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मध्य प्रदेश
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Anitya Gautam
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'''मध्य प्रदेश''' ({{langx|en|Madhya Pradesh|italic=no}}) [[भारत]] का एक [[राज्य]] है। इसकी आधिकारिक [[राजधानी]] [[भोपाल]] है। मध्य प्रदेश 1 नवंबर 2000 तक [[क्षेत्रफल]] के आधार पर [[भारत]] का सबसे बड़ा राज्य था। इस दिन मध्यप्रदेश राज्य से 16 जिले अलग कर [[छत्तीसगढ़]] राज्य की स्थापना हुई थी। मध्य प्रदेश की सीमाऐं पाँच राज्यों की सीमाओं से मिलती है। इसके उत्तर में [[उत्तर प्रदेश]], पूर्व में [[छत्तीसगढ़]], दक्षिण में [[महाराष्ट्र]], पश्चिम में [[गुजरात]], तथा उत्तर-पश्चिम में [[राजस्थान]] है।
खनिज संसाधनों से समृद्ध, मध्य प्रदेश [[हीरा|हीरे]] और [[तांबे]] का सबसे बड़ा भंडार है। अपने क्षेत्र की 30% से अधिक वन क्षेत्र के अधीन है। इसके पर्यटन उद्योग में काफी वृद्धि हुई है। राज्य ने वर्ष 2010-11 के लिये राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार जीता था।
मध्यप्रदेश मुख्य रूप से अपने पर्यटन के लिए भी जाना जाता है।<ref name="u384">{{cite web | title=मध्यप्रदेश राज्य केंद्र | website=State NIC Website | url=https://mpstate.nic.in/hi/ | language=hi | access-date=2026-10-18}}</ref> मांडू, धार, महेश्वर मंडलेश्वर, चोली, भीमबैठका, [[पचमढ़ी|पचमढी]], [[खजुराहो]], [[साँची स्तूप]], [[ग्वालियर का क़िला|ग्वालियर का किला]], और उज्जैन रीवा जल प्रपात मध्यप्रदेश के [[पर्यटन]] स्थल के प्रमुख उदाहरण हैं। उज्जैन जिले में प्रत्येक 12 वर्षों में कुंभ ([[सिंहस्थ]]) मेले का पुण्यपर्व विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है। शिवपुरी मध्य प्रदेश की पर्यटन नगरी है
[[मध्य प्रांत और बरार]] को छत्तीसगढ़ और मकराइ रियासतों के साथ मिलकर मध्य प्रदेश का गठन किया गया था। तब इसकी राजधानी [[नागपुर]] में थी। इसके बाद १ नवंबर १९५६ को मध्य भारत, विंध्य प्रदेश तथा भोपाल राज्यों को भी इसमें ही मिला दिया गया, जबकि दक्षिण के मराठी भाषी विदर्भ क्षेत्र को (राजधानी नागपुर समेत) बॉम्बे राज्य में स्थानांतरित कर दिया गया। पहले [[जबलपुर]] को राज्य की राजधानी के रूप में चिन्हित किया जा रहा था,परंतु अंतिम क्षणों में इस निर्णय को पलटकर भोपाल को राज्य की नवीन राजधानी घोषित कर दिया गया। जो कि [[सीहोर जिला|सीहोर जिले]] की एक तहसील हुआ करता था। १ नवंबर २००० को एक बार फिर मध्य प्रदेश का पुनर्गठन हुआ, और [[छत्तीसगढ़]] मध्य प्रदेश से अलग होकर भारत का [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|२६वाँ राज्य]] बन गया मध्य प्रदेश में सबसे जायदा वन ओर जंगल पाए जाते है मध्य प्रदेश मे हाईकोर्ट जबलपुर में है।
== विवरण ==
भारत की संस्कृति में मध्यप्रदेश जगमगाते [[दीपक]] के समान है, जिसकी रोशनी की सर्वथा अलग प्रभा और प्रभाव है। यह विभिन्न संस्कृतियों की अनेकता में एकता का जैसे आकर्षक गुलदस्ता है, मध्यप्रदेश, जिसे प्रकृति ने राष्ट्र की वेदी पर जैसे अपने हाथों से सजाकर रख दिया है, जिसका सतरंगी सौन्दर्य और मनमोहक सुगन्ध चारों ओर फैल रही है। यहाँ के जनपदों की आबोहवा में कला, साहित्य और संस्कृति की मधुमयी सुवास तैरती रहती है। यहाँ के लोक समूहों और जनजाति समूहों में प्रतिदिन नृत्य, संगीत, गीत की रसधारा सहज रूप से फूटती रहती है। यहाँ का हर दिन पर्व की तरह आता है और जीवन में आनंद रस घोलकर स्मृति के रूप में चला जाता है। इस प्रदेश के तुंग-उतुंग शैल शिखर विंध्य-सतपुड़ा, मैकाल-कैमूर की उपत्यिकाओं के अंतर से गूँजते अनेक पौराणिक आख्यान और [[नर्मदा]], [[सोन]], [[सिन्ध नदी (मध्य प्रदेश)|सिंध]], [[चंबल]], [[बेतवा]], [[केन]], [[धसान]], [[तवा नदी|तवा]], [[ताप्ती]], [[क्षिप्रा नदी|क्षिप्रा]], [[काली सिंध]] आदि सर-सरिताओं के उद्गम और मिलन की मिथकथाओं से फूटती सहस्त्र धाराएँ यहाँ के जीवन को आप्लावित ही नहीं करतीं, बल्कि परितृप्त भी करती हैं।
== संस्कृति ==
[[File:Distrikte von Madhya Pradesh 2021-hi.svg|right|thumb|400px|मध्य प्रदेश के ज़िले]]
मध्यप्रदेश में छह लोक संस्कृतियों का समावेशी संसार है। ये छह सांस्कृतिक क्षेत्र है–
# निमाड़
# मालवा
# बुंदेलखंड
# बघेलखंड
# महाकौशल
# ग्वालियर (चंबल)
# रीवा
प्रत्येक सांस्कृतिक क्षेत्र या भू-भाग का एक अलग जीवंत लोकजीवन, साहित्य, संस्कृति, इतिहास, कला, बोली और परिवेश है। मध्यप्रदेश लोक-संस्कृति के मर्मज्ञ विद्वान श्री वसन्त निरगुणे लिखते हैं- "संस्कृति किसी एक अकेले का दाय नहीं होती, उसमें पूरे समूह का सक्रिय सामूहिक दायित्व होता है। सांस्कृतिक अंचल (या क्षेत्र) की इयत्ता इसी भाव भूमि पर खड़ी होती है। जीवन शैली, कला, साहित्य और वाचिक परंपरा मिलकर किसी अंचल की सांस्कृतिक पहचान बनाती है।"
मध्यप्रदेश की संस्कृति विविधवर्णी है। गुजरात, महाराष्ट्र अथवा उड़ीसा की तरह इस प्रदेश को किसी भाषाई संस्कृति में नहीं पहचाना जाता। मध्यप्रदेश विभिन्न लोक और जनजातीय संस्कृतियों का समागम है। यहाँ कोई एक लोक संस्कृति नहीं है। यहाँ एक तरफ़ पाँच लोक संस्कृतियों का समावेशी संसार है, तो दूसरी ओर अनेक जनजातियों की आदिम संस्कृति का विस्तृत फलक पसरा है।
निष्कर्षत: मध्यप्रदेश छह सांस्कृतिक क्षेत्र [[निमाड़]], [[मालवा]], [[बुंदेलखंड]], [[बघेलखंड]], [[महाकौशल]] और [[ग्वालियर]] हैं। धार-झाबुआ, मंडला-बालाघाट, छिंदवाड़ा, नर्मदापुरम, खंडवा-[[बुरहानपुर]], बैतूल, रीवा-सीधी, शहडोल आदि जनजातीय क्षेत्रों में विभक्त है।
=== निमाड़ ===
{{main|निमाड़}}
निमाड़ मध्यप्रदेश के पश्चिमी अंचल में स्थित है। अगर इसके भौगोलिक सीमाओं पर एक दृष्टि डालें तो यह पता चला है कि निमाड़ के एक ओर [[विंध्य पर्वत|विंध्य]] की उतुंग शैल श्रृंखला और दूसरी तरफ़ सतपुड़ा की सात उपत्यिकाएँ हैं, जबकि मध्य में है [[नर्मदा]] की अजस्त्र जलधारा। पौराणिक काल में निमाड़ अनूप जनपद कहलाता था। बाद में इसे [[निमाड़]] की संज्ञा दी गयी। फिर इसे पूर्वी और पश्चिमी निमाड़ के रूप में जाना जाने लगा।
=== मालवा ===
{{main|मालवा}}
मालवा महाकवि [[कालिदास]] की धरती है। यहाँ की धरती हरी-भरी, धन-धान्य से भरपूर रही है। यहाँ के लोगों ने कभी भी अकाल को नहीं देखा। विंध्याचल के पठार पर प्रसरित मालवा की भूमि सस्य, श्यामल, सुंदर और उर्वर तो है ही, यहाँ की धरती पश्चिम भारत की सबसे अधिक स्वर्णमयी और गौरवमयी भूमि रही है। सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मालवा मे अपने आप को रोक रखा था।
मालवा भारत का सबसे बड़ा प्रांत रहा है जहां उज्जैन और शाजापुर एतिहासिक शहर व पुरातात क शहर हैं।
=== बुंदेलखंड ===
{{main|बुंदेलखंड}}
एक प्रचलित अवधारणा के अनुसार "वह क्षेत्र जो उत्तर में [[यमुना]], दक्षिण में विंध्य प्लेटों की श्रेणियों, उत्तर-पश्चिम में चंबल और दक्षिण पूर्व में पन्ना, अजमगढ़ श्रेणियों से घिरा हुआ है, [[बुंदेलखंड]] के नाम से जाना जाता है। इसमें [[उत्तर प्रदेश]] के पाँच जिले- [[जालौन जिला|जालौन]], [[झाँसी जिला|झाँसी]], [[ललितपुर जिला|ललितपुर]], [[हमीरपुर जिला, उत्तर प्रदेश|हमीरपुर]] और [[बांदा जिला, उत्तर प्रदेश|बाँदा]] तथा [[मध्यप्रेदश]] के पाँच जिले- [[सागर जिला|सागर]], [[दतिया जिला|दतिया]], [[टीकमगढ़ जिला|टीकमगढ़]], [[छतरपुर जिला|छतरपुर]] और [[पन्ना जिला|पन्ना]] के अलावा उत्तर-पश्चिम में चंबल नदी तक प्रसरित विस्तृत प्रदेश का नाम था।" [[कनिंघम]] ने "[[बुंदेलखंड]] के अधिकतम विस्तार के समय गंगा और [[यमुना]] का समस्त दक्षिणी प्रदेश (जो पश्चिम में [[बेतवा]] नदी से संलग्न है) पूर्व में [[चंदेरी]], [[सागर]] के [[अशोक नगर]] जिलों सहित [[तुमैन]] का विंध्यवासिनी देवी के मंदिर तक तथा दक्षिण में नर्मदा नदी के मुहाने के निकट बिल्हारी तक प्रसरित था", माना है।साथ ही विदिशा, गुना, अशोकनगर, दमोह ,नरसिंहपुर, निवाड़ी ,रायसेन, तथा जबलपुर ,कटनी जिले में बुंदेलखंड की संस्कृति भाषा की गहरी छाप देखने को मिलती है। बुंदेलखंड की संस्कृति उसकी भौगोलिक सीमाओं को पार कर उसके आस पास वाले जिलों पर देखने को मिलती है। बुंदेली भाषा मध्य प्रदेश के इस भाग में अगल ही पहचान बनाए हुए है । बुंदेली लोक साहित्य, लोक गायन तथा नृत्य क्षेत्र अत्यंत व्यापक है।
=== बघेलखंड ===
{{main|बघेलखंड }}
बघेलखंड की धरती का संबंध अति प्राचीन भारतीय संस्कृति से रहा है। यह भू-भाग रामायणकाल में [[कोसल|कोसल प्रांत]] के अंतर्गत था। [[महाभारत]] के काल में विराटनगर बघेलखंड की भूमि पर था, जो आजकल [[सोहागपुर]] के नाम से जाना जाता है। भगवान राम की वनगमन यात्रा इसी क्षेत्र से हुई थी। यहाँ के लोगों में शिव, शाक्त और वैष्णव संप्रदाय की परंपरा विद्यमान है। यहाँ नाथपंथी योगियो का खासा प्रभाव है। [[कबीर पंथ]] का प्रभाव भी सर्वाधिक है। महात्मा [[कबीरदास]] के अनुयायी धर्मदास बाँधवगढ़ के निवासी थी।
=== महाकोशल ===
[[जबलपुर संभाग]] का संपूर्ण हिस्सा महाकोशल कहलाता है। [[नर्मदा नदी]] किनारे बसा यह क्षेत्र सांस्कृतिक और प्राकृतिक समृद्धता में धनी है। यहाँ भेड़ाघाट जैसा विहंगम जल प्रपात है तो दूसरी ओर परमहंसी में ज्योतिष और द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी का आश्रम है।
=== ग्वालियर ===
[[चित्र:Gwalior-portadelelefant.jpg|right|250px|thumb|ग्वालियर किले का ग्वालियर-गेट नामक द्वार — किले के अंदर से लिया गया चित्र]]
{{main|ग्वालियर}}
मध्यप्रदेश का चंबल क्षेत्र भारत का वह मध्य भाग है, जहाँ भारतीय इतिहास की अनेक महत्वपूर्ण गतिविधियाँ घटित हुई हैं। इस क्षेत्र का सांस्कृतिक-आर्थिक केंद्र ग्वालियर शहर है। सांस्कृतिक रूप से भी यहाँ अनेक संस्कृतियों का आवागमन और संगम हुआ है। राजनीतिक घटनाओं का भी यह क्षेत्र हर समय केन्द्र रहा है। स्वतंत्रता से पहले यहाँ [[सिंधिया]] राजपरिवार का शासन रहा था। १८५७ का पहला स्वतंत्रता संग्राम झाँसी की वीरांगना [[रानी लक्ष्मीबाई]] ने इसी भूमि पर लड़ा था। सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र ग्वालियर अंचल संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, चित्रकला अथवा लोकचित्र कला हो या फिर साहित्य, लोक साहित्य की कोई विधा हो, ग्वालियर अंचल में एक विशिष्ट संस्कृति के साथ नवजीवन पाती रही है। ग्वालियर क्षेत्र की यही सांस्कृतिक हलचल उसकी पहचान और प्रतिष्ठा बनाने में सक्षम रही है।
== भूगोल ==
=== भारत में अवस्थिति ===
जैसा की नाम से ही प्रतीत होता हैं यह भारत के बीचो-बीच, अक्षांश 21°6' उत्तरी अक्षांश से 26°30' उत्तरी अक्षांश देशांतर 74°9' पूर्वी देशांतर से 82°48' पूर्वी देशांतर में स्थित हैं। राज्य, [[नर्मदा नदी]] के चारो और फैला हुआ है, जोकि विंध्य और सतपुड़ा पर्वतमाला के बीच पूर्व से पश्चिम की और बहती हैं, जोकि उत्तर और दक्षिण भारत के बीच पारंपरिक सीमा का काम करती हैं। मध्य प्रदेश की उत्तर से दक्षिण की लम्बाई 605 किलोमीटर तथा पश्चिम से पूर्व लंबाई 870 किलोमीटर है। मानक रेखा सिंगरौली जिले से गुजरती है तथा पश्चिम से पूर्व मध्य प्रदेश में 32 मिनट का समयांतराल है।
राज्य, दक्षिण में [[महाराष्ट्र]] से, पश्चिम में [[गुजरात]] से घिरा हुआ है, जबकि इसके उत्तर-पश्चिम में [[राजस्थान]], पूर्वोत्तर पर [[उत्तर प्रदेश]] और पूर्व में [[छत्तीसगढ़]] स्थित हैं।
मध्य प्रदेश में सबसे ऊँची चोटी, धूपगढ़ (पचमढ़ी) की है जिसकी ऊँचाई 1,350 मीटर (4,429 फुट) हैं।<ref>{{cite book
| title = मध्य प्रदेश, में घुमने और शिकार के लिए
| publisher = सूचना और प्रचार निदेशालय, मध्य प्रदेश
| year = 1964
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{{Geographic location
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}}
=== जलवायु===
मध्य प्रदेश में उष्णकटिबंधीय जलवायु है। अधिकांश उत्तर भारत की तरह, यहाँ ग्रीष्म ऋतू (अप्रैल-जून), के बाद [[मानसून]] की वर्षा (जुलाई-सितंबर) और फिर अपेक्षाकृत शुष्क शरदऋतु आती है। यहाँ औसत वर्षा 1371 मिमी (54.0 इंच) होती है। इसके दक्षिण-पूर्वी जिलों में भारी वर्षा होती है, कुछ स्थानों में तो 2,150 मिमी (84.6 इंच) तक बारिश होती हैं, पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी जिलों में 1,000 मिमी (39.4 इंच) या कम बारिश होती हैं।
===पर्यावरण===
2011 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में दर्ज वनक्षेत्र 94,689 वर्ग किमी(36,560 वर्ग मील) हैं जोकि राज्य के कुल क्षेत्र का 30.72% हैं, और भारत में स्थित कुल वनक्षेत्र का 12.30% है। मध्य प्रदेश सरकार ने इन क्षेत्र को "आरक्षित वन" (65.3%), "संरक्षित वन" (32.84%) और "उपलब्ध वन" (0.18%) में वर्गीकृत किया गया है। वन राज्य के उत्तरी और पश्चिमी भागों में कम घना है, जहाँ राज्य के प्रमुख शहर हैं,
राज्य में पाये जाने वाले मिट्टी के प्रमुख प्रकार हैं:
** [[काली मिट्टी]], सबसे मुख्य रूप से [[मालवा]] क्षेत्र, [[महाकौशल]] में और दक्षिणी [[बुन्देलखण्ड|बुंदेलखंड]] में
** [[लाल मिट्टी|लाल]] और पीली मिट्टी, [[बघेलखंड]] क्षेत्र में
** [[जलोढ़ मिट्टी]], उत्तरी मध्य प्रदेश में
** [[लैटराइट मिट्टी]], हाइलैंड क्षेत्रों में
** मिश्रित मिट्टी, [[ग्वालियर]] और [[चंबल]] संभाग के कुछ हिस्सों में
====वनस्पति और जीव====
प्रदेश में सबसे अधिक वनक्षेत्र हैं, इसीलिए यहाँ [[बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान|बाँधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान]], [[कान्हा राष्ट्रीय उद्यान]], [[सतपुड़ा राष्ट्रीय अभ्यारण्य]], [[संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान]], [[माधव राष्ट्रीय उद्यान]], [[वन विहार राष्ट्रीय उद्यान]], [[जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान]], [[पन्ना राष्ट्रीय उद्यान]] [[पेंच राष्ट्रीय उद्यान]], [[डायनासोर राष्ट्रीय उद्यान]], [[पालपुर कुनो राष्ट्रीय उद्यान]] सहित 11 राष्ट्रीय उद्यान एवं विश्व का प्रथम वाइट टाइगर सफारी और ज़ू मुकुंदपुर सतना में है तथा इसके अलावा यह कई प्राकृतिक संरक्षण उपस्थित हैं जिनमे [[अमरकंटक]], बाग गुफाएँ, [[बालाघाट ज़िला|बालाघाट]], बोरी प्राकृतिक रिजर्व, केन घड़ियाल, [[घाटीगाँव]] , कुनो पालपुर, नरवर, चंबल, कुकड़ेश्वर, [[नरसिंहगढ़]], नोरा देही, [[पचमढ़ी]], पनपथा, शिकारगंज, [[पातालकोट]] और तामिया सम्मलित हैं सतपुड़ा रेंज में [[पचमढ़ी बायोस्फीयर रिजर्व]], [[अमरकंटक बायोस्फियर रिजर्व]] और पन्ना राष्ट्रीय उद्यान भारत में उपस्थित 18 बायोस्फीयर में से तीन हैं। [[उदयगिरि गुफाएँ |उदयगिरि गुफा]] भी मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में स्थित है|<ref>{{cite web |title=मध्यप्रदेश में स्थित स्तूप एवं गुफाएँ |url=https://www.pittbi.com/madhyapradesh-mein-sthit-stoop-guphaen/ |website=PITTBI - पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया |date=17 सितम्बर 2022 |access-date=17 सितंबर 2022 |archive-date=20 सितंबर 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220920171016/https://www.pittbi.com/madhyapradesh-mein-sthit-stoop-guphaen/ |url-status=dead }}</ref>
कान्हा, बाँधवगढ़, पेंच, पन्ना, और सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान बाघ परियोजना क्षेत्रों के रूप में काम करते हैं। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य को, घड़ियाल और मगर, नदी डॉल्फिन, ऊदबिलाव और कई प्रकार के कछुओ के संरक्षण के लिए जाना जाता है।
राज्य के जंगलों में सागौन और साल के पेड़ बहुतायत में पाये जाते हैं।
=== नदियाँ===
[[नर्मदा नदी]] मध्य प्रदेश की सबसे प्रमुख और लंबी (1312 कि.मी.<ref>http://www.sardarsarovardam.org/the-narmada-river-basin.aspx {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20180817225939/http://www.sardarsarovardam.org/the-narmada-river-basin.aspx |date=17 अगस्त 2018 }} नर्मदा नदी बेसिन</ref>) नदी हैं। यह दरार घाटी के माध्यम से पश्चिम की ओर बहती हैं, इसके उत्तरी किनारे में विंध्य के विशाल पर्वतमाला, जबकि दक्षिण में सतपुड़ा के पहाड़ों की रेंज हैं। इसकी सहायक नदियों में बंजार, [[तवा नदी|तवा]], मचना, शक्कर, देनवा और [[सोनभद्र जिला|सोनभद्र]] नदियाँ आदि शामिल हैं। [[ताप्ती नदी]] भी नर्मदा के समानांतर, दरार घाटी के माध्यम से बहती हैं। नर्मदा-ताप्ती सिस्टम, राज्य की प्रमुख नदियों में से हैं और मध्य प्रदेश की लगभग एक चौथाई भूमि क्षेत्र को जल प्रदान करती हैं।
बाकी की नदियाँ [[चम्बल नदी|चंबल]], [[क्षिप्रा नदी|क्षिप्रा]], [[काली सिंध]], [[पार्वती नदी|पार्वती]], [[कुनो नदी|कुनो]], [[सिंध नदी|सिंध]], [[बेतवा नदी|बेतवा]], [[धसान नदी|धसान]] और [[केन नदी|केन]], जोकि पुर्व की और बहती हैंं, [[यमुना नदी]] में जाके मिलती हैंं क्षिप्रा नदी जिसके किनारे प्राचीन शहर [[उज्जैन]] बसा हुआ हैंं हिंदू धर्म के सबसे पवित्र नदियों में से एक हैं। यहाँ हर 12 साल में [[सिंहस्थ|सिंहस्थ कुंभ मेला]] आयोजित किया जाता हैं। इन नदियों द्वारा बहा के लाई गई भूमि कृषि समृद्ध होती हैंं। गंगा बेसिन के पूर्वी भाग में [[सोन नदी|सोन]], [[टोंस नदी|टोंस]], बीहर, सेलर नदी (मध्यप्रदेश का सबसे ऊँचा बहुटी जलप्रपात इसी नदी में बनता है [[Mauganj|मऊगंज]]) तथा [[रिहन्द नदी|रिहंद]] नदिया हैं। सोन, जो [[अमरकंटक]] के पास [[मैकल पर्वतमाला|मैकल पहाड़ो]] से निकलती हैं, दक्षिणी से [[गंगा नदी|गंगा]] की सबसे बड़ी सहायक नदी हैं जो कि [[हिमालय]] से ही नहीं निकलती हैं। सोन और उसकी सहायक नदियों, गंगा में मानसून का अथाह जल प्रवाहित करती हैं।
[[छत्तीसगढ़]] राज्य के गठन के बाद, [[महानदी]] बेसिन का बड़ा हिस्सा अब छत्तीसगढ़ में प्रवाहित होता हैं। वर्तमान में, [[अनूपपुर ज़िला|अनूपपुर]] जिले में हसदेव के पास नदी का केवल 154 km² बेसिन क्षेत्र ही मध्य प्रदेश में बहता हैं। [[वैनगंगा नदी|वैनगंगा]], [[वर्धा नदी|वर्धा]], [[पेँच नदी|पेंच]], [[कन्हान नदी|कन्हान]] नदियाँ, [[गोदावरी नदी]] प्रणाली में विशाल मात्रा में पानी का निर्वहन करती हैं। यहाँ कई महत्वपूर्ण राज्य के विकास में सिंचाई परियोजनाएँ कार्यरत हैं, जिसमें [[गोदावरी नदी]] [[घाटी]] [[सिंचाई]] [[परियोजना]] भी शामिल हैं।
<gallery mode="nolines" widths="170px" heights="120px">
चित्र:JhansiGhat.jpg|thumb|[[नर्मदा नदी]]
चित्र:Son River, Umaria district, MP, India.jpg|[[सोन नदी]], [[उमरिया जिला]]
चित्र:Dhuandhar falls4.JPG|thumb|[[भेड़ाघाट]] में संगमरमर की चट्टानों के माध्यम से बहती [[नर्मदा नदी]]
चित्र:Shri Ram Ghat 01.jpg|[[क्षिप्रा नदी]] पर श्रीराम घाट, [[उज्जैन]]
चित्र:Betwa in Ashoknagar.JPG|[[बेतवा नदी]], [[अशोकनगर जिला|अशोकनगर जिले]] में
</gallery>
===परिक्षेत्र===
मध्यप्रदेश को निम्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बाँटा गया है:
* [[कैमूर]] पठार और [[सतपुड़ा]] पहाड़ी
* [[विंध्य क्षेत्र|विंध्य]] पठार (पहाड़ी)
* [[नर्मदा नदी|नर्मदा]] घाटी
* [[वैनगंगा नदी|वैनगंगा]] घाटी
* [[गिर्द]] ([[ग्वालियर]]) क्षेत्र
* [[बुंदेलखंड]] क्षेत्र
* [[सतपुड़ा]] पठार (पहाड़ी)
* [[मालवा]] पठार
* [[निमाड़]] पठार
* [[झाबुआ]] पहाड़ी
====शहर====
{{main article|मध्य प्रदेश के ज़िले}}
मध्य प्रदेश राज्य में कुल 55 जिले हैं।<ref>{{cite news |last1=Narayan |first1=Udit |title=कमलनाथ कैबिनेट ने मैहर, चाचौड़ा और नागदा को जिला बनाने की मंजूरी दी, मध्यप्रदेश में अब 52 जिले होंगे |url=https://www.bhaskar.com/mp/bhopal/news/kamal-nath-cabinet-meeting-today-updates-madhya-pradesh-government-makes-big-decisions-in-todays-cabinet-meeting-127001649.html |accessdate=19 मार्च 2020 |work=Dainik Bhaskar |date=18 मार्च 2020 |language=hi |archive-url=https://web.archive.org/web/20200319052151/https://www.bhaskar.com/mp/bhopal/news/kamal-nath-cabinet-meeting-today-updates-madhya-pradesh-government-makes-big-decisions-in-todays-cabinet-meeting-127001649.html |archive-date=19 मार्च 2020 |url-status=live }}</ref>
==जनसांख्यिकी==
[[चित्र:Children in Raisen district, MP, India.jpg|200px|thumb|right|मध्य प्रदेश के [[रायसेन जिला|रायसेन जिले]] के [[भील]] जनजाति के प्यारे बच्चे]]
वर्ष 2011 की जनगणना के अंतिम आँकडों के अनुसार मध्य प्रदेश की कुल जनसंख्या 72,626,809 है<ref>{{Cite web|url=http://www.census2011.co.in/census/state/madhya+pradesh.html|title=Madhya Pradesh Population Sex Ratio in Madhya Pradesh Literacy rate data 2011-2019|website=www.census2011.co.in|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190228173446/http://www.census2011.co.in/census/state/madhya+pradesh.html|archive-date=28 फ़रवरी 2019|url-status=dead}}</ref> जिसमे 3,76,11,370(51.8%) पुरुष एवं 3,49,84,645(48.2%) महिलाएँ है मध्यप्रदेश का लिंगानुपात 930 है। मध्य प्रदेश की जनसंख्या, में कई समुदाय, जातीय समूह और जनजातियाँ आते हैं जिनमे यहाँ के मूल निवासी आदिवासी और हाल ही में अन्य राज्यों से आये प्रवासी भी शामिल है। राज्य की आबादी में [[अनुसूचित जाति]] और [[अनुसूचित जनजाति]] एक बड़े हिस्से का गठन करते हैं। मध्यप्रदेश के आदिवासी समूहों में मुख्य रूप से [[गोंड]], [[भील]], [[बैगा]], [[कोरकू]], भड़िया (या भरिया), [[हल्बा]], [[कौल]], मरिया, मालतो और [[सहरिया]] आते हैं। [[धार]], [[झाबुआ]], [[मंडला ज़िला|मंडला]] और [[डिंडौरी ज़िला|डिंडौरी]] जिलों में 50 प्रतिशत से अधिक जनजातीय आबादी की है। [[खरगोन]], [[छिंदवाड़ा]], [[सिवनी]], [[सीधी]], [[सिंगरौली]] और [[शहडोल]] जिलों में 30-50 प्रतिशत आबादी जनजातियों की है। 2011 की जनगणना के अनुसार, मध्य प्रदेश में आदिवासियों की जनसंख्या 15316000 हैं, जोकि कुल जनसंख्या का 21.10% हैं। यहाँ 46 मान्यता प्राप्त अनुसूचित जनजाति हैं और उनमें से तीन को "विशेष आदिम जनजातीय समूहों" का दर्जा प्राप्त हैं।<ref>[http://www.mp_gov_in_sc_st_welfare_2001/tribal/ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग, मध्य प्रदेश सरकार]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
विभिन्न भाषाई, सांस्कृतिक और भौगोलिक वातावरण और अन्य जटिलताओं के कारण मध्य प्रदेश के आदिवासी, बड़े पैमाने पर विकास की मुख्य धारा से कटा हुआ है। मध्य प्रदेश, [[मानव विकास सूचकांक]] के निम्न स्तर 0.375 (2011) पर हैं, जोकि राष्ट्रीय औसत से बहुत नीचे है।<ref name="UNDP_HDI_2011">[http://www.undp.org/content/dam/india/docs/madhyapradesh_factsheet.pdf मध्य प्रदेश: आर्थिक और मानव विकास संकेतक] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120916043423/http://www.undp.org/content/dam/india/docs/madhyapradesh_factsheet.pdf |date=16 सितंबर 2012 }}, यूएनडीपी (2011)</ref> इंडिया स्टेट हंगर इंडेक्स (2008) के अनुसार, मध्य प्रदेश में कुपोषण की स्थिति, 'बेहद खतरनाक' हैं और इसका स्थान इथोपिया और चाड के बीच है।<ref name="bbchunger">{{cite news | url=http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/7669152.stm | title=भारत राज्य में भूखमरी 'खतरनाक' स्तर पर | publisher=बीबीसी | date=14 अक्टूबर 2008 | accessdate=12 मई 2010 | archive-url=https://web.archive.org/web/20090930010722/http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/7669152.stm | archive-date=30 सितंबर 2009 | url-status=live }}</ref> राज्य की [[कन्या भ्रूण हत्या]] की स्थिति में भी, भारत में सबसे खराब प्रदर्शन है।<ref>{{cite web|url=http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-07-03/india/32522980_1_cases-mukesh-sinha-executive-director-ncrb|title=एक बार फिर, मध्य प्रदेश भ्रूण हत्या के मामलों में सबसे ऊपर है (अंग्रेजी में)|publisher=टाइम्स ऑफ इंडिया|access-date=22 फ़रवरी 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20130502220715/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-07-03/india/32522980_1_cases-mukesh-sinha-executive-director-ncrb|archive-date=2 मई 2013|url-status=live}}</ref> राज्य का प्रति व्यक्ति [[सकल राज्य घरेलू उत्पाद]] (जीडीपी)(2010-11), देश के सबसे कम में चौथा स्थान पर है।<ref name="PlanningCom_GSDP_2012">[http://planningcommission.nic.in/data/datatable/0904/tab_104.pdf मौजूदा मूल्यों पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) (15-03-2012 को)], भारत के योजना आयोग। {{webarchive |url=https://web.archive.org/web/20120516022406/http://planningcommission.nic.in/data/datatable/0904/tab_104.pdf |date=}}</ref> प्रदेश, भारत के [[राज्य]] हंगर इंडेक्स पर भी सबसे कम रैंकिंग वाले राज्य में से है।
मध्य प्रदेश कुपोषण के मामले में सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में से एक है। हाल ही के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 के अनुसार, पन्ना जिले में 43.1 प्रतिशत बच्चे कुपोषित, 24.7 प्रतिशत क्षीण और 40.3 प्रतिशत कम वजन वाले बच्चों की श्रेणी में आते है।<ref>{{Cite web|url=http://malnourishedkids.blogspot.com/2012/10/malnutrition-in-madhya-pradesh-overview.html|title=Malnourished Children of Madhya Pradesh: Malnutrition in Madhya Pradesh - An Overview|first=Saju|last=Mk|date=30 अक्तू॰ 2012|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190217071716/http://malnourishedkids.blogspot.com/2012/10/malnutrition-in-madhya-pradesh-overview.html|archive-date=17 फ़रवरी 2019|url-status=dead}}</ref> इसी तरह का मामला ग्रामीण छतरपुर में भी हैं जहां 44.4 प्रतिशत बच्चे कुपोषित, 17.8 प्रतिशत क्षीण और 41.2 प्रतिशत कम वजन के हैं।
<gallery mode="noline" width="175pix" lenth="100px">
चित्र:Breakfast making in adivasi village, Umaria district, India.jpg|एक आदिवासी महिला बाँधवगढ़ में नाश्ता तैयार करती हुईं
चित्र:Shepherds, Chambal, India.jpg|चंबल में चरवाहे
चित्र:Ploughing paddy field with oxen, Umaria district, MP, India.jpg|उमरिया जिले में एक युवा किसान
चित्र:Young Baiga women, India.jpg|युवा [[बैगा (जनजाति)|बैगा]] महिला
</gallery>
===धर्म===
2011 की जनगणना के अनुसार, प्रदेश में 90.9% लोग [[हिंदू धर्म]] को मानते हैं, जबकि अन्य में [[मुस्लिम]] (6.6%), [[जैन]](1%),[[ईसाई]] (0.3%), [[बौद्ध]] (0.3%), और [[सिख]] (0.2%) आदि आते है। प्रदेश के कई शहर अपनी धार्मिक आस्था के केंद्र के लिए जाने जाते रहे हैं। जिनमे से सबसे प्रमुख [[उज्जैन]] शहर हैं, जोकि भारत के सबसे प्राचीन शहरो में से एक हैं। यहाँ 12 [[ज्योतिर्लिंग]] में से एक [[उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर|महाकालेश्वर मंदिर]] दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। शहर में बहने वाली [[शिप्रा नदी]] के किनारे प्रसिध्द [[कुंभ मेला]] लगता है। इसके अलावा नर्मदा नदी के तट पर बसा [[ओंकारेश्वर मन्दिर|ओम्कारेश्वर]] भी 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं। [[हिंदू धर्म]] के अलावा अन्य धर्मों के कई धार्मिक केंद्र प्रदेश में उपस्थित हैं। [[भोपाल]] का [[ताज-उल-मस्जिद, भोपाल|ताज-उल-मस्जिद]] भारत की सबसे विशाल मस्जिदों में एक है। [[बड़वानी]] का [[बावनगजा]], [[दमोह]] का [[कुंडलपुर]], [[दतिया]] का सोनागिरी, [[अशोकनगर]] का [[निसईजी मल्हारगढ़]], [[बैतूल]] की मुक्तागिरी जैन धर्मालंबियोंं हेतु प्रसिद्ध है। [[विदिशा]] नगरी दशवें तीर्थेंकर भगवान [[शीतलनाथ]] की गर्भ जन्म व तप कल्याणक की भूमि है। [[बुंदेलखंड]] में [[दिगंबर]] जैन एवं [[मालवा]] में [[श्वेतांबर]] जैन बहूलता से पाये जाते हैं। [[बुंदेलखंड]] में [[दिगंबर]] जैन समुदाय का एक पंथ और स्थापित हुआ जो [[तारण पंथ]] कहलाता है। वही साँची में स्थित [[साँची का स्तूप]], बौद्ध के लिए केंद्र हैं। मैहर जो कि सतना जिले के अंतर्गत आता है माँ शारदा जो बुद्धि एवं विद्या की दायिनी है त्रिकूट पर्वत पर माँ का भव्य मंदिर है जो भारत के ५२ शक्तिपीठ में से एक है। दतिया में स्थित माँ पीतांबरा का मंदिर विश्व में अपनी अलग पहचान रखता है ऐसी मंदिर में माँ धूमावती की भी स्थापना है। नर्मदापुरम का सेठानी घाट, देवास जिले नेमावर में सिद्धनाथ महादेव, हरदा जिले के हंडिया में कुबेर के द्वारा पूजित रिद्धनाथ महादेव आदि नर्मदा के तट पर विशेष स्थान है इसके साथ ही माँ नर्मदा का उद्गम स्थल अमरकंटक बहुत ही प्रसिद्द स्थान है। रीवा जिले के देउर कोठार में लगभग 2 हजार वर्ष पुराने बौद्ध स्तूप और लगभग 5 हजार वर्ष प्राचीन शैलचित्रों की श्रृंखला मौजूद है। यह वर्ष 1982 में प्रकाश में आए थे। ये स्तूप सम्राट अशोक के शासनकाल में ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी के निर्मित हैं। देउर कोठार नामक स्थान, रीवा-इलाहाबाद मार्ग एनएच-27 पर सोहागी पहाड़ से पहले कटरा कस्बे के समीप स्थित है। यहां मौर्य कालीन मिट्टी ईट के बने 3 बड़े स्तूप और लगभग 46 पत्थरों के छोटे स्तूप बने है। अशोक युग के दौरान विंध्य क्षेत्र में बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार हुआ और भगवान बौद्ध के अवशेषों को वितरित कर स्तूपों का निर्माण किया गया। देउर कोठार के बौद्ध स्तूपों का समूह सबसे बड़ा बौद्ध स्तूप समूह है जिसमें पहला बौद्ध स्तूप ईंटों द्वारा बनाया गया था। एक मौर्यकालीन स्तंभ भी है जिसमें एक शिलालेख भी है जिसकी शुरुआत भगवतोष से होती है। यहाँ पर खुदाई के दौरान मौर्य कालीन ब्राही लेख के अभिलेख, शिलापट्ट स्तंभ और पात्रखंड भी प्राप्त हुए हैं।
===भाषा===
राज्य की आधिकारिक भाषा [[हिंदी]] है। इसके अलावा कई इलाको में [[संस्कृत]]<ref>{{cite web|url=https://www.patrika.com/bhopal-news/sanskrit-helped-in-the-development-of-a-village-6087/|title=यहां संस्कृत में बात करता है पूरा गांव|access-date=6 अक्तूबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191006062122/https://m.patrika.com/amp-news/bhopal-news/sanskrit-helped-in-the-development-of-a-village-6087/|archive-date=6 अक्तूबर 2019|url-status=dead}}</ref>, [[उर्दू]] और [[मराठी]] भाषियों की अच्छी खासी आबादी हैं। क्योंकी ये क्षेत्र कभी [[मराठा]] राज्य के अंतर्गत आते थे, बल्कि प्रदेश में महाराष्ट्र के बाहर [[मराठी लोग|मराठी लोगों]] की सबसे ज्यादा आबादी हैं। यहाँ कई क्षेत्रीय बोलियाँ भी बोली जाती हैं, जोकि कुछ लोगों के अनुसार हिंदी से ही निकल कर बनी हुई हैं जबकि कुछ के अनुसार ये अलग या अन्य भाषा से संबंधित हैं। इन बोलियों के अलावा मालवा में [[मालवी]], निमाड़ में [[निमाड़ी (बोली)|निमाड़ी]], बुंदेलखंड में [[बुंदेली]], और बघेलखंड और दक्षिण पूर्व में [[बघेली]] (रीवा) बोली जाती हैं। इन में से हर एक बोली एक दूसरे से बहुत अलग है।
यहाँ की अन्य भाषाओं में [[तेलुगू]], भिलोड़ी ([[भीली भाषा|भीली]]), [[गोंडी]], [[कोरकू]], कळतो (नहली), और निहाली (नाहली) आदि शामिल हैं, जोकि आदिवासी समूहों द्वारा बोली जाती हैं।
==शिक्षा==
[[चित्र:Indian Institute of Tourism and Travel Management (IITTM), Gwalior - panoramio - Gyanendrasinghchauha….jpg|right|200px|thumb|भारतीय पर्यटन और यात्रा प्रबंधन संस्थान (IITTM), ग्वालियर]]
2011 की जनगणना के अनुसार, मध्य प्रदेश की साक्षरता दर 70.60% थी, जिसमे पुरुष साक्षरता 80.5% और महिला साक्षरता 60.0% थी। वर्ष 2017 के आँकड़ों के मुताबिक, राज्य में 114,418 प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय, 3,851 उच्च विद्यालय और 4,765 उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हैं।<ref>{{Cite web|url=http://www.educationportal.mp.gov.in/Public/Schools/ssrs/State_School_Block.aspx?MP=1|title=Block Wise - Schools of Madhya Pradesh|website=www.educationportal.mp.gov.in|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190223213246/http://www.educationportal.mp.gov.in/Public/Schools/ssrs/State_School_Block.aspx?MP=1|archive-date=23 फ़रवरी 2019|url-status=dead}}</ref> राज्य में 400 इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर कॉलेजों, 250 प्रबंधन संस्थानों और 12 मेडिकल कॉलेज हैं।
राज्य में भारत के कई प्रमुख शैक्षिक और अनुसंधान संस्थान है जिनमे [[भारतीय प्रबंध संस्थान इंदौर|भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM)]] इंदौर, [[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर|भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(IIT)]] इंदौर, [[अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान]] ''(AIIMS)'' भोपाल, [[भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान]] (IISER) भोपाल, [[भारतीय पर्यटन और यात्रा प्रबंधन संस्थान|भारतीय पर्यटन और यात्रा प्रबंधन संस्थान (IITTM)]] ग्वालियर, आईआईएफएम भोपाल, नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी भोपाल शामिल हैं राज्य में एक पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय (नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर) भी हैं जिसके तीन संस्थान जबलपुर, महू और रीवा में है। प्रदेश की पहली निजी विश्वविद्यालय "जेपी अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गुना" एनएच-3 पर खूबसूरत कैंपस के साथ बना हुआ हैं। जोकि एनआईआरएफ (NIRF) के शीर्ष 100 में 86 वें स्थान पर है।
[[चित्र:PACL Campus, IIT Indore.jpg||left|200px|thumb|भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), इंदौर]]
यहाँ 500 डिग्री कॉलेज हैं, जोकि राज्य के ही विश्वविद्यालयों से सम्बंधित हैं। जिनमें निम्न शामिल है;
* [[जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय]] ([[जबलपुर]])
* [[मध्यप्रदेश पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय]] ([[भोपाल]])
* मध्यप्रदेश चिकित्सा विश्वविद्यालय (भोपाल)
* [[मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय]] (भोपाल)
* [[राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय|राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय]] (भोपाल)
* [[अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय]] ([[रीवा]])
* [[बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय]] (भोपाल)
* [[देवी अहिल्या विश्वविद्यालय]] ([[इन्दौर|इंदौर]])
* [[रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय]] (जबलपुर)
* [[विक्रम विश्वविद्यालय]] (उज्जैन)
* [[जीवाजी विश्वविद्यालय]] (ग्वालियर)
* [[डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय]] (सागर विश्वविद्यालय)
* [[इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय|इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय]](अमरकंटक, अनूपपुर)
* [[माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय|माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय विश्वविद्यालय]] (भोपाल)
वर्ष 1970 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्री-मेडिकल टेस्ट बोर्ड के लिये व्यावसायिक परीक्षा मंडल गठन किया गया। कुछ वर्ष के बाद 1981 में, प्री-इंजीनियरिंग बोर्ड का गठन किया गया था। फिर उसके बाद, वर्ष 1982 में इन बोर्डों दोनों को समामेलित कर मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (M.P.P.E.B.) जिसे व्यापम के रूप में भी जाना जाता है का गठन किया गया।<ref>{{Cite web|url=http://www.vyapam.nic.in|title=मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल, भोपाल|website=www.vyapam.nic.in|accessdate=2016-05-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20170303021641/http://www.vyapam.nic.in/|archive-date=3 मार्च 2017|url-status=dead}}</ref>
==संस्कृति==
मध्य प्रदेश के 3 स्थलों को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है, जिनमे [[खजुराहो]] (1986), [[साँची का स्तूप|साँची बौद्ध स्मारक]] (1989), और [[भीमबेटका पाषाण आश्रय|भीमबेटका की रॉक शेल्टर]] (2003) शामिल हैं। हाल ही में [[ओरछा]] को यूनेस्को द्वारा उसकी अस्थायी सूची में सम्मलित किया गया है।<ref>{{cite news |title=Madhya Pradesh's Orchha makes it to tentative list of UNESCO World Heritage sites |url=https://www.indiatoday.in/india/story/mp-s-orchha-makes-it-to-tentative-list-of-unesco-world-heritage-sites-1535198-2019-05-26 |accessdate=4 जुलाई 2019 |publisher=इंडिया टूडे |date=२०१९ |archive-url=https://web.archive.org/web/20190704050554/https://www.indiatoday.in/india/story/mp-s-orchha-makes-it-to-tentative-list-of-unesco-world-heritage-sites-1535198-2019-05-26 |archive-date=4 जुलाई 2019 |url-status=live }}</ref> अन्य वास्तुशिल्पीय दृष्टि से या प्राकृतिक स्थलों में [[अजयगढ़]], [[अमरकंटक]], [[असीरगढ़]], [[बांधवगढ़|बाँधवगढ़]], [[बावनगजा]], [[भोपाल]], [[विदिशा]], [[चंदेरी]], [[चित्रकूट]], [[धार]], [[ग्वालियर]], [[इंदौर]], [[जबलपुर]], [[बुरहानपुर]], [[महेश्वर]], [[मंडलेश्वर]], [[मांडू]], [[ओंकारेश्वर]], [[ओरछा]], [[पचमढ़ी]], [[शिवपुरी]], [[सोनागिरि]], [[मंडला]] और [[उज्जैन]] शामिल हैं।
मध्य प्रदेश में अपनी शास्त्रीय और लोक संगीत के लिए विख्यात है। विख्यात हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत घरानों में मध्य प्रदेश के मैहर घराने, ग्वालियर घराने और सेनिया घराने शामिल हैं। मध्यकालीन भारत के सबसे विख्यात दो गायक, [[तानसेन]] और [[बैजू बावरा]], वर्तमान मध्य प्रदेश के [[ग्वालियर]] के पास पैदा हुए थे। प्रशिद्ध ध्रुपद कलाकार अमीनुद्दीन डागर (इंदौर), गुंदेचा ब्रदर्स (उज्जैन) और उदय भवालकर (उज्जैन) भी वर्तमान के मध्य प्रदेश में पैदा हुए थे। माँ विंध्यवासिनी मंदिर अति प्राचीन मंदिर है। यह अशोक नगर जिले से दक्षिण दिशा की ओर [[तूमैन]] (तुम्वन) मे स्थित हैं। यहाँ खुदाई में प्राचीन मूर्तियाँ निकलती रहती है यह राजा मोरध्वज की नगरी के नाम से जानी जाती है यहाँ कई प्राचीन दार्शनिक स्थलो में बलराम मंदिर, हजारमुखी महादेव मंदिर, त्रिवेणी संगम,वोद्ध प्रतिमाएँ, लाखावंजारा वाखर गुफाएँ आदि कई स्थल है<ref name="SimonMark2000">{{cite book | author1=साइमन ब्रौटन | author2=मार्क एलिंगहम | author3=रिचर्ड ट्रिलो | title=विश्व संगीत: लैटिन और उत्तरी अमेरिका, कैरीबियाई, भारत, एशिया और प्रशांत | url=https://books.google.com/books?id=QzX8THIgRjUC&pg=PA91 | accessdate=13 सितम्बर 2012 | year=2000 | publisher=असहज गाइड | isbn=978-1-85828-636-5 | pages=91– | archive-url=https://web.archive.org/web/20130606122902/http://books.google.com/books?id=QzX8THIgRjUC&pg=PA91 | archive-date=6 जून 2013 | url-status=live }}</ref> पार्श्व गायक [[किशोर कुमार]] (खंडवा) और [[लता मंगेशकर]] (इंदौर) का जन्मस्थान भी मध्य प्रदेश में स्थित हैं। स्थानीय लोक गायन की शैलियों में फाग, भर्तहरि, संजा गीत, भोपा, कालबेलिया, भट्ट/भांड/चरन, वसदेवा, विदेसिया, कलगी तुर्रा, निर्गुनिया, आल्हा, [[पंडवानी]] गायन और गरबा गरबि गोवालं शामिल हैं।
==अर्थव्यवस्था==
मध्य प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वर्ष 2014-15 के लिए 84.27 बिलियन डॉलर था।<ref>{{Cite web|url=https://www.ibef.org/states/madhya-pradesh-presentation|title=GSDP of Madhya Pradesh, Industrial development in MP, MPSIDC|website=www.ibef.org|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20170228082037/http://www.ibef.org/states/madhya-pradesh-presentation|archive-date=28 फ़रवरी 2017|url-status=dead}}</ref> प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2013-14 में $871,45 था, और देश के अंतिम से छठे स्थान पर हैं।<ref>{{cite web|url = http://planningcommission.nic.in/data/datatable/data_2312/DatabookDec2014%20160.pdf|title = वर्तमान मूल्य पर प्रति व्यक्ति नेट स्टेट घरेलू उत्पाद|date = |accessdate = |website = |publisher = |last = |first = |archive-url = https://web.archive.org/web/20141225101510/http://planningcommission.nic.in/data/datatable/data_2312/DatabookDec2014%20160.pdf|archive-date = 25 दिसंबर 2014|url-status = dead}}</ref> 1999 और 2008 के बीच राज्य की सालाना वृद्धि दर बहुत कम (3.5%) थी।<ref name="lakshmi">{{Cite web|url=https://www.economist.com/special-report/2008/12/11/ruled-by-lakshmi|title=Ruled by Lakshmi|date=11 दिस॰ 2008|accessdate=1 मार्च 2019|via=The Economist|archive-url=https://web.archive.org/web/20190302024745/https://www.economist.com/special-report/2008/12/11/ruled-by-lakshmi|archive-date=2 मार्च 2019|url-status=live}}</ref> इसके बाद राज्य के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर में काफी सुधार हुआ है, और 2010-11 और 2011-12 के दौरान 8% एवं 12% क्रमशः बढ़ गया।<ref name="TOI_2012_GDP_12pc">{{cite news | url = http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-06-29/india/32471751_1_growth-rate-agriculture-growth-negative-growth | title = मध्य प्रदेश के जीडीपी में 12 फीसदी की वृध्दि (अंग्रेजी में) | author = लेमुएल लॉल | newspaper = द टाइम्स ऑफ इंडिया | date = 29 जून 2012 | accessdate = 10 सितम्बर 2012 | archive-url = https://web.archive.org/web/20130502174841/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-06-29/india/32471751_1_growth-rate-agriculture-growth-negative-growth | archive-date = 2 मई 2013 | url-status = live }}</ref>
राज्य में कृषिप्रधान अर्थव्यवस्था है। मध्य प्रदेश की प्रमुख फसलों में गेहूँ, सोयाबीन, चना, गन्ना, चावल, मक्का, कपास, राईं, सरसों और अरहर शामिल हैं। प्रदेश में इंदौर, सोयबीन की मंडी के लिए और सीहोर गेहूँ की मंडी के लिए देश भर का केंद्र हैं। लघु वनोपज (एमएफपी) जैसे की तेंदू, जिसके पत्ते का बीड़ी बनाने में इस्तेमाल किया जाता हैं, साल बीज, सागौन बीज, और लाख आदि भी राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए योगदान देते हैं।
मध्य प्रदेश में 5 [[विशेष आर्थिक क्षेत्र]] (सेज) है: जिनमे 3 आईटी/आईटीईएस (इंदौर, ग्वालियर), 1 खनिज आधारित (जबलपुर) और 1 कृषि आधारित (जबलपुर) शामिल हैं। अक्टूबर 2011 में, 14 सेज प्रस्तावित किया गए, जिनमे से 10 आईटी/ आईटीईएस आधारित थे। [[इंदौर]], राज्य का प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र है। इसके राज्य के केंद्र में स्थित होने के कारण, यहाँ कई उपभोक्ता वस्तु कंपनियों ने अपनी विनिर्माण केंद्रों की स्थापना की है।.<ref name="IBEF_2011">{{Cite web|url=http://www.ibef.org/download/Madhya_Pradesh_271211.pdf|title=मध्य प्रदेश: भारत ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20180927114553/https://www.ibef.org/download/Madhya_Pradesh_271211.pdf|archive-date=27 सितंबर 2018|url-status=dead}}</ref>
राज्य में भारत का हीरे और तांबे का सबसे बड़ा भंडार है। अन्य प्रमुख खनिज भंडार में कोयला, कालबेड मीथेन, मैंगनीज और डोलोमाइट शामिल हैं।
मध्य प्रदेश में 6 [[भारतीय आयुध निर्माणी|आयुध कारखाने]], जिनमें से 4 जबलपुर (वाहन निर्माणी, ग्रे आयरन फाउंड्री, गन कैरिज फैक्टरी, आयुध निर्माणी खमरिया) में स्थित है, बाकि एक-एक कटनी और इटारसी में हैं। ये कारखाने आयुध कारखाना बोर्ड द्वारा चलाए जाते हैं जिनमे [[भारतीय सशस्त्र सेनाएँ|भारतीय सशस्त्र बलों]] के लिए उत्पादों का निर्माण किया जाता हैं।
मध्य प्रदेश, महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 में उत्कृष्ट कार्य के लिए 10वें राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीत चुका हैं। राज्य में पर्यटन उद्योग भी जोर-शोर से बढ़ रहा है, वन्यजीव पर्यटन और कई संख्या में ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के स्थानों की उपस्थिति इनका मुख्य कारण हैं। [[साँची नगर|साँची]] और [[खजुराहो]] में विदेशी पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। प्रमुख शहरों के अलावा अन्य लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में [[भेड़ाघाट]], [[भीमबेटका]], [[भोजपुर]], [[महेश्वर]], [[मांडू]], [[ओरछा]], [[पचमढ़ी]], [[कान्हा राष्ट्रीय उद्यान|कान्हा]] और [[उज्जैन]] शामिल हैं।
===अवसंरचना===
===ऊर्जा===
राज्य की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 13880 मेगावॉट (31 मार्च 2015) है। सभी राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश बिजली उत्पादन में सबसे ज्यादा वार्षिक वृद्धि (46.18%) दर्ज की हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा भारत के सबसे बड़े सौर ऊर्जा संयंत्र योजना बनाई गई हैं। संयंत्र की बिजली उत्पादन की क्षमता 750 मेगावाट होगी, तथा इसे लगाने हेतु 4,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी। <ref>{{Cite web|url=https://www.thehindu.com/news/national/indias-largest-solar-power-plant-planned-in-rewa-district-madhya-pradesh/article6267409.ece|title=India’s largest solar power plant planned in Madhya Pradesh|date=31 जुल॰ 2014|accessdate=1 मार्च 2019|via=www.thehindu.com}}</ref> मध्य प्रदेश के रीवा जिले के गूढ तहसील में 1,590 हेक्टेयर के क्षेत्र में एक रीवा अल्ट्रा मेगा सौर पार्क प्रस्तावित है।
[[File:Mehta in night.png|मेहता गांव का सुंदर रात्रि दृश्य|thumb]]
===परिवहन===
मध्य प्रदेश में बस और ट्रेन सेवाएँ चारो तरफ फैली हुई हैं। प्रदेश की 99,043 किमी लंबी सड़क नेटवर्क में 20 [[राष्ट्रीय राजमार्ग]] भी शामिल है। प्रदेश में 4948 किलोमीटर लंबी रेल नेटवर्क का जाल फैला हुआ हैं, [[जबलपुर]] को भारतीय रेलवे के [[पश्चिम मध्य रेलवे]] का मुख्यालय बनाया गया है। [[मध्य रेलवे]] और [[पश्चिम रेलवे]] व दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे भी राज्य के कुछ हिस्सों को कवर करते हैं। पश्चिमी मध्य प्रदेश के अधिकांश क्षेत्र पश्चिम रेलवे के रतलाम रेल मंडल के अंर्तगत आते है, जिनमे इंदौर, उज्जैन, मंदसौर, खंडवा, नीमच, सीहोर और बैरागढ़ भोपाल आदि शहर शामिल हैं। राज्य में 20 प्रमुख रेलवे जंक्शन है। प्रमुख अंतर-राज्यीय बस टर्मिनल भोपाल, इंदौर, ग्वालियर जबलपुर और रीवा में स्थित हैं। प्रतिदिन 2000 से भी अधिक बसों का संचालन इन पाँच शहरो से होता हैं। शहर के अंदर की आवागमन हेतु, ज्यादातर बसों, निजी ऑटो रिक्शा और टैक्सियों का उपयोग होता है।
देश के बीचो-बीच होने के कारण राज्य के पास कोई समुद्र तट नहीं है। अधिकांश समुद्री व्यापार, पड़ोसी राज्यों में [[कांडला]] और [[जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह]] (न्हावा शेवा) के माध्यम से होता है जोकि सड़क और रेल नेटवर्क के माध्यम से प्रदेश से अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं।
===संचार माध्यम===
==सरकार और राजनीति==
{{see also|मध्य प्रदेश के मुख्यमन्त्रियों की सूची|मध्य प्रदेश के राज्यपालों की सूची}}
मध्य प्रदेश में विधान सभा की 230 सीट है। राज्य से भारत की संसद को 40 सदस्य भेजे जाते है: जिनमे 29 [[लोकसभा]] (निचले सदन) और 11 [[राज्यसभा]] के लिए (उच्च सदन) के लिए चुने जाते हैं। राज्य के संवैधानिक प्रमुख [[राज्यपाल]] होता हैं, जोकि [[भारत के राष्ट्रपति]] द्वारा केंद्र सरकार की अनुशंसा पर नियुक्त किया जाता है। राज्य का कार्यकारी प्रमुख [[मुख्यमंत्री]] होता हैं, जोकि विधानसभा के निर्वाचित सदस्यो में बहुमत के आधार पर चुना नेता होता हैं। वर्तमान में, राज्य के राज्यपाल [[मंगूभाई छगनभाई पटेल]] तथा मुख्यमंत्री, [[भारतीय जनता पार्टी]] के [[मोहन यादव|डॉ. मोहन यादव]] है। राज्य की प्रमुख राजनीतिक दलों में [[भारतीय जनता पार्टी|भाजपा]] और [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] हैं। कई पड़ोसी राज्यों के विपरीत, यहाँ छोटे या क्षेत्रीय दलों को विधानसभा चुनावों में ज्यादा सफलता नहीं मिली है। दिसंबर 2018 में राज्य के चुनावों में कांग्रेस ने 114 सीटों में जीत हासिल कर अन्य पार्टीयो की सहायता से 121 सीटों का पूर्ण बहुमत साबित किया, बीजेपी 109 सीटों पर जीत हासिल कर विपक्ष पर जा बैठी। 2 सीटों के साथ [[बहुजन समाज पार्टी]], राज्य में तीसरे स्थान पर हैं समाजवादी पार्टी ने 1 सीट पर जीत हासिल की वही 4 सीटें निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीतीं।
===पुलिस प्रशासन===
वर्ष 1976 में SBIEO विशेष जाँच सेल अपराध जाँच विभाग (सीआईडी) के अंतर्गत एक शाखा के रूप में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा राज्य अपराध अन्वेषण ब्यूरो गठित किया गया था। वर्ष 1989 में इसका नाम बदल कर राज्य आर्थिक अपराध ब्यूरो रखा गया था, जो गृह विभाग के नियंत्रण में कार्य करता था किंतु 1990 में राज्य आर्थिक अपराध ब्यूरो को सामान्य प्रशासन विभाग के अंतर्गत लाया गया। 22 जून 2013 को राज्य आर्थिक अपराध ब्यूरो नाम बदल कर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ रखा गया।
==खेल==
वर्ष 2013 में राज्य सरकार ने मलखम्ब को राज्य के खेल के रूप में घोषित किया गया। [[क्रिकेट]], [[हॉकी]], [[फुटबॉल]], [[बास्केटबॉल]], [[वॉलीबॉल]], साइकिल चलाना, [[तैराकी]], [[बैडमिंटन]] और [[टेबल टेनिस]] राज्य में लोकप्रिय खेल हैं। [[खो-खो]], [[गिल्ली-डंडा]], सितोलिया(पिट्ठू), कंचे और लंगड़ी जैसे पारंपरिक खेल ग्रामीण क्षेत्रों में काफी लोकप्रिय हैं। [[स्नूकर]], जिसका आविष्कार ब्रिटिश सेना के अधिकारियों द्वारा जबलपुर में किया हुआ माना जाता है, कई अंग्रेजी बोलने वाले और राष्ट्रमंडल देशों में लोकप्रिय है।
क्रिकेट मध्य प्रदेश में सबसे लोकप्रिय खेल है। यहाँ राज्य में तीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम [[नेहरू स्टेडियम (इंदौर)]], [[रूपसिंह स्टेडियम (ग्वालियर)]] और [[होलकर स्टेडियम|होल्कर क्रिकेट स्टेडियम]] (इंदौर) हैं। [[मध्य प्रदेश क्रिकेट टीम]] का रणजी ट्राफी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1998-99 में किया गया था, जब चंद्रकांत पंडित के नेतृत्व वाली टीम उपविजेता के रूप में रही। इसके पूर्ववर्ती, इंदौर के होल्कर क्रिकेट टीम, रणजी ट्राफी में चार बार जीत हासिल कर चुकी हैं।
भोपाल का ऐशबाग स्टेडियम विश्व हॉकी सीरीज की टीम भोपाल बादशाह का घरेलू मैदान है। राज्य में एक फुटबॉल टीम भी है जोकि संतोष ट्राफी में भाग लेता रहता है।
== इन्हें भी देखें ==
* [[टीन का पुरा]]
* [[मध्य प्रदेश के लोकसभा सदस्य]]
* [[मध्य प्रदेश का पर्यटन]]
* [[मध्य प्रदेश के शहरों की सूची]]
* [[मध्य प्रदेश के ज़िले|मध्य प्रदेश के जिले]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20100821212127/http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/st_mp01.htm मध्यप्रदेश]
* [https://web.archive.org/web/20101130131020/http://bharat.gov.in/citizen/tourism_madhyapradesh.php मध्यप्रदेश परिचय]
* [https://web.archive.org/web/20100202013257/http://www.mpinfo.org/mpinfonew/indexhindi.aspx मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग]
* [https://web.archive.org/web/20100923031238/http://www.mpinfo.org/mpinfonew/hindi/factfile/hsindexpage.asp मध्यप्रदेश का इतिहास]
[https://cgcollegeinfo.in/ मध्यप्रदेश का इतिहास]
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| demographics2_info1 = [[हिंदी]]<ref name="langoff">{{cite web |url=http://nclm.nic.in/shared/linkimages/NCLM47thReport.pdf |title=Report of the Commissioner for linguistic minorities: 47th report (July 2008 to June 2010) |pages=122–126 |publisher=Commissioner for Linguistic Minorities, Ministry of Minority Affairs, Government of India |access-date=16 February 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120513161847/http://nclm.nic.in/shared/linkimages/NCLM47thReport.pdf |archive-date=13 May 2012 |url-status=dead}}</ref>
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| blank1_name_sec1 = मानव विकास सूचकांक रैंक
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}}
'''मध्य प्रदेश''' ({{langx|en|Madhya Pradesh|italic=no}}) [[भारत]] का एक [[राज्य]] है। इसकी आधिकारिक [[राजधानी]] [[भोपाल]] है। मध्य प्रदेश 1 नवंबर 2000 तक [[क्षेत्रफल]] के आधार पर [[भारत]] का सबसे बड़ा राज्य था। इस दिन मध्यप्रदेश राज्य से 16 जिले अलग कर [[छत्तीसगढ़]] राज्य की स्थापना हुई थी। मध्य प्रदेश की सीमाऐं पाँच राज्यों की सीमाओं से मिलती है। इसके उत्तर में [[उत्तर प्रदेश]], पूर्व में [[छत्तीसगढ़]], दक्षिण में [[महाराष्ट्र]], पश्चिम में [[गुजरात]], तथा उत्तर-पश्चिम में [[राजस्थान]] है।
खनिज संसाधनों से समृद्ध, मध्य प्रदेश [[हीरा|हीरे]] और [[तांबे]] का सबसे बड़ा भंडार है। अपने क्षेत्र की 30% से अधिक वन क्षेत्र के अधीन है। इसके पर्यटन उद्योग में काफी वृद्धि हुई है। राज्य ने वर्ष 2010-11 के लिये राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार जीता था।
मध्यप्रदेश मुख्य रूप से अपने पर्यटन के लिए भी जाना जाता है।<ref name="u384">{{cite web | title=मध्यप्रदेश राज्य केंद्र | website=State NIC Website | url=https://mpstate.nic.in/hi/ | language=hi | access-date=2026-10-18}}</ref> मांडू, धार, महेश्वर मंडलेश्वर, चोली, भीमबैठका, [[पचमढ़ी|पचमढी]], [[खजुराहो]], [[साँची स्तूप]], [[ग्वालियर का क़िला|ग्वालियर का किला]], और उज्जैन रीवा जल प्रपात मध्यप्रदेश के [[पर्यटन]] स्थल के प्रमुख उदाहरण हैं। उज्जैन जिले में प्रत्येक 12 वर्षों में कुंभ ([[सिंहस्थ]]) मेले का पुण्यपर्व विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है। शिवपुरी मध्य प्रदेश की पर्यटन नगरी है
[[मध्य प्रांत और बरार]] को छत्तीसगढ़ और मकराइ रियासतों के साथ मिलकर मध्य प्रदेश का गठन किया गया था। तब इसकी राजधानी [[नागपुर]] में थी। इसके बाद १ नवंबर १९५६ को मध्य भारत, विंध्य प्रदेश तथा भोपाल राज्यों को भी इसमें ही मिला दिया गया, जबकि दक्षिण के मराठी भाषी विदर्भ क्षेत्र को (राजधानी नागपुर समेत) बॉम्बे राज्य में स्थानांतरित कर दिया गया। पहले [[जबलपुर]] को राज्य की राजधानी के रूप में चिन्हित किया जा रहा था,परंतु अंतिम क्षणों में इस निर्णय को पलटकर भोपाल को राज्य की नवीन राजधानी घोषित कर दिया गया। जो कि [[सीहोर जिला|सीहोर जिले]] की एक तहसील हुआ करता था। १ नवंबर २००० को एक बार फिर मध्य प्रदेश का पुनर्गठन हुआ, और [[छत्तीसगढ़]] मध्य प्रदेश से अलग होकर भारत का [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|२६वाँ राज्य]] बन गया मध्य प्रदेश में सबसे जायदा वन ओर जंगल पाए जाते है मध्य प्रदेश मे हाईकोर्ट जबलपुर में है।
== विवरण ==
भारत की संस्कृति में मध्यप्रदेश जगमगाते [[दीपक]] के समान है, जिसकी रोशनी की सर्वथा अलग प्रभा और प्रभाव है। यह विभिन्न संस्कृतियों की अनेकता में एकता का जैसे आकर्षक गुलदस्ता है, मध्यप्रदेश, जिसे प्रकृति ने राष्ट्र की वेदी पर जैसे अपने हाथों से सजाकर रख दिया है, जिसका सतरंगी सौन्दर्य और मनमोहक सुगन्ध चारों ओर फैल रही है। यहाँ के जनपदों की आबोहवा में कला, साहित्य और संस्कृति की मधुमयी सुवास तैरती रहती है। यहाँ के लोक समूहों और जनजाति समूहों में प्रतिदिन नृत्य, संगीत, गीत की रसधारा सहज रूप से फूटती रहती है। यहाँ का हर दिन पर्व की तरह आता है और जीवन में आनंद रस घोलकर स्मृति के रूप में चला जाता है। इस प्रदेश के तुंग-उतुंग शैल शिखर विंध्य-सतपुड़ा, मैकाल-कैमूर की उपत्यिकाओं के अंतर से गूँजते अनेक पौराणिक आख्यान और [[नर्मदा]], [[सोन]], [[सिन्ध नदी (मध्य प्रदेश)|सिंध]], [[चंबल]], [[बेतवा]], [[केन]], [[धसान]], [[तवा नदी|तवा]], [[ताप्ती]], [[क्षिप्रा नदी|क्षिप्रा]], [[काली सिंध]] आदि सर-सरिताओं के उद्गम और मिलन की मिथकथाओं से फूटती सहस्त्र धाराएँ यहाँ के जीवन को आप्लावित ही नहीं करतीं, बल्कि परितृप्त भी करती हैं।
== संस्कृति ==
[[File:Distrikte von Madhya Pradesh 2021-hi.svg|right|thumb|400px|मध्य प्रदेश के ज़िले]]
मध्यप्रदेश में छह लोक संस्कृतियों का समावेशी संसार है। ये छह सांस्कृतिक क्षेत्र है–
# निमाड़
# मालवा
# बुंदेलखंड
# बघेलखंड
# महाकौशल
# ग्वालियर (चंबल)
# रीवा
प्रत्येक सांस्कृतिक क्षेत्र या भू-भाग का एक अलग जीवंत लोकजीवन, साहित्य, संस्कृति, इतिहास, कला, बोली और परिवेश है। मध्यप्रदेश लोक-संस्कृति के मर्मज्ञ विद्वान श्री वसन्त निरगुणे लिखते हैं- "संस्कृति किसी एक अकेले का दाय नहीं होती, उसमें पूरे समूह का सक्रिय सामूहिक दायित्व होता है। सांस्कृतिक अंचल (या क्षेत्र) की इयत्ता इसी भाव भूमि पर खड़ी होती है। जीवन शैली, कला, साहित्य और वाचिक परंपरा मिलकर किसी अंचल की सांस्कृतिक पहचान बनाती है।"
मध्यप्रदेश की संस्कृति विविधवर्णी है। गुजरात, महाराष्ट्र अथवा उड़ीसा की तरह इस प्रदेश को किसी भाषाई संस्कृति में नहीं पहचाना जाता। मध्यप्रदेश विभिन्न लोक और जनजातीय संस्कृतियों का समागम है। यहाँ कोई एक लोक संस्कृति नहीं है। यहाँ एक तरफ़ पाँच लोक संस्कृतियों का समावेशी संसार है, तो दूसरी ओर अनेक जनजातियों की आदिम संस्कृति का विस्तृत फलक पसरा है।
निष्कर्षत: मध्यप्रदेश छह सांस्कृतिक क्षेत्र [[निमाड़]], [[मालवा]], [[बुंदेलखंड]], [[बघेलखंड]], [[महाकौशल]] और [[ग्वालियर]] हैं। धार-झाबुआ, मंडला-बालाघाट, छिंदवाड़ा, नर्मदापुरम, खंडवा-[[बुरहानपुर]], बैतूल, रीवा-सीधी, शहडोल आदि जनजातीय क्षेत्रों में विभक्त है।
=== निमाड़ ===
{{main|निमाड़}}
निमाड़ मध्यप्रदेश के पश्चिमी अंचल में स्थित है। अगर इसके भौगोलिक सीमाओं पर एक दृष्टि डालें तो यह पता चला है कि निमाड़ के एक ओर [[विंध्य पर्वत|विंध्य]] की उतुंग शैल श्रृंखला और दूसरी तरफ़ सतपुड़ा की सात उपत्यिकाएँ हैं, जबकि मध्य में है [[नर्मदा]] की अजस्त्र जलधारा। पौराणिक काल में निमाड़ अनूप जनपद कहलाता था। बाद में इसे [[निमाड़]] की संज्ञा दी गयी। फिर इसे पूर्वी और पश्चिमी निमाड़ के रूप में जाना जाने लगा।
=== मालवा ===
{{main|मालवा}}
मालवा महाकवि [[कालिदास]] की धरती है। यहाँ की धरती हरी-भरी, धन-धान्य से भरपूर रही है। यहाँ के लोगों ने कभी भी अकाल को नहीं देखा। विंध्याचल के पठार पर प्रसरित मालवा की भूमि सस्य, श्यामल, सुंदर और उर्वर तो है ही, यहाँ की धरती पश्चिम भारत की सबसे अधिक स्वर्णमयी और गौरवमयी भूमि रही है। सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मालवा मे अपने आप को रोक रखा था।
मालवा भारत का सबसे बड़ा प्रांत रहा है जहां उज्जैन और शाजापुर एतिहासिक शहर व पुरातात क शहर हैं।
=== बुंदेलखंड ===
{{main|बुंदेलखंड}}
एक प्रचलित अवधारणा के अनुसार "वह क्षेत्र जो उत्तर में [[यमुना]], दक्षिण में विंध्य प्लेटों की श्रेणियों, उत्तर-पश्चिम में चंबल और दक्षिण पूर्व में पन्ना, अजमगढ़ श्रेणियों से घिरा हुआ है, [[बुंदेलखंड]] के नाम से जाना जाता है। इसमें [[उत्तर प्रदेश]] के पाँच जिले- [[जालौन जिला|जालौन]], [[झाँसी जिला|झाँसी]], [[ललितपुर जिला|ललितपुर]], [[हमीरपुर जिला, उत्तर प्रदेश|हमीरपुर]] और [[बांदा जिला, उत्तर प्रदेश|बाँदा]] तथा [[मध्यप्रेदश]] के पाँच जिले- [[सागर जिला|सागर]], [[दतिया जिला|दतिया]], [[टीकमगढ़ जिला|टीकमगढ़]], [[छतरपुर जिला|छतरपुर]] और [[पन्ना जिला|पन्ना]] के अलावा उत्तर-पश्चिम में चंबल नदी तक प्रसरित विस्तृत प्रदेश का नाम था।" [[कनिंघम]] ने "[[बुंदेलखंड]] के अधिकतम विस्तार के समय गंगा और [[यमुना]] का समस्त दक्षिणी प्रदेश (जो पश्चिम में [[बेतवा]] नदी से संलग्न है) पूर्व में [[चंदेरी]], [[सागर]] के [[अशोक नगर]] जिलों सहित [[तुमैन]] का विंध्यवासिनी देवी के मंदिर तक तथा दक्षिण में नर्मदा नदी के मुहाने के निकट बिल्हारी तक प्रसरित था", माना है।साथ ही विदिशा, गुना, अशोकनगर, दमोह ,नरसिंहपुर, निवाड़ी ,रायसेन, तथा जबलपुर ,कटनी जिले में बुंदेलखंड की संस्कृति भाषा की गहरी छाप देखने को मिलती है। बुंदेलखंड की संस्कृति उसकी भौगोलिक सीमाओं को पार कर उसके आस पास वाले जिलों पर देखने को मिलती है। बुंदेली भाषा मध्य प्रदेश के इस भाग में अगल ही पहचान बनाए हुए है । बुंदेली लोक साहित्य, लोक गायन तथा नृत्य क्षेत्र अत्यंत व्यापक है।
=== बघेलखंड ===
{{main|बघेलखंड }}
बघेलखंड की धरती का संबंध अति प्राचीन भारतीय संस्कृति से रहा है। यह भू-भाग रामायणकाल में [[कोसल|कोसल प्रांत]] के अंतर्गत था। [[महाभारत]] के काल में विराटनगर बघेलखंड की भूमि पर था, जो आजकल [[सोहागपुर]] के नाम से जाना जाता है। भगवान राम की वनगमन यात्रा इसी क्षेत्र से हुई थी। यहाँ के लोगों में शिव, शाक्त और वैष्णव संप्रदाय की परंपरा विद्यमान है। यहाँ नाथपंथी योगियो का खासा प्रभाव है। [[कबीर पंथ]] का प्रभाव भी सर्वाधिक है। महात्मा [[कबीरदास]] के अनुयायी धर्मदास बाँधवगढ़ के निवासी थी।
=== महाकोशल ===
[[जबलपुर संभाग]] का संपूर्ण हिस्सा महाकोशल कहलाता है। [[नर्मदा नदी]] किनारे बसा यह क्षेत्र सांस्कृतिक और प्राकृतिक समृद्धता में धनी है। यहाँ भेड़ाघाट जैसा विहंगम जल प्रपात है तो दूसरी ओर परमहंसी में ज्योतिष और द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी का आश्रम है।
=== ग्वालियर ===
[[चित्र:Gwalior-portadelelefant.jpg|right|250px|thumb|ग्वालियर किले का ग्वालियर-गेट नामक द्वार — किले के अंदर से लिया गया चित्र]]
{{main|ग्वालियर}}
मध्यप्रदेश का चंबल क्षेत्र भारत का वह मध्य भाग है, जहाँ भारतीय इतिहास की अनेक महत्वपूर्ण गतिविधियाँ घटित हुई हैं। इस क्षेत्र का सांस्कृतिक-आर्थिक केंद्र ग्वालियर शहर है। सांस्कृतिक रूप से भी यहाँ अनेक संस्कृतियों का आवागमन और संगम हुआ है। राजनीतिक घटनाओं का भी यह क्षेत्र हर समय केन्द्र रहा है। स्वतंत्रता से पहले यहाँ [[सिंधिया]] राजपरिवार का शासन रहा था। १८५७ का पहला स्वतंत्रता संग्राम झाँसी की वीरांगना [[रानी लक्ष्मीबाई]] ने इसी भूमि पर लड़ा था। सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र ग्वालियर अंचल संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, चित्रकला अथवा लोकचित्र कला हो या फिर साहित्य, लोक साहित्य की कोई विधा हो, ग्वालियर अंचल में एक विशिष्ट संस्कृति के साथ नवजीवन पाती रही है। ग्वालियर क्षेत्र की यही सांस्कृतिक हलचल उसकी पहचान और प्रतिष्ठा बनाने में सक्षम रही है।
== भूगोल ==
=== भारत में अवस्थिति ===
जैसा की नाम से ही प्रतीत होता हैं यह भारत के बीचो-बीच, अक्षांश 21°6' उत्तरी अक्षांश से 26°30' उत्तरी अक्षांश देशांतर 74°9' पूर्वी देशांतर से 82°48' पूर्वी देशांतर में स्थित हैं। राज्य, [[नर्मदा नदी]] के चारो और फैला हुआ है, जोकि विंध्य और सतपुड़ा पर्वतमाला के बीच पूर्व से पश्चिम की और बहती हैं, जोकि उत्तर और दक्षिण भारत के बीच पारंपरिक सीमा का काम करती हैं। मध्य प्रदेश की उत्तर से दक्षिण की लम्बाई 605 किलोमीटर तथा पश्चिम से पूर्व लंबाई 870 किलोमीटर है। मानक रेखा सिंगरौली जिले से गुजरती है तथा पश्चिम से पूर्व मध्य प्रदेश में 32 मिनट का समयांतराल है।
राज्य, दक्षिण में [[महाराष्ट्र]] से, पश्चिम में [[गुजरात]] से घिरा हुआ है, जबकि इसके उत्तर-पश्चिम में [[राजस्थान]], पूर्वोत्तर पर [[उत्तर प्रदेश]] और पूर्व में [[छत्तीसगढ़]] स्थित हैं।
मध्य प्रदेश में सबसे ऊँची चोटी, धूपगढ़ (पचमढ़ी) की है जिसकी ऊँचाई 1,350 मीटर (4,429 फुट) हैं।<ref>{{cite book
| title = मध्य प्रदेश, में घुमने और शिकार के लिए
| publisher = सूचना और प्रचार निदेशालय, मध्य प्रदेश
| year = 1964
| oclc = 8112689
}}</ref>
{{Geographic location
|Centre = मध्य प्रदेश
|North = [[राजस्थान]] - [[उत्तर प्रदेश]]
|Northeast = [[उत्तर प्रदेश]]
|East = [[छत्तीसगढ़]]
|Southeast = [[छत्तीसगढ़]]
|South = [[महाराष्ट्र]]
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|Northwest = [[राजस्थान]]
}}
=== जलवायु===
मध्य प्रदेश में उष्णकटिबंधीय जलवायु है। अधिकांश उत्तर भारत की तरह, यहाँ ग्रीष्म ऋतू (अप्रैल-जून), के बाद [[मानसून]] की वर्षा (जुलाई-सितंबर) और फिर अपेक्षाकृत शुष्क शरदऋतु आती है। यहाँ औसत वर्षा 1371 मिमी (54.0 इंच) होती है। इसके दक्षिण-पूर्वी जिलों में भारी वर्षा होती है, कुछ स्थानों में तो 2,150 मिमी (84.6 इंच) तक बारिश होती हैं, पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी जिलों में 1,000 मिमी (39.4 इंच) या कम बारिश होती हैं।
===पर्यावरण===
2011 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में दर्ज वनक्षेत्र 94,689 वर्ग किमी(36,560 वर्ग मील) हैं जोकि राज्य के कुल क्षेत्र का 30.72% हैं, और भारत में स्थित कुल वनक्षेत्र का 12.30% है। मध्य प्रदेश सरकार ने इन क्षेत्र को "आरक्षित वन" (65.3%), "संरक्षित वन" (32.84%) और "उपलब्ध वन" (0.18%) में वर्गीकृत किया गया है। वन राज्य के उत्तरी और पश्चिमी भागों में कम घना है, जहाँ राज्य के प्रमुख शहर हैं,
राज्य में पाये जाने वाले मिट्टी के प्रमुख प्रकार हैं:
** [[काली मिट्टी]], सबसे मुख्य रूप से [[मालवा]] क्षेत्र, [[महाकौशल]] में और दक्षिणी [[बुन्देलखण्ड|बुंदेलखंड]] में
** [[लाल मिट्टी|लाल]] और पीली मिट्टी, [[बघेलखंड]] क्षेत्र में
** [[जलोढ़ मिट्टी]], उत्तरी मध्य प्रदेश में
** [[लैटराइट मिट्टी]], हाइलैंड क्षेत्रों में
** मिश्रित मिट्टी, [[ग्वालियर]] और [[चंबल]] संभाग के कुछ हिस्सों में
====वनस्पति और जीव====
प्रदेश में सबसे अधिक वनक्षेत्र हैं, इसीलिए यहाँ [[बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान|बाँधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान]], [[कान्हा राष्ट्रीय उद्यान]], [[सतपुड़ा राष्ट्रीय अभ्यारण्य]], [[संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान]], [[माधव राष्ट्रीय उद्यान]], [[वन विहार राष्ट्रीय उद्यान]], [[जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान]], [[पन्ना राष्ट्रीय उद्यान]] [[पेंच राष्ट्रीय उद्यान]], [[डायनासोर राष्ट्रीय उद्यान]], [[पालपुर कुनो राष्ट्रीय उद्यान]] सहित 11 राष्ट्रीय उद्यान एवं विश्व का प्रथम वाइट टाइगर सफारी और ज़ू मुकुंदपुर सतना में है तथा इसके अलावा यह कई प्राकृतिक संरक्षण उपस्थित हैं जिनमे [[अमरकंटक]], बाग गुफाएँ, [[बालाघाट ज़िला|बालाघाट]], बोरी प्राकृतिक रिजर्व, केन घड़ियाल, [[घाटीगाँव]] , कुनो पालपुर, नरवर, चंबल, कुकड़ेश्वर, [[नरसिंहगढ़]], नोरा देही, [[पचमढ़ी]], पनपथा, शिकारगंज, [[पातालकोट]] और तामिया सम्मलित हैं सतपुड़ा रेंज में [[पचमढ़ी बायोस्फीयर रिजर्व]], [[अमरकंटक बायोस्फियर रिजर्व]] और पन्ना राष्ट्रीय उद्यान भारत में उपस्थित 18 बायोस्फीयर में से तीन हैं। [[उदयगिरि गुफाएँ |उदयगिरि गुफा]] भी मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में स्थित है|<ref>{{cite web |title=मध्यप्रदेश में स्थित स्तूप एवं गुफाएँ |url=https://www.pittbi.com/madhyapradesh-mein-sthit-stoop-guphaen/ |website=PITTBI - पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया |date=17 सितम्बर 2022 |access-date=17 सितंबर 2022 |archive-date=20 सितंबर 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220920171016/https://www.pittbi.com/madhyapradesh-mein-sthit-stoop-guphaen/ |url-status=dead }}</ref>
कान्हा, बाँधवगढ़, पेंच, पन्ना, और सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान बाघ परियोजना क्षेत्रों के रूप में काम करते हैं। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य को, घड़ियाल और मगर, नदी डॉल्फिन, ऊदबिलाव और कई प्रकार के कछुओ के संरक्षण के लिए जाना जाता है।
राज्य के जंगलों में सागौन और साल के पेड़ बहुतायत में पाये जाते हैं।
=== नदियाँ===
[[नर्मदा नदी]] मध्य प्रदेश की सबसे प्रमुख और लंबी (1312 कि.मी.<ref>http://www.sardarsarovardam.org/the-narmada-river-basin.aspx {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20180817225939/http://www.sardarsarovardam.org/the-narmada-river-basin.aspx |date=17 अगस्त 2018 }} नर्मदा नदी बेसिन</ref>) नदी हैं। यह दरार घाटी के माध्यम से पश्चिम की ओर बहती हैं, इसके उत्तरी किनारे में विंध्य के विशाल पर्वतमाला, जबकि दक्षिण में सतपुड़ा के पहाड़ों की रेंज हैं। इसकी सहायक नदियों में बंजार, [[तवा नदी|तवा]], मचना, शक्कर, देनवा और [[सोनभद्र जिला|सोनभद्र]] नदियाँ आदि शामिल हैं। [[ताप्ती नदी]] भी नर्मदा के समानांतर, दरार घाटी के माध्यम से बहती हैं। नर्मदा-ताप्ती सिस्टम, राज्य की प्रमुख नदियों में से हैं और मध्य प्रदेश की लगभग एक चौथाई भूमि क्षेत्र को जल प्रदान करती हैं।
बाकी की नदियाँ [[चम्बल नदी|चंबल]], [[क्षिप्रा नदी|क्षिप्रा]], [[काली सिंध]], [[पार्वती नदी|पार्वती]], [[कुनो नदी|कुनो]], [[सिंध नदी|सिंध]], [[बेतवा नदी|बेतवा]], [[धसान नदी|धसान]] और [[केन नदी|केन]], जोकि पुर्व की और बहती हैंं, [[यमुना नदी]] में जाके मिलती हैंं क्षिप्रा नदी जिसके किनारे प्राचीन शहर [[उज्जैन]] बसा हुआ हैंं हिंदू धर्म के सबसे पवित्र नदियों में से एक हैं। यहाँ हर 12 साल में [[सिंहस्थ|सिंहस्थ कुंभ मेला]] आयोजित किया जाता हैं। इन नदियों द्वारा बहा के लाई गई भूमि कृषि समृद्ध होती हैंं। गंगा बेसिन के पूर्वी भाग में [[सोन नदी|सोन]], [[टोंस नदी|टोंस]], बीहर, सेलर नदी (मध्यप्रदेश का सबसे ऊँचा बहुटी जलप्रपात इसी नदी में बनता है [[Mauganj|मऊगंज]]) तथा [[रिहन्द नदी|रिहंद]] नदिया हैं। सोन, जो [[अमरकंटक]] के पास [[मैकल पर्वतमाला|मैकल पहाड़ो]] से निकलती हैं, दक्षिणी से [[गंगा नदी|गंगा]] की सबसे बड़ी सहायक नदी हैं जो कि [[हिमालय]] से ही नहीं निकलती हैं। सोन और उसकी सहायक नदियों, गंगा में मानसून का अथाह जल प्रवाहित करती हैं।
[[छत्तीसगढ़]] राज्य के गठन के बाद, [[महानदी]] बेसिन का बड़ा हिस्सा अब छत्तीसगढ़ में प्रवाहित होता हैं। वर्तमान में, [[अनूपपुर ज़िला|अनूपपुर]] जिले में हसदेव के पास नदी का केवल 154 km² बेसिन क्षेत्र ही मध्य प्रदेश में बहता हैं। [[वैनगंगा नदी|वैनगंगा]], [[वर्धा नदी|वर्धा]], [[पेँच नदी|पेंच]], [[कन्हान नदी|कन्हान]] नदियाँ, [[गोदावरी नदी]] प्रणाली में विशाल मात्रा में पानी का निर्वहन करती हैं। यहाँ कई महत्वपूर्ण राज्य के विकास में सिंचाई परियोजनाएँ कार्यरत हैं, जिसमें [[गोदावरी नदी]] [[घाटी]] [[सिंचाई]] [[परियोजना]] भी शामिल हैं।
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चित्र:JhansiGhat.jpg|thumb|[[नर्मदा नदी]]
चित्र:Son River, Umaria district, MP, India.jpg|[[सोन नदी]], [[उमरिया जिला]]
चित्र:Dhuandhar falls4.JPG|thumb|[[भेड़ाघाट]] में संगमरमर की चट्टानों के माध्यम से बहती [[नर्मदा नदी]]
चित्र:Shri Ram Ghat 01.jpg|[[क्षिप्रा नदी]] पर श्रीराम घाट, [[उज्जैन]]
चित्र:Betwa in Ashoknagar.JPG|[[बेतवा नदी]], [[अशोकनगर जिला|अशोकनगर जिले]] में
</gallery>
===परिक्षेत्र===
मध्यप्रदेश को निम्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बाँटा गया है:
* [[कैमूर]] पठार और [[सतपुड़ा]] पहाड़ी
* [[विंध्य क्षेत्र|विंध्य]] पठार (पहाड़ी)
* [[नर्मदा नदी|नर्मदा]] घाटी
* [[वैनगंगा नदी|वैनगंगा]] घाटी
* [[गिर्द]] ([[ग्वालियर]]) क्षेत्र
* [[बुंदेलखंड]] क्षेत्र
* [[सतपुड़ा]] पठार (पहाड़ी)
* [[मालवा]] पठार
* [[निमाड़]] पठार
* [[झाबुआ]] पहाड़ी
====शहर====
{{main article|मध्य प्रदेश के ज़िले}}
मध्य प्रदेश राज्य में कुल 55 जिले हैं।<ref>{{cite news |last1=Narayan |first1=Udit |title=कमलनाथ कैबिनेट ने मैहर, चाचौड़ा और नागदा को जिला बनाने की मंजूरी दी, मध्यप्रदेश में अब 52 जिले होंगे |url=https://www.bhaskar.com/mp/bhopal/news/kamal-nath-cabinet-meeting-today-updates-madhya-pradesh-government-makes-big-decisions-in-todays-cabinet-meeting-127001649.html |accessdate=19 मार्च 2020 |work=Dainik Bhaskar |date=18 मार्च 2020 |language=hi |archive-url=https://web.archive.org/web/20200319052151/https://www.bhaskar.com/mp/bhopal/news/kamal-nath-cabinet-meeting-today-updates-madhya-pradesh-government-makes-big-decisions-in-todays-cabinet-meeting-127001649.html |archive-date=19 मार्च 2020 |url-status=live }}</ref>
==जनसांख्यिकी==
[[चित्र:Children in Raisen district, MP, India.jpg|200px|thumb|right|मध्य प्रदेश के [[रायसेन जिला|रायसेन जिले]] के [[भील]] जनजाति के प्यारे बच्चे]]
वर्ष 2011 की जनगणना के अंतिम आँकडों के अनुसार मध्य प्रदेश की कुल जनसंख्या 72,626,809 है<ref>{{Cite web|url=http://www.census2011.co.in/census/state/madhya+pradesh.html|title=Madhya Pradesh Population Sex Ratio in Madhya Pradesh Literacy rate data 2011-2019|website=www.census2011.co.in|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190228173446/http://www.census2011.co.in/census/state/madhya+pradesh.html|archive-date=28 फ़रवरी 2019|url-status=dead}}</ref> जिसमे 3,76,11,370(51.8%) पुरुष एवं 3,49,84,645(48.2%) महिलाएँ है मध्यप्रदेश का लिंगानुपात 930 है। मध्य प्रदेश की जनसंख्या, में कई समुदाय, जातीय समूह और जनजातियाँ आते हैं जिनमे यहाँ के मूल निवासी आदिवासी और हाल ही में अन्य राज्यों से आये प्रवासी भी शामिल है। राज्य की आबादी में [[अनुसूचित जाति]] और [[अनुसूचित जनजाति]] एक बड़े हिस्से का गठन करते हैं। मध्यप्रदेश के आदिवासी समूहों में मुख्य रूप से [[गोंड]], [[भील]], [[बैगा]], [[कोरकू]], भड़िया (या भरिया), [[हल्बा]], [[कौल]], मरिया, मालतो और [[सहरिया]] आते हैं। [[धार]], [[झाबुआ]], [[मंडला ज़िला|मंडला]] और [[डिंडौरी ज़िला|डिंडौरी]] जिलों में 50 प्रतिशत से अधिक जनजातीय आबादी की है। [[खरगोन]], [[छिंदवाड़ा]], [[सिवनी]], [[सीधी]], [[सिंगरौली]] और [[शहडोल]] जिलों में 30-50 प्रतिशत आबादी जनजातियों की है। 2011 की जनगणना के अनुसार, मध्य प्रदेश में आदिवासियों की जनसंख्या 15316000 हैं, जोकि कुल जनसंख्या का 21.10% हैं। यहाँ 46 मान्यता प्राप्त अनुसूचित जनजाति हैं और उनमें से तीन को "विशेष आदिम जनजातीय समूहों" का दर्जा प्राप्त हैं।<ref>[http://www.mp_gov_in_sc_st_welfare_2001/tribal/ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग, मध्य प्रदेश सरकार]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
विभिन्न भाषाई, सांस्कृतिक और भौगोलिक वातावरण और अन्य जटिलताओं के कारण मध्य प्रदेश के आदिवासी, बड़े पैमाने पर विकास की मुख्य धारा से कटा हुआ है। मध्य प्रदेश, [[मानव विकास सूचकांक]] के निम्न स्तर 0.375 (2011) पर हैं, जोकि राष्ट्रीय औसत से बहुत नीचे है।<ref name="UNDP_HDI_2011">[http://www.undp.org/content/dam/india/docs/madhyapradesh_factsheet.pdf मध्य प्रदेश: आर्थिक और मानव विकास संकेतक] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120916043423/http://www.undp.org/content/dam/india/docs/madhyapradesh_factsheet.pdf |date=16 सितंबर 2012 }}, यूएनडीपी (2011)</ref> इंडिया स्टेट हंगर इंडेक्स (2008) के अनुसार, मध्य प्रदेश में कुपोषण की स्थिति, 'बेहद खतरनाक' हैं और इसका स्थान इथोपिया और चाड के बीच है।<ref name="bbchunger">{{cite news | url=http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/7669152.stm | title=भारत राज्य में भूखमरी 'खतरनाक' स्तर पर | publisher=बीबीसी | date=14 अक्टूबर 2008 | accessdate=12 मई 2010 | archive-url=https://web.archive.org/web/20090930010722/http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/7669152.stm | archive-date=30 सितंबर 2009 | url-status=live }}</ref> राज्य की [[कन्या भ्रूण हत्या]] की स्थिति में भी, भारत में सबसे खराब प्रदर्शन है।<ref>{{cite web|url=http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-07-03/india/32522980_1_cases-mukesh-sinha-executive-director-ncrb|title=एक बार फिर, मध्य प्रदेश भ्रूण हत्या के मामलों में सबसे ऊपर है (अंग्रेजी में)|publisher=टाइम्स ऑफ इंडिया|access-date=22 फ़रवरी 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20130502220715/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-07-03/india/32522980_1_cases-mukesh-sinha-executive-director-ncrb|archive-date=2 मई 2013|url-status=live}}</ref> राज्य का प्रति व्यक्ति [[सकल राज्य घरेलू उत्पाद]] (जीडीपी)(2010-11), देश के सबसे कम में चौथा स्थान पर है।<ref name="PlanningCom_GSDP_2012">[http://planningcommission.nic.in/data/datatable/0904/tab_104.pdf मौजूदा मूल्यों पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) (15-03-2012 को)], भारत के योजना आयोग। {{webarchive |url=https://web.archive.org/web/20120516022406/http://planningcommission.nic.in/data/datatable/0904/tab_104.pdf |date=}}</ref> प्रदेश, भारत के [[राज्य]] हंगर इंडेक्स पर भी सबसे कम रैंकिंग वाले राज्य में से है।
मध्य प्रदेश कुपोषण के मामले में सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में से एक है। हाल ही के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 के अनुसार, पन्ना जिले में 43.1 प्रतिशत बच्चे कुपोषित, 24.7 प्रतिशत क्षीण और 40.3 प्रतिशत कम वजन वाले बच्चों की श्रेणी में आते है।<ref>{{Cite web|url=http://malnourishedkids.blogspot.com/2012/10/malnutrition-in-madhya-pradesh-overview.html|title=Malnourished Children of Madhya Pradesh: Malnutrition in Madhya Pradesh - An Overview|first=Saju|last=Mk|date=30 अक्तू॰ 2012|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190217071716/http://malnourishedkids.blogspot.com/2012/10/malnutrition-in-madhya-pradesh-overview.html|archive-date=17 फ़रवरी 2019|url-status=dead}}</ref> इसी तरह का मामला ग्रामीण छतरपुर में भी हैं जहां 44.4 प्रतिशत बच्चे कुपोषित, 17.8 प्रतिशत क्षीण और 41.2 प्रतिशत कम वजन के हैं।
<gallery mode="noline" width="175pix" lenth="100px">
चित्र:Breakfast making in adivasi village, Umaria district, India.jpg|एक आदिवासी महिला बाँधवगढ़ में नाश्ता तैयार करती हुईं
चित्र:Shepherds, Chambal, India.jpg|चंबल में चरवाहे
चित्र:Ploughing paddy field with oxen, Umaria district, MP, India.jpg|उमरिया जिले में एक युवा किसान
चित्र:Young Baiga women, India.jpg|युवा [[बैगा (जनजाति)|बैगा]] महिला
</gallery>
===धर्म===
2011 की जनगणना के अनुसार, प्रदेश में 90.9% लोग [[हिंदू धर्म]] को मानते हैं, जबकि अन्य में [[मुस्लिम]] (6.6%), [[जैन]](1%),[[ईसाई]] (0.3%), [[बौद्ध]] (0.3%), और [[सिख]] (0.2%) आदि आते है। प्रदेश के कई शहर अपनी धार्मिक आस्था के केंद्र के लिए जाने जाते रहे हैं। जिनमे से सबसे प्रमुख [[उज्जैन]] शहर हैं, जोकि भारत के सबसे प्राचीन शहरो में से एक हैं। यहाँ 12 [[ज्योतिर्लिंग]] में से एक [[उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर|महाकालेश्वर मंदिर]] दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। शहर में बहने वाली [[शिप्रा नदी]] के किनारे प्रसिध्द [[कुंभ मेला]] लगता है। इसके अलावा नर्मदा नदी के तट पर बसा [[ओंकारेश्वर मन्दिर|ओम्कारेश्वर]] भी 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं। [[हिंदू धर्म]] के अलावा अन्य धर्मों के कई धार्मिक केंद्र प्रदेश में उपस्थित हैं। [[भोपाल]] का [[ताज-उल-मस्जिद, भोपाल|ताज-उल-मस्जिद]] भारत की सबसे विशाल मस्जिदों में एक है। [[बड़वानी]] का [[बावनगजा]], [[दमोह]] का [[कुंडलपुर]], [[दतिया]] का सोनागिरी, [[अशोकनगर]] का [[निसईजी मल्हारगढ़]], [[बैतूल]] की मुक्तागिरी जैन धर्मालंबियोंं हेतु प्रसिद्ध है। [[विदिशा]] नगरी दशवें तीर्थेंकर भगवान [[शीतलनाथ]] की गर्भ जन्म व तप कल्याणक की भूमि है। [[बुंदेलखंड]] में [[दिगंबर]] जैन एवं [[मालवा]] में [[श्वेतांबर]] जैन बहूलता से पाये जाते हैं। [[बुंदेलखंड]] में [[दिगंबर]] जैन समुदाय का एक पंथ और स्थापित हुआ जो [[तारण पंथ]] कहलाता है। वही साँची में स्थित [[साँची का स्तूप]], बौद्ध के लिए केंद्र हैं। मैहर जो कि सतना जिले के अंतर्गत आता है माँ शारदा जो बुद्धि एवं विद्या की दायिनी है त्रिकूट पर्वत पर माँ का भव्य मंदिर है जो भारत के ५२ शक्तिपीठ में से एक है। दतिया में स्थित माँ पीतांबरा का मंदिर विश्व में अपनी अलग पहचान रखता है ऐसी मंदिर में माँ धूमावती की भी स्थापना है। नर्मदापुरम का सेठानी घाट, देवास जिले नेमावर में सिद्धनाथ महादेव, हरदा जिले के हंडिया में कुबेर के द्वारा पूजित रिद्धनाथ महादेव आदि नर्मदा के तट पर विशेष स्थान है इसके साथ ही माँ नर्मदा का उद्गम स्थल अमरकंटक बहुत ही प्रसिद्द स्थान है। रीवा जिले के देउर कोठार में लगभग 2 हजार वर्ष पुराने बौद्ध स्तूप और लगभग 5 हजार वर्ष प्राचीन शैलचित्रों की श्रृंखला मौजूद है। यह वर्ष 1982 में प्रकाश में आए थे। ये स्तूप सम्राट अशोक के शासनकाल में ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी के निर्मित हैं। देउर कोठार नामक स्थान, रीवा-इलाहाबाद मार्ग एनएच-27 पर सोहागी पहाड़ से पहले कटरा कस्बे के समीप स्थित है। यहां मौर्य कालीन मिट्टी ईट के बने 3 बड़े स्तूप और लगभग 46 पत्थरों के छोटे स्तूप बने है। अशोक युग के दौरान विंध्य क्षेत्र में बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार हुआ और भगवान बौद्ध के अवशेषों को वितरित कर स्तूपों का निर्माण किया गया। देउर कोठार के बौद्ध स्तूपों का समूह सबसे बड़ा बौद्ध स्तूप समूह है जिसमें पहला बौद्ध स्तूप ईंटों द्वारा बनाया गया था। एक मौर्यकालीन स्तंभ भी है जिसमें एक शिलालेख भी है जिसकी शुरुआत भगवतोष से होती है। यहाँ पर खुदाई के दौरान मौर्य कालीन ब्राही लेख के अभिलेख, शिलापट्ट स्तंभ और पात्रखंड भी प्राप्त हुए हैं।
===भाषा===
राज्य की आधिकारिक भाषा [[हिंदी]] है। इसके अलावा कई इलाको में [[संस्कृत]]<ref>{{cite web|url=https://www.patrika.com/bhopal-news/sanskrit-helped-in-the-development-of-a-village-6087/|title=यहां संस्कृत में बात करता है पूरा गांव|access-date=6 अक्तूबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191006062122/https://m.patrika.com/amp-news/bhopal-news/sanskrit-helped-in-the-development-of-a-village-6087/|archive-date=6 अक्तूबर 2019|url-status=dead}}</ref>, [[उर्दू]] और [[मराठी]] भाषियों की अच्छी खासी आबादी हैं। क्योंकी ये क्षेत्र कभी [[मराठा]] राज्य के अंतर्गत आते थे, बल्कि प्रदेश में महाराष्ट्र के बाहर [[मराठी लोग|मराठी लोगों]] की सबसे ज्यादा आबादी हैं। यहाँ कई क्षेत्रीय बोलियाँ भी बोली जाती हैं, जोकि कुछ लोगों के अनुसार हिंदी से ही निकल कर बनी हुई हैं जबकि कुछ के अनुसार ये अलग या अन्य भाषा से संबंधित हैं। इन बोलियों के अलावा मालवा में [[मालवी]], निमाड़ में [[निमाड़ी (बोली)|निमाड़ी]], बुंदेलखंड में [[बुंदेली]], और बघेलखंड और दक्षिण पूर्व में [[बघेली]] (रीवा) बोली जाती हैं। इन में से हर एक बोली एक दूसरे से बहुत अलग है।<ref name="t363">{{cite web | title=Google Books | website=Google | url=https://www.google.co.in/books/edition/Madhya_Pradesh_Samanya_Gyan/KbSODwAAQBAJ?hl=hi&gbpv=1&dq=%E0%A4%AE%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF+%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6&pg=PA300&printsec=frontcover | language=hi | access-date=2026-10-18}}</ref>
यहाँ की अन्य भाषाओं में [[तेलुगू]], भिलोड़ी ([[भीली भाषा|भीली]]), [[गोंडी]], [[कोरकू]], कळतो (नहली), और निहाली (नाहली) आदि शामिल हैं, जोकि आदिवासी समूहों द्वारा बोली जाती हैं।
==शिक्षा==
[[चित्र:Indian Institute of Tourism and Travel Management (IITTM), Gwalior - panoramio - Gyanendrasinghchauha….jpg|right|200px|thumb|भारतीय पर्यटन और यात्रा प्रबंधन संस्थान (IITTM), ग्वालियर]]
2011 की जनगणना के अनुसार, मध्य प्रदेश की साक्षरता दर 70.60% थी, जिसमे पुरुष साक्षरता 80.5% और महिला साक्षरता 60.0% थी। वर्ष 2017 के आँकड़ों के मुताबिक, राज्य में 114,418 प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय, 3,851 उच्च विद्यालय और 4,765 उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हैं।<ref>{{Cite web|url=http://www.educationportal.mp.gov.in/Public/Schools/ssrs/State_School_Block.aspx?MP=1|title=Block Wise - Schools of Madhya Pradesh|website=www.educationportal.mp.gov.in|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190223213246/http://www.educationportal.mp.gov.in/Public/Schools/ssrs/State_School_Block.aspx?MP=1|archive-date=23 फ़रवरी 2019|url-status=dead}}</ref> राज्य में 400 इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर कॉलेजों, 250 प्रबंधन संस्थानों और 12 मेडिकल कॉलेज हैं।
राज्य में भारत के कई प्रमुख शैक्षिक और अनुसंधान संस्थान है जिनमे [[भारतीय प्रबंध संस्थान इंदौर|भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM)]] इंदौर, [[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर|भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(IIT)]] इंदौर, [[अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान]] ''(AIIMS)'' भोपाल, [[भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान]] (IISER) भोपाल, [[भारतीय पर्यटन और यात्रा प्रबंधन संस्थान|भारतीय पर्यटन और यात्रा प्रबंधन संस्थान (IITTM)]] ग्वालियर, आईआईएफएम भोपाल, नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी भोपाल शामिल हैं राज्य में एक पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय (नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर) भी हैं जिसके तीन संस्थान जबलपुर, महू और रीवा में है। प्रदेश की पहली निजी विश्वविद्यालय "जेपी अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गुना" एनएच-3 पर खूबसूरत कैंपस के साथ बना हुआ हैं। जोकि एनआईआरएफ (NIRF) के शीर्ष 100 में 86 वें स्थान पर है।
[[चित्र:PACL Campus, IIT Indore.jpg||left|200px|thumb|भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), इंदौर]]
यहाँ 500 डिग्री कॉलेज हैं, जोकि राज्य के ही विश्वविद्यालयों से सम्बंधित हैं। जिनमें निम्न शामिल है;
* [[जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय]] ([[जबलपुर]])
* [[मध्यप्रदेश पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय]] ([[भोपाल]])
* मध्यप्रदेश चिकित्सा विश्वविद्यालय (भोपाल)
* [[मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय]] (भोपाल)
* [[राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय|राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय]] (भोपाल)
* [[अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय]] ([[रीवा]])
* [[बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय]] (भोपाल)
* [[देवी अहिल्या विश्वविद्यालय]] ([[इन्दौर|इंदौर]])
* [[रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय]] (जबलपुर)
* [[विक्रम विश्वविद्यालय]] (उज्जैन)
* [[जीवाजी विश्वविद्यालय]] (ग्वालियर)
* [[डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय]] (सागर विश्वविद्यालय)
* [[इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय|इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय]](अमरकंटक, अनूपपुर)
* [[माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय|माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय विश्वविद्यालय]] (भोपाल)
वर्ष 1970 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्री-मेडिकल टेस्ट बोर्ड के लिये व्यावसायिक परीक्षा मंडल गठन किया गया। कुछ वर्ष के बाद 1981 में, प्री-इंजीनियरिंग बोर्ड का गठन किया गया था। फिर उसके बाद, वर्ष 1982 में इन बोर्डों दोनों को समामेलित कर मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (M.P.P.E.B.) जिसे व्यापम के रूप में भी जाना जाता है का गठन किया गया।<ref>{{Cite web|url=http://www.vyapam.nic.in|title=मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल, भोपाल|website=www.vyapam.nic.in|accessdate=2016-05-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20170303021641/http://www.vyapam.nic.in/|archive-date=3 मार्च 2017|url-status=dead}}</ref>
==संस्कृति==
मध्य प्रदेश के 3 स्थलों को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है, जिनमे [[खजुराहो]] (1986), [[साँची का स्तूप|साँची बौद्ध स्मारक]] (1989), और [[भीमबेटका पाषाण आश्रय|भीमबेटका की रॉक शेल्टर]] (2003) शामिल हैं। हाल ही में [[ओरछा]] को यूनेस्को द्वारा उसकी अस्थायी सूची में सम्मलित किया गया है।<ref>{{cite news |title=Madhya Pradesh's Orchha makes it to tentative list of UNESCO World Heritage sites |url=https://www.indiatoday.in/india/story/mp-s-orchha-makes-it-to-tentative-list-of-unesco-world-heritage-sites-1535198-2019-05-26 |accessdate=4 जुलाई 2019 |publisher=इंडिया टूडे |date=२०१९ |archive-url=https://web.archive.org/web/20190704050554/https://www.indiatoday.in/india/story/mp-s-orchha-makes-it-to-tentative-list-of-unesco-world-heritage-sites-1535198-2019-05-26 |archive-date=4 जुलाई 2019 |url-status=live }}</ref> अन्य वास्तुशिल्पीय दृष्टि से या प्राकृतिक स्थलों में [[अजयगढ़]], [[अमरकंटक]], [[असीरगढ़]], [[बांधवगढ़|बाँधवगढ़]], [[बावनगजा]], [[भोपाल]], [[विदिशा]], [[चंदेरी]], [[चित्रकूट]], [[धार]], [[ग्वालियर]], [[इंदौर]], [[जबलपुर]], [[बुरहानपुर]], [[महेश्वर]], [[मंडलेश्वर]], [[मांडू]], [[ओंकारेश्वर]], [[ओरछा]], [[पचमढ़ी]], [[शिवपुरी]], [[सोनागिरि]], [[मंडला]] और [[उज्जैन]] शामिल हैं।
मध्य प्रदेश में अपनी शास्त्रीय और लोक संगीत के लिए विख्यात है। विख्यात हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत घरानों में मध्य प्रदेश के मैहर घराने, ग्वालियर घराने और सेनिया घराने शामिल हैं। मध्यकालीन भारत के सबसे विख्यात दो गायक, [[तानसेन]] और [[बैजू बावरा]], वर्तमान मध्य प्रदेश के [[ग्वालियर]] के पास पैदा हुए थे। प्रशिद्ध ध्रुपद कलाकार अमीनुद्दीन डागर (इंदौर), गुंदेचा ब्रदर्स (उज्जैन) और उदय भवालकर (उज्जैन) भी वर्तमान के मध्य प्रदेश में पैदा हुए थे। माँ विंध्यवासिनी मंदिर अति प्राचीन मंदिर है। यह अशोक नगर जिले से दक्षिण दिशा की ओर [[तूमैन]] (तुम्वन) मे स्थित हैं। यहाँ खुदाई में प्राचीन मूर्तियाँ निकलती रहती है यह राजा मोरध्वज की नगरी के नाम से जानी जाती है यहाँ कई प्राचीन दार्शनिक स्थलो में बलराम मंदिर, हजारमुखी महादेव मंदिर, त्रिवेणी संगम,वोद्ध प्रतिमाएँ, लाखावंजारा वाखर गुफाएँ आदि कई स्थल है<ref name="SimonMark2000">{{cite book | author1=साइमन ब्रौटन | author2=मार्क एलिंगहम | author3=रिचर्ड ट्रिलो | title=विश्व संगीत: लैटिन और उत्तरी अमेरिका, कैरीबियाई, भारत, एशिया और प्रशांत | url=https://books.google.com/books?id=QzX8THIgRjUC&pg=PA91 | accessdate=13 सितम्बर 2012 | year=2000 | publisher=असहज गाइड | isbn=978-1-85828-636-5 | pages=91– | archive-url=https://web.archive.org/web/20130606122902/http://books.google.com/books?id=QzX8THIgRjUC&pg=PA91 | archive-date=6 जून 2013 | url-status=live }}</ref> पार्श्व गायक [[किशोर कुमार]] (खंडवा) और [[लता मंगेशकर]] (इंदौर) का जन्मस्थान भी मध्य प्रदेश में स्थित हैं। स्थानीय लोक गायन की शैलियों में फाग, भर्तहरि, संजा गीत, भोपा, कालबेलिया, भट्ट/भांड/चरन, वसदेवा, विदेसिया, कलगी तुर्रा, निर्गुनिया, आल्हा, [[पंडवानी]] गायन और गरबा गरबि गोवालं शामिल हैं।
==अर्थव्यवस्था==
मध्य प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वर्ष 2014-15 के लिए 84.27 बिलियन डॉलर था।<ref>{{Cite web|url=https://www.ibef.org/states/madhya-pradesh-presentation|title=GSDP of Madhya Pradesh, Industrial development in MP, MPSIDC|website=www.ibef.org|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20170228082037/http://www.ibef.org/states/madhya-pradesh-presentation|archive-date=28 फ़रवरी 2017|url-status=dead}}</ref> प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2013-14 में $871,45 था, और देश के अंतिम से छठे स्थान पर हैं।<ref>{{cite web|url = http://planningcommission.nic.in/data/datatable/data_2312/DatabookDec2014%20160.pdf|title = वर्तमान मूल्य पर प्रति व्यक्ति नेट स्टेट घरेलू उत्पाद|date = |accessdate = |website = |publisher = |last = |first = |archive-url = https://web.archive.org/web/20141225101510/http://planningcommission.nic.in/data/datatable/data_2312/DatabookDec2014%20160.pdf|archive-date = 25 दिसंबर 2014|url-status = dead}}</ref> 1999 और 2008 के बीच राज्य की सालाना वृद्धि दर बहुत कम (3.5%) थी।<ref name="lakshmi">{{Cite web|url=https://www.economist.com/special-report/2008/12/11/ruled-by-lakshmi|title=Ruled by Lakshmi|date=11 दिस॰ 2008|accessdate=1 मार्च 2019|via=The Economist|archive-url=https://web.archive.org/web/20190302024745/https://www.economist.com/special-report/2008/12/11/ruled-by-lakshmi|archive-date=2 मार्च 2019|url-status=live}}</ref> इसके बाद राज्य के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर में काफी सुधार हुआ है, और 2010-11 और 2011-12 के दौरान 8% एवं 12% क्रमशः बढ़ गया।<ref name="TOI_2012_GDP_12pc">{{cite news | url = http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-06-29/india/32471751_1_growth-rate-agriculture-growth-negative-growth | title = मध्य प्रदेश के जीडीपी में 12 फीसदी की वृध्दि (अंग्रेजी में) | author = लेमुएल लॉल | newspaper = द टाइम्स ऑफ इंडिया | date = 29 जून 2012 | accessdate = 10 सितम्बर 2012 | archive-url = https://web.archive.org/web/20130502174841/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-06-29/india/32471751_1_growth-rate-agriculture-growth-negative-growth | archive-date = 2 मई 2013 | url-status = live }}</ref>
राज्य में कृषिप्रधान अर्थव्यवस्था है। मध्य प्रदेश की प्रमुख फसलों में गेहूँ, सोयाबीन, चना, गन्ना, चावल, मक्का, कपास, राईं, सरसों और अरहर शामिल हैं। प्रदेश में इंदौर, सोयबीन की मंडी के लिए और सीहोर गेहूँ की मंडी के लिए देश भर का केंद्र हैं। लघु वनोपज (एमएफपी) जैसे की तेंदू, जिसके पत्ते का बीड़ी बनाने में इस्तेमाल किया जाता हैं, साल बीज, सागौन बीज, और लाख आदि भी राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए योगदान देते हैं।
मध्य प्रदेश में 5 [[विशेष आर्थिक क्षेत्र]] (सेज) है: जिनमे 3 आईटी/आईटीईएस (इंदौर, ग्वालियर), 1 खनिज आधारित (जबलपुर) और 1 कृषि आधारित (जबलपुर) शामिल हैं। अक्टूबर 2011 में, 14 सेज प्रस्तावित किया गए, जिनमे से 10 आईटी/ आईटीईएस आधारित थे। [[इंदौर]], राज्य का प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र है। इसके राज्य के केंद्र में स्थित होने के कारण, यहाँ कई उपभोक्ता वस्तु कंपनियों ने अपनी विनिर्माण केंद्रों की स्थापना की है।.<ref name="IBEF_2011">{{Cite web|url=http://www.ibef.org/download/Madhya_Pradesh_271211.pdf|title=मध्य प्रदेश: भारत ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20180927114553/https://www.ibef.org/download/Madhya_Pradesh_271211.pdf|archive-date=27 सितंबर 2018|url-status=dead}}</ref>
राज्य में भारत का हीरे और तांबे का सबसे बड़ा भंडार है। अन्य प्रमुख खनिज भंडार में कोयला, कालबेड मीथेन, मैंगनीज और डोलोमाइट शामिल हैं।
मध्य प्रदेश में 6 [[भारतीय आयुध निर्माणी|आयुध कारखाने]], जिनमें से 4 जबलपुर (वाहन निर्माणी, ग्रे आयरन फाउंड्री, गन कैरिज फैक्टरी, आयुध निर्माणी खमरिया) में स्थित है, बाकि एक-एक कटनी और इटारसी में हैं। ये कारखाने आयुध कारखाना बोर्ड द्वारा चलाए जाते हैं जिनमे [[भारतीय सशस्त्र सेनाएँ|भारतीय सशस्त्र बलों]] के लिए उत्पादों का निर्माण किया जाता हैं।
मध्य प्रदेश, महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 में उत्कृष्ट कार्य के लिए 10वें राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीत चुका हैं। राज्य में पर्यटन उद्योग भी जोर-शोर से बढ़ रहा है, वन्यजीव पर्यटन और कई संख्या में ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के स्थानों की उपस्थिति इनका मुख्य कारण हैं। [[साँची नगर|साँची]] और [[खजुराहो]] में विदेशी पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। प्रमुख शहरों के अलावा अन्य लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में [[भेड़ाघाट]], [[भीमबेटका]], [[भोजपुर]], [[महेश्वर]], [[मांडू]], [[ओरछा]], [[पचमढ़ी]], [[कान्हा राष्ट्रीय उद्यान|कान्हा]] और [[उज्जैन]] शामिल हैं।
===अवसंरचना===
===ऊर्जा===
राज्य की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 13880 मेगावॉट (31 मार्च 2015) है। सभी राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश बिजली उत्पादन में सबसे ज्यादा वार्षिक वृद्धि (46.18%) दर्ज की हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा भारत के सबसे बड़े सौर ऊर्जा संयंत्र योजना बनाई गई हैं। संयंत्र की बिजली उत्पादन की क्षमता 750 मेगावाट होगी, तथा इसे लगाने हेतु 4,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी। <ref>{{Cite web|url=https://www.thehindu.com/news/national/indias-largest-solar-power-plant-planned-in-rewa-district-madhya-pradesh/article6267409.ece|title=India’s largest solar power plant planned in Madhya Pradesh|date=31 जुल॰ 2014|accessdate=1 मार्च 2019|via=www.thehindu.com}}</ref> मध्य प्रदेश के रीवा जिले के गूढ तहसील में 1,590 हेक्टेयर के क्षेत्र में एक रीवा अल्ट्रा मेगा सौर पार्क प्रस्तावित है।
[[File:Mehta in night.png|मेहता गांव का सुंदर रात्रि दृश्य|thumb]]
===परिवहन===
मध्य प्रदेश में बस और ट्रेन सेवाएँ चारो तरफ फैली हुई हैं। प्रदेश की 99,043 किमी लंबी सड़क नेटवर्क में 20 [[राष्ट्रीय राजमार्ग]] भी शामिल है। प्रदेश में 4948 किलोमीटर लंबी रेल नेटवर्क का जाल फैला हुआ हैं, [[जबलपुर]] को भारतीय रेलवे के [[पश्चिम मध्य रेलवे]] का मुख्यालय बनाया गया है। [[मध्य रेलवे]] और [[पश्चिम रेलवे]] व दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे भी राज्य के कुछ हिस्सों को कवर करते हैं। पश्चिमी मध्य प्रदेश के अधिकांश क्षेत्र पश्चिम रेलवे के रतलाम रेल मंडल के अंर्तगत आते है, जिनमे इंदौर, उज्जैन, मंदसौर, खंडवा, नीमच, सीहोर और बैरागढ़ भोपाल आदि शहर शामिल हैं। राज्य में 20 प्रमुख रेलवे जंक्शन है। प्रमुख अंतर-राज्यीय बस टर्मिनल भोपाल, इंदौर, ग्वालियर जबलपुर और रीवा में स्थित हैं। प्रतिदिन 2000 से भी अधिक बसों का संचालन इन पाँच शहरो से होता हैं। शहर के अंदर की आवागमन हेतु, ज्यादातर बसों, निजी ऑटो रिक्शा और टैक्सियों का उपयोग होता है।
देश के बीचो-बीच होने के कारण राज्य के पास कोई समुद्र तट नहीं है। अधिकांश समुद्री व्यापार, पड़ोसी राज्यों में [[कांडला]] और [[जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह]] (न्हावा शेवा) के माध्यम से होता है जोकि सड़क और रेल नेटवर्क के माध्यम से प्रदेश से अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं।
===संचार माध्यम===
==सरकार और राजनीति==
{{see also|मध्य प्रदेश के मुख्यमन्त्रियों की सूची|मध्य प्रदेश के राज्यपालों की सूची}}
मध्य प्रदेश में विधान सभा की 230 सीट है। राज्य से भारत की संसद को 40 सदस्य भेजे जाते है: जिनमे 29 [[लोकसभा]] (निचले सदन) और 11 [[राज्यसभा]] के लिए (उच्च सदन) के लिए चुने जाते हैं। राज्य के संवैधानिक प्रमुख [[राज्यपाल]] होता हैं, जोकि [[भारत के राष्ट्रपति]] द्वारा केंद्र सरकार की अनुशंसा पर नियुक्त किया जाता है। राज्य का कार्यकारी प्रमुख [[मुख्यमंत्री]] होता हैं, जोकि विधानसभा के निर्वाचित सदस्यो में बहुमत के आधार पर चुना नेता होता हैं। वर्तमान में, राज्य के राज्यपाल [[मंगूभाई छगनभाई पटेल]] तथा मुख्यमंत्री, [[भारतीय जनता पार्टी]] के [[मोहन यादव|डॉ. मोहन यादव]] है। राज्य की प्रमुख राजनीतिक दलों में [[भारतीय जनता पार्टी|भाजपा]] और [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] हैं। कई पड़ोसी राज्यों के विपरीत, यहाँ छोटे या क्षेत्रीय दलों को विधानसभा चुनावों में ज्यादा सफलता नहीं मिली है। दिसंबर 2018 में राज्य के चुनावों में कांग्रेस ने 114 सीटों में जीत हासिल कर अन्य पार्टीयो की सहायता से 121 सीटों का पूर्ण बहुमत साबित किया, बीजेपी 109 सीटों पर जीत हासिल कर विपक्ष पर जा बैठी। 2 सीटों के साथ [[बहुजन समाज पार्टी]], राज्य में तीसरे स्थान पर हैं समाजवादी पार्टी ने 1 सीट पर जीत हासिल की वही 4 सीटें निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीतीं।
===पुलिस प्रशासन===
वर्ष 1976 में SBIEO विशेष जाँच सेल अपराध जाँच विभाग (सीआईडी) के अंतर्गत एक शाखा के रूप में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा राज्य अपराध अन्वेषण ब्यूरो गठित किया गया था। वर्ष 1989 में इसका नाम बदल कर राज्य आर्थिक अपराध ब्यूरो रखा गया था, जो गृह विभाग के नियंत्रण में कार्य करता था किंतु 1990 में राज्य आर्थिक अपराध ब्यूरो को सामान्य प्रशासन विभाग के अंतर्गत लाया गया। 22 जून 2013 को राज्य आर्थिक अपराध ब्यूरो नाम बदल कर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ रखा गया।
==खेल==
वर्ष 2013 में राज्य सरकार ने मलखम्ब को राज्य के खेल के रूप में घोषित किया गया। [[क्रिकेट]], [[हॉकी]], [[फुटबॉल]], [[बास्केटबॉल]], [[वॉलीबॉल]], साइकिल चलाना, [[तैराकी]], [[बैडमिंटन]] और [[टेबल टेनिस]] राज्य में लोकप्रिय खेल हैं। [[खो-खो]], [[गिल्ली-डंडा]], सितोलिया(पिट्ठू), कंचे और लंगड़ी जैसे पारंपरिक खेल ग्रामीण क्षेत्रों में काफी लोकप्रिय हैं। [[स्नूकर]], जिसका आविष्कार ब्रिटिश सेना के अधिकारियों द्वारा जबलपुर में किया हुआ माना जाता है, कई अंग्रेजी बोलने वाले और राष्ट्रमंडल देशों में लोकप्रिय है।
क्रिकेट मध्य प्रदेश में सबसे लोकप्रिय खेल है। यहाँ राज्य में तीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम [[नेहरू स्टेडियम (इंदौर)]], [[रूपसिंह स्टेडियम (ग्वालियर)]] और [[होलकर स्टेडियम|होल्कर क्रिकेट स्टेडियम]] (इंदौर) हैं। [[मध्य प्रदेश क्रिकेट टीम]] का रणजी ट्राफी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1998-99 में किया गया था, जब चंद्रकांत पंडित के नेतृत्व वाली टीम उपविजेता के रूप में रही। इसके पूर्ववर्ती, इंदौर के होल्कर क्रिकेट टीम, रणजी ट्राफी में चार बार जीत हासिल कर चुकी हैं।
भोपाल का ऐशबाग स्टेडियम विश्व हॉकी सीरीज की टीम भोपाल बादशाह का घरेलू मैदान है। राज्य में एक फुटबॉल टीम भी है जोकि संतोष ट्राफी में भाग लेता रहता है।
== इन्हें भी देखें ==
* [[टीन का पुरा]]
* [[मध्य प्रदेश के लोकसभा सदस्य]]
* [[मध्य प्रदेश का पर्यटन]]
* [[मध्य प्रदेश के शहरों की सूची]]
* [[मध्य प्रदेश के ज़िले|मध्य प्रदेश के जिले]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20100821212127/http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/st_mp01.htm मध्यप्रदेश]
* [https://web.archive.org/web/20101130131020/http://bharat.gov.in/citizen/tourism_madhyapradesh.php मध्यप्रदेश परिचय]
* [https://web.archive.org/web/20100202013257/http://www.mpinfo.org/mpinfonew/indexhindi.aspx मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग]
* [https://web.archive.org/web/20100923031238/http://www.mpinfo.org/mpinfonew/hindi/factfile/hsindexpage.asp मध्यप्रदेश का इतिहास]
[https://cgcollegeinfo.in/ मध्यप्रदेश का इतिहास]
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{{मध्य प्रदेश राज्य}}
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[[श्रेणी:मध्य प्रदेश]]
[[श्रेणी:भारत के राज्य]]
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खेमचंद्र पुनवानी
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सामग्री को "श्रद्धेय खेमचंद्र जी पुनवानी: जीवन, संघर्ष और इतिहास 1. पारिवारिक पृष्ठभूमि और संगठन से शुरुआती जुड़ाव खेमचंद्र जी पुनवानी का जन्म मन्दसौर जिले की ऐतिहासिक नगरी सीताम..." में बदला
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श्रद्धेय खेमचंद्र जी पुनवानी: जीवन, संघर्ष और इतिहास
1. पारिवारिक पृष्ठभूमि और संगठन से शुरुआती जुड़ाव
खेमचंद्र जी पुनवानी का जन्म मन्दसौर जिले की ऐतिहासिक नगरी सीतामऊ के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। उनका निवास स्थान सीतामऊ का राम मोहल्ला था। युवावस्था में ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विचारों से गहरे प्रभावित हुए।
• जब वर्ष 1951 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, तो मध्य प्रदेश (तब मध्य भारत) में संगठन को खड़ा करने का जिम्मा कुशाभाऊ ठाकरे को मिला।
• ठाकरे जी ने मालवा अंचल के जिन निष्ठावान युवाओं को चुना, उनमें खेमचंद्र जी पुनवानी सबसे आगे थे। उन्होंने राजनीति को कभी पेशा नहीं माना, बल्कि इसे राष्ट्र निर्माण का एक माध्यम समझा।
2. 'दीपक' चुनाव चिह्न और शुरुआती कड़ा संघर्ष (1950-1960 का दशक)
आज की भाजपा जिस विशाल स्वरूप में है, 1950 और 60 के दशक में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत थी। सीतामऊ-सुवासरा का क्षेत्र पूरी तरह ग्रामीण, पिछड़ा और कांग्रेस का अभेद्य गढ़ था।
• साइकिल यात्राएं और दीवार लेखन: खेमचंद्र जी अपने समकालीन साथी ठाकुर किशोर सिंह और मूलचंद खंडेलवाल के साथ साइकिलों पर पीछे दरी, चूना और गेरू बांधकर हफ्तों के लिए गांवों के दौरे पर निकल जाते थे।
• संसाधनों का अभाव: उस समय न प्रचार के लिए गाड़ियां थीं और न पैसा। खेमचंद्र जी स्वयं अपने हाथों से गांवों की कच्ची दीवारों पर जनसंघ का चुनाव चिह्न 'दीपक' पेंट करते थे। रात में किसी भी किसान के ओटले (चबूतरे) पर सो जाना और जो मिल जाए वह खा लेना, उनकी निष्ठा का प्रमाण था।
3. राम मोहल्ला का निवास: जनसंघ का 'अघोषित मुख्यालय'
सीतामऊ के राम मोहल्ला में स्थित खेमचंद्र जी का घर उस दौर में पूरे जिले के जनसंघ कार्यकर्ताओं के लिए एक 'कंट्रोल रूम' हुआ करता था।
• चाहे सुंदरलाल पटवा हों, वीरेंद्र कुमार सखलेचा हों या कुशाभाऊ ठाकरे, जब भी कोई बड़ा नेता मन्दसौर जिले के इस अंचल के दौरे पर आता, तो वह खेमचंद्र जी के घर ही ठहरता था।
• उनके घर की रसोई हर छोटे-बड़े कार्यकर्ता के लिए हमेशा खुली रहती थी। चुनाव की बड़ी-बड़ी रणनीतियाँ उनके घर की साधारण चटाई पर बैठकर बहुत ही सीमित संसाधनों में तय होती थीं।
4. 1964 का ऐतिहासिक उपचुनाव और किंगमेकर की भूमिका
सीतामऊ के राजनीतिक इतिहास में वर्ष 1964 का विधानसभा उपचुनाव सबसे प्रसिद्ध माना जाता है। कांग्रेस ने वहां के सबसे मजबूत और साधन-संपन्न नेता भंवरलाल नाहटा को उतारा था।
• जनसंघ ने ठाकुर किशोर सिंह को प्रत्याशी बनाया। इस चुनाव का पूरा मैनेजमेंट और कमान खेमचंद्र जी पुनवानी ने संभाली।
• उनके कुशल रणनीतिक नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं की मेहनत के दम पर जनसंघ ने कांग्रेस के उस किले को ढहा दिया और ठाकुर किशोर सिंह मात्र 450 वोटों से जीतकर विधानसभा पहुंचे। इस जीत ने पूरे मालवा में जनसंघ का डंका बजा दिया।
5. आपातकाल (1975): मीसा के तहत जेल यात्रा और यातनाएं
25 जून 1975 को जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया, तो विपक्ष के नेताओं की धरपकड़ शुरू हुई। मन्दसौर जिला इस तानाशाही के विरोध का सबसे बड़ा केंद्र बना।
• मीसा के तहत गिरफ्तारी: खेमचंद्र जी पुनवानी ने आपातकाल का खुलकर और प्रखर विरोध किया। इसके परिणामस्वरूप उन्हें मीसा (MISA) के कड़े कानून के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
• जेल की सख्त पाबंदियां: उन्होंने कई महीनों तक जेल की कालकोठरी में कठिन समय बिताया। शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के बावजूद वे झुके नहीं। उनके साथ जेल में ठाकुर किशोर सिंह और अन्य साथी भी बंद थे। जेल के अंदर भी इन नेताओं ने अपनी वैचारिक दृढ़ता को बनाए रखा और बाहर मौजूद कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते रहे।
6. भाजपा का गठन और निष्काम कर्मयोगी का अवसान
1977 में जेल से छूटने के बाद उन्होंने जनता पार्टी को मजबूत किया। लेकिन जब 1980 में 'दोहरी सदस्यता' के विवाद के बाद जनता पार्टी टूटी और 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का जन्म हुआ, तो खेमचंद्र जी तुरंत नई पार्टी के साथ खड़े हो गए।
• उन्होंने अपनी अंतिम सांस तक सुवासरा और सीतामऊ मंडल में भाजपा के सांगठनिक ढांचे को सींचा।
• उनकी सबसे बड़ी महानता यह थी कि उन्होंने अपने जीवन में कभी भी खुद के लिए विधायक या सांसद के टिकट की दौड़ नहीं लगाई। वे हमेशा संगठन के "भीष्म पितामह" बनकर रहे और दूसरों को आगे बढ़ाते रहे।
7. पारिवारिक और राजनीतिक विरासत
खेमचंद्र जी पुनवानी द्वारा बोए गए ईमानदारी, सादगी और वैचारिक निष्ठा के संस्कार आज भी उनके परिवार में जीवित हैं। उनके सुपुत्र रमेश चंद्र पुनवानी और परिवार के अन्य सदस्यों ने सीतामऊ में उनकी इस सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा को हमेशा बनाए रखा।
यही कारण है कि जब भी मन्दसौर जिले को 'जनसंघ की नर्सरी' कहा जाता है, तो खेमचंद्र जी पुनवानी का नाम उस नर्सरी के सबसे मजबूत और त्यागी आधार स्तंभ के रूप में इतिहास के पन्नों पर दर्ज मिलता है।
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खेमचंद्र पुनवानी
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श्रद्धेय खेमचंद्र जी पुनवानी: जीवन, संघर्ष और इतिहास
1. पारिवारिक पृष्ठभूमि और संगठन से शुरुआती जुड़ाव
खेमचंद्र जी पुनवानी का जन्म मन्दसौर जिले की ऐतिहासिक नगरी सीतामऊ के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। उनका निवास स्थान सीतामऊ का राम मोहल्ला था। युवावस्था में ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विचारों से गहरे प्रभावित हुए।
• जब वर्ष 1951 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, तो मध्य प्रदेश (तब मध्य भारत) में संगठन को खड़ा करने का जिम्मा कुशाभाऊ ठाकरे को मिला।
• ठाकरे जी ने मालवा अंचल के जिन निष्ठावान युवाओं को चुना, उनमें खेमचंद्र जी पुनवानी सबसे आगे थे। उन्होंने राजनीति को कभी पेशा नहीं माना, बल्कि इसे राष्ट्र निर्माण का एक माध्यम समझा।
2. 'दीपक' चुनाव चिह्न और शुरुआती कड़ा संघर्ष (1950-1960 का दशक)
आज की भाजपा जिस विशाल स्वरूप में है, 1950 और 60 के दशक में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत थी। सीतामऊ-सुवासरा का क्षेत्र पूरी तरह ग्रामीण, पिछड़ा और कांग्रेस का अभेद्य गढ़ था।
• साइकिल यात्राएं और दीवार लेखन: खेमचंद्र जी अपने समकालीन साथी ठाकुर किशोर सिंह और मूलचंद खंडेलवाल के साथ साइकिलों पर पीछे दरी, चूना और गेरू बांधकर हफ्तों के लिए गांवों के दौरे पर निकल जाते थे।
• संसाधनों का अभाव: उस समय न प्रचार के लिए गाड़ियां थीं और न पैसा। खेमचंद्र जी स्वयं अपने हाथों से गांवों की कच्ची दीवारों पर जनसंघ का चुनाव चिह्न 'दीपक' पेंट करते थे। रात में किसी भी किसान के ओटले (चबूतरे) पर सो जाना और जो मिल जाए वह खा लेना, उनकी निष्ठा का प्रमाण था।
3. राम मोहल्ला का निवास: जनसंघ का 'अघोषित मुख्यालय'
सीतामऊ के राम मोहल्ला में स्थित खेमचंद्र जी का घर उस दौर में पूरे जिले के जनसंघ कार्यकर्ताओं के लिए एक 'कंट्रोल रूम' हुआ करता था।
• चाहे सुंदरलाल पटवा हों, वीरेंद्र कुमार सखलेचा हों या कुशाभाऊ ठाकरे, जब भी कोई बड़ा नेता मन्दसौर जिले के इस अंचल के दौरे पर आता, तो वह खेमचंद्र जी के घर ही ठहरता था।
• उनके घर की रसोई हर छोटे-बड़े कार्यकर्ता के लिए हमेशा खुली रहती थी। चुनाव की बड़ी-बड़ी रणनीतियाँ उनके घर की साधारण चटाई पर बैठकर बहुत ही सीमित संसाधनों में तय होती थीं।
4. 1964 का ऐतिहासिक उपचुनाव और किंगमेकर की भूमिका
सीतामऊ के राजनीतिक इतिहास में वर्ष 1964 का विधानसभा उपचुनाव सबसे प्रसिद्ध माना जाता है। कांग्रेस ने वहां के सबसे मजबूत और साधन-संपन्न नेता भंवरलाल नाहटा को उतारा था।
• जनसंघ ने ठाकुर किशोर सिंह को प्रत्याशी बनाया। इस चुनाव का पूरा मैनेजमेंट और कमान खेमचंद्र जी पुनवानी ने संभाली।
• उनके कुशल रणनीतिक नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं की मेहनत के दम पर जनसंघ ने कांग्रेस के उस किले को ढहा दिया और ठाकुर किशोर सिंह मात्र 450 वोटों से जीतकर विधानसभा पहुंचे। इस जीत ने पूरे मालवा में जनसंघ का डंका बजा दिया।
5. आपातकाल (1975): मीसा के तहत जेल यात्रा और यातनाएं
25 जून 1975 को जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया, तो विपक्ष के नेताओं की धरपकड़ शुरू हुई। मन्दसौर जिला इस तानाशाही के विरोध का सबसे बड़ा केंद्र बना।
• मीसा के तहत गिरफ्तारी: खेमचंद्र जी पुनवानी ने आपातकाल का खुलकर और प्रखर विरोध किया। इसके परिणामस्वरूप उन्हें मीसा (MISA) के कड़े कानून के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
• जेल की सख्त पाबंदियां: उन्होंने कई महीनों तक जेल की कालकोठरी में कठिन समय बिताया। शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के बावजूद वे झुके नहीं। उनके साथ जेल में ठाकुर किशोर सिंह और अन्य साथी भी बंद थे। जेल के अंदर भी इन नेताओं ने अपनी वैचारिक दृढ़ता को बनाए रखा और बाहर मौजूद कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते रहे।
6. भाजपा का गठन और निष्काम कर्मयोगी का अवसान
1977 में जेल से छूटने के बाद उन्होंने जनता पार्टी को मजबूत किया। लेकिन जब 1980 में 'दोहरी सदस्यता' के विवाद के बाद जनता पार्टी टूटी और 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का जन्म हुआ, तो खेमचंद्र जी तुरंत नई पार्टी के साथ खड़े हो गए।
• उन्होंने अपनी अंतिम सांस तक सुवासरा और सीतामऊ मंडल में भाजपा के सांगठनिक ढांचे को सींचा।
• उनकी सबसे बड़ी महानता यह थी कि उन्होंने अपने जीवन में कभी भी खुद के लिए विधायक या सांसद के टिकट की दौड़ नहीं लगाई। वे हमेशा संगठन के "भीष्म पितामह" बनकर रहे और दूसरों को आगे बढ़ाते रहे।
7. पारिवारिक और राजनीतिक विरासत
खेमचंद्र जी पुनवानी द्वारा बोए गए ईमानदारी, सादगी और वैचारिक निष्ठा के संस्कार आज भी उनके परिवार में जीवित हैं। उनके सुपुत्र रमेश चंद्र पुनवानी और परिवार के अन्य सदस्यों ने सीतामऊ में उनकी इस सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा को हमेशा बनाए रखा।
यही कारण है कि जब भी मन्दसौर जिले को 'जनसंघ की नर्सरी' कहा जाता है, तो खेमचंद्र जी पुनवानी का नाम उस नर्सरी के सबसे मजबूत और त्यागी आधार स्तंभ के रूप में इतिहास के पन्नों पर दर्ज मिलता है।
== लोकतंत्र सेनानी श्री खेमचंद्र जी पुनवानी की जीवन परिचय ==
श्री खेमचंद्र जी पुनवानी की धर्मपत्नी का नाम श्री मति कमला देवी पुनवानी है
[[सदस्य:खेमचंद्र पुनवानी|खेमचंद्र पुनवानी]] ([[सदस्य वार्ता:खेमचंद्र पुनवानी|वार्ता]]) 16:10, 17 अक्टूबर 2026 (UTC)
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[[Special:Contributions/खेमचंद्र पुनवानी|खेमचंद्र पुनवानी]] ([[User talk:खेमचंद्र पुनवानी|वार्ता]]) द्वारा किए बदलाव को SM7 के बदलाव से पूर्ववत किया: बर्बरता हटाई।
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#[[:file:IndianoceanKandisa.jpg]]
#[[:file:Jaishankar_Prasad,1889-1937.jpg]]
#[[:file:Jkkk.jpg]]
#[[:file:Justice_League_(soundtrack).jpg]]
#[[:file:Laal_Singh_Chaddha.jpg]]
#[[:file:LinkinParkATSCover.jpg]]
#[[:file:Linkin_park_hybrid_theory.jpg]]
#[[:file:Main_baabul_ke_Des.png]]
#[[:file:Manchester_City.png]]
#[[:file:MeteoraLP.jpg]]
#[[:file:Minutes_to_Midnight_cover.jpg]]
#[[:file:Neelkamal_1947.jpg]]
#[[:file:New_PSG.png]]
#[[:file:Nil_Battey_Sannata_(cover).jpg]]
#[[:file:Os_kii_bunda.jpg]]
#[[:file:Pagglait_poster.jpg]]
#[[:file:Pepsi_IPL_logo.png]]
#[[:file:Php-logo-90.png]]
#[[:file:Pon_de_Replay_cover.png]]
#[[:file:Race_2_2013.jpg]]
#[[:file:Rihanna_-_Music_of_the_Sun.png]]
#[[:file:Rock_On_2_poster.jpg]]
#[[:file:Saiyaara_film_poster.jpg]]
#[[:file:Sohan_Singh_Bhakna.jpg]]
#[[:file:Sony_Pix_new_logo.png]]
#[[:file:Sony_Wah_new_logo.png]]
#[[:file:Sony_Yay_new_logo.png]]
#[[:file:Spain_National_Football_Team_badge.png]]
#[[:file:Spider-Man_Far_From_Home_Soundtrack_Cover.jpg]]
#[[:file:Spider-Man_Into_the_Spider-Verse_(2018_poster).png]]
#[[:file:Swachchhand.jpg]]
#[[:file:Terminator1984movieposter.jpg]]
#[[:file:Terminator2poster.jpg]]
#[[:file:The-dirty-picture.jpg]]
#[[:file:The_Amazing_Spiderman_2.jpg]]
#[[:file:The_Incredible_Hulk_poster.jpg]]
#[[:file:The_Matrix_soundtrack_cover.jpg]]
#[[:file:Transformers07.jpg]]
#[[:file:Troy2004Poster.jpg]]
#[[:file:Wonder_Woman_1984.jpg]]
#[[:file:आप_से_मौसिकी.jpg]]
#[[:file:आयरन_मैन_२_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:एक_पहेली_लीला_एल्बम_कवर.jpg]]
#[[:file:एक्स-मेन_ऑरिजिंस-_वूल्वरिन_फिल्म_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:एक्स-मैन_फिल्म_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:कबाली_-_फिल्म_.jpg]]
#[[:file:घोस्ट_राइडर_डीवीडी_कवर.jpeg]]
#[[:file:जॉन_कार्टर_फ़िल्म_पोस्टर.jpg]]
#[[:file:डेस्पासिटो.png]]
#[[:file:डॉक्टर_सट्रेंज-फिल्म_पोस्टर.jpg]]
#[[:file:तुम_ही_हो.jpg]]
#[[:file:नट_बोल्टू.png]]
#[[:file:पद्मावत_(फ़िल्म_एल्बम).jpg]]
#[[:file:पार्टी_विद_द_भूतनाथ.jpg]]
#[[:file:बालवीर_रिटर्न्स.png]]
#[[:file:यहाँ_मैं_घर_घर_खेली.jpg]]
#[[:file:यार_ना_मिले.jpg]]
#[[:file:रक्षा_बंधन.png]]
#[[:file:लाहौर_चिह्न.jpg]]
#[[:file:शपथ_लाइफ_ओके.jpg]]
#[[:file:समुंदर_के_लुटेरे-_अन्तिम_घडी_पोस्टर.jpeg]]
#[[:file:सोनिक_निकलोडियन.webp]]
#[[:file:सौदागर.jpg]]
#[[:file:स्कायफॉल_फिल्म_पोस्टर_और_हिंदी_वीसीडी.png]]
#[[:file:हैरी_पॉटर_और_रहस्यमयी_तहख़ाना_फिल्म_डीवीडी_कवर.jpeg]]
[[सदस्य:Balajijagadesh|Balajijagadesh]] ([[सदस्य वार्ता:Balajijagadesh|वार्ता]]) 09:04, 14 जुलाई 2026 (UTC)
:{{सुनो प्रबंधक}} मेंशन बिना हस्ताक्षर के किया गया था; अतः पिंग प्रणाली के कार्य न करने से किसी के पास मेंशन की अधिसूचना नहीं पहुँची। प्रबंधकों को दुबारा पिंग किया जा रहा।
:उपर्युक्त में से कई तो ऐसे चित्र हैं जिनका उपयोग संभवतः बाद के संपादनों में हट गया लगता है। उदाहरण के लिये फिल्मों के पोस्टर, जबकि फ़िल्म पर लेख मौजूद है। ऐसे चित्रों को दुबारा फ़िल्म ज्ञानसंदूक में जोड़ा जा सकता है। {{पिंग|हिंदुस्थान वासी}} जी शायद कुछ मदद कर पायें।
:जिन्हें किसी लेख में नहीं जोड़ा जा सकता उन्हें हटा दिया जाना चाहिये।--[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 12:33, 14 जुलाई 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:SM7|SM7]] जी और @[[सदस्य:Balajijagadesh|Balajijagadesh]] जी, मैं ऐसे चित्रों की हर कुछ माह से समीक्षा करता हूँ। हालांकि आधे चित्र पुनरीक्षण के अभाव में हटाये हुये होते हैं अतः इनका पुनरीक्षण करना पड़ेगा। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 17:12, 15 जुलाई 2026 (UTC)
::ऐसा ही कुछ हुआ होगा। यदि केवल इतने ही चित्र ऐसे हैं तो समीक्षा करके हटाए या रखे जा सकते हैं। [[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|<font color="80 00 80">हिंदुस्थान वासी</font>]]<sup> ''' [[सदस्य वार्ता:हिंदुस्थान वासी|वार्ता]]''' </sup> 07:01, 16 जुलाई 2026 (UTC)
:::@[[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|हिंदुस्थान वासी]] नमस्ते। समीक्षा में नहीं इन्हें वापस उन संबंधित लेखों में जोड़ने के कार्य में मदद माँग रहा था, क्योंकि आपकी रुचि फिल्मों में है। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 08:11, 16 जुलाई 2026 (UTC)
::::अच्छा। बात तो वही आएगी पर। यदि नए चित्र पोस्टर के तौर पर लगा दिए गए हैं। तो इनका शीह नामांकन ही होगा। पक्का तो नहीं कह सकता। लेकिन इनको देखेंगे का प्रयत्न करूंगा। [[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|<font color="80 00 80">हिंदुस्थान वासी</font>]]<sup> ''' [[सदस्य वार्ता:हिंदुस्थान वासी|वार्ता]]''' </sup> 08:24, 16 जुलाई 2026 (UTC)
== विकी परियोजनाओं का अनुवाद ==
हिन्दी विकिपीडिया पर अन्य भाषाओं की तुलना में काफ़ी चीज़ों के बारे में जानकारी कम है, हालांकि औसतन कहना चाहिए कम नहीं। स्थान, व्यक्ति, कोई सिद्धान्त, पुस्तक आदि पर तो काम हो जायेगा लेकिन मुझे लगता है कई सांचों में कमी है या वो हिंदी के अनुरूप नहीं है। इसी तरह बहुत से परियोजना पन्ना का हिंदी में अंतरभाषा कड़ी नहीं है या कड़ी है लेकिन सीधा अंग्रेज़ी की कड़ी हैं।
मेरा मानना है , प्रबन्धक नीति-निर्देश, शर्तें आदि पर ध्यान दें। केवल प्रबंधकों पर ही पूरा बोझ डालना भी सही नहीं है क्योंकि उनके अन्य कार्य भी हैं, तो सामान्य संपादकों को भी इस काम पर लगना चाहिए।
उदाहरण के लिए ये
[[https://en.wikipedia.org/wiki/Wikipedia:Compare_criteria_Good_v._Featured_article|क्या यह हिंदी में अन्य नाम से है या नया पृष्ठ बनाना चाहिए]] अंग्रेज़ी विकी से। [[सदस्य:Pushkar Singh|<span style="color:DeepPink;">पुष्कर सिंह</span>]] [[सदस्य वार्ता:Pushkar Singh|<span style="color:Red;">✉️</span>]] 09:19, 24 जुलाई 2026 (UTC)
== Request for comment (the future of Abstract Wikipedia) ==
<bdi lang="en" dir="ltr" class="mw-content-ltr">
Apologies if this has not yet been translated into your wiki's language. {{int:Please-translate}}
You are invited to voice your opinions in a [[:m:Requests for comment/The future of Abstract Wikipedia|request for comment about the future of Abstract Wikipedia]]. {{Int:Feedback-thanks-title}}
[[:m:User:Kowal2701|Kowal2701]] ([[:m:User talk:Kowal2701|talk]]) 12:24, 24 जुलाई 2026 (UTC)
</bdi>
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=Distribution_list/Global_message_delivery&oldid=30513860 पर मौजूद सूची का प्रयोग करके User:DreamRimmer@metawiki द्वारा भेजा गया संदेश -->
== Invitation to Participate in Kerala Culture Month 2026 ==
Dear Wikimedia Contributors,
We are excited to announce '''[[m:Kerala_Culture_Month_2026|Kerala Culture Month 2026]]''', a collaborative campaign launched in conjunction with [[m:WikiConference_India_2026|'''WikiConference India 2026'''.]] This initiative aims to expand and enhance content about Kerala across all Wikimedia projects, creating a comprehensive, open-access knowledge base.
'''Campaign Focus:'''
* Expand Wikipedia articles about Kerala in multiple languages
* Improve content quality with citations, images, and comprehensive information
* Populate Wikimedia Commons with freely licensed Kerala media
* Enrich Wikidata with structured information about Kerala-related topics
We invite you to contribute by writing new articles, enhancing existing ones, uploading media, or organizing data on Wikidata. Whether you're an experienced editor or new to Wikimedia, your participation matters.
For more information and to get involved, visit the campaign page: https://meta.wikimedia.org/wiki/Kerala_Culture_Month_2026 on your preferred Wikimedia project.
Best regards,
''Communications Team, WCI 2026''
<nowiki>~~~~</nowiki> [[सदस्य:Shadabgdg|Shadabgdg]] ([[सदस्य वार्ता:Shadabgdg|वार्ता]]) 15:51, 25 जुलाई 2026 (UTC)
== इन तीन साँचों को इम्पोर्ट कर दें ==
प्रबंधक जी,
इन तीन साँचों से संबंधित लेख लिखे जा चुके... आवश्यकता है कि इनके साँचे भी बन जायें ...
[[:en:Template:Quranic manuscripts]]
साँचा:क़ुरआन की पांडुलिपियाँ - श्रेणी:क़ुरआन की पांडुलिपियाँ --+-- श्रेणी:क़ुरआन
[[:en:Template:Campaignbox Campaigns of Muhammad]]
साँचा:मुहम्मद के सैन्य अभियान - श्रेणी:मुहम्मद
[[:en:Template:Usul al-Fiqh]] साँचा:उसूल-अल-फ़िक़्ह श्रेणी:फ़िक़्ह
आनुरोध कर्ता ... 📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 08:42, 29 जुलाई 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:Umarkairanvi|Umarkairanvi]] जी, [[सदस्य:Umarkairanvi/Template:Usul al-Fiqh]] पर आयात कर दिया गया है। अनुवाद के बाद मेरे वार्ता पन्ने पर सूचित कर दीजियेगा ताकि इसे साँचा: नामस्थान में ले जाया जा सके। आगे से साँचों के आयात के लिये [[वि:आयात]] पर अनुरोध किया करें, यहाँ चौपाल पर नहीं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 15:14, 3 अगस्त 2026 (UTC)
== यहाँ एक उचित हेडिंग दें ==
i am creating a new page मलिक अहमद खान फ़ारूकी
However this message comesup
इस पृष्ठ पर केवल विश्वसनीय सदस्यों को संपादन करने की अनुमति है। यदि आपका मानना है कि आपका कार्य रचनात्मक था, कृपया इस पृष्ठ के वार्ता पृष्ठ पर अपनी बात सप्रमाण रखें। बिना प्रमाण दावे अथवा पक्षपातपूर्ण अनुरोध हटा दिए जायेंगे। विघटनकारी व्यवहार जारी रखने पर आपके संपादन करने पर रोक लगाईं जा सकती है।
why am i unable to create this page. this is a new page
::{{Ping|Mundhalia746}} We already have a page on [[अहमद खान फ़ारूकी|मलिक अहमद खान फ़ारूकी]]. Perhaps you can help in improving the page contents or by adding references. --[[सदस्य:Hindustanilanguage|डॉ. मुज़म्मिल]] ([[सदस्य वार्ता:Hindustanilanguage|वार्ता]]) 19:13, 29 जुलाई 2026 (UTC)
== समस्या ==
@[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] और @[[सदस्य:SM7|SM7]] जी, मैं [[:चित्र:Silsilayy.jpg]] पर स्थानांतरण का अनुरोध किया जिसमें उसके [[चित्र वार्ता:Silsilayy.jpg|वार्ता पृष्ठ]] में Template:Rename media न दिखने की समस्या आ रही है। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 17:27, 31 जुलाई 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी नमस्ते।
:जब पूछना दो ही लोगों से है तो यहाँ चौपाल पे लिखने का कोई औचित्य नहीं। यह कोई सामूहिक चर्चा का विषय नहीं है।
:आपने जो {{tl|नाम बदलें}} का प्रयोग लिखा है उसके बाद साफ़-साफ़ लिखा हुआ तो आ ही रहा है कि यह साँचा फ़ाइलों के नाम बदलने के लिये अनुरोध करने के लिये नहीं है। इसकी जगह दूसरा साँचा है {{tl|rename media}} जिसका प्रयोग करके यह अनुरोध लिखा जाना चाहिए। तो उस साँचे को इस्तेमाल करिये। उसके प्रयोग की विधि उसी साँचे को देखने पे समझ में आ जायेगी।
:दूसरी बात, आपने नाम बदलें का अनुरोध भी एक व्यक्ति को पिंग करके लिखा था। इसकी क्या आवश्यकता पड़ गयी? आपको पहले भी मना किया है कि ऐसे अनुरोध में किसी व्यक्ति विशेष को पिंग करने की आवश्यकता नहीं। अगर आपको लगता है कि उसी व्यक्ति को आदेश देना है तो उसके वार्ता पन्ने पे लिखिए। यही काम आप स्थानांतरण अनुरोध में करते हैं, यही काम आप सूचनापट पे करते हैं।
:तीसरी बात, फ़ाइल का नाम हिंदी में कर लेने से क्या अतिरिक्त सुविधा मिल जायेगी? कोशिश तो यह की जाती है कि विकिमीडिया के सभी प्रोजेक्ट्स पर ऐसी फाइलें एक ही नाम से रहें। आपका अनुरोध भी स्वीकार करने योग्य नहीं है। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 03:49, 1 अगस्त 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:SM7|SM7]] और @[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] जी, मैंने यह अनुरोध 'ट्विंकल टूल' से किया था, जिससे सिस्टम ने डिफ़ॉल्ट रूप से गलत साँचा लगा दिया। मैंने अब वार्ता पृष्ठ पर इसे सुधार दिया है। प्रबंधकों से निवेदन है कि ट्विंकल में इस तकनीकी त्रुटि को भी ठीक करें ताकि अन्य सदस्यों को परेशानी न हो।
::<br />
::मेरा मुख्य उद्देश्य फ़ाइल का नाम हिंदी में करना नहीं था, बल्कि पोस्टर और अंग्रेज़ी विकि के अनुसार इसकी सही स्पेलिंग (<code>Silsilayy</code> से <code>Silsiilay</code>) करना था। पिंग के विषय में आपकी बात मैं अच्छी तरह समझ गया हूँ और आगे से इसका पूरा ध्यान रखूँगा।
::<nowiki>धन्यवाद। ~~~~</nowiki> [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 09:31, 1 अगस्त 2026 (UTC)
:::और महोदय साँचा:Rename media में '''नाम परिवर्तन''' का '''कारण''' दिखने का स्थान नहीं [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 09:35, 1 अगस्त 2026 (UTC)
::::@[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी, ट्विंकल "मुख्य" (लेख) नामस्थान के अतिरिक्त अन्य नामस्थानों के लिये पूरी तरह लोकलाइज नहीं है। अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि अन्य नामस्थानों में इसका प्रयोग न करें और ऐसे अनुरोध मैनुअली करें। अगर ट्विंकल विकल्प दिखने से अधिक भ्रम की स्थिति हो तो इसे अन्य नामस्थानों के लिये सुधार होने तक निष्क्रिय भी किया जा सकता है ताकि आप जैसे अन्य सदस्यों को कोई परेशानी न हो।
::::Rename media साँचे में आपको अलग से प्राचल नाम "reason =" लिखने की आवश्यकता नहीं। वैसे यह साँचा भी किसी ने परीक्षण के तौर पर बनाया था और पूरी तरह अनूदित नहीं है। समय मिलने पर इसका भी लोकलाइजेशन पूरा कर दिया जाएगा। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 11:12, 1 अगस्त 2026 (UTC)
== अनुवाद करते हुए ==
मैं संपादित करना चाहता हूँ [[मॉड्यूल:Lua banner]] क्योंकि मैं "This template uses Lua" को "यह टेम्पलेट Lua का उपयोग करता है।" में बदलना चाहता हूँ। [[विशेष:योगदान/~2026-42535-82|~2026-42535-82]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-42535-82|वार्ता]]) 05:08, 1 अगस्त 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:~2026-42535-82|~2026-42535-82]] आपका अनुरोधित अनुवाद समय मिलते ही पूरा कर दिया जायेगा। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 15:15, 3 अगस्त 2026 (UTC)
== मोबाइल संस्करण समस्या ==
किसी अनजाने कारण से, मेरे खाते में हिन्दी विकिपीडिया वेबसाइट मोबाइल संस्करण में अटका हुआ है। इससे में नारायम का प्रयोग नहीं कर सकता। कृपया इस समस्या को जल्द से जल्द ठीक करें। [[सदस्य:अमर तिवारी|अमर तिवारी]] ([[सदस्य वार्ता:अमर तिवारी|वार्ता]]) 10:13, 6 अगस्त 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:अमर तिवारी|अमर तिवारी]] यह आपके ब्राउजर से संबंधित हो सकता है या विकिपीडिया के किसी गैजेट से संबंधित। आप अपनी वरीयताओं (Preferences) में जाएँ और सभी गैजेट हटा दें (अनचेक करके सहेज लें)। खाते से लॉग आउट करें और फिर दुबारा लॉगिन करें। इसके बाद संपादन करके चेक करें। बाद में आप वरीयताओं में जाकर पुनः उन गैजेट्स को सक्रिय कर सकते हैं जिनका इस्तेमाल आप वास्तव में करते हों। कोई अनावश्यक गैजेट न चेक रहे। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 10:38, 6 अगस्त 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:SM7|SM7]] कैश मिटाने के बाद समस्या ठीक हो चुकी है। धन्यवाद. [[सदस्य:अमर तिवारी|अमर तिवारी]] ([[सदस्य वार्ता:अमर तिवारी|वार्ता]]) 14:46, 6 अगस्त 2026 (UTC)
== Linux के उच्चारण के संबंध में। ==
संजीव कुमार जी के ही निवेदन पर यह चर्चा है। आंग्लम् विकिपीडिया पर Linux का उच्चारण लिनुक्स दिखाया गया है, जबकि स्वयं लीनूस तूर्वाल्ड्स इसका उच्चारण लीनुक्स जैसा कर रहे थे। वहीं हिंदी पर यह "लिनक्स" है। बस यही चाहते हैं कि इस पर मत कराकर ठीक कराया जाए, ताकि भूलवश भी ग़लत जानकारी न दें बैठें।
17:26, 6 अगस्त 2026 (UTC)Dimple323
:: "लिनक्स" उचित है । --[[सदस्य:Hindustanilanguage|डॉ. मुज़म्मिल]] ([[सदस्य वार्ता:Hindustanilanguage|वार्ता]]) 22:07, 7 अगस्त 2026 (UTC)
== मार्क ज़करबर्ग के नाम की वर्तनी के संबंध में। ==
@संजीव कुमार जी, इनका सरनेम कभी "जुकरबर्ग" तो कभी "जुकेरबर्ग" लिखा जा रहा है। इसका शीर्षक "मार्क ज़करबर्ग" के रूप में परिवर्तित किया जाए। आप चेक करिएगा।[[सदस्य:Dimple323|Dimple323]] ([[सदस्य वार्ता:Dimple323|वार्ता]]) 15:52, 8 अगस्त 2026 (UTC)Dimple323
:स्रोत: https://www.bbc.com/hindi/articles/c62el743dy0o [[सदस्य:Dimple323|Dimple323]] ([[सदस्य वार्ता:Dimple323|वार्ता]]) 10:49, 25 अगस्त 2026 (UTC)
== प्रश्न ==
यदि किसी लेख में बहुत कम सामग्री हो (जैसे केवल एक वाक्य), तो क्या उसे शीघ्र हटाने के लिए नामांकित करना उचित है? [[सदस्य:अमर तिवारी|अमर तिवारी]] ([[सदस्य वार्ता:अमर तिवारी|वार्ता]]) 07:09, 11 अगस्त 2026 (UTC)
:नहीं। आपको उस लेख और उसकी सामग्री को जोड़कर उसका विस्तार करना चाहिए। यदि किसी लेख में जोड़ने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं है, तो दो या उससे अधिक संबंधित लेखों का विलय करके एक विस्तृत लेख बनाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में छोटे लेखों को अलग रखने के बजाय उन्हें मुख्य लेख पर पुनर्निर्देशन किया जा सकता है। [[सदस्य:Hindustanilanguage|डॉ. मुज़म्मिल]] ([[सदस्य वार्ता:Hindustanilanguage|वार्ता]]) 16:40, 13 अगस्त 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:Hindustanilanguage|Hindustanilanguage]] आपके उत्तर के लिए धन्यवाद। [[सदस्य:अमर तिवारी|अमर तिवारी]] ([[सदस्य वार्ता:अमर तिवारी|वार्ता]]) 12:09, 14 अगस्त 2026 (UTC)
== लेखों के मूल्यांकन में नरमी ==
मेरा सवाल सभी प्रबंधकों से है कि क्या लेखों के मूल्यांकन में थोडी नरमी नहीं बरती जा सकती है। मुझे याद है कि संविधान संपादनोत्सव वाले लेखों के मूल्यांकन का कार्य मुझे दिया गया था। मेरे हिसाब से मैंने काफी अच्छा मूल्यांकन किया था। वर्तमान प्रबंधकों जितनी सख्ती बरते भी हम लेखों की गुणवत्ता बनाये रख सकतेें हैं। यदि गलती 3-4 से ज्यादा हो तभी लेखों को शून्य दिया जाए।
आप समग्र गुणवत्ता के अंक कम कर सकते हैं,परंतु लेखों पर शून्य नंबर देना,दूसरों के घंटो की मेहनत को बेकार बताना है। मैं इसके सख्त खिलाफ हूँ। <span style="color:green;">✍</span>[[u:शीतल सिन्हा|<u><span style="color:Magenta;">शीतल </span></u>]] ([[User talk:शीतल सिन्हा|<span style="color:blue;">talk</span>]]) 19:01, 14 अगस्त 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:शीतल सिन्हा|शीतल सिन्हा]] जी नमस्ते! आपको देर से उत्तर देने के लिए क्षमा चाहता हूँ। आपने उपर्युक्त संविधान संपादनोत्सव में अच्छा मूल्यांकन किया था, इसमें कोई संदेह नहीं है। जून वाले संपादनोत्सव में जिसे आप सख्ती मान रही हैं वह न्यूनतम आवश्यकता है लेख निर्माण की। अगर मशीन से या मशीनी ढंग से ही लिखना है तो यह घंटों वाली मेहनत कहीं और की जानी चाहिए, क्योंकि इस कोटि के लेख कुछ मिनटों में ही मशीन (बॉट) से बनवाए जा सकते हैं। आपको 'हिंदी विकिपीडिया सम्मेलन 2026' में इसका उदाहरण दिया भी गया था। कृपया जिन गलतियों का उल्लेख आपके मूल्यांकन टिप्पणी में किया जाता है उसे दोहराने से बचें। आपका पूरा अधिकार है कि आप प्रतिरोध करें लेकिन आपकी इच्छा से आपका मूल्यांकन किया जाना न तो उचित है न ही संभव। चूँकि आपके अधिकांश लेखों का मूल्यांकन मैंने ही किया है इसलिए उत्तर देना मेरा दायित्व था। देर से उत्तर देने के लिए एक बार पुनः क्षमा चाहता हूँ। [[User:अजीत कुमार तिवारी|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color:red">'''अजीत कुमार तिवारी'''</span>]]<sup>[[User talk:अजीत कुमार तिवारी|<span style="color:green"> '''बातचीत'''</span>]]</sup> 16:13, 22 अगस्त 2026 (UTC)
== Invitation to pre-conference activities for WikiConference India 2026 ==
Dear Wikimedia contributors,
As the Wikiconference India 2026 draws nearer, the excitement is soaring as well! We are sending this message to inform you that two pre-conference activities are being held as a part of this meetup. The Wiki Loves Villages campaign 2026 starts on 15th August 2026, so get ready to contribute! This initiative aims to expand and enhance content and media about villages across all Wikimedia projects, creating a comprehensive, open-access knowledge base.
Campaign Focus:
A. Expand Wikipedia articles about Villages in India in multiple languages
B. Improve content quality with citations, images, and comprehensive information
C. Populate Wikimedia Commons with freely licensed media about a village
D. Enrich Wikidata with structured information about Village-related topics
We invite you to contribute by writing new articles, enhancing existing ones, uploading media, or organizing data on Wikidata. Whether you're an experienced editor or new to Wikimedia, your participation matters.
For more information and to get involved, visit the campaign page ([https://meta.wikimedia.org/wiki/Wiki_Loves_Village_2026](https://meta.wikimedia.org/wiki/Wiki_Loves_Village_2026)) on your preferred Wikimedia project.
Another way to contribute to a pre-conference activity is the innovative Wiki Loves Medicinal Plants 2026- it is a photography campaign hosted by WikiConference India 2026. The activity already started on 1st August and ends on 31st August 2026, so gear up to document local medicinal knowledge and fill the knowledge gaps.
This initiative aims to expand and enhance freely licensed images and other media of medicinal plants in and around our surroundings.
Campaign Focus:
A. Add freely licensed images of medicinal plants.
B. Improve description of existing medicinal plants.
C. Improve depictions of images.
D. Improve wikidata items.
We invite you to contribute by adding new photos, videos or enhancing existing ones. Whether you're an experienced editor or new to Wikimedia, your participation matters.
To know more about how to contribute, rules, and tips head to the Meta page to find information ([https://commons.wikimedia.org/wiki/Commons:Wiki_Loves_Medicinal_Plants](https://commons.wikimedia.org/wiki/Commons:Wiki_Loves_Medicinal_Plants)) on your preferred Wikimedia project.
Best regards,<br>WikiConference India 2026 pre-conference organizing team
-- '''[[user:kuldeepburjbhalaike|<i style="color:#FF4500; font-family:sylfaen">KuldeepBurjBhalaike</i>]]''' <sup style="color:#FF4500; font-family:georgia">([[User_talk:Kuldeepburjbhalaike|Talk]])</sup> 11:55, 13 अगस्त 2026 (UTC)
== हिंदी विकिमीडियन्स यूजर ग्रुप सूचना ==
* [[w:hi:विकिपीडिया:हिंदी विकिपीडिया सम्मेलन 2026|विकिपीडिया:हिंदी विकिपीडिया सम्मेलन 2026]] 7-9 अगस्त को नई दिल्ली के पास गुरुग्राम में संपन्न हुआ।
* [[w:hi:विकिपीडिया:स्वतंत्रता दिवस संपादनोत्सव 2026|विकिपीडिया:स्वतंत्रता दिवस संपादनोत्सव 2026]]- 15 अगस्त-14 सितंबर 2026 का आयोजन कल से शुरु हो रहा है जिसमें 80 लेख स्वीकृत होने पर 8000 के निश्चित पुरस्कार जीते जा सकते हैं।
* [[s:hi:विकिस्रोत:स्वतंत्रता दिवस संपादनोत्सव २०२६|विकिस्रोत:स्वतंत्रता दिवस संपादनोत्सव २०२६]] 15-30 अगस्त 2026 को विकिस्रोत पर आयोजित संपादनोत्सव में 40 अंक के पृष्ठ शोधित कर निश्चित पुरस्कार प्राप्त करें।
* [[w:hi:विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/जून 2026|विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/जून 2026]] के परिणाम घोषित हो गए हैं।
* [[s:hi:विकिस्रोत:गुणवत्ता संवर्द्धन संपादनोत्सव/जुलाई २०२६|विकिस्रोत:गुणवत्ता संवर्द्धन संपादनोत्सव/जुलाई २०२६]]
:सदस्यों से अनुरोध है कि 15 अगस्त से शुरु होने वाले संपादनोत्सवों में शामिल होकर हिंदी ई-सामग्री के निर्माण में सहयोग करें। --[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 17:49, 14 अगस्त 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] जी, अगर आप विकिस्रोत:स्वतंत्रता दिवस संपादनोत्सव २०२६ में 40 पृष्ठ के स्थान पर 40 अंक लिख दें तो अच्छा हो। क्योंकि विकिस्रोत पर कुछ पृष्ठ के 4 अंक दिए जा रहे है।
::विकिपीडिया:स्वतंत्रता दिवस संपादनोत्सव 2026 के पुरस्कार को स्पष्ट करें कि क्या 'विशेष पुरस्कार' सामान्य पुरस्कार राशि के अतिरिक्त दिया जाएगा? यदि किसी प्रतिभागी के 80 लेख स्वीकृत होते हैं, तो क्या गणना के अनुसार कुल राशि ₹17,000 (₹9,000 सामान्य पुरस्कार + ₹8,000 विशेष पुरस्कार) देय होगी? [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 02:00, 15 अगस्त 2026 (UTC)
:::40 पृष्ठ को 40 अंक के पृष्ठ किया गया। विशेष पुरस्कार को भी स्पष्ट किया गया है। यह पुरस्कार किसी अन्य पुरस्कार के साथ मिलाकर नहीं दिया जाएगा बल्कि 80 लेख स्वीकृत होने पर सभी को मिलेगा। प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कारों के लिए न्यूनतम अर्हता क्रमशः 100, 90 एवं 80 अंक है। एक से अधिक प्रतिभागियों के 80 लेख स्वीकृत होने की स्थिति में अंकों की यह संख्या बढ़ सकती है। किसी भी स्थिति में यह विशिष्ट पुरस्कार प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कारों के अलावा ही दिए जाएँगे, साथ नहीं। [[User:अजीत कुमार तिवारी|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color:red">'''अजीत कुमार तिवारी'''</span>]]<sup>[[User talk:अजीत कुमार तिवारी|<span style="color:green"> '''बातचीत'''</span>]]</sup> 03:26, 15 अगस्त 2026 (UTC)
::::@[[सदस्य:अजीत कुमार तिवारी|अजीत कुमार तिवारी]] जी धन्यवाद। भारत-यूक्रेन सांस्कृतिक धरोहर अनुभाग अभी उपलब्ध नहीं है [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 03:29, 15 अगस्त 2026 (UTC)
:::::शीघ्र ही उपलब्ध करवाया जाएगा। यदि आपको जल्दी है तो इस विषय से जुड़े अपने पसंदीदा लेखों का प्रस्ताव दे सकते हैं। [[User:अजीत कुमार तिवारी|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color:red">'''अजीत कुमार तिवारी'''</span>]]<sup>[[User talk:अजीत कुमार तिवारी|<span style="color:green"> '''बातचीत'''</span>]]</sup> 03:33, 15 अगस्त 2026 (UTC)
::::::@[[सदस्य:अजीत कुमार तिवारी|अजीत कुमार तिवारी]] जी, संपादकोत्सव के पृष्ठ में 'अपने लेख यहाँ जमा करें' पर पुराने संपादकोत्सव की कड़ी लगी है। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 03:37, 15 अगस्त 2026 (UTC)
::::::::संपादनोत्सव संबंधी प्रश्नों की चर्चा संपादनोत्सव के वार्ता पृष्ठ पर करें। यहाँ की सामग्री वहाँ कॉपी कर रहा हूँ। आगे की चर्चा वहीं होगी। वहीँ अपना उत्तर भी दे रहा हूँ।
:::::::[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 07:33, 15 अगस्त 2026 (UTC)
== लक्ष्मी मंदिर, खजुराहो पृष्ठ पर अर्ध-सुरक्षा हटाने का अनुरोध ==
नमस्ते,
मैं [[लक्ष्मी मंदिर, खजुराहो]] नाम से एक नया पृष्ठ बनाने का प्रयास कर रहा हूँ, लेकिन मुझे एक त्रुटि का सामना करना पड़ रहा है जो कहती है कि "इस पृष्ठ पर केवल विश्वसनीय सदस्यों को संपादन करने की अनुमति है।"
<span style="color:#d4330b;"></span>[[सदस्य:RJ Raawat|<span style="color:#d4330b;"><b>RJ RAAWAT</b></span>]]<span> | </span>[[सदस्य वार्ता:RJ Raawat|<small style="color:#373231;"><b>Talk</b></small>]] 09:09, 16 अगस्त 2026 (UTC)
== [[ब्रज भूमि (फिल्म)]] को हटाना ==
[[सदस्य:SM7|SM7]], अंग्रेजी विकीपीडिया से यह लेख [[ब्रज भूमि (फिल्म)]] हटाया जा चुका है। यहां से भी हटाया जाये। यह प्रचार सामग्री भी हो सकता है। उचित और विश्वसनीय सन्दर्भ भी लेख में नहीं हैं। वर्तमान में ज्ञानकोष हेतु उपयोगी नहीं है। एक क्षेत्रीय फिल्म का प्रचार। [[सदस्य: संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी तथा [[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|हिंदुस्थान वासी]] जी आप भी ध्यान दें।[[सदस्य:TheTarget2027|TheTarget2027]] ([[सदस्य वार्ता:TheTarget2027|वार्ता]]) 09:23, 17 अगस्त 2026 (UTC)
== संपर्क सूत्र निर्वाचन 2026 अक्तूबर के प्रस्तावित नियम पर मत दें ==
[[विकिपीडिया:संपर्क सूत्र]] पृष्ठ पर आगामी अक्तूबर में होने वाले संपर्क सूत्र के निर्वाचन के नियम प्रस्तावित किए गए हैं। पिछले वर्ष के निर्वाचन के दौरान हुई चर्चाओं के आधार पर प्रबंधक बैठक में चर्चा के उपरांत संशोधित नियम प्रस्तावित किए गए हैं। इनपर सदस्यों की राय का स्वागत है। [[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 23:52, 21 अगस्त 2026 (UTC)
:सदस्यों की राय के अनुरूप संशोधित संपर्क सूत्र निर्वाचन नियमावली पुनः सदस्यों की राय के लिए प्रस्तुत है। सदस्य 17 सितंबर तक इसपर राय दे सकते हैं। [[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 03:54, 10 सितंबर 2026 (UTC)
{{चर्चा शीर्ष}}
== स्वतंत्रता दिवस संपादनोत्सव 2026 से सम्बंधित ==
'''महोदय/महोदया जी,'''
मुझे एक जानकारी चाहिए थी। क्या कोई सदस्य एक बार में अपनी पसंद के कई लेख चुनकर उन्हें भविष्य में बनाने के लिए चिन्हित कर सकता है? [[विकिपीडिया:स्वतंत्रता_दिवस_संपादनोत्सव_2026]]
उदाहरण के लिए, @[[सदस्य:सीमा1|सीमा1]] नामक उपयोगकर्ता ने लगभग 11–12 लेख पहले से चिन्हित किए हुए हैं, लेकिन अभी तक उन पर लेख बनाने का कार्य शुरू नहीं हुआ है। चूँकि एक दिन में 5 से अधिक लेख अपलोड नहीं किए जा सकते हैं, इसलिए मैं जानना चाहता हूँ कि क्या इस प्रकार पहले से अधिक संख्या में लेख चिन्हित करना किसी नियम के विरुद्ध है, या फिर कोई भी सदस्य अपनी सुविधा के अनुसार भविष्य में बनाने के लिए कितने भी लेख चिन्हित कर सकता है?
