी मोहन बोरठाकुर और स्वर्गीय इली बोरठाकुर के घर हुआ था। उनका नाम संगीतकार [[जुबिन मेहता]] के नाम पर रखा गया था।<ref>{{cite news |last1=पराशर |first1=उत्पल |title='इन ब्राह्मणों को मार दिया जाना चाहिए', असम के गायक जुबीन गर्ग ने कहा; दर्ज मामले |url=https://www.hindustantimes.com/india-news/these-brahmins-should-be-killed-says-assam-singer-zubeen-garg-cases-filed/story-QgaKOmiMcqiCEhzOc8K29O.html |access-date=12 अप्रैल 2022 |work=हिंदुस्तान टाइम्स |date=29 जुलाई 2019 }}</ref><ref>{{Cite web |title=जब आप 'जुबीन गर्ग पूरा नाम' खोजते हैं तो Google मुस्लिम नाम दिखाता है |url=https://www.pratidintime.com/latest-assam-news-breaking-news-assam/google-shows-muslim-name-when-you-search-zubeen-garg-full-name |access-date=20 अगस्त 2022 |work=प्रतिदिन समय |date=28 अप्रैल 2020}}</ref> और अपने गोत्र ''गर्ग'' को अपने उपनाम के रूप में इस्तेमाल किया।<ref>{{Cite web |title=जुबीन गर्ग, लोकप्रिय असमिया गायक जुबीन गर्ग |url=https://www.indiaonline.in/about/personalities/singers/zubeen-garg |access-date=20 August 2022 |website=www.indiaonline.in |archive-date=20 अगस्त 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220820091745/https://www.indiaonline.in/about/personalities/singers/zubeen-garg |url-status=dead }}</ref> उनके पिता मोहिनी बोरठाकुर एक मजिस्ट्रेट थे,<ref name=":0" /> और ''कपिल ठाकुर''<ref name="जोंगकी"/> नाम से एक गीतकार और कवि हैं और उनकी मां स्वर्गीय इली बोरठाकुर एक गायिका थीं।<ref name=":0">{{Cite web |title=rediff.com: गैंगस्टर की या अली के पीछे की आवाज |url=http://specials.rediff.com/movies/2006/aug/07sd2.htm |access-date=20 अगस्त 2022 |website=specials.rediff.com}}</ref><ref name=":1">{{Cite web |date=14 मई 2017 |title=संगीत की भाषा |url=https://indianexpress.com/article/lifestyle/art-and-culture/the-language-of-music-4654378/ |access-date=20 अगस्त 2022 |website=द इंडियन एक्सप्रेस |language=en}}</ref> गर्ग की छोटी बहन जोंगकी बोरठाकुर एक अभिनेत्री और गायिका थीं, जिनकी 12 जनवरी 2002 में सोनितपुर जिले में एक कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी, जब वे अपने सह-कलाकारों के साथ स्टेज शो करने जा रही थीं।<ref name="Jongki">{{cite news | url=http://www.nenanews.com/NEE%20Feb.7-21,%2002/oh11.htm | title=जोंगकी बरठाकुर की कार दुर्घटना में मृत्यु | work=नॉर्थ ईस्ट न्यूज एजेंसी | date=21 फरवरी 2002 | archive-url=https://web.archive.org/web/20130313031027/http://www.nenanews.com/NEE%20Feb.7-21,%2002/oh11.htm |archive-date=13 March 2013 |access-date=19 January 2013}}</ref> उन्होंने 2002 में जोन्की बोरठाकुर की याद में एल्बम ''शिशु'' रिलीज़ किया था।<ref name=":1" /><ref name="Jongki" /> उनकी एक और बहन डॉ. पाल्मे बोरठाकुर हैं।<ref>{{Cite web |date=4 March 2020 |title="ज़ुबीन गर्ग अभी भी आईसीयू में हैं, लेकिन उनकी हालत काफी बेहतर है और वे ठीक हो रहे हैं," बहन डॉ. पाल्मे बोरठाकुर ने कहा |url=https://www.bollywoodbubble.com/bollywood-news/zubeen-garg-health-update/ |access-date=20 अगस्त 2022 |website=बॉलीवुड बबल |language=en}}</ref> गर्ग ने तमुलपुर हायर सेकेंडरी स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की और फिर बी. बोरूआ कॉलेज से विज्ञान स्नातक की डिग्री हासिल की<ref name=":0" /> लेकिन अपने गायन करियर पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी।<ref>{{Cite web |last=Rajkumar |first=Ankan |date=10 October 2019 |title=जुबीन की 'कंचनजंघा': बिना किसी कारण के विद्रोही |url=http://nenow.in/north-east-news/assam/zubeens-kanchanjangha-a-rebel-without-a-cause.html |access-date=20 August 2022 |website=NORTHEAST NOW |language=en-US}}</ref> गर्ग ने 4 फरवरी 2002 को असम के गोलाघाट की फैशन डिजाइनर गरिमा सैकिया से शादी की।<ref>{{cite web| url=https://thenortheasttoday.com/assam-zubeen-to-celebrate-his-birthday-by-releasing-music-album-of-mission-china/| title=असम: जुबीन गर्ग 'मिशन चाइना' का म्यूजिक एल्बम जारी करके अपना जन्मदिन मनाएंगे!| Publisher=thenortheasttoday.com| access-date=8 सितंबर 2017| archive-date=23 मई 2017| archive-url=https://web.archive.org/web/20170523122714/http://thenortheasttoday.com/assam-zubeen-to-celebrate-his-birthday-by-releasing-music-album-of-mission-china/| url-status=live}}</ref> गर्ग खुद को अधार्मिक मानते हैं और कहते हैं कि उनका कोई [[हिंदू धर्म में जाति व्यवस्था|जाति]] या [[धर्म]] नहीं है।<ref>{{cite news |title=मेरी कोई जाति, धर्म या भगवान नहीं है: जुबीन गर्ग |url=https://m.guwahatiplus.com/article/i-don-t-have-any-caste-religion-or-god-zubeen-garg/5862/amp#amp_tf=From%20%251%24s&aoh=17141538671889&referrer=https%3A%2F%2Fwww.google.com |work=गुवाहाटी प्लस |date=29 जुलाई 2019 |access-date=27 अप्रैल 2024 |archive-date=26 अप्रैल 2024 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240426180152/https://m.guwahatiplus.com/article/i-don-t-have-any-caste-religion-or-god-zubeen-garg/5862/amp#amp_tf=From%20%251%24s&aoh=17141538671889&referrer=https%3A%2F%2Fwww.google.com |url-status=dead }}</ref> 27 अगस्त को 2024, जुबीन गर्ग को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेघालय द्वारा डॉक्टर ऑफ लिटरेचर (डी. लिट.) की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।<ref>{{Cite web |title=माननीय डी. लिट. 10वें यूएसटीएम दीक्षांत समारोह में जुबीन गर्ग और लू माजॉ को सम्मानित किया गया – यूएसटीएम |url=https://ustm.ac.in/event/hon-d-litt-to-zubeen-garg-and-lou-majaw-at-10th-ustm-convocation/ |access-date=27 अगस्त 2024 |language=en-US}}</ref><ref>{{Cite web |last=Time |first=Pratidin |date=27 अगस्त 2024 |title=USTM ने 10वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया, जुबीन गर्ग और लू माजॉ को सम्मानित किया |url=https://www.pratidintime.com/north-east/meghalaya/ustm-holds-10th-convocation-honors-zubeen-garg-and-lou-majaw |access-date=27 अगस्त 2024 |website=Pratidin Time |language=en}}</ref> ==संगीतमय जीवन की शुरुआत== गर्ग ने तीन साल की उम्र से ही गाना शुरू कर दिया था।<ref>{{Cite news |title=जुबीन एक जन्मजात गायक हैं - टाइम्स ऑफ इंडिया |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/zubeen-is-a-born-singer/articleshow/2480292.cms |access-date=24 October 2022 |website=The Times of India |date=23 October 2007 |language=en}}</ref> उनकी पहली गुरु उनकी माँ थीं, जहाँ से उन्होंने गाना सीखा और फिर उन्होंने पंडित रॉबिन बनर्जी से 11 साल तक तबला सीखा।<ref name=":0" /> गुरु रमानी राय ने उन्हें असमिया लोक से परिचित कराया।<ref>{{Cite web |title=द ट्रिब्यून, चंडीगढ़, भारत - द ट्रिब्यून लाइफस्टाइल |url=https://www.tribuneindia.com/2012/20120725/ttlife1.htm |access-date=24 October 2022 |website=www.tribuneindia.com}}</ref><ref name=":2">{{Cite web |title=Singing in blood and composing is a little extension Zubeen Garg |url=https://www.indiaforums.com/article/singing-in-blood-and-composing-is-a-little-extension-zubeen-garg_6587 |access-date=20 August 2022 |website=India Forums |language=en}}</ref> गर्ग अपने स्कूल के दिनों से ही गीतों की रचना कर रहे थे और गायकों को गाने के लिए देते थे। ==गायन करियर== ===1992-1995: गायन करियर की शुरुआत=== गर्ग को एक पेशेवर गायक बनने का आत्मविश्वास तब मिला जब उन्होंने 1992 में आयोजित युवा महोत्सव में अपने पश्चिमी एकल प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदक जीता।<ref>{{Cite web |title=जुबीन गर्ग, लोकप्रिय असमिया गायक जुबीन गर्ग |url=https://www.indiaonline.in/about/personalities/singers/zubeen-garg |access-date=24 October 2022 |website=www.indiaonline.in |archive-date=20 अगस्त 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220820091745/https://www.indiaonline.in/about/personalities/singers/zubeen-garg |url-status=dead }}</ref> और इसके बाद उन्होंने अपने पहले असमिया एल्बम ''अनामिका'' के साथ पेशेवर संगीत में प्रवेश किया, जिसे नवंबर 1992 में रिलीज़ किया गया था।<ref name="futuresounds">{{cite web | url=http://www.futuresounds.in/store/anamika/ | title=जुबीन की पहली एल्बम अनामिका(অনামিকা) के बारे में futuresounds.com पर | Publisher=futuresounds.com | access-date=4 सितंबर 2015 | archive-date=5 अक्टूबर 2015 | archive-url=https://web.archive.org/web/20151005084005/http://www.futuresounds.in/store/anamika/ | url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |date=20 July 2022 |title=या अली गायक जुबीन गर्ग सिर में चोट लगने के बाद डिब्रूगढ़ के अस्पताल में भर्ती |url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/music/singer-zubeen-garg-hospitalised-in-dibrugarh-after-head-injury-101658304241201.html |access-date=20 August 2022 |website=Hindustan Times |language=en}}</ref><ref name="1"/> गर्ग के पहले रिकॉर्ड किए गए गाने ''"तुमी जुनू परिबा हुन"'' थे<ref>{{Citation |last=Hungama |title=तुमी जन परिबा सुन |url=https://www.hungama.com/song/tumi-jana-pariba-sun/2391720/ |language=en |access-date=5 December 2022}}</ref> और ''"तुमी जुनाकी हुबाख"''<ref>{{उद्धरण |last=Hungama |title=तुमी जुनाकी सुभाष |url=https://www.hungama.com/song/tumi-junaki-subhash/2391722/ |language=en |access-date=5 December 2022}}</ref> एल्बम ''रितु'' के लिए लेकिन 1993 में रिलीज़ किया गया था। एक गीतकार और संगीतकार के रूप में उनका पहला योगदान असमिया एल्बम ''अनुराधा'' में था, जिसे बॉलीवुड भक्ति गायक [[अनुराधा पौडवाल]] और उत्पल शर्मा ने गाया था, जो अक्टूबर 1993 में रिलीज़ हुआ था, इस प्रकार यह पहला एल्बम था जिसमें उन्होंने कोई स्वर नहीं दिया था।<ref>{{cite web|url=https://www.discogs.com/release/37402122-Anuradha-Paudwal-Utpal-Sharma-Anuradha|title=अनुराधा पौडवाल, उत्पल शर्मा – अनुराधा|trans-title=Anuradha Paudwal, Utpal Sharma – Anuradha|archive-url=https://web.archive.org/web/20260521121259/https://www.discogs.com/release/37402122-Anuradha-Paudwal-Utpal-Sharma-Anuradha|date=21 May 2026|archive-date=21 May 2026|website=Discogs}}</ref><ref>{{cite web|title=अनुराधा रोमांटिक असमिया कैसेट #utpolsharma #anuradhapaudwal #zubeengarg #assamesesong|trans-title=ANURADHA Romantic Assamese Cassette #utpolsharma #anuradhapaudwal #zubeengarg #assamesesong|archive-url=https://web.archive.org/web/20260521121922/https://www.youtube.com/watch?v=sDRG5hY9pIA|url=https://www.youtube.com/watch?v=sDRG5hY9pIA|archive-date=21 May 2026|website=YouTube}}</ref> उन्होंने कई अन्य एल्बम जारी किए जैसे ''सपुनर सुर'' (1992), ''जुनाकी मन'' (1993), ''माया'' (1994), ''आशा'' (1995) इत्यादि। 1995 में मुंबई आने से पहले, उन्होंने अपना पहला बिहू एल्बम ''उजान पिरिति'' जारी किया जो व्यावसायिक रूप से सफल रहा। उन्होंने कई अन्य एल्बम जारी किए जैसे ''सपुनर सुर'' (1992), ''जुनाकी मोन'' (1993), ''माया'' (1994), ''आशा'' (1995) इत्यादि। 1995 में मुंबई आने से पहले, उन्होंने अपना पहला बिहू एल्बम ''उजान पिरिति'' जारी किया जो व्यावसायिक रूप से सफल रहा। ===1995–1997: अपने पहले इंडिपॉप एल्बम के साथ बॉलीवुड सिंगिंग करियर शुरू करने के लिए मुंबई चले गए=== 1995 के मध्य में, गर्ग [[बॉलीवुड]] संगीत उद्योग में काम करने के लिए [[मुंबई]] चले गए जहाँ उन्होंने अपना पहला इंडीपॉप एकल एल्बम ''चांदनी रात'' शुरू किया।<ref>{{Cite web|title=चांदनी रात ज़ुबीन गर्ग की|trans-title=Chandni Raat by Zubeen Garg |date=9 October 2015 |url=https://music.apple.com/us/album/chandni-raat/1048576498 |language=en-US |access-date=24 October 2022}}</ref> 1995 के आखिर में, वह [[महालक्ष्मी अय्यर]] से मिले और अपना पहला गाना, "उजागोरी निखार उटोला मोन" रिकॉर्ड किया, जो उनके उस समय आने वाले असमिया एल्बम ''ज़ुबीनोर गान'' के लिए था, जो जनवरी 1996 में रिलीज़ हुआ, जो महालक्ष्मी अय्यर का पहला एल्बम था।<ref>{{cite news|url=https://assam.news18.com/news/assam/mahalakshmi-iyer-pay-tribute-to-zubeen-garg-skd-499891.html|archive-url=https://web.archive.org/web/20260518193251/https://assam.news18.com/news/assam/mahalakshmi-iyer-pay-tribute-to-zubeen-garg-skd-499891.html|title=महालक्ष्मी अय्यर: इमोशनल महालक्ष्मी ज़ुबीन के बारे में बात कर रही हैं, ज़ुबीन ने यह गाना सिर्फ़ महालक्ष्मी के लिए लिखा था, महालक्ष्मी ने बहुत सी बातें बताईं... बहुत सी कहानियाँ...! 'सुर सोपने सोपने' आज शाम 7.50 बजे|trans-title=জুবিনৰ কথা কৈ আৱেগিক মহালক্ষ্মী, কেৱল মহালক্ষ্মীৰ বাবেই জুবিনে লিখিছিল এই গান, মহালক্ষ্মীয়ে ক’লে বহু কথা... বহু কাহিনী...! আজি সন্ধিয়া ৭.৫০ বজাত ‘সুৰৰ সোপানে সোপানে’|last1=Bhagwati|first1=Nabajit|date=18 November 2025|archive-date=18 May 2026|work=News18 Assam Northeast}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.discogs.com/release/31638328-Zubeen-Garg-Mahalakshmi-Hema-Zubeenor-Gaan|title=ज़ुबीन गर्ग, महालक्ष्मी*, हेमा* – ज़ुबीनोर गान|website=Discogs}}</ref> बाद में, उन्होंने हिंदी कवर और रीमिक्स एल्बम रिकॉर्ड किए, जिनमें ''श्रद्धांजलि'' (1996), ''RE-MIX तेरे मेरे बीच में'' (1996), ''चंदा'' (1996), ''श्रद्धांजलि 2'' (1997), और दूसरे शामिल हैं।<ref name="Bollywoodmdb.com">{{cite web|url=http://www.bollywoodmdb.com/celebrities/biography/zubeen-garg/792|title=जुबीन के बारे में गर्ग|publisher=bollywoodmdb.com|access-date=30 अप्रैल 2017|archive-date=27 जनवरी 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180127083834/http://www.bollywoodmdb.com/celebrities/biography/zubeen-garg/792|url-status=live}}</ref> अगस्त 1996 में, उन्होंने जल्द ही रिलीज़ होने वाले हिंदी एल्बम ''दुनिया'' के गाने "मैंने देखे हैं सभी रंग दुनिया के" के लिए शुरुआती गिटार बजाया, यह पहला गाना या एल्बम था जिसमें उन्होंने कोई वोकल, लिरिक्स या म्यूज़िक कंपोज़िशन नहीं दिया था। यह गाना असल में [[आशा भोसले]] को गाना था, लेकिन उनके व्यस्त कार्यक्रम के कारण, उनकी जगह बॉलीवुड एक्ट्रेस से सिंगर बनीं रागेश्वरी ने ले ली। यह एल्बम 1997 की शुरुआत में रिलीज़ हुआ था।<ref>{{Cite news |date=19 September 2025|title=सिंगर ज़ुबीन गर्ग कौन थे? उनके पॉपुलर गाने, परिवार, अचीवमेंट्स के बारे में सब कुछ|trans-title=Who Was Singer Zubeen Garg? All About His Popular Songs, Family, Achievements |url=https://www.timesnownews.com/entertainment-news/bollywood/who-was-singer-zubeen-garg-who-died-at-52-all-about-his-popular-songs-family-achievements-article-152855099 |access-date=22 September 2025 |work=Times Now |archive-date=20 September 2025 |archive-url=https://web.archive.org/web/20250920172000/https://www.timesnownews.com/entertainment-news/bollywood/who-was-singer-zubeen-garg-who-died-at-52-all-about-his-popular-songs-family-achievements-article-152855099 |url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|title=रैग्ज़ के बारे में - उसका असली मकसद|trans-title=About Ragz - Her True Calling|archive-url=https://web.archive.org/web/20071010154213/http://www.raageshwari.com/about_her_true.htm|url=http://www.raageshwari.com/about_her_true.htm|website=www.raageshwari.com|archive-date=10 October 2007|access-date=9 June 2026}}</ref> ===1997–1998: पहला बंगाली एल्बम और भाई-बहनों का पहला एल्बम=== बॉलीवुड और असमिया फिल्म और म्यूजिक इंडस्ट्री में गाने के अलावा, उन्होंने अक्टूबर 1997 में बंगाली म्यूजिक इंडस्ट्री में कदम रखा, जहाँ उन्होंने अपना पहला बंगाली एल्बम ''सुरेर उपहार'' रिलीज़ किया, जिसमें मौसमी सहारिया के लीड को-वोकल्स और मिली बरुआ और [[सागरिका]] के बैकग्राउंड वोकल्स थे, जो [[शान]] की बहन हैं।<ref>{{cite web|url=https://www.discogs.com/release/36797428-Zubeen-Maushumi-Surer-Upahar|title=ज़ुबीन, मौसमी – सुरेर उपहार (कैसेट)|website=Discogs}}</ref> अगले महीने के दौरान, उन्होंने अपना सातवां असमिया एल्बम ''मुक्ति'' रिलीज़ किया, जिसमें उनकी बहन और उस समय की नई सह-गायिका जोंकी बोरठाकुर थीं। यह पहला असमिया भाई-बहन (भाई-बहन की जोड़ी) एल्बम बना और उन्होंने नाज़िया-ज़ोहेब और शान-सागरिका से प्रेरणा ली।<ref>{{cite web|url=https://www.discogs.com/release/35341735-Zubeen-Jonkie-Mukti|title=ज़ुबीन, जोंकी - मुक्ति (कैसेट)|website=Discogs}}</ref> शुरू में, यह एल्बम कैसेट फ़ॉर्मेट में रिलीज़ हुआ था, यह जनवरी 1998 में ऑडियो सीडी फ़ॉर्मेट में रिलीज़ होने वाला पहला असमिया एल्बम भी बना, उनके दूसरे असमिया एल्बम, ''स्निग्धा जुनक'' के साथ। इस असमिया एल्बम से पहले, असम में ऑडियो सीडी फ़ॉर्मेट में आने वाले सबसे पहले एल्बम शान का एल्बम ''लव-ऑलॉजी'' और रागेश्वरी का एल्बम ''दुनिया'' थे, जो मार्च 1997 में रिलीज़ हुआ था और दोनों ही उनके पहले सोलो एल्बम थे। ===1998–2003: प्लेबैक-सिंगिंग में डेब्यू, दूसरा इंडिपॉप एल्बम और उनका पहला सफल असमिया एल्बम या गाना=== गर्ग ने 1998 की शुरुआत में बॉलीवुड फिल्म ''[[पुरानी कब्र]]'' में प्लेबैक सिंगर के तौर पर अपनी पहली फिल्म की, जहाँ उन्होंने दो गाने गाए: "कुछ तो कहो" और "दिल मेरा चुराया एक हसीना"। अगले कुछ महीनों में, उन्होंने अपना पहला असमिया फिल्म गाना "बुकु दुरू दुरू" गाया जो फिल्म ''जौबोन अमोनी कोरे'' में है। नवंबर 1998 में, उन्होंने अपना दूसरा इंडिपॉप एल्बम ''यूं ही कभी'' जारी किया, जिसमें उस समय की नवोदित अभिनेत्री [[भूमिका चावला]] नज़र आईं, और यह भारत में चैनल वी और एमटीवी म्यूजिक चैनल पर प्रसारित होने वाला उनका पहला म्यूज़िक वीडियो भी था।<ref>{{cite web|archive-url=https://web.archive.org/web/20260420102323/https://www.discogs.com/release/15323196-Zubeen-Garg-Jojo-Miko-Yuhi-Kabhi|url=https://www.discogs.com/release/15323196-Zubeen-Garg-Jojo-Miko-Yuhi-Kabhi|title=ज़ुबीन गर्ग, जोजो*, मिको* – यही कभी|trans-title=Zubeen Garg, Jojo*, Miko* – Yuhi Kabhi|archive-date=20 April 2026|access-date=20 April 2026|website=Discogs|url-status=live}}</ref> उन्होंने ''[[दिल से]]'' (1998), ''[[डोली सजा के रखना]]'' (1998), ''मोरोम नोडिर गभोरू घात'' (1999), ''बुकुर माजोत जोले'' (1999), ''[[हिया दिया निया]]'' (2000), ''[[फ़िज़ा]]'' (2000) और अन्य सहित कई फिल्मों के लिए गीत गाए।<ref name="Bollywoodmdb.com"/> नवंबर 2000 में, गर्ग ने अपना अगला असमिया एल्बम ''पाखी'' रिलीज़ किया, जिनका सितंबर 2000 में अपनी मां के सम्मान में निधन हो गया था।<ref>{{cite web|url=https://www.discogs.com/release/31454714-Zubeen-Garg-Pakhi|title= ज़ुबीन गर्ग – पाखी (कैसेट)|trans-title=Zubeen Garg – Pakhi (Cassette)|website=Discogs}}</ref> अगले तीन महीनों के भीतर, गर्ग ने 2001 की फ़िल्म ''दाग'' में अपना सबसे प्रतिष्ठित रोमांटिक हिट गाना "मायाबिनी रातिर बुकुट" गाया और यह असमिया संगीत उद्योग में उनका पहला बड़ा ब्रेकथ्रू गीत बन गया।<ref>{{cite web|title=मायाबिनी रातिर बुकुट के बोल|trans-title=Mayabini Ratir Bukut Lyrics |url=https://assammirror.com/%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A7%9F%E0%A6%BE%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%A8%E0%A7%80-%E0%A7%B0%E0%A6%BE%E0%A6%A4%E0%A6%BF%E0%A7%B0-%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A6%95%E0%A7%81%E0%A6%A4-mayabini-ratir-bukut-lyrics/33/ |website=Assam Mirror |date=20 June 2024 |access-date=30 September 2025}}</ref><ref>{{Cite web |last= |first= |date=7 March 2021|title=नॉर्थईस्ट के सेंसेशन ज़ुबीन गर्ग: शुरुआती ज़िंदगी, करियर, अवॉर्ड और विवाद - सेंटिनेल असम|trans-title=Northeast's Sensation Zubeen Garg: Early Life, Career, Awards & Controversies - Sentinelassam |url=https://www.sentinelassam.com/entertainment/wikipedia-of-northeasts-singing-sensation-zubeen-garg-527402 |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20211017200643/https://www.sentinelassam.com/entertainment/wikipedia-of-northeasts-singing-sensation-zubeen-garg-527402 |archive-date=17 October 2021 |access-date=18 October 2021 |website=Sentinel Assam}}</ref> 2002 में, उन्होंने एक हिंदी गीत "मुझे प्यार हो गया" की रचना की, जिसे केके और सुनीता राव ने गाया था, जो इंडिपॉप एल्बम/टेलीविजन शो ''चैनल वी जैमिन'' में दिखाया गया था।<ref>{{cite web|archive-url=https://web.archive.org/web/20260521112618/https://www.youtube.com/watch?v=6cif83KjcAs|url=https://www.youtube.com/watch?v=6cif83KjcAs&lc=Ugxm_X4slPfQ0wqNRcB4AaABAg|title=मुझे प्यार हो गया - केके, सुनीता राव - केके गाने - भाग एक - केके द्वारा छिपा हुआ रत्न||trans-title=Mujhe Pyaar Ho Gaya - KK, Suneeta Rao - KK Songs - Part One - Hidden Gem by KK|date=16 November 2022|archive-date=21 May 2026|access-date=21 May 2026}}</ref><ref>{{cite web |title=Various – Channel [V] Jammin'|url=https://www.discogs.com/release/35854108-Various-Channel-V-Jammin|archive-url=https://web.archive.org/web/20260521115047/https://www.discogs.com/release/35854108-Various-Channel-V-Jammin|archive-date=21 May 2026|website=Discogs}}</ref><ref>{{cite web |title=विभिन्न - चैनल वी जैमिन'|trans-title=Various – Channel [V] Jammin'|url=https://www.discogs.com/release/35854108-Various-Channel-V-Jammin|archive-url=https://web.archive.org/web/20260521115047/https://www.discogs.com/release/35854108-Various-Channel-V-Jammin|archive-date=21 May 2026|website=Discogs}}</ref> उसी वर्ष उन्होंने फिल्म ''[[कांटे]]'' के लिए तीन गाने गाए। 2003 में, उन्होंने "सपने सारे" गाया और फिल्म ''मुद्दा'' से "ख्वाबों की", फिल्म ''चुपके से'' से "मैंगो अगर दिल से तो खुदा", फिल्म ''मुंबई से आया मेरा दोस्त'' और फिल्म ''जाल'' से "जो प्यार तुमने".<ref>{{Citation|last=Array|title=जो प्यार तुमने (जाल - द ट्रैप / साउंडट्रैक संस्करण) (पूर्ण गीत) - केके, के.एस. चित्रा - डाउनलोड करें या मुफ्त सुनें - जिओसावन|date=14 अगस्त 2008|url=https://www.jiosaavn.com/song/jo-pyar-tumne-jaal---the-trap--soundtrack-version/MQcBSA1RBgI|access-date=8 मार्च 2020|archive-date=20 फरवरी 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190220181601/https://www.jiosaavn.com/song/jo-pyar-tumne-jaal---the-trap--soundtrack-version/MQcBSA1RBgI|url-status=live}}</ref> ===2003–2006: बंगाली पार्श्व-गायन की शुरुआत और उनका एकल एल्बम ''जंत्र''=== बॉलीवुड और असमिया उद्योगों में गायन के अलावा, उन्होंने 2003 में बंगाली संगीत उद्योग में पदार्पण किया, जहां उन्होंने फिल्म ''मोन'' में दो गाने गाए। अगले वर्ष, उन्होंने फिल्म ''शुधु तुमी'' में तीन गाने गाए और फिल्म के संगीत निर्देशक थे। उसी वर्ष, उन्होंने अपने सह-गायकों के बिना अपना अगला एकल असमिया एल्बम ''जंत्रा'' (2004) जारी किया और यह उस वर्ष का सबसे अधिक कमाई करने वाला असमिया एल्बम बन गया। 2005 में उन्होंने फिल्म ''प्रेमी'' में ''ओ बॉन्डहुरे'' और ''लागेना भालो'' गाया। ===2006–2025: अभूतपूर्व गीत "या अली" और अधिक=== उन्हें बॉलीवुड में सबसे बड़ा ब्रेक फिल्म ''[[गैंगस्टर (2006 फ़िल्म)|गैंगस्टर]]'' से मिला, जहाँ उन्होंने ''या ​​अली''' गाना गाया था।<ref>{{cite web|title=संगीत हिट 2000-2009 |url=http://www.boxofficeindia.com/showProd.php?itemCat=286&catName=MjAwMC0yMDA5 |website=Boxofficeindia.com |access-date=30 अप्रैल 2017 |date=22 जनवरी 2009 |url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20090122120910/http://www.boxofficeindia.com/showProd.php?itemCat=286&catName=MjAwMC0yMDA5 |archive-date=22 January 2009 }}</ref> इस गाने ने उन्हें 2006 में सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक का ग्लोबल इंडियन फिल्म अवार्ड्स (GIFA) दिलाया। उनका अगला हिंदी एल्बम ''ज़िंदगी'' 2007 में रिलीज़ हुआ।<ref>{{Cite web |title=ज़ुबीन गर्ग ने नया एल्बम लॉन्च किया|trans-title=Zubeen Garg launched new album| |url=https://www.radioandmusic.com/content/editorial/news/zubeen-garg-launches-new-album |access-date=12 February 2023 |website=www.radioandmusic.com |lang=en-IN}}</ref> 2008 में उन्होंने फिल्म ''मोन माने ना'' से "मोन माने ना", फिल्म ''चिरोडिनी तुमी जे अमर'' से "पिया रे पिया रे" और फिल्म ''लव स्टोरी'' से "मोन जेटे चाय शुधु" जैसे कई बंगाली गाने रिकॉर्ड किए। ==एक्टिंग करियर== गाने के अलावा, गर्ग ने फिल्म ''तुमी मोर माथो मोर'' से एक्टर और डायरेक्टर के तौर पर भी डेब्यू किया, जो 2000 की शुरुआत में NK प्रोडक्शन के तहत रिलीज़ हुई थी। उन्होंने ''प्रेम अरु प्रेम'' (2002), ''दीनबंधु'' (2004), ''मोन जाई'' (2008), ''भाल पाबो नाजनिलु'' (2013), ''गाने की आने'' (2016), ''मिशन चाइना'' (2017), ''प्रियार प्रियो'' (2017), ''द अंडरवर्ल्ड'' (2018), ''कंचनजंघा'' (2019), ''राजनीति'' (2022), ''डॉ. बेजबरुआ 2'' (2023), ''शिकार'' (2024) और ''रोई रोई बिनाले'' (2025) जैसी कुछ फिल्मों में एक्टिंग की।<ref>{{Cite news |title=जुबीन गर्ग फिल्मोग्राफी |trans-title=Zubeen Garg filmography |url=https://timesofindia.indiatimes.com/topic/Zubeen-Garg/movies |work=The Times of India |access-date=1 February 2026 }}</ref> ==संगीत पेशा== ====असमिया एल्बम==== {{columns-list|3| * अनामिका (1992) * अनुराधा (1992) * माया (1994) * आशा (1995) * ज़ुबीनर गान (1996) * रंग (1996) * मुक्ति (1997) * जानमनी (1998) * शब्द (1998) * स्निग्ध जोनाक (1998) * मेघोर बोरोन (1999) * पाखी (1999) * रांगदाली (1999) * सपोन (1999) * हियामन (2001) * शिशू (2002) * बांधोई (2002) * आकौ हियामन (2002) * चिनाकी मन (2003) * संध्यातारा भाग-1 (2003) * पका धाने रिंगियाई (2003) * लाजुकी मन (2004) * जंत्र (2004) * देउका (2005) * चिनाकी सूर (2005) * बोरोखुन (2006) * संध्यातारा भाग-2 (2006) * मुखा (2006) * रूमाल (2008) * मेरा पसंदीदा गाना (2008) * वाँही (2010) * गीत (2011) * रनजुन (2012) * सोनाली मन (2012) * रॉक (2012) * पथ (2014) * किंग (2015) * मा (2019) * चिला (2020) }} ====हिंदी और बंगाली एल्बम==== {{columns-list|2| * चांदनी रात (1995) * चंदा (1996) * युन्ही कवि (1998) * श्रद्धांजलि (खंड 1,2,3) * मेरे लिए<ref>{{Cite web|title=मेरे लिए (2001) - हिंदी एल्बम, ट्रैकलिस्ट, पूर्ण एल्बम विवरण और अधिक (संग्रहीत)|url=http://www.zubeendiscography.com/2021/08/451265843261439035.html|access-date=2021-09-09|website =ZG Discography|language=en|archivedate=2021-08-28|archiveurl=https://web.archive.org/web/20210828180443/http://www.zubeendiscography.com/2021/08/451265843261439035.html|deadurl=unfit}}</ref> (2001) * नूपुर (2001) * ज़िंदगी<ref name="hindilyrics" />(2007) * पाकीजा (2013) * सूफी इश्क (2017) |}} == मृत्यु == 2025 के 19 सितम्बर को सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग दुर्घटना के बाद जुबीन गर्ग का निधन हो गया। पानी के नीचे उन्हें सांस लेने में दिक़्क़त हुई, वहाँ से बचाने के बाद कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) देने पर भी स्थानीय अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती करने के बाद उन्हें मृत घोषित किया गया।<ref>{{cite news |title=Assamese singer Zubeen Garg dies in scuba diving accident in Singapore |url=https://indianexpress.com/article/india/zubeen-garg-assamese-singer-dies-in-singapore-scuba-diving-accident-10259381/ |work=The Indian Express |date=19 September 2025 |access-date=19 September 2025}}</ref><ref>{{cite news |title=Popular Assam singer Zubeen Garg dies in Singapore accident |url=https://www.ndtv.com/entertainment/popular-assam-singer-zubeen-garg-dies-in-singapore-accident-9306555 |work=NDTV |date=19 September 2025 |access-date=19 September 2025}}</ref> वह सिंगापुर में नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में भाग लेने गए थे, जहाँ उनका कार्यक्रम प्रस्तुत करने का भी कार्यक्रम था। ===दाह संस्कार और अंत्येष्टि=== [[गुवाहाटी]] के पास कमरबुची एनसी गाँव में सरकार द्वारा आवंटित 3.3 एकड़ ज़मीन पर फैले इस श्मशान घाट का निर्माण स्थानीय ग्रामीणों ने स्वेच्छा से किया था; इसमें 5,000 शोकसभाओं के लिए जगह है। गर्ग का पार्थिव शरीर 23 सितंबर की सुबह तक जनता के श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए गुवाहाटी के अर्जुन भोगेश्वर बरुआ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में रखा गया था।<ref>{{cite news |title=जुबीन गर्ग का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार से पहले गुवाहाटी खेल परिसर में रखा जाएगा|url=https://www.telegraphindia.com/entertainment/zubeen-gargs-mortal-remains-to-be-kept-at-sarusajai-till-monday-assam-cm/cid/2124200 |work=The Telegraph |date=21 September 2025 |access-date=22 September 2025}}</ref><ref>{{cite news |title=ज़ुबीन गर्ग का अंतिम संस्कार 23 सितंबर को गुवाहाटी के पास पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा |url=https://www.telegraphindia.com/entertainment/zubeen-garg-to-be-cremated-with-full-state-honours-near-guwahati-on-september-23/cid/2124279 |work=The Telegraph |date=22 September 2025 |access-date=22 September 2025}}</ref><ref>{{cite news |title=असम के मुख्यमंत्री: जुबीन गर्ग का अंतिम संस्कार गुवाहाटी के पास करने की परिवार की इच्छा को प्राथमिकता दी गई; गुवाहाटी और जोरहाट दोनों में स्मारक बनाने की योजना|url=https://www.telegraphindia.com/entertainment/zubeen-garg-to-be-cremated-with-full-state-honours-near-guwahati-on-september-23/cid/2124279 |work=The Telegraph |date=22 September 2025 |access-date=22 September 2025}}</ref> गर्ग का अंतिम संस्कार 23 सितंबर को पूरे राजकीय सम्मान के साथ 21 तोपों की सलामी के साथ किया गया।<ref>{{cite news |last1=Dey |first1=Abhishek |title=जुबीन गर्ग: प्रतिष्ठित भारतीय गायक के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक एकत्रित हुए |url=https://www.bbc.com/news/articles/c8exxep4n00o |access-date=23 September 2025 |work=[[BBC]] |date=23 September 2025}}</ref><ref>{{cite news |last1=Burke |first1=Kieran |title=भारत में शोक संतप्त लोग ज़ुबीन गर्ग के जीवन का जश्न मना रहे हैं – DW – 09/23/2025 |url=https://www.dw.com/en/mourners-in-india-celebrate-the-life-of-zubeen-garg/a-74108148 |access-date=25 September 2025 |work=[[Deutsche Welle]] |date=23 September 2025 |language=en}}</ref> 30 सितंबर 2025 को, गर्ग की अस्थियाँ [[जोरहाट]] लाई गईं और 1 अक्टूबर को पारंपरिक तेरहवें दिन "आद्यश्राद्ध" समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह में उनके परिवार और हज़ारों प्रशंसक शामिल हुए। असम सरकार ने गुवाहाटी में एक स्मारक के अलावा, उनकी विरासत के सम्मान में जोरहाट में एक स्मारक बनाने की योजना की घोषणा की। अस्थियाँ कुछ दिनों तक जोरहाट के एक सार्वजनिक स्थल पर रखी गईं, ताकि प्रशंसक और शुभचिंतक उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दे सकें।<ref>{{cite news |title=Assam's oldest stadium in Jorhat to host Zubeen Garg's Shraddha on October 1 |url=https://assamtribune.com/assam/assams-oldest-stadium-in-jorhat-to-host-zubeen-gargs-shraddha-on-october-1-1592790 |newspaper=Assam Tribune |date=1 October 2025}}</ref><ref>{{cite news |title=Thousands gather at Jorhat Stadium for Zubeen Garg's 13th-day Adyashraddha |url=https://www.sentinelassam.com/topheadlines/thousands-gather-at-jorhat-stadium-for-zubeen-gargs-13th-day-adyashraddha |newspaper=Sentinel Assam |date=1 October 2025}}</ref><ref>{{cite news |title=Thousands pay emotional tribute to Zubeen Garg amid rain at Jorhat |url=https://www.pratidintime.com/latest-assam-news-breaking-news-assam/jorhat/thousands-pay-emotional-tribute-to-zubeen-garg-amid-rain-at-jorhat-10519076 |newspaper=Pratidin Time |date=4 October 2025}}</ref> ===श्रद्धांजलि=== [[File:Ambulance carrying Zubeen Garg amidst crowd.jpg|thumb|प्रशंसक और प्रशंसक उस एम्बुलेंस की एक झलक पाने की कोशिश कर रहे हैं जो ज़ुबीन गर्ग को असम ले गई थी]] गर्ग के निधन पर पूरे भारत में व्यापक श्रद्धांजलि अर्पित की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विपक्ष के नेता राहुल गांधी और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा सहित कई प्रमुख हस्तियों ने अपनी संवेदना व्यक्त की।<ref>{{cite news |title=गायक जुबीन गर्ग के निधन पर शोक संवेदनाएं |url=https://www.thehindu.com/entertainment/music/condolences-pour-in-over-death-of-singer-zubeen-garg/article70069962.ece |access-date=19 September 2025 |work=[[The Hindu]] |date=19 September 2025 |language=en-IN}}</ref><ref>{{Cite news |date=19 September 2025 |title=गायक जुबीन गर्ग का 52 साल की उम्र में निधन: पीएम मोदी ने जताया दुख; राहुल गांधी, खड़गे ने दी श्रद्धांजलि |url=https://timesofindia.indiatimes.com/india/assam-cm-himanta-biswa-sarma-mourns-zubeen-gargs-death-calls-him-assams-favourite-rockstar/articleshow/123996813.cms |access-date=19 September 2025 |work=The Times of India |issn=0971-8257}}</ref> श्रद्धांजलि स्वरूप असम सरकार ने 20 से 22 सितम्बर तक तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की तथा बाद में उनके अंतिम संस्कार के दिन को शामिल करते हुए इसे 23 सितम्बर तक बढ़ा दिया गया।<ref>{{cite news |title=ज़ुबीन गर्ग का अंतिम संस्कार: शोक की अवधि एक दिन बढ़ाई गई |url=https://www.telegraphindia.com/entertainment/zubeen-garg-to-be-cremated-with-full-state-honours-near-guwahati-on-september-23/cid/2124279 |work=The Telegraph |date=22 September 2025 |access-date=22 September 2025}}</ref><ref>{{cite news |title=असम में गायक जुबीन गर्ग के निधन पर तीन दिन का राजकीय शोक घोषित |url=https://www.thehindu.com/news/national/assam/zubeen-garg-death-singapore-assam-state-mourning-three-days/article70073216.ece |access-date=20 September 2025 |work=[[The Hindu]] |date=20 September 2025 |language=en-IN}}</ref> पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी शोक व्यक्त किया और गर्ग को अपना "प्यारा भाई" बताया तथा उनकी "मधुर आवाज और अदम्य साहस" की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उनके गीत "हमेशा अमर" रहेंगे।।<ref>{{cite news |title=Bengal CM Mamata Banerjee mourns singer Zubeen Garg's death|trans-title=बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गायक जुबीन गर्ग के निधन पर शोक व्यक्त किया|url=https://theprint.in/india/bengal-cm-mamata-banerjee-mourns-singer-zubeen-gargs-death/2747044/ |work=ThePrint |agency=PTI |date=19 September 2025 |access-date=23 September 2025}}</ref> राजनीतिक नेताओं के अलावा, भारतीय फ़िल्म और संगीत उद्योग की कई हस्तियों ने गर्ग के निधन पर शोक व्यक्त किया। साथी असमिया गायक [[पापोन]] ने इस क्षति को भाई खोने के समान बताया और गर्ग को "एक पीढ़ी की आवाज़" कहा। संगीत निर्देशक [[प्रीतम चक्रवर्ती]], जिन्होंने उनके साथ "गैंगस्टर" (2006) में काम किया था, ने कहा कि वह "स्तब्ध और स्तब्ध" हैं और उन्होंने गर्ग के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। संगीतकार [[ए॰ आर॰ रहमान]], अनुभवी गायक [[हरिहरन]], संगीतकार [[जीत गांगुली]], गीतकार [[समीर (गीतकार)|समीर अंजान]], रैपर [[बादशाह]], गायक [[अलीशा चिनॉय]], [[महालक्ष्मी अय्यर]], [[शान (गायक)|शान]], अमाल मलिक, देबोजीत साहा, [[कल्पना पटवारी]], [[रागेश्वरी|रागेश्वरी लूंबा स्वरूप]], [[शिल्पा राव]], [[सुनिधि चौहान]], [[सागरिका]], [[श्रेया घोषाल]], ताराली शर्मा, [[विशाल मिश्रा (संगीतकार)|विशाल मिश्रा]], [[विशाल दादलानी]], और अभिनेता देव और प्रसेनजीत चटर्जी ने भी सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि साझा की, जिसमें गर्ग के असमिया लोक से लेकर बॉलीवुड तक के क्रॉस-शैली के योगदान को याद किया गया।<ref>{{cite news |last1=P |first1=Devadasan K. |title=Zubeen Garg's final journey: India bids tearful goodbye |url=https://gulfnews.com/entertainment/zubeen-gargs-final-journey-india-bids-tearful-goodbye-1.500277469 |access-date=23 September 2025 |work=[[Gulf News]] |date=21 September 2025 |language=en}}</ref><ref>{{cite news |last1=Khan |first1=Lubna |title=Hariharan Pays Tribute After 'True Soul' Zubeen Garg's Death: 'He Belonged To People' |url=https://www.news18.com/movies/regional-cinema/hariharan-pays-tribute-after-true-soul-zubeen-gargs-death-he-belonged-to-people-aa-9588636.html |access-date=23 September 2025 |work=[[CNN-News18|News18]] |date=22 September 2025 |language=en}}</ref><ref>{{cite news |last1=Bhattacharya |first1=Tanisha |title=Zubeen Garg Death: Tributes From Shaan, Papon And Others - "Devastated And Shocked" |url=https://www.ndtv.com/entertainment/zubeen-garg-death-tributes-from-pritam-armaan-malik-and-others-devastated-and-shocked-9307008 |access-date=22 September 2025 |work=[[NDTV]] |date=19 September 2025}}</ref><ref name="sangbadpratidin">{{cite news |title='ভাইকে হারালাম', জুবিনের মৃত্যুতে বাকরুদ্ধ পাপন, শোকপ্রকাশ প্রীতম ও দেবের |trans-title='भाई खो दिया': ज़ुबीन की मौत पर पापोन अवाक, प्रीतम और देव ने दी श्रद्धांजलि|url=https://www.sangbadpratidin.in/entertainment/cinema/zubeen-garg-death-pritam-papon-dev-jeet-ganguly-are-devastated-by-news/ |work=Sangbad Pratidin |date=19 September 2025 |access-date=23 September 2025 |language=bn}}</ref> गर्ग ने 2019 में गुवाहाटी के बी. बरूआ कॉलेज में आयोजित एक संगीत कार्यक्रम में यह इच्छा व्यक्त की थी कि उनके निधन पर उनका गीत "मायाबिनी रातिर बुकुट" बजाया जाना चाहिए। उनकी मृत्यु के बाद, यह गीत न केवल उनके अंतिम संस्कार में, बल्कि पूरे असम में घरों और सार्वजनिक आयोजनों में भी व्यापक रूप से बजाया गया और "श्रद्धांजलि" का एक सामूहिक गान बन गया।<ref>{{cite magazine |last=Das |first=Yudhajit Shankar |date=22 September 2025 |url=https://www.indiatoday.in/india/story/zubeen-garg-funeral-song-mayabini-ratir-bukut-song-anthem-procession-guwahati-fans-grief-2791423-2025-09-22 |title=Zubeen Garg funeral: The phenomenon called Zubeen Garg and how Mayabini became an anthem|trans-title=ज़ुबीन गर्ग का अंतिम संस्कार: ज़ुबीन गर्ग नाम की घटना और कैसे मायाबिनी एक राष्ट्रगान बन गया |magazine=India Today |accessdate=23 September 2025}}</ref> ===जांच और परिणाम=== सिंगापुर के अधिकारियों द्वारा जारी [[मृत्यु प्रमाण पत्र]] में मृत्यु का कारण डूबना बताया गया है।<ref>{{Cite news |title=Zubeen Garg's cause of death revealed: Death certificate states singer died due to drowning |trans-title=ज़ुबीन गर्ग की मौत का कारण सामने आया: मृत्यु प्रमाण पत्र में बताया गया है कि गायक की मौत डूबने से हुई|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/zubeen-gargs-cause-of-death-revealed-death-certificate-states-singer-died-due-to-drowning/articleshow/124030064.cms |work=The Times of India |date=20 September 2025 |access-date=22 September 2025}}</ref> उनके प्रबंधक और महोत्सव आयोजक के खिलाफ लापरवाही और सुरक्षा उपायों की कमी का आरोप लगाते हुए कई एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें यह भी कहा गया कि गर्ग ने लाइफ जैकेट पहनने से इनकार कर दिया था।<ref>{{Cite news |title=Zubeen Garg death: Assam Police file FIR against event organiser, controversy angle to be probed |trans-title=गर्ग मौत: असम पुलिस ने कार्यक्रम आयोजक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की, विवाद के पहलू की भी होगी जांच|url=https://www.hindustantimes.com/india-news/zubeen-garg-death-assam-police-file-fir-against-event-organiser-controversy-angle-to-be-probed-101758350955318.html|work=Hindustan Times |date=21 September 2025 |access-date=22 September 2025}}</ref><ref>{{Cite news |title=No life jacket? Controversy angle under scanner in Zubeen Garg death probe so far|trans-title=लाइफ जैकेट नहीं? ज़ुबीन गर्ग की मौत की जाँच में अब तक विवाद का पहलू भी जाँच के घेरे में है|url=https://www.hindustantimes.com/india-news/no-life-jacket-controversy-angle-under-scanner-zubeen-garg-death-probe-so-far-101758362390294.html|work=Hindustan Times |date=21 September 2025 |access-date=22 September 2025}}</ref> बाद में उनकी पत्नी ने उनके मैनेजर के खिलाफ मामला वापस लेने की अपील की।<ref>{{Cite news |title=Withdraw FIRs against Siddhartha, says Garima |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/guwahati/withdraw-firs-against-siddhartha-says-garima/articleshow/124019732.cms |work=The Times of India |date=21 September 2025 |access-date=22 September 2025}}</ref> जनता की मांग के बाद, असम सरकार ने गर्ग के परिवार के सदस्यों की सहमति से जीएमसीएच में दूसरे पोस्टमार्टम का आदेश दिया।<ref>{{Cite news |last=Kalita |first=Kangkan |title=Second post-mortem on Garg on Tuesday after demands from people, says Assam CM Himanta Biswa Sarma|trans-title=असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, लोगों की मांग के बाद मंगलवार को गर्ग का दूसरा पोस्टमार्टम होगा|url=https://www.indiatoday.in/entertainment/story/second-post-mortem-on-zubeen-garg-on-tuesday-after-demands-from-people-says-assam-cm-himanta-biswa-sarma-2791537-2025-09-22|work=[[India Today]] |date=22 September 2025 |access-date=22 September 2025}}</ref> जनता की मांग और असमिया कलाकारों के दबाव के बाद जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया।<ref>{{cite news |last1=Purkayastha |first1=Biswa Kalyan |title=Assam: SIT formed to probe Zubeen Garg's death; Congress demands CBI inquiry |url=https://www.hindustantimes.com/india-news/assam-sit-formed-to-probe-zubeen-garg-s-death-congress-demands-cbi-inquiry-101758724645343.html |access-date=25 September 2025 |work=[[Hindustan Times]] |date=24 September 2025 |language=en}}</ref><ref>{{cite news |last1=Karmakar |first1=Sumir |title=Assam Police form SIT to probe Zubeen Garg's death following suspicion of foul play |url=https://www.deccanherald.com/india/assam/assam-police-form-sit-to-probe-zubeen-gargs-death-following-suspicion-of-foul-play-3741754 |access-date=25 September 2025 |work=[[Deccan Herald]] |date=24 September 2025 |language=en}}</ref><ref>{{cite news |last1=Son |first1=Mallika |title=Assam CM Himanta Sarma Orders SIT Probe Into Singer Zubeen Garg's Death |url=https://www.news18.com/india/assam-cm-himanta-sarma-orders-sit-probe-into-singer-zubeen-gargs-death-ws-l-9594331.html |access-date=25 September 2025 |work=[[CNN-News18|News18]] |date=24 September 2025 |language=en}}</ref> एसआईटी का नेतृत्व [[विशेष पुलिस महानिदेशक|विशेष डीजीपी]] [[भारतीय पुलिस सेवा|आईपीएस]] [[आपराधिक जांच विभाग (भारत)|सीआईडी]] के एम. पी. गुप्ता ने किया और उन्हें नौ अन्य पुलिस अधिकारियों ने सहायता प्रदान की।<ref>{{cite news |last1=Varma |first1=Ananya |title=Assam Police Form 10-Member SIT To Probe 'Suspicious' Demise Of Zubeen Garg |url=https://www.timesnownews.com/india/assam-police-form-10-member-sit-to-probe-suspicious-demise-of-zubeen-garg-article-152888057 |access-date=25 September 2025 |work=[[Times Now]] |date=24 September 2025 |language=en}}</ref><ref>{{cite news |title=Following CM's order Assam DGP forms10-member SIT to probe into Zubeen Garg's death- The Week |url=https://www.theweek.in/wire-updates/national/2025/09/24/cal55-as-zubeen-ld-sit.html |access-date=25 September 2025 |work=[[The Week (Indian magazine)|The Week]] |agency=[[Press Trust of India|PTI]] |date=24 September 2025}}</ref> एसआईटी की सहायता के बाद, सीआईडी ​​ने गर्ग की संदिग्ध मौत के संबंध में [[भारतीय न्याय संहिता, 2023|बीएनएस]] की धारा 61 (2), 105 और 106 (1) के तहत मामला (2025 का मामला संख्या 18) दर्ज किया।<ref>{{cite news |title=SIT, CID raids organiser's home amid probe into singer Zubeen Garg's demise |url=https://www.hindustantimes.com/india-news/sit-cid-raids-organiser-shyamkanu-mahantas-home-amid-probe-into-singer-zubeen-gargs-demise-101758894850541.html |access-date=26 September 2025 |work=[[Hindustan Times]] |agency=[[Asian News International|ANI]] |date=26 September 2025 |language=en}}</ref> महोत्सव के आयोजक श्यामकानु महंत और गर्ग के प्रबंधक सिद्धार्थ शर्मा के आवासों पर छापे मारे गए, जिसके दौरान इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और दस्तावेज जब्त किए गए।<ref>{{cite news |last1=Maheshwari |first1=Khushi |title=Zubeen Garg Death: SIT Team Raids Houses Of Festival Organiser, His Manager |url=https://www.ndtvprofit.com/nation/zubeen-garg-death-sit-team-raids-houses-of-festival-organiser-his-manager |access-date=26 September 2025 |work=[[NDTV]] |date=25 September 2025 |language=en }}{{Dead link|date=अप्रैल 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref><ref>{{cite news |title=Assam: SIT raids homes of singer Zubeen Garg's manager, event organiser |url=https://scroll.in/latest/1087010/assam-sit-raids-homes-of-singer-zubeen-gargs-manager-event-organiser |access-date=26 September 2025 |work=[[Scroll.in]] |date=26 September 2025 |language=en}}</ref> एसआईटी ने संगीतकार शेखर ज्योति गोस्वामी से भी पूछताछ की और उन्हें हिरासत में लिया, जो सिंगापुर में डाइविंग ट्रिप के दौरान गर्ग के साथ थे।<ref>{{cite news |title=Musician Shekharjyoti Goswami Arrested in Zubeen Garg Death Probe |url=https://www.sentinelassam.com/topheadlines/breaking-shekharjyoti-goswami-arrested-by-sit-in-zubeen-garg-death-case |work=The Sentinel Assam |date=25 September 2025 |access-date=26 September 2025}}</ref> असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने टिप्पणी की कि यदि एसआईटी निर्णायक परिणाम देने में विफल रही, तो मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया जाएगा।<ref>{{cite news |title=SIT questions musician in Zubeen Garg death case; CM warns probe may go to CBI if no results |url=https://m.economictimes.com/news/india/sit-questions-musician-in-zubeen-garg-death-case-cm-himanta-biswa-sarma-warns-probe-may-go-to-cbi-if-no-results/articleshow/124118501.cms |work=The Economic Times |date=23 September 2025 |access-date=26 September 2025}}</ref> जनता के गुस्से को देखते हुए, अखिल असम वकील संघ ने अपने सदस्यों से गर्ग की मौत के मामले में आरोपी व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व न करने का आग्रह किया।<ref>{{cite news |title=Lawyers urged not to represent accused in Zubeen Garg death case |url=https://www.thehindu.com/news/national/assam/lawyers-urged-not-to-represent-accused-in-zubeen-garg-death-case/article70098339.ece |access-date=27 September 2025 |work=[[The Hindu]] |date=26 September 2025 |language=en-IN}}</ref><ref>{{cite news |title=Zubeen Garg's death: Assam lawyers' association urged not to represent accused; CID issues notices to witnesses |url=https://www.newindianexpress.com/nation/2025/Sep/26/zubeen-gargs-death-assam-lawyers-association-urged-not-to-represent-accused-cid-issues-notices-to-witnesses |access-date=27 September 2025 |work=[[The New Indian Express]] |date=26 September 2025 |language=en}}</ref> परिस्थितियों की जांच के बाद 1 अक्टूबर 2025 को श्यामकानु महंत और सिद्धार्थ शर्मा को गिरफ्तार किया गया। दोनों को मामले के संबंध में पूछताछ के लिए गुवाहाटी लाया गया।<ref name="PratidinTime2025">{{cite web | title=BREAKING: Shyamkanu Mahanta, Siddharth Sharma Arrested, Brought To Guwahati | website=Pratidin Time | date=1 October 2025 | url=https://www.pratidintime.com/guwahati-news-breaking-latest/breaking-shyamkanu-mahanta-siddharth-sharma-arrested-brought-to-guwahati-10518028 | access-date=1 October 2025}}</ref> शेखर ज्योति गोस्वामी ने आरोप लगाया कि गर्ग के प्रबंधक सिद्धार्थ शर्मा और महोत्सव के आयोजक श्यामकानु महंत ने उन्हें ज़हर दिया होगा। गोस्वामी ने दावा किया कि शर्मा ने गर्ग के मुँह और नाक से झाग निकलने जैसे दिखाई देने वाले लक्षणों को एसिड रिफ्लक्स समझकर नज़रअंदाज़ कर दिया और चिकित्सा सहायता लेने में देरी की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शर्मा ने नाविक से नौका का नियंत्रण छीन लिया था और जब गर्ग पानी में संघर्ष कर रहे थे, तो उन्हें "उसे जाने दो, उसे जाने दो" कहते सुना गया। गोस्वामी ने इस बात पर जोर दिया कि गर्ग एक कुशल तैराक थे, जिन्होंने उन्हें और शर्मा दोनों को प्रशिक्षित किया था, जिससे दुर्घटनावश डूबने की संभावना बहुत कम हो जाती है।<ref>{{Cite web |title=Zubeen Garg's bandmate claims his manager may have poisoned him |url=https://www.indiatvnews.com/news/india/zubeen-garg-s-bandmate-claims-his-manager-may-have-poisoned-him-2025-10-04-1011305 |website=India TV News |date=4 October 2025 |access-date=5 October 2025}}</ref><ref>{{Cite web |title=Accident or murder? Zubeen Garg's bandmate alleges manager, festival organiser may have poisoned him |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/guwahati/accident-or-murder-zubeen-gargs-bandmate-shekhar-jyoti-goswami-alleges-manager-festival-organiser-may-have-poisoned-him-report/articleshow/124301735.cms |website=The Times of India |date=4 October 2025 |access-date=5 October 2025}}</ref> गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच) की आधिकारिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि जुबीन गर्ग की मौत "विषाक्तता के कारण नहीं हुई थी।" <ref>{{Cite news |last=रॉय|first=संजय|date=14 October 2025 |title=No poison found in Zubeen Garg’s 2nd autopsy; GMCH confirms death by drowning|trans-title=जुबीन गर्ग के दूसरे पोस्टमार्टम में कोई जहर नहीं मिला; जीएमसीएच ने डूबने से मौत की पुष्टि की |url=https://assamtribune.com/assam/no-poison-found-in-zubeen-gargs-2nd-autopsy-gmch-confirms-death-by-drowning-1594434 |work=असम ट्रिब्यून|access-date=14 October 2025}}</ref> ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} == बाहरी कड़ियाँ == {{Commons category|Zubeen Garg|जुबिन गर्ग}} * {{Facebook|ZUBEENsOFFICIAL}} * {{Twitter|zubeengarg1}} * {{Instagram|zubeen.garg}} * {{IMDb name|0958276}} [[श्रेणी:भारतीय गायक]] [[श्रेणी:भारतीय फिल्म पार्श्वगायक]] [[श्रेणी:असमिया पार्श्वगायक]] [[श्रेणी:असम के लोग]] [[श्रेणी:1972 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:२०२५ में निधन]] [[श्रेणी:जुबिन गर्ग]] ihx99218um6atd7u7cpz72x1l4b5sue 6630281 6630241 2026-10-16T17:41:39Z चाहर धर्मेंद्र 703114 [[Special:Contributions/~2026-55392-45|~2026-55392-45]] ([[User talk:~2026-55392-45|वार्ता]]) द्वारा किए गए बदलाव [[Special:Diff/6630241|6630241]] को पूर्ववत किया 6630281 wikitext text/x-wiki {{Infobox musical artist | bgcolour = lightgray | name = जुबिन गर्ग | image = File:Zubin Garg Live performance (cropped).jpg | caption = २०२५ में जुबिन गर्ग | image_size = 300px | birth_date = {{Birth date|1972|11|18}} | background = solo_singer | birth_name = जुबिन बरठाकुर | alias = {{hlist|गोल्डी<ref>{{cite web|last=Goswami|first=Darshana|title=The wonder boy called 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कंपनी|इरोज़ नाउ|सारेगामा|एस.वी.एफ.|सुरिंदर फिल्म्स|इस्के मूवीज़|इको म्यूज़िक|ध्वनि रिकॉर्ड्स|जुबिन गर्ग म्यूज़िक|अपून रिकॉर्ड्स|ए.सी. मल्टीमीडिया|जॉलीवुड नाउ म्यूज़िक}} | years_active = 1992 – 2025 | spouse = गरिमा शैक्या गर्ग | website = | birth_name = जुबिन बरठाकुर | work = [[जुबिन गर्ग द्वारा रिकॉर्ड किए गए गीतों की सूची]] }} '''जुबिन गर्ग''' ({{Lang-en|Zubeen Garg}}; 18 नवम्बर 1972 – 19 सितम्बर 2025) [[असम]], [[भारत]] के एक प्रसिद्ध [[गायक]] थे। वे एक [[संगीत निर्देशक]], [[गीतकार]], [[संगीतकार]], [[फिल्म अभिनेता]], निर्माता, [[निर्देशक]], वादक, [[कवि]] और [[सामाजिक कार्यकर्ता]] भी थे।<ref name="शब्द">{{cite web | url=http://www.xobdo.org/asm/%E0%A6%9C%E0%A7%81%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%A8%20%E0%A6%97%E0%A6%BE%E0%A7%B0%E0%A7%8D%E0%A6%97 | title=जुबिन गर्ग | publisher=xobdo.org | accessdate=19 January 2013 }}{{Dead link|date=October 2023 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref> उन्होंने [[असमिया भाषा|असमीया]], [[हिन्दी]], [[बंगाली भाषा|बंगाली]], [[बोड़ो भाषा|बोड़ो]], [[राजबंशी भाषा|राजबंशी]] (कमतापुरी/गोलपारिया), चाय बागानी भाषा, हाजोंग, मिशिंग, [[कार्बी भाषा|कार्बी]], [[गारो भाषा|गारो]], राभा, डिमासा, आहोम, देउरी, [[नेपाली]], [[भोजपुरी]], विष्णुप्रिया मणिपुरी, [[ककबरक]], [[उड़िया]], [[तमिल]], [[तेलुगु]], [[कन्नड़]], [[अंग्रेजी]], [[मलयालम]], [[मराठी]], [[संस्कृत]], [[सिन्धी]], [[उर्दू]] आदि अनेक भाषाओं में गीत गाए।<ref name="onlinesivasagar" /> १९९२ में जुबिन का पहला एल्बम ''अनामिका'' प्रकाशित हुआ,<ref name="futuresounds1">{{cite web | url=http://www.futuresounds.in/store/anamika/ | title=About Zubeen's debut album Anamika at futuresounds.com | publisher=futuresounds.com | accessdate= 4 September 2015}}</ref> जिसके बाद वे पेशेवर संगीत जगत से जुड़ गए।<ref name="onlinesivasagar">{{cite web | url=http://onlinesivasagar.com/music/zubeen-garg.html | title=About Zubeen Garg in Onlinesivasagar.com | publisher=onlinesivasagar.com | work=Abhijit Borah | accessdate=19 January 2013 | archive-date=7 जून 2009 | archive-url=https://web.archive.org/web/20090607014040/http://onlinesivasagar.com/music/zubeen-garg.html | url-status=dead }}</ref> बंगाली फिल्म ''शुधु तुमि'' के लिए उन्होंने 2005 में श्रेष्ठ संगीत निर्देशक का पुरस्कार जीता।<ref name="onlinesivasagar" /> [[हिन्दी फिल्म]] ''गैंगस्टर'' के गीत ''या अली'' के लिए उन्हें 2006 में ''ग्लोबल इंडियन फिल्म अवार्ड (GIFA)'' तथा ''स्टारडस्ट अवार्ड'' में ''श्रेष्ठ पार्श्व गायक (पुरुष)'' का पुरस्कार मिला। इसके अलावा ''Echoes of Silence'' (अंग्रेज़ी-खासी) फिल्म के लिए उन्हें [[राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार|राष्ट्रीय पुरस्कार (रजत कमल)]] से सम्मानित किया गया।<ref name="gomolo">{{cite web | url=http://www.gomolo.com/awards-won-by-zubeen-garg/6236 | title=Awards won by Zubeen Garg | publisher=gomolo.com | accessdate=4 September 2015 | archivedate=8 October 2015 | archiveurl=https://web.archive.org/web/20151008042606/http://www.gomolo.com/awards-won-by-zubeen-garg/6236 | deadurl=yes }}</ref> आधुनिक असमिया संगीत में नई धारा लाने के लिए 2014 में उन्हें रेनेसां असम पुरस्कार प्रदान किया गया।<ref name="amarasom">{{cite web | title=जुबिन गर्ग को रेनेसां असम पुरस्कार | publisher=आमार असम | date=13 March 2015 | accessdate=14 March 2015}}</ref> 27 मई 2024 को [[मेघालय]] विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने उन्हें मानद (डी.लिट.) की उपाधि दी। 2025 में बेलतला बोहागी उत्सव समिति ने उन्हें आजीवन साधना हेतु [[भूपेन हजारिका]] पुरस्कार प्रदान किया। जुबिन गर्ग एक बहु-वाद्य वादक भी थे। वे [[ढोल]], दोतारा, [[गिटार]], हारमोनिका, [[हारमोनियम]], मैंडोलिन, [[कीबोर्ड]], [[तबला]] और अन्य पर्कशन वाद्य बजाते थे।<ref>{{cite news|url=http://www.assamspider.com/resources/2469-Profile-Zubin-Garg-Singer-Music-composer.aspx|title=Profile of Zubeen Garg – Singer, Music composer of Assam|work=assamspider.com|access-date=30 April 2017|archive-date=4 July 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170704073945/http://www.assamspider.com/resources/2469-Profile-Zubin-Garg-Singer-Music-composer.aspx|url-status=dead}}</ref> वे असम के सर्वाधिक पारिश्रमिक प्राप्त करने वाले गायकों में से एक थे।<ref>{{Cite web|date=16 April 2017|title=Barred from singing in Hindi, Assam singer leaves Bihu stage|url=https://indianexpress.com/article/cities/guwahati/zubeen-garg-noonmati-bihu-sanmilan-stopped-from-singing-hindi-song-assam-top-singer-quits-bihu-stage-with-an-abuse-4614435/|url-access=limited|access-date=19 December 2020|website=The Indian Express|language=en}}</ref><ref>{{Cite web|date=19 September 2025|title=Zubeen Garg, Assamese superstar and voice of a generation, dies in Singapore scuba diving accident|url=https://indianexpress.com/article/india/zubeen-garg-assamese-singer-dies-in-singapore-during-seizure-while-swimming-accident-10259381/|access-date=19 September 2025|website=The Indian Express|language=en}}{{Dead link|date=October 2025 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref> लगभग 33 वर्षों के करियर में उन्होंने 40 भाषाओं में 38,000 से अधिक गीत रिकॉर्ड किए।<ref>{{cite news|title=Thousands of fans bid adieu to Zubeen at Guwahati stadium|url=https://www.thehindu.com/entertainment/music/singer-zubeen-gargs-body-arrives-at-guwahati-airport-thousands-gather-to-get-last-glimpse/article70076293.ece|access-date=23 September 2025|work=[[The Hindu]]|date=21 September 2025|language=en-IN}}</ref><ref>{{cite news|last1=Deb|first1=Abhijit|title=From 'Anamika' to 'Ya Ali': Zubeen Garg, a man of many emotions, bids farewell|url=https://www.thestatesman.com/entertainment/from-anamika-to-ya-ali-zubeen-garg-a-man-of-many-emotions-bids-farewell-1503488612.html|access-date=23 September 2025|work=[[The Statesman (India)|The Statesman]]|date=19 September 2025|language=en}}</ref> २० सितंबर २०२५ को सिंगापुर में जुबिन गर्ग का निधन हो गया। ==निजी जीवन== गर्ग का जन्म असमिया ब्राह्मण परिवार में तुरा, मेघालय में मोहिनी मोहन बोरठाकुर और स्वर्गीय इली बोरठाकुर के घर हुआ था। उनका नाम संगीतकार [[जुबिन मेहता]] के नाम पर रखा गया था।<ref>{{cite news |last1=पराशर |first1=उत्पल |title='इन ब्राह्मणों को मार दिया जाना चाहिए', असम के गायक जुबीन गर्ग ने कहा; दर्ज मामले |url=https://www.hindustantimes.com/india-news/these-brahmins-should-be-killed-says-assam-singer-zubeen-garg-cases-filed/story-QgaKOmiMcqiCEhzOc8K29O.html |access-date=12 अप्रैल 2022 |work=हिंदुस्तान टाइम्स |date=29 जुलाई 2019 }}</ref><ref>{{Cite web |title=जब आप 'जुबीन गर्ग पूरा नाम' खोजते हैं तो Google मुस्लिम नाम दिखाता है |url=https://www.pratidintime.com/latest-assam-news-breaking-news-assam/google-shows-muslim-name-when-you-search-zubeen-garg-full-name |access-date=20 अगस्त 2022 |work=प्रतिदिन समय |date=28 अप्रैल 2020}}</ref> और अपने गोत्र ''गर्ग'' को अपने उपनाम के रूप में इस्तेमाल किया।<ref>{{Cite web |title=जुबीन गर्ग, लोकप्रिय असमिया गायक जुबीन गर्ग |url=https://www.indiaonline.in/about/personalities/singers/zubeen-garg |access-date=20 August 2022 |website=www.indiaonline.in |archive-date=20 अगस्त 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220820091745/https://www.indiaonline.in/about/personalities/singers/zubeen-garg |url-status=dead }}</ref> उनके पिता मोहिनी बोरठाकुर एक मजिस्ट्रेट थे,<ref name=":0" /> और ''कपिल ठाकुर''<ref name="जोंगकी"/> नाम से एक गीतकार और कवि हैं और उनकी मां स्वर्गीय इली बोरठाकुर एक गायिका थीं।<ref name=":0">{{Cite web |title=rediff.com: गैंगस्टर की या अली के पीछे की आवाज |url=http://specials.rediff.com/movies/2006/aug/07sd2.htm |access-date=20 अगस्त 2022 |website=specials.rediff.com}}</ref><ref name=":1">{{Cite web |date=14 मई 2017 |title=संगीत की भाषा |url=https://indianexpress.com/article/lifestyle/art-and-culture/the-language-of-music-4654378/ |access-date=20 अगस्त 2022 |website=द इंडियन एक्सप्रेस |language=en}}</ref> गर्ग की छोटी बहन जोंगकी बोरठाकुर एक अभिनेत्री और गायिका थीं, जिनकी 12 जनवरी 2002 में सोनितपुर जिले में एक कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी, जब वे अपने सह-कलाकारों के साथ स्टेज शो करने जा रही थीं।<ref name="Jongki">{{cite news | url=http://www.nenanews.com/NEE%20Feb.7-21,%2002/oh11.htm | title=जोंगकी बरठाकुर की कार दुर्घटना में मृत्यु | work=नॉर्थ ईस्ट न्यूज एजेंसी | date=21 फरवरी 2002 | archive-url=https://web.archive.org/web/20130313031027/http://www.nenanews.com/NEE%20Feb.7-21,%2002/oh11.htm |archive-date=13 March 2013 |access-date=19 January 2013}}</ref> उन्होंने 2002 में जोन्की बोरठाकुर की याद में एल्बम ''शिशु'' रिलीज़ किया था।<ref name=":1" /><ref name="Jongki" /> उनकी एक और बहन डॉ. पाल्मे बोरठाकुर हैं।<ref>{{Cite web |date=4 March 2020 |title="ज़ुबीन गर्ग अभी भी आईसीयू में हैं, लेकिन उनकी हालत काफी बेहतर है और वे ठीक हो रहे हैं," बहन डॉ. पाल्मे बोरठाकुर ने कहा |url=https://www.bollywoodbubble.com/bollywood-news/zubeen-garg-health-update/ |access-date=20 अगस्त 2022 |website=बॉलीवुड बबल |language=en}}</ref> गर्ग ने तमुलपुर हायर सेकेंडरी स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की और फिर बी. बोरूआ कॉलेज से विज्ञान स्नातक की डिग्री हासिल की<ref name=":0" /> लेकिन अपने गायन करियर पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी।<ref>{{Cite web |last=Rajkumar |first=Ankan |date=10 October 2019 |title=जुबीन की 'कंचनजंघा': बिना किसी कारण के विद्रोही |url=http://nenow.in/north-east-news/assam/zubeens-kanchanjangha-a-rebel-without-a-cause.html |access-date=20 August 2022 |website=NORTHEAST NOW |language=en-US}}</ref> गर्ग ने 4 फरवरी 2002 को असम के गोलाघाट की फैशन डिजाइनर गरिमा सैकिया से शादी की।<ref>{{cite web| url=https://thenortheasttoday.com/assam-zubeen-to-celebrate-his-birthday-by-releasing-music-album-of-mission-china/| title=असम: जुबीन गर्ग 'मिशन चाइना' का म्यूजिक एल्बम जारी करके अपना जन्मदिन मनाएंगे!| Publisher=thenortheasttoday.com| access-date=8 सितंबर 2017| archive-date=23 मई 2017| archive-url=https://web.archive.org/web/20170523122714/http://thenortheasttoday.com/assam-zubeen-to-celebrate-his-birthday-by-releasing-music-album-of-mission-china/| url-status=live}}</ref> गर्ग खुद को अधार्मिक मानते हैं और कहते हैं कि उनका कोई [[हिंदू धर्म में जाति व्यवस्था|जाति]] या [[धर्म]] नहीं है।<ref>{{cite news |title=मेरी कोई जाति, धर्म या भगवान नहीं है: जुबीन गर्ग |url=https://m.guwahatiplus.com/article/i-don-t-have-any-caste-religion-or-god-zubeen-garg/5862/amp#amp_tf=From%20%251%24s&aoh=17141538671889&referrer=https%3A%2F%2Fwww.google.com |work=गुवाहाटी प्लस |date=29 जुलाई 2019 |access-date=27 अप्रैल 2024 |archive-date=26 अप्रैल 2024 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240426180152/https://m.guwahatiplus.com/article/i-don-t-have-any-caste-religion-or-god-zubeen-garg/5862/amp#amp_tf=From%20%251%24s&aoh=17141538671889&referrer=https%3A%2F%2Fwww.google.com |url-status=dead }}</ref> 27 अगस्त को 2024, जुबीन गर्ग को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेघालय द्वारा डॉक्टर ऑफ लिटरेचर (डी. लिट.) की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।<ref>{{Cite web |title=माननीय डी. लिट. 10वें यूएसटीएम दीक्षांत समारोह में जुबीन गर्ग और लू माजॉ को सम्मानित किया गया – यूएसटीएम |url=https://ustm.ac.in/event/hon-d-litt-to-zubeen-garg-and-lou-majaw-at-10th-ustm-convocation/ |access-date=27 अगस्त 2024 |language=en-US}}</ref><ref>{{Cite web |last=Time |first=Pratidin |date=27 अगस्त 2024 |title=USTM ने 10वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया, जुबीन गर्ग और लू माजॉ को सम्मानित किया |url=https://www.pratidintime.com/north-east/meghalaya/ustm-holds-10th-convocation-honors-zubeen-garg-and-lou-majaw |access-date=27 अगस्त 2024 |website=Pratidin Time |language=en}}</ref> ==संगीतमय जीवन की शुरुआत== गर्ग ने तीन साल की उम्र से ही गाना शुरू कर दिया था।<ref>{{Cite news |title=जुबीन एक जन्मजात गायक हैं - टाइम्स ऑफ इंडिया |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/zubeen-is-a-born-singer/articleshow/2480292.cms |access-date=24 October 2022 |website=The Times of India |date=23 October 2007 |language=en}}</ref> उनकी पहली गुरु उनकी माँ थीं, जहाँ से उन्होंने गाना सीखा और फिर उन्होंने पंडित रॉबिन बनर्जी से 11 साल तक तबला सीखा।<ref name=":0" /> गुरु रमानी राय ने उन्हें असमिया लोक से परिचित कराया।<ref>{{Cite web |title=द ट्रिब्यून, चंडीगढ़, भारत - द ट्रिब्यून लाइफस्टाइल |url=https://www.tribuneindia.com/2012/20120725/ttlife1.htm |access-date=24 October 2022 |website=www.tribuneindia.com}}</ref><ref name=":2">{{Cite web |title=Singing in blood and composing is a little extension Zubeen Garg |url=https://www.indiaforums.com/article/singing-in-blood-and-composing-is-a-little-extension-zubeen-garg_6587 |access-date=20 August 2022 |website=India Forums |language=en}}</ref> गर्ग अपने स्कूल के दिनों से ही गीतों की रचना कर रहे थे और गायकों को गाने के लिए देते थे। ==गायन करियर== ===1992-1995: गायन करियर की शुरुआत=== गर्ग को एक पेशेवर गायक बनने का आत्मविश्वास तब मिला जब उन्होंने 1992 में आयोजित युवा महोत्सव में अपने पश्चिमी एकल प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदक जीता।<ref>{{Cite web |title=जुबीन गर्ग, लोकप्रिय असमिया गायक जुबीन गर्ग |url=https://www.indiaonline.in/about/personalities/singers/zubeen-garg |access-date=24 October 2022 |website=www.indiaonline.in |archive-date=20 अगस्त 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220820091745/https://www.indiaonline.in/about/personalities/singers/zubeen-garg |url-status=dead }}</ref> और इसके बाद उन्होंने अपने पहले असमिया एल्बम ''अनामिका'' के साथ पेशेवर संगीत में प्रवेश किया, जिसे नवंबर 1992 में रिलीज़ किया गया था।<ref name="futuresounds">{{cite web | url=http://www.futuresounds.in/store/anamika/ | title=जुबीन की पहली एल्बम अनामिका(অনামিকা) के बारे में futuresounds.com पर | Publisher=futuresounds.com | access-date=4 सितंबर 2015 | archive-date=5 अक्टूबर 2015 | archive-url=https://web.archive.org/web/20151005084005/http://www.futuresounds.in/store/anamika/ | url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |date=20 July 2022 |title=या अली गायक जुबीन गर्ग सिर में चोट लगने के बाद डिब्रूगढ़ के अस्पताल में भर्ती |url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/music/singer-zubeen-garg-hospitalised-in-dibrugarh-after-head-injury-101658304241201.html |access-date=20 August 2022 |website=Hindustan Times |language=en}}</ref><ref name="1"/> गर्ग के पहले रिकॉर्ड किए गए गाने ''"तुमी जुनू परिबा हुन"'' थे<ref>{{Citation |last=Hungama |title=तुमी जन परिबा सुन |url=https://www.hungama.com/song/tumi-jana-pariba-sun/2391720/ |language=en |access-date=5 December 2022}}</ref> और ''"तुमी जुनाकी हुबाख"''<ref>{{उद्धरण |last=Hungama |title=तुमी जुनाकी सुभाष |url=https://www.hungama.com/song/tumi-junaki-subhash/2391722/ |language=en |access-date=5 December 2022}}</ref> एल्बम ''रितु'' के लिए लेकिन 1993 में रिलीज़ किया गया था। एक गीतकार और संगीतकार के रूप में उनका पहला योगदान असमिया एल्बम ''अनुराधा'' में था, जिसे बॉलीवुड भक्ति गायक [[अनुराधा पौडवाल]] और उत्पल शर्मा ने गाया था, जो अक्टूबर 1993 में रिलीज़ हुआ था, इस प्रकार यह पहला एल्बम था जिसमें उन्होंने कोई स्वर नहीं दिया था।<ref>{{cite web|url=https://www.discogs.com/release/37402122-Anuradha-Paudwal-Utpal-Sharma-Anuradha|title=अनुराधा पौडवाल, उत्पल शर्मा – अनुराधा|trans-title=Anuradha Paudwal, Utpal Sharma – Anuradha|archive-url=https://web.archive.org/web/20260521121259/https://www.discogs.com/release/37402122-Anuradha-Paudwal-Utpal-Sharma-Anuradha|date=21 May 2026|archive-date=21 May 2026|website=Discogs}}</ref><ref>{{cite web|title=अनुराधा रोमांटिक असमिया कैसेट #utpolsharma #anuradhapaudwal #zubeengarg #assamesesong|trans-title=ANURADHA Romantic Assamese Cassette #utpolsharma #anuradhapaudwal #zubeengarg #assamesesong|archive-url=https://web.archive.org/web/20260521121922/https://www.youtube.com/watch?v=sDRG5hY9pIA|url=https://www.youtube.com/watch?v=sDRG5hY9pIA|archive-date=21 May 2026|website=YouTube}}</ref> उन्होंने कई अन्य एल्बम जारी किए जैसे ''सपुनर सुर'' (1992), ''जुनाकी मन'' (1993), ''माया'' (1994), ''आशा'' (1995) इत्यादि। 1995 में मुंबई आने से पहले, उन्होंने अपना पहला बिहू एल्बम ''उजान पिरिति'' जारी किया जो व्यावसायिक रूप से सफल रहा। उन्होंने कई अन्य एल्बम जारी किए जैसे ''सपुनर सुर'' (1992), ''जुनाकी मोन'' (1993), ''माया'' (1994), ''आशा'' (1995) इत्यादि। 1995 में मुंबई आने से पहले, उन्होंने अपना पहला बिहू एल्बम ''उजान पिरिति'' जारी किया जो व्यावसायिक रूप से सफल रहा। ===1995–1997: अपने पहले इंडिपॉप एल्बम के साथ बॉलीवुड सिंगिंग करियर शुरू करने के लिए मुंबई चले गए=== 1995 के मध्य में, गर्ग [[बॉलीवुड]] संगीत उद्योग में काम करने के लिए [[मुंबई]] चले गए जहाँ उन्होंने अपना पहला इंडीपॉप एकल एल्बम ''चांदनी रात'' शुरू किया।<ref>{{Cite web|title=चांदनी रात ज़ुबीन गर्ग की|trans-title=Chandni Raat by Zubeen Garg |date=9 October 2015 |url=https://music.apple.com/us/album/chandni-raat/1048576498 |language=en-US |access-date=24 October 2022}}</ref> 1995 के आखिर में, वह [[महालक्ष्मी अय्यर]] से मिले और अपना पहला गाना, "उजागोरी निखार उटोला मोन" रिकॉर्ड किया, जो उनके उस समय आने वाले असमिया एल्बम ''ज़ुबीनोर गान'' के लिए था, जो जनवरी 1996 में रिलीज़ हुआ, जो महालक्ष्मी अय्यर का पहला एल्बम था।<ref>{{cite news|url=https://assam.news18.com/news/assam/mahalakshmi-iyer-pay-tribute-to-zubeen-garg-skd-499891.html|archive-url=https://web.archive.org/web/20260518193251/https://assam.news18.com/news/assam/mahalakshmi-iyer-pay-tribute-to-zubeen-garg-skd-499891.html|title=महालक्ष्मी अय्यर: इमोशनल महालक्ष्मी ज़ुबीन के बारे में बात कर रही हैं, ज़ुबीन ने यह गाना सिर्फ़ महालक्ष्मी के लिए लिखा था, महालक्ष्मी ने बहुत सी बातें बताईं... बहुत सी कहानियाँ...! 'सुर सोपने सोपने' आज शाम 7.50 बजे|trans-title=জুবিনৰ কথা কৈ আৱেগিক মহালক্ষ্মী, কেৱল মহালক্ষ্মীৰ বাবেই জুবিনে লিখিছিল এই গান, মহালক্ষ্মীয়ে ক’লে বহু কথা... বহু কাহিনী...! আজি সন্ধিয়া ৭.৫০ বজাত ‘সুৰৰ সোপানে সোপানে’|last1=Bhagwati|first1=Nabajit|date=18 November 2025|archive-date=18 May 2026|work=News18 Assam Northeast}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.discogs.com/release/31638328-Zubeen-Garg-Mahalakshmi-Hema-Zubeenor-Gaan|title=ज़ुबीन गर्ग, महालक्ष्मी*, हेमा* – ज़ुबीनोर गान|website=Discogs}}</ref> बाद में, उन्होंने हिंदी कवर और रीमिक्स एल्बम रिकॉर्ड किए, जिनमें ''श्रद्धांजलि'' (1996), ''RE-MIX तेरे मेरे बीच में'' (1996), ''चंदा'' (1996), ''श्रद्धांजलि 2'' (1997), और दूसरे शामिल हैं।<ref name="Bollywoodmdb.com">{{cite web|url=http://www.bollywoodmdb.com/celebrities/biography/zubeen-garg/792|title=जुबीन के बारे में गर्ग|publisher=bollywoodmdb.com|access-date=30 अप्रैल 2017|archive-date=27 जनवरी 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180127083834/http://www.bollywoodmdb.com/celebrities/biography/zubeen-garg/792|url-status=live}}</ref> अगस्त 1996 में, उन्होंने जल्द ही रिलीज़ होने वाले हिंदी एल्बम ''दुनिया'' के गाने "मैंने देखे हैं सभी रंग दुनिया के" के लिए शुरुआती गिटार बजाया, यह पहला गाना या एल्बम था जिसमें उन्होंने कोई वोकल, लिरिक्स या म्यूज़िक कंपोज़िशन नहीं दिया था। यह गाना असल में [[आशा भोसले]] को गाना था, लेकिन उनके व्यस्त कार्यक्रम के कारण, उनकी जगह बॉलीवुड एक्ट्रेस से सिंगर बनीं रागेश्वरी ने ले ली। यह एल्बम 1997 की शुरुआत में रिलीज़ हुआ था।<ref>{{Cite news |date=19 September 2025|title=सिंगर ज़ुबीन गर्ग कौन थे? उनके पॉपुलर गाने, परिवार, अचीवमेंट्स के बारे में सब कुछ|trans-title=Who Was Singer Zubeen Garg? All About His Popular Songs, Family, Achievements |url=https://www.timesnownews.com/entertainment-news/bollywood/who-was-singer-zubeen-garg-who-died-at-52-all-about-his-popular-songs-family-achievements-article-152855099 |access-date=22 September 2025 |work=Times Now |archive-date=20 September 2025 |archive-url=https://web.archive.org/web/20250920172000/https://www.timesnownews.com/entertainment-news/bollywood/who-was-singer-zubeen-garg-who-died-at-52-all-about-his-popular-songs-family-achievements-article-152855099 |url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|title=रैग्ज़ के बारे में - उसका असली मकसद|trans-title=About Ragz - Her True Calling|archive-url=https://web.archive.org/web/20071010154213/http://www.raageshwari.com/about_her_true.htm|url=http://www.raageshwari.com/about_her_true.htm|website=www.raageshwari.com|archive-date=10 October 2007|access-date=9 June 2026}}</ref> ===1997–1998: पहला बंगाली एल्बम और भाई-बहनों का पहला एल्बम=== बॉलीवुड और असमिया फिल्म और म्यूजिक इंडस्ट्री में गाने के अलावा, उन्होंने अक्टूबर 1997 में बंगाली म्यूजिक इंडस्ट्री में कदम रखा, जहाँ उन्होंने अपना पहला बंगाली एल्बम ''सुरेर उपहार'' रिलीज़ किया, जिसमें मौसमी सहारिया के लीड को-वोकल्स और मिली बरुआ और [[सागरिका]] के बैकग्राउंड वोकल्स थे, जो [[शान]] की बहन हैं।<ref>{{cite web|url=https://www.discogs.com/release/36797428-Zubeen-Maushumi-Surer-Upahar|title=ज़ुबीन, मौसमी – सुरेर उपहार (कैसेट)|website=Discogs}}</ref> अगले महीने के दौरान, उन्होंने अपना सातवां असमिया एल्बम ''मुक्ति'' रिलीज़ किया, जिसमें उनकी बहन और उस समय की नई सह-गायिका जोंकी बोरठाकुर थीं। यह पहला असमिया भाई-बहन (भाई-बहन की जोड़ी) एल्बम बना और उन्होंने नाज़िया-ज़ोहेब और शान-सागरिका से प्रेरणा ली।<ref>{{cite web|url=https://www.discogs.com/release/35341735-Zubeen-Jonkie-Mukti|title=ज़ुबीन, जोंकी - मुक्ति (कैसेट)|website=Discogs}}</ref> शुरू में, यह एल्बम कैसेट फ़ॉर्मेट में रिलीज़ हुआ था, यह जनवरी 1998 में ऑडियो सीडी फ़ॉर्मेट में रिलीज़ होने वाला पहला असमिया एल्बम भी बना, उनके दूसरे असमिया एल्बम, ''स्निग्धा जुनक'' के साथ। इस असमिया एल्बम से पहले, असम में ऑडियो सीडी फ़ॉर्मेट में आने वाले सबसे पहले एल्बम शान का एल्बम ''लव-ऑलॉजी'' और रागेश्वरी का एल्बम ''दुनिया'' थे, जो मार्च 1997 में रिलीज़ हुआ था और दोनों ही उनके पहले सोलो एल्बम थे। ===1998–2003: प्लेबैक-सिंगिंग में डेब्यू, दूसरा इंडिपॉप एल्बम और उनका पहला सफल असमिया एल्बम या गाना=== गर्ग ने 1998 की शुरुआत में बॉलीवुड फिल्म ''[[पुरानी कब्र]]'' में प्लेबैक सिंगर के तौर पर अपनी पहली फिल्म की, जहाँ उन्होंने दो गाने गाए: "कुछ तो कहो" और "दिल मेरा चुराया एक हसीना"। अगले कुछ महीनों में, उन्होंने अपना पहला असमिया फिल्म गाना "बुकु दुरू दुरू" गाया जो फिल्म ''जौबोन अमोनी कोरे'' में है। नवंबर 1998 में, उन्होंने अपना दूसरा इंडिपॉप एल्बम ''यूं ही कभी'' जारी किया, जिसमें उस समय की नवोदित अभिनेत्री [[भूमिका चावला]] नज़र आईं, और यह भारत में चैनल वी और एमटीवी म्यूजिक चैनल पर प्रसारित होने वाला उनका पहला म्यूज़िक वीडियो भी था।<ref>{{cite web|archive-url=https://web.archive.org/web/20260420102323/https://www.discogs.com/release/15323196-Zubeen-Garg-Jojo-Miko-Yuhi-Kabhi|url=https://www.discogs.com/release/15323196-Zubeen-Garg-Jojo-Miko-Yuhi-Kabhi|title=ज़ुबीन गर्ग, जोजो*, मिको* – यही कभी|trans-title=Zubeen Garg, Jojo*, Miko* – Yuhi Kabhi|archive-date=20 April 2026|access-date=20 April 2026|website=Discogs|url-status=live}}</ref> उन्होंने ''[[दिल से]]'' (1998), ''[[डोली सजा के रखना]]'' (1998), ''मोरोम नोडिर गभोरू घात'' (1999), ''बुकुर माजोत जोले'' (1999), ''[[हिया दिया निया]]'' (2000), ''[[फ़िज़ा]]'' (2000) और अन्य सहित कई फिल्मों के लिए गीत गाए।<ref name="Bollywoodmdb.com"/> नवंबर 2000 में, गर्ग ने अपना अगला असमिया एल्बम ''पाखी'' रिलीज़ किया, जिनका सितंबर 2000 में अपनी मां के सम्मान में निधन हो गया था।<ref>{{cite web|url=https://www.discogs.com/release/31454714-Zubeen-Garg-Pakhi|title= ज़ुबीन गर्ग – पाखी (कैसेट)|trans-title=Zubeen Garg – Pakhi (Cassette)|website=Discogs}}</ref> अगले तीन महीनों के भीतर, गर्ग ने 2001 की फ़िल्म ''दाग'' में अपना सबसे प्रतिष्ठित रोमांटिक हिट गाना "मायाबिनी रातिर बुकुट" गाया और यह असमिया संगीत उद्योग में उनका पहला बड़ा ब्रेकथ्रू गीत बन गया।<ref>{{cite web|title=मायाबिनी रातिर बुकुट के बोल|trans-title=Mayabini Ratir Bukut Lyrics |url=https://assammirror.com/%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A7%9F%E0%A6%BE%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%A8%E0%A7%80-%E0%A7%B0%E0%A6%BE%E0%A6%A4%E0%A6%BF%E0%A7%B0-%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A6%95%E0%A7%81%E0%A6%A4-mayabini-ratir-bukut-lyrics/33/ |website=Assam Mirror |date=20 June 2024 |access-date=30 September 2025}}</ref><ref>{{Cite web |last= |first= |date=7 March 2021|title=नॉर्थईस्ट के सेंसेशन ज़ुबीन गर्ग: शुरुआती ज़िंदगी, करियर, अवॉर्ड और विवाद - सेंटिनेल असम|trans-title=Northeast's Sensation Zubeen Garg: Early Life, Career, Awards & Controversies - Sentinelassam |url=https://www.sentinelassam.com/entertainment/wikipedia-of-northeasts-singing-sensation-zubeen-garg-527402 |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20211017200643/https://www.sentinelassam.com/entertainment/wikipedia-of-northeasts-singing-sensation-zubeen-garg-527402 |archive-date=17 October 2021 |access-date=18 October 2021 |website=Sentinel Assam}}</ref> 2002 में, उन्होंने एक हिंदी गीत "मुझे प्यार हो गया" की रचना की, जिसे केके और सुनीता राव ने गाया था, जो इंडिपॉप एल्बम/टेलीविजन शो ''चैनल वी जैमिन'' में दिखाया गया था।<ref>{{cite web|archive-url=https://web.archive.org/web/20260521112618/https://www.youtube.com/watch?v=6cif83KjcAs|url=https://www.youtube.com/watch?v=6cif83KjcAs&lc=Ugxm_X4slPfQ0wqNRcB4AaABAg|title=मुझे प्यार हो गया - केके, सुनीता राव - केके गाने - भाग एक - केके द्वारा छिपा हुआ रत्न||trans-title=Mujhe Pyaar Ho Gaya - KK, Suneeta Rao - KK Songs - Part One - Hidden Gem by KK|date=16 November 2022|archive-date=21 May 2026|access-date=21 May 2026}}</ref><ref>{{cite web |title=Various – Channel [V] Jammin'|url=https://www.discogs.com/release/35854108-Various-Channel-V-Jammin|archive-url=https://web.archive.org/web/20260521115047/https://www.discogs.com/release/35854108-Various-Channel-V-Jammin|archive-date=21 May 2026|website=Discogs}}</ref><ref>{{cite web |title=विभिन्न - चैनल वी जैमिन'|trans-title=Various – Channel [V] Jammin'|url=https://www.discogs.com/release/35854108-Various-Channel-V-Jammin|archive-url=https://web.archive.org/web/20260521115047/https://www.discogs.com/release/35854108-Various-Channel-V-Jammin|archive-date=21 May 2026|website=Discogs}}</ref> उसी वर्ष उन्होंने फिल्म ''[[कांटे]]'' के लिए तीन गाने गाए। 2003 में, उन्होंने "सपने सारे" गाया और फिल्म ''मुद्दा'' से "ख्वाबों की", फिल्म ''चुपके से'' से "मैंगो अगर दिल से तो खुदा", फिल्म ''मुंबई से आया मेरा दोस्त'' और फिल्म ''जाल'' से "जो प्यार तुमने".<ref>{{Citation|last=Array|title=जो प्यार तुमने (जाल - द ट्रैप / साउंडट्रैक संस्करण) (पूर्ण गीत) - केके, के.एस. चित्रा - डाउनलोड करें या मुफ्त सुनें - जिओसावन|date=14 अगस्त 2008|url=https://www.jiosaavn.com/song/jo-pyar-tumne-jaal---the-trap--soundtrack-version/MQcBSA1RBgI|access-date=8 मार्च 2020|archive-date=20 फरवरी 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190220181601/https://www.jiosaavn.com/song/jo-pyar-tumne-jaal---the-trap--soundtrack-version/MQcBSA1RBgI|url-status=live}}</ref> ===2003–2006: बंगाली पार्श्व-गायन की शुरुआत और उनका एकल एल्बम ''जंत्र''=== बॉलीवुड और असमिया उद्योगों में गायन के अलावा, उन्होंने 2003 में बंगाली संगीत उद्योग में पदार्पण किया, जहां उन्होंने फिल्म ''मोन'' में दो गाने गाए। अगले वर्ष, उन्होंने फिल्म ''शुधु तुमी'' में तीन गाने गाए और फिल्म के संगीत निर्देशक थे। उसी वर्ष, उन्होंने अपने सह-गायकों के बिना अपना अगला एकल असमिया एल्बम ''जंत्रा'' (2004) जारी किया और यह उस वर्ष का सबसे अधिक कमाई करने वाला असमिया एल्बम बन गया। 2005 में उन्होंने फिल्म ''प्रेमी'' में ''ओ बॉन्डहुरे'' और ''लागेना भालो'' गाया। ===2006–2025: अभूतपूर्व गीत "या अली" और अधिक=== उन्हें बॉलीवुड में सबसे बड़ा ब्रेक फिल्म ''[[गैंगस्टर (2006 फ़िल्म)|गैंगस्टर]]'' से मिला, जहाँ उन्होंने ''या ​​अली''' गाना गाया था।<ref>{{cite web|title=संगीत हिट 2000-2009 |url=http://www.boxofficeindia.com/showProd.php?itemCat=286&catName=MjAwMC0yMDA5 |website=Boxofficeindia.com |access-date=30 अप्रैल 2017 |date=22 जनवरी 2009 |url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20090122120910/http://www.boxofficeindia.com/showProd.php?itemCat=286&catName=MjAwMC0yMDA5 |archive-date=22 January 2009 }}</ref> इस गाने ने उन्हें 2006 में सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक का ग्लोबल इंडियन फिल्म अवार्ड्स (GIFA) दिलाया। उनका अगला हिंदी एल्बम ''ज़िंदगी'' 2007 में रिलीज़ हुआ।<ref>{{Cite web |title=ज़ुबीन गर्ग ने नया एल्बम लॉन्च किया|trans-title=Zubeen Garg launched new album| |url=https://www.radioandmusic.com/content/editorial/news/zubeen-garg-launches-new-album |access-date=12 February 2023 |website=www.radioandmusic.com |lang=en-IN}}</ref> 2008 में उन्होंने फिल्म ''मोन माने ना'' से "मोन माने ना", फिल्म ''चिरोडिनी तुमी जे अमर'' से "पिया रे पिया रे" और फिल्म ''लव स्टोरी'' से "मोन जेटे चाय शुधु" जैसे कई बंगाली गाने रिकॉर्ड किए। ==एक्टिंग करियर== गाने के अलावा, गर्ग ने फिल्म ''तुमी मोर माथो मोर'' से एक्टर और डायरेक्टर के तौर पर भी डेब्यू किया, जो 2000 की शुरुआत में NK प्रोडक्शन के तहत रिलीज़ हुई थी। उन्होंने ''प्रेम अरु प्रेम'' (2002), ''दीनबंधु'' (2004), ''मोन जाई'' (2008), ''भाल पाबो नाजनिलु'' (2013), ''गाने की आने'' (2016), ''मिशन चाइना'' (2017), ''प्रियार प्रियो'' (2017), ''द अंडरवर्ल्ड'' (2018), ''कंचनजंघा'' (2019), ''राजनीति'' (2022), ''डॉ. बेजबरुआ 2'' (2023), ''शिकार'' (2024) और ''रोई रोई बिनाले'' (2025) जैसी कुछ फिल्मों में एक्टिंग की।<ref>{{Cite news |title=जुबीन गर्ग फिल्मोग्राफी |trans-title=Zubeen Garg filmography |url=https://timesofindia.indiatimes.com/topic/Zubeen-Garg/movies |work=The Times of India |access-date=1 February 2026 }}</ref> ==संगीत पेशा== ====असमिया एल्बम==== {{columns-list|3| * अनामिका (1992) * अनुराधा (1992) * माया (1994) * आशा (1995) * ज़ुबीनर गान (1996) * रंग (1996) * मुक्ति (1997) * जानमनी (1998) * शब्द (1998) * स्निग्ध जोनाक (1998) * मेघोर बोरोन (1999) * पाखी (1999) * रांगदाली (1999) * सपोन (1999) * हियामन (2001) * शिशू (2002) * बांधोई (2002) * आकौ हियामन (2002) * चिनाकी मन (2003) * संध्यातारा भाग-1 (2003) * पका धाने रिंगियाई (2003) * लाजुकी मन (2004) * जंत्र (2004) * देउका (2005) * चिनाकी सूर (2005) * बोरोखुन (2006) * संध्यातारा भाग-2 (2006) * मुखा (2006) * रूमाल (2008) * मेरा पसंदीदा गाना (2008) * वाँही (2010) * गीत (2011) * रनजुन (2012) * सोनाली मन (2012) * रॉक (2012) * पथ (2014) * किंग (2015) * मा (2019) * चिला (2020) }} ====हिंदी और बंगाली एल्बम==== {{columns-list|2| * चांदनी रात (1995) * चंदा (1996) * युन्ही कवि (1998) * श्रद्धांजलि (खंड 1,2,3) * मेरे लिए<ref>{{Cite web|title=मेरे लिए (2001) - हिंदी एल्बम, ट्रैकलिस्ट, पूर्ण एल्बम विवरण और अधिक (संग्रहीत)|url=http://www.zubeendiscography.com/2021/08/451265843261439035.html|access-date=2021-09-09|website =ZG Discography|language=en|archivedate=2021-08-28|archiveurl=https://web.archive.org/web/20210828180443/http://www.zubeendiscography.com/2021/08/451265843261439035.html|deadurl=unfit}}</ref> (2001) * नूपुर (2001) * ज़िंदगी<ref name="hindilyrics" />(2007) * पाकीजा (2013) * सूफी इश्क (2017) |}} == मृत्यु == 2025 के 19 सितम्बर को सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग दुर्घटना के बाद जुबीन गर्ग का निधन हो गया। पानी के नीचे उन्हें सांस लेने में दिक़्क़त हुई, वहाँ से बचाने के बाद कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) देने पर भी स्थानीय अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती करने के बाद उन्हें मृत घोषित किया गया।<ref>{{cite news |title=Assamese singer Zubeen Garg dies in scuba diving accident in Singapore |url=https://indianexpress.com/article/india/zubeen-garg-assamese-singer-dies-in-singapore-scuba-diving-accident-10259381/ |work=The Indian Express |date=19 September 2025 |access-date=19 September 2025}}</ref><ref>{{cite news |title=Popular Assam singer Zubeen Garg dies in Singapore accident |url=https://www.ndtv.com/entertainment/popular-assam-singer-zubeen-garg-dies-in-singapore-accident-9306555 |work=NDTV |date=19 September 2025 |access-date=19 September 2025}}</ref> वह सिंगापुर में नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में भाग लेने गए थे, जहाँ उनका कार्यक्रम प्रस्तुत करने का भी कार्यक्रम था। ===दाह संस्कार और अंत्येष्टि=== [[गुवाहाटी]] के पास कमरबुची एनसी गाँव में सरकार द्वारा आवंटित 3.3 एकड़ ज़मीन पर फैले इस श्मशान घाट का निर्माण स्थानीय ग्रामीणों ने स्वेच्छा से किया था; इसमें 5,000 शोकसभाओं के लिए जगह है। गर्ग का पार्थिव शरीर 23 सितंबर की सुबह तक जनता के श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए गुवाहाटी के अर्जुन भोगेश्वर बरुआ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में रखा गया था।<ref>{{cite news |title=जुबीन गर्ग का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार से पहले गुवाहाटी खेल परिसर में रखा जाएगा|url=https://www.telegraphindia.com/entertainment/zubeen-gargs-mortal-remains-to-be-kept-at-sarusajai-till-monday-assam-cm/cid/2124200 |work=The Telegraph |date=21 September 2025 |access-date=22 September 2025}}</ref><ref>{{cite news |title=ज़ुबीन गर्ग का अंतिम संस्कार 23 सितंबर को गुवाहाटी के पास पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा |url=https://www.telegraphindia.com/entertainment/zubeen-garg-to-be-cremated-with-full-state-honours-near-guwahati-on-september-23/cid/2124279 |work=The Telegraph |date=22 September 2025 |access-date=22 September 2025}}</ref><ref>{{cite news |title=असम के मुख्यमंत्री: जुबीन गर्ग का अंतिम संस्कार गुवाहाटी के पास करने की परिवार की इच्छा को प्राथमिकता दी गई; गुवाहाटी और जोरहाट दोनों में स्मारक बनाने की योजना|url=https://www.telegraphindia.com/entertainment/zubeen-garg-to-be-cremated-with-full-state-honours-near-guwahati-on-september-23/cid/2124279 |work=The Telegraph |date=22 September 2025 |access-date=22 September 2025}}</ref> गर्ग का अंतिम संस्कार 23 सितंबर को पूरे राजकीय सम्मान के साथ 21 तोपों की सलामी के साथ किया गया।<ref>{{cite news |last1=Dey |first1=Abhishek |title=जुबीन गर्ग: प्रतिष्ठित भारतीय गायक के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक एकत्रित हुए |url=https://www.bbc.com/news/articles/c8exxep4n00o |access-date=23 September 2025 |work=[[BBC]] |date=23 September 2025}}</ref><ref>{{cite news |last1=Burke |first1=Kieran |title=भारत में शोक संतप्त लोग ज़ुबीन गर्ग के जीवन का जश्न मना रहे हैं – DW – 09/23/2025 |url=https://www.dw.com/en/mourners-in-india-celebrate-the-life-of-zubeen-garg/a-74108148 |access-date=25 September 2025 |work=[[Deutsche Welle]] |date=23 September 2025 |language=en}}</ref> 30 सितंबर 2025 को, गर्ग की अस्थियाँ [[जोरहाट]] लाई गईं और 1 अक्टूबर को पारंपरिक तेरहवें दिन "आद्यश्राद्ध" समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह में उनके परिवार और हज़ारों प्रशंसक शामिल हुए। असम सरकार ने गुवाहाटी में एक स्मारक के अलावा, उनकी विरासत के सम्मान में जोरहाट में एक स्मारक बनाने की योजना की घोषणा की। अस्थियाँ कुछ दिनों तक जोरहाट के एक सार्वजनिक स्थल पर रखी गईं, ताकि प्रशंसक और शुभचिंतक उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दे सकें।<ref>{{cite news |title=Assam's oldest stadium in Jorhat to host Zubeen Garg's Shraddha on October 1 |url=https://assamtribune.com/assam/assams-oldest-stadium-in-jorhat-to-host-zubeen-gargs-shraddha-on-october-1-1592790 |newspaper=Assam Tribune |date=1 October 2025}}</ref><ref>{{cite news |title=Thousands gather at Jorhat Stadium for Zubeen Garg's 13th-day Adyashraddha |url=https://www.sentinelassam.com/topheadlines/thousands-gather-at-jorhat-stadium-for-zubeen-gargs-13th-day-adyashraddha |newspaper=Sentinel Assam |date=1 October 2025}}</ref><ref>{{cite news |title=Thousands pay emotional tribute to Zubeen Garg amid rain at Jorhat |url=https://www.pratidintime.com/latest-assam-news-breaking-news-assam/jorhat/thousands-pay-emotional-tribute-to-zubeen-garg-amid-rain-at-jorhat-10519076 |newspaper=Pratidin Time |date=4 October 2025}}</ref> ===श्रद्धांजलि=== [[File:Ambulance carrying Zubeen Garg amidst crowd.jpg|thumb|प्रशंसक और प्रशंसक उस एम्बुलेंस की एक झलक पाने की कोशिश कर रहे हैं जो ज़ुबीन गर्ग को असम ले गई थी]] गर्ग के निधन पर पूरे भारत में व्यापक श्रद्धांजलि अर्पित की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विपक्ष के नेता राहुल गांधी और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा सहित कई प्रमुख हस्तियों ने अपनी संवेदना व्यक्त की।<ref>{{cite news |title=गायक जुबीन गर्ग के निधन पर शोक संवेदनाएं |url=https://www.thehindu.com/entertainment/music/condolences-pour-in-over-death-of-singer-zubeen-garg/article70069962.ece |access-date=19 September 2025 |work=[[The Hindu]] |date=19 September 2025 |language=en-IN}}</ref><ref>{{Cite news |date=19 September 2025 |title=गायक जुबीन गर्ग का 52 साल की उम्र में निधन: पीएम मोदी ने जताया दुख; राहुल गांधी, खड़गे ने दी श्रद्धांजलि |url=https://timesofindia.indiatimes.com/india/assam-cm-himanta-biswa-sarma-mourns-zubeen-gargs-death-calls-him-assams-favourite-rockstar/articleshow/123996813.cms |access-date=19 September 2025 |work=The Times of India |issn=0971-8257}}</ref> श्रद्धांजलि स्वरूप असम सरकार ने 20 से 22 सितम्बर तक तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की तथा बाद में उनके अंतिम संस्कार के दिन को शामिल करते हुए इसे 23 सितम्बर तक बढ़ा दिया गया।<ref>{{cite news |title=ज़ुबीन गर्ग का अंतिम संस्कार: शोक की अवधि एक दिन बढ़ाई गई |url=https://www.telegraphindia.com/entertainment/zubeen-garg-to-be-cremated-with-full-state-honours-near-guwahati-on-september-23/cid/2124279 |work=The Telegraph |date=22 September 2025 |access-date=22 September 2025}}</ref><ref>{{cite news |title=असम में गायक जुबीन गर्ग के निधन पर तीन दिन का राजकीय शोक घोषित |url=https://www.thehindu.com/news/national/assam/zubeen-garg-death-singapore-assam-state-mourning-three-days/article70073216.ece |access-date=20 September 2025 |work=[[The Hindu]] |date=20 September 2025 |language=en-IN}}</ref> पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी शोक व्यक्त किया और गर्ग को अपना "प्यारा भाई" बताया तथा उनकी "मधुर आवाज और अदम्य साहस" की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उनके गीत "हमेशा अमर" रहेंगे।।<ref>{{cite news |title=Bengal CM Mamata Banerjee mourns singer Zubeen Garg's death|trans-title=बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गायक जुबीन गर्ग के निधन पर शोक व्यक्त किया|url=https://theprint.in/india/bengal-cm-mamata-banerjee-mourns-singer-zubeen-gargs-death/2747044/ |work=ThePrint |agency=PTI |date=19 September 2025 |access-date=23 September 2025}}</ref> राजनीतिक नेताओं के अलावा, भारतीय फ़िल्म और संगीत उद्योग की कई हस्तियों ने गर्ग के निधन पर शोक व्यक्त किया। साथी असमिया गायक [[पापोन]] ने इस क्षति को भाई खोने के समान बताया और गर्ग को "एक पीढ़ी की आवाज़" कहा। संगीत निर्देशक [[प्रीतम चक्रवर्ती]], जिन्होंने उनके साथ "गैंगस्टर" (2006) में काम किया था, ने कहा कि वह "स्तब्ध और स्तब्ध" हैं और उन्होंने गर्ग के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। संगीतकार [[ए॰ आर॰ रहमान]], अनुभवी गायक [[हरिहरन]], संगीतकार [[जीत गांगुली]], गीतकार [[समीर (गीतकार)|समीर अंजान]], रैपर [[बादशाह]], गायक [[अलीशा चिनॉय]], [[महालक्ष्मी अय्यर]], [[शान (गायक)|शान]], अमाल मलिक, देबोजीत साहा, [[कल्पना पटवारी]], [[रागेश्वरी|रागेश्वरी लूंबा स्वरूप]], [[शिल्पा राव]], [[सुनिधि चौहान]], [[सागरिका]], [[श्रेया घोषाल]], ताराली शर्मा, [[विशाल मिश्रा (संगीतकार)|विशाल मिश्रा]], [[विशाल दादलानी]], और अभिनेता देव और प्रसेनजीत चटर्जी ने भी सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि साझा की, जिसमें गर्ग के असमिया लोक से लेकर बॉलीवुड तक के क्रॉस-शैली के योगदान को याद किया गया।<ref>{{cite news |last1=P |first1=Devadasan K. |title=Zubeen Garg's final journey: India bids tearful goodbye |url=https://gulfnews.com/entertainment/zubeen-gargs-final-journey-india-bids-tearful-goodbye-1.500277469 |access-date=23 September 2025 |work=[[Gulf News]] |date=21 September 2025 |language=en}}</ref><ref>{{cite news |last1=Khan |first1=Lubna |title=Hariharan Pays Tribute After 'True Soul' Zubeen Garg's Death: 'He Belonged To People' |url=https://www.news18.com/movies/regional-cinema/hariharan-pays-tribute-after-true-soul-zubeen-gargs-death-he-belonged-to-people-aa-9588636.html |access-date=23 September 2025 |work=[[CNN-News18|News18]] |date=22 September 2025 |language=en}}</ref><ref>{{cite news |last1=Bhattacharya |first1=Tanisha |title=Zubeen Garg Death: Tributes From Shaan, Papon And Others - "Devastated And Shocked" |url=https://www.ndtv.com/entertainment/zubeen-garg-death-tributes-from-pritam-armaan-malik-and-others-devastated-and-shocked-9307008 |access-date=22 September 2025 |work=[[NDTV]] |date=19 September 2025}}</ref><ref name="sangbadpratidin">{{cite news |title='ভাইকে হারালাম', জুবিনের মৃত্যুতে বাকরুদ্ধ পাপন, শোকপ্রকাশ প্রীতম ও দেবের |trans-title='भाई खो दिया': ज़ुबीन की मौत पर पापोन अवाक, प्रीतम और देव ने दी श्रद्धांजलि|url=https://www.sangbadpratidin.in/entertainment/cinema/zubeen-garg-death-pritam-papon-dev-jeet-ganguly-are-devastated-by-news/ |work=Sangbad Pratidin |date=19 September 2025 |access-date=23 September 2025 |language=bn}}</ref> गर्ग ने 2019 में गुवाहाटी के बी. बरूआ कॉलेज में आयोजित एक संगीत कार्यक्रम में यह इच्छा व्यक्त की थी कि उनके निधन पर उनका गीत "मायाबिनी रातिर बुकुट" बजाया जाना चाहिए। उनकी मृत्यु के बाद, यह गीत न केवल उनके अंतिम संस्कार में, बल्कि पूरे असम में घरों और सार्वजनिक आयोजनों में भी व्यापक रूप से बजाया गया और "श्रद्धांजलि" का एक सामूहिक गान बन गया।<ref>{{cite magazine |last=Das |first=Yudhajit Shankar |date=22 September 2025 |url=https://www.indiatoday.in/india/story/zubeen-garg-funeral-song-mayabini-ratir-bukut-song-anthem-procession-guwahati-fans-grief-2791423-2025-09-22 |title=Zubeen Garg funeral: The phenomenon called Zubeen Garg and how Mayabini became an anthem|trans-title=ज़ुबीन गर्ग का अंतिम संस्कार: ज़ुबीन गर्ग नाम की घटना और कैसे मायाबिनी एक राष्ट्रगान बन गया |magazine=India Today |accessdate=23 September 2025}}</ref> ===जांच और परिणाम=== सिंगापुर के अधिकारियों द्वारा जारी [[मृत्यु प्रमाण पत्र]] में मृत्यु का कारण डूबना बताया गया है।<ref>{{Cite news |title=Zubeen Garg's cause of death revealed: Death certificate states singer died due to drowning |trans-title=ज़ुबीन गर्ग की मौत का कारण सामने आया: मृत्यु प्रमाण पत्र में बताया गया है कि गायक की मौत डूबने से हुई|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/zubeen-gargs-cause-of-death-revealed-death-certificate-states-singer-died-due-to-drowning/articleshow/124030064.cms |work=The Times of India |date=20 September 2025 |access-date=22 September 2025}}</ref> उनके प्रबंधक और महोत्सव आयोजक के खिलाफ लापरवाही और सुरक्षा उपायों की कमी का आरोप लगाते हुए कई एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें यह भी कहा गया कि गर्ग ने लाइफ जैकेट पहनने से इनकार कर दिया था।<ref>{{Cite news |title=Zubeen Garg death: Assam Police file FIR against event organiser, controversy angle to be probed |trans-title=गर्ग मौत: असम पुलिस ने कार्यक्रम आयोजक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की, विवाद के पहलू की भी होगी जांच|url=https://www.hindustantimes.com/india-news/zubeen-garg-death-assam-police-file-fir-against-event-organiser-controversy-angle-to-be-probed-101758350955318.html|work=Hindustan Times |date=21 September 2025 |access-date=22 September 2025}}</ref><ref>{{Cite news |title=No life jacket? Controversy angle under scanner in Zubeen Garg death probe so far|trans-title=लाइफ जैकेट नहीं? ज़ुबीन गर्ग की मौत की जाँच में अब तक विवाद का पहलू भी जाँच के घेरे में है|url=https://www.hindustantimes.com/india-news/no-life-jacket-controversy-angle-under-scanner-zubeen-garg-death-probe-so-far-101758362390294.html|work=Hindustan Times |date=21 September 2025 |access-date=22 September 2025}}</ref> बाद में उनकी पत्नी ने उनके मैनेजर के खिलाफ मामला वापस लेने की अपील की।<ref>{{Cite news |title=Withdraw FIRs against Siddhartha, says Garima |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/guwahati/withdraw-firs-against-siddhartha-says-garima/articleshow/124019732.cms |work=The Times of India |date=21 September 2025 |access-date=22 September 2025}}</ref> जनता की मांग के बाद, असम सरकार ने गर्ग के परिवार के सदस्यों की सहमति से जीएमसीएच में दूसरे पोस्टमार्टम का आदेश दिया।<ref>{{Cite news |last=Kalita |first=Kangkan |title=Second post-mortem on Garg on Tuesday after demands from people, says Assam CM Himanta Biswa Sarma|trans-title=असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, लोगों की मांग के बाद मंगलवार को गर्ग का दूसरा पोस्टमार्टम होगा|url=https://www.indiatoday.in/entertainment/story/second-post-mortem-on-zubeen-garg-on-tuesday-after-demands-from-people-says-assam-cm-himanta-biswa-sarma-2791537-2025-09-22|work=[[India Today]] |date=22 September 2025 |access-date=22 September 2025}}</ref> जनता की मांग और असमिया कलाकारों के दबाव के बाद जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया।<ref>{{cite news |last1=Purkayastha |first1=Biswa Kalyan |title=Assam: SIT formed to probe Zubeen Garg's death; Congress demands CBI inquiry |url=https://www.hindustantimes.com/india-news/assam-sit-formed-to-probe-zubeen-garg-s-death-congress-demands-cbi-inquiry-101758724645343.html |access-date=25 September 2025 |work=[[Hindustan Times]] |date=24 September 2025 |language=en}}</ref><ref>{{cite news |last1=Karmakar |first1=Sumir |title=Assam Police form SIT to probe Zubeen Garg's death following suspicion of foul play |url=https://www.deccanherald.com/india/assam/assam-police-form-sit-to-probe-zubeen-gargs-death-following-suspicion-of-foul-play-3741754 |access-date=25 September 2025 |work=[[Deccan Herald]] |date=24 September 2025 |language=en}}</ref><ref>{{cite news |last1=Son |first1=Mallika |title=Assam CM Himanta Sarma Orders SIT Probe Into Singer Zubeen Garg's Death |url=https://www.news18.com/india/assam-cm-himanta-sarma-orders-sit-probe-into-singer-zubeen-gargs-death-ws-l-9594331.html |access-date=25 September 2025 |work=[[CNN-News18|News18]] |date=24 September 2025 |language=en}}</ref> एसआईटी का नेतृत्व [[विशेष पुलिस महानिदेशक|विशेष डीजीपी]] [[भारतीय पुलिस सेवा|आईपीएस]] [[आपराधिक जांच विभाग (भारत)|सीआईडी]] के एम. पी. गुप्ता ने किया और उन्हें नौ अन्य पुलिस अधिकारियों ने सहायता प्रदान की।<ref>{{cite news |last1=Varma |first1=Ananya |title=Assam Police Form 10-Member SIT To Probe 'Suspicious' Demise Of Zubeen Garg |url=https://www.timesnownews.com/india/assam-police-form-10-member-sit-to-probe-suspicious-demise-of-zubeen-garg-article-152888057 |access-date=25 September 2025 |work=[[Times Now]] |date=24 September 2025 |language=en}}</ref><ref>{{cite news |title=Following CM's order Assam DGP forms10-member SIT to probe into Zubeen Garg's death- The Week |url=https://www.theweek.in/wire-updates/national/2025/09/24/cal55-as-zubeen-ld-sit.html |access-date=25 September 2025 |work=[[The Week (Indian magazine)|The Week]] |agency=[[Press Trust of India|PTI]] |date=24 September 2025}}</ref> एसआईटी की सहायता के बाद, सीआईडी ​​ने गर्ग की संदिग्ध मौत के संबंध में [[भारतीय न्याय संहिता, 2023|बीएनएस]] की धारा 61 (2), 105 और 106 (1) के तहत मामला (2025 का मामला संख्या 18) दर्ज किया।<ref>{{cite news |title=SIT, CID raids organiser's home amid probe into singer Zubeen Garg's demise |url=https://www.hindustantimes.com/india-news/sit-cid-raids-organiser-shyamkanu-mahantas-home-amid-probe-into-singer-zubeen-gargs-demise-101758894850541.html |access-date=26 September 2025 |work=[[Hindustan Times]] |agency=[[Asian News International|ANI]] |date=26 September 2025 |language=en}}</ref> महोत्सव के आयोजक श्यामकानु महंत और गर्ग के प्रबंधक सिद्धार्थ शर्मा के आवासों पर छापे मारे गए, जिसके दौरान इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और दस्तावेज जब्त किए गए।<ref>{{cite news |last1=Maheshwari |first1=Khushi |title=Zubeen Garg Death: SIT Team Raids Houses Of Festival Organiser, His Manager |url=https://www.ndtvprofit.com/nation/zubeen-garg-death-sit-team-raids-houses-of-festival-organiser-his-manager |access-date=26 September 2025 |work=[[NDTV]] |date=25 September 2025 |language=en }}{{Dead link|date=अप्रैल 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref><ref>{{cite news |title=Assam: SIT raids homes of singer Zubeen Garg's manager, event organiser |url=https://scroll.in/latest/1087010/assam-sit-raids-homes-of-singer-zubeen-gargs-manager-event-organiser |access-date=26 September 2025 |work=[[Scroll.in]] |date=26 September 2025 |language=en}}</ref> एसआईटी ने संगीतकार शेखर ज्योति गोस्वामी से भी पूछताछ की और उन्हें हिरासत में लिया, जो सिंगापुर में डाइविंग ट्रिप के दौरान गर्ग के साथ थे।<ref>{{cite news |title=Musician Shekharjyoti Goswami Arrested in Zubeen Garg Death Probe |url=https://www.sentinelassam.com/topheadlines/breaking-shekharjyoti-goswami-arrested-by-sit-in-zubeen-garg-death-case |work=The Sentinel Assam |date=25 September 2025 |access-date=26 September 2025}}</ref> असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने टिप्पणी की कि यदि एसआईटी निर्णायक परिणाम देने में विफल रही, तो मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया जाएगा।<ref>{{cite news |title=SIT questions musician in Zubeen Garg death case; CM warns probe may go to CBI if no results |url=https://m.economictimes.com/news/india/sit-questions-musician-in-zubeen-garg-death-case-cm-himanta-biswa-sarma-warns-probe-may-go-to-cbi-if-no-results/articleshow/124118501.cms |work=The Economic Times |date=23 September 2025 |access-date=26 September 2025}}</ref> जनता के गुस्से को देखते हुए, अखिल असम वकील संघ ने अपने सदस्यों से गर्ग की मौत के मामले में आरोपी व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व न करने का आग्रह किया।<ref>{{cite news |title=Lawyers urged not to represent accused in Zubeen Garg death case |url=https://www.thehindu.com/news/national/assam/lawyers-urged-not-to-represent-accused-in-zubeen-garg-death-case/article70098339.ece |access-date=27 September 2025 |work=[[The Hindu]] |date=26 September 2025 |language=en-IN}}</ref><ref>{{cite news |title=Zubeen Garg's death: Assam lawyers' association urged not to represent accused; CID issues notices to witnesses |url=https://www.newindianexpress.com/nation/2025/Sep/26/zubeen-gargs-death-assam-lawyers-association-urged-not-to-represent-accused-cid-issues-notices-to-witnesses |access-date=27 September 2025 |work=[[The New Indian Express]] |date=26 September 2025 |language=en}}</ref> परिस्थितियों की जांच के बाद 1 अक्टूबर 2025 को श्यामकानु महंत और सिद्धार्थ शर्मा को गिरफ्तार किया गया। दोनों को मामले के संबंध में पूछताछ के लिए गुवाहाटी लाया गया।<ref name="PratidinTime2025">{{cite web | title=BREAKING: Shyamkanu Mahanta, Siddharth Sharma Arrested, Brought To Guwahati | website=Pratidin Time | date=1 October 2025 | url=https://www.pratidintime.com/guwahati-news-breaking-latest/breaking-shyamkanu-mahanta-siddharth-sharma-arrested-brought-to-guwahati-10518028 | access-date=1 October 2025}}</ref> शेखर ज्योति गोस्वामी ने आरोप लगाया कि गर्ग के प्रबंधक सिद्धार्थ शर्मा और महोत्सव के आयोजक श्यामकानु महंत ने उन्हें ज़हर दिया होगा। गोस्वामी ने दावा किया कि शर्मा ने गर्ग के मुँह और नाक से झाग निकलने जैसे दिखाई देने वाले लक्षणों को एसिड रिफ्लक्स समझकर नज़रअंदाज़ कर दिया और चिकित्सा सहायता लेने में देरी की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शर्मा ने नाविक से नौका का नियंत्रण छीन लिया था और जब गर्ग पानी में संघर्ष कर रहे थे, तो उन्हें "उसे जाने दो, उसे जाने दो" कहते सुना गया। गोस्वामी ने इस बात पर जोर दिया कि गर्ग एक कुशल तैराक थे, जिन्होंने उन्हें और शर्मा दोनों को प्रशिक्षित किया था, जिससे दुर्घटनावश डूबने की संभावना बहुत कम हो जाती है।<ref>{{Cite web |title=Zubeen Garg's bandmate claims his manager may have poisoned him |url=https://www.indiatvnews.com/news/india/zubeen-garg-s-bandmate-claims-his-manager-may-have-poisoned-him-2025-10-04-1011305 |website=India TV News |date=4 October 2025 |access-date=5 October 2025}}</ref><ref>{{Cite web |title=Accident or murder? Zubeen Garg's bandmate alleges manager, festival organiser may have poisoned him |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/guwahati/accident-or-murder-zubeen-gargs-bandmate-shekhar-jyoti-goswami-alleges-manager-festival-organiser-may-have-poisoned-him-report/articleshow/124301735.cms |website=The Times of India |date=4 October 2025 |access-date=5 October 2025}}</ref> गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच) की आधिकारिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि जुबीन गर्ग की मौत "विषाक्तता के कारण नहीं हुई थी।" <ref>{{Cite news |last=रॉय|first=संजय|date=14 October 2025 |title=No poison found in Zubeen Garg’s 2nd autopsy; GMCH confirms death by drowning|trans-title=जुबीन गर्ग के दूसरे पोस्टमार्टम में कोई जहर नहीं मिला; जीएमसीएच ने डूबने से मौत की पुष्टि की |url=https://assamtribune.com/assam/no-poison-found-in-zubeen-gargs-2nd-autopsy-gmch-confirms-death-by-drowning-1594434 |work=असम ट्रिब्यून|access-date=14 October 2025}}</ref> ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} == बाहरी कड़ियाँ == {{Commons category|Zubeen Garg|जुबिन गर्ग}} * {{Facebook|ZUBEENsOFFICIAL}} * {{Twitter|zubeengarg1}} * {{Instagram|zubeen.garg}} * {{IMDb name|0958276}} [[श्रेणी:भारतीय गायक]] [[श्रेणी:भारतीय फिल्म पार्श्वगायक]] [[श्रेणी:असमिया पार्श्वगायक]] [[श्रेणी:असम के लोग]] [[श्रेणी:1972 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:२०२५ में निधन]] [[श्रेणी:जुबिन गर्ग]] 21ybmhwy2y405qj29u89xt95wg3er1i सुंधा माता मंदिर 0 653664 6630407 6501912 2026-10-17T10:14:15Z SparrowQ 86379 [[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:जालोर जिले के दर्शनीय स्थल]] जोड़ी 6630407 wikitext text/x-wiki {{Infobox temple | name = सुंधा माताजी मंदिर | image= Sundha mata.jpg | pushpin_map = India Rajasthan | map_caption = Location in Rajasthan | latd = 24.833 | longd = 72.367 | coordinates_region = IN-RJ | coordinates_display= title | country = [[भारत]] | state = [[राजस्थान]] | location = सुंधा ,[[भीनमाल]] | primary_deity = [[चामुण्डा देवी]] }} '''सुंधा माताजी''' का [[मन्दिर]] लगभग 900 वर्ष के करीब पुराना है जो ऊँची [[पर्वत|पहाड़ी]] पर बसा है इसमें "माँ सुंधा" की [[मूर्ति]] स्थापित है यह [[जालौर]] ज़िले के [[भीनमाल]] ,सुंधा में स्थित है। <ref>{{Cite web |url=http://www.rajasthanaamantran.com/Temple.php |title=संग्रहीत प्रति |access-date=9 जुलाई 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150710043940/http://www.rajasthanaamantran.com/Temple.php |archive-date=10 जुलाई 2015 |url-status=dead }}</ref> [[राजस्थान]] का पहला रोपवे यहा लगा हुआ है। सुंधा माता जी का मदिर लगभग 850 मीटर उँचाई पर स्थित हैं। ==स्थापत्यकला== यह [[मन्दिर]] [[श्वेत|सफेद]] रंग के [[संगमरमर|संगमरमर]] [[पत्थर]] से <ref>{{Cite web |url=http://www.rome2rio.com/s/Ahmedabad/Sundha-Mata-Temple |title=संग्रहीत प्रति |access-date=9 जुलाई 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150709225543/http://www.rome2rio.com/s/Ahmedabad/Sundha-Mata-Temple |archive-date=9 जुलाई 2015 |url-status=dead }}</ref> बनाया गया है, [[माउंट आबू|आबु]] के [[दिलवाड़ा जैन मंदिर|दिलवाड़ा मंदिर]] जैसा दिखता है ,मन्दिर में माँ [[चामुण्डा देवी]] की मूर्ति भी है। पर्वत पर कई धर्मशाला हैं ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} ==बाहरी कड़ियाँ== *[https://web.archive.org/web/20090409231727/http://jalore.nic.in/sundhamata.html जालौर की आधिकारिक जालस्थल पर सुंधा माता] *[https://web.archive.org/web/20140313185101/http://sundhamata.org/ आधिकारिक जालस्थल] {{राजस्थान के हिन्दू मन्दिर}} [[श्रेणी:देवियाँ]] [[श्रेणी:राजस्थान में हिन्दू मन्दिर]] [[श्रेणी:जालौर जिले के मंदिर]] [[श्रेणी:जालोर जिले के दर्शनीय स्थल]] == इन्हें भी देखें == * [[विरात्रा माता मंदिर]] * [[करणी माता मन्दिर, बीकानेर]] * [[सच्चियाय माता मन्दिर]] * [[क्षेमंकरी माता मंदिर]] * [[जालौर]] * [[सांचौर|सांचोर]] 497ufx5v2h3osk6ht3yh7qrfvpjrn8g समग्र सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम 0 668691 6630239 6630200 2026-10-16T13:47:00Z Max 651050 [[Special:Contributions/~2026-55520-81|~2026-55520-81]] ([[User talk:~2026-55520-81|Talk]]) के संपादनों को हटाकर [[User:InternetArchiveBot|InternetArchiveBot]] के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया 6551247 wikitext text/x-wiki {{स्रोतहीन|date=अगस्त 2020}} '''समग्र सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम''' (Samagra Social Security Mission / SSSM) [[मध्य प्रदेश सरकार]] द्वारा संचालित योजनाओं की हितग्राहियों तक पहुंच को सहज एवं सरल बनाने हेतु वर्ष 2010 में स्थापित हुआ है। राज्य एवं केन्द्र शासन द्वारा संचालित योजनाओं की हितग्राहियों तक पहुंच को सहज एवं सरल तथा इनके लक्षित परिणामों को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से इसका क्रियान्वन किया जा रहा है। यह एक अंतरविभागीय और शासन-व्यापी कवायद है, जिसमें सभी विभागों की साझेदारी है। ==परिचय== इसके पहले मध्य प्रदेश में योजनाओं का क्रियान्‍वयन भिन्‍न-भिन्‍न विभागों द्वारा किया जा रहा था किंतु किसी भी विभाग के पास उक्‍त योजनाओं के अंतर्गत पंजीकृत हितग्राहियों का डेटाबेस ऑनलाईन उपलब्‍ध नहीं था। विभागों के पास अपने हितग्राहियों की अद्यतन जानकारी उपलब्‍ध नहीं होने से योजनाओं के क्रियान्‍वयन में पारदर्शिता नहीं थी। हितग्राही को भी योजनायों के लाभ लेने हेतु बार-बार आवेदन प्रस्तुत करना पड़ता था तथा आवेदन के साथ बार-बार अपनी पहचान सम्बिन्धित तथा योजना से सम्बंधित दस्तावेज/प्रमाणपत्र जैसे जाति प्रमाण पत्र अदि प्रस्तुत करने पड़ते थे। इससे आवेदक को असुविधा तथा कार्य में विलम्ब होता था। उपरोक्त को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश शासन ने प्रदेश में निवासरत सभी परिवारों तथा उनके सभी सदस्यों का डेटाबेस तैयार कर लिया है। डेटाबेस बनाने हेतु सर्वप्रथम सभी परिवारों का घर-घर जाकर सर्वे किया गया और सभी परिवारों तथा सदस्‍यों की जानकारी प्राप्त की गई तथा उसका पंजीयन समग्र पोर्टल किया गया। इस प्रक्रिया का पालन कर प्रदेश की [[राज्‍य जनसंख्‍या पंजी]] का निर्माण किया गया। जनसंख्‍या पंजी पर परिवार एवं परिवार सदस्‍य की विस्‍तृत प्रोफाइल पोर्टल पर उपलब्‍ध हैं जैसे कि परिवार किस जाति वर्ग, धर्म, परिवार गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करता हैं या नहीं, परिवार के मुखिया का नाम, सदस्‍य का नाम, आयु, लिंग, वैवाहिक स्‍तर, कार्यक्षेत्र, शैक्षणिक स्‍तर, विकलांगता, बचत खाते की जानकारी। पंजीयन उपरान्त सभी परिवारों को 8 अंको के समग्र परिवार आईडी तथा सभी सदस्यो को 9 अंको की समग्र आईडी दी गई है। समग्र यूनिक आईडी पूर्णतः निशुल्क है एवं सभी को दी गई है। यह जीवन काल में वही रहेगी। व्‍यक्ति स्‍वंय भी समग्र पोर्टल spr.samagra.gov.in, samagra.gov.in पर जाकर अपने एवं परिवार के सदस्‍य की समग्र यूनिक आईडी जान सकता हैं। वर्तमान मेँ समग्र पोर्टल पर समग्र आईडी के आधार पर विभिन्‍न योजनाओं जैसे छात्रवृत्ति (स्कूल), सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत कम दरों पर खाद्य (पीडीएस), बीमा, समस्‍त पेंशन योजनाएं, विवाह सहायता, अनुग्रह राशि, राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना, आम आदमी बीमा और मातृत्व अवकाश सहायता इत्‍यादि का लाभ दिया जा रहा है। राशि का भुगतान हितग्राहियों के पोर्टल पर पंजीकृत एवं सत्यापित बचत खातों मे किया जा रहा है। इससे हितग्राही-मूलक योजनाओं में पारदर्शिता एवं योजनाओं का लाभ सुलभता से सुनिश्चित करना संभव हुआ है। ==बाहरी कड़ियाँ== *[https://samagra.gov.in/ Samagra Portal] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20240414153107/https://samagra.gov.in/ |date=14 अप्रैल 2024 }} * [[श्रेणी:मध्य प्रदेश सरकार]] 23k5ilw8pnu38gvgkr46ahvqxqz2anl माधो सिंह प्रथम 0 677926 6630291 6427543 2026-10-16T18:38:36Z Mundhalia746 934684 6630291 wikitext text/x-wiki {{जीवनी स्रोतहीन|date=जनवरी 2017}} [[File:Portrait of Savai Madho Singh of Jaipur.jpeg|thumb|माधो सिंह प्रथम]] '''सरामद-ए-राजा-ए हिंदुस्तान राज-राजेश्वर राज-राजेंद्र महाराजधिराज महाराजा सवाई माधोसिँह जी प्रथम''' जयपुर के प्रमुख महाराजाओं में से एक थे। राजस्थान के [[सवाई माधोपुर]] शहर की स्थापना जयपुर के पूर्व महाराजा सवाई माधोसिंह जी प्रथम ने ही 1763 ईस्वी के लगभग की थी। सवाई माधोसिंह जी प्रथम की वजह से सवाई माधोपुर शहर 17वीं व 18वीं शताब्दी के आसपास एक ख्याति प्राप्त शहर माना जाने लगा था। राजस्थान सरकार ने 15 मई 1949 में सवाई माधोपुर शहर को सवाई माधोसिंहजी के नाम पर जिला बनाकर उनके द्वारा स्थापित शहर का सम्मान बढ़ा दिया। तब से लेकर आज तक जिले का नाम सवाई माधोपुर के रूप में भारत स्तर पर जाना जाता है। ===राज्याभिषेक 29/12/1750=== महाराजा सवाई माधो सिंहजी की माता मेवाड़-उदयपुर के महाराणा अमर सिंहजी द्वितीय की पुत्री चँद्र कँवरजी थी।इसके अतिरिक्त बाईजी लाल विचित्र कँवरजी और किशन कँवरजी भी चँद्र कँवर से उत्पन्न हुई थी। माधोसिँह जी की सात रानियाँ और पुत्र पाँच हुए थे जिनमे से उनके उत्तराधिकारी महाराजा सवाई पृथ्वी सिँहजी और उनके बाद बने महाराजा सवाई प्रताप सिँहजी की माता रानी चुंडावतजी कुंदन कँवरजी पुत्री रावत जसवंत सिंहजी देवगढ़ की थीं इसके अलावा अन्य रानियों में से रानी सिसोदीनीजी रतन कँवरजी पुत्री राजा सूरतान सिंहजी और दूसरी उनके पुत्र राजा सरदार सिंहजी बनेड़ा की पुत्री रानी ब्रज कँवरजी थीं। इनकी एक रानी राठौड़जी अर्जुन कँवरजी पुत्री महाराजा राय सिंहजी ईडर की और पौत्री महाराजा अजीत सिंहजी जोधपुर-मारवाड़ की थीं। अन्य पुत्र कुंवर मान सिँहजी,कुंवर भवानी सिँहजी और कुंवर रघुबीर सिँहजी भी हुए थे परंतु तीनों बाल्यकाल में ही समाप्त हो गए। ===सफदरगंज समझोता, 1758=== यह समझोता ''माधोसिंह प्रथम'' और ''मुगल बादशाह अहमदशाह और नवाब सफदरगंज(अवध)'' के मध्य 1758 को हुआ. इस समझौते के पश्चात मुगल बादशाह अहमदशाह ने माधोसिंह प्रथम को जनवरी1759 को रणथंभौर का किला भेंट किया। ===भरवाड़ा युद्ध 1761=== कोटा शासक ''शत्रुसाल, माधोसिंह''</big> को <u>रणथंभौर किला</u> दिए जाने के कारण अप्रसन हुए और बारां में यहयुद्ध हुआ. इस युद्ध में शत्रुसाल के सेनापति झालाजालिम सिंह ने माधोसिंह को पराजित कर दिया. इसयुद्धके पश्चात शत्रुसाल ने रणथंभौर पर अधिकार कर लिया '''1767 में माधोसिंह ने मावंडायुद्ध''' मे भरतपुर शासक जवाहरसिंह को पराजित किया गया 1763 मे मोतीडूंगरी महलों का निर्माण करवाया। अपने भाई ईश्वरीसिंह से उतराधिकार को लेकर संघर्ष__ ===झिलाई/जमोली संधि 1745=== यह संधि माधोसिंह प्रथम व ईश्वरीसिंहके मध्य जयपुर के दीवान राजमलखत्री करवाता हैं। इस संधि के तहत माधोसिंह को रामपुर व टोंक परगना देना तय हुआ। जो 5 लाख रुपए वार्षिक आय का परगना था l ===राजमहल का युद्ध 1 मार्च 1747 (टोंक में)=== ईश्वरीसिंह का साथ मुगलसेना ने दिया और माधोसिंहका साथ मेवाड़ महाराणा जगतसिंह2 और कोटा शासक दुर्जनसाल और मराठाओ ने दिया । लेकिन इस युद्ध में विजय ईश्वरीसिंह हुआ ===बगरू का युद्ध===<ref>{{Cite book|title=Rajasthan history books}}</ref> ईश्वरीसिंह का साथ मुगलसेना ने दिया और माधोसिंहका साथ मेवाड़ महाराणा जगतसिंह2 और कोटा शासक दुर्जनसाल और मराठाओ ने दिया । लेकिन इस युद्ध में विजय माधोसिंह की हुई. माधोसिंह के युद्ध जितने के पश्चात ईश्वरीसिंह से माल, निवाई, टोडा परगने मांगे जिसे ईश्वरी सिंह ने स्वीकार कर लिए। और मराठाओं को हर्जाना दिलवाया। ईश्वरी सिंहकी मृत्यु के बाद माधोसिंहप्रथम जयपुर का शासक बना। 5 मार्च 1768 गई। By rajasthan history books {{जयपुर के महाराजा}} [[श्रेणी:जयपुर के लोग]] [[श्रेणी:सवाई माधोपुर ज़िला]] [[श्रेणी:जयपुर के महाराजा]] {{आधार}} 8jo7z8o796zsqt2eycudjhcj25on8a1 6630292 6630291 2026-10-16T18:38:54Z Mundhalia746 934684 6630292 wikitext text/x-wiki {{जीवनी स्रोतहीन|date=जनवरी 2017}} [[File:Portrait of Savai Madho Singh of Jaipur.jpeg|thumb|माधो सिंह प्रथम]] '''सरामद-ए-राजा-ए हिंदुस्तान राज-राजेश्वर राज-राजेंद्र महाराजधिराज महाराजा सवाई माधोसिँह जी प्रथम''' जयपुर के प्रमुख महाराजाओं में से एक थे। राजस्थान के [[सवाई माधोपुर]] शहर की स्थापना जयपुर के पूर्व महाराजा सवाई माधोसिंह जी प्रथम ने ही 1763 ईस्वी के लगभग की थी। सवाई माधोसिंह जी प्रथम की वजह से सवाई माधोपुर शहर 17वीं व 18वीं शताब्दी के आसपास एक ख्याति प्राप्त शहर माना जाने लगा था। राजस्थान सरकार ने 15 मई 1949 में सवाई माधोपुर शहर को सवाई माधोसिंहजी के नाम पर जिला बनाकर उनके द्वारा स्थापित शहर का सम्मान बढ़ा दिया। तब से लेकर आज तक जिले का नाम सवाई माधोपुर के रूप में भारत स्तर पर जाना जाता है। ===राज्याभिषेक 29/12/1750=== महाराजा सवाई माधो सिंहजी की माता मेवाड़-उदयपुर के महाराणा अमर सिंहजी द्वितीय की पुत्री चँद्र कँवरजी थी।इसके अतिरिक्त बाईजी लाल विचित्र कँवरजी और किशन कँवरजी भी चँद्र कँवर से उत्पन्न हुई थी। माधोसिँह जी की सात रानियाँ और पुत्र पाँच हुए थे जिनमे से उनके उत्तराधिकारी महाराजा सवाई पृथ्वी सिँहजी और उनके बाद बने महाराजा सवाई प्रताप सिँहजी की माता रानी चुंडावतजी कुंदन कँवरजी पुत्री रावत जसवंत सिंहजी देवगढ़ की थीं इसके अलावा अन्य रानियों में से रानी सिसोदीनीजी रतन कँवरजी पुत्री राजा सूरतान सिंहजी और दूसरी उनके पुत्र राजा सरदार सिंहजी बनेड़ा की पुत्री रानी ब्रज कँवरजी थीं। इनकी एक रानी राठौड़जी अर्जुन कँवरजी पुत्री महाराजा राय सिंहजी ईडर की और पौत्री महाराजा अजीत सिंहजी जोधपुर-मारवाड़ की थीं। अन्य पुत्र कुंवर मान सिँहजी,कुंवर भवानी सिँहजी और कुंवर रघुबीर सिँहजी भी हुए थे परंतु तीनों बाल्यकाल में ही समाप्त हो गए। ===सफदरगंज समझोता, 1758=== यह समझोता ''माधोसिंह प्रथम'' और ''मुगल बादशाह अहमदशाह और नवाब सफदरगंज(अवध)'' के मध्य 1758 को हुआ. इस समझौते के पश्चात मुगल बादशाह अहमदशाह ने माधोसिंह प्रथम को जनवरी1759 को रणथंभौर का किला भेंट किया। ===भरवाड़ा युद्ध 1761=== कोटा शासक ''शत्रुसाल, माधोसिंह''</big> को <u>रणथंभौर किला</u> दिए जाने के कारण अप्रसन हुए और बारां में यहयुद्ध हुआ. इस युद्ध में शत्रुसाल के सेनापति झालाजालिम सिंह ने माधोसिंह को पराजित कर दिया. इसयुद्धके पश्चात शत्रुसाल ने रणथंभौर पर अधिकार कर लिया '''1767 में माधोसिंह ने मावंडायुद्ध''' मे भरतपुर शासक जवाहरसिंह को पराजित किया गया 1763 मे मोतीडूंगरी महलों का निर्माण करवाया। अपने भाई ईश्वरीसिंह से उतराधिकार को लेकर संघर्ष__ ===झिलाई/जमोली संधि 1745=== यह संधि माधोसिंह प्रथम व ईश्वरीसिंहके मध्य जयपुर के दीवान राजमलखत्री करवाता हैं। इस संधि के तहत माधोसिंह को रामपुर व टोंक परगना देना तय हुआ। जो 5 लाख रुपए वार्षिक आय का परगना था l ===राजमहल का युद्ध 1 मार्च 1747 (टोंक में)=== ईश्वरीसिंह का साथ मुगलसेना ने दिया और माधोसिंहका साथ मेवाड़ महाराणा जगतसिंह2 और कोटा शासक दुर्जनसाल और मराठाओ ने दिया । लेकिन इस युद्ध में विजय ईश्वरीसिंह हुआ ===बगरू का युद्ध===<ref>{{Cite book|title=Rajasthan history books}}</ref> ईश्वरीसिंह का साथ मुगलसेना ने दिया और माधोसिंहका साथ मेवाड़ महाराणा जगतसिंह2 और कोटा शासक दुर्जनसाल और मराठाओ ने दिया । लेकिन इस युद्ध में विजय माधोसिंह की हुई. माधोसिंह के युद्ध जितने के पश्चात ईश्वरीसिंह से माल, निवाई, टोडा परगने मांगे जिसे ईश्वरी सिंह ने स्वीकार कर लिए। और मराठाओं को हर्जाना दिलवाया। ईश्वरी सिंहकी मृत्यु के बाद माधोसिंहप्रथम जयपुर का शासक बना। 5 मार्च 1768 गई। By rajasthan history books {{जयपुर के महाराजा}} [[श्रेणी:जयपुर के लोग]] [[श्रेणी:सवाई माधोपुर ज़िला]] [[श्रेणी:जयपुर के महाराजा]] {{आधार}} eyrn0v2h3gh5kh3yeqds8oenc5th1hu 6630293 6630292 2026-10-16T18:40:44Z Mundhalia746 934684 6630293 wikitext text/x-wiki {{जीवनी स्रोतहीन|date=जनवरी 2017}} [[File:Portrait of Savai Madho Singh of Jaipur.jpeg|thumb|माधो सिंह प्रथम]] '''सरामद-ए-राजा-ए हिंदुस्तान राज-राजेश्वर राज-राजेंद्र महाराजधिराज महाराजा सवाई माधोसिँह जी प्रथम''' जयपुर के प्रमुख महाराजाओं में से एक थे। राजस्थान के [[सवाई माधोपुर]] शहर की स्थापना जयपुर के पूर्व महाराजा सवाई माधोसिंह जी प्रथम ने ही 1763 ईस्वी के लगभग की थी। सवाई माधोसिंह जी प्रथम की वजह से सवाई माधोपुर शहर 17वीं व 18वीं शताब्दी के आसपास एक ख्याति प्राप्त शहर माना जाने लगा था। राजस्थान सरकार ने 15 मई 1949 में सवाई माधोपुर शहर को सवाई माधोसिंहजी के नाम पर जिला बनाकर उनके द्वारा स्थापित शहर का सम्मान बढ़ा दिया। तब से लेकर आज तक जिले का नाम सवाई माधोपुर के रूप में भारत स्तर पर जाना जाता है। ===राज्याभिषेक 29/12/1750=== महाराजा सवाई माधो सिंहजी की माता मेवाड़-उदयपुर के महाराणा अमर सिंहजी द्वितीय की पुत्री चँद्र कँवरजी थी।इसके अतिरिक्त बाईजी लाल विचित्र कँवरजी और किशन कँवरजी भी चँद्र कँवर से उत्पन्न हुई थी। माधोसिँह जी की सात रानियाँ और पुत्र पाँच हुए थे जिनमे से उनके उत्तराधिकारी महाराजा सवाई पृथ्वी सिँहजी और उनके बाद बने महाराजा सवाई प्रताप सिँहजी की माता रानी चुंडावतजी कुंदन कँवरजी पुत्री रावत जसवंत सिंहजी देवगढ़ की थीं इसके अलावा अन्य रानियों में से रानी सिसोदीनीजी रतन कँवरजी पुत्री राजा सूरतान सिंहजी और दूसरी उनके पुत्र राजा सरदार सिंहजी बनेड़ा की पुत्री रानी ब्रज कँवरजी थीं। इनकी एक रानी राठौड़जी अर्जुन कँवरजी पुत्री महाराजा राय सिंहजी ईडर की और पौत्री महाराजा अजीत सिंहजी जोधपुर-मारवाड़ की थीं। अन्य पुत्र कुंवर मान सिँहजी,कुंवर भवानी सिँहजी और कुंवर रघुबीर सिँहजी भी हुए थे परंतु तीनों बाल्यकाल में ही समाप्त हो गए। ===सफदरगंज समझोता, 1758=== यह समझोता ''माधोसिंह प्रथम'' और ''मुगल बादशाह अहमदशाह और नवाब सफदरगंज(अवध)'' के मध्य 1758 को हुआ. इस समझौते के पश्चात मुगल बादशाह अहमदशाह ने माधोसिंह प्रथम को जनवरी 1759 को रणथंभौर का किला भेंट किया। ===भरवाड़ा युद्ध 1761=== कोटा शासक ''शत्रुसाल, माधोसिंह''</big> को <u>रणथंभौर किला</u> दिए जाने के कारण अप्रसन हुए और बारां में यहयुद्ध हुआ. इस युद्ध में शत्रुसाल के सेनापति झालाजालिम सिंह ने माधोसिंह को पराजित कर दिया. इसयुद्धके पश्चात शत्रुसाल ने रणथंभौर पर अधिकार कर लिया '''1767 में माधोसिंह ने मावंडायुद्ध''' मे भरतपुर शासक जवाहरसिंह को पराजित किया गया 1763 मे मोतीडूंगरी महलों का निर्माण करवाया। अपने भाई ईश्वरीसिंह से उतराधिकार को लेकर संघर्ष ===झिलाई/जमोली संधि 1745=== यह संधि माधोसिंह प्रथम व ईश्वरीसिंहके मध्य जयपुर के दीवान राजमलखत्री करवाता हैं। इस संधि के तहत माधोसिंह को रामपुर व टोंक परगना देना तय हुआ। जो 5 लाख रुपए वार्षिक आय का परगना था l ===राजमहल का युद्ध 1 मार्च 1747 (टोंक में)=== ईश्वरीसिंह का साथ मुगलसेना ने दिया और माधोसिंहका साथ मेवाड़ महाराणा जगतसिंह2 और कोटा शासक दुर्जनसाल और मराठाओ ने दिया । लेकिन इस युद्ध में विजय ईश्वरीसिंह हुआ ===बगरू का युद्ध=== <ref>{{Cite book|title=Rajasthan history books}}</ref> ईश्वरीसिंह का साथ मुगलसेना ने दिया और माधोसिंहका साथ मेवाड़ महाराणा जगतसिंह2 और कोटा शासक दुर्जनसाल और मराठाओ ने दिया । लेकिन इस युद्ध में विजय माधोसिंह की हुई. माधोसिंह के युद्ध जितने के पश्चात ईश्वरीसिंह से माल, निवाई, टोडा परगने मांगे जिसे ईश्वरी सिंह ने स्वीकार कर लिए। और मराठाओं को हर्जाना दिलवाया। ईश्वरी सिंहकी मृत्यु के बाद माधोसिंहप्रथम जयपुर का शासक बना। 5 मार्च 1768 गई। By rajasthan history books {{जयपुर के महाराजा}} [[श्रेणी:जयपुर के लोग]] [[श्रेणी:सवाई माधोपुर ज़िला]] [[श्रेणी:जयपुर के महाराजा]] {{आधार}} 192fxchtlvvcdm2slszu1bbm3k8xk3h गूगल प्ले 0 685348 6630264 6467907 2026-10-16T16:23:30Z राजा लाल मीणा 954052 /* */ 6630264 wikitext text/x-wiki '''गूगल प्ले'''({{lang-en|Google Play}}) [[गूगल]] द्वारा संचालित एक मंच है। यह [[एंड्रॉयड]] ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए आधिकारिक [[ऐप स्टोर]] के रूप में कार्य करता है, जो उपयोगकर्ताओं को एप्लीकेशन डाउनलोड करने की अनुमति देता है। गूगल प्ले संगीत, पत्रिकाओं, पुस्तकों, फिल्मों और टेलीविजन कार्यक्रमों की पेशकश के रूप में भी कार्य करता है। गूगल प्ले के द्वारा प्रदान की गई एप्लीकेशन नि:शुल्क या एक तय कीमत पर होती है। एंड्रॉयड मार्केट, गूगल संगीत, और गूगल ई-बुक्सस्टोर के विलय साथ 6 मार्च 2012 को गूगल प्ले शुरू किया गया था।<ref>{{cite web|url=https://googleblog.blogspot.com/2012/03/introducing-google-play-all-your.html|title=Introducing Google Play|publisher=गूगल|date=6 मार्च 2012|access-date=13 दिसंबर 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20161010012600/https://googleblog.blogspot.com/2012/03/introducing-google-play-all-your.html|archive-date=10 अक्तूबर 2016|url-status=live}}</ref> गूगल प्ले स्टोर पर 1,430,000 से अधिक एप्प्स प्रकाशित<ref name="1.4mil">{{cite web|url=http://www.zdnet.com/article/ios-versus-android-apple-app-store-versus-google-play-here-comes-the-next-battle-in-the-app-wars/|title=iOS versus Android. Apple App Store versus Google Play: Here comes the next battle in the app wars|author=स्टीव रेंजर|work=[[ZDNet]]|date=जनवरी 16, 2015|access-date=13 दिसंबर 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20161230180245/http://www.zdnet.com/article/ios-versus-android-apple-app-store-versus-google-play-here-comes-the-next-battle-in-the-app-wars/|archive-date=30 दिसंबर 2016|url-status=live}}</ref> और पचास अरब से अधिक डाउनलोड हो गए है।<ref>{{cite web |url=https://www.phonearena.com/news/Androids-Google-Play-beats-App-Store-with-over-1-million-apps-now-officially-largest_id45680 |title=Android's Google Play beats App Store with over 1 million apps, now officially largest |publisher=Phonearena.com |date= |accessdate=2013-08-28 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130823014517/http://www.phonearena.com/news/Androids-Google-Play-beats-App-Store-with-over-1-million-apps-now-officially-largest_id45680 |archive-date=23 अगस्त 2013 |url-status=dead }}</ref> == सन्दर्भ == {{reflist}} {{आधार}} [[श्रेणी:गूगल]] [[श्रेणी:गूगल सेवाएँ]] 82mpbbdb9l7tblndfotnm2hrfv7vxbu 6630279 6630264 2026-10-16T17:37:52Z चाहर धर्मेंद्र 703114 [[Special:Contributions/राजा लाल मीणा|राजा लाल मीणा]] ([[User talk:राजा लाल मीणा|वार्ता]]) द्वारा किए गए बदलाव [[Special:Diff/6630264|6630264]] को पूर्ववत किया 6630279 wikitext text/x-wiki '''गूगल प्ले'''({{lang-en|Google Play}}) [[गूगल]] द्वारा संचालित एक मंच है। यह [[एंड्रॉयड]] ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए आधिकारिक [[ऐप स्टोर]] के रूप में कार्य करता है, जो उपयोगकर्ताओं को एप्लीकेशन डाउनलोड करने की अनुमति देता है। गूगल प्ले संगीत, पत्रिकाओं, पुस्तकों, फिल्मों और टेलीविजन कार्यक्रमों की पेशकश के रूप में भी कार्य करता है। गूगल प्ले के द्वारा प्रदान की गई एप्लीकेशन नि:शुल्क या एक तय कीमत पर होती है। एंड्रॉयड मार्केट, गूगल संगीत, और गूगल ई-बुक्सस्टोर के विलय साथ 6 मार्च 2012 को गूगल प्ले शुरू किया गया था।<ref>{{cite web|url=https://googleblog.blogspot.com/2012/03/introducing-google-play-all-your.html|title=Introducing Google Play|publisher=गूगल|date=6 मार्च 2012|access-date=13 दिसंबर 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20161010012600/https://googleblog.blogspot.com/2012/03/introducing-google-play-all-your.html|archive-date=10 अक्तूबर 2016|url-status=live}}</ref> गूगल प्ले स्टोर पर 1,430,000 से अधिक एप्प्स प्रकाशित<ref name="1.4mil">{{cite web|url=http://www.zdnet.com/article/ios-versus-android-apple-app-store-versus-google-play-here-comes-the-next-battle-in-the-app-wars/|title=iOS versus Android. Apple App Store versus Google Play: Here comes the next battle in the app wars|author=स्टीव रेंजर|work=[[ZDNet]]|date=जनवरी 16, 2015|access-date=13 दिसंबर 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20161230180245/http://www.zdnet.com/article/ios-versus-android-apple-app-store-versus-google-play-here-comes-the-next-battle-in-the-app-wars/|archive-date=30 दिसंबर 2016|url-status=live}}</ref> और पचास अरब से अधिक डाउनलोड हो गए है।<ref>{{cite web |url=https://www.phonearena.com/news/Androids-Google-Play-beats-App-Store-with-over-1-million-apps-now-officially-largest_id45680 |title=Android's Google Play beats App Store with over 1 million apps, now officially largest |publisher=Phonearena.com |date= |accessdate=2013-08-28 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130823014517/http://www.phonearena.com/news/Androids-Google-Play-beats-App-Store-with-over-1-million-apps-now-officially-largest_id45680 |archive-date=23 अगस्त 2013 |url-status=dead }}</ref> == सन्दर्भ == {{reflist}} {{आधार}} [[श्रेणी:गूगल]] [[श्रेणी:गूगल सेवाएँ]] egdivq72ozr6ys1ezguutnd7s68inx1 शिशिर कुमार अधिकारी 0 727283 6630296 6621978 2026-10-16T19:07:16Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 0 sources and tagging 2 as dead.) #IABot (v2.0.9.6 6630296 wikitext text/x-wiki {{Multiple issues| {{उल्लेखनीयता|date=जनवरी 2017}} {{जीवनी स्रोत कम|date=जनवरी 2017}} {{प्रसंग|date=जनवरी 2017}} {{प्राथमिक स्रोत|date=जनवरी 2017}} }} {{Infobox officeholder | name = शिशिर अधिकारी | native_name = শিশির অধিকারী | image = The Minister of State of Rural Development, Shri Sisir Adhikari addressing the inaugural session of Bharat Nirman Public Information Campaign, at Srirampur, Bhardaman, West Bengal on December 11, 2010.jpg | caption = 2010 में एक सरकारी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिशिर अधिकारी | office = सदस्य, [[लोक सभा]] | constituency = [[कांथी लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|कांथी]] | term_start = 16 मई 2009 | term_end = 4 जून 2024 | predecessor = प्रशांत प्रधान | successor = [[सौमेंदु अधिकारी]] | office1 = केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री<br />[[भारत सरकार]] | primeminister1 = [[मनमोहन सिंह]] | term_start1 = 28 मई 2009 | term_end1 = 22 सितंबर 2012 | office2 = सदस्य, [[पश्चिम बंगाल विधान सभा]] | constituency2 = [[एगरा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र|एगरा]] | term_start2 = 2006 | term_end2 = 2009 | predecessor2 = प्रबोध चंद्र सिन्हा | successor2 = समरेश दास | constituency3 = कांथी दक्षिण | term_start3 = 2001 | term_end3 = 2006 | predecessor3 = शैलजा कुमार दास | successor3 = [[शुभेंदु अधिकारी]] | term_start4 = 1982 | term_end4 = 1987 | predecessor4 = शैलजा कुमार दास | successor4 = सुखेंदु मैती | birth_date = {{birth date and age|1941|9|19|df=y}} | birth_place = करकुली, [[पूर्व मेदिनीपुर ज़िला]], [[पश्चिम बंगाल]], [[भारत]] | party = [[भारतीय जनता पार्टी]] (2021–वर्तमान) | otherparty = [[सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस]] (1998–2021)<br />[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] (1972–1998) | spouse = गायत्री अधिकारी | children = 4 पुत्र (जिनमें [[शुभेंदु अधिकारी]], [[दिव्येंदु अधिकारी]], [[सौमेंदु अधिकारी]] शामिल हैं) | alma_mater = [[कलकत्ता विश्वविद्यालय]] | residence = शांतिनिकेतन आवास, कांथी, पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल }} '''शिशिर कुमार अधिकारी''' (बांग्ला: শিশির অধিকারী; जन्म: 19 सितंबर 1941) [[भारत]] के [[पश्चिम बंगाल]] राज्य के एक वरिष्ठ राजनीतिज्ञ हैं। वह [[कांथी लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र]] से 2009 से 2024 तक लगातार तीन बार [[लोक सभा]] सदस्य रहे हैं।<ref>{{cite web |url=https://loksabhaph.nic.in/Members/MemberBioprofile.aspx?mpsno=4393 |title=Detailed Member Profile: Shri Sisir Kumar Adhikari |publisher=Lok Sabha Secretariat |access-date=17 दिसंबर 2020}}</ref> इससे पूर्व वह [[मनमोहन सिंह]] के नेतृत्व वाली [[संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन|संप्रग]] सरकार में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री (2009–2012) के रूप में कार्य कर चुके हैं।<ref>{{Cite web |url=http://www.pib.nic.in/archieve/others/2014/mar/d2014030501.pdf |title=भारतीय चुनाव आयोग की अधिसूचना, नई दिल्ली |access-date=19 जुलाई 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140630221007/http://pib.nic.in/archieve/others/2014/mar/d2014030501.pdf |archive-date=30 जून 2014 |url-status=live }}</ref> शिशिर अधिकारी पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता तथा वरिष्ठ भाजपा नेता [[शुभेंदु अधिकारी]] के पिता हैं।<ref>{{cite news |url=https://indianexpress.com/article/explained/explained-who-is-sisir-father-of-suvendu-adhikari-who-is-now-in-the-bjp-7238712/ |title=Explained: Who is Sisir, father of Suvendu Adhikari, who is now in the BJP? |work=[[द इंडियन एक्सप्रेस|The Indian Express]] |date=22 मार्च 2021}} {{Dead link|date=अक्तूबर 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> वह 25 वर्षों से अधिक समय तक कांथी (कोंताई) नगरपालिका के अध्यक्ष रहे और [[पूर्व मेदिनीपुर ज़िला|पूर्व मेदिनीपुर ज़िले]] की राजनीति में उनका परिवार अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। == प्रारंभिक जीवन और शिक्षा == शिशिर अधिकारी का जन्म 19 सितंबर 1941 को पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर ज़िले के करकुली (कांथी) में एक स्वतंत्रता सेनानी परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम केनाराम अधिकारी और माता का नाम कादंबिनी अधिकारी था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा कांथी में पूरी की और 1960 में [[कलकत्ता विश्वविद्यालय]] से विज्ञान विषय में इंटरमीडिएट (I.Sc.) की डिग्री प्राप्त की।<ref>{{cite web |url=https://www.myneta.info/ls2014/candidate.php?candidate_id=7449 |title=Candidate Affidavit Information: Sisir Kumar Adhikari |publisher=Association for Democratic Reforms (MyNeta) |access-date=17 दिसंबर 2020}}</ref> == राजनीतिक जीवन == शिशिर अधिकारी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ की थी। === नगर पालिका और विधानसभा राजनीति === * वह 25 वर्ष से अधिक समय तक लगातार कांथी नगरपालिका के अध्यक्ष रहे और क्षेत्र के आधारभूत विकास में अग्रणी भूमिका निभाई। * वह तीन बार पश्चिम बंगाल विधान सभा के सदस्य (विधायक) चुने गए: ** '''1982:''' कांथी दक्षिण विधानसभा सीट से पहली बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए। ** '''2001:''' तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में कांथी दक्षिण सीट से पुनः विधायक चुने गए। ** '''2006:''' एगरा विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित होकर राज्य विधानसभा पहुंचे। === नंदीग्राम आंदोलन === 2007 में पूर्व मेदिनीपुर ज़िले में हुए ऐतिहासिक [[नंदीग्राम हिंसा|नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन]] में शिशिर अधिकारी और उनके पुत्र शुभेंदु अधिकारी ने निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने 'भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति' के गठन और संचालन में महत्वपूर्ण सहयोग दिया, जिसने राज्य में 34 वर्षों के वाम मोर्चा शासन के पतन की नींव रखी।<ref>{{cite news |url=https://www.thehindu.com/news/national/other-states/adhikaris-the-first-family-of-purba-medinipur/article33379201.ece |title=Adhikaris: The first family of Purba Medinipur |work=[[द हिन्दू|The Hindu]] |date=20 दिसंबर 2020}}</ref> === संसदीय राजनीति और केंद्रीय मंत्रिमंडल === * '''2009 आम चुनाव:''' शिशिर अधिकारी ने [[2009 भारतीय आम चुनाव|2009 के लोकसभा चुनाव]] में कांथी लोकसभा क्षेत्र से माकपा के प्रशांत प्रधान को 1,29,103 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया। * '''केंद्रीय राज्य मंत्री:''' चुनाव जीतने के बाद उन्हें डॉ. मनमोहन सिंह के मंत्रिमंडल में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री बनाया गया, जहाँ उन्होंने 28 मई 2009 से 22 सितंबर 2012 (तृणमूल कांग्रेस के संप्रग सरकार से समर्थन वापस लेने) तक पदभार संभाला।<ref>{{cite news |url=https://www.hindustantimes.com/india/had-no-work-say-former-tmc-ministers-in-upa-govt/story-kGcvsW00kYpB7WkKrvX9mN.html |title=Had no work, say former TMC ministers in UPA govt |work=[[हिन्दुस्तान टाईम्स|Hindustan Times]] |date=24 सितंबर 2012}} {{Dead link|date=अक्तूबर 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> * '''2014 और 2019:''' वह 2014 और 2019 के आम चुनावों में भारी मतों से जीतकर कांथी से सांसद बने रहे। === भारतीय जनता पार्टी में आगमन === दिसंबर 2020 में उनके पुत्र शुभेंदु अधिकारी द्वारा तृणमूल कांग्रेस छोड़कर [[भारतीय जनता पार्टी]] में शामिल होने के बाद, मार्च 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान एगरा में आयोजित [[अमित शाह]] की एक जनसभा में शिशिर अधिकारी भी औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गए।<ref>{{cite news |url=https://timesofindia.indiatimes.com/india/tmc-mp-sisir-adhikari-joins-bjp-at-amit-shahs-rally-in-bengal/articleshow/81620138.cms |title=TMC MP Sisir Adhikari joins BJP at Amit Shah's rally in Bengal |work=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया|The Times of India]] |date=21 मार्च 2021}}</ref> 2024 के लोकसभा चुनाव में उनके सबसे छोटे बेटे [[सौमेंदु अधिकारी]] ने कांथी सीट से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। == चुनावी इतिहास == {| class="wikitable sortable" ! वर्ष ! चुनाव ! निर्वाचन क्षेत्र ! दल ! प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार ! प्रतिद्वंद्वी दल ! परिणाम |- | 1982 | पश्चिम बंगाल विधान सभा | कांथी दक्षिण | [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] | सत्यब्रत मैती | [[भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)]] | {{won}} विजयी |- | 2001 | पश्चिम बंगाल विधान सभा | कांथी दक्षिण | [[सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस]] | शैलजा कुमार दास | [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] | {{won}} विजयी |- | 2006 | पश्चिम बंगाल विधान सभा | [[एगरा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र|एगरा]] | [[सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस]] | प्रबोध चंद्र सिन्हा | [[डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट पार्टी (प्रबोध चंद्र)]] | {{won}} विजयी |- | [[भारतीय आम चुनाव, 2009|2009]] | 15वीं [[लोक सभा]] | [[कांथी लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|कांथी]] | [[सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस]] | प्रशांत प्रधान | [[भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)]] | {{won}} विजयी |- | [[भारतीय आम चुनाव, 2014|2014]] | 16वीं [[लोक सभा]] | कांथी | [[सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस]] | तापस सिन्हा | [[भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)]] | {{won}} विजयी |- | [[भारतीय आम चुनाव, 2019|2019]] | 17वीं [[लोक सभा]] | कांथी | [[सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस]] | डॉ. देबाशीष सामंत | [[भारतीय जनता पार्टी]] | {{won}} विजयी |} == व्यक्तिगत जीवन == शिशिर अधिकारी का विवाह गायत्री अधिकारी से हुआ। उनके चार पुत्र हैं: # '''[[शुभेंदु अधिकारी]]:''' पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के पूर्व/वर्तमान नेता एवं नंदीग्राम से विधायक। # '''[[दिव्येंदु अधिकारी]]:''' [[तमलुक लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र]] से पूर्व सांसद (2016–2024)। # '''[[सौमेंदु अधिकारी]]:''' वर्तमान सांसद, [[कांथी लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र]] तथा कांथी नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष। # '''सुमेंदु अधिकारी:''' व्यवसायी। == सन्दर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * [https://loksabhaph.nic.in/Members/MemberBioprofile.aspx?mpsno=4393 भारतीय संसद (लोक सभा) आधिकारिक पोर्टल पर प्रोफ़ाइल] [[श्रेणी:१६वीं लोक सभा के सदस्य]] [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:पश्चिम बंगाल के सांसद]] [[श्रेणी:सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस के सांसद]] [[श्रेणी:1941 में जन्मे लोग]] {{जीवनचरित-आधार}} 6rrrratlenxlsqeybn633q5lup3j3j4 जय सिंह प्रथम 0 754416 6630374 6597339 2026-10-17T07:26:14Z Mundhalia746 934684 6630374 wikitext text/x-wiki {{Infobox royalty | succession = आमेर के राजा |image= [[File:Jai Singh I.png|250px|]] |caption = | reign = 1621-1667 | dynasty = कछवाहा | predecessor =[[भाव सिंह]] | successor = [[राम सिंह प्रथम]] | father = महा सिंह | mother = मेवाड़ राजकुमारी दमयंती कँवर | spouse = * [[रानी सुकमती]](1622-1700) * राजिबा बाई (निधन-1667 | issue = * [[राजा राम सिंह-प्रथम]] * [[जगत सिंह]] *[[सुखिजावती बाई]] (1641-1693) *[[निज़ाम बाई]] (1647-1716) 5 पुत्रियां और दो पुत्र | birth_date = 15 जुलाई 1611 | birth_place = [[दौसा]], [[राजस्थान]], [[भारत]] | death_date = 28 अगस्त 1667 | death_place = [[बुरहानपुर]], [[मध्य प्रदेश]] }} '''मिर्जा राजा जयसिंह''' या '''प्रथम जयसिंह''' (15 जुलाई, 1611 – 28 अगस्त, 1667) [[आमेर राज्य]] के शासक थे, जिन्होंने सन् 1621-1667 (46 वर्ष) तक आमेर पर शासन किया। ये आमेर के शासक के रूप में मुग़ल दरबार में सेनापति के पद पर सर्वाधिक सेवाएं (46 वर्ष) देने वाले शासक रहे हैं। जयसिंह ने 3 मुग़ल राजाओं का शासन काल देखा- [[जहांगीर]], [[शाहजहां]], और [[औरंगज़ेब]]। शाहजहां ने 1637 ई. में इन्हें "मिर्जा राजा" की उपाधि से सम्मानित किया गया था। == शासन का आरम्भिक काल (1621-1630) == मिर्ज़ा राजा भाव सिंह का कोई पुत्र ना होने के कारण 1621 ई. में उनके छोटे भाई महासिंह के पुत्र जय सिंह प्रथम मात्र 11 वर्ष की आयु में आमेर के शासक बने। अपने शासन काल के शुरआत में इन्होने मुग़ल बादशाह जहांगीर व शाहजहां की सेवा की । 1623 ई. में जहांगीर ने इन्हें अहमदनगर के शासक मालिक अम्बर के विरुद्ध भेजा जहाँ इन्होंने सफल सैन्य अभियान चलाया। जिस कारण से 1625 ई. में इन्हें जहांगीर ने दलेल खां पठान के विद्रोह का दमन करने भेजा और वहां भी ये विद्रोह को दबाने में सफल रहे। शाहजहां के काल में इन्होंने 1629 ई. में उज़बेगों के विद्रोह का सफलतापूर्वक दमन किया। == बीजापुर व गोलकुंडा अभियान (1636 ई.) == 1636 ई. में शाहजहां ने मुग़ल सेना को जय सिंह प्रथम के नेतृत्व में बीजापुर व गोलकुंडा अभियान पर भेजा वहां इनके सैन्य कौशल के कारण मुग़ल साम्राज्य को सफलताएं मिली । इस से खुश होकर मुग़ल बादशाह ने इनके लौटने पर इन्हें चाकसू व अजमेर के परगने उपहार में दिए। और इन्हें मिर्ज़ा राजा की उपाधि से सम्मानित किया। == कंधार की सूबेदारी (1651 -1653  ई.) == प्रथम बार 1637 ई. में शाहजहां के पुत्र शुजा के साथ इन्हें [[कंधार]] अभियान पर भेजा गया। इसके बाद 1651 ई. में शाहजहां ने इन्हें सदुल्ला खां के साथ में कंधार के युद्ध में नियुक्त किया जहाँ इन्होंने मुग़ल सेना के हरावल दस्ते ( सेना का अग्रभाग) का नेतृत्व किया। इस युद्ध के बाद कंधार में मुग़ल सत्ता स्थापित हो गयी और शाहजहां ने अपने पौत्र सुलेमान शिकोह ( [[दारा शिकोह]] का पुत्र) के साथ में संयुक्त रूप से इन्हें कंधार की सूबेदारी दे दी। == मिर्ज़ा राजा जय सिंह और मुग़ल उत्तराधिकार का युद्ध (1658 -59 ई.) == 1657-58 ई. में जब मुग़ल सत्ता में उत्तराधिकार को लेकर मतभेद हुए तब शाहजहां ने इन्हें 1658 ई. में इन्हें अपने पुत्र शुजा के विरुद्ध भेजा क्योंकि शाहजहां चाहते थे कि इनके ज्येष्ठ पुत्र दारा शिकोह अगला मुग़ल बादशाह बने। मिर्ज़ा राजा जय सिंह के नेतृत्व में सेना ने बहादुरपुर ( वर्तमान [[बनारस]], उत्तर प्रदेश के पास) के युद्ध में शुजा को पराजित कर दिया। इस से खुश होकर शाहजहां ने इनका मनसब बढ़ा के 6000 कर दिया। === धरमत का युद्ध (15 अप्रैल 1658) === शाहजहां के बाद अगला मुग़ल बादशाह बनने के लिए इनके 2 पुत्रों [[दारा शिकोह]] और [[औरंगज़ेब]] के मध्य विवाद था। इन दोनों के मध्य 15 अप्रैल 1658 को धरमत (मध्य प्रदेश) की मैदान पर युद्ध हुआ। इस युद्ध में शाहजहां के निवेदन करने पर मिर्ज़ा राजा जय सिंह ने दारा शिकोह के पक्ष से मुग़ल सेना का नेतृत्व किया। लेकिन इस युद्ध में औरंगज़ेब की जीत हुई। इससे एक बात स्पष्ट हो गयी थी कि औरग़ज़ेब में ही अगला मुग़ल शासक बनने की योग्यता है। इस कारण इन्होंने औरंगज़ेब के अगला मुग़ल शासक बनने की प्रबलता को देखते हुए 25 जून 1658 ई. को [[मथुरा]] (उत्तर प्रदेश) में औरंगज़ेब से मुलाकात की व अपना पूर्ण सहयोग औरंगज़ेब को देने का वचन देकर उसके पक्ष में शामिल हो गये। === दौराई/ देवराई का युद्ध ( मार्च, 1659 ) === मार्च 1659 ई. में दौराई ([[अजमेर]] की निकट) की मैदान में औरंगज़ेब व दारा शिकोह की मध्य मुग़ल सत्ता के लिए दूसरा व अंतिम युद्ध हुआ। इस युद्ध में अपने वचन अनुसार मिर्ज़ा राजा जय सिंह ने औरंगज़ेब के पक्ष से युद्ध लड़ा व उसकी सेना में हरावल दस्ते का नेतृत्व किया। इस युद्ध में औरग़ज़ेब विजयी होकर अगला मुग़ल बादशाह बना। == औरंगज़ेब काल और मिर्जा राजा जय सिंह (1659-1667) == जिस समय औरंगज़ेब शासक बना उस समय [[सतपुड़ा]] के दक्षिण में [[मराठा साम्राज्य|मराठे]] [[शिवाजी]] के नेतृत्व में शक्तिशाली होते जा रहे थे और मुग़ल सत्ता को वहां चुनौती दे रहे थे। साथ ही में मुगलों का खजाना भी लूटा जा रहा था । इस कारण 1665 ई. में औरंगज़ेब ने मिर्ज़ा राजा जय सिंह को १४ हजार सैनिक देकर दक्षिण के सुल्तानों और शिवाजी के विद्रोह को दबाने के लिये भेजा। जय सिंह ने महाराष्ट्र में शिवाजी से कई दुर्ग जीत लिये। इसके बाद [[पुरन्दर का दुर्ग|पुरन्दर के दुर्ग]] का घेरा डाल दिया। इसके बाद शिवाजी ने १६६५ में पुरन्दर की सन्धि की। इससे खुश होकर औरंगज़ेब ने उनके पद में वृद्धि की और उन्हें आगे [[बीजापुर]] (कर्नाटक) और तमिलनाडु में भेज दिया। लेकिन इस बार जय सिंह बीजापुर सल्तनत और तमिलनाडु पर पूर्णत विजय प्राप्त करने और उन्हे मुगल साम्राज्य का हिस्सा बनाने में असफल रहे। इस कारण औरंगजेब बहुत नाराज़ हुआ और इन्हें वापस आने का हुकुम दिया। इस समय तक शिवाजी मिर्ज़ा राजा जयसिंह के पुत्र राजा राम सिंह प्रथम की हवेली में मुग़ल कैद से भाग निकले। बीजापुर और तमिलनाडु के विजय अभियान में इनके असफल होने की कारण, जय सिंह और औरंगज़ेब के मध्य उतने अच्छे सम्बन्ध नहीं रहे। मिर्ज़ा राजा जयसिंह बूढ़े हो चुके थे। इस कारण मुगल बादशाह औरंगज़ेब ने राजा रामसिंह प्रथम को मुग़ल सम्राज्य का सेनापति घोषित कर दिया। मिर्जा राजा जय सिंह के ही कुछ सामंतों ने मराठों के साथ मिलकर ने इनकी वापसी में [[बुरहानपुर]] ( वर्तमान समय में [[मध्य प्रदेश]] में है) में जहर देकर हत्या कर दी। == मिर्जा राजा जयसिंह के नाम शिवाजी का पत्र == भारतीय इतिहास में दो ऐसे पत्र मिलते हैं जिन्हें दो विख्यात महापुरुषों ने लिखे थे। इनमे पहला पत्र "[[जफरनामा]]" कहलाता है, जिसे [[गुरु गोविन्द सिंह]] ने औरंगजेब को भाई दया सिंह के हाथों भेजा था। दूसरा पत्र [[छत्रपति शिवाजी|शिवाजी]] ने आमेर के राजा जयसिंह को भेजा था जो उसे 3 मार्च 1665 को मिल गया था। इन दोनों पत्रों में यह समानताएं हैं की दोनों फारसी भाषा में शेर के रूप में लिखे गए हैं। दोनों की पृष्टभूमि और विषय एक जैसी है। दोनों में देश और धर्म के प्रति अटूट प्रेम प्रकट किया गया है। शिवाजी का पत्र बरसों तक [[पटना साहेब]] के गुरुद्वारे के ग्रंथागार में रखा रहा। बाद में उसे [[जगन्नाथदास रत्नाकर|बाबू जगन्नाथदास रत्नाकर]] ने सन 1909 अप्रेल में काशी में [[काशी नागरी प्रचारिणी सभा]] से प्रकाशित किया था। बाद में "अमर स्वामी सरस्वती" ने उस पत्र का हिन्दी में पद्य और गद्य ने अनुवाद किया था। फिर सन 1985 में अमरज्योति प्रकाशन गाजियाबाद ने पुनः प्रकाशित किया था। औरंगजेब पूरे भारत में इस्लामी राज्य फैलाना चाहता था, लेकिन शिवाजी के कारण वह सफल नही हो रहा था। औरंगजेब चालाक और मक्कार था। उसने पहले तो शिवाजी से मित्रता करनी चाही और दोस्ती के बदले शिवाजी से 23 किले मांगे। लेकिन शिवाजी उसका प्रस्ताव ठुकराते हुए 1664 में सूरत पर हमला कर दिया और मुगलों की वह सारी संपत्ति लूट ली जो उनहोंने हिन्दुओं से लूटी थी। फिर औरंगजेब ने अपने मामा शाईश्ता खान को चालीस हजार की फ़ौज लेकर शिवाजी पर हमला करावा दिया और शिवाजी ने पूना के लाल महल में उसकी उंगलियाँ काट दीं, और वह भाग गया। फिर औरंगजेब ने जयसिंह को कहा कि वह शिवाजी को परास्त कर दे। जयसिंह खुद को [[राम]] का वंशज मानता था। उसने युद्ध में जीत हासिल करने के लिए एक सहस्र चण्डी यज्ञ भी कराया। शिवाजी को इसकी खबर मिल गयी थी जब उन्हें पता चला कि औरंगजेब हिन्दुओं को हिन्दुओं से लड़ाना चाहता है। जिस से दोनों तरफ से हिन्दू ही मरेंगे। तब शिवाजी ने जयसिंह को समझाने के लिए जो पत्र भेजा था, उसके कुछ अंश नीचे दिये गये हैं- ''१. जिगरबंद फर्जानाये रामचंद, ज़ि तो गर्दने राजापूतां बुलंद। : (हे रामचंद्र के वंशज, तुमसे तो क्षत्रिओं की इज्जत उंची हो रही है।) ''२. शुनीदम कि बर कस्दे मन आमदी, ब फ़तहे दयारे दकन आमदी। : (सुना है तुम दखन की तरफ हमले के लिए आ रहे हो।) ''३. न दानी मगर कि ईं सियाही शवद, कज ईं मुल्को दीं रा तबाही शवद। : (तुम क्या यह नहीं जानते कि इससे देश और धर्म बर्बाद हो जाएगा?) ''४. बगर चारा साजम ब तेगोतबर, दो जानिब रसद हिंदुआं रा जरर। : (अगर मैं अपनी तलवार का प्रयोग करूंगा तो दोनों तरफ से हिन्दू ही मरेंगे।) ''५. बि बायद कि बर दुश्मने दीं ज़नी बुनी बेख इस्लाम रा बर कुनी। : (उचित तो यह होता कि आप धर्म के दुश्मन इस्लाम की जड़ उखाड़ देते।) ''६. बिदानी कि बर हिन्दुआने दीगर, न यामद चि अज दस्त आं कीनावर। : (आपको पता नहीं कि इस कपटी ने हिन्दुओं पर क्या-क्या अत्याचार किये हैं।) ''७. ज़ि पासे वफ़ा गर बिदानी सखुन, चि कर्दी ब शाहे जहां याद कुन। : (इस आदमी की वफादारी से क्या लाभ है? तुम्हें पता नही कि इसने बाप शाहजहाँ के साथ क्या किया?) ''८. मिरा ज़हद बायद फरावां नमूद, पये हिन्दियो हिंद दीने हिनूद। : (हमें मिल कर हिंद देश हिन्दू धर्म और हिन्दुओं के लिए लड़ाना चाहिए।) ''९. ब शमशीरो तदबीर आबे दहम, ब तुर्की बतुर्की जवाबे दहम। : (हमें अपनी तलवार और तदबीर से दुश्मन को जैसे को तैसा जवाब देना चाहिए।) ''१०. तराज़ेम राहे सुए काम ख्वेश, फरोज़ेम दर दोजहाँ नाम ख्वेश। : (अगर आप मेरी सलाह मानेंगे तो आपका लोक परलोक नाम होगा।) == मृत्यु == 28 अगस्त 1667 ई. को इनकी बुरहानपुर(मध्य प्रदेश) में इनके विश्वासपात्र सामंतो द्वारा ज़हर देकर हत्या कर दी गयी। यहीं बुरहानपुर में मिर्ज़ा राजा जय सिंह की 38 खम्बों कि छतरी मौजूद है। इनकी मृत्यु की पश्चात् इनके ज्येष्ठ पुत्र राम सिंह प्रथम (1667 -1682 ) व उनके बाद उनके ज्येष्ठ पुत्र बिशन सिंह( 1682 -1700) आमेर के राजा बनते है जिनके पुत्र सवाई जय सिंह/ जय सिंह द्वितीय (1700-1743) हुए ।