कृपया इस संबंध में मेरा मार्गदर्शन करें।
धन्यवाद।
[[सदस्य:ATS2026|<span style="font-weight:bold; color:#0645AD;">ATS2026</span>]] · [[सदस्य वार्ता:ATS2026|<span style="color:#008080;">वार्ता</span>]] 10:18, 22 अगस्त 2026 (UTC)
:मैंने पहले कुछ लेख अपने नाम से चिन्हित किए थे, लेकिन अब उन्हें हटा दिया है, अतः आप उन लेखों पर कार्य कर सकते हैं। जहाँ तक नियमों की बात है, मेरी समझ के अनुसार पहले एक लेख पर कार्य करके उसे जमा करना और उसके बाद अगले लेख को चिन्हित करना उचित प्रक्रिया है। एक साथ बहुत अधिक लेख चिन्हित न करने की अपेक्षा है। [[सदस्य:सीमा1|सीमा1]] ([[सदस्य वार्ता:सीमा1|वार्ता]]) 11:22, 22 अगस्त 2026 (UTC)
::बहुत-बहुत धन्यवाद @[[सदस्य:सीमा1|सीमा1]] जी, आपने जानकारी देकर मेरी शंका दूर कर दी। अब मुझे संबंधित नियम अच्छी तरह समझ में आ गया है। [[सदस्य:ATS2026|<span style="font-weight:bold; color:#0645AD;">ATS2026</span>]] · [[सदस्य वार्ता:ATS2026|<span style="color:#008080;">वार्ता</span>]] 15:56, 22 अगस्त 2026 (UTC)
:::संपादनोत्सव संबंधी आगे की चर्चा उसके वार्ता पृष्ठ पर करें। चौपाल के संवाद वहाँ प्रतिलिपि कर रहा हूँ। --[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 22:11, 22 अगस्त 2026 (UTC)
::किसी प्रतिभागी के द्वारा एक दिन में अधिकतम 5 लेख चुने जा सकते हैं। वे इसे एक ही बार में चुन सकते हैं। चुने हुए लेख बनाने के बाद ही नए लेख (अधिकतम 5 तक) पुनः चुने जा सकते हैं। [[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 22:06, 22 अगस्त 2026 (UTC)
{{चर्चा तल}}
== साँचा:Infobox French commune सम्पादन निवेदन ==
साँचा:Infobox French commune में फ़्रांस के विभागों के नाम अंग्रेज़ी में है। उनके अनुवाद के लिए कृपया मुझे सम्पादन अनुमति दें। [[सदस्य:अमर तिवारी|अमर तिवारी]] ([[सदस्य वार्ता:अमर तिवारी|वार्ता]]) 02:17, 23 अगस्त 2026 (UTC)
:Infobox French commune में विभागों के नाम का हिंदी अनुवाद [[विशेष:योगदान/~2026-45964-89|~2026-45964-89]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-45964-89|वार्ता]]) 03:15, 23 अगस्त 2026 (UTC)
{{चर्चा शीर्ष}}
== सुझाव आमंत्रण ==
नमस्ते विकिपीडियन साथियों,
मैंने '''[[विकिपीडिया:चित्र प्रेरक पद हेतु निवेदन#AMAN KUMAR|विकिपीडिया:चित्र प्रेरक पद हेतु निवेदन]]''' पृष्ठ पर चित्र प्रेरक अधिकार के लिए अपना नामांकन किया है।
आप से विनम्र अनुरोध है कि कृपया मेरे योगदानों की समीक्षा करें और अपना सुझाव दें।
धन्यवाद [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 17:53, 24 अगस्त 2026 (UTC)
{{चर्चा तल}}
== जुआन ब्रांको के नए मसौदे की भाषाई समीक्षा ==
नमस्कार। सदस्य:EncreEtMarges/जुआन ब्रांको पर एक नया, स्वतंत्र और संक्षिप्त हिंदी मसौदा तैयार किया गया है:
https://hi.wikipedia.org/wiki/सदस्य:EncreEtMarges/जुआन_ब्रांको
मुख्य लेख 20 जुलाई और 20 अगस्त 2026 को ल५ (खराब मशीनी अनुवाद) के अंतर्गत हटाया गया था।
पारदर्शिता के लिए: मैं Les Ruches से संबद्ध हूँ, जो जुआन ब्रांको की 2027 की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी का समर्थन करता है। इसी हित-संबंध के कारण मैं इसे स्वयं मुख्य नामस्थान में पुनः प्रकाशित नहीं कर रहा हूँ। कृपया इसकी भाषा, स्वाभाविकता, तटस्थता और स्रोतों की स्वतंत्र समीक्षा करें। उपयुक्त होने पर कोई स्वतंत्र संपादक इसे मुख्य नामस्थान में स्थानांतरित कर सकता है। धन्यवाद। [[सदस्य:EncreEtMarges|EncreEtMarges]] ([[सदस्य वार्ता:EncreEtMarges|वार्ता]]) 02:32, 27 अगस्त 2026 (UTC)
== विकिमीडिया हार्डवेयर डोनेशन प्रोग्राम में समर्थन हेतु निवेदन ==
नमस्ते विकिपीडियन साथियों,
मैंने विकिमीडिया के हार्डवेयर डोनेशन प्रोग्राम में आवेदन किया है, यदि आपको मेरे द्वारा किए गए योगदान योग्य लगें, तो कृपया मेरे आवेदन का समर्थन (Endorse) करें। इस प्रक्रिया में समुदाय के सभी वरिष्ठ और साथी सदस्यों का समर्थन मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा।
आवेदन का लिंक यहाँ है: [[meta:Hardware donation program/AMAN KUMAR|Hardware donation program/AMAN KUMAR]]
आप सभी के समय और सहयोग के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद! [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:09, 27 अगस्त 2026 (UTC)
== संपादनोत्सव बैठक सूचना ==
* [https://meet.google.com/avn-bdsm-jup Google Meet की मदद से शामिल हों]
* 7:00 pm - 9:00 pm
* Sun, 30 August 2026
*स्वतंत्रता दिवस संपादनोत्सव 2026 के दौरान लेखों के मूल्यांकन और समस्याओं पर चर्चा के लिए बैठक का आयोजन किया जा रहा है।
{{चर्चा शीर्ष}}
== मॉड्यूल:Lang/data/iana languages सुधार अनुरोध ==
कृपया इन मानों को बदलें:
["te"] = "तेलुगु"
["ha"] = "हाउसा"
["zgh"] = "मानक मोरक्की अमज़िग़" [[सदस्य:अमर तिवारी|अमर तिवारी]] ([[सदस्य वार्ता:अमर तिवारी|वार्ता]]) 13:20, 31 अगस्त 2026 (UTC)
:{{done}} [[सदस्य:Max|Max]] ([[सदस्य वार्ता:Max|वार्ता]]) 13:24, 31 अगस्त 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:Max|Max]] धन्यवाद! [[सदस्य:अमर तिवारी|अमर तिवारी]] ([[सदस्य वार्ता:अमर तिवारी|वार्ता]]) 13:50, 31 अगस्त 2026 (UTC)
{{चर्चा तल}}
== विकिमीडिया हार्डवेयर डोनेशन प्रोग्राम में समर्थन हेतु निवेदन ==
नमस्ते विकिमीडियन्स,
मैंने विकिमीडिया हार्डवेयर डोनेशन प्रोग्राम में आवेदन किया है ताकि मैं विकी परियोजनाओं पर और अधिक योगदान दे सकूँ। यदि आपको मेरा योगदान उपयोगी लगता है तो कृपया इस लिंक ([[meta:Hardware donation program/आदेश यादव|Hardware donation program/आदेश यादव]]) के माध्यम से आप मेरा समर्थन (Endorse) कर सकते है। [[सदस्य:आदेश यादव|आदेश यादव]] ([[सदस्य वार्ता:आदेश यादव|वार्ता]]) १९:४१, १ सितम्बर २०२६ (UTC)
== Template editor user group ==
<div class="cd-moveMark">[[विकिपीडिया:दूतावास#Template editor user group]] से स्थानांतरित किया। [[सदस्य:Codename Noreste|Codename Noreste]] ([[सदस्य वार्ता:Codename Noreste|वार्ता]]) 17:46, 3 सितंबर 2026 (UTC)</div>
Hi. As you may know, only template editors have <code>editprotected</code> and <code>templateeditor</code>, but <code>templateeditor</code> is considered useless because Hindi Wikipedia does not have template editor protection (per InitialiseSettings.php). Instead, I want to propose moving to a new user group named Protected page editors (<code>editprotected</code>). This will only have <code>editprotected</code> as the only user right, allowing to edit fully protected pages. Thoughts? [[सदस्य:Codename Noreste|Codename Noreste]] ([[सदस्य वार्ता:Codename Noreste|वार्ता]]) 17:42, 3 सितंबर 2026 (UTC)
== मॉड्यूल:Lang/data/iana languages सम्पादन अनुरोध ==
कृपया [[मॉड्यूल:Lang/data/iana languages]] में इन मानों को बदलें:
["ary"] = {"मोरक्की अरबी"},
["xms"] = {"मोरक्की सांकेतिक भाषा"},
["aju"] = {"यहूदी-मोरक्की अरबी"},
क्योंकि मोरक्कोवासियों का उचित नाम "मोरक्की" होना चाहिये, धन्यवाद! [[सदस्य:अमर तिवारी|अमर तिवारी]] ([[सदस्य वार्ता:अमर तिवारी|वार्ता]]) 06:34, 6 सितंबर 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:अमर तिवारी|अमर तिवारी]] जी मुझे तो कहीं ऐसे प्रमाण नहीं मिल रहे कि मोरक्को वासियों को हिंदी में मोरक्की कहा जाता है, या वहाँ बोली जाने वाली भाषा को हिंदी में मोरक्की अरबी कहा जाता है। क्या आप कुछ विश्वसनीय स्रोत दे सकते हैं जहाँ इस शब्दावली का प्रयोग हुआ हो? --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 19:23, 6 सितंबर 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:SM7|SM7]] यह रहे कुछ: [https://www.google.co.in/books/edition/Vi%C5%9Bva_s%C4%81hitya_k%C4%AB_r%C5%ABpar%C4%93kh%C4%81/WX8KAQAAIAAJ?hl=en&gbpv=1&bsq=%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%80&dq=%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%80&printsec=frontcover], [https://www.google.co.in/books/edition/Dinaman/49xNAAAAYAAJ?hl=en&gbpv=1&bsq=%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%80&dq=%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%80&printsec=frontcover], [https://www.facebook.com/61586891228650/videos/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%85%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%A7-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%98%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A5%88%E0%A4%A0-18-%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A5%88%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A4-spain-illegal-immigratio/1599320535168385/], [https://www.google.co.in/books/edition/Nav%C4%ABna_gadya_racan%C4%81val%C4%AB/8pxjAAAAMAAJ?hl=en&gbpv=1&bsq=%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%80&dq=%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%80&printsec=frontcover], [https://books.google.co.in/books?id=Wjsmq894uIAC&newbks=0&printsec=frontcover&pg=PA16&dq=%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%80&hl=en&source=newbks_fb&redir_esc=y#v=onepage&q=%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%80&f=false]
::एक बात और है कि जैसे मेक्सिको संबंधी चीज़ों को "मेक्सिकी" कहे जाते है, उसी प्रकार मोरक्को संबंधियों को "मोरक्की" और कोसोवो संबंधियों को कोसोवी कहे जा सकते है। [[सदस्य:अमर तिवारी|अमर तिवारी]] ([[सदस्य वार्ता:अमर तिवारी|वार्ता]]) 00:52, 7 सितंबर 2026 (UTC)
== प्रारूप:कुलदीप चौधरी की समीक्षा एवं मुख्य लेख के लिए मार्गदर्शन ==
नमस्कार, मैंने [[प्रारूप:कुलदीप चौधरी]] तैयार किया है। लेख में नवभारत टाइम्स, अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे स्वतंत्र समाचार स्रोतों के संदर्भ दिए गए हैं। चूँकि यह लेख मेरे स्वयं के बारे में है, इसलिए हित-संघर्ष को ध्यान में रखते हुए मैं इसे स्वयं मुख्य नामस्थान में स्थानांतरित नहीं करना चाहता। कृपया कोई अनुभवी संपादक इसकी उल्लेखनीयता, निष्पक्षता और संदर्भों की समीक्षा कर बताए कि यह मुख्य लेख के लिए उपयुक्त है या इसमें क्या सुधार आवश्यक हैं। धन्यवाद। [[सदस्य:Kuldeepch71|Kuldeepch71]] ([[सदस्य वार्ता:Kuldeepch71|वार्ता]]) 12:00, 8 सितंबर 2026 (UTC)
:नमस्कार, इस अनुरोध को एक सप्ताह हो गया है। कृपया कोई अनुभवी संपादक [[प्रारूप:कुलदीप चौधरी]] की उल्लेखनीयता, संदर्भों और निष्पक्षता की समीक्षा कर मार्गदर्शन देने का कष्ट करें। धन्यवाद। [[सदस्य:Kuldeepch71|Kuldeepch71]] ([[सदस्य वार्ता:Kuldeepch71|वार्ता]]) 08:40, 15 सितंबर 2026 (UTC)
== edit karna ==
Samanya
[[विशेष:योगदान/~2026-49170-94|~2026-49170-94]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-49170-94|वार्ता]]) 11:46, 11 सितंबर 2026 (UTC)
== Wiki Resource Exchange request on hi.wiki ==
dosto
Mujhe Kuch [https://www.nypl.org/research/research-catalog/bib/b12872821 samagri][https://books.google.co.in/books?id=NLTXAAAAMAAJ&printsec=frontcover&source=gb_mobile_entity&newbks=1&newbks_redir=0&hl=en&gl=IN&ovdme=1&redir_esc=y#Meghalaya](academic material) chahiye thi, en.wiki draft ke liye aur maine anuroth [[:en:wp:rx]] kiya parantu wo nahi mili.
Fir maine dekha ye Delhi me publish hui hai, to maine [[:hi:wp:rx]] dekh par wa page hi nahi hai. Ab maine article request kaha karu.
[[सदस्य:獅眠洞|獅眠洞]] ([[सदस्य वार्ता:獅眠洞|वार्ता]]) 17:48, 11 सितंबर 2026 (UTC)
== आमंत्रण ==
नमस्ते विकिपीडियन्स, मैने रोलबैक अधिकार के लिए नामांकन किया है आप अपना मत यहाँ ([[विकिपीडिया:रोलबैकर्स अधिकार हेतु निवेदन#AMAN KUMAR 3|विकिपीडिया:रोलबैकर्स अधिकार हेतु निवेदन]]) लिख सकते हैं [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 22:15, 11 सितंबर 2026 (UTC)
== [[चीनी जनवादी गणराज्य]] ---> [[चीन]] ==
लेख चीनी जनवादी गणराज्य का नाम छोटा करना उचित होगा। कृपया नाम परिवर्तित करें। [[सदस्य:अमर तिवारी|अमर तिवारी]] ([[सदस्य वार्ता:अमर तिवारी|वार्ता]]) 04:17, 12 सितंबर 2026 (UTC)
== Change of country names from english to hindi ==
[[मॉड्यूल:Country alias]] consists of various countries which have names in english, i previously changed the name of india from english to hindi, then it was protected so please provide the permission so that i can change the country names to hindi [[सदस्य:Neeelzzz20|Neeelzzz20]] ([[सदस्य वार्ता:Neeelzzz20|वार्ता]]) 08:31, 12 सितंबर 2026 (UTC)
== [[ब्रज भूमि (फिल्म)]] को हटाने हेतु ==
इस लेख में गलत जानकारी और तथ्यहीन जानकारी हैं। विडंबना ये है कि इसे एडिट करने से भी रोक लगा दी गई है। सन्दर्भ भी विश्वशनीय नहीं हैं। एक क्षेत्रीय फिल्म का प्रचार भर है तथा लेखन शैली कई लोगों का गुणगान कर रही है बिना किसी सन्दर्भ के। मेरा प्रस्ताव है कि यह लेख हटा दिया जाये। यह लेख अंग्रेजी में अंग्रेजी विकिपीडिया पर भी था वहां से भी हटा दिया गया है। [[सदस्य:TheTarget2027|TheTarget2027]] ([[सदस्य वार्ता:TheTarget2027|वार्ता]]) 05:25, 14 सितंबर 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:TheTarget2027|TheTarget2027]] जी, यह फ़िल्म उल्लेखनीय है और इसके बारे में पर्याप्त समाचार संदर्भ तथा अन्य विश्वसनीय वेबसाइटों पर भी जानकारी उपलब्ध है। पृष्ठ सुरक्षित है, वरना इसमें सुधार करना पसंद करता। <br>
:[https://www.indiatv.in/entertainment/bollywood/remember-shola-aur-shabnam-raja-aka-raja-rajeshwar-pratap-singh-judev-is-from-royal-family-career-ended-in-side-roles-2026-03-25-1206602 इंडिया टीवी], [https://www.imdb.com/hi/title/tt2779648/fullcredits/ IMDB], [https://www.jagran.com/uttar-pradesh/hathras-shiv-kumar-was-not-the-creator-of-braj-land-film-18383324.html दैनिक जागरण], [https://www.saregama.com/album/brij-bhoomi_6232 सारेगामा]
:<br>
:<span style="color:#d4330b;"></span>[[सदस्य:RJ Raawat|<span style="color:#d4330b;"><b>RJ RAAWAT</b></span>]]<span> | </span>[[सदस्य वार्ता:RJ Raawat|<small style="color:#373231;"><b>Talk</b></small>]] 05:41, 14 सितंबर 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:RJ Raawat|RJ Raawat]] जी! आप पृष्ठ सुरक्षा हटाने के लिए [[विकिपीडिया:पृष्ठ सुरक्षा अनुरोध|यहाँ]] निवेदन कर सकते है। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 16:49, 14 सितंबर 2026 (UTC)
:::@[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] महोदय जी, मुझे इस पृष्ठ के बारे में जानकारी नहीं थी। आपने इसकी जानकारी देकर मेरी सहायता की, इसके लिए आपका हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद। <span style="color:#d4330b;"></span>[[सदस्य:RJ Raawat|<span style="color:#d4330b;"><b>RJ RAAWAT</b></span>]]<span> | </span>[[सदस्य वार्ता:RJ Raawat|<small style="color:#373231;"><b>Talk</b></small>]] 17:04, 14 सितंबर 2026 (UTC)
== सर्वर स्विच - आपका विकि जल्द कुछ समय के लिए केवल-पठनीय होगा ==
<section begin="server-switch"/><div class="plainlinks">
[[:m:Special:MyLanguage/Tech/Server switch|इस संदेश को अन्य भाषा में पढ़ें]] • [https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=Special:Translate&group=page-Tech%2FServer+switch&language=&action=page&filter= {{int:please-translate}}]
[[foundation:|विकिमीडिया संस्थान]] अपने डेटा सेंटरों के बीच ट्रैफ़िक को स्विच करेगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि विकिपीडिया और अन्य विकिमीडिया विकियाँ किसी विपत्ति के बाद भी ठीक से काम करे।
पूरा ट्रैफ़िक '''{{#time:j xg|2026-09-23|hi}}''' को स्विच करेगा। स्विच '''[https://zonestamp.toolforge.org/{{#time:U|2026-09-23T14:00|en}} {{#time:H:i e|2026-09-23T14:00}}]''' पर शुरू होगा।
दुर्भाग्यवश, कुछ सीमाओं के कारण [[mw:Special:MyLanguage/Manual:What is MediaWiki?|मीडियाविकि]] को बदलाव के समय सभी तरह के सम्पादनों को रोक देना होगा। हमें असुविधा के लिए खेद है और हम भविष्य में इसे कम-से-कम रखने पर काम कर रहे हैं।
सभी विकि-परियोजनाओं पर यह संक्रिया आरंभ करने से 30 मिनट पहले एक बैनर दिखाया जाएगा। यह बैनर संक्रिया के अंत तक दृश्य रहेगा।
आप इस बैनर के टेक्स्ट को [https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=Special%3ATranslate&group=Centralnotice-tgroup-read_only_banner&task=view&language=&filter=&action=translate अनुवादित या शोधित करने] में योगदान कर सकते हैं।
'''कुछ समय के लिए आप सभी विकियाँ पढ़ पाएँगे, मगर सम्पादित नहीं कर पाएँगे।'''
* आप {{#time:l j xg Y|2026-09-23|hi}} को एक घंटे तक सम्पादन नहीं कर पाएँगे।
* यदि आप इस समय के दौरान सम्पादन अथवा सहेजने का प्रयास करेंगे तो आपको एक त्रुटि संदेश दिखाई देगा। हम आशा करते हैं कि इस समय के दौरान कोई सम्पादन लुप्त नहीं होगा लेकिन हम इसकी प्रत्याभूति नहीं करते। यदि आपको कोई त्रुटि संदेश दिखाई देता है तो कृपया सब कुछ वापस ठीक होने तक प्रतीक्षा करें। तब आपको अपने सम्पादन सहेजने चाहिए। लेकिन, हम अनुशंसा करते हैं कि आप अपने बदलावों की एक प्रति पहले ही बना लें, जिसकी शायद ज़रूरत पड़े।
''अन्य प्रभाव'':
* बैकग्राउंड कार्य धीमे होंगे और कुछ को स्खलित कर दिया जा सकता है। लाल कड़ियाँ सामान्य गति से अद्यतन न भी हो सकती हैं। यदि आप पहले से ही कहीं से जुड़ा कोई लेख बनाते हैं तो कड़ी सामान्य से अधिक समय तक लाल रहेगी। कुछ लंबे समय तक चलने वाले स्क्रिप्टों को रोकना होगा।
* हम अपेक्षा करते हैं कि कोड की तैनातियाँ अन्य किसी सप्ताह की तरह ही होंगी। यद्यपि, कुछ विषयानुसार कोड यथासमय बंद रह सकते हैं यदि संबंधित संक्रिया की तदुपरांत आवश्यकता होती है।
* [[mw:Special:MyLanguage/GitLab|GitLab]] लगभग 90 मिनट के लिए अनुपलब्ध होगा।
यदि आवश्यक हो तो इस परियोजना को स्थगित किया जा सकता है। आप [[wikitech:Switch_Datacenter|wikitech.wikimedia.org पर अनुसूची]] को पढ़ सकते हैं। अन्य बदलावों की अनुसूची में घोषणा की जाएगी।
'''कृपया यह सूचना अपने समुदाय के साथ साझा करें।'''</div><section end="server-switch"/>
[[m:user:Trizek (WMF)|Trizek (WMF)]] 12:58, 15 सितंबर 2026 (UTC)
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=Distribution_list/Non-Technical_Village_Pumps_distribution_list&oldid=30513874 पर मौजूद सूची का प्रयोग करके User:Trizek (WMF)@metawiki द्वारा भेजा गया संदेश -->
== सुजानगढ़ के इतिहास संबंधी असत्यापित दावों पर चर्चा और प्रतिक्रिया हेतु निवेदन ==
नमस्कार,
सुजानगढ़ के इतिहास संबंधी असत्यापित दावों के संबंध में मैंने दिनांक 20 अगस्त 2026 को वार्ता:सुजानगढ़ पर आपत्ति दर्ज की थी तथा 2 सितंबर को फॉलो-अप किया था। अभी तक कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है।
कृपया संबंधित संपादकगण इस चर्चा को देखकर उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर अपनी प्रतिक्रिया देने का कष्ट करें।
धन्यवाद।
— Pauuu Kanwar [[सदस्य:Pauuu Kanwar|Pauuu Kanwar]] ([[सदस्य वार्ता:Pauuu Kanwar|वार्ता]]) 01:44, 18 सितंबर 2026 (UTC)
:नमस्कार!
:सुजानगढ़ के इतिहास और नामकरण से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर प्रामाणिक ऐतिहासिक स्रोत (The Imperial Gazetteer of India) साझा करने और तथ्यात्मक चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद। ऐतिहासिक सत्यता को सामने लाने का यह प्रयास बहुत सराहनीय है। [[सदस्य:HATHI47|HATHI47]] ([[सदस्य वार्ता:HATHI47|वार्ता]]) 11:44, 20 सितंबर 2026 (UTC)
::<blockquote>नमस्कार, इस चर्चा में शामिल होने और इस विषय को सही दिशा देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।</blockquote>
::[[विशेष:योगदान/~2026-50766-14|~2026-50766-14]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-50766-14|वार्ता]]) 11:55, 20 सितंबर 2026 (UTC)
::नमस्कार, इस चर्चा में शामिल होने और इस विषय को सही दिशा देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।" [[सदस्य:Pauuu Kanwar|Pauuu Kanwar]] ([[सदस्य वार्ता:Pauuu Kanwar|वार्ता]]) 12:02, 20 सितंबर 2026 (UTC)
:नमस्कार। सुजानगढ़ के इतिहास और नामकरण से संबंधित विषय पर प्रामाणिक एवं प्रकाशित ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर चर्चा आगे बढ़ाना एक सराहनीय प्रयास है। ऐसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक विषयों पर व्यक्तिगत मान्यताओं के बजाय उपलब्ध विश्वसनीय स्रोतों और प्रमाणों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। आशा है कि संबंधित संपादकगण उपलब्ध स्रोतों का निष्पक्षतापूर्वक अध्ययन कर तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने में सहयोग करेंगे। इस सार्थक पहल के लिए धन्यवाद। [[सदस्य:MAHENDRA BHATI77|MAHENDRA BHATI77]] ([[सदस्य वार्ता:MAHENDRA BHATI77|वार्ता]]) 08:22, 25 सितंबर 2026 (UTC)
== Your feedback wanted: Remove ''(Language link added:) and similar'' edits from Special:RecentChanges ==
''(Apologies for posting in English. You can help by translating it)''
Hello, I’m Danny from [[:en:w:Wikimedia_Deutschland|Wikimedia Deutschland’s]] [[m:Wikidata_For_Wikimedia_Projects|Wikidata For Wikimedia Projects]] team.<br/>
We have been investigating and examining how Wikidata’s use in the [[Special:RecentChanges]] and [[Special:Watchlist]] pages can be made to be more useful, or less ‘noisy’ (fewer edits that have little value to the reader).
We are currently exploring to make a change in the volume and the type of Wikidata edits that appear in these pages, and '''we need your feedback''' to help us ensure this is a positive change for the Wikis and won’t disrupt your workflows.<br/>
Language links are also known as sitelinks or interlanguage links and describe when a Wikidata item is connected to a Wiki, adding it to the language dropdown tool for other connected Wikis.
[[File:Types of Lang Link changes.png|x350px|frame|A variety of "Language Link" edits as seen in the Recent Changes feed]]
The request for feedback is whether you support the removal of these language link edits from the Recent Changes and Watchlist feed, or would you oppose such a change and if so, why?
Please share you thoughts on the dedicated '''[[m:Talk:Wikidata_For_Wikimedia_Projects/Clearer_Wikidata_Edit_Summaries/Hide_Language_Link_edits|metawiki Talk page]]'''.
Further information about this change: [[m:Wikidata_For_Wikimedia_Projects/Clearer_Wikidata_Edit_Summaries/Hide_Language_Link_edits|m:Wikidata_For_Wikimedia_Projects/Hide_Language_Link_edits]]
Thank you for any participation or feedback you give, -- [[m:User:Danny_Benjafield_(WMDE)|User:Danny Benjafield (WMDE)]] 15:26, 22 सितंबर 2026 (UTC)
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=User:Danny_Benjafield_(WMDE)/MassMessage_test_list&oldid=31070425 पर मौजूद सूची का प्रयोग करके User:Danny Benjafield (WMDE)@metawiki द्वारा भेजा गया संदेश -->
== [[मॉड्यूल:Political party/1]] में नया राजनीतिक दल जोड़ना ==
नमस्ते प्रबंधकों,
कृपया [[मॉड्यूल:Political party/1]] के `local full = {` भाग में निम्नलिखित राजनीतिक दल का डेटा जोड़ने की कृपा करें:<syntaxhighlight lang="lua">
["ममता सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस"] = {abbrev = "एमआईटीसी", color = "#13D6B6", shortname = "ममता तृणमूल",},
</syntaxhighlight>यह दल देवनागरी लिपि से शुरू होता है, इसलिए इसे `/1` उपपृष्ठ में जोड़ने का अनुरोध है ताकि विभिन्न चुनाव व निर्वाचन क्षेत्र के लेखों में इसका रंग और संक्षिप्त नाम सही ढंग से प्रदर्शित हो सके।
धन्यवाद। [[सदस्य:ManjurKhan|ManjurKhan]] ([[सदस्य वार्ता:ManjurKhan|वार्ता]]) 09:59, 25 सितंबर 2026 (UTC)
== नए लेख 'अभिषेक विजय' के ड्राफ्ट की समीक्षा और स्थानांतरण हेतु अनुरोध ==
[[सदस्य:Abhivj48|Abhivj48]] ([[सदस्य वार्ता:Abhivj48|वार्ता]]) 13:26, 25 सितंबर 2026 (UTC)
== संदर्भों की समीक्षा हेतु ==
[[वार्ता:राहुल शर्मा (किसान नेता)|वार्ता पृष्ठ]]
सक्रिय सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया इस लेख की वार्ता पर एक बार नज़र डालें और उपलब्ध संदर्भों की समीक्षा करें। <span style="color:#d4330b;"></span>[[सदस्य:RJ Raawat|<span style="color:#d4330b;"><b>RJ RAAWAT</b></span>]]<span> | </span>[[सदस्य वार्ता:RJ Raawat|<small style="color:#373231;"><b>Talk</b></small>]] 08:07, 28 सितंबर 2026 (UTC)
== संपर्क सूत्र निर्वाचन 2026 ==
[[विकिपीडिया:संपर्क सूत्र]] पृष्ठ पर हिंदी विकिमीडियन्स यूजर ग्रूप के 3 संपर्कसूत्रों के निर्वाचन की प्रक्रिया शुरु की गई है। नियमावली के अनुरूप सदस्य इस पृष्ठ पर 1-7 अक्टूबर तक उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन कर सकते हैं। हिंदी विकि के सदस्यों से अनुरोध है कि 9-22 अक्टूबर तक वे उम्मिदवारों पर अपना मत देकर संपर्क सूत्र के निर्वाचन में अपना सहयोग करें। --[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 00:47, 1 अक्टूबर 2026 (UTC)
== हटाने का नामांकन ==
# [[श्रेणी वार्ता:8077 ईसा पूर्व]]
# [[श्रेणी वार्ता:8149 ईसा पूर्व]]
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# [[श्रेणी वार्ता:8236 ईसा पूर्व]]
# [[श्रेणी वार्ता:8237 ईसा पूर्व]]
इन्हें हटाने का नामांकन कर रहा हूँ क्योंकि इसके केवल वार्ता पृष्ठ ही उपस्थित है[[User:विक्रम प्रताप|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:विक्रम प्रताप|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 23:34, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
: जी! कृपया आप हाँ/ना में ही उत्तर दे दिया करें या कोई सलाह दे दें तो अच्छा होगा, क्योंकि जब मैं पूछता नहीं और बड़ी मात्रा में नामांकन कर देता हूँ तो बाद में प्रबंधकों को बड़ी संख्या में नामांकनों को पूर्ववत करना पड़ता है।[[User:विक्रम प्रताप|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:विक्रम प्रताप|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 02:23, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:विक्रम प्रताप|विक्रम प्रताप]] जी, इन्हें बॉट से एकसाथ हटाया जा सकता है और मैं कई बार ऐसा करता भी हूँ। आपने ये सूची [https://orphantalk.toolforge.org/?wiki=hiwiki&ns=1%22 :toolforge:orphantalk] से प्रतिलिपी की है और इन्हें हटाने पर और आगे वाले दिखाई देने लग जायेंगे। अतः ऐसे सभी को प्रतिलिपि करने से बेहतर होगा कि स्पष्ट तौर पर पूरा प्रस्ताव लायें। यदि लोग सहमत होंगे तो मैं बॉट से सभी को एक ही साथ निबटा दूँगा। प्रबंधकों ने आपके कौनसे नामांकनों को बिना कारण पूर्ववत किया है? मुझे नहीं लगता कि किसी उचित कारण के किये हुये नामांकनों को ही पूर्ववत किया जाता है अतः नामांकन पहले से निर्धारित किसी कारण से ही करें। यदि किसी लेख को सुधारा जा सकता है तो हटाने के नामांकन के स्थान पर उसे सुधारने का प्रयास करें। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 12:30, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
: [[साँचा:१९९० में पद्म भूषण धारक]] जी, इसके जैसे सांचों के संदर्भ में नामांकन को पूर्ववत करने के संदर्भ में लिखा था इसके साथ ही प्रस्ताव के सम्बन्ध में कहना चाहता हूँ कि इसका कोई प्रारूप या कोई पुराना प्रस्ताव बता दें जिससे मैं सीख सकूँ। क्योंकि मैं नया हूँ [[User:विक्रम प्रताप|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:विक्रम प्रताप|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 12:33, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
: इसके इतर यदि आप सहायता कर दें तो अच्छा हो[[User:विक्रम प्रताप|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:विक्रम प्रताप|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 12:48, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:विक्रम प्रताप|विक्रम प्रताप]] जी, आपका मूल प्रस्ताव "श्रेणी वार्ता" पृष्ठों के लिए था। अब यदि आप इस तरह से लक्ष्य बदलते रहोगे तो खिचड़ी ही बनेगी, आपने उपर वाले पर क्या विचार किया है? अब खिचड़ी बनाते हुये मैं आपके नये प्रश्न का भी उत्तर लिख रहा हूँ। एक पूर्व प्रबंधक ने वर्ष के हिसाब पद्म भूषण धारकों के लेख बनाये थे और उनके उपयुक्त साँचे निर्मित करके लेखों पर उन्हें जोड़ा था। मैंने पिछले वर्ष इन्हें [[पद्म भूषण धारक (1990–1999)]] जैसे दशकीय लेखों में भेज दिया। अब ये साँचे अनावश्यक हो गये हैं और मुझे ये बात पीछले वर्ष से ज्ञात है। मैं इनका कोई और उपयोग कर रहा हूँ लेकिन उसमें आवश्यकता से अधिक समय लग रहा है। इसके अतिरिक्त इनका कोई उचित नामांकन नहीं आया है। क्या ये आपको किसी तरह की समस्या दिखा रहे हैं? क्या ये गूगल खोज या अन्य किसी स्थान पर विकिपीडिया के लिए समस्या पैदा कर रहे हैं? आपने जो कारण दिया वो "निरर्थक साँचा" लिखा था और ऐसा कोई कारण [[वि:शीह|शीघ्र हटाने के मापदण्डों]] में उल्लिखित नहीं है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 04:38, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
: @[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी श्रेणी वार्ता पृष्ठों को हटाने का प्रस्ताव कैसे दें? ये भी पूंछा है[[User:विक्रम प्रताप|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:विक्रम प्रताप|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:41, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:विक्रम प्रताप|विक्रम प्रताप]] जी, उसके लिए मैंने पहले ही लिख दिया कि आपने जहाँ से प्रतिलिपि किया है, उसकी कड़ी देकर एकसाथ ही प्रस्ताव रख देते तो बेहतर होता। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 04:45, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
::: @[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी! मैं समझ नहीं पा रहा था परंतु अब मैं समझ गया कि आगे से Toolforge पन्ने के लिंक के साथ प्रस्ताव करूंगा। बार बार प्रस्ताव करने का कारण ये होगा कि वहां अधिकतम 100 पन्ने ही एकसाथ दिखते है [[User:विक्रम प्रताप|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:विक्रम प्रताप|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:55, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
== हिंदी विकिपीडिया में नए पृष्ठों की समीक्षा व्यवस्था के संबंध में सुझाव ==
विकिपीडिया एक स्वतंत्र ज्ञानकोश है, जो सभी के सामूहिक योगदान से विकसित होता है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए मेरा एक सुझाव है।
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:@[[सदस्य:SD 78|SD 78]] जी, अंग्रेज़ी विकिपीडिया पर नये सदस्य मुख्य नामस्थान पर लेख नहीं बना सकते है अतः अस्थायी खातों और नये सदस्यों के लिए Draft की व्यवस्था की गयी है। हिन्दी विकिपीडिया पर मुख्य नामस्थान पर अस्थायी खातों और नये सदस्यों द्वारा लेख निर्मित किया जा सकता है अतः मुझे लगता है ऐसी नयी व्यवस्था लाकर सदस्यों का ही खराब होगा। यदि यहाँ भी लेख संख्या बहुत अधिक बढ़ जायेगी और अनुभवी सदस्यों की संख्या पर्याप्त होगी, तब ऐसी व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 11:53, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
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== सतवीर सैनी लेख में सम्पादन फ़िल्टर की समस्या ==
मैंने सतवीर सैनी के लेख में जन्मतिथि और उसके स्रोत का संदर्भ जोड़ा था, लेकिन स्वचालित फ़िल्टर ने सम्पादन रोक दिया। मेरा उद्देश्य लेख में सुधार करना था। कृपया बताएँ कि इस बदलाव को कैसे प्रकाशित किया जा सकता है। [[विशेष:योगदान/~2026-54698-19|~2026-54698-19]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-54698-19|वार्ता]]) 16:03, 11 अक्टूबर 2026 (UTC)
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दिल्ली
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Anitya Gautam
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{{हाल की घटना|date=जनवरी 2025}}
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'''दिल्ली''' ({{Langx|en|Delhi|italic=no}}), आधिकारिक तौर पर '''राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली'''<ref>{{Cite web |url=https://india.gov.in/hi/ |title=राष्ट्रीय-राजधानी-क्षेत्र-दिल्ली-की-वेबसाइट-देखें |access-date=12 जुलाई 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170701055708/https://india.gov.in/hi |archive-date=1 जुलाई 2017 |url-status=dead }}</ref> ({{Langx|en|National Capital Territory of Delhi|links=no|italic=no}}) [[भारत]] का एक महानगर और केंद्र-शासित प्रदेश है। इसमें [[नई दिल्ली (प्रशासनिक राजधानी क्षेत्र)|नई दिल्ली]] सम्मिलित है जो भारत की राजधानी है। दिल्ली में राजधानी के होने के नाते केंद्र सरकार की तीनों इकाइयों- कार्यपालिका, संसद और न्यायपालिका के मुख्यालय नई दिल्ली और दिल्ली में स्थापित हैं। १४८३ वर्ग किलोमीटर में फैला दिल्ली जनसंख्या के तौर पर भारत का दूसरा सबसे बड़ा महानगर है। यहाँ की जनसंख्या लगभग १ करोड़ ७० लाख है। यहाँ बोली जाने वाली मुख्य भाषाएँ हैं : [[हिन्दी]], [[पंजाबी भाषा|पंजाबी]], [[उर्दू]] और [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]। भारत में दिल्ली का ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्त्व है। इसके दक्षिण पश्चिम में [[अरावली]] पहाड़ियाँ और पूर्व में [[यमुना]] नदी है, जिसके किनारे यह नगर बसा हुआ है। यह प्राचीन समय में [[गंगा]] के मैदान से होकर जाने वाले वाणिज्य पथों के रास्ते में पड़ने वाला मुख्य पड़ाव था।<ref>{{cite book |last=Necipoglu |first=Gulru |title=Muqarnas: An Annual on the Visual Culture of the Islamic World |origyear=2002 |url=http://books.google.com/books?id=UJc2u33fCKQC&pg=PA16&dq=delhi+sultanate+political+center+city+delhi&sig=ACfU3U3zNMesuCjnsH7iAlLe5mKHpddn8w#PPA12,M1 |publisher=BRILL |isbn=9004125930 |pages=12–43 |chapter=Epigraphs, Scripture, and Architecture in the Early Sultanate of Delhi |chapterurl= |year=2002 |access-date=14 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140920212841/http://books.google.com/books?id=UJc2u33fCKQC&pg=PA16&dq=delhi+sultanate+political+center+city+delhi&sig=ACfU3U3zNMesuCjnsH7iAlLe5mKHpddn8w#PPA12,M1 |archive-date=20 सितंबर 2014 |url-status=live }}</ref>
[[यमुना नदी]] के किनारे स्थित इस नगर का गौरवशाली पौराणिक इतिहास है, और पुराणों में इसका विशेष महत्व है। यह भारत का अति प्राचीन नगर है। इसके इतिहास का प्रारम्भ [[सिन्धु घाटी सभ्यता]] से जुड़ा हुआ है। [[हरियाणा]] के आसपास के क्षेत्रों में हुई खुदाई से इस बात के प्रमाण मिले हैं। [[महाभारत]] काल में इसका नाम [[इन्द्रप्रस्थ]] था। [[दिल्ली सल्तनत]] के उत्थान के साथ ही दिल्ली एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक शहर के रूप में उभरी।<ref>{{cite book|last=Aitken|first=Bill|title=Speaking Stones: World Cultural Heritage Sites in India|origyear=2002|url=http://books.google.com/books?id=lu5jGGQ8fJkC&pg=PA21&dq=delhi+continuously+inhabited&sig=ACfU3U1Z52ojRmD1-ZS2QeQlb8UlGZeBhA|publisher=Eicher Goodearth Limited|isbn=8187780002|pages=264 pages|chapter=|chapterurl=|year=2001|access-date=14 मार्च 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20110914123144/http://books.google.com/books?id=lu5jGGQ8fJkC&pg=PA21&dq=delhi+continuously+inhabited&sig=ACfU3U1Z52ojRmD1-ZS2QeQlb8UlGZeBhA|archive-date=14 सितंबर 2011|url-status=live}}</ref> यहाँ कई प्राचीन एवं मध्यकालीन इमारतों तथा उनके अवशेषों को देखा जा सकता हैं। [[१६३९]] में मुगल बादशाह [[शाहजहाँ]] ने दिल्ली में ही एक चारदीवारी से घिरे शहर का निर्माण करवाया जो [[१६७९]] से [[१८५७]] तक [[मुगल साम्राज्य]] की राजधानी रही।
१८वीं एवं १९वीं शताब्दी में [[ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी]] ने लगभग पूरे भारत को अपने कब्जे में ले लिया। उन्होंने [[कोलकाता]] को अपनी राजधानी बनाया। [[१९११]] में [[दिल्ली दरबार]] में अंग्रेजी सरकार ने फैसला किया कि राजधानी को वापस दिल्ली लाया जाए। इसके लिए पुरानी दिल्ली के दक्षिण में एक नए नगर ''नई दिल्ली'' का निर्माण प्रारंभ हुआ। अंग्रेजों से [[१९४७]] में स्वतंत्रता प्राप्त कर नई दिल्ली को भारत की राजधानी घोषित किया गया।
स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात दिल्ली में विभिन्न क्षेत्रों से लोगों का प्रवासन हुआ, इससे दिल्ली के स्वरूप में आमूल परिवर्तन हुआ। विभिन्न प्रान्तों, धर्मों एवं जातियों के लोगों के दिल्ली में बसने के कारण दिल्ली का शहरीकरण तो हुआ ही साथ ही यहाँ एक मिश्रित संस्कृति ने भी जन्म लिया। आज दिल्ली भारत का एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक केन्द्र है।
== नामकरण ==
इस नगर का नाम "दिल्ली" कैसे पड़ा इसका कोई निश्चित सन्दर्भ नहीं मिलता, लेकिन व्यापक रूप से यह माना गया है कि यह एक प्राचीन राजा "ढिल्लु" से सम्बन्धित है। कुछ इतिहासकारों का यह मानना है कि यह देहलीज़ का एक विकृत रूप है, जिसका [[हिन्दुस्तानी]] में अर्थ होता है 'चौखट', जो कि इस नगर के सम्भवतः सिन्धु-गंगा समभूमि के प्रवेश-द्वार होने का सूचक है। एक और अनुमान के अनुसार इस नगर का प्रारम्भिक नाम "ढिलिका" था। हिन्दी/प्राकृत "ढीली" भी इस क्षेत्र के लिए प्रयोग किया जाता था।
== इतिहास ==
{{main|दिल्ली का इतिहास}}
[[चित्र:Delhi Red fort.jpg|thumb|300px|बाएँ|लाल किला]]
दिल्ली का प्राचीनतम उल्लेख महाभारत नामक [[महापुराण]] में मिलता है जहाँ इसका उल्लेख प्राचीन इन्द्रप्रस्थ के रूप में किया गया है। इन्द्रप्रस्थ महाभारत काल में [[पांडवों]] की राजधानी थी।<ref name=ecosurv1>{{cite web |url=http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/ES%202005-06/Chpt/1.pdf |title=Chapter 1: Introduction |accessdate=21 दिसंबर 2006 |format=PDF |work=Economic Survey of Delhi, 2005–2006 |publisher=Planning Department, Government of National Capital Territory of Delhi |pages=pp1–7 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161113174155/http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/ES%202005-06/Chpt/1.pdf |archive-date=13 नवंबर 2016 |url-status=dead }}</ref> पुरातात्विक रूप से जो पहले प्रमाण मिले हैं उससे पता चलता है कि ईसा से दो हजार वर्ष पहले भी दिल्ली तथा उसके आस-पास मानव निवास करते थे।<ref name=tourhist>{{cite web |url=http://www.indiatourism.com/delhi-history/index.html |title=Delhi History |accessdate=22 दिसंबर 2006 |work=Delhi Tourism |publisher=Advent InfoSoft (P) Ltd |archive-url=https://web.archive.org/web/20061208210557/http://www.indiatourism.com/delhi-history/index.html |archive-date=8 दिसंबर 2006 |url-status=dead }}</ref>। दिल्ली का इतिहास बेहद पुराना है करीब ७३० ईसा पूर्व के दौरान मालवा के शासक[[ राजा धन्ना भील ]]<nowiki/>के एक उत्तराधिकारी ने दिल्ली के सम्राट को चुनौती दी थी <ref>{{shorturl.at/bCYZ6}}</ref>।
[[मौर्य-काल]] (ईसा पूर्व ३००) से यहाँ एक नगर का विकास होना आरम्भ हुआ। महाराज [[पृथ्वीराज चौहान]] के दरबारी कवि [[चंद बरदाई]] की हिन्दी रचना [[पृथ्वीराज रासो]] में [[तोमर वंश|तोमर]] राजा [[अनंगपाल]] को दिल्ली का संस्थापक बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि उसने ही 'लाल-कोट' का निर्माण करवाया था और महरौली के गुप्त कालीन लौह-स्तंभ को दिल्ली लाया। दिल्ली में तोमरों का शासनकाल वर्ष [[९००]]-[[१२००]] तक माना जाता है। 'दिल्ली' या 'दिल्लिका' शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम उदयपुर में प्राप्त शिलालेखों पर पाया गया। इस शिलालेख का समय वर्ष ११७० निर्धारित किया गया। महाराज पृथ्वीराज चौहान को दिल्ली का अन्तिम हिन्दू सम्राट माना जाता है।
१२०६ ई० के बाद दिल्ली [[दिल्ली सल्तनत]] की राजधानी बनी। इस पर [[खिलज़ी वंश]], [[तुगलक़ वंश]], [[सैयद वंश]] और [[लोदी वंश]] समेत कुछ अन्य वंशों ने शासन किया। ऐसा माना जाता है कि आज की आधुनिक दिल्ली बनने से पहले दिल्ली सात बार उजड़ी और विभिन्न स्थानों पर बसी, जिनके कुछ अवशेष आधुनिक दिल्ली में अब भी देखे जा सकते हैं। दिल्ली के तत्कालीन शासकों ने इसके स्वरूप में कई बार परिवर्तन किया। मुगल बादशाह हुमायूँ ने सरहिन्द के निकट युद्ध में अफ़गानों को पराजित किया तथा बिना किसी विरोध के दिल्ली पर अधिकार कर लिया। हुमायूँ की मृत्यु के बाद हेमू विक्रमादित्य के नेतृत्व में अफ़गानों नें मुगल सेना को पराजित कर आगरा व दिल्ली पर पुनः अधिकार कर लिया। मुगल बादशाह [[अकबर]] ने अपनी राजधानी को दिल्ली से [[आगरा]] स्थान्तरित कर दिया। अकबर के पोते [[शाहजहाँ]] ([[१६२८]]-[[१६५८]]) ने सत्रहवीं सदी के मध्य में इसे सातवीं बार बसाया जिसे शाहजहाँनाबाद के नाम से पुकारा गया। शाहजहाँनाबाद को आम बोल-चाल की भाषा में पुराना शहर या पुरानी दिल्ली कहा जाता है। प्राचीनकाल से पुरानी दिल्ली पर अनेक राजाओं एवं सम्राटों ने राज्य किया है तथा समय-समय पर इसके नाम में भी परिवर्तन किया जाता रहा था। पुरानी दिल्ली [[१६३८]] के बाद मुग़ल सम्राटों की राजधानी रही। दिल्ली का आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफ़र था जिसकी मृत्यू निवार्सन में ही रंगून में हुई।
[[चित्र:ITO crossroads, New Delhi in 1950.jpg|अंगूठाकार|दाएँ|300px|दिल्ली के आईटीओ चौराहे का दृश्य, १९५०]]
[[१८५७]] के [[सिपाही विद्रोह]] के बाद दिल्ली पर ब्रिटिश शासन के हुकूमत में शासन चलने लगा। [[१८५७]] के इस [[प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम]] के आंदोलन को पूरी तरह दबाने के बाद अंग्रेजों ने [[बहादुरशाह ज़फ़र]] को [[रंगून]] भेज दिया तथा भारत पूरी तरह से अंग्रेजो के अधीन हो गया। प्रारम्भ में उन्होंने कलकत्ते (आजकल [[कोलकाता]]) से शासन संभाला परन्तु ब्रिटिश शासन काल के अन्तिम दिनों में [[पीटर महान]] के नेतृत्व में [[रूसी साम्राज्य]] का प्रभाव भारतीय उपमहाद्वीप में तेजी से बढ़ने लगा। जिसके कारण अंग्रेजों को यह लगने लगा कि कलकत्ता जो कि भारत के धुर पूरब में था वहां से [[अफ़ग़ानिस्तान]] एवं [[ईरान]] आदि पर सक्षम तरीके से आसानी से नियंत्रण नहीं स्थापित किया जा सकता है आगे चल कर के इसी कारण से [[१९११]] में [[उपनिवेश]] राजधानी को [[नई दिल्ली]] स्थानांतरित कर दिया गया एवं अनेक आधुनिक निर्माण कार्य करवाए गये। शहर के बड़े हिस्सों को ब्रिटिश आर्किटेक्ट्स सर एडविन लुटियंस और सर हर्बर्ट बेकर द्वारा डिजाइन किया गया था। [[१९४७]] में भारत की आजादी के बाद नई दिल्ली को अधिकारिक रूप से भारत की राजधानी घोषित कर दिया गया। दिल्ली में कई राजाओं के साम्राज्य के उदय तथा पतन के साक्ष्य आज भी विद्यमान हैं। सच्चे मायने में दिल्ली हमारे देश के भविष्य, भूतकाल एवं वर्तमान परिस्थितियों का मेल-मिश्रण हैं। तोमर शासकों में दिल्ली की स्थापना का श्रेय अनंगपाल को जाता है।
== जलवायु, भूगोल और जनसांख्यिकी ==
===दिल्ली-एनसीआर===
{{main|राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (भारत)}}
एनसीआर में दिल्ली से सटे सूबे उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कई शहर शामिल हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/union-territory/new-delhi/news/ut-del-hmu-new-haryanas-jind-and-karnal-add-in-part-of-ncr-zone-5017644-nor.html|title=एनसीआर में शामिल हुए जींद,करनाल और मुजफ्फरनगर, मथुरा को नहीं मिली मंजूरी|date=9 जून 2015|website=Dainik Bhaskar|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190407170136/https://www.bhaskar.com/union-territory/new-delhi/news/ut-del-hmu-new-haryanas-jind-and-karnal-add-in-part-of-ncr-zone-5017644-nor.html|archive-date=7 अप्रैल 2019|url-status=live}}</ref> एनसीआर में ४ करोड़ ७० से ज्यादा आबादी रहती है। समूचे एनसीआर में दिल्ली का क्षेत्रफल १,४८४ स्क्वायर किलोमीटर है। देश की राजधानी एनसीआर का २.९ फीसदी भाग कवर करती है। एनसीआर के तहत आने वाले क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के मेरठ, [[गाजियाबाद]], गौतम बुद्ध नगर ([[नोएडा]]), बुलंदशहर,शामली, बागपत, हापुड़ और मुजफ्फरनगर; और [[हरियाणा]] के [[फरीदाबाद]], [[गुड़गांव]], मेवात, रोहतक, सोनीपत, रेवाड़ी, झज्जर, [[पानीपत]], पलवल, महेंद्रगढ़, भिवाड़ी, जिंद और करनाल जैसे जिले शामिल हैं। [[राजस्थान]] से दो जिले - [[भरतपुर]] और [[अलवर]] एनसीआर में शामिल किए गए हैं।<ref>{{Cite web|url=https://abpnews.abplive.in/india-news/ncr-national-capital-region-of-india-a-to-z-things-you-must-know-about-it-762031|title=आप जिस दिल्ली-NCR में रहते हैं, जानिए- उसके बारे में A टू Z जानाकरी|first=एबीपी न्यूज़ वेब|last=डेस्क|date=4 जन॰ 2018|website=abpnews.abplive.in|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190407170215/https://abpnews.abplive.in/india-news/ncr-national-capital-region-of-india-a-to-z-things-you-must-know-about-it-762031|archive-date=7 अप्रैल 2019|url-status=dead}}</ref>
=== भौगोलिक स्थिति ===
{{main|दिल्ली का भूगोल}}
[[चित्र:YamunaRiver.jpg|thumb|200px|दिल्ली में [[यमुना]] नदी]]
[[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र]] दिल्ली {{convert|1484|km2|sqmi|abbr=on}} में विस्तृत है, जिसमें से {{convert|783|km2|sqmi|abbr=on|0}} भाग ग्रामीण और {{convert|700|km2|sqmi|abbr=on|0}} भाग शहरी घोषित है। दिल्ली उत्तर-दक्षिण में अधिकतम {{convert|51.9|km|mi|abbr=on|0}} है और पूर्व-पश्चिम में अधिकतम चौड़ाई {{convert|48.48|km|mi|abbr=on|0}} है। दिल्ली के अनुरक्षण हेतु तीन संस्थाएं कार्यरत है:-
* [[दिल्ली नगर निगम]]:विश्व का सबसे बड़ा स्थानीय निकाय है, जो कि अनुमानित १३७.८० लाख नागरिकों (क्षेत्रफल {{convert|1397.3|km2|sqmi|abbr=on|0|disp=or}}) को नागरिक सेवाएं प्रदान करती है। यह क्षेत्रफ़ल के हिसाब से भी मात्र [[टोक्यो]] से ही पीछे है।"<ref>Municipal Corporation of Delhi: About us [http://www.mcdonline.gov.in/mcd/aboutus.jsp] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090324083412/http://www.mcdonline.gov.in/mcd/aboutus.jsp|date=24 मार्च 2009}})</ref>. नगर निगम १३९७ वर्ग कि॰मी॰ का क्षेत्र देखती है। वर्तमान में दिल्ली नगर निगम को तीन हिस्सों में बाट दिया गया है उत्तरी दिल्ली नगर निगम,पूर्वी दिल्ली नगर निगम व दक्षिण दिल्ली नगर निगम।
* [[नई दिल्ली नगरपालिका परिषद]]: (एन डी एम सी) (क्षेत्रफल {{convert|42.7|km2|sqmi|abbr=on|0|disp=or}}) [[नई दिल्ली]] की नगरपालिका परिषद् का नाम है। इसके अधीन आने वाला कार्यक्षेत्र एन डी एम सी क्षेत्र कहलाता है।
* [[दिल्ली छावनी बोर्ड]]: (क्षेत्रफल ({{convert|43|km2|sqmi|abbr=on|0|disp=or}})<ref>{{cite web |url=http://www.ndmc.gov.in/AboutNDMC/NNDMCAct.aspx |title=परिचय |accessdate=3 जुलाई 2007 |work=द न्यू देल्ही म्युनिसिपल कॉन्सिल एक्ट १९९४ |publisher=[[नई दिल्ली नगर पालिका परिषद]] |archive-url=https://web.archive.org/web/20080302220220/http://www.ndmc.gov.in/AboutNDMC/NNDMCAct.aspx |archive-date=2 मार्च 2008 |url-status=live }}</ref> जो दिल्ली के [[दिल्ली छावनी|छावनी]] क्षेत्रों को देखता है।
दिल्ली एक अति-विस्तृत क्षेत्र है। यह अपने चरम पर उत्तर में सरूप नगर से दक्षिण में [[रजोकरी]] तक फैला है। पश्चिमतम छोर [[नजफगढ़]] से पूर्व में [[यमुना नदी]] तक (तुलनात्मक परंपरागत पूर्वी छोर)। वैसे [[शाहदरा]], [[भजनपुरा]], आदि इसके पूर्वतम छोर होने के साथ ही बड़े बाज़ारो में भी आते हैं। रा.रा.क्षेत्र में उपर्युक्त सीमाओं से लगे निकटवर्ती प्रदेशों के [[नोएडा]], [[गुड़गांव]] आदि क्षेत्र भी आते हैं। दिल्ली की भू-प्रकृति बहुत बदलती हुई है। यह उत्तर में समतल कृषि मैदानों से लेकर दक्षिण में शुष्क [[अरावली पर्वत]] के आरम्भ तक बदलती है। दिल्ली के दक्षिण में बड़ी प्राकृतिक झीलें हुआ करती थीं, जो अब अत्यधिक खनन के कारण सूखती चली गईं हैं। इनमें से एक है [[बड़खल झील]]। [[यमुना नदी]] शहर के पूर्वी क्षेत्रों को अलग करती है। ये क्षेत्र [[पूर्वी दिल्ली|यमुना पार]] कहलाते हैं, वैसे ये नई दिल्ली से बहुत से पुलों द्वारा भली-भांति जुड़े हुए हैं। [[दिल्ली मेट्रो]] भी अभी दो पुलों द्वारा नदी को पार करती है।
दिल्ली {{coord|28.61|N|77.23|E|}} पर [[भारत|उत्तरी भारत]] में बसा हुआ है। यह समुद्रतल से ७०० से १००० फीट की ऊँचाई पर [[हिमालय]] से १६० किलोमीटर दक्षिण में [[यमुना नदी]] के किनारे पर बसा है। यह उत्तर, पश्चिम एवं दक्षिण तीन तरफ से [[हरियाणा]] राज्य तथा पूर्व में [[उत्तर प्रदेश]] राज्य द्वारा घिरा हुआ है। दिल्ली लगभग पूर्णतया [[गंगा के मैदान|गांगेय क्षेत्र]] में स्थित है। दिल्ली के भूगोल के दो प्रधान अंग हैं [[यमुना]] सिंचित समतल एवं दिल्ली रिज (पहाड़ी)। अपेक्षाकृत निचले स्तर पर स्थित मैदानी उपत्यकाकृषि हेतु उत्कृष्ट भूमि उपलब्ध कराती है, हालांकि ये बाढ़ संभावित क्षेत्र रहे हैं। ये दिल्ली के पूर्वी ओर हैं। और पश्चिमी ओर रिज क्षेत्र है। इसकी अधिकतम ऊँचाई ३१८ मी.(१०४३ फी.)<ref name=gisridge>{{cite web
|url=http://www.fig.net/pub/fig_2002/Ts3-9/TS3_9_mohan.pdf
|title=जीआईएस-बेस्ड स्पैशियल इन्फ़ॉर्मेशन इंटीग्रेशन, मॉडलिंग एण्ड डिजिटल मैपिंग: ए न्यू ब्लेन्ड ऑफ टूल फ़ॉर जियोस्पेशियल एन्वायरेनमेण्टल हेल्थ एनालिसिस फ़ॉर देल्ही रिज
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|work=स्पैशियल इन्फ़ॉर्मेशन फ़ॉर हेल्थ मॉनीटरिंग एण्ड पॉपुलेशन मैंनेजमेंट
|publisher=एफ़आईजी XXII अन्तर्राष्ट्रीय कांग्रेस
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|url-status=dead
}}</ref> तक जाती है। यह दक्षिण में [[अरावली पर्वत]]माला से आरम्भ होकर शहर के पश्चिमी, उत्तर-पश्चिमी एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों तक फैले हैं। दिल्ली की जीवनरेखा [[यमुना]] [[हिन्दू धर्म]] में अति पवित्र नदियों में से एक है। एक अन्य छोटी नदी [[हिंडन नदी]] [[पूर्वी दिल्ली]] को [[गाजियाबाद]] से अलग करती है। दिल्ली [[भूकम्प|सीज़्मिक क्षेत्र-IV]] में आने से इसे बड़े [[भूकम्प|भूकम्पों]] का संभावित क्षेत्र बनाती है।<ref name=hazardprofile>{{cite web
|url=http://www.undp.org.in/dmweb/hazardprofile.pdf
|title=हैज़ार्ड प्रोफ़ाइल ऑफ़ इंडियन डिस्ट्रिक्ट्स
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|work=नेशनल कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोजेक्ट इन डाइज़ास्टार मैंनेजमेण्ट
|publisher=[[यूएनडीपी]]
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}}</ref>
=== जल सम्पदा ===
भूमिगत जलभृत लाखों वर्षों से प्राकृतिक रूप से नदियों और बरसाती धाराओं से नवजीवन पाते रहे हैं। भारत में गंगा-यमुना का मैदान ऐसा क्षेत्र है, जिसमें सबसे उत्तम जल संसाधन मौजूद हैं। यहाँ अच्छी वर्षा होती है और हिमालय के ग्लेशियरों से निकलने वाली सदानीरा नदियाँ बहती हैं। दिल्ली जैसे कुछ क्षेत्रों में भी कुछ ऐसा ही है। इसके दक्षिणी पठारी क्षेत्र का ढलाव समतल भाग की ओर है, जिसमें पहाड़ी श्रृंखलाओं ने प्राकृतिक झीलें बना दी हैं। पहाड़ियों पर का प्राकृतिक वनाच्छादन कई बारहमासी जलधाराओं का उद्गम स्थल हुआ करता था।<ref name="इंडिया वाटर पोर्टल">{{Cite web|url=https://hindi.indiawaterportal.org/?q=content/%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8|title=Hindi Water Portal|website=hindi.indiawaterportal.org|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20170228150506/http://hindi.indiawaterportal.org/?q=content%2F%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8|archive-date=28 फ़रवरी 2017|url-status=dead}}</ref>
व्यापारिक केन्द्र के रूप में दिल्ली आज जिस स्थिति में है; उसका कारण यहाँ चौड़ी पाट की एक यातायात योग्य नदी [[यमुना]] का होना ही है; जिसमें माल ढुलाई भी की जा सकती थी। ५०० ई. पूर्व में भी निश्चित ही यह एक ऐसी ऐश्वर्यशाली नगरी थी, जिसकी सम्पत्तियों की रक्षा के लिए नगर प्राचीर बनाने की आवश्यकता पड़ी थी। सलीमगढ़ और पुराना किला की खुदाइयों में प्राप्त तथ्यों और पुराना किला से इसके इतने प्राचीन नगर होने के प्रमाण मिलते हैं। [[१०००]] ई. के बाद से तो इसके इतिहास, इसके युध्दापदाओं और उनसे बदलने वाले राजवंशों का पर्याप्त विवरण मिलता है।<ref name="इंडिया वाटर पोर्टल"/>
भौगोलिक दृष्टि से अरावली की श्रंखलाओं से घिरे होने के कारण दिल्ली की शहरी बस्तियों को कुछ विशेष उपहार मिले हैं। अरावली श्रंखला और उसके प्राकृतिक वनों से तीन बारहमासी नदियाँ दिल्ली के मध्य से बहती यमुना में मिलती थीं। दक्षिण एशियाई भूसंरचनात्मक परिवर्तन से अब यमुना अपने पुराने मार्ग से पूर्व की ओर बीस किलोमीटर हट गई है।<ref>{{cite web|url=http://hindi.indiawaterportal.org/?q=content/%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8|title=दिल्ली की प्यास-यमुना को प्राणवान करने से ही स्थानीय जलस्रोतों को नवजीवन मिलेगा|publisher=इंडिया वाटर पोर्टल|accessdate=९ अगस्त २०१५|archive-url=https://web.archive.org/web/20170228150506/http://hindi.indiawaterportal.org/?q=content%2F%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8|archive-date=28 फ़रवरी 2017|url-status=dead}}</ref> ३००० ई. पूर्व में ये नदी दिल्ली में वर्तमान 'रिज' के पश्चिम में होकर बहती थी। उसी युग में अरावली की श्रृंखलाओं के दूसरी ओर [[सरस्वती नदी]] बहती थी, जो पहले तो पश्चिम की ओर सरकी और बाद में भौगोलिक संरचना में भूमिगत होकर पूर्णत: लुप्त हो गई।
एक अंग्रेज द्वारा १८०७ में किए गए सर्वेक्षण के आधार पर बने उपर्युक्त नक्शे में वह जलधाराएं दिखाई गई हैं, जो दिल्ली की [[यमुना]] में मिलती थीं। एक तिलपत की पहाड़ियों में दक्षिण से उत्तर की ओर बहती थी, तो दूसरी हौजखास में अनेक सहायक धाराओं को समेटते हुए पूर्वाभिमुख बहती बारापुला के स्थान पर निजामुद्दीन के ऊपरी यमुना प्रवाह में जाकर मिलती थी। एक तीसरी और इनसे बड़ी धारा जिसे साहिबी नदी (पूर्व नाम रोहिणी) कहते थे। दक्षिण-पश्चिम से निकल कर रिज के उत्तर में यमुना में मिलती थी। ऐसा लगता है कि विवर्तनिक हलचल के कारण इसके बहाव का निचाई वाला भूभाग कुछ ऊँचा हो गया, जिससे इसका यमुना में गिरना रूक गया।<ref name="इंडिया वाटर पोर्टल"/> पिछले मार्ग से इसका ज्यादा पानी नजफगढ़ झील में जाने लगा। कोई ७० वर्ष पहले तक इस झील का आकार २२० वर्ग किलोमीटर होता था। अंग्रेजों ने साहिबी नदी की गाद निकालकर तल सफ़ाई करके नाला [[नजफगढ़]] का नाम दिया और इसे यमुना में मिला दिया। यही जलधाराएं और यमुना-दिल्ली में अरावली की श्रृंखलाओं के कटोरे में बसने वाली अनेक बस्तियों और राजधानियों को सदा पर्याप्त जल उपलब्ध कराती आईं थीं।
[[हिमालय]] के [[हिमनद|हिमनदों]] से निकलने के कारण यमुना सदानीरा रही है। परन्तु अन्य उपर्युक्त उपनदियाँ अब से २०० वर्ष पूर्व तक ही, जब तक कि अरावली की पर्वतमाला प्राकृतिक वन से ढकी रहीं तभी तक बारहमासी रह सकीं। खेद है कि दिल्ली में वनों का कटान खिलजियों के समय से ही शुरू हो गया था। इस्लाम स्वीकार न करने वाले स्थानीय विद्रोहियों और लूटपाट करने वाले मेवों का दमन करने के लिए ऐसा किया गया था। साथ ही बढ़ती शहरी आबादी के भार से भी वन प्रांत सिकुड़ा है। इसके चलते वनांचल में संरक्षित वर्षा जल का अवक्षय हुआ।<ref name="इंडिया वाटर पोर्टल"/>
ब्रिटिश काल में अंग्रेजी शासन के दौरान दिल्ली में सड़कों के निर्माण और बाढ़ अवरोधी बांध बनाने से पर्यावरण परिवर्तन के कारण ये जलधाराएं वर्ष में ग्रीष्म के समय सूख जाने लगीं। स्वतंत्रता के बाद के समय में बरसाती नालों, फुटपाथों और गलियों को सीमेंट से पक्का किया गया, इससे इन धाराओं को जल पहुँचाने वाले स्वाभाविक मार्ग अवरुद्ध हो गये।<ref name="इंडिया वाटर पोर्टल"/> ऐसी दशा में, जहां इन्हें रास्ता नहीं मिला, वहाँ वे मानसून में बरसाती नालों की तरह उफनने लगीं। विशद रूप में सीमेंट कंक्रीट के निर्माणों के कारण उन्हें भूमिगत जलभृत्तों या नदी में मिलाने का उपाय नहीं रह गया है। आज इन नदियों में नगर का अधिकतर मैला ही गिरता है।
=== जलवायु ===
[[चित्र:Indiagatelightening.jpg|thumb|200px|[[इंडिया गेट]] के निकट [[तड़ित]]। दिल्ली अपनी अधिकतम वर्षा [[जुलाई]]-[[अगस्त]] माह में [[मानसून]] से पाता है।]]
दिल्ली के महाद्वीपीय जलवायु में [[ग्रीष्म ऋतु]] एवं [[शीत ऋतु]] के तापमान में बहुत अन्तर होता है। ग्रीष्म ऋतु लंबी, अत्यधिक गर्म [[अप्रैल]] से मध्य-[[अक्टूबर]] तक चलती हैं। इस बीच में [[मानसून]] सहित [[वर्षा ऋतु]] भी आती है। ये गर्मी काफ़ी घातक भी हो सकती है, जिसने भूतकाल में कई जानें ली हैं। [[मार्च]] के आरम्भ से ही वायु की दिशा में परिवर्तन होने लगता है। ये उत्तर-पश्चिम से हट कर दक्षिण-पश्चिम दिशा में चलने लगती हैं। ये अपने साथ [[राजस्थान]] की गर्म लहर और धूल भी लेती चलती हैं। ये गर्मी का मुख्य अंग हैं। इन्हें ही [[लू]] कहते हैं। [[अप्रैल]] से [[जून]] के महीने अत्यधिक गर्म होते हैं, जिनमें उच्च ऑक्सीकरण क्षमता होती है। जून के अन्त तक नमी में वृद्धि होती है जो पूर्व मॉनसून वर्षा लाती हैं। इसके बाद जुलाई से यहां [[मॉनसून]] की हवाएं चलती हैं, जो अच्छी वर्षा लाती हैं। अक्टूबर-नवंबर में शिशिर काल रहता है, जो हल्की ठंड के संग आनन्द दायक होता है। नवंबर से [[शीत ऋतु]] का आरम्भ होता है, जो [[फरवरी]] के आरम्भ तक चलता है। शीतकाल में घना [[कोहरा]] भी पड़ता है, एवं शीतलहर चलती है, जो कि फिर वही तेज गर्मी की भांति घातक होती है।<ref name=Fog>{{cite news| publisher=[[द हिन्दू]]| url=http://www.hindu.com/2005/01/07/stories/2005010719480300.htm| title=फ़ॉग कन्टीन्यूज़ टू डुस्रप्ट फ़्लाइट, ट्रेन्स| date=7 जनवरी 2006| access-date=31 जुलाई 2009| archive-url=https://web.archive.org/web/20060304160457/http://www.hindu.com/2005/01/07/stories/2005010719480300.htm| archive-date=4 मार्च 2006| url-status=live}}</ref> यहां के तापमान में अत्यधिक अन्तर आता है जो −०.६ [[सेल्सियस|°से.]] (३०.९ [[फ़ैरनहाइट|°फ़ै.]]) से लेकर {{convert|48|C|F}} तक जाता है।<ref name=coldDelhi>{{cite news| publisher=[[हिन्दुस्तान टाइम्स]]| url=http://www.hindustantimes.com/news/181_1593200,000600010001.htm| title=ऍट ०.२°सेल्सियस, देल्ही गेट्स इट्स कोल्डेस्ट डे| date=8 जनवरी 2006| archiveurl=https://web.archive.org/web/20060111153439/http://www.hindustantimes.com/news/181_1593200,000600010001.htm| archivedate=11 जनवरी 2006| access-date=31 जुलाई 2009| url-status=live}}</ref> वार्षिक औसत तापमान २५°से. (७७ °फ़ै.); मासिक औसत तापमान १३°से. से लेकर ३२°से (५६°फ़ै. से लेकर ९०°फ़ै.) तक होता है।<ref name=weatherbase>{{cite web | publisher=Canty and Associates LLC | url=http://www.weatherbase.com/weather/weather.php3?s=28124&refer=&units=metric | title=Weatherbase entry for Delhi | accessdate=16 जनवरी 2007 | archive-url=https://web.archive.org/web/20110907174813/http://www.weatherbase.com/weather/weather.php3?s=28124&refer=&units=metric | archive-date=7 सितंबर 2011 | url-status=live }}</ref> औसत वार्षिक वर्षा लगभग ७१४ मि.मी. (२८.१ [[इंच]]) होती है, जिसमें से अधिकतम [[मानसून]] द्वारा [[जुलाई]]-[[अगस्त]] में होती है।<ref name=ecosurv1/> दिल्ली में मानसून के आगमन की औसत तिथि २९ जून होती है।<ref name=hindumonsoon>{{cite news |first= विनसन |last= कुरियन |title= मॉनसून रीचेज़ देल्ही टू डेज़ अहेड ऑफ शिड्यूल |url= http://www.thehindubusinessline.com/2005/06/28/stories/2005062800830200.htm |work= |publisher= द हिन्दू बिज़नेस लाइन |date= २८ जून २००५ |access-date= 12 मार्च 2009 |archive-url= https://web.archive.org/web/20070930225909/http://www.thehindubusinessline.com/2005/06/28/stories/2005062800830200.htm |archive-date= 30 सितंबर 2007 |url-status= live }}</ref>
{{दिल्ली मौसम}}
=== वायु प्रदूषण ===
{{main|दिल्ली में वायु प्रदूषण}}
दिल्ली की वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) आम तौर पर जनवरी से सितंबर के बीच मध्यम (१०१-२००) स्तर है, और फिर यह तीन महीनों में बहुत खराब (३०१-४००), गंभीर (४०१-५००) या यहां तक कि खतरनाक (५००+) के स्तर में भी हो जाती है।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/out-of-here-in-november-in-del-ncr-smog-break-is-becoming-the-new-annual-vacation/articleshow/104979257.cms|title=Out of here in November: In Delhi-NCR, smog break is becoming the new annual vacation}}</ref><ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/delhi-aqi-cp-smog-tower-down-due-to-dpcc-says-minister-gopal-rai-official-says-running-cost-high/articleshow/104978284.cms|title=Delhi AQI: CP Smog tower down due to DPCC, says minister Gopal Rai; official says running cost high}}</ref> अक्टूबर से दिसंबर के बीच, विभिन्न कारकों के कारण, स्टबल जलने, दिवाली में जलने वाले अग्नि पटाखे और ठंड के मौसम ।<ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/day-after-diwali-delhis-air-turns-hazardous/articleshow/66539912.cms|title=SC firecracker order: Delhi cops to act against violators - Times of India ►|website=The Times of India|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20181108173945/https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/day-after-diwali-delhis-air-turns-hazardous/articleshow/66539912.cms|archive-date=8 नवंबर 2018|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/delhi-breathed-easier-from-january-to-april/articleshow/59011204.cms|title=Delhi breathed easier from January to April - Times of India|website=The Times of India|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20181109070658/https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/delhi-breathed-easier-from-january-to-april/articleshow/59011204.cms|archive-date=9 नवंबर 2018|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/delhi-news/air-pollution-delhi-enjoys-cleanest-february-in-three-years/story-SANlmslHev8ifFgZbh3WXI.html|title=Air pollution: Delhi enjoys cleanest February in three years|date=27 फ़र॰ 2018|website=https://www.hindustantimes.com/|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20181109070735/https://www.hindustantimes.com/delhi-news/air-pollution-delhi-enjoys-cleanest-february-in-three-years/story-SANlmslHev8ifFgZbh3WXI.html|archive-date=9 नवंबर 2018|url-status=live}}</ref>
=== जनसांख्यिकी ===
{{IndiaCensusPop
|title= दिल्ली में जनसंख्या
|1901= 405819
|1911= 413851
|1921= 488452
|1931= 636246
|1941= 917939
|1951= 1744072
|1961= 2658612
|1971= 4065698
|1981= 6220406
|1991= 9420644
|2001= 13782976
|estimate=
|estyear=
|estref=
|footnote= source: [http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/Ecosur2001-02/PDF/chapter3.pdf delhiplanning.nic.in]<br />
† 1951 में (1947 के भारत के विभाजन के बाद) बड़े पैमाने पर प्रवासन के कारण<br/> जनसंख्या में विशाल वृद्धि हुई। (ह्यूज पॉप्युलेशन राइज़ इन १९५१ ड्यू टू लार्ज <br/> स्केल इमिग्रेशन आफ्टर [[भारत का विभाजन|पार्टीशन ऑफ इंडिया]] इन १९४७).
}}
[[१९०१]] में ४ लाख की जनसंख्या के साथ दिल्ली एक छोटा नगर था। १९११ में नई दिल्ली का [[ब्रिटिश भारत]] की राजधानी बनने के साथ दिल्ली की जनसंख्या बढ़ने लगी। भारत के विभाजन के समय [[पाकिस्तान]] से एक बहुत बड़ी संख्या में लोग आकर दिल्ली में बसने लगे। यह प्रवासन विभाजन के बाद भी चलता रहा। वार्षिक ३.८५% की वृद्धि के साथ [[२००१]] में दिल्ली की जनसंख्या १ करोड़ ३८ लाख पहुँच चुकी है।<ref name=census01del>{{cite web
|url=http://www.censusindia.gov.in/
|archiveurl=https://web.archive.org/web/20070811095710/http://www.censusindia.net/profiles/del.html
|title=Provisional Population Totals: Delhi
|work=Provisional Population Totals : India . Census of India 2001, Paper 1 of 2001
|publisher=Office of the Registrar General, भारत
|access-date=14 मार्च 2009
|archive-date=11 अगस्त 2007
|url-status=live
}}</ref> १९९१ से २००१ के दशक में जनसंख्या की वृद्धि की दर ४७.०२% थी। दिल्ली में जनसख्या का घनत्व प्रति किलोमीटर ९,२९४ व्यक्ति तथा लिंग अनुपात ८२१ महिलाओं एवं १००० पुरूषों का है। यहाँ साक्षरता का प्रतिशत ८१.८२% है।
{{-}}
== प्रशासन और जनसांख्यिकी ==
{{See|भारत के राज्यों और संघ क्षेत्रों की राजधानियाँ}}
{{मुख्य|दिल्ली के जिले और उपमंडल }}
[[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली]] कुल नौ ज़िलों में बँटा हुआ है। हरेक जिले का एक उपायुक्त नियुक्त है और जिले के तीन उपजिले हैं। प्रत्येक उप जिले का एक उप जिलाधीश नियुक्त है। सभी उपायुक्त मंडलीय अधिकारी के अधीन होते हैं। दिल्ली का जिला प्रशासन सभी प्रकार की राज्य एवं केन्द्रीय नीतियों का प्रवर्तन विभाग होता है। यही विभिन्न अन्य सरकारी कार्यकलापों पर आधिकारिक नियंत्रण रखता है। निम्न लिखित दिल्ली के जिलों और उपजिलों की सूची है:-
[[File:Delhi districts hi.svg|thumb|300x300px|दिल्ली के जिले]]
;[[मध्य दिल्ली जिला]]
{{*}}[[दरिया गंज]]{{*}}[[पहाड़ गंज]]{{*}}[[करौल बाग]]
;[[उत्तर दिल्ली जिला]]
{{*}}[[सदर बाजार, दिल्ली]] {{*}}[[कोतवाली, दिल्ली]]{{*}}[[सब्जी मंडी]]
;[[दक्षिण दिल्ली जिला]]
{{*}}[[कालकाजी]]{{*}}[[डिफेन्स कालोनी]]{{*}}[[हौज खास]]
;[[पूर्वी दिल्ली जिला]]
{{*}}[[प्रीत विहार]]{{*}}[[लक्ष्मी नगर]]{{*}}[[वसुंधरा एंक्लेव]]{{*}}[[मयूर विहार]]
;[[शाहदरा (दिल्ली)]]
{{*}}[[गाँधी नगर, दिल्ली]]{{*}}[[शाहदरा]]{{*}}[[बिहारी कालोनी]]{{*}}[[विवेक विहार]]{{*}}[[दिलशाद गार्डन]]
;[[उत्तर पूर्वी दिल्ली जिला]]
{{*}}[[सीलमपुर]]{{*}}[[करावल नगर]]{{*}}[[सीमा पुरी]]{{*}}[[भजनपुरा]]
;[[दक्षिण पश्चिम दिल्ली जिला]]
{{*}}[[वसंत विहार]]{{*}}[[नजफगढ़]]{{*}}[[दिल्ली छावनी]]
;[[नई दिल्ली जिला]]
{{*}}[[कनाट प्लेस, नई दिल्ली|कनाट प्लेस]]{{*}}[[संसद मार्ग]]{{*}}[[चाणक्य पुरी]]
;[[उत्तर पश्चिम दिल्ली जिला]]
{{*}}[[सरस्वती विहार]]{{*}}[[नरेला]]{{*}}[[मॉडल टाउन, दिल्ली|मॉडल टाउन]]
;[[पश्चिम दिल्ली जिला]]
{{*}}[[पटेल नगर]]{{*}}[[राजौरी गार्डन]]{{*}}[[पंजाबी बाग]]
=== जनसांख्यिकी ===
{{IndiaCensusPop
|title= दिल्ली में जनसंख्या
|1901= 405819
|1911= 413851
|1921= 488452
|1931= 636246
|1941= 917939
|1951= 1744072
|1961= 2658612
|1971= 4065698
|1981= 6220406
|1991= 9420644
|2001= 13782976
|estimate=
|estyear=
|estref=
|footnote= source: [http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/Ecosur2001-02/PDF/chapter3.pdf delhiplanning.nic.in]<br />
† 1951 में (1947 के भारत के विभाजन के बाद) बड़े पैमाने पर प्रवासन के कारण<br/> जनसंख्या में विशाल वृद्धि हुई। (ह्यूज पॉप्युलेशन राइज़ इन १९५१ ड्यू टू लार्ज <br/> स्केल इमिग्रेशन आफ्टर [[भारत का विभाजन|पार्टीशन ऑफ इंडिया]] इन १९४७).
}}
[[१९०१]] में ४ लाख की जनसंख्या के साथ दिल्ली एक छोटा नगर था। १९११ में [[ब्रिटिश भारत]] की राजधानी बनने के साथ इसकी जनसंख्या बढ़ने लगी। भारत के विभाजन के समय [[पाकिस्तान]] से एक बहुत बड़ी संख्या में लोग आकर दिल्ली में बसने लगे। यह प्रवासन विभाजन के बाद भी चलता रहा। वार्षिक ३.८५% की वृद्धि के साथ [[२००१]] में दिल्ली की जनसंख्या १ करोड़ ३८ लाख पहुँच चुकी है।<ref name=census01del/> १९९१ से २००१ के दशक में जनसंख्या की वृद्धि की दर ४७.०२% थी। दिल्ली में जनसंख्या का घनत्व प्रति किलोमीटर ९,२९४ व्यक्ति तथा लिंग अनुपात ८२१ महिलाओं एवं १००० पुरूषों का है। यहाँ साक्षरता का प्रतिशत ८१.८२% है।
{{-}}
== दर्शनीय स्थल ==
{{main|दिल्ली के दर्शनीय स्थल}}
[[चित्र:Akshardham_Delhi.jpg|right|thumb|दिल्ली का [[अक्षरधाम मंदिर, दिल्ली|अक्षरधाम मंदिर]] विश्व में सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर परिसर है।<ref>{{cite web |url=http://timesofindia.indiatimes.com/Akshardham_temple_makes_it_to_Guinness_Book/articleshow/2651500.cms |title=अक्षरधाम मंदिर [[गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स]] में - [[टाइम्स ऑफ इंडिया]] |publisher=Timesofindia.indiatimes.com |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090111093300/http://timesofindia.indiatimes.com/Akshardham_temple_makes_it_to_Guinness_Book/articleshow/2651500.cms |archive-date=11 जनवरी 2009 |url-status=live }}</ref>]]
[[चित्र:DelhiMetro.jpg|thumb|दिल्ली मेट्रो - २००४]]
दिल्ली भारत का एक पर्यटन का मुख्य केन्द्र भी है। भारत की राजधानी नई दिल्ली का इसमें होने के कारण भारत सरकार के अनेक कार्यालय, [[राष्ट्रपति भवन]], [[संसद भवन]], [[केन्द्रीय सचिवालय]] आदि अनेक आधुनिक स्थापत्य के नमूने तो यहाँ देखे ही जा सकते हैं; प्राचीन नगर होने के कारण इसका ऐतिहासिक महत्त्व भी है। पुरातात्विक दृष्टि से [[पुराना किला]], [[सफदरजंग का मकबरा]], [[जंतर मंतर, दिल्ली|जंतर मंतर]], [[क़ुतुब मीनार]] और [[लौह स्तंभ]] जैसे अनेक विश्व प्रसिद्ध निर्माण यहाँ पर आकर्षण का केन्द्र समझे जाते हैं। एक ओर [[हुमायूँ का मकबरा]], [[लाल किला, दिल्ली|लाल किला]] जैसे [[भारत में विश्व धरोहर स्थल|विश्व धरोहर]] मुगल शैली की तथा [[पुराना किला]], [[सफदरजंग का मकबरा]], [[लोधी मकबरे परिसर]] आदि ऐतिहासिक राजसी इमारत यहाँ है तो दूसरी ओर [[निज़ामुद्दीन औलिया]] की पारलौकिक [[निजामुद्दीन दरगाह|दरगाह]] भी। लगभग सभी धर्मों के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल यहाँ हैं जैसे [[बिरला मंदिर, दिल्ली|बिरला मंदिर]], [[छतरपुर मंदिर, दिल्ली|आद्या कात्यायिनी शक्तिपीठ]], [[बंगला साहब गुरुद्वारा]], [[बहाई मंदिर]], अक्षर धाम मंदिर, और [[जामा मस्जिद, दिल्ली|जामा मस्जिद]]
देश के शहीदों का स्मारक [[इंडिया गेट]], [[राजपथ]] पर इसी शहर में निर्मित किया गया है। भारत के [[भारत के प्रधान मंत्री|प्रधान मंत्रियों]] की [[राजघाट समाधि परिसर|समाधियाँ]] हैं, [[जंतर मंतर]] है, [[लाल किला]] है साथ ही अनेक प्रकार के [[दिल्ली के संग्रहालय|संग्रहालय]] और अनेक [[दिल्ली के बाजार|बाज़ार]] हैं, जैसे [[कनॉट प्लेस, दिल्ली|कनॉट प्लेस]], [[चाँदनी चौक, दिल्ली|चाँदनी चौक]] और बहुत से रमणीक उद्यान भी हैं, जैसे [[मुगल उद्यान, दिल्ली|मुगल उद्यान]], [[पंच इंद्रिय उद्यान, दिल्ली|गार्डन ऑफ फाइव सेंसिस]], [[तालकटोरा उद्यान, दिल्ली|तालकटोरा गार्डन]], [[लोधी उद्यान, दिल्ली|लोदी गार्डन]], [[वन्य प्राणी उद्यान, दिल्ली|चिड़ियाघर]], आदि, जो दिल्ली घूमने आने वालों का दिल लुभा लेते हैं।
== दिल्ली के शिक्षा संस्थान ==
{{See|दिल्ली विश्वविद्यालय}}
{{main|दिल्ली के शिक्षा संस्थानों की सूची}}
[[चित्र:IITDelhiMath.jpg|thumb|left|[[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान]], दिल्ली; इस संस्थान को एशियावीक द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में चौथे सबसे अच्छे संस्थान का दर्जा दिया गया।<ref>{{cite web |url=http://www-cgi.cnn.com/ASIANOW/asiaweek/features/universities2000/scitech/sci.overall.html |title=Asiaweek.com | Asia's Best Universities 2000 | Overall Ranking |publisher=Cgi.cnn.com |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://www.webcitation.org/684WxRCIT?url=http://www-cgi.cnn.com/ASIANOW/asiaweek/features/universities2000/scitech/sci.overall.html |archive-date=31 मई 2012 |url-status=dead }}</ref>]]
[[File:AIIMS central lawn.jpg|thumb|संगत रूप से यह भारत का सर्वश्रेष्ठ आयुर्विज्ञान संस्थान है,<ref>{{cite web|url=http://indiatoday.intoday.in/index.php?option=com_content&task=view&issueid=27&id=8684§ionid=30&Itemid=1 |title=इंडिया टुडे - India’s most widely read magazine |publisher=Indiatoday.digitaltoday.in |author=Malini Bhupta |date= |accessdate=3 नवंबर 2008}}</ref> [[अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान]] आयुर्विज्ञान शोध और चिकित्सा के क्षेत्र में एक वैश्विक संस्थान है।<ref>{{cite web |url=http://www.newsweek.com/id/45114 |title=Medical Meccas: An Oasis for India's Poorest | Newsweek Health for Life | Newsweek.com |publisher=Newsweek.com |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090807031539/http://www.newsweek.com/id/45114 |archive-date=7 अगस्त 2009 |url-status=live }}</ref>]]
दिल्ली भारत में शिक्षा का एक महत्त्वपूर्ण केन्द्र है। दिल्ली के विकास के साथ-साथ यहाँ शिक्षा का भी तेजी से विकास हुआ है। प्राथमिक शिक्षा तो प्रायः सार्वजनिक है। एक बहुत बड़े अनुपात में बच्चे माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्त्री शिक्षा का विकास हर स्तर पर पुरुषों से अधिक हुआ है। यहाँ की शिक्षा संस्थाओं में विद्यार्थी भारत के सभी भागों से आते हैं। यहाँ कई सरकारी एवं निजी शिक्षा संस्थान हैं जो [[कला]], [[वाणिज्य]], [[विज्ञान]], प्रोद्योगिकी, आयुर्विज्ञान, विधि और प्रबंधन में उच्च स्तर की शिक्षा देने के लिए विख्यात हैं। उच्च शिक्षा के संस्थानों सबसे महत्त्वपूर्ण है जिसके अन्तर्गत कई कॉलेज एवं शोध संस्थान हैं। [[अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान]], [[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान]], [[जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय]], [[इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय]], [[गुरु गोबिन्द सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय]], [[टेरी - ऊर्जा और संसाधन संस्थान]] एवं [[जामिया मिलिया इस्लामिया]] उच्च शिक्षा के प्रमुख संस्थान हैं।
== संस्कृति ==
{{main|भारतीय संस्कृति}}
[[चित्र:Traditional pottery in Dilli Haat.jpg|thumb|[[दिल्ली हाट]] में प्रदर्शित परंपरागत पॉटरी उत्पाद।]]
दिल्ली शहर में बने स्मारकों से विदित होता है कि यहां की संस्कृति प्राच्य ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि से प्रभावित है। [[भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण]] विभाग ने दिल्ली शहर में लगभग १२०० धरोहर स्थल घोषित किए हैं, जो कि विश्व में किसी भी शहर से कहीं अधिक है।<ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/Promote-lesser-known-monuments-of-Delhi/articleshow/4194014.cms|title='Promote lesser-known monuments of Delhi' - Times of India|website=The Times of India|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190302024609/https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/Promote-lesser-known-monuments-of-Delhi/articleshow/4194014.cms|archive-date=2 मार्च 2019|url-status=live}}</ref> और इनमें से १७५ स्थल राष्ट्रीय धरोहर स्थल घोषित किए हैं।<ref name=asimonuments>{{cite web
|url=http://asi.nic.in/asi_monu_alphalist_delhi.asp
|title=Delhi Circle (N.C.T. of Delhi)
|accessdate=27 दिसंबर 2006
|work=List of Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains of National Importance
|publisher=[[भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण]]
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070514061700/http://asi.nic.in/asi_monu_alphalist_delhi.asp
|archive-date=14 मई 2007
|url-status=live
}}</ref> पुराना शहर वह स्थान है, जहां मुगलों और तुर्क शासकों ने स्थापत्य के कई नमूने खड़े किए, जैसे [[जामा मस्जिद, दिल्ली|जामा मस्जिद]] (भारत की सबसे बड़ी मस्जिद)<ref name=Jama>{{cite web| publisher=Terra Galleria| url=http://www.terragalleria.com/asia/india/delhi/picture.indi38660.html| title=Jama Masjid, भारत's largest mosque| accessdate=13 मार्च 2009| archive-url=https://web.archive.org/web/20090304032037/http://www.terragalleria.com/asia/india/delhi/picture.indi38660.html| archive-date=4 मार्च 2009| url-status=dead}}</ref> और [[लाल किला, दिल्ली|लाल किला]]। दिल्ली में फिल्हाल तीन [[विश्व धरोहर स्थल]] हैं – [[लाल किला, दिल्ली|लाल किला]], [[कुतुब मीनार]] और [[हुमायुं का मकबरा]]।<ref name=whsite>{{cite web|url=http://whc.unesco.org/en/statesparties/in|title=Properties inscribed on the World Heritage List: India|publisher=युनेस्को World Heritage Centre|access-date=14 अप्रैल 2009|archive-url=https://www.webcitation.org/684WrF3rd?url=http://whc.unesco.org/en/statesparties/in|archive-date=31 मई 2012|url-status=live}}</ref> अन्य स्मारकों में [[इंडिया गेट]], [[जंतर मंतर, दिल्ली|जंतर मंतर]] (१८वीं सदी की खगोलशास्त्रीय वेधशाला), [[पुराना किला]] (१६वीं सदी का किला). [[लक्ष्मीनारायण मंदिर, दिल्ली|बिरला मंदिर]], [[अक्षरधाम मंदिर, दिल्ली|अक्षरधाम मंदिर]] और [[कमल मंदिर]] आधुनिक स्थापत्यकला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। [[राज घाट]] में राष्ट्रपिता [[महात्मा गाँधी]] तथा निकट ही अन्य बड़े व्यक्तियों की समाधियां हैं। [[नई दिल्ली]] में बहुत से सरकारी कार्यालय, सरकारी आवास, तथा ब्रिटिश काल के अवशेष और इमारतें हैं। कुछ अत्यंत महत्त्वपूर्ण इमारतों में [[राष्ट्रपति भवन]], [[केन्द्रीय सचिवालय]], [[राजपथ]], [[संसद भवन]] और [[विजय चौक]] आते हैं। [[सफदरजंग का मकबरा]] और [[हुमायुं का मकबरा]] मुगल बागों के चार बाग शैली का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
दिल्ली के राजधानी [[नई दिल्ली]] से जुड़ाव और भूगोलीय निकटता ने यहाँ की राष्ट्रीय घटनाओं और अवसरों के महत्त्व को कई गुणा बढ़ा दिया है। यहाँ कई राष्ट्रीय त्यौहार जैसे [[गणतंत्र दिवस]], [[स्वतंत्रता दिवस]] और [[गाँधी जयंती]] खूब हर्षोल्लास से मनाए जाते हैं। भारत के स्वतंत्रता दिवस पर यहाँ के प्रधान मंत्री लाल किले से यहाँ की जनता को संबोधित करते हैं। बहुत से दिल्लीवासी इस दिन को पतंगें उड़ाकर मनाते हैं। इस दिन पतंगों को स्वतंत्रता का प्रतीक माना जाता है।<ref name=freedom>{{cite web| work=123independenceday.com| publisher=Compare Infobase Limited| url=http://123independenceday.com/indian/gift_of/freedom/| title=Independence Day| accessdate=4 जनवरी 2007| archive-url=https://www.webcitation.org/684WsTS3d?url=http://123independenceday.com/indian/gift_of/freedom/| archive-date=31 मई 2012| url-status=dead}}</ref> गणतंत्र दिवस की परेड एक वृहत जुलूस होता है, जिसमें भारत की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक झांकी का प्रदर्शन होता है।<ref name=repmil>{{cite web|url=http://www.thehindubusinessline.com/2002/01/28/stories/2002012800060800.htm|title=R-Day parade, an anachronism?|accessdate=13 जनवरी 2007|last=Ray Choudhury|first=Ray Choudhury|date=28 जनवरी 2002|publisher=द हिन्दू बिज़नस लाइन|archive-url=https://web.archive.org/web/20070304155931/http://www.thehindubusinessline.com/2002/01/28/stories/2002012800060800.htm|archive-date=4 मार्च 2007|url-status=live}}</ref><ref name=repcul>{{cite web|url=http://www.india-tourism.org/delhi-travel/delhi-fairs-festivals.html|archiveurl=https://web.archive.org/web/20070319223442/http://www.india-tourism.org/delhi-travel/delhi-fairs-festivals.html|title=Fairs & Festivals of Delhइ|work=Delhi Travel|publisher=India Tourism.org|access-date=14 अप्रैल 2009|archive-date=19 मार्च 2007|url-status=dead}}</ref>
यहाँ के धार्मिक त्यौहारों में [[दीवाली]], [[होली]], [[दशहरा]], [[दुर्गा पूजा]], [[महावीर जयंती]], [[गुरु परब]], [[क्रिसमस]], [[महाशिवरात्रि]], [[ईद उल फितर]], [[बुद्ध जयंती]] [[लोहड़ी]] [[पोंगल]] और [[ओड़म]] जैसे पर्व हैं।<ref name=repcul/> कुतुब फेस्टिवल में संगीतकारों और नर्तकों का अखिल भारतीय संगम होता है, जो कुछ रातों को जगमगा देता है। यह [[कुतुब मीनार]] के पार्श्व में आयोजित होता है।<ref name=qutubfest>{{cite news |first=Madhur |last=Tankha |title=It's Sufi and rock at Qutub Fest |url=http://www.hindu.com/2005/12/15/stories/2005121503090200.htm |work=नई दिल्ली |publisher=द हिन्दू |date=15 दिसम्बर 2005 |accessdate=13 जनवरी 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20060513084038/http://www.hindu.com/2005/12/15/stories/2005121503090200.htm |archive-date=13 मई 2006 |url-status=live }}</ref> अन्य कई पर्व भी यहाँ होते हैं: जैसे [[आम महोत्सव]], पतंगबाजी महोत्सव, [[वसंत पंचमी]] जो वार्षिक होते हैं। [[एशिया]] की सबसे बड़ी ऑटो प्रदर्शनी: [[ऑटो एक्स्पो]]<ref name="autogenerated2" /> दिल्ली में द्विवार्षिक आयोजित होती है। [[प्रगति मैदान]] में वार्षिक [[पुस्तक मेला]] आयोजित होता है। यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा पुस्तक मेला है, जिसमें विश्व के २३ राष्ट्र भाग लेते हैं। दिल्ली को उसकी उच्च पढ़ाकू क्षमता के कारण कभी कभी विश्व की पुस्तक राजधानी भी कहा जाता है।<ref>{{cite web |url=http://www.business-standard.com/india/storypage.php?autono=313090 |title=Sunil Sethi: Why Delhi is India`s Book Capital |publisher=Business-standard.com |author=Sunil Sethi / नई दिल्ली फ़रवरी 09, 2008 |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090101102116/http://www.business-standard.com/india/storypage.php?autono=313090 |archive-date=1 जनवरी 2009 |url-status=live }}</ref>
[[चित्र:AutoExpoIndica.jpg|thumb|[[ऑटो एक्स्पो]], एशिया का सबसे बड़ा ऑटो प्रदर्शनी अवसर है।<ref name="autogenerated2">{{cite web |url=http://www.hindu.com/2008/01/09/stories/2008010953071500.htm |title=द हिन्दू : Front Page : Asia’s largest auto carnival begins in Delhi tomorrow |publisher=Thehindu.com |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://www.webcitation.org/684WtqZHy?url=http://www.hindu.com/2008/01/09/stories/2008010953071500.htm |archive-date=31 मई 2012 |url-status=live }}</ref>, जो कि [[प्रगति मैदान]] में द्विवार्षिक आयोजित होता है।]]
[[पंजाबी खाना|पंजाबी]] और [[मुगलई खाना|मुगलई]] खान पान जैसे [[कबाब]] और [[बिरयानी]] दिल्ली के कई भागों में प्रसिद्ध हैं।<ref>[http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/2060348.cms Delhi to lead way in street food] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090305151610/http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/2060348.cms |date=5 मार्च 2009 }} Times of India</ref><ref name="इंडिया टुडे Food">[http://conclave.digitaltoday.in/conclave2008/index.php?issueid=32&id=2427&option=com_content&task=view§ionid=8 Discovering the spice route to Delhi] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20081231115904/http://conclave.digitaltoday.in/conclave2008/index.php?issueid=32&id=2427&option=com_content&task=view§ionid=8 |date=31 दिसंबर 2008 }} इंडिया टुडे</ref> दिल्ली की अत्यधिक मिश्रित जनसंख्या के कारण भारत के विभिन्न भागों के [[भारतीय खाना|खानपान]] की झलक मिलती है, जैसे [[राजस्थानी खाना|राजस्थानी]], [[महाराष्ट्रियन खाना|महाराष्ट्रियन]], [[बंगाली खाना|बंगाली]], [[हैदराबादी खाना|हैदराबादी]] खाना और [[दक्षिण भारतीय खाना|दक्षिण भारतीय खाने के आइटम]] जैसे [[इडली]], [[सांभर]], [[दोसा]] इत्यादि बहुतायत में मिल जाते हैं। इसके साथ ही स्थानीय खासियत, जैसे [[दिल्ली की चाट|चाट]] इत्यादि भी खूब मिलती है, जिसे लोग चटकारे लगा लगा कर खाते हैं। इनके अलावा यहाँ [[महाद्वीपीय खाना]] जैसे इटैलियन और चाइनीज़ खाना भी बहुतायत में उपलब्ध है।
इतिहास में दिल्ली उत्तर भारत का एक महत्त्वपूर्ण व्यापार केन्द्र भी रहा है। पुरानी दिल्ली ने अभी भी अपने गलियों में फैले बाज़ारों और पुरानी मुगल धरोहरों में इन व्यापारिक क्षमताओं का इतिहास छुपा कर रखा है।<ref name=slt>{{cite news |first=Sarina |last=Singh |title=Delhi: Old, new, sleek and rambunctious too |url=http://www.sltrib.com/travel/ci_4853701 |work=Travels with Lonely Planet: India |publisher=The Salt Lake Tribune |date=16 दिसम्बर 2006 |access-date=14 अप्रैल 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071010050635/http://www.sltrib.com/travel/ci_4853701 |archive-date=10 अक्तूबर 2007 |url-status=dead }}</ref> पुराने शहर के बाजारों में हर एक प्रकार का सामान मिलेगा। तेल में डूबे चटपटे आम, नींबू, आदि के अचारों से लेकर मंहगे हीरे जवाहरात, जेवर तक; दुल्हन के अलंकार, कपड़ों के थान, तैयार कपड़े, मसाले, मिठाइयाँ और क्या नहीं?<ref name=slt/> कई पुरानी हवेलियाँ इस शहर में अभी भी शोभा पा रही हैं और इतिहास को संजोए शान से खड़ी है।<ref name=jacob>{{cite journal |last = Jacob |first = Satish |year = 2002 |month = जुलाई |title = Wither, the walled city |journal = Seminar (web edition) |issue = 515 |url = http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20satish%20jacob.htm |access-date = 14 अप्रैल 2009 |archive-url = https://web.archive.org/web/20061212133015/http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20satish%20jacob.htm |archive-date = 12 दिसंबर 2006 |url-status = dead }}</ref> [[चांदनी चौक, दिल्ली|चांदनी चौक]], जो कि यहाँ का तीन शताब्दियों से भी पुराना बाजार है, दिल्ली के जेवर, ज़री साड़ियों और मसालों के लिए प्रसिद्ध है।<ref name=Chandni>{{cite web| publisher=About Palace on Wheels| work=Delhi Tours| url=http://www.aboutpalaceonwheels.com/palace-on-wheels-destinations/shopping-in-delhi.html| title=Shopping in Delhi| accessdate=4 जनवरी 2007| archive-url=https://www.webcitation.org/684Ww5Av6?url=http://www.aboutpalaceonwheels.com/palace-on-wheels-destinations/shopping-in-delhi.html| archive-date=31 मई 2012| url-status=dead}}</ref> दिल्ली की प्रसिद्ध कलाओं में से कुछ हैं यहाँ के [[ज़रदोज़ी]] (सोने के तार का काम, जिसे ज़री भी कहा जाता है) और [[मीनाकारी]] (जिसमें पीतल के बर्तनों इत्यादि पर नक्काशी के बीच रोगन भरा जाता है। यहाँ की कलाओं के लिए बाजार हैं [[प्रगति मैदान, दिल्ली]], [[दिल्ली हाट]], [[हौज खास, दिल्ली]]- जहां विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प के और हठकरघों के कार्य के नमूने मिल सकते हैं। समय के साथ साथ दिल्ली ने देश भर की कलाओं को यहाँ स्थान दिया हैं। इस तरह यहाँ की कोई खास शैली ना होकर एक अद्भुत मिश्रण हो गया है।<ref name=menon>{{cite journal |last = Menon |first = Anjolie Ela |year = 2002 |month = जुलाई |title = The Age That Was |journal = Seminar (web edition) |issue = 515 |url = http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20anjolie%20ela%20menon.htm |access-date = 14 अप्रैल 2009 |archive-url = https://web.archive.org/web/20090916212407/http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20anjolie%20ela%20menon.htm |archive-date = 16 सितंबर 2009 |url-status = dead }}</ref><ref name=dayal>{{cite journal | last = Dayal | first = Ravi | year = 2002 | month = जुलाई | title = A Kayastha’s View | journal = Seminar (web edition) | issue = 515 | url = http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20ravi%20dayal.htm | access-date = 14 अप्रैल 2009 | archive-url = https://web.archive.org/web/20090916211837/http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20ravi%20dayal.htm | archive-date = 16 सितंबर 2009 | url-status = dead }}</ref>
दिल्ली के निम्न भगिनी शहर हैं:<ref>{{cite web|url=http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/15278423.cms|publisher=India Times|title=Delhi to London, it’s a sister act|accessdate=18 फरवरी 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20170204131607/http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/15278423.cms|archive-date=4 फ़रवरी 2017|url-status=live}}</ref>
* [[शिकागो]], {{USA}}
* [[कुआला लंपूर]], {{MAS}}
* [[लंदन]], {{GBR}}
* [[मॉस्को]], {{RUS}}
* [[सिओल]], {{KOR}}
* [[वॉशिंगटन]], {{USA}}
* [[लॉस एंजिल्स]], {{USA}}
* [[सिडनी]], {{AUS}}
* [[पेरिस]], {{FRA}}
== स्थापत्य ==
[[चित्र:Qutab.jpg|thumb|left|{{convert|72.5|m|ft|abbr=on|0}} ऊंची [[कुतुब मीनार]], विश्व की सबसे ऊंची मुक्त-खड़ी [[मीनार]] है।<ref name="Qutab">{{cite web|url=http://portal.unesco.org/en/ev.php-URL_ID=6643&URL_DO=DO_TOPIC&URL_SECTION=201.html|title=Under threat: The Magnificent Minaret of Jam|work=The New Courier No 1|month=अक्टूबर|year=2002|publisher=युनेस्को|accessdate=3 मई 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20091111215826/http://portal.unesco.org/en/ev.php-URL_ID%3D6643%26URL_DO%3DDO_TOPIC%26URL_SECTION%3D201.html|archive-date=11 नवंबर 2009|url-status=live}}</ref>]]
इस ऐतिहासिक नगर में एक ओर प्राचीन, अतिप्राचीन काल के असंख्य खंडहर मिलते हैं, तो दूसरी ओर अवार्चीन काल के योजनानुसार निर्मित उपनगर भी। इसमें विश्व के किसी भी नवीनतम नगर से होड़ लेने की क्षमता है। प्राचीनकाल के कितने ही नगर नष्ट हो गए पर दिल्ली अपनी भौगिलिक स्थिति और समयानुसार परिवर्तनशीलता के कारण आज भी समृद्धशाली नगर ही नहीं महानगर है। [[भारत सरकार]] के संस्कृति मंत्रालय के [[भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग]] ने दिल्ली में १२०० इमारतों को ऐतिहासिक महत्त्व का तथा १७५ को राष्ट्रीय सांस्कृतिक स्मारक घोषित किया है।
[[चित्र:Humayun's tomb outside.jpg|thumb|right|[[१५६०]] में बना, [[हुमायुं का मकबरा]] [[मुगल स्थापत्यकला|मुगल मकबरा परिसर]] का प्रथम उदाहरण है।<ref>{{cite book |last=Petersen |first=Andrew |title=Dictionary of Islamic Architecture |url=http://books.google.com/books?id=gVQj7bW0W9MC&pg=PA204&dq=humayun%27s+tomb+architecture+mughal&lr=&sig=ACfU3U0LcITGtYPq59VMowHRAL5yKKa_eg |publisher=Routledge |location= |language= |isbn=0415213320 |pages= |chapter= |chapterurl= |year=1999 |access-date=17 मई 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110920083610/http://books.google.com/books?id=gVQj7bW0W9MC&pg=PA204&dq=humayun%27s+tomb+architecture+mughal&lr=&sig=ACfU3U0LcITGtYPq59VMowHRAL5yKKa_eg |archive-date=20 सितंबर 2011 |url-status=live }}</ref>]]
नई दिल्ली में [[महरौली]] में गुप्तकाल में निर्मित लौहस्तंभ है। यह प्रौद्योगिकी का एक अनुठा उदाहरण है। ईसा की चौथी शताब्दी में जब इसका निर्माण हुआ तब से आज तक इस पर जंग नहीं लगा। दिल्ली में इंडो-इस्लामी स्थापत्य का विकाश विशेष रूप से दृष्टगत होता है। दिल्ली के कुतुब परिसर में सबसे भव्य स्थापत्य कुतुब मिनार है। इस मिनार को स़ूफी संत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की स्मृति में बनवाया गया था। तुगलक काल में निर्मित गयासुद्दीन का मकबरा स्थापत्य में एक नई प्रवृत्ति का सूचक है। यह अष्टभुजाकार है। दिल्ली में हुमायूँ का मकबरा मुगल स्थापत्य कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। शाहजहाँ का शासनकाल स्थापत्य कला के लिए याद किया जाता है।
{{-}}
== अर्थ व्यवस्था ==
{{main|भारत की अर्थव्यवस्था}}
[[मुंबई]] के बाद दिल्ली भारत के सबसे बड़े व्यापारिक महानगरो में से है। देश में प्रति व्यक्ति औसत आय की दृष्टि से भी यह देश के सबसे सम्पन्न नगरो में गिना जाता है। [[१९९०]] के बाद से दिल्ली विदेशी निवशेकों का पसन्दीदा स्थान बना है। हाल में कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों जैसे [[पेप्सी]], गैप, इत्यादि ने दिल्ली और उसके आस-पास के क्षेत्रों में अपना मुख्यालय खोला है। क्रिसमस के दिन वर्ष [[२००२]] में दिल्ली के महानगरी क्षेत्रों में [[दिल्ली मेट्रो रेल]] का शुभारम्भ हुआ जिसे वर्ष २०२२ में पूरा किये जाने का अनुमान है।
हवाई यातायात द्वारा दिल्ली [[इन्दिरा गांधी अन्तरराष्ट्रीय विमानस्थल]] से पूरे विश्व से जुड़ा है।.
{{-}}
== यातायात सुविधाएं ==
{{main|दिल्ली में यातायात}}
[[चित्र:Signaturebridgenedelhi.png|thumb|[[सिग्नेचर ब्रिज]] यमुना नदी पर, दिल्ली में सबसे ऊंची संरचना है<ref>{{cite news|title= कुतुबमिनार से भी ऊंचे सिग्नेचर ब्रिज पर चढ़ते ही होने लगेगा अलग एहसास, पलक झपकते मिटेंगी दूरियां|url= https://www.amarujala.com/india-news/inaugaration-of-signature-bridge-of-delhi-see-photos|date= [[११ दिसम्बर]], [[२००२]]|access-date= 4 नवंबर 2018|archive-url= https://web.archive.org/web/20181104171442/https://www.amarujala.com/india-news/inaugaration-of-signature-bridge-of-delhi-see-photos|archive-date= 4 नवंबर 2018|url-status= live}}</ref>]]
[[चित्र:Delhi Metro.jpeg|thumb|[[दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन]] द्वारा संचालित मेट्रो रेल सेवा औसत ८,३७,००० सवारियां प्रतिदिन ले जाती है।<ref>{{cite web|url=http://timesofindia.indiatimes.com/news/city/delhi/Delhi-Metro-records-highest-ridership/articleshow/4860435.cms|title=Delhi Metro records highest ridership|publisher=[[द टाईम्स ऑफ़ इंडिया]]|date=5 अगस्त 2009|access-date=3 नवंबर 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20090809165516/http://timesofindia.indiatimes.com/news/city/delhi/Delhi-Metro-records-highest-ridership/articleshow/4860435.cms|archive-date=9 अगस्त 2009|url-status=live}}</ref>]]
[[चित्र:Delhi airport terminal 3 (cropped).jpg|thumb|इंदिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा]]
[[चित्र:Raj Path.jpg|thumb|[[रायसीना की पहाड़ियाँ]] में [[राजपथ]]। दिल्ली की कुल गाड़ियों का ३०% निजी वाहन हैं। दिल्ली में औसत ९६३ नए वाहन प्रतिदिन पंजीकृत होते हैं।<ref>{{cite web |url=http://www.iht.com/articles/2007/11/06/asia/delhi.php |title=Study finds air quality in Delhi has worsened dramatically - International Herald Tribune |publisher=Iht.com |author= |archiveurl=https://web.archive.org/web/20080706171906/http://www.iht.com/articles/2007/11/06/asia/delhi.php |archivedate=6 जुलाई 2008 |access-date=14 अप्रैल 2009 |url-status=dead }}</ref>]]
[[चित्र:নিউ দিল্লি রেলওয়ে স্টেশন.jpg|thumb|नई दिल्ली रेलवे स्टेशन]]
[[चित्र:Old Delhi Railway Station (DLI).jpg|thumb|दिल्ली जंक्शन रेलवे स्टेशन]]
दिल्ली के सार्वजनिक यातायात के साधन मुख्यतः बस, ऑटोरिक्शा और [[दिल्ली मेट्रो रेल|मेट्रो रेल]] सेवा हैं। दिल्ली की मुख्य यातायात आवश्यकता का ६०% बसें पूरा करती हैं।<ref name=ecosurv12>{{cite web|url=http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/ES%202005-06/Chpt/12.pdf|title=Chapter 12: Transport|accessdate=21 दिसंबर 2006|format=PDF|work=Economic Survey of Delhi, 2005–2006|publisher=Planning Department, Government of National Capital Territory of Delhi|pages=pp130–146|archive-url=https://web.archive.org/web/20070116044119/http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/ES%202005-06/Chpt/12.pdf|archive-date=16 जनवरी 2007|url-status=dead}}</ref> [[दिल्ली परिवहन निगम]] द्वारा संचालित सरकारी बस सेवा दिल्ली की प्रधान बस सेवा है। [[दिल्ली परिवहन निगम]] विश्व की सबसे बड़ी पर्यावरण सहयोगी बस-सेवा प्रदान करता है।<ref name=DTC>{{cite web|url=http://dtc.nic.in/ccharter.htm|title=Citizen Charter|accessdate=21 दिसंबर 2006|work=|publisher=Delhi Transport Corporation|archive-url=https://web.archive.org/web/20070110171420/http://dtc.nic.in/ccharter.htm|archive-date=10 जनवरी 2007|url-status=dead}}</ref> हाल ही में [[बस त्वरित पारगमन|बी आर टी]] कॉरिडोर की सेवा [[अंबेडकर नगर]] और [[दिल्ली गेट]] के बीच आरम्भ हुई है। जिसे तकनीकी खामियों के कारण तोड़ दिया है और अब सड़क को पुराने स्वरूप में बदल दिया गया है। [[ऑटो रिक्शा]] दिल्ली में यातायात का एक प्रभावी माध्यम है। ये ईंधन के रूप में [[कंप्रेस्ड नैचुरल गैस|सी एन जी]] का प्रयोग करते हैं, व इनका रंग हरा होता है। दिल्ली में वातानुकूलित टैक्सी सेवा भी उपलब्ध है जिनका किराया ७.५० से १५ रु/कि॰मी॰ तक है। दिल्ली की कुल वाहन संख्या का ३०% निजी वाहन हैं।<ref name=ecosurv12/> दिल्ली में १९२२.३२ कि॰मी॰ की लंबाई प्रति १०० कि॰मी॰२, के साथ भारत का सर्वाधिक सड़क घनत्व मिलता है।<ref name=ecosurv12/> दिल्ली भारत के पांच प्रमुख महानगरों से राष्ट्रीय राजमार्गों द्वारा जुड़ा है। ये राजमार्ग हैं: [[भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों की सूची|राष्ट्रीय राजमार्ग]] संख्या: १, २, ८, १० और २४। अभी कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने राष्ट्रीय राजमार्ग २४ जो निज़ामुद्दीन से मेरठ के लिए दिल्ली-मेरठ एक्स्प्रेस वे का उद्घाटन किया था वह ८ लेन का है जिसकी अधिकतम १०० किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से चल सकते हैं वो भी है। दिल्ली की सड़कों का अनुरक्षण [[दिल्ली नगर निगम]] (एम सी डी), दिल्ली छावनी बोर्ड, पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट (PWD) और [[दिल्ली विकास प्राधिकरण]] द्वारा किया जाता है।<ref name=roadauth>{{cite web|url=http://www.gisdevelopment.net/proceedings/mapindia/2006/transportation/mi06tran_200.htm|title=GIS Based Maintenance Management System (GMMS) For Major Roads Of Delhi|accessdate=14 जनवरी 2007|author=I.Prasada Rao|author2=Dr. P.K. Kanchan, Dr. P.K. Nanda|work=Map India 2006: Transportation|publisher=GISdevelopment.net|archive-url=https://web.archive.org/web/20060712102505/http://www.gisdevelopment.net/proceedings/mapindia/2006/transportation/mi06tran_200.htm|archive-date=12 जुलाई 2006|url-status=dead}}</ref> दिल्ली के उच्च जनसंख्या दर और उच्च अर्थ विकास दर ने दिल्ली पर यातायात की वृहत मांग का दबाव यहाँ की अवसंरचना पर बनाए रखा है। २००८ के अनुसार दिल्ली में ५५ लाख वाहन नगर निगम की सीमाओं के अंदर हैं। इस कारण दिल्ली विश्व का सबसे अधिक वाहनों वाला शहर है। साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ११२ लाख वाहन हैं।<ref>{{cite web |url=http://www.igovernment.in/site/traffic-snarl-snaps-42-cr-man-hour-from-delhi-ncr-workers/ |title=Traffic snarl snaps 42 Cr man-hour from Delhi, NCR workers at iGovernment |publisher=Igovernment.in |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080110092330/http://www.igovernment.in/site/traffic-snarl-snaps-42-cr-man-hour-from-delhi-ncr-workers/ |archive-date=10 जनवरी 2008 |url-status=dead }}</ref> सन १९८५ में दिल्ली में प्रत्येक १००० व्यक्ति पर ८५ कारें थीं।<ref>{{cite web |url=http://economictimes.indiatimes.com/Every_12th_Delhiite_owns_a_car/articleshow/2667484.cms |title=Every 12th Delhiite owns a car- Automobiles-Auto-News By Industry-News-दि इकॉनोमिक टाइम्स |publisher=Economictimes.indiatimes.com |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090111232915/http://economictimes.indiatimes.com/Every_12th_Delhiite_owns_a_car/articleshow/2667484.cms |archive-date=11 जनवरी 2009 |url-status=live }}</ref> दिल्ली के यातायात की मांगों को पूरा करने हेतु दिल्ली और केन्द्र सरकार ने एक मास रैपिड ट्रांज़िट सिस्टम का आरम्भ किया, जिसे दिल्ली मेट्रो कहते हैं।<ref name=ecosurv12/> सन १९९८ में [[सर्वोच्च न्यायालय]] ने दिल्ली के सभी सार्वजनिक वाहनों को डीज़ल के स्थान पर [[कंप्रेस्ड नैचुरल गैस]] का प्रयोग अनिवार्य रूप से करने का आदेश दिया था।<ref name="kumari">{{cite journal| author = R. Kumari, A.K. Attri, L. Int Panis, B.R. Gurjar| title = Emission estimates of Particulate Matter and Heavy Metals from Mobile sources in Delhi (India)| journal = J. Environ. Science & Engg.| volume = 55| issue = 2| pages = 127–142| date = अप्रैल 2013| url = https://www.researchgate.net/publication/259827470_Emission_estimates_of_Particulate_Matter_and_Heavy_Metals_from_Mobile_Sources_in_Delhi| access-date = 16 अप्रैल 2014| archive-url = https://web.archive.org/web/20141108235156/http://www.researchgate.net/publication/259827470_Emission_estimates_of_Particulate_Matter_and_Heavy_Metals_from_Mobile_Sources_in_Delhi| archive-date = 8 नवंबर 2014| url-status = live}}</ref><ref name=supremelaw>{{cite web|url=http://www.cleanairnet.org/caiasia/1412/articles-69423_delhi_case.pdf|title=Introduction|accessdate=14 जनवरी 2007|author=Armin Rosencranz|author2=Michael Jackson|format=PDF|work=The Delhi Pollution Case: The Supreme Court of India and the Limits of Judicial Power|publisher=indlaw.com|pages=p.3|archive-url=https://web.archive.org/web/20070614203640/http://www.cleanairnet.org/caiasia/1412/articles-69423_delhi_case.pdf|archive-date=14 जून 2007|url-status=dead}}</ref> तब से यहाँ सभी सार्वजनिक वाहन सी एन जी पर ही चालित हैं।
; मेट्रो सेवा
{{मुख्य|दिल्ली मेट्रो}}
[[दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन]] द्वारा संचालित [[दिल्ली मेट्रो रेल]] एक मास रैपिड ट्रांज़िट (त्वरित पारगमन) प्रणाली है, जो कि दिल्ली के कई क्षेत्रों में सेवा प्रदान करती है। इसकी शुरुआत २४ दिसम्बर २००२ को [[शहादरा]] [[तीस हजारी]] लाईन से हुई। इस परिवहन व्यवस्था की अधिकतम गति ८०किमी/घंटा (५०मील/घंटा) रखी गयी है और यह हर स्टेशन पर लगभग २० सेकेंड रुकती है। सभी ट्रेनों का निर्माण [[दक्षिण कोरिया]] की कंपनी रोटेम द्वारा किया गया है। दिल्ली की परिवहन व्यवसथा में मेट्रो रेल एक महत्त्वपूर्ण कड़ी है। इससे पहले परिवहन का ज़्यादातर बोझ सड़क पर था। प्रारम्भिक अवस्था में इसकी योजना छह मार्गों पर चलने की है जो दिल्ली के ज्यादातर हिस्से को जोड़ेगी। इसका पहला चरण [[वर्ष]] [[२००६]] में पूरा हो चुका है। दुसरे चरण में दिल्ली के [[महरौली]], [[बदरपुर बॉर्डर]], आनन्द विहार, जहांगीरपुरी, मुन्द्का और [[इन्दिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा]] अथवा दिल्ली से सटे [[नोएडा]], [[गुड़गांव]] और वैशाली को मेट्रो से जोड़ने का काम जारी है। परियोजना के तीसरे चरण में [[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र]] के शहरों [[गाजियाबाद]], [[फरीदाबाद]] इत्यादि को भी जोड़ने की योजना है। इस रेल व्यवस्था के चरण I में मार्ग की कुल लंबाई लगभग ६५.११ किमी है जिसमे १३ किमी भूमिगत एवं ५२ किलोमीटर एलीवेटेड मार्ग है। चरण II के अन्तर्गत पूरे मार्ग की लंबाई १२८ किमी होगी एवं इसमें ७९ स्टेशन होंगे जो अभी निर्माणाधीन हैं, इस चरण के २०१० तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-newdelhi/Delhi-Metro-confident-of-meeting-deadline/article14836060.ece|title=Delhi Metro confident of meeting deadline|date=17 सित॰ 2007|accessdate=1 मार्च 2019|via=www.thehindu.com|archive-url=https://web.archive.org/web/20180303140135/http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-newdelhi/Delhi-Metro-confident-of-meeting-deadline/article14836060.ece|archive-date=3 मार्च 2018|url-status=live}}</ref><ref name="Delhi Metro Masterplan 2021">Delhi Metro Masterplan 2021</ref> चरण III (११२ किमी) एवं IV (१०८.५ किमी) लंबाई की बनाये जाने का प्रस्ताव है जिसे क्रमश: २०१५ एवं २०२० तक पूरा किये जाने की योजना है। इन चारों चरणो का निर्माण कार्य पूरा हो जाने के पश्चात दिल्ली मेट्रो के मार्ग की कुल लंबाई ४१३.८ किलोमीटर की हो जाएगी जो [[लंदन]] के मेट्रो रेल (४०८ किमी) से भी बड़ा बना देगी।<ref name="Delhi Metro Masterplan 2021"/><ref>{{Cite web|url=http://www.delhimetrorail.com/commuters/images/metro_map_big.jpg|title=map of extensions, DMRC|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20061211073124/http://www.delhimetrorail.com/commuters/images/metro_map_big.jpg|archive-date=11 दिसंबर 2006|url-status=dead}}</ref><ref>द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया</ref><ref>Discovery channel : 24 hours with Delhi Metro</ref>
दिल्ली के २०२१ मास्टर प्लान के अनुसार बाद में मेट्रो रेल को दिल्ली के उपनगरों तक ले जाए जाने की भी योजना है।
;रेल सेवा
दिल्ली [[भारतीय रेल]] के [[:Image:India railway schematic map.svg|नक्शे]] का एक प्रधान जंक्शन है। यहाँ [[उत्तर रेलवे]] का मुख्यालय भी है। यहाँ के चार मुख्य रेलवे स्टेशन हैं: [[नई दिल्ली रेलवे स्टेशन]], [[दिल्ली जंक्शन]], [[सराय रोहिल्ला]] और [[हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन]]।<ref name=ecosurv12/> दिल्ली अन्य सभी मुख्य शहरों और महानगरों से कई राजमार्गों और एक्स्प्रेसवे (त्वरित मार्ग) द्वारा जुड़ा हुआ है। यहाँ वर्तमान में तीन एक्स्प्रेसवे हैं और तीन निर्माणाधीन हैं, जो इसे समृद्ध और वाणिज्यिक उपनगरों से जोड़ेंगे। [[दिल्ली गुड़गांव एक्स्प्रेसवे]] दिल्ली को [[गुड़गांव]] और अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से जोड़ता है। [[डी एन डी फ्लाइवे]] और [[नोएडा|नोएडा-]][[ग्रेटर नोएडा]] एक्स्प्रेसवे दिल्ली को दो मुख्य उपनगरों से जोड़ते हैं। ग्रेटर नोएडा में एक अलग अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा योजनाबद्ध है और नोएडा में इंडियन ग्रैंड प्रिक्स नियोजित है।
;वायु सेवा
[[इंदिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा]] दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम कोण पर स्थित है और यही अन्तर्देशीय और अन्तर्राष्ट्रीय वायु-यात्रियों के लिए शहर का मुख्य द्वार है। वर्ष २००६-०७ में हवाई अड्डे पर २३ मिलियन सवारियां दर्ज की गईं थीं,<ref name="autogenerated1">इंदिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा</ref><ref name=essentialtravel>{{cite web| publisher=Essential Travel Ltd., UK.| url=http://parking.essentialtravel.co.uk/worldairport/india/delhi.htm| title=Delhi – Indira Gandhi International Airport (DEL) information| accessdate=29 अप्रैल 2006| archive-url=https://web.archive.org/web/20060719165130/https://parking.essentialtravel.co.uk/worldairport/india/delhi.htm| archive-date=19 जुलाई 2006| url-status=dead}}</ref> जो इसे दक्षिण [[एशिया]] के व्यस्ततम विमानक्षेत्रों में से एक बनाती हैं। US$१९.३ लाख की लागत से एक नया टर्मिनल-३ निर्माणाधीन है, जो ३.४ करोड़ अतिरिक्त यात्री क्षमता का होगा, सन २०१० तक पूर्ण होना निश्चित है।<ref>{{cite web |url=http://www.dailytimes.com.pk/default.asp?page=2007\02\18\story_18-2-2007_pg5_24 |title=Daily Times - Leading News Resource of Pakistan |publisher=Dailytimes.com.pk |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archiveurl=https://archive.today/20120904074154/http://www.dailytimes.com.pk/default.asp?page=2007%5C02%5C18%5Cstory_18-2-2007_pg5_24 |archivedate=4 सितंबर 2012 |url-status=live }}</ref> इसके आगे भी विस्तार कार्यक्रम नियोजित हैं, जो यहाँ १०० मिलियन यात्री प्रतिवर्ष से अधिक की क्षमता देंगे।<ref name="autogenerated1"/> [[सफदरजंग विमानक्षेत्र]] दिल्ली का एक अन्य एयरफ़ील्ड है, जो सामान्य विमानन अभ्यासों के लिए और कुछ वीआईपी उड़ानों के लिए प्रयोग होता है।<ref name=safdur>{{cite web|url=http://gc.kls2.com/airport/VIDD|title=VIDD - Airport|accessdate=14 जनवरी 2007|work=Great Circle Search|publisher=Karl L. Swartz|archive-url=https://web.archive.org/web/20070310055725/http://gc.kls2.com/airport/VIDD|archive-date=10 मार्च 2007|url-status=live}}</ref>
==इन्हें भी देखें==
* [[भारत के राज्यों और संघ क्षेत्रों की राजधानियाँ]]
* [[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के सर्वाधिक जनसंख्या वाले शहरों की सूची]]
* [[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र]]
* [[नई दिल्ली]]
* [[दिल्ली छावनी]]
== सन्दर्भ ==
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== बाहरी कड़ियाँ ==
{{प्रवेशद्वार|दिल्ली}}
{{commonscat|delhi|दिल्ली}}
* [https://web.archive.org/web/20160305010439/http://pib.nic.in/newsite/hindifeature.aspx?relid=12661 दिल्ली का इतिहास]
* [https://web.archive.org/web/20060210222442/http://delhigovt.nic.in/newdelhi/index.html दिल्ली सरकार]
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|title=दिल्ली - गागर में सागर
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{{दिल्ली}}
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[[श्रेणी:भारत के केन्द्र शासित प्रदेश]]
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Anitya Gautam
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'''दिल्ली''' ({{Langx|en|Delhi|italic=no}}), आधिकारिक तौर पर '''राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली'''<ref>{{Cite web |url=https://india.gov.in/hi/ |title=राष्ट्रीय-राजधानी-क्षेत्र-दिल्ली-की-वेबसाइट-देखें |access-date=12 जुलाई 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170701055708/https://india.gov.in/hi |archive-date=1 जुलाई 2017 |url-status=dead }}</ref> ({{Langx|en|National Capital Territory of Delhi|links=no|italic=no}}) [[भारत]] का एक महानगर और केंद्र-शासित प्रदेश है। इसमें [[नई दिल्ली (प्रशासनिक राजधानी क्षेत्र)|नई दिल्ली]] सम्मिलित है जो भारत की राजधानी है। दिल्ली में राजधानी के होने के नाते केंद्र सरकार की तीनों इकाइयों- कार्यपालिका, संसद और न्यायपालिका के मुख्यालय नई दिल्ली और दिल्ली में स्थापित हैं। १४८३ वर्ग किलोमीटर में फैला दिल्ली [[जनसंख्या]] के तौर पर भारत का दूसरा सबसे बड़ा महानगर है। यहाँ की जनसंख्या लगभग १ करोड़ ७० लाख है। यहाँ बोली जाने वाली मुख्य भाषाएँ हैं : [[हिन्दी]], [[पंजाबी भाषा|पंजाबी]], [[उर्दू]] और [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]। भारत में दिल्ली का ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्त्व है। इसके दक्षिण पश्चिम में [[अरावली]] पहाड़ियाँ और पूर्व में [[यमुना]] नदी है, जिसके किनारे यह नगर बसा हुआ है। यह प्राचीन समय में [[गंगा]] के मैदान से होकर जाने वाले वाणिज्य पथों के रास्ते में पड़ने वाला मुख्य पड़ाव था।<ref>{{cite book |last=Necipoglu |first=Gulru |title=Muqarnas: An Annual on the Visual Culture of the Islamic World |origyear=2002 |url=http://books.google.com/books?id=UJc2u33fCKQC&pg=PA16&dq=delhi+sultanate+political+center+city+delhi&sig=ACfU3U3zNMesuCjnsH7iAlLe5mKHpddn8w#PPA12,M1 |publisher=BRILL |isbn=9004125930 |pages=12–43 |chapter=Epigraphs, Scripture, and Architecture in the Early Sultanate of Delhi |chapterurl= |year=2002 |access-date=14 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140920212841/http://books.google.com/books?id=UJc2u33fCKQC&pg=PA16&dq=delhi+sultanate+political+center+city+delhi&sig=ACfU3U3zNMesuCjnsH7iAlLe5mKHpddn8w#PPA12,M1 |archive-date=20 सितंबर 2014 |url-status=live }}</ref>
[[यमुना नदी]] के किनारे स्थित इस नगर का गौरवशाली पौराणिक इतिहास है, और पुराणों में इसका विशेष महत्व है। यह भारत का अति प्राचीन नगर है। इसके इतिहास का प्रारम्भ [[सिन्धु घाटी सभ्यता]] से जुड़ा हुआ है। [[हरियाणा]] के आसपास के क्षेत्रों में हुई खुदाई से इस बात के प्रमाण मिले हैं। [[महाभारत]] काल में इसका नाम [[इन्द्रप्रस्थ]] था। [[दिल्ली सल्तनत]] के उत्थान के साथ ही दिल्ली एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक शहर के रूप में उभरी।<ref>{{cite book|last=Aitken|first=Bill|title=Speaking Stones: World Cultural Heritage Sites in India|origyear=2002|url=http://books.google.com/books?id=lu5jGGQ8fJkC&pg=PA21&dq=delhi+continuously+inhabited&sig=ACfU3U1Z52ojRmD1-ZS2QeQlb8UlGZeBhA|publisher=Eicher Goodearth Limited|isbn=8187780002|pages=264 pages|chapter=|chapterurl=|year=2001|access-date=14 मार्च 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20110914123144/http://books.google.com/books?id=lu5jGGQ8fJkC&pg=PA21&dq=delhi+continuously+inhabited&sig=ACfU3U1Z52ojRmD1-ZS2QeQlb8UlGZeBhA|archive-date=14 सितंबर 2011|url-status=live}}</ref> यहाँ कई प्राचीन एवं मध्यकालीन इमारतों तथा उनके अवशेषों को देखा जा सकता हैं। [[१६३९]] में मुगल बादशाह [[शाहजहाँ]] ने दिल्ली में ही एक चारदीवारी से घिरे शहर का निर्माण करवाया जो [[१६७९]] से [[१८५७]] तक [[मुगल साम्राज्य]] की राजधानी रही।
१८वीं एवं १९वीं शताब्दी में [[ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी]] ने लगभग पूरे भारत को अपने कब्जे में ले लिया। उन्होंने [[कोलकाता]] को अपनी राजधानी बनाया। [[१९११]] में [[दिल्ली दरबार]] में अंग्रेजी सरकार ने फैसला किया कि राजधानी को वापस दिल्ली लाया जाए। इसके लिए पुरानी दिल्ली के दक्षिण में एक नए नगर ''नई दिल्ली'' का निर्माण प्रारंभ हुआ। अंग्रेजों से [[१९४७]] में स्वतंत्रता प्राप्त कर नई दिल्ली को भारत की राजधानी घोषित किया गया।
स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात दिल्ली में विभिन्न क्षेत्रों से लोगों का प्रवासन हुआ, इससे दिल्ली के स्वरूप में आमूल परिवर्तन हुआ। विभिन्न प्रान्तों, धर्मों एवं जातियों के लोगों के दिल्ली में बसने के कारण दिल्ली का शहरीकरण तो हुआ ही साथ ही यहाँ एक मिश्रित संस्कृति ने भी जन्म लिया। आज दिल्ली भारत का एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक केन्द्र है।
== नामकरण ==
इस नगर का नाम "दिल्ली" कैसे पड़ा इसका कोई निश्चित सन्दर्भ नहीं मिलता, लेकिन व्यापक रूप से यह माना गया है कि यह एक प्राचीन राजा "ढिल्लु" से सम्बन्धित है। कुछ इतिहासकारों का यह मानना है कि यह देहलीज़ का एक विकृत रूप है, जिसका [[हिन्दुस्तानी]] में अर्थ होता है 'चौखट', जो कि इस नगर के सम्भवतः सिन्धु-गंगा समभूमि के प्रवेश-द्वार होने का सूचक है। एक और अनुमान के अनुसार इस नगर का प्रारम्भिक नाम "ढिलिका" था। हिन्दी/प्राकृत "ढीली" भी इस क्षेत्र के लिए प्रयोग किया जाता था।
== इतिहास ==
{{main|दिल्ली का इतिहास}}
[[चित्र:Delhi Red fort.jpg|thumb|300px|बाएँ|लाल किला]]
दिल्ली का प्राचीनतम उल्लेख महाभारत नामक [[महापुराण]] में मिलता है जहाँ इसका उल्लेख प्राचीन इन्द्रप्रस्थ के रूप में किया गया है। इन्द्रप्रस्थ महाभारत काल में [[पांडवों]] की राजधानी थी।<ref name=ecosurv1>{{cite web |url=http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/ES%202005-06/Chpt/1.pdf |title=Chapter 1: Introduction |accessdate=21 दिसंबर 2006 |format=PDF |work=Economic Survey of Delhi, 2005–2006 |publisher=Planning Department, Government of National Capital Territory of Delhi |pages=pp1–7 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161113174155/http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/ES%202005-06/Chpt/1.pdf |archive-date=13 नवंबर 2016 |url-status=dead }}</ref> पुरातात्विक रूप से जो पहले प्रमाण मिले हैं उससे पता चलता है कि ईसा से दो हजार वर्ष पहले भी दिल्ली तथा उसके आस-पास मानव निवास करते थे।<ref name=tourhist>{{cite web |url=http://www.indiatourism.com/delhi-history/index.html |title=Delhi History |accessdate=22 दिसंबर 2006 |work=Delhi Tourism |publisher=Advent InfoSoft (P) Ltd |archive-url=https://web.archive.org/web/20061208210557/http://www.indiatourism.com/delhi-history/index.html |archive-date=8 दिसंबर 2006 |url-status=dead }}</ref>। दिल्ली का इतिहास बेहद पुराना है करीब ७३० ईसा पूर्व के दौरान मालवा के शासक[[ राजा धन्ना भील ]]<nowiki/>के एक उत्तराधिकारी ने दिल्ली के सम्राट को चुनौती दी थी <ref>{{shorturl.at/bCYZ6}}</ref>।
[[मौर्य-काल]] (ईसा पूर्व ३००) से यहाँ एक नगर का विकास होना आरम्भ हुआ। महाराज [[पृथ्वीराज चौहान]] के दरबारी कवि [[चंद बरदाई]] की हिन्दी रचना [[पृथ्वीराज रासो]] में [[तोमर वंश|तोमर]] राजा [[अनंगपाल]] को दिल्ली का संस्थापक बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि उसने ही 'लाल-कोट' का निर्माण करवाया था और महरौली के गुप्त कालीन लौह-स्तंभ को दिल्ली लाया। दिल्ली में तोमरों का शासनकाल वर्ष [[९००]]-[[१२००]] तक माना जाता है। 'दिल्ली' या 'दिल्लिका' शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम उदयपुर में प्राप्त शिलालेखों पर पाया गया। इस शिलालेख का समय वर्ष ११७० निर्धारित किया गया। महाराज पृथ्वीराज चौहान को दिल्ली का अन्तिम हिन्दू सम्राट माना जाता है।
१२०६ ई० के बाद दिल्ली [[दिल्ली सल्तनत]] की राजधानी बनी। इस पर [[खिलज़ी वंश]], [[तुगलक़ वंश]], [[सैयद वंश]] और [[लोदी वंश]] समेत कुछ अन्य वंशों ने शासन किया। ऐसा माना जाता है कि आज की आधुनिक दिल्ली बनने से पहले दिल्ली सात बार उजड़ी और विभिन्न स्थानों पर बसी, जिनके कुछ अवशेष आधुनिक दिल्ली में अब भी देखे जा सकते हैं। दिल्ली के तत्कालीन शासकों ने इसके स्वरूप में कई बार परिवर्तन किया। मुगल बादशाह हुमायूँ ने सरहिन्द के निकट युद्ध में अफ़गानों को पराजित किया तथा बिना किसी विरोध के दिल्ली पर अधिकार कर लिया। हुमायूँ की मृत्यु के बाद हेमू विक्रमादित्य के नेतृत्व में अफ़गानों नें मुगल सेना को पराजित कर आगरा व दिल्ली पर पुनः अधिकार कर लिया। मुगल बादशाह [[अकबर]] ने अपनी राजधानी को दिल्ली से [[आगरा]] स्थान्तरित कर दिया। अकबर के पोते [[शाहजहाँ]] ([[१६२८]]-[[१६५८]]) ने सत्रहवीं सदी के मध्य में इसे सातवीं बार बसाया जिसे शाहजहाँनाबाद के नाम से पुकारा गया। शाहजहाँनाबाद को आम बोल-चाल की भाषा में पुराना शहर या पुरानी दिल्ली कहा जाता है। प्राचीनकाल से पुरानी दिल्ली पर अनेक राजाओं एवं सम्राटों ने राज्य किया है तथा समय-समय पर इसके नाम में भी परिवर्तन किया जाता रहा था। पुरानी दिल्ली [[१६३८]] के बाद मुग़ल सम्राटों की राजधानी रही। दिल्ली का आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफ़र था जिसकी मृत्यू निवार्सन में ही रंगून में हुई।
[[चित्र:ITO crossroads, New Delhi in 1950.jpg|अंगूठाकार|दाएँ|300px|दिल्ली के आईटीओ चौराहे का दृश्य, १९५०]]
[[१८५७]] के [[सिपाही विद्रोह]] के बाद दिल्ली पर ब्रिटिश शासन के हुकूमत में शासन चलने लगा। [[१८५७]] के इस [[प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम]] के आंदोलन को पूरी तरह दबाने के बाद अंग्रेजों ने [[बहादुरशाह ज़फ़र]] को [[रंगून]] भेज दिया तथा भारत पूरी तरह से अंग्रेजो के अधीन हो गया। प्रारम्भ में उन्होंने कलकत्ते (आजकल [[कोलकाता]]) से शासन संभाला परन्तु ब्रिटिश शासन काल के अन्तिम दिनों में [[पीटर महान]] के नेतृत्व में [[रूसी साम्राज्य]] का प्रभाव भारतीय उपमहाद्वीप में तेजी से बढ़ने लगा। जिसके कारण अंग्रेजों को यह लगने लगा कि कलकत्ता जो कि भारत के धुर पूरब में था वहां से [[अफ़ग़ानिस्तान]] एवं [[ईरान]] आदि पर सक्षम तरीके से आसानी से नियंत्रण नहीं स्थापित किया जा सकता है आगे चल कर के इसी कारण से [[१९११]] में [[उपनिवेश]] राजधानी को [[नई दिल्ली]] स्थानांतरित कर दिया गया एवं अनेक आधुनिक निर्माण कार्य करवाए गये। शहर के बड़े हिस्सों को ब्रिटिश आर्किटेक्ट्स सर एडविन लुटियंस और सर हर्बर्ट बेकर द्वारा डिजाइन किया गया था। [[१९४७]] में भारत की आजादी के बाद नई दिल्ली को अधिकारिक रूप से भारत की राजधानी घोषित कर दिया गया। दिल्ली में कई राजाओं के साम्राज्य के उदय तथा पतन के साक्ष्य आज भी विद्यमान हैं। सच्चे मायने में दिल्ली हमारे देश के भविष्य, भूतकाल एवं वर्तमान परिस्थितियों का मेल-मिश्रण हैं। तोमर शासकों में दिल्ली की स्थापना का श्रेय अनंगपाल को जाता है।
== जलवायु, भूगोल और जनसांख्यिकी ==
===दिल्ली-एनसीआर===
{{main|राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (भारत)}}
एनसीआर में दिल्ली से सटे सूबे उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कई शहर शामिल हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/union-territory/new-delhi/news/ut-del-hmu-new-haryanas-jind-and-karnal-add-in-part-of-ncr-zone-5017644-nor.html|title=एनसीआर में शामिल हुए जींद,करनाल और मुजफ्फरनगर, मथुरा को नहीं मिली मंजूरी|date=9 जून 2015|website=Dainik Bhaskar|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190407170136/https://www.bhaskar.com/union-territory/new-delhi/news/ut-del-hmu-new-haryanas-jind-and-karnal-add-in-part-of-ncr-zone-5017644-nor.html|archive-date=7 अप्रैल 2019|url-status=live}}</ref> एनसीआर में ४ करोड़ ७० से ज्यादा आबादी रहती है। समूचे एनसीआर में दिल्ली का क्षेत्रफल १,४८४ स्क्वायर किलोमीटर है। देश की राजधानी एनसीआर का २.९ फीसदी भाग कवर करती है। एनसीआर के तहत आने वाले क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के मेरठ, [[गाजियाबाद]], गौतम बुद्ध नगर ([[नोएडा]]), बुलंदशहर,शामली, बागपत, हापुड़ और मुजफ्फरनगर; और [[हरियाणा]] के [[फरीदाबाद]], [[गुड़गांव]], मेवात, रोहतक, सोनीपत, रेवाड़ी, झज्जर, [[पानीपत]], पलवल, महेंद्रगढ़, भिवाड़ी, जिंद और करनाल जैसे जिले शामिल हैं। [[राजस्थान]] से दो जिले - [[भरतपुर]] और [[अलवर]] एनसीआर में शामिल किए गए हैं।<ref>{{Cite web|url=https://abpnews.abplive.in/india-news/ncr-national-capital-region-of-india-a-to-z-things-you-must-know-about-it-762031|title=आप जिस दिल्ली-NCR में रहते हैं, जानिए- उसके बारे में A टू Z जानाकरी|first=एबीपी न्यूज़ वेब|last=डेस्क|date=4 जन॰ 2018|website=abpnews.abplive.in|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190407170215/https://abpnews.abplive.in/india-news/ncr-national-capital-region-of-india-a-to-z-things-you-must-know-about-it-762031|archive-date=7 अप्रैल 2019|url-status=dead}}</ref>
=== भौगोलिक स्थिति ===
{{main|दिल्ली का भूगोल}}
[[चित्र:YamunaRiver.jpg|thumb|200px|दिल्ली में [[यमुना]] नदी]]
[[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र]] दिल्ली {{convert|1484|km2|sqmi|abbr=on}} में विस्तृत है, जिसमें से {{convert|783|km2|sqmi|abbr=on|0}} भाग ग्रामीण और {{convert|700|km2|sqmi|abbr=on|0}} भाग शहरी घोषित है। दिल्ली उत्तर-दक्षिण में अधिकतम {{convert|51.9|km|mi|abbr=on|0}} है और पूर्व-पश्चिम में अधिकतम चौड़ाई {{convert|48.48|km|mi|abbr=on|0}} है। दिल्ली के अनुरक्षण हेतु तीन संस्थाएं कार्यरत है:-
* [[दिल्ली नगर निगम]]:विश्व का सबसे बड़ा स्थानीय निकाय है, जो कि अनुमानित १३७.८० लाख नागरिकों (क्षेत्रफल {{convert|1397.3|km2|sqmi|abbr=on|0|disp=or}}) को नागरिक सेवाएं प्रदान करती है। यह क्षेत्रफ़ल के हिसाब से भी मात्र [[टोक्यो]] से ही पीछे है।"<ref>Municipal Corporation of Delhi: About us [http://www.mcdonline.gov.in/mcd/aboutus.jsp] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090324083412/http://www.mcdonline.gov.in/mcd/aboutus.jsp|date=24 मार्च 2009}})</ref>. नगर निगम १३९७ वर्ग कि॰मी॰ का क्षेत्र देखती है। वर्तमान में दिल्ली नगर निगम को तीन हिस्सों में बाट दिया गया है उत्तरी दिल्ली नगर निगम,पूर्वी दिल्ली नगर निगम व दक्षिण दिल्ली नगर निगम।
* [[नई दिल्ली नगरपालिका परिषद]]: (एन डी एम सी) (क्षेत्रफल {{convert|42.7|km2|sqmi|abbr=on|0|disp=or}}) [[नई दिल्ली]] की नगरपालिका परिषद् का नाम है। इसके अधीन आने वाला कार्यक्षेत्र एन डी एम सी क्षेत्र कहलाता है।
* [[दिल्ली छावनी बोर्ड]]: (क्षेत्रफल ({{convert|43|km2|sqmi|abbr=on|0|disp=or}})<ref>{{cite web |url=http://www.ndmc.gov.in/AboutNDMC/NNDMCAct.aspx |title=परिचय |accessdate=3 जुलाई 2007 |work=द न्यू देल्ही म्युनिसिपल कॉन्सिल एक्ट १९९४ |publisher=[[नई दिल्ली नगर पालिका परिषद]] |archive-url=https://web.archive.org/web/20080302220220/http://www.ndmc.gov.in/AboutNDMC/NNDMCAct.aspx |archive-date=2 मार्च 2008 |url-status=live }}</ref> जो दिल्ली के [[दिल्ली छावनी|छावनी]] क्षेत्रों को देखता है।
दिल्ली एक अति-विस्तृत क्षेत्र है। यह अपने चरम पर उत्तर में सरूप नगर से दक्षिण में [[रजोकरी]] तक फैला है। पश्चिमतम छोर [[नजफगढ़]] से पूर्व में [[यमुना नदी]] तक (तुलनात्मक परंपरागत पूर्वी छोर)। वैसे [[शाहदरा]], [[भजनपुरा]], आदि इसके पूर्वतम छोर होने के साथ ही बड़े बाज़ारो में भी आते हैं। रा.रा.क्षेत्र में उपर्युक्त सीमाओं से लगे निकटवर्ती प्रदेशों के [[नोएडा]], [[गुड़गांव]] आदि क्षेत्र भी आते हैं। दिल्ली की भू-प्रकृति बहुत बदलती हुई है। यह उत्तर में समतल कृषि मैदानों से लेकर दक्षिण में शुष्क [[अरावली पर्वत]] के आरम्भ तक बदलती है। दिल्ली के दक्षिण में बड़ी प्राकृतिक झीलें हुआ करती थीं, जो अब अत्यधिक खनन के कारण सूखती चली गईं हैं। इनमें से एक है [[बड़खल झील]]। [[यमुना नदी]] शहर के पूर्वी क्षेत्रों को अलग करती है। ये क्षेत्र [[पूर्वी दिल्ली|यमुना पार]] कहलाते हैं, वैसे ये नई दिल्ली से बहुत से पुलों द्वारा भली-भांति जुड़े हुए हैं। [[दिल्ली मेट्रो]] भी अभी दो पुलों द्वारा नदी को पार करती है।
दिल्ली {{coord|28.61|N|77.23|E|}} पर [[भारत|उत्तरी भारत]] में बसा हुआ है। यह समुद्रतल से ७०० से १००० फीट की ऊँचाई पर [[हिमालय]] से १६० किलोमीटर दक्षिण में [[यमुना नदी]] के किनारे पर बसा है। यह उत्तर, पश्चिम एवं दक्षिण तीन तरफ से [[हरियाणा]] राज्य तथा पूर्व में [[उत्तर प्रदेश]] राज्य द्वारा घिरा हुआ है। दिल्ली लगभग पूर्णतया [[गंगा के मैदान|गांगेय क्षेत्र]] में स्थित है। दिल्ली के भूगोल के दो प्रधान अंग हैं [[यमुना]] सिंचित समतल एवं दिल्ली रिज (पहाड़ी)। अपेक्षाकृत निचले स्तर पर स्थित मैदानी उपत्यकाकृषि हेतु उत्कृष्ट भूमि उपलब्ध कराती है, हालांकि ये बाढ़ संभावित क्षेत्र रहे हैं। ये दिल्ली के पूर्वी ओर हैं। और पश्चिमी ओर रिज क्षेत्र है। इसकी अधिकतम ऊँचाई ३१८ मी.(१०४३ फी.)<ref name=gisridge>{{cite web
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|title=जीआईएस-बेस्ड स्पैशियल इन्फ़ॉर्मेशन इंटीग्रेशन, मॉडलिंग एण्ड डिजिटल मैपिंग: ए न्यू ब्लेन्ड ऑफ टूल फ़ॉर जियोस्पेशियल एन्वायरेनमेण्टल हेल्थ एनालिसिस फ़ॉर देल्ही रिज
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}}</ref> तक जाती है। यह दक्षिण में [[अरावली पर्वत]]माला से आरम्भ होकर शहर के पश्चिमी, उत्तर-पश्चिमी एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों तक फैले हैं। दिल्ली की जीवनरेखा [[यमुना]] [[हिन्दू धर्म]] में अति पवित्र नदियों में से एक है। एक अन्य छोटी नदी [[हिंडन नदी]] [[पूर्वी दिल्ली]] को [[गाजियाबाद]] से अलग करती है। दिल्ली [[भूकम्प|सीज़्मिक क्षेत्र-IV]] में आने से इसे बड़े [[भूकम्प|भूकम्पों]] का संभावित क्षेत्र बनाती है।<ref name=hazardprofile>{{cite web
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|title=हैज़ार्ड प्रोफ़ाइल ऑफ़ इंडियन डिस्ट्रिक्ट्स
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|publisher=[[यूएनडीपी]]
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}}</ref>
=== जल सम्पदा ===
भूमिगत जलभृत लाखों वर्षों से प्राकृतिक रूप से नदियों और बरसाती धाराओं से नवजीवन पाते रहे हैं। भारत में गंगा-यमुना का मैदान ऐसा क्षेत्र है, जिसमें सबसे उत्तम जल संसाधन मौजूद हैं। यहाँ अच्छी वर्षा होती है और हिमालय के ग्लेशियरों से निकलने वाली सदानीरा नदियाँ बहती हैं। दिल्ली जैसे कुछ क्षेत्रों में भी कुछ ऐसा ही है। इसके दक्षिणी पठारी क्षेत्र का ढलाव समतल भाग की ओर है, जिसमें पहाड़ी श्रृंखलाओं ने प्राकृतिक झीलें बना दी हैं। पहाड़ियों पर का प्राकृतिक वनाच्छादन कई बारहमासी जलधाराओं का उद्गम स्थल हुआ करता था।<ref name="इंडिया वाटर पोर्टल">{{Cite web|url=https://hindi.indiawaterportal.org/?q=content/%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8|title=Hindi Water Portal|website=hindi.indiawaterportal.org|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20170228150506/http://hindi.indiawaterportal.org/?q=content%2F%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8|archive-date=28 फ़रवरी 2017|url-status=dead}}</ref>
व्यापारिक केन्द्र के रूप में दिल्ली आज जिस स्थिति में है; उसका कारण यहाँ चौड़ी पाट की एक यातायात योग्य नदी [[यमुना]] का होना ही है; जिसमें माल ढुलाई भी की जा सकती थी। ५०० ई. पूर्व में भी निश्चित ही यह एक ऐसी ऐश्वर्यशाली नगरी थी, जिसकी सम्पत्तियों की रक्षा के लिए नगर प्राचीर बनाने की आवश्यकता पड़ी थी। सलीमगढ़ और पुराना किला की खुदाइयों में प्राप्त तथ्यों और पुराना किला से इसके इतने प्राचीन नगर होने के प्रमाण मिलते हैं। [[१०००]] ई. के बाद से तो इसके इतिहास, इसके युध्दापदाओं और उनसे बदलने वाले राजवंशों का पर्याप्त विवरण मिलता है।<ref name="इंडिया वाटर पोर्टल"/>
भौगोलिक दृष्टि से अरावली की श्रंखलाओं से घिरे होने के कारण दिल्ली की शहरी बस्तियों को कुछ विशेष उपहार मिले हैं। अरावली श्रंखला और उसके प्राकृतिक वनों से तीन बारहमासी नदियाँ दिल्ली के मध्य से बहती यमुना में मिलती थीं। दक्षिण एशियाई भूसंरचनात्मक परिवर्तन से अब यमुना अपने पुराने मार्ग से पूर्व की ओर बीस किलोमीटर हट गई है।<ref>{{cite web|url=http://hindi.indiawaterportal.org/?q=content/%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8|title=दिल्ली की प्यास-यमुना को प्राणवान करने से ही स्थानीय जलस्रोतों को नवजीवन मिलेगा|publisher=इंडिया वाटर पोर्टल|accessdate=९ अगस्त २०१५|archive-url=https://web.archive.org/web/20170228150506/http://hindi.indiawaterportal.org/?q=content%2F%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8|archive-date=28 फ़रवरी 2017|url-status=dead}}</ref> ३००० ई. पूर्व में ये नदी दिल्ली में वर्तमान 'रिज' के पश्चिम में होकर बहती थी। उसी युग में अरावली की श्रृंखलाओं के दूसरी ओर [[सरस्वती नदी]] बहती थी, जो पहले तो पश्चिम की ओर सरकी और बाद में भौगोलिक संरचना में भूमिगत होकर पूर्णत: लुप्त हो गई।
एक अंग्रेज द्वारा १८०७ में किए गए सर्वेक्षण के आधार पर बने उपर्युक्त नक्शे में वह जलधाराएं दिखाई गई हैं, जो दिल्ली की [[यमुना]] में मिलती थीं। एक तिलपत की पहाड़ियों में दक्षिण से उत्तर की ओर बहती थी, तो दूसरी हौजखास में अनेक सहायक धाराओं को समेटते हुए पूर्वाभिमुख बहती बारापुला के स्थान पर निजामुद्दीन के ऊपरी यमुना प्रवाह में जाकर मिलती थी। एक तीसरी और इनसे बड़ी धारा जिसे साहिबी नदी (पूर्व नाम रोहिणी) कहते थे। दक्षिण-पश्चिम से निकल कर रिज के उत्तर में यमुना में मिलती थी। ऐसा लगता है कि विवर्तनिक हलचल के कारण इसके बहाव का निचाई वाला भूभाग कुछ ऊँचा हो गया, जिससे इसका यमुना में गिरना रूक गया।<ref name="इंडिया वाटर पोर्टल"/> पिछले मार्ग से इसका ज्यादा पानी नजफगढ़ झील में जाने लगा। कोई ७० वर्ष पहले तक इस झील का आकार २२० वर्ग किलोमीटर होता था। अंग्रेजों ने साहिबी नदी की गाद निकालकर तल सफ़ाई करके नाला [[नजफगढ़]] का नाम दिया और इसे यमुना में मिला दिया। यही जलधाराएं और यमुना-दिल्ली में अरावली की श्रृंखलाओं के कटोरे में बसने वाली अनेक बस्तियों और राजधानियों को सदा पर्याप्त जल उपलब्ध कराती आईं थीं।
[[हिमालय]] के [[हिमनद|हिमनदों]] से निकलने के कारण यमुना सदानीरा रही है। परन्तु अन्य उपर्युक्त उपनदियाँ अब से २०० वर्ष पूर्व तक ही, जब तक कि अरावली की पर्वतमाला प्राकृतिक वन से ढकी रहीं तभी तक बारहमासी रह सकीं। खेद है कि दिल्ली में वनों का कटान खिलजियों के समय से ही शुरू हो गया था। इस्लाम स्वीकार न करने वाले स्थानीय विद्रोहियों और लूटपाट करने वाले मेवों का दमन करने के लिए ऐसा किया गया था। साथ ही बढ़ती शहरी आबादी के भार से भी वन प्रांत सिकुड़ा है। इसके चलते वनांचल में संरक्षित वर्षा जल का अवक्षय हुआ।<ref name="इंडिया वाटर पोर्टल"/>
ब्रिटिश काल में अंग्रेजी शासन के दौरान दिल्ली में सड़कों के निर्माण और बाढ़ अवरोधी बांध बनाने से पर्यावरण परिवर्तन के कारण ये जलधाराएं वर्ष में ग्रीष्म के समय सूख जाने लगीं। स्वतंत्रता के बाद के समय में बरसाती नालों, फुटपाथों और गलियों को सीमेंट से पक्का किया गया, इससे इन धाराओं को जल पहुँचाने वाले स्वाभाविक मार्ग अवरुद्ध हो गये।<ref name="इंडिया वाटर पोर्टल"/> ऐसी दशा में, जहां इन्हें रास्ता नहीं मिला, वहाँ वे मानसून में बरसाती नालों की तरह उफनने लगीं। विशद रूप में सीमेंट कंक्रीट के निर्माणों के कारण उन्हें भूमिगत जलभृत्तों या नदी में मिलाने का उपाय नहीं रह गया है। आज इन नदियों में नगर का अधिकतर मैला ही गिरता है।
=== जलवायु ===
[[चित्र:Indiagatelightening.jpg|thumb|200px|[[इंडिया गेट]] के निकट [[तड़ित]]। दिल्ली अपनी अधिकतम वर्षा [[जुलाई]]-[[अगस्त]] माह में [[मानसून]] से पाता है।]]
दिल्ली के महाद्वीपीय जलवायु में [[ग्रीष्म ऋतु]] एवं [[शीत ऋतु]] के तापमान में बहुत अन्तर होता है। ग्रीष्म ऋतु लंबी, अत्यधिक गर्म [[अप्रैल]] से मध्य-[[अक्टूबर]] तक चलती हैं। इस बीच में [[मानसून]] सहित [[वर्षा ऋतु]] भी आती है। ये गर्मी काफ़ी घातक भी हो सकती है, जिसने भूतकाल में कई जानें ली हैं। [[मार्च]] के आरम्भ से ही वायु की दिशा में परिवर्तन होने लगता है। ये उत्तर-पश्चिम से हट कर दक्षिण-पश्चिम दिशा में चलने लगती हैं। ये अपने साथ [[राजस्थान]] की गर्म लहर और धूल भी लेती चलती हैं। ये गर्मी का मुख्य अंग हैं। इन्हें ही [[लू]] कहते हैं। [[अप्रैल]] से [[जून]] के महीने अत्यधिक गर्म होते हैं, जिनमें उच्च ऑक्सीकरण क्षमता होती है। जून के अन्त तक नमी में वृद्धि होती है जो पूर्व मॉनसून वर्षा लाती हैं। इसके बाद जुलाई से यहां [[मॉनसून]] की हवाएं चलती हैं, जो अच्छी वर्षा लाती हैं। अक्टूबर-नवंबर में शिशिर काल रहता है, जो हल्की ठंड के संग आनन्द दायक होता है। नवंबर से [[शीत ऋतु]] का आरम्भ होता है, जो [[फरवरी]] के आरम्भ तक चलता है। शीतकाल में घना [[कोहरा]] भी पड़ता है, एवं शीतलहर चलती है, जो कि फिर वही तेज गर्मी की भांति घातक होती है।<ref name=Fog>{{cite news| publisher=[[द हिन्दू]]| url=http://www.hindu.com/2005/01/07/stories/2005010719480300.htm| title=फ़ॉग कन्टीन्यूज़ टू डुस्रप्ट फ़्लाइट, ट्रेन्स| date=7 जनवरी 2006| access-date=31 जुलाई 2009| archive-url=https://web.archive.org/web/20060304160457/http://www.hindu.com/2005/01/07/stories/2005010719480300.htm| archive-date=4 मार्च 2006| url-status=live}}</ref> यहां के तापमान में अत्यधिक अन्तर आता है जो −०.६ [[सेल्सियस|°से.]] (३०.९ [[फ़ैरनहाइट|°फ़ै.]]) से लेकर {{convert|48|C|F}} तक जाता है।<ref name=coldDelhi>{{cite news| publisher=[[हिन्दुस्तान टाइम्स]]| url=http://www.hindustantimes.com/news/181_1593200,000600010001.htm| title=ऍट ०.२°सेल्सियस, देल्ही गेट्स इट्स कोल्डेस्ट डे| date=8 जनवरी 2006| archiveurl=https://web.archive.org/web/20060111153439/http://www.hindustantimes.com/news/181_1593200,000600010001.htm| archivedate=11 जनवरी 2006| access-date=31 जुलाई 2009| url-status=live}}</ref> वार्षिक औसत तापमान २५°से. (७७ °फ़ै.); मासिक औसत तापमान १३°से. से लेकर ३२°से (५६°फ़ै. से लेकर ९०°फ़ै.) तक होता है।<ref name=weatherbase>{{cite web | publisher=Canty and Associates LLC | url=http://www.weatherbase.com/weather/weather.php3?s=28124&refer=&units=metric | title=Weatherbase entry for Delhi | accessdate=16 जनवरी 2007 | archive-url=https://web.archive.org/web/20110907174813/http://www.weatherbase.com/weather/weather.php3?s=28124&refer=&units=metric | archive-date=7 सितंबर 2011 | url-status=live }}</ref> औसत वार्षिक वर्षा लगभग ७१४ मि.मी. (२८.१ [[इंच]]) होती है, जिसमें से अधिकतम [[मानसून]] द्वारा [[जुलाई]]-[[अगस्त]] में होती है।<ref name=ecosurv1/> दिल्ली में मानसून के आगमन की औसत तिथि २९ जून होती है।<ref name=hindumonsoon>{{cite news |first= विनसन |last= कुरियन |title= मॉनसून रीचेज़ देल्ही टू डेज़ अहेड ऑफ शिड्यूल |url= http://www.thehindubusinessline.com/2005/06/28/stories/2005062800830200.htm |work= |publisher= द हिन्दू बिज़नेस लाइन |date= २८ जून २००५ |access-date= 12 मार्च 2009 |archive-url= https://web.archive.org/web/20070930225909/http://www.thehindubusinessline.com/2005/06/28/stories/2005062800830200.htm |archive-date= 30 सितंबर 2007 |url-status= live }}</ref>
{{दिल्ली मौसम}}
=== वायु प्रदूषण ===
{{main|दिल्ली में वायु प्रदूषण}}
दिल्ली की वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) आम तौर पर जनवरी से सितंबर के बीच मध्यम (१०१-२००) स्तर है, और फिर यह तीन महीनों में बहुत खराब (३०१-४००), गंभीर (४०१-५००) या यहां तक कि खतरनाक (५००+) के स्तर में भी हो जाती है।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/out-of-here-in-november-in-del-ncr-smog-break-is-becoming-the-new-annual-vacation/articleshow/104979257.cms|title=Out of here in November: In Delhi-NCR, smog break is becoming the new annual vacation}}</ref><ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/delhi-aqi-cp-smog-tower-down-due-to-dpcc-says-minister-gopal-rai-official-says-running-cost-high/articleshow/104978284.cms|title=Delhi AQI: CP Smog tower down due to DPCC, says minister Gopal Rai; official says running cost high}}</ref> अक्टूबर से दिसंबर के बीच, विभिन्न कारकों के कारण, स्टबल जलने, दिवाली में जलने वाले अग्नि पटाखे और ठंड के मौसम ।<ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/day-after-diwali-delhis-air-turns-hazardous/articleshow/66539912.cms|title=SC firecracker order: Delhi cops to act against violators - Times of India ►|website=The Times of India|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20181108173945/https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/day-after-diwali-delhis-air-turns-hazardous/articleshow/66539912.cms|archive-date=8 नवंबर 2018|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/delhi-breathed-easier-from-january-to-april/articleshow/59011204.cms|title=Delhi breathed easier from January to April - Times of India|website=The Times of India|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20181109070658/https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/delhi-breathed-easier-from-january-to-april/articleshow/59011204.cms|archive-date=9 नवंबर 2018|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/delhi-news/air-pollution-delhi-enjoys-cleanest-february-in-three-years/story-SANlmslHev8ifFgZbh3WXI.html|title=Air pollution: Delhi enjoys cleanest February in three years|date=27 फ़र॰ 2018|website=https://www.hindustantimes.com/|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20181109070735/https://www.hindustantimes.com/delhi-news/air-pollution-delhi-enjoys-cleanest-february-in-three-years/story-SANlmslHev8ifFgZbh3WXI.html|archive-date=9 नवंबर 2018|url-status=live}}</ref>
=== जनसांख्यिकी ===
{{IndiaCensusPop
|title= दिल्ली में जनसंख्या
|1901= 405819
|1911= 413851
|1921= 488452
|1931= 636246
|1941= 917939
|1951= 1744072
|1961= 2658612
|1971= 4065698
|1981= 6220406
|1991= 9420644
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|estimate=
|estyear=
|estref=
|footnote= source: [http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/Ecosur2001-02/PDF/chapter3.pdf delhiplanning.nic.in]<br />
† 1951 में (1947 के भारत के विभाजन के बाद) बड़े पैमाने पर प्रवासन के कारण<br/> जनसंख्या में विशाल वृद्धि हुई। (ह्यूज पॉप्युलेशन राइज़ इन १९५१ ड्यू टू लार्ज <br/> स्केल इमिग्रेशन आफ्टर [[भारत का विभाजन|पार्टीशन ऑफ इंडिया]] इन १९४७).
}}
[[१९०१]] में ४ लाख की जनसंख्या के साथ दिल्ली एक छोटा नगर था। १९११ में नई दिल्ली का [[ब्रिटिश भारत]] की राजधानी बनने के साथ दिल्ली की जनसंख्या बढ़ने लगी। भारत के विभाजन के समय [[पाकिस्तान]] से एक बहुत बड़ी संख्या में लोग आकर दिल्ली में बसने लगे। यह प्रवासन विभाजन के बाद भी चलता रहा। वार्षिक ३.८५% की वृद्धि के साथ [[२००१]] में दिल्ली की जनसंख्या १ करोड़ ३८ लाख पहुँच चुकी है।<ref name=census01del>{{cite web
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|archiveurl=https://web.archive.org/web/20070811095710/http://www.censusindia.net/profiles/del.html
|title=Provisional Population Totals: Delhi
|work=Provisional Population Totals : India . Census of India 2001, Paper 1 of 2001
|publisher=Office of the Registrar General, भारत
|access-date=14 मार्च 2009
|archive-date=11 अगस्त 2007
|url-status=live
}}</ref> १९९१ से २००१ के दशक में जनसंख्या की वृद्धि की दर ४७.०२% थी। दिल्ली में जनसख्या का घनत्व प्रति किलोमीटर ९,२९४ व्यक्ति तथा लिंग अनुपात ८२१ महिलाओं एवं १००० पुरूषों का है। यहाँ साक्षरता का प्रतिशत ८१.८२% है।
{{-}}
== प्रशासन और जनसांख्यिकी ==
{{See|भारत के राज्यों और संघ क्षेत्रों की राजधानियाँ}}
{{मुख्य|दिल्ली के जिले और उपमंडल }}
[[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली]] कुल नौ ज़िलों में बँटा हुआ है। हरेक जिले का एक उपायुक्त नियुक्त है और जिले के तीन उपजिले हैं। प्रत्येक उप जिले का एक उप जिलाधीश नियुक्त है। सभी उपायुक्त मंडलीय अधिकारी के अधीन होते हैं। दिल्ली का जिला प्रशासन सभी प्रकार की राज्य एवं केन्द्रीय नीतियों का प्रवर्तन विभाग होता है। यही विभिन्न अन्य सरकारी कार्यकलापों पर आधिकारिक नियंत्रण रखता है। निम्न लिखित दिल्ली के जिलों और उपजिलों की सूची है:-
[[File:Delhi districts hi.svg|thumb|300x300px|दिल्ली के जिले]]
;[[मध्य दिल्ली जिला]]
{{*}}[[दरिया गंज]]{{*}}[[पहाड़ गंज]]{{*}}[[करौल बाग]]
;[[उत्तर दिल्ली जिला]]
{{*}}[[सदर बाजार, दिल्ली]] {{*}}[[कोतवाली, दिल्ली]]{{*}}[[सब्जी मंडी]]
;[[दक्षिण दिल्ली जिला]]
{{*}}[[कालकाजी]]{{*}}[[डिफेन्स कालोनी]]{{*}}[[हौज खास]]
;[[पूर्वी दिल्ली जिला]]
{{*}}[[प्रीत विहार]]{{*}}[[लक्ष्मी नगर]]{{*}}[[वसुंधरा एंक्लेव]]{{*}}[[मयूर विहार]]
;[[शाहदरा (दिल्ली)]]
{{*}}[[गाँधी नगर, दिल्ली]]{{*}}[[शाहदरा]]{{*}}[[बिहारी कालोनी]]{{*}}[[विवेक विहार]]{{*}}[[दिलशाद गार्डन]]
;[[उत्तर पूर्वी दिल्ली जिला]]
{{*}}[[सीलमपुर]]{{*}}[[करावल नगर]]{{*}}[[सीमा पुरी]]{{*}}[[भजनपुरा]]
;[[दक्षिण पश्चिम दिल्ली जिला]]
{{*}}[[वसंत विहार]]{{*}}[[नजफगढ़]]{{*}}[[दिल्ली छावनी]]
;[[नई दिल्ली जिला]]
{{*}}[[कनाट प्लेस, नई दिल्ली|कनाट प्लेस]]{{*}}[[संसद मार्ग]]{{*}}[[चाणक्य पुरी]]
;[[उत्तर पश्चिम दिल्ली जिला]]
{{*}}[[सरस्वती विहार]]{{*}}[[नरेला]]{{*}}[[मॉडल टाउन, दिल्ली|मॉडल टाउन]]
;[[पश्चिम दिल्ली जिला]]
{{*}}[[पटेल नगर]]{{*}}[[राजौरी गार्डन]]{{*}}[[पंजाबी बाग]]
=== जनसांख्यिकी ===
{{IndiaCensusPop
|title= दिल्ली में जनसंख्या
|1901= 405819
|1911= 413851
|1921= 488452
|1931= 636246
|1941= 917939
|1951= 1744072
|1961= 2658612
|1971= 4065698
|1981= 6220406
|1991= 9420644
|2001= 13782976
|estimate=
|estyear=
|estref=
|footnote= source: [http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/Ecosur2001-02/PDF/chapter3.pdf delhiplanning.nic.in]<br />
† 1951 में (1947 के भारत के विभाजन के बाद) बड़े पैमाने पर प्रवासन के कारण<br/> जनसंख्या में विशाल वृद्धि हुई। (ह्यूज पॉप्युलेशन राइज़ इन १९५१ ड्यू टू लार्ज <br/> स्केल इमिग्रेशन आफ्टर [[भारत का विभाजन|पार्टीशन ऑफ इंडिया]] इन १९४७).