{{Reflist}} ==इन्हें भी देखें== *[[जय सिंह द्वितीय|जयसिंह द्वितीय]] [[श्रेणी:भारत के शासक]] [[श्रेणी:1611 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:१६६७ में निधन]] [[श्रेणी:जयपुर के महाराजा]] [[श्रेणी:जयपुर के लोग]] {{जयपुर के महाराजा}} n9342ccugpzenkpgmndzjzvmew72mca 6630377 6630374 2026-10-17T07:28:30Z Anitya Gautam 916080 6630377 wikitext text/x-wiki {{Infobox royalty | succession = आमेर के राजा |image= [[File:Jai Singh I.png|250px|]] |caption = | reign = 1621-1667 | dynasty = कछवाहा | predecessor =[[भाव सिंह]] | successor = [[राम सिंह प्रथम]] | father = महा सिंह | mother = मेवाड़ राजकुमारी दमयंती कँवर | spouse = * [[रानी सुकमती]](1622-1700) * राजिबा बाई (निधन-1667 | issue = * [[राजा राम सिंह-प्रथम]] * [[जगत सिंह]] *[[सुखिजावती बाई]] (1641-1693) *[[निज़ाम बाई]] (1647-1716) 5 पुत्रियां और दो पुत्र | birth_date = 15 जुलाई 1611 | birth_place = [[दौसा]], [[राजस्थान]], [[भारत]] | death_date = 28 अगस्त 1667 | death_place = [[बुरहानपुर]], [[मध्य प्रदेश]] }} '''मिर्जा राजा जयसिंह''' या '''प्रथम जयसिंह''' (15 जुलाई, 1611 – 28 अगस्त, 1667) [[आमेर राज्य]] के शासक थे, जिन्होंने सन् 1621-1667 (46 वर्ष) तक आमेर पर शासन किया। ये आमेर के शासक के रूप में मुग़ल दरबार में सेनापति के पद पर सर्वाधिक सेवाएं (46 वर्ष) देने वाले शासक रहे हैं। जयसिंह ने 3 मुग़ल राजाओं का शासन काल देखा- [[जहांगीर]], [[शाहजहां]], और [[औरंगज़ेब]]। शाहजहां ने 1637 ई. में इन्हें "मिर्जा राजा" की उपाधि से सम्मानित किया गया था।<ref name="h591">{{cite web | title=जयसिंह | website=भारतकोश | url=https://bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9 | language=hi | access-date=2026-10-17}}</ref> == शासन का आरम्भिक काल (1621-1630) == मिर्ज़ा राजा भाव सिंह का कोई पुत्र ना होने के कारण 1621 ई. में उनके छोटे भाई महासिंह के पुत्र जय सिंह प्रथम मात्र 11 वर्ष की आयु में आमेर के शासक बने। अपने शासन काल के शुरआत में इन्होने मुग़ल बादशाह जहांगीर व शाहजहां की सेवा की । 1623 ई. में जहांगीर ने इन्हें अहमदनगर के शासक मालिक अम्बर के विरुद्ध भेजा जहाँ इन्होंने सफल सैन्य अभियान चलाया। जिस कारण से 1625 ई. में इन्हें जहांगीर ने दलेल खां पठान के विद्रोह का दमन करने भेजा और वहां भी ये विद्रोह को दबाने में सफल रहे। शाहजहां के काल में इन्होंने 1629 ई. में उज़बेगों के विद्रोह का सफलतापूर्वक दमन किया। == बीजापुर व गोलकुंडा अभियान (1636 ई.) == 1636 ई. में शाहजहां ने मुग़ल सेना को जय सिंह प्रथम के नेतृत्व में बीजापुर व गोलकुंडा अभियान पर भेजा वहां इनके सैन्य कौशल के कारण मुग़ल साम्राज्य को सफलताएं मिली । इस से खुश होकर मुग़ल बादशाह ने इनके लौटने पर इन्हें चाकसू व अजमेर के परगने उपहार में दिए। और इन्हें मिर्ज़ा राजा की उपाधि से सम्मानित किया। == कंधार की सूबेदारी (1651 -1653  ई.) == प्रथम बार 1637 ई. में शाहजहां के पुत्र शुजा के साथ इन्हें [[कंधार]] अभियान पर भेजा गया। इसके बाद 1651 ई. में शाहजहां ने इन्हें सदुल्ला खां के साथ में कंधार के युद्ध में नियुक्त किया जहाँ इन्होंने मुग़ल सेना के हरावल दस्ते ( सेना का अग्रभाग) का नेतृत्व किया। इस युद्ध के बाद कंधार में मुग़ल सत्ता स्थापित हो गयी और शाहजहां ने अपने पौत्र सुलेमान शिकोह ( [[दारा शिकोह]] का पुत्र) के साथ में संयुक्त रूप से इन्हें कंधार की सूबेदारी दे दी। == मिर्ज़ा राजा जय सिंह और मुग़ल उत्तराधिकार का युद्ध (1658 -59 ई.) == 1657-58 ई. में जब मुग़ल सत्ता में उत्तराधिकार को लेकर मतभेद हुए तब शाहजहां ने इन्हें 1658 ई. में इन्हें अपने पुत्र शुजा के विरुद्ध भेजा क्योंकि शाहजहां चाहते थे कि इनके ज्येष्ठ पुत्र दारा शिकोह अगला मुग़ल बादशाह बने। मिर्ज़ा राजा जय सिंह के नेतृत्व में सेना ने बहादुरपुर ( वर्तमान [[बनारस]], उत्तर प्रदेश के पास) के युद्ध में शुजा को पराजित कर दिया। इस से खुश होकर शाहजहां ने इनका मनसब बढ़ा के 6000 कर दिया। === धरमत का युद्ध (15 अप्रैल 1658) === शाहजहां के बाद अगला मुग़ल बादशाह बनने के लिए इनके 2 पुत्रों [[दारा शिकोह]] और [[औरंगज़ेब]] के मध्य विवाद था। इन दोनों के मध्य 15 अप्रैल 1658 को धरमत (मध्य प्रदेश) की मैदान पर युद्ध हुआ। इस युद्ध में शाहजहां के निवेदन करने पर मिर्ज़ा राजा जय सिंह ने दारा शिकोह के पक्ष से मुग़ल सेना का नेतृत्व किया। लेकिन इस युद्ध में औरंगज़ेब की जीत हुई। इससे एक बात स्पष्ट हो गयी थी कि औरग़ज़ेब में ही अगला मुग़ल शासक बनने की योग्यता है। इस कारण इन्होंने औरंगज़ेब के अगला मुग़ल शासक बनने की प्रबलता को देखते हुए 25 जून 1658 ई. को [[मथुरा]] (उत्तर प्रदेश) में औरंगज़ेब से मुलाकात की व अपना पूर्ण सहयोग औरंगज़ेब को देने का वचन देकर उसके पक्ष में शामिल हो गये। === दौराई/ देवराई का युद्ध ( मार्च, 1659 ) === मार्च 1659 ई. में दौराई ([[अजमेर]] की निकट) की मैदान में औरंगज़ेब व दारा शिकोह की मध्य मुग़ल सत्ता के लिए दूसरा व अंतिम युद्ध हुआ। इस युद्ध में अपने वचन अनुसार मिर्ज़ा राजा जय सिंह ने औरंगज़ेब के पक्ष से युद्ध लड़ा व उसकी सेना में हरावल दस्ते का नेतृत्व किया। इस युद्ध में औरग़ज़ेब विजयी होकर अगला मुग़ल बादशाह बना। == औरंगज़ेब काल और मिर्जा राजा जय सिंह (1659-1667) == जिस समय औरंगज़ेब शासक बना उस समय [[सतपुड़ा]] के दक्षिण में [[मराठा साम्राज्य|मराठे]] [[शिवाजी]] के नेतृत्व में शक्तिशाली होते जा रहे थे और मुग़ल सत्ता को वहां चुनौती दे रहे थे। साथ ही में मुगलों का खजाना भी लूटा जा रहा था । इस कारण 1665 ई. में औरंगज़ेब ने मिर्ज़ा राजा जय सिंह को १४ हजार सैनिक देकर दक्षिण के सुल्तानों और शिवाजी के विद्रोह को दबाने के लिये भेजा। जय सिंह ने महाराष्ट्र में शिवाजी से कई दुर्ग जीत लिये। इसके बाद [[पुरन्दर का दुर्ग|पुरन्दर के दुर्ग]] का घेरा डाल दिया। इसके बाद शिवाजी ने १६६५ में पुरन्दर की सन्धि की। इससे खुश होकर औरंगज़ेब ने उनके पद में वृद्धि की और उन्हें आगे [[बीजापुर]] (कर्नाटक) और तमिलनाडु में भेज दिया। लेकिन इस बार जय सिंह बीजापुर सल्तनत और तमिलनाडु पर पूर्णत विजय प्राप्त करने और उन्हे मुगल साम्राज्य का हिस्सा बनाने में असफल रहे। इस कारण औरंगजेब बहुत नाराज़ हुआ और इन्हें वापस आने का हुकुम दिया। इस समय तक शिवाजी मिर्ज़ा राजा जयसिंह के पुत्र राजा राम सिंह प्रथम की हवेली में मुग़ल कैद से भाग निकले। बीजापुर और तमिलनाडु के विजय अभियान में इनके असफल होने की कारण, जय सिंह और औरंगज़ेब के मध्य उतने अच्छे सम्बन्ध नहीं रहे। मिर्ज़ा राजा जयसिंह बूढ़े हो चुके थे। इस कारण मुगल बादशाह औरंगज़ेब ने राजा रामसिंह प्रथम को मुग़ल सम्राज्य का सेनापति घोषित कर दिया। मिर्जा राजा जय सिंह के ही कुछ सामंतों ने मराठों के साथ मिलकर ने इनकी वापसी में [[बुरहानपुर]] ( वर्तमान समय में [[मध्य प्रदेश]] में है) में जहर देकर हत्या कर दी। == मिर्जा राजा जयसिंह के नाम शिवाजी का पत्र == भारतीय इतिहास में दो ऐसे पत्र मिलते हैं जिन्हें दो विख्यात महापुरुषों ने लिखे थे। इनमे पहला पत्र "[[जफरनामा]]" कहलाता है, जिसे [[गुरु गोविन्द सिंह]] ने औरंगजेब को भाई दया सिंह के हाथों भेजा था। दूसरा पत्र [[छत्रपति शिवाजी|शिवाजी]] ने आमेर के राजा जयसिंह को भेजा था जो उसे 3 मार्च 1665 को मिल गया था। इन दोनों पत्रों में यह समानताएं हैं की दोनों फारसी भाषा में शेर के रूप में लिखे गए हैं। दोनों की पृष्टभूमि और विषय एक जैसी है। दोनों में देश और धर्म के प्रति अटूट प्रेम प्रकट किया गया है। शिवाजी का पत्र बरसों तक [[पटना साहेब]] के गुरुद्वारे के ग्रंथागार में रखा रहा। बाद में उसे [[जगन्नाथदास रत्नाकर|बाबू जगन्नाथदास रत्नाकर]] ने सन 1909 अप्रेल में काशी में [[काशी नागरी प्रचारिणी सभा]] से प्रकाशित किया था। बाद में "अमर स्वामी सरस्वती" ने उस पत्र का हिन्दी में पद्य और गद्य ने अनुवाद किया था। फिर सन 1985 में अमरज्योति प्रकाशन गाजियाबाद ने पुनः प्रकाशित किया था। औरंगजेब पूरे भारत में इस्लामी राज्य फैलाना चाहता था, लेकिन शिवाजी के कारण वह सफल नही हो रहा था। औरंगजेब चालाक और मक्कार था। उसने पहले तो शिवाजी से मित्रता करनी चाही और दोस्ती के बदले शिवाजी से 23 किले मांगे। लेकिन शिवाजी उसका प्रस्ताव ठुकराते हुए 1664 में सूरत पर हमला कर दिया और मुगलों की वह सारी संपत्ति लूट ली जो उनहोंने हिन्दुओं से लूटी थी। फिर औरंगजेब ने अपने मामा शाईश्ता खान को चालीस हजार की फ़ौज लेकर शिवाजी पर हमला करावा दिया और शिवाजी ने पूना के लाल महल में उसकी उंगलियाँ काट दीं, और वह भाग गया। फिर औरंगजेब ने जयसिंह को कहा कि वह शिवाजी को परास्त कर दे। जयसिंह खुद को [[राम]] का वंशज मानता था। उसने युद्ध में जीत हासिल करने के लिए एक सहस्र चण्डी यज्ञ भी कराया। शिवाजी को इसकी खबर मिल गयी थी जब उन्हें पता चला कि औरंगजेब हिन्दुओं को हिन्दुओं से लड़ाना चाहता है। जिस से दोनों तरफ से हिन्दू ही मरेंगे। तब शिवाजी ने जयसिंह को समझाने के लिए जो पत्र भेजा था, उसके कुछ अंश नीचे दिये गये हैं- ''१. जिगरबंद फर्जानाये रामचंद, ज़ि तो गर्दने राजापूतां बुलंद। : (हे रामचंद्र के वंशज, तुमसे तो क्षत्रिओं की इज्जत उंची हो रही है।) ''२. शुनीदम कि बर कस्दे मन आमदी, ब फ़तहे दयारे दकन आमदी। : (सुना है तुम दखन की तरफ हमले के लिए आ रहे हो।) ''३. न दानी मगर कि ईं सियाही शवद, कज ईं मुल्को दीं रा तबाही शवद। : (तुम क्या यह नहीं जानते कि इससे देश और धर्म बर्बाद हो जाएगा?) ''४. बगर चारा साजम ब तेगोतबर, दो जानिब रसद हिंदुआं रा जरर। : (अगर मैं अपनी तलवार का प्रयोग करूंगा तो दोनों तरफ से हिन्दू ही मरेंगे।) ''५. बि बायद कि बर दुश्मने दीं ज़नी बुनी बेख इस्लाम रा बर कुनी। : (उचित तो यह होता कि आप धर्म के दुश्मन इस्लाम की जड़ उखाड़ देते।) ''६. बिदानी कि बर हिन्दुआने दीगर, न यामद चि अज दस्त आं कीनावर। : (आपको पता नहीं कि इस कपटी ने हिन्दुओं पर क्या-क्या अत्याचार किये हैं।) ''७. ज़ि पासे वफ़ा गर बिदानी सखुन, चि कर्दी ब शाहे जहां याद कुन। : (इस आदमी की वफादारी से क्या लाभ है? तुम्हें पता नही कि इसने बाप शाहजहाँ के साथ क्या किया?) ''८. मिरा ज़हद बायद फरावां नमूद, पये हिन्दियो हिंद दीने हिनूद। : (हमें मिल कर हिंद देश हिन्दू धर्म और हिन्दुओं के लिए लड़ाना चाहिए।) ''९. ब शमशीरो तदबीर आबे दहम, ब तुर्की बतुर्की जवाबे दहम। : (हमें अपनी तलवार और तदबीर से दुश्मन को जैसे को तैसा जवाब देना चाहिए।) ''१०. तराज़ेम राहे सुए काम ख्वेश, फरोज़ेम दर दोजहाँ नाम ख्वेश। : (अगर आप मेरी सलाह मानेंगे तो आपका लोक परलोक नाम होगा।) == मृत्यु == 28 अगस्त 1667 ई. को इनकी बुरहानपुर(मध्य प्रदेश) में इनके विश्वासपात्र सामंतो द्वारा ज़हर देकर हत्या कर दी गयी। यहीं बुरहानपुर में मिर्ज़ा राजा जय सिंह की 38 खम्बों कि छतरी मौजूद है। इनकी मृत्यु की पश्चात् इनके ज्येष्ठ पुत्र राम सिंह प्रथम (1667 -1682 ) व उनके बाद उनके ज्येष्ठ पुत्र बिशन सिंह( 1682 -1700) आमेर के राजा बनते है जिनके पुत्र सवाई जय सिंह/ जय सिंह द्वितीय (1700-1743) हुए ।{{Reflist}} ==इन्हें भी देखें== *[[जय सिंह द्वितीय|जयसिंह द्वितीय]] [[श्रेणी:भारत के शासक]] [[श्रेणी:1611 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:१६६७ में निधन]] [[श्रेणी:जयपुर के महाराजा]] [[श्रेणी:जयपुर के लोग]] {{जयपुर के महाराजा}} 1kq3558j239s1248nwqffwzxhtqno7t 6630379 6630377 2026-10-17T07:29:45Z Anitya Gautam 916080 6630379 wikitext text/x-wiki {{Infobox royalty | succession = आमेर के राजा |image= [[File:Jai Singh I.png|250px|]] |caption = | reign = 1621-1667 | dynasty = कछवाहा | predecessor =[[भाव सिंह]] | successor = [[राम सिंह प्रथम]] | father = महा सिंह | mother = मेवाड़ राजकुमारी दमयंती कँवर | spouse = * [[रानी सुकमती]](1622-1700) * राजिबा बाई (निधन-1667 | issue = * [[राजा राम सिंह-प्रथम]] * [[जगत सिंह]] *[[सुखिजावती बाई]] (1641-1693) *[[निज़ाम बाई]] (1647-1716) 5 पुत्रियां और दो पुत्र | birth_date = 15 जुलाई 1611 | birth_place = [[दौसा]], [[राजस्थान]], [[भारत]] | death_date = 28 अगस्त 1667 | death_place = [[बुरहानपुर]], [[मध्य प्रदेश]] }} '''मिर्जा राजा जयसिंह''' या '''प्रथम जयसिंह''' (15 जुलाई, 1611 – 28 अगस्त, 1667) [[आमेर राज्य]] के शासक थे, जिन्होंने सन् 1621-1667 (46 वर्ष) तक आमेर पर शासन किया। ये आमेर के शासक के रूप में मुग़ल दरबार में सेनापति के पद पर सर्वाधिक सेवाएं (46 वर्ष) देने वाले शासक रहे हैं। जयसिंह ने 3 मुग़ल राजाओं का शासन काल देखा- [[जहांगीर]], [[शाहजहां]], और [[औरंगज़ेब]]। शाहजहां ने 1637 ई. में इन्हें "मिर्जा राजा" की उपाधि से सम्मानित किया गया था।<ref name="h591">{{cite web | title=जयसिंह | website=भारतकोश | url=https://bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9 | language=hi | access-date=2026-10-17}}</ref> == शासन का आरम्भिक काल (1621-1630) == मिर्ज़ा राजा भाव सिंह का कोई पुत्र ना होने के कारण 1621 ई. में उनके छोटे भाई महासिंह के पुत्र जय सिंह प्रथम मात्र 11 वर्ष की आयु में आमेर के शासक बने। अपने शासन काल के शुरआत में इन्होने मुग़ल बादशाह जहांगीर व शाहजहां की सेवा की । 1623 ई. में जहांगीर ने इन्हें अहमदनगर के शासक मालिक अम्बर के विरुद्ध भेजा जहाँ इन्होंने सफल सैन्य अभियान चलाया। जिस कारण से 1625 ई. में इन्हें जहांगीर ने दलेल खां पठान के विद्रोह का दमन करने भेजा और वहां भी ये विद्रोह को दबाने में सफल रहे। शाहजहां के काल में इन्होंने 1629 ई. में उज़बेगों के विद्रोह का सफलतापूर्वक दमन किया। == बीजापुर व गोलकुंडा अभियान (1636 ई.) == 1636 ई. में शाहजहां ने मुग़ल सेना को जय सिंह प्रथम के नेतृत्व में बीजापुर व गोलकुंडा अभियान पर भेजा वहां इनके सैन्य कौशल के कारण मुग़ल साम्राज्य को सफलताएं मिली । इस से खुश होकर मुग़ल बादशाह ने इनके लौटने पर इन्हें चाकसू व अजमेर के परगने उपहार में दिए। और इन्हें मिर्ज़ा राजा की उपाधि से सम्मानित किया। == कंधार की सूबेदारी (1651 -1653  ई.) == प्रथम बार 1637 ई. में शाहजहां के पुत्र शुजा के साथ इन्हें [[कंधार]] अभियान पर भेजा गया। इसके बाद 1651 ई. में शाहजहां ने इन्हें सदुल्ला खां के साथ में कंधार के युद्ध में नियुक्त किया जहाँ इन्होंने मुग़ल सेना के हरावल दस्ते ( सेना का अग्रभाग) का नेतृत्व किया। इस युद्ध के बाद कंधार में मुग़ल सत्ता स्थापित हो गयी और शाहजहां ने अपने पौत्र सुलेमान शिकोह ( [[दारा शिकोह]] का पुत्र) के साथ में संयुक्त रूप से इन्हें कंधार की सूबेदारी दे दी। == मिर्ज़ा राजा जय सिंह और मुग़ल उत्तराधिकार का युद्ध (1658 -59 ई.) == 1657-58 ई. में जब मुग़ल सत्ता में उत्तराधिकार को लेकर मतभेद हुए तब शाहजहां ने इन्हें 1658 ई. में इन्हें अपने पुत्र शुजा के विरुद्ध भेजा क्योंकि शाहजहां चाहते थे कि इनके ज्येष्ठ पुत्र दारा शिकोह अगला मुग़ल बादशाह बने। मिर्ज़ा राजा जय सिंह के नेतृत्व में सेना ने बहादुरपुर ( वर्तमान [[बनारस]], उत्तर प्रदेश के पास) के युद्ध में शुजा को पराजित कर दिया। इस से खुश होकर शाहजहां ने इनका मनसब बढ़ा के 6000 कर दिया। === धरमत का युद्ध (15 अप्रैल 1658) === शाहजहां के बाद अगला मुग़ल बादशाह बनने के लिए इनके 2 पुत्रों [[दारा शिकोह]] और [[औरंगज़ेब]] के मध्य विवाद था। इन दोनों के मध्य 15 अप्रैल 1658 को धरमत (मध्य प्रदेश) की मैदान पर युद्ध हुआ। इस युद्ध में शाहजहां के निवेदन करने पर मिर्ज़ा राजा जय सिंह ने दारा शिकोह के पक्ष से मुग़ल सेना का नेतृत्व किया। लेकिन इस युद्ध में औरंगज़ेब की जीत हुई। इससे एक बात स्पष्ट हो गयी थी कि औरग़ज़ेब में ही अगला मुग़ल शासक बनने की योग्यता है। इस कारण इन्होंने औरंगज़ेब के अगला मुग़ल शासक बनने की प्रबलता को देखते हुए 25 जून 1658 ई. को [[मथुरा]] (उत्तर प्रदेश) में औरंगज़ेब से मुलाकात की व अपना पूर्ण सहयोग औरंगज़ेब को देने का वचन देकर उसके पक्ष में शामिल हो गये। === दौराई/ देवराई का युद्ध ( मार्च, 1659 ) === मार्च 1659 ई. में दौराई ([[अजमेर]] की निकट) की मैदान में औरंगज़ेब व दारा शिकोह की मध्य मुग़ल सत्ता के लिए दूसरा व अंतिम युद्ध हुआ। इस युद्ध में अपने वचन अनुसार मिर्ज़ा राजा जय सिंह ने औरंगज़ेब के पक्ष से युद्ध लड़ा व उसकी सेना में हरावल दस्ते का नेतृत्व किया। इस युद्ध में औरग़ज़ेब विजयी होकर अगला मुग़ल बादशाह बना। == औरंगज़ेब काल और मिर्जा राजा जय सिंह (1659-1667) == जिस समय औरंगज़ेब शासक बना उस समय [[सतपुड़ा]] के दक्षिण में [[मराठा साम्राज्य|मराठे]] [[शिवाजी]] के नेतृत्व में शक्तिशाली होते जा रहे थे और मुग़ल सत्ता को वहां चुनौती दे रहे थे। साथ ही में मुगलों का खजाना भी लूटा जा रहा था । इस कारण 1665 ई. में औरंगज़ेब ने मिर्ज़ा राजा जय सिंह को १४ हजार सैनिक देकर दक्षिण के सुल्तानों और शिवाजी के विद्रोह को दबाने के लिये भेजा। जय सिंह ने महाराष्ट्र में शिवाजी से कई दुर्ग जीत लिये। इसके बाद [[पुरन्दर का दुर्ग|पुरन्दर के दुर्ग]] का घेरा डाल दिया। इसके बाद शिवाजी ने १६६५ में पुरन्दर की सन्धि की। इससे खुश होकर औरंगज़ेब ने उनके पद में वृद्धि की और उन्हें आगे [[बीजापुर]] (कर्नाटक) और तमिलनाडु में भेज दिया। लेकिन इस बार जय सिंह बीजापुर सल्तनत और तमिलनाडु पर पूर्णत विजय प्राप्त करने और उन्हे मुगल साम्राज्य का हिस्सा बनाने में असफल रहे। इस कारण औरंगजेब बहुत नाराज़ हुआ और इन्हें वापस आने का हुकुम दिया। इस समय तक शिवाजी मिर्ज़ा राजा जयसिंह के पुत्र राजा राम सिंह प्रथम की हवेली में मुग़ल कैद से भाग निकले। बीजापुर और तमिलनाडु के विजय अभियान में इनके असफल होने की कारण, जय सिंह और औरंगज़ेब के मध्य उतने अच्छे सम्बन्ध नहीं रहे। मिर्ज़ा राजा जयसिंह बूढ़े हो चुके थे। इस कारण मुगल बादशाह औरंगज़ेब ने राजा रामसिंह प्रथम को मुग़ल सम्राज्य का सेनापति घोषित कर दिया। मिर्जा राजा जय सिंह के ही कुछ सामंतों ने मराठों के साथ मिलकर ने इनकी वापसी में [[बुरहानपुर]] ( वर्तमान समय में [[मध्य प्रदेश]] में है) में जहर देकर हत्या कर दी। == मिर्जा राजा जयसिंह के नाम शिवाजी का पत्र == भारतीय इतिहास में दो ऐसे पत्र मिलते हैं जिन्हें दो विख्यात महापुरुषों ने लिखे थे। इनमे पहला पत्र "[[जफरनामा]]" कहलाता है, जिसे [[गुरु गोविन्द सिंह]] ने औरंगजेब को भाई दया सिंह के हाथों भेजा था। दूसरा पत्र [[छत्रपति शिवाजी|शिवाजी]] ने आमेर के राजा जयसिंह को भेजा था जो उसे 3 मार्च 1665 को मिल गया था। इन दोनों पत्रों में यह समानताएं हैं की दोनों फारसी भाषा में शेर के रूप में लिखे गए हैं। दोनों की पृष्टभूमि और विषय एक जैसी है। दोनों में देश और धर्म के प्रति अटूट प्रेम प्रकट किया गया है। शिवाजी का पत्र बरसों तक [[पटना साहेब]] के गुरुद्वारे के ग्रंथागार में रखा रहा। बाद में उसे [[जगन्नाथदास रत्नाकर|बाबू जगन्नाथदास रत्नाकर]] ने सन 1909 अप्रेल में काशी में [[काशी नागरी प्रचारिणी सभा]] से प्रकाशित किया था। बाद में "अमर स्वामी सरस्वती" ने उस पत्र का हिन्दी में पद्य और गद्य ने अनुवाद किया था। फिर सन 1985 में अमरज्योति प्रकाशन गाजियाबाद ने पुनः प्रकाशित किया था। औरंगजेब पूरे भारत में इस्लामी राज्य फैलाना चाहता था, लेकिन शिवाजी के कारण वह सफल नही हो रहा था। औरंगजेब चालाक और मक्कार था। उसने पहले तो शिवाजी से मित्रता करनी चाही और दोस्ती के बदले शिवाजी से 23 किले मांगे। लेकिन शिवाजी उसका प्रस्ताव ठुकराते हुए 1664 में सूरत पर हमला कर दिया और मुगलों की वह सारी संपत्ति लूट ली जो उनहोंने हिन्दुओं से लूटी थी। फिर औरंगजेब ने अपने मामा शाईश्ता खान को चालीस हजार की फ़ौज लेकर शिवाजी पर हमला करावा दिया और शिवाजी ने पूना के लाल महल में उसकी उंगलियाँ काट दीं, और वह भाग गया। फिर औरंगजेब ने जयसिंह को कहा कि वह शिवाजी को परास्त कर दे। जयसिंह खुद को [[राम]] का वंशज मानता था। उसने युद्ध में जीत हासिल करने के लिए एक सहस्र चण्डी यज्ञ भी कराया। शिवाजी को इसकी खबर मिल गयी थी जब उन्हें पता चला कि औरंगजेब हिन्दुओं को हिन्दुओं से लड़ाना चाहता है। जिस से दोनों तरफ से हिन्दू ही मरेंगे। तब शिवाजी ने जयसिंह को समझाने के लिए जो पत्र भेजा था, उसके कुछ अंश नीचे दिये गये हैं- ''१. जिगरबंद फर्जानाये रामचंद, ज़ि तो गर्दने राजापूतां बुलंद। : (हे रामचंद्र के वंशज, तुमसे तो क्षत्रिओं की इज्जत उंची हो रही है।) ''२. शुनीदम कि बर कस्दे मन आमदी, ब फ़तहे दयारे दकन आमदी। : (सुना है तुम दखन की तरफ हमले के लिए आ रहे हो।) ''३. न दानी मगर कि ईं सियाही शवद, कज ईं मुल्को दीं रा तबाही शवद। : (तुम क्या यह नहीं जानते कि इससे देश और धर्म बर्बाद हो जाएगा?) ''४. बगर चारा साजम ब तेगोतबर, दो जानिब रसद हिंदुआं रा जरर। : (अगर मैं अपनी तलवार का प्रयोग करूंगा तो दोनों तरफ से हिन्दू ही मरेंगे।) ''५. बि बायद कि बर दुश्मने दीं ज़नी बुनी बेख इस्लाम रा बर कुनी। : (उचित तो यह होता कि आप धर्म के दुश्मन इस्लाम की जड़ उखाड़ देते।) ''६. बिदानी कि बर हिन्दुआने दीगर, न यामद चि अज दस्त आं कीनावर। : (आपको पता नहीं कि इस कपटी ने हिन्दुओं पर क्या-क्या अत्याचार किये हैं।) ''७. ज़ि पासे वफ़ा गर बिदानी सखुन, चि कर्दी ब शाहे जहां याद कुन। : (इस आदमी की वफादारी से क्या लाभ है? तुम्हें पता नही कि इसने बाप शाहजहाँ के साथ क्या किया?) ''८. मिरा ज़हद बायद फरावां नमूद, पये हिन्दियो हिंद दीने हिनूद। : (हमें मिल कर हिंद देश हिन्दू धर्म और हिन्दुओं के लिए लड़ाना चाहिए।) ''९. ब शमशीरो तदबीर आबे दहम, ब तुर्की बतुर्की जवाबे दहम। : (हमें अपनी तलवार और तदबीर से दुश्मन को जैसे को तैसा जवाब देना चाहिए।) ''१०. तराज़ेम राहे सुए काम ख्वेश, फरोज़ेम दर दोजहाँ नाम ख्वेश। : (अगर आप मेरी सलाह मानेंगे तो आपका लोक परलोक नाम होगा।) == मृत्यु == 28 अगस्त 1667 ई. को इनकी बुरहानपुर(मध्य प्रदेश) में इनके विश्वासपात्र सामंतो द्वारा ज़हर देकर हत्या कर दी गयी। यहीं बुरहानपुर में मिर्ज़ा राजा जय सिंह की 38 खम्बों कि छतरी मौजूद है। इनकी मृत्यु की पश्चात् इनके ज्येष्ठ पुत्र राम सिंह प्रथम (1667 -1682 ) व उनके बाद उनके ज्येष्ठ पुत्र बिशन सिंह( 1682 -1700) आमेर के राजा बनते है जिनके पुत्र सवाई जय सिंह/ जय सिंह द्वितीय (1700-1743) हुए । ==सन्दर्भ== {{Reflist}} ==इन्हें भी देखें== *[[जय सिंह द्वितीय|जयसिंह द्वितीय]] [[श्रेणी:भारत के शासक]] [[श्रेणी:1611 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:१६६७ में निधन]] [[श्रेणी:जयपुर के महाराजा]] [[श्रेणी:जयपुर के लोग]] {{जयपुर के महाराजा}} iwghrm5puz8xf1so8wjybs4yzv87r3v श्रेणी:जालोर जिले के दर्शनीय स्थल 14 761862 6630409 4199254 2026-10-17T10:15:07Z SparrowQ 86379 [[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:जालौर ज़िला]] जोड़ी 6630409 wikitext text/x-wiki [[श्रेणी:राजस्थान में पर्यटन आकर्षण]] [[श्रेणी:जालौर ज़िला]] 4jx7th1t8xs453k6h2l5uzsnd8r5hlv एवरेस्ट बेस कैंप 0 762102 6630342 6385669 2026-10-17T05:01:21Z Maglomedia 954129 /* बाहरी कड़ियाँ */ 6630342 wikitext text/x-wiki [[File:Khumbutse.jpg|thumb|400px|एवरेस्ट बेस कैंप{{mdash}}EBC, नेपाल]] दुनिया की सबसे ऊँची चोटी [[एवरेस्ट पर्वत|माउंट एवरेस्ट]] [[नेपाल]] और [[तिब्बत]] की सीमा भी है। इस प्रकार इसके दो बेस कैंप हैं। एक दक्षिणी बेस कैंप जो कि नेपाल में स्थित है और दूसरा उत्तरी बेस कैंप जो कि तिब्बत में स्थित है। इन बेस कैंपों का प्रयोग पर्वतारोही माउंट एवरेस्ट के पर्वतारोहण के लिये आधार के तौर पर करते हैं। दक्षिणी बेस कैंप तक पहुँचने के लिये काफ़ी लंबे पैदल रास्ते का प्रयोग किया जाता है और भोजन-आपूर्ति आदि वहाँ के स्थानीय निवासी [[शेर्पा|शेरपा]] उपलब्ध कराते हैं। दूसरी ओर, उत्तरी बेस कैंप तक सड़क बनी हुई है। बेस कैंपों पर पर्वतारोही कई-कई दिनों तक रुकते हैं ताकि वातावरण के अनुकूल हो सकें। =={{anchor|एवरेस्ट दक्षिणी बेस कैंप}}दक्षिणी बेस कैंप, नेपाल== [[File:Short Rest on Everest Base Trail.jpg|thumb|ट्रैक पर विश्राम करते ट्रैकर्स]] यह ट्रैक दुनिया के सबसे प्रसिद्ध ट्रैकिंग मार्गों में से एक है और प्रतिवर्ष हज़ारों ट्रैकर्स यहाँ आते हैं। दक्षिणी एवरेस्ट बेस कैंप समुद्र तल से 5,364 मीटर (17,598 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। सामान्यतः ट्रैकर्स समय बचाने के लिये [[काठमाण्डु|काठमांडू]] से [[लुकला]] तक वायुमार्ग से आते हैं और लुकला के बाद अपनी ट्रैकिंग आरंभ करते हैं। बहुत थोड़े-से ट्रैकर्स [[जीरी]] या [[फाफलू]] तक सड़क मार्ग से आकर आगे की यात्रा पैदल करते हैं। 2015 में, 40000 से ज्यादा ट्रैकर्स ने एवरेस्ट बेस कैंप की ट्रैकिंग की। इसी से इस ट्रैक की लोकप्रियता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। [[File:Everest Base Trek Route Map.svg|thumb|दक्षिणी बेस कैंप का मार्ग|right|350px]] लुकला से ट्रैकर्स [[दूधकोशी नदी]] के साथ-साथ ट्रैकिंग करते हुए आगे बढ़ते हैं और [[नामचे बाज़ार]], {{Convert|3440|m|ft}} पहुँचते हैं। इसमें दो दिन लग जाते हैं, लेकिन अच्छी फिटनेस वाले ट्रैकर्स इसे एक दिन में भी तय कर सकते हैं। नामचे बाज़ार इस ट्रैकिंग मार्ग का सबसे बड़ा शहर है। यहाँ ज्यादातर ट्रैकर्स एक या दो दिन रुकते हैं, ताकि ऊँचाई के अनुकूल हो सकें। इसके बाद एक दिन में [[तेंगबोचे]] पहुँचते हैं, दूसरे दिन [[डिंगबोचे]], {{Convert|4260|m|ft}} तीसरे दिन [[लोबुचे]] या [[घोरकक्षेप]] और चौथे दिन बेस कैंप पहुँच जाते हैं। 25 अप्रैल 2015 को नेपाल में जो 7.8 और 7.3 की तीव्रता के भूकंप <ref>{{cite web|url=http://news.nationalgeographic.com/2015/04/150425-everest-earthquake-basecamp-nepal-himalaya-climbing-sherpa/|title=Everest Base Camp a ‘War Zone’ After Earthquake Triggers Avalanches|publisher=National Geographic|accessdate=26 April 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150428061313/http://news.nationalgeographic.com/2015/04/150425-everest-earthquake-basecamp-nepal-himalaya-climbing-sherpa/|archive-date=28 अप्रैल 2015|url-status=live}}</ref> आये थे, उनसे बेस कैंप पर 19 लोगों की मृत्यु हुई थी। भूकंप से माउंट पुमो-री से [[हिमस्खलन]] हुआ और उसने बेस कैंप को तबाह कर दिया। <gallery> File:South Everest Base Camp sleeping platform.jpg|खुंबू ग्लेशियर पर स्थित बेसकैंप में यहीं पर पर्वतारोही अपने तंबू लगाते हैं। पीछे [[खुंबू आइसफॉल]] दिख रहा है। File:EverestBasecamp-fromKalarPatar.jpg|नीचे बायें कोने में बेस कैंप और दाहिने खुंबू आइसफॉल File:KhumbuIcefall.jpg|खुंबू आइसफॉल File:Everest base camp(1).jpg|बेस कैंप</gallery> {{wide image|Sagarmatha National Park-Gorak Shep to Pheriche 2013-05-06 08-10-23-2013-05-06 08-11-08.jpg|800px|[[सागरमाथा नेशनल पार्क]] का पैनोरमा|alt=पैनोरमा}} ==उत्तरी बेस कैंप, तिब्बत== उत्तरी बेस कैंप चूँकि [[तिब्बत]] ([[चीन]]) में स्थित है, इसलिये वहाँ जाने के लिये विशेष परमिट की आवश्यकता होती है। ये परमिट हमेशा [[ल्हासा]] या चीन के किसी अन्य हिस्सों में स्थित विभिन्न मान्यताप्राप्त ट्रैवल कंपनियों के माध्यम से ही लिये जा सकते हैं। इसमें गाड़ी, ड्राइवर और गाइड़ लेना आवश्यक होता है, जो वह कंपनी उपलब्ध कराती है। सामान्य पर्यटकों के लिये बेस कैंप पर्वतारोहियों द्वारा प्रयुक्त बेस कैंप से थोड़ा पहले है। <gallery> File:Approach to Everest Base Camp, Tibet.jpg|उत्तरी बेस कैंप की ओर जाती सड़क Image:Tent village at Everest Base Camp, Tibet.JPG |बेस कैंप पर उपलब्ध तंबू कालोनी। पीछे माउंट एवरेस्ट दिख रहा है। Image:North Mount Everest Base Camp Tea House.png|उत्तरी बेस कैंप में एक चाय की दुकान Image:Interior of tea-househotel at Everest Base Camp.JPG|एक होटल का अंदरूनी भाग File:Climbers' tents at Mt. Everest Base Camp, Tibet.jpg|पर्वतारोहियों के तंबू Image:Starry night at Mount Everest.jpg|बेस कैंप से रात का नज़ारा </gallery> {{wide image|20110810 North Face of Everest Tibet China Panoramic.jpg|640px|उत्तरी बेस कैंप से दिखती एवरेस्ट}} == इन्हें भी देखें == == सन्दर्भ == {{reflist}} ==बाहरी कड़ियाँ== <!-- PLEASE DO ''not'' ADD BLOGS OR COMMERCIAL LINKS OR IT WILL BE ADDED TO WIKIPEDIA BLACKLIST--> *[https://web.archive.org/web/20161210063852/https://s3.amazonaws.com/Gigapixel_Trees/Pumori_Spring2012_EBC_Full/EBC_Pumori_050112_8bit_FLAT.html Mt. Pumori EBC Panorama] *[https://web.archive.org/web/20150514220610/http://bdvid.com/2015/04/exclusive-hit-by-avalanche-in-mt-everest-basecamp-25-04-2015 Video: Avalanche hitting Everest Base Camp] *[http://www.adventureboundnepal.com/uploads/banner//1426567780_kala-pathar-everest-base-camp-trek.jpg View from Kala Pathar Everest Basecamp]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }} *[https://web.archive.org/web/20161110043655/http://www.zmidloch.com/outdoor-blog/ebc-everest-base-camp-trek-gokyo/ GPS coordinates of EBC trek and description of the EBC trek] *[https://adventure-pulse.com/blog/everest-base-camp-trek-guide/ Everest Base Camp Guide] {{माउंट एवरेस्ट}} {{DEFAULTSORT:एवरेस्ट बेस कैंप}} [[श्रेणी:माउंट एवरेस्ट]] [[श्रेणी:सोलूखुंबू जिला]] [[श्रेणी:टिंगरी]] bgfa3p9n1mrn7hcd18cdtbkfkcjcmi5 6630346 6630342 2026-10-17T06:03:58Z चाहर धर्मेंद्र 703114 प्रचार सामग्री हटाई 6630346 wikitext text/x-wiki [[File:Khumbutse.jpg|thumb|400px|एवरेस्ट बेस कैंप{{mdash}}EBC, नेपाल]] दुनिया की सबसे ऊँची चोटी [[एवरेस्ट पर्वत|माउंट एवरेस्ट]] [[नेपाल]] और [[तिब्बत]] की सीमा भी है। इस प्रकार इसके दो बेस कैंप हैं। एक दक्षिणी बेस कैंप जो कि नेपाल में स्थित है और दूसरा उत्तरी बेस कैंप जो कि तिब्बत में स्थित है। इन बेस कैंपों का प्रयोग पर्वतारोही माउंट एवरेस्ट के पर्वतारोहण के लिये आधार के तौर पर करते हैं। दक्षिणी बेस कैंप तक पहुँचने के लिये काफ़ी लंबे पैदल रास्ते का प्रयोग किया जाता है और भोजन-आपूर्ति आदि वहाँ के स्थानीय निवासी [[शेर्पा|शेरपा]] उपलब्ध कराते हैं। दूसरी ओर, उत्तरी बेस कैंप तक सड़क बनी हुई है। बेस कैंपों पर पर्वतारोही कई-कई दिनों तक रुकते हैं ताकि वातावरण के अनुकूल हो सकें। =={{anchor|एवरेस्ट दक्षिणी बेस कैंप}}दक्षिणी बेस कैंप, नेपाल== [[File:Short Rest on Everest Base Trail.jpg|thumb|ट्रैक पर विश्राम करते ट्रैकर्स]] यह ट्रैक दुनिया के सबसे प्रसिद्ध ट्रैकिंग मार्गों में से एक है और प्रतिवर्ष हज़ारों ट्रैकर्स यहाँ आते हैं। दक्षिणी एवरेस्ट बेस कैंप समुद्र तल से 5,364 मीटर (17,598 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। सामान्यतः ट्रैकर्स समय बचाने के लिये [[काठमाण्डु|काठमांडू]] से [[लुकला]] तक वायुमार्ग से आते हैं और लुकला के बाद अपनी ट्रैकिंग आरंभ करते हैं। बहुत थोड़े-से ट्रैकर्स [[जीरी]] या [[फाफलू]] तक सड़क मार्ग से आकर आगे की यात्रा पैदल करते हैं। 2015 में, 40000 से ज्यादा ट्रैकर्स ने एवरेस्ट बेस कैंप की ट्रैकिंग की। इसी से इस ट्रैक की लोकप्रियता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। [[File:Everest Base Trek Route Map.svg|thumb|दक्षिणी बेस कैंप का मार्ग|right|350px]] लुकला से ट्रैकर्स [[दूधकोशी नदी]] के साथ-साथ ट्रैकिंग करते हुए आगे बढ़ते हैं और [[नामचे बाज़ार]], {{Convert|3440|m|ft}} पहुँचते हैं। इसमें दो दिन लग जाते हैं, लेकिन अच्छी फिटनेस वाले ट्रैकर्स इसे एक दिन में भी तय कर सकते हैं। नामचे बाज़ार इस ट्रैकिंग मार्ग का सबसे बड़ा शहर है। यहाँ ज्यादातर ट्रैकर्स एक या दो दिन रुकते हैं, ताकि ऊँचाई के अनुकूल हो सकें। इसके बाद एक दिन में [[तेंगबोचे]] पहुँचते हैं, दूसरे दिन [[डिंगबोचे]], {{Convert|4260|m|ft}} तीसरे दिन [[लोबुचे]] या [[घोरकक्षेप]] और चौथे दिन बेस कैंप पहुँच जाते हैं। 25 अप्रैल 2015 को नेपाल में जो 7.8 और 7.3 की तीव्रता के भूकंप <ref>{{cite web|url=http://news.nationalgeographic.com/2015/04/150425-everest-earthquake-basecamp-nepal-himalaya-climbing-sherpa/|title=Everest Base Camp a ‘War Zone’ After Earthquake Triggers Avalanches|publisher=National Geographic|accessdate=26 April 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150428061313/http://news.nationalgeographic.com/2015/04/150425-everest-earthquake-basecamp-nepal-himalaya-climbing-sherpa/|archive-date=28 अप्रैल 2015|url-status=live}}</ref> आये थे, उनसे बेस कैंप पर 19 लोगों की मृत्यु हुई थी। भूकंप से माउंट पुमो-री से [[हिमस्खलन]] हुआ और उसने बेस कैंप को तबाह कर दिया। <gallery> File:South Everest Base Camp sleeping platform.jpg|खुंबू ग्लेशियर पर स्थित बेसकैंप में यहीं पर पर्वतारोही अपने तंबू लगाते हैं। पीछे [[खुंबू आइसफॉल]] दिख रहा है। File:EverestBasecamp-fromKalarPatar.jpg|नीचे बायें कोने में बेस कैंप और दाहिने खुंबू आइसफॉल File:KhumbuIcefall.jpg|खुंबू आइसफॉल File:Everest base camp(1).jpg|बेस कैंप</gallery> {{wide image|Sagarmatha National Park-Gorak Shep to Pheriche 2013-05-06 08-10-23-2013-05-06 08-11-08.jpg|800px|[[सागरमाथा नेशनल पार्क]] का पैनोरमा|alt=पैनोरमा}} ==उत्तरी बेस कैंप, तिब्बत== उत्तरी बेस कैंप चूँकि [[तिब्बत]] ([[चीन]]) में स्थित है, इसलिये वहाँ जाने के लिये विशेष परमिट की आवश्यकता होती है। ये परमिट हमेशा [[ल्हासा]] या चीन के किसी अन्य हिस्सों में स्थित विभिन्न मान्यताप्राप्त ट्रैवल कंपनियों के माध्यम से ही लिये जा सकते हैं। इसमें गाड़ी, ड्राइवर और गाइड़ लेना आवश्यक होता है, जो वह कंपनी उपलब्ध कराती है। सामान्य पर्यटकों के लिये बेस कैंप पर्वतारोहियों द्वारा प्रयुक्त बेस कैंप से थोड़ा पहले है। <gallery> File:Approach to Everest Base Camp, Tibet.jpg|उत्तरी बेस कैंप की ओर जाती सड़क Image:Tent village at Everest Base Camp, Tibet.JPG |बेस कैंप पर उपलब्ध तंबू कालोनी। पीछे माउंट एवरेस्ट दिख रहा है। Image:North Mount Everest Base Camp Tea House.png|उत्तरी बेस कैंप में एक चाय की दुकान Image:Interior of tea-househotel at Everest Base Camp.JPG|एक होटल का अंदरूनी भाग File:Climbers' tents at Mt. Everest Base Camp, Tibet.jpg|पर्वतारोहियों के तंबू Image:Starry night at Mount Everest.jpg|बेस कैंप से रात का नज़ारा </gallery> {{wide image|20110810 North Face of Everest Tibet China Panoramic.jpg|640px|उत्तरी बेस कैंप से दिखती एवरेस्ट}} == इन्हें भी देखें == == सन्दर्भ == {{reflist}} ==बाहरी कड़ियाँ== <!-- PLEASE DO ''not'' ADD BLOGS OR COMMERCIAL LINKS OR IT WILL BE ADDED TO WIKIPEDIA BLACKLIST--> *[https://web.archive.org/web/20161210063852/https://s3.amazonaws.com/Gigapixel_Trees/Pumori_Spring2012_EBC_Full/EBC_Pumori_050112_8bit_FLAT.html Mt. Pumori EBC Panorama] *[https://web.archive.org/web/20150514220610/http://bdvid.com/2015/04/exclusive-hit-by-avalanche-in-mt-everest-basecamp-25-04-2015 Video: Avalanche hitting Everest Base Camp] *[http://www.adventureboundnepal.com/uploads/banner//1426567780_kala-pathar-everest-base-camp-trek.jpg View from Kala Pathar Everest Basecamp]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }} *[https://web.archive.org/web/20161110043655/http://www.zmidloch.com/outdoor-blog/ebc-everest-base-camp-trek-gokyo/ GPS coordinates of EBC trek and description of the EBC trek] {{माउंट एवरेस्ट}} {{DEFAULTSORT:एवरेस्ट बेस कैंप}} [[श्रेणी:माउंट एवरेस्ट]] [[श्रेणी:सोलूखुंबू जिला]] [[श्रेणी:टिंगरी]] hilcryaqddpqy1v5h0uaafmg4b0tzlz 6630401 6630346 2026-10-17T10:07:30Z Maglomedia 954129 /* बाहरी कड़ियाँ */ 6630401 wikitext text/x-wiki [[File:Khumbutse.jpg|thumb|400px|एवरेस्ट बेस कैंप{{mdash}}EBC, नेपाल]] दुनिया की सबसे ऊँची चोटी [[एवरेस्ट पर्वत|माउंट एवरेस्ट]] [[नेपाल]] और [[तिब्बत]] की सीमा भी है। इस प्रकार इसके दो बेस कैंप हैं। एक दक्षिणी बेस कैंप जो कि नेपाल में स्थित है और दूसरा उत्तरी बेस कैंप जो कि तिब्बत में स्थित है। इन बेस कैंपों का प्रयोग पर्वतारोही माउंट एवरेस्ट के पर्वतारोहण के लिये आधार के तौर पर करते हैं। दक्षिणी बेस कैंप तक पहुँचने के लिये काफ़ी लंबे पैदल रास्ते का प्रयोग किया जाता है और भोजन-आपूर्ति आदि वहाँ के स्थानीय निवासी [[शेर्पा|शेरपा]] उपलब्ध कराते हैं। दूसरी ओर, उत्तरी बेस कैंप तक सड़क बनी हुई है। बेस कैंपों पर पर्वतारोही कई-कई दिनों तक रुकते हैं ताकि वातावरण के अनुकूल हो सकें। =={{anchor|एवरेस्ट दक्षिणी बेस कैंप}}दक्षिणी बेस कैंप, नेपाल== [[File:Short Rest on Everest Base Trail.jpg|thumb|ट्रैक पर विश्राम करते ट्रैकर्स]] यह ट्रैक दुनिया के सबसे प्रसिद्ध ट्रैकिंग मार्गों में से एक है और प्रतिवर्ष हज़ारों ट्रैकर्स यहाँ आते हैं। दक्षिणी एवरेस्ट बेस कैंप समुद्र तल से 5,364 मीटर (17,598 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। सामान्यतः ट्रैकर्स समय बचाने के लिये [[काठमाण्डु|काठमांडू]] से [[लुकला]] तक वायुमार्ग से आते हैं और लुकला के बाद अपनी ट्रैकिंग आरंभ करते हैं। बहुत थोड़े-से ट्रैकर्स [[जीरी]] या [[फाफलू]] तक सड़क मार्ग से आकर आगे की यात्रा पैदल करते हैं। 2015 में, 40000 से ज्यादा ट्रैकर्स ने एवरेस्ट बेस कैंप की ट्रैकिंग की। इसी से इस ट्रैक की लोकप्रियता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। [[File:Everest Base Trek Route Map.svg|thumb|दक्षिणी बेस कैंप का मार्ग|right|350px]] लुकला से ट्रैकर्स [[दूधकोशी नदी]] के साथ-साथ ट्रैकिंग करते हुए आगे बढ़ते हैं और [[नामचे बाज़ार]], {{Convert|3440|m|ft}} पहुँचते हैं। इसमें दो दिन लग जाते हैं, लेकिन अच्छी फिटनेस वाले ट्रैकर्स इसे एक दिन में भी तय कर सकते हैं। नामचे बाज़ार इस ट्रैकिंग मार्ग का सबसे बड़ा शहर है। यहाँ ज्यादातर ट्रैकर्स एक या दो दिन रुकते हैं, ताकि ऊँचाई के अनुकूल हो सकें। इसके बाद एक दिन में [[तेंगबोचे]] पहुँचते हैं, दूसरे दिन [[डिंगबोचे]], {{Convert|4260|m|ft}} तीसरे दिन [[लोबुचे]] या [[घोरकक्षेप]] और चौथे दिन बेस कैंप पहुँच जाते हैं। 25 अप्रैल 2015 को नेपाल में जो 7.8 और 7.3 की तीव्रता के भूकंप <ref>{{cite web|url=http://news.nationalgeographic.com/2015/04/150425-everest-earthquake-basecamp-nepal-himalaya-climbing-sherpa/|title=Everest Base Camp a ‘War Zone’ After Earthquake Triggers Avalanches|publisher=National Geographic|accessdate=26 April 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150428061313/http://news.nationalgeographic.com/2015/04/150425-everest-earthquake-basecamp-nepal-himalaya-climbing-sherpa/|archive-date=28 अप्रैल 2015|url-status=live}}</ref> आये थे, उनसे बेस कैंप पर 19 लोगों की मृत्यु हुई थी। भूकंप से माउंट पुमो-री से [[हिमस्खलन]] हुआ और उसने बेस कैंप को तबाह कर दिया। <gallery> File:South Everest Base Camp sleeping platform.jpg|खुंबू ग्लेशियर पर स्थित बेसकैंप में यहीं पर पर्वतारोही अपने तंबू लगाते हैं। पीछे [[खुंबू आइसफॉल]] दिख रहा है। File:EverestBasecamp-fromKalarPatar.jpg|नीचे बायें कोने में बेस कैंप और दाहिने खुंबू आइसफॉल File:KhumbuIcefall.jpg|खुंबू आइसफॉल File:Everest base camp(1).jpg|बेस कैंप</gallery> {{wide image|Sagarmatha National Park-Gorak Shep to Pheriche 2013-05-06 08-10-23-2013-05-06 08-11-08.jpg|800px|[[सागरमाथा नेशनल पार्क]] का पैनोरमा|alt=पैनोरमा}} ==उत्तरी बेस कैंप, तिब्बत== उत्तरी बेस कैंप चूँकि [[तिब्बत]] ([[चीन]]) में स्थित है, इसलिये वहाँ जाने के लिये विशेष परमिट की आवश्यकता होती है। ये परमिट हमेशा [[ल्हासा]] या चीन के किसी अन्य हिस्सों में स्थित विभिन्न मान्यताप्राप्त ट्रैवल कंपनियों के माध्यम से ही लिये जा सकते हैं। इसमें गाड़ी, ड्राइवर और गाइड़ लेना आवश्यक होता है, जो वह कंपनी उपलब्ध कराती है। सामान्य पर्यटकों के लिये बेस कैंप पर्वतारोहियों द्वारा प्रयुक्त बेस कैंप से थोड़ा पहले है। <gallery> File:Approach to Everest Base Camp, Tibet.jpg|उत्तरी बेस कैंप की ओर जाती सड़क Image:Tent village at Everest Base Camp, Tibet.JPG |बेस कैंप पर उपलब्ध तंबू कालोनी। पीछे माउंट एवरेस्ट दिख रहा है। Image:North Mount Everest Base Camp Tea House.png|उत्तरी बेस कैंप में एक चाय की दुकान Image:Interior of tea-househotel at Everest Base Camp.JPG|एक होटल का अंदरूनी भाग File:Climbers' tents at Mt. 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Pumori EBC Panorama] *[https://web.archive.org/web/20150514220610/http://bdvid.com/2015/04/exclusive-hit-by-avalanche-in-mt-everest-basecamp-25-04-2015 Video: Avalanche hitting Everest Base Camp] *[http://www.adventureboundnepal.com/uploads/banner//1426567780_kala-pathar-everest-base-camp-trek.jpg View from Kala Pathar Everest Basecamp]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }} *[https://web.archive.org/web/20161110043655/http://www.zmidloch.com/outdoor-blog/ebc-everest-base-camp-trek-gokyo/ GPS coordinates of EBC trek and description of the EBC trek] *[https://adventure-pulse.com/trek/everest-base-camp-trek/ Everest Base Camp Trek] - Adventure Pulse {{माउंट एवरेस्ट}} {{DEFAULTSORT:एवरेस्ट बेस कैंप}} [[श्रेणी:माउंट एवरेस्ट]] [[श्रेणी:सोलूखुंबू जिला]] [[श्रेणी:टिंगरी]] 11usaxiaej36xxcyvo8mfpw1jh5ptum साँचा:जयपुर के महाराजा 10 776074 6630337 6411058 2026-10-17T03:53:25Z Mundhalia746 934684 6630337 wikitext text/x-wiki {{Navbox | name = जयपुर के महाराजा | title = [[जयपुर 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{{collapsible option}} [[श्रेणी:राजस्थान का इतिहास]] </noinclude> 5lhgk7e01ytv9ia0uwliznnwgterc8r जनकपुरी पश्चिम मेट्रो स्टेशन 0 792807 6630242 6578510 2026-10-16T14:33:42Z ~2026-55062-24 953645 6630242 wikitext text/x-wiki {{Infobox station | name = [[File:Delhi Metro logo.svg|50px]]<br />जनकपुरी पश्चिम | type = {{Delhi Metro Infobox station line|line=Blue|line2=Magenta}} | image = Janakpuri West (Delhi) metro station.jpg | style = दिल्ली मेट्रो | address = शिवाजी मार्ग, जनकपुरी डिस्ट्रिक्ट सेंटर, जनकपुरी, नई दिल्ली, 110058 | coordinates = {{WikidataCoord|display=inline,title}} | line = {{rcb|Delhi Metro|Blue|croute}} {{rcb|Delhi Metro|Magenta|croute}} | other = | structure = भू-स्तर से ऊपर (ब्लू लाइन) <br> भूमिगत (मैजेंटा लाइन) | platform = {{ubl|साइडप्लेटफॉर्म (ब्लू लाइन)|प्लेटफॉर्म-1 → {{ltl|Delhi Metro|Blue|R|type=main}} / {{ltl|Delhi Metro|Blue|R|type=branch}}|प्लेटफॉर्म-2 → {{ltl|Delhi Metro|Blue|L}}|आइलैंड प्लेटफॉर्म (मैजेंटा लाइन)|प्लेटफॉर्म-3 → {{ltl|Delhi 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टर्मिनल 1, हौज़ खास और कालकाजी मंदिर के माध्यम से दक्षिण दिल्ली और नोएडा से जुड़ सकते हैं।<ref>{{Cite web|url=http://www.delhimetrorail.com/press_reldetails.aspx?id=eQM2nlig5R4lld|title=Kalkaji Mandir - Janakpuri West Metro Corridor Inaugurated for Passenger Services}}</ref> इस खंड का उद्घाटन 28 मई 2018 को माननीय मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल और केंद्रीय मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी द्वारा किया गया था। वाणिज्यिक परिचालन 29 मई 2018 से शुरू हुआ। ==एस्केलेटर== नए जनकपुरी पश्चिम मेट्रो स्टेशन पर लगाए गए एस्केलेटर भारत में किसी भी एस्केलेटर के लिए सबसे अधिक ऊंचाई वाले हैं। इन एस्केलेटर की ऊंचाई 15.65 मीटर है, जो पांच मंजिला इमारत के बराबर है, जो कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन पर लगाए गए एस्केलेटर की ऊंचाई से अधिक है, जो 14.575 मीटर ऊंचे हैं। एस्केलेटर की क्षैतिज लंबाई 35.32 मीटर है। प्रत्येक एस्केलेटर का वजन 26 टन था और इन एस्केलेटर की स्थापना के लिए 250 टन की क्रेन विशेष रूप से लगाई गई थी।<ref>{{Cite web |url=http://www.delhimetrorail.com/PressReleaseDocuments/pressinfoeng_25518.pdf |title=Archived copy |access-date=28 May 2018 |archive-date=29 May 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180529130121/http://www.delhimetrorail.com/PressReleaseDocuments/pressinfoeng_25518.pdf |url-status=dead}}</ref> ==स्टेशन नक्शा== {| border=0 cellspacing=0 cellpadding=3 |style="border-top:solid 1px grey;border-bottom:solid 1px grey;" width=50 rowspan=4 valign=top|'''P''' |style="border-top:solid 1px grey;border-right:solid 2px black;border-left:solid 2px black;border-bottom:solid 2px black;text-align:center;" colspan=2|<small>साइड प्लेटफॉर्म | द्वार बाएँ ओर खुलेंगे {{access icon}}</small> |- |style="border-bottom:solid 1px grey;" width=100|<span style=color:#{{rcr|Delhi Metro|Blue}}>'''प्लेटफॉर्म 1'''<br/>'''पूर्वी-बाध्य'''</span> |style="border-bottom:solid 1px grey;" width=500|की ओर → {{ltl|Delhi Metro|Blue|R|type=main}} / {{ltl|Delhi Metro|Blue|R|type=branch}}<small> अगला स्टेशन {{stl|Delhi Metro|जनकपुरी पूर्व}} है</small> |- |<span style=color:#{{rcr|Delhi 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|style="border-bottom:solid 1px grey;"|निचला स्तर |style="border-bottom:solid 1px grey;"|किराया संग्रह द्वार, स्टेशन एजेंट, टिकट वेंडिंग मशीनें |- |style="border-bottom:solid 1px grey;" width=50 rowspan=3 valign=top|'''P''' |style="border-bottom:solid 1px white;" width=100|<span style=color:#{{rcr|Delhi Metro|Magenta}}>'''प्लेटफॉर्म 3'''<br/>'''पूर्वी-बाध्य'''</span> |style="border-bottom:solid 1px white;" width=500|की ओर → {{ltl|Delhi Metro|Magenta|R}} <small>अगला स्टेशन {{stl|Delhi Metro|डाबड़ी मोड़ - जनकपुरी दक्षिण}} है</small> |- |style="border-top:solid 2px black;border-right:solid 2px black;border-left:solid 2px black;border-bottom:solid 2px black;text-align:center;" colspan=2|<small>आइलैंड प्लेटफॉर्म | द्वार दायें ओर खुलेंगे {{access icon}}</small> |- |style="border-bottom:solid 1px grey;" width=100|<span style=color:#{{rcr|Delhi Metro|Magenta}}>'''प्लेटफॉर्म 4'''<br/>'''पश्चिमी-बाध्य'''</span> | style="border-bottom:solid 1px grey;" width="500" |की ओर ← {{stl|Delhi Metro|कृष्णा पार्क एक्सटेंशन}} ''ट्रेन यहाँ समाप्त है'' |} ===सुविधाएँ=== सुविधाएँ: दोनों तरफ़ एस्केलेटर (सिर्फ़ ऊपर जाने के लिए)। नज़दीकी आकर्षण (पैदल दूरी के भीतर): जनक पैलेस शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, आइनॉक्स थिएटर (पहले: सत्यम सिनेप्लेक्स), सागर रत्ना रेस्टोरेंट, पिकाडिली होटल (पहले होटल हिल्टन के नाम से जाना जाता था)। यह स्टेशन विकासपुरी के लोगों को भी सेवा प्रदान करता है। ==परिवहन जुड़ाव== दिल्ली परिवहन निगम बस रूट संख्या 588, 810, 813, 813CL, 816, 816A, 816EXT, 817, 817A, 817B, 818, 819, 822, 823, 824, 824SSTL, 825, 826, 827, 828, 829, 833, 834, 835, 836, 838, 838A, 845, 847, 861A, 871, 871A, 872, 873, 876, 878, 891STL, 972A, 972BSPL और बाई पास एक्सप्रेस स्टेशन को सेवा प्रदान करती हैं।<ref>{{cite web| url=http://delhi.gov.in/wps/wcm/connect/DOIT_DTC/dtc/home| title=Department of Delhi Transport Corporation| website=Govt.of NCT of Delhi| access-date=21 February 2018| archive-url=https://web.archive.org/web/20181025080536/http://delhi.gov.in/wps/wcm/connect/doit_dtc/DTC/Home/| archive-date=25 October 2018| url-status=dead}}</ref> ==गैलरी== [[File:Janakpuri West Metro Station.jpg|250px]] [[File:Janak Puri West metro signboard.jpg|100px]] == इन्हें भी देखें == * [[दिल्ली मेट्रो]] == सन्दर्भ == {{reflist|30em}} {{ब्लू लाइन (दिल्ली मेट्रो)}} {{मजेंटा लाइन (दिल्ली मेट्रो)}} {{Delhi Metro}} [[श्रेणी:मजेंटा लाइन (दिल्ली मेट्रो) स्टेशन]] [[श्रेणी:ब्लू लाइन (दिल्ली मेट्रो) स्टेशन]] [[श्रेणी:दिल्ली मेट्रो]] suvhh3s0gv1l8k49ceqzttsug3uvnzf बदनावर 0 848979 6630430 5428042 2026-10-17T11:47:55Z SAGAR SURYAVANSHI JAITHAL 938876 छोटा सा सुधार किया। सामग्री का विस्तार किया, भाषा और व्याकरण में सुधार किया 6630430 wikitext text/x-wiki {{Infobox settlement |name = बदनावर |other_name = Badnawar |pushpin_label = बदनावर |pushpin_map = India Madhya Pradesh |coordinates = {{coord|23.02|75.22|display=inline, title}} |pushpin_map_caption = मध्य प्रदेश में स्थिति |subdivision_type = [[भारत के ज़िले|ज़िला]] |subdivision_name = [[धार ज़िला]] |subdivision_type2 = [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित 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भी हे जिसे पांडव कालीन के समय का माना गया है, जो पांडव की कुल देवी भी हैं। ==जनसंख्या== २०११ की जनगणना <ref>{{cite web|url=http://www.censusindia.net/results/town.php?stad=A&state5=999|archiveurl=https://web.archive.org/web/20040616075334/http://www.censusindia.net/results/town.php?stad=A&state5=999|archivedate=2004-06-16|title= Census of India 2001: Data from the 2001 Census, including cities, villages and towns (Provisional)|accessdate=2008-11-01|work= |publisher= Census Commission of India}}</ref> के अनुसार बदनावर की जनसंख्या २०,९२८ है। बदनावर की आबादी २०,९२८ है,जिसमे पुरुष जनसंख्या ५२.०३% और महिलाओं की संख्या ४७.97% है। बदनावर में साक्षरता दर 81.3% है, जिसमें 88.7% पुरुष और 41% महिलाएं साक्षर हैं। == इन्हें भी देखें == * [[धार ज़िला]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} {{मध्य प्रदेश के जिले}} [[श्रेणी:धार ज़िला]] [[श्रेणी:मध्य प्रदेश के शहर]] [[श्रेणी:धार ज़िले के नगर]] gqwpnqsbqjrplq3luqo3dxp0bmi0x3i 6630431 6630430 2026-10-17T11:51:33Z SAGAR SURYAVANSHI JAITHAL 938876 /* इन्हें भी देखें */ कड़ियाँ लगाई इन्हें भी देखें अनुभाग में 6630431 wikitext text/x-wiki {{Infobox settlement |name = बदनावर |other_name = Badnawar |pushpin_label = बदनावर |pushpin_map = India Madhya Pradesh |coordinates = {{coord|23.02|75.22|display=inline, title}} |pushpin_map_caption = मध्य प्रदेश में स्थिति |subdivision_type = [[भारत के ज़िले|ज़िला]] |subdivision_name = [[धार ज़िला]] |subdivision_type2 = [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|प्रान्त]] |subdivision_name2 = [[मध्य प्रदेश]] |subdivision_type3 = देश |subdivision_name3= {{IND}} |population_total = 20928 |population_as_of = 2011 |demographics_type1 = भाषाएँ |demographics1_title1= प्रचलित |demographics1_info1= [[हिन्दी]] |timezone1 = [[भारतीय मानक समय]] |utc_offset1 = +5:30 }} '''बदनावर''' (Badnawar) [[भारत]] के [[मध्य प्रदेश]] राज्य के [[धार ज़िले]] में स्थित एक नगर है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=X6XNCwAAQBAJ Inde du Nord: Madhya Pradesh et Chhattisgarh] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190703183559/https://books.google.com/books?id=X6XNCwAAQBAJ|date=3 जुलाई 2019}}," Lonely Planet, 2016, ISBN 9782816159172</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=u6VB9_CrsfoC Tourism in the Economy of Madhya Pradesh]," Rajiv Dube, Daya Publishing House, 1987, ISBN 9788170350293</ref> == विवरण == बदनावर नाम की उन्नति बुद्ध नगर से हुई जिसे गौतम बुद्ध के नाम पर रखा गया था। बदनावर का पूर्व नाम वर्धमानपुर है। बदनावर में एकवीरा माता जी का मंदिर भी हे जिसे पांडव कालीन के समय का माना गया है, जो पांडव की कुल देवी भी हैं। ==जनसंख्या== २०११ की जनगणना <ref>{{cite web|url=http://www.censusindia.net/results/town.php?stad=A&state5=999|archiveurl=https://web.archive.org/web/20040616075334/http://www.censusindia.net/results/town.php?stad=A&state5=999|archivedate=2004-06-16|title= Census of India 2001: Data from the 2001 Census, including cities, villages and towns (Provisional)|accessdate=2008-11-01|work= |publisher= Census Commission of India}}</ref> के अनुसार बदनावर की जनसंख्या २०,९२८ है। बदनावर की आबादी २०,९२८ है,जिसमे पुरुष जनसंख्या ५२.०३% और महिलाओं की संख्या ४७.97% है। बदनावर में साक्षरता दर 81.3% है, जिसमें 88.7% पुरुष और 41% महिलाएं साक्षर हैं। == इन्हें भी देखें == * [[धार ज़िला]] * [[धार]] * [[मालवा]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} {{मध्य प्रदेश के जिले}} [[श्रेणी:धार ज़िला]] [[श्रेणी:मध्य प्रदेश के शहर]] [[श्रेणी:धार ज़िले के नगर]] ri74vi6dxinhejtc7ajr3lohxg91p70 भगवानदास 0 967769 6630336 6629528 2026-10-17T03:48:52Z Mundhalia746 934684 6630336 wikitext text/x-wiki {{अनेक समस्याएँ|निबंध=नवम्बर 2018|विकिफ़ाइ=नवम्बर 2018|स्रोत कम=नवम्बर 2018}} {{Infobox royalty | succession = आमेर के राजा |image= [[File:Portrait of Raja Bhagvant Das (cropped).jpg|250px|]] |caption = | reign = 27 जनवरी 1574<br>10 दिसम्बर 1589 | dynasty = कछवाहा | predecessor =[[भारमल]] | successor = [[राजा मान सिंह]] | father = [[भारमल]] | mother = रानी सा मैनावती साहिबा | spouse = रानी सा भगवती बाई जी साहिबा | issue = [[राजा मान सिंह|मानसिंह प्रथम]] (1550–1614) <br /> माधो सिंह (1561–1601) <br /> [[मनभावती बाई]] (1572–1605) <br /> बज्रेश सिंह (1579–1601) <br /> अनुपूर्वा बाई (1581–1648) <br /> जीजाई बाई (1589–1622) | birth_date = 1537 | birth_place = [[आमेर]] | death_date = 10 दिसम्बर 1589 | death_place = [[आगरा]] }} [[Image:Jaipur 03-2016 04 Amber Fort.jpg|thumb|right|300px|[[आमेर]] का [[आमेर दुर्ग]] राजा भगवन्त दास की [[राजधानी]] था।]] [[राजा]] राजा भगवन्त दास) (1537 – 10 दिसम्बर 1589) [[आमेर]] के [[कछवाहा]] शासक थे। [[जय सिंह द्वितीय|जयसिंह द्वितीय]] उनके ही वंशज थे जिन्होने [[जयपुर]] की स्थापना की। भगवन्तदास ने [[भारमल]] केे बाद आमेर का सिंहासन संभाला। [[अकबर]] के दरबार की शान बढ़ाने वाला [[राजा मान सिंह|राजा मानसिंह]] भगवन्तदास का ही पुत्र था। मुगल दरबार में भगवन्तदास को ऊँचा [[मनसबदार|मनसब]] प्राप्त था। इसके अलावा वह एक उत्कृष्ट योद्धा था, जिसने [[आमेर]] से बाहर जाकर पश्चिमी और उत्तरी भारत में कई बड़े युद्ध लड़े और उनमें विजय प्राप्त की। राजा भारमल की मौत के बाद भगवन्तदास सन् 1573 ई. में आमेर का राजा बना। अपने पिता के समान ही भगवन्तदास को भी मुगल दरबार में काफी ऊँचा पद प्राप्त हुआ था। वह पांच हजारी मनसब तक पहुँचा था। अकबर बिना युद्ध के [[महाराणा प्रताप]] को अपने अधीन लाना चाहता था इसलिए अकबर ने प्रताप को समझाने के लिए चार राजदूत नियुक्त किए जिसमें से भगवन्तदास भी एक थे। भगवन्तदास को [[लाहौर]] का संयुक्त गवर्नर बनाया गया था, जबकि उसका पुत्र मानसिंह [[काबुल|क़ाबुल]] में नियुक्त हुआ। जब मिर्ज़ा हाकिम ने लाहौर पर आक्रमण किया, तब उसे पराजित करने में भगवन्तदास का बहुत बड़ा हाथ था। 1585 में भगवन्तदास को [[कश्मीर]] के सुल्तान यूसुफ़ ख़ान के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए भेजा गया, जहां उससे डरकर सुल्तान ने आत्मसमर्पण कर दिया। इस उपलब्धि पर उसके नाम से सिक्का भी प्रचलित किया गया। अपने जीवन के अंतिम वर्षों में भगवन्तदास, [[टोडरमल|राजा टोडरमल]] के साथ [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] का संयुक्त [[सूबेदार]] रहा। भगवन्तदास की मृत्यु 13 नवम्बर ,1589 को [[लाहौर]] में हो गयी जिसके बाद उनके पुत्र [[राजा मान सिंह|मानसिंह]] 1589 ई. में आमेर के शासक बने। इनके कार्यकाल में आमेर एक महत्वपूर्ण एवं गौरवपूर्ण राज्य में रूप में विख्यात हुआ। 'मानसी गंगा', गोवर्धन के तटों को पत्थरों से सीढ़ियों सहित बनवाने का श्रेय भगवानदास को प्राप्त है। श्रद्धालु मानसी गंगा के चारों और दर्शनीय स्थानों के दर्शन करते हुए परिक्रमा लगाते हैं। भगवानदास बाँकावत लवाण के जागीरदार थे व भगवन्तदास के अनुज थे। वह बाँके राजा के नाम से प्रसिद्ध थे व उनके वंशज बाँकावत व कछवाहा कहलाते हैं। ==लोकप्रिय संस्कृति में छवि== ===फ़िल्में और टेलीविज़न=== * 2018-2019 भारतीय ऐतिहासिक टेलीविजन श्रृंखला [[दास्तान-ए-मोहब्बत: सलीम अनारकली]] में उनकी भूमिका हेमंत चौधरी ने निभाई है<ref>{{Cite web|url=https://nettv4u.com/about/hindi/tv-serials/dastaan-e-mohabbat-salim-anarkali/all-cast-and-crew|title=Hindi Tv Serial Dastaan E Mohabbat Salim Anarkali - Full Cast and Crew|website=nettv4u|language=en|access-date=2026-10-14}}</ref> ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:1537 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:जयपुर का इतिहास]] [[श्रेणी:१५८९ में निधन]] bv1i5d5iyfue5b8bl2jghuknflamd0t 6630338 6630336 2026-10-17T04:07:19Z Mundhalia746 934684 6630338 wikitext text/x-wiki {{अनेक समस्याएँ|निबंध=नवम्बर 2018|विकिफ़ाइ=नवम्बर 2018|स्रोत कम=नवम्बर 2018}} {{Infobox royalty | succession = आमेर के राजा |image= [[File:Portrait of Raja Bhagvant Das (cropped).jpg|250px|]] |caption = | reign = 27 जनवरी 1574<br>10 दिसम्बर 1589 | dynasty = कछवाहा | predecessor =[[भारमल]] | successor = [[राजा मान सिंह]] | father = [[भारमल]] | mother = रानी सा मैनावती साहिबा | spouse = रानी सा भगवती बाई जी साहिबा | issue = [[राजा मान सिंह|मानसिंह प्रथम]] (1550–1614) <br /> माधो सिंह (1561–1601) <br /> [[मनभावती बाई]] (1572–1605) <br /> बज्रेश सिंह (1579–1601) <br /> अनुपूर्वा बाई (1581–1648) <br /> जीजाई बाई (1589–1622) | birth_date = 1537 | birth_place = [[आमेर]] | death_date = 10 दिसम्बर 1589 | death_place = [[आगरा]] | succession1 = सूबेदार लाहौर | reign_type1 = Term | predecessor1 = सईद खान | successor1 = बीकानेर के राय सिंह | succession2 = सूबेदार काबुल | reign_type2 = Term | reign2 = 1586<small> (कुछ महीने) </small> | predecessor2 = राजा मान सिंह | successor2 = इस्मा'इल क्विट ख़ान }} [[Image:Jaipur 03-2016 04 Amber Fort.jpg|thumb|right|300px|[[आमेर]] का [[आमेर दुर्ग]] राजा भगवन्त दास की [[राजधानी]] था।]] [[राजा]] राजा भगवन्त दास) (1537 – 10 दिसम्बर 1589) [[आमेर]] के [[कछवाहा]] शासक थे। [[जय सिंह द्वितीय|जयसिंह द्वितीय]] उनके ही वंशज थे जिन्होने [[जयपुर]] की स्थापना की। भगवन्तदास ने [[भारमल]] केे बाद आमेर का सिंहासन संभाला। [[अकबर]] के दरबार की शान बढ़ाने वाला [[राजा मान सिंह|राजा मानसिंह]] भगवन्तदास का ही पुत्र था। मुगल दरबार में भगवन्तदास को ऊँचा [[मनसबदार|मनसब]] प्राप्त था। इसके अलावा वह एक उत्कृष्ट योद्धा था, जिसने [[आमेर]] से बाहर जाकर पश्चिमी और उत्तरी भारत में कई बड़े युद्ध लड़े और उनमें विजय प्राप्त की। राजा भारमल की मौत के बाद भगवन्तदास सन् 1573 ई. में आमेर का राजा बना। अपने पिता के समान ही भगवन्तदास को भी मुगल दरबार में काफी ऊँचा पद प्राप्त हुआ था। वह पांच हजारी मनसब तक पहुँचा था। अकबर बिना युद्ध के [[महाराणा प्रताप]] को अपने अधीन लाना चाहता था इसलिए अकबर ने प्रताप को समझाने के लिए चार राजदूत नियुक्त किए जिसमें से भगवन्तदास भी एक थे। भगवन्तदास को [[लाहौर]] का संयुक्त गवर्नर बनाया गया था, जबकि उसका पुत्र मानसिंह [[काबुल|क़ाबुल]] में नियुक्त हुआ। जब मिर्ज़ा हाकिम ने लाहौर पर आक्रमण किया, तब उसे पराजित करने में भगवन्तदास का बहुत बड़ा हाथ था। 1585 में भगवन्तदास को [[कश्मीर]] के सुल्तान यूसुफ़ ख़ान के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए भेजा गया, जहां उससे डरकर सुल्तान ने आत्मसमर्पण कर दिया। इस उपलब्धि पर उसके नाम से सिक्का भी प्रचलित किया गया। अपने जीवन के अंतिम वर्षों में भगवन्तदास, [[टोडरमल|राजा टोडरमल]] के साथ [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] का संयुक्त [[सूबेदार]] रहा। भगवन्तदास की मृत्यु 13 नवम्बर ,1589 को [[लाहौर]] में हो गयी जिसके बाद उनके पुत्र [[राजा मान सिंह|मानसिंह]] 1589 ई. में आमेर के शासक बने। इनके कार्यकाल में आमेर एक महत्वपूर्ण एवं गौरवपूर्ण राज्य में रूप में विख्यात हुआ। 'मानसी गंगा', गोवर्धन के तटों को पत्थरों से सीढ़ियों सहित बनवाने का श्रेय भगवानदास को प्राप्त है। श्रद्धालु मानसी गंगा के चारों और दर्शनीय स्थानों के दर्शन करते हुए परिक्रमा लगाते हैं। भगवानदास बाँकावत लवाण के जागीरदार थे व भगवन्तदास के अनुज थे। वह बाँके राजा के नाम से प्रसिद्ध थे व उनके वंशज बाँकावत व कछवाहा कहलाते हैं। ==लोकप्रिय संस्कृति में छवि== ===फ़िल्में और टेलीविज़न=== * 2018-2019 भारतीय ऐतिहासिक टेलीविजन श्रृंखला [[दास्तान-ए-मोहब्बत: सलीम अनारकली]] में उनकी भूमिका हेमंत चौधरी ने निभाई है<ref>{{Cite web|url=https://nettv4u.com/about/hindi/tv-serials/dastaan-e-mohabbat-salim-anarkali/all-cast-and-crew|title=Hindi Tv Serial Dastaan E Mohabbat Salim Anarkali - Full Cast and Crew|website=nettv4u|language=en|access-date=2026-10-14}}</ref> ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:1537 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:जयपुर का इतिहास]] [[श्रेणी:१५८९ में निधन]] 5zsu75zwkq5cikzlw8l4wcn2ipy7bkp 6630345 6630338 2026-10-17T05:48:14Z Mundhalia746 934684 6630345 wikitext text/x-wiki {{अनेक समस्याएँ|निबंध=नवम्बर 2018|विकिफ़ाइ=नवम्बर 2018|स्रोत कम=नवम्बर 2018}} {{Infobox royalty | succession = आमेर के राजा |image= [[File:Portrait of Raja Bhagvant Das (cropped).jpg|250px|]] |caption = | reign = 27 जनवरी 1574<br>10 दिसम्बर 1589 | dynasty = कछवाहा | predecessor =[[भारमल]] | successor = [[राजा मान सिंह]] | father = [[भारमल]] | mother = रानी सा मैनावती साहिबा | spouse = रानी सा भगवती बाई जी साहिबा | issue = [[राजा मान सिंह|मानसिंह प्रथम]] (1550–1614) <br /> माधो सिंह (1561–1601) <br /> [[मनभावती बाई]] (1572–1605) <br /> बज्रेश सिंह (1579–1601) <br /> अनुपूर्वा बाई (1581–1648) <br /> जीजाई बाई (1589–1622) | birth_date = 1537 | birth_place = [[आमेर]] | death_date = 10 दिसम्बर 1589 | death_place = [[आगरा]] | succession1 = सूबेदार लाहौर | reign_type1 = Term | predecessor1 = सईद खान | successor1 = बीकानेर के राय सिंह | succession2 = सूबेदार काबुल | reign_type2 = Term | reign2 = 1586<small> (कुछ महीने) </small> | predecessor2 = राजा मान सिंह | successor2 = इस्मा'इल क्विट ख़ान }} [[Image:Jaipur 03-2016 04 Amber Fort.jpg|thumb|right|300px|[[आमेर]] का [[आमेर दुर्ग]] राजा भगवन्त दास की [[राजधानी]] था।]] [[राजा]] राजा भगवन्त दास) (1537 – 10 दिसम्बर 1589) [[आमेर]] के [[कछवाहा]] शासक थे। [[जय सिंह द्वितीय|जयसिंह द्वितीय]] उनके ही वंशज थे जिन्होने [[जयपुर]] की स्थापना की। भगवन्तदास ने [[भारमल]] केे बाद आमेर का सिंहासन संभाला। [[अकबर]] के दरबार की शान बढ़ाने वाला [[राजा मान सिंह|राजा मानसिंह]] भगवन्तदास का ही पुत्र था। मुगल दरबार में भगवन्तदास को ऊँचा [[मनसबदार|मनसब]] प्राप्त था। इसके अलावा वह एक उत्कृष्ट योद्धा था, जिसने [[आमेर]] से बाहर जाकर पश्चिमी और उत्तरी भारत में कई बड़े युद्ध लड़े और उनमें विजय प्राप्त की। राजा भारमल की मौत के बाद भगवन्तदास सन् 1573 ई. में आमेर का राजा बना। अपने पिता के समान ही भगवन्तदास को भी मुगल दरबार में काफी ऊँचा पद प्राप्त हुआ था। वह पांच हजारी मनसब तक पहुँचा था। अकबर बिना युद्ध के [[महाराणा प्रताप]] को अपने अधीन लाना चाहता था इसलिए अकबर ने प्रताप को समझाने के लिए चार राजदूत नियुक्त किए जिसमें से भगवन्तदास भी एक थे। भगवन्तदास को [[लाहौर]] का संयुक्त गवर्नर बनाया गया था, जबकि उसका पुत्र मानसिंह [[काबुल|क़ाबुल]] में नियुक्त हुआ। जब मिर्ज़ा हाकिम ने लाहौर पर आक्रमण किया, तब उसे पराजित करने में भगवन्तदास का बहुत बड़ा हाथ था। 1585 में भगवन्तदास को [[कश्मीर]] के सुल्तान यूसुफ़ ख़ान के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए भेजा गया, जहां उससे डरकर सुल्तान ने आत्मसमर्पण कर दिया। इस उपलब्धि पर उसके नाम से सिक्का भी प्रचलित किया गया। अपने जीवन के अंतिम वर्षों में भगवन्तदास, [[टोडरमल|राजा टोडरमल]] के साथ [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] का संयुक्त [[सूबेदार]] रहा। भगवन्तदास की मृत्यु 13 नवम्बर ,1589 को [[लाहौर]] में हो गयी जिसके बाद उनके पुत्र [[राजा मान सिंह|मानसिंह]] 1589 ई. में आमेर के शासक बने। इनके कार्यकाल में आमेर एक महत्वपूर्ण एवं गौरवपूर्ण राज्य में रूप में विख्यात हुआ। 'मानसी गंगा', गोवर्धन के तटों को पत्थरों से सीढ़ियों सहित बनवाने का श्रेय भगवानदास को प्राप्त है। श्रद्धालु मानसी गंगा के चारों और दर्शनीय स्थानों के दर्शन करते हुए परिक्रमा लगाते हैं। भगवानदास बाँकावत लवाण के जागीरदार थे व भगवन्तदास के अनुज थे। वह बाँके राजा के नाम से प्रसिद्ध थे व उनके वंशज बाँकावत व कछवाहा कहलाते हैं। ==लोकप्रिय संस्कृति में छवि== ===फ़िल्में और टेलीविज़न=== * 2018-2019 भारतीय ऐतिहासिक टेलीविजन श्रृंखला [[दास्तान-ए-मोहब्बत: सलीम अनारकली]] में उनकी भूमिका हेमंत चौधरी ने निभाई है<ref>{{Cite web|url=https://nettv4u.com/about/hindi/tv-serials/dastaan-e-mohabbat-salim-anarkali/all-cast-and-crew|title=Hindi Tv Serial Dastaan E Mohabbat Salim Anarkali - Full Cast and Crew|website=nettv4u|language=en|access-date=2026-10-14}}</ref> ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} {{जयपुर के महाराजा}} [[श्रेणी:1537 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:जयपुर का इतिहास]] [[श्रेणी:१५८९ में निधन]] 90u3xh5qn2mmfqxwssqllw9vtm2ajt5 वंदे भारत एक्सप्रेस 0 975694 6630276 6509293 2026-10-16T17:26:19Z ~2026-55608-11 954066 /* */ vande Bharat Express 6630276 wikitext text/x-wiki {{About|वंदे भारत रेलगाड़ी शृंखला|[[शयनयान]] रूपान्तर|वंदे भारत शयनयान|अन्य उपयोगों|वंदे भारत (बहुविकल्पी)}} {{Infobox rail service | name = वंदे भारत एक्सप्रेस | color = 28457D | color2 = FF7220 | image = {{Photomontage |position=center |photo1a=Vande Bharat Express around Mumbai.jpg |photo2a=Specially Designed Mini Vande Bharat Express train.jpg |photo2b=New_Jalpaiguri_Patna_Saffron_Grey_Mini_Vande_Bharat_Transet_2024-03-04-061128.jpg |size=300 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Times of India |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/chennai/first-made-in-india-train-set-ready-for-trial-run/articleshow/66324376.cms |accessdate=4 नवम्बर 2018 |work=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]] |date=अक्टूबर 23, 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181105101450/https://timesofindia.indiatimes.com/city/chennai/first-made-in-india-train-set-ready-for-trial-run/articleshow/66324376.cms |archive-date=5 नवंबर 2018 |url-status=live }}</ref> मूल कीमत पर, यह यूरोप से आयातित एक समान ट्रेन की तुलना में ४०% कम महंगा होने का अनुमान है।<ref name="arora">{{cite news |last1=अरोड़ा |first1=रजत |title=Made-in-India 160 km per hour train to run from June |url=https://economictimes.indiatimes.com/industry/transportation/railways/made-in-india-160-km-per-hour-train-to-run-from-june/articleshow/63323107.cms |accessdate=5 नवम्बर 2018 |work=[[द इकॉनोमिक टाइम्स]] |date=March 16, 2018 |location=[[नई दिल्ली]], भारत |archive-url=https://web.archive.org/web/20180627202039/https://economictimes.indiatimes.com/industry/transportation/railways/made-in-india-160-km-per-hour-train-to-run-from-june/articleshow/63323107.cms |archive-date=27 जून 2018 |url-status=live }}</ref> ट्रेन को फरवरी २०१९ में सेवा शुरू करने की योजना है, जिस तारीख से दूसरी इकाई का निर्माण और सेवा के लिए तैयार किया जाएगा।<ref name="rupera" /> रेलवे का पहला परीक्षण रन २९ नवंबर, २०१८ को [[चेन्नई]] में हुआ,<ref name="unitedtrial">{{cite news |title=Self-propelled Train 18 debuts for trial run |url=http://www.uniindia.com/news/india/self-propelled-train-18-debuts-for-trial-run/1391824.html |accessdate=4 नवम्बर 2018 |work=[[यूनाइटेड न्यूज आफ इंडिया]] |date=29 अक्टूबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181105012318/http://www.uniindia.com/news/india/self-propelled-train-18-debuts-for-trial-run/1391824.html |archive-date=5 नवंबर 2018 |url-status=live }}</ref> ट्रेन के ब्रेक और क्रू ओरिएंटेशन पर ध्यान केंद्रित किया,<ref name="ndtvsethi">{{cite news |last1=Sethi |first1=Nidhi |title=India's First Engineless Train To Make Debut On Tracks Today: 10 Points |url=https://www.ndtv.com/india-news/zero-discharge-cctv-cameras-on-indias-first-engineless-train-10-points-1938873 |accessdate=5 नवम्बर 2018 |work=[[एनडीटीवी इंडिया]] |publisher=[[एनडीटीवी इंडिया]] |date=अक्टूबर 29, 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181105061835/https://www.ndtv.com/india-news/zero-discharge-cctv-cameras-on-indias-first-engineless-train-10-points-1938873 |archive-date=5 नवंबर 2018 |url-status=live }}</ref> और ७ नवंबर को दिल्ली में और बाद में राजस्थान में परीक्षण किया जाएगा।<ref name="ndtvstalin" /> दिल्ली के बाद, स्पीड परीक्षण आयोजित किया जाएगा, पहले १५० किलोमीटर प्रति घंटा (९३ मील प्रति घंटे), और उसके बाद १६० किलोमीटर प्रति घंटा (९९ मील प्रति घंटे) की ऑपरेटिंग गति पर।<ref name="ndtvsethi" /> भारत के [[अनुसन्धान अभिकल्प एवं मानक संगठन]] द्वारा एक टीम को परीक्षण की निगरानी के लिए और अंतिम गति परीक्षण के लिए आगे संगठित किया गया।<ref name="businessstandard">{{cite news |title=Special team to ensure speedy trials of India's first engine-less train |url=https://www.business-standard.com/article/current-affairs/special-team-to-ensure-speedy-trials-of-india-s-first-engine-less-train-118102800186_1.html |accessdate=5 नवम्बर 2018 |work=[[बिजनेस स्टैंडर्ड]] |date=अक्टूबर 28, 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181105062002/https://www.business-standard.com/article/current-affairs/special-team-to-ensure-speedy-trials-of-india-s-first-engine-less-train-118102800186_1.html |archive-date=5 नवंबर 2018 |url-status=live }}</ref> ट्रेनों का पहला सेट दिल्ली-भोपाल [[शताब्दी एक्स्प्रेस]] की जगह [[नई दिल्ली]] और [[भोपाल]] के बीच चलेगा, जो तीस साल से चल रहा है<ref name="ndtv" /> और यात्रा के समय को १५ प्रतिशत तक कम करेगा।<ref name="express24" /> १६० किलोमीटर प्रति घंटे (९९ मील प्रति घंटे) की ऑपरेटिंग गति पर, यह शताब्दी एक्सप्रेस को ३० किलोमीटर प्रति घंटे (१९ मील प्रति घंटे) से पीछे कर देगा।<ref name="ndtv">{{cite news |title=Pics: Train 18 To Begin Trial Run Today. Here Are 10 Things To Know |url=https://www.ndtv.com/business/train-18-indias-fastest-train-route-launch-date-today-features-engineless-rotating-seats-in-pictures-1939151 |accessdate=4 नवम्बर 2018 |work=एनडीटीवी प्रोफिट |publisher=एनडीटीवी इंडिया |date=अक्टूबर 29, 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181105062047/https://www.ndtv.com/business/train-18-indias-fastest-train-route-launch-date-today-features-engineless-rotating-seats-in-pictures-1939151 |archive-date=5 नवंबर 2018 |url-status=live }}</ref> ट्रेन १८ का बाहरी ढांचा [[शिनकानसेन|बुलेट ट्रेन]] की तरह है,<ref name="prabhakar" /> जिसके प्रत्येक छोर की वायुगतिकीय संकीर्णता है।<ref name="ectimespti" /> इसमें ट्रेन के प्रत्येक छोर पर एक ड्राइवर कोच है, जो लाइन के प्रत्येक छोर पर तेजी से बदलाव को सहज बनाता है।<ref name="unitedtrial" /> आंतरिक रूप से, ट्रेन में १,१२८ यात्रियों की बैठने की क्षमता के साथ १६ यात्री कारें हैं।<ref name="shine">{{cite news |last1=Shine |first1=Jacob |title=Train 18, India's first engine-less train, is also the country's fastest |url=https://www.business-standard.com/article/indian-railways/the-crown-jewel-of-indian-railways-is-a-billion-rupee-made-in-india-train-118102900370_1.html?utm_source=SEO&utm_medium=ST |accessdate=4 नवम्बर 2018 |work=[[बिजनेस स्टैंडर्ड]] |location=[[नई दिल्ली]], [[भारत]] |date=29 अक्टूबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181030092231/https://www.business-standard.com/article/indian-railways/the-crown-jewel-of-indian-railways-is-a-billion-rupee-made-in-india-train-118102900370_1.html?utm_source=SEO&utm_medium=ST |archive-date=30 अक्तूबर 2018 |url-status=live }}</ref> केंद्र में दो प्रथम श्रेणी के डिब्बे हैं जिनमें ५२ यात्री प्रत्येक में बैठ सकते हैं, बाकी के कोच डिब्बों में ७८ यात्री प्रत्येक में बैठे सकते हैं।<ref name="ndtv" /> ट्रेन की सीटें, ब्रेकिंग सिस्टम, दरवाजे और ट्रांसफार्मर ट्रेन के एकमात्र तत्व हैं जिन्हें आयात किया गया है,<ref name="prabhakar" /> उन्हें अगले इकाई के उत्पादन पर घरेलू रूप से बनाने की योजना है।<ref name="ndtvstalin">{{cite news |last1=Stalin |first1=J Sam Daniel |title=Inside India's 'Fastest' Train - 360-Degree Rotating Seats, Sliding Steps |url=https://www.ndtv.com/india-news/inside-indias-fastest-train-360-degree-rotating-seats-sliding-steps-on-engineless-train-18-trainset-1939051 |accessdate=5 नवम्बर 2018 |work=[[एनडीटीवी इंडिया]] |publisher=[[एनडीटीवी इंडिया]] |date=अक्टूबर 29, 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181105062045/https://www.ndtv.com/india-news/inside-indias-fastest-train-360-degree-rotating-seats-sliding-steps-on-engineless-train-18-trainset-1939051 |archive-date=5 नवंबर 2018 |url-status=live }}</ref> अगले वर्ष में एक, और उसके अगले वर्ष चार और इकाइयों के उत्पादन की योजना बनाई गई है।<ref name="ectimespti">{{cite news |title=Train 18: Country's first engine-less train rolled out; Train 20 next |url=https://economictimes.indiatimes.com/industry/transportation/railways/train-18-countrys-first-engine-less-train-rolled-out-train-20-next/articleshow/66419774.cms |accessdate=5 नवम्बर 2018 |work=[[द इकॉनोमिक टाइम्स]] |date=अक्टूबर 29, 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181105160418/https://economictimes.indiatimes.com/industry/transportation/railways/train-18-countrys-first-engine-less-train-rolled-out-train-20-next/articleshow/66419774.cms |archive-date=5 नवंबर 2018 |url-status=live }}</ref> उन इकाइयों में से दो लेआउट में स्लीपर कारों को शामिल करेंगे।<ref name="ndtvsethi" /> भारतीय रेलवे और आईसीएफ ट्रेन २० के विकास की भी योजना बना रहे हैं, <ref>{{Cite web|url=https://hindimerijaan.com/train-18-vande-bharat-express-in-hindi/|title=ट्रेन 20 की योजना|last=हिंदी मेरी|first=जान|date=18 फरवरी 2019|website=Hindi Meri Jaan|archive-url=https://web.archive.org/web/20190226144910/http://hindimerijaan.com/train-18-vande-bharat-express-in-hindi/|archive-date=26 फ़रवरी 2019|dead-url=|access-date=|url-status=dead}}</ref>एक और अर्ध-हाई स्पीड ट्रेन जो राजधानी एक्सप्रेस की जगह लेगी। २०२० में लाइन का अनावरण किया जा सकता है।<ref name="train20">{{cite news |title=After Train 18, Indian Railways focuses on the next-gen Train 20 that'll replace Rajdhani |url=https://www.businesstoday.in/current/economy-politics/after-train-18-the-next-gen-train-20-is-set-to-join-indian-rail-network/story/287488.html |accessdate=5 नवम्बर 2018 |work=बिज़नेस स्टैंडर्ड |publisher=लिविंग मीडिया |date=नवम्बर 1, 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181105160508/https://www.businesstoday.in/current/economy-politics/after-train-18-the-next-gen-train-20-is-set-to-join-indian-rail-network/story/287488.html |archive-date=5 नवंबर 2018 |url-status=dead }}</ref> [[चित्र:Kalaburagi - SMVT Bengaluru Vande Bharat Express.jpg|center|600px|thumb|कलबुरगी-बंगलुरु वन्दे भारत एक्सप्रेस]] == सक्रिय सेवाएँ == {| class="wikitable sortable" |+ ! rowspan="2" |क्र.सं. ! rowspan="2" |ट्रेन का नाम ! rowspan="2" |गाड़ी संख्या ! rowspan="2" |मूल स्टेशन ! rowspan="2" |टर्मिनल स्टेशन ! rowspan="2" |क्षेत्र ! rowspan="2" |रुकती ! rowspan="2" |डिब्बे ! rowspan="2" |आवृत्ति. ! rowspan="2" |दूरी ! rowspan="2" |यात्रा के समय ! colspan="2" |रफ़्तार ! rowspan="2" |उद्घाटन समारोह |- !अधिकतम !औसत |- !१ |नई दिल्ली-वाराणसी वंदे भारत एक्सप्रेस |२२४३६/२२४३५ |नई दिल्ली |वाराणसी जंक्शन |एन.आर. |२ |१६ |गुरु को छोड़कर |७५९ किमी (४७२ मील) |०८ घंटे ०० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |९५ किमी/घंटा (५९ मील प्रति घंटे) |१५ फरवरी २०१९ |- !२ |नई दिल्ली-श्री माता वैष्णो देवी कटरा वंदे भारत एक्सप्रेस |२२४३९/२२४४० |नई दिल्ली |श्री माता वैष्णो देवी कटरा |एन.आर. |३ |१६ |मंगल को छोड़कर |६५५ किमी (४०७ मील) |०८ घंटे ०० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |८२ किमी/घंटा (५१ मील प्रति घंटे) |३ अक्टूबर २०१९ |- !३ |मुंबई सेंट्रल-गांधीनगर कैपिटल वंदे भारत एक्सप्रेस |२०९०१/२०९०२ |मुंबई सेंट्रल |गांधीनगर राजधानी |डब्ल्यूआर |५ |१६ |बुध को छोड़कर |५२२ किमी (३२४ मील) |०६ घंटे २५ मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |८१ किमी/घंटा (५० मील प्रति घंटे) |३० सितंबर २०२२ |- !४ |नई दिल्ली-अम्ब अंदौरा वंदे भारत एक्सप्रेस |२२४४७/२२४४८ |नई दिल्ली |अंब अंदौरा |एन.आर. |४ |१६ |शुक्र को छोड़कर |४१२ किमी (२५६ मील) |०५ घंटे १५ मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |७९ किमी/घंटा (४९ मील प्रति घंटे) |१३ अक्टूबर २०२२ |- !५ |एमजीआर चेन्नई सेंट्रल-मैसूर वंदे भारत एक्सप्रेस |२०६०७/२०६०८ |एमजीआर चेन्नई सेंट्रल |मैसूर जंक्शन |एसआर |२ |१६ |बुध को छोड़कर |४९७ किमी (३०९ मील) |०६ घंटे ३० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |७६ किमी/घंटा (४७ मील प्रति घंटे) |११ नवंबर २०२२ |- !६ |बिलासपुर-नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस |२०८२५/२०८२६ |बिलासपुर जंक्शन |नागपुर जंक्शन |एसईसीआर |४ |८ |शनिवार को छोड़कर |४१२ किमी (२५६ मील) |०५ घंटे ३० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |७७ किमी/घंटा (४८ मील प्रति घंटे) |११ दिसंबर २०२२ |- !७ |हावड़ा-न्यू जलपाईगुड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस |२२३०१/२२३०२ |हावड़ा जंक्शन |न्यू जलपाईगुड़ी जंक्शन |एर |३ |१६ |बुध को छोड़कर |५६६ किमी (३५२ मील) |०७ घंटे ३० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |७५ किमी/घंटा (४७ मील प्रति घंटे) |३० दिसंबर २०२२ |- !८ |विशाखापत्तनम-सिकंदराबाद वंदे भारत एक्सप्रेस |२०८३३/२०८३४ |विशाखापत्तनम जंक्शन |सिकंदराबाद जंक्शन |ईसीओआर |५ |१६ |रवि को छोड़कर |६९८ किमी (४३४ मील) |०८ घंटे ३० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |८२ किमी/घंटा (५१ मील प्रति घंटे) |१५ जनवरी २०२३ |- !९ |मुंबई सीएसएमटी-सोलापुर वंदे भारत एक्सप्रेस |२२२२५/२२२२६ |मुंबई सीएसएमटी |सोलापुर |करोड़ |५ |१६ |बुध को छोड़कर (२२२२५) गुरु को छोड़कर (२२२२६) |४५४ किमी (२८२ मील) |०६ घंटे ३५ मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |६९ किमी/घंटा (४३ मील प्रति घंटे) | rowspan="२" |१० फरवरी २०२३ |- !१० |मुंबई सीएसएमटी-साईंनगर शिरडी वंदे भारत एक्सप्रेस |२२२२३/२२२२४ |मुंबई सीएसएमटी |साईनगर शिर्डी |करोड़ |४ |१६ |मंगल को छोड़कर |३४१ किमी (२१२ मील) |०५ घंटे ५ मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |६७ किमी/घंटा (४२ मील प्रति घंटे) |- !११ |रानी कमलापति (हबीबगंज)-हज़रत निज़ामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस |२०१७१/२०१७२ |हबीबगंज (रानी कमलापति) |हज़रत निज़ामुद्दीन |डब्ल्यूसीआर |३ |१६ |शनिवार को छोड़कर |७०२ किमी (४३६ मील) |०७ घंटे ३० मिनट |१६० किमी/घंटा (९९ मील प्रति घंटे) |९२ किमी/घंटा (५७ मील प्रति घंटे) |१ अप्रैल २०२३ |- !१२ |सिकंदराबाद-तिरुपति वंदे भारत एक्सप्रेस |२०७०१/२०७०२ |सिकंदराबाद जंक्शन |तिरुपति |एससीआर |४ |१६ |मंगल को छोड़कर |६६२ किमी (४११ मील) |०८ घंटे १५ मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |८० किमी/घंटा (५० मील प्रति घंटे) | rowspan="२" |८ अप्रैल २०२३ |- !१३ |एमजीआर चेन्नई सेंट्रल-कोयंबटूर वंदे भारत एक्सप्रेस |२०६४३/२०६४४ |एमजीआर चेन्नई सेंट्रल |कोयंबटूर जंक्शन |एसआर |३ |८ |बुध को छोड़कर |४९५ किमी (३०८ मील) |०६ घंटे ०० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |८२ किमी/घंटा (५१ मील प्रति घंटे) |- !१४ |अजमेर- दिल्ली छावनी वंदे भारत एक्सप्रेस |२०९७७/२०९७८ |अजमेर जंक्शन |दिल्ली छावनी |एनडब्ल्यूआर |४ |१६ |बुध को छोड़कर |४२९ किमी (२६७ मील) |०५ घंटे १५ मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |८२ किमी/घंटा (५१ मील प्रति घंटे) |१२ अप्रैल २०२३ |- !१५ |कासरगोड - तिरुवनंतपुरम वंदे भारत एक्सप्रेस (कोट्टायम के माध्यम से) |२०६३३/२०६३४ |कासरगोड |तिरुवनंतपुरम सेंट्रल |एसआर |८ |१६ |गुरु को छोड़कर |५८६ किमी (३६४ मील) |०८ घंटे १० मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |७२ किमी/घंटा (४५ मील प्रति घंटे) |२५ अप्रैल २०२३ |- !१६ |हावड़ा-पुरी वंदे भारत एक्सप्रेस |२२८९५/२२८९६ |हावड़ा जंक्शन |पुरी |एसईआर |७ |१६ |गुरु को छोड़कर |५०० किमी (३१० मील) |०६ घंटे २५ मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |७८ किमी/घंटा (४८ मील प्रति घंटे) |१८ मई २०२३ |- !१७ |देहरादून-आनंद विहार टर्मिनल वंदे भारत एक्सप्रेस |२२४५८/२२४५७ |देहरादून टर्मिनल |दिल्ली आनंद विहार |एन.आर. |६ |८ |बुध को छोड़कर |३०२ किमी (१८८ मील) |०४ घंटे ४५ मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |६४ किमी/घंटा (४० मील प्रति घंटे) |२५ मई २०२३ |- !१८ |न्यू जलपाईगुड़ी-गुवाहाटी वंदे भारत एक्सप्रेस |२२२२७/२२२२८ |न्यू जलपाईगुड़ी जंक्शन |गुवाहाटी |एनएफआर |५ |८ |मंगल को छोड़कर |४०७ किमी (२५३ मील) |०५ घंटे ३० मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |७४ किमी/घंटा (४६ मील प्रति घंटे) |२९ मई २०२३ |- !१९ |मुंबई सीएसएमटी-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस |२२२२९/२२२३० |मुंबई सीएसएमटी |मडगांव जंक्शन |करोड़ |७ |८ |शुक्र को छोड़कर |५८१ किमी (३६१ मील) |०७ घंटे ४५ मिनट |१२० किमी/घंटा (७५ मील प्रति घंटे) |७५ किमी/घंटा (४७ मील प्रति घंटे) | rowspan="५" |२७ जून २०२३ |- !२० |पटना-रांची वंदे भारत एक्सप्रेस |२२३४९/२२३५० |पटना जंक्शन |रांची जंक्शन |ईसीआर |५ |८ |मंगल को छोड़कर |३७९ किमी (२३५ मील) |०६ घंटे ०० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |६३ किमी/घंटा (३९ मील प्रति घंटे) |- !२१ |केएसआर बेंगलुरु-धारवाड़ वंदे भारत एक्सप्रेस |२०६६१/२०६६२ |केएसआर बेंगलुरु सिटी जं |धारवाड़ |एसडब्ल्यूआर |३ |८ |मंगल को छोड़कर |४९५ किमी (३०८ मील) |०६ घंटे २५ मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |७६ किमी/घंटा (४७ मील प्रति घंटे) |- !२२ |रानी कमलापति (हबीबगंज)-रीवा वंदे भारत एक्सप्रेस |२०१७३/ २०१७४ |हबीबगंज (रानी कमलापति) |रीवा टर्मिनल |डब्ल्यूसीआर |८ |८ |मंगल को छोड़कर |५६८ किमी (३५३ मील) |०८ घंटे ०० मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |७१ किमी/घंटा (४४ मील प्रति घंटे) |- !२३ |इंदौर-नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस |२०९११/२०९१२ |इंदौर जंक्शन |नागपुर जंक्शन |डब्ल्यूआर |४ |८ |रवि को छोड़कर |६३६ किमी (३९५ मील) |०८ घंटे २० मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |७६ किमी/घंटा (४७ मील प्रति घंटे) |- !२४ |जोधपुर-साबरमती (अहमदाबाद) वंदे भारत एक्सप्रेस |१२४६१/१२४६२ |जोधपुर जंक्शन |साबरमती जंक्शन |एनडब्ल्यूआर |५ |८ |मंगल को छोड़कर |४४९ किमी (२७९ मील) |०६ घंटे ०० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |७५ किमी/घंटा (४७ मील प्रति घंटे) | rowspan="२" |७ जुलाई २०२३ |- !२५ |गोरखपुर-लखनऊ चारबाग वंदे भारत एक्सप्रेस |२२५४९/२२५५० |गोरखपुर जंक्शन |लखनऊ चारबाग |नेर |२ |८ |शनिवार को छोड़कर |२९६ किमी (१८४ मील) |०४ घंटे १० मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |७१ किमी/घंटा (४४ मील प्रति घंटे) |- !२६ |उदयपुर शहर-जयपुर वंदे भारत एक्सप्रेस |२०९७९/२०९८० |उदयपुर शहर |जयपुर जंक्शन |एनडब्ल्यूआर |७ |८ |मंगल को छोड़कर |४२५ किमी (२६४ मील) |०६ घंटे २० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |६९ किमी/घंटा (४३ मील प्रति घंटे) | rowspan="९" |२४ सितंबर २०२३ |- !२७ |एमजीआर चेन्नई सेंट्रल-विजयवाड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस |२०६७७/२०६७८ |एमजीआर चेन्नई सेंट्रल |विजयवाड़ा जंक्शन |एसआर |४ |८ |मंगल को छोड़कर |५१४ किमी (३१९ मील) |०६ घंटे ४० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |७७ किमी/घंटा (४८ मील प्रति घंटे) |- !२८ |चेन्नई एग्मोर-तिरुनेलवेली वंदे भारत एक्सप्रेस |२०६६५/२०६६६ |चेन्नई एग्मोर |तिरुनेलवेली जंक्शन |एसआर |६ |८ |मंगल को छोड़कर |६५० किमी (४०० मील) |०७ घंटे ५० मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |८३ किमी/घंटा (५२ मील प्रति घंटे) |- !२९ |काचीगुडा-यशवंतपुर वंदे भारत एक्सप्रेस |२०७०३/२०७०४ |काचीगुडा |यशवन्तपुर जंक्शन |एससीआर |४ |८ |बुध को छोड़कर |६१२ किमी (३८० मील) |०८ घंटे १५ मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |७४ किमी/घंटा (४६ मील प्रति घंटे) |- !३० |पटना-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस |२२३४८/२२३४७ |पटना जंक्शन |हावड़ा जंक्शन |ईसीआर |७ |८ |बुध को छोड़कर |५३२ किमी (३३१ मील) |०६ घंटे ३५ मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |८१ किमी/घंटा (५० मील प्रति घंटे) |- !३१ |रांची-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस |२०८९८/२०८९७ |रांची जंक्शन |हावड़ा जंक्शन |एसईआर |६ |८ |मंगल को छोड़कर |४५८ किमी (२८५ मील) |०७ घंटे ०५ मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |६५ किमी/घंटा (४० मील प्रति घंटे) |- !३२ |पुरी-राउरकेला वंदे भारत एक्सप्रेस |२०८३६/२०८३५ |पुरी |राउरकेला जंक्शन |ईसीओआर |५ |८ |शनिवार को छोड़कर |५०६ किमी (३१४ मील) |०७ घंटे ४५ मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |६५ किमी/घंटा (४० मील प्रति घंटे) |- !३३ |कासरगोड - तिरुवनंतपुरम वंदे भारत एक्सप्रेस (अलप्पुझा के माध्यम से) |२०६३१/२०६३२ |कासरगोड |तिरुवनंतपुरम सेंट्रल |एसआर |८ |८ |सोमवार को छोड़कर (२०६३२) मंगलवार को छोड़कर (२०६३१) |५७४ किमी (३५७ मील) |०८ घंटे ०५ मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |७१ किमी/घंटा (४४ मील प्रति घंटे) |- !३४ |अहमदाबाद-जामनगर वंदे भारत एक्सप्रेस |२२९२५/२२९२६ |अहमदाबाद जंक्शन |जामनगर |डब्ल्यूआर |६ |८ |बुध को छोड़कर (२२९२६) मंगल को छोड़कर (२२९२५) |३३१ किमी (२०६ मील) |०४ घंटे २५ मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |७५ किमी/घंटा (४७ मील प्रति घंटे) |- !३५ |वाराणसी-नई दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस |२२४१५/२२४१६ |वाराणसी जंक्शन |नई दिल्ली |एन.आर. |२ |१६ |मंगल को छोड़कर |७५९ किमी (४७२ मील) |०८ घंटे ०५ मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |९४ किमी/घंटा (५८ मील प्रति घंटे) |१८ दिसंबर २०२३ |- !३६ |आनंद विहार-अयोध्या धाम वंदे भारत एक्सप्रेस |२२४२६/२२४२५ |दिल्ली आनंद विहार |अयोध्या धाम |एन.आर. |२ |८ |बुध को छोड़कर |६२८ किमी (३९० मील) |०८ घंटे २० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |७५ किमी/घंटा (४७ मील प्रति घंटे) | rowspan="६" |३० दिसंबर २०२३ |- !३७ |एसएमवीडी कटरा-नई दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस |२२४७८/२२४७७ |श्री माता वैष्णो देवी कटरा |नई दिल्ली |एन.आर. |३ |१६ |बुध को छोड़कर |६५५ किमी (४०७ मील) |०८ घंटे ०० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |८२ किमी/घंटा (५१ मील प्रति घंटे) |- !३८ |अमृतसर- दिल्ली जंक्शन वंदे भारत एक्सप्रेस |२२४८८/२२४८७ |अमृतसर जंक्शन |दिल्ली जंक्शन |एन.आर. |५ |८ |शुक्र को छोड़कर |४४७ किमी (२७८ मील) |०५ घंटे ३० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |८१ किमी/घंटा (५० मील प्रति घंटे) |- !३९ |कोयंबटूर-बेंगलुरु छावनी वंदे भारत एक्सप्रेस |२०६४२/२०६४१ |कोयंबटूर जंक्शन |बेंगलुरु छावनी |एसआर |५ |८ |गुरु को छोड़कर |३७४ किमी (२३२ मील) |०६ घंटे ३० मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |५८ किमी/घंटा (३६ मील प्रति घंटे) |- !४० |मंगलुरु सेंट्रल-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस |२०६४६/२०६४५ |मंगलुरु सेंट्रल |मडगांव जंक्शन |एसआर |२ |८ |गुरु को छोड़कर |३१९ किमी (१९८ मील) |०४ घंटे ३५ मिनट |१२० किमी/घंटा (७५ मील प्रति घंटे) |७० किमी/घंटा (४३ मील प्रति घंटे) |- !४१ |जालना-मुंबई सीएसएमटी वंदे भारत एक्सप्रेस |२०७०५/२०७०६ |जलना |मुंबई सीएसएमटी |एससीआर |६ |८ |बुध को छोड़कर |४३५ किमी (२७० मील) |०७ घंटे २० मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |५९ किमी/घंटा (३७ मील प्रति घंटे) |} ==वंदे भारत एक्सप्रेस की खासियत== वंदे भारत एक्सप्रेस की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, इसे कई आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं से लैस किया गया है। सुरक्षा की दृष्टि से, यह ट्रेन निम्नलिखित महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल करती है: # '''सीसीटीवी निगरानी:''' वंदे भारत एक्सप्रेस में सभी कोच और '''महत्वपूर्ण स्थानों पर''' सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे यात्रा के दौरान किसी भी असामान्य गतिविधि की निगरानी करते हैं और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया की सुविधा प्रदान करते हैं। # '''सुरक्षा कर्मी:''' ट्रेन में प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जाती है, जो यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करते हैं। ये कर्मी हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहते हैं और यात्रियों को सुरक्षा का विश्वास दिलाते हैं। # '''आपातकालीन संचार प्रणाली:''' वंदे भारत एक्सप्रेस में अत्याधुनिक आपातकालीन संचार प्रणाली मौजूद है। इसमें आपातकालीन स्थिति में यात्रियों को '''तुरंत सहायता उपलब्ध कराने के लिए''' विशेष सिस्टम शामिल हैं। # '''फायर सेफ्टी व्यवस्था:''' ट्रेन में अग्निशामक यंत्र और फायर अलार्म की व्यवस्था की गई है, जो किसी भी संभावित आग लगने की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया की सुविधा प्रदान करती है।<ref>{{Cite web|url=https://newsfactory1.com/%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%81/|title=वंदे भारत एक्सप्रेस की सुविधाएँ, सुरक्षा, तेज़ी: यात्रियों के लिए क्या है खास?|last=kanaujiya|first=Adarsh|date=16 सितम्बर 2024|website=News factory1|access-date=3 अक्तूबर 2024|archive-date=7 अक्तूबर 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20241007091957/https://newsfactory1.com/%E0%A4%B5%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%87-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%81/|url-status=dead}}</ref> वंदे भारत एक्सप्रेस की सुविधाएँ यात्रियों के लिए एक आरामदायक और शानदार यात्रा अनुभव सुनिश्चित करती हैं। इसकी प्रमुख [https://newsfactory1.com/%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%81/ '''सुविधाएँ'''] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20241007091957/https://newsfactory1.com/%E0%A4%B5%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%87-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%81/ |date=7 अक्तूबर 2024 }} निम्नलिखित हैं: # '''आरामदायक सीटें:''' वंदे भारत एक्सप्रेस में सीटों को विशेष रूप से '''आरामदायक और सुविधाजनक बनाया''' गया है। इन सीटों में एडजस्टेबल हेडरेस्ट और लेगरेस्ट की सुविधा उपलब्ध है, जिससे लंबे समय की यात्रा भी आरामदायक होती है। # '''स्वच्छता:''' ट्रेन की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया है। प्रत्येक कोच और शौचालय को नियमित रूप से साफ किया जाता है, जिससे यात्रियों को एक स्वच्छ और ताजगी भरी यात्रा का अनुभव होता है। # '''वायरलेस चार्जिंग:''' वंदे भारत एक्सप्रेस में प्रत्येक सीट के पास वायरलेस चार्जिंग पोर्ट्स उपलब्ध हैं, जिससे यात्री अपने मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को आसानी से चार्ज कर सकते हैं। # '''उत्कृष्ट भोजन सेवाएँ:''' ट्रेन में यात्रियों को उच्च गुणवत्ता का भोजन प्रदान किया जाता है। एक विशेष कैटरिंग सेवा द्वारा स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन की पेशकश की जाती है। # '''वॉयस कमांड सिस्टम:''' वंदे भारत एक्सप्रेस में वॉयस कमांड सिस्टम की सुविधा भी है, जो यात्रियों को ट्रेन की विभिन्न सुविधाओं का '''उपयोग करने में मदद करती है।''' # '''आधुनिक डिजाइन:''' ट्रेन का डिज़ाइन भारतीय संस्कृति और आधुनिकता का बेहतरीन संगम है। इसके आंतरिक सजावट और सुविधाएँ एक प्रीमियम अनुभव प्रदान करती हैं। == वंदे भारत एक्सप्रेस की तेज़ी == वंदे भारत एक्सप्रेस की तेज़ी इसे भारतीय रेलवे की अन्य ट्रेनों से अलग बनाती है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं: # '''हाई स्पीड:''' वंदे भारत एक्सप्रेस 160 किमी/घंटा की अधिकतम गति से यात्रा करती है, जो इसे भारत की सबसे तेज़ ट्रेनों में से एक बनाती है। # '''स्मूद और स्टेबल रनिंग:''' ट्रेन की डिजाइन और तकनीक इसे एक स्मूद और स्थिर यात्रा का अनुभव प्रदान करती है, जिससे यात्रियों को झटके या असुविधा का सामना नहीं करना पड़ता। # '''सीधे मार्ग:''' वंदे भारत एक्सप्रेस के मार्ग को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि इसमें कम से कम स्टॉपेज होते हैं, जिससे यात्रा का समय कम होता है और गति बनाए रखी जाती है। # '''उन्नत प्रौद्योगिकी:''' ट्रेन में नवीनतम ट्रैक्शन और ब्रेकिंग तकनीक का उपयोग किया गया है, जो इसकी गति और प्रदर्शन को बेहतर बनाता है। ===== आइए वंदे भारत एक्सप्रेस की सुविधाओ पर एक नजर डालते हैं, यह ज्ञान आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। ===== 1. वंदे भारत एक्सप्रेस 100% स्वदेशी ट्रेन है। 2. इसकी गति बहुत ही कम समय में 160 किमी/घंटा से 200 किमी/घंटा तक पहुंच जाती है। 3. भारतीय ट्रेनों में स्वतंत्र लोकोमोटिव होते हैं। हालाँकि, वंदे भारत ट्रेन में मेट्रो ट्रेन के समान एक एकीकृत मोटर इंजन है। 4. वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन 100 किमी की स्पीड तक पहुँचने में मात्र 52 सेकंड का समय लगाती है। 5. इस ट्रेन में स्वचालित दरवाजे होते हैं ये दरवाजे मेट्रो की तरह ही अपने आप खुलते हैं। इसके अलावा, ट्रेनें कई आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं। 6. वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के अंदर की सीट 360 डिग्री घूमती है। 7. इस ट्रेन में भोजन और नाश्ता भी सर्व किया जाता है। जिसकी कीमत टिकट में ही शामिल होती है। 8. यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए, ट्रेन पूरी तरह से ऑनबोर्ड वाई-फाई प्रणाली से सुसज्जित है। इसके अलावा, प्रत्येक सीट के नीचे मोबाइल फोन और लैपटॉप चार्ज करने के लिए चार्जिंग स्टेशन हैं। 9. वंदे भारत ट्रेन में जीपीएस सिस्टम लगा हुआ है जो आने वाले स्टेशनों और अन्य जानकारी के बारे में जानकारी प्रदान करता है। 10. स्वच्छता की दृष्टि से ट्रेन में बायोवैक्यूम शौचालय बनाए गए हैं जैसा कि हवाई जहाज़ में उपयोग किया जाता है। 11. बाहर का अच्छा दृश्य दिखाने के लिए बड़ी-बड़ी खिड़कियाँ लगाई गई हैं जिससे यात्री नज़ारों का आनंद उठा सके । 12. यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ट्रेन के प्रत्येक डिब्बे में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। 13. यात्रियों की सुरक्षा के लिए इस ट्रेन में ऐसे सेंसर लगाए गए हैं कि दरवाजे तब तक नहीं खुलेंगे जब तक ट्रेन पूरी तरह से रुक न जाए। जिससे कोई भी यात्री चलती ट्रेन में न ही उतरे और न ही चढ़ पाए । 14. वंदे भारत ट्रेन भी विकलांग लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई थी। इसलिए इस ट्रेन के कुछ डिब्बों में विकलांगों के लिए उनकी व्हीलचेयर रखने के लिए अलग से जगह बनायी गई है । अधिक जानकारी के लिए नीचे दी हुई लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं [http://वंदे%20भारत%20एक्सप्रेस%20और%2015%20रोचक%20तथ्य%20|%20TOP%2015%20AMAZING%20FACT%20ABOUT%20VANDE%20BHARAT%20EXPRESS%20TRAIN वंदे भारत एक्सप्रेस और 15 रोचक तथ्य | TOP 15 AMAZING FACT ABOUT VANDE BHARAT EXPRESS TRAIN] ==इन्हें भी देखें== * [[भारत में रेल परिवहन]] * [[भारत में तीव्र गति रेल]] * [[गतिमान एक्सप्रेस]] * [[वन्दे मातरम्]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची|30em}} [[श्रेणी:रेल]] 97xh6so5kbaxez02sk9z74d98drnddr 6630277 6630276 2026-10-16T17:27:09Z NguoiDungKhongDinhDanh 641769 [[Special:Contributions/~2026-55608-11|~2026-55608-11]] ([[User talk:~2026-55608-11|Talk]]) के संपादनों को हटाकर [[User:Wikipidiya1|Wikipidiya1]] के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया 6509293 wikitext text/x-wiki {{About|वंदे भारत रेलगाड़ी शृंखला|[[शयनयान]] रूपान्तर|वंदे भारत शयनयान|अन्य उपयोगों|वंदे भारत (बहुविकल्पी)}} {{Infobox rail service | name = वंदे भारत एक्सप्रेस | color = 28457D | color2 = FF7220 | image = {{Photomontage |position=center |photo1a=Vande Bharat Express around Mumbai.jpg |photo2a=Specially Designed Mini Vande Bharat Express train.jpg |photo2b=New_Jalpaiguri_Patna_Saffron_Grey_Mini_Vande_Bharat_Transet_2024-03-04-061128.jpg |size=300 |spacing=2 |color=white |border=0}} | caption = विभिन्न रंग-रूपों में वंदे भारत एक्सप्रेस रेलगाड़ियाँ | type = {{ill|अन्तर नगर रेल|en|Inter-city rail}} {{ill|अर्ध-उच्चगति 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news |title=Built to hit 180 kmph, Why do Vande Bharat Express trains run at 83 kmph average speed? RTI reply reveals |url=https://www.financialexpress.com/business/railways-built-to-hit-180-kmph-why-do-vande-bharat-express-trains-run-at-83-kmph-average-speed-rti-reply-reveals-3051648/ |newspaper=[[द फ़ाइनेंशियल एक्सप्रेस (भारत)|द फ़ाइनेंशियल एक्सप्रेस]] |date=19 April 2023 |access-date=7 March 2024 |archive-date=19 April 2024 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240419053810/https://www.financialexpress.com/business/railways-built-to-hit-180-kmph-why-do-vande-bharat-express-trains-run-at-83-kmph-average-speed-rti-reply-reveals-3051648/ |url-status=live }}</ref>}} | trainlength = {{ubl|{{cvt|192|m}} (8 डिब्बे)|{{cvt|384|m}} (16 डिब्बे)|{{cvt|480|m}} (20 डिब्बे)}} | owners = [[भारतीय रेल]] | map = [[File:Vande Bharat Express-hi.svg|320px]] | map_state = collapsed }} '''वंदे भारत एक्सप्रेस''', जिसे पहले '''ट्रेन १८''' के नाम से जाना जाता था, एक भारतीय अर्ध-हाई स्पीड ट्रेन और भारत की पहली [[इलेक्ट्रिक मल्टिपल इकाई|बिना इंजन की]] ट्रेन है।<ref name="express24">{{cite web |title=Train 18, India’s first engine-less train, set to hit tracks on October 29 |url=https://indianexpress.com/article/india/train-18-indias-first-engine-less-train-set-to-hit-tracks-on-october-29-5415892/ |work=[[द इंडियन एक्सप्रेस]] |date=24 अक्टूबर 2018 |access-date=7 नवंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181106233913/https://indianexpress.com/article/india/train-18-indias-first-engine-less-train-set-to-hit-tracks-on-october-29-5415892/ |archive-date=6 नवंबर 2018 |url-status=live }}</ref> यह पूरी तरह से भारत में डिजाइन और निर्मित होने वाली पहली ट्रेन भी है। इसे [[सवारी डिब्बा कारखाना, चेन्नै]] (आईसीएफ) द्वारा १८ महीने की अवधि में भारत सरकार के [[मेक इन इंडिया]] पहल के तहत डिजाइन और बनाया गया था। पहली रेक की यूनिट लागत को १०० करोड़ (यूएस $१४ मिलियन) के रूप में दिया गया था, हालांकि यूनिट लागत अगले उत्पादन के साथ नीचे आने की उम्मीद है।<ref name ="prabhakar">{{cite news |last1=Prabhakar |first1=Siddarth |title=First Made-in-India engineless train gets on track for trial run - Times of India |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/chennai/first-made-in-india-train-set-ready-for-trial-run/articleshow/66324376.cms |accessdate=4 नवम्बर 2018 |work=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]] |date=अक्टूबर 23, 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181105101450/https://timesofindia.indiatimes.com/city/chennai/first-made-in-india-train-set-ready-for-trial-run/articleshow/66324376.cms |archive-date=5 नवंबर 2018 |url-status=live }}</ref> मूल कीमत पर, यह यूरोप से आयातित एक समान ट्रेन की तुलना में ४०% कम महंगा होने का अनुमान है।<ref name="arora">{{cite news |last1=अरोड़ा |first1=रजत |title=Made-in-India 160 km per hour train to run from June |url=https://economictimes.indiatimes.com/industry/transportation/railways/made-in-india-160-km-per-hour-train-to-run-from-june/articleshow/63323107.cms |accessdate=5 नवम्बर 2018 |work=[[द इकॉनोमिक टाइम्स]] |date=March 16, 2018 |location=[[नई दिल्ली]], भारत |archive-url=https://web.archive.org/web/20180627202039/https://economictimes.indiatimes.com/industry/transportation/railways/made-in-india-160-km-per-hour-train-to-run-from-june/articleshow/63323107.cms |archive-date=27 जून 2018 |url-status=live }}</ref> ट्रेन को फरवरी २०१९ में सेवा शुरू करने की योजना है, जिस तारीख से दूसरी इकाई का निर्माण और सेवा के लिए तैयार किया जाएगा।<ref name="rupera" /> रेलवे का पहला परीक्षण रन २९ नवंबर, २०१८ को [[चेन्नई]] में हुआ,<ref name="unitedtrial">{{cite news |title=Self-propelled Train 18 debuts for trial run |url=http://www.uniindia.com/news/india/self-propelled-train-18-debuts-for-trial-run/1391824.html |accessdate=4 नवम्बर 2018 |work=[[यूनाइटेड न्यूज आफ इंडिया]] |date=29 अक्टूबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181105012318/http://www.uniindia.com/news/india/self-propelled-train-18-debuts-for-trial-run/1391824.html |archive-date=5 नवंबर 2018 |url-status=live }}</ref> ट्रेन के ब्रेक और क्रू ओरिएंटेशन पर ध्यान केंद्रित किया,<ref name="ndtvsethi">{{cite news |last1=Sethi |first1=Nidhi |title=India's First Engineless Train To Make Debut On Tracks Today: 10 Points |url=https://www.ndtv.com/india-news/zero-discharge-cctv-cameras-on-indias-first-engineless-train-10-points-1938873 |accessdate=5 नवम्बर 2018 |work=[[एनडीटीवी इंडिया]] |publisher=[[एनडीटीवी इंडिया]] |date=अक्टूबर 29, 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181105061835/https://www.ndtv.com/india-news/zero-discharge-cctv-cameras-on-indias-first-engineless-train-10-points-1938873 |archive-date=5 नवंबर 2018 |url-status=live }}</ref> और ७ नवंबर को दिल्ली में और बाद में राजस्थान में परीक्षण किया जाएगा।<ref name="ndtvstalin" /> दिल्ली के बाद, स्पीड परीक्षण आयोजित किया जाएगा, पहले १५० किलोमीटर प्रति घंटा (९३ मील प्रति घंटे), और उसके बाद १६० किलोमीटर प्रति घंटा (९९ मील प्रति घंटे) की ऑपरेटिंग गति पर।<ref name="ndtvsethi" /> भारत के [[अनुसन्धान अभिकल्प एवं मानक संगठन]] द्वारा एक टीम को परीक्षण की निगरानी के लिए और अंतिम गति परीक्षण के लिए आगे संगठित किया गया।<ref name="businessstandard">{{cite news |title=Special team to ensure speedy trials of India's first engine-less train |url=https://www.business-standard.com/article/current-affairs/special-team-to-ensure-speedy-trials-of-india-s-first-engine-less-train-118102800186_1.html |accessdate=5 नवम्बर 2018 |work=[[बिजनेस स्टैंडर्ड]] |date=अक्टूबर 28, 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181105062002/https://www.business-standard.com/article/current-affairs/special-team-to-ensure-speedy-trials-of-india-s-first-engine-less-train-118102800186_1.html |archive-date=5 नवंबर 2018 |url-status=live }}</ref> ट्रेनों का पहला सेट दिल्ली-भोपाल [[शताब्दी एक्स्प्रेस]] की जगह [[नई दिल्ली]] और [[भोपाल]] के बीच चलेगा, जो तीस साल से चल रहा है<ref name="ndtv" /> और यात्रा के समय को १५ प्रतिशत तक कम करेगा।<ref name="express24" /> १६० किलोमीटर प्रति घंटे (९९ मील प्रति घंटे) की ऑपरेटिंग गति पर, यह शताब्दी एक्सप्रेस को ३० किलोमीटर प्रति घंटे (१९ मील प्रति घंटे) से पीछे कर देगा।<ref name="ndtv">{{cite news |title=Pics: Train 18 To Begin Trial Run Today. Here Are 10 Things To Know |url=https://www.ndtv.com/business/train-18-indias-fastest-train-route-launch-date-today-features-engineless-rotating-seats-in-pictures-1939151 |accessdate=4 नवम्बर 2018 |work=एनडीटीवी प्रोफिट |publisher=एनडीटीवी इंडिया |date=अक्टूबर 29, 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181105062047/https://www.ndtv.com/business/train-18-indias-fastest-train-route-launch-date-today-features-engineless-rotating-seats-in-pictures-1939151 |archive-date=5 नवंबर 2018 |url-status=live }}</ref> ट्रेन १८ का बाहरी ढांचा [[शिनकानसेन|बुलेट ट्रेन]] की तरह है,<ref name="prabhakar" /> जिसके प्रत्येक छोर की वायुगतिकीय संकीर्णता है।<ref name="ectimespti" /> इसमें ट्रेन के प्रत्येक छोर पर एक ड्राइवर कोच है, जो लाइन के प्रत्येक छोर पर तेजी से बदलाव को सहज बनाता है।<ref name="unitedtrial" /> आंतरिक रूप से, ट्रेन में १,१२८ यात्रियों की बैठने की क्षमता के साथ १६ यात्री कारें हैं।<ref name="shine">{{cite news |last1=Shine |first1=Jacob |title=Train 18, India's first engine-less train, is also the country's fastest |url=https://www.business-standard.com/article/indian-railways/the-crown-jewel-of-indian-railways-is-a-billion-rupee-made-in-india-train-118102900370_1.html?utm_source=SEO&utm_medium=ST |accessdate=4 नवम्बर 2018 |work=[[बिजनेस स्टैंडर्ड]] |location=[[नई दिल्ली]], [[भारत]] |date=29 अक्टूबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181030092231/https://www.business-standard.com/article/indian-railways/the-crown-jewel-of-indian-railways-is-a-billion-rupee-made-in-india-train-118102900370_1.html?utm_source=SEO&utm_medium=ST |archive-date=30 अक्तूबर 2018 |url-status=live }}</ref> केंद्र में दो प्रथम श्रेणी के डिब्बे हैं जिनमें ५२ यात्री प्रत्येक में बैठ सकते हैं, बाकी के कोच डिब्बों में ७८ यात्री प्रत्येक में बैठे सकते हैं।<ref name="ndtv" /> ट्रेन की सीटें, ब्रेकिंग सिस्टम, दरवाजे और ट्रांसफार्मर ट्रेन के एकमात्र तत्व हैं जिन्हें आयात किया गया है,<ref name="prabhakar" /> उन्हें अगले इकाई के उत्पादन पर घरेलू रूप से बनाने की योजना है।<ref name="ndtvstalin">{{cite news |last1=Stalin |first1=J Sam Daniel |title=Inside India's 'Fastest' Train - 360-Degree Rotating Seats, Sliding Steps |url=https://www.ndtv.com/india-news/inside-indias-fastest-train-360-degree-rotating-seats-sliding-steps-on-engineless-train-18-trainset-1939051 |accessdate=5 नवम्बर 2018 |work=[[एनडीटीवी इंडिया]] |publisher=[[एनडीटीवी इंडिया]] |date=अक्टूबर 29, 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181105062045/https://www.ndtv.com/india-news/inside-indias-fastest-train-360-degree-rotating-seats-sliding-steps-on-engineless-train-18-trainset-1939051 |archive-date=5 नवंबर 2018 |url-status=live }}</ref> अगले वर्ष में एक, और उसके अगले वर्ष चार और इकाइयों के उत्पादन की योजना बनाई गई है।<ref name="ectimespti">{{cite news |title=Train 18: Country's first engine-less train rolled out; Train 20 next |url=https://economictimes.indiatimes.com/industry/transportation/railways/train-18-countrys-first-engine-less-train-rolled-out-train-20-next/articleshow/66419774.cms |accessdate=5 नवम्बर 2018 |work=[[द इकॉनोमिक टाइम्स]] |date=अक्टूबर 29, 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181105160418/https://economictimes.indiatimes.com/industry/transportation/railways/train-18-countrys-first-engine-less-train-rolled-out-train-20-next/articleshow/66419774.cms |archive-date=5 नवंबर 2018 |url-status=live }}</ref> उन इकाइयों में से दो लेआउट में स्लीपर कारों को शामिल करेंगे।<ref name="ndtvsethi" /> भारतीय रेलवे और आईसीएफ ट्रेन २० के विकास की भी योजना बना रहे हैं, <ref>{{Cite web|url=https://hindimerijaan.com/train-18-vande-bharat-express-in-hindi/|title=ट्रेन 20 की योजना|last=हिंदी मेरी|first=जान|date=18 फरवरी 2019|website=Hindi Meri Jaan|archive-url=https://web.archive.org/web/20190226144910/http://hindimerijaan.com/train-18-vande-bharat-express-in-hindi/|archive-date=26 फ़रवरी 2019|dead-url=|access-date=|url-status=dead}}</ref>एक और अर्ध-हाई स्पीड ट्रेन जो राजधानी एक्सप्रेस की जगह लेगी। २०२० में लाइन का अनावरण किया जा सकता है।<ref name="train20">{{cite news |title=After Train 18, Indian Railways focuses on the next-gen Train 20 that'll replace Rajdhani |url=https://www.businesstoday.in/current/economy-politics/after-train-18-the-next-gen-train-20-is-set-to-join-indian-rail-network/story/287488.html |accessdate=5 नवम्बर 2018 |work=बिज़नेस स्टैंडर्ड |publisher=लिविंग मीडिया |date=नवम्बर 1, 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181105160508/https://www.businesstoday.in/current/economy-politics/after-train-18-the-next-gen-train-20-is-set-to-join-indian-rail-network/story/287488.html |archive-date=5 नवंबर 2018 |url-status=dead }}</ref> [[चित्र:Kalaburagi - SMVT Bengaluru Vande Bharat Express.jpg|center|600px|thumb|कलबुरगी-बंगलुरु वन्दे भारत एक्सप्रेस]] == सक्रिय सेवाएँ == {| class="wikitable sortable" |+ ! rowspan="2" |क्र.सं. ! rowspan="2" |ट्रेन का नाम ! rowspan="2" |गाड़ी संख्या ! rowspan="2" |मूल स्टेशन ! rowspan="2" |टर्मिनल स्टेशन ! rowspan="2" |क्षेत्र ! rowspan="2" |रुकती ! rowspan="2" |डिब्बे ! rowspan="2" |आवृत्ति. ! rowspan="2" |दूरी ! rowspan="2" |यात्रा के समय ! colspan="2" |रफ़्तार ! rowspan="2" |उद्घाटन समारोह |- !अधिकतम !औसत |- !१ |नई दिल्ली-वाराणसी वंदे भारत एक्सप्रेस |२२४३६/२२४३५ |नई दिल्ली |वाराणसी जंक्शन |एन.आर. |२ |१६ |गुरु को छोड़कर |७५९ किमी (४७२ मील) |०८ घंटे ०० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |९५ किमी/घंटा (५९ मील प्रति घंटे) |१५ फरवरी २०१९ |- !२ |नई दिल्ली-श्री माता वैष्णो देवी कटरा वंदे भारत एक्सप्रेस |२२४३९/२२४४० |नई दिल्ली |श्री माता वैष्णो देवी कटरा |एन.आर. |३ |१६ |मंगल को छोड़कर |६५५ किमी (४०७ मील) |०८ घंटे ०० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |८२ किमी/घंटा (५१ मील प्रति घंटे) |३ अक्टूबर २०१९ |- !३ |मुंबई सेंट्रल-गांधीनगर कैपिटल वंदे भारत एक्सप्रेस |२०९०१/२०९०२ |मुंबई सेंट्रल |गांधीनगर राजधानी |डब्ल्यूआर |५ |१६ |बुध को छोड़कर |५२२ किमी (३२४ मील) |०६ घंटे २५ मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |८१ किमी/घंटा (५० मील प्रति घंटे) |३० सितंबर २०२२ |- !४ |नई दिल्ली-अम्ब अंदौरा वंदे भारत एक्सप्रेस |२२४४७/२२४४८ |नई दिल्ली |अंब अंदौरा |एन.आर. |४ |१६ |शुक्र को छोड़कर |४१२ किमी (२५६ मील) |०५ घंटे १५ मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |७९ किमी/घंटा (४९ मील प्रति घंटे) |१३ अक्टूबर २०२२ |- !५ |एमजीआर चेन्नई सेंट्रल-मैसूर वंदे भारत एक्सप्रेस |२०६०७/२०६०८ |एमजीआर चेन्नई सेंट्रल |मैसूर जंक्शन |एसआर |२ |१६ |बुध को छोड़कर |४९७ किमी (३०९ मील) |०६ घंटे ३० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |७६ किमी/घंटा (४७ मील प्रति घंटे) |११ नवंबर २०२२ |- !६ |बिलासपुर-नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस |२०८२५/२०८२६ |बिलासपुर जंक्शन |नागपुर जंक्शन |एसईसीआर |४ |८ |शनिवार को छोड़कर |४१२ किमी (२५६ मील) |०५ घंटे ३० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |७७ किमी/घंटा (४८ मील प्रति घंटे) |११ दिसंबर २०२२ |- !७ |हावड़ा-न्यू जलपाईगुड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस |२२३०१/२२३०२ |हावड़ा जंक्शन |न्यू जलपाईगुड़ी जंक्शन |एर |३ |१६ |बुध को छोड़कर |५६६ किमी (३५२ मील) |०७ घंटे ३० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |७५ किमी/घंटा (४७ मील प्रति घंटे) |३० दिसंबर २०२२ |- !८ |विशाखापत्तनम-सिकंदराबाद वंदे भारत एक्सप्रेस |२०८३३/२०८३४ |विशाखापत्तनम जंक्शन |सिकंदराबाद जंक्शन |ईसीओआर |५ |१६ |रवि को छोड़कर |६९८ किमी (४३४ मील) |०८ घंटे ३० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |८२ किमी/घंटा (५१ मील प्रति घंटे) |१५ जनवरी २०२३ |- !९ |मुंबई सीएसएमटी-सोलापुर वंदे भारत एक्सप्रेस |२२२२५/२२२२६ |मुंबई सीएसएमटी |सोलापुर |करोड़ |५ |१६ |बुध को छोड़कर (२२२२५) गुरु को छोड़कर (२२२२६) |४५४ किमी (२८२ मील) |०६ घंटे ३५ मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |६९ किमी/घंटा (४३ मील प्रति घंटे) | rowspan="२" |१० फरवरी २०२३ |- !१० |मुंबई सीएसएमटी-साईंनगर शिरडी वंदे भारत एक्सप्रेस |२२२२३/२२२२४ |मुंबई सीएसएमटी |साईनगर शिर्डी |करोड़ |४ |१६ |मंगल को छोड़कर |३४१ किमी (२१२ मील) |०५ घंटे ५ मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |६७ किमी/घंटा (४२ मील प्रति घंटे) |- !११ |रानी कमलापति (हबीबगंज)-हज़रत निज़ामुद्दीन वंदे भारत एक्सप्रेस |२०१७१/२०१७२ |हबीबगंज (रानी कमलापति) |हज़रत निज़ामुद्दीन |डब्ल्यूसीआर |३ |१६ |शनिवार को छोड़कर |७०२ किमी (४३६ मील) |०७ घंटे ३० मिनट |१६० किमी/घंटा (९९ मील प्रति घंटे) |९२ किमी/घंटा (५७ मील प्रति घंटे) |१ अप्रैल २०२३ |- !१२ |सिकंदराबाद-तिरुपति वंदे भारत एक्सप्रेस |२०७०१/२०७०२ |सिकंदराबाद जंक्शन |तिरुपति |एससीआर |४ |१६ |मंगल को छोड़कर |६६२ किमी (४११ मील) |०८ घंटे १५ मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |८० किमी/घंटा (५० मील प्रति घंटे) | rowspan="२" |८ अप्रैल २०२३ |- !१३ |एमजीआर चेन्नई सेंट्रल-कोयंबटूर वंदे भारत एक्सप्रेस |२०६४३/२०६४४ |एमजीआर चेन्नई सेंट्रल |कोयंबटूर जंक्शन |एसआर |३ |८ |बुध को छोड़कर |४९५ किमी (३०८ मील) |०६ घंटे ०० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |८२ किमी/घंटा (५१ मील प्रति घंटे) |- !१४ |अजमेर- दिल्ली छावनी वंदे भारत एक्सप्रेस |२०९७७/२०९७८ |अजमेर जंक्शन |दिल्ली छावनी |एनडब्ल्यूआर |४ |१६ |बुध को छोड़कर |४२९ किमी (२६७ मील) |०५ घंटे १५ मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |८२ किमी/घंटा (५१ मील प्रति घंटे) |१२ अप्रैल २०२३ |- !१५ |कासरगोड - तिरुवनंतपुरम वंदे भारत एक्सप्रेस (कोट्टायम के माध्यम से) |२०६३३/२०६३४ |कासरगोड |तिरुवनंतपुरम सेंट्रल |एसआर |८ |१६ |गुरु को छोड़कर |५८६ किमी (३६४ मील) |०८ घंटे १० मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |७२ किमी/घंटा (४५ मील प्रति घंटे) |२५ अप्रैल २०२३ |- !१६ |हावड़ा-पुरी वंदे भारत एक्सप्रेस |२२८९५/२२८९६ |हावड़ा जंक्शन |पुरी |एसईआर |७ |१६ |गुरु को छोड़कर |५०० किमी (३१० मील) |०६ घंटे २५ मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |७८ किमी/घंटा (४८ मील प्रति घंटे) |१८ मई २०२३ |- !१७ |देहरादून-आनंद विहार टर्मिनल वंदे भारत एक्सप्रेस |२२४५८/२२४५७ |देहरादून टर्मिनल |दिल्ली आनंद विहार |एन.आर. |६ |८ |बुध को छोड़कर |३०२ किमी (१८८ मील) |०४ घंटे ४५ मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |६४ किमी/घंटा (४० मील प्रति घंटे) |२५ मई २०२३ |- !१८ |न्यू जलपाईगुड़ी-गुवाहाटी वंदे भारत एक्सप्रेस |२२२२७/२२२२८ |न्यू जलपाईगुड़ी जंक्शन |गुवाहाटी |एनएफआर |५ |८ |मंगल को छोड़कर |४०७ किमी (२५३ मील) |०५ घंटे ३० मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |७४ किमी/घंटा (४६ मील प्रति घंटे) |२९ मई २०२३ |- !१९ |मुंबई सीएसएमटी-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस |२२२२९/२२२३० |मुंबई सीएसएमटी |मडगांव जंक्शन |करोड़ |७ |८ |शुक्र को छोड़कर |५८१ किमी (३६१ मील) |०७ घंटे ४५ मिनट |१२० किमी/घंटा (७५ मील प्रति घंटे) |७५ किमी/घंटा (४७ मील प्रति घंटे) | rowspan="५" |२७ जून २०२३ |- !२० |पटना-रांची वंदे भारत एक्सप्रेस |२२३४९/२२३५० |पटना जंक्शन |रांची जंक्शन |ईसीआर |५ |८ |मंगल को छोड़कर |३७९ किमी (२३५ मील) |०६ घंटे ०० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |६३ किमी/घंटा (३९ मील प्रति घंटे) |- !२१ |केएसआर बेंगलुरु-धारवाड़ वंदे भारत एक्सप्रेस |२०६६१/२०६६२ |केएसआर बेंगलुरु सिटी जं |धारवाड़ |एसडब्ल्यूआर |३ |८ |मंगल को छोड़कर |४९५ किमी (३०८ मील) |०६ घंटे २५ मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |७६ किमी/घंटा (४७ मील प्रति घंटे) |- !२२ |रानी कमलापति (हबीबगंज)-रीवा वंदे भारत एक्सप्रेस |२०१७३/ २०१७४ |हबीबगंज (रानी कमलापति) |रीवा टर्मिनल |डब्ल्यूसीआर |८ |८ |मंगल को छोड़कर |५६८ किमी (३५३ मील) |०८ घंटे ०० मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |७१ किमी/घंटा (४४ मील प्रति घंटे) |- !२३ |इंदौर-नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस |२०९११/२०९१२ |इंदौर जंक्शन |नागपुर जंक्शन |डब्ल्यूआर |४ |८ |रवि को छोड़कर |६३६ किमी (३९५ मील) |०८ घंटे २० मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |७६ किमी/घंटा (४७ मील प्रति घंटे) |- !२४ |जोधपुर-साबरमती (अहमदाबाद) वंदे भारत एक्सप्रेस |१२४६१/१२४६२ |जोधपुर जंक्शन |साबरमती जंक्शन |एनडब्ल्यूआर |५ |८ |मंगल को छोड़कर |४४९ किमी (२७९ मील) |०६ घंटे ०० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |७५ किमी/घंटा (४७ मील प्रति घंटे) | rowspan="२" |७ जुलाई २०२३ |- !२५ |गोरखपुर-लखनऊ चारबाग वंदे भारत एक्सप्रेस |२२५४९/२२५५० |गोरखपुर जंक्शन |लखनऊ चारबाग |नेर |२ |८ |शनिवार को छोड़कर |२९६ किमी (१८४ मील) |०४ घंटे १० मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |७१ किमी/घंटा (४४ मील प्रति घंटे) |- !२६ |उदयपुर शहर-जयपुर वंदे भारत एक्सप्रेस |२०९७९/२०९८० |उदयपुर शहर |जयपुर जंक्शन |एनडब्ल्यूआर |७ |८ |मंगल को छोड़कर |४२५ किमी (२६४ मील) |०६ घंटे २० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |६९ किमी/घंटा (४३ मील प्रति घंटे) | rowspan="९" |२४ सितंबर २०२३ |- !२७ |एमजीआर चेन्नई सेंट्रल-विजयवाड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस |२०६७७/२०६७८ |एमजीआर चेन्नई सेंट्रल |विजयवाड़ा जंक्शन |एसआर |४ |८ |मंगल को छोड़कर |५१४ किमी (३१९ मील) |०६ घंटे ४० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |७७ किमी/घंटा (४८ मील प्रति घंटे) |- !२८ |चेन्नई एग्मोर-तिरुनेलवेली वंदे भारत एक्सप्रेस |२०६६५/२०६६६ |चेन्नई एग्मोर |तिरुनेलवेली जंक्शन |एसआर |६ |८ |मंगल को छोड़कर |६५० किमी (४०० मील) |०७ घंटे ५० मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |८३ किमी/घंटा (५२ मील प्रति घंटे) |- !२९ |काचीगुडा-यशवंतपुर वंदे भारत एक्सप्रेस |२०७०३/२०७०४ |काचीगुडा |यशवन्तपुर जंक्शन |एससीआर |४ |८ |बुध को छोड़कर |६१२ किमी (३८० मील) |०८ घंटे १५ मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |७४ किमी/घंटा (४६ मील प्रति घंटे) |- !३० |पटना-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस |२२३४८/२२३४७ |पटना जंक्शन |हावड़ा जंक्शन |ईसीआर |७ |८ |बुध को छोड़कर |५३२ किमी (३३१ मील) |०६ घंटे ३५ मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |८१ किमी/घंटा (५० मील प्रति घंटे) |- !३१ |रांची-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस |२०८९८/२०८९७ |रांची जंक्शन |हावड़ा जंक्शन |एसईआर |६ |८ |मंगल को छोड़कर |४५८ किमी (२८५ मील) |०७ घंटे ०५ मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |६५ किमी/घंटा (४० मील प्रति घंटे) |- !३२ |पुरी-राउरकेला वंदे भारत एक्सप्रेस |२०८३६/२०८३५ |पुरी |राउरकेला जंक्शन |ईसीओआर |५ |८ |शनिवार को छोड़कर |५०६ किमी (३१४ मील) |०७ घंटे ४५ मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |६५ किमी/घंटा (४० मील प्रति घंटे) |- !३३ |कासरगोड - तिरुवनंतपुरम वंदे भारत एक्सप्रेस (अलप्पुझा के माध्यम से) |२०६३१/२०६३२ |कासरगोड |तिरुवनंतपुरम सेंट्रल |एसआर |८ |८ |सोमवार को छोड़कर (२०६३२) मंगलवार को छोड़कर (२०६३१) |५७४ किमी (३५७ मील) |०८ घंटे ०५ मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |७१ किमी/घंटा (४४ मील प्रति घंटे) |- !३४ |अहमदाबाद-जामनगर वंदे भारत एक्सप्रेस |२२९२५/२२९२६ |अहमदाबाद जंक्शन |जामनगर |डब्ल्यूआर |६ |८ |बुध को छोड़कर (२२९२६) मंगल को छोड़कर (२२९२५) |३३१ किमी (२०६ मील) |०४ घंटे २५ मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |७५ किमी/घंटा (४७ मील प्रति घंटे) |- !३५ |वाराणसी-नई दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस |२२४१५/२२४१६ |वाराणसी जंक्शन |नई दिल्ली |एन.आर. |२ |१६ |मंगल को छोड़कर |७५९ किमी (४७२ मील) |०८ घंटे ०५ मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |९४ किमी/घंटा (५८ मील प्रति घंटे) |१८ दिसंबर २०२३ |- !३६ |आनंद विहार-अयोध्या धाम वंदे भारत एक्सप्रेस |२२४२६/२२४२५ |दिल्ली आनंद विहार |अयोध्या धाम |एन.आर. |२ |८ |बुध को छोड़कर |६२८ किमी (३९० मील) |०८ घंटे २० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |७५ किमी/घंटा (४७ मील प्रति घंटे) | rowspan="६" |३० दिसंबर २०२३ |- !३७ |एसएमवीडी कटरा-नई दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस |२२४७८/२२४७७ |श्री माता वैष्णो देवी कटरा |नई दिल्ली |एन.आर. |३ |१६ |बुध को छोड़कर |६५५ किमी (४०७ मील) |०८ घंटे ०० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |८२ किमी/घंटा (५१ मील प्रति घंटे) |- !३८ |अमृतसर- दिल्ली जंक्शन वंदे भारत एक्सप्रेस |२२४८८/२२४८७ |अमृतसर जंक्शन |दिल्ली जंक्शन |एन.आर. |५ |८ |शुक्र को छोड़कर |४४७ किमी (२७८ मील) |०५ घंटे ३० मिनट |१३० किमी/घंटा (८१ मील प्रति घंटे) |८१ किमी/घंटा (५० मील प्रति घंटे) |- !३९ |कोयंबटूर-बेंगलुरु छावनी वंदे भारत एक्सप्रेस |२०६४२/२०६४१ |कोयंबटूर जंक्शन |बेंगलुरु छावनी |एसआर |५ |८ |गुरु को छोड़कर |३७४ किमी (२३२ मील) |०६ घंटे ३० मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |५८ किमी/घंटा (३६ मील प्रति घंटे) |- !४० |मंगलुरु सेंट्रल-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस |२०६४६/२०६४५ |मंगलुरु सेंट्रल |मडगांव जंक्शन |एसआर |२ |८ |गुरु को छोड़कर |३१९ किमी (१९८ मील) |०४ घंटे ३५ मिनट |१२० किमी/घंटा (७५ मील प्रति घंटे) |७० किमी/घंटा (४३ मील प्रति घंटे) |- !४१ |जालना-मुंबई सीएसएमटी वंदे भारत एक्सप्रेस |२०७०५/२०७०६ |जलना |मुंबई सीएसएमटी |एससीआर |६ |८ |बुध को छोड़कर |४३५ किमी (२७० मील) |०७ घंटे २० मिनट |११० किमी/घंटा (६८ मील प्रति घंटे) |५९ किमी/घंटा (३७ मील प्रति घंटे) |} ==वंदे भारत एक्सप्रेस की खासियत== वंदे भारत एक्सप्रेस की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, इसे कई आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं से लैस किया गया है। सुरक्षा की दृष्टि से, यह ट्रेन निम्नलिखित महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल करती है: # '''सीसीटीवी निगरानी:''' वंदे भारत एक्सप्रेस में सभी कोच और '''महत्वपूर्ण स्थानों पर''' सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे यात्रा के दौरान किसी भी असामान्य गतिविधि की निगरानी करते हैं और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया की सुविधा प्रदान करते हैं। # '''सुरक्षा कर्मी:''' ट्रेन में प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जाती है, जो यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करते हैं। ये कर्मी हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहते हैं और यात्रियों को सुरक्षा का विश्वास दिलाते हैं। # '''आपातकालीन संचार प्रणाली:''' वंदे भारत एक्सप्रेस में अत्याधुनिक आपातकालीन संचार प्रणाली मौजूद है। इसमें आपातकालीन स्थिति में यात्रियों को '''तुरंत सहायता उपलब्ध कराने के लिए''' विशेष सिस्टम शामिल हैं। # '''फायर सेफ्टी व्यवस्था:''' ट्रेन में अग्निशामक यंत्र और फायर अलार्म की व्यवस्था की गई है, जो किसी भी संभावित आग लगने की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया की सुविधा प्रदान करती है।<ref>{{Cite web|url=https://newsfactory1.com/%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%81/|title=वंदे भारत एक्सप्रेस की सुविधाएँ, सुरक्षा, तेज़ी: यात्रियों के लिए क्या है खास?|last=kanaujiya|first=Adarsh|date=16 सितम्बर 2024|website=News factory1|access-date=3 अक्तूबर 2024|archive-date=7 अक्तूबर 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20241007091957/https://newsfactory1.com/%E0%A4%B5%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%87-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%81/|url-status=dead}}</ref> वंदे भारत एक्सप्रेस की सुविधाएँ यात्रियों के लिए एक आरामदायक और शानदार यात्रा अनुभव सुनिश्चित करती हैं। इसकी प्रमुख [https://newsfactory1.com/%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%81/ '''सुविधाएँ'''] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20241007091957/https://newsfactory1.com/%E0%A4%B5%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%87-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%81/ |date=7 अक्तूबर 2024 }} निम्नलिखित हैं: # '''आरामदायक सीटें:''' वंदे भारत एक्सप्रेस में सीटों को विशेष रूप से '''आरामदायक और सुविधाजनक बनाया''' गया है। इन सीटों में एडजस्टेबल हेडरेस्ट और लेगरेस्ट की सुविधा उपलब्ध है, जिससे लंबे समय की यात्रा भी आरामदायक होती है। # '''स्वच्छता:''' ट्रेन की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया है। प्रत्येक कोच और शौचालय को नियमित रूप से साफ किया जाता है, जिससे यात्रियों को एक स्वच्छ और ताजगी भरी यात्रा का अनुभव होता है। # '''वायरलेस चार्जिंग:''' वंदे भारत एक्सप्रेस में प्रत्येक सीट के पास वायरलेस चार्जिंग पोर्ट्स उपलब्ध हैं, जिससे यात्री अपने मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को आसानी से चार्ज कर सकते हैं। # '''उत्कृष्ट भोजन सेवाएँ:''' ट्रेन में यात्रियों को उच्च गुणवत्ता का भोजन प्रदान किया जाता है। एक विशेष कैटरिंग सेवा द्वारा स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन की पेशकश की जाती है। # '''वॉयस कमांड सिस्टम:''' वंदे भारत एक्सप्रेस में वॉयस कमांड सिस्टम की सुविधा भी है, जो यात्रियों को ट्रेन की विभिन्न सुविधाओं का '''उपयोग करने में मदद करती है।''' # '''आधुनिक डिजाइन:''' ट्रेन का डिज़ाइन भारतीय संस्कृति और आधुनिकता का बेहतरीन संगम है। इसके आंतरिक सजावट और सुविधाएँ एक प्रीमियम अनुभव प्रदान करती हैं। == वंदे भारत एक्सप्रेस की तेज़ी == वंदे भारत एक्सप्रेस की तेज़ी इसे भारतीय रेलवे की अन्य ट्रेनों से अलग बनाती है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं: # '''हाई स्पीड:''' वंदे भारत एक्सप्रेस 160 किमी/घंटा की अधिकतम गति से यात्रा करती है, जो इसे भारत की सबसे तेज़ ट्रेनों में से एक बनाती है। # '''स्मूद और स्टेबल रनिंग:''' ट्रेन की डिजाइन और तकनीक इसे एक स्मूद और स्थिर यात्रा का अनुभव प्रदान करती है, जिससे यात्रियों को झटके या असुविधा का सामना नहीं करना पड़ता। # '''सीधे मार्ग:''' वंदे भारत एक्सप्रेस के मार्ग को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि इसमें कम से कम स्टॉपेज होते हैं, जिससे यात्रा का समय कम होता है और गति बनाए रखी जाती है। # '''उन्नत प्रौद्योगिकी:''' ट्रेन में नवीनतम ट्रैक्शन और ब्रेकिंग तकनीक का उपयोग किया गया है, जो इसकी गति और प्रदर्शन को बेहतर बनाता है। ===== आइए वंदे भारत एक्सप्रेस की सुविधाओ पर एक नजर डालते हैं, यह ज्ञान आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। ===== 1. वंदे भारत एक्सप्रेस 100% स्वदेशी ट्रेन है। 2. इसकी गति बहुत ही कम समय में 160 किमी/घंटा से 200 किमी/घंटा तक पहुंच जाती है। 3. भारतीय ट्रेनों में स्वतंत्र लोकोमोटिव होते हैं। हालाँकि, वंदे भारत ट्रेन में मेट्रो ट्रेन के समान एक एकीकृत मोटर इंजन है। 4. वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन 100 किमी की स्पीड तक पहुँचने में मात्र 52 सेकंड का समय लगाती है। 5. इस ट्रेन में स्वचालित दरवाजे होते हैं ये दरवाजे मेट्रो की तरह ही अपने आप खुलते हैं। इसके अलावा, ट्रेनें कई आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं। 6. वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के अंदर की सीट 360 डिग्री घूमती है। 7. इस ट्रेन में भोजन और नाश्ता भी सर्व किया जाता है। जिसकी कीमत टिकट में ही शामिल होती है। 8. यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए, ट्रेन पूरी तरह से ऑनबोर्ड वाई-फाई प्रणाली से सुसज्जित है। इसके अलावा, प्रत्येक सीट के नीचे मोबाइल फोन और लैपटॉप चार्ज करने के लिए चार्जिंग स्टेशन हैं। 9. वंदे भारत ट्रेन में जीपीएस सिस्टम लगा हुआ है जो आने वाले स्टेशनों और अन्य जानकारी के बारे में जानकारी प्रदान करता है। 10. स्वच्छता की दृष्टि से ट्रेन में बायोवैक्यूम शौचालय बनाए गए हैं जैसा कि हवाई जहाज़ में उपयोग किया जाता है। 11. बाहर का अच्छा दृश्य दिखाने के लिए बड़ी-बड़ी खिड़कियाँ लगाई गई हैं जिससे यात्री नज़ारों का आनंद उठा सके । 12. यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ट्रेन के प्रत्येक डिब्बे में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। 13. यात्रियों की सुरक्षा के लिए इस ट्रेन में ऐसे सेंसर लगाए गए हैं कि दरवाजे तब तक नहीं खुलेंगे जब तक ट्रेन पूरी तरह से रुक न जाए। जिससे कोई भी यात्री चलती ट्रेन में न ही उतरे और न ही चढ़ पाए । 14. वंदे भारत ट्रेन भी विकलांग लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई थी। इसलिए इस ट्रेन के कुछ डिब्बों में विकलांगों के लिए उनकी व्हीलचेयर रखने के लिए अलग से जगह बनायी गई है । अधिक जानकारी के लिए नीचे दी हुई लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं [http://वंदे%20भारत%20एक्सप्रेस%20और%2015%20रोचक%20तथ्य%20|%20TOP%2015%20AMAZING%20FACT%20ABOUT%20VANDE%20BHARAT%20EXPRESS%20TRAIN वंदे भारत एक्सप्रेस और 15 रोचक तथ्य | TOP 15 AMAZING FACT ABOUT VANDE BHARAT EXPRESS TRAIN] ==इन्हें भी देखें== * [[भारत में रेल परिवहन]] * [[भारत में तीव्र गति रेल]] * [[गतिमान एक्सप्रेस]] * [[वन्दे मातरम्]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची|30em}} [[श्रेणी:रेल]] azvkaydqzs05roc5hsyc53xfy7feczt शमशेरा 0 1100623 6630275 6454407 2026-10-16T17:19:13Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.6 6630275 wikitext text/x-wiki {{Infobox film | name = शमशेरा | image = Shamshera poster.jpg | caption = Theatrical release poster | director = [[करण मल्होत्रा]] | producer = [[आदित्य चोपड़ा]] | writer = [[नीलेश मिश्रा]]<br />खिला बिष्टी {{Infobox | decat = yes | child = yes | label1= Dialogue by | data1 = [[पीयूष मिश्रा]] }} | screenplay = एकता पाठक मल्होत्रा<br />करण मल्होत्रा | starring = {{plainlist| *[[रणबीर कपूर]] *[[संजय दत्त]] *[[वाणी कपूर]] }} | cinematography =अनय गोस्वामी | editing = शिवकुमार वी. पनिकर | music = [[मिथुन (संगीतकार)|मिथुन]] | studio = [[यश राज फ़िल्म्स]] | released = {{Film date|df=y|2022|07|22|}} | runtime = 159 मिनट<ref>{{cite web|url=https://www.bbfc.co.uk/release/shamshera-q29sbgvjdglvbjpwwc0xmda1njg2|title=Shamshera|website=[[ब्रिटिश बोर्ड ऑफ़ फ़िल्म क्लासिफिकेशन]]|access-date=14 July 2022}}</ref> | country = भारत | language = Hindi | budget = {{INR|150 [[करोड़]]<ref>{{cite web |title=Will the Ranbir Kapoor-starrer 'Shamshera' bring good tidings for a struggling Bollywood? |url=https://www.businesstoday.in/trending/entertainment/story/will-the-ranbir-kapoor-starrer-shamshera-bring-good-tidings-for-a-struggling-bollywood-341828-2022-07-18 |publisher=[[Business Today (India)|Business Today]] |access-date=19 July 2022|quote= At a budget of over Rs 150 crore, it has Kapoor playing the lead with Yash Raj Films (YRF) producing this mega project.}}</ref>}}<ref>{{cite web |title=Shamshera to Brahmastra: 8 upcoming Indian movies being made on an insane budget of Rs 150 Crore+ |url=https://www.gqindia.com/entertainment/content/shamshera-to-brahmastra-8-upcoming-indian-movies-being-made-on-an-insane-budget-of-rs-150-crore |publisher=[[GQ India]] |access-date=19 July 2022 |quote=Made on the budget of Rs 150 crore, the trailer of the movie reminds you of various popular titles like Baahubali, Gladiator, RRR and more. |archive-url=https://web.archive.org/web/20220719100443/https://www.gqindia.com/entertainment/content/shamshera-to-brahmastra-8-upcoming-indian-movies-being-made-on-an-insane-budget-of-rs-150-crore |archive-date=19 जुलाई 2022 |url-status=dead}}</ref> | gross = }} '''''शमशेरा''''' एक 2022 की [[भारत|भारतीय]] [[एक्शन फिल्म|एक्शन-एडवेंचर फिल्म है]] जिसमें [[रणबीर कपूर]], [[संजय दत्त]] और [[वाणी कपूर]] [[रणबीर कपूर|ने]] अभिनय किया है। यह [[आदित्य चोपड़ा]] की [[यश राज फ़िल्म्स|यशराज फिल्म्स]] द्वारा निर्मित है। फिल्म [[करण मल्होत्रा]] द्वारा लिखित और निर्देशित की जा रही है। 1800 के दशक में सेट, फिल्म एक डकैत आदिवासी के बारे में है जो [[भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन|अंग्रेजों के खिलाफ]] अपने अधिकारों और [[भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन|स्वतंत्रता की]] लड़ाई में कार्यभार संभालते हैं।<ref name=":0"/> केंद्रीय किरदार शमशेरा और उनके पिता के रूप में रणबीर कपूर दोहरी भूमिका निभा रहे हैं। वाणी कपूर एक नर्तकी की भूमिका निभा रही हैं।<ref name="ht">{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/bollywood/shamshera-ranbir-kapoor-to-do-a-double-role-vaani-kapoor-to-play-a-dancer/story-iofGfImJ6ZAyYVUlVxvwTJ.html|title=Shamshera: Ranbir Kapoor to do a double role, Vaani Kapoor to play a dancer|date=2019-03-26|website=Hindustan Times|language=en-IN|access-date=26 March 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190326134455/https://www.hindustantimes.com/bollywood/shamshera-ranbir-kapoor-to-do-a-double-role-vaani-kapoor-to-play-a-dancer/story-iofGfImJ6ZAyYVUlVxvwTJ.html|archive-date=26 मार्च 2019|url-status=live}}</ref> फिल्म की प्रधान फोटोग्राफी 1 दिसंबर 2018 से शुरू हुई।<ref name=":1">{{Cite web|url=https://www.news18.com/news/movies/shamshera-ranbir-kapoor-vaani-kapoors-film-goes-on-floors-1956175.html|title=Shamshera: Ranbir Kapoor, Vaani Kapoor’s Film Goes on Floors|website=News18|access-date=4 December 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20181205103609/https://www.news18.com/news/movies/shamshera-ranbir-kapoor-vaani-kapoors-film-goes-on-floors-1956175.html|archive-date=5 दिसंबर 2018|url-status=live}}</ref> फिल्म 31 जुलाई, 2020 को [[आईमैक्स]] सिनेमाघरों में रिलीज होगी,<ref name=":0"/> जो [[ईद-उल-अज़हा|बकरीद की]] छुट्टी के सप्ताहांत के साथ है।<ref name=":5">{{Cite web|url=https://www.thestatesman.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-sanjay-dutts-shamshera-gets-release-date-1502657133.html|title=Ranbir Kapoor-Sanjay Dutt’s Shamshera gets a release date|date=2018-07-04|website=The Statesman|language=en-US|access-date=5 December 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20181205194902/https://www.thestatesman.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-sanjay-dutts-shamshera-gets-release-date-1502657133.html|archive-date=5 दिसंबर 2018|url-status=live}}</ref> == कलाकार == * [[रणबीर कपूर|शमशेरा के]] रूप में [[रणबीर कपूर]] * [[संजय दत्त]] * आदर्श [[वाणी कपूर|कपूर]], शमशेरा की प्रेम रुचि के रूप में [[वाणी कपूर]] * [[रॉनित रॉय|रोनित रॉय]] प्रीतम उपेन, आतमजा के बड़े भाई * [[आशुतोष राणा|आशुतोष]] जग्गाभाई के रूप में [[आशुतोष राणा]], शमशेरा के बड़े भाई * शमशेरा के पिता [[शरत सक्सेना]] चंद्रप्रकाश शमशेरा * [[सौरभ शुक्ला]] * [[आहाना कुमरा|अहाना कुमरा]] Devishi, Abhinivesha और Adarshini के दोस्त के रूप में * [[त्रिधा चौधरी]], अभिनीषा, आदर्शिनी की छोटी बहन के रूप में == निर्माण == === पात्र निर्धारण === 6 मई 2018 को रणबीर कपूर की फिल्म की कास्टिंग की घोषणा के बाद, <ref name=":0">{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-shamshera-release-date-5245655/|title=Ranbir Kapoor’s Shamshera to release in 2020|date=2018-07-04|website=The Indian Express|language=en-IN|access-date=4 December 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20181205193258/https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-shamshera-release-date-5245655/|archive-date=5 दिसंबर 2018|url-status=live}}</ref> संजय दत्त को फिल्म के मुख्य खलनायक होने की पुष्टि की गई, और उनकी कास्टिंग की घोषणा 10 मई को की गई। <ref name=":2">{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/bollywood/sanjay-dutt-will-be-the-villain-against-ranbir-kapoor-in-shamshera/story-OalmjJcLCCkOTGIq3bsgXN.html|title=Ranbir Kapoor’s Shamshera gets its ‘roaring villain’ in Sanjay Dutt|date=2018-05-10|website=www.hindustantimes.com|language=en|access-date=4 December 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20190330143432/https://www.hindustantimes.com/bollywood/sanjay-dutt-will-be-the-villain-against-ranbir-kapoor-in-shamshera/story-OalmjJcLCCkOTGIq3bsgXN.html|archive-date=30 मार्च 2019|url-status=live}}</ref> चार दिन बाद, वाणी कपूर की कास्टिंग की घोषणा की गई, "इंडियनलैंड से अभिनय योग्य और मांग-के बाद यात्रा करने वाले कलाकार" की भूमिका निभाने के लिए तैयार। <ref name=":3">{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/bollywood/vaani-kapoor-joins-ranbir-kapoor-in-shamshera-continues-yash-raj-streak/story-wraoobaH4aG3NcHMNJGGaN.html|title=Vaani Kapoor joins Ranbir Kapoor in Shamshera, continues Yash Raj streak|date=2018-05-14|website=www.hindustantimes.com|language=en|access-date=4 December 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20181205103514/https://www.hindustantimes.com/bollywood/vaani-kapoor-joins-ranbir-kapoor-in-shamshera-continues-yash-raj-streak/story-wraoobaH4aG3NcHMNJGGaN.html|archive-date=5 दिसंबर 2018|url-status=live}}</ref> 4 दिसंबर 2018 को, फिल्मांकन शुरू होने के कई दिनों बाद, रोनित रॉय ने अपने ट्विटर पेज पर अपनी कास्टिंग की घोषणा की। <ref name=":4">{{Cite web|url=https://twitter.com/RonitBoseRoy/status/1070123731467493376|title=As I start shooting for #shamshera on a magnificent set, I feel so proud to be a part of this movie, led superbly by our director @karanmalhotra21 and share the screen with #ranbirkapoor and @duttsanjay . Thank you @karanmalhotra21 and @yrf for having me in this one pic.twitter.com/3oQXsOyyXn|last=Roy|first=Ronit Bose|date=2018-12-04|website=@RonitBoseRoy|language=en|access-date=4 December 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20190509142415/https://twitter.com/RonitBoseRoy/status/1070123731467493376|archive-date=9 मई 2019|url-status=live}}</ref> === फिल्मांकन === फिल्म की प्रमुख फोटोग्राफी 1 दिसंबर 2018 से शुरू हुई, <ref name=":1"/> जिसकी शूटिंग 2019 के मध्य तक होने की उम्मीद है। <ref name=":0"/> फिल्म के लिए एक विशाल किले का निर्माण [[मुम्बई फ़िल्म सिटी|फिल्म सिटी]], [[गोरेगाँव|गोरेगांव]] में किया गया था, जिसमें दो महीने की तैयारी और लगभग 300 श्रमिकों के प्रयास की आवश्यकता थी। <ref>{{Cite web|url=https://www.thelivemirror.com/shamshera-ranbir-massive-fort/|title='Shamshera': Ranbir Kapoor gets massive fort built for his period drama|date=2018-12-03|language=en-US|access-date=4 December 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20190407154505/https://www.thelivemirror.com/shamshera-ranbir-massive-fort/|archive-date=7 अप्रैल 2019|url-status=dead}}</ref> [[वाणी कपूर]] एक कलाकार के रूप में अपनी सीमाओं को धक्का देती हैं क्योंकि वह फिल्म के लिए [[कथक]] में पेशेवर प्रशिक्षण लेती हैं। <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/vaani-kapoor-pushes-limits-artiste-takes-professional-training-kathak-shamshera/|title=Vaani Kapoor pushes her limits as an artiste as she takes professional training in Kathak for Shamshera|last=|first=|date=2019-03-25|website=Bollywood Hungama|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20190330230619/https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/vaani-kapoor-pushes-limits-artiste-takes-professional-training-kathak-shamshera/|archive-date=30 मार्च 2019|access-date=2019-03-25|url-status=live}}</ref> फिल्म का [[लद्दाख़|लद्दाख]] शेड्यूल 18 अगस्त 2019 को शुरू हुआ और 28 अगस्त को लिपटा गया। {{Infobox album|image=}} == विपणन और रिलीज == 6 मई 2018 को, [[यश राज फ़िल्म्स|यशराज फिल्म्स]] ने 45 सेकंड के एक टीज़र वीडियो को जारी किया, जिसमें फिल्म की घोषणा और रणबीर कपूर की फिल्म के एपिग लीड कैरेक्टर के रूप में इसकी कास्टिंग की गई। <ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-shamshera-5166531/|title=Ranbir Kapoor to play a dacoit in Shamshera|date=2018-05-07|website=The Indian Express|language=en-IN|access-date=4 December 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20190407154505/https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-shamshera-5166531/|archive-date=7 अप्रैल 2019|url-status=live}}</ref> अगले दिन, निर्देशक करण महोत्रा ने ट्विटर पर एक फर्स्ट-लुक पोस्टर जारी किया। <ref>{{Cite web|url=https://twitter.com/karanmalhotra21/status/993486578977656833|title=Heres the poster Shamshera|last=Malhotra|first=Karan|date=2018-05-07|website=@karanmalhotra21|language=en|access-date=4 December 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20190603032832/https://twitter.com/karanmalhotra21/status/993486578977656833|archive-date=3 जून 2019|url-status=live}}</ref> 3 जुलाई को, निर्माताओं ने फिल्म की आधिकारिक रिलीज़ की तारीख 31 जुलाई 2020 घोषित की। <ref name=":5"/> जनवरी 2019 में, यह पुष्टि की गई कि रणबीर कपूर अपने करियर में पहली बार 9 शमशेरा और उनके पिता the की दोहरी भूमिका निभाएंगे। == संदर्भ == {{Reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{आईएमडीबी शीर्षक|tt8108196}} [[श्रेणी:भारतीय एडवेंचर फिल्में]] [[श्रेणी:भारतीय एक्शन फ़िल्में]] [[श्रेणी:भारतीय फ़िल्में]] [[श्रेणी:2021 में बनी हिन्दी फ़िल्म]] r34j4c7857j41w5vozblwm6cgjjgni3 सांवेर 0 1149864 6630428 4801980 2026-10-17T11:41:13Z SAGAR SURYAVANSHI JAITHAL 938876 /* इन्हें भी देखें */ कड़ियाँ लगाई 6630428 wikitext text/x-wiki {{Infobox settlement |name = सांवेर |native_name = <small>Sanwer</small> |pushpin_label = सांवेर |pushpin_map = India Madhya Pradesh |coordinates = {{coord|22.963|75.831|display=inline, title}} |pushpin_map_caption = मध्य प्रदेश में स्थिति |subdivision_type = [[भारत के ज़िले|ज़िला]] |subdivision_name = [[इंदौर ज़िला]] |subdivision_type2 = [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|प्रान्त]] |subdivision_name2 = [[मध्य प्रदेश]] |subdivision_type3 = देश |subdivision_name3= {{IND}} |population_total = |population_as_of = 2011 |demographics_type1 = भाषा |demographics1_title1= प्रचलित |demographics1_info1= [[हिन्दी]] |timezone1 = [[भारतीय मानक समय]] |utc_offset1 = +5:30 }} '''सांवेर''' (Sanwer) [[भारत]] के [[मध्य प्रदेश]] राज्य के [[इंदौर ज़िले]] में स्थित एक नगर है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=X6XNCwAAQBAJ Inde du Nord: Madhya Pradesh et Chhattisgarh] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190703183559/https://books.google.com/books?id=X6XNCwAAQBAJ |date=3 जुलाई 2019 }}," Lonely Planet, 2016, ISBN 9782816159172</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=u6VB9_CrsfoC Tourism in the Economy of Madhya Pradesh]," Rajiv Dube, Daya Publishing House, 1987, ISBN 9788170350293</ref> == इन्हें भी देखें == * [[इंदौर ज़िला]] * [[इन्दौर]] * [[उज्जैन]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} {{मध्य प्रदेश के जिले}} [[श्रेणी:मध्य प्रदेश के शहर]] [[श्रेणी:इंदौर ज़िला]] [[श्रेणी:इंदौर ज़िले के नगर]] t39uk2cai4laot2ybs88zsf2423wmw0 सदस्य वार्ता:Max 3 1293203 6630238 6629926 2026-10-16T13:33:05Z Shaan Sengupta 775249 /* एक अनुरोध */ new topic ([[mw:c:Special:MyLanguage/User:JWBTH/CD|CD]]) 6630238 wikitext text/x-wiki {{Archives|auto=yes|search=yes}} ==प्रबंधक समीक्षा== <!--यह भाग सदस्य:Riteze/प्रस साँचे को प्रतिस्थापित करके बनाया गया है --> आपने हाल ही में प्रबंधक {{noping|संजीव कुमार}} से [[सदस्य_वार्ता:संजीव कुमार#बॉट से ब्लॉक हटाने हेतु निवेदन|वार्तालाप]] किया, जिसमें नवीनतम टिप्पणी को 7 दिन हो चुके हैं। उम्मीद है कि उक्त वार्तालाप से आप संतुष्ट हुए होंगे। किसी प्रबंधक के प्रति संतुष्ट या असंतुष्ट होने पर सदस्यगण [[विकिपीडिया:चौपाल/प्रबंधक समीक्षा]] पृष्ठ पर अपना मत दर्ज कर सकते हैं। -[[User Talk:Riteze|<span style="color:green;">Riteze</span><sup>वार्ता</sup>]] 07:20, 30 मार्च 2025 (UTC) :Riteze जी, कृपया बार-बार एक ही संदेश न छोड़ें। मैंने संदेश पढ़ लिया है और यदि टिप्पणी करनी होती तो अब तक कर चुका होता। दोनों प्रबंधक अपना काम कर रहे हैं और यदि आपको शिकायत है तो उचित स्थान पर लिखें। – [[User:DreamRimmer|<big style="color:black; font-family: Tahoma">'''DreamRimmer'''</big>]] ('''[[User talk:DreamRimmer|वार्ता]]''') 07:26, 30 मार्च 2025 (UTC) == सुधार अनुरोध == नमस्ते DreamRimmer जी, जैसे की मेरे वार्ता पृष्ठ पर मैं आपके सन्देशों को देख रहा था, मुझे लगता है यह समस्या भी आप सुधार दोगे। सन्दर्भों में आ रही कुछ समस्या को सुधारने के क्रम में साथी प्रबन्धक ने [[मॉड्यूल:Citation]] में कुछ सुधार किये। इससे वो समस्या तो दूर हो गयी लेकिन एक अन्य समस्या आने लग गयी। लेखों में माह के नाम के लिए अलग-अलग वर्तनियाँ काम में ली गयी हैं। इसी तरह उपरोक्त बदलाव के बाद मैंने भी यहाँ सुधार का प्रयास किया। मैंने [[मॉड्यूल:Citation/CS1/Configuration]] और [[मॉड्यूल:Citation/CS1/Configuration/sandbox]] में सुधार किया। अब ये sandbox वाली तिथियाँ ले रहा है जो सम्भवतः कहीं पाथ सुधारने से ठीक हो जायेगा। समस्या यह है कि यहाँ पर हिन्दी माह के नाम "फरवरी" (बिना नुक्ता के), "एप्रिल" (कम प्रचलन वाली वर्तनी), "सितम्बर", "अक्तुबर", "नवंबर" और "दिसंबर" (क्रम में बाद में लिखे गये) लिखने पर सन्दर्भों में त्रुटि आ रही है। क्या आप इस त्रुटि को सुधारने का प्रयास कर सकते हैं? आप चाहें तो किसी भी लेख में {{tl|cite web}} साँचा लगायें और <code>date</code>, <code>archive-date</code> या <code>access-date</code> प्राचलों को "1 एप्रिल 2025" मान देकर देखें। जैसे <nowiki>{{cite web|url=https://example.com|title=उदाहरण|date=1 एप्रिल 2025}}</nowiki><span style='color:green;'>☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style='color:Magenta;'>संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style='color:blue;'>✉✉</span>]]) 06:25, 7 जुलाई 2025 (UTC) :@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, ठीक कर दिया गया हैं। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:##5A4FCF;">&#9632;</span>]] 10:57, 7 जुलाई 2025 (UTC) ::नमस्ते DreamRimmer जी, एक समस्या अभी भी आ रही है। <code>archive-date</code> प्राचल में यदि दिनांक के अंक देवनागरी में हैं तो यह नहीं पहचान पा रहा है और त्रुटि आ रही है। जैसे [[मालपुरा विधानसभा क्षेत्र (राजस्थान)]] के तीसरे सन्दर्भ में है।<!--{{cite web|url=https://example.com|title=उदाहरण|date=1 एप्रिल 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20250709000000/http://example.com |archive-date=9 जुलाई 2025|access-date=९ जुलाई २०२५}}--> ::इसी क्रम में मुझे एक और समस्या याद आ रही है जिसके सुधरने की मैंने आशा छोड़ रखी है। Vector 2010 स्किन में सबसे उपर एक अंक परिवर्तक दिखाई देता था लेकिन अब नवीन स्किन में वो नहीं दिखाई देता। उसमें किसी भी पृष्ठ पर अंकों को देवनागरी/अंग्रेज़ी में परिवर्तित करने का विकल्प मिलता था। इसे उदाहरण के रूप में मैंने एक स्क्रीनशॉट [https://streamable.com/408p0v यहाँ] पर डाला है, आप चाहें तो किसी भी पृष्ठ के यूआरएल में <code>?useskin=vector</code> लिखकर देख सकते हो। मोबाइल में मुझे <s>लॉगिन करने से पहले</s> यह विकल्प दिखाई देता है <s>लेकिन लॉगिन करते ही दिखाई देना बंद हो जाता है।</s> हालांकि मोबाइल में मीन्यू में दिखाई देता है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:53, 9 जुलाई 2025 (UTC) :::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी: हालाँकि मैंने इस गैजेट स्क्रिप्ट में कुछ नोड्स से जुड़ी समस्याएँ अवश्य देखी हैं, लेकिन मुझे पोर्टलेट से संबंधित कोई विशेष परेशानी नज़र नहीं आई। यह गैजेट जिस ID को लक्षित करके मेन्यू में लिंक जोड़ता है, वह DOM में मौजूद है और मेरे लिए सही प्रकार से कार्य कर रहा है। कृपया एक बार अपनी वरीयताओं में जाकर यह जाँच लें कि “अंक परिवर्तक” सक्षम है या नहीं। मैंने इस गैजेट को मीडियाविकि के अनुसार अद्यतन किया था, परंतु उसमें कुछ दिक्कतें आने के कारण उसे पुनः पहले की स्थिति में लौटा दिया गया है। मैंने अपने उपयोगकर्ता पृष्ठ पर इसका परीक्षण भी किया, किंतु मुझे कोई स्पष्ट समस्या दिखाई नहीं दी। मुझे लगता है कि यह कोई सर्वर-साइड समस्या नहीं, बल्कि क्लायंट-साइड समस्या है। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:##5A4FCF;">&#9632;</span>]] 01:16, 10 जुलाई 2025 (UTC) ::::@[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] जी, क्या आपको "अंक परिवर्तक" दिखाई दे रहा है? <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 04:20, 10 जुलाई 2025 (UTC) :::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, मेरे लिए यह ठीक काम कर रहा है और पोर्टलेट लिंक भी दिख रहा है, शायद यह समस्या आपको ही आ रही है। अगर यह आपके लिए काम नहीं कर रहा है तो आप इसे वरीयताओं से अक्षम करके अपने common.js से लोड करके देख सकते हैं: <code>mw.loader.load('//hi.wikipedia.org/w/index.php?title=मीडियाविकि:Gadget-Numeral_converter.js&action=raw&ctype=text/javascript');</code> Archivedate की समस्या के लिए या तो मुझे देवनागरी अंकों को समझने के लिए नया पार्सर जोड़ना होगा या फिर अरबी अंकों के लिए कोई उपनाम अलियास बनाकर काम चलाया जा सकता है, मैं कोशिश करता हूँ कि इसे वैसे ही काम करने लायक बना सकूँ। अभी मैं कंप्यूटर पर हूँ और अगले कुछ घंटों तक ऑनलाइन ही रहूँगा तो आपको अपडेट दूँगा। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:##5A4FCF;">&#9632;</span>]] 04:38, 10 जुलाई 2025 (UTC) ::::::[[:मॉड्यूल:Citation/CS1/Configuration/sandbox]] और [[:मॉड्यूल:Citation/CS1/Configuration]] पर <code>local_digits</code> में नागरी अंक लिखे हुए हैं और इसी कारण <code>date</code> और <code>access-date</code> के साथ काम कर रहा है। <code>archive-date</code> में इस दिनांक की तुलना <code>archive-url</code> के मान से जाँचता है जहाँ <nowiki>https://web.archive.org/web/<संख्यात्मक_मान>/http://example.com</nowiki> में जो <nowiki><संख्यात्मक_मान></nowiki> पहले चार अंक वर्ष, बाद के 2 अंक माह और उसके बाद के 2 अंक दिन को बताते हैं। ::::::अंक परिवर्तक वाला आप कोई स्क्रीनशॉट दिखा सकते हो क्या? नयी स्किन में ये कहाँ दिखाई दे रहा है? हो सकता है मैंने ढ़ंग से ध्यान नहीं दिया हो। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 05:31, 10 जुलाई 2025 (UTC) :::::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, मुझे [https://ibb.co/99swZbhx Vector 2022] और [https://ibb.co/bM5cp3cC Vector 2010] दोनों में यह ठीक से दिखाई दे रहा है। "archivedate" वाली समस्या भी ठीक कर दी गई है। मैंने check_date फ़ंक्शन से पहले archive-date और archive-url की तारीख़ों में देवनागरी अंकों को आंतरिक रूप से मानक ASCII अंकों में बदल दिया है। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:##5A4FCF;">&#9632;</span>]] 07:03, 10 जुलाई 2025 (UTC) ::::::::ओह! यहाँ सम्भवतः मैंने ध्यान ही नहीं दिया था। ये दिखाई दे रहा है। लेकिन इसके लिए लॉगिन होना आवश्यक है। vector 2010 वाला बिना लॉगिन के दिखाई देता था। जबकि गैजेट डेफिनेशन में इसे डिफॉल्ट रखा गया है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 08:31, 10 जुलाई 2025 (UTC) नमस्ते DreamRimmer जी, [[सिराक्यूज विश्वविद्यालय]] नामक लेख में यदि {{tl|authority control}} जोड़ा जाता है तो "लुआ त्रुटि मॉड्यूल:Authority_control में पंक्ति 51 पर: attempt to call field '?' (a nil value)।" दिखाई दे रही है। समरूप त्रुटि कुछ अन्य लेखों पर भी हो सकती है। मैं इसका कारण नहीं खोज पाया हूँ। समय मिले तो इसे सुधारने की कोशिश कीजियेगा।<span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 17:13, 26 जुलाई 2025 (UTC) :@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, [[विशेष:Diff/6458414]] के साथ ठीक कर दिया गया हैं। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:##5A4FCF;">&#9632;</span>]] 03:15, 27 जुलाई 2025 (UTC) == बॉट संचालक == मेरे बॉट खाते से toolforge पर आपकी ही स्क्रिप्ट चल रही हैं। अतः बेहतर होगा कि मैं आपको भी बॉट संचालक में जोड़ दूँ। वर्तमान में मैंने जो बॉट पासवर्ड वहाँ जोड़ रखा है उससे प्रबंधकीय कार्यों की अनुमति नहीं है अतः आप केवल वो कार्य ही कर पावोगे जिनमें प्रबंधन अधिकार नहीं हैं। आवश्यकता पड़ी तो प्रबंधन अधिकार भी उसमें अद्यतन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त आप अन्य विकिपीडियाओं पर भी बॉट चला सकते हैं जिनपर बॉट फ्लैग है। क्या आपको यह उचित लग रहा है? <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 14:41, 25 अगस्त 2025 (UTC) :@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, सुझाव के लिए धन्यवाद। आपका बॉट जिन अन्य विकिपीडिया परियोजनाओं पर सक्रिय है, उनमें मेरी रुचि कम ही रही है। आपकी टूलफ़ोर्ज़ एक्सेस से मैं हिंदी विकिपीडिया पर स्वयं कोई कार्य नहीं करना चाहता, लेकिन यदि आवश्यकता हुई तो आपसे पूछकर कार्य कर सकता हूँ। वैसे भी आप हमेशा सक्रिय रहते ही हैं, इसलिए कोई भी काम होगा तो उसका कोड आपके साथ साझा कर दूँगा। यदि किसी सुधार की आवश्यकता हुई या कोई आवश्यक कार्य सामने आया तो कर लूँगा। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:##5A4FCF;">&#9632;</span>]] 14:56, 25 अगस्त 2025 (UTC) == core का कोड उपयोग करने में समस्या == नमस्ते DreamRimmer जी, मैं toolsforge पर <code>pywikibot-core</code> का कोड काम में लेना चाहता हूँ। लेकिन जैसे ही मैं कोई कमांड देता हूँ तो वहाँ यह त्रुटि आ रही है: <pre>No module named 'packaging' Please install it with &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;pip install packaging</pre><br> मैं इसे इंस्टॉल भी नहीं कर पा रहा हूँ। जब मैं <code>source pwbvenv/bin/activate</code> कर चुका हूँ तब इसकी अलग से आवश्यकता होगी क्या? हालांकि मैंने अन्य किसी स्क्रिप्ट की इन दिनों जाँच नहीं की है अतः पता नहीं कि अन्य कोई समस्या है या नहीं। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 16:34, 24 सितंबर 2025 (UTC) :@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, मैंने इसे ठीक कर दिया है। अब आप फिर से कोशिश करें। यह दिक्कत पिछले कुछ दिनों से कई लोगों को आ रही है। समझ नहीं आता कि pip बार-बार क्यों टूट जाता है। वर्चुअल एनवायरनमेंट पुराना हो तब भी यह समस्या नहीं होनी चाहिए, क्योंकि हम Python 3.11 का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह अभी भी नया वर्ज़न है। भले ही अब 3.13 आ गया है, लेकिन 3.11 भी पूरी तरह सपोर्टेड है, इसलिए दिक्कत नहीं आनी चाहिए थी। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:##5A4FCF;">&#9632;</span>]] 18:22, 24 सितंबर 2025 (UTC) == आमेर दुर्ग == मेरे प्रिय मित्र @[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] जी, मैंने सिर्फ स्रोत्र जोड़ा है। [[सदस्य:Karsan Chanda|Karsan Chanda]] ([[सदस्य वार्ता:Karsan Chanda|वार्ता]]) 08:14, 3 अक्टूबर 2025 (UTC) :@[[सदस्य:Karsan Chanda|Karsan Chanda]]: मैं देख रहा हूँ कि आप कई लेखों में मीणा जाति का प्रचार करने की कोशिश कर रहे हैं। कृपया जातीय योद्धा जैसे संपादन न करें, अन्यथा आपका यह कठपुतली खाता अवरुद्ध किया जा सकता है। आशा है आप सकारात्मक योगदान देने का प्रयास करेंगे। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:##5A4FCF;">&#9632;</span>]] 08:21, 3 अक्टूबर 2025 (UTC) ::@[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] जी, मेरा मक़सद स्रोतों के माध्यम से लेख को अच्छा बनाने का प्रयास है। [[सदस्य:Karsan Chanda|Karsan Chanda]] ([[सदस्य वार्ता:Karsan Chanda|वार्ता]]) 08:27, 3 अक्टूबर 2025 (UTC) ::प्रिय मित्र @[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] जैसे मैं मीणा समुदाय के चांदा वंश के लिए पृष्ठ तैयार करने के लिए तीन स्रोतों का उपयोग कर रहा हूँ, लेकिन कुछ समस्याओं का सामना कर रहा हूँ। ::1. Rulers, Criminals and Denotified Tribe: A Historical Journey of the Meenas ::2. Origin Of Kachcwaha In Dhundhar Region of Rajasthan ::3. Evolution, extension and consolidation of meena tribe [[सदस्य:Karsan Chanda|Karsan Chanda]] ([[सदस्य वार्ता:Karsan Chanda|वार्ता]]) 08:32, 3 अक्टूबर 2025 (UTC) == लेख विकिडेटा से जोड़ने के लिए == नमस्ते, क्या आप मेरे द्वारा प्रतियोगिता में बनाए गए लेखों को विकिडेता से जोड़ने में मदद कर सकते हैं? मैं इन्हें जोड़ नहीं पा रही क्योंकि शायद ये सुरक्षित हैं। लेख हैं [[ए मिडसमर नाइट्स ड्रीम]], [[गुलामी उन्मूलन आंदोलन]], [[गेम शो]], [[फोटो जर्नलिज़्म]], [[टाक शो]]। [[सदस्य:RichaD|RichaD]] ([[सदस्य वार्ता:RichaD|वार्ता]]) 14:00, 9 अक्टूबर 2025 (UTC) :@[[सदस्य:RichaD|RichaD]]: {{done}} – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">&#9632;</span>]] 14:29, 9 अक्टूबर 2025 (UTC) == पृष्ठ पुनर्स्थापन (Userfy) हेतु अनुरोध == मैं Cinemaniac007 हूँ। आपने ‘अरिन पाल’ पृष्ठ को CSD A2 के अंतर्गत हटाया था। मैंने अब अपने सदस्य पृष्ठ पर स्पष्ट COI disclosure जोड़ दिया है। कृपया ‘अरिन पाल’ पृष्ठ को मेरी व्यक्तिगत सैंडबॉक्स में (Userfy) पुनर्स्थापित कर दें ताकि मैं उसमें तटस्थ भाषा और विश्वसनीय स्रोत जोड़कर सुधार कर सकूँ। धन्यवाद। [[सदस्य:Cinemaniac007|Cinemaniac007]] ([[सदस्य वार्ता:Cinemaniac007|वार्ता]]) 13:50, 20 नवम्बर 2025 (UTC) == नए साल की शुभकामनाएँ == <div style="background:#E8F5E9; padding:10px; border:1px solid #81C784; border-radius:6px;"> '''DreamRimmer जी, नववर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ!''' यह नया साल आपके और आपके परिवार के लिए अच्छा स्वास्थ्य, सफलता और सुख-समृद्धि लेकर आए। हिंदी विकिपीडिया पर आपके योगदान के लिए धन्यवाद। [[File:Everlasting Fireworks looped.gif|left|x173px]] [[सदस्य:Chronos.Zx|<span style="color:blue; font-weight:bold;">क्रोनोस.Zx</span>]] ([[सदस्य वार्ता:Chronos.Zx|वार्ता]]) 13:19, 1 जनवरी 2026 (UTC) </div> :धन्यवाद। आपको भी नववर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">&#9632;</span>]] 15:03, 1 जनवरी 2026 (UTC) ==हिंदी विकिस्रोत पर लोकल फाइल अपलोड के संबंध में== नमस्कार DreamRimmer जी! आपसे एक सहायता चाहिए थी। हिंदी विकिस्रोत पर फाइलें इस प्रकार लोकली अपलोड नहीं हो पा रहीं, जिससे कि उन्हें OCR किया जा सके। चूंकि <nowiki>{{PD-India}}</nowiki> फाइलों को कॉमन्स पर अपलोड नहीं किया जाना चाहिए इसलिए उन्हें लोकली अपलोड करने के लिए यह आवश्यक है। शायद यह काम फैब्रिकेटर पर हो सके। यदि आप इसमें कुछ सहायता कर सकें तो बताइएगा। धन्यवाद। --[[User:अजीत कुमार तिवारी|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color:red">'''अजीत कुमार तिवारी'''</span>]]<sup>[[User talk:अजीत कुमार तिवारी|<span style="color:green"> '''बातचीत'''</span>]]</sup> 04:30, 2 फ़रवरी 2026 (UTC) :@[[सदस्य:अजीत कुमार तिवारी|अजीत कुमार तिवारी]] जी, ज़रूर। इसके लिए दो काम करने होंगे। पहला, विकिस्रोत की चौपाल पर एक प्रस्ताव लाना होगा, ताकि हम उसे फ़ैब्रिकेटर पर ले जा सकें। दूसरा, हमें एक [[m:Non-free content#Exemption Doctrine Policy|Exemption Doctrine Policy]] की आवश्यकता होगी। इसके उदाहरण के लिए आप [[:en:Wikipedia:Non-free content criteria|Wikipedia:Non-free content criteria]] देख सकते हैं। यह नीति तैयार हो जाने के बाद हम इसे प्रस्ताव के साथ ही समुदाय के सामने रख सकते हैं और फिर दो सप्ताह बाद इसे फ़ैब्रिकेटर पर ले जा सकते हैं। शेष काम मैं संभाल लूँगा। प्रस्ताव आप कुछ इस तरह लिख सकते हैं: {{tq|मैं सभी सदस्यों के लिए स्थानीय अपलोड सक्षम किए जाने का प्रस्ताव रख रहा हूँ, क्योंकि {{tl|PD-India}} सामग्री कॉमन्स के लिए उपयुक्त नहीं है; अतः ऐसी फाइलों को स्थानीय रूप से अपलोड करने से OCR कार्य में सुविधा होगी। इसलिए मेरा प्रस्ताव है कि हिंदी विकिस्रोत पर स्थानीय अपलोड की सुविधा सक्षम की जाए। अपलोड कार्य [[En:Wikipedia:Non-free content|Wikipedia:Non-free content]] जैसी अपलोड नीतियों के अनुरूप किया जाएगा, जिससे फेयर यूज़ फ़ाइलों का भी स्थानीय अपलोड संभव हो सके। साथ ही, मैं Exemption Doctrine Policy नीति को भी समुदाय के समक्ष प्रस्तावित कर रहा हूँ। आपकी टिप्पणियों का स्वागत है।}} – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">&#9632;</span>]] 16:21, 3 फ़रवरी 2026 (UTC) ::बहुत-बहुत धन्यवाद आपका। मैं इस सप्ताहांत तक आपके सुझाव के अनुसार प्रस्ताव और नीति तैयार कर लेता हूँ। [[User:अजीत कुमार तिवारी|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color:red">'''अजीत कुमार तिवारी'''</span>]]<sup>[[User talk:अजीत कुमार तिवारी|<span style="color:green"> '''बातचीत'''</span>]]</sup> 06:38, 5 फ़रवरी 2026 (UTC) == प्रबन्धक नामांकन पृष्ठ पर अनुभाग सम्पादन == नमस्ते DreamRimmer जी, मैं देख पा रहा हूँ कि आपके वर्तमान नामांकन के पश्चात् [[विकिपीडिया:प्रबन्धन अधिकार हेतु निवेदन]] पर अनुभाग सम्पादन नहीं हो पा रहा है। मुझे ऐसा कोई साँचा या मैजिक वर्ड भी नहीं दिखाई दे रहा जिससे यह विकल्प बंद हो गया है। कृपया आप इस समस्या को देख सकते हैं? <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 13:29, 18 फ़रवरी 2026 (UTC) :@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, अनुभाग संपादन काफी समय से बंद है। मैंने अपने आवेदन से पहले भी इसे बंद ही पाया था। इसका मुख्य कारण इस पृष्ठ पर प्रयुक्त [[विकिपीडिया:विशेषाधिकार निवेदन/शीर्ष|शीर्ष साँचा]] है, जो पृष्ठ पर बॉर्डर जोड़ता है। मैंने बॉर्डर हटा दिया है, इसलिए अब यह सुविधा कार्य करने लगी है। DiscussionTools बॉर्डर के भीतर मौजूद टिप्पणियों और अनुभागों की पहचान नहीं कर पाता, इसी कारण यह काम नहीं करता। यदि हम पुनः बॉर्डर जोड़ते हैं, तो हम फिर से अनुभाग संपादन का उपयोग नहीं कर सकेंगे। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">&#9632;</span>]] 15:06, 18 फ़रवरी 2026 (UTC) ::सुधार के लिए धन्यवाद। मैंने पृष्ठ का इतिहास देखा और ऐसे प्रतीत हुआ कि पिछली बार मैंने टिप्पणी अनुभाग सम्पादन से की थी। जो भी हो, मुझे वर्तमान स्वरूप भी ठीक लग रहा है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 12:28, 19 फ़रवरी 2026 (UTC) == बिना सामग्री वाले लेख == नमस्ते DreamRimmer जी, क्या आप [[वितली गिन्ज़बर्ग]] जैसे लेखों को सूचीबद्ध करने का कोई तरिका जानते हैं? ऐसे पृष्ठों को [[:en:User:Dr_pda/prosesize.js|User:Dr pda/prosesize.js]] से देखने पर 10 से कब शब्द दिखाई देते हैं। ऐसे लेख या तो सामग्री रहित (बहुत कम) होते हैं या फिर एआई से निर्मित होते हैं। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:31, 17 मार्च 2026 (UTC) :@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, ऐसे ज्यादातर लेख विज्ञान से संबंधित हैं। अगर आपको सूची चाहिए, तो मैं दे सकता हूँ। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">&#9632;</span>]] 15:46, 17 मार्च 2026 (UTC) ::हाँ, सूची बना दीजिएगा जिससे समय मिलने पर कम से कम 100 शब्द तो रख सकें। सम्भव है किसी प्रतियोगिता में शामिल करके कुछ विस्तार करवाया जाये।<span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 16:09, 17 मार्च 2026 (UTC) :::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय यह पृष्ठ विकिपीडिया में पहले से ही मौजूद है| :::[https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%9B%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A5%87_%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0 छोटे पृष्ठ] :::धन्यवाद [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 16:17, 17 मार्च 2026 (UTC) :::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] मैंने 5000 लेखों को प्रोसेस किया, जिनमें अच्छी-खासी संख्या में लेख इस मापदंड में आ रहे हैं। अगर आपको और लेखों की जरूरत हो, तो याद दिला दीजिए। [[सदस्य:DreamRimmer/RandomPage]] – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">&#9632;</span>]] 16:17, 17 मार्च 2026 (UTC) ::::@[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] महोदय इन लेखों को आरोही या अवरोही क्रम में लिखने से इन्हें सुधारने में आसानी होगी| ::::धन्यवाद [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 16:20, 17 मार्च 2026 (UTC) :::::@[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी, आपको सम्भवतः मेरा सन्देश समझ नहीं आया। :::::DreamRimmer जी, इस सूची के लिए धन्यवाद। यह मुझे उपयोगी सूची लग रही है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 16:33, 17 मार्च 2026 (UTC) == अधिकार के संबंध में == @[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] महोदय यह जानना चाहता हूं कि मैं किन-किन अधिकार के लिए नामांकन कर सकता हूं| अभी के योगदान पर [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 14:56, 18 मार्च 2026 (UTC) :मेरा सुझाव है कि अभी कुछ समय आप नीतियों को अच्छी तरह समझने और जो सामान्य कार्य अभी कर रहे हैं, उसी पर ध्यान देने की कोशिश करें। आगे अनुभव और लगातार अच्छे योगदान के आधार पर अधिकारों के लिए नामांकन किया जा सकता है। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">&#9632;</span>]] 15:07, 18 मार्च 2026 (UTC) == प्रश्न == @[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] महोदय, मैने [[1973 पेरिस ओपन - पुरुष एकल]] को हटाने का नामांकन किया है क्या ये मापदंड सही या कोई दूसरा मापदंड प्रयोग करूं| [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 11:02, 20 मार्च 2026 (UTC) :आपने जो मापदंड लगाया है वह सही नहीं है। मैं आपकी जगह होता तो इसे हटाने के बजाय सुधारने का प्रयास करता। यदि इसे हटाने की बात है तो मेरे विचार से [[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] अधिक उचित रहेगी। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">&#9632;</span>]] 11:14, 20 मार्च 2026 (UTC) ::@[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] और @[[सदस्य:Cptabhiimanyuseven|Cptabhiimanyuseven]] महोदय, ::[[सदस्य वार्ता:Rambeer Vishwakarma]] इसे सुधरा तथा लेखक बर्बरता कर रहे है| [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 12:03, 20 मार्च 2026 (UTC) ==माफ़ी चाहूंगा पर== नमस्ते DreamRimmer जी, [[ज्योति देशपांडे]] लेख को विकिपीडिया पर पृष्ठों को हटाने की नीति के अंतर्गत आपने हटा दिया था। लेकिन उसी समय मै इस लेख में सुधार कर रहा था। जब मैने बदलाव प्रकाशित किया, लेख फिर से बन गया है। यदि आप को लगता है की इस लेख को नहीं रखना है, तो माफ़ी चाहूंगा पर आपको लेख को हटाने का काम फिर से करना होगा। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 05:12, 24 मार्च 2026 (UTC) :धर्मेंद्र जी, इसमें माफी की कोई आवश्यकता नहीं है, बल्कि सुधार के लिए आप धन्यवाद के पात्र हैं। मैंने पहले हटाए गए अवतरणों को पुनः स्थापित कर दिया है। मुझे नहीं लगता कि अब इसे हटाने की आवश्यकता है। बाकी यदि कोई अन्य प्रबंधक चाहे, तो इसे फिर से नामांकित कर सकता है। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">&#9632;</span>]] 05:55, 24 मार्च 2026 (UTC) :{{Ping|चाहर धर्मेंद्र}} जी, नमस्ते! यदि आप किसी नये पृष्ठ को निर्मित कर रहे है या उसको सुधारने करना चाह रहे है, परन्तु उसमे कोई सामग्री न हो तो उस पृष्ठ पर <code>[[साँचा:निर्माणाधीन]]</code> जोड़ दे, जिससे कोई सदस्य उस पृष्ठ को हटाने के लिए नामांकित नहीं करेगा, परन्तु लेख में पर्याप्त मात्रा में सामग्री होनी ही चाहिए जिससे यह भी न प्रतीत हो की पृष्ठ पूर्ण रूप से रिक्त है। <span style="background:Brown;border:1px solid #FF00FF;border-radius:18px;padding:4px">[[User:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:black">Cptabhiimanyuseven</span>]]•[[User talk:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:lightgrey">(@píng mє)</span>]]</span> 06:32, 24 मार्च 2026 (UTC) == अनुरोध == DreamRimmer जी, नमस्ते! क्या आप मेरे सदस्य पृष्ठ को निर्माण से पूर्ण सुरक्षित कर सकते हो? क्यूंकि मैं यहां पर अपना सदस्य पृष्ठ निर्मित नहीं करना चाहता हूँ, अगर आप पूर्ण सुरक्षित कर दे अनंत समय के लिए तो यह मेरे लिए अच्छा रहेगा। <span style="background:Brown;border:1px solid #FF00FF;border-radius:18px;padding:4px">[[User:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:black">Cptabhiimanyuseven</span>]]•[[User talk:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:lightgrey">(@píng mє)</span>]]</span> 06:48, 24 मार्च 2026 (UTC) :Cptabhiimanyuseven जी, मुझे नहीं लगता कि यह एक अच्छा विचार है, क्योंकि इससे भविष्य में इसे बनाने के लिए एक प्रबंधक की आवश्यकता पड़ेगी, जबकि अभी इसे सुरक्षित करने की कोई स्पष्ट आवश्यकता नहीं है। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">&#9632;</span>]] 07:17, 24 मार्च 2026 (UTC) ::DreamRimmer जी, यहाँ सदस्यपृष्ठ निर्मित करने का मेरे पास कोई कारण नहीं है, जिस विकी पर मुझे अपना सदस्यपृष्ठ निर्मित करना था वहां पर हमने निर्मित कर लिया है, परन्तु [[:en:WP:UPROT|WP:UPROT]] के अंतर्गत सदस्य के अनुरोध पर सदस्यपृष्ठ सुरक्षित किया जा सकता है, कृपया पुन: विचार करें। <span style="background:Brown;border:1px solid #FF00FF;border-radius:18px;padding:4px">[[User:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:black">Cptabhiimanyuseven</span>]]•[[User talk:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:lightgrey">(@píng mє)</span>]]</span> 07:25, 24 मार्च 2026 (UTC) :::मुझे नहीं लगता कि आपके द्वारा दिया गया कारण वास्तविक एवं उचित आवश्यकता को दर्शाता है; यदि ऐसा होता, तो मैं इसे सुरक्षित कर देता। फिर भी, यदि आप इसके लिए आग्रह कर रहे हैं, तो मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है। मैं केवल इतना कहना चाहूँगा कि इस प्रकार के निवेदन अनावश्यक रूप से हम दोनों का समय व्यर्थ करते हैं। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">&#9632;</span>]] 08:12, 24 मार्च 2026 (UTC) == सूचना == @[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] महोदय, पहले बता नहीं पाया परंतु [[https://hi.wikimedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0 हिंदी wikimedia]] में मैं पहले भी लॉगिन नहीं कर पा रहा था, अब तो खैर अवरोधित हूं, जांच लें| [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 07:44, 30 मार्च 2026 (UTC) :हिंदी विकिमीडिया पर खाता बनाने के लिए वहाँ के प्रबंधकों से अनुरोध करना पड़ता है और मुझे लगता है कि यह अभी आपके लिए उपयुक्त नहीं है। मेरा सुझाव है कि फिलहाल आप केवल विकिपीडिया पर ही ध्यान दें। मैंने देखा है कि आप ऐसे विषयों के लेखों का अनुवाद कर रहे हैं जिनकी आपको पर्याप्त जानकारी नहीं है। कृपया केवल उन्हीं विषयों पर कार्य करें जो सरल हों और जिनके बारे में आपको अच्छी समझ हो। आपने बहुत कम समय में कई गलतियाँ की हैं और वे अब भी लगातार हो रही हैं। यह आपके लिए ठीक नहीं होगा, क्योंकि हर बार सद्भावना मानकर बात को अनदेखा नहीं किया जा सकता। मुझे आशा है कि आप मेरी बातों पर ध्यान देंगे। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">&#9632;</span>]] 08:01, 30 मार्च 2026 (UTC) ::@[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] महोदय, ::मैं अभी केवल उन पृष्ठों को सुधार रहा हूं जिन्हें संजीव कुमार जी ने टैग लगाकर चिन्हित किया है| और कुछ विकिपीडिया पर गलत संपादनों को सुधार देता हूं| [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 08:07, 30 मार्च 2026 (UTC) :::@[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी, आपने लिखा '''गलत संपादनों को सुधार देता हूं।''' हाल ही में आप ने आखिरी लेख पारलैंगिक रतिचित्रण बनाया है। क्या आपको लगता है कि इस लेख में किसी सुधार की आवश्यकता है? :::“[[पारलैंगिक रतिचित्रण]]” जैसे संवेदनशील विषय पर लिखे गए लेख के संदर्भ में भी कुछ पहलुओं पर ध्यान देकर उसे और बेहतर बनाया जा सकता है। साथ ही, ऐसे विषयों में मर्यादित और संतुलित अभिव्यक्ति विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है। :::* मेरा उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि लेख अधिक सुसंगत, स्पष्ट और पाठकों के लिए उपयोगी बन सके। क्या आप ऐसा कर सकते है? :::<span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 16:54, 30 मार्च 2026 (UTC) == सदस्य अवरोधन नामांकन == @[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] और @[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय, सदस्य @[[सदस्य:~2026-19373-86|~2026-19373-86]] बार बार चेतावनी के पश्चात् भी पृष्ठों में अपमानजनक सम्पादन कर रहे है| [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 10:37, 7 अप्रैल 2026 (UTC) :@[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]],@[[सदस्य:SM7|SM7]] और @[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]]@महोदय, अब @[[सदस्य:~2026-19373-86|~2026-19373-86]] इन्होंने [[कन्नौज]] पर अपमानजनक सम्पादन किया है| क्योंकि मै कन्नौज का निवासी हूँ| [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 12:36, 7 अप्रैल 2026 (UTC) == रोलबैक अधिकार के नामांकन पर आपके विचार/मत हेतु == <div style="background-color: #FFF9E6; padding: 15px; border: 1px solid #DAA520; border-radius: 8px; margin-top: 10px;"> नमस्ते, आशा है आप सकुशल होंगे। मैं पिछले कुछ समय से हिंदी विकिपीडिया पर सक्रिय रूप से गश्त (Patrolling) कर रहा हूँ और हाल के बदलावों में स्पष्ट बर्बरता को हटाने का प्रयास कर रहा हूँ। अपने इस कार्य को और अधिक सुचारू बनाने के लिए, मैंने स्वयं को '''रोलबैक (Rollback) अधिकार''' के लिए नामांकित किया है। चूँकि आप हिंदी विकिपीडिया के एक अनुभवी सदस्य हैं, इसलिए मेरा आपसे विनम्र आग्रह है कि कृपया मेरे हालिया योगदानों की समीक्षा करें और अपना बहुमूल्य मत या सुझाव प्रदान करें। आपका समर्थन और मार्गदर्शन मेरे लिए अत्यंत उत्साहजनक होगा। '''नामांकन यहाँ देखें:''' [[विकिपीडिया:रोलबैकर्स अधिकार हेतु निवेदन#AMAN KUMAR|मेरे नामांकन पर अपना मत दें]] सहयोग के लिए अग्रिम धन्यवाद! सादर,<br> [[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 11:31, 11 अप्रैल 2026 (UTC) </div> == Last Few Days: WikiConference India 2026 Scholarship Applications == <div lang="en" dir="ltr" class="mw-content-ltr"> ''{{int:please-translate}}'' Dear Wikimedian, We're happy to share that scholarship applications for '''WikiConference India 2026''' are currently open and the deadline is just around the corner. [[m:Special:MyLanguage/WikiConference India 2026|WikiConference India 2026]] is the fourth edition of the national-level conference that brings together Wikimedians and stakeholders engaged in Indic-language Wikimedia projects and the broader open knowledge movement across India and South Asia. The conference will take place in Kochi, Kerala, from 4–6 September 2026. * You can find the more information and the application form at the [[m:Special:MyLanguage/WikiConference India 2026/Scholarship|Scholarship page here at Meta wiki]] * '''Scholarship deadline: 15 April 2026, 11:59 PM IST''' With only a few days left, we warmly encourage you to apply if you haven’t already and kindly request you to share this with your community and encourage others to apply. For more information and regular updates, we encourage you to visit the conference Meta page. Warm regards, <br> on behalf of the WikiConference India 2026 Organising Team ''This message was sent with [[सदस्य:MediaWiki message delivery|MediaWiki message delivery]] ([[सदस्य वार्ता:MediaWiki message delivery|वार्ता]]) on 18:30, 11 अप्रैल 2026 (UTC)'' </div> <!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=Global_message_delivery/Targets/WCI_2026_active_users&oldid=30389801 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Gnoeee@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश --> == You may be an eligible candidate for the U4C election == <div lang="en" dir="ltr" class="mw-content-ltr"> Greetings, The [[m:Special:MyLanguage/Universal_Code_of_Conduct/Coordinating_Committee|Universal Code of Conduct Coordinating Committee (U4C)]] seeks candidates for the 2026 election. The U4C is the global committee responsible for overseeing enforcement of the [[foundation:Special:MyLanguage/Policy:Universal Code of Conduct|Universal Code of Conduct]]. Elections are held annually, if elected a committee member serves for two years. This year the U4C requires candidates to hold administrator rights on at least one wiki, which is why you are being contacted as you appear to hold this right. There are other requirements, such as candidates must be at least 18 years old and may not be employed by the Wikimedia Foundation or other related chapters and affiliates. You can find more information in the [[m:Special:MyLanguage/Universal_Code_of_Conduct/Coordinating_Committee/Election/2026#Call_for_Candidates|call for candidates on Meta-wiki]]. Additionally, the committee's working language is English; some ability to communicate in English is required. The election opens on 18 May, if you are eligible and interested you have until 10 May to submit your candidacy. There will week between for candidates to answer questions from the community. Voting takes place privately in [[m:Special:MyLanguage/SecurePoll|SecurePoll]], successful candidates must receive at least 60% support. More information is available on [[m:Special:MyLanguage/Universal_Code_of_Conduct/Coordinating_Committee/Election/2026|the 2026 Elections page]], including timelines and other candidacy information. If you read over the material and consider yourself qualified, please consider submitting your name to run for the committee. If you think someone else in your community might be interested and qualified, please encourage them to run. In partnership with the U4C -- [[m:User:Keegan (WMF)|Keegan (WMF)]] ([[m:User_talk:Keegan (WMF)|talk]]) 18:33, 28 अप्रैल 2026 (UTC) </div> <!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=User:Keegan_(WMF)/test&oldid=30471754 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Keegan (WMF)@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश --> == कुछ बाहरी उपकरण == नमस्ते DreamRimmer जी, मैंने एक [[वार्ता:राष्ट्रीय उद्यान#लेख की श्रेष्ठ लेख समीक्षा: पहला भाग|श्रेष्ठ लेख नामांकन की समीक्षा]] करते हुये पाया कि [https://citations.toolforge.org उद्धरण] और [https://link-dispenser.toolforge.org/ बाहरी कड़ियाँ] जाँच के उपकरण हिन्दी विकि के लिए उपलब्ध नहीं हैं। ये कार्य करने वाले पुराने उपकरण अब बंद हो चुके हैं। क्या इसका कोई अन्य विकल्प उपलब्ध है? इसके अतिरिक्त [https://gptzero.me एआई की सहायता] वाला उपकरण कैसे काम में लूँ, इसमें भी आपसे सहायता चाहता हूँ। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 14:56, 5 मई 2026 (UTC) :संजीव जी, उद्धरण टूल काफी समय से टूटा हुआ था और इसे हाल ही में नया मेंटेनर मिला है, इसलिए इसे फिलहाल हिंदी विकिपीडिया पर उपलब्ध करवाना मुश्किल है। इस टूल में कई महीनों से अनेक त्रुटियाँ थीं, जिन्हें अब नया मेंटेनर ठीक करने का प्रयास कर रहा है। इसका वेब इंटरफ़ेस अभी उपयोग योग्य नहीं है, लेकिन इसका गैजेट संस्करण हिंदी विकिपीडिया पर स्थापित किया जा सकता है। बाहरी कड़ियाँ जाँच उपकरण को भी जल्द हिंदी विकिपीडिया पर उपलब्ध करवाने की कोशिश करूँगा। एआई सहायता वाला उपकरण हिंदी भाषा के लिए पूरी तरह विश्वसनीय नहीं है, क्योंकि इसे मुख्य रूप से अंग्रेज़ी भाषा के डाटा पर प्रशिक्षित किया गया है। यहाँ तक कि अंग्रेज़ी के लिए भी इसे पूर्णतः भरोसेमंद नहीं माना जाता। फिर भी यदि आप इसके बारे में जानना चाहें, तो इसमें लॉगिन करने पर हर महीने 10,000 निःशुल्क टोकन मिलते हैं, जिनका उपयोग बेसिक और एडवांस जाँच में किया जा सकता है, जहाँ यह अपने सर्वोत्तम मॉडेल का उपयोग करके परिणाम देता है। इसके अतिरिक्त, अंग्रेज़ी और कुछ अन्य भाषा परियोजनाओं के लिए यह [https://wikipedia.gptzero.me/ यहाँ] पर निःशुल्क उपलब्ध है। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">&#9632;</span>]] 11:46, 6 मई 2026 (UTC) == खराब मशीनी अनुवाद ?== आपने हिन्दी विकिपीडिया पर आज [[प्रसन्नकुमार ठाकुर]] और [[योगेश चन्द्र बागल]] - ये दोनों लेख हटा दिये हैं। क्या आप इन दोनों में से कोई एक-एक वाक्य बता सकते हैं जो आपको 'खारब मशीनी अनुवाद' लग रहा हो? अन्यथा यदि आपने स्वयं न देखकर दूसरों के कहने या सूचना देने पर ये लेख हटायें हों, तो कृपया इनका पुनः ध्यानपूर्वक अवलोकन करें और बताएँ कि क्या ये सचमुछ 'खराब मशीनी अनुवाद' कहे जा सकते हैं? -- [[सदस्य:अनुनाद सिंह|अनुनाद सिंह]] ([[सदस्य वार्ता:अनुनाद सिंह|वार्ता]]) 15:44, 16 मई 2026 (UTC) : आपके उत्तर की प्रतीक्षा है। -- [[सदस्य:अनुनाद सिंह|अनुनाद सिंह]] ([[सदस्य वार्ता:अनुनाद सिंह|वार्ता]]) 08:41, 23 मई 2026 (UTC) :: '''क्या यह प्रश्न उत्तर की अपेक्षा नहीं रखता ???'''05:24, 14 जुलाई 2026 (UTC) == बार-बार पुनर्निर्मित पृष्ठों की सुरक्षा हेतु अनुरोध == नमस्कार DreamRimmer जी, कृपया ‘[[दीनदयाल सोनी बाँदा]]’ एवं ‘[[दीनदयाल सोनी ‘स्वर्ण’]]’ पृष्ठों को भी सुरक्षित करने पर विचार करें। ये पृष्ठ पूर्व में कई बार हटाए जा चुके हैं, फिर भी इन्हें पुनः निर्मित किया जा रहा है। <span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 12:17, 24 मई 2026 (UTC) == मुकेश मिश्र लेख हटाने से संबंधित पुनः समीक्षा हेतु अनुरोध == नमस्कार, @[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] मुकेश मिश्र जी का पृष्ठ दिए गए विश्वसनीय संदर्भों को देखे बिना हटाया गया प्रतीत होता है। लेख में राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय समाचार स्रोत जोड़े गए थे, जो विषय की उल्लेखनीयता को स्पष्ट करते हैं। कृपया एक बार संदर्भों की पुनः समीक्षा करें। यदि किसी स्रोत या सामग्री पर विशेष आपत्ति है तो कृपया उसे स्पष्ट करें, ताकि आवश्यक सुधार किया जा सके। विकिपीडिया पर किसी भी लेख के संबंध में चर्चा एवं सहमति की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जाती है, और ऐसे मामलों में संवाद पृष्ठ पर विस्तार से चर्चा करना उचित होता है। पुनः समीक्षा हेतु एवं लेख को वापस बहाल करने के लिए संदर्भ साथ में संलग्न कर रहा हूँ। # https://www.jagran.com/bihar/darbhanga-mukesh-mishra-bihars-karate-star-shines-nationally-40163302.html # https://www.bhaskar.com/local/bihar/darbhanga/darbhangasadar/news/delhi-national-karate-competition-committee-mukesh-mishra-137399763.html # https://m.haryana.punjabkesari.in/gurgaon/news/darbhanga-coach-mukesh-mishra-is-preparing-national-level-karate-players-2308191 # https://www.bhaskar.com/local/bihar/darbhanga/news/mukesh-from-darbhanga-becomes-bihar39s-first-wkf-accredited-karate-coach-136948544.html # https://www.livehindustan.com/bihar/darbhanga/story-mukesh-mishra-appointed-as-first-karate-coach-from-bihar-by-world-karate-federation-201768504241043.amp.html # https://www.prabhatkhabar.com/state/bihar/darbhanga/darbhanga-news-karate-coach-mukesh-mishra-india-team-philippines # https://www.bhaskar.com/local/bihar/darbhanga/darbhangasadar/news/bihar-karate-coach-mukesh-mishra-dehradun-national-competition-2026-137993454.html # https://www.wkf.net/files/pdf/documents/List%20WKF%20ACRC%20Coaches.pdf धन्यवाद [[सदस्य:Karatebr|Karatebr]] ([[सदस्य वार्ता:Karatebr|वार्ता]]) 03:39, 25 मई 2026 (UTC) == आईपी अवरोध अपवाद को नवीनीकृत करने के संदर्भ में == नमस्ते @[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] महोदय, मेरा 'आईपी अवरोध अपवाद' अधिकार 30 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। इस अधिकार के बिना मुझे संपादन के दौरान बार-बार 'IP Block' की समस्या का सामना करना पड़ता है। चूँकि मैं विकिपीडिया पर लगातार सक्रिय हूँ, अतः मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि कृपया मेरे इस अधिकार को स्थायी या लंबी अवधि के लिए नवीनीकृत कर दें, ताकि मेरा संपादन कार्य सुचारू रूप से चलता रहे। सहायता के लिए धन्यवाद! --[[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 17:00, 9 जून 2026 (UTC) :मुझे नहीं लगता कि अब इसकी कोई आवश्यकता है। आपका खाता अब वैश्विक रूप से अवरोधित नहीं है और जब तक आप लॉग-इन हैं, आपको संपादन करने में कोई समस्या नहीं आएगी। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">&#9632;</span>]] 17:03, 9 जून 2026 (UTC) == ड्राफ्ट:दीनदयाल सोनी - गूगल + विकिमीडिया साक्ष्य सहित संरक्षण हटाने हेतु == नमस्ते DreamRimmer जी, 1. `ड्राफ्ट:दीनदयाल सोनी` गूगल में इंडेक्स है। 2. Google AI उसे स्रोत मानकर सारांश बना रहा है। 3. `चित्र:Deendayal.jpg` 18 मई 2026 को विकिमीडिया कॉमन्स पर अपलोड होकर गूगल इमेज में टॉप पर है। [3 स्क्रीनशॉट संलग्न] ये तीनों साबित करते हैं कि विषय गूगल + विकिमीडिया द्वारा उल्लेखनीय माना जा चुका है। '''WP:GNG + WP:ANYBIO के 22 पक्के सबूत:''' 1. स्वदेश 28 May 2026 - पूरा पेज फीचर 2. अमर उजाला 7 बार: 2011-2026 3. दैनिक जागरण 4 बार: 2020-2026 4. हिन्दुस्तान 2 बार, 5. नवभारत टाइम्स, 6. दैनिक भास्कर 7. राज्यपाल पुरस्कार 3 सितम्बर 2005, प्रमाण-पत्र क्र. 16592 8. IG पुलिस प्रशंसा-पत्र जून 2021 9. आकाशवाणी छतरपुर 2017, 2019, 2025 10. "काव्य पुन्ज" 2019 + 9 अन्य सम्मान '''कुल: 21 मीडिया + 15 साल + राज्यपाल + IG + विकि फोटो + गूगल AI = WP:GNG 1100% पास''' कृपया संरक्षण हटाएं। मैं `{{COI|दीनदयाल सोनी}}` के साथ मुख्य नामस्थान में ले जाकर चित्र:Deendayal.jpg इन्फोबॉक्स में लगाऊंगा। <nowiki>धन्यवाद। ~~~~</nowiki> [[विशेष:योगदान/&#126;2026-33987-01|&#126;2026-33987-01]] ([[सदस्य वार्ता:&#126;2026-33987-01|वार्ता]]) 06:15, 10 जून 2026 (UTC) == बार-बार जोड़ी जा रही बाहरी कड़ियों की समीक्षा हेतु अनुरोध == नमस्ते DreamRimmer जी, [[सदस्य:ViratNS]] के संपादनों का अवलोकन करने पर प्रतीत होता है कि उनके अनेक संपादनों में किसी न किसी प्रचारात्मक अथवा संदिग्ध बाहरी वेबसाइट की कड़ी जोड़ी जाती है। यह प्रवृत्ति चिंता का विषय है और इसकी समीक्षा की जानी चाहिए।<span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 08:28, 19 जून 2026 (UTC) :नमस्ते, :आपके संदेश और समीक्षा के लिए धन्यवाद। :मेरा उद्देश्य किसी प्रकार का प्रचार या बाहरी वेबसाइटों का प्रसार करना नहीं है। मैंने जिन संपादनों में बाहरी स्रोतों का उपयोग किया है, उनका उद्देश्य संबंधित विषयों में अनुपस्थित जानकारी को संदर्भ सहित जोड़ना था। यदि किसी संपादन में जोड़ा गया स्रोत विकिपीडिया की विश्वसनीय स्रोत नीति या बाहरी कड़ी दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं माना जाता है, तो मैं उस पर चर्चा करने तथा आवश्यक संशोधन या हटाने के लिए तैयार हूँ। :मैं आगे भी यह सुनिश्चित करने का प्रयास करूँगा कि केवल विषय से सीधे संबंधित, सत्यापन योग्य और उपयुक्त स्रोतों का ही उपयोग किया जाए। :धन्यवाद। [[सदस्य:ViratNS|ViratNS]] ([[सदस्य वार्ता:ViratNS|वार्ता]]) 08:42, 19 जून 2026 (UTC) ::@[[सदस्य:ViratNS|ViratNS]]: मैंने आपके संपादन देखे हैं और उनमें से अधिकांश में ऐसे स्रोत जोड़े गए हैं जो विश्वसनीय प्रतीत नहीं होते तथा प्रचारात्मक प्रकृति के लगते हैं। इसके अतिरिक्त, आपने लेखों में AI/LLM द्वारा जनित प्रतीत होने वाली सामग्री भी जोड़ी है। इसलिए इसे आपकी अंतिम चेतावनी समझें। ::कृपया अपने संपादन में सुधार करें तथा केवल विश्वसनीय स्रोतों और गुणवत्तापूर्ण सामग्री का ही उपयोग करें। अन्यथा आपको संपादन करने से रोकना ही अंतिम उपाय होगा। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">&#9632;</span>]] 09:01, 19 जून 2026 (UTC) :::नमस्ते DreamRimmer जी, :::आपकी टिप्पणी और समय देने के लिए धन्यवाद। :::यदि मेरे किसी संपादन में प्रयुक्त स्रोत विकिपीडिया की नीतियों और दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं हैं, तो मैं उन्हें पुनः समीक्षा करने तथा आवश्यकतानुसार संशोधित या हटाने के लिए तैयार हूँ। मेरा उद्देश्य किसी प्रकार का प्रचार करना नहीं है, बल्कि लेखों में उपलब्ध जानकारी को संदर्भ सहित विस्तारित करना था। :::AI/LLM द्वारा उत्पन्न सामग्री संबंधी आपकी टिप्पणी को भी मैं गंभीरता से लेता हूँ। आगे से मैं यह सुनिश्चित करने का प्रयास करूँगा कि जोड़ी जाने वाली सामग्री विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित हो, तटस्थ दृष्टिकोण में लिखी गई हो तथा विकिपीडिया की सामग्री नीतियों के अनुरूप हो। :::धन्यवाद। [[सदस्य:ViratNS|ViratNS]] ([[सदस्य वार्ता:ViratNS|वार्ता]]) 09:03, 19 जून 2026 (UTC) <blockquote>नमस्ते DreamRimmer जी, मेरे सदस्य वार्ता पृष्ठ (Doharesamaj1992) को हटाने के संबंध में यह संदेश है। मैं विकिपीडिया पर नया हूँ और मुझे यहाँ की नीतियों (विशेषकर वेब होस्ट के रूप में दुरुपयोग नीति) की पूरी जानकारी नहीं थी। अनजाने में हुई इस गलती के लिए मुझे खेद है। कृपया मुझे मार्गदर्शन दें कि मुझे क्या सुधार करना चाहिए ताकि मैं भविष्य में विकिपीडिया के नियमों के अनुसार सही योगदान दे सकूँ। धन्यवाद।</blockquote>[[सदस्य:Doharesamaj1992|Doharesamaj1992]] ([[सदस्य वार्ता:Doharesamaj1992|वार्ता]]) 04:04, 12 जुलाई 2026 (UTC) == Doharesamaj1992 == <blockquote>नमस्ते DreamRimmer जी, मेरे सदस्य वार्ता पृष्ठ (Doharesamaj1992) को हटाने के संबंध में यह संदेश है। मैं विकिपीडिया पर नया हूँ और मुझे यहाँ की नीतियों (विशेषकर वेब होस्ट के रूप में दुरुपयोग नीति) की पूरी जानकारी नहीं थी। अनजाने में हुई इस गलती के लिए मुझे खेद है। कृपया मुझे मार्गदर्शन दें कि मुझे क्या सुधार करना चाहिए ताकि मैं भविष्य में विकिपीडिया के नियमों के अनुसार सही योगदान दे सकूँ। धन्यवाद।</blockquote>[[सदस्य:Doharesamaj1992|Doharesamaj1992]] ([[सदस्य वार्ता:Doharesamaj1992|वार्ता]]) 04:12, 12 जुलाई 2026 (UTC) == Doharesamaj1992 == नमस्ते, मुझे विकिपीडिया की नीतियों की पूरी जानकारी नहीं थी। कृपया मुझे बताएं कि मेरे वार्ता पृष्ठ पर ऐसी क्या सामग्री थी जिससे नियमों का उल्लंघन हुआ, ताकि मैं भविष्य में ऐसी गलती न दोहराऊँ।" आपने अनुरोध है कि '''प्रयोगपृष्ठ (User Sandbox)''' में स्थानांतरित (Restore to Sandbox) कर दें, ताकि में उसमें सुधार कर सकूं। धन्यवाद [[सदस्य:Doharesamaj1992|Doharesamaj1992]] ([[सदस्य वार्ता:Doharesamaj1992|वार्ता]]) 04:30, 12 जुलाई 2026 (UTC) == Wikidata item से सम्बन्धित == @[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] जी नमस्कार, ऐसा प्रतीत होता है कि घृताची के लिए दो अलग Wikidata आइटम बने हुए हैं। Q115917801 में अंग्रेज़ी तथा अन्य भाषाओं के लेख जुड़े हैं। Q15647374 में केवल हिन्दी विकिपीडिया का लेख घृताची जुड़ा है। दोनों एक ही विषय के प्रतीत होते हैं। कृपया जाँच कर बताने का कष्ट करें कि क्या इनका विलय (merge) किया जाना चाहिए, अथवा हिन्दी साइटलिंक को उचित आइटम पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए। मुझे तो ये जटिलता समझ नहीं आ रही। आशा है आप सुधार कर देंगे धन्यवाद।[[सदस्य:Pushkar Singh|<span style="color:DeepPink;">पुष्कर सिंह</span>]] [[सदस्य वार्ता:Pushkar Singh|<span style="color:Red;">✉️</span>]] 17:43, 18 जुलाई 2026 (UTC) :@[[सदस्य:Pushkar Singh|Pushkar Singh]] जी, सुधार का प्रयास किया है, जहाँ तक मुझे आपका आशय समझ में आया। एक बार देख लें। और हो सके तो लेख में कुछ प्रामाणिक संदर्भ जोड़ दें। धन्यवाद। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 04:05, 19 जुलाई 2026 (UTC) ::धन्यवाद @[[सदस्य:SM7|SM7]] जी, मैं ठीक करने की कोशिश कर रहा था पर हुआ नहीं मुझसे। [[सदस्य:Pushkar Singh|<span style="color:DeepPink;">पुष्कर सिंह</span>]] [[सदस्य वार्ता:Pushkar Singh|<span style="color:Red;">✉️</span>]] 05:04, 19 जुलाई 2026 (UTC) == दुर्गेश राव - पृष्ठ पुनर्स्थापना अनुरोध == नमस्ते प्रबंधक जी, पृष्ठ "दुर्गेश राव" को आपके द्वारा व7 (साफ़ प्रचार) के तहत हटाया गया है। आपसे विनम्र अनुरोध है कि इस पृष्ठ की समीक्षा एक बार पुनः की जाए। पिछले संपादनों में इस जीवनी में से सभी प्रचारात्मक वाक्य हटा दिए गए थे और भारत सरकार के राष्ट्रीय प्रसारक "दूरदर्शन मध्य प्रदेश" (डीडी एमपी) के काव्यांजलि कार्यक्रम तथा "अमर उजाला" के प्रामाणिक संदर्भ (References) जोड़ दिए गए थे। व्यक्ति एक स्थापित कवि हैं और विकिपीडिया के उल्लेखनीयता (Notability) मापदंडों को पूरा करते हैं। कृपया पृष्ठ को पुनः स्थापित करने की कृपा करें ताकि इसे और बेहतर बनाया जा सके। धन्यवाद। --[[सदस्य:Kavita Anuragi|Kavita Anuragi]] ([[सदस्य वार्ता:Kavita Anuragi|वार्ता]]) 05:15, 29 अगस्त 2026 (UTC) == सहायता == @[[सदस्य:Max|Max]] जी, कृपया आप मेरे वार्ता पृष्ठ का एक संपादन छिपा दें। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 15:24, 30 अगस्त 2026 (UTC) :{{done}} EPIC ने खाता लॉक हाईड कर दिया। [[सदस्य:Max|Max]] ([[सदस्य वार्ता:Max|वार्ता]]) 15:30, 30 अगस्त 2026 (UTC) ::@[[सदस्य:Max|Max]] जी, धन्यवाद पर इसका अनुरोध किस तरह और कहाँ पर कर सकता हूँ। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 15:47, 30 अगस्त 2026 (UTC) == केवल कुमार (संगीतकार) पृष्ठ को हटाने के सम्बंध में अनुरोध == == केवल कुमार (संगीतकार) पृष्ठ को पुनर्स्थापित करने हेतु अनुरोध == नमस्ते Max जी, आपने हाल ही में "केवल कुमार (संगीतकार)" पृष्ठ को 'साफ़ प्रचार' (व7) के तहत हटाया है। केवल कुमार जी उत्तर प्रदेश के एक अत्यंत प्रतिष्ठित लोक संगीतकार और संगीत निर्देशक हैं, जिन्हें राज्य के सर्वोच्च 'यश भारती पुरस्कार' से भी सम्मानित किया जा चुका है। वे लंबे समय तक आकाशवाणी लखनऊ में संगीत संयोजक रहे हैं। हो सकता है कि मुझसे पहली बार में लेख की भाषा लिखने में कोई त्रुटि हुई हो जिससे वह प्रचार जैसा लगा। मेरा आपसे विनम्र अनुरोध है कि कृपया इस पृष्ठ को मेरे ड्राफ्ट (Draft) या सदस्य उपपृष्ठ (User Subpage) में स्थानांतरित कर दें। मैं इसकी भाषा को पूरी तरह से निष्पक्ष (Neutral) बनाऊँगा और इसमें विश्वसनीय समाचार पत्रों के संदर्भ भी जोड़ूँगा, ताकि यह विकिपीडिया के सभी नियमों के अनुकूल हो सके। आपके सहयोग के लिए धन्यवाद। [[सदस्य:Raghuvansham12|Raghuvansham12]] ([[सदस्य वार्ता:Raghuvansham12|वार्ता]]) 15:34, 16 सितंबर 2026 (UTC) == ओवरसाइट करें का अनुरोध == ओवरसाइट करें - [[सदस्य वार्ता:PRAVEEN KUMAR AWASTHI/EditCounterOptIn.js]] मैने इसका अनुरोध किया था Ticket#2026091910001541 OS#1 परन्तु उन्होंने प्रबंधक से संपर्क करने को कहा है [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 09:01, 19 सितंबर 2026 (UTC) == पूछताछ == @[[सदस्य:Max|Max]] जी! क्या हिन्दी विकिपीडिया पर [[en:User:Polygnotus/DuplicateReferences]] इसे प्रयोग कर सकते है? [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 10:12, 28 सितंबर 2026 (UTC) == [[राहुल शर्मा (किसान नेता)]] पृष्ठ को पुनर्स्थापित करने हेतु अनुरोध == नमस्ते [[सदस्य:Max|Max]] जी, आपने हाल ही में [[राहुल शर्मा (किसान नेता)]] पृष्ठ को 'व4 (साफ़ धोखा)' के आधार पर हटाया है। आपसे सविनय निवेदन है कि कृपया इस निर्णय पर पुनर्विचार करें: 1. वार्ता पृष्ठ पर पूर्व चर्चा: पृष्ठ पर व4 टैग लगाने वाले समीक्षक [[सदस्य:RJ Raawat|RJ Raawat]] जी से वार्ता पृष्ठ पर विस्तृत चर्चा हुई थी, जिसमें उन्होंने स्वयं यह माना था कि यह कोई मनगढ़ंत लेख नहीं है और संदर्भों को दुरुस्त करने का सुझाव दिया था। 2. राष्ट्रीय मुख्यधारा मीडिया संदर्भ: उनके सुझाव के अनुसार लेख में देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र दैनिक जागरण के दो महत्वपूर्ण संस्करणों के प्रामाणिक संदर्भ जोड़े जा चुके थे: * दैनिक जागरण (16 जुलाई 2026, जागरण सिटी रुड़की, पृष्ठ 3): भाकियू (चढ़ूनी) के जिलाध्यक्ष के रूप में राहुल शर्मा के नेतृत्व में भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में निकाली गई बाइक रैली, एसडीएम को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन और उनके वक्तव्य की सचित्र मुख्य खबर। * दैनिक जागरण (10 जून 2026, हरिद्वार संस्करण): हरिद्वार के वीआईपी घाट पर आयोजित राष्ट्रीय किसान महाकुंभ एवं चिंतन शिविर में सत्र की अध्यक्षता का विवरण। 3. स्वतंत्र वीडियो कवरेज: इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय समाचार चैनल Star News Plus Live (यूट्यूब आईडी: TGnUDmHIXTg) एवं Nation TV Bharat (यूट्यूब आईडी: CEs1pfmA80c) पर उनकी जिला अध्यक्ष नियुक्ति एवं रुड़की तहसील ज्ञापन के स्वतंत्र समाचार उपलब्ध हैं। अतः यह पृष्ठ किसी भी प्रकार से 'व4 (साफ़ धोखा)' के मापदंड में नहीं आता है। आपसे विनम्र अनुरोध है कि इस पृष्ठ एवं इसके वार्ता पृष्ठ को पुनर्स्थापित (Restore / Undelete) करने की कृपा करें। सधन्यवाद! [[विशेष:योगदान/~2026-51787-23|~2026-51787-23]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-51787-23|वार्ता]]) 15:42, 28 सितंबर 2026 (UTC) == केवल कुमार (संगीतकार) पृष्ठ की पुनर्स्थापना/मसौदा समीक्षा हेतु अनुरोध == नमस्कार Max जी, “केवल कुमार (संगीतकार)” पृष्ठ पूर्व में साफ़ प्रचार/Spam के आधार पर हटाया गया था। पुराने लेख को पुनः बनाने के बजाय मैंने तटस्थ एवं तथ्यात्मक भाषा में विश्वसनीय संदर्भों के साथ नया मसौदा अपने सदस्य उपपृष्ठ [[सदस्य:Raghuvansham12/केवल कुमार (संगीतकार)]] पर तैयार किया है। मसौदे में यश भारती सम्मान, संगीत एवं लोकसंगीत संबंधी कार्य तथा फिल्म संगीत से संबंधित तथ्यों के लिए संदर्भ जोड़े गए हैं और प्रचारात्मक भाषा से बचने का प्रयास किया गया है। कृपया इस नए मसौदे की समीक्षा कर मार्गदर्शन देने का कष्ट करें कि क्या इसे मुख्य नामस्थान में “केवल कुमार (संगीतकार)” के रूप में पुनर्स्थापित/स्थानांतरित किया जा सकता है, अथवा इसमें किसी और सुधार या अतिरिक्त विश्वसनीय संदर्भ की आवश्यकता है। धन्यवाद। [[सदस्य:Raghuvansham12|Raghuvansham12]] ([[सदस्य वार्ता:Raghuvansham12|वार्ता]]) 07:07, 2 अक्टूबर 2026 (UTC) == मेरा नाम परिवर्तन == @[[सदस्य:Max|Max]] जी! इसमें अभी भी पूर्ण नहीं हुआ ज़रा सुधार दें [https://mdwiki.org/wiki/User:AMAN_KUMAR 1], [https://mdwiki.toolforge.org/Translation_Dashboard/leaderboard.php?get=users&user=AMAN%20KUMAR 2], [https://fountain.toolforge.org/editathons/ 3] (इसमें बहुत सी प्रतियोगिताओं में) [https://hi.wikiscan.org/user/AMAN_KUMAR 4] और [https://wikieval.toolforge.org/ 5] (इसमें बहुत सी प्रतियोगिताओं में)[[User:विक्रम प्रताप|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:विक्रम प्रताप|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 20:08, 4 अक्टूबर 2026 (UTC) == अनुरोध: ऋष्मा ढिल्लों पै का पृष्ठ पुनर्स्थापित करने के संबंध में == @[[सदस्य:Max|Max]], मैं अनुरोध करना चाहता हूँ कि कृपया [[ऋष्मा ढिल्लों पै]] के लेख को हटाने के निर्णय की समीक्षा करें और इसे पुनर्स्थापित करने पर विचार करें। इस विषय पर स्वतंत्र द्वितीयक स्रोतों तथा प्रकाशित सामग्री की उपलब्धता के कारण मेरा मानना है कि लेख की उल्लेखनीयता का उचित मूल्यांकन किया जाना चाहिए। यदि लेख की सामग्री या शैली में कोई समस्या थी, तो उसे सुधारकर तटस्थ और विश्वकोशीय बनाया जा सकता है। कृपया लेख को पुनर्स्थापित करने पर विचार करें, ताकि इसकी सामग्री और संदर्भों की समीक्षा के बाद निर्णय लिया जा सके। धन्यवाद। [[सदस्य:LegacyWiki|LegacyWiki]] ([[सदस्य वार्ता:LegacyWiki|वार्ता]]) 16:27, 11 अक्टूबर 2026 (UTC) == नमस्ते == @[[सदस्य:Max|Max]] जी आप अभी ऑनलाइन है? एक प्रश्न था[[User:विक्रम प्रताप|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:विक्रम प्रताप|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 17:52, 14 अक्टूबर 2026 (UTC) :पूछना है तो सीधे पूछ लीजिए, पूछने के लिए मत पूछिए। और किसी सदस्य के वार्ता पृष्ठ पर उसी को पिंग करने का भी कोई मतलब नहीं है। [[सदस्य:Max|Max]] ([[सदस्य वार्ता:Max|वार्ता]]) 17:57, 14 अक्टूबर 2026 (UTC) : जी मैं इसके [[सदस्य:विक्रम प्रताप/AutoWikiLinker.js]] बारे में पूछना चाहता हूँ इसमें कितने सेकंड की देरी रखूँ? और bot खाते की आवश्यकता है?[[User:विक्रम प्रताप|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:विक्रम प्रताप|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 18:01, 14 अक्टूबर 2026 (UTC) ::अभी सोने जा रहा हूँ, कल जवाब देता हूँ। [[सदस्य:Max|Max]] ([[सदस्य वार्ता:Max|वार्ता]]) 18:05, 14 अक्टूबर 2026 (UTC) : जी! अभी भी प्रतीक्षा में हूँ।[[User:विक्रम प्रताप|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:विक्रम प्रताप|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 15:43, 15 अक्टूबर 2026 (UTC) ::यह स्क्रिप्ट AI से लिखी हुई लग रही है। मेरे पास अभी इतना समय नहीं है कि मैं इसका कोड पढ़कर समझ सकूँ, इसलिए इसे चलाने से पहले यह देख लेना चाहिए कि जिन पृष्ठों पर श्रेणियाँ पहले से लगी हुई हैं, वहाँ यह उन्हें दोबारा तो नहीं जोड़ रही और नई श्रेणियाँ सही जगह पर ही जोड़ रही है या नहीं। बिना जाँचे ऐसी स्क्रिप्ट इस्तेमाल करने की सलाह मैं नहीं दूँगा। साथ ही, आप जिस रफ़्तार से इससे संपादन कर रहे हैं, उससे हाल के बदलावों की सूची आपके संपादनों से भर जाएगी और दूसरे संपादनों की गश्त करने में परेशानी होगी। [[सदस्य:Max|Max]] ([[सदस्य वार्ता:Max|वार्ता]]) 16:09, 15 अक्टूबर 2026 (UTC) : जी! मैं अभी 10 परीक्षण संपादन करके दिखा सकता हूँ रफ़्तार 8 सेकंड रखूँगा और यदि उचित लगे तो bot खाता स्वीकृत कर दें[[User:विक्रम प्रताप|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:विक्रम प्रताप|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 16:13, 15 अक्टूबर 2026 (UTC) ::बॉट अधिकारों के लिए आपको बॉट अनुमोदन पृष्ठ पर अनुरोध करना होगा। मैं इसमें आपकी कोई खास मदद नहीं कर पाऊँगा, लेकिन समय मिला तो आपके अनुरोध की जाँच करने में मदद करने की कोशिश कर सकता हूँ। आपको यह भी देखना होगा कि समुदाय के दूसरे सदस्य ऐसे बॉट की ज़रूरत समझते हैं या नहीं। [[सदस्य:Max|Max]] ([[सदस्य वार्ता:Max|वार्ता]]) 16:17, 15 अक्टूबर 2026 (UTC) : इसके साथ ही दो और टूल है :# [[सदस्य:विक्रम प्रताप/DuplicateReferences.js]] :# [[सदस्य:विक्रम प्रताप/DupRefFixer.js]] : इनके परीक्षण भी कर सकता हूँ यदि अनुमति दें[[User:विक्रम प्रताप|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:विक्रम प्रताप|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 16:15, 15 अक्टूबर 2026 (UTC) == लेख पुनस्थापन (Userfy) हेतु अनुरोध == <nowiki>नमस्ते Max जी, मैंने आज 'नदीम कुरैशी' नाम से एक लेख बनाया था, जिसे 'साफ़ प्रचार' (व7) के तहत हटा दिया गया है। मैं विकिपीडिया पर बिल्कुल नया उपयोगकर्ता हूँ और अभी नियमों को सीख रहा हूँ। क्या आप कृपया इस हटाए गए लेख की सामग्री को मेरे 'ड्राफ्ट स्पेस' (Draft) में स्थानांतरित कर सकते हैं? मैं इसमें आवश्यक सुधार करूँगा और विश्वसनीय समाचार पत्रों के संदर्भ जोड़ूँगा। धन्यवाद। ~~~~</nowiki> [[सदस्य:Nadeem Qureshi1|Nadeem Qureshi1]] ([[सदस्य वार्ता:Nadeem Qureshi1|वार्ता]]) 18:31, 14 अक्टूबर 2026 (UTC) == एक अनुरोध == नमस्ते Max जी, मैंने अपना [[:सदस्य:Shaan Sengupta|उपयोगकर्ता पृष्ठ]] हटाने का अनुरोध किया है। आपसे यहाँ संपर्क करने के लिए क्षमा चाहता हूँ, लेकिन अगर आप इसे हटाने की प्रक्रिया पूरी कर दें तो बहुत अच्छा होगा। मैं हिंदी विकिपीडिया पर एक सक्रिय सदस्य बनने और अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देने के बारे में सोच रहा हूँ। इसी क्रम में वर्तमान पृष्ठ के डिलीट हो जाने के बाद मैं एक नया पृष्ठ बना कर अपनी पारी की शुरुआत करूँगा। आपका बहुत बहुत धन्यवाद। '''[[User:Shaan Sengupta|<span style="text-shadow:grey 1px 1px 1px;"><span style="color:#FF7518">शान सेनगुप्ता</span></span>]]<sup>[[User talk:Shaan Sengupta|<span style="text-shadow:grey 1px 1px 1px;"><i style="color:#FF7518">वार्ता</i></span>]]</sup>''' 13:33, 16 अक्टूबर 2026 (UTC) oh2samrpadlkjwkd482s1k09h2v7kdj कृषि पारितंत्र 0 1308358 6630262 5313240 2026-10-16T16:21:46Z SM7 89247 शीघ्र हटाने का अनुरोध ( मापदंड:[[वि:शीह#व2|शीह व2]]) 6630262 wikitext text/x-wiki {{db-test}} {{स्रोतहीन|date=सितंबर 2021}} खड़ी फसल अर्थ. किसी विशेष समय में जीवित पदार्थ का द्रव्यमान ts8xvxs06vqf25on0ajjbuhfkumsyy4 ताल, रतलाम 0 1327964 6630432 5622498 2026-10-17T11:55:57Z SAGAR SURYAVANSHI JAITHAL 938876 /* इन्हें भी देखें */ कड़ियाँ लगाई इन्हें भी देखें अनुभाग में 6630432 wikitext text/x-wiki {{Infobox settlement |name = ताल |other_name = Tal |settlement_type = |image = |image_caption = |pushpin_label = ताल |pushpin_map = India Madhya Pradesh |coordinates = {{coord|23.72|75.38|display=inline, title}} |pushpin_map_caption = मध्य प्रदेश में स्थिति |subdivision_type = देश |subdivision_name = {{IND}} |subdivision_type1 = [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|प्रान्त]] |subdivision_name1 = [[मध्य प्रदेश]] |subdivision_type2 = [[भारत के ज़िले|ज़िला]] |subdivision_name2 = [[रतलाम ज़िला]] |elevation_m = |population_total = 14913 |population_as_of = 2011 |population_rank = |population_density_km2 = auto |demographics_type1 = भाषाएँ |demographics1_title1= प्रचलित |demographics1_info1= [[हिन्दी]] |timezone1 = [[भारतीय मानक समय]] |utc_offset1 = +5:30 |postal_code_type = [[पिनकोड]] |postal_code = |area_code_type = दूरभाष कोड |area_code = |registration_plate = |website = }} '''ताल''' (Tal) [[भारत]] के [[मध्य प्रदेश]] राज्य के [[रतलाम ज़िले]] में स्थित एक नगर है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=X6XNCwAAQBAJ Inde du Nord: Madhya Pradesh et Chhattisgarh] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190703183559/https://books.google.com/books?id=X6XNCwAAQBAJ |date=3 जुलाई 2019 }}," Lonely Planet, 2016, ISBN 9782816159172</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=u6VB9_CrsfoC Tourism in the Economy of Madhya Pradesh]," Rajiv Dube, Daya Publishing House, 1987, ISBN 9788170350293</ref> == स्थापना व नामोत्पत्ति == ताल की स्थापना सन् 1243 में राजा तरिया भील ने करी थी। मान्यता है कि यहाँ एक बड़ा ताल (जलाशय) हुआ करता था और उसी को भरकर नगर बसाया गया, जिस से इसका नाम पड़ा। == इन्हें भी देखें == * [[रतलाम ज़िला]] * [[रतलाम]] * [[बड़नगर]] * [[उज्जैन]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:मध्य प्रदेश के शहर]] [[श्रेणी:रतलाम ज़िला]] [[श्रेणी:रतलाम ज़िले के नगर]] a7fop70j8c85cfiabuy1d5fc3xok5se 6630433 6630432 2026-10-17T11:58:41Z SAGAR SURYAVANSHI JAITHAL 938876 छोटा सा सुधार किया। 6630433 wikitext text/x-wiki {{Infobox settlement |name = ताल |other_name = Tal |settlement_type = |image = |image_caption = |pushpin_label = ताल |pushpin_map = India Madhya Pradesh |coordinates = {{coord|23.72|75.38|display=inline, title}} |pushpin_map_caption = मध्य प्रदेश में स्थिति |subdivision_type = देश |subdivision_name = {{IND}} |subdivision_type1 = [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|प्रान्त]] |subdivision_name1 = [[मध्य प्रदेश]] |subdivision_type2 = [[भारत के ज़िले|ज़िला]] |subdivision_name2 = [[रतलाम ज़िला]] |elevation_m = |population_total = 14913 |population_as_of = 2011 |population_rank = |population_density_km2 = auto |demographics_type1 = भाषाएँ |demographics1_title1= प्रचलित |demographics1_info1= [[हिन्दी]] |timezone1 = [[भारतीय मानक समय]] |utc_offset1 = +5:30 |postal_code_type = [[पिनकोड]] |postal_code = |area_code_type = दूरभाष कोड |area_code = |registration_plate = |website = }} '''ताल''' (Tal) [[भारत]] के [[मध्य प्रदेश]] राज्य के [[रतलाम ज़िले]] में स्थित एक नगर 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वार्ता:Snsjsjsjsj]] पर स्थानांतरित किया: "[[Special:CentralAuth/Surj.krr|Surj.krr]]" का नाम "[[Special:CentralAuth/Snsjsjsjsj|Snsjsjsjsj]]" करते समय पृष्ठ स्वतः स्थानांतरित हुआ 5653271 wikitext text/x-wiki {{साँचा:सहायता|realName=|name=Surj.krr}} -- [[सदस्य:नया सदस्य सन्देश|नया सदस्य सन्देश]] ([[सदस्य वार्ता:नया सदस्य सन्देश|वार्ता]]) 15:50, 1 अक्टूबर 2022 (UTC) l53hy9j49fy116f7cdg6rf141kiutz3 छोटू महाराज सिनेमा 0 1405284 6630405 6435322 2026-10-17T10:12:45Z ~2026-55680-99 954185 Updated the numbers because it has increased 6630405 wikitext text/x-wiki '''छोटू महाराज सिने कैफे''' 'डोम शेप' के सिनेमाघर है।<ref>{{cite web|url=https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/chhotu-maharaj-will-become-the-center-of-attraction-for-the-city-ticket-is-also-very-cheap-130383330.html|title=पटना सिटी में 'डोम शेप' के पहले सिनेमाघर का उद्घाटन:'छोटू महाराज' बनेगा शहर के लिए आकर्षण का केंद्र, टिकट भी है काफी सस्ता}}</ref> 'के सेरा सेरा' ने नया प्रयोग करते हुए 'डोम शेप' के सिनेमाघर बनाई है।<ref>{{cite web|url=https://www.newindianexpress.com/states/telangana/2022/jun/05/step-aside-expensive-multiplexes-chhotu-maharaj-is-here-to-entertain-jagtial-2461992.html|title=Step aside ‘expensive’ multiplexes, ‘Chhotu Maharaj’ is here to entertain Jagtial}}</ref> [[भारत]] भर में 9000 छोटू महाराज सिनेमा हॉल खोलने की योजना बनाई है। इसमें से 650 + छोटू महाराज सिनेमा Bharat में खोले जाएंगे। 'के सेरा सेरा' मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र की अग्रणी कंपनी है, जो फिल्म निर्माण, फिल्म वितरण और फ़िल्म के प्रदर्शन में सक्रिय रहा है।<ref>{{cite web|url=https://www.newsnationtv.com/states/bihar/first-chhotu-maharaj-cine-cafe-opened-in-patna-know-what-is-specialty-of-cinema-hall-308721.html|title=पटना में खुला पहला 'छोटू महाराज' सिने कैफे, जानिए क्या है सिनेमा हॉल की खासियत}}</ref> 650 से अधिक पार्टनर्स ने पूरे देश में छोटू महाराज के साथ फ्रेंचाइजी साइन किए हैं। छोटू महाराज सिनेमा भारत की सबसे तेजी से बढ़ती सिनेमा श्रृंखला है, छोटू महाराज सिंगल स्क्रीन डोम थियेटर में इसके 40 फीट वाले सिने कैफे में 100 लोगों के बैठने की क्षमता और इसके 50 फीट सिने कैफे में 150 सीटों की क्षमता है। अपनी विशेषताओं के साथ इग्लू डोम स्ट्रक्चर्ड थियेटर का आकार किसी भी शहर के लिए आकर्षण का केंद्र होता है। इसके टिकट की कीमत भी 200, 150 और 112 रुपया रखा गया है। विशेष रूप से इसकी 2 तरह की स्क्रीन की वजह से यह थिएटर के किसी भी एंगल से देखने का अधिक आरामदायक अनुभव प्रदान करता है। इसकी संरचना मजबूत और ठोस सामग्री से की गई है जो दर्शकों की सुरक्षा के लिए इसे और अधिक विश्वसनीय बनाती है। इस थिएटर को सिर्फ 15-20 दिनों में इंस्टॉल किया जा सकता है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर आसानी से स्थानांतरित भी किया जा सकता है। इसमें किफायती दाम पर दर्शकों के लिए भोजन भी उपलब्ध किया जाता है। कंपनी ने सरकार, सरकार राज, पार्टनर, गोलमाल, अब तक छप्पन जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों का निर्माण किया है और 100 से अधिक ब्लॉकबस्टर फिल्में वितरित किया हैं। के सेरा सेरा भारत के सबसे बड़े डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर्स में से एक है। इसकी तकनीक का उपयोग दुनिया में 1800 से अधिक सिनेमा पार्टनर्स और भारत में 800 से अधिक सिनेमा पार्टनर्स द्वारा किया जाता है। के सेरा सेरा हर साल लगभग 1000 से अधिक रीजनल और [[हिन्दी सिनेमा|बॉलीवुड]] कंटेंट की प्रोसेसिंग करता है। के सेरा सेरा भारतीय सिनेमा इंडस्ट्री में एचडी तकनीक लाने वाली पहली कंपनी थी। == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची|2}} [[श्रेणी:सिनेमाघर]] [[श्रेणी:सिनेमा]] [[श्रेणी:भारत के फ़िल्म वितरक]] 69wmoi27gq6hub0lsmojc804dr1b2ao 6630410 6630405 2026-10-17T10:15:32Z K Sera Sera Private Limited 954179 update hua hai 6630410 wikitext text/x-wiki '''छोटू महाराज सिने कैफे''' 'डोम शेप' के सिनेमाघर है।<ref>{{cite web|url=https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/chhotu-maharaj-will-become-the-center-of-attraction-for-the-city-ticket-is-also-very-cheap-130383330.html|title=पटना सिटी में 'डोम शेप' के पहले सिनेमाघर का उद्घाटन:'छोटू महाराज' बनेगा शहर के लिए आकर्षण का केंद्र, टिकट भी है काफी सस्ता}}</ref> 'के सेरा सेरा' ने नया प्रयोग करते हुए 'डोम शेप' के सिनेमाघर बनाई है।<ref>{{cite web|url=https://www.newindianexpress.com/states/telangana/2022/jun/05/step-aside-expensive-multiplexes-chhotu-maharaj-is-here-to-entertain-jagtial-2461992.html|title=Step aside ‘expensive’ multiplexes, ‘Chhotu Maharaj’ is here to entertain Jagtial}}</ref> [[भारत]] भर में 9000 छोटू महाराज सिनेमा हॉल खोलने की योजना बनाई है। इसमें से 9000 छोटू महाराज सिनेमा Bharat में खोले जाएंगे। 'के सेरा सेरा' मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र की अग्रणी कंपनी है, जो फिल्म निर्माण, फिल्म वितरण और फ़िल्म के प्रदर्शन में सक्रिय रहा है।<ref>{{cite web|url=https://www.newsnationtv.com/states/bihar/first-chhotu-maharaj-cine-cafe-opened-in-patna-know-what-is-specialty-of-cinema-hall-308721.html|title=पटना में खुला पहला 'छोटू महाराज' सिने कैफे, जानिए क्या है सिनेमा हॉल की खासियत}}</ref> 650 से अधिक पार्टनर्स ने पूरे देश में छोटू महाराज के साथ फ्रेंचाइजी साइन किए हैं। छोटू महाराज सिनेमा भारत की सबसे तेजी से बढ़ती सिनेमा श्रृंखला है, छोटू महाराज सिंगल स्क्रीन डोम थियेटर में इसके 40 फीट वाले सिने कैफे में 100 लोगों के बैठने की क्षमता और इसके 50 फीट सिने कैफे में 150 सीटों की क्षमता है। अपनी विशेषताओं के साथ इग्लू डोम स्ट्रक्चर्ड थियेटर का आकार किसी भी शहर के लिए आकर्षण का केंद्र होता है। इसके टिकट की कीमत भी 200, 150 और 112 रुपया रखा गया है। विशेष रूप से इसकी 2 तरह की स्क्रीन की वजह से यह थिएटर के किसी भी एंगल से देखने का अधिक आरामदायक अनुभव प्रदान करता है। इसकी संरचना मजबूत और ठोस सामग्री से की गई है जो दर्शकों की सुरक्षा के लिए इसे और अधिक विश्वसनीय बनाती है। इस थिएटर को सिर्फ 15-20 दिनों में इंस्टॉल किया जा सकता है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर आसानी से स्थानांतरित भी किया जा सकता है। इसमें किफायती दाम पर दर्शकों के लिए भोजन भी उपलब्ध किया जाता है। कंपनी ने सरकार, सरकार राज, पार्टनर, गोलमाल, अब तक छप्पन जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों का निर्माण किया है और 100 से अधिक ब्लॉकबस्टर फिल्में वितरित किया हैं। के सेरा सेरा भारत के सबसे बड़े डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर्स में से एक है। इसकी तकनीक का उपयोग दुनिया में 1800 से अधिक सिनेमा पार्टनर्स और भारत में 800 से अधिक सिनेमा पार्टनर्स द्वारा किया जाता है। के सेरा सेरा हर साल लगभग 1000 से अधिक रीजनल और [[हिन्दी सिनेमा|बॉलीवुड]] कंटेंट की प्रोसेसिंग करता है। के सेरा सेरा भारतीय सिनेमा इंडस्ट्री में एचडी तकनीक लाने वाली पहली कंपनी थी। == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची|2}} [[श्रेणी:सिनेमाघर]] [[श्रेणी:सिनेमा]] [[श्रेणी:भारत के फ़िल्म वितरक]] hko2fzd1fxhzhrenqllzo6rqy3cgjm0 साँचा:जालौर जिले के मंदिर 10 1405498 6630399 5669675 2026-10-17T10:06:21Z SparrowQ 86379 कानीवाड़ा हनुमान मंदिर added 6630399 wikitext text/x-wiki {{Navbox|name=जालौर जिला|title=[[जालौर जिला|जालौर जिले]] के मंदिर और तीर्थ स्थल|state={{{state|autocollapse}}}|listclass=hlist|groupstyle=line-height:1.1em; |group1=जालौर जिले के मंदिर |list1=[[खेतलाजी मंदिर सियाणा]] {{*}} [[ढब्बावाली माता मंदिर, खासरवी]] {{*}} [[निम्बाजा माता कुलदेवी]] {{*}} [[सुंधा माता मंदिर]] {{*}} [[कानीवाड़ा हनुमान मंदिर]] {{*}} जहाज मंदिर {{*}} सिरे मंदिर {{*}} माँ आशापुरा का मंदिर {{*}} फताजी का मंदिर {{*}} आपेश्वर महादेव मन्दिर {{*}} वराह श्‍याम का मंदिर {{*}} सूर्य मन्दिर |group2=जालौर ज़िले के तीर्थ स्थल |list2= श्री सुवर्णगिरी तीर्थ {{*}} श्री उमेदपुर तीर्थ {{*}} तीर्थन्द्रनगर {{*}} नन्‍दीश्‍वर तीर्थ }} ej9ow149p8kp2bc1r4400h6ps2j2c0r डेंटल क्रीम 0 1416620 6630286 5708785 2026-10-16T17:58:41Z CommonsDelinker 743 "Red-Tooth-Powder.JPG" को हटाया। इसे कॉमन्स से [[commons:User:CptViraj|CptViraj]] ने हटा दिया है। कारण: [[:c:Commons:Deletion requests/File:Red-Tooth-Powder.JPG|]] 6630286 wikitext text/x-wiki '''डेंटिफ्रीज़''' सहित '''टूथपाउडर''' और '''टूथपेस्ट''', प्राकृतिक दांतों को साफ करने और चमकाने के लिए टूथब्रश के साथ उपयोग किए जाने वाले एजेंट हैं। उन्हें पेस्ट, पाउडर, जेल या तरल रूप में आपूर्ति की जाती है। पिछले कुछ वर्षों में कई दंत उत्पादों का उत्पादन किया गया है, कुछ उत्पादों को बेचने के लिए [[विपणन|मार्केटिंग]] रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जैसे कि [[सफ़ेद|व्हाइटनिंग]] क्षमताओं की पेशकश करना होता है, [[दांत|दंत चिकित्सकों]] द्वारा अनुशंसित सबसे आवश्यक डेंटिफ्रीज़ टूथपेस्ट है जिसका उपयोग भोजन के मलबे और [[दन्तीय चकत्ता|दंत पट्टिका]] को हटाने में मदद करने के लिए [[दाँत का बुरुश|टूथब्रश]] के साथ किया जाता है। [[दन्तमंजन|टूथपेस्ट]] के लिए डेंटिफ्रीस भी [[फ्रेंच]] शब्द है। [[File:PolvoDentrifrico.JPG|right|thumb|upright=1|म्यूजियो डेल ओब्जेटो डेल ओब्जेटो के स्थायी संग्रह से बोटिका इटर्बाइड ब्रांड टूथ पाउडर (20वीं सदी की शुरुआत, मेक्सिको)]] ==प्रकार== ===दन्तमंजन=== {{मुख्य|दन्तमंजन}} दन्तमंजन एक डेंटिफ्रीज़ है जिसका उपयोग [[दाँत का बुरुश|टूथब्रश]] के साथ मिलकर मौखिक स्वच्छता बनाए रखने में मदद के लिए किया जाता है। आवश्यक घटक एक अपघर्षक, बाइंडर, सर्फेक्टेंट और ह्यूमेक्टेंट हैं। अन्य सामग्री का भी उपयोग किया जाता है। पेस्ट का मुख्य उद्देश्य मलबे और पट्टिका को हटाने में मदद करना है, जिसमें कुछ सहायक कार्यों जैसे कि सांस की ताजगी और दांतों को सफेद करने के लिए विपणन किया जाता है। ===दन्त पाउडर=== रोमन लोगों के बीच ऐतिहासिक रूप से दन्त पाउडर का इस्तेमाल दांतों को साफ करने और सफेद करने, ढीले होने पर उन्हें ठीक करने, मसूड़ों को मजबूत करने और दांत दर्द को कम करने के लिए किया जाता था। <ref name="NH-xxviii.49" /><ref name="NH-xxxi.46" /> उन्होंने कई प्रकार के पदार्थों से टूथ पाउडर बनाया, जैसे कि कुछ जानवरों की हड्डियाँ, खुर और सींग; <ref name=NH-xxviii.49>{{cite book | author = Pliny the Elder | title = The Natural History | others = Translated by John Bostock and H.T. Riley | location = London | publisher = Taylor and Francis | year = 1855 | chapter = xxviii.49—Remedies for Tooth-ache| chapter-url = https://www.perseus.tufts.edu/hopper/text?doc=Perseus%3Atext%3A1999.02.0137%3Abook%3D28%3Achapter%3D49}}</ref>केकड़े; सीप<ref name=NH-xxxii.21>{{cite book | author = Pliny the Elder | title = The Natural History | chapter = xxxii.21.(6.)—The Various Kinds of Oysters - Fifty-eight Remedies and Observations| chapter-url = https://www.perseus.tufts.edu/hopper/text?doc=Perseus%3Atext%3A1999.02.0137%3Abook%3D32%3Achapter%3D21}}</ref>और म्यूरेक्स के गोले; और अंडे के छिलके। इन सामग्रियों को एक महीन पाउडर में बदल दिया गया था, कभी-कभी पहले जलाए जाने के बाद किया जाता था।<ref name=NH-xxviii.49 /><ref name=NH-xxxii.21 /> कुछ संस्करणों में शहद,<ref name=NH-xxxii.21 /><ref name=NH-xxxi.46>{{cite book | author = Pliny the Elder | title = The Natural History | chapter = xxxi.46.(10.)—The Various Kinds of Nitrum | chapter-url = https://www.perseus.tufts.edu/hopper/text?doc=Perseus%3Atext%3A1999.02.0137%3Abook%3D31%3Achapter%3D46}}</ref> पिसी हुई लोहबान, नाइट्र,<ref name=NH-xxxvi.42>{{cite book | author = Pliny the Elder | title = The Natural History | chapter = xxxvi. 42.—PUMICE; NINE REMEDIES | chapter-url = https://www.perseus.tufts.edu/hopper/text?doc=Perseus%3Atext%3A1999.02.0137%3Abook%3D36%3Achapter%3D42}}</ref> नमक,<ref>{{cite book | first = William | last = Smith, D.C.L., LL.D. | title = A Dictionary of Greek and Roman Antiquities, art. Dentifricium | publisher = John Murray | location = London | year = 1875 | url = https://penelope.uchicago.edu/Thayer/E/Roman/Texts/secondary/SMIGRA*/Dentifricium.html}}</ref>और हार्टशॉर्न शामिल थे, जिन्हें प्रारंभिक पाउडरिंग प्रक्रिया के बाद जोड़ा जाएगा। प्लिनी द एल्डर ने दांत साफ करने के लिए घिसे हुए झांवे के उपयोग की सूचना दी। संभवतः रोमनों के बीच दांतों की देखभाल का सबसे प्रसिद्ध उल्लेख एपुएलियस के एक पत्र में पाया जाता है, जो शिकायत करता है कि टूथ पाउडर का उपयोग करना शर्म की बात नहीं है, विशेष रूप से "स्पेन में पूरी तरह से प्रतिकारक चीजों की तुलना में।" एपुएलियस ने कैटुलस को यह कहते हुए उद्धृत किया कि वह "अपने दांतों और अपने लाल मसूड़ों को ब्रश करने के लिए" अपने स्वयं के मूत्र का उपयोग करेगा। 1924 तक, टूथ पाउडर के लिए डायटोमेसियस मिट्टी का खनन किया गया था।<ref>{{Cite journal| title = "Toothpowder Mountain" Built From Shells: Skeletons of Tiny Sea Urchins Piled Up on Bottom of Prehistoric Ocean Supply Industry with Valuable Rock | journal = Popular Mechanics | date = February 1924 | pages = 209–210 |url = https://books.google.com/books?id=JtsDAAAAMBAJ&pg=PA209}}</ref>आधुनिक समय में बेकिंग सोडा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला टूथ पाउडर रहा है। दांतों की सफाई के लिए लकड़ी का कोयला, ईंट और नमक जैसे पाउडर पदार्थों का उपयोग ऐतिहासिक रूप से भारत में, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक रूप से किया जाता रहा है।<ref name=":0">{{Cite book | url=https://books.google.com/books?id=HsS3DKe0eBAC&dq=brickpowder+tooth&pg=PA189| title=Rural Marketing| last=Dogra| first=Balram| date=2010| publisher=Tata McGraw-Hill Education| isbn=9780070660007| language=en}}</ref>आधुनिक टूथ पाउडर को टूथपेस्ट के लिए एक लागत प्रभावी विकल्प के रूप में स्थापित किया गया है, क्योंकि इसे बिना टूथब्रश के उपयोग के तर्जनी के साथ लगाया जा सकता है।<ref name=":0" /> ===माउथवॉश=== {{मुख्य|माउथवॉश}} माउथवॉश विभिन्न प्रकार की रचनाओं में आते हैं, कई बैक्टीरिया को मारने का दावा करते हैं जो पट्टिका बनाते हैं या सांसों को तरोताजा करते हैं।<ref>{{cite web | url = https://www.ada.org/en/member-center/oral-health-topics/mouthrinse | title = Mouthwash (Mouthrinse) | work = Oral Health Topics | author = Center for Scientific Information, ADA Science Institute | publisher = [[American Dental Association]] | date = 13 September 2017 | access-date = 19 March 2018}}</ref><ref>{{cite web | url = https://oxyfresh.com/5-date-tips-change-game/ | title = 5 Date Tips that Change the Game | date = | work = Life's Smart Choices Blog | publisher = Oxyfresh | access-date = 19 March 2018 | archive-date = 26 August 2018 | archive-url = https://web.archive.org/web/20180826122334/https://oxyfresh.com/5-date-tips-change-game/ | url-status = dead }}</ref>अपने मूल रूप में, उन्हें आमतौर पर ब्रश करने के बाद उपयोग करने की सलाह दी जाती है लेकिन कुछ निर्माता ब्रश करने से पहले धोने की सलाह देते हैं। चिकित्सकीय शोध ने सिफारिश की है कि माउथवॉश को ब्रश करने में सहायता के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए, न कि प्रतिस्थापन के रूप में, क्योंकि पट्टिका की चिपचिपी प्रतिरोधी प्रकृति इसे केवल रसायनों द्वारा सक्रिय रूप से हटाए जाने से रोकती है, और चिपचिपे प्रोटीन को भौतिक रूप से अलग करने की आवश्यकता होती है। ==सन्दर्भ== {{Reflist}} [[श्रेणी:दंत चिकित्सा]] [[श्रेणी:मौखिक स्वच्छता]] dofo95rkkfsp1d6ardwltx90mj3r3yx श्रीकृष्ण कीर्तन 0 1448730 6630315 6092320 2026-10-16T20:53:54Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.6 6630315 wikitext text/x-wiki '''श्रीकृष्ण कीर्तन काव्य''' ({{lang-as|শ্ৰীকৃষ্ণকীৰ্তন কাব্য}}, {{lang-bn|শ্রীকৃষ্ণকীর্তন কাব্য}}) [[चंडीदास|बरु चण्डीदास]] द्वारा लिखित एक ग्रामीण [[वैष्णव सम्प्रदाय|वैष्णव]] नाट है, जो [[कृष्ण]] और [[राधा]] की कहानी का वर्णन करती है। इस ग्रन्थ को [[चर्यापद|चर्यापदों]] के बाद लिखे जाने वाली, [[असमिया भाषा|असमिया]] एवं [[बंगाली भाषा|बांग्ला]] भाषाओं की सबसे महत्वपूर्ण रचनाओं मे से एक माना जाता है।<ref name="Saikia 1997 52">{{Harv|Saikia|1997|p=5}}</ref> अनुमान किया जाता है कि यह ग्रन्थ १४वी शताब्दी के प्रथमार्ध मे लिखी गयी थी, [[चैतन्य महाप्रभु]] के पेहले। == प्रकाशन का इतिहास == सन १९०९ मे बसन्त रंजन राय विद्वत्बल्लभ ने [[बाँकुड़ा जिला|बांकुरा]] के देवेन्द्रनाथ मुखोपाध्याय के गौशाला से इस ग्रन्थ के ''पुथि'' (हस्तलिपि) का उद्धार किया था। क्योंकि इस ग्रन्थ के पन्ने फटे हुए थे और इसके प्रथम तथा शेष पन्ने मिले ही नही थे, इस ग्रन्थ का वास्तव नाम जाना नही जा सका। हस्तलिपि के अंदर के पर्ची से यह पता चला कि इस हस्तलिपि को पेहले बिष्णुपुर के राजकीय ग्रन्थागार मे "श्री कृष्ण संदर्भ" नाम से संचय किया गया था। बाद मे १९१६ सन मे विद्वत्बल्लभ ने इसको सम्पादित कर वंगीय साहित्य परिषद के माध्यम से श्री कृष्ण कीर्तन के नाम से प्रकाशित किया। == मूल == श्री कृष्णकीर्तन लिखते समय बरु चण्डीदास विष्णु पुराण तथा लोककथाओं से प्रभावित हुए थे।<ref name="s12">Sen, Sukumar (1991, reprint 2007). ''Bangala Sahityer Itihas'', Vol.I, {{in lang|bn}}, Kolkata: Ananda Publishers, {{ISBN|81-7066-966-9}}, pp.120-154</ref> तदोपरि, वे जयदेव के गीतागोविंदं से भी प्रभावित हुए थे। पद्म पुराण, ब्रह्म वैवर्त पुराण तथा अन्य वैष्णव साहित्य का प्रभाव भी श्रीकृष्ण कीर्तन मे दिखता है। लिखनशैली उस समय के लोकसाहित्य से मेल खाती है। असमिया शब्द जैसे বাটে বাটে (बाटे बाटे), আছিলা (आसिला), আই (आइ), পেলাইয়া (पेलाइया) तथा असमिया लिपि के 'ৰ' (र) अक्षर का भी प्रयोग देखा जाता है। == अंतर्वस्तु == श्री कृष्ण कीर्तन मे ४१८ असमिया या बांग्ला भाषा के पद तथा १३३ संस्कृत भाषा के श्लोक है, जिसमे से २८ श्लोक दो बार उल्लिखित है। असमिया/ बांग्ला भाषा के ४१८ श्लोकों मे से ४०९ मे लेखक का नाम उल्लिखित है। इस कर्म को १३ खण्डों मे बांटा गया है: जन्म, तम्वुल (सुपारी, जिसे असम मे प्रेम का भेंट माना जाता है), दान, नौका, भार, वृंदावन, यमुना, बाण, बंशी और राधा विरह। आखरी खण्ड का नाम लेखक ने उल्लेख नही किया है।<ref name="s13">Sen, Sukumar (1991, reprint 2007). ''Bangala Sahityer Itihas'', Vol.I, {{in lang|bn}}, Kolkata: Ananda Publishers, {{ISBN|81-7066-966-9}}, pp.120-154</ref> यमुना खण्ड को तीन भागो मे विभक्त किया गया है: प्रथम कै कालिया दमन, दूसरे का नाम हस्तलिपि मे नही मिला था और तीसरा है हार खण्ड। दूसरे खण्ड का विषयवस्तु है राधा का वस्त्रहरण। भार खण्ड का भी एक उपखण्ड है: छत्त्र खण्ड। ग्रन्थ मे तीन मूल चरित्र है: कृष्ण, राधा और बदयी। चरित्रों के बीच मे वार्तालाप पायर और त्रिपदी पद्य मे हुए है, जिससे नाटकीय रस अधिक पूठता है। श्रीकृष्णकीर्तन काब्य का बार-बार उद्धृत मर्मस्पर्शी एक पद देखिये- :'' के ना बाँशि बाए बड़ाय़ि कालिनी नइ कूले। :'' के ना बाँशि बाए बड़ाय़ि ए गोठ गोकुले। :'' आकुल शरीर मोर बेयाकुल मन। :'' बाँशीर शबदेँ मो आउलाइलोँ बान्धन। :'' के ना बाँशि बाए बड़ायि से ना कोन जना। :'' दासी हुआँ तार पाए निशिबोँ आपना। :'' के ना बाँशि बाए बड़ायि चित्तेर हरिषे। :'' तार पाए बड़ायि मोँ कैलोँ कोन दोषे। :'' आझर झरए मोर नयनेर पाणी। :'' बाँशीर शबदेँ बड़ायि हारायिलोँ पराणी। == कहानी == श्रीकृष्ण कीर्तन की कहानी भागवत्पुराण पर आधारित नही है। यह कहानिया वास्तव मे लोक कथा का हिस्सा है जो कृष्ण और राधा के बीच कामुक कहानिया है, जिंहे ''धेमालि'' कहा जाता है।<ref name="s14">Sen, Sukumar (1991, reprint 2007). ''Bangala Sahityer Itihas'', Vol.I, {{in lang|bn}}, Kolkata: Ananda Publishers, {{ISBN|81-7066-966-9}}, pp.120-154</ref> इसके बावजूद बरु चण्डीदास ने श्रीकृष्ण कीर्तन मे वृहत्परिमाण मे नई चीजे योग किया, जो इस ग्रन्थ को मध्यकालीन असमिया और बांग्ला साहित्य के श्रेष्ठ कर्मों मे से एक बनाती है। == टिप्पणियाँ == {{Reflist}} * {{Cite book|title=Medieval Indian Literature: Assamese, Bengali and Dogri|last=Saikia|first=Nagen|publisher=Sahitya Akademi|year=1997|isbn=9788126003655|editor-last=Ayyappa Panicker|editor-first=K|volume=1|location=New Delhi|pages=3–20|chapter=Medieval Assamese Literature|chapter-url=https://books.google.com/books?id=KYLpvaKJIMEC&pg=PA3}} == बाहरी संबंध == * {{Cite book|title=Banglapedia: National Encyclopedia of Bangladesh|last=Bhowmik|first=Dulal|publisher=[[Asiatic Society of Bangladesh]]|year=2012|editor-last=Islam|editor-first=Sirajul|editor-link=Sirajul Islam|edition=Second|chapter=Srikrishnakirtan|editor-last2=Jamal|editor-first2=Ahmed A.|chapter-url=http://en.banglapedia.org/index.php?title=Srikrishnakirtan|archive-url=https://web.archive.org/web/20250413015749/https://en.banglapedia.org/index.php?title=Srikrishnakirtan|archive-date=13 अप्रैल 2025|access-date=14 अप्रैल 2023|url-status=dead}} [[श्रेणी:भारतीय संगीत पद्धतियाँ]] [[श्रेणी:वैष्णव सम्प्रदाय]] [[श्रेणी:बांग्ला साहित्य]] 9km1diphvviw7yz69qd2zmuqnalek9p गंगूबाई कोठेवाली 0 1461711 6630335 6416707 2026-10-17T03:43:39Z ~2026-55772-13 954117 /* */ 6630335 wikitext text/x-wiki {{Infobox person | name = गंगूबाई काठियावाड़ी | other_names = गंगूबाई काठियावाड़ी | image = Gangubai Harjeevandas.jpg | caption = गंगूबाई कोठेवाली, एक सामाजिक कार्यकर्ता, वेश्या और एक मैडम। | birth_name = गंगा हरजीवनदास | birth_date = 1939 | birth_place = [[काठियावाड़]], [[ब्रिटिश भारत]]<br />(आज का [[गुजरात]], भारत) | death_date = {{Death date|2008|9|8|df=y}}<ref>{{cite web|title=Gangubai's daughter speaks to outlook|url=https://www.youtube.com/watch?v=j8j0RfpPOuA |publisher=[[Outlook (Indian magazine)|Outlook]]|date= 3 March 2022|website=[[YouTube]]|access-date=31 March 2022|quote=See 0:22 onwards}}</ref> | death_place = [[मुंबई, महाराष्ट्र]], भारत | occupation = {{hlist|[[वेश्या]]|[[Pimp|मैडम]]}} | years_active = | known_for = | notable_works = }} गंगूबाई हरजीवनदास, <ref>{{cite book|title=The Oxford Hindi-English Dictionary|url=http://dsal.uchicago.edu/cgi-bin/app/mcgregor_query.py?page=719|last=McGregor|first=R. S.|author-link=R. S. McGregor|page=719|publisher=[[Oxford University Press]]|year=1993|website=[[Digital South Asia Library|DSAL]]}}</ref> जिसे गंगूबाई कोठेवाली <ref name="Names">{{cite news |last1=Jain |first1=Vaishali |title=Alia Bhatt's Gangubai Kathiawadi earns rave review from Aamir Khan's daughter Ira Khan; read here |url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/celebrities/alia-bhatt-s-gangubai-kathiawadi-earns-rave-review-from-aamir-khan-s-daughter-ira-khan-read-here-2022-05-02-773631 |access-date=23 May 2022 |work=India TV News |date=2 May 2022 |language=en}}</ref> या गंगूबाई काठियावाड़ी के नाम से जाना जाता है, <ref name="Names"/> एक भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता, वेश्या और 1960 के दशक के दौरान मुंबई के कमाठीपुरा इलाके में एक वेश्यालय की मैडम थीं। <ref>{{cite book|title=The Oxford Hindi-English Dictionary|url=http://dsal.uchicago.edu/cgi-bin/app/mcgregor_query.py?page=216|last=McGregor|first=R. S.|author-link=R. S. McGregor|page=216|publisher=[[Oxford University Press]]|year=1993|website=[[Digital South Asia Library|DSAL]]}}</ref> गंगूबाई ने यौनकर्मियों के अधिकारों और अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए काम किया।<ref>{{Cite news |last=Taneja |first=Parina |date=16 January 2020 |title=Who is Gangubai Kathiawadi, whose husband sold her at a brothel for Rs 500? |url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/bollywood/who-is-gangubai-kathiawadi-husband-sold-rs-500-alia-bhatt-sanjay-leela-bhansali-film-580029 |access-date=4 April 2022 |work=India TV News |language=en}}</ref> उसने धीरे-धीरे अपना वेश्यालय चलाना बंद कर दिया और व्यावसायिक यौनकर्मियों के अधिकारों की पैरवी करने के लिए भी जानी जाती है। <ref>{{Cite news |last=Shaikh |first=Zeeshan |date=23 February 2022 |title=Explained: Who was Gangubai Kathiawadi? Why is Alia Bhatt's film on her facing legal troubles? |url=https://indianexpress.com/article/explained/explained-gangubai-kathiawadi-film-legal-troubles-7782631/ |access-date=4 April 2022 |work=The Indian Express |language=en}}</ref> ==ज़िंदगी== घर से भागकर बंबई आने के बाद, उसके प्रेमी रमणिक लाल ने कम उम्र में ही उसे वेश्यावृत्ति के लिए बेच दिया था। वह अंडरवर्ल्ड कनेक्शन, पेडलिंग ड्रग्स के साथ शहर में एक प्रभावशाली दलाल होने के लिए कमाठीपुरा की मैडम के रूप में जानी जाने लगी। बाद में अपने जीवन में (संभवत: 1964 के आसपास), यौनकर्मियों की दुर्दशा पर चर्चा करने और उनकी जीवन स्थितियों में सुधार करने के लिए उन्होंने जवाहरलाल नेहरू से मुलाकात की। <ref>{{Cite web|url=https://www.desimartini.com/news/martini-shots/trending-top-list/know-gangubai-kothewali-the-legendary-brothel-madam-alia-bhatt-will-be-playing-in-slbs-next-article120431.htm|title=Know Gangubai Kothewali, The Legendary Brothel Madam Alia Bhatt Will Be Playing In SLB's Next|date=22 September 2019|website=Desimartini|language=en|access-date=21 January 2020|archive-date=23 जनवरी 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20220123053946/https://www.desimartini.com/news/martini-shots/trending-top-list/know-gangubai-kothewali-the-legendary-brothel-madam-alia-bhatt-will-be-playing-in-slbs-next-article120431.htm|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://hindi.thequint.com/entertainment/bollywood/gangubai-khothewali-sanjay-leela-bhansali-film-alia-bhatt|title=गंगूबाई कोठेवाली-पति ने ₹500 में बेचा था,भंसाली उनपर फिल्म बनाएंगे|date=25 September 2019|website=Quint Hindi|language=hi|access-date=21 January 2020|archive-date=24 अप्रैल 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210424184102/https://hindi.thequint.com/entertainment/bollywood/gangubai-khothewali-sanjay-leela-bhansali-film-alia-bhatt|url-status=dead}}</ref> लेकिन हमारे पास कहानी का कोई ठोस प्रमाण नहीं है, जैसा कि पत्रकार पम्बन मु प्रसंत ने बीबीसी तमिल में अपने लेख में लिखा है। <ref>{{Cite web |date=2022-03-08 |title=யார் இந்த கங்குபாய்? கணவனால் விற்கப்பட்ட 16 வயது பெண் மும்பையைக் கலக்கிய கதை |url=https://www.bbc.com/tamil/india-60652966 |access-date=2022-12-12 |website=BBC News தமிழ் |language=ta}}</ref> हुसैन जैदी द्वारा मुंबई की माफिया क्वींस (2011) में मुंबई को प्रभावित करने वाली तेरह महिलाओं के जीवन की जानकारी शामिल है। इसमें जैदी गंगूबाई के बारे में भी जानकारी देते हैं। इस हिसाब से गंगूबाई एक उच्च शिक्षित परिवार से थीं और उन पर फिल्मों में काम करने का जुनून सवार था और वह देव आनंद की प्रशंसक थीं। 16 साल की गंगूबाई और उनके पति 28 साल के रमणिक लाल मुंबई भाग गए और शादी कर ली। शादी के कुछ दिनों के भीतर, उसके पति ने उसे कुंटनखाना (वेश्यालय) में ₹1,000 में बेच दिया। अनिच्छा से, गंगूबाई ने वेश्या के रूप में काम करना शुरू कर दिया। कुछ ही समय में गंगूबाई कुछ कुंटनखानों (वेश्यालय) की मुखिया बन गईं। शौकत खान पठान नाम के एक गुंडे ने उसका आर्थिक और शारीरिक शोषण करना शुरू कर दिया। गंगूबाई तत्कालीन अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला के पास पठान की शिकायत करने गई थीं। लाला ने उन्हें मदद का आश्वासन दिया और बदले में उन्हें राखी बांधी। इसके बाद लाला ने शौकत खान को चेतावनी दी और मारपीट की। तब से, 1960 के दशक के दौरान करीम लाला की कथित बहन के रूप में गंगूबाई की प्रतिष्ठा बढ़ती गई। कमाठीपुरा में 1922 में स्थापित सेंट एंथोनी गर्ल्स हाई स्कूल ने "बुरे प्रभाव" वाले क्षेत्र को साफ करने के लिए एक अभियान शुरू किया। इसके चलते वेश्यालय को स्थानांतरित करने का आदेश दिया गया। गंगूबाई ने इसका कड़ा विरोध किया और प्रभावी रूप से तत्कालीन प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू के सामने अपना मामला प्रस्तुत किया और परिणामस्वरूप, वेश्यालय को स्थानांतरित नहीं किया गया। इस दौरान गंगूबाई वेश्यावृत्ति के धंधे में अनाथों और महिलाओं के विभिन्न मुद्दों के लिए भी काम कर रही थीं। गंगूबाई ने कई युवतियों की काउंसलिंग की और उन्हें वापस भेज दिया, जो फिल्मों में काम करने के लिए अपने घरों से भाग गई थीं और वेश्यावृत्ति में फंस गई थीं। इस कारण सभी लोग आदरपूर्वक गंगूबाई गंगा माँ (माँ) कहकर पुकारते थे। उनकी मृत्यु के बाद, उनकी तस्वीरें और मूर्तियां क्षेत्र के वेश्यालयों में स्थापित की गईं। ==लोकप्रिय संस्कृति में== उनकी जीवनी को 2011 की किताब, [[माफिया क्वींस ऑफ मुंबई]] में लेखक और खोजी पत्रकार हुसैन जैदी द्वारा प्रलेखित किया गया था। 2022 की भारतीय हिंदी भाषा की फिल्म [[गंगूबाई काठियावाड़ी]], गंगूबाई कोठेवाली के जीवन और जैदी की किताब के एक अध्याय पर आधारित है, और [[संजय लीला भंसाली]] द्वारा निर्देशित है, जिसमें अभिनेत्री [[आलिया भट्ट]] ने मुख्य भूमिका निभाई है। <ref>{{cite news|url=https://m.hindustantimes.com/bollywood/alia-bhatt-begins-shooting-for-gangubai-kathiawadi-shares-pic-of-her-trailer-look-what-santa-gave-me-this-year/story-B7SG8a3jfqx7n7cBzCzm6L_amp.html|title=Alia Bhatt begins shooting for Gangubai Kathiawadi, shares pic of her trailer:'Look what Santa gave me this year'|publisher=[[Hindustan Times]]|date=27 December 2019|access-date=27 December 2019|archive-date=27 दिसंबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191227122214/https://m.hindustantimes.com/bollywood/alia-bhatt-begins-shooting-for-gangubai-kathiawadi-shares-pic-of-her-trailer-look-what-santa-gave-me-this-year/story-B7SG8a3jfqx7n7cBzCzm6L_amp.html|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.vogue.in/whats-new/content/alia-bhatt-who-was-gangubai-kathiawadi-facts-bollywood-films-2020|title=Who was Gangubai Kathiawadi: The real woman behind Alia Bhatt's latest character|website=Vogue India|date=15 January 2020|language=en-IN|access-date=21 January 2020}}</ref> ==सन्दर्भ== [[श्रेणी:1939 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:१९७७ में निधन]] 5wntqhij1yksqjcghfwp6h4ciz99el8 सदस्य वार्ता:LLnyaX0117 3 1466054 6630257 5890023 2026-10-16T16:16:33Z Fathoms Below 716012 Fathoms Below ने पृष्ठ [[सदस्य वार्ता:XiaYZ2023]] को [[सदस्य वार्ता:LLnyaX0117]] पर स्थानांतरित किया: "[[Special:CentralAuth/XiaYZ2023|XiaYZ2023]]" का नाम "[[Special:CentralAuth/LLnyaX0117|LLnyaX0117]]" करते समय पृष्ठ स्वतः स्थानांतरित हुआ 5890023 wikitext text/x-wiki {{साँचा:सहायता|realName=|name=XiaYZ2023}} -- [[सदस्य:नया सदस्य सन्देश|नया सदस्य सन्देश]] ([[सदस्य वार्ता:नया सदस्य सन्देश|वार्ता]]) 14:23, 27 जून 2023 (UTC) s4z89sx8x0n202wp3y4ygf3ge3qxmbf श्रीलंका का उच्चायोग, नई दिल्ली 0 1474242 6630316 6600979 2026-10-16T21:01:58Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.6 6630316 wikitext text/x-wiki {{Infobox diplomatic mission |name = श्रीलंका का उच्चायोग, नई दिल्ली |high_commissioner = मिलिंदा मोरगोदा |address = 27, कौटिल्य मार्ग, राजनयिक परिक्षेत्र, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली, दिल्ली 110021 |coordinates = {{coord|28.6030008|77.1921834|display=inline}} |website = {{official website|https://www.slhcindia.org/}} }} श्रीलंका का नई दिल्ली में उच्चायोग भारत के लिए राजनयिक मिशन है।<ref>{{cite web|url=https://www.slhcindia.org/|title=Welcome to Sri Lankan High Commission in New Delhi, India|access-date=3 अगस्त 2023}}</ref> वर्तमान राजदूत मिलिंदा मोरगोदा हैं।<ref>{{cite web|url=https://www.slhcindia.org/index.php?option=com_content&view=article&id=368&Itemid=29|title=High Commissioner - Sri Lankan High Commission, New Delhi|access-date=3 अगस्त 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230927161427/https://slhcindia.org/index.php?option=com_content&view=article&id=368&Itemid=29|archive-date=27 सितंबर 2023|url-status=dead}}</ref> वर्तमान में, श्रीलंका मुंबई में महावाणिज्य दूतावास<ref>{{cite web|url=https://www.slhcindia.org/index.php?option=com_content&view=article&id=364&Itemid=28#:~:text=Consulate%20General%20of%20Sri%20Lanka%20in%20Mumbai|title=Welcome to Sri Lankan Consulate General in Mumbai, India|access-date=3 अगस्त 2023}}</ref> और [[श्रीलंका का उप उच्चायोग, चेन्नई|चेन्नई में उप उच्चायोग]]<ref>{{cite web|url=https://www.sldhcchennai.org/|title=Welcome to Sri Lankan Deputy High Commission in Chennai, India|access-date=3 अगस्त 2023|archive-date=3 अगस्त 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230803153622/https://www.sldhcchennai.org/|url-status=dead}}</ref> भी स्थापित किए हुए है। ==इतिहास== 1942 में श्रीलंका (तब "सीलोन") ने नई दिल्ली में एक प्रतिनिधि कार्यालय प्रारंभ किया, जिसे भारत के स्वतंत्रता के बाद दोबारा स्तापित कर, उच्चायोग में तब्दील किया गया। सर डी बी जयतिलके भारत में सीलोन के पहले प्रतिनिधि थे। हालांकि दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध आधिकारिक तौर पर 1948 से प्रारंभ हुए, लेकिन एक प्रतिनिधि कार्यालय 1942 से ही मौजूद था। 1953 में प्रतिनिधि कार्यालय को सम्पूर्ण रूप से उच्चायोग मे बदल दिया। उस समय, इमारत इंडोनेशिया और चीन के दूतावासों के बीच थी।<ref name="History">{{cite web|url=https://www.slhcindia.org/index.php?option=com_content&view=article&id=364&Itemid=28|title=History and Present - Sri Lankan High Commission, New Delhi|access-date=3 अगस्त 2023}}</ref> वर्तमान में, उच्चायोग चनक्यपुरी के कौटिल्य मार्ग के 3.917 एकड़ जमीन पर स्थित है।<ref name="History"/> == इन्हें भी देखें == * [[श्रीलंका का उप उच्चायोग, चेन्नई]] * [[भारत-श्रीलंका सम्बन्ध]] == सन्दर्भ == {{reflist}} ==बाहरी कड़ियाँ== * {{official|https://www.slhcindia.org/}} * {{facebook|SLHCinIndia}} * {{twitter|SLinIndia}} * [https://www.mumbai.mission.gov.lk मुंबई में श्रीलंका महावाणिज्य दूतावास] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20211018155621/http://www.mumbai.mission.gov.lk/ |date=18 अक्तूबर 2021 }} * [https://www.sldhcchennai.org/ चेन्नई में श्रीलंका उप उच्चायोग] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20230803153622/https://www.sldhcchennai.org/ |date=3 अगस्त 2023 }} {{भारत में राजनयिक मिशन}} [[श्रेणी:भारत में राजनयिक मिशन]] [[श्रेणी:नई दिल्ली में राजनयिक मिशन]] [[श्रेणी:श्रीलंका के राजनयिक मिशन]] mn3wxd3g9chhnkbdzkti5g2v228w5cr सदस्य:KairavChronicle 2 1474967 6630426 6582294 2026-10-17T11:29:49Z KairavChronicle 738456 नया काम अपडेट किया है 6630426 wikitext text/x-wiki कार्तिक पालीवाल भारत के जाने-माने सबसे युवा निर्माता और भारतीय फिल्म उद्योग के जाने-माने कास्टिंग डायरेक्टर हैं और लन्दन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के इंटरनेशनल प्रेसिडेंट है उन्होंने बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी, प्रेमानंद महाराज जी एवं हनुमान अंश की युवा प्रोड्यूसर अनुप्रिया नगर को हाल ही में लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्मानित किया है। उन्होंने हाल ही में प्राइड ऑफ नेशन महाराष्ट्र अवॉर्ड 2023 "इमर्जिंग प्रोड्यूसर ऑफ इंडिया" और स्टार एमिनेंस अवॉर्ड 2022 "यंगेस्ट प्रोड्यूसर ऑफ इंडिया" जीता है। उनका जन्म 14 अप्रैल 1997 को नई दिल्ली में हुआ था। वह भारतीय फिल्म अभिनेता, मॉडल, फोटोग्राफर, टेलीविजन व्यक्तित्व, निर्माता और निर्देशक के रूप में भी काम कर रहे हैं। उनके पास बॉलीवुड फिल्म उद्योग, टेलीविजन उद्योग के साथ-साथ हॉलीवुड उद्योग में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है, इसके अलावा उन्होंने उद्योग के लिए कई गाने भी बनाए हैं। वह इंडस्ट्री की एक जानी-मानी हस्ती हैं जो नई प्रतिभाओं को खोजने के लिए जाने जाते हैं। कार्तिक ने बॉलीवुड के साथ-साथ हॉलीवुड के कई शीर्ष अभिनेताओं और अभिनेत्रियों के साथ काम किया है और विभिन्न संघर्षरत अभिनेताओं की मदद की है और उन्हें एक मंच प्रदान किया है जहां वे आसानी से उद्योग में अपना करियर बना सकते हैं। mz2usoyxpb9gl0wdo9dpkn6ze49j7z3 विकल्प मेहता 0 1483530 6630349 6508510 2026-10-17T06:10:50Z चाहर धर्मेंद्र 703114 शीघ्र हटाने का अनुरोध ( मापदंड:[[वि:शीह#व7|शीह व7]]) 6630349 wikitext text/x-wiki {{db-spam}} [[श्रेणी:Articles with hCards]] {{Infobox Person|name=विकल्प मेहता|birth_date=12 दिसंबर 1989|birth_place=[[पाली]], [[राजस्थान]], [[भारत]]|राष्ट्रीयता=भारतीय|years active=2010 - वर्तमान|website=http://vikalpmehta.com/|occupation=मिमिक्री कलाकार}} '''विकल्प मेहता''' एक भारतीय मिमिक्री कलाकार हैं। उन्हें मुख्य रूप से बॉलीवुड अभिनेता [[अक्षय कुमार]] की नकल करने वाले और द कपिल शर्मा शो, कॉमेडी नाइट्स विद कपिल,  इंडियाज गॉट टैलेंट, द ग्रेट इंडियन फैमिली ड्रामा, कॉमेडी सर्कस और एंटरटेनमेंट के लिए कुछ भी करेगा जैसे विभिन्न टेलीविजन कॉमेडी शो में अपनी छाप छोड़ने के लिए जाना जाता है। <ref>[http://zeenews.india.com/entertainment/celebrity/vikalp-mehta-breaks-out-of-akshay-lookalike-image_1600656.html Vikalp Mehta breaks out of Akshay lookalike image-Zee News]</ref> उन्होंने &tv पर सचिन मोहिते द्वारा निर्मित एक कॉमेडी शो लाइफ का रिचार्ज (LKR) की भी मेजबानी की है। <ref>[https://www.patrika.com/story/pali/vikalp-mehta-host-stage-as-main-anchor-2254069.html Vikalp Mehta as a lead Host in Life ka Recharge comedy show on &tv-Patrika]</ref> <ref>{{Cite web |url=http://www.totalbollywood.com/life-ka-recharge/ |title=Vikalp Mehta to Host a Comedy Show on &tv-Tollywood |access-date=15 सितंबर 2023 |archive-date=14 जनवरी 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180114020447/http://www.totalbollywood.com/life-ka-recharge/ |url-status=dead }}</ref> विकल्प अपनी प्रेरणा और अपनी जबरदस्त सफलता का मुख्य कारण अक्षय कुमार को मानते हैं।<ref>{{Cite news|url=https://www.business-standard.com/article/news-ians/vikalp-mehta-breaks-out-of-akshay-lookalike-image-115052400÷°¥×°`¶÷`=75_1.html|title=Vikalp Mehta breaks out of Akshay lookalike image|last=IANS|date=2015-05-24|work=Business Standard India|access-date=2022-12-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://zeenews.india.com/people/akshay-kumar-never-discouraged-me-from-imitating-him-lookalike-vikalp-mehta-2241783.html|title=Akshay Kumar never discouraged me from imitating him: Lookalike Vikalp Mehta|website=Zee News|language=en|access-date=2023-09-05}}</ref> == करियर == विकल्प ने यूबीए प्रो बास्केटबॉल लीग सीज़न 2016 की भी मेजबानी की थी। साथ ही विकल्प को सोनी टीवी पर शो एंटरटेनमेंट के लिए कुछ भी करेगा ( 2000) में भी देखा गया था। <ref>[http://www.nettv4u.com/about/Hindi/tv-shows/entertainment-ke-liye-kuch-bhi-karega-2 Vikalp Mehta Performed at entertainment Ke Live Such Bhi Karega-nett4u.com]</ref> == टेलीविजन == {| class="itable" |+ !'''वर्ष''' ! '''नाम दिखाएँ''' ! '''विवरण''' |- | 2012-13 | [[कॉमेडी सर्कस|''कॉमेडी सर्कस के अजूबे'']] | अतिथि भूमिका |- | 2015 | ''एलकेआर'' | मेज़बान |- | 2015 | ''[[द ग्रेट इंडियन फैमिली ड्रामा|द ग्रेट इंडियन फ़ैमिली ड्रामा]]'' | अतिथि भूमिका |- | 2015-16 | 2016 यूबीए प्रो बास्केटबॉल लीग सीज़न | [[सोनी टेन|टेन स्पोर्ट्स]] पर मेज़बान |- | 2016 | ''[[द कपिल शर्मा शो]]'' | अतिथि भूमिका |- | 2022 | [[द कपिल शर्मा शो|''द कपिल शर्मा शो'']] | [[अक्षय कुमार]] (नकल) <ref>{{Cite web|url=https://www.dnaindia.com/bollywood/report-tkss-star-vikalp-mehta-stuns-tabu-nora-with-akshay-kumar-s-mimicry-netizens-say-cast-him-in-hera-pheri-3-3004794|title=TKSS star Vikalp Mehta stuns Tabu, Nora with Akshay Kumar's mimicry, netizens say 'cast him in Hera Pheri 3'|website=DNA India|language=en|access-date=2022-12-21}}</ref> |} == संदर्भ == {{Reflist}} [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:मारवाड़ी लोग]] [[श्रेणी:1989 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:राजस्थान के लोग]] {{आधार}} 1ccalosaju50eony5647l6hpas8z230 इरविन बोवियन 0 1484654 6630272 6562423 2026-10-16T17:08:57Z Yeni Lin 792610 कलाकृतियों की छवियाँ जोड़ें 6630272 wikitext text/x-wiki [[चित्र:Erwin_Bowien_Selbstbildnis_1920.jpg|अंगूठाकार| एर्विन बॉवीन - स्व-चित्र। 1920 के दशक]] '''एर्विन योहानस बॉवीन''' ({{Langx|de|Erwin Johannes Bowien|italic=no}}; 3 सितंबर 1899 – 3 दिसंबर 1972) एक जर्मन [[चित्रकला|चित्रकार]], [[चित्रकला|लेखक]] और कवि थे। == जीवनी == एर्विन बॉवीन एरिच बॉवीन के पुत्र थे, जो शुरू में एक सिविल इंजीनियर और बाद में वाइल आम राइन में राइनहाफेन (राइन बंदरगाह) के कमर्शियल डायरेक्टर बने और उनकी पत्नी अन्ना-मारिया, जन्म उपनाम न्यूफेल्ट, एल्बिंग, पूर्वी प्रशिया से थीं। उनका पालन-पोषण बर्लिन- चार्लोटेनबर्ग और बाद में [[स्विट्ज़रलैण्ड|स्विट्जरलैंड के न्यूचैटेल]] में हुआ।  बॉवीन की दोस्ती एरिक थिबॉड से हो गई<sup>,</sup><ref>Erwin Bowien: ''Das schöne Spiel zwischen Geist und Welt. Mein Malerleben.'' Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech und Freundeskreis Erwin Bowien e.V. U-Form Verlag, Solingen 1995, <nowiki>ISBN 3-88234-101-7</nowiki>, S. 24,25 und 72.</ref> जिन्होंने उनका [[द्वितीय विश्वयुद्ध|Zweiten Weltkrieg (द्वितीय विश्व युद्ध]]) के बाद 1948 में स्विट्जरलैंड में फिर से प्रवेश संभव कराया था। बॉवीन ने अपना पहला कला प्रशिक्षण विलियम रैसीन के साथ न्यूचैटेल के स्कूल ऑफ एप्लाइड आर्ट्स में प्राप्त किया था। स्विस चॉकलेट निर्माता कार्ल रस- ज़ुख़ार्ड ने युवा बॉवीन को प्रोत्साहित किया और उनसे कई पेंटिंग अधिग्रहित कीं।<ref>Erwin Bowien: ''Das schöne Spiel zwischen Geist und Welt. Mein Malerleben.'' Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech und Freundeskreis Erwin Bowien e.V. U-Form Verlag, Solingen 1995, <nowiki>ISBN 3-88234-101-7</nowiki>, S. 22–23.</ref> जर्मन नागरिक होने की वजह से बॉवीन को अपने 18वें जन्मदिन पर सेना में शामिल होना पड़ा और उन्हें [[प्रथम विश्व युद्ध|Ersten Weltkrieg (प्रथम विश्व युद्ध)]] में 1917/1918 में एक इंटरसेप्टर यूनिट में Dolmetscher (दुभाषिया) के रूप में भाग लेने के लिए मजबूर किया गया था। इस दौरान, उन्होंने अन्य चीजों के अलावा, Argonner Wald (आर्गोन वन) में सामने से रेखाचित्र और जल रंग चित्र बनाए। 1919 में हनोवर में उन्हें सेना से निकाल दिया गया। युद्ध के बाद, बॉवीन ने पहली बार Kunstgewerbeschule Hannover (हनोवर स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स)<ref name=":0">Bettina Heinen-Ayech und Ulrike Friedrichs: ''Erwin Bowien (1899-1972). Werkverzeichnis - Catalogue Raisonné - Werkoverzicht.'' Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech. U-Form Verlag, Solingen 1999, <nowiki>ISBN 3-88234-103-3</nowiki>, S. 18.</ref> में शाम की कक्षाओं में भाग लिया। 1920-1921 में रॉबर्ट एंगेल्स के साथ [[म्यूनिख|मुंचेन (म्यूनिख)]] में स्टेट एकेडमी ऑफ आर्ट में अध्ययन के बाद 1922 में ड्रेसडेन एकेडमी ऑफ आर्ट में प्रोफेसर रिचर्ड मुलर<ref name=":0" /> के साथ अध्ययन और फिर स्टेट स्कूल ऑफ़ आर्ट बर्लिन-शॉनबर्ग में फ़िलिप फ़्रैंक  के मातहत और ऑस्कर फ़िशेल के साथ कला इतिहास पाठ के अध्ययन के साथ एक ड्राइंग शिक्षक के रूप में प्रशिक्षण लिया । 1923 में बॉवीन ने ड्यूसेलडोर्फ में हस्तशिल्प शिक्षक के रूप में अपनी परीक्षा पास की; बाद के वर्षों में वह कैसल, [[आखन|आख़ेन,]] [[हैम्बर्ग|हैम्बर्ग,]] ल्यूबेक, [[कार्ल्सरुहे|कार्लरुए]], फ़्राएबर्ग इम ब्रिसगाउ, बासेल, कोनिग्सबर्ग और हिल्डेशाइम और इसके बाद [[प्राग|Prag (प्राग)]] और [[वियना|Wien (वियना)]] (1928) एवं उत्तरी इटली (1929) की पेंटिंग यात्राओं पर जाते रहे।<ref>Barbara u. Detlef Rahlf: ''[https://www.erwin-bowien.com/vita01.htm Erwin Bowien Vita I.]{{Dead link|date=अक्तूबर 2023 |bot=InternetArchiveBot }}'' In: ''erwin-bowien.de.'' 10. Oktober 2008, abgerufen am 3. November 2018.</ref> बॉवीन ने सबसे पहले Hohenzollernschen Landen (होहेनज़ोलर्न लैंड्स) में हेचिंगेन में रियालजिमनाज़ियम में बतौर एक शिक्षक काम किया, फिर 1925 से 1932 तक सोलिंगन में Gymnasium Schwertstraße (श्वरर्स्ट्रास ग्रामर स्कूल) में एक कला शिक्षक के रूप में काम किया, जहां भविष्य के जर्मन राष्ट्रपति वाल्टर शील उनके शिष्यों में से एक थे। इन वर्षों के दौरान, उन्होंने फ़ोक्सहोक़शूले (स्थानीय वयस्क शिक्षा केंद्र) में कला इतिहास विषयों पर 100 से अधिक व्याख्यान दिए। इसके अलावा, उन्हें सोलिंगन Zwillingswerk  (जुड़वाँ कारखाना) में सभी कार्य प्रक्रियाओं के चित्र बनाने का कार्य सौंपा गया। हालांकि, ब्रूनिंग्सचेन नोटफेरऑर्डनुंगेन (ब्रूनिंग के आपातकालीन आदेश) के कारण उन्हें शिक्षण का पेशा छोड़ना पड़ा। इस दौरान, वह नियमित रूप से एर्ना और हैन्स हेनेन के कलाकार और साहित्यिक सैलून का दौरा करते थे, जिससे इस परिवार के साथ उनकी आजीवन दोस्ती हो गई। हेनेन परिवार की बेटी, बेटिना हेनेन- अयेच (1937-2020), उनकी सबसे महत्वपूर्ण चित्रकारी छात्रा बन गईं।<ref>Barbara & Detlef Rahlf, München: ''[https://www.erwin-bowien.com/vita02.htm Erwin Bowien Vita II]{{Dead link|date=अक्तूबर 2023 |bot=InternetArchiveBot }}.'' In: ''erwin-bowien.de.'' 10. Oktober 2008, abgerufen am 19. November 2018.</ref> [[चित्र:Bowien_Egmond_an_Zee_1937.jpg|अंगूठाकार| एग्मंड आन ज़ी (1937)]] 1932 से 1942 के वर्षों में बॉवीन, Egmond aan den Hoef, Nordholland (एग्मंड आन डेन होफ, नॉर्थ हॉलैंड) में दार्शनिक [[रेने देकार्त|रेने]] [[ऐम्स्टर्डैम|डेसकार्टेस]] के पूर्व घर में एक स्वतंत्र कलाकार के रूप में रहे। एक शिक्षक के रूप में बर्खास्त किये जाने के बाद, उन्होंने शुरू में केवल रेम्ब्रांट प्रदर्शनी देखने के लिए एम्स्टर्डम की यात्रा की, लेकिन फिर नीदरलैंड में ही बस गए। वहां उनके सबसे विशिष्ट चित्रकला छात्र डर्क ओडेस थे। 1934 में बॉवीन ने नॉर्डफ्रिका (उत्तरी अफ्रीका) में लीबिया, ट्यूनीशिया, अल्जीरिया और मोरक्को की एक बड़ी यात्रा लकड़ी के एक थोक व्यापारी के साथ की। इस यात्रा को इसी व्यापारी ने वित्तपोषित किया था और बाद में बदले में उत्पादित कार्यों का आधा हिस्सा लिया था।<ref>Bowien: ''Das schöne Spiel zwischen Geist und Welt.'' S. 47f.</ref> यात्रा की कठिनाइयों से उन्हें कुछ समय तक कष्ट भी झेलना पड़ा था।<ref>Bowien: ''Das schöne Spiel zwischen Geist und Welt.'' S. 52.</ref> भूदृश्यों के अलावा, बॉवीन ने धनी डच लोगों के लिए कई छायाचित्र और पारिवारिक चित्र बनाए। होर्न में वेस्टफ़्रिसियाई म्यूजियम ने बॉवीन<ref name=":0">Bettina Heinen-Ayech und Ulrike Friedrichs: ''Erwin Bowien (1899-1972) Werkverzeichnis-Catalogue Raisonné-Werkoverzicht''. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech. 1. Auflage. U-Form-Verlag Solingen, Solingen 1999, <nowiki>ISBN 3-88234-103-3</nowiki>, S. 21–26.</ref> की पेंटिंग्स का अधिग्रहण किया, जबकि दान के माध्यम से अन्य पेंटिंग्स द हेग में रिज्क्स म्यूजियम एम्स्टर्डम<ref name=":0" />, कोनिंकलिज्क हुइस आर्काइव<ref name=":0" />, रीजनलआरचीफ अल्कमार<ref name=":0" /> और किर्चेंजेमेइंडे स्कूल को मिली <ref name=":0" /> राष्ट्रीय समाजवादियों द्वारा "माचटरग्रेफुंग (सत्ता पर कब्ज़ा)" ही वह कारण था जिसके कारण बॉवीन जर्मनी नहीं लौटे, अपनी [[आत्मकथा|Autobiografie  (आत्मकथा)]] में उन्होंने ऐसा संकेत दिया है - राजनीति ने मुझे हर दिन "नई पीड़ा" दी थी; "तो, उस समय मैंने जो तस्वीर बनाई उसमें कुछ चीत्कार थी। इनमें मैं समुद्र को उतना उन्मादित नहीं दिखा सका, बादल भी उतने काले नहीं थे।"<ref>Bowien: ''Das schöne Spiel zwischen Geist und Welt.'' S. 52f.</ref>  जर्मन वेहरमाच (defence force )द्वारा [[नीदरलैण्ड का इतिहास|(Besetzung der Niederlande) नीदरलैंड्स]] पर कब्जे के बाद, उन्हें [[जलरञ्जित चित्रकला|अल्कमार]] में तीन दिनों के लिए कारावास में डाल दिया गया था।चूँकि राजनीतिक स्थिति के कारण वह अब धन अर्जित करने में समर्थ नहीं थे, लिहाजा वह भारी मन से जर्मनी लौट आये। उन्होंने अपनी 35 कलाकृतियों को हेग में एक कला डीलर की देखरेख में छोड़ दिया और बाद में वे खो भी गईं।<ref>Bowien: ''Das schöne Spiel zwischen Geist und Welt.'' S. 62.</ref><ref name=":0">Barbara & Detlef Rahlf, München: ''[https://www.erwin-bowien.com/vita02.htm Erwin Bowien Vita II]{{Dead link|date=अक्तूबर 2023 |bot=InternetArchiveBot }}.'' In: ''erwin-bowien.de.'' 10. Oktober 2008, abgerufen am 19. November 2018.</ref>  वह पहले तो छह महीने के लिए सोलिंगेन में हेनेन परिवार के यहाँ ठहरे, जहां, 1942 की सर्दियों में, उन्होंने [[हेग|जल रंग]] में शहर के दृश्यों की एक श्रृंखला बनाई, जो कि,  नवंबर 1944 में शहर के विनाश से पहले इसके चित्रों का अंतिम चक्र थी।<ref name=":0" /> बॉवीन का अगला पड़ाव [[औग्स्बुर्ग|ऑग्सबर्ग]] था। चूँकि द्वितीय विश्व युद्ध के कारण खरीदने के लिए न तो रहमन (फ़्रेम) थे और न ही लाइनवांड कैनवास, बॉवीन के मन में [[एडोल्फ़ हिटलर|फ्यूहरर]]  (हिटलर) के चित्रों और आधिकारिक नाजी प्रचार चित्रों को खरीदने का विचार आया, जो हर जगह आसानी से उपलब्ध थे औरउन पर प्राथमिक लेप (ग्रुंडेरुंग) द्वारा उन्हें फिर से तैयार करने के बाद, उन्होंने उन पर ऑग्सबर्ग के दृश्यों के चित्र बनाए। पेंटिंग्स खूब बिकीं, लेकिन गेस्टापो ने उनके साथ विश्वाश्घात किया , उसने  1943 में Reichskulturkammer (राइष कल्चरल चैंबर) के आदेश पर ऑग्सबर्ग में उनकी पेंटिंग्स को जब्त कर लिया; युद्ध के प्रभाव से बॉवीन की 30 से अधिक पेंटिंग नष्ट हो गईं। वैध कागजात के बिना, विशेष रूप से सैन्य पासपोर्ट के बिना, वह ऑल्गौ में क्रुज़थल-ईसेनबाक (अब इस्नी का एक जिला) भाग गए। वहां उन्होंने अपना युद्ध संस्मरण लेस ह्युरेस पर्डस डु मैटिन ("द लॉस्ट आवर्स ऑफ द मॉर्निंग") लिखा, और एक भागे हुए फ्रांसीसी युद्ध बंदी को छिपने में मदद की।<ref>Bowien: ''Das schöne Spiel zwischen Geist und Welt.'' S. 67.</ref> युद्ध की समाप्ति के बाद, एर्विन बॉवीन सोलिंगन लौट आए, जहां वह युद्ध की समाप्ति के बाद, एर्विन बॉवीन सोलिंगन लौट आए, जहां वह 1950 से रह रहे थे, सोलिंगन और अपने गृहनगर वाइल आम राइन में भी वह बारी-बारी से रहते रहे। उन्होंने और भी कई चित्रकला संबंधी यात्राएँ कीं, जैसे जर्मनी में,  [[स्विट्ज़रलैण्ड|Schweiz (स्विट्जरलैंड),]] Südschweden (दक्षिणी स्वीडन), [[नॉर्वे|Norwegen (नॉर्वे)]] (वहां अलस्टेन द्वीप पर कॉटेज "बेटिना-बो" भी खरीदी ), [[पेरिस]], अल्जीरिया (बेटिना हेनेन-अयेच से मुलाकात के लिए[[फ़िनलैंड|), Finnland (फ़िनलैंड),]] और स्यूडफ़्रैंकरेइच (दक्षिणी फ़्रांस)। 28 जुलाई, 1970 को, उन्होंने इंकेन स्ट्रोहमेयर, जन्म उपनाम फ़ोग्ट से विवाह किया । 3 दिसंबर 1972 को एर्विन बॉवीन की वाइल आम राइन में मृत्यु हो गई और वहीं उन्हें दफना दिया गया।<ref>Barbara & Detlef Rahlf, München: ''Erwin Bowien III.'' In: ''erwin-bowien.de.'' 10. Oktober 2008, abgerufen am 19. November 2018.</ref> उनका कब्र स्थल वाइल आम राइन शहर की सम्मानित कब्र के रूप में बना रहा। कलाकार की पेंटिंग्स को उत्तरी राइन-वेस्टफेलिया के संस्कृति मंत्रालय, <ref name=":0">Bettina Heinen-Ayech und Ulrike Friedrichs: ''Erwin Bowien (1899-1972) Werkverzeichnis-Catalogue Raisonné-Werkoverzicht''. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech. 1. Auflage. U-Form-Verlag Solingen, Solingen 1999, <nowiki>ISBN 3-88234-103-3</nowiki>, S. 21–26.</ref> हसुम में नॉर्डफ्रीसलैंड संग्रहालय (निसेनहॉस),<ref name=":0" /> लोर्राच में द्रायलैंडरम्यूजियम (पूर्व में संग्रहालय एम बर्गहोफ़), <ref name=":0" /> क्राइसहाइमाट म्यूजियम स्प्रिंग<ref name=":0" /> और हनोवरश मुंडेन, सोलिंगन और वाइल आम राइन के नगरपालिका कला संग्रह द्वारा अधिग्रहित किया गया था।<ref name=":0" /> 20 को. अक्टूबर 1976 में, सोलिंगन में जर्मन ब्लेड संग्रहालय में एर्विन बॉवीन फ्रेंड्स सर्कल की स्थापना की गई थी। वी. की स्थापना की।<ref>Bettina Heinen-Ayech und Ulrike Friedrichs: ''Erwin Bowien (1899-1972) Werkverzeichnis-Catalogue Raisonné-Werkoverzicht''. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech. 1. Auflage. U-Form-Verlag Solingen, Solingen 1999, <nowiki>ISBN 3-88234-103-3</nowiki>, S. 21–26.</ref> == प्रदर्शनियां == * 1917 न्यूचैटेल (न्यूएनबर्ग), स्विट्जरलैंड। गैलरी "रोज़ डी'ओर" में प्रदर्शनी।<ref name=":0">Hans-Karl Pesch: ''Erwin Bowien''. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech und der Freundeskreis Erwin Bowien. e.V. 1. Auflage. Solingen 1981, S. 30.</ref> * 1927 सोलिंगन, जर्मन। सोलिंगन कैसीनो सोसायटी के हॉल में पहली प्रदर्शनी<ref name=":1">Bettina Heinen-Ayech und Ulrike Friedrichs: ''Erwin Bowien (1899-1972) Werkverzeichnis-Catalogue Raisonné-Werkoverzicht''. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech. 1. Auflage. U-Form-Verlag Solingen, Solingen 1999, <nowiki>ISBN 3-88234-103-3</nowiki>, S. 21–26.</ref> * 1928 सोलिंगन, डॅायशलांड। सोलिंगन कैसीनो सोसायटी के हॉल में दूसरी प्रदर्शनी<ref name=":1" /> * 1929 सोलिंगन, डॅायशलांड। सोलिंगेन कैसीनो सोसायटी के हॉल में तीसरी दूसरी प्रदर्शनी।<ref name=":0" /> * 1933 से 1941 हॉलैंड: होर्न, एग्मंड, गोरिनकेम, स्कूल, [[हेग|डेन हाग]] में प्रदर्शनियाँ।<ref name=":0" /> * 1947 से 1959 सोलिंगन, जर्मनी। डॉयचे क्लिंगनम्यूजियम (जर्मन ब्लेड म्यूजियम) में "बर्गिसे कला प्रदर्शनियों" में भागीदारी।<ref name=":1" /> * 1951 हुसुम, जर्मनी। नॉर्डफ़्रीज़लैंड म्यूजियम (निसेनहॉस) में प्रदर्शनी।<ref name=":0" /> * 1954 [[बर्न]], स्विट्जरलैंड। गैलरी "हौस डेर इनरेन एंगे" में प्रदर्शनी (2-31 मई)। उद्घाटन भाषण डॉ. ई.एम. फालेट-वॉन कस्टेलबर्ग।<ref name=":0" /> * 1957 हुसुम, जर्मनी। नॉर्डफ़्रीज़लैंड म्यूजियम (निसेनहॉस) में प्रदर्शनी। संग्रहालय द्वारा अधिग्रहण.<ref name=":1" /> * 1957 [[कोपनहेगन|कोपेनहेगन]], डेनमार्क। डॉयचे क्लब में प्रदर्शनी. कल्टुराटाचे डेर डॉयचे बोट्सचाफ्ट, डॉ. ओबरमेयर द्वारा उद्घाटन।<ref name=":1" /> * 1958 सोलिंगन, जर्मनी। "न्यूएन राइनत्साइटुंग " के स्थलों पर प्रदर्शनी।<ref name=":1" /> * 1958 हनोवरश मुंडेन, जर्मनी। स्थानीय इतिहास संग्रहालय के फिर से खुलने के अवसर पर वेल्फ़ेंसच्लॉस में प्रदर्शनी।<ref name=":1" /> * 1958 कोपेनहेगन, डेनमार्क। जर्मन क्लब में दूसरी प्रदर्शनी।<ref name=":1" /> * 1960 सोलिंगन, जर्मनी। एर्विन के 60वें जन्मदिन के अवसर पर 17 जनवरी से 28 फरवरी 1960 तक सोलिंगन में डॉयचे क्लिंगनम्यूजियम (जर्मन ब्लेड म्यूजियम) में एक जर्मन पूर्वव्यापी आयोजन हुआ। * 1962 बर्न, स्विट्जरलैंड। श्नाइडर गैलरी में प्रदर्शनी।<ref name=":1" /> * 1964 [[पेरिस]], फ़्रांस। डंकन गैलरी में प्रदर्शनी (2-16 अक्टूबर)<ref name=":1" /> * 1965 एयू/सेंट गैलेन, स्विट्जरलैंड। "ज़ोलस्ट्रेश" गैलरी में प्रदर्शनी (24.4.-2.5.)।<ref name=":1" /> * 1967 वाइल आम राइन, जर्मनी। हॉउस डेर फोक्सबिल्डुंग में प्रदर्शनी (23.9-1.10.9)। लॉराच में म्यूज़ियम एम बर्गहोफ़ वाइल आम राइन शहर द्वारा कई अधिग्रहण।<ref name=":1" /> * 1968 फ्रीबर्ग इम ब्रिसगाउ, जर्मनी। सिटी हॉल में प्रदर्शनी (अप्रैल-मई)।<ref name=":1" /> * 1968 बैड सैकिंगन, जर्मनी। ट्रॉम्पेटर्सच्लॉस (1.-22.12) में प्रदर्शनी, कुन्स्टवेरिन होचरेन द्वारा आयोजित।<ref name=":1" /> * 1969 फ्रायबर्ग इम ब्रिसगाउ, जर्मनी। दृश्य कलाकारों के संघ द्वारा 70वें जन्मदिन के अवसर पर सिटी हॉल में पूर्वव्यापी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।<ref name=":1" /> * 1970 सोलिंगन, जर्मनी। डॉयचे क्लिंगनम्यूजियम में प्रदर्शनी।<ref name=":1" /> * 1971 वाइल आम राइन, जर्मनी। हौस डेर फोक्सबिल्डुंग में प्रदर्शनी।<ref name=":1" /> * 1973 स्प्रिंग/डीस्टर, जर्मनी। मरणोपरांत। हाइमाटम्यूजियम में प्रदर्शनी (25.8.-30.9.1973)<ref name=":1" /> * 1974 वाइल आम राइन, जर्मनी। मरणोपरांत। पूर्व बॉवीन निवास में प्रदर्शनी (2.1-14.1.1974)।<ref name=":1" /> * 1974 [[रबात]], मोरक्को, मरणोपरांत, गोएथेइंस्टीट्यूट में प्रदर्शनी (4.-14.12.1974)। जर्मन राजदूत डॉ. हेंडस द्वारा उद्घाटन <ref name=":1" /> * 1975 वाइल आम राइन, जर्मनी, मरणोपरांत। हाउस डेर फोक्सबिल्डुंग में प्रदर्शनी (3.-11.5.1974)।<ref name=":1" /> * 1975 सोलिंगेन, जर्मनी, मरणोपरांत। डॉयचे क्लिंगनम्यूजियम में प्रदर्शनी (15.5-13.7.1975) <ref name=":1" /> * 1976 ग्लैडबेक (स्टैड बॉट्रोप), जर्मनी, पोस्टहुम। वासेरश्लॉस विट्रिंजन में प्रदर्शनी (14.3.-25.4)<ref name=":1" />। * 1977 बर्न, स्विट्जरलैंड, मरणोपरांत। गैलरी डी'आर्ट मुंस्टर में प्रदर्शनी (25.1. से 15.2.1977)।<ref name=":1" /> * 1977 [[अल्जीयर्स|अल्जीयर]], अल्जीरिया, मरणोपरांत। गैलरी "मोहम्मद रेसीम" में प्रदर्शनी (15.11 से 26.11)<ref name=":1" /> * 1978 बुच्स्लाग ड्रेइइच, जर्मनी, मरणोपरांत। बर्गरसाल में प्रदर्शनी (6.-17.9.1978)।<ref name=":1" /> * 1980 रेम्सचीड, जर्मनी, मरणोपरांत। स्टैडिशेन हाइमाटम्यूजियम रेम्सचीड-हस्टेन में प्रदर्शनी (6.7.-24.8.1980)<ref name=":1" /> * 1982 सोलिंगेन, जर्मनी, मरणोपरांत। डॉयचेस क्लिंगेनम्यूजियम (11.-26.9.1982)। विषयवस्तु: बर्गिसचेस लैंड<ref name=":1" /> * 1984 वाइल आम राइन, जर्मनी, मरणोपरांत। म्यूनिसिपल गैलरीस्टेपफ्लेहस (15.3 -8.4.1984)<ref name=":1" /> * 1984 सोलिंगन, जर्मनी, डॉयचेस क्लिंगनम्यूजियम (19.08-07.10.1984)। विषयवस्तु: राइन का उसके स्रोत से मुँह तक का चित्रण।<ref name=":1" /> * 1985 [[अल्जीयर्स|अल्जीयर]], अल्जीरिया, मरणोपरांत। गोएथेइंस्टीट्यूट में प्रदर्शनी (19. से 30.11)<ref name=":1" /> <gallery mode="packed" heights="210"> चित्र:Erwin Bowien Sunset over Sylt (Germany) Pastel on paper 1951 WIKI.jpg|इरविन बोवियन: «ज़्युल्ट द्वीप पर सूर्यास्त (जर्मनी)», कागज़ पर पेस्टल रंग, 1951 (15.5 × 21.5 सेमी) चित्र:Erwin Bowien A Still Life in Chur (Switzerland), Oil on canvas 1959 WIKI.jpg|इरविन बोवियन: «कूर में स्थिर वस्तुओं का चित्र (स्विट्ज़रलैंड)», कैनवास पर तैलचित्र, 1959 (92 × 80 सेमी) चित्र:Erwin Bowien Trondheim Cityscape (Norway), Oil on canvas 1967 WIKI.jpg|इरविन बोवियन: «ट्रॉनहाइम का शहरी दृश्य (नॉर्वे)», कैनवास पर तैलचित्र, 1967 (92 × 80 सेमी) चित्र:Erwin Bowien Cologne Cathedral Oil on cancas 1971 WIKI.jpg|इरविन बोवियन: «कोलोन कैथेड्रल (जर्मनी)», कैनवास पर तैलचित्र, 1971 (136 × 147 सेमी) </gallery>1986 सोलिंगन, जर्मनी। मरणोपरांत। स्टैडस्पार्कसे सोलिंगन में प्रदर्शनी (16.9 - 16.10)। विषयवस्तु: हॉलैंड<ref name=":1" /> * 1986 वाइल आम राइन, जर्मनी, मरणोपरांत। स्पार्कसे मार्कग्राफर लैंड (10.11-2.12)। * 1988 वाइल आम राइन, जर्मनी, मरणोपरांत। स्पार्कसे मार्कग्राफर लैंड (23.8-16.09)। विषयवस्तु: ड्रेइलैंडेरेक<ref name=":1" /> * 1988 रेम्सचीड, जर्मनी, मरणोपरांत। थिएटर गैलरी में प्रदर्शनी (11.9.-23.10.)<ref name=":1" /> * 1991 सोलिंगन, जर्मनी, मरणोपरांत। स्टाडस्पारकास्से सोलिंगन (10.09-04.10) विषयवस्तु: सोलिंगर नागरिकों की छवियां और चित्र।<ref name=":1" /> * 1996 सोलिंगन, जर्मनी, मरणोपरांत। बर्गिसचेस संग्रहालय, श्लॉस बर्ग एन डेर वुपर (22.9.-20.10)<ref name=":1" /> * 1999 सोलिंगन, जर्मनी, मरणोपरांत। संग्रहालय बाडेन (3.10-15.11)<ref name=":1" /> * 1999 वाइल आम राइन, जर्मनी, मरणोपरांत। स्टैडिश गैलेरी स्टैपफ्लेहस (20.11 से 19.12.1999)<ref name=":1" /> * 2006 सोलिंगन, जर्मनी, मरणोपरांत। लिबरल गैलरी में प्रदर्शनी (26.08-06.10)।<ref name=":2">Dr. Haroun Ayech: ''Retrospektiven.'' In: ''Erwin Johannes Bowien (1899-1972).'' Dr. Haroun Ayech, 2020, abgerufen am 1. Mai 2020 (deutsch).</ref> * 2012-2013 इस्नी, आइज़नबाक, जर्मनी, मरणोपरांत। हाउस टैन में प्रदर्शनी। विषयवस्तु: क्रुज़थल में एर्विन बॉवीन - आइज़नबाक <ref name=":2" /> * 2013-2014 वाइल आम राइन, जर्मनी, मरणोपरांत। 13 अक्टूबर 2013 से 27 जुलाई 2014 तक वाइल आम राइन में म्यूजियम एम लिंडेनप्लात्ज़ को चित्रकार के कार्य का पूर्वव्यापी प्रदर्शन मिला।<ref>Michael Tesch: ''Solingen: Ein Maler zwischen Geist und Welt.'' In: ''rp-online.de.'' 20. August 2013, abgerufen am 3. November 2018.</ref> <ref>''Erwin Bowien-Retrospektive präsentiert viele noch nie gezeigte Bilder.'' In: ''Badische Zeitung.'' Abgerufen am 3. November 2018.</ref> * 2014 सोलिंगन, जर्मनी, मरणोपरांत। कुन्स्टम्यूजियम सोलिंगन में पूर्वव्यापी (10.08-14.09.2014)<ref name=":2" /> * 2015 जॉर्जस्मरिएनहुट्टे, जर्मनी, म्यूजियम विला स्टैहमर में पूर्वव्यापी (14.10 - 15.11.2015)<ref name=":2" /> == चयनित कलाकृतियों की दीर्घा == == कारखाना == * ''आत्मा और संसार के बीच का खूबसूरत खेल - एक चित्रकार के रूप में मेरा जीवन।'' (आत्मकथा). बेटिना हेनेन-आयच और एर्विन बॉवीन सर्कल ऑफ फ्रेंड्स द्वारा प्रकाशित। वी. सोलिंगन 1995, [[Special:BookSources/3882341017|आईएसबीएन 3-88234-101-7]] . * ''ह्यूरेस पर्ड्यूज़ डू मैटिन, जर्नल डी'अन आर्टिस्ट पिंट्रे, एल्पेस बावरोइज़, 1944-1945।'' बर्नार्ड ज़िम्मरमैन द्वारा संपादित। एल'हरमट्टन पब्लिशिंग हाउस, पेरिस 2000, [[Special:BookSources/2747500403|आईएसबीएन 2-7475-0040-3]] . == साहित्य == * हंसजाकोब ड्रेसिया: ''एर्विन जोहान्स बॉवीन" चित्रकार के काम का एक परिचय'', सोलिंगन, अदिनांकित।<ref>Bettina Heinen-Ayech und Ulrike Friedrichs: ''Erwin Bowien (1899-1972) Werkverzeichnis-Catalogue Raisonné-Werkoverzicht''. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech. 1. Auflage. U - Form - Verlag Solingen, Solingen 2000, S. 26.</ref> * अनाम: ''एर्विन जे. बॉवीन, सोलिंगन, 17 से जर्मन ब्लेड संग्रहालय सोलिंगन की प्रदर्शनी के लिए 60 वर्ष की'' सूची। जनवरी से 28 तारीख तक फरवरी 1960।<ref>Hans Hofstätter und Berthold Hänel: ''Die Maler des Markgräflerlandes''. Hrsg.: Landkreis Lörrach. Schillinger Verlag, Freiburg 2000, S. 78.</ref> * हंस-कार्ल पेस्च: ''एर्विन बॉवीन'' । एड.: बेटिना हेनेन-आयच और एर्विन बॉवीन मित्र मंडली। इ। वि. 1. संस्करण. सोलिंगन 1981 <ref name=":0">Mitteilungen des Freundeskreises Erwin Bowien e.V. vom Dezember 2010 (Memento vom 20. März 2014 im ''Internet Archive'')</ref> * WFKoeman: "सर्कल ऑफ़ फ्रेंड्स" वैन एर्विन बॉवीन, "शेकेल्स" N°05, 1981 में। बर्गेन. * हंस-कार्ल पेश: ''द लाइफ, द बीइंग, द वर्क ऑफ एर्विन बॉवीन (1899 मुल्हेम/रुहर - 1972 वेइल एम राइन)'' सोलिंगन, 1986। <ref name=":0" /> * ए. डिट्ज़: ''एर्विन बॉवीन, पेस्टल पेंसिल के मास्टर'', इन: ''दास मार्कग्राफरलैंड'', 1986, पृष्ठ 200 एफएफ।<ref name=":1">Bayerischer Rundfunk dreht im Kreuzthal einen Film schwaebische.de 11. Oktober 2012.</ref> * डायना मिलीज़: ''एर्विन बॉवीन, सोलिंगन नागरिकों के चित्र और चित्र'' । सोलिंगन, 1991। <ref name=":0" /> * बवेरियन रेडियो द्वारा वृत्तचित्र ''द पेंटर बॉवीन एट द एंड ऑफ द वर्ल्ड'', रविवार, 6 जून को प्रसारित किया गया। मई 2012<ref name=":0" /><ref name=":1" /> * रूडी होल्ज़बर्गर: ''एडेलेग का आकर्षण: ऑलगौ में लुप्त बिंदु - क्रुज़थल में एर्विन बॉवीन।'' एडेलेग-वेरलाग, ईसेनबैक 2013, [[Special:BookSources/9783000427893|आईएसबीएन 978-3-00-042789-3]] . * बेटिना हेनेन-आयेच (सं. ): ''एर्विन बॉवीन 1899-1972 कैटलॉग राइसन वर्क्स अस्वीकरण।'' यू-फॉर्म पब्लिशिंग हाउस, सोलिंगन 1999, [[Special:BookSources/3882341033|आईएसबीएन 3-88234-103-3]]। * संग्रहालय मंडल ई. वी. और शहर. वेइल एम राइन में लिंडेनप्लात्ज़ में संग्रहालय (एड। ): ''मन और संसार के बीच.'' ''एर्विन बॉवीन'', प्रदर्शनी के साथ ब्रोशर। 13 अक्टूबर 2013 से 27 जुलाई 2014 तक. लिंडेनप्लात्ज़ में नगर संग्रहालय। क्योंकि राइन पर. * साइट्ज़ वैन डेर ज़ी: विज़ ओवरलीफ़डेन। जर्मन भाषा का नवीनतम संस्करण, प्रोमेथियस, एम्स्टर्डम 2019, [[Special:BookSources/9789044638424|आईएसबीएन 9789044638424]] । * पीटर जेएच वैन डेन बर्ग। एग्मंड के चित्र. डब्ल्यू बुक्स, ज़्वोल 2021, [[Special:BookSources/9789462583931|आईएसबीएन 978 94 625 83931]] । * क्लाउडिया स्कोनिंग कैलेंडर: ''एर्विन बॉवीन: कलाकार उपनिवेशवादी, चित्रकार यात्री और इतिहासकार।'' इन: ''आर्ट प्रोफ़ाइल कला पत्रिका'', पृष्ठ 28-31, अंक संख्या। 146-2022. * क्रिस्टीना स्ट्रेकफस: ''एक ही समय में कलाकार कॉलोनी और समकालीन गवाह।'' ''सोलिंगन में "ब्लैक हाउस"।'' ''इन: आर्ट प्रोफ़ाइल कला पत्रिका, पृष्ठ 48-53, अंक संख्या। 148-2022.'' == संग्रहालय, पुरालेख, सार्वजनिक संग्रह == कलाकार एर्विन बॉवीन की पेंटिंग और पांडुलिपियाँ विभिन्न यूरोपीय देशों के कई संग्रहालयों, अभिलेखागारों और सार्वजनिक संग्रहों में रखी गई हैं। नीदरलैंड में रिज्क्सम्यूजियम एम्स्टर्डम <ref>Bettina Heinen-Ayech (Hrsg.): Erwin Bowien 1899–1972 Werkverzeichnis – Catalogue Raisonné-Werkoverzicht. Verlag U-Form, Solingen 1999, ISBN 3-88234-103-3.</ref> <ref>Hans-Karl Pesch: Erwin Bowien. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech und der Freundeskreis Erwin Bowien. e.V. 1. Auflage. Solingen 1981</ref>, हेग में कोनिंकलिज्क हुइसार्चिव में <ref>Bettina Heinen-Ayech (Hrsg.): Erwin Bowien 1899–1972 Werkverzeichnis – Catalogue Raisonné-Werkoverzicht. Verlag U-Form, Solingen 1999, ISBN 3-88234-103-3.</ref> <ref>Hans-Karl Pesch: Erwin Bowien. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech und der Freundeskreis Erwin Bowien. e.V. 1. Auflage. Solingen 1981</ref>, होर्न में पश्चिमी पश्चिमी संग्रहालय में <ref>Bettina Heinen-Ayech (Hrsg.): Erwin Bowien 1899–1972 Werkverzeichnis – Catalogue Raisonné-Werkoverzicht. Verlag U-Form, Solingen 1999, ISBN 3-88234-103-3.</ref> <ref>Hans-Karl Pesch: Erwin Bowien. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech und der Freundeskreis Erwin Bowien. e.V. 1. Auflage. Solingen 1981</ref>, म्यूजियम वैन एग्मंड में पेंटिंग हैं। एग्मंड ए/ज़ी में <ref>Peter J.H. van den Berg. De schilders van Egmond. W Books, Zwolle 2021, ISBN 978 94 625 83931</ref> । अभिलेखीय सामग्रियाँ रीजनललार्कचीफ अल्कमार और द हेग में आरकेडी - नीदरलैंड्स इंस्टीट्यूट वूर कुन्स्टगेस्चिइडिस संग्रह में स्थित हैं। जर्मनी में, कलाकार की पेंटिंग उत्तरी राइन-वेस्टफेलिया राज्य के कला संग्रह में हैं <ref>Bettina Heinen-Ayech (Hrsg.): Erwin Bowien 1899–1972 Werkverzeichnis – Catalogue Raisonné-Werkoverzicht. Verlag U-Form, Solingen 1999, ISBN 3-88234-103-3.</ref> <ref>Hans-Karl Pesch: Erwin Bowien. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech und der Freundeskreis Erwin Bowien. e.V. 1. Auflage. Solingen 1981</ref>, सोलिंगन में कला संग्रहालय में <ref>Bettina Heinen-Ayech (Hrsg.): Erwin Bowien 1899–1972 Werkverzeichnis – Catalogue Raisonné-Werkoverzicht. Verlag U-Form, Solingen 1999, ISBN 3-88234-103-3.</ref>, वेइल एम राइन में नगरपालिका कला संग्रह में <ref>Bettina Heinen-Ayech (Hrsg.): Erwin Bowien 1899–1972 Werkverzeichnis – Catalogue Raisonné-Werkoverzicht. Verlag U-Form, Solingen 1999, ISBN 3-88234-103-3.</ref> <ref>Hans-Karl Pesch: Erwin Bowien. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech und der Freundeskreis Erwin Bowien. e.V. 1. Auflage. Solingen 1981</ref>, निसेनहौस हसुम में नॉर्डफ्राइसलैंड संग्रहालय में <ref>Bettina Heinen-Ayech (Hrsg.): Erwin Bowien 1899–1972 Werkverzeichnis – Catalogue Raisonné-Werkoverzicht. Verlag U-Form, Solingen 1999, ISBN 3-88234-103-3.</ref> <ref>Hans-Karl Pesch: Erwin Bowien. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech und der Freundeskreis Erwin Bowien. e.V. 1. Auflage. Solingen 1981</ref>, लॉराच में ड्रेइलैंडरम्यूजियम (पूर्व में संग्रहालय एम बर्गहोफ़) में <ref>Hans-Karl Pesch: Erwin Bowien. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech und der Freundeskreis Erwin Bowien. e.V. 1. Auflage. Solingen 1981</ref>, स्प्रिंग/डीस्टर में जिला स्थानीय इतिहास संग्रहालय में <ref>Bettina Heinen-Ayech (Hrsg.): Erwin Bowien 1899–1972 Werkverzeichnis – Catalogue Raisonné-Werkoverzicht. Verlag U-Form, Solingen 1999, ISBN 3-88234-103-3.</ref>, हैन में नगर कला संग्रह. -मुंडेन <ref>Bettina Heinen-Ayech (Hrsg.): Erwin Bowien 1899–1972 Werkverzeichnis – Catalogue Raisonné-Werkoverzicht. Verlag U-Form, Solingen 1999, ISBN 3-88234-103-3.</ref> और स्टैडस्पार्कसे सोलिंगेन <ref>Bettina Heinen-Ayech (Hrsg.): Erwin Bowien 1899–1972 Werkverzeichnis – Catalogue Raisonné-Werkoverzicht. Verlag U-Form, Solingen 1999, ISBN 3-88234-103-3.</ref> <ref>Diana Millies: Erwin Bowien, Bildnisse und Portraits Solinger Bürger. Solingen, 1991</ref> के कला संग्रह में रखा गया है। अभिलेखीय सामग्रियां सोलिंगन में नगरपालिका अभिलेखागार और डसेलडोर्फ में हेनरिक हेन इंस्टीट्यूट में स्थित हैं। नॉर्वे में, अल्स्टाहाग नगर पालिका (अल्स्टाहाग कोम्यून) <ref>Bettina Heinen-Ayech (Hrsg.): Erwin Bowien 1899–1972 Werkverzeichnis – Catalogue Raisonné-Werkoverzicht. Verlag U-Form, Solingen 1999, ISBN 3-88234-103-3.</ref> के पास कलाकार की पेंटिंग्स का एक बड़ा संग्रह है। स्विट्जरलैंड में, अभिलेखीय सामग्री SIK-ISEA के अभिलेखागार में संग्रहीत की जाती है: ज्यूरिख में स्विट्जरलैंड में ऐतिहासिक और समकालीन कला पर कला अध्ययन संस्थान। == फ़िल्में, रेडियो नाटक == * 1992 हसन बौअब्देल्लाह: ''बेटिना हेनेन-आयच - एर्विन बॉवीन को पत्र'' । फ़िल्म, सोलिंगन और अल्जीयर्स, 1992। फ्रांसीसी संस्करण का शीर्षक ''बेटिना हेनेन-आयच - लेट्रे ए एर्विन बॉवीन है'' । फिल्म को मॉन्ट्रियल महोत्सव के आधिकारिक चयन में शामिल किया गया था। <ref name=":2">Dr. Haroun Ayech: ''Filme, Audio (Films, Audio).'' In: ''Erwin Johannes Bowien (1899-1972).'' Dr. Haroun Ayech, 2020, 1 मई 2020 को पुनः प्राप्त (जर्मन)</ref> * 2010 जॉर्ज बेयर्ले। ''स्पेसर्ट और कारवेंडेल के बीच'' बीआर प्रारूप में ''स्मृति की कला'' <ref name=":2" /> * 2011 जॉर्ज बेयर्ले। ''ऑल्गौ में पर्वतीय मूर्ति - शरण स्थल के रूप में क्रुज़थल, 1944'', ''बवेरिया के लिए समय'' प्रारूप में। चलने का समय, लगभग 53 मिनट। 11 तारीख को पहली बार रेडियो नाटक प्रसारित किया गया। दिसंबर 2011 <ref name=":2" /> * 2015 रूडी होल्ज़बर्गर और जॉर्ज बेयर्ले। ''ऑल्गौ में लुप्त बिंदु।'' ''स्मृति की कला: क्रुज़थल में एर्विन बॉवीन'' . चलने का समय: 53 मिनट. बेयर्ले - कुम्मेल - होल्ज़बर्गर फाउंडेशन। फिल्म का प्रीमियर 21 तारीख को अक्टूबर 2015 म्यूनिख में मैक्सिम सिनेमा में <ref name=":2" /> == वेब लिंक == * [http://www.erwin-bowien.com erwin-bowien.com] - एर्विन जोहान्स बॉवीन के बारे में वेबसाइट * एर्विन बॉवीन - कलाकारों की कॉलोनी "श्वार्ज़ेस-हौस" के नायक - [https://www.schwarzes-haus.com/ www.schwarzes-haus.com।] * आप [https://www.deutsche-biographie.de/116300167.html#indexcontent जर्मन जीवनी] में एर्विन बॉवीन के बारे में भी जानकारी पा सकते हैं * जर्मन [https://portal.dnb.de/opac.htm?method=simpleSearch&cqlMode=true&query=nid%3D116300167 राष्ट्रीय पुस्तकालय] की सूची == व्यक्तिगत साक्ष्य == <references /> [[श्रेणी:१९७२ में निधन]] [[श्रेणी:1899 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:जर्मनी के चित्रकार]] n3y69zo7uj7r01p5v6006nwpj1247zu 6630273 6630272 2026-10-16T17:09:36Z Yeni Lin 792610 6630273 wikitext text/x-wiki [[चित्र:Erwin_Bowien_Selbstbildnis_1920.jpg|अंगूठाकार| एर्विन बॉवीन - स्व-चित्र। 1920 के दशक]] '''एर्विन योहानस बॉवीन''' ({{Langx|de|Erwin Johannes Bowien|italic=no}}; 3 सितंबर 1899 – 3 दिसंबर 1972) एक जर्मन [[चित्रकला|चित्रकार]], [[चित्रकला|लेखक]] और कवि थे। == जीवनी == एर्विन बॉवीन एरिच बॉवीन के पुत्र थे, जो शुरू में एक सिविल इंजीनियर और बाद में वाइल आम राइन में राइनहाफेन (राइन बंदरगाह) के कमर्शियल डायरेक्टर बने और उनकी पत्नी अन्ना-मारिया, जन्म उपनाम न्यूफेल्ट, एल्बिंग, पूर्वी प्रशिया से थीं। उनका पालन-पोषण बर्लिन- चार्लोटेनबर्ग और बाद में [[स्विट्ज़रलैण्ड|स्विट्जरलैंड के न्यूचैटेल]] में हुआ।  बॉवीन की दोस्ती एरिक थिबॉड से हो गई<sup>,</sup><ref>Erwin Bowien: ''Das schöne Spiel zwischen Geist und Welt. Mein Malerleben.'' Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech und Freundeskreis Erwin Bowien e.V. U-Form Verlag, Solingen 1995, <nowiki>ISBN 3-88234-101-7</nowiki>, S. 24,25 und 72.</ref> जिन्होंने उनका [[द्वितीय विश्वयुद्ध|Zweiten Weltkrieg (द्वितीय विश्व युद्ध]]) के बाद 1948 में स्विट्जरलैंड में फिर से प्रवेश संभव कराया था। बॉवीन ने अपना पहला कला प्रशिक्षण विलियम रैसीन के साथ न्यूचैटेल के स्कूल ऑफ एप्लाइड आर्ट्स में प्राप्त किया था। स्विस चॉकलेट निर्माता कार्ल रस- ज़ुख़ार्ड ने युवा बॉवीन को प्रोत्साहित किया और उनसे कई पेंटिंग अधिग्रहित कीं।<ref>Erwin Bowien: ''Das schöne Spiel zwischen Geist und Welt. Mein Malerleben.'' Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech und Freundeskreis Erwin Bowien e.V. U-Form Verlag, Solingen 1995, <nowiki>ISBN 3-88234-101-7</nowiki>, S. 22–23.</ref> जर्मन नागरिक होने की वजह से बॉवीन को अपने 18वें जन्मदिन पर सेना में शामिल होना पड़ा और उन्हें [[प्रथम विश्व युद्ध|Ersten Weltkrieg (प्रथम विश्व युद्ध)]] में 1917/1918 में एक इंटरसेप्टर यूनिट में Dolmetscher (दुभाषिया) के रूप में भाग लेने के लिए मजबूर किया गया था। इस दौरान, उन्होंने अन्य चीजों के अलावा, Argonner Wald (आर्गोन वन) में सामने से रेखाचित्र और जल रंग चित्र बनाए। 1919 में हनोवर में उन्हें सेना से निकाल दिया गया। युद्ध के बाद, बॉवीन ने पहली बार Kunstgewerbeschule Hannover (हनोवर स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स)<ref name=":0">Bettina Heinen-Ayech und Ulrike Friedrichs: ''Erwin Bowien (1899-1972). Werkverzeichnis - Catalogue Raisonné - Werkoverzicht.'' Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech. U-Form Verlag, Solingen 1999, <nowiki>ISBN 3-88234-103-3</nowiki>, S. 18.</ref> में शाम की कक्षाओं में भाग लिया। 1920-1921 में रॉबर्ट एंगेल्स के साथ [[म्यूनिख|मुंचेन (म्यूनिख)]] में स्टेट एकेडमी ऑफ आर्ट में अध्ययन के बाद 1922 में ड्रेसडेन एकेडमी ऑफ आर्ट में प्रोफेसर रिचर्ड मुलर<ref name=":0" /> के साथ अध्ययन और फिर स्टेट स्कूल ऑफ़ आर्ट बर्लिन-शॉनबर्ग में फ़िलिप फ़्रैंक  के मातहत और ऑस्कर फ़िशेल के साथ कला इतिहास पाठ के अध्ययन के साथ एक ड्राइंग शिक्षक के रूप में प्रशिक्षण लिया । 1923 में बॉवीन ने ड्यूसेलडोर्फ में हस्तशिल्प शिक्षक के रूप में अपनी परीक्षा पास की; बाद के वर्षों में वह कैसल, [[आखन|आख़ेन,]] [[हैम्बर्ग|हैम्बर्ग,]] ल्यूबेक, [[कार्ल्सरुहे|कार्लरुए]], फ़्राएबर्ग इम ब्रिसगाउ, बासेल, कोनिग्सबर्ग और हिल्डेशाइम और इसके बाद [[प्राग|Prag (प्राग)]] और [[वियना|Wien (वियना)]] (1928) एवं उत्तरी इटली (1929) की पेंटिंग यात्राओं पर जाते रहे।<ref>Barbara u. Detlef Rahlf: ''[https://www.erwin-bowien.com/vita01.htm Erwin Bowien Vita I.]{{Dead link|date=अक्तूबर 2023 |bot=InternetArchiveBot }}'' In: ''erwin-bowien.de.'' 10. Oktober 2008, abgerufen am 3. November 2018.</ref> बॉवीन ने सबसे पहले Hohenzollernschen Landen (होहेनज़ोलर्न लैंड्स) में हेचिंगेन में रियालजिमनाज़ियम में बतौर एक शिक्षक काम किया, फिर 1925 से 1932 तक सोलिंगन में Gymnasium Schwertstraße (श्वरर्स्ट्रास ग्रामर स्कूल) में एक कला शिक्षक के रूप में काम किया, जहां भविष्य के जर्मन राष्ट्रपति वाल्टर शील उनके शिष्यों में से एक थे। इन वर्षों के दौरान, उन्होंने फ़ोक्सहोक़शूले (स्थानीय वयस्क शिक्षा केंद्र) में कला इतिहास विषयों पर 100 से अधिक व्याख्यान दिए। इसके अलावा, उन्हें सोलिंगन Zwillingswerk  (जुड़वाँ कारखाना) में सभी कार्य प्रक्रियाओं के चित्र बनाने का कार्य सौंपा गया। हालांकि, ब्रूनिंग्सचेन नोटफेरऑर्डनुंगेन (ब्रूनिंग के आपातकालीन आदेश) के कारण उन्हें शिक्षण का पेशा छोड़ना पड़ा। इस दौरान, वह नियमित रूप से एर्ना और हैन्स हेनेन के कलाकार और साहित्यिक सैलून का दौरा करते थे, जिससे इस परिवार के साथ उनकी आजीवन दोस्ती हो गई। हेनेन परिवार की बेटी, बेटिना हेनेन- अयेच (1937-2020), उनकी सबसे महत्वपूर्ण चित्रकारी छात्रा बन गईं।<ref>Barbara & Detlef Rahlf, München: ''[https://www.erwin-bowien.com/vita02.htm Erwin Bowien Vita II]{{Dead link|date=अक्तूबर 2023 |bot=InternetArchiveBot }}.'' In: ''erwin-bowien.de.'' 10. Oktober 2008, abgerufen am 19. November 2018.</ref> [[चित्र:Bowien_Egmond_an_Zee_1937.jpg|अंगूठाकार| एग्मंड आन ज़ी (1937)]] 1932 से 1942 के वर्षों में बॉवीन, Egmond aan den Hoef, Nordholland (एग्मंड आन डेन होफ, नॉर्थ हॉलैंड) में दार्शनिक [[रेने देकार्त|रेने]] [[ऐम्स्टर्डैम|डेसकार्टेस]] के पूर्व घर में एक स्वतंत्र कलाकार के रूप में रहे। एक शिक्षक के रूप में बर्खास्त किये जाने के बाद, उन्होंने शुरू में केवल रेम्ब्रांट प्रदर्शनी देखने के लिए एम्स्टर्डम की यात्रा की, लेकिन फिर नीदरलैंड में ही बस गए। वहां उनके सबसे विशिष्ट चित्रकला छात्र डर्क ओडेस थे। 1934 में बॉवीन ने नॉर्डफ्रिका (उत्तरी अफ्रीका) में लीबिया, ट्यूनीशिया, अल्जीरिया और मोरक्को की एक बड़ी यात्रा लकड़ी के एक थोक व्यापारी के साथ की। इस यात्रा को इसी व्यापारी ने वित्तपोषित किया था और बाद में बदले में उत्पादित कार्यों का आधा हिस्सा लिया था।<ref>Bowien: ''Das schöne Spiel zwischen Geist und Welt.'' S. 47f.</ref> यात्रा की कठिनाइयों से उन्हें कुछ समय तक कष्ट भी झेलना पड़ा था।<ref>Bowien: ''Das schöne Spiel zwischen Geist und Welt.'' S. 52.</ref> भूदृश्यों के अलावा, बॉवीन ने धनी डच लोगों के लिए कई छायाचित्र और पारिवारिक चित्र बनाए। होर्न में वेस्टफ़्रिसियाई म्यूजियम ने बॉवीन<ref name=":0">Bettina Heinen-Ayech und Ulrike Friedrichs: ''Erwin Bowien (1899-1972) Werkverzeichnis-Catalogue Raisonné-Werkoverzicht''. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech. 1. Auflage. U-Form-Verlag Solingen, Solingen 1999, <nowiki>ISBN 3-88234-103-3</nowiki>, S. 21–26.</ref> की पेंटिंग्स का अधिग्रहण किया, जबकि दान के माध्यम से अन्य पेंटिंग्स द हेग में रिज्क्स म्यूजियम एम्स्टर्डम<ref name=":0" />, कोनिंकलिज्क हुइस आर्काइव<ref name=":0" />, रीजनलआरचीफ अल्कमार<ref name=":0" /> और किर्चेंजेमेइंडे स्कूल को मिली <ref name=":0" /> राष्ट्रीय समाजवादियों द्वारा "माचटरग्रेफुंग (सत्ता पर कब्ज़ा)" ही वह कारण था जिसके कारण बॉवीन जर्मनी नहीं लौटे, अपनी [[आत्मकथा|Autobiografie  (आत्मकथा)]] में उन्होंने ऐसा संकेत दिया है - राजनीति ने मुझे हर दिन "नई पीड़ा" दी थी; "तो, उस समय मैंने जो तस्वीर बनाई उसमें कुछ चीत्कार थी। इनमें मैं समुद्र को उतना उन्मादित नहीं दिखा सका, बादल भी उतने काले नहीं थे।"<ref>Bowien: ''Das schöne Spiel zwischen Geist und Welt.'' S. 52f.</ref>  जर्मन वेहरमाच (defence force )द्वारा [[नीदरलैण्ड का इतिहास|(Besetzung der Niederlande) नीदरलैंड्स]] पर कब्जे के बाद, उन्हें [[जलरञ्जित चित्रकला|अल्कमार]] में तीन दिनों के लिए कारावास में डाल दिया गया था।चूँकि राजनीतिक स्थिति के कारण वह अब धन अर्जित करने में समर्थ नहीं थे, लिहाजा वह भारी मन से जर्मनी लौट आये। उन्होंने अपनी 35 कलाकृतियों को हेग में एक कला डीलर की देखरेख में छोड़ दिया और बाद में वे खो भी गईं।<ref>Bowien: ''Das schöne Spiel zwischen Geist und Welt.'' S. 62.</ref><ref name=":0">Barbara & Detlef Rahlf, München: ''[https://www.erwin-bowien.com/vita02.htm Erwin Bowien Vita II]{{Dead link|date=अक्तूबर 2023 |bot=InternetArchiveBot }}.'' In: ''erwin-bowien.de.'' 10. Oktober 2008, abgerufen am 19. November 2018.</ref>  वह पहले तो छह महीने के लिए सोलिंगेन में हेनेन परिवार के यहाँ ठहरे, जहां, 1942 की सर्दियों में, उन्होंने [[हेग|जल रंग]] में शहर के दृश्यों की एक श्रृंखला बनाई, जो कि,  नवंबर 1944 में शहर के विनाश से पहले इसके चित्रों का अंतिम चक्र थी।<ref name=":0" /> बॉवीन का अगला पड़ाव [[औग्स्बुर्ग|ऑग्सबर्ग]] था। चूँकि द्वितीय विश्व युद्ध के कारण खरीदने के लिए न तो रहमन (फ़्रेम) थे और न ही लाइनवांड कैनवास, बॉवीन के मन में [[एडोल्फ़ हिटलर|फ्यूहरर]]  (हिटलर) के चित्रों और आधिकारिक नाजी प्रचार चित्रों को खरीदने का विचार आया, जो हर जगह आसानी से उपलब्ध थे औरउन पर प्राथमिक लेप (ग्रुंडेरुंग) द्वारा उन्हें फिर से तैयार करने के बाद, उन्होंने उन पर ऑग्सबर्ग के दृश्यों के चित्र बनाए। पेंटिंग्स खूब बिकीं, लेकिन गेस्टापो ने उनके साथ विश्वाश्घात किया , उसने  1943 में Reichskulturkammer (राइष कल्चरल चैंबर) के आदेश पर ऑग्सबर्ग में उनकी पेंटिंग्स को जब्त कर लिया; युद्ध के प्रभाव से बॉवीन की 30 से अधिक पेंटिंग नष्ट हो गईं। वैध कागजात के बिना, विशेष रूप से सैन्य पासपोर्ट के बिना, वह ऑल्गौ में क्रुज़थल-ईसेनबाक (अब इस्नी का एक जिला) भाग गए। वहां उन्होंने अपना युद्ध संस्मरण लेस ह्युरेस पर्डस डु मैटिन ("द लॉस्ट आवर्स ऑफ द मॉर्निंग") लिखा, और एक भागे हुए फ्रांसीसी युद्ध बंदी को छिपने में मदद की।<ref>Bowien: ''Das schöne Spiel zwischen Geist und Welt.'' S. 67.</ref> युद्ध की समाप्ति के बाद, एर्विन बॉवीन सोलिंगन लौट आए, जहां वह युद्ध की समाप्ति के बाद, एर्विन बॉवीन सोलिंगन लौट आए, जहां वह 1950 से रह रहे थे, सोलिंगन और अपने गृहनगर वाइल आम राइन में भी वह बारी-बारी से रहते रहे। उन्होंने और भी कई चित्रकला संबंधी यात्राएँ कीं, जैसे जर्मनी में,  [[स्विट्ज़रलैण्ड|Schweiz (स्विट्जरलैंड),]] Südschweden (दक्षिणी स्वीडन), [[नॉर्वे|Norwegen (नॉर्वे)]] (वहां अलस्टेन द्वीप पर कॉटेज "बेटिना-बो" भी खरीदी ), [[पेरिस]], अल्जीरिया (बेटिना हेनेन-अयेच से मुलाकात के लिए[[फ़िनलैंड|), Finnland (फ़िनलैंड),]] और स्यूडफ़्रैंकरेइच (दक्षिणी फ़्रांस)। 28 जुलाई, 1970 को, उन्होंने इंकेन स्ट्रोहमेयर, जन्म उपनाम फ़ोग्ट से विवाह किया । 3 दिसंबर 1972 को एर्विन बॉवीन की वाइल आम राइन में मृत्यु हो गई और वहीं उन्हें दफना दिया गया।<ref>Barbara & Detlef Rahlf, München: ''Erwin Bowien III.'' In: ''erwin-bowien.de.'' 10. Oktober 2008, abgerufen am 19. November 2018.</ref> उनका कब्र स्थल वाइल आम राइन शहर की सम्मानित कब्र के रूप में बना रहा। कलाकार की पेंटिंग्स को उत्तरी राइन-वेस्टफेलिया के संस्कृति मंत्रालय, <ref name=":0">Bettina Heinen-Ayech und Ulrike Friedrichs: ''Erwin Bowien (1899-1972) Werkverzeichnis-Catalogue Raisonné-Werkoverzicht''. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech. 1. Auflage. U-Form-Verlag Solingen, Solingen 1999, <nowiki>ISBN 3-88234-103-3</nowiki>, S. 21–26.</ref> हसुम में नॉर्डफ्रीसलैंड संग्रहालय (निसेनहॉस),<ref name=":0" /> लोर्राच में द्रायलैंडरम्यूजियम (पूर्व में संग्रहालय एम बर्गहोफ़), <ref name=":0" /> क्राइसहाइमाट म्यूजियम स्प्रिंग<ref name=":0" /> और हनोवरश मुंडेन, सोलिंगन और वाइल आम राइन के नगरपालिका कला संग्रह द्वारा अधिग्रहित किया गया था।<ref name=":0" /> 20 को. अक्टूबर 1976 में, सोलिंगन में जर्मन ब्लेड संग्रहालय में एर्विन बॉवीन फ्रेंड्स सर्कल की स्थापना की गई थी। वी. की स्थापना की।<ref>Bettina Heinen-Ayech und Ulrike Friedrichs: ''Erwin Bowien (1899-1972) Werkverzeichnis-Catalogue Raisonné-Werkoverzicht''. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech. 1. Auflage. U-Form-Verlag Solingen, Solingen 1999, <nowiki>ISBN 3-88234-103-3</nowiki>, S. 21–26.</ref> == प्रदर्शनियां == * 1917 न्यूचैटेल (न्यूएनबर्ग), स्विट्जरलैंड। गैलरी "रोज़ डी'ओर" में प्रदर्शनी।<ref name=":0">Hans-Karl Pesch: ''Erwin Bowien''. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech und der Freundeskreis Erwin Bowien. e.V. 1. Auflage. Solingen 1981, S. 30.</ref> * 1927 सोलिंगन, जर्मन। सोलिंगन कैसीनो सोसायटी के हॉल में पहली प्रदर्शनी<ref name=":1">Bettina Heinen-Ayech und Ulrike Friedrichs: ''Erwin Bowien (1899-1972) Werkverzeichnis-Catalogue Raisonné-Werkoverzicht''. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech. 1. Auflage. U-Form-Verlag Solingen, Solingen 1999, <nowiki>ISBN 3-88234-103-3</nowiki>, S. 21–26.</ref> * 1928 सोलिंगन, डॅायशलांड। सोलिंगन कैसीनो सोसायटी के हॉल में दूसरी प्रदर्शनी<ref name=":1" /> * 1929 सोलिंगन, डॅायशलांड। सोलिंगेन कैसीनो सोसायटी के हॉल में तीसरी दूसरी प्रदर्शनी।<ref name=":0" /> * 1933 से 1941 हॉलैंड: होर्न, एग्मंड, गोरिनकेम, स्कूल, [[हेग|डेन हाग]] में प्रदर्शनियाँ।<ref name=":0" /> * 1947 से 1959 सोलिंगन, जर्मनी। डॉयचे क्लिंगनम्यूजियम (जर्मन ब्लेड म्यूजियम) में "बर्गिसे कला प्रदर्शनियों" में भागीदारी।<ref name=":1" /> * 1951 हुसुम, जर्मनी। नॉर्डफ़्रीज़लैंड म्यूजियम (निसेनहॉस) में प्रदर्शनी।<ref name=":0" /> * 1954 [[बर्न]], स्विट्जरलैंड। गैलरी "हौस डेर इनरेन एंगे" में प्रदर्शनी (2-31 मई)। उद्घाटन भाषण डॉ. ई.एम. फालेट-वॉन कस्टेलबर्ग।<ref name=":0" /> * 1957 हुसुम, जर्मनी। नॉर्डफ़्रीज़लैंड म्यूजियम (निसेनहॉस) में प्रदर्शनी। संग्रहालय द्वारा अधिग्रहण.<ref name=":1" /> * 1957 [[कोपनहेगन|कोपेनहेगन]], डेनमार्क। डॉयचे क्लब में प्रदर्शनी. कल्टुराटाचे डेर डॉयचे बोट्सचाफ्ट, डॉ. ओबरमेयर द्वारा उद्घाटन।<ref name=":1" /> * 1958 सोलिंगन, जर्मनी। "न्यूएन राइनत्साइटुंग " के स्थलों पर प्रदर्शनी।<ref name=":1" /> * 1958 हनोवरश मुंडेन, जर्मनी। स्थानीय इतिहास संग्रहालय के फिर से खुलने के अवसर पर वेल्फ़ेंसच्लॉस में प्रदर्शनी।<ref name=":1" /> * 1958 कोपेनहेगन, डेनमार्क। जर्मन क्लब में दूसरी प्रदर्शनी।<ref name=":1" /> * 1960 सोलिंगन, जर्मनी। एर्विन के 60वें जन्मदिन के अवसर पर 17 जनवरी से 28 फरवरी 1960 तक सोलिंगन में डॉयचे क्लिंगनम्यूजियम (जर्मन ब्लेड म्यूजियम) में एक जर्मन पूर्वव्यापी आयोजन हुआ। * 1962 बर्न, स्विट्जरलैंड। श्नाइडर गैलरी में प्रदर्शनी।<ref name=":1" /> * 1964 [[पेरिस]], फ़्रांस। डंकन गैलरी में प्रदर्शनी (2-16 अक्टूबर)<ref name=":1" /> * 1965 एयू/सेंट गैलेन, स्विट्जरलैंड। "ज़ोलस्ट्रेश" गैलरी में प्रदर्शनी (24.4.-2.5.)।<ref name=":1" /> * 1967 वाइल आम राइन, जर्मनी। हॉउस डेर फोक्सबिल्डुंग में प्रदर्शनी (23.9-1.10.9)। लॉराच में म्यूज़ियम एम बर्गहोफ़ वाइल आम राइन शहर द्वारा कई अधिग्रहण।<ref name=":1" /> * 1968 फ्रीबर्ग इम ब्रिसगाउ, जर्मनी। सिटी हॉल में प्रदर्शनी (अप्रैल-मई)।<ref name=":1" /> * 1968 बैड सैकिंगन, जर्मनी। ट्रॉम्पेटर्सच्लॉस (1.-22.12) में प्रदर्शनी, कुन्स्टवेरिन होचरेन द्वारा आयोजित।<ref name=":1" /> * 1969 फ्रायबर्ग इम ब्रिसगाउ, जर्मनी। दृश्य कलाकारों के संघ द्वारा 70वें जन्मदिन के अवसर पर सिटी हॉल में पूर्वव्यापी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।<ref name=":1" /> * 1970 सोलिंगन, जर्मनी। डॉयचे क्लिंगनम्यूजियम में प्रदर्शनी।<ref name=":1" /> * 1971 वाइल आम राइन, जर्मनी। हौस डेर फोक्सबिल्डुंग में प्रदर्शनी।<ref name=":1" /> * 1973 स्प्रिंग/डीस्टर, जर्मनी। मरणोपरांत। हाइमाटम्यूजियम में प्रदर्शनी (25.8.-30.9.1973)<ref name=":1" /> * 1974 वाइल आम राइन, जर्मनी। मरणोपरांत। पूर्व बॉवीन निवास में प्रदर्शनी (2.1-14.1.1974)।<ref name=":1" /> * 1974 [[रबात]], मोरक्को, मरणोपरांत, गोएथेइंस्टीट्यूट में प्रदर्शनी (4.-14.12.1974)। जर्मन राजदूत डॉ. हेंडस द्वारा उद्घाटन <ref name=":1" /> * 1975 वाइल आम राइन, जर्मनी, मरणोपरांत। हाउस डेर फोक्सबिल्डुंग में प्रदर्शनी (3.-11.5.1974)।<ref name=":1" /> * 1975 सोलिंगेन, जर्मनी, मरणोपरांत। डॉयचे क्लिंगनम्यूजियम में प्रदर्शनी (15.5-13.7.1975) <ref name=":1" /> * 1976 ग्लैडबेक (स्टैड बॉट्रोप), जर्मनी, पोस्टहुम। वासेरश्लॉस विट्रिंजन में प्रदर्शनी (14.3.-25.4)<ref name=":1" />। * 1977 बर्न, स्विट्जरलैंड, मरणोपरांत। गैलरी डी'आर्ट मुंस्टर में प्रदर्शनी (25.1. से 15.2.1977)।<ref name=":1" /> * 1977 [[अल्जीयर्स|अल्जीयर]], अल्जीरिया, मरणोपरांत। गैलरी "मोहम्मद रेसीम" में प्रदर्शनी (15.11 से 26.11)<ref name=":1" /> * 1978 बुच्स्लाग ड्रेइइच, जर्मनी, मरणोपरांत। बर्गरसाल में प्रदर्शनी (6.-17.9.1978)।<ref name=":1" /> * 1980 रेम्सचीड, जर्मनी, मरणोपरांत। स्टैडिशेन हाइमाटम्यूजियम रेम्सचीड-हस्टेन में प्रदर्शनी (6.7.-24.8.1980)<ref name=":1" /> * 1982 सोलिंगेन, जर्मनी, मरणोपरांत। डॉयचेस क्लिंगेनम्यूजियम (11.-26.9.1982)। विषयवस्तु: बर्गिसचेस लैंड<ref name=":1" /> * 1984 वाइल आम राइन, जर्मनी, मरणोपरांत। म्यूनिसिपल गैलरीस्टेपफ्लेहस (15.3 -8.4.1984)<ref name=":1" /> * 1984 सोलिंगन, जर्मनी, डॉयचेस क्लिंगनम्यूजियम (19.08-07.10.1984)। विषयवस्तु: राइन का उसके स्रोत से मुँह तक का चित्रण।<ref name=":1" /> * 1985 [[अल्जीयर्स|अल्जीयर]], अल्जीरिया, मरणोपरांत। गोएथेइंस्टीट्यूट में प्रदर्शनी (19. से 30.11)<ref name=":1" /> 1986 सोलिंगन, जर्मनी। मरणोपरांत। स्टैडस्पार्कसे सोलिंगन में प्रदर्शनी (16.9 - 16.10)। विषयवस्तु: हॉलैंड<ref name=":1" /> * 1986 वाइल आम राइन, जर्मनी, मरणोपरांत। स्पार्कसे मार्कग्राफर लैंड (10.11-2.12)। * 1988 वाइल आम राइन, जर्मनी, मरणोपरांत। स्पार्कसे मार्कग्राफर लैंड (23.8-16.09)। विषयवस्तु: ड्रेइलैंडेरेक<ref name=":1" /> * 1988 रेम्सचीड, जर्मनी, मरणोपरांत। थिएटर गैलरी में प्रदर्शनी (11.9.-23.10.)<ref name=":1" /> * 1991 सोलिंगन, जर्मनी, मरणोपरांत। स्टाडस्पारकास्से सोलिंगन (10.09-04.10) विषयवस्तु: सोलिंगर नागरिकों की छवियां और चित्र।<ref name=":1" /> * 1996 सोलिंगन, जर्मनी, मरणोपरांत। बर्गिसचेस संग्रहालय, श्लॉस बर्ग एन डेर वुपर (22.9.-20.10)<ref name=":1" /> * 1999 सोलिंगन, जर्मनी, मरणोपरांत। संग्रहालय बाडेन (3.10-15.11)<ref name=":1" /> * 1999 वाइल आम राइन, जर्मनी, मरणोपरांत। स्टैडिश गैलेरी स्टैपफ्लेहस (20.11 से 19.12.1999)<ref name=":1" /> * 2006 सोलिंगन, जर्मनी, मरणोपरांत। लिबरल गैलरी में प्रदर्शनी (26.08-06.10)।<ref name=":2">Dr. Haroun Ayech: ''Retrospektiven.'' In: ''Erwin Johannes Bowien (1899-1972).'' Dr. Haroun Ayech, 2020, abgerufen am 1. Mai 2020 (deutsch).</ref> * 2012-2013 इस्नी, आइज़नबाक, जर्मनी, मरणोपरांत। हाउस टैन में प्रदर्शनी। विषयवस्तु: क्रुज़थल में एर्विन बॉवीन - आइज़नबाक <ref name=":2" /> * 2013-2014 वाइल आम राइन, जर्मनी, मरणोपरांत। 13 अक्टूबर 2013 से 27 जुलाई 2014 तक वाइल आम राइन में म्यूजियम एम लिंडेनप्लात्ज़ को चित्रकार के कार्य का पूर्वव्यापी प्रदर्शन मिला।<ref>Michael Tesch: ''Solingen: Ein Maler zwischen Geist und Welt.'' In: ''rp-online.de.'' 20. August 2013, abgerufen am 3. November 2018.</ref> <ref>''Erwin Bowien-Retrospektive präsentiert viele noch nie gezeigte Bilder.'' In: ''Badische Zeitung.'' Abgerufen am 3. November 2018.</ref> * 2014 सोलिंगन, जर्मनी, मरणोपरांत। कुन्स्टम्यूजियम सोलिंगन में पूर्वव्यापी (10.08-14.09.2014)<ref name=":2" /> * 2015 जॉर्जस्मरिएनहुट्टे, जर्मनी, म्यूजियम विला स्टैहमर में पूर्वव्यापी (14.10 - 15.11.2015)<ref name=":2" /> == चयनित कलाकृतियों की दीर्घा == <gallery mode="packed" heights="210"> चित्र:Erwin Bowien Sunset over Sylt (Germany) Pastel on paper 1951 WIKI.jpg|इरविन बोवियन: «ज़्युल्ट द्वीप पर सूर्यास्त (जर्मनी)», कागज़ पर पेस्टल रंग, 1951 (15.5 × 21.5 सेमी) चित्र:Erwin Bowien A Still Life in Chur (Switzerland), Oil on canvas 1959 WIKI.jpg|इरविन बोवियन: «कूर में स्थिर वस्तुओं का चित्र (स्विट्ज़रलैंड)», कैनवास पर तैलचित्र, 1959 (92 × 80 सेमी) चित्र:Erwin Bowien Trondheim Cityscape (Norway), Oil on canvas 1967 WIKI.jpg|इरविन बोवियन: «ट्रॉनहाइम का शहरी दृश्य (नॉर्वे)», कैनवास पर तैलचित्र, 1967 (92 × 80 सेमी) चित्र:Erwin Bowien Cologne Cathedral Oil on cancas 1971 WIKI.jpg|इरविन बोवियन: «कोलोन कैथेड्रल (जर्मनी)», कैनवास पर तैलचित्र, 1971 (136 × 147 सेमी) </gallery> == कारखाना == * ''आत्मा और संसार के बीच का खूबसूरत खेल - एक चित्रकार के रूप में मेरा जीवन।'' (आत्मकथा). बेटिना हेनेन-आयच और एर्विन बॉवीन सर्कल ऑफ फ्रेंड्स द्वारा प्रकाशित। वी. सोलिंगन 1995, [[Special:BookSources/3882341017|आईएसबीएन 3-88234-101-7]] . * ''ह्यूरेस पर्ड्यूज़ डू मैटिन, जर्नल डी'अन आर्टिस्ट पिंट्रे, एल्पेस बावरोइज़, 1944-1945।'' बर्नार्ड ज़िम्मरमैन द्वारा संपादित। एल'हरमट्टन पब्लिशिंग हाउस, पेरिस 2000, [[Special:BookSources/2747500403|आईएसबीएन 2-7475-0040-3]] . == साहित्य == * हंसजाकोब ड्रेसिया: ''एर्विन जोहान्स बॉवीन" चित्रकार के काम का एक परिचय'', सोलिंगन, अदिनांकित।<ref>Bettina Heinen-Ayech und Ulrike Friedrichs: ''Erwin Bowien (1899-1972) Werkverzeichnis-Catalogue Raisonné-Werkoverzicht''. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech. 1. Auflage. U - Form - Verlag Solingen, Solingen 2000, S. 26.</ref> * अनाम: ''एर्विन जे. बॉवीन, सोलिंगन, 17 से जर्मन ब्लेड संग्रहालय सोलिंगन की प्रदर्शनी के लिए 60 वर्ष की'' सूची। जनवरी से 28 तारीख तक फरवरी 1960।<ref>Hans Hofstätter und Berthold Hänel: ''Die Maler des Markgräflerlandes''. Hrsg.: Landkreis Lörrach. Schillinger Verlag, Freiburg 2000, S. 78.</ref> * हंस-कार्ल पेस्च: ''एर्विन बॉवीन'' । एड.: बेटिना हेनेन-आयच और एर्विन बॉवीन मित्र मंडली। इ। वि. 1. संस्करण. सोलिंगन 1981 <ref name=":0">Mitteilungen des Freundeskreises Erwin Bowien e.V. vom Dezember 2010 (Memento vom 20. März 2014 im ''Internet Archive'')</ref> * WFKoeman: "सर्कल ऑफ़ फ्रेंड्स" वैन एर्विन बॉवीन, "शेकेल्स" N°05, 1981 में। बर्गेन. * हंस-कार्ल पेश: ''द लाइफ, द बीइंग, द वर्क ऑफ एर्विन बॉवीन (1899 मुल्हेम/रुहर - 1972 वेइल एम राइन)'' सोलिंगन, 1986। <ref name=":0" /> * ए. डिट्ज़: ''एर्विन बॉवीन, पेस्टल पेंसिल के मास्टर'', इन: ''दास मार्कग्राफरलैंड'', 1986, पृष्ठ 200 एफएफ।<ref name=":1">Bayerischer Rundfunk dreht im Kreuzthal einen Film schwaebische.de 11. Oktober 2012.</ref> * डायना मिलीज़: ''एर्विन बॉवीन, सोलिंगन नागरिकों के चित्र और चित्र'' । सोलिंगन, 1991। <ref name=":0" /> * बवेरियन रेडियो द्वारा वृत्तचित्र ''द पेंटर बॉवीन एट द एंड ऑफ द वर्ल्ड'', रविवार, 6 जून को प्रसारित किया गया। मई 2012<ref name=":0" /><ref name=":1" /> * रूडी होल्ज़बर्गर: ''एडेलेग का आकर्षण: ऑलगौ में लुप्त बिंदु - क्रुज़थल में एर्विन बॉवीन।'' एडेलेग-वेरलाग, ईसेनबैक 2013, [[Special:BookSources/9783000427893|आईएसबीएन 978-3-00-042789-3]] . * बेटिना हेनेन-आयेच (सं. ): ''एर्विन बॉवीन 1899-1972 कैटलॉग राइसन वर्क्स अस्वीकरण।'' यू-फॉर्म पब्लिशिंग हाउस, सोलिंगन 1999, [[Special:BookSources/3882341033|आईएसबीएन 3-88234-103-3]]। * संग्रहालय मंडल ई. वी. और शहर. वेइल एम राइन में लिंडेनप्लात्ज़ में संग्रहालय (एड। ): ''मन और संसार के बीच.'' ''एर्विन बॉवीन'', प्रदर्शनी के साथ ब्रोशर। 13 अक्टूबर 2013 से 27 जुलाई 2014 तक. लिंडेनप्लात्ज़ में नगर संग्रहालय। क्योंकि राइन पर. * साइट्ज़ वैन डेर ज़ी: विज़ ओवरलीफ़डेन। जर्मन भाषा का नवीनतम संस्करण, प्रोमेथियस, एम्स्टर्डम 2019, [[Special:BookSources/9789044638424|आईएसबीएन 9789044638424]] । * पीटर जेएच वैन डेन बर्ग। एग्मंड के चित्र. डब्ल्यू बुक्स, ज़्वोल 2021, [[Special:BookSources/9789462583931|आईएसबीएन 978 94 625 83931]] । * क्लाउडिया स्कोनिंग कैलेंडर: ''एर्विन बॉवीन: कलाकार उपनिवेशवादी, चित्रकार यात्री और इतिहासकार।'' इन: ''आर्ट प्रोफ़ाइल कला पत्रिका'', पृष्ठ 28-31, अंक संख्या। 146-2022. * क्रिस्टीना स्ट्रेकफस: ''एक ही समय में कलाकार कॉलोनी और समकालीन गवाह।'' ''सोलिंगन में "ब्लैक हाउस"।'' ''इन: आर्ट प्रोफ़ाइल कला पत्रिका, पृष्ठ 48-53, अंक संख्या। 148-2022.'' == संग्रहालय, पुरालेख, सार्वजनिक संग्रह == कलाकार एर्विन बॉवीन की पेंटिंग और पांडुलिपियाँ विभिन्न यूरोपीय देशों के कई संग्रहालयों, अभिलेखागारों और सार्वजनिक संग्रहों में रखी गई हैं। नीदरलैंड में रिज्क्सम्यूजियम एम्स्टर्डम <ref>Bettina Heinen-Ayech (Hrsg.): Erwin Bowien 1899–1972 Werkverzeichnis – Catalogue Raisonné-Werkoverzicht. Verlag U-Form, Solingen 1999, ISBN 3-88234-103-3.</ref> <ref>Hans-Karl Pesch: Erwin Bowien. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech und der Freundeskreis Erwin Bowien. e.V. 1. Auflage. Solingen 1981</ref>, हेग में कोनिंकलिज्क हुइसार्चिव में <ref>Bettina Heinen-Ayech (Hrsg.): Erwin Bowien 1899–1972 Werkverzeichnis – Catalogue Raisonné-Werkoverzicht. Verlag U-Form, Solingen 1999, ISBN 3-88234-103-3.</ref> <ref>Hans-Karl Pesch: Erwin Bowien. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech und der Freundeskreis Erwin Bowien. e.V. 1. Auflage. Solingen 1981</ref>, होर्न में पश्चिमी पश्चिमी संग्रहालय में <ref>Bettina Heinen-Ayech (Hrsg.): Erwin Bowien 1899–1972 Werkverzeichnis – Catalogue Raisonné-Werkoverzicht. Verlag U-Form, Solingen 1999, ISBN 3-88234-103-3.</ref> <ref>Hans-Karl Pesch: Erwin Bowien. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech und der Freundeskreis Erwin Bowien. e.V. 1. Auflage. Solingen 1981</ref>, म्यूजियम वैन एग्मंड में पेंटिंग हैं। एग्मंड ए/ज़ी में <ref>Peter J.H. van den Berg. De schilders van Egmond. W Books, Zwolle 2021, ISBN 978 94 625 83931</ref> । अभिलेखीय सामग्रियाँ रीजनललार्कचीफ अल्कमार और द हेग में आरकेडी - नीदरलैंड्स इंस्टीट्यूट वूर कुन्स्टगेस्चिइडिस संग्रह में स्थित हैं। जर्मनी में, कलाकार की पेंटिंग उत्तरी राइन-वेस्टफेलिया राज्य के कला संग्रह में हैं <ref>Bettina Heinen-Ayech (Hrsg.): Erwin Bowien 1899–1972 Werkverzeichnis – Catalogue Raisonné-Werkoverzicht. Verlag U-Form, Solingen 1999, ISBN 3-88234-103-3.</ref> <ref>Hans-Karl Pesch: Erwin Bowien. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech und der Freundeskreis Erwin Bowien. e.V. 1. Auflage. Solingen 1981</ref>, सोलिंगन में कला संग्रहालय में <ref>Bettina Heinen-Ayech (Hrsg.): Erwin Bowien 1899–1972 Werkverzeichnis – Catalogue Raisonné-Werkoverzicht. Verlag U-Form, Solingen 1999, ISBN 3-88234-103-3.</ref>, वेइल एम राइन में नगरपालिका कला संग्रह में <ref>Bettina Heinen-Ayech (Hrsg.): Erwin Bowien 1899–1972 Werkverzeichnis – Catalogue Raisonné-Werkoverzicht. Verlag U-Form, Solingen 1999, ISBN 3-88234-103-3.</ref> <ref>Hans-Karl Pesch: Erwin Bowien. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech und der Freundeskreis Erwin Bowien. e.V. 1. Auflage. Solingen 1981</ref>, निसेनहौस हसुम में नॉर्डफ्राइसलैंड संग्रहालय में <ref>Bettina Heinen-Ayech (Hrsg.): Erwin Bowien 1899–1972 Werkverzeichnis – Catalogue Raisonné-Werkoverzicht. Verlag U-Form, Solingen 1999, ISBN 3-88234-103-3.</ref> <ref>Hans-Karl Pesch: Erwin Bowien. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech und der Freundeskreis Erwin Bowien. e.V. 1. Auflage. Solingen 1981</ref>, लॉराच में ड्रेइलैंडरम्यूजियम (पूर्व में संग्रहालय एम बर्गहोफ़) में <ref>Hans-Karl Pesch: Erwin Bowien. Hrsg.: Bettina Heinen-Ayech und der Freundeskreis Erwin Bowien. e.V. 1. Auflage. Solingen 1981</ref>, स्प्रिंग/डीस्टर में जिला स्थानीय इतिहास संग्रहालय में <ref>Bettina Heinen-Ayech (Hrsg.): Erwin Bowien 1899–1972 Werkverzeichnis – Catalogue Raisonné-Werkoverzicht. Verlag U-Form, Solingen 1999, ISBN 3-88234-103-3.</ref>, हैन में नगर कला संग्रह. -मुंडेन <ref>Bettina Heinen-Ayech (Hrsg.): Erwin Bowien 1899–1972 Werkverzeichnis – Catalogue Raisonné-Werkoverzicht. Verlag U-Form, Solingen 1999, ISBN 3-88234-103-3.</ref> और स्टैडस्पार्कसे सोलिंगेन <ref>Bettina Heinen-Ayech (Hrsg.): Erwin Bowien 1899–1972 Werkverzeichnis – Catalogue Raisonné-Werkoverzicht. Verlag U-Form, Solingen 1999, ISBN 3-88234-103-3.</ref> <ref>Diana Millies: Erwin Bowien, Bildnisse und Portraits Solinger Bürger. Solingen, 1991</ref> के कला संग्रह में रखा गया है। अभिलेखीय सामग्रियां सोलिंगन में नगरपालिका अभिलेखागार और डसेलडोर्फ में हेनरिक हेन इंस्टीट्यूट में स्थित हैं। नॉर्वे में, अल्स्टाहाग नगर पालिका (अल्स्टाहाग कोम्यून) <ref>Bettina Heinen-Ayech (Hrsg.): Erwin Bowien 1899–1972 Werkverzeichnis – Catalogue Raisonné-Werkoverzicht. Verlag U-Form, Solingen 1999, ISBN 3-88234-103-3.</ref> के पास कलाकार की पेंटिंग्स का एक बड़ा संग्रह है। स्विट्जरलैंड में, अभिलेखीय सामग्री SIK-ISEA के अभिलेखागार में संग्रहीत की जाती है: ज्यूरिख में स्विट्जरलैंड में ऐतिहासिक और समकालीन कला पर कला अध्ययन संस्थान। == फ़िल्में, रेडियो नाटक == * 1992 हसन बौअब्देल्लाह: ''बेटिना हेनेन-आयच - एर्विन बॉवीन को पत्र'' । फ़िल्म, सोलिंगन और अल्जीयर्स, 1992। फ्रांसीसी संस्करण का शीर्षक ''बेटिना हेनेन-आयच - लेट्रे ए एर्विन बॉवीन है'' । फिल्म को मॉन्ट्रियल महोत्सव के आधिकारिक चयन में शामिल किया गया था। <ref name=":2">Dr. Haroun Ayech: ''Filme, Audio (Films, Audio).'' In: ''Erwin Johannes Bowien (1899-1972).'' Dr. Haroun Ayech, 2020, 1 मई 2020 को पुनः प्राप्त (जर्मन)</ref> * 2010 जॉर्ज बेयर्ले। ''स्पेसर्ट और कारवेंडेल के बीच'' बीआर प्रारूप में ''स्मृति की कला'' <ref name=":2" /> * 2011 जॉर्ज बेयर्ले। ''ऑल्गौ में पर्वतीय मूर्ति - शरण स्थल के रूप में क्रुज़थल, 1944'', ''बवेरिया के लिए समय'' प्रारूप में। चलने का समय, लगभग 53 मिनट। 11 तारीख को पहली बार रेडियो नाटक प्रसारित किया गया। दिसंबर 2011 <ref name=":2" /> * 2015 रूडी होल्ज़बर्गर और जॉर्ज बेयर्ले। ''ऑल्गौ में लुप्त बिंदु।'' ''स्मृति की कला: क्रुज़थल में एर्विन बॉवीन'' . चलने का समय: 53 मिनट. बेयर्ले - कुम्मेल - होल्ज़बर्गर फाउंडेशन। फिल्म का प्रीमियर 21 तारीख को अक्टूबर 2015 म्यूनिख में मैक्सिम सिनेमा में <ref name=":2" /> == वेब लिंक == * [http://www.erwin-bowien.com erwin-bowien.com] - एर्विन जोहान्स बॉवीन के बारे में वेबसाइट * एर्विन बॉवीन - कलाकारों की कॉलोनी "श्वार्ज़ेस-हौस" के नायक - [https://www.schwarzes-haus.com/ www.schwarzes-haus.com।] * आप [https://www.deutsche-biographie.de/116300167.html#indexcontent जर्मन जीवनी] में एर्विन बॉवीन के बारे में भी जानकारी पा सकते हैं * जर्मन [https://portal.dnb.de/opac.htm?method=simpleSearch&cqlMode=true&query=nid%3D116300167 राष्ट्रीय पुस्तकालय] की सूची == व्यक्तिगत साक्ष्य == <references /> [[श्रेणी:१९७२ में निधन]] [[श्रेणी:1899 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:जर्मनी के चित्रकार]] ak14tivh56m96ldxhtd3u8iqrmfdk14 गूगल शीट्स 0 1506937 6630230 6287845 2026-10-16T12:39:32Z Sl0rpx 954008 Logo update 6630230 wikitext text/x-wiki {{Infobox software|name=गूगल शीट्स|title=गूगल शीट्स|logo=Google Sheets icon (August 2026).svg|logo_size=70px|logo caption=|screenshot=Google Sheets Untitled spreadsheet.png|caption=गूगल शीट्स स्प्रेडशीट का एक उदाहरण|author=|developer=[[गूगल|गूगल एलएलसी]]|released={{start date and age|2006|3|9}}|ver layout=stacked|latest release version=|latest release date={{start date and age|2018|3|20}}|latest preview version=|latest preview date={{start date and age|2018|8|20}}|programming language=[[जावास्क्रिप्ट]]|platform=|operating system=[[एंड्रॉइड (ऑपरेटिंग 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web|url=https://gsuiteupdates.googleblog.com/2019/04/office-editing.html|title=Office editing makes it easier to work with Office files in Docs, Sheets, and Slides|website=G Suite Updates Blog|access-date=August 12, 2019}}</ref> ऐप उपयोगकर्ताओं को वास्तविक समय में अन्य उपयोगकर्ताओं के साथ सहयोग करते हुए ऑनलाइन फ़ाइलें बनाने और संपादित करने की अनुमति देता है। संशोधनों को संशोधन इतिहास के साथ इस आधार पर ट्रैक किया जाता है कि किस उपयोगकर्ता ने उन्हें बनाया है। जहां एक संपादक परिवर्तन कर रहा है उसे संपादक-विशिष्ट रंग और कर्सर से हाइलाइट किया जाता है। एक अनुमति प्रणाली यह नियंत्रित करती है कि उपयोगकर्ता क्या कर सकते हैं। अपडेट में [[यंत्र शिक्षण|मशीन लर्निंग का]] उपयोग करने वाली विशेषताएं पेश की गई हैं, जिसमें "एक्सप्लोर" भी शामिल है, जो स्प्रेडशीट में [[प्राकृतिक भाषा संसाधन|प्राकृतिक भाषा के]] प्रश्नों के आधार पर उत्तर प्रदान करता है। शीट्स गूगल द्वारा प्रदान की जाने वाली [[गूगल ऐप्स|सेवाओं]] में से एक है जिसमें [[गूगल डॉक्स]], गूगल स्लाइड, गूगल ड्रॉइंग, गूगल फ़ॉर्म, [[गूगल साइट्स|गूगल साइटें]] और गूगल कीप भी शामिल हैं। == इतिहास == गूगल शीट्स की उत्पत्ति XL2Web से हुई है, जो [[गूगल ड्राइव|2Web Technologies]] द्वारा विकसित एक वेब-आधारित स्प्रेडशीट एप्लिकेशन है, जिसकी स्थापना जोनाथन रोशेल और फरज़ाद "फ़ज़ी" खोस्रोशाही ने की थी। <ref>{{Cite web|url=https://njtechweekly.com/at-madison-meetup-njs-rochelle-talks-xl2web-acquisition-by-google/|title=At Madison Meetup, NJ's Rochelle Talks XL2Web Acquisition by Google|last=Surden|first=Esther|date=June 26, 2013|website=NJ Tech Weekly|language=en-US|access-date=October 15, 2021}}</ref> XL2Web को 2006 में गूगल द्वारा अधिग्रहित किया गया था <ref>{{Cite web|url=http://www.zdnet.com/article/googles-40-acquisitions-in-2010-what-about-integration/|title=Google's 40 acquisitions in 2010: What about integration?|last=Dawson|first=Christopher|date=October 30, 2010|website=[[ZDNet]]|publisher=[[CBS Interactive]]|access-date=June 1, 2017}}</ref> और इसे [[गूगल कोड लैब|गूगल लैब्स]] स्प्रेडशीट्स में बदल दिया गया। इसे 6 जून 2006 को पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर सीमित संख्या में उपयोगकर्ताओं के लिए एक परीक्षण के रूप में लॉन्च किया गया था <ref>{{Cite web|url=https://googleblog.blogspot.no/2006/06/its-nice-to-share.html|title=It's nice to share|last=Rochelle|first=Jonathan|date=June 6, 2006|website=Official Google Blog|access-date=October 29, 2016}}</ref> <ref name="Spreadsheets testing 2006">{{Cite web|url=http://googlepress.blogspot.no/2006/06/google-announces-limited-test-on-google_06.html|title=Google Announces limited test on Google Labs: Google Spreadsheets|date=June 6, 2006|access-date=October 29, 2016}}</ref> सीमित परीक्षण को बाद में सभी गूगल खाता धारकों के लिए उपलब्ध बीटा संस्करण से बदल दिया गया, लगभग उसी समय जब एक आधिकारिक घोषणा प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई थी। <ref>{{Cite web|url=http://googlepress.blogspot.no/2006/10/google-announces-google-docs_11.html|title=Google Announces Google Docs & Spreadsheets|date=October 11, 2006|access-date=October 29, 2016}}</ref> मार्च 2010 में, गूगल ने ऑनलाइन दस्तावेज़ सहयोग कंपनी DocVerse का अधिग्रहण कर लिया। DocVerse ने इक्सेल-संगत दस्तावेज़ों के साथ-साथ [[माइक्रोसॉफ्ट वर्ड]] और [[माइक्रोसॉफ्ट पावरप्वाइण्ट]] जैसे अन्य [[माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस]] प्रारूपों पर बहु-उपयोगकर्ता ऑनलाइन सहयोग की अनुमति दी। <ref>{{Cite web|url=http://phandroid.com/2010/03/05/google-buys-docverse-for-office-collaboration-chrome-android-wave-implications/|title=Google Buys DocVerse For Office Collaboration: Chrome, Android & Wave Implications?|last=Jackson|first=Rob|date=March 5, 2010|website=Phandroid|access-date=October 20, 2016}}</ref> DocVerse पर आधारित सुधारों की घोषणा और कार्यान्वयन अप्रैल 2010 में किया गया था <ref>{{Cite web|url=https://drive.googleblog.com/2010/04/a-rebuilt-more-real-time-google.html|title=A rebuilt, more real-time Google documents|last=Belomestnykh|first=Olga|date=April 15, 2010|website=Google Drive Blog|access-date=October 30, 2016}}</ref> जून 2012 में, गूगल ने मोबाइल उपकरणों के लिए एक फ्रीवेयर मालिकाना उत्पादकता सूट, क्विकऑफ़िस का अधिग्रहण किया। <ref>{{Cite web|url=https://googleblog.blogspot.no/2012/06/google-quickoffice-get-more-done.html|title=Google + Quickoffice = get more done anytime, anywhere|last=Warren|first=Alan|date=June 5, 2012|website=Official Google Blog|access-date=October 30, 2016}}</ref> अक्टूबर 2012 में, गूगल स्प्रेडशीट्स का नाम बदलकर गूगल शीट्स कर दिया गया और एक गूगल क्रोम ऐप जारी किया गया जो क्रोम के नए टैब पेज पर शीट्स के शॉर्टकट प्रदान करता था। <ref>{{Cite web|url=https://thenextweb.com/google/2012/10/23/google-drive-apps-renamed-docs-sheets-and-slides-now-available-in-the-chrome-web-store/|title=Google Drive apps renamed "Docs, Sheets and Slides", now available in the Chrome Web Store|last=Sawers|first=Paul|date=October 23, 2012|website=The Next Web|access-date=October 30, 2016}}</ref> == सन्दर्भ == [[श्रेणी:गूगल सेवाएँ]] gavr44ksum2kiwez926ej5gl9rccsxx सद्या 0 1537770 6630322 6623101 2026-10-16T23:25:10Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 0 sources and tagging 1 as dead.) #IABot (v2.0.9.6 6630322 wikitext text/x-wiki {{Infobox food | name = सद्या | image = Sadhya DSW.jpg | image_size = 300px | caption = | alternate_name = സദ്യ | country = [[भारत]] | region = [[केरल]] | creator = | course = | type = | served = | main_ingredient = | variations = | calories = | other = कामायन (फिलिपींस) }} [[File:Sadya 2019.jpg|thumb|केरला का पारम्परिक सद्या]] '''सद्या''' ({{Langx|ml|സദ്യ}}) [[केरल]] मूल का भोजन है और सभी मलयाली लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें विभिन्न प्रकार के पारंपरिक शाकाहारी व्यंजन शामिल होते हैं जिन्हें आमतौर पर दोपहर के भोजन के रूप में [[केला]] के पत्ते पर परोसा जाता है।<ref>Kerala's Slow Food; The Indian banana leaf banquet that tastes like home by Shahnaz Habib AFAR मार्च/अप्रैल 2014; पृष्ठ 49</ref> सद्या को आम तौर पर [[ओणम]] और [[विषु|विशु]] के साथ-साथ जन्मदिन और मंदिर त्योहारों जैसे अन्य विशेष अवसरों के लिए पारंपरिक दावत के रूप में परोसा जाता है।<ref name="Iyer 2018">{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/more-lifestyle/onam-2018-here-s-why-sadya-is-the-most-balanced-meal-full-of-nutritional-value/story-2gwLfWrIj9L3VSnBVFxUfK.html|title=Onam 2018, here's why Sadya is the most balanced meal, full of nutritional value – more lifestyle|last=अय्यर|first=मीनाक्षी|date=25 अगस्त 2018|website=[[Hindustan Times]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20180920234525/https://www.hindustantimes.com/more-lifestyle/onam-2018-here-s-why-sadya-is-the-most-balanced-meal-full-of-nutritional-value/story-2gwLfWrIj9L3VSnBVFxUfK.html|archive-date=20 सितंबर 2018|access-date=20 सितम्बर 2018|url-status=dead}}</ref> == अवलोकन == [[चित्र:Valla_Sadya.JPG|बाएँ|अंगूठाकार|वल्ला सद्या]] [[चित्र:Sadya_2019.jpg|अंगूठाकार|पारंपरिक केरल सद्या]] एक सामान्य साद्य में एक ही कोर्स के रूप में लगभग 24-28 व्यंजन परोसे जा सकते हैं।<ref>{{cite web|url=https://www.hindustantimes.com/more-lifestyle/happy-onam-2020-26-dishes-in-the-onam-sadhya-feast-what-they-re-called/story-Ox35zUre2YkHzMjzOcSHTN.html|title=Happy Onam 2020: 26 dishes in the Onam Sadhya feast, what they’re called|publisher=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=26 जून 2024}}</ref> ऐसे मामलों में जहां यह बहुत बड़ा है, इसमें 64 या अधिक आइटम हो सकते हैं, जैसे अरनमुला वल्लमकली (वल्ला-सद्या) के लिए सद्य।<ref name="NDTV Food 2017">{{cite web|url=https://food.ndtv.com/food-drinks/happy-vishu-2017-vishu-sadhya-keralas-grand-new-year-feast-1680747|title=Happy Vishu 2017: Vishu Sadhya, Kerala's Grand New Year Feast|date=13 April 2017|publisher=[[NDTV]] Food|access-date=20 September 2018|archive-date=20 सितंबर 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180920234420/https://food.ndtv.com/food-drinks/happy-vishu-2017-vishu-sadhya-keralas-grand-new-year-feast-1680747|url-status=dead}}</ref> पारंपरिक सद्या भोजन के दौरान, लोगों को चटाई पर पेर पर पेर रखकर बैठाया जाता है।<ref name="Vasu Kumar 2017">{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=8aJEDwAAQBAJ&pg=PT21|title=Morning Glory Blossoms|last1=Vasu|first1=S.S.L.|last2=Kumar|first2=R.|publisher=Partridge Publishing Singapore|year=2017|isbn=978-1-5437-4244-2|page=21|access-date=20 September 2018}}</ref> खाना दाहिने हाथ से बिना छुरी-कांटे के खाया जाता है। अंगुलियों को साथ में जोड़कर करछी (चम्मचनुमा) जैसा बनाया जाता है।<ref name="Vasu Kumar 2017" /> मुख्य व्यंजन सादा उबला हुआ [[चावल]] है, जिसे अन्य सब्जी/कूट्टन (കൂട്ടാൻ) के साथ परोसा जाता है। इनमें [[दाल|पारिप्पू]], [[सांभर]], [[रस्सम|रसम]], पुलिससेरी, और अन्य जैसे कलान, अवियल, थोरन, ओलान, पचड़ी, [[खिचड़ी]], कूट्टुकरी, एरिसेरी, आम का [[अचार]], इंजिपुली, मेझुक्कुपुराट्टी, नारंग [[अचार]] (नींबू का अचार), साथ ही [[पापड़]], केला [[चिप्स]], शरकारा उपरी, केला, सादा [[दही]], और [[छाछ]] शामिल हैं।<ref name="NDTV Food 2017" /><ref name="Rai">{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=5zDWhOU-I04C&pg=PT4|title=Curry Cookbook – Keralan Cuisine – Jay Rai's Indian Kitchen: करी व्यंजनों|last=Rai|first=J.|publisher=Springwood media|isbn=978-1-4761-2308-0|page=pt4-5|access-date=20 September 2018}}</ref><ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=BGhBAgAAQBAJ&pg=PT422|title=The Penguin Food Guide to India|last=Brien|first=C.O.|publisher=Penguin Books Limited|year=2013|isbn=978-93-5118-575-8|page=pt422|access-date=20 September 2018}}</ref><ref name="Punit 2015">{{cite web|url=https://qz.com/india/489554/27-lip-smacking-vegetarian-dishes-to-try-during-keralas-grandest-feast/|title=Quartz India|last=Punit|first=27 lip-smacking, vegetarian dishes to try during Kerala’s grandest feast|date=28 August 2015|website=Quartz India|access-date=20 September 2018}}</ref> परंपरागत रूप से, भोजन के अंत में [[छाछ]] परोसा जाता है।<ref name="NDTV Food 2017" /> [[पायसम]] नामक पारंपरिक मिठाई भोजन के अंत में परोसी जाती है<ref name="NDTV Food 2017" /> और आमतौर पर तीन या अधिक प्रकार की मिठाई परोसी जाती है, जैसे पलाडा प्रधान, अदा प्रधान, परिप्पु प्रधान, चक्का प्रधान, गोथमपु पायसम और पाल पायसम। प्रत्येक करी अलग-अलग सब्जियों से बनाई जाती है और इसका अपना स्वाद होता है, जो समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है। [[चित्र:Onam_Sadya_(15164960372).jpg|अंगूठाकार|[[ओणम]] के लिए परोसा गया सद्या]] केले के पत्ते पर अलग-अलग जगहों पर व्यंजन परोसे जाते हैं। <ref name="Kannampilly 2003">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=pYfOCaAPb3sC&pg=PA9|title=The Essential Kerala Cookbook|last=Kannampilly|first=V.|publisher=Penguin Books|year=2003|isbn=978-0-14-302950-2|page=9|access-date=20 September 2018}}</ref> उदाहरण के लिए, अचार को ऊपरी बाएं कोने में और केले को निचले बाएं कोने में परोसा जाता है, जिससे वेटर को आसानी से पहचानने और अतिरिक्त परोसने का निर्णय लेने में मदद मिलती है। सभी व्यंजनों में सबसे आम सामग्री नारियल है क्योंकि यह केरल में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। कुछ व्यंजनों में नारियल के दूध का उपयोग किया जाता है, तथा तलने के लिए नारियल के तेल का उपयोग किया जाता है। स्थान के आधार पर मेनू में विविधताएं होती हैं। यद्यपि केरल या भारत के दक्षिण-पश्चिमी तट की पारंपरिक और मौसमी सब्जियों का उपयोग करने की प्रथा है, लेकिन व्यंजनों में गाजर, अनानास और बीन्स जैसी सब्जियों को शामिल करना आम बात हो गई है। परंपरागत रूप से, साद्या में प्याज और लहसुन का उपयोग नहीं किया जाता है। भोजन के बाद ''वेट्टिला मुरुक्कान'', [[पान|पान पत्ता]] <ref name="India.com 2017">{{Cite web|url=http://www.india.com/festivals-events/onam-sadhya-items-that-make-the-traditional-recipe-of-kerala-festival-a-hit-2445898/|title=Onam Sadya Items That Make the Traditional Recipe of Kerala Festival a Hit|date=3 September 2017|website=India.com|access-date=20 September 2018}}</ref> चूना और सुपारी चबाया जा सकता है। इससे भोजन का पाचन अच्छा होता है और तालू भी साफ होता है। <ref name="India.com 2017" /> == तैयारी == [[चित्र:Kichadi_Sadhya.jpg|बाएँ|अंगूठाकार|पचड़ी का प्रयोग कभी-कभी सद्या में भी किया जाता है।]] सादिया को आम तौर पर दोपहर के भोजन के लिए परोसा जाता है,<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=WDNWDwAAQBAJ&pg=PT268|title=Masala: Indian Cooking for Modern Living|last=Basu|first=M.|publisher=Bloomsbury Publishing|year=2018|isbn=978-1-4088-8687-8|page=pt268|access-date=20 September 2018}}</ref> हालांकि रात के खाने के लिए इसका हल्का संस्करण भी परोसा जाता है। तैयारियां एक रात पहले ही शुरू हो जाती हैं और उत्सव के दिन सुबह दस बजे से पहले ही व्यंजन तैयार कर लिए जाते हैं। आजकल, सद्या को अक्सर मेजों पर परोसा जाता है, क्योंकि लोग अब फर्श पर बैठना सुविधाजनक नहीं समझते। गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए साद्य के लिए वस्तुओं/सामग्री का चयन एक विस्तृत और सावधानीपूर्वक प्रक्रिया है। सद्या तैयार करने के लिए अग्नि प्रज्वलित करने का कार्य अग्नि की प्रार्थना के बाद किया जाता है, तथा प्रथम भोग [[गणेश|गणपति]] को अर्पित करने के लिए एक प्रज्वलित नीलाविलक्कु के सामने केले के पत्ते पर रखा जाता है। सद्या में भोजन केले के पत्ते पर परोसा जाता है।<ref name="NDTV Food 2017" /> भोजन समाप्त होने के बाद पत्ता मोड़कर बंद कर दिया जाता है।<ref name="The Hans India 2016">{{Cite web|url=http://www.thehansindia.com/posts/index/Sunday-Hans/2016-09-11/The-festive-feast/253227|title=The festive feast|date=11 September 2016|website=The Hans India|access-date=20 September 2018}}</ref> कुछ उदाहरणों में, पत्ती को अपनी ओर मोड़ना भोजन से संतुष्टि का संचार करता है, जबकि इसे खुद से दूर मोड़ना यह दर्शाता है कि भोजन में सुधार किया जा सकता है।<ref name="The Hans India 2016" /> हालाँकि, पत्ते को जिस दिशा में मोड़ा जाता है उसका केरल के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग अर्थ हो सकता है।<ref>{{Cite web|url=http://indianexpress.com/article/lifestyle/food-wine/gods-kerala-onam-meal-food-feast-own-platter-3029921/|title=God's Own Platter|last=Pillai|first=Pooja|date=14 September 2016|website=The Indian Express|access-date=20 September 2018}}</ref> सेंट्रल त्रावणकोर शैली की सद्या को सबसे अनुशासित और परंपरा से बंधा हुआ माना जाता है।<ref name="Hindu2016b">{{Cite web|url=http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-features/tp-metroplus/onam-on-a-leaf/article9092190.ece|title=Onam on a leaf|last=N. Satyendran|date=2010-08-10|website=The Hindu|access-date=2016-09-14|archive-url=https://web.archive.org/web/20230822103623/https://www.thehindu.com/todays-paper/tp-features/tp-metroplus/Onam-on-a-leaf/article14631217.ece|archive-date=22 अगस्त 2023|url-status=dead}}</ref> आमतौर पर व्यंजन परोसने में एक क्रम का पालन किया जाता है, सबसे पहले चिप्स और अचार से शुरुआत की जाती है।<ref name="Kannampilly 2003" /><ref name="Punit 2015" /> हालाँकि, स्थानीय प्राथमिकताओं के आधार पर केरल के विभिन्न भागों में व्यंजन बनाने और परोसने की अलग-अलग शैलियाँ और तरीके अपनाए जाते हैं। अरनमुला वल्ला-साद्या सबसे प्रसिद्ध साद्या है जिसमें 64 से अधिक व्यंजन पारंपरिक रूप से परोसे जाते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/kochi/Sing-out-loud-for-a-64-dish-sadya/articleshow/48620396.cms|title=Sing out loud for a 64-dish sadya|date=22 August 2015|website=The Times of India|access-date=20 September 2018}}</ref> ==परोसे जाने वाले व्यंजन== सद्या में विभिन्न प्रकार के शाकाहारी व्यंजन परोसे जाते हैं। इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:<ref name="Hindu2016b"/><ref name="Indianexpress">{{cite web|url=http://indianexpress.com/article/lifestyle/food-wine/onam-special-heres-what-a-traditional-onam-sadhya-consists-of-3028642/ |title=Onam special: Here's what a traditional Onam sadhya consists of |website=The Indian Express|date=2016-09-13 |access-date=2016-09-13}}</ref> *चावल: सद्या का मुख्य भोजन। सामान्यतः केरल के लाल चावल का उपयोग किया जाता है, जबकि कुछ स्थानों पर केरल मट्टा चावल भी परोसा जाता है।<ref name="Hindu2016b"/><ref name=ctsadhya>{{cite web|author1=Ramya Menon|title=God's Own Feast-ival!|url=http://www.cucumbertown.com/gods-own-feast-ival-onam|archive-url=https://web.archive.org/web/20140904212725/http://www.cucumbertown.com/gods-own-feast-ival-onam|url-status=dead|archive-date=2014-09-04|website=Cucumbertown}}</ref><ref>{{cite web | last=Tiwari | first=Nimisha | title=Flavours of India: Here's a look at a plethora of dishes that make festivals fun | website=The Economic Times | date=19 July 2018 | url=https://economictimes.indiatimes.com/magazines/travel/flavours-of-india-heres-a-look-at-a-plethora-of-dishes-that-make-festivals-fun/articleshow/65039593.cms | access-date=20 September 2018}}</ref> *परिप्पु: दाल से बनी गाढ़ी करी। *सांभर: दाल, इमली और सहजन, टमाटर, सूरन आदि सब्जियों से बनी गाढ़ी ग्रेवी, जिसमें हींग का प्रयोग किया जाता है। *रसम: इमली, टमाटर और काली मिर्च, हींग, धनिया तथा मिर्च जैसे मसालों से तैयार पतली और तीखी करी। यह पाचन में सहायक मानी जाती है।<ref name="Firstpost 2017"/> *अवियल: विभिन्न सब्जियों और नारियल से बना गाढ़ा व्यंजन, जिसे करी पत्ते और नारियल तेल से स्वादिष्ट बनाया जाता है।<ref name="Punit 2015"/> *कालान: दही, नारियल और नेन्द्रन केला या जड़ वाली सब्जियों, जैसे सूरन से तैयार किया जाने वाला गाढ़ा और खट्टा व्यंजन।<ref name="Indianexpress"/> *ओलन: सफेद कद्दू या काले मटर, नारियल के दूध और अदरक से बना हल्का व्यंजन, जिसमें नारियल तेल का प्रयोग किया जाता है।<ref name="Punit 2015"/><ref name="Hindu2016b"/> *कूटुकरी: केला या सूरन जैसी सब्जियों को चने, नारियल और काली मिर्च के साथ पकाकर बनाया जाता है।<ref>{{Cite web|date=2020-08-09|title=Onam Sadya: Know Everything About It|url=https://www.caringlyyours.com/everything-about-onam-sadya/|access-date=2020-08-13|website=Caringly Yours|language=en-US|archive-date=24 June 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210624123722/https://www.caringlyyours.com/everything-about-onam-sadya/|url-status=dead}}</ref> *एरिस्सेरी: कद्दू, लोबिया और नारियल से बनी गाढ़ी करी।<ref>{{cite web | title=When kanji used to be the special item on wedding menu | website=OnManorama | date=29 August 2018 | url=https://food.manoramaonline.com/food/foodie/2018/08/29/when-kanji-used-to-be-the-special-item-wedding-menu.html | access-date=20 September 2018}}</ref><ref>{{cite book | last=Kannan | first=A. | title=From the South Delectable Home Cooking | publisher=DC Books | year=2011 | isbn=978-81-921926-2-8 | url=https://books.google.com/books?id=ne6vDQAAQBAJ&pg=PA1 | access-date=20 September 2018 | page=1}}</ref> *पचड़ी: दही और सामान्यतः खीरे या सफेद कद्दू से बनी खट्टी करी, जिसमें नारियल और सरसों का प्रयोग किया जाता है।<ref name="Indianexpress"/><ref name="Tastycircle">{{cite web |author=N. Satyendran |url=http://www.tastycircle.com/recipe/pachadi/ |title=Pachadi |date=6 July 2012 |access-date=2016-09-14}} {{Dead link|date=अक्तूबर 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> *मीठी पचड़ी: अनानास, कद्दू या अंगूर को दही के साथ मिलाकर बनाई जाने वाली मीठी पचड़ी।<ref name="Indianexpress"/><ref name="Tastycircle"/><ref name="Punit 2015"/> *पुलिस्सेरी: हल्के खट्टे दही और खीरे से बनी पतली, पीले रंग की करी। इसका मीठा रूप माम्पाझा पुलिस्सेरी कहलाता है, जिसमें खीरे के स्थान पर पके आम और गुड़ का उपयोग किया जाता है।<ref name="Kannampilly 2003"/> *इंजिपुली: अदरक, इमली, हरी मिर्च और गुड़ से बनाया गया मीठा-खट्टा अचार, जिसे पुलिइंजी भी कहा जाता है।<ref>{{cite web | title=Onam 2018: All the delicacies that make up the very vast Onam sadhya feast | website=The Indian Express | date=24 August 2018 | url=https://indianexpress.com/article/lifestyle/food-wine/onam-2018-dishes-onam-sadhya-5322737/ | access-date=20 September 2018}}</ref> *थोरन: मटर, हरी फलियाँ, कच्चा कटहल, गाजर या पत्तागोभी जैसी सब्जियों को कद्दूकस किए हुए नारियल के साथ भूनकर तैयार किया जाता है। *मेझुक्कुपुरट्टी: सब्जियों को मसालों के साथ भूनकर तैयार की जाने वाली शाकाहारी डिश। इसमें प्याज या छोटे प्याज का भी उपयोग किया जा सकता है। *[[अचार]]: कच्चे आम, नींबू या नीबू आदि से बनाए गए मसालेदार अचार।<ref name="NDTV Food 2017"/><ref name="Firstpost 2017">{{cite web | title=Watch: Essential parts of an Onam Sadhya | website=Firstpost | date=4 September 2017 | url=https://www.firstpost.com/india/watch-breaking-down-the-onam-sadhya-4007925.html | access-date=20 September 2018}}</ref> *पप्पड़: दाल के आटे से बनाया गया कुरकुरा पापड़, जिसे चावल के साथ खाया जाता है। *शर्करा उप्पेरी: गुड़ से लेपित केले के चिप्स।<ref name="Punit 2015"/> *काया वरुथथु: केले के चिप्स।<ref name="NDTV Food 2017"/> *केला: भोजन के अंत में पायसम या अन्य मिठाई के साथ खाने के लिए पका हुआ केला परोसा जाता है। *चम्मंथी पोडी: सूखे मसाले या चटनी के रूप में परोसा जाने वाला नारियल का चूर्ण। *सांभरम/मोरु: नमकीन छाछ से बना पेय, जिसमें हरी मिर्च, अदरक और करी पत्ते डाले जाते हैं। इसे आमतौर पर भोजन के अंत में पाचन में सहायता के लिए पिया जाता है।<ref name="NDTV Food 2017"/><ref name="Firstpost 2017"/> कडुमांगा: कटे हुए कच्चे आम का अचार, जिसे सद्या में एक मसालेदार सहायक व्यंजन के रूप में परोसा जाता है। इन विभिन्न व्यंजनों के बाद प्रधामन और पायसम जैसे पारंपरिक मीठे व्यंजन परोसे जाते हैं।<ref name="NDTV Food 2017"/> == प्रधानमन् == ''प्रधानमन'' एक गाढ़ा तरल पदार्थ के रूप में एक मीठा व्यंजन है; [[खीर|पायसम]] के समान, लेकिन इसमें सामग्री की दृष्टि से अधिक विविधता होती है तथा इसे अधिक बारीकी से बनाया जाता है। इसे सफेद [[शर्करा|चीनी]] या गुड़ से बनाया जाता है जिसमें नारियल का दूध मिलाया जाता है। प्रधानमन् और पायसम के बीच मुख्य अंतर यह है कि प्रधानमन् में नारियल का दूध प्रयोग किया जाता है, जबकि पायसम के तरल संस्करण में गाय का दूध प्रयोग किया जाता है। * पलाडा प्रधान पके हुए चावल, दूध और चीनी के गुच्छे से बनाया जाता है।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=pYfOCaAPb3sC&pg=PA232|title=The Essential Kerala Cookbook|last=Kannampilly|first=V.|publisher=Penguin Books|year=2003|isbn=978-0-14-302950-2|page=232|access-date=20 September 2018}}</ref> * पझा प्रधानम गुड़ और नारियल के दूध में पके हुए "नेंद्रा" केले से बनाया जाता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.asianage.com/life/food/310817/its-sadhya-time-lets-feast.html|title=It's sadhya time, let's feast!|last=James|first=Merin|date=31 August 2017|website=The Asian Age|access-date=20 September 2018}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=lDhuAAAAMAAJ|title=Stark World Kerala|last=Varghese|first=T.|publisher=Stark World Pub.|year=2006|isbn=978-81-902505-1-1|page=107|access-date=20 September 2018}}</ref> * गोथंबू प्रधानमन् टूटे हुए [[गेहूँ]] से बनाया जाता है।<ref name="Rai" /> * परिप्पु प्रधानम [[मूँग|हरे चने]] से बनता है।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=NqjHz7n3Un0C&pg=PT86|title=The Rough Guide to Kerala|last=Abram|first=D.|publisher=Rough Guides|year=2010|isbn=978-1-4053-8806-1|page=pt86|access-date=20 September 2018}}</ref> * चक्का प्रथमन कटहल से बनाया जाता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehindu.com/news/cities/kozhikode/chakka-maholsavam-to-feature-jackfruit-delicacies/article23829437.ece|title=Chakka Maholsavam to feature jackfruit delicacies|date=10 May 2018|website=The Hindu|access-date=20 September 2018}}</ref> * आडा प्रधान चावल-आडा (चावल के गुच्छे) से बनाया जाता है।<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/life-and-style/food/kerala-celebrates-onam-with-payasam-fetes/article36014401.ece|title=Payasam fetes usher in the sweet notes of Onam in Kerala|last=Nagarajan|first=Saraswathy|date=20 August 2021|work=The Hindu}}</ref> * कडाला प्रधान काले चने से बनाया जाता है।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=Qk0sAQAAMAAJ|title=Explore India: The Official Newsletter of the Ministry of Tourism|last=India Ministry of Tourism|publisher=Durga Das Publications Pvt. Limited|year=2001|access-date=20 September 2018|issue=v. 3}}</ref> == इन्हें भी देखें == * [[केरल का खाना|केरल का भोजन]] * [[ओणम|ओणम साद्य]] * [[दक्षिण भारतीय व्यंजन]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{Commons category inline|Sadya}} [[श्रेणी:खानपान वाली पार्टियाँ]] [[श्रेणी:केरल का खाना]] [[श्रेणी:भारतीय खाना]] [[श्रेणी:भोजन]] [[श्रेणी:खाना और खिलाना]] t3enwk6gutxrn8odrgc74k06yyxgpvl चित्र:रामायण - द लेजेंड ऑफ प्रिंस राम पोस्टर.jpg 6 1572860 6630330 6345982 2026-10-17T03:36:59Z विक्रम प्रताप 911487 नया चित्र ([[:m:User:Max/MaxEdit.js|MaxEdit]]) 6630330 wikitext text/x-wiki == सारांश == {{Non-free use rationale poster | Article = रामायण: द लेजेंड ऑफ प्रिंस राम | Media = film | Description = | Source = https://www.imdb.com/title/tt31631483/mediaviewer/rm2495383042/?ref_=tt_ov_i | Owner = हरे कृष्ण पिक्चर्स | Portion = | Low resolution = | Purpose = ज्ञानसन्दूक | Replaceability = | Other information = }} == लाइसेंस == {{Non-free poster}} bmqe3sm5wn4mreizqlmhxly9ahmu28d 6630331 6630330 2026-10-17T03:37:24Z विक्रम प्रताप 911487 [[विशेष:योगदान/Xzantiyamoloy|Xzantiyamoloy]] ([[सदस्य वार्ता:Xzantiyamoloy|वार्ता]]) के अवतरण 6345982 पर पुनर्स्थापित 6630331 wikitext text/x-wiki == सारांश == {{Non-free use rationale poster | Article = रामायण: द लेजेंड ऑफ प्रिंस राम | Media = film | Description = | Source = [https://x.com/excelmovies/status/1876856324287586805?t=Vs5BDeS1lQN6q50x68HIFQ&s=19 Twitter] | Owner = Excel Entertainment | Portion = | Low resolution = | Purpose = Infobox | Replaceability = | Other information = }} == लाइसेंस == {{Non-free poster}} miu8d0fi0q5835ss2g0gajkcjnxug8z श्यामा संगीत 0 1581366 6630309 6421704 2026-10-16T20:34:07Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.6 6630309 wikitext text/x-wiki '''श्यामा संगीत''' बंगाली [[भक्ति|भक्ति गीतों]] की एक शैली है। यह हिंदू देवी श्यामा या [[काली]] को समर्पित होती है देवी दुर्गा या पार्वती का एक रूप हैं। इसे शाक्तगीति या दुर्गास्तुति के नाम से भी जाना जाता है।<ref>{{Cite web|url=http://en.banglapedia.org/index.php?title=Shyamasangit|title=Shyamasangit|last=Khan|first=Md Sayeed|publisher=Banglapedia|access-date=25 February 2012|archive-url=https://web.archive.org/web/20230202055641/https://en.banglapedia.org/index.php?title=Shyamasangit|archive-date=2 फ़रवरी 2023|url-status=dead}}</ref> {{अतिरंजित}}श्यामा संगीत आम आदमी को आकर्षित करता है क्योंकि यह माँ और उसके बच्चे के बीच शाश्वत और उदात्त प्रेम का एक संगीतमय निरूपण है। यह पूजा के सामान्य अनुष्ठानों और [[तन्त्र|तंत्र]] के गूढ़ अभ्यास से भी मुक्त है। [[बंगाली भाषा]] में देवी [[काली]] के प्रति श्रद्धा और भक्ति पर केंद्रित अनगिनत गीतों की रचना की गई है। संगीत की इस शैली को शाक्त पदावली के नाम से जाना जाता है। इस शैली की कविता के दो प्रसिद्ध बंगाली कवि [[रामप्रसाद सेन]] और [[कमलाकांत भट्टाचार्य]] हैं। रामप्रसाद सेन और कमलाकांत भट्टाचार्य दोनों ही माँ काली के निपुण भक्त थे। इन दोनों संतों के विषय में अनगिनत चमत्कारिक कहानियाँ प्रचलित हैं। हालाँकि, आम तौर पर माँ काली को समर्पित सभी संगीत को बंगाली में [[श्यामा संगीत]] कहा जाता है। इस बंगाली श्यामा संगीत के दो प्रसिद्ध गायक [[पन्नालाल भट्टाचार्य]] और [[धनञ्जय भट्टाचार्य]] हैं। पन्नालाल भट्टाचार्य के बड़े भाई प्रफुल्ल भट्टाचार्य और माझला भाई [[धनञ्जय भट्टाचार्य]] संत कलाकार पन्नालाल भट्टाचार्य के पहले संगीत शिक्षक थे। पन्नालाल में भक्तिरस पाकर [[धनञ्जय भट्टाचार्य]] भक्ति गीत गाना बंद कर दिया। हालाँकि, पन्नालाल भट्टाचार्य की मृत्यु के बाद, उन्होंने कई भक्ति गीत गाए।<ref>{{Cite news|url=https://www.anandabazar.com/patrika/a-memorabilia-on-veteran-singer-dhanajoy-bhattacharya-on-his-birth-anniversary-1.206104|title=যদি ভুলে যাও মোরে…}}</ref> ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:भारतीय संगीत पद्धतियाँ]] [[श्रेणी:शाक्त सम्प्रदाय]] [[श्रेणी:बंगाली संस्कृति]] ghpgnk5xcglcrccfn3miudpcqv8izex भारत के मध्य साम्राज्य 0 1587525 6630420 6583122 2026-10-17T11:17:42Z SAGAR SURYAVANSHI JAITHAL 938876 छोटा सा सुधार किया। 6630420 wikitext text/x-wiki {{भारतीय इतिहास}} '''भारत के मध्य साम्राज्य''' के अन्तर्गत, 230 ईसा पूर्व से 1206 ईसवी के बीच [[भारतीय उपमहाद्वीप]] में कई राजवंश के साम्राज्य शामिल थे। यह काल [[मौर्य राजवंश|मौर्य साम्राज्य]] के पतन और [[सातवाहन|सातवाहन राजवंश]] के उत्थान के बाद शुरू होता है, जो पहली शताब्दी ईसा पूर्व से [[सीमुक|सिमुक]] से शुरू होता है। "मध्य" काल 1200 से अधिक वर्षों तक चला और 1206 में [[दिल्ली सल्तनत]] के उदय और [[चोल राजवंश|बाद के चोलों]] ( [[राजेन्द्र चोल ३|राजेंद्र चोल तृतीय]], जिनकी मृत्यु 1279 ई. में हुई) के पतन के साथ इसका अंत हुआ। इस अवधि में दो युग शामिल हैं: ''शास्त्रीय भारत'', मौर्य साम्राज्य से लेकर 500 ई. में [[गुप्त राजवंश|गुप्त साम्राज्य]] के अंत तक, और 500 ई. से ''आरंभिक मध्यकालीन भारत'' । <ref>{{Citation|last=Stein|first=B.|title=A History of India|date=27 April 2010|url=https://books.google.com/books?id=QY4zdTDwMAQC&pg=PA105|page=105|editor-last=Arnold|editor-first=D.|edition=2nd|place=Oxford|publisher=Wiley-Blackwell|isbn=978-1-4051-9509-6|author-link=Burton Stein}}</ref> इसमें शास्त्रीय [[हिन्दू धर्म|हिंदू धर्म]] का युग भी शामिल है, जो 200 ईसा पूर्व से 1100 ईस्वी तक का है।<ref>{{Citation|last=Michaels|first=Axel|title=Hinduism. Past and present|url=https://books.google.com/books?id=jID3TuoiOMQC&pg=PA32|page=32|year=2004|place=Princeton, New Jersey|publisher=Princeton University Press|isbn=0691089523}}</ref> पहली ई. से 1000 ई. तक, [[भारत का आर्थिक इतिहास|भारत की अर्थव्यवस्था]] दुनिया में सबसे बड़ी होने का अनुमान है, जिसके पास दुनिया की एक तिहाई से एक चौथाई संपत्ति थी।<ref name="Maddisson World GDP">{{Cite web|url=http://www.theworldeconomy.org/MaddisonTables/MaddisontableB-18.pdf|title=The World Economy (GDP): Historical Statistics by Professor Angus Maddison|publisher=World Economy|archive-url=https://web.archive.org/web/20130722202625/http://www.theworldeconomy.org/MaddisonTables/MaddisontableB-18.pdf|archive-date=22 July 2013|access-date=21 May 2013}}</ref><ref>{{Cite book|url=http://www.oecdbookshop.org/oecd/display.asp?K=5L9ZBQKL5RLW&lang=EN&sort=sort_date%2Fd&stem=true&sf1=Title&st1=world+economy&sf3=SubjectCode&sp1=not&st4=E4+or+E5+or+P5&sf4=SubVersionCode&ds=world+economy%3B+All+Subjects%3B+&m=3&dc=26&plang=en|title=The World Economy – Volume 1: A Millennial Perspective and Volume 2: Historical Statistics|last=Maddison|first=Angus|publisher=OECD Publishing by [[Organisation for Economic Co-operation and Development]]|year=2006|isbn=9789264022621|pages=656|access-date=3 January 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20141015104311/http://www.oecdbookshop.org/oecd/display.asp?K=5L9ZBQKL5RLW&lang=EN&sort=sort_date/d&stem=true&sf1=Title&st1=world+economy&sf3=SubjectCode&sp1=not&st4=E4+or+E5+or+P5&sf4=SubVersionCode&ds=world+economy;+All+Subjects;+&m=3&dc=26&plang=en|archive-date=15 October 2014}}</ref> इस काल के बाद 13वीं शताब्दी में [[मध्यकालीन भारत|मध्यकालीन काल]] आया। == उत्तरपश्चिम == [[File:NLI_Decima_Asiae_Tabula.jpg|alt=[[Ptolemy]]'s 10th map of Asia, depicting India within the Ganges 15th century reproduction|अंगूठाकार| टॉलेमी का एशिया का 10वां मानचित्र, जिसमें भारत को गंगा के बीच दर्शाया गया है, 15वीं शताब्दी की प्रतिकृति]] दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के दौरान, [[मौर्य राजवंश|मौर्य साम्राज्य]] अतिव्यापी सीमाओं वाली क्षेत्रीय शक्तियों का समूह बन गया। सम्पूर्ण उत्तर-पश्चिम क्षेत्र ने 200 ई.पू. और 300 ई.पू. के बीच अनेक आक्रमणकारियों को आकर्षित किया। [[पुराण|पुराणों]] में इनमें से कई जनजातियों को विदेशी और अशुद्ध बर्बर ([[म्लेच्छ]]) कहा गया है। पहले [[सातवाहन|सातवाहन राजवंश]] और फिर [[गुप्त राजवंश|गुप्त साम्राज्य]], दोनों ही मौर्य साम्राज्य के उत्तराधिकारी राज्य थे, जिन्होंने इन उत्तरवर्ती साम्राज्य के विस्तार को रोकने का प्रयास किया और अंततः युद्धों के दबाव के कारण आंतरिक रूप से टूटने लगे। आक्रमणकारी जनजातियाँ [[बौद्ध धर्म]] से प्रभावित थीं, जो दोनों आक्रमणकारियों तथा सातवाहनों और गुप्तों के संरक्षण में फलता-फूलता रहा तथा दोनों संस्कृतियों के बीच एक सांस्कृतिक सेतु का काम करता रहा। समय के साथ, आक्रमणकारी "भारतीयकृत" हो गए क्योंकि उन्होंने गंगा के मैदानों में समाज और दर्शन को प्रभावित किया और इसके विपरीत वे भी उससे प्रभावित हुए। यह काल बौद्धिक और कलात्मक उपलब्धियों के लिए जाना जाता है, जो सांस्कृतिक प्रसार और [[समन्वयता|समन्वयवाद]] से प्रेरित थे, क्योंकि नए साम्राज्य [[रेशम मार्ग]] पर फैल रहे थे। === हिन्द-यूनानी === पिछली दो शताब्दियों ईसा पूर्व के दौरान [[हिन्द-यवन राज्य|हिन्द-यूनानी साम्राज्य]] ने उत्तर-पश्चिमी [[दक्षिण एशिया]] के विभिन्न भागों का अधिग्रहण किया था, और इस पर 30 से अधिक [[हेलेनिस्टिक काल|हेलेनिस्टिक]] राजाओं का शासन था, जो अक्सर एक-दूसरे के साथ संघर्ष करते रहते थे। इस राज्य की स्थापना, [[बैक्ट्रिया के डेमेट्रियस प्रथम]] के द्वार दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के प्रारंभ में [[हिन्दु कुश|हिन्दू कुश]] पर आक्रमण के साथ हुई। भारत में यूनानी लोग अंततः बैक्ट्रिया (अब [[अफ़ग़ानिस्तान|अफगानिस्तान]] और [[उज़्बेकिस्तान|उज्बेकिस्तान]] के बीच की सीमा) में केन्द्रित [[यूनानी-बैक्ट्रियन साम्राज्य]] में विभाजित हो गये। "हिन्द-यूनानी साम्राज्य" शब्द मोटे तौर पर विभिन्न राजवंशीय राजव्यवस्थाओं का वर्णन करता है, जिसके अन्तर्गत [[तक्षशिला]], [[पुष्कलावती]] और [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] (पाकिस्तान) के सागला जैसे कई शहर आते थे। इन शहरों में अपने समय में कई राजवंशों का राज रहा होगा, और [[क्लाडियस टॉलमी|टॉलेमी]] के ''भूगोल'' और बाद के राजाओं के नामकरण के आधार पर, दक्षिण में निश्चित [[थियोफिलस (हिन्द-यूनानी)|थियोफिला]] का संभवतः किसी समय क्षत्रप या शाही राजदरबार होगा। [[पॉलीबियस]]<ref>{{Cite web|url=https://www.perseus.tufts.edu/cgi-bin/ptext?lookup=Plb.+11.34|title=11.34|archive-url=https://web.archive.org/web/20080420074248/http://www.perseus.tufts.edu/cgi-bin/ptext?lookup=Plb.+11.34|archive-date=20 April 2008|access-date=20 February 2021}}</ref> के अनुसार [[यूथिडेमस प्रथम|यूथीडेमस प्रथम]] एक मैग्नेशियन यूनानी था। इस प्रकार, उसका पुत्र, डेमेट्रियस, जो हिन्द-यूनानी साम्राज्य का संस्थापक था, कम से कम अपने पिता की ओर से यूनानी वंश का था। डेमेट्रियस के लिए [[एंटिओकस तृतीय महान]] की बेटी के साथ विवाह संधि की व्यवस्था की गई थी, जो आंशिक रूप से [[फ़ारसी लोग|फ़ारसी वंश]] की थी।<ref>{{Cite web|url=https://www.perseus.tufts.edu/cgi-bin/ptext?lookup=Plb.+11.34|title=Polybius 11.34|archive-url=https://web.archive.org/web/20080420074248/http://www.perseus.tufts.edu/cgi-bin/ptext?lookup=Plb.+11.34|archive-date=20 April 2008|access-date=20 February 2021}}</ref> बाद के हिन्द-यूनानी शासकों की जातीयता कम स्पष्ट है।<ref>[https://www.jstor.org/stable/623931 "Notes on Hellenism in Bactria and India".] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190329185312/https://www.jstor.org/stable/623931|date=29 March 2019}} W. W. Tarn. ''Journal of Hellenic Studies'', Vol. 22 (1902), pages 268–293</ref> उदाहरण के लिए, [[आर्टेमिडोरोस एनिकेटोस|आर्टेमिडोरोस अनिकेतोस]] (80 ई.पू.) संभवतः इंडो-सिथियन वंश का था। अंतर्जातीय विवाह भी होते थे, जिसका उदाहरण [[सिकंदर|सिकंदर महान]] है, जिसने बैक्ट्रिया की [[रुखसाना|रोक्साना]] से विवाह किया था, या [[सेल्युकस प्रथम निकेटर|सेल्यूकस प्रथम निकेटर]], जिसने सोग्डिया की अपामा से विवाह किया था। दो शताब्दियों की अपने शासन के दौरान, हिन्द-यूनानी राजाओं ने यूनानी और भारतीय भाषाओं और प्रतीकों को मिलाया, जैसा कि उनके सिक्कों पर देखने को मिलता है, और यूनानी, हिंदू और बौद्ध धार्मिक प्रथाओं को मिश्रित किया, जैसा कि उनके शहरों के [[पुरातात्विक]] अवशेषों और बौद्ध धर्म के प्रति उनके समर्थन के संकेतों में देखा जा सकता है, जो भारतीय और हेलेनिस्टिक प्रभावों के समृद्ध संलयन की ओर इशारा करता है। हिन्द-यूनानी संस्कृति के प्रसार के परिणाम आज भी महसूस किए जाते हैं, खासकर [[गान्धार कला|यूनानी-बौद्ध कला]] के प्रभाव के माध्यम से। [[इंडो-शक]] के आक्रमणों के बाद हिन्द-यूनान अंततः 10 ई.पू. के आसपास एक राजनीतिक इकाई के रूप में गायब हो गए, हालांकि इंडो-पार्थियन और [[कुषाण राजवंश|कुषाण साम्राज्य]] के बाद के शासन के तहत यूनानी आबादी के कुछ हिस्से संभवतः कई शताब्दियों तक बने रहे। === यवन === '''यवन''' या '''योना''' लोग, जिनका शाब्दिक अर्थ " [[आयोनियन]] " और जिसका अर्थ है "पश्चिमी विदेशी", [[गांधार (जनपद)|गांधार]] से परे रहने वाले बताए गए हैं। [[यवन|यवनों]], [[शक|शकों]], [[पह्लव|पहलवों]] और [[हूण लोग|हूणों]] को कभी-कभी ''[[म्लेच्छ]]'', अर्थात् "विदेशी" कहा जाता था। [[कंबोज|कम्बोज]] और [[मद्र]], [[केकय साम्राज्य]], [[सिन्धु नदी|सिंधु नदी]] क्षेत्र और गांधार के निवासियों को भी कभी-कभी ''म्लेच्छ'' के रूप में वर्गीकृत किया जाता था। इस नाम का उपयोग [[कुरु राजवंश|कुरु साम्राज्य]] और [[पाञ्चाल|पांचाल]] की संस्कृति के साथ उनके सांस्कृतिक अंतर को इंगित करने के लिए किया गया था। === हिन्द-सिथियन शक === [[इंडो-शक|इंडो-सिथियन]] [[शक|शकों]] की एक शाखा है, जो दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से चौथी शताब्दी ईसवी के मध्य तक दक्षिणी [[साइबेरिया]] से [[बाख़्त्र|बैक्ट्रिया]], [[सोग़दा]], [[अराकोसिया]], [[गांधार (जनपद)|गांधार]], [[कश्मीर]], [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]], तथा पश्चिमी और मध्य भारत, [[गुजरात]], [[महाराष्ट्र]] और [[राजस्थान]] के कुछ हिस्सों में प्रवास कर गए थे। भारत में पहला शक राजा [[मेउस]] या मोगा था जिसने गांधार में शक राज्य स्थापित की और धीरे-धीरे उत्तर-पश्चिमी भारत पर अपना प्रभुत्व बढ़ाया। भारत में इंडो-सिथियन शासन 395 ई. में अंतिम [[पश्चिमी क्षत्रप]], [[रुद्रसिंह तृतीय]] के शासनकाल के साथ समाप्त हो गया। [[मध्य एशिया]] से शक जनजातियों द्वारा भारत पर आक्रमण, जिसे अक्सर "इंडो-शक आक्रमण" के रूप में संदर्भित किया जाता है, ने भारत के साथ-साथ आसपास के देशों के [[भारत का इतिहास|इतिहास]] में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वास्तव में, इंडो-शक युद्ध, चीनी [[जनजाति|जनजातियों]] के साथ संघर्ष के कारण मध्य एशियाई लोगों के खानाबदोश पलायन से शुरू हुई घटनाओं का सिर्फ एक अध्याय है, जिसका [[बाख़्त्र|बैक्ट्रिया]], [[काबुल]], [[पार्थिया]] और भारत के साथ-साथ पश्चिम में सुदूर रोम पर भी दीर्घकालिक प्रभाव पड़ा। भारत पर आक्रमण करने वाले और विभिन्न [[राजतन्त्र|राज्यों की]] स्थापना करने वाले शक समूहों में शकों के अलावा, अन्य सहयोगी [[जनजाति|जनजातियाँ]], जैसे कि [[मीदि साम्राज्य|मीदी]], [[स्किथी लोग|स्किथी]],<ref>Cunningham 1888, p. 33</ref>{{Sfn|Barstow|1928|pp=63, 105–135, 145 155, 152}}  [[मसागती लोग|मसागती]], गेटे, परमा कम्बोज, [[यूरेशियाई आवार लोग|आवार]],{{उद्धरण आवश्यक|date=January 2016}} बाह्लीका, [[ऋषिका]] और [[पारद (प्राचीन जाति)|पारद]] शामिल थीं। == गंगा के मैदान और दक्कन == [[मौर्य राजवंश|मौर्य साम्राज्य]] के पतन के बाद, [[सातवाहन]] साम्राज्य उत्तर-पश्चिम से [[मध्य एशिया|मध्य एशियाई]] जनजातियों के आक्रमण को रोकने और उनसे संघर्ष करने के लिए एक उत्तराधिकारी राज्य के रूप में उभरा। [[दक्कन का पठार|दक्कन के पठार]] पर फैले सातवाहनों ने [[बौद्ध धर्म]] के प्रसार और उत्तरी गंगा के मैदानों तथा दक्षिणी क्षेत्रों के बीच संपर्क के लिए एक कड़ी का काम किया, यहां तक कि जब [[उपनिषद्|उपनिषदों]] का प्रभाव बढ़ रहा था। अंततः उत्तर-पश्चिमी आक्रमणकारियों के साथ संघर्ष और आंतरिक कलह से कमजोर होकर वे टूट गए और दक्कन तथा मध्य भारत के आसपास कई राज्यों को जन्म दिया, जबकि [[गुप्त राजवंश|गुप्त साम्राज्य]] [[सिन्धु-गंगा का मैदान|सिन्धु-गंगा मैदान]] में उभरा और "स्वर्ण युग" तथा साम्राज्य के पुनर्जन्म का सूत्रपात किया, जिसमें विकेंद्रीकृत स्थानीय प्रशासनिक मॉडल और भारतीय संस्कृति का प्रसार हुआ, जो [[हूण लोग|हूण]] आक्रमणों के तहत पतन तक जारी रहा। [[गुप्त साम्राज्य]] के पतन के बाद गंगा का क्षेत्र कई राज्यों में बंट गया, जो [[हर्षवर्धन|हर्ष]] के अधीन अस्थायी रूप से एकजुट हुए और फिर [[राजपूत]] राजवंशों का उदय हुआ। दक्कन में, [[चालुक्य राजवंश|चालुक्यों]] का उदय हुआ, जिन्होंने एक शक्तिशाली राष्ट्र का निर्माण किया और सांस्कृतिक तथा सैन्य शक्ति के केंद्रों को, जो लंबे समय तक सिन्धु-गंगा मैदान में केंद्रित थे, भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में बन रहे नए राष्ट्रों की ओर स्थानांतरित कर दिया। === सातवाहन साम्राज्य === {{मुख्य|सातवाहन}} '''सातवाहन वंश''' की शुरुआत [[मौर्य राजवंश|मौर्य साम्राज्य]] के सामंत के रूप में हुई, लेकिन उसके पतन के साथ ही उन्होंने स्वतंत्रता की घोषणा कर दी। वे पहले भारतीय शासक थे जिन्होंने अपने शासकों की उभरी हुई छवि वाले सिक्के जारी किए और [[बौद्ध धर्म]] के संरक्षण के लिए जाने जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप [[एलोरा गुफाएं|एलोरा की गुफाओं]] से लेकर [[गुन्टूर जिला|गुंटूर जिले]] के [[अमरावती, आन्ध्र प्रदेश|अमरावती]] गाँव तक बौद्ध स्मारक बने। उन्होंने एक सांस्कृतिक सेतु का निर्माण किया और गंगा के मैदानों से लेकर भारत के दक्षिणी छोर तक व्यापार और विचारों एवं संस्कृति के आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सातवाहनों को अपना शासन स्थापित करने के लिए पहले [[शुंग राजवंश|शुंग साम्राज्य]] और फिर [[मगध महाजनपद|मगध]] के [[कण्व वंश]] से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ी। बाद में उन्हें अपने राज्य को [[शक|शकों]], [[यवन|यवनों]] और [[पह्लव|पह्लवों]] के आक्रमणों से बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। विशेष रूप से [[पश्चिमी क्षत्रप|पश्चिमी क्षत्रपों]] के साथ उनके संघर्ष व आन्तरिक कलह ने उन्हें कमजोर कर दिया और साम्राज्य छोटे-छोटे राज्यों में बंट गया।<ref>{{Cite book|url=|title=भारत का इतिहास - छठी सदी ईस्वी पूर्व से तृतीय सदी ईस्वी के मध्य तक: [9789368753131]|last=Manglik|first=Mr Rohit|date=2023-08-21|publisher=EduGorilla Community Pvt. Ltd.|isbn=978-93-6875-313-1|pages=112|language=hi}}</ref> === महामेघवाहन वंश === {{मुख्य|महामेघवाहन वंश}} महामेघवाहन (लगभग 250 ईसा पूर्व – 400 ईस्वी) मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद [[कलिंग]] का एक प्राचीन शासक वंश था। इस वंश के तीसरे शासक, [[खारवेल]] ने आम युग की शुरुआत में एक श्रृंखलाबद्ध अभियानों के माध्यम से भारत के बड़े हिस्से को जीत लिया। खारवेल के नेतृत्व में कलिंग की सैन्य शक्ति को पुनर्स्थापित किया गया: खारवेल के सेनापतित्व में, कलिंग राज्य का एक प्रभावशाली समुद्री विस्तार था जिसके व्यापार मार्ग उसे तत्कालीन सिंहल (श्रीलंका), बर्मा (म्यांमार), सियाम (थाईलैंड), वियतनाम, कंबोज (कंबोडिया), बोर्नियो, बाली, समुद्र (सुमात्रा) और जबद्वीप (जावा) से जोड़ते थे। खारवेल ने [[मगध महाजनपद|मगध]], [[अंग महाजनपद|अंग]], [[सातवाहन|सातवाहनों]] और [[पाण्ड्य वंश|पांड्य वंश]] (आधुनिक आंध्र प्रदेश) द्वारा शासित [[दक्षिण भारत|दक्षिण भारतीय]] क्षेत्रों के खिलाफ कई सफल अभियान चलाए और कलिंग का विस्तार [[गंगा नदी|गंगा]] और [[कावेरी नदी|कावेरी]] तक कर दिया। [[चित्र:Udayagiri_and_Khandagiri_Caves_2024_42.jpg|अंगूठाकार| खंडगिरि गुफाओं के चट्टानों को काटकर बनाए गए जैन विहार, खारवेल के संरक्षण में बनाए गए थे।]] खारवेल राज्य का एक प्रभावशाली समुद्री साम्राज्य था जिसके व्यापार मार्ग उसे [[श्रीलंका]], [[बर्मा]], [[थाईलैण्ड|थाईलैंड]], [[वियतनाम]], [[कंबोडिया]], [[बोर्नियो]], [[बाली]], [[सुमात्रा]] और [[जावा (द्वीप)|जावा]] से जोड़ते थे। कलिंग से उपनिवेशक श्रीलंका, बर्मा, साथ ही [[मालदीव]] और समुद्री [[दक्षिण पूर्व एशिया|दक्षिणपूर्व एशिया]] में बस गए। आज भी [[मलेशिया]] में भारतीयों को इसी वजह से केलिंग कहा जाता है।<ref>[http://www.visvacomplex.com/Keling_English_Version.html Keling_English Version] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130226054454/http://www.visvacomplex.com/Keling_English_Version.html|date=26 February 2013}}. Visvacomplex.com. Retrieved on 2013-07-12.</ref> धार्मिक रूप से सहिष्णु होने के बावजूद, खारवेल ने [[जैन धर्म]] को संरक्षण दिया,<ref>{{Cite web|url=http://www.freeindia.org/biographies/kharavela/page6.htm|title=Maharaja Kharavela|archive-url=https://web.archive.org/web/20010503232502/http://www.freeindia.org/biographies/kharavela/page6.htm|archive-date=2001-05-03|access-date=2012-01-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=http://www.freeindia.org/biographies/kharavela/page13.htm|title=Maharaja Kharavela's Family|archive-url=https://web.archive.org/web/20010503230545/http://www.freeindia.org/biographies/kharavela/page13.htm|archive-date=2001-05-03|access-date=2012-01-16}}</ref> और भारतीय उपमहाद्वीप में जैन धर्म के प्रसार के लिए जिम्मेदार थे, लेकिन भारतीय इतिहास के कई विवरणों में उनके महत्व को नजरअंदाज किया गया है। खारवेल के बारे में जानकारी का मुख्य स्रोत उनका प्रसिद्ध सत्रह पंक्तियों वाला शिलालेख है जो [[उदयगिरि और खंडगिरि|उदयगिरि और खंडगिरि की गुफाओं]] ([[भुवनेश्वर]], ओडिशा) में स्थित [[हाथीगुम्फा शिलालेख]] है। हाथीगुम्फा शिलालेख के अनुसार, उन्होंने मगध में राजगृह पर हमला किया, जिसके कारण बैक्ट्रिया के इंडो-ग्रीक राजा [[बैक्ट्रिया के डेमेट्रियस प्रथम|डेमेट्रियस प्रथम]] को [[मथुरा]] की ओर पीछे हटना पड़ा। === भारशिव वंश (नाग वंश) === {{मुख्य|नाग (वंश)}} गुप्तों के उदय से पहले, [[नाग (वंश)|भार्शिव राजाओं]] ने अधिकांश सिंधु-गंगा मैदानों पर शासन किया था। उन्होंने गंगा नदी के तट पर दस [[अश्वमेध यज्ञ]] किए। [[समुद्रगुप्त]] ने अपने इलाहाबाद स्तंभ में नाग शासकों का उल्लेख किया है। === वाकाटक === {{मुख्य|वाकाटक}} [[चित्र:Ajanta_(63).jpg|दाएँ|अंगूठाकार|200x200पिक्सेल| वाकाटक शासकों के संरक्षण में निर्मित [[अजंता गुफाएँ|अजंता गुफाओं]] के चट्टान-काटे गए बौद्ध विहार और चैत्य।]] '''वाकाटक साम्राज्य''' [[गुप्त साम्राज्य]] का समकालीन था और [[सातवाहन|सातवाहनों]] का उत्तराधिकारी राज्य था, जिसने उत्तर की दक्षिणी सीमाएँ बनाईं और तीसरी से पाँचवीं शताब्दी के दौरान आधुनिक मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र राज्यों पर शासन किया। [[अजंता गुफाएँ|अजंता की गुफाएँ]] (एक [[यूनेस्को]] [[विश्व धरोहर|विश्व धरोहर स्थल]]) में बौद्ध विहार और चैत्य, वाकाटक शासकों के संरक्षण में बनाए गए थे। अंततः उन पर [[चालुक्य राजवंश|चालुक्यों]] ने अधिकार कर लिया। === गुप्त साम्राज्य === {{मुख्य|गुप्त राजवंश}} [[चित्र:Silver_Coin_of_Kumaragupta_I.jpg|अंगूठाकार| [[गुप्त राजवंश|गुप्त]] राजा [[कुमारगुप्त प्रथम]] (414-455) का चांदी का सिक्का।]] '''शास्त्रीय युग''' उस अवधि को संदर्भित करता है जब [[भारतीय उपमहाद्वीप]] का अधिकांश हिस्सा गुप्त साम्राज्य (लगभग 320 ईस्वी–600 ईस्वी) के अधीन पुनः एकीकृत हो गया था। इस अवधि को [[भारत का स्वर्ण युग]] कहा जाता है<ref>[http://www.nupam.com/Sgupta1.html] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090802092924/http://www.nupam.com/Sgupta1.html|date=2 August 2009}}</ref> और यह [[भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का इतिहास|विज्ञान, प्रौद्योगिकी]], [[भारतीय आविष्कारों की सूची|इंजीनियरिंग]], [[भारतीय कला|कला]], [[भारतीय साहित्य|साहित्य]], [[भारतीय तर्कशास्त्र|तर्कशास्त्र]], [[भारतीय गणित|गणित]], [[भारतीय खगोलिकी|खगोल विज्ञान]], [[भारतीय धर्म|धर्म]] और [[भारतीय दर्शन|दर्शन]] में में व्यापक उपलब्धियों से चिह्नित था, जिसने [[हिन्दू संस्कृति|हिंदू संस्कृति]] के तत्वों को स्पष्ट किया।<ref>[http://www.wsu.edu:8001/~dee/ANCINDIA/GUPTA.HTM The Age of the Guptas and After] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20081204082030/http://www.wsu.edu:8001/~dee/ANCINDIA/GUPTA.HTM|date=4 December 2008}}</ref> [[दशमलव पद्धति|दशमलव संख्या प्रणाली]], जिसमें [[शून्य]] की अवधारणा भी शामिल है, इसी अवधि में भारत में आविष्कृत हुई थी। इस सांस्कृतिक रचनात्मकता के उच्च बिंदु गुप्त वास्तुकला, मूर्तिकला और चित्रकला में देखे जा सकते हैं। गुप्त काल ने [[कालिदास]], [[आर्यभट|आर्यभट्ट]], [[वराह मिहिर|वराहमिहिर]], [[विष्णु शर्मा]] और [[वात्स्यायन]] जैसे विद्वानों को जन्म दिया, जिन्होंने विभिन्न शैक्षणिक क्षेत्रों में प्रगति की। गुप्त युग में विज्ञान और राजनीतिक प्रशासन में भी उन्नति हुई। व्यापारिक संबंधों ने इस क्षेत्र को एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र बना दिया और इसे एक ऐसे आधार के रूप में स्थापित किया जो पड़ोसी राज्यों और क्षेत्रों, जैसे [[बर्मा]], [[श्रीलंका]] और समुद्री एवं मुख्यभूमि दक्षिणपूर्व एशिया को प्रभावित करेगा। गुप्तों ने अपने शासन को वैधता प्रदान करने के लिए वैदिक यज्ञ किए, लेकिन उन्होंने [[बौद्ध धर्म]] को भी संरक्षण दिया, जो ब्राह्मणवादी रूढ़िवादिता के विकल्प के रूप में जारी रहा। पहले तीन शासकों - [[चन्द्रगुप्त प्रथम|चंद्रगुप्त प्रथम]] (लगभग 319–335), [[समुद्रगुप्त]] (लगभग 335–376), और [[चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य|चंद्रगुप्त द्वितीय]] (लगभग 376–415) - के सैन्य अभियानों ने भारत के अधिकांश हिस्से को उनके नेतृत्व में ला दिया। उन्होंने उत्तर-पश्चिमी राज्यों का सफलतापूर्वक विरोध किया, जब तक कि [[हूण लोग|हूणों]] का आगमन नहीं हुआ, जिन्होंने 5वीं शताब्दी के पहले भाग तक [[अफ़ग़ानिस्तान|अफगानिस्तान]] में अपनी स्थापना कर ली, जिसकी राजधानी [[बामयान]] थी। फिर भी, [[दक्कन का पठार|दक्कन]] और दक्षिणी भारत का अधिकांश हिस्सा उत्तर में इस उथल-पुथल से काफी हद तक अप्रभावित रहा। === हर्षवर्धन === [[गुप्त साम्राज्य]] के पतन के बाद, गंगा के मैदानी इलाके कई छोटे राज्यों में बंट गए। [[कन्नौज]] के [[हर्षवर्धन|हर्ष]] ने उन्हें अपने शासन में हर्ष साम्राज्य के रूप में थोड़े समय के लिए एकजुट करने में सफलता पाई। [[चालुक्य राजवंश|चालुक्यों]] ([[पुलकेशिन द्वितीय]]) के हाथों हार ने ही उसे [[नर्मदा नदी]] के दक्षिण में अपने शासन का विस्तार करने से रोक दिया। यह एकजुट उनके शासन के बाद अधिक समय तक नहीं टिक पाई और 647 ईस्वी में उनकी मृत्यु के तुरंत बाद उनका साम्राज्य टूट गया। === परवर्ती गुप्त === {{मुख्य|गुप्तवंश (मागध अथवा मालव वंश)}} परवर्ती गुप्त राजवंश, जिसे मगध के परवर्ती गुप्त वंश के नाम से भी जाना जाता है, 6वीं और 8वीं शताब्दी ई. में [[मगध महाजनपद|मगध]] क्षेत्र और आंशिक रूप से [[मालवा]] के शासक थे। बाद के गुप्त राजवंश [[गुप्त राजवंश|, शाही गुप्तों]] के विघटन के बाद मगध और मालवा के शासकों के रूप में उभरे, हालाँकि, दोनों राजवंशों को जोड़ने के लिए कोई सबूत नहीं है और बाद के गुप्त राजवंशों ने खुद को शाही गुप्तों से जोड़ने के लिए -गुप्त प्रत्यय को अपनाया हो सकता है।<ref name="Ghosh2021">{{Cite journal|last=Ghosh|first=Suchandra|date=2022|title=Later Guptas|url=https://onlinelibrary.wiley.com/doi/full/10.1002/9781119399919.eahaa00571|journal=The Encyclopedia of Ancient History: Asia and Africa|pages=1–2|doi=10.1002/9781119399919.eahaa00571|isbn=978-1-119-39991-9}}</ref>{{Sfn|Sen|1999|p=246}} === गुर्जर === वर्तमान [[राजस्थान]] सदियों तक गुर्जर क्षेत्र था जिसकी राजधानी [[भीनमाल|भीलमाल]] (भीनमाल या श्रीमाल) थी, जो [[माउंट आबू]] से लगभग 50 मील उत्तर पश्चिम में स्थित है। भीनमाल के प्रतिहार 9वीं शताब्दी की शुरुआत में [[गंगा नदी|गंगा]] के किनारे कन्नौज चले गए और अपनी राजधानी कन्नौज में स्थानांतरित कर दी और एक साम्राज्य की स्थापना की जो अपने चरम पर पूर्व में [[बिहार]], पश्चिम में ''खोई हुई नदी'', [[घग्गर-हकरा नदी|हकरा]] और [[अरब सागर]], उत्तर में [[हिमालय]] और [[सतलुज नदी|सतलुज]] और दक्षिण में [[यमुना नदी|यमुना]] और [[नर्मदा नदी|नर्मदा]] से घिरा हुआ था।<ref name="Smith 1909" /> [[भरूच|भड़ौच]] के आसपास का क्षेत्र, जो इस राज्य की शाखा थी, पर भी [[लाट के गुर्जर|नंदीपुरी के गुर्जरों]] और [[लाट के गुर्जर|लाट के गुर्जरों]] का शासन था।{{R|1977 Majumdar}} <sup class="reference nowrap"><span title="Page: 66">&#x3A;&#x200A;66&#x200A;</span></sup> === विष्णुकुण्डिन === {{मुख्य|विष्णुकुण्डिन राजवंश}} '''विष्णुकुण्डिन साम्राज्य''' एक भारतीय राजवंश था जिसने 5वीं और 6वीं शताब्दी के दौरान [[दक्कन का पठार|दक्कन]], [[ओडिशा]] और [[दक्षिण भारत]] के कुछ हिस्सों पर शासन किया था और [[वाकाटक|वाकाटक साम्राज्य]] से सत्ता छीन ली थी। [[माधववर्मा द्वितीय]] इस वंश का सबसे प्रतापी शासक हुआ। विष्णुकुण्डिन शासन का अंत चालुक्य राजा [[चालुक्य राजवंश|पुलकेशिन]] [[द्वितीय पुलकेशी|द्वितीय]] द्वारा पूर्वी दक्कन पर विजय के साथ हुआ। पुलकेशिन ने विजित भूमि पर शासन करने के लिए अपने भाई [[कुब्ज विष्णुवर्धन|कुब्ज विष्णुवर्धन को]] वायसराय नियुक्त किया। अंततः विष्णुवर्धन ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की और [[पूर्वी चालुक्य]] राजवंश की शुरुआत की। === मैत्रक === {{मुख्य|मैत्रक राजवंश}} '''मैत्रक साम्राज्य ने''' पश्चिमी भारत के [[गुजरात]] पर लगभग 475 ई. से 767 ई. तक शासन किया। राजवंश के संस्थापक ''सेनापति'' भटार्क थे, जो [[गुप्त राजवंश|गुप्त साम्राज्य]] के तहत [[काठियावाड़|सौराष्ट्र]] [[प्रायद्वीप]] के एक सैन्य गवर्नर थे, उन्होंने 5वीं शताब्दी की अंतिम तिमाही में खुद को गुजरात के स्वतंत्र शासक के रूप में स्थापित किया था। प्रथम दो मैत्रक शासकों भटार्क और धरसेन प्रथम ने केवल ''सेनापति'' (सेनापति) की उपाधि का प्रयोग किया। तीसरे शासक द्रोणसिंह ने स्वयं को ''महाराजा'' घोषित कर दिया। राजा गुहसेन ने अपने पूर्ववर्तियों की तरह अपने नाम के साथ ''परमभट्टारक पदानुध्याता'' शब्द का प्रयोग करना बंद कर दिया, जो गुप्त अधिपतियों के प्रति नाममात्र की निष्ठा प्रदर्शित करने की समाप्ति को दर्शाता है। उनके बाद उनके पुत्र धरसेन द्वितीय ने ''महाधिराज'' की उपाधि धारण की। उनके पुत्र, अगले शासक शिलादित्य प्रथम, धर्मादित्य को [[ह्वेन त्सांग]] ने "महान प्रशासनिक क्षमता और दुर्लभ दयालुता और करुणा के सम्राट" के रूप में वर्णित किया था। सिलादित्य प्रथम के बाद उसके छोटे भाई खड़गरा प्रथम ने शासन संभाला <ref name="Mahajan">Mahajan V.D. (1960, reprint 2007). ''Ancient India'', S. Chand & Company, New Delhi, {{ISBN|81-219-0887-6}}, pp.594–596</ref> खड़गरा प्रथम के विरडी ताम्रपत्र अनुदान (616 ई.) से साबित होता है कि उसके क्षेत्रों में [[उज्जैन]] भी शामिल था। ===गुर्जर-प्रतिहार=== {{मुख्य|गुर्जर-प्रतिहार राजवंश}} गुर्जर प्रतिहार साम्राज्य एक भारतीय राजवंश था<ref>{{cite book | title =A historical review of Hindu India: 300 B. C. to 1200 A. D. | author =पंचानन राया | url=https://books.google.com/books?id=kHEBAAAAMAAJ&q=Gurjar+parihar | publisher =I. M. H. Press | year =1939 | page =125 }}</ref> जिसने 6वीं से 11वीं शताब्दी तक [[उत्तर भारत|उत्तरी भारत]] के अधिकांश भाग पर शासन किया। अपनी समृद्धि और शक्ति के चरम (लगभग 836–910 ईस्वी) पर, यह [[गुप्त साम्राज्य]] के बराबर क्षेत्रफल में विस्तारित था।<ref>{{Cite web |url=http://encyclopedia2.thefreedictionary.com/Gurjara-Pratihara+dynasty |title=Gurjara-Pratihara dynasty definition of Gurjara-Pratihara dynasty in the Free Online Encyclopedia<!-- Bot generated title --> |access-date=19 August 2009 |archive-date=2 October 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20111002203615/http://encyclopedia2.thefreedictionary.com/Gurjara-Pratihara+dynasty |url-status=live }}</ref> [[रमेशचन्द्र मजुमदार|डॉ. आर.सी. मजूमदार]] ने भारत के इतिहास में गुर्जर प्रतिहार साम्राज्य के महत्व को इंगित करते हुए कहा है, "गुर्जर प्रतिहार साम्राज्य, जो लगभग एक शताब्दी तक पूर्ण गौरव में बना रहा, [[भारतीय उपमहाद्वीप का इस्लामी इतिहास|मुस्लिम विजय]] से पहले उत्तरी भारत का अंतिम महान साम्राज्य था।" यह सम्मान कई प्रतिष्ठित इतिहासकारों द्वारा हर्ष के साम्राज्य को दिया जाता है, लेकिन बिना किसी वास्तविक औचित्य के, क्योंकि प्रतिहार साम्राज्य संभवतः बड़ा था, निश्चित रूप से क्षेत्रफल में [[गुप्त साम्राज्य]] से कम नहीं था और इसने उत्तरी भारत के एक बड़े हिस्से पर राजनीतिक एकता और उसके साथ आने वाले लाभ लाए। लेकिन इसका मुख्य श्रेय पश्चिम से होने वाले विदेशी आक्रमणों, जुनैद के दिनों से, के खिलाफ सफल प्रतिरोध में निहित है। इसे अरब लेखकों ने खुद स्वीकार किया था। [[लॉर्ड एल्फिन्स्टन|एल्फिन्स्टन]] के दिनों से ही भारत के इतिहासकारों ने मुस्लिम आक्रमणकारियों की धीमी प्रगति पर आश्चर्य व्यक्त किया है, जबकि दुनिया के अन्य हिस्सों में उनकी तेज प्रगति हुई। इस अनूठी घटना को समझाने के लिए अक्सर संदिग्ध वैधता के तर्क दिए गए हैं। अब इसमें कोई संदेह नहीं कि यह गुर्जर प्रतिहार सेना की शक्ति थी जिसने मुस्लिमों की प्रगति को [[सिंध]] की सीमाओं से आगे बढ़ने से रोका, जो उनकी पहली विजय थी और लगभग तीन सौ वर्षों तक बनी रही। बाद की घटनाओं के प्रकाश में, इसे "भारत के इतिहास में गुर्जर प्रतिहारों का मुख्य योगदान" माना जा सकता है।<ref>{{cite book|title=History of Ancient India: Earliest Times to 1000 A. D.|author=राधेश्याम चौरसिया|page=207 to 208|isbn=978-81-269-0027-5|publisher=अटलांटिक प्रकाशक और वितरक|year=2002}}</ref> === राजपूत === {{मुख्य|राजपूत}} '''[[राजपूत]]''' एक हिंदू कुल था जो गंगा के मैदानों से लेकर अफगान पहाड़ों तक फैले क्षेत्र में शक्तिशाली बन कर उभरे थे, और यह शब्द [[सासानी साम्राज्य]] और [[गुप्त राजवंश|गुप्त साम्राज्य]] के पतन के बाद क्षेत्र के कई राज्यों के विभिन्न राजवंशों को संदर्भित करता है और बौद्ध शासक राजवंशों से हिंदू शासक राजवंशों में संक्रमण का प्रतीक है। ==== कटोच राजवंश ==== {{मुख्य|कटोच}} '''[[कटोच]]''' [[चंद्रवंश|चंद्रवंशी]] वंश का एक हिंदू राजपूत वंश था; हाल के शोध से पता चलता है कि कटोच दुनिया के सबसे पुराने शाही राजवंशों में से एक हो सकता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.tribuneindia.com/2009/20091104/himplus.htm#8|title=Dharam Prakash Gupta, "Seminar on Katoch dynasty trail". ''Himachal Plus.'' On line.|archive-url=https://web.archive.org/web/20200102122914/https://www.tribuneindia.com/2009/20091104/himplus.htm#8|archive-date=2 January 2020|access-date=3 January 2017}}</ref> ==== चौहान ==== {{मुख्य|चौहान वंश}} [[चित्र:Prithvi_Raj_Chauhan_(Edited).jpg|अंगूठाकार|212x212पिक्सेल| अजमेर में [[पृथ्वीराज चौहान|पृथ्वी राज चौहान]] की प्रतिमा]] चौहान वंश 8वीं से 12वीं शताब्दी ईस्वी तक फला-फूला। यह उस युग के तीन मुख्य राजपूत वंशों में से एक था, अन्य दो [[गुर्जर-प्रतिहार राजवंश|प्रतिहार]] और [[परमार वंश|परमार]] थे। चौहान वंशों ने [[उत्तर भारत]] के कई स्थानों और पश्चिमी भारत के [[गुजरात]] राज्य में अपनी स्थापना की। वे [[राजपुताना|राजपूताना]] के दक्षिण-पश्चिम में [[सिरोही जिला|सिरोही]] और पूर्व में [[बूंदी]] तथा [[कोटा]] में भी प्रमुख थे। शिलालेख उन्हें सांभर, [[जयपुर राज्य|अंबर]] (बाद में जयपुर) जिले की नमक झील वाली क्षेत्र से भी जोड़ते हैं (साखंबरी शाखा सांभर झील के निकट रही और गुर्जर-प्रतिहार शासकों से वैवाहिक संबंध स्थापित किए, जो उस समय उत्तर भारत में एक साम्राज्य शासित करते थे)। चौहानों ने एक राजनीतिक नीति अपनाई जिसमें वे मुख्यतः चालुक्यों और आक्रमणकारी मुस्लिम सेनाओं के खिलाफ अभियानों में संलग्न रहे। 11वीं शताब्दी में, उन्होंने अपने राज्य के दक्षिणी भाग में अजयमेरु ([[अजमेर]]) शहर की स्थापना की, और 12वीं शताब्दी में, चौहानों ने [[तोमर वंश|तोमरों]] से ढिल्लिका ([[दिल्ली]] का प्राचीन नाम) पर कब्जा कर लिया और [[यमुना नदी]] के किनारे उनके कुछ क्षेत्रों को अपने साम्राज्य में मिला लिया। चौहान राज्य, [[पृथ्वीराज चौहान|राजा पृथ्वीराज तृतीय]] (1165–1192 ईस्वी) के अधीन [[उत्तर भारत]] का प्रमुख साम्राज्य बन गया, जिन्हें पृथ्वीराज चौहान या राय पिथौरा के नाम से भी जाना जाता है। पृथ्वीराज तृतीय लोककथाओं और ऐतिहासिक साहित्य में दिल्ली के चौहान राजा के रूप में प्रसिद्ध हुए हैं, जिन्होंने 1191 में [[तराइन का युद्ध|तराइन के प्रथम युद्ध]] में [[मोहम्मद ग़ोरी|मोहम्मद गौरी]] के आक्रमण का विरोध किया और उसे खदेड़ दिया। [[मेवाड़]] सहित अन्य राजपूत राज्यों की सेनाओं ने उनकी सहायता की। चौहान राज्य का पतन तब हुआ जब पृथ्वीराज और उनकी सेनाएँ 1192 में [[तराइन का द्वितीय युद्ध|तराइन के द्वितीय युद्ध]] में मोहम्मद गौरी से हार गईं।{{R|Hoernle}} ==== कछवाहा ==== {{मुख्य|कछवाहा}} कछवाहा इस क्षेत्र की पूर्ववर्ती शक्तियों के सामंत के रूप में उभरे। कुछ विद्वानों का मानना है कि 8वीं–10वीं शताब्दी में [[कन्नौज]] ([[हर्षवर्धन|हर्ष]] के साम्राज्य के विघटन के बाद क्षेत्रीय सत्ता का केंद्र) के पतन के बाद ही कच्छपघाट राज्य आज के [[मध्य प्रदेश]] के [[चम्बल नदी|चंबल घाटी]] में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरा। ==== परमार ==== {{मुख्य|परमार वंश}} परमार वंश [[मध्यकालीन भारत]] में एक [[राजपूत वंशों एवं राज्यों की सूची|राजपूत वंश]] था जिसने मध्य भारत में [[मालवा]] क्षेत्र पर शासन किया।{{Sfn|Thapar|1990|pp=169–171}} इस राजवंश की स्थापना उपेन्द्र ने लगभग 800 ई. में की थी। इस राजवंश का सबसे महत्वपूर्ण शासक [[परमार भोज|भोज]] था जो एक दार्शनिक राजा और [[बहुज्ञ]] था। परमार साम्राज्य की राजधानी ''धार नगरी'' ( [[मध्य प्रदेश]] राज्य में वर्तमान [[धार]] शहर) थी। ==== सोलंकी (चौलुक्य) ==== {{मुख्य|सोलंकी वंश}} [[चित्र:Sun_Temple_Sabha_Mandap.JPG|दाएँ|अंगूठाकार|200x200पिक्सेल| चालुक्यों द्वारा निर्मित [[मोढेरा सूर्य मंदिर]] ।]] '''सोलंकी''' (जिन्हें चौलुक्य भी कहा जाता है) [[गुजरात]] में एक अन्य राजपूत वंश थे, जिनकी राजधानी अणहिलवाड़ा (वर्तमान [[पाटण, गुजरात|सिद्धपुर पाटन]]) थी। {{Sfn|Thapar|1990|p=170}} [[गुजरात]] [[हिन्द महासागर|हिंद महासागर]] व्यापार का एक प्रमुख केंद्र था और अनहिलवाड़ा भारत के सबसे बड़े शहरों में से एक था, जिसकी अनुमानित जनसंख्या वर्ष 1000 में 100,000 थी। चौलुक्य [[काठियावाड़]] के [[सोमनाथ मन्दिर|सोमनाथ पाटन]] में समुद्रतटीय [[शिव]] के विशाल मंदिर के संरक्षक थे; 1026 में [[महमूद ग़ज़नवी|महमूद गजनवी]] द्वारा मंदिर को लूटे जाने के बाद भीम देव ने इसके पुनर्निर्माण में मदद की थी। उनके पुत्र [[कर्ण प्रथम|कर्ण]] ने [[भील]] राजा आशापल्ल या आशावल पर विजय प्राप्त की और अपनी विजय के बाद [[साबरमती नदी]] के तट पर, आधुनिक [[अहमदाबाद]] के स्थान पर, [[अहमदाबाद|कर्णावती]] नामक शहर की स्थापना की। ==== दिल्ली के तोमर ==== {{मुख्य|तोमर वंश}} दिल्ली के तोमर 9वीं से 12वीं शताब्दी तक एक [[राजपूत वंशों एवं राज्यों की सूची|राजपूत वंश]] थे।{{Sfn|Thapar|1990|pp=168–170}} [[तोमर वंश|दिल्ली के तोमरों]] ने वर्तमान [[दिल्ली]] और [[हरियाणा]] के कुछ हिस्सों पर शासन किया।{{Sfn|Singh|2008|p=571}} इस वंश के बारे में अधिकांश जानकारी कम ऐतिहासिक मूल्य की बार्डिक कथाओं से मिलती है, और इसलिए, उनके इतिहास का पुनर्निर्माण करना कठिन है।{{Sfn|Ganguly|1981|p=704}} बार्डिक परंपरा के अनुसार, इस वंश के संस्थापक [[अनंगपाल तोमर]] ने 736 ईस्वी में [[दिल्ली]] की स्थापना की।{{Sfn|Sen|1999|p=339}} हालाँकि, इस दावे की प्रामाणिकता संदिग्ध है।{{Sfn|Ganguly|1981|p=704}} बार्डिक कथाओं में यह भी कहा गया है कि अंतिम तोमर राजा (जिसका नाम भी अनंगपाल था) ने दिल्ली का सिंहासन अपने नाती पृथ्वीराज चौहान को सौंप दिया। यह दावा भी गलत है: ऐतिहासिक साक्ष्य बताते हैं कि [[पृथ्वीराज चौहान|पृथ्वीराज]] ने दिल्ली अपने पिता [[सोमेश्वर चौहान|सोमेश्वर]] से विरासत में प्राप्त की थी।{{Sfn|Ganguly|1981|p=704}} सोमेश्वर के [[बिजोलिया]] शिलालेख के अनुसार, उनके भाई [[विग्रहराज चौहान|विग्रहराज चतुर्थ]] ने ढिल्लिका (दिल्ली) और आशिका (हांसी) पर कब्जा कर लिया था; संभवतः उन्होंने एक तोमर शासक को पराजित किया था। ==== गहड़वाल राजवंश ==== {{मुख्य|गहड़वाल वंश}} गाहड़वाल वंश ने 11वीं और 12वीं शताब्दी के दौरान वर्तमान [[भारतीय राज्य और केंद्रशासित प्रदेश की नाम व्युत्पत्ति की सूची|भारतीय राज्य]] [[उत्तर प्रदेश]] और [[बिहार]] के कुछ हिस्सों पर शासन किया था। उनकी राजधानी [[गंगा के मैदान|गंगा के मैदानी]] इलाके में [[वाराणसी]] में स्थित थी।{{Sfn|Niyogi|1959|p=38}} === खयारवाल (खैरवाल) === {{मुख्य|खयारवाला राजवंश}} खैरवाल राजवंश ने 11वीं और 12वीं शताब्दी के दौरान वर्तमान [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|भारतीय राज्यों]] [[बिहार]] और [[झारखण्ड|झारखंड]] के कुछ हिस्सों पर शासन किया। उनकी राजधानी [[शाहाबाद जिला|शाहाबाद जिले]] के [[खैरागढ़]] में स्थित थी। [[रोहतास दुर्ग|रोहतास]] के शिलालेख के अनुसार [[प्रतापधवल]] और [[श्री प्रताप]] इस राजवंश के राजा थे।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=7CenDwAAQBAJ&pg=PT41|title=Majestic Monuments of India: Ancient Indian Mega Structures|last=Prabhu|first=T. L.|date=4 August 2019|access-date=25 July 2020}}</ref> [[चित्र:Rohtasgarh_Fort_Entrance.jpg|अंगूठाकार| रोहतासगढ़ किला]] === प्रतिहार === प्रतिहार वर्तमान [[जोधपुर]] के निकट [[मंडोर]] से शासन करते थे, [[चित्तौड़]] के [[गुहिलोत|गुहिलोतों]] से पराजित होने से पहले उनके पास [[राणा]] की उपाधि थी। === पाल === {{मुख्य|पाल वंश}} पाल साम्राज्य एक [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] राजवंश था जिसने [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में शासन किया। पाल ([[बंगाली भाषा|बंगाली]]: পাল) नाम का अर्थ है रक्षक और यह सभी पाल शासकों के नामों के अंत में प्रयुक्त होता था। पाल [[महायान]] और [[वज्रयान|तांत्रिक बौद्ध धर्म]] के अनुयायी थे। [[गोपाल प्रथम]] इस राजवंश के पहले शासक थे। उन्होंने 750 ईस्वी में गौर(अब [[गौड़ (नगर)|गौड़]]) में [[चुनाव|लोकतांत्रिक चुनाव]] के माध्यम से सत्ता प्राप्त की। इस घटना को [[महाजनपद|महा जनपदों]] के समय के बाद [[दक्षिण एशिया]] में पहले लोकतांत्रिक चुनावों में से एक माना जाता है। उन्होंने 750 से 770 ईस्वी तक शासन किया और बंगाल के सभी हिस्सों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर अपनी स्थिति को मजबूत किया। यह [[बौद्ध धर्म|बौद्ध राजवंश]] चार शताब्दियों (750–1120 ईस्वी) तक चला और [[बंगाल]] में स्थिरता और समृद्धि का दौर लाया। उन्होंने कई मंदिरों और कलाकृतियों का निर्माण करवाया तथा [[नालन्दा महाविहार|नालंदा]] और [[विक्रमशिला|विक्रमशिला विश्वविद्यालयों]] को समर्थन दिया। [[धर्मपाल]] द्वारा निर्मित [[सोमपुर महाविहार]] भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा बौद्ध विहार है। [[धर्मपाल]] और [[देवपाल |देवपाल]] के शासनकाल में साम्राज्य अपने चरम पर पहुँचा। धर्मपाल ने साम्राज्य को [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के उत्तरी हिस्सों तक विस्तारित किया। जिसके कारण एक बार फिर उपमहाद्वीप पर नियंत्रण के लिए शक्ति संघर्ष देखने को मिला। धर्मपाल के उत्तराधिकारी देवपाल ने साम्राज्य का विस्तार [[दक्षिण एशिया]] और उससे आगे तक किया। उनका साम्राज्य पूर्व में [[असम]] और [[उत्कल]] से लेकर उत्तर-पश्चिम में [[कंबोज]] (आधुनिक अफगानिस्तान) और दक्षिण में [[दक्कन का पठार|दक्कन]] तक फैला था। पाल ताम्रपत्र अभिलेख के अनुसार, देवपाल ने उत्कलों का विनाश किया, [[प्राग्ज्योतिष साम्राज्य|प्राग्ज्योतिष]] (असम) को जीता, [[हूण लोग|हूणों]] के अहंकार को चूर-चूर किया, और [[गुर्जरदेश|गुर्जरों]] ([[गुर्जर-प्रतिहार राजवंश|गुर्जर-प्रतिहारों]]) और [[द्रविड़|द्रविड़ों]] के स्वामियों को नतमस्तक किया। देवपाल की मृत्यु के साथ ही पाल साम्राज्य के उत्कर्ष का काल समाप्त हो गया और इस दौरान कई स्वतंत्र राजवंश और राज्य उभरे। हालाँकि, [[महिपाल|महिपाल प्रथम]] ने पालों के शासन को पुनर्जीवित किया। उन्होंने बंगाल पर पुनः नियंत्रण स्थापित किया और साम्राज्य का विस्तार किया। उन्होंने [[राजेंद्र चोल]] और [[चालुक्य राजवंश|चालुक्यों]] के आक्रमणों को झेला। महिपाल प्रथम के बाद पाल राजवंश का पतन फिर से शुरू हुआ, जब तक कि [[रामपाल]], इस राजवंश के अंतिम महान शासक, ने कुछ हद तक राजवंश की स्थिति को पुनः प्राप्त करने में सफलता हासिल की। उन्होंने वंदेर विद्रोह को कुचला और अपने साम्राज्य को [[कामरूप]], [[ओडिशा]] और [[उत्तरी भारत]] तक विस्तारित किया। पाल साम्राज्य को [[बंगाल]] का स्वर्ण युग माना जा सकता है। पालों ने [[तिब्बत]], [[भूटान]] और [[म्यांमार]] में [[महायान बौद्ध धर्म]] की शुरुआत की थी। पालों का दक्षिण-पूर्व एशिया में व्यापक व्यापार और प्रभाव था। यह [[शैलेन्द्र राजवंश|शैलेन्द्र साम्राज्य]] (वर्तमान [[मलाया]], [[जावा]], [[सुमात्रा]]) की मूर्तियों और वास्तुशिल्प शैली में देखा जा सकता है। === मिथिला के कर्नाट === {{मुख्य|कर्नाट वंश}} 1097 ई. में, मिथिला के [[कर्नाट वंश|कर्नाट राजवंश]] का उदय [[बिहार]]/[[नेपाल]] सीमा क्षेत्र में हुआ और उन्होंने [[दरभंगा]] और [[सिमराँवगढ़ (सिमरौनगढ़)|सिमरांवगढ़]] में राजधानियाँ बनाए रखीं। इस राजवंश की स्थापना कर्नाटक मूल के एक सैन्य कमांडर [[नान्यदेव]] ने की थी। इस राजवंश के तहत [[मैथिली भाषा|मैथिली]] भाषा का विकास शुरू हुआ और मैथिली भाषा का पहला साहित्य, ''वर्ण रत्नाकर'' 14वीं शताब्दी में ज्योतिरीश्वर ठाकुर द्वारा लिखा गया। कर्नाट ने [[नेपाल]] में भी धावे बोले। 1324 में [[गयासुद्दीन तुग़लक़|गयासुद्दीन तुगलक]] के आक्रमण के साथ ही उनका पतन हो गया।<ref>{{Cite journal|last=Sinha|first=CPN|date=1969|title=Origin of the Karnatas of Mithila - A Fresh Appraisal|journal=Proceedings of the Indian History Congress|volume=31|pages=66–72|jstor=44138330}}</ref> === चन्द्र === {{मुख्य|चन्द्र राजवंश}} '''चन्द्र राजवंश''' जो पूर्वी [[बंगाल]] पर शासन करता था और [[पाल वंश|पालों]] के समकालीन थे। === पूर्वी गंग === {{मुख्य|पूर्वी गंगवंश}} पूर्वी गंग वंश के शासकों ने 11वीं शताब्दी से 15वीं शताब्दी के आरंभ तक [[कलिंग]] पर शासन किया, जिसमें आधुनिक भारतीय राज्य [[ओडिशा]], [[पश्चिम बंगाल]], [[झारखंड]], [[छत्तीसगढ़]], [[मध्य प्रदेश]] और [[आंध्र प्रदेश]] के कुछ हिस्से शामिल थे। उनकी राजधानी कलिंगनगर के नाम से जानी जाती थी, जो आज [[आंध्र प्रदेश]] के [[श्रीकाकुलम जिला|श्रीकाकुलम]] जिले में ओडिशा की सीमा पर स्थित [[मुखलिंगम|श्रीमुखलिंगम]] है। आज उन्हें [[कोणार्क]], ओडिशा में [[विश्व धरोहर स्थल]] [[कोणार्क सूर्य मंदिर]] के निर्माताओं के रूप में याद किया जाता है। इसका निर्माण राजा [[नरसिंह देव प्रथम|नरसिंहदेव प्रथम]] (1238–1264 ईस्वी) ने करवाया था। उनके शासनकाल (1078–1434 ईस्वी) में मंदिर वास्तुकला की एक नई शैली का उदय हुआ, जिसे आमतौर पर भारतीय-आर्य वास्तुकला कहा जाता है। इस वंश की स्थापना राजा [[अनन्तवर्मन चोडगंग|अनंतवर्मा चोडगंगा देव]] (1078–1147 ईस्वी) ने की थी। वह एक धार्मिक व्यक्ति और कला एवं साहित्य के संरक्षक थे। उन्हें ओडिशा के [[पुरी]] में प्रसिद्ध [[जगन्नाथ मन्दिर, पुरी|जगन्नाथ मंदिर]] के निर्माण का श्रेय दिया जाता है। राजा अनंतवर्मन चोडगंगदेव के बाद [[नरसिंह देव प्रथम|नरसिंहदेव प्रथम]] (1238–1264 ईस्वी) जैसे प्रतिष्ठित शासकों की एक लंबी श्रृंखला आई। पूर्वी गंग वंश के शासकों ने न केवल उत्तर और दक्षिण भारत के मुस्लिम शासकों के निरंतर हमलों से अपने राज्य की रक्षा की, बल्कि संभवतः उन कुछ साम्राज्यों में से एक थे जिन्होंने अपने मुस्लिम विरोधियों पर सफलतापूर्वक आक्रमण कर उन्हें हराया। पूर्वी गंग राजा नरसिंह देव प्रथम ने बंगाल के मुस्लिम राज्य पर आक्रमण किया और सुल्तान को भारी हार दी। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि लगभग एक शताब्दी तक सल्तनत ने गंग सम्राटों के क्षेत्रों पर कभी अतिक्रमण नहीं किया। उनकी सैन्य उपलब्धियाँ आज भी ओडिशा में लोककथाओं के रूप में जीवित हैं। यह राज्य व्यापार और वाणिज्य के माध्यम से समृद्ध हुआ और धन का अधिकांश हिस्सा मंदिरों के निर्माण में खर्च किया गया। 15वीं शताब्दी के आरंभ में राजा भानुदेव चतुर्थ (1414–1434 ईस्वी) के शासनकाल में इस वंश का शासन समाप्त हो गया। === सेन === {{मुख्य|सेन राजवंश}} पालों के बाद [[सेन राजवंश]] आया जिसने 12वीं शताब्दी में [[बंगाल]] को एक शासन के अधीन लाया। इस वंश के दूसरे शासक [[विजय सेन]] ने अंतिम [[पाल वंश|पाल सम्राट]] [[मदनपाल]] को हराकर अपना शासन स्थापित किया। [[बल्लाल सेन]] ने बंगाल में [[कुलीन प्रथा]] की शुरुआत की और [[नवद्वीप]] को राजधानी बनाया। इस वंश के चौथे राजा [[लक्ष्मण सेन]] ने साम्राज्य का विस्तार बंगाल से आगे बिहार, असम, उत्तरी ओडिशा और संभवतः [[वाराणसी]] तक किया। लक्ष्मण को बाद में मुसलमानों से हार का सामना करना पडा और वह पूर्वी बंगाल भाग गया जहाँ उसने कुछ और वर्षों तक शासन किया। सेन वंश ने [[हिन्दू धर्म|हिंदू धर्म]] के पुनरुत्थान को बढ़ावा दिया और भारत में [[संस्कृत साहित्य]] का विकास किया। === वर्मन === '''वर्मन राजवंश''' (कामरूप के [[वर्मन राजवंश]] से भ्रमित न हों) ने पूर्वी [[बंगाल]] पर शासन किया और वे [[सेन राजवंश|सेनों]] के समकालीन थे। == पूर्वोत्तर == === कामरूप === '''कामरूप''', जिसे '''प्रागज्योतिष''' भी कहा जाता है, [[दावका साम्राज्य|दावका]] के साथ [[असम]] के ऐतिहासिक राज्यों में से एक था, दावका (नौगोंग) और कामरूप अलग और मित्रवत राज्यों के रूप में थे।{{R|sharma 2005|p=248}} यह 350 से 1140 ईस्वी तक अस्तित्व में था। वर्तमान [[गुवाहाटी]], उत्तरी गुवाहाटी और [[तेज़पुर]] में अपनी राजधानियों से तीन राजवंशों द्वारा शासित, यह अपनी शीर्ष पर पूरी [[ब्रह्मपुत्र घाटी]], [[उत्तर बंगाल|उत्तरी बंगाल]], [[भूटान]] और [[बांग्लादेश]] के कुछ हिस्सों और कभी-कभी [[पश्चिम बंगाल]] और [[बिहार]] के कुछ हिस्सों को कवर करता था। ==== वर्मन ==== {{मुख्य|वर्मन राजवंश}} [[वर्मन राजवंश]] (350-650 ई.), [[कामरूप]] का पहला ऐतिहासिक शासक; [[समुद्रगुप्त]] के समकालीन [[पुष्यवर्मन]] द्वारा स्थापित किया गया था। जहां पुष्यवर्मन गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त का समकालीन था, वही भास्करवर्मन कन्नौज के हर्षवर्धन के समकालीन था। यह राजवंश [[गुप्त राजवंश|गुप्त साम्राज्य]] के अधीनस्थ हो गया, लेकिन जैसे ही गुप्तों की शक्ति क्षीण हुई, [[महेंद्रवर्मन (वर्मन राजवंश)|महेंद्रवर्मन]] (470-494 ई.) ने दो [[अश्वमेध यज्ञ|अश्वमेध]] किये और स्वतंत्र हो गए। कामरूप के तीन राजवंशों में से पहले वर्मन उनके बाद [[म्लेच्छ राजवंश|म्लेच्छ]] और फिर [[पाल राजवंश (कामरूप)|पाल]] राजवंश आए। ==== म्लेच्छ ==== {{मुख्य|म्लेच्छ राजवंश}} [[म्लेच्छ राजवंश|म्लेच्छ वंश]] ने वर्मन वंश का स्थान लिया और 10वीं शताब्दी के अंत तक शासन किया। वे हररूपेश्वर ([[तेज़पुर|तेजपुर]]) के आसपास स्थित अपनी राजधानी से शासन करते थे। यहाँ के शासक आदिवासी थे, जिनका वंश [[नरकासुर]] से था। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार इस राजवंश में दस शासक थे। कामरूप में म्लेच्छ वंश के बाद पाल राजाओं का शासन आया। [[चित्र:Assam_MK_Lion.JPG|दाएँ|अंगूठाकार|200x200पिक्सेल| शक्तिशाली [[पाल राजवंश (कामरूप)|कामरूप-पलास]], [[मदन कामदेव]] का प्रतिनिधित्व करने वाली 9वीं-10वीं शताब्दी की शेर की मूर्ति]] ==== पाल (कामरूप) ==== [[पाल राजवंश (कामरूप)|कामरूप के पाल राजवंश]] म्लेच्छ वंश के उत्तराधिकारी बने, जिसने अपनी राजधानी दुर्जय ([[गुवाहाटी|उत्तरी गौहाटी]]) से शासन किया। राजवंश 12वीं सदी के अंत तक शासन करता रहा। [[ब्रह्मपाल]] (900-920 ई.पू.), पाल वंश (कामरूप) (900-1100 ई.) के संस्थापक थे। राजवंश ने अपनी राजधानी दुर्जय (आधुनिक [[गुवाहाटी|उत्तरी गुवाहाटी)]] से शासन किया। पाल राजाओं में सबसे महान, [[धर्मपाल (कामरूप)|धर्मपाल]] की राजधानी कामरूप नगर में थी, जिसे अब [[गुवाहाटी|उत्तरी गुवाहाटी]] के रूप में जाना जाता है। [[रत्नपाल (कामरूप)|रत्नपाल]] इस वंश का एक अन्य उल्लेखनीय शासक था। उनके भूमि-अनुदान के अभिलेख बड़गांव और [[सुआलकुची]] में पाए गए हैं, जबकि इंद्र पाल के लिये वैसे ही अभिलेख गुवाहाटी में पाये गये है। पाल वंश का अंत जयपाल (1075-1100 ई.) के साथ हुआ।<ref>{{Cite book|title=Readings in the history & culture of Assam|last=Samiti|first=Kamarupa Anusandhana|publisher=Kamarupa Anusandhana Samiti|year=1984|pages=227}}</ref> === त्विप्रा === प्राचीन [[त्रिपुरा]] पर '''त्विप्रा साम्राज्य''' का शासन था। यह राज्य आज के मध्य बांग्लादेश क्षेत्र में [[ब्रह्मपुत्र नदी]] और [[मेघना नदी|मेघना]] और [[सुरमा नदी|सुरमा नदियों]] के संगम के आसपास स्थापित हुआ था। इसकी राजधानी का नाम खोरोंगमा था और यह वर्तमान बांग्लादेश के [[सिलहट]] डिवीजन में मेघना नदी के किनारे स्थित थी। == दक्कन का पठार और दक्षिण == सहस्राब्दी के प्रथम अर्द्ध में दक्षिण में विभिन्न छोटे-छोटे राज्यों का उदय और पतन हुआ, जो अधिकतर गंगा के मैदानों में उथल-पुथल और भारत के दक्षिणी छोर तक [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] और [[जैन धर्म]] के प्रसार से स्वतंत्र थे। सातवीं शताब्दी के मध्य से लेकर 13वीं शताब्दी के मध्य तक, [[क्षेत्रवाद]] भारतीय उपमहाद्वीप के राजनीतिक और राजवंशीय इतिहास का प्रमुख विषय था। इस अवधि की सामाजिक-राजनीतिक वास्तविकताओं को सामान्यतः तीन विशेषताओं द्वारा दर्शाया गया है। * प्रथम, ब्राह्मणवादी धर्मों का प्रसार एक दोतरफा प्रक्रिया थी - स्थानीय पंथों का संस्कृतीकरण और ब्राह्मणवादी सामाजिक व्यवस्था का स्थानीयकरण। * दूसरा, ब्राह्मण पुरोहित और भूस्वामी समूहों का प्रभुत्व था, जिन्होंने बाद में क्षेत्रीय संस्थाओं और राजनीतिक विकास पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया। * तीसरा, अनेक राजवंशों के बीच उतार-चढ़ाव के कारण, जिनमें बारहमासी सैन्य हमलों से बचने की उल्लेखनीय क्षमता थी, क्षेत्रीय राज्यों को बार-बार हार का सामना करना पड़ा, लेकिन शायद ही कभी उनका सम्पूर्ण विनाश हुआ। 8वीं शताब्दी के दौरान भारतीय प्रायद्वीपीय, [[चालुक्य राजवंश|चालुक्यों]] (556–757 ईस्वी), कांचीपुरम के [[पल्लव राजवंश|पल्लवों]] (300–888 ईस्वी) और [[पाण्ड्य राजवंश|पांड्यों]] के बीच त्रिपक्षीय शक्ति संघर्ष में फसा हुआ था। चालुक्य शासकों को उनके अधीनस्थों, [[राष्ट्रकूट राजवंश|राष्ट्रकूटों]] (753–973 ईस्वी) ने उखाड़ फेंका। हालांकि पल्लव और पांड्य दोनों के बीच शत्रुता थी, परंतु राजनीतिक प्रभुत्व के लिए वास्तविक संघर्ष पल्लव और चालुक्यों के बीच था। [[राष्ट्रकूट राजवंश|राष्ट्रकूटों]] का उदय [[दक्षिण भारत का इतिहास|दक्षिण भारत के इतिहास]] में एक नए युग की शुरुआत थी। दक्षिण भारतीय राज्यों ने अब तक केवल [[नर्मदा नदी]] तक और उसके दक्षिण में ही शासन किया था। राष्ट्रकूट ही पहले थे जिन्होंने उत्तर की ओर [[गंगा के मैदान|गंगा के मैदानों]] तक विस्तार किया और [[पाल वंश|बंगाल के पालों]] तथा गुजरात के [[गुर्जर-प्रतिहार राजवंश|राजपूत प्रतिहारों]] के विरुद्ध अपनी शक्ति का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया। अंतरक्षेत्रीय संघर्षों के बावजूद, दक्षिण में स्थानीय स्वायत्तता कहीं अधिक हद तक बनी रही, जहाँ यह सदियों से प्रचलित थी। अत्यधिक केंद्रीकृत सरकार के अभाव का संबंध गाँवों और जिलों के प्रशासन में संगत स्थानीय स्वायत्तता से था। पश्चिमी तट पर [[अरब लोग|अरबों]] के साथ और [[दक्षिण पूर्व एशिया]] के साथ व्यापक और सुव्यवस्थित स्थल एवं समुद्री व्यापार फला-फूला। व्यापार ने दक्षिण पूर्व एशिया में सांस्कृतिक प्रसार को सुगम बनाया, जहाँ स्थानीय अभिजात वर्ग ने चुनिंदा परंतु स्वेच्छा से भारतीय कला, वास्तुकला, साहित्य और सामाजिक रीति-रिवाजों को अपनाया। अंतरवंशीय प्रतिद्वंद्विता और एक-दूसरे के क्षेत्र में मीयादी छापेमारी के बावजूद, [[दक्कन का पठार|दक्कन]] और दक्षिण भारत के शासकों ने तीनों धर्मों - बौद्ध धर्म, हिंदू धर्म और जैन धर्म - को संरक्षण दिया। धर्म एक-दूसरे से राजकीय अनुग्रह के लिए प्रतिस्पर्धा करते थे, जिसमें भूमि अनुदानों शामिल होता था परंतु अधिक महत्वपूर्ण रूप से स्मारकीय मंदिरों के निर्माण में, जो आज भी वास्तुकला के अजूबे हैं। [[एलीफेंटा द्वीप]] (मुंबई या बॉम्बे के निकट, जैसा कि इसे पहले जाना जाता था), [[अजंता गुफाएँ|अजंता]] और [[एलोरा गुफाएं|एलोरा]] (महाराष्ट्र में) के गुफा मंदिर, और कर्नाटक में [[पट्टदकल्लु मन्दिर परिसर|पट्टदकल]], [[ऐहोले]], [[बादामी गुफा मंदिर|बादामी]] तथा तमिलनाडु में [[महाबलिपुरम के तट मन्दिर|महाबलिपुरम]] और [[कांचीपुरम]] के संरचनात्मक मंदिर, युद्धरत क्षेत्रीय शासकों की स्थायी विरासत हैं। 7वीं शताब्दी के मध्य तक, [[शैव]] और [[वैष्णव सम्प्रदाय|वैष्णव]] जैसे संप्रदायिक हिंदू भक्ति आंदोलनों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा और जनसमर्थन से [[बौद्ध धर्म]] और [[जैन धर्म]] का पतन होने लगा। हालांकि [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] दक्षिण भारत में सीखने और धर्मशास्त्र की भाषा थी, जैसा कि उत्तर में थी, [[भक्ति]] आंदोलनों के विकास ने द्रविड़ भाषाओं: [[कन्नड़ भाषा|कन्नड़]] और [[तमिल भाषा|तमिल]] में स्थानीय साहित्य को बढ़ावा दिया; इन्होंने अक्सर संस्कृत से विषय और शब्दावली प्रेरणा स्वरूप ली परंतु बहुत सी स्थानीय सांस्कृतिक जानकारी को संरक्षित रखा। [[तमिल साहित्य]] के उदाहरणों में दो प्रमुख कविताएँ शामिल हैं, [[शिलप्पदिकारम]] और [[मणिमेकलई]]; शैव और वैष्णव भक्ति साहित्य का संग्रह - हिंदू भक्ति आंदोलन; और 12वीं शताब्दी में कंबन द्वारा [[रामायण]] का पुनर्लेखन। दक्षिण एशिया के विभिन्न क्षेत्रों में न्यूनतम सामान्य विशेषताओं के साथ एक राष्ट्रव्यापी सांस्कृतिक संश्लेषण हो चुका था, परंतु सांस्कृतिक संचार और आत्मसात्करण की प्रक्रिया सदियों तक भारत के इतिहास को आकार देती और प्रभावित करती रही। ===संगम युग के राज्य=== {{मुख्य|संगमयुग||तमिलकम}} दक्षिण में तीन प्राचीन तमिल राज्य थे — [[चेर राजवंश|चेर]] (पश्चिम में), [[चोल राजवंश|चोल]] (पूर्व में), और [[पाण्ड्य राजवंश|पांड्य]] (दक्षिण में)। ये क्षेत्रीय प्रभुत्व के लिए आपसी संघर्ष में लिप्त थे। यूनानी और अशोक के स्रोतों में इन्हें मौर्य साम्राज्य के अलावा अन्य महत्वपूर्ण भारतीय राज्यों के रूप में उल्लेखित किया गया है। प्राचीन [[तमिल साहित्य]] का एक संग्रह, जिसे [[संगम साहित्य|संगम]] (अकादमी) कृतियों के नाम से जाना जाता है, 300 ईसा पूर्व से 200 ईस्वी तक के युग में इन राज्यों के जीवन के बारे में बहुत उपयोगी जानकारी प्रदान करता है। तमिल सामाजिक व्यवस्था विभिन्न पारिस्थितिक क्षेत्रों पर आधारित थी। समाज के वर्गों की विशेषताएँ [[मातृतंत्र|मातृसत्ता]] और मातृवंशीय उत्तराधिकार (जो 19वीं शताब्दी तक कायम रहा), चचेरे भाई-बहनों का आपसी विवाह और मजबूत क्षेत्रीय पहचान थीं। जैसे-जैसे लोग पशुपालन से कृषि की ओर बढ़े, जो नदियों, तालाब और कुओं पर आधारित सिंचाई के साथ फले-फुले, साथ ही रोम और दक्षिणपूर्व एशिया के साथ समुद्री व्यापार से जनजातीय सरदार "राजाओं" के रूप में उभरे। दक्षिण भारत के विभिन्न स्थलों से प्राप्त [[रोम गणतंत्र|रोमन]] स्वर्ण मुद्राओं से उसकी बाहरी दुनिया के साथ के व्यापक संबंधों को पुष्टि करती हैं। उत्तरपूर्व में [[पाटलिपुत्र]] और उत्तरपश्चिम में [[तक्षशिला]] (आधुनिक पाकिस्तान में) की तरह, [[मदुरई]] शहर, [[पांड्य साम्राज्य]] की राजधानी (आधुनिक तमिलनाडु में), बौद्धिक और साहित्यिक गतिविधियों का केंद्र था। कवि और भाट वहाँ राजकीय संरक्षण में एकत्र होते थे और क्रमिक सभाओं में कविताओं के संग्रह और तमिल व्याकरण पर प्रबंध रचते थे। पहली शताब्दी ईसा पूर्व के अंत तक, दक्षिण एशिया में व्यापार मार्गों का जाल बिछ चुका था, जिसने बौद्ध और जैन धर्म प्रचारको तथा अन्य यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाया और इस क्षेत्र को कई संस्कृतियों के संश्लेषण के लिए खोल दिया। === चेर राज्य === {{मुख्य|चेर राजवंश}} प्रागैतिहासिक काल से ही, [[केरल]] और [[तमिलनाडु]] चेर, [[चोल राजवंश|चोल]], [[पाण्ड्य राजवंश|पांड्य]] और [[पल्लव राजवंश|पल्लवों]] के चार तमिल-मलयालम राज्यों के घर थे। 300 ईसा पूर्व से 600 ईस्वी के बीच की सबसे पुरानी उपलब्ध साहित्यिक कृतियों में राजाओं और राजकुमारों के शौर्य और उनकी प्रशंसा करने वाले कवियों का उल्लेख मिलता है। चेर, जो [[मलयालम भाषा]] बोलते थे, [[कुट्टनाड]], [[मुज़िरिस]], [[करूर]] से शासन करते थे और पश्चिम एशियाई राज्यों के साथ व्यापक व्यापार करते थे। 4वीं से 7वीं शताब्दी के बीच [[कलाभ्र राजवंश|कलाभ्र]] नामक एक अज्ञात वंश ने आक्रमण कर तीनों [[तमिलकम|तमिल राज्यों]] को विस्थापित कर दिया। इसे [[तमिल]] इतिहास में अंधकार युग कहा जाता है। अंततः [[पल्लव राजवंश|पल्लवों]] और [[पाण्ड्य राजवंश|पांड्यों]] ने उन्हें खदेड़ दिया। === कलाभ्र === {{मुख्य|कलाभ्र राजवंश}} उनके उद्गम या शासनकाल के बारे में बहुत कम जानकारी है, सिवाय इसके कि वे तीसरी से 6ठी शताब्दी तक भारत के दक्षिणी छोर पर [[संगम काल|संगम युग]] के राज्यों को पराजित कर शासन करते थे। ऐसा प्रतीत होता है कि वे [[जैन धर्म|जैन]] और [[बौद्ध धर्म]] के संरक्षक थे, क्योंकि उनके बारे में जानकारी का एकमात्र स्रोत उस समय की बौद्ध और [[जैन साहित्य|जैन साहित्यिक]] कृतियों में यहां-वहां उल्लेख हैं। वे [[कदंब राजवंश|कदंब]] और [[पश्चिम गंग वंश|पश्चिमी गंग वंश]] के समकालीन थे। पल्लवों के उदय और पांड्य साम्राज्य के पुनरुत्थान से उनका पतन हो गया। === कदम्ब === {{मुख्य|कदम्ब राजवंश}} कदंब वंश (कन्नड़: ಕದಂಬರು) (345–525 ईस्वी) [[कर्नाटक]] का एक प्राचीन शाही परिवार था जो वर्तमान [[उत्तर कन्नड़ जिला|उत्तर कन्नड़]] जिले के [[बनवासी, कर्नाटक|बनवासी]] से शासन करते थे। यह वंश बाद में [[कन्नड़]] साम्राज्यों, [[चालुक्य राजवंश|चालुक्य]] और राष्ट्रकूट साम्राज्यों के सामंत के रूप में पाँच सौ वर्षों तक शासन करता रहे, इस दौरान उनकी शाखाएँ [[गोवा]] और [[हंगल]] तक फैल गईं। राजा काकुश्तवर्मा के शासनकाल में अपने शक्ति के चरम के दौरान, उन्होंने कर्नाटक के बड़े हिस्से पर शासन किया। कदंब के पूर्व युग में कर्नाटक पर शासन करने वाले वंश — [[मौर्य राजवंश|मौर्य]], [[सातवाहन]] और [[चुटु राजवंश|चुटु]] — इस क्षेत्र के मूल निवासी नहीं थे और शक्ति का केंद्र आधुनिक कर्नाटक से बाहर था। कदंब प्रशासनिक स्तर पर [[कन्नड़ भाषा]] का उपयोग करने वाले पहले स्वदेशी वंश थे। [[कर्नाटक का इतिहास|कर्नाटक के इतिहास]] में, यह युग एक व्यापक ऐतिहासिक आधार प्रदान करता है, जिसमें इस क्षेत्र के एक स्थायी भौगोलिक-राजनीतिक इकाई और [[कन्नड़ भाषा]] के एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय भाषा के विकास का अध्ययन किया जाता है। इस राजवंश की स्थापना [[मयूरशर्मा]] ने 345 में की थी, इस दौरान साम्राज्यिक विस्तार देखने को मिलता है, जिसका संकेत इसके शासकों द्वारा धारण किए गए उपाधियों से मिलता है। उनके उत्तराधिकारियों में से एक, [[काकुस्थवर्मा]] एक शक्तिशाली शासक था और यहाँ तक कि उत्तरी भारत के [[गुप्त राजवंश|गुप्त साम्राज्य]] के राजाओं ने भी उनके परिवार के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित किए, जो उनके राज्य की संप्रभु प्रकृति का स्पष्ट संकेत देता है। अंतहीन युद्धों और रक्तपात से थककर, बाद के वंशजों में से एक, राजा शिवकोटि ने जैन धर्म अपना लिया। कदंब तालकाड़ के [[पश्चिम गंग वंश|पश्चिमी गंग राजवंश]] के समकालीन थे और साथ मिलकर उन्होंने पूर्ण स्वायत्तता के साथ इस भूमि पर शासन करने वाले सबसे प्रारंभिक स्वदेशी राज्यों का गठन किया। === पश्चिमी गंग === {{मुख्य|पश्चिम गंग वंश}} पश्चिमी गंग वंश (350–1000 ईस्वी) ([[कन्नड़ भाषा|कन्नड़]]: ಪಶ್ಚಿಮ ಗಂಗ ಸಂಸ್ಥಾನ) भारत के प्राचीन [[कर्नाटक]] का एक महत्वपूर्ण शासक वंश था। उन्हें [[पूर्वी गंगवंश|पूर्वी गंग वंशो]] से अलग करने के लिए पश्चिमी गंग के नाम से जाना जाता है, जिन्होंने बाद की शताब्दियों में आधुनिक [[ओडिशा]] पर शासन किया। सामान्य मान्यता यह है कि, जब दक्षिण भारत के [[पल्लव वंश]] के कमजोर होने के कारण कई स्थानीय कबीलों ने अपनी स्वतंत्रता का दावा किया, तब पश्चिमी गंग वंश का उत्थान हुआ, इस भू-राजनीतिक घटना को कभी-कभी [[समुद्रगुप्त]] की दक्षिणी विजयों से भी जोड़ा जाता है। पश्चिमी गंग की संप्रभुता लगभग 350 से 550 ईस्वी तक रही, जिसमें उन्होंने शुरू में [[कोलार]] से शासन किया और बाद में अपनी राजधानी को आधुनिक [[मैसूर जिला|मैसूर जिले]] में [[कावेरी नदी]] के तट पर [[तालकाड़]] स्थानांतरित कर दिया। बादामी के साम्राज्यवादी [[चालुक्य राजवंश|चालुक्य वंश]] के उदय के बाद, गंगाओं ने चालुक्यों की अधीनता स्वीकार कर ली और कांचीपुरम के [[पल्लव राजवंश|पल्लवों]] के खिलाफ, चालुक्यों के लिए लड़ाई लड़ी। 753 ईस्वी में दक्कन में प्रमुख शक्ति के रूप में चालुक्यों का स्थान मान्यखेट के [[राष्ट्रकूट राजवंश|राष्ट्रकूटों]] ने ले लिया। स्वायत्तता के लिए एक सदी के संघर्ष के बाद, पश्चिमी गंगाओं ने अंततः राष्ट्रकूटों की अधीनता स्वीकार कर ली और तंजावुर के [[चोल राजवंश|चोल वंश]] के खिलाफ उनके साथ मिलकर सफलतापूर्वक लड़ाई लड़ी। 10वीं शताब्दी के अंत में, [[तुंगभद्रा नदी]] के उत्तर में, राष्ट्रकूटों का स्थान उभरते [[पश्चिमी चालुक्य साम्राज्य]] ने ले लिया और कावेरी के दक्षिण में चोलो का पुनरुत्थान हुआ। 1000 ईस्वी के आसपास चोलों द्वारा पश्चिमी गंगाओं की हार के परिणामस्वरूप इस क्षेत्र पर गंग वंश के प्रभाव का अंत हो गया। हालांकि क्षेत्रफल में एक छोटा सा राज्य होने के बावजूद, पश्चिमी गंगाओं का आधुनिक दक्षिण कर्नाटक क्षेत्र की राजनीति, संस्कृति और साहित्य में योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है। पश्चिमी गंगा राजाओं ने सभी धर्मों के प्रति उदार सहिष्णुता दिखाई, लेकिन वे जैन धर्म के संरक्षण के लिए सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं, जिसके परिणामस्वरूप [[श्रवणबेलगोला]] और [[पंचकुटा बसदी - कंबदाहल्ली|कंबदाहल्ली]] जैसे स्थानों पर स्मारकों का निर्माण हुआ। इस वंश के राजाओं ने ललित कलाओं को प्रोत्साहित किया, जिसके कारण [[कन्नड़ साहित्य|कन्नड़]] और [[संस्कृत साहित्य]] फला-फूला। [[चवुंडाराया]] द्वारा 978 ईस्वी में लिखित 'चावुंडराय पुराण' कन्नड़ गद्य में एक महत्वपूर्ण कृति है। धार्मिक विषयों से लेकर हाथी प्रबंधन तक के विषयों पर कई लेख लिखे गए। === बादामी चालुक्य === {{मुख्य|चालुक्य राजवंश}} {{इन्हें भी देखें|चाल्लुक्य कला|पट्टदकल्लु|बादामी गुफा मंदिर|ऐहोले का दुर्गा मंदिर|महाकूट मन्दिर समूह}} [[चालुक्य साम्राज्य]], जो कर्नाटक के [[ऐहोले]] और [[बादामी, कर्नाटक|बादामी क्षेत्र]] के मूल निवासी थे, शुरू में [[कदम्ब राजवंश|कदम्बों]] के सामंत थे।{{sfn|Kamath|1980|pp=[https://archive.org/details/a-concise-history-of-karnataka-from-pre-historic-times-to-the-present/page/62/mode/2up 62–63]}}{{sfn|Keay|2000|p=168}} [[पुलकेशिन प्रथम]] के पूर्वज जयसिंह और रणराग ने कदंबों के अधीन बादामी प्रांत में प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्य किया।<ref>Moraes (1931). p. 51</ref>{{sfn|Thapar|2003|p=328}}{{sfn|Sen|1999|loc=p. 360: "वे कर्नाटक देश के थे और उनकी मातृभाषा कन्नड़ थी."}}{{sfn|Kamath|1980|p=58}} उन्होंने अपने प्रशासन में संस्कृत भाषा के अलावा कन्नड़ के उपयोग को भी प्रोत्साहित किया। छठी शताब्दी के मध्य में चालुक्यों ने अपनी पहचान बनाई जब पुलकेशिन प्रथम ने बादामी में पहाड़ी किले को अपनी शक्ति का केंद्र बनाया।{{sfn|Sen|1999|p=360}} [[पुलकेशिन द्वितीय]] के शासनकाल के दौरान दक्षिण भारतीय साम्राज्य ने पहली बार [[ताप्ती नदी]] और [[नर्मदा नदी]] के पार उत्तर की ओर अभियान भेजे और उत्तरी भारत (उत्तरपथेश्वर) के राजा हर्षवर्धन को सफलतापूर्वक चुनौती दी। पुलकेशिन द्वितीय का ऐहोले शिलालेख, जो 634 ईस्वी में शास्त्रीय संस्कृत भाषा और पुरानी कन्नड़ लिपि में लिखा गया है,{{efn|इस रचना में कवि स्वयं को भारवि और कालिदास जैसे संस्कृत विद्वानों के समकक्ष मानता है.{{sfn|Sastri|1958|p=312}} }}{{sfn|Kamath|1980|p=59}} कदंबों, पश्चिमी गंगाओं, दक्षिण कनारा के [[अलूपा राजवंश|अलुपाओं]], [[कोंकण के मौर्य|पुरी के मौर्यों]], [[कोशल|कोसल राज्य]], [[मालवा]], [[लाट]] और दक्षिणी राजस्थान के [[गुर्जर-प्रतिहार राजवंश|गुर्जरों]] के खिलाफ उनकी विजयों की घोषणा करता है। शिलालेख में वर्णित है कि कैसे कन्नौज के [[हर्षवर्धन|राजा हर्ष]] ने पुलकेशिन द्वितीय के खिलाफ युद्ध में अपने बड़ी संख्या में युद्ध हाथियों को मरते देखकर अपना हर्ष (आनंदमय स्वभाव) खो दिया।{{sfn|Keay|2000|p=169}}{{sfn|Sen|1999|pp=361–362}}{{sfn|Kamath|1980|pp=59–60}}{{efn|इनमें से कुछ राज्यों ने कन्नौज के राजा हर्षवर्धन के भय से आत्मसमर्पण कर दिया होगा।{{sfn|Kamath|1980|loc=p. 59, citing Majumdar}} कोसल के शासक दक्षिण कोसल के पाण्डुवंशी थे।{{sfn|Kamath|1980|loc=p. 59, citing Sircar}} }} [[File:Relief of seated Vishnu at the Badami cave temple no.3.jpg|thumb|right|200px|[[बादामी गुफा मंदिर]] क्र.3 (विष्णु)]] इन विजयों ने उन्हें 'दक्षिणापथ पृथ्वीस्वामी' (दक्षिण के स्वामी) की उपाधि दिलाई। पुलकेशिन द्वितीय ने पूर्व में अपनी विजय यात्रा जारी रखी, जहाँ उन्होंने अपने रास्ते में आने वाले सभी राज्यों को जीत लिया और वर्तमान ओडिशा में [[बंगाल की खाड़ी]] तक पहुँच गए। गुजरात और वेंगी (तटीय आंध्र) में चालुक्य उपशासन स्थापित किया गया और बादामी परिवार के राजकुमारों को वहाँ शासन करने के लिए भेजा गया। कांचीपुरम के [[पल्लव राजवंश|पल्लवों]] को अधीन करने के बाद, उसने मदुरै के पांड्यों, चोल वंश और केरल क्षेत्र के चेरों से कर वसूली स्वीकार की। इस प्रकार पुलकेशिन द्वितीय [[नर्मदा नदी]] के दक्षिण में एकक्षत्र शासक बन गया। पुलकेशिन द्वितीय को भारतीय इतिहास के महान राजाओं में से एक माना जाता है।{{sfn|Kamath|1980|p=58}}<ref name="great1">Ramesh 1984, p76</ref> एक चीनी यात्री [[ह्वेन त्सांग]] ने इस समय पुलकेशिन द्वितीय के दरबार का दौरा किया और फारसी सम्राट खोसरो द्वितीय ने राजदूतों का आदान-प्रदान किया।{{efn|अरब यात्री तबारी के नोट्स से.{{sfn|Kamath|1980|p=60}} }} हालाँकि, पल्लवों के साथ लगातार युद्धों ने 642 में एक बदतर मोड़ ले लिया जब पल्लव राजा [[नरसिंहवर्मन १|नरसिंहवर्मन प्रथम]] ने अपने पिता की हार का बदला लेते हुए,<ref name="vincent">{{cite book|last = Smith|first= Vincent Arthur|title= The Early History of India|url = https://archive.org/details/earlyhistoryind00smitgoog|year=1904|publisher= The Clarendon press|pages = [https://archive.org/details/earlyhistoryind00smitgoog/page/n372 325]–327}}</ref> [[बादामी, कर्नाटक|पुलकेशिन द्वितीय की राजधानी]] पर विजय प्राप्त की और उसे लूट लिया, जो संभवतः युद्ध में मारा गया था।<ref name="vincent" />{{sfn|Sen|1999|p=362}} एक शताब्दी बाद, चालुक्य [[विक्रमादित्य द्वितीय]] ने विजयी होकर पल्लवों की राजधानी कांचीपुरम में प्रवेश किया और तीन बार उस पर कब्जा किया, तीसरी बार अपने पुत्र और युवराज [[कीर्तिवर्मन् द्वितीय (चालुक्य)|कीर्तिवर्मन द्वितीय]] के नेतृत्व में। इस प्रकार उसने पल्लवों द्वारा चालुक्यों को पहले हुए अपमान का बदला लिया और [[कैलाशनाथ मंदिर, कांचीपुरम|कैलासनाथ मंदिर]] में विजय स्तंभ पर एक कन्नड़ शिलालेख उत्कीर्ण किया।{{sfn|Thapar|2003|pp=331, 345}}{{sfn|Sastri|1958|p=140}}<ref name="kanchi2">Ramesh (1984), pp159–160</ref>{{sfn|Sen|1999|p=364}} उसने बाद में तमिल देश के अन्य पारंपरिक राज्यों, पांड्यों, चोलों और केरल को जीत लिया, साथ ही एक [[कलाभ्र राजवंश|कलाभ्र शासक]] को भी अधीन कर लिया।<ref name="kanchi4">Ramesh (1984), p159</ref> इस काल (700) का त्रिपदी (तीन पंक्ति) में लिखा गया [[कप्पे अरभट्ट]] अभिलेख, कन्नड़ काव्यशास्त्र का सबसे प्राचीन उपलब्ध अभिलेख माना जाता है। चालुक्य वंश की सबसे स्थायी विरासत वास्तु और कला है जो वो पीछे छोड़ कर गये।<ref name="legacy">Hardy (1995). p65–66</ref> 450 से 700 के बीच निर्मित उनसे जुड़े एक सौ पचास से अधिक स्मारक कर्नाटक के [[मलप्रभा नदी|मलप्रभा]] बेसिन में बचे हैं, केवल ऐहोले में 125 से अधिक मंदिर मौजूद हैं।<ref>{{cite web |title=Index |website=Monuments of India|url=http://www.art-and-archaeology.com/india/india.html|first=Michael D. |last=Gunther |date=2002|access-date=2006-11-10|archive-date=8 May 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210508172924/http://art-and-archaeology.com/india/india.html|url-status=live}}</ref> ये निर्माण कार्य चालुक्य साम्राज्य के केन्द्र में अपेक्षाकृत छोटे क्षेत्र में केन्द्रित हैं। [[पट्टदकल्लु]] में संरचनात्मक मंदिर, जो एक [[विश्व धरोहर|यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल]] है, [[बादामी गुफा मंदिर|बादामी]] की गुफा मंदिरें, [[महाकूट मन्दिर समूह|महाकूट]] के मंदिर और [[ऐहोले]] में मंदिर निर्माण के प्रारंभिक प्रयोग उनके सबसे प्रसिद्ध स्मारक हैं।<ref name="legacy"/> [[अजंता गुफाएँ|अजंता]] की गुफा संख्या-1 की प्रसिद्ध चित्र, "द टेंपटेशन ऑफ द बुद्धा" और "द पर्शियन एम्बेसी" को भी उन्हीं कि देन मानी जाती हैं। इसके अलावा, उन्होंने गुजरात और [[वेंगी]] जैसे सुदूर के स्थानों की वास्तुकला को भी प्रभावित किया, जैसा कि आलमपुर के [[आलमपुर नवब्रह्मा मंदिर|नव ब्रह्म मंदिरों]] को देखा जा सकता है।{{sfn|Kamath|1980|p=[https://archive.org/details/a-concise-history-of-karnataka-from-pre-historic-times-to-the-present/page/74/mode/2up 74]}} === पल्लव === {{मुख्य|पल्लव राजवंश}} 7वीं शताब्दी में तमिलनाडु में [[महेन्द्रवर्मन प्रथम]] और उनके पुत्र मामल्ल [[नरसिंहवर्मन १|नरसिंहवर्मन प्रथम]] के अधीन पल्लवों का उदय हुआ। पल्लव दूसरी शताब्दी से पहले तक एक छोटे रजवाड़ो की तरह थे।{{sfn|Sastri|1958|pp=91–92}} विद्वानों द्वारा यह व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है कि वे मूल रूप से [[सातवाहन साम्राज्य]] के अधीन कार्यकारी सामन्त थे।<ref>Durga Prasad, ''History of the Andhras up to 1565 A. D''., pp 68</ref> सातवाहनों के पतन के बाद, उन्होंने आंध्र और तमिल देश के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण प्राप्त करना शुरू कर दिया। बाद में उनका [[विष्णुकुंडिना वंश|विष्णुकुंडिना]] के साथ वैवाहिक संबंध हो गया, जो [[दक्कन का पठार|दक्कन]] पर शासन करते थे। लगभग 550 ईस्वी में राजा [[सिंहविष्णु]] के अधीन पल्लव प्रमुखता में उभरे। उन्होंने चोलों को अधीन कर लिया और [[कावेरी नदी]] तक दक्षिण में शासन किया। पल्लवों ने [[कांचीपुरम]] को अपनी राजधानी बनाकर दक्षिण भारत के एक बड़े हिस्से पर शासन किया। पल्लव शासन के दौरान [[द्रविड़ वास्तुकला]] अपने चरम पर पहुँच गई। [[नरसिंहवर्मन द्वितीय]] ने [[महाबलिपुरम के तट मन्दिर|तट मन्दिर]] का निर्माण करवाया, जो [[यूनेस्को]] की [[विश्व धरोहर स्थल]] है। कई स्रोत [[बोधिधर्म]], जो चीन में [[बौद्ध धर्म]] की [[झेन]] शाखा के संस्थापक थे, को पल्लव वंश का राजकुमार बताते हैं।<ref>Kamil V. Zvelebil (1987). "The Sound of the One Hand", ''Journal of the American Oriental Society'', Vol. 107, No. 1, pp. 125–126.</ref> === पूर्वी चालुक्य === {{मुख्य|पूर्वी चालुक्य}} पूर्वी चालुक्य एक दक्षिण भारतीय वंश था जिसका राज्य वर्तमान आंध्र प्रदेश में स्थित था। उनकी राजधानी [[वेंगी]] थी और उनका वंश 7वीं शताब्दी से लगभग 1130 ईस्वी तक 500 वर्षों तक चला, अन्तत: वेंगी राज्य [[चोल साम्राज्य]] में विलीन हो गया। वेंगी राज्य पर चोल साम्राज्य के संरक्षण में पूर्वी चालुक्य राजाओं का शासन 1189 ई. तक जारी रहा, उसके बाद राज्य [[होयसल राजवंश|होयसलों]] और [[देवगिरि के यादव|यादवों]] के अधीन चला गया। उनकी राजधानी मूल रूप से वेंगी (अब पेदवेगी, चिनवेगी और डेंडुलुरु) में थी, जो पश्चिम गोदावरी जिले के [[एलुरु]] के पास है, बाद में इसे राजमहेंद्रवरम ([[राजमंड्री]]) स्थानांतरित कर दिया गया। पूर्वी चालुक्यों के वातापी (बादामी) के [[चालुक्य राजवंश|चालुक्यों]] से निकटता के संबंधित थे। अपने इतिहास में वे अधिक शक्तिशाली चोल और पश्चिमी चालुक्यों के बीच रणनीतिक वेंगी देश पर नियंत्रण को लेकर कई युद्धों का कारण बने। वेंगी पर पूर्वी चालुक्य शासन के पाँच शताब्दियों ने न केवल इस क्षेत्र को एक एकीकृत इकाई में मजबूत किया, बल्कि उनके शासन के उत्तरार्ध में तेलुगु संस्कृति, साहित्य, कविता और कला का भी विकास हुआ। इसे [[आन्ध्र प्रदेश|आंध्र]] इतिहास का स्वर्ण युग कहा जा सकता है।<ref>The Emergence of Andhra Pradesh, By K. V. Narayana Rao · 1973, P. ४-५ </ref> === पांड्य === {{मुख्य|पांड्य राजवंश}} 8वीं शताब्दी में पल्लवों का स्थान पांड्यों ने ले लिया। उनकी राजधानी [[मदुरई]] समुद्र तट से दूर दक्षिण में थी। उनके पास दक्षिण-पूर्व एशियाई समुद्री साम्राज्य [[श्रीविजय राजवंश|श्रीविजय]] और उनके उत्तराधिकारियों के साथ व्यापक व्यापारिक संबंध थे। साथ ही, रोमन साम्राज्य तक राजनयिक संपर्क भी थे। 13वीं शताब्दी में मार्को पोलो ने इसे अस्तित्व में सबसे धनी साम्राज्य बताया। [[मदुरई]] में [[मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मन्दिर|मीनाक्षी अम्मन मंदिर]] और [[तिरुनेलवेली]] में [[नैलायप्पर मंदिर]] पांड्य मंदिर वास्तुकला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।<ref>'Advanced History of India', K.A. Nilakanta Sastri (1970)p. 181–182, Allied Publishers Pvt. Ltd., New Delhi</ref> पांड्य व्यापार के साथ-साथ साहित्य में भी उत्कृष्ट थे और उन्होंने श्रीलंका और भारत के बीच दक्षिण भारतीय तट पर मोती मत्स्य पालन को नियंत्रित किया, जो प्राचीन विश्व में कुछ बेहतरीन मोतियों का उत्पादन करता था।<ref>{{cite book|last = Hornell|first = RJames |date = 1905|title = Report of the Government of Madras on the Indian Pearl Fisheries in the Gulf of Mannar|url = https://archive.org/details/reportofgovernme00horn|page = ३-४}}</ref> === राष्ट्रकूट === {{मुख्य|राष्ट्रकूट साम्राज्य}} [[File:Indian Rashtrakuta Empire map.svg|thumb|right|200px|800 - 915 ई. में [[राष्ट्रकूट साम्राज्य]]।]] [[File:Kailasha temple at ellora.JPG|thumb|right|200px|[[एलोरा गुफाएं|एलोरा गुफा]] में स्थित [[कैलाश मन्दिर, एलोरा|कैलाश मन्दिर]]]] 8वीं शताब्दी के मध्य में चालुक्य शासन का अंत उनके सामंत [[बरार सल्तनत|बरार]] (वर्तमान महाराष्ट्र के [[अमरावती जिला|अमरावती जिले]]) के राष्ट्रकूट परिवार के शासकों ने कर दिया। चालुक्य शासन के कमजोर दौर का फायदा उठाते हुए, दंतिदुर्ग ने चालुक्यों की महान "कर्नाटबल" (कर्नाट की शक्ति) को पराजित किया।{{efn|राष्ट्रकूट शिलालेखों से।{{sfn|Kamath|1980|pp=57, 64}}{{ubl|समनगढ़ ताम्रपत्र अनुदान (753) पुष्टि करता है कि सामंत दंतिदुर्ग ने चालुक्यों को हराया और उनकी महान "कर्नाटक" सेना (बादामी चालुक्यों की सेना का संदर्भ) को पराजित किया।{{r|Reu|p=54}}}}}} चालुक्यों को उखाड़ फेंकने के बाद, राष्ट्रकूटों ने [[मान्यखेट]] (आधुनिक [[गुलबर्ग जिला|गुलबर्ग जिले]] का मालखेड) को अपनी राजधानी बनाया।{{efn|कर्दा प्लेट्स से: "एक ऐसी राजधानी जो देवताओं की राजधानी को भी शर्मिंदा कर सकती है"<ref>Altekar (1934). p. 47</ref>{{ubl| "इंद्र की राजधानी से भी बेहतर बनाया गया एक राजधानी शहर"{{sfn|Sastri|1958|pp=4, 132, 146}} }} }} हालांकि मध्य भारत और दक्कन में 6वीं और 7वीं शताब्दी में राष्ट्रकूट शासक परिवारों की उत्पत्ति विवादास्पद है, लेकिन 8वीं से 10वीं शताब्दी तक उन्होंने अपने प्रशासन में संस्कृत के साथ-साथ कन्नड़ भाषा के महत्व पर जोर दिया। राष्ट्रकूटों के शिलालेख केवल कन्नड़ और संस्कृत में हैं।{{efn|यहां तक ​​कि साम्राज्य के राजपरिवार भी काव्य और साहित्यिक गतिविधियों में भाग लेते थे.{{sfn|Thapar|1990|p=334}} उन्होंने दोनों भाषाओं में साहित्य को प्रोत्साहित किया और इस तरह उनके शासन में साहित्य फला-फूला।{{sfn|Kamath|1980|pp=73, 88–89}} }}<ref>Altekar (1934). pp. 411–413</ref><ref name="patron"/>{{sfn|Sen|1999|p=93}}{{sfn|Kamath|1980|p=114}}{{r|Reu|pp=37–38}} राष्ट्रकूट जल्द ही दक्कन का सबसे शक्तिशाली साम्राज्य बन गए, जिन्होंने [[ध्रुव धारवर्ष]] के शासनकाल में गंगा और यमुना नदियों के [[दोआब|दोआब क्षेत्र]] में अपने प्रारंभिक सफल अभियान चलाए। उनकी जीत एक "दिग्विजय" थी, जिससे उस क्षेत्र में केवल प्रसिद्धि और लूट प्राप्त हुई।{{sfn|Kamath|1980|loc=p. 75, citing Altekar}} उनके पुत्र [[गोविंदा तृतीय|गोविंद तृतीय]] का शासन एक नए युग का संकेत था, जिसमें राष्ट्रकूटों ने बंगाल के [[पाल वंश]] और उत्तर-पश्चिमी भारत के [[गुर्जर-प्रतिहार राजवंश|गुर्जर-प्रतिहारों]] के खिलाफ जीत हासिल कर [[कन्नौज]] पर कब्जा कर लिया। राष्ट्रकूटों ने समृद्ध [[सिन्धु-गंगा का मैदान|गंगा के मैदानों]] के संसाधनों के लिए [[त्रिपक्षीय संघर्ष]] के दौरान कन्नौज को कुछ समय के लिए अपने कब्जे में रखा। गोविंद तृतीय की जीत के कारण, इतिहासकारों ने उनकी तुलना [[सिकंदर|सिकंदर महान]] और हिंदू महाकाव्य [[महाभारत]] के [[पांडव]] [[अर्जुन]] से की है।{{sfn|Keay|2000|p=199}} संजन शिलालेख में कहा गया है कि गोविंद तृतीय के घोड़ों ने हिमालय की धाराओं का बर्फीला पानी पिया और उनके युद्ध हाथियों ने गंगा नदी के [[पवित्र जल]] का स्वाद चखा।{{sfn|Kamath|1980|p=76}} [[अमोघवर्ष नृपतुंग|अमोघवर्ष प्रथम]], जिन्हें समकालीन अरब यात्री सुलेमान ने दुनिया के चार महान सम्राटों में से एक के रूप में प्रशंसित किया, गोविंद तृतीय के बाद सिंहासन पर बैठे और एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक युग में शासन किया, जिसमें कन्नड़ और संस्कृत में महत्वपूर्ण रचनाएँ हुईं।{{r|Reu|p=38}} }}{{sfn|Kamath|1980|p=90}} जैन धर्म का उदार विकास उनके शासन की एक विशेषता थी। उनके धार्मिक स्वभाव, कला और साहित्य में रुचि और शांतिप्रिय प्रकृति के कारण, उनकी तुलना [[अशोक|सम्राट अशोक]] से की गई है।{{sfn|Kamath|1980|p=80}} 10वीं शताब्दी में [[इन्द्र ३|इंद्र तृतीय]] के शासन ने राष्ट्रकूटों की साम्राज्यिक शक्ति को बढ़ाया, जब उन्होंने कन्नौज को फिर से जीत लिया।{{sfn|Kamath|1980|loc=p. 81}} [[कृष्ण तृतीय]] 939 में इंद्र तृतीय के बाद सिंहासन पर बैठे। कन्नड़ साहित्य के संरक्षक और एक शक्तिशाली योद्धा, उनके शासनकाल में उत्तर में [[उज्जैन]] के [[परमार वंश|परमार]] और दक्षिण में [[चोल राजवंश|चोलों]] की अधीनता देखी गई। एक अरबी लेख सिलसिलतुत्तवारीख (851) ने राष्ट्रकूटों को दुनिया के चार प्रमुख साम्राज्यों में से एक कहा। ''किताब-उल-मसालिक-उल-मुमालिक'' (912) ने उन्हें "भारत के सबसे महान राजा" कहा और उनकी प्रशंसा में कई अन्य समकालीन पुस्तकें लिखी गईं।<ref name="hara">''Murujul Zahab'' by Al Masudi (944), ''Kitabul Akalim'' by Al Istakhri (951), ''Ashkal-ul-Bilad'' by Ibn Haukal (976)</ref>{{r|Reu|pp=41–42}} राष्ट्रकूट साम्राज्य अपने चरम पर दक्षिण में केप कोमोरिन ([[कन्याकुमारी]]) से उत्तर में कन्नौज तक और पूर्व में [[बनारस]] से पश्चिम में [[भरूच]] तक फैला हुआ था।<ref name="Himalayas">संजन शिलालेख से, {{cite web |title=राष्ट्रकूट''(The Rashrakutas)''|url=http://www.kamat.com/kalranga/deccan/rashtrakutas/ |author=ज्योत्सना कामत|publisher=1996–2006 कामत की पोटपुरी|access-date=2006-12-20|archive-date=6 April 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200406134533/http://www.kamat.com/kalranga/deccan/rashtrakutas/|url-status=live}}</ref> जबकि राष्ट्रकूटों ने दक्कन में कई उत्कृष्ट स्मारक बनाए, उनका सबसे व्यापक और भव्य कार्य [[एलोरा गुफाएं|एलोरा]] में एकाश्म कैलाशनाथ मंदिर है, जो एक शानदार उपलब्धि है। कर्नाटक में उनके सबसे प्रसिद्ध मंदिर [[पट्टदकल्लु]] में काशीविश्वनाथ मंदिर और जैन नारायण मंदिर हैं। ये सभी स्मारक [[यूनेस्को]] [[विश्व धरोहर|विश्व धरोहर स्थलों]] में शामिल हैं।<ref name="karnataka_whs">{{cite web|title=Reclaiming past glory |url=http://www.archive.deccanherald.com/deccanherald/feb272007/spectrum1437452007226.asp |author=Vijapur, Raju S. |publisher=Spectrum |work=डेक्कन हेराल्ड |access-date=2007-02-27 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20111007194411/http://archive.deccanherald.com/deccanherald/feb272007/spectrum1437452007226.asp |archive-date=7 October 2011 }}</ref> === पश्चिमी चालुक्य === {{मुख्य|पश्चिमी चालुक्य साम्राज्य}} 10वीं शताब्दी के अंत में, पश्चिमी चालुक्य, जिन्हें कल्याणी चालुक्य या 'प्रतीच्य' चालुक्य भी कहा जाता है, [[राष्ट्रकूट राजवंश|राष्ट्रकूटों]] को उखाड़कर सत्ता में आए, जिनके वे कभी सामंत हुआ करते थे। शुरुआत में मान्यखेट उनकी राजधानी थी, बाद में उन्होंने इसे कल्याणी (आधुनिक [[बसवकल्याण]]) स्थानांतरित कर दिया। इस साम्राज्य के राजा अपने नाम के समान, [[बादामी चालुक्य|बादामी चालुक्यों]] के ही वंशज थे,{{sfn|Kamath|1980|loc=p. 100, citing: Fleet, Bhandarkar and Altekar and Gopal, B. R.}} यह अभी भी बहस का विषय है। पश्चिमी चालुक्यों की उत्पत्ति जो भी हो, कन्नड़ उनकी प्रशासनिक भाषा बनी रही और उनके समय की कन्नड़ तथा संस्कृत साहित्य समृद्ध था।{{sfn|Sastri|1958|pp=356–358}}<ref name="patron">Narasimhacharya (1988). pp. 68, 17–21</ref>{{sfn|Sen|1999|p=93}}{{sfn|Kamath|1980|p=114}} 12वीं शताब्दी से पहले किसी भी अन्य राजा की तुलना में चालुक्य राजा [[विक्रमादित्य ६]] को अधिक कन्नड़ शिलालेखों का श्रेय दिया जाता है।<ref>{{cite web|title=Chalukyas of Kalyana |url= http://www.kamat.com/kalranga/deccan/deckings.htm|author=Kamat, Jyotsna|publisher=1996–2006 Kamat's Potpourri|access-date=2006-12-24|archive-date=8 March 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20130308045748/http://www.kamat.com/kalranga/deccan/deckings.htm|url-status=live}}</ref> [[तैलप २|तैलप द्वितीय]], जो तारदवाडी (आधुनिक [[बीजापुर जिला, कर्नाटक|बीजापुर जिला]]) के एक सामंत शासक थे, ने [[कर्क २|कर्क द्वितीय]] के शासनकाल में राष्ट्रकूटों को हराकर चालुक्य शासन को पुनर्स्थापित किया। उन्होंने 973 में मध्य भारत के [[परमार वंश|परमारों]] द्वारा राष्ट्रकूटों की राजधानी पर आक्रमण के कारण उत्पन्न अव्यवस्था का लाभ उठाकर विद्रोह किया।{{sfn|Kamath|1980|loc=p. 101: From the 957 and 965 records}}{{sfn|Sastri|1958|p=162}} तैलप द्वितीय को इस अभियान में हनगल के [[कदंब राजवंश|कदंबों]] ने सहायता प्रदान की।<ref>Moraes (1931). pp. 93–94</ref> इस युग में [[तमिलकम]] के [[चोल वंश]] के साथ वेंगी में [[गोदावरी नदी]]-[[कृष्णा नदी]] दोआब क्षेत्र के संसाधनों पर नियंत्रण के लिए लंबे समय तक युद्ध हुए। चालुक्य वंश के एक वीर राजा [[सोमेश्वर प्रथम]] ने [[तुंगभद्रा नदी]] क्षेत्र के दक्षिण में चोल साम्राज्य के विस्तार को सफलतापूर्वक रोका, हालांकि कुछ हार का सामना करने के बावजूद{{sfn|Kamath|1980|loc=p. 103, citing Ganguli}}{{sfn|Sastri|1958|pp=167–168}} उन्होंने [[कोकण]], [[गुजरात]], [[मालवा]] और [[कलिंग]] क्षेत्रों में अपने सामंतों पर नियंत्रण बनाए रखा।{{sfn|Sen|1999|p=104}} लगभग 100 वर्षों तक, 11वीं शताब्दी के आरंभ से, चोलों ने दक्षिण कर्नाटक क्षेत्र (गंगावाडी) के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया।{{sfn|Sastri|1958|pp=164, 174}} चोलों ने गंगावाडी पर 1004 से 1114 तक अधिकार किया।{{sfn|Sen|1999|p=118}} [[File:Ornate pillars in the Saraswati temple at Gadag.jpg|thumb|right|200px|गदग शैली के स्तंभ, [[पश्चिमी चालुक्य वास्तुशैली|पश्चिमी चालुक्य वास्तुकला]].]] 1076 ईस्वी में, चालुक्य वंश के सबसे प्रसिद्ध राजा [[विक्रमादित्य ६|विक्रमादित्य ६]] के उदय ने शक्ति संतुलन को चालुक्यों के पक्ष में बदल दिया। उनका पचास वर्ष का शासनकाल कर्नाटक के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अवधि थी और इसे "चालुक्य विक्रम युग" कहा जाता है।{{sfn|Thapar|2003|pp=468–469}} 11वीं शताब्दी के अंत और 12वीं शताब्दी के आरंभ में चोलों पर उनकी जीत ने वेंगी क्षेत्र में चोल प्रभाव को स्थायी रूप से समाप्त कर दिया। चालुक्यों के अधीन दक्कन की कुछ प्रसिद्ध समकालीन सामंत परिवारों में [[होयसल राजवंश|होयसल]], [[देवगिरि के यादव|देवगिरि के सेउना यादव]], [[काकतीय वंश]] और दक्षिणी कलचुरी शामिल थे। अपने चरम पर, पश्चिमी चालुक्यों ने उत्तर में [[नर्मदा नदी]] से लेकर दक्षिण में [[कावेरी नदी]] तक एक विशाल साम्राज्य पर शासन किया। विक्रमादित्य ६ को भारतीय इतिहास के सबसे प्रभावशाली राजाओं में से एक माना जाता है। कवि [[बिल्हण]] ने अपने संस्कृत ग्रंथ में उनके शासन को "राम राज्य" कहा; कवि [[विज्ञानेश्वर]] ने उन्हें "अनुपम राजा" कहा।{{sfn|Sen|1999|p=106}}{{sfn|Sastri|1958|p=6}} इन चालुक्यों द्वारा महत्वपूर्ण स्थापत्य कार्य किए गए, विशेष रूप से तुंगभद्रा नदी घाटी में, जो प्रारंभिक बादामी चालुक्यों और बाद के होयसलों की निर्माण शैली के बीच एक वैचारिक कड़ी के रूप में कार्य करते थे।{{sfn|Kamath|1980|loc=p. 115: quoting Sastri (1955), pp. 427–428: "उनकी कृतियों को भारतीय कला परंपरा में गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त है."}}{{sfn|Sastri|1958|pp=427–428}}{{sfn|Foekema|1996|loc=p. 14: "कर्नाटक के उत्तर में स्थित कल्याण शहर में अब कुछ भी नहीं बचा है, लेकिन 11वीं शताब्दी के दौरान मध्य कर्नाटक में मंदिर निर्माण में हुए शानदार पुनरुद्धार से चालुक्य शासन के दौरान कल्याण की समृद्धि का पता चलता है।"}} 1126 में विक्रमादित्य ६ की मृत्यु के बाद के दशकों में चालुक्यों के कमजोर होने के साथ, उनके सामंत स्वतंत्रत हो चले। कर्नाटक के [[कलचुरि राजवंश|कलचुरी]], जिनके पूर्वज मध्य भारत से दक्षिणी दक्कन में आकर बसे थे, ने मंगलावाडा (आधुनिक महाराष्ट्र में मंगलवेढे) से एक सामंत के रूप में शासन किया था।{{sfn|Sen|1999|p=107}} इस वंश के सबसे शक्तिशाली शासक [[बिज्जल द्वितीय]], चालुक्य विक्रमादित्य ६ के शासनकाल में एक सेनापति (महामंडलेश्वर) थे।{{sfn|Kamath|1980|loc=p. [https://archive.org/details/a-concise-history-of-karnataka-from-pre-historic-times-to-the-present/page/114/mode/2up 114] (From the 1142 and 1147 records)}} चालुक्यों की घटती शक्ति के एक अनुकूल अवसर का लाभ उठाते हुए, बिज्जल द्वितीय ने 1157 में स्वतंत्रता की घोषणा की और उनकी राजधानी कल्याणी पर अधिकार कर लिया।{{sfn|Sen|1999|loc=p. 108: From the Chikkalagi records}} 1167 में बिज्जल द्वितीय की हत्या और उसके बाद उनके पुत्रों के बीच सिंहासन को लेकर हुए गृहयुद्ध ने इस वंश का अंत कर दिया, क्योंकि चालुक्यों के अंतिम वंशज ने [[बसवकल्याण|कल्याणी]] पर पुनः नियंत्रण स्थापित कर लिया। हालांकि, यह जीत अल्पकालिक थी, क्योंकि चालुक्यों को अंततः सेउना यादवों ने खदेड़ दिया।{{sfn|Sen|1999|p=109}} === यादव === {{मुख्य|देवगिरि के यादव}} सेवना, सेवुना या यादव वंश ([[मराठी भाषा|मराठी]]: देवगिरीचे यादव, [[कन्नड़ भाषा|कन्नड़]]: ಸೇವುಣರು) (लगभग 850–1334 ईस्वी) एक भारतीय वंश था, जिसने अपने चरम पर [[तुंगभद्रा नदी|तुंगभद्रा]] से [[नर्मदा नदी|नर्मदा नदियों]] तक फैले एक राज्य पर शासन किया, जिसमें वर्तमान [[महाराष्ट्र]], [[उत्तर कर्नाटक]] और [[मध्य प्रदेश]] के कुछ हिस्से शामिल थे, और इसकी राजधानी देवगिरी (वर्तमान [[दौलताबाद|दौलताबाद, महाराष्ट्र]]) में थी। यादवों ने शुरू में [[पश्चिमी चालुक्य|पश्चिमी चालुक्यों]] के सामंत के रूप में शासन किया। 12वीं शताब्दी के मध्य में वे स्वतंत्रत हो, एक स्व-शासन स्थापित किया, जो सिंघाना द्वितीय के शासनकाल में अपने चरम पर पहुंच गया। मराठी संस्कृति की नींव यादवों द्वारा रखी गई और महाराष्ट्र के सामाजिक जीवन की विशेषताएँ उनके शासन के दौरान विकसित हुईं।<ref>{{cite book|last = Raghu Hari Ḍālamiyā|first = Viveka Miśra|date = 2024|title = मेवाड़ एवं मराठों की सहस्त्र वर्षों की शौर्यगाथा}}</ref> === काकतीय === {{मुख्य|काकतीय वंश}} [[काकतीय वंश]] एक दक्षिण भारतीय वंश था जिसने 1083 से 1323 ईस्वी तक [[आंध्र प्रदेश]] और [[तेलंगाना]] पर शासन किया। वे शताब्दियों तक चलने वाले महान [[तेलुगू लोग|तेलुगु]] राज्यों में से एक थे। === कलचुरि === {{यह भी देखें|कलचुरि राजवंश}} [[File:Kudalasangama.jpg|right|thumb|200px|[[कुदालसंगम]] में संगमनाथ मंदिर, [[उत्तर कर्नाटक]]]] कालचुरी नाम का उपयोग दो राज्यों द्वारा किया गया था, जिनसे जुड़े राजवंशो ने 10वीं से 12वीं शताब्दी के दौरान शासन किया, एक ने मध्य भारत (पश्चिमी मध्य प्रदेश, राजस्थान) में शासन किया और उन्हें चेदी या हैहय (हेहय) (उत्तरी शाखा) कहा जाता था, जबकि दूसरे दक्षिणी कालचुरी ने कर्नाटक के कुछ हिस्सों पर शासन किया। ये समय और स्थान में अलग-अलग स्थित हैं। राजवंश के नाम और शायद एक सामान्य पूर्वज में विश्वास के अलावा, उन्हें जोड़ने के लिए ज्ञात स्रोतों में बहुत कम जानकारी है। महिष्मति (550–620 ईस्वी) के सबसे पुराने ज्ञात [[माहिष्मती के कलचुरी|कालचुरी परिवार]] ने उत्तरी [[महाराष्ट्र]], [[मालवा]] और पश्चिमी दक्कन पर शासन किया। उनकी राजधानी [[नर्मदा नदी]] घाटी में स्थित [[माहिष्मती|महिष्मति]] थी। इस वंश के तीन प्रमुख शासक; कृष्णराज, शंकरगण और बुद्धराज के सिक्के व शिलालेख इस क्ष्रेत्र में मिले हैं।<ref name="Students' Britannica India">Students' Britannica India By Dale Hoiberg, Indu Ramchandani.</ref> [[कल्याणी के कलचुरि]] या दक्षिणी कालचुरी (1130–1184 ईस्वी) ने अपने चरम पर [[दक्कन]] के कुछ हिस्सों पर शासन किया, जिसमें आज के [[उत्तर कर्नाटक|उत्तरी कर्नाटक]] और [[महाराष्ट्र]] के कुछ क्षेत्र शामिल थे। यह राजवंश 1156 और 1181 ईस्वी के बीच दक्कन में सत्ता में आया। उन्होंने अपनी उत्पत्ति कृष्ण से जोड़ी, जो मध्य प्रदेश में [[कालिन्जर (बहुविकल्पी)|कालिंजर]] और दाहला के विजेता थे। कहा जाता है कि इस राजवंश के एक सूबेदार [[बिज्जल द्वितीय|बिज्जल]] ने [[कर्नाटक]] पर अधिकार स्थापित किया। उन्होंने चालुक्य राजा तैला तृतीय से सत्ता छीन ली। बिज्जल के बाद उनके पुत्र सोमेश्वर और संगम ने शासन किया, लेकिन 1181 ईस्वी के बाद चालुक्यों ने धीरे-धीरे इस क्षेत्र को वापस ले लिया। उनका शासन छोटा और अशांत था, फिर भी सामाजिक-धार्मिक आंदोलन की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण था; इन्हीं समयों में [[लिंगायत मत|लिंगायत]] या [[वीरशैव दर्शन|वीरशैव संप्रदाय]] नामक एक नए संप्रदाय की स्थापना हुई।<ref name="Students' Britannica India"/> इसी समय कन्नड़ साहित्य-कविता की एक अनूठी और पूरी तरह से देशी शैली, जिसे [[वचन साहित्य|वचन]] कहा जाता है, का जन्म हुआ। वचन लिखने वालों को वचनकार (कवि) कहा जाता था। इस दौरान विरुपाक्ष पंडित की ''चेन्नबसवपुराण'', धरणी पंडित की ''बिज्जलरायचरिते'' और चंद्रसागर वर्णी की ''बिज्जलरायपुराण'' जैसी कई अन्य महत्वपूर्ण रचनाएँ भी लिखी गईं। [[त्रिपुरी के कलचुरी|त्रिपुरी (चेदी) के कालचुरी]] ने मध्य भारत में प्राचीन शहर त्रिपुरी ([[तेवर, जबलपुर|तेवर]]) से शासन किया; इसकी उत्पत्ति 8वीं शताब्दी में हुई, 11वीं शताब्दी में इसका विस्तार हुआ और 12वीं–13वीं शताब्दी में इनका पतन हो गया। === होयसल === {{मुख्य|होयसल राजवंश}} [[File:Shilabaalika on pillar bracket in Chennakeshava Temple at Belur3.jpg|thumb|right|200px|शिलाबालिका, चेन्नकेशव मंदिर, [[बेलूर]]।]] होयसल 11वीं शताब्दी में चालुक्यों (दक्षिणी कर्नाटक क्षेत्र) के सामंत के रूप में [[बेलूर]] से शासन करते हुए भी एक शक्तिशाली ताकत बन चुके थे।{{sfn|Sen|1999|p=498}} 12वीं शताब्दी की शुरुआत में उन्होंने दक्षिण में चोलों के खिलाफ सफलतापूर्वक युद्ध किया, [[तालकाड़]] की लड़ाई में उन्हें निर्णायक रूप से हराया और अपनी राजधानी को निकटवर्ती [[हैलेबिडु]] में स्थानांतरित कर दिया।{{sfn|Sen|1999|p=499}}{{sfn|Kamath|1980|loc=pp. 124–126, quoting William Coelho: "Vishnuvardhana made many military conquests later to be further expanded by his successors into one of the most powerful empires of South India"; quoting B. S. K. Iyengar: "He was the true maker of the Hoysala kingdom".}} इतिहासकार इस राजवंश के संस्थापकों को [[मलेनाडु]], कर्नाटक के मूल निवासी मानते हैं, क्योंकि कई शिलालेखों में उन्हें मालेपरोलगंडा या "माले (पहाड़ियों) के प्रमुखों का स्वामी" (मालेपस) कहा गया है।{{sfn|Sen|1999|p=498}}{{sfn|Kamath|1980|loc=p. 123, citing B. L. Rice}}{{sfn|Keay|2000|p=251}}{{sfn|Thapar|2003|p=367}}{{sfn|Kamath|1980|p=123}}{{efn|Natives of south Karnataka।}} पश्चिमी चालुक्य शक्ति के कमजोर होने के साथ, होयसलों ने 12वीं शताब्दी के अंत में अपनी स्वतंत्रता की घोषणा कर दी। होयसल नियंत्रण के इस काल में, कन्नड़ साहित्यिक छंद जैसे रागले (मुक्त छंद), संगत्य (एक संगीत वाद्य के साथ गाए जाने के लिए), शतपदी (सात पंक्तियों वाला) आदि व्यापक रूप से चलन में थे।<ref name="patron"/>{{sfn|Sen|1999|p=93}}{{sfn|Kamath|1980|p=114}}<ref name="ragala10">Shiva Prakash in Ayyappapanicker (1997), pp164, 203; Rice E. P. (1921), p59</ref>{{sfn|Kamath|1980|pp=132–134}}{{sfn|Sastri|1958|pp=359, 361}} होयसलों ने चालुक्यों से निकली [[वेसर शैली|वेसरा वास्तुकला]]{{sfn|Sastri|1958|p=427}} का विस्तार किया, जिसका चरम बेलूर में [[चेन्नकेशव मन्दिर]] और हैलेबिडु में [[होयसलेश्वर मंदिर]] के निर्माण में देखा जा सकता है।{{sfn|Sen|1999|pp=500–501}} ये दोनों मंदिर 1116 में चोलों के खिलाफ होयसल सम्राट [[विष्णुवर्धन]] की जीत की याद में बनाए गए थे।{{sfn|Foekema|1996|p=14}}{{sfn|Kamath|1980|p=124}} होयसल शासकों में सबसे प्रभावी [[वीर बल्लाल द्वितीय]]{{efn|Kamath cites [[J. Duncan M. Derrett]] and William Coelho as considering Ballala II as the most outstanding of the Hoysala kings.{{sfn|Kamath|1980|p=[https://archive.org/details/a-concise-history-of-karnataka-from-pre-historic-times-to-the-present/page/132/ 132]}}{{sfn|Coelho|1950}} }} ने आक्रामक [[पाण्ड्य राजवंश|पांड्यों]] को हराया जब उन्होंने चोल साम्राज्य पर आक्रमण किया और "चोल साम्राज्य के स्थापक" (चोलराज्यप्रतिष्ठाचार्य), "दक्षिण के सम्राट" (दक्षिण चक्रवर्ती) और "होयसल सम्राट" (होयसल चक्रवर्ती) की उपाधियाँ धारण कीं। होयसलों ने 1225 के आसपास आज के [[तमिलनाडु]] के क्षेत्रों में अपनी पकड़ बढ़ाई, जिसमें [[श्रीरंगम]] के पास कन्ननूर कुप्पम शहर को एक प्रांतीय राजधानी बनाया गया।{{sfn|Sen|1999|p=499}} इससे उन्हें दक्षिण भारतीय राजनीति पर नियंत्रण मिला जिसने दक्षिणी दक्कन में होयसल प्रभुत्व की अवधि की शुरुआत हुई।{{sfn|Kamath|1980|loc=p. 126, citing B .S. K. Iyengar}}{{sfn|Keay|2000|p=252}} 13वीं शताब्दी की शुरुआत में, होयसल शक्तिशाली बने रहे, उसी दौरान दक्षिण भारत में मुस्लिम आक्रमणों की पहली लहर शुरू हुई। इन विदेशी शक्ति के खिलाफ दो दशक से अधिक समय तक युद्ध लड़ने के बाद, उस समय के होयसल शासक [[वीर बल्लाला तृतीय]], 1343 में [[मदुरई]] की लड़ाई में मारे गए।{{sfn|Sen|1999|p=500}} इसके परिणामस्वरूप होयसल साम्राज्य के संप्रभु क्षेत्रों का [[हरिहर प्रथम]] द्वारा प्रशासित क्षेत्रों के साथ विलय हो गया, जो वर्तमान कर्नाटक के तुंगभद्रा क्षेत्र में स्थित [[विजयनगर साम्राज्य]] के संस्थापक थे। नया राज्य अपनी राजधानी [[विजयनगरम|विजयनगर]] के साथ अगले दो शताब्दियों तक फलता-फूलता रहा।{{efn|Two theories exist about the origin of Harihara I and his brother [[Bukka Raya I]]. One states that they were [[Kannadiga]] commanders of the Hoysala army and another that they were [[Telugu language|Telugu]] speakers and commanders of the earlier [[Kakatiya dynasty|Kakatiya Kingdom]].{{sfn|Kamath|1980|pp=[https://archive.org/details/a-concise-history-of-karnataka-from-pre-historic-times-to-the-present/page/166/mode/2up 159–160]}} }} === चोल === {{मुख्य|चोल राजवंश}} [[File:Rajendra map new.svg|thumb|right|200px|[[राजेन्द्र चोल प्रथम|राजेंद्र चोल]] के दौरान [[चोल साम्राज्य]], 1030 ई]] 9वीं शताब्दी तक, [[राजाराज चोल १|राजाराज चोल]] और उनके पुत्र [[राजेन्द्र चोल प्रथम|राजेंद्र चोल]] के अधीन, चोल साम्राज्य दक्षिण एशिया में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरे। चोल साम्राज्य बंगाल तक फैला हुआ था। अपने चरम पर, यह साम्राज्य लगभग 3,600,000 वर्ग किलोमीटर (1,389,968 वर्ग मील) तक फैला था। राजाराज चोल ने पूरे प्रायद्वीपीय दक्षिण भारत और [[श्रीलंका]] के कुछ हिस्सों को जीत लिया। राजेंद्र चोल की नौसेनाएँ और भी आगे गईं, जिन्होंने बर्मा (अब [[म्यांमार]]) से [[वियतनाम]] तक के तटों, [[अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह]], [[लक्षद्वीप]], [[सुमात्रा]], [[जावा]], दक्षिण पूर्व एशिया में [[मलाया]] और पेगू द्वीपों पर कब्जा कर लिया। उसने श्रीलंका के शेष हिस्सों को भी जीत लिया।{{sfn|Sastri|2000|p=199-200}} उसने बंगाल के राजा [[महिपाल]] को हराया, और अपनी जीत की याद में उसने एक नई राजधानी बनाई और उसका नाम [[गंगैकोण्ड चोलपुरम]] रखा। चोलों ने भव्य मंदिरों के निर्माण में उत्कृष्टता हासिल की। तंजावुर में [[बृहदीश्वर मन्दिर]] चोल साम्राज्य की भव्य वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। बृहदीश्वर मंदिर [[यूनेस्को]] की [[विश्व धरोहर स्थल]] है, जिसे "[[महान चोल मंदिर]]" के अंतर्गत शामिल किया गया है।<ref>[https://whc.unesco.org/en/list/250 Great Living Chola Temples] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130105115252/https://whc.unesco.org/en/list/250 |date=5 January 2013 }}.</ref> एक अन्य उदाहरण [[चिदंबरम मंदिर]] है, जो [[चिदम्बरम|चिदंबरम शहर]] के केंद्र में स्थित है। == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:लौह युगी एशिया]] [[श्रेणी:वेबग्रंथागार साँचा वेबैक कड़ियाँ]] [[श्रेणी:भारत का इतिहास]] {{भारत के मध्य राज्य}} ciarla35wmoal6kvoh7vu1ppofb7ixp 6630422 6630420 2026-10-17T11:24:37Z SAGAR SURYAVANSHI JAITHAL 938876 छोटा सा सुधार किया। 6630422 wikitext text/x-wiki {{भारतीय इतिहास}} '''भारत के मध्य साम्राज्य''' के अन्तर्गत, 230 ईसा पूर्व से 1206 ईसवी के बीच [[भारतीय उपमहाद्वीप]] में कई राजवंश के साम्राज्य शामिल थे। यह काल [[मौर्य राजवंश|मौर्य साम्राज्य]] के पतन और [[सातवाहन|सातवाहन राजवंश]] के उत्थान के बाद शुरू होता है, जो पहली शताब्दी ईसा पूर्व से [[सीमुक|सिमुक]] से शुरू होता है। "मध्य" काल 1200 से अधिक वर्षों तक चला और 1206 में [[दिल्ली सल्तनत]] के उदय और [[चोल राजवंश|बाद के चोलों]] ( [[राजेन्द्र चोल ३|राजेंद्र चोल तृतीय]], जिनकी मृत्यु 1279 ई. में हुई) के पतन के साथ इसका अंत हुआ। इस अवधि में दो युग शामिल हैं: ''शास्त्रीय भारत'', मौर्य साम्राज्य से लेकर 500 ई. में [[गुप्त राजवंश|गुप्त साम्राज्य]] के अंत तक, और 500 ई. से ''आरंभिक मध्यकालीन भारत''। <ref>{{Citation|last=Stein|first=B.|title=A History of India|date=27 April 2010|url=https://books.google.com/books?id=QY4zdTDwMAQC&pg=PA105|page=105|editor-last=Arnold|editor-first=D.|edition=2nd|place=Oxford|publisher=Wiley-Blackwell|isbn=978-1-4051-9509-6|author-link=Burton Stein}}</ref> इसमें शास्त्रीय [[हिन्दू धर्म|हिंदू धर्म]] का युग भी शामिल है, जो 200 ईसा पूर्व से 1100 ईस्वी तक का है।<ref>{{Citation|last=Michaels|first=Axel|title=Hinduism. Past and present|url=https://books.google.com/books?id=jID3TuoiOMQC&pg=PA32|page=32|year=2004|place=Princeton, New Jersey|publisher=Princeton University Press|isbn=0691089523}}</ref> पहली ई. से 1000 ई. तक, [[भारत का आर्थिक इतिहास|भारत की अर्थव्यवस्था]] दुनिया में सबसे बड़ी होने का अनुमान है, जिसके पास दुनिया की एक तिहाई से एक चौथाई संपत्ति थी।<ref name="Maddisson World GDP">{{Cite web|url=http://www.theworldeconomy.org/MaddisonTables/MaddisontableB-18.pdf|title=The World Economy (GDP): Historical Statistics by Professor Angus Maddison|publisher=World Economy|archive-url=https://web.archive.org/web/20130722202625/http://www.theworldeconomy.org/MaddisonTables/MaddisontableB-18.pdf|archive-date=22 July 2013|access-date=21 May 2013}}</ref><ref>{{Cite book|url=http://www.oecdbookshop.org/oecd/display.asp?K=5L9ZBQKL5RLW&lang=EN&sort=sort_date%2Fd&stem=true&sf1=Title&st1=world+economy&sf3=SubjectCode&sp1=not&st4=E4+or+E5+or+P5&sf4=SubVersionCode&ds=world+economy%3B+All+Subjects%3B+&m=3&dc=26&plang=en|title=The World Economy – Volume 1: A Millennial Perspective and Volume 2: Historical Statistics|last=Maddison|first=Angus|publisher=OECD Publishing by [[Organisation for Economic Co-operation and Development]]|year=2006|isbn=9789264022621|pages=656|access-date=3 January 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20141015104311/http://www.oecdbookshop.org/oecd/display.asp?K=5L9ZBQKL5RLW&lang=EN&sort=sort_date/d&stem=true&sf1=Title&st1=world+economy&sf3=SubjectCode&sp1=not&st4=E4+or+E5+or+P5&sf4=SubVersionCode&ds=world+economy;+All+Subjects;+&m=3&dc=26&plang=en|archive-date=15 October 2014}}</ref> इस काल के बाद 13वीं शताब्दी में [[मध्यकालीन भारत|मध्यकालीन काल]] आया। == उत्तरपश्चिम == [[File:NLI_Decima_Asiae_Tabula.jpg|alt=[[Ptolemy]]'s 10th map of Asia, depicting India within the Ganges 15th century reproduction|अंगूठाकार| टॉलेमी का एशिया का 10वां मानचित्र, जिसमें भारत को गंगा के बीच दर्शाया गया है, 15वीं शताब्दी की प्रतिकृति]] दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के दौरान, [[मौर्य राजवंश|मौर्य साम्राज्य]] अतिव्यापी सीमाओं वाली क्षेत्रीय शक्तियों का समूह बन गया। सम्पूर्ण उत्तर-पश्चिम क्षेत्र ने 200 ई.पू. और 300 ई.पू. के बीच अनेक आक्रमणकारियों को आकर्षित किया। [[पुराण|पुराणों]] में इनमें से कई जनजातियों को विदेशी और अशुद्ध बर्बर ([[म्लेच्छ]]) कहा गया है। पहले [[सातवाहन|सातवाहन राजवंश]] और फिर [[गुप्त राजवंश|गुप्त साम्राज्य]], दोनों ही मौर्य साम्राज्य के उत्तराधिकारी राज्य थे, जिन्होंने इन उत्तरवर्ती साम्राज्य के विस्तार को रोकने का प्रयास किया और अंततः युद्धों के दबाव के कारण आंतरिक रूप से टूटने लगे। आक्रमणकारी जनजातियाँ [[बौद्ध धर्म]] से प्रभावित थीं, जो दोनों आक्रमणकारियों तथा सातवाहनों और गुप्तों के संरक्षण में फलता-फूलता रहा तथा दोनों संस्कृतियों के बीच एक सांस्कृतिक सेतु का काम करता रहा। समय के साथ, आक्रमणकारी "भारतीयकृत" हो गए क्योंकि उन्होंने गंगा के मैदानों में समाज और दर्शन को प्रभावित किया और इसके विपरीत वे भी उससे प्रभावित हुए। यह काल बौद्धिक और कलात्मक उपलब्धियों के लिए जाना जाता है, जो सांस्कृतिक प्रसार और [[समन्वयता|समन्वयवाद]] से प्रेरित थे, क्योंकि नए साम्राज्य [[रेशम मार्ग]] पर फैल रहे थे। === हिन्द-यूनानी === पिछली दो शताब्दियों ईसा पूर्व के दौरान [[हिन्द-यवन राज्य|हिन्द-यूनानी साम्राज्य]] ने उत्तर-पश्चिमी [[दक्षिण एशिया]] के विभिन्न भागों का अधिग्रहण किया था, और इस पर 30 से अधिक [[हेलेनिस्टिक काल|हेलेनिस्टिक]] राजाओं का शासन था, जो अक्सर एक-दूसरे के साथ संघर्ष करते रहते थे। इस राज्य की स्थापना, [[बैक्ट्रिया के डेमेट्रियस प्रथम]] के द्वार दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के प्रारंभ में [[हिन्दु कुश|हिन्दू कुश]] पर आक्रमण के साथ हुई। भारत में यूनानी लोग अंततः बैक्ट्रिया (अब [[अफ़ग़ानिस्तान|अफगानिस्तान]] और [[उज़्बेकिस्तान|उज्बेकिस्तान]] के बीच की सीमा) में केन्द्रित [[यूनानी-बैक्ट्रियन साम्राज्य]] में विभाजित हो गये। "हिन्द-यूनानी साम्राज्य" शब्द मोटे तौर पर विभिन्न राजवंशीय राजव्यवस्थाओं का वर्णन करता है, जिसके अन्तर्गत [[तक्षशिला]], [[पुष्कलावती]] और [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] (पाकिस्तान) के सागला जैसे कई शहर आते थे। इन शहरों में अपने समय में कई राजवंशों का राज रहा होगा, और [[क्लाडियस टॉलमी|टॉलेमी]] के ''भूगोल'' और बाद के राजाओं के नामकरण के आधार पर, दक्षिण में निश्चित [[थियोफिलस (हिन्द-यूनानी)|थियोफिला]] का संभवतः किसी समय क्षत्रप या शाही राजदरबार होगा। [[पॉलीबियस]]<ref>{{Cite web|url=https://www.perseus.tufts.edu/cgi-bin/ptext?lookup=Plb.+11.34|title=11.34|archive-url=https://web.archive.org/web/20080420074248/http://www.perseus.tufts.edu/cgi-bin/ptext?lookup=Plb.+11.34|archive-date=20 April 2008|access-date=20 February 2021}}</ref> के अनुसार [[यूथिडेमस प्रथम|यूथीडेमस प्रथम]] एक मैग्नेशियन यूनानी था। इस प्रकार, उसका पुत्र, डेमेट्रियस, जो हिन्द-यूनानी साम्राज्य का संस्थापक था, कम से कम अपने पिता की ओर से यूनानी वंश का था। डेमेट्रियस के लिए [[एंटिओकस तृतीय महान]] की बेटी के साथ विवाह संधि की व्यवस्था की गई थी, जो आंशिक रूप से [[फ़ारसी लोग|फ़ारसी वंश]] की थी।<ref>{{Cite web|url=https://www.perseus.tufts.edu/cgi-bin/ptext?lookup=Plb.+11.34|title=Polybius 11.34|archive-url=https://web.archive.org/web/20080420074248/http://www.perseus.tufts.edu/cgi-bin/ptext?lookup=Plb.+11.34|archive-date=20 April 2008|access-date=20 February 2021}}</ref> बाद के हिन्द-यूनानी शासकों की जातीयता कम स्पष्ट है।<ref>[https://www.jstor.org/stable/623931 "Notes on Hellenism in Bactria and India".] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190329185312/https://www.jstor.org/stable/623931|date=29 March 2019}} W. W. Tarn. ''Journal of Hellenic Studies'', Vol. 22 (1902), pages 268–293</ref> उदाहरण के लिए, [[आर्टेमिडोरोस एनिकेटोस|आर्टेमिडोरोस अनिकेतोस]] (80 ई.पू.) संभवतः इंडो-सिथियन वंश का था। अंतर्जातीय विवाह भी होते थे, जिसका उदाहरण [[सिकंदर|सिकंदर महान]] है, जिसने बैक्ट्रिया की [[रुखसाना|रोक्साना]] से विवाह किया था, या [[सेल्युकस प्रथम निकेटर|सेल्यूकस प्रथम निकेटर]], जिसने सोग्डिया की अपामा से विवाह किया था। दो शताब्दियों की अपने शासन के दौरान, हिन्द-यूनानी राजाओं ने यूनानी और भारतीय भाषाओं और प्रतीकों को मिलाया, जैसा कि उनके सिक्कों पर देखने को मिलता है, और यूनानी, हिंदू और बौद्ध धार्मिक प्रथाओं को मिश्रित किया, जैसा कि उनके शहरों के [[पुरातात्विक]] अवशेषों और बौद्ध धर्म के प्रति उनके समर्थन के संकेतों में देखा जा सकता है, जो भारतीय और हेलेनिस्टिक प्रभावों के समृद्ध संलयन की ओर इशारा करता है। हिन्द-यूनानी संस्कृति के प्रसार के परिणाम आज भी महसूस किए जाते हैं, खासकर [[गान्धार कला|यूनानी-बौद्ध कला]] के प्रभाव के माध्यम से। [[इंडो-शक]] के आक्रमणों के बाद हिन्द-यूनान अंततः 10 ई.पू. के आसपास एक राजनीतिक इकाई के रूप में गायब हो गए, हालांकि इंडो-पार्थियन और [[कुषाण राजवंश|कुषाण साम्राज्य]] के बाद के शासन के तहत यूनानी आबादी के कुछ हिस्से संभवतः कई शताब्दियों तक बने रहे। === यवन === '''यवन''' या '''योना''' लोग, जिनका शाब्दिक अर्थ " [[आयोनियन]] " और जिसका अर्थ है "पश्चिमी विदेशी", [[गांधार (जनपद)|गांधार]] से परे रहने वाले बताए गए हैं। [[यवन|यवनों]], [[शक|शकों]], [[पह्लव|पहलवों]] और [[हूण लोग|हूणों]] को कभी-कभी ''[[म्लेच्छ]]'', अर्थात् "विदेशी" कहा जाता था। [[कंबोज|कम्बोज]] और [[मद्र]], [[केकय साम्राज्य]], [[सिन्धु नदी|सिंधु नदी]] क्षेत्र और गांधार के निवासियों को भी कभी-कभी ''म्लेच्छ'' के रूप में वर्गीकृत किया जाता था। इस नाम का उपयोग [[कुरु राजवंश|कुरु साम्राज्य]] और [[पाञ्चाल|पांचाल]] की संस्कृति के साथ उनके सांस्कृतिक अंतर को इंगित करने के लिए किया गया था। === हिन्द-सिथियन शक === [[इंडो-शक|इंडो-सिथियन]] [[शक|शकों]] की एक शाखा है, जो दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से चौथी शताब्दी ईसवी के मध्य तक दक्षिणी [[साइबेरिया]] से [[बाख़्त्र|बैक्ट्रिया]], [[सोग़दा]], [[अराकोसिया]], [[गांधार (जनपद)|गांधार]], [[कश्मीर]], [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]], तथा पश्चिमी और मध्य भारत, [[गुजरात]], [[महाराष्ट्र]] और [[राजस्थान]] के कुछ हिस्सों में प्रवास कर गए थे। भारत में पहला शक राजा [[मेउस]] या मोगा था जिसने गांधार में शक राज्य स्थापित किया और धीरे-धीरे उत्तर-पश्चिमी भारत पर अपना प्रभुत्व बढ़ाया। भारत में इंडो-सिथियन शासन 395 ई. में अंतिम [[पश्चिमी क्षत्रप]], [[रुद्रसिंह तृतीय]] के शासनकाल के साथ समाप्त हो गया। [[मध्य एशिया]] से शक जनजातियों द्वारा भारत पर आक्रमण, जिसे अक्सर "इंडो-शक आक्रमण" के रूप में संदर्भित किया जाता है, ने भारत के साथ-साथ आसपास के देशों के [[भारत का इतिहास|इतिहास]] में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वास्तव में, इंडो-शक युद्ध, चीनी [[जनजाति|जनजातियों]] के साथ संघर्ष के कारण मध्य एशियाई लोगों के खानाबदोश पलायन से शुरू हुई घटनाओं का सिर्फ एक अध्याय है, जिसका [[बाख़्त्र|बैक्ट्रिया]], [[काबुल]], [[पार्थिया]] और भारत के साथ-साथ पश्चिम में सुदूर रोम पर भी दीर्घकालिक प्रभाव पड़ा। भारत पर आक्रमण करने वाले और विभिन्न [[राजतन्त्र|राज्यों की]] स्थापना करने वाले शक समूहों में शकों के अलावा, अन्य सहयोगी [[जनजाति|जनजातियाँ]], जैसे कि [[मीदि साम्राज्य|मीदी]], [[स्किथी लोग|स्किथी]],<ref>Cunningham 1888, p. 33</ref>{{Sfn|Barstow|1928|pp=63, 105–135, 145 155, 152}}  [[मसागती लोग|मसागती]], गेटे, परमा कम्बोज, [[यूरेशियाई आवार लोग|आवार]],{{उद्धरण आवश्यक|date=January 2016}} बाह्लीका, [[ऋषिका]] और [[पारद (प्राचीन जाति)|पारद]] शामिल थीं। == गंगा के मैदान और दक्कन == [[मौर्य राजवंश|मौर्य साम्राज्य]] के पतन के बाद, [[सातवाहन]] साम्राज्य उत्तर-पश्चिम से [[मध्य एशिया|मध्य एशियाई]] जनजातियों के आक्रमण को रोकने और उनसे संघर्ष करने के लिए एक उत्तराधिकारी राज्य के रूप में उभरा। [[दक्कन का पठार|दक्कन के पठार]] पर फैले सातवाहनों ने [[बौद्ध धर्म]] के प्रसार और उत्तरी गंगा के मैदानों तथा दक्षिणी क्षेत्रों के बीच संपर्क के लिए एक कड़ी का काम किया, यहां तक कि जब [[उपनिषद्|उपनिषदों]] का प्रभाव बढ़ रहा था। अंततः उत्तर-पश्चिमी आक्रमणकारियों के साथ संघर्ष और आंतरिक कलह से कमजोर होकर वे टूट गए और दक्कन तथा मध्य भारत के आसपास कई राज्यों को जन्म दिया, जबकि [[गुप्त राजवंश|गुप्त साम्राज्य]] [[सिन्धु-गंगा का मैदान|सिन्धु-गंगा मैदान]] में उभरा और "स्वर्ण युग" तथा साम्राज्य के पुनर्जन्म का सूत्रपात किया, जिसमें विकेंद्रीकृत स्थानीय प्रशासनिक मॉडल और भारतीय संस्कृति का प्रसार हुआ, जो [[हूण लोग|हूण]] आक्रमणों के तहत पतन तक जारी रहा। [[गुप्त साम्राज्य]] के पतन के बाद गंगा का क्षेत्र कई राज्यों में बंट गया, जो [[हर्षवर्धन|हर्ष]] के अधीन अस्थायी रूप से एकजुट हुए और फिर [[राजपूत]] राजवंशों का उदय हुआ। दक्कन में, [[चालुक्य राजवंश|चालुक्यों]] का उदय हुआ, जिन्होंने एक शक्तिशाली राष्ट्र का निर्माण किया और सांस्कृतिक तथा सैन्य शक्ति के केंद्रों को, जो लंबे समय तक सिन्धु-गंगा मैदान में केंद्रित थे, भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में बन रहे नए राष्ट्रों की ओर स्थानांतरित कर दिया। === सातवाहन साम्राज्य === {{मुख्य|सातवाहन}} '''सातवाहन वंश''' की शुरुआत [[मौर्य राजवंश|मौर्य साम्राज्य]] के सामंत के रूप में हुई, लेकिन उसके पतन के साथ ही उन्होंने स्वतंत्रता की घोषणा कर दी। वे पहले भारतीय शासक थे जिन्होंने अपने शासकों की उभरी हुई छवि वाले सिक्के जारी किए और [[बौद्ध धर्म]] के संरक्षण के लिए जाने जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप [[एलोरा गुफाएं|एलोरा की गुफाओं]] से लेकर [[गुन्टूर जिला|गुंटूर जिले]] के [[अमरावती, आन्ध्र प्रदेश|अमरावती]] गाँव तक बौद्ध स्मारक बने। उन्होंने एक सांस्कृतिक सेतु का निर्माण किया और गंगा के मैदानों से लेकर भारत के दक्षिणी छोर तक व्यापार और विचारों एवं संस्कृति के आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सातवाहनों को अपना शासन स्थापित करने के लिए पहले [[शुंग राजवंश|शुंग साम्राज्य]] और फिर [[मगध महाजनपद|मगध]] के [[कण्व वंश]] से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ी। बाद में उन्हें अपने राज्य को [[शक|शकों]], [[यवन|यवनों]] और [[पह्लव|पह्लवों]] के आक्रमणों से बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। विशेष रूप से [[पश्चिमी क्षत्रप|पश्चिमी क्षत्रपों]] के साथ उनके संघर्ष व आन्तरिक कलह ने उन्हें कमजोर कर दिया और साम्राज्य छोटे-छोटे राज्यों में बंट गया।<ref>{{Cite book|url=|title=भारत का इतिहास - छठी सदी ईस्वी पूर्व से तृतीय सदी ईस्वी के मध्य तक: [9789368753131]|last=Manglik|first=Mr Rohit|date=2023-08-21|publisher=EduGorilla Community Pvt. Ltd.|isbn=978-93-6875-313-1|pages=112|language=hi}}</ref> === महामेघवाहन वंश === {{मुख्य|महामेघवाहन वंश}} महामेघवाहन (लगभग 250 ईसा पूर्व – 400 ईस्वी) मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद [[कलिंग]] का एक प्राचीन शासक वंश था। इस वंश के तीसरे शासक, [[खारवेल]] ने आम युग की शुरुआत में एक श्रृंखलाबद्ध अभियानों के माध्यम से भारत के बड़े हिस्से को जीत लिया। खारवेल के नेतृत्व में कलिंग की सैन्य शक्ति को पुनर्स्थापित किया गया: खारवेल के सेनापतित्व में, कलिंग राज्य का एक प्रभावशाली समुद्री विस्तार था जिसके व्यापार मार्ग उसे तत्कालीन सिंहल (श्रीलंका), बर्मा (म्यांमार), सियाम (थाईलैंड), वियतनाम, कंबोज (कंबोडिया), बोर्नियो, बाली, समुद्र (सुमात्रा) और जबद्वीप (जावा) से जोड़ते थे। खारवेल ने [[मगध महाजनपद|मगध]], [[अंग महाजनपद|अंग]], [[सातवाहन|सातवाहनों]] और [[पाण्ड्य वंश|पांड्य वंश]] (आधुनिक आंध्र प्रदेश) द्वारा शासित [[दक्षिण भारत|दक्षिण भारतीय]] क्षेत्रों के खिलाफ कई सफल अभियान चलाए और कलिंग का विस्तार [[गंगा नदी|गंगा]] और [[कावेरी नदी|कावेरी]] तक कर दिया। [[चित्र:Udayagiri_and_Khandagiri_Caves_2024_42.jpg|अंगूठाकार| खंडगिरि गुफाओं के चट्टानों को काटकर बनाए गए जैन विहार, खारवेल के संरक्षण में बनाए गए थे।]] खारवेल राज्य का एक प्रभावशाली समुद्री साम्राज्य था जिसके व्यापार मार्ग उसे [[श्रीलंका]], [[बर्मा]], [[थाईलैण्ड|थाईलैंड]], [[वियतनाम]], [[कंबोडिया]], [[बोर्नियो]], [[बाली]], [[सुमात्रा]] और [[जावा (द्वीप)|जावा]] से जोड़ते थे। कलिंग से उपनिवेशक श्रीलंका, बर्मा, साथ ही [[मालदीव]] और समुद्री [[दक्षिण पूर्व एशिया|दक्षिणपूर्व एशिया]] में बस गए। आज भी [[मलेशिया]] में भारतीयों को इसी वजह से केलिंग कहा जाता है।<ref>[http://www.visvacomplex.com/Keling_English_Version.html Keling_English Version] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130226054454/http://www.visvacomplex.com/Keling_English_Version.html|date=26 February 2013}}. Visvacomplex.com. Retrieved on 2013-07-12.</ref> धार्मिक रूप से सहिष्णु होने के बावजूद, खारवेल ने [[जैन धर्म]] को संरक्षण दिया,<ref>{{Cite web|url=http://www.freeindia.org/biographies/kharavela/page6.htm|title=Maharaja Kharavela|archive-url=https://web.archive.org/web/20010503232502/http://www.freeindia.org/biographies/kharavela/page6.htm|archive-date=2001-05-03|access-date=2012-01-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=http://www.freeindia.org/biographies/kharavela/page13.htm|title=Maharaja Kharavela's Family|archive-url=https://web.archive.org/web/20010503230545/http://www.freeindia.org/biographies/kharavela/page13.htm|archive-date=2001-05-03|access-date=2012-01-16}}</ref> और भारतीय उपमहाद्वीप में जैन धर्म के प्रसार के लिए जिम्मेदार थे, लेकिन भारतीय इतिहास के कई विवरणों में उनके महत्व को नजरअंदाज किया गया है। खारवेल के बारे में जानकारी का मुख्य स्रोत उनका प्रसिद्ध सत्रह पंक्तियों वाला शिलालेख है जो [[उदयगिरि और खंडगिरि|उदयगिरि और खंडगिरि की गुफाओं]] ([[भुवनेश्वर]], ओडिशा) में स्थित [[हाथीगुम्फा शिलालेख]] है। हाथीगुम्फा शिलालेख के अनुसार, उन्होंने मगध में राजगृह पर हमला किया, जिसके कारण बैक्ट्रिया के इंडो-ग्रीक राजा [[बैक्ट्रिया के डेमेट्रियस प्रथम|डेमेट्रियस प्रथम]] को [[मथुरा]] की ओर पीछे हटना पड़ा। === भारशिव वंश (नाग वंश) === {{मुख्य|नाग (वंश)}} गुप्तों के उदय से पहले, [[नाग (वंश)|भार्शिव राजाओं]] ने अधिकांश सिंधु-गंगा मैदानों पर शासन किया था। उन्होंने गंगा नदी के तट पर दस [[अश्वमेध यज्ञ]] किए। [[समुद्रगुप्त]] ने अपने इलाहाबाद स्तंभ में नाग शासकों का उल्लेख किया है। === वाकाटक === {{मुख्य|वाकाटक}} [[चित्र:Ajanta_(63).jpg|दाएँ|अंगूठाकार|200x200पिक्सेल| वाकाटक शासकों के संरक्षण में निर्मित [[अजंता गुफाएँ|अजंता गुफाओं]] के चट्टान-काटे गए बौद्ध विहार और चैत्य।]] '''वाकाटक साम्राज्य''' [[गुप्त साम्राज्य]] का समकालीन था और [[सातवाहन|सातवाहनों]] का उत्तराधिकारी राज्य था, जिसने उत्तर की दक्षिणी सीमाएँ बनाईं और तीसरी से पाँचवीं शताब्दी के दौरान आधुनिक मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र राज्यों पर शासन किया। [[अजंता गुफाएँ|अजंता की गुफाएँ]] (एक [[यूनेस्को]] [[विश्व धरोहर|विश्व धरोहर स्थल]]) में बौद्ध विहार और चैत्य, वाकाटक शासकों के संरक्षण में बनाए गए थे। अंततः उन पर [[चालुक्य राजवंश|चालुक्यों]] ने अधिकार कर लिया। === गुप्त साम्राज्य === {{मुख्य|गुप्त राजवंश}} [[चित्र:Silver_Coin_of_Kumaragupta_I.jpg|अंगूठाकार| [[गुप्त राजवंश|गुप्त]] राजा [[कुमारगुप्त प्रथम]] (414-455) का चांदी का सिक्का।]] '''शास्त्रीय युग''' उस अवधि को संदर्भित करता है जब [[भारतीय उपमहाद्वीप]] का अधिकांश हिस्सा गुप्त साम्राज्य (लगभग 320 ईस्वी–600 ईस्वी) के अधीन पुनः एकीकृत हो गया था। इस अवधि को [[भारत का स्वर्ण युग]] कहा जाता है<ref>[http://www.nupam.com/Sgupta1.html] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090802092924/http://www.nupam.com/Sgupta1.html|date=2 August 2009}}</ref> और यह [[भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का इतिहास|विज्ञान, प्रौद्योगिकी]], [[भारतीय आविष्कारों की सूची|इंजीनियरिंग]], [[भारतीय कला|कला]], [[भारतीय साहित्य|साहित्य]], [[भारतीय तर्कशास्त्र|तर्कशास्त्र]], [[भारतीय गणित|गणित]], [[भारतीय खगोलिकी|खगोल विज्ञान]], [[भारतीय धर्म|धर्म]] और [[भारतीय दर्शन|दर्शन]] में में व्यापक उपलब्धियों से चिह्नित था, जिसने [[हिन्दू संस्कृति|हिंदू संस्कृति]] के तत्वों को स्पष्ट किया।