}}
[[१९०१]] में ४ लाख की जनसंख्या के साथ दिल्ली एक छोटा नगर था। १९११ में [[ब्रिटिश भारत]] की राजधानी बनने के साथ इसकी जनसंख्या बढ़ने लगी। भारत के विभाजन के समय [[पाकिस्तान]] से एक बहुत बड़ी संख्या में लोग आकर दिल्ली में बसने लगे। यह प्रवासन विभाजन के बाद भी चलता रहा। वार्षिक ३.८५% की वृद्धि के साथ [[२००१]] में दिल्ली की जनसंख्या १ करोड़ ३८ लाख पहुँच चुकी है।<ref name=census01del/> १९९१ से २००१ के दशक में जनसंख्या की वृद्धि की दर ४७.०२% थी। दिल्ली में जनसंख्या का घनत्व प्रति किलोमीटर ९,२९४ व्यक्ति तथा लिंग अनुपात ८२१ महिलाओं एवं १००० पुरूषों का है। यहाँ साक्षरता का प्रतिशत ८१.८२% है।
{{-}}
== दर्शनीय स्थल ==
{{main|दिल्ली के दर्शनीय स्थल}}
[[चित्र:Akshardham_Delhi.jpg|right|thumb|दिल्ली का [[अक्षरधाम मंदिर, दिल्ली|अक्षरधाम मंदिर]] विश्व में सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर परिसर है।<ref>{{cite web |url=http://timesofindia.indiatimes.com/Akshardham_temple_makes_it_to_Guinness_Book/articleshow/2651500.cms |title=अक्षरधाम मंदिर [[गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स]] में - [[टाइम्स ऑफ इंडिया]] |publisher=Timesofindia.indiatimes.com |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090111093300/http://timesofindia.indiatimes.com/Akshardham_temple_makes_it_to_Guinness_Book/articleshow/2651500.cms |archive-date=11 जनवरी 2009 |url-status=live }}</ref>]]
[[चित्र:DelhiMetro.jpg|thumb|दिल्ली मेट्रो - २००४]]
दिल्ली भारत का एक पर्यटन का मुख्य केन्द्र भी है। भारत की राजधानी नई दिल्ली का इसमें होने के कारण भारत सरकार के अनेक कार्यालय, [[राष्ट्रपति भवन]], [[संसद भवन]], [[केन्द्रीय सचिवालय]] आदि अनेक आधुनिक स्थापत्य के नमूने तो यहाँ देखे ही जा सकते हैं; प्राचीन नगर होने के कारण इसका ऐतिहासिक महत्त्व भी है। पुरातात्विक दृष्टि से [[पुराना किला]], [[सफदरजंग का मकबरा]], [[जंतर मंतर, दिल्ली|जंतर मंतर]], [[क़ुतुब मीनार]] और [[लौह स्तंभ]] जैसे अनेक विश्व प्रसिद्ध निर्माण यहाँ पर आकर्षण का केन्द्र समझे जाते हैं। एक ओर [[हुमायूँ का मकबरा]], [[लाल किला, दिल्ली|लाल किला]] जैसे [[भारत में विश्व धरोहर स्थल|विश्व धरोहर]] मुगल शैली की तथा [[पुराना किला]], [[सफदरजंग का मकबरा]], [[लोधी मकबरे परिसर]] आदि ऐतिहासिक राजसी इमारत यहाँ है तो दूसरी ओर [[निज़ामुद्दीन औलिया]] की पारलौकिक [[निजामुद्दीन दरगाह|दरगाह]] भी। लगभग सभी धर्मों के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल यहाँ हैं जैसे [[बिरला मंदिर, दिल्ली|बिरला मंदिर]], [[छतरपुर मंदिर, दिल्ली|आद्या कात्यायिनी शक्तिपीठ]], [[बंगला साहब गुरुद्वारा]], [[बहाई मंदिर]], अक्षर धाम मंदिर, और [[जामा मस्जिद, दिल्ली|जामा मस्जिद]]
देश के शहीदों का स्मारक [[इंडिया गेट]], [[राजपथ]] पर इसी शहर में निर्मित किया गया है। भारत के [[भारत के प्रधान मंत्री|प्रधान मंत्रियों]] की [[राजघाट समाधि परिसर|समाधियाँ]] हैं, [[जंतर मंतर]] है, [[लाल किला]] है साथ ही अनेक प्रकार के [[दिल्ली के संग्रहालय|संग्रहालय]] और अनेक [[दिल्ली के बाजार|बाज़ार]] हैं, जैसे [[कनॉट प्लेस, दिल्ली|कनॉट प्लेस]], [[चाँदनी चौक, दिल्ली|चाँदनी चौक]] और बहुत से रमणीक उद्यान भी हैं, जैसे [[मुगल उद्यान, दिल्ली|मुगल उद्यान]], [[पंच इंद्रिय उद्यान, दिल्ली|गार्डन ऑफ फाइव सेंसिस]], [[तालकटोरा उद्यान, दिल्ली|तालकटोरा गार्डन]], [[लोधी उद्यान, दिल्ली|लोदी गार्डन]], [[वन्य प्राणी उद्यान, दिल्ली|चिड़ियाघर]], आदि, जो दिल्ली घूमने आने वालों का दिल लुभा लेते हैं।
== दिल्ली के शिक्षा संस्थान ==
{{See|दिल्ली विश्वविद्यालय}}
{{main|दिल्ली के शिक्षा संस्थानों की सूची}}
[[चित्र:IITDelhiMath.jpg|thumb|left|[[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान]], दिल्ली; इस संस्थान को एशियावीक द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में चौथे सबसे अच्छे संस्थान का दर्जा दिया गया।<ref>{{cite web |url=http://www-cgi.cnn.com/ASIANOW/asiaweek/features/universities2000/scitech/sci.overall.html |title=Asiaweek.com | Asia's Best Universities 2000 | Overall Ranking |publisher=Cgi.cnn.com |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://www.webcitation.org/684WxRCIT?url=http://www-cgi.cnn.com/ASIANOW/asiaweek/features/universities2000/scitech/sci.overall.html |archive-date=31 मई 2012 |url-status=dead }}</ref>]]
[[File:AIIMS central lawn.jpg|thumb|संगत रूप से यह भारत का सर्वश्रेष्ठ आयुर्विज्ञान संस्थान है,<ref>{{cite web|url=http://indiatoday.intoday.in/index.php?option=com_content&task=view&issueid=27&id=8684§ionid=30&Itemid=1 |title=इंडिया टुडे - India’s most widely read magazine |publisher=Indiatoday.digitaltoday.in |author=Malini Bhupta |date= |accessdate=3 नवंबर 2008}}</ref> [[अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान]] आयुर्विज्ञान शोध और चिकित्सा के क्षेत्र में एक वैश्विक संस्थान है।<ref>{{cite web |url=http://www.newsweek.com/id/45114 |title=Medical Meccas: An Oasis for India's Poorest | Newsweek Health for Life | Newsweek.com |publisher=Newsweek.com |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090807031539/http://www.newsweek.com/id/45114 |archive-date=7 अगस्त 2009 |url-status=live }}</ref>]]
दिल्ली भारत में शिक्षा का एक महत्त्वपूर्ण केन्द्र है। दिल्ली के विकास के साथ-साथ यहाँ शिक्षा का भी तेजी से विकास हुआ है। प्राथमिक शिक्षा तो प्रायः सार्वजनिक है। एक बहुत बड़े अनुपात में बच्चे माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्त्री शिक्षा का विकास हर स्तर पर पुरुषों से अधिक हुआ है। यहाँ की शिक्षा संस्थाओं में विद्यार्थी भारत के सभी भागों से आते हैं। यहाँ कई सरकारी एवं निजी शिक्षा संस्थान हैं जो [[कला]], [[वाणिज्य]], [[विज्ञान]], प्रोद्योगिकी, आयुर्विज्ञान, विधि और प्रबंधन में उच्च स्तर की शिक्षा देने के लिए विख्यात हैं। उच्च शिक्षा के संस्थानों सबसे महत्त्वपूर्ण है जिसके अन्तर्गत कई कॉलेज एवं शोध संस्थान हैं। [[अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान]], [[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान]], [[जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय]], [[इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय]], [[गुरु गोबिन्द सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय]], [[टेरी - ऊर्जा और संसाधन संस्थान]] एवं [[जामिया मिलिया इस्लामिया]] उच्च शिक्षा के प्रमुख संस्थान हैं।
== संस्कृति ==
{{main|भारतीय संस्कृति}}
[[चित्र:Traditional pottery in Dilli Haat.jpg|thumb|[[दिल्ली हाट]] में प्रदर्शित परंपरागत पॉटरी उत्पाद।]]
दिल्ली शहर में बने स्मारकों से विदित होता है कि यहां की संस्कृति प्राच्य ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि से प्रभावित है। [[भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण]] विभाग ने दिल्ली शहर में लगभग १२०० धरोहर स्थल घोषित किए हैं, जो कि विश्व में किसी भी शहर से कहीं अधिक है।<ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/Promote-lesser-known-monuments-of-Delhi/articleshow/4194014.cms|title='Promote lesser-known monuments of Delhi' - Times of India|website=The Times of India|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190302024609/https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/Promote-lesser-known-monuments-of-Delhi/articleshow/4194014.cms|archive-date=2 मार्च 2019|url-status=live}}</ref> और इनमें से १७५ स्थल राष्ट्रीय धरोहर स्थल घोषित किए हैं।<ref name=asimonuments>{{cite web
|url=http://asi.nic.in/asi_monu_alphalist_delhi.asp
|title=Delhi Circle (N.C.T. of Delhi)
|accessdate=27 दिसंबर 2006
|work=List of Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains of National Importance
|publisher=[[भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण]]
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070514061700/http://asi.nic.in/asi_monu_alphalist_delhi.asp
|archive-date=14 मई 2007
|url-status=live
}}</ref> पुराना शहर वह स्थान है, जहां मुगलों और तुर्क शासकों ने स्थापत्य के कई नमूने खड़े किए, जैसे [[जामा मस्जिद, दिल्ली|जामा मस्जिद]] (भारत की सबसे बड़ी मस्जिद)<ref name=Jama>{{cite web| publisher=Terra Galleria| url=http://www.terragalleria.com/asia/india/delhi/picture.indi38660.html| title=Jama Masjid, भारत's largest mosque| accessdate=13 मार्च 2009| archive-url=https://web.archive.org/web/20090304032037/http://www.terragalleria.com/asia/india/delhi/picture.indi38660.html| archive-date=4 मार्च 2009| url-status=dead}}</ref> और [[लाल किला, दिल्ली|लाल किला]]। दिल्ली में फिल्हाल तीन [[विश्व धरोहर स्थल]] हैं – [[लाल किला, दिल्ली|लाल किला]], [[कुतुब मीनार]] और [[हुमायुं का मकबरा]]।<ref name=whsite>{{cite web|url=http://whc.unesco.org/en/statesparties/in|title=Properties inscribed on the World Heritage List: India|publisher=युनेस्को World Heritage Centre|access-date=14 अप्रैल 2009|archive-url=https://www.webcitation.org/684WrF3rd?url=http://whc.unesco.org/en/statesparties/in|archive-date=31 मई 2012|url-status=live}}</ref> अन्य स्मारकों में [[इंडिया गेट]], [[जंतर मंतर, दिल्ली|जंतर मंतर]] (१८वीं सदी की खगोलशास्त्रीय वेधशाला), [[पुराना किला]] (१६वीं सदी का किला). [[लक्ष्मीनारायण मंदिर, दिल्ली|बिरला मंदिर]], [[अक्षरधाम मंदिर, दिल्ली|अक्षरधाम मंदिर]] और [[कमल मंदिर]] आधुनिक स्थापत्यकला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। [[राज घाट]] में राष्ट्रपिता [[महात्मा गाँधी]] तथा निकट ही अन्य बड़े व्यक्तियों की समाधियां हैं। [[नई दिल्ली]] में बहुत से सरकारी कार्यालय, सरकारी आवास, तथा ब्रिटिश काल के अवशेष और इमारतें हैं। कुछ अत्यंत महत्त्वपूर्ण इमारतों में [[राष्ट्रपति भवन]], [[केन्द्रीय सचिवालय]], [[राजपथ]], [[संसद भवन]] और [[विजय चौक]] आते हैं। [[सफदरजंग का मकबरा]] और [[हुमायुं का मकबरा]] मुगल बागों के चार बाग शैली का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
दिल्ली के राजधानी [[नई दिल्ली]] से जुड़ाव और भूगोलीय निकटता ने यहाँ की राष्ट्रीय घटनाओं और अवसरों के महत्त्व को कई गुणा बढ़ा दिया है। यहाँ कई राष्ट्रीय त्यौहार जैसे [[गणतंत्र दिवस]], [[स्वतंत्रता दिवस]] और [[गाँधी जयंती]] खूब हर्षोल्लास से मनाए जाते हैं। भारत के स्वतंत्रता दिवस पर यहाँ के प्रधान मंत्री लाल किले से यहाँ की जनता को संबोधित करते हैं। बहुत से दिल्लीवासी इस दिन को पतंगें उड़ाकर मनाते हैं। इस दिन पतंगों को स्वतंत्रता का प्रतीक माना जाता है।<ref name=freedom>{{cite web| work=123independenceday.com| publisher=Compare Infobase Limited| url=http://123independenceday.com/indian/gift_of/freedom/| title=Independence Day| accessdate=4 जनवरी 2007| archive-url=https://www.webcitation.org/684WsTS3d?url=http://123independenceday.com/indian/gift_of/freedom/| archive-date=31 मई 2012| url-status=dead}}</ref> गणतंत्र दिवस की परेड एक वृहत जुलूस होता है, जिसमें भारत की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक झांकी का प्रदर्शन होता है।<ref name=repmil>{{cite web|url=http://www.thehindubusinessline.com/2002/01/28/stories/2002012800060800.htm|title=R-Day parade, an anachronism?|accessdate=13 जनवरी 2007|last=Ray Choudhury|first=Ray Choudhury|date=28 जनवरी 2002|publisher=द हिन्दू बिज़नस लाइन|archive-url=https://web.archive.org/web/20070304155931/http://www.thehindubusinessline.com/2002/01/28/stories/2002012800060800.htm|archive-date=4 मार्च 2007|url-status=live}}</ref><ref name=repcul>{{cite web|url=http://www.india-tourism.org/delhi-travel/delhi-fairs-festivals.html|archiveurl=https://web.archive.org/web/20070319223442/http://www.india-tourism.org/delhi-travel/delhi-fairs-festivals.html|title=Fairs & Festivals of Delhइ|work=Delhi Travel|publisher=India Tourism.org|access-date=14 अप्रैल 2009|archive-date=19 मार्च 2007|url-status=dead}}</ref>
यहाँ के धार्मिक त्यौहारों में [[दीवाली]], [[होली]], [[दशहरा]], [[दुर्गा पूजा]], [[महावीर जयंती]], [[गुरु परब]], [[क्रिसमस]], [[महाशिवरात्रि]], [[ईद उल फितर]], [[बुद्ध जयंती]] [[लोहड़ी]] [[पोंगल]] और [[ओड़म]] जैसे पर्व हैं।<ref name=repcul/> कुतुब फेस्टिवल में संगीतकारों और नर्तकों का अखिल भारतीय संगम होता है, जो कुछ रातों को जगमगा देता है। यह [[कुतुब मीनार]] के पार्श्व में आयोजित होता है।<ref name=qutubfest>{{cite news |first=Madhur |last=Tankha |title=It's Sufi and rock at Qutub Fest |url=http://www.hindu.com/2005/12/15/stories/2005121503090200.htm |work=नई दिल्ली |publisher=द हिन्दू |date=15 दिसम्बर 2005 |accessdate=13 जनवरी 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20060513084038/http://www.hindu.com/2005/12/15/stories/2005121503090200.htm |archive-date=13 मई 2006 |url-status=live }}</ref> अन्य कई पर्व भी यहाँ होते हैं: जैसे [[आम महोत्सव]], पतंगबाजी महोत्सव, [[वसंत पंचमी]] जो वार्षिक होते हैं। [[एशिया]] की सबसे बड़ी ऑटो प्रदर्शनी: [[ऑटो एक्स्पो]]<ref name="autogenerated2" /> दिल्ली में द्विवार्षिक आयोजित होती है। [[प्रगति मैदान]] में वार्षिक [[पुस्तक मेला]] आयोजित होता है। यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा पुस्तक मेला है, जिसमें विश्व के २३ राष्ट्र भाग लेते हैं। दिल्ली को उसकी उच्च पढ़ाकू क्षमता के कारण कभी कभी विश्व की पुस्तक राजधानी भी कहा जाता है।<ref>{{cite web |url=http://www.business-standard.com/india/storypage.php?autono=313090 |title=Sunil Sethi: Why Delhi is India`s Book Capital |publisher=Business-standard.com |author=Sunil Sethi / नई दिल्ली फ़रवरी 09, 2008 |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090101102116/http://www.business-standard.com/india/storypage.php?autono=313090 |archive-date=1 जनवरी 2009 |url-status=live }}</ref>
[[चित्र:AutoExpoIndica.jpg|thumb|[[ऑटो एक्स्पो]], एशिया का सबसे बड़ा ऑटो प्रदर्शनी अवसर है।<ref name="autogenerated2">{{cite web |url=http://www.hindu.com/2008/01/09/stories/2008010953071500.htm |title=द हिन्दू : Front Page : Asia’s largest auto carnival begins in Delhi tomorrow |publisher=Thehindu.com |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://www.webcitation.org/684WtqZHy?url=http://www.hindu.com/2008/01/09/stories/2008010953071500.htm |archive-date=31 मई 2012 |url-status=live }}</ref>, जो कि [[प्रगति मैदान]] में द्विवार्षिक आयोजित होता है।]]
[[पंजाबी खाना|पंजाबी]] और [[मुगलई खाना|मुगलई]] खान पान जैसे [[कबाब]] और [[बिरयानी]] दिल्ली के कई भागों में प्रसिद्ध हैं।<ref>[http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/2060348.cms Delhi to lead way in street food] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090305151610/http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/2060348.cms |date=5 मार्च 2009 }} Times of India</ref><ref name="इंडिया टुडे Food">[http://conclave.digitaltoday.in/conclave2008/index.php?issueid=32&id=2427&option=com_content&task=view§ionid=8 Discovering the spice route to Delhi] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20081231115904/http://conclave.digitaltoday.in/conclave2008/index.php?issueid=32&id=2427&option=com_content&task=view§ionid=8 |date=31 दिसंबर 2008 }} इंडिया टुडे</ref> दिल्ली की अत्यधिक मिश्रित जनसंख्या के कारण भारत के विभिन्न भागों के [[भारतीय खाना|खानपान]] की झलक मिलती है, जैसे [[राजस्थानी खाना|राजस्थानी]], [[महाराष्ट्रियन खाना|महाराष्ट्रियन]], [[बंगाली खाना|बंगाली]], [[हैदराबादी खाना|हैदराबादी]] खाना और [[दक्षिण भारतीय खाना|दक्षिण भारतीय खाने के आइटम]] जैसे [[इडली]], [[सांभर]], [[दोसा]] इत्यादि बहुतायत में मिल जाते हैं। इसके साथ ही स्थानीय खासियत, जैसे [[दिल्ली की चाट|चाट]] इत्यादि भी खूब मिलती है, जिसे लोग चटकारे लगा लगा कर खाते हैं। इनके अलावा यहाँ [[महाद्वीपीय खाना]] जैसे इटैलियन और चाइनीज़ खाना भी बहुतायत में उपलब्ध है।
इतिहास में दिल्ली उत्तर भारत का एक महत्त्वपूर्ण व्यापार केन्द्र भी रहा है। पुरानी दिल्ली ने अभी भी अपने गलियों में फैले बाज़ारों और पुरानी मुगल धरोहरों में इन व्यापारिक क्षमताओं का इतिहास छुपा कर रखा है।<ref name=slt>{{cite news |first=Sarina |last=Singh |title=Delhi: Old, new, sleek and rambunctious too |url=http://www.sltrib.com/travel/ci_4853701 |work=Travels with Lonely Planet: India |publisher=The Salt Lake Tribune |date=16 दिसम्बर 2006 |access-date=14 अप्रैल 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071010050635/http://www.sltrib.com/travel/ci_4853701 |archive-date=10 अक्तूबर 2007 |url-status=dead }}</ref> पुराने शहर के बाजारों में हर एक प्रकार का सामान मिलेगा। तेल में डूबे चटपटे आम, नींबू, आदि के अचारों से लेकर मंहगे हीरे जवाहरात, जेवर तक; दुल्हन के अलंकार, कपड़ों के थान, तैयार कपड़े, मसाले, मिठाइयाँ और क्या नहीं?<ref name=slt/> कई पुरानी हवेलियाँ इस शहर में अभी भी शोभा पा रही हैं और इतिहास को संजोए शान से खड़ी है।<ref name=jacob>{{cite journal |last = Jacob |first = Satish |year = 2002 |month = जुलाई |title = Wither, the walled city |journal = Seminar (web edition) |issue = 515 |url = http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20satish%20jacob.htm |access-date = 14 अप्रैल 2009 |archive-url = https://web.archive.org/web/20061212133015/http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20satish%20jacob.htm |archive-date = 12 दिसंबर 2006 |url-status = dead }}</ref> [[चांदनी चौक, दिल्ली|चांदनी चौक]], जो कि यहाँ का तीन शताब्दियों से भी पुराना बाजार है, दिल्ली के जेवर, ज़री साड़ियों और मसालों के लिए प्रसिद्ध है।<ref name=Chandni>{{cite web| publisher=About Palace on Wheels| work=Delhi Tours| url=http://www.aboutpalaceonwheels.com/palace-on-wheels-destinations/shopping-in-delhi.html| title=Shopping in Delhi| accessdate=4 जनवरी 2007| archive-url=https://www.webcitation.org/684Ww5Av6?url=http://www.aboutpalaceonwheels.com/palace-on-wheels-destinations/shopping-in-delhi.html| archive-date=31 मई 2012| url-status=dead}}</ref> दिल्ली की प्रसिद्ध कलाओं में से कुछ हैं यहाँ के [[ज़रदोज़ी]] (सोने के तार का काम, जिसे ज़री भी कहा जाता है) और [[मीनाकारी]] (जिसमें पीतल के बर्तनों इत्यादि पर नक्काशी के बीच रोगन भरा जाता है। यहाँ की कलाओं के लिए बाजार हैं [[प्रगति मैदान, दिल्ली]], [[दिल्ली हाट]], [[हौज खास, दिल्ली]]- जहां विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प के और हठकरघों के कार्य के नमूने मिल सकते हैं। समय के साथ साथ दिल्ली ने देश भर की कलाओं को यहाँ स्थान दिया हैं। इस तरह यहाँ की कोई खास शैली ना होकर एक अद्भुत मिश्रण हो गया है।<ref name=menon>{{cite journal |last = Menon |first = Anjolie Ela |year = 2002 |month = जुलाई |title = The Age That Was |journal = Seminar (web edition) |issue = 515 |url = http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20anjolie%20ela%20menon.htm |access-date = 14 अप्रैल 2009 |archive-url = https://web.archive.org/web/20090916212407/http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20anjolie%20ela%20menon.htm |archive-date = 16 सितंबर 2009 |url-status = dead }}</ref><ref name=dayal>{{cite journal | last = Dayal | first = Ravi | year = 2002 | month = जुलाई | title = A Kayastha’s View | journal = Seminar (web edition) | issue = 515 | url = http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20ravi%20dayal.htm | access-date = 14 अप्रैल 2009 | archive-url = https://web.archive.org/web/20090916211837/http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20ravi%20dayal.htm | archive-date = 16 सितंबर 2009 | url-status = dead }}</ref>
दिल्ली के निम्न भगिनी शहर हैं:<ref>{{cite web|url=http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/15278423.cms|publisher=India Times|title=Delhi to London, it’s a sister act|accessdate=18 फरवरी 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20170204131607/http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/15278423.cms|archive-date=4 फ़रवरी 2017|url-status=live}}</ref>
* [[शिकागो]], {{USA}}
* [[कुआला लंपूर]], {{MAS}}
* [[लंदन]], {{GBR}}
* [[मॉस्को]], {{RUS}}
* [[सिओल]], {{KOR}}
* [[वॉशिंगटन]], {{USA}}
* [[लॉस एंजिल्स]], {{USA}}
* [[सिडनी]], {{AUS}}
* [[पेरिस]], {{FRA}}
== स्थापत्य ==
[[चित्र:Qutab.jpg|thumb|left|{{convert|72.5|m|ft|abbr=on|0}} ऊंची [[कुतुब मीनार]], विश्व की सबसे ऊंची मुक्त-खड़ी [[मीनार]] है।<ref name="Qutab">{{cite web|url=http://portal.unesco.org/en/ev.php-URL_ID=6643&URL_DO=DO_TOPIC&URL_SECTION=201.html|title=Under threat: The Magnificent Minaret of Jam|work=The New Courier No 1|month=अक्टूबर|year=2002|publisher=युनेस्को|accessdate=3 मई 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20091111215826/http://portal.unesco.org/en/ev.php-URL_ID%3D6643%26URL_DO%3DDO_TOPIC%26URL_SECTION%3D201.html|archive-date=11 नवंबर 2009|url-status=live}}</ref>]]
इस ऐतिहासिक नगर में एक ओर प्राचीन, अतिप्राचीन काल के असंख्य खंडहर मिलते हैं, तो दूसरी ओर अवार्चीन काल के योजनानुसार निर्मित उपनगर भी। इसमें विश्व के किसी भी नवीनतम नगर से होड़ लेने की क्षमता है। प्राचीनकाल के कितने ही नगर नष्ट हो गए पर दिल्ली अपनी भौगिलिक स्थिति और समयानुसार परिवर्तनशीलता के कारण आज भी समृद्धशाली नगर ही नहीं महानगर है। [[भारत सरकार]] के संस्कृति मंत्रालय के [[भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग]] ने दिल्ली में १२०० इमारतों को ऐतिहासिक महत्त्व का तथा १७५ को राष्ट्रीय सांस्कृतिक स्मारक घोषित किया है।
[[चित्र:Humayun's tomb outside.jpg|thumb|right|[[१५६०]] में बना, [[हुमायुं का मकबरा]] [[मुगल स्थापत्यकला|मुगल मकबरा परिसर]] का प्रथम उदाहरण है।<ref>{{cite book |last=Petersen |first=Andrew |title=Dictionary of Islamic Architecture |url=http://books.google.com/books?id=gVQj7bW0W9MC&pg=PA204&dq=humayun%27s+tomb+architecture+mughal&lr=&sig=ACfU3U0LcITGtYPq59VMowHRAL5yKKa_eg |publisher=Routledge |location= |language= |isbn=0415213320 |pages= |chapter= |chapterurl= |year=1999 |access-date=17 मई 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110920083610/http://books.google.com/books?id=gVQj7bW0W9MC&pg=PA204&dq=humayun%27s+tomb+architecture+mughal&lr=&sig=ACfU3U0LcITGtYPq59VMowHRAL5yKKa_eg |archive-date=20 सितंबर 2011 |url-status=live }}</ref>]]
नई दिल्ली में [[महरौली]] में गुप्तकाल में निर्मित लौहस्तंभ है। यह प्रौद्योगिकी का एक अनुठा उदाहरण है। ईसा की चौथी शताब्दी में जब इसका निर्माण हुआ तब से आज तक इस पर जंग नहीं लगा। दिल्ली में इंडो-इस्लामी स्थापत्य का विकाश विशेष रूप से दृष्टगत होता है। दिल्ली के कुतुब परिसर में सबसे भव्य स्थापत्य कुतुब मिनार है। इस मिनार को स़ूफी संत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की स्मृति में बनवाया गया था। तुगलक काल में निर्मित गयासुद्दीन का मकबरा स्थापत्य में एक नई प्रवृत्ति का सूचक है। यह अष्टभुजाकार है। दिल्ली में हुमायूँ का मकबरा मुगल स्थापत्य कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। शाहजहाँ का शासनकाल स्थापत्य कला के लिए याद किया जाता है।
{{-}}
== अर्थ व्यवस्था ==
{{main|भारत की अर्थव्यवस्था}}
[[मुंबई]] के बाद दिल्ली भारत के सबसे बड़े व्यापारिक महानगरो में से है। देश में प्रति व्यक्ति औसत आय की दृष्टि से भी यह देश के सबसे सम्पन्न नगरो में गिना जाता है। [[१९९०]] के बाद से दिल्ली विदेशी निवशेकों का पसन्दीदा स्थान बना है। हाल में कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों जैसे [[पेप्सी]], गैप, इत्यादि ने दिल्ली और उसके आस-पास के क्षेत्रों में अपना मुख्यालय खोला है। क्रिसमस के दिन वर्ष [[२००२]] में दिल्ली के महानगरी क्षेत्रों में [[दिल्ली मेट्रो रेल]] का शुभारम्भ हुआ जिसे वर्ष २०२२ में पूरा किये जाने का अनुमान है।
हवाई यातायात द्वारा दिल्ली [[इन्दिरा गांधी अन्तरराष्ट्रीय विमानस्थल]] से पूरे विश्व से जुड़ा है।.
{{-}}
== यातायात सुविधाएं ==
{{main|दिल्ली में यातायात}}
[[चित्र:Signaturebridgenedelhi.png|thumb|[[सिग्नेचर ब्रिज]] यमुना नदी पर, दिल्ली में सबसे ऊंची संरचना है<ref>{{cite news|title= कुतुबमिनार से भी ऊंचे सिग्नेचर ब्रिज पर चढ़ते ही होने लगेगा अलग एहसास, पलक झपकते मिटेंगी दूरियां|url= https://www.amarujala.com/india-news/inaugaration-of-signature-bridge-of-delhi-see-photos|date= [[११ दिसम्बर]], [[२००२]]|access-date= 4 नवंबर 2018|archive-url= https://web.archive.org/web/20181104171442/https://www.amarujala.com/india-news/inaugaration-of-signature-bridge-of-delhi-see-photos|archive-date= 4 नवंबर 2018|url-status= live}}</ref>]]
[[चित्र:Delhi Metro.jpeg|thumb|[[दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन]] द्वारा संचालित मेट्रो रेल सेवा औसत ८,३७,००० सवारियां प्रतिदिन ले जाती है।<ref>{{cite web|url=http://timesofindia.indiatimes.com/news/city/delhi/Delhi-Metro-records-highest-ridership/articleshow/4860435.cms|title=Delhi Metro records highest ridership|publisher=[[द टाईम्स ऑफ़ इंडिया]]|date=5 अगस्त 2009|access-date=3 नवंबर 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20090809165516/http://timesofindia.indiatimes.com/news/city/delhi/Delhi-Metro-records-highest-ridership/articleshow/4860435.cms|archive-date=9 अगस्त 2009|url-status=live}}</ref>]]
[[चित्र:Delhi airport terminal 3 (cropped).jpg|thumb|इंदिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा]]
[[चित्र:Raj Path.jpg|thumb|[[रायसीना की पहाड़ियाँ]] में [[राजपथ]]। दिल्ली की कुल गाड़ियों का ३०% निजी वाहन हैं। दिल्ली में औसत ९६३ नए वाहन प्रतिदिन पंजीकृत होते हैं।<ref>{{cite web |url=http://www.iht.com/articles/2007/11/06/asia/delhi.php |title=Study finds air quality in Delhi has worsened dramatically - International Herald Tribune |publisher=Iht.com |author= |archiveurl=https://web.archive.org/web/20080706171906/http://www.iht.com/articles/2007/11/06/asia/delhi.php |archivedate=6 जुलाई 2008 |access-date=14 अप्रैल 2009 |url-status=dead }}</ref>]]
[[चित्र:নিউ দিল্লি রেলওয়ে স্টেশন.jpg|thumb|नई दिल्ली रेलवे स्टेशन]]
[[चित्र:Old Delhi Railway Station (DLI).jpg|thumb|दिल्ली जंक्शन रेलवे स्टेशन]]
दिल्ली के सार्वजनिक यातायात के साधन मुख्यतः बस, ऑटोरिक्शा और [[दिल्ली मेट्रो रेल|मेट्रो रेल]] सेवा हैं। दिल्ली की मुख्य यातायात आवश्यकता का ६०% बसें पूरा करती हैं।<ref name=ecosurv12>{{cite web|url=http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/ES%202005-06/Chpt/12.pdf|title=Chapter 12: Transport|accessdate=21 दिसंबर 2006|format=PDF|work=Economic Survey of Delhi, 2005–2006|publisher=Planning Department, Government of National Capital Territory of Delhi|pages=pp130–146|archive-url=https://web.archive.org/web/20070116044119/http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/ES%202005-06/Chpt/12.pdf|archive-date=16 जनवरी 2007|url-status=dead}}</ref> [[दिल्ली परिवहन निगम]] द्वारा संचालित सरकारी बस सेवा दिल्ली की प्रधान बस सेवा है। [[दिल्ली परिवहन निगम]] विश्व की सबसे बड़ी पर्यावरण सहयोगी बस-सेवा प्रदान करता है।<ref name=DTC>{{cite web|url=http://dtc.nic.in/ccharter.htm|title=Citizen Charter|accessdate=21 दिसंबर 2006|work=|publisher=Delhi Transport Corporation|archive-url=https://web.archive.org/web/20070110171420/http://dtc.nic.in/ccharter.htm|archive-date=10 जनवरी 2007|url-status=dead}}</ref> हाल ही में [[बस त्वरित पारगमन|बी आर टी]] कॉरिडोर की सेवा [[अंबेडकर नगर]] और [[दिल्ली गेट]] के बीच आरम्भ हुई है। जिसे तकनीकी खामियों के कारण तोड़ दिया है और अब सड़क को पुराने स्वरूप में बदल दिया गया है। [[ऑटो रिक्शा]] दिल्ली में यातायात का एक प्रभावी माध्यम है। ये ईंधन के रूप में [[कंप्रेस्ड नैचुरल गैस|सी एन जी]] का प्रयोग करते हैं, व इनका रंग हरा होता है। दिल्ली में वातानुकूलित टैक्सी सेवा भी उपलब्ध है जिनका किराया ७.५० से १५ रु/कि॰मी॰ तक है। दिल्ली की कुल वाहन संख्या का ३०% निजी वाहन हैं।<ref name=ecosurv12/> दिल्ली में १९२२.३२ कि॰मी॰ की लंबाई प्रति १०० कि॰मी॰२, के साथ भारत का सर्वाधिक सड़क घनत्व मिलता है।<ref name=ecosurv12/> दिल्ली भारत के पांच प्रमुख महानगरों से राष्ट्रीय राजमार्गों द्वारा जुड़ा है। ये राजमार्ग हैं: [[भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों की सूची|राष्ट्रीय राजमार्ग]] संख्या: १, २, ८, १० और २४। अभी कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने राष्ट्रीय राजमार्ग २४ जो निज़ामुद्दीन से मेरठ के लिए दिल्ली-मेरठ एक्स्प्रेस वे का उद्घाटन किया था वह ८ लेन का है जिसकी अधिकतम १०० किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से चल सकते हैं वो भी है। दिल्ली की सड़कों का अनुरक्षण [[दिल्ली नगर निगम]] (एम सी डी), दिल्ली छावनी बोर्ड, पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट (PWD) और [[दिल्ली विकास प्राधिकरण]] द्वारा किया जाता है।<ref name=roadauth>{{cite web|url=http://www.gisdevelopment.net/proceedings/mapindia/2006/transportation/mi06tran_200.htm|title=GIS Based Maintenance Management System (GMMS) For Major Roads Of Delhi|accessdate=14 जनवरी 2007|author=I.Prasada Rao|author2=Dr. P.K. Kanchan, Dr. P.K. Nanda|work=Map India 2006: Transportation|publisher=GISdevelopment.net|archive-url=https://web.archive.org/web/20060712102505/http://www.gisdevelopment.net/proceedings/mapindia/2006/transportation/mi06tran_200.htm|archive-date=12 जुलाई 2006|url-status=dead}}</ref> दिल्ली के उच्च जनसंख्या दर और उच्च अर्थ विकास दर ने दिल्ली पर यातायात की वृहत मांग का दबाव यहाँ की अवसंरचना पर बनाए रखा है। २००८ के अनुसार दिल्ली में ५५ लाख वाहन नगर निगम की सीमाओं के अंदर हैं। इस कारण दिल्ली विश्व का सबसे अधिक वाहनों वाला शहर है। साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ११२ लाख वाहन हैं।<ref>{{cite web |url=http://www.igovernment.in/site/traffic-snarl-snaps-42-cr-man-hour-from-delhi-ncr-workers/ |title=Traffic snarl snaps 42 Cr man-hour from Delhi, NCR workers at iGovernment |publisher=Igovernment.in |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080110092330/http://www.igovernment.in/site/traffic-snarl-snaps-42-cr-man-hour-from-delhi-ncr-workers/ |archive-date=10 जनवरी 2008 |url-status=dead }}</ref> सन १९८५ में दिल्ली में प्रत्येक १००० व्यक्ति पर ८५ कारें थीं।<ref>{{cite web |url=http://economictimes.indiatimes.com/Every_12th_Delhiite_owns_a_car/articleshow/2667484.cms |title=Every 12th Delhiite owns a car- Automobiles-Auto-News By Industry-News-दि इकॉनोमिक टाइम्स |publisher=Economictimes.indiatimes.com |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090111232915/http://economictimes.indiatimes.com/Every_12th_Delhiite_owns_a_car/articleshow/2667484.cms |archive-date=11 जनवरी 2009 |url-status=live }}</ref> दिल्ली के यातायात की मांगों को पूरा करने हेतु दिल्ली और केन्द्र सरकार ने एक मास रैपिड ट्रांज़िट सिस्टम का आरम्भ किया, जिसे दिल्ली मेट्रो कहते हैं।<ref name=ecosurv12/> सन १९९८ में [[सर्वोच्च न्यायालय]] ने दिल्ली के सभी सार्वजनिक वाहनों को डीज़ल के स्थान पर [[कंप्रेस्ड नैचुरल गैस]] का प्रयोग अनिवार्य रूप से करने का आदेश दिया था।<ref name="kumari">{{cite journal| author = R. Kumari, A.K. Attri, L. Int Panis, B.R. Gurjar| title = Emission estimates of Particulate Matter and Heavy Metals from Mobile sources in Delhi (India)| journal = J. Environ. Science & Engg.| volume = 55| issue = 2| pages = 127–142| date = अप्रैल 2013| url = https://www.researchgate.net/publication/259827470_Emission_estimates_of_Particulate_Matter_and_Heavy_Metals_from_Mobile_Sources_in_Delhi| access-date = 16 अप्रैल 2014| archive-url = https://web.archive.org/web/20141108235156/http://www.researchgate.net/publication/259827470_Emission_estimates_of_Particulate_Matter_and_Heavy_Metals_from_Mobile_Sources_in_Delhi| archive-date = 8 नवंबर 2014| url-status = live}}</ref><ref name=supremelaw>{{cite web|url=http://www.cleanairnet.org/caiasia/1412/articles-69423_delhi_case.pdf|title=Introduction|accessdate=14 जनवरी 2007|author=Armin Rosencranz|author2=Michael Jackson|format=PDF|work=The Delhi Pollution Case: The Supreme Court of India and the Limits of Judicial Power|publisher=indlaw.com|pages=p.3|archive-url=https://web.archive.org/web/20070614203640/http://www.cleanairnet.org/caiasia/1412/articles-69423_delhi_case.pdf|archive-date=14 जून 2007|url-status=dead}}</ref> तब से यहाँ सभी सार्वजनिक वाहन सी एन जी पर ही चालित हैं।
; मेट्रो सेवा
{{मुख्य|दिल्ली मेट्रो}}
[[दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन]] द्वारा संचालित [[दिल्ली मेट्रो रेल]] एक मास रैपिड ट्रांज़िट (त्वरित पारगमन) प्रणाली है, जो कि दिल्ली के कई क्षेत्रों में सेवा प्रदान करती है। इसकी शुरुआत २४ दिसम्बर २००२ को [[शहादरा]] [[तीस हजारी]] लाईन से हुई। इस परिवहन व्यवस्था की अधिकतम गति ८०किमी/घंटा (५०मील/घंटा) रखी गयी है और यह हर स्टेशन पर लगभग २० सेकेंड रुकती है। सभी ट्रेनों का निर्माण [[दक्षिण कोरिया]] की कंपनी रोटेम द्वारा किया गया है। दिल्ली की परिवहन व्यवसथा में मेट्रो रेल एक महत्त्वपूर्ण कड़ी है। इससे पहले परिवहन का ज़्यादातर बोझ सड़क पर था। प्रारम्भिक अवस्था में इसकी योजना छह मार्गों पर चलने की है जो दिल्ली के ज्यादातर हिस्से को जोड़ेगी। इसका पहला चरण [[वर्ष]] [[२००६]] में पूरा हो चुका है। दुसरे चरण में दिल्ली के [[महरौली]], [[बदरपुर बॉर्डर]], आनन्द विहार, जहांगीरपुरी, मुन्द्का और [[इन्दिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा]] अथवा दिल्ली से सटे [[नोएडा]], [[गुड़गांव]] और वैशाली को मेट्रो से जोड़ने का काम जारी है। परियोजना के तीसरे चरण में [[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र]] के शहरों [[गाजियाबाद]], [[फरीदाबाद]] इत्यादि को भी जोड़ने की योजना है। इस रेल व्यवस्था के चरण I में मार्ग की कुल लंबाई लगभग ६५.११ किमी है जिसमे १३ किमी भूमिगत एवं ५२ किलोमीटर एलीवेटेड मार्ग है। चरण II के अन्तर्गत पूरे मार्ग की लंबाई १२८ किमी होगी एवं इसमें ७९ स्टेशन होंगे जो अभी निर्माणाधीन हैं, इस चरण के २०१० तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-newdelhi/Delhi-Metro-confident-of-meeting-deadline/article14836060.ece|title=Delhi Metro confident of meeting deadline|date=17 सित॰ 2007|accessdate=1 मार्च 2019|via=www.thehindu.com|archive-url=https://web.archive.org/web/20180303140135/http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-newdelhi/Delhi-Metro-confident-of-meeting-deadline/article14836060.ece|archive-date=3 मार्च 2018|url-status=live}}</ref><ref name="Delhi Metro Masterplan 2021">Delhi Metro Masterplan 2021</ref> चरण III (११२ किमी) एवं IV (१०८.५ किमी) लंबाई की बनाये जाने का प्रस्ताव है जिसे क्रमश: २०१५ एवं २०२० तक पूरा किये जाने की योजना है। इन चारों चरणो का निर्माण कार्य पूरा हो जाने के पश्चात दिल्ली मेट्रो के मार्ग की कुल लंबाई ४१३.८ किलोमीटर की हो जाएगी जो [[लंदन]] के मेट्रो रेल (४०८ किमी) से भी बड़ा बना देगी।<ref name="Delhi Metro Masterplan 2021"/><ref>{{Cite web|url=http://www.delhimetrorail.com/commuters/images/metro_map_big.jpg|title=map of extensions, DMRC|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20061211073124/http://www.delhimetrorail.com/commuters/images/metro_map_big.jpg|archive-date=11 दिसंबर 2006|url-status=dead}}</ref><ref>द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया</ref><ref>Discovery channel : 24 hours with Delhi Metro</ref>
दिल्ली के २०२१ मास्टर प्लान के अनुसार बाद में मेट्रो रेल को दिल्ली के उपनगरों तक ले जाए जाने की भी योजना है।
;रेल सेवा
दिल्ली [[भारतीय रेल]] के [[:Image:India railway schematic map.svg|नक्शे]] का एक प्रधान जंक्शन है। यहाँ [[उत्तर रेलवे]] का मुख्यालय भी है। यहाँ के चार मुख्य रेलवे स्टेशन हैं: [[नई दिल्ली रेलवे स्टेशन]], [[दिल्ली जंक्शन]], [[सराय रोहिल्ला]] और [[हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन]]।<ref name=ecosurv12/> दिल्ली अन्य सभी मुख्य शहरों और महानगरों से कई राजमार्गों और एक्स्प्रेसवे (त्वरित मार्ग) द्वारा जुड़ा हुआ है। यहाँ वर्तमान में तीन एक्स्प्रेसवे हैं और तीन निर्माणाधीन हैं, जो इसे समृद्ध और वाणिज्यिक उपनगरों से जोड़ेंगे। [[दिल्ली गुड़गांव एक्स्प्रेसवे]] दिल्ली को [[गुड़गांव]] और अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से जोड़ता है। [[डी एन डी फ्लाइवे]] और [[नोएडा|नोएडा-]][[ग्रेटर नोएडा]] एक्स्प्रेसवे दिल्ली को दो मुख्य उपनगरों से जोड़ते हैं। ग्रेटर नोएडा में एक अलग अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा योजनाबद्ध है और नोएडा में इंडियन ग्रैंड प्रिक्स नियोजित है।
;वायु सेवा
[[इंदिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा]] दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम कोण पर स्थित है और यही अन्तर्देशीय और अन्तर्राष्ट्रीय वायु-यात्रियों के लिए शहर का मुख्य द्वार है। वर्ष २००६-०७ में हवाई अड्डे पर २३ मिलियन सवारियां दर्ज की गईं थीं,<ref name="autogenerated1">इंदिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा</ref><ref name=essentialtravel>{{cite web| publisher=Essential Travel Ltd., UK.| url=http://parking.essentialtravel.co.uk/worldairport/india/delhi.htm| title=Delhi – Indira Gandhi International Airport (DEL) information| accessdate=29 अप्रैल 2006| archive-url=https://web.archive.org/web/20060719165130/https://parking.essentialtravel.co.uk/worldairport/india/delhi.htm| archive-date=19 जुलाई 2006| url-status=dead}}</ref> जो इसे दक्षिण [[एशिया]] के व्यस्ततम विमानक्षेत्रों में से एक बनाती हैं। US$१९.३ लाख की लागत से एक नया टर्मिनल-३ निर्माणाधीन है, जो ३.४ करोड़ अतिरिक्त यात्री क्षमता का होगा, सन २०१० तक पूर्ण होना निश्चित है।<ref>{{cite web |url=http://www.dailytimes.com.pk/default.asp?page=2007\02\18\story_18-2-2007_pg5_24 |title=Daily Times - Leading News Resource of Pakistan |publisher=Dailytimes.com.pk |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archiveurl=https://archive.today/20120904074154/http://www.dailytimes.com.pk/default.asp?page=2007%5C02%5C18%5Cstory_18-2-2007_pg5_24 |archivedate=4 सितंबर 2012 |url-status=live }}</ref> इसके आगे भी विस्तार कार्यक्रम नियोजित हैं, जो यहाँ १०० मिलियन यात्री प्रतिवर्ष से अधिक की क्षमता देंगे।<ref name="autogenerated1"/> [[सफदरजंग विमानक्षेत्र]] दिल्ली का एक अन्य एयरफ़ील्ड है, जो सामान्य विमानन अभ्यासों के लिए और कुछ वीआईपी उड़ानों के लिए प्रयोग होता है।<ref name=safdur>{{cite web|url=http://gc.kls2.com/airport/VIDD|title=VIDD - Airport|accessdate=14 जनवरी 2007|work=Great Circle Search|publisher=Karl L. Swartz|archive-url=https://web.archive.org/web/20070310055725/http://gc.kls2.com/airport/VIDD|archive-date=10 मार्च 2007|url-status=live}}</ref>
==इन्हें भी देखें==
* [[भारत के राज्यों और संघ क्षेत्रों की राजधानियाँ]]
* [[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के सर्वाधिक जनसंख्या वाले शहरों की सूची]]
* [[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र]]
* [[नई दिल्ली]]
* [[दिल्ली छावनी]]
== सन्दर्भ ==
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== बाहरी कड़ियाँ ==
{{प्रवेशद्वार|दिल्ली}}
{{commonscat|delhi|दिल्ली}}
* [https://web.archive.org/web/20160305010439/http://pib.nic.in/newsite/hindifeature.aspx?relid=12661 दिल्ली का इतिहास]
* [https://web.archive.org/web/20060210222442/http://delhigovt.nic.in/newdelhi/index.html दिल्ली सरकार]
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}}
'''दिल्ली''' ({{Langx|en|Delhi|italic=no}}), आधिकारिक तौर पर '''राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली'''<ref>{{Cite web |url=https://india.gov.in/hi/ |title=राष्ट्रीय-राजधानी-क्षेत्र-दिल्ली-की-वेबसाइट-देखें |access-date=12 जुलाई 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170701055708/https://india.gov.in/hi |archive-date=1 जुलाई 2017 |url-status=dead }}</ref> ({{Langx|en|National Capital Territory of Delhi|links=no|italic=no}}) [[भारत]] का एक महानगर और केंद्र-शासित प्रदेश है। इसमें [[नई दिल्ली (प्रशासनिक राजधानी क्षेत्र)|नई दिल्ली]] सम्मिलित है जो भारत की राजधानी है। दिल्ली में राजधानी के होने के नाते केंद्र सरकार की तीनों इकाइयों- कार्यपालिका, संसद और न्यायपालिका के मुख्यालय नई दिल्ली और दिल्ली में स्थापित हैं। १४८३ वर्ग किलोमीटर में फैला दिल्ली [[जनसंख्या]] के तौर पर भारत का दूसरा सबसे बड़ा महानगर है। यहाँ की जनसंख्या लगभग १ करोड़ ७० लाख है। यहाँ बोली जाने वाली मुख्य भाषाएँ हैं : [[हिन्दी]], [[पंजाबी भाषा|पंजाबी]], [[उर्दू]] और [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]। भारत में दिल्ली का ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्त्व है। इसके [[दक्षिण पश्चिम]] में [[अरावली]] पहाड़ियाँ और पूर्व में [[यमुना]] नदी है, जिसके किनारे यह नगर बसा हुआ है। यह प्राचीन समय में [[गंगा]] के मैदान से होकर जाने वाले वाणिज्य पथों के रास्ते में पड़ने वाला मुख्य पड़ाव था।<ref>{{cite book |last=Necipoglu |first=Gulru |title=Muqarnas: An Annual on the Visual Culture of the Islamic World |origyear=2002 |url=http://books.google.com/books?id=UJc2u33fCKQC&pg=PA16&dq=delhi+sultanate+political+center+city+delhi&sig=ACfU3U3zNMesuCjnsH7iAlLe5mKHpddn8w#PPA12,M1 |publisher=BRILL |isbn=9004125930 |pages=12–43 |chapter=Epigraphs, Scripture, and Architecture in the Early Sultanate of Delhi |chapterurl= |year=2002 |access-date=14 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140920212841/http://books.google.com/books?id=UJc2u33fCKQC&pg=PA16&dq=delhi+sultanate+political+center+city+delhi&sig=ACfU3U3zNMesuCjnsH7iAlLe5mKHpddn8w#PPA12,M1 |archive-date=20 सितंबर 2014 |url-status=live }}</ref>
[[यमुना नदी]] के किनारे स्थित इस नगर का गौरवशाली पौराणिक इतिहास है, और पुराणों में इसका विशेष महत्व है। यह भारत का अति प्राचीन नगर है। इसके इतिहास का प्रारम्भ [[सिन्धु घाटी सभ्यता]] से जुड़ा हुआ है। [[हरियाणा]] के आसपास के क्षेत्रों में हुई खुदाई से इस बात के प्रमाण मिले हैं। [[महाभारत]] काल में इसका नाम [[इन्द्रप्रस्थ]] था। [[दिल्ली सल्तनत]] के उत्थान के साथ ही दिल्ली एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक शहर के रूप में उभरी।<ref>{{cite book|last=Aitken|first=Bill|title=Speaking Stones: World Cultural Heritage Sites in India|origyear=2002|url=http://books.google.com/books?id=lu5jGGQ8fJkC&pg=PA21&dq=delhi+continuously+inhabited&sig=ACfU3U1Z52ojRmD1-ZS2QeQlb8UlGZeBhA|publisher=Eicher Goodearth Limited|isbn=8187780002|pages=264 pages|chapter=|chapterurl=|year=2001|access-date=14 मार्च 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20110914123144/http://books.google.com/books?id=lu5jGGQ8fJkC&pg=PA21&dq=delhi+continuously+inhabited&sig=ACfU3U1Z52ojRmD1-ZS2QeQlb8UlGZeBhA|archive-date=14 सितंबर 2011|url-status=live}}</ref> यहाँ कई प्राचीन एवं मध्यकालीन इमारतों तथा उनके अवशेषों को देखा जा सकता हैं। [[१६३९]] में मुगल बादशाह [[शाहजहाँ]] ने दिल्ली में ही एक चारदीवारी से घिरे शहर का निर्माण करवाया जो [[१६७९]] से [[१८५७]] तक [[मुगल साम्राज्य]] की राजधानी रही।
१८वीं एवं १९वीं शताब्दी में [[ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी]] ने लगभग पूरे भारत को अपने कब्जे में ले लिया। उन्होंने [[कोलकाता]] को अपनी राजधानी बनाया। [[१९११]] में [[दिल्ली दरबार]] में अंग्रेजी सरकार ने फैसला किया कि राजधानी को वापस दिल्ली लाया जाए। इसके लिए पुरानी दिल्ली के दक्षिण में एक नए नगर ''नई दिल्ली'' का निर्माण प्रारंभ हुआ। अंग्रेजों से [[१९४७]] में स्वतंत्रता प्राप्त कर नई दिल्ली को भारत की राजधानी घोषित किया गया।
स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात दिल्ली में विभिन्न क्षेत्रों से लोगों का प्रवासन हुआ, इससे दिल्ली के स्वरूप में आमूल परिवर्तन हुआ। विभिन्न प्रान्तों, धर्मों एवं जातियों के लोगों के दिल्ली में बसने के कारण दिल्ली का शहरीकरण तो हुआ ही साथ ही यहाँ एक मिश्रित संस्कृति ने भी जन्म लिया। आज दिल्ली भारत का एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक केन्द्र है।
== नामकरण ==
इस नगर का नाम "दिल्ली" कैसे पड़ा इसका कोई निश्चित सन्दर्भ नहीं मिलता, लेकिन व्यापक रूप से यह माना गया है कि यह एक प्राचीन राजा "ढिल्लु" से सम्बन्धित है। कुछ इतिहासकारों का यह मानना है कि यह देहलीज़ का एक विकृत रूप है, जिसका [[हिन्दुस्तानी]] में अर्थ होता है 'चौखट', जो कि इस नगर के सम्भवतः सिन्धु-गंगा समभूमि के प्रवेश-द्वार होने का सूचक है। एक और अनुमान के अनुसार इस नगर का प्रारम्भिक नाम "ढिलिका" था। हिन्दी/प्राकृत "ढीली" भी इस क्षेत्र के लिए प्रयोग किया जाता था।
== इतिहास ==
{{main|दिल्ली का इतिहास}}
[[चित्र:Delhi Red fort.jpg|thumb|300px|बाएँ|लाल किला]]
दिल्ली का प्राचीनतम उल्लेख महाभारत नामक [[महापुराण]] में मिलता है जहाँ इसका उल्लेख प्राचीन इन्द्रप्रस्थ के रूप में किया गया है। इन्द्रप्रस्थ महाभारत काल में [[पांडवों]] की राजधानी थी।<ref name=ecosurv1>{{cite web |url=http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/ES%202005-06/Chpt/1.pdf |title=Chapter 1: Introduction |accessdate=21 दिसंबर 2006 |format=PDF |work=Economic Survey of Delhi, 2005–2006 |publisher=Planning Department, Government of National Capital Territory of Delhi |pages=pp1–7 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161113174155/http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/ES%202005-06/Chpt/1.pdf |archive-date=13 नवंबर 2016 |url-status=dead }}</ref> पुरातात्विक रूप से जो पहले प्रमाण मिले हैं उससे पता चलता है कि ईसा से दो हजार वर्ष पहले भी दिल्ली तथा उसके आस-पास मानव निवास करते थे।<ref name=tourhist>{{cite web |url=http://www.indiatourism.com/delhi-history/index.html |title=Delhi History |accessdate=22 दिसंबर 2006 |work=Delhi Tourism |publisher=Advent InfoSoft (P) Ltd |archive-url=https://web.archive.org/web/20061208210557/http://www.indiatourism.com/delhi-history/index.html |archive-date=8 दिसंबर 2006 |url-status=dead }}</ref>। दिल्ली का इतिहास बेहद पुराना है करीब ७३० ईसा पूर्व के दौरान मालवा के शासक[[ राजा धन्ना भील ]]<nowiki/>के एक उत्तराधिकारी ने दिल्ली के सम्राट को चुनौती दी थी <ref>{{shorturl.at/bCYZ6}}</ref>।
[[मौर्य-काल]] (ईसा पूर्व ३००) से यहाँ एक नगर का विकास होना आरम्भ हुआ। महाराज [[पृथ्वीराज चौहान]] के दरबारी कवि [[चंद बरदाई]] की हिन्दी रचना [[पृथ्वीराज रासो]] में [[तोमर वंश|तोमर]] राजा [[अनंगपाल]] को दिल्ली का संस्थापक बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि उसने ही 'लाल-कोट' का निर्माण करवाया था और महरौली के गुप्त कालीन लौह-स्तंभ को दिल्ली लाया। दिल्ली में तोमरों का शासनकाल वर्ष [[९००]]-[[१२००]] तक माना जाता है। 'दिल्ली' या 'दिल्लिका' शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम उदयपुर में प्राप्त शिलालेखों पर पाया गया। इस शिलालेख का समय वर्ष ११७० निर्धारित किया गया। महाराज पृथ्वीराज चौहान को दिल्ली का अन्तिम हिन्दू सम्राट माना जाता है।
१२०६ ई० के बाद दिल्ली [[दिल्ली सल्तनत]] की राजधानी बनी। इस पर [[खिलज़ी वंश]], [[तुगलक़ वंश]], [[सैयद वंश]] और [[लोदी वंश]] समेत कुछ अन्य वंशों ने शासन किया। ऐसा माना जाता है कि आज की आधुनिक दिल्ली बनने से पहले दिल्ली सात बार उजड़ी और विभिन्न स्थानों पर बसी, जिनके कुछ अवशेष आधुनिक दिल्ली में अब भी देखे जा सकते हैं। दिल्ली के तत्कालीन शासकों ने इसके स्वरूप में कई बार परिवर्तन किया। मुगल बादशाह हुमायूँ ने सरहिन्द के निकट युद्ध में अफ़गानों को पराजित किया तथा बिना किसी विरोध के दिल्ली पर अधिकार कर लिया। हुमायूँ की मृत्यु के बाद हेमू विक्रमादित्य के नेतृत्व में अफ़गानों नें मुगल सेना को पराजित कर आगरा व दिल्ली पर पुनः अधिकार कर लिया। मुगल बादशाह [[अकबर]] ने अपनी राजधानी को दिल्ली से [[आगरा]] स्थान्तरित कर दिया। अकबर के पोते [[शाहजहाँ]] ([[१६२८]]-[[१६५८]]) ने सत्रहवीं सदी के मध्य में इसे सातवीं बार बसाया जिसे शाहजहाँनाबाद के नाम से पुकारा गया। शाहजहाँनाबाद को आम बोल-चाल की भाषा में पुराना शहर या पुरानी दिल्ली कहा जाता है। प्राचीनकाल से पुरानी दिल्ली पर अनेक राजाओं एवं सम्राटों ने राज्य किया है तथा समय-समय पर इसके नाम में भी परिवर्तन किया जाता रहा था। पुरानी दिल्ली [[१६३८]] के बाद मुग़ल सम्राटों की राजधानी रही। दिल्ली का आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफ़र था जिसकी मृत्यू निवार्सन में ही रंगून में हुई।
[[चित्र:ITO crossroads, New Delhi in 1950.jpg|अंगूठाकार|दाएँ|300px|दिल्ली के आईटीओ चौराहे का दृश्य, १९५०]]
[[१८५७]] के [[सिपाही विद्रोह]] के बाद दिल्ली पर ब्रिटिश शासन के हुकूमत में शासन चलने लगा। [[१८५७]] के इस [[प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम]] के आंदोलन को पूरी तरह दबाने के बाद अंग्रेजों ने [[बहादुरशाह ज़फ़र]] को [[रंगून]] भेज दिया तथा भारत पूरी तरह से अंग्रेजो के अधीन हो गया। प्रारम्भ में उन्होंने कलकत्ते (आजकल [[कोलकाता]]) से शासन संभाला परन्तु ब्रिटिश शासन काल के अन्तिम दिनों में [[पीटर महान]] के नेतृत्व में [[रूसी साम्राज्य]] का प्रभाव भारतीय उपमहाद्वीप में तेजी से बढ़ने लगा। जिसके कारण अंग्रेजों को यह लगने लगा कि कलकत्ता जो कि भारत के धुर पूरब में था वहां से [[अफ़ग़ानिस्तान]] एवं [[ईरान]] आदि पर सक्षम तरीके से आसानी से नियंत्रण नहीं स्थापित किया जा सकता है आगे चल कर के इसी कारण से [[१९११]] में [[उपनिवेश]] राजधानी को [[नई दिल्ली]] स्थानांतरित कर दिया गया एवं अनेक आधुनिक निर्माण कार्य करवाए गये। शहर के बड़े हिस्सों को ब्रिटिश आर्किटेक्ट्स सर एडविन लुटियंस और सर हर्बर्ट बेकर द्वारा डिजाइन किया गया था। [[१९४७]] में भारत की आजादी के बाद नई दिल्ली को अधिकारिक रूप से भारत की राजधानी घोषित कर दिया गया। दिल्ली में कई राजाओं के साम्राज्य के उदय तथा पतन के साक्ष्य आज भी विद्यमान हैं। सच्चे मायने में दिल्ली हमारे देश के भविष्य, भूतकाल एवं वर्तमान परिस्थितियों का मेल-मिश्रण हैं। तोमर शासकों में दिल्ली की स्थापना का श्रेय अनंगपाल को जाता है।
== जलवायु, भूगोल और जनसांख्यिकी ==
===दिल्ली-एनसीआर===
{{main|राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (भारत)}}
एनसीआर में दिल्ली से सटे सूबे उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कई शहर शामिल हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/union-territory/new-delhi/news/ut-del-hmu-new-haryanas-jind-and-karnal-add-in-part-of-ncr-zone-5017644-nor.html|title=एनसीआर में शामिल हुए जींद,करनाल और मुजफ्फरनगर, मथुरा को नहीं मिली मंजूरी|date=9 जून 2015|website=Dainik Bhaskar|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190407170136/https://www.bhaskar.com/union-territory/new-delhi/news/ut-del-hmu-new-haryanas-jind-and-karnal-add-in-part-of-ncr-zone-5017644-nor.html|archive-date=7 अप्रैल 2019|url-status=live}}</ref> एनसीआर में ४ करोड़ ७० से ज्यादा आबादी रहती है। समूचे एनसीआर में दिल्ली का क्षेत्रफल १,४८४ स्क्वायर किलोमीटर है। देश की राजधानी एनसीआर का २.९ फीसदी भाग कवर करती है। एनसीआर के तहत आने वाले क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के मेरठ, [[गाजियाबाद]], गौतम बुद्ध नगर ([[नोएडा]]), बुलंदशहर,शामली, बागपत, हापुड़ और मुजफ्फरनगर; और [[हरियाणा]] के [[फरीदाबाद]], [[गुड़गांव]], मेवात, रोहतक, सोनीपत, रेवाड़ी, झज्जर, [[पानीपत]], पलवल, महेंद्रगढ़, भिवाड़ी, जिंद और करनाल जैसे जिले शामिल हैं। [[राजस्थान]] से दो जिले - [[भरतपुर]] और [[अलवर]] एनसीआर में शामिल किए गए हैं।<ref>{{Cite web|url=https://abpnews.abplive.in/india-news/ncr-national-capital-region-of-india-a-to-z-things-you-must-know-about-it-762031|title=आप जिस दिल्ली-NCR में रहते हैं, जानिए- उसके बारे में A टू Z जानाकरी|first=एबीपी न्यूज़ वेब|last=डेस्क|date=4 जन॰ 2018|website=abpnews.abplive.in|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190407170215/https://abpnews.abplive.in/india-news/ncr-national-capital-region-of-india-a-to-z-things-you-must-know-about-it-762031|archive-date=7 अप्रैल 2019|url-status=dead}}</ref>
=== भौगोलिक स्थिति ===
{{main|दिल्ली का भूगोल}}
[[चित्र:YamunaRiver.jpg|thumb|200px|दिल्ली में [[यमुना]] नदी]]
[[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र]] दिल्ली {{convert|1484|km2|sqmi|abbr=on}} में विस्तृत है, जिसमें से {{convert|783|km2|sqmi|abbr=on|0}} भाग ग्रामीण और {{convert|700|km2|sqmi|abbr=on|0}} भाग शहरी घोषित है। दिल्ली उत्तर-दक्षिण में अधिकतम {{convert|51.9|km|mi|abbr=on|0}} है और पूर्व-पश्चिम में अधिकतम चौड़ाई {{convert|48.48|km|mi|abbr=on|0}} है। दिल्ली के अनुरक्षण हेतु तीन संस्थाएं कार्यरत है:-
* [[दिल्ली नगर निगम]]:विश्व का सबसे बड़ा स्थानीय निकाय है, जो कि अनुमानित १३७.८० लाख नागरिकों (क्षेत्रफल {{convert|1397.3|km2|sqmi|abbr=on|0|disp=or}}) को नागरिक सेवाएं प्रदान करती है। यह क्षेत्रफ़ल के हिसाब से भी मात्र [[टोक्यो]] से ही पीछे है।"<ref>Municipal Corporation of Delhi: About us [http://www.mcdonline.gov.in/mcd/aboutus.jsp] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090324083412/http://www.mcdonline.gov.in/mcd/aboutus.jsp|date=24 मार्च 2009}})</ref>. नगर निगम १३९७ वर्ग कि॰मी॰ का क्षेत्र देखती है। वर्तमान में दिल्ली नगर निगम को तीन हिस्सों में बाट दिया गया है उत्तरी दिल्ली नगर निगम,पूर्वी दिल्ली नगर निगम व दक्षिण दिल्ली नगर निगम।
* [[नई दिल्ली नगरपालिका परिषद]]: (एन डी एम सी) (क्षेत्रफल {{convert|42.7|km2|sqmi|abbr=on|0|disp=or}}) [[नई दिल्ली]] की नगरपालिका परिषद् का नाम है। इसके अधीन आने वाला कार्यक्षेत्र एन डी एम सी क्षेत्र कहलाता है।
* [[दिल्ली छावनी बोर्ड]]: (क्षेत्रफल ({{convert|43|km2|sqmi|abbr=on|0|disp=or}})<ref>{{cite web |url=http://www.ndmc.gov.in/AboutNDMC/NNDMCAct.aspx |title=परिचय |accessdate=3 जुलाई 2007 |work=द न्यू देल्ही म्युनिसिपल कॉन्सिल एक्ट १९९४ |publisher=[[नई दिल्ली नगर पालिका परिषद]] |archive-url=https://web.archive.org/web/20080302220220/http://www.ndmc.gov.in/AboutNDMC/NNDMCAct.aspx |archive-date=2 मार्च 2008 |url-status=live }}</ref> जो दिल्ली के [[दिल्ली छावनी|छावनी]] क्षेत्रों को देखता है।
दिल्ली एक अति-विस्तृत क्षेत्र है। यह अपने चरम पर उत्तर में सरूप नगर से दक्षिण में [[रजोकरी]] तक फैला है। पश्चिमतम छोर [[नजफगढ़]] से पूर्व में [[यमुना नदी]] तक (तुलनात्मक परंपरागत पूर्वी छोर)। वैसे [[शाहदरा]], [[भजनपुरा]], आदि इसके पूर्वतम छोर होने के साथ ही बड़े बाज़ारो में भी आते हैं। रा.रा.क्षेत्र में उपर्युक्त सीमाओं से लगे निकटवर्ती प्रदेशों के [[नोएडा]], [[गुड़गांव]] आदि क्षेत्र भी आते हैं। दिल्ली की भू-प्रकृति बहुत बदलती हुई है। यह उत्तर में समतल कृषि मैदानों से लेकर दक्षिण में शुष्क [[अरावली पर्वत]] के आरम्भ तक बदलती है। दिल्ली के दक्षिण में बड़ी प्राकृतिक झीलें हुआ करती थीं, जो अब अत्यधिक खनन के कारण सूखती चली गईं हैं। इनमें से एक है [[बड़खल झील]]। [[यमुना नदी]] शहर के पूर्वी क्षेत्रों को अलग करती है। ये क्षेत्र [[पूर्वी दिल्ली|यमुना पार]] कहलाते हैं, वैसे ये नई दिल्ली से बहुत से पुलों द्वारा भली-भांति जुड़े हुए हैं। [[दिल्ली मेट्रो]] भी अभी दो पुलों द्वारा नदी को पार करती है।
दिल्ली {{coord|28.61|N|77.23|E|}} पर [[भारत|उत्तरी भारत]] में बसा हुआ है। यह समुद्रतल से ७०० से १००० फीट की ऊँचाई पर [[हिमालय]] से १६० किलोमीटर दक्षिण में [[यमुना नदी]] के किनारे पर बसा है। यह उत्तर, पश्चिम एवं दक्षिण तीन तरफ से [[हरियाणा]] राज्य तथा पूर्व में [[उत्तर प्रदेश]] राज्य द्वारा घिरा हुआ है। दिल्ली लगभग पूर्णतया [[गंगा के मैदान|गांगेय क्षेत्र]] में स्थित है। दिल्ली के भूगोल के दो प्रधान अंग हैं [[यमुना]] सिंचित समतल एवं दिल्ली रिज (पहाड़ी)। अपेक्षाकृत निचले स्तर पर स्थित मैदानी उपत्यकाकृषि हेतु उत्कृष्ट भूमि उपलब्ध कराती है, हालांकि ये बाढ़ संभावित क्षेत्र रहे हैं। ये दिल्ली के पूर्वी ओर हैं। और पश्चिमी ओर रिज क्षेत्र है। इसकी अधिकतम ऊँचाई ३१८ मी.(१०४३ फी.)<ref name=gisridge>{{cite web
|url=http://www.fig.net/pub/fig_2002/Ts3-9/TS3_9_mohan.pdf
|title=जीआईएस-बेस्ड स्पैशियल इन्फ़ॉर्मेशन इंटीग्रेशन, मॉडलिंग एण्ड डिजिटल मैपिंग: ए न्यू ब्लेन्ड ऑफ टूल फ़ॉर जियोस्पेशियल एन्वायरेनमेण्टल हेल्थ एनालिसिस फ़ॉर देल्ही रिज
|accessdate=३ फ़रवरी २००३
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|year=२००२
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|archive-url=https://www.webcitation.org/684JsgcnW?url=http://www.fig.net/pub/fig_2002/Ts3-9/TS3_9_mohan.pdf
|archive-date=31 मई 2012
|url-status=dead
}}</ref> तक जाती है। यह दक्षिण में [[अरावली पर्वत]]माला से आरम्भ होकर शहर के पश्चिमी, उत्तर-पश्चिमी एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों तक फैले हैं। दिल्ली की जीवनरेखा [[यमुना]] [[हिन्दू धर्म]] में अति पवित्र नदियों में से एक है। एक अन्य छोटी नदी [[हिंडन नदी]] [[पूर्वी दिल्ली]] को [[गाजियाबाद]] से अलग करती है। दिल्ली [[भूकम्प|सीज़्मिक क्षेत्र-IV]] में आने से इसे बड़े [[भूकम्प|भूकम्पों]] का संभावित क्षेत्र बनाती है।<ref name=hazardprofile>{{cite web
|url=http://www.undp.org.in/dmweb/hazardprofile.pdf
|title=हैज़ार्ड प्रोफ़ाइल ऑफ़ इंडियन डिस्ट्रिक्ट्स
|format=PDF
|work=नेशनल कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोजेक्ट इन डाइज़ास्टार मैंनेजमेण्ट
|publisher=[[यूएनडीपी]]
|archiveurl=https://web.archive.org/web/20060519100611/http://www.undp.org.in/dmweb/hazardprofile.pdf
|access-date=31 जुलाई 2009
|archive-date=19 मई 2006
|url-status=dead
}}</ref>
=== जल सम्पदा ===
भूमिगत जलभृत लाखों वर्षों से प्राकृतिक रूप से नदियों और बरसाती धाराओं से नवजीवन पाते रहे हैं। भारत में गंगा-यमुना का मैदान ऐसा क्षेत्र है, जिसमें सबसे उत्तम जल संसाधन मौजूद हैं। यहाँ अच्छी वर्षा होती है और हिमालय के ग्लेशियरों से निकलने वाली सदानीरा नदियाँ बहती हैं। दिल्ली जैसे कुछ क्षेत्रों में भी कुछ ऐसा ही है। इसके दक्षिणी पठारी क्षेत्र का ढलाव समतल भाग की ओर है, जिसमें पहाड़ी श्रृंखलाओं ने प्राकृतिक झीलें बना दी हैं। पहाड़ियों पर का प्राकृतिक वनाच्छादन कई बारहमासी जलधाराओं का उद्गम स्थल हुआ करता था।<ref name="इंडिया वाटर पोर्टल">{{Cite web|url=https://hindi.indiawaterportal.org/?q=content/%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8|title=Hindi Water Portal|website=hindi.indiawaterportal.org|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20170228150506/http://hindi.indiawaterportal.org/?q=content%2F%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8|archive-date=28 फ़रवरी 2017|url-status=dead}}</ref>
व्यापारिक केन्द्र के रूप में दिल्ली आज जिस स्थिति में है; उसका कारण यहाँ चौड़ी पाट की एक यातायात योग्य नदी [[यमुना]] का होना ही है; जिसमें माल ढुलाई भी की जा सकती थी। ५०० ई. पूर्व में भी निश्चित ही यह एक ऐसी ऐश्वर्यशाली नगरी थी, जिसकी सम्पत्तियों की रक्षा के लिए नगर प्राचीर बनाने की आवश्यकता पड़ी थी। सलीमगढ़ और पुराना किला की खुदाइयों में प्राप्त तथ्यों और पुराना किला से इसके इतने प्राचीन नगर होने के प्रमाण मिलते हैं। [[१०००]] ई. के बाद से तो इसके इतिहास, इसके युध्दापदाओं और उनसे बदलने वाले राजवंशों का पर्याप्त विवरण मिलता है।<ref name="इंडिया वाटर पोर्टल"/>
भौगोलिक दृष्टि से अरावली की श्रंखलाओं से घिरे होने के कारण दिल्ली की शहरी बस्तियों को कुछ विशेष उपहार मिले हैं। अरावली श्रंखला और उसके प्राकृतिक वनों से तीन बारहमासी नदियाँ दिल्ली के मध्य से बहती यमुना में मिलती थीं। दक्षिण एशियाई भूसंरचनात्मक परिवर्तन से अब यमुना अपने पुराने मार्ग से पूर्व की ओर बीस किलोमीटर हट गई है।<ref>{{cite web|url=http://hindi.indiawaterportal.org/?q=content/%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8|title=दिल्ली की प्यास-यमुना को प्राणवान करने से ही स्थानीय जलस्रोतों को नवजीवन मिलेगा|publisher=इंडिया वाटर पोर्टल|accessdate=९ अगस्त २०१५|archive-url=https://web.archive.org/web/20170228150506/http://hindi.indiawaterportal.org/?q=content%2F%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8|archive-date=28 फ़रवरी 2017|url-status=dead}}</ref> ३००० ई. पूर्व में ये नदी दिल्ली में वर्तमान 'रिज' के पश्चिम में होकर बहती थी। उसी युग में अरावली की श्रृंखलाओं के दूसरी ओर [[सरस्वती नदी]] बहती थी, जो पहले तो पश्चिम की ओर सरकी और बाद में भौगोलिक संरचना में भूमिगत होकर पूर्णत: लुप्त हो गई।
एक अंग्रेज द्वारा १८०७ में किए गए सर्वेक्षण के आधार पर बने उपर्युक्त नक्शे में वह जलधाराएं दिखाई गई हैं, जो दिल्ली की [[यमुना]] में मिलती थीं। एक तिलपत की पहाड़ियों में दक्षिण से उत्तर की ओर बहती थी, तो दूसरी हौजखास में अनेक सहायक धाराओं को समेटते हुए पूर्वाभिमुख बहती बारापुला के स्थान पर निजामुद्दीन के ऊपरी यमुना प्रवाह में जाकर मिलती थी। एक तीसरी और इनसे बड़ी धारा जिसे साहिबी नदी (पूर्व नाम रोहिणी) कहते थे। दक्षिण-पश्चिम से निकल कर रिज के उत्तर में यमुना में मिलती थी। ऐसा लगता है कि विवर्तनिक हलचल के कारण इसके बहाव का निचाई वाला भूभाग कुछ ऊँचा हो गया, जिससे इसका यमुना में गिरना रूक गया।<ref name="इंडिया वाटर पोर्टल"/> पिछले मार्ग से इसका ज्यादा पानी नजफगढ़ झील में जाने लगा। कोई ७० वर्ष पहले तक इस झील का आकार २२० वर्ग किलोमीटर होता था। अंग्रेजों ने साहिबी नदी की गाद निकालकर तल सफ़ाई करके नाला [[नजफगढ़]] का नाम दिया और इसे यमुना में मिला दिया। यही जलधाराएं और यमुना-दिल्ली में अरावली की श्रृंखलाओं के कटोरे में बसने वाली अनेक बस्तियों और राजधानियों को सदा पर्याप्त जल उपलब्ध कराती आईं थीं।
[[हिमालय]] के [[हिमनद|हिमनदों]] से निकलने के कारण यमुना सदानीरा रही है। परन्तु अन्य उपर्युक्त उपनदियाँ अब से २०० वर्ष पूर्व तक ही, जब तक कि अरावली की पर्वतमाला प्राकृतिक वन से ढकी रहीं तभी तक बारहमासी रह सकीं। खेद है कि दिल्ली में वनों का कटान खिलजियों के समय से ही शुरू हो गया था। इस्लाम स्वीकार न करने वाले स्थानीय विद्रोहियों और लूटपाट करने वाले मेवों का दमन करने के लिए ऐसा किया गया था। साथ ही बढ़ती शहरी आबादी के भार से भी वन प्रांत सिकुड़ा है। इसके चलते वनांचल में संरक्षित वर्षा जल का अवक्षय हुआ।<ref name="इंडिया वाटर पोर्टल"/>
ब्रिटिश काल में अंग्रेजी शासन के दौरान दिल्ली में सड़कों के निर्माण और बाढ़ अवरोधी बांध बनाने से पर्यावरण परिवर्तन के कारण ये जलधाराएं वर्ष में ग्रीष्म के समय सूख जाने लगीं। स्वतंत्रता के बाद के समय में बरसाती नालों, फुटपाथों और गलियों को सीमेंट से पक्का किया गया, इससे इन धाराओं को जल पहुँचाने वाले स्वाभाविक मार्ग अवरुद्ध हो गये।<ref name="इंडिया वाटर पोर्टल"/> ऐसी दशा में, जहां इन्हें रास्ता नहीं मिला, वहाँ वे मानसून में बरसाती नालों की तरह उफनने लगीं। विशद रूप में सीमेंट कंक्रीट के निर्माणों के कारण उन्हें भूमिगत जलभृत्तों या नदी में मिलाने का उपाय नहीं रह गया है। आज इन नदियों में नगर का अधिकतर मैला ही गिरता है।
=== जलवायु ===
[[चित्र:Indiagatelightening.jpg|thumb|200px|[[इंडिया गेट]] के निकट [[तड़ित]]। दिल्ली अपनी अधिकतम वर्षा [[जुलाई]]-[[अगस्त]] माह में [[मानसून]] से पाता है।]]
दिल्ली के महाद्वीपीय जलवायु में [[ग्रीष्म ऋतु]] एवं [[शीत ऋतु]] के तापमान में बहुत अन्तर होता है। ग्रीष्म ऋतु लंबी, अत्यधिक गर्म [[अप्रैल]] से मध्य-[[अक्टूबर]] तक चलती हैं। इस बीच में [[मानसून]] सहित [[वर्षा ऋतु]] भी आती है। ये गर्मी काफ़ी घातक भी हो सकती है, जिसने भूतकाल में कई जानें ली हैं। [[मार्च]] के आरम्भ से ही वायु की दिशा में परिवर्तन होने लगता है। ये उत्तर-पश्चिम से हट कर दक्षिण-पश्चिम दिशा में चलने लगती हैं। ये अपने साथ [[राजस्थान]] की गर्म लहर और धूल भी लेती चलती हैं। ये गर्मी का मुख्य अंग हैं। इन्हें ही [[लू]] कहते हैं। [[अप्रैल]] से [[जून]] के महीने अत्यधिक गर्म होते हैं, जिनमें उच्च ऑक्सीकरण क्षमता होती है। जून के अन्त तक नमी में वृद्धि होती है जो पूर्व मॉनसून वर्षा लाती हैं। इसके बाद जुलाई से यहां [[मॉनसून]] की हवाएं चलती हैं, जो अच्छी वर्षा लाती हैं। अक्टूबर-नवंबर में शिशिर काल रहता है, जो हल्की ठंड के संग आनन्द दायक होता है। नवंबर से [[शीत ऋतु]] का आरम्भ होता है, जो [[फरवरी]] के आरम्भ तक चलता है। शीतकाल में घना [[कोहरा]] भी पड़ता है, एवं शीतलहर चलती है, जो कि फिर वही तेज गर्मी की भांति घातक होती है।<ref name=Fog>{{cite news| publisher=[[द हिन्दू]]| url=http://www.hindu.com/2005/01/07/stories/2005010719480300.htm| title=फ़ॉग कन्टीन्यूज़ टू डुस्रप्ट फ़्लाइट, ट्रेन्स| date=7 जनवरी 2006| access-date=31 जुलाई 2009| archive-url=https://web.archive.org/web/20060304160457/http://www.hindu.com/2005/01/07/stories/2005010719480300.htm| archive-date=4 मार्च 2006| url-status=live}}</ref> यहां के तापमान में अत्यधिक अन्तर आता है जो −०.६ [[सेल्सियस|°से.]] (३०.९ [[फ़ैरनहाइट|°फ़ै.]]) से लेकर {{convert|48|C|F}} तक जाता है।<ref name=coldDelhi>{{cite news| publisher=[[हिन्दुस्तान टाइम्स]]| url=http://www.hindustantimes.com/news/181_1593200,000600010001.htm| title=ऍट ०.२°सेल्सियस, देल्ही गेट्स इट्स कोल्डेस्ट डे| date=8 जनवरी 2006| archiveurl=https://web.archive.org/web/20060111153439/http://www.hindustantimes.com/news/181_1593200,000600010001.htm| archivedate=11 जनवरी 2006| access-date=31 जुलाई 2009| url-status=live}}</ref> वार्षिक औसत तापमान २५°से. (७७ °फ़ै.); मासिक औसत तापमान १३°से. से लेकर ३२°से (५६°फ़ै. से लेकर ९०°फ़ै.) तक होता है।<ref name=weatherbase>{{cite web | publisher=Canty and Associates LLC | url=http://www.weatherbase.com/weather/weather.php3?s=28124&refer=&units=metric | title=Weatherbase entry for Delhi | accessdate=16 जनवरी 2007 | archive-url=https://web.archive.org/web/20110907174813/http://www.weatherbase.com/weather/weather.php3?s=28124&refer=&units=metric | archive-date=7 सितंबर 2011 | url-status=live }}</ref> औसत वार्षिक वर्षा लगभग ७१४ मि.मी. (२८.१ [[इंच]]) होती है, जिसमें से अधिकतम [[मानसून]] द्वारा [[जुलाई]]-[[अगस्त]] में होती है।<ref name=ecosurv1/> दिल्ली में मानसून के आगमन की औसत तिथि २९ जून होती है।<ref name=hindumonsoon>{{cite news |first= विनसन |last= कुरियन |title= मॉनसून रीचेज़ देल्ही टू डेज़ अहेड ऑफ शिड्यूल |url= http://www.thehindubusinessline.com/2005/06/28/stories/2005062800830200.htm |work= |publisher= द हिन्दू बिज़नेस लाइन |date= २८ जून २००५ |access-date= 12 मार्च 2009 |archive-url= https://web.archive.org/web/20070930225909/http://www.thehindubusinessline.com/2005/06/28/stories/2005062800830200.htm |archive-date= 30 सितंबर 2007 |url-status= live }}</ref>
{{दिल्ली मौसम}}
=== वायु प्रदूषण ===
{{main|दिल्ली में वायु प्रदूषण}}
दिल्ली की वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) आम तौर पर जनवरी से सितंबर के बीच मध्यम (१०१-२००) स्तर है, और फिर यह तीन महीनों में बहुत खराब (३०१-४००), गंभीर (४०१-५००) या यहां तक कि खतरनाक (५००+) के स्तर में भी हो जाती है।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/out-of-here-in-november-in-del-ncr-smog-break-is-becoming-the-new-annual-vacation/articleshow/104979257.cms|title=Out of here in November: In Delhi-NCR, smog break is becoming the new annual vacation}}</ref><ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/delhi-aqi-cp-smog-tower-down-due-to-dpcc-says-minister-gopal-rai-official-says-running-cost-high/articleshow/104978284.cms|title=Delhi AQI: CP Smog tower down due to DPCC, says minister Gopal Rai; official says running cost high}}</ref> अक्टूबर से दिसंबर के बीच, विभिन्न कारकों के कारण, स्टबल जलने, दिवाली में जलने वाले अग्नि पटाखे और ठंड के मौसम ।<ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/day-after-diwali-delhis-air-turns-hazardous/articleshow/66539912.cms|title=SC firecracker order: Delhi cops to act against violators - Times of India ►|website=The Times of India|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20181108173945/https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/day-after-diwali-delhis-air-turns-hazardous/articleshow/66539912.cms|archive-date=8 नवंबर 2018|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/delhi-breathed-easier-from-january-to-april/articleshow/59011204.cms|title=Delhi breathed easier from January to April - Times of India|website=The Times of India|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20181109070658/https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/delhi-breathed-easier-from-january-to-april/articleshow/59011204.cms|archive-date=9 नवंबर 2018|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/delhi-news/air-pollution-delhi-enjoys-cleanest-february-in-three-years/story-SANlmslHev8ifFgZbh3WXI.html|title=Air pollution: Delhi enjoys cleanest February in three years|date=27 फ़र॰ 2018|website=https://www.hindustantimes.com/|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20181109070735/https://www.hindustantimes.com/delhi-news/air-pollution-delhi-enjoys-cleanest-february-in-three-years/story-SANlmslHev8ifFgZbh3WXI.html|archive-date=9 नवंबर 2018|url-status=live}}</ref>
=== जनसांख्यिकी ===
{{IndiaCensusPop
|title= दिल्ली में जनसंख्या
|1901= 405819
|1911= 413851
|1921= 488452
|1931= 636246
|1941= 917939
|1951= 1744072
|1961= 2658612
|1971= 4065698
|1981= 6220406
|1991= 9420644
|2001= 13782976
|estimate=
|estyear=
|estref=
|footnote= source: [http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/Ecosur2001-02/PDF/chapter3.pdf delhiplanning.nic.in]<br />
† 1951 में (1947 के भारत के विभाजन के बाद) बड़े पैमाने पर प्रवासन के कारण<br/> जनसंख्या में विशाल वृद्धि हुई। (ह्यूज पॉप्युलेशन राइज़ इन १९५१ ड्यू टू लार्ज <br/> स्केल इमिग्रेशन आफ्टर [[भारत का विभाजन|पार्टीशन ऑफ इंडिया]] इन १९४७).
}}
[[१९०१]] में ४ लाख की जनसंख्या के साथ दिल्ली एक छोटा नगर था। १९११ में नई दिल्ली का [[ब्रिटिश भारत]] की राजधानी बनने के साथ दिल्ली की जनसंख्या बढ़ने लगी। भारत के विभाजन के समय [[पाकिस्तान]] से एक बहुत बड़ी संख्या में लोग आकर दिल्ली में बसने लगे। यह प्रवासन विभाजन के बाद भी चलता रहा। वार्षिक ३.८५% की वृद्धि के साथ [[२००१]] में दिल्ली की जनसंख्या १ करोड़ ३८ लाख पहुँच चुकी है।<ref name=census01del>{{cite web
|url=http://www.censusindia.gov.in/
|archiveurl=https://web.archive.org/web/20070811095710/http://www.censusindia.net/profiles/del.html
|title=Provisional Population Totals: Delhi
|work=Provisional Population Totals : India . Census of India 2001, Paper 1 of 2001
|publisher=Office of the Registrar General, भारत
|access-date=14 मार्च 2009
|archive-date=11 अगस्त 2007
|url-status=live
}}</ref> १९९१ से २००१ के दशक में जनसंख्या की वृद्धि की दर ४७.०२% थी। दिल्ली में जनसख्या का घनत्व प्रति किलोमीटर ९,२९४ व्यक्ति तथा लिंग अनुपात ८२१ महिलाओं एवं १००० पुरूषों का है। यहाँ साक्षरता का प्रतिशत ८१.८२% है।
{{-}}
== प्रशासन और जनसांख्यिकी ==
{{See|भारत के राज्यों और संघ क्षेत्रों की राजधानियाँ}}
{{मुख्य|दिल्ली के जिले और उपमंडल }}
[[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली]] कुल नौ ज़िलों में बँटा हुआ है। हरेक जिले का एक उपायुक्त नियुक्त है और जिले के तीन उपजिले हैं। प्रत्येक उप जिले का एक उप जिलाधीश नियुक्त है। सभी उपायुक्त मंडलीय अधिकारी के अधीन होते हैं। दिल्ली का जिला प्रशासन सभी प्रकार की राज्य एवं केन्द्रीय नीतियों का प्रवर्तन विभाग होता है। यही विभिन्न अन्य सरकारी कार्यकलापों पर आधिकारिक नियंत्रण रखता है। निम्न लिखित दिल्ली के जिलों और उपजिलों की सूची है:-
[[File:Delhi districts hi.svg|thumb|300x300px|दिल्ली के जिले]]
;[[मध्य दिल्ली जिला]]
{{*}}[[दरिया गंज]]{{*}}[[पहाड़ गंज]]{{*}}[[करौल बाग]]
;[[उत्तर दिल्ली जिला]]
{{*}}[[सदर बाजार, दिल्ली]] {{*}}[[कोतवाली, दिल्ली]]{{*}}[[सब्जी मंडी]]
;[[दक्षिण दिल्ली जिला]]
{{*}}[[कालकाजी]]{{*}}[[डिफेन्स कालोनी]]{{*}}[[हौज खास]]
;[[पूर्वी दिल्ली जिला]]
{{*}}[[प्रीत विहार]]{{*}}[[लक्ष्मी नगर]]{{*}}[[वसुंधरा एंक्लेव]]{{*}}[[मयूर विहार]]
;[[शाहदरा (दिल्ली)]]
{{*}}[[गाँधी नगर, दिल्ली]]{{*}}[[शाहदरा]]{{*}}[[बिहारी कालोनी]]{{*}}[[विवेक विहार]]{{*}}[[दिलशाद गार्डन]]
;[[उत्तर पूर्वी दिल्ली जिला]]
{{*}}[[सीलमपुर]]{{*}}[[करावल नगर]]{{*}}[[सीमा पुरी]]{{*}}[[भजनपुरा]]
;[[दक्षिण पश्चिम दिल्ली जिला]]
{{*}}[[वसंत विहार]]{{*}}[[नजफगढ़]]{{*}}[[दिल्ली छावनी]]
;[[नई दिल्ली जिला]]
{{*}}[[कनाट प्लेस, नई दिल्ली|कनाट प्लेस]]{{*}}[[संसद मार्ग]]{{*}}[[चाणक्य पुरी]]
;[[उत्तर पश्चिम दिल्ली जिला]]
{{*}}[[सरस्वती विहार]]{{*}}[[नरेला]]{{*}}[[मॉडल टाउन, दिल्ली|मॉडल टाउन]]
;[[पश्चिम दिल्ली जिला]]
{{*}}[[पटेल नगर]]{{*}}[[राजौरी गार्डन]]{{*}}[[पंजाबी बाग]]
=== जनसांख्यिकी ===
{{IndiaCensusPop
|title= दिल्ली में जनसंख्या
|1901= 405819
|1911= 413851
|1921= 488452
|1931= 636246
|1941= 917939
|1951= 1744072
|1961= 2658612
|1971= 4065698
|1981= 6220406
|1991= 9420644
|2001= 13782976
|estimate=
|estyear=
|estref=
|footnote= source: [http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/Ecosur2001-02/PDF/chapter3.pdf delhiplanning.nic.in]<br />
† 1951 में (1947 के भारत के विभाजन के बाद) बड़े पैमाने पर प्रवासन के कारण<br/> जनसंख्या में विशाल वृद्धि हुई। (ह्यूज पॉप्युलेशन राइज़ इन १९५१ ड्यू टू लार्ज <br/> स्केल इमिग्रेशन आफ्टर [[भारत का विभाजन|पार्टीशन ऑफ इंडिया]] इन १९४७).
}}
[[१९०१]] में ४ लाख की जनसंख्या के साथ दिल्ली एक छोटा नगर था। १९११ में [[ब्रिटिश भारत]] की राजधानी बनने के साथ इसकी जनसंख्या बढ़ने लगी। भारत के विभाजन के समय [[पाकिस्तान]] से एक बहुत बड़ी संख्या में लोग आकर दिल्ली में बसने लगे। यह प्रवासन विभाजन के बाद भी चलता रहा। वार्षिक ३.८५% की वृद्धि के साथ [[२००१]] में दिल्ली की जनसंख्या १ करोड़ ३८ लाख पहुँच चुकी है।<ref name=census01del/> १९९१ से २००१ के दशक में जनसंख्या की वृद्धि की दर ४७.०२% थी। दिल्ली में जनसंख्या का घनत्व प्रति किलोमीटर ९,२९४ व्यक्ति तथा लिंग अनुपात ८२१ महिलाओं एवं १००० पुरूषों का है। यहाँ साक्षरता का प्रतिशत ८१.८२% है।
{{-}}
== दर्शनीय स्थल ==
{{main|दिल्ली के दर्शनीय स्थल}}
[[चित्र:Akshardham_Delhi.jpg|right|thumb|दिल्ली का [[अक्षरधाम मंदिर, दिल्ली|अक्षरधाम मंदिर]] विश्व में सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर परिसर है।<ref>{{cite web |url=http://timesofindia.indiatimes.com/Akshardham_temple_makes_it_to_Guinness_Book/articleshow/2651500.cms |title=अक्षरधाम मंदिर [[गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स]] में - [[टाइम्स ऑफ इंडिया]] |publisher=Timesofindia.indiatimes.com |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090111093300/http://timesofindia.indiatimes.com/Akshardham_temple_makes_it_to_Guinness_Book/articleshow/2651500.cms |archive-date=11 जनवरी 2009 |url-status=live }}</ref>]]
[[चित्र:DelhiMetro.jpg|thumb|दिल्ली मेट्रो - २००४]]
दिल्ली भारत का एक पर्यटन का मुख्य केन्द्र भी है। भारत की राजधानी नई दिल्ली का इसमें होने के कारण भारत सरकार के अनेक कार्यालय, [[राष्ट्रपति भवन]], [[संसद भवन]], [[केन्द्रीय सचिवालय]] आदि अनेक आधुनिक स्थापत्य के नमूने तो यहाँ देखे ही जा सकते हैं; प्राचीन नगर होने के कारण इसका ऐतिहासिक महत्त्व भी है। पुरातात्विक दृष्टि से [[पुराना किला]], [[सफदरजंग का मकबरा]], [[जंतर मंतर, दिल्ली|जंतर मंतर]], [[क़ुतुब मीनार]] और [[लौह स्तंभ]] जैसे अनेक विश्व प्रसिद्ध निर्माण यहाँ पर आकर्षण का केन्द्र समझे जाते हैं। एक ओर [[हुमायूँ का मकबरा]], [[लाल किला, दिल्ली|लाल किला]] जैसे [[भारत में विश्व धरोहर स्थल|विश्व धरोहर]] मुगल शैली की तथा [[पुराना किला]], [[सफदरजंग का मकबरा]], [[लोधी मकबरे परिसर]] आदि ऐतिहासिक राजसी इमारत यहाँ है तो दूसरी ओर [[निज़ामुद्दीन औलिया]] की पारलौकिक [[निजामुद्दीन दरगाह|दरगाह]] भी। लगभग सभी धर्मों के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल यहाँ हैं जैसे [[बिरला मंदिर, दिल्ली|बिरला मंदिर]], [[छतरपुर मंदिर, दिल्ली|आद्या कात्यायिनी शक्तिपीठ]], [[बंगला साहब गुरुद्वारा]], [[बहाई मंदिर]], अक्षर धाम मंदिर, और [[जामा मस्जिद, दिल्ली|जामा मस्जिद]]
देश के शहीदों का स्मारक [[इंडिया गेट]], [[राजपथ]] पर इसी शहर में निर्मित किया गया है। भारत के [[भारत के प्रधान मंत्री|प्रधान मंत्रियों]] की [[राजघाट समाधि परिसर|समाधियाँ]] हैं, [[जंतर मंतर]] है, [[लाल किला]] है साथ ही अनेक प्रकार के [[दिल्ली के संग्रहालय|संग्रहालय]] और अनेक [[दिल्ली के बाजार|बाज़ार]] हैं, जैसे [[कनॉट प्लेस, दिल्ली|कनॉट प्लेस]], [[चाँदनी चौक, दिल्ली|चाँदनी चौक]] और बहुत से रमणीक उद्यान भी हैं, जैसे [[मुगल उद्यान, दिल्ली|मुगल उद्यान]], [[पंच इंद्रिय उद्यान, दिल्ली|गार्डन ऑफ फाइव सेंसिस]], [[तालकटोरा उद्यान, दिल्ली|तालकटोरा गार्डन]], [[लोधी उद्यान, दिल्ली|लोदी गार्डन]], [[वन्य प्राणी उद्यान, दिल्ली|चिड़ियाघर]], आदि, जो दिल्ली घूमने आने वालों का दिल लुभा लेते हैं।
== दिल्ली के शिक्षा संस्थान ==
{{See|दिल्ली विश्वविद्यालय}}
{{main|दिल्ली के शिक्षा संस्थानों की सूची}}
[[चित्र:IITDelhiMath.jpg|thumb|left|[[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान]], दिल्ली; इस संस्थान को एशियावीक द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में चौथे सबसे अच्छे संस्थान का दर्जा दिया गया।<ref>{{cite web |url=http://www-cgi.cnn.com/ASIANOW/asiaweek/features/universities2000/scitech/sci.overall.html |title=Asiaweek.com | Asia's Best Universities 2000 | Overall Ranking |publisher=Cgi.cnn.com |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://www.webcitation.org/684WxRCIT?url=http://www-cgi.cnn.com/ASIANOW/asiaweek/features/universities2000/scitech/sci.overall.html |archive-date=31 मई 2012 |url-status=dead }}</ref>]]
[[File:AIIMS central lawn.jpg|thumb|संगत रूप से यह भारत का सर्वश्रेष्ठ आयुर्विज्ञान संस्थान है,<ref>{{cite web|url=http://indiatoday.intoday.in/index.php?option=com_content&task=view&issueid=27&id=8684§ionid=30&Itemid=1 |title=इंडिया टुडे - India’s most widely read magazine |publisher=Indiatoday.digitaltoday.in |author=Malini Bhupta |date= |accessdate=3 नवंबर 2008}}</ref> [[अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान]] आयुर्विज्ञान शोध और चिकित्सा के क्षेत्र में एक वैश्विक संस्थान है।<ref>{{cite web |url=http://www.newsweek.com/id/45114 |title=Medical Meccas: An Oasis for India's Poorest | Newsweek Health for Life | Newsweek.com |publisher=Newsweek.com |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090807031539/http://www.newsweek.com/id/45114 |archive-date=7 अगस्त 2009 |url-status=live }}</ref>]]
दिल्ली भारत में शिक्षा का एक महत्त्वपूर्ण केन्द्र है। दिल्ली के विकास के साथ-साथ यहाँ शिक्षा का भी तेजी से विकास हुआ है। प्राथमिक शिक्षा तो प्रायः सार्वजनिक है। एक बहुत बड़े अनुपात में बच्चे माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्त्री शिक्षा का विकास हर स्तर पर पुरुषों से अधिक हुआ है। यहाँ की शिक्षा संस्थाओं में विद्यार्थी भारत के सभी भागों से आते हैं। यहाँ कई सरकारी एवं निजी शिक्षा संस्थान हैं जो [[कला]], [[वाणिज्य]], [[विज्ञान]], प्रोद्योगिकी, आयुर्विज्ञान, विधि और प्रबंधन में उच्च स्तर की शिक्षा देने के लिए विख्यात हैं। उच्च शिक्षा के संस्थानों सबसे महत्त्वपूर्ण है जिसके अन्तर्गत कई कॉलेज एवं शोध संस्थान हैं। [[अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान]], [[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान]], [[जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय]], [[इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय]], [[गुरु गोबिन्द सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय]], [[टेरी - ऊर्जा और संसाधन संस्थान]] एवं [[जामिया मिलिया इस्लामिया]] उच्च शिक्षा के प्रमुख संस्थान हैं।
== संस्कृति ==
{{main|भारतीय संस्कृति}}
[[चित्र:Traditional pottery in Dilli Haat.jpg|thumb|[[दिल्ली हाट]] में प्रदर्शित परंपरागत पॉटरी उत्पाद।]]
दिल्ली शहर में बने स्मारकों से विदित होता है कि यहां की संस्कृति प्राच्य ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि से प्रभावित है। [[भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण]] विभाग ने दिल्ली शहर में लगभग १२०० धरोहर स्थल घोषित किए हैं, जो कि विश्व में किसी भी शहर से कहीं अधिक है।<ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/Promote-lesser-known-monuments-of-Delhi/articleshow/4194014.cms|title='Promote lesser-known monuments of Delhi' - Times of India|website=The Times of India|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190302024609/https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/Promote-lesser-known-monuments-of-Delhi/articleshow/4194014.cms|archive-date=2 मार्च 2019|url-status=live}}</ref> और इनमें से १७५ स्थल राष्ट्रीय धरोहर स्थल घोषित किए हैं।<ref name=asimonuments>{{cite web
|url=http://asi.nic.in/asi_monu_alphalist_delhi.asp
|title=Delhi Circle (N.C.T. of Delhi)
|accessdate=27 दिसंबर 2006
|work=List of Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains of National Importance
|publisher=[[भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण]]
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070514061700/http://asi.nic.in/asi_monu_alphalist_delhi.asp
|archive-date=14 मई 2007
|url-status=live
}}</ref> पुराना शहर वह स्थान है, जहां मुगलों और तुर्क शासकों ने स्थापत्य के कई नमूने खड़े किए, जैसे [[जामा मस्जिद, दिल्ली|जामा मस्जिद]] (भारत की सबसे बड़ी मस्जिद)<ref name=Jama>{{cite web| publisher=Terra Galleria| url=http://www.terragalleria.com/asia/india/delhi/picture.indi38660.html| title=Jama Masjid, भारत's largest mosque| accessdate=13 मार्च 2009| archive-url=https://web.archive.org/web/20090304032037/http://www.terragalleria.com/asia/india/delhi/picture.indi38660.html| archive-date=4 मार्च 2009| url-status=dead}}</ref> और [[लाल किला, दिल्ली|लाल किला]]। दिल्ली में फिल्हाल तीन [[विश्व धरोहर स्थल]] हैं – [[लाल किला, दिल्ली|लाल किला]], [[कुतुब मीनार]] और [[हुमायुं का मकबरा]]।<ref name=whsite>{{cite web|url=http://whc.unesco.org/en/statesparties/in|title=Properties inscribed on the World Heritage List: India|publisher=युनेस्को World Heritage Centre|access-date=14 अप्रैल 2009|archive-url=https://www.webcitation.org/684WrF3rd?url=http://whc.unesco.org/en/statesparties/in|archive-date=31 मई 2012|url-status=live}}</ref> अन्य स्मारकों में [[इंडिया गेट]], [[जंतर मंतर, दिल्ली|जंतर मंतर]] (१८वीं सदी की खगोलशास्त्रीय वेधशाला), [[पुराना किला]] (१६वीं सदी का किला). [[लक्ष्मीनारायण मंदिर, दिल्ली|बिरला मंदिर]], [[अक्षरधाम मंदिर, दिल्ली|अक्षरधाम मंदिर]] और [[कमल मंदिर]] आधुनिक स्थापत्यकला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। [[राज घाट]] में राष्ट्रपिता [[महात्मा गाँधी]] तथा निकट ही अन्य बड़े व्यक्तियों की समाधियां हैं। [[नई दिल्ली]] में बहुत से सरकारी कार्यालय, सरकारी आवास, तथा ब्रिटिश काल के अवशेष और इमारतें हैं। कुछ अत्यंत महत्त्वपूर्ण इमारतों में [[राष्ट्रपति भवन]], [[केन्द्रीय सचिवालय]], [[राजपथ]], [[संसद भवन]] और [[विजय चौक]] आते हैं। [[सफदरजंग का मकबरा]] और [[हुमायुं का मकबरा]] मुगल बागों के चार बाग शैली का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
दिल्ली के राजधानी [[नई दिल्ली]] से जुड़ाव और भूगोलीय निकटता ने यहाँ की राष्ट्रीय घटनाओं और अवसरों के महत्त्व को कई गुणा बढ़ा दिया है। यहाँ कई राष्ट्रीय त्यौहार जैसे [[गणतंत्र दिवस]], [[स्वतंत्रता दिवस]] और [[गाँधी जयंती]] खूब हर्षोल्लास से मनाए जाते हैं। भारत के स्वतंत्रता दिवस पर यहाँ के प्रधान मंत्री लाल किले से यहाँ की जनता को संबोधित करते हैं। बहुत से दिल्लीवासी इस दिन को पतंगें उड़ाकर मनाते हैं। इस दिन पतंगों को स्वतंत्रता का प्रतीक माना जाता है।<ref name=freedom>{{cite web| work=123independenceday.com| publisher=Compare Infobase Limited| url=http://123independenceday.com/indian/gift_of/freedom/| title=Independence Day| accessdate=4 जनवरी 2007| archive-url=https://www.webcitation.org/684WsTS3d?url=http://123independenceday.com/indian/gift_of/freedom/| archive-date=31 मई 2012| url-status=dead}}</ref> गणतंत्र दिवस की परेड एक वृहत जुलूस होता है, जिसमें भारत की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक झांकी का प्रदर्शन होता है।<ref name=repmil>{{cite web|url=http://www.thehindubusinessline.com/2002/01/28/stories/2002012800060800.htm|title=R-Day parade, an anachronism?|accessdate=13 जनवरी 2007|last=Ray Choudhury|first=Ray Choudhury|date=28 जनवरी 2002|publisher=द हिन्दू बिज़नस लाइन|archive-url=https://web.archive.org/web/20070304155931/http://www.thehindubusinessline.com/2002/01/28/stories/2002012800060800.htm|archive-date=4 मार्च 2007|url-status=live}}</ref><ref name=repcul>{{cite web|url=http://www.india-tourism.org/delhi-travel/delhi-fairs-festivals.html|archiveurl=https://web.archive.org/web/20070319223442/http://www.india-tourism.org/delhi-travel/delhi-fairs-festivals.html|title=Fairs & Festivals of Delhइ|work=Delhi Travel|publisher=India Tourism.org|access-date=14 अप्रैल 2009|archive-date=19 मार्च 2007|url-status=dead}}</ref>
यहाँ के धार्मिक त्यौहारों में [[दीवाली]], [[होली]], [[दशहरा]], [[दुर्गा पूजा]], [[महावीर जयंती]], [[गुरु परब]], [[क्रिसमस]], [[महाशिवरात्रि]], [[ईद उल फितर]], [[बुद्ध जयंती]] [[लोहड़ी]] [[पोंगल]] और [[ओड़म]] जैसे पर्व हैं।<ref name=repcul/> कुतुब फेस्टिवल में संगीतकारों और नर्तकों का अखिल भारतीय संगम होता है, जो कुछ रातों को जगमगा देता है। यह [[कुतुब मीनार]] के पार्श्व में आयोजित होता है।<ref name=qutubfest>{{cite news |first=Madhur |last=Tankha |title=It's Sufi and rock at Qutub Fest |url=http://www.hindu.com/2005/12/15/stories/2005121503090200.htm |work=नई दिल्ली |publisher=द हिन्दू |date=15 दिसम्बर 2005 |accessdate=13 जनवरी 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20060513084038/http://www.hindu.com/2005/12/15/stories/2005121503090200.htm |archive-date=13 मई 2006 |url-status=live }}</ref> अन्य कई पर्व भी यहाँ होते हैं: जैसे [[आम महोत्सव]], पतंगबाजी महोत्सव, [[वसंत पंचमी]] जो वार्षिक होते हैं। [[एशिया]] की सबसे बड़ी ऑटो प्रदर्शनी: [[ऑटो एक्स्पो]]<ref name="autogenerated2" /> दिल्ली में द्विवार्षिक आयोजित होती है। [[प्रगति मैदान]] में वार्षिक [[पुस्तक मेला]] आयोजित होता है। यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा पुस्तक मेला है, जिसमें विश्व के २३ राष्ट्र भाग लेते हैं। दिल्ली को उसकी उच्च पढ़ाकू क्षमता के कारण कभी कभी विश्व की पुस्तक राजधानी भी कहा जाता है।<ref>{{cite web |url=http://www.business-standard.com/india/storypage.php?autono=313090 |title=Sunil Sethi: Why Delhi is India`s Book Capital |publisher=Business-standard.com |author=Sunil Sethi / नई दिल्ली फ़रवरी 09, 2008 |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090101102116/http://www.business-standard.com/india/storypage.php?autono=313090 |archive-date=1 जनवरी 2009 |url-status=live }}</ref>
[[चित्र:AutoExpoIndica.jpg|thumb|[[ऑटो एक्स्पो]], एशिया का सबसे बड़ा ऑटो प्रदर्शनी अवसर है।<ref name="autogenerated2">{{cite web |url=http://www.hindu.com/2008/01/09/stories/2008010953071500.htm |title=द हिन्दू : Front Page : Asia’s largest auto carnival begins in Delhi tomorrow |publisher=Thehindu.com |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://www.webcitation.org/684WtqZHy?url=http://www.hindu.com/2008/01/09/stories/2008010953071500.htm |archive-date=31 मई 2012 |url-status=live }}</ref>, जो कि [[प्रगति मैदान]] में द्विवार्षिक आयोजित होता है।]]
[[पंजाबी खाना|पंजाबी]] और [[मुगलई खाना|मुगलई]] खान पान जैसे [[कबाब]] और [[बिरयानी]] दिल्ली के कई भागों में प्रसिद्ध हैं।<ref>[http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/2060348.cms Delhi to lead way in street food] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090305151610/http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/2060348.cms |date=5 मार्च 2009 }} Times of India</ref><ref name="इंडिया टुडे Food">[http://conclave.digitaltoday.in/conclave2008/index.php?issueid=32&id=2427&option=com_content&task=view§ionid=8 Discovering the spice route to Delhi] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20081231115904/http://conclave.digitaltoday.in/conclave2008/index.php?issueid=32&id=2427&option=com_content&task=view§ionid=8 |date=31 दिसंबर 2008 }} इंडिया टुडे</ref> दिल्ली की अत्यधिक मिश्रित जनसंख्या के कारण भारत के विभिन्न भागों के [[भारतीय खाना|खानपान]] की झलक मिलती है, जैसे [[राजस्थानी खाना|राजस्थानी]], [[महाराष्ट्रियन खाना|महाराष्ट्रियन]], [[बंगाली खाना|बंगाली]], [[हैदराबादी खाना|हैदराबादी]] खाना और [[दक्षिण भारतीय खाना|दक्षिण भारतीय खाने के आइटम]] जैसे [[इडली]], [[सांभर]], [[दोसा]] इत्यादि बहुतायत में मिल जाते हैं। इसके साथ ही स्थानीय खासियत, जैसे [[दिल्ली की चाट|चाट]] इत्यादि भी खूब मिलती है, जिसे लोग चटकारे लगा लगा कर खाते हैं। इनके अलावा यहाँ [[महाद्वीपीय खाना]] जैसे इटैलियन और चाइनीज़ खाना भी बहुतायत में उपलब्ध है।
इतिहास में दिल्ली उत्तर भारत का एक महत्त्वपूर्ण व्यापार केन्द्र भी रहा है। पुरानी दिल्ली ने अभी भी अपने गलियों में फैले बाज़ारों और पुरानी मुगल धरोहरों में इन व्यापारिक क्षमताओं का इतिहास छुपा कर रखा है।<ref name=slt>{{cite news |first=Sarina |last=Singh |title=Delhi: Old, new, sleek and rambunctious too |url=http://www.sltrib.com/travel/ci_4853701 |work=Travels with Lonely Planet: India |publisher=The Salt Lake Tribune |date=16 दिसम्बर 2006 |access-date=14 अप्रैल 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071010050635/http://www.sltrib.com/travel/ci_4853701 |archive-date=10 अक्तूबर 2007 |url-status=dead }}</ref> पुराने शहर के बाजारों में हर एक प्रकार का सामान मिलेगा। तेल में डूबे चटपटे आम, नींबू, आदि के अचारों से लेकर मंहगे हीरे जवाहरात, जेवर तक; दुल्हन के अलंकार, कपड़ों के थान, तैयार कपड़े, मसाले, मिठाइयाँ और क्या नहीं?<ref name=slt/> कई पुरानी हवेलियाँ इस शहर में अभी भी शोभा पा रही हैं और इतिहास को संजोए शान से खड़ी है।<ref name=jacob>{{cite journal |last = Jacob |first = Satish |year = 2002 |month = जुलाई |title = Wither, the walled city |journal = Seminar (web edition) |issue = 515 |url = http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20satish%20jacob.htm |access-date = 14 अप्रैल 2009 |archive-url = https://web.archive.org/web/20061212133015/http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20satish%20jacob.htm |archive-date = 12 दिसंबर 2006 |url-status = dead }}</ref> [[चांदनी चौक, दिल्ली|चांदनी चौक]], जो कि यहाँ का तीन शताब्दियों से भी पुराना बाजार है, दिल्ली के जेवर, ज़री साड़ियों और मसालों के लिए प्रसिद्ध है।<ref name=Chandni>{{cite web| publisher=About Palace on Wheels| work=Delhi Tours| url=http://www.aboutpalaceonwheels.com/palace-on-wheels-destinations/shopping-in-delhi.html| title=Shopping in Delhi| accessdate=4 जनवरी 2007| archive-url=https://www.webcitation.org/684Ww5Av6?url=http://www.aboutpalaceonwheels.com/palace-on-wheels-destinations/shopping-in-delhi.html| archive-date=31 मई 2012| url-status=dead}}</ref> दिल्ली की प्रसिद्ध कलाओं में से कुछ हैं यहाँ के [[ज़रदोज़ी]] (सोने के तार का काम, जिसे ज़री भी कहा जाता है) और [[मीनाकारी]] (जिसमें पीतल के बर्तनों इत्यादि पर नक्काशी के बीच रोगन भरा जाता है। यहाँ की कलाओं के लिए बाजार हैं [[प्रगति मैदान, दिल्ली]], [[दिल्ली हाट]], [[हौज खास, दिल्ली]]- जहां विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प के और हठकरघों के कार्य के नमूने मिल सकते हैं। समय के साथ साथ दिल्ली ने देश भर की कलाओं को यहाँ स्थान दिया हैं। इस तरह यहाँ की कोई खास शैली ना होकर एक अद्भुत मिश्रण हो गया है।<ref name=menon>{{cite journal |last = Menon |first = Anjolie Ela |year = 2002 |month = जुलाई |title = The Age That Was |journal = Seminar (web edition) |issue = 515 |url = http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20anjolie%20ela%20menon.htm |access-date = 14 अप्रैल 2009 |archive-url = https://web.archive.org/web/20090916212407/http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20anjolie%20ela%20menon.htm |archive-date = 16 सितंबर 2009 |url-status = dead }}</ref><ref name=dayal>{{cite journal | last = Dayal | first = Ravi | year = 2002 | month = जुलाई | title = A Kayastha’s View | journal = Seminar (web edition) | issue = 515 | url = http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20ravi%20dayal.htm | access-date = 14 अप्रैल 2009 | archive-url = https://web.archive.org/web/20090916211837/http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20ravi%20dayal.htm | archive-date = 16 सितंबर 2009 | url-status = dead }}</ref>
दिल्ली के निम्न भगिनी शहर हैं:<ref>{{cite web|url=http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/15278423.cms|publisher=India Times|title=Delhi to London, it’s a sister act|accessdate=18 फरवरी 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20170204131607/http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/15278423.cms|archive-date=4 फ़रवरी 2017|url-status=live}}</ref>
* [[शिकागो]], {{USA}}
* [[कुआला लंपूर]], {{MAS}}
* [[लंदन]], {{GBR}}
* [[मॉस्को]], {{RUS}}
* [[सिओल]], {{KOR}}
* [[वॉशिंगटन]], {{USA}}
* [[लॉस एंजिल्स]], {{USA}}
* [[सिडनी]], {{AUS}}
* [[पेरिस]], {{FRA}}
== स्थापत्य ==
[[चित्र:Qutab.jpg|thumb|left|{{convert|72.5|m|ft|abbr=on|0}} ऊंची [[कुतुब मीनार]], विश्व की सबसे ऊंची मुक्त-खड़ी [[मीनार]] है।<ref name="Qutab">{{cite web|url=http://portal.unesco.org/en/ev.php-URL_ID=6643&URL_DO=DO_TOPIC&URL_SECTION=201.html|title=Under threat: The Magnificent Minaret of Jam|work=The New Courier No 1|month=अक्टूबर|year=2002|publisher=युनेस्को|accessdate=3 मई 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20091111215826/http://portal.unesco.org/en/ev.php-URL_ID%3D6643%26URL_DO%3DDO_TOPIC%26URL_SECTION%3D201.html|archive-date=11 नवंबर 2009|url-status=live}}</ref>]]
इस ऐतिहासिक नगर में एक ओर प्राचीन, अतिप्राचीन काल के असंख्य खंडहर मिलते हैं, तो दूसरी ओर अवार्चीन काल के योजनानुसार निर्मित उपनगर भी। इसमें विश्व के किसी भी नवीनतम नगर से होड़ लेने की क्षमता है। प्राचीनकाल के कितने ही नगर नष्ट हो गए पर दिल्ली अपनी भौगिलिक स्थिति और समयानुसार परिवर्तनशीलता के कारण आज भी समृद्धशाली नगर ही नहीं महानगर है। [[भारत सरकार]] के संस्कृति मंत्रालय के [[भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग]] ने दिल्ली में १२०० इमारतों को ऐतिहासिक महत्त्व का तथा १७५ को राष्ट्रीय सांस्कृतिक स्मारक घोषित किया है।
[[चित्र:Humayun's tomb outside.jpg|thumb|right|[[१५६०]] में बना, [[हुमायुं का मकबरा]] [[मुगल स्थापत्यकला|मुगल मकबरा परिसर]] का प्रथम उदाहरण है।<ref>{{cite book |last=Petersen |first=Andrew |title=Dictionary of Islamic Architecture |url=http://books.google.com/books?id=gVQj7bW0W9MC&pg=PA204&dq=humayun%27s+tomb+architecture+mughal&lr=&sig=ACfU3U0LcITGtYPq59VMowHRAL5yKKa_eg |publisher=Routledge |location= |language= |isbn=0415213320 |pages= |chapter= |chapterurl= |year=1999 |access-date=17 मई 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110920083610/http://books.google.com/books?id=gVQj7bW0W9MC&pg=PA204&dq=humayun%27s+tomb+architecture+mughal&lr=&sig=ACfU3U0LcITGtYPq59VMowHRAL5yKKa_eg |archive-date=20 सितंबर 2011 |url-status=live }}</ref>]]
नई दिल्ली में [[महरौली]] में गुप्तकाल में निर्मित लौहस्तंभ है। यह प्रौद्योगिकी का एक अनुठा उदाहरण है। ईसा की चौथी शताब्दी में जब इसका निर्माण हुआ तब से आज तक इस पर जंग नहीं लगा। दिल्ली में इंडो-इस्लामी स्थापत्य का विकाश विशेष रूप से दृष्टगत होता है। दिल्ली के कुतुब परिसर में सबसे भव्य स्थापत्य कुतुब मिनार है। इस मिनार को स़ूफी संत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की स्मृति में बनवाया गया था। तुगलक काल में निर्मित गयासुद्दीन का मकबरा स्थापत्य में एक नई प्रवृत्ति का सूचक है। यह अष्टभुजाकार है। दिल्ली में हुमायूँ का मकबरा मुगल स्थापत्य कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। शाहजहाँ का शासनकाल स्थापत्य कला के लिए याद किया जाता है।
{{-}}
== अर्थ व्यवस्था ==
{{main|भारत की अर्थव्यवस्था}}
[[मुंबई]] के बाद दिल्ली भारत के सबसे बड़े व्यापारिक महानगरो में से है। देश में प्रति व्यक्ति औसत आय की दृष्टि से भी यह देश के सबसे सम्पन्न नगरो में गिना जाता है। [[१९९०]] के बाद से दिल्ली विदेशी निवशेकों का पसन्दीदा स्थान बना है। हाल में कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों जैसे [[पेप्सी]], गैप, इत्यादि ने दिल्ली और उसके आस-पास के क्षेत्रों में अपना मुख्यालय खोला है। क्रिसमस के दिन वर्ष [[२००२]] में दिल्ली के महानगरी क्षेत्रों में [[दिल्ली मेट्रो रेल]] का शुभारम्भ हुआ जिसे वर्ष २०२२ में पूरा किये जाने का अनुमान है।
हवाई यातायात द्वारा दिल्ली [[इन्दिरा गांधी अन्तरराष्ट्रीय विमानस्थल]] से पूरे विश्व से जुड़ा है।.
{{-}}
== यातायात सुविधाएं ==
{{main|दिल्ली में यातायात}}
[[चित्र:Signaturebridgenedelhi.png|thumb|[[सिग्नेचर ब्रिज]] यमुना नदी पर, दिल्ली में सबसे ऊंची संरचना है<ref>{{cite news|title= कुतुबमिनार से भी ऊंचे सिग्नेचर ब्रिज पर चढ़ते ही होने लगेगा अलग एहसास, पलक झपकते मिटेंगी दूरियां|url= https://www.amarujala.com/india-news/inaugaration-of-signature-bridge-of-delhi-see-photos|date= [[११ दिसम्बर]], [[२००२]]|access-date= 4 नवंबर 2018|archive-url= https://web.archive.org/web/20181104171442/https://www.amarujala.com/india-news/inaugaration-of-signature-bridge-of-delhi-see-photos|archive-date= 4 नवंबर 2018|url-status= live}}</ref>]]
[[चित्र:Delhi Metro.jpeg|thumb|[[दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन]] द्वारा संचालित मेट्रो रेल सेवा औसत ८,३७,००० सवारियां प्रतिदिन ले जाती है।<ref>{{cite web|url=http://timesofindia.indiatimes.com/news/city/delhi/Delhi-Metro-records-highest-ridership/articleshow/4860435.cms|title=Delhi Metro records highest ridership|publisher=[[द टाईम्स ऑफ़ इंडिया]]|date=5 अगस्त 2009|access-date=3 नवंबर 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20090809165516/http://timesofindia.indiatimes.com/news/city/delhi/Delhi-Metro-records-highest-ridership/articleshow/4860435.cms|archive-date=9 अगस्त 2009|url-status=live}}</ref>]]
[[चित्र:Delhi airport terminal 3 (cropped).jpg|thumb|इंदिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा]]
[[चित्र:Raj Path.jpg|thumb|[[रायसीना की पहाड़ियाँ]] में [[राजपथ]]। दिल्ली की कुल गाड़ियों का ३०% निजी वाहन हैं। दिल्ली में औसत ९६३ नए वाहन प्रतिदिन पंजीकृत होते हैं।<ref>{{cite web |url=http://www.iht.com/articles/2007/11/06/asia/delhi.php |title=Study finds air quality in Delhi has worsened dramatically - International Herald Tribune |publisher=Iht.com |author= |archiveurl=https://web.archive.org/web/20080706171906/http://www.iht.com/articles/2007/11/06/asia/delhi.php |archivedate=6 जुलाई 2008 |access-date=14 अप्रैल 2009 |url-status=dead }}</ref>]]
[[चित्र:নিউ দিল্লি রেলওয়ে স্টেশন.jpg|thumb|नई दिल्ली रेलवे स्टेशन]]
[[चित्र:Old Delhi Railway Station (DLI).jpg|thumb|दिल्ली जंक्शन रेलवे स्टेशन]]
दिल्ली के सार्वजनिक यातायात के साधन मुख्यतः बस, ऑटोरिक्शा और [[दिल्ली मेट्रो रेल|मेट्रो रेल]] सेवा हैं। दिल्ली की मुख्य यातायात आवश्यकता का ६०% बसें पूरा करती हैं।<ref name=ecosurv12>{{cite web|url=http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/ES%202005-06/Chpt/12.pdf|title=Chapter 12: Transport|accessdate=21 दिसंबर 2006|format=PDF|work=Economic Survey of Delhi, 2005–2006|publisher=Planning Department, Government of National Capital Territory of Delhi|pages=pp130–146|archive-url=https://web.archive.org/web/20070116044119/http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/ES%202005-06/Chpt/12.pdf|archive-date=16 जनवरी 2007|url-status=dead}}</ref> [[दिल्ली परिवहन निगम]] द्वारा संचालित सरकारी बस सेवा दिल्ली की प्रधान बस सेवा है। [[दिल्ली परिवहन निगम]] विश्व की सबसे बड़ी पर्यावरण सहयोगी बस-सेवा प्रदान करता है।<ref name=DTC>{{cite web|url=http://dtc.nic.in/ccharter.htm|title=Citizen Charter|accessdate=21 दिसंबर 2006|work=|publisher=Delhi Transport Corporation|archive-url=https://web.archive.org/web/20070110171420/http://dtc.nic.in/ccharter.htm|archive-date=10 जनवरी 2007|url-status=dead}}</ref> हाल ही में [[बस त्वरित पारगमन|बी आर टी]] कॉरिडोर की सेवा [[अंबेडकर नगर]] और [[दिल्ली गेट]] के बीच आरम्भ हुई है। जिसे तकनीकी खामियों के कारण तोड़ दिया है और अब सड़क को पुराने स्वरूप में बदल दिया गया है। [[ऑटो रिक्शा]] दिल्ली में यातायात का एक प्रभावी माध्यम है। ये ईंधन के रूप में [[कंप्रेस्ड नैचुरल गैस|सी एन जी]] का प्रयोग करते हैं, व इनका रंग हरा होता है। दिल्ली में वातानुकूलित टैक्सी सेवा भी उपलब्ध है जिनका किराया ७.५० से १५ रु/कि॰मी॰ तक है। दिल्ली की कुल वाहन संख्या का ३०% निजी वाहन हैं।<ref name=ecosurv12/> दिल्ली में १९२२.३२ कि॰मी॰ की लंबाई प्रति १०० कि॰मी॰२, के साथ भारत का सर्वाधिक सड़क घनत्व मिलता है।<ref name=ecosurv12/> दिल्ली भारत के पांच प्रमुख महानगरों से राष्ट्रीय राजमार्गों द्वारा जुड़ा है। ये राजमार्ग हैं: [[भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों की सूची|राष्ट्रीय राजमार्ग]] संख्या: १, २, ८, १० और २४। अभी कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने राष्ट्रीय राजमार्ग २४ जो निज़ामुद्दीन से मेरठ के लिए दिल्ली-मेरठ एक्स्प्रेस वे का उद्घाटन किया था वह ८ लेन का है जिसकी अधिकतम १०० किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से चल सकते हैं वो भी है। दिल्ली की सड़कों का अनुरक्षण [[दिल्ली नगर निगम]] (एम सी डी), दिल्ली छावनी बोर्ड, पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट (PWD) और [[दिल्ली विकास प्राधिकरण]] द्वारा किया जाता है।<ref name=roadauth>{{cite web|url=http://www.gisdevelopment.net/proceedings/mapindia/2006/transportation/mi06tran_200.htm|title=GIS Based Maintenance Management System (GMMS) For Major Roads Of Delhi|accessdate=14 जनवरी 2007|author=I.Prasada Rao|author2=Dr. P.K. Kanchan, Dr. P.K. Nanda|work=Map India 2006: Transportation|publisher=GISdevelopment.net|archive-url=https://web.archive.org/web/20060712102505/http://www.gisdevelopment.net/proceedings/mapindia/2006/transportation/mi06tran_200.htm|archive-date=12 जुलाई 2006|url-status=dead}}</ref> दिल्ली के उच्च जनसंख्या दर और उच्च अर्थ विकास दर ने दिल्ली पर यातायात की वृहत मांग का दबाव यहाँ की अवसंरचना पर बनाए रखा है। २००८ के अनुसार दिल्ली में ५५ लाख वाहन नगर निगम की सीमाओं के अंदर हैं। इस कारण दिल्ली विश्व का सबसे अधिक वाहनों वाला शहर है। साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ११२ लाख वाहन हैं।<ref>{{cite web |url=http://www.igovernment.in/site/traffic-snarl-snaps-42-cr-man-hour-from-delhi-ncr-workers/ |title=Traffic snarl snaps 42 Cr man-hour from Delhi, NCR workers at iGovernment |publisher=Igovernment.in |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080110092330/http://www.igovernment.in/site/traffic-snarl-snaps-42-cr-man-hour-from-delhi-ncr-workers/ |archive-date=10 जनवरी 2008 |url-status=dead }}</ref> सन १९८५ में दिल्ली में प्रत्येक १००० व्यक्ति पर ८५ कारें थीं।<ref>{{cite web |url=http://economictimes.indiatimes.com/Every_12th_Delhiite_owns_a_car/articleshow/2667484.cms |title=Every 12th Delhiite owns a car- Automobiles-Auto-News By Industry-News-दि इकॉनोमिक टाइम्स |publisher=Economictimes.indiatimes.com |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090111232915/http://economictimes.indiatimes.com/Every_12th_Delhiite_owns_a_car/articleshow/2667484.cms |archive-date=11 जनवरी 2009 |url-status=live }}</ref> दिल्ली के यातायात की मांगों को पूरा करने हेतु दिल्ली और केन्द्र सरकार ने एक मास रैपिड ट्रांज़िट सिस्टम का आरम्भ किया, जिसे दिल्ली मेट्रो कहते हैं।<ref name=ecosurv12/> सन १९९८ में [[सर्वोच्च न्यायालय]] ने दिल्ली के सभी सार्वजनिक वाहनों को डीज़ल के स्थान पर [[कंप्रेस्ड नैचुरल गैस]] का प्रयोग अनिवार्य रूप से करने का आदेश दिया था।<ref name="kumari">{{cite journal| author = R. Kumari, A.K. Attri, L. Int Panis, B.R. Gurjar| title = Emission estimates of Particulate Matter and Heavy Metals from Mobile sources in Delhi (India)| journal = J. Environ. Science & Engg.| volume = 55| issue = 2| pages = 127–142| date = अप्रैल 2013| url = https://www.researchgate.net/publication/259827470_Emission_estimates_of_Particulate_Matter_and_Heavy_Metals_from_Mobile_Sources_in_Delhi| access-date = 16 अप्रैल 2014| archive-url = https://web.archive.org/web/20141108235156/http://www.researchgate.net/publication/259827470_Emission_estimates_of_Particulate_Matter_and_Heavy_Metals_from_Mobile_Sources_in_Delhi| archive-date = 8 नवंबर 2014| url-status = live}}</ref><ref name=supremelaw>{{cite web|url=http://www.cleanairnet.org/caiasia/1412/articles-69423_delhi_case.pdf|title=Introduction|accessdate=14 जनवरी 2007|author=Armin Rosencranz|author2=Michael Jackson|format=PDF|work=The Delhi Pollution Case: The Supreme Court of India and the Limits of Judicial Power|publisher=indlaw.com|pages=p.3|archive-url=https://web.archive.org/web/20070614203640/http://www.cleanairnet.org/caiasia/1412/articles-69423_delhi_case.pdf|archive-date=14 जून 2007|url-status=dead}}</ref> तब से यहाँ सभी सार्वजनिक वाहन सी एन जी पर ही चालित हैं।
; मेट्रो सेवा
{{मुख्य|दिल्ली मेट्रो}}
[[दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन]] द्वारा संचालित [[दिल्ली मेट्रो रेल]] एक मास रैपिड ट्रांज़िट (त्वरित पारगमन) प्रणाली है, जो कि दिल्ली के कई क्षेत्रों में सेवा प्रदान करती है। इसकी शुरुआत २४ दिसम्बर २००२ को [[शहादरा]] [[तीस हजारी]] लाईन से हुई। इस परिवहन व्यवस्था की अधिकतम गति ८०किमी/घंटा (५०मील/घंटा) रखी गयी है और यह हर स्टेशन पर लगभग २० सेकेंड रुकती है। सभी ट्रेनों का निर्माण [[दक्षिण कोरिया]] की कंपनी रोटेम द्वारा किया गया है। दिल्ली की परिवहन व्यवसथा में मेट्रो रेल एक महत्त्वपूर्ण कड़ी है। इससे पहले परिवहन का ज़्यादातर बोझ सड़क पर था। प्रारम्भिक अवस्था में इसकी योजना छह मार्गों पर चलने की है जो दिल्ली के ज्यादातर हिस्से को जोड़ेगी। इसका पहला चरण [[वर्ष]] [[२००६]] में पूरा हो चुका है। दुसरे चरण में दिल्ली के [[महरौली]], [[बदरपुर बॉर्डर]], आनन्द विहार, जहांगीरपुरी, मुन्द्का और [[इन्दिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा]] अथवा दिल्ली से सटे [[नोएडा]], [[गुड़गांव]] और वैशाली को मेट्रो से जोड़ने का काम जारी है। परियोजना के तीसरे चरण में [[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र]] के शहरों [[गाजियाबाद]], [[फरीदाबाद]] इत्यादि को भी जोड़ने की योजना है। इस रेल व्यवस्था के चरण I में मार्ग की कुल लंबाई लगभग ६५.११ किमी है जिसमे १३ किमी भूमिगत एवं ५२ किलोमीटर एलीवेटेड मार्ग है। चरण II के अन्तर्गत पूरे मार्ग की लंबाई १२८ किमी होगी एवं इसमें ७९ स्टेशन होंगे जो अभी निर्माणाधीन हैं, इस चरण के २०१० तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-newdelhi/Delhi-Metro-confident-of-meeting-deadline/article14836060.ece|title=Delhi Metro confident of meeting deadline|date=17 सित॰ 2007|accessdate=1 मार्च 2019|via=www.thehindu.com|archive-url=https://web.archive.org/web/20180303140135/http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-newdelhi/Delhi-Metro-confident-of-meeting-deadline/article14836060.ece|archive-date=3 मार्च 2018|url-status=live}}</ref><ref name="Delhi Metro Masterplan 2021">Delhi Metro Masterplan 2021</ref> चरण III (११२ किमी) एवं IV (१०८.५ किमी) लंबाई की बनाये जाने का प्रस्ताव है जिसे क्रमश: २०१५ एवं २०२० तक पूरा किये जाने की योजना है। इन चारों चरणो का निर्माण कार्य पूरा हो जाने के पश्चात दिल्ली मेट्रो के मार्ग की कुल लंबाई ४१३.८ किलोमीटर की हो जाएगी जो [[लंदन]] के मेट्रो रेल (४०८ किमी) से भी बड़ा बना देगी।<ref name="Delhi Metro Masterplan 2021"/><ref>{{Cite web|url=http://www.delhimetrorail.com/commuters/images/metro_map_big.jpg|title=map of extensions, DMRC|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20061211073124/http://www.delhimetrorail.com/commuters/images/metro_map_big.jpg|archive-date=11 दिसंबर 2006|url-status=dead}}</ref><ref>द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया</ref><ref>Discovery channel : 24 hours with Delhi Metro</ref>
दिल्ली के २०२१ मास्टर प्लान के अनुसार बाद में मेट्रो रेल को दिल्ली के उपनगरों तक ले जाए जाने की भी योजना है।
;रेल सेवा
दिल्ली [[भारतीय रेल]] के [[:Image:India railway schematic map.svg|नक्शे]] का एक प्रधान जंक्शन है। यहाँ [[उत्तर रेलवे]] का मुख्यालय भी है। यहाँ के चार मुख्य रेलवे स्टेशन हैं: [[नई दिल्ली रेलवे स्टेशन]], [[दिल्ली जंक्शन]], [[सराय रोहिल्ला]] और [[हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन]]।<ref name=ecosurv12/> दिल्ली अन्य सभी मुख्य शहरों और महानगरों से कई राजमार्गों और एक्स्प्रेसवे (त्वरित मार्ग) द्वारा जुड़ा हुआ है। यहाँ वर्तमान में तीन एक्स्प्रेसवे हैं और तीन निर्माणाधीन हैं, जो इसे समृद्ध और वाणिज्यिक उपनगरों से जोड़ेंगे। [[दिल्ली गुड़गांव एक्स्प्रेसवे]] दिल्ली को [[गुड़गांव]] और अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से जोड़ता है। [[डी एन डी फ्लाइवे]] और [[नोएडा|नोएडा-]][[ग्रेटर नोएडा]] एक्स्प्रेसवे दिल्ली को दो मुख्य उपनगरों से जोड़ते हैं। ग्रेटर नोएडा में एक अलग अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा योजनाबद्ध है और नोएडा में इंडियन ग्रैंड प्रिक्स नियोजित है।
;वायु सेवा
[[इंदिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा]] दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम कोण पर स्थित है और यही अन्तर्देशीय और अन्तर्राष्ट्रीय वायु-यात्रियों के लिए शहर का मुख्य द्वार है। वर्ष २००६-०७ में हवाई अड्डे पर २३ मिलियन सवारियां दर्ज की गईं थीं,<ref name="autogenerated1">इंदिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा</ref><ref name=essentialtravel>{{cite web| publisher=Essential Travel Ltd., UK.| url=http://parking.essentialtravel.co.uk/worldairport/india/delhi.htm| title=Delhi – Indira Gandhi International Airport (DEL) information| accessdate=29 अप्रैल 2006| archive-url=https://web.archive.org/web/20060719165130/https://parking.essentialtravel.co.uk/worldairport/india/delhi.htm| archive-date=19 जुलाई 2006| url-status=dead}}</ref> जो इसे दक्षिण [[एशिया]] के व्यस्ततम विमानक्षेत्रों में से एक बनाती हैं। US$१९.३ लाख की लागत से एक नया टर्मिनल-३ निर्माणाधीन है, जो ३.४ करोड़ अतिरिक्त यात्री क्षमता का होगा, सन २०१० तक पूर्ण होना निश्चित है।<ref>{{cite web |url=http://www.dailytimes.com.pk/default.asp?page=2007\02\18\story_18-2-2007_pg5_24 |title=Daily Times - Leading News Resource of Pakistan |publisher=Dailytimes.com.pk |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archiveurl=https://archive.today/20120904074154/http://www.dailytimes.com.pk/default.asp?page=2007%5C02%5C18%5Cstory_18-2-2007_pg5_24 |archivedate=4 सितंबर 2012 |url-status=live }}</ref> इसके आगे भी विस्तार कार्यक्रम नियोजित हैं, जो यहाँ १०० मिलियन यात्री प्रतिवर्ष से अधिक की क्षमता देंगे।<ref name="autogenerated1"/> [[सफदरजंग विमानक्षेत्र]] दिल्ली का एक अन्य एयरफ़ील्ड है, जो सामान्य विमानन अभ्यासों के लिए और कुछ वीआईपी उड़ानों के लिए प्रयोग होता है।<ref name=safdur>{{cite web|url=http://gc.kls2.com/airport/VIDD|title=VIDD - Airport|accessdate=14 जनवरी 2007|work=Great Circle Search|publisher=Karl L. Swartz|archive-url=https://web.archive.org/web/20070310055725/http://gc.kls2.com/airport/VIDD|archive-date=10 मार्च 2007|url-status=live}}</ref>
==इन्हें भी देखें==
* [[भारत के राज्यों और संघ क्षेत्रों की राजधानियाँ]]
* [[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के सर्वाधिक जनसंख्या वाले शहरों की सूची]]
* [[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र]]
* [[नई दिल्ली]]
* [[दिल्ली छावनी]]
== सन्दर्भ ==
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== बाहरी कड़ियाँ ==
{{प्रवेशद्वार|दिल्ली}}
{{commonscat|delhi|दिल्ली}}
* [https://web.archive.org/web/20160305010439/http://pib.nic.in/newsite/hindifeature.aspx?relid=12661 दिल्ली का इतिहास]
* [https://web.archive.org/web/20060210222442/http://delhigovt.nic.in/newdelhi/index.html दिल्ली सरकार]
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}}
'''दिल्ली''' ({{Langx|en|Delhi|italic=no}}), आधिकारिक तौर पर '''राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली'''<ref>{{Cite web |url=https://india.gov.in/hi/ |title=राष्ट्रीय-राजधानी-क्षेत्र-दिल्ली-की-वेबसाइट-देखें |access-date=12 जुलाई 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170701055708/https://india.gov.in/hi |archive-date=1 जुलाई 2017 |url-status=dead }}</ref> ({{Langx|en|National Capital Territory of Delhi|links=no|italic=no}}) [[भारत]] का एक महानगर और केंद्र-शासित प्रदेश है। इसमें [[नई दिल्ली (प्रशासनिक राजधानी क्षेत्र)|नई दिल्ली]] सम्मिलित है जो भारत की राजधानी है। दिल्ली में राजधानी के होने के नाते केंद्र सरकार की तीनों इकाइयों- कार्यपालिका, संसद और न्यायपालिका के मुख्यालय नई दिल्ली और दिल्ली में स्थापित हैं। १४८३ वर्ग किलोमीटर में फैला दिल्ली [[जनसंख्या]] के तौर पर भारत का दूसरा सबसे बड़ा महानगर है। यहाँ की जनसंख्या लगभग १ करोड़ ७० लाख है। यहाँ बोली जाने वाली मुख्य भाषाएँ हैं : [[हिन्दी]], [[पंजाबी भाषा|पंजाबी]], [[उर्दू]] और [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]। भारत में दिल्ली का ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्त्व है। इसके [[दक्षिण पश्चिम]] में [[अरावली]] पहाड़ियाँ और पूर्व में [[यमुना]] नदी है, जिसके किनारे यह [[नगर]] बसा हुआ है। यह प्राचीन समय में [[गंगा]] के मैदान से होकर जाने वाले वाणिज्य पथों के रास्ते में पड़ने वाला मुख्य पड़ाव था।<ref>{{cite book |last=Necipoglu |first=Gulru |title=Muqarnas: An Annual on the Visual Culture of the Islamic World |origyear=2002 |url=http://books.google.com/books?id=UJc2u33fCKQC&pg=PA16&dq=delhi+sultanate+political+center+city+delhi&sig=ACfU3U3zNMesuCjnsH7iAlLe5mKHpddn8w#PPA12,M1 |publisher=BRILL |isbn=9004125930 |pages=12–43 |chapter=Epigraphs, Scripture, and Architecture in the Early Sultanate of Delhi |chapterurl= |year=2002 |access-date=14 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140920212841/http://books.google.com/books?id=UJc2u33fCKQC&pg=PA16&dq=delhi+sultanate+political+center+city+delhi&sig=ACfU3U3zNMesuCjnsH7iAlLe5mKHpddn8w#PPA12,M1 |archive-date=20 सितंबर 2014 |url-status=live }}</ref>
[[यमुना नदी]] के किनारे स्थित इस नगर का गौरवशाली पौराणिक इतिहास है, और पुराणों में इसका विशेष महत्व है। यह भारत का अति प्राचीन नगर है। इसके इतिहास का प्रारम्भ [[सिन्धु घाटी सभ्यता]] से जुड़ा हुआ है। [[हरियाणा]] के आसपास के क्षेत्रों में हुई खुदाई से इस बात के प्रमाण मिले हैं। [[महाभारत]] काल में इसका नाम [[इन्द्रप्रस्थ]] था। [[दिल्ली सल्तनत]] के उत्थान के साथ ही दिल्ली एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक शहर के रूप में उभरी।<ref>{{cite book|last=Aitken|first=Bill|title=Speaking Stones: World Cultural Heritage Sites in India|origyear=2002|url=http://books.google.com/books?id=lu5jGGQ8fJkC&pg=PA21&dq=delhi+continuously+inhabited&sig=ACfU3U1Z52ojRmD1-ZS2QeQlb8UlGZeBhA|publisher=Eicher Goodearth Limited|isbn=8187780002|pages=264 pages|chapter=|chapterurl=|year=2001|access-date=14 मार्च 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20110914123144/http://books.google.com/books?id=lu5jGGQ8fJkC&pg=PA21&dq=delhi+continuously+inhabited&sig=ACfU3U1Z52ojRmD1-ZS2QeQlb8UlGZeBhA|archive-date=14 सितंबर 2011|url-status=live}}</ref> यहाँ कई प्राचीन एवं मध्यकालीन इमारतों तथा उनके अवशेषों को देखा जा सकता हैं। [[१६३९]] में मुगल बादशाह [[शाहजहाँ]] ने दिल्ली में ही एक चारदीवारी से घिरे शहर का निर्माण करवाया जो [[१६७९]] से [[१८५७]] तक [[मुगल साम्राज्य]] की राजधानी रही।
१८वीं एवं १९वीं शताब्दी में [[ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी]] ने लगभग पूरे भारत को अपने कब्जे में ले लिया। उन्होंने [[कोलकाता]] को अपनी राजधानी बनाया। [[१९११]] में [[दिल्ली दरबार]] में अंग्रेजी सरकार ने फैसला किया कि राजधानी को वापस दिल्ली लाया जाए। इसके लिए पुरानी दिल्ली के दक्षिण में एक नए नगर ''नई दिल्ली'' का निर्माण प्रारंभ हुआ। अंग्रेजों से [[१९४७]] में स्वतंत्रता प्राप्त कर नई दिल्ली को भारत की राजधानी घोषित किया गया।
स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात दिल्ली में विभिन्न क्षेत्रों से लोगों का प्रवासन हुआ, इससे दिल्ली के स्वरूप में आमूल परिवर्तन हुआ। विभिन्न प्रान्तों, धर्मों एवं जातियों के लोगों के दिल्ली में बसने के कारण दिल्ली का शहरीकरण तो हुआ ही साथ ही यहाँ एक मिश्रित संस्कृति ने भी जन्म लिया। आज दिल्ली भारत का एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक केन्द्र है।
== नामकरण ==
इस नगर का नाम "दिल्ली" कैसे पड़ा इसका कोई निश्चित सन्दर्भ नहीं मिलता, लेकिन व्यापक रूप से यह माना गया है कि यह एक प्राचीन राजा "ढिल्लु" से सम्बन्धित है। कुछ इतिहासकारों का यह मानना है कि यह देहलीज़ का एक विकृत रूप है, जिसका [[हिन्दुस्तानी]] में अर्थ होता है 'चौखट', जो कि इस नगर के सम्भवतः सिन्धु-गंगा समभूमि के प्रवेश-द्वार होने का सूचक है। एक और अनुमान के अनुसार इस नगर का प्रारम्भिक नाम "ढिलिका" था। हिन्दी/प्राकृत "ढीली" भी इस क्षेत्र के लिए प्रयोग किया जाता था।
== इतिहास ==
{{main|दिल्ली का इतिहास}}
[[चित्र:Delhi Red fort.jpg|thumb|300px|बाएँ|लाल किला]]
दिल्ली का प्राचीनतम उल्लेख महाभारत नामक [[महापुराण]] में मिलता है जहाँ इसका उल्लेख प्राचीन इन्द्रप्रस्थ के रूप में किया गया है। इन्द्रप्रस्थ महाभारत काल में [[पांडवों]] की राजधानी थी।<ref name=ecosurv1>{{cite web |url=http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/ES%202005-06/Chpt/1.pdf |title=Chapter 1: Introduction |accessdate=21 दिसंबर 2006 |format=PDF |work=Economic Survey of Delhi, 2005–2006 |publisher=Planning Department, Government of National Capital Territory of Delhi |pages=pp1–7 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161113174155/http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/ES%202005-06/Chpt/1.pdf |archive-date=13 नवंबर 2016 |url-status=dead }}</ref> पुरातात्विक रूप से जो पहले प्रमाण मिले हैं उससे पता चलता है कि ईसा से दो हजार वर्ष पहले भी दिल्ली तथा उसके आस-पास मानव निवास करते थे।<ref name=tourhist>{{cite web |url=http://www.indiatourism.com/delhi-history/index.html |title=Delhi History |accessdate=22 दिसंबर 2006 |work=Delhi Tourism |publisher=Advent InfoSoft (P) Ltd |archive-url=https://web.archive.org/web/20061208210557/http://www.indiatourism.com/delhi-history/index.html |archive-date=8 दिसंबर 2006 |url-status=dead }}</ref>। दिल्ली का इतिहास बेहद पुराना है करीब ७३० ईसा पूर्व के दौरान मालवा के शासक[[ राजा धन्ना भील ]]<nowiki/>के एक उत्तराधिकारी ने दिल्ली के सम्राट को चुनौती दी थी <ref>{{shorturl.at/bCYZ6}}</ref>।
[[मौर्य-काल]] (ईसा पूर्व ३००) से यहाँ एक नगर का विकास होना आरम्भ हुआ। महाराज [[पृथ्वीराज चौहान]] के दरबारी कवि [[चंद बरदाई]] की हिन्दी रचना [[पृथ्वीराज रासो]] में [[तोमर वंश|तोमर]] राजा [[अनंगपाल]] को दिल्ली का संस्थापक बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि उसने ही 'लाल-कोट' का निर्माण करवाया था और महरौली के गुप्त कालीन लौह-स्तंभ को दिल्ली लाया। दिल्ली में तोमरों का शासनकाल वर्ष [[९००]]-[[१२००]] तक माना जाता है। 'दिल्ली' या 'दिल्लिका' शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम उदयपुर में प्राप्त शिलालेखों पर पाया गया। इस शिलालेख का समय वर्ष ११७० निर्धारित किया गया। महाराज पृथ्वीराज चौहान को दिल्ली का अन्तिम हिन्दू सम्राट माना जाता है।
१२०६ ई० के बाद दिल्ली [[दिल्ली सल्तनत]] की राजधानी बनी। इस पर [[खिलज़ी वंश]], [[तुगलक़ वंश]], [[सैयद वंश]] और [[लोदी वंश]] समेत कुछ अन्य वंशों ने शासन किया। ऐसा माना जाता है कि आज की आधुनिक दिल्ली बनने से पहले दिल्ली सात बार उजड़ी और विभिन्न स्थानों पर बसी, जिनके कुछ अवशेष आधुनिक दिल्ली में अब भी देखे जा सकते हैं। दिल्ली के तत्कालीन शासकों ने इसके स्वरूप में कई बार परिवर्तन किया। मुगल बादशाह हुमायूँ ने सरहिन्द के निकट युद्ध में अफ़गानों को पराजित किया तथा बिना किसी विरोध के दिल्ली पर अधिकार कर लिया। हुमायूँ की मृत्यु के बाद हेमू विक्रमादित्य के नेतृत्व में अफ़गानों नें मुगल सेना को पराजित कर आगरा व दिल्ली पर पुनः अधिकार कर लिया। मुगल बादशाह [[अकबर]] ने अपनी राजधानी को दिल्ली से [[आगरा]] स्थान्तरित कर दिया। अकबर के पोते [[शाहजहाँ]] ([[१६२८]]-[[१६५८]]) ने सत्रहवीं सदी के मध्य में इसे सातवीं बार बसाया जिसे शाहजहाँनाबाद के नाम से पुकारा गया। शाहजहाँनाबाद को आम बोल-चाल की भाषा में पुराना शहर या पुरानी दिल्ली कहा जाता है। प्राचीनकाल से पुरानी दिल्ली पर अनेक राजाओं एवं सम्राटों ने राज्य किया है तथा समय-समय पर इसके नाम में भी परिवर्तन किया जाता रहा था। पुरानी दिल्ली [[१६३८]] के बाद मुग़ल सम्राटों की राजधानी रही। दिल्ली का आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफ़र था जिसकी मृत्यू निवार्सन में ही रंगून में हुई।
[[चित्र:ITO crossroads, New Delhi in 1950.jpg|अंगूठाकार|दाएँ|300px|दिल्ली के आईटीओ चौराहे का दृश्य, १९५०]]
[[१८५७]] के [[सिपाही विद्रोह]] के बाद दिल्ली पर ब्रिटिश शासन के हुकूमत में शासन चलने लगा। [[१८५७]] के इस [[प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम]] के आंदोलन को पूरी तरह दबाने के बाद अंग्रेजों ने [[बहादुरशाह ज़फ़र]] को [[रंगून]] भेज दिया तथा भारत पूरी तरह से अंग्रेजो के अधीन हो गया। प्रारम्भ में उन्होंने कलकत्ते (आजकल [[कोलकाता]]) से शासन संभाला परन्तु ब्रिटिश शासन काल के अन्तिम दिनों में [[पीटर महान]] के नेतृत्व में [[रूसी साम्राज्य]] का प्रभाव भारतीय उपमहाद्वीप में तेजी से बढ़ने लगा। जिसके कारण अंग्रेजों को यह लगने लगा कि कलकत्ता जो कि भारत के धुर पूरब में था वहां से [[अफ़ग़ानिस्तान]] एवं [[ईरान]] आदि पर सक्षम तरीके से आसानी से नियंत्रण नहीं स्थापित किया जा सकता है आगे चल कर के इसी कारण से [[१९११]] में [[उपनिवेश]] राजधानी को [[नई दिल्ली]] स्थानांतरित कर दिया गया एवं अनेक आधुनिक निर्माण कार्य करवाए गये। शहर के बड़े हिस्सों को ब्रिटिश आर्किटेक्ट्स सर एडविन लुटियंस और सर हर्बर्ट बेकर द्वारा डिजाइन किया गया था। [[१९४७]] में भारत की आजादी के बाद नई दिल्ली को अधिकारिक रूप से भारत की राजधानी घोषित कर दिया गया। दिल्ली में कई राजाओं के साम्राज्य के उदय तथा पतन के साक्ष्य आज भी विद्यमान हैं। सच्चे मायने में दिल्ली हमारे देश के भविष्य, भूतकाल एवं वर्तमान परिस्थितियों का मेल-मिश्रण हैं। तोमर शासकों में दिल्ली की स्थापना का श्रेय अनंगपाल को जाता है।
== जलवायु, भूगोल और जनसांख्यिकी ==
===दिल्ली-एनसीआर===
{{main|राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (भारत)}}
एनसीआर में दिल्ली से सटे सूबे उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कई शहर शामिल हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/union-territory/new-delhi/news/ut-del-hmu-new-haryanas-jind-and-karnal-add-in-part-of-ncr-zone-5017644-nor.html|title=एनसीआर में शामिल हुए जींद,करनाल और मुजफ्फरनगर, मथुरा को नहीं मिली मंजूरी|date=9 जून 2015|website=Dainik Bhaskar|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190407170136/https://www.bhaskar.com/union-territory/new-delhi/news/ut-del-hmu-new-haryanas-jind-and-karnal-add-in-part-of-ncr-zone-5017644-nor.html|archive-date=7 अप्रैल 2019|url-status=live}}</ref> एनसीआर में ४ करोड़ ७० से ज्यादा आबादी रहती है। समूचे एनसीआर में दिल्ली का क्षेत्रफल १,४८४ स्क्वायर किलोमीटर है। देश की राजधानी एनसीआर का २.९ फीसदी भाग कवर करती है। एनसीआर के तहत आने वाले क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के मेरठ, [[गाजियाबाद]], गौतम बुद्ध नगर ([[नोएडा]]), बुलंदशहर,शामली, बागपत, हापुड़ और मुजफ्फरनगर; और [[हरियाणा]] के [[फरीदाबाद]], [[गुड़गांव]], मेवात, रोहतक, सोनीपत, रेवाड़ी, झज्जर, [[पानीपत]], पलवल, महेंद्रगढ़, भिवाड़ी, जिंद और करनाल जैसे जिले शामिल हैं। [[राजस्थान]] से दो जिले - [[भरतपुर]] और [[अलवर]] एनसीआर में शामिल किए गए हैं।<ref>{{Cite web|url=https://abpnews.abplive.in/india-news/ncr-national-capital-region-of-india-a-to-z-things-you-must-know-about-it-762031|title=आप जिस दिल्ली-NCR में रहते हैं, जानिए- उसके बारे में A टू Z जानाकरी|first=एबीपी न्यूज़ वेब|last=डेस्क|date=4 जन॰ 2018|website=abpnews.abplive.in|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190407170215/https://abpnews.abplive.in/india-news/ncr-national-capital-region-of-india-a-to-z-things-you-must-know-about-it-762031|archive-date=7 अप्रैल 2019|url-status=dead}}</ref>
=== भौगोलिक स्थिति ===
{{main|दिल्ली का भूगोल}}
[[चित्र:YamunaRiver.jpg|thumb|200px|दिल्ली में [[यमुना]] नदी]]
[[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र]] दिल्ली {{convert|1484|km2|sqmi|abbr=on}} में विस्तृत है, जिसमें से {{convert|783|km2|sqmi|abbr=on|0}} भाग ग्रामीण और {{convert|700|km2|sqmi|abbr=on|0}} भाग शहरी घोषित है। दिल्ली उत्तर-दक्षिण में अधिकतम {{convert|51.9|km|mi|abbr=on|0}} है और पूर्व-पश्चिम में अधिकतम चौड़ाई {{convert|48.48|km|mi|abbr=on|0}} है। दिल्ली के अनुरक्षण हेतु तीन संस्थाएं कार्यरत है:-
* [[दिल्ली नगर निगम]]:विश्व का सबसे बड़ा स्थानीय निकाय है, जो कि अनुमानित १३७.८० लाख नागरिकों (क्षेत्रफल {{convert|1397.3|km2|sqmi|abbr=on|0|disp=or}}) को नागरिक सेवाएं प्रदान करती है। यह क्षेत्रफ़ल के हिसाब से भी मात्र [[टोक्यो]] से ही पीछे है।"<ref>Municipal Corporation of Delhi: About us [http://www.mcdonline.gov.in/mcd/aboutus.jsp] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090324083412/http://www.mcdonline.gov.in/mcd/aboutus.jsp|date=24 मार्च 2009}})</ref>. नगर निगम १३९७ वर्ग कि॰मी॰ का क्षेत्र देखती है। वर्तमान में दिल्ली नगर निगम को तीन हिस्सों में बाट दिया गया है उत्तरी दिल्ली नगर निगम,पूर्वी दिल्ली नगर निगम व दक्षिण दिल्ली नगर निगम।
* [[नई दिल्ली नगरपालिका परिषद]]: (एन डी एम सी) (क्षेत्रफल {{convert|42.7|km2|sqmi|abbr=on|0|disp=or}}) [[नई दिल्ली]] की नगरपालिका परिषद् का नाम है। इसके अधीन आने वाला कार्यक्षेत्र एन डी एम सी क्षेत्र कहलाता है।
* [[दिल्ली छावनी बोर्ड]]: (क्षेत्रफल ({{convert|43|km2|sqmi|abbr=on|0|disp=or}})<ref>{{cite web |url=http://www.ndmc.gov.in/AboutNDMC/NNDMCAct.aspx |title=परिचय |accessdate=3 जुलाई 2007 |work=द न्यू देल्ही म्युनिसिपल कॉन्सिल एक्ट १९९४ |publisher=[[नई दिल्ली नगर पालिका परिषद]] |archive-url=https://web.archive.org/web/20080302220220/http://www.ndmc.gov.in/AboutNDMC/NNDMCAct.aspx |archive-date=2 मार्च 2008 |url-status=live }}</ref> जो दिल्ली के [[दिल्ली छावनी|छावनी]] क्षेत्रों को देखता है।
दिल्ली एक अति-विस्तृत क्षेत्र है। यह अपने चरम पर उत्तर में सरूप नगर से दक्षिण में [[रजोकरी]] तक फैला है। पश्चिमतम छोर [[नजफगढ़]] से पूर्व में [[यमुना नदी]] तक (तुलनात्मक परंपरागत पूर्वी छोर)। वैसे [[शाहदरा]], [[भजनपुरा]], आदि इसके पूर्वतम छोर होने के साथ ही बड़े बाज़ारो में भी आते हैं। रा.रा.क्षेत्र में उपर्युक्त सीमाओं से लगे निकटवर्ती प्रदेशों के [[नोएडा]], [[गुड़गांव]] आदि क्षेत्र भी आते हैं। दिल्ली की भू-प्रकृति बहुत बदलती हुई है। यह उत्तर में समतल कृषि मैदानों से लेकर दक्षिण में शुष्क [[अरावली पर्वत]] के आरम्भ तक बदलती है। दिल्ली के दक्षिण में बड़ी प्राकृतिक झीलें हुआ करती थीं, जो अब अत्यधिक खनन के कारण सूखती चली गईं हैं। इनमें से एक है [[बड़खल झील]]। [[यमुना नदी]] शहर के पूर्वी क्षेत्रों को अलग करती है। ये क्षेत्र [[पूर्वी दिल्ली|यमुना पार]] कहलाते हैं, वैसे ये नई दिल्ली से बहुत से पुलों द्वारा भली-भांति जुड़े हुए हैं। [[दिल्ली मेट्रो]] भी अभी दो पुलों द्वारा नदी को पार करती है।
दिल्ली {{coord|28.61|N|77.23|E|}} पर [[भारत|उत्तरी भारत]] में बसा हुआ है। यह समुद्रतल से ७०० से १००० फीट की ऊँचाई पर [[हिमालय]] से १६० किलोमीटर दक्षिण में [[यमुना नदी]] के किनारे पर बसा है। यह उत्तर, पश्चिम एवं दक्षिण तीन तरफ से [[हरियाणा]] राज्य तथा पूर्व में [[उत्तर प्रदेश]] राज्य द्वारा घिरा हुआ है। दिल्ली लगभग पूर्णतया [[गंगा के मैदान|गांगेय क्षेत्र]] में स्थित है। दिल्ली के भूगोल के दो प्रधान अंग हैं [[यमुना]] सिंचित समतल एवं दिल्ली रिज (पहाड़ी)। अपेक्षाकृत निचले स्तर पर स्थित मैदानी उपत्यकाकृषि हेतु उत्कृष्ट भूमि उपलब्ध कराती है, हालांकि ये बाढ़ संभावित क्षेत्र रहे हैं। ये दिल्ली के पूर्वी ओर हैं। और पश्चिमी ओर रिज क्षेत्र है। इसकी अधिकतम ऊँचाई ३१८ मी.(१०४३ फी.)<ref name=gisridge>{{cite web
|url=http://www.fig.net/pub/fig_2002/Ts3-9/TS3_9_mohan.pdf
|title=जीआईएस-बेस्ड स्पैशियल इन्फ़ॉर्मेशन इंटीग्रेशन, मॉडलिंग एण्ड डिजिटल मैपिंग: ए न्यू ब्लेन्ड ऑफ टूल फ़ॉर जियोस्पेशियल एन्वायरेनमेण्टल हेल्थ एनालिसिस फ़ॉर देल्ही रिज
|accessdate=३ फ़रवरी २००३
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|year=२००२
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|archive-url=https://www.webcitation.org/684JsgcnW?url=http://www.fig.net/pub/fig_2002/Ts3-9/TS3_9_mohan.pdf
|archive-date=31 मई 2012
|url-status=dead
}}</ref> तक जाती है। यह दक्षिण में [[अरावली पर्वत]]माला से आरम्भ होकर शहर के पश्चिमी, उत्तर-पश्चिमी एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों तक फैले हैं। दिल्ली की जीवनरेखा [[यमुना]] [[हिन्दू धर्म]] में अति पवित्र नदियों में से एक है। एक अन्य छोटी नदी [[हिंडन नदी]] [[पूर्वी दिल्ली]] को [[गाजियाबाद]] से अलग करती है। दिल्ली [[भूकम्प|सीज़्मिक क्षेत्र-IV]] में आने से इसे बड़े [[भूकम्प|भूकम्पों]] का संभावित क्षेत्र बनाती है।<ref name=hazardprofile>{{cite web
|url=http://www.undp.org.in/dmweb/hazardprofile.pdf
|title=हैज़ार्ड प्रोफ़ाइल ऑफ़ इंडियन डिस्ट्रिक्ट्स
|format=PDF
|work=नेशनल कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोजेक्ट इन डाइज़ास्टार मैंनेजमेण्ट
|publisher=[[यूएनडीपी]]
|archiveurl=https://web.archive.org/web/20060519100611/http://www.undp.org.in/dmweb/hazardprofile.pdf
|access-date=31 जुलाई 2009
|archive-date=19 मई 2006
|url-status=dead
}}</ref>
=== जल सम्पदा ===
भूमिगत जलभृत लाखों वर्षों से प्राकृतिक रूप से नदियों और बरसाती धाराओं से नवजीवन पाते रहे हैं। भारत में गंगा-यमुना का मैदान ऐसा क्षेत्र है, जिसमें सबसे उत्तम जल संसाधन मौजूद हैं। यहाँ अच्छी वर्षा होती है और हिमालय के ग्लेशियरों से निकलने वाली सदानीरा नदियाँ बहती हैं। दिल्ली जैसे कुछ क्षेत्रों में भी कुछ ऐसा ही है। इसके दक्षिणी पठारी क्षेत्र का ढलाव समतल भाग की ओर है, जिसमें पहाड़ी श्रृंखलाओं ने प्राकृतिक झीलें बना दी हैं। पहाड़ियों पर का प्राकृतिक वनाच्छादन कई बारहमासी जलधाराओं का उद्गम स्थल हुआ करता था।<ref name="इंडिया वाटर पोर्टल">{{Cite web|url=https://hindi.indiawaterportal.org/?q=content/%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8|title=Hindi Water Portal|website=hindi.indiawaterportal.org|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20170228150506/http://hindi.indiawaterportal.org/?q=content%2F%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8|archive-date=28 फ़रवरी 2017|url-status=dead}}</ref>
व्यापारिक केन्द्र के रूप में दिल्ली आज जिस स्थिति में है; उसका कारण यहाँ चौड़ी पाट की एक यातायात योग्य नदी [[यमुना]] का होना ही है; जिसमें माल ढुलाई भी की जा सकती थी। ५०० ई. पूर्व में भी निश्चित ही यह एक ऐसी ऐश्वर्यशाली नगरी थी, जिसकी सम्पत्तियों की रक्षा के लिए नगर प्राचीर बनाने की आवश्यकता पड़ी थी। सलीमगढ़ और पुराना किला की खुदाइयों में प्राप्त तथ्यों और पुराना किला से इसके इतने प्राचीन नगर होने के प्रमाण मिलते हैं। [[१०००]] ई. के बाद से तो इसके इतिहास, इसके युध्दापदाओं और उनसे बदलने वाले राजवंशों का पर्याप्त विवरण मिलता है।<ref name="इंडिया वाटर पोर्टल"/>
भौगोलिक दृष्टि से अरावली की श्रंखलाओं से घिरे होने के कारण दिल्ली की शहरी बस्तियों को कुछ विशेष उपहार मिले हैं। अरावली श्रंखला और उसके प्राकृतिक वनों से तीन बारहमासी नदियाँ दिल्ली के मध्य से बहती यमुना में मिलती थीं। दक्षिण एशियाई भूसंरचनात्मक परिवर्तन से अब यमुना अपने पुराने मार्ग से पूर्व की ओर बीस किलोमीटर हट गई है।<ref>{{cite web|url=http://hindi.indiawaterportal.org/?q=content/%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8|title=दिल्ली की प्यास-यमुना को प्राणवान करने से ही स्थानीय जलस्रोतों को नवजीवन मिलेगा|publisher=इंडिया वाटर पोर्टल|accessdate=९ अगस्त २०१५|archive-url=https://web.archive.org/web/20170228150506/http://hindi.indiawaterportal.org/?q=content%2F%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8|archive-date=28 फ़रवरी 2017|url-status=dead}}</ref> ३००० ई. पूर्व में ये नदी दिल्ली में वर्तमान 'रिज' के पश्चिम में होकर बहती थी। उसी युग में अरावली की श्रृंखलाओं के दूसरी ओर [[सरस्वती नदी]] बहती थी, जो पहले तो पश्चिम की ओर सरकी और बाद में भौगोलिक संरचना में भूमिगत होकर पूर्णत: लुप्त हो गई।
एक अंग्रेज द्वारा १८०७ में किए गए सर्वेक्षण के आधार पर बने उपर्युक्त नक्शे में वह जलधाराएं दिखाई गई हैं, जो दिल्ली की [[यमुना]] में मिलती थीं। एक तिलपत की पहाड़ियों में दक्षिण से उत्तर की ओर बहती थी, तो दूसरी हौजखास में अनेक सहायक धाराओं को समेटते हुए पूर्वाभिमुख बहती बारापुला के स्थान पर निजामुद्दीन के ऊपरी यमुना प्रवाह में जाकर मिलती थी। एक तीसरी और इनसे बड़ी धारा जिसे साहिबी नदी (पूर्व नाम रोहिणी) कहते थे। दक्षिण-पश्चिम से निकल कर रिज के उत्तर में यमुना में मिलती थी। ऐसा लगता है कि विवर्तनिक हलचल के कारण इसके बहाव का निचाई वाला भूभाग कुछ ऊँचा हो गया, जिससे इसका यमुना में गिरना रूक गया।<ref name="इंडिया वाटर पोर्टल"/> पिछले मार्ग से इसका ज्यादा पानी नजफगढ़ झील में जाने लगा। कोई ७० वर्ष पहले तक इस झील का आकार २२० वर्ग किलोमीटर होता था। अंग्रेजों ने साहिबी नदी की गाद निकालकर तल सफ़ाई करके नाला [[नजफगढ़]] का नाम दिया और इसे यमुना में मिला दिया। यही जलधाराएं और यमुना-दिल्ली में अरावली की श्रृंखलाओं के कटोरे में बसने वाली अनेक बस्तियों और राजधानियों को सदा पर्याप्त जल उपलब्ध कराती आईं थीं।
[[हिमालय]] के [[हिमनद|हिमनदों]] से निकलने के कारण यमुना सदानीरा रही है। परन्तु अन्य उपर्युक्त उपनदियाँ अब से २०० वर्ष पूर्व तक ही, जब तक कि अरावली की पर्वतमाला प्राकृतिक वन से ढकी रहीं तभी तक बारहमासी रह सकीं। खेद है कि दिल्ली में वनों का कटान खिलजियों के समय से ही शुरू हो गया था। इस्लाम स्वीकार न करने वाले स्थानीय विद्रोहियों और लूटपाट करने वाले मेवों का दमन करने के लिए ऐसा किया गया था। साथ ही बढ़ती शहरी आबादी के भार से भी वन प्रांत सिकुड़ा है। इसके चलते वनांचल में संरक्षित वर्षा जल का अवक्षय हुआ।<ref name="इंडिया वाटर पोर्टल"/>
ब्रिटिश काल में अंग्रेजी शासन के दौरान दिल्ली में सड़कों के निर्माण और बाढ़ अवरोधी बांध बनाने से पर्यावरण परिवर्तन के कारण ये जलधाराएं वर्ष में ग्रीष्म के समय सूख जाने लगीं। स्वतंत्रता के बाद के समय में बरसाती नालों, फुटपाथों और गलियों को सीमेंट से पक्का किया गया, इससे इन धाराओं को जल पहुँचाने वाले स्वाभाविक मार्ग अवरुद्ध हो गये।<ref name="इंडिया वाटर पोर्टल"/> ऐसी दशा में, जहां इन्हें रास्ता नहीं मिला, वहाँ वे मानसून में बरसाती नालों की तरह उफनने लगीं। विशद रूप में सीमेंट कंक्रीट के निर्माणों के कारण उन्हें भूमिगत जलभृत्तों या नदी में मिलाने का उपाय नहीं रह गया है। आज इन नदियों में नगर का अधिकतर मैला ही गिरता है।
=== जलवायु ===
[[चित्र:Indiagatelightening.jpg|thumb|200px|[[इंडिया गेट]] के निकट [[तड़ित]]। दिल्ली अपनी अधिकतम वर्षा [[जुलाई]]-[[अगस्त]] माह में [[मानसून]] से पाता है।]]
दिल्ली के महाद्वीपीय जलवायु में [[ग्रीष्म ऋतु]] एवं [[शीत ऋतु]] के तापमान में बहुत अन्तर होता है। ग्रीष्म ऋतु लंबी, अत्यधिक गर्म [[अप्रैल]] से मध्य-[[अक्टूबर]] तक चलती हैं। इस बीच में [[मानसून]] सहित [[वर्षा ऋतु]] भी आती है। ये गर्मी काफ़ी घातक भी हो सकती है, जिसने भूतकाल में कई जानें ली हैं। [[मार्च]] के आरम्भ से ही वायु की दिशा में परिवर्तन होने लगता है। ये उत्तर-पश्चिम से हट कर दक्षिण-पश्चिम दिशा में चलने लगती हैं। ये अपने साथ [[राजस्थान]] की गर्म लहर और धूल भी लेती चलती हैं। ये गर्मी का मुख्य अंग हैं। इन्हें ही [[लू]] कहते हैं। [[अप्रैल]] से [[जून]] के महीने अत्यधिक गर्म होते हैं, जिनमें उच्च ऑक्सीकरण क्षमता होती है। जून के अन्त तक नमी में वृद्धि होती है जो पूर्व मॉनसून वर्षा लाती हैं। इसके बाद जुलाई से यहां [[मॉनसून]] की हवाएं चलती हैं, जो अच्छी वर्षा लाती हैं। अक्टूबर-नवंबर में शिशिर काल रहता है, जो हल्की ठंड के संग आनन्द दायक होता है। नवंबर से [[शीत ऋतु]] का आरम्भ होता है, जो [[फरवरी]] के आरम्भ तक चलता है। शीतकाल में घना [[कोहरा]] भी पड़ता है, एवं शीतलहर चलती है, जो कि फिर वही तेज गर्मी की भांति घातक होती है।<ref name=Fog>{{cite news| publisher=[[द हिन्दू]]| url=http://www.hindu.com/2005/01/07/stories/2005010719480300.htm| title=फ़ॉग कन्टीन्यूज़ टू डुस्रप्ट फ़्लाइट, ट्रेन्स| date=7 जनवरी 2006| access-date=31 जुलाई 2009| archive-url=https://web.archive.org/web/20060304160457/http://www.hindu.com/2005/01/07/stories/2005010719480300.htm| archive-date=4 मार्च 2006| url-status=live}}</ref> यहां के तापमान में अत्यधिक अन्तर आता है जो −०.६ [[सेल्सियस|°से.]] (३०.९ [[फ़ैरनहाइट|°फ़ै.]]) से लेकर {{convert|48|C|F}} तक जाता है।<ref name=coldDelhi>{{cite news| publisher=[[हिन्दुस्तान टाइम्स]]| url=http://www.hindustantimes.com/news/181_1593200,000600010001.htm| title=ऍट ०.२°सेल्सियस, देल्ही गेट्स इट्स कोल्डेस्ट डे| date=8 जनवरी 2006| archiveurl=https://web.archive.org/web/20060111153439/http://www.hindustantimes.com/news/181_1593200,000600010001.htm| archivedate=11 जनवरी 2006| access-date=31 जुलाई 2009| url-status=live}}</ref> वार्षिक औसत तापमान २५°से. (७७ °फ़ै.); मासिक औसत तापमान १३°से. से लेकर ३२°से (५६°फ़ै. से लेकर ९०°फ़ै.) तक होता है।<ref name=weatherbase>{{cite web | publisher=Canty and Associates LLC | url=http://www.weatherbase.com/weather/weather.php3?s=28124&refer=&units=metric | title=Weatherbase entry for Delhi | accessdate=16 जनवरी 2007 | archive-url=https://web.archive.org/web/20110907174813/http://www.weatherbase.com/weather/weather.php3?s=28124&refer=&units=metric | archive-date=7 सितंबर 2011 | url-status=live }}</ref> औसत वार्षिक वर्षा लगभग ७१४ मि.मी. (२८.१ [[इंच]]) होती है, जिसमें से अधिकतम [[मानसून]] द्वारा [[जुलाई]]-[[अगस्त]] में होती है।<ref name=ecosurv1/> दिल्ली में मानसून के आगमन की औसत तिथि २९ जून होती है।<ref name=hindumonsoon>{{cite news |first= विनसन |last= कुरियन |title= मॉनसून रीचेज़ देल्ही टू डेज़ अहेड ऑफ शिड्यूल |url= http://www.thehindubusinessline.com/2005/06/28/stories/2005062800830200.htm |work= |publisher= द हिन्दू बिज़नेस लाइन |date= २८ जून २००५ |access-date= 12 मार्च 2009 |archive-url= https://web.archive.org/web/20070930225909/http://www.thehindubusinessline.com/2005/06/28/stories/2005062800830200.htm |archive-date= 30 सितंबर 2007 |url-status= live }}</ref>
{{दिल्ली मौसम}}
=== वायु प्रदूषण ===
{{main|दिल्ली में वायु प्रदूषण}}
दिल्ली की वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) आम तौर पर जनवरी से सितंबर के बीच मध्यम (१०१-२००) स्तर है, और फिर यह तीन महीनों में बहुत खराब (३०१-४००), गंभीर (४०१-५००) या यहां तक कि खतरनाक (५००+) के स्तर में भी हो जाती है।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/out-of-here-in-november-in-del-ncr-smog-break-is-becoming-the-new-annual-vacation/articleshow/104979257.cms|title=Out of here in November: In Delhi-NCR, smog break is becoming the new annual vacation}}</ref><ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/delhi-aqi-cp-smog-tower-down-due-to-dpcc-says-minister-gopal-rai-official-says-running-cost-high/articleshow/104978284.cms|title=Delhi AQI: CP Smog tower down due to DPCC, says minister Gopal Rai; official says running cost high}}</ref> अक्टूबर से दिसंबर के बीच, विभिन्न कारकों के कारण, स्टबल जलने, दिवाली में जलने वाले अग्नि पटाखे और ठंड के मौसम ।<ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/day-after-diwali-delhis-air-turns-hazardous/articleshow/66539912.cms|title=SC firecracker order: Delhi cops to act against violators - Times of India ►|website=The Times of India|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20181108173945/https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/day-after-diwali-delhis-air-turns-hazardous/articleshow/66539912.cms|archive-date=8 नवंबर 2018|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/delhi-breathed-easier-from-january-to-april/articleshow/59011204.cms|title=Delhi breathed easier from January to April - Times of India|website=The Times of India|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20181109070658/https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/delhi-breathed-easier-from-january-to-april/articleshow/59011204.cms|archive-date=9 नवंबर 2018|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/delhi-news/air-pollution-delhi-enjoys-cleanest-february-in-three-years/story-SANlmslHev8ifFgZbh3WXI.html|title=Air pollution: Delhi enjoys cleanest February in three years|date=27 फ़र॰ 2018|website=https://www.hindustantimes.com/|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20181109070735/https://www.hindustantimes.com/delhi-news/air-pollution-delhi-enjoys-cleanest-february-in-three-years/story-SANlmslHev8ifFgZbh3WXI.html|archive-date=9 नवंबर 2018|url-status=live}}</ref>
=== जनसांख्यिकी ===
{{IndiaCensusPop
|title= दिल्ली में जनसंख्या
|1901= 405819
|1911= 413851
|1921= 488452
|1931= 636246
|1941= 917939
|1951= 1744072
|1961= 2658612
|1971= 4065698
|1981= 6220406
|1991= 9420644
|2001= 13782976
|estimate=
|estyear=
|estref=
|footnote= source: [http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/Ecosur2001-02/PDF/chapter3.pdf delhiplanning.nic.in]<br />
† 1951 में (1947 के भारत के विभाजन के बाद) बड़े पैमाने पर प्रवासन के कारण<br/> जनसंख्या में विशाल वृद्धि हुई। (ह्यूज पॉप्युलेशन राइज़ इन १९५१ ड्यू टू लार्ज <br/> स्केल इमिग्रेशन आफ्टर [[भारत का विभाजन|पार्टीशन ऑफ इंडिया]] इन १९४७).
}}
[[१९०१]] में ४ लाख की जनसंख्या के साथ दिल्ली एक छोटा नगर था। १९११ में नई दिल्ली का [[ब्रिटिश भारत]] की राजधानी बनने के साथ दिल्ली की जनसंख्या बढ़ने लगी। भारत के विभाजन के समय [[पाकिस्तान]] से एक बहुत बड़ी संख्या में लोग आकर दिल्ली में बसने लगे। यह प्रवासन विभाजन के बाद भी चलता रहा। वार्षिक ३.८५% की वृद्धि के साथ [[२००१]] में दिल्ली की जनसंख्या १ करोड़ ३८ लाख पहुँच चुकी है।<ref name=census01del>{{cite web
|url=http://www.censusindia.gov.in/
|archiveurl=https://web.archive.org/web/20070811095710/http://www.censusindia.net/profiles/del.html
|title=Provisional Population Totals: Delhi
|work=Provisional Population Totals : India . Census of India 2001, Paper 1 of 2001
|publisher=Office of the Registrar General, भारत
|access-date=14 मार्च 2009
|archive-date=11 अगस्त 2007
|url-status=live
}}</ref> १९९१ से २००१ के दशक में जनसंख्या की वृद्धि की दर ४७.०२% थी। दिल्ली में जनसख्या का घनत्व प्रति किलोमीटर ९,२९४ व्यक्ति तथा लिंग अनुपात ८२१ महिलाओं एवं १००० पुरूषों का है। यहाँ साक्षरता का प्रतिशत ८१.८२% है।
{{-}}
== प्रशासन और जनसांख्यिकी ==
{{See|भारत के राज्यों और संघ क्षेत्रों की राजधानियाँ}}
{{मुख्य|दिल्ली के जिले और उपमंडल }}
[[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली]] कुल नौ ज़िलों में बँटा हुआ है। हरेक जिले का एक उपायुक्त नियुक्त है और जिले के तीन उपजिले हैं। प्रत्येक उप जिले का एक उप जिलाधीश नियुक्त है। सभी उपायुक्त मंडलीय अधिकारी के अधीन होते हैं। दिल्ली का जिला प्रशासन सभी प्रकार की राज्य एवं केन्द्रीय नीतियों का प्रवर्तन विभाग होता है। यही विभिन्न अन्य सरकारी कार्यकलापों पर आधिकारिक नियंत्रण रखता है। निम्न लिखित दिल्ली के जिलों और उपजिलों की सूची है:-
[[File:Delhi districts hi.svg|thumb|300x300px|दिल्ली के जिले]]
;[[मध्य दिल्ली जिला]]
{{*}}[[दरिया गंज]]{{*}}[[पहाड़ गंज]]{{*}}[[करौल बाग]]
;[[उत्तर दिल्ली जिला]]
{{*}}[[सदर बाजार, दिल्ली]] {{*}}[[कोतवाली, दिल्ली]]{{*}}[[सब्जी मंडी]]
;[[दक्षिण दिल्ली जिला]]
{{*}}[[कालकाजी]]{{*}}[[डिफेन्स कालोनी]]{{*}}[[हौज खास]]
;[[पूर्वी दिल्ली जिला]]
{{*}}[[प्रीत विहार]]{{*}}[[लक्ष्मी नगर]]{{*}}[[वसुंधरा एंक्लेव]]{{*}}[[मयूर विहार]]
;[[शाहदरा (दिल्ली)]]
{{*}}[[गाँधी नगर, दिल्ली]]{{*}}[[शाहदरा]]{{*}}[[बिहारी कालोनी]]{{*}}[[विवेक विहार]]{{*}}[[दिलशाद गार्डन]]
;[[उत्तर पूर्वी दिल्ली जिला]]
{{*}}[[सीलमपुर]]{{*}}[[करावल नगर]]{{*}}[[सीमा पुरी]]{{*}}[[भजनपुरा]]
;[[दक्षिण पश्चिम दिल्ली जिला]]
{{*}}[[वसंत विहार]]{{*}}[[नजफगढ़]]{{*}}[[दिल्ली छावनी]]
;[[नई दिल्ली जिला]]
{{*}}[[कनाट प्लेस, नई दिल्ली|कनाट प्लेस]]{{*}}[[संसद मार्ग]]{{*}}[[चाणक्य पुरी]]
;[[उत्तर पश्चिम दिल्ली जिला]]
{{*}}[[सरस्वती विहार]]{{*}}[[नरेला]]{{*}}[[मॉडल टाउन, दिल्ली|मॉडल टाउन]]
;[[पश्चिम दिल्ली जिला]]
{{*}}[[पटेल नगर]]{{*}}[[राजौरी गार्डन]]{{*}}[[पंजाबी बाग]]
=== जनसांख्यिकी ===
{{IndiaCensusPop
|title= दिल्ली में जनसंख्या
|1901= 405819
|1911= 413851
|1921= 488452
|1931= 636246
|1941= 917939
|1951= 1744072
|1961= 2658612
|1971= 4065698
|1981= 6220406
|1991= 9420644
|2001= 13782976
|estimate=
|estyear=
|estref=
|footnote= source: [http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/Ecosur2001-02/PDF/chapter3.pdf delhiplanning.nic.in]<br />
† 1951 में (1947 के भारत के विभाजन के बाद) बड़े पैमाने पर प्रवासन के कारण<br/> जनसंख्या में विशाल वृद्धि हुई। (ह्यूज पॉप्युलेशन राइज़ इन १९५१ ड्यू टू लार्ज <br/> स्केल इमिग्रेशन आफ्टर [[भारत का विभाजन|पार्टीशन ऑफ इंडिया]] इन १९४७).
}}
[[१९०१]] में ४ लाख की जनसंख्या के साथ दिल्ली एक छोटा नगर था। १९११ में [[ब्रिटिश भारत]] की राजधानी बनने के साथ इसकी जनसंख्या बढ़ने लगी। भारत के विभाजन के समय [[पाकिस्तान]] से एक बहुत बड़ी संख्या में लोग आकर दिल्ली में बसने लगे। यह प्रवासन विभाजन के बाद भी चलता रहा। वार्षिक ३.८५% की वृद्धि के साथ [[२००१]] में दिल्ली की जनसंख्या १ करोड़ ३८ लाख पहुँच चुकी है।<ref name=census01del/> १९९१ से २००१ के दशक में जनसंख्या की वृद्धि की दर ४७.०२% थी। दिल्ली में जनसंख्या का घनत्व प्रति किलोमीटर ९,२९४ व्यक्ति तथा लिंग अनुपात ८२१ महिलाओं एवं १००० पुरूषों का है। यहाँ साक्षरता का प्रतिशत ८१.८२% है।
{{-}}
== दर्शनीय स्थल ==
{{main|दिल्ली के दर्शनीय स्थल}}
[[चित्र:Akshardham_Delhi.jpg|right|thumb|दिल्ली का [[अक्षरधाम मंदिर, दिल्ली|अक्षरधाम मंदिर]] विश्व में सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर परिसर है।<ref>{{cite web |url=http://timesofindia.indiatimes.com/Akshardham_temple_makes_it_to_Guinness_Book/articleshow/2651500.cms |title=अक्षरधाम मंदिर [[गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स]] में - [[टाइम्स ऑफ इंडिया]] |publisher=Timesofindia.indiatimes.com |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090111093300/http://timesofindia.indiatimes.com/Akshardham_temple_makes_it_to_Guinness_Book/articleshow/2651500.cms |archive-date=11 जनवरी 2009 |url-status=live }}</ref>]]
[[चित्र:DelhiMetro.jpg|thumb|दिल्ली मेट्रो - २००४]]
दिल्ली भारत का एक पर्यटन का मुख्य केन्द्र भी है। भारत की राजधानी नई दिल्ली का इसमें होने के कारण भारत सरकार के अनेक कार्यालय, [[राष्ट्रपति भवन]], [[संसद भवन]], [[केन्द्रीय सचिवालय]] आदि अनेक आधुनिक स्थापत्य के नमूने तो यहाँ देखे ही जा सकते हैं; प्राचीन नगर होने के कारण इसका ऐतिहासिक महत्त्व भी है। पुरातात्विक दृष्टि से [[पुराना किला]], [[सफदरजंग का मकबरा]], [[जंतर मंतर, दिल्ली|जंतर मंतर]], [[क़ुतुब मीनार]] और [[लौह स्तंभ]] जैसे अनेक विश्व प्रसिद्ध निर्माण यहाँ पर आकर्षण का केन्द्र समझे जाते हैं। एक ओर [[हुमायूँ का मकबरा]], [[लाल किला, दिल्ली|लाल किला]] जैसे [[भारत में विश्व धरोहर स्थल|विश्व धरोहर]] मुगल शैली की तथा [[पुराना किला]], [[सफदरजंग का मकबरा]], [[लोधी मकबरे परिसर]] आदि ऐतिहासिक राजसी इमारत यहाँ है तो दूसरी ओर [[निज़ामुद्दीन औलिया]] की पारलौकिक [[निजामुद्दीन दरगाह|दरगाह]] भी। लगभग सभी धर्मों के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल यहाँ हैं जैसे [[बिरला मंदिर, दिल्ली|बिरला मंदिर]], [[छतरपुर मंदिर, दिल्ली|आद्या कात्यायिनी शक्तिपीठ]], [[बंगला साहब गुरुद्वारा]], [[बहाई मंदिर]], अक्षर धाम मंदिर, और [[जामा मस्जिद, दिल्ली|जामा मस्जिद]]
देश के शहीदों का स्मारक [[इंडिया गेट]], [[राजपथ]] पर इसी शहर में निर्मित किया गया है। भारत के [[भारत के प्रधान मंत्री|प्रधान मंत्रियों]] की [[राजघाट समाधि परिसर|समाधियाँ]] हैं, [[जंतर मंतर]] है, [[लाल किला]] है साथ ही अनेक प्रकार के [[दिल्ली के संग्रहालय|संग्रहालय]] और अनेक [[दिल्ली के बाजार|बाज़ार]] हैं, जैसे [[कनॉट प्लेस, दिल्ली|कनॉट प्लेस]], [[चाँदनी चौक, दिल्ली|चाँदनी चौक]] और बहुत से रमणीक उद्यान भी हैं, जैसे [[मुगल उद्यान, दिल्ली|मुगल उद्यान]], [[पंच इंद्रिय उद्यान, दिल्ली|गार्डन ऑफ फाइव सेंसिस]], [[तालकटोरा उद्यान, दिल्ली|तालकटोरा गार्डन]], [[लोधी उद्यान, दिल्ली|लोदी गार्डन]], [[वन्य प्राणी उद्यान, दिल्ली|चिड़ियाघर]], आदि, जो दिल्ली घूमने आने वालों का दिल लुभा लेते हैं।
== दिल्ली के शिक्षा संस्थान ==
{{See|दिल्ली विश्वविद्यालय}}
{{main|दिल्ली के शिक्षा संस्थानों की सूची}}
[[चित्र:IITDelhiMath.jpg|thumb|left|[[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान]], दिल्ली; इस संस्थान को एशियावीक द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में चौथे सबसे अच्छे संस्थान का दर्जा दिया गया।<ref>{{cite web |url=http://www-cgi.cnn.com/ASIANOW/asiaweek/features/universities2000/scitech/sci.overall.html |title=Asiaweek.com | Asia's Best Universities 2000 | Overall Ranking |publisher=Cgi.cnn.com |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://www.webcitation.org/684WxRCIT?url=http://www-cgi.cnn.com/ASIANOW/asiaweek/features/universities2000/scitech/sci.overall.html |archive-date=31 मई 2012 |url-status=dead }}</ref>]]
[[File:AIIMS central lawn.jpg|thumb|संगत रूप से यह भारत का सर्वश्रेष्ठ आयुर्विज्ञान संस्थान है,<ref>{{cite web|url=http://indiatoday.intoday.in/index.php?option=com_content&task=view&issueid=27&id=8684§ionid=30&Itemid=1 |title=इंडिया टुडे - India’s most widely read magazine |publisher=Indiatoday.digitaltoday.in |author=Malini Bhupta |date= |accessdate=3 नवंबर 2008}}</ref> [[अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान]] आयुर्विज्ञान शोध और चिकित्सा के क्षेत्र में एक वैश्विक संस्थान है।<ref>{{cite web |url=http://www.newsweek.com/id/45114 |title=Medical Meccas: An Oasis for India's Poorest | Newsweek Health for Life | Newsweek.com |publisher=Newsweek.com |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090807031539/http://www.newsweek.com/id/45114 |archive-date=7 अगस्त 2009 |url-status=live }}</ref>]]
दिल्ली भारत में शिक्षा का एक महत्त्वपूर्ण केन्द्र है। दिल्ली के विकास के साथ-साथ यहाँ शिक्षा का भी तेजी से विकास हुआ है। प्राथमिक शिक्षा तो प्रायः सार्वजनिक है। एक बहुत बड़े अनुपात में बच्चे माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्त्री शिक्षा का विकास हर स्तर पर पुरुषों से अधिक हुआ है। यहाँ की शिक्षा संस्थाओं में विद्यार्थी भारत के सभी भागों से आते हैं। यहाँ कई सरकारी एवं निजी शिक्षा संस्थान हैं जो [[कला]], [[वाणिज्य]], [[विज्ञान]], प्रोद्योगिकी, आयुर्विज्ञान, विधि और प्रबंधन में उच्च स्तर की शिक्षा देने के लिए विख्यात हैं। उच्च शिक्षा के संस्थानों सबसे महत्त्वपूर्ण है जिसके अन्तर्गत कई कॉलेज एवं शोध संस्थान हैं। [[अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान]], [[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान]], [[जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय]], [[इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय]], [[गुरु गोबिन्द सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय]], [[टेरी - ऊर्जा और संसाधन संस्थान]] एवं [[जामिया मिलिया इस्लामिया]] उच्च शिक्षा के प्रमुख संस्थान हैं।
== संस्कृति ==
{{main|भारतीय संस्कृति}}
[[चित्र:Traditional pottery in Dilli Haat.jpg|thumb|[[दिल्ली हाट]] में प्रदर्शित परंपरागत पॉटरी उत्पाद।]]
दिल्ली शहर में बने स्मारकों से विदित होता है कि यहां की संस्कृति प्राच्य ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि से प्रभावित है। [[भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण]] विभाग ने दिल्ली शहर में लगभग १२०० धरोहर स्थल घोषित किए हैं, जो कि विश्व में किसी भी शहर से कहीं अधिक है।<ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/Promote-lesser-known-monuments-of-Delhi/articleshow/4194014.cms|title='Promote lesser-known monuments of Delhi' - Times of India|website=The Times of India|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190302024609/https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/Promote-lesser-known-monuments-of-Delhi/articleshow/4194014.cms|archive-date=2 मार्च 2019|url-status=live}}</ref> और इनमें से १७५ स्थल राष्ट्रीय धरोहर स्थल घोषित किए हैं।<ref name=asimonuments>{{cite web
|url=http://asi.nic.in/asi_monu_alphalist_delhi.asp
|title=Delhi Circle (N.C.T. of Delhi)
|accessdate=27 दिसंबर 2006
|work=List of Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains of National Importance
|publisher=[[भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण]]
|archive-url=https://web.archive.org/web/20070514061700/http://asi.nic.in/asi_monu_alphalist_delhi.asp
|archive-date=14 मई 2007
|url-status=live
}}</ref> पुराना शहर वह स्थान है, जहां मुगलों और तुर्क शासकों ने स्थापत्य के कई नमूने खड़े किए, जैसे [[जामा मस्जिद, दिल्ली|जामा मस्जिद]] (भारत की सबसे बड़ी मस्जिद)<ref name=Jama>{{cite web| publisher=Terra Galleria| url=http://www.terragalleria.com/asia/india/delhi/picture.indi38660.html| title=Jama Masjid, भारत's largest mosque| accessdate=13 मार्च 2009| archive-url=https://web.archive.org/web/20090304032037/http://www.terragalleria.com/asia/india/delhi/picture.indi38660.html| archive-date=4 मार्च 2009| url-status=dead}}</ref> और [[लाल किला, दिल्ली|लाल किला]]। दिल्ली में फिल्हाल तीन [[विश्व धरोहर स्थल]] हैं – [[लाल किला, दिल्ली|लाल किला]], [[कुतुब मीनार]] और [[हुमायुं का मकबरा]]।<ref name=whsite>{{cite web|url=http://whc.unesco.org/en/statesparties/in|title=Properties inscribed on the World Heritage List: India|publisher=युनेस्को World Heritage Centre|access-date=14 अप्रैल 2009|archive-url=https://www.webcitation.org/684WrF3rd?url=http://whc.unesco.org/en/statesparties/in|archive-date=31 मई 2012|url-status=live}}</ref> अन्य स्मारकों में [[इंडिया गेट]], [[जंतर मंतर, दिल्ली|जंतर मंतर]] (१८वीं सदी की खगोलशास्त्रीय वेधशाला), [[पुराना किला]] (१६वीं सदी का किला). [[लक्ष्मीनारायण मंदिर, दिल्ली|बिरला मंदिर]], [[अक्षरधाम मंदिर, दिल्ली|अक्षरधाम मंदिर]] और [[कमल मंदिर]] आधुनिक स्थापत्यकला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। [[राज घाट]] में राष्ट्रपिता [[महात्मा गाँधी]] तथा निकट ही अन्य बड़े व्यक्तियों की समाधियां हैं। [[नई दिल्ली]] में बहुत से सरकारी कार्यालय, सरकारी आवास, तथा ब्रिटिश काल के अवशेष और इमारतें हैं। कुछ अत्यंत महत्त्वपूर्ण इमारतों में [[राष्ट्रपति भवन]], [[केन्द्रीय सचिवालय]], [[राजपथ]], [[संसद भवन]] और [[विजय चौक]] आते हैं। [[सफदरजंग का मकबरा]] और [[हुमायुं का मकबरा]] मुगल बागों के चार बाग शैली का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
दिल्ली के राजधानी [[नई दिल्ली]] से जुड़ाव और भूगोलीय निकटता ने यहाँ की राष्ट्रीय घटनाओं और अवसरों के महत्त्व को कई गुणा बढ़ा दिया है। यहाँ कई राष्ट्रीय त्यौहार जैसे [[गणतंत्र दिवस]], [[स्वतंत्रता दिवस]] और [[गाँधी जयंती]] खूब हर्षोल्लास से मनाए जाते हैं। भारत के स्वतंत्रता दिवस पर यहाँ के प्रधान मंत्री लाल किले से यहाँ की जनता को संबोधित करते हैं। बहुत से दिल्लीवासी इस दिन को पतंगें उड़ाकर मनाते हैं। इस दिन पतंगों को स्वतंत्रता का प्रतीक माना जाता है।<ref name=freedom>{{cite web| work=123independenceday.com| publisher=Compare Infobase Limited| url=http://123independenceday.com/indian/gift_of/freedom/| title=Independence Day| accessdate=4 जनवरी 2007| archive-url=https://www.webcitation.org/684WsTS3d?url=http://123independenceday.com/indian/gift_of/freedom/| archive-date=31 मई 2012| url-status=dead}}</ref> गणतंत्र दिवस की परेड एक वृहत जुलूस होता है, जिसमें भारत की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक झांकी का प्रदर्शन होता है।<ref name=repmil>{{cite web|url=http://www.thehindubusinessline.com/2002/01/28/stories/2002012800060800.htm|title=R-Day parade, an anachronism?|accessdate=13 जनवरी 2007|last=Ray Choudhury|first=Ray Choudhury|date=28 जनवरी 2002|publisher=द हिन्दू बिज़नस लाइन|archive-url=https://web.archive.org/web/20070304155931/http://www.thehindubusinessline.com/2002/01/28/stories/2002012800060800.htm|archive-date=4 मार्च 2007|url-status=live}}</ref><ref name=repcul>{{cite web|url=http://www.india-tourism.org/delhi-travel/delhi-fairs-festivals.html|archiveurl=https://web.archive.org/web/20070319223442/http://www.india-tourism.org/delhi-travel/delhi-fairs-festivals.html|title=Fairs & Festivals of Delhइ|work=Delhi Travel|publisher=India Tourism.org|access-date=14 अप्रैल 2009|archive-date=19 मार्च 2007|url-status=dead}}</ref>
यहाँ के धार्मिक त्यौहारों में [[दीवाली]], [[होली]], [[दशहरा]], [[दुर्गा पूजा]], [[महावीर जयंती]], [[गुरु परब]], [[क्रिसमस]], [[महाशिवरात्रि]], [[ईद उल फितर]], [[बुद्ध जयंती]] [[लोहड़ी]] [[पोंगल]] और [[ओड़म]] जैसे पर्व हैं।<ref name=repcul/> कुतुब फेस्टिवल में संगीतकारों और नर्तकों का अखिल भारतीय संगम होता है, जो कुछ रातों को जगमगा देता है। यह [[कुतुब मीनार]] के पार्श्व में आयोजित होता है।<ref name=qutubfest>{{cite news |first=Madhur |last=Tankha |title=It's Sufi and rock at Qutub Fest |url=http://www.hindu.com/2005/12/15/stories/2005121503090200.htm |work=नई दिल्ली |publisher=द हिन्दू |date=15 दिसम्बर 2005 |accessdate=13 जनवरी 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20060513084038/http://www.hindu.com/2005/12/15/stories/2005121503090200.htm |archive-date=13 मई 2006 |url-status=live }}</ref> अन्य कई पर्व भी यहाँ होते हैं: जैसे [[आम महोत्सव]], पतंगबाजी महोत्सव, [[वसंत पंचमी]] जो वार्षिक होते हैं। [[एशिया]] की सबसे बड़ी ऑटो प्रदर्शनी: [[ऑटो एक्स्पो]]<ref name="autogenerated2" /> दिल्ली में द्विवार्षिक आयोजित होती है। [[प्रगति मैदान]] में वार्षिक [[पुस्तक मेला]] आयोजित होता है। यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा पुस्तक मेला है, जिसमें विश्व के २३ राष्ट्र भाग लेते हैं। दिल्ली को उसकी उच्च पढ़ाकू क्षमता के कारण कभी कभी विश्व की पुस्तक राजधानी भी कहा जाता है।<ref>{{cite web |url=http://www.business-standard.com/india/storypage.php?autono=313090 |title=Sunil Sethi: Why Delhi is India`s Book Capital |publisher=Business-standard.com |author=Sunil Sethi / नई दिल्ली फ़रवरी 09, 2008 |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090101102116/http://www.business-standard.com/india/storypage.php?autono=313090 |archive-date=1 जनवरी 2009 |url-status=live }}</ref>
[[चित्र:AutoExpoIndica.jpg|thumb|[[ऑटो एक्स्पो]], एशिया का सबसे बड़ा ऑटो प्रदर्शनी अवसर है।<ref name="autogenerated2">{{cite web |url=http://www.hindu.com/2008/01/09/stories/2008010953071500.htm |title=द हिन्दू : Front Page : Asia’s largest auto carnival begins in Delhi tomorrow |publisher=Thehindu.com |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://www.webcitation.org/684WtqZHy?url=http://www.hindu.com/2008/01/09/stories/2008010953071500.htm |archive-date=31 मई 2012 |url-status=live }}</ref>, जो कि [[प्रगति मैदान]] में द्विवार्षिक आयोजित होता है।]]
[[पंजाबी खाना|पंजाबी]] और [[मुगलई खाना|मुगलई]] खान पान जैसे [[कबाब]] और [[बिरयानी]] दिल्ली के कई भागों में प्रसिद्ध हैं।<ref>[http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/2060348.cms Delhi to lead way in street food] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090305151610/http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/2060348.cms |date=5 मार्च 2009 }} Times of India</ref><ref name="इंडिया टुडे Food">[http://conclave.digitaltoday.in/conclave2008/index.php?issueid=32&id=2427&option=com_content&task=view§ionid=8 Discovering the spice route to Delhi] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20081231115904/http://conclave.digitaltoday.in/conclave2008/index.php?issueid=32&id=2427&option=com_content&task=view§ionid=8 |date=31 दिसंबर 2008 }} इंडिया टुडे</ref> दिल्ली की अत्यधिक मिश्रित जनसंख्या के कारण भारत के विभिन्न भागों के [[भारतीय खाना|खानपान]] की झलक मिलती है, जैसे [[राजस्थानी खाना|राजस्थानी]], [[महाराष्ट्रियन खाना|महाराष्ट्रियन]], [[बंगाली खाना|बंगाली]], [[हैदराबादी खाना|हैदराबादी]] खाना और [[दक्षिण भारतीय खाना|दक्षिण भारतीय खाने के आइटम]] जैसे [[इडली]], [[सांभर]], [[दोसा]] इत्यादि बहुतायत में मिल जाते हैं। इसके साथ ही स्थानीय खासियत, जैसे [[दिल्ली की चाट|चाट]] इत्यादि भी खूब मिलती है, जिसे लोग चटकारे लगा लगा कर खाते हैं। इनके अलावा यहाँ [[महाद्वीपीय खाना]] जैसे इटैलियन और चाइनीज़ खाना भी बहुतायत में उपलब्ध है।
इतिहास में दिल्ली उत्तर भारत का एक महत्त्वपूर्ण व्यापार केन्द्र भी रहा है। पुरानी दिल्ली ने अभी भी अपने गलियों में फैले बाज़ारों और पुरानी मुगल धरोहरों में इन व्यापारिक क्षमताओं का इतिहास छुपा कर रखा है।<ref name=slt>{{cite news |first=Sarina |last=Singh |title=Delhi: Old, new, sleek and rambunctious too |url=http://www.sltrib.com/travel/ci_4853701 |work=Travels with Lonely Planet: India |publisher=The Salt Lake Tribune |date=16 दिसम्बर 2006 |access-date=14 अप्रैल 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071010050635/http://www.sltrib.com/travel/ci_4853701 |archive-date=10 अक्तूबर 2007 |url-status=dead }}</ref> पुराने शहर के बाजारों में हर एक प्रकार का सामान मिलेगा। तेल में डूबे चटपटे आम, नींबू, आदि के अचारों से लेकर मंहगे हीरे जवाहरात, जेवर तक; दुल्हन के अलंकार, कपड़ों के थान, तैयार कपड़े, मसाले, मिठाइयाँ और क्या नहीं?<ref name=slt/> कई पुरानी हवेलियाँ इस शहर में अभी भी शोभा पा रही हैं और इतिहास को संजोए शान से खड़ी है।<ref name=jacob>{{cite journal |last = Jacob |first = Satish |year = 2002 |month = जुलाई |title = Wither, the walled city |journal = Seminar (web edition) |issue = 515 |url = http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20satish%20jacob.htm |access-date = 14 अप्रैल 2009 |archive-url = https://web.archive.org/web/20061212133015/http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20satish%20jacob.htm |archive-date = 12 दिसंबर 2006 |url-status = dead }}</ref> [[चांदनी चौक, दिल्ली|चांदनी चौक]], जो कि यहाँ का तीन शताब्दियों से भी पुराना बाजार है, दिल्ली के जेवर, ज़री साड़ियों और मसालों के लिए प्रसिद्ध है।<ref name=Chandni>{{cite web| publisher=About Palace on Wheels| work=Delhi Tours| url=http://www.aboutpalaceonwheels.com/palace-on-wheels-destinations/shopping-in-delhi.html| title=Shopping in Delhi| accessdate=4 जनवरी 2007| archive-url=https://www.webcitation.org/684Ww5Av6?url=http://www.aboutpalaceonwheels.com/palace-on-wheels-destinations/shopping-in-delhi.html| archive-date=31 मई 2012| url-status=dead}}</ref> दिल्ली की प्रसिद्ध कलाओं में से कुछ हैं यहाँ के [[ज़रदोज़ी]] (सोने के तार का काम, जिसे ज़री भी कहा जाता है) और [[मीनाकारी]] (जिसमें पीतल के बर्तनों इत्यादि पर नक्काशी के बीच रोगन भरा जाता है। यहाँ की कलाओं के लिए बाजार हैं [[प्रगति मैदान, दिल्ली]], [[दिल्ली हाट]], [[हौज खास, दिल्ली]]- जहां विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प के और हठकरघों के कार्य के नमूने मिल सकते हैं। समय के साथ साथ दिल्ली ने देश भर की कलाओं को यहाँ स्थान दिया हैं। इस तरह यहाँ की कोई खास शैली ना होकर एक अद्भुत मिश्रण हो गया है।<ref name=menon>{{cite journal |last = Menon |first = Anjolie Ela |year = 2002 |month = जुलाई |title = The Age That Was |journal = Seminar (web edition) |issue = 515 |url = http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20anjolie%20ela%20menon.htm |access-date = 14 अप्रैल 2009 |archive-url = https://web.archive.org/web/20090916212407/http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20anjolie%20ela%20menon.htm |archive-date = 16 सितंबर 2009 |url-status = dead }}</ref><ref name=dayal>{{cite journal | last = Dayal | first = Ravi | year = 2002 | month = जुलाई | title = A Kayastha’s View | journal = Seminar (web edition) | issue = 515 | url = http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20ravi%20dayal.htm | access-date = 14 अप्रैल 2009 | archive-url = https://web.archive.org/web/20090916211837/http://www.india-seminar.com/2002/515/515%20ravi%20dayal.htm | archive-date = 16 सितंबर 2009 | url-status = dead }}</ref>
दिल्ली के निम्न भगिनी शहर हैं:<ref>{{cite web|url=http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/15278423.cms|publisher=India Times|title=Delhi to London, it’s a sister act|accessdate=18 फरवरी 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20170204131607/http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/15278423.cms|archive-date=4 फ़रवरी 2017|url-status=live}}</ref>
* [[शिकागो]], {{USA}}
* [[कुआला लंपूर]], {{MAS}}
* [[लंदन]], {{GBR}}
* [[मॉस्को]], {{RUS}}
* [[सिओल]], {{KOR}}
* [[वॉशिंगटन]], {{USA}}
* [[लॉस एंजिल्स]], {{USA}}
* [[सिडनी]], {{AUS}}
* [[पेरिस]], {{FRA}}
== स्थापत्य ==
[[चित्र:Qutab.jpg|thumb|left|{{convert|72.5|m|ft|abbr=on|0}} ऊंची [[कुतुब मीनार]], विश्व की सबसे ऊंची मुक्त-खड़ी [[मीनार]] है।<ref name="Qutab">{{cite web|url=http://portal.unesco.org/en/ev.php-URL_ID=6643&URL_DO=DO_TOPIC&URL_SECTION=201.html|title=Under threat: The Magnificent Minaret of Jam|work=The New Courier No 1|month=अक्टूबर|year=2002|publisher=युनेस्को|accessdate=3 मई 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20091111215826/http://portal.unesco.org/en/ev.php-URL_ID%3D6643%26URL_DO%3DDO_TOPIC%26URL_SECTION%3D201.html|archive-date=11 नवंबर 2009|url-status=live}}</ref>]]
इस ऐतिहासिक नगर में एक ओर प्राचीन, अतिप्राचीन काल के असंख्य खंडहर मिलते हैं, तो दूसरी ओर अवार्चीन काल के योजनानुसार निर्मित उपनगर भी। इसमें विश्व के किसी भी नवीनतम नगर से होड़ लेने की क्षमता है। प्राचीनकाल के कितने ही नगर नष्ट हो गए पर दिल्ली अपनी भौगिलिक स्थिति और समयानुसार परिवर्तनशीलता के कारण आज भी समृद्धशाली नगर ही नहीं महानगर है। [[भारत सरकार]] के संस्कृति मंत्रालय के [[भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग]] ने दिल्ली में १२०० इमारतों को ऐतिहासिक महत्त्व का तथा १७५ को राष्ट्रीय सांस्कृतिक स्मारक घोषित किया है।
[[चित्र:Humayun's tomb outside.jpg|thumb|right|[[१५६०]] में बना, [[हुमायुं का मकबरा]] [[मुगल स्थापत्यकला|मुगल मकबरा परिसर]] का प्रथम उदाहरण है।<ref>{{cite book |last=Petersen |first=Andrew |title=Dictionary of Islamic Architecture |url=http://books.google.com/books?id=gVQj7bW0W9MC&pg=PA204&dq=humayun%27s+tomb+architecture+mughal&lr=&sig=ACfU3U0LcITGtYPq59VMowHRAL5yKKa_eg |publisher=Routledge |location= |language= |isbn=0415213320 |pages= |chapter= |chapterurl= |year=1999 |access-date=17 मई 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110920083610/http://books.google.com/books?id=gVQj7bW0W9MC&pg=PA204&dq=humayun%27s+tomb+architecture+mughal&lr=&sig=ACfU3U0LcITGtYPq59VMowHRAL5yKKa_eg |archive-date=20 सितंबर 2011 |url-status=live }}</ref>]]
नई दिल्ली में [[महरौली]] में गुप्तकाल में निर्मित लौहस्तंभ है। यह प्रौद्योगिकी का एक अनुठा उदाहरण है। ईसा की चौथी शताब्दी में जब इसका निर्माण हुआ तब से आज तक इस पर जंग नहीं लगा। दिल्ली में इंडो-इस्लामी स्थापत्य का विकाश विशेष रूप से दृष्टगत होता है। दिल्ली के कुतुब परिसर में सबसे भव्य स्थापत्य कुतुब मिनार है। इस मिनार को स़ूफी संत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की स्मृति में बनवाया गया था। तुगलक काल में निर्मित गयासुद्दीन का मकबरा स्थापत्य में एक नई प्रवृत्ति का सूचक है। यह अष्टभुजाकार है। दिल्ली में हुमायूँ का मकबरा मुगल स्थापत्य कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। शाहजहाँ का शासनकाल स्थापत्य कला के लिए याद किया जाता है।
{{-}}
== अर्थ व्यवस्था ==
{{main|भारत की अर्थव्यवस्था}}
[[मुंबई]] के बाद दिल्ली भारत के सबसे बड़े व्यापारिक महानगरो में से है। देश में प्रति व्यक्ति औसत आय की दृष्टि से भी यह देश के सबसे सम्पन्न नगरो में गिना जाता है। [[१९९०]] के बाद से दिल्ली विदेशी निवशेकों का पसन्दीदा स्थान बना है। हाल में कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों जैसे [[पेप्सी]], गैप, इत्यादि ने दिल्ली और उसके आस-पास के क्षेत्रों में अपना मुख्यालय खोला है। क्रिसमस के दिन वर्ष [[२००२]] में दिल्ली के महानगरी क्षेत्रों में [[दिल्ली मेट्रो रेल]] का शुभारम्भ हुआ जिसे वर्ष २०२२ में पूरा किये जाने का अनुमान है।
हवाई यातायात द्वारा दिल्ली [[इन्दिरा गांधी अन्तरराष्ट्रीय विमानस्थल]] से पूरे विश्व से जुड़ा है।.
{{-}}
== यातायात सुविधाएं ==
{{main|दिल्ली में यातायात}}
[[चित्र:Signaturebridgenedelhi.png|thumb|[[सिग्नेचर ब्रिज]] यमुना नदी पर, दिल्ली में सबसे ऊंची संरचना है<ref>{{cite news|title= कुतुबमिनार से भी ऊंचे सिग्नेचर ब्रिज पर चढ़ते ही होने लगेगा अलग एहसास, पलक झपकते मिटेंगी दूरियां|url= https://www.amarujala.com/india-news/inaugaration-of-signature-bridge-of-delhi-see-photos|date= [[११ दिसम्बर]], [[२००२]]|access-date= 4 नवंबर 2018|archive-url= https://web.archive.org/web/20181104171442/https://www.amarujala.com/india-news/inaugaration-of-signature-bridge-of-delhi-see-photos|archive-date= 4 नवंबर 2018|url-status= live}}</ref>]]
[[चित्र:Delhi Metro.jpeg|thumb|[[दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन]] द्वारा संचालित मेट्रो रेल सेवा औसत ८,३७,००० सवारियां प्रतिदिन ले जाती है।<ref>{{cite web|url=http://timesofindia.indiatimes.com/news/city/delhi/Delhi-Metro-records-highest-ridership/articleshow/4860435.cms|title=Delhi Metro records highest ridership|publisher=[[द टाईम्स ऑफ़ इंडिया]]|date=5 अगस्त 2009|access-date=3 नवंबर 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20090809165516/http://timesofindia.indiatimes.com/news/city/delhi/Delhi-Metro-records-highest-ridership/articleshow/4860435.cms|archive-date=9 अगस्त 2009|url-status=live}}</ref>]]
[[चित्र:Delhi airport terminal 3 (cropped).jpg|thumb|इंदिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा]]
[[चित्र:Raj Path.jpg|thumb|[[रायसीना की पहाड़ियाँ]] में [[राजपथ]]। दिल्ली की कुल गाड़ियों का ३०% निजी वाहन हैं। दिल्ली में औसत ९६३ नए वाहन प्रतिदिन पंजीकृत होते हैं।<ref>{{cite web |url=http://www.iht.com/articles/2007/11/06/asia/delhi.php |title=Study finds air quality in Delhi has worsened dramatically - International Herald Tribune |publisher=Iht.com |author= |archiveurl=https://web.archive.org/web/20080706171906/http://www.iht.com/articles/2007/11/06/asia/delhi.php |archivedate=6 जुलाई 2008 |access-date=14 अप्रैल 2009 |url-status=dead }}</ref>]]
[[चित्र:নিউ দিল্লি রেলওয়ে স্টেশন.jpg|thumb|नई दिल्ली रेलवे स्टेशन]]
[[चित्र:Old Delhi Railway Station (DLI).jpg|thumb|दिल्ली जंक्शन रेलवे स्टेशन]]
दिल्ली के सार्वजनिक यातायात के साधन मुख्यतः बस, ऑटोरिक्शा और [[दिल्ली मेट्रो रेल|मेट्रो रेल]] सेवा हैं। दिल्ली की मुख्य यातायात आवश्यकता का ६०% बसें पूरा करती हैं।<ref name=ecosurv12>{{cite web|url=http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/ES%202005-06/Chpt/12.pdf|title=Chapter 12: Transport|accessdate=21 दिसंबर 2006|format=PDF|work=Economic Survey of Delhi, 2005–2006|publisher=Planning Department, Government of National Capital Territory of Delhi|pages=pp130–146|archive-url=https://web.archive.org/web/20070116044119/http://delhiplanning.nic.in/Economic%20Survey/ES%202005-06/Chpt/12.pdf|archive-date=16 जनवरी 2007|url-status=dead}}</ref> [[दिल्ली परिवहन निगम]] द्वारा संचालित सरकारी बस सेवा दिल्ली की प्रधान बस सेवा है। [[दिल्ली परिवहन निगम]] विश्व की सबसे बड़ी पर्यावरण सहयोगी बस-सेवा प्रदान करता है।<ref name=DTC>{{cite web|url=http://dtc.nic.in/ccharter.htm|title=Citizen Charter|accessdate=21 दिसंबर 2006|work=|publisher=Delhi Transport Corporation|archive-url=https://web.archive.org/web/20070110171420/http://dtc.nic.in/ccharter.htm|archive-date=10 जनवरी 2007|url-status=dead}}</ref> हाल ही में [[बस त्वरित पारगमन|बी आर टी]] कॉरिडोर की सेवा [[अंबेडकर नगर]] और [[दिल्ली गेट]] के बीच आरम्भ हुई है। जिसे तकनीकी खामियों के कारण तोड़ दिया है और अब सड़क को पुराने स्वरूप में बदल दिया गया है। [[ऑटो रिक्शा]] दिल्ली में यातायात का एक प्रभावी माध्यम है। ये ईंधन के रूप में [[कंप्रेस्ड नैचुरल गैस|सी एन जी]] का प्रयोग करते हैं, व इनका रंग हरा होता है। दिल्ली में वातानुकूलित टैक्सी सेवा भी उपलब्ध है जिनका किराया ७.५० से १५ रु/कि॰मी॰ तक है। दिल्ली की कुल वाहन संख्या का ३०% निजी वाहन हैं।<ref name=ecosurv12/> दिल्ली में १९२२.३२ कि॰मी॰ की लंबाई प्रति १०० कि॰मी॰२, के साथ भारत का सर्वाधिक सड़क घनत्व मिलता है।<ref name=ecosurv12/> दिल्ली भारत के पांच प्रमुख महानगरों से राष्ट्रीय राजमार्गों द्वारा जुड़ा है। ये राजमार्ग हैं: [[भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों की सूची|राष्ट्रीय राजमार्ग]] संख्या: १, २, ८, १० और २४। अभी कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने राष्ट्रीय राजमार्ग २४ जो निज़ामुद्दीन से मेरठ के लिए दिल्ली-मेरठ एक्स्प्रेस वे का उद्घाटन किया था वह ८ लेन का है जिसकी अधिकतम १०० किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से चल सकते हैं वो भी है। दिल्ली की सड़कों का अनुरक्षण [[दिल्ली नगर निगम]] (एम सी डी), दिल्ली छावनी बोर्ड, पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट (PWD) और [[दिल्ली विकास प्राधिकरण]] द्वारा किया जाता है।<ref name=roadauth>{{cite web|url=http://www.gisdevelopment.net/proceedings/mapindia/2006/transportation/mi06tran_200.htm|title=GIS Based Maintenance Management System (GMMS) For Major Roads Of Delhi|accessdate=14 जनवरी 2007|author=I.Prasada Rao|author2=Dr. P.K. Kanchan, Dr. P.K. Nanda|work=Map India 2006: Transportation|publisher=GISdevelopment.net|archive-url=https://web.archive.org/web/20060712102505/http://www.gisdevelopment.net/proceedings/mapindia/2006/transportation/mi06tran_200.htm|archive-date=12 जुलाई 2006|url-status=dead}}</ref> दिल्ली के उच्च जनसंख्या दर और उच्च अर्थ विकास दर ने दिल्ली पर यातायात की वृहत मांग का दबाव यहाँ की अवसंरचना पर बनाए रखा है। २००८ के अनुसार दिल्ली में ५५ लाख वाहन नगर निगम की सीमाओं के अंदर हैं। इस कारण दिल्ली विश्व का सबसे अधिक वाहनों वाला शहर है। साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ११२ लाख वाहन हैं।<ref>{{cite web |url=http://www.igovernment.in/site/traffic-snarl-snaps-42-cr-man-hour-from-delhi-ncr-workers/ |title=Traffic snarl snaps 42 Cr man-hour from Delhi, NCR workers at iGovernment |publisher=Igovernment.in |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080110092330/http://www.igovernment.in/site/traffic-snarl-snaps-42-cr-man-hour-from-delhi-ncr-workers/ |archive-date=10 जनवरी 2008 |url-status=dead }}</ref> सन १९८५ में दिल्ली में प्रत्येक १००० व्यक्ति पर ८५ कारें थीं।<ref>{{cite web |url=http://economictimes.indiatimes.com/Every_12th_Delhiite_owns_a_car/articleshow/2667484.cms |title=Every 12th Delhiite owns a car- Automobiles-Auto-News By Industry-News-दि इकॉनोमिक टाइम्स |publisher=Economictimes.indiatimes.com |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090111232915/http://economictimes.indiatimes.com/Every_12th_Delhiite_owns_a_car/articleshow/2667484.cms |archive-date=11 जनवरी 2009 |url-status=live }}</ref> दिल्ली के यातायात की मांगों को पूरा करने हेतु दिल्ली और केन्द्र सरकार ने एक मास रैपिड ट्रांज़िट सिस्टम का आरम्भ किया, जिसे दिल्ली मेट्रो कहते हैं।<ref name=ecosurv12/> सन १९९८ में [[सर्वोच्च न्यायालय]] ने दिल्ली के सभी सार्वजनिक वाहनों को डीज़ल के स्थान पर [[कंप्रेस्ड नैचुरल गैस]] का प्रयोग अनिवार्य रूप से करने का आदेश दिया था।<ref name="kumari">{{cite journal| author = R. Kumari, A.K. Attri, L. Int Panis, B.R. Gurjar| title = Emission estimates of Particulate Matter and Heavy Metals from Mobile sources in Delhi (India)| journal = J. Environ. Science & Engg.| volume = 55| issue = 2| pages = 127–142| date = अप्रैल 2013| url = https://www.researchgate.net/publication/259827470_Emission_estimates_of_Particulate_Matter_and_Heavy_Metals_from_Mobile_Sources_in_Delhi| access-date = 16 अप्रैल 2014| archive-url = https://web.archive.org/web/20141108235156/http://www.researchgate.net/publication/259827470_Emission_estimates_of_Particulate_Matter_and_Heavy_Metals_from_Mobile_Sources_in_Delhi| archive-date = 8 नवंबर 2014| url-status = live}}</ref><ref name=supremelaw>{{cite web|url=http://www.cleanairnet.org/caiasia/1412/articles-69423_delhi_case.pdf|title=Introduction|accessdate=14 जनवरी 2007|author=Armin Rosencranz|author2=Michael Jackson|format=PDF|work=The Delhi Pollution Case: The Supreme Court of India and the Limits of Judicial Power|publisher=indlaw.com|pages=p.3|archive-url=https://web.archive.org/web/20070614203640/http://www.cleanairnet.org/caiasia/1412/articles-69423_delhi_case.pdf|archive-date=14 जून 2007|url-status=dead}}</ref> तब से यहाँ सभी सार्वजनिक वाहन सी एन जी पर ही चालित हैं।
; मेट्रो सेवा
{{मुख्य|दिल्ली मेट्रो}}
[[दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन]] द्वारा संचालित [[दिल्ली मेट्रो रेल]] एक मास रैपिड ट्रांज़िट (त्वरित पारगमन) प्रणाली है, जो कि दिल्ली के कई क्षेत्रों में सेवा प्रदान करती है। इसकी शुरुआत २४ दिसम्बर २००२ को [[शहादरा]] [[तीस हजारी]] लाईन से हुई। इस परिवहन व्यवस्था की अधिकतम गति ८०किमी/घंटा (५०मील/घंटा) रखी गयी है और यह हर स्टेशन पर लगभग २० सेकेंड रुकती है। सभी ट्रेनों का निर्माण [[दक्षिण कोरिया]] की कंपनी रोटेम द्वारा किया गया है। दिल्ली की परिवहन व्यवसथा में मेट्रो रेल एक महत्त्वपूर्ण कड़ी है। इससे पहले परिवहन का ज़्यादातर बोझ सड़क पर था। प्रारम्भिक अवस्था में इसकी योजना छह मार्गों पर चलने की है जो दिल्ली के ज्यादातर हिस्से को जोड़ेगी। इसका पहला चरण [[वर्ष]] [[२००६]] में पूरा हो चुका है। दुसरे चरण में दिल्ली के [[महरौली]], [[बदरपुर बॉर्डर]], आनन्द विहार, जहांगीरपुरी, मुन्द्का और [[इन्दिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा]] अथवा दिल्ली से सटे [[नोएडा]], [[गुड़गांव]] और वैशाली को मेट्रो से जोड़ने का काम जारी है। परियोजना के तीसरे चरण में [[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र]] के शहरों [[गाजियाबाद]], [[फरीदाबाद]] इत्यादि को भी जोड़ने की योजना है। इस रेल व्यवस्था के चरण I में मार्ग की कुल लंबाई लगभग ६५.११ किमी है जिसमे १३ किमी भूमिगत एवं ५२ किलोमीटर एलीवेटेड मार्ग है। चरण II के अन्तर्गत पूरे मार्ग की लंबाई १२८ किमी होगी एवं इसमें ७९ स्टेशन होंगे जो अभी निर्माणाधीन हैं, इस चरण के २०१० तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-newdelhi/Delhi-Metro-confident-of-meeting-deadline/article14836060.ece|title=Delhi Metro confident of meeting deadline|date=17 सित॰ 2007|accessdate=1 मार्च 2019|via=www.thehindu.com|archive-url=https://web.archive.org/web/20180303140135/http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-newdelhi/Delhi-Metro-confident-of-meeting-deadline/article14836060.ece|archive-date=3 मार्च 2018|url-status=live}}</ref><ref name="Delhi Metro Masterplan 2021">Delhi Metro Masterplan 2021</ref> चरण III (११२ किमी) एवं IV (१०८.५ किमी) लंबाई की बनाये जाने का प्रस्ताव है जिसे क्रमश: २०१५ एवं २०२० तक पूरा किये जाने की योजना है। इन चारों चरणो का निर्माण कार्य पूरा हो जाने के पश्चात दिल्ली मेट्रो के मार्ग की कुल लंबाई ४१३.८ किलोमीटर की हो जाएगी जो [[लंदन]] के मेट्रो रेल (४०८ किमी) से भी बड़ा बना देगी।<ref name="Delhi Metro Masterplan 2021"/><ref>{{Cite web|url=http://www.delhimetrorail.com/commuters/images/metro_map_big.jpg|title=map of extensions, DMRC|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20061211073124/http://www.delhimetrorail.com/commuters/images/metro_map_big.jpg|archive-date=11 दिसंबर 2006|url-status=dead}}</ref><ref>द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया</ref><ref>Discovery channel : 24 hours with Delhi Metro</ref>
दिल्ली के २०२१ मास्टर प्लान के अनुसार बाद में मेट्रो रेल को दिल्ली के उपनगरों तक ले जाए जाने की भी योजना है।
;रेल सेवा
दिल्ली [[भारतीय रेल]] के [[:Image:India railway schematic map.svg|नक्शे]] का एक प्रधान जंक्शन है। यहाँ [[उत्तर रेलवे]] का मुख्यालय भी है। यहाँ के चार मुख्य रेलवे स्टेशन हैं: [[नई दिल्ली रेलवे स्टेशन]], [[दिल्ली जंक्शन]], [[सराय रोहिल्ला]] और [[हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन]]।<ref name=ecosurv12/> दिल्ली अन्य सभी मुख्य शहरों और महानगरों से कई राजमार्गों और एक्स्प्रेसवे (त्वरित मार्ग) द्वारा जुड़ा हुआ है। यहाँ वर्तमान में तीन एक्स्प्रेसवे हैं और तीन निर्माणाधीन हैं, जो इसे समृद्ध और वाणिज्यिक उपनगरों से जोड़ेंगे। [[दिल्ली गुड़गांव एक्स्प्रेसवे]] दिल्ली को [[गुड़गांव]] और अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से जोड़ता है। [[डी एन डी फ्लाइवे]] और [[नोएडा|नोएडा-]][[ग्रेटर नोएडा]] एक्स्प्रेसवे दिल्ली को दो मुख्य उपनगरों से जोड़ते हैं। ग्रेटर नोएडा में एक अलग अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा योजनाबद्ध है और नोएडा में इंडियन ग्रैंड प्रिक्स नियोजित है।
;वायु सेवा
[[इंदिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा]] दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम कोण पर स्थित है और यही अन्तर्देशीय और अन्तर्राष्ट्रीय वायु-यात्रियों के लिए शहर का मुख्य द्वार है। वर्ष २००६-०७ में हवाई अड्डे पर २३ मिलियन सवारियां दर्ज की गईं थीं,<ref name="autogenerated1">इंदिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा</ref><ref name=essentialtravel>{{cite web| publisher=Essential Travel Ltd., UK.| url=http://parking.essentialtravel.co.uk/worldairport/india/delhi.htm| title=Delhi – Indira Gandhi International Airport (DEL) information| accessdate=29 अप्रैल 2006| archive-url=https://web.archive.org/web/20060719165130/https://parking.essentialtravel.co.uk/worldairport/india/delhi.htm| archive-date=19 जुलाई 2006| url-status=dead}}</ref> जो इसे दक्षिण [[एशिया]] के व्यस्ततम विमानक्षेत्रों में से एक बनाती हैं। US$१९.३ लाख की लागत से एक नया टर्मिनल-३ निर्माणाधीन है, जो ३.४ करोड़ अतिरिक्त यात्री क्षमता का होगा, सन २०१० तक पूर्ण होना निश्चित है।<ref>{{cite web |url=http://www.dailytimes.com.pk/default.asp?page=2007\02\18\story_18-2-2007_pg5_24 |title=Daily Times - Leading News Resource of Pakistan |publisher=Dailytimes.com.pk |date= |accessdate=3 नवंबर 2008 |archiveurl=https://archive.today/20120904074154/http://www.dailytimes.com.pk/default.asp?page=2007%5C02%5C18%5Cstory_18-2-2007_pg5_24 |archivedate=4 सितंबर 2012 |url-status=live }}</ref> इसके आगे भी विस्तार कार्यक्रम नियोजित हैं, जो यहाँ १०० मिलियन यात्री प्रतिवर्ष से अधिक की क्षमता देंगे।<ref name="autogenerated1"/> [[सफदरजंग विमानक्षेत्र]] दिल्ली का एक अन्य एयरफ़ील्ड है, जो सामान्य विमानन अभ्यासों के लिए और कुछ वीआईपी उड़ानों के लिए प्रयोग होता है।<ref name=safdur>{{cite web|url=http://gc.kls2.com/airport/VIDD|title=VIDD - Airport|accessdate=14 जनवरी 2007|work=Great Circle Search|publisher=Karl L. Swartz|archive-url=https://web.archive.org/web/20070310055725/http://gc.kls2.com/airport/VIDD|archive-date=10 मार्च 2007|url-status=live}}</ref>
==इन्हें भी देखें==
* [[भारत के राज्यों और संघ क्षेत्रों की राजधानियाँ]]
* [[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के सर्वाधिक जनसंख्या वाले शहरों की सूची]]
* [[राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र]]
* [[नई दिल्ली]]
* [[दिल्ली छावनी]]
== सन्दर्भ ==
{{reflist|2}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
{{प्रवेशद्वार|दिल्ली}}
{{commonscat|delhi|दिल्ली}}
* [https://web.archive.org/web/20160305010439/http://pib.nic.in/newsite/hindifeature.aspx?relid=12661 दिल्ली का इतिहास]
* [https://web.archive.org/web/20060210222442/http://delhigovt.nic.in/newdelhi/index.html दिल्ली सरकार]
{{Template group
|title=दिल्ली - गागर में सागर
|list=
{{दिल्ली}}
{{दिल्ली में संग्रहालय}}
{{दिल्ली के जिले}}
{{दिल्ली मेट्रो की लाइनें}}
<!-- {{दिल्ली के प्रमुख मार्ग (सड़क)}} -->
{{भारत के राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की राजधानियाँ}}
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[[श्रेणी:भारत के केन्द्र शासित प्रदेश]]
[[श्रेणी:एशिया के महानगर]]
[[श्रेणी:भारत के महानगर]]
[[श्रेणी:दिल्ली]]
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[[श्रेणी:राजधानी ज़िले और क्षेत्र]]
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मुलायम सिंह यादव
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wikitext
text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक राजनीतिज्ञ
| name = [[ मुलायम सिंह यादव]]
| image = Uttar Pradesh Chief Minister Shri.Mulayam Singh Yadav, addressing at the National Development Council, New Delhi on December 9, 2006 (cropped).jpg
| office = [[उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री]]
| term_start = 5 दिसम्बर 1989
| term_end = 24 जून 1991
| predecessor = [[नारायण दत्त तिवारी]]
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| predecessor1 = [[राष्ट्रपति शासन]]
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| successor2 = [[मायावती]]
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| term_start3 = 1 जून 1996
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| predecessor3 = [[प्रमोद महाजन]]
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| birth_date = 22 नवम्बर 1939
| death_date = {{मृत्यु तिथि एवं आयु|df=yes|2022|10|10|1939|11|22}}<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/live-news-from-cities-weather-pollution-covid-cases-schools-shut-uttar-pradesh-delhi-telangana-tamil-nadu-rain-news-10-october-2022/amp_liveblog/94749409.cms|title=Mulayam Singh Yadav dies at 82 due to ill health, was in ICU since 2nd October|website=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|archive-date=10 October 2022|access-date=10 October 2022}}</ref>
| birth_place = [[सैफई]], [[इटावा]], [[उत्तर प्रदेश]]
| father =
| Sopuce = मालती देवी , साधना गुप्ता
| children = [[अखिलेश यादव]] [[प्रतीक यादव]]
| party = [[सोशलिस्ट पार्टी]], [[लोकदल]], [[जनता दल]], [[समाजवादी पार्टी]] 1992 से 2022 तक
| alma_mater =
| footnotes =
| बेटे का नाम = अखिलेश यादव (राजनेता)
प्रतीक यादव (व्यवसायी)
| पार्टी का नाम = समाजवादी पार्टी
| भाई-बहिन = शिव पाल सिंह यादव, राम गोपाल यादव,
अभय राम सिंह यादव, राजपाल सिंह यादव,
रतन सिंह यादव और कमला देवी यादव
}}
'''मुलायम सिंह''' (22 नवम्बर 1939 – 10 अक्टूबर 2022) [[भारत]] के एक राजनेता एवं [[उत्तर प्रदेश]] के पूर्व मुख्यमंत्री थे। मुलायम भारत के [[भारत के रक्षा मंत्री|रक्षा मंत्री]] भी रह चुके हैं। इससे पहले एक [[शिक्षक]] थे किन्तु शिक्षण कार्य छोड़कर इन्होंने [[राजनीति]] में कदम रखा। वर्ष 1992 में एक राजनीतिक पार्टी [[समाजवादी पार्टी]] की स्थापना की। मुलायम को 26 जनवरी
2023 की पूर्व संध्या पर [[पद्म विभूषण]] से भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा सम्मानित किया गया।<ref>{{Cite web|url=https://hindi.news18.com/news/nation/mulayam-singh-yadav-conferred-padma-vibhushan-posthumously-by-president-droupadi-murmu-akhilesh-receives-award-5776341.html|title=Padma Awards 2023: मुलायम सिंह यादव को मिला मरणोपरांत पद्म विभूषण, बेटे अखिलेश ने लिया सम्मान, देखें VIDEO|date=2023-04-05|website=न्यूज़18 हिंदी|language=hi|access-date=2024-11-23|archive-date=4 जून 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240604132320/https://hindi.news18.com/news/nation/mulayam-singh-yadav-conferred-padma-vibhushan-posthumously-by-president-droupadi-murmu-akhilesh-receives-award-5776341.html|url-status=dead}}</ref>
== व्यक्तिगत जीवन ==
मुलायम सिंह यादव का जन्म 22 नवम्बर 1939 को [[इटावा सफारी पार्क|इटावा]] जिले के [[सैफई]] गाँव में मूर्ति देवी व सुघर सिंह यादव (कमरिया )के [[किसान]] परिवार में हुआ। मुलायम सिंह यादव अपने पाँच भाई-बहनों में रतनसिंह यादव से छोटे व अभयराम सिंह यादव, शिवपाल सिंह यादव, राजपाल सिंह और कमला देवी से बड़े हैं। प्रोफेसर रामगोपाल यादव इनके चचेरे भाई हैं। पिता सुघर सिंह उन्हें पहलवान बनाना चाहते थे किन्तु पहलवानी में अपने राजनीतिक गुरु चौधरी नत्थूसिंह को [[मैनपुरी]] में आयोजित एक कुश्ती-प्रतियोगिता में प्रभावित करने के पश्चात उन्होंने नत्थूसिंह के परम्परागत विधान सभा क्षेत्र जसवन्त नगर से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया।<ref>{{Cite web|url=https://www.amarujala.com/photo-gallery/uttar-pradesh/kanpur/mulayam-singh-yadav-life-story|title=पहलवानी छाेड़ राजनीति में आए थे मुलायम, बड़े-बड़ाें काे दी है पटखनी, पढ़िए मुलायम का सफर|website=अमर उजाला|language=hi|access-date=2020-10-07}}</ref>
[[राजनीति]] में आने से पूर्व मुलायम सिंह यादव [[आगरा विश्वविद्यालय]] से [[राजनीति विज्ञान]] में [[स्नातकोत्तर]] (एम॰ए॰) और बी॰टी॰ करने के उपरान्त इन्टर कालेज में प्रवक्ता नियुक्त हुए और सक्रिय राजनीति में रहते हुए नौकरी से त्यागपत्र दे दिया। मुलायम सिंह जी का काफ़ी लंबी बीमारी के कारण 10 अक्टूबर 2022 को मेदांता अस्पताल गुरुग्राम में निधन हो गया।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/india/politics/story/mulayam-singh-yadav-no-more-live-news-and-update-samajwadi-party-akhilesh-yadav-ntc-1553012-2022-10-10|title=नहीं रहे नेताजी, 82 साल की उम्र में समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव ने ली अंतिम सांस|date=2022-10-10|website=आज तक|language=hi|access-date=2022-10-11}}</ref>
== राजनीतिक जीवन ==
मुलायम सिंह उत्तर भारत के बड़े समाजवादी और किसान नेता रहे हैं। एक साधारण किसान परिवार में जन्म लेने वाले मुलायम सिंह ने अपना राजनीतिक जीवन उत्तर प्रदेश में विधायक के रूप में शुरू किया। बहुत कम समय में ही मुलायम सिंह का प्रभाव पूरे उत्तर प्रदेश में नज़र आने लगा। मुलायम सिंह ने उत्तर प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग समाज का सामाजिक स्तर को ऊपर करने में महत्वपूर्ण कार्य किया। सामाजिक चेतना के कारण उत्तर प्रदेश की राजनीति में अन्य पिछड़ा वर्ग का महत्वपूर्ण स्थान हैं। समाजवादी नेता रामसेवक यादव के प्रमुख अनुयायी (शिष्य) थे तथा इन्हीं के आशीर्वाद से मुलायम सिंह 1967 में पहली बार [[विधान सभा]] के सदस्य चुने गये और मन्त्री बने। 1992में उन्होंने [[समाजवादी पार्टी]] बनाई। वे तीन बार क्रमशः 5 दिसम्बर 1989 से 24 जनवरी 1991 तक, 5 दिसम्बर 1993 से 3 जून 1996 तक और 29 अगस्त 2003 से 11 मई 2007 तक [[उत्तर प्रदेश]] के मुख्य मन्त्री रहे। इसके अतिरिक्त वे केन्द्र सरकार में रक्षा मन्त्री भी रह चुके हैं। उत्तर प्रदेश में यादव समाज के सबसे बड़े नेता के रूप में मुलायम सिंह की पहचान है। उत्तर प्रदेश में सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने में मुलायम सिंह ने साहसिक योगदान किया। मुलायम सिंह की पहचान एक धर्मनिरपेक्ष नेता की है। उत्तर प्रदेश में उनकी पार्टी समाजवादी पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी माना जाता है। उत्तर प्रदेश की सियासी दुनिया में मुलायम सिंह यादव को प्यार से नेता जी कहा जाता है।
2012 में समाजवादी पार्टी को उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव में पूर्ण बहुमत मिला। यह पहली बार हुआ था कि उत्तर प्रदेश में सपा अपने बूते सरकार बनाने की स्थिति में थी। नेता जी के पुत्र और सपा के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बसपा की सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुद्दा जोर शोर से उठाया और प्रदेश के सामने विकास का एजेंडा रखा। अखिलेश यादव के विकास के वादों से प्रभावित होकर पूरे प्रदेश में उनको व्यापक जनसमर्थन मिला। चुनाव के बाद नेतृत्व का सवाल उठा तो नेताजी ने वरिष्ठ साथियों के विमर्श के बाद अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया। अखिलेश यादव मुलायम सिंह के पुत्र है। अखिलेश यादव ने नेता जी के बताए गये रास्ते पर चलते हुए उत्तर प्रदेश को विकास के पथ पर आगे बढ़ाया.
'समाजवादी पार्टी' के नेता मुलायम सिंह यादव पिछले तीन दशक से राजनीति में सक्रिय हैं। अपने राजनीतिक गुरु नत्थूसिंह को मैनपुरी में आयोजित एक कुश्ती प्रतियोगिता में प्रभावित करने के पश्चात मुलायम सिंह ने नत्थूसिंह के परम्परागत विधान सभा क्षेत्र जसवन्त नगर से ही अपना राजनीतिक सफर आरम्भ किया था। मुलायम सिंह यादव जसवंत नगर और फिर इटावा की सहकारी बैंक के निदेशक चुने गए थे। विधायक का चुनाव भी 'सोशलिस्ट पार्टी' और फिर 'प्रजा सोशलिस्ट पार्टी' से लड़ा था। इसमें उन्होंने विजय भी प्राप्त की। उन्होंने स्कूल के अध्यापन कार्य से इस्तीफा दे दिया था। पहली बार मंत्री बनने के लिए मुलायम सिंह यादव को 1977 तक इंतज़ार करना पड़ा, जब कांग्रेस विरोधी लहर में उत्तर प्रदेश में भी जनता सरकार बनी थी। 1980 में भी कांग्रेस की सरकार में वे राज्य मंत्री रहे और फिर [[चौधरी चरण सिंह]] के लोकदल के अध्यक्ष बने और विधान सभा चुनाव हार गए। चौधरी साहब ने विधान परिषद में मनोनीत करवाया, जहाँ वे प्रतिपक्ष के नेता भी रहे।
1996 में मुलायम सिंह यादव ग्यारहवीं लोकसभा के लिए मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र से चुने गए थे और उस समय जो संयुक्त मोर्चा सरकार बनी थी, उसमें मुलायम सिंह भी शामिल थे और देश के रक्षामंत्री बने थे।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/explained/story/samajwadi-party-former-chief-mulayam-singh-yadav-death-mulayam-singh-yadav-defence-minister-martyr-soldiers-dead-body-ntc-1553053-2022-10-10|title=क्या था मुलायम सिंह यादव का वो फैसला? जिस कारण घर तक पहुंचता है शहीदों का पार्थिव शरीर|date=2022-10-10|website=आज तक|language=hi|access-date=2022-10-11}}</ref> यह सरकार बहुत लंबे समय तक चली नहीं। मुलायम सिंह यादव को प्रधानमंत्री बनाने की भी बात चली थी। प्रधानमंत्री पद की दौड़ में वे सबसे आगे खड़े थे, किंतु उनके सजातियों ने उनका साथ नहीं दिया। लालू प्रसाद यादव और शरद यादव ने उनके इस इरादे पर पानी फेर दिया। इसके बाद चुनाव हुए तो मुलायम सिंह संभल से लोकसभा में वापस लौटे। असल में वे कन्नौज भी जीते थे, किंतु वहाँ से उन्होंने अपने बेटे अखिलेश यादव को सांसद बनाया।
===केंद्रीय राजनीति===
केंद्रीय राजनीति में मुलायम सिंह का प्रवेश 1996 में हुआ, जब काँग्रेस पार्टी को हरा कर संयुक्त मोर्चा ने सरकार बनाई। एच. डी. देवेगौडा के नेतृत्व वाली इस सरकार में वह रक्षामंत्री बनाए गए थे(*सैनिकों के शव को युद्ध क्षेत्र से वापस लाने की प्रथा मुलायम सिंह यादव ने ही शुरू की थी।), किंतु यह सरकार भी ज़्यादा दिन चल नहीं पाई और तीन साल में भारत को दो प्रधानमंत्री देने के बाद सत्ता से बाहर हो गई। 'भारतीय जनता पार्टी' के साथ उनकी विमुखता से लगता था, वह काँग्रेस के नज़दीक होंगे, लेकिन 1999 में उनके समर्थन का आश्वासन ना मिलने पर काँग्रेस सरकार बनाने में असफल रही और दोनों पार्टियों के संबंधों में कड़वाहट पैदा हो गई। 2002 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 391 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए, जबकि 1996 के चुनाव में उसने केवल 281 सीटों पर ही चुनाव लड़ा था।
===राजनीतिक दर्शन तथा विदेश यात्रा===
मुलायम सिंह यादव की राष्ट्रवाद, लोकतंत्र, समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धान्तों में अटूट आस्था रही है। भारतीय भाषाओं, भारतीय संस्कृति और शोषित पीड़ित वर्गों के हितों के लिए उनका अनवरत संघर्ष जारी रहा है। उन्होंने ब्रिटेन, रूस, फ्रांस, जर्मनी, स्विटजरलैण्ड, पोलैंड और नेपाल आदि देशों की भी यात्राएँ की हैं।
लोकसभा सदस्य
कहा जाता है कि मुलायम सिंह उत्तर प्रदेश की किसी भी जनसभा में कम से कम पचास लोगों को नाम लेकर मंच पर बुला सकते हैं। समाजवाद के फ़्राँसीसी पुरोधा 'कॉम डी सिमॉन' की अभिजात्यवर्गीय पृष्ठभूमि के विपरीत उनका भारतीय संस्करण केंद्रीय भारत के कभी निपट गाँव रहे सैंफई के अखाड़े में तैयार हुआ है। वहाँ उन्होंने पहलवानी के साथ ही राजनीति के पैंतरे भी सीखे।
लोकसभा से मुलायम सिंह यादव ग्यारहवीं, बारहवीं, तेरहवीं और पंद्रहवीं लोकसभा के सदस्य चुने गये थे।
===सदस्यता===
विधान परिषद 1982-1985
विधान सभा 1967, 1974, 1977, 1985, 1989, 1991, 1993 और 1996 (आठ बार)
विपक्ष के नेता, उत्तर प्रदेश विधान परिषद 1982-1985
विपक्ष के नेता, उत्तर प्रदेश विधान सभा 1985-1987
केंद्रीय कैबिनेट मंत्री
सहकारिता और पशुपालन मंत्री 1977
रक्षा मंत्री 1996-1998
==पुरस्कार व सम्मान==
पूर्व मुख्यमंत्री एवं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को 28 मई, 2012 को लंदन में 'अंतर्राष्ट्रीय जूरी पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ़ जूरिस्ट की जारी विज्ञप्ति में हाईकोर्ट ऑफ़ लंदन के सेवानिवृत न्यायाधीश सर गाविन लाइटमैन ने बताया कि श्री यादव का इस पुरस्कार के लिये चयन बार और पीठ की प्रगति में बेझिझक योगदान देना है। उन्होंने कहा कि श्री यादव का विधि एवं न्याय क्षेत्र से जुड़े लोगों में भाईचारा पैदा करने में सहयोग दुनियाभर में लाजवाब है।
ज्ञातव्य है कि मुलायम सिंह यादव ने विधि क्षेत्र में ख़ासा योगदान दिया है। समाज में भाईचारे की भावना पैदाकर मुलायम सिंह यादव का लोगों को न्याय दिलाने में विशेष योगदान है। उन्होंने कई विधि विश्वविद्यालयों में भी महत्त्वपूर्ण योगदान किया है।
== विवादित विचार ==
अपने एक भाषण के दौरान मुलायम सिंह ने बलात्कार की घटना पर कहा कि '' लड़के गलतियां करते हैं। "<ref>{{Cite web |url=http://tribune.com.pk/story/717810/ally-of-indias-modi-says-rape-sometimes-right-sometimes-wrong/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=20 अगस्त 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150919113827/http://tribune.com.pk/story/717810/ally-of-indias-modi-says-rape-sometimes-right-sometimes-wrong/ |archive-date=19 सितंबर 2015 |url-status=live }}</ref>
लोक सभा २००९ के चुनाव अभियान में मुलायम सिंह ने कहा कि अंग्रेजी और कम्प्यूटर की शिक्षा समाप्त करने को कहा इससे बेरोजगारी फैलती है।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/india/SP-vows-to-abolish-English-computers/articleshow/4389164.cms?from=mdr|title=SP vows to abolish English, computers|date=2009-04-12|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2024-11-23|issn=0971-8257}}</ref>
दिनांक १८ अगस्त २०१५ को एक सभा में बलात्कार पर विवादित ब्यान दिया।<ref>{{Cite web |url=http://www.bbc.com/hindi/india/2015/08/150819_mulayam_comments_badaun_rape_ps?ocid=socialflow_twitter |title=संग्रहीत प्रति |access-date=20 अगस्त 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150923223330/http://www.bbc.com/hindi/india/2015/08/150819_mulayam_comments_badaun_rape_ps?ocid=socialflow_twitter |archive-date=23 सितंबर 2015 |url-status=live }}</ref>
मुलायम सिंह यादव ने लखनऊ में ई-रिक्शा के वितरण समारोह में (१८ अगस्त २०१५ ) बलात्कार पर विचार व्यक्त करने पर महोबा जिले की स्थानीय कोर्ट ने अदालत में उपस्थिति के लिए समन जारी किया था।<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/other-states/UP-Court-summons-Mulayam-Singh-over-rape-remark/article60364319.ece|title=UP court summons Mulayam over rape remark|date=2015-08-21|work=द हिन्दू|access-date=2024-11-23|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref><ref>{{Cite web |url=http://www.jagran.com/uttar-pradesh/lucknow-city-mahoba-court-registered-case-on-rape-statement-of-mulayam-12764797.html?src=p1 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=21 अगस्त 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150824000958/http://www.jagran.com/uttar-pradesh/lucknow-city-mahoba-court-registered-case-on-rape-statement-of-mulayam-12764797.html?src=p1 |archive-date=24 अगस्त 2015 |url-status=live }}</ref>
*निलंबित आई पी एस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को धमकाने आरोप में सी जे एम सोमप्रभा मिश्रा ,लखनऊ ने समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के विरुद्ध आई पी सी की धारा १५६(३) के अंतर्गत एफ आई आर दर्ज करने का आदेश दिया। <ref>{{Cite web |url=http://www.jagran.com/uttar-pradesh/lucknow-city-12896278.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=18 सितंबर 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160826211339/http://www.jagran.com/uttar-pradesh/lucknow-city-12896278.html |archive-date=26 अगस्त 2016 |url-status=live }}</ref>
==अयोध्या गोलीकांड==
1990 के दशक के शुरुआत में राम जन्मभूमि मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद अपने चरम पर था। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिराने के लिए कारसेवा शुरू कर दिया था। कारसेवा और राममंदिर निर्माण हेतु भाजपा नेता [[लालकृष्ण आडवाणी]] ने सितम्बर 1990 में सोमनाथ मंदिर से अयोध्या तक रथ यात्रा शुरू कर दी उस समय यूपी के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे। मुलायम सिंह यादव ने अक्टूबर 1990 में लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा का विरोध करते हुए कहा था, ''उन्हें कोशिश करने दें और अयोध्या में प्रवेश करने दें। हम उन्हें कानून का अर्थ सिखाएंगे। कोई मस्जिद नहीं तोड़ी जाएगी।'' हालांकि आडवाणी उस समय आयोध्या नहीं पहुंच सकें क्योंकि बिहार की तत्कालीन [[जनता दल]] सरकार के मुख्यमंत्री [[लालू प्रसाद यादव]] ने उन्हें समस्तीपुर से गिरफ्तार करवा दिया लेकिन अक्टूबर 1990 के अंतिम सप्ताह में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन फैजाबाद जिले में कारसेवकों की विशाल भीड़ एकत्र होने लगी। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने बाबरी मस्जिद की सुरक्षा का भरोसा देते हुए बयान दिया की ''बाबरी मस्जिद पर कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता'', 30 अक्टूबर 1990 को कारसेवकों के साथ पूरे देश से आये साधु-संतों की भीड़ हनुमानगढ़ी<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/india/uttar-pradesh/story/ayodhya-dispute-firing-karsevaks-mulla-mulayam-hanuman-garhi-571472-2018-11-02|title=28 साल पुराना अयोध्या का वो गोलीकांड, जिससे मुलायम बन गए 'मुल्ला'|date=2018-11-02|website=आज तक|language=hi|access-date=2023-08-31}}</ref> की ओर बढ़ने का प्रयास करने लगी,कारसेवकों का इरादा विवादित बाबरी मस्जिद तोड़ कर राम जन्म भूमि मंदिर का निर्माण करने का था। पूरे शहर में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मद्देनजर कर्फ्यू लगा दिया गया इसके बावजूद अयोध्या में भीड़ बेकाबू हो रही थी। उत्तर प्रदेश पुलिस ने बाबरी मस्जिद के आसपास 1.5 किलोमीटर के इलाके में बैरिकेडिंग कर रखी थी प्रशासन और सुरक्षा बलों के अलावा किसी का भी प्रतिबंधित इलाके में प्रवेश की अनुमति नहीं थी। सुबह का समय था कारसेवकों की भीड़ लगातार मस्जिद के ओर बढ़ रही थी, सुरक्षा बलों और प्रशासन के अधिकारी गण लगातार कारसेवकों से पीछे हटने का आग्रह कर रही थी इसी वक़्त कारसेवकों की भीड़ ने बैरिकेडिंग का एक हिस्सा तोड़ा दिया और मस्जिद की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस और सुरक्षा बलों ने फायरिंग कर दी जिसमें भगदड़ हुए और कई कारसेवक पुलिस की गोली से घायल हुए।<ref>{{Cite web|url=https://www.thelallantop.com/news/post/mulayam-singh-ordered-police-to-open-firing-on-karsevaks|title=मुलायम सिंह यादव ने ऑर्डर दिया, अयोध्या में कारसेवकों को गोली मार दी गई!|last=जोशी|first=ज्योति|website=द लल्लनटॉप|language=hi|access-date=2023-08-31}}</ref> 2 नवंबर 1990 को कारसेवकों का जत्था फिर रणनीति अपनाते हुए बाबरी मस्जिद की ओर प्रस्थान किया। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए तैनात सुरक्षाकर्मियों के पैर छूकर कारसेवक आगे बढ़े, जिनमें महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल थे। पैर छूने वाले इरादे से स्तब्ध फायरिंग की घटना के दो दिन बाद सुरक्षाकर्मी पीछे हट जाते और कारसेवक आगे बढ़ते।
सुरक्षाकर्मियों ने रणनीति को देखा और उन्हें चेतावनी दी। हालांकि, कारसेवक नहीं रुके और सुरक्षा बलों ने तीन दिन में दूसरी बार फायरिंग कर दी। झड़पों में कई की मौत हो गई। आधिकारिक रिकॉर्ड में 17 मौतें दिखाई गईं लेकिन भाजपा ने मरने वालों की संख्या अधिक बताई। मरने वालों में कोलकाता के कोठारी भाई- राम और शरद भी शामिल थे। उन्हें 30 अक्टूबर को बाबरी मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा पकड़े देखा गया था।<ref>{{Cite web|url=https://www.amarujala.com/video/india-news/mulayam-singh-yadav-known-as-mulla-mulayam-after-ayodhya-firing|title='मुल्ला मुलायम' की गूंज और कल्याण सिंह बन गए सीएम, जानें अयोध्या गोलीकांड का किस्सा|website=अमर उजाला|language=hi|access-date=2023-08-31}}</ref>
बाद में मुलायम सिंह ने कहा की ''भाजपा वालों ने 11लाख की भीड़ कारसेवा के नाम खड़ी कर दी थी,देश की एकता के लिए उन्हें अयोध्या में गोली चलवानी पड़ी थी। अगर गोली नहीं चलती तो मुसलमानों का देश से विश्वास उठ जाता।'' उन्होंने कहा ''गोली चलने का अफसोस है मगर देश की एकता के लिए 16 की जगह 30 जानें भी जातीं तो भी पीछे नहीं हटते'', बाद में फिर एक कार्यक्रम में मुलायम सिंह<ref>{{Cite web|url=https://www.amarujala.com/uttar-pradesh/kanpur/mulayam-singh-yadav-talks-about-ayodhya-kand-on-karsevak|title='कारसेवकाें पर गाेली चलवाने की' यह वजह बताई थी मुलायम ने|website=अमर उजाला|language=hi|access-date=2023-08-31}}</ref> कहा था कि गोली चलवाने से उनकी बहुत आलोचना हुई। संसद में उनका विरोध भी हुआ। मगर यह कदम देश हित में था। ऐसा न होता तो हिन्दुस्तान का मुसलमान कहता कि अगर हमारा धर्मस्थल नहीं बच सकता तो हिन्दुस्तान में रहने का क्या औचित्य। समाजवाद का मतलब सबको साथ लेकर चलना है। भेदभाव नहीं होना चाहिए। अयोध्या गोली कांड और मंदिर मस्जिद विवाद की खबरें अंतराष्ट्रीय खबरों में बहुत सुर्खियों में रहीं थी|
==सन्दर्भ==
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== बाहरी कड़ियाँ ==
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चाहर धर्मेंद्र
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{{ज्ञानसन्दूक राजनीतिज्ञ
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अभय राम सिंह यादव, राजपाल सिंह यादव,
रतन सिंह यादव और कमला देवी यादव
}}
'''मुलायम सिंह''' (22 नवम्बर 1939 – 10 अक्टूबर 2022) [[भारत]] के एक राजनेता एवं [[उत्तर प्रदेश]] के पूर्व मुख्यमंत्री थे। मुलायम भारत के [[भारत के रक्षा मंत्री|रक्षा मंत्री]] भी रह चुके हैं। इससे पहले एक [[शिक्षक]] थे किन्तु शिक्षण कार्य छोड़कर इन्होंने [[राजनीति]] में कदम रखा। वर्ष 1992 में एक राजनीतिक पार्टी [[समाजवादी पार्टी]] की स्थापना की। मुलायम को 26 जनवरी
2023 की पूर्व संध्या पर [[पद्म विभूषण]] से भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा सम्मानित किया गया।<ref>{{Cite web|url=https://hindi.news18.com/news/nation/mulayam-singh-yadav-conferred-padma-vibhushan-posthumously-by-president-droupadi-murmu-akhilesh-receives-award-5776341.html|title=Padma Awards 2023: मुलायम सिंह यादव को मिला मरणोपरांत पद्म विभूषण, बेटे अखिलेश ने लिया सम्मान, देखें VIDEO|date=2023-04-05|website=न्यूज़18 हिंदी|language=hi|access-date=2024-11-23|archive-date=4 जून 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240604132320/https://hindi.news18.com/news/nation/mulayam-singh-yadav-conferred-padma-vibhushan-posthumously-by-president-droupadi-murmu-akhilesh-receives-award-5776341.html|url-status=dead}}</ref>
== व्यक्तिगत जीवन ==
मुलायम सिंह यादव का जन्म 22 नवम्बर 1939 को [[इटावा सफारी पार्क|इटावा]] जिले के [[सैफई]] गाँव में मूर्ति देवी व सुघर सिंह यादव के [[किसान]] परिवार में हुआ। मुलायम सिंह यादव अपने पाँच भाई-बहनों में रतनसिंह यादव से छोटे व अभयराम सिंह यादव, शिवपाल सिंह यादव, राजपाल सिंह और कमला देवी से बड़े हैं। प्रोफेसर रामगोपाल यादव इनके चचेरे भाई हैं। पिता सुघर सिंह उन्हें पहलवान बनाना चाहते थे किन्तु पहलवानी में अपने राजनीतिक गुरु चौधरी नत्थूसिंह को [[मैनपुरी]] में आयोजित एक कुश्ती-प्रतियोगिता में प्रभावित करने के पश्चात उन्होंने नत्थूसिंह के परम्परागत विधान सभा क्षेत्र जसवन्त नगर से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया।<ref>{{Cite web|url=https://www.amarujala.com/photo-gallery/uttar-pradesh/kanpur/mulayam-singh-yadav-life-story|title=पहलवानी छाेड़ राजनीति में आए थे मुलायम, बड़े-बड़ाें काे दी है पटखनी, पढ़िए मुलायम का सफर|website=अमर उजाला|language=hi|access-date=2020-10-07}}</ref>
[[राजनीति]] में आने से पूर्व मुलायम सिंह यादव [[आगरा विश्वविद्यालय]] से [[राजनीति विज्ञान]] में [[स्नातकोत्तर]] (एम॰ए॰) और बी॰टी॰ करने के उपरान्त इन्टर कालेज में प्रवक्ता नियुक्त हुए और सक्रिय राजनीति में रहते हुए नौकरी से त्यागपत्र दे दिया। मुलायम सिंह जी का काफ़ी लंबी बीमारी के कारण 10 अक्टूबर 2022 को मेदांता अस्पताल गुरुग्राम में निधन हो गया।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/india/politics/story/mulayam-singh-yadav-no-more-live-news-and-update-samajwadi-party-akhilesh-yadav-ntc-1553012-2022-10-10|title=नहीं रहे नेताजी, 82 साल की उम्र में समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव ने ली अंतिम सांस|date=2022-10-10|website=आज तक|language=hi|access-date=2022-10-11}}</ref>
== राजनीतिक जीवन ==
मुलायम सिंह उत्तर भारत के बड़े समाजवादी और किसान नेता रहे हैं। एक साधारण किसान परिवार में जन्म लेने वाले मुलायम सिंह ने अपना राजनीतिक जीवन उत्तर प्रदेश में विधायक के रूप में शुरू किया। बहुत कम समय में ही मुलायम सिंह का प्रभाव पूरे उत्तर प्रदेश में नज़र आने लगा। मुलायम सिंह ने उत्तर प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग समाज का सामाजिक स्तर को ऊपर करने में महत्वपूर्ण कार्य किया। सामाजिक चेतना के कारण उत्तर प्रदेश की राजनीति में अन्य पिछड़ा वर्ग का महत्वपूर्ण स्थान हैं। समाजवादी नेता रामसेवक यादव के प्रमुख अनुयायी (शिष्य) थे तथा इन्हीं के आशीर्वाद से मुलायम सिंह 1967 में पहली बार [[विधान सभा]] के सदस्य चुने गये और मन्त्री बने। 1992में उन्होंने [[समाजवादी पार्टी]] बनाई। वे तीन बार क्रमशः 5 दिसम्बर 1989 से 24 जनवरी 1991 तक, 5 दिसम्बर 1993 से 3 जून 1996 तक और 29 अगस्त 2003 से 11 मई 2007 तक [[उत्तर प्रदेश]] के मुख्य मन्त्री रहे। इसके अतिरिक्त वे केन्द्र सरकार में रक्षा मन्त्री भी रह चुके हैं। उत्तर प्रदेश में यादव समाज के सबसे बड़े नेता के रूप में मुलायम सिंह की पहचान है। उत्तर प्रदेश में सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने में मुलायम सिंह ने साहसिक योगदान किया। मुलायम सिंह की पहचान एक धर्मनिरपेक्ष नेता की है। उत्तर प्रदेश में उनकी पार्टी समाजवादी पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी माना जाता है। उत्तर प्रदेश की सियासी दुनिया में मुलायम सिंह यादव को प्यार से नेता जी कहा जाता है।
2012 में समाजवादी पार्टी को उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव में पूर्ण बहुमत मिला। यह पहली बार हुआ था कि उत्तर प्रदेश में सपा अपने बूते सरकार बनाने की स्थिति में थी। नेता जी के पुत्र और सपा के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बसपा की सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुद्दा जोर शोर से उठाया और प्रदेश के सामने विकास का एजेंडा रखा। अखिलेश यादव के विकास के वादों से प्रभावित होकर पूरे प्रदेश में उनको व्यापक जनसमर्थन मिला। चुनाव के बाद नेतृत्व का सवाल उठा तो नेताजी ने वरिष्ठ साथियों के विमर्श के बाद अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया। अखिलेश यादव मुलायम सिंह के पुत्र है। अखिलेश यादव ने नेता जी के बताए गये रास्ते पर चलते हुए उत्तर प्रदेश को विकास के पथ पर आगे बढ़ाया.
'समाजवादी पार्टी' के नेता मुलायम सिंह यादव पिछले तीन दशक से राजनीति में सक्रिय हैं। अपने राजनीतिक गुरु नत्थूसिंह को मैनपुरी में आयोजित एक कुश्ती प्रतियोगिता में प्रभावित करने के पश्चात मुलायम सिंह ने नत्थूसिंह के परम्परागत विधान सभा क्षेत्र जसवन्त नगर से ही अपना राजनीतिक सफर आरम्भ किया था। मुलायम सिंह यादव जसवंत नगर और फिर इटावा की सहकारी बैंक के निदेशक चुने गए थे। विधायक का चुनाव भी 'सोशलिस्ट पार्टी' और फिर 'प्रजा सोशलिस्ट पार्टी' से लड़ा था। इसमें उन्होंने विजय भी प्राप्त की। उन्होंने स्कूल के अध्यापन कार्य से इस्तीफा दे दिया था। पहली बार मंत्री बनने के लिए मुलायम सिंह यादव को 1977 तक इंतज़ार करना पड़ा, जब कांग्रेस विरोधी लहर में उत्तर प्रदेश में भी जनता सरकार बनी थी। 1980 में भी कांग्रेस की सरकार में वे राज्य मंत्री रहे और फिर [[चौधरी चरण सिंह]] के लोकदल के अध्यक्ष बने और विधान सभा चुनाव हार गए। चौधरी साहब ने विधान परिषद में मनोनीत करवाया, जहाँ वे प्रतिपक्ष के नेता भी रहे।
1996 में मुलायम सिंह यादव ग्यारहवीं लोकसभा के लिए मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र से चुने गए थे और उस समय जो संयुक्त मोर्चा सरकार बनी थी, उसमें मुलायम सिंह भी शामिल थे और देश के रक्षामंत्री बने थे।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/explained/story/samajwadi-party-former-chief-mulayam-singh-yadav-death-mulayam-singh-yadav-defence-minister-martyr-soldiers-dead-body-ntc-1553053-2022-10-10|title=क्या था मुलायम सिंह यादव का वो फैसला? जिस कारण घर तक पहुंचता है शहीदों का पार्थिव शरीर|date=2022-10-10|website=आज तक|language=hi|access-date=2022-10-11}}</ref> यह सरकार बहुत लंबे समय तक चली नहीं। मुलायम सिंह यादव को प्रधानमंत्री बनाने की भी बात चली थी। प्रधानमंत्री पद की दौड़ में वे सबसे आगे खड़े थे, किंतु उनके सजातियों ने उनका साथ नहीं दिया। लालू प्रसाद यादव और शरद यादव ने उनके इस इरादे पर पानी फेर दिया। इसके बाद चुनाव हुए तो मुलायम सिंह संभल से लोकसभा में वापस लौटे। असल में वे कन्नौज भी जीते थे, किंतु वहाँ से उन्होंने अपने बेटे अखिलेश यादव को सांसद बनाया।
===केंद्रीय राजनीति===
केंद्रीय राजनीति में मुलायम सिंह का प्रवेश 1996 में हुआ, जब काँग्रेस पार्टी को हरा कर संयुक्त मोर्चा ने सरकार बनाई। एच. डी. देवेगौडा के नेतृत्व वाली इस सरकार में वह रक्षामंत्री बनाए गए थे(*सैनिकों के शव को युद्ध क्षेत्र से वापस लाने की प्रथा मुलायम सिंह यादव ने ही शुरू की थी।), किंतु यह सरकार भी ज़्यादा दिन चल नहीं पाई और तीन साल में भारत को दो प्रधानमंत्री देने के बाद सत्ता से बाहर हो गई। 'भारतीय जनता पार्टी' के साथ उनकी विमुखता से लगता था, वह काँग्रेस के नज़दीक होंगे, लेकिन 1999 में उनके समर्थन का आश्वासन ना मिलने पर काँग्रेस सरकार बनाने में असफल रही और दोनों पार्टियों के संबंधों में कड़वाहट पैदा हो गई। 2002 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 391 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए, जबकि 1996 के चुनाव में उसने केवल 281 सीटों पर ही चुनाव लड़ा था।
===राजनीतिक दर्शन तथा विदेश यात्रा===
मुलायम सिंह यादव की राष्ट्रवाद, लोकतंत्र, समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धान्तों में अटूट आस्था रही है। भारतीय भाषाओं, भारतीय संस्कृति और शोषित पीड़ित वर्गों के हितों के लिए उनका अनवरत संघर्ष जारी रहा है। उन्होंने ब्रिटेन, रूस, फ्रांस, जर्मनी, स्विटजरलैण्ड, पोलैंड और नेपाल आदि देशों की भी यात्राएँ की हैं।
लोकसभा सदस्य
कहा जाता है कि मुलायम सिंह उत्तर प्रदेश की किसी भी जनसभा में कम से कम पचास लोगों को नाम लेकर मंच पर बुला सकते हैं। समाजवाद के फ़्राँसीसी पुरोधा 'कॉम डी सिमॉन' की अभिजात्यवर्गीय पृष्ठभूमि के विपरीत उनका भारतीय संस्करण केंद्रीय भारत के कभी निपट गाँव रहे सैंफई के अखाड़े में तैयार हुआ है। वहाँ उन्होंने पहलवानी के साथ ही राजनीति के पैंतरे भी सीखे।
लोकसभा से मुलायम सिंह यादव ग्यारहवीं, बारहवीं, तेरहवीं और पंद्रहवीं लोकसभा के सदस्य चुने गये थे।
===सदस्यता===
विधान परिषद 1982-1985
विधान सभा 1967, 1974, 1977, 1985, 1989, 1991, 1993 और 1996 (आठ बार)
विपक्ष के नेता, उत्तर प्रदेश विधान परिषद 1982-1985
विपक्ष के नेता, उत्तर प्रदेश विधान सभा 1985-1987
केंद्रीय कैबिनेट मंत्री
सहकारिता और पशुपालन मंत्री 1977
रक्षा मंत्री 1996-1998
==पुरस्कार व सम्मान==
पूर्व मुख्यमंत्री एवं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को 28 मई, 2012 को लंदन में 'अंतर्राष्ट्रीय जूरी पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ़ जूरिस्ट की जारी विज्ञप्ति में हाईकोर्ट ऑफ़ लंदन के सेवानिवृत न्यायाधीश सर गाविन लाइटमैन ने बताया कि श्री यादव का इस पुरस्कार के लिये चयन बार और पीठ की प्रगति में बेझिझक योगदान देना है। उन्होंने कहा कि श्री यादव का विधि एवं न्याय क्षेत्र से जुड़े लोगों में भाईचारा पैदा करने में सहयोग दुनियाभर में लाजवाब है।
ज्ञातव्य है कि मुलायम सिंह यादव ने विधि क्षेत्र में ख़ासा योगदान दिया है। समाज में भाईचारे की भावना पैदाकर मुलायम सिंह यादव का लोगों को न्याय दिलाने में विशेष योगदान है। उन्होंने कई विधि विश्वविद्यालयों में भी महत्त्वपूर्ण योगदान किया है।
== विवादित विचार ==
अपने एक भाषण के दौरान मुलायम सिंह ने बलात्कार की घटना पर कहा कि '' लड़के गलतियां करते हैं। "<ref>{{Cite web |url=http://tribune.com.pk/story/717810/ally-of-indias-modi-says-rape-sometimes-right-sometimes-wrong/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=20 अगस्त 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150919113827/http://tribune.com.pk/story/717810/ally-of-indias-modi-says-rape-sometimes-right-sometimes-wrong/ |archive-date=19 सितंबर 2015 |url-status=live }}</ref>
लोक सभा २००९ के चुनाव अभियान में मुलायम सिंह ने कहा कि अंग्रेजी और कम्प्यूटर की शिक्षा समाप्त करने को कहा इससे बेरोजगारी फैलती है।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/india/SP-vows-to-abolish-English-computers/articleshow/4389164.cms?from=mdr|title=SP vows to abolish English, computers|date=2009-04-12|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2024-11-23|issn=0971-8257}}</ref>
दिनांक १८ अगस्त २०१५ को एक सभा में बलात्कार पर विवादित ब्यान दिया।<ref>{{Cite web |url=http://www.bbc.com/hindi/india/2015/08/150819_mulayam_comments_badaun_rape_ps?ocid=socialflow_twitter |title=संग्रहीत प्रति |access-date=20 अगस्त 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150923223330/http://www.bbc.com/hindi/india/2015/08/150819_mulayam_comments_badaun_rape_ps?ocid=socialflow_twitter |archive-date=23 सितंबर 2015 |url-status=live }}</ref>
मुलायम सिंह यादव ने लखनऊ में ई-रिक्शा के वितरण समारोह में (१८ अगस्त २०१५ ) बलात्कार पर विचार व्यक्त करने पर महोबा जिले की स्थानीय कोर्ट ने अदालत में उपस्थिति के लिए समन जारी किया था।<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/other-states/UP-Court-summons-Mulayam-Singh-over-rape-remark/article60364319.ece|title=UP court summons Mulayam over rape remark|date=2015-08-21|work=द हिन्दू|access-date=2024-11-23|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref><ref>{{Cite web |url=http://www.jagran.com/uttar-pradesh/lucknow-city-mahoba-court-registered-case-on-rape-statement-of-mulayam-12764797.html?src=p1 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=21 अगस्त 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150824000958/http://www.jagran.com/uttar-pradesh/lucknow-city-mahoba-court-registered-case-on-rape-statement-of-mulayam-12764797.html?src=p1 |archive-date=24 अगस्त 2015 |url-status=live }}</ref>
*निलंबित आई पी एस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को धमकाने आरोप में सी जे एम सोमप्रभा मिश्रा ,लखनऊ ने समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के विरुद्ध आई पी सी की धारा १५६(३) के अंतर्गत एफ आई आर दर्ज करने का आदेश दिया। <ref>{{Cite web |url=http://www.jagran.com/uttar-pradesh/lucknow-city-12896278.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=18 सितंबर 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160826211339/http://www.jagran.com/uttar-pradesh/lucknow-city-12896278.html |archive-date=26 अगस्त 2016 |url-status=live }}</ref>
==अयोध्या गोलीकांड==
1990 के दशक के शुरुआत में राम जन्मभूमि मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद अपने चरम पर था। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिराने के लिए कारसेवा शुरू कर दिया था। कारसेवा और राममंदिर निर्माण हेतु भाजपा नेता [[लालकृष्ण आडवाणी]] ने सितम्बर 1990 में सोमनाथ मंदिर से अयोध्या तक रथ यात्रा शुरू कर दी उस समय यूपी के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे। मुलायम सिंह यादव ने अक्टूबर 1990 में लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा का विरोध करते हुए कहा था, ''उन्हें कोशिश करने दें और अयोध्या में प्रवेश करने दें। हम उन्हें कानून का अर्थ सिखाएंगे। कोई मस्जिद नहीं तोड़ी जाएगी।'' हालांकि आडवाणी उस समय आयोध्या नहीं पहुंच सकें क्योंकि बिहार की तत्कालीन [[जनता दल]] सरकार के मुख्यमंत्री [[लालू प्रसाद यादव]] ने उन्हें समस्तीपुर से गिरफ्तार करवा दिया लेकिन अक्टूबर 1990 के अंतिम सप्ताह में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन फैजाबाद जिले में कारसेवकों की विशाल भीड़ एकत्र होने लगी। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने बाबरी मस्जिद की सुरक्षा का भरोसा देते हुए बयान दिया की ''बाबरी मस्जिद पर कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता'', 30 अक्टूबर 1990 को कारसेवकों के साथ पूरे देश से आये साधु-संतों की भीड़ हनुमानगढ़ी<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/india/uttar-pradesh/story/ayodhya-dispute-firing-karsevaks-mulla-mulayam-hanuman-garhi-571472-2018-11-02|title=28 साल पुराना अयोध्या का वो गोलीकांड, जिससे मुलायम बन गए 'मुल्ला'|date=2018-11-02|website=आज तक|language=hi|access-date=2023-08-31}}</ref> की ओर बढ़ने का प्रयास करने लगी,कारसेवकों का इरादा विवादित बाबरी मस्जिद तोड़ कर राम जन्म भूमि मंदिर का निर्माण करने का था। पूरे शहर में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मद्देनजर कर्फ्यू लगा दिया गया इसके बावजूद अयोध्या में भीड़ बेकाबू हो रही थी। उत्तर प्रदेश पुलिस ने बाबरी मस्जिद के आसपास 1.5 किलोमीटर के इलाके में बैरिकेडिंग कर रखी थी प्रशासन और सुरक्षा बलों के अलावा किसी का भी प्रतिबंधित इलाके में प्रवेश की अनुमति नहीं थी। सुबह का समय था कारसेवकों की भीड़ लगातार मस्जिद के ओर बढ़ रही थी, सुरक्षा बलों और प्रशासन के अधिकारी गण लगातार कारसेवकों से पीछे हटने का आग्रह कर रही थी इसी वक़्त कारसेवकों की भीड़ ने बैरिकेडिंग का एक हिस्सा तोड़ा दिया और मस्जिद की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस और सुरक्षा बलों ने फायरिंग कर दी जिसमें भगदड़ हुए और कई कारसेवक पुलिस की गोली से घायल हुए।<ref>{{Cite web|url=https://www.thelallantop.com/news/post/mulayam-singh-ordered-police-to-open-firing-on-karsevaks|title=मुलायम सिंह यादव ने ऑर्डर दिया, अयोध्या में कारसेवकों को गोली मार दी गई!|last=जोशी|first=ज्योति|website=द लल्लनटॉप|language=hi|access-date=2023-08-31}}</ref> 2 नवंबर 1990 को कारसेवकों का जत्था फिर रणनीति अपनाते हुए बाबरी मस्जिद की ओर प्रस्थान किया। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए तैनात सुरक्षाकर्मियों के पैर छूकर कारसेवक आगे बढ़े, जिनमें महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल थे। पैर छूने वाले इरादे से स्तब्ध फायरिंग की घटना के दो दिन बाद सुरक्षाकर्मी पीछे हट जाते और कारसेवक आगे बढ़ते।
सुरक्षाकर्मियों ने रणनीति को देखा और उन्हें चेतावनी दी। हालांकि, कारसेवक नहीं रुके और सुरक्षा बलों ने तीन दिन में दूसरी बार फायरिंग कर दी। झड़पों में कई की मौत हो गई। आधिकारिक रिकॉर्ड में 17 मौतें दिखाई गईं लेकिन भाजपा ने मरने वालों की संख्या अधिक बताई। मरने वालों में कोलकाता के कोठारी भाई- राम और शरद भी शामिल थे। उन्हें 30 अक्टूबर को बाबरी मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा पकड़े देखा गया था।<ref>{{Cite web|url=https://www.amarujala.com/video/india-news/mulayam-singh-yadav-known-as-mulla-mulayam-after-ayodhya-firing|title='मुल्ला मुलायम' की गूंज और कल्याण सिंह बन गए सीएम, जानें अयोध्या गोलीकांड का किस्सा|website=अमर उजाला|language=hi|access-date=2023-08-31}}</ref>
बाद में मुलायम सिंह ने कहा की ''भाजपा वालों ने 11लाख की भीड़ कारसेवा के नाम खड़ी कर दी थी,देश की एकता के लिए उन्हें अयोध्या में गोली चलवानी पड़ी थी। अगर गोली नहीं चलती तो मुसलमानों का देश से विश्वास उठ जाता।'' उन्होंने कहा ''गोली चलने का अफसोस है मगर देश की एकता के लिए 16 की जगह 30 जानें भी जातीं तो भी पीछे नहीं हटते'', बाद में फिर एक कार्यक्रम में मुलायम सिंह<ref>{{Cite web|url=https://www.amarujala.com/uttar-pradesh/kanpur/mulayam-singh-yadav-talks-about-ayodhya-kand-on-karsevak|title='कारसेवकाें पर गाेली चलवाने की' यह वजह बताई थी मुलायम ने|website=अमर उजाला|language=hi|access-date=2023-08-31}}</ref> कहा था कि गोली चलवाने से उनकी बहुत आलोचना हुई। संसद में उनका विरोध भी हुआ। मगर यह कदम देश हित में था। ऐसा न होता तो हिन्दुस्तान का मुसलमान कहता कि अगर हमारा धर्मस्थल नहीं बच सकता तो हिन्दुस्तान में रहने का क्या औचित्य। समाजवाद का मतलब सबको साथ लेकर चलना है। भेदभाव नहीं होना चाहिए। अयोध्या गोली कांड और मंदिर मस्जिद विवाद की खबरें अंतराष्ट्रीय खबरों में बहुत सुर्खियों में रहीं थी|
==सन्दर्भ==
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== बाहरी कड़ियाँ ==
[[श्रेणी:1939 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:समाजवादी पार्टी के राजनीतिज्ञ]]
[[श्रेणी:२०२२ में निधन]]
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दुर्गा
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[[File:Durga, Burdwan, 2011.JPG|thumb|दुर्गा पूजा का पांडाल, 2011]]
'''दुर्गा''' या [[आदिशक्ति]] हिन्दुओं की प्रमुख देवी मानी जाती हैं जिन्हें माता, [[नवदुर्गा]], [[देवी]], [[शक्ति]], आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, पार्वती , जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामों से भी जाना जाता हैं।<ref>David R. Kinsley 1989, pp. 3-4.</ref><ref>{{cite web|url=https://blogs.timesofindia.indiatimes.com/the-photo-blog/9-days-9-avatars-be-ferocious-like-goddess-kaalratri/|title=9 days, 9 avatars: Be ferocious like Goddess Kaalratri|access-date=27 सितंबर 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170615104643/http://blogs.timesofindia.indiatimes.com/the-photo-blog/9-days-9-avatars-be-ferocious-like-goddess-kaalratri/|archive-date=15 जून 2017|url-status=dead}}</ref> [[शाक्त|शाक्त सम्प्रदाय]] की वह मुख्य देवी हैं। दुर्गा को आदि शक्ति, परम भगवती [[परब्रह्म]] बताया गया है। वह अंधकार व अज्ञानता रुपी राक्षसों से रक्षा करने वाली, ममतामई, मोक्ष प्रदायनी तथा कल्याणकारी हैं। उनके बारे में मान्यता है कि वे शान्ति, समृद्धि तथा [[धर्म]] पर आघात करने वाली राक्षसी शक्तियों का विनाश करतीं हैं।<ref>Paul Reid-Bowen 2012, pp. 212-213.</ref>
दुर्गा का निरूपण [[सिंह]] पर सवार एक [[देवी]] के रूप में की जाती है। दुर्गा देवी आठ भुजाओं से युक्त हैं जिन सभी में कोई न कोई शस्त्रास्त्र होते है। उन्होने [[महिषासुर]] नामक असुर का वध किया। महिषासुर (= महिष + असुर = भैंसा जैसा असुर) करतीं हैं। जिन ज्योतिर्लिंगों में देवी दुर्गा की स्थापना रहती है उनको सिद्धपीठ कहते है। वहाँ किये गए सभी संकल्प पूर्ण होते है। माता का दुर्गा देवी नाम दुर्गम नाम के महान दैत्य का वध करने के कारण पड़ा। माता ने शताक्षी स्वरूप धारण किया और उसके बाद शाकंभरी देवी के नाम से विख्यात हुई शाकंभरी देवी ने ही दुर्गमासुर का वध किया। जिसके कारण वे समस्त ब्रह्मांड में दुर्गा देवी के नाम से भी विख्यात हो गई। माता के देश में अनेकों मंदिर हैं कहीं पर महिषासुरमर्दिनि शक्तिपीठ तो कहीं पर कामाख्या देवी। यही देवी कोलकाता में महाकाली के नाम से विख्यात और सहारनपुर के प्राचीन शक्तिपीठ मे [[शाकम्भरी]] देवी के रूप में ये ही पूजी जाती हैं।
हिन्दुओं के शक्ति साम्प्रदाय में भगवती दुर्गा को ही दुनिया की पराशक्ति और सर्वोच्च [[देवता]] माना जाता है (शाक्त साम्प्रदाय [[ईश्वर]] को देवी के रूप में मानता है)। [[वेद|वेदों]] में तो दुर्गा का व्यापाक उल्लेख है, किन्तु [[उपनिषद]] में देवी "उमा हैमवती" (उमा, हिमालय की पुत्री) का वर्णन है। [[पुराण]] में दुर्गा को आदिशक्ति माना गया है। दुर्गा असल में [[शिव]] की पत्नी [[आदिशक्ति]] का एक रूप हैं, शिव की उस पराशक्ति को प्रधान प्रकृति, गुणवती माया, बुद्धितत्व की जननी तथा विकाररहित बताया गया है। एकांकी (केंद्रित) होने पर भी वह माया शक्ति संयोगवश अनेक हो जाती है। उस आदि शक्ति देवी ने ही सरस्वती(ब्रह्मा जी की पहली पत्नी), लक्ष्मी, और मुख्य रूप से पार्वती(सती) के रूप में जन्म लिया और उसने ब्रह्मा, विष्णु और महेश से विवाह किया था। तीन रूप होकर भी दुर्गा (आदि शक्ति) एक ही है।
देवी दुर्गा के स्वयं कई रूप हैं (सावित्री, लक्ष्मी एव पार्वती से अलग)। मुख्य रूप उनका "'''गौरी'''" है, अर्थात शान्तमय, सुन्दर और गोरा रूप। उनका सबसे भयानक रूप "'''काली'''" है, अर्थात काला रूप। विभिन्न रूपों में दुर्गा [[भारत]] और [[नेपाल]] के कई मन्दिरों और तीर्थस्थानों में पूजी जाती हैं।भगवती दुर्गा की सवारी शेर है।
मार्कण्डेय पुराण में ब्रहदेव ने मनुष्य जाति की रक्षा के लिए एक परम गुप्त, परम उपयोगी और मनुष्य का कल्याणकारी देवी कवच एवं व देवी सुक्त बताया है और कहा है कि जो मनुष्य इन उपायों को करेगा, वह इस संसार में सुख भोग कर अन्त समय में बैकुण्ठ को जाएगा। ब्रहदेव ने कहा कि जो मनुष्य दुर्गा सप्तशती का पाठ करेगा उसे सुख मिलेगा। भगवत पुराण के अनुसार माँ जगदम्बा का अवतरण श्रेष्ठ पुरूषो की रक्षा के लिए हुआ है। जबकि श्रीं मद देवीभागवत के अनुसार वेदों और पुराणों कि रक्षा के और दुष्टों के दलन के लिए माँ जगदंबा का अवतरण हुआ है। इसी तरह से ऋगवेद के अनुसार माँ दुर्गा ही आदि-शक्ति है, उन्ही से सारे विश्व का संचालन होता है और उनके अलावा और कोई अविनाशी नही है।
इसीलिए नवरात्रि के दौरान नव दुर्गा के नौ रूपों का ध्यान, उपासना व आराधना की जाती है तथा नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के एक-एक शक्ति रूप का पूजन किया जाता है।
और जय [https://www.smstime.in/2022/09/Durga-maa-Aarti.html अम्बे गौरी आरती] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20220912090734/https://www.smstime.in/2022/09/Durga-maa-Aarti.html |date=12 सितंबर 2022 }} माँ दुर्गा की सबसे प्रसिद्ध आरती में से एक है। मां अम्बे की यह प्रसिद्ध आरती मां दुर्गा जी से जुड़े ज्यादातर मौकों पर पढ़ी जाती है।
== दुर्गा के 108 नाम==
[[दुर्गा सप्तशती]] के अनुसार इनके 108 नाम बताये गये हैं।<ref>{{cite web|url=https://ndtv.in/faith/durga-108-names-1823354|title=मां दुर्गा के 108 नाम, इसके साथ जानें हर रूप का अर्थ|access-date=7 अप्रैल 2024|archive-date=7 अप्रैल 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240407163454/https://ndtv.in/faith/durga-108-names-1823354|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.prabhatkhabar.com/top-stories/chanting-108-names-of-maa-durga-in-navratri-bml|title=नवरात्रि में करते हैं मां दुर्गा के 108 नामों का जाप, जानें क्या है नियम?|work=प्रभात खबर}}</ref>
*1. '''[[सती]]''' : [[अग्नि]] में जल कर भी जीवित होने वाली
*2. '''साध्वी''' : आशावादी
*3. '''भवप्रीता''' : भगवान् शिव पर प्रीति रखने वाली
*4. '''भवानी''' : ब्रह्मांड की निवास
*5. '''भवमोचनी''' : संसार बंधनों से मुक्त करने वाली
*6. '''आर्या''' : देवी
*7. '''दुर्गा''' : देवी
*8. '''जया''' : विजयी
*9. '''आद्या''' : शुरूआत की वास्तविकता
*10. '''त्रिनेत्र''' : तीन आँखों वाली
*11. '''शूलधारिणी''' : शूल धारण करने वाली
*12. '''पिनाकधारिणी''' करने वाली
*13. '''चित्रा''' : सुरम्य, सुन्दर
*14. '''चंद्रघण्टा''' : प्रचण्ड स्वर से घण्टा नाद करने वाली, घंटे की आवाज निकालने वाली
*15. '''महातपा''' : भारी तपस्या करने वाली
*16. '''मन''' : मनन- शक्ति
*17. '''बुद्धि''' : सर्वज्ञाता
*18. '''अहंकारा''' : अभिमान करने वाली
*19. '''चित्तरूपा''' : वह जो सोच की अवस्था में है
*20. '''चिता''' : मृत्युशय्या
*21. '''चिति''' : चेतना
*22. '''सर्वमन्त्रमयी''' : सभी मंत्रों का ज्ञान रखने वाली
*23. '''सत्ता''' : सत्-स्वरूपा, जो सब से ऊपर है
*24. '''सत्यानन्दस्वरूपिणी''' : अनन्त आनंद का रूप
*25. '''अनन्ता''' : जिनके स्वरूप का कहीं अन्त नहीं
*26. '''भाविनी''' : सबको उत्पन्न करने वाली, खूबसूरत औरत
*27. '''भाव्या''' : भावना एवं ध्यान करने योग्य
*28. '''भव्या''' : कल्याणरूपा, भव्यता के साथ
*29. '''अभव्या''' : जिससे बढ़कर भव्य कुछ नहीं
*30. '''सदागति''' : हमेशा गति में, मोक्ष दान
*31. '''शाम्भवी''' : शिवप्रिया, शंभू की पत्नी
*32. '''देवमाता''' : देवगण की माता
*33. '''चिन्ता''' : चिन्ता
*34. '''रत्नप्रिया''' : गहने से प्यार
*35. '''सर्वविद्या''' : ज्ञान का निवास
*36. '''दक्षकन्या''' : दक्ष की बेटी
*37. '''दक्षयज्ञविनाशिनी''' : दक्ष के यज्ञ को रोकने वाली
*38. '''अपर्णा''' : तपस्या के समय पत्ते को भी न खाने वाली
*39. '''अनेकवर्णा''' : अनेक रंगों वाली
*40. '''पाटला''' : लाल रंग वाली
*41. '''पाटलावती''' : गुलाब के फूल या लाल परिधान या फूल धारण करने वाली
*42. '''पट्टाम्बरपरीधाना''' : रेशमी वस्त्र पहनने वाली
*43. '''कलामंजीरारंजिनी''' : पायल को धारण करके प्रसन्न रहने वाली
*44. '''अमेय''' : जिसकी कोई सीमा नहीं
*45. '''विक्रमा''' : असीम पराक्रमी
*46. '''क्रूरा''' : दैत्यों के प्रति कठोर
*47. '''सुन्दरी''' : सुंदर रूप वाली
*48. '''सुरसुन्दरी''' : अत्यंत सुंदर
*49. '''वनदुर्गा''' : जंगलों की देवी, बनशंकरी अथवा शाकम्भरी
*50. '''मातंगी''' : मतंगा की देवी
*51. '''मातंगमुनिपूजिता''' : बाबा मतंगा द्वारा पूजनीय
*52. '''ब्राह्मी''' : भगवान ब्रह्मा की शक्ति
*53. '''माहेश्वरी''' : प्रभु शिव की शक्ति
*54. '''इंद्री''' : इन्द्र की शक्ति
*55. '''कौमारी''' : किशोरी
*56. '''वैष्णवी''' : अजेय
*57. '''चामुण्डा''' : चंड और मुंड का नाश करने वाली
*58. '''वाराही''' : वराह पर सवार होने वाली
*59. '''लक्ष्मी''' : सौभाग्य की देवी
*60. '''पुरुषाकृति''' : वह जो पुरुष धारण कर ले
*61. '''विमिलौत्त्कार्शिनी''' : आनन्द प्रदान करने वाली
*62. '''ज्ञाना''' : ज्ञान से भरी हुई
*63. '''क्रिया''' : हर कार्य में होने वाली
*64. '''नित्या''' : अनन्त
*65. '''बुद्धिदा''' : ज्ञान देने वाली
*66. '''बहुला''' : विभिन्न रूपों वाली
*67. '''बहुलप्रेमा''' : सर्व प्रिय
*68. '''सर्ववाहनवाहना''' : सभी वाहन पर विराजमान होने वाली
*69. '''निशुम्भशुम्भहननी''' : शुम्भ, निशुम्भ का वध करने वाली
*70. '''महिषासुरमर्दिनि''' : महिषासुर का वध करने वाली
*71. '''मधुकैटभहंत्री''' : मधु व कैटभ का नाश करने वाली
*72. '''चण्डमुण्ड विनाशिनि''' : चंड और मुंड का नाश करने वाली
*73. '''सर्वासुरविनाशा''' : सभी राक्षसों का नाश करने वाली
*74. '''सर्वदानवघातिनी''' : संहार के लिए शक्ति रखने वाली
*75. '''सर्वशास्त्रमयी''' : सभी सिद्धांतों में निपुण
*76. '''सत्या''' : सच्चाई
*77. '''सर्वास्त्रधारिणी''' : सभी हथियारों को धारण करने वाली
*78. '''अनेकशस्त्रहस्ता''' : हाथों में कई हथियार धारण करने वाली
*79. '''अनेकास्त्रधारिणी''' : अनेक हथियारों को धारण करने वाली
*80. '''कुमारी''' : सुंदर किशोरी
*81. '''एककन्या''' : कन्या
*82. '''कैशोरी''' : जवान लड़की
*83. '''युवती''' : नारी
*84. '''यति''' : तपस्वी
*85. '''अप्रौढा''' : जो कभी पुराना ना हो
*86. '''प्रौढा''' : जो पुराना है
*87. '''वृद्धमाता''' : शिथिल
*88. '''बलप्रदा''' : शक्ति देने वाली
*89. '''महोदरी''' : ब्रह्मांड को संभालने वाली
*90. '''मुक्तकेशी''' : खुले बाल वाली
*91. '''घोररूपा''' : एक भयंकर दृष्टिकोण वाली
*92. '''महाबला''' : अपार शक्ति वाली
*93. '''अग्निज्वाला''' : मार्मिक आग की तरह
*94. '''रौद्रमुखी''' : विध्वंसक रुद्र की तरह भयंकर चेहरा
*95. '''कालरात्रि''' : काले रंग वाली
*96. '''तपस्विनी''' : तपस्या में लगे हुए
*97. '''नारायणी''' : भगवान नारायण की विनाशकारी रूप
*98. '''भद्रकाली''' : काली का भयंकर रूप
*99. '''विष्णुमाया''' : भगवान विष्णु की माया
*100. '''जलोदरी''' : ब्रह्मांड में निवास करने वाली
*101. '''शिवदूती''' : भगवान शिव की राजदूत
*102. '''करली''' : हिंसक
*103. '''अनन्ता''' : विनाश रहित
*104. '''परमेश्वरी''' : प्रथम देवी
*105. '''कात्यायनी''' : ऋषि कात्यायन द्वारा पूजनीय
*106. '''सावित्री''' : सूर्य की बेटी
*107. '''प्रत्यक्षा''' : वास्तविक
*108. '''ब्रह्मवादिनी''' : वर्तमान में हर जगह वास करने वाली
सती दुर्गा जी एक नाम है। [[दक्ष प्रजापति|दक्ष]] ने अपने यज्ञ में सभी देवताओं को आमंत्रित किया , लेकिन [[शिव]] और सती को आमंत्रण नहीं दिया। इससे क्रुद्ध होकर, अपमान का प्रतिकार करने के लिए इन्होंने उग्रचंडी के रूप में अपने पिता के यज्ञ का विध्वंस किया था। इनके हाथों की संख्या १८ मानी जाती है। आश्विन महीने में कृष्णपक्ष की नवमी दिन शाक्तमतावलंबी विशेष रूप से उग्रचंडी की पूजा करते हैं।
== दीर्घा ==
<gallery>
चित्र:Maa Durga.jpg|दुर्गा पूजा में स्थापित माँ दुर्गा की प्रतिमा
चित्र:Durga Mahisasuramardini.JPG
चित्र:S344 durga-idol-golden.png|माँ दुर्गा की स्वर्ण प्रतिमा
चित्र:Goddesses (2672698653).jpg
चित्र:Durga, Burdwan, 2011.JPG
File:Goddess Durga Maa 2.jpg
File:Goddess Durga Maa.jpg
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== स्तुति ==
श्री [[दुर्गा सप्तशती]] मे शास्त्रोंक्त स्तुति के कुछ श्लोक जो प्रचलित व प्रसिद्ध हैं यथा निम्नलिखित है -
{{rquote|center|''
या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
या देवी सर्वभेतेषु चेतनेत्यभिधीयते। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
यादेवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥<ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=ctniDwAAQBAJ&pg=PT527&dq=%E0%A4%AF%E0%A4%BE+%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%80+%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%B7%E0%A5%81+%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A3%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BF+%E0%A4%B6%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE&hl=en&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwiZ8472iZGCAxWibWwGHewjBSsQ6AF6BAgPEAM#v=onepage&q=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%20%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%80%20%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%B7%E0%A5%81%20%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A3%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BF%20%E0%A4%B6%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE&f=false|title=Paratatva Stuti: A COLLECTION OF HINDU MANTRAS, STOTRAS AND KEERTANS|last=K|first=Naveena C.|publisher=Naveena C K|language=en}}</ref>''|दुर्गा सप्तशती}}
== इन्हें भी देखें ==
* [[दुर्गा पूजा]]
* [[माँ वत्सला भवानी]]
* [[शक्ति]]
* [[शाक्त सम्प्रदाय]]
* [[पान्थोइबी]]
* [[हुदुर दुर्गा]]
* [[देवीमाहात्म्य]]
* [[नवदुर्गा]]
* [[महाविद्या]]
* [[दुर्गा सप्तशती के सिद्ध-मंत्र]]
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{हिन्दू देवी देवता}}
{{हिन्दू धर्म}}
[[श्रेणी:हिन्दू धर्म]]
[[श्रेणी:हिन्दू देवियाँ]]
[[श्रेणी:कॉमन्स पर निर्वाचित चित्र युक्त लेख]]
[[श्रेणी:दुर्गा]]
e165rdyfoz3yjc87s9eirpuudlxcovy
कोशिका
0
6108
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2026-10-18T08:23:43Z
Anitya Gautam
916080
6630658
wikitext
text/x-wiki
{{आज का आलेख}}
[[चित्र:Epithelial-cells.jpg|right|thumb|160px|कोशिका]]
'''कोशिका''' (Cell) सजीवों के शरीर की रचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है और प्राय: स्वत: जनन की सामर्थ्य रखती है। यह विभिन्न पदार्थों का वह छोटे-से-छोटा संगठित रूप है जिसमें वे सभी क्रियाएँ होती हैं जिन्हें सामूहिक रूप से हम जीवन कहते हैं।
'कोशिका' का अंग्रेजी शब्द ''सेल'' (''Cell'') [[लातिन भाषा|लैटिन भाषा]] के 'शेलुला' शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ 'एक छोटा कमरा' है। कुछ सजीव जैसे [[जीवाणु|जीवाणुओं]] के [[शरीर]] एक ही [[कोशिका]] से बने होते हैं, उन्हें एककोशकीय जीव कहते हैं जबकि कुछ सजीव जैसे [[होमो सेपियन्स|मनुष्य]] का शरीर अनेक कोशिकाओं से मिलकर बना होता है उन्हें बहुकोशकीय सजीव कहते हैं। कोशिका की खोज [[रॉबर्ट हुक|रॉबर्ट हूक]] ने [[१६६५]] ई० में किया।<ref name="Hooke">"<cite>... I could exceedingly plainly perceive it to be all perforated and porous, much like a Honey-comb, but that the pores of it were not regular [..] these pores, or cells, [..] were indeed the first microscopical pores I ever saw, and perhaps, that were ever seen, for I had not met with any Writer or Person, that had made any mention of them before this. . .</cite>" – Hooke describing his observations on a thin slice of cork. [http://www.ucmp.berkeley.edu/history/hooke.html Robert Hooke] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090204111047/http://ucmp.berkeley.edu/history/hooke.html |date=4 फ़रवरी 2009 }}</ref> [[१८३९]] ई० में श्लाइडेन तथा श्वान ने [[कोशिका सिद्धान्त]] प्रस्तुत किया जिसके अनुसार सभी सजीवों का शरीर एक या एकाधिक कोशिकाओं से मिलकर बना होता है तथा सभी कोशिकाओं की उत्पत्ति पहले से उपस्थित किसी कोशिका से ही होती है।
सजीवों की सभी जैविक क्रियाएँ कोशिकाओं के भीतर होती हैं। कोशिकाओं के भीतर ही आवश्यक [[अनुवांशिकता|आनुवांशिक सूचनाएँ]] होती हैं जिनसे कोशिका के कार्यों का नियंत्रण होता है तथा सूचनाएँ अगली पीढ़ी की कोशिकाओं में स्थानान्तरित होती हैं।<ref>{{cite book
| last = Maton
| first = Anthea
| authorlink =
| author2 = Hopkins, Jean Johnson, Susan LaHart, David Quon Warner, Maryanna Wright, Jill D
| title = Cells Building Blocks of Life
| publisher = Prentice Hall
| year = 1997
| location = New Jersey
| pages =
| url = https://archive.org/details/cellsbuildingblo00mato
| doi =
| id =
| isbn = 0-13-423476-6
| url-access = registration
}}</ref>
कोशिकाओं का विधिवत अध्ययन [[कोशिका विज्ञान]] (Cytology) या '[[कोशिका विज्ञान|कोशिका जैविकी]]' (Cell Biology) कहलाता है।
== आविष्कार एवं अनुसंधान का इतिहास ==
* [[रॉबर्ट हुक]] ने 1665 में बोतल की [[कार्क]] की एक पतली परत के अध्ययन के आधार पर मधुमक्खी के छत्ते जैसे कोष्ठ देखे और इन्हें कोशा नाम दिया। यह तथ्य उनकी पुस्तक माइक्रोग्राफ़िया में छपा। राबर्ट हुक ने कोशा-भित्तियों के आधार पर कोशा शब्द प्रयोग किया।
* '''1674''' [[एंटोनी वॉन ल्यूवेन्हॉक]] ने जीवित कोशा का सर्वप्रथम अध्ययन किया।
उन्होंने जीवित कोशिका को दाँत की खुरचनी में देखा था ।
* '''1831''' में [[रॉबर्ट ब्राउन (वनस्पतिशास्त्री)|रॉबर्ट ब्राउन]] ने कोशिका में 'केंद्रक एवं केंद्रिका' का पता लगाया।
* तदरोचित नामक वैज्ञानिक ने 1824 में कोशिका सिद्धांत (cell theory) का विचार प्रस्तुत किया, परन्तु इसका श्रेय वनस्पति-विज्ञान-शास्त्री श्लाइडेन (Matthias Jakob Schleiden) और जन्तु-विज्ञान-शास्त्री श्वान (Theodor Schwann) को दिया जाता है जिन्होंने ठीक प्रकार से कोशिका सिद्धांत को (1839 में) प्रस्तुत किया और बतलाया कि 'कोशिकाएं पौधों तथा जन्तुओं की रचनात्मक इकाई हैं।'
* '''1855''' : रुडॉल्फ विर्चो ने विचार रखा कि कोशिकाएँ सदा [[कोशिका विभाजन|कोशिकाओं के विभाजन]] से ही पैदा होती हैं।
* '''1953''': वाट्सन और क्रिक (Watson and Crick) ने डीएनए के 'डबल-हेलिक्स संरचना' की पहली बार घोषणा की।
* '''1981''': लिन मार्गुलिस (Lynn Margulis) ने कोशिका क्रम विकास में 'सिबियोस' (Symbiosis in Cell Evolution) पर शोधपत्र प्रस्तुत किया।
* '''1888''': में वाल्डेयर (Waldeyer) ने गुणसूत्र (Chromosome) का नामकरण किया ।
* '''1883''': ईमें स्विम्पर (ने पर्णहरित (Chloroplast) Schimper) का नामकरण किया ।
* '''1892''': में वीजमैन (Weissman) ने सोमेटोप्लाज़्म (Somatoplasm) एवं जर्मप्लाज्म (Germplasm) के बीच अंतर स्पष्ट किया।
* '''1955''': में जी.इ पैलेड (G.E. Palade) ने राइबोसोम (Ribosome) की खोज की। <ref>{{Cite web |url=https://www.hindistudy.in/2018/10/discovery-of-cell-hindi.html |title=कोशिका की खोज "HindStudy.in" |access-date=5 नवंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181106004639/https://www.hindistudy.in/2018/10/discovery-of-cell-hindi.html |archive-date=6 नवंबर 2018 |url-status=dead }}</ref>
== प्रकार ==
[[चित्र:Celltypes.svg|right|thumb|300px|दो प्रकार की कोशिकाएँ : यूकैरोटिक (बाएँ) तथा प्रोकैरिओटिक (दाएँ)]]
कोशिकाएँ दो प्रकार की होती हैं,
* [[प्रोकैरियोटिक कोशिका]] (prokaryotic cells) तथा
* [[सुकेन्द्रिक|यूकैरियोटिक कोशिका]] (eukaryotic cell)
प्रोकैरियोटिक कोशिकाएँ प्रायः स्वतंत्र होती हैं जबकि यूकैरियोटिक कोशिकाएँ, बहुकोशीय प्राणियों में पायी जाती हैं। प्रोकैरियोटिक कोशिका में कोई स्पष्ट [[कोशिका केन्द्रक|केन्द्रक]] नहीं होता है। इनमें पाए जाने वाले अल्पविकसित केन्द्रक को केंद्रकाभ कहते है जो कोशिका द्रव में बिखरे होते हैं। इस प्रकार की कोशिका जीवाणु तथा नीली हरी शैवाल में पायी जाती है। सभी उच्च श्रेणी के पौधों और जन्तुओं में यूकैरियोटिक प्रकार की कोशिका पाई जाती है। सभी यूकैरियोटिक कोशिकाओ में संगठित [[कोशिका केन्द्रक|केन्द्रक]] पाया जाता है जो एक आवरण से ढका होता है।
== कोशिका संरचना ==
कोशिकाएँ सजीव होती हैं तथा वे सभी कार्य करती हैं, जिन्हें सजीव प्राणी करते हैं। इनका आकार अतिसूक्ष्म तथा आकृति गोलाकार, अंडाकार, स्तंभाकार, रोमकयुक्त, कशाभिकायुक्त, बहुभुजीय आदि प्रकार की होती है। ये जेली जैसी एक वस्तु द्वारा घिरी होती हैं। इस आवरण को कोशिकावरण (cell membrane) या कोशिका-झिल्ली कहते हैं यह झिल्ली अवकलीय पारगम्य (selectively permeable) होती है जिसका अर्थ है कि यह झिल्ली किसी पदार्थ ([[अणु]] या [[आयन|ऑयन]]) को मुक्त रूप से पार होने देती है, सीमित मात्रा में पार होने देती है या बिल्कुल रोक देती है। इसे कभी-कभी 'जीवद्रव्य कला' (plasma membrane) भी कहा जाता है। इसके भीतर निम्नलिखित संरचनाएँ पाई जाती हैं:-
:(1) केंद्रक एवं केंद्रिका
:(2) जीवद्रव्य
:(3) गोल्गी सम्मिश्र या गोल्गी यंत्र
:(4) कणाभ सूत्र
:(5) अंतर्प्रद्रव्य डालिका
:(6) गुणसूत्र (पितृसूत्र) एवं जीन
:(7) राइबोसोम तथा सेन्ट्रोसोम
:(8) लवक
कुछ खास भिन्नताओं को छोड़ सभी प्रकार की कोशिकाओं, पादप एवं जन्तु कोशिका की संरचना लगभग एक जैसी होती है। ये सजीव और निर्जीव दोनों तरह की इकाईयों से मिलकर बनी होती हैं। एक सामान्य कोशिका या प्रारूपिक कोशिका के मुख्य तीन भाग हैं, कोशिकावरण, कोशिका द्रव्य एवं केन्द्रक। कोशिकावरण कोशिका का सबसे बाहर का आवरण या घेरा है। पादप कोशिका में [[कोशिका भित्ति]] और [[कोशिका झिल्ली]] मिलकर कोशिकावरण का निर्माण करते हैं। जन्तु कोशिका में कोशिका भित्ति नहीं पाई जाती अतः कोशिका झिल्ली ही सबसे बाहरी आवरण है। कोशिका झिल्ली एवं केन्द्रक के बीच के भाग को कोशिका द्रव्य कहा जाता है, इसमें विभिन्न कोशिकांग होते हैं। केन्द्रक कोशिका के अन्दर पाये जाने वाली एक गोल एवं सघन रचना है। केन्द्रक को कोशिका का '[[मस्तिष्क]]' कहा जाता है। जिस प्रकार शरीर के सारे क्रियायों का नियंत्रण मस्तिष्क करता है ठीक उसी प्रकार कोशिका के सारे कार्यों का नियंत्रण केन्द्रक द्वारा होता है।
=== केंद्रक===
एक कोशिका में सामान्यतः एक ही केंद्रक (nucleus) होता है, किंतु कभी-कभी एक से अधिक केंद्रक भी पाए जाते हैं। कोशिका के समस्त कार्यों का यह संचालन केंद्र होता है। जब कोशिका विभाजित होती है तो इसका भी विभाजन हो जाता है। केंद्रक कोशिका के भीतर एक तरल पदार्थ कोशिकाद्रव्य (cytoplasm) में प्राय: तैरता रहता है। इसका यद्यपि कोई निश्चित स्थान नहीं होता, तथापि यह अधिकतर लगभग मध्यभाग में ही स्थित होता है। कुछ कोशिकाओं में इसकी स्थिति आधारीय (basal) और कुछ में सीमांतीय (peripheral) भी होती है। केंद्रक की आकृति गोलाकार, वर्तुलाकार या अंडाकार होती है। तथापि, कभी-कभी यह बेलनाकार, दीर्घवृत्ताकार, सपात, शाखान्वित, नाशपाती जैसा, भालाकार आदि स्वरूपों का भी हो सकता है। इसके भीतर केंद्रकरस (nuclear sap) केंद्रिका (nucleolus) तथा पितृसूत्र (chromosomes) पाए जाते हैं। केंद्रक के आवरण को केंद्रककला (nuclear membrance or nucleolemma) कहते हैं।
==== केंद्रिका (Nucleolus) ====
प्रत्येक केंद्रक में एक या अधिक केंद्रिकाएँ पाई जाती हैं। कोशिका विभाजन की कुछ विशेष अवस्था में केंद्रिका लुप्त हो जाती, किंतु बाद में पुन: प्रकट हो जाती है। केंद्रिका के भीतर रिबोन्यूक्लीइक अम्ल (ritioncleric acid or RNA) तथा कुछ विशेष प्रकार के एंज़ाइम अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। केंद्रिका सूत्रण (mitosis) या सूत्री विभाजन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।
=== जीवद्रव्य (protoplasm) ===
यह एक गाढ़ा तरल पदार्थ होता है जो स्थानविशेष पर विशेष नामों द्वारा जाना जाता है; जैसे, द्रव्यकला (plasma membrane) तथा केंद्रक के मध्यवर्ती स्थान में पाए जाने वाले जीवद्रव्य को कोशिकाद्रव्य (cyt plasm) और केंद्रक झिल्ली (nuclear membrane) के भीतर पाए जाने वाले जीवद्रव्य को केंद्रक द्रव्य (nucleoplasm) कहते हैं। कोशिका का यह भाग अत्यंत चैतन्य और कोशिका की समस्त जैवीय प्रक्रियाओं का केंद्र होता है। इसे इसीलिए 'सजीव' (living) कहा जाता है। जीव वैज्ञानिक इसे 'जीवन का भौतिक आधार' (physcial basis of life) नाम से संबोधित करते हैं। आधुनिक जीव वैज्ञानिकों ने जीवद्रव्य का रासायनिक विश्लेषण करके यह तो पता लगा लिया है कि उसका निर्माण किन-किन घटकों द्वारा हुआ है, किंतु आज तक किसी भी वैज्ञानिक को उसमें (जीवद्रव्य) प्राण का संचार करने में सफलता हाथ नहीं लगी है। ऐसा है यह प्रकृति का रहस्यमय पदार्थ।
जीवद्रव्य का निर्माण कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन तथा अनेक कार्बनिक (organic) तथा अकार्बनिक (inorganic) पदार्थो द्वारा हुआ होता है। इसमें जल की मात्रा लगभग 80% प्रोटीन 15%, वसाएँ 3% तथा कार्बोहाइड्रेट 1% और अकार्बनिक लवण की 1 होती है। जीवद्रव्यों के कई प्रकार होते हैं, जैसे कोलाइड (colloid), कणाभ (granular), तंतुमय (fibrillar), जालीदार (reticular), कूपिकाकार (alveolar), आदि।
=== गोल्गी सम्मिश्र या यंत्र (Golgi complex or apparatus) ===
इस अंग का यह नाम इसके खोजकर्ता कैमिलो गोल्गी, के नाम पर पड़ा है, जिन्होंने 1898 में सर्वप्रथम इसकी खोज की। यह अंग साधारणतः केंद्रक के समीप, अकेले या समूहों में पाया जाता है। इसकी रचना तीन तत्वों (elements) या घटकों (components) द्वारा हुई होती है : सपाट कोश (flattened sacs), बड़ी बड़ी रिक्तिकाएँ (large vacueles) तथा आशय (vesicles)। यह एक प्रकार के जाल (network) जैसा दिखलाई देता है। इनका मुख्य कार्य कोशिकीय स्रवण (cellular secretion) और प्रोटीनों, वसाओं तथा कतिपय किण्वों (enzymes) का भडारण करना (storage) है।
=== कणाभसूत्र (Mitochondria) ===
ये कणिकाओं (granules) या शलाकाओं (rods) की आकृतिवाले होते हैं। ये अंगक (organelle) कोशिकाद्रव्य (cytoplasm) में स्थित होते हैं। इनकी संख्या विभिन्न जंतुओं में पाँच लाख तक हो सकती है। इनका आकार 1/2 माइक्रॉन से लेकर 2 माइक्रॉन के बीच होता है। विरल उदाहरणों (rare cases) में इनकी लंबाई 40 माइक्रॉन तक हो सकती है। इनके अनेक कार्य बतलाए गए हैं, जो इनकी आकृति पर निर्भर करते हैं। तथापि इनका मुख्य कार्य कोशिकीय श्वसन (cellular respiration) बतलाया जाता है। इन्हें कोशिका का 'पावर प्लांट' (power plant) कहा जाता है, क्योंकि इनसे आवश्यक ऊर्जा (energy) की आपूर्ति होती रहती है।
=== अंतर्प्रद्रव्य जालिका (fndoplasmic reticulum) ===
यह जालिका कोशिकाद्रव्य (cytoplasm) में आशयों (vesicles) और नलिकाओं (tubules) के रूप में फैली रहती है। इसकी स्थिति सामान्यतः केंद्रकीय झिल्ली (nuclear membrane) तथा द्रव्यकला (plasma membrane) के बीच होती है, किंतु यह अक्सर संपूर्ण कोशिका में फैली रहती है। यह जालिका दो प्रकार की होती है : चिकनी सतहवाली (smooth surfaced) और खुरदुरी सतहवाली (rough surfaced)। इसकी सतह खुरदुरी इसलिए होती है कि इस पर राइबोसोम (ribosomes) के कण बिखरे रहते हैं। इसके अनके कार्य बतलाए गए हैं, जैसे यांत्रिक आधारण (mechanical support), द्रव्यों का प्रत्यावर्तन (exchange of materials), अंत: कोशिकीय अभिगमन (intracellular transport), प्रोटोन संश्लेषण (protein synthesis) इत्यादि।
=== [[गुणसूत्र]] या [[पितृसूत्र]] ([[chromosomes]]) ===
यह शब्द क्रोम ([[ chrom ]]) तथा [[सोमा]] ([[ soma ]]) शब्दों से मिलकर बना है, जिसका अर्थ होता है : [[रंगीन पिंड]] ([[colour bodies]])। गुणसूत्र केंद्रकों के भीतर जोड़ों (pairs) में पाए जाते हैं और कोशिका विभाजन के साथ केंद्रक सहित बाँट जाया करते हैं। इनमें स्थित जीवों की पूर्वजों के पैत्रिक गुणों का वाहक कहा जाता है। इनकी संख्या जीवों में निश्चित होती है, जो एक दो जोड़ों से लेकर कई सौ जोड़ों तक हो सकती है। इनका आकार 1 माइक्रॉन से 30 [[माइक्रोन]] तक (लंबा) होता है। इनकी आकृति साधारणतः अंग्रेजी भाषा के अक्षर S जैसी होती हैं। इनमें [[न्यूक्लिओ-प्रोटीन]] ([[nucle-o-protein]]) मुख्य रूप से पाए जाते हैं। पितृसूत्रों के कुछ विशेष प्रकार भी पाए जाते हैं, जिन्हें [[लैंपब्रश पितृसूत्र]] ([[lanmpbrush chromosomes]]) और [[पोलीटेने क्रोमोसोम]] ([[polyteene chromosomes]]) की संज्ञा दी गई है। इन्हें W, X, Y, Z, आदि नामों से संबोधित किया जाता है।
==== [[जीन]] (gene) ====
जीनों को पैत्रिक गुणों का वाहक (carriers of hereditary characters) माना जाता है। क्रोमोसोम या पितृसूत्रों का निर्माण हिस्टोन प्रोटीन तथा डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक ऐसिड [[ DNA ]] तथा राइबोन्यूक्लिक ऐसिड [[ RNA ]] से मिलकर हुआ होता है। जीन का निर्माण इन्हीं में से एक, डी॰ एन॰ ए॰ द्वारा होता है। कोशिका विभाजनों के फलस्वरूप जब नए जीव के जीवन का सूत्रपात होता है, तो यही जीन पैतृक एवं शरीरिक गुणों के साथ माता पिता से निकलकर संततियों में चले जाते हैं। यह आदान प्रदान माता के [[डिंब]] ([[ovum]]) तथा पिता के [[शुक्राणु]] (sperms) में स्थित जीनों के द्वारा संपन्न होता है। सन् [[1970]] के जून मास में अमरीका स्थित भारतीय [[वैज्ञानिक]] श्री [[हरगोविंद खुराना]] को कृत्रिम जीन उत्पन्न करने में अभूतपूर्व सफलता मिली थी। इन्हें सन् [[1978]] में [[नोबेल पुरस्कार]] मिला था।
=== रिबोसोम (ribosomes) सेंट्रोसोम (centrosomes) ===
सूक्ष्म गुलिकाओं के रूप में प्राप्त इन संरचनाओं को केवल इलेक्ट्रॉन माइक्रॉस्कोप के द्वारा ही देखा जा सकता है। इनकी रचना 50% प्रोटीन तथा 50% आर॰ एन॰ ए॰ द्वारा हुई होती है। ये विशेषकर अंतर्प्रद्रव्य जालिका के ऊपर पाए जाते हैं। इनमें प्रोटीनों का संश्लेषण होता है।
'''सेंट्रोसोम''' (centrosomes)– ये केंद्रक के समीप पाए जाते हैं। इनके एक विशेष भाग को सेंट्रोस्फीयर (centrosphere) कहते हैं, जिसके भीतर सेंट्रिओलों (centrioles) का एक जोड़ा पाया जाता है। कोशिका विभाजन के समय ये विभाजक कोशिका के ध्रुव (pole) का निर्धारण और कुछ कोशिकाओं में कशाभिका (flagella) जैसी संरचनाओं को उत्पन्न करते हैं।
=== लवक (plastids) ===
लवक अधिकतर पौधों में ही पाए जाते हैं। ये एक प्रकार के रंजक कण (pigment granules) हैं, जो जीवद्रव्य (protoplasm) में यत्र तत्र बिखरे रहते हैं। क्लोरोफिल (chlorophyll) धारक वर्ण के लवक को हरित् लवक (chloroplas) कहा जाता है। इसी के कारण वृक्षों में हरापन दिखलाई देता है। क्लोरोफिल के ही कारण पेड़ पौधे प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) करते हैं। कुछ वैज्ञानिकों के मतानुसार लवक कोशिकाद्रव्यीय वंशानुगति (cytoplasmic inheritance) के रूप में कोशिका विभाजन के समय संतति कोशिकाओं में सीधे सीधे स्थानांतरित हो जाते हैं।
=== कोशिका विभाजन ( Cell Division ) ===
कोशिका विभाजन के प्रक्रिया की जानकारी सर्वप्रथम 1855 ई. में विरचाऊ को हुई।
कोशिका में विभाजन तीन तरीके से होता है *
असूत्री विभाजन ( Amitosis ) : जीवाणु, नील हरित शैवाल, यीस्ट, अमीबा तथा कुछ अन्य प्रोटोजोआ आदि जिनमें अविकसित कोशिकाएँ होती हैं, उनमें ‘असूत्री विभाजन’ होती है।
समसूत्री विभाजन ( Mitosis ) : समसूत्री विभाजन सिर्फ कायिक कोशिकाओं (Somatic Cells) में होता है।
* 1882 ई. में ‘वाल्टर फ्लेमिंग’ द्वारा ही कोशिका के इस विभाजन को Mitosis (समसूत्री विभाजन) नाम दिया गया।
* समसूत्री विभाजन इंटरफेज, प्रोफेज, मेटाफेज, एनाफेज तथा टेलोफेज जैसी 5 अवस्थाओं में संपन्न होता है।
* दो कोशिका विभाजनों के बीच की वह अवधि जिसमें कोशिका स्वयं को विभाजन के लिए तैयार करती है, इंटरफेज कहलाती है।
* प्रोफेज विभाजन की प्रथम अवस्था है। इसके अंत तक केंद्रक विलुप्त हो जाता है।
* ‘गुणसूत्र’ मध्य रेखा (Equitorial Plate) पर मेटाफेज में आते हैं।
* एनाफेज सबसे कम अवधि (2-3 मिनट) में संपन्न होने वाली अवस्था है। इसमें क्रोमैटिड
* U.V. या L की आकृति ले लेते हैं।
* समसूत्री विभाजन की अंतिम अवस्था टेलोफेज है।
* समसूत्री विभाजन के परिणामस्वरूप एक जनक कोशिका से दो संतति कोशिकाओं का जन्म होता है।
* समसूत्री विभाजन के परिणाम स्वरूप बने प्रत्येक संतति कोशिका में गुणसूत्रों की संख्या जनक कोशिका के समान ही होती है।
* विभाजन के कारण जीवों में वृद्धि एवं विकास होता है। कुछ सूक्ष्म जीवों में इसी विभाजन के द्वारा अलैंगिक प्रजनन की क्रिया होती है।
* समसूत्री विभाजन द्वारा शरीर में नवीन कोशिकाओं का निर्माण होता है, इस प्रकार शरीर की मरम्मत होती है एवं घाव भरते हैं।
अर्द्धसूत्री विभाजन ( Meiosis )
* इसे न्यूनकारी विभाजन भी कहते हैं
* इस विभाजन का नाम ‘Meiosis’ 1905 ई. में फार्मर तथा मूरे ने रखा।
* अर्द्धसूत्री विभाजन की ओर वीज मैन द्वारा की गई तथा इसका सर्वप्रथम विस्तृत अध्ययन 1888 ई. में स्ट्रॉसवर्गर ने किया।
* यह विभाजन सिर्फ जनन कोशिकाओं (Sex Cells) में होता है।
* अर्द्धसूत्री विभाजन की दो अवस्थाएँ होती हैंअर्द्धसूत्री-I एवं अर्द्धसूत्री-III)
* अर्द्धसूत्री-I विभाजन में चार अवस्थायें आती हैंप्रोफेज-I, मेटाफेज-I, एनाफेज-I तथा टेलोफेज-I।
कोशिका में जीवद्रव्य पाया जाता है जिसे वैज्ञानिक हक्सले ने जीवन का भौतिक आधार बताया।
जीवद्रव्य में सर्वाधिक मात्रा में जल पाया जाता है जबकि कार्बनिक पदार्थ के रूप में सर्वाधिक मात्रा में प्रोटीन पायी जाती है।
== कार्य ==
=== वृद्धि तथा चयापचय ===
=== सृजन ===
=== प्रोटीन संश्लेषण ===
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
== इन्हें भी देखें ==
* [[कोशिका विज्ञान]] (Cytology)
* [[ऊतक विज्ञान]] (Histology)
* [[कोशिकांग]] (organelle)
{{कोशिका}}
{{जीवविज्ञान}}
[[श्रेणी:कोशिकाविज्ञान]]
[[श्रेणी:कोशिका]]
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Anitya Gautam
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{{आज का आलेख}}
[[चित्र:Epithelial-cells.jpg|right|thumb|160px|कोशिका]]
'''कोशिका''' (Cell) सजीवों के शरीर की रचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है और प्राय: स्वत: जनन की सामर्थ्य रखती है। यह विभिन्न पदार्थों का वह छोटे-से-छोटा संगठित रूप है जिसमें वे सभी क्रियाएँ होती हैं जिन्हें सामूहिक रूप से हम जीवन कहते हैं।
'कोशिका' का अंग्रेजी शब्द ''सेल'' (''Cell'') [[लातिन भाषा|लैटिन भाषा]] के 'शेलुला' शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ 'एक छोटा कमरा' है। कुछ सजीव जैसे [[जीवाणु|जीवाणुओं]] के [[शरीर]] एक ही [[कोशिका]] से बने होते हैं, उन्हें एककोशकीय जीव कहते हैं जबकि कुछ सजीव जैसे [[होमो सेपियन्स|मनुष्य]] का शरीर अनेक कोशिकाओं से मिलकर बना होता है उन्हें बहुकोशकीय सजीव कहते हैं। कोशिका की खोज [[रॉबर्ट हुक|रॉबर्ट हूक]] ने [[१६६५]] ई० में किया।<ref name="Hooke">"<cite>... I could exceedingly plainly perceive it to be all perforated and porous, much like a Honey-comb, but that the pores of it were not regular [..] these pores, or cells, [..] were indeed the first microscopical pores I ever saw, and perhaps, that were ever seen, for I had not met with any Writer or Person, that had made any mention of them before this. . .</cite>" – Hooke describing his observations on a thin slice of cork. [http://www.ucmp.berkeley.edu/history/hooke.html Robert Hooke] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090204111047/http://ucmp.berkeley.edu/history/hooke.html |date=4 फ़रवरी 2009 }}</ref> [[१८३९]] ई० में श्लाइडेन तथा श्वान ने [[कोशिका सिद्धान्त]] प्रस्तुत किया जिसके अनुसार सभी सजीवों का शरीर एक या एकाधिक कोशिकाओं से मिलकर बना होता है तथा सभी कोशिकाओं की उत्पत्ति पहले से उपस्थित किसी कोशिका से ही होती है।
सजीवों की सभी जैविक क्रियाएँ कोशिकाओं के भीतर होती हैं। कोशिकाओं के भीतर ही आवश्यक [[अनुवांशिकता|आनुवांशिक सूचनाएँ]] होती हैं जिनसे कोशिका के कार्यों का नियंत्रण होता है तथा सूचनाएँ अगली पीढ़ी की कोशिकाओं में स्थानान्तरित होती हैं।<ref>{{cite book
| last = Maton
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| author2 = Hopkins, Jean Johnson, Susan LaHart, David Quon Warner, Maryanna Wright, Jill D
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| publisher = Prentice Hall
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}}</ref>
कोशिकाओं का विधिवत अध्ययन [[कोशिका विज्ञान]] (Cytology) या '[[कोशिका विज्ञान|कोशिका जैविकी]]' (Cell Biology) कहलाता है।
== आविष्कार एवं अनुसंधान का इतिहास ==
* [[रॉबर्ट हुक]] ने 1665 में बोतल की [[कार्क]] की एक पतली परत के अध्ययन के आधार पर मधुमक्खी के छत्ते जैसे कोष्ठ देखे और इन्हें कोशा नाम दिया। यह तथ्य उनकी पुस्तक माइक्रोग्राफ़िया में छपा। राबर्ट हुक ने कोशा-भित्तियों के आधार पर कोशा शब्द प्रयोग किया।
* '''1674''' [[एंटोनी वॉन ल्यूवेन्हॉक]] ने जीवित कोशा का सर्वप्रथम अध्ययन किया।
उन्होंने जीवित कोशिका को दाँत की खुरचनी में देखा था ।
* '''1831''' में [[रॉबर्ट ब्राउन (वनस्पतिशास्त्री)|रॉबर्ट ब्राउन]] ने कोशिका में 'केंद्रक एवं केंद्रिका' का पता लगाया।
* तदरोचित नामक वैज्ञानिक ने 1824 में कोशिका सिद्धांत (cell theory) का विचार प्रस्तुत किया, परन्तु इसका श्रेय वनस्पति-विज्ञान-शास्त्री श्लाइडेन (Matthias Jakob Schleiden) और जन्तु-विज्ञान-शास्त्री श्वान (Theodor Schwann) को दिया जाता है जिन्होंने ठीक प्रकार से कोशिका सिद्धांत को (1839 में) प्रस्तुत किया और बतलाया कि 'कोशिकाएं पौधों तथा जन्तुओं की रचनात्मक इकाई हैं।'
* '''1855''' : रुडॉल्फ विर्चो ने विचार रखा कि कोशिकाएँ सदा [[कोशिका विभाजन|कोशिकाओं के विभाजन]] से ही पैदा होती हैं।
* '''1953''': वाट्सन और क्रिक (Watson and Crick) ने डीएनए के 'डबल-हेलिक्स संरचना' की पहली बार घोषणा की।
* '''1981''': लिन मार्गुलिस (Lynn Margulis) ने कोशिका क्रम विकास में 'सिबियोस' (Symbiosis in Cell Evolution) पर शोधपत्र प्रस्तुत किया।
* '''1888''': में वाल्डेयर (Waldeyer) ने गुणसूत्र (Chromosome) का नामकरण किया ।
* '''1883''': ईमें स्विम्पर (ने पर्णहरित (Chloroplast) Schimper) का नामकरण किया ।
* '''1892''': में वीजमैन (Weissman) ने सोमेटोप्लाज़्म (Somatoplasm) एवं जर्मप्लाज्म (Germplasm) के बीच अंतर स्पष्ट किया।
* '''1955''': में जी.इ पैलेड (G.E. Palade) ने राइबोसोम (Ribosome) की खोज की। <ref>{{Cite web |url=https://www.hindistudy.in/2018/10/discovery-of-cell-hindi.html |title=कोशिका की खोज "HindStudy.in" |access-date=5 नवंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181106004639/https://www.hindistudy.in/2018/10/discovery-of-cell-hindi.html |archive-date=6 नवंबर 2018 |url-status=dead }}</ref>
== प्रकार ==
[[चित्र:Celltypes.svg|right|thumb|300px|दो प्रकार की कोशिकाएँ : यूकैरोटिक (बाएँ) तथा प्रोकैरिओटिक (दाएँ)]]
कोशिकाएँ दो प्रकार की होती हैं,
* [[प्रोकैरियोटिक कोशिका]] (prokaryotic cells) तथा
* [[सुकेन्द्रिक|यूकैरियोटिक कोशिका]] (eukaryotic cell)
प्रोकैरियोटिक कोशिकाएँ प्रायः स्वतंत्र होती हैं जबकि यूकैरियोटिक कोशिकाएँ, बहुकोशीय प्राणियों में पायी जाती हैं। [[प्रोकैरियोटिक कोशिका]] में कोई स्पष्ट [[कोशिका केन्द्रक|केन्द्रक]] नहीं होता है। इनमें पाए जाने वाले अल्पविकसित केन्द्रक को केंद्रकाभ कहते है जो कोशिका द्रव में बिखरे होते हैं। इस प्रकार की कोशिका जीवाणु तथा नीली हरी शैवाल में पायी जाती है। सभी उच्च श्रेणी के पौधों और जन्तुओं में यूकैरियोटिक प्रकार की कोशिका पाई जाती है। सभी यूकैरियोटिक कोशिकाओ में संगठित [[कोशिका केन्द्रक|केन्द्रक]] पाया जाता है जो एक आवरण से ढका होता है।
== कोशिका संरचना ==
कोशिकाएँ सजीव होती हैं तथा वे सभी कार्य करती हैं, जिन्हें सजीव प्राणी करते हैं। इनका आकार अतिसूक्ष्म तथा आकृति गोलाकार, अंडाकार, स्तंभाकार, रोमकयुक्त, कशाभिकायुक्त, बहुभुजीय आदि प्रकार की होती है। ये जेली जैसी एक वस्तु द्वारा घिरी होती हैं। इस आवरण को कोशिकावरण (cell membrane) या कोशिका-झिल्ली कहते हैं यह झिल्ली अवकलीय पारगम्य (selectively permeable) होती है जिसका अर्थ है कि यह झिल्ली किसी पदार्थ ([[अणु]] या [[आयन|ऑयन]]) को मुक्त रूप से पार होने देती है, सीमित मात्रा में पार होने देती है या बिल्कुल रोक देती है। इसे कभी-कभी 'जीवद्रव्य कला' (plasma membrane) भी कहा जाता है। इसके भीतर निम्नलिखित संरचनाएँ पाई जाती हैं:-
:(1) केंद्रक एवं केंद्रिका
:(2) जीवद्रव्य
:(3) गोल्गी सम्मिश्र या गोल्गी यंत्र
:(4) कणाभ सूत्र
:(5) अंतर्प्रद्रव्य डालिका
:(6) गुणसूत्र (पितृसूत्र) एवं जीन
:(7) राइबोसोम तथा सेन्ट्रोसोम
:(8) लवक
कुछ खास भिन्नताओं को छोड़ सभी प्रकार की कोशिकाओं, पादप एवं जन्तु कोशिका की संरचना लगभग एक जैसी होती है। ये सजीव और निर्जीव दोनों तरह की इकाईयों से मिलकर बनी होती हैं। एक सामान्य कोशिका या प्रारूपिक कोशिका के मुख्य तीन भाग हैं, कोशिकावरण, कोशिका द्रव्य एवं केन्द्रक। कोशिकावरण कोशिका का सबसे बाहर का आवरण या घेरा है। पादप कोशिका में [[कोशिका भित्ति]] और [[कोशिका झिल्ली]] मिलकर कोशिकावरण का निर्माण करते हैं। जन्तु कोशिका में कोशिका भित्ति नहीं पाई जाती अतः कोशिका झिल्ली ही सबसे बाहरी आवरण है। कोशिका झिल्ली एवं केन्द्रक के बीच के भाग को कोशिका द्रव्य कहा जाता है, इसमें विभिन्न कोशिकांग होते हैं। केन्द्रक कोशिका के अन्दर पाये जाने वाली एक गोल एवं सघन रचना है। केन्द्रक को कोशिका का '[[मस्तिष्क]]' कहा जाता है। जिस प्रकार शरीर के सारे क्रियायों का नियंत्रण मस्तिष्क करता है ठीक उसी प्रकार कोशिका के सारे कार्यों का नियंत्रण केन्द्रक द्वारा होता है।
=== केंद्रक===
एक कोशिका में सामान्यतः एक ही केंद्रक (nucleus) होता है, किंतु कभी-कभी एक से अधिक केंद्रक भी पाए जाते हैं। कोशिका के समस्त कार्यों का यह संचालन केंद्र होता है। जब कोशिका विभाजित होती है तो इसका भी विभाजन हो जाता है। केंद्रक कोशिका के भीतर एक तरल पदार्थ कोशिकाद्रव्य (cytoplasm) में प्राय: तैरता रहता है। इसका यद्यपि कोई निश्चित स्थान नहीं होता, तथापि यह अधिकतर लगभग मध्यभाग में ही स्थित होता है। कुछ कोशिकाओं में इसकी स्थिति आधारीय (basal) और कुछ में सीमांतीय (peripheral) भी होती है। केंद्रक की आकृति गोलाकार, वर्तुलाकार या अंडाकार होती है। तथापि, कभी-कभी यह बेलनाकार, दीर्घवृत्ताकार, सपात, शाखान्वित, नाशपाती जैसा, भालाकार आदि स्वरूपों का भी हो सकता है। इसके भीतर केंद्रकरस (nuclear sap) केंद्रिका (nucleolus) तथा पितृसूत्र (chromosomes) पाए जाते हैं। केंद्रक के आवरण को केंद्रककला (nuclear membrance or nucleolemma) कहते हैं।
==== केंद्रिका (Nucleolus) ====
प्रत्येक केंद्रक में एक या अधिक केंद्रिकाएँ पाई जाती हैं। कोशिका विभाजन की कुछ विशेष अवस्था में केंद्रिका लुप्त हो जाती, किंतु बाद में पुन: प्रकट हो जाती है। केंद्रिका के भीतर रिबोन्यूक्लीइक अम्ल (ritioncleric acid or RNA) तथा कुछ विशेष प्रकार के एंज़ाइम अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। केंद्रिका सूत्रण (mitosis) या सूत्री विभाजन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।
=== जीवद्रव्य (protoplasm) ===
यह एक गाढ़ा तरल पदार्थ होता है जो स्थानविशेष पर विशेष नामों द्वारा जाना जाता है; जैसे, द्रव्यकला (plasma membrane) तथा केंद्रक के मध्यवर्ती स्थान में पाए जाने वाले जीवद्रव्य को कोशिकाद्रव्य (cyt plasm) और केंद्रक झिल्ली (nuclear membrane) के भीतर पाए जाने वाले जीवद्रव्य को केंद्रक द्रव्य (nucleoplasm) कहते हैं। कोशिका का यह भाग अत्यंत चैतन्य और कोशिका की समस्त जैवीय प्रक्रियाओं का केंद्र होता है। इसे इसीलिए 'सजीव' (living) कहा जाता है। जीव वैज्ञानिक इसे 'जीवन का भौतिक आधार' (physcial basis of life) नाम से संबोधित करते हैं। आधुनिक जीव वैज्ञानिकों ने जीवद्रव्य का रासायनिक विश्लेषण करके यह तो पता लगा लिया है कि उसका निर्माण किन-किन घटकों द्वारा हुआ है, किंतु आज तक किसी भी वैज्ञानिक को उसमें (जीवद्रव्य) प्राण का संचार करने में सफलता हाथ नहीं लगी है। ऐसा है यह प्रकृति का रहस्यमय पदार्थ।
जीवद्रव्य का निर्माण कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन तथा अनेक कार्बनिक (organic) तथा अकार्बनिक (inorganic) पदार्थो द्वारा हुआ होता है। इसमें जल की मात्रा लगभग 80% प्रोटीन 15%, वसाएँ 3% तथा कार्बोहाइड्रेट 1% और अकार्बनिक लवण की 1 होती है। जीवद्रव्यों के कई प्रकार होते हैं, जैसे कोलाइड (colloid), कणाभ (granular), तंतुमय (fibrillar), जालीदार (reticular), कूपिकाकार (alveolar), आदि।
=== गोल्गी सम्मिश्र या यंत्र (Golgi complex or apparatus) ===
इस अंग का यह नाम इसके खोजकर्ता कैमिलो गोल्गी, के नाम पर पड़ा है, जिन्होंने 1898 में सर्वप्रथम इसकी खोज की। यह अंग साधारणतः केंद्रक के समीप, अकेले या समूहों में पाया जाता है। इसकी रचना तीन तत्वों (elements) या घटकों (components) द्वारा हुई होती है : सपाट कोश (flattened sacs), बड़ी बड़ी रिक्तिकाएँ (large vacueles) तथा आशय (vesicles)। यह एक प्रकार के जाल (network) जैसा दिखलाई देता है। इनका मुख्य कार्य कोशिकीय स्रवण (cellular secretion) और प्रोटीनों, वसाओं तथा कतिपय किण्वों (enzymes) का भडारण करना (storage) है।
=== कणाभसूत्र (Mitochondria) ===
ये कणिकाओं (granules) या शलाकाओं (rods) की आकृतिवाले होते हैं। ये अंगक (organelle) कोशिकाद्रव्य (cytoplasm) में स्थित होते हैं। इनकी संख्या विभिन्न जंतुओं में पाँच लाख तक हो सकती है। इनका आकार 1/2 माइक्रॉन से लेकर 2 माइक्रॉन के बीच होता है। विरल उदाहरणों (rare cases) में इनकी लंबाई 40 माइक्रॉन तक हो सकती है। इनके अनेक कार्य बतलाए गए हैं, जो इनकी आकृति पर निर्भर करते हैं। तथापि इनका मुख्य कार्य कोशिकीय श्वसन (cellular respiration) बतलाया जाता है। इन्हें कोशिका का 'पावर प्लांट' (power plant) कहा जाता है, क्योंकि इनसे आवश्यक ऊर्जा (energy) की आपूर्ति होती रहती है।
=== अंतर्प्रद्रव्य जालिका (fndoplasmic reticulum) ===
यह जालिका कोशिकाद्रव्य (cytoplasm) में आशयों (vesicles) और नलिकाओं (tubules) के रूप में फैली रहती है। इसकी स्थिति सामान्यतः केंद्रकीय झिल्ली (nuclear membrane) तथा द्रव्यकला (plasma membrane) के बीच होती है, किंतु यह अक्सर संपूर्ण कोशिका में फैली रहती है। यह जालिका दो प्रकार की होती है : चिकनी सतहवाली (smooth surfaced) और खुरदुरी सतहवाली (rough surfaced)। इसकी सतह खुरदुरी इसलिए होती है कि इस पर राइबोसोम (ribosomes) के कण बिखरे रहते हैं। इसके अनके कार्य बतलाए गए हैं, जैसे यांत्रिक आधारण (mechanical support), द्रव्यों का प्रत्यावर्तन (exchange of materials), अंत: कोशिकीय अभिगमन (intracellular transport), प्रोटोन संश्लेषण (protein synthesis) इत्यादि।
=== [[गुणसूत्र]] या [[पितृसूत्र]] ([[chromosomes]]) ===
यह शब्द क्रोम ([[ chrom ]]) तथा [[सोमा]] ([[ soma ]]) शब्दों से मिलकर बना है, जिसका अर्थ होता है : [[रंगीन पिंड]] ([[colour bodies]])। गुणसूत्र केंद्रकों के भीतर जोड़ों (pairs) में पाए जाते हैं और कोशिका विभाजन के साथ केंद्रक सहित बाँट जाया करते हैं। इनमें स्थित जीवों की पूर्वजों के पैत्रिक गुणों का वाहक कहा जाता है। इनकी संख्या जीवों में निश्चित होती है, जो एक दो जोड़ों से लेकर कई सौ जोड़ों तक हो सकती है। इनका आकार 1 माइक्रॉन से 30 [[माइक्रोन]] तक (लंबा) होता है। इनकी आकृति साधारणतः अंग्रेजी भाषा के अक्षर S जैसी होती हैं। इनमें [[न्यूक्लिओ-प्रोटीन]] ([[nucle-o-protein]]) मुख्य रूप से पाए जाते हैं। पितृसूत्रों के कुछ विशेष प्रकार भी पाए जाते हैं, जिन्हें [[लैंपब्रश पितृसूत्र]] ([[lanmpbrush chromosomes]]) और [[पोलीटेने क्रोमोसोम]] ([[polyteene chromosomes]]) की संज्ञा दी गई है। इन्हें W, X, Y, Z, आदि नामों से संबोधित किया जाता है।
==== [[जीन]] (gene) ====
जीनों को पैत्रिक गुणों का वाहक (carriers of hereditary characters) माना जाता है। क्रोमोसोम या पितृसूत्रों का निर्माण हिस्टोन प्रोटीन तथा डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक ऐसिड [[ DNA ]] तथा राइबोन्यूक्लिक ऐसिड [[ RNA ]] से मिलकर हुआ होता है। जीन का निर्माण इन्हीं में से एक, डी॰ एन॰ ए॰ द्वारा होता है। कोशिका विभाजनों के फलस्वरूप जब नए जीव के जीवन का सूत्रपात होता है, तो यही जीन पैतृक एवं शरीरिक गुणों के साथ माता पिता से निकलकर संततियों में चले जाते हैं। यह आदान प्रदान माता के [[डिंब]] ([[ovum]]) तथा पिता के [[शुक्राणु]] (sperms) में स्थित जीनों के द्वारा संपन्न होता है। सन् [[1970]] के जून मास में अमरीका स्थित भारतीय [[वैज्ञानिक]] श्री [[हरगोविंद खुराना]] को कृत्रिम जीन उत्पन्न करने में अभूतपूर्व सफलता मिली थी। इन्हें सन् [[1978]] में [[नोबेल पुरस्कार]] मिला था।
=== रिबोसोम (ribosomes) सेंट्रोसोम (centrosomes) ===
सूक्ष्म गुलिकाओं के रूप में प्राप्त इन संरचनाओं को केवल इलेक्ट्रॉन माइक्रॉस्कोप के द्वारा ही देखा जा सकता है। इनकी रचना 50% प्रोटीन तथा 50% आर॰ एन॰ ए॰ द्वारा हुई होती है। ये विशेषकर अंतर्प्रद्रव्य जालिका के ऊपर पाए जाते हैं। इनमें प्रोटीनों का संश्लेषण होता है।
'''सेंट्रोसोम''' (centrosomes)– ये केंद्रक के समीप पाए जाते हैं। इनके एक विशेष भाग को सेंट्रोस्फीयर (centrosphere) कहते हैं, जिसके भीतर सेंट्रिओलों (centrioles) का एक जोड़ा पाया जाता है। कोशिका विभाजन के समय ये विभाजक कोशिका के ध्रुव (pole) का निर्धारण और कुछ कोशिकाओं में कशाभिका (flagella) जैसी संरचनाओं को उत्पन्न करते हैं।
=== लवक (plastids) ===
लवक अधिकतर पौधों में ही पाए जाते हैं। ये एक प्रकार के रंजक कण (pigment granules) हैं, जो जीवद्रव्य (protoplasm) में यत्र तत्र बिखरे रहते हैं। क्लोरोफिल (chlorophyll) धारक वर्ण के लवक को हरित् लवक (chloroplas) कहा जाता है। इसी के कारण वृक्षों में हरापन दिखलाई देता है। क्लोरोफिल के ही कारण पेड़ पौधे प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) करते हैं। कुछ वैज्ञानिकों के मतानुसार लवक कोशिकाद्रव्यीय वंशानुगति (cytoplasmic inheritance) के रूप में कोशिका विभाजन के समय संतति कोशिकाओं में सीधे सीधे स्थानांतरित हो जाते हैं।
=== कोशिका विभाजन ( Cell Division ) ===
कोशिका विभाजन के प्रक्रिया की जानकारी सर्वप्रथम 1855 ई. में विरचाऊ को हुई।
कोशिका में विभाजन तीन तरीके से होता है *
असूत्री विभाजन ( Amitosis ) : जीवाणु, नील हरित शैवाल, यीस्ट, अमीबा तथा कुछ अन्य प्रोटोजोआ आदि जिनमें अविकसित कोशिकाएँ होती हैं, उनमें ‘असूत्री विभाजन’ होती है।
समसूत्री विभाजन ( Mitosis ) : समसूत्री विभाजन सिर्फ कायिक कोशिकाओं (Somatic Cells) में होता है।
* 1882 ई. में ‘वाल्टर फ्लेमिंग’ द्वारा ही कोशिका के इस विभाजन को Mitosis (समसूत्री विभाजन) नाम दिया गया।
* समसूत्री विभाजन इंटरफेज, प्रोफेज, मेटाफेज, एनाफेज तथा टेलोफेज जैसी 5 अवस्थाओं में संपन्न होता है।
* दो कोशिका विभाजनों के बीच की वह अवधि जिसमें कोशिका स्वयं को विभाजन के लिए तैयार करती है, इंटरफेज कहलाती है।
* प्रोफेज विभाजन की प्रथम अवस्था है। इसके अंत तक केंद्रक विलुप्त हो जाता है।
* ‘गुणसूत्र’ मध्य रेखा (Equitorial Plate) पर मेटाफेज में आते हैं।
* एनाफेज सबसे कम अवधि (2-3 मिनट) में संपन्न होने वाली अवस्था है। इसमें क्रोमैटिड
* U.V. या L की आकृति ले लेते हैं।
* समसूत्री विभाजन की अंतिम अवस्था टेलोफेज है।
* समसूत्री विभाजन के परिणामस्वरूप एक जनक कोशिका से दो संतति कोशिकाओं का जन्म होता है।
* समसूत्री विभाजन के परिणाम स्वरूप बने प्रत्येक संतति कोशिका में गुणसूत्रों की संख्या जनक कोशिका के समान ही होती है।
* विभाजन के कारण जीवों में वृद्धि एवं विकास होता है। कुछ सूक्ष्म जीवों में इसी विभाजन के द्वारा अलैंगिक प्रजनन की क्रिया होती है।
* समसूत्री विभाजन द्वारा शरीर में नवीन कोशिकाओं का निर्माण होता है, इस प्रकार शरीर की मरम्मत होती है एवं घाव भरते हैं।
अर्द्धसूत्री विभाजन ( Meiosis )
* इसे न्यूनकारी विभाजन भी कहते हैं
* इस विभाजन का नाम ‘Meiosis’ 1905 ई. में फार्मर तथा मूरे ने रखा।
* अर्द्धसूत्री विभाजन की ओर वीज मैन द्वारा की गई तथा इसका सर्वप्रथम विस्तृत अध्ययन 1888 ई. में स्ट्रॉसवर्गर ने किया।
* यह विभाजन सिर्फ जनन कोशिकाओं (Sex Cells) में होता है।
* अर्द्धसूत्री विभाजन की दो अवस्थाएँ होती हैंअर्द्धसूत्री-I एवं अर्द्धसूत्री-III)
* अर्द्धसूत्री-I विभाजन में चार अवस्थायें आती हैंप्रोफेज-I, मेटाफेज-I, एनाफेज-I तथा टेलोफेज-I।
कोशिका में जीवद्रव्य पाया जाता है जिसे वैज्ञानिक हक्सले ने जीवन का भौतिक आधार बताया।
जीवद्रव्य में सर्वाधिक मात्रा में जल पाया जाता है जबकि कार्बनिक पदार्थ के रूप में सर्वाधिक मात्रा में प्रोटीन पायी जाती है।
== कार्य ==
=== वृद्धि तथा चयापचय ===
=== सृजन ===
=== प्रोटीन संश्लेषण ===
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
== इन्हें भी देखें ==
* [[कोशिका विज्ञान]] (Cytology)
* [[ऊतक विज्ञान]] (Histology)
* [[कोशिकांग]] (organelle)
{{कोशिका}}
{{जीवविज्ञान}}
[[श्रेणी:कोशिकाविज्ञान]]
[[श्रेणी:कोशिका]]
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भारतीय थलसेना
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Anitya Gautam
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{{Infobox military unit
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'''भारतीय थलसेना''' , सेना की भूमि-आधारित दल की शाखा है और यह [[भारतीय सशस्त्र सेनाएँ|भारतीय सशस्त्र बल]] का सबसे बड़ा अंग है। [[भारत के राष्ट्रपति|भारत का राष्ट्रपति]], थलसेना का प्रधान सेनापति होता है,<ref>{{cite web |url=http://presidentofindia.nic.in/about.htm |title=About – The President of India |trans-title=भारत के राष्ट्रपति – के बारे में |publisher= |accessdate=१९ फ़रवरी २०१७ |language=अंग्रेज़ी |archive-url=https://web.archive.org/web/20160405170925/http://www.presidentofindia.nic.in/about.htm |archive-date=5 अप्रैल 2016 |url-status=dead }}</ref> और इसकी कमान [[भारत के थलसेनाध्यक्ष|भारतीय थलसेनाध्यक्ष]] के हाथों में होती है जो कि चार-सितारा [[जनरल]] स्तर के अधिकारी होते हैं। पाँच-सित रैंक के साथ [[फील्ड मार्शल (भारत)|फील्ड मार्शल]] की रैंक भारतीय सेना में श्रेष्ठतम सम्मान की औपचारिक स्थिति है, आजतक मात्र दो अधिकारियों को इससे सम्मानित किया गया है।<ref name="m355">{{cite web | last=Tiwari | first=Madan | title=भारतीय सेना को बड़ी सफलता, जम्मू-कश्मीर में लश्कर का पाकिस्तानी कमांडर ढेर | publisher=हिंदुस्तान | date=2026-09-05 | url=https://www.livehindustan.com/national/jammu-kashmir-budgam-encounter-lashkar-pakistani-commander-yasir-killed-by-indian-army-201788602610295.html | language=hi | access-date=2026-10-17}}</ref> भारतीय सेना का उद्भव [[ईस्ट इण्डिया कम्पनी]], जो कि [[ब्रिटिश भारतीय सेना]] के रूप में परिवर्तित हुई थी, और भारतीय राज्यों की सेना से हुआ, जो [[भारत की स्वतन्त्रता|स्वतन्त्रता]] के पश्चात राष्ट्रीय सेना के रूप में परिणत हुई। भारतीय सेना की टुकड़ी और रेजिमेंट का विविध इतिहास रहा हैं इसने दुनिया भर में कई लड़ाई की और अभियानों में हिस्सा लिया है, तथा आजादी से पहले और बाद में बड़ी संख्या में [[भारतीय सेना के युद्ध सम्मान|युद्ध सम्मान]] अर्जित किये।<ref name="Sarbans">{{cite book |title=Battle Honours of the Indian Army 1757–1971 |trans-title= भारतीय सेना के युद्ध सम्मान १७५७–१९७१ |last=सिंह |first=सरबंस |year=१९९३ |publisher=विजन बुक्स |location=नई दिल्ली |isbn=8170941156 |language=अंग्रेज़ी}}</ref>
भारतीय सेना का प्राथमिक उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद की एकता सुनिश्चित करना, राष्ट्र को बाहरी आक्रमण और आन्तरिक खतरों से बचाव, और अपनी सीमाओं पर शान्ति और सुरक्षा को बनाए रखना हैं। यह प्राकृतिक आपदाओं और अन्य गड़बड़ी के दौरान मानवीय बचाव अभियान भी चलाते है, जैसे [[ऑपरेशन सूर्य आशा]], और आन्तरिक खतरों से निपटने के लिए सरकार द्वारा भी सहायता हेतु अनुरोध किया जा सकता है। यह [[भारतीय नौसेना]] और [[भारतीय वायुसेना]] के साथ राष्ट्रीय शक्ति का एक प्रमुख अंग है।<ref>Headquarters Army Training Command. "Indian Army Doctrine". October 2004. [https://web.archive.org/web/20071201062843/http://%7b%7bcite/ Archive link] via [[archive.org]] (original url: <nowiki>{{cite web|url=http://indianarmy.nic.in/indianarmydoctrine_1.doc |title=Archived copy |accessdate=1 December 2007 |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20071201062843/http://indianarmy.nic.in/indianarmydoctrine_1.doc |archivedate=1 December 2007 }}</nowiki>).</ref> सेना अब तक पड़ोसी देश
इस्लामी पाकिस्तान के साथ चार युद्धों तथा चीन के साथ एक युद्ध लड़ चुकी है। सेना द्वारा किए गए अन्य प्रमुख अभियानों में [[गोवा मुक्ति संग्राम|ऑपरेशन विजय]], [[ऑपरेशन मेघदूत]] और [[ऑपरेशन कैक्टस]] शामिल हैं। संघर्षों के अलावा, सेना ने शान्ति के समय कई बड़े अभियानों, जैसे [[ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स]] और युद्ध-अभ्यास शूरवीर का संचालन किया है। सेना ने कई देशो में संयुक्त राष्ट्र के शान्ति मिशनों में एक सक्रिय प्रतिभागी भी रहा है जिनमे साइप्रस, लेबनान, कांगो, अंगोला, कम्बोडिया, वियतनाम, नामीबिया, एल साल्वाडोर, लाइबेरिया, मोज़ाम्बिक और सोमालिया आदि सम्मलित हैं। राजस्थान के झुंझुनूं जिले को सैनिकों का शहर कहा जाता है।
भारतीय सेना में एक [[सैन्य-दल (रेजिमेंट)]] प्रणाली है, लेकिन यह बुनियादी क्षेत्र गठन विभाजन के साथ संचालन और भौगोलिक रूप से सात कमान में विभाजित है। यह एक सर्व-स्वयंसेवी बल है और इसमें देश के सक्रिय रक्षा कर्मियों का 80% से अधिक हिस्सा है। यह 12,00,255 सक्रिय सैनिकों<ref>{{cite web|url=http://pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=(Release%20ID%20:148814)|title="Press Information Bureau".|publisher=pib.nic.in|access-date=18 फ़रवरी 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20160915111743/http://pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=(Release%20ID%20:148814)|archive-date=15 सितंबर 2016|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|url=https://en.wikipedia.org/wiki/International_Institute_for_Strategic_Studies|title=International Institute for Strategic Studies (3 February 2014)|access-date=15 मार्च 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170320150114/https://en.wikipedia.org/wiki/International_Institute_for_Strategic_Studies|archive-date=20 मार्च 2017|url-status=live}}</ref> और 9,90,960 आरक्षित सैनिकों<ref>{{cite web|url=https://en.wikipedia.org/wiki/International_Institute_for_Strategic_Studies|title=International Institute for Strategic Studies (3 February 2014)|access-date=15 मार्च 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170320150114/https://en.wikipedia.org/wiki/International_Institute_for_Strategic_Studies|archive-date=20 मार्च 2017|url-status=live}}</ref> के साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी स्थायी सेना है।
सेना ने सैनिको के आधुनिकीकरण कार्यक्रम की शुरुआत की है, जिसे "फ्यूचरिस्टिक इन्फैंट्री सैनिक एक प्रणाली के रूप में" के नाम से जाना जाता है इसके साथ ही यह अपने बख़्तरबन्द, तोपखाने और उड्डयन शाखाओं के लिए नए संसाधनों का संग्रह एवं सुधार भी कर रहा है।.<ref name="tmb2010">{{cite book|title=The Military Balance 2010|url=https://archive.org/details/militarybalance2010iiss|year=2010|publisher=Routledge|location=Oxfordshire|isbn=1857435575|pages=[https://archive.org/details/militarybalance2010iiss/page/n348 351], 359–364}}</ref><ref name="isfeb10">{{cite news|title=Indian Army Modernisation Needs a Major Push|url=http://www.indiastrategic.in/topstories482.htm|accessdate=10 July 2013|newspaper=India Strategic|date=February 2010|archive-url=https://web.archive.org/web/20130906195929/http://indiastrategic.in/topstories482.htm|archive-date=6 सितंबर 2013|url-status=dead}}</ref><ref name="dn2a12">{{cite news|title=India's Military Modernisation Up To 2027 Gets Approval|url=http://www.defencenow.com/news/611/indias-military-modernisation-up-to-2027-gets-approval.html|accessdate=10 July 2013|newspaper=Defence Now|date=2 April 2012|archive-url=https://web.archive.org/web/20131029201514/http://www.defencenow.com/news/611/indias-military-modernisation-up-to-2027-gets-approval.html|archive-date=29 अक्तूबर 2013|url-status=dead}}</ref>
== इतिहास ==
{{Main|भारत का सैन्य इतिहास}}
1947 में स्वतन्त्रता मिलने के बाद [[ब्रिटिश भारतीय सेना]] को नये बने राष्ट्र [[भारत]] और इस्लामी गणराज्य [[पाकिस्तान]] की सेवा करने के लिये 2 भागों में बाँट दिया गया। अधिकतर इकाइयों को भारत के पास रखा गया। चार गोरखा सैन्य दलों को ब्रिटिश सेना में स्थानान्तरित किया गया जबकि शेष को भारत के लिए भेजा गया।
जैसा कि ज्ञात है, भारतीय सेना में ब्रिटिश भारतीय सेना से व्युत्पन्न हुयी है तो इसकी संरचना, वर्दी और परम्पराओं को अनिवार्य रूप से विरासत में ब्रिटिश से लिया गया हैं|
=== प्रथम कश्मीर युद्ध (1947) ===
{{Main|१९४७ का भारत-पाक युद्ध}}
स्वतन्त्रता के लगभग तुरन्त बाद से ही भारत और पाकिस्तान के मध्य तनाव पैदा हो गया था और दोनों देशों के बीच पहले तीन पूर्ण पैमाने पर हुये युद्ध के बाद राजसी राज्य कश्मीर का विभाजन कर दिया गय। कश्मीर के महाराजा की भारत या पाकिस्तान में से किसी भी राष्ट्र के साथ विलय की अनिच्छा के बाद पाकिस्तान द्वारा कश्मीर के कुछ हिस्सों मे आदिवासी आक्रमण प्रायोजित करवाया गया। भारत द्वारा आरोपित पुरुषों को भी नियमित रूप से पाकिस्तान की सेना मे शामिल किया गया। जल्द ही पाकिस्तान ने अपने दलों को सभी राज्यों को अपने में संलग्न करने के लिये भेजा। [[महाराज हरि सिंह|महाराजा हरि सिंह]] ने भारत और पंडित जवाहर नेहरू से अपनी मदद करने की याचना की, पर उनको कहा गया कि भारत के पास उनकी मदद करने के लिये कोई कारण नही है। इस पर उन्होने कश्मीर के विलय के एकतरफा सन्धिपत्र पर हस्ताक्षर किये जिसका निर्णय भारत सरकार द्वारा लिया गया पर पाकिस्तान को यह सन्धि कभी भी स्वीकार नहीं हुई। इस सन्धि के तुरन्त बाद ही भारतीय सेना को आक्रमणकारियों से मुकाबला करने के लिये श्रीनगर भेजा गया। इस दल में जनरल थिम्मैया भी शामिल थे जिन्होने इस कार्यवाही में काफी प्रसिद्धि हासिल की और बाद में भारतीय सेना के प्रमुख बने। पूरे राज्य में एक गहन युद्ध छिड़ गया और पुराने साथी आपस मे लड़ रहे थे। दोनो पक्षों में कुछ को राज्यवार बढत मिली तो साथ ही साथ महत्वपूर्ण नुकसान भी हुआ। [[१९४८|1948]] के अन्त में नियन्त्रण रेखा पर लड़ रहे सैनिकों में असहज शान्ति हो गई जिसको संयुक्त राष्ट्र द्वारा भारत और पाकिस्तान में विभाजित कर दिया गया। पाकिस्तान और भारत के मध्य कश्मीर में उत्पन्न हुआ तनाव कभी भी पूर्ण रूप से समाप्त नहीं हुआ है।
=== हैदराबाद का विलय (1948) ===
{{Main|ऑपरेशन पोलो }}
भारत के विभाजन के उपरान्त राजसी राज्य हैदराबाद, जो कि निजा़म द्वारा शासित था, ने स्वतन्त्र राज्य के तौर रहना पसन्द किया। निजा़म ने हैदराबाद को भारत में मिलाने पर अपनी आपत्ति दर्ज करवाई। भारत सरकार और हैदराबाद के निज़ाम के बीच पैदा हुई अनिर्णायक स्थिति को समाप्त करने हेतु भारत के उप-प्रधानमन्त्री [[वल्लभ भाई पटेल|सरदार बल्लभ भाई पटेल]] द्वारा 12 सितम्बर 1948 को भारतीय टुकड़ियों को हैदराबाद की सुरक्षा करने का आदेश दिया। 5 दिनों की गहन लड़ाई के बाद वायु सेना के समर्थन से भारतीय सेना ने हैदराबाद की सेना को परास्त कर दिया। उसी दिन हैदराबाद को भारत गणराज्य का भाग घोषित कर दिया गया। पोलो कार्यवाही के अगुआ मेजर जनरल जॉयन्तो नाथ चौधरी को कानून व्यवस्था स्थापित करने के लिये हैदराबाद का सैन्य शाशक (1948-1949) घोषित किया गया।
=== गोवा, दमन और दीव का विलय (1961) ===
{{seealso|गोवा मुक्ति संग्राम}}
ब्रिटिश और [[फ्रांस|फ़्रांस]] द्वारा अपने सभी औपनिवेशिक अधिकारों को समाप्त करने के बाद भी [[भारतीय उपमहाद्वीप]], [[गोवा]], [[दमन और दीव]] में पुर्तगालियों का शासन रहा। पुर्तगालियों द्वारा बारबार बातचीत को अस्वीकार कर देने पर [[नई दिल्ली]] द्वारा 12 दिसम्बर 1961 को ऑपरेशन विजय की घोषणा की और अपनी सेना के एक छोटे से दल को पुर्तगाली क्षेत्रों पर आक्रमण करने के आदेश दिए। 26 घण्टे चले युद्ध के बाद गोवा और दमन और दीव को सुरक्षित स्वतन्त्र करा लिया गया और उनको भारत का अंग घोषित कर दिया गया।
=== भारत-चीन युद्ध (1962) ===
{{Main|भारत-चीन युद्ध}}
1959 से भारत प्रगत नीति का पालन करना शुरु कर दिया। 'प्रगत नीति' के अन्तर्गत भारतीय गश्त दलों ने चीन द्वारा भारतीय सीमा के काफी अन्दर तक हथियाई गई चौकियों पर हमला बोल कर उन्हें फिर कब्जे में लिया। भारत के मैक-महोन रेखा को ही अंतरराष्ट्रीय सीमा मान लिए जाने पर जोर डालने के कारण भारत और चीन की सेनाओं के बीच छोटे स्तर पर संघर्ष छिड़ गया। बहरहाल, भारत और चीन के बीच मैत्रीपूर्ण सम्बन्धों के कारण विवाद ने अधिक तूल नहीं पकड़ा। युद्ध का कारण [[अक्साई चिन]] और [[अरुणाचल प्रदेश]] की क्षेत्रों की सम्प्रभुता को लेकर था। अक्साई चिन में, जिसे भारत द्वारा कश्मीर और चीन द्वारा झिंजियांग का हिस्सा का दावा किया जाता रहा है, एक महत्वपूर्ण सड़क लिंक है जोकि तिब्बत और चीनी क्षेत्रों झिंजियांग को जोड़ती है। चीन के [[तिब्बत]] में भारत की भागीदारी के संदेह के चलते दोनों देशों के बीच संघर्ष की संभावनाएँ और बढ़ गई।
[[चित्र:Hall of Fame Museum, Leh.jpg|अंगूठाकार|भारत-तिब्बत सीमा के पास लेह में भारतीय सेना हॉल ऑफ फेम]]
हैदराबाद व गोवा में अपने सैन्य अभियानों की सफलता से उत्साहित भारत ने चीन के साथ सीमा विवाद में आक्रामक रुख ले लिया। 1962 में, भारतीय सेना को भूटान और अरुणाचल प्रदेश के बीच की सीमा के निकट और विवादित [[मैकमहोन रेखा]] के लगभग स्थित 5 किमी उत्तर में स्थित थाग ला रिज तक आगे बढ़ने का आदेश दिया गया। इसी बीच चीनी सेनाएँ भी भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कर चुकी थीं और दोनो देशों के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया जब भारतीय सेनाओं ने पाया कि चीन ने [[अक्साई चिन]] क्षेत्र में सड़क बना ली है। वार्ताओं की एक श्रृंखला के बाद, चीन की [[पीपल्स लिबरेशन आर्मी|पीपुल्स लिबरेशन आर्मी]] ने थाग ला रिज पर भारतीय सेनाओं के ठिकानों पर हमला बोल दिया। चीन के इस कदम से भारत आश्चर्यचकित रह गया और 12 अक्टूबर को नेहरू ने अक्साई चिन से चीनियों को खदेड़ने के आदेश जारी कर दिए। किन्तु, भारतीय सेना के विभिन्न प्रभागों के बीच तालमेल की कमी और वायु सेना के प्रयोग के निर्णय में की गई देरी ने चीन को महत्वपूर्ण सामरिक व रणनीतिक बढ़त लेने का अवसर दे दिया। 20 अक्टूबर को चीनी सैनिकों नें दोनों मोर्चों उत्तर-पश्चिम और सीमा के उत्तर-पूर्वी भागों में भारत पर हमला किया और अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश के विशाल भाग पर कब्जा कर लिया।
जब लड़ाई विवादित प्रदेशों से भी परे चली गई तो चीन ने भारत सरकार को बातचीत के लिए आमन्त्रण दिया, लेकिन भारत अपने खोए क्षेत्र हासिल करने के लिए अड़ा रहा। कोई शान्तिपूर्ण समझौता न होते देख, चीन ने एकतरफा युद्धविराम घोषित करते हुए अरुणाचल प्रदेश से अपनी सेना को वापस बुला लिया। वापसी के कारण विवादित भी हैं। भारत का दावा है कि चीन के लिए अग्रिम मोर्चे पर मौजूद सेनाओं को सहायता पहुँचाना सम्भव न रह गया था, तथा संयुक्त राज्य अमेरिका का राजनयिक समर्थन भी एक कारण था। जबकि चीन का दावा था कि यह क्षेत्र अब भी उसके कब्जे में है जिसपर उसने कूटनीतिक दावा किया था। भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच विभाजन रेखा को [[वास्तविक नियंत्रण रेखा]] का नाम दिया गया।
भारत के सैन्य कमाण्डरों द्वारा लिए गए कमजोर फैसलों ने कई सवाल उठाए। जल्द ही भारत सरकार द्वारा भारतीय सेना के खराब प्रदर्शन के कारणों का निर्धारण करने के लिए [[ब्रूक्स-भगत रपट| हेंडरसन ब्रूक्स समिति]] का गठन कर दिया गया। कथित तौर पर समिति की रिपोर्ट ने भारतीय सशस्त्र बलों की कमान की गलतियाँ निकाली और अपनी नाकामियों के लिए कई मोर्चों पर विफल रहने के लिए कार्यकारी सरकार की बुरी तरह आलोचना की। समिति ने पाया कि हार के लिए प्रमुख कारण लड़ाई शुरु होने के बाद भी भारत चीन के साथ सीमा पर कम सैनिकों की तैनाती था और यह भी कि भारतीय वायु सेना को चीनी परिवहन लाइनों को लक्ष्य बनाने के लिए चीन द्वारा भारतीय नागरिक क्षेत्रों पर जवाबी हवाई हमले के डर से अनुमति नहीं दी गई। ज्यादातर दोष के तत्कालीन रक्षा मन्त्री [[वी के कृष्ण मेनन|कृष्ण मेनन]] की अक्षमता पर भी दिया गया। रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की लगातार माँग के बावजूद हेंडरसन - ब्रूक्स रिपोर्ट अभी भी गोपनीय रखी गई है।
=== द्वितीय कश्मीर युद्ध (1965) ===
{{Main|१९६५ का भारत-पाक युद्ध}}
पाकिस्तान के साथ एक दूसरे टकराव पर मोटे तौर पर 1965 में जगह ले ली [[कश्मीर]]. पाकिस्तानी राष्ट्रपति [[अयूब ख़ान|अयूब खान]] शुरू''[[ऑपरेशन जिब्राल्टर]]'' [[१९६५|1965]] अगस्त में जिसके दौरान कई पाकिस्तानी अर्धसैनिक सैनिकों को भारतीय प्रशासित कश्मीर में घुसपैठ और भारत विरोधी विद्रोह चिंगारी की कोशिश की. पाकिस्तानी नेताओं का मानना है कि भारत, जो अभी भी विनाशकारी युद्ध भारत - चीन से उबरने का प्रयास कर रहा था, एक सैन्य जोर और विद्रोह के साथ सौदा करने में असमर्थ होगा. हालाँकि, ऑपरेशन एक प्रमुख विफलता के बाद से कश्मीरी लोगों को इस तरह के एक विद्रोह के लिए थोड़ा समर्थन दिखाया और भारत जल्दी बलों स्थानान्तरित घुसपैठियों को बाहर निकालने. भारतीय जवाबी हमले के प्रक्षेपण के एक पखवाड़े के भीतर, घुसपैठियों के सबसे वापस पाकिस्तान के लिए पीछे हट गया था।
[[चित्र:1965 Indo-Pak War DestroyedShermanTank.jpg|अंगूठाकार|असल उत्तर की लड़ाई के बाद नष्ट हुए पाकिस्तानी शर्मन टैंक के पास भारतीय सेना अधिकारी।]]
ऑपरेशन जिब्राल्टर की विफलता से पस्त है और सीमा पार भारतीय बलों द्वारा एक प्रमुख आक्रमण की उम्मीद है, पाकिस्तान [[ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम] 1 सितम्बर को शुरू, भारत Chamb - Jaurian क्षेत्र हमलावर. जवाबी कार्रवाई में, 6 सितम्बर को पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय सेना के 15 इन्फैन्ट्री डिवीजन अन्तरराष्ट्रीय सीमा पार कर गया।
प्रारम्भ में, भारतीय सेना के उत्तरी क्षेत्र में काफी सफलता के साथ मुलाकात की. पाकिस्तान के खिलाफ लम्बे समय तक तोपखाने barrages शुरू करने के बाद, भारत कश्मीर में तीन महत्वपूर्ण पर्वत पदों पर कब्जा करने में सक्षम था। 9 सितम्बर तक भारतीय सेना सड़कों में काफी पाकिस्तान में बनाया था। भारत पाकिस्तानी टैंकों की सबसे बड़ी दौड़ था जब पाकिस्तान के एक बख्तरबन्द डिवीजन के आक्रामक [Asal उत्तर [लड़ाई]] पर सितम्बर 10 वीं पा गया था। छह पाकिस्तानी आर्मड रेजिमेंट लड़ाई में भाग लिया, अर्थात् 19 (पैटन) लांसर्स, 12 कैवलरी (Chafee), 24 (पैटन) कैवलरी 4 कैवलरी (पैटन), 5 (पैटन) हार्स और 6 लांसर्स (पैटन). इन तीन अवर टैंक के साथ भारतीय आर्मड रेजिमेंट द्वारा विरोध किया गया, [[डेकन हार्स]] (शेरमेन), 3 (सेंचुरियन) कैवलरी और 8 कैवलरी (AMX). लड़ाई इतनी भयंकर और तीव्र है कि समय यह समाप्त हो गया था द्वारा, 4 भारतीय डिवीजन के बारे में या तो नष्ट में 97 पाकिस्तानी टैंक, या क्षतिग्रस्त, या अक्षुण्ण हालत में कब्जा कर लिया था। यह 72 पैटन टैंक और 25 Chafees और Shermans शामिल हैं। 28 Pattons सहित 97 टैंक, 32 शर्त में चल रहे थे। भारतीय खेम करण पर 32 टैंक खो दिया है। के बारे में मोटे तौर पर उनमें से पन्द्रह पाकिस्तानी सेना, ज्यादातर शेरमेन टैंक द्वारा कब्जा कर लिया गया। युद्ध के अंत तक, यह अनुमान लगाया गया था कि 100 से अधिक पाकिस्तानी टैंक को नष्ट कर दिया और गया एक अतिरिक्त 150 भारत द्वारा कब्जा कर लिया गया। भारतीय सेना ने संघर्ष के दौरान 128 टैंक खो दिया है। इनमें से 40 टैंक के बारे में, उनमें से ज्यादातर AMX-13s और Shermans पुराने Chamb और खेम करण के पास लड़ाई के दौरान पाकिस्तानी हाथों में गिर गया।
23 सितम्बर तक भारतीय सेना +३००० रणभूमि मौतों का सामना करना पड़ा, जबकि पाकिस्तान 3800 की तुलना में कम नहीं सामना करना पड़ा. [[सोवियत संघ]] दोनों देशों के बीच एक शान्ति समझौते की मध्यस्थता की थी और बाद में औपचारिक वार्ता में आयोजित किए गए [[ताशकन्द|ताशकंद]], एक युद्धविराम पर घोषित किया गया था 23 सितम्बर। भारतीय प्रधानमन्त्री [[लालबहादुर शास्त्री|लाल बहादुर शास्त्री]] और अयूब खान लगभग सभी युद्ध पूर्व पदों को वापस लेने पर सहमत हुए. समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद घण्टे, लाल बहादुर शास्त्री ताशकन्द विभिन्न षड्यन्त्र के सिद्धान्त को हवा देने में रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। युद्ध पूर्व पदों के लिए वापस करने का निर्णय के कारण भारत के रूप में नई दिल्ली में राजनीति के बीच एक चिल्लाहट युद्ध के अन्त में एक लाभप्रद स्थिति में स्पष्ट रूप से किया गया था। एक स्वतन्त्र विश्लेषक के मुताबिक, युद्ध को जारी रखने के आगे नुकसान का नेतृत्व होता है और अन्ततः पाकिस्तान के लिए हार।<ref><nowiki><ref></nowiki>http://www.globalsecurity.org/military/world/war/indo-pak_1965.htm {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20170509223002/http://www.globalsecurity.org/military/world/war/indo-pak_1965.htm|date=9 मई 2017}} <nowiki></ref>
=== बांग्लादेश मुक्ति युद्ध (1971) ===
{{Main|१९७१ का भारत-पाक युद्ध}}
{{See also|हिलि की लड़ाई|लोंगेवाला का युद्ध|बसंतसर का युद्ध}}
एक स्वतन्त्रता आन्दोलन में बाहर तोड़ दिया [[पूर्वी पाकिस्तान]] जो था [[ऑपरेशन सर्चलाइट| बेरहमी से कुचल दिया.]] पाकिस्तानी बलों द्वारा. कारण बड़े पैमाने पर [[1971 बांग्लादेश अत्याचार|अत्याचारों]] उनके खिलाफ के हजारों <nowiki>[[बंगाली लोग|बंगालियों]]</nowiki> पड़ोसी भारत में शरण ली, वहाँ एक प्रमुख शरणार्थी संकट के कारण. जल्दी 1971 में, भारत बंगाली विद्रोहियों के लिए पूर्ण समर्थन, [[मुक्ति वाहिनी]] के रूप में जाना जाता घोषित और भारतीय एजेंटों को बड़े पैमाने पर गुप्त आपरेशनों में शामिल थे उन्हें सहायता.