<ref>[http://www.wsu.edu:8001/~dee/ANCINDIA/GUPTA.HTM The Age of the Guptas and After] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20081204082030/http://www.wsu.edu:8001/~dee/ANCINDIA/GUPTA.HTM|date=4 December 2008}}</ref> [[दशमलव पद्धति|दशमलव संख्या प्रणाली]], जिसमें [[शून्य]] की अवधारणा भी शामिल है, इसी अवधि में भारत में आविष्कृत हुई थी। इस सांस्कृतिक रचनात्मकता के उच्च बिंदु गुप्त वास्तुकला, मूर्तिकला और चित्रकला में देखे जा सकते हैं। गुप्त काल ने [[कालिदास]], [[आर्यभट|आर्यभट्ट]], [[वराह मिहिर|वराहमिहिर]], [[विष्णु शर्मा]] और [[वात्स्यायन]] जैसे विद्वानों को जन्म दिया, जिन्होंने विभिन्न शैक्षणिक क्षेत्रों में प्रगति की। गुप्त युग में विज्ञान और राजनीतिक प्रशासन में भी उन्नति हुई। व्यापारिक संबंधों ने इस क्षेत्र को एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र बना दिया और इसे एक ऐसे आधार के रूप में स्थापित किया जो पड़ोसी राज्यों और क्षेत्रों, जैसे [[बर्मा]], [[श्रीलंका]] और समुद्री एवं मुख्यभूमि दक्षिणपूर्व एशिया को प्रभावित करेगा। गुप्तों ने अपने शासन को वैधता प्रदान करने के लिए वैदिक यज्ञ किए, लेकिन उन्होंने [[बौद्ध धर्म]] को भी संरक्षण दिया, जो ब्राह्मणवादी रूढ़िवादिता के विकल्प के रूप में जारी रहा। पहले तीन शासकों - [[चन्द्रगुप्त प्रथम|चंद्रगुप्त प्रथम]] (लगभग 319–335), [[समुद्रगुप्त]] (लगभग 335–376), और [[चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य|चंद्रगुप्त द्वितीय]] (लगभग 376–415) - के सैन्य अभियानों ने भारत के अधिकांश हिस्से को उनके नेतृत्व में ला दिया। उन्होंने उत्तर-पश्चिमी राज्यों का सफलतापूर्वक विरोध किया, जब तक कि [[हूण लोग|हूणों]] का आगमन नहीं हुआ, जिन्होंने 5वीं शताब्दी के पहले भाग तक [[अफ़ग़ानिस्तान|अफगानिस्तान]] में अपनी स्थापना कर ली, जिसकी राजधानी [[बामयान]] थी। फिर भी, [[दक्कन का पठार|दक्कन]] और दक्षिणी भारत का अधिकांश हिस्सा उत्तर में इस उथल-पुथल से काफी हद तक अप्रभावित रहा। === हर्षवर्धन === [[गुप्त साम्राज्य]] के पतन के बाद, गंगा के मैदानी इलाके कई छोटे राज्यों में बंट गए। [[कन्नौज]] के [[हर्षवर्धन|हर्ष]] ने उन्हें अपने शासन में हर्ष साम्राज्य के रूप में थोड़े समय के लिए एकजुट करने में सफलता पाई। [[चालुक्य राजवंश|चालुक्यों]] ([[पुलकेशिन द्वितीय]]) के हाथों हार ने ही उसे [[नर्मदा नदी]] के दक्षिण में अपने शासन का विस्तार करने से रोक दिया। यह एकजुटता उनके शासन के बाद अधिक समय तक नहीं टिक पाई और 647 ईस्वी में उनकी मृत्यु के तुरंत बाद उनका साम्राज्य टूट गया। === परवर्ती गुप्त === {{मुख्य|गुप्तवंश (मागध अथवा मालव वंश)}} परवर्ती गुप्त राजवंश, जिसे मगध के परवर्ती गुप्त वंश के नाम से भी जाना जाता है, 6वीं और 8वीं शताब्दी ई. में [[मगध महाजनपद|मगध]] क्षेत्र और आंशिक रूप से [[मालवा]] के शासक थे। बाद के गुप्त राजवंश [[गुप्त राजवंश|, शाही गुप्तों]] के विघटन के बाद मगध और मालवा के शासकों के रूप में उभरे, हालाँकि, दोनों राजवंशों को जोड़ने के लिए कोई सबूत नहीं है और बाद के गुप्त राजवंशों ने खुद को शाही गुप्तों से जोड़ने के लिए -गुप्त प्रत्यय को अपनाया हो सकता है।<ref name="Ghosh2021">{{Cite journal|last=Ghosh|first=Suchandra|date=2022|title=Later Guptas|url=https://onlinelibrary.wiley.com/doi/full/10.1002/9781119399919.eahaa00571|journal=The Encyclopedia of Ancient History: Asia and Africa|pages=1–2|doi=10.1002/9781119399919.eahaa00571|isbn=978-1-119-39991-9}}</ref>{{Sfn|Sen|1999|p=246}} === गुर्जर === वर्तमान [[राजस्थान]] सदियों तक गुर्जर क्षेत्र था जिसकी राजधानी [[भीनमाल|भीलमाल]] (भीनमाल या श्रीमाल) थी, जो [[माउंट आबू]] से लगभग 50 मील उत्तर पश्चिम में स्थित है। भीनमाल के प्रतिहार 9वीं शताब्दी की शुरुआत में [[गंगा नदी|गंगा]] के किनारे कन्नौज चले गए और अपनी राजधानी कन्नौज में स्थानांतरित कर दी और एक साम्राज्य की स्थापना की जो अपने चरम पर पूर्व में [[बिहार]], पश्चिम में ''खोई हुई नदी'', [[घग्गर-हकरा नदी|हकरा]] और [[अरब सागर]], उत्तर में [[हिमालय]] और [[सतलुज नदी|सतलुज]] और दक्षिण में [[यमुना नदी|यमुना]] और [[नर्मदा नदी|नर्मदा]] से घिरा हुआ था।<ref name="Smith 1909" /> [[भरूच|भड़ौच]] के आसपास का क्षेत्र, जो इस राज्य की शाखा थी, पर भी [[लाट के गुर्जर|नंदीपुरी के गुर्जरों]] और [[लाट के गुर्जर|लाट के गुर्जरों]] का शासन था।{{R|1977 Majumdar}} <sup class="reference nowrap"><span title="Page: 66">&#x3A;&#x200A;66&#x200A;</span></sup> === विष्णुकुण्डिन === {{मुख्य|विष्णुकुण्डिन राजवंश}} '''विष्णुकुण्डिन साम्राज्य''' एक भारतीय राजवंश था जिसने 5वीं और 6वीं शताब्दी के दौरान [[दक्कन का पठार|दक्कन]], [[ओडिशा]] और [[दक्षिण भारत]] के कुछ हिस्सों पर शासन किया था और [[वाकाटक|वाकाटक साम्राज्य]] से सत्ता छीन ली थी। [[माधववर्मा द्वितीय]] इस वंश का सबसे प्रतापी शासक हुआ। विष्णुकुण्डिन शासन का अंत चालुक्य राजा [[चालुक्य राजवंश|पुलकेशिन]] [[द्वितीय पुलकेशी|द्वितीय]] द्वारा पूर्वी दक्कन पर विजय के साथ हुआ। पुलकेशिन ने विजित भूमि पर शासन करने के लिए अपने भाई [[कुब्ज विष्णुवर्धन|कुब्ज विष्णुवर्धन को]] वायसराय नियुक्त किया। अंततः विष्णुवर्धन ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की और [[पूर्वी चालुक्य]] राजवंश की शुरुआत की। === मैत्रक === {{मुख्य|मैत्रक राजवंश}} '''मैत्रक साम्राज्य ने''' पश्चिमी भारत के [[गुजरात]] पर लगभग 475 ई. से 767 ई. तक शासन किया। राजवंश के संस्थापक ''सेनापति'' भटार्क थे, जो [[गुप्त राजवंश|गुप्त साम्राज्य]] के तहत [[काठियावाड़|सौराष्ट्र]] [[प्रायद्वीप]] के एक सैन्य गवर्नर थे, उन्होंने 5वीं शताब्दी की अंतिम तिमाही में खुद को गुजरात के स्वतंत्र शासक के रूप में स्थापित किया था। प्रथम दो मैत्रक शासकों भटार्क और धरसेन प्रथम ने केवल ''सेनापति'' (सेनापति) की उपाधि का प्रयोग किया। तीसरे शासक द्रोणसिंह ने स्वयं को ''महाराजा'' घोषित कर दिया। राजा गुहसेन ने अपने पूर्ववर्तियों की तरह अपने नाम के साथ ''परमभट्टारक पदानुध्याता'' शब्द का प्रयोग करना बंद कर दिया, जो गुप्त अधिपतियों के प्रति नाममात्र की निष्ठा प्रदर्शित करने की समाप्ति को दर्शाता है। उनके बाद उनके पुत्र धरसेन द्वितीय ने ''महाधिराज'' की उपाधि धारण की। उनके पुत्र, अगले शासक शिलादित्य प्रथम, धर्मादित्य को [[ह्वेन त्सांग]] ने "महान प्रशासनिक क्षमता और दुर्लभ दयालुता और करुणा के सम्राट" के रूप में वर्णित किया था। सिलादित्य प्रथम के बाद उसके छोटे भाई खड़गरा प्रथम ने शासन संभाला <ref name="Mahajan">Mahajan V.D. (1960, reprint 2007). ''Ancient India'', S. Chand & Company, New Delhi, {{ISBN|81-219-0887-6}}, pp.594–596</ref> खड़गरा प्रथम के विरडी ताम्रपत्र अनुदान (616 ई.) से साबित होता है कि उसके क्षेत्रों में [[उज्जैन]] भी शामिल था। ===गुर्जर-प्रतिहार=== {{मुख्य|गुर्जर-प्रतिहार राजवंश}} गुर्जर प्रतिहार साम्राज्य एक भारतीय राजवंश था<ref>{{cite book | title =A historical review of Hindu India: 300 B. C. to 1200 A. D. | author =पंचानन राया | url=https://books.google.com/books?id=kHEBAAAAMAAJ&q=Gurjar+parihar | publisher =I. M. H. Press | year =1939 | page =125 }}</ref> जिसने 6वीं से 11वीं शताब्दी तक [[उत्तर भारत|उत्तरी भारत]] के अधिकांश भाग पर शासन किया। अपनी समृद्धि और शक्ति के चरम (लगभग 836–910 ईस्वी) पर, यह [[गुप्त साम्राज्य]] के बराबर क्षेत्रफल में विस्तारित था।<ref>{{Cite web |url=http://encyclopedia2.thefreedictionary.com/Gurjara-Pratihara+dynasty |title=Gurjara-Pratihara dynasty definition of Gurjara-Pratihara dynasty in the Free Online Encyclopedia<!-- Bot generated title --> |access-date=19 August 2009 |archive-date=2 October 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20111002203615/http://encyclopedia2.thefreedictionary.com/Gurjara-Pratihara+dynasty |url-status=live }}</ref> [[रमेशचन्द्र मजुमदार|डॉ. आर.सी. मजूमदार]] ने भारत के इतिहास में गुर्जर प्रतिहार साम्राज्य के महत्व को इंगित करते हुए कहा है, "गुर्जर प्रतिहार साम्राज्य, जो लगभग एक शताब्दी तक पूर्ण गौरव में बना रहा, [[भारतीय उपमहाद्वीप का इस्लामी इतिहास|मुस्लिम विजय]] से पहले उत्तरी भारत का अंतिम महान साम्राज्य था।" यह सम्मान कई प्रतिष्ठित इतिहासकारों द्वारा हर्ष के साम्राज्य को दिया जाता है, लेकिन बिना किसी वास्तविक औचित्य के, क्योंकि प्रतिहार साम्राज्य संभवतः बड़ा था, निश्चित रूप से क्षेत्रफल में [[गुप्त साम्राज्य]] से कम नहीं था और इसने उत्तरी भारत के एक बड़े हिस्से पर राजनीतिक एकता और उसके साथ आने वाले लाभ लाए। लेकिन इसका मुख्य श्रेय पश्चिम से होने वाले विदेशी आक्रमणों, जुनैद के दिनों से, के खिलाफ सफल प्रतिरोध में निहित है। इसे अरब लेखकों ने खुद स्वीकार किया था। [[लॉर्ड एल्फिन्स्टन|एल्फिन्स्टन]] के दिनों से ही भारत के इतिहासकारों ने मुस्लिम आक्रमणकारियों की धीमी प्रगति पर आश्चर्य व्यक्त किया है, जबकि दुनिया के अन्य हिस्सों में उनकी तेज प्रगति हुई। इस अनूठी घटना को समझाने के लिए अक्सर संदिग्ध वैधता के तर्क दिए गए हैं। अब इसमें कोई संदेह नहीं कि यह गुर्जर प्रतिहार सेना की शक्ति थी जिसने मुस्लिमों की प्रगति को [[सिंध]] की सीमाओं से आगे बढ़ने से रोका, जो उनकी पहली विजय थी और लगभग तीन सौ वर्षों तक बनी रही। बाद की घटनाओं के प्रकाश में, इसे "भारत के इतिहास में गुर्जर प्रतिहारों का मुख्य योगदान" माना जा सकता है।<ref>{{cite book|title=History of Ancient India: Earliest Times to 1000 A. D.|author=राधेश्याम चौरसिया|page=207 to 208|isbn=978-81-269-0027-5|publisher=अटलांटिक प्रकाशक और वितरक|year=2002}}</ref> === राजपूत === {{मुख्य|राजपूत}} '''[[राजपूत]]''' एक हिंदू कुल था जो गंगा के मैदानों से लेकर अफगान पहाड़ों तक फैले क्षेत्र में शक्तिशाली बन कर उभरे थे, और यह शब्द [[सासानी साम्राज्य]] और [[गुप्त राजवंश|गुप्त साम्राज्य]] के पतन के बाद क्षेत्र के कई राज्यों के विभिन्न राजवंशों को संदर्भित करता है और बौद्ध शासक राजवंशों से हिंदू शासक राजवंशों में संक्रमण का प्रतीक है। ==== कटोच राजवंश ==== {{मुख्य|कटोच}} '''[[कटोच]]''' [[चंद्रवंश|चंद्रवंशी]] वंश का एक हिंदू राजपूत वंश था; हाल के शोध से पता चलता है कि कटोच दुनिया के सबसे पुराने शाही राजवंशों में से एक हो सकता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.tribuneindia.com/2009/20091104/himplus.htm#8|title=Dharam Prakash Gupta, "Seminar on Katoch dynasty trail". ''Himachal Plus.'' On line.|archive-url=https://web.archive.org/web/20200102122914/https://www.tribuneindia.com/2009/20091104/himplus.htm#8|archive-date=2 January 2020|access-date=3 January 2017}}</ref> ==== चौहान ==== {{मुख्य|चौहान वंश}} [[चित्र:Prithvi_Raj_Chauhan_(Edited).jpg|अंगूठाकार|212x212पिक्सेल| अजमेर में [[पृथ्वीराज चौहान|पृथ्वी राज चौहान]] की प्रतिमा]] चौहान वंश 8वीं से 12वीं शताब्दी ईस्वी तक फला-फूला। यह उस युग के तीन मुख्य राजपूत वंशों में से एक था, अन्य दो [[गुर्जर-प्रतिहार राजवंश|प्रतिहार]] और [[परमार वंश|परमार]] थे। चौहान वंशों ने [[उत्तर भारत]] के कई स्थानों और पश्चिमी भारत के [[गुजरात]] राज्य में अपनी स्थापना की। वे [[राजपुताना|राजपूताना]] के दक्षिण-पश्चिम में [[सिरोही जिला|सिरोही]] और पूर्व में [[बूंदी]] तथा [[कोटा]] में भी प्रमुख थे। शिलालेख उन्हें सांभर, [[जयपुर राज्य|अंबर]] (बाद में जयपुर) जिले की नमक झील वाली क्षेत्र से भी जोड़ते हैं (साखंबरी शाखा सांभर झील के निकट रही और गुर्जर-प्रतिहार शासकों से वैवाहिक संबंध स्थापित किए, जो उस समय उत्तर भारत में एक साम्राज्य शासित करते थे)। चौहानों ने एक राजनीतिक नीति अपनाई जिसमें वे मुख्यतः चालुक्यों और आक्रमणकारी मुस्लिम सेनाओं के खिलाफ अभियानों में संलग्न रहे। 11वीं शताब्दी में, उन्होंने अपने राज्य के दक्षिणी भाग में अजयमेरु ([[अजमेर]]) शहर की स्थापना की, और 12वीं शताब्दी में, चौहानों ने [[तोमर वंश|तोमरों]] से ढिल्लिका ([[दिल्ली]] का प्राचीन नाम) पर कब्जा कर लिया और [[यमुना नदी]] के किनारे उनके कुछ क्षेत्रों को अपने साम्राज्य में मिला लिया। चौहान राज्य, [[पृथ्वीराज चौहान|राजा पृथ्वीराज तृतीय]] (1165–1192 ईस्वी) के अधीन [[उत्तर भारत]] का प्रमुख साम्राज्य बन गया, जिन्हें पृथ्वीराज चौहान या राय पिथौरा के नाम से भी जाना जाता है। पृथ्वीराज तृतीय लोककथाओं और ऐतिहासिक साहित्य में दिल्ली के चौहान राजा के रूप में प्रसिद्ध हुए हैं, जिन्होंने 1191 में [[तराइन का युद्ध|तराइन के प्रथम युद्ध]] में [[मोहम्मद ग़ोरी|मोहम्मद गौरी]] के आक्रमण का विरोध किया और उसे खदेड़ दिया। [[मेवाड़]] सहित अन्य राजपूत राज्यों की सेनाओं ने उनकी सहायता की। चौहान राज्य का पतन तब हुआ जब पृथ्वीराज और उनकी सेनाएँ 1192 में [[तराइन का द्वितीय युद्ध|तराइन के द्वितीय युद्ध]] में मोहम्मद गौरी से हार गईं।{{R|Hoernle}} ==== कछवाहा ==== {{मुख्य|कछवाहा}} कछवाहा इस क्षेत्र की पूर्ववर्ती शक्तियों के सामंत के रूप में उभरे। कुछ विद्वानों का मानना है कि 8वीं–10वीं शताब्दी में [[कन्नौज]] ([[हर्षवर्धन|हर्ष]] के साम्राज्य के विघटन के बाद क्षेत्रीय सत्ता का केंद्र) के पतन के बाद ही कच्छपघाट राज्य आज के [[मध्य प्रदेश]] के [[चम्बल नदी|चंबल घाटी]] में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरा। ==== परमार ==== {{मुख्य|परमार वंश}} परमार वंश [[मध्यकालीन भारत]] में एक [[राजपूत वंशों एवं राज्यों की सूची|राजपूत वंश]] था जिसने मध्य भारत में [[मालवा]] क्षेत्र पर शासन किया।{{Sfn|Thapar|1990|pp=169–171}} इस राजवंश की स्थापना उपेन्द्र ने लगभग 800 ई. में की थी। इस राजवंश का सबसे महत्वपूर्ण शासक [[परमार भोज|भोज]] था जो एक दार्शनिक राजा और [[बहुज्ञ]] था। परमार साम्राज्य की राजधानी ''धार नगरी'' ( [[मध्य प्रदेश]] राज्य में वर्तमान [[धार]] शहर) थी। ==== सोलंकी (चौलुक्य) ==== {{मुख्य|सोलंकी वंश}} [[चित्र:Sun_Temple_Sabha_Mandap.JPG|दाएँ|अंगूठाकार|200x200पिक्सेल| चालुक्यों द्वारा निर्मित [[मोढेरा सूर्य मंदिर]] ।]] '''सोलंकी''' (जिन्हें चौलुक्य भी कहा जाता है) [[गुजरात]] में एक अन्य राजपूत वंश थे, जिनकी राजधानी अणहिलवाड़ा (वर्तमान [[पाटण, गुजरात|सिद्धपुर पाटन]]) थी। {{Sfn|Thapar|1990|p=170}} [[गुजरात]] [[हिन्द महासागर|हिंद महासागर]] व्यापार का एक प्रमुख केंद्र था और अनहिलवाड़ा भारत के सबसे बड़े शहरों में से एक था, जिसकी अनुमानित जनसंख्या वर्ष 1000 में 100,000 थी। चौलुक्य [[काठियावाड़]] के [[सोमनाथ मन्दिर|सोमनाथ पाटन]] में समुद्रतटीय [[शिव]] के विशाल मंदिर के संरक्षक थे; 1026 में [[महमूद ग़ज़नवी|महमूद गजनवी]] द्वारा मंदिर को लूटे जाने के बाद भीम देव ने इसके पुनर्निर्माण में मदद की थी। उनके पुत्र [[कर्ण प्रथम|कर्ण]] ने [[भील]] राजा आशापल्ल या आशावल पर विजय प्राप्त की और अपनी विजय के बाद [[साबरमती नदी]] के तट पर, आधुनिक [[अहमदाबाद]] के स्थान पर, [[अहमदाबाद|कर्णावती]] नामक शहर की स्थापना की। ==== दिल्ली के तोमर ==== {{मुख्य|तोमर वंश}} दिल्ली के तोमर 9वीं से 12वीं शताब्दी तक एक [[राजपूत वंशों एवं राज्यों की सूची|राजपूत वंश]] थे।{{Sfn|Thapar|1990|pp=168–170}} [[तोमर वंश|दिल्ली के तोमरों]] ने वर्तमान [[दिल्ली]] और [[हरियाणा]] के कुछ हिस्सों पर शासन किया।{{Sfn|Singh|2008|p=571}} इस वंश के बारे में अधिकांश जानकारी कम ऐतिहासिक मूल्य की बार्डिक कथाओं से मिलती है, और इसलिए, उनके इतिहास का पुनर्निर्माण करना कठिन है।{{Sfn|Ganguly|1981|p=704}} बार्डिक परंपरा के अनुसार, इस वंश के संस्थापक [[अनंगपाल तोमर]] ने 736 ईस्वी में [[दिल्ली]] की स्थापना की।{{Sfn|Sen|1999|p=339}} हालाँकि, इस दावे की प्रामाणिकता संदिग्ध है।{{Sfn|Ganguly|1981|p=704}} बार्डिक कथाओं में यह भी कहा गया है कि अंतिम तोमर राजा (जिसका नाम भी अनंगपाल था) ने दिल्ली का सिंहासन अपने नाती पृथ्वीराज चौहान को सौंप दिया। यह दावा भी गलत है: ऐतिहासिक साक्ष्य बताते हैं कि [[पृथ्वीराज चौहान|पृथ्वीराज]] ने दिल्ली अपने पिता [[सोमेश्वर चौहान|सोमेश्वर]] से विरासत में प्राप्त की थी।{{Sfn|Ganguly|1981|p=704}} सोमेश्वर के [[बिजोलिया]] शिलालेख के अनुसार, उनके भाई [[विग्रहराज चौहान|विग्रहराज चतुर्थ]] ने ढिल्लिका (दिल्ली) और आशिका (हांसी) पर कब्जा कर लिया था; संभवतः उन्होंने एक तोमर शासक को पराजित किया था। ==== गहड़वाल राजवंश ==== {{मुख्य|गहड़वाल वंश}} गाहड़वाल वंश ने 11वीं और 12वीं शताब्दी के दौरान वर्तमान [[भारतीय राज्य और केंद्रशासित प्रदेश की नाम व्युत्पत्ति की सूची|भारतीय राज्य]] [[उत्तर प्रदेश]] और [[बिहार]] के कुछ हिस्सों पर शासन किया था। उनकी राजधानी [[गंगा के मैदान|गंगा के मैदानी]] इलाके में [[वाराणसी]] में स्थित थी।{{Sfn|Niyogi|1959|p=38}} === खयारवाल (खैरवाल) === {{मुख्य|खयारवाला राजवंश}} खैरवाल राजवंश ने 11वीं और 12वीं शताब्दी के दौरान वर्तमान [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|भारतीय राज्यों]] [[बिहार]] और [[झारखण्ड|झारखंड]] के कुछ हिस्सों पर शासन किया। उनकी राजधानी [[शाहाबाद जिला|शाहाबाद जिले]] के [[खैरागढ़]] में स्थित थी। [[रोहतास दुर्ग|रोहतास]] के शिलालेख के अनुसार [[प्रतापधवल]] और [[श्री प्रताप]] इस राजवंश के राजा थे।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=7CenDwAAQBAJ&pg=PT41|title=Majestic Monuments of India: Ancient Indian Mega Structures|last=Prabhu|first=T. L.|date=4 August 2019|access-date=25 July 2020}}</ref> [[चित्र:Rohtasgarh_Fort_Entrance.jpg|अंगूठाकार| रोहतासगढ़ किला]] === प्रतिहार === प्रतिहार वर्तमान [[जोधपुर]] के निकट [[मंडोर]] से शासन करते थे, [[चित्तौड़]] के [[गुहिलोत|गुहिलोतों]] से पराजित होने से पहले उनके पास [[राणा]] की उपाधि थी। === पाल === {{मुख्य|पाल वंश}} पाल साम्राज्य एक [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] राजवंश था जिसने [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में शासन किया। पाल ([[बंगाली भाषा|बंगाली]]: পাল) नाम का अर्थ है रक्षक और यह सभी पाल शासकों के नामों के अंत में प्रयुक्त होता था। पाल [[महायान]] और [[वज्रयान|तांत्रिक बौद्ध धर्म]] के अनुयायी थे। [[गोपाल प्रथम]] इस राजवंश के पहले शासक थे। उन्होंने 750 ईस्वी में गौर(अब [[गौड़ (नगर)|गौड़]]) में [[चुनाव|लोकतांत्रिक चुनाव]] के माध्यम से सत्ता प्राप्त की। इस घटना को [[महाजनपद|महा जनपदों]] के समय के बाद [[दक्षिण एशिया]] में पहले लोकतांत्रिक चुनावों में से एक माना जाता है। उन्होंने 750 से 770 ईस्वी तक शासन किया और बंगाल के सभी हिस्सों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर अपनी स्थिति को मजबूत किया। यह [[बौद्ध धर्म|बौद्ध राजवंश]] चार शताब्दियों (750–1120 ईस्वी) तक चला और [[बंगाल]] में स्थिरता और समृद्धि का दौर लाया। उन्होंने कई मंदिरों और कलाकृतियों का निर्माण करवाया तथा [[नालन्दा महाविहार|नालंदा]] और [[विक्रमशिला|विक्रमशिला विश्वविद्यालयों]] को समर्थन दिया। [[धर्मपाल]] द्वारा निर्मित [[सोमपुर महाविहार]] भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा बौद्ध विहार है। [[धर्मपाल]] और [[देवपाल |देवपाल]] के शासनकाल में साम्राज्य अपने चरम पर पहुँचा। धर्मपाल ने साम्राज्य को [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के उत्तरी हिस्सों तक विस्तारित किया। जिसके कारण एक बार फिर उपमहाद्वीप पर नियंत्रण के लिए शक्ति संघर्ष देखने को मिला। धर्मपाल के उत्तराधिकारी देवपाल ने साम्राज्य का विस्तार [[दक्षिण एशिया]] और उससे आगे तक किया। उनका साम्राज्य पूर्व में [[असम]] और [[उत्कल]] से लेकर उत्तर-पश्चिम में [[कंबोज]] (आधुनिक अफगानिस्तान) और दक्षिण में [[दक्कन का पठार|दक्कन]] तक फैला था। पाल ताम्रपत्र अभिलेख के अनुसार, देवपाल ने उत्कलों का विनाश किया, [[प्राग्ज्योतिष साम्राज्य|प्राग्ज्योतिष]] (असम) को जीता, [[हूण लोग|हूणों]] के अहंकार को चूर-चूर किया, और [[गुर्जरदेश|गुर्जरों]] ([[गुर्जर-प्रतिहार राजवंश|गुर्जर-प्रतिहारों]]) और [[द्रविड़|द्रविड़ों]] के स्वामियों को नतमस्तक किया। देवपाल की मृत्यु के साथ ही पाल साम्राज्य के उत्कर्ष का काल समाप्त हो गया और इस दौरान कई स्वतंत्र राजवंश और राज्य उभरे। हालाँकि, [[महिपाल|महिपाल प्रथम]] ने पालों के शासन को पुनर्जीवित किया। उन्होंने बंगाल पर पुनः नियंत्रण स्थापित किया और साम्राज्य का विस्तार किया। उन्होंने [[राजेंद्र चोल]] और [[चालुक्य राजवंश|चालुक्यों]] के आक्रमणों को झेला। महिपाल प्रथम के बाद पाल राजवंश का पतन फिर से शुरू हुआ, जब तक कि [[रामपाल]], इस राजवंश के अंतिम महान शासक, ने कुछ हद तक राजवंश की स्थिति को पुनः प्राप्त करने में सफलता हासिल की। उन्होंने वंदेर विद्रोह को कुचला और अपने साम्राज्य को [[कामरूप]], [[ओडिशा]] और [[उत्तरी भारत]] तक विस्तारित किया। पाल साम्राज्य को [[बंगाल]] का स्वर्ण युग माना जा सकता है। पालों ने [[तिब्बत]], [[भूटान]] और [[म्यांमार]] में [[महायान बौद्ध धर्म]] की शुरुआत की थी। पालों का दक्षिण-पूर्व एशिया में व्यापक व्यापार और प्रभाव था। यह [[शैलेन्द्र राजवंश|शैलेन्द्र साम्राज्य]] (वर्तमान [[मलाया]], [[जावा]], [[सुमात्रा]]) की मूर्तियों और वास्तुशिल्प शैली में देखा जा सकता है। === मिथिला के कर्नाट === {{मुख्य|कर्नाट वंश}} 1097 ई. में, मिथिला के [[कर्नाट वंश|कर्नाट राजवंश]] का उदय [[बिहार]]/[[नेपाल]] सीमा क्षेत्र में हुआ और उन्होंने [[दरभंगा]] और [[सिमराँवगढ़ (सिमरौनगढ़)|सिमरांवगढ़]] में राजधानियाँ बनाए रखीं। इस राजवंश की स्थापना कर्नाटक मूल के एक सैन्य कमांडर [[नान्यदेव]] ने की थी। इस राजवंश के तहत [[मैथिली भाषा|मैथिली]] भाषा का विकास शुरू हुआ और मैथिली भाषा का पहला साहित्य, ''वर्ण रत्नाकर'' 14वीं शताब्दी में ज्योतिरीश्वर ठाकुर द्वारा लिखा गया। कर्नाट ने [[नेपाल]] में भी धावे बोले। 1324 में [[गयासुद्दीन तुग़लक़|गयासुद्दीन तुगलक]] के आक्रमण के साथ ही उनका पतन हो गया।<ref>{{Cite journal|last=Sinha|first=CPN|date=1969|title=Origin of the Karnatas of Mithila - A Fresh Appraisal|journal=Proceedings of the Indian History Congress|volume=31|pages=66–72|jstor=44138330}}</ref> === चन्द्र === {{मुख्य|चन्द्र राजवंश}} '''चन्द्र राजवंश''' जो पूर्वी [[बंगाल]] पर शासन करता था और [[पाल वंश|पालों]] के समकालीन थे। === पूर्वी गंग === {{मुख्य|पूर्वी गंगवंश}} पूर्वी गंग वंश के शासकों ने 11वीं शताब्दी से 15वीं शताब्दी के आरंभ तक [[कलिंग]] पर शासन किया, जिसमें आधुनिक भारतीय राज्य [[ओडिशा]], [[पश्चिम बंगाल]], [[झारखंड]], [[छत्तीसगढ़]], [[मध्य प्रदेश]] और [[आंध्र प्रदेश]] के कुछ हिस्से शामिल थे। उनकी राजधानी कलिंगनगर के नाम से जानी जाती थी, जो आज [[आंध्र प्रदेश]] के [[श्रीकाकुलम जिला|श्रीकाकुलम]] जिले में ओडिशा की सीमा पर स्थित [[मुखलिंगम|श्रीमुखलिंगम]] है। आज उन्हें [[कोणार्क]], ओडिशा में [[विश्व धरोहर स्थल]] [[कोणार्क सूर्य मंदिर]] के निर्माताओं के रूप में याद किया जाता है। इसका निर्माण राजा [[नरसिंह देव प्रथम|नरसिंहदेव प्रथम]] (1238–1264 ईस्वी) ने करवाया था। उनके शासनकाल (1078–1434 ईस्वी) में मंदिर वास्तुकला की एक नई शैली का उदय हुआ, जिसे आमतौर पर भारतीय-आर्य वास्तुकला कहा जाता है। इस वंश की स्थापना राजा [[अनन्तवर्मन चोडगंग|अनंतवर्मा चोडगंगा देव]] (1078–1147 ईस्वी) ने की थी। वह एक धार्मिक व्यक्ति और कला एवं साहित्य के संरक्षक थे। उन्हें ओडिशा के [[पुरी]] में प्रसिद्ध [[जगन्नाथ मन्दिर, पुरी|जगन्नाथ मंदिर]] के निर्माण का श्रेय दिया जाता है। राजा अनंतवर्मन चोडगंगदेव के बाद [[नरसिंह देव प्रथम|नरसिंहदेव प्रथम]] (1238–1264 ईस्वी) जैसे प्रतिष्ठित शासकों की एक लंबी श्रृंखला आई। पूर्वी गंग वंश के शासकों ने न केवल उत्तर और दक्षिण भारत के मुस्लिम शासकों के निरंतर हमलों से अपने राज्य की रक्षा की, बल्कि संभवतः उन कुछ साम्राज्यों में से एक थे जिन्होंने अपने मुस्लिम विरोधियों पर सफलतापूर्वक आक्रमण कर उन्हें हराया। पूर्वी गंग राजा नरसिंह देव प्रथम ने बंगाल के मुस्लिम राज्य पर आक्रमण किया और सुल्तान को भारी हार दी। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि लगभग एक शताब्दी तक सल्तनत ने गंग सम्राटों के क्षेत्रों पर कभी अतिक्रमण नहीं किया। उनकी सैन्य उपलब्धियाँ आज भी ओडिशा में लोककथाओं के रूप में जीवित हैं। यह राज्य व्यापार और वाणिज्य के माध्यम से समृद्ध हुआ और धन का अधिकांश हिस्सा मंदिरों के निर्माण में खर्च किया गया। 15वीं शताब्दी के आरंभ में राजा भानुदेव चतुर्थ (1414–1434 ईस्वी) के शासनकाल में इस वंश का शासन समाप्त हो गया। === सेन === {{मुख्य|सेन राजवंश}} पालों के बाद [[सेन राजवंश]] आया जिसने 12वीं शताब्दी में [[बंगाल]] को एक शासन के अधीन लाया। इस वंश के दूसरे शासक [[विजय सेन]] ने अंतिम [[पाल वंश|पाल सम्राट]] [[मदनपाल]] को हराकर अपना शासन स्थापित किया। [[बल्लाल सेन]] ने बंगाल में [[कुलीन प्रथा]] की शुरुआत की और [[नवद्वीप]] को राजधानी बनाया। इस वंश के चौथे राजा [[लक्ष्मण सेन]] ने साम्राज्य का विस्तार बंगाल से आगे बिहार, असम, उत्तरी ओडिशा और संभवतः [[वाराणसी]] तक किया। लक्ष्मण को बाद में मुसलमानों से हार का सामना करना पडा और वह पूर्वी बंगाल भाग गया जहाँ उसने कुछ और वर्षों तक शासन किया। सेन वंश ने [[हिन्दू धर्म|हिंदू धर्म]] के पुनरुत्थान को बढ़ावा दिया और भारत में [[संस्कृत साहित्य]] का विकास किया। === वर्मन === '''वर्मन राजवंश''' (कामरूप के [[वर्मन राजवंश]] से भ्रमित न हों) ने पूर्वी [[बंगाल]] पर शासन किया और वे [[सेन राजवंश|सेनों]] के समकालीन थे। == पूर्वोत्तर == === कामरूप === '''कामरूप''', जिसे '''प्रागज्योतिष''' भी कहा जाता है, [[दावका साम्राज्य|दावका]] के साथ [[असम]] के ऐतिहासिक राज्यों में से एक था, दावका (नौगोंग) और कामरूप अलग और मित्रवत राज्यों के रूप में थे।{{R|sharma 2005|p=248}} यह 350 से 1140 ईस्वी तक अस्तित्व में था। वर्तमान [[गुवाहाटी]], उत्तरी गुवाहाटी और [[तेज़पुर]] में अपनी राजधानियों से तीन राजवंशों द्वारा शासित, यह अपनी शीर्ष पर पूरी [[ब्रह्मपुत्र घाटी]], [[उत्तर बंगाल|उत्तरी बंगाल]], [[भूटान]] और [[बांग्लादेश]] के कुछ हिस्सों और कभी-कभी [[पश्चिम बंगाल]] और [[बिहार]] के कुछ हिस्सों को कवर करता था। ==== वर्मन ==== {{मुख्य|वर्मन राजवंश}} [[वर्मन राजवंश]] (350-650 ई.), [[कामरूप]] का पहला ऐतिहासिक शासक; [[समुद्रगुप्त]] के समकालीन [[पुष्यवर्मन]] द्वारा स्थापित किया गया था। जहां पुष्यवर्मन गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त का समकालीन था, वही भास्करवर्मन कन्नौज के हर्षवर्धन के समकालीन था। यह राजवंश [[गुप्त राजवंश|गुप्त साम्राज्य]] के अधीनस्थ हो गया, लेकिन जैसे ही गुप्तों की शक्ति क्षीण हुई, [[महेंद्रवर्मन (वर्मन राजवंश)|महेंद्रवर्मन]] (470-494 ई.) ने दो [[अश्वमेध यज्ञ|अश्वमेध]] किये और स्वतंत्र हो गए। कामरूप के तीन राजवंशों में से पहले वर्मन उनके बाद [[म्लेच्छ राजवंश|म्लेच्छ]] और फिर [[पाल राजवंश (कामरूप)|पाल]] राजवंश आए। ==== म्लेच्छ ==== {{मुख्य|म्लेच्छ राजवंश}} [[म्लेच्छ राजवंश|म्लेच्छ वंश]] ने वर्मन वंश का स्थान लिया और 10वीं शताब्दी के अंत तक शासन किया। वे हररूपेश्वर ([[तेज़पुर|तेजपुर]]) के आसपास स्थित अपनी राजधानी से शासन करते थे। यहाँ के शासक आदिवासी थे, जिनका वंश [[नरकासुर]] से था। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार इस राजवंश में दस शासक थे। कामरूप में म्लेच्छ वंश के बाद पाल राजाओं का शासन आया। [[चित्र:Assam_MK_Lion.JPG|दाएँ|अंगूठाकार|200x200पिक्सेल| शक्तिशाली [[पाल राजवंश (कामरूप)|कामरूप-पलास]], [[मदन कामदेव]] का प्रतिनिधित्व करने वाली 9वीं-10वीं शताब्दी की शेर की मूर्ति]] ==== पाल (कामरूप) ==== [[पाल राजवंश (कामरूप)|कामरूप के पाल राजवंश]] म्लेच्छ वंश के उत्तराधिकारी बने, जिसने अपनी राजधानी दुर्जय ([[गुवाहाटी|उत्तरी गौहाटी]]) से शासन किया। राजवंश 12वीं सदी के अंत तक शासन करता रहा। [[ब्रह्मपाल]] (900-920 ई.पू.), पाल वंश (कामरूप) (900-1100 ई.) के संस्थापक थे। राजवंश ने अपनी राजधानी दुर्जय (आधुनिक [[गुवाहाटी|उत्तरी गुवाहाटी)]] से शासन किया। पाल राजाओं में सबसे महान, [[धर्मपाल (कामरूप)|धर्मपाल]] की राजधानी कामरूप नगर में थी, जिसे अब [[गुवाहाटी|उत्तरी गुवाहाटी]] के रूप में जाना जाता है। [[रत्नपाल (कामरूप)|रत्नपाल]] इस वंश का एक अन्य उल्लेखनीय शासक था। उनके भूमि-अनुदान के अभिलेख बड़गांव और [[सुआलकुची]] में पाए गए हैं, जबकि इंद्र पाल के लिये वैसे ही अभिलेख गुवाहाटी में पाये गये है। पाल वंश का अंत जयपाल (1075-1100 ई.) के साथ हुआ।<ref>{{Cite book|title=Readings in the history & culture of Assam|last=Samiti|first=Kamarupa Anusandhana|publisher=Kamarupa Anusandhana Samiti|year=1984|pages=227}}</ref> === त्विप्रा === प्राचीन [[त्रिपुरा]] पर '''त्विप्रा साम्राज्य''' का शासन था। यह राज्य आज के मध्य बांग्लादेश क्षेत्र में [[ब्रह्मपुत्र नदी]] और [[मेघना नदी|मेघना]] और [[सुरमा नदी|सुरमा नदियों]] के संगम के आसपास स्थापित हुआ था। इसकी राजधानी का नाम खोरोंगमा था और यह वर्तमान बांग्लादेश के [[सिलहट]] डिवीजन में मेघना नदी के किनारे स्थित थी। == दक्कन का पठार और दक्षिण == सहस्राब्दी के प्रथम अर्द्ध में दक्षिण में विभिन्न छोटे-छोटे राज्यों का उदय और पतन हुआ, जो अधिकतर गंगा के मैदानों में उथल-पुथल और भारत के दक्षिणी छोर तक [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] और [[जैन धर्म]] के प्रसार से स्वतंत्र थे। सातवीं शताब्दी के मध्य से लेकर 13वीं शताब्दी के मध्य तक, [[क्षेत्रवाद]] भारतीय उपमहाद्वीप के राजनीतिक और राजवंशीय इतिहास का प्रमुख विषय था। इस अवधि की सामाजिक-राजनीतिक वास्तविकताओं को सामान्यतः तीन विशेषताओं द्वारा दर्शाया गया है। * प्रथम, ब्राह्मणवादी धर्मों का प्रसार एक दोतरफा प्रक्रिया थी - स्थानीय पंथों का संस्कृतीकरण और ब्राह्मणवादी सामाजिक व्यवस्था का स्थानीयकरण। * दूसरा, ब्राह्मण पुरोहित और भूस्वामी समूहों का प्रभुत्व था, जिन्होंने बाद में क्षेत्रीय संस्थाओं और राजनीतिक विकास पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया। * तीसरा, अनेक राजवंशों के बीच उतार-चढ़ाव के कारण, जिनमें बारहमासी सैन्य हमलों से बचने की उल्लेखनीय क्षमता थी, क्षेत्रीय राज्यों को बार-बार हार का सामना करना पड़ा, लेकिन शायद ही कभी उनका सम्पूर्ण विनाश हुआ। 8वीं शताब्दी के दौरान भारतीय प्रायद्वीपीय, [[चालुक्य राजवंश|चालुक्यों]] (556–757 ईस्वी), कांचीपुरम के [[पल्लव राजवंश|पल्लवों]] (300–888 ईस्वी) और [[पाण्ड्य राजवंश|पांड्यों]] के बीच त्रिपक्षीय शक्ति संघर्ष में फसा हुआ था। चालुक्य शासकों को उनके अधीनस्थों, [[राष्ट्रकूट राजवंश|राष्ट्रकूटों]] (753–973 ईस्वी) ने उखाड़ फेंका। हालांकि पल्लव और पांड्य दोनों के बीच शत्रुता थी, परंतु राजनीतिक प्रभुत्व के लिए वास्तविक संघर्ष पल्लव और चालुक्यों के बीच था। [[राष्ट्रकूट राजवंश|राष्ट्रकूटों]] का उदय [[दक्षिण भारत का इतिहास|दक्षिण भारत के इतिहास]] में एक नए युग की शुरुआत थी। दक्षिण भारतीय राज्यों ने अब तक केवल [[नर्मदा नदी]] तक और उसके दक्षिण में ही शासन किया था। राष्ट्रकूट ही पहले थे जिन्होंने उत्तर की ओर [[गंगा के मैदान|गंगा के मैदानों]] तक विस्तार किया और [[पाल वंश|बंगाल के पालों]] तथा गुजरात के [[गुर्जर-प्रतिहार राजवंश|राजपूत प्रतिहारों]] के विरुद्ध अपनी शक्ति का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया। अंतरक्षेत्रीय संघर्षों के बावजूद, दक्षिण में स्थानीय स्वायत्तता कहीं अधिक हद तक बनी रही, जहाँ यह सदियों से प्रचलित थी। अत्यधिक केंद्रीकृत सरकार के अभाव का संबंध गाँवों और जिलों के प्रशासन में संगत स्थानीय स्वायत्तता से था। पश्चिमी तट पर [[अरब लोग|अरबों]] के साथ और [[दक्षिण पूर्व एशिया]] के साथ व्यापक और सुव्यवस्थित स्थल एवं समुद्री व्यापार फला-फूला। व्यापार ने दक्षिण पूर्व एशिया में सांस्कृतिक प्रसार को सुगम बनाया, जहाँ स्थानीय अभिजात वर्ग ने चुनिंदा परंतु स्वेच्छा से भारतीय कला, वास्तुकला, साहित्य और सामाजिक रीति-रिवाजों को अपनाया। अंतरवंशीय प्रतिद्वंद्विता और एक-दूसरे के क्षेत्र में मीयादी छापेमारी के बावजूद, [[दक्कन का पठार|दक्कन]] और दक्षिण भारत के शासकों ने तीनों धर्मों - बौद्ध धर्म, हिंदू धर्म और जैन धर्म - को संरक्षण दिया। धर्म एक-दूसरे से राजकीय अनुग्रह के लिए प्रतिस्पर्धा करते थे, जिसमें भूमि अनुदानों शामिल होता था परंतु अधिक महत्वपूर्ण रूप से स्मारकीय मंदिरों के निर्माण में, जो आज भी वास्तुकला के अजूबे हैं। [[एलीफेंटा द्वीप]] (मुंबई या बॉम्बे के निकट, जैसा कि इसे पहले जाना जाता था), [[अजंता गुफाएँ|अजंता]] और [[एलोरा गुफाएं|एलोरा]] (महाराष्ट्र में) के गुफा मंदिर, और कर्नाटक में [[पट्टदकल्लु मन्दिर परिसर|पट्टदकल]], [[ऐहोले]], [[बादामी गुफा मंदिर|बादामी]] तथा तमिलनाडु में [[महाबलिपुरम के तट मन्दिर|महाबलिपुरम]] और [[कांचीपुरम]] के संरचनात्मक मंदिर, युद्धरत क्षेत्रीय शासकों की स्थायी विरासत हैं। 7वीं शताब्दी के मध्य तक, [[शैव]] और [[वैष्णव सम्प्रदाय|वैष्णव]] जैसे संप्रदायिक हिंदू भक्ति आंदोलनों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा और जनसमर्थन से [[बौद्ध धर्म]] और [[जैन धर्म]] का पतन होने लगा। हालांकि [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] दक्षिण भारत में सीखने और धर्मशास्त्र की भाषा थी, जैसा कि उत्तर में थी, [[भक्ति]] आंदोलनों के विकास ने द्रविड़ भाषाओं: [[कन्नड़ भाषा|कन्नड़]] और [[तमिल भाषा|तमिल]] में स्थानीय साहित्य को बढ़ावा दिया; इन्होंने अक्सर संस्कृत से विषय और शब्दावली प्रेरणा स्वरूप ली परंतु बहुत सी स्थानीय सांस्कृतिक जानकारी को संरक्षित रखा। [[तमिल साहित्य]] के उदाहरणों में दो प्रमुख कविताएँ शामिल हैं, [[शिलप्पदिकारम]] और [[मणिमेकलई]]; शैव और वैष्णव भक्ति साहित्य का संग्रह - हिंदू भक्ति आंदोलन; और 12वीं शताब्दी में कंबन द्वारा [[रामायण]] का पुनर्लेखन। दक्षिण एशिया के विभिन्न क्षेत्रों में न्यूनतम सामान्य विशेषताओं के साथ एक राष्ट्रव्यापी सांस्कृतिक संश्लेषण हो चुका था, परंतु सांस्कृतिक संचार और आत्मसात्करण की प्रक्रिया सदियों तक भारत के इतिहास को आकार देती और प्रभावित करती रही। ===संगम युग के राज्य=== {{मुख्य|संगमयुग||तमिलकम}} दक्षिण में तीन प्राचीन तमिल राज्य थे — [[चेर राजवंश|चेर]] (पश्चिम में), [[चोल राजवंश|चोल]] (पूर्व में), और [[पाण्ड्य राजवंश|पांड्य]] (दक्षिण में)। ये क्षेत्रीय प्रभुत्व के लिए आपसी संघर्ष में लिप्त थे। यूनानी और अशोक के स्रोतों में इन्हें मौर्य साम्राज्य के अलावा अन्य महत्वपूर्ण भारतीय राज्यों के रूप में उल्लेखित किया गया है। प्राचीन [[तमिल साहित्य]] का एक संग्रह, जिसे [[संगम साहित्य|संगम]] (अकादमी) कृतियों के नाम से जाना जाता है, 300 ईसा पूर्व से 200 ईस्वी तक के युग में इन राज्यों के जीवन के बारे में बहुत उपयोगी जानकारी प्रदान करता है। तमिल सामाजिक व्यवस्था विभिन्न पारिस्थितिक क्षेत्रों पर आधारित थी। समाज के वर्गों की विशेषताएँ [[मातृतंत्र|मातृसत्ता]] और मातृवंशीय उत्तराधिकार (जो 19वीं शताब्दी तक कायम रहा), चचेरे भाई-बहनों का आपसी विवाह और मजबूत क्षेत्रीय पहचान थीं। जैसे-जैसे लोग पशुपालन से कृषि की ओर बढ़े, जो नदियों, तालाब और कुओं पर आधारित सिंचाई के साथ फले-फुले, साथ ही रोम और दक्षिणपूर्व एशिया के साथ समुद्री व्यापार से जनजातीय सरदार "राजाओं" के रूप में उभरे। दक्षिण भारत के विभिन्न स्थलों से प्राप्त [[रोम गणतंत्र|रोमन]] स्वर्ण मुद्राओं से उसकी बाहरी दुनिया के साथ के व्यापक संबंधों को पुष्टि करती हैं। उत्तरपूर्व में [[पाटलिपुत्र]] और उत्तरपश्चिम में [[तक्षशिला]] (आधुनिक पाकिस्तान में) की तरह, [[मदुरई]] शहर, [[पांड्य साम्राज्य]] की राजधानी (आधुनिक तमिलनाडु में), बौद्धिक और साहित्यिक गतिविधियों का केंद्र था। कवि और भाट वहाँ राजकीय संरक्षण में एकत्र होते थे और क्रमिक सभाओं में कविताओं के संग्रह और तमिल व्याकरण पर प्रबंध रचते थे। पहली शताब्दी ईसा पूर्व के अंत तक, दक्षिण एशिया में व्यापार मार्गों का जाल बिछ चुका था, जिसने बौद्ध और जैन धर्म प्रचारको तथा अन्य यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाया और इस क्षेत्र को कई संस्कृतियों के संश्लेषण के लिए खोल दिया। === चेर राज्य === {{मुख्य|चेर राजवंश}} प्रागैतिहासिक काल से ही, [[केरल]] और [[तमिलनाडु]] चेर, [[चोल राजवंश|चोल]], [[पाण्ड्य राजवंश|पांड्य]] और [[पल्लव राजवंश|पल्लवों]] के चार तमिल-मलयालम राज्यों के घर थे। 300 ईसा पूर्व से 600 ईस्वी के बीच की सबसे पुरानी उपलब्ध साहित्यिक कृतियों में राजाओं और राजकुमारों के शौर्य और उनकी प्रशंसा करने वाले कवियों का उल्लेख मिलता है। चेर, जो [[मलयालम भाषा]] बोलते थे, [[कुट्टनाड]], [[मुज़िरिस]], [[करूर]] से शासन करते थे और पश्चिम एशियाई राज्यों के साथ व्यापक व्यापार करते थे। 4वीं से 7वीं शताब्दी के बीच [[कलाभ्र राजवंश|कलाभ्र]] नामक एक अज्ञात वंश ने आक्रमण कर तीनों [[तमिलकम|तमिल राज्यों]] को विस्थापित कर दिया। इसे [[तमिल]] इतिहास में अंधकार युग कहा जाता है। अंततः [[पल्लव राजवंश|पल्लवों]] और [[पाण्ड्य राजवंश|पांड्यों]] ने उन्हें खदेड़ दिया। === कलाभ्र === {{मुख्य|कलाभ्र राजवंश}} उनके उद्गम या शासनकाल के बारे में बहुत कम जानकारी है, सिवाय इसके कि वे तीसरी से 6ठी शताब्दी तक भारत के दक्षिणी छोर पर [[संगम काल|संगम युग]] के राज्यों को पराजित कर शासन करते थे। ऐसा प्रतीत होता है कि वे [[जैन धर्म|जैन]] और [[बौद्ध धर्म]] के संरक्षक थे, क्योंकि उनके बारे में जानकारी का एकमात्र स्रोत उस समय की बौद्ध और [[जैन साहित्य|जैन साहित्यिक]] कृतियों में यहां-वहां उल्लेख हैं। वे [[कदंब राजवंश|कदंब]] और [[पश्चिम गंग वंश|पश्चिमी गंग वंश]] के समकालीन थे। पल्लवों के उदय और पांड्य साम्राज्य के पुनरुत्थान से उनका पतन हो गया। === कदम्ब === {{मुख्य|कदम्ब राजवंश}} कदंब वंश (कन्नड़: ಕದಂಬರು) (345–525 ईस्वी) [[कर्नाटक]] का एक प्राचीन शाही परिवार था जो वर्तमान [[उत्तर कन्नड़ जिला|उत्तर कन्नड़]] जिले के [[बनवासी, कर्नाटक|बनवासी]] से शासन करते थे। यह वंश बाद में [[कन्नड़]] साम्राज्यों, [[चालुक्य राजवंश|चालुक्य]] और राष्ट्रकूट साम्राज्यों के सामंत के रूप में पाँच सौ वर्षों तक शासन करता रहे, इस दौरान उनकी शाखाएँ [[गोवा]] और [[हंगल]] तक फैल गईं। राजा काकुश्तवर्मा के शासनकाल में अपने शक्ति के चरम के दौरान, उन्होंने कर्नाटक के बड़े हिस्से पर शासन किया। कदंब के पूर्व युग में कर्नाटक पर शासन करने वाले वंश — [[मौर्य राजवंश|मौर्य]], [[सातवाहन]] और [[चुटु राजवंश|चुटु]] — इस क्षेत्र के मूल निवासी नहीं थे और शक्ति का केंद्र आधुनिक कर्नाटक से बाहर था। कदंब प्रशासनिक स्तर पर [[कन्नड़ भाषा]] का उपयोग करने वाले पहले स्वदेशी वंश थे। [[कर्नाटक का इतिहास|कर्नाटक के इतिहास]] में, यह युग एक व्यापक ऐतिहासिक आधार प्रदान करता है, जिसमें इस क्षेत्र के एक स्थायी भौगोलिक-राजनीतिक इकाई और [[कन्नड़ भाषा]] के एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय भाषा के विकास का अध्ययन किया जाता है। इस राजवंश की स्थापना [[मयूरशर्मा]] ने 345 में की थी, इस दौरान साम्राज्यिक विस्तार देखने को मिलता है, जिसका संकेत इसके शासकों द्वारा धारण किए गए उपाधियों से मिलता है। उनके उत्तराधिकारियों में से एक, [[काकुस्थवर्मा]] एक शक्तिशाली शासक था और यहाँ तक कि उत्तरी भारत के [[गुप्त राजवंश|गुप्त साम्राज्य]] के राजाओं ने भी उनके परिवार के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित किए, जो उनके राज्य की संप्रभु प्रकृति का स्पष्ट संकेत देता है। अंतहीन युद्धों और रक्तपात से थककर, बाद के वंशजों में से एक, राजा शिवकोटि ने जैन धर्म अपना लिया। कदंब तालकाड़ के [[पश्चिम गंग वंश|पश्चिमी गंग राजवंश]] के समकालीन थे और साथ मिलकर उन्होंने पूर्ण स्वायत्तता के साथ इस भूमि पर शासन करने वाले सबसे प्रारंभिक स्वदेशी राज्यों का गठन किया। === पश्चिमी गंग === {{मुख्य|पश्चिम गंग वंश}} पश्चिमी गंग वंश (350–1000 ईस्वी) ([[कन्नड़ भाषा|कन्नड़]]: ಪಶ್ಚಿಮ ಗಂಗ ಸಂಸ್ಥಾನ) भारत के प्राचीन [[कर्नाटक]] का एक महत्वपूर्ण शासक वंश था। उन्हें [[पूर्वी गंगवंश|पूर्वी गंग वंशो]] से अलग करने के लिए पश्चिमी गंग के नाम से जाना जाता है, जिन्होंने बाद की शताब्दियों में आधुनिक [[ओडिशा]] पर शासन किया। सामान्य मान्यता यह है कि, जब दक्षिण भारत के [[पल्लव वंश]] के कमजोर होने के कारण कई स्थानीय कबीलों ने अपनी स्वतंत्रता का दावा किया, तब पश्चिमी गंग वंश का उत्थान हुआ, इस भू-राजनीतिक घटना को कभी-कभी [[समुद्रगुप्त]] की दक्षिणी विजयों से भी जोड़ा जाता है। पश्चिमी गंग की संप्रभुता लगभग 350 से 550 ईस्वी तक रही, जिसमें उन्होंने शुरू में [[कोलार]] से शासन किया और बाद में अपनी राजधानी को आधुनिक [[मैसूर जिला|मैसूर जिले]] में [[कावेरी नदी]] के तट पर [[तालकाड़]] स्थानांतरित कर दिया। बादामी के साम्राज्यवादी [[चालुक्य राजवंश|चालुक्य वंश]] के उदय के बाद, गंगाओं ने चालुक्यों की अधीनता स्वीकार कर ली और कांचीपुरम के [[पल्लव राजवंश|पल्लवों]] के खिलाफ, चालुक्यों के लिए लड़ाई लड़ी। 753 ईस्वी में दक्कन में प्रमुख शक्ति के रूप में चालुक्यों का स्थान मान्यखेट के [[राष्ट्रकूट राजवंश|राष्ट्रकूटों]] ने ले लिया। स्वायत्तता के लिए एक सदी के संघर्ष के बाद, पश्चिमी गंगाओं ने अंततः राष्ट्रकूटों की अधीनता स्वीकार कर ली और तंजावुर के [[चोल राजवंश|चोल वंश]] के खिलाफ उनके साथ मिलकर सफलतापूर्वक लड़ाई लड़ी। 10वीं शताब्दी के अंत में, [[तुंगभद्रा नदी]] के उत्तर में, राष्ट्रकूटों का स्थान उभरते [[पश्चिमी चालुक्य साम्राज्य]] ने ले लिया और कावेरी के दक्षिण में चोलो का पुनरुत्थान हुआ। 1000 ईस्वी के आसपास चोलों द्वारा पश्चिमी गंगाओं की हार के परिणामस्वरूप इस क्षेत्र पर गंग वंश के प्रभाव का अंत हो गया। हालांकि क्षेत्रफल में एक छोटा सा राज्य होने के बावजूद, पश्चिमी गंगाओं का आधुनिक दक्षिण कर्नाटक क्षेत्र की राजनीति, संस्कृति और साहित्य में योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है। पश्चिमी गंगा राजाओं ने सभी धर्मों के प्रति उदार सहिष्णुता दिखाई, लेकिन वे जैन धर्म के संरक्षण के लिए सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं, जिसके परिणामस्वरूप [[श्रवणबेलगोला]] और [[पंचकुटा बसदी - कंबदाहल्ली|कंबदाहल्ली]] जैसे स्थानों पर स्मारकों का निर्माण हुआ। इस वंश के राजाओं ने ललित कलाओं को प्रोत्साहित किया, जिसके कारण [[कन्नड़ साहित्य|कन्नड़]] और [[संस्कृत साहित्य]] फला-फूला। [[चवुंडाराया]] द्वारा 978 ईस्वी में लिखित 'चावुंडराय पुराण' कन्नड़ गद्य में एक महत्वपूर्ण कृति है। धार्मिक विषयों से लेकर हाथी प्रबंधन तक के विषयों पर कई लेख लिखे गए। === बादामी चालुक्य === {{मुख्य|चालुक्य राजवंश}} {{इन्हें भी देखें|चाल्लुक्य कला|पट्टदकल्लु|बादामी गुफा मंदिर|ऐहोले का दुर्गा मंदिर|महाकूट मन्दिर समूह}} [[चालुक्य साम्राज्य]], जो कर्नाटक के [[ऐहोले]] और [[बादामी, कर्नाटक|बादामी क्षेत्र]] के मूल निवासी थे, शुरू में [[कदम्ब राजवंश|कदम्बों]] के सामंत थे।{{sfn|Kamath|1980|pp=[https://archive.org/details/a-concise-history-of-karnataka-from-pre-historic-times-to-the-present/page/62/mode/2up 62–63]}}{{sfn|Keay|2000|p=168}} [[पुलकेशिन प्रथम]] के पूर्वज जयसिंह और रणराग ने कदंबों के अधीन बादामी प्रांत में प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्य किया।<ref>Moraes (1931). p. 51</ref>{{sfn|Thapar|2003|p=328}}{{sfn|Sen|1999|loc=p. 360: "वे कर्नाटक देश के थे और उनकी मातृभाषा कन्नड़ थी."}}{{sfn|Kamath|1980|p=58}} उन्होंने अपने प्रशासन में संस्कृत भाषा के अलावा कन्नड़ के उपयोग को भी प्रोत्साहित किया। छठी शताब्दी के मध्य में चालुक्यों ने अपनी पहचान बनाई जब पुलकेशिन प्रथम ने बादामी में पहाड़ी किले को अपनी शक्ति का केंद्र बनाया।{{sfn|Sen|1999|p=360}} [[पुलकेशिन द्वितीय]] के शासनकाल के दौरान दक्षिण भारतीय साम्राज्य ने पहली बार [[ताप्ती नदी]] और [[नर्मदा नदी]] के पार उत्तर की ओर अभियान भेजे और उत्तरी भारत (उत्तरपथेश्वर) के राजा हर्षवर्धन को सफलतापूर्वक चुनौती दी। पुलकेशिन द्वितीय का ऐहोले शिलालेख, जो 634 ईस्वी में शास्त्रीय संस्कृत भाषा और पुरानी कन्नड़ लिपि में लिखा गया है,{{efn|इस रचना में कवि स्वयं को भारवि और कालिदास जैसे संस्कृत विद्वानों के समकक्ष मानता है.{{sfn|Sastri|1958|p=312}} }}{{sfn|Kamath|1980|p=59}} कदंबों, पश्चिमी गंगाओं, दक्षिण कनारा के [[अलूपा राजवंश|अलुपाओं]], [[कोंकण के मौर्य|पुरी के मौर्यों]], [[कोशल|कोसल राज्य]], [[मालवा]], [[लाट]] और दक्षिणी राजस्थान के [[गुर्जर-प्रतिहार राजवंश|गुर्जरों]] के खिलाफ उनकी विजयों की घोषणा करता है। शिलालेख में वर्णित है कि कैसे कन्नौज के [[हर्षवर्धन|राजा हर्ष]] ने पुलकेशिन द्वितीय के खिलाफ युद्ध में अपने बड़ी संख्या में युद्ध हाथियों को मरते देखकर अपना हर्ष (आनंदमय स्वभाव) खो दिया।{{sfn|Keay|2000|p=169}}{{sfn|Sen|1999|pp=361–362}}{{sfn|Kamath|1980|pp=59–60}}{{efn|इनमें से कुछ राज्यों ने कन्नौज के राजा हर्षवर्धन के भय से आत्मसमर्पण कर दिया होगा।{{sfn|Kamath|1980|loc=p. 59, citing Majumdar}} कोसल के शासक दक्षिण कोसल के पाण्डुवंशी थे।{{sfn|Kamath|1980|loc=p. 59, citing Sircar}} }} [[File:Relief of seated Vishnu at the Badami cave temple no.3.jpg|thumb|right|200px|[[बादामी गुफा मंदिर]] क्र.3 (विष्णु)]] इन विजयों ने उन्हें 'दक्षिणापथ पृथ्वीस्वामी' (दक्षिण के स्वामी) की उपाधि दिलाई। पुलकेशिन द्वितीय ने पूर्व में अपनी विजय यात्रा जारी रखी, जहाँ उन्होंने अपने रास्ते में आने वाले सभी राज्यों को जीत लिया और वर्तमान ओडिशा में [[बंगाल की खाड़ी]] तक पहुँच गए। गुजरात और वेंगी (तटीय आंध्र) में चालुक्य उपशासन स्थापित किया गया और बादामी परिवार के राजकुमारों को वहाँ शासन करने के लिए भेजा गया। कांचीपुरम के [[पल्लव राजवंश|पल्लवों]] को अधीन करने के बाद, उसने मदुरै के पांड्यों, चोल वंश और केरल क्षेत्र के चेरों से कर वसूली स्वीकार की। इस प्रकार पुलकेशिन द्वितीय [[नर्मदा नदी]] के दक्षिण में एकक्षत्र शासक बन गया। पुलकेशिन द्वितीय को भारतीय इतिहास के महान राजाओं में से एक माना जाता है।{{sfn|Kamath|1980|p=58}}<ref name="great1">Ramesh 1984, p76</ref> एक चीनी यात्री [[ह्वेन त्सांग]] ने इस समय पुलकेशिन द्वितीय के दरबार का दौरा किया और फारसी सम्राट खोसरो द्वितीय ने राजदूतों का आदान-प्रदान किया।{{efn|अरब यात्री तबारी के नोट्स से.{{sfn|Kamath|1980|p=60}} }} हालाँकि, पल्लवों के साथ लगातार युद्धों ने 642 में एक बदतर मोड़ ले लिया जब पल्लव राजा [[नरसिंहवर्मन १|नरसिंहवर्मन प्रथम]] ने अपने पिता की हार का बदला लेते हुए,<ref name="vincent">{{cite book|last = Smith|first= Vincent Arthur|title= The Early History of India|url = https://archive.org/details/earlyhistoryind00smitgoog|year=1904|publisher= The Clarendon press|pages = [https://archive.org/details/earlyhistoryind00smitgoog/page/n372 325]–327}}</ref> [[बादामी, कर्नाटक|पुलकेशिन द्वितीय की राजधानी]] पर विजय प्राप्त की और उसे लूट लिया, जो संभवतः युद्ध में मारा गया था।<ref name="vincent" />{{sfn|Sen|1999|p=362}} एक शताब्दी बाद, चालुक्य [[विक्रमादित्य द्वितीय]] ने विजयी होकर पल्लवों की राजधानी कांचीपुरम में प्रवेश किया और तीन बार उस पर कब्जा किया, तीसरी बार अपने पुत्र और युवराज [[कीर्तिवर्मन् द्वितीय (चालुक्य)|कीर्तिवर्मन द्वितीय]] के नेतृत्व में। इस प्रकार उसने पल्लवों द्वारा चालुक्यों को पहले हुए अपमान का बदला लिया और [[कैलाशनाथ मंदिर, कांचीपुरम|कैलासनाथ मंदिर]] में विजय स्तंभ पर एक कन्नड़ शिलालेख उत्कीर्ण किया।{{sfn|Thapar|2003|pp=331, 345}}{{sfn|Sastri|1958|p=140}}<ref name="kanchi2">Ramesh (1984), pp159–160</ref>{{sfn|Sen|1999|p=364}} उसने बाद में तमिल देश के अन्य पारंपरिक राज्यों, पांड्यों, चोलों और केरल को जीत लिया, साथ ही एक [[कलाभ्र राजवंश|कलाभ्र शासक]] को भी अधीन कर लिया।<ref name="kanchi4">Ramesh (1984), p159</ref> इस काल (700) का त्रिपदी (तीन पंक्ति) में लिखा गया [[कप्पे अरभट्ट]] अभिलेख, कन्नड़ काव्यशास्त्र का सबसे प्राचीन उपलब्ध अभिलेख माना जाता है। चालुक्य वंश की सबसे स्थायी विरासत वास्तु और कला है जो वो पीछे छोड़ कर गये।<ref name="legacy">Hardy (1995). p65–66</ref> 450 से 700 के बीच निर्मित उनसे जुड़े एक सौ पचास से अधिक स्मारक कर्नाटक के [[मलप्रभा नदी|मलप्रभा]] बेसिन में बचे हैं, केवल ऐहोले में 125 से अधिक मंदिर मौजूद हैं।<ref>{{cite web |title=Index |website=Monuments of India|url=http://www.art-and-archaeology.com/india/india.html|first=Michael D. |last=Gunther |date=2002|access-date=2006-11-10|archive-date=8 May 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210508172924/http://art-and-archaeology.com/india/india.html|url-status=live}}</ref> ये निर्माण कार्य चालुक्य साम्राज्य के केन्द्र में अपेक्षाकृत छोटे क्षेत्र में केन्द्रित हैं। [[पट्टदकल्लु]] में संरचनात्मक मंदिर, जो एक [[विश्व धरोहर|यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल]] है, [[बादामी गुफा मंदिर|बादामी]] की गुफा मंदिरें, [[महाकूट मन्दिर समूह|महाकूट]] के मंदिर और [[ऐहोले]] में मंदिर निर्माण के प्रारंभिक प्रयोग उनके सबसे प्रसिद्ध स्मारक हैं।<ref name="legacy"/> [[अजंता गुफाएँ|अजंता]] की गुफा संख्या-1 की प्रसिद्ध चित्र, "द टेंपटेशन ऑफ द बुद्धा" और "द पर्शियन एम्बेसी" को भी उन्हीं कि देन मानी जाती हैं। इसके अलावा, उन्होंने गुजरात और [[वेंगी]] जैसे सुदूर के स्थानों की वास्तुकला को भी प्रभावित किया, जैसा कि आलमपुर के [[आलमपुर नवब्रह्मा मंदिर|नव ब्रह्म मंदिरों]] को देखा जा सकता है।{{sfn|Kamath|1980|p=[https://archive.org/details/a-concise-history-of-karnataka-from-pre-historic-times-to-the-present/page/74/mode/2up 74]}} === पल्लव === {{मुख्य|पल्लव राजवंश}} 7वीं शताब्दी में तमिलनाडु में [[महेन्द्रवर्मन प्रथम]] और उनके पुत्र मामल्ल [[नरसिंहवर्मन १|नरसिंहवर्मन प्रथम]] के अधीन पल्लवों का उदय हुआ। पल्लव दूसरी शताब्दी से पहले तक एक छोटे रजवाड़ो की तरह थे।{{sfn|Sastri|1958|pp=91–92}} विद्वानों द्वारा यह व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है कि वे मूल रूप से [[सातवाहन साम्राज्य]] के अधीन कार्यकारी सामन्त थे।<ref>Durga Prasad, ''History of the Andhras up to 1565 A. D''., pp 68</ref> सातवाहनों के पतन के बाद, उन्होंने आंध्र और तमिल देश के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण प्राप्त करना शुरू कर दिया। बाद में उनका [[विष्णुकुंडिना वंश|विष्णुकुंडिना]] के साथ वैवाहिक संबंध हो गया, जो [[दक्कन का पठार|दक्कन]] पर शासन करते थे। लगभग 550 ईस्वी में राजा [[सिंहविष्णु]] के अधीन पल्लव प्रमुखता में उभरे। उन्होंने चोलों को अधीन कर लिया और [[कावेरी नदी]] तक दक्षिण में शासन किया। पल्लवों ने [[कांचीपुरम]] को अपनी राजधानी बनाकर दक्षिण भारत के एक बड़े हिस्से पर शासन किया। पल्लव शासन के दौरान [[द्रविड़ वास्तुकला]] अपने चरम पर पहुँच गई। [[नरसिंहवर्मन द्वितीय]] ने [[महाबलिपुरम के तट मन्दिर|तट मन्दिर]] का निर्माण करवाया, जो [[यूनेस्को]] की [[विश्व धरोहर स्थल]] है। कई स्रोत [[बोधिधर्म]], जो चीन में [[बौद्ध धर्म]] की [[झेन]] शाखा के संस्थापक थे, को पल्लव वंश का राजकुमार बताते हैं।<ref>Kamil V. Zvelebil (1987). "The Sound of the One Hand", ''Journal of the American Oriental Society'', Vol. 107, No. 1, pp. 125–126.</ref> === पूर्वी चालुक्य === {{मुख्य|पूर्वी चालुक्य}} पूर्वी चालुक्य एक दक्षिण भारतीय वंश था जिसका राज्य वर्तमान आंध्र प्रदेश में स्थित था। उनकी राजधानी [[वेंगी]] थी और उनका वंश 7वीं शताब्दी से लगभग 1130 ईस्वी तक 500 वर्षों तक चला, अन्तत: वेंगी राज्य [[चोल साम्राज्य]] में विलीन हो गया। वेंगी राज्य पर चोल साम्राज्य के संरक्षण में पूर्वी चालुक्य राजाओं का शासन 1189 ई. तक जारी रहा, उसके बाद राज्य [[होयसल राजवंश|होयसलों]] और [[देवगिरि के यादव|यादवों]] के अधीन चला गया। उनकी राजधानी मूल रूप से वेंगी (अब पेदवेगी, चिनवेगी और डेंडुलुरु) में थी, जो पश्चिम गोदावरी जिले के [[एलुरु]] के पास है, बाद में इसे राजमहेंद्रवरम ([[राजमंड्री]]) स्थानांतरित कर दिया गया। पूर्वी चालुक्यों के वातापी (बादामी) के [[चालुक्य राजवंश|चालुक्यों]] से निकटता के संबंधित थे। अपने इतिहास में वे अधिक शक्तिशाली चोल और पश्चिमी चालुक्यों के बीच रणनीतिक वेंगी देश पर नियंत्रण को लेकर कई युद्धों का कारण बने। वेंगी पर पूर्वी चालुक्य शासन के पाँच शताब्दियों ने न केवल इस क्षेत्र को एक एकीकृत इकाई में मजबूत किया, बल्कि उनके शासन के उत्तरार्ध में तेलुगु संस्कृति, साहित्य, कविता और कला का भी विकास हुआ। इसे [[आन्ध्र प्रदेश|आंध्र]] इतिहास का स्वर्ण युग कहा जा सकता है।<ref>The Emergence of Andhra Pradesh, By K. V. Narayana Rao · 1973, P. ४-५ </ref> === पांड्य === {{मुख्य|पांड्य राजवंश}} 8वीं शताब्दी में पल्लवों का स्थान पांड्यों ने ले लिया। उनकी राजधानी [[मदुरई]] समुद्र तट से दूर दक्षिण में थी। उनके पास दक्षिण-पूर्व एशियाई समुद्री साम्राज्य [[श्रीविजय राजवंश|श्रीविजय]] और उनके उत्तराधिकारियों के साथ व्यापक व्यापारिक संबंध थे। साथ ही, रोमन साम्राज्य तक राजनयिक संपर्क भी थे। 13वीं शताब्दी में मार्को पोलो ने इसे अस्तित्व में सबसे धनी साम्राज्य बताया। [[मदुरई]] में [[मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मन्दिर|मीनाक्षी अम्मन मंदिर]] और [[तिरुनेलवेली]] में [[नैलायप्पर मंदिर]] पांड्य मंदिर वास्तुकला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।<ref>'Advanced History of India', K.A. Nilakanta Sastri (1970)p. 181–182, Allied Publishers Pvt. Ltd., New Delhi</ref> पांड्य व्यापार के साथ-साथ साहित्य में भी उत्कृष्ट थे और उन्होंने श्रीलंका और भारत के बीच दक्षिण भारतीय तट पर मोती मत्स्य पालन को नियंत्रित किया, जो प्राचीन विश्व में कुछ बेहतरीन मोतियों का उत्पादन करता था।<ref>{{cite book|last = Hornell|first = RJames |date = 1905|title = Report of the Government of Madras on the Indian Pearl Fisheries in the Gulf of Mannar|url = https://archive.org/details/reportofgovernme00horn|page = ३-४}}</ref> === राष्ट्रकूट === {{मुख्य|राष्ट्रकूट साम्राज्य}} [[File:Indian Rashtrakuta Empire map.svg|thumb|right|200px|800 - 915 ई. में [[राष्ट्रकूट साम्राज्य]]।]] [[File:Kailasha temple at ellora.JPG|thumb|right|200px|[[एलोरा गुफाएं|एलोरा गुफा]] में स्थित [[कैलाश मन्दिर, एलोरा|कैलाश मन्दिर]]]] 8वीं शताब्दी के मध्य में चालुक्य शासन का अंत उनके सामंत [[बरार सल्तनत|बरार]] (वर्तमान महाराष्ट्र के [[अमरावती जिला|अमरावती जिले]]) के राष्ट्रकूट परिवार के शासकों ने कर दिया। चालुक्य शासन के कमजोर दौर का फायदा उठाते हुए, दंतिदुर्ग ने चालुक्यों की महान "कर्नाटबल" (कर्नाट की शक्ति) को पराजित किया।{{efn|राष्ट्रकूट शिलालेखों से।{{sfn|Kamath|1980|pp=57, 64}}{{ubl|समनगढ़ ताम्रपत्र अनुदान (753) पुष्टि करता है कि सामंत दंतिदुर्ग ने चालुक्यों को हराया और उनकी महान "कर्नाटक" सेना (बादामी चालुक्यों की सेना का संदर्भ) को पराजित किया।{{r|Reu|p=54}}}}}} चालुक्यों को उखाड़ फेंकने के बाद, राष्ट्रकूटों ने [[मान्यखेट]] (आधुनिक [[गुलबर्ग जिला|गुलबर्ग जिले]] का मालखेड) को अपनी राजधानी बनाया।{{efn|कर्दा प्लेट्स से: "एक ऐसी राजधानी जो देवताओं की राजधानी को भी शर्मिंदा कर सकती है"<ref>Altekar (1934). p. 47</ref>{{ubl| "इंद्र की राजधानी से भी बेहतर बनाया गया एक राजधानी शहर"{{sfn|Sastri|1958|pp=4, 132, 146}} }} }} हालांकि मध्य भारत और दक्कन में 6वीं और 7वीं शताब्दी में राष्ट्रकूट शासक परिवारों की उत्पत्ति विवादास्पद है, लेकिन 8वीं से 10वीं शताब्दी तक उन्होंने अपने प्रशासन में संस्कृत के साथ-साथ कन्नड़ भाषा के महत्व पर जोर दिया। राष्ट्रकूटों के शिलालेख केवल कन्नड़ और संस्कृत में हैं।{{efn|यहां तक ​​कि साम्राज्य के राजपरिवार भी काव्य और साहित्यिक गतिविधियों में भाग लेते थे.{{sfn|Thapar|1990|p=334}} उन्होंने दोनों भाषाओं में साहित्य को प्रोत्साहित किया और इस तरह उनके शासन में साहित्य फला-फूला।{{sfn|Kamath|1980|pp=73, 88–89}} }}<ref>Altekar (1934). pp. 411–413</ref><ref name="patron"/>{{sfn|Sen|1999|p=93}}{{sfn|Kamath|1980|p=114}}{{r|Reu|pp=37–38}} राष्ट्रकूट जल्द ही दक्कन का सबसे शक्तिशाली साम्राज्य बन गए, जिन्होंने [[ध्रुव धारवर्ष]] के शासनकाल में गंगा और यमुना नदियों के [[दोआब|दोआब क्षेत्र]] में अपने प्रारंभिक सफल अभियान चलाए। उनकी जीत एक "दिग्विजय" थी, जिससे उस क्षेत्र में केवल प्रसिद्धि और लूट प्राप्त हुई।{{sfn|Kamath|1980|loc=p. 75, citing Altekar}} उनके पुत्र [[गोविंदा तृतीय|गोविंद तृतीय]] का शासन एक नए युग का संकेत था, जिसमें राष्ट्रकूटों ने बंगाल के [[पाल वंश]] और उत्तर-पश्चिमी भारत के [[गुर्जर-प्रतिहार राजवंश|गुर्जर-प्रतिहारों]] के खिलाफ जीत हासिल कर [[कन्नौज]] पर कब्जा कर लिया। राष्ट्रकूटों ने समृद्ध [[सिन्धु-गंगा का मैदान|गंगा के मैदानों]] के संसाधनों के लिए [[त्रिपक्षीय संघर्ष]] के दौरान कन्नौज को कुछ समय के लिए अपने कब्जे में रखा। गोविंद तृतीय की जीत के कारण, इतिहासकारों ने उनकी तुलना [[सिकंदर|सिकंदर महान]] और हिंदू महाकाव्य [[महाभारत]] के [[पांडव]] [[अर्जुन]] से की है।{{sfn|Keay|2000|p=199}} संजन शिलालेख में कहा गया है कि गोविंद तृतीय के घोड़ों ने हिमालय की धाराओं का बर्फीला पानी पिया और उनके युद्ध हाथियों ने गंगा नदी के [[पवित्र जल]] का स्वाद चखा।{{sfn|Kamath|1980|p=76}} [[अमोघवर्ष नृपतुंग|अमोघवर्ष प्रथम]], जिन्हें समकालीन अरब यात्री सुलेमान ने दुनिया के चार महान सम्राटों में से एक के रूप में प्रशंसित किया, गोविंद तृतीय के बाद सिंहासन पर बैठे और एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक युग में शासन किया, जिसमें कन्नड़ और संस्कृत में महत्वपूर्ण रचनाएँ हुईं।{{r|Reu|p=38}} }}{{sfn|Kamath|1980|p=90}} जैन धर्म का उदार विकास उनके शासन की एक विशेषता थी। उनके धार्मिक स्वभाव, कला और साहित्य में रुचि और शांतिप्रिय प्रकृति के कारण, उनकी तुलना [[अशोक|सम्राट अशोक]] से की गई है।{{sfn|Kamath|1980|p=80}} 10वीं शताब्दी में [[इन्द्र ३|इंद्र तृतीय]] के शासन ने राष्ट्रकूटों की साम्राज्यिक शक्ति को बढ़ाया, जब उन्होंने कन्नौज को फिर से जीत लिया।{{sfn|Kamath|1980|loc=p. 81}} [[कृष्ण तृतीय]] 939 में इंद्र तृतीय के बाद सिंहासन पर बैठे। कन्नड़ साहित्य के संरक्षक और एक शक्तिशाली योद्धा, उनके शासनकाल में उत्तर में [[उज्जैन]] के [[परमार वंश|परमार]] और दक्षिण में [[चोल राजवंश|चोलों]] की अधीनता देखी गई। एक अरबी लेख सिलसिलतुत्तवारीख (851) ने राष्ट्रकूटों को दुनिया के चार प्रमुख साम्राज्यों में से एक कहा। ''किताब-उल-मसालिक-उल-मुमालिक'' (912) ने उन्हें "भारत के सबसे महान राजा" कहा और उनकी प्रशंसा में कई अन्य समकालीन पुस्तकें लिखी गईं।<ref name="hara">''Murujul Zahab'' by Al Masudi (944), ''Kitabul Akalim'' by Al Istakhri (951), ''Ashkal-ul-Bilad'' by Ibn Haukal (976)</ref>{{r|Reu|pp=41–42}} राष्ट्रकूट साम्राज्य अपने चरम पर दक्षिण में केप कोमोरिन ([[कन्याकुमारी]]) से उत्तर में कन्नौज तक और पूर्व में [[बनारस]] से पश्चिम में [[भरूच]] तक फैला हुआ था।<ref name="Himalayas">संजन शिलालेख से, {{cite web |title=राष्ट्रकूट''(The Rashrakutas)''|url=http://www.kamat.com/kalranga/deccan/rashtrakutas/ |author=ज्योत्सना कामत|publisher=1996–2006 कामत की पोटपुरी|access-date=2006-12-20|archive-date=6 April 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200406134533/http://www.kamat.com/kalranga/deccan/rashtrakutas/|url-status=live}}</ref> जबकि राष्ट्रकूटों ने दक्कन में कई उत्कृष्ट स्मारक बनाए, उनका सबसे व्यापक और भव्य कार्य [[एलोरा गुफाएं|एलोरा]] में एकाश्म कैलाशनाथ मंदिर है, जो एक शानदार उपलब्धि है। कर्नाटक में उनके सबसे प्रसिद्ध मंदिर [[पट्टदकल्लु]] में काशीविश्वनाथ मंदिर और जैन नारायण मंदिर हैं। ये सभी स्मारक [[यूनेस्को]] [[विश्व धरोहर|विश्व धरोहर स्थलों]] में शामिल हैं।<ref name="karnataka_whs">{{cite web|title=Reclaiming past glory |url=http://www.archive.deccanherald.com/deccanherald/feb272007/spectrum1437452007226.asp |author=Vijapur, Raju S. |publisher=Spectrum |work=डेक्कन हेराल्ड |access-date=2007-02-27 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20111007194411/http://archive.deccanherald.com/deccanherald/feb272007/spectrum1437452007226.asp |archive-date=7 October 2011 }}</ref> === पश्चिमी चालुक्य === {{मुख्य|पश्चिमी चालुक्य साम्राज्य}} 10वीं शताब्दी के अंत में, पश्चिमी चालुक्य, जिन्हें कल्याणी चालुक्य या 'प्रतीच्य' चालुक्य भी कहा जाता है, [[राष्ट्रकूट राजवंश|राष्ट्रकूटों]] को उखाड़कर सत्ता में आए, जिनके वे कभी सामंत हुआ करते थे। शुरुआत में मान्यखेट उनकी राजधानी थी, बाद में उन्होंने इसे कल्याणी (आधुनिक [[बसवकल्याण]]) स्थानांतरित कर दिया। इस साम्राज्य के राजा अपने नाम के समान, [[बादामी चालुक्य|बादामी चालुक्यों]] के ही वंशज थे,{{sfn|Kamath|1980|loc=p. 100, citing: Fleet, Bhandarkar and Altekar and Gopal, B. R.}} यह अभी भी बहस का विषय है। पश्चिमी चालुक्यों की उत्पत्ति जो भी हो, कन्नड़ उनकी प्रशासनिक भाषा बनी रही और उनके समय की कन्नड़ तथा संस्कृत साहित्य समृद्ध था।{{sfn|Sastri|1958|pp=356–358}}<ref name="patron">Narasimhacharya (1988). pp. 68, 17–21</ref>{{sfn|Sen|1999|p=93}}{{sfn|Kamath|1980|p=114}} 12वीं शताब्दी से पहले किसी भी अन्य राजा की तुलना में चालुक्य राजा [[विक्रमादित्य ६]] को अधिक कन्नड़ शिलालेखों का श्रेय दिया जाता है।<ref>{{cite web|title=Chalukyas of Kalyana |url= http://www.kamat.com/kalranga/deccan/deckings.htm|author=Kamat, Jyotsna|publisher=1996–2006 Kamat's Potpourri|access-date=2006-12-24|archive-date=8 March 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20130308045748/http://www.kamat.com/kalranga/deccan/deckings.htm|url-status=live}}</ref> [[तैलप २|तैलप द्वितीय]], जो तारदवाडी (आधुनिक [[बीजापुर जिला, कर्नाटक|बीजापुर जिला]]) के एक सामंत शासक थे, ने [[कर्क २|कर्क द्वितीय]] के शासनकाल में राष्ट्रकूटों को हराकर चालुक्य शासन को पुनर्स्थापित किया। उन्होंने 973 में मध्य भारत के [[परमार वंश|परमारों]] द्वारा राष्ट्रकूटों की राजधानी पर आक्रमण के कारण उत्पन्न अव्यवस्था का लाभ उठाकर विद्रोह किया।{{sfn|Kamath|1980|loc=p. 101: From the 957 and 965 records}}{{sfn|Sastri|1958|p=162}} तैलप द्वितीय को इस अभियान में हनगल के [[कदंब राजवंश|कदंबों]] ने सहायता प्रदान की।<ref>Moraes (1931). pp. 93–94</ref> इस युग में [[तमिलकम]] के [[चोल वंश]] के साथ वेंगी में [[गोदावरी नदी]]-[[कृष्णा नदी]] दोआब क्षेत्र के संसाधनों पर नियंत्रण के लिए लंबे समय तक युद्ध हुए। चालुक्य वंश के एक वीर राजा [[सोमेश्वर प्रथम]] ने [[तुंगभद्रा नदी]] क्षेत्र के दक्षिण में चोल साम्राज्य के विस्तार को सफलतापूर्वक रोका, हालांकि कुछ हार का सामना करने के बावजूद{{sfn|Kamath|1980|loc=p. 103, citing Ganguli}}{{sfn|Sastri|1958|pp=167–168}} उन्होंने [[कोकण]], [[गुजरात]], [[मालवा]] और [[कलिंग]] क्षेत्रों में अपने सामंतों पर नियंत्रण बनाए रखा।{{sfn|Sen|1999|p=104}} लगभग 100 वर्षों तक, 11वीं शताब्दी के आरंभ से, चोलों ने दक्षिण कर्नाटक क्षेत्र (गंगावाडी) के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया।{{sfn|Sastri|1958|pp=164, 174}} चोलों ने गंगावाडी पर 1004 से 1114 तक अधिकार किया।{{sfn|Sen|1999|p=118}} [[File:Ornate pillars in the Saraswati temple at Gadag.jpg|thumb|right|200px|गदग शैली के स्तंभ, [[पश्चिमी चालुक्य वास्तुशैली|पश्चिमी चालुक्य वास्तुकला]].]] 1076 ईस्वी में, चालुक्य वंश के सबसे प्रसिद्ध राजा [[विक्रमादित्य ६|विक्रमादित्य ६]] के उदय ने शक्ति संतुलन को चालुक्यों के पक्ष में बदल दिया। उनका पचास वर्ष का शासनकाल कर्नाटक के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अवधि थी और इसे "चालुक्य विक्रम युग" कहा जाता है।{{sfn|Thapar|2003|pp=468–469}} 11वीं शताब्दी के अंत और 12वीं शताब्दी के आरंभ में चोलों पर उनकी जीत ने वेंगी क्षेत्र में चोल प्रभाव को स्थायी रूप से समाप्त कर दिया। चालुक्यों के अधीन दक्कन की कुछ प्रसिद्ध समकालीन सामंत परिवारों में [[होयसल राजवंश|होयसल]], [[देवगिरि के यादव|देवगिरि के सेउना यादव]], [[काकतीय वंश]] और दक्षिणी कलचुरी शामिल थे। अपने चरम पर, पश्चिमी चालुक्यों ने उत्तर में [[नर्मदा नदी]] से लेकर दक्षिण में [[कावेरी नदी]] तक एक विशाल साम्राज्य पर शासन किया। विक्रमादित्य ६ को भारतीय इतिहास के सबसे प्रभावशाली राजाओं में से एक माना जाता है। कवि [[बिल्हण]] ने अपने संस्कृत ग्रंथ में उनके शासन को "राम राज्य" कहा; कवि [[विज्ञानेश्वर]] ने उन्हें "अनुपम राजा" कहा।{{sfn|Sen|1999|p=106}}{{sfn|Sastri|1958|p=6}} इन चालुक्यों द्वारा महत्वपूर्ण स्थापत्य कार्य किए गए, विशेष रूप से तुंगभद्रा नदी घाटी में, जो प्रारंभिक बादामी चालुक्यों और बाद के होयसलों की निर्माण शैली के बीच एक वैचारिक कड़ी के रूप में कार्य करते थे।{{sfn|Kamath|1980|loc=p. 115: quoting Sastri (1955), pp. 427–428: "उनकी कृतियों को भारतीय कला परंपरा में गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त है."}}{{sfn|Sastri|1958|pp=427–428}}{{sfn|Foekema|1996|loc=p. 14: "कर्नाटक के उत्तर में स्थित कल्याण शहर में अब कुछ भी नहीं बचा है, लेकिन 11वीं शताब्दी के दौरान मध्य कर्नाटक में मंदिर निर्माण में हुए शानदार पुनरुद्धार से चालुक्य शासन के दौरान कल्याण की समृद्धि का पता चलता है।"}} 1126 में विक्रमादित्य ६ की मृत्यु के बाद के दशकों में चालुक्यों के कमजोर होने के साथ, उनके सामंत स्वतंत्रत हो चले। कर्नाटक के [[कलचुरि राजवंश|कलचुरी]], जिनके पूर्वज मध्य भारत से दक्षिणी दक्कन में आकर बसे थे, ने मंगलावाडा (आधुनिक महाराष्ट्र में मंगलवेढे) से एक सामंत के रूप में शासन किया था।{{sfn|Sen|1999|p=107}} इस वंश के सबसे शक्तिशाली शासक [[बिज्जल द्वितीय]], चालुक्य विक्रमादित्य ६ के शासनकाल में एक सेनापति (महामंडलेश्वर) थे।{{sfn|Kamath|1980|loc=p. [https://archive.org/details/a-concise-history-of-karnataka-from-pre-historic-times-to-the-present/page/114/mode/2up 114] (From the 1142 and 1147 records)}} चालुक्यों की घटती शक्ति के एक अनुकूल अवसर का लाभ उठाते हुए, बिज्जल द्वितीय ने 1157 में स्वतंत्रता की घोषणा की और उनकी राजधानी कल्याणी पर अधिकार कर लिया।{{sfn|Sen|1999|loc=p. 108: From the Chikkalagi records}} 1167 में बिज्जल द्वितीय की हत्या और उसके बाद उनके पुत्रों के बीच सिंहासन को लेकर हुए गृहयुद्ध ने इस वंश का अंत कर दिया, क्योंकि चालुक्यों के अंतिम वंशज ने [[बसवकल्याण|कल्याणी]] पर पुनः नियंत्रण स्थापित कर लिया। हालांकि, यह जीत अल्पकालिक थी, क्योंकि चालुक्यों को अंततः सेउना यादवों ने खदेड़ दिया।{{sfn|Sen|1999|p=109}} === यादव === {{मुख्य|देवगिरि के यादव}} सेवना, सेवुना या यादव वंश ([[मराठी भाषा|मराठी]]: देवगिरीचे यादव, [[कन्नड़ भाषा|कन्नड़]]: ಸೇವುಣರು) (लगभग 850–1334 ईस्वी) एक भारतीय वंश था, जिसने अपने चरम पर [[तुंगभद्रा नदी|तुंगभद्रा]] से [[नर्मदा नदी|नर्मदा नदियों]] तक फैले एक राज्य पर शासन किया, जिसमें वर्तमान [[महाराष्ट्र]], [[उत्तर कर्नाटक]] और [[मध्य प्रदेश]] के कुछ हिस्से शामिल थे, और इसकी राजधानी देवगिरी (वर्तमान [[दौलताबाद|दौलताबाद, महाराष्ट्र]]) में थी। यादवों ने शुरू में [[पश्चिमी चालुक्य|पश्चिमी चालुक्यों]] के सामंत के रूप में शासन किया। 12वीं शताब्दी के मध्य में वे स्वतंत्रत हो, एक स्व-शासन स्थापित किया, जो सिंघाना द्वितीय के शासनकाल में अपने चरम पर पहुंच गया। मराठी संस्कृति की नींव यादवों द्वारा रखी गई और महाराष्ट्र के सामाजिक जीवन की विशेषताएँ उनके शासन के दौरान विकसित हुईं।<ref>{{cite book|last = Raghu Hari Ḍālamiyā|first = Viveka Miśra|date = 2024|title = मेवाड़ एवं मराठों की सहस्त्र वर्षों की शौर्यगाथा}}</ref> === काकतीय === {{मुख्य|काकतीय वंश}} [[काकतीय वंश]] एक दक्षिण भारतीय वंश था जिसने 1083 से 1323 ईस्वी तक [[आंध्र प्रदेश]] और [[तेलंगाना]] पर शासन किया। वे शताब्दियों तक चलने वाले महान [[तेलुगू लोग|तेलुगु]] राज्यों में से एक थे। === कलचुरि === {{यह भी देखें|कलचुरि राजवंश}} [[File:Kudalasangama.jpg|right|thumb|200px|[[कुदालसंगम]] में संगमनाथ मंदिर, [[उत्तर कर्नाटक]]]] कालचुरी नाम का उपयोग दो राज्यों द्वारा किया गया था, जिनसे जुड़े राजवंशो ने 10वीं से 12वीं शताब्दी के दौरान शासन किया, एक ने मध्य भारत (पश्चिमी मध्य प्रदेश, राजस्थान) में शासन किया और उन्हें चेदी या हैहय (हेहय) (उत्तरी शाखा) कहा जाता था, जबकि दूसरे दक्षिणी कालचुरी ने कर्नाटक के कुछ हिस्सों पर शासन किया। ये समय और स्थान में अलग-अलग स्थित हैं। राजवंश के नाम और शायद एक सामान्य पूर्वज में विश्वास के अलावा, उन्हें जोड़ने के लिए ज्ञात स्रोतों में बहुत कम जानकारी है। महिष्मति (550–620 ईस्वी) के सबसे पुराने ज्ञात [[माहिष्मती के कलचुरी|कालचुरी परिवार]] ने उत्तरी [[महाराष्ट्र]], [[मालवा]] और पश्चिमी दक्कन पर शासन किया। उनकी राजधानी [[नर्मदा नदी]] घाटी में स्थित [[माहिष्मती|महिष्मति]] थी। इस वंश के तीन प्रमुख शासक; कृष्णराज, शंकरगण और बुद्धराज के सिक्के व शिलालेख इस क्ष्रेत्र में मिले हैं।<ref name="Students' Britannica India">Students' Britannica India By Dale Hoiberg, Indu Ramchandani.</ref> [[कल्याणी के कलचुरि]] या दक्षिणी कालचुरी (1130–1184 ईस्वी) ने अपने चरम पर [[दक्कन]] के कुछ हिस्सों पर शासन किया, जिसमें आज के [[उत्तर कर्नाटक|उत्तरी कर्नाटक]] और [[महाराष्ट्र]] के कुछ क्षेत्र शामिल थे। यह राजवंश 1156 और 1181 ईस्वी के बीच दक्कन में सत्ता में आया। उन्होंने अपनी उत्पत्ति कृष्ण से जोड़ी, जो मध्य प्रदेश में [[कालिन्जर (बहुविकल्पी)|कालिंजर]] और दाहला के विजेता थे। कहा जाता है कि इस राजवंश के एक सूबेदार [[बिज्जल द्वितीय|बिज्जल]] ने [[कर्नाटक]] पर अधिकार स्थापित किया। उन्होंने चालुक्य राजा तैला तृतीय से सत्ता छीन ली। बिज्जल के बाद उनके पुत्र सोमेश्वर और संगम ने शासन किया, लेकिन 1181 ईस्वी के बाद चालुक्यों ने धीरे-धीरे इस क्षेत्र को वापस ले लिया। उनका शासन छोटा और अशांत था, फिर भी सामाजिक-धार्मिक आंदोलन की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण था; इन्हीं समयों में [[लिंगायत मत|लिंगायत]] या [[वीरशैव दर्शन|वीरशैव संप्रदाय]] नामक एक नए संप्रदाय की स्थापना हुई।<ref name="Students' Britannica India"/> इसी समय कन्नड़ साहित्य-कविता की एक अनूठी और पूरी तरह से देशी शैली, जिसे [[वचन साहित्य|वचन]] कहा जाता है, का जन्म हुआ। वचन लिखने वालों को वचनकार (कवि) कहा जाता था। इस दौरान विरुपाक्ष पंडित की ''चेन्नबसवपुराण'', धरणी पंडित की ''बिज्जलरायचरिते'' और चंद्रसागर वर्णी की ''बिज्जलरायपुराण'' जैसी कई अन्य महत्वपूर्ण रचनाएँ भी लिखी गईं। [[त्रिपुरी के कलचुरी|त्रिपुरी (चेदी) के कालचुरी]] ने मध्य भारत में प्राचीन शहर त्रिपुरी ([[तेवर, जबलपुर|तेवर]]) से शासन किया; इसकी उत्पत्ति 8वीं शताब्दी में हुई, 11वीं शताब्दी में इसका विस्तार हुआ और 12वीं–13वीं शताब्दी में इनका पतन हो गया। === होयसल === {{मुख्य|होयसल राजवंश}} [[File:Shilabaalika on pillar bracket in Chennakeshava Temple at Belur3.jpg|thumb|right|200px|शिलाबालिका, चेन्नकेशव मंदिर, [[बेलूर]]।]] होयसल 11वीं शताब्दी में चालुक्यों (दक्षिणी कर्नाटक क्षेत्र) के सामंत के रूप में [[बेलूर]] से शासन करते हुए भी एक शक्तिशाली ताकत बन चुके थे।{{sfn|Sen|1999|p=498}} 12वीं शताब्दी की शुरुआत में उन्होंने दक्षिण में चोलों के खिलाफ सफलतापूर्वक युद्ध किया, [[तालकाड़]] की लड़ाई में उन्हें निर्णायक रूप से हराया और अपनी राजधानी को निकटवर्ती [[हैलेबिडु]] में स्थानांतरित कर दिया।{{sfn|Sen|1999|p=499}}{{sfn|Kamath|1980|loc=pp. 124–126, quoting William Coelho: "Vishnuvardhana made many military conquests later to be further expanded by his successors into one of the most powerful empires of South India"; quoting B. S. K. Iyengar: "He was the true maker of the Hoysala kingdom".}} इतिहासकार इस राजवंश के संस्थापकों को [[मलेनाडु]], कर्नाटक के मूल निवासी मानते हैं, क्योंकि कई शिलालेखों में उन्हें मालेपरोलगंडा या "माले (पहाड़ियों) के प्रमुखों का स्वामी" (मालेपस) कहा गया है।{{sfn|Sen|1999|p=498}}{{sfn|Kamath|1980|loc=p. 123, citing B. L. Rice}}{{sfn|Keay|2000|p=251}}{{sfn|Thapar|2003|p=367}}{{sfn|Kamath|1980|p=123}}{{efn|Natives of south Karnataka।}} पश्चिमी चालुक्य शक्ति के कमजोर होने के साथ, होयसलों ने 12वीं शताब्दी के अंत में अपनी स्वतंत्रता की घोषणा कर दी। होयसल नियंत्रण के इस काल में, कन्नड़ साहित्यिक छंद जैसे रागले (मुक्त छंद), संगत्य (एक संगीत वाद्य के साथ गाए जाने के लिए), शतपदी (सात पंक्तियों वाला) आदि व्यापक रूप से चलन में थे।<ref name="patron"/>{{sfn|Sen|1999|p=93}}{{sfn|Kamath|1980|p=114}}<ref name="ragala10">Shiva Prakash in Ayyappapanicker (1997), pp164, 203; Rice E. P. (1921), p59</ref>{{sfn|Kamath|1980|pp=132–134}}{{sfn|Sastri|1958|pp=359, 361}} होयसलों ने चालुक्यों से निकली [[वेसर शैली|वेसरा वास्तुकला]]{{sfn|Sastri|1958|p=427}} का विस्तार किया, जिसका चरम बेलूर में [[चेन्नकेशव मन्दिर]] और हैलेबिडु में [[होयसलेश्वर मंदिर]] के निर्माण में देखा जा सकता है।{{sfn|Sen|1999|pp=500–501}} ये दोनों मंदिर 1116 में चोलों के खिलाफ होयसल सम्राट [[विष्णुवर्धन]] की जीत की याद में बनाए गए थे।{{sfn|Foekema|1996|p=14}}{{sfn|Kamath|1980|p=124}} होयसल शासकों में सबसे प्रभावी [[वीर बल्लाल द्वितीय]]{{efn|Kamath cites [[J. Duncan M. Derrett]] and William Coelho as considering Ballala II as the most outstanding of the Hoysala kings.{{sfn|Kamath|1980|p=[https://archive.org/details/a-concise-history-of-karnataka-from-pre-historic-times-to-the-present/page/132/ 132]}}{{sfn|Coelho|1950}} }} ने आक्रामक [[पाण्ड्य राजवंश|पांड्यों]] को हराया जब उन्होंने चोल साम्राज्य पर आक्रमण किया और "चोल साम्राज्य के स्थापक" (चोलराज्यप्रतिष्ठाचार्य), "दक्षिण के सम्राट" (दक्षिण चक्रवर्ती) और "होयसल सम्राट" (होयसल चक्रवर्ती) की उपाधियाँ धारण कीं। होयसलों ने 1225 के आसपास आज के [[तमिलनाडु]] के क्षेत्रों में अपनी पकड़ बढ़ाई, जिसमें [[श्रीरंगम]] के पास कन्ननूर कुप्पम शहर को एक प्रांतीय राजधानी बनाया गया।{{sfn|Sen|1999|p=499}} इससे उन्हें दक्षिण भारतीय राजनीति पर नियंत्रण मिला जिसने दक्षिणी दक्कन में होयसल प्रभुत्व की अवधि की शुरुआत हुई।{{sfn|Kamath|1980|loc=p. 126, citing B .S. K. Iyengar}}{{sfn|Keay|2000|p=252}} 13वीं शताब्दी की शुरुआत में, होयसल शक्तिशाली बने रहे, उसी दौरान दक्षिण भारत में मुस्लिम आक्रमणों की पहली लहर शुरू हुई। इन विदेशी शक्ति के खिलाफ दो दशक से अधिक समय तक युद्ध लड़ने के बाद, उस समय के होयसल शासक [[वीर बल्लाला तृतीय]], 1343 में [[मदुरई]] की लड़ाई में मारे गए।{{sfn|Sen|1999|p=500}} इसके परिणामस्वरूप होयसल साम्राज्य के संप्रभु क्षेत्रों का [[हरिहर प्रथम]] द्वारा प्रशासित क्षेत्रों के साथ विलय हो गया, जो वर्तमान कर्नाटक के तुंगभद्रा क्षेत्र में स्थित [[विजयनगर साम्राज्य]] के संस्थापक थे। नया राज्य अपनी राजधानी [[विजयनगरम|विजयनगर]] के साथ अगले दो शताब्दियों तक फलता-फूलता रहा।{{efn|Two theories exist about the origin of Harihara I and his brother [[Bukka Raya I]]. One states that they were [[Kannadiga]] commanders of the Hoysala army and another that they were [[Telugu language|Telugu]] speakers and commanders of the earlier [[Kakatiya dynasty|Kakatiya Kingdom]].{{sfn|Kamath|1980|pp=[https://archive.org/details/a-concise-history-of-karnataka-from-pre-historic-times-to-the-present/page/166/mode/2up 159–160]}} }} === चोल === {{मुख्य|चोल राजवंश}} [[File:Rajendra map new.svg|thumb|right|200px|[[राजेन्द्र चोल प्रथम|राजेंद्र चोल]] के दौरान [[चोल साम्राज्य]], 1030 ई]] 9वीं शताब्दी तक, [[राजाराज चोल १|राजाराज चोल]] और उनके पुत्र [[राजेन्द्र चोल प्रथम|राजेंद्र चोल]] के अधीन, चोल साम्राज्य दक्षिण एशिया में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरे। चोल साम्राज्य बंगाल तक फैला हुआ था। अपने चरम पर, यह साम्राज्य लगभग 3,600,000 वर्ग किलोमीटर (1,389,968 वर्ग मील) तक फैला था। राजाराज चोल ने पूरे प्रायद्वीपीय दक्षिण भारत और [[श्रीलंका]] के कुछ हिस्सों को जीत लिया। राजेंद्र चोल की नौसेनाएँ और भी आगे गईं, जिन्होंने बर्मा (अब [[म्यांमार]]) से [[वियतनाम]] तक के तटों, [[अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह]], [[लक्षद्वीप]], [[सुमात्रा]], [[जावा]], दक्षिण पूर्व एशिया में [[मलाया]] और पेगू द्वीपों पर कब्जा कर लिया। उसने श्रीलंका के शेष हिस्सों को भी जीत लिया।{{sfn|Sastri|2000|p=199-200}} उसने बंगाल के राजा [[महिपाल]] को हराया, और अपनी जीत की याद में उसने एक नई राजधानी बनाई और उसका नाम [[गंगैकोण्ड चोलपुरम]] रखा। चोलों ने भव्य मंदिरों के निर्माण में उत्कृष्टता हासिल की। तंजावुर में [[बृहदीश्वर मन्दिर]] चोल साम्राज्य की भव्य वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। बृहदीश्वर मंदिर [[यूनेस्को]] की [[विश्व धरोहर स्थल]] है, जिसे "[[महान चोल मंदिर]]" के अंतर्गत शामिल किया गया है।<ref>[https://whc.unesco.org/en/list/250 Great Living Chola Temples] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130105115252/https://whc.unesco.org/en/list/250 |date=5 January 2013 }}.</ref> एक अन्य उदाहरण [[चिदंबरम मंदिर]] है, जो [[चिदम्बरम|चिदंबरम शहर]] के केंद्र में स्थित है। == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:लौह युगी एशिया]] [[श्रेणी:वेबग्रंथागार साँचा वेबैक कड़ियाँ]] [[श्रेणी:भारत का इतिहास]] {{भारत के मध्य राज्य}} jjr76aqoio0ntw6qrvz8x51y2hkyjzi आहोब्लांको 0 1598944 6630411 6561543 2026-10-17T10:18:24Z Amherst99 19940 /* */ 6630411 wikitext text/x-wiki {{स्रोत कम|date=अगस्त 2025}} {{Infobox prepared food|veg=veg|image=Ajo blanco.jpg|caption=[[अंगूर]] के साथ परोसा गया आहोब्लांको|country={{ESP}}|alternate_name=आख़ो ब्लांको, श्वेत गज़्पाचो|region=[[आंदालुसिया]]|course=स्टार्टर|served=ठंडा|main_ingredient=[[डबलरोटी]], [[बादाम]], [[लहसुन]], [[पानी]], [[ज़ैतून का तेल]]}} '''आख़ोब्लांको''' ({{Langx|es|ajoblanco|4=श्वेत लहसुन|italic=no}}) [[स्पेन]] का एक लोकप्रिय ठंडा [[सूप (झोल)|सूप]] है। यह मूल [[ग्रानादा]] और [[मालागा]] में हुई थी। इसे [[डबलरोटी]], [[बादाम]], [[लहसुन]], [[पानी]], [[जैतून का तेल|जैतून के तेल]], [[नमक]] और कभी कभी [[सिरका|सिरके]] से बनाया जाता है। इसे प्रायः [[अंगूर]] या [[तरबूज़]] के साथ परोसा जाता है। आहोब्लांको को "श्वेत [[गज़्पाचो]]" के नाम से भी जाना जाता है।<ref>{{cite web|url=http://cookalmostanything.blogspot.com/2007/03/ajo-blanco-white-gazpacho.html|title=Ajo Blanco - White Gazpacho &#124; Cook (almost) Anything at Least Once|date=2007-03-23|publisher=Cookalmostanything.blogspot.com|accessdate=2018-07-06}}</ref> == इतिहास == आख़ोब्लांको [[अरब खाना|अरब]] मूल का है, क्योंकि बादाम को स्पेन में [[अरब लोग]] द्वारा परिचय किया गया था।<ref>{{Cite web|url=https://www.spanish.academy/blog/10-incredible-ways-arabic-influenced-spanish-culture-and-language/#:~:text=Almonds%2C%20dried%20fruits%2C%20dates%2C,the%20Arabs%20brought%20to%20Spain|title=10 Incredible Ways Arabic Influenced Spanish Culture and Language|last=Canún|first=Nicole|date=January 21, 2022}}</ref>बाद में यह [[आंदालुसिया]] का एक पारंपरिक पकवान बना।<ref>{{Cite web|url=http://malagagastronomyguide.com/en/ajoblanco/|title=Ajoblanco|website=Guía Gastronómica de Málaga|language=en-US|access-date=2024-03-12}}</ref>{{citation needed|date=April 2017}} == तैयारी == डबलरोटी को कोमल बनाने के लिए रात भर भिगोया जाता है। बादाम और लहसुन को साथ में पीसा जाता है एक श्वेत पेस्ट बनाने के लिए। अंततः पानी और ज़ैतून के तेल को पेस्ट में डाला जाता है और [[पायस (इमल्शन)|पायस]] जैसा रूप पाने तक पीटा जाता है। ==उत्सव== हर वर्ष 2 सितंबर को [[अलमाचार]] नगर में आख़ोब्लांको को मनाया जाता है।<ref>{{Cite web |url=http://www.andalucia.org/es/eventos/fiesta-del-ajoblanco/ |title=Fiesta del ajoblanco web-page (in Spanish) |access-date=30 अगस्त 2025 |archive-date=6 जुलाई 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180706075203/http://www.andalucia.org/es/eventos/fiesta-del-ajoblanco/ |url-status=dead }}</ref> == संदर्भ == {{reflist}} [[श्रेणी:आंदालुसियाई खाना]] 31l9kvteapain5bfrzf0wgkof58j180 ट्रू फ्रॉग 0 1608801 6630417 6609808 2026-10-17T11:01:12Z SAGAR SURYAVANSHI JAITHAL 938876 टू फ्रॉग लेख में इसके वैज्ञानिक कुल को प्रदर्शित करती एक प्रासंगिक वास्तविक छवि और हिंदी कैप्शन जोड़ा 6630417 wikitext text/x-wiki {{कृत्रिम बुद्धि सामग्री}}[[चित्र:RanaRidibundaFemale.jpg|अंगूठाकार|पाठ=हरी और भूरी धारीदार त्वचा वाला एक मेंढक जो सूखे पत्तों और मिट्टी की पृष्ठभूमि पर बैठा हुआ है, और उसकी बड़ी आँखें साफ़ दिखाई दे रही हैं।|रेनिडी (Ranidae) कुल से संबंधित एक सच्चे मेंढक (Rana ridibunda) का क्लोज-अप दृश्य।]] '''ट्रू फ्रॉग''' (अंग्रेज़ी: ''True frog'') मेंढकों के उस समूह को कहा जाता है जो रैनिडी (Ranidae) कुल से संबंधित होते हैं। इन्हें “'''सच्चे मेंढक'''” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनकी शारीरिक संरचना और जीवन-शैली को मेंढकों की मानक विशेषताओं का प्रतिनिधि माना जाता है। '''ट्रू फ्रॉग''' [[विश्व]] के लगभग सभी महाद्वीपों में पाए जाते हैं और मीठे [[जल]] के [[पारिस्थितिकी तंत्र]] में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।<ref>{{cite encyclopedia |title=True frog |encyclopedia=Encyclopaedia Britannica |url=https://www.britannica.com/animal/frog-amphibian |language=en }}</ref> == पहचान और शारीरिक संरचना == '''ट्रू फ्रॉग''' का शरीर चिकनी और नम [[त्वचा]] वाला होता है। इनके पिछले पैर लंबे और शक्तिशाली होते हैं, जो इन्हें लंबी छलांग लगाने और तैरने में सहायता करते हैं। आंखें उभरी हुई होती हैं और इनके पास स्पष्ट कर्णपटल (कान का पर्दा) पाया जाता है। त्वचा के माध्यम से [[श्वसन]] करने की क्षमता इन्हें [[उभयचर]] जीवन के लिए अनुकूल बनाती है।<ref>{{cite book |last=Duellman |first=William E. |title=Biology of Amphibians |year=1994 |url=https://archive.org/details/biologyofamphibi0000duel |publisher=Johns Hopkins University Press |language=en }}</ref> == आवास और वितरण == '''ट्रू फ्रॉग''' सामान्यतः तालाबों, झीलों, नदियों, दलदलों और वर्षावनों में पाए जाते हैं। ये [[जल]] और स्थल दोनों पर जीवन व्यतीत कर सकते हैं। इनका वितरण [[यूरोप]], [[एशिया]], [[अफ्रीका]], [[उत्तरी अमेरिका]] और [[ऑस्ट्रेलिया]] के कुछ भागों तक फैला हुआ है।<ref>{{cite web |title=Family Ranidae |website=AmphibiaWeb |language=en }}</ref> == आहार == '''ट्रू फ्रॉग''' [[मांसाहारी]] होते हैं। इनका आहार मुख्य रूप से [[कीट]], मक्खियाँ, [[मच्छर]], केंचुए और छोटे अकशेरुकी जीव होते हैं। ये अपनी चिपचिपी और लंबी [[जीभ]] की सहायता से [[शिकार]] को तुरंत पकड़ लेते हैं।<ref>{{cite book |last=Pough |first=F. Harvey |title=Herpetology |year=2001 |url=https://archive.org/details/herpetology00poug |publisher=Pearson Education |language=en }}</ref> == जीवन चक्र == '''ट्रू फ्रॉग''' का जीवन चक्र [[अंडा]], टैडपोल (लार्वा) और [[वयस्क]] अवस्था में पूर्ण होता है। [[मादा]] जल में अंडे देती है, जिनसे टैडपोल निकलते हैं। समय के साथ टैडपोल का कायांतरण होकर वह [[वयस्क]] [[मेंढक]] में परिवर्तित हो जाता है।<ref>{{cite book |last=Zug |first=George R. |title=Herpetology: An Introductory Biology of Amphibians and Reptiles |year=2001 |url=https://archive.org/details/herpetologyintro0000zugg |publisher=Academic Press |language=en }}</ref> == पारिस्थितिक महत्व == '''ट्रू फ्रॉग''' [[पर्यावरण]] संतुलन बनाए रखने में सहायक होते हैं। ये कीटों की संख्या को नियंत्रित करते हैं और स्वयं पक्षियों, सरीसृपों तथा स्तनधारियों के लिए भोजन का स्रोत होते हैं। इन्हें पारिस्थितिक स्वास्थ्य का संकेतक भी माना जाता है।<ref>{{cite encyclopedia |title=Frog |encyclopedia=Encyclopaedia Britannica |language=en }}</ref> == संदर्भ == <references/> [[श्रेणी:उभयचर]] [[श्रेणी:मेंढक]] [[श्रेणी:रैनिडी]] erqakk2v18kmx4tdgq01h14lyae3u97 सफ़ागा 0 1609888 6630370 6532546 2026-10-17T07:17:49Z अमर तिवारी 932885 /* इतिहास */ 6630370 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक अवस्थापन|<!-- Politics -----------------> | name = सफ़ागा | native_name = سفاجا | nickname = | settlement_type = शहर | image_skyline = {{Photomontage | photo1a = Images from Safaga No 1..JPG | photo2a = Kalawy Magic Life 01 2008.JPG | photo2b = Safaga - panoramio (2).jpg | photo3a = Safaga.jpg | size = 275 | spacing = 2 | color = transparent | border = 0 }} | image_caption = सफ़ागा के चित्र | image_flag = | flag_size = | image_seal = | seal_size = | image_shield = | shield_size = | image_map = | mapsize = | map_caption = | pushpin_map = Egypt<!-- the name of a location map as per http://en.wikipedia.org/wiki/Template:Location_map --> | pushpin_label_position = bottom | pushpin_mapsize = 300 | pushpin_map_caption = मिस्र में अवस्थिति | subdivision_type = देश | 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= ar }} '''सफ़ागा''' ({{langx|ar|سفاجا}}) [[मिस्र]] का एक [[बंदरगाह]] शहर है। यह [[लाल सागर]] के तट पर स्थित [[हर्गाडा]] से 53 km दक्षिण में है। सफ़ागा एक पर्यटन स्थान भी है, जहाँ कई [[बंगला|बंगले]] और घर भी हैं। शहर में अनेक [[फॉस्फेट|फ़ाॅस्फ़ेट]] खानें भी हैं, जिस प्रकार इसे फ़ाॅस्फ़ेट का निर्यात केंद्र माना जाता है। सफ़ागा 164 km लंबे मार्ग से [[ऊपरी मिस्र]] के [[क़ेना]] शहर से जुड़ा हुआ है। [[श्रेणी:मिस्र में पर्यटन]] [[श्रेणी:मिस्र में ग़ोताख़ोरी स्थल]] [[श्रेणी:मिस्र में आबाद तटीय स्थान]] == इतिहास == इस नगर को 282 और 268 ई.पू. के बीच स्थापित किया गया था।<ref name="Strabo">[https://www.perseus.tufts.edu/hopper/text?doc=urn:cts:greekLit:tlg0099.tlg001.perseus-grc1:16.4.5 Strabo, Geography, §16.4.5]</ref><ref name="Stephanus">[https://topostext.org/work/241#Ph666.16 Stephanus of Byzantium, Ethnica, §Ph666.16]</ref> इसका पहला नाम '''फ़िलोतेरा''' ({{langx|grc|Φιλωτέρα}}) फ़िरौन [[तुलामय द्वितीय]] की [[फ़िलोटेरा|मृतक बहन]] की स्मृति में रखा गया था।<ref name="Strabo" /> बाइज़ेंटाइन लेखक स्तेफ़ानोस के अनुसार, इसे '''फ़िलोतेरिदा''' ({{lang|grc|Φιλωτερίδα}}) नाम से भी जाना जाता था।<ref name="Stephanus" /> == जलवायु == [[कोपेन जलवायु वर्गीकरण]] के अनुसार, सफ़ागा के पास [[गर्म मरुस्थलीय जलवायु]] (BWh) है।<ref name="Climate-Data.org">{{cite web|url=http://en.climate-data.org/location/8597/|title=Climate: Port Safaga - Climate graph, Temperature graph, Climate table|publisher=Climate-Data.org|archive-url=https://web.archive.org/web/20131105172128/http://en.climate-data.org/location/8597/|archive-date=5 November 2013|access-date=13 August 2013|url-status=live}}</ref> सबसे ऊँचा तापमान {{convert|46|C}} 30 जुलाई 2002 को अभिलिखित किया गया था, जबकि सबसे कम {{convert|0|C}} 2 फ़रवरी 1993 को अभिलिखित किया गया था।<ref name="Voodoo Skies">{{cite web|url=http://voodooskies.com/weather/egypt/safaga|title=Safaga, Egypt|publisher=Voodoo Skies|archive-url=https://web.archive.org/web/20140116091520/http://voodooskies.com/weather/egypt/safaga|archive-date=2014-01-16|access-date=2014-01-15|url-status=live}}</ref> {{मौसम सन्दूक|metric first=yes|single line=yes|location=सफ़ागा|Jan record high C=33|Feb record high C=34|Mar record high C=38|Apr record high C=42|May record high C=43|Jun record high C=46|Jul record high C=46|Aug record high C=44|Sep record high C=43|Oct record high C=43|Nov record high C=35|Dec record high C=34|Jan high C=21.9|Feb high C=22.7|Mar high C=26.1|Apr high C=28.1|May high C=31.7|Jun high C=33.8|Jul high C=34|Aug high C=34.4|Sep high C=32.3|Oct high C=30.2|Nov high C=27|Dec high C=23.4|Jan mean C=16.3|Feb mean C=16.8|Mar mean C=20.4|Apr mean C=22.5|May mean C=26.2|Jun mean C=28.6|Jul mean C=29|Aug mean C=29.6|Sep mean C=27.6|Oct mean C=25.2|Nov mean C=21.6|Dec mean C=17.9|Jan low C=10.7|Feb low C=11|Mar low C=14.8|Apr low C=16.9|May low C=20.7|Jun low C=23.5|Jul low C=24.1|Aug low C=24.9|Sep low 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''Weather2Travel'' for rainy days and sunshine<ref name="Weather2Travel">{{cite web |title=Safaga Climate and Weather Averages, Egypt |url=http://www.weather2travel.com/climate-guides/egypt/safaga.php |publisher=Weather2Travel |access-date=2014-01-15 |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20141007112909/http://www.weather2travel.com/climate-guides/egypt/safaga.php |archive-date=2014-10-07 }}</ref>|source 2=''Voodoo Skies'' for record temperatures<ref name="Voodoo Skies"/>}} {| class="wikitable" |+सफ़ागा माध्य सागर तापमान !जनवरी !फ़रवरी !मार्च !अप्रैल !मई !जून !जुलाई !अगस्त !सितंबर !अक्टूबर !नवंबर !दिसंबर |- |{{convert|23|°C}} |{{convert|22|°C}} |{{convert|22|°C}} |{{convert|23|°C}} |{{convert|25|°C}} |{{convert|26|°C}} |{{convert|28|°C}} |{{convert|29|°C}} |{{convert|28|°C}} |{{convert|27|°C}} |{{convert|26|°C}} |{{convert|24|°C}} |} == संदर्भ == {{reflist}} 9lni2ord0ync9m2e2fql6ppjvgxii1p शेर्रातिन मदरसा 0 1610044 6630300 6606896 2026-10-16T19:39:35Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.6 6630300 wikitext text/x-wiki {{Infobox building|name=शेर्रातिन मदरसा|native_name=مدرسة الشراطين|native_name_lang=Arabic|image=فندق البركة.jpg|image_size=|image_caption=मदरसे का मुख्य प्रांगण|alternate_names=एर-रशीदिया मदरसा|etymology=|status=ऐतिहासिक स्थल, पर्यटक आकर्षण|building_type=[[मदरसा]]|architectural_style=[[मोरक्की वास्तुकला|मोरक्की]], [[मूरिश वास्तुकला|मूरिश]]|location=[[फ़ेज़, मोरक्को|फ़ेज़]], [[मोरक्को]]|namesake=सुल्तान [[अल-रशीद (मोरक्को)|अल-रशीद]]|start_date=17 दिसंबर 1670|material=देवदार की लकड़ी, ईंट, [[स्टुको]], टाइल|coordinates={{coord|34|03|50.5|N|4|58|26|W|type:city|display=inline, title}}}}'''शेर्रातिन मदरसा''' ({{Langx|ar|مدرسة الشراطين|translit=Madrasat esh-Sherātīn|lit=रस्सी बनाने वालों का स्कूल}}) फ़ेज़, मोरक्को में स्थित एक [[मदरसा]] है।<ref>{{Cite web|url=http://www.idpc.ma/view/pc_architecture/sanae:270002|title=Medersa Ech-Cherratine|website=www.idpc.ma|language=fr-FR|access-date=2019-11-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20191117110611/http://www.idpc.ma/view/pc_architecture/sanae:270002|archive-date=17 नवंबर 2019|url-status=dead}}</ref> इसे '''एर-रशीदिया मदरसा''' के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण 1670 में अलावी राजवंश के सुल्तान मौली अल-रशीद द्वारा करवाया गया था। == इतिहास == [[चित्र:Médersa_Cherratin,_cour_intérieure_B335222103_02_FP7952828.jpg|बाएँ|अंगूठाकार|20वीं शताब्दी की शुरुआत में शेर्रातिन मदरसा]] मदरसे का निर्माण 17 दिसंबर 1670 ईस्वी (1 शाबान 1081 हिजरी) को सुल्तान मौली अल-रशीद के शासनकाल में शुरू हुआ था।<ref name=":3">{{Cite web|url=http://archnet.org/sites/1734|title=Shiratin Madrasa|website=Archnet|access-date=21 मार्च 2026|archive-date=9 जनवरी 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210109134830/http://archnet.org/sites/1734|url-status=dead}}</ref> इस नए मदरसे ने एक पुराने मदरसे (मदरसा अल-लब्बादिन) का स्थान लिया, जिसे पारंपरिक स्रोतों के अनुसार छात्रों द्वारा अपवित्र किए जाने के कारण नष्ट कर दिया गया था। 'शेर्रातिन' नाम का अर्थ "रस्सी बनाने वाले" है, जो पास के एक बाजार की ओर संकेत करता है जहाँ रस्सी बनाने वाले स्थापित थे। शहर के अन्य मदरसों की तरह, इसका उपयोग उन छात्रों और शिक्षकों के ठहरने के लिए किया जाता था जो पास के अल-क़राविय्यिन विश्वविद्यालय में अध्ययन करने या काम करने के लिए आते थे। 19वीं और 20वीं शताब्दी की शुरुआत तक, यह मदरसा मुख्य रूप से अल्जीरिया, रिफ़ क्षेत्र और तफ़िलाल्त के छात्रों के लिए समर्पित था।<ref name=":04">{{Cite book|title=Fès avant le protectorat|last=Le Tourneau|first=Roger|year=1949|location=Casablanca|pages=84, 463–464}}</ref> == वास्तुकला == यह इमारत ईंट और देवदार की लकड़ी से बनी है। मदरसे में एक सजावटी दरवाजे के माध्यम से प्रवेश किया जाता है, जहाँ से एक गलियारा मुख्य केंद्रीय प्रांगण की ओर ले जाता है। प्रांगण के केंद्र में संगमरमर के कटोरे वाला एक फव्वारा है। प्रांगण चारों ओर से दीर्घाओं (galleries) से घिरा हुआ है। दक्षिण-पूर्व की ओर, तीन 'हॉर्सशू' (नाल के आकार के) मेहराब हैं जो सीधे प्रार्थना कक्ष की ओर ले जाते हैं। प्रार्थना कक्ष में एक केंद्रीय ''[[मिहराब]]'' है जो नक्काशीदार स्टुको से सजाया गया है। यह मदरसा अपने बड़े आकार के लिए जाना जाता है, हालांकि यह शहर के पुराने मरीनिद मदरसों (जैसे अल-अत्तारिन मदरसा) की तुलना में कम सजाया गया है। प्रांगण के चारों ओर, दो ऊपरी मंजिलों पर छात्र आवास की एक बड़ी श्रृंखला है, जिसमें उस समय 130 से 150 छात्र रह सकते थे। यह व्यवस्था फ़ेज़ के पुराने मदरसों के विपरीत है, लेकिन [[मराकेश]] के 16वीं शताब्दी के बेन यूसुफ मदरसा के समान है।<ref name=":02">{{Cite book|title=L'architecture musulmane d'Occident|last=Marçais|first=Georges|year=1954|location=Paris|pages=392–393}}</ref><gallery> चित्र:Cherratine_DSCF5998.jpg|मदरसे का प्रवेश द्वार चित्र:Cherratine_DSCF6208.jpg|मुख्य प्रांगण चित्र:Cherratine_DSCF6028.jpg|प्रार्थना कक्ष के मिहराब की ओर मुख्य प्रांगण का दृश्य चित्र:Cherratine_DSCF6052.jpg|प्रार्थना कक्ष का मिहराब चित्र:Cherratine_DSCF6083.jpg|छात्र आवासों के लिए बने छोटे माध्यमिक प्रांगणों में से एक </gallery> == संदर्भ == <references /> == बाहरी कड़ियाँ == {{commonscat|Cherratine Madrasa}} 0qk6u87sjz5wj8agxbqa2nvdtpqkarq शेरातीन मदरसा 0 1610127 6630299 6552089 2026-10-16T19:38:16Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.6 6630299 wikitext text/x-wiki {{Infobox building|name=शेरातीन मदरसा|native_name=مدرسة الشراطين|native_name_lang=Arabic|image=فندق البركة.jpg|image_caption=मदरसे का मुख्य प्रांगण|alternate_names=अर-रशीदिया मदरसा, रास अल-शेरातीन मदरसा|status=ऐतिहासिक स्थल, पर्यटक आकर्षण|building_type=[[मदरसा]]|architectural_style=[[मोरक्को की वास्तुकला|मोरक्को]], [[मूरिश वास्तुकला|मूरिश]]|location=[[फ़ेज़, मोरक्को|फ़ेज़]], [[मोरक्को]]|coordinates={{coord|34|03|50.5|N|4|58|26|W|type:city|display=inline, title}}|namesake=सुल्तान [[मोरक्को के अल-रशीद|मुले अल-रशीद]]|construction_start_date=17 दिसंबर 1670|material=देवदार की लकड़ी, ईंट, [[स्टुको]], टाइल}}'''शेरातीन मदरसा''' ({{Langx|ar|مدرسة الشراطين}}) मोरक्को के फ़ेज़ में स्थित एक [[मदरसा]] है।<ref>{{Cite web|url=http://www.idpc.ma/view/pc_architecture/sanae:270002|title=Medersa Ech-Cherratine|publisher=PASS Technologie|access-date=22 मार्च 2026|archive-url=https://web.archive.org/web/20191117110611/http://www.idpc.ma/view/pc_architecture/sanae:270002|archive-date=17 नवंबर 2019|url-status=dead}}</ref> इसे '''अर-रशीदिया मदरसा''' या '''रास अल-शेरातीन मदरसा''' के नाम से भी जाना जाता है।<ref name=":04">{{Cite book|title=Fès avant le protectorat|last=Le Tourneau|first=Roger|publisher=Société Marocaine de Librairie et d'Édition|year=1949|location=Casablanca|pages=84, 463–464}}</ref> इसका निर्माण 1670 में अलावी राजवंश के सुल्तान मुले अल-रशीद द्वारा करवाया गया था। == इतिहास == [[चित्र:Médersa_Cherratin,_cour_intérieure_B335222103_02_FP7952828.jpg|बाएँ|अंगूठाकार|20वीं शताब्दी की शुरुआत में शेरातीन मदरसा]] मदरसे का निर्माण सुल्तान मुले अल-रशीद के शासनकाल के दौरान 17 दिसंबर 1670 को शुरू हुआ था।<ref name=":3">{{Cite web|url=http://archnet.org/sites/1734|title=Shiratin Madrasa|website=Archnet|access-date=22 मार्च 2026|archive-date=9 जनवरी 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210109134830/http://archnet.org/sites/1734|url-status=dead}}</ref><ref name=":02">{{Cite book|title=L'architecture musulmane d'Occident|last=Marçais|first=Georges|publisher=Arts et métiers graphiques|year=1954|location=Paris|pages=392–393}}</ref> इस नवनिर्मित मदरसे ने एक पुराने मदरसे, मदरसा अल-लब्बादिन का स्थान लिया, जिसे पारंपरिक स्रोतों के अनुसार छात्रों के अनियंत्रित व्यवहार के कारण नष्ट कर दिया गया था। 'शेरातीन' नाम का अर्थ 'रस्सी बनाने वाले' होता है, जो पास के एक बाजार की उपस्थिति को संदर्भित करता है जहाँ रस्सी बनाने वाले स्थापित थे।<ref name=":6">{{Cite book|title=Fès: Joyau de la civilisation islamique|last=Gaudio|first=Attilio|year=1982|isbn=2723301591|location=Paris}}</ref> शहर के अन्य मदरसों की तरह, इसका उपयोग शहर के बाहर से आने वाले छात्रों और शिक्षकों को ठहराने के लिए किया जाता था जो पास की अल-करविय्यिन विश्वविद्यालय में अध्ययन या काम करने के लिए आते थे।<ref name=":122">{{Cite book|title=A practical guide to Islamic Monuments in Morocco|url=https://archive.org/details/practicalguideto0000rich_l1s6|last=Parker|first=Richard|publisher=The Baraka Press|year=1981}}</ref> 19वीं और 20वीं शताब्दी तक, यह मदरसा मुख्य रूप से [[अल्जीरिया]], रिफ़ क्षेत्र और ताफिलाल्त के छात्रों के आवास के लिए समर्पित था।<ref name=":04" /> == वास्तुकला == इमारत ईंट और देवदार की लकड़ी से बनी है। मदरसे में एक सजावटी प्रवेश द्वार के माध्यम से प्रवेश किया जाता है, जहाँ से एक गलियारा मुख्य केंद्रीय प्रांगण की ओर ले जाता है। प्रांगण के केंद्र में संगमरमर के कटोरे वाला एक फव्वारा है। प्रांगण चारों ओर से दीर्घाओं या पोर्टिको से घिरा हुआ है। दक्षिण-पूर्वी हिस्से में तीन मेहराब हैं जो सीधे एक आयताकार प्रार्थना कक्ष की ओर ले जाते हैं, जिसमें नक्काशीदार स्टुको से सजाया गया एक केंद्रीय ''[[मिहराब]]'' है। यद्यपि यह मदरसा आकार में बड़ा है, लेकिन पुराने [[मरीनिद सल्तनत|मरीनिद]] मदरसों (जैसे अल-अत्तारीन मदरसा) की तुलना में यह कम सजाया गया है। फिर भी, प्रांगण की दीर्घाओं के लकड़ी के लिंटेल और स्टुको कोबेल पर [[अरबस्क]] रूपांकन खुदे हुए हैं।<ref name=":02" /><ref name=":132" /> प्रांगण के चारों ओर, ऊपरी दो मंजिलों पर छोटे छात्र कमरों की एक बड़ी श्रृंखला है जो उस समय 130 से 150 छात्रों को ठहरा सकती थी। इस क्षेत्र में कई छोटे आंतरिक प्रांगण और बहु-मंजिला दीर्घाएँ शामिल हैं। यह व्यवस्था फ़ेज़ के पुराने मरीनिद मदरसों के विपरीत है, लेकिन [[मराकेश]] के 16वीं शताब्दी के [[बेन यूसुफ मदरसा]] की व्यवस्था के समान है।<ref name=":02" /> == संदर्भ == <references /> == बाहरी कड़ियाँ == {{commonscat|Cherratine Madrasa}} lhzzwozpgt6ag2gbw5dgeyooo66f664 कानीवाड़ा 0 1612319 6630402 6554057 2026-10-17T10:12:16Z SparrowQ 86379 [[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:जालौर जिले के मंदिर]] हटाई 6630402 wikitext text/x-wiki {| class="infobox ib-settlement vcard" ! colspan="2" class="infobox-above" |<div class="fn org">कानीवाड़ा</div> |- | colspan="2" class="infobox-subheader" |<div class="category">गाँव</div> |- class="mergedtoprow ib-settlement-official" | colspan="2" class="infobox-full-data" |कानीवाड़ा |- class="mergedtoprow" | colspan="2" class="infobox-full-data" |<div class="switcher-container"><templatestyles src="Module:Location map/styles.css"></templatestyles><div class="center"><div class="locmap" style="width:250px;float:none;clear:both;margin-left:auto;margin-right:auto"><div style="width:250px;padding:0"><div style="position:relative;width:250px">[[चित्र:Kaniwada Hanuman Temple.jpg|250px|thumb|[[कानीवाड़ा हनुमान मंदिर]]]][[चित्र:India_Rajasthan_location_map.svg|वर्ग=notpageimage noviewer|250x250पिक्सेल|Kaniwara is located in Rajasthan]]<div class="od notheme" style="top:62.903%;left:35.513%;font-size:91%"><div class="id" style="left:-3px;top:-3px">[[चित्र:Red_pog.svg|कड़ी=|वर्ग=notpageimage noviewer|6x6पिक्सेल|Kaniwara]]</div><div class="pr" style="width:6em;left:4px"><div>कानीवाड़ा</div></div></div></div><div style="padding-top:0.2em">राजस्थान, भारत में स्थान</div><span class="switcher-label" style="display:none">राजस्थान का नक्शा 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B. P. |date=2023-02-08 |title=कानीवाड़ा का चमत्कारी मंदिर, जहां बिना छत के रहते हैं हनुमान भगवान |url=https://www.abplive.com/lifestyle/religion/rajasthan-jalore-kaniwada-hanuman-mandir-jalore-dalit-priests-get-worship-done-unique-temple-without-roof-2328991 |access-date=2025-11-15 |website=ABP News |language=hi}}</ref><ref>{{Cite news |title=800 साल पुराना है [[जालोर]] का यह [[हनुमान मंदिर]], आस्था और चमत्कार का है संगम, सामाजिक एकता का भी है प्रतीक |url=https://hindi.news18.com/news/dharm/jalore-kaniwada-hanuman-temple-is-800-years-old-confluence-of-faith-and-miracles-pm-modi-also-praised-social-unity-local18-9170844.html |archive-url=https://web.archive.org/web/20250413033034/https://hindi.news18.com/news/dharm/jalore-kaniwada-hanuman-temple-is-800-years-old-confluence-of-faith-and-miracles-pm-modi-also-praised-social-unity-local18-9170844.html |archive-date=2025-04-13 |access-date=2025-11-15 |work=News18 हिंदी |language=hi-IN}}</ref><ref>{{Cite web |last=डेस्क |first=डीएनए हिंदी वेब |title=Hanuman Mandir Jalore: राजस्थान के इस हनुमान मंदिर की कभी नहीं बन सकी छत, जानें क्यों ? |url=https://www.dnaindia.com/hindi/spiritual/report-jalore-kaniwada-hanuman-mandir-rajasthan-never-made-roof-know-reason-intresting-fact-4074779 |access-date=2025-11-15 |website=DNA Hindi |language=hi}}</ref> ==संदर्भ== [[श्रेणी:हनुमान मंदिर]] [[श्रेणी:राजस्थान के लोक देवता]] [[श्रेणी:जालोर जिले के दर्शनीय स्थल]] [[श्रेणी:राजस्थान में हिन्दू मन्दिर]] [[श्रेणी:जालौर ज़िले के गाँव]] [[श्रेणी:विकिडेटा पर अनुपलब्ध निर्देशांक]] c2pdneijtsyb8mqudbl8pnbuisiayef 6630403 6630402 2026-10-17T10:12:32Z SparrowQ 86379 [[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:राजस्थान में हिन्दू मन्दिर]] हटाई 6630403 wikitext text/x-wiki {| class="infobox ib-settlement vcard" ! colspan="2" class="infobox-above" |<div class="fn org">कानीवाड़ा</div> |- | colspan="2" class="infobox-subheader" |<div class="category">गाँव</div> |- class="mergedtoprow ib-settlement-official" | colspan="2" class="infobox-full-data" |कानीवाड़ा |- class="mergedtoprow" | colspan="2" class="infobox-full-data" |<div class="switcher-container"><templatestyles src="Module:Location map/styles.css"></templatestyles><div class="center"><div class="locmap" style="width:250px;float:none;clear:both;margin-left:auto;margin-right:auto"><div style="width:250px;padding:0"><div style="position:relative;width:250px">[[चित्र:Kaniwada Hanuman Temple.jpg|250px|thumb|[[कानीवाड़ा हनुमान मंदिर]]]][[चित्र:India_Rajasthan_location_map.svg|वर्ग=notpageimage noviewer|250x250पिक्सेल|Kaniwara is located in Rajasthan]]<div class="od notheme" style="top:62.903%;left:35.513%;font-size:91%"><div class="id" style="left:-3px;top:-3px">[[चित्र:Red_pog.svg|कड़ी=|वर्ग=notpageimage noviewer|6x6पिक्सेल|Kaniwara]]</div><div class="pr" style="width:6em;left:4px"><div>कानीवाड़ा</div></div></div></div><div style="padding-top:0.2em">राजस्थान, भारत में स्थान</div><span class="switcher-label" style="display:none">राजस्थान का नक्शा दिखाएँ</span></div></div></div><templatestyles src="Module:Location map/styles.css"></templatestyles><div class="center"><div class="locmap" style="width:250px;float:none;clear:both;margin-left:auto;margin-right:auto"><div style="width:250px;padding:0"><div style="position:relative;width:250px">[[चित्र:India_location_map.svg|वर्ग=notpageimage noviewer|269x269पिक्सेल|Kaniwara is located in India]]<div class="od notheme" style="top:36.727%;left:17.676%;font-size:91%"><div class="id" style="left:-3px;top:-3px">[[चित्र:Red_pog.svg|कड़ी=|वर्ग=notpageimage noviewer|6x6पिक्सेल|Kaniwara]]</div><div class="pr" style="width:6em;left:4px"><div>कनिवारा</div></div></div></div><div style="padding-top:0.2em">कानीवाड़ा (भारत) </div><span class="switcher-label" style="display:none">भारत का नक्शा दिखाएँ</span></div></div></div><templatestyles src="Module:Location map/styles.css"></templatestyles><div class="center"><div class="locmap" style="width:250px;float:none;clear:both;margin-left:auto;margin-right:auto"><div style="width:250px;padding:0"><div style="position:relative;width:250px">[[चित्र:India_location_map.svg|वर्ग=notpageimage noviewer|269x269पिक्सेल|Kaniwara is located in India]]<div class="od notheme" style="top:36.727%;left:17.676%;font-size:91%"><div class="id" style="left:-3px;top:-3px">[[चित्र:Red_pog.svg|कड़ी=|वर्ग=notpageimage noviewer|6x6पिक्सेल|Kaniwara]]</div><div class="pr" style="width:6em;left:4px"><div></div> </div></div></div><div style="padding-top:0.2em">कनिवारा (भारत) </div><span class="switcher-label" style="display:none">भारत का नक्शा दिखाएँ</span></div></div></div></div>कानीवाड़ा |- | colspan="2" class="infobox-full-data" |निर्देशांकः 25°33′49′′N 72°39′23′′E/25.5635748 °N 72.6562804 °E/ |- class="mergedrow" ! class="infobox-label" scope="row" |[[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|राज्य]] | class="infobox-data" |[[राजस्थान]] |- class="mergedrow" ! class="infobox-label" scope="row" |[[भारत के ज़िले|जिला]] | class="infobox-data" |[[जालौर जिला|जालोर]] |- class="mergedtoprow" ! class="infobox-label" scope="row" |स्थापित किया गया | class="infobox-data" |[[१६वीं शताब्दी|16वीं शताब्दी]] |- class="mergedtoprow" ! colspan="2" class="infobox-header" |सरकार<div class="ib-settlement-fn"></div> |- class="mergedrow" ! class="infobox-label" scope="row" |• टाइप करें&nbsp;&nbsp; | class="infobox-data" |[[पंचायत|ग्राम पंचायत]] |- class="mergedrow" ! class="infobox-label" scope="row" |• शरीर&nbsp;&nbsp; | class="infobox-data agent" |पंचायती राज (भारत) |- class="mergedtoprow" ! class="infobox-label" scope="row" |ऊँचाई<div class="ib-settlement-fn"></div> | class="infobox-data" |162 मी. (531 फीट) &nbsp;&nbsp; |- class="mergedtoprow" ! colspan="2" class="infobox-header" |भाषाएँ<div class="ib-settlement-fn"></div> |- class="mergedrow" ! class="infobox-label" scope="row" |• आधिकारिक&nbsp;&nbsp; | class="infobox-data" |[[हिन्दी|हिंदी]], [[मारवाड़ी भाषा|मारवाड़ी]] |- class="mergedtoprow" ! class="infobox-label" scope="row" |[[आईएसओ 3166|आईएसओ 3166 कोड]] | class="infobox-data nickname" |[[आइएसओ 3166-2:आइएन|आरजे-आईएन]] |- class="mergedrow" ! class="infobox-label" scope="row" |[[वाहन पंजीकरण प्लेट|वाहनों का पंजीकरण]] | class="infobox-data" |आरजे-16 |- class="mergedrow" ! class="infobox-label" scope="row" |[[लिंगानुपात]] | class="infobox-data" |938♂/♀ |} '''कानिवाड़ा '''<ref>{{Cite web |title=Kaniwara Village Population - Ahore - Jalor, Rajasthan |url=https://www.census2011.co.in/data/village/89230-kaniwara-rajasthan.html |access-date=2026-05-17 |website=www.census2011.co.in}}</ref><ref>{{Cite web |title=Kaniwara Village (Pincode: 343001), Ahore, Jalore {{!}} Rajasthan {{!}} – Population, Area, Nearby Villages, Assembly & Parliament Constituency |url=https://villageinfo.org/village/89230 |access-date=2026-05-17 |website=villageinfo.org}}</ref> भारत के राजस्थान राज्य के जालोर जिले की आहोर तहसील में स्थित एक गाँव है। यह अपने ऐतिहासिक और अनूठे [[कानीवाड़ा हनुमान मंदिर]] के लिए व्यापक रूप से प्रसिद्ध है ।<ref>{{Cite web |title=कानीवाड़ा का 800 साल पुराना चमत्कारी हनुमानजी मंदिर, जानिए किस दिन पूरी होती है मनोकामना |url=https://www.patrika.com/jalore-news/hanuman-mandir-800-years-miraculous-hanuman-ji-temple-in-kaniwara-rajasthan-8490434 |access-date=2025-11-15 |website=Patrika News |language=hi}}</ref><ref>{{Cite web |last=Live |first=A. B. P. |date=2023-02-08 |title=कानीवाड़ा का चमत्कारी मंदिर, जहां बिना छत के रहते हैं हनुमान भगवान |url=https://www.abplive.com/lifestyle/religion/rajasthan-jalore-kaniwada-hanuman-mandir-jalore-dalit-priests-get-worship-done-unique-temple-without-roof-2328991 |access-date=2025-11-15 |website=ABP News |language=hi}}</ref><ref>{{Cite news |title=800 साल पुराना है [[जालोर]] का यह [[हनुमान मंदिर]], आस्था और चमत्कार का है संगम, सामाजिक एकता का भी है प्रतीक |url=https://hindi.news18.com/news/dharm/jalore-kaniwada-hanuman-temple-is-800-years-old-confluence-of-faith-and-miracles-pm-modi-also-praised-social-unity-local18-9170844.html |archive-url=https://web.archive.org/web/20250413033034/https://hindi.news18.com/news/dharm/jalore-kaniwada-hanuman-temple-is-800-years-old-confluence-of-faith-and-miracles-pm-modi-also-praised-social-unity-local18-9170844.html |archive-date=2025-04-13 |access-date=2025-11-15 |work=News18 हिंदी |language=hi-IN}}</ref><ref>{{Cite web |last=डेस्क |first=डीएनए हिंदी वेब |title=Hanuman Mandir Jalore: राजस्थान के इस हनुमान मंदिर की कभी नहीं बन सकी छत, जानें क्यों ? |url=https://www.dnaindia.com/hindi/spiritual/report-jalore-kaniwada-hanuman-mandir-rajasthan-never-made-roof-know-reason-intresting-fact-4074779 |access-date=2025-11-15 |website=DNA Hindi |language=hi}}</ref> ==संदर्भ== [[श्रेणी:हनुमान मंदिर]] [[श्रेणी:राजस्थान के लोक देवता]] [[श्रेणी:जालोर जिले के दर्शनीय स्थल]] [[श्रेणी:जालौर ज़िले के गाँव]] [[श्रेणी:विकिडेटा पर अनुपलब्ध निर्देशांक]] mfayc07mmyqymo8583rcxi8b4quj83y 6630404 6630403 2026-10-17T10:12:42Z SparrowQ 86379 [[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:हनुमान मंदिर]] हटाई 6630404 wikitext text/x-wiki {| class="infobox ib-settlement vcard" ! colspan="2" class="infobox-above" |<div class="fn org">कानीवाड़ा</div> |- | colspan="2" class="infobox-subheader" |<div class="category">गाँव</div> |- class="mergedtoprow ib-settlement-official" | colspan="2" class="infobox-full-data" |कानीवाड़ा |- class="mergedtoprow" | colspan="2" class="infobox-full-data" |<div class="switcher-container"><templatestyles src="Module:Location map/styles.css"></templatestyles><div class="center"><div class="locmap" style="width:250px;float:none;clear:both;margin-left:auto;margin-right:auto"><div style="width:250px;padding:0"><div style="position:relative;width:250px">[[चित्र:Kaniwada Hanuman Temple.jpg|250px|thumb|[[कानीवाड़ा हनुमान मंदिर]]]][[चित्र:India_Rajasthan_location_map.svg|वर्ग=notpageimage noviewer|250x250पिक्सेल|Kaniwara is located in Rajasthan]]<div class="od notheme" style="top:62.903%;left:35.513%;font-size:91%"><div class="id" style="left:-3px;top:-3px">[[चित्र:Red_pog.svg|कड़ी=|वर्ग=notpageimage noviewer|6x6पिक्सेल|Kaniwara]]</div><div class="pr" style="width:6em;left:4px"><div>कानीवाड़ा</div></div></div></div><div style="padding-top:0.2em">राजस्थान, भारत में स्थान</div><span class="switcher-label" style="display:none">राजस्थान का नक्शा दिखाएँ</span></div></div></div><templatestyles src="Module:Location map/styles.css"></templatestyles><div class="center"><div class="locmap" style="width:250px;float:none;clear:both;margin-left:auto;margin-right:auto"><div style="width:250px;padding:0"><div style="position:relative;width:250px">[[चित्र:India_location_map.svg|वर्ग=notpageimage noviewer|269x269पिक्सेल|Kaniwara is located in India]]<div class="od notheme" style="top:36.727%;left:17.676%;font-size:91%"><div class="id" style="left:-3px;top:-3px">[[चित्र:Red_pog.svg|कड़ी=|वर्ग=notpageimage noviewer|6x6पिक्सेल|Kaniwara]]</div><div class="pr" style="width:6em;left:4px"><div>कनिवारा</div></div></div></div><div style="padding-top:0.2em">कानीवाड़ा (भारत) </div><span class="switcher-label" style="display:none">भारत का नक्शा दिखाएँ</span></div></div></div><templatestyles src="Module:Location map/styles.css"></templatestyles><div class="center"><div class="locmap" style="width:250px;float:none;clear:both;margin-left:auto;margin-right:auto"><div style="width:250px;padding:0"><div style="position:relative;width:250px">[[चित्र:India_location_map.svg|वर्ग=notpageimage noviewer|269x269पिक्सेल|Kaniwara is located in India]]<div class="od notheme" style="top:36.727%;left:17.676%;font-size:91%"><div class="id" style="left:-3px;top:-3px">[[चित्र:Red_pog.svg|कड़ी=|वर्ग=notpageimage noviewer|6x6पिक्सेल|Kaniwara]]</div><div class="pr" style="width:6em;left:4px"><div></div> </div></div></div><div style="padding-top:0.2em">कनिवारा (भारत) </div><span class="switcher-label" style="display:none">भारत का नक्शा दिखाएँ</span></div></div></div></div>कानीवाड़ा |- | colspan="2" class="infobox-full-data" |निर्देशांकः 25°33′49′′N 72°39′23′′E/25.5635748 °N 72.6562804 °E/ |- class="mergedrow" ! class="infobox-label" scope="row" |[[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|राज्य]] | class="infobox-data" |[[राजस्थान]] |- class="mergedrow" ! class="infobox-label" scope="row" |[[भारत के ज़िले|जिला]] | class="infobox-data" |[[जालौर जिला|जालोर]] |- class="mergedtoprow" ! class="infobox-label" scope="row" |स्थापित किया गया | class="infobox-data" |[[१६वीं शताब्दी|16वीं शताब्दी]] |- class="mergedtoprow" ! colspan="2" class="infobox-header" |सरकार<div class="ib-settlement-fn"></div> |- class="mergedrow" ! class="infobox-label" scope="row" |• टाइप करें&nbsp;&nbsp; | class="infobox-data" |[[पंचायत|ग्राम पंचायत]] |- class="mergedrow" ! class="infobox-label" scope="row" |• शरीर&nbsp;&nbsp; | class="infobox-data agent" |पंचायती राज (भारत) |- class="mergedtoprow" ! class="infobox-label" scope="row" |ऊँचाई<div class="ib-settlement-fn"></div> | class="infobox-data" |162 मी. 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B. P. |date=2023-02-08 |title=कानीवाड़ा का चमत्कारी मंदिर, जहां बिना छत के रहते हैं हनुमान भगवान |url=https://www.abplive.com/lifestyle/religion/rajasthan-jalore-kaniwada-hanuman-mandir-jalore-dalit-priests-get-worship-done-unique-temple-without-roof-2328991 |access-date=2025-11-15 |website=ABP News |language=hi}}</ref><ref>{{Cite news |title=800 साल पुराना है [[जालोर]] का यह [[हनुमान मंदिर]], आस्था और चमत्कार का है संगम, सामाजिक एकता का भी है प्रतीक |url=https://hindi.news18.com/news/dharm/jalore-kaniwada-hanuman-temple-is-800-years-old-confluence-of-faith-and-miracles-pm-modi-also-praised-social-unity-local18-9170844.html |archive-url=https://web.archive.org/web/20250413033034/https://hindi.news18.com/news/dharm/jalore-kaniwada-hanuman-temple-is-800-years-old-confluence-of-faith-and-miracles-pm-modi-also-praised-social-unity-local18-9170844.html |archive-date=2025-04-13 |access-date=2025-11-15 |work=News18 हिंदी |language=hi-IN}}</ref><ref>{{Cite web |last=डेस्क |first=डीएनए हिंदी वेब |title=Hanuman Mandir Jalore: राजस्थान के इस हनुमान मंदिर की कभी नहीं बन सकी छत, जानें क्यों ? |url=https://www.dnaindia.com/hindi/spiritual/report-jalore-kaniwada-hanuman-mandir-rajasthan-never-made-roof-know-reason-intresting-fact-4074779 |access-date=2025-11-15 |website=DNA Hindi |language=hi}}</ref> ==संदर्भ== [[श्रेणी:राजस्थान के लोक देवता]] [[श्रेणी:जालोर जिले के दर्शनीय स्थल]] [[श्रेणी:जालौर ज़िले के गाँव]] [[श्रेणी:विकिडेटा पर अनुपलब्ध निर्देशांक]] oxqp154oiw6zqigdvncy7klmfwatt9l 6630406 6630404 2026-10-17T10:12:49Z SparrowQ 86379 [[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:राजस्थान के लोक देवता]] हटाई 6630406 wikitext text/x-wiki {| class="infobox ib-settlement vcard" ! colspan="2" class="infobox-above" |<div class="fn org">कानीवाड़ा</div> |- | colspan="2" class="infobox-subheader" |<div class="category">गाँव</div> |- class="mergedtoprow ib-settlement-official" | colspan="2" class="infobox-full-data" |कानीवाड़ा |- class="mergedtoprow" | colspan="2" class="infobox-full-data" |<div class="switcher-container"><templatestyles src="Module:Location map/styles.css"></templatestyles><div class="center"><div class="locmap" style="width:250px;float:none;clear:both;margin-left:auto;margin-right:auto"><div style="width:250px;padding:0"><div style="position:relative;width:250px">[[चित्र:Kaniwada Hanuman Temple.jpg|250px|thumb|[[कानीवाड़ा हनुमान मंदिर]]]][[चित्र:India_Rajasthan_location_map.svg|वर्ग=notpageimage noviewer|250x250पिक्सेल|Kaniwara is located in Rajasthan]]<div class="od notheme" style="top:62.903%;left:35.513%;font-size:91%"><div class="id" style="left:-3px;top:-3px">[[चित्र:Red_pog.svg|कड़ी=|वर्ग=notpageimage noviewer|6x6पिक्सेल|Kaniwara]]</div><div class="pr" style="width:6em;left:4px"><div>कानीवाड़ा</div></div></div></div><div style="padding-top:0.2em">राजस्थान, भारत में स्थान</div><span class="switcher-label" style="display:none">राजस्थान का नक्शा दिखाएँ</span></div></div></div><templatestyles src="Module:Location map/styles.css"></templatestyles><div class="center"><div class="locmap" style="width:250px;float:none;clear:both;margin-left:auto;margin-right:auto"><div style="width:250px;padding:0"><div style="position:relative;width:250px">[[चित्र:India_location_map.svg|वर्ग=notpageimage noviewer|269x269पिक्सेल|Kaniwara is located in India]]<div class="od notheme" style="top:36.727%;left:17.676%;font-size:91%"><div class="id" style="left:-3px;top:-3px">[[चित्र:Red_pog.svg|कड़ी=|वर्ग=notpageimage noviewer|6x6पिक्सेल|Kaniwara]]</div><div class="pr" style="width:6em;left:4px"><div>कनिवारा</div></div></div></div><div style="padding-top:0.2em">कानीवाड़ा (भारत) </div><span class="switcher-label" style="display:none">भारत का नक्शा दिखाएँ</span></div></div></div><templatestyles src="Module:Location map/styles.css"></templatestyles><div class="center"><div class="locmap" style="width:250px;float:none;clear:both;margin-left:auto;margin-right:auto"><div style="width:250px;padding:0"><div style="position:relative;width:250px">[[चित्र:India_location_map.svg|वर्ग=notpageimage noviewer|269x269पिक्सेल|Kaniwara is located in India]]<div class="od notheme" style="top:36.727%;left:17.676%;font-size:91%"><div class="id" style="left:-3px;top:-3px">[[चित्र:Red_pog.svg|कड़ी=|वर्ग=notpageimage noviewer|6x6पिक्सेल|Kaniwara]]</div><div class="pr" style="width:6em;left:4px"><div></div> </div></div></div><div style="padding-top:0.2em">कनिवारा (भारत) </div><span class="switcher-label" style="display:none">भारत का नक्शा दिखाएँ</span></div></div></div></div>कानीवाड़ा |- | colspan="2" class="infobox-full-data" |निर्देशांकः 25°33′49′′N 72°39′23′′E/25.5635748 °N 72.6562804 °E/ |- class="mergedrow" ! class="infobox-label" scope="row" |[[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|राज्य]] | class="infobox-data" |[[राजस्थान]] |- class="mergedrow" ! class="infobox-label" scope="row" |[[भारत के ज़िले|जिला]] | class="infobox-data" |[[जालौर जिला|जालोर]] |- class="mergedtoprow" ! class="infobox-label" scope="row" |स्थापित किया गया | class="infobox-data" |[[१६वीं शताब्दी|16वीं शताब्दी]] |- class="mergedtoprow" ! colspan="2" class="infobox-header" |सरकार<div class="ib-settlement-fn"></div> |- class="mergedrow" ! class="infobox-label" scope="row" |• टाइप करें&nbsp;&nbsp; | class="infobox-data" |[[पंचायत|ग्राम पंचायत]] |- class="mergedrow" ! class="infobox-label" scope="row" |• शरीर&nbsp;&nbsp; | class="infobox-data agent" |पंचायती राज (भारत) |- class="mergedtoprow" ! class="infobox-label" scope="row" |ऊँचाई<div class="ib-settlement-fn"></div> | class="infobox-data" |162 मी. (531 फीट) &nbsp;&nbsp; |- class="mergedtoprow" ! colspan="2" class="infobox-header" |भाषाएँ<div class="ib-settlement-fn"></div> |- class="mergedrow" ! class="infobox-label" scope="row" |• आधिकारिक&nbsp;&nbsp; | class="infobox-data" |[[हिन्दी|हिंदी]], [[मारवाड़ी भाषा|मारवाड़ी]] |- class="mergedtoprow" ! class="infobox-label" scope="row" |[[आईएसओ 3166|आईएसओ 3166 कोड]] | class="infobox-data nickname" |[[आइएसओ 3166-2:आइएन|आरजे-आईएन]] |- class="mergedrow" ! class="infobox-label" scope="row" |[[वाहन पंजीकरण प्लेट|वाहनों का पंजीकरण]] | class="infobox-data" |आरजे-16 |- class="mergedrow" ! class="infobox-label" scope="row" |[[लिंगानुपात]] | class="infobox-data" |938♂/♀ |} '''कानिवाड़ा '''<ref>{{Cite web |title=Kaniwara Village Population - Ahore - Jalor, Rajasthan |url=https://www.census2011.co.in/data/village/89230-kaniwara-rajasthan.html |access-date=2026-05-17 |website=www.census2011.co.in}}</ref><ref>{{Cite web |title=Kaniwara Village (Pincode: 343001), Ahore, Jalore {{!}} Rajasthan {{!}} – Population, Area, Nearby Villages, Assembly & Parliament Constituency |url=https://villageinfo.org/village/89230 |access-date=2026-05-17 |website=villageinfo.org}}</ref> भारत के राजस्थान राज्य के जालोर जिले की आहोर तहसील में स्थित एक गाँव है। यह अपने ऐतिहासिक और अनूठे [[कानीवाड़ा हनुमान मंदिर]] के लिए व्यापक रूप से प्रसिद्ध है ।<ref>{{Cite web |title=कानीवाड़ा का 800 साल पुराना चमत्कारी हनुमानजी मंदिर, जानिए किस दिन पूरी होती है मनोकामना |url=https://www.patrika.com/jalore-news/hanuman-mandir-800-years-miraculous-hanuman-ji-temple-in-kaniwara-rajasthan-8490434 |access-date=2025-11-15 |website=Patrika News |language=hi}}</ref><ref>{{Cite web |last=Live |first=A. B. P. |date=2023-02-08 |title=कानीवाड़ा का चमत्कारी मंदिर, जहां बिना छत के रहते हैं हनुमान भगवान |url=https://www.abplive.com/lifestyle/religion/rajasthan-jalore-kaniwada-hanuman-mandir-jalore-dalit-priests-get-worship-done-unique-temple-without-roof-2328991 |access-date=2025-11-15 |website=ABP News |language=hi}}</ref><ref>{{Cite news |title=800 साल पुराना है [[जालोर]] का यह [[हनुमान मंदिर]], आस्था और चमत्कार का है संगम, सामाजिक एकता का भी है प्रतीक |url=https://hindi.news18.com/news/dharm/jalore-kaniwada-hanuman-temple-is-800-years-old-confluence-of-faith-and-miracles-pm-modi-also-praised-social-unity-local18-9170844.html |archive-url=https://web.archive.org/web/20250413033034/https://hindi.news18.com/news/dharm/jalore-kaniwada-hanuman-temple-is-800-years-old-confluence-of-faith-and-miracles-pm-modi-also-praised-social-unity-local18-9170844.html |archive-date=2025-04-13 |access-date=2025-11-15 |work=News18 हिंदी |language=hi-IN}}</ref><ref>{{Cite web |last=डेस्क |first=डीएनए हिंदी वेब |title=Hanuman Mandir Jalore: राजस्थान के इस हनुमान मंदिर की कभी नहीं बन सकी छत, जानें क्यों ? |url=https://www.dnaindia.com/hindi/spiritual/report-jalore-kaniwada-hanuman-mandir-rajasthan-never-made-roof-know-reason-intresting-fact-4074779 |access-date=2025-11-15 |website=DNA Hindi |language=hi}}</ref> ==संदर्भ== [[श्रेणी:जालोर जिले के दर्शनीय स्थल]] [[श्रेणी:जालौर ज़िले के गाँव]] [[श्रेणी:विकिडेटा पर अनुपलब्ध निर्देशांक]] lwdgn7bb10cecerr97aeeqw9mb2bcg0 रुद्र पर्वत 0 1612973 6630381 6559255 2026-10-17T07:54:03Z CommonsDelinker 743 "Rudra_Parvat.jpg" को हटाया। इसे कॉमन्स से [[commons:User:CptViraj|CptViraj]] ने हटा दिया है। कारण: [[:c:Commons:Deletion requests/Files uploaded by Tarzen954|]] 6630381 wikitext text/x-wiki रुद्र पर्वत [[रुद्र]] पर्वत [[हिमाचल प्रदेश]], भारत में स्थित एक ऊँचा हिमालयी पर्वत है। इसके निर्देशांक 32°10′54.43″N और 78°36′07.65″E हैं। यह पर्वत 5,100 मीटर से अधिक ऊँचाई पर स्थित है और ट्रांस‑हिमालयी पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है। रुद्र पर्वत अपने बर्फ़ीले ग्लेशियरों, खड़ी ढलानों और कठिन पहुँच वाले रास्तों के लिए जाना जाता है। यह पर्वत न केवल भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरणीय, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।<ref>{{cite web |last1=Ashu |first1=Mann |title=The Storm Peak: Rudra's Unyielding Watch |url=https://www.republicworld.com/opinion/the-storm-peak-rudra-s-unyielding-watch-2026-06-01-126425 |website=Republic World |publisher=Republic World |access-date=3 जून 2026 |language=en-IN |date=1 जून 2026}}</ref> =='''भौगोलिक स्थिति'''== रुद्र पर्वत उस क्षेत्र में स्थित है जहाँ भारतीय मानसून की नम हवाएँ और तिब्बती पठार की ठंडी, शुष्क हवाएँ मिलती हैं। इस कारण यहाँ मौसम बहुत जल्दी बदलता है। तेज़ हवाएँ, अचानक बर्फबारी और अत्यधिक ठंड इस क्षेत्र की आम विशेषताएँ हैं। पर्वत की ऊँचाइयों पर मौजूद ग्लेशियरों से पिघला हुआ पानी छोटी नदियों में बहकर घाटियों तक पहुँचता है और बाद में बड़े नदी तंत्र से जुड़ जाता है। यह पानी स्थानीय समुदायों, कृषि और पशुपालन के लिए जीवनदायिनी है। =='''भूविज्ञान और भूभाग'''== रुद्र पर्वत बर्फ़ीली चोटियों, ग्लेशियरों और चट्टानी ढलानों से बना है। इसका भूभाग कठोर और दुर्गम है। ग्लेशियर यहाँ के जल चक्र के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे पानी का संग्रह करते हैं और धीरे-धीरे इसे नीचे के क्षेत्रों में छोड़ते हैं। इस पानी के बिना स्थानीय कृषि और पशुपालन संभव नहीं है। इसके अलावा, पर्वत का भूभाग स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और वन्य जीवन को भी प्रभावित करता है। =='''सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व'''== रुद्र पर्वत प्राचीन काल से भारत, [[तिब्बत]] और मध्य एशिया को जोड़ने वाले व्यापार और यात्रा मार्गों का हिस्सा रहा है। इन मार्गों के माध्यम से लोग नमक, ऊन, रेशम, धार्मिक ग्रंथ और विचार ले जाते थे। स्थानीय हिमालयी समुदायों में पर्वतों को केवल प्राकृतिक संरचना नहीं माना जाता, बल्कि उन्हें सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। रुद्र पर्वत स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली का भी हिस्सा है। =='''सर्वेक्षण और रणनीतिक महत्व'''== 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन ने हिमालय का वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया। ग्रेट ट्रिगोनोमेट्रिकल सर्वे के दौरान रुद्र पर्वत और आसपास के क्षेत्रों का मापन किया गया। इस सर्वेक्षण ने प्रशासनिक और रणनीतिक दृष्टि से क्षेत्र की समझ बढ़ाई और उच्च हिमालयी क्षेत्रों के भूगोल और ऊँचाई का सटीक ज्ञान प्रदान किया। =='''उच्च हिमालयी चुनौतियाँ'''== उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जीवन कठिन है। यहाँ ऑक्सीजन कम होती है और तापमान बहुत ठंडा रहता है। हिमस्खलन और भूस्खलन का खतरा भी रहता है। दूरस्थ और दुर्गम रास्तों के कारण यहाँ पहुँच सीमित होती है। स्थानीय लोग और यात्रियों को इन परिस्थितियों में जीवित रहने के लिए अनुभव, तैयारी और सावधानी बरतनी पड़ती है। =='''पर्यावरणीय चिंता'''== जलवायु परिवर्तन के कारण रुद्र पर्वत के ग्लेशियर पीछे हट रहे हैं और पिघलने के पैटर्न बदल रहे हैं। इससे नदियों और जल स्रोतों पर असर पड़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप नीचे बसे लोग, खेती, पशुपालन और वन्य जीवन प्रभावित हो सकते हैं। वैज्ञानिक लगातार इन परिवर्तनों का अध्ययन कर रहे हैं ताकि भविष्य में जल सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जा सके। रुद्र पर्वत हिमालय की एक महत्वपूर्ण शिखर है। इसकी बर्फ़ीली चोटियाँ, ग्लेशियर और नदियाँ न केवल भौगोलिक रूप से, बल्कि स्थानीय जीवन और पर्यावरण के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह पर्वत हिमालयी जीवन, पारिस्थितिकी और सांस्कृतिक इतिहास को समझने का एक महत्वपूर्ण संदर्भ प्रदान करता है। aggjs8u598fi7g6897dxqz06f70z5ah विश्व की स्तनधारी प्रजातियाँ 0 1614718 6630240 6582923 2026-10-16T13:51:31Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 2 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.6 6630240 wikitext text/x-wiki {{Infobox book | name = विश्व की स्तनधारी प्रजातियाँ | image = | editor = डॉन ई. विल्सन और डीएन एम. रीडर | subject = प्राणी विज्ञान, स्तनधारी विज्ञान, वर्गिकी | genre = वैज्ञानिक संदर्भ ग्रंथ | publisher = जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी प्रेस | release_date = 2005 (तीसरा संस्करण) | pages = 2,142 (दो खंडों में) }} '''विश्व की स्तनधारी प्रजातियाँ''' ({{Lang-en|Mammal Species of the World}}), जिसे संक्षेप में '''MSW''' कहा जाता है, प्राणी विज्ञान के क्षेत्र में एक अत्यंत प्रतिष्ठित और मानक संदर्भ ग्रंथ है। यह ग्रंथ दुनिया भर में पाई जाने वाली सभी ज्ञात स्तनधारी प्रजातियों के वर्गीकरण, नामकरण और भौगोलिक वितरण का सबसे व्यापक और आधिकारिक दस्तावेज़ है। वैश्विक स्तर पर जीवविज्ञानियों, संरक्षणवादियों और शोधकर्ताओं द्वारा इसका उपयोग स्तनधारियों के वैज्ञानिक नामों और उनकी वर्गिकी को प्रमाणित करने के लिए किया जाता है।<ref>{{Cite book|last=Wilson|first=Don E.|last2=Reeder|first2=DeeAnn M.|title=Mammal Species of the World: A Taxonomic and Geographic Reference|publisher=Johns Hopkins University Press|year=2005|isbn=978-0801882210|edition=3rd|pages=Preface (xxi-xxv)}}</ref> == प्रकाशन का इतिहास और संस्करण == स्तनधारियों के वर्गीकरण में एकरूपता लाने के उद्देश्य से इस ग्रंथ के अब तक तीन प्रमुख संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं: * '''पहला संस्करण (1982):''' इसका संपादन जे. एच. होनकी और उनके सहयोगियों द्वारा किया गया था। यह पहली बार था जब दुनिया भर की स्तनधारी प्रजातियों की एक व्यापक सूची एक ही स्थान पर संकलित की गई थी।<ref>{{Cite book|last=Honacki|first=James H.|title=Mammal Species of the World: A Taxonomic and Geographic Reference|url=https://archive.org/details/mammalspeciesofw0000unse_p1w2|publisher=Allen Press and Association of Systematics Collections|year=1982|isbn=978-0942924008|pages=[https://archive.org/details/mammalspeciesofw0000unse_p1w2/page/1 1]-5}}</ref> * '''दूसरा संस्करण (1993):''' इसे डॉन ई. विल्सन और डीएन एम. रीडर द्वारा संपादित किया गया, जिसमें नई खोजी गई प्रजातियों और आनुवंशिक शोधों के आधार पर वर्गीकरण में कई सुधार किए गए। * '''तीसरा संस्करण:''' यह सबसे प्रसिद्ध और वर्तमान में व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला संस्करण है। दो विशाल खंडों में प्रकाशित इस संस्करण में 136 स्तनधारी परिवारों और 5,416 से अधिक प्रजातियों का विस्तृत विवरण दर्ज़ है। == संरचना और विषयवस्तु == 'मैमल स्पीशीज़ ऑफ़ द वर्ल्ड' को मुख्य रूप से स्तनधारियों के वैज्ञानिक वर्गीकरण के पदानुक्रम - गण, कुल, वंश, और अंत में प्रजाति - के अनुसार व्यवस्थित किया गया है। पुस्तक में सूचीबद्ध प्रत्येक प्रजाति के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी प्रदान की गई है: # '''वैज्ञानिक नाम और लेखक:''' प्रजाति का वर्तमान स्वीकृत लैटिन नाम और उस वैज्ञानिक का नाम जिसने सबसे पहले इसका वर्णन किया था। # '''प्रारूप स्थान:''' वह सटीक भौगोलिक स्थान जहाँ से इस प्रजाति का पहला प्रामाणिक नमूना खोजा गया था। # '''भौगोलिक वितरण:''' दुनिया के किन देशों या क्षेत्रों में यह प्रजाति प्राकृतिक रूप से पाई जाती है। # '''समानार्थी शब्द:''' वर्गीकरण के इतिहास में इस प्रजाति को दिए गए अन्य सभी पुराने या अमान्य नाम।<ref>{{Cite web|url=https://www.departments.bucknell.edu/biology/resources/msw3/|title=Mammal Species of the World (Online Database)|publisher=Bucknell University|access-date=21 जून 2026|archive-url=https://web.archive.org/web/20250906021539/https://www.departments.bucknell.edu/biology/resources/msw3/|archive-date=6 सितंबर 2025|url-status=dead}}</ref> == वैश्विक मान्यता और डिजिटल उपलब्धता == इस ग्रंथ की वैज्ञानिक प्रामाणिकता का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि '''[[अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ]]''' अपनी प्रसिद्ध 'लाल सूची' तैयार करते समय स्तनधारियों के नामकरण के लिए मुख्य रूप से इसी ग्रंथ को आधार मानता है। इसके अतिरिक्त, (वन्यजीवों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन) जैसी वैश्विक संस्थाएँ भी इसी के वर्गीकरण का पालन करती हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.iucnredlist.org/resources/taxonomic-sources|title=Taxonomic Sources and Standard References|publisher=IUCN Red List of Threatened Species|access-date=21 जून 2026}}</ref> शोधकर्ताओं और छात्रों की सुविधा के लिए, तीसरे संस्करण (2005) का पूरा डेटाबेस अमेरिका के बकनेल विश्वविद्यालय द्वारा ऑनलाइन होस्ट किया गया है, जहाँ इसे मुफ्त में खोजा और पढ़ा जा सकता है। वर्तमान में इस ग्रंथ के चौथे संस्करण पर कार्य चल रहा है, जिसमें डीएनए अनुक्रमण के कारण खोजी गई नई प्रजातियों को शामिल किया जाएगा।<ref>{{Cite journal|last=Schlitter|first=Duane A.|title=Review of Mammal Species of the World: A Taxonomic and Geographic Reference|url=https://archive.org/details/sim_journal-of-mammalogy_2006-02_87_1/page/149|journal=Journal of Mammalogy|volume=87|issue=1|year=2006|pages=149–151}}</ref> == सन्दर्भ == {{Reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * [https://web.archive.org/web/20250906021539/https://www.departments.bucknell.edu/biology/resources/msw3/ 'मैमल स्पीशीज़ ऑफ़ द वर्ल्ड' का ऑनलाइन खोज डेटाबेस (बकनेल यूनिवर्सिटी)] [[श्रेणी:प्राणी विज्ञान]] [[श्रेणी:स्तनधारी]] tjsk35aaxxgoa3zixih8hdoy2x8penp साइक्लोस्पोरा 0 1616355 6630340 6629770 2026-10-17T04:24:42Z QuestForTrueTruth 852879 2026 ग्रीष्मकालीन प्रकोप के बारे में जानकारी दी गई है। 6630340 wikitext text/x-wiki {{Infobox medical condition | name = साइक्लोस्पोरियासिस | image = Cyclospora cayetanensis.jpg | caption = ''Cyclospora cayetanensis'' | pronounce = | field = [[संक्रामक रोग]] | synonyms = साइक्लोस्पोरोसिस | symptoms = {{hlist|पानी जैसा [[दस्त]]|भूख न लगना|वजन कम होना|[[पेट दर्द]]|[[मतली]]|[[थकान]]}} | complications = {{hlist|[[निर्जलीकरण]]|[[कुपोषण]]}} | onset = 2–14 दिन | duration = 6 सप्ताह तक | types = | causes = ''Cyclospora cayetanensis'' का मल–मुख मार्ग द्वारा संचरण | risks = दूषित भोजन (आमतौर पर ताज़ी उपज) या पानी का सेवन | diagnosis = {{hlist|मल की जाँच|पॉलीमरेज़ शृंखला अभिक्रिया|PCR}} | differential = | prevention = भोजन को पकाना और अच्छी तरह धोना | treatment = | medication = ट्राइमेथोप्रिम/सल्फामेथोक्साज़ोल | prognosis = | frequency = | deaths = }} {{Update after|2027}} '''साइक्लोस्पोरियासिस''' ({{Langx|en|Cyclosporiasis}}) एक रोग है, जो ''Cyclospora cayetanensis'' के ऊओसाइटों द्वारा होने वाले संक्रमण के कारण होता है। यह एक रोगजनक ''एपिकॉम्प्लेक्सा प्रोटोज़ोआ'' है, जो मल से दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैलता है।<ref name="Mathison 2021 Cyclosporiasis Microorganisms">{{Cite journal |last1=Mathison |first1=Blaine A. |last2=Pritt |first2=Bobbi S. |date=2021-09-02 |title=Cyclosporiasis-Updates on Clinical Presentation, Pathology, Clinical Diagnosis, and Treatment |journal=Microorganisms |volume=9 |issue=9 |pages=1863 |doi=10.3390/microorganisms9091863 |doi-access=free |issn=2076-2607 |pmc=8471761 |pmid=34576758}}</ref><ref>Talaro, Kathleen P., and Arthur Talaro. ''Foundations in Microbiology: Basic Principles''. Dubuque, Iowa: McGraw-Hill, 2002.</ref> यह खाद्य विषाक्तता का एक कारण है।<ref>{{Cite web|url=https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/17957-cyclosporiasis|title=What Is Cyclosporiasis?|website=Cleveland Clinic}}</ref>क्योंकि ''Cyclospora'' के ऊसिस्ट संक्रामक बनने से पहले पर्यावरण में 1–2 सप्ताह तक बीजाणुकरण (sporulate) करते हैं, इसलिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में प्रत्यक्ष संचरण की संभावना कम होती है।<ref>{{Cite web |last=CDC |date=2024-09-04 |title=About Cyclosporiasis |url=https://www.cdc.gov/cyclosporiasis/about/index.html |access-date=2025-10-24 |website=Cyclosporiasis |language=en-us}}</ref> संक्रमण विश्वभर में होते हैं, मुख्य रूप से [[उष्णकटिबंधीय]] और [[उपोष्णकटिबंधीय]] क्षेत्रों में, लेकिन 2010 के दशक से संयुक्त राज्य अमेरिका में भी ग्रीष्म ऋतु के दौरान मौसमी रूप से होते रहे हैं।<ref name="Mathison 2021 Cyclosporiasis Microorganisms" /> प्रकोपों को संयुक्त राज्य अमेरिका में दूषित फलों और सब्ज़ियों से जोड़ा गया है, और अन्य स्थानों पर संक्रमण कभी-कभी अधिक व्यापक रूप से खराब स्वच्छता मानकों से संबंधित होता है।<ref name="Mathison 2021 Cyclosporiasis Microorganisms" /> साइक्लोस्पोरियासिस का प्राथमिक लक्षण पानी जैसा [[दस्त]] है। साइक्लोस्पोरियासिस के अधिकांश मामलों में लक्षण हल्के होते हैं या बिल्कुल भी नहीं होते, लेकिन गंभीर रोग या यहाँ तक कि मृत्यु (आमतौर पर गंभीर [[निर्जलीकरण]] के कारण) हो सकती है, विशेष रूप से शिशुओं तथा प्रतिरक्षी-क्षीण लोगों में।<ref name="Mathison 2021 Cyclosporiasis Microorganisms" /> == संकेत और लक्षण == [[File:Cyclospora Lifecycle.gif|thumb|साइक्लोस्पोरियासिस का जीवन चक्र।]] ''Cyclospora cayetanensis'' [[आंत्रशोथ]] का कारण बनता है, जिसमें बीमारी की गंभीरता आयु, मेज़बान की स्थिति तथा संक्रामक खुराक की मात्रा के आधार पर भिन्न होती है। साइक्लोस्पोरियासिस के लक्षणों में पानी जैसा दस्त, भूख में कमी, वजन कम होना, पेट में सूजन और ऐंठन, बढ़ी हुई वायु त्याग, [[मतली]], थकान तथा हल्का [[ज्वर]] शामिल हैं। कभी-कभी इसके साथ उल्टी, पर्याप्त वजन में कमी, अत्यधिक दस्त तथा मांसपेशियों में दर्द भी हो सकता है।<ref>{{Cite web |last= |date=14 July 2026 |title=Symptoms of Cyclosporiasis |url=https://www.cdc.gov/cyclosporiasis/signs-symptoms/index.html |access-date=16 July 2026 |website=Cyclosporiasis |language=en-us|publisher=[[Centers for Disease Control and Prevention]]}}</ref><ref name="Mathison 2021 Cyclosporiasis Microorganisms" /> मेज़बान में [[ऊष्मायन अवधि]] आमतौर पर संक्रामक ऊओसिस्ट (oocysts) के सेवन के लगभग एक सप्ताह बाद होती है, और बीमारी स्व-सीमित होने से पहले 6 सप्ताह तक रह सकती है। उपचार न किए जाने पर, बीमारी दोबारा उभर सकती है। यह रोग शिशुओं, वृद्ध लोगों, उन लोगों सहित जो बीमार तो हो जाते हैं लेकिन स्थानिक (एंडेमिक) देशों में निवास नहीं करते, तथा कमज़ोर प्रतिरक्षा तंत्र वाले लोगों, जैसे एचआईवी/एड्स से ग्रस्त लोगों में, अधिक गंभीर होने की प्रवृत्ति रखता है।<ref>{{cite web |title=Symptoms of cyclosporiasis. Disease |url=https://www.cdc.gov/parasites/cyclosporiasis/disease.html |access-date=January 10, 2013 |publisher=Global Health - Division of Parasitic Diseases and Malaria Notice |archive-date=July 9, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220709093822/https://www.cdc.gov/parasites/cyclosporiasis/disease.html |url-status=dead }}</ref> गंभीर दस्त होने पर [[निर्जलीकरण]] और [[कुपोषण]] साइक्लोस्पोरायसिस के मामलों को जटिल बना सकते हैं।<ref name="Mathison 2021 Cyclosporiasis Microorganisms" /> मध्यम से गंभीर निर्जलीकरण की घटना असामान्य होती है,<ref name="Mathison 2021 Cyclosporiasis Microorganisms" /> लेकिन जब यह उपस्थित होता है, तो इसके लक्षणों में प्रतिपूरक क्षिप्रहृदयता, [[निम्न रक्तचाप]], तथा त्वचा की प्रत्यास्थता में कमी जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं। हालांकि, निर्जलीकरण के नैदानिक लक्षण असंगत होते हैं, और निर्जलीकरण गंभीर होने पर भी बहुत सूक्ष्म हो सकते हैं।<ref>{{Cite news |title=Dehydration-Dehydration - Symptoms & causes - Mayo Clinic |url=https://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/dehydration/symptoms-causes/syc-20354086 |archive-url=https://web.archive.org/web/20260623223654/https://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/dehydration/symptoms-causes/syc-20354086 |archive-date=2026-06-23 |access-date=2026-07-19 |work=Mayo Clinic |language=en}}</ref><ref>{{Cite journal |last=Lacey |first=Jonathan |last2=Corbett |first2=Jo |last3=Forni |first3=Lui |last4=Hooper |first4=Lee |last5=Hughes |first5=Fintan |last6=Minto |first6=Gary |last7=Moss |first7=Charlotte |last8=Price |first8=Susanna |last9=Whyte |first9=Greg |last10=Woodcock |first10=Tom |last11=Mythen |first11=Michael |last12=Montgomery |first12=Hugh |date=2019 |title=A multidisciplinary consensus on dehydration: definitions, diagnostic methods and clinical implications |url=https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/31204514 |journal=Annals of Medicine |volume=51 |issue=3-4 |pages=232–251 |doi=10.1080/07853890.2019.1628352 |issn=1365-2060 |pmc=7877883 |pmid=31204514}}</ref> प्रतिरक्षादुर्बल रोगियों में कभी-कभी इन्फ्लुएंज़ा-जैसी बीमारी के अविशिष्ट लक्षण भी देखे जाते हैं। == जोखिम कारक == विकासशील उष्णकटिबंधीय या उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में रहने वाले या यात्रा करने वाले व्यक्तियों में ''C. cayetanensis'' से संक्रमित होने का जोखिम बढ़ सकता है, क्योंकि यह इन क्षेत्रों में स्थानिक (एंडेमिक) है। स्थानिक क्षेत्रों में संक्रमण मौसमी प्रवृत्ति प्रदर्शित करते हैं, जिसे अभी तक अच्छी तरह से समझा नहीं गया है, जबकि उत्तरी अमेरिका में प्रकोप सबसे अधिक प्रायः वसंत ऋतु के उत्तरार्ध और ग्रीष्म ऋतु के दौरान होते हैं, जहाँ बड़ी संख्या में ऊओसिस्टों के स्पोरुलेट होने के लिए गर्म तापमान आवश्यक होता है।.<ref name="k-state.edu">{{cite web |title=Cyclospora cayetanensis |url=http://www.k-state.edu/parasitology/cyclospora/cyclospora.html |access-date=31 October 2001 |publisher=Division of Biology, Kansas State University}}</ref> विकासशील देशों की यात्रा के दौरान दूषित भोजन या पानी का सेवन करना [[यात्रियों का दस्त]] विकसित होने का एक सुविदित तरीका है, हालांकि विकासशील देशों से आयातित उपज भी अंतरराष्ट्रीय यात्रा के बिना इसका कारण बन सकती है।<ref>{{cite web |date=Fall 2002 |editor=NaTashua Davis |title=The McNair Journal |url=http://mcnair.missouri.edu/journal02.pdf |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20200926005459/https://mcnair.missouri.edu/journal02.pdf |archive-date=2020-09-26 |access-date=2015-04-30 |publisher=University of Missouri-Columbia}}</ref> दूषित पानी या मानव मल का [[उर्वरक]] के रूप में उपयोग किए जाने के परिणामस्वरूप ओओसिस्ट प्रायः पर्यावरण में उपस्थित होते हैं। चूँकि ऊसिस्ट (oocysts) संक्रमित व्यक्तियों के मल में उत्सर्जित होते हैं और फिर संक्रामक बनने से पहले उन्हें पर्यावरण में 2–14 दिनों तक परिपक्व होना पड़ता है, इसलिए किसी व्यक्ति के सीधे किसी अन्य व्यक्ति, जैसे कि किसी संक्रमित खाद्य-प्रबंधक (food handler), से संक्रमित होने की संभावना कम होती है।<ref name="pmid-20065331">{{cite journal |last1=Ortega |first1=Ynés R. |last2=Sanchez |first2=Roxana |date=January 2010 |title=Update on Cyclospora cayetanensis , a Food-Borne and Waterborne Parasite |journal=Clinical Microbiology Reviews |volume=23 |issue=1 |pages=218–234 |doi=10.1128/CMR.00026-09 |pmc=2806662 |pmid=20065331}}</ref> == निदान == [[निदान]] मल में पहचानने योग्य oocysts की कमी के कारण कठिन हो सकता है। PCR-आधारित DNA परीक्षण और अम्ल-तीव्र धुंधलाकरण पहचान में सहायता कर सकते हैं।<ref name="Mathison 2021 Cyclosporiasis Microorganisms" /> सुसंगत अतिसार संबंधी बीमारी के दौरान गर्मियों में, दो सप्ताह के भीतर ''Cyclospora'' oocysts से अधिक दूषित होने की संभावना वाले खाद्य पदार्थों, जैसे ताजी पत्तेदार सब्जियों, तुलसी, धनिया, या ताजी बेरीज के हाल ही में सेवन का इतिहास, साइक्लोस्पोरियासिस के संदेह को उत्पन्न करना चाहिए।<ref name="Mathison 2021 Cyclosporiasis Microorganisms" /> PCR प्रवर्धन को छोड़कर, एक बार संदिग्ध oocysts वाले नमूने को प्राप्त कर लेने के बाद, ''C. cayetanensis'' की पहचान करने के लिए मानक परीक्षण किए जाते हैं; गोलाकार oocysts के लिए फेज़-कंट्रास्ट ऑप्टिकल माइक्रोस्कोपी, परिवर्तनीय धुंधलापन (हल्के से लाल तक) के लिए संशोधित एसिड-फास्ट धुंधलाकरण, और autofluorescence के लिए ultraviolet प्रकाश का उपयोग किया जाता है। इन oocysts को प्राप्त करना आमतौर पर चुनौतीपूर्ण होता है, हालांकि हाल के अध्ययनों से उन्हें प्राप्त करने के आसान तरीकों का पता चलता है। oocysts की पहचान करने के लिए मल की जाँच में उपयोग की जाने वाली विभिन्न तकनीकों पर हाल के एक अध्ययन में, मल के एक नमूने को सुक्रोज़ विलयन में अपकेंद्रित करने और फिर उसकी थोड़ी मात्रा को एक स्लाइड पर स्थानांतरित करने की विधि ''C. cayetanensis'' oocysts का पता लगाने में उल्लेखनीय रूप से प्रभावी पाई गई—दोनों, पाए गए oocysts की संख्या और श्रम की सापेक्ष आसानी के संदर्भ में। वास्तव में, शोधपत्र ने निष्कर्ष निकाला कि प्राप्त सकारात्मक नमूने लगभग 84% थे।<ref>{{cite journal |last1=Riner |first1=Diana K. |last2=Mullin |first2=Andrew S. |last3=Lucas |first3=Sasha Y. |last4=Cross |first4=John H. |last5=Lindquist |first5=H.D. Alan |date=October 2007 |title=Enhanced concentration and isolation of Cyclospora cayetanensis oocysts from human fecal samples |journal=Journal of Microbiological Methods |volume=71 |issue=1 |pages=75–77 |doi=10.1016/j.mimet.2007.06.021 |pmid=17698229}}</ref> कम से कम एक न्यूक्लिक अम्ल प्रवर्धन परीक्षण <!-- (NAAT) --> संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप दोनों में व्यावसायिक रूप से उपलब्ध है, और कई अतिरिक्त परीक्षण पैनल यूरोप में उपयोग के लिए अनुमोदित हैं लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका में नहीं।<ref name="Mathison 2021 Cyclosporiasis Microorganisms"/>{{Update inline|date=July 2026|reason=More have likely been approved in recent years in the USA}} === निदान की चुनौतियाँ === अपने छोटे आकार, अंतःकोशिकीय आवास और अनेक हिस्टोलॉजिकल अभिरंजकों को ठीक से ग्रहण न कर पाने के कारण, ''C. cayetanensis'' का निदान बहुत कठिन हो सकता है। अब तक इस प्रोटोज़ोआन के सकारात्मक निदान के लिए चार विधियाँ स्थापित की गई हैं - मल के नमूनों में माइक्रोस्कोप द्वारा ओओसिस्ट का पता लगाना, आंतों के द्रव/छोटी आंत की बायोप्सी के नमूनों में ओओसिस्ट को पुनः प्राप्त करना, ओओसिस्ट के स्पोरुलेशन का प्रदर्शन करना, और PCR द्वारा ''C. cayetanensis'' DNA का प्रवर्धन। चूँकि इसका पता लगाना इतना कठिन है, इसलिए एक नकारात्मक परिणाम से ''C. cayetanensis'' की संभावना को नकारा नहीं जाना चाहिए; अगले कुछ दिनों में लिए गए ताज़ा मल के नमूनों से संबंधित परीक्षणों पर भी विचार किया जाना चाहिए।{{cn|date=May 2023}} [[File:Egg_Comparison.gif|thumb|साइक्लोस्पोरा के साथ अंडों की तुलना: Giardia-Cyclospora-Cryptosporidium-बैक्टीरियम-वायरस]] ''C. cayetanensis'' को अतीत में अन्य प्रोटोजोआ संक्रमणों के साथ भ्रमित किया गया है, जिसमें सबसे अधिक इसे गलत पहचान के कारण ''Cryptosporidium parvum'' समझ लिया जाता था। कई अंतर देखे जा सकते हैं, जिनमें आकार—''C. parvum'' छोटा होता है; संशोधित एसिड-फास्ट स्टेनिंग से प्राप्त भिन्न परिणाम—''C. parvum'' में लगातार लाल रंग की स्टेनिंग होती है, जबकि ''C. cayetanensis'' में परिवर्तनशील स्टेनिंग दिखाई देती है; और UV प्रकाश के तहत ऑटोफ्लोरेसेंस—''C. cayetanensis'' इसे प्रदर्शित करता है, जबकि ''C. parvum'' ऐसा नहीं करता है।{{cn|date=May 2023}} == उपचार == अधिकांश लोग जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली स्वस्थ होती है, बिना उपचार के ठीक हो जाते हैं।<ref name="CDC-2026">{{Cite news |date=2026-07-14 |title=Clinical Care of Cyclosporiasis |url=https://www.cdc.gov/cyclosporiasis/hcp/clinical-care/index.html |archive-url=https://web.archive.org/web/20260715203534/https://www.cdc.gov/cyclosporiasis/hcp/clinical-care/index.html |archive-date=2026-07-15 |access-date=2026-07-16 |work=CDC |language=en-us}}</ref>यदि उपचार न किया जाए, तो बीमारी कुछ दिनों से लेकर एक महीने या उससे अधिक समय तक रह सकती है। संकेत और लक्षण दूर होते हुए प्रतीत हो सकते हैं और फिर एक या अधिक बार वापस आ सकते हैं (पुनरावृत्ति)। दस्त-रोधी दवा दस्त को कम करने में मदद कर सकती है, लेकिन इसे लेने से पहले स्वास्थ्य-सेवा प्रदाता से परामर्श करने की सलाह दी जाती है। जिन लोगों का स्वास्थ्य खराब है या जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है, उनमें गंभीर या लंबे समय तक चलने वाली बीमारी का जोखिम अधिक हो सकता है।<ref name="cdc.gov">{{cite web |date=2018-10-18 |title=CDC - Cyclosporiasis - Treatment |url=https://www.cdc.gov/parasites/cyclosporiasis/treatment.html |website=CDC |access-date=2026-07-16 |archive-date=2022-12-08 |archive-url=https://web.archive.org/web/20221208174745/https://www.cdc.gov/parasites/cyclosporiasis/treatment.html |url-status=dead }}</ref> === प्रथम-पंक्ति उपचार === ट्राइमेथोप्रिम/सल्फामेथोक्साज़ोल (TMP-SMX), जिसे बैक्ट्रीम या को-ट्राइमेथोप्रिम के नाम से भी जाना जाता है, साइक्लोस्पोरियासिस के लिए पसंद का उपचार है। प्रतिरक्षाविहीन वयस्कों के लिए अनुशंसित खुराक 7–10 दिनों तक प्रतिदिन 160 mg TMP + 800 mg SMX की दो खुराक है; प्रतिरक्षाविहीन वयस्कों को आमतौर पर यही खुराक दी जाती है, लेकिन अधिक लंबी अवधि के लिए।<ref name="Mathison 2021 Cyclosporiasis Microorganisms"/><ref name="CDC-2026"/> The cure rate with TMP-SMX is around 96%.<ref name="Pyzocha N">Pyzocha N, Cuda A. Common Intestinal Parasites. ''American family physician''. 2023;108(5):487-493. Accessed July 16, 2026. </ref> TMP-SMX के प्रभावों में ऊओसिस्ट उत्सर्जन की अवधि में उल्लेखनीय कमी, दस्त का समाप्त होना, तथा दो से तीन दिनों के भीतर मल के नमूनों में ऊओसिस्ट का नकारात्मक पाया जाना शामिल है।<ref name="cdc.gov"/> गर्भावस्था के दौरान TMP-SMX को श्रेणी C में वर्गीकृत किया गया है, जिसका अर्थ है कि संभावित प्रतिकूल प्रभाव (जैसे टेराटोजेनिक, भ्रूण-घातक, या अन्य) उत्पन्न हो सकते हैं, और इसे केवल तभी दिया जाना चाहिए जब संभावित लाभ जोखिम को पर्याप्त रूप से उचित ठहराता हो। गर्भावस्था के अंतिम चरण के निकट इस औषधि से बचना चाहिए, क्योंकि नवजात शिशुओं में hyperbilirubinemia और kernicterus की उच्च संभावना होती है। इसके अतिरिक्त, TMP-SMX स्तन दुग्ध में उत्सर्जित हो सकता है, जो स्वस्थ, पूर्ण-अवधि वाले नवजात शिशुओं में संगत माना जाता है, किंतु समय से पूर्व जन्मे, बीमार, तनावग्रस्त, या पीलिया-ग्रस्त शिशुओं में इससे बचना चाहिए।<ref>{{cite web |date=2018-05-14 |title=CDC - Cyclosporiasis - Resources for Health Professionals - Treatment for Cyclosporiasis |url=https://www.cdc.gov/parasites/cyclosporiasis/health_professionals/tx.html |website=CDC |access-date=2026-07-16 |archive-date=2022-12-14 |archive-url=https://web.archive.org/web/20221214005723/https://www.cdc.gov/parasites/cyclosporiasis/health_professionals/tx.html |url-status=dead }}</ref> === विकल्प === उन लोगों के लिए जो ट्राइमेथोप्रिम/सल्फामेथोक्साज़ोल ले पाने में असमर्थ हैं (जैसे, सल्फोनामाइड से एलर्जी के कारण), nitazoxanide या ciprofloxacin को वैकल्पिक लेकिन बहुत कम प्रभावी एजेंट के रूप में अनुशंसित किया जाता है।<ref name="Mathison 2021 Cyclosporiasis Microorganisms"/><ref>{{cite web |title=Cyclospora infection Treatments and drugs |url=http://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/cyclospora/basics/treatment/con-20032789 |publisher=Mayo Clinic |access-date=19 अगस्त 2026 |archive-date=26 जुलाई 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170726223235/http://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/cyclospora/basics/treatment/con-20032789 |url-status=dead }}</ref>कुछ स्रोत सिप्रोफ्लोक्सासिन को व्यापक रूप से अप्रभावी मानते हैं।<ref name="CDC-2026"/> कई सामान्य परजीवीरोधी दवाएँ ''Cyclospora'' के विरुद्ध अप्रभावी हैं, जिनमें शामिल हैं:<ref name="CDC-2026"/> *एल्बेंडाज़ोल *अज़िथ्रोमाइसिन *टेट्रासाइक्लिन और डॉक्सीसाइक्लिन *मेट्रोनिडाज़ोल *ट्राइमेथोप्रिम (सल्फामेथॉक्साज़ोल के बिना) *टिनिडाज़ोल *क्विनाक्रिन *नैलिडिक्सिक एसिड *डिलोक्सानाइड फ्यूरोएट == रोकथाम == इस रोगजनक के विरुद्ध कोई टीका उपलब्ध नहीं है।<ref>{{cite web |date=2018-06-15 |title=Cyclosporiasis - Prevention & Control |url=https://www.cdc.gov/parasites/cyclosporiasis/prevent.html |publisher=CDC |access-date=2026-07-16 |archive-date=2022-11-29 |archive-url=https://web.archive.org/web/20221129231453/https://www.cdc.gov/parasites/cyclosporiasis/prevent.html |url-status=dead }}</ref> संक्रमण मल से दूषित भोजन और पानी के माध्यम से होता है, और भोजन को पकाना तथा पानी को उबालना ''Cyclospora'' को मारने का एकमात्र तरीका है।<ref>{{Cite web |last=Wallace |first=Katrine |date=2026-07-15 |title=Why we still don't know what foods are the source of the cyclospora outbreak |url=https://www.statnews.com/2026/07/15/why-cyclospora-source-remains-unknown-epidemiologist-explains/ |access-date=2026-07-15 |website=STAT |language=en-US}}</ref>भोजन तैयार करने से पहले साबुन और पानी से हाथ धोना तथा फलों और सब्जियों को बहते पानी के नीचे धोने से जोखिम कम हो सकता है, लेकिन रोगजनक को विश्वसनीय रूप से हटाया नहीं जा सकता। नियमित स्वच्छता द्वारा इसके मारे जाने की संभावना नहीं है।