20 नवम्बर 1971 को भारतीय सेना 14 पंजाब बटालियन चले गए और [[45 कैवलरी]] गरीबपुर, पूर्वी पाकिस्तान के साथ भारत की सीमा के पास एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर है और में सफलतापूर्वक [[गरीबपुर की लड़ाई | कब्जा कर लिया]. अगले दिन और [[Atgram की लड़ाई | संघर्ष] भारतीय और पाकिस्तानी सेनाओं के बीच जगह ले ली. भारत बंगाली विद्रोह में बढ़ती भागीदारी से सावधान [[पाकिस्तान वायुसेना|पाकिस्तान वायु सेना]] (पीएएफ) का शुभारंभ किया [ऑपरेशन [Chengiz खान | हड़ताल अग्रकय] 3 दिसम्बर को भारतीय सेना पूर्वी पाकिस्तान के साथ अपनी सीमा के निकट पदों पर. हवाई आपरेशन, तथापि, इसकी कहा उद्देश्यों को पूरा करने में विफल रहा है और भारत पाकिस्तान के खिलाफ एक पूर्ण पैमाने पर युद्ध के कारण उसी दिन घोषित किया। आधी रात से, भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना के साथ, पूर्वी पाकिस्तान में प्रमुख सैन्य जोर का शुभारंभ किया। भारतीय सेना की निर्णायक सहित पूर्वी मोर्चे पर कई लड़ाइयों जीता [Hilli [लड़ाई]]
[[चित्र:1971 Instrument of Surrender WaPo.jpg|अंगूठाकार|पाकिस्तानी पूर्वी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल ए.ए.के. नियाज़ी (दाएं), लेफ्टिनेंट जनरल जे.एस. अरोरा की देखरेख में समर्पण पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए।]]
पाकिस्तान के पश्चिमी मोर्चे पर भारत के खिलाफ जवाबी हमले का शुभारंभ किया। December 4, 1971 को, एक कंपनी के 23 बटालियन के [[पंजाब रेजिमेंट]] का पता चला और पाकिस्तान के पास सेना की 51 इन्फैंट्री डिवीजन के आंदोलन को रोक [[रामगढ़ शेखावाटी|रामगढ़]], राजस्थान. [[लोंगेवाला का युद्ध]] के दौरान जो लागू एक कंपनी है, हालांकि outnumbered, वीरतापूर्वक लड़ी और पाकिस्तानी अग्रिम नाकाम जब तक भारतीय वायु सेना अपने सेनानियों को निर्देशित करने के लिए पाकिस्तानी टैंक संलग्न. समय लड़ाई समाप्त करके 34 पाकिस्तानी टैंक और 50 APCs या नष्ट हो गए थे परित्यक्त. के बारे में 200 पाकिस्तानी सैनिकों को लड़ाई के दौरान कार्रवाई में मारे गए थे जबकि केवल 2 भारतीय सैनिकों को उनके जीवन खो दिया है। 4 दिसम्बर से 16 तक भारतीय सेना लड़ी और अंत जिसमें से 66 पाकिस्तानी टैंक को नष्ट कर रहे थे और 40 से कब्जा कर लिया गया [[बसंतसर का युद्ध]] जीता. बदले में पाकिस्तानी बलों के लिए केवल 11 भारतीय टैंकों को नष्ट करने में सक्षम थे। 16 दिसम्बर तक पाकिस्तान के पूर्वी और पश्चिमी दोनों मोर्चों पर बड़े आकार का क्षेत्र खो दिया था।
लेफ्टिनेंट | जगजीत सिंह अरोड़ा के आदेश के तहत जनरल जे एस अरोड़ा, भारतीय सेना के तीन कोर में प्रवेश किया जो पूर्वी पाकिस्तान पर आक्रमण किया था [[ढाका]] और पाकिस्तानी सेना ने 16 दिसम्बर 1971 को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर किया। पाकिस्तान के लेफ्टिनेंट जनरल के बाद [[अमीर अब्दुल्ला खान नियाजी| AAK नियाज़ी]] समर्पण के साधन पर हस्ताक्षर किए, भारत में 90,000 से अधिक पाकिस्तानी [[] युद्ध के कैदियों (+३८,००० सशस्त्र बलों के कर्मियों और 52,000 मिलिशिया पश्चिम पाकिस्तानी मूल के और नौकरशाहों) ले लिया।
1972 में, [[शिमला समझौते] दोनों देशों के तनाव और simmered के बीच हस्ताक्षर किए गए थे। हालांकि, वहाँ कूटनीतिक तनाव है जो दोनों पक्षों पर वृद्धि हुई सैन्य सतर्कता में समापन में कभी कभी spurts थे।
=== सियाचिन विवाद (1984-) ===
{{Main|सियाचिन विवाद}}
[[सियाचिन हिमनद|सियाचिन ग्लेशियर]], हालांकि कश्मीर क्षेत्र के एक हिस्सा है, आधिकारिक तौर पर सीमांकन नहीं है। एक परिणाम के रूप में, पहले 1980 के दशक के लिए, न तो भारत और न ही पाकिस्तान इस क्षेत्र में स्थायी सैन्य उपस्थिति को बनाए रखा. हालांकि, पाकिस्तान पर्वतारोहण अभियानों के 1950 के दशक के दौरान ग्लेशियर श्रृंखला की मेजबानी शुरू कर दिया. 1980 के दशक तक पाकिस्तान की सरकार पर्वतारोहियों के लिए विशेष अभियान परमिट देने गया था और संयुक्त राज्य अमेरिका सेना नक्शे जानबूझकर पाकिस्तान के एक भाग के रूप में सियाचिन से पता चला है। इस अभ्यास कार्यकाल के समकालीन अर्थ ''[[oropolitics]]''को जन्म दिया ।
[[चित्र:An Indian Army soldier in snow camouflage.jpg|अंगूठाकार|भारतीय सेना का एक जवान, एक गश्ती समूह का हिस्सा, बर्फ की आड़ में एक एसआईजी 716i पकड़े हुए।]]
एक irked भारत का शुभारंभ किया [[ऑपरेशन मेघदूत]] अप्रैल 1984 के दौरान जो पूरे कुमाऊं रेजिमेंट भारतीय सेना की ग्लेशियर पहुंचा था। पाकिस्तानी सेना ने जल्दी से जवाब दिया और दोनों के बीच संघर्ष का पालन किया। भारतीय सेना सामरिक [[सिया ला]] और [[Bilafond ला]] पहाड़ गुजरता है और 1985 के द्वारा, क्षेत्र के 1000 वर्ग मील से अधिक, पाकिस्तान ने दावा किया, भारतीय नियंत्रण के अधीन था।<ref>Edward W. Desmond. [http://www.time.com/time/magazine/article/0,9171,958254-2,00.html "The Himalayas War at the Top Of the World"] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090114104526/http://www.time.com/time/magazine/article/0%2C9171%2C958254-2%2C00.html|date=14 January 2009}}. ''[[Time (magazine)|Time]]'' (31 July 1989).</ref> भारतीय सेना के लिए और अधिक नियंत्रण से ग्लेशियर के 2/3rd जारी है।<ref>http://www {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20200514102730/https://www/ |date=14 मई 2020 }}. globalsecurity.org सैन्य ///विश्व युद्ध /</ref> पाकिस्तान सियाचिन पर नियंत्रण पाने के कई असफल प्रयास किया। देर से 1987 में, पाकिस्तान के बारे में 8,000 सैनिकों जुटाए और उन्हें Khapalu निकट garrisoned, हालांकि Bilafond La. कब्जा करने के लिए लक्ष्य है, वे भारतीय सेना कर्मियों Bilafond रखवाली उलझाने के बाद वापस फेंक दिया गया। पाकिस्तान द्वारा 1990, 1995, 1996 और 1999 में पदों को पुनः प्राप्त करने के लिए आगे प्रयास शुरू किया गया।
भारत के लिए अत्यंत दुर्गम परिस्थितियों और नियमित रूप से [[माउंटेन वॉरफेयर|पहाड़ युद्ध]].<ref>Http://www.time.com/time/asia {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20080907034747/http://time.com/time/asia/ |date=7 सितंबर 2008 }} का एक उदाहरण के रूप में उद्धृत है सियाचिन पर संघर्ष के बावजूद एक मजबूत क्षेत्र में सैनिक उपस्थिति को बनाए रखने के लिए जारी है / covers/501050711/story.html</ref> सियाचिन से अधिक नियंत्रण बनाए रखने भारतीय सेना के लिए कई सैन्य चुनौतियों poses. कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्षेत्र में निर्माण किया गया, समुद्र के स्तर से ऊपर एक हेलिपैड 21,000 फीट (+६४०० मीटर) सहित<ref>http://edition.cnn.com/2002/WORLD/asiapcf/south/05/20/{{Dead link|date=सितंबर 2021 |bot=InternetArchiveBot }}. siachen.kashmir /</ref> 2004 में भारतीय सेना के एक अनुमान के अनुसार 2 लाख अमरीकी डॉलर एक दिन खर्च करने के लिए अपने क्षेत्र में तैनात कर्मियों का समर्थन.<ref>Arun Bhattacharjee. [http://www.atimes.com/atimes/South_Asia/FI23Df04.html "On Kashmir, hot air and trial balloons"] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160228201511/http://indiatoday.intoday.in/story/assault-rifle-excalibur-drdo-dalbir-singh-indian-army-arde/1/449238.html|date=28 February 2016}}. ''[[Asia Times]]'' (23 September 2004).</ref>
=== उपद्रव-रोधी गतिविधियाँ ===
भारतीय सेना अतीत में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लड़ाई [[रमाशंकर यादव 'विद्रोही'|विद्रोही]] और [[आतंकवाद | आतंकवादियों]] राष्ट्र के भीतर. सेना [[ऑपरेशन ब्लू स्टार|ऑपरेशन ब्लूस्टार]] और [[ऑपरेशन वुडरोज़]] सिख विद्रोहियों का मुकाबला करने के लिए 1980 के दशक में. शुभारंभ सेना के साथ [[अर्द्धसैनिक बलों भारत के कुछ अर्धसैनिक बलों]], बनाए रखने के प्रधानमंत्री जिम्मेदारी है <nowiki>[[कानून और व्यवस्था (राजनीति) | कानून और व्यवस्था]]</nowiki> परेशान [[जम्मू और कश्मीर|जम्मू कश्मीर]] क्षेत्र में. भारतीय सेना [[श्रीलंका]] 1987 में के एक भाग के रूप में भी एक दल भेजा है [[भारतीय शांति सेना.]]
=== कारगिल संघर्ष (1999) ===
{{Main|कारगिल युद्ध}}
और कुछ दिनों के बाद, पाकिस्तान और अधिक द्वारा प्रतिक्रिया [[Chagai मैं | परमाणु परीक्षणों]] देने के दोनों देशों के [[परमाणु प्रतिरोध]] क्षमता | 1998 में, भारत [[परमाणु परीक्षण]] [[पोखरण-2|पोखरण द्वितीय]] किया जाता है कूटनीतिक तनाव के बाद ढील [[लाहौर शिखर सम्मेलन]] 1999 में आयोजित किया गया था। आशावाद की भावना कम रहता था, तथापि, के बाद से मध्य 1999-पाकिस्तानी अर्धसैनिक बलों में और कश्मीरी आतंकवादियों पर कब्जा कर लिया वीरान है, लेकिन सामरिक, [[कारगिल जिले]] भारत के हिमालय हाइट्स. इन दुर्गम सर्दियों की शुरुआत के दौरान किया गया था भारतीय सेना द्वारा खाली थे और वसंत में reoccupied चाहिए. ''[[मुजाहिदीन]]''जो इन क्षेत्रों का नियंत्रण ले लिया महत्वपूर्ण समर्थन प्राप्त है, दोनों हाथ और आपूर्ति के रूप में पाकिस्तान से. उनके नियंत्रण है, जो भी''टाइगर हिल''के तहत हाइट्स के कुछ महत्वपूर्ण [[श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर|श्रीनगर -]][[ लेह] राजमार्ग (एनएच 1A), [[बटालिक]] और [[Dras]] की अनदेखी .
[[चित्र:. IndianArmyKargil.jpg | सेना ट्रकों भारतीय गर्मियों में 1999 में कारगिल में लड़ रहे सैनिकों के लिए आपूर्ति ले]]
एक बार पाकिस्तानी आक्रमण के पैमाने का एहसास था, भारतीय सेना जल्दी 200,000 के बारे में सैनिकों जुटाए और [[ऑपरेशन विजय (1999) | ऑपरेशन विजय]] शुरू किया गया था। हालांकि, बाद से ऊंचाइयों पाकिस्तान के नियंत्रण के अधीन थे, भारत एक स्पष्ट रणनीतिक नुकसान में था। राष्ट्रीय राजमार्ग 1 ए पर भारतीयों पर भारी हताहत inflicting<ref name="NLI">[http://www.dailytimes.com.pk/default.asp?page=story_5-5-2003_pg7_14 Indian general praises Pakistani valour at Kargil] 5 May 2003 Daily Times, Pakistan {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090116123416/http://www.dailytimes.com.pk/default.asp?page=story_5-5-2003_pg7_14|date=16 January 2009}}</ref> यह भारतीय सेना के लिए एक गंभीर समस्या है के रूप में राजमार्ग अपने मुख्य सैन्य और आपूर्ति मार्ग था इ शार्प, 2003 द्वारा प्रकाशित रॉबर्ट Wirsing करके युद्ध की छाया में<ref>कश्मीर थी।
ISBN 0-7656-1090-6 pp36 </ref> इस प्रकार, भारतीय सेना की पहली प्राथमिकता चोटियों कि NH1a के तत्काल आसपास के क्षेत्र में थे हटा देना था। यह भारतीय सैनिकों में पहली बार टाइगर हिल और Dras में Tololing जटिल लक्ष्यीकरण परिणामस्वरूप<ref>प्रबंध Adekeye Adebajo, चंद्र लेखा श्रीराम 21 वीं सदी में सशस्त्र संघर्ष pp192 रूटलेज, 193 द्वारा प्रकाशित </ref> यह जल्द ही अधिक हमलों से पीछा किया गया था। बटालिक Turtok उप - क्षेत्र है जो सियाचिन ग्लेशियर तक पहुँच प्रदान पर. 4590 प्वाइंट है, जो NH1a के निकटतम दृश्य था सफलतापूर्वक पर 14 जून को भारतीय बलों द्वारा पुनः कब्जा दक्षिण एशिया में युद्ध के नेब्रास्का प्रेस प्रदीप बरुआ 261 राज्य में पेज के यू द्वारा प्रकाशित किया गया था।
हालांकि राजमार्ग के आसपास के क्षेत्र में पदों के अधिकांश मध्य जून तक मंजूरी दे दी, द्रास के पास राजमार्ग के कुछ भागों में युद्ध के अंत तक गोलीबारी छिटपुट देखा. एक बार NH1a क्षेत्र साफ हो गया था, भारतीय सेना नियंत्रण रेखा के पार वापस हमलावर बल ड्राइविंग के लिए बदल गया। [Tololing [लड़ाई]], अन्य हमलों के बीच धीरे - धीरे भारत के पक्ष में मुकाबला झुका. फिर भी, कुछ पदों की एक कड़ी प्रतिरोध डाल सहित टाइगर हिल (5140 प्वाइंट) है कि केवल युद्ध के बाद में गिर गया,. के रूप में पूरी तरह से ऑपरेशन चल रहा था, के बारे में 250 तोपों में लाया गया पोस्ट में थे में घुसपैठियों को स्पष्ट दृष्टि से [लाइन]]. कई महत्वपूर्ण बिंदुओं में, न तो तोपखाने और न ही हवा शक्ति बेदखल कर सकता है चौकियों पाकिस्तान सैनिकों, जो दिखाई रेंज के बाहर थे द्वारा मानव. भारतीय सेना के कुछ प्रत्यक्ष ललाट जमीन हमले है जो धीमी गति से थे और एक भारी टोल ले लिया खड़ी चढ़ाई है कि 18,000 फीट (+५५०० मीटर) के रूप में उच्च के रूप में चोटियों पर बनाया जाना था दिया मुहिम शुरू की. संघर्ष में दो महीने, भारतीय सेना धीरे लकीरें वे खो दिया था की सबसे retaken था, सर्दी की<ref>{{cite web|url=http://www.lrb.co.uk/v23/n08/ali_01_.html|title=Tariq Ali · Bitter Chill of Winter: Kashmir · LRB 19 April 2001|work=London Review of Books|archive-url=https://web.archive.org/web/20091001175541/http://www.lrb.co.uk/v23/n08/ali_01_.html|archive-date=1 October 2009|access-date=4 April 2016|url-status=live}}</ref><ref>{{cite book|title=Kargil : A Wake Up Call|author=Colonel Ravi Nanda|publisher=Vedams Books|year=1999|isbn=978-81-7095-074-5}} [https://www.vedamsbooks.com/no14953.htm Online summary of the Book] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20070928055430/https://www.vedamsbooks.com/no14953.htm|date=28 September 2007}}</ref> सरकारी गिनती के अनुसार, एक अनुमान के अनुसार 75% -80% और घुसपैठ क्षेत्र के लगभग सभी उच्च भूमि भारतीय नियंत्रण के तहत वापस आ गया था।
[[चित्र:Kargil war.jpg|अंगूठाकार|कारगिल युद्ध के दौरान लड़ाई जीतने के बाद भारतीय सैनिक।]]
भारत पर, समाचार जिनमें से चिंतित अमेरिकी | के रूप में पाकिस्तान पाया खुद एक कांटेदार स्थिति में entwined सेना छिपकर परमाणु हमले परमाणु युद्ध की योजना बनाई थी राष्ट्रपति [[बिल क्लिंटन]], एक कड़ी चेतावनी में नवाज शरीफ के परिणामस्वरूप<ref>{{Cite web|url=http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/1989886.stm|title=Pakistan 'prepared nuclear strike'|date=16 May 2002|website=BBC|archive-url=https://web.archive.org/web/20090112044143/http://news.bbc.co.uk/1/hi/world/south_asia/1989886.stm|archive-date=12 January 2009}}</ref> वाशिंगटन पर समझौते के बाद 4 जुलाई, जहां शरीफ पाकिस्तानी सैनिकों को वापस लेने पर सहमत हुए, लड़ने के सबसे एक क्रमिक रोकने के लिए आया था, लेकिन कुछ पाकिस्तानी सेना ने भारतीय पक्ष पर स्थिति में बने रहे नियंत्रण रेखा. इसके अलावा, [[यूनाइटेड जिहाद काउंसिल]] (सभी [अतिवादी []] समूहों के लिए एक छाता) एक चढ़ाई नीचे के लिए पाकिस्तान की योजना को अस्वीकार कर दिया है, बजाय पर लड़ने के निर्णय लेने.<nowiki><ref> </nowiki>[Http://news.bbc. co.uk/1/hi/world/south_asia/386537.stm पाकिस्तान और कश्मीर के आतंकवादियों]{{Dead link|date=जून 2020|bot=InternetArchiveBot}} <nowiki></ref></nowiki> जुलाई के आखिरी हफ्ते में भारतीय सेना अपनी अंतिम हमलों का शुभारंभ किया, के रूप में जल्द ही के रूप में द्रास Subsector पाकिस्तान की मंजूरी दे दी थी बलों से लड़ने पर रह गए 26 जुलाई. दिन के बाद से''कारगिल विजय''भारत में (कारगिल विजय दिवस) दिवस के रूप में चिह्नित किया गया है है। युद्ध के अंत तक भारत सभी क्षेत्र दक्षिण और नियंत्रण रेखा के पूर्व का नियंत्रण फिर से शुरू किया था, के रूप में जुलाई 1972 में शिमला समझौते के अनुसार स्थापित किया गया था।
=== ऑपरेशन पराक्रम ===
भारतीय संसद ऑपरेशन पराक्रम में जो भारतीय सैनिकों की हजारों की दसियों भारत - पाकिस्तान सीमा पर तैनात किया गया था शुरू किया गया था पर हमले. भारत हमले समर्थन के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराया. सबसे बड़ा सैन्य किसी एशियाई देश से बाहर किए गए व्यायाम आपरेशन किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य अभी स्पष्ट नहीं है है लेकिन [[परमाणु संघर्ष]] पाकिस्तान, जो भारतीय संसद पर दिसंबर हमले के बाद तेजी से संभव लग रहा था के साथ किसी भी भविष्य के लिए सेना को तैयार करने के लिए किया गया है प्रकट होता है।
=== संयुक्त राष्ट्र शान्ति सेना में योगदान ===
[[चित्र:IndiansoldiersKorea1953.jpg|thumb|right|[[कोरिया]] में सितंबर १९५३ में तटस्थ बफर जोन के साथ शांति स्थापित करने के लिए [[भारतीय सशस्त्र सेनाएँ|भारतीय सेना]] के आगमन पर]]
[[चित्र:9 avril 2015. Binza, Nord Kivu, RD Congo. Un casque bleu d’INBATT 2 et un soldat des FARDC se saluent et s’encouragent mutuellement. (16534163503).jpg|अंगूठाकार|भारतीय सेना के एक शांतिदूत और एक FARDC सैनिक हाथ मिलाते हैं और एक दूसरे को प्रोत्साहित करते हैं]]
वर्तमान में [[भारतीय सशस्त्र सेनाएँ|भारतीय सेना]] की एक टुकड़ी [[संयुक्त राष्ट्र]] की सहायता के लिये समर्पित रहती है। भारतीय सेना द्वारा निरन्तर कठिन कार्यों में भाग लेने की प्रतिबद्धताओं की हमेशा प्रशंसा की गई है।
भारतीय सेना ने संयुक्त राष्ट्र के कई शान्ति स्थापित करने की कार्यवाहियों में भाग लिया गया है जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं: [[अंगोला]], [[कम्बोडिया]], [[साइप्रस]], [[कांगो लोकतान्त्रिक गणराज्य|लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो]], [[अल साल्वाडोर]], [[नामीबिया]], [[लेबनान]], [[लाइबेरिया]], [[मोज़ाम्बीक|मोजाम्बिक]], [[रुआण्डा|रवाण्डा]], [[सोमालिया]], [[श्रीलंका]] और [[वियतनाम]]| भारतीय सेना ने कोरिया में हुयी लड़ाई के दौरान घायलों और बीमारों को सुरक्षित लाने के लिये भी अपनी अर्द्ध-सैनिकों की इकाई प्रदान की थी।
== प्रमुख युद्धाभ्यास ==
==== ऑपरेशन संघ शक्ति ====
इसके बाद से कहा है कि इस अभ्यास का मुख्य लक्ष्य अम्बाला आधारित''द्वितीय स्ट्राइक''कोर जुटाना रणनीति को मान्य किया गया था। एयर समर्थन इस अभ्यास का एक हिस्सा था और हवाई छतरी सेना की एक पूरी बटालियन के युद्ध खेल के संचालन के दौरान पैराड्रॉप्ड संबद्ध उपकरणों के साथ. कुछ २०००० सैनिक अभ्यास में भाग लिया।
==== अश्वमेध अश्वमेध ====
भारतीय सेना व्यायाम अश्वमेध में अपने नेटवर्क केंद्रित युद्ध क्षमताओं का परीक्षण किया। व्यायाम थार रेगिस्तान में आयोजित किया गया, जिसमें 30,000 से अधिक सैनिकों ने भाग लिया।<ref>{{Cite web|url=http://www.india-defence.com/reports/3115|title=भारतीय सेना परीक्षण Ashwamedh युद्ध खेल में नेटवर्क केंद्रित युद्ध क्षमता|archive-url=https://web.archive.org/web/20120205100849/http://www.india-defence.com/reports/3115|archive-date=5 फ़रवरी 2012}}</ref> असममित युद्ध क्षमता भी दौरान भारतीय सेना द्वारा परीक्षण किया गया था 'अश्वमेध' पैदल सैनिकों के महत्व
==== ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स ====
ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स नवंबर 1986 में भारतीय सेना द्वारा शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य भारत की पश्चिमी सीमा पर पूर्ण पैमाने पर युद्ध का अनुकरण करना था। यह अभ्यास भारत में अब तक आयोजित सबसे बड़ा अभ्यास था। इसमें नौ पैदल सेना, तीन मशीनीकृत, तीन बख्तरबंद डिवीजन और एक हवाई हमला डिवीजन, साथ ही तीन स्वतंत्र बख्तरबंद ब्रिगेड शामिल थे। भारतीय नौसेना के साथ उभयचर आक्रमण अभ्यास भी आयोजित किए गए। ब्रासस्टैक्स में कथित तौर पर परमाणु हमला अभ्यास भी शामिल था। इससे पाकिस्तान के साथ तनाव बढ़ गया।<ref>{{cite magazine|author=John Cherian|title=An exercise in anticipation|url=http://www.hinduonnet.com/fline/fl1811/18110990.htm|date=26 May – 8 June 2001|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20041207205511/http://www.hinduonnet.com/fline/fl1811/18110990.htm|archive-date=7 December 2004|magazine=[[Frontline (magazine)|Frontline]]|volume=18|issue=11|access-date=13 April 2022}}</ref>
== थलसेना का कार्यबल ==
=== क्षमता ===
[[चित्र:Honour_guard,_India_20060302-9_d-0108-2-515h.jpg|अंगूठाकार|विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की राजकीय यात्रा में घुडसवार [[राष्ट्रपति अंगरक्षक (भारत)|राष्ट्रपति अंगरक्षक]].]]
{| class="wikitable"
! colspan="2" |'''भारतीय थल सेना सम्बंधित आंकड़े'''
|-
|[[तत्कालीन कार्यरत|कार्यरत सैनिक]]
|1,300,000
|-
|[[आरक्षित सैनिक]]
|1,200,000
|-
|[[प्रादेशिक सेना]]
|200,000**
|-
|[[मुख्य युद्धक टैंक]]
|4500
|-
|[[तोपख़ाना|तोपखाना]]
|12,800
|-
|[[प्रक्षेपास्त्र]]
|100 (अग्नि-1, अग्नि-2)
|-
|[[क्रूज प्रक्षेपास्त्र]]
|[[ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र|ब्रह्मोस]]
|-
|[[वायुयान]]
|10 [[स्क्वाड्रन]] हेलिकॉप्टर
|-
|[[सतह से वायु प्रक्षेपास्त्र]]
|90000
|}
<small>* 300,000 प्रथम पंक्ति ओर 500,000 द्वितीय पंक्ति के योद्धा सम्मिलित हैं </small>
<small>** 40,000 प्रथम पंक्ति ओर 160,000 द्वितीय पंक्ति के योद्धा सम्मिलित हैं</small>
=== आंकड़े ===
* 4 त्वरित (Reorganised सेना Plains इन्फैंट्री प्रभागों)
* 18 इन्फैंट्री प्रभागों
* 10 माउंटेन प्रभागों
* 3 आर्मड प्रभागों
* 2 आर्टिलरी प्रभागों
* 13 एयर डिफेंस + ब्रिगेड्स 2 भूतल एयर मिसाइल समूह
* 5 स्वतंत्र बख्तरबंद ब्रिगेड
* 15 स्वतंत्र आर्टिलरी ब्रिगेड
* 7 स्वतंत्र इन्फैंट्री ब्रिगेड
* 1 पैराशूट ब्रिगेड
* 4 अभियंता ब्रिगेड
* 14 सेना उड्डयन हेलीकाप्टर इकाइयों
====== उप - इकाइयाँ ======
* 63 टैंक रेजिमेंट
* 7 एयरबोर्न बटालियन
* 200 आर्टिलरी रेजिमेंट
* 360 इन्फैंट्री बटालियन + 5 पैरा बटालियन (एस एफ)
* 40 मैकेनाइज्ड इंफेंट्री बटालियन
* लड़ाकू हेलीकाप्टर इकाइयों 20
* 52 एयर डिफेंस रेजिमेंट
=== पदानुक्रम संरचना ===
[[चित्र:Indian_Army_Gurkha_rifles.jpg|अंगूठाकार|The 1st Battalion of [[1 Gorkha Rifles]] of the Indian Army take position outside a simulated combat town during a training exercise.]]
{{main|Indian Army all Rank List}}
[https://technicalpathway.com/indian-army-all-rank-list/ भारतीय सेना के विभिन्न पद अवरोही क्रम में इस प्रकार हैं:]
'''कमीशन प्राप्त अधिकारी'''
* [[फ़ील्ड मार्शल (भारत)|फ़ील्ड मार्शल]]<sup>1</sup>
* [[जनरल]] (यह [[थलसेना अध्यक्ष]] का पद है)
* [[लेफ्टिनेंट-जनरल]]
* [[मेजर-जनरल]]
* [[ब्रिगेडियर]]
* [[कर्नल]]
* [[लेफ्टिनेंट-कर्नल]]
* [[मेजर]]
* [[कैप्टन]]
* [[लेफ्टिनेंट]]
* [[सेकंड लेफ्टिनेंट]]<sup>2</sup>
'''कनिष्ठ कमीशन प्राप्त अधिकारी (JCOs)'''
* सूबेदार मेजर /[[मानद कप्तान]]<sup>3</sup>
* सूबेदार /[[मानद लेफ्टिनेंट]]<sup>3</sup>
* [[सूबेदार मेजर]]
* [[सूबेदार]]
* [[नायब सूबेदार]]
'''गैर कमीशन प्राप्त अधिकारी (NCOs)'''
* [[रेजीमेंट हवलदार मेजर]]<sup>2</sup>
* [[रेजीमेंट क्वार्टरमास्टर हवलदार मेजर]]<sup>2</sup>
* [[कंपनी हवलदार मेजर]]
* [[कंपनी क्वार्टरमास्टर हवलदार मेजर]]
* [[हवलदार]]
* [[नायक]]
* [[लांसनायक]]
* [[सिपाही]]
<small>नोट:<br />
*1 आज तक केवल दो ही जनरल फील्ड मार्शल के पद से विभूषित हुए हैं। - : फील्ड मार्शल [[के एम करिअप्पा]]{{ndash}} भारतीय सेना के प्रथम कमाण्डर इन चीफ (यह पद अब समाप्त कर दिया गया है) {{ndash}} तथा फील्ड मार्शल [[सैम मानेकशा]], १९७१ युद्ध के दौरान सेनाध्यक्ष<br />
*2. This has now been discontinued. Non-Commissioned Officers in the rank of Havildar are elible for Honorary JCO ranks. यह अब बंद कर दिया गया है। हवलदार के रैंक में गैर कमीशंड अधिकारी मानद जूनियर कमीशन अफसर रैंकों के लिए elible हैं <br />
*3. Given to Outstanding JCO's Rank and pay of a Lieutenant, role continues to be of a JCO. बकाया है जूनियर कमीशन अफसर श्रेष्टता श्रेणी को देखते हुए और एक लेफ्टिनेंट के भुगतान, भूमिका एक जूनियर कमीशन अफसर का होना जारी है </small>
=== अन्य सैन्य व्यूह (Other Field Formations) ===
[[चित्र:IA_men.jpg|अंगूठाकार|A section of the Indian Army takes charge during a military exercise.]]
* [[प्रभाग (सेना) | प्रभाग]]: सेना डिवीजन एक कोर और एक ब्रिगेड के बीच एक मध्यवर्ती है। यह सबसे बड़ी सेना में हड़ताली बल है। प्रत्येक प्रभाग [जनरल आफिसर कमांडिंग (जीओसी) द्वारा [[मेजर जनरल] रैंक में होता है। यह आमतौर पर +१५,००० मुकाबला सैनिकों और 8000 का समर्थन तत्वों के होते हैं। वर्तमान में, भारतीय सेना 4 रैपिड (पुनः संगठित सेना Plains इन्फैंट्री प्रभागों) सहित 34 प्रभागों लड़ाई प्रभागों, 18 इन्फैन्ट्री प्रभागों, 10 माउंटेन प्रभागों, 3 आर्मड प्रभागों और 2 आर्टिलरी प्रभागों. प्रत्येक डिवीजन के कई composes [[ब्रिगेड्स]].
* [[ब्रिगेड]]: ब्रिगेड डिवीजन की तुलना में छोटे है और आम तौर पर विभिन्न लड़ाकू समर्थन और आर्म्स और सेवाएँ के तत्वों के साथ साथ 3 इन्फैन्ट्री बटालियन के होते हैं। यह की अध्यक्षता में है एक [[ब्रिगेडियर]] के बराबर [[ब्रिगेडियर जनरल]] भारतीय सेना भी 5 स्वतंत्र बख्तरबंद ब्रिगेड, 15 स्वतंत्र आर्टिलरी ब्रिगेड, 7 स्वतंत्र इन्फैंट्री ब्रिगेड, 1 स्वतंत्र पैराशूट ब्रिगेड, 3 स्वतंत्र वायु रक्षा ब्रिगेड, 2 स्वतंत्र वायु रक्षा समूह और 4 स्वतंत्र अभियंता ब्रिगेड है। ये स्वतंत्र ब्रिगेड कोर कमांडर (जीओसी कोर) के तहत सीधे काम.
* [[बटालियन]]: एक बटालियन की कमान में है एक [[कर्नल]] और इन्फैंट्री के मुख्य लड़ इकाई है। यह 900 से अधिक कर्मियों की होते हैं।
* [[कंपनी (सैन्य इकाई) | कंपनी] के नेतृत्व: [[मेजर]], एक कंपनी के 120 सैनिकों को शामिल.
* [[प्लाटून]]: एक कंपनी और धारा के बीच एक मध्यवर्ती, एक प्लाटून [[लेफ्टिनेंट]] या कमीशंड अधिकारियों की उपलब्धता पर निर्भर करता है, एक जूनियर कमीशंड अधिकारी [रैंक के साथ, [जूनियर कमीशन अफसर की अध्यक्षता में | सूबेदार ]] या [[जूनियर कमीशन अफसर | नायब सूबेदार]]. यह बारे में 32 सैनिकों की कुल संख्या है।
* [[धारा (सैन्य इकाई) | धारा]]: सबसे छोटा 10 कर्मियों के एक शक्ति के साथ सैन्य संगठन. रैंक के एक गैर कमीशन अधिकारी द्वारा कमान संभाली [[हवलदार]] या [सार्जेंट []].
<!--
:* [[Division (Military)|Division]]: An Army Division is an intermediate between a Corps and a Brigade. It is the largest striking force in the army. Each Division is headed by [General Officer Commanding] (GOC) in the rank of [[Major General]]. It usually consists of 15,000 combat troops and 8,000 support elements. Currently, the Indian Army has 34 Divisions including 4 Rapid (Re-organised Army Plains Infantry Divisions) Action Divisions, 18 Infantry Divisions, 10 Mountain Divisions, 3 Armoured Divisions and 2 Artillery Divisions. Each Division composes of several [[Brigades]].
:* [[Brigade]]: The Brigade is smaller than the Division and generally consists of 3 Infantry Battalions along with elements of various Combat & Support Arms & Services. It is headed by a [[Brigadier]] equivalent to a [[Brigadier General]]. The Indian Army also has 5 Independent Armoured Brigades, 15 Independent Artillery Brigades, 7 Independent Infantry Brigades, 1 Independent Parachute Brigade,3 Independent Air Defence Brigades, 2 Independent Air Defence Groups and 4 Independent Engineer Brigades. These Independent Brigades operate directly under the Corps Commander (GOC Corps).
:* [[Battalion]]: A Battalion is commanded by a [[Colonel]] and is the Infantry's main fighting unit. It consists of more than 900 personnel.
:* [[Company (military unit)|Company]]: Headed by the [[Major]], a Company comprises 120 soldiers.
:* [[Platoon]]: An intermediate between a Company and Section, a Platoon is headed by a [[Lieutenant]] or depending on the availability of Commissioned Officers, a Junior Commissioned Officer, with the rank of [[JCO|Subedar]] or [[JCO|Naib-Subedar]]. It has a total strength of about 32 troops.
:* [[Section (military unit)|Section]]: Smallest military outfit with a strength of 10 personnel. Commanded by a Non-commissioned officer of the rank of [[Havildar]] or [[Sergeant]].
===Mahar regt===
{{main|List of regiments of the Indian Army}}
[[चित्र:Indian Army-Sikh Light Infantry regiment.jpeg|right|thumb|Soldiers of the [[Sikh Light Infantry]].]]
--->
=== पैदल सेना रेजिमेंट (Infantry Regiments) ===
<!--
There are several battalions or units under the same formation in a Regiment. The Gurkha Regiment, for instance, has several battalions. All formations under a Regiment are battalions of the same arms or Corps (i.e., Infantry or Engineers). Regiments are not exactly field formations; they mostly do not make a formation. All Regiments of the Gurkha's for instance would not fight together as one formation, but can be dispersed over various Brigades or Corps or even Commands।
--->
{{see|List of regiments of the Indian Army}}
[[चित्र:Artillery_Insignia.gif|अंगूठाकार|Artillery Insignia]]
==== तोपखाना रेजिमेंट (Artillery Regiments) ====
[[तोपख़ाना|तोपखाना]] सेना के विध्वंसक शक्ति का मुख्य अंग है | भारत में प्राचीन ग्रंथों में तोपखाने का वर्णन मिलता है | तोप को संस्कृत में शतघ्नी कहा जाता है | मध्य कालीन इतिहास में तोप का प्रयोग सर्वप्रथम बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध में सन १५२६ ई० में किया था| कुछ नवीन प्रमाणों से यहाँ प्रतीत होता है के तोप का प्रयोग बहमनी राजाओं ने १३६८ में अदोनी के युद्ध में तथा गुजरात के शासक मोहमद शाह ने १५ वीं शताब्दी में किया था |भरत मे तोप खाना के दोउ केन्द्र है ह्य्द्रबद और नसिक रोअद
== युद्ध सिद्धान्त ==<!--
The current combat doctrine of the Indian Army is based on effectively utilizing holding formations and strike formations. In the case of an attack, the holding formations would contain the enemy and strike formations would counterattack to neutralize enemy forces. In the case of an Indian attack, the holding formations would pin enemy forces down whilst the strike formations attack at a point of Indian choosing. The Indian Army is large enough to devote several corps to the strike role. Currently, the army is also looking at enhancing its [[special forces]] capabilities.
-->
== उपस्कर एवं उपकरण ==
[[चित्र:Arjun_MBT_bump_track_test.JPG|दाएँ|अंगूठाकार|[[Arjun MBT]].]]
[[चित्र:Indian_Army_T-90.jpg|अंगूठाकार|[[T-90|Bhishma T-90]] MBT.]]
[[चित्र:Indian_Army_T-72_image1.jpg|दाएँ|अंगूठाकार|[[T-72]] Ajeya.]]
[[चित्र:Nag_with_NAMICA_Defexpo-2008.JPG|दाएँ|अंगूठाकार|[[Nag missile]] and NAMICA (Nag Missile Carrier).]]
{{main|Equipment of the Indian Army}}
<!--
Most of the army equipment is imported, but efforts are being made to manufacture indigenous equipment. All Indian Military Firearms guns are manufactured under the umbrella administration of the Ordnance Factory Board, with principal Firearm manufacturing facilities in Ishapore, [[Cossipore]], Kanpur, Jabalpur and Tiruchirapalli. Indian National Small Arms System (INSAS) rifle, which is successfully inducted by Indian Army since 1997 is a product of Ordanance Factory Board, Ishapore। While ammunition is manufactured at Kirkee (Now Khadki) and possibly at Bolangir.
--->
=== विमान ===
<!--This article is on the Indian army. So please do not include aircraft of the Indian Air Force.-->
<!--
:''This is a list of aircraft of the Indian Army. For the list of aircraft of the [[Indian Air Force]], see [[List of aircraft of the Indian Air Force]].''
The Indian Army operates more than 200 [[helicopter]]s, plus additional [[unmanned aerial vehicle]]s.
--->[[चित्र:ILA_2008_PD_414.JPG|अंगूठाकार|[[HAL Dhruv]]]]
<!-- Image with inadequate rationale removed: [[Image:NISHANT UAV Flight.jpg|right|thumb|[[DRDO Nishant]] Unmanned Aerial Vehicles.]] -->
{| class="wikitable"
!विमान!!उद्गम!!प्रकार!!संस्करण!!सवारत!!टिप्पणी
|-
| [[HAL Dhruv]] || {{IND}} || utility helicopter || || 36+ || To acquire 73 more Dhruv in next 5 years.
|-
| [[Aérospatiale Alouette III|Aérospatiale SA 316 Alouette III]] || {{FRA}} || utility helicopter || SA 316B Chetak || 60 || to be replaced by Dhruv
|-
| [[Aérospatiale Lama|Aérospatiale SA 315 Lama]] || {{FRA}} || utility helicopter || SA 315B Cheetah || 48 || to be replaced by Dhruv
|-
| [[DRDO Nishant]] || {{IND}} || reconnaissance UAV || || 1 || Delivery of 12 UAV's in 2008.
|-
| [[Israel Aerospace Industries|IAI Searcher II]] || {{ISR}} || reconnaissance UAV || || 100+ ||
|-
| [[IAI Heron|IAI Heron II]] || {{ISR}} || reconnaissance UAV || || 50+ ||
|}
<!--
The Indian army had projected a requirement for a helicopter that can carry loads of up to 75 kg heights of {{convert|23000|ft|m}} on the Siachen Glacier in Jammu and Kashmir. Flying at these heights poses unique challenges due to the rarefied atmosphere. The Indian Army chose the [[Eurocopter Fennec|Eurocopter AS 550]] for a $550 million contract for 197 light helicopters to replace its ageing fleet of [[Aérospatiale Alouette III|Chetaks]] and [[Aérospatiale Alouette II|Cheetahs]], some of which were inducted more than three decades ago.<ref>[http://www.kalingatimes.com/orissa_business/news/20070408_Eurocopter_wins_deal.htm Eurocopter wins big Indian Army deal]</ref>
The deal has however been scrapped amidst allegations of corruption during the bidding process.
---><ref>{{Cite web |url=http://www.khaleejtimes.com/DisplayArticleNew.asp?xfile=data%2Fsubcontinent%2F2007%2FDecember%2Fsubcontinent_December215.xml§ion=subcontinent&col= |title=संग्रहीत प्रति |access-date=15 जून 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120211201356/http://www.khaleejtimes.com/DisplayArticleNew.asp?xfile=data%2Fsubcontinent%2F2007%2FDecember%2Fsubcontinent_December215.xml§ion=subcontinent&col= |archive-date=11 फ़रवरी 2012 |url-status=dead }}</ref>
== परम वीर चक्र विजेता ==
भारत का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार [[परमवीर चक्र]] प्राप्त करने वाले वीरों की सूची इस प्रकार है :
{| class="wikitable"
! अनुक्रम !! संख्या !! नाम !! रेजीमेंट !!तिथि !! स्थान !! टिप्पणी
|-
| 1 || IC-521 || [[सोमनाथ शर्मा|मेजर सोमनाथ शर्मा]] || चौथी बटालियन, [[कुमाऊं रेजिमेंट|कुमाऊँ रेजीमेंट]] || [[३ नवम्बर|3 नवंबर]], [[१९४७|1947]] || [[बडगाम|बड़गाम]], [[कश्मीर]] || मरणोपरांत
|-
| 2 || IC-22356 || [[करम सिंह|लांस नायक करम सिंह]] || पहली बटालियन, [[सिख रेजिमेंट|सिख रेजीमेंट]] || [[१३ अक्टूबर|13 अक्तूबर]], [[१९४८|1948]] || [[टिथवाल]], [[कश्मीर]] ||
|-
| 3 || SS-14246 || [[राम राघोबा राणे|सेकेंड लेफ़्टीनेंट राम राघोबा राणे]] || [[इंडियन कार्प्स ऑफ इंजिनयर्स]]|| [[८ अप्रैल|8 अप्रैल]], [[१९४८|1948]] || [[नौशेरा]], [[कश्मीर]] ||
|-
| 4 || 27373 || [[यदुनाथ सिंह|नायक यदुनाथ सिंह]] || पहली बटालियन, [[राजपूत रेजिमेंट|राजपूत रेजीमेंट]] || फरवरी [[१९४८|1948]] || [[नौशेरा]], [[कश्मीर]] || मरणोपरांत
|-
| 5 || 2831592 || [[पीरू सिंह|कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह]] || छ्ठी बटालियन, [[राजपूताना राइफल्स]] || [[१७ जुलाई|17-]][[१८ जुलाई|18]] [[जुलाई]], [[१९४८|1948]] || [[टिथवाल]], [[कश्मीर]] || मरणोपरांत
|-
| 6 || IC-8497 || [[गुरबचन सिंह सलारिया|कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया]] || तीसरी बटालियन, [[१ गोरखा राइफल्स]]|| [[५ दिसम्बर|5 दिसंबर]], [[१९६१|1961]] || [[एलिजाबेथ विले]], [[काटंगा]], [[कांगो गणराज्य|कांगो]] || मरणोपरांत
|-
| 7 || IC-7990 || [[धनसिंह थापा|मेजर धनसिंह थापा]] || पहली बटालियन, [[गोरखा राइफल्स]]|| [[२० अक्टूबर|20 अक्तूबर]], [[१९६२|1962]] || [[लद्दाख़|लद्दाख]], ||
|-
| 8 || JC-4547 || [[सूबेदार जोगिंदर सिंह]] || पहली बटालियन, [[सिख रेजिमेंट|सिख रेजीमेंट]] || [[२३ अक्टूबर|23 अक्तूबर]], [[१९६२|1962]] || [[तोंगपेन ला]], [[नार्थ इस्ट फ्रंटियर एजेंसी]], [[भारत]] || मरणोपरांत
|-
| 9 || IC-7990 || [[शैतान सिंह|मेजर शैतान सिंह]] || तेरहवीं बटालियन, [[कुमाऊं रेजिमेंट|कुमाऊँ रेजीमेंट]] || [[१८ नवम्बर|18 नवंबर]], [[१९६२|1962]] || [[रेज़ांग ला]] || मरणोपरांत
|-
| 10 || 2639885 || [[अब्दुल हमीद|कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद]] || चौथी बटालियन, [[ग्रेनेडियर्स|बाम्बे ग्रेनेडियर्स]] || [[१० सितंबर|10 सितंबर]], [[१९६५|1965]] || [[चीमा]], [[खेमकरण सेक्टर]]|| मरणोपरांत
|-
| 11 || IC-5565 || [[लेफ्टिनेंट कर्नल ए॰ बी॰ तारापोर|लेफ्टीनेंट कर्नल आर्देशिर तारापोर]] || [[द पूना हार्स]] || [[१५ अक्टूबर|15 अक्तूबर]], [[१९६५|1965]] || [[फिलौरा]], [[सियालकोट]] सेक्टर, [[पाकिस्तान]] || मरणोपरांत
|-
| 12 || 4239746 || [[अलबर्ट एक्का|लांस नायक अलबर्ट एक्का]] || चौदहवीं बटालियन, [[बिहार रेजिमेंट|बिहार रेजीमेंट]] || [[३ दिसम्बर|3 दिसंबर]], [[१९७१|1971]] || [[गंगासागर]] || मरणोपरांत
|-
| 13 || 10877 F(P) || [[निर्मलजीत सिंह सेखों | फ्लाईंग आफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों]] || अठारहवीं स्क्वैड्रन, [[भारतीय वायुसेना]] || [[१४ दिसम्बर|14 दिसंबर]], [[१९७१|1971]] || [[श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर|श्रीनगर]], [[कश्मीर]] || मरणोपरांत
|-
| 14 || IC-25067 || [[अरुण खेतरपाल|लेफ्टीनेंट अरुण क्षेत्रपाल]] || [[द पूना हार्स|पूना हार्स]] || [[१६ दिसम्बर|16 दिसंबर]], [[१९७१|1971]] || [[जरपाल]], [[शकरगढ़]] सेक्टर || मरणोपरांत
|-
| 15 || IC-14608 || [[मेजर]] [[होशियार सिंह]] || तीसरी बटालियन, [[ग्रेनेडियर्स|बाम्बे ग्रेनेडियर्स]] || [[१७ दिसम्बर|17 दिसंबर]], [[१९७१|1971]] || [[बसंतार नदी]], [[शकरगढ़]] सेक्टर ||
|-
| 16 || JC-155825 || [[बन्ना सिंह|नायब सूबेदार बन्ना सिंह]] || आठवीं बटालियन, [[जम्मू कश्मीर लाइट इन्फेंट्री|जम्मू कश्मीर लाइट इनफेन्ट्री]] || [[२३ जून|23 जून]], [[१९८७|1987]] || [[सियाचिन हिमनद|सियाचिन ग्लेशियर]], [[जम्मू और कश्मीर|जम्मू कश्मीर]] || जीवित
|-
| 17 || IC-32907 || [[रामास्वामी परमेश्वरन|मेजर रामास्वामी परमेश्वरन]] || आठवीं बटालियन, [[महार रेजिमेंट|महार रेजीमेंट]] || [[२५ नवंबर|25 नवंबर]], [[१९८७|1987]] || [[श्रीलंका]] || मरणोपरांत
|-
| 18 || IC-56959 || [[मनोज कुमार पांडेय|लेफ्टीनेंट मनोज कुमार पांडे]] || प्रथम बटालियन, [[ग्यारहवीं गोरखा राइफल्स]]|| [[३ जुलाई|3 जुलाई]], [[१९९९|1999]] || [[ज़ुबेर टाप]], [[बटालिक]] सेक्टर, [[कारगिल]] क्षेत्र, [[जम्मू और कश्मीर|जम्मू कश्मीर]] || मरणोपरांत
|-
| 19 || 2690572 || [[योगेन्द्र सिंह यादव|ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव]] || अठारहवीं बटालियन, [[ग्रेनेडियर्स|द ग्रेनेडियर्स]] || [[४ जुलाई|4 जुलाई]], [[१९९९|1999]] || [[टाइगर हिल्स]], [[कारगिल]] क्षेत्र || जीवित
|-
| 20 || 13760533|| [[राइफलमैन संजय कुमार]] || तेरहवीं बटालियन, [[जम्मू कश्मीर राइफल्स]] || [[५ जुलाई|5 जुलाई]], [[१९९९|1999]] ||फ्लैट टाप क्षेत्र, [[कारगिल]] || जीवित
|-
| 21 || IC-57556 || [[विक्रम बत्रा|कैप्टन विक्रम बत्रा]] || तेरहवीं बटालियन, [[जम्मू कश्मीर राइफल्स]] || [[६ जुलाई|6 जुलाई]], [[१९९९|1999]] || बिंदु 5140, बिंदु 4875, [[कारगिल]] क्षेत्र|| मरणोपरांत
|}
== भारतीय थलसेना की संरचना ==
भारतीय थलसेना को 13 कोर के अंतर्गत 35 प्रभागों में संगठित किया गया है। सेना का मुख्यालय, भारतीय राजधानी नई दिल्ली में स्थित है, और यह सेना प्रमुख (चीफ ऑफ़ दी आर्मी स्टाफ) के निरिक्षण में रहती हैं। वर्तमान में जनरल मनोज पाण्डेय सेना प्रमुख हैं।
===कमान संरचना===
सेना की 6 क्रियाशील कमान(कमांड) और 1 प्रशिक्षण कमांड है। प्रत्येक कमान का नेतृत्व जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ होता है जोकि एक लेफ्टिनेंट जनरल रैंक का अधिकारी होता हैं। प्रत्येक कमांड, नई दिल्ली में स्थित सेना मुख्यालय से सीधे जुड़ा हुआ है। इन कमानो को नीचे उनके सही क्रम में दर्शाया गया हैं,
{| class="wikitable" c
|-
! कमांड चिह्न !! कमांड का नाम!! मुख्यालय
!कमांडर!! अधीनस्थ इकाइयां(यूनिट्)
|-
|[[File:Indian Army HQ.jpg|50px]] || '''मुख्यालय, भारतीय सेना''' || [[नई दिल्ली]]
||| 50वीं भारतीय पैराशूट दल – [[आगरा]]
|-
| [[File:IA Central Command.jpg|50px]] || '''[[केंद्रीय कमान]]''' || [[लखनऊ]]
|लेफ्टिनेंट जनरल बी एस नेगी<ref name=IndianArmyCentComCinC>{{Cite web |title=Central Command: General Officer Commanding-in-Chief |url=http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=/cT7fozqiMj75K0+l6rJXA==&ParentID=x2lMczCcdPXVXidTLE48vA== |website=Official Website of Indian Army |access-date=31 December 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161224164815/http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=%2FcT7fozqiMj75K0%2Bl6rJXA%3D%3D&ParentID=x2lMczCcdPXVXidTLE48vA%3D%3D |archive-date=24 दिसंबर 2016 |url-status=dead }}</ref>|| [[I कोर]] — वर्तमान में दक्षिण पश्चिमी कमान सौंपा गया हैं
|-
| [[File:IA Eastern Command.jpg|50px]] || '''[[पूर्वी कमान]]''' ||[[कोलकाता]]
|लेफ्टिनेंट जनरल [[प्रवीण बक्षी]]<ref name=IndianArmyEasternCinC>{{Cite web |title=Eastern Command: General Officer Commanding-in-Chief |url=http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=dRp9C73SFYB4+QOoSEbg9g==&ParentID=I3ibiVTbFqhGzhBh0HmPtg== |website=Official Website of Indian Army |access-date=31 December 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161224144457/http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=dRp9C73SFYB4+QOoSEbg9g==&ParentID=I3ibiVTbFqhGzhBh0HmPtg== |archive-date=24 दिसंबर 2016 |url-status=dead }}</ref>||
*[[23वीं इन्फैंट्री डिवीजन]] – [[राँची|रांची]]
*[[III कोर]] – [[दीमापुर]]
**दूसरी माउंटेन डिवीजन – [[डिब्रूगढ़]]
**57वीं माउंटेन डिवीजन – [[लेइमखोंग]]
**56वीं माउंटेन डिवीजन – [[जखमा]]
* [[IV कोर]] – [[तेज़पुर]], [[असम]]
**71वीं माउंटेन डिवीजन – [[मिसमारी]]
**5वीं माउंटेन डिवीजन – [[बोमडिला]]
**21वीं माउंटेन डिवीजन – [[रंगिया]]
* [[XXXIII कोर]] – [[सिलीगुड़ी]], [[पश्चिम बंगाल]]
**17वीं माउंटेन डिवीजन – [[गान्तोक|गंगटोक]]
**20वीं माउंटेन डिवीजन – [[बिनागुरी]]
**27वीं माउंटेन डिवीजन – [[कालीम्पोंग]]
|-
| [[File:IA Northern Command.jpg|50px]] || '''[[उत्तरी कमान]]''' || [[उधमपुर]]
|लेफ्टिनेंट जनरल [[देवराज अनबू]]<ref name=IndianArmyNorthernCinC>{{Cite web |title=Northern Command: General Officer Commanding-in-Chief |url=http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=TxlsIMDv8lbQU1uDctKynA==&ParentID=mRia2MN4hBGPekTwu636kA== |website=Official Website of Indian Army |access-date=31 December 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161224161144/http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=TxlsIMDv8lbQU1uDctKynA%3D%3D&ParentID=mRia2MN4hBGPekTwu636kA%3D%3D |archive-date=24 दिसंबर 2016 |url-status=dead }}</ref><ref>{{Cite news|url=http://indianexpress.com/article/india/india-news-india/lieutenant-general-devraj-anbu-new-chief-of-northern-command-4366402/|title=Lieutenant General Devraj Anbu new chief of Northern Command|date=2016-11-09|newspaper=The Indian Express|access-date=2016-11-30|archive-url=https://web.archive.org/web/20161201081243/http://indianexpress.com/article/india/india-news-india/lieutenant-general-devraj-anbu-new-chief-of-northern-command-4366402/|archive-date=1 दिसंबर 2016|url-status=live}}</ref>||
* [[XIV कोर]], – [[लेह]]
**तीसरी इन्फैंट्री डिवीजन – [[लेह]]
**8वाँ माउंटेन डिवीजन – [[द्रास]]
* [[XV कोर]], – [[श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर|श्रीनगर]]
**19वीं इन्फैंट्री डिवीजन – [[बारामूला]],
**28वीं माउंटेन डिवीजन – [[गुरेज]]
* [[XVI कोर]] – [[नागरोटा]]
**10वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[अखनूर]]
**25वीं इन्फैंट्री डिवीजन – [[राजौरी]]
**39वीं इन्फैंट्री डिवीजन – [[योल, हिमाचल प्रदेश|योल]]
**10 तोपख़ाना दल
|-
| [[File:IA Southern Command.jpg|50px]] || '''[[दक्षिणी कमान (भारतीय सेना)|दक्षिणी कमान]]''' || [[पुणे]]
|लेफ्टिनेंट जनरल पी एम हरिज़<ref name=IndianArmySouthernCinC>{{Cite web |title=Southern Command: General Officer Commanding-in-Chief |url=http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=7bp5VU2Yk4Nkc0B/43O86A==&ParentID=TElfvo47P2ZNSTeZy2XeiQ== |website=Official Website of Indian Army |access-date=4 January 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161224181224/http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=7bp5VU2Yk4Nkc0B%2F43O86A%3D%3D&ParentID=TElfvo47P2ZNSTeZy2XeiQ%3D%3D |archive-date=24 दिसंबर 2016 |url-status=dead }}</ref><ref>{{Cite news|url=http://indianexpress.com/article/india/india-news-india/lt-gen-hariz-takes-over-as-general-officer-commanding-in-chief-of-southern-command/|title=Lt Gen Hariz takes over as General Officer Commanding-in-Chief of Southern Command|date=2016-09-02|newspaper=The Indian Express|language=en|access-date=2017-01-28|archive-url=https://web.archive.org/web/20161216162258/http://indianexpress.com/article/india/india-news-india/lt-gen-hariz-takes-over-as-general-officer-commanding-in-chief-of-southern-command/|archive-date=16 दिसंबर 2016|url-status=live}}</ref>||
* 41वीं तोपख़ाना विभाग – [[पुणे]]
* [[XII कोर]] – [[जोधपुर]]
**चौथा बख़्तरबंद दल
**340वाँ यांत्रिक दल
**11वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[अहमदाबाद]]
**12वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[जोधपुर]]
* [[XXI कोर]] – [[भोपाल]]
**31वाँ बख़्तरबंद विभाग – [[झाँसी|झांसी]]
**36वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[सागर शहर|सागर]]
**54वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[हैदराबाद]]/[[सिकंदराबाद]]
**475वाँ अभियांत्रिकी दल
|-
| [[File:IA South Western Command.jpg|50px]] || '''[[दक्षिण पश्चिमी कमान]]''' || [[जयपुर]]
|लेफ्टिनेंट जनरल अभय कृष्ण<ref name=IndianArmySouthWesternCinC>{{Cite web |title=South Western Command: General Officer Commanding-in-Chief |url=http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=a2MLQ3yto6uCWUY9XHpy8A==&ParentID=xUEsT5PZZUuy9dPtAtE9mQ==&flag=67hbnIIkxaLVo4aPlccGTw== |website=Official Website of Indian Army |access-date=4 January 2017}}</ref><ref>{{Cite news|url=http://economictimes.indiatimes.com/news/defence/lt-gen-abhay-krishna-takes-over-armys-south-western-command/articleshow/56783300.cms|title=Lt Gen Abhay Krishna takes over Army's South Western Command - The Economic Times|newspaper=The Economic Times|access-date=2017-01-28|archive-url=https://web.archive.org/web/20170206082941/http://economictimes.indiatimes.com/news/defence/lt-gen-abhay-krishna-takes-over-armys-south-western-command/articleshow/56783300.cms|archive-date=6 फ़रवरी 2017|url-status=live}}</ref>||
*42वाँ तोपख़ाना विभाग – [[जयपुर]]
* [[I कोर]] – [[मथुरा]]
**चौथा
इन्फैंट्री डिवीजन – [[इलाहाबाद]]
**छटवां पर्वतारोही प्रभाग – [[बरेली]]
**33वाँ बख़्तरबंद प्रभाग – [[हिसार सैन्य स्टेशन]]
* [[X कोर]] – [[बठिंडा|भटिंडा]]
**16वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[श्रीगंगानगर|श्री गंगानगर]]
**18वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[कोटा]]
**24वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[बीकानेर]]
**छटवां बख़्तरबंद दल
**615वाँ स्वतंत्र वायु रक्षा दल
**471वाँ अभियांत्रिकी दल
|-
| [[File:IA Western Command.jpg|50px]] || '''[[पश्चिमी कमान]]''' || [[चंडीमंदिर]]
|लेफ्टिनेंट जनरल सुरिंदर सिंह<ref name=IndianArmyWesternCinC>{{Cite web |title=Western Command: General Officer Commanding-in-Chief |url=http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=92UIUkUPuasLVXb6Cz/kWg==&ParentID=gbrSGczz4H3pO3kGy3ENEw== |website=Official Website of Indian Army |access-date=4 January 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160228201511/http://indiatoday.intoday.in/story/assault-rifle-excalibur-drdo-dalbir-singh-indian-army-arde/1/449238.html |archive-date=28 फ़रवरी 2016 |url-status=dead }}</ref><ref>{{Cite news|url=http://www.business-standard.com/article/pti-stories/lt-gen-surinder-singh-takes-charge-of-western-command-116091700629_1.html|title=Lt Gen Surinder Singh takes charge of Western Command|last=India|first=Press Trust of|date=17 September 2016|newspaper=Business Standard India|access-date=18 September 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160918142150/http://www.business-standard.com/article/pti-stories/lt-gen-surinder-singh-takes-charge-of-western-command-116091700629_1.html|archive-date=18 सितंबर 2016|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=http://indianexpress.com/article/india/india-news-india/lt-gen-surinder-singh-takes-over-as-goc-in-c-3036878/|title=Lt Gen Surinder Singh takes over as GOC-in-C|date=18 September 2016|access-date=18 September 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160919131602/http://indianexpress.com/article/india/india-news-india/lt-gen-surinder-singh-takes-over-as-goc-in-c-3036878/|archive-date=19 सितंबर 2016|url-status=live}}</ref>||
*40वाँ तोपख़ाना विभाग – [[अम्बाला|अंबाला]]
*[[II कोर]], – [[अम्बाला|अंबाला]]
**पहला बख़्तरबंद विभाग – [[पटियाला]]
**14वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[देहरादून]]
**22वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[मेरठ]]
**474वाँ अभियांत्रिकी दल
**612वाँ यंत्रीकृत स्वतंत्र वायु रक्षा दल
* [[IX कोर]], – [[योल, हिमाचल प्रदेश|योल]]
**26वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[जम्मू]]
**29वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[पठानकोट]]
**2nd बख़्तरबंद दल
**3rd स्वतंत्र बख़्तरबंद दल
* [[XI कोर]], मुख्यालय [[जलंधर|जालंधर]] में
**7वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[फ़िरोज़पुर|फिरोजपुर]]
**9वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[मेरठ]]
**15वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[अमृतसर]]
**23वाँ बख़्तरबंद दल
**55वाँ यंत्रीकृत दल
|-
| [[File:IA Training Command.jpg|50px]] || '''[[सेना प्रशिक्षण कमान]]''' || [[शिमला]]
|लेफ्टिनेंट जनरल डी.आर. सोनी <ref name=IndianArmyARTRACCinC>{{Cite web |title=ARTRAC: General Officer Commanding-in-Chief |url=http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=4iCDWdun4tbD8LHiOpZ5Mw==&ParentID=QHC/uQdgSqLFNY1hMj6Maw== |website=Official Website of Indian Army |access-date=4 January 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161224205459/http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=4iCDWdun4tbD8LHiOpZ5Mw%3D%3D&ParentID=QHC%2FuQdgSqLFNY1hMj6Maw%3D%3D |archive-date=24 दिसंबर 2016 |url-status=dead }}</ref><ref>{{Cite news |title=D R Soni takes over ARTAC |url=http://www.tribuneindia.com/news/himachal/lt-gen-soni-is-goc-in-chief-of-artrac/296728.html |last= |first= |date=17 September 2016 |newspaper=[[The Tribune (Chandigarh)|The Tribune]] |access-date=3 February 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161002165914/http://www.tribuneindia.com/news/himachal/lt-gen-soni-is-goc-in-chief-of-artrac/296728.html |archive-date=2 अक्तूबर 2016 |url-status=live }}</ref>||
|}
===लड़ाकू दल ===
[[File:An Indian army soldier pulls security during a rehearsal at Forward Operating Base Sparta in Alaska.jpg|thumb|अभ्यास के दौरान भारतीय सेना का एक सैनिक]]
[[File:An Indian Army soldier with the 99th Mountain Brigade fires at role-playing insurgents during bilateral training with U.S. paratroopers in 2013.jpg|thumb|भारतीय सेना के 99वाँ पर्वतीय दल का एक सैनिक अभ्यास के दौरान]]
नीचे दिए गए कोर, विशिष्ट पैन-आर्मी कार्यों हेतु एक कार्यात्मक प्रभाग हैं। भारतीय प्रादेशिक सेना विभिन्न इन्फैंट्री रेजिमेंटों से संबद्ध बटालियन हैं, जिनमे कुछ विभागीय इकाइयां, कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स, आर्मी मेडिकल कोर या आर्मी सर्विस कोर से हैं। ये अंशकालिक आरक्षित के रूप में सेवा करते हैं।
{| class="wikitable"
!नाम
!महानिदेशक
!केंद्र
|-
|[[भारतीय सेना बख्तरबंद कोर|बख्तरबंद कोर]]
|
|बख्तरबंद कोर केंद्र और स्कूल, [[अहमदनगर]]
|-
|[[तोपखाना रेजिमेंट]]
|लेफ्टिनेंट जनरल पी के श्रीवास्तव, वीएसएम<ref name=IndianArmyArtilleryDG>{{Cite web |title=The Regiment of Artillery: Director General and Colonel Commandant |url=http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=tp6QV4gmHtrUy/2aWwOdPQ==&ParentID=c/kSjJUgAet86QVQqfy9rQ== |website=Official Website of Indian Army |access-date=7 January 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161224160759/http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=tp6QV4gmHtrUy%2F2aWwOdPQ%3D%3D&ParentID=c%2FkSjJUgAet86QVQqfy9rQ%3D%3D |archive-date=24 दिसंबर 2016 |url-status=dead }}</ref>
|तोपखाना स्कूल,[[नासिक]] के पास [[देवलाली]]
|-
|[[वायुरक्षा सेना कोर]]
|लेफ्टिनेंट जनरल ए के सेहगल, वीएसएम<ref name=IndianArmyAirDefenceDG>{{Cite web |title=Army Air Defence: Director General and Colonel Commandant |url=http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTemp2P_SameRow1Flash2C.aspx?MnId=sAfhA9jyS0nVao8srSkuig==&ParentID=MYf/ZqOryVj+hMZZBdL2Yw==&flag=7QuSd9EEv4RiL0wgt7N/BA== |website=Official Website of Indian Army |access-date=7 January 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161224215707/http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTemp2P_SameRow1Flash2C.aspx?MnId=sAfhA9jyS0nVao8srSkuig%3D%3D&ParentID=MYf%2FZqOryVj%2BhMZZBdL2Yw%3D%3D&flag=7QuSd9EEv4RiL0wgt7N%2FBA%3D%3D |archive-date=24 दिसंबर 2016 |url-status=dead }}</ref>
|[[गोपालपुर, उड़ीसा|गोपालपुर]], [[ओडिशा|उड़ीसा]].
|-
|[[सेना के विमानन कोर]]
|लेफ्टिनेंट जनरल पी.के. भरली, वीएसएम<ref name=IndianArmyAviationDG>{{Cite web |title=Army Aviation Corps: Director General and Colonel Commandant |url=http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=1jNdrzG4uqOdGXvYwmFaHA==&ParentID=jXRQ8bX13B68jZasmqKbng== |website=Official Website of Indian Army |access-date=7 January 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161224215513/http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=1jNdrzG4uqOdGXvYwmFaHA%3D%3D&ParentID=jXRQ8bX13B68jZasmqKbng%3D%3D |archive-date=24 दिसंबर 2016 |url-status=dead }}</ref>
|लड़ाकू सेना विमानन प्रशिक्षण केंद्र, [[नासिक]].
|-
|[[इंजीनियर्स कोर]]
|
|कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग, दापोडी, [[पुणे]]<br>[[मद्रास इंजीनियर समूह]], [[बंगलौर|बैंगलोर]]<br>[[बंगाल इंजीनियर समूह]], [[रुड़की]]<br>[[बॉम्बे इंजीनियर समूह]], [[खडकी]], [[पुणे]] के पास
|-
|[[संकेतक कोर]]
|
|[[दूरसंचार इंजीनियरिंग सैन्य कॉलेज]] (एमसीटीई), [[डॉ॰ आम्बेडकर नगर|महू]]<br>दो सिग्नल प्रशिक्षण केन्द्र [[जबलपुर]] और [[गोवा]] में.
|-
|[[मशीनीकृत इन्फैंट्री]]
|
|[[अहमदनगर]]
|-
|इन्फैंट्री
|
|
|-
|[[ऑर्डिनेंस सेना कोर|ऑर्डिनेंस कोर]]
|लेफ्टिनेंट जनरल अमित सरीन एवीएसएम, एसएम, वीएसएम, एडीसी<ref name=IndianArmyOrdnanceDG>{{Cite web |title=Army Ordnance Corps: Director General and Colonel Commandant |url=http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=CNUJnxFeqXbpaSvjb3Zi6w==&ParentID=NZffZKdqcLoMGUL+9XwHEQ== |website=Official Website of Indian Army |access-date=29 January 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160228201511/http://indiatoday.intoday.in/story/assault-rifle-excalibur-drdo-dalbir-singh-indian-army-arde/1/449238.html |archive-date=28 फ़रवरी 2016 |url-status=dead }}</ref>
|[[सिकंदराबाद]]
|}
==== पैदल सेना (इन्फैंट्री)====
[[File:Yudh Abhyas 2013, 2nd Batallion, 5th Gurkha Rifles.jpg|left|thumb|2013 युद्ध अभ्यास के दौरान 99वें माउंटेन ब्रिगेड के दूसरे बटालियन, 5 गोरखा राइफल्स के सैनिक।]]
अपनी स्थापना के समय, भारतीय सेना को ब्रिटिश सेना की संगठनात्मक संरचना विरासत में मिली, जो आज भी कायम है। इसलिए, अपने पूर्ववर्ती की तरह, एक भारतीय इन्फैंट्री रेजिमेंट की ज़िम्मेदारी न सिर्फ फ़ील्ड ऑपरेशन की है बल्कि युद्ध मैदान और बटालियन में अच्छी तरह से प्रशिक्षित सैनिक प्रदान करना भी हैं, जैसे कि एक ही रेजिमेंट के बटालियन का कई दल, प्रभागों, कोर, कमान और यहां तक कि थिएटरों में होना आम बात है। अपने ब्रिटिश और राष्ट्रमंडल समकक्षों की तरह, सैनिक अपने आवंटित रेजिमेंट के प्रति बेहद वफादार और बहुत गर्व करते हैं, जहाँ सामान्यतः उनका पूरा कार्यकाल बीतता हैं।
भारतीय सेना के इन्फैंट्री रेजिमेंट्स में नियुक्ति, विशिष्ट चयन मानदंडों के आधार पर होती हैं, जैसे कि क्षेत्रीय, जातीयता, या धर्म पर; [[असम रेजिमेंट]], [[जाट रेजिमेंट]], और [[सिख रेजिमेंट]] क्रमशः। अधिकतर रेजिमेंट तो ब्रटिश राज के समय के ही हैं, लेकिन लद्दाख स्काउट, अरुणाचल स्काउट्स, और सिक्किम स्काउट्स, सीमा सुरक्षा विशेष दल, स्वतंत्रता के बाद बनाये गए हैं।
[[File:Jammu and Kashmir Light Infantry (JAK LI) soldier.jpg|thumb|इंसास राइफल के साथ इंडिया गेट की रक्षा करता, जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फैंट्री का एक जवान।]]
[[File:Indian Army-Rajput regiment.jpeg|right|thumb|राजपूत रेजिमेंट के सैनिक]]
[[File:Indian Army-Sikh Light Infantry regiment.jpeg|thumb|सिख लाइट इन्फैंट्री के सैनिक]]
[[File:Indian Army-Madras regiment.jpeg|thumb|मद्रास रेजिमेंट के सैनिक]]
वर्षों से विभिन्न राजनीतिक और सैन्य गुटों ने रेजिमेंटों की इस अनूठी चयन मानदंड प्रक्रिया को भंग करने की कोशिश करते रहे है उनका मानना था की कि सैनिक का अपने रेजिमेंट के प्रति वफादारी या उसमे उसके ही जातीय के लोगों के प्रति निष्ठा, भारत के प्रति निष्ठा से ऊपर न हो जाये। और उन्होंने कुछ गैर नस्लीय, धर्म, क्षेत्रीय रेजिमेंट, जैसे कि ब्रिगेड ऑफ गॉर्ड्स और पैराशूट रेजिमेंट, बनाने में सफल भी रहे, लेकिन पहले से बने रेजिमेंट्स में इस प्रकार के प्रयोग का कम ही समर्थन देखने को मिला हैं।
'''भारतीय सेना के रेजिमेंट, अपनी वरिष्ठता के क्रम में:'''<ref>{{cite web|url=http://www.bharat-rakshak.com/LAND-FORCES/Units/Infantry.html?layout=default |title=Infantry Regiments |publisher=Bharat Rakshak |year=2008 |accessdate=24 January 2014 |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20131007164813/http://bharat-rakshak.com/LAND-FORCES/Units/Infantry.html?layout=default |archivedate=7 October 2013 }}</ref>
{| class="wikitable sortable"
!रेजिमेंट
!रेजिमेंट केंद्र
!वर्ष
|-
|[[गार्ड ब्रिगेड]]<ref name=IndianArmyGuardsFormation>{{Cite web |title=History of The Brigade of the Guards: Formation of the Brigade |url=http://www.indianarmy.gov.in/Site/FormTemplete/frmTemp4P2C.aspx?MnId=IdfFaGk/yr0rh/pOqUzTfw==&ParentID=JSXgaRIj0MV51BKzfPPGBQ== |website=Official Website of Indian Army |access-date=7 January 2017}}</ref>
|[[कम्पटी]], [[महाराष्ट्र]]
|1949
|-
|[[पैराशूट रेजिमेंट]]
|[[बंगलौर|बैंगलोर]], [[कर्नाटक]]
|1945
|-
|[[मैकेनाइज़्ड इन्फेंट्री रेजिमेंट]]
|[[अहमदनगर]], [[महाराष्ट्र]]
|1979
|-
|[[पंजाब रेजिमेंट]]
|[[रामगढ़ छावनी]], [[झारखण्ड|झारखंड]]
|1761
|-
|[[मद्रास रेजिमेंट]]
|[[वेलिंग्टन|वेलिंगटन]], [[उधगमंडलम]]
|1758
|-
|[[द ग्रेनेडियर]]
|[[जबलपुर]], [[मध्य प्रदेश]]
|1778
|-
|[[मराठा लाइट इन्फेंट्री]]
|[[बेलगाम]], [[कर्नाटक]]
|1768
|-
|[[राजपूताना राइफल्स]]
|[[दिल्ली छावनी]], [[नई दिल्ली]]
|1775
|-
|[[राजपूत रेजिमेंट]]
|[[फ़तेहगढ़|फतेहगढ़]], [[उत्तर प्रदेश]]
|1778
|-
|[[जाट रेजिमेंट]]
|[[बरेली]], [[उत्तर प्रदेश]]
|1795
|-
|[[सिख रेजिमेंट]]
|[[रामगढ़ छावनी]], [[झारखण्ड|झारखंड]]
|1846
|-
|[[सिख लाइट इन्फेंट्री]]
|[[फ़तेहगढ़|फतेहगढ़]], [[उत्तर प्रदेश]]
|1857
|-
|[[डोगरा रेजिमेंट]]
|[[फ़ैज़ाबाद|फैजाबाद]], [[उत्तर प्रदेश]]
|1877
|-
|[[गढ़वाल राइफल्स]]
|[[लांसडाउन]], [[उत्तराखण्ड|उत्तराखंड]]
|1887
|-
|[[कुमाऊं रेजिमेंट]]
|[[रानीखेत]], [[उत्तराखण्ड|उत्तराखंड]]
|1813
|-
|[[असम रेजिमेंट]]
|[[शिलांग]], [[मेघालय]]
|1941
|-
|[[बिहार रेजिमेंट]]
|[[दानापुर छावनी]], [[पटना]], [[बिहार]]
|1941
|-
|[[महार रेजिमेंट]]
|[[सागर]], [[मध्य प्रदेश]]
|1941
|-
|[[जम्मू कश्मीर राइफल्स]]
|[[जबलपुर]], [[मध्य प्रदेश]]
|1821
|-
|[[जम्मू कश्मीर लाइट इन्फेंट्री]]
|[[अवंतीपुर]], [[जम्मू और कश्मीर]]
|1947
|-
|[[नागा रेजिमेंट]]
|[[रानीखेत]], [[उत्तराखण्ड|उत्तराखंड]]
|1970
|-
|[[1 गोरखा राइफल्स|1 गोरखा राइफल्स (मालाओं रेजिमेंट)]]
|[[सबाथु]], [[हिमाचल प्रदेश]]
|1815
|-
|[[3 गोरखा राइफल्स]]
|[[वाराणसी]], [[उत्तर प्रदेश]]
|1815
|-
|[[4 गोरखा राइफल्स]]
|[[सबाथु]], [[हिमाचल प्रदेश]]
|1857
|-
|[[5 गोरखा राइफल्स|5 गोरखा राइफल्स (फ्रंटियर फोर्स)]]
|[[शिलांग]], [[मेघालय]]
|1858
|-
|[[8 गोरखा राइफल्स]]
|[[शिलांग]], [[मेघालय]]
|1824
|-
|[[9 गोरखा राइफल्स]]
|[[वाराणसी]], [[उत्तर प्रदेश]]
|1817
|-
|[[11 गोरखा राइफल्स]]
|[[लखनऊ]], उत्तर प्रदेश
|1918
|-
|[[लद्दाख स्काउट्स]]
|[[लेह]], [[जम्मू और कश्मीर]]
|1963
|-
|[[राष्ट्रीय राइफल्स]]
|
|1990
|-
|[[अरुणाचल स्काउट्स]]
|[[शिलांग]], [[मेघालय]]
|2010
|-
|[[सिक्किम स्काउट्स]]
|
|2013
|}
====तोपख़ाना (आर्टिलरी)====
[[File:Pinaka.JPG|thumb|[[पिनाक मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर|पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लांचरों]] का [[कारगिल युद्ध]] के दौरान इस्तेमाल किया गया]]
[[तोपखाना रेजिमेंट]] (आर्टिलरी रेजिमेंट) भारतीय सेना का दूसरा सबसे बड़ा हाथ है, जोकि सेना की कुल ताकत का लगभग छठवाँ भाग हैं। मूल रूप से यह 1935 में ब्रिटिश भारतीय सेना में रॉयल भारतीय तोपखाने के नाम से शामिल हुआ था। और अब इस रेजिमेंट को, सेना को स्व-प्रचालित [[आर्टिलरी फील्ड]] प्रदान करने का काम सौंपा गया है, जिसमे बंदूकें, तोप, भारी मोर्टार, रॉकेट और मिसाइल आदि भी सम्मलित हैं।
भारतीय सेना द्वारा संचालित लगभग सभी लड़ाकू अभियानों में, तोपखाना रेजिमेंट एक अभिन्न अंग के रूप में, भारतीय सेना की सफलता में एक प्रमुख योगदानकर्ता रहा है। [[कारगिल युद्ध]] के दौरान, वह भारतीय तोपखाना ही था, जिसने दुश्मन को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया था।<ref>{{cite web|url=http://zeenews.india.com/news/nation/indian-artillery-inflicted-maximum-damage-to-pak-during-kargil_669140.html|title=Indian artillery inflicted maximum damage to Pak during Kargil|work=Zee News|accessdate=26 November 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20141031120505/http://zeenews.india.com/news/nation/indian-artillery-inflicted-maximum-damage-to-pak-during-kargil_669140.html|archive-date=31 अक्तूबर 2014|url-status=live}}</ref> पिछले कुछ वर्षों में, पांच तोपखाना अधिकारी भारतीय सेना की सर्वोच्च पद, सेना प्रमुख के रूप में रह चुके हैं।
[[File:Bofors gun 155mm.jpg|thumb|left|बोफोर्स तोप]]कुछ समय के लिए, आज की तुलना में तोपखाना रेजिमेंट सेना के कर्मियों के काफी बड़े हिस्से की कमान संभालता था, जिनमें हवाई रक्षा तोपखाना और कुछ विमानन संपत्तियों का रख-रखाव भी सम्मलित थे। फिर 1990 के दशक में सेना के वायु रक्षा कोर के गठन किया गया और विमानन संपत्तियों को सेना के विमानन कॉर्प्स को हस्तान्तरित कर दिया गया। अब यह रेजिमेंट अपना ध्यान फील्ड आर्टिलरी पर केंद्रित करता है, और प्रत्येक परिचालन कमानो के लिए रेजिमेंट और बैटरी की आपूर्ति करता है। इस रेजिमेंट का मुख्यालय नाशिक, महाराष्ट्र में है, इसके साथ यहाँ एक संग्रहालय भी स्थित है। भारतीय सेना का तोपखाना स्कूल [[देवलाली]] में स्थित है।
तीन दशकों से आधुनिक तोपखाने के आयात या उत्पादन में निरंतर विफलताओं के बाद<ref>{{cite web |url=http://www.defensenews.com/article/20140321/DEFREG03/303210026 |title=Upgraded Indian Howitzers Cleared for Summer Trials |last1=RAGHUVSNSHI |first1=VIVEK |date=21 March 2014 |website=www.defensenews.com |publisher=Gannett Government Media |accessdate=21 March 2014 |archive-date=21 मार्च 2014 |archive-url=https://archive.today/20140321145114/http://www.defensenews.com/article/20140321/DEFREG03/303210026 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.thehindu.com/news/national/inside-indias-defence-acquisition-mess/article3255466.ece |title=Inside India's defence acquisition mess |last1=Swami |first1=Praveen |date=29 March 2012 |work=The Hindu |accessdate=4 January 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140107015921/http://www.thehindu.com/news/national/inside-indias-defence-acquisition-mess/article3255466.ece |archive-date=7 जनवरी 2014 |url-status=live }}</ref>, अंततः तोपखाना रेजिमेंट 130 मिमी और 150 मिमी तोपो की अधिप्राप्ति कर ली है।<ref>{{cite web|url=http://www.ndtv.com/article/india/in-dhanush-indian-army-s-prayers-answered-544552|title=In 'Dhanush', Indian Army's Prayers Answered|work=NDTV.com|accessdate=26 November 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20141103002850/http://www.ndtv.com/article/india/in-dhanush-indian-army-s-prayers-answered-544552|archive-date=3 नवंबर 2014|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.dnaindia.com/india/report-defence-ministry-agrees-to-army-s-long-pending-demand-of-artillery-guns-2015130|title=Defence ministry agrees to army's long pending demand of artillery guns|work=dna|accessdate=26 November 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20141124222833/http://www.dnaindia.com/india/report-defence-ministry-agrees-to-army-s-long-pending-demand-of-artillery-guns-2015130|archive-date=24 नवंबर 2014|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.newindianexpress.com/defence/Indigenous-Artillery-Gun-Dhanush-to-be-Ready-This-Year/2014/03/18/article2116399.ece|title=Indigenous Artillery Gun 'Dhanush' to be Ready This Year|work=The New Indian Express|accessdate=26 November 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20141122105735/http://www.newindianexpress.com/defence/Indigenous-Artillery-Gun-Dhanush-to-be-Ready-This-Year/2014/03/18/article2116399.ece|archive-date=22 नवंबर 2014|url-status=live}}</ref> सेना बड़ी संख्या में रॉकेट लांचरों को भी सेवा में ला रहा है, अगले दशक के अंत तक 22 रेजिमेंट को स्वदेशी-विकसित [[पिनाक मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर|पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर]] से सशत्र किया जायेगा।<ref>{{cite web |title=Indian Army to increase indigenous rocket regiments by 2022 |url=http://www.firstpost.com/india/indian-army-to-increase-indigenous-rocket-regiments-by-2022-3144102.html |date=7 December 2016 |accessdate=8 December 2016 |publisher=Firstpost |archive-url=https://web.archive.org/web/20161208111922/http://www.firstpost.com/india/indian-army-to-increase-indigenous-rocket-regiments-by-2022-3144102.html |archive-date=8 दिसंबर 2016 |url-status=dead }}</ref>
====बख़्तरबंद (आर्मर) ====
====पैरा (विशेष बल)====
=== (आदेश) कमान ===
सेना के सामरिक 6 आदेशों चल रही है। प्रत्येक आदेश [[लेफ्टिनेंट जनरल] रैंक के साथ जनरल कमांडिंग इन चीफ अधिकारी की अध्यक्षता में है। प्रत्येक आदेश सीधे में सेना मुख्यालय से संबद्ध है [[नई दिल्ली]. इन आदेशों नीचे उनके सही क्रम को ऊपर उठाने के स्थान (शहर) और उनके कमांडरों में दिया जाता है। उनकी भी एक प्रशिक्षण ARTRAC के रूप में जाना जाता है आदेश है।
{| class = "wikitable"
! कमान
! कमान मुख्यालय
! जीओसी - इन - सी
|-
| दक्षिणी कमान
| [[पुणे]]
| लेफ्टिनेंट जनरल नोबल Thamburaj
|-
| पूर्वी कमान
| [[कोलकाता]]
| लेफ्टिनेंट जनरल वीके सिंह
|-
| मध्य कमान
| [[लखनऊ]]
| लेफ्टिनेंट जनरल H.S. पनाग, पीवीएसएम, एवीएसएम *, एडीसी
|-
| पश्चिमी कमान
| [[चंडीमंदिर]] ([[चण्डीगढ़|चंडीगढ़]])
| लेफ्टिनेंट जनरल टी.के. सप्रू
|-
| उत्तरी कमान
| [[उधमपुर]]
| लेफ्टिनेंट जनरल पीसी भारद्वाज
|-
| दक्षिण पश्चिमी कमान
| [[जयपुर]]
| लेफ्टिनेंट जनरल CKS साबू
|}
=== (कोर) कॉर्प ===
==== व्यूह - रचना (फील्ड गठन) ====
[[वाहिनी]] सेना के एक क्षेत्र में एक कमान के भीतर एक क्षेत्र के लिए जिम्मेदार गठन है। स्ट्राइक होल्डिंग और मिश्रित: वहाँ भारतीय सेना वाहिनी के 3 प्रकार के होते हैं। कमान आम तौर पर 2 या अधिक कोर के होते हैं। अपने आदेश के तहत एक कोर सेना प्रभागों है। कोर मुख्यालय सेना में उच्चतम क्षेत्र गठन है।
{| Class = "wikitable"
! वाहिनी
! मुख्यालय
! कमान
! जनरल आफिसर कमांडिंग (जीओसी)
! प्रभागों<ref>प्रभाग और जेन विश्व सेनाओं से ब्रिगेड स्रोत जानकारी, अंक 19, 2006, p.319</ref>
|-
| [[मैं कोर (भारत)|1 कोर]]
| [[मथुरा]], [[उत्तर प्रदेश]]
| मध्य कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल पीसी कटोच
| 4 इन्फैंट्री डिवीजन ([[इलाहाबाद]]), 6 Mtn डिव ([[बरेली]]), 33 ARMD डिव ([[हिसार, भारत | हिसार]])
|-
| कोर 2
| [[अम्बाला]], [[हरियाणा]]
| पश्चिमी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल जेपी सिंह, एवीएसएम
| 1 ARMD डिव ([[अम्बाला]]), 14 त्वरित (देहरादून), 22 इन्फैंट्री डिवीजन [[मेरठ]])
|-
| [[III के कोर (भारत) | 3 कोर]]
| Rangapahar ([[दीमापुर]]), [[नागालैण्ड|नागालैंड]]
| पूर्वी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कुमार Loomba
| 23 इन्फैंट्री डिवीजन [[राँची| रांची]]), 57 Mtn (डिव [[Leihmakong]])
|-
| [[चतुर्थ कोर (भारत) | 4 कोर]]
| [[तेज़पुर|तेजपुर]], [[असम]]
| पूर्वी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल आर के छाबड़ा
| 2 Mtn डिव ([[डिब्रूगढ़]]), 5 Mtn डिव ([[बोमडिला]]), 21 Mtn डिव ([[रंगिया]])
|-
|9 वाहिनी
| [[योल, भारत | योल]], [[हिमाचल प्रदेश]]
| पश्चिमी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल पीके रामपाल
| 26 इन्फैंट्री डिवीजन ([[जम्मू छावनी | जम्मू]) 29, इन्फैंट्री डिवीजन([[पठानकोट]]), 2,3,16 इंडस्ट्रीज़ ARMD Bdes
|-
|10 कोर
| [[बठिंडा|भटिंडा]], पंजाब
| पश्चिमी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल
| 16 इन्फैंट्री डिवीजन ([[श्रीगंगानगर|श्री गंगानगर]]), 18 त्वरित ([[कोटा| कोटा]]), 24 त्वरित ([[बीकानेर]]), 6 इंडस्ट्रीज़ ARMD BDE
|-
| 11 वाहिनी
| [[जलंधर|जालंधर]], पंजाब
| पश्चिमी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल श्रीधरन श्याम कुमार, एसएम, वीएसएम
| 7 इन्फैंट्री डिवीजन ([[फ़िरोज़पुर|फिरोजपुर]]), 9 इन्फैंट्री डिवीजन ([[मेरठ]]), 15 इन्फैंट्री डिवीजन ([[अमृतसर]]), 23 ARMD BDE, 55 Mech BDE
|-
|कोर 12
| [[जोधपुर]], [[राजस्थान]]
| दक्षिण पश्चिमी कमान
|
| 4 ARMD BDE, 340 Mech BDE, 11 इन्फैंट्री डिवीजन ([[अहमदाबाद]]), 12 Inf (प्रभाग [[ जोधपुर]])
|-
| 14 वाहिनी
| [[लेह]], [[लद्दाख़|लद्दाख]]
| उत्तरी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल जयंत कुमार मोहंती UYSM, एसएम, वीएसएम
| 3 इन्फैंट्री डिवीजन ([[लेह]]), [[8 इन्फैंट्री डिवीजन (भारत) | 8 माउंटेन डिवीजन]] ([[Dras ]] ),<ref> [[Globalsecurity.org] https://web.archive.org/web/20081216152813/http://www.globalsecurity.org/military/world/india/northcom.htm, दिसंबर 2007 पहुँचा तोपखाना ब्रिगेड </ref>
|-
| 15 वीं कोर
| [[श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर|श्रीनगर]], [[जम्मू और कश्मीर|जम्मू एवं कश्मीर]]
| उत्तरी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल मुकेश सभरवाल
| 19 इन्फैंट्री डिवीजन ([[बारामूला]]), 28 इन्फैंट्री डिवीजन [[गुरेज ]] , [[Bandipora जिला]]), तोपखाना ब्रिगेड
|-
|16 वाहिनी
| [[नगरोटा, जम्मू और कश्मीर|नगरोटा]], जम्मू एवं कश्मीर
| उत्तरी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल आर Karwal
| 10 Inf (डिव [[अखनूर ]]),<ref> इन्हें भी देखें https://web.archive.org/web/20081220184054/http://orbat.com/ site/cimh/divisions/10th%% 20Division 20orbat% 20Chaamb 201971.html% </ref> 25 Inf डिव ([[Rajauri]]), 39 Inf डिव ([[योल, भारत | योल]]), तोपखाना ब्रिगेड, बख़्तरबंद ब्रिगेड?
|-
| 21 कोर (पूर्व [[आईपीकेएफ]])
| [[भोपाल]], [[मध्य प्रदेश]]
| दक्षिणी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल
| [[31 भारतीय आर्मड डिवीजन | 31 ARMD डिव]] ([[झाँसी|झांसी]]), 36 त्वरित ([[सागर]]), 54 Inf (डिव [[Sikandrabad]]), आर्टि, ई., eng bdes
|-
| [[तैंतीसवीं कोर (भारत)| 33 वाहिनी]]
| [[सिलीगुड़ी]], [[पश्चिम बंगाल]]
| पूर्वी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल पीके रथ
| 17 माउंटेन डिवीजन ([[गान्तोक|गंगटोक]]), 20 माउंटेन डिवीजन([[बिनागुरी]], [[जलपाईगुड़ी जिला|जलपाईगुड़ी जिले]]), 27 माउंटेन डिवीजन ([[कलिमपॉन्ग]]), आर्टि BDE
|-
|9 वाहिनी
| [[योल, भारत | योल]], [[हिमाचल प्रदेश]]
| पश्चिमी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल पीके रामपाल
| 26 इन्फैंट्री डिवीजन ([[जम्मू छावनी | जम्मू]) 29, इन्फैंट्री डिवीजन([[पठानकोट]]), 2,3,16 इंडस्ट्रीज़ ARMD Bdes
|-
|10 कोर
| [[बठिंडा|भटिंडा]], पंजाब
| पश्चिमी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल
| 16 इन्फैंट्री डिवीजन ([[श्रीगंगानगर|श्री गंगानगर]]), 18 त्वरित ([[कोटा| कोटा]]), 24 त्वरित ([[बीकानेर]]), 6 इंडस्ट्रीज़ ARMD BDE
|-
|कोर 12
| [[जलंधर|जालंधर]], पंजाब
| पश्चिमी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल श्रीधरन श्याम कुमार, एसएम, वीएसएम
| 7 इन्फैंट्री डिवीजन ([[फ़िरोज़पुर|फिरोजपुर]]), 9 इन्फैंट्री डिवीजन ([[मेरठ]]), 15 इन्फैंट्री डिवीजन ([[अमृतसर]]), 23 ARMD BDE, 55 Mech BDE
|-
|कोर 12
| [[जोधपुर]], [[राजस्थान]]
| दक्षिण पश्चिमी कमान
|
| 4 ARMD BDE, 340 Mech BDE, 11 इन्फैंट्री डिवीजन ([[अहमदाबाद]]), 12 Inf (प्रभाग [[ जोधपुर]])
|-
|16 वाहिनी
| [[लेह]], [[लद्दाख़|लद्दाख]]
| उत्तरी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल जयंत कुमार मोहंती UYSM, एसएम, वीएसएम
| 3 इन्फैंट्री डिवीजन ([[लेह]]), [[8 इन्फैंट्री डिवीजन (भारत) | 8 माउंटेन डिवीजन]] ([[Dras ]] ),<ref> [[Globalsecurity.org] https://web.archive.org/web/20081216152813/http://www.globalsecurity.org/military/world/india/northcom.htm, दिसंबर 2007 पहुँचा तोपखाना ब्रिगेड </ref>
|-
| 15 वीं कोर
| [[श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर|श्रीनगर]], [[जम्मू और कश्मीर|जम्मू एवं कश्मीर]]
| उत्तरी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल मुकेश सभरवाल
| 19 इन्फैंट्री डिवीजन ([[बारामूला]]), 28 इन्फैंट्री डिवीजन [[गुरेज ]] , [[Bandipora जिला]]), तोपखाना ब्रिगेड
|-
|16 वाहिनी
| [[नगरोटा, जम्मू और कश्मीर|नगरोटा]], जम्मू एवं कश्मीर
| उत्तरी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल आर Karwal
| 10 Inf (डिव [[अखनूर ]]),<ref> इन्हें भी देखें https://web.archive.org/web/20081220184054/http://orbat.com/ site/cimh/divisions/10th%% 20Division 20orbat% 20Chaamb 201971.html% </ref> 25 Inf डिव ([[Rajauri]]), 39 Inf डिव ([[योल, भारत | योल]]), तोपखाना ब्रिगेड, बख़्तरबंद ब्रिगेड?
|-
|9 वाहिनी
| [[योल, भारत | योल]], [[हिमाचल प्रदेश]]
| पश्चिमी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल पीके रामपाल
| <nowiki>26 इन्फैंट्री डिवीजन ([[जम्मू छावनी | जम्मू]]) 29, इन्फैंट्री डिवीजन(</nowiki>[[पठानकोट]]), 2,3,16 इंडस्ट्रीज़ ARMD Bdes
|-
|10 कोर
| [[बठिंडा|भटिंडा]], पंजाब
| पश्चिमी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल
| 16 इन्फैंट्री डिवीजन ([[श्रीगंगानगर|श्री गंगानगर]]), 18 त्वरित ([[कोटा| कोटा]]), 24 त्वरित ([[बीकानेर]]), 6 इंडस्ट्रीज़ ARMD BDE
|-
|कोर 12
| [[जलंधर|जालंधर]], पंजाब
| पश्चिमी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल श्रीधरन श्याम कुमार, एसएम, वीएसएम
| 7 इन्फैंट्री डिवीजन ([[फ़िरोज़पुर|फिरोजपुर]]), 9 इन्फैंट्री डिवीजन ([[मेरठ]]), 15 इन्फैंट्री डिवीजन ([[अमृतसर]]), 23 ARMD BDE, 55 Mech BDE
|-
|कोर 12
| [[जोधपुर]], [[राजस्थान]]
| दक्षिण पश्चिमी कमान
|
| 4 ARMD BDE, 340 Mech BDE, 11 इन्फैंट्री डिवीजन ([[अहमदाबाद]]), 12 Inf (प्रभाग [[ जोधपुर]])
|-
|16 वाहिनी
| [[लेह]], [[लद्दाख़|लद्दाख]]
| उत्तरी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल जयंत कुमार मोहंती UYSM, एसएम, वीएसएम
| 3 इन्फैंट्री डिवीजन ([[लेह]]), [[8 इन्फैंट्री डिवीजन (भारत) | 8 माउंटेन डिवीजन]] ([[Dras ]] ),<ref> [[Globalsecurity.org] https://web.archive.org/web/20081216152813/http://www.globalsecurity.org/military/world/india/northcom.htm, दिसंबर 2007 पहुँचा तोपखाना ब्रिगेड </ref>
|-
| 15 वीं कोर
| [[श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर|श्रीनगर]], [[जम्मू और कश्मीर|जम्मू एवं कश्मीर]]
| उत्तरी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल मुकेश सभरवाल
| 19 इन्फैंट्री डिवीजन ([[बारामूला]]), 28 इन्फैंट्री डिवीजन [[गुरेज ]] , [[Bandipora जिला]]), तोपखाना ब्रिगेड
|-
|16 वाहिनी
| [[नगरोटा, जम्मू और कश्मीर|नगरोटा]], जम्मू एवं कश्मीर
| उत्तरी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल आर Karwal
| 10 Inf (डिव [[अखनूर ]]),<ref> इन्हें भी देखें https://web.archive.org/web/20081220184054/http://orbat.com/ site/cimh/divisions/10th%% 20Division 20orbat% 20Chaamb 201971.html% </ref> 25 Inf डिव ([[Rajauri]]), 39 Inf डिव ([[योल, भारत | योल]]), तोपखाना ब्रिगेड, बख़्तरबंद ब्रिगेड?
|}
==== रेजिमेंट संगठन ====
(फील्ड कोर ऊपर उल्लेख किया है के साथ भ्रमित होने की नहीं) इस के अलावा रेजिमेंट या कोर या विभागों भारतीय सेना के हैं। कोर नीचे उल्लेख किया कार्यात्मक विशिष्ट अखिल सेना कार्यों के साथ सौंपा डिवीजनों हैं।
# आर्मी डेंटल कोर
# सेना शिक्षा कोर - सेंटर में [[पचमढ़ी]].
# [[आर्मी मेडिकल कोर]] - सेंटर में <nowiki>[[लखनऊ]]</nowiki>.
# सेना आयुध कोर में केंद्र [[जबलपुर]] और [[सिकंदराबाद]].
# सेना डाक सेवा कोर
# सेना सेवा कोर - [[बंगलौर]] पर केंद्र
# वाहिनी इलेक्ट्रिकल और भोपाल में मैकेनिकल इंजीनियर्स के केंद्र और [[सिकंदराबाद]].
# [[वाहिनी सैन्य पुलिस के]] [https://web.archive.org/web/20091102122238/http://en.wikipedia.org/wiki/Indian_Corps_of_Military_Police] - बंगलौर में केंद्र
# इंटेलीजेंस कोर - सेंटर में [[पुणे]].
# जज एडवोकेट जनरल विभाग. सैन्य विधि संस्थान में [[कैम्पटी ]] ,[[ नागपुर]].
# सैन्य फार्म सेवा
# [[मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (इंडिया) | मिलिट्री नर्सिंग सर्विस]]
# रिमाउंट और वेटेनरी कोर
# पायनियर कोर
# भारतीय इन्फैन्ट्री रेजिमेंट
# आर्मड रेजिमेंट कोर - बख्तरबंद कोर स्कूल और सेंटर [अहमदनगर []]
# आर्टिलरी रेजिमेंट - आर्टिलरी स्कूल में [[देवलाली]] के निकट [[नासिक]].
# [[भारतीय सेना के कोर इंजीनियर्स | कोर ऑफ इंजीनियर्स] - दपोदी पर सैन्य अभियांत्रिकी कालेज, [[पुणे]]. केंद्र इस प्रकार है - [[मद्रास इंजीनियर ग्रुप]] [[बंगलौर]], [[बंगाल इंजीनियर ग्रुप]] [[रुड़की]] और [[बॉम्बे इंजीनियर ग्रुप]] Khadki में, [[पुणे]] के रूप में स्थित हैं .
# आर्मी एयर डिफेंस सेंटर कोर [[गोपालपुर]] [[ओडिशा|उड़ीसा]] राज्य.
# मैकेनाइज्ड इंफेंट्री अहमदनगर - पर रेजिमेंटल केंद्र [[]].
# सिग्नल कोर
# सेना उड्डयन कोर
{{भारतीय सेना के शस्त्र और सेवाएँ}}
== रेजिमेंट ==
वहाँ कई बटालियनों या इकाइयों के एक रेजिमेंट में वही गठन के अंतर्गत हैं। गोरखा रेजिमेंट, उदाहरण के लिए, कई बटालियनों है। एक रेजिमेंट के तहत सभी संरचनाओं के एक ही हथियार या कोर (यानी, इन्फैंट्री या इंजीनियर्स) की बटालियनों हैं। रेजिमेंट बिल्कुल क्षेत्र संरचनाओं नहीं कर रहे हैं, वे ज्यादातर एक गठन नहीं कर सकता हूँ. गोरखा उदाहरण के लिए सभी रेजिमेंट के एक साथ एक गठन के रूप में लड़ना नहीं है, लेकिन विभिन्न ब्रिगेड या कोर या भी आदेश पर फैलाया जा सकता है।
===इंफैंट्री रेजिमेंट्स (32)===
वरीयता के आधार पर:<ref>{{cite web | url=http://www.bharat-rakshak.com/LAND-FORCES/Units/Infantry.html?layout=default | title=Infantry Regiments | publisher=Bharat Rakshak | date=2008 | accessdate=24 January 2014 | archive-date=7 अक्तूबर 2013 | archive-url=https://web.archive.org/web/20131007164813/http://bharat-rakshak.com/LAND-FORCES/Units/Infantry.html?layout=default | url-status=dead }}</ref>
* [[गार्ड ब्रिगेड]]
* [[पैराशूट रेजिमेंट]]
* [[मैकेनाइज़्ड इन्फेंट्री रेजिमेंट]]
* [[पंजाब रेजिमेंट|पंजाब रेजिमेंट्स]]
* [[मद्रास रेजिमेंट]]
* [[ग्रेनेडियर्स]]
* [[मराठा लाइट इन्फेंट्री]]
* [[राजपूताना राइफल्स]]
* [[राजपूत रेजिमेंट]]
* [[जाट रेजिमेंट]]
* [[सिख रेजिमेंट]]
* [[सिख लाइट इन्फेंट्री]]
* [[डोगरा रेजिमेंट]]
* [[गढ़वाल राइफल्स]]
* [[कुमाऊं रेजिमेंट]]
* [[असम रेजिमेंट]]
* [[बिहार रेजिमेंट]]
* [[माहर रेजिमेंट]]
* [[जम्मू कश्मीर राइफल्स]]
* [[जम्मू कश्मीर लाइट इन्फेंट्री]]
* [[नागा रेजिमेंट]]
* [[1 गोरखा राइफल्स]]
* [[3 गोरखा राइफल्स]]
* [[4 गोरखा राइफल्स]]
* [[5 गोरखा राइफल्स|5 गोरखा राइफल्स (फ्रंटियर फ़ोर्स)]]
* [[8 गोरखा राइफल्स]]
* [[9 गोरखा राइफल्स]]
* [[11 गोरखा राइफल्स]]
* [[लद्दाख स्काउट्स]]
* [[राष्ट्रीय राइफल्स]]
* [[अरुणाचल स्काउट्स]]
* [[सिक्किम स्काउट्स]]
===एक नज़र में व्याख्या===
{| class="wikitable sortable" border="1"
|-
! रेजिमेंट
! से सक्रिय
! रेजिमेंट का केंद्र
! आदर्श वाक्य (मोटो)
! युद्ध घोष (वॉर क्राई)
|-
| [[1 गोरखा राइफल्स]]
| 1815
| सुबाथु, हिमाचल प्रदेश
| कायर हुनु भन्दा मर्नु राम्रो
| जय महाकाली, आयो गोरखाली
|-
| [[3 गोरखा राइफल्स ]]
| 1815
| वाराणसी, उत्तर प्रदेश
| कायर हुनु भन्दा मर्नु राम्रो
| जय महाकाली, आयो गोरखाली
|-
| [[4 गोरखा राइफल्स ]]
| 1857
| सुबथु, हिमाचल प्रदेश
| कायर हुनु भन्दा मर्नु राम्रो
| जय महाकाली, आयो गोरखाली
|-
| [[5 गोरखा राइफल्स ]]
| 1858
| शिलोंग, मेघालय
| शौर्य एवं निष्ठा
| जय महाकाली, आयो गोरखाली
|-
| [[8 गोरखा राइफल्स ]]
| 1824
|शिलोंग, मेघालय
| कायर हुनु भन्दा मर्नु राम्रो
| जय महाकाली, आयो गोरखाली
|-
| [[9 गोरखा राइफल्स ]]
| 1817
| वाराणसी, उत्तर प्रदेश
| कायर हुनु भन्दा मर्नु राम्रो
| जय महाकाली, आयो गोरखाली
|-
| [[11 गोरखा राइफल्स ]]
| 1918-1922; 1948 से
| लखनऊ, उत्तर प्रदेश
| यत्राहम् विजयस्तत्रः
| जय महाकाली, आयो गोरखाली
|-
| [[गढ़वाल राइफल्स]]
| 1887
| लैंसडौन, भारत
| युद्ध कीर्ति निश्चय
| बद्री विशाल लाल की जय
|-
| [[गार्ड ब्रिगेड]]
| 1948
| कैम्पटी, महाराष्ट्र
| पहला हमेशा पहला
| गरुड़ का हूँ बोल प्यारे
|-
| [[बिहार रेजिमेंट ]]
| 1941
| दानापुर, बिहार
| करम ही धरम
| जय बजरंगबली
|-
| [[पैराशूट रेजिमेंट ]]
| 1945
| बैंगलोर, कर्नाटक
| शत्रुजीत
| सर्वदा शक्तिशाली
|-
| [[पंजाब रेजिमेंट (भारत)|पंजाब रेजिमेंट]]
| 1761
| रामगढ़ छावनी, [[झारखंड]]
| स्थल व जल
| जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल
|-
| [[मद्रास रेजिमेंट]]
| 1758
| वेलिंगटन, तमिलनाडू
| स्वधर्मे निधनं श्रेयः
| वीरा मद्रासी, अडी कोलू, अडी कोलू
|-
| [[ग्रेनेडियर रेजिमेंट]]
| 1758
| जबलपुर, मध्य प्रदेश
| सर्वदा शक्तिशाली
| आदर्श वाक्य के समान
|-
| [[मराठा लाइट इन्फेंट्री]]
| 1768
| बेलगाम, कर्नाटक
| ड्यूटी, ऑनर, करेज
| बोल छत्रपति शिवजी महाराज की जय, तेमलाइ माता की जय!
|-
| [[राजपूताना राइफल्स]]
| 1775
| [[दिल्ली छावनी]]
| वीर भोग्य: वसुंधरा
| राजा राम चंद्र की जय
|-
| [[राजपूत रेजिमेंट]]
| 1778
| [[फतेहगढ़]], उत्तर प्रदेश
| सर्वत्र विजय
| बोल बजरंग बाली की जय
|-
| [[जाट रेजिमेंट]]
| 1795
| बरेली, उत्तर प्रदेश
| संगठन व वीरता
| जाट बलवान, जय भगवान
|-
| [[सिख रेजिमेंट ]]
| 1846
| रामगार्घ छावनी , झारखंड
| निश्चय कर अपनी जीत करूँ
| जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल
|-
| [[सिख लाइट इन्फेंट्री]]
| 1944
| [[फतेहगढ़]], उत्तर प्रदेश
| देग तेग फ़तेह
| जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल
|-
| [[डोगरा रेजिमेंट ]]
| 1877
| फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश
| कर्तव्यम् अनवतं
| ज्वाला माता की जय
|-
| [[कुमाऊं रेजिमेंट]]
| 1813
| रानीखेत, उत्तराखंड
| पराक्रमो विजयते
| कालिका माता की जय
बजरंग बाली की जय
दादा किशन की जय
जय दुर्गे
|-
| [[माहर रेजिमेंट]]
| 1941
| सागर, मध्य प्रदेश
| यश सिद्धि
| बोलो भारत माता की जय
|-
|}
=== आर्मरड रेजिमेंट्स (62) ===
{{See also|भारतीय सेना के आर्मर्ड दस्ते}}
* [[राष्ट्रपति के सुरक्षागार्ड (भारत)|राष्ट्रपति के सुरक्षागार्ड]]
* [[स्किनर्स हॉर्स|1 हॉर्स]] या [[स्किनर्स हॉर्स]]
* [[2nd लैंसर्स (गार्डनर्स हॉर्स)|2 लैंसर्स]]
* [[3rd कैवेलरी (भारत)|3rd कैवेलरी]]
* [[4th ड्यूक ऑफ़ कैंब्रिज का अपना हडसन्स हॉर्स|4 हॉर्स]] या 'हडसन्स हॉर्स'
* [[5 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[6 आर्मर्ड रेजिमेंट|6 लैंसर्स]]
* [[7वी लाइट कैवेलरी|7 कैवेलरी]]
* [[8वी किंग जॉर्ज की अपनी लाइट कैवेलरी|8 कैवेलरी]]
* [[9वी रॉयल डेक्कन हॉर्स|9 हॉर्स]] या 'डेक्कन हॉर्स'
* [[10 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* 11 आर्मर्ड रेजिमेंट
* [[12वी कैवेलरी|12 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[13 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[14वी प्रिंस ऑफ वेल्स का अपना स्किन्ड हॉर्स|14 हॉर्स]] या 'स्किन्ड/Scinde हॉर्स’
* [[15th लैंसर्स|15 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[16th लाइट कैवेलरी|16 कैवेलरी]]
* [[द पूना हॉर्स|17 हॉर्स]] ([[डी पूना हॉर्स]])
* [[18 कैवेलरी]]
* [[19 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[20 लैंसर्स]]
* [[सेंट्रल इंडियन हॉर्स]] (21वे स्थान पर)
* [[40 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[41 आर्मर्ड रेजिमेंट (भारत)|41 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[42 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[43 आर्मर्ड रेजिमेंट]]- एकमात्र आर्मर्ड रेजिमेंट स्टैंडर्ड हथियार के रूप में MBT अर्जुन टैंक के साथ।
* [[44 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[45 कैवेलरी]]
* [[46 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[47 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[48 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[49 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[50 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[51 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[52 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[53 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[61वी कैवेलरी रेजिमेंट (भारत)|61 कैवेलरी]]
* [[62वी कैवेलरी रेजिमेंट (भारत)|62 कैवेलरी]]
* [[63 कैवेलरी]]
* [[64 कैवेलरी]]
* [[65 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[66 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[67 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[68 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[69 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[70 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[71 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[72 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[73 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[74 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[75 आर्मर्ड रेजिमेंट]] - 12 मार्च 1971 के भारत पाक युद्ध के दौरान भारत की एकमात्र आर्मर्ड रेजिमेंट जिसे विदेशी जमीन पर उतार गया।
* [[76 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[81 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[82 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[83 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[84 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[85 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[86 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[87 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[88 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[89 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[90 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
==== तोपखाना रेजिमेंट (आर्टिलरी रेजिमेंट) ====
तोपखाना सेना के विध्वंसक शक्ति का मुख्य अंग है | भारत सभी प्राचीन ग्रंथों सभी तोपखाने का वर्णन मिलता है | तोप को संस्कृत सभी शतघ्नी कहा जाता है | मध्य कालीन इतिहास सभी तोप का प्रयोग सर्वप्रथम बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध सभी 1526 सन 0 ई सभी किया था | कुछ नवीन प्रमाणों से यहाँ प्रतीत होता है के तोप का प्रयोग बहमनी राजाओं 1368 ने सभी अदोनी के युद्ध सभी तथा गुजरात के शासक मोहमद शाह ने 15 वीं शताब्दी सभी किया था | भारत मे तोप खाना के दो केंद्र है।
===आर्टिलरी रेजिमेंट्स की इकाइयाँ===
आर्टिलरी की कुछ यूनिट्स नीचे प्रदशित की गयी हैं :
* 140 AAD regt (द स्काई लेन्सर्स)
* [[71st कुर्ग राइफल्स |37 कुर्ग एंटी-टैंक रेजिमेंट RIA]]
* [[9 Parachute फील्ड रेजिमेंट]]
* [[11 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[12 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[15 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[16 मीडियम रेजिमेंट]]
* (34 मीडियम रेजिमेंट(कैसिनो)
* [[38 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[40 फील्ड रेजिमेंट (असल उत्तर)]]
* [[42 फील्ड रेजिमेंट (DBN)]]
* [[56 फील्ड रेजिमेंट (JITRA)]]
* [[61 मीडियम रेजिमेंट]] (17वी माउंटेन डिवीज़न के साथ भी सेवा दी।)
* [[63 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[70 फील्ड रेजिमेंट ]] (सवियर्स)
* [[76 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[80 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[92 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[99 फील्ड रेजिमेंट (सयलहेत/Sylhet)]]
* [[106 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[161 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[163 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[168 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[169 फील्ड रेजिमेंट (लोंगेवाला)]]
* [[172 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[175 रेजिमेंट (फील्ड या मीडियम)]]
* [[191 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[193 मीडियम रेजिमेंट (सोलटॉम/Soltom)]]
* [[195 फील्ड रेजिमेंट (बनवत )]]
* [[200 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[216 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[223 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[228 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[237 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[253 मीडियम रेजिमेंट (माइटी मीडियम)]]
* [[255 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[274 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[286 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[298 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[307 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[311 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[314 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[315 फील्ड रेजिमेंट]]<ref>http://www.tribuneindia.com/2000/20000126/nation.htm#2</ref>
* [[821 Light रेजिमेंट]] बॉम्बर्स
* [[3342 msl regt]]
* [[110 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[279 SATA Bty]]
* [[91 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[122 SATA रेजिमेंट]]
* [[125 SATA रेजिमेंट (सवा लाख)]] हेरॉन UAV युक्त भारत की पहली रेजिमेंट।
* [[161 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[861 रेजिमेंट]] ब्रह्मोस से युक्त (ब्लॉक I)
* [[862 रेजिमेंट]] ब्रह्मोस से युक्त (ब्लॉक II)
* [[863 रेजिमेंट]] ब्रह्मोस से युक्त (ब्लॉक II)
* [[864 रेजिमेंट]] ब्रह्मोस से युक्त (ब्लॉक III)
* [[170 मीडियम रेजिमेंट]] (वीर राजपूत)
=== इंजीनियर समूह===
इन को ब्रिटिश भारत की तत्कालीन प्रेसीडेंसियों में से प्रत्येक सैपर और खान समूह में से गठित किया गया। ये वरीयता क्रम में नीचे सूचीबद्ध हैं:
* [[मद्रास सैपर्स ]]
* [[बंगाल सैपर्स ]]
* [[बॉम्बे सैपर्स ]]
== युद्ध सिद्धान्त ==
भारतीय सेना के वर्तमान सिद्धांत का मुकाबला प्रभावी ढंग से पकड़े संरचनाओं और हड़ताल संरचनाओं के उपयोग पर आधारित है। एक हमले के मामले में पकड़े संरचनाओं दुश्मन होते हैं और हड़ताल संरचनाओं दुश्मन ताकतों को बेअसर पलटवार होगा. एक भारतीय हमले के मामले में पकड़े संरचनाओं दुश्मन ताकतों नीचे पिन भारतीय को चुनने के एक बिंदु पर whilst हड़ताल संरचनाओं हमले. भारतीय सेना काफी बड़ी हड़ताल भूमिका के लिए कई कोर समर्पित है। वर्तमान में, सेना अपने [[विशेष बलों]] क्षमताओं को बढ़ाने में भी देख रहा है।
== उपस्कर एवं उपकरण ==
[[चित्र: अर्जुन एमबीटी टक्कर ट्रैक test.JPG | सही | अंगूठे | [[एमबीटी अर्जुन ]].]]
[[चित्र: भारतीय सेना टी 90.jpg | अंगूठे | [[T-90 | भीष्म टी 90] एमबीटी]]
[[चित्र: भारतीय सेना T-72 image1.jpg | अंगूठे | सही | [[टी 72] अजेय]]
[[चित्र: Defexpo NAMICA साथ नाग - 2008.JPG | सही | अंगूठे | [[नाग प्रक्षेपास्त्र|नाग मिसाइल]] और NAMICA (नाग मिसाइल वाहक)]]
{{मुख्य | भारतीय सेना के उपकरण}}
सेना के उपकरणों के अधिकांश आयातित है, लेकिन प्रयासों के लिए स्वदेशी उपकरणों के निर्माण किए जा रहे हैं। सभी भारतीय सैन्य आग्नेयास्त्रों बंदूकें आयुध निर्माणी बोर्ड की छतरी के प्रशासन के तहत निर्मित कर रहे हैं, ईशापुर में प्रिंसिपल बन्दूक विनिर्माण सुविधाओं के साथ, [[काशीपुर, उत्तराखण्ड|काशीपुर]], कानपुर, जबलपुर और तिरूचिरापल्ली. भारतीय राष्ट्रीय लघु शस्त्र प्रणाली (INSAS) राइफल है, जो सफलतापूर्वक 1997 के बाद से भारतीय सेना द्वारा शामिल Ordanance निर्माणी बोर्ड, ईशापुर के एक उत्पाद है। जबकि गोला बारूद किरकी (अब Khadki) में निर्मित है और संभवतः बोलंगीर पर.
== भारतीय सेना में कैसे शामिल हों ==
<ref>{{Cite web|url=https://alljobs.co.in/career/how-to-join-indian-army/|title=How To Join Indian Army|last=Career|first=Guide|date=2022-01-11GMT+000011:44:48+00:00|website=Career guide|language=en-US|access-date=2022-01-18|archive-date=15 जनवरी 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20220115083729/https://alljobs.co.in/career/how-to-join-indian-army/|url-status=dead}}</ref>
* सैनिक सामान्य ड्यूटी
* सैनिक व्यापारी
* एनडीए परीक्षा के माध्यम से
* तकनीकी प्रवेश योजना
* सैनिक प्रवेश योजना
https://anilsiriti.in/wp-content/uploads/2023/04/AITT-CTS-Schedule-2023.png {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20230502123215/https://anilsiriti.in/wp-content/uploads/2023/04/AITT-CTS-Schedule-2023.png |date=2 मई 2023 }}
== भारतीय थल सेना की नई दिशा ==
* मेजर कैलाश चौधरी ाहरी खतरों के विरुद्ध शक्ति सन्तुलन के द्वारा या युद्ध छेड़ने की स्थिति में संरक्षित राष्ट्रीय हितों, सम्प्रभुता की रक्षा, क्षेत्रीय अखण्डता और भारत की एकता की रक्षा करना।
* सरकारी तन्त्र को छाया युद्ध और आन्तरिक खतरों में मदद करना और आवश्यकता पड़ने पर नागरिक अधिकारों में सहायता करना।"<ref>{{Cite web |url=http://indianarmy.nic.in/indianarmydoctrine_1.doc |title=Indian Army doctrine |access-date=12 जनवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071201062843/http://indianarmy.nic.in/indianarmydoctrine_1.doc |archive-date=1 दिसंबर 2007 |url-status=dead }}</ref>
*दैवीय आपदा जैसे भूकम्प, बाढ़, समुद्री तूफान ,आग लगने ,विस्फोट आदि के अवसर पर नागरिक प्रशासन की मदद करना।
*नागरिक प्रशासन के पंगु होने पर उसकी सहायता करना।
== इन्हें भी देखें ==
* [[भारतीय सशस्त्र सेनाएँ|भारतीय सशस्त्र सेनाएं]]
* [[ब्रिटिश भारतीय सेना]]
* [[आज़ाद हिन्द फ़ौज]]
* [[प्रादेशिक सेना]]
* [[भारतीय सेनाएं सशस्त्र]]
* [[ब्रिटिश भारतीय सेना]]
* [[आज़ाद हिन्द फ़ौज|इंडियन नेशनल आर्मी]]
* [[भारतीय प्रादेशिक सेना]]
== बाहरी कड़ियाँ ==
{{Commonscat|Army of India}}
* [https://web.archive.org/web/20170626223336/https://indianarmy.nic.in/ Official website of the Indian Army]
* [https://web.archive.org/web/20070102002543/http://armedforces.nic.in/ Official website of the Indian Armed Forces]
* [https://web.archive.org/web/20090202122230/http://mod.nic.in/ Official website of the Defence Ministry of India]
* [https://web.archive.org/web/20041206180157/http://www.bharat-rakshak.com/LAND-FORCES/Army/ Bharat Rakshak: Indian Army]
* [https://web.archive.org/web/20160106003728/http://www.globalsecurity.org/military/world/india/army.htm Indian army guide]
* [https://web.archive.org/web/20070909104627/http://frontierindia.net/category/indian-army-news/ Indian Army news]
== सन्दर्भ ==
{{reflist|2}}
{{भारतीय सेना}}
[[श्रेणी:भारतीय सेना]]
64tmq1po92vh7nun6lw7o25qo0m318n
6630593
6630512
2026-10-18T05:32:14Z
चाहर धर्मेंद्र
703114
यहाँ पर इस सन्दर्भ का कोई मतलब नहीं।
6630593
wikitext
text/x-wiki
{{अनुवाद}}
{{Infobox military unit
|unit_name = भारतीय थलसेना
|image = ADGPI Indian Army.svg
|caption = भारतीय सेना की कलगी
|dates =09/12/2024
|start_date = {{Start date and age|df=yes|1895|04|01}}
|country = [[भारत]]
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|size = 12,00,255 सक्रिय कर्मिक<ref name="pib">{{cite web|url=http://pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=(Release%20ID%20:148814)|title=Press Information Bureau|trans-title=पत्र सूचना कार्यालय|author=|date=|work=pib.nic.in|access-date=18 फ़रवरी 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20160915111743/http://pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=(Release%20ID%20:148814)|archive-date=15 सितंबर 2016|url-status=live}}</ref><br/>9,90,960 रिजर्व कर्मीक<ref name="IISS 2014">{{cite book| title=The Military Balance 2014 |trans-title= सैन्य संतुलन २०१४, |page= २४१–२४६ | author1=सामरिक अध्ययन के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थान | authorlink1=:en:International Institute for Strategic Studies| date=३ फ़रवरी २०१४ | publisher= रूटलेज | location=[[लंदन]]| isbn=9781857437225| ref=IISS2014 |language=अंग्रेज़ी}}</ref><br/>[[सक्रिय भारतीय सैन्य विमान सूची#आर्मी एविएशन कॉर्प्स|~232 विमान]]<ref>{{Cite book|url=https://www.flightglobal.com/download?ac=90688|title=World Air Forces 2023|publisher=Flight International|pages=20}}</ref><ref name="Flightglobal">{{cite web |title=World Air Forces 2015 |trans-title=विश्व वायु सेना २०१५ |url=https://d1fmezig7cekam.cloudfront.net/VPP/Global/Flight/Airline%20Business/AB%20home/Edit/WorldAirForces2015.pdf |page=१७ |website=[[फ्लाइटग्लोबल]] |format=पीडीएफ |accessdate=१९ फ़रवरी २०१७ |language=अंग्रेज़ी |archive-url=https://web.archive.org/web/20141219164437/https://d1fmezig7cekam.cloudfront.net/VPP/Global/Flight/Airline%20Business/AB%20home/Edit/WorldAirForces2015.pdf |archive-date=19 दिसंबर 2014 |url-status=live }}</ref>
|command_structure = [[भारतीय सशस्त्र सेनाएँ]]
|garrison = [[नई दिल्ली]]
|garrison_label = मुख्यालय
|motto = "''सर्विस बिफोर सेल्फ़''" (स्वपूर्व सेवा)
|colors = सुनहरा, लाल और काला <br />{{color box|#FFD700}}{{color box|#D90000}}{{color box|#000000}}
|colors_label = रंग
|army day = {{Start date and age|df=yes|1949|01|15}}
|anniversaries = 15 जनवरी – [[सेना दिवस (भारत)|सेना दिवस]]
|website = [http://indianarmy.nic.in/ indianarmy.nic.in]<!-- Commanders -->
|commander1 = [[उपेंद्र द्विवेदी|जनरल उपेंद्र द्विवेदी]]
|commander1_label = [[भारत के थलसेनाध्यक्ष|थलसेनाध्यक्ष]]
|commander2 =[[लेफ्टिनेंट जनरल]] एन. एस. राजा सुब्रमणि
|commander2_label = [[उप सेना प्रमुख (भारत)|उप सेनाप्रमुख]]
|notable_commanders = [[के एम करिअप्पा|फ़ील्ड मार्शल के॰एम॰ करिअप्पा]]<br />[[सैम मानेकशॉ|फ़ील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ]]
<!-- Insignia -->
|identification_symbol=[[File:Flag of Indian Army.svg|border|200px]]
|identification_symbol_label=ध्वज
|identification_symbol_2=
|identification_symbol_2_label=
<!-- Aircraft -->
|aircraft_electronic=
|aircraft_helicopter=[[एचएएल रुद्र]]
|aircraft_transport=[[एचएएल ध्रुव]], [[ऐरोस्पैटियल अलौटे III|एचएएल चेतल]], [[ऐरोस्पैटियल एसए 315बी लामा|एचएएल चीता और चीतल]]
}}
'''भारतीय थलसेना''' , सेना की भूमि-आधारित दल की शाखा है और यह [[भारतीय सशस्त्र सेनाएँ|भारतीय सशस्त्र बल]] का सबसे बड़ा अंग है। [[भारत के राष्ट्रपति|भारत का राष्ट्रपति]], थलसेना का प्रधान सेनापति होता है,<ref>{{cite web |url=http://presidentofindia.nic.in/about.htm |title=About – The President of India |trans-title=भारत के राष्ट्रपति – के बारे में |publisher= |accessdate=१९ फ़रवरी २०१७ |language=अंग्रेज़ी |archive-url=https://web.archive.org/web/20160405170925/http://www.presidentofindia.nic.in/about.htm |archive-date=5 अप्रैल 2016 |url-status=dead }}</ref> और इसकी कमान [[भारत के थलसेनाध्यक्ष|भारतीय थलसेनाध्यक्ष]] के हाथों में होती है जो कि चार-सितारा [[जनरल]] स्तर के अधिकारी होते हैं। पाँच-सित रैंक के साथ [[फील्ड मार्शल (भारत)|फील्ड मार्शल]] की रैंक भारतीय सेना में श्रेष्ठतम सम्मान की औपचारिक स्थिति है, आजतक मात्र दो अधिकारियों को इससे सम्मानित किया गया है। भारतीय सेना का उद्भव [[ईस्ट इण्डिया कम्पनी]], जो कि [[ब्रिटिश भारतीय सेना]] के रूप में परिवर्तित हुई थी, और भारतीय राज्यों की सेना से हुआ, जो [[भारत की स्वतन्त्रता|स्वतन्त्रता]] के पश्चात राष्ट्रीय सेना के रूप में परिणत हुई। भारतीय सेना की टुकड़ी और रेजिमेंट का विविध इतिहास रहा हैं इसने दुनिया भर में कई लड़ाई की और अभियानों में हिस्सा लिया है, तथा आजादी से पहले और बाद में बड़ी संख्या में [[भारतीय सेना के युद्ध सम्मान|युद्ध सम्मान]] अर्जित किये।<ref name="Sarbans">{{cite book |title=Battle Honours of the Indian Army 1757–1971 |trans-title= भारतीय सेना के युद्ध सम्मान १७५७–१९७१ |last=सिंह |first=सरबंस |year=१९९३ |publisher=विजन बुक्स |location=नई दिल्ली |isbn=8170941156 |language=अंग्रेज़ी}}</ref>
भारतीय सेना का प्राथमिक उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद की एकता सुनिश्चित करना, राष्ट्र को बाहरी आक्रमण और आन्तरिक खतरों से बचाव, और अपनी सीमाओं पर शान्ति और सुरक्षा को बनाए रखना हैं। यह प्राकृतिक आपदाओं और अन्य गड़बड़ी के दौरान मानवीय बचाव अभियान भी चलाते है, जैसे [[ऑपरेशन सूर्य आशा]], और आन्तरिक खतरों से निपटने के लिए सरकार द्वारा भी सहायता हेतु अनुरोध किया जा सकता है। यह [[भारतीय नौसेना]] और [[भारतीय वायुसेना]] के साथ राष्ट्रीय शक्ति का एक प्रमुख अंग है।<ref>Headquarters Army Training Command. "Indian Army Doctrine". October 2004. [https://web.archive.org/web/20071201062843/http://%7b%7bcite/ Archive link] via [[archive.org]] (original url: <nowiki>{{cite web|url=http://indianarmy.nic.in/indianarmydoctrine_1.doc |title=Archived copy |accessdate=1 December 2007 |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20071201062843/http://indianarmy.nic.in/indianarmydoctrine_1.doc |archivedate=1 December 2007 }}</nowiki>).</ref> सेना अब तक पड़ोसी देश
इस्लामी पाकिस्तान के साथ चार युद्धों तथा चीन के साथ एक युद्ध लड़ चुकी है। सेना द्वारा किए गए अन्य प्रमुख अभियानों में [[गोवा मुक्ति संग्राम|ऑपरेशन विजय]], [[ऑपरेशन मेघदूत]] और [[ऑपरेशन कैक्टस]] शामिल हैं। संघर्षों के अलावा, सेना ने शान्ति के समय कई बड़े अभियानों, जैसे [[ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स]] और युद्ध-अभ्यास शूरवीर का संचालन किया है। सेना ने कई देशो में संयुक्त राष्ट्र के शान्ति मिशनों में एक सक्रिय प्रतिभागी भी रहा है जिनमे साइप्रस, लेबनान, कांगो, अंगोला, कम्बोडिया, वियतनाम, नामीबिया, एल साल्वाडोर, लाइबेरिया, मोज़ाम्बिक और सोमालिया आदि सम्मलित हैं। राजस्थान के झुंझुनूं जिले को सैनिकों का शहर कहा जाता है।
भारतीय सेना में एक [[सैन्य-दल (रेजिमेंट)]] प्रणाली है, लेकिन यह बुनियादी क्षेत्र गठन विभाजन के साथ संचालन और भौगोलिक रूप से सात कमान में विभाजित है। यह एक सर्व-स्वयंसेवी बल है और इसमें देश के सक्रिय रक्षा कर्मियों का 80% से अधिक हिस्सा है। यह 12,00,255 सक्रिय सैनिकों<ref>{{cite web|url=http://pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=(Release%20ID%20:148814)|title="Press Information Bureau".|publisher=pib.nic.in|access-date=18 फ़रवरी 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20160915111743/http://pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=(Release%20ID%20:148814)|archive-date=15 सितंबर 2016|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|url=https://en.wikipedia.org/wiki/International_Institute_for_Strategic_Studies|title=International Institute for Strategic Studies (3 February 2014)|access-date=15 मार्च 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170320150114/https://en.wikipedia.org/wiki/International_Institute_for_Strategic_Studies|archive-date=20 मार्च 2017|url-status=live}}</ref> और 9,90,960 आरक्षित सैनिकों<ref>{{cite web|url=https://en.wikipedia.org/wiki/International_Institute_for_Strategic_Studies|title=International Institute for Strategic Studies (3 February 2014)|access-date=15 मार्च 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170320150114/https://en.wikipedia.org/wiki/International_Institute_for_Strategic_Studies|archive-date=20 मार्च 2017|url-status=live}}</ref> के साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी स्थायी सेना है।
सेना ने सैनिको के आधुनिकीकरण कार्यक्रम की शुरुआत की है, जिसे "फ्यूचरिस्टिक इन्फैंट्री सैनिक एक प्रणाली के रूप में" के नाम से जाना जाता है इसके साथ ही यह अपने बख़्तरबन्द, तोपखाने और उड्डयन शाखाओं के लिए नए संसाधनों का संग्रह एवं सुधार भी कर रहा है।.<ref name="tmb2010">{{cite book|title=The Military Balance 2010|url=https://archive.org/details/militarybalance2010iiss|year=2010|publisher=Routledge|location=Oxfordshire|isbn=1857435575|pages=[https://archive.org/details/militarybalance2010iiss/page/n348 351], 359–364}}</ref><ref name="isfeb10">{{cite news|title=Indian Army Modernisation Needs a Major Push|url=http://www.indiastrategic.in/topstories482.htm|accessdate=10 July 2013|newspaper=India Strategic|date=February 2010|archive-url=https://web.archive.org/web/20130906195929/http://indiastrategic.in/topstories482.htm|archive-date=6 सितंबर 2013|url-status=dead}}</ref><ref name="dn2a12">{{cite news|title=India's Military Modernisation Up To 2027 Gets Approval|url=http://www.defencenow.com/news/611/indias-military-modernisation-up-to-2027-gets-approval.html|accessdate=10 July 2013|newspaper=Defence Now|date=2 April 2012|archive-url=https://web.archive.org/web/20131029201514/http://www.defencenow.com/news/611/indias-military-modernisation-up-to-2027-gets-approval.html|archive-date=29 अक्तूबर 2013|url-status=dead}}</ref>
== इतिहास ==
{{Main|भारत का सैन्य इतिहास}}
1947 में स्वतन्त्रता मिलने के बाद [[ब्रिटिश भारतीय सेना]] को नये बने राष्ट्र [[भारत]] और इस्लामी गणराज्य [[पाकिस्तान]] की सेवा करने के लिये 2 भागों में बाँट दिया गया। अधिकतर इकाइयों को भारत के पास रखा गया। चार गोरखा सैन्य दलों को ब्रिटिश सेना में स्थानान्तरित किया गया जबकि शेष को भारत के लिए भेजा गया।
जैसा कि ज्ञात है, भारतीय सेना में ब्रिटिश भारतीय सेना से व्युत्पन्न हुयी है तो इसकी संरचना, वर्दी और परम्पराओं को अनिवार्य रूप से विरासत में ब्रिटिश से लिया गया हैं|
=== प्रथम कश्मीर युद्ध (1947) ===
{{Main|१९४७ का भारत-पाक युद्ध}}
स्वतन्त्रता के लगभग तुरन्त बाद से ही भारत और पाकिस्तान के मध्य तनाव पैदा हो गया था और दोनों देशों के बीच पहले तीन पूर्ण पैमाने पर हुये युद्ध के बाद राजसी राज्य कश्मीर का विभाजन कर दिया गय। कश्मीर के महाराजा की भारत या पाकिस्तान में से किसी भी राष्ट्र के साथ विलय की अनिच्छा के बाद पाकिस्तान द्वारा कश्मीर के कुछ हिस्सों मे आदिवासी आक्रमण प्रायोजित करवाया गया। भारत द्वारा आरोपित पुरुषों को भी नियमित रूप से पाकिस्तान की सेना मे शामिल किया गया। जल्द ही पाकिस्तान ने अपने दलों को सभी राज्यों को अपने में संलग्न करने के लिये भेजा। [[महाराज हरि सिंह|महाराजा हरि सिंह]] ने भारत और पंडित जवाहर नेहरू से अपनी मदद करने की याचना की, पर उनको कहा गया कि भारत के पास उनकी मदद करने के लिये कोई कारण नही है। इस पर उन्होने कश्मीर के विलय के एकतरफा सन्धिपत्र पर हस्ताक्षर किये जिसका निर्णय भारत सरकार द्वारा लिया गया पर पाकिस्तान को यह सन्धि कभी भी स्वीकार नहीं हुई। इस सन्धि के तुरन्त बाद ही भारतीय सेना को आक्रमणकारियों से मुकाबला करने के लिये श्रीनगर भेजा गया। इस दल में जनरल थिम्मैया भी शामिल थे जिन्होने इस कार्यवाही में काफी प्रसिद्धि हासिल की और बाद में भारतीय सेना के प्रमुख बने। पूरे राज्य में एक गहन युद्ध छिड़ गया और पुराने साथी आपस मे लड़ रहे थे। दोनो पक्षों में कुछ को राज्यवार बढत मिली तो साथ ही साथ महत्वपूर्ण नुकसान भी हुआ। [[१९४८|1948]] के अन्त में नियन्त्रण रेखा पर लड़ रहे सैनिकों में असहज शान्ति हो गई जिसको संयुक्त राष्ट्र द्वारा भारत और पाकिस्तान में विभाजित कर दिया गया। पाकिस्तान और भारत के मध्य कश्मीर में उत्पन्न हुआ तनाव कभी भी पूर्ण रूप से समाप्त नहीं हुआ है।
=== हैदराबाद का विलय (1948) ===
{{Main|ऑपरेशन पोलो }}
भारत के विभाजन के उपरान्त राजसी राज्य हैदराबाद, जो कि निजा़म द्वारा शासित था, ने स्वतन्त्र राज्य के तौर रहना पसन्द किया। निजा़म ने हैदराबाद को भारत में मिलाने पर अपनी आपत्ति दर्ज करवाई। भारत सरकार और हैदराबाद के निज़ाम के बीच पैदा हुई अनिर्णायक स्थिति को समाप्त करने हेतु भारत के उप-प्रधानमन्त्री [[वल्लभ भाई पटेल|सरदार बल्लभ भाई पटेल]] द्वारा 12 सितम्बर 1948 को भारतीय टुकड़ियों को हैदराबाद की सुरक्षा करने का आदेश दिया। 5 दिनों की गहन लड़ाई के बाद वायु सेना के समर्थन से भारतीय सेना ने हैदराबाद की सेना को परास्त कर दिया। उसी दिन हैदराबाद को भारत गणराज्य का भाग घोषित कर दिया गया। पोलो कार्यवाही के अगुआ मेजर जनरल जॉयन्तो नाथ चौधरी को कानून व्यवस्था स्थापित करने के लिये हैदराबाद का सैन्य शाशक (1948-1949) घोषित किया गया।
=== गोवा, दमन और दीव का विलय (1961) ===
{{seealso|गोवा मुक्ति संग्राम}}
ब्रिटिश और [[फ्रांस|फ़्रांस]] द्वारा अपने सभी औपनिवेशिक अधिकारों को समाप्त करने के बाद भी [[भारतीय उपमहाद्वीप]], [[गोवा]], [[दमन और दीव]] में पुर्तगालियों का शासन रहा। पुर्तगालियों द्वारा बारबार बातचीत को अस्वीकार कर देने पर [[नई दिल्ली]] द्वारा 12 दिसम्बर 1961 को ऑपरेशन विजय की घोषणा की और अपनी सेना के एक छोटे से दल को पुर्तगाली क्षेत्रों पर आक्रमण करने के आदेश दिए। 26 घण्टे चले युद्ध के बाद गोवा और दमन और दीव को सुरक्षित स्वतन्त्र करा लिया गया और उनको भारत का अंग घोषित कर दिया गया।
=== भारत-चीन युद्ध (1962) ===
{{Main|भारत-चीन युद्ध}}
1959 से भारत प्रगत नीति का पालन करना शुरु कर दिया। 'प्रगत नीति' के अन्तर्गत भारतीय गश्त दलों ने चीन द्वारा भारतीय सीमा के काफी अन्दर तक हथियाई गई चौकियों पर हमला बोल कर उन्हें फिर कब्जे में लिया। भारत के मैक-महोन रेखा को ही अंतरराष्ट्रीय सीमा मान लिए जाने पर जोर डालने के कारण भारत और चीन की सेनाओं के बीच छोटे स्तर पर संघर्ष छिड़ गया। बहरहाल, भारत और चीन के बीच मैत्रीपूर्ण सम्बन्धों के कारण विवाद ने अधिक तूल नहीं पकड़ा। युद्ध का कारण [[अक्साई चिन]] और [[अरुणाचल प्रदेश]] की क्षेत्रों की सम्प्रभुता को लेकर था। अक्साई चिन में, जिसे भारत द्वारा कश्मीर और चीन द्वारा झिंजियांग का हिस्सा का दावा किया जाता रहा है, एक महत्वपूर्ण सड़क लिंक है जोकि तिब्बत और चीनी क्षेत्रों झिंजियांग को जोड़ती है। चीन के [[तिब्बत]] में भारत की भागीदारी के संदेह के चलते दोनों देशों के बीच संघर्ष की संभावनाएँ और बढ़ गई।
[[चित्र:Hall of Fame Museum, Leh.jpg|अंगूठाकार|भारत-तिब्बत सीमा के पास लेह में भारतीय सेना हॉल ऑफ फेम]]
हैदराबाद व गोवा में अपने सैन्य अभियानों की सफलता से उत्साहित भारत ने चीन के साथ सीमा विवाद में आक्रामक रुख ले लिया। 1962 में, भारतीय सेना को भूटान और अरुणाचल प्रदेश के बीच की सीमा के निकट और विवादित [[मैकमहोन रेखा]] के लगभग स्थित 5 किमी उत्तर में स्थित थाग ला रिज तक आगे बढ़ने का आदेश दिया गया। इसी बीच चीनी सेनाएँ भी भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कर चुकी थीं और दोनो देशों के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया जब भारतीय सेनाओं ने पाया कि चीन ने [[अक्साई चिन]] क्षेत्र में सड़क बना ली है। वार्ताओं की एक श्रृंखला के बाद, चीन की [[पीपल्स लिबरेशन आर्मी|पीपुल्स लिबरेशन आर्मी]] ने थाग ला रिज पर भारतीय सेनाओं के ठिकानों पर हमला बोल दिया। चीन के इस कदम से भारत आश्चर्यचकित रह गया और 12 अक्टूबर को नेहरू ने अक्साई चिन से चीनियों को खदेड़ने के आदेश जारी कर दिए। किन्तु, भारतीय सेना के विभिन्न प्रभागों के बीच तालमेल की कमी और वायु सेना के प्रयोग के निर्णय में की गई देरी ने चीन को महत्वपूर्ण सामरिक व रणनीतिक बढ़त लेने का अवसर दे दिया। 20 अक्टूबर को चीनी सैनिकों नें दोनों मोर्चों उत्तर-पश्चिम और सीमा के उत्तर-पूर्वी भागों में भारत पर हमला किया और अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश के विशाल भाग पर कब्जा कर लिया।
जब लड़ाई विवादित प्रदेशों से भी परे चली गई तो चीन ने भारत सरकार को बातचीत के लिए आमन्त्रण दिया, लेकिन भारत अपने खोए क्षेत्र हासिल करने के लिए अड़ा रहा। कोई शान्तिपूर्ण समझौता न होते देख, चीन ने एकतरफा युद्धविराम घोषित करते हुए अरुणाचल प्रदेश से अपनी सेना को वापस बुला लिया। वापसी के कारण विवादित भी हैं। भारत का दावा है कि चीन के लिए अग्रिम मोर्चे पर मौजूद सेनाओं को सहायता पहुँचाना सम्भव न रह गया था, तथा संयुक्त राज्य अमेरिका का राजनयिक समर्थन भी एक कारण था। जबकि चीन का दावा था कि यह क्षेत्र अब भी उसके कब्जे में है जिसपर उसने कूटनीतिक दावा किया था। भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच विभाजन रेखा को [[वास्तविक नियंत्रण रेखा]] का नाम दिया गया।
भारत के सैन्य कमाण्डरों द्वारा लिए गए कमजोर फैसलों ने कई सवाल उठाए। जल्द ही भारत सरकार द्वारा भारतीय सेना के खराब प्रदर्शन के कारणों का निर्धारण करने के लिए [[ब्रूक्स-भगत रपट| हेंडरसन ब्रूक्स समिति]] का गठन कर दिया गया। कथित तौर पर समिति की रिपोर्ट ने भारतीय सशस्त्र बलों की कमान की गलतियाँ निकाली और अपनी नाकामियों के लिए कई मोर्चों पर विफल रहने के लिए कार्यकारी सरकार की बुरी तरह आलोचना की। समिति ने पाया कि हार के लिए प्रमुख कारण लड़ाई शुरु होने के बाद भी भारत चीन के साथ सीमा पर कम सैनिकों की तैनाती था और यह भी कि भारतीय वायु सेना को चीनी परिवहन लाइनों को लक्ष्य बनाने के लिए चीन द्वारा भारतीय नागरिक क्षेत्रों पर जवाबी हवाई हमले के डर से अनुमति नहीं दी गई। ज्यादातर दोष के तत्कालीन रक्षा मन्त्री [[वी के कृष्ण मेनन|कृष्ण मेनन]] की अक्षमता पर भी दिया गया। रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की लगातार माँग के बावजूद हेंडरसन - ब्रूक्स रिपोर्ट अभी भी गोपनीय रखी गई है।
=== द्वितीय कश्मीर युद्ध (1965) ===
{{Main|१९६५ का भारत-पाक युद्ध}}
पाकिस्तान के साथ एक दूसरे टकराव पर मोटे तौर पर 1965 में जगह ले ली [[कश्मीर]]. पाकिस्तानी राष्ट्रपति [[अयूब ख़ान|अयूब खान]] शुरू''[[ऑपरेशन जिब्राल्टर]]'' [[१९६५|1965]] अगस्त में जिसके दौरान कई पाकिस्तानी अर्धसैनिक सैनिकों को भारतीय प्रशासित कश्मीर में घुसपैठ और भारत विरोधी विद्रोह चिंगारी की कोशिश की. पाकिस्तानी नेताओं का मानना है कि भारत, जो अभी भी विनाशकारी युद्ध भारत - चीन से उबरने का प्रयास कर रहा था, एक सैन्य जोर और विद्रोह के साथ सौदा करने में असमर्थ होगा. हालाँकि, ऑपरेशन एक प्रमुख विफलता के बाद से कश्मीरी लोगों को इस तरह के एक विद्रोह के लिए थोड़ा समर्थन दिखाया और भारत जल्दी बलों स्थानान्तरित घुसपैठियों को बाहर निकालने. भारतीय जवाबी हमले के प्रक्षेपण के एक पखवाड़े के भीतर, घुसपैठियों के सबसे वापस पाकिस्तान के लिए पीछे हट गया था।
[[चित्र:1965 Indo-Pak War DestroyedShermanTank.jpg|अंगूठाकार|असल उत्तर की लड़ाई के बाद नष्ट हुए पाकिस्तानी शर्मन टैंक के पास भारतीय सेना अधिकारी।]]
ऑपरेशन जिब्राल्टर की विफलता से पस्त है और सीमा पार भारतीय बलों द्वारा एक प्रमुख आक्रमण की उम्मीद है, पाकिस्तान [[ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम] 1 सितम्बर को शुरू, भारत Chamb - Jaurian क्षेत्र हमलावर. जवाबी कार्रवाई में, 6 सितम्बर को पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय सेना के 15 इन्फैन्ट्री डिवीजन अन्तरराष्ट्रीय सीमा पार कर गया।
प्रारम्भ में, भारतीय सेना के उत्तरी क्षेत्र में काफी सफलता के साथ मुलाकात की. पाकिस्तान के खिलाफ लम्बे समय तक तोपखाने barrages शुरू करने के बाद, भारत कश्मीर में तीन महत्वपूर्ण पर्वत पदों पर कब्जा करने में सक्षम था। 9 सितम्बर तक भारतीय सेना सड़कों में काफी पाकिस्तान में बनाया था। भारत पाकिस्तानी टैंकों की सबसे बड़ी दौड़ था जब पाकिस्तान के एक बख्तरबन्द डिवीजन के आक्रामक [Asal उत्तर [लड़ाई]] पर सितम्बर 10 वीं पा गया था। छह पाकिस्तानी आर्मड रेजिमेंट लड़ाई में भाग लिया, अर्थात् 19 (पैटन) लांसर्स, 12 कैवलरी (Chafee), 24 (पैटन) कैवलरी 4 कैवलरी (पैटन), 5 (पैटन) हार्स और 6 लांसर्स (पैटन). इन तीन अवर टैंक के साथ भारतीय आर्मड रेजिमेंट द्वारा विरोध किया गया, [[डेकन हार्स]] (शेरमेन), 3 (सेंचुरियन) कैवलरी और 8 कैवलरी (AMX). लड़ाई इतनी भयंकर और तीव्र है कि समय यह समाप्त हो गया था द्वारा, 4 भारतीय डिवीजन के बारे में या तो नष्ट में 97 पाकिस्तानी टैंक, या क्षतिग्रस्त, या अक्षुण्ण हालत में कब्जा कर लिया था। यह 72 पैटन टैंक और 25 Chafees और Shermans शामिल हैं। 28 Pattons सहित 97 टैंक, 32 शर्त में चल रहे थे। भारतीय खेम करण पर 32 टैंक खो दिया है। के बारे में मोटे तौर पर उनमें से पन्द्रह पाकिस्तानी सेना, ज्यादातर शेरमेन टैंक द्वारा कब्जा कर लिया गया। युद्ध के अंत तक, यह अनुमान लगाया गया था कि 100 से अधिक पाकिस्तानी टैंक को नष्ट कर दिया और गया एक अतिरिक्त 150 भारत द्वारा कब्जा कर लिया गया। भारतीय सेना ने संघर्ष के दौरान 128 टैंक खो दिया है। इनमें से 40 टैंक के बारे में, उनमें से ज्यादातर AMX-13s और Shermans पुराने Chamb और खेम करण के पास लड़ाई के दौरान पाकिस्तानी हाथों में गिर गया।
23 सितम्बर तक भारतीय सेना +३००० रणभूमि मौतों का सामना करना पड़ा, जबकि पाकिस्तान 3800 की तुलना में कम नहीं सामना करना पड़ा. [[सोवियत संघ]] दोनों देशों के बीच एक शान्ति समझौते की मध्यस्थता की थी और बाद में औपचारिक वार्ता में आयोजित किए गए [[ताशकन्द|ताशकंद]], एक युद्धविराम पर घोषित किया गया था 23 सितम्बर। भारतीय प्रधानमन्त्री [[लालबहादुर शास्त्री|लाल बहादुर शास्त्री]] और अयूब खान लगभग सभी युद्ध पूर्व पदों को वापस लेने पर सहमत हुए. समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद घण्टे, लाल बहादुर शास्त्री ताशकन्द विभिन्न षड्यन्त्र के सिद्धान्त को हवा देने में रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। युद्ध पूर्व पदों के लिए वापस करने का निर्णय के कारण भारत के रूप में नई दिल्ली में राजनीति के बीच एक चिल्लाहट युद्ध के अन्त में एक लाभप्रद स्थिति में स्पष्ट रूप से किया गया था। एक स्वतन्त्र विश्लेषक के मुताबिक, युद्ध को जारी रखने के आगे नुकसान का नेतृत्व होता है और अन्ततः पाकिस्तान के लिए हार।<ref><nowiki><ref></nowiki>http://www.globalsecurity.org/military/world/war/indo-pak_1965.htm {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20170509223002/http://www.globalsecurity.org/military/world/war/indo-pak_1965.htm|date=9 मई 2017}} <nowiki></ref>
=== बांग्लादेश मुक्ति युद्ध (1971) ===
{{Main|१९७१ का भारत-पाक युद्ध}}
{{See also|हिलि की लड़ाई|लोंगेवाला का युद्ध|बसंतसर का युद्ध}}
एक स्वतन्त्रता आन्दोलन में बाहर तोड़ दिया [[पूर्वी पाकिस्तान]] जो था [[ऑपरेशन सर्चलाइट| बेरहमी से कुचल दिया.]] पाकिस्तानी बलों द्वारा. कारण बड़े पैमाने पर [[1971 बांग्लादेश अत्याचार|अत्याचारों]] उनके खिलाफ के हजारों <nowiki>[[बंगाली लोग|बंगालियों]]</nowiki> पड़ोसी भारत में शरण ली, वहाँ एक प्रमुख शरणार्थी संकट के कारण. जल्दी 1971 में, भारत बंगाली विद्रोहियों के लिए पूर्ण समर्थन, [[मुक्ति वाहिनी]] के रूप में जाना जाता घोषित और भारतीय एजेंटों को बड़े पैमाने पर गुप्त आपरेशनों में शामिल थे उन्हें सहायता.
20 नवम्बर 1971 को भारतीय सेना 14 पंजाब बटालियन चले गए और [[45 कैवलरी]] गरीबपुर, पूर्वी पाकिस्तान के साथ भारत की सीमा के पास एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर है और में सफलतापूर्वक [[गरीबपुर की लड़ाई | कब्जा कर लिया]. अगले दिन और [[Atgram की लड़ाई | संघर्ष] भारतीय और पाकिस्तानी सेनाओं के बीच जगह ले ली. भारत बंगाली विद्रोह में बढ़ती भागीदारी से सावधान [[पाकिस्तान वायुसेना|पाकिस्तान वायु सेना]] (पीएएफ) का शुभारंभ किया [ऑपरेशन [Chengiz खान | हड़ताल अग्रकय] 3 दिसम्बर को भारतीय सेना पूर्वी पाकिस्तान के साथ अपनी सीमा के निकट पदों पर. हवाई आपरेशन, तथापि, इसकी कहा उद्देश्यों को पूरा करने में विफल रहा है और भारत पाकिस्तान के खिलाफ एक पूर्ण पैमाने पर युद्ध के कारण उसी दिन घोषित किया। आधी रात से, भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना के साथ, पूर्वी पाकिस्तान में प्रमुख सैन्य जोर का शुभारंभ किया। भारतीय सेना की निर्णायक सहित पूर्वी मोर्चे पर कई लड़ाइयों जीता [Hilli [लड़ाई]]
[[चित्र:1971 Instrument of Surrender WaPo.jpg|अंगूठाकार|पाकिस्तानी पूर्वी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल ए.ए.के. नियाज़ी (दाएं), लेफ्टिनेंट जनरल जे.एस. अरोरा की देखरेख में समर्पण पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए।]]
पाकिस्तान के पश्चिमी मोर्चे पर भारत के खिलाफ जवाबी हमले का शुभारंभ किया। December 4, 1971 को, एक कंपनी के 23 बटालियन के [[पंजाब रेजिमेंट]] का पता चला और पाकिस्तान के पास सेना की 51 इन्फैंट्री डिवीजन के आंदोलन को रोक [[रामगढ़ शेखावाटी|रामगढ़]], राजस्थान. [[लोंगेवाला का युद्ध]] के दौरान जो लागू एक कंपनी है, हालांकि outnumbered, वीरतापूर्वक लड़ी और पाकिस्तानी अग्रिम नाकाम जब तक भारतीय वायु सेना अपने सेनानियों को निर्देशित करने के लिए पाकिस्तानी टैंक संलग्न. समय लड़ाई समाप्त करके 34 पाकिस्तानी टैंक और 50 APCs या नष्ट हो गए थे परित्यक्त. के बारे में 200 पाकिस्तानी सैनिकों को लड़ाई के दौरान कार्रवाई में मारे गए थे जबकि केवल 2 भारतीय सैनिकों को उनके जीवन खो दिया है। 4 दिसम्बर से 16 तक भारतीय सेना लड़ी और अंत जिसमें से 66 पाकिस्तानी टैंक को नष्ट कर रहे थे और 40 से कब्जा कर लिया गया [[बसंतसर का युद्ध]] जीता. बदले में पाकिस्तानी बलों के लिए केवल 11 भारतीय टैंकों को नष्ट करने में सक्षम थे। 16 दिसम्बर तक पाकिस्तान के पूर्वी और पश्चिमी दोनों मोर्चों पर बड़े आकार का क्षेत्र खो दिया था।
लेफ्टिनेंट | जगजीत सिंह अरोड़ा के आदेश के तहत जनरल जे एस अरोड़ा, भारतीय सेना के तीन कोर में प्रवेश किया जो पूर्वी पाकिस्तान पर आक्रमण किया था [[ढाका]] और पाकिस्तानी सेना ने 16 दिसम्बर 1971 को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर किया। पाकिस्तान के लेफ्टिनेंट जनरल के बाद [[अमीर अब्दुल्ला खान नियाजी| AAK नियाज़ी]] समर्पण के साधन पर हस्ताक्षर किए, भारत में 90,000 से अधिक पाकिस्तानी [[] युद्ध के कैदियों (+३८,००० सशस्त्र बलों के कर्मियों और 52,000 मिलिशिया पश्चिम पाकिस्तानी मूल के और नौकरशाहों) ले लिया।
1972 में, [[शिमला समझौते] दोनों देशों के तनाव और simmered के बीच हस्ताक्षर किए गए थे। हालांकि, वहाँ कूटनीतिक तनाव है जो दोनों पक्षों पर वृद्धि हुई सैन्य सतर्कता में समापन में कभी कभी spurts थे।
=== सियाचिन विवाद (1984-) ===
{{Main|सियाचिन विवाद}}
[[सियाचिन हिमनद|सियाचिन ग्लेशियर]], हालांकि कश्मीर क्षेत्र के एक हिस्सा है, आधिकारिक तौर पर सीमांकन नहीं है। एक परिणाम के रूप में, पहले 1980 के दशक के लिए, न तो भारत और न ही पाकिस्तान इस क्षेत्र में स्थायी सैन्य उपस्थिति को बनाए रखा. हालांकि, पाकिस्तान पर्वतारोहण अभियानों के 1950 के दशक के दौरान ग्लेशियर श्रृंखला की मेजबानी शुरू कर दिया. 1980 के दशक तक पाकिस्तान की सरकार पर्वतारोहियों के लिए विशेष अभियान परमिट देने गया था और संयुक्त राज्य अमेरिका सेना नक्शे जानबूझकर पाकिस्तान के एक भाग के रूप में सियाचिन से पता चला है। इस अभ्यास कार्यकाल के समकालीन अर्थ ''[[oropolitics]]''को जन्म दिया ।
[[चित्र:An Indian Army soldier in snow camouflage.jpg|अंगूठाकार|भारतीय सेना का एक जवान, एक गश्ती समूह का हिस्सा, बर्फ की आड़ में एक एसआईजी 716i पकड़े हुए।]]
एक irked भारत का शुभारंभ किया [[ऑपरेशन मेघदूत]] अप्रैल 1984 के दौरान जो पूरे कुमाऊं रेजिमेंट भारतीय सेना की ग्लेशियर पहुंचा था। पाकिस्तानी सेना ने जल्दी से जवाब दिया और दोनों के बीच संघर्ष का पालन किया। भारतीय सेना सामरिक [[सिया ला]] और [[Bilafond ला]] पहाड़ गुजरता है और 1985 के द्वारा, क्षेत्र के 1000 वर्ग मील से अधिक, पाकिस्तान ने दावा किया, भारतीय नियंत्रण के अधीन था।<ref>Edward W. Desmond. [http://www.time.com/time/magazine/article/0,9171,958254-2,00.html "The Himalayas War at the Top Of the World"] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090114104526/http://www.time.com/time/magazine/article/0%2C9171%2C958254-2%2C00.html|date=14 January 2009}}. ''[[Time (magazine)|Time]]'' (31 July 1989).</ref> भारतीय सेना के लिए और अधिक नियंत्रण से ग्लेशियर के 2/3rd जारी है।<ref>http://www {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20200514102730/https://www/ |date=14 मई 2020 }}. globalsecurity.org सैन्य ///विश्व युद्ध /</ref> पाकिस्तान सियाचिन पर नियंत्रण पाने के कई असफल प्रयास किया। देर से 1987 में, पाकिस्तान के बारे में 8,000 सैनिकों जुटाए और उन्हें Khapalu निकट garrisoned, हालांकि Bilafond La. कब्जा करने के लिए लक्ष्य है, वे भारतीय सेना कर्मियों Bilafond रखवाली उलझाने के बाद वापस फेंक दिया गया। पाकिस्तान द्वारा 1990, 1995, 1996 और 1999 में पदों को पुनः प्राप्त करने के लिए आगे प्रयास शुरू किया गया।
भारत के लिए अत्यंत दुर्गम परिस्थितियों और नियमित रूप से [[माउंटेन वॉरफेयर|पहाड़ युद्ध]].<ref>Http://www.time.com/time/asia {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20080907034747/http://time.com/time/asia/ |date=7 सितंबर 2008 }} का एक उदाहरण के रूप में उद्धृत है सियाचिन पर संघर्ष के बावजूद एक मजबूत क्षेत्र में सैनिक उपस्थिति को बनाए रखने के लिए जारी है / covers/501050711/story.html</ref> सियाचिन से अधिक नियंत्रण बनाए रखने भारतीय सेना के लिए कई सैन्य चुनौतियों poses. कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्षेत्र में निर्माण किया गया, समुद्र के स्तर से ऊपर एक हेलिपैड 21,000 फीट (+६४०० मीटर) सहित<ref>http://edition.cnn.com/2002/WORLD/asiapcf/south/05/20/{{Dead link|date=सितंबर 2021 |bot=InternetArchiveBot }}. siachen.kashmir /</ref> 2004 में भारतीय सेना के एक अनुमान के अनुसार 2 लाख अमरीकी डॉलर एक दिन खर्च करने के लिए अपने क्षेत्र में तैनात कर्मियों का समर्थन.<ref>Arun Bhattacharjee. [http://www.atimes.com/atimes/South_Asia/FI23Df04.html "On Kashmir, hot air and trial balloons"] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160228201511/http://indiatoday.intoday.in/story/assault-rifle-excalibur-drdo-dalbir-singh-indian-army-arde/1/449238.html|date=28 February 2016}}. ''[[Asia Times]]'' (23 September 2004).</ref>
=== उपद्रव-रोधी गतिविधियाँ ===
भारतीय सेना अतीत में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लड़ाई [[रमाशंकर यादव 'विद्रोही'|विद्रोही]] और [[आतंकवाद | आतंकवादियों]] राष्ट्र के भीतर. सेना [[ऑपरेशन ब्लू स्टार|ऑपरेशन ब्लूस्टार]] और [[ऑपरेशन वुडरोज़]] सिख विद्रोहियों का मुकाबला करने के लिए 1980 के दशक में. शुभारंभ सेना के साथ [[अर्द्धसैनिक बलों भारत के कुछ अर्धसैनिक बलों]], बनाए रखने के प्रधानमंत्री जिम्मेदारी है <nowiki>[[कानून और व्यवस्था (राजनीति) | कानून और व्यवस्था]]</nowiki> परेशान [[जम्मू और कश्मीर|जम्मू कश्मीर]] क्षेत्र में. भारतीय सेना [[श्रीलंका]] 1987 में के एक भाग के रूप में भी एक दल भेजा है [[भारतीय शांति सेना.]]
=== कारगिल संघर्ष (1999) ===
{{Main|कारगिल युद्ध}}
और कुछ दिनों के बाद, पाकिस्तान और अधिक द्वारा प्रतिक्रिया [[Chagai मैं | परमाणु परीक्षणों]] देने के दोनों देशों के [[परमाणु प्रतिरोध]] क्षमता | 1998 में, भारत [[परमाणु परीक्षण]] [[पोखरण-2|पोखरण द्वितीय]] किया जाता है कूटनीतिक तनाव के बाद ढील [[लाहौर शिखर सम्मेलन]] 1999 में आयोजित किया गया था। आशावाद की भावना कम रहता था, तथापि, के बाद से मध्य 1999-पाकिस्तानी अर्धसैनिक बलों में और कश्मीरी आतंकवादियों पर कब्जा कर लिया वीरान है, लेकिन सामरिक, [[कारगिल जिले]] भारत के हिमालय हाइट्स. इन दुर्गम सर्दियों की शुरुआत के दौरान किया गया था भारतीय सेना द्वारा खाली थे और वसंत में reoccupied चाहिए. ''[[मुजाहिदीन]]''जो इन क्षेत्रों का नियंत्रण ले लिया महत्वपूर्ण समर्थन प्राप्त है, दोनों हाथ और आपूर्ति के रूप में पाकिस्तान से. उनके नियंत्रण है, जो भी''टाइगर हिल''के तहत हाइट्स के कुछ महत्वपूर्ण [[श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर|श्रीनगर -]][[ लेह] राजमार्ग (एनएच 1A), [[बटालिक]] और [[Dras]] की अनदेखी .
[[चित्र:. IndianArmyKargil.jpg | सेना ट्रकों भारतीय गर्मियों में 1999 में कारगिल में लड़ रहे सैनिकों के लिए आपूर्ति ले]]
एक बार पाकिस्तानी आक्रमण के पैमाने का एहसास था, भारतीय सेना जल्दी 200,000 के बारे में सैनिकों जुटाए और [[ऑपरेशन विजय (1999) | ऑपरेशन विजय]] शुरू किया गया था। हालांकि, बाद से ऊंचाइयों पाकिस्तान के नियंत्रण के अधीन थे, भारत एक स्पष्ट रणनीतिक नुकसान में था। राष्ट्रीय राजमार्ग 1 ए पर भारतीयों पर भारी हताहत inflicting<ref name="NLI">[http://www.dailytimes.com.pk/default.asp?page=story_5-5-2003_pg7_14 Indian general praises Pakistani valour at Kargil] 5 May 2003 Daily Times, Pakistan {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090116123416/http://www.dailytimes.com.pk/default.asp?page=story_5-5-2003_pg7_14|date=16 January 2009}}</ref> यह भारतीय सेना के लिए एक गंभीर समस्या है के रूप में राजमार्ग अपने मुख्य सैन्य और आपूर्ति मार्ग था इ शार्प, 2003 द्वारा प्रकाशित रॉबर्ट Wirsing करके युद्ध की छाया में<ref>कश्मीर थी।
ISBN 0-7656-1090-6 pp36 </ref> इस प्रकार, भारतीय सेना की पहली प्राथमिकता चोटियों कि NH1a के तत्काल आसपास के क्षेत्र में थे हटा देना था। यह भारतीय सैनिकों में पहली बार टाइगर हिल और Dras में Tololing जटिल लक्ष्यीकरण परिणामस्वरूप<ref>प्रबंध Adekeye Adebajo, चंद्र लेखा श्रीराम 21 वीं सदी में सशस्त्र संघर्ष pp192 रूटलेज, 193 द्वारा प्रकाशित </ref> यह जल्द ही अधिक हमलों से पीछा किया गया था। बटालिक Turtok उप - क्षेत्र है जो सियाचिन ग्लेशियर तक पहुँच प्रदान पर. 4590 प्वाइंट है, जो NH1a के निकटतम दृश्य था सफलतापूर्वक पर 14 जून को भारतीय बलों द्वारा पुनः कब्जा दक्षिण एशिया में युद्ध के नेब्रास्का प्रेस प्रदीप बरुआ 261 राज्य में पेज के यू द्वारा प्रकाशित किया गया था।
हालांकि राजमार्ग के आसपास के क्षेत्र में पदों के अधिकांश मध्य जून तक मंजूरी दे दी, द्रास के पास राजमार्ग के कुछ भागों में युद्ध के अंत तक गोलीबारी छिटपुट देखा. एक बार NH1a क्षेत्र साफ हो गया था, भारतीय सेना नियंत्रण रेखा के पार वापस हमलावर बल ड्राइविंग के लिए बदल गया। [Tololing [लड़ाई]], अन्य हमलों के बीच धीरे - धीरे भारत के पक्ष में मुकाबला झुका. फिर भी, कुछ पदों की एक कड़ी प्रतिरोध डाल सहित टाइगर हिल (5140 प्वाइंट) है कि केवल युद्ध के बाद में गिर गया,. के रूप में पूरी तरह से ऑपरेशन चल रहा था, के बारे में 250 तोपों में लाया गया पोस्ट में थे में घुसपैठियों को स्पष्ट दृष्टि से [लाइन]]. कई महत्वपूर्ण बिंदुओं में, न तो तोपखाने और न ही हवा शक्ति बेदखल कर सकता है चौकियों पाकिस्तान सैनिकों, जो दिखाई रेंज के बाहर थे द्वारा मानव. भारतीय सेना के कुछ प्रत्यक्ष ललाट जमीन हमले है जो धीमी गति से थे और एक भारी टोल ले लिया खड़ी चढ़ाई है कि 18,000 फीट (+५५०० मीटर) के रूप में उच्च के रूप में चोटियों पर बनाया जाना था दिया मुहिम शुरू की. संघर्ष में दो महीने, भारतीय सेना धीरे लकीरें वे खो दिया था की सबसे retaken था, सर्दी की<ref>{{cite web|url=http://www.lrb.co.uk/v23/n08/ali_01_.html|title=Tariq Ali · Bitter Chill of Winter: Kashmir · LRB 19 April 2001|work=London Review of Books|archive-url=https://web.archive.org/web/20091001175541/http://www.lrb.co.uk/v23/n08/ali_01_.html|archive-date=1 October 2009|access-date=4 April 2016|url-status=live}}</ref><ref>{{cite book|title=Kargil : A Wake Up Call|author=Colonel Ravi Nanda|publisher=Vedams Books|year=1999|isbn=978-81-7095-074-5}} [https://www.vedamsbooks.com/no14953.htm Online summary of the Book] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20070928055430/https://www.vedamsbooks.com/no14953.htm|date=28 September 2007}}</ref> सरकारी गिनती के अनुसार, एक अनुमान के अनुसार 75% -80% और घुसपैठ क्षेत्र के लगभग सभी उच्च भूमि भारतीय नियंत्रण के तहत वापस आ गया था।
[[चित्र:Kargil war.jpg|अंगूठाकार|कारगिल युद्ध के दौरान लड़ाई जीतने के बाद भारतीय सैनिक।]]
भारत पर, समाचार जिनमें से चिंतित अमेरिकी | के रूप में पाकिस्तान पाया खुद एक कांटेदार स्थिति में entwined सेना छिपकर परमाणु हमले परमाणु युद्ध की योजना बनाई थी राष्ट्रपति [[बिल क्लिंटन]], एक कड़ी चेतावनी में नवाज शरीफ के परिणामस्वरूप<ref>{{Cite web|url=http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/1989886.stm|title=Pakistan 'prepared nuclear strike'|date=16 May 2002|website=BBC|archive-url=https://web.archive.org/web/20090112044143/http://news.bbc.co.uk/1/hi/world/south_asia/1989886.stm|archive-date=12 January 2009}}</ref> वाशिंगटन पर समझौते के बाद 4 जुलाई, जहां शरीफ पाकिस्तानी सैनिकों को वापस लेने पर सहमत हुए, लड़ने के सबसे एक क्रमिक रोकने के लिए आया था, लेकिन कुछ पाकिस्तानी सेना ने भारतीय पक्ष पर स्थिति में बने रहे नियंत्रण रेखा. इसके अलावा, [[यूनाइटेड जिहाद काउंसिल]] (सभी [अतिवादी []] समूहों के लिए एक छाता) एक चढ़ाई नीचे के लिए पाकिस्तान की योजना को अस्वीकार कर दिया है, बजाय पर लड़ने के निर्णय लेने.<nowiki><ref> </nowiki>[Http://news.bbc. co.uk/1/hi/world/south_asia/386537.stm पाकिस्तान और कश्मीर के आतंकवादियों]{{Dead link|date=जून 2020|bot=InternetArchiveBot}} <nowiki></ref></nowiki> जुलाई के आखिरी हफ्ते में भारतीय सेना अपनी अंतिम हमलों का शुभारंभ किया, के रूप में जल्द ही के रूप में द्रास Subsector पाकिस्तान की मंजूरी दे दी थी बलों से लड़ने पर रह गए 26 जुलाई. दिन के बाद से''कारगिल विजय''भारत में (कारगिल विजय दिवस) दिवस के रूप में चिह्नित किया गया है है। युद्ध के अंत तक भारत सभी क्षेत्र दक्षिण और नियंत्रण रेखा के पूर्व का नियंत्रण फिर से शुरू किया था, के रूप में जुलाई 1972 में शिमला समझौते के अनुसार स्थापित किया गया था।
=== ऑपरेशन पराक्रम ===
भारतीय संसद ऑपरेशन पराक्रम में जो भारतीय सैनिकों की हजारों की दसियों भारत - पाकिस्तान सीमा पर तैनात किया गया था शुरू किया गया था पर हमले. भारत हमले समर्थन के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराया. सबसे बड़ा सैन्य किसी एशियाई देश से बाहर किए गए व्यायाम आपरेशन किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य अभी स्पष्ट नहीं है है लेकिन [[परमाणु संघर्ष]] पाकिस्तान, जो भारतीय संसद पर दिसंबर हमले के बाद तेजी से संभव लग रहा था के साथ किसी भी भविष्य के लिए सेना को तैयार करने के लिए किया गया है प्रकट होता है।
=== संयुक्त राष्ट्र शान्ति सेना में योगदान ===
[[चित्र:IndiansoldiersKorea1953.jpg|thumb|right|[[कोरिया]] में सितंबर १९५३ में तटस्थ बफर जोन के साथ शांति स्थापित करने के लिए [[भारतीय सशस्त्र सेनाएँ|भारतीय सेना]] के आगमन पर]]
[[चित्र:9 avril 2015. Binza, Nord Kivu, RD Congo. Un casque bleu d’INBATT 2 et un soldat des FARDC se saluent et s’encouragent mutuellement. (16534163503).jpg|अंगूठाकार|भारतीय सेना के एक शांतिदूत और एक FARDC सैनिक हाथ मिलाते हैं और एक दूसरे को प्रोत्साहित करते हैं]]
वर्तमान में [[भारतीय सशस्त्र सेनाएँ|भारतीय सेना]] की एक टुकड़ी [[संयुक्त राष्ट्र]] की सहायता के लिये समर्पित रहती है। भारतीय सेना द्वारा निरन्तर कठिन कार्यों में भाग लेने की प्रतिबद्धताओं की हमेशा प्रशंसा की गई है।
भारतीय सेना ने संयुक्त राष्ट्र के कई शान्ति स्थापित करने की कार्यवाहियों में भाग लिया गया है जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं: [[अंगोला]], [[कम्बोडिया]], [[साइप्रस]], [[कांगो लोकतान्त्रिक गणराज्य|लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो]], [[अल साल्वाडोर]], [[नामीबिया]], [[लेबनान]], [[लाइबेरिया]], [[मोज़ाम्बीक|मोजाम्बिक]], [[रुआण्डा|रवाण्डा]], [[सोमालिया]], [[श्रीलंका]] और [[वियतनाम]]| भारतीय सेना ने कोरिया में हुयी लड़ाई के दौरान घायलों और बीमारों को सुरक्षित लाने के लिये भी अपनी अर्द्ध-सैनिकों की इकाई प्रदान की थी।
== प्रमुख युद्धाभ्यास ==
==== ऑपरेशन संघ शक्ति ====
इसके बाद से कहा है कि इस अभ्यास का मुख्य लक्ष्य अम्बाला आधारित''द्वितीय स्ट्राइक''कोर जुटाना रणनीति को मान्य किया गया था। एयर समर्थन इस अभ्यास का एक हिस्सा था और हवाई छतरी सेना की एक पूरी बटालियन के युद्ध खेल के संचालन के दौरान पैराड्रॉप्ड संबद्ध उपकरणों के साथ. कुछ २०००० सैनिक अभ्यास में भाग लिया।
==== अश्वमेध अश्वमेध ====
भारतीय सेना व्यायाम अश्वमेध में अपने नेटवर्क केंद्रित युद्ध क्षमताओं का परीक्षण किया। व्यायाम थार रेगिस्तान में आयोजित किया गया, जिसमें 30,000 से अधिक सैनिकों ने भाग लिया।<ref>{{Cite web|url=http://www.india-defence.com/reports/3115|title=भारतीय सेना परीक्षण Ashwamedh युद्ध खेल में नेटवर्क केंद्रित युद्ध क्षमता|archive-url=https://web.archive.org/web/20120205100849/http://www.india-defence.com/reports/3115|archive-date=5 फ़रवरी 2012}}</ref> असममित युद्ध क्षमता भी दौरान भारतीय सेना द्वारा परीक्षण किया गया था 'अश्वमेध' पैदल सैनिकों के महत्व
==== ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स ====
ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स नवंबर 1986 में भारतीय सेना द्वारा शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य भारत की पश्चिमी सीमा पर पूर्ण पैमाने पर युद्ध का अनुकरण करना था। यह अभ्यास भारत में अब तक आयोजित सबसे बड़ा अभ्यास था। इसमें नौ पैदल सेना, तीन मशीनीकृत, तीन बख्तरबंद डिवीजन और एक हवाई हमला डिवीजन, साथ ही तीन स्वतंत्र बख्तरबंद ब्रिगेड शामिल थे। भारतीय नौसेना के साथ उभयचर आक्रमण अभ्यास भी आयोजित किए गए। ब्रासस्टैक्स में कथित तौर पर परमाणु हमला अभ्यास भी शामिल था। इससे पाकिस्तान के साथ तनाव बढ़ गया।<ref>{{cite magazine|author=John Cherian|title=An exercise in anticipation|url=http://www.hinduonnet.com/fline/fl1811/18110990.htm|date=26 May – 8 June 2001|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20041207205511/http://www.hinduonnet.com/fline/fl1811/18110990.htm|archive-date=7 December 2004|magazine=[[Frontline (magazine)|Frontline]]|volume=18|issue=11|access-date=13 April 2022}}</ref>
== थलसेना का कार्यबल ==
=== क्षमता ===
[[चित्र:Honour_guard,_India_20060302-9_d-0108-2-515h.jpg|अंगूठाकार|विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की राजकीय यात्रा में घुडसवार [[राष्ट्रपति अंगरक्षक (भारत)|राष्ट्रपति अंगरक्षक]].]]
{| class="wikitable"
! colspan="2" |'''भारतीय थल सेना सम्बंधित आंकड़े'''
|-
|[[तत्कालीन कार्यरत|कार्यरत सैनिक]]
|1,300,000
|-
|[[आरक्षित सैनिक]]
|1,200,000
|-
|[[प्रादेशिक सेना]]
|200,000**
|-
|[[मुख्य युद्धक टैंक]]
|4500
|-
|[[तोपख़ाना|तोपखाना]]
|12,800
|-
|[[प्रक्षेपास्त्र]]
|100 (अग्नि-1, अग्नि-2)
|-
|[[क्रूज प्रक्षेपास्त्र]]
|[[ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र|ब्रह्मोस]]
|-
|[[वायुयान]]
|10 [[स्क्वाड्रन]] हेलिकॉप्टर
|-
|[[सतह से वायु प्रक्षेपास्त्र]]
|90000
|}
<small>* 300,000 प्रथम पंक्ति ओर 500,000 द्वितीय पंक्ति के योद्धा सम्मिलित हैं </small>
<small>** 40,000 प्रथम पंक्ति ओर 160,000 द्वितीय पंक्ति के योद्धा सम्मिलित हैं</small>
=== आंकड़े ===
* 4 त्वरित (Reorganised सेना Plains इन्फैंट्री प्रभागों)
* 18 इन्फैंट्री प्रभागों
* 10 माउंटेन प्रभागों
* 3 आर्मड प्रभागों
* 2 आर्टिलरी प्रभागों
* 13 एयर डिफेंस + ब्रिगेड्स 2 भूतल एयर मिसाइल समूह
* 5 स्वतंत्र बख्तरबंद ब्रिगेड
* 15 स्वतंत्र आर्टिलरी ब्रिगेड
* 7 स्वतंत्र इन्फैंट्री ब्रिगेड
* 1 पैराशूट ब्रिगेड
* 4 अभियंता ब्रिगेड
* 14 सेना उड्डयन हेलीकाप्टर इकाइयों
====== उप - इकाइयाँ ======
* 63 टैंक रेजिमेंट
* 7 एयरबोर्न बटालियन
* 200 आर्टिलरी रेजिमेंट
* 360 इन्फैंट्री बटालियन + 5 पैरा बटालियन (एस एफ)
* 40 मैकेनाइज्ड इंफेंट्री बटालियन
* लड़ाकू हेलीकाप्टर इकाइयों 20
* 52 एयर डिफेंस रेजिमेंट
=== पदानुक्रम संरचना ===
[[चित्र:Indian_Army_Gurkha_rifles.jpg|अंगूठाकार|The 1st Battalion of [[1 Gorkha Rifles]] of the Indian Army take position outside a simulated combat town during a training exercise.]]
{{main|Indian Army all Rank List}}
[https://technicalpathway.com/indian-army-all-rank-list/ भारतीय सेना के विभिन्न पद अवरोही क्रम में इस प्रकार हैं:]
'''कमीशन प्राप्त अधिकारी'''
* [[फ़ील्ड मार्शल (भारत)|फ़ील्ड मार्शल]]<sup>1</sup>
* [[जनरल]] (यह [[थलसेना अध्यक्ष]] का पद है)
* [[लेफ्टिनेंट-जनरल]]
* [[मेजर-जनरल]]
* [[ब्रिगेडियर]]
* [[कर्नल]]
* [[लेफ्टिनेंट-कर्नल]]
* [[मेजर]]
* [[कैप्टन]]
* [[लेफ्टिनेंट]]
* [[सेकंड लेफ्टिनेंट]]<sup>2</sup>
'''कनिष्ठ कमीशन प्राप्त अधिकारी (JCOs)'''
* सूबेदार मेजर /[[मानद कप्तान]]<sup>3</sup>
* सूबेदार /[[मानद लेफ्टिनेंट]]<sup>3</sup>
* [[सूबेदार मेजर]]
* [[सूबेदार]]
* [[नायब सूबेदार]]
'''गैर कमीशन प्राप्त अधिकारी (NCOs)'''
* [[रेजीमेंट हवलदार मेजर]]<sup>2</sup>
* [[रेजीमेंट क्वार्टरमास्टर हवलदार मेजर]]<sup>2</sup>
* [[कंपनी हवलदार मेजर]]
* [[कंपनी क्वार्टरमास्टर हवलदार मेजर]]
* [[हवलदार]]
* [[नायक]]
* [[लांसनायक]]
* [[सिपाही]]
<small>नोट:<br />
*1 आज तक केवल दो ही जनरल फील्ड मार्शल के पद से विभूषित हुए हैं। - : फील्ड मार्शल [[के एम करिअप्पा]]{{ndash}} भारतीय सेना के प्रथम कमाण्डर इन चीफ (यह पद अब समाप्त कर दिया गया है) {{ndash}} तथा फील्ड मार्शल [[सैम मानेकशा]], १९७१ युद्ध के दौरान सेनाध्यक्ष<br />
*2. This has now been discontinued. Non-Commissioned Officers in the rank of Havildar are elible for Honorary JCO ranks. यह अब बंद कर दिया गया है। हवलदार के रैंक में गैर कमीशंड अधिकारी मानद जूनियर कमीशन अफसर रैंकों के लिए elible हैं <br />
*3. Given to Outstanding JCO's Rank and pay of a Lieutenant, role continues to be of a JCO. बकाया है जूनियर कमीशन अफसर श्रेष्टता श्रेणी को देखते हुए और एक लेफ्टिनेंट के भुगतान, भूमिका एक जूनियर कमीशन अफसर का होना जारी है </small>
=== अन्य सैन्य व्यूह (Other Field Formations) ===
[[चित्र:IA_men.jpg|अंगूठाकार|A section of the Indian Army takes charge during a military exercise.]]
* [[प्रभाग (सेना) | प्रभाग]]: सेना डिवीजन एक कोर और एक ब्रिगेड के बीच एक मध्यवर्ती है। यह सबसे बड़ी सेना में हड़ताली बल है। प्रत्येक प्रभाग [जनरल आफिसर कमांडिंग (जीओसी) द्वारा [[मेजर जनरल] रैंक में होता है। यह आमतौर पर +१५,००० मुकाबला सैनिकों और 8000 का समर्थन तत्वों के होते हैं। वर्तमान में, भारतीय सेना 4 रैपिड (पुनः संगठित सेना Plains इन्फैंट्री प्रभागों) सहित 34 प्रभागों लड़ाई प्रभागों, 18 इन्फैन्ट्री प्रभागों, 10 माउंटेन प्रभागों, 3 आर्मड प्रभागों और 2 आर्टिलरी प्रभागों. प्रत्येक डिवीजन के कई composes [[ब्रिगेड्स]].
* [[ब्रिगेड]]: ब्रिगेड डिवीजन की तुलना में छोटे है और आम तौर पर विभिन्न लड़ाकू समर्थन और आर्म्स और सेवाएँ के तत्वों के साथ साथ 3 इन्फैन्ट्री बटालियन के होते हैं। यह की अध्यक्षता में है एक [[ब्रिगेडियर]] के बराबर [[ब्रिगेडियर जनरल]] भारतीय सेना भी 5 स्वतंत्र बख्तरबंद ब्रिगेड, 15 स्वतंत्र आर्टिलरी ब्रिगेड, 7 स्वतंत्र इन्फैंट्री ब्रिगेड, 1 स्वतंत्र पैराशूट ब्रिगेड, 3 स्वतंत्र वायु रक्षा ब्रिगेड, 2 स्वतंत्र वायु रक्षा समूह और 4 स्वतंत्र अभियंता ब्रिगेड है। ये स्वतंत्र ब्रिगेड कोर कमांडर (जीओसी कोर) के तहत सीधे काम.
* [[बटालियन]]: एक बटालियन की कमान में है एक [[कर्नल]] और इन्फैंट्री के मुख्य लड़ इकाई है। यह 900 से अधिक कर्मियों की होते हैं।
* [[कंपनी (सैन्य इकाई) | कंपनी] के नेतृत्व: [[मेजर]], एक कंपनी के 120 सैनिकों को शामिल.
* [[प्लाटून]]: एक कंपनी और धारा के बीच एक मध्यवर्ती, एक प्लाटून [[लेफ्टिनेंट]] या कमीशंड अधिकारियों की उपलब्धता पर निर्भर करता है, एक जूनियर कमीशंड अधिकारी [रैंक के साथ, [जूनियर कमीशन अफसर की अध्यक्षता में | सूबेदार ]] या [[जूनियर कमीशन अफसर | नायब सूबेदार]]. यह बारे में 32 सैनिकों की कुल संख्या है।
* [[धारा (सैन्य इकाई) | धारा]]: सबसे छोटा 10 कर्मियों के एक शक्ति के साथ सैन्य संगठन. रैंक के एक गैर कमीशन अधिकारी द्वारा कमान संभाली [[हवलदार]] या [सार्जेंट []].
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:* [[Division (Military)|Division]]: An Army Division is an intermediate between a Corps and a Brigade. It is the largest striking force in the army. Each Division is headed by [General Officer Commanding] (GOC) in the rank of [[Major General]]. It usually consists of 15,000 combat troops and 8,000 support elements. Currently, the Indian Army has 34 Divisions including 4 Rapid (Re-organised Army Plains Infantry Divisions) Action Divisions, 18 Infantry Divisions, 10 Mountain Divisions, 3 Armoured Divisions and 2 Artillery Divisions. Each Division composes of several [[Brigades]].
:* [[Brigade]]: The Brigade is smaller than the Division and generally consists of 3 Infantry Battalions along with elements of various Combat & Support Arms & Services. It is headed by a [[Brigadier]] equivalent to a [[Brigadier General]]. The Indian Army also has 5 Independent Armoured Brigades, 15 Independent Artillery Brigades, 7 Independent Infantry Brigades, 1 Independent Parachute Brigade,3 Independent Air Defence Brigades, 2 Independent Air Defence Groups and 4 Independent Engineer Brigades. These Independent Brigades operate directly under the Corps Commander (GOC Corps).
:* [[Battalion]]: A Battalion is commanded by a [[Colonel]] and is the Infantry's main fighting unit. It consists of more than 900 personnel.
:* [[Company (military unit)|Company]]: Headed by the [[Major]], a Company comprises 120 soldiers.
:* [[Platoon]]: An intermediate between a Company and Section, a Platoon is headed by a [[Lieutenant]] or depending on the availability of Commissioned Officers, a Junior Commissioned Officer, with the rank of [[JCO|Subedar]] or [[JCO|Naib-Subedar]]. It has a total strength of about 32 troops.
:* [[Section (military unit)|Section]]: Smallest military outfit with a strength of 10 personnel. Commanded by a Non-commissioned officer of the rank of [[Havildar]] or [[Sergeant]].
===Mahar regt===
{{main|List of regiments of the Indian Army}}
[[चित्र:Indian Army-Sikh Light Infantry regiment.jpeg|right|thumb|Soldiers of the [[Sikh Light Infantry]].]]
--->
=== पैदल सेना रेजिमेंट (Infantry Regiments) ===
<!--
There are several battalions or units under the same formation in a Regiment. The Gurkha Regiment, for instance, has several battalions. All formations under a Regiment are battalions of the same arms or Corps (i.e., Infantry or Engineers). Regiments are not exactly field formations; they mostly do not make a formation. All Regiments of the Gurkha's for instance would not fight together as one formation, but can be dispersed over various Brigades or Corps or even Commands।
--->
{{see|List of regiments of the Indian Army}}
[[चित्र:Artillery_Insignia.gif|अंगूठाकार|Artillery Insignia]]
==== तोपखाना रेजिमेंट (Artillery Regiments) ====
[[तोपख़ाना|तोपखाना]] सेना के विध्वंसक शक्ति का मुख्य अंग है | भारत में प्राचीन ग्रंथों में तोपखाने का वर्णन मिलता है | तोप को संस्कृत में शतघ्नी कहा जाता है | मध्य कालीन इतिहास में तोप का प्रयोग सर्वप्रथम बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध में सन १५२६ ई० में किया था| कुछ नवीन प्रमाणों से यहाँ प्रतीत होता है के तोप का प्रयोग बहमनी राजाओं ने १३६८ में अदोनी के युद्ध में तथा गुजरात के शासक मोहमद शाह ने १५ वीं शताब्दी में किया था |भरत मे तोप खाना के दोउ केन्द्र है ह्य्द्रबद और नसिक रोअद
== युद्ध सिद्धान्त ==<!--
The current combat doctrine of the Indian Army is based on effectively utilizing holding formations and strike formations. In the case of an attack, the holding formations would contain the enemy and strike formations would counterattack to neutralize enemy forces. In the case of an Indian attack, the holding formations would pin enemy forces down whilst the strike formations attack at a point of Indian choosing. The Indian Army is large enough to devote several corps to the strike role. Currently, the army is also looking at enhancing its [[special forces]] capabilities.
-->
== उपस्कर एवं उपकरण ==
[[चित्र:Arjun_MBT_bump_track_test.JPG|दाएँ|अंगूठाकार|[[Arjun MBT]].]]
[[चित्र:Indian_Army_T-90.jpg|अंगूठाकार|[[T-90|Bhishma T-90]] MBT.]]
[[चित्र:Indian_Army_T-72_image1.jpg|दाएँ|अंगूठाकार|[[T-72]] Ajeya.]]
[[चित्र:Nag_with_NAMICA_Defexpo-2008.JPG|दाएँ|अंगूठाकार|[[Nag missile]] and NAMICA (Nag Missile Carrier).]]
{{main|Equipment of the Indian Army}}
<!--
Most of the army equipment is imported, but efforts are being made to manufacture indigenous equipment. All Indian Military Firearms guns are manufactured under the umbrella administration of the Ordnance Factory Board, with principal Firearm manufacturing facilities in Ishapore, [[Cossipore]], Kanpur, Jabalpur and Tiruchirapalli. Indian National Small Arms System (INSAS) rifle, which is successfully inducted by Indian Army since 1997 is a product of Ordanance Factory Board, Ishapore। While ammunition is manufactured at Kirkee (Now Khadki) and possibly at Bolangir.
--->
=== विमान ===
<!--This article is on the Indian army. So please do not include aircraft of the Indian Air Force.-->
<!--
:''This is a list of aircraft of the Indian Army. For the list of aircraft of the [[Indian Air Force]], see [[List of aircraft of the Indian Air Force]].''
The Indian Army operates more than 200 [[helicopter]]s, plus additional [[unmanned aerial vehicle]]s.
--->[[चित्र:ILA_2008_PD_414.JPG|अंगूठाकार|[[HAL Dhruv]]]]
<!-- Image with inadequate rationale removed: [[Image:NISHANT UAV Flight.jpg|right|thumb|[[DRDO Nishant]] Unmanned Aerial Vehicles.]] -->
{| class="wikitable"
!विमान!!उद्गम!!प्रकार!!संस्करण!!सवारत!!टिप्पणी
|-
| [[HAL Dhruv]] || {{IND}} || utility helicopter || || 36+ || To acquire 73 more Dhruv in next 5 years.
|-
| [[Aérospatiale Alouette III|Aérospatiale SA 316 Alouette III]] || {{FRA}} || utility helicopter || SA 316B Chetak || 60 || to be replaced by Dhruv
|-
| [[Aérospatiale Lama|Aérospatiale SA 315 Lama]] || {{FRA}} || utility helicopter || SA 315B Cheetah || 48 || to be replaced by Dhruv
|-
| [[DRDO Nishant]] || {{IND}} || reconnaissance UAV || || 1 || Delivery of 12 UAV's in 2008.
|-
| [[Israel Aerospace Industries|IAI Searcher II]] || {{ISR}} || reconnaissance UAV || || 100+ ||
|-
| [[IAI Heron|IAI Heron II]] || {{ISR}} || reconnaissance UAV || || 50+ ||
|}
<!--
The Indian army had projected a requirement for a helicopter that can carry loads of up to 75 kg heights of {{convert|23000|ft|m}} on the Siachen Glacier in Jammu and Kashmir. Flying at these heights poses unique challenges due to the rarefied atmosphere. The Indian Army chose the [[Eurocopter Fennec|Eurocopter AS 550]] for a $550 million contract for 197 light helicopters to replace its ageing fleet of [[Aérospatiale Alouette III|Chetaks]] and [[Aérospatiale Alouette II|Cheetahs]], some of which were inducted more than three decades ago.<ref>[http://www.kalingatimes.com/orissa_business/news/20070408_Eurocopter_wins_deal.htm Eurocopter wins big Indian Army deal]</ref>
The deal has however been scrapped amidst allegations of corruption during the bidding process.
---><ref>{{Cite web |url=http://www.khaleejtimes.com/DisplayArticleNew.asp?xfile=data%2Fsubcontinent%2F2007%2FDecember%2Fsubcontinent_December215.xml§ion=subcontinent&col= |title=संग्रहीत प्रति |access-date=15 जून 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120211201356/http://www.khaleejtimes.com/DisplayArticleNew.asp?xfile=data%2Fsubcontinent%2F2007%2FDecember%2Fsubcontinent_December215.xml§ion=subcontinent&col= |archive-date=11 फ़रवरी 2012 |url-status=dead }}</ref>
== परम वीर चक्र विजेता ==
भारत का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार [[परमवीर चक्र]] प्राप्त करने वाले वीरों की सूची इस प्रकार है :
{| class="wikitable"
! अनुक्रम !! संख्या !! नाम !! रेजीमेंट !!तिथि !! स्थान !! टिप्पणी
|-
| 1 || IC-521 || [[सोमनाथ शर्मा|मेजर सोमनाथ शर्मा]] || चौथी बटालियन, [[कुमाऊं रेजिमेंट|कुमाऊँ रेजीमेंट]] || [[३ नवम्बर|3 नवंबर]], [[१९४७|1947]] || [[बडगाम|बड़गाम]], [[कश्मीर]] || मरणोपरांत
|-
| 2 || IC-22356 || [[करम सिंह|लांस नायक करम सिंह]] || पहली बटालियन, [[सिख रेजिमेंट|सिख रेजीमेंट]] || [[१३ अक्टूबर|13 अक्तूबर]], [[१९४८|1948]] || [[टिथवाल]], [[कश्मीर]] ||
|-
| 3 || SS-14246 || [[राम राघोबा राणे|सेकेंड लेफ़्टीनेंट राम राघोबा राणे]] || [[इंडियन कार्प्स ऑफ इंजिनयर्स]]|| [[८ अप्रैल|8 अप्रैल]], [[१९४८|1948]] || [[नौशेरा]], [[कश्मीर]] ||
|-
| 4 || 27373 || [[यदुनाथ सिंह|नायक यदुनाथ सिंह]] || पहली बटालियन, [[राजपूत रेजिमेंट|राजपूत रेजीमेंट]] || फरवरी [[१९४८|1948]] || [[नौशेरा]], [[कश्मीर]] || मरणोपरांत
|-
| 5 || 2831592 || [[पीरू सिंह|कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह]] || छ्ठी बटालियन, [[राजपूताना राइफल्स]] || [[१७ जुलाई|17-]][[१८ जुलाई|18]] [[जुलाई]], [[१९४८|1948]] || [[टिथवाल]], [[कश्मीर]] || मरणोपरांत
|-
| 6 || IC-8497 || [[गुरबचन सिंह सलारिया|कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया]] || तीसरी बटालियन, [[१ गोरखा राइफल्स]]|| [[५ दिसम्बर|5 दिसंबर]], [[१९६१|1961]] || [[एलिजाबेथ विले]], [[काटंगा]], [[कांगो गणराज्य|कांगो]] || मरणोपरांत
|-
| 7 || IC-7990 || [[धनसिंह थापा|मेजर धनसिंह थापा]] || पहली बटालियन, [[गोरखा राइफल्स]]|| [[२० अक्टूबर|20 अक्तूबर]], [[१९६२|1962]] || [[लद्दाख़|लद्दाख]], ||
|-
| 8 || JC-4547 || [[सूबेदार जोगिंदर सिंह]] || पहली बटालियन, [[सिख रेजिमेंट|सिख रेजीमेंट]] || [[२३ अक्टूबर|23 अक्तूबर]], [[१९६२|1962]] || [[तोंगपेन ला]], [[नार्थ इस्ट फ्रंटियर एजेंसी]], [[भारत]] || मरणोपरांत
|-
| 9 || IC-7990 || [[शैतान सिंह|मेजर शैतान सिंह]] || तेरहवीं बटालियन, [[कुमाऊं रेजिमेंट|कुमाऊँ रेजीमेंट]] || [[१८ नवम्बर|18 नवंबर]], [[१९६२|1962]] || [[रेज़ांग ला]] || मरणोपरांत
|-
| 10 || 2639885 || [[अब्दुल हमीद|कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद]] || चौथी बटालियन, [[ग्रेनेडियर्स|बाम्बे ग्रेनेडियर्स]] || [[१० सितंबर|10 सितंबर]], [[१९६५|1965]] || [[चीमा]], [[खेमकरण सेक्टर]]|| मरणोपरांत
|-
| 11 || IC-5565 || [[लेफ्टिनेंट कर्नल ए॰ बी॰ तारापोर|लेफ्टीनेंट कर्नल आर्देशिर तारापोर]] || [[द पूना हार्स]] || [[१५ अक्टूबर|15 अक्तूबर]], [[१९६५|1965]] || [[फिलौरा]], [[सियालकोट]] सेक्टर, [[पाकिस्तान]] || मरणोपरांत
|-
| 12 || 4239746 || [[अलबर्ट एक्का|लांस नायक अलबर्ट एक्का]] || चौदहवीं बटालियन, [[बिहार रेजिमेंट|बिहार रेजीमेंट]] || [[३ दिसम्बर|3 दिसंबर]], [[१९७१|1971]] || [[गंगासागर]] || मरणोपरांत
|-
| 13 || 10877 F(P) || [[निर्मलजीत सिंह सेखों | फ्लाईंग आफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों]] || अठारहवीं स्क्वैड्रन, [[भारतीय वायुसेना]] || [[१४ दिसम्बर|14 दिसंबर]], [[१९७१|1971]] || [[श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर|श्रीनगर]], [[कश्मीर]] || मरणोपरांत
|-
| 14 || IC-25067 || [[अरुण खेतरपाल|लेफ्टीनेंट अरुण क्षेत्रपाल]] || [[द पूना हार्स|पूना हार्स]] || [[१६ दिसम्बर|16 दिसंबर]], [[१९७१|1971]] || [[जरपाल]], [[शकरगढ़]] सेक्टर || मरणोपरांत
|-
| 15 || IC-14608 || [[मेजर]] [[होशियार सिंह]] || तीसरी बटालियन, [[ग्रेनेडियर्स|बाम्बे ग्रेनेडियर्स]] || [[१७ दिसम्बर|17 दिसंबर]], [[१९७१|1971]] || [[बसंतार नदी]], [[शकरगढ़]] सेक्टर ||
|-
| 16 || JC-155825 || [[बन्ना सिंह|नायब सूबेदार बन्ना सिंह]] || आठवीं बटालियन, [[जम्मू कश्मीर लाइट इन्फेंट्री|जम्मू कश्मीर लाइट इनफेन्ट्री]] || [[२३ जून|23 जून]], [[१९८७|1987]] || [[सियाचिन हिमनद|सियाचिन ग्लेशियर]], [[जम्मू और कश्मीर|जम्मू कश्मीर]] || जीवित
|-
| 17 || IC-32907 || [[रामास्वामी परमेश्वरन|मेजर रामास्वामी परमेश्वरन]] || आठवीं बटालियन, [[महार रेजिमेंट|महार रेजीमेंट]] || [[२५ नवंबर|25 नवंबर]], [[१९८७|1987]] || [[श्रीलंका]] || मरणोपरांत
|-
| 18 || IC-56959 || [[मनोज कुमार पांडेय|लेफ्टीनेंट मनोज कुमार पांडे]] || प्रथम बटालियन, [[ग्यारहवीं गोरखा राइफल्स]]|| [[३ जुलाई|3 जुलाई]], [[१९९९|1999]] || [[ज़ुबेर टाप]], [[बटालिक]] सेक्टर, [[कारगिल]] क्षेत्र, [[जम्मू और कश्मीर|जम्मू कश्मीर]] || मरणोपरांत
|-
| 19 || 2690572 || [[योगेन्द्र सिंह यादव|ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव]] || अठारहवीं बटालियन, [[ग्रेनेडियर्स|द ग्रेनेडियर्स]] || [[४ जुलाई|4 जुलाई]], [[१९९९|1999]] || [[टाइगर हिल्स]], [[कारगिल]] क्षेत्र || जीवित
|-
| 20 || 13760533|| [[राइफलमैन संजय कुमार]] || तेरहवीं बटालियन, [[जम्मू कश्मीर राइफल्स]] || [[५ जुलाई|5 जुलाई]], [[१९९९|1999]] ||फ्लैट टाप क्षेत्र, [[कारगिल]] || जीवित
|-
| 21 || IC-57556 || [[विक्रम बत्रा|कैप्टन विक्रम बत्रा]] || तेरहवीं बटालियन, [[जम्मू कश्मीर राइफल्स]] || [[६ जुलाई|6 जुलाई]], [[१९९९|1999]] || बिंदु 5140, बिंदु 4875, [[कारगिल]] क्षेत्र|| मरणोपरांत
|}
== भारतीय थलसेना की संरचना ==
भारतीय थलसेना को 13 कोर के अंतर्गत 35 प्रभागों में संगठित किया गया है। सेना का मुख्यालय, भारतीय राजधानी नई दिल्ली में स्थित है, और यह सेना प्रमुख (चीफ ऑफ़ दी आर्मी स्टाफ) के निरिक्षण में रहती हैं। वर्तमान में जनरल मनोज पाण्डेय सेना प्रमुख हैं।
===कमान संरचना===
सेना की 6 क्रियाशील कमान(कमांड) और 1 प्रशिक्षण कमांड है। प्रत्येक कमान का नेतृत्व जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ होता है जोकि एक लेफ्टिनेंट जनरल रैंक का अधिकारी होता हैं। प्रत्येक कमांड, नई दिल्ली में स्थित सेना मुख्यालय से सीधे जुड़ा हुआ है। इन कमानो को नीचे उनके सही क्रम में दर्शाया गया हैं,
{| class="wikitable" c
|-
! कमांड चिह्न !! कमांड का नाम!! मुख्यालय
!कमांडर!! अधीनस्थ इकाइयां(यूनिट्)
|-
|[[File:Indian Army HQ.jpg|50px]] || '''मुख्यालय, भारतीय सेना''' || [[नई दिल्ली]]
||| 50वीं भारतीय पैराशूट दल – [[आगरा]]
|-
| [[File:IA Central Command.jpg|50px]] || '''[[केंद्रीय कमान]]''' || [[लखनऊ]]
|लेफ्टिनेंट जनरल बी एस नेगी<ref name=IndianArmyCentComCinC>{{Cite web |title=Central Command: General Officer Commanding-in-Chief |url=http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=/cT7fozqiMj75K0+l6rJXA==&ParentID=x2lMczCcdPXVXidTLE48vA== |website=Official Website of Indian Army |access-date=31 December 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161224164815/http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=%2FcT7fozqiMj75K0%2Bl6rJXA%3D%3D&ParentID=x2lMczCcdPXVXidTLE48vA%3D%3D |archive-date=24 दिसंबर 2016 |url-status=dead }}</ref>|| [[I कोर]] — वर्तमान में दक्षिण पश्चिमी कमान सौंपा गया हैं
|-
| [[File:IA Eastern Command.jpg|50px]] || '''[[पूर्वी कमान]]''' ||[[कोलकाता]]
|लेफ्टिनेंट जनरल [[प्रवीण बक्षी]]<ref name=IndianArmyEasternCinC>{{Cite web |title=Eastern Command: General Officer Commanding-in-Chief |url=http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=dRp9C73SFYB4+QOoSEbg9g==&ParentID=I3ibiVTbFqhGzhBh0HmPtg== |website=Official Website of Indian Army |access-date=31 December 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161224144457/http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=dRp9C73SFYB4+QOoSEbg9g==&ParentID=I3ibiVTbFqhGzhBh0HmPtg== |archive-date=24 दिसंबर 2016 |url-status=dead }}</ref>||
*[[23वीं इन्फैंट्री डिवीजन]] – [[राँची|रांची]]
*[[III कोर]] – [[दीमापुर]]
**दूसरी माउंटेन डिवीजन – [[डिब्रूगढ़]]
**57वीं माउंटेन डिवीजन – [[लेइमखोंग]]
**56वीं माउंटेन डिवीजन – [[जखमा]]
* [[IV कोर]] – [[तेज़पुर]], [[असम]]
**71वीं माउंटेन डिवीजन – [[मिसमारी]]
**5वीं माउंटेन डिवीजन – [[बोमडिला]]
**21वीं माउंटेन डिवीजन – [[रंगिया]]
* [[XXXIII कोर]] – [[सिलीगुड़ी]], [[पश्चिम बंगाल]]
**17वीं माउंटेन डिवीजन – [[गान्तोक|गंगटोक]]
**20वीं माउंटेन डिवीजन – [[बिनागुरी]]
**27वीं माउंटेन डिवीजन – [[कालीम्पोंग]]
|-
| [[File:IA Northern Command.jpg|50px]] || '''[[उत्तरी कमान]]''' || [[उधमपुर]]
|लेफ्टिनेंट जनरल [[देवराज अनबू]]<ref name=IndianArmyNorthernCinC>{{Cite web |title=Northern Command: General Officer Commanding-in-Chief |url=http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=TxlsIMDv8lbQU1uDctKynA==&ParentID=mRia2MN4hBGPekTwu636kA== |website=Official Website of Indian Army |access-date=31 December 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161224161144/http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=TxlsIMDv8lbQU1uDctKynA%3D%3D&ParentID=mRia2MN4hBGPekTwu636kA%3D%3D |archive-date=24 दिसंबर 2016 |url-status=dead }}</ref><ref>{{Cite news|url=http://indianexpress.com/article/india/india-news-india/lieutenant-general-devraj-anbu-new-chief-of-northern-command-4366402/|title=Lieutenant General Devraj Anbu new chief of Northern Command|date=2016-11-09|newspaper=The Indian Express|access-date=2016-11-30|archive-url=https://web.archive.org/web/20161201081243/http://indianexpress.com/article/india/india-news-india/lieutenant-general-devraj-anbu-new-chief-of-northern-command-4366402/|archive-date=1 दिसंबर 2016|url-status=live}}</ref>||
* [[XIV कोर]], – [[लेह]]
**तीसरी इन्फैंट्री डिवीजन – [[लेह]]
**8वाँ माउंटेन डिवीजन – [[द्रास]]
* [[XV कोर]], – [[श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर|श्रीनगर]]
**19वीं इन्फैंट्री डिवीजन – [[बारामूला]],
**28वीं माउंटेन डिवीजन – [[गुरेज]]
* [[XVI कोर]] – [[नागरोटा]]
**10वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[अखनूर]]
**25वीं इन्फैंट्री डिवीजन – [[राजौरी]]
**39वीं इन्फैंट्री डिवीजन – [[योल, हिमाचल प्रदेश|योल]]
**10 तोपख़ाना दल
|-
| [[File:IA Southern Command.jpg|50px]] || '''[[दक्षिणी कमान (भारतीय सेना)|दक्षिणी कमान]]''' || [[पुणे]]
|लेफ्टिनेंट जनरल पी एम हरिज़<ref name=IndianArmySouthernCinC>{{Cite web |title=Southern Command: General Officer Commanding-in-Chief |url=http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=7bp5VU2Yk4Nkc0B/43O86A==&ParentID=TElfvo47P2ZNSTeZy2XeiQ== |website=Official Website of Indian Army |access-date=4 January 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161224181224/http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=7bp5VU2Yk4Nkc0B%2F43O86A%3D%3D&ParentID=TElfvo47P2ZNSTeZy2XeiQ%3D%3D |archive-date=24 दिसंबर 2016 |url-status=dead }}</ref><ref>{{Cite news|url=http://indianexpress.com/article/india/india-news-india/lt-gen-hariz-takes-over-as-general-officer-commanding-in-chief-of-southern-command/|title=Lt Gen Hariz takes over as General Officer Commanding-in-Chief of Southern Command|date=2016-09-02|newspaper=The Indian Express|language=en|access-date=2017-01-28|archive-url=https://web.archive.org/web/20161216162258/http://indianexpress.com/article/india/india-news-india/lt-gen-hariz-takes-over-as-general-officer-commanding-in-chief-of-southern-command/|archive-date=16 दिसंबर 2016|url-status=live}}</ref>||
* 41वीं तोपख़ाना विभाग – [[पुणे]]
* [[XII कोर]] – [[जोधपुर]]
**चौथा बख़्तरबंद दल
**340वाँ यांत्रिक दल
**11वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[अहमदाबाद]]
**12वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[जोधपुर]]
* [[XXI कोर]] – [[भोपाल]]
**31वाँ बख़्तरबंद विभाग – [[झाँसी|झांसी]]
**36वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[सागर शहर|सागर]]
**54वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[हैदराबाद]]/[[सिकंदराबाद]]
**475वाँ अभियांत्रिकी दल
|-
| [[File:IA South Western Command.jpg|50px]] || '''[[दक्षिण पश्चिमी कमान]]''' || [[जयपुर]]
|लेफ्टिनेंट जनरल अभय कृष्ण<ref name=IndianArmySouthWesternCinC>{{Cite web |title=South Western Command: General Officer Commanding-in-Chief |url=http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=a2MLQ3yto6uCWUY9XHpy8A==&ParentID=xUEsT5PZZUuy9dPtAtE9mQ==&flag=67hbnIIkxaLVo4aPlccGTw== |website=Official Website of Indian Army |access-date=4 January 2017}}</ref><ref>{{Cite news|url=http://economictimes.indiatimes.com/news/defence/lt-gen-abhay-krishna-takes-over-armys-south-western-command/articleshow/56783300.cms|title=Lt Gen Abhay Krishna takes over Army's South Western Command - The Economic Times|newspaper=The Economic Times|access-date=2017-01-28|archive-url=https://web.archive.org/web/20170206082941/http://economictimes.indiatimes.com/news/defence/lt-gen-abhay-krishna-takes-over-armys-south-western-command/articleshow/56783300.cms|archive-date=6 फ़रवरी 2017|url-status=live}}</ref>||
*42वाँ तोपख़ाना विभाग – [[जयपुर]]
* [[I कोर]] – [[मथुरा]]
**चौथा
इन्फैंट्री डिवीजन – [[इलाहाबाद]]
**छटवां पर्वतारोही प्रभाग – [[बरेली]]
**33वाँ बख़्तरबंद प्रभाग – [[हिसार सैन्य स्टेशन]]
* [[X कोर]] – [[बठिंडा|भटिंडा]]
**16वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[श्रीगंगानगर|श्री गंगानगर]]
**18वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[कोटा]]
**24वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[बीकानेर]]
**छटवां बख़्तरबंद दल
**615वाँ स्वतंत्र वायु रक्षा दल
**471वाँ अभियांत्रिकी दल
|-
| [[File:IA Western Command.jpg|50px]] || '''[[पश्चिमी कमान]]''' || [[चंडीमंदिर]]
|लेफ्टिनेंट जनरल सुरिंदर सिंह<ref name=IndianArmyWesternCinC>{{Cite web |title=Western Command: General Officer Commanding-in-Chief |url=http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=92UIUkUPuasLVXb6Cz/kWg==&ParentID=gbrSGczz4H3pO3kGy3ENEw== |website=Official Website of Indian Army |access-date=4 January 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160228201511/http://indiatoday.intoday.in/story/assault-rifle-excalibur-drdo-dalbir-singh-indian-army-arde/1/449238.html |archive-date=28 फ़रवरी 2016 |url-status=dead }}</ref><ref>{{Cite news|url=http://www.business-standard.com/article/pti-stories/lt-gen-surinder-singh-takes-charge-of-western-command-116091700629_1.html|title=Lt Gen Surinder Singh takes charge of Western Command|last=India|first=Press Trust of|date=17 September 2016|newspaper=Business Standard India|access-date=18 September 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160918142150/http://www.business-standard.com/article/pti-stories/lt-gen-surinder-singh-takes-charge-of-western-command-116091700629_1.html|archive-date=18 सितंबर 2016|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=http://indianexpress.com/article/india/india-news-india/lt-gen-surinder-singh-takes-over-as-goc-in-c-3036878/|title=Lt Gen Surinder Singh takes over as GOC-in-C|date=18 September 2016|access-date=18 September 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160919131602/http://indianexpress.com/article/india/india-news-india/lt-gen-surinder-singh-takes-over-as-goc-in-c-3036878/|archive-date=19 सितंबर 2016|url-status=live}}</ref>||
*40वाँ तोपख़ाना विभाग – [[अम्बाला|अंबाला]]
*[[II कोर]], – [[अम्बाला|अंबाला]]
**पहला बख़्तरबंद विभाग – [[पटियाला]]
**14वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[देहरादून]]
**22वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[मेरठ]]
**474वाँ अभियांत्रिकी दल
**612वाँ यंत्रीकृत स्वतंत्र वायु रक्षा दल
* [[IX कोर]], – [[योल, हिमाचल प्रदेश|योल]]
**26वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[जम्मू]]
**29वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[पठानकोट]]
**2nd बख़्तरबंद दल
**3rd स्वतंत्र बख़्तरबंद दल
* [[XI कोर]], मुख्यालय [[जलंधर|जालंधर]] में
**7वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[फ़िरोज़पुर|फिरोजपुर]]
**9वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[मेरठ]]
**15वाँ इन्फैंट्री डिवीजन – [[अमृतसर]]
**23वाँ बख़्तरबंद दल
**55वाँ यंत्रीकृत दल
|-
| [[File:IA Training Command.jpg|50px]] || '''[[सेना प्रशिक्षण कमान]]''' || [[शिमला]]
|लेफ्टिनेंट जनरल डी.आर. सोनी <ref name=IndianArmyARTRACCinC>{{Cite web |title=ARTRAC: General Officer Commanding-in-Chief |url=http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=4iCDWdun4tbD8LHiOpZ5Mw==&ParentID=QHC/uQdgSqLFNY1hMj6Maw== |website=Official Website of Indian Army |access-date=4 January 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161224205459/http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=4iCDWdun4tbD8LHiOpZ5Mw%3D%3D&ParentID=QHC%2FuQdgSqLFNY1hMj6Maw%3D%3D |archive-date=24 दिसंबर 2016 |url-status=dead }}</ref><ref>{{Cite news |title=D R Soni takes over ARTAC |url=http://www.tribuneindia.com/news/himachal/lt-gen-soni-is-goc-in-chief-of-artrac/296728.html |last= |first= |date=17 September 2016 |newspaper=[[The Tribune (Chandigarh)|The Tribune]] |access-date=3 February 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161002165914/http://www.tribuneindia.com/news/himachal/lt-gen-soni-is-goc-in-chief-of-artrac/296728.html |archive-date=2 अक्तूबर 2016 |url-status=live }}</ref>||
|}
===लड़ाकू दल ===
[[File:An Indian army soldier pulls security during a rehearsal at Forward Operating Base Sparta in Alaska.jpg|thumb|अभ्यास के दौरान भारतीय सेना का एक सैनिक]]
[[File:An Indian Army soldier with the 99th Mountain Brigade fires at role-playing insurgents during bilateral training with U.S. paratroopers in 2013.jpg|thumb|भारतीय सेना के 99वाँ पर्वतीय दल का एक सैनिक अभ्यास के दौरान]]
नीचे दिए गए कोर, विशिष्ट पैन-आर्मी कार्यों हेतु एक कार्यात्मक प्रभाग हैं। भारतीय प्रादेशिक सेना विभिन्न इन्फैंट्री रेजिमेंटों से संबद्ध बटालियन हैं, जिनमे कुछ विभागीय इकाइयां, कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स, आर्मी मेडिकल कोर या आर्मी सर्विस कोर से हैं। ये अंशकालिक आरक्षित के रूप में सेवा करते हैं।
{| class="wikitable"
!नाम
!महानिदेशक
!केंद्र
|-
|[[भारतीय सेना बख्तरबंद कोर|बख्तरबंद कोर]]
|
|बख्तरबंद कोर केंद्र और स्कूल, [[अहमदनगर]]
|-
|[[तोपखाना रेजिमेंट]]
|लेफ्टिनेंट जनरल पी के श्रीवास्तव, वीएसएम<ref name=IndianArmyArtilleryDG>{{Cite web |title=The Regiment of Artillery: Director General and Colonel Commandant |url=http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=tp6QV4gmHtrUy/2aWwOdPQ==&ParentID=c/kSjJUgAet86QVQqfy9rQ== |website=Official Website of Indian Army |access-date=7 January 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161224160759/http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=tp6QV4gmHtrUy%2F2aWwOdPQ%3D%3D&ParentID=c%2FkSjJUgAet86QVQqfy9rQ%3D%3D |archive-date=24 दिसंबर 2016 |url-status=dead }}</ref>
|तोपखाना स्कूल,[[नासिक]] के पास [[देवलाली]]
|-
|[[वायुरक्षा सेना कोर]]
|लेफ्टिनेंट जनरल ए के सेहगल, वीएसएम<ref name=IndianArmyAirDefenceDG>{{Cite web |title=Army Air Defence: Director General and Colonel Commandant |url=http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTemp2P_SameRow1Flash2C.aspx?MnId=sAfhA9jyS0nVao8srSkuig==&ParentID=MYf/ZqOryVj+hMZZBdL2Yw==&flag=7QuSd9EEv4RiL0wgt7N/BA== |website=Official Website of Indian Army |access-date=7 January 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161224215707/http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTemp2P_SameRow1Flash2C.aspx?MnId=sAfhA9jyS0nVao8srSkuig%3D%3D&ParentID=MYf%2FZqOryVj%2BhMZZBdL2Yw%3D%3D&flag=7QuSd9EEv4RiL0wgt7N%2FBA%3D%3D |archive-date=24 दिसंबर 2016 |url-status=dead }}</ref>
|[[गोपालपुर, उड़ीसा|गोपालपुर]], [[ओडिशा|उड़ीसा]].
|-
|[[सेना के विमानन कोर]]
|लेफ्टिनेंट जनरल पी.के. भरली, वीएसएम<ref name=IndianArmyAviationDG>{{Cite web |title=Army Aviation Corps: Director General and Colonel Commandant |url=http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=1jNdrzG4uqOdGXvYwmFaHA==&ParentID=jXRQ8bX13B68jZasmqKbng== |website=Official Website of Indian Army |access-date=7 January 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161224215513/http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=1jNdrzG4uqOdGXvYwmFaHA%3D%3D&ParentID=jXRQ8bX13B68jZasmqKbng%3D%3D |archive-date=24 दिसंबर 2016 |url-status=dead }}</ref>
|लड़ाकू सेना विमानन प्रशिक्षण केंद्र, [[नासिक]].
|-
|[[इंजीनियर्स कोर]]
|
|कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग, दापोडी, [[पुणे]]<br>[[मद्रास इंजीनियर समूह]], [[बंगलौर|बैंगलोर]]<br>[[बंगाल इंजीनियर समूह]], [[रुड़की]]<br>[[बॉम्बे इंजीनियर समूह]], [[खडकी]], [[पुणे]] के पास
|-
|[[संकेतक कोर]]
|
|[[दूरसंचार इंजीनियरिंग सैन्य कॉलेज]] (एमसीटीई), [[डॉ॰ आम्बेडकर नगर|महू]]<br>दो सिग्नल प्रशिक्षण केन्द्र [[जबलपुर]] और [[गोवा]] में.
|-
|[[मशीनीकृत इन्फैंट्री]]
|
|[[अहमदनगर]]
|-
|इन्फैंट्री
|
|
|-
|[[ऑर्डिनेंस सेना कोर|ऑर्डिनेंस कोर]]
|लेफ्टिनेंट जनरल अमित सरीन एवीएसएम, एसएम, वीएसएम, एडीसी<ref name=IndianArmyOrdnanceDG>{{Cite web |title=Army Ordnance Corps: Director General and Colonel Commandant |url=http://www.indianarmy.nic.in/Site/FormTemplete/frmTempSimple.aspx?MnId=CNUJnxFeqXbpaSvjb3Zi6w==&ParentID=NZffZKdqcLoMGUL+9XwHEQ== |website=Official Website of Indian Army |access-date=29 January 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160228201511/http://indiatoday.intoday.in/story/assault-rifle-excalibur-drdo-dalbir-singh-indian-army-arde/1/449238.html |archive-date=28 फ़रवरी 2016 |url-status=dead }}</ref>
|[[सिकंदराबाद]]
|}
==== पैदल सेना (इन्फैंट्री)====
[[File:Yudh Abhyas 2013, 2nd Batallion, 5th Gurkha Rifles.jpg|left|thumb|2013 युद्ध अभ्यास के दौरान 99वें माउंटेन ब्रिगेड के दूसरे बटालियन, 5 गोरखा राइफल्स के सैनिक।]]
अपनी स्थापना के समय, भारतीय सेना को ब्रिटिश सेना की संगठनात्मक संरचना विरासत में मिली, जो आज भी कायम है। इसलिए, अपने पूर्ववर्ती की तरह, एक भारतीय इन्फैंट्री रेजिमेंट की ज़िम्मेदारी न सिर्फ फ़ील्ड ऑपरेशन की है बल्कि युद्ध मैदान और बटालियन में अच्छी तरह से प्रशिक्षित सैनिक प्रदान करना भी हैं, जैसे कि एक ही रेजिमेंट के बटालियन का कई दल, प्रभागों, कोर, कमान और यहां तक कि थिएटरों में होना आम बात है। अपने ब्रिटिश और राष्ट्रमंडल समकक्षों की तरह, सैनिक अपने आवंटित रेजिमेंट के प्रति बेहद वफादार और बहुत गर्व करते हैं, जहाँ सामान्यतः उनका पूरा कार्यकाल बीतता हैं।
भारतीय सेना के इन्फैंट्री रेजिमेंट्स में नियुक्ति, विशिष्ट चयन मानदंडों के आधार पर होती हैं, जैसे कि क्षेत्रीय, जातीयता, या धर्म पर; [[असम रेजिमेंट]], [[जाट रेजिमेंट]], और [[सिख रेजिमेंट]] क्रमशः। अधिकतर रेजिमेंट तो ब्रटिश राज के समय के ही हैं, लेकिन लद्दाख स्काउट, अरुणाचल स्काउट्स, और सिक्किम स्काउट्स, सीमा सुरक्षा विशेष दल, स्वतंत्रता के बाद बनाये गए हैं।
[[File:Jammu and Kashmir Light Infantry (JAK LI) soldier.jpg|thumb|इंसास राइफल के साथ इंडिया गेट की रक्षा करता, जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फैंट्री का एक जवान।]]
[[File:Indian Army-Rajput regiment.jpeg|right|thumb|राजपूत रेजिमेंट के सैनिक]]
[[File:Indian Army-Sikh Light Infantry regiment.jpeg|thumb|सिख लाइट इन्फैंट्री के सैनिक]]
[[File:Indian Army-Madras regiment.jpeg|thumb|मद्रास रेजिमेंट के सैनिक]]
वर्षों से विभिन्न राजनीतिक और सैन्य गुटों ने रेजिमेंटों की इस अनूठी चयन मानदंड प्रक्रिया को भंग करने की कोशिश करते रहे है उनका मानना था की कि सैनिक का अपने रेजिमेंट के प्रति वफादारी या उसमे उसके ही जातीय के लोगों के प्रति निष्ठा, भारत के प्रति निष्ठा से ऊपर न हो जाये। और उन्होंने कुछ गैर नस्लीय, धर्म, क्षेत्रीय रेजिमेंट, जैसे कि ब्रिगेड ऑफ गॉर्ड्स और पैराशूट रेजिमेंट, बनाने में सफल भी रहे, लेकिन पहले से बने रेजिमेंट्स में इस प्रकार के प्रयोग का कम ही समर्थन देखने को मिला हैं।
'''भारतीय सेना के रेजिमेंट, अपनी वरिष्ठता के क्रम में:'''<ref>{{cite web|url=http://www.bharat-rakshak.com/LAND-FORCES/Units/Infantry.html?layout=default |title=Infantry Regiments |publisher=Bharat Rakshak |year=2008 |accessdate=24 January 2014 |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20131007164813/http://bharat-rakshak.com/LAND-FORCES/Units/Infantry.html?layout=default |archivedate=7 October 2013 }}</ref>
{| class="wikitable sortable"
!रेजिमेंट
!रेजिमेंट केंद्र
!वर्ष
|-
|[[गार्ड ब्रिगेड]]<ref name=IndianArmyGuardsFormation>{{Cite web |title=History of The Brigade of the Guards: Formation of the Brigade |url=http://www.indianarmy.gov.in/Site/FormTemplete/frmTemp4P2C.aspx?MnId=IdfFaGk/yr0rh/pOqUzTfw==&ParentID=JSXgaRIj0MV51BKzfPPGBQ== |website=Official Website of Indian Army |access-date=7 January 2017}}</ref>
|[[कम्पटी]], [[महाराष्ट्र]]
|1949
|-
|[[पैराशूट रेजिमेंट]]
|[[बंगलौर|बैंगलोर]], [[कर्नाटक]]
|1945
|-
|[[मैकेनाइज़्ड इन्फेंट्री रेजिमेंट]]
|[[अहमदनगर]], [[महाराष्ट्र]]
|1979
|-
|[[पंजाब रेजिमेंट]]
|[[रामगढ़ छावनी]], [[झारखण्ड|झारखंड]]
|1761
|-
|[[मद्रास रेजिमेंट]]
|[[वेलिंग्टन|वेलिंगटन]], [[उधगमंडलम]]
|1758
|-
|[[द ग्रेनेडियर]]
|[[जबलपुर]], [[मध्य प्रदेश]]
|1778
|-
|[[मराठा लाइट इन्फेंट्री]]
|[[बेलगाम]], [[कर्नाटक]]
|1768
|-
|[[राजपूताना राइफल्स]]
|[[दिल्ली छावनी]], [[नई दिल्ली]]
|1775
|-
|[[राजपूत रेजिमेंट]]
|[[फ़तेहगढ़|फतेहगढ़]], [[उत्तर प्रदेश]]
|1778
|-
|[[जाट रेजिमेंट]]
|[[बरेली]], [[उत्तर प्रदेश]]
|1795
|-
|[[सिख रेजिमेंट]]
|[[रामगढ़ छावनी]], [[झारखण्ड|झारखंड]]
|1846
|-
|[[सिख लाइट इन्फेंट्री]]
|[[फ़तेहगढ़|फतेहगढ़]], [[उत्तर प्रदेश]]
|1857
|-
|[[डोगरा रेजिमेंट]]
|[[फ़ैज़ाबाद|फैजाबाद]], [[उत्तर प्रदेश]]
|1877
|-
|[[गढ़वाल राइफल्स]]
|[[लांसडाउन]], [[उत्तराखण्ड|उत्तराखंड]]
|1887
|-
|[[कुमाऊं रेजिमेंट]]
|[[रानीखेत]], [[उत्तराखण्ड|उत्तराखंड]]
|1813
|-
|[[असम रेजिमेंट]]
|[[शिलांग]], [[मेघालय]]
|1941
|-
|[[बिहार रेजिमेंट]]
|[[दानापुर छावनी]], [[पटना]], [[बिहार]]
|1941
|-
|[[महार रेजिमेंट]]
|[[सागर]], [[मध्य प्रदेश]]
|1941
|-
|[[जम्मू कश्मीर राइफल्स]]
|[[जबलपुर]], [[मध्य प्रदेश]]
|1821
|-
|[[जम्मू कश्मीर लाइट इन्फेंट्री]]
|[[अवंतीपुर]], [[जम्मू और कश्मीर]]
|1947
|-
|[[नागा रेजिमेंट]]
|[[रानीखेत]], [[उत्तराखण्ड|उत्तराखंड]]
|1970
|-
|[[1 गोरखा राइफल्स|1 गोरखा राइफल्स (मालाओं रेजिमेंट)]]
|[[सबाथु]], [[हिमाचल प्रदेश]]
|1815
|-
|[[3 गोरखा राइफल्स]]
|[[वाराणसी]], [[उत्तर प्रदेश]]
|1815
|-
|[[4 गोरखा राइफल्स]]
|[[सबाथु]], [[हिमाचल प्रदेश]]
|1857
|-
|[[5 गोरखा राइफल्स|5 गोरखा राइफल्स (फ्रंटियर फोर्स)]]
|[[शिलांग]], [[मेघालय]]
|1858
|-
|[[8 गोरखा राइफल्स]]
|[[शिलांग]], [[मेघालय]]
|1824
|-
|[[9 गोरखा राइफल्स]]
|[[वाराणसी]], [[उत्तर प्रदेश]]
|1817
|-
|[[11 गोरखा राइफल्स]]
|[[लखनऊ]], उत्तर प्रदेश
|1918
|-
|[[लद्दाख स्काउट्स]]
|[[लेह]], [[जम्मू और कश्मीर]]
|1963
|-
|[[राष्ट्रीय राइफल्स]]
|
|1990
|-
|[[अरुणाचल स्काउट्स]]
|[[शिलांग]], [[मेघालय]]
|2010
|-
|[[सिक्किम स्काउट्स]]
|
|2013
|}
====तोपख़ाना (आर्टिलरी)====
[[File:Pinaka.JPG|thumb|[[पिनाक मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर|पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लांचरों]] का [[कारगिल युद्ध]] के दौरान इस्तेमाल किया गया]]
[[तोपखाना रेजिमेंट]] (आर्टिलरी रेजिमेंट) भारतीय सेना का दूसरा सबसे बड़ा हाथ है, जोकि सेना की कुल ताकत का लगभग छठवाँ भाग हैं। मूल रूप से यह 1935 में ब्रिटिश भारतीय सेना में रॉयल भारतीय तोपखाने के नाम से शामिल हुआ था। और अब इस रेजिमेंट को, सेना को स्व-प्रचालित [[आर्टिलरी फील्ड]] प्रदान करने का काम सौंपा गया है, जिसमे बंदूकें, तोप, भारी मोर्टार, रॉकेट और मिसाइल आदि भी सम्मलित हैं।
भारतीय सेना द्वारा संचालित लगभग सभी लड़ाकू अभियानों में, तोपखाना रेजिमेंट एक अभिन्न अंग के रूप में, भारतीय सेना की सफलता में एक प्रमुख योगदानकर्ता रहा है। [[कारगिल युद्ध]] के दौरान, वह भारतीय तोपखाना ही था, जिसने दुश्मन को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया था।<ref>{{cite web|url=http://zeenews.india.com/news/nation/indian-artillery-inflicted-maximum-damage-to-pak-during-kargil_669140.html|title=Indian artillery inflicted maximum damage to Pak during Kargil|work=Zee News|accessdate=26 November 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20141031120505/http://zeenews.india.com/news/nation/indian-artillery-inflicted-maximum-damage-to-pak-during-kargil_669140.html|archive-date=31 अक्तूबर 2014|url-status=live}}</ref> पिछले कुछ वर्षों में, पांच तोपखाना अधिकारी भारतीय सेना की सर्वोच्च पद, सेना प्रमुख के रूप में रह चुके हैं।
[[File:Bofors gun 155mm.jpg|thumb|left|बोफोर्स तोप]]कुछ समय के लिए, आज की तुलना में तोपखाना रेजिमेंट सेना के कर्मियों के काफी बड़े हिस्से की कमान संभालता था, जिनमें हवाई रक्षा तोपखाना और कुछ विमानन संपत्तियों का रख-रखाव भी सम्मलित थे। फिर 1990 के दशक में सेना के वायु रक्षा कोर के गठन किया गया और विमानन संपत्तियों को सेना के विमानन कॉर्प्स को हस्तान्तरित कर दिया गया। अब यह रेजिमेंट अपना ध्यान फील्ड आर्टिलरी पर केंद्रित करता है, और प्रत्येक परिचालन कमानो के लिए रेजिमेंट और बैटरी की आपूर्ति करता है। इस रेजिमेंट का मुख्यालय नाशिक, महाराष्ट्र में है, इसके साथ यहाँ एक संग्रहालय भी स्थित है। भारतीय सेना का तोपखाना स्कूल [[देवलाली]] में स्थित है।
तीन दशकों से आधुनिक तोपखाने के आयात या उत्पादन में निरंतर विफलताओं के बाद<ref>{{cite web |url=http://www.defensenews.com/article/20140321/DEFREG03/303210026 |title=Upgraded Indian Howitzers Cleared for Summer Trials |last1=RAGHUVSNSHI |first1=VIVEK |date=21 March 2014 |website=www.defensenews.com |publisher=Gannett Government Media |accessdate=21 March 2014 |archive-date=21 मार्च 2014 |archive-url=https://archive.today/20140321145114/http://www.defensenews.com/article/20140321/DEFREG03/303210026 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.thehindu.com/news/national/inside-indias-defence-acquisition-mess/article3255466.ece |title=Inside India's defence acquisition mess |last1=Swami |first1=Praveen |date=29 March 2012 |work=The Hindu |accessdate=4 January 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140107015921/http://www.thehindu.com/news/national/inside-indias-defence-acquisition-mess/article3255466.ece |archive-date=7 जनवरी 2014 |url-status=live }}</ref>, अंततः तोपखाना रेजिमेंट 130 मिमी और 150 मिमी तोपो की अधिप्राप्ति कर ली है।<ref>{{cite web|url=http://www.ndtv.com/article/india/in-dhanush-indian-army-s-prayers-answered-544552|title=In 'Dhanush', Indian Army's Prayers Answered|work=NDTV.com|accessdate=26 November 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20141103002850/http://www.ndtv.com/article/india/in-dhanush-indian-army-s-prayers-answered-544552|archive-date=3 नवंबर 2014|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.dnaindia.com/india/report-defence-ministry-agrees-to-army-s-long-pending-demand-of-artillery-guns-2015130|title=Defence ministry agrees to army's long pending demand of artillery guns|work=dna|accessdate=26 November 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20141124222833/http://www.dnaindia.com/india/report-defence-ministry-agrees-to-army-s-long-pending-demand-of-artillery-guns-2015130|archive-date=24 नवंबर 2014|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.newindianexpress.com/defence/Indigenous-Artillery-Gun-Dhanush-to-be-Ready-This-Year/2014/03/18/article2116399.ece|title=Indigenous Artillery Gun 'Dhanush' to be Ready This Year|work=The New Indian Express|accessdate=26 November 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20141122105735/http://www.newindianexpress.com/defence/Indigenous-Artillery-Gun-Dhanush-to-be-Ready-This-Year/2014/03/18/article2116399.ece|archive-date=22 नवंबर 2014|url-status=live}}</ref> सेना बड़ी संख्या में रॉकेट लांचरों को भी सेवा में ला रहा है, अगले दशक के अंत तक 22 रेजिमेंट को स्वदेशी-विकसित [[पिनाक मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर|पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर]] से सशत्र किया जायेगा।<ref>{{cite web |title=Indian Army to increase indigenous rocket regiments by 2022 |url=http://www.firstpost.com/india/indian-army-to-increase-indigenous-rocket-regiments-by-2022-3144102.html |date=7 December 2016 |accessdate=8 December 2016 |publisher=Firstpost |archive-url=https://web.archive.org/web/20161208111922/http://www.firstpost.com/india/indian-army-to-increase-indigenous-rocket-regiments-by-2022-3144102.html |archive-date=8 दिसंबर 2016 |url-status=dead }}</ref>
====बख़्तरबंद (आर्मर) ====
====पैरा (विशेष बल)====
=== (आदेश) कमान ===
सेना के सामरिक 6 आदेशों चल रही है। प्रत्येक आदेश [[लेफ्टिनेंट जनरल] रैंक के साथ जनरल कमांडिंग इन चीफ अधिकारी की अध्यक्षता में है। प्रत्येक आदेश सीधे में सेना मुख्यालय से संबद्ध है [[नई दिल्ली]. इन आदेशों नीचे उनके सही क्रम को ऊपर उठाने के स्थान (शहर) और उनके कमांडरों में दिया जाता है। उनकी भी एक प्रशिक्षण ARTRAC के रूप में जाना जाता है आदेश है।
{| class = "wikitable"
! कमान
! कमान मुख्यालय
! जीओसी - इन - सी
|-
| दक्षिणी कमान
| [[पुणे]]
| लेफ्टिनेंट जनरल नोबल Thamburaj
|-
| पूर्वी कमान
| [[कोलकाता]]
| लेफ्टिनेंट जनरल वीके सिंह
|-
| मध्य कमान
| [[लखनऊ]]
| लेफ्टिनेंट जनरल H.S. पनाग, पीवीएसएम, एवीएसएम *, एडीसी
|-
| पश्चिमी कमान
| [[चंडीमंदिर]] ([[चण्डीगढ़|चंडीगढ़]])
| लेफ्टिनेंट जनरल टी.के. सप्रू
|-
| उत्तरी कमान
| [[उधमपुर]]
| लेफ्टिनेंट जनरल पीसी भारद्वाज
|-
| दक्षिण पश्चिमी कमान
| [[जयपुर]]
| लेफ्टिनेंट जनरल CKS साबू
|}
=== (कोर) कॉर्प ===
==== व्यूह - रचना (फील्ड गठन) ====
[[वाहिनी]] सेना के एक क्षेत्र में एक कमान के भीतर एक क्षेत्र के लिए जिम्मेदार गठन है। स्ट्राइक होल्डिंग और मिश्रित: वहाँ भारतीय सेना वाहिनी के 3 प्रकार के होते हैं। कमान आम तौर पर 2 या अधिक कोर के होते हैं। अपने आदेश के तहत एक कोर सेना प्रभागों है। कोर मुख्यालय सेना में उच्चतम क्षेत्र गठन है।
{| Class = "wikitable"
! वाहिनी
! मुख्यालय
! कमान
! जनरल आफिसर कमांडिंग (जीओसी)
! प्रभागों<ref>प्रभाग और जेन विश्व सेनाओं से ब्रिगेड स्रोत जानकारी, अंक 19, 2006, p.319</ref>
|-
| [[मैं कोर (भारत)|1 कोर]]
| [[मथुरा]], [[उत्तर प्रदेश]]
| मध्य कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल पीसी कटोच
| 4 इन्फैंट्री डिवीजन ([[इलाहाबाद]]), 6 Mtn डिव ([[बरेली]]), 33 ARMD डिव ([[हिसार, भारत | हिसार]])
|-
| कोर 2
| [[अम्बाला]], [[हरियाणा]]
| पश्चिमी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल जेपी सिंह, एवीएसएम
| 1 ARMD डिव ([[अम्बाला]]), 14 त्वरित (देहरादून), 22 इन्फैंट्री डिवीजन [[मेरठ]])
|-
| [[III के कोर (भारत) | 3 कोर]]
| Rangapahar ([[दीमापुर]]), [[नागालैण्ड|नागालैंड]]
| पूर्वी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कुमार Loomba
| 23 इन्फैंट्री डिवीजन [[राँची| रांची]]), 57 Mtn (डिव [[Leihmakong]])
|-
| [[चतुर्थ कोर (भारत) | 4 कोर]]
| [[तेज़पुर|तेजपुर]], [[असम]]
| पूर्वी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल आर के छाबड़ा
| 2 Mtn डिव ([[डिब्रूगढ़]]), 5 Mtn डिव ([[बोमडिला]]), 21 Mtn डिव ([[रंगिया]])
|-
|9 वाहिनी
| [[योल, भारत | योल]], [[हिमाचल प्रदेश]]
| पश्चिमी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल पीके रामपाल
| 26 इन्फैंट्री डिवीजन ([[जम्मू छावनी | जम्मू]) 29, इन्फैंट्री डिवीजन([[पठानकोट]]), 2,3,16 इंडस्ट्रीज़ ARMD Bdes
|-
|10 कोर
| [[बठिंडा|भटिंडा]], पंजाब
| पश्चिमी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल
| 16 इन्फैंट्री डिवीजन ([[श्रीगंगानगर|श्री गंगानगर]]), 18 त्वरित ([[कोटा| कोटा]]), 24 त्वरित ([[बीकानेर]]), 6 इंडस्ट्रीज़ ARMD BDE
|-
| 11 वाहिनी
| [[जलंधर|जालंधर]], पंजाब
| पश्चिमी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल श्रीधरन श्याम कुमार, एसएम, वीएसएम
| 7 इन्फैंट्री डिवीजन ([[फ़िरोज़पुर|फिरोजपुर]]), 9 इन्फैंट्री डिवीजन ([[मेरठ]]), 15 इन्फैंट्री डिवीजन ([[अमृतसर]]), 23 ARMD BDE, 55 Mech BDE
|-
|कोर 12
| [[जोधपुर]], [[राजस्थान]]
| दक्षिण पश्चिमी कमान
|
| 4 ARMD BDE, 340 Mech BDE, 11 इन्फैंट्री डिवीजन ([[अहमदाबाद]]), 12 Inf (प्रभाग [[ जोधपुर]])
|-
| 14 वाहिनी
| [[लेह]], [[लद्दाख़|लद्दाख]]
| उत्तरी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल जयंत कुमार मोहंती UYSM, एसएम, वीएसएम
| 3 इन्फैंट्री डिवीजन ([[लेह]]), [[8 इन्फैंट्री डिवीजन (भारत) | 8 माउंटेन डिवीजन]] ([[Dras ]] ),<ref> [[Globalsecurity.org] https://web.archive.org/web/20081216152813/http://www.globalsecurity.org/military/world/india/northcom.htm, दिसंबर 2007 पहुँचा तोपखाना ब्रिगेड </ref>
|-
| 15 वीं कोर
| [[श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर|श्रीनगर]], [[जम्मू और कश्मीर|जम्मू एवं कश्मीर]]
| उत्तरी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल मुकेश सभरवाल
| 19 इन्फैंट्री डिवीजन ([[बारामूला]]), 28 इन्फैंट्री डिवीजन [[गुरेज ]] , [[Bandipora जिला]]), तोपखाना ब्रिगेड
|-
|16 वाहिनी
| [[नगरोटा, जम्मू और कश्मीर|नगरोटा]], जम्मू एवं कश्मीर
| उत्तरी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल आर Karwal
| 10 Inf (डिव [[अखनूर ]]),<ref> इन्हें भी देखें https://web.archive.org/web/20081220184054/http://orbat.com/ site/cimh/divisions/10th%% 20Division 20orbat% 20Chaamb 201971.html% </ref> 25 Inf डिव ([[Rajauri]]), 39 Inf डिव ([[योल, भारत | योल]]), तोपखाना ब्रिगेड, बख़्तरबंद ब्रिगेड?
|-
| 21 कोर (पूर्व [[आईपीकेएफ]])
| [[भोपाल]], [[मध्य प्रदेश]]
| दक्षिणी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल
| [[31 भारतीय आर्मड डिवीजन | 31 ARMD डिव]] ([[झाँसी|झांसी]]), 36 त्वरित ([[सागर]]), 54 Inf (डिव [[Sikandrabad]]), आर्टि, ई., eng bdes
|-
| [[तैंतीसवीं कोर (भारत)| 33 वाहिनी]]
| [[सिलीगुड़ी]], [[पश्चिम बंगाल]]
| पूर्वी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल पीके रथ
| 17 माउंटेन डिवीजन ([[गान्तोक|गंगटोक]]), 20 माउंटेन डिवीजन([[बिनागुरी]], [[जलपाईगुड़ी जिला|जलपाईगुड़ी जिले]]), 27 माउंटेन डिवीजन ([[कलिमपॉन्ग]]), आर्टि BDE
|-
|9 वाहिनी
| [[योल, भारत | योल]], [[हिमाचल प्रदेश]]
| पश्चिमी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल पीके रामपाल
| 26 इन्फैंट्री डिवीजन ([[जम्मू छावनी | जम्मू]) 29, इन्फैंट्री डिवीजन([[पठानकोट]]), 2,3,16 इंडस्ट्रीज़ ARMD Bdes
|-
|10 कोर
| [[बठिंडा|भटिंडा]], पंजाब
| पश्चिमी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल
| 16 इन्फैंट्री डिवीजन ([[श्रीगंगानगर|श्री गंगानगर]]), 18 त्वरित ([[कोटा| कोटा]]), 24 त्वरित ([[बीकानेर]]), 6 इंडस्ट्रीज़ ARMD BDE
|-
|कोर 12
| [[जलंधर|जालंधर]], पंजाब
| पश्चिमी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल श्रीधरन श्याम कुमार, एसएम, वीएसएम
| 7 इन्फैंट्री डिवीजन ([[फ़िरोज़पुर|फिरोजपुर]]), 9 इन्फैंट्री डिवीजन ([[मेरठ]]), 15 इन्फैंट्री डिवीजन ([[अमृतसर]]), 23 ARMD BDE, 55 Mech BDE
|-
|कोर 12
| [[जोधपुर]], [[राजस्थान]]
| दक्षिण पश्चिमी कमान
|
| 4 ARMD BDE, 340 Mech BDE, 11 इन्फैंट्री डिवीजन ([[अहमदाबाद]]), 12 Inf (प्रभाग [[ जोधपुर]])
|-
|16 वाहिनी
| [[लेह]], [[लद्दाख़|लद्दाख]]
| उत्तरी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल जयंत कुमार मोहंती UYSM, एसएम, वीएसएम
| 3 इन्फैंट्री डिवीजन ([[लेह]]), [[8 इन्फैंट्री डिवीजन (भारत) | 8 माउंटेन डिवीजन]] ([[Dras ]] ),<ref> [[Globalsecurity.org] https://web.archive.org/web/20081216152813/http://www.globalsecurity.org/military/world/india/northcom.htm, दिसंबर 2007 पहुँचा तोपखाना ब्रिगेड </ref>
|-
| 15 वीं कोर
| [[श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर|श्रीनगर]], [[जम्मू और कश्मीर|जम्मू एवं कश्मीर]]
| उत्तरी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल मुकेश सभरवाल
| 19 इन्फैंट्री डिवीजन ([[बारामूला]]), 28 इन्फैंट्री डिवीजन [[गुरेज ]] , [[Bandipora जिला]]), तोपखाना ब्रिगेड
|-
|16 वाहिनी
| [[नगरोटा, जम्मू और कश्मीर|नगरोटा]], जम्मू एवं कश्मीर
| उत्तरी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल आर Karwal
| 10 Inf (डिव [[अखनूर ]]),<ref> इन्हें भी देखें https://web.archive.org/web/20081220184054/http://orbat.com/ site/cimh/divisions/10th%% 20Division 20orbat% 20Chaamb 201971.html% </ref> 25 Inf डिव ([[Rajauri]]), 39 Inf डिव ([[योल, भारत | योल]]), तोपखाना ब्रिगेड, बख़्तरबंद ब्रिगेड?
|-
|9 वाहिनी
| [[योल, भारत | योल]], [[हिमाचल प्रदेश]]
| पश्चिमी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल पीके रामपाल
| <nowiki>26 इन्फैंट्री डिवीजन ([[जम्मू छावनी | जम्मू]]) 29, इन्फैंट्री डिवीजन(</nowiki>[[पठानकोट]]), 2,3,16 इंडस्ट्रीज़ ARMD Bdes
|-
|10 कोर
| [[बठिंडा|भटिंडा]], पंजाब
| पश्चिमी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल
| 16 इन्फैंट्री डिवीजन ([[श्रीगंगानगर|श्री गंगानगर]]), 18 त्वरित ([[कोटा| कोटा]]), 24 त्वरित ([[बीकानेर]]), 6 इंडस्ट्रीज़ ARMD BDE
|-
|कोर 12
| [[जलंधर|जालंधर]], पंजाब
| पश्चिमी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल श्रीधरन श्याम कुमार, एसएम, वीएसएम
| 7 इन्फैंट्री डिवीजन ([[फ़िरोज़पुर|फिरोजपुर]]), 9 इन्फैंट्री डिवीजन ([[मेरठ]]), 15 इन्फैंट्री डिवीजन ([[अमृतसर]]), 23 ARMD BDE, 55 Mech BDE
|-
|कोर 12
| [[जोधपुर]], [[राजस्थान]]
| दक्षिण पश्चिमी कमान
|
| 4 ARMD BDE, 340 Mech BDE, 11 इन्फैंट्री डिवीजन ([[अहमदाबाद]]), 12 Inf (प्रभाग [[ जोधपुर]])
|-
|16 वाहिनी
| [[लेह]], [[लद्दाख़|लद्दाख]]
| उत्तरी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल जयंत कुमार मोहंती UYSM, एसएम, वीएसएम
| 3 इन्फैंट्री डिवीजन ([[लेह]]), [[8 इन्फैंट्री डिवीजन (भारत) | 8 माउंटेन डिवीजन]] ([[Dras ]] ),<ref> [[Globalsecurity.org] https://web.archive.org/web/20081216152813/http://www.globalsecurity.org/military/world/india/northcom.htm, दिसंबर 2007 पहुँचा तोपखाना ब्रिगेड </ref>
|-
| 15 वीं कोर
| [[श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर|श्रीनगर]], [[जम्मू और कश्मीर|जम्मू एवं कश्मीर]]
| उत्तरी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल मुकेश सभरवाल
| 19 इन्फैंट्री डिवीजन ([[बारामूला]]), 28 इन्फैंट्री डिवीजन [[गुरेज ]] , [[Bandipora जिला]]), तोपखाना ब्रिगेड
|-
|16 वाहिनी
| [[नगरोटा, जम्मू और कश्मीर|नगरोटा]], जम्मू एवं कश्मीर
| उत्तरी कमान
| लेफ्टिनेंट जनरल आर Karwal
| 10 Inf (डिव [[अखनूर ]]),<ref> इन्हें भी देखें https://web.archive.org/web/20081220184054/http://orbat.com/ site/cimh/divisions/10th%% 20Division 20orbat% 20Chaamb 201971.html% </ref> 25 Inf डिव ([[Rajauri]]), 39 Inf डिव ([[योल, भारत | योल]]), तोपखाना ब्रिगेड, बख़्तरबंद ब्रिगेड?
|}
==== रेजिमेंट संगठन ====
(फील्ड कोर ऊपर उल्लेख किया है के साथ भ्रमित होने की नहीं) इस के अलावा रेजिमेंट या कोर या विभागों भारतीय सेना के हैं। कोर नीचे उल्लेख किया कार्यात्मक विशिष्ट अखिल सेना कार्यों के साथ सौंपा डिवीजनों हैं।
# आर्मी डेंटल कोर
# सेना शिक्षा कोर - सेंटर में [[पचमढ़ी]].
# [[आर्मी मेडिकल कोर]] - सेंटर में <nowiki>[[लखनऊ]]</nowiki>.
# सेना आयुध कोर में केंद्र [[जबलपुर]] और [[सिकंदराबाद]].
# सेना डाक सेवा कोर
# सेना सेवा कोर - [[बंगलौर]] पर केंद्र
# वाहिनी इलेक्ट्रिकल और भोपाल में मैकेनिकल इंजीनियर्स के केंद्र और [[सिकंदराबाद]].
# [[वाहिनी सैन्य पुलिस के]] [https://web.archive.org/web/20091102122238/http://en.wikipedia.org/wiki/Indian_Corps_of_Military_Police] - बंगलौर में केंद्र
# इंटेलीजेंस कोर - सेंटर में [[पुणे]].
# जज एडवोकेट जनरल विभाग. सैन्य विधि संस्थान में [[कैम्पटी ]] ,[[ नागपुर]].
# सैन्य फार्म सेवा
# [[मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (इंडिया) | मिलिट्री नर्सिंग सर्विस]]
# रिमाउंट और वेटेनरी कोर
# पायनियर कोर
# भारतीय इन्फैन्ट्री रेजिमेंट
# आर्मड रेजिमेंट कोर - बख्तरबंद कोर स्कूल और सेंटर [अहमदनगर []]
# आर्टिलरी रेजिमेंट - आर्टिलरी स्कूल में [[देवलाली]] के निकट [[नासिक]].
# [[भारतीय सेना के कोर इंजीनियर्स | कोर ऑफ इंजीनियर्स] - दपोदी पर सैन्य अभियांत्रिकी कालेज, [[पुणे]]. केंद्र इस प्रकार है - [[मद्रास इंजीनियर ग्रुप]] [[बंगलौर]], [[बंगाल इंजीनियर ग्रुप]] [[रुड़की]] और [[बॉम्बे इंजीनियर ग्रुप]] Khadki में, [[पुणे]] के रूप में स्थित हैं .
# आर्मी एयर डिफेंस सेंटर कोर [[गोपालपुर]] [[ओडिशा|उड़ीसा]] राज्य.
# मैकेनाइज्ड इंफेंट्री अहमदनगर - पर रेजिमेंटल केंद्र [[]].
# सिग्नल कोर
# सेना उड्डयन कोर
{{भारतीय सेना के शस्त्र और सेवाएँ}}
== रेजिमेंट ==
वहाँ कई बटालियनों या इकाइयों के एक रेजिमेंट में वही गठन के अंतर्गत हैं। गोरखा रेजिमेंट, उदाहरण के लिए, कई बटालियनों है। एक रेजिमेंट के तहत सभी संरचनाओं के एक ही हथियार या कोर (यानी, इन्फैंट्री या इंजीनियर्स) की बटालियनों हैं। रेजिमेंट बिल्कुल क्षेत्र संरचनाओं नहीं कर रहे हैं, वे ज्यादातर एक गठन नहीं कर सकता हूँ. गोरखा उदाहरण के लिए सभी रेजिमेंट के एक साथ एक गठन के रूप में लड़ना नहीं है, लेकिन विभिन्न ब्रिगेड या कोर या भी आदेश पर फैलाया जा सकता है।
===इंफैंट्री रेजिमेंट्स (32)===
वरीयता के आधार पर:<ref>{{cite web | url=http://www.bharat-rakshak.com/LAND-FORCES/Units/Infantry.html?layout=default | title=Infantry Regiments | publisher=Bharat Rakshak | date=2008 | accessdate=24 January 2014 | archive-date=7 अक्तूबर 2013 | archive-url=https://web.archive.org/web/20131007164813/http://bharat-rakshak.com/LAND-FORCES/Units/Infantry.html?layout=default | url-status=dead }}</ref>
* [[गार्ड ब्रिगेड]]
* [[पैराशूट रेजिमेंट]]
* [[मैकेनाइज़्ड इन्फेंट्री रेजिमेंट]]
* [[पंजाब रेजिमेंट|पंजाब रेजिमेंट्स]]
* [[मद्रास रेजिमेंट]]
* [[ग्रेनेडियर्स]]
* [[मराठा लाइट इन्फेंट्री]]
* [[राजपूताना राइफल्स]]
* [[राजपूत रेजिमेंट]]
* [[जाट रेजिमेंट]]
* [[सिख रेजिमेंट]]
* [[सिख लाइट इन्फेंट्री]]
* [[डोगरा रेजिमेंट]]
* [[गढ़वाल राइफल्स]]
* [[कुमाऊं रेजिमेंट]]
* [[असम रेजिमेंट]]
* [[बिहार रेजिमेंट]]
* [[माहर रेजिमेंट]]
* [[जम्मू कश्मीर राइफल्स]]
* [[जम्मू कश्मीर लाइट इन्फेंट्री]]
* [[नागा रेजिमेंट]]
* [[1 गोरखा राइफल्स]]
* [[3 गोरखा राइफल्स]]
* [[4 गोरखा राइफल्स]]
* [[5 गोरखा राइफल्स|5 गोरखा राइफल्स (फ्रंटियर फ़ोर्स)]]
* [[8 गोरखा राइफल्स]]
* [[9 गोरखा राइफल्स]]
* [[11 गोरखा राइफल्स]]
* [[लद्दाख स्काउट्स]]
* [[राष्ट्रीय राइफल्स]]
* [[अरुणाचल स्काउट्स]]
* [[सिक्किम स्काउट्स]]
===एक नज़र में व्याख्या===
{| class="wikitable sortable" border="1"
|-
! रेजिमेंट
! से सक्रिय
! रेजिमेंट का केंद्र
! आदर्श वाक्य (मोटो)
! युद्ध घोष (वॉर क्राई)
|-
| [[1 गोरखा राइफल्स]]
| 1815
| सुबाथु, हिमाचल प्रदेश
| कायर हुनु भन्दा मर्नु राम्रो
| जय महाकाली, आयो गोरखाली
|-
| [[3 गोरखा राइफल्स ]]
| 1815
| वाराणसी, उत्तर प्रदेश
| कायर हुनु भन्दा मर्नु राम्रो
| जय महाकाली, आयो गोरखाली
|-
| [[4 गोरखा राइफल्स ]]
| 1857
| सुबथु, हिमाचल प्रदेश
| कायर हुनु भन्दा मर्नु राम्रो
| जय महाकाली, आयो गोरखाली
|-
| [[5 गोरखा राइफल्स ]]
| 1858
| शिलोंग, मेघालय
| शौर्य एवं निष्ठा
| जय महाकाली, आयो गोरखाली
|-
| [[8 गोरखा राइफल्स ]]
| 1824
|शिलोंग, मेघालय
| कायर हुनु भन्दा मर्नु राम्रो
| जय महाकाली, आयो गोरखाली
|-
| [[9 गोरखा राइफल्स ]]
| 1817
| वाराणसी, उत्तर प्रदेश
| कायर हुनु भन्दा मर्नु राम्रो
| जय महाकाली, आयो गोरखाली
|-
| [[11 गोरखा राइफल्स ]]
| 1918-1922; 1948 से
| लखनऊ, उत्तर प्रदेश
| यत्राहम् विजयस्तत्रः
| जय महाकाली, आयो गोरखाली
|-
| [[गढ़वाल राइफल्स]]
| 1887
| लैंसडौन, भारत
| युद्ध कीर्ति निश्चय
| बद्री विशाल लाल की जय
|-
| [[गार्ड ब्रिगेड]]
| 1948
| कैम्पटी, महाराष्ट्र
| पहला हमेशा पहला
| गरुड़ का हूँ बोल प्यारे
|-
| [[बिहार रेजिमेंट ]]
| 1941
| दानापुर, बिहार
| करम ही धरम
| जय बजरंगबली
|-
| [[पैराशूट रेजिमेंट ]]
| 1945
| बैंगलोर, कर्नाटक
| शत्रुजीत
| सर्वदा शक्तिशाली
|-
| [[पंजाब रेजिमेंट (भारत)|पंजाब रेजिमेंट]]
| 1761
| रामगढ़ छावनी, [[झारखंड]]
| स्थल व जल
| जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल
|-
| [[मद्रास रेजिमेंट]]
| 1758
| वेलिंगटन, तमिलनाडू
| स्वधर्मे निधनं श्रेयः
| वीरा मद्रासी, अडी कोलू, अडी कोलू
|-
| [[ग्रेनेडियर रेजिमेंट]]
| 1758
| जबलपुर, मध्य प्रदेश
| सर्वदा शक्तिशाली
| आदर्श वाक्य के समान
|-
| [[मराठा लाइट इन्फेंट्री]]
| 1768
| बेलगाम, कर्नाटक
| ड्यूटी, ऑनर, करेज
| बोल छत्रपति शिवजी महाराज की जय, तेमलाइ माता की जय!
|-
| [[राजपूताना राइफल्स]]
| 1775
| [[दिल्ली छावनी]]
| वीर भोग्य: वसुंधरा
| राजा राम चंद्र की जय
|-
| [[राजपूत रेजिमेंट]]
| 1778
| [[फतेहगढ़]], उत्तर प्रदेश
| सर्वत्र विजय
| बोल बजरंग बाली की जय
|-
| [[जाट रेजिमेंट]]
| 1795
| बरेली, उत्तर प्रदेश
| संगठन व वीरता
| जाट बलवान, जय भगवान
|-
| [[सिख रेजिमेंट ]]
| 1846
| रामगार्घ छावनी , झारखंड
| निश्चय कर अपनी जीत करूँ
| जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल
|-
| [[सिख लाइट इन्फेंट्री]]
| 1944
| [[फतेहगढ़]], उत्तर प्रदेश
| देग तेग फ़तेह
| जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल
|-
| [[डोगरा रेजिमेंट ]]
| 1877
| फैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश
| कर्तव्यम् अनवतं
| ज्वाला माता की जय
|-
| [[कुमाऊं रेजिमेंट]]
| 1813
| रानीखेत, उत्तराखंड
| पराक्रमो विजयते
| कालिका माता की जय
बजरंग बाली की जय
दादा किशन की जय
जय दुर्गे
|-
| [[माहर रेजिमेंट]]
| 1941
| सागर, मध्य प्रदेश
| यश सिद्धि
| बोलो भारत माता की जय
|-
|}
=== आर्मरड रेजिमेंट्स (62) ===
{{See also|भारतीय सेना के आर्मर्ड दस्ते}}
* [[राष्ट्रपति के सुरक्षागार्ड (भारत)|राष्ट्रपति के सुरक्षागार्ड]]
* [[स्किनर्स हॉर्स|1 हॉर्स]] या [[स्किनर्स हॉर्स]]
* [[2nd लैंसर्स (गार्डनर्स हॉर्स)|2 लैंसर्स]]
* [[3rd कैवेलरी (भारत)|3rd कैवेलरी]]
* [[4th ड्यूक ऑफ़ कैंब्रिज का अपना हडसन्स हॉर्स|4 हॉर्स]] या 'हडसन्स हॉर्स'
* [[5 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[6 आर्मर्ड रेजिमेंट|6 लैंसर्स]]
* [[7वी लाइट कैवेलरी|7 कैवेलरी]]
* [[8वी किंग जॉर्ज की अपनी लाइट कैवेलरी|8 कैवेलरी]]
* [[9वी रॉयल डेक्कन हॉर्स|9 हॉर्स]] या 'डेक्कन हॉर्स'
* [[10 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* 11 आर्मर्ड रेजिमेंट
* [[12वी कैवेलरी|12 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[13 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[14वी प्रिंस ऑफ वेल्स का अपना स्किन्ड हॉर्स|14 हॉर्स]] या 'स्किन्ड/Scinde हॉर्स’
* [[15th लैंसर्स|15 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[16th लाइट कैवेलरी|16 कैवेलरी]]
* [[द पूना हॉर्स|17 हॉर्स]] ([[डी पूना हॉर्स]])
* [[18 कैवेलरी]]
* [[19 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[20 लैंसर्स]]
* [[सेंट्रल इंडियन हॉर्स]] (21वे स्थान पर)
* [[40 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[41 आर्मर्ड रेजिमेंट (भारत)|41 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[42 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[43 आर्मर्ड रेजिमेंट]]- एकमात्र आर्मर्ड रेजिमेंट स्टैंडर्ड हथियार के रूप में MBT अर्जुन टैंक के साथ।
* [[44 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[45 कैवेलरी]]
* [[46 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[47 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[48 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[49 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[50 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[51 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[52 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[53 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[61वी कैवेलरी रेजिमेंट (भारत)|61 कैवेलरी]]
* [[62वी कैवेलरी रेजिमेंट (भारत)|62 कैवेलरी]]
* [[63 कैवेलरी]]
* [[64 कैवेलरी]]
* [[65 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[66 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[67 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[68 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[69 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[70 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[71 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[72 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[73 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[74 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[75 आर्मर्ड रेजिमेंट]] - 12 मार्च 1971 के भारत पाक युद्ध के दौरान भारत की एकमात्र आर्मर्ड रेजिमेंट जिसे विदेशी जमीन पर उतार गया।
* [[76 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[81 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[82 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[83 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[84 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[85 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[86 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[87 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[88 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[89 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
* [[90 आर्मर्ड रेजिमेंट]]
==== तोपखाना रेजिमेंट (आर्टिलरी रेजिमेंट) ====
तोपखाना सेना के विध्वंसक शक्ति का मुख्य अंग है | भारत सभी प्राचीन ग्रंथों सभी तोपखाने का वर्णन मिलता है | तोप को संस्कृत सभी शतघ्नी कहा जाता है | मध्य कालीन इतिहास सभी तोप का प्रयोग सर्वप्रथम बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध सभी 1526 सन 0 ई सभी किया था | कुछ नवीन प्रमाणों से यहाँ प्रतीत होता है के तोप का प्रयोग बहमनी राजाओं 1368 ने सभी अदोनी के युद्ध सभी तथा गुजरात के शासक मोहमद शाह ने 15 वीं शताब्दी सभी किया था | भारत मे तोप खाना के दो केंद्र है।
===आर्टिलरी रेजिमेंट्स की इकाइयाँ===
आर्टिलरी की कुछ यूनिट्स नीचे प्रदशित की गयी हैं :
* 140 AAD regt (द स्काई लेन्सर्स)
* [[71st कुर्ग राइफल्स |37 कुर्ग एंटी-टैंक रेजिमेंट RIA]]
* [[9 Parachute फील्ड रेजिमेंट]]
* [[11 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[12 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[15 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[16 मीडियम रेजिमेंट]]
* (34 मीडियम रेजिमेंट(कैसिनो)
* [[38 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[40 फील्ड रेजिमेंट (असल उत्तर)]]
* [[42 फील्ड रेजिमेंट (DBN)]]
* [[56 फील्ड रेजिमेंट (JITRA)]]
* [[61 मीडियम रेजिमेंट]] (17वी माउंटेन डिवीज़न के साथ भी सेवा दी।)
* [[63 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[70 फील्ड रेजिमेंट ]] (सवियर्स)
* [[76 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[80 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[92 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[99 फील्ड रेजिमेंट (सयलहेत/Sylhet)]]
* [[106 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[161 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[163 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[168 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[169 फील्ड रेजिमेंट (लोंगेवाला)]]
* [[172 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[175 रेजिमेंट (फील्ड या मीडियम)]]
* [[191 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[193 मीडियम रेजिमेंट (सोलटॉम/Soltom)]]
* [[195 फील्ड रेजिमेंट (बनवत )]]
* [[200 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[216 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[223 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[228 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[237 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[253 मीडियम रेजिमेंट (माइटी मीडियम)]]
* [[255 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[274 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[286 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[298 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[307 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[311 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[314 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[315 फील्ड रेजिमेंट]]<ref>http://www.tribuneindia.com/2000/20000126/nation.htm#2</ref>
* [[821 Light रेजिमेंट]] बॉम्बर्स
* [[3342 msl regt]]
* [[110 मीडियम रेजिमेंट]]
* [[279 SATA Bty]]
* [[91 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[122 SATA रेजिमेंट]]
* [[125 SATA रेजिमेंट (सवा लाख)]] हेरॉन UAV युक्त भारत की पहली रेजिमेंट।
* [[161 फील्ड रेजिमेंट]]
* [[861 रेजिमेंट]] ब्रह्मोस से युक्त (ब्लॉक I)
* [[862 रेजिमेंट]] ब्रह्मोस से युक्त (ब्लॉक II)
* [[863 रेजिमेंट]] ब्रह्मोस से युक्त (ब्लॉक II)
* [[864 रेजिमेंट]] ब्रह्मोस से युक्त (ब्लॉक III)
* [[170 मीडियम रेजिमेंट]] (वीर राजपूत)
=== इंजीनियर समूह===
इन को ब्रिटिश भारत की तत्कालीन प्रेसीडेंसियों में से प्रत्येक सैपर और खान समूह में से गठित किया गया। ये वरीयता क्रम में नीचे सूचीबद्ध हैं:
* [[मद्रास सैपर्स ]]
* [[बंगाल सैपर्स ]]
* [[बॉम्बे सैपर्स ]]
== युद्ध सिद्धान्त ==
भारतीय सेना के वर्तमान सिद्धांत का मुकाबला प्रभावी ढंग से पकड़े संरचनाओं और हड़ताल संरचनाओं के उपयोग पर आधारित है। एक हमले के मामले में पकड़े संरचनाओं दुश्मन होते हैं और हड़ताल संरचनाओं दुश्मन ताकतों को बेअसर पलटवार होगा. एक भारतीय हमले के मामले में पकड़े संरचनाओं दुश्मन ताकतों नीचे पिन भारतीय को चुनने के एक बिंदु पर whilst हड़ताल संरचनाओं हमले. भारतीय सेना काफी बड़ी हड़ताल भूमिका के लिए कई कोर समर्पित है। वर्तमान में, सेना अपने [[विशेष बलों]] क्षमताओं को बढ़ाने में भी देख रहा है।
== उपस्कर एवं उपकरण ==
[[चित्र: अर्जुन एमबीटी टक्कर ट्रैक test.JPG | सही | अंगूठे | [[एमबीटी अर्जुन ]].]]
[[चित्र: भारतीय सेना टी 90.jpg | अंगूठे | [[T-90 | भीष्म टी 90] एमबीटी]]
[[चित्र: भारतीय सेना T-72 image1.jpg | अंगूठे | सही | [[टी 72] अजेय]]
[[चित्र: Defexpo NAMICA साथ नाग - 2008.JPG | सही | अंगूठे | [[नाग प्रक्षेपास्त्र|नाग मिसाइल]] और NAMICA (नाग मिसाइल वाहक)]]
{{मुख्य | भारतीय सेना के उपकरण}}
सेना के उपकरणों के अधिकांश आयातित है, लेकिन प्रयासों के लिए स्वदेशी उपकरणों के निर्माण किए जा रहे हैं। सभी भारतीय सैन्य आग्नेयास्त्रों बंदूकें आयुध निर्माणी बोर्ड की छतरी के प्रशासन के तहत निर्मित कर रहे हैं, ईशापुर में प्रिंसिपल बन्दूक विनिर्माण सुविधाओं के साथ, [[काशीपुर, उत्तराखण्ड|काशीपुर]], कानपुर, जबलपुर और तिरूचिरापल्ली. भारतीय राष्ट्रीय लघु शस्त्र प्रणाली (INSAS) राइफल है, जो सफलतापूर्वक 1997 के बाद से भारतीय सेना द्वारा शामिल Ordanance निर्माणी बोर्ड, ईशापुर के एक उत्पाद है। जबकि गोला बारूद किरकी (अब Khadki) में निर्मित है और संभवतः बोलंगीर पर.
== भारतीय सेना में कैसे शामिल हों ==
<ref>{{Cite web|url=https://alljobs.co.in/career/how-to-join-indian-army/|title=How To Join Indian Army|last=Career|first=Guide|date=2022-01-11GMT+000011:44:48+00:00|website=Career guide|language=en-US|access-date=2022-01-18|archive-date=15 जनवरी 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20220115083729/https://alljobs.co.in/career/how-to-join-indian-army/|url-status=dead}}</ref>
* सैनिक सामान्य ड्यूटी
* सैनिक व्यापारी
* एनडीए परीक्षा के माध्यम से
* तकनीकी प्रवेश योजना
* सैनिक प्रवेश योजना
https://anilsiriti.in/wp-content/uploads/2023/04/AITT-CTS-Schedule-2023.png {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20230502123215/https://anilsiriti.in/wp-content/uploads/2023/04/AITT-CTS-Schedule-2023.png |date=2 मई 2023 }}
== भारतीय थल सेना की नई दिशा ==
* मेजर कैलाश चौधरी ाहरी खतरों के विरुद्ध शक्ति सन्तुलन के द्वारा या युद्ध छेड़ने की स्थिति में संरक्षित राष्ट्रीय हितों, सम्प्रभुता की रक्षा, क्षेत्रीय अखण्डता और भारत की एकता की रक्षा करना।
* सरकारी तन्त्र को छाया युद्ध और आन्तरिक खतरों में मदद करना और आवश्यकता पड़ने पर नागरिक अधिकारों में सहायता करना।"<ref>{{Cite web |url=http://indianarmy.nic.in/indianarmydoctrine_1.doc |title=Indian Army doctrine |access-date=12 जनवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071201062843/http://indianarmy.nic.in/indianarmydoctrine_1.doc |archive-date=1 दिसंबर 2007 |url-status=dead }}</ref>
*दैवीय आपदा जैसे भूकम्प, बाढ़, समुद्री तूफान ,आग लगने ,विस्फोट आदि के अवसर पर नागरिक प्रशासन की मदद करना।
*नागरिक प्रशासन के पंगु होने पर उसकी सहायता करना।
== इन्हें भी देखें ==
* [[भारतीय सशस्त्र सेनाएँ|भारतीय सशस्त्र सेनाएं]]
* [[ब्रिटिश भारतीय सेना]]
* [[आज़ाद हिन्द फ़ौज]]
* [[प्रादेशिक सेना]]
* [[भारतीय सेनाएं सशस्त्र]]
* [[ब्रिटिश भारतीय सेना]]
* [[आज़ाद हिन्द फ़ौज|इंडियन नेशनल आर्मी]]
* [[भारतीय प्रादेशिक सेना]]
== बाहरी कड़ियाँ ==
{{Commonscat|Army of India}}
* [https://web.archive.org/web/20170626223336/https://indianarmy.nic.in/ Official website of the Indian Army]
* [https://web.archive.org/web/20070102002543/http://armedforces.nic.in/ Official website of the Indian Armed Forces]
* [https://web.archive.org/web/20090202122230/http://mod.nic.in/ Official website of the Defence Ministry of India]
* [https://web.archive.org/web/20041206180157/http://www.bharat-rakshak.com/LAND-FORCES/Army/ Bharat Rakshak: Indian Army]
* [https://web.archive.org/web/20160106003728/http://www.globalsecurity.org/military/world/india/army.htm Indian army guide]
* [https://web.archive.org/web/20070909104627/http://frontierindia.net/category/indian-army-news/ Indian Army news]
== सन्दर्भ ==
{{reflist|2}}
{{भारतीय सेना}}
[[श्रेणी:भारतीय सेना]]
dvq83glw8fvysztlqzfj7lsqhfrcgzx
जीवाणु
0
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2026-10-18T08:19:10Z
Anitya Gautam
916080
6630654
wikitext
text/x-wiki
{{आज का आलेख}}
{{Taxobox
| name = जीवाणु (बैक्टीरिया)
| image = E. coli Bacteria (7316101966).jpg
| image_caption = [[ ऐशेरिशिया कोलाई]] <br><small>Escherichia coli</small>
| domain = [[जीवाणु]] <small>(Bacteria)</small>
| domain_authority = <small>वूज़, कैंडलर और व्हीलिस, 1990</small>
| subdivision_ranks = [[संघ (जीवविज्ञान)|संघ]]
| subdivision =
* <small>''[[ऐसिडोबैक्टीरिया]] (Acidobacteria)''</small>
* <small>''[[ऐक्टीनोबैक्टीरिया]] (Actinobacteria)''</small>
* <small>''[[ऐक्वीफ़िसी]] (Aquificae)''</small>
* <small>''[[आर्माटीमोनाडीटीस]] (Armatimonadetes)''</small>
* <small>''[[बैक्टीरोइडिटीस]] (Bacteroidetes)''</small>
* <small>''[[कैल्डीसेरिका]] (Caldiserica)''</small>
* <small>''[[क्लैमिडियाई]] (Chlamydiae)''</small>
* <small>''[[क्लोरोबी]] (Chlorobi)''</small>
* <small>''[[क्लोरोफ़्लेक्सी (संघ)|क्लोरोफ़्लेक्सी]] (Chloroflexi)''</small>
* <small>''[[क्रिसियोगिनीटीस]] (Chrysiogenetes)''</small>
* <small>''[[सायनोबैक्टीरिया]] (Cyanobacteria)''</small>
* <small>''[[:en:Deferribacteres|Deferribacteres]]''</small>
* <small>''[[डायनोकोक्कस-थर्मस]] (Deinococcus-Thermus)''</small>
* <small>''[[:en:Dictyoglomi|Dictyoglomi]]''</small>
* <small>''[[:en:Elusimicrobia|Elusimicrobia]]''</small>
* <small>''[[:en:Fibrobacteres|Fibrobacteres]]''</small>
* <small>''[[फ़र्मीक्यूटीस]] (Firmicutes)''</small>
* <small>''[[:en:Fusobacteria|Fusobacteria]]''</small>
* <small>''[[:en:Gemmatimonadetes|Gemmatimonadetes]]''</small>
* <small>''[[:en:Lentisphaerae|Lentisphaerae]]''</small>
* <small>''[[नाइट्रोस्पिराए]] (Nitrospirae)''</small>
* <small>''[[:en:Planctomycetes|Planctomycetes]]''</small>
* <small>''[[प्रोटियोबैक्टीरिया]] (Proteobacteria)''</small>
* <small>''[[स्पाइरोकीट]] (Spirochaetes)''</small>
* <small>''[[:en:Synergistetes|Synergistetes]]''</small>
* <small>''[[:en:Tenericutes|Tenericutes]]''</small>
* <small>''[[:en:Thermodesulfobacteria|Thermodesulfobacteria]]''</small>
* <small>''[[:en:Thermotogae|Thermotogae]]''</small>
* <small>''[[:en:Verrucomicrobia|Verrucomicrobia]]''</small>
}}
'''जीवाणु''' (Bacteria) [[सूक्ष्म जीव]] हैं जो प्रायः [[कोशिका|एककोशिकीय]] होते हैं। ये [[अकेन्द्रिक]], [[कोशिका भित्ति|कोशिका भित्तियुक्त]], [[कोशिका|एककोशकीय]] सरल जीव हैं और प्रायः सर्वत्र पाये जाते हैं। इनका आकार कुछ मिलिमीटर तक ही होता हैं। इनकी आकृति गोल या मुक्त-चक्राकार से लेकर छड़ आदि के आकार की हो सकती हैं। ये पृथ्वी पर मिट्टी में, अम्लीय, गर्म जल-धाराओं में, नाभिकीय पदार्थों में<ref>{{cite journal |author=Fredrickson J, Zachara J, Balkwill D, ''et al'' |title=Geomicrobiology of high-level nuclear waste-contaminated vadose sediments at the Hanford site, Washington state |url=http://aem.asm.org/cgi/content/full/70/7/4230?view=long&pmid=15240306 |journal=Appl Environ Microbiol |volume=70 |issue=7 |pages=4230–41 |year=2004 |pmid=15240306 |doi=10.1128/AEM.70.7.4230-4241.2004 |access-date=14 सितंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080929074759/http://aem.asm.org/cgi/content/full/70/7/4230?view=long&pmid=15240306 |archive-date=29 सितंबर 2008 |url-status=live |issn = 0099-2240}}</ref>, जल में, भू-पपड़ी में, यहां तक की कार्बनिक पदार्थों में तथा पौधौं एवं जन्तुओं के शरीर के भीतर भी पाये जाते हैं। साधारणतः एक ग्राम मिट्टी में ४ करोड़ जीवाणु [[कोशिका|कोष]] तथा १ मिलीलीटर जल में १० लाख जीवाणु पाए जाते हैं।
सम्पूर्ण पृथ्वी पर जीवाणुओं की कुल संख्या अनुमानतः लगभग ५x१०<sup>३०</sup> होगी <ref name="pnas_1">{{cite journal |author=Whitman W, Coleman D, Wiebe W |title=Prokaryotes: the unseen majority |url=http://www.pnas.org/cgi/content/full/95/12/6578 |journal=Proc Natl Acad Sci U S a |volume=95 |issue=12 |pages=6578–83 |year=1998 |pmid=9618454 |doi=10.1073/pnas.95.12.6578 |access-date=14 सितंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080305184844/http://www.pnas.org/cgi/content/full/95/12/6578 |archive-date=5 मार्च 2008 |url-status=live }}</ref> जो संसार के [[बायोमास]] का एक बहुत बड़ा भाग है।<ref name="pnas_1" /> ये कई तत्वों के चक्र में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं, जैसे कि वायुमंडलीय [[नाइट्रोजन]] के स्थरीकरण में। हलाकि बहुत सारे वंश के जीवाणुओं का श्रेणी विभाजन भी नहीं हुआ है तथापि लगभग आधी प्रजातियों को किसी न किसी प्रयोगशाला में उगाया जा चुका है।<ref name="Rappe">{{cite journal |author=Rappé MS, Giovannoni SJ |title=The uncultured microbial majority |url=https://archive.org/details/sim_annual-review-of-microbiology_2003_57/page/369 |journal=Annu. Rev. Microbiol. |volume=57 |issue= |pages=369–94 |year=2003 |pmid=14527284 |doi=10.1146/annurev.micro.57.030502.090759}}</ref> जीवाणुओं का अध्ययन [[बैक्टिरियोलोजी]] के अन्तर्गत किया जाता है जो कि [[सूक्ष्मजैविकी| सूक्ष्म जैविकी]] की ही एक शाखा है।
मानव शरीर में जितनी भी मानव कोशिकाएं है, उसकी लगभग १० गुणा संख्या तो जीवाणु कोष की ही है। इनमें से अधिकांश जीवाणु त्वचा तथा [[आहार नाल|अहार-नाल]] में पाए जाते हैं।<ref>{{cite journal |author=Sears CL |title=A dynamic partnership: celebrating our gut flora |journal=Anaerobe |volume=11 |issue=5 |pages=247–51 |year=2005 |pmid=16701579 |doi=10.1016/j.anaerobe.2005.05.001}}</ref> हानिकारक जीवाणु [[इम्यून तंत्र]] के रक्षक प्रभाव के कारण शरीर को नुकसान नहीं पहुंचा पाते। कुछ जीवाणु लाभदायक भी होते हैं। अनेक प्रकार के परजीवी जीवाणु कई रोग उत्पन्न करते हैं, जैसे - [[ हैजा]] , मियादी बुखार, [[ निमोनिया]] , [[तपेदिक]] या [[क्षयरोग]], [[प्लेग]] इत्यादि। केवल क्षय रोग से ही प्रतिवर्ष लगभग २० लाख लोग मरते हैं, जिनमें से अधिकांश उप-सहारा क्षेत्र के होते हैं।<ref>{{cite web | url = http://www.who.int/healthinfo/bodgbd2002revised/en/index.html | title = 2002 WHO mortality data | accessdate = 2007-01-20 | archive-url = https://web.archive.org/web/20131023060502/http://www.who.int/healthinfo/bodgbd2002revised/en/index.html | archive-date = 23 अक्तूबर 2013 | url-status = live }}</ref>
विकसित देशों में जीवाणुओं के संक्रमण का उपचार करने के लिए तथा कृषि कार्यों में [[प्रतिजैविक]] का उपयोग होता है, इसलिए जीवाणुओं में इन प्रतिजैविक दवाओं के प्रति प्रतिरोधक शक्ति विकसित होती जा रही है। औद्योगिक क्षेत्र में जीवाणुओं की किण्वन क्रिया द्वारा [[दही]], [[पनीर]] इत्यादि वस्तुओं का निर्माण होता है। इनका उपयोग प्रतिजैविकी तथा और रसायनों के निर्माण में तथा [[जैवप्रौद्योगिकी]] के क्षेत्र में होता है।<ref>{{cite journal |author=Ishige T, Honda K, Shimizu S |title=Whole organism biocatalysis |journal=Curr Opin Chem Biol |volume=9 |issue=2 |pages=174–80 |year=2005 |pmid=15811802 |doi=10.1016/j.cbpa.2005.02.001}}</ref>
पहले जीवाणुओं को पौधा माना जाता था परंतु अब उनका वर्गीकरण [[प्रोकैरियोट्स]] के रूप में होता है। दूसरे जन्तु कोशिकों तथा [[यूकैरियोट्स]] की भांति जीवाणु कोष में पूर्ण विकसित [[केन्द्रक]] का सर्वथा अभाव होता है जबकि दोहरी [[झिल्ली]] युक्त कोशिकांग यदा कदा ही पाए जाते है। पारंपरिक रूप से जीवाणु शब्द का प्रयोग सभी सजीवों के लिए होता था, परंतु यह वैज्ञानिक वर्गीकरण [[१९९०]] में हुई एक खोज के बाद बदल गया जिसमें पता चला कि प्रोकैरियोटिक सजीव वास्तव में दो भिन्न समूह के जीवों से बने हैं जिनका [[क्रम विकास]] एक ही पूर्वज से हुआ। इन दो प्रकार के जीवों को जीवाणु एवं [[आर्किया]] कहा जाता है।<ref name="autogenerated2">{{cite journal |author=Woese C, Kandler O, Wheelis M |title=Towards a natural system of organisms: proposal for the domains Archaea, Bacteria, and Eucarya |url=http://www.pnas.org/cgi/reprint/87/12/4576 |journal=Proc Natl Acad Sci U S a |volume=87 |issue=12 |pages=4576–9 |year=1990 |pmid=2112744 |doi=10.1073/pnas.87.12.4576 |access-date=17 सितंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080627233102/http://www.pnas.org/cgi/reprint/87/12/4576 |archive-date=27 जून 2008 |url-status=live }}</ref>
== इतिहास ==
[[चित्र:Louis Pasteur.jpg|thumb|200px|right|[[लूई पाश्चर]]]]
जीवाणुओं को सबसे पहले [[१६७६]] ई. में डच वैज्ञानिक [[एण्टनी वाँन ल्यूवोनहूक]] ने एकल [[लेंस]] वाले [[सूक्ष्मदर्शी यंत्र]] से देखा था जिसे उसने स्वयं बनाया था। <ref>{{cite journal |author=Porter JR |title=Antony van Leeuwenhoek: Tercentenary of his discovery of bacteria |journal=Bacteriological reviews |volume=40 |issue=2 |pages=260–269 |year=1976 |pmid=786250 |doi= |url=http://mmbr.asm.org/cgi/pmidlookup?view=long&pmid=786250 |access-date=30 सितंबर 2008 |archive-url=https://archive.today/20120530194602/http://mmbr.asm.org/cgi/pmidlookup?view=long&pmid=786250 |archive-date=30 मई 2012 |url-status=live }}</ref> परन्तु उस समय उसने इन्हें [[जंतुक]] (animalcule) समझा था। अपने अवलोकनों की पुष्टि के लिए उसने रायल सोसाइटी को कई पत्र लिखे।<ref>{{cite journal |author=van Leeuwenhoek A |title=An abstract of a letter from Mr. Anthony Leevvenhoek at Delft, dated Sep. 17, 1683, Containing Some Microscopical Observations, about Animals in the Scurf of the Teeth, the Substance Call'd Worms in the Nose, the Cuticula Consisting of Scales |url=http://www.journals.royalsoc.ac.uk/content/120136/?k=Sep.+17%2c+1683 |journal=Philosophical Transactions (1683–1775) |volume=14 |pages=568–574 |year=1684 |accessdate=2007-08-19 }}{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref><ref>{{cite journal |author=van Leeuwenhoek A |title=Part of a Letter from Mr Antony van Leeuwenhoek, concerning the Worms in Sheeps Livers, Gnats, and Animalcula in the Excrements of Frogs |url=http://www.journals.royalsoc.ac.uk/link.asp?id=4j53731651310230 |journal=Philosophical Transactions (1683–1775) |volume=22 |pages=509–518 |year=1700 |accessdate=2007-08-19 }}{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref><ref>{{cite journal |author=van Leeuwenhoek A |title=Part of a Letter from Mr Antony van Leeuwenhoek, F. R. S. concerning Green Weeds Growing in Water, and Some Animalcula Found about Them |url=http://www.journals.royalsoc.ac.uk/link.asp?id=fl73121jk4150280 |journal=Philosophical Transactions (1683-1775) |volume=23 |pages=1304–11 |year=1702 |accessdate=2007-08-19 |doi=10.1098/rstl.1702.0042 }}{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
१६८३ ई. में ल्यूवेनहॉक ने जीवाणु का चित्रण कर अपने मत की पुष्टि की। [[१८६४]] ई. में फ्रांसनिवासी [[लूई पाश्चर]] तथा [[१८९०]] ई. में कोच ने यह मत व्यक्त किया कि इन जीवाणुओं से रोग फैलते हैं।<ref>{{cite web | url = http://biotech.law.lsu.edu/cphl/history/articles/pasteur.htm#paperII | title = Pasteur's Papers on the Germ Theory | publisher = LSU Law Center's Medical and Public Health Law Site, Historic Public Health Articles | accessdate = 2006-11-23 | archive-url = https://web.archive.org/web/20171108031227/https://biotech.law.lsu.edu/cphl/history/articles/pasteur.htm#paperII | archive-date = 8 नवंबर 2017 | url-status = dead }}</ref>
पाश्चर ने [[१९८९]] में प्रयोगों द्वारा यह दिखाया कि [[किण्वन]] की रासायनिक क्रिया सूक्ष्म जीवों द्वारा होती है। कोच [[सूक्ष्मजैविकी]] के क्षेत्र में युगपुरूष माने जाते हैं, इन्होंने [[हैजा]], ऐन्थ्रेक्स तथा [[क्षय रोग|क्षय रोगों]] पर गहन अध्ययन किया। अंततः कोच ने यह सिद्ध कर दिया कि कई रोग सूक्ष्म जीवों के कारण होते हैं। इसके लिए [[१९०५]] ई. में उन्हें [[नोबेल पुरस्कार]] से सम्मानित किया गया।<ref>{{cite web | url = http://nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/laureates/1905/ | title = The Nobel Prize in Physiology or Medicine 1905 | publisher = Nobelprize.org | accessdate = 2006-11-22 | archive-url = https://web.archive.org/web/20061210184150/http://nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/laureates/1905/ | archive-date = 10 दिसंबर 2006 | url-status = live }}</ref> कोच न रोगों एवं उनके कारक जीवों का पता लगाने के लिए कुछ परिकल्पनाएं की थी जो आज भी इस्तेमाल होती हैं।<ref>{{cite journal |author=O'Brien S, Goedert J |title=HIV causes AIDS: Koch's postulates fulfilled |journal=Curr Opin Immunol |volume=8 |issue=5 |pages=613–618 |year=1996 |pmid=8902385 |doi=10.1016/S0952-7915(96)80075-6}}</ref>
१९वीं शताब्दी तक सभी जान गए थे कि जीवाणु कई रोगों के कारक हैं, फिर भी किसी प्रभावी [[प्रतिजैविक]] की खोज नहीं हो सकी।<ref>{{cite journal |author=Thurston A |title=Of blood, inflammation and gunshot wounds: the history of the control of sepsis |journal=Aust N Z J Surg |volume=70 |issue=12 |pages=855–61 |year=2000 |pmid=11167573 |doi=10.1046/j.1440-1622.2000.01983.x}}</ref> सबसे पहले प्रतिजैविक का आविष्कार [[१९१०]] में पॉल एहरिच ने किया जिससे [[सिफलिस]] रोग की चिकित्सा सम्भव हो सकी।<ref>{{cite journal |author=Schwartz R |title=Paul Ehrlich's magic bullets |url=https://archive.org/details/sim_new-england-journal-of-medicine_2004-03-11_350_11/page/1078 |journal=N Engl J Med |volume=350 |issue=11 |pages=1079–80 |year=2004|pmid = 15014180 |doi=10.1056/NEJMp048021}}</ref> इसके लिए [[१९०८]] ई. में उन्हें [[चिकित्साशास्त्र]] में [[नोबेल पुरस्कार]] प्रदान किया गया। इन्होंने जीवाणुओं को अभिरंजित करने की कारगर विधियां खोज निकाली, जिनके आधार पर ग्राम स्टेन की रचना संभव हुई।<ref>{{cite web | url = http://nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/laureates/1908/ehrlich-bio.html | title = Biography of Paul Ehrlich | publisher = Nobelprize.org | accessdate = 2006-11-26 | archive-url = https://web.archive.org/web/20061128093700/http://nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/laureates/1908/ehrlich-bio.html | archive-date = 28 नवंबर 2006 | url-status = live }}</ref>
== उत्पत्ति एवं क्रमविकास ==
आधुनिक जीवाणुओं के पूर्वज वे एक कोशिकीय [[सूक्ष्मजीव]] थे, जिनकी उत्पत्ति ४० करोड़ वर्ष पूर्व पृथ्वी पर जीवन के आरम्भ के समय हुई। इसके बाद लगभग ३० करोड़ वर्ष तक पृथ्वी पर जीवन के नाम पर सूक्ष्मजीव ही थे। इनमें जीवाणु तथा [[आर्किया]] मुख्य थे।<ref>{{cite journal |author=Schopf J |title=Disparate rates, differing fates: tempo and mode of evolution changed from the Precambrian to the Phanerozoic |journal=Proc Natl Acad Sci U S a |volume=91 |issue=15 |pages=6735–42 |year=1994 |pmid=8041691 |pmc=44277 |doi=10.1073/pnas.91.15.6735 |url=http://www.pnas.org/cgi/pmidlookup?view=long&pmid=8041691}}</ref><ref>{{cite journal |author=DeLong E, Pace N |title=Environmental diversity of bacteria and archaea |journal=Syst Biol |volume=50 |issue=4 |pages=470–78 |year=2001|pmid = 12116647 |doi=10.1080/106351501750435040}}</ref> स्ट्रोमेटोलाइट्स जैसे जीवाणुओं के [[जीवाश्म]] पाये गए हैं परन्तु इनकी अस्पष्ट बाह्य संरचना के कारण जीवाणुओं को समझने में इनसे कोई खास मदद नहीं मिली।
== वर्गीकरण ==
जीवाणुओं का वर्गीकरण आकृति के अनुसार किया जाता है। उदाहरण-
1. [[दण्डाणु]] (बैसिलाइ) – दंड जैसे,
2. गोलाणु (कोक्काई)- बिन्दु जैसे,
3. सर्पिलाणु (स्पिरिलाइ) – लहरदार आदि।
[[चित्र:Bacterial morphology diagram.svg|center|500px|thumb|जीवाणु आकारिकी]]
==मानव के विभिन्न अंगों को प्रभावित करने वाले जीवाणु==
[[चित्र:Bacterial infections and involved species.png|center|500px|thumb|बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण तथा उससे सम्बन्धित जीवाणु-प्रजाति]]
== इन्हें भी देखें ==
* [[फफूंद]] (फंगस)
* [[विषाणु]] (वाइरस)
* [[सूक्ष्मजैविकी]]
* [[एककोशिकीय]]
* [[ प्रोकैरियोटिक कोशिका]]
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
{{pp-semi-template|small=yes}}
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://web.archive.org/web/20180902220754/http://www.vivacepanorama.com/major-diseases-caused-by-bacteria-in-the-human-body/ मानव शरीर में जीवाणुओं द्वारा होने वाले प्रमुख रोग]
[[श्रेणी:जीव विज्ञान]]
[[श्रेणी:सूक्ष्मजैविकी]]
[[श्रेणी:जीवाणु]]
[[श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना]]
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2026-10-18T08:19:49Z
Anitya Gautam
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wikitext
text/x-wiki
{{आज का आलेख}}
{{Taxobox
| name = जीवाणु (बैक्टीरिया)
| image = E. coli Bacteria (7316101966).jpg
| image_caption = [[ ऐशेरिशिया कोलाई]] <br><small>Escherichia coli</small>
| domain = [[जीवाणु]] <small>(Bacteria)</small>
| domain_authority = <small>वूज़, कैंडलर और व्हीलिस, 1990</small>
| subdivision_ranks = [[संघ (जीवविज्ञान)|संघ]]
| subdivision =
* <small>''[[ऐसिडोबैक्टीरिया]] (Acidobacteria)''</small>
* <small>''[[ऐक्टीनोबैक्टीरिया]] (Actinobacteria)''</small>
* <small>''[[ऐक्वीफ़िसी]] (Aquificae)''</small>
* <small>''[[आर्माटीमोनाडीटीस]] (Armatimonadetes)''</small>
* <small>''[[बैक्टीरोइडिटीस]] (Bacteroidetes)''</small>
* <small>''[[कैल्डीसेरिका]] (Caldiserica)''</small>
* <small>''[[क्लैमिडियाई]] (Chlamydiae)''</small>
* <small>''[[क्लोरोबी]] (Chlorobi)''</small>
* <small>''[[क्लोरोफ़्लेक्सी (संघ)|क्लोरोफ़्लेक्सी]] (Chloroflexi)''</small>
* <small>''[[क्रिसियोगिनीटीस]] (Chrysiogenetes)''</small>
* <small>''[[सायनोबैक्टीरिया]] (Cyanobacteria)''</small>
* <small>''[[:en:Deferribacteres|Deferribacteres]]''</small>
* <small>''[[डायनोकोक्कस-थर्मस]] (Deinococcus-Thermus)''</small>
* <small>''[[:en:Dictyoglomi|Dictyoglomi]]''</small>
* <small>''[[:en:Elusimicrobia|Elusimicrobia]]''</small>
* <small>''[[:en:Fibrobacteres|Fibrobacteres]]''</small>
* <small>''[[फ़र्मीक्यूटीस]] (Firmicutes)''</small>
* <small>''[[:en:Fusobacteria|Fusobacteria]]''</small>
* <small>''[[:en:Gemmatimonadetes|Gemmatimonadetes]]''</small>
* <small>''[[:en:Lentisphaerae|Lentisphaerae]]''</small>
* <small>''[[नाइट्रोस्पिराए]] (Nitrospirae)''</small>
* <small>''[[:en:Planctomycetes|Planctomycetes]]''</small>
* <small>''[[प्रोटियोबैक्टीरिया]] (Proteobacteria)''</small>
* <small>''[[स्पाइरोकीट]] (Spirochaetes)''</small>
* <small>''[[:en:Synergistetes|Synergistetes]]''</small>
* <small>''[[:en:Tenericutes|Tenericutes]]''</small>
* <small>''[[:en:Thermodesulfobacteria|Thermodesulfobacteria]]''</small>
* <small>''[[:en:Thermotogae|Thermotogae]]''</small>
* <small>''[[:en:Verrucomicrobia|Verrucomicrobia]]''</small>
}}
'''जीवाणु''' (Bacteria) [[सूक्ष्म जीव]] हैं जो प्रायः [[कोशिका|एककोशिकीय]] होते हैं। ये [[अकेन्द्रिक]], [[कोशिका भित्ति|कोशिका भित्तियुक्त]], [[कोशिका|एककोशकीय]] सरल [[जीव]] हैं और प्रायः सर्वत्र पाये जाते हैं। इनका आकार कुछ [[मिलिमीटर]] तक ही होता हैं। इनकी आकृति गोल या मुक्त-चक्राकार से लेकर छड़ आदि के आकार की हो सकती हैं। ये पृथ्वी पर मिट्टी में, अम्लीय, गर्म जल-धाराओं में, नाभिकीय पदार्थों में<ref>{{cite journal |author=Fredrickson J, Zachara J, Balkwill D, ''et al'' |title=Geomicrobiology of high-level nuclear waste-contaminated vadose sediments at the Hanford site, Washington state |url=http://aem.asm.org/cgi/content/full/70/7/4230?view=long&pmid=15240306 |journal=Appl Environ Microbiol |volume=70 |issue=7 |pages=4230–41 |year=2004 |pmid=15240306 |doi=10.1128/AEM.70.7.4230-4241.2004 |access-date=14 सितंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080929074759/http://aem.asm.org/cgi/content/full/70/7/4230?view=long&pmid=15240306 |archive-date=29 सितंबर 2008 |url-status=live |issn = 0099-2240}}</ref>, जल में, भू-पपड़ी में, यहां तक की कार्बनिक पदार्थों में तथा पौधौं एवं जन्तुओं के शरीर के भीतर भी पाये जाते हैं। साधारणतः एक ग्राम मिट्टी में ४ करोड़ जीवाणु [[कोशिका|कोष]] तथा १ मिलीलीटर जल में १० लाख जीवाणु पाए जाते हैं।
सम्पूर्ण पृथ्वी पर जीवाणुओं की कुल संख्या अनुमानतः लगभग ५x१०<sup>३०</sup> होगी <ref name="pnas_1">{{cite journal |author=Whitman W, Coleman D, Wiebe W |title=Prokaryotes: the unseen majority |url=http://www.pnas.org/cgi/content/full/95/12/6578 |journal=Proc Natl Acad Sci U S a |volume=95 |issue=12 |pages=6578–83 |year=1998 |pmid=9618454 |doi=10.1073/pnas.95.12.6578 |access-date=14 सितंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080305184844/http://www.pnas.org/cgi/content/full/95/12/6578 |archive-date=5 मार्च 2008 |url-status=live }}</ref> जो संसार के [[बायोमास]] का एक बहुत बड़ा भाग है।<ref name="pnas_1" /> ये कई तत्वों के चक्र में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं, जैसे कि वायुमंडलीय [[नाइट्रोजन]] के स्थरीकरण में। हलाकि बहुत सारे वंश के जीवाणुओं का श्रेणी विभाजन भी नहीं हुआ है तथापि लगभग आधी प्रजातियों को किसी न किसी प्रयोगशाला में उगाया जा चुका है।<ref name="Rappe">{{cite journal |author=Rappé MS, Giovannoni SJ |title=The uncultured microbial majority |url=https://archive.org/details/sim_annual-review-of-microbiology_2003_57/page/369 |journal=Annu. Rev. Microbiol. |volume=57 |issue= |pages=369–94 |year=2003 |pmid=14527284 |doi=10.1146/annurev.micro.57.030502.090759}}</ref> जीवाणुओं का अध्ययन [[बैक्टिरियोलोजी]] के अन्तर्गत किया जाता है जो कि [[सूक्ष्मजैविकी| सूक्ष्म जैविकी]] की ही एक शाखा है।
मानव शरीर में जितनी भी मानव कोशिकाएं है, उसकी लगभग १० गुणा संख्या तो जीवाणु कोष की ही है। इनमें से अधिकांश जीवाणु त्वचा तथा [[आहार नाल|अहार-नाल]] में पाए जाते हैं।<ref>{{cite journal |author=Sears CL |title=A dynamic partnership: celebrating our gut flora |journal=Anaerobe |volume=11 |issue=5 |pages=247–51 |year=2005 |pmid=16701579 |doi=10.1016/j.anaerobe.2005.05.001}}</ref> हानिकारक जीवाणु [[इम्यून तंत्र]] के रक्षक प्रभाव के कारण शरीर को नुकसान नहीं पहुंचा पाते। कुछ जीवाणु लाभदायक भी होते हैं। अनेक प्रकार के परजीवी जीवाणु कई रोग उत्पन्न करते हैं, जैसे - [[ हैजा]] , मियादी बुखार, [[ निमोनिया]] , [[तपेदिक]] या [[क्षयरोग]], [[प्लेग]] इत्यादि। केवल क्षय रोग से ही प्रतिवर्ष लगभग २० लाख लोग मरते हैं, जिनमें से अधिकांश उप-सहारा क्षेत्र के होते हैं।<ref>{{cite web | url = http://www.who.int/healthinfo/bodgbd2002revised/en/index.html | title = 2002 WHO mortality data | accessdate = 2007-01-20 | archive-url = https://web.archive.org/web/20131023060502/http://www.who.int/healthinfo/bodgbd2002revised/en/index.html | archive-date = 23 अक्तूबर 2013 | url-status = live }}</ref>
विकसित देशों में जीवाणुओं के संक्रमण का उपचार करने के लिए तथा कृषि कार्यों में [[प्रतिजैविक]] का उपयोग होता है, इसलिए जीवाणुओं में इन प्रतिजैविक दवाओं के प्रति प्रतिरोधक शक्ति विकसित होती जा रही है। औद्योगिक क्षेत्र में जीवाणुओं की किण्वन क्रिया द्वारा [[दही]], [[पनीर]] इत्यादि वस्तुओं का निर्माण होता है। इनका उपयोग प्रतिजैविकी तथा और रसायनों के निर्माण में तथा [[जैवप्रौद्योगिकी]] के क्षेत्र में होता है।<ref>{{cite journal |author=Ishige T, Honda K, Shimizu S |title=Whole organism biocatalysis |journal=Curr Opin Chem Biol |volume=9 |issue=2 |pages=174–80 |year=2005 |pmid=15811802 |doi=10.1016/j.cbpa.2005.02.001}}</ref>
पहले जीवाणुओं को पौधा माना जाता था परंतु अब उनका वर्गीकरण [[प्रोकैरियोट्स]] के रूप में होता है। दूसरे जन्तु कोशिकों तथा [[यूकैरियोट्स]] की भांति जीवाणु कोष में पूर्ण विकसित [[केन्द्रक]] का सर्वथा अभाव होता है जबकि दोहरी [[झिल्ली]] युक्त कोशिकांग यदा कदा ही पाए जाते है। पारंपरिक रूप से जीवाणु शब्द का प्रयोग सभी सजीवों के लिए होता था, परंतु यह वैज्ञानिक वर्गीकरण [[१९९०]] में हुई एक खोज के बाद बदल गया जिसमें पता चला कि प्रोकैरियोटिक सजीव वास्तव में दो भिन्न समूह के जीवों से बने हैं जिनका [[क्रम विकास]] एक ही पूर्वज से हुआ। इन दो प्रकार के जीवों को जीवाणु एवं [[आर्किया]] कहा जाता है।<ref name="autogenerated2">{{cite journal |author=Woese C, Kandler O, Wheelis M |title=Towards a natural system of organisms: proposal for the domains Archaea, Bacteria, and Eucarya |url=http://www.pnas.org/cgi/reprint/87/12/4576 |journal=Proc Natl Acad Sci U S a |volume=87 |issue=12 |pages=4576–9 |year=1990 |pmid=2112744 |doi=10.1073/pnas.87.12.4576 |access-date=17 सितंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080627233102/http://www.pnas.org/cgi/reprint/87/12/4576 |archive-date=27 जून 2008 |url-status=live }}</ref>
== इतिहास ==
[[चित्र:Louis Pasteur.jpg|thumb|200px|right|[[लूई पाश्चर]]]]
जीवाणुओं को सबसे पहले [[१६७६]] ई. में डच वैज्ञानिक [[एण्टनी वाँन ल्यूवोनहूक]] ने एकल [[लेंस]] वाले [[सूक्ष्मदर्शी यंत्र]] से देखा था जिसे उसने स्वयं बनाया था। <ref>{{cite journal |author=Porter JR |title=Antony van Leeuwenhoek: Tercentenary of his discovery of bacteria |journal=Bacteriological reviews |volume=40 |issue=2 |pages=260–269 |year=1976 |pmid=786250 |doi= |url=http://mmbr.asm.org/cgi/pmidlookup?view=long&pmid=786250 |access-date=30 सितंबर 2008 |archive-url=https://archive.today/20120530194602/http://mmbr.asm.org/cgi/pmidlookup?view=long&pmid=786250 |archive-date=30 मई 2012 |url-status=live }}</ref> परन्तु उस समय उसने इन्हें [[जंतुक]] (animalcule) समझा था। अपने अवलोकनों की पुष्टि के लिए उसने रायल सोसाइटी को कई पत्र लिखे।<ref>{{cite journal |author=van Leeuwenhoek A |title=An abstract of a letter from Mr. Anthony Leevvenhoek at Delft, dated Sep. 17, 1683, Containing Some Microscopical Observations, about Animals in the Scurf of the Teeth, the Substance Call'd Worms in the Nose, the Cuticula Consisting of Scales |url=http://www.journals.royalsoc.ac.uk/content/120136/?k=Sep.+17%2c+1683 |journal=Philosophical Transactions (1683–1775) |volume=14 |pages=568–574 |year=1684 |accessdate=2007-08-19 }}{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref><ref>{{cite journal |author=van Leeuwenhoek A |title=Part of a Letter from Mr Antony van Leeuwenhoek, concerning the Worms in Sheeps Livers, Gnats, and Animalcula in the Excrements of Frogs |url=http://www.journals.royalsoc.ac.uk/link.asp?id=4j53731651310230 |journal=Philosophical Transactions (1683–1775) |volume=22 |pages=509–518 |year=1700 |accessdate=2007-08-19 }}{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref><ref>{{cite journal |author=van Leeuwenhoek A |title=Part of a Letter from Mr Antony van Leeuwenhoek, F. R. S. concerning Green Weeds Growing in Water, and Some Animalcula Found about Them |url=http://www.journals.royalsoc.ac.uk/link.asp?id=fl73121jk4150280 |journal=Philosophical Transactions (1683-1775) |volume=23 |pages=1304–11 |year=1702 |accessdate=2007-08-19 |doi=10.1098/rstl.1702.0042 }}{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
१६८३ ई. में ल्यूवेनहॉक ने जीवाणु का चित्रण कर अपने मत की पुष्टि की। [[१८६४]] ई. में फ्रांसनिवासी [[लूई पाश्चर]] तथा [[१८९०]] ई. में कोच ने यह मत व्यक्त किया कि इन जीवाणुओं से रोग फैलते हैं।<ref>{{cite web | url = http://biotech.law.lsu.edu/cphl/history/articles/pasteur.htm#paperII | title = Pasteur's Papers on the Germ Theory | publisher = LSU Law Center's Medical and Public Health Law Site, Historic Public Health Articles | accessdate = 2006-11-23 | archive-url = https://web.archive.org/web/20171108031227/https://biotech.law.lsu.edu/cphl/history/articles/pasteur.htm#paperII | archive-date = 8 नवंबर 2017 | url-status = dead }}</ref>
पाश्चर ने [[१९८९]] में प्रयोगों द्वारा यह दिखाया कि [[किण्वन]] की रासायनिक क्रिया सूक्ष्म जीवों द्वारा होती है। कोच [[सूक्ष्मजैविकी]] के क्षेत्र में युगपुरूष माने जाते हैं, इन्होंने [[हैजा]], ऐन्थ्रेक्स तथा [[क्षय रोग|क्षय रोगों]] पर गहन अध्ययन किया। अंततः कोच ने यह सिद्ध कर दिया कि कई रोग सूक्ष्म जीवों के कारण होते हैं। इसके लिए [[१९०५]] ई. में उन्हें [[नोबेल पुरस्कार]] से सम्मानित किया गया।<ref>{{cite web | url = http://nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/laureates/1905/ | title = The Nobel Prize in Physiology or Medicine 1905 | publisher = Nobelprize.org | accessdate = 2006-11-22 | archive-url = https://web.archive.org/web/20061210184150/http://nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/laureates/1905/ | archive-date = 10 दिसंबर 2006 | url-status = live }}</ref> कोच न रोगों एवं उनके कारक जीवों का पता लगाने के लिए कुछ परिकल्पनाएं की थी जो आज भी इस्तेमाल होती हैं।<ref>{{cite journal |author=O'Brien S, Goedert J |title=HIV causes AIDS: Koch's postulates fulfilled |journal=Curr Opin Immunol |volume=8 |issue=5 |pages=613–618 |year=1996 |pmid=8902385 |doi=10.1016/S0952-7915(96)80075-6}}</ref>
१९वीं शताब्दी तक सभी जान गए थे कि जीवाणु कई रोगों के कारक हैं, फिर भी किसी प्रभावी [[प्रतिजैविक]] की खोज नहीं हो सकी।<ref>{{cite journal |author=Thurston A |title=Of blood, inflammation and gunshot wounds: the history of the control of sepsis |journal=Aust N Z J Surg |volume=70 |issue=12 |pages=855–61 |year=2000 |pmid=11167573 |doi=10.1046/j.1440-1622.2000.01983.x}}</ref> सबसे पहले प्रतिजैविक का आविष्कार [[१९१०]] में पॉल एहरिच ने किया जिससे [[सिफलिस]] रोग की चिकित्सा सम्भव हो सकी।<ref>{{cite journal |author=Schwartz R |title=Paul Ehrlich's magic bullets |url=https://archive.org/details/sim_new-england-journal-of-medicine_2004-03-11_350_11/page/1078 |journal=N Engl J Med |volume=350 |issue=11 |pages=1079–80 |year=2004|pmid = 15014180 |doi=10.1056/NEJMp048021}}</ref> इसके लिए [[१९०८]] ई. में उन्हें [[चिकित्साशास्त्र]] में [[नोबेल पुरस्कार]] प्रदान किया गया। इन्होंने जीवाणुओं को अभिरंजित करने की कारगर विधियां खोज निकाली, जिनके आधार पर ग्राम स्टेन की रचना संभव हुई।<ref>{{cite web | url = http://nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/laureates/1908/ehrlich-bio.html | title = Biography of Paul Ehrlich | publisher = Nobelprize.org | accessdate = 2006-11-26 | archive-url = https://web.archive.org/web/20061128093700/http://nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/laureates/1908/ehrlich-bio.html | archive-date = 28 नवंबर 2006 | url-status = live }}</ref>
== उत्पत्ति एवं क्रमविकास ==
आधुनिक जीवाणुओं के पूर्वज वे एक कोशिकीय [[सूक्ष्मजीव]] थे, जिनकी उत्पत्ति ४० करोड़ वर्ष पूर्व पृथ्वी पर जीवन के आरम्भ के समय हुई। इसके बाद लगभग ३० करोड़ वर्ष तक पृथ्वी पर जीवन के नाम पर सूक्ष्मजीव ही थे। इनमें जीवाणु तथा [[आर्किया]] मुख्य थे।<ref>{{cite journal |author=Schopf J |title=Disparate rates, differing fates: tempo and mode of evolution changed from the Precambrian to the Phanerozoic |journal=Proc Natl Acad Sci U S a |volume=91 |issue=15 |pages=6735–42 |year=1994 |pmid=8041691 |pmc=44277 |doi=10.1073/pnas.91.15.6735 |url=http://www.pnas.org/cgi/pmidlookup?view=long&pmid=8041691}}</ref><ref>{{cite journal |author=DeLong E, Pace N |title=Environmental diversity of bacteria and archaea |journal=Syst Biol |volume=50 |issue=4 |pages=470–78 |year=2001|pmid = 12116647 |doi=10.1080/106351501750435040}}</ref> स्ट्रोमेटोलाइट्स जैसे जीवाणुओं के [[जीवाश्म]] पाये गए हैं परन्तु इनकी अस्पष्ट बाह्य संरचना के कारण जीवाणुओं को समझने में इनसे कोई खास मदद नहीं मिली।
== वर्गीकरण ==
जीवाणुओं का वर्गीकरण आकृति के अनुसार किया जाता है। उदाहरण-
1. [[दण्डाणु]] (बैसिलाइ) – दंड जैसे,
2. गोलाणु (कोक्काई)- बिन्दु जैसे,
3. सर्पिलाणु (स्पिरिलाइ) – लहरदार आदि।
[[चित्र:Bacterial morphology diagram.svg|center|500px|thumb|जीवाणु आकारिकी]]
==मानव के विभिन्न अंगों को प्रभावित करने वाले जीवाणु==
[[चित्र:Bacterial infections and involved species.png|center|500px|thumb|बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण तथा उससे सम्बन्धित जीवाणु-प्रजाति]]
== इन्हें भी देखें ==
* [[फफूंद]] (फंगस)
* [[विषाणु]] (वाइरस)
* [[सूक्ष्मजैविकी]]
* [[एककोशिकीय]]
* [[ प्रोकैरियोटिक कोशिका]]
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
{{pp-semi-template|small=yes}}
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://web.archive.org/web/20180902220754/http://www.vivacepanorama.com/major-diseases-caused-by-bacteria-in-the-human-body/ मानव शरीर में जीवाणुओं द्वारा होने वाले प्रमुख रोग]
[[श्रेणी:जीव विज्ञान]]
[[श्रेणी:सूक्ष्मजैविकी]]
[[श्रेणी:जीवाणु]]
[[श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना]]
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2026-10-18T08:20:34Z
Anitya Gautam
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wikitext
text/x-wiki
{{आज का आलेख}}
{{Taxobox
| name = जीवाणु (बैक्टीरिया)
| image = E. coli Bacteria (7316101966).jpg
| image_caption = [[ ऐशेरिशिया कोलाई]] <br><small>Escherichia coli</small>
| domain = [[जीवाणु]] <small>(Bacteria)</small>
| domain_authority = <small>वूज़, कैंडलर और व्हीलिस, 1990</small>
| subdivision_ranks = [[संघ (जीवविज्ञान)|संघ]]
| subdivision =
* <small>''[[ऐसिडोबैक्टीरिया]] (Acidobacteria)''</small>
* <small>''[[ऐक्टीनोबैक्टीरिया]] (Actinobacteria)''</small>
* <small>''[[ऐक्वीफ़िसी]] (Aquificae)''</small>
* <small>''[[आर्माटीमोनाडीटीस]] (Armatimonadetes)''</small>
* <small>''[[बैक्टीरोइडिटीस]] (Bacteroidetes)''</small>
* <small>''[[कैल्डीसेरिका]] (Caldiserica)''</small>
* <small>''[[क्लैमिडियाई]] (Chlamydiae)''</small>
* <small>''[[क्लोरोबी]] (Chlorobi)''</small>
* <small>''[[क्लोरोफ़्लेक्सी (संघ)|क्लोरोफ़्लेक्सी]] (Chloroflexi)''</small>
* <small>''[[क्रिसियोगिनीटीस]] (Chrysiogenetes)''</small>
* <small>''[[सायनोबैक्टीरिया]] (Cyanobacteria)''</small>
* <small>''[[:en:Deferribacteres|Deferribacteres]]''</small>
* <small>''[[डायनोकोक्कस-थर्मस]] (Deinococcus-Thermus)''</small>
* <small>''[[:en:Dictyoglomi|Dictyoglomi]]''</small>
* <small>''[[:en:Elusimicrobia|Elusimicrobia]]''</small>
* <small>''[[:en:Fibrobacteres|Fibrobacteres]]''</small>
* <small>''[[फ़र्मीक्यूटीस]] (Firmicutes)''</small>
* <small>''[[:en:Fusobacteria|Fusobacteria]]''</small>
* <small>''[[:en:Gemmatimonadetes|Gemmatimonadetes]]''</small>
* <small>''[[:en:Lentisphaerae|Lentisphaerae]]''</small>
* <small>''[[नाइट्रोस्पिराए]] (Nitrospirae)''</small>
* <small>''[[:en:Planctomycetes|Planctomycetes]]''</small>
* <small>''[[प्रोटियोबैक्टीरिया]] (Proteobacteria)''</small>
* <small>''[[स्पाइरोकीट]] (Spirochaetes)''</small>
* <small>''[[:en:Synergistetes|Synergistetes]]''</small>
* <small>''[[:en:Tenericutes|Tenericutes]]''</small>
* <small>''[[:en:Thermodesulfobacteria|Thermodesulfobacteria]]''</small>
* <small>''[[:en:Thermotogae|Thermotogae]]''</small>
* <small>''[[:en:Verrucomicrobia|Verrucomicrobia]]''</small>
}}
'''जीवाणु''' (Bacteria) [[सूक्ष्म जीव]] हैं जो प्रायः [[कोशिका|एककोशिकीय]] होते हैं। ये [[अकेन्द्रिक]], [[कोशिका भित्ति|कोशिका भित्तियुक्त]], [[कोशिका|एककोशकीय]] सरल [[जीव]] हैं और प्रायः सर्वत्र पाये जाते हैं। इनका आकार कुछ [[मिलिमीटर]] तक ही होता हैं। इनकी आकृति गोल या मुक्त-चक्राकार से लेकर छड़ आदि के आकार की हो सकती हैं। ये पृथ्वी पर मिट्टी में, अम्लीय, गर्म जल-धाराओं में, नाभिकीय पदार्थों में<ref>{{cite journal |author=Fredrickson J, Zachara J, Balkwill D, ''et al'' |title=Geomicrobiology of high-level nuclear waste-contaminated vadose sediments at the Hanford site, Washington state |url=http://aem.asm.org/cgi/content/full/70/7/4230?view=long&pmid=15240306 |journal=Appl Environ Microbiol |volume=70 |issue=7 |pages=4230–41 |year=2004 |pmid=15240306 |doi=10.1128/AEM.70.7.4230-4241.2004 |access-date=14 सितंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080929074759/http://aem.asm.org/cgi/content/full/70/7/4230?view=long&pmid=15240306 |archive-date=29 सितंबर 2008 |url-status=live |issn = 0099-2240}}</ref>, जल में, भू-पपड़ी में, यहां तक की कार्बनिक पदार्थों में तथा पौधौं एवं जन्तुओं के शरीर के भीतर भी पाये जाते हैं। साधारणतः एक ग्राम मिट्टी में ४ करोड़ जीवाणु [[कोशिका|कोष]] तथा १ मिलीलीटर जल में १० लाख जीवाणु पाए जाते हैं।
सम्पूर्ण पृथ्वी पर जीवाणुओं की कुल संख्या अनुमानतः लगभग ५x१०<sup>३०</sup> होगी <ref name="pnas_1">{{cite journal |author=Whitman W, Coleman D, Wiebe W |title=Prokaryotes: the unseen majority |url=http://www.pnas.org/cgi/content/full/95/12/6578 |journal=Proc Natl Acad Sci U S a |volume=95 |issue=12 |pages=6578–83 |year=1998 |pmid=9618454 |doi=10.1073/pnas.95.12.6578 |access-date=14 सितंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080305184844/http://www.pnas.org/cgi/content/full/95/12/6578 |archive-date=5 मार्च 2008 |url-status=live }}</ref> जो संसार के [[बायोमास]] का एक बहुत बड़ा भाग है।<ref name="pnas_1" /> ये कई तत्वों के चक्र में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं, जैसे कि वायुमंडलीय [[नाइट्रोजन]] के स्थरीकरण में। हलाकि बहुत सारे वंश के जीवाणुओं का श्रेणी विभाजन भी नहीं हुआ है तथापि लगभग आधी प्रजातियों को किसी न किसी [[प्रयोगशाला]] में उगाया जा चुका है।<ref name="Rappe">{{cite journal |author=Rappé MS, Giovannoni SJ |title=The uncultured microbial majority |url=https://archive.org/details/sim_annual-review-of-microbiology_2003_57/page/369 |journal=Annu. Rev. Microbiol. |volume=57 |issue= |pages=369–94 |year=2003 |pmid=14527284 |doi=10.1146/annurev.micro.57.030502.090759}}</ref> जीवाणुओं का अध्ययन [[बैक्टिरियोलोजी]] के अन्तर्गत किया जाता है जो कि [[सूक्ष्मजैविकी| सूक्ष्म जैविकी]] की ही एक शाखा है।
मानव शरीर में जितनी भी मानव कोशिकाएं है, उसकी लगभग १० गुणा संख्या तो जीवाणु कोष की ही है। इनमें से अधिकांश जीवाणु त्वचा तथा [[आहार नाल|अहार-नाल]] में पाए जाते हैं।<ref>{{cite journal |author=Sears CL |title=A dynamic partnership: celebrating our gut flora |journal=Anaerobe |volume=11 |issue=5 |pages=247–51 |year=2005 |pmid=16701579 |doi=10.1016/j.anaerobe.2005.05.001}}</ref> हानिकारक जीवाणु [[इम्यून तंत्र]] के रक्षक प्रभाव के कारण शरीर को नुकसान नहीं पहुंचा पाते। कुछ जीवाणु लाभदायक भी होते हैं। अनेक प्रकार के परजीवी जीवाणु कई रोग उत्पन्न करते हैं, जैसे - [[ हैजा]] , मियादी बुखार, [[ निमोनिया]] , [[तपेदिक]] या [[क्षयरोग]], [[प्लेग]] इत्यादि। केवल क्षय रोग से ही प्रतिवर्ष लगभग २० लाख लोग मरते हैं, जिनमें से अधिकांश उप-सहारा क्षेत्र के होते हैं।<ref>{{cite web | url = http://www.who.int/healthinfo/bodgbd2002revised/en/index.html | title = 2002 WHO mortality data | accessdate = 2007-01-20 | archive-url = https://web.archive.org/web/20131023060502/http://www.who.int/healthinfo/bodgbd2002revised/en/index.html | archive-date = 23 अक्तूबर 2013 | url-status = live }}</ref>
विकसित देशों में जीवाणुओं के संक्रमण का उपचार करने के लिए तथा कृषि कार्यों में [[प्रतिजैविक]] का उपयोग होता है, इसलिए जीवाणुओं में इन प्रतिजैविक दवाओं के प्रति प्रतिरोधक शक्ति विकसित होती जा रही है। औद्योगिक क्षेत्र में जीवाणुओं की किण्वन क्रिया द्वारा [[दही]], [[पनीर]] इत्यादि वस्तुओं का निर्माण होता है। इनका उपयोग प्रतिजैविकी तथा और रसायनों के निर्माण में तथा [[जैवप्रौद्योगिकी]] के क्षेत्र में होता है।<ref>{{cite journal |author=Ishige T, Honda K, Shimizu S |title=Whole organism biocatalysis |journal=Curr Opin Chem Biol |volume=9 |issue=2 |pages=174–80 |year=2005 |pmid=15811802 |doi=10.1016/j.cbpa.2005.02.001}}</ref>
पहले जीवाणुओं को पौधा माना जाता था परंतु अब उनका वर्गीकरण [[प्रोकैरियोट्स]] के रूप में होता है। दूसरे जन्तु कोशिकों तथा [[यूकैरियोट्स]] की भांति जीवाणु कोष में पूर्ण विकसित [[केन्द्रक]] का सर्वथा अभाव होता है जबकि दोहरी [[झिल्ली]] युक्त कोशिकांग यदा कदा ही पाए जाते है। पारंपरिक रूप से जीवाणु शब्द का प्रयोग सभी सजीवों के लिए होता था, परंतु यह वैज्ञानिक वर्गीकरण [[१९९०]] में हुई एक खोज के बाद बदल गया जिसमें पता चला कि प्रोकैरियोटिक सजीव वास्तव में दो भिन्न समूह के जीवों से बने हैं जिनका [[क्रम विकास]] एक ही पूर्वज से हुआ। इन दो प्रकार के जीवों को जीवाणु एवं [[आर्किया]] कहा जाता है।<ref name="autogenerated2">{{cite journal |author=Woese C, Kandler O, Wheelis M |title=Towards a natural system of organisms: proposal for the domains Archaea, Bacteria, and Eucarya |url=http://www.pnas.org/cgi/reprint/87/12/4576 |journal=Proc Natl Acad Sci U S a |volume=87 |issue=12 |pages=4576–9 |year=1990 |pmid=2112744 |doi=10.1073/pnas.87.12.4576 |access-date=17 सितंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080627233102/http://www.pnas.org/cgi/reprint/87/12/4576 |archive-date=27 जून 2008 |url-status=live }}</ref>