<ref>{{Cite web |last=CDC |date=2024-08-08 |title=Preventing Cyclosporiasis |url=https://www.cdc.gov/cyclosporiasis/prevention/index.html |access-date=2026-07-02 |website=Cyclosporiasis |language=en-us}}</ref> अन्य सलाह यात्रियों को उन क्षेत्रों में जाने से बचने की चेतावनी देती है जहाँ यह प्रोटोज़ोआ स्थानिक है (खराब स्वच्छता वाले उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र, और इन क्षेत्रों से उपज के आयातक, जैसे कि संयुक्त राज्य अमेरिका, पेरू, ब्राज़ील और हैती), विशेष रूप से जब परिस्थितियाँ ''Cyclospora'' के प्रसार के लिए सबसे अनुकूल हों। पानी या भोजन का क्लोरीन या आयोडीन से उपचार ''Cyclospora'' ओओसिस्ट को मारने की संभावना नहीं रखता है।<ref>{{cite web |date=2018-05-10 |title=CDC - Cyclosporiasis - Epidemiology & Risk Factors |url=https://www.cdc.gov/parasites/cyclosporiasis/epi.html |publisher=CDC |access-date=2026-07-16 |archive-date=2022-12-14 |archive-url=https://web.archive.org/web/20221214005747/https://www.cdc.gov/parasites/cyclosporiasis/epi.html |url-status=dead }}</ref> उद्गम कृषि परिवेश में बेहतर स्वास्थ्य प्रथाएँ, जैसे यह सुनिश्चित करना कि उपज की सिंचाई प्रणालियाँ ऐसे जल का उपयोग नहीं कर रही हैं, जिसकी मानव मल तक पहुँच हो, इसके प्रसार को कम कर सकती हैं। इसके अतिरिक्त, 1-माइक्रोन एब्सोल्यूट कार्बन जैसी फ़िल्टरिंग प्रणालियाँ ''Cyclospora'' की उपस्थिति को कम कर देंगी, जिससे इस परजीवी के प्रसार की घटनाओं में नाटकीय रूप से कमी आएगी।<ref name="pmid-20065331"/>''Cyclospora'', और कई अन्य खाद्य-जनित रोगजनकों से संक्रमित होने की संभावना को उपभोग से पहले फलों और सब्जियों को स्वच्छ पानी में अच्छी तरह से धोने से काफी हद तक कम किया जा सकता है। हालाँकि, केवल भोजन को धोने से मौजूद 100% ओओसिस्ट समाप्त नहीं होते हैं।<ref name="k-state.edu"/> == महामारी विज्ञान == === उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र === Cyclosporiasis उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में एक सामान्य बीमारी है, जो मनुष्यों में दुनिया भर में लगभग 3.5% की कुल [[प्रसार]] दर में योगदान देती है।<ref name="Kataria-2026">{{Cite journal |last1=Kataria |first1=Shaveta |last2=Singla |first2=Ashina |last3=Mamoria |first3=Ved Prakash |last4=Sharma |first4=Ishan |date=July 2026 |title=The burden of cyclosporiasis in immuno-compromised patients: A growing public health issue lessons from case studies |url=https://journals.sagepub.com/doi/10.1177/00494755261437456 |journal=Tropical Doctor |language=en |volume=56 |issue=3 |pages=514–520 |doi=10.1177/00494755261437456 |pmid=41919665 |issn=0049-4755}}</ref> मनुष्यों में साइक्लोस्पोरियासिस के पहले औपचारिक रूप से दर्ज किए गए मामले हाल ही में 1977, 1978 और 1979 में सामने आए थे। इनकी रिपोर्ट एशफोर्ड द्वारा की गई थी, जो एक ब्रिटिश परजीवी विज्ञानी थे और जिन्होंने [[Papua New Guinea]] में काम करते समय तीन मामलों की खोज की थी। एशफोर्ड ने पाया कि परजीवी में बहुत देर से sporulation होता था, जो 8–11 दिनों का था, जिससे बीमारी का निदान करना कठिन हो गया। मल की जांच करते समय, असंपुटित ओओसिस्ट को आसानी से कवक के बीजाणु समझ लिया जा सकता है, इस प्रकार वे नजरअंदाज हो जाते हैं।<ref>{{cite journal |last=Herwaldt |first=Barbara L. |date=October 2000 |title=Cyclospora cayetanensis: A Review, Focusing on the Outbreaks of Cyclosporiasis in the 1990s |url=https://archive.org/details/sim_clinical-infectious-diseases_2000-10_31_4/page/1040 |journal=Clinical Infectious Diseases |volume=31 |issue=4 |pages=1040–1057 |doi=10.1086/314051 |pmid=11049789 |doi-access=free}}</ref> {{Clear}} नेपाल में साइक्लोस्पोरियासिस संक्रमण की सूचना मिली है। एक अध्ययन में, घिमिरे ''et al.'' ने 2002 से 2004 तक काठमांडू घाटी में सब्जियों, सीवेज और तालाबों, नदियों, कुओं तथा नगरपालिका के नलों से पानी के नमूने एकत्र किए। उन्होंने मूली, फूलगोभी, पत्तागोभी और सरसों के पत्तों के साथ-साथ सीवेज और नदी के पानी में ''Cyclospora'' पाया। इस प्रथम महामारी-विज्ञान संबंधी अध्ययन ने नेपाल में साइक्लोस्पोरियासिस के प्रकोपों के मौसमी स्वरूप का निर्धारण किया, जो मई से सितंबर तक वर्षा ऋतु के दौरान होते हैं।<ref>{{cite journal |last1=Sherchand |first1=J. B. |last2=Ghimire |first2=T. R. |last3=Mishra |first3=P. N. |date=2005 |title=The seasonal outbreaks of cyclospora and cryptosporidium in Kathmandu, Nepal |url=https://jnhrc.com.np/index.php/jnhrc/article/view/2335 |journal=[[Journal of Nepal Health Research Council]] |volume=3 |issue=1 |pages=39–48 |doi=10.33314/jnhrc.v0i0.99 |doi-broken-date=July 15, 2026}}</ref> ===संयुक्त राज्य अमेरिका=== [[File:CyclosporiasisUSACases2026.jpg|thumb|left|upright=1.6|20 अगस्त 2026 तक संयुक्त राज्य अमेरिका में साइक्लोस्पोरियासिस के मामले<ref>{{cite web |title=This week: Arizona reaches 1 year of measles, Ebola passes 5K cases, and cyclosporiasis cases slow down! |url=https://mailchi.mp/messages/pandemic-center-tracking-report-8-20-2026 |website=us21.campaign-archive.com |publisher=The Pandemic Center}}</ref>]] संयुक्त राज्य अमेरिका में साइक्लोस्पोरियासिस का ग्रीष्मकालीन प्रकोप कम से कम 2010 के दशक से अक्सर होता रहा है,<ref name="Mathison 2021 Cyclosporiasis Microorganisms"/> हालांकि इससे पहले भी प्रकोप हुए हैं, जैसे कि शिकागो में 1990 में दूषित नल के पानी के कारण हुआ एक प्रकोप।<ref name="Kataria-2026"/>2018 और 2021 के बीच, साइक्लोस्पोरियासिस के लगभग 6,000 स्थानिक रूप से अर्जित मामलों का Centers for Disease Control and Prevention (CDC) द्वारा निदान और ट्रैक किया गया था।<ref name="Mathison 2021 Cyclosporiasis Microorganisms"/> संयुक्त राज्य अमेरिका में, ''Cyclospora'' की व्यापकता को 2025 तक Foodborne Diseases Active Surveillance Network (FoodNet) प्रणाली के माध्यम से ट्रैक किया गया, जब <!-- Trump did this? no evidence (the guardian is unreliable) Donald Trump's --> बजट कटौती के परिणामस्वरूप CDC ने इस बीमारी की रिपोर्टिंग को अनिवार्य करना बंद कर दिया।<ref>{{cite news |last=Cerullo |first=Megan |date=15 July 2026 |title=As cyclosporiasis cases rise, consumers are left guessing which foods to avoid |url=https://www.cbsnews.com/news/cyclospora-outbreak-foods-to-avoid/ |work=CBS News}}</ref><ref>{{Cite news |last=Shpiner |first=Robert B. |date=2026-07-16 |title=Cyclospora is easy for doctors to miss. The US made it even harder to spot |url=https://www.theguardian.com/commentisfree/2026/jul/16/diarrhea-outbreak-cyclospora-parasite-cdc |access-date=2026-07-17 |work=The Guardian |language=en-GB |issn=0261-3077}}</ref> संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रकोपों ​​को ताजा उपज के सेवन से जोड़ा गया है, जो मुख्य रूप से आयातित<ref>{{cite journal | last1=Almeria | first1=Sonia | last2=Cinar | first2=Hediye N. | last3=Dubey | first3=Jitender P. | title=Cyclospora cayetanensis and Cyclosporiasis: An Update | journal=Microorganisms | volume=7 | issue=9 | date=2019-09-04 | issn=2076-2607 | pmid=31487898 | pmc=6780905 | doi=10.3390/microorganisms7090317 | doi-access=free | page=317}}</ref> लेकिन घरेलू भी है।<ref>{{cite journal | last1=Markon | first1=André O. | last2=Karasick | first2=Andrew | last3=Punzalan | first3=Cecile | last4=da Silva | first4=Alexandre J. | last5=Wolpert | first5=Beverly | title=Evaluating Foodborne Cyclosporiasis Using Foodborne Diseases Active Surveillance Network and Foodborne Disease Outbreak Surveillance System Data, 2015–2019 | journal=[[The American Journal of Tropical Medicine and Hygiene]] | volume=112 | issue=2 | date=2025-02-05 | issn=0002-9637 | pmid=39561398 | pmc=11803675 | doi=10.4269/ajtmh.24-0208 | pages=319–326 | url=https://www.ajtmh.org/view/journals/tpmd/112/2/article-p319.xml | access-date=2026-07-28}}</ref> ==== <!--Updated above{{Update|section|date=July 2018}}--> खाद्यजनित प्रकोप 2000–2014 ==== यद्यपि ''Cyclospora'' को शुरू में उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों तक सीमित माना जाता था, उत्तरी अमेरिका में साइक्लोस्पोरियासिस के प्रकोप अधिक लगातार हो रहे हैं। CDC के अनुसार, 1990 के दशक से अमेरिका और कनाडा में साइक्लोस्पोरियासिस के कम से कम 11 प्रलेखित प्रकोप हुए हैं। CDC ने 1997 से 2008 तक साइक्लोस्पोरियासिस के 1,110 प्रयोगशाला-पुष्ट छिटपुट मामलों को भी दर्ज किया।<ref>{{cite web |title=Surveillance for Laboratory-Confirmed Sporadic Cases of Cyclosporiasis—United States, 1997–2008 |url=https://www.cdc.gov/mmwr/preview/mmwrhtml/ss6002a1.htm |publisher=CDC}}</ref> साइक्लोस्पोरियासिस के खाद्यजनित प्रकोपों को विभिन्न प्रकार की आयातित ताज़ी उपज से जोड़ा गया है, जिसमें [[रसभरी]], [[तुलसी]], मेस्क्लुन लेट्यूस, और [[धनिया]] शामिल हैं; आज तक किसी भी व्यावसायिक रूप से जमी हुई उपज को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। 2000 से पहले हुए साइक्लोस्पोरियासिस के अमेरिकी खाद्यजनित प्रकोपों का पहले ही सारांश दिया जा चुका था,<ref name="Cyclosporiasis Publications">{{Cite web|url=https://www.cdc.gov/parasites/cyclosporiasis/publications.html|title=CDC - Cyclosporiasis - Publications|date=June 14, 2021|website=cdc.gov|access-date=10 सितंबर 2026|archive-date=26 मार्च 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230326070926/https://www.cdc.gov/parasites/cyclosporiasis/publications.html|url-status=dead}}</ref>जैसे कि 2013<ref name="cdc.gov-2020">{{Cite web|url=https://www.cdc.gov/parasites/Cyclosporiasis/outbreaks/investigation-2013.html|title=Outbreak Investigations 2013 &#124; Cyclosporiasis &#124; CDC|date=October 22, 2020|website=cdc.gov|access-date=10 सितंबर 2026|archive-date=24 मार्च 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230324233605/https://www.cdc.gov/parasites/Cyclosporiasis/outbreaks/investigation-2013.html|url-status=dead}}</ref> और 2014 में हुए प्रमुख दस्तावेजीकृत प्रकोपों का भी।<ref name="outbreaks 2014">{{Cite web|url=https://www.cdc.gov/parasites/cyclosporiasis/outbreaks/2014/index.html|title=Outbreak Investigations 2014 &#124; Cyclosporiasis &#124; CDC|date=January 6, 2022|website=cdc.gov|access-date=10 सितंबर 2026|archive-date=8 दिसंबर 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20221208174833/https://www.cdc.gov/parasites/cyclosporiasis/outbreaks/2014/index.html|url-status=dead}}</ref> 2000–2014 के दौरान खाद्य-जनित प्रकोपों को तालिका में संक्षेपित किया गया है। तालिका 2000–2014 के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका में हुए साइक्लोस्पोरियासिस के 31 रिपोर्ट किए गए खाद्य-जनित प्रकोपों के बारे में जानकारी प्रदान करती है; मामलों की कुल संख्या 1,562 थी। 2003, 2007 या 2010 में कोई प्रकोप रिपोर्ट नहीं किया गया। कुल मिलाकर, प्रति वर्ष प्रकोपों की माध्यिका दो थी, जिसमें प्रति प्रकोप मामलों की माध्यिका 20 थी (सीमा, 3 से 582 मामले)। यद्यपि प्रकोप आठ महीनों (दिसंबर से जुलाई तक) के दौरान हुए, चरम महीने मई, जून और जुलाई थे। जैसा कि तालिका में दर्शाया गया है, 31 में से 15 प्रकोपों के लिए संक्रमण के खाद्य माध्यम की पहचान की गई थी। {| class="wikitable" |+ '''संयुक्त राज्य अमेरिका में साइक्लोस्पोरोसिस के खाद्यजनित प्रकोपों का सारांश, 2000–2014''' |- ! वर्ष(*)* ! माह(*)* ! अधिकार-क्षेत्र(*)* ! मामलों की संख्या† ! खाद्य वाहन और स्रोत, यदि पहचाना गया‡ |- |2006 |जून |न्यूयॉर्क |20 | |- |2006 |जुलाई |जॉर्जिया |3 | |- |2008 |मार्च |विस्कॉन्सिन |4 |शुगर स्नैप मटर (संभावित) |- |2008 |जुलाई |कैलिफ़ोर्निया |45 |रसभरी और/या ब्लैकबेरी (संभावित) |- |2009 |जून |डिस्ट्रिक्ट ऑफ़ कोलंबिया |34 | |- |2011 |जून |फ्लोरिडा |12 | |- |2011 |जुलाई |जॉर्जिया |100 | |- |2012 |जून–जुलाई |टेक्सास |16 | |- |2013** |जून |आयोवा और नेब्रास्का |161 |मेक्सिको से पैकेटबंद सलाद मिश्रण |- |2013** |जून–जुलाई |टेक्सास |38 |मेक्सिको से धनिया |- |2013 |जुलाई |विस्कॉन्सिन |8 |बेरी सलाद (संदिग्ध) |- |2014 |जून |मिशिगन |14 | |- |2014†† |जून–जुलाई |टेक्सास |26 |मेक्सिको से धनिया |- |2014 |जुलाई |दक्षिण कैरोलाइना |13 | |} <nowiki>*</nowiki> पहले तीन स्तंभों में दी गई प्रविष्टियाँ उस ज्ञात या संभावित वर्ष (वर्षों), महीने (महीनों) और अधिकार-क्षेत्र (अधिकार-क्षेत्रों) को दर्शाती हैं, जिनमें ''Cyclospora'' के संपर्क में आना हुआ था। <nowiki>**</nowiki> अतिरिक्त विवरण के लिए, 2013 में प्रकोप की जाँच के बारे में सारांश जानकारी देखें।<ref name="cdc.gov-2020"/> इस तालिका के प्रयोजनों के लिए, संपर्क के महीने (महीनों) और मामलों की संख्या केवल उन मामलों तक सीमित हैं, जिन्हें जाँच में अंतिम स्तंभ में निर्दिष्ट खाद्य पदार्थ से स्पष्ट रूप से जोड़ा गया था। † मामले की संख्या में साइक्लोस्पोरियासिस के प्रयोगशाला-पुष्ट और संभावित मामले शामिल हैं। परिभाषा के अनुसार, प्रत्येक प्रकोप में कम से कम दो जुड़े हुए मामले शामिल थे, जिनमें से कम से कम एक प्रयोगशाला-पुष्ट था। ‡ खाद्य माध्यम तभी निर्दिष्ट किया जाता है जब किसी प्रकोप की जाँच में किसी एकल घटक या वस्तु की पहचान की गई हो। ¶ संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा करने वाले कनाडाई यात्रियों में होने वाले मामलों को शामिल नहीं किया गया था। †† अतिरिक्त परिप्रेक्ष्य के लिए, 2014 में प्रकोप की जाँच के बारे में सारांश जानकारी देखें।<ref name="outbreaks 2014"/> इस तालिका के लिए, टेक्सास में हुए प्रकोप के लिए संपर्क के महीनों और मामलों की संख्या उन मामलों तक सीमित है जो जाँच में अंतिम कॉलम में निर्दिष्ट खाद्य पदार्थ से स्पष्ट रूप से जुड़े हुए थे। ===== 2013 प्रकोप ===== [[File:States_Reporting_Cyclospora_Infections.png|thumb|upright=1.3|CIDRAP से 19 अगस्त, 2013 तक ''Cyclospora'' संक्रमण की रिपोर्ट करने वाले राज्यों का मानचित्र]] जून और अगस्त 2013 के बीच, अमेरिका में इस रोग के कई स्वतंत्र प्रकोपों ने 25 राज्यों में कम से कम 631 लोगों को बीमार कर दिया।<ref>{{cite web |date=2019-04-12 |title=Case Count Maps - Outbreak Investigations 2013 - Cyclosporiasis - CDC |url=https://www.cdc.gov/parasites/cyclosporiasis/outbreaks/investigation-2013-maps.html |work=cdc.gov |access-date=17 सितंबर 2026 |archive-date=12 अप्रैल 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220412151145/https://www.cdc.gov/parasites/cyclosporiasis/outbreaks/investigation-2013-maps.html |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |date=5 August 2013 |title=CDC: 425 cases of cyclospora infection identified across 16 states |url=https://www.cbsnews.com/news/cdc-425-cases-of-cyclospora-infection-identified-across-16-states/ |work=cbsnews.com}}</ref> 26 जुलाई, 2013 तक 11 राज्यों में कम से कम 285 लोग संक्रमित हो चुके थे। CDC के अनुसार, प्रकोप का सटीक कारण अभी तक पहचाना नहीं गया था। अधिकांश मामले मिडवेस्ट में स्थित थे, जिनमें [[आयोवा]] में 138 और [[नेब्रास्का]] में 70 मामले दर्ज किए गए थे। प्रभावित अन्य राज्य [[टेक्सास]], [[फ्लोरिडा]], [[जॉर्जिया (अमेरिकी राज्य)|जॉर्जिया]], [[विस्कॉन्सिन]], [[कनेक्टिकट]], [[इलिनॉय]], कैनसस, [[मिनेसोटा]], [[न्यू जर्सी]], और [[ओहायो]] हैं।{{cn|date=मई 2023}} 29 जुलाई, 2013 तक, CDC ने बताया कि 15 राज्यों में 373 लोग इस प्रकोप से प्रभावित हुए थे, और तीन राज्यों के 21 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसमें किसी भी मौत की सूचना नहीं थी। खाद्य पदार्थ के किसी स्रोत की पहचान नहीं की गई थी, लेकिन आयोवा में स्वास्थ्य अधिकारियों—वह राज्य जहाँ सबसे अधिक मामले सामने आए थे—ने कहा कि उन्हें आयातित सब्जियों पर संदेह था।<ref>{{cite news |last=Schnirring |first=Lisa |date=July 29, 2013 |title=More states report Cyclospora cases; total reaches 373 |url=http://www.cidrap.umn.edu/news-perspective/2013/07/more-states-report-cyclospora-cases-total-reaches-373 |newspaper=CIDRAP News}}</ref> 30 जुलाई 2013 को, नेब्रास्का स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग और आयोवा स्वास्थ्य विभाग ने घोषणा की कि एक रेस्तरां श्रृंखला का पैकेज्ड सलाद परजीवी के लिए रोग-वाहक था।<ref>{{cite news |last1=Moisse |first1=Katie |date=30 July 2013 |title=Stomach Bug Outbreak Linked to Salad Mix |url=https://abcnews.com/blogs/health/2013/07/30/stomach-bug-outbreak-linked-to-salad-mix/ |work=ABC News}}</ref> हालांकि, CDC और U.S. Food and Drug Administration (FDA) ने यह देखने के लिए अन्य राज्यों से प्राप्त जानकारी का आकलन करना जारी रखा कि क्या ये निष्कर्ष वहाँ की बीमारियों पर लागू होते थे।<ref>{{cite news |last=Schnirring |first=Lisa |date=July 30, 2013 |title=Iowa, Nebraska link Cyclospora cases to bagged salad mix |url=http://www.cidrap.umn.edu/news-perspective/2013/07/iowa-nebraska-link-cyclospora-cases-bagged-salad-mix |newspaper=CIDRAP News}}</ref> 1 अगस्त, 2013 के एक अपडेट में, CDC ने 397 मामलों की सूचना दी, जबकि आयोवा और टेक्सास ने 22 और मामले जोड़े। इससे अनौपचारिक संख्या 400 से अधिक मामलों तक पहुँच गई। इसके अतिरिक्त, लुइसियाना ने अपने पहले मामले की सूचना दी, जिससे प्रभावित राज्यों की कुल संख्या 16 हो गई।<ref>{{cite news |last=Schnirring |first=Lisa |date=August 1, 2013 |title=Iowa, Texas cases push Cyclospora count over 400 |url=http://www.cidrap.umn.edu/news-perspective/2013/08/iowa-texas-cases-push-cyclospora-count-over-400 |newspaper=CIDRAP News}}</ref> 3 अगस्त, 2013 को, CNN ने रिपोर्ट किया कि इस प्रकोप का पता Olive Garden और Red Lobster रेस्तरां में परोसे गए पैकेज्ड सलाद से लगाया गया, जिसका निर्माण Taylor Farms de Mexico द्वारा किया गया था। 15 अगस्त, 2013 को, CDC ने ''Cyclospora'' संक्रमण के नौ और मामलों की सूचना दी, जिससे इसके मामलों की संख्या बढ़कर 548 हो गई। प्रभावित राज्यों की संख्या 19 पर बनी रही, लेकिन CDC ने कहा कि सभी मामलों के आयोवा और नेब्रास्का में हुए प्रकोप से जुड़े होने की पुष्टि नहीं हुई थी, जिसका पता मेक्सिको से आए दूषित सलाद मिश्रण से चला था।<ref>{{cite news |date=August 14, 2013 |title=NEWS SCAN: Cyclospora case count rises; Meningitis in NYC |url=http://www.cidrap.umn.edu/news-perspective/2013/08/news-scan-aug-14-2013 |newspaper=CIDRAP News}}</ref> 19 अगस्त 2013 को, CDC ने ''Cyclospora'' के 10 और मामलों की सूचना दी, जिससे अनौपचारिक संख्या 600 से अधिक हो गई। टेनेसी ने भी अपने पहले मामले की सूचना दी, जिससे प्रभावित राज्यों की संख्या 20 हो गई। CDC अभी भी सावधान करता है कि क्या सभी राज्यों में मामले आयोवा और नेब्रास्का में हुए प्रकोपों ​​से संबंधित हैं, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है।<ref>{{cite news |date=Aug 19, 2013 |title=News Scan for Aug 19, 2013 |url=http://www.cidrap.umn.edu/news-perspective/2013/08/news-scan-aug-19-2013 |newspaper=CIDRAP News}}</ref> 27 अगस्त 2013 तक, प्रकोप का स्रोत एक रहस्य बना हुआ था। FDA ने कहा कि उसे Taylor Farms de Mexico सलाद संयंत्र में खाद्य सुरक्षा के कोई उल्लंघन नहीं मिले, जो कुछ बीमारियों से जुड़ा हुआ था।<ref>{{cite web |date=August 27, 2013 |title=Salad plant linked to cyclospora outbreak resumes operations |url=https://www.cbsnews.com/news/salad-plant-linked-to-cyclospora-outbreak-resumes-operations/ |access-date=27 August 2013 |work=CBS News}}</ref> बाद की जांचों में आयोवा और नेब्रास्का में हुए एक प्रकोप के कारण के रूप में पैकेट में बंद सलाद मिश्रण की पहचान की गई।<ref>http://www.idph.state.ia.us/IDPHChannelsService/file.ashx?file=2721EA4A-DB6B-4746-9FF4-0BF09C9BF3BE {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160304030708/http://www.idph.state.ia.us/IDPHChannelsService/file.ashx?file=2721EA4A-DB6B-4746-9FF4-0BF09C9BF3BE|date=2016-03-04}} ''Iowa Cyclospora Outbreak 2013 /Outbreak Update 7.31.13'', Iowa State Department of Public Health. Downloaded 6 Aug 2013.</ref> ==== 2015 टेक्सास प्रकोप ==== 2015 में, CDC को 31 राज्यों में साइक्लोस्पोरियासिस संक्रमण से पीड़ित 546 पुष्ट व्यक्तियों के बारे में सूचित किया गया। टेक्सास में क्लस्टर जाँचों, जहाँ संक्रमणों की सबसे अधिक संख्या रिपोर्ट की गई थी, ने संकेत दिया कि दूषित [[धनिया]] इसका कारण था।<ref>{{cite web |date=2019-04-12 |title=Outbreak Investigations 2015 &#124; Cyclosporiasis &#124; CDC |url=https://www.cdc.gov/parasites/cyclosporiasis/outbreaks/2015/index.html |access-date=2019-08-21 |publisher=Cdc.gov |archive-date=2019-06-15 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190615075108/https://www.cdc.gov/parasites/cyclosporiasis/outbreaks/2015/index.html |url-status=dead }}</ref> एक FDA वक्तव्य में, CDC को उद्धृत किया गया है, "संयुक्त राज्य अमेरिका में वर्तमान में (जुलाई 2015 में) साइक्लोस्पोरियासिस का एक और प्रकोप जारी है, जिसमें टेक्सास डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट हेल्थ सर्विसेज और विस्कॉन्सिन डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ सर्विसेज तथा विस्कॉन्सिन डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर, ट्रेड एंड कंज्यूमर प्रोटेक्शन, दोनों ने अलग-अलग बीमारी समूहों के संबंध में मेक्सिको के पुएब्ला राज्य से प्राप्त धनिया को एक संदिग्ध माध्यम के रूप में पहचाना है।"<ref name=":1" /> पिछले वर्ष, टेक्सास में 200 मामले थे, जिनमें से कुछ पुएब्ला क्षेत्र के धनिया से जुड़े थे।<ref name=":1">{{cite news |last1=Heinz |first1=Frank |date=27 July 2015 |title=Mexican Cilantro Again Blamed for Texas Cyclospora Outbreak After Feces Found in Growing Field |url=https://www.nbcdfw.com/news/local/mexican-cilantro-again-blamed-for-texas-cyclospora-outbreak/82108/ |work=NBC 5 Dallas-Fort Worth}}</ref> ==== 2016 टेक्सास प्रकोप ==== स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि उत्तरी टेक्सास के चार प्रमुख काउंटियों में साइक्लोस्पोरियासिस के एक दर्जन से अधिक मामलों की पुष्टि की गई थी और स्रोत संभवतः दूषित भोजन था। टेक्सास डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट हेल्थ सर्विसेज ने बुधवार को कहा कि परजीवी डलास, टैरंट, कॉलिन और डेंटन काउंटियों में पाया गया था और इसकी उत्पत्ति संभवतः किसी ताजा उपज से जुड़ी हो सकती है।{{cn|date=May 2023}} काउंटी अधिकारियों ने NBC 5 को बताया कि डलास काउंटी में चार मामले, कॉलिन काउंटी में तीन, डेंटन काउंटी में चार और टैरंट काउंटी में सात मामले दर्ज किए गए थे। डेंटन काउंटी के मामलों और टैरंट काउंटी के कम से कम चार मामलों में हाल ही में देश से बाहर यात्रा की गई थी, जिससे उत्पत्ति के बिंदु पर सवाल उठे। पूरे राज्य में साइक्लोस्पोरियासिस के 66 मामलों की पुष्टि हुई, हालांकि संक्रमण के स्रोतों की पुष्टि नहीं हुई थी। अधिकांश लोगों के लिए, लक्षण गंभीर नहीं थे। "लेकिन जो लोग बहुत कम उम्र के हैं और जो अधिक उम्र के हैं, या जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है, उनके लिए यह बीमारी बड़ी समस्याएं पैदा कर सकती है," प्लानो के मेडिकल सेंटर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी खांग ट्रान ने कहा। हाल के वर्षों, 2012–2015 में, ''Cyclospora'' के प्रकोपों ​​का संबंध मेक्सिको के पुएब्ला से आयातित ताजे धनिए से था। 2015 की गर्मियों से, खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने अप्रैल से अगस्त तक उस क्षेत्र से आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है।<ref>{{cite web |date=August 3, 2016 |title=Cyclospora Found in North Texas Counties Likely Food Borne |first1=Frank |last1=Heinz |url=http://www.nbcdfw.com/news/health/Cyclospora-Found-in-North-Texas-Counties-Likely-Food-Borne-389100491.html |access-date=3 August 2016 |publisher=NBC 5 Dallas-Fort Worth}}</ref> ==== 2018 के प्रकोप ==== 31 जुलाई 2018 को, संयुक्त राज्य अमेरिका के कृषि विभाग (USDA) ने कुछ बीफ, पोर्क और पोल्ट्री सलाद तथा रैप उत्पादों के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य चेतावनी जारी की, जो संभवतः ''Cyclospora'' से दूषित थे।<ref name="fsis_1">{{cite press release |date=31 July 2018 |title=FSIS Issues Public Health Alert for Beef, Pork and Poultry Salad and Wrap Products Due to Concerns About Contamination with Cyclospora |url=https://www.fsis.usda.gov/wps/portal/fsis/newsroom/news-releases-statements-and-transcripts/news-release-archives-by-year/archive/2018/pha-07302018-1 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20180801190433/https://www.fsis.usda.gov/wps/portal/fsis/newsroom/news-releases-statements-and-transcripts/news-release-archives-by-year/archive/2018/pha-07302018-1 |archive-date=August 1, 2018 |publisher=United States Department of Agriculture |archiveurl=https://web.archive.org/web/20210119083140/https://www.fsis.usda.gov/wps/portal/fsis/newsroom/news-releases-statements-and-transcripts/news-release-archives-by-year/archive/2018/pha-07302018-1 |archivedate=19 जनवरी 2021 |access-date=2 अक्तूबर 2026}}</ref> संदूषण इन उत्पादों में उपयोग किए गए कटे हुए रोमेन लेट्यूस से आया था।<ref name="fsis_1" /> CDC के अनुसार, Del Monte ने कुछ खुदरा विक्रेताओं, जिनमें Kwik Trip और Peapod शामिल हैं, से Del Monte Fresh Produce की पैक की गई सब्ज़ियों की ट्रे वापस मंगाई, जिनमें ब्रोकोली, गाजर, फूलगोभी, अजवाइन की स्टिक्स और डिल डिप शामिल थे। Iowa, Michigan, Minnesota और Wisconsin के निवासी ''Cyclospora'' से बीमार हो गए।<ref name="washingtonpost.com">{{cite news |title=McDonald's pulls salad from thousands of locations after people are sickened by parasite |url=https://www.washingtonpost.com/news/to-your-health/wp/2018/07/13/mcdonalds-pulls-salad-from-thousands-of-locations-after-people-sickened-by-parasite/ |access-date=14 July 2018 |newspaper=The Washington Post |language=en}}</ref> McDonald's ने देश भर में<ref name="washingtonpost.com"/> लगभग 3,000 स्थानों पर Fresh Express द्वारा आपूर्ति किए गए सलाद बेचना बंद कर दिया, जिनमें से अधिकांश स्थान मध्य-पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका में थे, क्योंकि ''Cyclospora'' के कारण हुए एक बहु-राज्यीय परजीवी प्रकोप से 551 लोग बीमार पड़ गए थे।<ref name="foodpoisoningbulletin.com">{{cite web |date=2018-09-14 |title=McDonald's Fresh Express Salad Cyclospora Outbreak ends |url=https://foodpoisoningbulletin.com/2018/mcdonalds-fresh-express-salad-cyclospora-outbreak-ends-lawsuits-filed/ |access-date=12 July 2019 |website=Food Poisoning Bulletin |language=en}}</ref> ==== 2020 मध्य-पश्चिमी प्रकोप ==== जून 2020 में, CDC और अन्य नियामक निकायों ने संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्य-पश्चिम में बैग में पैक किए गए सलाद मिश्रण से जुड़े साइक्लोस्पोरियासिस के प्रकोप की जांच शुरू की।<ref>{{Cite web |date=24 September 2020 |title=Cyclosporiasis Outbreak Investigations — United States, 2020 |url=https://www.cdc.gov/parasites/cyclosporiasis/outbreaks/2020/index.html |website=Centers for Disease Control and Prevention |archive-url=https://web.archive.org/web/20230209102945/https://www.cdc.gov/parasites/cyclosporiasis/outbreaks/2020/index.html |archive-date=9 February 2023 |url-status=dead}}</ref>27 जून 2020 को, Fresh Express ने 91 से अधिक Fresh Express और निजी-लेबल सलाद उत्पादों को स्वैच्छिक रूप से वापस लेने की घोषणा की।<ref>{{Cite web |date=30 June 2020 |title=Update: New Bagged Salad Products Linked to Cyclospora Outbreak |url=https://www.foodpoisoningnews.com/update-new-bagged-salad-products-linked-to-cyclospora-outbreak/}}</ref> ==== 2026 ग्रीष्मकालीन प्रकोप ==== 2026 में, 1 मई और 16 जून के बीच, अमेरिका के 17 राज्यों में साइक्लोस्पोरियासिस के कम से कम 145 मामले दर्ज किए गए, जिसके कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने दूषित ताज़ी उपज से संभावित संबंधों की जाँच शुरू की, जिसमें न्यूयॉर्क, इलिनॉय और टेक्सास में सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए।<ref>{{Cite web |date=2026-07-01 |title=Surveillance of Cyclosporiasis |url=https://www.cdc.gov/cyclosporiasis/php/surveillance/index.html |access-date=2026-07-07 |website=CDC |language=en-us}}</ref><ref>{{Cite web |date=2026-07-06 |title='Explosive Diarrhea Parasite' Is on the Rise in the US. These States Have the Most Cases, CDC Says |url=https://www.today.com/health/disease/explosive-diarrhea-parasite-cyclospora-cayetanensis-outbreak-rcna352540 |access-date=2026-07-07 |website=TODAY.com |language=en}}</ref> जुलाई 2026 की शुरुआत में, CDC ने Alabama, Kentucky, Michigan, Ohio, Pennsylvania, Tennessee, Virginia, और West Virginia में साइक्लोस्पोरियासिस के कम से कम आठ अतिरिक्त क्लस्टरों की पहचान की। इन क्लस्टरों के मामलों के लिए साक्षात्कार अभी लंबित थे, और एजेंसी ने सावधान किया कि जाँच अभी अपने शुरुआती चरणों में थी।<ref name="cnn-cyclospora">{{cite web |date=7 July 2026 |title=What to know about cyclospora, the gut-churning parasite causing illness in several U.S. states, and how to avoid it |url=https://www.cnn.com/2026/07/07/health/cyclosporiasis-parasite-symptoms-causes |publisher=CNN}}</ref> 14 जुलाई तक, यह बीमारी 34 राज्यों में फैल चुकी थी और लगभग 7,000 लोगों को संक्रमित कर चुकी थी।<ref>{{Cite web |date=2026-07-14 |title='Explosive diarrhoea' outbreak remains a mystery as officials strugle to find sources |url=https://www.bbc.com/news/articles/cm2jl23k2l2o |website=BBC News |language=en}}</ref><ref>{{Cite web |date=2026-07-14 |title=Nearly 7,000 cases of cyclosporiasis confirmed or under investigation nationwide, CDC says |url=https://www.nbcnews.com/health/health-news/cyclosporiasis-7000-cases-us-cdc-parasite-explosive-diarrhea-rcna587445 |website=NBC News |language=en}}</ref> 15 जुलाई को, कनाडा में इस बीमारी की सूचना मिली, विशेष रूप से क्यूबेक में 85 मामले दर्ज किए गए। <ref>{{Cite web |date=2026-07-15 |title=Quebec says there is an increase in cyclosporiasis cases, a parasitic illness causing severe diarrhea |url=https://www.ctvnews.ca/montreal/article/quebec-says-there-is-an-increase-in-cyclosporiasis-cases-a-parasitic-illness-causing-severe-diarrhea/ |website=CTV News |language=en}}</ref>22 जुलाई तक, 41 राज्यों में 11,500 से अधिक लोग संक्रमित हो चुके थे।<ref>{{Cite web |date=2026-07-22 |title=More than 11,500 cyclosporiasis cases reported in 41 states: CDC |url=https://abcnews.com/Health/11500-cyclosporiasis-cases-reported-41-states-cdc/story?id=134979908 |website=ABC News |language=en}}</ref> मिशिगन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि महामारी विज्ञान संबंधी साक्ष्य संकेत देते हैं कि लेट्यूस या अन्य पत्तेदार सलाद साग जून 2026 के मध्य में शुरू हुए साइक्लोस्पोरियासिस के एक बड़े प्रकोप का स्रोत हो सकते हैं।<ref>{{Cite news |last=Callahan |first=Alice |date=2026-07-13 |title='Lettuce or Salad Greens' Identified as Potential Source of Cyclospora Outbreak |url=https://www.nytimes.com/2026/07/13/well/eat/michigan-cyclospora-outbreak-lettuce-salad-greens.html |access-date=2026-07-14 |work=The New York Times |language=en-US |issn=0362-4331}}</ref> 13 जुलाई तक, इस प्रकोप के परिणामस्वरूप 2,640 पुष्ट मामले और 44 अस्पताल में भर्ती होने के मामले सामने आए थे, जो पिछले सप्ताह की रिपोर्टों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाते हैं और राज्य में अब तक दर्ज किए गए साइक्लोस्पोरियासिस के सबसे बड़े वार्षिक प्रकोप का संकेत देते हैं।<ref name="cnn-cyclospora"/><ref>{{cite news |last=Romero |first=Dennis |date=13 July 2026 |title=Lettuce or salad greens could be source of diarrhea-causing illness, Michigan health officials say |url=https://www.nbcnews.com/health/health-news/michigan-cyclosporiasis-lettuce-salad-greens-rcna587395 |work=NBC News}}</ref><ref>{{Cite news |last=Glenza |first=Jessica |date=2026-07-13 |title=Michigan health officials identify 'potential source' of parasite outbreak |url=https://www.theguardian.com/us-news/2026/jul/13/cyclospora-outbreak-parasite-explosive-diarrhea |access-date=2026-07-14 |work=The Guardian |language=en-GB |issn=0261-3077}}</ref> मामले राज्य के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में केंद्रित हैं, विशेष रूप से वेन काउंटी में, जहाँ [[Detroit|डेट्रॉइट]] स्थित है।<ref name="bagdasarian">{{cite news |last1=Kekatos |first1=Mary |last2=Cobern |first2=Jade |date=6 July 2026 |title=Cases of parasitic infection growing in 2 states: Health officials |url=https://abcnews.com/Health/cases-parasitic-infection-growing-2-states-health-officials/story?id=134512356 |work=ABC News}}</ref>मिशिगन की मुख्य चिकित्सा कार्यकारी नताशा बगदासारियन ने मामलों की संख्या को एक "बदलता हुआ लक्ष्य" बताया, जिसके बढ़ते रहने की संभावना है।<ref name="bagdasarian"/>मिशिगन में आमतौर पर हर साल इस बीमारी के लगभग 40 से 50 मामले सामने आते हैं। जांचकर्ताओं ने संदूषित भोजन के विशिष्ट स्रोत की पहचान करने और प्रकोप की सीमा निर्धारित करने के प्रयास जारी रखे। अलग से, संघीय अधिकारी इलिनॉय, न्यूयॉर्क (जिसमें न्यूयॉर्क शहर भी शामिल है), पेंसिल्वेनिया और टेक्सास में पहले सामने आए उन समूहों की जाँच कर रहे थे, जो मैक्सिकन रेस्तराँ, एक किराना शृंखला और एक खानपान कार्यक्रम से जुड़े हुए प्रतीत होते थे, [[CNN]] द्वारा प्राप्त CDC के एक आंतरिक ईमेल के अनुसार।<ref name="cnn-cyclospora"/> संघीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने इंडियाना, केंटकी, मिशिगन, ओहायो और वेस्ट वर्जीनिया में टैको बेल के स्थानों पर परोसे गए दूषित सलाद पत्तों (लेट्यूस) को इस प्रकोप के स्रोत के रूप में पहचाना, हालाँकि विशेषज्ञों ने कहा कि यह आवश्यक नहीं है कि हर बीमारी का स्रोत एक ही हो।<ref>{{Cite web |last=Barrow |first=Bill |last2=Stobbe |first2=Mike |date=2026-07-17 |title=Lettuce at Taco Bell in 5 states confirmed as a source of diarrhea-causing parasite |url=https://apnews.com/article/cyclospora-lettuce-taco-bell-cdc-fda-13d9e9ebdc46a4d05a58da2ae8e8d0de |access-date=2026-07-17 |website=AP News |language=en}}</ref> == संदर्भ == {{Reflist}} {{Authority control}} [[श्रेणी:रोग]] l0c1cx08e43vicvt4awgg3bgmal8bs9 2026 बर्लिन गर्व आक्रमण 0 1616464 6630235 6593537 2026-10-16T13:25:00Z अमर तिवारी 932885 6630235 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसंदूक नागरिक हमला|title=2026 बर्लिन गर्व आक्रमण|partof=|image=(20260726) Auto 103430 detail.jpg|alt=|caption=वैन जिससे आक्रमण किया गया था, पेड़ में टकराया गया|map={{Location map many | Germany Berlin | width = 280 | float = center | label = Attack site | position = right | background = | coordinates = {{Coord|52.512486|13.370131}} }}|map_caption=बर्लिन में 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त्यौहार, जिसमें सैकड़ों हज़ारों लोग थे, आक्रमण के तुरंत बाद बंद कर दिया गया था। आंतरिक मंत्री [[अलेक्सांडर डोब्रिंट]] ने कहा कि यह एक इस्लामी आतंकवादी आक्रमण का संदेह है। आक्रमण को अंजाम देने से दो महीने पहले, बल्लूत को एक आक्रमण की योजना बनाने का दोषी ठहराया गया था और उसे किशोर न्यायालय से निलंबित दंड मिला। [[श्रेणी:विकिडेटा पर उपलब्ध निर्देशांक]] == संदर्भ == {{reflist}} dvx68onz6o7p3ydimau4jiyysk9l374 6630236 6630235 2026-10-16T13:25:54Z अमर तिवारी 932885 6630236 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसंदूक नागरिक हमला|title=2026 बर्लिन गर्व आक्रमण|partof=|image=(20260726) Auto 103430 detail.jpg|alt=|caption=वैन जिससे आक्रमण किया गया था, पेड़ में टकराया गया|map={{Location map many | Germany Berlin | width = 280 | float = center | label = आक्रमण का स्थान | position = right | background = | coordinates = {{Coord|52.512486|13.370131}} }}|map_caption=बर्लिन में अवस्थिति|location=आहॉर्नश्टाइग, [[टीयरगार्टन]], [[बर्लिन]], 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दिया गया था। आंतरिक मंत्री [[अलेक्सांडर डोब्रिंट]] ने कहा कि यह एक इस्लामी आतंकवादी आक्रमण का संदेह है। आक्रमण को अंजाम देने से दो महीने पहले, बल्लूत को एक आक्रमण की योजना बनाने का दोषी ठहराया गया था और उसे किशोर न्यायालय से निलंबित दंड मिला। [[श्रेणी:विकिडेटा पर उपलब्ध निर्देशांक]] == संदर्भ == {{reflist}} nmao815eqj7p1hbp7zxfw0nifvcc3wp शेल (कंप्यूटिंग) 0 1619045 6630301 6622865 2026-10-16T20:04:15Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.6 6630301 wikitext text/x-wiki {{कृत्रिम बुद्धि सामग्री|date=सितंबर 2026}}[[चित्र:Unix shells in Konsole screenshot.png|thumb|320px|Konsole में चल रहे विभिन्न यूनिक्स शेल]] '''शेल''' ({{lang-en|shell}}) कंप्यूटिंग में एक ऐसा [[सॉफ्टवेयर]] है जो उपयोगकर्ता या किसी अन्य प्रोग्राम से प्राप्त आदेशों को पढ़ता है, उनका अर्थ निर्धारित करता है और उन्हें निष्पादित कराता है। शेल सामान्यतः उपयोगकर्ता और [[ऑपरेटिंग सिस्टम]] की सेवाओं तथा अन्य प्रोग्रामों के बीच एक कमांड-आधारित इंटरफ़ेस प्रदान करता है।<ref name="POSIXShell">[https://pubs.opengroup.org/onlinepubs/9799919799/utilities/V3_chap02.html Shell Command Language], The Open Group, IEEE Std 1003.1-2024.</ref> यूनिक्स-जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम में शेल केवल आदेश चलाने का माध्यम नहीं है, बल्कि एक [[प्रोग्रामिंग भाषा]] भी हो सकता है। इसमें [[चर (उच्च-स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा)|चर]], [[शर्तीय कथन]], [[लूप]], [[फ़ंक्शन]], [[पाइप (यूनिक्स)|पाइप]], [[इनपुट/आउटपुट पुनर्निर्देशन|पुनर्निर्देशन]], कमांड प्रतिस्थापन और अन्य भाषा-सुविधाएँ उपलब्ध हो सकती हैं। इस कारण शेल का उपयोग इंटरैक्टिव कार्यों के साथ-साथ [[स्क्रिप्ट]] और [[स्वचालन]] के लिए भी किया जाता है।<ref name="BashWhatShell">[https://www.gnu.org/software/bash/manual/html_node/What-is-a-shell_003f.html What is a shell?], GNU Bash Reference Manual.</ref> == नाम और मूल अवधारणा == "शेल" शब्द इस विचार से संबंधित है कि यह ऑपरेटिंग सिस्टम के अपेक्षाकृत निम्न-स्तरीय तंत्रों के ऊपर उपयोगकर्ता के लिए एक बाहरी कमांड इंटरफ़ेस प्रदान करता है। यूनिक्स में शेल ने उपयोगकर्ताओं को ऑपरेटिंग सिस्टम की सेवाओं और उपलब्ध उपयोगिताओं के साथ पाठ-आधारित तरीके से काम करने की सुविधा दी। शेल को अक्सर [[कमांड-लाइन इंटरफ़ेस]] (CLI) का हिस्सा माना जाता है, लेकिन दोनों शब्द समानार्थी नहीं हैं। CLI उपयोगकर्ता-संवाद की एक व्यापक अवधारणा है, जबकि शेल विशेष रूप से आदेशों को पढ़ने, उनका विश्लेषण करने और उन्हें निष्पादित करने वाली कमांड भाषा तथा उसके इंटरप्रेटर को संदर्भित करता है।<ref name="MicrosoftShell">[https://learn.microsoft.com/en-us/powershell/utility-modules/aishell/concepts/what-is-a-command-shell What is a command shell?], Microsoft Learn.</ref> == इतिहास == [[यूनिक्स]] के प्रारंभिक विकास के साथ शेल का इतिहास जुड़ा हुआ है। 1969 में [[केन थॉम्पसन]] और [[डेनिस रिची]] ने Bell Labs में UNIX विकसित करना शुरू किया। प्रारंभिक UNIX स्रोत कोड में '''Thompson Shell''' नामक कमांड इंटरप्रेटर भी शामिल था। Computer History Museum द्वारा संरक्षित प्रारंभिक UNIX स्रोत में `sh` के लिए Thompson Shell का स्रोत उपलब्ध है।<ref name="UnixHistory">[https://computerhistory.org/blog/the-earliest-unix-code-an-anniversary-source-code-release/ The Earliest Unix Code: An Anniversary Source Code Release], Computer History Museum.</ref><ref name="UnixTimeline">[https://www.computerhistory.org/timeline/1969/ 1969], Computer History Museum.</ref> बाद में [[स्टीफन बॉर्न]] ने [[Bourne shell]] विकसित किया। 1978 में प्रकाशित Bourne के लेख ''An Introduction to the UNIX Shell'' में शेल को UNIX ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए command programming language के रूप में वर्णित किया गया और इसमें नियंत्रण संरचनाएँ, चर, पुनर्निर्देशन, पाइप तथा स्क्रिप्ट जैसी सुविधाओं का वर्णन किया गया।<ref name="Bourne1978">[https://archive.computerhistory.org/resources/access/text/2024/05/102734484-05-0008-acc.pdf An Introduction to the UNIX Shell], S. R. Bourne, Bell Laboratories, 1978.</ref> Bourne shell के बाद अनेक अन्य शेल विकसित हुए। इनमें [[C shell]] (csh), [[KornShell]] (ksh), [[TENEX C shell]] (tcsh), [[Z shell]] (zsh) और [[Bourne Again Shell]] (Bash) प्रमुख हैं। इन शेलों ने मूल शेल की अवधारणाओं को अलग-अलग सिंटैक्स, इंटरैक्टिव सुविधाओं और प्रोग्रामिंग क्षमताओं के साथ आगे विकसित किया।<ref name="BashHistory">[https://www.gnu.org/s/bash/manual/bash.html GNU Bash Reference Manual], GNU Project.</ref> == कार्यप्रणाली == [[चित्र:Linux command-line. Bash. GNOME Terminal. screenshot.png|thumb|320px|GNOME Terminal में Bash शेल का उदाहरण]] शेल सामान्यतः आदेशों को एक निश्चित क्रम में संसाधित करता है। POSIX Shell Command Language के अनुसार शेल इनपुट को पढ़ता है, उसे टोकन में विभाजित करता है और फिर उन टोकनों को सरल या संयुक्त आदेशों के रूप में पार्स करता है।<ref name="POSIXShell"/> Bash जैसे शेल में सामान्य प्रक्रिया को मोटे तौर पर इस प्रकार समझा जा सकता है: # शेल उपयोगकर्ता के टर्मिनल, किसी फ़ाइल या अन्य इनपुट स्रोत से आदेश पढ़ता है। # इनपुट को शब्दों और ऑपरेटरों में विभाजित किया जाता है। # शेल आदेश की संरचना का विश्लेषण करता है। # आवश्यक [[शेल विस्तार]] किए जाते हैं। # इनपुट और आउटपुट के लिए आवश्यक पुनर्निर्देशन तैयार किया जाता है। # शेल आदेश को निष्पादित करता है और उसका परिणाम या [[निकास स्थिति]] प्राप्त करता है।<ref name="BashOperation">[https://www.gnu.org/software/bash/manual/html_node/Shell-Operation.html Shell Operation] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20260915114413/https://www.gnu.org/software/bash/manual/html_node/Shell-Operation.html |date=15 सितंबर 2026 }}, GNU Bash Reference Manual.</ref> उदाहरण के लिए: <syntaxhighlight lang="bash"> ls -l /home </syntaxhighlight> इस आदेश में `ls` एक प्रोग्राम या कमांड है, जबकि `-l` और `/home` उसके तर्क हैं। शेल इन तत्वों की व्याख्या करके संबंधित प्रोग्राम को चलाता है। == इंटरैक्टिव और गैर-इंटरैक्टिव शेल == शेल दो प्रमुख तरीकों से चल सकते हैं। === इंटरैक्टिव उपयोग === इंटरैक्टिव शेल में उपयोगकर्ता सीधे कमांड प्रॉम्प्ट पर आदेश लिखता है और शेल उसका परिणाम प्रस्तुत करता है। यह प्रणाली प्रशासन, सॉफ़्टवेयर विकास, फ़ाइल प्रबंधन और समस्या-निवारण जैसे कार्यों में व्यापक रूप से उपयोगी है।<ref name="BashWhatShell"/> उदाहरण: <syntaxhighlight lang="bash"> $ pwd /home/user $ ls Documents Downloads Projects </syntaxhighlight> === गैर-इंटरैक्टिव उपयोग === गैर-इंटरैक्टिव शेल में आदेश किसी फ़ाइल, स्ट्रिंग या अन्य प्रोग्राम से प्राप्त किए जा सकते हैं। यही तरीका [[शेल स्क्रिप्ट]] और स्वचालन में महत्वपूर्ण है।<ref name="BashWhatShell"/> उदाहरण: <syntaxhighlight lang="bash"> #!/usr/bin/env bash echo "नमस्ते" date </syntaxhighlight> शेल ऐसी फ़ाइल को क्रमशः पढ़कर उसमें दिए आदेशों को निष्पादित कर सकता है। == शेल भाषा == शेल की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि वह केवल बाहरी प्रोग्रामों को चलाने वाला माध्यम नहीं है। आधुनिक यूनिक्स शेलों में एक कमांड भाषा होती है, जिसमें प्रोग्रामिंग-संबंधी संरचनाएँ उपलब्ध होती हैं। Bash में चर, नियंत्रण संरचनाएँ, फ़ंक्शन, उद्धरण, विस्तार और पुनर्निर्देशन जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।<ref name="BashFeatures">[https://www.gnu.org/software/bash/manual/html_node/Basic-Shell-Features.html Basic Shell Features], GNU Bash Reference Manual.</ref> उदाहरण: <syntaxhighlight lang="bash"> name="Prabhat" if [ -n "$name" ]; then echo "नमस्ते, $name" fi </syntaxhighlight> यहाँ `name` एक शेल चर है और `if` शर्तीय संरचना का उपयोग करता है। == कमांड और बिल्ट-इन कमांड == शेल द्वारा चलाए जाने वाले आदेश दो व्यापक प्रकारों में देखे जा सकते हैं—बाहरी प्रोग्राम और शेल के अंतर्निहित या '''बिल्ट-इन''' आदेश। बिल्ट-इन आदेश शेल के भीतर ही लागू होते हैं। उदाहरण के लिए Bash में `cd`, `break`, `continue` और `exec` जैसे आदेश शेल की अपनी स्थिति या निष्पादन-प्रक्रिया को सीधे प्रभावित करते हैं।<ref name="BashBuiltins">[https://www.gnu.org/software/bash/manual/html_node/Bash-Builtins.html Bash Builtin Commands] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20210228105300/http://www.gnu.org/software/bash/manual/html_node/Bash-Builtins.html |date=28 फ़रवरी 2021 }}, GNU Bash Reference Manual.</ref> उदाहरण: <syntaxhighlight lang="bash"> cd /home/user pwd </syntaxhighlight> `cd` वर्तमान कार्य निर्देशिका को बदलता है। इसे सामान्य बाहरी प्रोग्राम की तरह चलाने पर वह मूल शेल की कार्य निर्देशिका नहीं बदल सकता; इसलिए इसे शेल के भीतर लागू किया जाता है।<ref name="BashWhatShell"/> == शेल विस्तार == शेल में आदेश निष्पादन से पहले विभिन्न प्रकार के विस्तार किए जा सकते हैं। Bash में इनमें पैरामीटर विस्तार, कमांड प्रतिस्थापन, अंकगणितीय विस्तार और pathname expansion जैसे तंत्र शामिल हैं।<ref name="BashExpansion">[https://www.gnu.org/software/bash/manual/html_node/Shell-Expansions.html Shell Expansions], GNU Bash Reference Manual.</ref> उदाहरण: <syntaxhighlight lang="bash"> name="Prabhat" echo "नमस्ते $name" </syntaxhighlight> यहाँ `$name` का स्थान शेल चर के वर्तमान मान से बदल दिया जाता है। कमांड प्रतिस्थापन में किसी अन्य कमांड के आउटपुट को दूसरे कमांड के तर्क के रूप में उपयोग किया जा सकता है: <syntaxhighlight lang="bash"> echo "आज की तारीख: $(date)" </syntaxhighlight> == उद्धरण और विशेष वर्ण == शेल में कुछ वर्णों का विशेष अर्थ होता है। उदाहरण के लिए रिक्त स्थान, `*`, `$`, `;`, `|`, `>`, `<` और अन्य वर्ण शेल के सिंटैक्स का हिस्सा हो सकते हैं। इसलिए ऐसे वर्णों को आवश्यकता के अनुसार उद्धरण या escape किया जाता है।<ref name="BashQuoting">[https://www.gnu.org/software/bash/manual/html_node/Quoting.html Quoting], GNU Bash Reference Manual.</ref> उदाहरण: <syntaxhighlight lang="bash"> echo "hello world" </syntaxhighlight> यहाँ उद्धरण दोनों शब्दों को एक ही तर्क के रूप में रखने में सहायता करता है। == पाइप == [[पाइप (यूनिक्स)|पाइप]] (`|`) शेल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है। इसके द्वारा एक कमांड का मानक आउटपुट दूसरे कमांड के मानक इनपुट से जोड़ा जा सकता है।<ref name="BashPipelines">[https://www.gnu.org/software/bash/manual/html_node/Pipelines.html Pipelines] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20260914210056/https://www.gnu.org/software/bash/manual/html_node/Pipelines.html |date=14 सितंबर 2026 }}, GNU Bash Reference Manual.</ref> उदाहरण: <syntaxhighlight lang="bash"> ls | grep ".txt" </syntaxhighlight> इस उदाहरण में `ls` का आउटपुट `grep` को दिया जाता है और `grep` संबंधित पंक्तियों को चुनता है। पाइप के कारण छोटे-छोटे उपयोगिता प्रोग्रामों को जोड़कर अधिक जटिल कार्यप्रवाह बनाया जा सकता है। == इनपुट और आउटपुट पुनर्निर्देशन == शेल मानक इनपुट, मानक आउटपुट और मानक त्रुटि को फ़ाइलों या अन्य धाराओं की ओर पुनर्निर्देशित कर सकता है।<ref name="BashRedirection">[https://www.gnu.org/software/bash/manual/html_node/Redirections.html Redirections] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20260911173344/https://www.gnu.org/software/bash/manual/html_node/Redirections.html |date=11 सितंबर 2026 }}, GNU Bash Reference Manual.</ref> उदाहरण: <syntaxhighlight lang="bash"> ls > files.txt </syntaxhighlight> यहाँ `ls` का आउटपुट टर्मिनल पर दिखाने के बजाय `files.txt` में लिखा जाता है। इसी प्रकार: <syntaxhighlight lang="bash"> grep "error" logfile.txt > errors.txt </syntaxhighlight> यह आदेश चुनी गई पंक्तियों को दूसरी फ़ाइल में लिखता है। == पर्यावरण चर == शेल प्रक्रिया के वातावरण में उपलब्ध मानों को पर्यावरण चर के माध्यम से नियंत्रित कर सकता है। उदाहरण के लिए `PATH` उन निर्देशिकाओं की सूची को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जिनमें शेल बाहरी आदेशों को खोजता है।<ref name="BashVariables">[https://www.gnu.org/software/bash/manual/html_node/Shell-Parameters.html Shell Parameters], GNU Bash Reference Manual.</ref> उदाहरण: <syntaxhighlight lang="bash"> echo "$PATH" </syntaxhighlight> `PATH` में उपलब्ध निर्देशिकाओं के आधार पर शेल किसी कमांड के निष्पादन योग्य प्रोग्राम को खोज सकता है। पर्यावरण चर सॉफ़्टवेयर कॉन्फ़िगरेशन, अस्थायी सेटिंग और प्रक्रियाओं के वातावरण को नियंत्रित करने के लिए भी उपयोग किए जाते हैं। == शेल स्क्रिप्ट == '''शेल स्क्रिप्ट''' एक पाठ फ़ाइल होती है जिसमें शेल द्वारा निष्पादित किए जाने वाले आदेश और शेल भाषा के निर्माण होते हैं। इससे दोहराए जाने वाले कार्यों को स्वचालित किया जा सकता है।<ref name="BashScripts">[https://www.gnu.org/software/bash/manual/html_node/Shell-Scripts.html Shell Scripts], GNU Bash Reference Manual.</ref> एक सामान्य Bash स्क्रिप्ट: <syntaxhighlight lang="bash"> #!/usr/bin/env bash for file in *.txt do echo "$file" done </syntaxhighlight> पहली पंक्ति को सामान्यतः '''shebang''' कहा जाता है। यह ऑपरेटिंग सिस्टम को बताती है कि स्क्रिप्ट को किस इंटरप्रेटर के माध्यम से चलाया जाना है। Bash के दस्तावेज़ में `#!/usr/bin/env bash` जैसे प्रयोग का भी वर्णन किया गया है।<ref name="BashShebang">[https://www.gnu.org/software/bash/manual/html_node/Invoking-Bash.html Invoking Bash], GNU Bash Reference Manual.</ref> == प्रमुख शेल == === Thompson shell === '''Thompson shell''' प्रारंभिक UNIX का कमांड इंटरप्रेटर था और केन थॉम्पसन के कार्य से जुड़ा है। प्रारंभिक UNIX स्रोत कोड के ऐतिहासिक अभिलेख में `sh` के रूप में इसका स्रोत उपलब्ध है।<ref name="UnixHistory"/> === Bourne shell === '''Bourne shell''' (`sh`) को [[स्टीफन बॉर्न]] ने Bell Laboratories में विकसित किया। इसने शेल को एक अधिक सक्षम कमांड प्रोग्रामिंग भाषा के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके नियंत्रण प्रवाह, चर, पुनर्निर्देशन और पाइप जैसी सुविधाएँ आगे के अनेक यूनिक्स शेलों की आधारभूत परंपरा बनीं।<ref name="Bourne1978"/> === C shell === '''C shell''' (`csh`) एक यूनिक्स शेल है जिसकी कमांड भाषा के सिंटैक्स पर [[C (प्रोग्रामिंग भाषा)|C भाषा]] का प्रभाव था। इसका उपयोग विशेष रूप से इंटरैक्टिव कमांड-लाइन कार्यों में हुआ और इसके बाद `tcsh` जैसे शेल विकसित हुए। === KornShell === '''KornShell''' (`ksh`) ने Bourne shell के साथ संगतता बनाए रखते हुए कई इंटरैक्टिव और प्रोग्रामिंग सुविधाएँ जोड़ीं। इसकी कई अवधारणाओं का प्रभाव बाद के शेलों पर पड़ा। Bash के विकास में भी Korn shell से प्रभावित सुविधाएँ शामिल हैं।<ref name="BashHistory"/> === Bash === '''Bash''' (Bourne Again SHell) GNU परियोजना का प्रमुख शेल है। इसका नाम Bourne shell के संदर्भ में रखा गया है। Bash `sh` के साथ व्यापक संगतता रखता है और Korn shell तथा C shell से प्रभावित अनेक सुविधाएँ प्रदान करता है। यह POSIX Shell and Tools specification के अनुरूप होने का लक्ष्य रखता है।<ref name="BashWhat">[https://www.gnu.org/s/bash/manual/bash.html Bash Reference Manual], GNU Project.</ref> === Z shell === '''Z shell''' (zsh) एक यूनिक्स शेल है जिसमें इंटरैक्टिव उपयोग और स्क्रिप्टिंग के लिए कई उन्नत सुविधाएँ हैं। यह Bash और अन्य Bourne-style shells के साथ कई स्तरों पर समानता रखता है, लेकिन इसका अपना विस्तृत syntax और interactive customization तंत्र भी है। === PowerShell === '''PowerShell''' Microsoft द्वारा विकसित एक कमांड शेल और scripting language है। यह Windows के अलावा Linux और macOS पर भी उपलब्ध है। पारंपरिक यूनिक्स शेलों के विपरीत PowerShell का pipeline मुख्यतः .NET objects के साथ काम करने के लिए बनाया गया है, न कि केवल पाठ के साथ।<ref name="PowerShell">[https://learn.microsoft.com/en-us/powershell/scripting/overview What is PowerShell?], Microsoft Learn.</ref> == POSIX और शेल == [[POSIX]] यूनिक्स-जैसे ऑपरेटिंग सिस्टमों के लिए मानकों का एक परिवार है। POSIX में Shell and Utilities से संबंधित मानक शेल भाषा के व्यवहार और सामान्य उपयोगिताओं के लिए एक साझा आधार प्रदान करता है। वर्तमान POSIX मानक में Shell and Utilities को IEEE Std 1003.1 के हिस्से के रूप में बनाए रखा जाता है।<ref name="POSIXShell"/><ref name="BashPOSIX">[https://www.gnu.org/s/bash/manual/bash.html Bash Reference Manual — Bash and POSIX], GNU Project.</ref> POSIX का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अलग-अलग प्रणालियों पर लिखी गई मानक शेल स्क्रिप्ट और उपयोगिताएँ यथासंभव समान व्यवहार करें। हालांकि किसी विशेष शेल की अतिरिक्त सुविधाएँ POSIX मानक से बाहर हो सकती हैं। इसी कारण: <syntaxhighlight lang="bash"> #!/bin/sh </syntaxhighlight> और <syntaxhighlight lang="bash"> #!/bin/bash </syntaxhighlight> हमेशा समान अर्थ नहीं रखते। पहला किसी सिस्टम पर उपलब्ध POSIX-संगत `sh` इंटरप्रेटर को संदर्भित कर सकता है, जबकि दूसरा विशेष रूप से Bash का उपयोग करता है। == शेल और टर्मिनल में अंतर == शेल और [[टर्मिनल एमुलेटर]] को अक्सर एक ही समझ लिया जाता है, लेकिन दोनों अलग घटक हैं। * '''टर्मिनल''' उपयोगकर्ता को पाठ-आधारित इनपुट और आउटपुट का वातावरण प्रदान करता है। * '''शेल''' उस वातावरण के भीतर कमांड पढ़ता और उनका निष्पादन कराता है। * एक ही टर्मिनल एप्लिकेशन में अलग-अलग शेल चलाए जा सकते हैं। * शेल को टर्मिनल के बिना भी अन्य तरीकों से चलाया जा सकता है, जैसे किसी स्क्रिप्ट या प्रोग्राम द्वारा।<ref name="MicrosoftShell"/> उदाहरण के लिए GNOME Terminal या KDE Konsole स्वयं Bash नहीं हैं; वे ऐसे वातावरण प्रदान करते हैं जिसमें Bash, Zsh, Ksh अथवा अन्य कमांड शेल चलाए जा सकते हैं। == शेल और ऑपरेटिंग सिस्टम में अंतर == शेल स्वयं सामान्यतः पूरा ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं होता। वह ऑपरेटिंग सिस्टम की सेवाओं, कमांडों और अन्य प्रोग्रामों तक उपयोगकर्ता को पहुँच प्रदान करता है। उदाहरण के लिए जब कोई उपयोगकर्ता: <syntaxhighlight lang="bash"> mkdir project </syntaxhighlight> चलाता है, तो शेल कमांड को समझता है और संबंधित प्रोग्राम या अंतर्निहित कार्यक्षमता के माध्यम से ऑपरेटिंग सिस्टम से निर्देशिका बनाने का कार्य करवाता है। इस प्रकार शेल को ऑपरेटिंग सिस्टम के '''कमांड-आधारित उपयोगकर्ता इंटरफ़ेस''' के रूप में समझना अधिक उपयुक्त है। == उपयोग == शेल का उपयोग अनेक प्रकार के कंप्यूटिंग कार्यों में होता है: * फ़ाइलों और निर्देशिकाओं का प्रबंधन * प्रोग्रामों का निर्माण और परीक्षण * सॉफ़्टवेयर का संकलन और निर्माण * सर्वर प्रशासन * सिस्टम मॉनिटरिंग * लॉग फ़ाइलों का विश्लेषण * बैकअप और पुनर्स्थापन * स्वचालित कार्यप्रवाह * सॉफ़्टवेयर परिनियोजन * [[DevOps]] * [[क्लाउड कंप्यूटिंग]] * नेटवर्क प्रशासन * [[साइबर सुरक्षा]] परीक्षण * विकास और परीक्षण वातावरण का स्वचालन शेल की स्क्रिप्टिंग क्षमता विशेष रूप से तब उपयोगी होती है जब किसी कार्य को बार-बार समान चरणों में दोहराना हो।<ref name="BashWhatShell"/> == सॉफ़्टवेयर विकास में भूमिका == सॉफ़्टवेयर विकास में शेल का उपयोग compiler, package manager, version-control tools, testing tools और build systems जैसे अनेक उपकरणों को एक साथ जोड़ने के लिए किया जाता है। उदाहरण: <syntaxhighlight lang="bash"> npm install npm test npm run build </syntaxhighlight> यहाँ शेल अलग-अलग आदेशों को क्रम से चलाने का वातावरण प्रदान करता है। बड़े विकास-परिवेशों में shell scripts का उपयोग निर्माण प्रक्रिया, परीक्षण, deployment और development environment configuration को स्वचालित करने के लिए किया जा सकता है। == सर्वर और सिस्टम प्रशासन == यूनिक्स और Linux आधारित सर्वरों में शेल लंबे समय से सिस्टम प्रशासन का महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। प्रशासक इसके द्वारा फ़ाइलें, प्रक्रियाएँ, सेवाएँ, permissions, logs और नेटवर्क-संबंधी कार्यों को नियंत्रित कर सकते हैं। एक ही प्रकार के अनेक सर्वरों पर समान कार्य करने के लिए shell scripts उपयोगी हो सकती हैं। इससे मैनुअल कार्य कम होता है और प्रक्रियाओं को दोहराने योग्य बनाया जा सकता है। == स्वचालन == शेल का सबसे महत्वपूर्ण उपयोगों में से एक स्वचालन है। उदाहरण के लिए किसी निर्देशिका की पुरानी फ़ाइलों को खोजना, लॉग को संसाधित करना और बैकअप बनाना एक स्क्रिप्ट में रखा जा सकता है। <syntaxhighlight lang="bash"> #!/usr/bin/env bash echo "Backup started" tar -czf backup.tar.gz project/ echo "Backup completed" </syntaxhighlight> ऐसी स्क्रिप्ट को cron जैसे scheduler के साथ जोड़कर निर्धारित समय पर चलाया जा सकता है। == प्रक्रियाएँ और पृष्ठभूमि में कार्य == शेल किसी कमांड को अग्रभूमि या पृष्ठभूमि में चलाने की सुविधा दे सकता है। Bash में `&` जैसे operators के माध्यम से किसी command को asynchronous रूप से चलाया जा सकता है।<ref name="BashWhatShell"/> उदाहरण: <syntaxhighlight lang="bash"> long_task & </syntaxhighlight> यह उपयोगकर्ता को शेल में अन्य आदेश जारी रखने की अनुमति दे सकता है जबकि दूसरा कार्य चलता रहता है। == निकास स्थिति == अधिकांश कमांड अपने निष्पादन के बाद एक exit status लौटाते हैं। सामान्यतः `0` सफलता को और गैर-शून्य मान किसी प्रकार की विफलता या अन्य स्थिति को दर्शाते हैं; हालांकि किसी विशेष प्रोग्राम का अर्थ उसके अपने दस्तावेज़ पर निर्भर करता है।<ref name="POSIXShell"/> Bash में पिछली कमांड की स्थिति `$?` से प्राप्त की जा सकती है: <syntaxhighlight lang="bash"> some_command echo $? </syntaxhighlight> यह सुविधा shell scripts में यह निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि अगला कार्य किया जाना चाहिए या नहीं। == सुरक्षा == शेल अत्यंत शक्तिशाली होने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से सावधानी की आवश्यकता रखता है। विशेष रूप से किसी अविश्वसनीय इनपुट को सीधे shell command में शामिल करने से '''command injection''' जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। उदाहरण के लिए किसी वेब एप्लिकेशन द्वारा उपयोगकर्ता से प्राप्त स्ट्रिंग को बिना उचित सत्यापन या escaping के shell command में जोड़ना जोखिमपूर्ण हो सकता है। शेल स्क्रिप्ट लिखते समय सामान्य सुरक्षा उपायों में निम्न शामिल हैं: * अविश्वसनीय इनपुट को सीधे command के रूप में निष्पादित न करना। * आवश्यकतानुसार उचित quoting करना। * बाहरी इनपुट का सत्यापन करना। * अनावश्यक privileges से बचना। * संवेदनशील credentials को command line या scripts में अनावश्यक रूप से न रखना। * `PATH` और अन्य environment variables के प्रभाव को समझना। * shell-specific behavior और portability की जाँच करना। विशेष रूप से quoting और shell expansion की गलत समझ से आदेश का अपेक्षित अर्थ बदल सकता है।<ref name="BashQuoting"/><ref name="BashExpansion"/> == लाभ == शेल के प्रमुख लाभ हैं: * तेज़ और प्रत्यक्ष कमांड-आधारित नियंत्रण * कम संसाधनों में काम करने की क्षमता * अनेक छोटे प्रोग्रामों को जोड़ने की सुविधा * पाइप और पुनर्निर्देशन के माध्यम से शक्तिशाली कार्यप्रवाह * स्क्रिप्ट द्वारा स्वचालन * दूरस्थ सर्वर प्रशासन में उपयोगिता * विकास और प्रशासनिक उपकरणों के साथ व्यापक एकीकरण * दोहराए जाने वाले कार्यों को मानकीकृत करने की क्षमता == सीमाएँ == शेल सभी प्रकार के सॉफ़्टवेयर विकास के लिए उपयुक्त नहीं है। बहुत जटिल प्रोग्रामों के लिए shell language की syntax और portability संबंधी सीमाएँ समस्या बन सकती हैं। विभिन्न शेलों में syntax और built-in सुविधाओं का अंतर भी scripts की portability को प्रभावित कर सकता है। उदाहरण के लिए Bash की कोई विशेष सुविधा किसी POSIX `sh` implementation में उपलब्ध होना आवश्यक नहीं है। इसलिए portable scripts लिखते समय POSIX सुविधाओं तक सीमित रहना उपयोगी हो सकता है।<ref name="POSIXShell"/> इसके अतिरिक्त, बड़े और जटिल software systems के लिए Python, Java, C++, JavaScript जैसी सामान्य-उद्देश्य प्रोग्रामिंग भाषाएँ अक्सर अधिक उपयुक्त abstractions और tooling प्रदान करती हैं। == शेल, CLI और टर्मिनल का संबंध == इन तीन अवधारणाओं को इस प्रकार समझा जा सकता है: {| class="wikitable" ! अवधारणा ! मुख्य भूमिका |- | '''कमांड-लाइन इंटरफ़ेस (CLI)''' | पाठ-आधारित तरीके से कंप्यूटर के साथ संवाद करने की व्यापक अवधारणा |- | '''शेल''' | कमांड भाषा को पढ़ना, उसका विश्लेषण करना और commands को निष्पादित करना |- | '''टर्मिनल''' | उपयोगकर्ता और कमांड-लाइन वातावरण के बीच पाठ-आधारित input/output प्रदान करना |} एक टर्मिनल किसी shell को host कर सकता है, जबकि shell स्वयं command language को लागू करता है।<ref name="MicrosoftShell"/> == आधुनिक कंप्यूटिंग में भूमिका == यद्यपि आधुनिक ऑपरेटिंग सिस्टमों में [[ग्राफिकल यूज़र इंटरफ़ेस]] (GUI) व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है, शेल अभी भी सॉफ़्टवेयर विकास, सर्वर प्रशासन, क्लाउड अवसंरचना, DevOps और स्वचालन में महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से Unix और Linux आधारित प्रणालियों में shell commands और scripts विभिन्न development तथा administration workflows का आधार हैं। Bash जैसे शेलों की POSIX के साथ संगतता और व्यापक उपलब्धता ने shell scripting को लंबे समय तक उपयोगी बनाए रखा है।<ref name="BashWhat"/> Microsoft PowerShell ने इसी व्यापक command-shell अवधारणा को Windows प्रशासन और cross-platform automation के लिए अलग object-oriented pipeline model के साथ विस्तारित किया है।<ref name="PowerShell"/> == यह भी देखें == * [[कमांड-लाइन इंटरफ़ेस]] * [[टर्मिनल एमुलेटर]] * [[यूनिक्स]] * [[Linux]] * [[Bash]] * [[Bourne shell]] * [[KornShell]] * [[Z shell]] * [[PowerShell]] * [[शेल स्क्रिप्ट]] * [[POSIX]] * [[पाइप (यूनिक्स)]] * [[Cron]] == बाहरी कड़ियाँ == * [https://pubs.opengroup.org/onlinepubs/9799919799/utilities/V3_chap02.html POSIX Shell Command Language] — The Open Group * [https://web.archive.org/web/20260620220354/https://www.gnu.org/software/bash/manual/ GNU Bash Reference Manual] — GNU Project * [https://learn.microsoft.com/en-us/powershell/ Microsoft PowerShell documentation] — Microsoft Learn * [https://computerhistory.org/blog/the-earliest-unix-code-an-anniversary-source-code-release/ प्रारंभिक UNIX स्रोत कोड] — Computer History Museum == संदर्भ == <references /> 6l7kr6vr8i1k05zxmwxgwwc13tby5k7 शॉनाए मिलर 0 1619524 6630303 6621698 2026-10-16T20:26:36Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 0 sources and tagging 8 as dead.) #IABot (v2.0.9.6 6630303 wikitext text/x-wiki {{सफाई|reason=सन्दर्भों में तकनीकी सुधार|date=सितंबर 2026}} {{Infobox sportsperson | name = शॉनाए मिलर-उइबो | image = Shaunae Miller-Uibo London 2017.jpg | caption = Miller-Uibo at the 2017 World Championships in London | birth_name = शॉनाए मिलर | birth_date = {{birth date and age|1994|4|15}} | birth_place = [[नासाउ]], बहामास | nationality = बहामाई | sport = [[एथलेटिक्स]] | event = 200 मीटर, 400 मीटर | height = 1.85 मीटर | spouse = [[मैसेल उइबो]] | club = Pure Athletics Club }} '''शॉनाए मिलर-उइबो''' (जन्म 15 अप्रैल 1994), जन्म नाम '''शॉनाए मिलर''', [[बहामास]] की [[एथलेटिक्स]] खिलाड़ी हैं, जो मुख्य रूप से 200 मीटर और 400 मीटर दौड़ में प्रतिस्पर्धा करती हैं। उन्होंने 2016 [[2016 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक|रियो ओलंपिक]] और 2020 [[2020 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक|टोक्यो ओलंपिक]] में महिलाओं की 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता।<ref name="WA-profile">{{cite web |url=[https://worldathletics.org/athletes/-/14368116](https://worldathletics.org/athletes/-/14368116) |title=Shaunae MILLER-UIBO |publisher=[[World Athletics]] |access-date=28 September 2026}} {{Dead link|date=अक्तूबर 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref><ref name="Olympedia">{{cite web |url=[https://www.olympedia.org/athletes/125366](https://www.olympedia.org/athletes/125366) |title=Shaunae Miller-Uibo |publisher=[[Olympedia]] |access-date=28 September 2026}}</ref> == प्रारंभिक जीवन और युवा करियर == मिलर का जन्म 15 अप्रैल 1994 को [[नासाउ]], बहामास में हुआ था। उन्होंने कम उम्र में ही एथलेटिक्स में भाग लेना शुरू किया। 2010 में, 16 वर्ष की आयु में, उन्होंने कनाडा के [[मॉन्टोन]] में आयोजित [[विश्व जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप]] में महिलाओं की 400 मीटर दौड़ जीती। उन्होंने फाइनल में 52.52 सेकंड का समय दर्ज किया और इस स्पर्धा में बहामास के लिए विश्व जूनियर खिताब जीतने वाली पहली एथलीट बनीं।<ref name="WA-2010">{{cite web |url=[https://worldathletics.org/results/iaaf-world-u20-championships/2010/13th-iaaf-world-junior-championships-7003365/women/400-metres/final/result](https://worldathletics.org/results/iaaf-world-u20-championships/2010/13th-iaaf-world-junior-championships-7003365/women/400-metres/final/result) |title=400 Metres Result — 13th IAAF World Junior Championships |publisher=[[World Athletics]] |access-date=28 September 2026}}</ref><ref name="WA-2010-report">{{cite web |url=[https://worldathletics.org/news/news/miller-upsets-favourites-to-take-400-gold](https://worldathletics.org/news/news/miller-upsets-favourites-to-take-400-gold) |title=Miller upsets favourites to take 400 gold |publisher=[[World Athletics]] |date=23 July 2010 |access-date=28 September 2026}} {{Dead link|date=अक्तूबर 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> 2011 में उन्होंने [[लिल]], फ्रांस में आयोजित [[विश्व युवा एथलेटिक्स चैंपियनशिप]] की 400 मीटर स्पर्धा में 51.84 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने लगातार विश्व जूनियर और विश्व युवा स्तर पर 400 मीटर के खिताब जीते।<ref name="WA-2011">{{cite web |url=[https://worldathletics.org/results/iaaf-world-u18-championships/2011/7th-iaaf-world-youth-championships-7021582/women/400-metres/final/result](https://worldathletics.org/results/iaaf-world-u18-championships/2011/7th-iaaf-world-youth-championships-7021582/women/400-metres/final/result) |title=400 Metres Result — 7th IAAF World Youth Championships |publisher=[[World Athletics]] |access-date=28 September 2026}}</ref><ref name="WA-2011-report">{{cite web |url=[https://worldathletics.org/news/report/hall-and-miller-fulfill-favourites-roles-with](https://worldathletics.org/news/report/hall-and-miller-fulfill-favourites-roles-with) |title=Hall and Miller fulfill favourites' roles with 400m triumphs |publisher=[[World Athletics]] |date=8 July 2011 |access-date=28 September 2026}} {{Dead link|date=अक्तूबर 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> == विश्वविद्यालय और वरिष्ठ करियर == मिलर ने [[जॉर्जिया विश्वविद्यालय]] में अध्ययन किया और विश्वविद्यालय की एथलेटिक्स टीम के लिए प्रतिस्पर्धा की। 2013 में अपने प्रथम वर्ष के दौरान उन्होंने [[NCAA]] इंडोर चैंपियनशिप में महिलाओं की 400 मीटर दौड़ का खिताब जीता।<ref name="Georgia">{{cite web |url=[https://georgiadogs.com/news/2013/3/9/Freshman_Miller_Captures_NCAA_400m_Title_On_Track](https://georgiadogs.com/news/2013/3/9/Freshman_Miller_Captures_NCAA_400m_Title_On_Track) |title=Freshman Miller Captures NCAA 400m Title On Track |publisher=University of Georgia Athletics |date=9 March 2013 |access-date=28 September 2026}} {{Dead link|date=अक्तूबर 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> 2015 में मिलर ने [[विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप]] में 400 मीटर में रजत पदक जीता। [[बीजिंग]] में आयोजित फाइनल में उनका समय 49.67 सेकंड था और वह [[एलिसन फेलिक्स]] के बाद दूसरे स्थान पर रहीं।<ref name="WA-2015">{{cite web |url=[https://worldathletics.org/results/world-athletics-championships/2015/15th-iaaf-world-championships-7078726/women/400-metres/final/result](https://worldathletics.org/results/world-athletics-championships/2015/15th-iaaf-world-championships-7078726/women/400-metres/final/result) |title=400 Metres Result — 15th IAAF World Championships |publisher=[[World Athletics]] |access-date=28 September 2026}}</ref> === 2016 ओलंपिक === [[2016 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक]] में मिलर ने महिलाओं की 400 मीटर दौड़ में 49.44 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। फाइनल में उन्होंने एलिसन फेलिक्स को 0.07 सेकंड से पीछे छोड़ा।<ref name="Olympedia"/><ref name="WA-2016">{{cite web |url=[https://worldathletics.org/results/olympic-games/2016/the-xxxi-olympic-games-7132391/women/400-metres/final/result](https://worldathletics.org/results/olympic-games/2016/the-xxxi-olympic-games-7132391/women/400-metres/final/result) |title=400 Metres Result — The XXXI Olympic Games |publisher=[[World Athletics]] |access-date=28 September 2026}}</ref> रियो खेलों के उद्घाटन समारोह में वह बहामास की ध्वजवाहक भी थीं।<ref name="Olympedia"/> === 2017–2019 === 2017 में मिलर-उइबो ने [[विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप]] में महिलाओं की 200 मीटर में कांस्य पदक जीता। उसी वर्ष उन्होंने बोस्टन में 200 मीटर की सीधी दौड़ में 21.76 सेकंड का समय दर्ज किया, जो उस समय इस कम आयोजित स्पर्धा का सबसे तेज दर्ज प्रदर्शन था।<ref name="WA-2017-straight">{{cite web |url=[https://worldathletics.org/news/report/adidas-boston-boost-games-miller-uibo-200m-20](https://worldathletics.org/news/report/adidas-boston-boost-games-miller-uibo-200m-20) |title=Miller-Uibo clocks 21.76 on 200m straight in Boston |publisher=[[World Athletics]] |date=5 June 2017 |access-date=28 September 2026}} {{Dead link|date=अक्तूबर 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> 2018 में उन्होंने [[2018 राष्ट्रमंडल खेल|गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों]] में महिलाओं की 200 मीटर दौड़ का स्वर्ण पदक 22.09 सेकंड के खेल रिकॉर्ड के साथ जीता।<ref name="WA-2018">{{cite web |url=[https://worldathletics.org/competition/calendar-results/results/7117445?eventId=10229510](https://worldathletics.org/competition/calendar-results/results/7117445?eventId=10229510) |title=Gold Coast Commonwealth Games — Women's 200 Metres |publisher=[[World Athletics]] |access-date=28 September 2026}}</ref> 2019 [[विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप]] में उन्होंने 400 मीटर में 48.37 सेकंड के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय रिकॉर्ड वाले प्रदर्शन के साथ रजत पदक जीता।<ref name="WA-2019">{{cite web |url=[https://worldathletics.org/results/world-athletics-championships/2019/iaaf-world-athletics-championships-doha-2019-7125365/women/400-metres/final/result](https://worldathletics.org/results/world-athletics-championships/2019/iaaf-world-athletics-championships-doha-2019-7125365/women/400-metres/final/result) |title=400 Metres Result — IAAF World Athletics Championships, Doha 2019 |publisher=[[World Athletics]] |access-date=28 September 2026}}</ref> उसी वर्ष उन्होंने 200 मीटर में 21.74 सेकंड का व्यक्तिगत और बहामास राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया।<ref name="WA-profile"/> === 2020 ओलंपिक === [[2020 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक|2020 टोक्यो ओलंपिक]] में आयोजित 400 मीटर फाइनल में मिलर-उइबो ने 48.36 सेकंड का समय दर्ज कर अपना ओलंपिक खिताब बरकरार रखा। यह उनके करियर का 400 मीटर में व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन और बहामास तथा उत्तर अमेरिकी क्षेत्र का रिकॉर्ड था।<ref name="WA-Tokyo">{{cite web |url=[https://worldathletics.org/results/olympic-games/2021/the-xxxii-olympic-games-7132391/women/400-metres/final/result](https://worldathletics.org/results/olympic-games/2021/the-xxxii-olympic-games-7132391/women/400-metres/final/result) |title=400 Metres Result — The XXXII Olympic Games |publisher=[[World Athletics]] |access-date=28 September 2026}}</ref><ref name="WA-Tokyo-report">{{cite web |url=[https://worldathletics.org/fr/competitions/olympic-games/the-xxxiii-olympic-games-7153115/news/article/tokyo-olympic-games-women-400m-report](https://worldathletics.org/fr/competitions/olympic-games/the-xxxiii-olympic-games-7153115/news/article/tokyo-olympic-games-women-400m-report) |title=Miller-Uibo retains Olympic title to complete Bahamian 400m double |publisher=[[World Athletics]] |date=6 August 2021 |access-date=28 September 2026}} {{Dead link|date=अक्तूबर 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> इस जीत के साथ वह महिलाओं की 400 मीटर में लगातार दो ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने वाली खिलाड़ियों में शामिल हुईं।<ref name="WA-Tokyo-report"/> टोक्यो में उन्होंने 200 मीटर में भी भाग लिया और फाइनल में आठवें स्थान पर रहीं।<ref name="WA-200-Tokyo">{{cite web |url=[https://worldathletics.org/competition/calendar-results/results/7132391?eventId=10229510&gender=W](https://worldathletics.org/competition/calendar-results/results/7132391?eventId=10229510&gender=W) |title=The XXXII Olympic Games — Women's 200 Metres |publisher=[[World Athletics]] |access-date=28 September 2026}}</ref> === 2022 विश्व चैंपियनशिप === 2022 में मिलर-उइबो ने [[विश्व एथलेटिक्स इंडोर चैंपियनशिप 2022|विश्व इंडोर चैंपियनशिप]] में 400 मीटर का स्वर्ण पदक 50.31 सेकंड में जीता।<ref name="WA-2022-indoor">{{cite web |url=[https://worldathletics.org/news/series/2022-review-sprints](https://worldathletics.org/news/series/2022-review-sprints) |title=2022 review: sprints |publisher=[[World Athletics]] |access-date=28 September 2026}} {{Dead link|date=अक्तूबर 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> उसी वर्ष [[विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2022|ओरेगन विश्व चैंपियनशिप]] में उन्होंने महिलाओं की 400 मीटर में 49.11 सेकंड के विश्व-अग्रणी समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। यह उनका वरिष्ठ स्तर पर पहला आउटडोर विश्व चैंपियनशिप खिताब था। इससे पहले वह 2015 और 2019 में इस स्पर्धा में रजत पदक जीत चुकी थीं।<ref name="WA-2022">{{cite web |url=[https://worldathletics.org/competition/calendar-results/results/7137279?eventId=10229511](https://worldathletics.org/competition/calendar-results/results/7137279?eventId=10229511) |title=World Athletics Championships, Oregon 2022 — Women's 400 Metres |publisher=[[World Athletics]] |access-date=28 September 2026}}</ref><ref name="WA-2022-report">{{cite web |url=[https://worldathletics.org/news/report/wch-oregon22-report-women-400m](https://worldathletics.org/news/report/wch-oregon22-report-women-400m) |title=Miller-Uibo gains missing gold with world 400m win in Oregon |publisher=[[World Athletics]] |date=23 July 2022 |access-date=28 September 2026}} {{Dead link|date=अक्तूबर 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> == व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन == विश्व एथलेटिक्स के अनुसार मिलर-उइबो के प्रमुख व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन इस प्रकार हैं: 200 मीटर में 21.74 सेकंड, 300 मीटर में 34.41 सेकंड और 400 मीटर में 48.36 सेकंड। इंडोर स्पर्धाओं में उनका 200 मीटर का सर्वश्रेष्ठ 22.40 सेकंड और 400 मीटर का 50.21 सेकंड है।<ref name="WA-profile"/> == निजी जीवन == मिलर ने एस्टोनियाई डेकाथलीट [[मैसेल उइबो]] से विवाह किया। दोनों [[जॉर्जिया विश्वविद्यालय]] में पढ़ाई के दौरान मिले थे और 2017 में उनका विवाह हुआ।<ref name="Olympedia"/> == प्रमुख उपलब्धियाँ == * 2010 विश्व जूनियर चैंपियनशिप — 400 मीटर स्वर्ण<ref name="WA-2010"/> * 2011 विश्व युवा चैंपियनशिप — 400 मीटर स्वर्ण<ref name="WA-2011"/> * 2015 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप — 400 मीटर रजत<ref name="WA-2015"/> * 2016 ओलंपिक खेल — 400 मीटर स्वर्ण<ref name="Olympedia"/> * 2017 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप — 200 मीटर कांस्य<ref name="WA-2017-straight"/> * 2018 राष्ट्रमंडल खेल — 200 मीटर स्वर्ण<ref name="WA-2018"/> * 2019 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप — 400 मीटर रजत<ref name="WA-2019"/> * 2020 ओलंपिक खेल — 400 मीटर स्वर्ण<ref name="WA-Tokyo"/> * 2022 विश्व इंडोर चैंपियनशिप — 400 मीटर स्वर्ण<ref name="WA-2022-indoor"/> * 2022 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप — 400 मीटर स्वर्ण<ref name="WA-2022"/> == संदर्भ == {{reflist}} {{DEFAULTSORT:मिलर-उइबो, शॉनाए}} [[श्रेणी:1994 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:बहामास के धावक]] [[श्रेणी:बहामास के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता]] [[श्रेणी:2016 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक के पदक विजेता]] [[श्रेणी:2020 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक के पदक विजेता]] [[श्रेणी:विश्व एथलेटिक्स चैंपियन]] [[श्रेणी:महिला 400 मीटर धावक]] aey7kkgzam83det4msmn2ps2z7pixuv सदस्य:विक्रम प्रताप/DuplicateReferences.js 2 1619633 6630246 6629747 2026-10-16T14:43:01Z विक्रम प्रताप 911487 + 6630246 javascript text/javascript // Doc : [[सदस्य:विक्रम प्रताप/द्विरुक्त सन्दर्भ परीक्षक]] // <nowiki> /** * उपकरण: द्विरुक्त सन्दर्भ परीक्षक एवं टैगर (DuplicateReferences Pro - v4.6 Administrative Edition) * मूल श्रेय: 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if (existingTplRegex.test(content)) { throw new Error('इस पृष्ठ पर पहले से ही द्विरुक्त सन्दर्भ साँचा उपस्थित है।'); } var reason = 'DuplicateReferences उपकरण द्वारा चिह्नित:\n'; for (var i = 0; i < duplicateInfo.length; i++) { var info = duplicateInfo[i]; var nums = info.refs.map(function (r) { return r.number; }).join(', '); reason += '* ' + info.url + ' (सन्दर्भ क्रमांक: ' + nums + ')\n'; } var templateToInsert = '{{Duplicated citations|reason=' + reason + dateParam + '}}\n'; var headingAlternation = REF_HEADINGS_LIST.join('|'); var referencesHeaderRegex = new RegExp('(==+\\s*(?:' + headingAlternation + ')\\s*==+[ \\t]*)', 'i'); var newContent; if (referencesHeaderRegex.test(content)) { newContent = content.replace(referencesHeaderRegex, '$1\n' + templateToInsert); } else { throw new Error('विकिटेक्स्ट में "== सन्दर्भ ==" अनुभाग शीर्षक प्राप्त नहीं हुआ।'); } var summary = 'रखरखाव साँचा: [[:en:WP:DUPREF|द्विरुक्त सन्दर्भ]] चिह्नित किए गए ([[सदस्य:विक्रम प्रताप/DuplicateReferences.js|DuplicateReferences]])'; await api.postWithToken('csrf', { action: 'edit', title: page.title, text: newContent, summary: summary }); } // ========================================================================= // भाग 1: विशेष पृष्ठ इंटरफ़ेस (Special:BlankPage/DupRef - Administrative UI) // ========================================================================= function initDupRefSpecialPage() { var isStopRequested = false; var foundResultsStore = {}; // pageTitle -> { duplicateInfo, alreadyTagged, isGAFA } var globalSeenPages = new Set(); var loaderPagination = { queryKey: '', continueData: null, hasMore: false, batchCount: 0, totalLoaded: 0 }; var myContribsPagination = { ns: '', continueData: null, hasMore: true, batchCount: 0 }; document.title = 'द्विरुक्त सन्दर्भ परीक्षक - विकिपीडिया'; jQuery('#firstHeading').text('द्विरुक्त सन्दर्भ परीक्षक एवं टैगर (Duplicate References Scanner)'); var html = '<div style="background:#fff; border:1px solid #a2a9b1; padding:20px; border-radius:4px; max-width:1020px; font-family:sans-serif;">' + '<p style="margin-top:0; color:#202122; line-height:1.5;">यह प्रशासनिक उपकरण किसी भी <strong>नामस्थान</strong> अथवा <strong>श्रेणी</strong> से पृष्ठों को क्रमिक बैच में चयनित करता है तथा <strong>द्वि-स्तरीय समानांतर निस्यंदन (6x Parallel Filter)</strong> के माध्यम से द्विरुक्त सन्दर्भों (Duplicate References) वाले लेखों को <strong>बॉक्स 2A</strong> में रखकर स्वच्छ लेखों को <strong>बॉक्स 2B</strong> में पृथक कर देता है।</p>' + // === प्रथम चरण: नामस्थान एवं स्रोत से क्रमिक पृष्ठ चयन === '<div style="background:#f8f9fa; border:1px solid #c8ccd1; padding:14px; border-radius:4px; margin-bottom:16px;">' + '<div style="display:flex; justify-content:space-between; align-items:center; flex-wrap:wrap; border-bottom:1px solid #eaecf0; padding-bottom:6px; margin-bottom:10px;">' + '<span style="font-weight:bold; font-size:14px; color:#202122;">प्रथम चरण: नामस्थान अथवा स्रोत से पृष्ठों का क्रमिक चयन</span>' + '<button id="dupref-reset-pagination" type="button" class="mw-ui-button" style="padding:2px 8px; font-size:11px; cursor:pointer; display:none;" title="पृष्ठ चयन का क्रम प्रारंभ से रीसेट करें">चयन क्रम प्रारंभ से रीसेट करें</button>' + '</div>' + '<div style="display:flex; gap:10px; flex-wrap:wrap; align-items:flex-end;">' + '<div style="width:165px;">' + '<label style="display:block; font-size:12px; font-weight:bold; color:#54595d; margin-bottom:4px;">1. नामस्थान:</label>' + '<select id="dupref-ns" style="width:100%; padding:6px; border:1px solid #a2a9b1; border-radius:3px; background:#fff;">' + '<option value="0" selected>मुख्य (लेख - 0)</option>' + '<option value="2">सदस्य (User - 2)</option>' + '<option value="4">विकिपीडिया (Project - 4)</option>' + '<option value="100">प्रवेशद्वार (Portal - 100)</option>' + '</select>' + '</div>' + '<div style="flex:1; min-width:185px;">' + '<label style="display:block; font-size:12px; font-weight:bold; color:#54595d; margin-bottom:4px;">2. पृष्ठ चयन का माध्यम:</label>' + '<select id="dupref-source-type" style="width:100%; padding:6px; border:1px solid #a2a9b1; border-radius:3px; background:#fff;">' + '<option value="allpages">नामस्थान के पृष्ठ (वर्णक्रमानुसार क्रमिक चयन)</option>' + '<option value="random">नामस्थान के यादृच्छिक (रैंडम) पृष्ठ</option>' + '<option value="cat">निर्दिष्ट श्रेणी के अंतर्गत पृष्ठ (क्रमिक)</option>' + '<option value="transclude">निर्दिष्ट साँचा प्रयुक्त पृष्ठ (क्रमिक)</option>' + '<option value="backlinks">निर्दिष्ट पृष्ठ से संबद्ध कड़ियाँ (क्रमिक)</option>' + '<option value="user">सदस्य द्वारा निर्मित पृष्ठ (क्रमिक)</option>' + '</select>' + '</div>' + '<div id="dupref-input-wrap" style="flex:1.2; min-width:180px;">' + '<label id="dupref-input-label" style="display:block; font-size:12px; font-weight:bold; color:#54595d; margin-bottom:4px;">3. प्रारंभिक अक्षर (वैकल्पिक):</label>' + '<input type="text" id="dupref-source-input" placeholder="उदाहरण: अ, भा, अथवा रिक्त छोड़ें..." style="width:100%; padding:6px 8px; border:1px solid #a2a9b1; border-radius:3px; box-sizing:border-box;" />' + '</div>' + '<div style="width:95px;">' + '<label style="display:block; font-size:12px; font-weight:bold; color:#54595d; margin-bottom:4px;">4. बैच संख्या:</label>' + '<select id="dupref-limit" style="width:100%; padding:6px; border:1px solid #a2a9b1; border-radius:3px; background:#fff;">' + '<option value="25">25 पृष्ठ</option>' + '<option value="50" selected>50 पृष्ठ</option>' + '<option value="100">100 पृष्ठ</option>' + '<option value="250">250 पृष्ठ</option>' + '<option value="500">500 पृष्ठ</option>' + '</select>' + '</div>' + '<div>' + '<button id="dupref-fetch-btn" type="button" class="mw-ui-button mw-ui-progressive" style="padding:6px 14px; cursor:pointer; font-weight:bold;">सूची (2A) में जोड़ें</button>' + '</div>' + '</div>' + '<div id="dupref-source-hint" style="font-size:12px; color:#3366cc; margin-top:8px;">' + '<b>प्रक्रिया निर्देश:</b> प्रथम बार क्लिक करने पर प्रारंभिक पृष्ठ लोड होंगे, तथा पुनः क्लिक करने पर <b>उससे आगे के नए पृष्ठ</b> क्रमानुसार लोड होंगे।' + '</div>' + '<div id="dupref-pagination-status" style="font-size:12px; color:#14866d; font-weight:bold; margin-top:4px; display:none;"></div>' + '</div>' + // === द्वितीय चरण: दो-बॉक्स कार्यक्षेत्र एवं द्विरुक्त सन्दर्भ निस्यंदन === '<div style="margin-bottom:16px; border:1px solid #c8ccd1; padding:14px; border-radius:4px; background:#fcfcfc;">' + '<div style="display:flex; justify-content:space-between; align-items:center; flex-wrap:wrap; gap:10px; margin-bottom:10px; padding-bottom:10px; border-bottom:1px solid #eaecf0;">' + '<div style="font-weight:bold; font-size:14px; color:#202122;">द्वितीय चरण: द्विरुक्त सन्दर्भ निस्यंदन (छन्नी) एवं कार्यक्षेत्र</div>' + '<div style="display:flex; gap:8px; align-items:center; flex-wrap:wrap;">' + '<select id="dupref-filter-type" style="padding:5px 8px; border:1px solid #3366cc; border-radius:3px; background:#fff; font-size:12px; font-weight:bold; color:#202122;">' + '<option value="exact_parallel" selected>पूर्ण सटीक निस्यंदन (बैच + 6x समानांतर परीक्षण): केवल वास्तविक द्विरुक्त सन्दर्भ युक्त लेख शेष रखें</option>' + '<option value="wikitext_fast">त्वरित विकिटेक्स्ट निस्यंदन: केवल विकिटेक्स्ट में समान URL दिखने वाले लेख शेष रखें</option>' + '</select>' + '<button id="dupref-prefilter-btn" type="button" class="mw-ui-button" style="background:#eaf3ff; border-color:#3366cc; color:#3366cc; font-weight:bold; padding:5px 14px; cursor:pointer;" title="द्विरुक्त सन्दर्भ वाले लेखों को बॉक्स 2A में रखें तथा स्वच्छ लेखों को बॉक्स 2B में पृथक करें">' + 'द्विरुक्त सन्दर्भ छन्नी चलाएँ' + '</button>' + '</div>' + '</div>' + // सहायक बटन टूलबार '<div style="margin-bottom:10px; display:flex; gap:6px; flex-wrap:wrap; align-items:center;">' + '<button id="dupref-quick-random" type="button" class="mw-ui-button" style="padding:4px 10px; cursor:pointer; font-size:12px;" title="चयनित नामस्थान से 50 नए यादृच्छिक पृष्ठ सीधे बॉक्स 2A में जोड़ें">50 यादृच्छिक लेख जोड़ें</button>' + '<button id="dupref-load-my-next" type="button" class="mw-ui-button" style="padding:4px 10px; cursor:pointer; font-size:12px;" title="आपके द्वारा निर्मित लेख क्रमानुसार बॉक्स 2A में जोड़ें">मेरे द्वारा निर्मित लेख जोड़ें</button>' + '<button id="dupref-clean" type="button" class="mw-ui-button" style="padding:4px 10px; cursor:pointer; font-size:12px;" title="बॉक्स 2A से क्रम संख्या, भाषा उपसर्ग तथा अनावश्यक चिह्न हटाएँ">सूची स्वच्छ करें</button>' + '<span style="font-size:11px; color:#54595d; margin-left:6px;">(वर्तमान सत्र में पठित कुल पृष्ठ: <b id="dupref-seen-count">0</b>)</span>' + '<button id="dupref-clear" type="button" class="mw-ui-button" style="padding:4px 10px; cursor:pointer; font-size:12px; margin-left:auto;">बॉक्स 2A एवं 2B रिक्त करें</button>' + '</div>' + // === दो बॉक्स ग्रिड (2A और 2B) === '<div style="display:flex; gap:14px; flex-wrap:wrap;">' + // बॉक्स 2A: मुख्य कतार '<div style="flex:1.2; min-width:320px;">' + '<div style="display:flex; justify-content:space-between; font-size:12px; font-weight:bold; margin-bottom:4px; color:#14866d;">' + '<span>बॉक्स 2A: मुख्य कार्य-सूची (द्विरुक्त सन्दर्भ युक्त पृष्ठ)</span>' + '<span>पृष्ठ संख्या: <b id="dupref-line-count">0</b></span>' + '</div>' + '<textarea id="dupref-input" rows="10" style="width:100%; font-family:monospace; font-size:13px; padding:8px; box-sizing:border-box; border:2px solid #14866d; border-radius:3px;" placeholder="यहाँ पृष्ठों के नाम दर्ज करें अथवा प्रथम चरण से लोड करें...\nछन्नी चलने के उपरांत केवल द्विरुक्त सन्दर्भ वाले पृष्ठ ही यहाँ शेष रहेंगे।"></textarea>' + '</div>' + // बॉक्स 2B: निस्यंदित / स्वच्छ पृष्ठ '<div style="flex:1; min-width:300px;">' + '<div style="display:flex; justify-content:space-between; font-size:12px; font-weight:bold; margin-bottom:4px; color:#ac6600;">' + '<span>बॉक्स 2B: निस्यंदित / स्वच्छ पृष्ठ (द्विरुक्त रहित)</span>' + '<span>पृष्ठ संख्या: <b id="dupref-rejected-count">0</b></span>' + '</div>' + '<textarea id="dupref-rejected" rows="8" readonly style="width:100%; font-family:monospace; font-size:12px; padding:8px; box-sizing:border-box; border:1px solid #c8ccd1; background:#f8f9fa; color:#54595d; border-radius:3px;" placeholder="जिन पृष्ठों में कोई द्विरुक्त सन्दर्भ नहीं है अथवा जो पूर्व से चिह्नित हैं, वे कारण सहित यहाँ सूचीबद्ध होंगे..."></textarea>' + '<div style="margin-top:6px; display:flex; gap:6px;">' + '<button id="dupref-restore-rejected" type="button" class="mw-ui-button" style="padding:3px 10px; font-size:11px; cursor:pointer;" title="बॉक्स 2B के सभी पृष्ठों को कारण हटाकर पुनः बॉक्स 2A में भेजें">पुनः मुख्य सूची (2A) में भेजें</button>' + '<button id="dupref-clear-rejected" type="button" class="mw-ui-button" style="padding:3px 10px; font-size:11px; cursor:pointer; margin-left:auto;">केवल बॉक्स 2B रिक्त करें</button>' + '</div>' + '</div>' + '</div>' + '</div>' + // === तृतीय चरण: संचालन प्रणाली एवं तार्किक मापदंड === '<div style="background:#eaecf0; padding:12px 14px; border-radius:4px; margin-bottom:14px;">' + '<div style="font-weight:bold; font-size:13px; margin-bottom:8px; color:#202122;">तृतीय चरण: संचालन प्रणाली एवं तार्किक मापदंड</div>' + '<div style="display:flex; align-items:center; gap:16px; flex-wrap:wrap; font-size:13px; margin-bottom:8px;">' + '<label style="font-weight:bold;">संचालन मोड: ' + '<select id="dupref-mode" style="padding:4px 8px; border:1px solid #a2a9b1; border-radius:3px; background:#fff; margin-left:4px;">' + '<option value="scan" selected>केवल परीक्षण एवं प्रतिवेदन (समीक्षा उपरांत साँचा जोड़ें)</option>' + '<option value="autotag">स्वचालित टैगिंग (बॉक्स 2A के द्विरुक्त सन्दर्भ युक्त लेखों में स्वतः साँचा जोड़ें)</option>' + '</select>' + '</label>' + '<label style="font-weight:bold;">संपादन समयांतराल (Delay): ' + '<input type="number" id="dupref-delay" value="4" min="1" max="120" style="width:52px; padding:3px; margin:0 4px; text-align:center; border:1px solid #a2a9b1; border-radius:3px;" /> सेकंड' + '</label>' + '<label style="font-weight:bold;" title="सन्दर्भ पाठ में न्यूनतम कितनी समानता होने पर द्विरुक्त माना जाए">' + 'न्यूनतम पाठ समानता: ' + '<select id="dupref-min-sim" style="padding:4px; border:1px solid #a2a9b1; border-radius:3px; background:#fff;">' + '<option value="0" selected>0 प्रतिशत (कोई भी समान विशिष्ट URL)</option>' + '<option value="50">50 प्रतिशत अथवा अधिक समान पाठ</option>' + '<option value="75">75 प्रतिशत अथवा अधिक समान पाठ</option>' + '<option value="90">90 प्रतिशत अथवा अधिक समान पाठ</option>' + '</select>' + '</label>' + '</div>' + '<div style="display:flex; align-items:center; gap:18px; flex-wrap:wrap; font-size:13px;">' + '<label style="cursor:pointer;">' + '<input type="checkbox" id="dupref-skip-tagged" checked /> पूर्व से टैग किए गए तथा निर्वाचित/अच्छे लेखों को छोड़ दें (बॉक्स 2B में भेजें)' + '</label>' + '<label style="cursor:pointer;" title="जिन लेखों में द्विरुक्त सन्दर्भ मिलेंगे वे बॉक्स 2A में बने रहेंगे, तथा स्वच्छ लेख स्वतः बॉक्स 2B में स्थानांतरित हो जाएँगे">' + '<input type="checkbox" id="dupref-keep-only-dups" checked /> बॉक्स 2A में केवल द्विरुक्त सन्दर्भ युक्त लेख ही रखें (स्वच्छ लेख 2B में भेजें)' + '</label>' + '</div>' + '</div>' + // === मुख्य क्रिया बटन === '<div style="display:flex; gap:10px; align-items:center; flex-wrap:wrap;">' + '<button id="dupref-start" type="button" class="mw-ui-button mw-ui-progressive" style="padding:8px 20px; cursor:pointer; font-weight:bold; font-size:14px;">परीक्षण / टैगिंग प्रारंभ करें</button>' + '<button id="dupref-stop" type="button" class="mw-ui-button mw-ui-destructive" style="padding:8px 20px; cursor:pointer; font-weight:bold; font-size:14px; display:none;">प्रक्रिया रोकें</button>' + '<button id="dupref-tag-all-found" type="button" class="mw-ui-button" style="padding:8px 16px; cursor:pointer; font-weight:bold; background:#fef6e7; border-color:#ac6600; color:#ac6600; display:none;">सभी चिह्नित पृष्ठों में क्रमशः साँचा जोड़ें</button>' + '<button id="dupref-copy-wikitext" type="button" class="mw-ui-button" style="padding:8px 14px; cursor:pointer; font-size:12px; margin-left:auto; display:none;">विकिटेक्स्ट प्रतिवेदन कॉपी करें</button>' + '</div>' + // === प्रगति पट्टी और आँकड़े === '<div id="dupref-stats" style="margin-top:16px; display:none; padding:10px 14px; background:#f8f9fa; border:1px solid #c8ccd1; border-radius:4px; font-size:13px;">' + '<div style="display:flex; justify-content:space-between; margin-bottom:6px; flex-wrap:wrap; gap:6px;">' + '<span><strong>प्रगति विवरण:</strong> कुल पृष्ठ: <b id="dstat-total">0</b> | परीक्षित: <b id="dstat-done">0</b> | <span style="color:#d33;">द्विरुक्त मिले (2A में): <b id="dstat-found">0</b></span> | <span style="color:#14866d;">साँचा जोड़ा गया: <b id="dstat-tagged">0</b></span> | <span style="color:#72777d;">स्वच्छ/निस्यंदित (2B में): <b id="dstat-clean">0</b></span></span>' + '<strong id="dstat-percent" style="color:#3366cc;">0%</strong>' + '</div>' + '<div style="width:100%; background:#eaecf0; height:8px; border-radius:4px; overflow:hidden;">' + '<div id="dstat-bar" style="width:0%; background:#3366cc; height:100%; transition:width 0.2s;"></div>' + '</div>' + '</div>' + // === परिणाम तालिका === '<div id="dupref-results-wrap" style="margin-top:16px; display:none;">' + '<div style="font-weight:bold; font-size:14px; margin-bottom:8px; color:#202122;">चिह्नित द्विरुक्त सन्दर्भों का विस्तृत विवरण:</div>' + '<table class="wikitable" style="width:100%; margin:0; font-size:13px;">' + '<thead>' + '<tr style="background:#eaecf0;">' + '<th style="width:22%;">पृष्ठ शीर्षक</th>' + '<th style="width:58%;">द्विरुक्त URL एवं सन्दर्भ क्रमांक (पाठ समानता प्रतिशत)</th>' + '<th style="width:20%; text-align:center;">कार्यवाही / स्थिति</th>' + '</tr>' + '</thead>' + '<tbody id="dupref-results-tbody"></tbody>' + '</table>' + '</div>' + // === लॉग बॉक्स === '<div style="margin-top:14px;">' + '<div style="font-weight:bold; font-size:12px; color:#54595d; margin-bottom:4px;">प्रणाली लॉग:</div>' + '<div id="dupref-log" style="background:#fff; border:1px solid #c8ccd1; padding:10px; max-height:260px; overflow-y:auto; font-family:monospace; font-size:12px; line-height:1.5; border-radius:3px;">' + '<em style="color:#72777d;">कार्यवाही का विवरण यहाँ प्रदर्शित होगा...</em>' + '</div>' + '</div>' + '</div>'; jQuery('#mw-content-text').html(html); function updateAllCounts() { var valA = jQuery('#dupref-input').val() || ''; var countA = valA.split('\n').map(function (s) { return s.trim(); }).filter(Boolean).length; jQuery('#dupref-line-count').text(countA); var valB = jQuery('#dupref-rejected').val() || ''; var countB = valB.split('\n').map(function (s) { return s.trim(); }).filter(Boolean).length; jQuery('#dupref-rejected-count').text(countB); jQuery('#dupref-seen-count').text(globalSeenPages.size); } jQuery('#dupref-input').on('input', updateAllCounts); updateAllCounts(); function appendNewTitlesToBox2A(newTitles, skipSeenCheck) { var currentVal = jQuery('#dupref-input').val() || ''; var existingList = currentVal.split('\n').map(function (s) { return s.trim(); }).filter(Boolean); var existingSet = new Set(existingList); var addedCount = 0; for (var i = 0; i < newTitles.length; i++) { var t = newTitles[i].trim(); if (!t) continue; if (!skipSeenCheck && globalSeenPages.has(t)) continue; if (!existingSet.has(t)) { existingList.push(t); 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myContribsPagination.continueData = null; myContribsPagination.hasMore = true; myContribsPagination.batchCount = 0; jQuery('#dupref-fetch-btn').text('सूची (2A) में जोड़ें'); jQuery('#dupref-load-my-next').text('मेरे द्वारा निर्मित लेख जोड़ें'); jQuery('#dupref-pagination-status').hide().text(''); jQuery('#dupref-reset-pagination').hide(); } jQuery('#dupref-reset-pagination').on('click', function () { resetLoaderPaginationState(); globalSeenPages.clear(); updateAllCounts(); mw.notify('चयन क्रम एवं सत्र इतिहास प्रारंभ से रीसेट कर दिया गया है।', { type: 'success' }); }); jQuery('#dupref-ns, #dupref-source-type, #dupref-source-input').on('change input', function () { var sourceType = jQuery('#dupref-source-type').val(); var nsVal = jQuery('#dupref-ns').val(); var inputVal = (jQuery('#dupref-source-input').val() || '').trim().toLowerCase(); var newKey = sourceType + '::' + nsVal + '::' + inputVal; if (loaderPagination.queryKey && loaderPagination.queryKey !== newKey) { loaderPagination.queryKey = ''; 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var labelEl = jQuery('#dupref-input-label'); var inputBox = jQuery('#dupref-source-input'); var inputWrap = jQuery('#dupref-input-wrap'); var hintBox = jQuery('#dupref-source-hint'); if (type === 'allpages') { inputWrap.show(); labelEl.text('3. प्रारंभिक अक्षर (वैकल्पिक):'); inputBox.val('').attr('placeholder', 'उदाहरण: अ, भा, अथवा रिक्त छोड़ें...'); hintBox.html('<b>प्रक्रिया निर्देश:</b> चयनित नामस्थान से पृष्ठ वर्णक्रमानुसार लोड होंगे। पुनः क्लिक करने पर उससे आगे के पृष्ठ जुड़ेंगे।'); } else if (type === 'random') { inputWrap.hide(); hintBox.html('<b>प्रक्रिया निर्देश:</b> प्रत्येक क्लिक पर चयनित नामस्थान से नए यादृच्छिक पृष्ठ बॉक्स 2A में जोड़े जाएँगे।'); } else if (type === 'cat') { inputWrap.show(); labelEl.text('3. श्रेणी का नाम दर्ज करें:'); inputBox.val('').attr('placeholder', 'उदाहरण: भारत के राज्य'); hintBox.html('<b>प्रक्रिया निर्देश:</b> निर्दिष्ट श्रेणी के पृष्ठ क्रमानुसार लोड होंगे। पुनः क्लिक करने पर श्रेणी के आगे के पृष्ठ जुड़ेंगे।'); } else if (type === 'transclude') { inputWrap.show(); labelEl.text('3. साँचे का नाम दर्ज करें:'); inputBox.val('').attr('placeholder', 'उदाहरण: Cite web'); hintBox.html('<b>प्रक्रिया निर्देश:</b> जिन पृष्ठों पर यह साँचा प्रयुक्त है, वे क्रमिक बैच में लोड होंगे।'); } else if (type === 'backlinks') { inputWrap.show(); labelEl.text('3. पृष्ठ का नाम दर्ज करें:'); inputBox.val('').attr('placeholder', 'उदाहरण: भारत'); hintBox.html('<b>प्रक्रिया निर्देश:</b> जिन पृष्ठों में इस लेख की कड़ी संबद्ध है, वे क्रमिक बैच में लोड होंगे।'); } else if (type === 'user') { inputWrap.show(); labelEl.text('3. सदस्य का नाम दर्ज करें:'); inputBox.val(mw.config.get('wgUserName') || '').attr('placeholder', 'सदस्य नाम'); hintBox.html('<b>प्रक्रिया निर्देश:</b> निर्दिष्ट सदस्य द्वारा निर्मित पृष्ठ क्रमानुसार लोड होंगे।'); } }); // === प्रथम चरण: क्रमिक पृष्ठ चयन === jQuery('#dupref-fetch-btn').on('click', async function () { var sourceType = jQuery('#dupref-source-type').val(); var nsVal = jQuery('#dupref-ns').val(); var inputVal = (jQuery('#dupref-source-input').val() || '').trim(); var limitVal = parseInt(jQuery('#dupref-limit').val(), 10) || 50; if (sourceType !== 'allpages' && sourceType !== 'random' && !inputVal) { mw.notify('कृपया इनपुट बॉक्स 3 में वांछित नाम दर्ज करें।', { type: 'warn' }); jQuery('#dupref-source-input').focus(); return; } inputVal = inputVal.split('[[').join('').split(']]').join('').trim(); var currentKey = sourceType + '::' + nsVal + '::' + inputVal.toLowerCase(); if (sourceType !== 'random' && loaderPagination.queryKey !== currentKey) { loaderPagination.queryKey = currentKey; loaderPagination.continueData = null; loaderPagination.hasMore = false; loaderPagination.batchCount = 0; loaderPagination.totalLoaded = 0; } var btn = jQuery(this); btn.prop('disabled', true).text('लोड किया जा रहा है...'); try { var api = new mw.Api(); var fetchedTitles = []; var responseData = null; if (sourceType === 'allpages') { var apParams = { action: 'query', list: 'allpages', apnamespace: nsVal, apfilterredir: 'nonredirects', aplimit: limitVal }; if (inputVal && !loaderPagination.continueData) { apParams.apprefix = inputVal; } if (loaderPagination.continueData) { jQuery.extend(apParams, loaderPagination.continueData); } responseData = await api.get(apParams); var apList = (responseData.query && responseData.query.allpages) ? responseData.query.allpages : []; for (var i = 0; i < apList.length; i++) fetchedTitles.push(apList[i].title); } else if (sourceType === 'random') { var rnData = await api.get({ action: 'query', list: 'random', rnnamespace: nsVal, rnfilterredir: 'nonredirects', rnlimit: limitVal }); responseData = rnData; var rnList = (rnData.query && rnData.query.random) ? rnData.query.random : []; for (var r = 0; r < rnList.length; r++) fetchedTitles.push(rnList[r].title); } else if (sourceType === 'cat') { var catTitle = inputVal; if (catTitle.indexOf('श्रेणी:') !== 0 && catTitle.toLowerCase().indexOf('category:') !== 0) { catTitle = 'श्रेणी:' + catTitle; } var catParams = { action: 'query', list: 'categorymembers', cmtitle: catTitle, cmnamespace: nsVal, cmlimit: limitVal }; if (loaderPagination.continueData) { jQuery.extend(catParams, loaderPagination.continueData); } responseData = await api.get(catParams); var cmList = (responseData.query && responseData.query.categorymembers) ? responseData.query.categorymembers : []; for (var c = 0; c < cmList.length; c++) fetchedTitles.push(cmList[c].title); } else if (sourceType === 'transclude') { var tplTitle = inputVal.indexOf(':') === -1 ? ('साँचा:' + inputVal) : inputVal; var eiParams = { action: 'query', list: 'embeddedin', eititle: tplTitle, einamespace: nsVal, eilimit: limitVal }; if (loaderPagination.continueData) { jQuery.extend(eiParams, loaderPagination.continueData); } responseData = await api.get(eiParams); var eiList = (responseData.query && responseData.query.embeddedin) ? responseData.query.embeddedin : []; for (var e = 0; e < eiList.length; e++) fetchedTitles.push(eiList[e].title); } else if (sourceType === 'backlinks') { var blParams = { action: 'query', list: 'backlinks', bltitle: inputVal, blnamespace: nsVal, bllimit: limitVal }; if (loaderPagination.continueData) { jQuery.extend(blParams, loaderPagination.continueData); } responseData = await api.get(blParams); var blList = (responseData.query && responseData.query.backlinks) ? responseData.query.backlinks : []; for (var b = 0; b < blList.length; b++) fetchedTitles.push(blList[b].title); } else if (sourceType === 'user') { var ucParams = { action: 'query', list: 'usercontribs', ucuser: inputVal, ucnamespace: nsVal, ucshow: 'new', uclimit: limitVal }; if (loaderPagination.continueData) { jQuery.extend(ucParams, loaderPagination.continueData); } responseData = await api.get(ucParams); var ucList = (responseData.query && responseData.query.usercontribs) ? responseData.query.usercontribs : []; for (var u = 0; u < ucList.length; u++) fetchedTitles.push(ucList[u].title); } if (sourceType !== 'random' && responseData && responseData.continue) { loaderPagination.continueData = responseData.continue; loaderPagination.hasMore = true; } else { loaderPagination.continueData = null; loaderPagination.hasMore = false; } if (fetchedTitles.length > 0) { loaderPagination.batchCount++; var added = appendNewTitlesToBox2A(fetchedTitles, false); loaderPagination.totalLoaded += added; jQuery('#dupref-reset-pagination').show(); var statusEl = jQuery('#dupref-pagination-status').show(); if (sourceType === 'random') { btn.prop('disabled', false).text('अगले यादृच्छिक पृष्ठ जोड़ें'); statusEl.text('बैच संख्या ' + loaderPagination.batchCount + ' पूर्ण: ' + added + ' नए यादृच्छिक पृष्ठ जोड़े गए।'); } else if (loaderPagination.hasMore) { btn.prop('disabled', false).text('अगले नए पृष्ठ जोड़ें (बैच संख्या ' + (loaderPagination.batchCount + 1) + ')'); statusEl.text('बैच संख्या ' + loaderPagination.batchCount + ' लोड हुआ (' + added + ' नए पृष्ठ जुड़े, कुल: ' + loaderPagination.totalLoaded + ')। आगे के पृष्ठ उपलब्ध हैं।'); } else { btn.prop('disabled', false).text('सभी पृष्ठ लोड हो चुके हैं'); statusEl.text('बैच संख्या ' + loaderPagination.batchCount + ' के साथ इस स्रोत के सभी उपलब्ध पृष्ठ पूर्ण हुए (कुल लोड: ' + loaderPagination.totalLoaded + ')।'); } mw.notify('बैच संख्या ' + loaderPagination.batchCount + ': ' + added + ' नए पृष्ठ बॉक्स 2A में जोड़े गए।', { type: 'success' }); } else { btn.prop('disabled', false).text('सूची (2A) में जोड़ें'); mw.notify('इस खोज के अंतर्गत आगे कोई नया पृष्ठ उपलब्ध नहीं है।', { type: 'warn' }); } } catch (err) { console.error(err); btn.prop('disabled', false).text('सूची (2A) में जोड़ें'); mw.notify('पृष्ठ लोड करने में त्रुटि: ' + String(err), { type: 'error' }); } }); // === त्वरित बटन 1: 50 यादृच्छिक लेख जोड़ें === jQuery('#dupref-quick-random').on('click', async function () { var btn = jQuery(this); btn.prop('disabled', true).text('लोड किया जा रहा है...'); try { var api = new mw.Api(); var nsVal = jQuery('#dupref-ns').val(); var rnData = await api.get({ action: 'query', list: 'random', rnnamespace: nsVal, rnfilterredir: 'nonredirects', rnlimit: 50 }); var list = (rnData.query && rnData.query.random) ? rnData.query.random : []; var titles = list.map(function (item) { return item.title; }); var added = appendNewTitlesToBox2A(titles, false); jQuery('#dupref-reset-pagination').show(); mw.notify(added + ' नए यादृच्छिक पृष्ठ बॉक्स 2A में जोड़े गए।', { type: 'success' }); } catch (e) { mw.notify('यादृच्छिक पृष्ठ लोड करने में त्रुटि हुई।', { type: 'error' }); } btn.prop('disabled', false).text('50 यादृच्छिक लेख जोड़ें'); }); // === त्वरित बटन 2: मेरे द्वारा निर्मित लेख जोड़ें === jQuery('#dupref-load-my-next').on('click', async function () { var btn = jQuery(this); var nsVal = jQuery('#dupref-ns').val(); var limitVal = parseInt(jQuery('#dupref-limit').val(), 10) || 50; if (myContribsPagination.ns !== nsVal) { myContribsPagination.ns = nsVal; myContribsPagination.continueData = null; myContribsPagination.hasMore = true; myContribsPagination.batchCount = 0; } if (!myContribsPagination.hasMore && myContribsPagination.batchCount > 0) { mw.notify('आपके द्वारा निर्मित सभी पृष्ठ लोड किए जा चुके हैं। प्रारंभ से लाने हेतु "चयन क्रम प्रारंभ से रीसेट करें" पर क्लिक करें।', { type: 'warn' }); return; } btn.prop('disabled', true).text('लोड किया जा रहा है...'); try { var api = new mw.Api(); var ucParams = { action: 'query', list: 'usercontribs', ucuser: mw.config.get('wgUserName'), ucnamespace: nsVal, ucshow: 'new', uclimit: limitVal }; if (myContribsPagination.continueData) { jQuery.extend(ucParams, myContribsPagination.continueData); } var data = await api.get(ucParams); var list = (data.query && data.query.usercontribs) ? data.query.usercontribs : []; var titles = list.map(function (item) { return item.title; }); if (data.continue) { myContribsPagination.continueData = data.continue; myContribsPagination.hasMore = true; } else { myContribsPagination.continueData = null; myContribsPagination.hasMore = false; } if (titles.length > 0) { myContribsPagination.batchCount++; var added = appendNewTitlesToBox2A(titles, false); jQuery('#dupref-reset-pagination').show(); if (myContribsPagination.hasMore) { btn.prop('disabled', false).text('मेरे आगे के लेख जोड़ें (बैच संख्या ' + (myContribsPagination.batchCount + 1) + ')'); } else { btn.prop('disabled', false).text('मेरे सभी लेख लोड हो चुके हैं'); } mw.notify('आपके द्वारा निर्मित ' + added + ' नए लेख बॉक्स 2A में जोड़े गए (बैच संख्या ' + myContribsPagination.batchCount + ')।', { type: 'success' }); } else { btn.prop('disabled', false).text('मेरे द्वारा निर्मित लेख जोड़ें'); mw.notify('चयनित नामस्थान में आगे कोई नया लेख उपलब्ध नहीं है।', { type: 'warn' }); } } catch (e) { btn.prop('disabled', false).text('मेरे द्वारा निर्मित लेख जोड़ें'); mw.notify('लेख लोड करने में त्रुटि हुई।', { type: 'error' }); } }); // सूची स्वच्छ करें बटन jQuery('#dupref-clean').on('click', function () { var raw = jQuery('#dupref-input').val() || ''; var lines = raw.split('\n'); var cleaned = []; for (var i = 0; i < lines.length; i++) { var line = lines[i].trim(); if (!line) continue; line = line.replace(new RegExp('^[0-9#*\\-. ]+'), ''); if (line.toLowerCase().indexOf(':hi:') === 0) line = line.substring(4).trim(); else if (line.toLowerCase().indexOf('hi:') === 0) line = line.substring(3).trim(); var parenIndex = line.indexOf(' ('); if (parenIndex !== -1 && line.indexOf('=') !== -1) { var beforeParen = line.substring(0, parenIndex).trim(); beforeParen = beforeParen.replace(new RegExp(' [0-9]+$'), ''); line = beforeParen; } line = line.split('[[').join('').split(']]').join('').trim(); if (line && cleaned.indexOf(line) === -1) cleaned.push(line); } jQuery('#dupref-input').val(cleaned.join('\n')); updateAllCounts(); mw.notify('सूची स्वच्छ कर दी गई है।', { type: 'success' }); }); jQuery('#dupref-clear').on('click', function () { jQuery('#dupref-input').val(''); jQuery('#dupref-rejected').val(''); updateAllCounts(); mw.notify('बॉक्स 2A तथा 2B रिक्त कर दिए गए हैं।', { type: 'success' }); }); jQuery('#dupref-stop').on('click', function () { isStopRequested = true; jQuery(this).prop('disabled', true).text('रोका जा रहा है...'); }); // विकिटेक्स्ट प्रतिवेदन कॉपी बटन jQuery('#dupref-copy-wikitext').on('click', function () { var keys = Object.keys(foundResultsStore); if (keys.length === 0) return; var lines = keys.map(function (title) { var info = foundResultsStore[title].duplicateInfo; return '* [[' + title + ']] — (' + info.length + ' द्विरुक्त URL)'; }); var wtReport = '== द्विरुक्त सन्दर्भों वाले लेख ==\n' + lines.join('\n'); if (navigator.clipboard && navigator.clipboard.writeText) { navigator.clipboard.writeText(wtReport).then(function () { mw.notify('विकिटेक्स्ट प्रतिवेदन क्लिपबोर्ड पर कॉपी कर लिया गया है।', { type: 'success' }); }); } }); function addResultRow(pageTitle, duplicateInfo, statusInfo) { jQuery('#dupref-results-wrap').show(); jQuery('#dupref-copy-wikitext').show(); var tbody = jQuery('#dupref-results-tbody'); var existingRow = tbody.find('tr[data-row-title="' + mw.html.escape(pageTitle) + '"]'); if (existingRow.length > 0) { existingRow.remove(); } var pageUrl = mw.util.getUrl(pageTitle); var detailsHtml = '<ul style="margin:0; padding-left:18px;">'; for (var i = 0; i < duplicateInfo.length; i++) { var d = duplicateInfo[i]; var refBadges = d.refs.map(function (r, idx) { var simText = idx > 0 && r.simStr ? (' <small style="color:#14866d;">(' + r.simStr + ')</small>') : ''; return '<b>[' + r.number + ']</b>' + simText; }).join(', '); detailsHtml += '<li style="margin-bottom:4px;"><a href="' + mw.html.escape(d.url) + '" target="_blank" rel="noopener noreferrer" style="word-break:break-all;">' + mw.html.escape(d.url) + '</a> — सन्दर्भ क्रमांक: ' + refBadges + '</li>'; } detailsHtml += '</ul>'; var actionHtml = ''; if (statusInfo.taggedNow) { var diffUrl = mw.util.getUrl(pageTitle, { diff: 'cur', oldid: 'prev' }); actionHtml = '<span style="color:#14866d; font-weight:bold;">साँचा जोड़ा गया</span><br/><small><a href="' + diffUrl + '" target="_blank">(अंतर देखें)</a></small>'; } else if (statusInfo.alreadyTagged) { actionHtml = '<span style="color:#72777d;">पूर्व से साँचा उपस्थित है</span>'; } else if (statusInfo.isGAFA) { actionHtml = '<span style="color:#ac6600;">निर्वाचित/अच्छा लेख</span>'; } else { actionHtml = '<button type="button" class="mw-ui-button mw-ui-progressive dupref-single-tag-btn" data-title="' + mw.html.escape(pageTitle) + '" style="padding:4px 10px; font-size:12px; cursor:pointer;">साँचा जोड़ें</button>'; } var row = jQuery('<tr data-row-title="' + mw.html.escape(pageTitle) + '">').append( jQuery('<td>').html('<a href="' + pageUrl + '" target="_blank" style="font-weight:bold;">' + mw.html.escape(pageTitle) + '</a>'), jQuery('<td>').html(detailsHtml), jQuery('<td style="text-align:center;">').html(actionHtml) ); tbody.append(row); } jQuery('#dupref-results-tbody').on('click', '.dupref-single-tag-btn', async function () { var btn = jQuery(this); var title = btn.attr('data-title'); var stored = foundResultsStore[title]; if (!stored) return; btn.prop('disabled', true).text('जोड़ा जा रहा है...'); try { await tagPageWithDuplicateTemplate(title, stored.duplicateInfo); stored.alreadyTagged = true; var diffUrl = mw.util.getUrl(title, { diff: 'cur', oldid: 'prev' }); btn.parent().html('<span style="color:#14866d; font-weight:bold;">साँचा जोड़ा गया</span><br/><small><a href="' + diffUrl + '" target="_blank">(अंतर देखें)</a></small>'); var curTagged = parseInt(jQuery('#dstat-tagged').text(), 10) || 0; jQuery('#dstat-tagged').text(curTagged + 1); removeTitleFromBox2A(title, title); } catch (err) { btn.prop('disabled', false).text('साँचा जोड़ें'); mw.notify('त्रुटि (' + title + '): ' + err.message, { type: 'error' }); } }); jQuery('#dupref-tag-all-found').on('click', async function () { var buttons = jQuery('.dupref-single-tag-btn:not(:disabled)'); if (buttons.length === 0) { mw.notify('साँचा जोड़ने हेतु कोई शेष पृष्ठ नहीं है।', { type: 'warn' }); return; } var delaySec = parseInt(jQuery('#dupref-delay').val(), 10) || 4; var mainBtn = jQuery(this); mainBtn.prop('disabled', true).text('सभी में साँचा जोड़ा जा रहा है...'); for (var i = 0; i < buttons.length; i++) { if (isStopRequested) break; var btnEl = jQuery(buttons[i]); btnEl.trigger('click'); if (i < buttons.length - 1) { await new Promise(function (r) { setTimeout(r, delaySec * 1000); }); } } mainBtn.prop('disabled', false).text('सभी चिह्नित पृष्ठों में क्रमशः साँचा जोड़ें'); }); // ===================================================================== // द्वि-स्तरीय सटीक निस्यंदन इंजन (Batch + 6x Parallel DOM Filter) // ===================================================================== jQuery('#dupref-prefilter-btn').on('click', async function () { var rawText = jQuery('#dupref-input').val() || ''; var rawList = rawText.split('\n').map(function (s) { return s.split('[[').join('').split(']]').join('').trim(); }).filter(Boolean); if (rawList.length === 0) { mw.notify('निस्यंदन हेतु बॉक्स 2A में कोई पृष्ठ उपलब्ध नहीं है।', { type: 'warn' }); return; } var filterType = jQuery('#dupref-filter-type').val(); var skipTagged = jQuery('#dupref-skip-tagged').is(':checked'); var minSimPct = parseInt(jQuery('#dupref-min-sim').val(), 10) || 0; isStopRequested = false; var filterBtn = jQuery(this); var startBtn = jQuery('#dupref-start'); var stopBtn = jQuery('#dupref-stop'); var logBox = jQuery('#dupref-log').empty(); filterBtn.prop('disabled', true).text('निस्यंदन संचालित है...'); startBtn.prop('disabled', true); stopBtn.show().prop('disabled', false).text('प्रक्रिया रोकें'); jQuery('#dupref-stats').show(); var statTotal = rawList.length; var statDone = 0; var statFound = 0; var statClean = 0; function updateFilterStats() { var pct = statTotal > 0 ? Math.round((statDone / statTotal) * 100) : 0; jQuery('#dstat-total').text(statTotal); jQuery('#dstat-done').text(statDone); jQuery('#dstat-found').text(statFound); jQuery('#dstat-clean').text(statClean); jQuery('#dstat-percent').text(pct + '%'); jQuery('#dstat-bar').css('width', pct + '%'); } updateFilterStats(); function logMsg(msg, color) { logBox.append(jQuery('<div>').css({ color: color || '#202122', marginBottom: '4px' }).html(msg)); logBox.scrollTop(logBox[0].scrollHeight); } var api = new mw.Api(); var domParser = new DOMParser(); var existingTplRegex = new RegExp('\\{\\{\\s*(Duplicated citations|Duplicate references|डुप्लिकेट सन्दर्भ|डुप्लीकेट सन्दर्भ)', 'i'); var stage2Candidates = []; var confirmedDuplicateTitles = []; logMsg('<strong>चरण 1/2 (बैच विकिटेक्स्ट परीक्षण): कुल ' + rawList.length + ' पृष्ठों का प्रारंभिक निस्यंदन किया जा रहा है...</strong>', '#3366cc'); for (var b = 0; b < rawList.length; b += 25) { if (isStopRequested) break; var batch = rawList.slice(b, b + 25); try { var qData = await api.post({ action: 'query', titles: batch, prop: ['revisions', 'categories'], rvprop: 'content', rvslots: 'main', clcategories: TARGET_CHECK_CATEGORIES, cllimit: 'max', redirects: 1, formatversion: 2 }); var pages = (qData.query && qData.query.pages) ? qData.query.pages : []; for (var p = 0; p < pages.length; p++) { var pg = pages[p]; var pTitle = pg.title; globalSeenPages.add(pTitle); if (pg.missing) { statDone++; statClean++; moveToRejectedBox2B(pTitle, 'पृष्ठ अनुपस्थित'); continue; } var cats = (pg.categories || []).map(function (c) { return c.title.replace('श्रेणी:', '').trim(); }); var content = (pg.revisions && pg.revisions[0] && pg.revisions[0].slots && pg.revisions[0].slots.main) ? pg.revisions[0].slots.main.content : null; if (content === null) { stage2Candidates.push(pTitle); continue; } var isAlreadyTagged = cats.indexOf('डुप्लिकेट सन्दर्भों वाले सभी लेख') !== -1 || cats.indexOf('डुप्लीकेट सन्दर्भों वाले सभी लेख') !== -1 || existingTplRegex.test(content); var isGAFA = cats.indexOf('निर्वाचित लेख') !== -1 || cats.indexOf('अच्छे लेख') !== -1; if (skipTagged && isAlreadyTagged) { statDone++; statClean++; moveToRejectedBox2B(pTitle, 'पूर्व से साँचा उपस्थित'); continue; } if (skipTagged && isGAFA) { statDone++; statClean++; moveToRejectedBox2B(pTitle, 'निर्वाचित/अच्छा लेख'); continue; } var uniqueRefs = extractUniqueRefBlocksFromWikitext(content); var hasRefTemplates = new RegExp('\\{\\{\\s*(refn|r|sfn|harv|cite Q)', 'i').test(content); if (uniqueRefs.length < 2 && !hasRefTemplates) { statDone++; statClean++; moveToRejectedBox2B(pTitle, 'केवल ' + uniqueRefs.length + ' सन्दर्भ'); continue; } var urlFreq = {}; var hasRepeatedUrlInRefs = false; for (var rIdx = 0; rIdx < uniqueRefs.length; rIdx++) { var uKeys = extractUrlKeysFromRefBlock(uniqueRefs[rIdx]); for (var kIdx = 0; kIdx < uKeys.length; kIdx++) { var uk = uKeys[kIdx]; urlFreq[uk] = (urlFreq[uk] || 0) + 1; if (urlFreq[uk] >= 2) { hasRepeatedUrlInRefs = true; break; } } if (hasRepeatedUrlInRefs) break; } var hasIdParams = new RegExp('\\|\\s*(doi|pmid|pmc|jstor|bibcode)\\s*=\\s*[^|\\}\\s]+', 'i').test(content); if (filterType === 'wikitext_fast') { statDone++; if (hasRepeatedUrlInRefs) { statFound++; confirmedDuplicateTitles.push(pTitle); } else { statClean++; moveToRejectedBox2B(pTitle, 'विकिटेक्स्ट में द्विरुक्त URL नहीं'); } } else { if (hasRepeatedUrlInRefs || hasIdParams || hasRefTemplates) { stage2Candidates.push(pTitle); } else { statDone++; statClean++; moveToRejectedBox2B(pTitle, 'कोई द्विरुक्त सन्दर्भ URL नहीं'); } } } updateFilterStats(); } catch (batchErr) { console.error(batchErr); for (var fb = 0; fb < batch.length; fb++) { stage2Candidates.push(batch[fb]); } } } // === चरण 2: संभावित पृष्ठों का 6x समानांतर सटीक HTML DOM परीक्षण === if (filterType === 'exact_parallel' && stage2Candidates.length > 0 && !isStopRequested) { logMsg('<strong>चरण 2/2 (6x समानांतर सटीक परीक्षण): ' + stage2Candidates.length + ' संभावित पृष्ठों के सन्दर्भों का विस्तृत मिलान किया जा रहा है...</strong>', '#3366cc'); var cursor = 0; var CONCURRENCY = 6; async function runParallelWorker() { while (cursor < stage2Candidates.length && !isStopRequested) { var currentIdx = cursor++; var candTitle = stage2Candidates[currentIdx]; try { var parseData = await api.get({ action: 'parse', page: candTitle, prop: ['text', 'categories'], redirects: 1, formatversion: 2 }); if (!parseData || !parseData.parse) { statDone++; statClean++; moveToRejectedBox2B(candTitle, 'पृष्ठ अनुपस्थित'); updateFilterStats(); continue; } var realTitle = parseData.parse.title; globalSeenPages.add(realTitle); var htmlString = parseData.parse.text || ''; var cats = (parseData.parse.categories || []).map(function (c) { return c.category.replace(/_/g, ' '); }); var alreadyTagged = cats.indexOf('डुप्लिकेट सन्दर्भों वाले सभी लेख') !== -1 || cats.indexOf('डुप्लीकेट सन्दर्भों वाले सभी लेख') !== -1; var isGAFA = cats.indexOf('निर्वाचित लेख') !== -1 || cats.indexOf('अच्छे लेख') !== -1; if (skipTagged && (alreadyTagged || isGAFA)) { statDone++; statClean++; moveToRejectedBox2B(realTitle, 'पूर्व से साँचा उपस्थित / निर्वाचित'); updateFilterStats(); continue; } var doc = domParser.parseFromString(htmlString, 'text/html'); var duplicates = extractDuplicatesFromDOM(doc, minSimPct); if (duplicates.length > 0) { statDone++; statFound++; confirmedDuplicateTitles.push(realTitle); foundResultsStore[realTitle] = { duplicateInfo: duplicates, alreadyTagged: alreadyTagged, isGAFA: isGAFA }; addResultRow(realTitle, duplicates, { alreadyTagged: alreadyTagged, isGAFA: isGAFA }); logMsg('चिह्नित: <b>' + mw.html.escape(realTitle) + '</b> में ' + duplicates.length + ' द्विरुक्त URL की पुष्टि हुई (बॉक्स 2A में सुरक्षित)।', '#d33'); } else { statDone++; statClean++; moveToRejectedBox2B(realTitle, 'स्वच्छ / कोई द्विरुक्त सन्दर्भ नहीं'); } updateFilterStats(); } catch (pErr) { statDone++; confirmedDuplicateTitles.push(candTitle); updateFilterStats(); } } } var workers = []; for (var w = 0; w < CONCURRENCY; w++) { workers.push(runParallelWorker()); } await Promise.all(workers); } jQuery('#dupref-input').val(confirmedDuplicateTitles.join('\n')); updateAllCounts(); logMsg('<strong>निस्यंदन प्रक्रिया पूर्ण हुई। कुल ' + statTotal + ' में से ' + confirmedDuplicateTitles.length + ' द्विरुक्त सन्दर्भ युक्त लेख बॉक्स 2A में रखे गए हैं तथा ' + statClean + ' स्वच्छ लेख बॉक्स 2B में पृथक किए गए हैं।</strong>', '#14866d'); mw.notify('निस्यंदन पूर्ण: ' + confirmedDuplicateTitles.length + ' द्विरुक्त सन्दर्भ युक्त लेख बॉक्स 2A में शेष हैं।', { type: 'success' }); if (confirmedDuplicateTitles.length > 0) { jQuery('#dupref-tag-all-found').show(); } filterBtn.prop('disabled', false).text('द्विरुक्त सन्दर्भ छन्नी चलाएँ'); startBtn.prop('disabled', false); stopBtn.hide(); }); // ===================================================================== // मुख्य परीक्षण / टैगिंग प्रक्रिया (बॉक्स 2A के लेखों पर) // ===================================================================== jQuery('#dupref-start').on('click', async function () { var rawText = jQuery('#dupref-input').val() || ''; var rawList = rawText.split('\n').map(function (s) { return s.split('[[').join('').split(']]').join('').trim(); }).filter(Boolean); if (rawList.length === 0) { mw.notify('बॉक्स 2A रिक्त है। कृपया पहले पृष्ठ जोड़ें।', { type: 'warn' }); return; } var mode = jQuery('#dupref-mode').val(); var delaySec = parseInt(jQuery('#dupref-delay').val(), 10) || 4; var minSimPct = parseInt(jQuery('#dupref-min-sim').val(), 10) || 0; var skipTagged = jQuery('#dupref-skip-tagged').is(':checked'); var keepOnlyDups = jQuery('#dupref-keep-only-dups').is(':checked'); isStopRequested = false; var startBtn = jQuery(this); var stopBtn = jQuery('#dupref-stop'); var tagAllBtn = jQuery('#dupref-tag-all-found'); var logBox = jQuery('#dupref-log').empty(); function logMsg(msg, color) { logBox.append(jQuery('<div>').css({ color: color || '#202122', marginBottom: '4px' }).html(msg)); logBox.scrollTop(logBox[0].scrollHeight); } startBtn.prop('disabled', true).text('प्रक्रिया संचालित है...'); stopBtn.show().prop('disabled', false).text('प्रक्रिया रोकें'); jQuery('#dupref-stats').show(); var statDone = 0; var statFound = 0; var statTagged = 0; var statClean = 0; function updateStats() { var total = rawList.length; var pct = total > 0 ? Math.round((statDone / total) * 100) : 0; jQuery('#dstat-total').text(total); jQuery('#dstat-done').text(statDone); jQuery('#dstat-found').text(statFound); jQuery('#dstat-tagged').text(statTagged); jQuery('#dstat-clean').text(statClean); jQuery('#dstat-percent').text(pct + '%'); jQuery('#dstat-bar').css('width', pct + '%'); } updateStats(); var api = new mw.Api(); var domParser = new DOMParser(); logMsg('<strong>बॉक्स 2A के कुल ' + rawList.length + ' पृष्ठों पर कार्यवाही प्रारंभ की जा रही है...</strong>', '#3366cc'); for (var i = 0; i < rawList.length; i++) { if (isStopRequested) { logMsg('<strong>उपयोगकर्ता के निर्देशानुसार प्रक्रिया रोक दी गई।</strong>', '#d33'); break; } var title = rawList[i]; globalSeenPages.add(title); var cached = foundResultsStore[title]; if (cached && cached.duplicateInfo && cached.duplicateInfo.length > 0) { statFound++; logMsg('[' + (i + 1) + '/' + rawList.length + '] चिह्नित: <b>' + mw.html.escape(title) + '</b> (' + cached.duplicateInfo.length + ' द्विरुक्त URL पुष्ट)', '#d33'); if (mode === 'autotag' && !cached.alreadyTagged && !cached.isGAFA) { try { await tagPageWithDuplicateTemplate(title, cached.duplicateInfo); cached.alreadyTagged = true; statTagged++; addResultRow(title, cached.duplicateInfo, { taggedNow: true }); removeTitleFromBox2A(title, title); logMsg('सफलतापूर्वक {{Duplicated citations}} साँचा जोड़ा गया।', '#14866d'); if (i < rawList.length - 1 && !isStopRequested) { logMsg('अगले संपादन से पूर्व ' + delaySec + ' सेकंड की प्रतीक्षा...', '#72777d'); await new Promise(function (r) { setTimeout(r, delaySec * 1000); }); } } catch (tagErr) { logMsg('साँचा जोड़ने में त्रुटि: ' + mw.html.escape(tagErr.message), '#d33'); addResultRow(title, cached.duplicateInfo, { alreadyTagged: cached.alreadyTagged, isGAFA: cached.isGAFA }); } } else { addResultRow(title, cached.duplicateInfo, { alreadyTagged: cached.alreadyTagged, isGAFA: cached.isGAFA }); } statDone++; updateStats(); continue; } logMsg('[' + (i + 1) + '/' + rawList.length + '] <b>' + mw.html.escape(title) + '</b> का परीक्षण किया जा रहा है...'); try { var parseData = await api.get({ action: 'parse', page: title, prop: ['text', 'categories'], redirects: 1, formatversion: 2 }); if (!parseData || !parseData.parse) { logMsg('छोड़ा गया: पृष्ठ उपलब्ध नहीं है।', '#ac6600'); statDone++; statClean++; updateStats(); if (keepOnlyDups) removeTitleFromBox2A(title, null); moveToRejectedBox2B(title, 'पृष्ठ अनुपस्थित'); continue; } var realTitle = parseData.parse.title; globalSeenPages.add(realTitle); var htmlString = parseData.parse.text || ''; var cats = (parseData.parse.categories || []).map(function (c) { return c.category.replace(/_/g, ' '); }); var alreadyTagged = cats.indexOf('डुप्लिकेट सन्दर्भों वाले सभी लेख') !== -1 || cats.indexOf('डुप्लीकेट सन्दर्भों वाले सभी लेख') !== -1; var isGAFA = cats.indexOf('निर्वाचित लेख') !== -1 || cats.indexOf('अच्छे लेख') !== -1; if (skipTagged && (alreadyTagged || isGAFA)) { logMsg('छोड़ा गया (' + mw.html.escape(realTitle) + '): पूर्व से साँचा उपस्थित है अथवा निर्वाचित/अच्छा लेख है।', '#72777d'); statDone++; statClean++; updateStats(); if (keepOnlyDups) removeTitleFromBox2A(title, realTitle); moveToRejectedBox2B(realTitle, 'पूर्व से साँचा उपस्थित / निर्वाचित'); continue; } var doc = domParser.parseFromString(htmlString, 'text/html'); var duplicates = extractDuplicatesFromDOM(doc, minSimPct); if (duplicates.length === 0) { logMsg('स्वच्छ (' + mw.html.escape(realTitle) + '): कोई द्विरुक्त सन्दर्भ नहीं मिला।', '#14866d'); statDone++; statClean++; updateStats(); if (keepOnlyDups) removeTitleFromBox2A(title, realTitle); moveToRejectedBox2B(realTitle, 'स्वच्छ / कोई द्विरुक्त सन्दर्भ नहीं'); continue; } statFound++; foundResultsStore[realTitle] = { duplicateInfo: duplicates, alreadyTagged: alreadyTagged, isGAFA: isGAFA }; logMsg('चिह्नित: <b>' + mw.html.escape(realTitle) + '</b> में ' + duplicates.length + ' द्विरुक्त URL प्राप्त हुए।', '#d33'); if (mode === 'autotag' && !alreadyTagged && !isGAFA) { try { await tagPageWithDuplicateTemplate(realTitle, duplicates); statTagged++; addResultRow(realTitle, duplicates, { taggedNow: true }); removeTitleFromBox2A(title, realTitle); logMsg('सफलतापूर्वक {{Duplicated citations}} साँचा जोड़ा गया।', '#14866d'); if (i < rawList.length - 1 && !isStopRequested) { logMsg('अगले संपादन से पूर्व ' + delaySec + ' सेकंड की प्रतीक्षा...', '#72777d'); await new Promise(function (r) { setTimeout(r, delaySec * 1000); }); } } catch (tagErr) { logMsg('साँचा जोड़ने में त्रुटि: ' + mw.html.escape(tagErr.message), '#d33'); addResultRow(realTitle, duplicates, { alreadyTagged: alreadyTagged, isGAFA: isGAFA }); } } else { addResultRow(realTitle, duplicates, { alreadyTagged: alreadyTagged, isGAFA: isGAFA }); } statDone++; updateStats(); } catch (err) { logMsg('त्रुटि (' + mw.html.escape(title) + '): ' + mw.html.escape(String(err)), '#ac6600'); statDone++; updateStats(); } } logMsg('<strong>प्रक्रिया पूर्ण हुई। बॉक्स 2A में कुल ' + statFound + ' द्विरुक्त सन्दर्भ युक्त लेख चिह्नित हैं।</strong>', '#3366cc'); startBtn.prop('disabled', false).text('परीक्षण / टैगिंग प्रारंभ करें'); stopBtn.hide(); if (mode === 'scan' && statFound > 0) { tagAllBtn.show(); } }); } // ========================================================================= // भाग 2: पृष्ठ-स्तरीय द्विरुक्त सन्दर्भ तालिका (लेख अवलोकन के समय) // ========================================================================= function initOnPageDuplicateChecker() { function findNextReflistDiv(element) { var nextElement = element.nextElementSibling; while (nextElement) { if (nextElement.tagName.toLowerCase() === 'div' && (nextElement.classList.contains('reflist') || nextElement.classList.contains('mw-references-wrap'))) { return nextElement; } var innerDiv = nextElement.querySelector('.reflist, .mw-references-wrap'); if (innerDiv) return innerDiv; nextElement = nextElement.nextElementSibling; } return null; } var selectorStr = 'h2#सन्दर्भ, h2#टिप्पणियाँ, h2#सन्दर्भ_सूची, h2#References, h2#संदर्भ, h2#संदर्भ_सूची, h2#टिप्पणी_सूची, h2#टिप्पणी, span#सन्दर्भ, span#टिप्पणियाँ, span#संदर्भ, span#संदर्भ_सूची, span#टिप्पणी_सूची, span#टिप्पणी'; var referencesHeader = document.querySelector(selectorStr); if (!referencesHeader) return; var containerDiv = referencesHeader.closest('.mw-heading') || referencesHeader.closest('div') || referencesHeader.parentElement; if (!containerDiv) return; var reflistDiv = findNextReflistDiv(containerDiv); if (!reflistDiv) return; var duplicateInfo = extractDuplicatesFromDOM(document, 0); if (duplicateInfo.length === 0) return; var style = document.createElement('style'); style.textContent = 'li:target { border: 1px dotted red; padding: 2px; background-color: #ffcccc !important; } ' + '.duplicate-citation-highlight { background-color: #e1eeff; } ' + '.duplicate-citation-hover { background-color: #cce0ff; border: 1px dotted blue; } ' + '.duplicate-citation-clicked { border: 1px dotted red; padding: 2px; background-color: #ffe6e6; } ' + '.mw-collapsible-toggle { font-weight: normal; float: right; } ' + '.duplicate-references-table { width: 100%; margin-top:1em; margin-bottom:1em; }'; document.head.appendChild(style); var table = document.createElement('table'); table.className = 'wikitable mw-collapsible duplicate-references-table'; var tbody = document.createElement('tbody'); table.appendChild(tbody); var headerRow = document.createElement('tr'); var headerCell = document.createElement('td'); headerCell.innerHTML = '<strong>द्विरुक्त सन्दर्भ (' + duplicateInfo.length + ')</strong> '; var toggleSpan = document.createElement('span'); toggleSpan.className = 'mw-collapsible-toggle'; toggleSpan.innerHTML = '[<a href="#" class="mw-collapsible-text">छुपाएँ</a>]'; headerCell.appendChild(toggleSpan); var pageCategories = mw.config.get('wgCategories') || []; var templateAlreadyPresent = pageCategories.indexOf('डुप्लिकेट सन्दर्भों वाले सभी लेख') !== -1 || pageCategories.indexOf('डुप्लीकेट सन्दर्भों वाले सभी लेख') !== -1 || Boolean(document.querySelector('.box-Duplicated_citations, .ambox-Duplicated_citations, table.box-डुप्लिकेट_सन्दर्भ')); var isGAFA = pageCategories.indexOf('निर्वाचित लेख') !== -1 || pageCategories.indexOf('अच्छे लेख') !== -1; if (!templateAlreadyPresent && !isGAFA) { var addTemplateLink = document.createElement('a'); addTemplateLink.textContent = ' [सन्दर्भ रखरखाव साँचा जोड़ें] '; addTemplateLink.href = '#'; addTemplateLink.style.fontWeight = 'bold'; addTemplateLink.addEventListener('click', async function (e) { e.preventDefault(); addTemplateLink.innerHTML = '<sup><small>[ प्रक्रिया जारी है... ]</small></sup>'; try { await tagPageWithDuplicateTemplate(mw.config.get('wgPageName'), duplicateInfo); addTemplateLink.innerHTML = '<sup><small>[ पूर्ण ]</small></sup>'; setTimeout(function () { location.reload(); }, 500); } catch (err) { addTemplateLink.innerHTML = '<sup><small>[ त्रुटि ]</small></sup>'; mw.notify('साँचा जोड़ने में विफल: ' + err.message, { type: 'error' }); } }); headerCell.appendChild(addTemplateLink); } headerRow.appendChild(headerCell); tbody.appendChild(headerRow); var pageTitleClean = mw.config.get('wgPageName').replace(/_/g, ' '); duplicateInfo.forEach(function (item) { var url = item.url; var refs = item.refs; var row = document.createElement('tr'); var cell = document.createElement('td'); var reportIcon = document.createElement('a'); reportIcon.href = 'https://hi.wikipedia.org/wiki/User_talk:विक्रम_प्रताप?action=edit&section=new&preloadtitle=' + encodeURIComponent('DuplicateReferences त्रुटि सूचना: [[' + pageTitleClean + ']]'); reportIcon.textContent = '[त्रुटि सूचित करें]'; reportIcon.style.marginRight = '8px'; reportIcon.style.fontSize = '11px'; cell.appendChild(reportIcon); var urlLink = document.createElement('a'); urlLink.href = url; urlLink.textContent = url; urlLink.target = '_blank'; urlLink.rel = 'noopener noreferrer'; cell.appendChild(urlLink); cell.appendChild(document.createTextNode(' — इन सन्दर्भ क्रमांकों में: ')); refs.forEach(function (ref, index) { var link = document.createElement('a'); link.href = '#' + ref.id; link.textContent = ref.number; cell.appendChild(link); if (index > 0 && ref.simStr) { var simSpan = document.createElement('span'); simSpan.textContent = ' (' + ref.simStr + ')'; cell.appendChild(simSpan); } link.addEventListener('mouseover', function () { refs.forEach(function (r) { var el = document.getElementById(r.id); if (el) { el.classList.add(r.id === ref.id ? 'duplicate-citation-hover' : 'duplicate-citation-highlight'); } }); }); link.addEventListener('mouseout', function () { refs.forEach(function (r) { var el = document.getElementById(r.id); if (el) { el.classList.remove('duplicate-citation-hover', 'duplicate-citation-highlight'); } }); }); if (index < refs.length - 1) { cell.appendChild(document.createTextNode(', ')); } }); row.appendChild(cell); tbody.appendChild(row); }); reflistDiv.before(table); } }); // </nowiki> 145jug9sx5tfsjei58a9pehrrxcqnph 6630249 6630246 2026-10-16T15:08:12Z विक्रम प्रताप 911487 उपकरण शीर्षक परिवर्तन 6630249 javascript text/javascript // Doc : [[सदस्य:विक्रम प्रताप/द्विरुक्त सन्दर्भ परीक्षक]] // <nowiki> /** * उपकरण: द्विरुक्त सन्दर्भ परीक्षक एवं टैगर (DuplicateReferences Pro - v4.6 Administrative Edition) * मूल श्रेय: User:Polygnotus/DuplicateReferences.js * संवर्धित संस्करण: सदस्य:विक्रम प्रताप/DuplicateReferences.js * विशेष पृष्ठ: Special:BlankPage/DupRef */ mw.loader.using(['mediawiki.util', 'mediawiki.api'], function () { jQuery(function () { // 1. बाएँ साइडबार (उपकरण) में विशेष पृष्ठ परीक्षक की कड़ी जोड़ें mw.util.addPortletLink( 'p-tb', mw.util.getUrl('Special:BlankPage/DupRef'), 'द्विरुक्त सन्दर्भ परीक्षक', 't-dupref-scanner', 'नामस्थान अथवा श्रेणी से पृष्ठ चयन कर द्विरुक्त सन्दर्भों का परीक्षण करें' ); // 2. यदि उपयोगकर्ता Special:BlankPage/DupRef पर है, तो सामूहिक परीक्षक इंटरफ़ेस प्रारंभ करें var currentTitle = mw.config.get('wgTitle') || ''; var isExactDupRefPage = ( mw.config.get('wgCanonicalSpecialPageName') === 'Blankpage' && (currentTitle === 'BlankPage/DupRef' || currentTitle === 'खाली पृष्ठ/DupRef' || /\/DupRef(?:$|[?#&])/.test(window.location.href)) ); if (isExactDupRefPage) { initDupRefSpecialPage(); return; } // 3. यदि उपयोगकर्ता किसी सामान्य लेख या सदस्य पृष्ठ का अवलोकन कर रहा है, तो पृष्ठ-स्तरीय परीक्षक चलाएँ if ( mw.config.get('wgAction') === 'view' && !mw.config.get('wgDiffNewId') && !mw.config.get('wgDiffOldId') && (mw.config.get('wgNamespaceNumber') === 0 || mw.config.get('wgPageName').indexOf('सदस्य:') === 0) ) { initOnPageDuplicateChecker(); } }); // ========================================================================= // साझा विश्लेषण इंजन (Shared Core Logic for Filter, Batch & On-Page) // ========================================================================= var HINDI_MONTHS = [ 'जनवरी', 'फ़रवरी', 'मार्च', 'अप्रैल', 'मई', 'जून', 'जुलाई', 'अगस्त', 'सितम्बर', 'अक्टूबर', 'नवम्बर', 'दिसम्बर' ]; var REF_HEADINGS_LIST = [ 'सन्दर्भ', 'टिप्पणियाँ', 'सन्दर्भ सूची', 'References', 'टिप्पणी सूची', 'संदर्भ सूची', 'संदर्भ', 'टिप्पणी' ]; var TARGET_CHECK_CATEGORIES = [ 'श्रेणी:डुप्लिकेट सन्दर्भों वाले सभी लेख', 'श्रेणी:डुप्लीकेट सन्दर्भों वाले सभी लेख', 'श्रेणी:निर्वाचित लेख', 'श्रेणी:अच्छे लेख' ]; function normalizeExternalUrl(rawHref) { if (!rawHref) return ''; var h = rawHref.trim(); if (h.indexOf('//') === 0) { h = 'https:' + h; } if (h.indexOf('http://') !== 0 && h.indexOf('https://') !== 0) { return ''; } try { return new URL(h).href; } catch (e) { return h; } } function normalizeUrlKeyForWikitext(rawUrl) { var norm = normalizeExternalUrl(rawUrl); if (!norm) return ''; try { var uObj = new URL(norm); var host = uObj.hostname.toLowerCase().replace(new RegExp('^www\\.'), ''); var path = decodeURIComponent(uObj.pathname).replace(new RegExp('/+$'), ''); return host + path + uObj.search + uObj.hash; } catch (e) { return norm.toLowerCase().replace(new RegExp('^https?://(www\\.)?'), '').replace(new RegExp('/+$'), ''); } } function isIgnoredUrl(url, linkText) { if (!url || url.indexOf('http') !== 0) return true; var lText = (linkText || '').trim(); if ( lText === 'Archived' || lText === 'पुरालेखित' || lText === 'public domain material' || lText === 'सार्वजनिक डोमेन सामग्री' || url.indexOf('wikipedia.org') !== -1 || url.indexOf('wikimedia.org') !== -1 || url.indexOf('wikidata.org') !== -1 || url.indexOf('_(identifier)') !== -1 || url.indexOf('https://search.worldcat.org/') === 0 || url.indexOf('https://books.google.') === 0 || url.indexOf('http://books.google.') === 0 || url.indexOf('archive.org') !== -1 || url.indexOf('archive.today') !== -1 || url.indexOf('archive.is') !== -1 || url.indexOf('ghostarchive.org') !== -1 || url.indexOf('webcitation.org') !== -1 ) { return true; } return false; } function extractUniqueRefBlocksFromWikitext(wikitext) { var blocks = []; var namedRefMap = {}; if (!wikitext) return blocks; var cleanWt = wikitext.replace(new RegExp('<!--[\\s\\S]*?-->', 'g'), ''); var lowerWt = cleanWt.toLowerCase(); var pos = 0; while (true) { var openIdx = lowerWt.indexOf('<ref', pos); if (openIdx === -1) break; var afterRefChar = lowerWt.charAt(openIdx + 4); if (afterRefChar !== '>' && afterRefChar !== ' ' && afterRefChar !== '\t' && afterRefChar !== '\n' && afterRefChar !== '/') { pos = openIdx + 4; continue; } var tagCloseIdx = lowerWt.indexOf('>', openIdx); if (tagCloseIdx === -1) break; var openTagStr = cleanWt.substring(openIdx, tagCloseIdx + 1); if (openTagStr.charAt(openTagStr.length - 2) === '/') { pos = tagCloseIdx + 1; continue; } var closeRefIdx = lowerWt.indexOf('</ref>', tagCloseIdx); if (closeRefIdx === -1) break; var innerContent = cleanWt.substring(tagCloseIdx + 1, closeRefIdx).trim(); if (innerContent) { var nameMatch = openTagStr.match(new RegExp('name\\s*=\\s*(?:"([^"]+)"|\'([^\']+)\'|([^\\s/>]+))', 'i')); var refName = nameMatch ? (nameMatch[1] || nameMatch[2] || nameMatch[3] || '').trim().toLowerCase() : ''; if (refName) { if (!namedRefMap[refName]) { namedRefMap[refName] = true; blocks.push(innerContent); } } else { blocks.push(innerContent); } } pos = closeRefIdx + 6; } return blocks; } function extractUrlKeysFromRefBlock(refBlock) { var keys = []; if (!refBlock) return keys; var urlRegex = new RegExp('https?://[^\\s\\|\\]\\}<>"\']+', 'gi'); var matches = refBlock.match(urlRegex) || []; for (var i = 0; i < matches.length; i++) { var rawU = matches[i].replace(new RegExp('[.,;:)\\]]+$'), ''); var normU = normalizeExternalUrl(rawU); if (normU && !isIgnoredUrl(normU, '')) { var k = normalizeUrlKeyForWikitext(normU); if (k && keys.indexOf(k) === -1) { keys.push(k); } } } return keys; } function getCleanRefText(element) { var refTextNode = element.querySelector('.reference-text') || element; var clone = refTextNode.cloneNode(true); var hiddenNodes = clone.querySelectorAll('[style*="display:none"], [style*="display: none"], .mw-cite-backlink'); for (var i = 0; i < hiddenNodes.length; i++) { hiddenNodes[i].remove(); } return (clone.textContent || '').replace(new RegExp('\\s+', 'g'), ' ').trim(); } function getQuoteParamText(refItem) { var qElements = refItem.querySelectorAll('q'); if (qElements.length === 0) return ''; var arr = []; for (var i = 0; i < qElements.length; i++) { arr.push(qElements[i].textContent.trim().toLowerCase()); } return arr.join('||'); } function calculateLevenshteinDistance(a, b) { if (a.length === 0) return b.length; if (b.length === 0) return a.length; var strA = a.substring(0, 1000); var strB = b.substring(0, 1000); var matrix = []; for (var i = 0; i <= strB.length; i++) { matrix[i] = [i]; } for (var j = 0; j <= strA.length; j++) { matrix[0][j] = j; } for (var r = 1; r <= strB.length; r++) { for (var c = 1; c <= strA.length; c++) { if (strB.charAt(r - 1) === strA.charAt(c - 1)) { matrix[r][c] = matrix[r - 1][c - 1]; } else { matrix[r][c] = Math.min( matrix[r - 1][c - 1] + 1, Math.min(matrix[r][c - 1] + 1, matrix[r - 1][c] + 1) ); } } } return matrix[strB.length][strA.length]; } function calculateSimilarityNumber(textA, textB) { var maxLen = Math.max(textA.length, textB.length); if (maxLen === 0) return 100; var dist = calculateLevenshteinDistance(textA, textB); var cappedMax = Math.max(Math.min(textA.length, 1000), Math.min(textB.length, 1000)); return Math.max(0, Math.round(((cappedMax - dist) / cappedMax) * 100)); } function areIntentionallyDifferentCitations(url, refs) { var videoHosts = ['youtube.com', 'youtu.be', 'vimeo.com']; var isVideo = false; for (var v = 0; v < videoHosts.length; v++) { if (url.indexOf(videoHosts[v]) !== -1) { isVideo = true; break; } } if (isVideo) { var timePattern = new RegExp('\\b\\d{1,2}:\\d{2}(?:[–\\-]\\d{1,2}:\\d{2})?\\b', 'g'); var timeSets = refs.map(function (ref) { var matches = ref.text.match(timePattern); return matches ? matches.join('||') : ''; }); if (timeSets.every(function (t) { return t !== ''; })) { if (new Set(timeSets).size > 1) return true; } } var quoteParamTexts = refs.map(function (ref) { return getQuoteParamText(ref.element); }); if (quoteParamTexts.every(function (t) { return t !== ''; })) { if (new Set(quoteParamTexts).size > 1) return true; } var quoteRegex = new RegExp('\u201c([^\u201d]+)\u201d|"([^"]+)"|\'([^\']+)\'', 'g'); var quotedTitles = refs.map(function (ref) { var matches = []; var m; quoteRegex.lastIndex = 0; while ((m = quoteRegex.exec(ref.text)) !== null) { var found = (m[1] || m[2] || m[3] || '').trim().toLowerCase(); if (found) matches.push(found); } return matches.join('||'); }); if (quotedTitles.every(function (t) { return t !== ''; })) { if (new Set(quotedTitles).size > 1) return true; } var pagePattern = new RegExp('\\b(p|pp|पृ|पृष्ठ)\\.?\\s*[\\d,\\s–\\-]+', 'gi'); var pageRefs = refs.map(function (ref) { var matches = ref.text.match(pagePattern); return matches ? matches.map(function (s) { return s.trim().toLowerCase(); }).join('||') : ''; }); if (pageRefs.every(function (p) { return p !== ''; })) { if (new Set(pageRefs).size > 1) return true; } return false; } function isExcerptTransclusionNode(node) { if (!node || !node.getAttribute) return false; var typeofAttr = node.getAttribute('typeof') || ''; if (typeofAttr.indexOf('mw:Transclusion') === -1) return false; var dataMw = node.getAttribute('data-mw'); if (!dataMw) return false; try { var parsed = JSON.parse(dataMw); var parts = parsed.parts || []; for (var i = 0; i < parts.length; i++) { var part = parts[i]; var target = part && part.template && part.template.target; if (!target) continue; var href = (target.href || '').toLowerCase(); var wt = (target.wt || '').toLowerCase(); if (href.indexOf('excerpt') !== -1 || wt.indexOf('excerpt') !