== इतिहास ==
[[चित्र:Louis Pasteur.jpg|thumb|200px|right|[[लूई पाश्चर]]]]
जीवाणुओं को सबसे पहले [[१६७६]] ई. में डच वैज्ञानिक [[एण्टनी वाँन ल्यूवोनहूक]] ने एकल [[लेंस]] वाले [[सूक्ष्मदर्शी यंत्र]] से देखा था जिसे उसने स्वयं बनाया था। <ref>{{cite journal |author=Porter JR |title=Antony van Leeuwenhoek: Tercentenary of his discovery of bacteria |journal=Bacteriological reviews |volume=40 |issue=2 |pages=260–269 |year=1976 |pmid=786250 |doi= |url=http://mmbr.asm.org/cgi/pmidlookup?view=long&pmid=786250 |access-date=30 सितंबर 2008 |archive-url=https://archive.today/20120530194602/http://mmbr.asm.org/cgi/pmidlookup?view=long&pmid=786250 |archive-date=30 मई 2012 |url-status=live }}</ref> परन्तु उस समय उसने इन्हें [[जंतुक]] (animalcule) समझा था। अपने अवलोकनों की पुष्टि के लिए उसने रायल सोसाइटी को कई पत्र लिखे।<ref>{{cite journal |author=van Leeuwenhoek A |title=An abstract of a letter from Mr. Anthony Leevvenhoek at Delft, dated Sep. 17, 1683, Containing Some Microscopical Observations, about Animals in the Scurf of the Teeth, the Substance Call'd Worms in the Nose, the Cuticula Consisting of Scales |url=http://www.journals.royalsoc.ac.uk/content/120136/?k=Sep.+17%2c+1683 |journal=Philosophical Transactions (1683–1775) |volume=14 |pages=568–574 |year=1684 |accessdate=2007-08-19 }}{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref><ref>{{cite journal |author=van Leeuwenhoek A |title=Part of a Letter from Mr Antony van Leeuwenhoek, concerning the Worms in Sheeps Livers, Gnats, and Animalcula in the Excrements of Frogs |url=http://www.journals.royalsoc.ac.uk/link.asp?id=4j53731651310230 |journal=Philosophical Transactions (1683–1775) |volume=22 |pages=509–518 |year=1700 |accessdate=2007-08-19 }}{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref><ref>{{cite journal |author=van Leeuwenhoek A |title=Part of a Letter from Mr Antony van Leeuwenhoek, F. R. S. concerning Green Weeds Growing in Water, and Some Animalcula Found about Them |url=http://www.journals.royalsoc.ac.uk/link.asp?id=fl73121jk4150280 |journal=Philosophical Transactions (1683-1775) |volume=23 |pages=1304–11 |year=1702 |accessdate=2007-08-19 |doi=10.1098/rstl.1702.0042 }}{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
१६८३ ई. में ल्यूवेनहॉक ने जीवाणु का चित्रण कर अपने मत की पुष्टि की। [[१८६४]] ई. में फ्रांसनिवासी [[लूई पाश्चर]] तथा [[१८९०]] ई. में कोच ने यह मत व्यक्त किया कि इन जीवाणुओं से रोग फैलते हैं।<ref>{{cite web | url = http://biotech.law.lsu.edu/cphl/history/articles/pasteur.htm#paperII | title = Pasteur's Papers on the Germ Theory | publisher = LSU Law Center's Medical and Public Health Law Site, Historic Public Health Articles | accessdate = 2006-11-23 | archive-url = https://web.archive.org/web/20171108031227/https://biotech.law.lsu.edu/cphl/history/articles/pasteur.htm#paperII | archive-date = 8 नवंबर 2017 | url-status = dead }}</ref>
पाश्चर ने [[१९८९]] में प्रयोगों द्वारा यह दिखाया कि [[किण्वन]] की रासायनिक क्रिया सूक्ष्म जीवों द्वारा होती है। कोच [[सूक्ष्मजैविकी]] के क्षेत्र में युगपुरूष माने जाते हैं, इन्होंने [[हैजा]], ऐन्थ्रेक्स तथा [[क्षय रोग|क्षय रोगों]] पर गहन अध्ययन किया। अंततः कोच ने यह सिद्ध कर दिया कि कई रोग सूक्ष्म जीवों के कारण होते हैं। इसके लिए [[१९०५]] ई. में उन्हें [[नोबेल पुरस्कार]] से सम्मानित किया गया।<ref>{{cite web | url = http://nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/laureates/1905/ | title = The Nobel Prize in Physiology or Medicine 1905 | publisher = Nobelprize.org | accessdate = 2006-11-22 | archive-url = https://web.archive.org/web/20061210184150/http://nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/laureates/1905/ | archive-date = 10 दिसंबर 2006 | url-status = live }}</ref> कोच न रोगों एवं उनके कारक जीवों का पता लगाने के लिए कुछ परिकल्पनाएं की थी जो आज भी इस्तेमाल होती हैं।<ref>{{cite journal |author=O'Brien S, Goedert J |title=HIV causes AIDS: Koch's postulates fulfilled |journal=Curr Opin Immunol |volume=8 |issue=5 |pages=613–618 |year=1996 |pmid=8902385 |doi=10.1016/S0952-7915(96)80075-6}}</ref>
१९वीं शताब्दी तक सभी जान गए थे कि जीवाणु कई रोगों के कारक हैं, फिर भी किसी प्रभावी [[प्रतिजैविक]] की खोज नहीं हो सकी।<ref>{{cite journal |author=Thurston A |title=Of blood, inflammation and gunshot wounds: the history of the control of sepsis |journal=Aust N Z J Surg |volume=70 |issue=12 |pages=855–61 |year=2000 |pmid=11167573 |doi=10.1046/j.1440-1622.2000.01983.x}}</ref> सबसे पहले प्रतिजैविक का आविष्कार [[१९१०]] में पॉल एहरिच ने किया जिससे [[सिफलिस]] रोग की चिकित्सा सम्भव हो सकी।<ref>{{cite journal |author=Schwartz R |title=Paul Ehrlich's magic bullets |url=https://archive.org/details/sim_new-england-journal-of-medicine_2004-03-11_350_11/page/1078 |journal=N Engl J Med |volume=350 |issue=11 |pages=1079–80 |year=2004|pmid = 15014180 |doi=10.1056/NEJMp048021}}</ref> इसके लिए [[१९०८]] ई. में उन्हें [[चिकित्साशास्त्र]] में [[नोबेल पुरस्कार]] प्रदान किया गया। इन्होंने जीवाणुओं को अभिरंजित करने की कारगर विधियां खोज निकाली, जिनके आधार पर ग्राम स्टेन की रचना संभव हुई।<ref>{{cite web | url = http://nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/laureates/1908/ehrlich-bio.html | title = Biography of Paul Ehrlich | publisher = Nobelprize.org | accessdate = 2006-11-26 | archive-url = https://web.archive.org/web/20061128093700/http://nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/laureates/1908/ehrlich-bio.html | archive-date = 28 नवंबर 2006 | url-status = live }}</ref>
== उत्पत्ति एवं क्रमविकास ==
आधुनिक जीवाणुओं के पूर्वज वे एक कोशिकीय [[सूक्ष्मजीव]] थे, जिनकी उत्पत्ति ४० करोड़ वर्ष पूर्व पृथ्वी पर जीवन के आरम्भ के समय हुई। इसके बाद लगभग ३० करोड़ वर्ष तक पृथ्वी पर जीवन के नाम पर सूक्ष्मजीव ही थे। इनमें जीवाणु तथा [[आर्किया]] मुख्य थे।<ref>{{cite journal |author=Schopf J |title=Disparate rates, differing fates: tempo and mode of evolution changed from the Precambrian to the Phanerozoic |journal=Proc Natl Acad Sci U S a |volume=91 |issue=15 |pages=6735–42 |year=1994 |pmid=8041691 |pmc=44277 |doi=10.1073/pnas.91.15.6735 |url=http://www.pnas.org/cgi/pmidlookup?view=long&pmid=8041691}}</ref><ref>{{cite journal |author=DeLong E, Pace N |title=Environmental diversity of bacteria and archaea |journal=Syst Biol |volume=50 |issue=4 |pages=470–78 |year=2001|pmid = 12116647 |doi=10.1080/106351501750435040}}</ref> स्ट्रोमेटोलाइट्स जैसे जीवाणुओं के [[जीवाश्म]] पाये गए हैं परन्तु इनकी अस्पष्ट बाह्य संरचना के कारण जीवाणुओं को समझने में इनसे कोई खास मदद नहीं मिली।
== वर्गीकरण ==
जीवाणुओं का वर्गीकरण आकृति के अनुसार किया जाता है। उदाहरण-
1. [[दण्डाणु]] (बैसिलाइ) – दंड जैसे,
2. गोलाणु (कोक्काई)- बिन्दु जैसे,
3. सर्पिलाणु (स्पिरिलाइ) – लहरदार आदि।
[[चित्र:Bacterial morphology diagram.svg|center|500px|thumb|जीवाणु आकारिकी]]
==मानव के विभिन्न अंगों को प्रभावित करने वाले जीवाणु==
[[चित्र:Bacterial infections and involved species.png|center|500px|thumb|बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण तथा उससे सम्बन्धित जीवाणु-प्रजाति]]
== इन्हें भी देखें ==
* [[फफूंद]] (फंगस)
* [[विषाणु]] (वाइरस)
* [[सूक्ष्मजैविकी]]
* [[एककोशिकीय]]
* [[ प्रोकैरियोटिक कोशिका]]
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
{{pp-semi-template|small=yes}}
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://web.archive.org/web/20180902220754/http://www.vivacepanorama.com/major-diseases-caused-by-bacteria-in-the-human-body/ मानव शरीर में जीवाणुओं द्वारा होने वाले प्रमुख रोग]
[[श्रेणी:जीव विज्ञान]]
[[श्रेणी:सूक्ष्मजैविकी]]
[[श्रेणी:जीवाणु]]
[[श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना]]
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Anitya Gautam
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wikitext
text/x-wiki
{{आज का आलेख}}
{{Taxobox
| name = जीवाणु (बैक्टीरिया)
| image = E. coli Bacteria (7316101966).jpg
| image_caption = [[ ऐशेरिशिया कोलाई]] <br><small>Escherichia coli</small>
| domain = [[जीवाणु]] <small>(Bacteria)</small>
| domain_authority = <small>वूज़, कैंडलर और व्हीलिस, 1990</small>
| subdivision_ranks = [[संघ (जीवविज्ञान)|संघ]]
| subdivision =
* <small>''[[ऐसिडोबैक्टीरिया]] (Acidobacteria)''</small>
* <small>''[[ऐक्टीनोबैक्टीरिया]] (Actinobacteria)''</small>
* <small>''[[ऐक्वीफ़िसी]] (Aquificae)''</small>
* <small>''[[आर्माटीमोनाडीटीस]] (Armatimonadetes)''</small>
* <small>''[[बैक्टीरोइडिटीस]] (Bacteroidetes)''</small>
* <small>''[[कैल्डीसेरिका]] (Caldiserica)''</small>
* <small>''[[क्लैमिडियाई]] (Chlamydiae)''</small>
* <small>''[[क्लोरोबी]] (Chlorobi)''</small>
* <small>''[[क्लोरोफ़्लेक्सी (संघ)|क्लोरोफ़्लेक्सी]] (Chloroflexi)''</small>
* <small>''[[क्रिसियोगिनीटीस]] (Chrysiogenetes)''</small>
* <small>''[[सायनोबैक्टीरिया]] (Cyanobacteria)''</small>
* <small>''[[:en:Deferribacteres|Deferribacteres]]''</small>
* <small>''[[डायनोकोक्कस-थर्मस]] (Deinococcus-Thermus)''</small>
* <small>''[[:en:Dictyoglomi|Dictyoglomi]]''</small>
* <small>''[[:en:Elusimicrobia|Elusimicrobia]]''</small>
* <small>''[[:en:Fibrobacteres|Fibrobacteres]]''</small>
* <small>''[[फ़र्मीक्यूटीस]] (Firmicutes)''</small>
* <small>''[[:en:Fusobacteria|Fusobacteria]]''</small>
* <small>''[[:en:Gemmatimonadetes|Gemmatimonadetes]]''</small>
* <small>''[[:en:Lentisphaerae|Lentisphaerae]]''</small>
* <small>''[[नाइट्रोस्पिराए]] (Nitrospirae)''</small>
* <small>''[[:en:Planctomycetes|Planctomycetes]]''</small>
* <small>''[[प्रोटियोबैक्टीरिया]] (Proteobacteria)''</small>
* <small>''[[स्पाइरोकीट]] (Spirochaetes)''</small>
* <small>''[[:en:Synergistetes|Synergistetes]]''</small>
* <small>''[[:en:Tenericutes|Tenericutes]]''</small>
* <small>''[[:en:Thermodesulfobacteria|Thermodesulfobacteria]]''</small>
* <small>''[[:en:Thermotogae|Thermotogae]]''</small>
* <small>''[[:en:Verrucomicrobia|Verrucomicrobia]]''</small>
}}
'''जीवाणु''' (Bacteria) [[सूक्ष्म जीव]] हैं जो प्रायः [[कोशिका|एककोशिकीय]] होते हैं। ये [[अकेन्द्रिक]], [[कोशिका भित्ति|कोशिका भित्तियुक्त]], [[कोशिका|एककोशकीय]] सरल [[जीव]] हैं और प्रायः सर्वत्र पाये जाते हैं। इनका आकार कुछ [[मिलिमीटर]] तक ही होता हैं। इनकी आकृति गोल या मुक्त-चक्राकार से लेकर छड़ आदि के आकार की हो सकती हैं। ये पृथ्वी पर मिट्टी में, अम्लीय, गर्म जल-धाराओं में, नाभिकीय पदार्थों में<ref>{{cite journal |author=Fredrickson J, Zachara J, Balkwill D, ''et al'' |title=Geomicrobiology of high-level nuclear waste-contaminated vadose sediments at the Hanford site, Washington state |url=http://aem.asm.org/cgi/content/full/70/7/4230?view=long&pmid=15240306 |journal=Appl Environ Microbiol |volume=70 |issue=7 |pages=4230–41 |year=2004 |pmid=15240306 |doi=10.1128/AEM.70.7.4230-4241.2004 |access-date=14 सितंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080929074759/http://aem.asm.org/cgi/content/full/70/7/4230?view=long&pmid=15240306 |archive-date=29 सितंबर 2008 |url-status=live |issn = 0099-2240}}</ref>, जल में, भू-पपड़ी में, यहां तक की कार्बनिक पदार्थों में तथा पौधौं एवं जन्तुओं के शरीर के भीतर भी पाये जाते हैं। साधारणतः एक ग्राम मिट्टी में ४ करोड़ जीवाणु [[कोशिका|कोष]] तथा १ मिलीलीटर जल में १० लाख जीवाणु पाए जाते हैं।
सम्पूर्ण पृथ्वी पर जीवाणुओं की कुल संख्या अनुमानतः लगभग ५x१०<sup>३०</sup> होगी <ref name="pnas_1">{{cite journal |author=Whitman W, Coleman D, Wiebe W |title=Prokaryotes: the unseen majority |url=http://www.pnas.org/cgi/content/full/95/12/6578 |journal=Proc Natl Acad Sci U S a |volume=95 |issue=12 |pages=6578–83 |year=1998 |pmid=9618454 |doi=10.1073/pnas.95.12.6578 |access-date=14 सितंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080305184844/http://www.pnas.org/cgi/content/full/95/12/6578 |archive-date=5 मार्च 2008 |url-status=live }}</ref> जो संसार के [[बायोमास]] का एक बहुत बड़ा भाग है।<ref name="pnas_1" /> ये कई तत्वों के चक्र में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं, जैसे कि वायुमंडलीय [[नाइट्रोजन]] के स्थरीकरण में। हलाकि बहुत सारे वंश के जीवाणुओं का श्रेणी विभाजन भी नहीं हुआ है तथापि लगभग आधी प्रजातियों को किसी न किसी [[प्रयोगशाला]] में उगाया जा चुका है।<ref name="Rappe">{{cite journal |author=Rappé MS, Giovannoni SJ |title=The uncultured microbial majority |url=https://archive.org/details/sim_annual-review-of-microbiology_2003_57/page/369 |journal=Annu. Rev. Microbiol. |volume=57 |issue= |pages=369–94 |year=2003 |pmid=14527284 |doi=10.1146/annurev.micro.57.030502.090759}}</ref> जीवाणुओं का अध्ययन [[बैक्टिरियोलोजी]] के अन्तर्गत किया जाता है जो कि [[सूक्ष्मजैविकी| सूक्ष्म जैविकी]] की ही एक शाखा है।
मानव शरीर में जितनी भी मानव कोशिकाएं है, उसकी लगभग १० गुणा संख्या तो जीवाणु कोष की ही है। इनमें से अधिकांश जीवाणु त्वचा तथा [[आहार नाल|अहार-नाल]] में पाए जाते हैं।<ref>{{cite journal |author=Sears CL |title=A dynamic partnership: celebrating our gut flora |journal=Anaerobe |volume=11 |issue=5 |pages=247–51 |year=2005 |pmid=16701579 |doi=10.1016/j.anaerobe.2005.05.001}}</ref> हानिकारक जीवाणु [[इम्यून तंत्र]] के रक्षक प्रभाव के कारण शरीर को नुकसान नहीं पहुंचा पाते। कुछ जीवाणु लाभदायक भी होते हैं। अनेक प्रकार के परजीवी जीवाणु कई रोग उत्पन्न करते हैं, जैसे - [[ हैजा]] , मियादी बुखार, [[ निमोनिया]] , [[तपेदिक]] या [[क्षयरोग]], [[प्लेग]] इत्यादि। केवल क्षय रोग से ही प्रतिवर्ष लगभग २० लाख लोग मरते हैं, जिनमें से अधिकांश उप-सहारा क्षेत्र के होते हैं।<ref>{{cite web | url = http://www.who.int/healthinfo/bodgbd2002revised/en/index.html | title = 2002 WHO mortality data | accessdate = 2007-01-20 | archive-url = https://web.archive.org/web/20131023060502/http://www.who.int/healthinfo/bodgbd2002revised/en/index.html | archive-date = 23 अक्तूबर 2013 | url-status = live }}</ref>
विकसित देशों में जीवाणुओं के संक्रमण का उपचार करने के लिए तथा कृषि कार्यों में [[प्रतिजैविक]] का उपयोग होता है, इसलिए जीवाणुओं में इन प्रतिजैविक दवाओं के प्रति प्रतिरोधक शक्ति विकसित होती जा रही है। औद्योगिक क्षेत्र में जीवाणुओं की किण्वन क्रिया द्वारा [[दही]], [[पनीर]] इत्यादि वस्तुओं का निर्माण होता है। इनका उपयोग प्रतिजैविकी तथा और रसायनों के निर्माण में तथा [[जैवप्रौद्योगिकी]] के क्षेत्र में होता है।<ref>{{cite journal |author=Ishige T, Honda K, Shimizu S |title=Whole organism biocatalysis |journal=Curr Opin Chem Biol |volume=9 |issue=2 |pages=174–80 |year=2005 |pmid=15811802 |doi=10.1016/j.cbpa.2005.02.001}}</ref>
पहले जीवाणुओं को पौधा माना जाता था परंतु अब उनका वर्गीकरण [[प्रोकैरियोट्स]] के रूप में होता है। दूसरे जन्तु कोशिकों तथा [[यूकैरियोट्स]] की भांति जीवाणु कोष में पूर्ण विकसित [[केन्द्रक]] का सर्वथा अभाव होता है जबकि दोहरी [[झिल्ली]] युक्त कोशिकांग यदा कदा ही पाए जाते है। पारंपरिक रूप से जीवाणु शब्द का प्रयोग सभी सजीवों के लिए होता था, परंतु यह वैज्ञानिक वर्गीकरण [[१९९०]] में हुई एक खोज के बाद बदल गया जिसमें पता चला कि प्रोकैरियोटिक सजीव वास्तव में दो भिन्न समूह के जीवों से बने हैं जिनका [[क्रम विकास]] एक ही पूर्वज से हुआ। इन दो प्रकार के जीवों को जीवाणु एवं [[आर्किया]] कहा जाता है।<ref name="autogenerated2">{{cite journal |author=Woese C, Kandler O, Wheelis M |title=Towards a natural system of organisms: proposal for the domains Archaea, Bacteria, and Eucarya |url=http://www.pnas.org/cgi/reprint/87/12/4576 |journal=Proc Natl Acad Sci U S a |volume=87 |issue=12 |pages=4576–9 |year=1990 |pmid=2112744 |doi=10.1073/pnas.87.12.4576 |access-date=17 सितंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080627233102/http://www.pnas.org/cgi/reprint/87/12/4576 |archive-date=27 जून 2008 |url-status=live }}</ref>
== इतिहास ==
[[चित्र:Louis Pasteur.jpg|thumb|200px|right|[[लूई पाश्चर]]]]
जीवाणुओं को सबसे पहले [[१६७६]] ई. में डच वैज्ञानिक [[एण्टनी वाँन ल्यूवोनहूक]] ने एकल [[लेंस]] वाले [[सूक्ष्मदर्शी यंत्र]] से देखा था जिसे उसने स्वयं बनाया था। <ref>{{cite journal |author=Porter JR |title=Antony van Leeuwenhoek: Tercentenary of his discovery of bacteria |journal=Bacteriological reviews |volume=40 |issue=2 |pages=260–269 |year=1976 |pmid=786250 |doi= |url=http://mmbr.asm.org/cgi/pmidlookup?view=long&pmid=786250 |access-date=30 सितंबर 2008 |archive-url=https://archive.today/20120530194602/http://mmbr.asm.org/cgi/pmidlookup?view=long&pmid=786250 |archive-date=30 मई 2012 |url-status=live }}</ref> परन्तु उस समय उसने इन्हें [[जंतुक]] (animalcule) समझा था। अपने अवलोकनों की पुष्टि के लिए उसने रायल सोसाइटी को कई पत्र लिखे।<ref>{{cite journal |author=van Leeuwenhoek A |title=An abstract of a letter from Mr. Anthony Leevvenhoek at Delft, dated Sep. 17, 1683, Containing Some Microscopical Observations, about Animals in the Scurf of the Teeth, the Substance Call'd Worms in the Nose, the Cuticula Consisting of Scales |url=http://www.journals.royalsoc.ac.uk/content/120136/?k=Sep.+17%2c+1683 |journal=Philosophical Transactions (1683–1775) |volume=14 |pages=568–574 |year=1684 |accessdate=2007-08-19 }}{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref><ref>{{cite journal |author=van Leeuwenhoek A |title=Part of a Letter from Mr Antony van Leeuwenhoek, concerning the Worms in Sheeps Livers, Gnats, and Animalcula in the Excrements of Frogs |url=http://www.journals.royalsoc.ac.uk/link.asp?id=4j53731651310230 |journal=Philosophical Transactions (1683–1775) |volume=22 |pages=509–518 |year=1700 |accessdate=2007-08-19 }}{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref><ref>{{cite journal |author=van Leeuwenhoek A |title=Part of a Letter from Mr Antony van Leeuwenhoek, F. R. S. concerning Green Weeds Growing in Water, and Some Animalcula Found about Them |url=http://www.journals.royalsoc.ac.uk/link.asp?id=fl73121jk4150280 |journal=Philosophical Transactions (1683-1775) |volume=23 |pages=1304–11 |year=1702 |accessdate=2007-08-19 |doi=10.1098/rstl.1702.0042 }}{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
१६८३ ई. में ल्यूवेनहॉक ने जीवाणु का चित्रण कर अपने मत की पुष्टि की। [[१८६४]] ई. में फ्रांसनिवासी [[लूई पाश्चर]] तथा [[१८९०]] ई. में कोच ने यह मत व्यक्त किया कि इन जीवाणुओं से रोग फैलते हैं।<ref>{{cite web | url = http://biotech.law.lsu.edu/cphl/history/articles/pasteur.htm#paperII | title = Pasteur's Papers on the Germ Theory | publisher = LSU Law Center's Medical and Public Health Law Site, Historic Public Health Articles | accessdate = 2006-11-23 | archive-url = https://web.archive.org/web/20171108031227/https://biotech.law.lsu.edu/cphl/history/articles/pasteur.htm#paperII | archive-date = 8 नवंबर 2017 | url-status = dead }}</ref>
पाश्चर ने [[१९८९]] में प्रयोगों द्वारा यह दिखाया कि [[किण्वन]] की [[रासायनिक]] क्रिया सूक्ष्म जीवों द्वारा होती है। कोच [[सूक्ष्मजैविकी]] के क्षेत्र में युगपुरूष माने जाते हैं, इन्होंने [[हैजा]], ऐन्थ्रेक्स तथा [[क्षय रोग|क्षय रोगों]] पर गहन अध्ययन किया। अंततः कोच ने यह सिद्ध कर दिया कि कई रोग सूक्ष्म जीवों के कारण होते हैं। इसके लिए [[१९०५]] ई. में उन्हें [[नोबेल पुरस्कार]] से सम्मानित किया गया।<ref>{{cite web | url = http://nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/laureates/1905/ | title = The Nobel Prize in Physiology or Medicine 1905 | publisher = Nobelprize.org | accessdate = 2006-11-22 | archive-url = https://web.archive.org/web/20061210184150/http://nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/laureates/1905/ | archive-date = 10 दिसंबर 2006 | url-status = live }}</ref> कोच न रोगों एवं उनके कारक जीवों का पता लगाने के लिए कुछ परिकल्पनाएं की थी जो आज भी इस्तेमाल होती हैं।<ref>{{cite journal |author=O'Brien S, Goedert J |title=HIV causes AIDS: Koch's postulates fulfilled |journal=Curr Opin Immunol |volume=8 |issue=5 |pages=613–618 |year=1996 |pmid=8902385 |doi=10.1016/S0952-7915(96)80075-6}}</ref>
[[१९वीं शताब्दी]] तक सभी जान गए थे कि जीवाणु कई रोगों के कारक हैं, फिर भी किसी प्रभावी [[प्रतिजैविक]] की खोज नहीं हो सकी।<ref>{{cite journal |author=Thurston A |title=Of blood, inflammation and gunshot wounds: the history of the control of sepsis |journal=Aust N Z J Surg |volume=70 |issue=12 |pages=855–61 |year=2000 |pmid=11167573 |doi=10.1046/j.1440-1622.2000.01983.x}}</ref> सबसे पहले प्रतिजैविक का आविष्कार [[१९१०]] में पॉल एहरिच ने किया जिससे [[सिफलिस]] रोग की चिकित्सा सम्भव हो सकी।<ref>{{cite journal |author=Schwartz R |title=Paul Ehrlich's magic bullets |url=https://archive.org/details/sim_new-england-journal-of-medicine_2004-03-11_350_11/page/1078 |journal=N Engl J Med |volume=350 |issue=11 |pages=1079–80 |year=2004|pmid = 15014180 |doi=10.1056/NEJMp048021}}</ref> इसके लिए [[१९०८]] ई. में उन्हें [[चिकित्साशास्त्र]] में [[नोबेल पुरस्कार]] प्रदान किया गया। इन्होंने जीवाणुओं को अभिरंजित करने की कारगर विधियां खोज निकाली, जिनके आधार पर ग्राम स्टेन की रचना संभव हुई।<ref>{{cite web | url = http://nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/laureates/1908/ehrlich-bio.html | title = Biography of Paul Ehrlich | publisher = Nobelprize.org | accessdate = 2006-11-26 | archive-url = https://web.archive.org/web/20061128093700/http://nobelprize.org/nobel_prizes/medicine/laureates/1908/ehrlich-bio.html | archive-date = 28 नवंबर 2006 | url-status = live }}</ref>
== उत्पत्ति एवं क्रमविकास ==
आधुनिक जीवाणुओं के पूर्वज वे एक कोशिकीय [[सूक्ष्मजीव]] थे, जिनकी उत्पत्ति ४० करोड़ वर्ष पूर्व पृथ्वी पर जीवन के आरम्भ के समय हुई। इसके बाद लगभग ३० करोड़ वर्ष तक पृथ्वी पर जीवन के नाम पर सूक्ष्मजीव ही थे। इनमें जीवाणु तथा [[आर्किया]] मुख्य थे।<ref>{{cite journal |author=Schopf J |title=Disparate rates, differing fates: tempo and mode of evolution changed from the Precambrian to the Phanerozoic |journal=Proc Natl Acad Sci U S a |volume=91 |issue=15 |pages=6735–42 |year=1994 |pmid=8041691 |pmc=44277 |doi=10.1073/pnas.91.15.6735 |url=http://www.pnas.org/cgi/pmidlookup?view=long&pmid=8041691}}</ref><ref>{{cite journal |author=DeLong E, Pace N |title=Environmental diversity of bacteria and archaea |journal=Syst Biol |volume=50 |issue=4 |pages=470–78 |year=2001|pmid = 12116647 |doi=10.1080/106351501750435040}}</ref> स्ट्रोमेटोलाइट्स जैसे जीवाणुओं के [[जीवाश्म]] पाये गए हैं परन्तु इनकी अस्पष्ट बाह्य संरचना के कारण जीवाणुओं को समझने में इनसे कोई खास मदद नहीं मिली।
== वर्गीकरण ==
जीवाणुओं का वर्गीकरण आकृति के अनुसार किया जाता है। उदाहरण-
1. [[दण्डाणु]] (बैसिलाइ) – दंड जैसे,
2. गोलाणु (कोक्काई)- बिन्दु जैसे,
3. सर्पिलाणु (स्पिरिलाइ) – लहरदार आदि।
[[चित्र:Bacterial morphology diagram.svg|center|500px|thumb|जीवाणु आकारिकी]]
==मानव के विभिन्न अंगों को प्रभावित करने वाले जीवाणु==
[[चित्र:Bacterial infections and involved species.png|center|500px|thumb|बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण तथा उससे सम्बन्धित जीवाणु-प्रजाति]]
== इन्हें भी देखें ==
* [[फफूंद]] (फंगस)
* [[विषाणु]] (वाइरस)
* [[सूक्ष्मजैविकी]]
* [[एककोशिकीय]]
* [[ प्रोकैरियोटिक कोशिका]]
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
{{pp-semi-template|small=yes}}
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://web.archive.org/web/20180902220754/http://www.vivacepanorama.com/major-diseases-caused-by-bacteria-in-the-human-body/ मानव शरीर में जीवाणुओं द्वारा होने वाले प्रमुख रोग]
[[श्रेणी:जीव विज्ञान]]
[[श्रेणी:सूक्ष्मजैविकी]]
[[श्रेणी:जीवाणु]]
[[श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना]]
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चम्बल नदी
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Anitya Gautam
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| discharge1_avg = {{convert|456|m3/s|cuft/s|abbr=on}}<ref>{{cite web |url= http://www.wii.gov.in/images/images/documents/research_report_2011_asses_water_chambal.pdf|title= Assessment of minimum water flow requirements of Chambal River in the context of Gharial (Gavialis gangeticus) and Gangetic Dolphin (Platanista gangetica) conservation|last1= Hussain|first1=Syed |last2= Sharma|first2= R.K.|last3=Dasgupta|first3=Niladri|last4=Raha|first4=Anshuman|date=April 2011 |website= www.wii.gov.in|publisher=Wildlife Institute of India |access-date=11 February 2014}}</ref>
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'''चम्बल (चंबल) नदी''' [[मध्य भारत (पूर्व राज्य)|मध्य भारत]] में [[यमुना नदी]] की [[उपनदी|सहायक नदी]] है। यह नदी "जानापाव पर्वत " बांगचु पॉइंट [[डॉ॰ आम्बेडकर नगर|महू]] से निकलती है। इसका प्राचीन नाम "चर्मण्वती " है। इसकी सहायक नदियाँ [[शिप्रा नदी|शिप्रा]], सिन्ध (सिंध), [[काली सिन्ध नदी|काली सिन्ध]], ओर [[कुनू नदी]] है। यह नदी भारत में उत्तर तथा उत्तर-मध्य भाग में [[राजस्थान]] के चित्तौड़ गढ़ के चौरासी गढ से[[कोटा जिला|कोटा]] तथा [[धौलपुर जिला|धौलपुर]] सवाईमाधोपुर, [[मध्य प्रदेश]] के [[धार ज़िला|धार]], [[उज्जैन ज़िला|उज्जैन]], [[रतलाम ज़िला|रतलाम]], [[मंदसौर जिला|मन्दसौर]], [[भिंड ज़िला|भिंड]], [[मुरैना जिला|मुरैना]] आदि जिलों से होकर बहती है।<ref>[https://www.patrika.com/kanpur-news/story-of-pollution-free-chambal-river-news-in-hindi-1472893/] अकांक्षा सिंह, पत्रिका, लखनऊ, कानपुर</ref> यह नदी दक्षिण की ओर मुड़ कर [[उत्तर प्रदेश]] राज्य में [[यमुना नदी|यमुना]] में शामिल होने के पहले राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच सीमा बनाती है। इस नदी पर चार जल विधुत परियोजना -गांधी सागर, राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर और कोटा बैराज (कोटा)- चल रही है।<ref>[https://gkindiatoday.com/%E0%A4%9A%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AC%E0%A4%B2-%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7/] {{Dead link|date=सितंबर 2026 |bot=InternetArchiveBot }} gkindiatoday.com 3 Oct, 2020</ref> प्रसिद्ध ''चूलीय जल प्रपात''चम्बल (चंबल) नदी रावतभाटा जिले मे है चोलिया जलप्रपात की ऊंचाई 18 मीटर है और यह राजस्थान का सबसे ऊंचा जलप्रपात है। कुल लम्बाई 135। राजस्थान की औधोगिक नगरी [[कोटा]] इस नदी के किनारे स्थित है।
यह एक बारहमासी नदी है। इसका उद्गम स्थल जानापाव की पहाड़ी (मध्य प्रदेश) है।<ref>[https://bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%9A%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%B2_%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80]bharatdiscovery.org]</ref> यह दक्षिण में महू शहर के, इन्दौर (इंदौर) के पास, विन्ध्य (विंध्य) रेंज में मध्य प्रदेश में दक्षिण ढलान से होकर गुजरती है। चम्बल और उसकी सहायक नदियाँ उत्तर पश्चिमी मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र के नाले, जबकि इसकी सहायक नदी, बनास, जो अरावली पर्वतों से शुरू होती है इसमें मिल जाती है। सवाईाधोपुर में चंबल बनास सीप नदी त्रिवेणी संगम बनाती हैं । चम्बल, [[कावेरी]], [[यमुना]], [[सिन्धु]], पहुज भरेह के पास पचनदा में, उत्तर प्रदेश राज्य में जालौन (उरई
) और इटावा जिले की सीमा पर शामिल पाँच नदियों के सङ्गम (संगम) समाप्त होता है।चंबल नदी [[राजस्थान]] कि सबसे बड़ी नदी है । चम्बल नदी में सवाई माधोपुर तथा धौलपुर में बीहड़ (गहरे उबड़ खाबड़ खड्डे )पाए जाते हैं ।
चम्बल नदी कि सहायक नदियां ,बनास ,आहू,परवन, कालीसिंध, आदि है विस्तार से जानकारी के लिए यहां पढ़ें [https://www.examraftaar.com/rajasthan-ki-nadiya/ Read More] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20221122140719/https://www.examraftaar.com/rajasthan-ki-nadiya/ |date=22 नवंबर 2022 }}
== अपवाह क्षेत्र==
चम्बल के अपवाह क्षेत्र में चित्तौड़, कोटा, बूँदी, सवाई माधौपुर, करौली, धौलपुर इत्यादि इलाके शामिल हैं। तथा सवाई माधोपुर, करौली व धौलपुर से गुजरती हुई राजस्थान व मध्यप्रदेश की सीमा बनाते हुए चलती है जो कि 252 किलोमीटर की है।<ref>[https://www.rajasthangyan.com/trick?tid=200&filter=All] rajasthangyan.com</ref> <ref>[https://m.dailyhunt.in/news/india/hindi/gs+junction-epaper-gsjun/chambal+nadi+ka+apavah+kshetr+aur+sahayak+nadiya-newsid-n169937436] m.dailyhunt.in</ref>
== सहायक नदियाँ =
बायीं तरफ की सहायक नदियां-
बनास नदी,चाकण नदी,मेज नदी,कुराल,बामनी,गुजांली।
दायीं तरह की सहायक नदियां-
कुनू,सीप,पार्वती,कालीसिंध,आलनिया,छोटी कालीसिंध।
== मुहाना ==
उत्तर प्रदेश में बहते हुए 965 किलोमीटर की दूरी तय करके यमुना नदी में मिल जाती है। चम्बल नदी का कुल अपवाह क्षेत्र 19,500 वर्ग किलोमीटर हैं।{{Cn|date=नवम्बर 2019}} चम्बल यमुना नदी की मुख्य सहायक नदियों में से एक है। उतरप्रदेश के इटावा जिले के मुरादगंज के पास यमुना में मिल जाती है।
== ग्रन्थों के अनुसार ==
[[महाभारत]] के अनुसार राजा रंतिदेव के यज्ञों में जो आर्द्र चर्म राशि इकट्ठा हो गई थी उसी से यह नदी उदभुत हुई थी-
'''महानदी चर्मराशेरूत्क्लेदात् ससृजेयतःततश्चर्मण्वतीत्येवं विख्याता स महानदी'''।
कालिदास ने भी मेघदूत-पूर्वमेघ 47 में चर्मण्वती नदी को रंतिदेव की कीर्ति का मूर्त स्वरूप कहा गया है-
<poem>आराध्यैनं शदवनभवं देवमुल्लघिताध्वा,
सिद्धद्वन्द्वैर्जलकण भयाद्वीणिभिदैत्त मार्गः।
व्यालम्बेथास्सुरभितनयालंभजां मानयिष्यन्,
स्रोतो मूत्यभुवि परिणतां रंतिदेवस्य कीर्तिः।</poem>
इन उल्लेखों से यह जान पड़ता है कि रंतिदेव ने चर्मवती के तट पर अनेक यज्ञ किए थे।
महाभारत में भी चर्मवती का उल्लेख है -
'''ततश्चर्मणवती कूले जंभकस्यात्मजं नृपं ददर्श वासुदेवेन शेषितं पूर्ववैरिणा'''<br>
अर्थात इसके पश्चात सहदेव ने (दक्षिण दिशा की विजय यात्रा के प्रसंग में) चर्मण्वती के तट पर जंभक के पुत्र को देखा जिसे उसके पूर्व शत्रु वासुदेव ने जीवित छोड़ दिया था। सहदेव इसे युद्ध में हराकर दक्षिण की ओर अग्रसर हुए थे।
चर्मण्वती नदी को वन पर्व के तीर्थ यात्रा अनु पर्व में पुण्य नदी माना गया है -<br>
'''चर्मण्वती समासाद्य नियतों नियताशनः रंतिदेवाभ्यनुज्ञातमग्निष्टोमफलं लभेत्'''।
श्रीमदभागवत में चर्मवती का नर्मदा के साथ उल्लेख है-<br>
'''सुरसानर्मदा चर्मण्वती सिंधुरंधः'''
इस नदी का उदगम जनपव की पहाड़ियों से हुआ है। यहीं से गम्भीरा (गंभीरा) नदी भी निकलती है। यह यमुना की सहायक नदी है।
महाभारत में अश्वनदी का चर्मण्वती में, चर्मण्वती का यमुना में और यमुना का गङ्गा (गंगा) नदी में मिलने का उल्लेख है –
<poem>मंजूषात्वश्वनद्याः सा ययौ चर्मण्वती नदीम्,
चर्मण्वत्याश्व यमुना ततो गङ्गा जगामह।
गङ्गायाः सूतविषये चंपामनुययौपुरीम्।</poem>
चंबल की विशेषताएं:-
विश्व में सर्वाधिक अवनालिका अपरदन करने वाली नदी।
एकमात्र नदी जिस पर 100km में 4 बांध निर्मित है।
राजस्थान में सर्वाधिक सतही जल वाली नदी।
राजस्थान की एकमात्र नदी जो यूनेस्को सूची में शामिल होने के लिए नामित हुई थी।
राजस्थान की सबसे लंबी नदी है।
== इन्हें भी देखें ==
* [[यमुना नदी]]
* [[बनास नदी]]
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{भारत की नदियाँ}}
[[श्रेणी:चम्बल नदी|*]]
[[श्रेणी:भारत की नदियाँ]]
[[श्रेणी:मध्य प्रदेश की नदियाँ]]
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[[श्रेणी:यमुना नदी की उपनदियाँ]]
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'''चम्बल (चंबल) नदी''' [[मध्य भारत (पूर्व राज्य)|मध्य भारत]] में [[यमुना नदी]] की [[उपनदी|सहायक नदी]] है। यह नदी "जानापाव पर्वत " बांगचु पॉइंट [[डॉ॰ आम्बेडकर नगर|महू]] से निकलती है। इसका प्राचीन नाम "चर्मण्वती " है। इसकी सहायक नदियाँ [[शिप्रा नदी|शिप्रा]], सिन्ध (सिंध), [[काली सिन्ध नदी|काली सिन्ध]], ओर [[कुनू नदी]] है। यह नदी भारत में उत्तर तथा उत्तर-मध्य भाग में [[राजस्थान]] के चित्तौड़ गढ़ के चौरासी गढ से[[कोटा जिला|कोटा]] तथा [[धौलपुर जिला|धौलपुर]] सवाईमाधोपुर, [[मध्य प्रदेश]] के [[धार ज़िला|धार]], [[उज्जैन ज़िला|उज्जैन]], [[रतलाम ज़िला|रतलाम]], [[मंदसौर जिला|मन्दसौर]], [[भिंड ज़िला|भिंड]], [[मुरैना जिला|मुरैना]] आदि जिलों से होकर बहती है।<ref>[https://www.patrika.com/kanpur-news/story-of-pollution-free-chambal-river-news-in-hindi-1472893/] अकांक्षा सिंह, पत्रिका, लखनऊ, कानपुर</ref> यह नदी दक्षिण की ओर मुड़ कर [[उत्तर प्रदेश]] राज्य में [[यमुना नदी|यमुना]] में शामिल होने के पहले राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच सीमा बनाती है। इस नदी पर चार जल विधुत परियोजना -गांधी सागर, राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर और कोटा बैराज (कोटा)- चल रही है।<ref>[https://gkindiatoday.com/%E0%A4%9A%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AC%E0%A4%B2-%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7/] {{Dead link|date=सितंबर 2026 |bot=InternetArchiveBot }} gkindiatoday.com 3 Oct, 2020</ref> प्रसिद्ध ''चूलीय जल प्रपात''चम्बल (चंबल) नदी रावतभाटा जिले मे है चोलिया जलप्रपात की ऊंचाई 18 मीटर है और यह राजस्थान का सबसे ऊंचा जलप्रपात है। कुल लम्बाई 135। राजस्थान की औधोगिक नगरी [[कोटा]] इस नदी के किनारे स्थित है।
यह एक बारहमासी नदी है। इसका उद्गम स्थल जानापाव की पहाड़ी (मध्य प्रदेश) है।<ref>[https://bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%9A%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%B2_%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80]bharatdiscovery.org]</ref> यह दक्षिण में महू शहर के, इन्दौर (इंदौर) के पास, विन्ध्य (विंध्य) रेंज में मध्य प्रदेश में दक्षिण ढलान से होकर गुजरती है। चम्बल और उसकी सहायक नदियाँ उत्तर पश्चिमी मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र के नाले, जबकि इसकी सहायक नदी, बनास, जो अरावली पर्वतों से शुरू होती है इसमें मिल जाती है। सवाईाधोपुर में चंबल बनास सीप नदी त्रिवेणी संगम बनाती हैं । चम्बल, [[कावेरी]], [[यमुना]], [[सिन्धु]], पहुज भरेह के पास पचनदा में, [[उत्तर प्रदेश]] राज्य में जालौन (उरई
) और इटावा जिले की सीमा पर शामिल पाँच नदियों के सङ्गम (संगम) समाप्त होता है।चंबल नदी [[राजस्थान]] कि सबसे बड़ी नदी है । चम्बल नदी में सवाई माधोपुर तथा धौलपुर में बीहड़ (गहरे उबड़ खाबड़ खड्डे )पाए जाते हैं ।
चम्बल नदी कि सहायक नदियां ,बनास ,आहू,परवन, कालीसिंध, आदि है विस्तार से जानकारी के लिए यहां पढ़ें [https://www.examraftaar.com/rajasthan-ki-nadiya/ Read More] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20221122140719/https://www.examraftaar.com/rajasthan-ki-nadiya/ |date=22 नवंबर 2022 }}
== अपवाह क्षेत्र==
चम्बल के अपवाह क्षेत्र में चित्तौड़, कोटा, बूँदी, सवाई माधौपुर, करौली, धौलपुर इत्यादि इलाके शामिल हैं। तथा सवाई माधोपुर, करौली व धौलपुर से गुजरती हुई राजस्थान व मध्यप्रदेश की सीमा बनाते हुए चलती है जो कि 252 किलोमीटर की है।<ref>[https://www.rajasthangyan.com/trick?tid=200&filter=All] rajasthangyan.com</ref> <ref>[https://m.dailyhunt.in/news/india/hindi/gs+junction-epaper-gsjun/chambal+nadi+ka+apavah+kshetr+aur+sahayak+nadiya-newsid-n169937436] m.dailyhunt.in</ref>
== सहायक नदियाँ =
बायीं तरफ की सहायक नदियां-
बनास नदी,चाकण नदी,मेज नदी,कुराल,बामनी,गुजांली।
दायीं तरह की सहायक नदियां-
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== मुहाना ==
उत्तर प्रदेश में बहते हुए 965 किलोमीटर की दूरी तय करके यमुना नदी में मिल जाती है। चम्बल नदी का कुल अपवाह क्षेत्र 19,500 वर्ग किलोमीटर हैं।{{Cn|date=नवम्बर 2019}} चम्बल यमुना नदी की मुख्य सहायक नदियों में से एक है। उतरप्रदेश के इटावा जिले के मुरादगंज के पास यमुना में मिल जाती है।
== ग्रन्थों के अनुसार ==
[[महाभारत]] के अनुसार राजा रंतिदेव के यज्ञों में जो आर्द्र चर्म राशि इकट्ठा हो गई थी उसी से यह नदी उदभुत हुई थी-
'''महानदी चर्मराशेरूत्क्लेदात् ससृजेयतःततश्चर्मण्वतीत्येवं विख्याता स महानदी'''।
कालिदास ने भी मेघदूत-पूर्वमेघ 47 में चर्मण्वती नदी को रंतिदेव की कीर्ति का मूर्त स्वरूप कहा गया है-
<poem>आराध्यैनं शदवनभवं देवमुल्लघिताध्वा,
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इन उल्लेखों से यह जान पड़ता है कि रंतिदेव ने चर्मवती के तट पर अनेक यज्ञ किए थे।
महाभारत में भी चर्मवती का उल्लेख है -
'''ततश्चर्मणवती कूले जंभकस्यात्मजं नृपं ददर्श वासुदेवेन शेषितं पूर्ववैरिणा'''<br>
अर्थात इसके पश्चात सहदेव ने (दक्षिण दिशा की विजय यात्रा के प्रसंग में) चर्मण्वती के तट पर जंभक के पुत्र को देखा जिसे उसके पूर्व शत्रु वासुदेव ने जीवित छोड़ दिया था। सहदेव इसे युद्ध में हराकर दक्षिण की ओर अग्रसर हुए थे।
चर्मण्वती नदी को वन पर्व के तीर्थ यात्रा अनु पर्व में पुण्य नदी माना गया है -<br>
'''चर्मण्वती समासाद्य नियतों नियताशनः रंतिदेवाभ्यनुज्ञातमग्निष्टोमफलं लभेत्'''।
श्रीमदभागवत में चर्मवती का नर्मदा के साथ उल्लेख है-<br>
'''सुरसानर्मदा चर्मण्वती सिंधुरंधः'''
इस नदी का उदगम जनपव की पहाड़ियों से हुआ है। यहीं से गम्भीरा (गंभीरा) नदी भी निकलती है। यह यमुना की सहायक नदी है।
महाभारत में अश्वनदी का चर्मण्वती में, चर्मण्वती का यमुना में और यमुना का गङ्गा (गंगा) नदी में मिलने का उल्लेख है –
<poem>मंजूषात्वश्वनद्याः सा ययौ चर्मण्वती नदीम्,
चर्मण्वत्याश्व यमुना ततो गङ्गा जगामह।
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चंबल की विशेषताएं:-
विश्व में सर्वाधिक अवनालिका अपरदन करने वाली नदी।
एकमात्र नदी जिस पर 100km में 4 बांध निर्मित है।
राजस्थान में सर्वाधिक सतही जल वाली नदी।
राजस्थान की एकमात्र नदी जो यूनेस्को सूची में शामिल होने के लिए नामित हुई थी।
राजस्थान की सबसे लंबी नदी है।
== इन्हें भी देखें ==
* [[यमुना नदी]]
* [[बनास नदी]]
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{भारत की नदियाँ}}
[[श्रेणी:चम्बल नदी|*]]
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'''चम्बल (चंबल) नदी''' [[मध्य भारत (पूर्व राज्य)|मध्य भारत]] में [[यमुना नदी]] की [[उपनदी|सहायक नदी]] है। यह नदी "जानापाव पर्वत " बांगचु पॉइंट [[डॉ॰ आम्बेडकर नगर|महू]] से निकलती है। इसका प्राचीन नाम "चर्मण्वती " है। इसकी सहायक नदियाँ [[शिप्रा नदी|शिप्रा]], सिन्ध (सिंध), [[काली सिन्ध नदी|काली सिन्ध]], ओर [[कुनू नदी]] है। यह नदी भारत में उत्तर तथा उत्तर-मध्य भाग में [[राजस्थान]] के चित्तौड़ गढ़ के चौरासी गढ से[[कोटा जिला|कोटा]] तथा [[धौलपुर जिला|धौलपुर]] सवाईमाधोपुर, [[मध्य प्रदेश]] के [[धार ज़िला|धार]], [[उज्जैन ज़िला|उज्जैन]], [[रतलाम ज़िला|रतलाम]], [[मंदसौर जिला|मन्दसौर]], [[भिंड ज़िला|भिंड]], [[मुरैना जिला|मुरैना]] आदि जिलों से होकर बहती है।<ref>[https://www.patrika.com/kanpur-news/story-of-pollution-free-chambal-river-news-in-hindi-1472893/] अकांक्षा सिंह, पत्रिका, लखनऊ, कानपुर</ref> यह नदी दक्षिण की ओर मुड़ कर [[उत्तर प्रदेश]] राज्य में [[यमुना नदी|यमुना]] में शामिल होने के पहले राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच सीमा बनाती है। इस नदी पर चार जल विधुत परियोजना -गांधी सागर, राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर और कोटा बैराज (कोटा)- चल रही है।<ref>[https://gkindiatoday.com/%E0%A4%9A%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AC%E0%A4%B2-%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7/] {{Dead link|date=सितंबर 2026 |bot=InternetArchiveBot }} gkindiatoday.com 3 Oct, 2020</ref> प्रसिद्ध ''चूलीय जल प्रपात''चम्बल (चंबल) नदी रावतभाटा जिले मे है चोलिया जलप्रपात की ऊंचाई 18 मीटर है और यह राजस्थान का सबसे ऊंचा जलप्रपात है। कुल लम्बाई 135। राजस्थान की औधोगिक नगरी [[कोटा]] इस नदी के किनारे स्थित है।
यह एक बारहमासी नदी है। इसका उद्गम स्थल जानापाव की पहाड़ी (मध्य प्रदेश) है।<ref>[https://bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%9A%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%B2_%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80]bharatdiscovery.org]</ref> यह दक्षिण में महू शहर के, इन्दौर (इंदौर) के पास, विन्ध्य (विंध्य) रेंज में मध्य प्रदेश में दक्षिण ढलान से होकर गुजरती है। चम्बल और उसकी सहायक नदियाँ उत्तर पश्चिमी मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र के नाले, जबकि इसकी सहायक नदी, बनास, जो अरावली पर्वतों से शुरू होती है इसमें मिल जाती है। सवाईाधोपुर में चंबल बनास सीप नदी त्रिवेणी संगम बनाती हैं । चम्बल, [[कावेरी]], [[यमुना]], [[सिन्धु]], पहुज भरेह के पास पचनदा में, [[उत्तर प्रदेश]] राज्य में जालौन (उरई
) और इटावा जिले की सीमा पर शामिल पाँच नदियों के सङ्गम (संगम) समाप्त होता है।चंबल नदी [[राजस्थान]] कि सबसे बड़ी नदी है । चम्बल नदी में सवाई माधोपुर तथा धौलपुर में बीहड़ (गहरे उबड़ खाबड़ खड्डे )पाए जाते हैं ।
चम्बल नदी कि सहायक नदियां ,बनास ,आहू,परवन, कालीसिंध, आदि है विस्तार से जानकारी के लिए यहां पढ़ें [https://www.examraftaar.com/rajasthan-ki-nadiya/ Read More] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20221122140719/https://www.examraftaar.com/rajasthan-ki-nadiya/ |date=22 नवंबर 2022 }}
== अपवाह क्षेत्र==
चम्बल के अपवाह क्षेत्र में चित्तौड़, कोटा, बूँदी, सवाई माधौपुर, करौली, धौलपुर इत्यादि इलाके शामिल हैं। तथा सवाई माधोपुर, करौली व धौलपुर से गुजरती हुई राजस्थान व [[मध्यप्रदेश]] की सीमा बनाते हुए चलती है जो कि 252 किलोमीटर की है।<ref>[https://www.rajasthangyan.com/trick?tid=200&filter=All] rajasthangyan.com</ref> <ref>[https://m.dailyhunt.in/news/india/hindi/gs+junction-epaper-gsjun/chambal+nadi+ka+apavah+kshetr+aur+sahayak+nadiya-newsid-n169937436] m.dailyhunt.in</ref>
== सहायक नदियाँ =
बायीं तरफ की सहायक नदियां-
बनास नदी,चाकण नदी,मेज नदी,कुराल,बामनी,गुजांली।
दायीं तरह की सहायक नदियां-
कुनू,सीप,पार्वती,कालीसिंध,आलनिया,छोटी कालीसिंध।
== मुहाना ==
उत्तर प्रदेश में बहते हुए 965 किलोमीटर की दूरी तय करके यमुना नदी में मिल जाती है। चम्बल नदी का कुल अपवाह क्षेत्र 19,500 वर्ग किलोमीटर हैं।{{Cn|date=नवम्बर 2019}} चम्बल यमुना नदी की मुख्य सहायक नदियों में से एक है। उतरप्रदेश के इटावा जिले के मुरादगंज के पास यमुना में मिल जाती है।
== ग्रन्थों के अनुसार ==
[[महाभारत]] के अनुसार राजा रंतिदेव के यज्ञों में जो आर्द्र चर्म राशि इकट्ठा हो गई थी उसी से यह नदी उदभुत हुई थी-
'''महानदी चर्मराशेरूत्क्लेदात् ससृजेयतःततश्चर्मण्वतीत्येवं विख्याता स महानदी'''।
कालिदास ने भी मेघदूत-पूर्वमेघ 47 में चर्मण्वती नदी को रंतिदेव की कीर्ति का मूर्त स्वरूप कहा गया है-
<poem>आराध्यैनं शदवनभवं देवमुल्लघिताध्वा,
सिद्धद्वन्द्वैर्जलकण भयाद्वीणिभिदैत्त मार्गः।
व्यालम्बेथास्सुरभितनयालंभजां मानयिष्यन्,
स्रोतो मूत्यभुवि परिणतां रंतिदेवस्य कीर्तिः।</poem>
इन उल्लेखों से यह जान पड़ता है कि रंतिदेव ने चर्मवती के तट पर अनेक यज्ञ किए थे।
महाभारत में भी चर्मवती का उल्लेख है -
'''ततश्चर्मणवती कूले जंभकस्यात्मजं नृपं ददर्श वासुदेवेन शेषितं पूर्ववैरिणा'''<br>
अर्थात इसके पश्चात सहदेव ने (दक्षिण दिशा की विजय यात्रा के प्रसंग में) चर्मण्वती के तट पर जंभक के पुत्र को देखा जिसे उसके पूर्व शत्रु वासुदेव ने जीवित छोड़ दिया था। सहदेव इसे युद्ध में हराकर दक्षिण की ओर अग्रसर हुए थे।
चर्मण्वती नदी को वन पर्व के तीर्थ यात्रा अनु पर्व में पुण्य नदी माना गया है -<br>
'''चर्मण्वती समासाद्य नियतों नियताशनः रंतिदेवाभ्यनुज्ञातमग्निष्टोमफलं लभेत्'''।
श्रीमदभागवत में चर्मवती का नर्मदा के साथ उल्लेख है-<br>
'''सुरसानर्मदा चर्मण्वती सिंधुरंधः'''
इस नदी का उदगम जनपव की पहाड़ियों से हुआ है। यहीं से गम्भीरा (गंभीरा) नदी भी निकलती है। यह यमुना की सहायक नदी है।
महाभारत में अश्वनदी का चर्मण्वती में, चर्मण्वती का यमुना में और यमुना का गङ्गा (गंगा) नदी में मिलने का उल्लेख है –
<poem>मंजूषात्वश्वनद्याः सा ययौ चर्मण्वती नदीम्,
चर्मण्वत्याश्व यमुना ततो गङ्गा जगामह।
गङ्गायाः सूतविषये चंपामनुययौपुरीम्।</poem>
चंबल की विशेषताएं:-
विश्व में सर्वाधिक अवनालिका अपरदन करने वाली नदी।
एकमात्र नदी जिस पर 100km में 4 बांध निर्मित है।
राजस्थान में सर्वाधिक सतही जल वाली नदी।
राजस्थान की एकमात्र नदी जो यूनेस्को सूची में शामिल होने के लिए नामित हुई थी।
राजस्थान की सबसे लंबी नदी है।
== इन्हें भी देखें ==
* [[यमुना नदी]]
* [[बनास नदी]]
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{भारत की नदियाँ}}
[[श्रेणी:चम्बल नदी|*]]
[[श्रेणी:भारत की नदियाँ]]
[[श्रेणी:मध्य प्रदेश की नदियाँ]]
[[श्रेणी:राजस्थान की नदियाँ]]
[[श्रेणी:यमुना नदी की उपनदियाँ]]
{{भूगोल-आधार}}
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प्राचीन भारत
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text/x-wiki
{{स्रोतहीन|date=मई 2016}}
मानव के उदय से लेकर दसवीं सदी तक के [[भारत का इतिहास]], '''प्राचीन भारत का इतिहास''' कहलाता है।<ref>{{cite web|url=http://www.bbc.com/hindi/india-42527770|title=भारत का 20 लाख साल पुराना इतिहास देखेंगे?|access-date=11 जनवरी 2018|archive-ʳʳᵘʸʳᵈʸᵗᵈ ᵗʰᵗᵗᵍᵗᵗʰᵉ ʸⁱᵈ ᴳᴴ ʰʰᵗʸʸᵘᵘurl=https://web.archive.org/web/20180105014934/http://www.bbc.com/hindi/india-42527770|archive-date=5 जनवरी 2018|url-status=ᴸⁱᵛᵉʳᵖᵒᵒˡ 5'‰⅝ᵗᵒ ᵗⁱᵐᵉ}}</ref>
== प्राचीन भारतीय इतिहास की जानकारी के साधन ==
{{मुख्य|प्राचीन भारतीय इतिहास की जानकारी के साधन}}1.पुरातात्विक स्त्रोत __इसके अंतर्गत अभिलेख, सिक्का,[[स्मारक]], भवन और चित्र आदि आते है,यह उत्खनन से प्राप्त किया जाता है।पुरातात्विक स्त्रोत साहित्यिक स्त्रोत से अधिक प्रमाणित है।
2.साहित्यिक स्त्रोत __ इसके अंतर्गत वेद, पुराण अरंन्यंक ,उपनिषद,महाकाव्य, जातक,पिटक आदि आते है।
3.विदेशी यात्रीयो का वर्णन __विदेशी यात्रियो के वर्णन से तार्त्पय है कि जो विदेशी [[भारत]] मे घूमने आए वह यहाॅ के बारे कुछ लिखकर गए जैसे: फाहइयान ने अशोक के छः स्तंभ के बारे जानकारी लेकर गया।
== पाषाण युग ==
[[पाषाण युग]] से तात्पर्य ऐसे काल से है जब लोग [[पत्थर|पत्थरों]] पर आश्रित थे। पत्थर के [[औज़ार]], पत्थर की गुफा ही उनके जीवन के प्रमुख आधार थे। यह मानव सभ्यता के आरंभिक काल में से है जब मानव आज की तरह विकसित नहीं था। इस काल में मानव प्राकृतिक आपदाओं से जूझता रहता था और शिकार तथा कन्द-मूल फल खाकर अपना जीवन बसर करता था।
=== पुरापाषाण युग ===
{{main|भारत का पुरापाषाण युग}}
[[हिमयुग]] का अधिकांश भाग पुरापाषाण काल में बीता है। भारतीय पुरापाषाण युग को औजारों, जलवायु परिवर्तनों के आधार पर तीन भागों में बांटा जाता है -
* आरंभिक या निम्न पुरापाषाण युग (25,00,000 ईस्वी पूर्व - 100,000 ई. पू.)
* मध्य पुरापाषाण युग (1,000,000 ई. पू. - 40,000 ई. पू.)
* उच्च पुरापाषाण युग (40,000 ई.पू - 10,000 ई.पू.)
आदिम मानव के जीवाश्म भारत में नहीं मिले हैं। [[महाराष्ट्र]] के बोरी नामक स्थान पर मिले तथ्यों से अंदेशा होता है कि मानव की उत्पत्ति 14 लाख वर्ष पूर्व हुई होगी। यह बात लगभग सर्वमान्य है कि अफ़्रीका की अपेक्षा भारत में मानव बाद में बसे। यद्दपि यहां के लोगों का पाषाण कौशल लगभग उसी तरह विकसित हुआ जिस तरह [[अफ़्रीका]] में। इस समय का मानव अपना भोजन कठिनाई से ही बटोर पाता था। वह ना तो खेती करना जानता था और ना ही घर बनाना। यह अवस्था 9000 ई.पू. तक रही होगी।
[[पुरापाषाण काल]] के औजार [[छोटा नागपुर पठार|छोटानागपुर के पठार]] में मिले हैं जो 1,00,000 ई.पू. तक हो सकते हैं। [[आन्ध्र प्रदेश|आंध्र प्रदेश]] के [[कर्नूल|कुर्नूल]] जिले में 20,000 ई.पू. से 10,000 ई.पू. के मध्य के औजार मिले हैं। इनके साथ हड्डी के उपकरण और पशुओं के अवशेष भी मिले हैं। [[उत्तर प्रदेश]] के [[मिर्ज़ापुर]] जिले की [[बेलन घाटी]] में जो पशुओं के अवशेष मिले हैं उनसे ज्ञात होता है कि [[बकरी]], [[भेड़]], [[गाय]], [[भैंस]] इत्यादि पाले जाते थे। फिर भी पुरापाषाण युग की आदिम अवस्था का मानव [[शिकार]] और खाद्य संग्रह पर जीता था। [[पुराण|पुराणों]] में केवल [[फल]] और [[कन्द मूल]] खाकर जीने वालों का जिक्र है। इस तरह के कुछ लोग तो आधुनिक काल तक पर्वतों और गुफाओं में रहते आए हैं।
=== नवपाषाण युग ===
भारत में नवपाषाण युग के अवशेष सम्भवतः 6000 ई०पू० से 1000 ई०पू के है।विकास कि यह अवधि भारतीय उपमहाद्वीप में कुछ देर से आयी क्योकि ऐसा माना jata है कि विश्व के बडे भूभाग( south west Asia) में यह युग 8000-7000 ई०पू० के आसपास पनपा, यहाँ से नील घाटी (Egypt) होते हुए यूरोप पहुंचा। इस युग में मानव पत्थर कि बनी हाथ कि कुल्हाड़ियां आदि औजार पत्थर को छिल घीस और चमकाकर तैयार करता था, उत्तरी भारत में नवपाषाण युग का स्थल बुर्जहोम (कश्मीर) में पाया गया है।
भारत में नव पाषाण काल के प्रमुख चार स्थल है
== ताम्र पाषाण युग ==
नवपाषाण युग का अन्त होते होते धातुओं का प्रयोग शुरू हो गया था। ताम्र पाषाणिक युग में तांबा तथा प्रस्तर के हथियार ही प्रयुक्त होते थे। इस समय तक लोहा या कांसे का प्रयोग आरम्भ नहीं हुआ था। [[भारत]] में ताम्र पाषाण युग की बस्तियां दक्षिण पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी मध्य
प्रदेश, पश्चिमी महाराष्ट्र तथा दक्षिण पूर्वी भारत में पाई गई है। और सारे भारत में जंगल ही था
== कांस्य युग और सिंधु घाटी सभ्यता ==
{{main|सिंधु घाटी सभ्यता}}
बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ तक इतिहासकारों की यह मान्यता थी कि वैदिक सभ्यता भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता है। परन्तु सर [[दयाराम साहनी]] के नेतृत्व में १९२१ में जब [[हड़प्पा]] (पंजाब के माँन्टगोमरी जिले में स्थित) की खुदाई हुई तब इस बात का पता चला कि भारत की सबसे पुरानी सभ्यता वैदिक नहीं वरन [[सिंधु घाटी सभ्यता|सिन्धु घाटी की सभ्यता]] है। अगले साल अर्थात १९२२ में [[राखालदास बनर्जी]] के नेतृत्व में [[मोहन जोदड़ो|मोहनजोदड़ो]] (सिन्ध के [[लाड़काना|लरकाना]] जिले में स्थित) की खुदाई हुई। हड़प्पा टीले के बारे में सबसे पहले चार्ल्स मैसन ने १९२६ में उल्लेख किया था। मोहनजोदड़ो को [[सिन्धी भाषा]] में मृतकों का टीला कहा जाता है। १९२२ में राखालदास बनर्जी ने और इसके बाद १९२२ से १९३० तक सर जॉन मार्शल के निर्देशन में यहां उत्खनन कार्य करवाया गया।
[[सिंधु घाटी सभ्यता]] (2500 ईसापूर्व से 1750 ईसापूर्व तक) विश्व की प्राचीन नदी घाटी सभ्यताओं में से एक प्रमुख सभ्यता है। सम्मानित पत्रिका नेचर में प्रकाशित शोध के अनुसार यह सभ्यता कम से कम 8000 वर्ष पुरानी है। यह [[हड़प्पा]] सभ्यता और 'सिंधु-सरस्वती सभ्यता' के नाम से भी जानी जाती है। इसका विकास सिंधु और घघ्घर/हकड़ा (प्राचीन सरस्वती) के किनारे हुआ।[[मोहन जोदड़ो|मोहनजोदड़ो]], कालीबंगा, लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी और हड़प्पा इसके प्रमुख केन्द्र थे। दिसम्बर २०१४ में भिर्दाना को अबतक का खोजा गया सबसे प्राचीन नगर माना गया सिंधु घाटी सभ्यता का। ब्रिटिश काल में हुई खुदाइयों के आधार पर पुरातत्ववेत्ता और इतिहासकारों का अनुमान है कि यह अत्यंत विकसित सभ्यता थी और ये शहर अनेक बार बसे और उजड़े हैं।
इस सभ्यता की सबसे विशेष बात थी यहां की विकसित नगर निर्माण योजना। [[हड़प्पा]] तथा [[मोहन जोदड़ो|मोहनजोदड़ो]] दोनो नगरों के अपने दुर्ग थे जहां शासक वर्ग का परिवार रहता था। प्रत्येक नगर में दुर्ग के बाहर एक एक उससे निम्न स्तर का शहर था जहां ईंटों के मकानों में सामान्य लोग रहते थे। इन नगर भवनों के बारे में विशेष बात ये थी कि ये जाल की तरह विन्यस्त थे। यानि सड़के एक दूसरे को समकोण पर काटती थीं और नगर अनेक आयताकार खंडों में विभक्त हो जाता था। ये बात सभी सिन्धु बस्तियों पर लागू होती थीं चाहे वे छोटी हों या बड़ी। हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो के भवन बड़े होते थे। वहाँ के स्मारक इस बात के प्रमाण हैं कि वहाँ के शासक मजदूर जुटाने और कर-संग्रह में परम कुशल थे। ईंटों की बड़ी-बड़ी इमारत देख कर सामान्य लोगों को भी यह लगेगा कि ये शासक कितने प्रतापी और प्रतिष्ठावान् थे।
मोहनजोदड़ो का अब तक का सबसे प्रसिद्ध स्थल है विशाल सार्वजनिक स्नानागार, जिसका जलाशय दुर्ग के टीले में है।
=== उत्पत्ति ===
इतनी विस्तृत सभ्यता होने के बावजूद भी इसकी उत्पत्ति को लेकर आज भी विद्वानों में मतैक्य का अभाव है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि हड़प्पा संस्कृति के जितने भी स्थलों की अब तक खुदाई हुई है वहां सभ्यता के विकास अनुक्रम का चिन्ह स्पष्ट नही मिलता है अर्थात इस सभ्यता के अवशेष जहां कहीं भी मिले हैं अपनी पूर्ण विकसित अवस्था में ही मिले हैं।
सर जॉन मार्शल, गार्डन चाईल्ड, मार्टीमर व्हीलर आदि इतिहासकारों की मान्यता है कि हड़प्पा सभ्यता की उत्पत्ति में विदेशी तत्व का हाथ रहा है। इन इतिहासकारों का मानना है कि हड़प्पा की उत्पत्ति [[मेसोपोटामिया]] की शाखा सुमेरिया की सभ्यता की प्रेरणा से हुई है। इन दोनो सभ्यताओं में कुछ समानताएं भी देखने को मिलती है जो इस प्रकार है -
*(१) दोनो ही सभ्यता नगरीय है।
*(२) दोनो ही सभ्यताओं के निवासी कांसे और तांबे के साथ साथ पाषाण के लघु उपकरणों का प्रयोग करते थे।
*(३) दोनों ही सभ्यताओं के भवन निर्माण में कच्चे और पक्के दोनो ही प्रकार के ईंटों का प्रयोग हुआ है।
*(४) दोनो को [[लिपि]] का ज्ञान था।
इन्ही समानताओं के आधार पर व्हीलर ने सैन्धव सभ्यता को [[सुमेरियन सभ्यता]] का एक उपनिवेश बताय़ा था। लेकिन इन समानताओं के बावजूद कुछ ऐसी असमानताएं भी हैं जिनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती है। हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना सुमेरिया की सभ्यता से अधिक सुव्यवस्थित है। दोनो ही सभ्यताओं में आम उपयोग की चीजें काफी भिन्न हैं जैसे बर्तन, उपकरण, मूर्तियां, मुहरें आदि। फिर दोनों ही सभ्यताओं के लिपि में भी अंतर है। जहां सुमेरियाई लिपि में ९०० अक्षर हैं वहीं [[सरस्वती लिपि|सिन्धु लिपि]] में केवल ४०० अक्षर हैं। इन विभिन्नताओं के होते हुए दोनो सभ्यताओं को समान मानना समुचित नहीं लगता है|
== वैदिक काल ==
{{main|वैदिक सभ्यता}}
सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) के पश्चात भारत में जिस नवीन सभ्यता का विकास हुआ उसे ही आर्य (Aryan) अथवा वैदिक सभ्यता (Vedic Civilization) के नाम से जाना जाता है। इस काल की जानकारी हमे मुख्यत: वेदों से प्राप्त होती है, जिसमे [[ऋग्वेद]] सर्वप्राचीन होने के कारण सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। वैदिक काल को ऋग्वैदिक काल या पूर्व वैदिक काल (1500 -1000 ई.पु.) तथा उत्तर वैदिक काल (1000 - 600 ई.पु.) में बांटा गया है। आम तौर पर अधिकतर विद्वान वैदिक सभ्यता का काल 5000 ईसा पूर्व से 500 ईसा पूर्व के बीच में मानत है|
== उत्तरवैदिक काल ==
(१०००-६०० ई०पू०)
ऋग्वैदिक काल में आर्यों का निवास स्थान सिन्धु तथा सरस्वती नदियों के बीच में था। बाद में वे सम्पूर्ण उत्तर भारत में फ़ैल चुके थे। सभ्यता का मुख्य क्षेत्र गंगा और उसकी सहायक नदियों का मैदान हो गया था। गंगा को आज भारत की सबसे पवित्र नदी माना जाता है। इस काल में विश् का विस्तार होता गया और कई जन विलुप्त हो गए। भरत, त्रित्सु और तुर्वस जैसे जन् राजनीतिक हलकों से ग़ायब हो गए जबकि पुरू पहले से अधिक शक्तिशाली हो गए। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में कुछ नए राज्यों का विकास हो गया था, जैसे - काशी, कोसल, विदेह ([[मिथिला]]), मगध और अंग।
ऋग्वैदिक काल में सरस्वती नदी को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। ग॓गा और यमुना नदी का उल्लेख केवल एक बार हुआ है। इस काल में कौसाम्बी नगर मे॓ पहली बार पक्की ईटो का प्रयोग किया गया। इस काल में वर्ण व्यासाय के बजाय जन्म के आधार पे निर्धारित होने लगे
अथर्ववेद की रचना उत्तर-वैदिक काल के दौरान हुई थी; इसे वैदिक युग के अंत में लिखा गया था।
== वैदिक साहित्य ==
* वैदिक साहित्य में चार वेद एवं उनकी संहिताओं, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषदों एवं वेदांगों को शामिल किया जाता है।
* वेदों की संख्या चार है- ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद।
* ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद विश्व के प्रथम प्रामाणिक ग्रन्थ है।
* वेदों को अपौरुषेय कहा गया है। गुरु द्वारा शिष्यों को मौखिक रूप से कंठस्त कराने के कारण वेदों को "श्रुति" की संज्ञा दी गई है।
=== ऋग्वेद ===
1. ऋग्वेद देवताओं की स्तुति से सम्बंधित रचनाओं का संग्रह है।
2. यह 10 मंडलों में विभक्त है। इसमे 2 से 7 तक के मंडल प्राचीनतम माने जाते हैं। प्रथम एवं दशम मंडल बाद में जोड़े गए हैं। इसमें 1028 सूक्त हैं।
3. इसकी भाषा '''''पद्यात्मक''''' है।
4. ऋग्वेद में 33 प्रकार के देवों (दिव्य गुणो से युक्त पदार्थो) का उल्लेख मिलता है।
5. प्रसिद्ध गायत्री मंत्र जो सूर्य से सम्बंधित देवी गायत्री को संबोधित है, ऋग्वेद में सर्वप्रथम प्राप्त होता है।गायत्री मंत्र ऋग्वेद के तीसरे मंडल में उल्लेखित है।
6. ' असतो मा सद्गमय ' वाक्य ऋग्वेद से लिया गया है।
7. ऋग्वेद में मंत्र को कंठस्त करने में स्त्रियों के नाम भी मिलते हैं, जिनमें प्रमुख हैं- लोपामुद्रा, घोषा, शाची, पौलोमी एवं काक्षावृती आदि।
8. इसके पुरोहित के नाम होत्री है।
=== यजुर्वेद ===
* यजु का अर्थ होता है यज्ञ। इसमें धनुर्यवीद्या का उल्लेख है।
* यजुर्वेद वेद में यज्ञ की विधियों का वर्णन किया गया है।
* इसमे मंत्रों का संकलन आनुष्ठानिक यज्ञ के समय सस्तर पाठ करने के उद्देश्य से किया गया है।
* इसमें मंत्रों के साथ-साथ धार्मिक अनुष्ठानों का भी विवरण है, जिसे मंत्रोच्चारण के साथ संपादित किए जाने का विधान सुझाया गया है।
* यजुर्वेद की भाषा पद्यात्मक एवं गद्यात्मक दोनों है।
* यजुर्वेद की दो शाखाएं हैं- कृष्ण यजुर्वेद तथा शुक्ल यजुर्वेद।
* कृष्ण यजुर्वेद की चार शाखाएं हैं- मैत्रायणी संहिता, काठक संहिता, कपिन्थल तथा संहिता। शुक्ल यजुर्वेद की दो शाखाएं हैं- मध्यान्दीन तथा कण्व संहिता।
* यह 40 अध्याय में विभाजित है।
* इसी ग्रन्थ में पहली बार राजसूय तथा वाजपेय जैसे दो राजकीय समारोह का उल्लेख है।
=== सामवेद ===
सामवेद की रचना ऋग्वेद में दिए गए मंत्रों को गाने योग्य बनाने हेतु की गयी थी।
* इसमे 1810 छंद हैं जिनमें 75 को छोड़कर शेष सभी ऋग्वेद में उल्लेखित हैं।
* सामवेद तीन शाखाओं में विभक्त है- कौथुम, राणायनीय और जैमनीय।
* सामवेद को भारत की प्रथम संगीतात्मक पुस्तक होने का गौरव प्राप्त है।
=== अथर्व वेद ===
* इस वेद में रहस्यमई विद्याओं, चमत्कार, जादू टोने, आयुर्वेद जड़ी बूटियों का वर्णन मिलता है।
* इसमें कुल 20 अध्याय में 5687 मंत्र हैं।
* अथर्ववेद आठ खंड में विभाजित है। इसमें भेषज वेद और धातु वेद दो प्रकार मिलते हैं।
== बौद्ध और जैन धर्म==
{{main|बौद्ध धर्म}}
ईसा पूर्व छठी सदी तक वैदिक कर्मकांडों की परंपरा का अनुपालन कम हो गया था। उपनिषद ने जीवन की आधारभूत समस्या के बारे में स्वाधीनता प्रदान कर दिया था। इसके फलस्वरूप कई धार्मिक पंथों तथा संप्रदायों की स्थापना हुई। उस समय ऐसे किसी 62 सम्प्रदायों के बार में जानकारी मिलती है। लेकिन इनमें से केवल 2 ने भारतीय जनमानस को लम्बे समय तक प्रभावित किया - जैन और बौद्ध।
जैन धर्म पहले से ही विद्यमान था। दोनों श्रमण संस्कृति पर आधारित हैं। वैदिकों ने श्रमण संस्कृति को बाद में उपनिषदों में अपनाया।
=== जैन धर्म ===
जैन धर्म के दो तीर्थकरों - [[ऋषभदेव|ऋषभनाथ]] तथा [[अरिष्टनेमि]]- का उल्लेख ऋग्वेद में पाया जाता है। कुछ विद्वानों का मत है कि हड़प्पा की खुदाई में जो नग्न धड़ की मूर्ति मिली है वो किसी तीर्थकर की है। [[पार्श्वनाथ]] तेइसवें तीर्थकर तथा [[महावीर|भगवान महावीर]] चौबीसवें तीर्थकर थे। वर्धमान महावीर जो कि जैनों के सबसे प्रमुख तथा अन्तिम तीर्थकर थे, का जन्म 540 ईसापूर्व के आसपास [[वैशाली]] के पास कुंडग्राम में हुआ था। 42 वर्ष की अवस्था में उन्हें कैवल्य (परम ज्ञान) प्राप्त हुआ।
महावीर ने पार्श्वनाथ के चार सिद्धांतों को स्वीकार किया -
* '''अहिंसा''' - जीव हत्य न करना
* '''अमृषा''' - झूठ न बोलना
* '''अस्तेय''' - चोरी न करना
* '''अपरिग्रह''' - सम्पत्ति इकठ्ठा न करना
इसके अतिरिक्त उन्होंने अपना पांचवा सिद्धांत भी अपने उपदेशों में जोड़ा -
* '''ब्रह्मचर्य''' - इंद्रियों पर नियंत्रण
इस सम्प्रदाय के दो अंग हैं - श्वेताबर तथा दिगंबर
=== बौद्ध धर्म ===
जैन धर्म की तरह इसका मूल भी एक उच्चवर्गीय क्षत्रिय परिवार से था। गौतम नाम से जन्में [[गौतम बुद्ध|महात्मा बुद्ध]] का जन्म 563 ईसापूर्व में शाक्यकुल के राजा शुद्धोदन के घर हुआ था। इन्होने भी सांसारिक जीवन जीने के बाद एक दिन (या रात) अचानक से अपना गार्हस्थ छोड़कर सत्य की खोज में चल पड़े।
बुद्ध के उपदेशों में चार आर्य सत्य समाहित हैं -
* दुख
* दुख समुद्दय
* दुख निरोध
* दुख निरोध गामिनी प्रतिपदा।
उन्होंने अष्टांगिक मार्ग का सुझाव दिया जिसका पालन करके मनुष्य पुनर्जन्म के बंधन से दूर हो सकता है -
* सम्यक वाक्
* सम्यक कर्म
* सम्यक आजीविका
* सम्यक व्यायाम
* सम्यक स्मृति
* सम्यक समाधि
* सम्यक संकल्प
* सम्यक दृष्टि
बौद्ध धर्म का प्रभाव [[भारत]] के बाहर भी हुआ। [[अफ़ग़ानिस्तान]] (उस समय फ़ारसी शासकों के अधीन), [[चीन]], [[जापान]] तथा [[श्रीलंका]] के अतिरिक्त इसने दक्षिण पूर्व एशिया में भी अपनी पहचान बनाई।
== यूनानी तथा फारसी आक्रमण ==
उस समय उत्तर पश्चिमी भारत में कोई खास संगठित राज्य नहीं था। लगातार शक्तिशाली हो रहे [[फ़ारसी साम्राज्य]] की नज़र इधर की ओर भी गई। हंलांकि अब तक फ़ारस पर राज कर रहे चन्द्र राजा [[यूनान]], पश्चिमी एशिया तथा मध्य एशिया की ओर बढ़ रहे थे, उन्होंने भारत की अनदेखी नहीं की थी।
शक्तिशाली अजमीड/हखामनी (Achaemenid) शासकों की निगाह इस क्षेत्र पर थी और Kuru-s कुरुस [[साईरस]] (558ईसापूर्व - 530 ईसापूर्व) ने [[हिन्दु कुश|हिंदूकुश]] के दक्षिण के रजवाड़ो को अपने अधीन कर लिया। इसके बाद दारयवाहु (डेरियस, 522-486 ईसापूर्व) के शासनकाल में फ़ारसी शासन के विस्तार के साक्ष्य मिलते हैं। इसके उत्कीर्ण लेखों में दो ज़ग़ह ''हिन्दू'' को इसके राज्य का हिस्सा बताया गया है। इस संदर्भ में ''हिन्दू'' शब्द का सही अर्थ बता पाना कठिन है पर इसका तात्पर्य किसा ऐसे प्रदेश से अवश्य है जो सिंधु नदी के पूर्व में हो।
ईसापूर्व चौथी सदी में जब यूनानी और फ़ारसी शासक पश्चिम एशिया (आधुनिक [[तुर्की]] का क्षेत्र) पर अपना प्रभुत्व जमाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। मकदूनिया के राजा [[सिकंदर]] के हाथों हखामनी शासक डेरियस तृतीय के हारने के पश्चात स्थिति में परिवर्तन आ गया। सिकंदर पश्चिम एशिया जीतने के बाद [[अरब]], [[मिस्र]] तथा उसके बाद फ़ारस के केन्द्र ([[ईरान]]) तक पहुंच गया। इतने से भी जब उसको संतोष नहीं हुआ तो वो [[अफ़ग़ानिस्तान|अफ़गानिस्तान]] होते हुए 326 ईसा पूर्व में पश्चिमोत्तर भारत पहुँच गया।
सिकंदर के [[भारत]] आने के बारे में कोई भारतीय स्रोत उपलब्ध नहीं है। सिकंदर के विजय अभियान की बात केवल यूनानी तथा रोमन स्रोतों में उपलब्ध है तथा उन्हें सत्य के करीब मान कर ये सब लिखा गया है। यूनानी ग्रंथ तो सिकंदर के [[भारत]] अभियान का विस्तार से वर्णन करते हैं पर वे [[चाणक्य|कौटिल्य]] के बारे में एक शब्द भी नहीं लिखते हैं।
सिकंदर जब भारत पहुंचा तो [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] (अविभाजित पंजाब) में [[रावलपिंडी]] के पास का राजा उसकी सहायता के लिए पहँच गया। अन्य लगभग सभी राजाओं ने सिन्दर का डटकर मुकाबला किया पर वे सिकन्दर की अनुभवी सेनाओं से हार गए। यूनानी लेखकों ने इन राजाओं के वीरता की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। इसके बाद [[झेलम नदी|झेलम]] और [[चिनाब]] के बीच स्थित प्रदेश का राजा '''पोरस''' (जो कि पौरव का यूनानी नाम लगता है) ने सिकंदर का वीरता पूर्वक सामना किया। 326 ईस्वी पूर््व का यह झेलम नदी के तट पर हुआ पोरस व सिकंदर के मध्य का युद्ध हाइडेस्पीच का युद्ध कहलाता है ।कहा जाता है कि युद्ध हारने के बाद जब पोरस बन्दी बनकर सिकन्दर के सामने प्रस्तुत हुआ तो उससे पूछा गया - ''तुम्हारे साथ कैसा सुलूक (वर्ताव) किया जाय''। तो उसने साहसी उत्तर दिया -" ''जैसा एक राजा दूसरे राजा के साथ करता है'' "। उसके उत्तर पर मुग्ध होकर सिकन्दर ने उसका हारा हुआ प्रदेश लौटा दिया। इसके बाद जब उसे भारत के वीर योद्धा चन्द्रगुप्त मोर्य(मगध का नंद राजा-चंद्रगुप्त नही) की विशाल सेना का सामना करना था तब भय से ग्रसित सेना को लेकर सिकन्दर आगे नहीं बढ़ सका और वापस लौट गया।
== महाजनपद ==
{{main|महाजनपद}}
बौद्ध ग्रंथ [[अंगुत्तरनिकाय|अंगुत्तर निकाय]] के अनुसार कुल सोलह (16) महाजनपद थे - [[अवन्ति]],[[अश्मक]] या अस्सक, [[अंग]], [[कंबोज|कम्बोज]], [[काशी]], [[कुरु]], [[कोशल]], [[गंधार]], [[चेदि]], [[वज्जि]] या वृजि, [[वत्स]] या वंश, [[पाञ्चाल|पांचाल]], [[मगध महाजनपद|मगध]], [[मत्स्य]] या [[मच्छ]], [[मल्ल]], [[सुरसेन]]।
इनमें सत्ता के लिए संघर्ष चलता रहता था।
== महापद्मनंद नंदमौर्य साम्राज्य ==
{{main|मौर्य वंश}}
ईसापूर्व छठी सदी के प्रमुख राज्य थे - मगध, कोसल, वत्स के पौरव और अवंति के प्रद्योत। चौथी सदी में [[चन्द्रगुप्त मौर्य|चन्द्रगुप्त मौर्य ( चंद्र नंद )]] मोत्तर [[भारत]] को यूनानी शासकों से मुक्ति दिला दी। इसके बाद उसने मगध की ओर अपना ध्यान केन्द्रित किया जो उस समय नंदों के शासन में था। जैन ग्रंथ परिशिष्ठ पर्वन में कहा गया है कि [[चाणक्य|सम्राट धनानंद]] ने चाणक्य को अपने राजमहल से बाहर निकाल दिया इसलिए चंद्रगुप्त मौर्य को बड़का कर अपने ही बड़े भाई धनानंद को मरवा दिया चंद्र नंद से चंद्रगुप्त मौर्य बन गया इसके बाद चन्द्रगुप्त ने दक्षिण की ओर अपने साम्राज्य का विस्तार किया। चन्द्रगुप्त ने सिकंदर के क्षत्रप [[सेल्युकस प्रथम निकेटर|सेल्यूकस]] को हाराया था जिसके फलस्वरूप उसने [[हेरात]], [[कांधार|कंदहार]], [[काबुल]] तथा [[बलूचिस्तान (पाकिस्तान)|बलूचिस्तान]] के प्रांत चंद्रगुप्त को सौंप दिए थे।
चन्द्रगुप्त के बाद [[बिन्दुसार|बिंदुसार]] के पुत्र [[अशोक]] ने मौर्य साम्राज्य को अपने चरम पर पहुँचा दिया। [[कर्नाटक]] के चित्तलदुर्ग तथा मास्की में अशोक के शिलालेख पाए गए हैं। चुंकि उसके पड़ोसी राज्य [[चोल राजवंश|चोल]], [[पाण्ड्य राजवंश|पांड्य]] या [[चेर राजवंश|केरलपुत्रों]] के साथ अशोक या बिंदुसार के किसा लड़ाई का वर्णन नहीं मिलता है इसलिए ऐसा माना जाता है कि ये प्रदेश चन्द्रगुप्त के द्वारा ही जीता गया था। अशोक के जीवन का निर्णायक युद्ध [[कलिंग का युद्ध]] था। इसमें उत्कलों से लड़ते हुए अशोक को अपनी सेना द्वारा किए गए नरसंहार के प्रति ग्लानि हुई और उसने बौद्ध धर्म को अपना लिया। फिर उसने बौद्ध धर्म का प्रचार भी करवाया।
चन्द्रगुप्त मौर्य के समय में यूनानी राजदूत [[मेगस्थनीज|मेगास्थनीज़]] , सेल्यूकस के द्वारा उनके दरबार में भेजा गया। उसने चन्द्रगुप्त मौर्य के राज्य तथा उसकी राजधानी [[पाटलिपुत्र]] (आधुनिक [[पटना]]) का वर्णन किया है। इस दौरान कला का भी विकास हुआ महापद्मा नंद
== मौर्यों के बाद ==
मौर्यों के पतन के बाद [[शुंग राजवंश]] ने सत्ता सम्हाली। ऐसा माना जाता है कि मौर्य राजा वृहदृथ के सेनापति पुष्यमित्र ने बृहद्रथ की हत्या कर दी थी जिसके बाद शुंग वंश की स्थापना हुई। शुंगों ने 187 ईसापूर्व से 75 ईसापूर्व तक शासन किया। इसी काल में महाराष्ट्र में सातवाहनों का और दक्षिण में [[चेर]], [[चोल राजवंश|चोल]] और पांड्यों का उदय हुआ। सातवाहनों के साम्राज्य को आंध्र भी कहते हैं जो अत्यन्त शक्तिशाली था।
पुष्यमुत्र के शासनकाल में पश्चिम से यवनों का आक्रमण हुआ। इसी काल के माने जाने वाले वैयाकरण [[पतञ्जलि|पतंजलि]] ने इस आक्रमण का उल्लेख किया है। [[कालिदास]] ने भी अपने [[मालविकाग्निमित्रम्]] में [[वसुमित्र]] के साथ यवनों के युद्ध का चर्चा किया है। इन आक्रमणकारियों ने भारत की सत्ता पर कब्जा कर लिया। कुछ प्रमुख भारतीय-यूनानी शासक थे - यूथीडेमस, डेमेट्रियस तथा मिनांडर। मिनांडर ने बौद्ध धर्म अपना लिया था तथा उसका प्रदेश अफगानिस्तान से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था।
इसके बाद पह्लवों का शासन आया जिनके बारे में अधिक जानकारी उपल्ब्ध नहीं है। तत्पश्चात शकों का शासन आया। शक लोग मध्य एशिया के निवासी थे जिन्हें यू-ची नामक कबीले ने उनके मूल निवास से खदेड़ दिया गया था। इसके बाद वे भारत आए। इसके बाद यू-ची जनजाति के लोग भी भारत आ गए क्योंकि [[चीन की विशाल दीवार|चीन की महान दीवार]] के बनने के बाद मध्य एशिया की परिस्थिति उनके अनूकूल नहीं थी। ये [[कुषाण राजवंश|कुषाण]] कहलाए। [[कनिष्क]] इस वंश का सबसे प्रतापी राजा था। कनिष्क ने ७८ ईसवी से 101 ईस्वी तक राज किया।
== समकालीन दक्षिण भारत ==
दक्षिण में चेर, पांड्य तथा चोल के बीच सत्ता संघर्ष चलता रहा था। संगम साहित्य इस समय की सबसे अमूल्य धरोहर थी। तिरूवल्लुवर द्वारा रचित [[तिरुक्कुरल]] तमिल भाषा का प्राचीनतम ग्रंघ माना जाता है। धार्मिक सम्प्रदायों का प्रचलन था और मुख्यतः वैष्णव, शैव, बौद्ध तथा जैन सम्प्रदायों के अनुयायी थे।
== गुप्त काल ==
{{main|गुप्त वंश}}
सन् ३२० ईस्वी में [[चन्द्रगुप्त प्रथम]] अपने पिता घटोत्कच के बाद राजा बना जिसने गुप्त वंश की नींव डाली। इसके बाद [[समुद्रगुप्त]] (३४० इस्वी), चन्द्रगुप्त द्वितीय, [[कुमारगुप्त प्रथम]] (४१३-४५५ इस्वी) और [[स्कन्दगुप्त|स्कंदगुप्त]] शासक बने। इसके करीब १०० वर्षों तक गुप्त वंश का अस्तित्व बना रहा। ६०६ इस्वी में [[हर्षवर्धन|हर्ष]] के उदय तक किसी एक प्रमुख सत्ता की कमी रही। इस काल में कला और साहित्य का उत्तर तथा दक्षिण दोनों में विकास हुआ। इस काल का सबसे प्रतापी शासक "[[समुद्रगुप्त]]" था जिसके शासनकाल में भारत को "सोने की चिड़िया" कहा जाने लगा।
ग्यारहवीं तथा बारहवीं सदी में भारतीय [[कला]], [[भाषा]] तथा [[धर्म]] का प्रचार दक्षिणपूर्व एशिया में भी हुआ।
==प्राचीन भारत के राजवंश और उनके संस्थापक ==
{| class="wikitable sortable"
! वंश !! राजधनी !! संस्थापक
|-
| [[कुरु वंश]] || [[हस्तिनापुर]] || [[भरत वंश (कुरु पांडु)]]
|-
| [[हर्यक वंश]] || [[राजगृह]], [[पाटलिपुत्र]] || [[बिम्बिसार]]
|-
| [[शिशुनाग वंश]] || पाटलिपुत्र, वैशाली || [[शिशुनाग]]
|-
| [[नंद वंश|नन्द वंश]] || पाटलिपुत्र || महापद्मनन्द
|-
| [[मौर्य राजवंश|मौर्य वंश]] || पाटलिपुत्र || चंद्रगुप्त मौर्य
|-
| [[शुंग राजवंश|शुंग वंश]] || विदिशा || पुष्यमित्र शुंग
|-
| [[कण्व वंश]] || पाटलिपुत्र || वसुदेव
|-
| [[सातवाहन|सातवाहन वंश]] || पैठन || सिमुक
|-
| [[महामेघवाहन वंश|चेदि वंश]] || सोत्थवती || महामोघवाहन
|-
| हिंद-यवन || शाकल ( सियालकेट ) || डेमेट्रियस
|-
| [[कुषाण राजवंश|कुषाण वंश]] || पुरुषपुर पेशावर || कुजुल कडफिसेस
|-
| [[कदम्ब वंश]] || बनवासी || मयूरशर्मन
|-
| [[गंग वंश]] || तलकाड || कोंकणिवर्मा
|-
| [[गुप्त राजवंश|गुप्त वंश]] || पाटलिपुत्र || श्रीगुप्त
|-
| [[मौखरी वंश]] || कन्नौज || ईशानवर्मा
|-
| [[हूण वंश]] || स्यालकोट || तोरमाण
|-
| [[मैत्रक वंश]] || वल्लभी || भट्टारक
|-
| [[उत्तरगुप्त वंश]] || पाटलिपुत्र || कृष्णगुप्त
|-
| [[गौड़ वंश]] || कर्णसुवर्ण, मुर्शिदाबाद || शशांक
|-
| [[पुष्यभूति वंश]] || थानेश्वर || प्रभाकरवर्धन
|-
| [[पाल वंश]] || [[मुंगेर]] || गोपाल
|-
| [[सेन राजवंश|सेन वंश]] || राढ़ || सामन्तसेन
|-
| [[राष्ट्रकूट राजवंश|राष्ट्रकूट वंश]] || मान्यखेत || दन्तिवर्मन
|-
| [[गुर्जर प्रतिहार वंश]] || कन्नौज || नागभट्ट प्रथम
|-
| [[कलचुरी]] [[महामेघवाहन वंश|चेदि वंश]] || त्रिपुरी || कोक्कल प्रथम
|-
| [[परमार वंश]] || धारा || कृष्णराज/ उपेन्द्र
|-
| [[लोदी वंश]] || दिल्ली ||
|-
| [[महदेले लोधी वंश]] || मोहली || दृगपाल/महदेले
|-
| [[सोलंकी वंश]] || अन्हिलवाड़ || मूलराज प्रथम
|-
| [[चन्देल|चन्देल वंश]] || खजुराहो (महोबा) || नन्नुक
|-
| [[गहड़वाल वंश]] || कन्नौज || चन्द्रदेव
|-
| [[चौहान वंश]] || अजमेर || वासुदेव
|-
| [[तोमर वंश]] || ढिल्लिका || अनंगपाल
|-
| [[चालुक्य राजवंश|चालुक्य वंश]] (बादामी) || बादामी || पुलकेशिन प्रथम
|-
| चालुक्य वंश (कल्याणी) || मान्यखेत || तैलप द्वितीय
|-
| चालुक्य वंश (वेंगि) || वेंगि || विष्णुवर्धन
|-
| [[पल्लव राजवंश|पल्लव वंश]] || [[कांचीपुरम|कांची]] || [[सिंहवर्मा]]
|-
| [[चोल राजवंश|चोल वंश]] || [[तंजावुर|तंजौर]], तंजावुर || [[विजयालय]]
|}
== इन्हें भी देखें ==
* [[मगध के राजवंशों और शासकों की सूची]]
* [[प्राचीन भारत की आर्थिक संस्थाएं]]
* [[प्राचीन भारत में गणतंत्र]]
* [[भारत के प्राचीन वैज्ञानिक|प्राचीन भारत के वैज्ञानिक]]
* [[प्राचीन भारतीय विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी|प्राचीन भारत में विज्ञान एवं तकनीक]]
* [[प्राचीन भारतीय कलाएँ]]
* [[प्राचीन भारतीय परंपरा और इतिहास]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20110826211239/http://books.google.co.in/books?id=FFhd8ktl7XsC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false प्राचीन भारत का सामाजिक एवं आर्थिक इतिहास] (गूगल पुस्तक ; लेखक - ओम प्रकाश प्रसाद)
* [https://web.archive.org/web/20121215060522/http://books.google.co.in/books?id=7_GWRA79yJgC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false प्राचीन भारत का सामाजिक और आर्थिक इतिहास] (गूगल पुस्तक ; लेखक - शिव स्वरूप सहाय)
* [https://web.archive.org/web/20100613003424/http://iish.org/index.php?option=com_content&view=article&id=71:a-brief-introduction-to-technological-brilliance-of-ancient-india&catid=37:heritage-india-news&Itemid=56 A brief introduction to technological brilliance of Ancient India] (इण्डियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंटिफिक हेरिटेज)
* [https://web.archive.org/web/20140328200741/http://books.google.co.in/books?id=1mYAw7OIUkEC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false प्राचीन भारत के वैज्ञानिक कर्णधार] (गूगल पुस्तक ; लेखक - स्वामी सत्यप्रकाश सरस्वती)
* [https://web.archive.org/web/20150406043218/http://books.google.co.in/books?id=GnAPjKdM_OMC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false प्राचीन भारत में रसायन का विकास] (गूगल पुस्तक; लेखक - स्वामी सत्यप्रकाश सरस्वती)
* [https://web.archive.org/web/20121215042127/http://books.google.co.in/books?id=xHun9M65_qAC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false प्राचीन भारत में दूत पद्धति] (गूगल पुस्तक ; लेखक - आनन्द प्रकाश गौड़)
* [https://web.archive.org/web/20121215063331/http://books.google.co.in/books?id=KtF8zGa5zvcC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false श्रेण्य युग ('क्लासिकल एज' का हिन्दी अनुवाद)] (गूगल पुस्तक ; लेखक - आर सी मजुमदार ; अनुवादक - शिवदान सिंह चौहान)
* [https://web.archive.org/web/20121215041900/http://books.google.co.in/books?id=V4cGO9w4pb8C&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false भारतीय इतिहास के कुछ विषय (Archaeology & Ancient India)] (गूगल पुस्तक ; लेखक - रघुनाथ राय)
* [https://web.archive.org/web/20121215042036/http://books.google.co.in/books?id=mdqq14ZB-KcC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false प्राचीन भारत का राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास] (गूगल पुस्तक ; लेखक - धनपति पाण्डेय)
* [http://books.google.co.in/books?id=vhUZrj975BAC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false हिन्दू सभ्यता] (गूगल पुस्तक ; लेखक - राधाकुमुद मुखर्जी)
[[श्रेणी:प्राचीन भारत| ]]
[[श्रेणी:भूगोल और स्थानों की रूपरेखाएँ]]
28n9x34h547rm0j885ns611shjckc4b
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6630694
2026-10-18T10:43:15Z
Anitya Gautam
916080
6630695
wikitext
text/x-wiki
{{स्रोतहीन|date=मई 2016}}
मानव के उदय से लेकर दसवीं सदी तक के [[भारत का इतिहास]], '''प्राचीन भारत का इतिहास''' कहलाता है।<ref>{{cite web|url=http://www.bbc.com/hindi/india-42527770|title=भारत का 20 लाख साल पुराना इतिहास देखेंगे?|access-date=11 जनवरी 2018|archive-ʳʳᵘʸʳᵈʸᵗᵈ ᵗʰᵗᵗᵍᵗᵗʰᵉ ʸⁱᵈ ᴳᴴ ʰʰᵗʸʸᵘᵘurl=https://web.archive.org/web/20180105014934/http://www.bbc.com/hindi/india-42527770|archive-date=5 जनवरी 2018|url-status=ᴸⁱᵛᵉʳᵖᵒᵒˡ 5'‰⅝ᵗᵒ ᵗⁱᵐᵉ}}</ref>
== प्राचीन भारतीय इतिहास की जानकारी के साधन ==
{{मुख्य|प्राचीन भारतीय इतिहास की जानकारी के साधन}}1.पुरातात्विक स्त्रोत __इसके अंतर्गत अभिलेख, सिक्का,[[स्मारक]], भवन और [[चित्र]] आदि आते है,यह उत्खनन से प्राप्त किया जाता है।पुरातात्विक स्त्रोत साहित्यिक स्त्रोत से अधिक प्रमाणित है।
2.साहित्यिक स्त्रोत __ इसके अंतर्गत वेद, पुराण अरंन्यंक ,उपनिषद,महाकाव्य, जातक,पिटक आदि आते है।
3.विदेशी यात्रीयो का वर्णन __विदेशी यात्रियो के वर्णन से तार्त्पय है कि जो विदेशी [[भारत]] मे घूमने आए वह यहाॅ के बारे कुछ लिखकर गए जैसे: फाहइयान ने अशोक के छः स्तंभ के बारे जानकारी लेकर गया।
== पाषाण युग ==
[[पाषाण युग]] से तात्पर्य ऐसे काल से है जब लोग [[पत्थर|पत्थरों]] पर आश्रित थे। पत्थर के [[औज़ार]], पत्थर की गुफा ही उनके जीवन के प्रमुख आधार थे। यह मानव सभ्यता के आरंभिक काल में से है जब मानव आज की तरह विकसित नहीं था। इस काल में मानव प्राकृतिक आपदाओं से जूझता रहता था और शिकार तथा कन्द-मूल फल खाकर अपना जीवन बसर करता था।
=== पुरापाषाण युग ===
{{main|भारत का पुरापाषाण युग}}
[[हिमयुग]] का अधिकांश भाग पुरापाषाण काल में बीता है। भारतीय पुरापाषाण युग को औजारों, जलवायु परिवर्तनों के आधार पर तीन भागों में बांटा जाता है -
* आरंभिक या निम्न पुरापाषाण युग (25,00,000 ईस्वी पूर्व - 100,000 ई. पू.)
* मध्य पुरापाषाण युग (1,000,000 ई. पू. - 40,000 ई. पू.)
* उच्च पुरापाषाण युग (40,000 ई.पू - 10,000 ई.पू.)
आदिम मानव के जीवाश्म भारत में नहीं मिले हैं। [[महाराष्ट्र]] के बोरी नामक स्थान पर मिले तथ्यों से अंदेशा होता है कि मानव की उत्पत्ति 14 लाख वर्ष पूर्व हुई होगी। यह बात लगभग सर्वमान्य है कि अफ़्रीका की अपेक्षा भारत में मानव बाद में बसे। यद्दपि यहां के लोगों का पाषाण कौशल लगभग उसी तरह विकसित हुआ जिस तरह [[अफ़्रीका]] में। इस समय का मानव अपना भोजन कठिनाई से ही बटोर पाता था। वह ना तो खेती करना जानता था और ना ही घर बनाना। यह अवस्था 9000 ई.पू. तक रही होगी।
[[पुरापाषाण काल]] के औजार [[छोटा नागपुर पठार|छोटानागपुर के पठार]] में मिले हैं जो 1,00,000 ई.पू. तक हो सकते हैं। [[आन्ध्र प्रदेश|आंध्र प्रदेश]] के [[कर्नूल|कुर्नूल]] जिले में 20,000 ई.पू. से 10,000 ई.पू. के मध्य के औजार मिले हैं। इनके साथ हड्डी के उपकरण और पशुओं के अवशेष भी मिले हैं। [[उत्तर प्रदेश]] के [[मिर्ज़ापुर]] जिले की [[बेलन घाटी]] में जो पशुओं के अवशेष मिले हैं उनसे ज्ञात होता है कि [[बकरी]], [[भेड़]], [[गाय]], [[भैंस]] इत्यादि पाले जाते थे। फिर भी पुरापाषाण युग की आदिम अवस्था का मानव [[शिकार]] और खाद्य संग्रह पर जीता था। [[पुराण|पुराणों]] में केवल [[फल]] और [[कन्द मूल]] खाकर जीने वालों का जिक्र है। इस तरह के कुछ लोग तो आधुनिक काल तक पर्वतों और गुफाओं में रहते आए हैं।
=== नवपाषाण युग ===
भारत में नवपाषाण युग के अवशेष सम्भवतः 6000 ई०पू० से 1000 ई०पू के है।विकास कि यह अवधि भारतीय उपमहाद्वीप में कुछ देर से आयी क्योकि ऐसा माना jata है कि विश्व के बडे भूभाग( south west Asia) में यह युग 8000-7000 ई०पू० के आसपास पनपा, यहाँ से नील घाटी (Egypt) होते हुए यूरोप पहुंचा। इस युग में मानव पत्थर कि बनी हाथ कि कुल्हाड़ियां आदि औजार पत्थर को छिल घीस और चमकाकर तैयार करता था, उत्तरी भारत में नवपाषाण युग का स्थल बुर्जहोम (कश्मीर) में पाया गया है।
भारत में नव पाषाण काल के प्रमुख चार स्थल है
== ताम्र पाषाण युग ==
नवपाषाण युग का अन्त होते होते धातुओं का प्रयोग शुरू हो गया था। ताम्र पाषाणिक युग में तांबा तथा प्रस्तर के हथियार ही प्रयुक्त होते थे। इस समय तक लोहा या कांसे का प्रयोग आरम्भ नहीं हुआ था। [[भारत]] में ताम्र पाषाण युग की बस्तियां दक्षिण पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी मध्य
प्रदेश, पश्चिमी महाराष्ट्र तथा दक्षिण पूर्वी भारत में पाई गई है। और सारे भारत में जंगल ही था
== कांस्य युग और सिंधु घाटी सभ्यता ==
{{main|सिंधु घाटी सभ्यता}}
बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ तक इतिहासकारों की यह मान्यता थी कि वैदिक सभ्यता भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता है। परन्तु सर [[दयाराम साहनी]] के नेतृत्व में १९२१ में जब [[हड़प्पा]] (पंजाब के माँन्टगोमरी जिले में स्थित) की खुदाई हुई तब इस बात का पता चला कि भारत की सबसे पुरानी सभ्यता वैदिक नहीं वरन [[सिंधु घाटी सभ्यता|सिन्धु घाटी की सभ्यता]] है। अगले साल अर्थात १९२२ में [[राखालदास बनर्जी]] के नेतृत्व में [[मोहन जोदड़ो|मोहनजोदड़ो]] (सिन्ध के [[लाड़काना|लरकाना]] जिले में स्थित) की खुदाई हुई। हड़प्पा टीले के बारे में सबसे पहले चार्ल्स मैसन ने १९२६ में उल्लेख किया था। मोहनजोदड़ो को [[सिन्धी भाषा]] में मृतकों का टीला कहा जाता है। १९२२ में राखालदास बनर्जी ने और इसके बाद १९२२ से १९३० तक सर जॉन मार्शल के निर्देशन में यहां उत्खनन कार्य करवाया गया।
[[सिंधु घाटी सभ्यता]] (2500 ईसापूर्व से 1750 ईसापूर्व तक) विश्व की प्राचीन नदी घाटी सभ्यताओं में से एक प्रमुख सभ्यता है। सम्मानित पत्रिका नेचर में प्रकाशित शोध के अनुसार यह सभ्यता कम से कम 8000 वर्ष पुरानी है। यह [[हड़प्पा]] सभ्यता और 'सिंधु-सरस्वती सभ्यता' के नाम से भी जानी जाती है। इसका विकास सिंधु और घघ्घर/हकड़ा (प्राचीन सरस्वती) के किनारे हुआ।[[मोहन जोदड़ो|मोहनजोदड़ो]], कालीबंगा, लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी और हड़प्पा इसके प्रमुख केन्द्र थे। दिसम्बर २०१४ में भिर्दाना को अबतक का खोजा गया सबसे प्राचीन नगर माना गया सिंधु घाटी सभ्यता का। ब्रिटिश काल में हुई खुदाइयों के आधार पर पुरातत्ववेत्ता और इतिहासकारों का अनुमान है कि यह अत्यंत विकसित सभ्यता थी और ये शहर अनेक बार बसे और उजड़े हैं।
इस सभ्यता की सबसे विशेष बात थी यहां की विकसित नगर निर्माण योजना। [[हड़प्पा]] तथा [[मोहन जोदड़ो|मोहनजोदड़ो]] दोनो नगरों के अपने दुर्ग थे जहां शासक वर्ग का परिवार रहता था। प्रत्येक नगर में दुर्ग के बाहर एक एक उससे निम्न स्तर का शहर था जहां ईंटों के मकानों में सामान्य लोग रहते थे। इन नगर भवनों के बारे में विशेष बात ये थी कि ये जाल की तरह विन्यस्त थे। यानि सड़के एक दूसरे को समकोण पर काटती थीं और नगर अनेक आयताकार खंडों में विभक्त हो जाता था। ये बात सभी सिन्धु बस्तियों पर लागू होती थीं चाहे वे छोटी हों या बड़ी। हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो के भवन बड़े होते थे। वहाँ के स्मारक इस बात के प्रमाण हैं कि वहाँ के शासक मजदूर जुटाने और कर-संग्रह में परम कुशल थे। ईंटों की बड़ी-बड़ी इमारत देख कर सामान्य लोगों को भी यह लगेगा कि ये शासक कितने प्रतापी और प्रतिष्ठावान् थे।
मोहनजोदड़ो का अब तक का सबसे प्रसिद्ध स्थल है विशाल सार्वजनिक स्नानागार, जिसका जलाशय दुर्ग के टीले में है।
=== उत्पत्ति ===
इतनी विस्तृत सभ्यता होने के बावजूद भी इसकी उत्पत्ति को लेकर आज भी विद्वानों में मतैक्य का अभाव है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि हड़प्पा संस्कृति के जितने भी स्थलों की अब तक खुदाई हुई है वहां सभ्यता के विकास अनुक्रम का चिन्ह स्पष्ट नही मिलता है अर्थात इस सभ्यता के अवशेष जहां कहीं भी मिले हैं अपनी पूर्ण विकसित अवस्था में ही मिले हैं।
सर जॉन मार्शल, गार्डन चाईल्ड, मार्टीमर व्हीलर आदि इतिहासकारों की मान्यता है कि हड़प्पा सभ्यता की उत्पत्ति में विदेशी तत्व का हाथ रहा है। इन इतिहासकारों का मानना है कि हड़प्पा की उत्पत्ति [[मेसोपोटामिया]] की शाखा सुमेरिया की सभ्यता की प्रेरणा से हुई है। इन दोनो सभ्यताओं में कुछ समानताएं भी देखने को मिलती है जो इस प्रकार है -
*(१) दोनो ही सभ्यता नगरीय है।
*(२) दोनो ही सभ्यताओं के निवासी कांसे और तांबे के साथ साथ पाषाण के लघु उपकरणों का प्रयोग करते थे।
*(३) दोनों ही सभ्यताओं के भवन निर्माण में कच्चे और पक्के दोनो ही प्रकार के ईंटों का प्रयोग हुआ है।
*(४) दोनो को [[लिपि]] का ज्ञान था।
इन्ही समानताओं के आधार पर व्हीलर ने सैन्धव सभ्यता को [[सुमेरियन सभ्यता]] का एक उपनिवेश बताय़ा था। लेकिन इन समानताओं के बावजूद कुछ ऐसी असमानताएं भी हैं जिनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती है। हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना सुमेरिया की सभ्यता से अधिक सुव्यवस्थित है। दोनो ही सभ्यताओं में आम उपयोग की चीजें काफी भिन्न हैं जैसे बर्तन, उपकरण, मूर्तियां, मुहरें आदि। फिर दोनों ही सभ्यताओं के लिपि में भी अंतर है। जहां सुमेरियाई लिपि में ९०० अक्षर हैं वहीं [[सरस्वती लिपि|सिन्धु लिपि]] में केवल ४०० अक्षर हैं। इन विभिन्नताओं के होते हुए दोनो सभ्यताओं को समान मानना समुचित नहीं लगता है|
== वैदिक काल ==
{{main|वैदिक सभ्यता}}
सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) के पश्चात भारत में जिस नवीन सभ्यता का विकास हुआ उसे ही आर्य (Aryan) अथवा वैदिक सभ्यता (Vedic Civilization) के नाम से जाना जाता है। इस काल की जानकारी हमे मुख्यत: वेदों से प्राप्त होती है, जिसमे [[ऋग्वेद]] सर्वप्राचीन होने के कारण सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। वैदिक काल को ऋग्वैदिक काल या पूर्व वैदिक काल (1500 -1000 ई.पु.) तथा उत्तर वैदिक काल (1000 - 600 ई.पु.) में बांटा गया है। आम तौर पर अधिकतर विद्वान वैदिक सभ्यता का काल 5000 ईसा पूर्व से 500 ईसा पूर्व के बीच में मानत है|
== उत्तरवैदिक काल ==
(१०००-६०० ई०पू०)
ऋग्वैदिक काल में आर्यों का निवास स्थान सिन्धु तथा सरस्वती नदियों के बीच में था। बाद में वे सम्पूर्ण उत्तर भारत में फ़ैल चुके थे। सभ्यता का मुख्य क्षेत्र गंगा और उसकी सहायक नदियों का मैदान हो गया था। गंगा को आज भारत की सबसे पवित्र नदी माना जाता है। इस काल में विश् का विस्तार होता गया और कई जन विलुप्त हो गए। भरत, त्रित्सु और तुर्वस जैसे जन् राजनीतिक हलकों से ग़ायब हो गए जबकि पुरू पहले से अधिक शक्तिशाली हो गए। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में कुछ नए राज्यों का विकास हो गया था, जैसे - काशी, कोसल, विदेह ([[मिथिला]]), मगध और अंग।
ऋग्वैदिक काल में सरस्वती नदी को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। ग॓गा और यमुना नदी का उल्लेख केवल एक बार हुआ है। इस काल में कौसाम्बी नगर मे॓ पहली बार पक्की ईटो का प्रयोग किया गया। इस काल में वर्ण व्यासाय के बजाय जन्म के आधार पे निर्धारित होने लगे
अथर्ववेद की रचना उत्तर-वैदिक काल के दौरान हुई थी; इसे वैदिक युग के अंत में लिखा गया था।
== वैदिक साहित्य ==
* वैदिक साहित्य में चार वेद एवं उनकी संहिताओं, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषदों एवं वेदांगों को शामिल किया जाता है।
* वेदों की संख्या चार है- ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद।
* ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद विश्व के प्रथम प्रामाणिक ग्रन्थ है।
* वेदों को अपौरुषेय कहा गया है। गुरु द्वारा शिष्यों को मौखिक रूप से कंठस्त कराने के कारण वेदों को "श्रुति" की संज्ञा दी गई है।
=== ऋग्वेद ===
1. ऋग्वेद देवताओं की स्तुति से सम्बंधित रचनाओं का संग्रह है।
2. यह 10 मंडलों में विभक्त है। इसमे 2 से 7 तक के मंडल प्राचीनतम माने जाते हैं। प्रथम एवं दशम मंडल बाद में जोड़े गए हैं। इसमें 1028 सूक्त हैं।
3. इसकी भाषा '''''पद्यात्मक''''' है।
4. ऋग्वेद में 33 प्रकार के देवों (दिव्य गुणो से युक्त पदार्थो) का उल्लेख मिलता है।
5. प्रसिद्ध गायत्री मंत्र जो सूर्य से सम्बंधित देवी गायत्री को संबोधित है, ऋग्वेद में सर्वप्रथम प्राप्त होता है।गायत्री मंत्र ऋग्वेद के तीसरे मंडल में उल्लेखित है।
6. ' असतो मा सद्गमय ' वाक्य ऋग्वेद से लिया गया है।
7. ऋग्वेद में मंत्र को कंठस्त करने में स्त्रियों के नाम भी मिलते हैं, जिनमें प्रमुख हैं- लोपामुद्रा, घोषा, शाची, पौलोमी एवं काक्षावृती आदि।
8. इसके पुरोहित के नाम होत्री है।
=== यजुर्वेद ===
* यजु का अर्थ होता है यज्ञ। इसमें धनुर्यवीद्या का उल्लेख है।
* यजुर्वेद वेद में यज्ञ की विधियों का वर्णन किया गया है।
* इसमे मंत्रों का संकलन आनुष्ठानिक यज्ञ के समय सस्तर पाठ करने के उद्देश्य से किया गया है।
* इसमें मंत्रों के साथ-साथ धार्मिक अनुष्ठानों का भी विवरण है, जिसे मंत्रोच्चारण के साथ संपादित किए जाने का विधान सुझाया गया है।
* यजुर्वेद की भाषा पद्यात्मक एवं गद्यात्मक दोनों है।
* यजुर्वेद की दो शाखाएं हैं- कृष्ण यजुर्वेद तथा शुक्ल यजुर्वेद।
* कृष्ण यजुर्वेद की चार शाखाएं हैं- मैत्रायणी संहिता, काठक संहिता, कपिन्थल तथा संहिता। शुक्ल यजुर्वेद की दो शाखाएं हैं- मध्यान्दीन तथा कण्व संहिता।
* यह 40 अध्याय में विभाजित है।
* इसी ग्रन्थ में पहली बार राजसूय तथा वाजपेय जैसे दो राजकीय समारोह का उल्लेख है।
=== सामवेद ===
सामवेद की रचना ऋग्वेद में दिए गए मंत्रों को गाने योग्य बनाने हेतु की गयी थी।
* इसमे 1810 छंद हैं जिनमें 75 को छोड़कर शेष सभी ऋग्वेद में उल्लेखित हैं।
* सामवेद तीन शाखाओं में विभक्त है- कौथुम, राणायनीय और जैमनीय।
* सामवेद को भारत की प्रथम संगीतात्मक पुस्तक होने का गौरव प्राप्त है।
=== अथर्व वेद ===
* इस वेद में रहस्यमई विद्याओं, चमत्कार, जादू टोने, आयुर्वेद जड़ी बूटियों का वर्णन मिलता है।
* इसमें कुल 20 अध्याय में 5687 मंत्र हैं।
* अथर्ववेद आठ खंड में विभाजित है। इसमें भेषज वेद और धातु वेद दो प्रकार मिलते हैं।
== बौद्ध और जैन धर्म==
{{main|बौद्ध धर्म}}
ईसा पूर्व छठी सदी तक वैदिक कर्मकांडों की परंपरा का अनुपालन कम हो गया था। उपनिषद ने जीवन की आधारभूत समस्या के बारे में स्वाधीनता प्रदान कर दिया था। इसके फलस्वरूप कई धार्मिक पंथों तथा संप्रदायों की स्थापना हुई। उस समय ऐसे किसी 62 सम्प्रदायों के बार में जानकारी मिलती है। लेकिन इनमें से केवल 2 ने भारतीय जनमानस को लम्बे समय तक प्रभावित किया - जैन और बौद्ध।
जैन धर्म पहले से ही विद्यमान था। दोनों श्रमण संस्कृति पर आधारित हैं। वैदिकों ने श्रमण संस्कृति को बाद में उपनिषदों में अपनाया।
=== जैन धर्म ===
जैन धर्म के दो तीर्थकरों - [[ऋषभदेव|ऋषभनाथ]] तथा [[अरिष्टनेमि]]- का उल्लेख ऋग्वेद में पाया जाता है। कुछ विद्वानों का मत है कि हड़प्पा की खुदाई में जो नग्न धड़ की मूर्ति मिली है वो किसी तीर्थकर की है। [[पार्श्वनाथ]] तेइसवें तीर्थकर तथा [[महावीर|भगवान महावीर]] चौबीसवें तीर्थकर थे। वर्धमान महावीर जो कि जैनों के सबसे प्रमुख तथा अन्तिम तीर्थकर थे, का जन्म 540 ईसापूर्व के आसपास [[वैशाली]] के पास कुंडग्राम में हुआ था। 42 वर्ष की अवस्था में उन्हें कैवल्य (परम ज्ञान) प्राप्त हुआ।
महावीर ने पार्श्वनाथ के चार सिद्धांतों को स्वीकार किया -
* '''अहिंसा''' - जीव हत्य न करना
* '''अमृषा''' - झूठ न बोलना
* '''अस्तेय''' - चोरी न करना
* '''अपरिग्रह''' - सम्पत्ति इकठ्ठा न करना
इसके अतिरिक्त उन्होंने अपना पांचवा सिद्धांत भी अपने उपदेशों में जोड़ा -
* '''ब्रह्मचर्य''' - इंद्रियों पर नियंत्रण
इस सम्प्रदाय के दो अंग हैं - श्वेताबर तथा दिगंबर
=== बौद्ध धर्म ===
जैन धर्म की तरह इसका मूल भी एक उच्चवर्गीय क्षत्रिय परिवार से था। गौतम नाम से जन्में [[गौतम बुद्ध|महात्मा बुद्ध]] का जन्म 563 ईसापूर्व में शाक्यकुल के राजा शुद्धोदन के घर हुआ था। इन्होने भी सांसारिक जीवन जीने के बाद एक दिन (या रात) अचानक से अपना गार्हस्थ छोड़कर सत्य की खोज में चल पड़े।
बुद्ध के उपदेशों में चार आर्य सत्य समाहित हैं -
* दुख
* दुख समुद्दय
* दुख निरोध
* दुख निरोध गामिनी प्रतिपदा।
उन्होंने अष्टांगिक मार्ग का सुझाव दिया जिसका पालन करके मनुष्य पुनर्जन्म के बंधन से दूर हो सकता है -
* सम्यक वाक्
* सम्यक कर्म
* सम्यक आजीविका
* सम्यक व्यायाम
* सम्यक स्मृति
* सम्यक समाधि
* सम्यक संकल्प
* सम्यक दृष्टि
बौद्ध धर्म का प्रभाव [[भारत]] के बाहर भी हुआ। [[अफ़ग़ानिस्तान]] (उस समय फ़ारसी शासकों के अधीन), [[चीन]], [[जापान]] तथा [[श्रीलंका]] के अतिरिक्त इसने दक्षिण पूर्व एशिया में भी अपनी पहचान बनाई।
== यूनानी तथा फारसी आक्रमण ==
उस समय उत्तर पश्चिमी भारत में कोई खास संगठित राज्य नहीं था। लगातार शक्तिशाली हो रहे [[फ़ारसी साम्राज्य]] की नज़र इधर की ओर भी गई। हंलांकि अब तक फ़ारस पर राज कर रहे चन्द्र राजा [[यूनान]], पश्चिमी एशिया तथा मध्य एशिया की ओर बढ़ रहे थे, उन्होंने भारत की अनदेखी नहीं की थी।
शक्तिशाली अजमीड/हखामनी (Achaemenid) शासकों की निगाह इस क्षेत्र पर थी और Kuru-s कुरुस [[साईरस]] (558ईसापूर्व - 530 ईसापूर्व) ने [[हिन्दु कुश|हिंदूकुश]] के दक्षिण के रजवाड़ो को अपने अधीन कर लिया। इसके बाद दारयवाहु (डेरियस, 522-486 ईसापूर्व) के शासनकाल में फ़ारसी शासन के विस्तार के साक्ष्य मिलते हैं। इसके उत्कीर्ण लेखों में दो ज़ग़ह ''हिन्दू'' को इसके राज्य का हिस्सा बताया गया है। इस संदर्भ में ''हिन्दू'' शब्द का सही अर्थ बता पाना कठिन है पर इसका तात्पर्य किसा ऐसे प्रदेश से अवश्य है जो सिंधु नदी के पूर्व में हो।
ईसापूर्व चौथी सदी में जब यूनानी और फ़ारसी शासक पश्चिम एशिया (आधुनिक [[तुर्की]] का क्षेत्र) पर अपना प्रभुत्व जमाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। मकदूनिया के राजा [[सिकंदर]] के हाथों हखामनी शासक डेरियस तृतीय के हारने के पश्चात स्थिति में परिवर्तन आ गया। सिकंदर पश्चिम एशिया जीतने के बाद [[अरब]], [[मिस्र]] तथा उसके बाद फ़ारस के केन्द्र ([[ईरान]]) तक पहुंच गया। इतने से भी जब उसको संतोष नहीं हुआ तो वो [[अफ़ग़ानिस्तान|अफ़गानिस्तान]] होते हुए 326 ईसा पूर्व में पश्चिमोत्तर भारत पहुँच गया।
सिकंदर के [[भारत]] आने के बारे में कोई भारतीय स्रोत उपलब्ध नहीं है। सिकंदर के विजय अभियान की बात केवल यूनानी तथा रोमन स्रोतों में उपलब्ध है तथा उन्हें सत्य के करीब मान कर ये सब लिखा गया है। यूनानी ग्रंथ तो सिकंदर के [[भारत]] अभियान का विस्तार से वर्णन करते हैं पर वे [[चाणक्य|कौटिल्य]] के बारे में एक शब्द भी नहीं लिखते हैं।
सिकंदर जब भारत पहुंचा तो [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] (अविभाजित पंजाब) में [[रावलपिंडी]] के पास का राजा उसकी सहायता के लिए पहँच गया। अन्य लगभग सभी राजाओं ने सिन्दर का डटकर मुकाबला किया पर वे सिकन्दर की अनुभवी सेनाओं से हार गए। यूनानी लेखकों ने इन राजाओं के वीरता की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। इसके बाद [[झेलम नदी|झेलम]] और [[चिनाब]] के बीच स्थित प्रदेश का राजा '''पोरस''' (जो कि पौरव का यूनानी नाम लगता है) ने सिकंदर का वीरता पूर्वक सामना किया। 326 ईस्वी पूर््व का यह झेलम नदी के तट पर हुआ पोरस व सिकंदर के मध्य का युद्ध हाइडेस्पीच का युद्ध कहलाता है ।कहा जाता है कि युद्ध हारने के बाद जब पोरस बन्दी बनकर सिकन्दर के सामने प्रस्तुत हुआ तो उससे पूछा गया - ''तुम्हारे साथ कैसा सुलूक (वर्ताव) किया जाय''। तो उसने साहसी उत्तर दिया -" ''जैसा एक राजा दूसरे राजा के साथ करता है'' "। उसके उत्तर पर मुग्ध होकर सिकन्दर ने उसका हारा हुआ प्रदेश लौटा दिया। इसके बाद जब उसे भारत के वीर योद्धा चन्द्रगुप्त मोर्य(मगध का नंद राजा-चंद्रगुप्त नही) की विशाल सेना का सामना करना था तब भय से ग्रसित सेना को लेकर सिकन्दर आगे नहीं बढ़ सका और वापस लौट गया।
== महाजनपद ==
{{main|महाजनपद}}
बौद्ध ग्रंथ [[अंगुत्तरनिकाय|अंगुत्तर निकाय]] के अनुसार कुल सोलह (16) महाजनपद थे - [[अवन्ति]],[[अश्मक]] या अस्सक, [[अंग]], [[कंबोज|कम्बोज]], [[काशी]], [[कुरु]], [[कोशल]], [[गंधार]], [[चेदि]], [[वज्जि]] या वृजि, [[वत्स]] या वंश, [[पाञ्चाल|पांचाल]], [[मगध महाजनपद|मगध]], [[मत्स्य]] या [[मच्छ]], [[मल्ल]], [[सुरसेन]]।
इनमें सत्ता के लिए संघर्ष चलता रहता था।
== महापद्मनंद नंदमौर्य साम्राज्य ==
{{main|मौर्य वंश}}
ईसापूर्व छठी सदी के प्रमुख राज्य थे - मगध, कोसल, वत्स के पौरव और अवंति के प्रद्योत। चौथी सदी में [[चन्द्रगुप्त मौर्य|चन्द्रगुप्त मौर्य ( चंद्र नंद )]] मोत्तर [[भारत]] को यूनानी शासकों से मुक्ति दिला दी। इसके बाद उसने मगध की ओर अपना ध्यान केन्द्रित किया जो उस समय नंदों के शासन में था। जैन ग्रंथ परिशिष्ठ पर्वन में कहा गया है कि [[चाणक्य|सम्राट धनानंद]] ने चाणक्य को अपने राजमहल से बाहर निकाल दिया इसलिए चंद्रगुप्त मौर्य को बड़का कर अपने ही बड़े भाई धनानंद को मरवा दिया चंद्र नंद से चंद्रगुप्त मौर्य बन गया इसके बाद चन्द्रगुप्त ने दक्षिण की ओर अपने साम्राज्य का विस्तार किया। चन्द्रगुप्त ने सिकंदर के क्षत्रप [[सेल्युकस प्रथम निकेटर|सेल्यूकस]] को हाराया था जिसके फलस्वरूप उसने [[हेरात]], [[कांधार|कंदहार]], [[काबुल]] तथा [[बलूचिस्तान (पाकिस्तान)|बलूचिस्तान]] के प्रांत चंद्रगुप्त को सौंप दिए थे।
चन्द्रगुप्त के बाद [[बिन्दुसार|बिंदुसार]] के पुत्र [[अशोक]] ने मौर्य साम्राज्य को अपने चरम पर पहुँचा दिया। [[कर्नाटक]] के चित्तलदुर्ग तथा मास्की में अशोक के शिलालेख पाए गए हैं। चुंकि उसके पड़ोसी राज्य [[चोल राजवंश|चोल]], [[पाण्ड्य राजवंश|पांड्य]] या [[चेर राजवंश|केरलपुत्रों]] के साथ अशोक या बिंदुसार के किसा लड़ाई का वर्णन नहीं मिलता है इसलिए ऐसा माना जाता है कि ये प्रदेश चन्द्रगुप्त के द्वारा ही जीता गया था। अशोक के जीवन का निर्णायक युद्ध [[कलिंग का युद्ध]] था। इसमें उत्कलों से लड़ते हुए अशोक को अपनी सेना द्वारा किए गए नरसंहार के प्रति ग्लानि हुई और उसने बौद्ध धर्म को अपना लिया। फिर उसने बौद्ध धर्म का प्रचार भी करवाया।
चन्द्रगुप्त मौर्य के समय में यूनानी राजदूत [[मेगस्थनीज|मेगास्थनीज़]] , सेल्यूकस के द्वारा उनके दरबार में भेजा गया। उसने चन्द्रगुप्त मौर्य के राज्य तथा उसकी राजधानी [[पाटलिपुत्र]] (आधुनिक [[पटना]]) का वर्णन किया है। इस दौरान कला का भी विकास हुआ महापद्मा नंद
== मौर्यों के बाद ==
मौर्यों के पतन के बाद [[शुंग राजवंश]] ने सत्ता सम्हाली। ऐसा माना जाता है कि मौर्य राजा वृहदृथ के सेनापति पुष्यमित्र ने बृहद्रथ की हत्या कर दी थी जिसके बाद शुंग वंश की स्थापना हुई। शुंगों ने 187 ईसापूर्व से 75 ईसापूर्व तक शासन किया। इसी काल में महाराष्ट्र में सातवाहनों का और दक्षिण में [[चेर]], [[चोल राजवंश|चोल]] और पांड्यों का उदय हुआ। सातवाहनों के साम्राज्य को आंध्र भी कहते हैं जो अत्यन्त शक्तिशाली था।
पुष्यमुत्र के शासनकाल में पश्चिम से यवनों का आक्रमण हुआ। इसी काल के माने जाने वाले वैयाकरण [[पतञ्जलि|पतंजलि]] ने इस आक्रमण का उल्लेख किया है। [[कालिदास]] ने भी अपने [[मालविकाग्निमित्रम्]] में [[वसुमित्र]] के साथ यवनों के युद्ध का चर्चा किया है। इन आक्रमणकारियों ने भारत की सत्ता पर कब्जा कर लिया। कुछ प्रमुख भारतीय-यूनानी शासक थे - यूथीडेमस, डेमेट्रियस तथा मिनांडर। मिनांडर ने बौद्ध धर्म अपना लिया था तथा उसका प्रदेश अफगानिस्तान से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था।
इसके बाद पह्लवों का शासन आया जिनके बारे में अधिक जानकारी उपल्ब्ध नहीं है। तत्पश्चात शकों का शासन आया। शक लोग मध्य एशिया के निवासी थे जिन्हें यू-ची नामक कबीले ने उनके मूल निवास से खदेड़ दिया गया था। इसके बाद वे भारत आए। इसके बाद यू-ची जनजाति के लोग भी भारत आ गए क्योंकि [[चीन की विशाल दीवार|चीन की महान दीवार]] के बनने के बाद मध्य एशिया की परिस्थिति उनके अनूकूल नहीं थी। ये [[कुषाण राजवंश|कुषाण]] कहलाए। [[कनिष्क]] इस वंश का सबसे प्रतापी राजा था। कनिष्क ने ७८ ईसवी से 101 ईस्वी तक राज किया।
== समकालीन दक्षिण भारत ==
दक्षिण में चेर, पांड्य तथा चोल के बीच सत्ता संघर्ष चलता रहा था। संगम साहित्य इस समय की सबसे अमूल्य धरोहर थी। तिरूवल्लुवर द्वारा रचित [[तिरुक्कुरल]] तमिल भाषा का प्राचीनतम ग्रंघ माना जाता है। धार्मिक सम्प्रदायों का प्रचलन था और मुख्यतः वैष्णव, शैव, बौद्ध तथा जैन सम्प्रदायों के अनुयायी थे।
== गुप्त काल ==
{{main|गुप्त वंश}}
सन् ३२० ईस्वी में [[चन्द्रगुप्त प्रथम]] अपने पिता घटोत्कच के बाद राजा बना जिसने गुप्त वंश की नींव डाली। इसके बाद [[समुद्रगुप्त]] (३४० इस्वी), चन्द्रगुप्त द्वितीय, [[कुमारगुप्त प्रथम]] (४१३-४५५ इस्वी) और [[स्कन्दगुप्त|स्कंदगुप्त]] शासक बने। इसके करीब १०० वर्षों तक गुप्त वंश का अस्तित्व बना रहा। ६०६ इस्वी में [[हर्षवर्धन|हर्ष]] के उदय तक किसी एक प्रमुख सत्ता की कमी रही। इस काल में कला और साहित्य का उत्तर तथा दक्षिण दोनों में विकास हुआ। इस काल का सबसे प्रतापी शासक "[[समुद्रगुप्त]]" था जिसके शासनकाल में भारत को "सोने की चिड़िया" कहा जाने लगा।
ग्यारहवीं तथा बारहवीं सदी में भारतीय [[कला]], [[भाषा]] तथा [[धर्म]] का प्रचार दक्षिणपूर्व एशिया में भी हुआ।
==प्राचीन भारत के राजवंश और उनके संस्थापक ==
{| class="wikitable sortable"
! वंश !! राजधनी !! संस्थापक
|-
| [[कुरु वंश]] || [[हस्तिनापुर]] || [[भरत वंश (कुरु पांडु)]]
|-
| [[हर्यक वंश]] || [[राजगृह]], [[पाटलिपुत्र]] || [[बिम्बिसार]]
|-
| [[शिशुनाग वंश]] || पाटलिपुत्र, वैशाली || [[शिशुनाग]]
|-
| [[नंद वंश|नन्द वंश]] || पाटलिपुत्र || महापद्मनन्द
|-
| [[मौर्य राजवंश|मौर्य वंश]] || पाटलिपुत्र || चंद्रगुप्त मौर्य
|-
| [[शुंग राजवंश|शुंग वंश]] || विदिशा || पुष्यमित्र शुंग
|-
| [[कण्व वंश]] || पाटलिपुत्र || वसुदेव
|-
| [[सातवाहन|सातवाहन वंश]] || पैठन || सिमुक
|-
| [[महामेघवाहन वंश|चेदि वंश]] || सोत्थवती || महामोघवाहन
|-
| हिंद-यवन || शाकल ( सियालकेट ) || डेमेट्रियस
|-
| [[कुषाण राजवंश|कुषाण वंश]] || पुरुषपुर पेशावर || कुजुल कडफिसेस
|-
| [[कदम्ब वंश]] || बनवासी || मयूरशर्मन
|-
| [[गंग वंश]] || तलकाड || कोंकणिवर्मा
|-
| [[गुप्त राजवंश|गुप्त वंश]] || पाटलिपुत्र || श्रीगुप्त
|-
| [[मौखरी वंश]] || कन्नौज || ईशानवर्मा
|-
| [[हूण वंश]] || स्यालकोट || तोरमाण
|-
| [[मैत्रक वंश]] || वल्लभी || भट्टारक
|-
| [[उत्तरगुप्त वंश]] || पाटलिपुत्र || कृष्णगुप्त
|-
| [[गौड़ वंश]] || कर्णसुवर्ण, मुर्शिदाबाद || शशांक
|-
| [[पुष्यभूति वंश]] || थानेश्वर || प्रभाकरवर्धन
|-
| [[पाल वंश]] || [[मुंगेर]] || गोपाल
|-
| [[सेन राजवंश|सेन वंश]] || राढ़ || सामन्तसेन
|-
| [[राष्ट्रकूट राजवंश|राष्ट्रकूट वंश]] || मान्यखेत || दन्तिवर्मन
|-
| [[गुर्जर प्रतिहार वंश]] || कन्नौज || नागभट्ट प्रथम
|-
| [[कलचुरी]] [[महामेघवाहन वंश|चेदि वंश]] || त्रिपुरी || कोक्कल प्रथम
|-
| [[परमार वंश]] || धारा || कृष्णराज/ उपेन्द्र
|-
| [[लोदी वंश]] || दिल्ली ||
|-
| [[महदेले लोधी वंश]] || मोहली || दृगपाल/महदेले
|-
| [[सोलंकी वंश]] || अन्हिलवाड़ || मूलराज प्रथम
|-
| [[चन्देल|चन्देल वंश]] || खजुराहो (महोबा) || नन्नुक
|-
| [[गहड़वाल वंश]] || कन्नौज || चन्द्रदेव
|-
| [[चौहान वंश]] || अजमेर || वासुदेव
|-
| [[तोमर वंश]] || ढिल्लिका || अनंगपाल
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| [[चालुक्य राजवंश|चालुक्य वंश]] (बादामी) || बादामी || पुलकेशिन प्रथम
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| चालुक्य वंश (कल्याणी) || मान्यखेत || तैलप द्वितीय
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| चालुक्य वंश (वेंगि) || वेंगि || विष्णुवर्धन
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| [[पल्लव राजवंश|पल्लव वंश]] || [[कांचीपुरम|कांची]] || [[सिंहवर्मा]]
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| [[चोल राजवंश|चोल वंश]] || [[तंजावुर|तंजौर]], तंजावुर || [[विजयालय]]
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== इन्हें भी देखें ==
* [[मगध के राजवंशों और शासकों की सूची]]
* [[प्राचीन भारत की आर्थिक संस्थाएं]]
* [[प्राचीन भारत में गणतंत्र]]
* [[भारत के प्राचीन वैज्ञानिक|प्राचीन भारत के वैज्ञानिक]]
* [[प्राचीन भारतीय विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी|प्राचीन भारत में विज्ञान एवं तकनीक]]
* [[प्राचीन भारतीय कलाएँ]]
* [[प्राचीन भारतीय परंपरा और इतिहास]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20110826211239/http://books.google.co.in/books?id=FFhd8ktl7XsC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false प्राचीन भारत का सामाजिक एवं आर्थिक इतिहास] (गूगल पुस्तक ; लेखक - ओम प्रकाश प्रसाद)
* [https://web.archive.org/web/20121215060522/http://books.google.co.in/books?id=7_GWRA79yJgC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false प्राचीन भारत का सामाजिक और आर्थिक इतिहास] (गूगल पुस्तक ; लेखक - शिव स्वरूप सहाय)
* [https://web.archive.org/web/20100613003424/http://iish.org/index.php?option=com_content&view=article&id=71:a-brief-introduction-to-technological-brilliance-of-ancient-india&catid=37:heritage-india-news&Itemid=56 A brief introduction to technological brilliance of Ancient India] (इण्डियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंटिफिक हेरिटेज)
* [https://web.archive.org/web/20140328200741/http://books.google.co.in/books?id=1mYAw7OIUkEC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false प्राचीन भारत के वैज्ञानिक कर्णधार] (गूगल पुस्तक ; लेखक - स्वामी सत्यप्रकाश सरस्वती)
* [https://web.archive.org/web/20150406043218/http://books.google.co.in/books?id=GnAPjKdM_OMC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false प्राचीन भारत में रसायन का विकास] (गूगल पुस्तक; लेखक - स्वामी सत्यप्रकाश सरस्वती)
* [https://web.archive.org/web/20121215042127/http://books.google.co.in/books?id=xHun9M65_qAC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false प्राचीन भारत में दूत पद्धति] (गूगल पुस्तक ; लेखक - आनन्द प्रकाश गौड़)
* [https://web.archive.org/web/20121215063331/http://books.google.co.in/books?id=KtF8zGa5zvcC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false श्रेण्य युग ('क्लासिकल एज' का हिन्दी अनुवाद)] (गूगल पुस्तक ; लेखक - आर सी मजुमदार ; अनुवादक - शिवदान सिंह चौहान)
* [https://web.archive.org/web/20121215041900/http://books.google.co.in/books?id=V4cGO9w4pb8C&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false भारतीय इतिहास के कुछ विषय (Archaeology & Ancient India)] (गूगल पुस्तक ; लेखक - रघुनाथ राय)
* [https://web.archive.org/web/20121215042036/http://books.google.co.in/books?id=mdqq14ZB-KcC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false प्राचीन भारत का राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास] (गूगल पुस्तक ; लेखक - धनपति पाण्डेय)
* [http://books.google.co.in/books?id=vhUZrj975BAC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false हिन्दू सभ्यता] (गूगल पुस्तक ; लेखक - राधाकुमुद मुखर्जी)
[[श्रेणी:प्राचीन भारत| ]]
[[श्रेणी:भूगोल और स्थानों की रूपरेखाएँ]]
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{{स्रोतहीन|date=मई 2016}}
मानव के उदय से लेकर दसवीं सदी तक के [[भारत का इतिहास]], '''प्राचीन भारत का इतिहास''' कहलाता है।<ref>{{cite web|url=http://www.bbc.com/hindi/india-42527770|title=भारत का 20 लाख साल पुराना इतिहास देखेंगे?|access-date=11 जनवरी 2018|archive-ʳʳᵘʸʳᵈʸᵗᵈ ᵗʰᵗᵗᵍᵗᵗʰᵉ ʸⁱᵈ ᴳᴴ ʰʰᵗʸʸᵘᵘurl=https://web.archive.org/web/20180105014934/http://www.bbc.com/hindi/india-42527770|archive-date=5 जनवरी 2018|url-status=ᴸⁱᵛᵉʳᵖᵒᵒˡ 5'‰⅝ᵗᵒ ᵗⁱᵐᵉ}}</ref>
== प्राचीन भारतीय इतिहास की जानकारी के साधन ==
{{मुख्य|प्राचीन भारतीय इतिहास की जानकारी के साधन}}1.पुरातात्विक स्त्रोत __इसके अंतर्गत अभिलेख, सिक्का,[[स्मारक]], भवन और [[चित्र]] आदि आते है,यह उत्खनन से प्राप्त किया जाता है।पुरातात्विक स्त्रोत साहित्यिक स्त्रोत से अधिक प्रमाणित है।
2.साहित्यिक स्त्रोत __ इसके अंतर्गत वेद, पुराण अरंन्यंक ,उपनिषद,महाकाव्य, जातक,पिटक आदि आते है।
3.विदेशी यात्रीयो का वर्णन __विदेशी यात्रियो के वर्णन से तार्त्पय है कि जो विदेशी [[भारत]] मे घूमने आए वह यहाॅ के बारे कुछ लिखकर गए जैसे: फाहइयान ने अशोक के छः स्तंभ के बारे जानकारी लेकर गया।
== पाषाण युग ==
[[पाषाण युग]] से तात्पर्य ऐसे काल से है जब लोग [[पत्थर|पत्थरों]] पर आश्रित थे। पत्थर के [[औज़ार]], पत्थर की गुफा ही उनके जीवन के प्रमुख आधार थे। यह मानव सभ्यता के आरंभिक काल में से है जब [[मानव]] आज की तरह विकसित नहीं था। इस काल में मानव प्राकृतिक आपदाओं से जूझता रहता था और शिकार तथा कन्द-मूल फल खाकर अपना जीवन बसर करता था।
=== पुरापाषाण युग ===
{{main|भारत का पुरापाषाण युग}}
[[हिमयुग]] का अधिकांश भाग पुरापाषाण काल में बीता है। भारतीय पुरापाषाण युग को औजारों, जलवायु परिवर्तनों के आधार पर तीन भागों में बांटा जाता है -
* आरंभिक या निम्न पुरापाषाण युग (25,00,000 ईस्वी पूर्व - 100,000 ई. पू.)
* मध्य पुरापाषाण युग (1,000,000 ई. पू. - 40,000 ई. पू.)
* उच्च पुरापाषाण युग (40,000 ई.पू - 10,000 ई.पू.)
आदिम मानव के जीवाश्म भारत में नहीं मिले हैं। [[महाराष्ट्र]] के बोरी नामक स्थान पर मिले तथ्यों से अंदेशा होता है कि मानव की उत्पत्ति 14 लाख वर्ष पूर्व हुई होगी। यह बात लगभग सर्वमान्य है कि अफ़्रीका की अपेक्षा भारत में मानव बाद में बसे। यद्दपि यहां के लोगों का पाषाण कौशल लगभग उसी तरह विकसित हुआ जिस तरह [[अफ़्रीका]] में। इस समय का मानव अपना भोजन कठिनाई से ही बटोर पाता था। वह ना तो खेती करना जानता था और ना ही घर बनाना। यह अवस्था 9000 ई.पू. तक रही होगी।
[[पुरापाषाण काल]] के औजार [[छोटा नागपुर पठार|छोटानागपुर के पठार]] में मिले हैं जो 1,00,000 ई.पू. तक हो सकते हैं। [[आन्ध्र प्रदेश|आंध्र प्रदेश]] के [[कर्नूल|कुर्नूल]] जिले में 20,000 ई.पू. से 10,000 ई.पू. के मध्य के औजार मिले हैं। इनके साथ हड्डी के उपकरण और पशुओं के अवशेष भी मिले हैं। [[उत्तर प्रदेश]] के [[मिर्ज़ापुर]] जिले की [[बेलन घाटी]] में जो पशुओं के अवशेष मिले हैं उनसे ज्ञात होता है कि [[बकरी]], [[भेड़]], [[गाय]], [[भैंस]] इत्यादि पाले जाते थे। फिर भी पुरापाषाण युग की आदिम अवस्था का मानव [[शिकार]] और खाद्य संग्रह पर जीता था। [[पुराण|पुराणों]] में केवल [[फल]] और [[कन्द मूल]] खाकर जीने वालों का जिक्र है। इस तरह के कुछ लोग तो आधुनिक काल तक पर्वतों और गुफाओं में रहते आए हैं।
=== नवपाषाण युग ===
भारत में नवपाषाण युग के अवशेष सम्भवतः 6000 ई०पू० से 1000 ई०पू के है।विकास कि यह अवधि भारतीय उपमहाद्वीप में कुछ देर से आयी क्योकि ऐसा माना jata है कि विश्व के बडे भूभाग( south west Asia) में यह युग 8000-7000 ई०पू० के आसपास पनपा, यहाँ से नील घाटी (Egypt) होते हुए यूरोप पहुंचा। इस युग में मानव पत्थर कि बनी हाथ कि कुल्हाड़ियां आदि औजार पत्थर को छिल घीस और चमकाकर तैयार करता था, उत्तरी भारत में नवपाषाण युग का स्थल बुर्जहोम (कश्मीर) में पाया गया है।
भारत में नव पाषाण काल के प्रमुख चार स्थल है
== ताम्र पाषाण युग ==
नवपाषाण युग का अन्त होते होते धातुओं का प्रयोग शुरू हो गया था। ताम्र पाषाणिक युग में तांबा तथा प्रस्तर के हथियार ही प्रयुक्त होते थे। इस समय तक लोहा या कांसे का प्रयोग आरम्भ नहीं हुआ था। [[भारत]] में ताम्र पाषाण युग की बस्तियां दक्षिण पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी मध्य
प्रदेश, पश्चिमी महाराष्ट्र तथा दक्षिण पूर्वी भारत में पाई गई है। और सारे भारत में जंगल ही था
== कांस्य युग और सिंधु घाटी सभ्यता ==
{{main|सिंधु घाटी सभ्यता}}
बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ तक इतिहासकारों की यह मान्यता थी कि वैदिक सभ्यता भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता है। परन्तु सर [[दयाराम साहनी]] के नेतृत्व में १९२१ में जब [[हड़प्पा]] (पंजाब के माँन्टगोमरी जिले में स्थित) की खुदाई हुई तब इस बात का पता चला कि भारत की सबसे पुरानी सभ्यता वैदिक नहीं वरन [[सिंधु घाटी सभ्यता|सिन्धु घाटी की सभ्यता]] है। अगले साल अर्थात १९२२ में [[राखालदास बनर्जी]] के नेतृत्व में [[मोहन जोदड़ो|मोहनजोदड़ो]] (सिन्ध के [[लाड़काना|लरकाना]] जिले में स्थित) की खुदाई हुई। हड़प्पा टीले के बारे में सबसे पहले चार्ल्स मैसन ने १९२६ में उल्लेख किया था। मोहनजोदड़ो को [[सिन्धी भाषा]] में मृतकों का टीला कहा जाता है। १९२२ में राखालदास बनर्जी ने और इसके बाद १९२२ से १९३० तक सर जॉन मार्शल के निर्देशन में यहां उत्खनन कार्य करवाया गया।
[[सिंधु घाटी सभ्यता]] (2500 ईसापूर्व से 1750 ईसापूर्व तक) विश्व की प्राचीन नदी घाटी सभ्यताओं में से एक प्रमुख सभ्यता है। सम्मानित पत्रिका नेचर में प्रकाशित शोध के अनुसार यह सभ्यता कम से कम 8000 वर्ष पुरानी है। यह [[हड़प्पा]] सभ्यता और 'सिंधु-सरस्वती सभ्यता' के नाम से भी जानी जाती है। इसका विकास सिंधु और घघ्घर/हकड़ा (प्राचीन सरस्वती) के किनारे हुआ।[[मोहन जोदड़ो|मोहनजोदड़ो]], कालीबंगा, लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी और हड़प्पा इसके प्रमुख केन्द्र थे। दिसम्बर २०१४ में भिर्दाना को अबतक का खोजा गया सबसे प्राचीन नगर माना गया सिंधु घाटी सभ्यता का। ब्रिटिश काल में हुई खुदाइयों के आधार पर पुरातत्ववेत्ता और इतिहासकारों का अनुमान है कि यह अत्यंत विकसित सभ्यता थी और ये शहर अनेक बार बसे और उजड़े हैं।
इस सभ्यता की सबसे विशेष बात थी यहां की विकसित नगर निर्माण योजना। [[हड़प्पा]] तथा [[मोहन जोदड़ो|मोहनजोदड़ो]] दोनो नगरों के अपने दुर्ग थे जहां शासक वर्ग का परिवार रहता था। प्रत्येक नगर में दुर्ग के बाहर एक एक उससे निम्न स्तर का शहर था जहां ईंटों के मकानों में सामान्य लोग रहते थे। इन नगर भवनों के बारे में विशेष बात ये थी कि ये जाल की तरह विन्यस्त थे। यानि सड़के एक दूसरे को समकोण पर काटती थीं और नगर अनेक आयताकार खंडों में विभक्त हो जाता था। ये बात सभी सिन्धु बस्तियों पर लागू होती थीं चाहे वे छोटी हों या बड़ी। हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो के भवन बड़े होते थे। वहाँ के स्मारक इस बात के प्रमाण हैं कि वहाँ के शासक मजदूर जुटाने और कर-संग्रह में परम कुशल थे। ईंटों की बड़ी-बड़ी इमारत देख कर सामान्य लोगों को भी यह लगेगा कि ये शासक कितने प्रतापी और प्रतिष्ठावान् थे।
मोहनजोदड़ो का अब तक का सबसे प्रसिद्ध स्थल है विशाल सार्वजनिक स्नानागार, जिसका जलाशय दुर्ग के टीले में है।
=== उत्पत्ति ===
इतनी विस्तृत सभ्यता होने के बावजूद भी इसकी उत्पत्ति को लेकर आज भी विद्वानों में मतैक्य का अभाव है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि हड़प्पा संस्कृति के जितने भी स्थलों की अब तक खुदाई हुई है वहां सभ्यता के विकास अनुक्रम का चिन्ह स्पष्ट नही मिलता है अर्थात इस सभ्यता के अवशेष जहां कहीं भी मिले हैं अपनी पूर्ण विकसित अवस्था में ही मिले हैं।
सर जॉन मार्शल, गार्डन चाईल्ड, मार्टीमर व्हीलर आदि इतिहासकारों की मान्यता है कि हड़प्पा सभ्यता की उत्पत्ति में विदेशी तत्व का हाथ रहा है। इन इतिहासकारों का मानना है कि हड़प्पा की उत्पत्ति [[मेसोपोटामिया]] की शाखा सुमेरिया की सभ्यता की प्रेरणा से हुई है। इन दोनो सभ्यताओं में कुछ समानताएं भी देखने को मिलती है जो इस प्रकार है -
*(१) दोनो ही सभ्यता नगरीय है।
*(२) दोनो ही सभ्यताओं के निवासी कांसे और तांबे के साथ साथ पाषाण के लघु उपकरणों का प्रयोग करते थे।
*(३) दोनों ही सभ्यताओं के भवन निर्माण में कच्चे और पक्के दोनो ही प्रकार के ईंटों का प्रयोग हुआ है।
*(४) दोनो को [[लिपि]] का ज्ञान था।
इन्ही समानताओं के आधार पर व्हीलर ने सैन्धव सभ्यता को [[सुमेरियन सभ्यता]] का एक उपनिवेश बताय़ा था। लेकिन इन समानताओं के बावजूद कुछ ऐसी असमानताएं भी हैं जिनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती है। हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना सुमेरिया की सभ्यता से अधिक सुव्यवस्थित है। दोनो ही सभ्यताओं में आम उपयोग की चीजें काफी भिन्न हैं जैसे बर्तन, उपकरण, मूर्तियां, मुहरें आदि। फिर दोनों ही सभ्यताओं के लिपि में भी अंतर है। जहां सुमेरियाई लिपि में ९०० अक्षर हैं वहीं [[सरस्वती लिपि|सिन्धु लिपि]] में केवल ४०० अक्षर हैं। इन विभिन्नताओं के होते हुए दोनो सभ्यताओं को समान मानना समुचित नहीं लगता है|
== वैदिक काल ==
{{main|वैदिक सभ्यता}}
सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) के पश्चात भारत में जिस नवीन सभ्यता का विकास हुआ उसे ही आर्य (Aryan) अथवा वैदिक सभ्यता (Vedic Civilization) के नाम से जाना जाता है। इस काल की जानकारी हमे मुख्यत: वेदों से प्राप्त होती है, जिसमे [[ऋग्वेद]] सर्वप्राचीन होने के कारण सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। वैदिक काल को ऋग्वैदिक काल या पूर्व वैदिक काल (1500 -1000 ई.पु.) तथा उत्तर वैदिक काल (1000 - 600 ई.पु.) में बांटा गया है। आम तौर पर अधिकतर विद्वान वैदिक सभ्यता का काल 5000 ईसा पूर्व से 500 ईसा पूर्व के बीच में मानत है|
== उत्तरवैदिक काल ==
(१०००-६०० ई०पू०)
ऋग्वैदिक काल में आर्यों का निवास स्थान सिन्धु तथा सरस्वती नदियों के बीच में था। बाद में वे सम्पूर्ण उत्तर भारत में फ़ैल चुके थे। सभ्यता का मुख्य क्षेत्र गंगा और उसकी सहायक नदियों का मैदान हो गया था। गंगा को आज भारत की सबसे पवित्र नदी माना जाता है। इस काल में विश् का विस्तार होता गया और कई जन विलुप्त हो गए। भरत, त्रित्सु और तुर्वस जैसे जन् राजनीतिक हलकों से ग़ायब हो गए जबकि पुरू पहले से अधिक शक्तिशाली हो गए। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में कुछ नए राज्यों का विकास हो गया था, जैसे - काशी, कोसल, विदेह ([[मिथिला]]), मगध और अंग।
ऋग्वैदिक काल में सरस्वती नदी को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। ग॓गा और यमुना नदी का उल्लेख केवल एक बार हुआ है। इस काल में कौसाम्बी नगर मे॓ पहली बार पक्की ईटो का प्रयोग किया गया। इस काल में वर्ण व्यासाय के बजाय जन्म के आधार पे निर्धारित होने लगे
अथर्ववेद की रचना उत्तर-वैदिक काल के दौरान हुई थी; इसे वैदिक युग के अंत में लिखा गया था।
== वैदिक साहित्य ==
* वैदिक साहित्य में चार वेद एवं उनकी संहिताओं, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषदों एवं वेदांगों को शामिल किया जाता है।
* वेदों की संख्या चार है- ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद।
* ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद विश्व के प्रथम प्रामाणिक ग्रन्थ है।
* वेदों को अपौरुषेय कहा गया है। गुरु द्वारा शिष्यों को मौखिक रूप से कंठस्त कराने के कारण वेदों को "श्रुति" की संज्ञा दी गई है।
=== ऋग्वेद ===
1. ऋग्वेद देवताओं की स्तुति से सम्बंधित रचनाओं का संग्रह है।
2. यह 10 मंडलों में विभक्त है। इसमे 2 से 7 तक के मंडल प्राचीनतम माने जाते हैं। प्रथम एवं दशम मंडल बाद में जोड़े गए हैं। इसमें 1028 सूक्त हैं।
3. इसकी भाषा '''''पद्यात्मक''''' है।
4. ऋग्वेद में 33 प्रकार के देवों (दिव्य गुणो से युक्त पदार्थो) का उल्लेख मिलता है।
5. प्रसिद्ध गायत्री मंत्र जो सूर्य से सम्बंधित देवी गायत्री को संबोधित है, ऋग्वेद में सर्वप्रथम प्राप्त होता है।गायत्री मंत्र ऋग्वेद के तीसरे मंडल में उल्लेखित है।
6. ' असतो मा सद्गमय ' वाक्य ऋग्वेद से लिया गया है।
7. ऋग्वेद में मंत्र को कंठस्त करने में स्त्रियों के नाम भी मिलते हैं, जिनमें प्रमुख हैं- लोपामुद्रा, घोषा, शाची, पौलोमी एवं काक्षावृती आदि।
8. इसके पुरोहित के नाम होत्री है।
=== यजुर्वेद ===
* यजु का अर्थ होता है यज्ञ। इसमें धनुर्यवीद्या का उल्लेख है।
* यजुर्वेद वेद में यज्ञ की विधियों का वर्णन किया गया है।
* इसमे मंत्रों का संकलन आनुष्ठानिक यज्ञ के समय सस्तर पाठ करने के उद्देश्य से किया गया है।
* इसमें मंत्रों के साथ-साथ धार्मिक अनुष्ठानों का भी विवरण है, जिसे मंत्रोच्चारण के साथ संपादित किए जाने का विधान सुझाया गया है।
* यजुर्वेद की भाषा पद्यात्मक एवं गद्यात्मक दोनों है।
* यजुर्वेद की दो शाखाएं हैं- कृष्ण यजुर्वेद तथा शुक्ल यजुर्वेद।
* कृष्ण यजुर्वेद की चार शाखाएं हैं- मैत्रायणी संहिता, काठक संहिता, कपिन्थल तथा संहिता। शुक्ल यजुर्वेद की दो शाखाएं हैं- मध्यान्दीन तथा कण्व संहिता।
* यह 40 अध्याय में विभाजित है।
* इसी ग्रन्थ में पहली बार राजसूय तथा वाजपेय जैसे दो राजकीय समारोह का उल्लेख है।
=== सामवेद ===
सामवेद की रचना ऋग्वेद में दिए गए मंत्रों को गाने योग्य बनाने हेतु की गयी थी।
* इसमे 1810 छंद हैं जिनमें 75 को छोड़कर शेष सभी ऋग्वेद में उल्लेखित हैं।
* सामवेद तीन शाखाओं में विभक्त है- कौथुम, राणायनीय और जैमनीय।
* सामवेद को भारत की प्रथम संगीतात्मक पुस्तक होने का गौरव प्राप्त है।
=== अथर्व वेद ===
* इस वेद में रहस्यमई विद्याओं, चमत्कार, जादू टोने, आयुर्वेद जड़ी बूटियों का वर्णन मिलता है।
* इसमें कुल 20 अध्याय में 5687 मंत्र हैं।
* अथर्ववेद आठ खंड में विभाजित है। इसमें भेषज वेद और धातु वेद दो प्रकार मिलते हैं।
== बौद्ध और जैन धर्म==
{{main|बौद्ध धर्म}}
ईसा पूर्व छठी सदी तक वैदिक कर्मकांडों की परंपरा का अनुपालन कम हो गया था। उपनिषद ने जीवन की आधारभूत समस्या के बारे में स्वाधीनता प्रदान कर दिया था। इसके फलस्वरूप कई धार्मिक पंथों तथा संप्रदायों की स्थापना हुई। उस समय ऐसे किसी 62 सम्प्रदायों के बार में जानकारी मिलती है। लेकिन इनमें से केवल 2 ने भारतीय जनमानस को लम्बे समय तक प्रभावित किया - जैन और बौद्ध।
जैन धर्म पहले से ही विद्यमान था। दोनों श्रमण संस्कृति पर आधारित हैं। वैदिकों ने श्रमण संस्कृति को बाद में उपनिषदों में अपनाया।
=== जैन धर्म ===
जैन धर्म के दो तीर्थकरों - [[ऋषभदेव|ऋषभनाथ]] तथा [[अरिष्टनेमि]]- का उल्लेख ऋग्वेद में पाया जाता है। कुछ विद्वानों का मत है कि हड़प्पा की खुदाई में जो नग्न धड़ की मूर्ति मिली है वो किसी तीर्थकर की है। [[पार्श्वनाथ]] तेइसवें तीर्थकर तथा [[महावीर|भगवान महावीर]] चौबीसवें तीर्थकर थे। वर्धमान महावीर जो कि जैनों के सबसे प्रमुख तथा अन्तिम तीर्थकर थे, का जन्म 540 ईसापूर्व के आसपास [[वैशाली]] के पास कुंडग्राम में हुआ था। 42 वर्ष की अवस्था में उन्हें कैवल्य (परम ज्ञान) प्राप्त हुआ।
महावीर ने पार्श्वनाथ के चार सिद्धांतों को स्वीकार किया -
* '''अहिंसा''' - जीव हत्य न करना
* '''अमृषा''' - झूठ न बोलना
* '''अस्तेय''' - चोरी न करना
* '''अपरिग्रह''' - सम्पत्ति इकठ्ठा न करना
इसके अतिरिक्त उन्होंने अपना पांचवा सिद्धांत भी अपने उपदेशों में जोड़ा -
* '''ब्रह्मचर्य''' - इंद्रियों पर नियंत्रण
इस सम्प्रदाय के दो अंग हैं - श्वेताबर तथा दिगंबर
=== बौद्ध धर्म ===
जैन धर्म की तरह इसका मूल भी एक उच्चवर्गीय क्षत्रिय परिवार से था। गौतम नाम से जन्में [[गौतम बुद्ध|महात्मा बुद्ध]] का जन्म 563 ईसापूर्व में शाक्यकुल के राजा शुद्धोदन के घर हुआ था। इन्होने भी सांसारिक जीवन जीने के बाद एक दिन (या रात) अचानक से अपना गार्हस्थ छोड़कर सत्य की खोज में चल पड़े।
बुद्ध के उपदेशों में चार आर्य सत्य समाहित हैं -
* दुख
* दुख समुद्दय
* दुख निरोध
* दुख निरोध गामिनी प्रतिपदा।
उन्होंने अष्टांगिक मार्ग का सुझाव दिया जिसका पालन करके मनुष्य पुनर्जन्म के बंधन से दूर हो सकता है -
* सम्यक वाक्
* सम्यक कर्म
* सम्यक आजीविका
* सम्यक व्यायाम
* सम्यक स्मृति
* सम्यक समाधि
* सम्यक संकल्प
* सम्यक दृष्टि
बौद्ध धर्म का प्रभाव [[भारत]] के बाहर भी हुआ। [[अफ़ग़ानिस्तान]] (उस समय फ़ारसी शासकों के अधीन), [[चीन]], [[जापान]] तथा [[श्रीलंका]] के अतिरिक्त इसने दक्षिण पूर्व एशिया में भी अपनी पहचान बनाई।
== यूनानी तथा फारसी आक्रमण ==
उस समय उत्तर पश्चिमी भारत में कोई खास संगठित राज्य नहीं था। लगातार शक्तिशाली हो रहे [[फ़ारसी साम्राज्य]] की नज़र इधर की ओर भी गई। हंलांकि अब तक फ़ारस पर राज कर रहे चन्द्र राजा [[यूनान]], पश्चिमी एशिया तथा मध्य एशिया की ओर बढ़ रहे थे, उन्होंने भारत की अनदेखी नहीं की थी।
शक्तिशाली अजमीड/हखामनी (Achaemenid) शासकों की निगाह इस क्षेत्र पर थी और Kuru-s कुरुस [[साईरस]] (558ईसापूर्व - 530 ईसापूर्व) ने [[हिन्दु कुश|हिंदूकुश]] के दक्षिण के रजवाड़ो को अपने अधीन कर लिया। इसके बाद दारयवाहु (डेरियस, 522-486 ईसापूर्व) के शासनकाल में फ़ारसी शासन के विस्तार के साक्ष्य मिलते हैं। इसके उत्कीर्ण लेखों में दो ज़ग़ह ''हिन्दू'' को इसके राज्य का हिस्सा बताया गया है। इस संदर्भ में ''हिन्दू'' शब्द का सही अर्थ बता पाना कठिन है पर इसका तात्पर्य किसा ऐसे प्रदेश से अवश्य है जो सिंधु नदी के पूर्व में हो।
ईसापूर्व चौथी सदी में जब यूनानी और फ़ारसी शासक पश्चिम एशिया (आधुनिक [[तुर्की]] का क्षेत्र) पर अपना प्रभुत्व जमाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। मकदूनिया के राजा [[सिकंदर]] के हाथों हखामनी शासक डेरियस तृतीय के हारने के पश्चात स्थिति में परिवर्तन आ गया। सिकंदर पश्चिम एशिया जीतने के बाद [[अरब]], [[मिस्र]] तथा उसके बाद फ़ारस के केन्द्र ([[ईरान]]) तक पहुंच गया। इतने से भी जब उसको संतोष नहीं हुआ तो वो [[अफ़ग़ानिस्तान|अफ़गानिस्तान]] होते हुए 326 ईसा पूर्व में पश्चिमोत्तर भारत पहुँच गया।
सिकंदर के [[भारत]] आने के बारे में कोई भारतीय स्रोत उपलब्ध नहीं है। सिकंदर के विजय अभियान की बात केवल यूनानी तथा रोमन स्रोतों में उपलब्ध है तथा उन्हें सत्य के करीब मान कर ये सब लिखा गया है। यूनानी ग्रंथ तो सिकंदर के [[भारत]] अभियान का विस्तार से वर्णन करते हैं पर वे [[चाणक्य|कौटिल्य]] के बारे में एक शब्द भी नहीं लिखते हैं।
सिकंदर जब भारत पहुंचा तो [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] (अविभाजित पंजाब) में [[रावलपिंडी]] के पास का राजा उसकी सहायता के लिए पहँच गया। अन्य लगभग सभी राजाओं ने सिन्दर का डटकर मुकाबला किया पर वे सिकन्दर की अनुभवी सेनाओं से हार गए। यूनानी लेखकों ने इन राजाओं के वीरता की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। इसके बाद [[झेलम नदी|झेलम]] और [[चिनाब]] के बीच स्थित प्रदेश का राजा '''पोरस''' (जो कि पौरव का यूनानी नाम लगता है) ने सिकंदर का वीरता पूर्वक सामना किया। 326 ईस्वी पूर््व का यह झेलम नदी के तट पर हुआ पोरस व सिकंदर के मध्य का युद्ध हाइडेस्पीच का युद्ध कहलाता है ।कहा जाता है कि युद्ध हारने के बाद जब पोरस बन्दी बनकर सिकन्दर के सामने प्रस्तुत हुआ तो उससे पूछा गया - ''तुम्हारे साथ कैसा सुलूक (वर्ताव) किया जाय''। तो उसने साहसी उत्तर दिया -" ''जैसा एक राजा दूसरे राजा के साथ करता है'' "। उसके उत्तर पर मुग्ध होकर सिकन्दर ने उसका हारा हुआ प्रदेश लौटा दिया। इसके बाद जब उसे भारत के वीर योद्धा चन्द्रगुप्त मोर्य(मगध का नंद राजा-चंद्रगुप्त नही) की विशाल सेना का सामना करना था तब भय से ग्रसित सेना को लेकर सिकन्दर आगे नहीं बढ़ सका और वापस लौट गया।
== महाजनपद ==
{{main|महाजनपद}}
बौद्ध ग्रंथ [[अंगुत्तरनिकाय|अंगुत्तर निकाय]] के अनुसार कुल सोलह (16) महाजनपद थे - [[अवन्ति]],[[अश्मक]] या अस्सक, [[अंग]], [[कंबोज|कम्बोज]], [[काशी]], [[कुरु]], [[कोशल]], [[गंधार]], [[चेदि]], [[वज्जि]] या वृजि, [[वत्स]] या वंश, [[पाञ्चाल|पांचाल]], [[मगध महाजनपद|मगध]], [[मत्स्य]] या [[मच्छ]], [[मल्ल]], [[सुरसेन]]।
इनमें सत्ता के लिए संघर्ष चलता रहता था।
== महापद्मनंद नंदमौर्य साम्राज्य ==
{{main|मौर्य वंश}}
ईसापूर्व छठी सदी के प्रमुख राज्य थे - मगध, कोसल, वत्स के पौरव और अवंति के प्रद्योत। चौथी सदी में [[चन्द्रगुप्त मौर्य|चन्द्रगुप्त मौर्य ( चंद्र नंद )]] मोत्तर [[भारत]] को यूनानी शासकों से मुक्ति दिला दी। इसके बाद उसने मगध की ओर अपना ध्यान केन्द्रित किया जो उस समय नंदों के शासन में था। जैन ग्रंथ परिशिष्ठ पर्वन में कहा गया है कि [[चाणक्य|सम्राट धनानंद]] ने चाणक्य को अपने राजमहल से बाहर निकाल दिया इसलिए चंद्रगुप्त मौर्य को बड़का कर अपने ही बड़े भाई धनानंद को मरवा दिया चंद्र नंद से चंद्रगुप्त मौर्य बन गया इसके बाद चन्द्रगुप्त ने दक्षिण की ओर अपने साम्राज्य का विस्तार किया। चन्द्रगुप्त ने सिकंदर के क्षत्रप [[सेल्युकस प्रथम निकेटर|सेल्यूकस]] को हाराया था जिसके फलस्वरूप उसने [[हेरात]], [[कांधार|कंदहार]], [[काबुल]] तथा [[बलूचिस्तान (पाकिस्तान)|बलूचिस्तान]] के प्रांत चंद्रगुप्त को सौंप दिए थे।
चन्द्रगुप्त के बाद [[बिन्दुसार|बिंदुसार]] के पुत्र [[अशोक]] ने मौर्य साम्राज्य को अपने चरम पर पहुँचा दिया। [[कर्नाटक]] के चित्तलदुर्ग तथा मास्की में अशोक के शिलालेख पाए गए हैं। चुंकि उसके पड़ोसी राज्य [[चोल राजवंश|चोल]], [[पाण्ड्य राजवंश|पांड्य]] या [[चेर राजवंश|केरलपुत्रों]] के साथ अशोक या बिंदुसार के किसा लड़ाई का वर्णन नहीं मिलता है इसलिए ऐसा माना जाता है कि ये प्रदेश चन्द्रगुप्त के द्वारा ही जीता गया था। अशोक के जीवन का निर्णायक युद्ध [[कलिंग का युद्ध]] था। इसमें उत्कलों से लड़ते हुए अशोक को अपनी सेना द्वारा किए गए नरसंहार के प्रति ग्लानि हुई और उसने बौद्ध धर्म को अपना लिया। फिर उसने बौद्ध धर्म का प्रचार भी करवाया।
चन्द्रगुप्त मौर्य के समय में यूनानी राजदूत [[मेगस्थनीज|मेगास्थनीज़]] , सेल्यूकस के द्वारा उनके दरबार में भेजा गया। उसने चन्द्रगुप्त मौर्य के राज्य तथा उसकी राजधानी [[पाटलिपुत्र]] (आधुनिक [[पटना]]) का वर्णन किया है। इस दौरान कला का भी विकास हुआ महापद्मा नंद
== मौर्यों के बाद ==
मौर्यों के पतन के बाद [[शुंग राजवंश]] ने सत्ता सम्हाली। ऐसा माना जाता है कि मौर्य राजा वृहदृथ के सेनापति पुष्यमित्र ने बृहद्रथ की हत्या कर दी थी जिसके बाद शुंग वंश की स्थापना हुई। शुंगों ने 187 ईसापूर्व से 75 ईसापूर्व तक शासन किया। इसी काल में महाराष्ट्र में सातवाहनों का और दक्षिण में [[चेर]], [[चोल राजवंश|चोल]] और पांड्यों का उदय हुआ। सातवाहनों के साम्राज्य को आंध्र भी कहते हैं जो अत्यन्त शक्तिशाली था।
पुष्यमुत्र के शासनकाल में पश्चिम से यवनों का आक्रमण हुआ। इसी काल के माने जाने वाले वैयाकरण [[पतञ्जलि|पतंजलि]] ने इस आक्रमण का उल्लेख किया है। [[कालिदास]] ने भी अपने [[मालविकाग्निमित्रम्]] में [[वसुमित्र]] के साथ यवनों के युद्ध का चर्चा किया है। इन आक्रमणकारियों ने भारत की सत्ता पर कब्जा कर लिया। कुछ प्रमुख भारतीय-यूनानी शासक थे - यूथीडेमस, डेमेट्रियस तथा मिनांडर। मिनांडर ने बौद्ध धर्म अपना लिया था तथा उसका प्रदेश अफगानिस्तान से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था।
इसके बाद पह्लवों का शासन आया जिनके बारे में अधिक जानकारी उपल्ब्ध नहीं है। तत्पश्चात शकों का शासन आया। शक लोग मध्य एशिया के निवासी थे जिन्हें यू-ची नामक कबीले ने उनके मूल निवास से खदेड़ दिया गया था। इसके बाद वे भारत आए। इसके बाद यू-ची जनजाति के लोग भी भारत आ गए क्योंकि [[चीन की विशाल दीवार|चीन की महान दीवार]] के बनने के बाद मध्य एशिया की परिस्थिति उनके अनूकूल नहीं थी। ये [[कुषाण राजवंश|कुषाण]] कहलाए। [[कनिष्क]] इस वंश का सबसे प्रतापी राजा था। कनिष्क ने ७८ ईसवी से 101 ईस्वी तक राज किया।
== समकालीन दक्षिण भारत ==
दक्षिण में चेर, पांड्य तथा चोल के बीच सत्ता संघर्ष चलता रहा था। संगम साहित्य इस समय की सबसे अमूल्य धरोहर थी। तिरूवल्लुवर द्वारा रचित [[तिरुक्कुरल]] तमिल भाषा का प्राचीनतम ग्रंघ माना जाता है। धार्मिक सम्प्रदायों का प्रचलन था और मुख्यतः वैष्णव, शैव, बौद्ध तथा जैन सम्प्रदायों के अनुयायी थे।
== गुप्त काल ==
{{main|गुप्त वंश}}
सन् ३२० ईस्वी में [[चन्द्रगुप्त प्रथम]] अपने पिता घटोत्कच के बाद राजा बना जिसने गुप्त वंश की नींव डाली। इसके बाद [[समुद्रगुप्त]] (३४० इस्वी), चन्द्रगुप्त द्वितीय, [[कुमारगुप्त प्रथम]] (४१३-४५५ इस्वी) और [[स्कन्दगुप्त|स्कंदगुप्त]] शासक बने। इसके करीब १०० वर्षों तक गुप्त वंश का अस्तित्व बना रहा। ६०६ इस्वी में [[हर्षवर्धन|हर्ष]] के उदय तक किसी एक प्रमुख सत्ता की कमी रही। इस काल में कला और साहित्य का उत्तर तथा दक्षिण दोनों में विकास हुआ। इस काल का सबसे प्रतापी शासक "[[समुद्रगुप्त]]" था जिसके शासनकाल में भारत को "सोने की चिड़िया" कहा जाने लगा।
ग्यारहवीं तथा बारहवीं सदी में भारतीय [[कला]], [[भाषा]] तथा [[धर्म]] का प्रचार दक्षिणपूर्व एशिया में भी हुआ।
==प्राचीन भारत के राजवंश और उनके संस्थापक ==
{| class="wikitable sortable"
! वंश !! राजधनी !! संस्थापक
|-
| [[कुरु वंश]] || [[हस्तिनापुर]] || [[भरत वंश (कुरु पांडु)]]
|-
| [[हर्यक वंश]] || [[राजगृह]], [[पाटलिपुत्र]] || [[बिम्बिसार]]
|-
| [[शिशुनाग वंश]] || पाटलिपुत्र, वैशाली || [[शिशुनाग]]
|-
| [[नंद वंश|नन्द वंश]] || पाटलिपुत्र || महापद्मनन्द
|-
| [[मौर्य राजवंश|मौर्य वंश]] || पाटलिपुत्र || चंद्रगुप्त मौर्य
|-
| [[शुंग राजवंश|शुंग वंश]] || विदिशा || पुष्यमित्र शुंग
|-
| [[कण्व वंश]] || पाटलिपुत्र || वसुदेव
|-
| [[सातवाहन|सातवाहन वंश]] || पैठन || सिमुक
|-
| [[महामेघवाहन वंश|चेदि वंश]] || सोत्थवती || महामोघवाहन
|-
| हिंद-यवन || शाकल ( सियालकेट ) || डेमेट्रियस
|-
| [[कुषाण राजवंश|कुषाण वंश]] || पुरुषपुर पेशावर || कुजुल कडफिसेस
|-
| [[कदम्ब वंश]] || बनवासी || मयूरशर्मन
|-
| [[गंग वंश]] || तलकाड || कोंकणिवर्मा
|-
| [[गुप्त राजवंश|गुप्त वंश]] || पाटलिपुत्र || श्रीगुप्त
|-
| [[मौखरी वंश]] || कन्नौज || ईशानवर्मा
|-
| [[हूण वंश]] || स्यालकोट || तोरमाण
|-
| [[मैत्रक वंश]] || वल्लभी || भट्टारक
|-
| [[उत्तरगुप्त वंश]] || पाटलिपुत्र || कृष्णगुप्त
|-
| [[गौड़ वंश]] || कर्णसुवर्ण, मुर्शिदाबाद || शशांक
|-
| [[पुष्यभूति वंश]] || थानेश्वर || प्रभाकरवर्धन
|-
| [[पाल वंश]] || [[मुंगेर]] || गोपाल
|-
| [[सेन राजवंश|सेन वंश]] || राढ़ || सामन्तसेन
|-
| [[राष्ट्रकूट राजवंश|राष्ट्रकूट वंश]] || मान्यखेत || दन्तिवर्मन
|-
| [[गुर्जर प्रतिहार वंश]] || कन्नौज || नागभट्ट प्रथम
|-
| [[कलचुरी]] [[महामेघवाहन वंश|चेदि वंश]] || त्रिपुरी || कोक्कल प्रथम
|-
| [[परमार वंश]] || धारा || कृष्णराज/ उपेन्द्र
|-
| [[लोदी वंश]] || दिल्ली ||
|-
| [[महदेले लोधी वंश]] || मोहली || दृगपाल/महदेले
|-
| [[सोलंकी वंश]] || अन्हिलवाड़ || मूलराज प्रथम
|-
| [[चन्देल|चन्देल वंश]] || खजुराहो (महोबा) || नन्नुक
|-
| [[गहड़वाल वंश]] || कन्नौज || चन्द्रदेव
|-
| [[चौहान वंश]] || अजमेर || वासुदेव
|-
| [[तोमर वंश]] || ढिल्लिका || अनंगपाल
|-
| [[चालुक्य राजवंश|चालुक्य वंश]] (बादामी) || बादामी || पुलकेशिन प्रथम
|-
| चालुक्य वंश (कल्याणी) || मान्यखेत || तैलप द्वितीय
|-
| चालुक्य वंश (वेंगि) || वेंगि || विष्णुवर्धन
|-
| [[पल्लव राजवंश|पल्लव वंश]] || [[कांचीपुरम|कांची]] || [[सिंहवर्मा]]
|-
| [[चोल राजवंश|चोल वंश]] || [[तंजावुर|तंजौर]], तंजावुर || [[विजयालय]]
|}
== इन्हें भी देखें ==
* [[मगध के राजवंशों और शासकों की सूची]]
* [[प्राचीन भारत की आर्थिक संस्थाएं]]
* [[प्राचीन भारत में गणतंत्र]]
* [[भारत के प्राचीन वैज्ञानिक|प्राचीन भारत के वैज्ञानिक]]
* [[प्राचीन भारतीय विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी|प्राचीन भारत में विज्ञान एवं तकनीक]]
* [[प्राचीन भारतीय कलाएँ]]
* [[प्राचीन भारतीय परंपरा और इतिहास]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20110826211239/http://books.google.co.in/books?id=FFhd8ktl7XsC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false प्राचीन भारत का सामाजिक एवं आर्थिक इतिहास] (गूगल पुस्तक ; लेखक - ओम प्रकाश प्रसाद)
* [https://web.archive.org/web/20121215060522/http://books.google.co.in/books?id=7_GWRA79yJgC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false प्राचीन भारत का सामाजिक और आर्थिक इतिहास] (गूगल पुस्तक ; लेखक - शिव स्वरूप सहाय)
* [https://web.archive.org/web/20100613003424/http://iish.org/index.php?option=com_content&view=article&id=71:a-brief-introduction-to-technological-brilliance-of-ancient-india&catid=37:heritage-india-news&Itemid=56 A brief introduction to technological brilliance of Ancient India] (इण्डियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंटिफिक हेरिटेज)
* [https://web.archive.org/web/20140328200741/http://books.google.co.in/books?id=1mYAw7OIUkEC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false प्राचीन भारत के वैज्ञानिक कर्णधार] (गूगल पुस्तक ; लेखक - स्वामी सत्यप्रकाश सरस्वती)
* [https://web.archive.org/web/20150406043218/http://books.google.co.in/books?id=GnAPjKdM_OMC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false प्राचीन भारत में रसायन का विकास] (गूगल पुस्तक; लेखक - स्वामी सत्यप्रकाश सरस्वती)
* [https://web.archive.org/web/20121215042127/http://books.google.co.in/books?id=xHun9M65_qAC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false प्राचीन भारत में दूत पद्धति] (गूगल पुस्तक ; लेखक - आनन्द प्रकाश गौड़)
* [https://web.archive.org/web/20121215063331/http://books.google.co.in/books?id=KtF8zGa5zvcC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false श्रेण्य युग ('क्लासिकल एज' का हिन्दी अनुवाद)] (गूगल पुस्तक ; लेखक - आर सी मजुमदार ; अनुवादक - शिवदान सिंह चौहान)
* [https://web.archive.org/web/20121215041900/http://books.google.co.in/books?id=V4cGO9w4pb8C&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false भारतीय इतिहास के कुछ विषय (Archaeology & Ancient India)] (गूगल पुस्तक ; लेखक - रघुनाथ राय)
* [https://web.archive.org/web/20121215042036/http://books.google.co.in/books?id=mdqq14ZB-KcC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false प्राचीन भारत का राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास] (गूगल पुस्तक ; लेखक - धनपति पाण्डेय)
* [http://books.google.co.in/books?id=vhUZrj975BAC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false हिन्दू सभ्यता] (गूगल पुस्तक ; लेखक - राधाकुमुद मुखर्जी)
[[श्रेणी:प्राचीन भारत| ]]
[[श्रेणी:भूगोल और स्थानों की रूपरेखाएँ]]
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2026-10-18T10:45:05Z
Anitya Gautam
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wikitext
text/x-wiki
{{स्रोतहीन|date=मई 2016}}
मानव के उदय से लेकर दसवीं सदी तक के [[भारत का इतिहास]], '''प्राचीन भारत का इतिहास''' कहलाता है।<ref>{{cite web|url=http://www.bbc.com/hindi/india-42527770|title=भारत का 20 लाख साल पुराना इतिहास देखेंगे?|access-date=11 जनवरी 2018|archive-ʳʳᵘʸʳᵈʸᵗᵈ ᵗʰᵗᵗᵍᵗᵗʰᵉ ʸⁱᵈ ᴳᴴ ʰʰᵗʸʸᵘᵘurl=https://web.archive.org/web/20180105014934/http://www.bbc.com/hindi/india-42527770|archive-date=5 जनवरी 2018|url-status=ᴸⁱᵛᵉʳᵖᵒᵒˡ 5'‰⅝ᵗᵒ ᵗⁱᵐᵉ}}</ref>
== प्राचीन भारतीय इतिहास की जानकारी के साधन ==
{{मुख्य|प्राचीन भारतीय इतिहास की जानकारी के साधन}}1.पुरातात्विक स्त्रोत __इसके अंतर्गत अभिलेख, सिक्का,[[स्मारक]], भवन और [[चित्र]] आदि आते है,यह उत्खनन से प्राप्त किया जाता है।पुरातात्विक स्त्रोत साहित्यिक स्त्रोत से अधिक प्रमाणित है।
2.साहित्यिक स्त्रोत __ इसके अंतर्गत वेद, पुराण अरंन्यंक ,उपनिषद,महाकाव्य, जातक,पिटक आदि आते है।
3.विदेशी यात्रीयो का वर्णन __विदेशी यात्रियो के वर्णन से तार्त्पय है कि जो विदेशी [[भारत]] मे घूमने आए वह यहाॅ के बारे कुछ लिखकर गए जैसे: फाहइयान ने अशोक के छः स्तंभ के बारे जानकारी लेकर गया।
== पाषाण युग ==
[[पाषाण युग]] से तात्पर्य ऐसे काल से है जब लोग [[पत्थर|पत्थरों]] पर आश्रित थे। पत्थर के [[औज़ार]], पत्थर की गुफा ही उनके जीवन के प्रमुख आधार थे। यह मानव सभ्यता के आरंभिक काल में से है जब [[मानव]] आज की तरह विकसित नहीं था। इस काल में मानव प्राकृतिक आपदाओं से जूझता रहता था और शिकार तथा कन्द-मूल फल खाकर अपना जीवन बसर करता था।
=== पुरापाषाण युग ===
{{main|भारत का पुरापाषाण युग}}
[[हिमयुग]] का अधिकांश भाग पुरापाषाण काल में बीता है। भारतीय पुरापाषाण युग को औजारों, जलवायु परिवर्तनों के आधार पर तीन भागों में बांटा जाता है -
* आरंभिक या निम्न पुरापाषाण युग (25,00,000 ईस्वी पूर्व - 100,000 ई. पू.)