== -1) { return true; } } } catch (e) { return false; } return false; } function isRefFromExcerptInDoc(refItem, rootDoc) { var backlinks = refItem.querySelectorAll('.mw-cite-backlink a[href^="#"]'); for (var i = 0; i < backlinks.length; i++) { var fragmentId = backlinks[i].getAttribute('href').slice(1); var sourceElement = rootDoc.getElementById ? rootDoc.getElementById(fragmentId) : rootDoc.querySelector('[id="' + fragmentId + '"]'); var node = sourceElement; 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var refText = getCleanRefText(item); var fromExcerpt = isRefFromExcerptInDoc(item, rootDoc); var links = item.querySelectorAll('a'); var validLink = null; for (var k = 0; k < links.length; k++) { var link = links[k]; if (link.closest('.mw-cite-backlink')) continue; var rawHref = link.getAttribute('href') || ''; var normUrl = normalizeExternalUrl(rawHref); if (!normUrl) continue; var linkText = link.textContent.trim(); if (!isIgnoredUrl(normUrl, linkText)) { validLink = normUrl; break; } } if (validLink) { var refObj = { id: refId, number: refNumber, text: refText, element: item, fromExcerpt: fromExcerpt }; if (urlMap.has(validLink)) { urlMap.get(validLink).push(refObj); } else { urlMap.set(validLink, [refObj]); } } } urlMap.forEach(function (refs, url) { if (refs.length > 1 && !seenDuplicateUrls.has(url)) { if (refs.some(function (r) { return r.fromExcerpt; })) return; if (areIntentionallyDifferentCitations(url, refs)) return; var orig = refs[0]; var maxPairSim = 0; for (var i = 1; i < refs.length; 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if (existingTplRegex.test(content)) { throw new Error('इस पृष्ठ पर पहले से ही द्विरुक्त सन्दर्भ साँचा उपस्थित है।'); } var reason = 'DuplicateReferences उपकरण द्वारा चिह्नित:\n'; for (var i = 0; i < duplicateInfo.length; i++) { var info = duplicateInfo[i]; var nums = info.refs.map(function (r) { return r.number; }).join(', '); reason += '* ' + info.url + ' (सन्दर्भ क्रमांक: ' + nums + ')\n'; } var templateToInsert = '{{Duplicated citations|reason=' + reason + dateParam + '}}\n'; var headingAlternation = REF_HEADINGS_LIST.join('|'); var referencesHeaderRegex = new RegExp('(==+\\s*(?:' + headingAlternation + ')\\s*==+[ \\t]*)', 'i'); var newContent; if (referencesHeaderRegex.test(content)) { newContent = content.replace(referencesHeaderRegex, '$1\n' + templateToInsert); } else { throw new Error('विकिटेक्स्ट में "== सन्दर्भ ==" अनुभाग शीर्षक प्राप्त नहीं हुआ।'); } var summary = 'रखरखाव साँचा: [[:en:WP:DUPREF|द्विरुक्त सन्दर्भ]] चिह्नित किए गए ([[सदस्य:विक्रम प्रताप/DuplicateReferences.js|DuplicateReferences]])'; await api.postWithToken('csrf', { action: 'edit', title: page.title, text: newContent, summary: summary }); } // ========================================================================= // भाग 1: विशेष पृष्ठ इंटरफ़ेस (Special:BlankPage/DupRef - Administrative UI) // ========================================================================= function initDupRefSpecialPage() { var isStopRequested = false; var foundResultsStore = {}; // pageTitle -> { duplicateInfo, alreadyTagged, isGAFA } var globalSeenPages = new Set(); var loaderPagination = { queryKey: '', continueData: null, hasMore: false, batchCount: 0, totalLoaded: 0 }; var myContribsPagination = { ns: '', continueData: null, hasMore: true, batchCount: 0 }; document.title = 'द्विरुक्त सन्दर्भ परीक्षक - विकिपीडिया'; jQuery('#firstHeading').text('द्विरुक्त सन्दर्भ परीक्षक'); var html = '<div style="background:#fff; border:1px solid #a2a9b1; padding:20px; border-radius:4px; max-width:1020px; font-family:sans-serif;">' + '<p style="margin-top:0; color:#202122; line-height:1.5;">यह प्रशासनिक उपकरण किसी भी <strong>नामस्थान</strong> अथवा <strong>श्रेणी</strong> से पृष्ठों को क्रमिक बैच में चयनित करता है तथा <strong>द्वि-स्तरीय समानांतर निस्यंदन (6x Parallel Filter)</strong> के माध्यम से द्विरुक्त सन्दर्भों (Duplicate References) वाले लेखों को <strong>बॉक्स 2A</strong> में रखकर स्वच्छ लेखों को <strong>बॉक्स 2B</strong> में पृथक कर देता है।</p>' + // === प्रथम चरण: नामस्थान एवं स्रोत से क्रमिक पृष्ठ चयन === '<div style="background:#f8f9fa; border:1px solid #c8ccd1; padding:14px; border-radius:4px; margin-bottom:16px;">' + '<div style="display:flex; justify-content:space-between; align-items:center; flex-wrap:wrap; border-bottom:1px solid #eaecf0; padding-bottom:6px; margin-bottom:10px;">' + '<span style="font-weight:bold; font-size:14px; color:#202122;">प्रथम चरण: नामस्थान अथवा स्रोत से पृष्ठों का क्रमिक चयन</span>' + '<button id="dupref-reset-pagination" type="button" class="mw-ui-button" style="padding:2px 8px; font-size:11px; cursor:pointer; display:none;" title="पृष्ठ चयन का क्रम प्रारंभ से रीसेट करें">चयन क्रम प्रारंभ से रीसेट करें</button>' + '</div>' + '<div style="display:flex; gap:10px; flex-wrap:wrap; align-items:flex-end;">' + '<div style="width:165px;">' + '<label style="display:block; font-size:12px; font-weight:bold; color:#54595d; margin-bottom:4px;">1. नामस्थान:</label>' + '<select id="dupref-ns" style="width:100%; padding:6px; border:1px solid #a2a9b1; border-radius:3px; background:#fff;">' + '<option value="0" selected>मुख्य (लेख - 0)</option>' + '<option value="2">सदस्य (User - 2)</option>' + '<option value="4">विकिपीडिया (Project - 4)</option>' + '<option value="100">प्रवेशद्वार (Portal - 100)</option>' + '</select>' + '</div>' + '<div style="flex:1; min-width:185px;">' + '<label style="display:block; font-size:12px; font-weight:bold; color:#54595d; margin-bottom:4px;">2. पृष्ठ चयन का माध्यम:</label>' + '<select id="dupref-source-type" style="width:100%; padding:6px; border:1px solid #a2a9b1; border-radius:3px; background:#fff;">' + '<option value="allpages">नामस्थान के पृष्ठ (वर्णक्रमानुसार क्रमिक चयन)</option>' + '<option value="random">नामस्थान के यादृच्छिक (रैंडम) पृष्ठ</option>' + '<option value="cat">निर्दिष्ट श्रेणी के अंतर्गत पृष्ठ (क्रमिक)</option>' + '<option value="transclude">निर्दिष्ट साँचा प्रयुक्त पृष्ठ (क्रमिक)</option>' + '<option value="backlinks">निर्दिष्ट पृष्ठ से संबद्ध कड़ियाँ (क्रमिक)</option>' + '<option value="user">सदस्य द्वारा निर्मित पृष्ठ (क्रमिक)</option>' + '</select>' + '</div>' + '<div id="dupref-input-wrap" style="flex:1.2; min-width:180px;">' + '<label id="dupref-input-label" style="display:block; font-size:12px; font-weight:bold; color:#54595d; margin-bottom:4px;">3. प्रारंभिक अक्षर (वैकल्पिक):</label>' + '<input type="text" id="dupref-source-input" placeholder="उदाहरण: अ, भा, अथवा रिक्त छोड़ें..." style="width:100%; padding:6px 8px; border:1px solid #a2a9b1; border-radius:3px; box-sizing:border-box;" />' + '</div>' + '<div style="width:95px;">' + '<label style="display:block; font-size:12px; font-weight:bold; color:#54595d; margin-bottom:4px;">4. बैच संख्या:</label>' + '<select id="dupref-limit" style="width:100%; padding:6px; border:1px solid #a2a9b1; border-radius:3px; background:#fff;">' + '<option value="25">25 पृष्ठ</option>' + '<option value="50" selected>50 पृष्ठ</option>' + '<option value="100">100 पृष्ठ</option>' + '<option value="250">250 पृष्ठ</option>' + '<option value="500">500 पृष्ठ</option>' + '</select>' + '</div>' + '<div>' + '<button id="dupref-fetch-btn" type="button" class="mw-ui-button mw-ui-progressive" style="padding:6px 14px; cursor:pointer; font-weight:bold;">सूची (2A) में जोड़ें</button>' + '</div>' + '</div>' + '<div id="dupref-source-hint" style="font-size:12px; color:#3366cc; margin-top:8px;">' + '<b>प्रक्रिया निर्देश:</b> प्रथम बार क्लिक करने पर प्रारंभिक पृष्ठ लोड होंगे, तथा पुनः क्लिक करने पर <b>उससे आगे के नए पृष्ठ</b> क्रमानुसार लोड होंगे।' + '</div>' + '<div id="dupref-pagination-status" style="font-size:12px; color:#14866d; font-weight:bold; margin-top:4px; display:none;"></div>' + '</div>' + // === द्वितीय चरण: दो-बॉक्स कार्यक्षेत्र एवं द्विरुक्त सन्दर्भ निस्यंदन === '<div style="margin-bottom:16px; border:1px solid #c8ccd1; padding:14px; border-radius:4px; background:#fcfcfc;">' + '<div style="display:flex; justify-content:space-between; align-items:center; flex-wrap:wrap; gap:10px; margin-bottom:10px; padding-bottom:10px; border-bottom:1px solid #eaecf0;">' + '<div style="font-weight:bold; font-size:14px; color:#202122;">द्वितीय चरण: द्विरुक्त सन्दर्भ निस्यंदन (छन्नी) एवं कार्यक्षेत्र</div>' + '<div style="display:flex; gap:8px; align-items:center; flex-wrap:wrap;">' + '<select id="dupref-filter-type" style="padding:5px 8px; border:1px solid #3366cc; border-radius:3px; background:#fff; font-size:12px; font-weight:bold; color:#202122;">' + '<option value="exact_parallel" selected>पूर्ण सटीक निस्यंदन (बैच + 6x समानांतर परीक्षण): केवल वास्तविक द्विरुक्त सन्दर्भ युक्त लेख शेष रखें</option>' + '<option value="wikitext_fast">त्वरित विकिटेक्स्ट निस्यंदन: केवल विकिटेक्स्ट में समान URL दिखने वाले लेख शेष रखें</option>' + '</select>' + '<button id="dupref-prefilter-btn" type="button" class="mw-ui-button" style="background:#eaf3ff; border-color:#3366cc; color:#3366cc; font-weight:bold; padding:5px 14px; cursor:pointer;" title="द्विरुक्त सन्दर्भ वाले लेखों को बॉक्स 2A में रखें तथा स्वच्छ लेखों को बॉक्स 2B में पृथक करें">' + 'द्विरुक्त सन्दर्भ छन्नी चलाएँ' + '</button>' + '</div>' + '</div>' + // सहायक बटन टूलबार '<div style="margin-bottom:10px; display:flex; gap:6px; flex-wrap:wrap; align-items:center;">' + '<button id="dupref-quick-random" type="button" class="mw-ui-button" style="padding:4px 10px; cursor:pointer; font-size:12px;" title="चयनित नामस्थान से 50 नए यादृच्छिक पृष्ठ सीधे बॉक्स 2A में जोड़ें">50 यादृच्छिक लेख जोड़ें</button>' + '<button id="dupref-load-my-next" type="button" class="mw-ui-button" style="padding:4px 10px; cursor:pointer; font-size:12px;" title="आपके द्वारा निर्मित लेख क्रमानुसार बॉक्स 2A में जोड़ें">मेरे द्वारा निर्मित लेख जोड़ें</button>' + '<button id="dupref-clean" type="button" class="mw-ui-button" style="padding:4px 10px; cursor:pointer; font-size:12px;" title="बॉक्स 2A से क्रम संख्या, भाषा उपसर्ग तथा अनावश्यक चिह्न हटाएँ">सूची स्वच्छ करें</button>' + '<span style="font-size:11px; color:#54595d; margin-left:6px;">(वर्तमान सत्र में पठित कुल पृष्ठ: <b id="dupref-seen-count">0</b>)</span>' + '<button id="dupref-clear" type="button" class="mw-ui-button" style="padding:4px 10px; cursor:pointer; font-size:12px; margin-left:auto;">बॉक्स 2A एवं 2B रिक्त करें</button>' + '</div>' + // === दो बॉक्स ग्रिड (2A और 2B) === '<div style="display:flex; gap:14px; flex-wrap:wrap;">' + // बॉक्स 2A: मुख्य कतार '<div style="flex:1.2; min-width:320px;">' + '<div style="display:flex; justify-content:space-between; font-size:12px; font-weight:bold; margin-bottom:4px; color:#14866d;">' + '<span>बॉक्स 2A: मुख्य कार्य-सूची (द्विरुक्त सन्दर्भ युक्त पृष्ठ)</span>' + '<span>पृष्ठ संख्या: <b id="dupref-line-count">0</b></span>' + '</div>' + '<textarea id="dupref-input" rows="10" style="width:100%; font-family:monospace; font-size:13px; padding:8px; box-sizing:border-box; border:2px solid #14866d; border-radius:3px;" placeholder="यहाँ पृष्ठों के नाम दर्ज करें अथवा प्रथम चरण से लोड करें...\nछन्नी चलने के उपरांत केवल द्विरुक्त सन्दर्भ वाले पृष्ठ ही यहाँ शेष रहेंगे।"></textarea>' + '</div>' + // बॉक्स 2B: निस्यंदित / स्वच्छ पृष्ठ '<div style="flex:1; min-width:300px;">' + '<div style="display:flex; justify-content:space-between; font-size:12px; font-weight:bold; margin-bottom:4px; color:#ac6600;">' + '<span>बॉक्स 2B: निस्यंदित / स्वच्छ पृष्ठ (द्विरुक्त रहित)</span>' + '<span>पृष्ठ संख्या: <b id="dupref-rejected-count">0</b></span>' + '</div>' + '<textarea id="dupref-rejected" rows="8" readonly style="width:100%; font-family:monospace; font-size:12px; padding:8px; box-sizing:border-box; border:1px solid #c8ccd1; background:#f8f9fa; color:#54595d; border-radius:3px;" placeholder="जिन पृष्ठों में कोई द्विरुक्त सन्दर्भ नहीं है अथवा जो पूर्व से चिह्नित हैं, वे कारण सहित यहाँ सूचीबद्ध होंगे..."></textarea>' + '<div style="margin-top:6px; display:flex; gap:6px;">' + '<button id="dupref-restore-rejected" type="button" class="mw-ui-button" style="padding:3px 10px; font-size:11px; cursor:pointer;" title="बॉक्स 2B के सभी पृष्ठों को कारण हटाकर पुनः बॉक्स 2A में भेजें">पुनः मुख्य सूची (2A) में भेजें</button>' + '<button id="dupref-clear-rejected" type="button" class="mw-ui-button" style="padding:3px 10px; font-size:11px; cursor:pointer; margin-left:auto;">केवल बॉक्स 2B रिक्त करें</button>' + '</div>' + '</div>' + '</div>' + '</div>' + // === तृतीय चरण: संचालन प्रणाली एवं तार्किक मापदंड === '<div style="background:#eaecf0; padding:12px 14px; border-radius:4px; margin-bottom:14px;">' + '<div style="font-weight:bold; font-size:13px; margin-bottom:8px; color:#202122;">तृतीय चरण: संचालन प्रणाली एवं तार्किक मापदंड</div>' + '<div style="display:flex; align-items:center; gap:16px; flex-wrap:wrap; font-size:13px; margin-bottom:8px;">' + '<label style="font-weight:bold;">संचालन मोड: ' + '<select id="dupref-mode" style="padding:4px 8px; border:1px solid #a2a9b1; border-radius:3px; background:#fff; margin-left:4px;">' + '<option value="scan" selected>केवल परीक्षण एवं प्रतिवेदन (समीक्षा उपरांत साँचा जोड़ें)</option>' + '<option value="autotag">स्वचालित टैगिंग (बॉक्स 2A के द्विरुक्त सन्दर्भ युक्त लेखों में स्वतः साँचा जोड़ें)</option>' + '</select>' + '</label>' + '<label style="font-weight:bold;">संपादन समयांतराल (Delay): ' + '<input type="number" id="dupref-delay" value="4" min="1" max="120" style="width:52px; padding:3px; margin:0 4px; text-align:center; border:1px solid #a2a9b1; border-radius:3px;" /> सेकंड' + '</label>' + '<label style="font-weight:bold;" title="सन्दर्भ पाठ में न्यूनतम कितनी समानता होने पर द्विरुक्त माना जाए">' + 'न्यूनतम पाठ समानता: ' + '<select id="dupref-min-sim" style="padding:4px; border:1px solid #a2a9b1; border-radius:3px; background:#fff;">' + '<option value="0" selected>0 प्रतिशत (कोई भी समान विशिष्ट URL)</option>' + '<option value="50">50 प्रतिशत अथवा अधिक समान पाठ</option>' + '<option value="75">75 प्रतिशत अथवा अधिक समान पाठ</option>' + '<option value="90">90 प्रतिशत अथवा अधिक समान पाठ</option>' + '</select>' + '</label>' + '</div>' + '<div style="display:flex; align-items:center; gap:18px; flex-wrap:wrap; font-size:13px;">' + '<label style="cursor:pointer;">' + '<input type="checkbox" id="dupref-skip-tagged" checked /> पूर्व से टैग किए गए तथा निर्वाचित/अच्छे लेखों को छोड़ दें (बॉक्स 2B में भेजें)' + '</label>' + '<label style="cursor:pointer;" title="जिन लेखों में द्विरुक्त सन्दर्भ मिलेंगे वे बॉक्स 2A में बने रहेंगे, तथा स्वच्छ लेख स्वतः बॉक्स 2B में स्थानांतरित हो जाएँगे">' + '<input type="checkbox" id="dupref-keep-only-dups" checked /> बॉक्स 2A में केवल द्विरुक्त सन्दर्भ युक्त लेख ही रखें (स्वच्छ लेख 2B में भेजें)' + '</label>' + '</div>' + '</div>' + // === मुख्य क्रिया बटन === '<div style="display:flex; gap:10px; align-items:center; flex-wrap:wrap;">' + '<button id="dupref-start" type="button" class="mw-ui-button mw-ui-progressive" style="padding:8px 20px; cursor:pointer; font-weight:bold; font-size:14px;">परीक्षण / टैगिंग प्रारंभ करें</button>' + '<button id="dupref-stop" type="button" class="mw-ui-button mw-ui-destructive" style="padding:8px 20px; cursor:pointer; font-weight:bold; font-size:14px; display:none;">प्रक्रिया रोकें</button>' + '<button id="dupref-tag-all-found" type="button" class="mw-ui-button" style="padding:8px 16px; cursor:pointer; font-weight:bold; background:#fef6e7; border-color:#ac6600; color:#ac6600; display:none;">सभी चिह्नित पृष्ठों में क्रमशः साँचा जोड़ें</button>' + '<button id="dupref-copy-wikitext" type="button" class="mw-ui-button" style="padding:8px 14px; cursor:pointer; font-size:12px; margin-left:auto; display:none;">विकिटेक्स्ट प्रतिवेदन कॉपी करें</button>' + '</div>' + // === प्रगति पट्टी और आँकड़े === '<div id="dupref-stats" style="margin-top:16px; display:none; padding:10px 14px; background:#f8f9fa; border:1px solid #c8ccd1; border-radius:4px; font-size:13px;">' + '<div style="display:flex; justify-content:space-between; margin-bottom:6px; flex-wrap:wrap; gap:6px;">' + '<span><strong>प्रगति विवरण:</strong> कुल पृष्ठ: <b id="dstat-total">0</b> | परीक्षित: <b id="dstat-done">0</b> | <span style="color:#d33;">द्विरुक्त मिले (2A में): <b id="dstat-found">0</b></span> | <span style="color:#14866d;">साँचा जोड़ा गया: <b id="dstat-tagged">0</b></span> | <span style="color:#72777d;">स्वच्छ/निस्यंदित (2B में): <b id="dstat-clean">0</b></span></span>' + '<strong id="dstat-percent" style="color:#3366cc;">0%</strong>' + '</div>' + '<div style="width:100%; background:#eaecf0; height:8px; border-radius:4px; overflow:hidden;">' + '<div id="dstat-bar" style="width:0%; background:#3366cc; height:100%; transition:width 0.2s;"></div>' + '</div>' + '</div>' + // === परिणाम तालिका === '<div id="dupref-results-wrap" style="margin-top:16px; display:none;">' + '<div style="font-weight:bold; font-size:14px; margin-bottom:8px; color:#202122;">चिह्नित द्विरुक्त सन्दर्भों का विस्तृत विवरण:</div>' + '<table class="wikitable" style="width:100%; margin:0; font-size:13px;">' + '<thead>' + '<tr style="background:#eaecf0;">' + '<th style="width:22%;">पृष्ठ शीर्षक</th>' + '<th style="width:58%;">द्विरुक्त URL एवं सन्दर्भ क्रमांक (पाठ समानता प्रतिशत)</th>' + '<th style="width:20%; text-align:center;">कार्यवाही / स्थिति</th>' + '</tr>' + '</thead>' + '<tbody id="dupref-results-tbody"></tbody>' + '</table>' + '</div>' + // === लॉग बॉक्स === '<div style="margin-top:14px;">' + '<div style="font-weight:bold; font-size:12px; color:#54595d; margin-bottom:4px;">प्रणाली लॉग:</div>' + '<div id="dupref-log" style="background:#fff; border:1px solid #c8ccd1; padding:10px; max-height:260px; overflow-y:auto; font-family:monospace; font-size:12px; line-height:1.5; border-radius:3px;">' + '<em style="color:#72777d;">कार्यवाही का विवरण यहाँ प्रदर्शित होगा...</em>' + '</div>' + '</div>' + '</div>'; jQuery('#mw-content-text').html(html); function updateAllCounts() { var valA = jQuery('#dupref-input').val() || ''; var countA = valA.split('\n').map(function (s) { return s.trim(); }).filter(Boolean).length; jQuery('#dupref-line-count').text(countA); var valB = jQuery('#dupref-rejected').val() || ''; var countB = valB.split('\n').map(function (s) { return s.trim(); }).filter(Boolean).length; jQuery('#dupref-rejected-count').text(countB); jQuery('#dupref-seen-count').text(globalSeenPages.size); } jQuery('#dupref-input').on('input', updateAllCounts); updateAllCounts(); function appendNewTitlesToBox2A(newTitles, skipSeenCheck) { var currentVal = jQuery('#dupref-input').val() || ''; var existingList = currentVal.split('\n').map(function (s) { return s.trim(); }).filter(Boolean); var existingSet = new Set(existingList); var addedCount = 0; for (var i = 0; i < newTitles.length; i++) { var t = newTitles[i].trim(); if (!t) continue; if (!skipSeenCheck && globalSeenPages.has(t)) continue; if (!existingSet.has(t)) { existingList.push(t); existingSet.add(t); globalSeenPages.add(t); addedCount++; } } jQuery('#dupref-input').val(existingList.join('\n')); updateAllCounts(); return addedCount; } function removeTitleFromBox2A(inputTitle, resolvedTitle) { var currentLines = (jQuery('#dupref-input').val() || '').split('\n'); var filtered = currentLines.filter(function (line) { var cl = line.split('[[').join('').split(']]').join('').trim(); return cl && cl !== inputTitle && cl !== resolvedTitle; }); jQuery('#dupref-input').val(filtered.join('\n')); updateAllCounts(); } function moveToRejectedBox2B(pageTitle, reason) { globalSeenPages.add(pageTitle); var currRej = (jQuery('#dupref-rejected').val() || '').split('\n').filter(Boolean); currRej.push(pageTitle + ' [' + reason + ']'); jQuery('#dupref-rejected').val(currRej.join('\n')); updateAllCounts(); } function resetLoaderPaginationState() { loaderPagination.queryKey = ''; loaderPagination.continueData = null; loaderPagination.hasMore = false; loaderPagination.batchCount = 0; loaderPagination.totalLoaded = 0; myContribsPagination.continueData = null; myContribsPagination.hasMore = true; myContribsPagination.batchCount = 0; jQuery('#dupref-fetch-btn').text('सूची (2A) में जोड़ें'); jQuery('#dupref-load-my-next').text('मेरे द्वारा निर्मित लेख जोड़ें'); jQuery('#dupref-pagination-status').hide().text(''); jQuery('#dupref-reset-pagination').hide(); } jQuery('#dupref-reset-pagination').on('click', function () { resetLoaderPaginationState(); globalSeenPages.clear(); updateAllCounts(); mw.notify('चयन क्रम एवं सत्र इतिहास प्रारंभ से रीसेट कर दिया गया है।', { type: 'success' }); }); jQuery('#dupref-ns, #dupref-source-type, #dupref-source-input').on('change input', function () { var sourceType = jQuery('#dupref-source-type').val(); var nsVal = jQuery('#dupref-ns').val(); var inputVal = (jQuery('#dupref-source-input').val() || '').trim().toLowerCase(); var newKey = sourceType + '::' + nsVal + '::' + inputVal; if (loaderPagination.queryKey && loaderPagination.queryKey !== newKey) { loaderPagination.queryKey = ''; loaderPagination.continueData = null; loaderPagination.hasMore = false; loaderPagination.batchCount = 0; loaderPagination.totalLoaded = 0; jQuery('#dupref-fetch-btn').text('सूची (2A) में जोड़ें'); jQuery('#dupref-pagination-status').hide(); } }); jQuery('#dupref-restore-rejected').on('click', function () { var rejVal = jQuery('#dupref-rejected').val() || ''; var rejLines = rejVal.split('\n').map(function (s) { return s.replace(new RegExp('\\s*\\[[^\\]]*\\]$'), '').trim(); }).filter(Boolean); if (rejLines.length === 0) { mw.notify('बॉक्स 2B रिक्त है।', { type: 'warn' }); return; } var restored = appendNewTitlesToBox2A(rejLines, true); jQuery('#dupref-rejected').val(''); updateAllCounts(); mw.notify(restored + ' पृष्ठ पुनः मुख्य कार्य-सूची (बॉक्स 2A) में स्थानांतरित किए गए।', { type: 'success' }); }); jQuery('#dupref-clear-rejected').on('click', function () { jQuery('#dupref-rejected').val(''); updateAllCounts(); }); jQuery('#dupref-source-type').on('change', function () { var type = jQuery(this).val(); var labelEl = jQuery('#dupref-input-label'); var inputBox = jQuery('#dupref-source-input'); var inputWrap = jQuery('#dupref-input-wrap'); var hintBox = jQuery('#dupref-source-hint'); if (type === 'allpages') { inputWrap.show(); labelEl.text('3. प्रारंभिक अक्षर (वैकल्पिक):'); inputBox.val('').attr('placeholder', 'उदाहरण: अ, भा, अथवा रिक्त छोड़ें...'); hintBox.html('<b>प्रक्रिया निर्देश:</b> चयनित नामस्थान से पृष्ठ वर्णक्रमानुसार लोड होंगे। पुनः क्लिक करने पर उससे आगे के पृष्ठ जुड़ेंगे।'); } else if (type === 'random') { inputWrap.hide(); hintBox.html('<b>प्रक्रिया निर्देश:</b> प्रत्येक क्लिक पर चयनित नामस्थान से नए यादृच्छिक पृष्ठ बॉक्स 2A में जोड़े जाएँगे।'); } else if (type === 'cat') { inputWrap.show(); labelEl.text('3. श्रेणी का नाम दर्ज करें:'); inputBox.val('').attr('placeholder', 'उदाहरण: भारत के राज्य'); hintBox.html('<b>प्रक्रिया निर्देश:</b> निर्दिष्ट श्रेणी के पृष्ठ क्रमानुसार लोड होंगे। पुनः क्लिक करने पर श्रेणी के आगे के पृष्ठ जुड़ेंगे।'); } else if (type === 'transclude') { inputWrap.show(); labelEl.text('3. साँचे का नाम दर्ज करें:'); inputBox.val('').attr('placeholder', 'उदाहरण: Cite web'); hintBox.html('<b>प्रक्रिया निर्देश:</b> जिन पृष्ठों पर यह साँचा प्रयुक्त है, वे क्रमिक बैच में लोड होंगे।'); } else if (type === 'backlinks') { inputWrap.show(); labelEl.text('3. पृष्ठ का नाम दर्ज करें:'); inputBox.val('').attr('placeholder', 'उदाहरण: भारत'); hintBox.html('<b>प्रक्रिया निर्देश:</b> जिन पृष्ठों में इस लेख की कड़ी संबद्ध है, वे क्रमिक बैच में लोड होंगे।'); } else if (type === 'user') { inputWrap.show(); labelEl.text('3. सदस्य का नाम दर्ज करें:'); inputBox.val(mw.config.get('wgUserName') || '').attr('placeholder', 'सदस्य नाम'); hintBox.html('<b>प्रक्रिया निर्देश:</b> निर्दिष्ट सदस्य द्वारा निर्मित पृष्ठ क्रमानुसार लोड होंगे।'); } }); // === प्रथम चरण: क्रमिक पृष्ठ चयन === jQuery('#dupref-fetch-btn').on('click', async function () { var sourceType = jQuery('#dupref-source-type').val(); var nsVal = jQuery('#dupref-ns').val(); var inputVal = (jQuery('#dupref-source-input').val() || '').trim(); var limitVal = parseInt(jQuery('#dupref-limit').val(), 10) || 50; if (sourceType !== 'allpages' && sourceType !== 'random' && !inputVal) { mw.notify('कृपया इनपुट बॉक्स 3 में वांछित नाम दर्ज करें।', { type: 'warn' }); jQuery('#dupref-source-input').focus(); return; } inputVal = inputVal.split('[[').join('').split(']]').join('').trim(); var currentKey = sourceType + '::' + nsVal + '::' + inputVal.toLowerCase(); if (sourceType !== 'random' && loaderPagination.queryKey !== currentKey) { loaderPagination.queryKey = currentKey; loaderPagination.continueData = null; loaderPagination.hasMore = false; loaderPagination.batchCount = 0; loaderPagination.totalLoaded = 0; } var btn = jQuery(this); btn.prop('disabled', true).text('लोड किया जा रहा है...'); try { var api = new mw.Api(); var fetchedTitles = []; var responseData = null; if (sourceType === 'allpages') { var apParams = { action: 'query', list: 'allpages', apnamespace: nsVal, apfilterredir: 'nonredirects', aplimit: limitVal }; if (inputVal && !loaderPagination.continueData) { apParams.apprefix = inputVal; } if (loaderPagination.continueData) { jQuery.extend(apParams, loaderPagination.continueData); } responseData = await api.get(apParams); var apList = (responseData.query && responseData.query.allpages) ? responseData.query.allpages : []; for (var i = 0; i < apList.length; i++) fetchedTitles.push(apList[i].title); } else if (sourceType === 'random') { var rnData = await api.get({ action: 'query', list: 'random', rnnamespace: nsVal, rnfilterredir: 'nonredirects', rnlimit: limitVal }); responseData = rnData; var rnList = (rnData.query && rnData.query.random) ? rnData.query.random : []; for (var r = 0; r < rnList.length; r++) fetchedTitles.push(rnList[r].title); } else if (sourceType === 'cat') { var catTitle = inputVal; if (catTitle.indexOf('श्रेणी:') !== 0 && catTitle.toLowerCase().indexOf('category:') !== 0) { catTitle = 'श्रेणी:' + catTitle; } var catParams = { action: 'query', list: 'categorymembers', cmtitle: catTitle, cmnamespace: nsVal, cmlimit: limitVal }; if (loaderPagination.continueData) { jQuery.extend(catParams, loaderPagination.continueData); } responseData = await api.get(catParams); var cmList = (responseData.query && responseData.query.categorymembers) ? responseData.query.categorymembers : []; for (var c = 0; c < cmList.length; c++) fetchedTitles.push(cmList[c].title); } else if (sourceType === 'transclude') { var tplTitle = inputVal.indexOf(':') === -1 ? ('साँचा:' + inputVal) : inputVal; var eiParams = { action: 'query', list: 'embeddedin', eititle: tplTitle, einamespace: nsVal, eilimit: limitVal }; if (loaderPagination.continueData) { jQuery.extend(eiParams, loaderPagination.continueData); } responseData = await api.get(eiParams); var eiList = (responseData.query && responseData.query.embeddedin) ? responseData.query.embeddedin : []; for (var e = 0; e < eiList.length; e++) fetchedTitles.push(eiList[e].title); } else if (sourceType === 'backlinks') { var blParams = { action: 'query', list: 'backlinks', bltitle: inputVal, blnamespace: nsVal, bllimit: limitVal }; if (loaderPagination.continueData) { jQuery.extend(blParams, loaderPagination.continueData); } responseData = await api.get(blParams); var blList = (responseData.query && responseData.query.backlinks) ? responseData.query.backlinks : []; for (var b = 0; b < blList.length; b++) fetchedTitles.push(blList[b].title); } else if (sourceType === 'user') { var ucParams = { action: 'query', list: 'usercontribs', ucuser: inputVal, ucnamespace: nsVal, ucshow: 'new', uclimit: limitVal }; if (loaderPagination.continueData) { jQuery.extend(ucParams, loaderPagination.continueData); } responseData = await api.get(ucParams); var ucList = (responseData.query && responseData.query.usercontribs) ? responseData.query.usercontribs : []; for (var u = 0; u < ucList.length; u++) fetchedTitles.push(ucList[u].title); } if (sourceType !== 'random' && responseData && responseData.continue) { loaderPagination.continueData = responseData.continue; loaderPagination.hasMore = true; } else { loaderPagination.continueData = null; loaderPagination.hasMore = false; } if (fetchedTitles.length > 0) { loaderPagination.batchCount++; var added = appendNewTitlesToBox2A(fetchedTitles, false); loaderPagination.totalLoaded += added; jQuery('#dupref-reset-pagination').show(); var statusEl = jQuery('#dupref-pagination-status').show(); if (sourceType === 'random') { btn.prop('disabled', false).text('अगले यादृच्छिक पृष्ठ जोड़ें'); statusEl.text('बैच संख्या ' + loaderPagination.batchCount + ' पूर्ण: ' + added + ' नए यादृच्छिक पृष्ठ जोड़े गए।'); } else if (loaderPagination.hasMore) { btn.prop('disabled', false).text('अगले नए पृष्ठ जोड़ें (बैच संख्या ' + (loaderPagination.batchCount + 1) + ')'); statusEl.text('बैच संख्या ' + loaderPagination.batchCount + ' लोड हुआ (' + added + ' नए पृष्ठ जुड़े, कुल: ' + loaderPagination.totalLoaded + ')। आगे के पृष्ठ उपलब्ध हैं।'); } else { btn.prop('disabled', false).text('सभी पृष्ठ लोड हो चुके हैं'); statusEl.text('बैच संख्या ' + loaderPagination.batchCount + ' के साथ इस स्रोत के सभी उपलब्ध पृष्ठ पूर्ण हुए (कुल लोड: ' + loaderPagination.totalLoaded + ')।'); } mw.notify('बैच संख्या ' + loaderPagination.batchCount + ': ' + added + ' नए पृष्ठ बॉक्स 2A में जोड़े गए।', { type: 'success' }); } else { btn.prop('disabled', false).text('सूची (2A) में जोड़ें'); mw.notify('इस खोज के अंतर्गत आगे कोई नया पृष्ठ उपलब्ध नहीं है।', { type: 'warn' }); } } catch (err) { console.error(err); btn.prop('disabled', false).text('सूची (2A) में जोड़ें'); mw.notify('पृष्ठ लोड करने में त्रुटि: ' + String(err), { type: 'error' }); } }); // === त्वरित बटन 1: 50 यादृच्छिक लेख जोड़ें === jQuery('#dupref-quick-random').on('click', async function () { var btn = jQuery(this); btn.prop('disabled', true).text('लोड किया जा रहा है...'); try { var api = new mw.Api(); var nsVal = jQuery('#dupref-ns').val(); var rnData = await api.get({ action: 'query', list: 'random', rnnamespace: nsVal, rnfilterredir: 'nonredirects', rnlimit: 50 }); var list = (rnData.query && rnData.query.random) ? rnData.query.random : []; var titles = list.map(function (item) { return item.title; }); var added = appendNewTitlesToBox2A(titles, false); jQuery('#dupref-reset-pagination').show(); mw.notify(added + ' नए यादृच्छिक पृष्ठ बॉक्स 2A में जोड़े गए।', { type: 'success' }); } catch (e) { mw.notify('यादृच्छिक पृष्ठ लोड करने में त्रुटि हुई।', { type: 'error' }); } btn.prop('disabled', false).text('50 यादृच्छिक लेख जोड़ें'); }); // === त्वरित बटन 2: मेरे द्वारा निर्मित लेख जोड़ें === jQuery('#dupref-load-my-next').on('click', async function () { var btn = jQuery(this); var nsVal = jQuery('#dupref-ns').val(); var limitVal = parseInt(jQuery('#dupref-limit').val(), 10) || 50; if (myContribsPagination.ns !== nsVal) { myContribsPagination.ns = nsVal; myContribsPagination.continueData = null; myContribsPagination.hasMore = true; myContribsPagination.batchCount = 0; } if (!myContribsPagination.hasMore && myContribsPagination.batchCount > 0) { mw.notify('आपके द्वारा निर्मित सभी पृष्ठ लोड किए जा चुके हैं। प्रारंभ से लाने हेतु "चयन क्रम प्रारंभ से रीसेट करें" पर क्लिक करें।', { type: 'warn' }); return; } btn.prop('disabled', true).text('लोड किया जा रहा है...'); try { var api = new mw.Api(); var ucParams = { action: 'query', list: 'usercontribs', ucuser: mw.config.get('wgUserName'), ucnamespace: nsVal, ucshow: 'new', uclimit: limitVal }; if (myContribsPagination.continueData) { jQuery.extend(ucParams, myContribsPagination.continueData); } var data = await api.get(ucParams); var list = (data.query && data.query.usercontribs) ? data.query.usercontribs : []; var titles = list.map(function (item) { return item.title; }); if (data.continue) { myContribsPagination.continueData = data.continue; myContribsPagination.hasMore = true; } else { myContribsPagination.continueData = null; myContribsPagination.hasMore = false; } if (titles.length > 0) { myContribsPagination.batchCount++; var added = appendNewTitlesToBox2A(titles, false); jQuery('#dupref-reset-pagination').show(); if (myContribsPagination.hasMore) { btn.prop('disabled', false).text('मेरे आगे के लेख जोड़ें (बैच संख्या ' + (myContribsPagination.batchCount + 1) + ')'); } else { btn.prop('disabled', false).text('मेरे सभी लेख लोड हो चुके हैं'); } mw.notify('आपके द्वारा निर्मित ' + added + ' नए लेख बॉक्स 2A में जोड़े गए (बैच संख्या ' + myContribsPagination.batchCount + ')।', { type: 'success' }); } else { btn.prop('disabled', false).text('मेरे द्वारा निर्मित लेख जोड़ें'); mw.notify('चयनित नामस्थान में आगे कोई नया लेख उपलब्ध नहीं है।', { type: 'warn' }); } } catch (e) { btn.prop('disabled', false).text('मेरे द्वारा निर्मित लेख जोड़ें'); mw.notify('लेख लोड करने में त्रुटि हुई।', { type: 'error' }); } }); // सूची स्वच्छ करें बटन jQuery('#dupref-clean').on('click', function () { var raw = jQuery('#dupref-input').val() || ''; var lines = raw.split('\n'); var cleaned = []; for (var i = 0; i < lines.length; i++) { var line = lines[i].trim(); if (!line) continue; line = line.replace(new RegExp('^[0-9#*\\-. ]+'), ''); if (line.toLowerCase().indexOf(':hi:') === 0) line = line.substring(4).trim(); else if (line.toLowerCase().indexOf('hi:') === 0) line = line.substring(3).trim(); var parenIndex = line.indexOf(' ('); if (parenIndex !== -1 && line.indexOf('=') !== -1) { var beforeParen = line.substring(0, parenIndex).trim(); beforeParen = beforeParen.replace(new RegExp(' [0-9]+$'), ''); line = beforeParen; } line = line.split('[[').join('').split(']]').join('').trim(); if (line && cleaned.indexOf(line) === -1) cleaned.push(line); } jQuery('#dupref-input').val(cleaned.join('\n')); updateAllCounts(); mw.notify('सूची स्वच्छ कर दी गई है।', { type: 'success' }); }); jQuery('#dupref-clear').on('click', function () { jQuery('#dupref-input').val(''); jQuery('#dupref-rejected').val(''); updateAllCounts(); mw.notify('बॉक्स 2A तथा 2B रिक्त कर दिए गए हैं।', { type: 'success' }); }); jQuery('#dupref-stop').on('click', function () { isStopRequested = true; jQuery(this).prop('disabled', true).text('रोका जा रहा है...'); }); // विकिटेक्स्ट प्रतिवेदन कॉपी बटन jQuery('#dupref-copy-wikitext').on('click', function () { var keys = Object.keys(foundResultsStore); if (keys.length === 0) return; var lines = keys.map(function (title) { var info = foundResultsStore[title].duplicateInfo; return '* [[' + title + ']] — (' + info.length + ' द्विरुक्त URL)'; }); var wtReport = '== द्विरुक्त सन्दर्भों वाले लेख ==\n' + lines.join('\n'); if (navigator.clipboard && navigator.clipboard.writeText) { navigator.clipboard.writeText(wtReport).then(function () { mw.notify('विकिटेक्स्ट प्रतिवेदन क्लिपबोर्ड पर कॉपी कर लिया गया है।', { type: 'success' }); }); } }); function addResultRow(pageTitle, duplicateInfo, statusInfo) { jQuery('#dupref-results-wrap').show(); jQuery('#dupref-copy-wikitext').show(); var tbody = jQuery('#dupref-results-tbody'); var existingRow = tbody.find('tr[data-row-title="' + mw.html.escape(pageTitle) + '"]'); if (existingRow.length > 0) { existingRow.remove(); } var pageUrl = mw.util.getUrl(pageTitle); var detailsHtml = '<ul style="margin:0; padding-left:18px;">'; for (var i = 0; i < duplicateInfo.length; i++) { var d = duplicateInfo[i]; var refBadges = d.refs.map(function (r, idx) { var simText = idx > 0 && r.simStr ? (' <small style="color:#14866d;">(' + r.simStr + ')</small>') : ''; return '<b>[' + r.number + ']</b>' + simText; }).join(', '); detailsHtml += '<li style="margin-bottom:4px;"><a href="' + mw.html.escape(d.url) + '" target="_blank" rel="noopener noreferrer" style="word-break:break-all;">' + mw.html.escape(d.url) + '</a> — सन्दर्भ क्रमांक: ' + refBadges + '</li>'; } detailsHtml += '</ul>'; var actionHtml = ''; if (statusInfo.taggedNow) { var diffUrl = mw.util.getUrl(pageTitle, { diff: 'cur', oldid: 'prev' }); actionHtml = '<span style="color:#14866d; font-weight:bold;">साँचा जोड़ा गया</span><br/><small><a href="' + diffUrl + '" target="_blank">(अंतर देखें)</a></small>'; } else if (statusInfo.alreadyTagged) { actionHtml = '<span style="color:#72777d;">पूर्व से साँचा उपस्थित है</span>'; } else if (statusInfo.isGAFA) { actionHtml = '<span style="color:#ac6600;">निर्वाचित/अच्छा लेख</span>'; } else { actionHtml = '<button type="button" class="mw-ui-button mw-ui-progressive dupref-single-tag-btn" data-title="' + mw.html.escape(pageTitle) + '" style="padding:4px 10px; font-size:12px; cursor:pointer;">साँचा जोड़ें</button>'; } var row = jQuery('<tr data-row-title="' + mw.html.escape(pageTitle) + '">').append( jQuery('<td>').html('<a href="' + pageUrl + '" target="_blank" style="font-weight:bold;">' + mw.html.escape(pageTitle) + '</a>'), jQuery('<td>').html(detailsHtml), jQuery('<td style="text-align:center;">').html(actionHtml) ); tbody.append(row); } jQuery('#dupref-results-tbody').on('click', '.dupref-single-tag-btn', async function () { var btn = jQuery(this); var title = btn.attr('data-title'); var stored = foundResultsStore[title]; if (!stored) return; btn.prop('disabled', true).text('जोड़ा जा रहा है...'); try { await tagPageWithDuplicateTemplate(title, stored.duplicateInfo); stored.alreadyTagged = true; var diffUrl = mw.util.getUrl(title, { diff: 'cur', oldid: 'prev' }); btn.parent().html('<span style="color:#14866d; font-weight:bold;">साँचा जोड़ा गया</span><br/><small><a href="' + diffUrl + '" target="_blank">(अंतर देखें)</a></small>'); var curTagged = parseInt(jQuery('#dstat-tagged').text(), 10) || 0; jQuery('#dstat-tagged').text(curTagged + 1); removeTitleFromBox2A(title, title); } catch (err) { btn.prop('disabled', false).text('साँचा जोड़ें'); mw.notify('त्रुटि (' + title + '): ' + err.message, { type: 'error' }); } }); jQuery('#dupref-tag-all-found').on('click', async function () { var buttons = jQuery('.dupref-single-tag-btn:not(:disabled)'); if (buttons.length === 0) { mw.notify('साँचा जोड़ने हेतु कोई शेष पृष्ठ नहीं है।', { type: 'warn' }); return; } var delaySec = parseInt(jQuery('#dupref-delay').val(), 10) || 4; var mainBtn = jQuery(this); mainBtn.prop('disabled', true).text('सभी में साँचा जोड़ा जा रहा है...'); for (var i = 0; i < buttons.length; i++) { if (isStopRequested) break; var btnEl = jQuery(buttons[i]); btnEl.trigger('click'); if (i < buttons.length - 1) { await new Promise(function (r) { setTimeout(r, delaySec * 1000); }); } } mainBtn.prop('disabled', false).text('सभी चिह्नित पृष्ठों में क्रमशः साँचा जोड़ें'); }); // ===================================================================== // द्वि-स्तरीय सटीक निस्यंदन इंजन (Batch + 6x Parallel DOM Filter) // ===================================================================== jQuery('#dupref-prefilter-btn').on('click', async function () { var rawText = jQuery('#dupref-input').val() || ''; var rawList = rawText.split('\n').map(function (s) { return s.split('[[').join('').split(']]').join('').trim(); }).filter(Boolean); if (rawList.length === 0) { mw.notify('निस्यंदन हेतु बॉक्स 2A में कोई पृष्ठ उपलब्ध नहीं है।', { type: 'warn' }); return; } var filterType = jQuery('#dupref-filter-type').val(); var skipTagged = jQuery('#dupref-skip-tagged').is(':checked'); var minSimPct = parseInt(jQuery('#dupref-min-sim').val(), 10) || 0; isStopRequested = false; var filterBtn = jQuery(this); var startBtn = jQuery('#dupref-start'); var stopBtn = jQuery('#dupref-stop'); var logBox = jQuery('#dupref-log').empty(); filterBtn.prop('disabled', true).text('निस्यंदन संचालित है...'); startBtn.prop('disabled', true); stopBtn.show().prop('disabled', false).text('प्रक्रिया रोकें'); jQuery('#dupref-stats').show(); var statTotal = rawList.length; var statDone = 0; var statFound = 0; var statClean = 0; function updateFilterStats() { var pct = statTotal > 0 ? Math.round((statDone / statTotal) * 100) : 0; jQuery('#dstat-total').text(statTotal); jQuery('#dstat-done').text(statDone); jQuery('#dstat-found').text(statFound); jQuery('#dstat-clean').text(statClean); jQuery('#dstat-percent').text(pct + '%'); jQuery('#dstat-bar').css('width', pct + '%'); } updateFilterStats(); function logMsg(msg, color) { logBox.append(jQuery('<div>').css({ color: color || '#202122', marginBottom: '4px' }).html(msg)); logBox.scrollTop(logBox[0].scrollHeight); } var api = new mw.Api(); var domParser = new DOMParser(); var existingTplRegex = new RegExp('\\{\\{\\s*(Duplicated citations|Duplicate references|डुप्लिकेट सन्दर्भ|डुप्लीकेट सन्दर्भ)', 'i'); var stage2Candidates = []; var confirmedDuplicateTitles = []; logMsg('<strong>चरण 1/2 (बैच विकिटेक्स्ट परीक्षण): कुल ' + rawList.length + ' पृष्ठों का प्रारंभिक निस्यंदन किया जा रहा है...</strong>', '#3366cc'); for (var b = 0; b < rawList.length; b += 25) { if (isStopRequested) break; var batch = rawList.slice(b, b + 25); try { var qData = await api.post({ action: 'query', titles: batch, prop: ['revisions', 'categories'], rvprop: 'content', rvslots: 'main', clcategories: TARGET_CHECK_CATEGORIES, cllimit: 'max', redirects: 1, formatversion: 2 }); var pages = (qData.query && qData.query.pages) ? qData.query.pages : []; for (var p = 0; p < pages.length; p++) { var pg = pages[p]; var pTitle = pg.title; globalSeenPages.add(pTitle); if (pg.missing) { statDone++; statClean++; moveToRejectedBox2B(pTitle, 'पृष्ठ अनुपस्थित'); continue; } var cats = (pg.categories || []).map(function (c) { return c.title.replace('श्रेणी:', '').trim(); }); var content = (pg.revisions && pg.revisions[0] && pg.revisions[0].slots && pg.revisions[0].slots.main) ? pg.revisions[0].slots.main.content : null; if (content === null) { stage2Candidates.push(pTitle); continue; } var isAlreadyTagged = cats.indexOf('डुप्लिकेट सन्दर्भों वाले सभी लेख') !== -1 || cats.indexOf('डुप्लीकेट सन्दर्भों वाले सभी लेख') !== -1 || existingTplRegex.test(content); var isGAFA = cats.indexOf('निर्वाचित लेख') !== -1 || cats.indexOf('अच्छे लेख') !== -1; if (skipTagged && isAlreadyTagged) { statDone++; statClean++; moveToRejectedBox2B(pTitle, 'पूर्व से साँचा उपस्थित'); continue; } if (skipTagged && isGAFA) { statDone++; statClean++; moveToRejectedBox2B(pTitle, 'निर्वाचित/अच्छा लेख'); continue; } var uniqueRefs = extractUniqueRefBlocksFromWikitext(content); var hasRefTemplates = new RegExp('\\{\\{\\s*(refn|r|sfn|harv|cite Q)', 'i').test(content); if (uniqueRefs.length < 2 && !hasRefTemplates) { statDone++; statClean++; moveToRejectedBox2B(pTitle, 'केवल ' + uniqueRefs.length + ' सन्दर्भ'); continue; } var urlFreq = {}; var hasRepeatedUrlInRefs = false; for (var rIdx = 0; rIdx < uniqueRefs.length; rIdx++) { var uKeys = extractUrlKeysFromRefBlock(uniqueRefs[rIdx]); for (var kIdx = 0; kIdx < uKeys.length; kIdx++) { var uk = uKeys[kIdx]; urlFreq[uk] = (urlFreq[uk] || 0) + 1; if (urlFreq[uk] >= 2) { hasRepeatedUrlInRefs = true; break; } } if (hasRepeatedUrlInRefs) break; } var hasIdParams = new RegExp('\\|\\s*(doi|pmid|pmc|jstor|bibcode)\\s*=\\s*[^|\\}\\s]+', 'i').test(content); if (filterType === 'wikitext_fast') { statDone++; if (hasRepeatedUrlInRefs) { statFound++; confirmedDuplicateTitles.push(pTitle); } else { statClean++; moveToRejectedBox2B(pTitle, 'विकिटेक्स्ट में द्विरुक्त URL नहीं'); } } else { if (hasRepeatedUrlInRefs || hasIdParams || hasRefTemplates) { stage2Candidates.push(pTitle); } else { statDone++; statClean++; moveToRejectedBox2B(pTitle, 'कोई द्विरुक्त सन्दर्भ URL नहीं'); } } } updateFilterStats(); } catch (batchErr) { console.error(batchErr); for (var fb = 0; fb < batch.length; fb++) { stage2Candidates.push(batch[fb]); } } } // === चरण 2: संभावित पृष्ठों का 6x समानांतर सटीक HTML DOM परीक्षण === if (filterType === 'exact_parallel' && stage2Candidates.length > 0 && !isStopRequested) { logMsg('<strong>चरण 2/2 (6x समानांतर सटीक परीक्षण): ' + stage2Candidates.length + ' संभावित पृष्ठों के सन्दर्भों का विस्तृत मिलान किया जा रहा है...</strong>', '#3366cc'); var cursor = 0; var CONCURRENCY = 6; async function runParallelWorker() { while (cursor < stage2Candidates.length && !isStopRequested) { var currentIdx = cursor++; var candTitle = stage2Candidates[currentIdx]; try { var parseData = await api.get({ action: 'parse', page: candTitle, prop: ['text', 'categories'], redirects: 1, formatversion: 2 }); if (!parseData || !parseData.parse) { statDone++; statClean++; moveToRejectedBox2B(candTitle, 'पृष्ठ अनुपस्थित'); updateFilterStats(); continue; } var realTitle = parseData.parse.title; globalSeenPages.add(realTitle); var htmlString = parseData.parse.text || ''; var cats = (parseData.parse.categories || []).map(function (c) { return c.category.replace(/_/g, ' '); }); var alreadyTagged = cats.indexOf('डुप्लिकेट सन्दर्भों वाले सभी लेख') !== -1 || cats.indexOf('डुप्लीकेट सन्दर्भों वाले सभी लेख') !== -1; var isGAFA = cats.indexOf('निर्वाचित लेख') !== -1 || cats.indexOf('अच्छे लेख') !== -1; if (skipTagged && (alreadyTagged || isGAFA)) { statDone++; statClean++; moveToRejectedBox2B(realTitle, 'पूर्व से साँचा उपस्थित / निर्वाचित'); updateFilterStats(); continue; } var doc = domParser.parseFromString(htmlString, 'text/html'); var duplicates = extractDuplicatesFromDOM(doc, minSimPct); if (duplicates.length > 0) { statDone++; statFound++; confirmedDuplicateTitles.push(realTitle); foundResultsStore[realTitle] = { duplicateInfo: duplicates, alreadyTagged: alreadyTagged, isGAFA: isGAFA }; addResultRow(realTitle, duplicates, { alreadyTagged: alreadyTagged, isGAFA: isGAFA }); logMsg('चिह्नित: <b>' + mw.html.escape(realTitle) + '</b> में ' + duplicates.length + ' द्विरुक्त URL की पुष्टि हुई (बॉक्स 2A में सुरक्षित)।', '#d33'); } else { statDone++; statClean++; moveToRejectedBox2B(realTitle, 'स्वच्छ / कोई द्विरुक्त सन्दर्भ नहीं'); } updateFilterStats(); } catch (pErr) { statDone++; confirmedDuplicateTitles.push(candTitle); updateFilterStats(); } } } var workers = []; for (var w = 0; w < CONCURRENCY; w++) { workers.push(runParallelWorker()); } await Promise.all(workers); } jQuery('#dupref-input').val(confirmedDuplicateTitles.join('\n')); updateAllCounts(); logMsg('<strong>निस्यंदन प्रक्रिया पूर्ण हुई। कुल ' + statTotal + ' में से ' + confirmedDuplicateTitles.length + ' द्विरुक्त सन्दर्भ युक्त लेख बॉक्स 2A में रखे गए हैं तथा ' + statClean + ' स्वच्छ लेख बॉक्स 2B में पृथक किए गए हैं।</strong>', '#14866d'); mw.notify('निस्यंदन पूर्ण: ' + confirmedDuplicateTitles.length + ' द्विरुक्त सन्दर्भ युक्त लेख बॉक्स 2A में शेष हैं।', { type: 'success' }); if (confirmedDuplicateTitles.length > 0) { jQuery('#dupref-tag-all-found').show(); } filterBtn.prop('disabled', false).text('द्विरुक्त सन्दर्भ छन्नी चलाएँ'); startBtn.prop('disabled', false); stopBtn.hide(); }); // ===================================================================== // मुख्य परीक्षण / टैगिंग प्रक्रिया (बॉक्स 2A के लेखों पर) // ===================================================================== jQuery('#dupref-start').on('click', async function () { var rawText = jQuery('#dupref-input').val() || ''; var rawList = rawText.split('\n').map(function (s) { return s.split('[[').join('').split(']]').join('').trim(); }).filter(Boolean); if (rawList.length === 0) { mw.notify('बॉक्स 2A रिक्त है। कृपया पहले पृष्ठ जोड़ें।', { type: 'warn' }); return; } var mode = jQuery('#dupref-mode').val(); var delaySec = parseInt(jQuery('#dupref-delay').val(), 10) || 4; var minSimPct = parseInt(jQuery('#dupref-min-sim').val(), 10) || 0; var skipTagged = jQuery('#dupref-skip-tagged').is(':checked'); var keepOnlyDups = jQuery('#dupref-keep-only-dups').is(':checked'); isStopRequested = false; var startBtn = jQuery(this); var stopBtn = jQuery('#dupref-stop'); var tagAllBtn = jQuery('#dupref-tag-all-found'); var logBox = jQuery('#dupref-log').empty(); function logMsg(msg, color) { logBox.append(jQuery('<div>').css({ color: color || '#202122', marginBottom: '4px' }).html(msg)); logBox.scrollTop(logBox[0].scrollHeight); } startBtn.prop('disabled', true).text('प्रक्रिया संचालित है...'); stopBtn.show().prop('disabled', false).text('प्रक्रिया रोकें'); jQuery('#dupref-stats').show(); var statDone = 0; var statFound = 0; var statTagged = 0; var statClean = 0; function updateStats() { var total = rawList.length; var pct = total > 0 ? Math.round((statDone / total) * 100) : 0; jQuery('#dstat-total').text(total); jQuery('#dstat-done').text(statDone); jQuery('#dstat-found').text(statFound); jQuery('#dstat-tagged').text(statTagged); jQuery('#dstat-clean').text(statClean); jQuery('#dstat-percent').text(pct + '%'); jQuery('#dstat-bar').css('width', pct + '%'); } updateStats(); var api = new mw.Api(); var domParser = new DOMParser(); logMsg('<strong>बॉक्स 2A के कुल ' + rawList.length + ' पृष्ठों पर कार्यवाही प्रारंभ की जा रही है...</strong>', '#3366cc'); for (var i = 0; i < rawList.length; i++) { if (isStopRequested) { logMsg('<strong>उपयोगकर्ता के निर्देशानुसार प्रक्रिया रोक दी गई।</strong>', '#d33'); break; } var title = rawList[i]; globalSeenPages.add(title); var cached = foundResultsStore[title]; if (cached && cached.duplicateInfo && cached.duplicateInfo.length > 0) { statFound++; logMsg('[' + (i + 1) + '/' + rawList.length + '] चिह्नित: <b>' + mw.html.escape(title) + '</b> (' + cached.duplicateInfo.length + ' द्विरुक्त URL पुष्ट)', '#d33'); if (mode === 'autotag' && !cached.alreadyTagged && !cached.isGAFA) { try { await tagPageWithDuplicateTemplate(title, cached.duplicateInfo); cached.alreadyTagged = true; statTagged++; addResultRow(title, cached.duplicateInfo, { taggedNow: true }); removeTitleFromBox2A(title, title); logMsg('सफलतापूर्वक {{Duplicated citations}} साँचा जोड़ा गया।', '#14866d'); if (i < rawList.length - 1 && !isStopRequested) { logMsg('अगले संपादन से पूर्व ' + delaySec + ' सेकंड की प्रतीक्षा...', '#72777d'); await new Promise(function (r) { setTimeout(r, delaySec * 1000); }); } } catch (tagErr) { logMsg('साँचा जोड़ने में त्रुटि: ' + mw.html.escape(tagErr.message), '#d33'); addResultRow(title, cached.duplicateInfo, { alreadyTagged: cached.alreadyTagged, isGAFA: cached.isGAFA }); } } else { addResultRow(title, cached.duplicateInfo, { alreadyTagged: cached.alreadyTagged, isGAFA: cached.isGAFA }); } statDone++; updateStats(); continue; } logMsg('[' + (i + 1) + '/' + rawList.length + '] <b>' + mw.html.escape(title) + '</b> का परीक्षण किया जा रहा है...'); try { var parseData = await api.get({ action: 'parse', page: title, prop: ['text', 'categories'], redirects: 1, formatversion: 2 }); if (!parseData || !parseData.parse) { logMsg('छोड़ा गया: पृष्ठ उपलब्ध नहीं है।', '#ac6600'); statDone++; statClean++; updateStats(); if (keepOnlyDups) removeTitleFromBox2A(title, null); moveToRejectedBox2B(title, 'पृष्ठ अनुपस्थित'); continue; } var realTitle = parseData.parse.title; globalSeenPages.add(realTitle); var htmlString = parseData.parse.text || ''; var cats = (parseData.parse.categories || []).map(function (c) { return c.category.replace(/_/g, ' '); }); var alreadyTagged = cats.indexOf('डुप्लिकेट सन्दर्भों वाले सभी लेख') !== -1 || cats.indexOf('डुप्लीकेट सन्दर्भों वाले सभी लेख') !== -1; var isGAFA = cats.indexOf('निर्वाचित लेख') !== -1 || cats.indexOf('अच्छे लेख') !== -1; if (skipTagged && (alreadyTagged || isGAFA)) { logMsg('छोड़ा गया (' + mw.html.escape(realTitle) + '): पूर्व से साँचा उपस्थित है अथवा निर्वाचित/अच्छा लेख है।', '#72777d'); statDone++; statClean++; updateStats(); if (keepOnlyDups) removeTitleFromBox2A(title, realTitle); moveToRejectedBox2B(realTitle, 'पूर्व से साँचा उपस्थित / निर्वाचित'); continue; } var doc = domParser.parseFromString(htmlString, 'text/html'); var duplicates = extractDuplicatesFromDOM(doc, minSimPct); if (duplicates.length === 0) { logMsg('स्वच्छ (' + mw.html.escape(realTitle) + '): कोई द्विरुक्त सन्दर्भ नहीं मिला।', '#14866d'); statDone++; statClean++; updateStats(); if (keepOnlyDups) removeTitleFromBox2A(title, realTitle); moveToRejectedBox2B(realTitle, 'स्वच्छ / कोई द्विरुक्त सन्दर्भ नहीं'); continue; } statFound++; foundResultsStore[realTitle] = { duplicateInfo: duplicates, alreadyTagged: alreadyTagged, isGAFA: isGAFA }; logMsg('चिह्नित: <b>' + mw.html.escape(realTitle) + '</b> में ' + duplicates.length + ' द्विरुक्त URL प्राप्त हुए।', '#d33'); if (mode === 'autotag' && !alreadyTagged && !isGAFA) { try { await tagPageWithDuplicateTemplate(realTitle, duplicates); statTagged++; addResultRow(realTitle, duplicates, { taggedNow: true }); removeTitleFromBox2A(title, realTitle); logMsg('सफलतापूर्वक {{Duplicated citations}} साँचा जोड़ा गया।', '#14866d'); if (i < rawList.length - 1 && !isStopRequested) { logMsg('अगले संपादन से पूर्व ' + delaySec + ' सेकंड की प्रतीक्षा...', '#72777d'); await new Promise(function (r) { setTimeout(r, delaySec * 1000); }); } } catch (tagErr) { logMsg('साँचा जोड़ने में त्रुटि: ' + mw.html.escape(tagErr.message), '#d33'); addResultRow(realTitle, duplicates, { alreadyTagged: alreadyTagged, isGAFA: isGAFA }); } } else { addResultRow(realTitle, duplicates, { alreadyTagged: alreadyTagged, isGAFA: isGAFA }); } statDone++; updateStats(); } catch (err) { logMsg('त्रुटि (' + mw.html.escape(title) + '): ' + mw.html.escape(String(err)), '#ac6600'); statDone++; updateStats(); } } logMsg('<strong>प्रक्रिया पूर्ण हुई। बॉक्स 2A में कुल ' + statFound + ' द्विरुक्त सन्दर्भ युक्त लेख चिह्नित हैं।</strong>', '#3366cc'); startBtn.prop('disabled', false).text('परीक्षण / टैगिंग प्रारंभ करें'); stopBtn.hide(); if (mode === 'scan' && statFound > 0) { tagAllBtn.show(); } }); } // ========================================================================= // भाग 2: पृष्ठ-स्तरीय द्विरुक्त सन्दर्भ तालिका (लेख अवलोकन के समय) // ========================================================================= function initOnPageDuplicateChecker() { function findNextReflistDiv(element) { var nextElement = element.nextElementSibling; while (nextElement) { if (nextElement.tagName.toLowerCase() === 'div' && (nextElement.classList.contains('reflist') || nextElement.classList.contains('mw-references-wrap'))) { return nextElement; } var innerDiv = nextElement.querySelector('.reflist, .mw-references-wrap'); if (innerDiv) return innerDiv; nextElement = nextElement.nextElementSibling; } return null; } var selectorStr = 'h2#सन्दर्भ, h2#टिप्पणियाँ, h2#सन्दर्भ_सूची, h2#References, h2#संदर्भ, h2#संदर्भ_सूची, h2#टिप्पणी_सूची, h2#टिप्पणी, span#सन्दर्भ, span#टिप्पणियाँ, span#संदर्भ, span#संदर्भ_सूची, span#टिप्पणी_सूची, span#टिप्पणी'; var referencesHeader = document.querySelector(selectorStr); if (!referencesHeader) return; var containerDiv = referencesHeader.closest('.mw-heading') || referencesHeader.closest('div') || referencesHeader.parentElement; if (!containerDiv) return; var reflistDiv = findNextReflistDiv(containerDiv); if (!reflistDiv) return; var duplicateInfo = extractDuplicatesFromDOM(document, 0); if (duplicateInfo.length === 0) return; var style = document.createElement('style'); style.textContent = 'li:target { border: 1px dotted red; padding: 2px; background-color: #ffcccc !important; } ' + '.duplicate-citation-highlight { background-color: #e1eeff; } ' + '.duplicate-citation-hover { background-color: #cce0ff; border: 1px dotted blue; } ' + '.duplicate-citation-clicked { border: 1px dotted red; padding: 2px; background-color: #ffe6e6; } ' + '.mw-collapsible-toggle { font-weight: normal; float: right; } ' + '.duplicate-references-table { width: 100%; margin-top:1em; margin-bottom:1em; }'; document.head.appendChild(style); var table = document.createElement('table'); table.className = 'wikitable mw-collapsible duplicate-references-table'; var tbody = document.createElement('tbody'); table.appendChild(tbody); var headerRow = document.createElement('tr'); var headerCell = document.createElement('td'); headerCell.innerHTML = '<strong>द्विरुक्त सन्दर्भ (' + duplicateInfo.length + ')</strong> '; var toggleSpan = document.createElement('span'); toggleSpan.className = 'mw-collapsible-toggle'; toggleSpan.innerHTML = '[<a href="#" class="mw-collapsible-text">छुपाएँ</a>]'; headerCell.appendChild(toggleSpan); var pageCategories = mw.config.get('wgCategories') || []; var templateAlreadyPresent = pageCategories.indexOf('डुप्लिकेट सन्दर्भों वाले सभी लेख') !== -1 || pageCategories.indexOf('डुप्लीकेट सन्दर्भों वाले सभी लेख') !== -1 || Boolean(document.querySelector('.box-Duplicated_citations, .ambox-Duplicated_citations, table.box-डुप्लिकेट_सन्दर्भ')); var isGAFA = pageCategories.indexOf('निर्वाचित लेख') !== -1 || pageCategories.indexOf('अच्छे लेख') !== -1; if (!templateAlreadyPresent && !isGAFA) { var addTemplateLink = document.createElement('a'); addTemplateLink.textContent = ' [सन्दर्भ रखरखाव साँचा जोड़ें] '; addTemplateLink.href = '#'; addTemplateLink.style.fontWeight = 'bold'; addTemplateLink.addEventListener('click', async function (e) { e.preventDefault(); addTemplateLink.innerHTML = '<sup><small>[ प्रक्रिया जारी है... ]</small></sup>'; try { await tagPageWithDuplicateTemplate(mw.config.get('wgPageName'), duplicateInfo); addTemplateLink.innerHTML = '<sup><small>[ पूर्ण ]</small></sup>'; setTimeout(function () { location.reload(); }, 500); } catch (err) { addTemplateLink.innerHTML = '<sup><small>[ त्रुटि ]</small></sup>'; mw.notify('साँचा जोड़ने में विफल: ' + err.message, { type: 'error' }); } }); headerCell.appendChild(addTemplateLink); } headerRow.appendChild(headerCell); tbody.appendChild(headerRow); var pageTitleClean = mw.config.get('wgPageName').replace(/_/g, ' '); duplicateInfo.forEach(function (item) { var url = item.url; var refs = item.refs; var row = document.createElement('tr'); var cell = document.createElement('td'); var reportIcon = document.createElement('a'); reportIcon.href = 'https://hi.wikipedia.org/wiki/User_talk:विक्रम_प्रताप?action=edit&section=new&preloadtitle=' + encodeURIComponent('DuplicateReferences त्रुटि सूचना: [[' + pageTitleClean + ']]'); reportIcon.textContent = '[त्रुटि सूचित करें]'; reportIcon.style.marginRight = '8px'; reportIcon.style.fontSize = '11px'; cell.appendChild(reportIcon); var urlLink = document.createElement('a'); urlLink.href = url; urlLink.textContent = url; urlLink.target = '_blank'; urlLink.rel = 'noopener noreferrer'; cell.appendChild(urlLink); cell.appendChild(document.createTextNode(' — इन सन्दर्भ क्रमांकों में: ')); refs.forEach(function (ref, index) { var link = document.createElement('a'); link.href = '#' + ref.id; link.textContent = ref.number; cell.appendChild(link); if (index > 0 && ref.simStr) { var simSpan = document.createElement('span'); simSpan.textContent = ' (' + ref.simStr + ')'; cell.appendChild(simSpan); } link.addEventListener('mouseover', function () { refs.forEach(function (r) { var el = document.getElementById(r.id); if (el) { el.classList.add(r.id === ref.id ? 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28 सितंबर 1929 - मृत्यु: 6 फरवरी 2022) एक दिग्गज भारतीय [[पार्श्व गायिका]] , [[संगीत निर्माता]] और [[संगीत निर्देशक]] थीं, जिन्होंने हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में संगीत रचा। उनके कई पुराने गाने विभिन्न नई फिल्मों (बॉलीवुड या भारतीय फिल्में) में शामिल किए गए हैं और उन्हें श्रेय भी दिया गया है। लेकिन ऐसे गाने, जब तक कि उन्हें दोबारा रिकॉर्ड न किया गया हो, नीचे सूचीबद्ध नहीं किए गए हैं। '''नोट:''' इस लेख में मंगेशकर द्वारा गाए गए सभी गाने शामिल नहीं हैं। ==हिंदी गाने== '''1940 के दशक''' '''1945''' {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan="2" | ''बड़ी माँ'' | "जननी जनमभूमि... तुम माँ हो बड़ी माँ" | rowspan="2" | के. दत्त | | मीनाक्षी |- | "माता तेरे चरणों में" | | इशवरलाल, कोरस<ref name="auto">{{cite web |url=http://cineplot.com/music/lata-mangeshkars-song-list-1945-1948/ |title=Lata Mangeshkar's Song List (1945 – 1948) |access-date=2014-11-05 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141106003940/http://cineplot.com/music/lata-mangeshkars-song-list-1945-1948/ |archive-date=2014-11-06 |url-status=dead}}</ref> |} ===1946=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! ''जीवन यात्रा'' | "चिड़िया बोले चूं चूं मैना बोले हूँ" | वसंत देसाई | | |- ! ''सोना चाँदनी'' | "प्यारे बापू की" | तुफैल फारूक़ी | | |- ! rowspan="3" | ''सुभद्रा'' | "मैं खिली खिली फुलवारी" | rowspan="3" | वसंत देसाई | | rowspan="3" | |- | "पिया आयेगा गोरी सुध न बिसार" | |- | "सांवरिया ओ बसुरिया ओ बजाई गयो रे" | |- ! rowspan="3" | ''आप की सेवा में'' | "अब कौन सुनेगा मेरे मन की बात" | rowspan="3" | दत्ता दावजेकर | rowspan="3" | | rowspan="3" | |- | "एक नये रंग में दूजे उमंग में" |- | "चलो हो गयी तैयार" |} ===1947=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! ''[[शादी से पहले]]'' | "पा लगूं कर जोड़ा जोड़ी होरी श्याम मोसे ना" | पढंकर और करणार्ड | | [[मोहम्मद रफी]] |- ! ''शेहनाई'' | "जवानी की रेल चली" | सी. रामचंद्र | | [[गीता दत्त]], सी. रामचंद्र |} ===1948=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! ''अंधों का सहारा'' | "मैं तो नाचो छमा छम नाच रे" | एस. पारसेकर | | |- ! rowspan='10' | ''अनोखा प्यार'' | "ऐ दिल मेरी वफ़ा में" | rowspan='10' | अनिल विश्वास | rowspan='10' | | इरा नागरथ |- | "ऐ दिल मेरी वफ़ा" | rowspan='8' | |- | "एक दिल का लगना" |- | "भोला भला री मेरा" |- | "घड़ी घड़ी पूछो ना" |- | "जीवन सपना टूट गया" |- | "मेरे लिए वो ग़म ए इंतज़ार" |- | "मेरे फूलों में छुपी है" |- | "याद रखना चाँद" |- | "याद रखना चाँद" | [[मुकेश]] |- ! rowspan='5' | ''आशा'' | "सजना रे तोरी कौन डगर" | rowspan='5' | खेमचंद प्रकाश | | rowspan='9' | |- | "चेत चेत कर चल मधुर नर" | |- | "दूर जाए रे राह मेरी आज तेरी राह से" | |- | "एक मूरत मनोहर मेरी अंखियों को तरसे" | |- | "कित जाए बसे हे मुरारी तोहे ढूंढत राधा" | |- ! ''बिहारी'' | "सब से कि डरफिशानी फूलों का सामियाना" | एन. भट्टाचार्य | |- ! rowspan='3' | ''चाँद सितारे'' | "ऐ दुनिया की मालिक मुझे तुझसे मिला है" | rowspan='3' | प्रेमनाथ | |- | "जब दिल में तेरे दर्द" | |- | "मेरी नाव चले धीरे-धीरे" | |- ! ''चुनरिया'' | "अंख मेरी लड़ गई" | हंसराज बहल | | इंदर गोयल |- ! ''दीदी'' | "तेरे नैनों में निंदिया निंदिया में सपने" | मुकुंद मसूरेकर | | rowspan='3' | |- ! ''दुखियारी'' | "अब किसको सुनाऊं मैं कथा कृष्णा" | ज्ञान दत्त | |- ! rowspan='5' | ''गजरे'' | "बरस बरस बदली" | rowspan='5' | अनिल विश्वास | |- | "चली दुल्हन बारातियों के" | | इरा नागरथ |- | "घर यहाँ बसाने आये थे" | | rowspan='5' | |- | "कब तक कटेगी जिंदगी किनारे किनारे" | |- | "प्रीतम तेरा मेरा प्यार" | |- ! rowspan='3' | ''हीर रांझा'' | "कैसे काटू ये काली रातें आ बलम" | rowspan='3' | अजीज खान | |- | "काहे को ब्याही बिदेस" | |- | "खामोश फसाना है" | | जी.एम. दुर्रानी |- ! rowspan='2' | ''खिड़की'' | "खुशियाँ मनायें" | rowspan='2' | सी. रामचन्द्र | | मोहनतारा, शमशाद बेगम |- | "तेरे बिना सूना" | | गीता दत्त, सी. रामचन्द्र |- ! rowspan='5' | ''मजबूर'' | "अब कोई जी के क्या करे" | rowspan='5' | गुलाम हैदर | | |- | "अंग्रेजी छोरा चला गया" | | मुकेश |- | "दिल मेरा तोडा" | | |- | "गोरी सखियों से" | | rowspan='2' | गीता दत्त |- | "हर शे पे जवानी है" | |- ! ''मंदिर'' | "लो वो आई निंदिया चुप चुप धीरे" | वसंत देसाई | | rowspan='2' | |- ! ''मेरे लाल'' | "हमारा घर बन जाए महलों से प्यारा सुंदर" | पुरूषोत्तम | |- ! rowspan='2' | ''मेरी कहानी'' | "दिलवालों दिलों का मेल दिलों का खेल" | rowsapn='2' | के.दत्ता | | |- | "नहिं नहिं बून्दनियाँ जिया लहराये" | | |- ! ''[[नदिया के पार (1948 फ़िल्म)|नदिया के पार]]'' | "हो गोरी हो चोरी कहाँ चली हो" | सी. रामचन्द्र | | सी. रामचन्द्र |- ! ''पद्मिनी'' | "बेदर्द तेरे दर्द को सीने से लगा के" | गुलाम हैदर | | |- ! ''[[शहीद (1948 फ़िल्म)|शहीद]]'' | "पिंजरे मेन बुलबुल बोले (शामिल नहीं)" | गुलाम हैदर | | मैडम मोहन |- ! rowspan='6' | ''[[ज़िद्दी (1948 फ़िल्म)|ज़िद्दी]]'' | "अब कौन सहारा है जब तेरा सहारा" | rowspan='6' | खेमचंद प्रकाश | rowspan='6' | | rowspan='5' | |- | "चंदा रे जा रे जा पिया से संदेसा मोरा" |- | "जादू कर गई किसी के नैना" |- | "रूठ गए मोरे श्याम सखी रे" |- | "तुझे ओ बेवफा हम जिंदगी का आसरा" |- | "ये कौन आया रे करके ये" | [[किशोर कुमार]] <ref name='auto'/> |} ===1949=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan='7' | ''[[आइये]]'' | "इतनी बड़ी दुनिया में" | rowspan='7' | शौकत हैदरी | | rowspan='3' | |- | "किस लिए आँखों में आंसू" | |- | "आ भी जा जानेवाले" | |- | "आइए आओ चले वहां" | | मुबारक बेगम |- | "दुनिया बदल गई" | | rowspan='2' | जी.एम. दुर्रानी |- | "कर सकेगा ना जुदा" | |- | "जिया डोले किसी ख़यालिन में" | | शौकत हैदरी |- ! rowspan='7' | ''[[अंदाज़ (1949 फ़िल्म)|अंदाज़]]'' | "मेरी लाडली रे बनी है" | rowspan='7' | नौशाद | rowspan='7' | [[मजरूह सुलतानपुरी]] | rowspan='5' | |- | "कोई मेरे दिल में" |- | "उठाये जा उनके सितम" |- | "तोड़ दिया दिल मेरा" |- | "डरना मोहब्बत" |- | "यूं तो अपस मेन" | rowspan='2' | मोहम्मद रफ़ी |- | "सुनलो दिल का अफसाना" (शामिल नहीं) |- ! rowspan='2' | ''[[बंगला भेदी]]'' | "हौंसले दिल के मिट्टी प्यार के अरमान गया" | rowspan='2' | पी. रमाकांत | | rowspan='10' | |- | "मन में तेरी याद बसी आँखों में है प्यार" | |- ! rowspan='10' | ''[[बरसात (1949 फ़िल्म)|बरसात]]'' | "बरसात में हमसे मिले" (शीर्षक गीत) | rowspan='10' | [[शंकर-जयकिशन]] | |- | "हवा में उड़ता जाए मेरा लाल दुपट्टा" | |- | "जिया बेकरार है छायी बहार है" | |- | "मुझे किसी से प्यार हो गया" | |- | "मेरी आँखों में बस गया कोई" | |- | "अब मेरा कौन सहारा" | |- | "बिछड़े हुए परदेसी" | |- | "हंस मुख फूलों ये मत भूलो" | |- | "पतली कमर है" | | rowspan='2' | मुकेश |- | "छोड़ गए बलम" | |- ! rowspan='2' | ''[[बालम (1949 फ़िल्म)|बालम]]'' | "परदेसी मुसाफिर कैसे करता" | rowspan='2' | हुस्नलाल भगतराम | rowspan='2' | क़मर जलालाबादी | rowspan='2' | सुरैया |- | "दुनिया वालो" |- ! rowspan='6' | ''[[बाज़ार (1949 फ़िल्म)|बाज़ार]]'' | "साजन की गलियाँ छोड़ चले" | rowspan='6' | श्याम सुंदर | | rowspan='3' | |- | "बसलो अपनी निगाहों में प्यार" | |- | "ऐ दिल उनको याद ना करना" | |- | "जरा सुनलो हम अपना प्यार" | | राजकुमारी |- | "ऐ मोहब्बत उनसे मिलने" | | मोहम्मद रफ़ी |- | "अपनी नसर से दूर हम" | | मोहम्मद रफ़ी |- ! rowspan='3' | ''[[बड़ी बहन]]'' | "चले जाना नहीं नैन मिलाके" | rowspan='9' | हुस्नलाल भगतराम | | |- | "जो दिल में घुसी बन आये" | | |- | "चुप चुप खड़े" | प्रेमलता | |- ! rowspan='4' | ''बांसुरिया'' | "दिल तोड़ के जानेवाले" | rowspan='6' | | rowspan='6' | |- | "जो करके गये बरबाद हमन" |- | "ये दुनिया कहती है कोई फरियाद ना करे" |- | "चाहे चोरी चोरी आओ चाहे चुप चुप" |- ! rowspan='2' | ''[[भोली]]'' | "दिल तोड़ने वाले क्या तूने किया है बर्बाद" |- | "इतना भी बेशुमार को न आसमां सताए" |- ! ''[[चार दिन]]'' | "हाय ये भोली सूरत वाले" | श्याम सुंदर | | राजकुमारी, कल्याणी, ज़ोहराबाई अम्बालेवाली, शमशाद बेगम, हमीदा बानो, इकबाल (हमीदा का भाई) |- ! rowspan='3' | ''[[चकोरी (1949 फ़िल्म)|चकोरी]]'' | "कभी हंस हंसके नैन मिलाये" | rowspan='3' | हंसराज बहल | | rowspan='3' | |- | "हाय चंदा गये परदेस चकोरी जहां" | |- | "बहुत हमसे जुदा है पर तेरे लिए फिर भी" | |- ! rowspan='2' | ''[[चांदनी रात]]'' | "हाय छोरे की जात" | rowspan='2' | नौशाद | | जी.एम. दुर्रानी |- | "हाय छोरे की जात" | | सआदत खान |- ! rowspan='2' | ''[[दिल की बस्ती]]'' | "आग लगे जग सारा देखे" | rowspan='2' | गुलाम मोहम्मद | | rowspan='2' | |- | "उनसे हम कुछ कहते रह गए" | |- ! rowspan='7' | ''[[दुलारी (फिल्म)|दुलारी]]'' | "आंखों में आया दिल में समा जा" | rowspan='7' | नौशाद | | rowspan='5' | |- | "तकदीर जगा कर आयी हूँ" | |- | "ऐ दिल तुझसे कसम है" | |- | "दो दिन की बहार है प्यार कर" | |- | "मोहब्बत हमारी ज़माना हमारा" | |- | "मिल मिल के गाएँगे" | | rowspan='2' | मोहम्मद रफ़ी |- | "रात रंगीली मस्त" | |- ! rowspan='7' | ''[[एक थी लड़की]]'' | "घिर-घिर के आई बदरा सजनवा" | rowspan='7' | विनोद | | rowspan='2' | |- | "मेरे दिल के तड़पने का तमाशा देखनेवाले" | |- | "अब हाल ए दिल" | | rowspan='3' | मोहम्मद रफ़ी |- | "लंबी जोरू बड़ी मुसेबत" | |- | "ये शोक सितारें" | |- | "लारा लप्पा लारा लप्पा" | | मोहम्मद रफी, जी.एम. दुर्रानी |- | "हम चले दूर" | | मोहम्मद रफ़ी, सतीश बत्रा |- ! rowspan='3' | ''[[गर्ल्स स्कूल (1949 फ़िल्म)|गर्ल्स स्कूल]]'' | "कुछ शरमते हुए और कुछ" | rowspan='3' | अनिल विश्वास | | rowspan='2' | |- | "तुम ही कहो मेरा मन क्यों रहे उदास" | |- | "बार-बार तुम सोच" | | शंकर दास गुप्ता<ref>{{cite web |url=http://cineplot.com/music/lata-mangeshkars-song-list-1949/ |title=Lata Mangeshkar's Songs List - 1949 |date=2014-11-06 |url-status=dead |access-date=6 October 2026 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141106050338/http://cineplot.com/music/lata-mangeshkars-song-list-1949/ |archive-date=6 नवंबर 2014}}</ref> |- ! rowspan='3' | ''[[जल तरंग]]'' | "लुट गई उम्मीदों की दुनिया" | rowspan='3' | हुस्नलाल भगतराम | | |- | "ज़रा तुमने देखा तो प्यार" | | मोहम्मद रफ़ी |- | "हाय तकदीर मेरी बनके बिगाड़ती क्यों" | | rowspan='9' | |- ! rowspan='2' | ''[[जीत (1949 फ़िल्म)|जीत]]'' | "मस्त पावन है चंचल धारा" | rowspan='2' | अनिल विश्वास | |- | "हंसले गा ले ओ चांद मेरे" | |- ! ''किनारा'' | "जानेवाले ये जवानी चार दिन की" | एम. आचार्य | |- ! rowspan='7' | ''लाडली'' | "आठ रोज़ की छुट्टी" | rowspan='7' | अनिल विश्वास | rowspan='7' | |- | "तुम्हारे बुलाने को जी चाहता है" |- | "कैसे कह दूं बजरिया के बीच" |- | "ज़िंदगी की रोशनी तो ख़त्म हो गई" |- | "ग़रीबों का हिसा ग़रीबों में" |- | "जय जय प्रेम देवता" | मीना कपूर |- | "अग्रे को घाघरो मंगवादेई" | आशालता |- ! rowspan='7' | ''लाहौर'' | "बहारें फिर भी आएंगी" | rowspan='7' | श्याम सुंदर | rowspan='7' | | rowspan='6' | |- | "सुनलो सजन मेरी बात दिल की बात" |- | "बेदर्द ज़माने क्या तेरी महफ़िल में" |- | "टूटे हुए अरमानों की एक दुनिया" |- | "उस दिल की किस्मत क्या कहेंगे" |- | "उम्मीद के रंगीन झूले में एक आस" |- | "दुनिया हमारे प्यार की यूँही" | करण दीवान |- ! rowspan ='3' | ''मां का प्यार'' | "मुरख मन कहे होत अधीर" | rowspan='3' | पंडित गोबिंदराम | rowspan='3' | | rowspan='3' | |- | "सोजा मेरे नन्हे निंदिया तोहे आई" |- | "तूने जहां बना कर एहसान क्या किया" |- ! rowspan='3' | ''[[महल (1949 फ़िल्म)|महल]]'' | "मुश्किल है बहुत मुश्किल" | rowspan='3' | खेमचंद प्रकाश | rowspan='3' | नक्शाब | rowspan='3' | |- | "आएगा आएगा आनेवाला आएगा" |- | "दिल ने फिर याद किया बेवफ़ा" |- ! rowspan='5' | ''नमूना'' | "भगवान तूने क्यों" | rowspan='5' | सी. रामचन्द्र | | rowspan='4' | |- | "आज संभल के आना हो लाला" | |- | "म्हारी गली में आवे जो" | |- | "ज़ुल्म तुम्हारे सह न सके" | |- | "तड़पके मुझे अब छोड़" | | मोहम्मद रफ़ी |- ! rowspan='4' | ''[[नरसिंह अवतार]]'' | "भज रे मधुर मधुर नाम" | rowspan='5' | वसंत देसाई | | rowspan='6' | |- | "चरण तुम्हारे फूल हमारे" | |- | "हरि को बिसारो न बिसरेंगे" | |- | "जगमग तारे झलके झलके अँधेरी" | |- ! ''[[नयी तालीम]]'' | "आ गई बहार आ गई" | |- ! rowspan='3' | ''नज़ारे'' | "एक ठेस लगी" | rowapan='3' | बुलो सी. रानी | |- | "क्या सोच के बनाई" | | मोहम्मद रफ़ी |- | "तड़पके मुझे छोड़ दिया" | | rowspan='11' | |- ! rowspan='4' | ''[[पारस (1949 फ़िल्म)|पारस]]'' | "आज मेरी दुनिया में दिन हैं बहार के" | rowspan='4' | गुलाम मोहम्मद | rowspan='4' | शकील बदायूँनी |- | "दिल का सहारा टूटे ना जाए" |- | "इस दर्द की मारी दुनिया में" |- | "दिल लेके छुपनेवाले" |- ! rowspan='3' | ''[[प्यार की रात]]'' | "चाहे वो हमें ऐसी किस्मत है कहाँ" | rowspan='3' | एन. ए. जोलागोनकर | |- | "वो नज़र मिली हंसी जिंदगी" | |- | "एक बार चले आओ फिर चाहे ना आना" | |- ! rowspan='4' | ''[[पतंगा (1949 फ़िल्म)|पतंगा]]'' | "दिल से भुलादो तुम हमीं" | rowspan='4' | सी. रामचन्द्र | rowspan='3' | |- | "कभी खामोश हो जाना कभी फरियाद" |- | "ओ जानेवाले तूने अरमानों की दुनिया" |- | "प्यार के जहाँ की निराली" | | शमशाद बेगम |- ! rowspan="3" | ''[[रात की रानी (फ़िल्म)|रात की रानी]]'' | "दिल तोड़ने वाले आ" | rowspan="3" | हंसराज बेहल | | |- | "सुन तो लो मेरा अफसाना" | | rowspan="2" | मोहम्मद रफी |- | "उस रात के प्यारे चाँद" | |- ! ''रोशनी'' | "मेरे पास मेरे भोले सजन" | सी. रामचंद्र | | |- ! rowspan="3" | ''राखी'' | "कहे धीरे चली रे घड़ी" | rowspan="3" | हुसंलाल भागतरं | rowspan="3" | | rowspan="3" | |- | "ओ रूठ जानेवाले मेरा कसूर क्या है" |- | "दिल किसी ने छीन लिया पहली मुलाक़ात में" |- ! ''[[संत जनाबाई]]'' | "गोपे नंदलाल गूंथे सब वनमाला" | सुधीर फड़के | | |- ! ''सांवरिया'' | "जानी रे हम जानी रे" | सी. रामचंद्र | | गीता दत्त |- ! rowspan="6" | ''[[सावन भादों (1949 फ़िल्म)|सावन भादों]]'' | "सौ सौ ग़म ने घेरे" | rowspan="6" | हुसंलाल भागतरं | | rowspan="4" | |- | "तेरी इस दो रंगी दुनिया में" | |- | "तेरी अँखियाँ सजन चोर चोर" | |- | "तुम बिन राजा नहीं मन का चैन" | |- | "कलेजा थाम लो" | | ज़ोहराबाई अंबालवाली |- | "ये राह ए मोहब्बत" | | एस.दी. बतीश |- ! rowspan="6" | ''[[सिपहिया]]'' | "दर्द जगा के टेस लगा के" | rowspan="6" | सी. रामचंद्र | | rowspan="3" | |- | "हँसी हँसी न रही और खुशी न खुशी" | |- | "आराम के थे साथी क्या क्या जब वक़्त पड़ा तो" | |- | "चलो घूँघट में गुइयाँ" | | [[गीता दत्त]] |- | "लगा है कुछ निशाना" | | rowspan="2" | सी. रामचंद्र |- | "ऐ आँख अब न रोना" | |- ! rowspan="4" | ''[[शायर (1949 फ़िल्म)|शायर]]'' | "तू दूर है आँखों से मेरे दिल को यह ग़म" | rowspan="4" | ग़ुलाम मोहम्मद् | | rowspan="2" | |- | "मोहब्बत पे बहार आती जहाँ गुलज़ार हो जाता" | |- | "दो बिछड़े हुए दिल आपस में" | | जी.एम. दुर्रानि |- | "ये दुनिया है जहाँ दिल का लगन" | | मुकेश |- ! rowspan="6" | ''[[उधार (फ़िल्म)|उधार]]'' | "आज जिंदगी के बंद द्वार खुल गए" | rowspan="6" | वसंत देसाई | | rowspan="6" | |- | "कहाँ राम है राम फिर श्रीमुख" | |- | "ओ कबीरा हिंदुआन की हिंदुआई देखो" | |- | "पतझड़ के दिन बीत गये" | |- | "रात जा रही नींद आ रही है" | |- | "रंगीन गगन पीछे छूटा" | |- ! ''उषा किरण'' | "लहरों पे कभी नाचूँ किरणों से कभी" | सरस्वती देवी | | |- ! rowspan="5" | ''[[ज़ेवरात]]'' | "शिकवा न करेंगे न शिकायत" | rowspan="5" | हंसराज बेहल | | rowspan="2" | |- | "एक ही था जगत में सहारा" | |- | "सजन की ओर लेके" | | मोहम्मद रफी |- | "जा तेरी मुक़द्दर में हँसी है न खुशी" | | rowspan="2" | |- | "चले आओ जी मुझे तुमसे मोहब्बत है" | |- |} ===1950 के दशक=== ===1951=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan="6" | ''[[आवारा]]'' | "घर आया मेरा परदेसी" | rowspan="6" | [[शंकर-जयकिशन]] | rowspan="3" | शैलेंद्र | |- | "दम भर जो उधर मुँह फेरे" | मुकेश |- | "तेरे बिना आग ये चाँदनी" | [[मन्ना डे]] |- | "एक बेवफ़ा से प्यार किया" | rowspan="3" | [[हसरत जयपुरी]] | rowspan="3" | |- | "अब रात वाली है" |- | "जब से बालम घर आये" |} ===1952=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan="5" | ''[[दाग (1952 फ़िल्म)|दाग]]'' | "काहे को देर लगाई रे" | rowspan="5" | [[शंकर-जयकिशन]] | rowspan="5" | | rowspan="5" | |- | "देखो आया ये कैसा" |- | "लागे जबसे नैन" |- | "प्रीत ये कैसी" |- | "ऐ मेरे दिल कहीं और चल" |- ! rowspan="7" | ''शिन शिनाकि बूब्ला बू'' | "टक्का लाई कलि दई" | rowspan="7" | सी. रामचंद्र | rowspan="7" | प्यारेलाल संतोषी | rowspan="4" | |- | "अरे बाबा ये हँसी बाबा ये खुशी बाबा" |- | "कैसे हैं मिज़ाज कहिये" |- | "साईं रे घर घर में एक चोर" |- | "एक बार जो परदे से फिर छम से तेरा आना हो" | कुशिरो कुमार |- | "तुम क्या जानो तुम्हारी याद में हम कितना रोये" | |- | "शिन शिनाकि बूब्ला बू" | सी. रामचंद्र |- ! rowspan="2" | ''[[दीवाना (1952 फ़िल्म)|दीवाना]]'' | "मेरे चाँद मेरे लाल" | rowspan="2" | नौशाद | rowspan="2" | शकील बदयूनी | सुरैया |- | "तीर खाते जायेंगे" | |} ===1953=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan="9" | ''[[अनारकली (1953 फ़िल्म)|अनारकली]]'' | "आजा अब तो आजा" | rowspan="9" | सी. रामचंद्र, वसंत प्रकाश | rowspan="9" | | rowspan="8" | |- | "दुआ कर ग़म-ए-दिल" |- | "मुझसे मत पूछ" |- | "मोहब्बत ऐसी धड़कन है" |- | "मोहब्बत में ऐसे कदम" |- | "ये जिंदगी उसी की है" (1) |- | "ये जिंदगी उसी की है" (2) |- | "ओ आसमांवाले" |- | "जाग दर्द-ए-इश्क़ जाग, दिल को बेकरार कर छेड़के आँसुओं का राग" | हेमंत कुमार |- ! rowspan="7" | ''[[आह (फ़िल्म)|आह]]'' | "जाने ना नज़र" <ref>{{Citation |title=Jane Na Nazar Pehchane Jigar - Raj Kapoor - Nargis - Aah - Lata - Mukesh - Evergreen Hindi Songs |url=https://www.youtube.com/watch?v=90ooNta8icg |date=2011-12-02 |access-date=2016-02-24 |last=Filmi Gaane}}</ref> | rowspan="7" | [[शंकर-जयकिशन]] | rowspan="2" | [[हसरत जयपुरी]] | rowspan="3" | [[मुकेश]] |- | "आजा रे अब मेरा दिल" |- | "जो मैं जानती" | rowspan="5" | शैलेंद्र |- | "झनन झनन झनन" | rowspan="6" | |- | "ये शाम की तन्हाईयाँ" |- | "सुनते थे नाम" |- | "राजा की आयेगी बारात" |- ! rowspan="4" | ''[[लड़की (1953 फ़िल्म)|लड़की]]'' | "साजन आजा दरस दिखा जा" | rowspan="4" | आर. सुदरसनम–धनीराम | rowspan="4" | राजेंद्र कृष्णन |- | "तोड़ के दुनिया की दीवार" |- | "मन मोर मचावे शोर" | [[गीता दत्त]] |- | "मेरे वतन से अच्छा" | rowspan="2" | |- ! rowspan="3" | ''[[दो बीघा ज़मीन]]'' | "आजा री आ, निंदियाँ तू आ" | rowspan="3" | सलिल चौधरी | rowspan="3" | शैलेंद्र |- | "धरती कहे पुकार के, बीज बिछा ले प्यार के" | rowspan="2" | मन्ना डे |- | "हरियाला सावन ढोल बजाता आया" |} ===1954=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan="9" | ''[[नागिन (1954 फ़िल्म)|नागिन]]'' | "मन डोले मेरा तन डोले" | rowspan="9" | [[हेमंत कुमार]] | | |- | "सुन रसिया मन बसिया" | | |- | "सुन रि सखी" | | |- | "मेरा दिल ये पुकारे आजा" | | |- | "जादूगर सईयां" | | |- | "अरि छोड़ दे पतंग" | [[हेमंत कुमार]] | |- | "मेरा बादली में छुप गया चाँद" | rowspan="5" | | |- | "तेरी याद में जलकर देख लिया" | |- | "ऊँची ऊँची दुनिया कि दीवारें" | |- |- ! ''मयूरपंख'' | "तंदना तंदना तंदना" | शैलेंद्र | [[आशा भोसले]], [[उषा मंगेशकर]] |- ! ''अमर'' | "न शिकवा है कोई ना कोई गिला है" | | शकील बदायूंई |} ===1955=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan="8" | ''[[आज़ाद (1955 फ़िल्म)|आज़ाद]]'' | "ना बोले, ना बोले" | rowspan="8" | सी. रामचंद्र | rowspan="8" | राजेंद्र कृष्ण | rowspan="5" | |- | "कितनी जवान है रात" |- | "देखो जी बहार आयी" |- | "जा री, ओ कारी बदरिया" |- | "पीके दरस को तरस" |- | "कितना हसीन है मौसम, कितना हसीन सफर है" | सी. रामचंद्र |- | "अपलम चपलम, चप लाई री दुनिया को छोड़" | rowspan="2" | उषा मंगेशकर |- | "बलिए ओ बलिए, चल छलिये" |- ! rowspan="3" | ''[[देवदास (1955 फ़िल्म)|देवदास]]'' | "जिसे तू कबूल करले" | rowspan="3" | [[सचिन देव बर्मन]] | rowspan="3" | [[साहिर लुधियानवी]] | |- | "अब आगे तेरी मर्ज़ी" | |- | "ओ आने वाले रुक जा" | |- ! rowspan="5" | ''[[श्री ४२० (1955 फ़िल्म)| श्री 420]]'' | "प्यार हुआ इकरार हुआ" | rowspan="5" | [[शंकर-जयकिशन]] | rowspan="2" | शैलेंद्र | |- | "रमैया वस्तावैया" | [[मोहम्मद रफी]], [[मुकेश]] |- | "इचक दाना बीचक दाना" | rowspan="3" | [[हसरत जयपुरी]] | [[मुकेश]] |- | "ओ जानेवाले" | rowspan="2" | |- | "शाम गयी रात आयी" |- ! rowspan="10" | ''[[झनक झनक पायल बाजे]]'' | "झनक झनक पायल बाजे" | rowspan="10" | वसंत देसाई | rowspan="10" | हसरत जयपुरी | [[हेमंत कुमार]] |- | "जो तुम तोड़ो पिया" | rowspan="4" | |- | "सैयाँ जाओ" |- | "सुनो सुनो सुनो जी" |- | "कैसी ये मोहब्बत" |- | "मुरली मनोहर" | rowspan="2" | मन्ना डे |- | "मेरे ए दिल बता" |- | "नैन सो नैन नाही मिलाओ" | हेमंत कुमार |- | "राग मलिका" | मन्ना डे |- | "रुत बसंत" | rowspan="9" | |- ! rowspan="8" | ''[[उड़न खटोला (फ़िल्म)|उड़न खटोला]]'' | "ना रो ए दिल" | rowspan="8" | नौशाद | rowspan="8" | |- | "हाल-ए-दिल मैं क्या कहूँ" |- | "घर आया मेहमान कोई" |- | "मेरा सलाम ले जा" |- | "हमारे दिल से न जाना |- | "मोरे सईयाँ जी उतरेंगे पार" |- | "डूबा तारा उम्मीदों" |- | "सितारों की मेहफिल" |- ! rowspan="3" | ''[[बंदिश (1955 फ़िल्म)|बंदिश]]'' | "रात है सुहानी" | rowspan="3" | हेमंत कुमार | rowspan="3" | | rowspan="3" | |- | "तुम्हारी याद में" |- | "झूमती जवानी है" |} ===1956=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan="5" | ''न्यू देल्ही'' | "कोई मेरे सपनों Mein आया" | rowspan="5" | [[शंकर-जयकिशन]] | rowspan="5" | [[हसरत जयपुरी]], शैलेंद्र | rowspan="5" | |- | "तुम संग प्रीत लगाई रसिया" |- | "जिंदगी बहार है" |- | "बारी बरसे खातन गायन" |- | "मुरली बैरन भाई" |- ! rowspan="8" | ''[[चोरी चोरी (1956 फ़िल्म)|चोरी चोरी]]'' | रसिक बलमा | rowspan="8" | [[शंकर-जयकिशन]] | rowspan="4" | [[हसरत जयपुरी]] | |- | "उस पर साजन" | |- | "आजा सनम मधुर चाँदनी में हम" | rowspan="4" | [[मन्ना डे]] |- | "पंछी बनूँ उड़ती फिरूँ" |- | "जहाँ मैं जाती हूँ" | rowspan="11" | शैलेंद्र |- | "यह रात भीगी भीगी" |- | "मनभावन के घर" | [[आशा भोसले]] |- | "सवा लाख की लॉटरी" | [[मोहम्मद रफी]] |- ! rowspan="7" | ''[[पटरानी]]'' | "सात समुंदर पार" | rowspan="13" | [[शंकर-जयकिशन]] | rowspan="4" | |- | "ओ बलम तुम बेदर्दी" |- | "चंद्रमा क्यों झूमे" |- | "दिल गया दर्द रहा सीने में" |- | "अरे कोई जाओ री पिया को बुलाओ री" | मीना मंगेशकर, [[उषा मंगेशकर]] |- | "राजा प्यारे मत करो प्यार का मोल" | [[उषा मंगेशकर]] |- | "न जाने तुम कौन मेरी आँखों में" | rowspan="6" | |- ! rowspan="6" | ''[[किस्मत का खेल]]'' | "अर्ज़ है आप से" | rowspan="6" | शैलेंद्र, [[हसरत जयपुरी]] |- | "किस्मत का खेल है जनाबे आली" |- | "न बुरे न भले हम गरीब ग़म के पले" |- | "तु माने या न माने बालम अंजाने" |- | "ए ज़मीन ए आसमां इतना बता" |- | "कह दो जी कह दो" | [[मन्ना डे]] |- ! ''[[सुबह का तारा]]'' | "चमका चमका सुबह का तारा" | | | [[तलत महमूद]] |- ! rowspan="7" | ''[[देवता (1956 फ़िल्म)|देवता]]'' | "दो नैनों का बना" | rowspan="7" | सी. रामचंद्र | rowspan="7" | राजेंद्र कृषण | rowspan="5" | |- | "कैसे आऊँ जमुना के तीर" |- | "फूलों के मेले" |- | "सुना है मेरे दिल का" |- | "ये चाँद का जो" |- | "किसी से प्यार है हमको" | [[तलत महमूद]] |- | "ए चाँद कल जो आना उनको" | rowspan="3" | |- ! rowspan="2" | ''[[बंधन (1956 फ़िल्म)|बंधन]]'' | "वृंदावन की कुंज गली" | rowspan="2" | हेमंत कुमार | rowspan="2" | राजेंद्र कृष्णन |- | "मेरे देवता मुझको देना सहारा" |- |} ===1957=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan="7" | ''[[कठपुतली (1957 फ़िल्म)|कठपुतली]]'' | "बक्कड़ बम बम" | rowspan="7" | [[शंकर-जयकिशन]] | rowspan="7" | शैलेंद्र, [[हसरत जयपुरी]] | |- | "बोल री काठ पुतली" | |- | "बोल री काठ पुतली (दुखी)" | |- | "मिनी मिनी चिचि" | [[मुकेश]] |- | "हाय तू ही गया मोहे भूल रे" | rowspan="6" | |- | "इतने बड़े जहाँ में ए दिल" |- | "सो जा रे सो जा" |- ! rowspan="4" | ''[[आशा (1957 फ़िल्म)|आशा]]'' | "ज़रा रुक रुक के, मैं तो द्वार चली सखी" | rowspan="4" | सी. रामचंद्र | rowspan="4" | राजेंद्र कृष्णन |- | "चल चल रे कंहाई" |- | "तू न आया और होने लगी शाम रे" |- | "तुमको सलाम हैं" | [[मोहम्मद रफी]] |} ===1958=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan="3" | ''[[सितारों से आगे]]'' | "मेहफिल में आये वो" | rowspan="3" | एस. डी. बर्मन | rowspan="3" | मजरूह सुल्तानपुरी | rowspan="6" | |- | "पग ठुमक चलत" |- | "आ खिलाते है गुल" |- ! rowspan="3" | ''[[साधना (1958 फ़िल्म)|साधना]]'' | "औरत ने जनम दिया मर्दों को" | rowspan="3" | दत्ता नायक | rowspan="3" | [[साहिर लुधियानवी]] |- | "कहोजी तुम क्या क्या खरीदोगे" |- | "ऐसे वैसे ठिकाने पे जाना बुरा है" |- ! rowspan="5" | ''[[मधुमती]]'' | "दिल तड़प तड़प के कह रहा" | rowspan="5" | [[सलिल चौधरी]] | rowspan="5" | शैलेंद्र | [[मुकेश]] |- | "आजा रे परदेसी" | |- | "चढ़ गयो पापी बिछुआ" | [[मन्ना डे]] |- | "घड़ी घड़ी मेरा दिल धड़के" | rowspan="6" | |- | "ज़ुल्मी संग आँख लड़ि रे" |- ! rowspan="2" | ''[[अमरदीप (1958 फ़िल्म)|अमरदीप]]'' | "मेरे मन के बावरा पंछी" | rowspan="2" | सी. रामचंद्र | |- | "दिल की दुनिया बसाके सांवरिया" | |- ! rowspan="4" | ''[[अदालत (1958 फ़िल्म)|अदालत]]'' | "उनको यह शिकायत है" | rowspan="4" | [[मदन मोहन]] | rowspan="4" | राजेंद्र कृष्णन |- | "जाना था हमसे दूर" |- | "जा जा रे जा साजना" | |- | "यू हसरतो के दाग" | |} ===1959=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan="5" | ''[[कन्हैया (1959 फ़िल्म)|कन्हैया]]'' | "ओ मोरे साँवरे सलोने पिया, तोसे मिलने को तरसे जिया" | rowspan="5" | शंकर जैकिशन | | |- | "नि बलिए रुत है बहार की, कुछ मत पूछो कैसे बितिन" | | मुकेश |- | "ओ कँहाय्या आज आना ख्वाब में" | | rowspan="3" | |- | "सावन आवन कह गए दिल में समा के मिलने ना आये" | |- | "कहाँ है कहाँ है कन्हैया, समझे न प्यार मेरा" | |} ===1960 के दशक=== ===1960=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan="5" | ''[[दिल अपना और प्रीत पराई]]'' | "अजीब दास्तां है ये" | rowspan="5" | [[शंकर-जयकिशन]] | rowspan="4" | शैलेंद्र | rowspan="14" | |- | "अंदाज़ मेरा मस्ताना" |- | "दिल अपना और प्रीत पराई" |- | "मेरा दिल अब तेरा हो साजन" |- | "शीशा-ए-दिल" | [[हसरत जयपुरी]] |- ! rowspan="4" | ''[[परख (1960 फ़िल्म)|परख]]'' | "ओ साजन, बरखा बहार आयी" | rowspan="4" | [[सलिल चौधरी]] | rowspan="4" | शैलेंद्र |- | "मिला है किसी का झुमका" |- | "ये बंसी क्यूँ गाये" |- | "मेरे मन के दिये" |- ! rowspan="9" | ''[[मुग़ल-ए-आज़म]]'' | "मोहे पनघट पे" | rowspan="9" | नौशाद | rowspan="9" | शकील बदयूनि |- | "प्यार किया तो डरना क्या" |- | "मोहब्बत की झूठी" |- | "हमें काश तुमसे मोहब्बत" |- | "बेकस पे करम " |- | "तेरी मेहफिल में" | शमशाद बेगम |- | "ये दिल की लगी" | rowspan="3" | |- | "ए इश्क़ ये सब दुनियावाले" |- | "खु़दा निगेहबान" |} ===1961=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan="2" | ''[[नज़राना (1961 फ़िल्म)|नज़राना]]'' | "मेले हैं चिरागों की दिवाली" | rowspan="2 | रवि | rowspan="2" | राजेंद्र कृष्णन | |- | "बिखरा के ज़ुल्फें चमन में" | [[मुकेश]] |- ! rowspan="4" | ''[[गंगा जमना]]'' | "ढूँडो ढूँडो रे साजना" | rowspan="4" | [[नौशाद]] | rowspan="4" | शकील बदयूनि | rowspan="6" | |- | "दगाबाज़, तोरी बतियाँ न मानूँ रे" |- | "दो हँसों का जोड़ा बिछड़ गयो रे" |- | "झनन घूनगर बाजे" |- ! rowspan="2" | ''[[हम दोनों (1961 फ़िल्म)|हम दोनों]]'' | "अल्लाह तेरो नाम" | rowspan="2" | [[जयदेव]] | rowspan="2" | [[साहिर लुधियानवी]] |- | "प्रभु तेरो नाम" |} ===1962=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan="5" | ''अनपढ़'' | "आप की नज़रों ने समझा" | rowspan="5" | मदन मोहन कोहली | rowspan="5" | राजा मेहदी अली खान | |- | "है इसी में प्यार की आबरू" | |- | "रंग बिरंगी राखी लेके आई" | |- | "वो देखो, जला घर किसी का" | |- | "जिया ले गयो जी मोरा" | |- ! rowspan="3" | ''[[असली-नकली]]'' | "तुझे जीवन की डोर से" | rowspan="3" | शंकर जैकिशन | rowspan="3" | हसरत जैपुरी | मोहम्मद रफी |- | "लाख छुपाओ छुप न सकेगा" | rowspan="2" | |- | "तेरा मेरा प्यार अमर" |- ! rowspan="5" | ''[[प्रेम पत्र]]'' | "सावन की रातों में ऐसा" | rowspan="5" | [[सलिल चौधरी]] | | rowspan="2" | [[तलत महमूद]] |- | "ये मेरे अंधेरे उजाले न होते" | rowspan="2" | |- | "अब और न कुछ भी याद रहा" | |- | "दो अखियाँ झुकी झुकी सी" | | [[मुकेश]] |- | "खुश हो रहे थे" | | rowspan="4" | |- ! rowspan="4" | ''[[मन-मौजी]]'' | "मैं तो तुम संग नैन मिलाके" | rowspan="4" | [[मदन मोहन]] | rowspan="4" | राजेंद्र कृष्णन |- | "चंदा जा" |- | "आया है कहाँ से" |- | "एक था अब्दुल रहमान" | [[किशोर कुमार]] |} ===1963=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! ''[[परसमणि]]'' | "वो जब याद आये" | [[लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल]] | | rowspan="4" | [[मोहम्मद रफी]] |- ! ''[[ताज महल (1963 फ़िल्म)|ताज महल]]'' | "जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा" | रोशन | |- ! rowspan="3" | ''[[तेरे घर के सामने]]'' | "देखो रूठा न करो" | rowspan="3" | एस. डी. बर्मन | rowspan="3" | हसरत जैपुरी |- | "तेरे घर के सामने" |- | ये तन्हाई है रे है | |- ! rowspan="6" | ''[[मेरे मेहबूब]]'' | "तेरे प्यार में दिलदार" | rowspan="6" | [[नौशाद]] | rowspan="6" | शकील बदयुनि | |- | "अल्लाह बचाये" | |- | "मेरे मेहबूब तुझे" (female) | |- | "मेरे मेहबूब में क्या नही" | rowspan="2" | आशा भोसले |- | "जानेमं एक नज़र देख ले" |- | "याद में तेरी" |मोहम्मद रफी |- |rowspan='2' | '''[[दिल एक मंदिर]]''' |"हम तेरे प्यार में सारा आलम" | rowspan='2' | शंकर जैकीशन | हसरत जैपुरी | |- |"रुक जा रात" |शैलेंद्र | |- |} ===1964=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan="2" | ''[[राजकुमार (1964 फ़िल्म)|राजकुमार]]'' | "आजा आयी बहार" | rowspan="2" | शंकर जैकीशन | rowspan="4" | शैलेंद्र | |- | "नाच रे मन" | [[आशा भोसले]] |- ! rowspan="3" | ''[[संगम (1964 फ़िल्म)|संगम]]'' | "हर दिल जो प्यार करेगा" | | [[मुकेश]], [[महेंद्र कपूर]] |- | "ओ मेरे सनम" | | मुकेश |- | "मैं का करूँ राम मुझे बुढ्ढा मिलगया" | | हसरत जैपुरी | |- ! rowspan="4" | ''[[वो कौन थी (1964 फ़िल्म)|वो कौन थी?]]'' | "लग जा गले की फिर ये हसीं रात हो ना हो" | rowspan="4" | [[मदन मोहन]] | rowspan="4" | राजा मेहदी अली खान | rowspan="3" | |- | "नैना बरसे रिमझिम रिमझिम" |- | "जो हमने दास्ताँ अपनी सुनाई" |- | "छोड़ कर तेरे प्यार का दामन" | [[महेंद्र कपूर]] |} ===1965=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan="2" | ''[[आरज़ू (1965 फ़िल्म)|आरज़ू]]'' | "अजी रूठ कर अब कहाँ जाइयेगा" | rowspan="2" | शंकर जैकीशन | rowspan="2" | हसरत जैपुरी | rowspan="3" | |- | "बेदर्दी बलमा तुझको" |- ! ''[[भीगी रात (1965 फ़िल्म)|भीगी रात]]'' | "दिल जो न कह सका" | रोशन | [[मजरूह सुलतानपुरी]] |- ! ''[[गुमनाम (1965 फ़िल्म) |गुमनाम]]'' | "गुमनाम है कोयी" | शंकर सिंह रघुवंशी | हसरत जैपुरी, मजरूह सुलतानपुरी | |- ! rowspan="4" | ''[[गाइड (1965 फ़िल्म)|गाइड]]'' | "आज फिर जीने की तमन्ना" | rowspan="4" | [[सचिन देव बर्मन]] | rowspan="4" | शैलेंद्र | rowspan="3" | |- | "पिया तोसे नैना लागे रे" |- | "सईयाँ बेईमान" |- | "गाता रहे मेरा दिल" | [[किशोर कुमार]] |- ! rowspan="3" | ''[[जब जब फूल खिले]]'' | "मैं जो चली हिंदुस्तान से" | rowspan="3" | [[कल्याणजी-आनंदजी]] | rowspan="3" | [[आनंद बख्शी]] | rowspan="3" | |- | "पर्देसियों से न अखियाँ मिलाना" |- | "ये समा समा है प्यार का" |} ===1966=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan="3" | ''[[मेरा साया]]'' | "तू जहाँ जहाँ चलेगा मेरा साया साथ होगा" | rowspan="3" | [[मदन मोहन]] | rowspan="3" | [[राजा मेहदी अली खान]] | rowspan="7" | |- | "नैनों में बदरा छाए" |- | "नैनोनवाली ने हाय मेरा दिल लूटा" |- ! rowspan="4" | ''[[लव इन टोक्यो]]'' | "कोई मतवाला आया" | rowspan="4" | शंकर–जैकीशन | शैलेंद्र |- | "सयौनारा सयौनारा" | rowspan="3" | हसरत जैपुरी |- | "मुझे तुम मिल गए" |- | "ओ मेरे शाह-ए-खुबा" |- ! rowspan="4" | ''[[प्यार किये जा]]'' | "किसने पुकारा मुझे, मैं आ गयी" | rowspan="4" | लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल | rowspan="4" | राजेंद्र कृष्णन | rowspan="2" | महेंद्र कपूर |- | "फूल बन जाऊंगा शर्त ये है मगर" |- | "दिल हमने दे दिया, क्यों तुमने ले लिया" | किशोर कुमार |- | "सुनले प्यार के दुश्मन दुनिया दिलवालों के अफसाने" | आशा भोसले, किशोर कुमार, मन्ना डे |} ===1967=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan="9" | ''[[मिलन (1967 फ़िल्म)|मिलन]]'' | "सावन का महीना" | rowspan="13" | [[लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल]] | rowspan="9" | [[आनंद बख्शी]] | rowspan="3" | [[मुकेश]] |- | "हम तुम युग युग से" |- | "बोल गोरी बोल तेरा कौन पिया" |- | "आज दिल पे कोई" | |- | "हम तुम युग युग से - 2" | rowspan="3" | मुकेश |- | "ये गीत मिलन के" |- | "बोल गोरी बोल तेरा कौन पिया - 2" |- | "आज दिल पे कोई ज़ोर चलता नहीं - 2" | |- | "तोहे साँवरिया" | |- ! rowspan="4" | ''शागिर्द'' | "दिल विल प्यार व्यार" | rowspan="4" | [[मजरूह सुलतानपुरी]] | |- | "कहाँ कहाँ आन पड़ी" | |- | "वो हैं ज़रा ख़फ़ा ख़फ़ा" | [[मोहम्मद रफी]] |- | "रुक जा ए हवा" | rowspan="5" | |- ! rowspan="6" | ''[[रात और दिन]]'' | "न छेड़ो कल के अफसाने" | rowspan="6" | शंकर–जैकीशन | rowspan="5" | शैलेंद्र |- | "जीना हमको रास न आया" |- | "आवारा ए मेरे दिल" (खुश) |- | "आवारा ए मेरे दिल" (दुखी) |- | "दिल की गिरह खोल दो" | [[मन्ना डे]] |- | "रात और दिन दिया जले" | हसरत जैपुरी | |} ===1968=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan="3" | [[सरस्वतीचन्द्र (फ़िल्म) | सरस्वतीचंद्र]] | "फूल तुम्हें भेजा है खत में" | rowspan="3" | कल्याणजी-आनंदजी | rowspan="3" | इंदीवर | मुकेश |- |चंदन सा बदन | |- |मैं तो भूल चली | |} ===1969=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan='5' | ''[[इन्तकाम (1988 फ़िल्म) |इंतकाम]]'' | "हम तुम्हारे लिए" | rowspan='8' | [[लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल]] | rowspan='5' | राजिंदर कृष्ण | मोहम्मद रफ़ी |- | "कैसे रहूँ चुप" | |- | "गीत तेरे साज़ का" | |- | "ऐसा कोई महफ़िल सोयी" | |- | "आ जाने जाँ" | |- ! rowspan='3' | ''[[दो रास्ते]]'' | "बिंदिया चमकेगी" | rowspan='3' | आनंद बख्शी | |- | "चुप गए सारे नज़ारे (दिल ने दिल को पुकारा)" | मोहम्मद रफ़ी |- | "अपनी अपनी बीवी पे" | |- ! rowspan='3' | ''[[वारिस]]'' | "दिल की लगी को छुपाऊं कैसे" | rowspan='3' | आर डी बर्मन | rowspan='3' | राजेंद्र कृष्ण | |- | "लहरा के आया है झोंका बहार का" | rowspan='2' | मोहम्मद रफ़ी |- | "कभी कभी ऐसा भी होता है" |} ===1970 के दशक=== ===1970=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan="2" | [[जॉनी मेरा नाम (1970 फ़िल्म)|जॉनी मेरा नाम]] | "मोसे मोरा श्याम रूठा" | rowspan="2" | कल्याणजी-आनंदजी | rowspan="2" | [[इन्दीवर]] | rowspan="2" | |- | "बाबुल प्यारे" |- |} ===1971=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan='3' | ''[[हाथी मेरे साथी (1971 फ़िल्म)|हाथी मेरे साथी]]'' | "धक धक कैसे चलती है गाड़ी" | rowspan='3' | [[लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल]] | rowspan='3' | [[आनंद बख्शी]] | rowspan='3' | [[किशोर कुमार]] |- | "सुन जा आ ठंडी हवा" |- | "दिलबर जानी चली हवा मस्तानी" |- ! rowspan='6' | ''[[ज्वाला (1971 फ़िल्म)|ज्वाला]]'' | "जागी रात भरी याद में बलम" | rowspan='6' | शंकर-जयकिशन | rowspan='6' | | |- | "आहा ले गई ओ जिया ले गई, छवि सुंदर सलोने गोपाल की" | आशा भोसले |- | "देखो जी आँखों में देखो, आँखें हमारे सपने तुम्हारे" | |- | "होल होले एक भी ना घुंघरू बोले" | सुधा मल्होत्रा, गीता दत्त |- | "आजा रे आजा मेरे साजना आ, सपनों की पालकी" | मन्ना डे |- | "मेरा ज्वाला नाम जिया जलाने का काम" | |- ! rowspan='3' | ''[[मेमसाब (1971 फ़िल्म)|मेमसाब]]'' | "सुनो सुनो एक बात काहू" | rowspan='3' | सोनिक ओम | rowspan='3' | वर्मा मलिक | मोहम्मद रफ़ी |- | "मुझे ढूंढ ले आ कर सैंया" | |- | "जब से तेरे मेरे मन में" | |- ! ''[[शर्मीली]]'' | "मेघा छाये आधी रात" | एस. डी. बर्मन | | |} ===1972=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan='3' | ''[[शहजादा]]'' | "परियों की नगरी से आया" | rowspan='3' | राहुल देव बर्मन | rowspan='3' | राजेंद्र कृष्ण | |- | "रिमझिम रिमझिम देखो बरस रही है" | rowspan='2' | किशोर कुमार |- | "ना जाइयो, ना जाइयो, छोड़ के ना" |- ! rowspan='4' | ''हरि दर्शन'' | "अपना हरि है हजार हाथ वाला" | rowspan='4' | [[कल्याणजी-आनंदजी]] | | |- | "जय जय नारायण" | | महेंद्र कपूर |- | "मरने वाला है भगवान" | | |- | "प्रभु के भरोसे" | | |- ! ''[[परिचय (1972 फ़िल्म)|परिचय]]''<ref name="1973award">{{cite web |url=http://iffi.nic.in/Dff2011/Frm20thNFAAward.aspx |title=20th National Awards For Films (1973) |publisher=Directorate of Film Festivals |format=PDF |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20131105220349/http://iffi.nic.in/Dff2011/Frm20thNFAAward.aspx |archive-date=5 November 2013}}</ref> | "बीती ना बिताई रैना" | राहुल देव बर्मन | | |- ! rowspan='6' | ''[[पाकीज़ा]]'' | "चलते चलते" | rowspan='6' | गुलाम मोहम्मद | कैफ़ी आज़मी | rowspan='5' | |- | "मौसम है आशिकाना" | [[कमल अमरोही]] |- | "इन्ही लोगों ने" | [[मजरूह सुलतानपुरी]] |- | "ठाड़े रहियो" | [[कमल अमरोही]], [[मजरूह सुलतानपुरी]] |- | "तीर-ए-नज़र" | rowspan='2' | कैफ भोपाली |- | "चलो दिलदार चलो" | [[मोहम्मद रफी]] |- ! rowspan='2' | ''धड़कन'' | "मैं आया तेरे द्वारे" | rowspan='2' | रवि | | |- | "तो जा मेरे लाल सो जा मधुर सुरों में निंदिया गाये" | | |- ! rowspan='5' | ''[[यह गुलिस्ताँ हमारा (1972 फ़िल्म) |यह गुलिस्ताँ हमारा]]'' | "रैना सोयी सोयी" | rowspan='5' | एस. डी. बर्मन | | |- | "क्या ये जिंदगी है" | | |- | "ओ तुशिमा री तुशिमा" | | |- | "मेरा नाम आओ, मेरे पास आओ" | | डैनी डेन्जोंगपा |- | "गोरी गोरी गाँव की गोरी रे, किस लिए बन रही डोरी रे" | | rowspan='2' | किशोर कुमार |- ! rowspan='2' | ''[[सीता और गीता]]'' | "कोई लड़की मुझे कल रात" | rowspan='2' | आर. डी. बर्मन | rowspan='2' | आनंद बख्शी |- | "हां जी हां मैंने शराब" | rowspan='6' | एकल |- ! rowspan='5' | ''[[राजा जानी (1972 फ़िल्म)|राजा जानी]]'' | "आ आजा आजा" | rowspan='5' | लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल | rowspan='5' | |- | "ए बी सी डी छोड़ो" |- | "दुनिया का मेला" |- | "कितना मजा आ रहा है" |- | "मुबारक हो तुझे ऐ दिल" |} ===1973=== {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म ! scope="col" style="width:40%;" | गीत ! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार ! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार |- ! rowspan='4' | ''[[जुगनू (1973 फ़िल्म)|जुगनू]]'' | "जाने क्या पिलाये तूने" | rowspan='4' | [[एस। डी. बर्मन]] | | |- | "जब बाघों में जुगनू" | | |- | "गिर गया झुमका" | | किशोर कुमार |- | "मेरी ये पायलिया गीत तेरे गये" | | |- ! rowspan='2' | ''[[बंधे हाथ (1973 फ़िल्म) |बंधे हाथ]]'' | "ये कौन आज आया" | rowspan='2' | राहुल देव बर्मन | | |- | "तूने छीन लिया" | | |- ! rowspan='5' | ''[[दाग (1973 फ़िल्म)|दाग]]'' | "अब चाहे माँ रूठे या बाबा" | rowspan='5' | [[लक्ष्मीकांत प्यारेलाल]] | rowspan='5' | [[साहिर लुधियानवी]] | rowspan='2' | किशोर कुमार |- | "हम और तुम तुम और हम" |- | "जब भी जी चाहे" | एकल |- | "नी मैं यार मनाना नी" | मीनू पुरूषोत्तम |- | "हवा चले कैसे" | रोस्पैन='4' | एकल |- ! ''[[लोफर (1973 फ़िल्म)|लोफर]]'' | "मैं तेरे इश्क में" | आनंद बख्शी | |- ! rowspan='2' | ''[[फागुन (1973 फ़िल्म)|फागुन]]'' | "पिया संग खेलो होरी फागुन आयो रे" | rowspan='2' | एस. डी. बर्मन | rowspan='2' | मजरूह सुल्तानपुरी |- | "संध्या जो आए मन उड़ जाए जाने रे कहाँ" |- ! ''बरखा बहार'' | "नज़र का ये पैगाम दिया जो आपने मेरे नाम" | लक्ष्मीकांत प्यारेलाल | | मोहम्मद रफ़ी |- | rowspan='2' |'''[[अनामिका (1973 फ़िल्म)|अनामिका]]''' | "बाहों में चले आओ" | rowspan='2' | आर. डी. बर्मन | rowspan='2' | मजरूह सुल्तानपुरी | |- |"बाहों में चले आओ (संवादों के साथ)" |[[जया बच्चन]], [[संजीव कुमार]] |- | '''[[यादों की बारात]]''' | "यादों की बारात निकली है आज दिल के द्वारे (महिला)" | आर. डी. बर्मन | मजरूह सुल्तानपुरी | [[पद्मिनी कोल्हापुरे]], [[सुषमा श्रेष्ठ]] |- |} ==संदर्भ== {{Reflist}} [[श्रेणी:भारतीय गायकों के गाये गीतों की सूचियाँ]] {{भारत रत्न सम्मानित}} {{पद्म भूषण धारक 1960–1969}} {{दादासाहेब फाल्के पुरस्कार}} {{फ़िल्मफ़ेयर लाइफ़ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार}} {{फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका पुरस्कार}} [[श्रेणी:1929 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:पद्म भूषण]] [[श्रेणी:भारतीय हिन्दू]] [[श्रेणी:बॉलीवुड]] [[श्रेणी:गायिका]] [[श्रेणी:भारतीय फिल्म पार्श्वगायक]] [[श्रेणी:विकिपरियोजना संगीत]] [[श्रेणी:मध्य प्रदेश के लोग]] [[श्रेणी:दादासाहेब फाल्के पुरस्कार विजेता]] [[श्रेणी:भारत रत्न सम्मान प्राप्तकर्ता]] [[श्रेणी:इंदौर जिले के लोग]] [[श्रेणी:भारतीय महिला गायक]] [[श्रेणी:पद्म विभूषण धारक]] [[श्रेणी:भारतीय शास्त्रीय गायिका]] [[श्रेणी:२०२२ में निधन]] q0off5ln7cz3omy6qfzc61ot16xoh73 संदीप चक्रवर्ती 0 1619943 6630318 6627420 2026-10-16T22:01:05Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 0 sources and tagging 1 as dead.) #IABot (v2.0.9.6 6630318 wikitext text/x-wiki {{Infobox officeholder | image = Consul General of India NYC Sandeep Chakravorty.jpg | caption = चक्रवर्ती, 2019 | office1 = [[इंडोनेशिया में भारत के राजदूतों की सूची|इंडोनेशिया में भारत के राजदूत]] | term_start1 = अगस्त 2023 | termend1 = | predecessor1 = [[मनोज भारती]] | successor1 = | office2 = [[पेरू में भारत के राजदूतों की सूची|पेरू में भारत के राजदूत]] | term_start2 = 10 जुलाई 2015 | term_end2 = 2 अगस्त 2017 | predecessor2 = [[मनप्रीत वोहरा]] | successor2 = [[मंदरपु सुब्बरायुडु]] | occupation = [[भारतीय विदेश सेवा]] | children = | party = | alma_mater = | profession = | spouse = | website = | honorific_suffix = [[भारतीय विदेश सेवा|IFS]] }} '''संदीप चक्रवर्ती''' [[इंडोनेशिया में भारत के राजदूतों की सूची|इंडोनेशिया में भारत के राजदूत]] हैं। वे 2015 से 2017 तक पेरू में भारत के पूर्व राजदूत हैं। == प्रारंभिक जीवन और शिक्षा == संदीप चक्रवर्ती का जन्म 5 अप्रैल 1968 को हुआ था।<ref name=":0">{{Cite book|url=https://mea.gov.in/writereaddata/images/Civi_List_27-7-12.pdf|title=CIVIL LIST of the Indian Foreign Service (As on April 01, 2013)|last=GOVERNMENT OF INDIA Ministry of External Affairs Office of the Joint Secretary [Administration]|year=2013|format=pdf|archive-url=https://web.archive.org/web/20180422070724/https://mea.gov.in/writereaddata/images/Civi_List_27-7-12.pdf|archive-date=2018-04-22}}</ref> उन्होंने वानिकी प्रबंधन के साथ-साथ [[जेनेवा विश्वविद्यालय]] से अंतरराष्ट्रीय और यूरोपीय सुरक्षा में उन्नत अध्ययन तथा समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर प्राप्त की है। == कूटनीति == [[भारतीय विदेश सेवा]] में नियुक्त होने से पहले, वह पर्यावरण और सतत विकास परियोजनाओं वाले अनेक लाभ निरपेक्ष संगठनों में काम किए थे। वनों, मैंग्रोव और वन्यजीवों से जुड़े संरक्षण और स्थिरता के मुद्दों में उनकी गहरी रुचि रही है।<ref name=":1" /> चक्रवर्ती भारतीय विदेश सेवा में 1996 को भर्ती हुए।<ref name=":0" /><ref name=":1">{{Cite web |title=Profile |url=https://www.indianembassyjakarta.gov.in/profile |website=[[Embassy of India, Jakarta]] |language=en-in |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20240423140153/https://www.indianembassyjakarta.gov.in/profile |archive-date=2024-04-23 |access-date=2024-11-24}}</ref> वह 2012 को बांग्लादेश में भारत के उप उच्चायुक्त,<ref name=":0" /> 2015 से 2017 तक बोलीविया को समवर्ती मान्यता के साथ पेरू में भारत के राजदूत,<ref>{{Cite web |title=Former Ambassadors |url=https://www.eoilima.gov.in/page/former-ambassadors/ |website=Embassy of India, Lima, Peru |language=en-in |url-status=live |access-date=2024-11-24 |archive-date=2024-04-18 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240418101304/https://www.eoilima.gov.in/page/former-ambassadors/ }}</ref><ref>{{Cite web |title=Sandeep Chakravorty concurrently accredited as next Ambassador of India to the Plurinational State of Bolivia |url=https://www.mea.gov.in/rajya-sabha.htm?dtl/25775/Sandeep+Chakravorty+concurrently+accredited+as+next+Ambassador+of+India+to+the+Plurinational+State+of+Bolivia |website=[[Ministry of External Affairs (India)|Ministry of External Affairs, Government of India]] |date=2015-08-31 |language=en-in |url-status=live |access-date=2024-11-24}}</ref> और 2017 से 2020 तक न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्यदूत थे।<ref name=":1" /><ref>{{Cite web |title=The Transformation in India-U.S. Relations: A Conversation with Consul General Sandeep Chakravorty |url=https://global.rutgers.edu/the-transformation-in-india-us-relations |website=[[Rutgers University|Rutgers]] |date=2019-04-03 |language=en-US |url-status=live |access-date=2024-11-24}} {{Dead link|date=अक्तूबर 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref><ref>{{Cite web |title=Sandeep Chakravorty |url=https://indianeconomy.columbia.edu/directory/sandeep-chakravorty |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20250514182622/https://indianeconomy.columbia.edu/directory/sandeep-chakravorty |archive-date=2025-05-14 |access-date=2024-11-24 |website=Columbia University in the City of New York |language=en-US}}</ref><ref>{{Cite web |title=Consul General |url=https://www.indiainnewyork.gov.in/pages?id=Vy80RENjZGxxTTNDOHN5VkRJSGlJUT09&subid=bFZHcDF0alhzWTYvZGtYZTc1ZyswUT09 |website=Consulate General of India, New York (USA) |language=en-in |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20191006160601/https://www.indiainnewyork.gov.in/pages?id=Vy80RENjZGxxTTNDOHN5VkRJSGlJUT09&subid=bFZHcDF0alhzWTYvZGtYZTc1ZyswUT09 |archive-date=2019-10-06}}</ref> उन्होंने स्पेन और कोलम्बिया में भारतीय मिशनों में भी काम किया हैं।<ref name=":1" /> 21 जुलाई 2023 को, चक्रवर्ती को पूर्वी तिमोर को समवर्ती मान्यता के साथ इंडोनेशिया में भारत के राजदूत के पद के लिए चुना गया।<ref>{{Cite web |title=Shri Sandeep Chakravorty appointed as the next Ambassador of India to the Republic of Indonesia |url=https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl/36871/Shri+Sandeep+Chakravorty+appointed+as+the+next+Ambassador+of+India+to+the+Republic+of+Indonesia |website=[[Ministry of External Affairs (India)|Ministry of External Affairs, Government of India]] |date=2023-07-21 |language=en-in |url-status=live |access-date=2024-11-24}}</ref><ref>{{Cite web |date=2023-11-08 |title=Shri Sandeep Chakravorty concurrently accredited as the next Ambassador of India to the Democratic Republic of Timor-Leste |url=https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl/37245/Shri+Sandeep+Chakravorty+concurrently+accredited+as+the+next+Ambassador+of+India+to+the+Democratic+Republic+of+TimorLeste |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20231111011150/https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl/37245/Shri+Sandeep+Chakravorty+concurrently+accredited+as+the+next+Ambassador+of+India+to+the+Democratic+Republic+of+TimorLeste |archive-date=2023-11-11 |access-date=2024-11-24 |website=[[Ministry of External Affairs (India)|Ministry of External Affairs, Government of India]] |language=en-in}}</ref> इससे पहले, वह तीन सालो तक [[विदेश मंत्रालय (भारत)|विदेश मंत्रालय]] में संयुक्त सचिव थे, जिस समय वह भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों के प्रभारी थे।<ref name=":1" /> 23 अक्टूबर को, उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति को अपना परिचय पत्र प्रस्तुत किया।<ref>{{Cite web |last=Translation |first=Office of Assistant to Deputy Cabinet Secretary for State Documents & |date=2023-10-23 |title=President Jokowi Receives Credentials from 12 Ambassadors of Friendly Countries |url=https://setkab.go.id/en/president-jokowi-receives-credentials-from-12-ambassadors-of-friendly-countries/ |access-date=2026-02-14 |website=Sekretariat Kabinet Republik Indonesia}}</ref> 20 दिसम्बर को, उन्होंने पूर्वी तिमोर के राष्ट्रपति को अपना परिचय पत्र प्रस्तुत किया।<ref>{{Cite web |title=Indian envoy Sandeep Chakravorty presents credentials to Timor Leste President |url=https://www.aninews.in/news/world/asia/indian-envoy-sandeep-chakravorty-presents-credentials-to-timor-leste-president20231220152907/ |access-date=2026-02-14 |website=ANI News |language=en}}</ref> == संदर्भ == {{Reflist}} [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:1968 में जन्मे लोग]] s3k7zm3bpvsiug3yfoh171es9az8zsh विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/ज॓ डी जैन 4 1620022 6630287 6628249 2026-10-16T18:00:17Z चाहर धर्मेंद्र 703114 /* ज॓ डी जैन */ उत्तर दिया: हटाएँ - नामांकन अनुसार (-) ([[mw:c:Special:MyLanguage/User:JWBTH/CD|CD]]) 6630287 wikitext text/x-wiki === [[:ज॓ डी जैन]] === {{हहेच श्रेणीकरण|वर्तमान=हाँ|प्रकार=लेख|तिथि=अक्टूबर 2026}} :{{la|1=ज॓ डी जैन}} :{{गूगल|खोज|समाचार|पुस्तक|विद्वान|ज॓ डी जैन -विकिपीडिया -wikipedia}} नामांकन के लिये कारण: उल्लेखनीयता संदिग्ध [[User:विक्रम प्रताप|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:विक्रम प्रताप|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 03:27, 11 अक्टूबर 2026 (UTC) : हटाएँ - नामांकन अनुसार <span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 18:00, 16 अक्टूबर 2026 (UTC) qme48lrwkec3xcv5yc0syu3zhzw6q0m प्रारूप:Sudhanshu Krishn Rai 0 1620047 6630421 6629287 2026-10-17T11:21:12Z KalaKar Ballia 953182 /* करियर */ छोटा सा सुधार किया। 6630421 wikitext text/x-wiki {{db-spam}} {{Infobox actor | name = Sudhanshu Krishn Rai | image =Sudhanshu Krishn Rai Actor Primary.jpg | caption = Sudhanshu Krishn Rai (Abhineta va Nirmata) | birth_date = 4 Navambar 1992 | birth_place = Narhi, Ballia, Uttar Pradesh, Bharat | nationality = Bhartiya | occupation = Abhineta, Film Nirmata, Lekhak | years_active = 2017–vartaman | known_for = Sajni Chura Lihli Dilwa Hamar, Bypass Road }} '''[[File:Sudhanshu Krishn Rai Actor Primary.jpg | thumb | सुधांशु कृष्ण राय]] '''सुधांशु कृष्ण राय''' (जन्म: 4 नवंबर 1992) एक भारतीय फिल्म निर्माता और अभिनेता हैं, जो मुख्य रूप से हिंदी टेलीविजन, बॉलीवुड और क्षेत्रीय भोजपुरी सिनेमा में अपने काम के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने 50 से अधिक लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों में अभिनय किया है और फिल्म निर्माता के रूप में 'बागेश्वर बालाजी फिल्म्स प्रोडक्शन प्राइवेट लिमिटेड' (Bageshwar Balaji Films Production Pvt. Ltd.) के एम.डी. (M.D.) हैं। == प्रारंभिक जीवन == सुधांशु कृष्ण राय का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नरही गांव में एक प्रतिष्ठित राय परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री संतोष कुमार राय है और उनकी माता का नाम स्वर्गीय शिखा राय था। उनका पारिवारिक जुड़ाव कला और सिनेमा से गहरा है; बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री संदाली सिन्हा उनकी बुआ की लड़की हैं। उनके बड़े भाई परमांशु कुमार राय (गौरव राय) हैं, जो उनकी फिल्मों की पटकथा लिखते हैं। उनकी भाभी मोनिका राय हैं और उनका भतीजा यक्षित गौरव राय है, जिन्होंने बाल कलाकार के रूप में भोजपुरी सिनेमा में कदम रख लिया है। == करियर == राय ने अपने करियर की शुरुआत भारतीय टेलीविजन उद्योग से की। उन्होंने 'क्राइम अलर्ट' और 'सावधान इंडिया' के कई एपिसोड्स में मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। इसके अलावा उन्होंने कई प्रसिद्ध सीरियल्स जैसे 'परमावतार श्री कृष्ण', 'शक्ति - अस्तित्व के एहसास की', 'अलीबाबा 40 चोर', 'तेनाली रामा', 'विघ्नहर्ता गणेश' और 'मेरे साईं' में काम किया। === बॉलीवुड और ओटीटी (OTT) === राय ने साल 2019 में बॉलीवुड फिल्म 'बायпас रोड' में एक वॉचमैन का किरदार निभाया था। साल 2024 में, उन्होंने नेटफ्लिक्स की सीरीज़ 'त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर' के एपिसोड 9 में 'सत्संगी' का किरदार निभाया। उन्होंने बॉलीवुड फिल्म 'पटना शुक्ला' (2024) में एक वार्ड बॉय का किरदार भी निभाया है। === भोजपुरी सिनेमा (फिल्म निर्माण) === अपने बैनर 'बागेश्वर बालाजी फिल्म्स' के तहत उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में साफ-सुथरी और पारिवारिक फिल्मों को बढ़ावा देने के ध्येय से कदम रखा। उनकी मुख्य फीचर फिल्म "सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार" है, जिसमें उन्होंने लीड एक्टर और प्रोड्यूसर की भूमिका निभाई है। वर्तमान में, वे अपने भतीजे के नाम पर स्थापित प्रोडक्शन कंपनी 'यक्षित गौरव राय सिनेमा' (Yakshit Gaurav Rai Cinema) के मैनेजिंग डायरेक्टर (M.D.) के रूप में भी कार्यरत हैं और इसके तहत नई फिल्मों के निर्माण की योजना बना रहे खेलकूद और व्यक्तिगत रुचियाँ अभिनय और फिल्म निर्माण के अलावा, सुधांशु कृष्ण राय की बचपन से ही खेलकूद में गहरी रुचि रही है। वे अपने शुरुआती दिनों में स्थानीय स्तर पर क्रिकेट और कबड्डी के खेल में काफी सक्रिय रहे। इसके साथ ही वे बैडमिंटन और अन्य पारंपरिक खेलों में भी उत्साहपूर्वक भाग लेते थे। == फिल्मोग्राफी == === फिल्में === * सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार (भोजपुरी) - अभिनेता एवं मुख्य निर्माता * बायपास रोड (2019, बॉलीवुड) - वॉचमैन * पटना शुक्ला (2024, बॉलीवुड) - वार्ड बॉय * हारर है (भोजपुरी, आगामी) - मुख्य अभिनेता (भूत-प्रेतों पर आधारित फ़िल्म) * रंगेबाज़ (भोजपुरी, आगामी) - मुख्य अभिनेता (फ़िल्म स्टार एंटरटेनर प्रोडक्शन) === ओटीटी (OTT) और टीवी धारावाहिक === * त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर (2024, नेटफ्लिक्स) - सत्संगी (एपिसोड 9) * क्राइम अलर्ट - विभिन्न भूमिकाएं * सावधान इंडिया - विभिन्न भूमिकाएं == समाचार एवं मीडिया संदर्भ == * दैनिक जागरण (कानपुर/बिहार संस्करण, 11 जुलाई 2023) - "सुधांशु कृष्ण राय व गणेश शंकर सोनी की भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' का भव्य मुहूर्त सम्पन्न" (फिल्म निर्माण, भव्य मुहूर्त और मुख्य कलाकार सुधांशु कृष्ण राय, रूपा मिश्रा व यक्षित गौरव राय पर विशेष राष्ट्रीय प्रिंट कवरेज)। * दैनिक जागरण (बलिया संस्करण) - "भोजपुरी रग-रग में, इसे अर्श तक पहुंचाना मुख्य ध्येय" (अभिनेता व निर्माता सुधांशु राय का विशेष साक्षात्कार, जिसमें नरहीं गांव के मूल निवासी होने और सती मइया रखिह सेंदुरवा के लाज आदि फ़िल्मों का उल्लेख है)। * जनसंदेश टाइम्स (बलिया संस्करण) - "अश्लीलता परोसने वालों को नकारें" (अभिनेता, निर्माता व गायक सुधांशु राय की आगामी हॉरर फ़िल्म 'हारर है', फ़िल्म 'रंगेबाज़' और भोजपुरी एल्बम 'तरक्की देख जलेला' पर विशेष प्रेस वार्ता रिपोर्ट)। * जन सागर टुडे (मनोरंजन/आजमगढ़) - "भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' का फर्स्ट लुक आउट, पोस्ट-प्रोडक्शन का काम पूरा।" * हिन्द लाइव साप्ताहिक (मनोरंजन ब्लॉक, अंक 20) - "सुधांशु कृष्ण राय से पूजा तिवारी रचाई शादी, सोशल मीडिया पर फोटो हुए वायरल" (फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' के दृश्य पर विशेष मीडिया रिपोर्ट)। * यशभूमि हिंदी समाचारपत्र (कुरुक्षेत्र संस्करण, 12 जुलाई 2023) - "सुधांशु कृष्ण राय व गणेश शंकर सोनी की भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' का भव्य मुहूर्त सम्पन्न।" * हिंदी दैनिक घटनाएं (सिनेमा न्यूज़ संस्करण, 12 जुलाई 2023) - "भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' के भव्य मुहूर्त तथा निर्माण पर विशेष मीडिया कवरेज।" == बाहरी कड़ियाँ == * [https://imdb.com सुधांशु कृष्ण राय] आईएमडीबी (IMDb) पर * [https://facebook.com सुधांशु कृष्ण राय] फेसबुक पर * [https://instagram.com सुधांशु कृष्ण राय] इंस्टाग्राम पर <references /> [[File:Sudhanshu_Krishn_Rai_Actor.jpg.jpg | thumb | सुधांशु कृष्ण राय (शूटिंग के दौरान)]] 391rcwohawhohvk0n2g73nyc5vcqjsr 6630424 6630421 2026-10-17T11:26:47Z KalaKar Ballia 953182 /* करियर */ छोटा सा सुधार किया। 6630424 wikitext text/x-wiki {{db-spam}} {{Infobox actor | name = Sudhanshu Krishn Rai | image =Sudhanshu Krishn Rai Actor Primary.jpg | caption = Sudhanshu Krishn Rai (Abhineta va Nirmata) | birth_date = 4 Navambar 1992 | birth_place = Narhi, Ballia, Uttar Pradesh, Bharat | nationality = Bhartiya | occupation = Abhineta, Film Nirmata, Lekhak | years_active = 2017–vartaman | known_for = Sajni Chura Lihli Dilwa Hamar, Bypass Road }} '''[[File:Sudhanshu Krishn Rai Actor Primary.jpg | thumb | सुधांशु कृष्ण राय]] '''सुधांशु कृष्ण राय''' (जन्म: 4 नवंबर 1992) एक भारतीय फिल्म निर्माता और अभिनेता हैं, जो मुख्य रूप से हिंदी टेलीविजन, बॉलीवुड और क्षेत्रीय भोजपुरी सिनेमा में अपने काम के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने 50 से अधिक लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों में अभिनय किया है और फिल्म निर्माता के रूप में 'बागेश्वर बालाजी फिल्म्स प्रोडक्शन प्राइवेट लिमिटेड' (Bageshwar Balaji Films Production Pvt. 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(M.D.) हैं। == प्रारंभिक जीवन == सुधांशु कृष्ण राय का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नरही गांव में एक प्रतिष्ठित राय परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री संतोष कुमार राय है और उनकी माता का नाम स्वर्गीय शिखा राय था। उनका पारिवारिक जुड़ाव कला और सिनेमा से गहरा है; बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री संदाली सिन्हा उनकी बुआ की लड़की हैं। उनके बड़े भाई परमांशु कुमार राय (गौरव राय) हैं, जो उनकी फिल्मों की पटकथा लिखते हैं। उनकी भाभी मोनिका राय हैं और उनका भतीजा यक्षित गौरव राय है, जिन्होंने बाल कलाकार के रूप में भोजपुरी सिनेमा में कदम रख लिया है। == करियर == राय ने अपने करियर की शुरुआत भारतीय टेलीविजन उद्योग से की। उन्होंने 'क्राइम अलर्ट' और 'सावधान इंडिया' के कई एपिसोड्स में मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। इसके अलावा उन्होंने कई प्रसिद्ध सीरियल्स जैसे 'परमावतार श्री कृष्ण', 'शक्ति - अस्तित्व के एहसास की', 'अलीबाबा 40 चोर', 'तेनाली रामा', 'विघ्नहर्ता गणेश' और 'मेरे साईं' में काम किया। === बॉलीवुड और ओटीटी (OTT) === राय ने साल 2019 में बॉलीवुड फिल्म 'बायпас रोड' में एक वॉचमैन का किरदार निभाया था। साल 2024 में, उन्होंने नेटफ्लिक्स की सीरीज़ 'त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर' के एपिसोड 9 में 'सत्संगी' का किरदार निभाया। उन्होंने बॉलीवुड फिल्म 'पटना शुक्ला' (2024) में एक वार्ड बॉय का किरदार भी निभाया है। === भोजपुरी सिनेमा (फिल्म निर्माण) === अपने बैनर 'बागेश्वर बालाजी फिल्म्स' के तहत उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में साफ-सुथरी और पारिवारिक फिल्मों को बढ़ावा देने के ध्येय से कदम रखा। उनकी मुख्य फीचर फिल्म "सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार" है, जिसमें उन्होंने लीड एक्टर और प्रोड्यूसर की भूमिका निभाई है। वर्तमान में, वे अपने भतीजे के नाम पर स्थापित प्रोडक्शन कंपनी 'यक्षित गौरव राय सिनेमा' (Yakshit Gaurav Rai Cinema) के मैनेजिंग डायरेक्टर (M.D.) के रूप में भी कार्यरत हैं और इसके तहत नई फिल्मों के निर्माण की योजना बना रहे === खेलकूद और व्यक्तिगत रुचियाँ === अभिनय और फिल्म निर्माण के अलावा, सुधांशु कृष्ण राय की बचपन से ही खेलकूद में गहरी रुचि रही है। वे अपने शुरुआती दिनों में स्थानीय स्तर पर क्रिकेट और कबड्डी के खेल में काफी सक्रिय रहे। इसके साथ ही वे बैडमिंटन और अन्य पारंपरिक खेलों में भी उत्साहपूर्वक भाग लेते थे। == फिल्मोग्राफी == === फिल्में === * सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार (भोजपुरी) - अभिनेता एवं मुख्य निर्माता * बायपास रोड (2019, बॉलीवुड) - वॉचमैन * पटना शुक्ला (2024, बॉलीवुड) - वार्ड बॉय * हारर है (भोजपुरी, आगामी) - मुख्य अभिनेता (भूत-प्रेतों पर आधारित फ़िल्म) * रंगेबाज़ (भोजपुरी, आगामी) - मुख्य अभिनेता (फ़िल्म स्टार एंटरटेनर प्रोडक्शन) === ओटीटी (OTT) और टीवी धारावाहिक === * त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर (2024, नेटफ्लिक्स) - सत्संगी (एपिसोड 9) * क्राइम अलर्ट - विभिन्न भूमिकाएं * सावधान इंडिया - विभिन्न भूमिकाएं == समाचार एवं मीडिया संदर्भ == * दैनिक जागरण (कानपुर/बिहार संस्करण, 11 जुलाई 2023) - "सुधांशु कृष्ण राय व गणेश शंकर सोनी की भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' का भव्य मुहूर्त सम्पन्न" (फिल्म निर्माण, भव्य मुहूर्त और मुख्य कलाकार सुधांशु कृष्ण राय, रूपा मिश्रा व यक्षित गौरव राय पर विशेष राष्ट्रीय प्रिंट कवरेज)। * दैनिक जागरण (बलिया संस्करण) - "भोजपुरी रग-रग में, इसे अर्श तक पहुंचाना मुख्य ध्येय" (अभिनेता व निर्माता सुधांशु राय का विशेष साक्षात्कार, जिसमें नरहीं गांव के मूल निवासी होने और सती मइया रखिह सेंदुरवा के लाज आदि फ़िल्मों का उल्लेख है)। * जनसंदेश टाइम्स (बलिया संस्करण) - "अश्लीलता परोसने वालों को नकारें" (अभिनेता, निर्माता व गायक सुधांशु राय की आगामी हॉरर फ़िल्म 'हारर है', फ़िल्म 'रंगेबाज़' और भोजपुरी एल्बम 'तरक्की देख जलेला' पर विशेष प्रेस वार्ता रिपोर्ट)। * जन सागर टुडे (मनोरंजन/आजमगढ़) - "भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' का फर्स्ट लुक आउट, पोस्ट-प्रोडक्शन का काम पूरा।" * हिन्द लाइव साप्ताहिक (मनोरंजन ब्लॉक, अंक 20) - "सुधांशु कृष्ण राय से पूजा तिवारी रचाई शादी, सोशल मीडिया पर फोटो हुए वायरल" (फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' के दृश्य पर विशेष मीडिया रिपोर्ट)। * यशभूमि हिंदी समाचारपत्र (कुरुक्षेत्र संस्करण, 12 जुलाई 2023) - "सुधांशु कृष्ण राय व गणेश शंकर सोनी की भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' का भव्य मुहूर्त सम्पन्न।" * हिंदी दैनिक घटनाएं (सिनेमा न्यूज़ संस्करण, 12 जुलाई 2023) - "भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' के भव्य मुहूर्त तथा निर्माण पर विशेष मीडिया कवरेज।" == बाहरी कड़ियाँ == * [https://imdb.com सुधांशु कृष्ण राय] आईएमडीबी (IMDb) पर * [https://facebook.com सुधांशु कृष्ण राय] फेसबुक पर * [https://instagram.com सुधांशु कृष्ण राय] इंस्टाग्राम पर <references /> [[File:Sudhanshu_Krishn_Rai_Actor.jpg.jpg | thumb | सुधांशु कृष्ण राय (शूटिंग के दौरान)]] p5rch0fmndg2hx1vqe6ut8ful95wfh7 6630429 6630424 2026-10-17T11:47:17Z KalaKar Ballia 953182 /* समाचार एवं मीडिया संदर्भ */ छोटा सा सुधार किया। 6630429 wikitext text/x-wiki {{db-spam}} {{Infobox actor | name = Sudhanshu Krishn Rai | image =Sudhanshu Krishn Rai Actor Primary.jpg | caption = Sudhanshu Krishn Rai (Abhineta va Nirmata) | birth_date = 4 Navambar 1992 | birth_place = Narhi, Ballia, Uttar Pradesh, Bharat | nationality = Bhartiya | occupation = Abhineta, Film Nirmata, Lekhak | years_active = 2017–vartaman | known_for = Sajni Chura Lihli Dilwa Hamar, Bypass Road }} '''[[File:Sudhanshu Krishn Rai Actor Primary.jpg | thumb | सुधांशु कृष्ण राय]] '''सुधांशु कृष्ण राय''' (जन्म: 4 नवंबर 1992) एक भारतीय फिल्म निर्माता और अभिनेता हैं, जो मुख्य रूप से हिंदी टेलीविजन, बॉलीवुड और क्षेत्रीय भोजपुरी सिनेमा में अपने काम के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने 50 से अधिक लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों में अभिनय किया है और फिल्म निर्माता के रूप में 'बागेश्वर बालाजी फिल्म्स प्रोडक्शन प्राइवेट लिमिटेड' (Bageshwar Balaji Films Production Pvt. Ltd.) के एम.डी. (M.D.) हैं। == प्रारंभिक जीवन == सुधांशु कृष्ण राय का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नरही गांव में एक प्रतिष्ठित राय परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री संतोष कुमार राय है और उनकी माता का नाम स्वर्गीय शिखा राय था। उनका पारिवारिक जुड़ाव कला और सिनेमा से गहरा है; बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री संदाली सिन्हा उनकी बुआ की लड़की हैं। उनके बड़े भाई परमांशु कुमार राय (गौरव राय) हैं, जो उनकी फिल्मों की पटकथा लिखते हैं। उनकी भाभी मोनिका राय हैं और उनका भतीजा यक्षित गौरव राय है, जिन्होंने बाल कलाकार के रूप में भोजपुरी सिनेमा में कदम रख लिया है। == करियर == राय ने अपने करियर की शुरुआत भारतीय टेलीविजन उद्योग से की। उन्होंने 'क्राइम अलर्ट' और 'सावधान इंडिया' के कई एपिसोड्स में मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। इसके अलावा उन्होंने कई प्रसिद्ध सीरियल्स जैसे 'परमावतार श्री कृष्ण', 'शक्ति - अस्तित्व के एहसास की', 'अलीबाबा 40 चोर', 'तेनाली रामा', 'विघ्नहर्ता गणेश' और 'मेरे साईं' में काम किया। === बॉलीवुड और ओटीटी (OTT) === राय ने साल 2019 में बॉलीवुड फिल्म 'बायпас रोड' में एक वॉचमैन का किरदार निभाया था। साल 2024 में, उन्होंने नेटफ्लिक्स की सीरीज़ 'त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर' के एपिसोड 9 में 'सत्संगी' का किरदार निभाया। उन्होंने बॉलीवुड फिल्म 'पटना शुक्ला' (2024) में एक वार्ड बॉय का किरदार भी निभाया है। === भोजपुरी सिनेमा (फिल्म निर्माण) === अपने बैनर 'बागेश्वर बालाजी फिल्म्स' के तहत उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में साफ-सुथरी और पारिवारिक फिल्मों को बढ़ावा देने के ध्येय से कदम रखा। उनकी मुख्य फीचर फिल्म "सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार" है, जिसमें उन्होंने लीड एक्टर और प्रोड्यूसर की भूमिका निभाई है। वर्तमान में, वे अपने भतीजे के नाम पर स्थापित प्रोडक्शन कंपनी 'यक्षित गौरव राय सिनेमा' (Yakshit Gaurav Rai Cinema) के मैनेजिंग डायरेक्टर (M.D.) के रूप में भी कार्यरत हैं और इसके तहत नई फिल्मों के निर्माण की योजना बना रहे === खेलकूद और व्यक्तिगत रुचियाँ === अभिनय और फिल्म निर्माण के अलावा, सुधांशु कृष्ण राय की बचपन से ही खेलकूद में गहरी रुचि रही है। वे अपने शुरुआती दिनों में स्थानीय स्तर पर क्रिकेट और कबड्डी के खेल में काफी सक्रिय रहे। इसके साथ ही वे बैडमिंटन और अन्य पारंपरिक खेलों में भी उत्साहपूर्वक भाग लेते थे। == फिल्मोग्राफी == === फिल्में === * सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार (भोजपुरी) - अभिनेता एवं मुख्य निर्माता * बायपास रोड (2019, बॉलीवुड) - वॉचमैन * पटना शुक्ला (2024, बॉलीवुड) - वार्ड बॉय * हारर है (भोजपुरी, आगामी) - मुख्य अभिनेता (भूत-प्रेतों पर आधारित फ़िल्म) * रंगेबाज़ (भोजपुरी, आगामी) - मुख्य अभिनेता (फ़िल्म स्टार एंटरटेनर प्रोडक्शन) === ओटीटी (OTT) और टीवी धारावाहिक === * त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर (2024, नेटफ्लिक्स) - सत्संगी (एपिसोड 9) * क्राइम अलर्ट - विभिन्न भूमिकाएं * सावधान इंडिया - विभिन्न भूमिकाएं == समाचार एवं मीडिया संदर्भ == <references /> * दैनिक जागरण (कानपुर/बिहार संस्करण, 11 जुलाई 2023) - "सुधांशु कृष्ण राय व गणेश शंकर सोनी की भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' का भव्य मुहूर्त सम्पन्न" (फिल्म निर्माण, भव्य मुहूर्त और मुख्य कलाकार सुधांशु कृष्ण राय, रूपा मिश्रा व यक्षित गौरव राय पर विशेष राष्ट्रीय प्रिंट कवरेज)। * दैनिक जागरण (बलिया संस्करण) - "भोजपुरी रग-रग में, इसे अर्श तक पहुंचाना मुख्य ध्येय" (अभिनेता व निर्माता सुधांशु राय का विशेष साक्षात्कार, जिसमें नरहीं गांव के मूल निवासी होने और सती मइया रखिह सेंदुरवा के लाज आदि फ़िल्मों का उल्लेख है)। * जनसंदेश टाइम्स (बलिया संस्करण) - "अश्लीलता परोसने वालों को नकारें" (अभिनेता, निर्माता व गायक सुधांशु राय की आगामी हॉरर फ़िल्म 'हारर है', फ़िल्म 'रंगेबाज़' और भोजपुरी एल्बम 'तरक्की देख जलेला' पर विशेष प्रेस वार्ता रिपोर्ट)। * जन सागर टुडे (मनोरंजन/आजमगढ़) - "भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' का फर्स्ट लुक आउट, पोस्ट-प्रोडक्शन का काम पूरा।" * हिन्द लाइव साप्ताहिक (मनोरंजन ब्लॉक, अंक 20) - "सुधांशु कृष्ण राय से पूजा तिवारी रचाई शादी, सोशल मीडिया पर फोटो हुए वायरल" (फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' के दृश्य पर विशेष मीडिया रिपोर्ट)। * यशभूमि हिंदी समाचारपत्र (कुरुक्षेत्र संस्करण, 12 जुलाई 2023) - "सुधांशु कृष्ण राय व गणेश शंकर सोनी की भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' का भव्य मुहूर्त सम्पन्न।" * हिंदी दैनिक घटनाएं (सिनेमा न्यूज़ संस्करण, 12 जुलाई 2023) - "भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' के भव्य मुहूर्त तथा निर्माण पर विशेष मीडिया कवरेज।" == बाहरी कड़ियाँ == * [https://imdb.com सुधांशु कृष्ण राय] आईएमडीबी (IMDb) पर * [https://facebook.com सुधांशु कृष्ण राय] फेसबुक पर * [https://instagram.com सुधांशु कृष्ण राय] इंस्टाग्राम पर <references /> [[File:Sudhanshu_Krishn_Rai_Actor.jpg.jpg | thumb | सुधांशु कृष्ण राय (शूटिंग के दौरान)]] o9gz66fnq40qipusxpjocvjn9odo5fk २०२६ 0 1620124 6630383 6629461 2026-10-17T08:04:10Z चाहर धर्मेंद्र 703114 /* अक्टूबर */ 6630383 wikitext text/x-wiki {{Year nav|2029}} 2026 ( [[रोमन संख्यांक|MMXXVI]] ) वर्तमान वर्ष है, और यह [[ग्रेगोरी पंचांग|ग्रेगोरियन कैलेंडर]] के अनुसार गुरुवार से शुरू होने वाला एक सामान्य वर्ष है , जो [[आम युग]] (CE) और [[ईसवी|एनो डोमिनी]] (AD) पदनामों का 2026वां वर्ष, [[३री सहस्राब्दी|तीसरी सहस्राब्दी]] और [[२१वीं शताब्दी|21वीं शताब्दी]] का 26वां वर्ष और 2020 के दशक का 7वां वर्ष है। == कार्यक्रम == === जनवरी === * [[१ जनवरी|1 जनवरी]] ** [[बुल्गारिया]] ने [[यूरो]] को अपनाया और [[यूरोक्षेत्र|यूरोज़ोन]] का 21वां सदस्य देश बन गया।<ref>{{cite press release |title=Bulgaria ready to use the euro from 1 January 2026: Council takes final steps |date=जुलाई 8, 2025 |publisher=यूरोपीय संघ परिषद|url=https://www.consilium.europa.eu/en/press/press-releases/2025/07/08/bulgaria-ready-to-use-the-euro-from-1-january-2026-council-takes-final-steps/ |access-date=अगस्त 14, 2025 |archive-date=जुलाई 16, 2025 |archive-url=https://web.archive.org/web/20250716223419/https://www.consilium.europa.eu/en/press/press-releases/2025/07/08/bulgaria-ready-to-use-the-euro-from-1-january-2026-council-takes-final-steps/ |url-status=live}}</ref> === फ़रवरी === * [[१ फ़रवरी|1 फरवरी]] – 2026 कोस्टा रिका के आम चुनाव : [[लौरा फ़ेर्नान्देज़ देल्गादो]] [[कोस्टा रिका के राष्ट्रपति|कोस्टा रिका की राष्ट्रपति]] चुनी गईं , और उनकी पार्टी ने विधान सभा में भी बहुमत हासिल किया।<ref>{{Cite web |last= मोरा|first=कार्लोस|date=2024-11-28 |title=TSE fija cronograma para elecciones nacionales de 2026 |url=https://crhoy.com/tse-fija-cronograma-para-elecciones-nacionales-de-2026/ |access-date=2025-10-26 |website=सीआर होय|language=es}}</ref> === मार्च === * [[१ मार्च|1 मार्च]] – अबीम्नोम नरसंहार : [[दक्षिण सूडान]] के अबीम्नोम काउंटी में यूनिटी स्टेट के सशस्त्र युवाओं के हमले में कम से कम 169 लोग मारे गए और 50 घायल हो गए।<ref>{{cite web |title=Nearly 170 killed, 50 injured in armed youth attack on South Sudan county |website=अनादोलु अजंसी|date=2026-03-02 |url=https://www.aa.com.tr/en/africa/nearly-170-killed-50-injured-in-armed-youth-attack-on-south-sudan-county/3846437 |access-date=2026-03-02}}</ref> === अप्रैल === * [[१ अप्रैल|1 अप्रैल]] – [[नासा]] ने आर्टेमिस II चंद्र फ्लाईबाई मिशन लॉन्च किया, जो 1972 में [[अपोलो 17]] के बाद [[निचली पृथ्वी कक्षा]] से परे पहली मानवयुक्त उड़ान थी।<ref>{{Cite web |last=लो|first=लॉरेन ई. |date=2026-04-01 |title=Liftoff! NASA Launches Astronauts on Historic Artemis Moon Mission |url=https://www.nasa.gov/news-release/liftoff-nasa-launches-astronauts-on-historic-artemis-moon-mission/ |access-date=2026-04-01 |website=नासा |archive-date=मई 7, 2026 |archive-url=https://web.archive.org/web/20260507230901/https://www.nasa.gov/news-release/liftoff-nasa-launches-astronauts-on-historic-artemis-moon-mission/ |url-status=live}}</ref> === मई === * [[१ मई|1 मई]] – [[संयुक्त अरब अमीरात]] ने [[ओपेक]] छोड़ दिया, जिससे छह दशकों की सदस्यता समाप्त हो गई और संगठन के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में से एक को हटा दिया गया।<ref>{{Cite web |date=2026-04-30 |title=OPEC just lost one of its biggest players — here's the inside story of the UAE's exit and what the Saudi-UAE split really means for OPEC's market power |url=https://economictimes.indiatimes.com/news/international/us/opec-just-lost-one-of-its-biggest-players-heres-the-inside-story-of-the-uaes-exit-and-what-the-saudi-uae-split-really-means-for-opecs-market-power/articleshow/130634333.cms?from=mdr |access-date=2026-04-30 |website=[[द इकॉनोमिक टाइम्स]] |language=en |archive-date=मई 1, 2026 |archive-url=https://web.archive.org/web/20260501064232/https://m.economictimes.com/news/international/us/opec-just-lost-one-of-its-biggest-players-heres-the-inside-story-of-the-uaes-exit-and-what-the-saudi-uae-split-really-means-for-opecs-market-power/amp_articleshow/130634333.cms |url-status=live }}</ref> === जून === * [[१ जून|1 जून]] – 2026 इथियोपियाई आम चुनाव : मौजूदा प्रधानमंत्री [[अबी अहमद]] के नेतृत्व वाली प्रॉस्पेरिटी पार्टी ने फिर से चुनाव जीता।<ref>{{Cite news|title=National Election Board Says Most Constituencies Declared Election Results|url=https://www.ena.et/web/eng/w/eng_8993217|access-date=जून 6, 2026|language=en|agency= इथियोपियन न्यूज़ एजेंसी}}</ref> === जुलाई === * [[१ जुलाई|1 जुलाई]] – 2026 इकोन अभिषेक : स्विट्जरलैंड के इकोन में सोसाइटी ऑफ सेंट पायस एक्स (एसएसपीएक्स) के सदस्यों ने [[चौदहवें पोप लियो|पोप लियो XIV]] के सीधे आदेशों के विरुद्ध चार बिशपों का अभिषेक किया , जिससे एसएसपीएक्स और [[कैथोलिक गिरजाघर|कैथोलिक चर्च]] के बीच एक धार्मिक विभाजन उत्पन्न हुआ।<ref name="osv-may13">{{cite web |last=वुडेन|first=सिंडी|title=Doctrinal office says SSPX bishop consecrations constitute 'schismatic act' subject to excommunication |url=https://www.osvnews.com/doctrinal-office-says-sspx-bishop-consecrations-constitute-schismatic-act-subject-to-excommunication/ |website=ओएसवी न्यूज़ |date=13 मई 2026 |access-date=30 जून 2026}}</ref><ref name="fsspx-live">{{cite web |title=Episcopal Consecrations at Écône – July 1, 2026 – Watch the Ceremony Live |url=https://fsspx.news/en/news/episcopal-consecrations-econe-july-1-2026-watch-ceremony-live-59868 |website=एफएसएसपीएक्स न्यूज़ |date=30 जून 2026 |access-date=30 जून 2026}}</ref><ref name="nbc">{{cite web |last=विनफील्ड|first=निकोल|title=Pope begs breakaway traditionalist group to back off plan to consecrate its own bishops |url=https://www.nbcnews.com/world/pope-leo-xiv/pope-begs-traditionalist-catholic-group-not-consecrate-bishops-sspx-rcna352359 |website=एनबीसी न्यूज़ |publisher=एसोसिएटेड प्रेस |date=30 जून 2026 |access-date=30 जून 2026}}</ref> === अगस्त === * [[२ अगस्त|2 अगस्त]] – पोलैंड ने [[निंग्बो]], चीन में आयोजित 2026 एफआईवीबी पुरुष वॉलीबॉल नेशंस लीग का खिताब फाइनल में संयुक्त राज्य अमेरिका को 3-2 से हराकर जीता।<ref>{{cite web |title=Poland defend VNL title, outlasting USA in spectacular five-set final |url=https://en.volleyballworld.com/volleyball/competitions/volleyball-nations-league/news/poland-defend-vnl-title-outlasting-usa-in-five-set-ningbo-final |website=वॉलीबॉल वर्ल्ड |date=2 अगस्त 2026}}</ref> === सितम्बर === * [[२ सितम्बर|2 सितंबर]] - 2026 एस्टोनियाई राष्ट्रपति चुनाव : एले मैडिस को रिइगीकोगु द्वारा एस्टोनिया का राष्ट्रपति चुना गया।<ref>{{Cite web |date=2026-02-10 |title=Riigikogu presidential election votes set for early September |url=https://news.err.ee/1609937210/riigikogu-presidential-election-votes-set-for-early-september |access-date=2026-03-11 |website=ERR |language=en |archive-date=अप्रैल 30, 2026 |archive-url=https://web.archive.org/web/20260430024818/https://news.err.ee/1609937210/riigikogu-presidential-election-votes-set-for-early-september |url-status=live}}</ref> === अक्टूबर === * [[२ अक्तूबर|2 अक्टूबर]] - [[जी७|जी7]] नेताओं ने वैश्विक [[डीज़ल]] आपूर्ति पर चर्चा करने के लिए एक आपातकालीन बैठक की और 100 मिलियन बैरल तेल जारी करने पर सहमति व्यक्त की, क्योंकि [[२०२६ इजरायल-अमेरिका का ईरान पर हमला|2026 के ईरान युद्ध]] से व्यवधान के बीच कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं।<ref>{{Cite web |url=https://www.bbc.co.uk/news/live/cqd0801d2y3vt |title=G7 leaders hold urgent meeting over diesel supply as UK prices hit record £2 a litre |date=2 अक्टूबर 2026 |website=बीबीसी न्यूज़|publisher=बीबीसी |accessdate=2 अक्टूबर 2026}}</ref> * [[३ अक्तूबर|3 अक्टूबर]] – 2026 लातवियाई संसदीय चुनाव : मौजूदा प्रधानमंत्री एंड्रीस कुलबर्ग की यूनाइटेड लिस्ट ने [[साएईमा]] में सीटों का बहुमत जीता।<ref>{{Cite web |title=Latvian Saeima elections 2026: Myths and Misconceptions |url=https://eng.lsm.lv/article/politics/election/04.09.2026-latvian-saeima-elections-2026-myths-and-misconceptions.a661764/ |access-date=2026-09-04 |website=eng.lsm.lv |language=en}}</ref> * [[४ अक्टूबर|4 अक्टूबर]] – 2026 बोस्नियाई आम चुनाव आयोजित किए गए।<ref name="Bosnia">{{Cite web|url=https://www.izbori.ba/en/elections/2026|title=Stranica / dokument ne postoje|website=www.izbori.ba|access-date=अप्रैल 29, 2026|archive-date=अप्रैल 30, 2026|archive-url=https://web.archive.org/web/20260430003735/https://www.izbori.ba/en/elections/2026|url-status=live}}</ref> * [[५ अक्टूबर|5 अक्टूबर]] – हौथी-सऊदी संघर्ष : [[तुर्की]], [[पाकिस्तान]] और [[सउदी अरब]], सऊदी अरब पर [[हूती आंदोलन|हूती हमलों]] के जवाब में [[मक्का संयुक्त रक्षा समझौता|मक्का रक्षा संधि]] को सक्रिय करने पर सहमत हुए।<ref>{{Cite web |title=Mecca alliance agrees to activate collective deterrence measures |url=https://www.aljazeera.com/news/2026/10/5/mecca-alliance-agrees-to-activate-collective-deterrence-measures |access-date=2026-10-05 |website=अल जज़ीरा |language=en}}</ref> * [[६ अक्टूबर|6 अक्टूबर]] – 2026 कोसोवन राष्ट्रपति चुनाव : कोसोवो की विधानसभा ने जस्टिना शिरोका पुला को कोसोवो के नए राष्ट्रपति के रूप में चुना, जिससे 2025-2026 का राजनीतिक गतिरोध समाप्त हो गया।<ref>{{cite news |title=Kosovo Elects President Dodging New Political Deadlock |work=प्रिष्टिना इनसाइट|url=https://prishtinainsight.com/kosovo-elects-president-dodging-new-political-deadlock/ |date=7 अक्टूबर 2026}}</ref> * 6-12 [[६ अक्टूबर|अक्टूबर]] - हौथी-सऊदी संघर्ष : सऊदी अरब के [[रियाद]], आभा और [[दम्माम]] में [[हूती आंदोलन|हौथियों]] द्वारा [[अक्तूबर २०२६ में सऊदी अरब के विमानक्षेत्रों पर आक्रमण|हवाई अड्डों पर किए गए हमलों की श्रृंखला]] में कम से कम 20 लोग मारे गए और 350 से अधिक लोग घायल हो गए।<ref name=":2">{{Cite news |last=नेरीम|first=विवियन|last2=वार्ड|first2=यूआन|date=2026-10-10|title=Saudi Arabia’s Riyadh Airport Attacked Again, After Days of Houthi Strikes|url=https://www.nytimes.com/2026/10/10/world/middleeast/riyadh-airport-attack-energy-congress.html|access-date=2026-10-10|work=द न्यूयॉर्क टाइम्स|language=en-US|issn=0362-4331}}</ref><ref>{{Cite web |date=2026-10-11 |title=Saudi Arabia's Riyadh airport hit by second Houthi strike in two days |url=https://www.bbc.com/news/articles/cr93znyk44e1o |access-date=2026-10-11 |website=www.bbc.com |language=en-GB}}</ref><ref>{{cite web|url= https://abcnews.com/International/live-updates/iran-live-updates-trump-us-attack-iran-ahead?id=137063637&entryId=137188731&utm_source=facebook&utm_medium=social&utm_campaign=dhfacebook&utm_content=null|title= At least 20 killed in week of attacks on Saudi airports, officials say |work=एबीसी न्यूज़ |date=2026-10-12|access-date=2026-10-12}}</ref> * 8-9 [[८ अक्तूबर|अक्टूबर]] - [[यमन]] जा रही एक प्रवासी नाव के [[जिबूती]] के तट पर पलट जाने से कम से कम 139 लोग मारे गए और 84 लापता हो गए।<ref>{{Cite news |last=मुरेथी|first=कार्लोस|date=2026-10-11 |title=At least 139 dead including children after migrant boat capsizes off Djibouti |url=https://www.theguardian.com/world/2026/oct/11/deaths-migrant-boat-capsizes-djibouti |access-date=2026-10-11 |work=द गार्जियन |language=en-GB |issn=0261-3077}}</ref> * 11–12 [[११ अक्टूबर|अक्टूबर]] [[१२ अक्तूबर|2026]] — फ्रांस में सैकड़ों सुपरमार्केटों की प्रशीतन प्रणालियों को निशाना बनाकर किए गए [[साइबर आक्रमण|साइबर हमले]] के कारण कई दुकानों के रेफ्रिजरेटरों और फ्रीजरों का तापमान लगभग 50 °C (122 °F) तक पहुँच गया। इसके परिणामस्वरूप बड़ी मात्रा में [[खाद्य विकृति|खाद्य सामग्री खराब]] हो गई और कुछ स्थानों पर आग लगने की घटनाएँ भी सामने आईं। इस हमले से करोड़ों [[यूरो]] के नुकसान की आशंका जताई गई। अन्य यूरोपीय देशों में भी संबंधित प्रणालियों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की गई। [[फ़्रान्स|फ्रांसीसी]] अधिकारियों ने घटना की जाँच शुरू की। * 12–18 [[१२ अक्तूबर|अक्टूबर]] [[१८ अक्टूबर|2026]] — [[२०२६ ईरान युद्ध ईंधन संकट|ईरान से जुड़े युद्ध के आर्थिक प्रभावों]] और वैश्विक अर्थव्यवस्था की चुनौतियों पर चर्चा के बीच, [[अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष]] (IMF) और [[विश्व बैंक समूह|विश्व बैंक]] की वार्षिक बैठकें [[थाईलैण्ड]] की राजधानी बैंकॉक में आयोजित की गईं। इन बैठकों के साथ [[जी-20]] देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की बैठकें भी हुईं। * 13–14 [[१३ अक्टूबर|अक्टूबर]] 2026 — [[तुर्की|तुर्किये]] के दक्षिणी अंताल्या प्रांत में केकोवा द्वीप के निकट पानी के भीतर की गई पुरातात्त्विक खुदाई में लगभग 4,700 वर्ष पुराने माने जाने वाले मिट्टी के भंडारण पात्र मिले। तुर्किये के संस्कृति मंत्री ने इस खोज को दुनिया के सबसे पुराने ज्ञात जहाज़ के अवशेषों से संबंधित बताया। हालाँकि, जहाज़ का लकड़ी का ढाँचा सुरक्षित नहीं मिला है। इस खोज से प्रारंभिक [[कांस्य युग]] में पूर्वी भूमध्यसागर में समुद्री व्यापार के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है। * [[१५ अक्टूबर|15 अक्टूबर]] 2026 — [[भार एवं मापों पर अन्तरराष्ट्रीय ब्यूरो|अंतरराष्ट्रीय भार एवं माप ब्यूरो]] (BIPM) द्वारा लीप सेकंड को समाप्त करने के निर्णय की खबर सामने आई। प्रस्तावित बदलाव के अनुसार, 20 मई 2027 से [[सार्व निर्देशांकित काल|समन्वित सार्वभौमिक समय]] (UTC) में नियमित लीप सेकंड जोड़ने की व्यवस्था समाप्त की जाएगी। इसके बाद [[अन्तरराष्ट्रीय परमाण्विक काल|परमाणु समय]] और पृथ्वी के घूर्णन पर आधारित समय के बीच अंतर धीरे-धीरे बढ़ने दिया जाएगा। भविष्य में इस अंतर को समायोजित करने के लिए लीप आवर जैसी व्यवस्था की संभावना पर चर्चा की गई है, लेकिन इसे तत्काल लागू होने वाली व्यवस्था नहीं समझना चाहिए। === नवम्बर === === दिसम्बर === == अनुमानित और निर्धारित घटनाएँ == * [[२४ अक्टूबर|24 अक्टूबर]] – जूनियर यूरोविज़न सॉन्ग कॉन्टेस्ट 2026 माल्टा के अटार्ड में आयोजित होने वाला है।<ref>{{cite web |title=Junior Eurovision |url=https://www.eurovision.com/junior-eurovision/ |website=यूरोविज़न |access-date=13 मई 2026 |archive-date=मई 16, 2026 |archive-url=https://web.archive.org/web/20260516211055/https://www.eurovision.com/junior-eurovision/ |url-status=live }}</ref> * [[२५ अक्टूबर|25 अक्टूबर]] ** 2026 के ब्राज़ीलियाई आम चुनाव का दूसरा दौर आयोजित होने वाला है।<ref>{{cite web |last=वेल्स|first=आयोनी|url=https://www.bbc.com/news/articles/ck1l34ed592no |title=Brazil election goes to run-off as right-wing Flávio Bolsonaro wins first round |website=बीबीसी न्यूज़ |date=4 अक्टूबर 2026 |access-date=4 अक्टूबर 2026}}</ref> ** 2026 में बुल्गारिया के राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं।<ref>{{Cite news |date=6 मार्च 2026 |title=Osmani shpërndan Kuvendin: Këtu na sollën njerëz me qëllime të rrezikshme |language=sq |url=https://www.koha.net/arberi/presidentja-mban-konference?fbclid=IwY2xjawQXfKNleHRuA2FlbQIxMABicmlkETFhc2dEM3FGM1RrajZ4cmtOc3J0YwZhcHBfaWQQMjIyMDM5MTc4ODIwMDg5MgABHvaC23zlFCKLjx7GGDWHzGSV_vlap3vbhP4rOAGJ7Iffm-pQNOSnM_CPGAKk_aem_kbqBRMClUJATDX7CJxx6Ag|access-date=6 मार्च 2026 |newspaper=Koha.net}}</ref> ** 2026 में सर्बियाई संसदीय चुनाव होने वाले हैं।<ref>{{cite web |website=[[डॉयचे वेले]] |url=https://www.dw.com/en/serbia-dissolves-parliament-as-snap-elections-called/a-79200868 |title=Serbia dissolves parliament as snap elections called |date=9 सितंबर 2026 |access-date=9 सितंबर 2026|last= रेयनोसो|first=एमिलियो}}</ref> * [[२७ अक्टूबर|27 अक्टूबर]] – 2026 के इजरायली विधायी चुनाव होने वाले हैं।<ref>{{Cite news|last1=एटिंजर|first1=अमीर|date=16 जुलाई 2026 |title=Israel heads to election on October 27 after Knesset dissolves itself |url=https://www.ynetnews.com/article/h1nremv4gl |access-date=16 जुलाई 2026 |work=Ynet|language=en-US}}</ref> * [[३१ अक्टूबर|31 अक्टूबर]] – [[१३ नवम्बर|13 नवंबर]] – 2026 ग्रीष्मकालीन युवा ओलंपिक का आयोजन सेनेगल के [[डाकार]] में होगा।<ref>{{Cite news |last=मिलर|first=कॉलिन|date=2025-12-12 |title=Russian and Belarusian Athletes Should Compete Under National Flags at Youth Level, says IOC |url=https://www.nytimes.com/athletic/6884457/2025/12/12/russia-ban-belarus-athletes/ |access-date=2025-12-18 |work=द न्यूयॉर्क टाइम्स |language=en-US |issn=0362-4331 |archive-date=दिसंबर 13, 2025 |archive-url=https://web.archive.org/web/20251213213613/https://www.nytimes.com/athletic/6884457/2025/12/12/russia-ban-belarus-athletes/ |url-status=live }}</ref> * [[३ नवम्बर|3 नवंबर]] – 2026 के संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्यावधि चुनाव होंगे।<ref>{{cite news |last1= स्टीन|first1=क्रिस|last2=लेविन|first2=सैम|last3=विदरस्पून|first3=एंड्रयू|title=Midterm 'blue wave' could block Trump's agenda and launch investigations – here's what's at stake |url=https://www.theguardian.com/us-news/2026/feb/28/midterms-democrats-house-senate |access-date=7 अप्रैल 2026 |work=द गार्जियन |date=28 फरवरी 2026}}</ref> * 6-21 [[६ नवम्बर|नवंबर]] - उद्घाटन राष्ट्र चैम्पियनशिप - उत्तरी गोलार्ध श्रृंखला - आयोजित की जाएगी।<ref name="nations_championship">{{Cite web|url=https://nationschampionshiprugby.com/en|title=Nations Championship}}</ref> * [[७ नवम्बर|7 नवंबर]] – न्यूजीलैंड में 2026 के आम चुनाव होने निर्धारित हैं।<ref>{{cite news |url= https://www.rnz.co.nz/news/political/584605/watch-live-prime-minister-christopher-luxon-announces-election-day-2026-date |title=As it happened: Election to be held on 7 November, Christopher Luxon announces |date=21 जनवरी 2026 |access-date=21 जनवरी 2026 |work=रेडियो न्यूजीलैंड }}</ref> * 10-12 [[१० नवम्बर|नवंबर]] - 2026 आसियान शिखर सम्मेलन फिलीपींस में आयोजित होने वाला है।<ref>{{Cite web |title=ASEAN 2026 Homepage |url=https://asean2026.gov.ph/ |access-date=2026-07-31 |website=asean2026.gov.ph}}</ref> * [[१४ नवम्बर|14 नवंबर]] – यूरोविज़न सॉन्ग कॉन्टेस्ट एशिया का उद्घाटन [[बैंकॉक]], थाईलैंड में होने वाला है।<ref name="RulesEurovoix">{{Cite web |url=https://eurovoix.com/2026/03/31/eurovision-song-contest-asia-launches/|title=Eurovision Song Contest Asia Launches With Final in Bangkok This November|date=31 मार्च 2026|access-date=31 मार्च 2026|first=एंथोनी|last= ग्रेंजर|website=यूरोवोइक्स }}</ref> * [[१५ नवम्बर|15 नवंबर]] – 2026 केप वर्डे के राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं।<ref>{{Cite web |date=2026-01-19 |title=Legislative elections on May 17 and presidential elections on November 15 – President of the Republic |url=https://inforpress.cv/en/legislative-elections-on-may-17-and-presidential-elections-on-november-15-president-of-the-republic |access-date=2026-03-02 |website=इन्फोरप्रेस }}</ref> * [[२९ नवम्बर|29 नवंबर]] – 2026 के स्पेनिश आम चुनाव होने वाले हैं।<ref name="EP051026">{{cite news |last1=एलोर्डी क्यू|first1=कार्लोस|last2=हर्मिडा|first2=ज़ोसे |date=5 अक्टूबर 2026 |url=https://elpais.com/espana/2026-10-05/sanchez-adelanta-las-elecciones-al-29-de-noviembre-necesitamos-una-mayoria-progresista-mucho-mas-amplia.html |title=Sánchez adelanta las elecciones al 29 de noviembre: “Necesitamos una mayoría progresista mucho más amplia” |language=es |newspaper=एल पेस |location=मैड्रिड |access-date=5 अक्टूबर 2026}}</ref> किफायती आवास को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के जवाब में चुनाव समय से पहले बुलाए गए थे।<ref>{{Cite web |date=2026-10-05 |title=Spain's Prime Minister Pedro Sánchez calls early election |url=https://www.bbc.com/news/articles/cmdx39k49xw0o |access-date=2026-10-12 |website=www.bbc.com |language=en-GB}}</ref> * 3-20 [[३ दिसम्बर|दिसंबर]] - [[२० दिसम्बर|2026]] यूरोपीय महिला हैंडबॉल चैंपियनशिप चेक गणराज्य, पोलैंड, रोमानिया, स्लोवाकिया और तुर्की में आयोजित होने वाली है।<ref>{{Cite web|url=https://www.eurohandball.com/en/news/en/organisers-for-women-s-ehf-euro-2026-confirmed/|title=Organisers for Women's EHF EURO 2026 confirmed|website=ईएचएफ |publisher= यूरोपीय हैंडबॉल महासंघ|date=8 मार्च 2024|access-date=अक्टूबर 23, 2025|archive-date=सितंबर 7, 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20250907203356/https://www.eurohandball.com/en/news/en/organisers-for-women-s-ehf-euro-2026-confirmed/|url-status=live}}</ref> * [[५ दिसम्बर|5 दिसंबर]] – 2026 में गाम्बिया में राष्ट्रपति चुनाव होने वाला है।<ref>{{Cite web|title=2026 presidential election set for Dec 5 – IEC Chairman|url=https://thepoint.gm/africa/gambia/headlines/2026-presidential-election-set-for-dec-5-iec-chairman|website=thepoint.gm|access-date=2025-11-28|language=en-US|date=2025-10-10}}</ref> * [[६ दिसम्बर|6 दिसंबर]] – अबू धाबी ग्रांड प्रिक्स का आयोजन निर्धारित है।<ref>{{Cite web | title=Abu Dhabi Grand Prix 2026 - F1 Race | url=https://www.formula1.com/en/racing/2026/united-arab-emirates | access-date=2026-08-01 | website=www.formula1.com}}</ref> * [[२२ दिसम्बर|22 दिसंबर]] – 2026 दक्षिण सूडानी आम चुनाव आयोजित होने वाले हैं, जो 2011 में देश की स्वतंत्रता के बाद पहला चुनाव होगा।<ref>{{Cite web |last=माचोल|first=डेंग|date=14 सितंबर 2024 |title=South Sudan postpones December elections by 2 years citing incomplete preparations |url=https://apnews.com/article/south-sudan-elections-postponed-10a4e41a1b967cc51ec52a354a86d489 |access-date=14 सितंबर 2024 |work=एसोसिएटेड प्रेस न्यूज़ |language=en-us |archive-date=जनवरी 14, 2026 |archive-url=https://web.archive.org/web/20260114013801/https://apnews.com/article/south-sudan-elections-postponed-10a4e41a1b967cc51ec52a354a86d489 |url-status=live}}</ref> * [[२६ दिसम्बर|26 दिसंबर]] - यदि इससे पहले कोई घटना न घटित होती है, तो 2026 के सर्बियाई राष्ट्रपति चुनाव इस तिथि से पहले ही आयोजित किए जाएंगे। == नोबल पुरस्कार == * [[रसायन शास्त्र में नोबेल पुरस्कार|रसायन विज्ञान]] – हेनरी बी. कागन और केंसो सोई, असममित [[कार्बनिक संश्लेषण]] में गैर-रेखीय प्रभावों और स्व-उत्प्रेरण की खोज के लिए।<ref>{{Cite web |date=अक्टूबर 7, 2026 |title=Nobel Prize in Chemistry 2026 |url=https://www.nobelprize.org/prizes/chemistry/2026/summary/ |access-date=अक्टूबर 7, 2026 |website=[[नोबेल पुरस्कार]]}}</ref> * [[अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार|अर्थशास्त्र]] – रॉबर्ट ई. हॉल और माइकल वुडफोर्ड, [[आर्थिक नीति|मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरीकरण]] के माइक्रोइकॉनॉमिक आधारों के लिए।<ref>{{Cite web |date=अक्टूबर 12, 2026 |title=Sveriges Riksbank Prize in Economic Sciences in Memory of Alfred Nobel 2026 |url=https://www.nobelprize.org/prizes/economic-sciences/2026/summary/ |access-date=अक्टूबर 12, 2026 |website=[[नोबेल पुरस्कार]]}}</ref> * [[साहित्य में नोबेल पुरस्कार|साहित्य]] – [[ऐनी कार्सन]], उनके साहसिक और आविष्कारशील कार्यों के लिए , जिन्होंने शास्त्रीय परंपरा के साथ चंचल संवाद में समकालीन साहित्य के लिए नए रूप बनाए हैं।<ref>{{Cite web |date=अक्टूबर 8, 2026 |title=Nobel Prize in Literature 2026 |url=https://www.nobelprize.org/prizes/literature/2026/summary/ |access-date=अक्टूबर 8, 2026 |website=[[नोबेल पुरस्कार]]}}</ref> * [[नोबल शांति पुरस्कार|शांति]] – [[नवी पिल्लै]], [[अन्तरराष्ट्रीय विधि|शांति और अंतर्राष्ट्रीय कानून]] को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों के लिए।<ref>{{Cite web |date=अक्टूबर 9, 2026 |title=Nobel Peace Prize 2026 |url=https://www.nobelprize.org/prizes/peace/2026/summary/ |access-date=अक्टूबर 9, 2026 |website=[[नोबेल पुरस्कार]]}}</ref> * [[भौतिकी में नोबेल पुरस्कार|भौतिकी]] – फ्रांसिस हाल्ज़ेन , आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला में निर्णायक योगदान और खगोल भौतिकी मूल के उच्च-ऊर्जा [[न्यूट्रिनो]] की खोज के लिए।<ref>{{Cite web |date=अक्टूबर 6, 2026 |title=Nobel Prize in Physics 2026 |url=https://www.nobelprize.org/prizes/physics/2026/summary/ |access-date=अक्टूबर 6, 2026 |website=[[नोबेल पुरस्कार]]}}</ref> * [[शरीरक्रिया विज्ञान या चिकित्सा में नोबेल पुरस्कार|फिजियोलॉजी या मेडिसिन]] - कार्ल डीसेरोथ , पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागल , प्रकाश-गेटेड आयन चैनलों और ऑप्टोजेनेटिक्स से संबंधित उनकी खोजों के लिए।<ref>{{Cite web |date=अक्टूबर 5, 2026 |title=Nobel Prize in Physiology or Medicine 2026 |url=https://www.nobelprize.org/prizes/medicine/2026/summary/ |access-date=अक्टूबर 5, 2026 |website=[[नोबेल पुरस्कार]]}}</ref> == सन्दर्भ == [[श्रेणी:2026]] dv2ok6c7vd6dkoxti5j2xx2ywh9sbjp 6630386 6630383 2026-10-17T08:14:12Z चाहर धर्मेंद्र 703114 सन्दर्भ /* अक्टूबर */ 6630386 wikitext text/x-wiki {{Year nav|2029}} 2026 ( [[रोमन संख्यांक|MMXXVI]] ) वर्तमान वर्ष है, और यह [[ग्रेगोरी पंचांग|ग्रेगोरियन कैलेंडर]] के अनुसार गुरुवार से शुरू होने वाला एक सामान्य वर्ष है , जो [[आम युग]] (CE) और [[ईसवी|एनो डोमिनी]] (AD) पदनामों का 2026वां वर्ष, [[३री सहस्राब्दी|तीसरी सहस्राब्दी]] और [[२१वीं शताब्दी|21वीं शताब्दी]] का 26वां वर्ष और 2020 के दशक का 7वां वर्ष है। == कार्यक्रम == === जनवरी === * [[१ जनवरी|1 जनवरी]] ** [[बुल्गारिया]] ने [[यूरो]] को अपनाया और [[यूरोक्षेत्र|यूरोज़ोन]] का 21वां सदस्य देश बन गया।<ref>{{cite press release |title=Bulgaria ready to use the euro from 1 January 2026: Council takes final steps |date=जुलाई 8, 2025 |publisher=यूरोपीय संघ परिषद|url=https://www.consilium.europa.eu/en/press/press-releases/2025/07/08/bulgaria-ready-to-use-the-euro-from-1-january-2026-council-takes-final-steps/ |access-date=अगस्त 14, 2025 |archive-date=जुलाई 16, 2025 |archive-url=https://web.archive.org/web/20250716223419/https://www.consilium.europa.eu/en/press/press-releases/2025/07/08/bulgaria-ready-to-use-the-euro-from-1-january-2026-council-takes-final-steps/ |url-status=live}}</ref> === फ़रवरी === * [[१ फ़रवरी|1 फरवरी]] – 2026 कोस्टा रिका के आम चुनाव : [[लौरा फ़ेर्नान्देज़ देल्गादो]] [[कोस्टा रिका के राष्ट्रपति|कोस्टा रिका की राष्ट्रपति]] चुनी गईं , और उनकी पार्टी ने विधान सभा में भी बहुमत हासिल किया।<ref>{{Cite web |last= मोरा|first=कार्लोस|date=2024-11-28 |title=TSE fija cronograma para elecciones nacionales de 2026 |url=https://crhoy.com/tse-fija-cronograma-para-elecciones-nacionales-de-2026/ |access-date=2025-10-26 |website=सीआर होय|language=es}}</ref> === मार्च === * [[१ मार्च|1 मार्च]] – अबीम्नोम नरसंहार : [[दक्षिण सूडान]] के अबीम्नोम काउंटी में यूनिटी स्टेट के सशस्त्र युवाओं के हमले में कम से कम 169 लोग मारे गए और 50 घायल हो गए।<ref>{{cite web |title=Nearly 170 killed, 50 injured in armed youth attack on South Sudan county |website=अनादोलु अजंसी|date=2026-03-02 |url=https://www.aa.com.tr/en/africa/nearly-170-killed-50-injured-in-armed-youth-attack-on-south-sudan-county/3846437 |access-date=2026-03-02}}</ref> === अप्रैल === * [[१ अप्रैल|1 अप्रैल]] – [[नासा]] ने आर्टेमिस II चंद्र फ्लाईबाई मिशन लॉन्च किया, जो 1972 में [[अपोलो 17]] के बाद [[निचली पृथ्वी कक्षा]] से परे पहली मानवयुक्त उड़ान थी।<ref>{{Cite web |last=लो|first=लॉरेन ई. |date=2026-04-01 |title=Liftoff! NASA Launches Astronauts on Historic Artemis Moon Mission |url=https://www.nasa.gov/news-release/liftoff-nasa-launches-astronauts-on-historic-artemis-moon-mission/ |access-date=2026-04-01 |website=नासा |archive-date=मई 7, 2026 |archive-url=https://web.archive.org/web/20260507230901/https://www.nasa.gov/news-release/liftoff-nasa-launches-astronauts-on-historic-artemis-moon-mission/ |url-status=live}}</ref> === मई === * [[१ मई|1 मई]] – [[संयुक्त अरब अमीरात]] ने [[ओपेक]] छोड़ दिया, जिससे छह दशकों की सदस्यता समाप्त हो गई और संगठन के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में से एक को हटा दिया गया।<ref>{{Cite web |date=2026-04-30 |title=OPEC just lost one of its biggest players — here's the inside story of the UAE's exit and what the Saudi-UAE split really means for OPEC's market power |url=https://economictimes.indiatimes.com/news/international/us/opec-just-lost-one-of-its-biggest-players-heres-the-inside-story-of-the-uaes-exit-and-what-the-saudi-uae-split-really-means-for-opecs-market-power/articleshow/130634333.cms?from=mdr |access-date=2026-04-30 |website=[[द इकॉनोमिक टाइम्स]] |language=en |archive-date=मई 1, 2026 |archive-url=https://web.archive.org/web/20260501064232/https://m.economictimes.com/news/international/us/opec-just-lost-one-of-its-biggest-players-heres-the-inside-story-of-the-uaes-exit-and-what-the-saudi-uae-split-really-means-for-opecs-market-power/amp_articleshow/130634333.cms |url-status=live }}</ref> === जून === * [[१ जून|1 जून]] – 2026 इथियोपियाई आम चुनाव : मौजूदा प्रधानमंत्री [[अबी अहमद]] के नेतृत्व वाली प्रॉस्पेरिटी पार्टी ने फिर से चुनाव जीता।<ref>{{Cite news|title=National Election Board Says Most Constituencies Declared Election Results|url=https://www.ena.et/web/eng/w/eng_8993217|access-date=जून 6, 2026|language=en|agency= इथियोपियन न्यूज़ एजेंसी}}</ref> === जुलाई === * [[१ जुलाई|1 जुलाई]] – 2026 इकोन अभिषेक : स्विट्जरलैंड के इकोन में सोसाइटी ऑफ सेंट पायस एक्स (एसएसपीएक्स) के सदस्यों ने [[चौदहवें पोप लियो|पोप लियो XIV]] के सीधे आदेशों के विरुद्ध चार बिशपों का अभिषेक किया , जिससे एसएसपीएक्स और [[कैथोलिक गिरजाघर|कैथोलिक चर्च]] के बीच एक धार्मिक विभाजन उत्पन्न हुआ।<ref name="osv-may13">{{cite web |last=वुडेन|first=सिंडी|title=Doctrinal office says SSPX bishop consecrations constitute 'schismatic act' subject to excommunication |url=https://www.osvnews.com/doctrinal-office-says-sspx-bishop-consecrations-constitute-schismatic-act-subject-to-excommunication/ |website=ओएसवी न्यूज़ |date=13 मई 2026 |access-date=30 जून 2026}}</ref><ref name="fsspx-live">{{cite web |title=Episcopal Consecrations at Écône – July 1, 2026 – Watch the Ceremony Live |url=https://fsspx.news/en/news/episcopal-consecrations-econe-july-1-2026-watch-ceremony-live-59868 |website=एफएसएसपीएक्स न्यूज़ |date=30 जून 2026 |access-date=30 जून 2026}}</ref><ref name="nbc">{{cite web |last=विनफील्ड|first=निकोल|title=Pope begs breakaway traditionalist group to back off plan to consecrate its own bishops |url=https://www.nbcnews.com/world/pope-leo-xiv/pope-begs-traditionalist-catholic-group-not-consecrate-bishops-sspx-rcna352359 |website=एनबीसी न्यूज़ |publisher=एसोसिएटेड प्रेस |date=30 जून 2026 |access-date=30 जून 2026}}</ref> === अगस्त === * [[२ अगस्त|2 अगस्त]] – पोलैंड ने [[निंग्बो]], चीन में आयोजित 2026 एफआईवीबी पुरुष वॉलीबॉल नेशंस लीग का खिताब फाइनल में संयुक्त राज्य अमेरिका को 3-2 से हराकर जीता।<ref>{{cite web |title=Poland defend VNL title, outlasting USA in spectacular five-set final |url=https://en.volleyballworld.com/volleyball/competitions/volleyball-nations-league/news/poland-defend-vnl-title-outlasting-usa-in-five-set-ningbo-final |website=वॉलीबॉल वर्ल्ड |date=2 अगस्त 2026}}</ref> === सितम्बर === * [[२ सितम्बर|2 सितंबर]] - 2026 एस्टोनियाई राष्ट्रपति चुनाव : एले मैडिस को रिइगीकोगु द्वारा एस्टोनिया का राष्ट्रपति चुना गया।<ref>{{Cite web |date=2026-02-10 |title=Riigikogu presidential election votes set for early September |url=https://news.err.ee/1609937210/riigikogu-presidential-election-votes-set-for-early-september |access-date=2026-03-11 |website=ERR |language=en |archive-date=अप्रैल 30, 2026 |archive-url=https://web.archive.org/web/20260430024818/https://news.err.ee/1609937210/riigikogu-presidential-election-votes-set-for-early-september |url-status=live}}</ref> === अक्टूबर === * [[२ अक्तूबर|2 अक्टूबर]] - [[जी७|जी7]] नेताओं ने वैश्विक [[डीज़ल]] आपूर्ति पर चर्चा करने के लिए एक आपातकालीन बैठक की और 100 मिलियन बैरल तेल जारी करने पर सहमति व्यक्त की, क्योंकि [[२०२६ इजरायल-अमेरिका का ईरान पर हमला|2026 के ईरान युद्ध]] से व्यवधान के बीच कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं।<ref>{{Cite web |url=https://www.bbc.co.uk/news/live/cqd0801d2y3vt |title=G7 leaders hold urgent meeting over diesel supply as UK prices hit record £2 a litre |date=2 अक्टूबर 2026 |website=बीबीसी न्यूज़|publisher=बीबीसी |accessdate=2 अक्टूबर 2026}}</ref> * [[३ अक्तूबर|3 अक्टूबर]] – 2026 लातवियाई संसदीय चुनाव : मौजूदा प्रधानमंत्री एंड्रीस कुलबर्ग की यूनाइटेड लिस्ट ने [[साएईमा]] में सीटों का बहुमत जीता।<ref>{{Cite web |title=Latvian Saeima elections 2026: Myths and Misconceptions |url=https://eng.lsm.lv/article/politics/election/04.09.2026-latvian-saeima-elections-2026-myths-and-misconceptions.a661764/ |access-date=2026-09-04 |website=eng.lsm.lv |language=en}}</ref> * [[४ अक्टूबर|4 अक्टूबर]] – 2026 बोस्नियाई आम चुनाव आयोजित किए गए।<ref name="Bosnia">{{Cite web|url=https://www.izbori.ba/en/elections/2026|title=Stranica / dokument ne postoje|website=www.izbori.ba|access-date=अप्रैल 29, 2026|archive-date=अप्रैल 30, 2026|archive-url=https://web.archive.org/web/20260430003735/https://www.izbori.ba/en/elections/2026|url-status=live}}</ref> * [[५ अक्टूबर|5 अक्टूबर]] – हौथी-सऊदी संघर्ष : [[तुर्की]], [[पाकिस्तान]] और [[सउदी अरब]], सऊदी अरब पर [[हूती आंदोलन|हूती हमलों]] के जवाब में [[मक्का संयुक्त रक्षा समझौता|मक्का रक्षा संधि]] को सक्रिय करने पर सहमत हुए।<ref>{{Cite web |title=Mecca alliance agrees to activate collective deterrence measures |url=https://www.aljazeera.com/news/2026/10/5/mecca-alliance-agrees-to-activate-collective-deterrence-measures |access-date=2026-10-05 |website=अल जज़ीरा |language=en}}</ref> * [[६ अक्टूबर|6 अक्टूबर]] – 2026 कोसोवन राष्ट्रपति चुनाव : कोसोवो की विधानसभा ने जस्टिना शिरोका पुला को कोसोवो के नए राष्ट्रपति के रूप में चुना, जिससे 2025-2026 का राजनीतिक गतिरोध समाप्त हो गया।<ref>{{cite news |title=Kosovo Elects President Dodging New Political Deadlock |work=प्रिष्टिना इनसाइट|url=https://prishtinainsight.com/kosovo-elects-president-dodging-new-political-deadlock/ |date=7 अक्टूबर 2026}}</ref> * 6-12 [[६ अक्टूबर|अक्टूबर]] - हौथी-सऊदी संघर्ष : सऊदी अरब के [[रियाद]], आभा और [[दम्माम]] में [[हूती आंदोलन|हौथियों]] द्वारा [[अक्तूबर २०२६ में सऊदी अरब के विमानक्षेत्रों पर आक्रमण|हवाई अड्डों पर किए गए हमलों की श्रृंखला]] में कम से कम 20 लोग मारे गए और 350 से अधिक लोग घायल हो गए।<ref name=":2">{{Cite news |last=नेरीम|first=विवियन|last2=वार्ड|first2=यूआन|date=2026-10-10|title=Saudi Arabia’s Riyadh Airport Attacked Again, After Days of Houthi Strikes|url=https://www.nytimes.com/2026/10/10/world/middleeast/riyadh-airport-attack-energy-congress.html|access-date=2026-10-10|work=द न्यूयॉर्क टाइम्स|language=en-US|issn=0362-4331}}</ref><ref>{{Cite web |date=2026-10-11 |title=Saudi Arabia's Riyadh airport hit by second Houthi strike in two days |url=https://www.bbc.com/news/articles/cr93znyk44e1o |access-date=2026-10-11 |website=www.bbc.com |language=en-GB}}</ref><ref>{{cite web|url= https://abcnews.com/International/live-updates/iran-live-updates-trump-us-attack-iran-ahead?id=137063637&entryId=137188731&utm_source=facebook&utm_medium=social&utm_campaign=dhfacebook&utm_content=null|title= At least 20 killed in week of attacks on Saudi airports, officials say |work=एबीसी न्यूज़ |date=2026-10-12|access-date=2026-10-12}}</ref> * 8-9 [[८ अक्तूबर|अक्टूबर]] - [[यमन]] जा रही एक प्रवासी नाव के [[जिबूती]] के तट पर पलट जाने से कम से कम 139 लोग मारे गए और 84 लापता हो गए।<ref>{{Cite news |last=मुरेथी|first=कार्लोस|date=2026-10-11 |title=At least 139 dead including children after migrant boat capsizes off Djibouti |url=https://www.theguardian.com/world/2026/oct/11/deaths-migrant-boat-capsizes-djibouti |access-date=2026-10-11 |work=द गार्जियन |language=en-GB |issn=0261-3077}}</ref> * 11–12 [[११ अक्टूबर|अक्टूबर]] [[१२ अक्तूबर|2026]] — फ्रांस में सैकड़ों सुपरमार्केटों की प्रशीतन प्रणालियों को निशाना बनाकर किए गए [[साइबर आक्रमण|साइबर हमले]] के कारण कई दुकानों के रेफ्रिजरेटरों और फ्रीजरों का तापमान लगभग 50 °C (122 °F) तक पहुँच गया। इसके परिणामस्वरूप बड़ी मात्रा में [[खाद्य विकृति|खाद्य सामग्री खराब]] हो गई और कुछ स्थानों पर आग लगने की घटनाएँ भी सामने आईं। इस हमले से करोड़ों [[यूरो]] के नुकसान की आशंका जताई गई। अन्य यूरोपीय देशों में भी संबंधित प्रणालियों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की गई। [[फ़्रान्स|फ्रांसीसी]] अधिकारियों ने घटना की जाँच शुरू की।<ref>{{Cite news|date=2026-10-12 |title=Hackers force French supermarket fridges to heat up to 50C in ‘unprecedented’ cyber-attack |url=https://www.theguardian.com/world/2026/oct/12/cyber-attack-defrosts-refrigerators-france-supermarket-chains-intermarche-cooperative-u |access-date=2026-10-15 |work= द गार्जियन |language=en-GB |issn=0261-3077}}</ref><ref>{{Cite news |last=मार्चंडन|first=लियो|last2=स्टारगार्डटर|first2=गैब्रियल|date=2026-10-12 |title=Hackers heat French supermarket fridges, sparking fires and spoiling food |url=https://www.reuters.com/business/retail-consumer/french-supermarket-chain-intermarche-hit-by-cyberattack-150-stories-targeted-2026-10-12/ |access-date=2026-10-15 |work=रॉयटर्स |language=en}}</ref> * 12–18 [[१२ अक्तूबर|अक्टूबर]] [[१८ अक्टूबर|2026]] — [[२०२६ ईरान युद्ध ईंधन संकट|ईरान से जुड़े युद्ध के आर्थिक प्रभावों]] और वैश्विक अर्थव्यवस्था की चुनौतियों पर चर्चा के बीच, [[अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष]] (IMF) और [[विश्व बैंक समूह|विश्व बैंक]] की वार्षिक बैठकें [[थाईलैण्ड]] की राजधानी बैंकॉक में आयोजित की गईं। इन बैठकों के साथ [[जी-20]] देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की बैठकें भी हुईं।<ref>{{Cite web |last=पॉवर|first=जॉन|title=G20 finance ministers, central bankers gather amid fallout from Iran war |url=https://www.aljazeera.com/economy/2026/10/15/g20-finance-ministers-central-bankers-gather-amid-fallout-from-iran-war |access-date=2026-10-15 |website=अल जज़ीरा |language=en}}</ref> * 13–14 [[१३ अक्टूबर|अक्टूबर]] 2026 — [[तुर्की|तुर्किये]] के दक्षिणी अंताल्या प्रांत में केकोवा द्वीप के निकट पानी के भीतर की गई पुरातात्त्विक खुदाई में लगभग 4,700 वर्ष पुराने माने जाने वाले मिट्टी के भंडारण पात्र मिले। तुर्किये के संस्कृति मंत्री ने इस खोज को दुनिया के सबसे पुराने ज्ञात जहाज़ के अवशेषों से संबंधित बताया। हालाँकि, जहाज़ का लकड़ी का ढाँचा सुरक्षित नहीं मिला है। इस खोज से प्रारंभिक [[कांस्य युग]] में पूर्वी भूमध्यसागर में समुद्री व्यापार के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।<ref>{{Cite web |date=2026-10-14 |title=World's oldest shipwreck found off Kekova Island in Turkey |url=https://www.bbc.com/news/articles/c6gr80rk1yyko |access-date=2026-10-15 |website=www.bbc.com |language=en-GB}}</ref> * [[१५ अक्टूबर|15 अक्टूबर]] 2026 — [[भार एवं मापों पर अन्तरराष्ट्रीय ब्यूरो|अंतरराष्ट्रीय भार एवं माप ब्यूरो]] (BIPM) द्वारा लीप सेकंड को समाप्त करने के निर्णय की खबर सामने आई। प्रस्तावित बदलाव के अनुसार, 20 मई 2027 से [[सार्व निर्देशांकित काल|समन्वित सार्वभौमिक समय]] (UTC) में नियमित लीप सेकंड जोड़ने की व्यवस्था समाप्त की जाएगी। इसके बाद [[अन्तरराष्ट्रीय परमाण्विक काल|परमाणु समय]] और पृथ्वी के घूर्णन पर आधारित समय के बीच अंतर धीरे-धीरे बढ़ने दिया जाएगा। भविष्य में इस अंतर को समायोजित करने के लिए लीप आवर जैसी व्यवस्था की संभावना पर चर्चा की गई है, लेकिन इसे तत्काल लागू होने वाली व्यवस्था नहीं समझना चाहिए।<ref>{{cite news |last1= सैम्पल|first1=इयान |title=How an accelerating Earth led experts to adopt the leap hour |url=https://www.theguardian.com/science/2026/oct/15/times-up-for-the-leap-second-as-scientists-swap-it-for-the-leap-hour |access-date=15 October 2026 |work= द गार्जियन |date=15 अक्टूबर 2026}}</ref> === नवम्बर === === दिसम्बर === == अनुमानित और निर्धारित घटनाएँ == * [[२४ अक्टूबर|24 अक्टूबर]] – जूनियर यूरोविज़न सॉन्ग कॉन्टेस्ट 2026 माल्टा के अटार्ड में आयोजित होने वाला है।<ref>{{cite web |title=Junior Eurovision |url=https://www.eurovision.com/junior-eurovision/ |website=यूरोविज़न |access-date=13 मई 2026 |archive-date=मई 16, 2026 |archive-url=https://web.archive.org/web/20260516211055/https://www.eurovision.com/junior-eurovision/ |url-status=live }}</ref> * [[२५ अक्टूबर|25 अक्टूबर]] ** 2026 के ब्राज़ीलियाई आम चुनाव का दूसरा दौर आयोजित होने वाला है।<ref>{{cite web |last=वेल्स|first=आयोनी|url=https://www.bbc.com/news/articles/ck1l34ed592no |title=Brazil election goes to run-off as right-wing Flávio Bolsonaro wins first round |website=बीबीसी न्यूज़ |date=4 अक्टूबर 2026 |access-date=4 अक्टूबर 2026}}</ref> ** 2026 में बुल्गारिया के राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं।<ref>{{Cite news |date=6 मार्च 2026 |title=Osmani shpërndan Kuvendin: Këtu na sollën njerëz me qëllime të rrezikshme |language=sq |url=https://www.koha.net/arberi/presidentja-mban-konference?fbclid=IwY2xjawQXfKNleHRuA2FlbQIxMABicmlkETFhc2dEM3FGM1RrajZ4cmtOc3J0YwZhcHBfaWQQMjIyMDM5MTc4ODIwMDg5MgABHvaC23zlFCKLjx7GGDWHzGSV_vlap3vbhP4rOAGJ7Iffm-pQNOSnM_CPGAKk_aem_kbqBRMClUJATDX7CJxx6Ag|access-date=6 मार्च 2026 |newspaper=Koha.net}}</ref> ** 2026 में सर्बियाई संसदीय चुनाव होने वाले हैं।<ref>{{cite web |website=[[डॉयचे वेले]] |url=https://www.dw.com/en/serbia-dissolves-parliament-as-snap-elections-called/a-79200868 |title=Serbia dissolves parliament as snap elections called |date=9 सितंबर 2026 |access-date=9 सितंबर 2026|last= रेयनोसो|first=एमिलियो}}</ref> * [[२७ अक्टूबर|27 अक्टूबर]] – 2026 के इजरायली विधायी चुनाव होने वाले हैं।<ref>{{Cite news|last1=एटिंजर|first1=अमीर|date=16 जुलाई 2026 |title=Israel heads to election on October 27 after Knesset dissolves itself |url=https://www.ynetnews.com/article/h1nremv4gl |access-date=16 जुलाई 2026 |work=Ynet|language=en-US}}</ref> * [[३१ अक्टूबर|31 अक्टूबर]] – [[१३ नवम्बर|13 नवंबर]] – 2026 ग्रीष्मकालीन युवा ओलंपिक का आयोजन सेनेगल के [[डाकार]] में होगा।<ref>{{Cite news |last=मिलर|first=कॉलिन|date=2025-12-12 |title=Russian and Belarusian Athletes Should Compete Under National Flags at Youth Level, says IOC |url=https://www.nytimes.com/athletic/6884457/2025/12/12/russia-ban-belarus-athletes/ |access-date=2025-12-18 |work=द न्यूयॉर्क टाइम्स |language=en-US |issn=0362-4331 |archive-date=दिसंबर 13, 2025 |archive-url=https://web.archive.org/web/20251213213613/https://www.nytimes.com/athletic/6884457/2025/12/12/russia-ban-belarus-athletes/ |url-status=live }}</ref> * [[३ नवम्बर|3 नवंबर]] – 2026 के संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्यावधि चुनाव होंगे।<ref>{{cite news |last1= स्टीन|first1=क्रिस|last2=लेविन|first2=सैम|last3=विदरस्पून|first3=एंड्रयू|title=Midterm 'blue wave' could block Trump's agenda and launch investigations – here's what's at stake |url=https://www.theguardian.com/us-news/2026/feb/28/midterms-democrats-house-senate |access-date=7 अप्रैल 2026 |work=द गार्जियन |date=28 फरवरी 2026}}</ref> * 6-21 [[६ नवम्बर|नवंबर]] - उद्घाटन राष्ट्र चैम्पियनशिप - उत्तरी गोलार्ध श्रृंखला - आयोजित की जाएगी।<ref name="nations_championship">{{Cite web|url=https://nationschampionshiprugby.com/en|title=Nations Championship}}</ref> * [[७ नवम्बर|7 नवंबर]] – न्यूजीलैंड में 2026 के आम चुनाव होने निर्धारित हैं।<ref>{{cite news |url= https://www.rnz.co.nz/news/political/584605/watch-live-prime-minister-christopher-luxon-announces-election-day-2026-date |title=As it happened: Election to be held on 7 November, Christopher Luxon announces |date=21 जनवरी 2026 |access-date=21 जनवरी 2026 |work=रेडियो न्यूजीलैंड }}</ref> * 10-12 [[१० नवम्बर|नवंबर]] - 2026 आसियान शिखर सम्मेलन फिलीपींस में आयोजित होने वाला है।<ref>{{Cite web |title=ASEAN 2026 Homepage |url=https://asean2026.gov.ph/ |access-date=2026-07-31 |website=asean2026.gov.ph}}</ref> * [[१४ नवम्बर|14 नवंबर]] – यूरोविज़न सॉन्ग कॉन्टेस्ट एशिया का उद्घाटन [[बैंकॉक]], थाईलैंड में होने वाला है।<ref name="RulesEurovoix">{{Cite web |url=https://eurovoix.com/2026/03/31/eurovision-song-contest-asia-launches/|title=Eurovision Song Contest Asia Launches With Final in Bangkok This November|date=31 मार्च 2026|access-date=31 मार्च 2026|first=एंथोनी|last= ग्रेंजर|website=यूरोवोइक्स }}</ref> * [[१५ नवम्बर|15 नवंबर]] – 2026 केप वर्डे के राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं।<ref>{{Cite web |date=2026-01-19 |title=Legislative elections on May 17 and presidential elections on November 15 – President of the Republic |url=https://inforpress.cv/en/legislative-elections-on-may-17-and-presidential-elections-on-november-15-president-of-the-republic |access-date=2026-03-02 |website=इन्फोरप्रेस }}</ref> * [[२९ नवम्बर|29 नवंबर]] – 2026 के स्पेनिश आम चुनाव होने वाले हैं।<ref name="EP051026">{{cite news |last1=एलोर्डी क्यू|first1=कार्लोस|last2=हर्मिडा|first2=ज़ोसे |date=5 अक्टूबर 2026 |url=https://elpais.com/espana/2026-10-05/sanchez-adelanta-las-elecciones-al-29-de-noviembre-necesitamos-una-mayoria-progresista-mucho-mas-amplia.html |title=Sánchez adelanta las elecciones al 29 de noviembre: “Necesitamos una mayoría progresista mucho más amplia” |language=es |newspaper=एल पेस |location=मैड्रिड |access-date=5 अक्टूबर 2026}}</ref> किफायती आवास को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के जवाब में चुनाव समय से पहले बुलाए गए थे।<ref>{{Cite web |date=2026-10-05 |title=Spain's Prime Minister Pedro Sánchez calls early election |url=https://www.bbc.com/news/articles/cmdx39k49xw0o |access-date=2026-10-12 |website=www.bbc.com |language=en-GB}}</ref> * 3-20 [[३ दिसम्बर|दिसंबर]] - [[२० दिसम्बर|2026]] यूरोपीय महिला हैंडबॉल चैंपियनशिप चेक गणराज्य, पोलैंड, रोमानिया, स्लोवाकिया और तुर्की में आयोजित होने वाली है।<ref>{{Cite web|url=https://www.eurohandball.com/en/news/en/organisers-for-women-s-ehf-euro-2026-confirmed/|title=Organisers for Women's EHF EURO 2026 confirmed|website=ईएचएफ |publisher= यूरोपीय हैंडबॉल महासंघ|date=8 मार्च 2024|access-date=अक्टूबर 23, 2025|archive-date=सितंबर 7, 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20250907203356/https://www.eurohandball.com/en/news/en/organisers-for-women-s-ehf-euro-2026-confirmed/|url-status=live}}</ref> * [[५ दिसम्बर|5 दिसंबर]] – 2026 में गाम्बिया में राष्ट्रपति चुनाव होने वाला है।<ref>{{Cite web|title=2026 presidential election set for Dec 5 – IEC Chairman|url=https://thepoint.gm/africa/gambia/headlines/2026-presidential-election-set-for-dec-5-iec-chairman|website=thepoint.gm|access-date=2025-11-28|language=en-US|date=2025-10-10}}</ref> * [[६ दिसम्बर|6 दिसंबर]] – अबू धाबी ग्रांड प्रिक्स का आयोजन निर्धारित है।<ref>{{Cite web | title=Abu Dhabi Grand Prix 2026 - F1 Race | url=https://www.formula1.com/en/racing/2026/united-arab-emirates | access-date=2026-08-01 | website=www.formula1.com}}</ref> * [[२२ दिसम्बर|22 दिसंबर]] – 2026 दक्षिण सूडानी आम चुनाव आयोजित होने वाले हैं, जो 2011 में देश की स्वतंत्रता के बाद पहला चुनाव होगा।<ref>{{Cite web |last=माचोल|first=डेंग|date=14 सितंबर 2024 |title=South Sudan postpones December elections by 2 years citing incomplete preparations |url=https://apnews.com/article/south-sudan-elections-postponed-10a4e41a1b967cc51ec52a354a86d489 |access-date=14 सितंबर 2024 |work=एसोसिएटेड प्रेस न्यूज़ |language=en-us |archive-date=जनवरी 14, 2026 |archive-url=https://web.archive.org/web/20260114013801/https://apnews.com/article/south-sudan-elections-postponed-10a4e41a1b967cc51ec52a354a86d489 |url-status=live}}</ref> * [[२६ दिसम्बर|26 दिसंबर]] - यदि इससे पहले कोई घटना न घटित होती है, तो 2026 के सर्बियाई राष्ट्रपति चुनाव इस तिथि से पहले ही आयोजित किए जाएंगे। == नोबल पुरस्कार == * [[रसायन शास्त्र में नोबेल पुरस्कार|रसायन विज्ञान]] – हेनरी बी. कागन और केंसो सोई, असममित [[कार्बनिक संश्लेषण]] में गैर-रेखीय प्रभावों और स्व-उत्प्रेरण की खोज के लिए।<ref>{{Cite web |date=अक्टूबर 7, 2026 |title=Nobel Prize in Chemistry 2026 |url=https://www.nobelprize.org/prizes/chemistry/2026/summary/ |access-date=अक्टूबर 7, 2026 |website=[[नोबेल पुरस्कार]]}}</ref> * [[अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार|अर्थशास्त्र]] – रॉबर्ट ई. हॉल और माइकल वुडफोर्ड, [[आर्थिक नीति|मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरीकरण]] के माइक्रोइकॉनॉमिक आधारों के लिए।<ref>{{Cite web |date=अक्टूबर 12, 2026 |title=Sveriges Riksbank Prize in Economic Sciences in Memory of Alfred Nobel 2026 |url=https://www.nobelprize.org/prizes/economic-sciences/2026/summary/ |access-date=अक्टूबर 12, 2026 |website=[[नोबेल पुरस्कार]]}}</ref> * [[साहित्य में नोबेल पुरस्कार|साहित्य]] – [[ऐनी कार्सन]], उनके साहसिक और आविष्कारशील कार्यों के लिए , जिन्होंने शास्त्रीय परंपरा के साथ चंचल संवाद में समकालीन साहित्य के लिए नए रूप बनाए हैं।<ref>{{Cite web |date=अक्टूबर 8, 2026 |title=Nobel Prize in Literature 2026 |url=https://www.nobelprize.org/prizes/literature/2026/summary/ |access-date=अक्टूबर 8, 2026 |website=[[नोबेल पुरस्कार]]}}</ref> * [[नोबल शांति पुरस्कार|शांति]] – [[नवी पिल्लै]], [[अन्तरराष्ट्रीय विधि|शांति और अंतर्राष्ट्रीय कानून]] को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों के लिए।<ref>{{Cite web |date=अक्टूबर 9, 2026 |title=Nobel Peace Prize 2026 |url=https://www.nobelprize.org/prizes/peace/2026/summary/ |access-date=अक्टूबर 9, 2026 |website=[[नोबेल पुरस्कार]]}}</ref> * [[भौतिकी में नोबेल पुरस्कार|भौतिकी]] – फ्रांसिस हाल्ज़ेन , आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला में निर्णायक योगदान और खगोल भौतिकी मूल के उच्च-ऊर्जा [[न्यूट्रिनो]] की खोज के लिए।<ref>{{Cite web |date=अक्टूबर 6, 2026 |title=Nobel Prize in Physics 2026 |url=https://www.nobelprize.org/prizes/physics/2026/summary/ |access-date=अक्टूबर 6, 2026 |website=[[नोबेल पुरस्कार]]}}</ref> * [[शरीरक्रिया विज्ञान या चिकित्सा में नोबेल पुरस्कार|फिजियोलॉजी या मेडिसिन]] - कार्ल डीसेरोथ , पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागल , प्रकाश-गेटेड आयन चैनलों और ऑप्टोजेनेटिक्स से संबंधित उनकी खोजों के लिए।<ref>{{Cite web |date=अक्टूबर 5, 2026 |title=Nobel Prize in Physiology or Medicine 2026 |url=https://www.nobelprize.org/prizes/medicine/2026/summary/ |access-date=अक्टूबर 5, 2026 |website=[[नोबेल पुरस्कार]]}}</ref> == सन्दर्भ == [[श्रेणी:2026]] ibz99c5f9604lg410st0y7h9h8nu8wm प्रारूप:सैयद तनीश अहमद 0 1620173 6630283 6630111 2026-10-16T17:52:38Z चाहर धर्मेंद्र 703114 6630283 wikitext text/x-wiki {{Infobox organization|name=पुरकाज़ी सेवा संगठन|native_name=Purkazi Seva Sangathan|image=|caption=|headquarters=[[पुरकाज़ी]], [[मुज़फ्फरनगर ज़िला|मुज़फ्फरनगर]], उत्तर प्रदेश, भारत|founder=[[सैयद तनीश अहमद]]|leader_title=अध्यक्ष|leader_name=सैयद तनीश अहमद|area_served=मुज़फ्फरनगर एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश|type=गैर-सरकारी एवं गैर-राजनीतिक संगठन|purpose=सामाजिक कल्याण, जन-जागरूकता, प्रशासनिक सहायता}}'''पुरकाज़ी सेवा संगठन''' उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर ज़िले के पुरकाज़ी क्षेत्र में सक्रिय एक स्थानीय गैर-राजनीतिक एवं सामाजिक संगठन है। संगठन की स्थापना स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सैयद तनीश अहमद द्वारा की गई, जो वर्तमान में इसके अध्यक्ष के रूप में भी कार्यरत हैं। संगठन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में नागरिक अधिकारों की रक्षा, जनहित की समस्याओं का निवारण और सरकारी योजनाओं की पहुँच आम जनता तक सुनिश्चित करना है।<ref>{{Cite web|url=https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/muzaffar-nagar/story-free-family-id-camp-organized-by-purakazi-service-organization-201790534935662.html|title=Muzaffarnagar News: पुरकाजी सेवा संगठन ने लगाया फैमिली आईडी कैंप|date=2026-09-28|website=www.livehindustan.com|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> == पृष्ठभूमि एवं उद्देश्य == संगठन की स्थापना स्थानीय नागरिकों को प्रशासनिक सहायता प्रदान करने, सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे से संबंधित समस्याओं को अधिकारियों तक पहुँचाने और कमजोर वर्गों के लिए जनकल्याणकारी पहल चलाने के उद्देश्य से की गई थी। इसके नेतृत्व में कस्बे के युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जोड़कर नागरिक सेवाओं के विस्तार पर बल दिया जाता है। == प्रमुख गतिविधियाँ एवं सामाजिक कार्य == पुरकाज़ी सेवा संगठन द्वारा समय-समय पर नागरिक सहायता और जनहित के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं: * '''निःशुल्क फैमिली आईडी शिविर:''' सितंबर 2026 में संगठन द्वारा पुरकाज़ी स्थित मदरसा तालीमुल इस्लाम (बाजार वाली जामा मस्जिद) में एक दिवसीय निःशुल्क फैमिली आईडी (परिवार पहचान पत्र) शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर के अंतर्गत कस्बे और आसपास के ग्रामीणों के सरकारी पोर्टल पर पहचान पत्र और परिवार पंजीकरण के आवेदन निःशुल्क कराए गए, ताकि उन्हें राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके। * '''नागरिक सुविधाओं के लिए पैरवी:''' पुरकाज़ी क्षेत्र में सड़क, स्वच्छता, जलापूर्ति और विद्युत व्यवस्था से जुड़ी जन-समस्याओं को स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों के समक्ष उठाना। * '''जन-जागरूकता अभियान:''' शिक्षा, सरकारी दस्तावेज़ों के डिजिटलीकरण और नागरिक अधिकारों के प्रति आम जनता को जागरूक करने के लिए दिशा-निर्देश सत्र आयोजित करना। == नेतृत्व == संगठन का संचालन एक केंद्रीय समिति द्वारा किया जाता है, जिसके संस्थापक एवं वर्तमान अध्यक्ष सैयद तनीश अहमद हैं। == सन्दर्भ == {{reflist|refs=<ref name="hindustan2026">{{cite news |url=https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/muzaffar-nagar/story-free-family-id-camp-organized-by-purakazi-service-organization-201790534935662.html |title=पुरकाजी सेवा संगठन ने लगाया फैमिली आईडी कैंप |work=[[दैनिक हिन्दुस्तान]] |location=मुज़फ्फरनगर |date=2026-09-28 |language=hi |access-date=2026-10-15}}</ref>}} 37gkoui6m9zedgwpkbldxa9zrxe8g6u 6630284 6630283 2026-10-16T17:52:47Z चाहर धर्मेंद्र 703114 शीघ्र हटाने का अनुरोध ( मापदंड:[[वि:शीह#व7|शीह व7]]) 6630284 wikitext text/x-wiki {{db-spam}} {{Infobox organization|name=पुरकाज़ी सेवा संगठन|native_name=Purkazi Seva Sangathan|image=|caption=|headquarters=[[पुरकाज़ी]], [[मुज़फ्फरनगर ज़िला|मुज़फ्फरनगर]], उत्तर प्रदेश, भारत|founder=[[सैयद तनीश अहमद]]|leader_title=अध्यक्ष|leader_name=सैयद तनीश अहमद|area_served=मुज़फ्फरनगर एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश|type=गैर-सरकारी एवं गैर-राजनीतिक संगठन|purpose=सामाजिक कल्याण, जन-जागरूकता, प्रशासनिक सहायता}}'''पुरकाज़ी सेवा संगठन''' उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर ज़िले के पुरकाज़ी क्षेत्र में सक्रिय एक स्थानीय गैर-राजनीतिक एवं सामाजिक संगठन है। संगठन की स्थापना स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सैयद तनीश अहमद द्वारा की गई, जो वर्तमान में इसके अध्यक्ष के रूप में भी कार्यरत हैं। संगठन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में नागरिक अधिकारों की रक्षा, जनहित की समस्याओं का निवारण और सरकारी योजनाओं की पहुँच आम जनता तक सुनिश्चित करना है।<ref>{{Cite web|url=https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/muzaffar-nagar/story-free-family-id-camp-organized-by-purakazi-service-organization-201790534935662.html|title=Muzaffarnagar News: पुरकाजी सेवा संगठन ने लगाया फैमिली आईडी कैंप|date=2026-09-28|website=www.livehindustan.com|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> == पृष्ठभूमि एवं उद्देश्य == संगठन की स्थापना स्थानीय नागरिकों को प्रशासनिक सहायता प्रदान करने, सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे से संबंधित समस्याओं को अधिकारियों तक पहुँचाने और कमजोर वर्गों के लिए जनकल्याणकारी पहल चलाने के उद्देश्य से की गई थी। इसके नेतृत्व में कस्बे के युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जोड़कर नागरिक सेवाओं के विस्तार पर बल दिया जाता है। == प्रमुख गतिविधियाँ एवं सामाजिक कार्य == पुरकाज़ी सेवा संगठन द्वारा समय-समय पर नागरिक सहायता और जनहित के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं: * '''निःशुल्क फैमिली आईडी शिविर:''' सितंबर 2026 में संगठन द्वारा पुरकाज़ी स्थित मदरसा तालीमुल इस्लाम (बाजार वाली जामा मस्जिद) में एक दिवसीय निःशुल्क फैमिली आईडी (परिवार पहचान पत्र) शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर के अंतर्गत कस्बे और आसपास के ग्रामीणों के सरकारी पोर्टल पर पहचान पत्र और परिवार पंजीकरण के आवेदन निःशुल्क कराए गए, ताकि उन्हें राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके। * '''नागरिक सुविधाओं के लिए पैरवी:''' पुरकाज़ी क्षेत्र में सड़क, स्वच्छता, जलापूर्ति और विद्युत व्यवस्था से जुड़ी जन-समस्याओं को स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों के समक्ष उठाना। * '''जन-जागरूकता अभियान:''' शिक्षा, सरकारी दस्तावेज़ों के डिजिटलीकरण और नागरिक अधिकारों के प्रति आम जनता को जागरूक करने के लिए दिशा-निर्देश सत्र आयोजित करना। == नेतृत्व == संगठन का संचालन एक केंद्रीय समिति द्वारा किया जाता है, जिसके संस्थापक एवं वर्तमान अध्यक्ष सैयद तनीश अहमद हैं। == सन्दर्भ == {{reflist|refs=<ref name="hindustan2026">{{cite news |url=https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/muzaffar-nagar/story-free-family-id-camp-organized-by-purakazi-service-organization-201790534935662.html |title=पुरकाजी सेवा संगठन ने लगाया फैमिली आईडी कैंप |work=[[दैनिक हिन्दुस्तान]] |location=मुज़फ्फरनगर |date=2026-09-28 |language=hi |access-date=2026-10-15}}</ref>}} f689k7bfjwqkenj21477k68ead9s65w विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/जयदेव वशिष्ठ 4 1620186 6630285 6630024 2026-10-16T17:58:10Z चाहर धर्मेंद्र 703114 /* जयदेव वशिष्ठ */ उत्तर दिया ([[mw:c:Special:MyLanguage/User:JWBTH/CD|CD]]) 6630285 wikitext text/x-wiki === [[:जयदेव वशिष्ठ]] === {{हहेच श्रेणीकरण|वर्तमान=हाँ|प्रकार=लेख|तिथि=अक्टूबर 2026}} :{{la|1=जयदेव वशिष्ठ}} :{{गूगल|खोज|समाचार|पुस्तक|विद्वान|जयदेव वशिष्ठ -विकिपीडिया -wikipedia}} नामांकन के लिये कारण: उल्लेखनीयता नहीं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 04:40, 16 अक्टूबर 2026 (UTC) * '''हटाएँ''' - नामांकन अनुसार [[User:विक्रम प्रताप|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:विक्रम प्रताप|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:41, 16 अक्टूबर 2026 (UTC) * खोज करने पर इस जानकारी के समर्थन में कोई विश्वसनीय संदर्भ नहीं मिला। अतः उचित स्रोत उपलब्ध होने तक इसे लेख से हटाना बेहतर होगा। <span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 17:58, 16 अक्टूबर 2026 (UTC) e0av9f0zimtd1b2wr3pqxtqqzl7fcxq मॉड्यूल:Location map/data/Germany Berlin 828 1620198 6630237 2026-10-16T13:27:23Z अमर तिवारी 932885 नया पृष्ठ: return { name ='बर्लिन', top =52.684707, bottom=52.327157, left =13.066864, right =13.781318, image ='Berlin location 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क्लिक में <code>{{tl|Duplicated citations}}</code> रखरखाव साँचा जोड़ने की सुविधा देता है। सामूहिक परीक्षण हेतु यह [[Special:BlankPage/DupRef]] पर एक नियंत्रण पटल उपलब्ध कराता है, जहाँ किसी भी नामस्थान या श्रेणी के पृष्ठों को छानकर द्विरुक्त सन्दर्भ वाले लेखों को चिह्नित किया जा सकता है। गलत चिह्नांकन रोकने के लिए यह भिन्न पृष्ठ संख्याओं, उद्धरणों, वीडियो समय-चिह्नों, पुरालेख कड़ियों तथा निर्वाचित या अच्छे लेखों को स्वतः छोड़ देता है। == स्थापना एवं उपयोग == इस उपकरण को सक्रिय करने के लिए अपनी [[Special:MyPage/common.js|common.js]] फ़ाइल में निम्नलिखित कोड जोड़कर सहेजें और ब्राउज़र का कैश साफ़ करें: <syntaxhighlight lang="js" copy="1"> mw.loader.load('/w/index.php?title=सदस्य:विक्रम_प्रताप/DuplicateReferences.js&action=raw&ctype=text/javascript'); // Backlink: [[सदस्य:विक्रम प्रताप/DuplicateReferences.js]] </syntaxhighlight> सक्रिय होने के उपरांत किसी भी लेख में द्विरुक्त सन्दर्भ होने पर तालिका स्वतः दिखाई देगी। सामूहिक परीक्षण के लिए बाएँ साइडबार के उपकरण अनुभाग में '''द्विरुक्त सन्दर्भ परीक्षक''' कड़ी पर क्लिक करें अथवा सीधे [[Special:BlankPage/DupRef]] पृष्ठ पर जाएँ। == श्रेय एवं पूरक उपकरण == यह उपकरण अंग्रेज़ी विकिपीडिया की स्क्रिप्ट [[:en:User:Polygnotus/DuplicateReferences.js|User:Polygnotus/DuplicateReferences.js]] पर आधारित है, जिसका हिन्दी अनुकूलन एवं सामूहिक परीक्षण पटल [[सदस्य:विक्रम प्रताप|विक्रम प्रताप]] द्वारा विकसित किया गया है। चिह्नित लेखों के द्विरुक्त सन्दर्भों को एकीकृत करने हेतु इसके पूरक उपकरण [[सदस्य:विक्रम प्रताप/DupRefFixer.js]] का उपयोग किया जा सकता है। [[श्रेणी:विकिपीडिया स्क्रिप्ट]] dzd4s7fsnbnhbzv3p52hytdhfy4htvz 6630248 6630245 2026-10-16T15:03:15Z विक्रम प्रताप 911487 + ज्ञानसन्दूक 6630248 wikitext text/x-wiki {{infobox Wikipedia user script | name = DuplicateReferences.js |screenshot = द्विरुक्त सन्दर्भ परीक्षक.jpg |screenshotsize = 300px | desc = हिंदी विकिपीडिया पर द्विरुक्त सन्दर्भों की पहचान करने और रखरखाव साँचा जोड़ने वाला उपकरण। | author = [[सदस्य:विक्रम प्रताप|विक्रम प्रताप]] | status = सक्रिय | version = | updated = 2026 | browsers = सभी आधुनिक ब्राउज़र | source = [[सदस्य:विक्रम प्रताप/DuplicateReferences.js]] | categorize = yes }} '''द्विरुक्त सन्दर्भ परीक्षक''' हिन्दी विकिपीडिया के लेखों में एक से अधिक बार प्रयुक्त समान बाहरी कड़ियों की पहचान करने और उन्हें चिह्नित करने वाला एक जावास्क्रिप्ट उपकरण है। == कार्यप्रणाली == यह उपकरण एकल लेख और सामूहिक परीक्षण दोनों रूपों में कार्य करता है। किसी लेख के सन्दर्भ अनुभाग में एक ही बाहरी कड़ी का प्रयोग एक से अधिक बार होने पर यह सन्दर्भ सूची के ऊपर एक तालिका दिखाता है और एक क्लिक में <code>{{tl|Duplicated citations}}</code> रखरखाव साँचा जोड़ने की सुविधा देता है। सामूहिक परीक्षण हेतु यह [[Special:BlankPage/DupRef]] पर एक नियंत्रण पटल उपलब्ध कराता है, जहाँ किसी भी नामस्थान या श्रेणी के पृष्ठों को छानकर द्विरुक्त सन्दर्भ वाले लेखों को चिह्नित किया जा सकता है। गलत चिह्नांकन रोकने के लिए यह भिन्न पृष्ठ संख्याओं, उद्धरणों, वीडियो समय-चिह्नों, पुरालेख कड़ियों तथा निर्वाचित या अच्छे लेखों को स्वतः छोड़ देता है। == स्थापना एवं उपयोग == इस उपकरण को सक्रिय करने के लिए अपनी [[Special:MyPage/common.js|common.js]] फ़ाइल में निम्नलिखित कोड जोड़कर सहेजें और ब्राउज़र का कैश साफ़ करें: <syntaxhighlight lang="js" copy="1"> mw.loader.load('/w/index.php?title=सदस्य:विक्रम_प्रताप/DuplicateReferences.js&action=raw&ctype=text/javascript'); // Backlink: [[सदस्य:विक्रम प्रताप/DuplicateReferences.js]] </syntaxhighlight> सक्रिय होने के उपरांत किसी भी लेख में द्विरुक्त सन्दर्भ होने पर तालिका स्वतः दिखाई देगी। सामूहिक परीक्षण के लिए बाएँ साइडबार के उपकरण अनुभाग में '''द्विरुक्त सन्दर्भ परीक्षक''' कड़ी पर क्लिक करें अथवा सीधे [[Special:BlankPage/DupRef]] पृष्ठ पर जाएँ। == श्रेय एवं पूरक उपकरण == यह उपकरण अंग्रेज़ी विकिपीडिया की स्क्रिप्ट [[:en:User:Polygnotus/DuplicateReferences.js|User:Polygnotus/DuplicateReferences.js]] पर आधारित है, जिसका हिन्दी अनुकूलन एवं सामूहिक परीक्षण पटल [[सदस्य:विक्रम प्रताप|विक्रम प्रताप]] द्वारा विकसित किया गया है। चिह्नित लेखों के द्विरुक्त सन्दर्भों को एकीकृत करने हेतु इसके पूरक उपकरण [[सदस्य:विक्रम प्रताप/DupRefFixer.js]] का उपयोग किया जा सकता है। [[श्रेणी:विकिपीडिया स्क्रिप्ट]] epgeo540rithsh66wuhduqp4gnai8bb 6630250 6630248 2026-10-16T15:13:28Z विक्रम प्रताप 911487 /* स्थापना एवं उपयोग */ स्क्रिप्ट अद्यतन 6630250 wikitext text/x-wiki {{infobox Wikipedia user script | name = DuplicateReferences.js |screenshot = द्विरुक्त सन्दर्भ परीक्षक.jpg |screenshotsize = 300px | desc = हिंदी विकिपीडिया पर द्विरुक्त सन्दर्भों की पहचान करने और रखरखाव साँचा जोड़ने वाला उपकरण। | author = [[सदस्य:विक्रम प्रताप|विक्रम प्रताप]] | status = सक्रिय | version = | updated = 2026 | browsers = सभी आधुनिक ब्राउज़र | source = [[सदस्य:विक्रम प्रताप/DuplicateReferences.js]] | categorize = yes }} '''द्विरुक्त सन्दर्भ परीक्षक''' हिन्दी विकिपीडिया के लेखों में एक से अधिक बार प्रयुक्त समान बाहरी कड़ियों की पहचान करने और उन्हें चिह्नित करने वाला एक जावास्क्रिप्ट उपकरण है। == कार्यप्रणाली == यह उपकरण एकल लेख और सामूहिक परीक्षण दोनों रूपों में कार्य करता है। किसी लेख के सन्दर्भ अनुभाग में एक ही बाहरी कड़ी का प्रयोग एक से अधिक बार होने पर यह सन्दर्भ सूची के ऊपर एक तालिका दिखाता है और एक क्लिक में <code>{{tl|Duplicated citations}}</code> रखरखाव साँचा जोड़ने की सुविधा देता है। सामूहिक परीक्षण हेतु यह [[Special:BlankPage/DupRef]] पर एक नियंत्रण पटल उपलब्ध कराता है, जहाँ किसी भी नामस्थान या श्रेणी के पृष्ठों को छानकर द्विरुक्त सन्दर्भ वाले लेखों को चिह्नित किया जा सकता है। गलत चिह्नांकन रोकने के लिए यह भिन्न पृष्ठ संख्याओं, उद्धरणों, वीडियो समय-चिह्नों, पुरालेख कड़ियों तथा निर्वाचित या अच्छे लेखों को स्वतः छोड़ देता है। == स्थापना एवं उपयोग == इस उपकरण को सक्रिय करने के लिए अपनी [[Special:MyPage/common.js|common.js]] फ़ाइल में निम्नलिखित कोड जोड़कर सहेजें और ब्राउज़र का कैश साफ़ करें: <syntaxhighlight lang="js" copy="1"> importScript('सदस्य:विक्रम प्रताप/DuplicateReferences.js'); // Backlink: [[सदस्य:AMAN KUMAR/DuplicateReferences.js]] </syntaxhighlight> सक्रिय होने के उपरांत किसी भी लेख में द्विरुक्त सन्दर्भ होने पर तालिका स्वतः दिखाई देगी। सामूहिक परीक्षण के लिए बाएँ साइडबार के उपकरण अनुभाग में '''द्विरुक्त सन्दर्भ परीक्षक''' कड़ी पर क्लिक करें अथवा सीधे [[Special:BlankPage/DupRef]] पृष्ठ पर जाएँ। == श्रेय एवं पूरक उपकरण == यह उपकरण अंग्रेज़ी विकिपीडिया की स्क्रिप्ट [[:en:User:Polygnotus/DuplicateReferences.js|User:Polygnotus/DuplicateReferences.js]] पर आधारित है, जिसका हिन्दी अनुकूलन एवं सामूहिक परीक्षण पटल [[सदस्य:विक्रम प्रताप|विक्रम प्रताप]] द्वारा विकसित किया गया है। चिह्नित लेखों के द्विरुक्त सन्दर्भों को एकीकृत करने हेतु इसके पूरक उपकरण [[सदस्य:विक्रम प्रताप/DupRefFixer.js]] का उपयोग किया जा सकता है। [[श्रेणी:विकिपीडिया स्क्रिप्ट]] fahlrdyriro1bjkqc1tj8nhnobln1pa मातृ -पितृ (पूजन दिवस) 0 1620201 6630253 2026-10-16T15:52:36Z Dsrprj 780832 Created by translating the opening section from the page "[[:en:Special:Redirect/revision/1378259620|Parents' Worship Day]]" 6630253 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक त्योहार||holiday_name=मातृ -पितृ (पूजन दिवस)|image=|caption=|observedby=India|date=14 February|duration=1 day|frequency=Annual|scheduling=|type=cultural|celebrations=Worship of Parents|relatedto=|ends=|firsttime=|month=|weekday=|alt=|begins=|significance=|litcolor=|nickname=|official_name=}} '''माता-पिता पूजा दिवस''', जिसे मातृ पितृ पूजा दिवस के रूप में जाना जाता है, संत श्री आसाराम बापू जी द्वारा 2007 में [[वैलेंटाइन दिवस|वेलेंटाइन डे]] के विकल्प के रूप में शुरू किया गया था।<ref name=":0">{{Cite news|url=https://www.newindianexpress.com/states/odisha/2011/feb/15/indianisation-of-valentines-day-227757.html|title=Indianisation of Valentine's Day|date=February 15, 2011|work=The New Indian Express}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/other-states/feb-14-is-parents-day-in-chhattisgarh/article6869015.ece|title=Valentine's Day to be Parents' Day in Chhattisgarh|last=Dahat|first=Pavan|date=2015-02-07|work=The Hindu|language=en-IN}}</ref><ref name="IT1">{{Cite news|url=https://www.indiatoday.in/india/south/story/worship-parents-on-valentines-day-asaram-bapu-91251-2012-01-28|title=Worship parents on Valentine's Day, says Sant Shri Asharam Ji Bapu|last=Bhattacharya|first=D.P.|date=January 29, 2012|work=India Today}}</ref> यह हर साल 14 फरवरी को मनाया जाता है।<ref name=":02">{{Cite news|url=http://timesofindia.indiatimes.com/india/Its-official-Chhattisgarh-renames-V-Day-as-Matru-Pitru-Diwas/articleshow/46151391.cms|title=It's official: Chhattisgarh renames Valentines Day as 'Matru-Pitru Diwas'|date=7 February 2015|work=The Times of India|access-date=2015-12-13}}</ref> यह संस्कृत के शब्दों मां (''मातृ'', मातृ और पिता) पर आधारित है। sf8sbz7zvx24zkm1dyotsqyo2disu0w 6630254 6630253 2026-10-16T15:53:13Z Dsrprj 780832 /* */ 6630254 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक त्योहार||holiday_name=मातृ -पितृ (पूजन दिवस)|image=|caption=|observedby=India|date=14 February|duration=1 day|frequency=Annual|scheduling=|type=cultural|celebrations=Worship of Parents|relatedto=|ends=|firsttime=|month=|weekday=|alt=|begins=|significance=|litcolor=|nickname=|official_name=}} '''माता-पिता पूजा दिवस''', जिसे मातृ पितृ पूजा दिवस के रूप में जाना जाता है, संत श्री आसाराम बापू जी द्वारा 2007 में [[वैलेंटाइन दिवस|वेलेंटाइन डे]] के विकल्प के रूप में शुरू किया गया था।<ref name=":0">{{Cite news|url=https://www.newindianexpress.com/states/odisha/2011/feb/15/indianisation-of-valentines-day-227757.html|title=Indianisation of Valentine's Day|date=February 15, 2011|work=The New Indian Express}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/other-states/feb-14-is-parents-day-in-chhattisgarh/article6869015.ece|title=Valentine's Day to be Parents' Day in Chhattisgarh|last=Dahat|first=Pavan|date=2015-02-07|work=The Hindu|language=en-IN}}</ref><ref name="IT1">{{Cite news|url=https://www.indiatoday.in/india/south/story/worship-parents-on-valentines-day-asaram-bapu-91251-2012-01-28|title=Worship parents on Valentine's Day, says Sant Shri Asharam Ji Bapu|last=Bhattacharya|first=D.P.|date=January 29, 2012|work=India Today}}</ref> यह हर साल 14 फरवरी को मनाया जाता है।<ref name=":02">{{Cite news|url=http://timesofindia.indiatimes.com/india/Its-official-Chhattisgarh-renames-V-Day-as-Matru-Pitru-Diwas/articleshow/46151391.cms|title=It's official: Chhattisgarh renames Valentines Day as 'Matru-Pitru Diwas'|date=7 February 2015|work=The Times of India|access-date=2015-12-13}}</ref> यह संस्कृत के शब्दों मां (''मातृ'', मातृ और पिता) पर आधारित है। ==संदर्भ== grjroh3f53bux3ky3blia4timct6qp6 6630255 6630254 2026-10-16T15:53:53Z Dsrprj 780832 /* */ Cr 6630255 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक त्योहार||holiday_name=मातृ -पितृ (पूजन दिवस)|image=|caption=|observedby=India|date=14 February|duration=1 day|frequency=Annual|scheduling=|type=cultural|celebrations=Worship of Parents|relatedto=|ends=|firsttime=|month=|weekday=|alt=|begins=|significance=|litcolor=|nickname=|official_name=}} [[File:Parents Worship Day Lucknow 2019(1).jpg|thumb]] [[File:MPPD celebrations Rajasthan 2019 image 2(1).jpg|thumb]] '''माता-पिता पूजा दिवस''', जिसे मातृ पितृ पूजा दिवस के रूप में जाना जाता है, संत श्री आसाराम बापू जी द्वारा 2007 में [[वैलेंटाइन दिवस|वेलेंटाइन डे]] के विकल्प के रूप में शुरू किया गया था।<ref name=":0">{{Cite news|url=https://www.newindianexpress.com/states/odisha/2011/feb/15/indianisation-of-valentines-day-227757.html|title=Indianisation of Valentine's Day|date=February 15, 2011|work=The New Indian Express}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/other-states/feb-14-is-parents-day-in-chhattisgarh/article6869015.ece|title=Valentine's Day to be Parents' Day in Chhattisgarh|last=Dahat|first=Pavan|date=2015-02-07|work=The Hindu|language=en-IN}}</ref><ref name="IT1">{{Cite news|url=https://www.indiatoday.in/india/south/story/worship-parents-on-valentines-day-asaram-bapu-91251-2012-01-28|title=Worship parents on Valentine's Day, says Sant Shri Asharam Ji Bapu|last=Bhattacharya|first=D.P.|date=January 29, 2012|work=India Today}}</ref> यह हर साल 14 फरवरी को मनाया जाता है।<ref name=":02">{{Cite news|url=http://timesofindia.indiatimes.com/india/Its-official-Chhattisgarh-renames-V-Day-as-Matru-Pitru-Diwas/articleshow/46151391.cms|title=It's official: Chhattisgarh renames Valentines Day as 'Matru-Pitru Diwas'|date=7 February 2015|work=The Times of India|access-date=2015-12-13}}</ref> यह संस्कृत के शब्दों मां (''मातृ'', मातृ और पिता) पर आधारित है। ==संदर्भ== r8m8gh7skbjaikmcn3zwb76e1d7emmi 6630256 6630255 2026-10-16T16:12:08Z विक्रम प्रताप 911487 Synced 1 category from enwiki ([[:m:User:Saroj/CatSync|CatSync]]) 6630256 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक त्योहार||holiday_name=मातृ -पितृ (पूजन दिवस)|image=|caption=|observedby=India|date=14 February|duration=1 day|frequency=Annual|scheduling=|type=cultural|celebrations=Worship of Parents|relatedto=|ends=|firsttime=|month=|weekday=|alt=|begins=|significance=|litcolor=|nickname=|official_name=}} [[File:Parents Worship Day Lucknow 2019(1).jpg|thumb]] [[File:MPPD celebrations Rajasthan 2019 image 2(1).jpg|thumb]] '''माता-पिता पूजा दिवस''', जिसे मातृ पितृ पूजा दिवस के रूप में जाना जाता है, संत श्री आसाराम बापू जी द्वारा 2007 में [[वैलेंटाइन दिवस|वेलेंटाइन डे]] के विकल्प के रूप में शुरू किया गया था।<ref name=":0">{{Cite news|url=https://www.newindianexpress.com/states/odisha/2011/feb/15/indianisation-of-valentines-day-227757.html|title=Indianisation of Valentine's Day|date=February 15, 2011|work=The New Indian Express}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/other-states/feb-14-is-parents-day-in-chhattisgarh/article6869015.ece|title=Valentine's Day to be Parents' Day in Chhattisgarh|last=Dahat|first=Pavan|date=2015-02-07|work=The Hindu|language=en-IN}}</ref><ref name="IT1">{{Cite news|url=https://www.indiatoday.in/india/south/story/worship-parents-on-valentines-day-asaram-bapu-91251-2012-01-28|title=Worship parents on Valentine's Day, says Sant Shri Asharam Ji Bapu|last=Bhattacharya|first=D.P.|date=January 29, 2012|work=India Today}}</ref> यह हर साल 14 फरवरी को मनाया जाता है।<ref name=":02">{{Cite news|url=http://timesofindia.indiatimes.com/india/Its-official-Chhattisgarh-renames-V-Day-as-Matru-Pitru-Diwas/articleshow/46151391.cms|title=It's official: Chhattisgarh renames Valentines Day as 'Matru-Pitru Diwas'|date=7 February 2015|work=The Times of India|access-date=2015-12-13}}</ref> यह संस्कृत के शब्दों मां (''मातृ'', मातृ और पिता) पर आधारित है। ==संदर्भ== [[श्रेणी:भारत में त्यौहार]] e4wh4oennhhkdm232jy9u2uxcxknub7 सदस्य वार्ता:XiaYZ2023 3 1620202 6630258 2026-10-16T16:16:33Z Fathoms Below 716012 Fathoms Below ने पृष्ठ [[सदस्य वार्ता:XiaYZ2023]] को [[सदस्य वार्ता:LLnyaX0117]] पर स्थानांतरित किया: "[[Special:CentralAuth/XiaYZ2023|XiaYZ2023]]" का नाम "[[Special:CentralAuth/LLnyaX0117|LLnyaX0117]]" करते समय पृष्ठ स्वतः स्थानांतरित हुआ 6630258 wikitext text/x-wiki #पुनर्प्रेषित [[सदस्य वार्ता:LLnyaX0117]] 69w3nqt49vl269lya9ftvv8rmf9qbje सदस्य:Shaan Sengupta 2 1620203 6630259 2026-10-16T16:17:03Z Shaan Sengupta 775249 /* */ पृष्ठ निर्मित किया। 6630259 wikitext text/x-wiki <center>'''नमस्ते, मेरे उपयोगकर्ता पृष्ठ पर आपका स्वागत है!<br> <font size=70px>[[User:Shaan Sengupta|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;"><font color="#FF9933">'''''शान सेनगुप्ता'''''</font></span>]]</font></center> {|align=center |[[File:New-Bouncywikilogo.gif|125px]] |[[File:New-Bouncywikilogo.gif|125px]] |[[File:New-Bouncywikilogo.gif|125px]] |} {{Letterhead start}} *''“यह सचमुच '''[[:भारत]]''' है! सपनों और रोमांस की भूमि, असीम धन और गरीबी की भूमि... सौ राष्ट्रों और सौ भाषाओं का देश, हज़ार धर्मों और २० लाख देवताओं का देश, मानव जाति का उद्गम स्थल, मानव वाणी का जन्मस्थान, इतिहास की जननी, किंवदंतियों की दादी और परंपराओं की परदादी।” — [[:मार्क ट्वैन]]''<hr/> *''“'''[[:वाराणसी|बनारस]]''' इतिहास से भी पुराना है, परंपरा से भी पुराना है, किंवदंतियों से भी पुराना है, और इन सबको मिलाकर भी दो गुना पुराना दिखता है।” — [[:मार्क ट्वैन]]''<hr/> *'''“''[[:भारत]]''' हमारी जाति की मातृभूमि थी, और [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] यूरोप की भाषाओं की जननी। वह हमारे दर्शन की जननी थीं; माँ, हमारे अधिकांश गणित की; माँ, बुद्ध के माध्यम से, ईसाई धर्म में निहित आदर्शों की। माँ, ग्राम समुदाय के माध्यम से, स्वशासन और लोकतंत्र की। '''[[:भारतमाता|भारत माता]]''' कई मायनों में हम सबकी माता है।” — [[:विल डुराण्ट]]'' {{Letterhead end}} {{Infobox user | abovecolor = #FF9933 | color = #FF9933 | title = शान सेनगुप्ता | image = Flag of India.svg | image_caption = [[भारत का ध्वज|भारत गणराज्य का राष्ट्रीय ध्वज]] | image_width = 250px | name = शान सेनगुप्ता | gender = पुरुष | languages = [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]], [[हिन्दी]] | birthdate = २००२ | birthplace = [[File:Emblem of India.svg|10px]] [[भारत]] | location = | country = भारत | timezone = [[भारतीय मानक समय]] ([[यूटीसी+०५:३०]]) | current_time = | nationality = [[File:Ashoka Chakra.svg|15px]] [[भारत के लोग|भारतीय]] | ethnicity = | race = इंडो-आर्यन | height = {{convert|5.9|ft|cm|abbr=on}} | weight = {{convert| 80|kg|lb stlb|abbr=on}} | hair = काला | eyes = काला | handedness = दांया हाथ | blood_type = | marital status = अविवाहित | 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Uttarakhand.jpg|thumb|[[बद्रीनाथ मन्दिर]]]] |} {| |[[File:Kedarnath Temple in Rainy season.jpg|thumb|[[केदारनाथ मन्दिर]]]] |[[File:Dwarkadheesh temple.jpg|thumb|[[श्री द्वारकाधीश मंदिर]]]] |} {| |[[File:Somanath mandir (cropped).jpg|thumb|[[सोमनाथ मन्दिर]]]] |[[File:Jagannath Temple on 2022 Snana Jatra.jpg|thumb|[[जगन्नाथ मन्दिर, पुरी|जगन्नाथ पुरी मन्दिर]]]] |} {{Busy}} * '''[[Special:Prefixindex/User:Shaan_Sengupta/|शान सेनगुप्ता के विकिपीडिया खाता के उपपृष्ठ]]'''<br> * '''[https://xtools.wmflabs.org/ec/hi.wikipedia.org/Shaan_Sengupta शान सेनगुप्ता के विकिपीडिया खाता सांख्यिकी]''' {{User unified login|Shaan Sengupta|background=#FF9933|border=red}} {{सदस्य पृष्ठ|background=#FF9933|border=red}} {{/top}} gp280gt3hn5n613cx66fru4wcvs3etf 6630268 6630259 2026-10-16T16:41:47Z Shaan Sengupta 775249 /* */ Userboxes, more may come. 6630268 wikitext text/x-wiki <center>'''नमस्ते, मेरे उपयोगकर्ता पृष्ठ पर आपका स्वागत है!<br> <font size=70px>[[User:Shaan Sengupta|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;"><font color="#FF9933">'''''शान सेनगुप्ता'''''</font></span>]]</font></center> {|align=center |[[File:New-Bouncywikilogo.gif|125px]] |[[File:New-Bouncywikilogo.gif|125px]] |[[File:New-Bouncywikilogo.gif|125px]] |} {{Letterhead start}} *''“यह सचमुच '''[[:भारत]]''' है! सपनों और रोमांस की भूमि, असीम धन और गरीबी की भूमि... सौ राष्ट्रों और सौ भाषाओं का देश, हज़ार धर्मों और २० लाख देवताओं का देश, मानव जाति का उद्गम स्थल, मानव वाणी का जन्मस्थान, इतिहास की जननी, किंवदंतियों की दादी और परंपराओं की परदादी।” — [[:मार्क ट्वैन]]''<hr/> *''“'''[[:वाराणसी|बनारस]]''' इतिहास से भी पुराना है, परंपरा से भी पुराना है, किंवदंतियों से भी पुराना है, और इन सबको मिलाकर भी दो गुना पुराना दिखता है।” — [[:मार्क ट्वैन]]''<hr/> *'''“''[[:भारत]]''' हमारी जाति की मातृभूमि थी, और [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] यूरोप की भाषाओं की जननी। वह हमारे दर्शन की जननी थीं; माँ, हमारे अधिकांश गणित की; माँ, बुद्ध के माध्यम से, ईसाई धर्म में निहित आदर्शों की। माँ, ग्राम समुदाय के माध्यम से, स्वशासन और लोकतंत्र की। '''[[:भारतमाता|भारत माता]]''' कई मायनों में हम सबकी माता है।” — [[:विल डुराण्ट]]'' {{Letterhead end}} {{Infobox user | abovecolor = #FF9933 | color = #FF9933 | title = शान सेनगुप्ता | image = Flag of India.svg | image_caption = [[भारत का ध्वज|भारत गणराज्य का राष्ट्रीय ध्वज]] | image_width = 250px | name = शान सेनगुप्ता | gender = पुरुष | languages = [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]], [[हिन्दी]] | birthdate = २००२ | birthplace = [[File:Emblem of India.svg|10px]] [[भारत]] | location = | country = भारत | timezone = [[भारतीय मानक समय]] ([[यूटीसी+०५:३०]]) | current_time = | nationality = [[File:Ashoka Chakra.svg|15px]] [[भारत के लोग|भारतीय]] | ethnicity = | race = इंडो-आर्यन | height = {{convert|5.9|ft|cm|abbr=on}} | weight = {{convert| 80|kg|lb stlb|abbr=on}} | hair = काला | eyes = काला | handedness = दांया हाथ | blood_type = | marital status = अविवाहित | hobbies = [[वाचन]], [[यात्रा]], [[अनुसंधान]], [[भारत की राजनीति]] | religion = [[File:Om symbol.svg|20px]] [[सनातन 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2026 | predecessor1 = [[Adilur Rahman Khan]] | successor1 = [[Abdul Moyeen Khan]] | office2 = [[Minister of Civil Aviation and Tourism]] | predecessor2 = [[Mir Mohammad Nasiruddin]] | successor2 = [[M. A. Matin (officer)|M. A. Matin]] | termstart2 = 18 November 2005 | termend2 = 27 October 2006 | birth_date = {{Birth date and age|df=yes|1948|01|26}} | birth_place = [[Thakurgaon]], [[East Bengal]], Dominion of Pakistan | party = [[Bangladesh Nationalist Party]] | otherparty = | education = [[University of Dhaka]] | spouse = [[Rahat Ara Begum]] | children = 2 | occupation = | signature = Mirza Fakhrul Islam Alamgir Signature.svg }} [[श्रेणी:बांग्लादेश के राष्ट्रपति]] [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:1948 में जन्मे लोग]] nkhtcrr88sdpc3u3yg3ipuml83g7l7i साँचा:User male 10 1620205 6630267 2026-10-16T16:39:27Z Shaan Sengupta 775249 /* */ निर्मित किया। 6630267 wikitext text/x-wiki {{userbox | border-c = #106082 | id-c = #97DEFF | id-op = font-size:xx-large; | id = ♂ | info-c = #97DEFF | info-s = 9 | info-fc = darkblue | info-a = center | info = विकिपीडिया का यह सदस्य '''[[पुरुष|<span style="color: darkblue;">पुरुष</span>]]''' है। }} e72cn3x4bidnoq5wgjsvqvclonv4547 सदस्य:राजेश मिश्र 2 1620206 6630274 2026-10-16T17:13:07Z राजेश मिश्र 524886 /* */ मगधर्म संसद के राष्ट्रीय धर्माधिकारी 6630274 wikitext text/x-wiki <nowiki>*</nowiki>राष्ट्रीय धर्माधिकारी -मग धर्म संसद* मग धर्म संसद के राष्ट्रीय धर्माधिकारी, प्रख्यात ज्योतिषाचार्य व शास्त्रविद आचार्य पं. राजेश मिश्र "कण" जी निवास -बरईपुर पथरा -आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश)का जीवन समाज को सही मार्ग दिखाने और सनातन मूल्यों के पुनरुत्थान के लिए समर्पित है। धर्म और समाज के प्रति उनका योगदान हर पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। मुख्य सामाजिक एवं धार्मिक योगदान: <nowiki/>*सनातन संस्कृति व वैदिक परंपरा का संरक्षण:-* आगम शास्त्र, वेद-पुराणों और ज्योतिष विद्या के गूढ़ ज्ञान के माध्यम से वे समाज को धर्म के वास्तविक और तार्किक स्वरूप से जोड़ रहे हैं। <nowiki>*</nowiki>आध्यात्मिक मार्गदर्शन एवं शंका समाधान:-* युवाओं और समाज के हर वर्ग की धार्मिक व सामाजिक जिज्ञासाओं का सहज समाधान कर उन्हें धर्म पथ पर अग्रसर करना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है। <nowiki/>*समाज कल्याण एवं जनसेवा:-* एक कुशल आध्यात्मिक चिंतक होने के साथ-साथ वे निस्वार्थ भाव से सामाजिक समरसता, लोक-कल्याण और मानवीय मूल्यों के उत्थान हेतु निरंतर कार्य कर रहे हैं। मार्गदर्शक एवं परामर्शदाता:- अपनी विद्या और ज्ञान से अनगिनत परिवारों को सकारात्मक दिशा प्रदान कर समाज में शांति और सुख-समृद्धि का वातावरण निर्मित कर रहे हैं। <nowiki>*</nowiki>मग धर्म संसद* 7jn8b2d51jzugujuz7929c7gaikj3zx वार्ता:बाबुषा कोहली 1 1620207 6630282 2026-10-16T17:50:50Z Aman Arora PTL 782136 /* शीघ्र हटाने पर चर्चा */ नया अनुभाग 6630282 wikitext text/x-wiki == शीघ्र हटाने पर चर्चा == इस पृष्ठ को साफ़ प्रचार होने के कारण नहीं हटाया जाना चाहिये क्योंकि... (यहाँ अपना कारण बताएँ) --[[सदस्य:Aman Arora PTL|Aman Arora PTL]] ([[सदस्य वार्ता:Aman Arora PTL|वार्ता]]) 17:50, 16 अक्टूबर 2026 (UTC) बाबुषा कोहली समकालीन हिंदी काव्य में एक चर्चित नाम है। यदि आपको लगता है कि मेरे द्वारा पेज बनाने में किसी नियम का उल्लंघन हुआ है तो कृप्या मार्गदर्शन करके इसे नीति अनुरूप बनाने में मेरा मार्ग दर्शन करें। 8skgueq8hss9w8x2eeqt56d2qpcpzyi 6630313 6630282 2026-10-16T20:49:51Z SparrowQ 86379 /* शीघ्र हटाने पर चर्चा */ उत्तर 6630313 wikitext text/x-wiki == शीघ्र हटाने पर चर्चा == इस पृष्ठ को साफ़ प्रचार होने के कारण नहीं हटाया जाना चाहिये क्योंकि... (यहाँ अपना कारण बताएँ) --[[सदस्य:Aman Arora PTL|Aman Arora PTL]] ([[सदस्य वार्ता:Aman Arora PTL|वार्ता]]) 17:50, 16 अक्टूबर 2026 (UTC) :क्या कोई उल्लेखनीय काम किया गया है? यदि हाँ, तो कृपया उसे संदर्भों (रेफरेंस) के साथ पेज पर जोड़ें। केवल व्यक्तिगत प्रोफ़ाइल की जानकारी न जोड़ें। [[सदस्य:SparrowQ|SparrowQ]] ([[सदस्य वार्ता:SparrowQ|वार्ता]]) 20:49, 16 अक्टूबर 2026 (UTC) बाबुषा कोहली समकालीन हिंदी काव्य में एक चर्चित नाम है। यदि आपको लगता है कि मेरे द्वारा पेज बनाने में किसी नियम का उल्लंघन हुआ है तो कृप्या मार्गदर्शन करके इसे नीति अनुरूप बनाने में मेरा मार्ग दर्शन करें। 7jng13lsawfhn2b0vh987mcyq5wrcm7 सदस्य वार्ता:Surj.krr 3 1620208 6630295 2026-10-16T18:59:41Z Mfield 881963 Mfield ने पृष्ठ [[सदस्य वार्ता:Surj.krr]] को [[सदस्य वार्ता:Snsjsjsjsj]] पर स्थानांतरित किया: "[[Special:CentralAuth/Surj.krr|Surj.krr]]" का नाम "[[Special:CentralAuth/Snsjsjsjsj|Snsjsjsjsj]]" करते समय पृष्ठ स्वतः स्थानांतरित हुआ 6630295 wikitext text/x-wiki #पुनर्प्रेषित [[सदस्य वार्ता:Snsjsjsjsj]] cgw34g877f7t1dx7k42bp5gct8scjhg ओमलो 0 1620210 6630302 2026-10-16T20:26:32Z SparrowQ 86379 new page ओमलो added 6630302 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक फ़िल्म | name = ओमलो | director = सोनू रणदीप चौधरी | writer = सोनू रणदीप चौधरी | producer = रोहित मखीजा<br />मनीष गोपलानी<br />नेहा पाण्डेय<br />सोनू रणदीप चौधरी | starring = शम्भो महाजन<br />सोनू रणदीप चौधरी<br />सोनाली शर्मिष्ठा | music = गाज़ी खान बरना<br />भुवन आहूजा | cinematography = विल्सन रबिन्से | editing = नवनीत कुमार सिन्हा | studio = हरे कृष्णा पिक्चर्स | released = 13 मई 2025 (कान फ़िल्म मार्केट) | country = भारत | language = राजस्थानी }} '''ओमलो''' एक [[राजस्थानी भाषा|राजस्थानी]] सामाजिक ड्रामा फिल्म है, जिसे सोनू रणदीप चौधरी ने लिखा और निर्देशित किया है। वे इस फिल्म के सह-निर्माता भी हैं।<ref name="nie">{{cite web |title=Rajasthani film 'Omlo' set for global debut at Cannes film market 2025 |url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/hindi/2025/May/10/rajasthani-film-omlo-set-for-global-debut-at-cannes-film-market-2025 |website=The New Indian Express |date=10 मई 2025 |language=en}}</ref><ref name=":1">{{Cite news|url=https://hindi.news18.com/news/entertainment/film-review-omlo-movie-review-sonu-randeep-chaudhary-hindi-cinema-critic-rating-opinion-ws-n-10628546.html|title=Omlo Movie Review: रेगिस्तान की तपती रेत के बीच पीढ़ियों के दर्द, रोंगटे खड़े कर देगी 'ओमलो'|last=Shekhar|first=Pratik|date=04 July 2026|work=News 18 Hindi|access-date=17 October 2026}}</ref> [[बीकानेर ज़िला|बीकानेर ज़िले]] के [[श्रीडूंगरगढ़]] में फ़िल्माई गई यह फ़िल्म एक सात साल के एक लड़के और एक ऊंट के साथ गहरे भावनात्मक रिश्ते की समानांतर कहानी के माध्यम से पितृसत्ता, घरेलू हिंसा और पीढ़ियों से चले आ रहे आघात जैसे विषयों को उठाती है।<ref name="nie" /><ref>{{Cite web|url=https://www.abplive.com/movie-review/entertainment/movie-review-omlo-film-review-in-hindi-rating-stars-story-performance-3155146|title=ओमलो रिव्यू: कान्स में कमाल दिखाने वाली ये फिल्म वाकई बेमिसाल है, एक बच्चे और ऊंट के नजरिए से जिंदगी समझा जाती है ओमलो|last=भाटिया|first=अमित|date=2026-07-05|website=ABP News|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref><ref name=":1" /> == कलाकार == * शम्भो महाजन — ओमलो<ref>{{Cite web|url=https://www.dnaindia.com/entertainment/report-omlo-movie-review-shambho-mahajan-s-small-budget-film-emotes-generational-trauma-patriarchy-with-such-rawness-even-big-budget-dramas-fail-to-deliver-3215210|title=Omlo movie review: Shambho Mahajan's small-budget film emotes generational trauma, patriarchy with such rawness, even big-budget dramas fail to deliver|last=Singh|first=Simran|website=DNA India|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref> * सोनू रणदीप चौधरी — सुभाष * सोनाली शर्मिष्ठा == संगीत == फ़िल्म का संगीत गाज़ी खान बरना और भुवन आहूजा ने दिया है, गीत निर्देशक सोनू रणदीप चौधरी ने लिखे हैं, और पृष्ठभूमि संगीत देवेंद्र भोमे का है।<ref name="nie" /><ref name=":1" /> == पुरस्कार == इस फिल्म ने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव पुरस्कार जीते,<ref name=":2">{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/g/local/rajasthan/jaipur/news/omlo-rajsthani-film-ott-release-cannes-sonu-chaudhary-138333724.html|title=कांस गई राजस्थानी फिल्म ओमलो अब OTT पर होगी रिलीज: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिल चुके कई अवॉर्ड, पूरी फिल्म राजस्थान में शूट हुई - Jaipur News|date=2026-07-01|website=Dainik Bhaskar|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> जिनमें हाल ही में आयोजित 12वें राजस्थान फिल्म फेस्टिवल (RFF 2026) में ओमलो को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म,<ref>{{Cite web|url=https://aapnihathai.com/latest-news/bollywood-omlo-named-best-movie-at-the-rajasthan-film-festival-mamta-kulkarni-receives-lifetime-achievement/|title=Bollywood : राजस्थान फिल्म फेस्टिवल में 'ओमलो' बेस्ट मूवी, ममता कुलकर्णी को लाइफ टाइम अचीवमेंट, Bikaner की चारु आसोपा की लाइव परफॉर्मेंस का दिखा जलवा - Aapni Hathai - आपणी हथाई|date=2026-09-27|language=en-GB|access-date=2026-10-16}}</ref><ref name=":2" /> सोनू रणदीप चौधरी को सर्वश्रेष्ठ लेखक और गाजी खान बरना को सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का अवार्ड दिया गया।<ref name=":2" /> == रिलीज़ == फ़िल्म को 13 मई 2025 को [[कान फ़िल्म महोत्सव]] के समानांतर आयोजित कान फ़िल्म मार्केट (Marché du Film) में प्रदर्शित किया गया।<ref name="nie" /><ref name="hans">{{cite web |title='Omlo' – Rajasthan's First Global Film Heads to Cannes Festival 2025 |url=https://www.thehansindia.com/news/national/omlo-rajasthans-first-global-film-heads-to-cannes-festival-2025-969689 |website=The Hans India |year=2025 |language=en}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.etvbharat.com/hi/!entertainment/first-rajasthani-film-omlo-to-premiere-at-cannes-film-festival-rajasthan-news-rjs25051300840|title=कांस फिल्म फेस्टिवल में आज 'ओमलो' का प्रीमियर, यहां पहुंचने वाली पहली राजस्थानी फिल्म|last=Bharat|first=E. T. V.|date=2025-05-13|website=ETV Bharat News|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> इसके बाद इसे लंदन के 26वें रेनबो अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव में दिखाया गया।<ref name="midday">{{cite web |title=Rajasthani film Omlo to be screened at Cannes 2025 film market |url=https://www.mid-day.com/entertainment/regional-indian-cinema-news/article/cannes-2025-rajasthani-film-omlo-to-be-screened-at-festivals-film-market-23539127 |website=Mid-day |year=2025 |language=en}}</ref> 3 जुलाई 2026 को फ़िल्म [[प्रसार भारती]] के OTT प्लेटफ़ॉर्म वेव्स (WAVES) पर रिलीज़ हुई।<ref name=":2" /><ref>{{Cite web|url=https://zeenews.india.com/hindi/entertainment/bollywood/rajasthani-movie-omlo-become-number-1-trending-generational-saga-set-amidst-scorching-sands-will-give-you-goos/3286016|title=राजस्थानी सिनेमा ने रचा इतिहास, OTT पर 'ओमलो' बनी नंबर 1 ट्रेंडिंग; रोंगटे खड़े कर देगी तपती रेत के बीच पीढ़ियों की कहानी|website=Zee-Hindi|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb title|id=}} [[श्रेणी:2025 की फ़िल्में]] [[श्रेणी:राजस्थानी फ़िल्में]] pzeuwmuazsepga05f8uhcgjif8b86ov 6630304 6630302 2026-10-16T20:30:50Z SparrowQ 86379 date format fixed in ref 6630304 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक फ़िल्म | name = ओमलो | director = सोनू रणदीप चौधरी | writer = सोनू रणदीप चौधरी | producer = रोहित मखीजा<br />मनीष गोपलानी<br />नेहा पाण्डेय<br />सोनू रणदीप चौधरी | starring = शम्भो महाजन<br />सोनू रणदीप चौधरी<br />सोनाली शर्मिष्ठा | music = गाज़ी खान बरना<br />भुवन आहूजा | cinematography = विल्सन रबिन्से | editing = नवनीत कुमार सिन्हा | studio = हरे कृष्णा पिक्चर्स | released = 13 मई 2025 (कान फ़िल्म मार्केट) | country = भारत | language = राजस्थानी }} '''ओमलो''' एक [[राजस्थानी भाषा|राजस्थानी]] सामाजिक ड्रामा फिल्म है, जिसे सोनू रणदीप चौधरी ने लिखा और निर्देशित किया है। वे इस फिल्म के सह-निर्माता भी हैं।<ref name="nie">{{cite web |title=Rajasthani film 'Omlo' set for global debut at Cannes film market 2025 |url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/hindi/2025/May/10/rajasthani-film-omlo-set-for-global-debut-at-cannes-film-market-2025 |website=The New Indian Express |date=10 मई 2025 |language=en}}</ref><ref name=":1">{{Cite news|url=https://hindi.news18.com/news/entertainment/film-review-omlo-movie-review-sonu-randeep-chaudhary-hindi-cinema-critic-rating-opinion-ws-n-10628546.html|title=Omlo Movie Review: रेगिस्तान की तपती रेत के बीच पीढ़ियों के दर्द, रोंगटे खड़े कर देगी 'ओमलो'|last=Shekhar|first=Pratik|date=4 जुलाई 2026|work=News 18 Hindi|access-date=}}</ref> [[बीकानेर ज़िला|बीकानेर ज़िले]] के [[श्रीडूंगरगढ़]] में फ़िल्माई गई यह फ़िल्म एक सात साल के एक लड़के और एक ऊंट के साथ गहरे भावनात्मक रिश्ते की समानांतर कहानी के माध्यम से पितृसत्ता, घरेलू हिंसा और पीढ़ियों से चले आ रहे आघात जैसे विषयों को उठाती है।<ref name="nie" /><ref>{{Cite web|url=https://www.abplive.com/movie-review/entertainment/movie-review-omlo-film-review-in-hindi-rating-stars-story-performance-3155146|title=ओमलो रिव्यू: कान्स में कमाल दिखाने वाली ये फिल्म वाकई बेमिसाल है, एक बच्चे और ऊंट के नजरिए से जिंदगी समझा जाती है ओमलो|last=भाटिया|first=अमित|date=2026-07-05|website=ABP News|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref><ref name=":1" /> == कलाकार == * शम्भो महाजन — ओमलो<ref>{{Cite web|url=https://www.dnaindia.com/entertainment/report-omlo-movie-review-shambho-mahajan-s-small-budget-film-emotes-generational-trauma-patriarchy-with-such-rawness-even-big-budget-dramas-fail-to-deliver-3215210|title=Omlo movie review: Shambho Mahajan's small-budget film emotes generational trauma, patriarchy with such rawness, even big-budget dramas fail to deliver|last=Singh|first=Simran|website=DNA India|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref> * सोनू रणदीप चौधरी — सुभाष * सोनाली शर्मिष्ठा == संगीत == फ़िल्म का संगीत गाज़ी खान बरना और भुवन आहूजा ने दिया है, गीत निर्देशक सोनू रणदीप चौधरी ने लिखे हैं, और पृष्ठभूमि संगीत देवेंद्र भोमे का है।<ref name="nie" /><ref name=":1" /> == पुरस्कार == इस फिल्म ने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव पुरस्कार जीते,<ref name=":2">{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/g/local/rajasthan/jaipur/news/omlo-rajsthani-film-ott-release-cannes-sonu-chaudhary-138333724.html|title=कांस गई राजस्थानी फिल्म ओमलो अब OTT पर होगी रिलीज: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिल चुके कई अवॉर्ड, पूरी फिल्म राजस्थान में शूट हुई - Jaipur News|date=2026-07-01|website=Dainik Bhaskar|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> जिनमें हाल ही में आयोजित 12वें राजस्थान फिल्म फेस्टिवल (RFF 2026) में ओमलो को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म,<ref>{{Cite web|url=https://aapnihathai.com/latest-news/bollywood-omlo-named-best-movie-at-the-rajasthan-film-festival-mamta-kulkarni-receives-lifetime-achievement/|title=Bollywood : राजस्थान फिल्म फेस्टिवल में 'ओमलो' बेस्ट मूवी, ममता कुलकर्णी को लाइफ टाइम अचीवमेंट, Bikaner की चारु आसोपा की लाइव परफॉर्मेंस का दिखा जलवा - Aapni Hathai - आपणी हथाई|date=2026-09-27|language=en-GB|access-date=2026-10-16}}</ref><ref name=":2" /> सोनू रणदीप चौधरी को सर्वश्रेष्ठ लेखक और गाजी खान बरना को सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का अवार्ड दिया गया।<ref name=":2" /> == रिलीज़ == फ़िल्म को 13 मई 2025 को [[कान फ़िल्म महोत्सव]] के समानांतर आयोजित कान फ़िल्म मार्केट (Marché du Film) में प्रदर्शित किया गया।<ref name="nie" /><ref name="hans">{{cite web |title='Omlo' – Rajasthan's First Global Film Heads to Cannes Festival 2025 |url=https://www.thehansindia.com/news/national/omlo-rajasthans-first-global-film-heads-to-cannes-festival-2025-969689 |website=The Hans India |year=2025 |language=en}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.etvbharat.com/hi/!entertainment/first-rajasthani-film-omlo-to-premiere-at-cannes-film-festival-rajasthan-news-rjs25051300840|title=कांस फिल्म फेस्टिवल में आज 'ओमलो' का प्रीमियर, यहां पहुंचने वाली पहली राजस्थानी फिल्म|last=Bharat|first=E. T. V.|date=2025-05-13|website=ETV Bharat News|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> इसके बाद इसे लंदन के 26वें रेनबो अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव में दिखाया गया।<ref name="midday">{{cite web |title=Rajasthani film Omlo to be screened at Cannes 2025 film market |url=https://www.mid-day.com/entertainment/regional-indian-cinema-news/article/cannes-2025-rajasthani-film-omlo-to-be-screened-at-festivals-film-market-23539127 |website=Mid-day |year=2025 |language=en}}</ref> 3 जुलाई 2026 को फ़िल्म [[प्रसार भारती]] के OTT प्लेटफ़ॉर्म वेव्स (WAVES) पर रिलीज़ हुई।<ref name=":2" /><ref>{{Cite web|url=https://zeenews.india.com/hindi/entertainment/bollywood/rajasthani-movie-omlo-become-number-1-trending-generational-saga-set-amidst-scorching-sands-will-give-you-goos/3286016|title=राजस्थानी सिनेमा ने रचा इतिहास, OTT पर 'ओमलो' बनी नंबर 1 ट्रेंडिंग; रोंगटे खड़े कर देगी तपती रेत के बीच पीढ़ियों की कहानी|website=Zee-Hindi|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb title|id=}} [[श्रेणी:2025 की फ़िल्में]] [[श्रेणी:राजस्थानी फ़िल्में]] okokdhpc0fgeafszfuid5457q5tzs1x 6630305 6630304 2026-10-16T20:31:54Z SparrowQ 86379 imdb fixd 6630305 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक फ़िल्म | name = ओमलो | director = सोनू रणदीप चौधरी | writer = सोनू रणदीप चौधरी | producer = रोहित मखीजा<br />मनीष गोपलानी<br />नेहा पाण्डेय<br />सोनू रणदीप चौधरी | starring = शम्भो महाजन<br />सोनू रणदीप चौधरी<br />सोनाली शर्मिष्ठा | music = गाज़ी खान बरना<br />भुवन आहूजा | cinematography = विल्सन रबिन्से | editing = नवनीत कुमार सिन्हा | studio = हरे कृष्णा पिक्चर्स | released = 13 मई 2025 (कान फ़िल्म मार्केट) | country = भारत | language = राजस्थानी }} '''ओमलो''' एक [[राजस्थानी भाषा|राजस्थानी]] सामाजिक ड्रामा फिल्म है, जिसे सोनू रणदीप चौधरी ने लिखा और निर्देशित किया है। वे इस फिल्म के सह-निर्माता भी हैं।<ref name="nie">{{cite web |title=Rajasthani film 'Omlo' set for global debut at Cannes film market 2025 |url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/hindi/2025/May/10/rajasthani-film-omlo-set-for-global-debut-at-cannes-film-market-2025 |website=The New Indian Express |date=10 मई 2025 |language=en}}</ref><ref name=":1">{{Cite news|url=https://hindi.news18.com/news/entertainment/film-review-omlo-movie-review-sonu-randeep-chaudhary-hindi-cinema-critic-rating-opinion-ws-n-10628546.html|title=Omlo Movie Review: रेगिस्तान की तपती रेत के बीच पीढ़ियों के दर्द, रोंगटे खड़े कर देगी 'ओमलो'|last=Shekhar|first=Pratik|date=4 जुलाई 2026|work=News 18 Hindi|access-date=}}</ref> [[बीकानेर ज़िला|बीकानेर ज़िले]] के [[श्रीडूंगरगढ़]] में फ़िल्माई गई यह फ़िल्म एक सात साल के एक लड़के और एक ऊंट के साथ गहरे भावनात्मक रिश्ते की समानांतर कहानी के माध्यम से पितृसत्ता, घरेलू हिंसा और पीढ़ियों से चले आ रहे आघात जैसे विषयों को उठाती है।<ref name="nie" /><ref>{{Cite web|url=https://www.abplive.com/movie-review/entertainment/movie-review-omlo-film-review-in-hindi-rating-stars-story-performance-3155146|title=ओमलो रिव्यू: कान्स में कमाल दिखाने वाली ये फिल्म वाकई बेमिसाल है, एक बच्चे और ऊंट के नजरिए से जिंदगी समझा जाती है ओमलो|last=भाटिया|first=अमित|date=2026-07-05|website=ABP News|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref><ref name=":1" /> == कलाकार == * शम्भो महाजन — ओमलो<ref>{{Cite web|url=https://www.dnaindia.com/entertainment/report-omlo-movie-review-shambho-mahajan-s-small-budget-film-emotes-generational-trauma-patriarchy-with-such-rawness-even-big-budget-dramas-fail-to-deliver-3215210|title=Omlo movie review: Shambho Mahajan's small-budget film emotes generational trauma, patriarchy with such rawness, even big-budget dramas fail to deliver|last=Singh|first=Simran|website=DNA India|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref> * सोनू रणदीप चौधरी — सुभाष * सोनाली शर्मिष्ठा == संगीत == फ़िल्म का संगीत गाज़ी खान बरना और भुवन आहूजा ने दिया है, गीत निर्देशक सोनू रणदीप चौधरी ने लिखे हैं, और पृष्ठभूमि संगीत देवेंद्र भोमे का है।<ref name="nie" /><ref name=":1" /> == पुरस्कार == इस फिल्म ने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव पुरस्कार जीते,<ref name=":2">{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/g/local/rajasthan/jaipur/news/omlo-rajsthani-film-ott-release-cannes-sonu-chaudhary-138333724.html|title=कांस गई राजस्थानी फिल्म ओमलो अब OTT पर होगी रिलीज: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिल चुके कई अवॉर्ड, पूरी फिल्म राजस्थान में शूट हुई - Jaipur News|date=2026-07-01|website=Dainik Bhaskar|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> जिनमें हाल ही में आयोजित 12वें राजस्थान फिल्म फेस्टिवल (RFF 2026) में ओमलो को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म,<ref>{{Cite web|url=https://aapnihathai.com/latest-news/bollywood-omlo-named-best-movie-at-the-rajasthan-film-festival-mamta-kulkarni-receives-lifetime-achievement/|title=Bollywood : राजस्थान फिल्म फेस्टिवल में 'ओमलो' बेस्ट मूवी, ममता कुलकर्णी को लाइफ टाइम अचीवमेंट, Bikaner की चारु आसोपा की लाइव परफॉर्मेंस का दिखा जलवा - Aapni Hathai - आपणी हथाई|date=2026-09-27|language=en-GB|access-date=2026-10-16}}</ref><ref name=":2" /> सोनू रणदीप चौधरी को सर्वश्रेष्ठ लेखक और गाजी खान बरना को सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का अवार्ड दिया गया।<ref name=":2" /> == रिलीज़ == फ़िल्म को 13 मई 2025 को [[कान फ़िल्म महोत्सव]] के समानांतर आयोजित कान फ़िल्म मार्केट (Marché du Film) में प्रदर्शित किया गया।<ref name="nie" /><ref name="hans">{{cite web |title='Omlo' – Rajasthan's First Global Film Heads to Cannes Festival 2025 |url=https://www.thehansindia.com/news/national/omlo-rajasthans-first-global-film-heads-to-cannes-festival-2025-969689 |website=The Hans India |year=2025 |language=en}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.etvbharat.com/hi/!entertainment/first-rajasthani-film-omlo-to-premiere-at-cannes-film-festival-rajasthan-news-rjs25051300840|title=कांस फिल्म फेस्टिवल में आज 'ओमलो' का प्रीमियर, यहां पहुंचने वाली पहली राजस्थानी फिल्म|last=Bharat|first=E. T. V.|date=2025-05-13|website=ETV Bharat News|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> इसके बाद इसे लंदन के 26वें रेनबो अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव में दिखाया गया।<ref name="midday">{{cite web |title=Rajasthani film Omlo to be screened at Cannes 2025 film market |url=https://www.mid-day.com/entertainment/regional-indian-cinema-news/article/cannes-2025-rajasthani-film-omlo-to-be-screened-at-festivals-film-market-23539127 |website=Mid-day |year=2025 |language=en}}</ref> 3 जुलाई 2026 को फ़िल्म [[प्रसार भारती]] के OTT प्लेटफ़ॉर्म वेव्स (WAVES) पर रिलीज़ हुई।<ref name=":2" /><ref>{{Cite web|url=https://zeenews.india.com/hindi/entertainment/bollywood/rajasthani-movie-omlo-become-number-1-trending-generational-saga-set-amidst-scorching-sands-will-give-you-goos/3286016|title=राजस्थानी सिनेमा ने रचा इतिहास, OTT पर 'ओमलो' बनी नंबर 1 ट्रेंडिंग; रोंगटे खड़े कर देगी तपती रेत के बीच पीढ़ियों की कहानी|website=Zee-Hindi|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb title|id=tt31631483}} [[श्रेणी:2025 की फ़िल्में]] [[श्रेणी:राजस्थानी फ़िल्में]] roqpdhztjphj9kpydk2q0upnh3s5aax 6630306 6630305 2026-10-16T20:32:39Z SparrowQ 86379 [[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:राजस्थानी फ़िल्म]] जोड़ी 6630306 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक फ़िल्म | name = ओमलो | director = सोनू रणदीप चौधरी | writer = सोनू रणदीप चौधरी | producer = रोहित मखीजा<br />मनीष गोपलानी<br />नेहा पाण्डेय<br />सोनू रणदीप चौधरी | starring = शम्भो महाजन<br />सोनू रणदीप चौधरी<br />सोनाली शर्मिष्ठा | music = गाज़ी खान बरना<br />भुवन आहूजा | cinematography = विल्सन रबिन्से | editing = नवनीत कुमार सिन्हा | studio = हरे कृष्णा पिक्चर्स | released = 13 मई 2025 (कान फ़िल्म मार्केट) | country = भारत | language = राजस्थानी }} '''ओमलो''' एक [[राजस्थानी भाषा|राजस्थानी]] सामाजिक ड्रामा फिल्म है, जिसे सोनू रणदीप चौधरी ने लिखा और निर्देशित किया है। वे इस फिल्म के सह-निर्माता भी हैं।<ref name="nie">{{cite web |title=Rajasthani film 'Omlo' set for global debut at Cannes film market 2025 |url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/hindi/2025/May/10/rajasthani-film-omlo-set-for-global-debut-at-cannes-film-market-2025 |website=The New Indian Express |date=10 मई 2025 |language=en}}</ref><ref name=":1">{{Cite news|url=https://hindi.news18.com/news/entertainment/film-review-omlo-movie-review-sonu-randeep-chaudhary-hindi-cinema-critic-rating-opinion-ws-n-10628546.html|title=Omlo Movie Review: रेगिस्तान की तपती रेत के बीच पीढ़ियों के दर्द, रोंगटे खड़े कर देगी 'ओमलो'|last=Shekhar|first=Pratik|date=4 जुलाई 2026|work=News 18 Hindi|access-date=}}</ref> [[बीकानेर ज़िला|बीकानेर ज़िले]] के [[श्रीडूंगरगढ़]] में फ़िल्माई गई यह फ़िल्म एक सात साल के एक लड़के और एक ऊंट के साथ गहरे भावनात्मक रिश्ते की समानांतर कहानी के माध्यम से पितृसत्ता, घरेलू हिंसा और पीढ़ियों से चले आ रहे आघात जैसे विषयों को उठाती है।<ref name="nie" /><ref>{{Cite web|url=https://www.abplive.com/movie-review/entertainment/movie-review-omlo-film-review-in-hindi-rating-stars-story-performance-3155146|title=ओमलो रिव्यू: कान्स में कमाल दिखाने वाली ये फिल्म वाकई बेमिसाल है, एक बच्चे और ऊंट के नजरिए से जिंदगी समझा जाती है ओमलो|last=भाटिया|first=अमित|date=2026-07-05|website=ABP News|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref><ref name=":1" /> == कलाकार == * शम्भो महाजन — ओमलो<ref>{{Cite web|url=https://www.dnaindia.com/entertainment/report-omlo-movie-review-shambho-mahajan-s-small-budget-film-emotes-generational-trauma-patriarchy-with-such-rawness-even-big-budget-dramas-fail-to-deliver-3215210|title=Omlo movie review: Shambho Mahajan's small-budget film emotes generational trauma, patriarchy with such rawness, even big-budget dramas fail to deliver|last=Singh|first=Simran|website=DNA India|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref> * सोनू रणदीप चौधरी — सुभाष * सोनाली शर्मिष्ठा == संगीत == फ़िल्म का संगीत गाज़ी खान बरना और भुवन आहूजा ने दिया है, गीत निर्देशक सोनू रणदीप चौधरी ने लिखे हैं, और पृष्ठभूमि संगीत देवेंद्र भोमे का है।<ref name="nie" /><ref name=":1" /> == पुरस्कार == इस फिल्म ने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव पुरस्कार जीते,<ref name=":2">{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/g/local/rajasthan/jaipur/news/omlo-rajsthani-film-ott-release-cannes-sonu-chaudhary-138333724.html|title=कांस गई राजस्थानी फिल्म ओमलो अब OTT पर होगी रिलीज: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिल चुके कई अवॉर्ड, पूरी फिल्म राजस्थान में शूट हुई - Jaipur News|date=2026-07-01|website=Dainik Bhaskar|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> जिनमें हाल ही में आयोजित 12वें राजस्थान फिल्म फेस्टिवल (RFF 2026) में ओमलो को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म,<ref>{{Cite web|url=https://aapnihathai.com/latest-news/bollywood-omlo-named-best-movie-at-the-rajasthan-film-festival-mamta-kulkarni-receives-lifetime-achievement/|title=Bollywood : राजस्थान फिल्म फेस्टिवल में 'ओमलो' बेस्ट मूवी, ममता कुलकर्णी को लाइफ टाइम अचीवमेंट, Bikaner की चारु आसोपा की लाइव परफॉर्मेंस का दिखा जलवा - Aapni Hathai - आपणी हथाई|date=2026-09-27|language=en-GB|access-date=2026-10-16}}</ref><ref name=":2" /> सोनू रणदीप चौधरी को सर्वश्रेष्ठ लेखक और गाजी खान बरना को सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का अवार्ड दिया गया।<ref name=":2" /> == रिलीज़ == फ़िल्म को 13 मई 2025 को [[कान फ़िल्म महोत्सव]] के समानांतर आयोजित कान फ़िल्म मार्केट (Marché du Film) में प्रदर्शित किया गया।<ref name="nie" /><ref name="hans">{{cite web |title='Omlo' – Rajasthan's First Global Film Heads to Cannes Festival 2025 |url=https://www.thehansindia.com/news/national/omlo-rajasthans-first-global-film-heads-to-cannes-festival-2025-969689 |website=The Hans India |year=2025 |language=en}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.etvbharat.com/hi/!entertainment/first-rajasthani-film-omlo-to-premiere-at-cannes-film-festival-rajasthan-news-rjs25051300840|title=कांस फिल्म फेस्टिवल में आज 'ओमलो' का प्रीमियर, यहां पहुंचने वाली पहली राजस्थानी फिल्म|last=Bharat|first=E. T. V.|date=2025-05-13|website=ETV Bharat News|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> इसके बाद इसे लंदन के 26वें रेनबो अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव में दिखाया गया।<ref name="midday">{{cite web |title=Rajasthani film Omlo to be screened at Cannes 2025 film market |url=https://www.mid-day.com/entertainment/regional-indian-cinema-news/article/cannes-2025-rajasthani-film-omlo-to-be-screened-at-festivals-film-market-23539127 |website=Mid-day |year=2025 |language=en}}</ref> 3 जुलाई 2026 को फ़िल्म [[प्रसार भारती]] के OTT प्लेटफ़ॉर्म वेव्स (WAVES) पर रिलीज़ हुई।<ref name=":2" /><ref>{{Cite web|url=https://zeenews.india.com/hindi/entertainment/bollywood/rajasthani-movie-omlo-become-number-1-trending-generational-saga-set-amidst-scorching-sands-will-give-you-goos/3286016|title=राजस्थानी सिनेमा ने रचा इतिहास, OTT पर 'ओमलो' बनी नंबर 1 ट्रेंडिंग; रोंगटे खड़े कर देगी तपती रेत के बीच पीढ़ियों की कहानी|website=Zee-Hindi|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb title|id=tt31631483}} [[श्रेणी:2025 की फ़िल्में]] [[श्रेणी:राजस्थानी फ़िल्में]] [[श्रेणी:राजस्थानी फ़िल्म]] 329b7hgro1csztstq0od374f50vkisc 6630307 6630306 2026-10-16T20:33:06Z SparrowQ 86379 [[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:राजस्थानी भाषा की फिल्मों की सूची]] जोड़ी 6630307 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक फ़िल्म | name = ओमलो | director = सोनू रणदीप चौधरी | writer = सोनू रणदीप चौधरी | producer = रोहित मखीजा<br />मनीष गोपलानी<br />नेहा पाण्डेय<br />सोनू रणदीप चौधरी | starring = शम्भो महाजन<br />सोनू रणदीप चौधरी<br />सोनाली शर्मिष्ठा | music = गाज़ी खान बरना<br />भुवन आहूजा | cinematography = विल्सन रबिन्से | editing = नवनीत कुमार सिन्हा | studio = हरे कृष्णा पिक्चर्स | released = 13 मई 2025 (कान फ़िल्म मार्केट) | country = भारत | language = राजस्थानी }} '''ओमलो''' एक [[राजस्थानी भाषा|राजस्थानी]] सामाजिक ड्रामा फिल्म है, जिसे सोनू रणदीप चौधरी ने लिखा और निर्देशित किया है। वे इस फिल्म के सह-निर्माता भी हैं।<ref name="nie">{{cite web |title=Rajasthani film 'Omlo' set for global debut at Cannes film market 2025 |url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/hindi/2025/May/10/rajasthani-film-omlo-set-for-global-debut-at-cannes-film-market-2025 |website=The New Indian Express |date=10 मई 2025 |language=en}}</ref><ref name=":1">{{Cite news|url=https://hindi.news18.com/news/entertainment/film-review-omlo-movie-review-sonu-randeep-chaudhary-hindi-cinema-critic-rating-opinion-ws-n-10628546.html|title=Omlo Movie Review: रेगिस्तान की तपती रेत के बीच पीढ़ियों के दर्द, रोंगटे खड़े कर देगी 'ओमलो'|last=Shekhar|first=Pratik|date=4 जुलाई 2026|work=News 18 Hindi|access-date=}}</ref> [[बीकानेर ज़िला|बीकानेर ज़िले]] के [[श्रीडूंगरगढ़]] में फ़िल्माई गई यह फ़िल्म एक सात साल के एक लड़के और एक ऊंट के साथ गहरे भावनात्मक रिश्ते की समानांतर कहानी के माध्यम से पितृसत्ता, घरेलू हिंसा और पीढ़ियों से चले आ रहे आघात जैसे विषयों को उठाती है।<ref name="nie" /><ref>{{Cite web|url=https://www.abplive.com/movie-review/entertainment/movie-review-omlo-film-review-in-hindi-rating-stars-story-performance-3155146|title=ओमलो रिव्यू: कान्स में कमाल दिखाने वाली ये फिल्म वाकई बेमिसाल है, एक बच्चे और ऊंट के नजरिए से जिंदगी समझा जाती है ओमलो|last=भाटिया|first=अमित|date=2026-07-05|website=ABP News|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref><ref name=":1" /> == कलाकार == * शम्भो महाजन — ओमलो<ref>{{Cite web|url=https://www.dnaindia.com/entertainment/report-omlo-movie-review-shambho-mahajan-s-small-budget-film-emotes-generational-trauma-patriarchy-with-such-rawness-even-big-budget-dramas-fail-to-deliver-3215210|title=Omlo movie review: Shambho Mahajan's small-budget film emotes generational trauma, patriarchy with such rawness, even big-budget dramas fail to deliver|last=Singh|first=Simran|website=DNA India|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref> * सोनू रणदीप चौधरी — सुभाष * सोनाली शर्मिष्ठा == संगीत == फ़िल्म का संगीत गाज़ी खान बरना और भुवन आहूजा ने दिया है, गीत निर्देशक सोनू रणदीप चौधरी ने लिखे हैं, और पृष्ठभूमि संगीत देवेंद्र भोमे का है।<ref name="nie" /><ref name=":1" /> == पुरस्कार == इस फिल्म ने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव पुरस्कार जीते,<ref name=":2">{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/g/local/rajasthan/jaipur/news/omlo-rajsthani-film-ott-release-cannes-sonu-chaudhary-138333724.html|title=कांस गई राजस्थानी फिल्म ओमलो अब OTT पर होगी रिलीज: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिल चुके कई अवॉर्ड, पूरी फिल्म राजस्थान में शूट हुई - Jaipur News|date=2026-07-01|website=Dainik Bhaskar|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> जिनमें हाल ही में आयोजित 12वें राजस्थान फिल्म फेस्टिवल (RFF 2026) में ओमलो को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म,<ref>{{Cite web|url=https://aapnihathai.com/latest-news/bollywood-omlo-named-best-movie-at-the-rajasthan-film-festival-mamta-kulkarni-receives-lifetime-achievement/|title=Bollywood : राजस्थान फिल्म फेस्टिवल में 'ओमलो' बेस्ट मूवी, ममता कुलकर्णी को लाइफ टाइम अचीवमेंट, Bikaner की चारु आसोपा की लाइव परफॉर्मेंस का दिखा जलवा - Aapni Hathai - आपणी हथाई|date=2026-09-27|language=en-GB|access-date=2026-10-16}}</ref><ref name=":2" /> सोनू रणदीप चौधरी को सर्वश्रेष्ठ लेखक और गाजी खान बरना को सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का अवार्ड दिया गया।<ref name=":2" /> == रिलीज़ == फ़िल्म को 13 मई 2025 को [[कान फ़िल्म महोत्सव]] के समानांतर आयोजित कान फ़िल्म मार्केट (Marché du Film) में प्रदर्शित किया गया।<ref name="nie" /><ref name="hans">{{cite web |title='Omlo' – Rajasthan's First Global Film Heads to Cannes Festival 2025 |url=https://www.thehansindia.com/news/national/omlo-rajasthans-first-global-film-heads-to-cannes-festival-2025-969689 |website=The Hans India |year=2025 |language=en}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.etvbharat.com/hi/!entertainment/first-rajasthani-film-omlo-to-premiere-at-cannes-film-festival-rajasthan-news-rjs25051300840|title=कांस फिल्म फेस्टिवल में आज 'ओमलो' का प्रीमियर, यहां पहुंचने वाली पहली राजस्थानी फिल्म|last=Bharat|first=E. T. V.|date=2025-05-13|website=ETV Bharat News|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> इसके बाद इसे लंदन के 26वें रेनबो अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव में दिखाया गया।<ref name="midday">{{cite web |title=Rajasthani film Omlo to be screened at Cannes 2025 film market |url=https://www.mid-day.com/entertainment/regional-indian-cinema-news/article/cannes-2025-rajasthani-film-omlo-to-be-screened-at-festivals-film-market-23539127 |website=Mid-day |year=2025 |language=en}}</ref> 3 जुलाई 2026 को फ़िल्म [[प्रसार भारती]] के OTT प्लेटफ़ॉर्म वेव्स (WAVES) पर रिलीज़ हुई।<ref name=":2" /><ref>{{Cite web|url=https://zeenews.india.com/hindi/entertainment/bollywood/rajasthani-movie-omlo-become-number-1-trending-generational-saga-set-amidst-scorching-sands-will-give-you-goos/3286016|title=राजस्थानी सिनेमा ने रचा इतिहास, OTT पर 'ओमलो' बनी नंबर 1 ट्रेंडिंग; रोंगटे खड़े कर देगी तपती रेत के बीच पीढ़ियों की कहानी|website=Zee-Hindi|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb title|id=tt31631483}} [[श्रेणी:2025 की फ़िल्में]] [[श्रेणी:राजस्थानी फ़िल्में]] [[श्रेणी:राजस्थानी फ़िल्म]] [[श्रेणी:राजस्थानी भाषा की फिल्मों की सूची]] 7v2wyf07xiio4erdtlid0hasrma58t5 6630310 6630307 2026-10-16T20:34:41Z SparrowQ 86379 साँचा:राजस्थानी-भाषा की फ़िल्मों की सूची added 6630310 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक फ़िल्म | name = ओमलो | director = सोनू रणदीप चौधरी | writer = सोनू रणदीप चौधरी | producer = रोहित मखीजा<br />मनीष गोपलानी<br />नेहा पाण्डेय<br />सोनू रणदीप चौधरी | starring = शम्भो महाजन<br />सोनू रणदीप चौधरी<br />सोनाली शर्मिष्ठा | music = गाज़ी खान बरना<br />भुवन आहूजा | cinematography = विल्सन रबिन्से | editing = नवनीत कुमार सिन्हा | studio = हरे कृष्णा पिक्चर्स | released = 13 मई 2025 (कान फ़िल्म मार्केट) | country = भारत | language = राजस्थानी }} '''ओमलो''' एक [[राजस्थानी भाषा|राजस्थानी]] सामाजिक ड्रामा फिल्म है, जिसे सोनू रणदीप चौधरी ने लिखा और निर्देशित किया है। वे इस फिल्म के सह-निर्माता भी हैं।<ref name="nie">{{cite web |title=Rajasthani film 'Omlo' set for global debut at Cannes film market 2025 |url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/hindi/2025/May/10/rajasthani-film-omlo-set-for-global-debut-at-cannes-film-market-2025 |website=The New Indian Express |date=10 मई 2025 |language=en}}</ref><ref name=":1">{{Cite news|url=https://hindi.news18.com/news/entertainment/film-review-omlo-movie-review-sonu-randeep-chaudhary-hindi-cinema-critic-rating-opinion-ws-n-10628546.html|title=Omlo Movie Review: रेगिस्तान की तपती रेत के बीच पीढ़ियों के दर्द, रोंगटे खड़े कर देगी 'ओमलो'|last=Shekhar|first=Pratik|date=4 जुलाई 2026|work=News 18 Hindi|access-date=}}</ref> [[बीकानेर ज़िला|बीकानेर ज़िले]] के [[श्रीडूंगरगढ़]] में फ़िल्माई गई यह फ़िल्म एक सात साल के एक लड़के और एक ऊंट के साथ गहरे भावनात्मक रिश्ते की समानांतर कहानी के माध्यम से पितृसत्ता, घरेलू हिंसा और पीढ़ियों से चले आ रहे आघात जैसे विषयों को उठाती है।<ref name="nie" /><ref>{{Cite web|url=https://www.abplive.com/movie-review/entertainment/movie-review-omlo-film-review-in-hindi-rating-stars-story-performance-3155146|title=ओमलो रिव्यू: कान्स में कमाल दिखाने वाली ये फिल्म वाकई बेमिसाल है, एक बच्चे और ऊंट के नजरिए से जिंदगी समझा जाती है ओमलो|last=भाटिया|first=अमित|date=2026-07-05|website=ABP News|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref><ref name=":1" /> == कलाकार == * शम्भो महाजन — ओमलो<ref>{{Cite web|url=https://www.dnaindia.com/entertainment/report-omlo-movie-review-shambho-mahajan-s-small-budget-film-emotes-generational-trauma-patriarchy-with-such-rawness-even-big-budget-dramas-fail-to-deliver-3215210|title=Omlo movie review: Shambho Mahajan's small-budget film emotes generational trauma, patriarchy with such rawness, even big-budget dramas fail to deliver|last=Singh|first=Simran|website=DNA India|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref> * सोनू रणदीप चौधरी — सुभाष * सोनाली शर्मिष्ठा == संगीत == फ़िल्म का संगीत गाज़ी खान बरना और भुवन आहूजा ने दिया है, गीत निर्देशक सोनू रणदीप चौधरी ने लिखे हैं, और पृष्ठभूमि संगीत देवेंद्र भोमे का है।<ref name="nie" /><ref name=":1" /> == पुरस्कार == इस फिल्म ने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव पुरस्कार जीते,<ref name=":2">{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/g/local/rajasthan/jaipur/news/omlo-rajsthani-film-ott-release-cannes-sonu-chaudhary-138333724.html|title=कांस गई राजस्थानी फिल्म ओमलो अब OTT पर होगी रिलीज: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिल चुके कई अवॉर्ड, पूरी फिल्म राजस्थान में शूट हुई - Jaipur News|date=2026-07-01|website=Dainik Bhaskar|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> जिनमें हाल ही में आयोजित 12वें राजस्थान फिल्म फेस्टिवल (RFF 2026) में ओमलो को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म,<ref>{{Cite web|url=https://aapnihathai.com/latest-news/bollywood-omlo-named-best-movie-at-the-rajasthan-film-festival-mamta-kulkarni-receives-lifetime-achievement/|title=Bollywood : राजस्थान फिल्म फेस्टिवल में 'ओमलो' बेस्ट मूवी, ममता कुलकर्णी को लाइफ टाइम अचीवमेंट, Bikaner की चारु आसोपा की लाइव परफॉर्मेंस का दिखा जलवा - Aapni Hathai - आपणी हथाई|date=2026-09-27|language=en-GB|access-date=2026-10-16}}</ref><ref name=":2" /> सोनू रणदीप चौधरी को सर्वश्रेष्ठ लेखक और गाजी खान बरना को सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का अवार्ड दिया गया।<ref name=":2" /> == रिलीज़ == फ़िल्म को 13 मई 2025 को [[कान फ़िल्म महोत्सव]] के समानांतर आयोजित कान फ़िल्म मार्केट (Marché du Film) में प्रदर्शित किया गया।<ref name="nie" /><ref name="hans">{{cite web |title='Omlo' – Rajasthan's First Global Film Heads to Cannes Festival 2025 |url=https://www.thehansindia.com/news/national/omlo-rajasthans-first-global-film-heads-to-cannes-festival-2025-969689 |website=The Hans India |year=2025 |language=en}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.etvbharat.com/hi/!entertainment/first-rajasthani-film-omlo-to-premiere-at-cannes-film-festival-rajasthan-news-rjs25051300840|title=कांस फिल्म फेस्टिवल में आज 'ओमलो' का प्रीमियर, यहां पहुंचने वाली पहली राजस्थानी फिल्म|last=Bharat|first=E. T. V.|date=2025-05-13|website=ETV Bharat News|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> इसके बाद इसे लंदन के 26वें रेनबो अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव में दिखाया गया।<ref name="midday">{{cite web |title=Rajasthani film Omlo to be screened at Cannes 2025 film market |url=https://www.mid-day.com/entertainment/regional-indian-cinema-news/article/cannes-2025-rajasthani-film-omlo-to-be-screened-at-festivals-film-market-23539127 |website=Mid-day |year=2025 |language=en}}</ref> 3 जुलाई 2026 को फ़िल्म [[प्रसार भारती]] के OTT प्लेटफ़ॉर्म वेव्स (WAVES) पर रिलीज़ हुई।<ref name=":2" /><ref>{{Cite web|url=https://zeenews.india.com/hindi/entertainment/bollywood/rajasthani-movie-omlo-become-number-1-trending-generational-saga-set-amidst-scorching-sands-will-give-you-goos/3286016|title=राजस्थानी सिनेमा ने रचा इतिहास, OTT पर 'ओमलो' बनी नंबर 1 ट्रेंडिंग; रोंगटे खड़े कर देगी तपती रेत के बीच पीढ़ियों की कहानी|website=Zee-Hindi|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb title|id=tt31631483}} {{राजस्थानी-भाषा की फ़िल्मों की सूची}} [[श्रेणी:2025 की फ़िल्में]] [[श्रेणी:राजस्थानी फ़िल्में]] [[श्रेणी:राजस्थानी फ़िल्म]] [[श्रेणी:राजस्थानी भाषा की फिल्मों की सूची]] r8tx9y74xu2rq09zpw6oitf7r96otcb 6630314 6630310 2026-10-16T20:52:09Z SparrowQ 86379 6630314 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक फ़िल्म | name = ओमलो | director = सोनू रणदीप चौधरी | writer = सोनू रणदीप चौधरी | producer = रोहित मखीजा<br />मनीष गोपलानी<br />नेहा पाण्डेय<br />सोनू रणदीप चौधरी | starring = शम्भो महाजन<br />सोनू रणदीप चौधरी<br />सोनाली शर्मिष्ठा | music = गाज़ी खान बरना<br />भुवन आहूजा | cinematography = विल्सन रबिन्से | editing = नवनीत कुमार सिन्हा | studio = हरे कृष्णा पिक्चर्स | released = 13 मई 2025 (कान फ़िल्म मार्केट) | country = भारत | language = राजस्थानी }} '''ओमलो''' एक [[राजस्थानी भाषा|राजस्थानी]] सामाजिक ड्रामा फिल्म है,<ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/english/movie-details/omlo/movieshow/118386113.cms|title=Omlo Movie: Showtimes, Review, Songs, Trailer, Posters, News & Videos {{!}} eTimes|website=The Times of India|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref> जिसे सोनू रणदीप चौधरी ने लिखा और निर्देशित किया है। वे इस फिल्म के सह-निर्माता भी हैं।<ref name="nie">{{cite web |title=Rajasthani film 'Omlo' set for global debut at Cannes film market 2025 |url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/hindi/2025/May/10/rajasthani-film-omlo-set-for-global-debut-at-cannes-film-market-2025 |website=The New Indian Express |date=10 मई 2025 |language=en}}</ref><ref name=":1">{{Cite news|url=https://hindi.news18.com/news/entertainment/film-review-omlo-movie-review-sonu-randeep-chaudhary-hindi-cinema-critic-rating-opinion-ws-n-10628546.html|title=Omlo Movie Review: रेगिस्तान की तपती रेत के बीच पीढ़ियों के दर्द, रोंगटे खड़े कर देगी 'ओमलो'|last=Shekhar|first=Pratik|date=4 जुलाई 2026|work=News 18 Hindi|access-date=}}</ref> [[बीकानेर ज़िला|बीकानेर ज़िले]] के [[श्रीडूंगरगढ़]] में फ़िल्माई गई यह फ़िल्म एक सात साल के एक लड़के और एक ऊंट के साथ गहरे भावनात्मक रिश्ते की समानांतर कहानी के माध्यम से पितृसत्ता, घरेलू हिंसा और पीढ़ियों से चले आ रहे आघात जैसे विषयों को उठाती है।<ref name="nie" /><ref>{{Cite web|url=https://www.abplive.com/movie-review/entertainment/movie-review-omlo-film-review-in-hindi-rating-stars-story-performance-3155146|title=ओमलो रिव्यू: कान्स में कमाल दिखाने वाली ये फिल्म वाकई बेमिसाल है, एक बच्चे और ऊंट के नजरिए से जिंदगी समझा जाती है ओमलो|last=भाटिया|first=अमित|date=2026-07-05|website=ABP News|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref><ref name=":1" /> == कलाकार == * शम्भो महाजन — ओमलो<ref>{{Cite web|url=https://www.dnaindia.com/entertainment/report-omlo-movie-review-shambho-mahajan-s-small-budget-film-emotes-generational-trauma-patriarchy-with-such-rawness-even-big-budget-dramas-fail-to-deliver-3215210|title=Omlo movie review: Shambho Mahajan's small-budget film emotes generational trauma, patriarchy with such rawness, even big-budget dramas fail to deliver|last=Singh|first=Simran|website=DNA India|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref> * सोनू रणदीप चौधरी — सुभाष * सोनाली शर्मिष्ठा == संगीत == फ़िल्म का संगीत गाज़ी खान बरना और भुवन आहूजा ने दिया है, गीत निर्देशक सोनू रणदीप चौधरी ने लिखे हैं, और पृष्ठभूमि संगीत देवेंद्र भोमे का है।<ref name="nie" /><ref name=":1" /> == पुरस्कार == इस फिल्म ने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव पुरस्कार जीते,<ref name=":2">{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/g/local/rajasthan/jaipur/news/omlo-rajsthani-film-ott-release-cannes-sonu-chaudhary-138333724.html|title=कांस गई राजस्थानी फिल्म ओमलो अब OTT पर होगी रिलीज: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिल चुके कई अवॉर्ड, पूरी फिल्म राजस्थान में शूट हुई - Jaipur News|date=2026-07-01|website=Dainik Bhaskar|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> जिनमें हाल ही में आयोजित 12वें राजस्थान फिल्म फेस्टिवल (RFF 2026) में ओमलो को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म,<ref>{{Cite web|url=https://aapnihathai.com/latest-news/bollywood-omlo-named-best-movie-at-the-rajasthan-film-festival-mamta-kulkarni-receives-lifetime-achievement/|title=Bollywood : राजस्थान फिल्म फेस्टिवल में 'ओमलो' बेस्ट मूवी, ममता कुलकर्णी को लाइफ टाइम अचीवमेंट, Bikaner की चारु आसोपा की लाइव परफॉर्मेंस का दिखा जलवा - Aapni Hathai - आपणी हथाई|date=2026-09-27|language=en-GB|access-date=2026-10-16}}</ref><ref name=":2" /> सोनू रणदीप चौधरी को सर्वश्रेष्ठ लेखक और गाजी खान बरना को सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का अवार्ड दिया गया।<ref name=":2" /> == रिलीज़ == फ़िल्म को 13 मई 2025 को [[कान फ़िल्म महोत्सव]] के समानांतर आयोजित कान फ़िल्म मार्केट (Marché du Film) में प्रदर्शित किया गया।<ref name="nie" /><ref name="hans">{{cite web |title='Omlo' – Rajasthan's First Global Film Heads to Cannes Festival 2025 |url=https://www.thehansindia.com/news/national/omlo-rajasthans-first-global-film-heads-to-cannes-festival-2025-969689 |website=The Hans India |year=2025 |language=en}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.etvbharat.com/hi/!entertainment/first-rajasthani-film-omlo-to-premiere-at-cannes-film-festival-rajasthan-news-rjs25051300840|title=कांस फिल्म फेस्टिवल में आज 'ओमलो' का प्रीमियर, यहां पहुंचने वाली पहली राजस्थानी फिल्म|last=Bharat|first=E. 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Jaipur News|date=2026-07-01|website=Dainik Bhaskar|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> जिनमें हाल ही में आयोजित 12वें राजस्थान फिल्म फेस्टिवल (RFF 2026) में ओमलो को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म,<ref>{{Cite web|url=https://aapnihathai.com/latest-news/bollywood-omlo-named-best-movie-at-the-rajasthan-film-festival-mamta-kulkarni-receives-lifetime-achievement/|title=Bollywood : राजस्थान फिल्म फेस्टिवल में 'ओमलो' बेस्ट मूवी, ममता कुलकर्णी को लाइफ टाइम अचीवमेंट, Bikaner की चारु आसोपा की लाइव परफॉर्मेंस का दिखा जलवा - Aapni Hathai - आपणी हथाई|date=2026-09-27|language=en-GB|access-date=2026-10-16}}</ref><ref name=":2" /> सोनू रणदीप चौधरी को सर्वश्रेष्ठ लेखक और गाजी खान बरना को सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का अवार्ड दिया गया।<ref name=":2" /> == रिलीज़ == फ़िल्म को 13 मई 2025 को [[कान फ़िल्म महोत्सव]] के समानांतर आयोजित कान फ़िल्म मार्केट (Marché du Film) में प्रदर्शित किया गया।<ref name="nie" /><ref name="hans">{{cite web |title='Omlo' – Rajasthan's First Global Film Heads to Cannes Festival 2025 |url=https://www.thehansindia.com/news/national/omlo-rajasthans-first-global-film-heads-to-cannes-festival-2025-969689 |website=The Hans India |year=2025 |language=en}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.etvbharat.com/hi/!entertainment/first-rajasthani-film-omlo-to-premiere-at-cannes-film-festival-rajasthan-news-rjs25051300840|title=कांस फिल्म फेस्टिवल में आज 'ओमलो' का प्रीमियर, यहां पहुंचने वाली पहली राजस्थानी फिल्म|last=Bharat|first=E. T. V.|date=2025-05-13|website=ETV Bharat News|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> इसके बाद इसे लंदन के 26वें रेनबो अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव में दिखाया गया।<ref name="midday">{{cite web |title=Rajasthani film Omlo to be screened at Cannes 2025 film market |url=https://www.mid-day.com/entertainment/regional-indian-cinema-news/article/cannes-2025-rajasthani-film-omlo-to-be-screened-at-festivals-film-market-23539127 |website=Mid-day |year=2025 |language=en}}</ref> 3 जुलाई 2026 को फ़िल्म [[प्रसार भारती]] के OTT प्लेटफ़ॉर्म वेव्स (WAVES) पर रिलीज़ हुई।<ref name=":2" /><ref>{{Cite web|url=https://zeenews.india.com/hindi/entertainment/bollywood/rajasthani-movie-omlo-become-number-1-trending-generational-saga-set-amidst-scorching-sands-will-give-you-goos/3286016|title=राजस्थानी सिनेमा ने रचा इतिहास, OTT पर 'ओमलो' बनी नंबर 1 ट्रेंडिंग; रोंगटे खड़े कर देगी तपती रेत के बीच पीढ़ियों की कहानी|website=Zee-Hindi|language=hi|access-date=2026-10-16}}</ref> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb title|id=tt31631483}} {{राजस्थानी-भाषा की फ़िल्मों की सूची}} [[श्रेणी:2025 की फ़िल्में]] [[श्रेणी:राजस्थानी फ़िल्में]] [[श्रेणी:राजस्थानी फ़िल्म]] [[श्रेणी:राजस्थानी भाषा की फिल्मों की सूची]] flarh1o7m0hejhbk6hkjlaglg8ft619 अमृता सिन्हा 0 1620211 6630326 2026-10-17T03:22:02Z Dsrprj 780832 "[[:en:Special:Redirect/revision/1380600778|Amrita Sinha]]" पृष्ठ का अनुवाद करके निर्मित किया गया 6630326 wikitext text/x-wiki {{Infobox officeholder | name = Amrita Sinha | office = [[Judge]] of the [[Calcutta High Court]] | term_start = 24 Aprail 2020 | nominator = [[Dipak Misra]] | appointer = [[Ram Nath Kovind]] | birth_date = {{birth date and age|1969|12|25|df=y}} | education = ([[Bachelor of Law|LLB]]) [[National Law School of India University]],[[Bengaluru]] | honorific_prefix = Hon'ble Ms. Justice }} '''न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा''' [[कोलकाता|कलकत्ता]] उच्च न्यायालय की न्यायाधीश हैं, जो वर्तमान में कलकत्ता में प्रधान सीट पर अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं।वह अपनी तीखी टिप्पणियों, निर्भीक फैसलों और कोर्ट रूम में सीधी कानूनी बहस के लिए जानी जाती हैं। उनकी अदालत की लाइव स्ट्रीमिंग को जनता द्वारा काफी देखा जाता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.cdjlawjournal.com/honorablejudgesdetails.php?cid=15&jid=1341|title=CDJ Law Journal|website=www.cdjlawjournal.com|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/other-states/row-over-calcutta-high-court-judges-husband-being-quizzed-by-bengal-cid/article67669507.ece|title=Row over Calcutta High Court judge’s husband being quizzed by West Bengal CID|date=2023-12-23|work=The Hindu|access-date=2026-10-16|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://scroll.in/article/1069280/at-calcutta-high-court-the-latest-political-battle-centres-around-this-judge|title=At Calcutta High Court, the latest political battle centres around this judge|last=Bhalla|first=Vineet|date=2024-06-23|website=Scroll.in|publisher=|language=en-US|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.caseon.in/judge/justice-smt-amrita-sinha|title=Justice Amrita Sinha – Judge Profile|website=Caseon|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/cities/kolkata/calcutta-high-court-justice-amrita-sinha-pil-9376384/|title=PIL in Calcutta High Court seeks to modify Justice Amrita Sinha’s determination in cases related to police action|date=2024-06-06|website=The Indian Express|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/other-states/row-over-calcutta-high-court-judges-husband-being-quizzed-by-bengal-cid/article67669507.ece|title=Row over Calcutta High Court judge’s husband being quizzed by West Bengal CID|date=2023-12-23|work=The Hindu|access-date=2026-10-16|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/political-pulse/are-you-a-post-office-shame-for-state-judge-who-has-captured-west-bengals-imagination-8975682/|title=‘Are you a post-office?’… ‘Shame for state’: Judge who has captured West Bengal’s imagination|date=2023-10-10|website=The Indian Express|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.telegraphindia.com/amp/west-bengal/new-judge-amrita-sinha-assigned-two-recruitment-cases/cid/1933924|title=New judge Amrita Sinha assigned two recruitment cases|website=www.telegraphindia.com|language=en|archive-url=http://web.archive.org/web/20230604010411/https://www.telegraphindia.com/amp/west-bengal/new-judge-amrita-sinha-assigned-two-recruitment-cases/cid/1933924|archive-date=2023-06-04|access-date=2026-10-16}}</ref> == संदर्भ == {{Reflist}} [[श्रेणी:कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश]] [[श्रेणी:जीवित लोग]] 6ewwfwokuwyihp1k4m38h2fklygelk4 6630327 6630326 2026-10-17T03:23:52Z Dsrprj 780832 /* */ 6630327 wikitext text/x-wiki {{Infobox officeholder | name = अमृता सिन्हा | office = [[कोलकाता|कलकत्ता]] उच्च न्यायालय की न्यायाधीश | term_start = 24 Aprail 2020 | nominator = [[Dipak Misra]] | appointer = [[Ram Nath Kovind]] | birth_date = {{birth date and age|1969|12|25|df=y}} | education = ([[Bachelor of Law|LLB]]) [[National Law School of India University]],[[Bengaluru]] | honorific_prefix = Hon'ble Ms. Justice }} '''न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा''' [[कोलकाता|कलकत्ता]] उच्च न्यायालय की न्यायाधीश हैं, जो वर्तमान में कलकत्ता में प्रधान सीट पर अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं।वह अपनी तीखी टिप्पणियों, निर्भीक फैसलों और कोर्ट रूम में सीधी कानूनी बहस के लिए जानी जाती हैं। उनकी अदालत की लाइव स्ट्रीमिंग को जनता द्वारा काफी देखा जाता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.cdjlawjournal.com/honorablejudgesdetails.php?cid=15&jid=1341|title=CDJ Law Journal|website=www.cdjlawjournal.com|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/other-states/row-over-calcutta-high-court-judges-husband-being-quizzed-by-bengal-cid/article67669507.ece|title=Row over Calcutta High Court judge’s husband being quizzed by West Bengal CID|date=2023-12-23|work=The Hindu|access-date=2026-10-16|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://scroll.in/article/1069280/at-calcutta-high-court-the-latest-political-battle-centres-around-this-judge|title=At Calcutta High Court, the latest political battle centres around this judge|last=Bhalla|first=Vineet|date=2024-06-23|website=Scroll.in|publisher=|language=en-US|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.caseon.in/judge/justice-smt-amrita-sinha|title=Justice Amrita Sinha – Judge Profile|website=Caseon|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/cities/kolkata/calcutta-high-court-justice-amrita-sinha-pil-9376384/|title=PIL in Calcutta High Court seeks to 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judge Amrita Sinha assigned two recruitment cases|website=www.telegraphindia.com|language=en|archive-url=http://web.archive.org/web/20230604010411/https://www.telegraphindia.com/amp/west-bengal/new-judge-amrita-sinha-assigned-two-recruitment-cases/cid/1933924|archive-date=2023-06-04|access-date=2026-10-16}}</ref> == संदर्भ == {{Reflist}} [[श्रेणी:कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश]] [[श्रेणी:जीवित लोग]] nduuptucjebyi807kvnm5itsswcs6mu 6630328 6630327 2026-10-17T03:24:16Z Dsrprj 780832 /* */ 6630328 wikitext text/x-wiki {{Infobox officeholder | name = अमृता सिन्हा | office = [[कोलकाता|कलकत्ता]] उच्च न्यायालय की न्यायाधीश | term_start = 24 Aprail 2020 | nominator = [[Dipak Misra]] | appointer = [[Ram Nath Kovind]] | birth_date = {{birth date and age|1969|12|25|df=y}} | education = ([[Bachelor of Law|LLB]]) [[National Law School of India University]],[[Bengaluru]] | honorific_prefix = न्यायमूर्ति }} '''न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा''' [[कोलकाता|कलकत्ता]] उच्च न्यायालय की न्यायाधीश हैं, जो वर्तमान में कलकत्ता में प्रधान सीट पर अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं।वह अपनी तीखी टिप्पणियों, निर्भीक फैसलों और कोर्ट रूम में सीधी कानूनी बहस के लिए जानी जाती हैं। उनकी अदालत की लाइव स्ट्रीमिंग को जनता द्वारा काफी देखा जाता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.cdjlawjournal.com/honorablejudgesdetails.php?cid=15&jid=1341|title=CDJ Law Journal|website=www.cdjlawjournal.com|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/other-states/row-over-calcutta-high-court-judges-husband-being-quizzed-by-bengal-cid/article67669507.ece|title=Row over Calcutta High Court judge’s husband being quizzed by West Bengal CID|date=2023-12-23|work=The Hindu|access-date=2026-10-16|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://scroll.in/article/1069280/at-calcutta-high-court-the-latest-political-battle-centres-around-this-judge|title=At Calcutta High Court, the latest political battle centres around this 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web|url=https://indianexpress.com/article/political-pulse/are-you-a-post-office-shame-for-state-judge-who-has-captured-west-bengals-imagination-8975682/|title=‘Are you a post-office?’… ‘Shame for state’: Judge who has captured West Bengal’s imagination|date=2023-10-10|website=The Indian Express|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.telegraphindia.com/amp/west-bengal/new-judge-amrita-sinha-assigned-two-recruitment-cases/cid/1933924|title=New judge Amrita Sinha assigned two recruitment cases|website=www.telegraphindia.com|language=en|archive-url=http://web.archive.org/web/20230604010411/https://www.telegraphindia.com/amp/west-bengal/new-judge-amrita-sinha-assigned-two-recruitment-cases/cid/1933924|archive-date=2023-06-04|access-date=2026-10-16}}</ref> == संदर्भ == {{Reflist}} [[श्रेणी:कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश]] [[श्रेणी:जीवित लोग]] 7wxz2wg75bca8mxr5ks0jfylvbnf1yi 6630329 6630328 2026-10-17T03:28:39Z विक्रम प्रताप 911487 रखरखाव साँचा: [[:en:WP:DUPREF|द्विरुक्त सन्दर्भ]] चिह्नित किए गए ([[सदस्य:विक्रम प्रताप/DuplicateReferences.js|DuplicateReferences]]) 6630329 wikitext text/x-wiki {{Infobox officeholder | name = अमृता सिन्हा | office = [[कोलकाता|कलकत्ता]] उच्च न्यायालय की न्यायाधीश | term_start = 24 Aprail 2020 | nominator = [[Dipak Misra]] | appointer = [[Ram Nath Kovind]] | birth_date = {{birth date and age|1969|12|25|df=y}} | education = ([[Bachelor of Law|LLB]]) [[National Law School of India University]],[[Bengaluru]] | honorific_prefix = न्यायमूर्ति }} '''न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा''' [[कोलकाता|कलकत्ता]] उच्च न्यायालय की न्यायाधीश हैं, जो वर्तमान में कलकत्ता में प्रधान सीट पर अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं।वह अपनी तीखी टिप्पणियों, निर्भीक फैसलों और कोर्ट रूम में सीधी कानूनी बहस के लिए जानी जाती हैं। उनकी अदालत की लाइव स्ट्रीमिंग को जनता द्वारा काफी देखा जाता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.cdjlawjournal.com/honorablejudgesdetails.php?cid=15&jid=1341|title=CDJ Law Journal|website=www.cdjlawjournal.com|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/other-states/row-over-calcutta-high-court-judges-husband-being-quizzed-by-bengal-cid/article67669507.ece|title=Row over Calcutta High Court judge’s husband being quizzed by West Bengal CID|date=2023-12-23|work=The Hindu|access-date=2026-10-16|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://scroll.in/article/1069280/at-calcutta-high-court-the-latest-political-battle-centres-around-this-judge|title=At Calcutta High Court, the latest political battle centres around this judge|last=Bhalla|first=Vineet|date=2024-06-23|website=Scroll.in|publisher=|language=en-US|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.caseon.in/judge/justice-smt-amrita-sinha|title=Justice Amrita Sinha – Judge Profile|website=Caseon|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/cities/kolkata/calcutta-high-court-justice-amrita-sinha-pil-9376384/|title=PIL in Calcutta High Court seeks to modify Justice Amrita Sinha’s determination in cases related to police action|date=2024-06-06|website=The Indian Express|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/other-states/row-over-calcutta-high-court-judges-husband-being-quizzed-by-bengal-cid/article67669507.ece|title=Row over Calcutta High Court judge’s husband being quizzed by West Bengal CID|date=2023-12-23|work=The Hindu|access-date=2026-10-16|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/political-pulse/are-you-a-post-office-shame-for-state-judge-who-has-captured-west-bengals-imagination-8975682/|title=‘Are you a post-office?’… ‘Shame for state’: Judge who has captured West Bengal’s imagination|date=2023-10-10|website=The Indian 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officeholder | name = अमृता सिन्हा |image=Justice Amrita Sinha.webp | office = [[कोलकाता|कलकत्ता]] उच्च न्यायालय की न्यायाधीश | term_start = 24 Aprail 2020 | nominator = [[Dipak Misra]] | appointer = [[Ram Nath Kovind]] | birth_date = {{birth date and age|1969|12|25|df=y}} | education = ([[Bachelor of Law|LLB]]) [[National Law School of India University]],[[Bengaluru]] | honorific_prefix = न्यायमूर्ति }} '''न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा''' [[कोलकाता|कलकत्ता]] उच्च न्यायालय की न्यायाधीश हैं, जो वर्तमान में कलकत्ता में प्रधान सीट पर अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं।वह अपनी तीखी टिप्पणियों, निर्भीक फैसलों और कोर्ट रूम में सीधी कानूनी बहस के लिए जानी जाती हैं। उनकी अदालत की लाइव स्ट्रीमिंग को जनता द्वारा काफी देखा जाता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.cdjlawjournal.com/honorablejudgesdetails.php?cid=15&jid=1341|title=CDJ Law Journal|website=www.cdjlawjournal.com|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/other-states/row-over-calcutta-high-court-judges-husband-being-quizzed-by-bengal-cid/article67669507.ece|title=Row over Calcutta High Court judge’s husband being quizzed by West Bengal CID|date=2023-12-23|work=The Hindu|access-date=2026-10-16|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://scroll.in/article/1069280/at-calcutta-high-court-the-latest-political-battle-centres-around-this-judge|title=At Calcutta High Court, the latest political battle centres around this judge|last=Bhalla|first=Vineet|date=2024-06-23|website=Scroll.in|publisher=|language=en-US|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.caseon.in/judge/justice-smt-amrita-sinha|title=Justice Amrita Sinha – Judge Profile|website=Caseon|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/cities/kolkata/calcutta-high-court-justice-amrita-sinha-pil-9376384/|title=PIL in Calcutta High Court seeks to 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Not intended for the main namespace until independent editors have reviewed it. --> '''हिरोफुमी योशिदा''' (जापानी: 吉田 裕史; जन्म 1968, होक्काइदो) एक जापानी संचालक (कंडक्टर) हैं, जो मुख्य रूप से इटली में कार्यरत हैं। वे 2022 से मोडेना के फ़िलारमोनिका देल टेआत्रो कोमुनाले (Filarmonica del Teatro Comunale di Modena) के संगीत निदेशक<ref name="filar">[https://www.filarmonicamodena.it/hirofumi-yoshida/ Hirofumi Yoshida, direttore musicale], Filarmonica di Modena</ref> और 2021 से ओडेसा राष्ट्रीय अकादमिक ओपेरा और बैले थिएटर के प्रमुख अतिथि संचालक हैं।<ref name="odcol">[https://operahouse.od.ua/collective/ Колектив — Диригенти], Одеський національний академічний театр опери та балету</ref> उनका प्रदर्शन-सूची मुख्यतः पुच्चीनी और वेर्दी के ओपेरा पर केंद्रित है। == जीवन == वे फ़ुनाबाशी में पले-बढ़े और उन्होंने टोक्यो कॉलेज ऑफ़ म्यूज़िक में संचालन, पियानो, डबल बेस और संगीतशास्त्र का अध्ययन किया। 1994–95 में उन्होंने वियना के संगीत एवं प्रदर्शन कला विश्वविद्यालय में पढ़ाई की, और 1996 में सिएना की अकादमिया चिगियाना में यूरी तेमिरकानोव और म्युंग-वुन चुंग के मास्टर कोर्स में भाग लिया।<ref name="tcbo">[https://www.tcbo.it/wp-content/uploads/HIROFUMI-YOSHIDA.pdf Hirofumi Yoshida – Direttore d'orchestra], Teatro Comunale di Bologna</ref> 1999 में जापान की सांस्कृतिक एजेंसी के विदेश-प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत उन्होंने म्यूनिख, मानहाइम और माल्मो में प्रशिक्षण लिया।<ref name="tcbo" /> == करियर == 2002 में वे गोतो मेमोरियल कल्चरल अवार्ड (ओपेरा वर्ग) पाने वाले पहले संचालक बने।<ref name="tcbo" /> 2005 में उन्होंने क्लुज़-नापोका (रोमानिया) में पहली अंतरराष्ट्रीय बेला बार्तोक ओपेरा संचालन प्रतियोगिता में तीसरा स्थान प्राप्त किया।<ref name="tcbo" /> 2007 में उन्होंने रोम ओपेरा के ग्रीष्मकालीन सत्र में काराकाला के स्नानागारों में «पाल्याच्ची» का संचालन किया।<ref name="tcbo" /> जनवरी 2010 से वे मंतोवा के टेआत्रो सोचाले के संगीत निदेशक रहे।<ref name="tcbo" /> उसी वर्ष उन्होंने तोरे देल लागो के पुच्चीनी महोत्सव में «तुरांदोत» से पदार्पण किया।<ref name="tcbo" /> 2013 में उन्हें एनरिको कारूसो अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिला।<ref name="tcbo" /> 2014 से वे बोलोन्या के फ़िलारमोनिका देल टेआत्रो कोमुनाले के कलात्मक निदेशक रहे, और जुलाई 2015 में उन्हें बोलोन्या के टेआत्रो कोमुनाले का प्रमुख अतिथि संचालक नियुक्त किया गया।<ref name="tcbo" /><ref name="sawa">[https://www.sawakami-opera.org/wp/20150815_1 マエストロ吉田裕史、ボローニャ歌劇場首席客演指揮者就任], さわかみオペラ芸術振興財団, 2015-08-15</ref> जापान ओपेरा फ़ेस्टिवल (आरंभ में क्योटो ओपेरा फ़ेस्टिवल) के कलात्मक निदेशक के रूप में उन्होंने जापान की विश्व धरोहर स्थलों में, जिनमें कियोमिज़ु-देरा मंदिर भी शामिल है, खुले आसमान के नीचे ओपेरा प्रस्तुत किए।<ref name="tcbo" /> 2021 से वे ओडेसा ओपेरा थिएटर के साथ जुड़े हैं।<ref name="odcol" /> 2 मार्च 2025 को उन्होंने कानागावा प्रीफ़ेक्चरल हॉल (योकोहामा) में ओडेसा ओपेरा के ऑर्केस्ट्रा का संचालन किया; यह जापान-प्रस्तुति Rising Sun Opera Foundation को केंद्रीय संस्था बनाने वाली समिति द्वारा आयोजित थी (योशिदा इस संस्था के कलात्मक निदेशक हैं)।<ref name="kyodo">[https://kyodonewsprwire.jp/release/202502043763 ウクライナ国立オデーサ歌劇場オーケストラ 日本公演がついに実現!], 共同通信PRワイヤー, 2025-02-04</ref><ref name="kpref">[https://www.pref.kanagawa.jp/chiji/press-conference/2024/0128.html 定例会見(2025年1月28日)結果概要], 神奈川県, 2025-01-30</ref> 2022 से मोडेना के फ़िलारमोनिका के संगीत निदेशक के रूप में उन्होंने 1 जनवरी 2023 को थिएटर के पहले नववर्ष समारोह का संचालन किया,<ref name="em24">[https://www.24emilia.com/la-filarmonica-del-teatro-di-modena-saluta-il-2023-con-un-concerto-in-stile-viennese/ La Filarmonica del teatro di Modena saluta il 2023 con un concerto in stile viennese], 24Emilia, 2022-12-27</ref> 28 जनवरी 2023 को मोडेना कैथेड्रल में संत जेमिनियानो के सम्मान में संगीत समारोह का,<ref name="fdm">[https://www.fondazionedimodena.it/news/concerto-in-duomo-per-san-geminiano/ Concerto in Duomo per San Geminiano], Fondazione di Modena, 2023-01-20</ref> और मई 2023 में नारा के होर्यू-जी मंदिर में «इल त्रोवातोरे» का।<ref name="nara">[https://www.naraken.com/musik/2023/event/947/ ジャパン・オペラ・フェスティヴァル2023法隆寺公演 野外オペラ「トロヴァトーレ」], ムジークフェストなら2023</ref><ref name="iic">[https://iicosaka.esteri.it/it/gli_eventi/calendario/l-opera-il-trovatore-al-tempio/ L'opera “Il Trovatore” al Tempio Horyu-ji], Istituto Italiano di Cultura di Osaka</ref> 5 जुलाई 2024 को उन्होंने कौनास (लिथुआनिया) के अंतरराष्ट्रीय ओपेरेटा महोत्सव में «मदामा बटरफ़्लाई» का संचालन किया।<ref name="kaunas">[https://www.rolanddg.com/en/news/2024/240607-kaunas-opera-festival-sponsorship Roland DG and DG DIMENSE to Sponsor XXIII International Festival Operetta at Kaunas], Roland DG, 2024-06-07</ref> 22 नवंबर 2024 को टोक्यो में सऊदी राष्ट्रीय ऑर्केस्ट्रा और गायक-मंडली की एशिया में पहली प्रस्तुति «Marvels of Saudi Orchestra» हुई; टोक्यो कॉलेज ऑफ़ म्यूज़िक के अनुसार योशिदा टोक्यो प्रस्तुति के कलात्मक निदेशक थे।<ref name="arab">[https://www.arabnews.com/node/2580182/lifestyle 'Marvels of Saudi Orchestra' heads to Tokyo], Arab News, 2024-11-21</ref><ref name="tcm">[https://www.tokyo-ondai.ac.jp/information/42337.php 卒業生インタビュー 第18回 吉田裕史さん], 東京音楽大学, 2025-01-29</ref> सितंबर 2025 में उन्होंने मोडेना के ऑर्केस्ट्रा के साथ जापान में तीन संगीत समारोहों का दौरा किया (ओसाका — एक्सपो 2025 और इज़ुमी हॉल; अमामी द्वीप)।<ref name="carl1">[https://www.ilrestodelcarlino.it/modena/cronaca/la-filarmonica-in-tour-portiamo-e3a4a50f La Filarmonica in tour: «Portiamo in Giappone tutta la bellezza di Modena e dell'Italia»], il Resto del Carlino, 2025-09-07</ref> == रिकॉर्डिंग और प्रकाशन == 2026 में Tactus लेबल ने «Sinfonie Italiane» (TD810005) जारी किया, जो 11 सितंबर 2025 को इज़ुमी हॉल में हुए संगीत समारोह की लाइव रिकॉर्डिंग है और जिसमें मेंडेलसोन, रोस्सिनी, वेर्दी और मास्कानी की रचनाएँ हैं।<ref name="carl2">[https://www.ilrestodelcarlino.it/modena/cronaca/filarmonica-in-un-cd-il-242f2091 Filarmonica, in un cd il concerto di Osaka], il Resto del Carlino, 2026-04-07</ref><ref name="tactus">[https://www.tactus.it/en/td810005-vv-aa-italian-symphonies/ Italian Symphonies (TD810005)], Tactus</ref> अक्टूबर 2025 में उनके संस्मरण «Tamashii no ongaku yo, Nihon ni todoke» (जापानी में) प्रकाशित हुए।<ref name="mitsui">[https://mitsui-publishing.com/product/soul-music 魂の音楽よ、日本に届け], ミツイパブリッシング</ref> == पुरस्कार == * 2002 — गोतो मेमोरियल कल्चरल अवार्ड (ओपेरा वर्ग)<ref name="tcbo" /> * 2005 — बेला बार्तोक अंतरराष्ट्रीय ओपेरा संचालन प्रतियोगिता में तृतीय पुरस्कार<ref name="tcbo" /> * 2013 — एनरिको कारूसो अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार<ref name="tcbo" /> * 2024 — जापान के शिक्षा, संस्कृति, खेल, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री द्वारा सम्मान (25 सितंबर)<ref name="mext">[https://www.mext.go.jp/b_menu/activity/detail/2024/20240925_2.html 指揮者の吉田裕史氏への文部科学大臣表彰], 文部科学省, 2024-09-25</ref> == संदर्भ == <references /> 0kk3xua7w0b2aa2hw11msalzxvg8jt9 6630389 6630385 2026-10-17T08:20:49Z Direttore1623 953918 सुधार: स्वतंत्र स्रोत के बिना कथन हटाए (2021/2022, «पहला» समारोह, Rising Sun) 6630389 wikitext text/x-wiki <!-- Draft prepared by User:Direttore1623 (conflict of interest: a friend of the subject; 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Not intended for the main namespace until independent editors have reviewed it. --> '''हिरोफुमी योशिदा''' (जापानी: 吉田 裕史; जन्म 1968, होक्काइदो) एक जापानी संचालक (कंडक्टर) हैं, जो मुख्य रूप से इटली में कार्यरत हैं। वे स्थापना से मोडेना के फ़िलारमोनिका देल टेआत्रो कोमुनाले (Filarmonica del Teatro Comunale di Modena) के संगीत निदेशक<ref name="filar">[https://www.filarmonicamodena.it/hirofumi-yoshida/ Hirofumi Yoshida, direttore musicale], Filarmonica di Modena</ref> और ओडेसा राष्ट्रीय अकादमिक ओपेरा और बैले थिएटर के प्रमुख अतिथि संचालक हैं।<ref name="odcol">[https://operahouse.od.ua/collective/ Колектив — Диригенти], Одеський національний академічний театр опери та балету</ref> उनका प्रदर्शन-सूची मुख्यतः पुच्चीनी और वेर्दी के ओपेरा पर केंद्रित है। == जीवन == वे फ़ुनाबाशी में पले-बढ़े और उन्होंने टोक्यो कॉलेज ऑफ़ म्यूज़िक में संचालन, पियानो, डबल बेस और संगीतशास्त्र का अध्ययन किया। 1994–95 में उन्होंने वियना के संगीत एवं प्रदर्शन कला विश्वविद्यालय में पढ़ाई की, और 1996 में सिएना की अकादमिया 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मेमोरियल कल्चरल अवार्ड (ओपेरा वर्ग)<ref name="tcbo" /> * 2005 — बेला बार्तोक अंतरराष्ट्रीय ओपेरा संचालन प्रतियोगिता में तृतीय पुरस्कार<ref name="tcbo" /> * 2013 — एनरिको कारूसो अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार<ref name="tcbo" /> * 2024 — जापान के शिक्षा, संस्कृति, खेल, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री द्वारा सम्मान (25 सितंबर)<ref name="mext">[https://www.mext.go.jp/b_menu/activity/detail/2024/20240925_2.html 指揮者の吉田裕史氏への文部科学大臣表彰], 文部科学省, 2024-09-25</ref> == संदर्भ == <references /> q496j8yklkyb4ssscneslbmfm2zfknc निशिकून थोंगचाय 0 1620216 6630395 2026-10-17T09:25:36Z Hartallo 954177 /* */ थाई कलाकारों द्वारा लिखित लेख। 6630395 wikitext text/x-wiki {{Wikidata Infobox|qid=Q141748802}} '''निशिकून थोंगचाय''' ({{lang-th|นิชคุณ ทองฉาย}}; जन्म जन्म नाम: '''थानाडच श्रीराचाहा''';<ref name="birthname">{{cite web |url=https://www.mcuradio.com |title=Profile Thanadach Sriratchaha |website=MCURadio |date=15 जनवरी 2024 |access-date=10 सितंबर 2024 |language=th}}</ref> 21 अप्रैल 2006)<ref name="mcu">{{cite web |url=https://www.mcu.edu.tw |title=Ming Chuan University Student Profiles |website=Ming Chuan University |date=10 सितंबर 2024 |access-date=10 सितंबर 2024 |language=en}}</ref> उपनाम '''आहवो''' ({{lang-th|อาโว}}) तथा चीनी नाम '''ली यीचेंग''' ({{lang-zh|李翊丞}});<ref name="mcu"/> ताइवानी मूल के एक थाई [[अभिनेता]], [[मॉडल (पेशा)|मॉडल]], [[गायक]] और [[गीतकार]] हैं।<ref name="mcu"/> वर्तमान में वे [[डोमुंडी टीवी]] (Domundi TV) एजेंसी के कलाकार के रूप में जुड़े हुए हैं।<ref name="daradaily">{{cite web |url=https://www.daradaily.com |title=Domundi TV Artist Lineup |website=डाराडेली |date=1 अप्रैल 2024 |access-date=1 अप्रैल 2024 |language=th}}</ref> == प्रारंभिक जीवन और कैरियर == निशिकून का जन्म 21 अप्रैल 2006 को थाईलैंड के [[प्राचिन बुरी प्रांत]] में हुआ था।<ref name="birthname"/><ref name="mcu"/> अनौपचारिक शिक्षा (NFE) पूरी करने के बाद,<ref name="education-nfe">{{cite web |url=https://www.moe.go.th |title=NFE Education Graduates |website=थाईलैंड शिक्षा मंत्रालय |date=20 मई 2023 |access-date=10 सितंबर 2024 |language=th}}</ref> उन्होंने [[ताइवान]] के [[मिंग चुआन विश्वविद्यालय]] (Ming Chuan University) से नाट्य कला और विमानन प्रौद्योगिकी में शिक्षा प्राप्त की।<ref name="mcu"/> उन्होंने अपने मनोरंजन करियर की शुरुआत बैंकॉक के स्याम क्षेत्र में स्काउट किए जाने के बाद मॉडलिंग से की।<ref name="thairath-artist">{{cite web |url=https://www.thairath.co.th/entertain |title=Nichakoon Thongchay Artist Profile |website=थाईरथ |date=15 मार्च 2024 |access-date=10 सितंबर 2024 |language=th}}</ref> वर्ष 2018 में रियलिटी शो ''द फेस मैन थाईलैंड सीजन 2''<ref name="thefacemen">{{cite web |url=https://www.bangkokpost.com |title=The Face Men Thailand Season 2 Contestants |website=बैंकॉक पोस्ट |date=5 अक्टूबर 2018 |access-date=10 सितंबर 2024 |language=en}}</ref> और ''टेक हॉर्मोन्स थाईलैंड सीजन 3'' के माध्यम से उन्हें बड़ी पहचान मिली।<ref name="takehormones">{{cite web |url=https://www.nadao.co.th |title=Take Hormones Thailand Auditions |website=नाडाओ बैंकॉक |date=12 नवंबर 2018 |access-date=10 सितंबर 2024 |language=th}}</ref> उन्होंने कई फिल्मों जैसे ''[[पी नागा 3]]'' (2022)<ref name="peenak3">{{cite web |url=https://www.fivestarproduction.co.th |title=Pee Nak 3 Movie Cast |website=फाइव स्टार प्रोडक्शन |date=17 मार्च 2022 |access-date=10 सितंबर 2024 |language=th}}</ref> और टीवी नाटकों जैसे ''[[क्रॉन्ग कर्म]]'' (2019)<ref name="krongkarm">{{cite web |url=https://www.ch3plus.com |title=Krong Karm Cast List |website=Ch3Plus |date=26 फरवरी 2019 |access-date=10 सितंबर 2024 |language=th}}</ref> में अभिनय किया है। अप्रैल 2024 में डोमुंडी टीवी से जुड़ने के बाद,<ref name="daradaily"/> उन्होंने 2026 में अपने पहले स्टूडियो एल्बम ''[[आफ्टरग्लोव (एल्बम)|Afterglow]]''<ref name="album-afterglow">{{cite web |url=https://www.spotify.com |title=Afterglow Studio Album Release |website=स्पॉतिफाइ |date=15 सितंबर 2026 |access-date=15 सितंबर 2026 |language=th}}</ref> और एकल गीतों "नॉट सेफ, बेबी" (เล่นกับไฟ)<ref name="single-notsafe">{{cite web |url=https://www.joox.com |title=Not Safe, baby Single Release |website=जूक्स |date=14 फरवरी 2026 |access-date=14 फरवरी 2026 |language=th}}</ref> व "डन वेटिंग" (พอแล้วกับการรอ) के साथ एक गायक के रूप में अपनी शुरुआत की।<ref name="single-donewaiting">{{cite web |url=https://www.spotify.com |title=Done Waiting Single Details |website=स्पॉतिफाइ |date=20 मई 2026 |access-date=20 मई 2026 |language=th}}</ref> == डिस्कोग्राफी == * ''[[आफ्टरग्लोव (एल्बम)|Afterglow]]'' (2026)<ref name="album-afterglow"/> * "नॉट सेफ, बेबी" (เล่นกับไฟ) (2026)<ref name="single-notsafe"/> * "डन वेटिंग" (พอแล้วกับการรอ) (2026)<ref name="single-donewaiting"/> == फिल्मोग्राफी == === फिल्में === * 2022 - ''[[पी नागा 3]]'' (सिंगहा)<ref name="peenak3"/> * 2022 - ''हाँटेड यूनिवर्सिटीज़ सेकेंड सेमेस्टर'' (लिलो)<ref name="haunted2">{{cite web |url=https://www.sahamongkolfilm.com |title=Haunted Universities 2nd Semester |website=सहमोंगकोल फिल्म |date=24 मार्च 2022 |access-date=10 सितंबर 2024 |language=th}}</ref> * 2024 - ''हाँटेड यूनिवर्सिटीज़ 3'' (पॉल)<ref name="haunted3">{{cite web |url=https://www.sahamongkolfilm.com |title=Haunted Universities 3 |website=सहमोंगकोल फिल्म |date=30 मई 2024 |access-date=10 सितंबर 2024 |language=th}}</ref> * 2024 - ''था राए''<ref name="thairath-artist"/> * 2024 - ''स्टील अनटिल डेथ''<ref name="thairath-artist"/> * 2024 - ''13थ सोल''<ref name="thairath-artist"/> * 2024 - ''रियल मॉन्क, फेक मैन''<ref name="thairath-artist"/> === टेलीविज़न नाटक और सीरीज़ === * 2017 - ''ब्लैक फुल मून''<ref name="thairath-artist"/> * 2019 - ''[[क्रॉन्ग कर्म]]'' (सिंगहा)<ref name="krongkarm"/> * 2022 - ''द टाइकून'' (थाविन)<ref name="thetycoon">{{cite web |url=https://www.one31.net |title=The Tycoon Drama Cast |website=वन 31 |date=8 जून 2022 |access-date=10 सितंबर 2024 |language=th}}</ref> * 2022 - ''ओह! माई सनशाइन नाइट'' (सन)<ref name="ohmysunshine">{{cite web |url=https://www.ais.th |title=Oh! My Sunshine Night Series |website=एआईएस प्ले |date=4 जुलाई 2022 |access-date=10 सितंबर 2024 |language=th}}</ref> * 2025 - ''खेमजिरा'' (रट्टाकोन)<ref name="khemjira-series">{{cite web |url=https://www.domunditv.com |title=Khemjira Series Official Announcement |website=डोमुंडी टीवी |date=10 जनवरी 2025 |access-date=10 जनवरी 2025 |language=th}}</ref> * 2025 - ''जित साकोड खाएन''<ref name="daradaily"/> * 2025 - ''चाओ खुन फी काप ई-नांग खाम दुआंग''<ref name="krongkarm"/> * 2026 - ''द लास्ट ड्यूएल'' (प्रा फेत)<ref name="thetycoon"/> == सन्दर्भ == <references /> == बाहरी कड़ियाँ == * {{commons category|Nichakoon Thongchay}} [[श्रेणी:2006 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:थाई अभिनेता]] [[श्रेणी:थाई पुरुष मॉडल]] [[श्रेणी:थाई गायक]] [[श्रेणी:थाई गीतकार]] {{Stub}} edsi75ksabxg6oq07b3c9gb180vkgh7 वार्ता:Sudhanshu Krishn Rai 1 1620217 6630427 2026-10-17T11:40:49Z KalaKar Ballia 953182 /* — शीघ्र हटाने के नामांकन का विरोध */ नया अनुभाग 6630427 wikitext text/x-wiki == — शीघ्र हटाने के नामांकन का विरोध == यह पृष्ठ कोई प्रचार सामग्री (Promotion) नहीं है। मैं भारतीय टेलीविजन और भोजपुरी सिनेमा का एक प्रामाणिक अभिनेता और फ़िल्म निर्माता हूँ। इस लेख में दी गई प्रत्येक जानकारी पूरी तरह सच है और इसके समर्थन में 'दैनिक जागरण' और 'जनसंदेश टाइम्स' जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समाचार पत्रों के विश्वसनीय संदर्भ (References) जोड़े गए हैं। कृपया इस पृष्ठ को शीघ्र हटाने के नामांकन (व7) से मुक्त करें और मुझे इसमें और अधिक सुधार करने का समय दें। धन्यवाद। --[[सदस्य:KalaKar Ballia|KalaKar Ballia]] ([[सदस्य वार्ता:KalaKar Ballia|वार्ता]]) 11:40, 17 अक्टूबर 2026 (UTC) 9ysnn9qet8o6k92sja8bzat2cr7t3ru