* मध्य पुरापाषाण युग (1,000,000 ई. पू. - 40,000 ई. पू.)
* उच्च पुरापाषाण युग (40,000 ई.पू - 10,000 ई.पू.)
आदिम मानव के जीवाश्म भारत में नहीं मिले हैं। [[महाराष्ट्र]] के बोरी नामक स्थान पर मिले तथ्यों से अंदेशा होता है कि मानव की उत्पत्ति 14 लाख वर्ष पूर्व हुई होगी। यह बात लगभग सर्वमान्य है कि [[अफ़्रीका]] की अपेक्षा भारत में मानव बाद में बसे। यद्दपि यहां के लोगों का पाषाण कौशल लगभग उसी तरह विकसित हुआ जिस तरह [[अफ़्रीका]] में। इस समय का मानव अपना भोजन कठिनाई से ही बटोर पाता था। वह ना तो खेती करना जानता था और ना ही घर बनाना। यह अवस्था 9000 ई.पू. तक रही होगी।
[[पुरापाषाण काल]] के औजार [[छोटा नागपुर पठार|छोटानागपुर के पठार]] में मिले हैं जो 1,00,000 ई.पू. तक हो सकते हैं। [[आन्ध्र प्रदेश|आंध्र प्रदेश]] के [[कर्नूल|कुर्नूल]] जिले में 20,000 ई.पू. से 10,000 ई.पू. के मध्य के औजार मिले हैं। इनके साथ हड्डी के उपकरण और पशुओं के अवशेष भी मिले हैं। [[उत्तर प्रदेश]] के [[मिर्ज़ापुर]] जिले की [[बेलन घाटी]] में जो पशुओं के अवशेष मिले हैं उनसे ज्ञात होता है कि [[बकरी]], [[भेड़]], [[गाय]], [[भैंस]] इत्यादि पाले जाते थे। फिर भी पुरापाषाण युग की आदिम अवस्था का मानव [[शिकार]] और खाद्य संग्रह पर जीता था। [[पुराण|पुराणों]] में केवल [[फल]] और [[कन्द मूल]] खाकर जीने वालों का जिक्र है। इस तरह के कुछ लोग तो आधुनिक काल तक पर्वतों और गुफाओं में रहते आए हैं।
=== नवपाषाण युग ===
भारत में नवपाषाण युग के अवशेष सम्भवतः 6000 ई०पू० से 1000 ई०पू के है।विकास कि यह अवधि भारतीय उपमहाद्वीप में कुछ देर से आयी क्योकि ऐसा माना jata है कि विश्व के बडे भूभाग( south west Asia) में यह युग 8000-7000 ई०पू० के आसपास पनपा, यहाँ से नील घाटी (Egypt) होते हुए यूरोप पहुंचा। इस युग में मानव पत्थर कि बनी हाथ कि कुल्हाड़ियां आदि औजार पत्थर को छिल घीस और चमकाकर तैयार करता था, उत्तरी भारत में नवपाषाण युग का स्थल बुर्जहोम (कश्मीर) में पाया गया है।
भारत में नव पाषाण काल के प्रमुख चार स्थल है
== ताम्र पाषाण युग ==
नवपाषाण युग का अन्त होते होते धातुओं का प्रयोग शुरू हो गया था। ताम्र पाषाणिक युग में तांबा तथा प्रस्तर के हथियार ही प्रयुक्त होते थे। इस समय तक लोहा या कांसे का प्रयोग आरम्भ नहीं हुआ था। [[भारत]] में ताम्र पाषाण युग की बस्तियां दक्षिण पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी मध्य
प्रदेश, पश्चिमी महाराष्ट्र तथा दक्षिण पूर्वी भारत में पाई गई है। और सारे भारत में जंगल ही था
== कांस्य युग और सिंधु घाटी सभ्यता ==
{{main|सिंधु घाटी सभ्यता}}
बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ तक इतिहासकारों की यह मान्यता थी कि वैदिक सभ्यता भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता है। परन्तु सर [[दयाराम साहनी]] के नेतृत्व में १९२१ में जब [[हड़प्पा]] (पंजाब के माँन्टगोमरी जिले में स्थित) की खुदाई हुई तब इस बात का पता चला कि भारत की सबसे पुरानी सभ्यता वैदिक नहीं वरन [[सिंधु घाटी सभ्यता|सिन्धु घाटी की सभ्यता]] है। अगले साल अर्थात १९२२ में [[राखालदास बनर्जी]] के नेतृत्व में [[मोहन जोदड़ो|मोहनजोदड़ो]] (सिन्ध के [[लाड़काना|लरकाना]] जिले में स्थित) की खुदाई हुई। हड़प्पा टीले के बारे में सबसे पहले चार्ल्स मैसन ने १९२६ में उल्लेख किया था। मोहनजोदड़ो को [[सिन्धी भाषा]] में मृतकों का टीला कहा जाता है। १९२२ में राखालदास बनर्जी ने और इसके बाद १९२२ से १९३० तक सर जॉन मार्शल के निर्देशन में यहां उत्खनन कार्य करवाया गया।
[[सिंधु घाटी सभ्यता]] (2500 ईसापूर्व से 1750 ईसापूर्व तक) विश्व की प्राचीन नदी घाटी सभ्यताओं में से एक प्रमुख सभ्यता है। सम्मानित पत्रिका नेचर में प्रकाशित शोध के अनुसार यह सभ्यता कम से कम 8000 वर्ष पुरानी है। यह [[हड़प्पा]] सभ्यता और 'सिंधु-सरस्वती सभ्यता' के नाम से भी जानी जाती है। इसका विकास सिंधु और घघ्घर/हकड़ा (प्राचीन सरस्वती) के किनारे हुआ।[[मोहन जोदड़ो|मोहनजोदड़ो]], कालीबंगा, लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी और हड़प्पा इसके प्रमुख केन्द्र थे। दिसम्बर २०१४ में भिर्दाना को अबतक का खोजा गया सबसे प्राचीन नगर माना गया सिंधु घाटी सभ्यता का। ब्रिटिश काल में हुई खुदाइयों के आधार पर पुरातत्ववेत्ता और इतिहासकारों का अनुमान है कि यह अत्यंत विकसित सभ्यता थी और ये शहर अनेक बार बसे और उजड़े हैं।
इस सभ्यता की सबसे विशेष बात थी यहां की विकसित नगर निर्माण योजना। [[हड़प्पा]] तथा [[मोहन जोदड़ो|मोहनजोदड़ो]] दोनो नगरों के अपने दुर्ग थे जहां शासक वर्ग का परिवार रहता था। प्रत्येक नगर में दुर्ग के बाहर एक एक उससे निम्न स्तर का शहर था जहां ईंटों के मकानों में सामान्य लोग रहते थे। इन नगर भवनों के बारे में विशेष बात ये थी कि ये जाल की तरह विन्यस्त थे। यानि सड़के एक दूसरे को समकोण पर काटती थीं और नगर अनेक आयताकार खंडों में विभक्त हो जाता था। ये बात सभी सिन्धु बस्तियों पर लागू होती थीं चाहे वे छोटी हों या बड़ी। हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो के भवन बड़े होते थे। वहाँ के स्मारक इस बात के प्रमाण हैं कि वहाँ के शासक मजदूर जुटाने और कर-संग्रह में परम कुशल थे। ईंटों की बड़ी-बड़ी इमारत देख कर सामान्य लोगों को भी यह लगेगा कि ये शासक कितने प्रतापी और प्रतिष्ठावान् थे।
मोहनजोदड़ो का अब तक का सबसे प्रसिद्ध स्थल है विशाल सार्वजनिक स्नानागार, जिसका जलाशय दुर्ग के टीले में है।
=== उत्पत्ति ===
इतनी विस्तृत सभ्यता होने के बावजूद भी इसकी उत्पत्ति को लेकर आज भी विद्वानों में मतैक्य का अभाव है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि हड़प्पा संस्कृति के जितने भी स्थलों की अब तक खुदाई हुई है वहां सभ्यता के विकास अनुक्रम का चिन्ह स्पष्ट नही मिलता है अर्थात इस सभ्यता के अवशेष जहां कहीं भी मिले हैं अपनी पूर्ण विकसित अवस्था में ही मिले हैं।
सर जॉन मार्शल, गार्डन चाईल्ड, मार्टीमर व्हीलर आदि इतिहासकारों की मान्यता है कि हड़प्पा सभ्यता की उत्पत्ति में विदेशी तत्व का हाथ रहा है। इन इतिहासकारों का मानना है कि हड़प्पा की उत्पत्ति [[मेसोपोटामिया]] की शाखा सुमेरिया की सभ्यता की प्रेरणा से हुई है। इन दोनो सभ्यताओं में कुछ समानताएं भी देखने को मिलती है जो इस प्रकार है -
*(१) दोनो ही सभ्यता नगरीय है।
*(२) दोनो ही सभ्यताओं के निवासी कांसे और तांबे के साथ साथ पाषाण के लघु उपकरणों का प्रयोग करते थे।
*(३) दोनों ही सभ्यताओं के भवन निर्माण में कच्चे और पक्के दोनो ही प्रकार के ईंटों का प्रयोग हुआ है।
*(४) दोनो को [[लिपि]] का ज्ञान था।
इन्ही समानताओं के आधार पर व्हीलर ने सैन्धव सभ्यता को [[सुमेरियन सभ्यता]] का एक उपनिवेश बताय़ा था। लेकिन इन समानताओं के बावजूद कुछ ऐसी असमानताएं भी हैं जिनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती है। हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना सुमेरिया की सभ्यता से अधिक सुव्यवस्थित है। दोनो ही सभ्यताओं में आम उपयोग की चीजें काफी भिन्न हैं जैसे बर्तन, उपकरण, मूर्तियां, मुहरें आदि। फिर दोनों ही सभ्यताओं के लिपि में भी अंतर है। जहां सुमेरियाई लिपि में ९०० अक्षर हैं वहीं [[सरस्वती लिपि|सिन्धु लिपि]] में केवल ४०० अक्षर हैं। इन विभिन्नताओं के होते हुए दोनो सभ्यताओं को समान मानना समुचित नहीं लगता है|
== वैदिक काल ==
{{main|वैदिक सभ्यता}}
सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) के पश्चात भारत में जिस नवीन सभ्यता का विकास हुआ उसे ही आर्य (Aryan) अथवा वैदिक सभ्यता (Vedic Civilization) के नाम से जाना जाता है। इस काल की जानकारी हमे मुख्यत: वेदों से प्राप्त होती है, जिसमे [[ऋग्वेद]] सर्वप्राचीन होने के कारण सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। वैदिक काल को ऋग्वैदिक काल या पूर्व वैदिक काल (1500 -1000 ई.पु.) तथा उत्तर वैदिक काल (1000 - 600 ई.पु.) में बांटा गया है। आम तौर पर अधिकतर विद्वान वैदिक सभ्यता का काल 5000 ईसा पूर्व से 500 ईसा पूर्व के बीच में मानत है|
== उत्तरवैदिक काल ==
(१०००-६०० ई०पू०)
ऋग्वैदिक काल में आर्यों का निवास स्थान सिन्धु तथा सरस्वती नदियों के बीच में था। बाद में वे सम्पूर्ण उत्तर भारत में फ़ैल चुके थे। सभ्यता का मुख्य क्षेत्र गंगा और उसकी सहायक नदियों का मैदान हो गया था। गंगा को आज भारत की सबसे पवित्र नदी माना जाता है। इस काल में विश् का विस्तार होता गया और कई जन विलुप्त हो गए। भरत, त्रित्सु और तुर्वस जैसे जन् राजनीतिक हलकों से ग़ायब हो गए जबकि पुरू पहले से अधिक शक्तिशाली हो गए। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में कुछ नए राज्यों का विकास हो गया था, जैसे - काशी, कोसल, विदेह ([[मिथिला]]), मगध और अंग।
ऋग्वैदिक काल में सरस्वती नदी को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। ग॓गा और यमुना नदी का उल्लेख केवल एक बार हुआ है। इस काल में कौसाम्बी नगर मे॓ पहली बार पक्की ईटो का प्रयोग किया गया। इस काल में वर्ण व्यासाय के बजाय जन्म के आधार पे निर्धारित होने लगे
अथर्ववेद की रचना उत्तर-वैदिक काल के दौरान हुई थी; इसे वैदिक युग के अंत में लिखा गया था।
== वैदिक साहित्य ==
* वैदिक साहित्य में चार वेद एवं उनकी संहिताओं, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषदों एवं वेदांगों को शामिल किया जाता है।
* वेदों की संख्या चार है- ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद।
* ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद विश्व के प्रथम प्रामाणिक ग्रन्थ है।
* वेदों को अपौरुषेय कहा गया है। गुरु द्वारा शिष्यों को मौखिक रूप से कंठस्त कराने के कारण वेदों को "श्रुति" की संज्ञा दी गई है।
=== ऋग्वेद ===
1. ऋग्वेद देवताओं की स्तुति से सम्बंधित रचनाओं का संग्रह है।
2. यह 10 मंडलों में विभक्त है। इसमे 2 से 7 तक के मंडल प्राचीनतम माने जाते हैं। प्रथम एवं दशम मंडल बाद में जोड़े गए हैं। इसमें 1028 सूक्त हैं।
3. इसकी भाषा '''''पद्यात्मक''''' है।
4. ऋग्वेद में 33 प्रकार के देवों (दिव्य गुणो से युक्त पदार्थो) का उल्लेख मिलता है।
5. प्रसिद्ध गायत्री मंत्र जो सूर्य से सम्बंधित देवी गायत्री को संबोधित है, ऋग्वेद में सर्वप्रथम प्राप्त होता है।गायत्री मंत्र ऋग्वेद के तीसरे मंडल में उल्लेखित है।
6. ' असतो मा सद्गमय ' वाक्य ऋग्वेद से लिया गया है।
7. ऋग्वेद में मंत्र को कंठस्त करने में स्त्रियों के नाम भी मिलते हैं, जिनमें प्रमुख हैं- लोपामुद्रा, घोषा, शाची, पौलोमी एवं काक्षावृती आदि।
8. इसके पुरोहित के नाम होत्री है।
=== यजुर्वेद ===
* यजु का अर्थ होता है यज्ञ। इसमें धनुर्यवीद्या का उल्लेख है।
* यजुर्वेद वेद में यज्ञ की विधियों का वर्णन किया गया है।
* इसमे मंत्रों का संकलन आनुष्ठानिक यज्ञ के समय सस्तर पाठ करने के उद्देश्य से किया गया है।
* इसमें मंत्रों के साथ-साथ धार्मिक अनुष्ठानों का भी विवरण है, जिसे मंत्रोच्चारण के साथ संपादित किए जाने का विधान सुझाया गया है।
* यजुर्वेद की भाषा पद्यात्मक एवं गद्यात्मक दोनों है।
* यजुर्वेद की दो शाखाएं हैं- कृष्ण यजुर्वेद तथा शुक्ल यजुर्वेद।
* कृष्ण यजुर्वेद की चार शाखाएं हैं- मैत्रायणी संहिता, काठक संहिता, कपिन्थल तथा संहिता। शुक्ल यजुर्वेद की दो शाखाएं हैं- मध्यान्दीन तथा कण्व संहिता।
* यह 40 अध्याय में विभाजित है।
* इसी ग्रन्थ में पहली बार राजसूय तथा वाजपेय जैसे दो राजकीय समारोह का उल्लेख है।
=== सामवेद ===
सामवेद की रचना ऋग्वेद में दिए गए मंत्रों को गाने योग्य बनाने हेतु की गयी थी।
* इसमे 1810 छंद हैं जिनमें 75 को छोड़कर शेष सभी ऋग्वेद में उल्लेखित हैं।
* सामवेद तीन शाखाओं में विभक्त है- कौथुम, राणायनीय और जैमनीय।
* सामवेद को भारत की प्रथम संगीतात्मक पुस्तक होने का गौरव प्राप्त है।
=== अथर्व वेद ===
* इस वेद में रहस्यमई विद्याओं, चमत्कार, जादू टोने, आयुर्वेद जड़ी बूटियों का वर्णन मिलता है।
* इसमें कुल 20 अध्याय में 5687 मंत्र हैं।
* अथर्ववेद आठ खंड में विभाजित है। इसमें भेषज वेद और धातु वेद दो प्रकार मिलते हैं।
== बौद्ध और जैन धर्म==
{{main|बौद्ध धर्म}}
ईसा पूर्व छठी सदी तक वैदिक कर्मकांडों की परंपरा का अनुपालन कम हो गया था। उपनिषद ने जीवन की आधारभूत समस्या के बारे में स्वाधीनता प्रदान कर दिया था। इसके फलस्वरूप कई धार्मिक पंथों तथा संप्रदायों की स्थापना हुई। उस समय ऐसे किसी 62 सम्प्रदायों के बार में जानकारी मिलती है। लेकिन इनमें से केवल 2 ने भारतीय जनमानस को लम्बे समय तक प्रभावित किया - जैन और बौद्ध।
जैन धर्म पहले से ही विद्यमान था। दोनों श्रमण संस्कृति पर आधारित हैं। वैदिकों ने श्रमण संस्कृति को बाद में उपनिषदों में अपनाया।
=== जैन धर्म ===
जैन धर्म के दो तीर्थकरों - [[ऋषभदेव|ऋषभनाथ]] तथा [[अरिष्टनेमि]]- का उल्लेख ऋग्वेद में पाया जाता है। कुछ विद्वानों का मत है कि हड़प्पा की खुदाई में जो नग्न धड़ की मूर्ति मिली है वो किसी तीर्थकर की है। [[पार्श्वनाथ]] तेइसवें तीर्थकर तथा [[महावीर|भगवान महावीर]] चौबीसवें तीर्थकर थे। वर्धमान महावीर जो कि जैनों के सबसे प्रमुख तथा अन्तिम तीर्थकर थे, का जन्म 540 ईसापूर्व के आसपास [[वैशाली]] के पास कुंडग्राम में हुआ था। 42 वर्ष की अवस्था में उन्हें कैवल्य (परम ज्ञान) प्राप्त हुआ।
महावीर ने पार्श्वनाथ के चार सिद्धांतों को स्वीकार किया -
* '''अहिंसा''' - जीव हत्य न करना
* '''अमृषा''' - झूठ न बोलना
* '''अस्तेय''' - चोरी न करना
* '''अपरिग्रह''' - सम्पत्ति इकठ्ठा न करना
इसके अतिरिक्त उन्होंने अपना पांचवा सिद्धांत भी अपने उपदेशों में जोड़ा -
* '''ब्रह्मचर्य''' - इंद्रियों पर नियंत्रण
इस सम्प्रदाय के दो अंग हैं - श्वेताबर तथा दिगंबर
=== बौद्ध धर्म ===
जैन धर्म की तरह इसका मूल भी एक उच्चवर्गीय क्षत्रिय परिवार से था। गौतम नाम से जन्में [[गौतम बुद्ध|महात्मा बुद्ध]] का जन्म 563 ईसापूर्व में शाक्यकुल के राजा शुद्धोदन के घर हुआ था। इन्होने भी सांसारिक जीवन जीने के बाद एक दिन (या रात) अचानक से अपना गार्हस्थ छोड़कर सत्य की खोज में चल पड़े।
बुद्ध के उपदेशों में चार आर्य सत्य समाहित हैं -
* दुख
* दुख समुद्दय
* दुख निरोध
* दुख निरोध गामिनी प्रतिपदा।
उन्होंने अष्टांगिक मार्ग का सुझाव दिया जिसका पालन करके मनुष्य पुनर्जन्म के बंधन से दूर हो सकता है -
* सम्यक वाक्
* सम्यक कर्म
* सम्यक आजीविका
* सम्यक व्यायाम
* सम्यक स्मृति
* सम्यक समाधि
* सम्यक संकल्प
* सम्यक दृष्टि
बौद्ध धर्म का प्रभाव [[भारत]] के बाहर भी हुआ। [[अफ़ग़ानिस्तान]] (उस समय फ़ारसी शासकों के अधीन), [[चीन]], [[जापान]] तथा [[श्रीलंका]] के अतिरिक्त इसने दक्षिण पूर्व एशिया में भी अपनी पहचान बनाई।
== यूनानी तथा फारसी आक्रमण ==
उस समय उत्तर पश्चिमी भारत में कोई खास संगठित राज्य नहीं था। लगातार शक्तिशाली हो रहे [[फ़ारसी साम्राज्य]] की नज़र इधर की ओर भी गई। हंलांकि अब तक फ़ारस पर राज कर रहे चन्द्र राजा [[यूनान]], पश्चिमी एशिया तथा मध्य एशिया की ओर बढ़ रहे थे, उन्होंने भारत की अनदेखी नहीं की थी।
शक्तिशाली अजमीड/हखामनी (Achaemenid) शासकों की निगाह इस क्षेत्र पर थी और Kuru-s कुरुस [[साईरस]] (558ईसापूर्व - 530 ईसापूर्व) ने [[हिन्दु कुश|हिंदूकुश]] के दक्षिण के रजवाड़ो को अपने अधीन कर लिया। इसके बाद दारयवाहु (डेरियस, 522-486 ईसापूर्व) के शासनकाल में फ़ारसी शासन के विस्तार के साक्ष्य मिलते हैं। इसके उत्कीर्ण लेखों में दो ज़ग़ह ''हिन्दू'' को इसके राज्य का हिस्सा बताया गया है। इस संदर्भ में ''हिन्दू'' शब्द का सही अर्थ बता पाना कठिन है पर इसका तात्पर्य किसा ऐसे प्रदेश से अवश्य है जो सिंधु नदी के पूर्व में हो।
ईसापूर्व चौथी सदी में जब यूनानी और फ़ारसी शासक पश्चिम एशिया (आधुनिक [[तुर्की]] का क्षेत्र) पर अपना प्रभुत्व जमाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। मकदूनिया के राजा [[सिकंदर]] के हाथों हखामनी शासक डेरियस तृतीय के हारने के पश्चात स्थिति में परिवर्तन आ गया। सिकंदर पश्चिम एशिया जीतने के बाद [[अरब]], [[मिस्र]] तथा उसके बाद फ़ारस के केन्द्र ([[ईरान]]) तक पहुंच गया। इतने से भी जब उसको संतोष नहीं हुआ तो वो [[अफ़ग़ानिस्तान|अफ़गानिस्तान]] होते हुए 326 ईसा पूर्व में पश्चिमोत्तर भारत पहुँच गया।
सिकंदर के [[भारत]] आने के बारे में कोई भारतीय स्रोत उपलब्ध नहीं है। सिकंदर के विजय अभियान की बात केवल यूनानी तथा रोमन स्रोतों में उपलब्ध है तथा उन्हें सत्य के करीब मान कर ये सब लिखा गया है। यूनानी ग्रंथ तो सिकंदर के [[भारत]] अभियान का विस्तार से वर्णन करते हैं पर वे [[चाणक्य|कौटिल्य]] के बारे में एक शब्द भी नहीं लिखते हैं।
सिकंदर जब भारत पहुंचा तो [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] (अविभाजित पंजाब) में [[रावलपिंडी]] के पास का राजा उसकी सहायता के लिए पहँच गया। अन्य लगभग सभी राजाओं ने सिन्दर का डटकर मुकाबला किया पर वे सिकन्दर की अनुभवी सेनाओं से हार गए। यूनानी लेखकों ने इन राजाओं के वीरता की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। इसके बाद [[झेलम नदी|झेलम]] और [[चिनाब]] के बीच स्थित प्रदेश का राजा '''पोरस''' (जो कि पौरव का यूनानी नाम लगता है) ने सिकंदर का वीरता पूर्वक सामना किया। 326 ईस्वी पूर््व का यह झेलम नदी के तट पर हुआ पोरस व सिकंदर के मध्य का युद्ध हाइडेस्पीच का युद्ध कहलाता है ।कहा जाता है कि युद्ध हारने के बाद जब पोरस बन्दी बनकर सिकन्दर के सामने प्रस्तुत हुआ तो उससे पूछा गया - ''तुम्हारे साथ कैसा सुलूक (वर्ताव) किया जाय''। तो उसने साहसी उत्तर दिया -" ''जैसा एक राजा दूसरे राजा के साथ करता है'' "। उसके उत्तर पर मुग्ध होकर सिकन्दर ने उसका हारा हुआ प्रदेश लौटा दिया। इसके बाद जब उसे भारत के वीर योद्धा चन्द्रगुप्त मोर्य(मगध का नंद राजा-चंद्रगुप्त नही) की विशाल सेना का सामना करना था तब भय से ग्रसित सेना को लेकर सिकन्दर आगे नहीं बढ़ सका और वापस लौट गया।
== महाजनपद ==
{{main|महाजनपद}}
बौद्ध ग्रंथ [[अंगुत्तरनिकाय|अंगुत्तर निकाय]] के अनुसार कुल सोलह (16) महाजनपद थे - [[अवन्ति]],[[अश्मक]] या अस्सक, [[अंग]], [[कंबोज|कम्बोज]], [[काशी]], [[कुरु]], [[कोशल]], [[गंधार]], [[चेदि]], [[वज्जि]] या वृजि, [[वत्स]] या वंश, [[पाञ्चाल|पांचाल]], [[मगध महाजनपद|मगध]], [[मत्स्य]] या [[मच्छ]], [[मल्ल]], [[सुरसेन]]।
इनमें सत्ता के लिए संघर्ष चलता रहता था।
== महापद्मनंद नंदमौर्य साम्राज्य ==
{{main|मौर्य वंश}}
ईसापूर्व छठी सदी के प्रमुख राज्य थे - मगध, कोसल, वत्स के पौरव और अवंति के प्रद्योत। चौथी सदी में [[चन्द्रगुप्त मौर्य|चन्द्रगुप्त मौर्य ( चंद्र नंद )]] मोत्तर [[भारत]] को यूनानी शासकों से मुक्ति दिला दी। इसके बाद उसने मगध की ओर अपना ध्यान केन्द्रित किया जो उस समय नंदों के शासन में था। जैन ग्रंथ परिशिष्ठ पर्वन में कहा गया है कि [[चाणक्य|सम्राट धनानंद]] ने चाणक्य को अपने राजमहल से बाहर निकाल दिया इसलिए चंद्रगुप्त मौर्य को बड़का कर अपने ही बड़े भाई धनानंद को मरवा दिया चंद्र नंद से चंद्रगुप्त मौर्य बन गया इसके बाद चन्द्रगुप्त ने दक्षिण की ओर अपने साम्राज्य का विस्तार किया। चन्द्रगुप्त ने सिकंदर के क्षत्रप [[सेल्युकस प्रथम निकेटर|सेल्यूकस]] को हाराया था जिसके फलस्वरूप उसने [[हेरात]], [[कांधार|कंदहार]], [[काबुल]] तथा [[बलूचिस्तान (पाकिस्तान)|बलूचिस्तान]] के प्रांत चंद्रगुप्त को सौंप दिए थे।
चन्द्रगुप्त के बाद [[बिन्दुसार|बिंदुसार]] के पुत्र [[अशोक]] ने मौर्य साम्राज्य को अपने चरम पर पहुँचा दिया। [[कर्नाटक]] के चित्तलदुर्ग तथा मास्की में अशोक के शिलालेख पाए गए हैं। चुंकि उसके पड़ोसी राज्य [[चोल राजवंश|चोल]], [[पाण्ड्य राजवंश|पांड्य]] या [[चेर राजवंश|केरलपुत्रों]] के साथ अशोक या बिंदुसार के किसा लड़ाई का वर्णन नहीं मिलता है इसलिए ऐसा माना जाता है कि ये प्रदेश चन्द्रगुप्त के द्वारा ही जीता गया था। अशोक के जीवन का निर्णायक युद्ध [[कलिंग का युद्ध]] था। इसमें उत्कलों से लड़ते हुए अशोक को अपनी सेना द्वारा किए गए नरसंहार के प्रति ग्लानि हुई और उसने बौद्ध धर्म को अपना लिया। फिर उसने बौद्ध धर्म का प्रचार भी करवाया।
चन्द्रगुप्त मौर्य के समय में यूनानी राजदूत [[मेगस्थनीज|मेगास्थनीज़]] , सेल्यूकस के द्वारा उनके दरबार में भेजा गया। उसने चन्द्रगुप्त मौर्य के राज्य तथा उसकी राजधानी [[पाटलिपुत्र]] (आधुनिक [[पटना]]) का वर्णन किया है। इस दौरान कला का भी विकास हुआ महापद्मा नंद
== मौर्यों के बाद ==
मौर्यों के पतन के बाद [[शुंग राजवंश]] ने सत्ता सम्हाली। ऐसा माना जाता है कि मौर्य राजा वृहदृथ के सेनापति पुष्यमित्र ने बृहद्रथ की हत्या कर दी थी जिसके बाद शुंग वंश की स्थापना हुई। शुंगों ने 187 ईसापूर्व से 75 ईसापूर्व तक शासन किया। इसी काल में महाराष्ट्र में सातवाहनों का और दक्षिण में [[चेर]], [[चोल राजवंश|चोल]] और पांड्यों का उदय हुआ। सातवाहनों के साम्राज्य को आंध्र भी कहते हैं जो अत्यन्त शक्तिशाली था।
पुष्यमुत्र के शासनकाल में पश्चिम से यवनों का आक्रमण हुआ। इसी काल के माने जाने वाले वैयाकरण [[पतञ्जलि|पतंजलि]] ने इस आक्रमण का उल्लेख किया है। [[कालिदास]] ने भी अपने [[मालविकाग्निमित्रम्]] में [[वसुमित्र]] के साथ यवनों के युद्ध का चर्चा किया है। इन आक्रमणकारियों ने भारत की सत्ता पर कब्जा कर लिया। कुछ प्रमुख भारतीय-यूनानी शासक थे - यूथीडेमस, डेमेट्रियस तथा मिनांडर। मिनांडर ने बौद्ध धर्म अपना लिया था तथा उसका प्रदेश अफगानिस्तान से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था।
इसके बाद पह्लवों का शासन आया जिनके बारे में अधिक जानकारी उपल्ब्ध नहीं है। तत्पश्चात शकों का शासन आया। शक लोग मध्य एशिया के निवासी थे जिन्हें यू-ची नामक कबीले ने उनके मूल निवास से खदेड़ दिया गया था। इसके बाद वे भारत आए। इसके बाद यू-ची जनजाति के लोग भी भारत आ गए क्योंकि [[चीन की विशाल दीवार|चीन की महान दीवार]] के बनने के बाद मध्य एशिया की परिस्थिति उनके अनूकूल नहीं थी। ये [[कुषाण राजवंश|कुषाण]] कहलाए। [[कनिष्क]] इस वंश का सबसे प्रतापी राजा था। कनिष्क ने ७८ ईसवी से 101 ईस्वी तक राज किया।
== समकालीन दक्षिण भारत ==
दक्षिण में चेर, पांड्य तथा चोल के बीच सत्ता संघर्ष चलता रहा था। संगम साहित्य इस समय की सबसे अमूल्य धरोहर थी। तिरूवल्लुवर द्वारा रचित [[तिरुक्कुरल]] तमिल भाषा का प्राचीनतम ग्रंघ माना जाता है। धार्मिक सम्प्रदायों का प्रचलन था और मुख्यतः वैष्णव, शैव, बौद्ध तथा जैन सम्प्रदायों के अनुयायी थे।
== गुप्त काल ==
{{main|गुप्त वंश}}
सन् ३२० ईस्वी में [[चन्द्रगुप्त प्रथम]] अपने पिता घटोत्कच के बाद राजा बना जिसने गुप्त वंश की नींव डाली। इसके बाद [[समुद्रगुप्त]] (३४० इस्वी), चन्द्रगुप्त द्वितीय, [[कुमारगुप्त प्रथम]] (४१३-४५५ इस्वी) और [[स्कन्दगुप्त|स्कंदगुप्त]] शासक बने। इसके करीब १०० वर्षों तक गुप्त वंश का अस्तित्व बना रहा। ६०६ इस्वी में [[हर्षवर्धन|हर्ष]] के उदय तक किसी एक प्रमुख सत्ता की कमी रही। इस काल में कला और साहित्य का उत्तर तथा दक्षिण दोनों में विकास हुआ। इस काल का सबसे प्रतापी शासक "[[समुद्रगुप्त]]" था जिसके शासनकाल में भारत को "सोने की चिड़िया" कहा जाने लगा।
ग्यारहवीं तथा बारहवीं सदी में भारतीय [[कला]], [[भाषा]] तथा [[धर्म]] का प्रचार दक्षिणपूर्व एशिया में भी हुआ।
==प्राचीन भारत के राजवंश और उनके संस्थापक ==
{| class="wikitable sortable"
! वंश !! राजधनी !! संस्थापक
|-
| [[कुरु वंश]] || [[हस्तिनापुर]] || [[भरत वंश (कुरु पांडु)]]
|-
| [[हर्यक वंश]] || [[राजगृह]], [[पाटलिपुत्र]] || [[बिम्बिसार]]
|-
| [[शिशुनाग वंश]] || पाटलिपुत्र, वैशाली || [[शिशुनाग]]
|-
| [[नंद वंश|नन्द वंश]] || पाटलिपुत्र || महापद्मनन्द
|-
| [[मौर्य राजवंश|मौर्य वंश]] || पाटलिपुत्र || चंद्रगुप्त मौर्य
|-
| [[शुंग राजवंश|शुंग वंश]] || विदिशा || पुष्यमित्र शुंग
|-
| [[कण्व वंश]] || पाटलिपुत्र || वसुदेव
|-
| [[सातवाहन|सातवाहन वंश]] || पैठन || सिमुक
|-
| [[महामेघवाहन वंश|चेदि वंश]] || सोत्थवती || महामोघवाहन
|-
| हिंद-यवन || शाकल ( सियालकेट ) || डेमेट्रियस
|-
| [[कुषाण राजवंश|कुषाण वंश]] || पुरुषपुर पेशावर || कुजुल कडफिसेस
|-
| [[कदम्ब वंश]] || बनवासी || मयूरशर्मन
|-
| [[गंग वंश]] || तलकाड || कोंकणिवर्मा
|-
| [[गुप्त राजवंश|गुप्त वंश]] || पाटलिपुत्र || श्रीगुप्त
|-
| [[मौखरी वंश]] || कन्नौज || ईशानवर्मा
|-
| [[हूण वंश]] || स्यालकोट || तोरमाण
|-
| [[मैत्रक वंश]] || वल्लभी || भट्टारक
|-
| [[उत्तरगुप्त वंश]] || पाटलिपुत्र || कृष्णगुप्त
|-
| [[गौड़ वंश]] || कर्णसुवर्ण, मुर्शिदाबाद || शशांक
|-
| [[पुष्यभूति वंश]] || थानेश्वर || प्रभाकरवर्धन
|-
| [[पाल वंश]] || [[मुंगेर]] || गोपाल
|-
| [[सेन राजवंश|सेन वंश]] || राढ़ || सामन्तसेन
|-
| [[राष्ट्रकूट राजवंश|राष्ट्रकूट वंश]] || मान्यखेत || दन्तिवर्मन
|-
| [[गुर्जर प्रतिहार वंश]] || कन्नौज || नागभट्ट प्रथम
|-
| [[कलचुरी]] [[महामेघवाहन वंश|चेदि वंश]] || त्रिपुरी || कोक्कल प्रथम
|-
| [[परमार वंश]] || धारा || कृष्णराज/ उपेन्द्र
|-
| [[लोदी वंश]] || दिल्ली ||
|-
| [[महदेले लोधी वंश]] || मोहली || दृगपाल/महदेले
|-
| [[सोलंकी वंश]] || अन्हिलवाड़ || मूलराज प्रथम
|-
| [[चन्देल|चन्देल वंश]] || खजुराहो (महोबा) || नन्नुक
|-
| [[गहड़वाल वंश]] || कन्नौज || चन्द्रदेव
|-
| [[चौहान वंश]] || अजमेर || वासुदेव
|-
| [[तोमर वंश]] || ढिल्लिका || अनंगपाल
|-
| [[चालुक्य राजवंश|चालुक्य वंश]] (बादामी) || बादामी || पुलकेशिन प्रथम
|-
| चालुक्य वंश (कल्याणी) || मान्यखेत || तैलप द्वितीय
|-
| चालुक्य वंश (वेंगि) || वेंगि || विष्णुवर्धन
|-
| [[पल्लव राजवंश|पल्लव वंश]] || [[कांचीपुरम|कांची]] || [[सिंहवर्मा]]
|-
| [[चोल राजवंश|चोल वंश]] || [[तंजावुर|तंजौर]], तंजावुर || [[विजयालय]]
|}
== इन्हें भी देखें ==
* [[मगध के राजवंशों और शासकों की सूची]]
* [[प्राचीन भारत की आर्थिक संस्थाएं]]
* [[प्राचीन भारत में गणतंत्र]]
* [[भारत के प्राचीन वैज्ञानिक|प्राचीन भारत के वैज्ञानिक]]
* [[प्राचीन भारतीय विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी|प्राचीन भारत में विज्ञान एवं तकनीक]]
* [[प्राचीन भारतीय कलाएँ]]
* [[प्राचीन भारतीय परंपरा और इतिहास]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20110826211239/http://books.google.co.in/books?id=FFhd8ktl7XsC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false प्राचीन भारत का सामाजिक एवं आर्थिक इतिहास] (गूगल पुस्तक ; लेखक - ओम प्रकाश प्रसाद)
* [https://web.archive.org/web/20121215060522/http://books.google.co.in/books?id=7_GWRA79yJgC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false प्राचीन भारत का सामाजिक और आर्थिक इतिहास] (गूगल पुस्तक ; लेखक - शिव स्वरूप सहाय)
* [https://web.archive.org/web/20100613003424/http://iish.org/index.php?option=com_content&view=article&id=71:a-brief-introduction-to-technological-brilliance-of-ancient-india&catid=37:heritage-india-news&Itemid=56 A brief introduction to technological brilliance of Ancient India] (इण्डियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंटिफिक हेरिटेज)
* [https://web.archive.org/web/20140328200741/http://books.google.co.in/books?id=1mYAw7OIUkEC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false प्राचीन भारत के वैज्ञानिक कर्णधार] (गूगल पुस्तक ; लेखक - स्वामी सत्यप्रकाश सरस्वती)
* [https://web.archive.org/web/20150406043218/http://books.google.co.in/books?id=GnAPjKdM_OMC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false प्राचीन भारत में रसायन का विकास] (गूगल पुस्तक; लेखक - स्वामी सत्यप्रकाश सरस्वती)
* [https://web.archive.org/web/20121215042127/http://books.google.co.in/books?id=xHun9M65_qAC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false प्राचीन भारत में दूत पद्धति] (गूगल पुस्तक ; लेखक - आनन्द प्रकाश गौड़)
* [https://web.archive.org/web/20121215063331/http://books.google.co.in/books?id=KtF8zGa5zvcC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false श्रेण्य युग ('क्लासिकल एज' का हिन्दी अनुवाद)] (गूगल पुस्तक ; लेखक - आर सी मजुमदार ; अनुवादक - शिवदान सिंह चौहान)
* [https://web.archive.org/web/20121215041900/http://books.google.co.in/books?id=V4cGO9w4pb8C&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false भारतीय इतिहास के कुछ विषय (Archaeology & Ancient India)] (गूगल पुस्तक ; लेखक - रघुनाथ राय)
* [https://web.archive.org/web/20121215042036/http://books.google.co.in/books?id=mdqq14ZB-KcC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false प्राचीन भारत का राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास] (गूगल पुस्तक ; लेखक - धनपति पाण्डेय)
* [http://books.google.co.in/books?id=vhUZrj975BAC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false हिन्दू सभ्यता] (गूगल पुस्तक ; लेखक - राधाकुमुद मुखर्जी)
[[श्रेणी:प्राचीन भारत| ]]
[[श्रेणी:भूगोल और स्थानों की रूपरेखाएँ]]
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'''आलू''' एक [[सब्जी]] है। विज्ञान की दृष्टि से यह एक तना है। इसकी उद्गम स्थान दक्षिण अमेरिका का पेरू संदर्भ है। यह गेहूँ|गेहूं धान तथा मक्का के बाद सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली फसल है। भारत में यह विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में उगाया जाता है। यह जमीन के नीचे पैदा होता है। आलू के उत्पादन में चीन और रूस के बाद भारत तीसरे स्थान पर है।मथुरा-आगरा मार्ग के निकट, भारत में आलू की खेती
== इतिहास ==
अमेरिकी वैलल्लूने एक अनुसंधान से यह निष्कर्ष निकाला कि पेरू के किसान आज से लगभग 7000 साल पहले से आलू उगा रह हैं। सोलहवीं सदी में [[स्पेन]] ने अपने दक्षिण अमेरिकी उपनिवेशों से आलू को यूरोप पहुंचाया उसके बाद ब्रिटेन जैसे देशों ने आलू को दुनिया भर में लोकप्रिय बना दिया। आज
लो भी [[आयरलैण्ड|आयरलैंड]] तथा [[रूस]] की अधिकांश जनता आलू पर निर्भर है। भारत में आलू पुर्तगालियो
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lo]] में यह सब से लोकप्रिय सब्जी है। इसे सभी प्रकार की सब्जियों के साथ मिला कर पका सकते हैं।
== निर्मित पकवान ==
आलू से अनेक खाद्य सामग्री बनती है जैसे [[वड़ापाव]], [[चाट]], आलू भरी [[कचौड़ी]], चिप्स, [[पापड़]], फ्रेंचफ्राइस, [[समोसा]], [[टिक्की]], चोखा आदि। आलू को अन्य सब्जियों के साथ मिला कर तरह-तरह के पकवान बनाये जाते हैं।
[[File:Potato transportation to cold storage in India (1).jpg|thumb|कोल्ड स्टोरेज में संरक्षण हेतु जाती आलू की बोरियो से लदी ट्रालियां]]
==आलू के अनोखे गुण==
वैसे तो आलू भारत में ज़्यादातर लोगों की पसंदीदा सब्जी है लेकिन कई लोग इसे अधिक चर्बी वाला समझकर खाने से परहेज करते हैं। परंतु आलू में कुछ उपयोगी गुण भी हैं। आलू में विटामिन सी, बी कॉम्पलेक्स तथा आयरन , कैल्शियम, मैंगनीज, फास्फोरस तत्त्व होते हैं। इसके अलावा आलू में कई औषधीय गुण होने के साथ सौंदर्यवर्धक गुण भी है जैसे यदि त्वचा का कोई भाग जल जाता है उस पर कच्चा आलू कुचलकर तुरंत लगा देने से आराम मिलता है। <ref>http://religion.bhaskar.com/news/yoga-ooh-these-unique-properties-of-potato-knowing-you-speak-the-same-3749152.html</ref> <ref>{{Cite web |url= http://hindi.webdunia.com/healthy-food/%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B2%E0%A5%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3-107070300010_1.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=1 फ़रवरी 2015 |archive-url= https://web.archive.org/web/20170503123931/http://hindi.webdunia.com/healthy-food/%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B2%E0%A5%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3-107070300010_1.htm |archive-date=3 मई 2017 |url-status=dead }}</ref>
== सन्दर्भ ==
[[चित्र:Potatoes_from_India.jpg|अंगूठाकार|भारत में मिलने वाले आलू।]]
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{{सब्जियाँ}}
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[[श्रेणी:आलू]]
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'''आलू''' एक [[सब्जी]] है। विज्ञान की दृष्टि से यह एक तना है। इसकी उद्गम स्थान दक्षिण अमेरिका का पेरू संदर्भ है। यह गेहूँ|गेहूं धान तथा मक्का के बाद सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली फसल है। भारत में यह विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में उगाया जाता है। यह जमीन के नीचे पैदा होता है। आलू के उत्पादन में चीन और रूस के बाद भारत तीसरे स्थान पर है।मथुरा-आगरा मार्ग के निकट, भारत में आलू की खेती
== इतिहास ==
अमेरिकी वैलल्लूने एक अनुसंधान से यह निष्कर्ष निकाला कि पेरू के [[किसान]] आज से लगभग 7000 साल पहले से आलू उगा रह हैं। सोलहवीं सदी में [[स्पेन]] ने अपने दक्षिण अमेरिकी उपनिवेशों से आलू को यूरोप पहुंचाया उसके बाद ब्रिटेन जैसे देशों ने आलू को दुनिया भर में लोकप्रिय बना दिया। आज
लो भी [[आयरलैण्ड|आयरलैंड]] तथा [[रूस]] की अधिकांश जनता आलू पर निर्भर है। भारत में आलू पुर्तगालियो
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lo]] में यह सब से लोकप्रिय सब्जी है। इसे सभी प्रकार की सब्जियों के साथ मिला कर पका सकते हैं।
== निर्मित पकवान ==
आलू से अनेक खाद्य सामग्री बनती है जैसे [[वड़ापाव]], [[चाट]], आलू भरी [[कचौड़ी]], चिप्स, [[पापड़]], फ्रेंचफ्राइस, [[समोसा]], [[टिक्की]], चोखा आदि। आलू को अन्य सब्जियों के साथ मिला कर तरह-तरह के पकवान बनाये जाते हैं।
[[File:Potato transportation to cold storage in India (1).jpg|thumb|कोल्ड स्टोरेज में संरक्षण हेतु जाती आलू की बोरियो से लदी ट्रालियां]]
==आलू के अनोखे गुण==
वैसे तो आलू भारत में ज़्यादातर लोगों की पसंदीदा सब्जी है लेकिन कई लोग इसे अधिक चर्बी वाला समझकर खाने से परहेज करते हैं। परंतु आलू में कुछ उपयोगी गुण भी हैं। आलू में विटामिन सी, बी कॉम्पलेक्स तथा आयरन , कैल्शियम, मैंगनीज, फास्फोरस तत्त्व होते हैं। इसके अलावा आलू में कई औषधीय गुण होने के साथ सौंदर्यवर्धक गुण भी है जैसे यदि त्वचा का कोई भाग जल जाता है उस पर कच्चा आलू कुचलकर तुरंत लगा देने से आराम मिलता है। <ref>http://religion.bhaskar.com/news/yoga-ooh-these-unique-properties-of-potato-knowing-you-speak-the-same-3749152.html</ref> <ref>{{Cite web |url= http://hindi.webdunia.com/healthy-food/%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B2%E0%A5%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3-107070300010_1.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=1 फ़रवरी 2015 |archive-url= https://web.archive.org/web/20170503123931/http://hindi.webdunia.com/healthy-food/%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B2%E0%A5%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3-107070300010_1.htm |archive-date=3 मई 2017 |url-status=dead }}</ref>
== सन्दर्भ ==
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'''आलू''' एक [[सब्जी]] है। विज्ञान की दृष्टि से यह एक तना है। इसकी उद्गम स्थान [[दक्षिण अमेरिका]] का पेरू संदर्भ है। यह गेहूँ|गेहूं धान तथा मक्का के बाद सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली फसल है। भारत में यह विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में उगाया जाता है। यह जमीन के नीचे पैदा होता है। आलू के उत्पादन में चीन और रूस के बाद भारत तीसरे स्थान पर है।मथुरा-आगरा मार्ग के निकट, भारत में आलू की खेती
== इतिहास ==
अमेरिकी वैलल्लूने एक अनुसंधान से यह निष्कर्ष निकाला कि पेरू के [[किसान]] आज से लगभग 7000 साल पहले से आलू उगा रह हैं। सोलहवीं सदी में [[स्पेन]] ने अपने दक्षिण अमेरिकी उपनिवेशों से आलू को यूरोप पहुंचाया उसके बाद ब्रिटेन जैसे देशों ने आलू को दुनिया भर में लोकप्रिय बना दिया। आज
लो भी [[आयरलैण्ड|आयरलैंड]] तथा [[रूस]] की अधिकांश जनता आलू पर निर्भर है। भारत में आलू पुर्तगालियो
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lo]] में यह सब से लोकप्रिय सब्जी है। इसे सभी प्रकार की सब्जियों के साथ मिला कर पका सकते हैं।
== निर्मित पकवान ==
आलू से अनेक खाद्य सामग्री बनती है जैसे [[वड़ापाव]], [[चाट]], आलू भरी [[कचौड़ी]], चिप्स, [[पापड़]], फ्रेंचफ्राइस, [[समोसा]], [[टिक्की]], चोखा आदि। आलू को अन्य सब्जियों के साथ मिला कर तरह-तरह के पकवान बनाये जाते हैं।
[[File:Potato transportation to cold storage in India (1).jpg|thumb|कोल्ड स्टोरेज में संरक्षण हेतु जाती आलू की बोरियो से लदी ट्रालियां]]
==आलू के अनोखे गुण==
वैसे तो आलू भारत में ज़्यादातर लोगों की पसंदीदा सब्जी है लेकिन कई लोग इसे अधिक चर्बी वाला समझकर खाने से परहेज करते हैं। परंतु आलू में कुछ उपयोगी गुण भी हैं। आलू में विटामिन सी, बी कॉम्पलेक्स तथा आयरन , कैल्शियम, मैंगनीज, फास्फोरस तत्त्व होते हैं। इसके अलावा आलू में कई औषधीय गुण होने के साथ सौंदर्यवर्धक गुण भी है जैसे यदि त्वचा का कोई भाग जल जाता है उस पर कच्चा आलू कुचलकर तुरंत लगा देने से आराम मिलता है। <ref>http://religion.bhaskar.com/news/yoga-ooh-these-unique-properties-of-potato-knowing-you-speak-the-same-3749152.html</ref> <ref>{{Cite web |url= http://hindi.webdunia.com/healthy-food/%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B2%E0%A5%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3-107070300010_1.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=1 फ़रवरी 2015 |archive-url= https://web.archive.org/web/20170503123931/http://hindi.webdunia.com/healthy-food/%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B2%E0%A5%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3-107070300010_1.htm |archive-date=3 मई 2017 |url-status=dead }}</ref>
== सन्दर्भ ==
[[चित्र:Potatoes_from_India.jpg|अंगूठाकार|भारत में मिलने वाले आलू।]]
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[[श्रेणी:आलू]]
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'''आलू''' एक [[सब्जी]] है। विज्ञान की दृष्टि से यह एक तना है। इसकी उद्गम स्थान [[दक्षिण अमेरिका]] का पेरू संदर्भ है। यह गेहूँ|गेहूं धान तथा मक्का के बाद सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली फसल है। भारत में यह विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में उगाया जाता है। यह जमीन के नीचे पैदा होता है। आलू के उत्पादन में चीन और रूस के बाद भारत तीसरे स्थान पर है।मथुरा-आगरा मार्ग के निकट, भारत में आलू की खेती
== इतिहास ==
अमेरिकी वैलल्लूने एक अनुसंधान से यह निष्कर्ष निकाला कि पेरू के [[किसान]] आज से लगभग ७००० साल पहले से आलू उगा रह हैं। सोलहवीं सदी में [[स्पेन]] ने अपने दक्षिण अमेरिकी उपनिवेशों से आलू को [[यूरोप]] पहुंचाया उसके बाद ब्रिटेन जैसे देशों ने आलू को दुनिया भर में लोकप्रिय बना दिया। आज
लो भी [[आयरलैण्ड|आयरलैंड]] तथा [[रूस]] की अधिकांश जनता आलू पर निर्भर है। भारत में आलू पुर्तगालियो
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lo]] में यह सब से लोकप्रिय सब्जी है। इसे सभी प्रकार की सब्जियों के साथ मिला कर पका सकते हैं।
== निर्मित पकवान ==
आलू से अनेक खाद्य सामग्री बनती है जैसे [[वड़ापाव]], [[चाट]], आलू भरी [[कचौड़ी]], चिप्स, [[पापड़]], फ्रेंचफ्राइस, [[समोसा]], [[टिक्की]], चोखा आदि। आलू को अन्य सब्जियों के साथ मिला कर तरह-तरह के पकवान बनाये जाते हैं।
[[File:Potato transportation to cold storage in India (1).jpg|thumb|कोल्ड स्टोरेज में संरक्षण हेतु जाती आलू की बोरियो से लदी ट्रालियां]]
==आलू के अनोखे गुण==
वैसे तो आलू भारत में ज़्यादातर लोगों की पसंदीदा सब्जी है लेकिन कई लोग इसे अधिक चर्बी वाला समझकर खाने से परहेज करते हैं। परंतु आलू में कुछ उपयोगी गुण भी हैं। आलू में विटामिन सी, बी कॉम्पलेक्स तथा आयरन , कैल्शियम, मैंगनीज, फास्फोरस तत्त्व होते हैं। इसके अलावा आलू में कई औषधीय गुण होने के साथ सौंदर्यवर्धक गुण भी है जैसे यदि त्वचा का कोई भाग जल जाता है उस पर कच्चा आलू कुचलकर तुरंत लगा देने से आराम मिलता है। <ref>http://religion.bhaskar.com/news/yoga-ooh-these-unique-properties-of-potato-knowing-you-speak-the-same-3749152.html</ref> <ref>{{Cite web |url= http://hindi.webdunia.com/healthy-food/%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B2%E0%A5%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3-107070300010_1.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=1 फ़रवरी 2015 |archive-url= https://web.archive.org/web/20170503123931/http://hindi.webdunia.com/healthy-food/%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B2%E0%A5%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3-107070300010_1.htm |archive-date=3 मई 2017 |url-status=dead }}</ref>
== सन्दर्भ ==
[[चित्र:Potatoes_from_India.jpg|अंगूठाकार|भारत में मिलने वाले आलू।]]
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[[श्रेणी:सब्ज़ी]]
[[श्रेणी:आलू]]
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'''आलू''' एक [[सब्जी]] है। विज्ञान की दृष्टि से यह एक तना है। इसकी उद्गम स्थान [[दक्षिण अमेरिका]] का पेरू संदर्भ है। यह गेहूँ|गेहूं धान तथा मक्का के बाद सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली फसल है। भारत में यह विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में उगाया जाता है। यह जमीन के नीचे पैदा होता है। आलू के उत्पादन में चीन और रूस के बाद भारत तीसरे स्थान पर है।मथुरा-आगरा मार्ग के निकट, भारत में आलू की खेती
== इतिहास ==
अमेरिकी वैलल्लूने एक अनुसंधान से यह निष्कर्ष निकाला कि [[पेरू]] के [[किसान]] आज से लगभग ७००० साल पहले से आलू उगा रह हैं। सोलहवीं सदी में [[स्पेन]] ने अपने दक्षिण अमेरिकी उपनिवेशों से आलू को [[यूरोप]] पहुंचाया उसके बाद ब्रिटेन जैसे देशों ने आलू को दुनिया भर में लोकप्रिय बना दिया। आज
लो भी [[आयरलैण्ड|आयरलैंड]] तथा [[रूस]] की अधिकांश जनता आलू पर निर्भर है। भारत में आलू पुर्तगालियो
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lo]] में यह सब से लोकप्रिय सब्जी है। इसे सभी प्रकार की सब्जियों के साथ मिला कर पका सकते हैं।
== निर्मित पकवान ==
आलू से अनेक खाद्य सामग्री बनती है जैसे [[वड़ापाव]], [[चाट]], आलू भरी [[कचौड़ी]], चिप्स, [[पापड़]], फ्रेंचफ्राइस, [[समोसा]], [[टिक्की]], चोखा आदि। आलू को अन्य सब्जियों के साथ मिला कर तरह-तरह के पकवान बनाये जाते हैं।
[[File:Potato transportation to cold storage in India (1).jpg|thumb|कोल्ड स्टोरेज में संरक्षण हेतु जाती आलू की बोरियो से लदी ट्रालियां]]
==आलू के अनोखे गुण==
वैसे तो आलू भारत में ज़्यादातर लोगों की पसंदीदा सब्जी है लेकिन कई लोग इसे अधिक चर्बी वाला समझकर खाने से परहेज करते हैं। परंतु आलू में कुछ उपयोगी गुण भी हैं। आलू में विटामिन सी, बी कॉम्पलेक्स तथा आयरन , कैल्शियम, मैंगनीज, फास्फोरस तत्त्व होते हैं। इसके अलावा आलू में कई औषधीय गुण होने के साथ सौंदर्यवर्धक गुण भी है जैसे यदि त्वचा का कोई भाग जल जाता है उस पर कच्चा आलू कुचलकर तुरंत लगा देने से आराम मिलता है। <ref>http://religion.bhaskar.com/news/yoga-ooh-these-unique-properties-of-potato-knowing-you-speak-the-same-3749152.html</ref> <ref>{{Cite web |url= http://hindi.webdunia.com/healthy-food/%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B2%E0%A5%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3-107070300010_1.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=1 फ़रवरी 2015 |archive-url= https://web.archive.org/web/20170503123931/http://hindi.webdunia.com/healthy-food/%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B2%E0%A5%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3-107070300010_1.htm |archive-date=3 मई 2017 |url-status=dead }}</ref>
== सन्दर्भ ==
[[चित्र:Potatoes_from_India.jpg|अंगूठाकार|भारत में मिलने वाले आलू।]]
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{{सब्जियाँ}}
[[श्रेणी:सब्ज़ी]]
[[श्रेणी:आलू]]
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'''आलू''' एक [[सब्जी]] है। विज्ञान की दृष्टि से यह एक तना है। इसकी उद्गम स्थान [[दक्षिण अमेरिका]] का पेरू संदर्भ है। यह गेहूँ|गेहूं धान तथा मक्का के बाद सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली फसल है। भारत में यह विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में उगाया जाता है। यह जमीन के नीचे पैदा होता है। आलू के उत्पादन में चीन और रूस के बाद भारत तीसरे स्थान पर है।मथुरा-आगरा मार्ग के निकट, भारत में आलू की खेती
== इतिहास ==
अमेरिकी वैलल्लूने एक अनुसंधान से यह निष्कर्ष निकाला कि [[पेरू]] के [[किसान]] आज से लगभग ७००० साल पहले से आलू उगा रह हैं। सोलहवीं सदी में [[स्पेन]] ने अपने दक्षिण अमेरिकी उपनिवेशों से आलू को [[यूरोप]] पहुंचाया उसके बाद ब्रिटेन जैसे देशों ने आलू को दुनिया भर में लोकप्रिय बना दिया। आज
लो भी [[आयरलैण्ड|आयरलैंड]] तथा [[रूस]] की अधिकांश जनता आलू पर निर्भर है। [[भारत]] में आलू पुर्तगालियो
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olद्वारा लाया गया | [[
lo]] में यह सब से लोकप्रिय सब्जी है। इसे सभी प्रकार की सब्जियों के साथ मिला कर पका सकते हैं।
== निर्मित पकवान ==
आलू से अनेक खाद्य सामग्री बनती है जैसे [[वड़ापाव]], [[चाट]], आलू भरी [[कचौड़ी]], चिप्स, [[पापड़]], फ्रेंचफ्राइस, [[समोसा]], [[टिक्की]], चोखा आदि। आलू को अन्य सब्जियों के साथ मिला कर तरह-तरह के पकवान बनाये जाते हैं।
[[File:Potato transportation to cold storage in India (1).jpg|thumb|कोल्ड स्टोरेज में संरक्षण हेतु जाती आलू की बोरियो से लदी ट्रालियां]]
==आलू के अनोखे गुण==
वैसे तो आलू भारत में ज़्यादातर लोगों की पसंदीदा सब्जी है लेकिन कई लोग इसे अधिक चर्बी वाला समझकर खाने से परहेज करते हैं। परंतु आलू में कुछ उपयोगी गुण भी हैं। आलू में विटामिन सी, बी कॉम्पलेक्स तथा आयरन , कैल्शियम, मैंगनीज, फास्फोरस तत्त्व होते हैं। इसके अलावा आलू में कई औषधीय गुण होने के साथ सौंदर्यवर्धक गुण भी है जैसे यदि त्वचा का कोई भाग जल जाता है उस पर कच्चा आलू कुचलकर तुरंत लगा देने से आराम मिलता है। <ref>http://religion.bhaskar.com/news/yoga-ooh-these-unique-properties-of-potato-knowing-you-speak-the-same-3749152.html</ref> <ref>{{Cite web |url= http://hindi.webdunia.com/healthy-food/%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B2%E0%A5%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3-107070300010_1.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=1 फ़रवरी 2015 |archive-url= https://web.archive.org/web/20170503123931/http://hindi.webdunia.com/healthy-food/%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B2%E0%A5%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3-107070300010_1.htm |archive-date=3 मई 2017 |url-status=dead }}</ref>
== सन्दर्भ ==
[[चित्र:Potatoes_from_India.jpg|अंगूठाकार|भारत में मिलने वाले आलू।]]
{{Reflist}}
{{सब्जियाँ}}
[[श्रेणी:सब्ज़ी]]
[[श्रेणी:आलू]]
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चाहर धर्मेंद्र
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सफाई
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text/x-wiki
'''आलू''' एक [[सब्जी]] है। विज्ञान की दृष्टि से यह एक तना है। इसकी उद्गम स्थान [[दक्षिण अमेरिका]] का पेरू संदर्भ है। यह गेहूँ|गेहूं धान तथा मक्का के बाद सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली फसल है। भारत में यह विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में उगाया जाता है। यह जमीन के नीचे पैदा होता है। आलू के उत्पादन में चीन और रूस के बाद भारत तीसरे स्थान पर है।मथुरा-आगरा मार्ग के निकट, भारत में आलू की खेती
== इतिहास ==
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक अनुसंधान से यह निष्कर्ष निकाला कि [[पेरू]] के [[किसान]] आज से लगभग ७००० साल पहले से आलू उगा रहे हैं। सोलहवीं सदी में [[स्पेन]] ने अपने दक्षिण अमेरिकी उपनिवेशों से आलू को [[यूरोप]] पहुंचाया उसके बाद ब्रिटेन जैसे देशों ने आलू को दुनिया भर में लोकप्रिय बना दिया। आज भी [[आयरलैण्ड|आयरलैंड]] तथा [[रूस]] की अधिकांश जनता आलू पर निर्भर है। भारत में आलू पुर्तगालियो द्वारा लाया गया। [[भारत]] में यह सब से लोकप्रिय सब्जी है। इसे सभी प्रकार की सब्जियों के साथ मिला कर पका सकते हैं।
== निर्मित पकवान ==
आलू से अनेक खाद्य सामग्री बनती है जैसे [[वड़ापाव]], [[चाट]], आलू भरी [[कचौड़ी]], चिप्स, [[पापड़]], फ्रेंचफ्राइस, [[समोसा]], [[टिक्की]], चोखा आदि। आलू को अन्य सब्जियों के साथ मिला कर तरह-तरह के पकवान बनाये जाते हैं।
[[File:Potato transportation to cold storage in India (1).jpg|thumb|कोल्ड स्टोरेज में संरक्षण हेतु जाती आलू की बोरियो से लदी ट्रालियां]]
==आलू के अनोखे गुण==
वैसे तो आलू भारत में ज़्यादातर लोगों की पसंदीदा सब्जी है लेकिन कई लोग इसे अधिक चर्बी वाला समझकर खाने से परहेज करते हैं। परंतु आलू में कुछ उपयोगी गुण भी हैं। आलू में विटामिन सी, बी कॉम्पलेक्स तथा आयरन , कैल्शियम, मैंगनीज, फास्फोरस तत्त्व होते हैं। इसके अलावा आलू में कई औषधीय गुण होने के साथ सौंदर्यवर्धक गुण भी है जैसे यदि त्वचा का कोई भाग जल जाता है उस पर कच्चा आलू कुचलकर तुरंत लगा देने से आराम मिलता है। <ref>http://religion.bhaskar.com/news/yoga-ooh-these-unique-properties-of-potato-knowing-you-speak-the-same-3749152.html</ref> <ref>{{Cite web |url= http://hindi.webdunia.com/healthy-food/%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B2%E0%A5%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3-107070300010_1.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=1 फ़रवरी 2015 |archive-url= https://web.archive.org/web/20170503123931/http://hindi.webdunia.com/healthy-food/%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B2%E0%A5%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%A3-107070300010_1.htm |archive-date=3 मई 2017 |url-status=dead }}</ref>
== सन्दर्भ ==
[[चित्र:Potatoes_from_India.jpg|अंगूठाकार|भारत में मिलने वाले आलू।]]
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{{सब्जियाँ}}
[[श्रेणी:सब्ज़ी]]
[[श्रेणी:आलू]]
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आदि शंकराचार्य
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Anitya Gautam
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text/x-wiki
{{About|दार्शनिक आदि शंकराचार्य |हिन्दू धर्म के धर्मगुरु पद |शंकराचार्य}}
{{redirect|आदि शंकर|फ़िल्म निर्माता|आदि शंकर (फ़िल्म निर्माता)}}
{{Infobox Hindu leader
|name = शिवावतार भगवान श्रीमद् आदि शंकराचार्य
|God of = ज्ञान, योग, वैदिक ज्ञान, कर्मकाण्ड, वेद, भाष्य, मंत्र, तंत्र एवं शक्ति शांति के के अधिष्ठात्र देवता
|image = Raja Ravi Varma - Sankaracharya.jpg
|image_size = 300px
|caption = ''शिष्यों के मध्य में जगदगुरु आदि शंकराचार्य'', [[राजा रवि वर्मा]] द्वारा (1904) में चित्रित
|birth_date = लगभग 508 ईसा पूर्व =
|nationality = [[भारतीय]]
|death_place = [[केदारनाथ कस्बा|केदारनाथ]], [[पाल साम्राज्य]]<br />वर्तमान में [[उत्तराखंड|उत्तराखण्ड]], भारत
|guru = [[योगी गोविन्द नाथ]]
|philosophy = [[अद्वैत वेदांत|अद्वैत वेदान्त]], [[नाथ संप्रदाय]] का साहित्य
|honors = शिवावतार, शंकराचार्य योगी, आदिगुरु, श्रीमज्जगदगुरु, धर्मचक्रप्रवर्तक, यतिचक्र चुरामणि, धर्मसम्राट, भगवान
|founder = [[दशनामी संप्रदाय]] (नाथ संप्रदाय)
|literary_works = [[भज गोविन्दम्]], [[मठाम्मनाय महानुशासन]], ब्रह्मसूत्र भाष्य, वेदान्त सूत्र, १०८ उपनिषदों पर भाष्य, अनगिनत स्तुति, स्तोत्रादि की रचना
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|influenced =शिव, गोरखनाथ
|quote = [[अहं ब्रह्मास्मि]], [[प्रज्ञानं ब्रह्म]], [[तत्त्वमसि]], ब्रह्म सत्यं जगत मिथ्या
|Festival = वैशाख शुक्ल पंचमी
|birth_place=लगभग 750 ई॰{{refn|group=note|name="date"}}}}
'''आचार्य शंकर''' भारतीय महान् दार्शनिक एवं धर्मप्रवर्तक और योगी थे। उन्होंने [[अद्वैत वेदान्त]] को ठोस आधार प्रदान किया। [[श्रीमद्भगवद्गीता|भगवद्गीता]], [[उपनिषद्|उपनिषदों]] और [[ब्रह्मसूत्र|वेदांतसूत्रों]] पर लिखी हुई इन की टीकाएँ बहुत प्रसिद्ध हैं। उन्होंने सांख्यदर्शन का प्रधानकारणवाद और मीमांसा दर्शन के ज्ञान कर्म समुच्चयवाद का खण्डन किया।
योगी शंकराचार्य जी का जन्म सन ५०८ - ५०९ ई.पू. में हुआ था।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=G3AMAQAAMAAJ&q=Shankaracharya+508+bce&dq=Shankaracharya+508+bce&hl=hi&sa=X&ved=2ahUKEwiTxdC6gaHzAhUhBKYKHUlCCCgQ6AF6BAgDEAM|title=A Tribute to Hinduism: Thoughts and Wisdom Spanning Continents and Time about India and Her Culture|last=Londhe|first=Sushama|publisher=Pragun Publication|year=2008|isbn=9788189920661|pages=3|language=Eng|format=Hardcover|quote=Adi Shankaracharya ( 508 - 477 BCE ) was undoubtedly an immortal spiritual leader..}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=f4pUBQAAQBAJ&pg=PA150&dq=%E0%A4%86%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF+508+%E0%A4%88%E0%A4%AA%E0%A5%82&hl=en&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwj8sLLC0MqBAxWW_mEKHZIPDxIQ6AF6BAgNEAM#v=onepage&q=%E0%A4%86%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%20508%20%E0%A4%88%E0%A4%AA%E0%A5%82&f=false|title=Vikramshila Ka Itihas: Vikramshila Ka Itihas: The History of Vikramshila University by Parshuram Thakur Brahmavadi|last=Brahmavadi|first=Parshuram Thakur|date=2013-01-01|publisher=Prabhat Prakashan|year=|isbn=978-81-7721-218-1|pages=150|language=hi|quote=इतिहासकारों ने आदि शंकराचार्य का समय आठवीं सदी मानकर हिंदी साहित्य के इतिहास को भी अंधकार युग में धकेल दिया है , जबकि बिहार , वैशाली स्थित प्राकृत अनुवादक डॉ . डी . एम . त्रिवेद के एक शिलालेख के अनुसार शंकराचार्य काल ई . पू . 508 , बुद्ध ई . पू . 527 साबित होता है । ' क्रॉनिकल ऑफ नेपाल हिस्टरी , में बुद्ध का काल ई . पू . 1887 ई . पू . तक दरशाया है , यानी बुद्ध 1887 ई . पू . से 1807 ई . पू तक जीवित थे । वहीं आचार्य शंकर की जन्मतिथि ई . पू . 509 का प्रमाण एक जैन अभिलेख में भी मिलता है ।}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=O5bXAAAAMAAJ&q=Adi+Shankaracharya+508+BCE&dq=Adi+Shankaracharya+508+BCE&hl=en&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwjZxN3N0sqBAxWpSGwGHSRbBHgQ6AF6BAgOEAM#Adi%20Shankaracharya%20508%20BCE|title=Studies in Religion and Change|last=Society|first=Indian History and Culture|date=1983|publisher=Books & Books|year=1983|isbn=|pages=73|language=en|quote=Guruparampara - Smritis of Dwaraka and , Govardhana - Puri Peetham too agree with this date of Adi Sankara , i.e. K.E. 2593 corresponding to 508 B.C.}}</ref><ref>{{Cite journal|date=1979|title=Journal of Indian History|url=https://books.google.co.in/books?id=H_htAAAAMAAJ&q=Adi+Shankaracharya+508+BCE&dq=Adi+Shankaracharya+508+BCE&hl=hi&sa=X&ved=2ahUKEwihv5XlgqHzAhVRIqYKHYB2CCEQ6AF6BAgFEAM|journal=Department of Modern Indian History|volume=57|pages=225-30}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=T5DXAAAAMAAJ&q=Adi+Shankaracharya+508+BCE&dq=Adi+Shankaracharya+508+BCE&hl=hi&sa=X&ved=2ahUKEwihv5XlgqHzAhVRIqYKHYB2CCEQ6AF6BAgJEAM|title=Kanchi Kamakoti Math, a Myth|publisher=Varanasi Raj Gopal Sharma|year=1987|pages=64|language=en|quote=Sri Adi Sankar's time ( 508 B.C ) . They claim this plate as their own since the plate mentions the recipient living in a math near Hastishailanatha temple .}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=7RIqAAAAYAAJ&q=Adi+Shankaracharya+508+BCE&dq=Adi+Shankaracharya+508+BCE&hl=en&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwjZxN3N0sqBAxWpSGwGHSRbBHgQ6AF6BAgNEAM#Adi%20Shankaracharya%20508%20BCE|title=History Revealed by the Rāmāyaṇa Astronomy|last=Chaudhuri|first=Puspendu|date=1998|publisher=Firma KLM|isbn=978-81-7102-097-3|language=en|quote=Shri Vivekananda Choudhury , however , in his aforesaid book proved that Adi Shankara was born on April 22 , Sunday , 508 B.C}}</ref><ref>{{Cite journal|date=2019|title=Ritual Journeys in South Asia: Constellations and Contestations of Mobility and space|url=https://books.google.co.in/books?id=_1GoDwAAQBAJ&pg=PT33&dq=Adi+Shankaracharya+508+BCE&hl=hi&sa=X&ved=2ahUKEwihv5XlgqHzAhVRIqYKHYB2CCEQ6AF6BAgLEAM#v=onepage&q=Adi%20Shankaracharya%20508%20BCE&f=false|journal=Ritual Journeys in South Asia|publisher=Christoph Bergmann|volume=9|pages=}}</ref><ref>{{Cite journal|year=1979|title=Swarajya|url=https://books.google.co.in/books?id=zf0sAAAAIAAJ&q=Adi+Shankaracharya+508+BCE&dq=Adi+Shankaracharya+508+BCE&hl=hi&sa=X&ved=2ahUKEwihv5XlgqHzAhVRIqYKHYB2CCEQ6AF6BAgHEAM|journal=Swarajya|publisher=T. Sadavisam|volume=23|pages=2}}</ref><ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.481060|title=भारतीय इतिहास की भयंकर भूलें ( Some Blunders of Indian Historical Research का हिन्दी अनुवाद )|last=N. Oak|first=Purushottam|last2=भट्ट|first2=श्री जगमोहन राव|date=1971|year=1971|pages=190-207|language=hi|access-date=2017-01-25}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=hLHXAAAAMAAJ&q=Adi+Shankaracharya+508+BCE&dq=Adi+Shankaracharya+508+BCE&hl=hi&sa=X&ved=2ahUKEwjKnZHUiqHzAhWQBd4KHfHSAN04ChDoAXoECAMQAw|title=A Religious History of Ancient India, Upto C. 1200 A.D.: Smarta, epic-Pauranika and Tantrika Hinduism, Christianity and Islam|publisher=Śrīrāma Goyala|year=1986|pages=60|language=en|quote=Adi Sankara was born in 508 or 509 B.C.}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=HLU9AAAAMAAJ&q=inauthor:%22Kota+Venkatachelam%22&dq=inauthor:%22Kota+Venkatachelam%22&hl=hi&sa=X&redir_esc=y|title=Age of Buddha, Milinda & Amtiyoka and Yugapurana|publisher=Kota Venkatachelam|year=1956|pages=201|language=en|format=Original PDF|quote=Birth of Adi Sankara 509 BC|access-date=2020-03-22}}</ref> इन्होंने भारतवर्ष में चार कोनों में चार [[मठ|मठों]] की स्थापना की थी जो अभी तक बहुत प्रसिद्ध और पवित्र माने जाते हैं और जिन पर आसीन संन्यासी 'शंकराचार्य' कहे जाते हैं। वे चारों स्थान ये हैं-
१: [[जोशीमठ|ज्योतिष्पीठ बदरिकाश्रम]],
२: [[शृंगेरी शारदा पीठम|श्रृंगेरी पीठ]],
३: [[द्वारिका पीठ|द्वारिका शारदा पीठ]] और
४: [[गोवर्धन मठ|पुरी गोवर्धन पीठ]]।
इन्होंने अनेक विधर्मियों को भी अपने धर्म में दीक्षित किया था।<ref name="j118">{{cite web | title=Google Books | website=Google | url=https://www.google.co.in/books/edition/Aadi_Shankaracharya/al26EAAAQBAJ?hl=hi&gbpv=1&dq=%E0%A4%86%E0%A4%A6%E0%A4%BF+%E0%A4%B6%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF&pg=PR15&printsec=frontcover | language=hi | access-date=2026-10-17}}</ref> ये भगवान् [[शिव|शंकर]] के [[अवतार]] माने जाते हैं। इन्होंने [[ब्रह्मसूत्र|ब्रह्मसूत्रों]] की बहुत विशद और रोचक व्याख्या की है।<ref>{{Cite web|url=https://www.jagran.com/news/national-adi-shankaracharya-jayanti-that-amazing-journey-of-adi-shankaracharya-the-bearer-of-culture-fills-with-wonder-jagran-special-20227747.html|title=Adi Shankaracharya Praktotsav: आश्चर्य से भर देती है आदि शंकराचार्य की वह अद्भुत यात्रा|last=|first=|date=|website=jagran|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=}}</ref>
उन के विचारोपदेश [[आत्मा]] और [[परमात्मा]] की एकरूपता पर आधारित हैं जिस के अनुसार परमात्मा एक ही समय में [[सगुण]] और [[निर्गुण ब्रह्म|निर्गुण]] दोनों ही स्वरूपों में रहता है। [[स्मार्त संप्रदाय]] में आचार्य शंकर को [[शिव]] का अवतार माना जाता है। इन्होंने [[ईशावास्य उपनिषद्|ईश]], [[केनोपनिषद|केन]], [[कठ उपनिषद्|कठ]], [[प्रश्नोपनिषद|प्रश्न]], [[मुण्डकोपनिषद्|मुण्डक]], [[माण्डूक्योपनिषद|मांडूक्य]], [[ऐतरेय उपनिषद|ऐतरेय]], [[तैत्तिरीयोपनिषद|तैत्तिरीय]], [[बृहदारण्यक उपनिषद्|बृहदारण्यक]] और [[छांदोग्य उपनिषद|छान्दोग्योपनिषद्]] पर [[भाष्य]] लिखा। [[वेद|वेदों]] में लिखे ज्ञान को एकमात्र [[ईश्वर]] को संबोधित समझा और उस का प्रचार तथा वार्ता पूरे [[भारत]]वर्ष में की। उस समय वेदों की समझ के बारे में मतभेद होने पर उत्पन्न [[चार्वाक]], [[जैन धर्म|जैन]] आदि मतों को शास्त्रार्थों द्वारा खण्डित किया।
[[कलियुग]] के प्रथम चरण में विलुप्त तथा विकृत वैदिक ज्ञान विज्ञान को उद्भासित और विशुद्ध कर वैदिक वाङ्मय को दार्शनिक, व्यावहारिक, वैज्ञानिक धरातल पर समृद्ध करने वाले एवं राजर्षि सुधन्वा को सार्वभौम सम्राट् ख्यापित करने वाले चतुराम्नाय चतुष्पीठ संस्थापक नित्य तथा नैमित्तिक युग्मावतार श्रीशिवस्वरुप भगवत्पाद शंकराचार्य की अमोघदृष्टि तथा अद्भुत कृति सर्वथा स्तुत्य है।
सतयुग की अपेक्षा त्रेता में, त्रेता की अपेक्षा द्वापर में तथा द्वापर की अपेक्षा कलि में मनुष्यों की प्रज्ञाशक्ति तथा प्राणशक्ति एवं धर्म औेर आध्यात्म का ह्रास सुनिश्चित है। यही कारण है कि कृतयुग में शिवावतार भगवान् दक्षिणामूर्ति ने केवल मौन व्याख्यान से शिष्यों के संशयों का निवारण किया। त्रेता में [[दत्तात्रेय|गुरु दत्तात्रेय]] जिन को [[ब्रह्मा]], [[विष्णु]] और [[शिव|महेश]] भगवान् द्वारा ज्ञान प्रदान किया गया था, उन्होंने सूत्रात्मक वाक्यों के द्वारा अनुगतों का उद्धार किया। द्वापर में नारायणावतार भगवान् कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने वेदों का विभाग कर महाभारत तथा पुराणादि की एवं ब्रह्मसूत्रों की संरचना कर एवं शुक, लोमहर्षण आदि कथाव्यासों को प्रशिक्षित कर धर्म तथा आध्यात्म को उज्जीवित रखा। कलियुग में भगवत्पाद श्रीमद् शंकराचार्य ने भाष्य, प्रकरण तथा स्तोत्रग्रन्थों की संरचना कर , विधर्मियों पन्थायियों एवं मीमांसकादि से शास्त्रार्थ, परकाय प्रवेश कर, नारदकुण्ड से अर्चाविग्रह श्रीबदरीनाथ एवं भूगर्भ से अर्चाविग्रह श्रीजगन्नाथ दारुब्रह्म को प्रकट कर तथा प्रस्थापित कर, सुधन्वा सार्वभौम को राजसिंहासन समर्पित कर एवं चतुराम्नाय - चतुष्पीठों की स्थापना कर अहर्निश अथक परिश्रम के द्वारा धर्म और अध्यात्म को उज्जीवित तथा प्रतिष्ठित किया।
व्यासपीठ के पोषक राजपीठ के परिपालक धर्माचार्यों को श्रीभगवत्पाद ने नीतिशास्त्र, कुलाचार तथा श्रौत स्मार्त कर्म, उपासना तथा ज्ञानकाण्ड के यथायोग्य प्रचार प्रसार की भावना से अपने अधिकार क्षेत्र में परिभ्रमण का उपदेश दिया। उन्होंने धर्मराज्य की स्थापना के लिये व्यासपीठ तथा राजपीठ में सद्भावपूर्ण सम्वाद के माध्यम से सामंजस्य बनाये रखने की प्रेरणा प्रदान की। ब्रह्मतेज तथा क्षात्रबल के साहचर्य से सर्वसुमंगल कालयोग की सिद्धि को सुनिश्चित मान कर कालगर्भित तथा कालातीतदर्शी आचार्य शंकर ने व्यासपीठ तथा राजपीठ का शोधन कर दोनों में सैद्धान्तिक सामंजस्य साधा।
दशनामी गोस्वामी में सरस्वती, गिरि, पुरी, वन, योगी, पर्वत, अरण्य, सागर, तीर्थ, आश्रम, भारती उपनाम वाले योगी, गोस्वामी इन के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी माने जाते हैं और उन के प्रमुख सामाजिक संगठन का नाम "अंतरराष्ट्रीय जगत्गुरु दशनाम गोस्वामी एकता अखाड़ा परिषद" है। आचार्य शंकर ने पूरे भारत में मंदिरों और शक्तिपीठों की पुनः स्थापना की। नील पर्वत पर स्थित चंडी देवी मंदिर इन्हीं द्वारा स्थापित किया माना जाता है। शिवालिक पर्वत शृंखला की पहाड़ियों के मध्य स्थित माता शाकम्भरी देवी शक्तिपीठ में जा कर इन्होंने पूजा अर्चना की और शाकंभरी देवी के साथ तीन देवियाँ भीमा, भ्रामरी और शताक्षी देवी की प्रतिमाओं को स्थापित किया। कामाक्षी देवी मंदिर भी इन्हीं द्वारा स्थापित है जिस से उस युग में धर्म का बढ़ चढ़कर प्रसार हुआ था।
==जीवनचरित==
आचार्य शंकर का जन्म ५०७ ई.स.पू. में [[केरल]] में [[कालड़ी]] अथवा 'काषल' नामक ग्राम में हुआ था। आचार्य शंकर के पिता का नाम शिवगुरु भट्ट और माता का नाम अयम्बा था। बहुत दिन तक सपत्नीक शिव को आराधना करने के अनंतर शिवगुरु ने पुत्ररत्न पाया था, अत: उस का नाम शंकर रखा। जब ये तीन ही वर्ष के थे तब इनके पिता का देहांत हो गया। ये बड़े ही मेधावी तथा प्रतिभाशाली थे। ६ वर्ष की अवस्था में ही ये प्रकांड पंडित हो गए थे और ८ वर्ष की अवस्था में इन्होंने संन्यास ग्रहण किया था। इन के संन्यास ग्रहण करने के समय की कथा बड़ी विचित्र है। कहते हैं कि माता एकमात्र पुत्र को [[संन्यास]]ी बनने की आज्ञा नहीं देती थीं। तब एक दिन नदी किनारे एक मकर ने आचार्य शंकर का पैर पकड़ लिया तब इस समय का फायदा उठाते आचार्य शंकर ने अपनी माता से कहा "मुझे सन्यास लेने की आज्ञा दो नहीं तो यह मकर मुझे खा जायेगा", इस से भयभीत होकर माता ने तुरंत इन्हें संन्यासी होने की आज्ञा प्रदान की; और आश्चर्य है कि, जैसे ही माता ने आज्ञा दी वैसे ही तुरन्त मकर ने आचार्य शंकर का पैर छोड़ दिया और इन्होंने [[गोविन्द नाथ]] से संन्यास ग्रहण किया।<ref>{{Cite web|url=https://hindi.webdunia.com/sanatan-dharma-mahapurush/adi-shankaracharya-119050400029_1.html|title=आदि शंकराचार्य के जन्म के बारे में फैला भ्रम, जानिए सचाई|last=|first=|date=|website=Hindi Webdunia|archive-url=https://web.archive.org/web/20190725132851/http://hindi.webdunia.com/sanatan-dharma-mahapurush/adi-shankaracharya-119050400029_1.html|archive-date=25 जुलाई 2019|dead-url=|access-date=|url-status=dead}}</ref>
पहले ये कुछ दिनों तक [[काशी]] में रहे, और तब इन्होंने विजिलबिंदु के तालवन में आचार्य [[मण्डन मिश्र]] को सपत्नीक [[शास्त्रार्थ]] में परास्त किया। इन्होंने समस्त भारतवर्ष में भ्रमण कर के [[बौद्ध धर्म|वैदिक]] धर्म को पुनरुज्जीवित किया।
३२ वर्ष की अल्प आयु में सम्वत् ४७५ ई.पू. में [[केदारनाथ कस्बा|केदारनाथ]] के समीप शिवलोक गमन कर गए थे।
== काल ==
[[भारत की संस्कृति|भारतीय संस्कृति]] के विकास एवं संरक्षण में आद्य शंकराचार्य का विशेष योगदान है। राजा सुधन्वा चौहान, जो कि आचार्य शंकर के समकालीन थे, के ताम्रपत्र में आचार्य शंकर का जन्म युधिष्ठिराब्द २६३१ शक् (५०७ ई०पू०) तथा शिवलोक गमन युधिष्ठिराब्द २६६३ शक् (४७५ ई०पू०) सर्वमान्य है। इस के प्रमाण सभी शांकर मठों में मिलते हैं।
आचार्य शंकर ने जो चार पीठ स्थापित किये, उन के काल निर्धारण में उत्थापित की गई भ्रांतियाँ -
१: उत्तर दिशा में बदरिकाश्रम में ज्योतिर्पीठ : स्थापना-युधिष्ठिर संवत् 2641-2645
२: पश्चिम में द्वारिका शारदापीठ- यु.सं. 2648
३: दक्षिण शृंगेरीपीठ- यु.सं. 2648
४: पूर्व दिशा जगन्नाथपुरी गोवर्द्धनपीठ - यु.सं. 2655
आचार्य शंकर अंतिम दिनों में कांची कामकोटि पीठ २६५८ यु.सं. में निवास कर रहे थे।
शारदापीठ में लिखा है -
: "युधिष्ठिर शके २६३१ वैशाखशुक्लापंचम्यां श्रीमच्ठछंकरावतार:।
: ……तदनु २६६३ कार्तिकशुक्लपूर्णिमायां ……श्रीमच्छंकरभगवत्पूज्यपादा…… निजदेहेनैव…… निजधाम प्राविशन्निति।
अर्थात् युधिष्ठिर संवत् २६३१ में वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को श्रीशंकराचार्य का जन्म हुआ और युधि.सं. २६६३ कार्तिकशुक्ल पूर्णिमा को देहत्याग हुआ। युधिष्ठिर संवत् ३१३९ ई पू में प्रवर्तित हुआ था।
राजा सुधन्वा के ताम्रपत्र का लेख द्वारिकापीठ के एक आचार्य ने "विमर्श" नामक ग्रन्थ में प्रकाशित किया है -
:'निखिलयोगिचक्रवर्त्ती श्रीमच्छंकरभगवत्पादपद्मयोर्भ्र
:मरायमाणसुधन्वनो मम सोमवंशचूडामणियुधिष्ठिरपारम्पर्
: यपरिप्राप्तभारतवर्षस्यांजलिबद्धपूर्वकेयं राजन्यस्य विज्ञप्ति:………युधिष्ठिरशके २६६३ आश्विन शुक्ल १५।
एक अन्य ताम्रपत्र संस्कृतचंद्रिका (कोल्हापुर) के खण्ड 14, संख्या 2 - 3 में प्रकाशित हुआ था। उस के अनुसार गुजरात के राजा सर्वजित् वर्मा ने द्वारिकाशारदापीठ के प्रथम आचार्य सुरेश्वराचार्य (पूर्व नाम - मंडनमिश्र) से लेकर 29वें आचार्य श्री नृसिंहाश्रम तक सभी आचार्यों के विवरण हैं। इस में प्रथम आचार्य का समय 2649 युधि. सं. दिया है।
सर्वज्ञसदाशिवकृत "पुण्यश्लोकमंजरी" आत्मबोध द्वारा रचित "गुरुरत्नमालिका" तथा उसकी टीका "सुषमा"में कुछ श्लोक हैं।
उन में एक श्लोक इस प्रकार है -
:तिष्ये प्रयात्यनलशेवधिबाणनेत्रे, ये नन्दने दिनमणावुदगध्वभाजि ।
:रात्रोदितेरुडुविनिर्गतमंगलग्नेत्याहूतवान् शिवगुरु: स च शंकरेति ॥
अर्थ- अनल=3 , शेवधि=निधि=9, बाण=5,नेत्र=2 ,
अर्थात् 3952 | 'अंकानां वामतोगति:' इस नियमसे अंक विपरीत क्रम से रखने पर 2593 कलिसंवत् बना|
[कलिसंवत् 3102 B.C. में प्रारम्भ हुआ ]
तदनुसार 3102-2593=509 BC में आदि शंकराचार्य जी का जन्म वर्ष निश्चित होता है।
कुमारिल भट्ट जो कि शंकराचार्य के समकालीन थे, जैन ग्रंथ जिनविजय में लिखा है -
:ऋषिर्वारस्तथा पूर्ण मर्त्याक्षौ वाममेलनात्।
:एकीकृत्य लभेतांक:क्रोधीस्यात्तत्र वत्सर:। ।
:भट्टाचार्यस्य कुमारस्य कर्मकाण्डैकवादिन:।
:ज्ञेय: प्रादुर्भवस्तस्मिन् वर्षे यौधिष्ठिरे शके।।
जैन लोग युधिष्ठिरसंवत् को ४६८ कलिसंवत् से प्रारम्भ हुआ मानते हैं।
श्लोकार्थ- ऋषि=7,वार=7,पूर्ण=0, मर्त्याक्षौ=2,
7702 "अंकानांवामतोगति"
2077 युधिष्ठिर संवत् आया
अर्थात् 557 B.C.
कुमारिल 48 वर्ष बड़े थे => 509 B.C. श्रीशंकराचार्य जी का जन्मवर्ष सिद्ध होता है।
"जिनविजय" में आचार्य शंकर के देहावसान के विषय में लिखा है -
:ऋषिर्बाणस्तथा भूमिर्मर्त्याक्षौ वांममेलनात्।
:एकत्वेन लभेतांकस्ताम्राक्षस्तत्र वत्सर: ॥
2157 यु. सं. 476 B.C. में आचार्य शंकर ब्रह्मलीन हुए :
बृहत्शंकरविजय में चित्सुखाचार्य (शंकराचार्य के सह अध्यायी) ने लिखा है -
:षड्विंशकेशतके श्रीमद् युधिष्ठिरशकस्य वै।
:एकत्रिंशेऽथ वर्षेतु हायने नन्दने शुभे॥
:………………………………|
:प्रासूत तन्वंसाध्वी गिरिजेव षडाननम्॥
यहाँ युधिष्ठिर शक 2631 में अर्थात् 508 ई. पू. में आचार्य का जन्म संवत् बताया गया है।
वर्तमान इतिहासकार जिन शंकराचार्य को 788 - 820 ई. का बताते हैं वे वस्तुत: कामकोटि पीठके 38वें आचार्य अभिनवशंकर जी थे। वे 787 से 840 ईसवीसन् तक विद्यमान थे। वे चिदम्बरम वासी श्रीविश्वजी के पुत्र थे। इन्होंने कश्मीर के वाक्पतिभट्ट को शास्त्रार्थ में पराजित किया और ३० वर्ष तक मठ के आचार्य पद पर रहे।
== प्रमुख कार्य ==
शंकर दिग्विजय, शंकरविजयविलास, शंकरजय आदि ग्रन्थों में उन के जीवन से सम्बन्धित तथ्य उद्घाटित होते हैं। दक्षिण भारत के [[केरल]] राज्य (तत्कालीन [[मालाबार]]प्रांत) में आद्य शंकराचार्य जी का जन्म हुआ था। उनके पिता शिव गुरु तैत्तिरीय शाखा के यजुर्वेदी भट्ट [[ब्राह्मण]] थे। भारतीय प्राच्य परम्परा में आचार्य शंकर को [[शिव]] का अवतार स्वीकार किया जाता है। कुछ उन के जीवन के चमत्कारिक तथ्य सामने आते हैं, जिस से प्रतीत होता है कि वास्तव में आद्य शंकराचार्य शिव के अवतार थे। ८ वर्ष की अवस्था में आचार्य गोविन्द नाथ के शिष्यत्व को ग्रहण कर संन्यासी हो जाना, पुन: [[वाराणसी]] से होते हुए बद्रिकाश्रम तक की पैदल यात्रा करना, सोलह वर्ष की अवस्था में बद्रीकाश्रम पहुंच कर [[ब्रह्मसूत्र]] पर भाष्य लिखना, सम्पूर्ण भारत वर्ष में भ्रमण कर अद्वैत वेदान्त का प्रचार करना, [[दरभंगा]] में जाकर आचार्य [[मण्डन मिश्र]] से शास्त्रार्थ कर वेदान्त की दीक्षा देना तथा आचार्य मण्डन मिश्र को संन्यास धारण कराना, भारतवर्ष में प्रचलित तत्कालीन कुरीतियों को दूर कर समभावदर्शी धर्म की स्थापना करना - इत्यादि कार्य इन के महत्त्व को और बढ़ा देता है। दशनाम गोस्वामी समाज (सरस्वती, गिरि, पुरी, बन, भारती, तीर्थ, सागर, अरण्य, पर्वत और आश्रम) की संस्थापना कर, सनातन धर्म गुरु के रूप में हिंदुओं के प्रचार प्रसार व रक्षा का कार्य सौंपा और उन्हें अपना आध्यात्मिक उत्तराधिकारी भी बताया।
=== मठ ===
चार धार्मिक मठों में दक्षिण के [[शृंगेरी]] शंकराचार्यपीठ, पूर्व ([[ओडिशा]]) [[जगन्नाथ मन्दिर, पुरी|जगन्नाथपुरी]] में गोवर्धनपीठ, पश्चिम [[द्वारका|द्वारिका]] में शारदामठ तथा [[बद्रीनाथ मन्दिर|बद्रिकाश्रम]] में ज्योतिर्पीठ भारत की एकात्मकता को आज भी दिग्दर्शित कर रहा है। कुछ लोग [[शृंगेरी]] को शारदापीठ तथा [[गुजरात]] के द्वारिका में मठ को काली मठ कहते हैं। उक्त सभी कार्य को सम्पादित कर ३२ वर्ष की आयु में ब्रह्मलीन हुए।
== शास्त्रीय प्रमाण ==
:'' सर्गे प्राथमिके प्रयाति विरतिं मार्गे स्थिते दौर्गते
:'' स्वर्गे दुर्गमतामुपेयुषि भृशं दुर्गेऽपवर्गे सति।
:'' वर्गे देहभृतां निसर्ग मलिने जातोपसर्गेऽखिले
:'' सर्गे विश्वसृजस्तदीयवपुषा भर्गोऽवतीर्णो भुवि। ।
अर्थ:- " सनातन संस्कृति के पुरोधा सनकादि महर्षियों का प्राथमिक सर्ग जब उपरति को प्राप्त हो गया , अभ्युदय तथा नि:श्रेयसप्रद वैदिक सन्मार्ग की दुर्गति होने लगी , फलस्वरुप स्वर्ग दुर्गम होने लगा ,अपवर्ग अगम हो गया , तब इस भूतल पर भगवान भर्ग ( शिव ) शंकर रूप से अवतीर्ण हुऐ। "
भगवान शिव द्वारा द्वारा कलियुग के प्रथम चरण में अपने चार शिष्यों के साथ जगदगुरु आचार्य शंकर के रूप में अवतार लेने का वर्णन पुराणशास्त्र में भी वर्णित हैं जो इस प्रकार हैं :-
: कल्यब्दे द्विसहस्त्रान्ते लोकानुग्रहकाम्यया।
: चतुर्भि: सह शिष्यैस्तु शंकरोऽवतरिष्यति। । ( भविष्योत्तर पुराण ३६ )
अर्थ :- " कलि के दो सहस्त्र वर्ष व्यतीत होने के पश्चात लोक अनुग्रह की कामना से श्री सर्वेश्वर शिव अपने चार शिष्यों के साथ अवतार धारण कर अवतरित होते हैं। "
: निन्दन्ति वेदविद्यांच द्विजा: कर्माणि वै कलौ।
: कलौ देवो महादेव: शंकरो नीललोहित:। ।
: प्रकाशते प्रतिष्ठार्थं धर्मस्य विकृताकृति:।
: ये तं विप्रा निषेवन्ते येन केनापि शंकरम्। ।
: कलिदोषान्विनिर्जित्य प्रयान्ति परमं पदम्। (लिंगपुराण ४०. २०-२१.१/२)
अर्थ:- " कलि में ब्राह्मण वेदविद्या और वैदिक कर्मों की जब निन्दा करने लगते हैं ; रुद्र संज्ञक विकटरुप नीललोहित महादेव धर्म की प्रतिष्ठा के लिये अवतीर्ण होते हैं। जो ब्राह्मणादि जिस किसी उपाय से उनका आस्था सहित अनुसरण सेवन करते हैं ; वे परमगति को प्राप्त होते हैं। "
: कलौ रुद्रो महादेवो लोकानामीश्वर: पर:।
: न देवता भवेन्नृणां देवतानांच दैवतम्। ।
: करिष्यत्यवताराणि शंकरो नीललोहित:।
: श्रौतस्मार्त्तप्रतिष्ठार्थं भक्तानां हितकाम्यया। ।
: उपदेक्ष्यति तज्ज्ञानं शिष्याणां ब्रह्मासंज्ञितम।
: सर्ववेदान्तसार हि धर्मान वेदनदिर्शितान। ।
: ये तं विप्रा निषेवन्ते येन केनोपचारत:।
: विजित्य कलिजान दोषान यान्ति ते परमं पदम। । ( कूर्मपुराण १.२८.३२-३४)
अर्थ:- " कलि में देवों के देव महादेव लोकों के परमेश्वर रुद्र शिव मनुष्यों के उद्धार के लिये उन भक्तों की हित की कामना से श्रौत-स्मार्त -प्रतिपादित धर्म की प्रतिष्ठा के लिये विविध अवतारों को ग्रहण करेंगें। वे शिष्यों को वेदप्रतिपादित सर्ववेदान्तसार ब्रह्मज्ञानरुप मोक्ष धर्मों का उपदेश करेंगें। जो ब्राह्मण जिस किसी भी प्रकार उनका सेवन करते हैं ; वे कलिप्रभव दोषों को जीतकर परमपद को प्राप्त करते हैं। "
: व्याकुर्वन् व्याससूत्रार्थं श्रुतेरर्थं यथोचिवान्।
: श्रुतेर्न्याय: स एवार्थ: शंकर: सवितानन:। । ( शिवपुराण-रुद्रखण्ड ७.१)
अर्थ:- "सूर्यसदृश प्रतापी श्री शिवावतार आचार्य शंकर श्री बादरायण - वेदव्यासविरचित ब्रह्मसूत्रों पर श्रुतिसम्मत युक्तियुक्त भाष्य संरचना करते हैं। "
== महत्त्व ==
शंकराचार्य के विषय में कहा गया है-
: ''अष्टवर्षेचतुर्वेदी, द्वादशेसर्वशास्त्रवित् षोडशेकृतवान्भाष्यम्द्वात्रिंशेमुनिरभ्यगात्
अर्थात् आठ वर्ष की आयु में चारों वेदों में निष्णात हो गए, बारह वर्ष की आयु में सभी शास्त्रों में पारंगत, सोलह वर्ष की आयु में शांकरभाष्यतथा बत्तीस वर्ष की आयु में शरीर त्याग दिया। ब्रह्मसूत्र के ऊपर शांकरभाष्यकी रचना कर विश्व को एक सूत्र में बांधने का प्रयास भी शंकराचार्य के द्वारा किया गया है, जो कि सामान्य मानव से सम्भव नहीं है। शंकराचार्य के दर्शन में सगुण ब्रह्म तथा निर्गुण ब्रह्म दोनों का हम दर्शन, कर सकते हैं। निर्गुण ब्रह्म उनका निराकार ईश्वर है तथा सगुण ब्रह्म साकार ईश्वर है। जीव अज्ञान व्यष्टि की उपाधि से युक्त है। ''तत्त्वमसि'' तुम ही ब्रह्म हो; ''अहं ब्रह्मास्मि'' मैं ही ब्रह्म हूं; 'अयामात्मा ब्रह्म' यह आत्मा ही ब्रह्म है; इन बृहदारण्यकोपनिषद् तथा छान्दोग्योपनिषद वाक्यों के द्वारा इस जीवात्मा को निराकार ब्रह्म से अभिन्न स्थापित करने का प्रयत्न शंकराचार्य जी ने किया है। ब्रह्म को जगत् के उत्पत्ति, स्थिति तथा प्रलय का निमित्त कारण बताए हैं। ब्रह्म सत् (त्रिकालाबाधित) नित्य, चैतन्यस्वरूप तथा आनंद स्वरूप है। ऐसा उन्होंने स्वीकार किया है। जीवात्मा को भी सत् स्वरूप, चैतन्य स्वरूप तथा आनंद स्वरूप स्वीकार किया है। जगत् के स्वरूप को बताते हुए कहते हैं कि -
: ''नामरूपाभ्यां व्याकृतस्य अनेककर्तृभोक्तृसंयुक्तस्य प्रतिनियत देशकालनिमित्तक्रियाफलाश्रयस्य मनसापि अचिन्त्यरचनारूपस्य जन्मस्थितिभंगंयत:।
अर्थात् नाम एवं रूप से व्याकृत, अनेक कर्ता, अनेक भोक्ता से संयुक्त, जिसमें देश, काल, निमित्त और क्रियाफल भी नियत हैं। जिस जगत् की सृष्टि को मन से भी कल्पना नहीं कर सकते, उस जगत् की उत्पत्ति, स्थिति तथा लय जिससे होता है, उसको ब्रह्म कहते हैं। सम्पूर्ण जगत् के जीवों को ब्रह्म के रूप में स्वीकार करना, तथा तर्क आदि के द्वारा उसके सिद्ध कर देना, आदि शंकराचार्य की विशेषता रही है। इस प्रकार शंकराचार्य के व्यक्तित्व तथा कृतित्वके मूल्यांकन से हम कह सकते हैं कि राष्ट्र को एक सूत्र में बांधने का कार्य शंकराचार्य जी ने सर्वतोभावेनकिया था। भारतीय संस्कृति के विस्तार में भी इनका अमूल्य योगदान रहा है।
== शास्त्रार्थ ==
[[चित्र:AdiShankara1.jpg|अंगूठाकार|दाएँ|आदि शंकराचाय जी की मूर्ति]]
आदि शंकराचार्य ने बौद्ध धर्म सहित अपने समय के विभिन्न दार्शनिक विचारधाराओं से धार्मिक वाद-विवाद किया और शास्त्रार्थ में कुछ उल्लेखनीय लोगों को सार्वजनिक रूप से हराया।<ref>https://www.google.co.uk/books/edition/Science_of_the_Mystical/ULvtDwAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=adi+shankara+defeated+buddhism&pg=PT59&printsec=frontcover Science of the Mystical: An Eye Opener to the Scientific Substratum in Spirituality</ref>
वे [[केरल]] से लंबी पदयात्रा करके [[नर्मदा नदी]] के तट पर स्थित ओंकारनाथ पहुँचे। वहाँ गुरु गोविंद<nowiki/>पाद से [[योग]] शिक्षा तथा अद्वैत ब्रह्म ज्ञान प्राप्त करने लगे। तीन वर्ष तक आचार्य शंकर अद्वैत तत्त्व की साधना करते रहे। तत्पश्चात गुरु आज्ञा से वे [[काशी विश्वनाथ मन्दिर|काशी विश्वनाथ जी]] के दर्शन के लिए निकल पड़े। जब वे [[काशी]] जा रहे थे कि एक चांडाल उनकी राह में आ गया। उन्होंने क्रोधित हो चांडाल को वहाँ से हट जाने के लिए कहा तो चांडाल बोला- ‘हे मुनि! आप शरीरों में रहने वाले एक परमात्मा की उपेक्षा कर रहे हैं, इसलिए आप अब्राह्मण हैं। अतएव मेरे मार्ग से आप हट जायें।’ चांडाल की देववाणी सुन आचार्य शंकर ने अति प्रभावित होकर कहा-‘आपने मुझे ज्ञान दिया है, अत: आप मेरे गुरु हुए।’ यह कहकर आचार्य शंकर ने उन्हें प्रणाम किया तो चांडाल के स्थान पर शिव तथा चार देवों के उन्हें दर्शन हुए। काशी में कुछ दिन रहने के दौरान वे माहिष्मति नगरी (बिहार का [[महिषी]]) में आचार्य मंडन मिश्र से मिलने गए। आचार्य मिश्र के घर जो पालतू मैना थी वह भी वेद मंत्रों का उच्चारण करती थी। मिश्र जी के घर जाकर आचार्य शंकर ने उन्हें शास्त्रार्थ में हरा दिया। पति आचार्य मिश्र को हारता देख पत्नी आचार्य शंकर से बोलीं- ‘महात्मन! अभी आपने आधे ही अंग को जीता है। अपनी युक्तियों से मुझे पराजित करके ही आप विजयी कहला सकेंगे।’
तब मिश्र जी की पत्नी भारती ने [[कामशास्त्र]] पर प्रश्न करने प्रारम्भ किए। किंतु आचार्य शंकर तो [[ब्रह्मचारी|बाल-ब्रह्मचारी]] थे, अत: काम से संबंधित उनके प्रश्नों के उत्तर कहाँ से देते? इस पर उन्होंने भारती देवी से कुछ दिनों का समय माँगा तथा पर-काया में प्रवेश कर उस विषय की सारी जानकारी प्राप्त की। इसके बाद आचार्य शंकर ने भारती को भी शास्त्रार्थ में हरा दिया। [[काशी]] में प्रवास के दौरान उन्होंने और भी बड़े-बड़े ज्ञानी पंडितों को शास्त्रार्थ में परास्त किया और गुरु पद पर प्रतिष्ठित हुए। अनेक शिष्यों ने उनसे दीक्षा ग्रहण की। इसके बाद वे धर्म का प्रचार करने लगे। वेदांत प्रचार में संलग्न रहकर उन्होंने अनेक ग्रंथों की रचना भी की। अद्वैत ब्रह्मवादी आचार्य शंकर केवल निर्विशेष ब्रह्म को सत्य मानते थे और ब्रह्मज्ञान में ही निमग्न रहते थे। एक बार वे ब्रह्म मुहूर्त में अपने शिष्यों के साथ एक अति सँकरी गली से स्नान हेतु [[मणिकर्णिका]] घाट जा रहे थे। रास्ते में एक युवती अपने मृत पति का सिर गोद में लिए विलाप करती हुई बैठी थी। आचार्य शंकर के शिष्यों ने उस स्त्री से अपने पति के शव को हटाकर रास्ता देने की प्रार्थना की, लेकिन वह स्त्री उसे अनसुना कर रुदन करती रही। तब स्वयं आचार्य ने उससे वह शव हटाने का अनुरोध किया। उनका आग्रह सुनकर वह स्त्री कहने लगी- ‘हे संन्यासी! आप मुझसे बार-बार यह शव हटाने के लिए कह रहे हैं। आप इस शव को ही हट जाने के लिए क्यों नहीं कहते?’ यह सुनकर आचार्य बोले- ‘हे देवी! आप शोक में कदाचित यह भी भूल गई कि शव में स्वयं हटने की शक्ति ही नहीं है।’ स्त्री ने तुरंत उत्तर दिया- ‘महात्मन् आपकी दृष्टि में तो शक्ति निरपेक्ष ब्रह्म ही जगत का कर्ता है। फिर शक्ति के बिना यह शव क्यों नहीं हट सकता?’ उस स्त्री का ऐसा गंभीर, ज्ञानमय, रहस्यपूर्ण वाक्य सुनकर आचार्य वहीं बैठ गए। उन्हें समाधि लग गई। अंत:चक्षु में उन्होंने देखा- सर्वत्र आद्याशक्ति महामाया लीला विलाप कर रही हैं। उनका हृदय अनिवर्चनीय आनंद से भर गया और मुख से मातृ वंदना की शब्दमयी धारा स्तोत्र बनकर फूट पड़ी।
अब आचार्य शंकर ऐसे महासागर बन गए, जिसमें अद्वैतवाद, शुद्धाद्वैतवाद, विशिष्टा द्वैतवाद, निर्गुण ब्रह्म ज्ञान के साथ सगुण साकार की भक्ति की धाराएँ एक साथ हिलोरें लेने लगीं। उन्होंने अनुभव किया कि ज्ञान की अद्वैत भूमि पर जो परमात्मा निर्गुण निराकार ब्रह्म है, वही द्वैत की भूमि पर सगुण साकार है। उन्होंने निर्गुण और सगुण दोनों का समर्थन करके निर्गुण तक पहुँचने के लिए सगुण की उपासना को अपरिहार्य सीढ़ी माना। ज्ञान और भक्ति की मिलन भूमि पर यह भी अनुभव किया कि अद्वैत ज्ञान ही सभी साधनाओं की परम उपलब्धि है। उन्होंने ‘ब्रह्मं सत्यं जगन्मिथ्या’ का उद्घोष भी किया और शिव, पार्वती, गणेश, विष्णु आदि के भक्तिरसपूर्ण स्तोत्र भी रचे, ‘सौन्दर्य लहरी’, ‘विवेक चूड़ामणि’ जैसे श्रेष्ठतम ग्रंथों की रचना की। प्रस्थान त्रयी के भष्य भी लिखे। अपने अकाट्य तर्कों से शैव-शाक्त-वैष्णवों का द्वंद्व समाप्त किया और पंचदेवोपासना का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने आसेतु हिमालय संपूर्ण भरत की यात्रा की और चार मठों की स्थापना करके पूरे देश को सांस्कृतिक, धार्मिक, दार्शनिक, आध्यात्मिक तथा भौगोलिक एकता के अविच्छिन्न सूत्र में बाँध दिया। उन्होंने समस्त मानव जाति को जीवन्मुक्ति का एक सूत्र दिया-
: ''दुर्जन: सज्जनो भूयात सज्जन: शांतिमाप्नुयात्।
: ''शान्तो मुच्येत बंधेम्यो मुक्त: चान्यान् विमोच्येत्॥
अर्थात् दुर्जन सज्जन बनें, सज्जन शांति बनें। शांतजन बंधनों से मुक्त हों और मुक्त अन्य जनों को मुक्त करें। अपना प्रयोजन पूरा होने बाद तैंतीस वर्ष की अल्पायु में उन्होंने इस नश्वर देह को छोड़ दिया।
== दर्शन और विचार ==
{{main|अद्वैत वेदान्त}}
=== संक्षेप में अद्वैत ===
शंकराचार्य एक महान समन्वयवादी थे। उन्हें सनातन धर्म को पुनः स्थापित एवं प्रतिष्ठित करने का श्रेय दिया जाता है। एक तरफ उन्होने अद्वैत चिन्तन को पुनर्जीवित करके सनातन हिन्दू धर्म के दार्शनिक आधार को सुदृढ़ किया, तो दूसरी तरफ उन्होने जनसामान्य में प्रचलित मूर्तिपूजा का औचित्य सिद्ध करने का भी प्रयास किया।
आदि शकराचार्य जी महाराज की 108 फूट की मूर्ति ओम्कारेश्वर जिला खंडवा मध्यप्रदेश में स्थापित की जा रही है
कई यूरोपीय विद्वानों का हवाला देते हुए, [[Lucian Blaga]] समझता है कि आदि शंकराचार्य 'सभी समय का सबसे बड़े तत्वमीमांसा का विद्वान है'।<ref>लुचीयान बलागा, धर्म के दर्शन का कोर्स, पेरिस, अल्बा -यूलिया, फरोनदे का प्रकाशन संस्था, एक हजार नौ सौ नब्बे चार, उनहत्तर का पृष्ठ। (ISBN 973-963-1215)</ref> आदि शंकराचार्य ने कहा कि ज्ञान के दो प्रकार के होते हैं। एक पराविद्या कहा जाता है और अन्य में अपराविद्या कहा जाता है। पहला सगुण ब्रह्म (ईश्वर) होता है लेकिन दूसरा निर्गुण ब्रह्म होता है।<ref>मीर्चा ईटु, भारतीय दर्शन और भारतीय धर्म, ब्राशोव, लैटिन पूरबी का प्रकाशन संस्था, दो हज़ार चार, सड़सठ और अड़सठ के पृष्ठों। (ISBN 973-9338-70-4)</ref>
;शंकर के अद्वैत का दर्शन का सार-
* ब्रह्म और जीव मूलतः और तत्वतः एक हैं। हमे जो भी अंतर नज़र आता है उसका कारण अज्ञान है।
* जीव की मुक्ति के लिये ज्ञान आवश्यक है।
* जीव की मुक्ति ब्रह्म में लीन हो जाने में है।
==बौद्ध धर्म का पतन==
उन्होंने अपने समय में अस्तित्वहीन रीति-रिवाजों, ईश्वरविहीन बौद्ध धर्म और कई अन्य परंपराओं के प्रतिकारक रूप का विरोध किया।
अद्वैत परंपरा के अनुयायियों का दावा है कि वह "बौद्धों को दूर भगाने" के लिए भी जिम्मेदार थे। ऐतिहासिक रूप से भारत में बौद्ध धर्म का पतन शंकर या यहां तक कि [[कुमारिल भट्ट]] (जिन्होंने एक परंपरा के अनुसार "बौद्धों को वाद-विवाद में हराकर" उनका रंग फीका किया था) के बाद लंबे समय तक जाना जाता है, अफगानिस्तान में मुस्लिम आक्रमण से कुछ समय पहले (पहले गांधार)। परंपरा के अनुसार, उन्होंने रूढ़िवादी हिंदू परंपराओं और विधर्मी गैर-हिंदू-परंपराओं दोनों से अन्य विचारकों के साथ प्रवचन और तात्विक तर्क-वितर्क के माध्यम से अपने दर्शन का प्रचार करने के लिए भारतीय उपमहाद्वीप में यात्रा की। यद्यपि अद्वैत के आज के अनुयायी मानते हैं कि शंकर ने व्यक्तिगत रूप से बौद्धों के खिलाफ तर्क दिया, एक ऐतिहासिक स्रोत, माधवीय शंकर विजयम, इंगित करता है कि शंकर ने मीमांसा, सांख्य, न्याय, वैशेषिक और योग विद्वानों के साथ बहस की उतनी ही उत्सुकता से मांग की जितनी कि किसी भी बौद्ध के साथ।
[[विन्सेंट स्मिथ]] सहित कई विद्वानों का भी तर्क है कि भारत में [[बौद्ध धर्म]] के पतन में आदि शंकराचार्य की कुछ प्रमुख भूमिका रही होगी।<ref>{{Cite book|last=rajnish|first=manu|url=https://books.google.com/books?id=y_z_8ImnviEC&newbks=0&printsec=frontcover&pg=PT60&dq=Adi+Shankara+Buddhism+decline&hl=en|title=STATE OF MIND|publisher=manu rajnish|isbn=978-93-5087-127-0|language=en}}</ref><ref>{{Cite book|last=Ph.D|first=M. Jankiraman|url=https://books.google.com/books?id=36AGEAAAQBAJ&newbks=0&printsec=frontcover&pg=PT139&dq=Adi+Shankaracharya+single-handedly+defeated+Buddhism+in+India&hl=en|title=Perspectives in Indian History: From the Origins to AD 1857|date=2020-11-03|publisher=Notion Press|isbn=978-1-64983-995-4|language=en}}</ref>
आदि शंकराचार्य के आने से भारतीय उपमहाद्वीप पर बौद्ध धर्म का प्रभाव कम हो गया। इसके साथ ही एक बार फिर वैदिक धर्म का पुनः पुनरुद्धार होना शुरू हुआ।
== ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रभाव ==
शङ्कराचार्य ने अपने वेदान्त को सुप्रतिष्ठित करने के लिए निम्नांकित कार्य सम्पादित किए-
*(१) उन्होंने स्पष्ट किया कि वैशेषिक, न्याय तथा सांख्य वैदिक दर्शन नहीं है यद्यपि यह वेद में आस्था रखते हैं। सांख्य के ईश्वरवादी तथा स्वयं को वेदाधारित होने के दावे को आचार्य बादरायण ने अपने ब्रह्मसूत्र में तथा शङ्कराचार्य ने अपने भाष्य में किया। शङ्कराचार्य ने सांख्य को वेदान्त का ‘प्रधानमल्ल’ अर्थात् मुख्य प्रतिद्वन्दी बताया।
*(२) आचार्य ने पूर्वमीमांसाकृत वेद की कर्मपरक व्याख्या का खण्डन किया। पूर्वमीमांसा के अनुसार वेद के वह भाग जो स्पष्ट रूप से कर्मपरक नहीं है वह परोक्ष रूप से कर्म के अप्र बनकर ही सार्थक होते हैं। शङ्कराचार्य ने यह सिद्ध किया कि वेद का मुख्य लक्ष्य परमतत्त्व को प्रकाशित करना है अतः वेद के ज्ञानपूर्ण मन्त्रभाग और उपनिषद् भाग मुख्य हैं। वेद के उपासना और कर्मपरक भाग गौण हैं क्योंकि इनका उद्देश्य चित्त की शुद्धि करना है।
*(३) इन्होंने उपनिषद् के प्राचीन व्याख्याकार जैसे भर्तृप्रपञ्च आदि के ब्रह्मपरिणामवाद अथवा भेदाभेदवाद मत का खण्डन किया। उसके स्थान पर आचार्य ने अद्वैतवाद का प्रतिपादन किया।
*(४) इन्होंने सिद्ध किया कि निर्विशेष या निर्गुण ब्रह्म ‘शून्य’ नहीं है। ‘नेति-नेति’ ब्रह्म विषयक निर्वचनों का निषेध करता है, स्वयं ब्रह्म का नहीं। निर्विशेष ब्रह्मवाद निरपेक्ष अद्वैतवाद है।
*(५) आचार्य ने बौद्धों के विज्ञानवाद का मार्मिक खण्डन किया तथा अपने नित्य औपनिषद् आत्मचैतन्यवाद को उससे पृथक् सिद्ध किया।
*(६) उन्होंने सिद्ध किया कि माया या अविद्या ब्रह्म की अनिर्वचनीय शक्ति के रूप में उपनिषद् सिद्धान्त है। उपनिषद् में तात्विक भेद, द्वैत, परिणाम आदि का कोई स्थान नहीं है।
== रचनाएँ==
{| class="wikitable"
|-
|
* अष्टोत्तरसहस्रनामावलिः
* उपदेशसहस्री
* चर्पटपंजरिकास्तोत्रम्
* तत्त्वविवेकाख्यम्
* दत्तात्रेयस्तोत्रम्
* द्वादशपंजरिकास्तोत्रम्
* '''पंचदशी'''
** कूटस्थदीप
** चित्रदीप
** तत्त्वविवेक
** तृप्तिदीप
** द्वैतविवेक
** ध्यानदीप
** नाटक दीप
** पंचकोशविवेक
** पंचमहाभूतविवेक
** पंचकोशविवेक
** ब्रह्मानन्दे अद्वैतानन्द
** ब्रह्मानन्दे आत्मानन्द
** ब्रह्मानन्दे योगानन्द
** महावाक्यविवेक
** विद्यानन्द
** विषयानन्द
* परापूजास्तोत्रम्
* प्रपंचसार
|
* [[भवान्यष्टकम्]]
* लघुवाक्यवृत्ती
* [[विवेकचूडामणि]]
* सर्ववेदान्तसिद्धान्तसारसंग्रह
* साधनपंचकम
* '''भाष्य'''
** अध्यात्म पटल भाष्य
** ईशोपनिषद भाष्य
** ऐतरोपनिषद भाष्य
** कठोपनिषद भाष्य
** केनोपनिषद भाष्य
** छांदोग्योपनिषद भाष्य
** तैत्तिरीयोपनिषद भाष्य
** नृसिंह पूर्वतपन्युपनिषद भाष्य
** प्रश्नोपनिषद भाष्य
** बृहदारण्यकोपनिषद भाष्य
** ब्रह्मसूत्र भाष्य
** भगवद्गीता भाष्य
** ललिता त्रिशती भाष्य
** हस्तामलकीय भाष्य
** मंडूकोपनिषद कारिका भाष्य
** मुंडकोपनिषद भाष्य
** विष्णुसहस्रनाम स्तोत्र भाष्य
** सनत्सुजातीय भाष्य
|}
===लघु तत्त्वज्ञानविषयक रचनाएँ===
{| class="wikitable"
|-
|
* अद्वैत अनुभूति (८४)
* अद्वैत पंचकम् (५)
* अनात्मा श्रीविगर्हण (१८)
* अपरोक्षानुभूति (१४४)
* उपदेश पंचकम् किंवा साधन पंचकम् (५)
* एकश्लोकी (१)
* कौपीनपंचकम् (५)
* जीवनमुक्त आनंदलहरी (१७)
* तत्त्वोपदेश(८७)
* धन्याष्टकम् (८)
* निर्वाण मंजरी (१२)
* निर्वाणशतकम् (६)
* पंचीकरणम् (गद्य)
* प्रबोध सुधाकर (२५७)
* प्रश्नोत्तर रत्नमालिका (६७)
* प्रौढ अनुभूति (१७)
* यति पंचकम् (५)
* योग तरावली(?) (२९)
* वाक्यवृत्ति (५३)
* शतश्लोकी (१००)
* सदाचार अनुसंधानम् (५५)
* साधन पंचकम् किंवा उपदेश पंचकम् (५)
* स्वरूपानुसंधान अष्टकम् (९)
* स्वात्म निरूपणम् (१५३)
* स्वात्मप्रकाशिका (६८)
|
; गणेश स्तुति
* गणेश पंचरत्नम् (५)
* गणेश भुजांगम् (९)
;शिवस्तुति
* दशश्लोकी स्तुति (१०)
* दक्षिणमूर्ति अष्टकम् (१०)
* दक्षिणमूर्ति स्तोत्रम् (१९)
* दक्षिणमूर्ति वर्णमाला स्तोत्रम् (१३)
* मृत्युंजय मानसिक पूजा (४६)
* वेदसार शिव स्तोत्रम् (११)
* शिव अपराधक्षमापन स्तोत्रम् (१७)
* शिव आनंदलहरी (१००)
* शिव केशादिपादान्तवर्णन स्तोत्रम् (२९)
* शिव नामावलि अष्टकम् (९)
* शिव पंचाक्षर स्तोत्रम् (६)
* शिव पंचाक्षरा नक्षत्रमालास्तोत्रम् (२८)
* शिव पादादिकेशान्तवर्णनस्तोत्रम् (४१)
* शिव भुजांगम् (४)
* शिव मानस पूजा(५)
* सुवर्णमाला स्तुति (५०)
|
;शक्तिस्तुति
* अन्नपूर्णा अष्टकम् (८)
* आनंदलहरी
* कनकधारा स्तोत्रम् (१८)
* कल्याण वृष्टिस्तव (१६)
* गौरी दशकम् (११)
* त्रिपुरसुंदरी अष्टकम् (८)
* त्रिपुरसुंदरी मानस पूजा (१२७)
* त्रिपुरसुंदरी वेद पाद स्तोत्रम् (१०)
* देवी चतु:षष्ठी उपचार पूजा स्तोत्रम् (७२)
* देवी भुजांगम् (२८)
* नवरत्न मालिका (१०)
* देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम्
* भवानी भुजांगम् (१७)
* भ्रमरांबा अष्टकम् (९)
* मंत्रमातृका पुष्पमालास्तव (१७)
* महिषासुरमर्दिनी स्तोत्रम्
* ललिता पंचरत्नम् (६)
* शारदा भुजंगप्रयात स्तोत्रम् (८)
* [[सौन्दर्यलहरी]] (१००)
* नर्मदाष्टक
;विष्णु एवं उनके अवतारों की स्तुति
* अच्युताष्टकम् (९)
* कृष्णाष्टकम् (८)
* गोविंदाष्टकम् (९)
|
* जगन्नाथाष्टकम् (८)
* पांडुरंगाष्टकम् (९)
* भगवन् मानस पूजा (१०)
* मोहमुद्गार ([[भज गोविन्दम्|भजगोविंदम्]]) (३१)
* राम भुजंगप्रयात स्तोत्रम् (२९)
* लक्ष्मीनृसिंह करावलंब (करुणरस) स्तोत्रम् (१७)
* लक्ष्मीनरसिंह पंचरत्नम् (५)
* विष्णुपादादिकेशान्त स्तोत्रम् (५२)
* विष्णु भुजंगप्रयात स्तोत्रम् (१४)
* षट्पदीस्तोत्रम् (७)
;अन्य देवताओं एवं तीर्थों की स्तुति
* अर्धनारीश्वरस्तोत्रम् (९)
* उमा महेश्वर स्तोत्रम् (१३)
* काशी पंचकम् (५)
* गंगाष्टकम् (९)
* गुरु अष्टकम् (१०)
* नर्मदाष्टकम् (९)
* निर्गुण मानस पूजा (३३)
* मनकर्णिका अष्टकम् (९)
* यमुनाष्टकम् (८)
* यमुनाष्टकम्-२ (९)
|}
== इन्हें भी देखें ==
* [[अद्वैत वेदान्त|अद्वैतवाद]]
* [[कुमारिल भट्ट]]
* [[मण्डन मिश्र]]
* [[पद्मपादाचार्य]]
* [[शंकराचार्य]]
* [[महानुशासन|मठाम्नाय महानुशासन]] (आद्य शंकराचार्य द्वारा रचित ग्रन्थ जिसमें मठों के संचालन का विधान है।)
==सन्दर्भ==
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://www.gitasupersite.iitk.ac.in/brahmasutra_content?language=dv&field_chapter_value=1&field_quarter_value=1&field_nsutra_value=0 श्री शंकर विरचित ब्रह्मसूत्रभाष्य]
*[https://advaitasharada.sringeri.net/display/bhashyaVyakhya/BS?vyakhya=NY श्रीमच्छङ्करभगवत्पूज्यपादविरचितम् ब्रह्मसूत्रभाष्यम्] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20260704163245/https://advaitasharada.sringeri.net/display/bhashyaVyakhya/BS%3Fvyakhya%3DNY |date=4 जुलाई 2026 }}
* [https://web.archive.org/web/20100219233258/http://hindi.webdunia.com/religion/religion/religiousplaces/0904/28/1090428046_1.htm शंकराचार्य के चार मठ]
* [https://web.archive.org/web/20101025081358/http://advaita-vedanta.org/texts/shankara_works.html आदि शंकराचार्य का संपूर्ण रचना संसार]
* [https://web.archive.org/web/20140714225831/http://www.hinduebooks.blogspot.in/2010/08/works-of-sri-sankaracharya-sanskrit-20.html Complete Works of Sri Sankaracharya ''संस्कृत में'' - 20 Volumes]
*[https://archive.org/details/Works_of_Sankaracharya_with_Hindi_Translation/Aitareya Upanishad Sankara Bhashya with Hindi Translation - Gita Press 1938/mode/2up ऐतरोयोपनिषद, हिन्दी अनुवाद सहित]
{{हिन्दू धर्म}}
{{Authority control}}
[[श्रेणी:शंकराचार्य]]
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उर्मिला मातोंडकर
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2026-10-17T18:16:04Z
हिंदुस्थान वासी
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text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति
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'''उर्मिला मातोंडकर''' (जन्म: [[४ फ़रवरी|4 फरवरी]], [[१९७४|1974]]) [[हिन्दी]] फ़िल्मों की एक [[अभिनेत्री]] हैं। उर्मिला ने अपने फिल्मी जीवन कि शुरुआत एक बाल कलाकार के रूप में १९८० की फिल्म 'कलयुग' से किया और एक सम्पूर्ण अभिनेत्री के रूप में वो पहली बार १९९१ की फिल्म 'नर्सिम्हा' में आई। १९९५ में रंगीला, १९९७ में जुदाई और १९९८ में सत्या में उर्मिला के अभिनय को बहुत सराहा गया, इन तीनों फिल्मों को फिल्मफेयर पुरस्कारों के लिये नामित किया गया।
== व्यक्तिगत जीवन ==
उर्मिला मातोंडकर ने अपने से १० वर्ष छोटे कश्मीर के रहने वाले मॉडल व् व्यवसायी मोहसिन अख्तर मीर से 3 मार्च 2016 को शादी की । <ref>{{Cite web|url=https://angaarnews.com/entertainment/urmila-matondkars-rare-appearance-without-wedding-ring-amid-divorce-rumors/|title=Urmila Matondkar's Rare Appearance Without Wedding Ring Amid Divorce Rumors|last=Sayali|date=2024-10-22|website=angaarnews.com|language=en-US|access-date=2024-10-25|archive-date=26 नवंबर 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20241126152715/https://angaarnews.com/entertainment/urmila-matondkars-rare-appearance-without-wedding-ring-amid-divorce-rumors/|url-status=dead}}</ref>
== प्रमुख फिल्में ==
{| border="2" cellpadding="4" cellspacing="0" width="95%" style="margin: 1em 1em 1em 0; background: #f9f9f9; border: 1px #aaa solid; border-collapse: collapse; font-size: 95%;"
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! वर्ष !! फ़िल्म !! चरित्र !! टिप्पणी
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== नामांकन और पुरस्कार ==
== सन्दर्भ ==
== बाहरी कड़ियाँ ==
[[श्रेणी:अभिनेत्री]]
[[श्रेणी:हिन्दी अभिनेत्री]]
[[श्रेणी:भारतीय हिन्दू]]
[[श्रेणी:1974 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
{{जीवनचरित-आधार}}
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विक्रम प्रताप
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{{Talk header}}
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Anitya Gautam
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[[चित्र:Joghurt.jpg|thumb|तुर्की की दही.]]
{{nutritionalvalue | name=दही, पूर्ण वसा | kJ=257 | protein=3.5 g | fat= 3.3 g | carbs=4.7 g | sugars=4.7 g (*) | calcium_mg=121 | riboflavin_mg=0.14 | satfat=2.1 g | monofat=0.9 g | right=1 | source_usda=1 | note=(*) [[लैक्टोज़]] की मात्रा भंडारण के दौरान घटती है।}}
'''दही''' एक [[दुग्ध-उत्पाद]] है जिसका निर्माण [[दूध]] के [[जीवाणु |जीवाणुज]] [[किण्वन]] द्वारा होता है। [[लैक्टोज]] का किण्वन लैक्टिक अम्ल बनाता है, जो दूध प्रोटीन से प्रतिक्रिया कर इसे दही मे बदल देता है साथ ही इसे इसकी खास बनावट और विशेष खट्टा स्वाद भी प्रदान करता है। '''सोया दही''', दही का एक गैर दुग्ध-उत्पाद विकल्प है जिसे सोया दूध से बनाया जाता है।
खाने में दही का प्रयोग पिछले लगभग 4500 साल से किया जा रहा है। आज इसका सेवन दुनिया भर में किया जाता है। यह एक स्वास्थ्यप्रद पोषक आहार है। यह प्रोटीन, कैल्शियम, राइबोफ्लेविन, विटामिन B6 और विटामिन B12 जैसे पोषक तत्वों से समृद्ध होता है।
दही को 72 से 75 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर गर्म करके उसे 21 डिग्री सेंटीग्रेड ताप तक ठंडा करके उसमें 1 से 2% जामन मिलाकर 8 से 10 घंटे बाद बना उत्पादक कहलाता है
दही में अम्लता -- 0.7-0.9%
दही में लैक्टोज -- 4=6-5%
== दही के लाभ ==
इसमें कुछ ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं, जिसके कारण यह दूध की अपेक्षा जल्दी पच जाता है। जिन लोगों को पेट की परेशानियां जैसे- अपच, कब्ज, गैस जैसी बीमारियाँ घेरे रहती हैं, उनके लिए दही या उससे बनी लस्सी, मट्ठा, छाछ का उपयोग करने से आंतों की दूर हो जाती है। डाइजेशन अच्छी तरह से होने लगता है और भूख खुलकर लगती है।<ref>{{Cite web |url=http://navbharattimes.indiatimes.com/home-and-relations/fitness/---/articleshow/17321123.cms |title=संग्रहीत प्रति |access-date=31 मार्च 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140331145051/http://navbharattimes.indiatimes.com/home-and-relations/fitness/---/articleshow/17321123.cms |archive-date=31 मार्च 2014 |url-status=live }}</ref>
==दही में छुपा है खूबसूरती का ख़जाना==
दही एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जो खाने में स्वास्थ्यवर्धक तो है ही साथ ही ये सौंदर्य निखारने के लिए भी अच्छा स्रोत माना जाता है। गर्मियों में अक्सर तेज धूप शरीर पर पड़ने से त्वचा झुलस या टैन हो जाती है, ऐसे में दही टैनिग कम करने के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है। इतना ही नही दही में बेसन मिलाकर लगाने से भी चेहरे पर चमक आती है। <ref>{{Cite web |url=http://hindi.webdunia.com/beauty-care-tips/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9F%E0%A5%80-111092300069_1.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=21 नवंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141129045718/http://hindi.webdunia.com/beauty-care-tips/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9F%E0%A5%80-111092300069_1.htm |archive-date=29 नवंबर 2014 |url-status=dead }}</ref> <ref>{{Cite web |url=http://hindi.webduniya.com/home-remedies/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%96%E0%A5%82%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-110060400028_1.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=21 नवंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141129032409/http://hindi.webduniya.com/home-remedies/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%96%E0%A5%82%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-110060400028_1.htm |archive-date=29 नवंबर 2014 |url-status=dead }}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== इन्हें भी देखें==
== बाहरी कड़ियाँ==
[[श्रेणी:दुग्ध-उत्पाद]]
[[श्रेणी:भारतीय व्यंजन]]
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[[चित्र:Joghurt.jpg|thumb|तुर्की की दही.]]
{{nutritionalvalue | name=दही, पूर्ण वसा | kJ=257 | protein=3.5 g | fat= 3.3 g | carbs=4.7 g | sugars=4.7 g (*) | calcium_mg=121 | riboflavin_mg=0.14 | satfat=2.1 g | monofat=0.9 g | right=1 | source_usda=1 | note=(*) [[लैक्टोज़]] की मात्रा भंडारण के दौरान घटती है।}}
'''दही''' एक [[दुग्ध-उत्पाद]] है जिसका निर्माण [[दूध]] के [[जीवाणु |जीवाणुज]] [[किण्वन]] द्वारा होता है। [[लैक्टोज]] का किण्वन लैक्टिक अम्ल बनाता है, जो दूध प्रोटीन से प्रतिक्रिया कर इसे दही मे बदल देता है साथ ही इसे इसकी खास बनावट और विशेष खट्टा स्वाद भी प्रदान करता है। '''सोया दही''', दही का एक गैर दुग्ध-उत्पाद विकल्प है जिसे सोया दूध से बनाया जाता है।
खाने में दही का प्रयोग पिछले लगभग ४५०० साल से किया जा रहा है। आज इसका सेवन दुनिया भर में किया जाता है। यह एक स्वास्थ्यप्रद पोषक आहार है। यह प्रोटीन, कैल्शियम, राइबोफ्लेविन, विटामिन B6 और विटामिन B12 जैसे पोषक तत्वों से समृद्ध होता है।
दही को 72 से 75 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर गर्म करके उसे 21 डिग्री सेंटीग्रेड ताप तक ठंडा करके उसमें 1 से 2% जामन मिलाकर 8 से 10 घंटे बाद बना उत्पादक कहलाता है
दही में अम्लता -- 0.7-0.9%
दही में लैक्टोज -- 4=6-5%
== दही के लाभ ==
इसमें कुछ ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं, जिसके कारण यह दूध की अपेक्षा जल्दी पच जाता है। जिन लोगों को पेट की परेशानियां जैसे- अपच, कब्ज, गैस जैसी बीमारियाँ घेरे रहती हैं, उनके लिए दही या उससे बनी लस्सी, मट्ठा, छाछ का उपयोग करने से आंतों की दूर हो जाती है। डाइजेशन अच्छी तरह से होने लगता है और भूख खुलकर लगती है।<ref>{{Cite web |url=http://navbharattimes.indiatimes.com/home-and-relations/fitness/---/articleshow/17321123.cms |title=संग्रहीत प्रति |access-date=31 मार्च 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140331145051/http://navbharattimes.indiatimes.com/home-and-relations/fitness/---/articleshow/17321123.cms |archive-date=31 मार्च 2014 |url-status=live }}</ref>
==दही में छुपा है खूबसूरती का ख़जाना==
दही एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जो खाने में स्वास्थ्यवर्धक तो है ही साथ ही ये सौंदर्य निखारने के लिए भी अच्छा स्रोत माना जाता है। गर्मियों में अक्सर तेज धूप शरीर पर पड़ने से त्वचा झुलस या टैन हो जाती है, ऐसे में दही टैनिग कम करने के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है। इतना ही नही दही में बेसन मिलाकर लगाने से भी चेहरे पर चमक आती है। <ref>{{Cite web |url=http://hindi.webdunia.com/beauty-care-tips/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9F%E0%A5%80-111092300069_1.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=21 नवंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141129045718/http://hindi.webdunia.com/beauty-care-tips/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9F%E0%A5%80-111092300069_1.htm |archive-date=29 नवंबर 2014 |url-status=dead }}</ref> <ref>{{Cite web |url=http://hindi.webduniya.com/home-remedies/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%96%E0%A5%82%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-110060400028_1.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=21 नवंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141129032409/http://hindi.webduniya.com/home-remedies/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%96%E0%A5%82%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-110060400028_1.htm |archive-date=29 नवंबर 2014 |url-status=dead }}</ref>
== सन्दर्भ ==
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== इन्हें भी देखें==
== बाहरी कड़ियाँ==
[[श्रेणी:दुग्ध-उत्पाद]]
[[श्रेणी:भारतीय व्यंजन]]
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[[चित्र:Joghurt.jpg|thumb|तुर्की की दही.]]
{{nutritionalvalue | name=दही, पूर्ण वसा | kJ=257 | protein=3.5 g | fat= 3.3 g | carbs=4.7 g | sugars=4.7 g (*) | calcium_mg=121 | riboflavin_mg=0.14 | satfat=2.1 g | monofat=0.9 g | right=1 | source_usda=1 | note=(*) [[लैक्टोज़]] की मात्रा भंडारण के दौरान घटती है।}}
'''दही''' एक [[दुग्ध-उत्पाद]] है जिसका निर्माण [[दूध]] के [[जीवाणु |जीवाणुज]] [[किण्वन]] द्वारा होता है। [[लैक्टोज]] का किण्वन लैक्टिक अम्ल बनाता है, जो दूध प्रोटीन से प्रतिक्रिया कर इसे दही मे बदल देता है साथ ही इसे इसकी खास बनावट और विशेष खट्टा स्वाद भी प्रदान करता है। '''सोया दही''', दही का एक गैर दुग्ध-उत्पाद विकल्प है जिसे सोया [[दूध]] से बनाया जाता है।
खाने में दही का प्रयोग पिछले लगभग ४५०० साल से किया जा रहा है। आज इसका सेवन दुनिया भर में किया जाता है। यह एक स्वास्थ्यप्रद पोषक [[आहार]] है। यह [[प्रोटीन]], कैल्शियम, राइबोफ्लेविन, विटामिन B6 और विटामिन B12 जैसे पोषक तत्वों से समृद्ध होता है।
दही को 72 से 75 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर गर्म करके उसे 21 डिग्री सेंटीग्रेड ताप तक ठंडा करके उसमें 1 से 2% जामन मिलाकर 8 से 10 घंटे बाद बना उत्पादक कहलाता है
दही में अम्लता -- 0.7-0.9%
दही में लैक्टोज -- 4=6-5%
== दही के लाभ ==
इसमें कुछ ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं, जिसके कारण यह दूध की अपेक्षा जल्दी पच जाता है। जिन लोगों को पेट की परेशानियां जैसे- अपच, कब्ज, गैस जैसी बीमारियाँ घेरे रहती हैं, उनके लिए दही या उससे बनी लस्सी, मट्ठा, छाछ का उपयोग करने से आंतों की दूर हो जाती है। डाइजेशन अच्छी तरह से होने लगता है और भूख खुलकर लगती है।<ref>{{Cite web |url=http://navbharattimes.indiatimes.com/home-and-relations/fitness/---/articleshow/17321123.cms |title=संग्रहीत प्रति |access-date=31 मार्च 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140331145051/http://navbharattimes.indiatimes.com/home-and-relations/fitness/---/articleshow/17321123.cms |archive-date=31 मार्च 2014 |url-status=live }}</ref>
==दही में छुपा है खूबसूरती का ख़जाना==
दही एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जो खाने में स्वास्थ्यवर्धक तो है ही साथ ही ये सौंदर्य निखारने के लिए भी अच्छा स्रोत माना जाता है। गर्मियों में अक्सर तेज धूप शरीर पर पड़ने से त्वचा झुलस या टैन हो जाती है, ऐसे में दही टैनिग कम करने के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है। इतना ही नही दही में बेसन मिलाकर लगाने से भी चेहरे पर चमक आती है। <ref>{{Cite web |url=http://hindi.webdunia.com/beauty-care-tips/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9F%E0%A5%80-111092300069_1.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=21 नवंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141129045718/http://hindi.webdunia.com/beauty-care-tips/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9F%E0%A5%80-111092300069_1.htm |archive-date=29 नवंबर 2014 |url-status=dead }}</ref> <ref>{{Cite web |url=http://hindi.webduniya.com/home-remedies/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%96%E0%A5%82%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-110060400028_1.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=21 नवंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141129032409/http://hindi.webduniya.com/home-remedies/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%96%E0%A5%82%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-110060400028_1.htm |archive-date=29 नवंबर 2014 |url-status=dead }}</ref>
== सन्दर्भ ==
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== इन्हें भी देखें==
== बाहरी कड़ियाँ==
[[श्रेणी:दुग्ध-उत्पाद]]
[[श्रेणी:भारतीय व्यंजन]]
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[[चित्र:Joghurt.jpg|thumb|तुर्की की दही.]]
{{nutritionalvalue | name=दही, पूर्ण वसा | kJ=257 | protein=3.5 g | fat= 3.3 g | carbs=4.7 g | sugars=4.7 g (*) | calcium_mg=121 | riboflavin_mg=0.14 | satfat=2.1 g | monofat=0.9 g | right=1 | source_usda=1 | note=(*) [[लैक्टोज़]] की मात्रा भंडारण के दौरान घटती है।}}
'''दही''' एक [[दुग्ध-उत्पाद]] है जिसका निर्माण [[दूध]] के [[जीवाणु |जीवाणुज]] [[किण्वन]] द्वारा होता है। [[लैक्टोज]] का किण्वन लैक्टिक अम्ल बनाता है, जो दूध प्रोटीन से प्रतिक्रिया कर इसे दही मे बदल देता है साथ ही इसे इसकी खास बनावट और विशेष खट्टा स्वाद भी प्रदान करता है। '''सोया दही''', दही का एक गैर दुग्ध-उत्पाद विकल्प है जिसे सोया [[दूध]] से बनाया जाता है।
खाने में दही का प्रयोग पिछले लगभग ४५०० साल से किया जा रहा है। आज इसका सेवन दुनिया भर में किया जाता है। यह एक स्वास्थ्यप्रद पोषक [[आहार]] है। यह [[प्रोटीन]], [[कैल्शियम]], राइबोफ्लेविन, विटामिन B6 और विटामिन B12 जैसे पोषक तत्वों से समृद्ध होता है।
दही को 72 से 75 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर गर्म करके उसे 21 डिग्री सेंटीग्रेड ताप तक ठंडा करके उसमें 1 से 2% जामन मिलाकर 8 से 10 घंटे बाद बना उत्पादक कहलाता है
दही में अम्लता -- 0.7-0.9%
दही में लैक्टोज -- 4=6-5%
== दही के लाभ ==
इसमें कुछ ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं, जिसके कारण यह दूध की अपेक्षा जल्दी पच जाता है। जिन लोगों को पेट की परेशानियां जैसे- अपच, कब्ज, गैस जैसी बीमारियाँ घेरे रहती हैं, उनके लिए दही या उससे बनी लस्सी, मट्ठा, छाछ का उपयोग करने से आंतों की दूर हो जाती है। डाइजेशन अच्छी तरह से होने लगता है और भूख खुलकर लगती है।<ref>{{Cite web |url=http://navbharattimes.indiatimes.com/home-and-relations/fitness/---/articleshow/17321123.cms |title=संग्रहीत प्रति |access-date=31 मार्च 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140331145051/http://navbharattimes.indiatimes.com/home-and-relations/fitness/---/articleshow/17321123.cms |archive-date=31 मार्च 2014 |url-status=live }}</ref>
==दही में छुपा है खूबसूरती का ख़जाना==
दही एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जो खाने में स्वास्थ्यवर्धक तो है ही साथ ही ये सौंदर्य निखारने के लिए भी अच्छा स्रोत माना जाता है। गर्मियों में अक्सर तेज धूप शरीर पर पड़ने से त्वचा झुलस या टैन हो जाती है, ऐसे में दही टैनिग कम करने के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है। इतना ही नही दही में बेसन मिलाकर लगाने से भी चेहरे पर चमक आती है। <ref>{{Cite web |url=http://hindi.webdunia.com/beauty-care-tips/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9F%E0%A5%80-111092300069_1.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=21 नवंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141129045718/http://hindi.webdunia.com/beauty-care-tips/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9F%E0%A5%80-111092300069_1.htm |archive-date=29 नवंबर 2014 |url-status=dead }}</ref> <ref>{{Cite web |url=http://hindi.webduniya.com/home-remedies/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%96%E0%A5%82%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-110060400028_1.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=21 नवंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141129032409/http://hindi.webduniya.com/home-remedies/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%96%E0%A5%82%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-110060400028_1.htm |archive-date=29 नवंबर 2014 |url-status=dead }}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== इन्हें भी देखें==
== बाहरी कड़ियाँ==
[[श्रेणी:दुग्ध-उत्पाद]]
[[श्रेणी:भारतीय व्यंजन]]
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text/x-wiki
[[चित्र:Joghurt.jpg|thumb|तुर्की की दही.]]
{{nutritionalvalue | name=दही, पूर्ण वसा | kJ=257 | protein=3.5 g | fat= 3.3 g | carbs=4.7 g | sugars=4.7 g (*) | calcium_mg=121 | riboflavin_mg=0.14 | satfat=2.1 g | monofat=0.9 g | right=1 | source_usda=1 | note=(*) [[लैक्टोज़]] की मात्रा भंडारण के दौरान घटती है।}}
'''दही''' एक [[दुग्ध-उत्पाद]] है जिसका निर्माण [[दूध]] के [[जीवाणु |जीवाणुज]] [[किण्वन]] द्वारा होता है। [[लैक्टोज]] का किण्वन लैक्टिक अम्ल बनाता है, जो दूध प्रोटीन से प्रतिक्रिया कर इसे दही मे बदल देता है साथ ही इसे इसकी खास बनावट और विशेष खट्टा स्वाद भी प्रदान करता है। '''सोया दही''', दही का एक गैर दुग्ध-उत्पाद विकल्प है जिसे सोया [[दूध]] से बनाया जाता है।
खाने में दही का प्रयोग पिछले लगभग ४५०० साल से किया जा रहा है। आज इसका सेवन दुनिया भर में किया जाता है। यह एक स्वास्थ्यप्रद पोषक [[आहार]] है। यह [[प्रोटीन]], [[कैल्शियम]], [[राइबोफ्लेविन]], [[विटामिन B6]] और [[विटामिन B12]] जैसे पोषक तत्वों से समृद्ध होता है।
दही को 72 से 75 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर गर्म करके उसे 21 डिग्री सेंटीग्रेड ताप तक ठंडा करके उसमें 1 से 2% जामन मिलाकर 8 से 10 घंटे बाद बना उत्पादक कहलाता है
दही में अम्लता -- 0.7-0.9%
दही में लैक्टोज -- 4=6-5%
== दही के लाभ ==
इसमें कुछ ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं, जिसके कारण यह दूध की अपेक्षा जल्दी पच जाता है। जिन लोगों को पेट की परेशानियां जैसे- अपच, कब्ज, गैस जैसी बीमारियाँ घेरे रहती हैं, उनके लिए दही या उससे बनी लस्सी, मट्ठा, छाछ का उपयोग करने से आंतों की दूर हो जाती है। डाइजेशन अच्छी तरह से होने लगता है और भूख खुलकर लगती है।<ref>{{Cite web |url=http://navbharattimes.indiatimes.com/home-and-relations/fitness/---/articleshow/17321123.cms |title=संग्रहीत प्रति |access-date=31 मार्च 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140331145051/http://navbharattimes.indiatimes.com/home-and-relations/fitness/---/articleshow/17321123.cms |archive-date=31 मार्च 2014 |url-status=live }}</ref>
==दही में छुपा है खूबसूरती का ख़जाना==
दही एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जो खाने में स्वास्थ्यवर्धक तो है ही साथ ही ये सौंदर्य निखारने के लिए भी अच्छा स्रोत माना जाता है। गर्मियों में अक्सर तेज धूप शरीर पर पड़ने से त्वचा झुलस या टैन हो जाती है, ऐसे में दही टैनिग कम करने के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है। इतना ही नही दही में बेसन मिलाकर लगाने से भी चेहरे पर चमक आती है। <ref>{{Cite web |url=http://hindi.webdunia.com/beauty-care-tips/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9F%E0%A5%80-111092300069_1.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=21 नवंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141129045718/http://hindi.webdunia.com/beauty-care-tips/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9F%E0%A5%80-111092300069_1.htm |archive-date=29 नवंबर 2014 |url-status=dead }}</ref> <ref>{{Cite web |url=http://hindi.webduniya.com/home-remedies/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%96%E0%A5%82%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-110060400028_1.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=21 नवंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141129032409/http://hindi.webduniya.com/home-remedies/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%96%E0%A5%82%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-110060400028_1.htm |archive-date=29 नवंबर 2014 |url-status=dead }}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== इन्हें भी देखें==
== बाहरी कड़ियाँ==
[[श्रेणी:दुग्ध-उत्पाद]]
[[श्रेणी:भारतीय व्यंजन]]
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[[चित्र:Joghurt.jpg|thumb|तुर्की की दही.]]
{{nutritionalvalue | name=दही, पूर्ण वसा | kJ=257 | protein=3.5 g | fat= 3.3 g | carbs=4.7 g | sugars=4.7 g (*) | calcium_mg=121 | riboflavin_mg=0.14 | satfat=2.1 g | monofat=0.9 g | right=1 | source_usda=1 | note=(*) [[लैक्टोज़]] की मात्रा भंडारण के दौरान घटती है।}}
'''दही''' एक [[दुग्ध-उत्पाद]] है जिसका निर्माण [[दूध]] के [[जीवाणु |जीवाणुज]] [[किण्वन]] द्वारा होता है। [[लैक्टोज]] का किण्वन लैक्टिक अम्ल बनाता है, जो दूध प्रोटीन से प्रतिक्रिया कर इसे दही मे बदल देता है साथ ही इसे इसकी खास बनावट और विशेष खट्टा स्वाद भी प्रदान करता है। '''सोया दही''', दही का एक गैर दुग्ध-उत्पाद विकल्प है जिसे सोया [[दूध]] से बनाया जाता है।
खाने में दही का प्रयोग पिछले लगभग ४५०० साल से किया जा रहा है। आज इसका सेवन दुनिया भर में किया जाता है। यह एक स्वास्थ्यप्रद पोषक [[आहार]] है। यह [[प्रोटीन]], [[कैल्शियम]], [[राइबोफ्लेविन]], [[विटामिन B6]] और विटामिन B12 जैसे पोषक तत्वों से समृद्ध होता है।
दही को 72 से 75 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर गर्म करके उसे 21 डिग्री [[सेंटीग्रेड]] ताप तक ठंडा करके उसमें 1 से 2% जामन मिलाकर 8 से 10 घंटे बाद बना उत्पादक कहलाता है
दही में अम्लता -- 0.7-0.9%
दही में लैक्टोज -- 4=6-5%
== दही के लाभ ==
इसमें कुछ ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं, जिसके कारण यह दूध की अपेक्षा जल्दी पच जाता है। जिन लोगों को पेट की परेशानियां जैसे- अपच, कब्ज, गैस जैसी बीमारियाँ घेरे रहती हैं, उनके लिए दही या उससे बनी [[लस्सी]], मट्ठा, छाछ का उपयोग करने से आंतों की दूर हो जाती है। डाइजेशन अच्छी तरह से होने लगता है और भूख खुलकर लगती है।<ref>{{Cite web |url=http://navbharattimes.indiatimes.com/home-and-relations/fitness/---/articleshow/17321123.cms |title=संग्रहीत प्रति |access-date=31 मार्च 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140331145051/http://navbharattimes.indiatimes.com/home-and-relations/fitness/---/articleshow/17321123.cms |archive-date=31 मार्च 2014 |url-status=live }}</ref>
==दही में छुपा है खूबसूरती का ख़जाना==
दही एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जो खाने में स्वास्थ्यवर्धक तो है ही साथ ही ये सौंदर्य निखारने के लिए भी अच्छा स्रोत माना जाता है। गर्मियों में अक्सर तेज धूप शरीर पर पड़ने से त्वचा झुलस या टैन हो जाती है, ऐसे में दही टैनिग कम करने के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है। इतना ही नही दही में बेसन मिलाकर लगाने से भी चेहरे पर चमक आती है। <ref>{{Cite web |url=http://hindi.webdunia.com/beauty-care-tips/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9F%E0%A5%80-111092300069_1.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=21 नवंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141129045718/http://hindi.webdunia.com/beauty-care-tips/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9F%E0%A5%80-111092300069_1.htm |archive-date=29 नवंबर 2014 |url-status=dead }}</ref> <ref>{{Cite web |url=http://hindi.webduniya.com/home-remedies/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%96%E0%A5%82%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-110060400028_1.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=21 नवंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141129032409/http://hindi.webduniya.com/home-remedies/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%96%E0%A5%82%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-110060400028_1.htm |archive-date=29 नवंबर 2014 |url-status=dead }}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== इन्हें भी देखें==
== बाहरी कड़ियाँ==
[[श्रेणी:दुग्ध-उत्पाद]]
[[श्रेणी:भारतीय व्यंजन]]
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text/x-wiki
[[चित्र:Joghurt.jpg|thumb|तुर्की की दही.]]
{{nutritionalvalue | name=दही, पूर्ण वसा | kJ=257 | protein=3.5 g | fat= 3.3 g | carbs=4.7 g | sugars=4.7 g (*) | calcium_mg=121 | riboflavin_mg=0.14 | satfat=2.1 g | monofat=0.9 g | right=1 | source_usda=1 | note=(*) [[लैक्टोज़]] की मात्रा भंडारण के दौरान घटती है।}}
'''दही''' एक [[दुग्ध-उत्पाद]] है जिसका निर्माण [[दूध]] के [[जीवाणु |जीवाणुज]] [[किण्वन]] द्वारा होता है। [[लैक्टोज]] का किण्वन लैक्टिक अम्ल बनाता है, जो दूध प्रोटीन से प्रतिक्रिया कर इसे दही मे बदल देता है साथ ही इसे इसकी खास बनावट और विशेष खट्टा स्वाद भी प्रदान करता है। '''सोया दही''', दही का एक गैर दुग्ध-उत्पाद विकल्प है जिसे सोया [[दूध]] से बनाया जाता है।
खाने में दही का प्रयोग पिछले लगभग ४५०० साल से किया जा रहा है। आज इसका सेवन दुनिया भर में किया जाता है। यह एक स्वास्थ्यप्रद पोषक [[आहार]] है। यह [[प्रोटीन]], [[कैल्शियम]], [[राइबोफ्लेविन]], [[विटामिन B6]] और विटामिन B12 जैसे पोषक तत्वों से समृद्ध होता है।
दही को 72 से 75 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर गर्म करके उसे 21 डिग्री [[सेंटीग्रेड]] ताप तक ठंडा करके उसमें 1 से 2% जामन मिलाकर 8 से 10 घंटे बाद बना उत्पादक कहलाता है
दही में अम्लता -- 0.7-0.9%
दही में लैक्टोज -- 4=6-5%
== दही के लाभ ==
इसमें कुछ ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं, जिसके कारण यह दूध की अपेक्षा जल्दी पच जाता है। जिन लोगों को पेट की परेशानियां जैसे- अपच, [[कब्ज]], [[गैस]] जैसी बीमारियाँ घेरे रहती हैं, उनके लिए दही या उससे बनी [[लस्सी]], मट्ठा, छाछ का उपयोग करने से आंतों की दूर हो जाती है। डाइजेशन अच्छी तरह से होने लगता है और भूख खुलकर लगती है।<ref>{{Cite web |url=http://navbharattimes.indiatimes.com/home-and-relations/fitness/---/articleshow/17321123.cms |title=संग्रहीत प्रति |access-date=31 मार्च 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140331145051/http://navbharattimes.indiatimes.com/home-and-relations/fitness/---/articleshow/17321123.cms |archive-date=31 मार्च 2014 |url-status=live }}</ref>
==दही में छुपा है खूबसूरती का ख़जाना==
दही एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जो खाने में स्वास्थ्यवर्धक तो है ही साथ ही ये सौंदर्य निखारने के लिए भी अच्छा स्रोत माना जाता है। गर्मियों में अक्सर तेज धूप शरीर पर पड़ने से त्वचा झुलस या [[टैन]] हो जाती है, ऐसे में दही टैनिग कम करने के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है। इतना ही नही दही में [[बेसन]] मिलाकर लगाने से भी चेहरे पर चमक आती है। <ref>{{Cite web |url=http://hindi.webdunia.com/beauty-care-tips/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9F%E0%A5%80-111092300069_1.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=21 नवंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141129045718/http://hindi.webdunia.com/beauty-care-tips/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9F%E0%A5%80-111092300069_1.htm |archive-date=29 नवंबर 2014 |url-status=dead }}</ref> <ref>{{Cite web |url=http://hindi.webduniya.com/home-remedies/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%96%E0%A5%82%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-110060400028_1.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=21 नवंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141129032409/http://hindi.webduniya.com/home-remedies/%E0%A4%A6%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%96%E0%A5%82%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-110060400028_1.htm |archive-date=29 नवंबर 2014 |url-status=dead }}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== इन्हें भी देखें==
== बाहरी कड़ियाँ==
[[श्रेणी:दुग्ध-उत्पाद]]
[[श्रेणी:भारतीय व्यंजन]]
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सतीश कौशिक
0
21751
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2026-10-17T18:20:58Z
हिंदुस्थान वासी
89741
/* बतौर निर्देशक */
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text/x-wiki
{{Infobox person
| name = सतीश कौशिक
| image = Satish Kaushik on the sets of Mr. Kabaadi.jpg
| imagesize = 250px
| caption = 2017 में कौशिक
| birth_name = सतीश चंद्र कौशिक
| birth_date = {{birth date|1956|04|13|df=yes}}
| birth_place = [[महेन्द्रगढ़ ]], [[हरियाणा|पूर्व पंजाब]], [[भारत]]<br>{{small|(वर्तमान [[हरियाणा]] में)}}
| death_date = {{Death date and age|df=y|2023|03|09|1956|04|13}}<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/satish-kaushik-dies-8486215/|title=Satish Kaushik dies of a heart attack at 66, funeral held in Mumbai|date=9 मार्च 2023}}</ref><ref name="auto">{{Cite web|url=https://www.livemint.com/news/india/indian-actor-satish-kaushik-passed-away-at-66-report-11678320738282.html|title=Indian actor Satish Kaushik passes away at 66, tweets Anupam Kher|date=9 मार्च 2023|website=Live Mint}}</ref>
| death_place = [[गुरुग्राम]], [[हरियाणा]], [[भारत]]
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*[[किरोड़ीमल महाविद्यालय]], [[दिल्ली विश्वविद्यालय]]
*[[राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय]]
*[[भारतीय फिल्म और टेलिविज़न संस्थान]]}}
| occupation = {{hlist|[[अभिनेता]]|[[फ़िल्म निर्माता]]|[[पटकथा लेखक ]]|[[हास्य अभिनेता]]}}
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| spouse = {{marriage|शशि कौशिक|1985}}
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}}
'''सतीश कौशिक''' (13 अप्रैल 1956 – 9 मार्च 2023<ref>{{cite web|url=https://www.aajtak.in/entertainment/bollywood-news/story/bollywood-actor-director-satish-kaushik-died-his-last-post-viral-he-played-holi-before-one-day-see-here-tmovf-1650946-2023-03-09
|title= नहीं रहे दिग्गज अभिनेता सतीश कौशिक, कार में ह्रदय घात से हुई मृत्यु|website=aajtak.in|date =9 March 2023}}</ref>)[[हिन्दी]] फ़िल्मों के एक [[अभिनेता]], निदेशक, निर्माता, हास्य अभिनेता, एवम पटकथा लेखक थे।
== प्रारंभिक जीवन ==
सतीश का जन्म 13 अप्रैल 1956 को [[महेंद्रगढ़]], [[हरियाणा]] में हुआ था।<ref>{{cite web|url= https://blog.indiacontent.in/people/buy-images-happy-birthday-satish-kaushik_6567/|title=Happy Birthday Satish Kaushik|website=India Content}}</ref> उन्होंने 1972 में [[किरोड़ीमल महाविद्यालय|किरोड़ीमल कॉलेज]], [[दिल्ली विश्वविद्यालय]] से स्नातक किया।<ref>{{cite web|url= https://www.news18.com/news/lifestyle/i-owe-my-success-to-the-theatre-society-of-kirorimal-college-satish-kaushik-1047709.html|title=I owe my success to the theatre society of Kirori Mal College -: Satish Kaushik|date=August 19, 2015|website=News18|author=Mini Dixit}}</ref> वह [[राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय]] और [[भारतीय फिल्म और टेलिविज़न संस्थान]] के पूर्व छात्र थे।<ref>{{cite web|url= https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/professional-schools-polish-your-skills-satish-kaushik/|title= Professional school's polish your skills says Satish Kaushik|website=Indian Express|date=August 21, 2015|author=IANS}}</ref>
==व्यक्तिगत जीवन==
उनका विवाह 1985 में शशि कौशिक से हुआ था।<ref>{{cite web|url= https://www.indiaforums.com/article/satish-kaushik-reveals-his-wifes-reaction-on-his-marriage-proposal-to-pregnant-neena-gupta_177308|title= Satish Kaushik reveals his wife's reaction on his marriage proposal to pregnant Neena Gupta|website=India Forums|date=June 18, 2021|author=Team India Forums|accessdate=March 12, 2022}}</ref> उनके बेटे शानू कौशिक की 1996 में मृत्यु हो गई जब वह सिर्फ दो साल के थे। <ref>{{cite web|url= https://www.bollywoodbubble.com/bubble-diaries/nostalgia/when-satish-kaushik-couldnt-get-time-to-mourn-his-sons-death/|title=When Satish Kaushik couldn't get time to mourn his sons death|website=Bollywood Bubble|accessdate=April 19, 2021}}</ref> 2012 में, उनकी बेटी वंशिका का जन्म [[स्थानापन्न मातृत्व|सरोगेट माता]] के माध्यम से हुआ था।<ref>{{cite web|url= https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/satish-kaushik-rediscoveres-fatherhood-after-16-years/articleshow/15349074.cms|title=Satish Kaushik rediscovers fatherhood after 16 years|website=Times of India|author=Subhash K. Jha|date=August 4, 2012}}</ref>
==मृत्यु==
दिल का दौरा पड़ने के कारण 09 मार्च 2023 को [[गुरुग्राम]] में 66 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।<ref>{{Cite news |title=Satish Kaushik dies of a heart attack at 66, body to be brought to Mumbai after postmortem |work=[[The Indian Express]] |url=https://indianexpress.com/article/entertainment/satish-kaushik-dies-8486215/}}</ref> फिल्म बिरादरी में उनके मित्र [[अनुपम खेर]] ने उनकी मृत्यु की खबर की घोषणा की।<ref name="auto"/><ref>{{Cite web|url=https://www.instagram.com/p/CpjAejWI2a0/|title=Anupam Kher on Instagram: "जानता हूँ “मृत्यु ही इस दुनिया का अंतिम सच है!” पर ये बात मैं जीते जी कभी अपने जिगरी दोस्त #SatishKaushik के बारे में लिखूँगा, ये मैंने सपने में भी नहीं सोचा था।45 साल की दोस्ती पर ऐसे अचानक पूर्णविराम !! Life will NEVER be the same without you SATISH ! ओम् शांति! 💔💔💔 #SatishKaushik #Friend"|website=Instagram}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-64885036|title=Satish Kaushik: Bollywood actor-filmmaker dies at 66|publisher=BBC news}}</ref> अपने आखिरी इंस्टाग्राम पोस्ट में, उन्हें आखिरी बार [[जावेद अख्तर]], [[शबाना आज़मी]] के घर [[अली फज़ल]], [[ऋचा चड्ढा]] और [[महिमा चौधरी]]<ref>{{cite web|url=https://www.latestly.com/socially/entertainment/bollywood/satish-kaushik-dies-at-66-actor-directors-last-insta-post-was-pics-of-him-celebrating-holi-2023-at-javed-akhtar-shabana-azmis-house-with-ali-fazal-richa-chadha-and-mahima-chaudhry-4925543.html|title=Satish Kaushik Dies at 66: Actor-Director's Last Insta Post Was Pics of Him Celebrating Holi 2023 at Javed Akhtar, Shabana Azmi's House With Ali Fazal, Richa Chadha and Mahima Chaudhry| date=9 March 2023 |work=Latestly |access-date=9 March 2023 |url-status=live}}</ref> के साथ होली 2023 मनाते हुए देखा गया था।
==प्रमुख फिल्में==
{| border="2" cellpadding="4" cellspacing="0" width="60%" style="margin: 1em 1em 1em 0; background: #f9f9f9; border: 1px #aaa solid; border-collapse: collapse; font-size: 95%;"
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! वर्ष !! फ़िल्म !! चरित्र !! टिप्पणी
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|2025
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|[[:श्रेणी:2008 में बनी हिन्दी फ़िल्म|2008]] || [[गॉड तुस्सी ग्रेट हो]] || ||
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|[[:श्रेणी:2007 में बनी हिन्दी फ़िल्म|2007]] || [[ब्रिक लेन (2007 फ़िल्म)|ब्रिक लेन]] || ||
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|[[:श्रेणी:2007 में बनी हिन्दी फ़िल्म|2007]] || [[माइग्रेशन (2007 फ़िल्म)|माइग्रेशन]] || ||
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|[[:श्रेणी:2006 में बनी हिन्दी फ़िल्म|2006]] || [[उमर (2006 फ़िल्म)|उमर]] || राजपाल सिंह ||
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|[[:श्रेणी:2006 में बनी हिन्दी फ़िल्म|2006]] || [[शून्य (2006 फ़िल्म)|शून्य]] || ||
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|[[:श्रेणी:2005 में बनी हिन्दी फ़िल्म|2005]] || [[खुल्लम खुल्ला प्यार करें]] || ||
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|[[:श्रेणी:2004 में बनी हिन्दी फ़िल्म|2004]] || [[वज़ह (2004 फ़िल्म)|वज़ह]] || ||
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|[[:श्रेणी:2003 में बनी हिन्दी फ़िल्म|2003]] || [[कलकता मेल (2003 फ़िल्म)|कैलकटा मॉल]] || ||
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|[[:श्रेणी:2003 में बनी हिन्दी फ़िल्म|2003]] || [[आउट ऑफ कन्ट्रोल (2003 फ़िल्म)|आउट ऑफ कन्ट्रोल]] || ||
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|[[:श्रेणी:2003 में बनी हिन्दी फ़िल्म|2003]] || [[तहज़ीब (2003 फ़िल्म)|तहज़ीब]] || ||
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|[[:श्रेणी:2000 में बनी हिन्दी फ़िल्म|2000]] || [[हद कर दी आपने]] || प्रकाश चौधरी ||
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|[[:श्रेणी:2000 में बनी हिन्दी फ़िल्म|2000]] || [[पापा द ग्रेट (2000 फ़िल्म)|पापा द ग्रेट]] || चुटकी प्रसाद ||
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|[[:श्रेणी:2000 में बनी हिन्दी फ़िल्म|2000]] || [[हमारा दिल आपके पास है]] || ||
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|[[:श्रेणी:2000 में बनी हिन्दी फ़िल्म|2000]] || [[तेरा जादू चल गया]] || ||
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|[[:श्रेणी:2000 में बनी हिन्दी फ़िल्म|2000]] || [[दुल्हन हम ले जायेंगे]] || ||
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|[[:श्रेणी:1999 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1999]] || [[बड़े दिलवाला]] || ||
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|[[:श्रेणी:1999 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1999]] || [[राजाजी (1999 फ़िल्म)|राजाजी]] || ||
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|[[:श्रेणी:1999 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1999]] || [[हसीना मान जायेगी (1999 फ़िल्म)|हसीना मान जायेगी]] || ||
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|[[:श्रेणी:1999 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1999]] || [[हम आपके दिल में रहते हैं]] || ||
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|[[:श्रेणी:1999 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1999]] || [[आ अब लौट चलें]] || चौरसिया ||
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|[[:श्रेणी:1998 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1998]] || [[परदेसी बाबू (1998 फ़िल्म)|परदेसी बाबू]] || ||
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|[[:श्रेणी:1996 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1996]] || [[साजन चले ससुराल]] || ||
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|[[:श्रेणी:1990 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1990]] || [[तकदीर का तमाशा (1990 फ़िल्म)|तकदीर का तमाशा]] || ||
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=== बतौर लेखक ===
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=== बतौर निर्माता ===
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! वर्ष !! फ़िल्म !! टिप्पणी
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|[[:श्रेणी:1987 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1987]] || [[मिस्टर इंडिया (1987 फ़िल्म)|मिस्टर इण्डिया]] ||
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=== बतौर निर्देशक ===
{| border="2" cellpadding="4" cellspacing="0" width="95%" style="margin: 1em 1em 1em 0; background: #f9f9f9; border: 1px #aaa solid; border-collapse: collapse; font-size: 95%;"
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! वर्ष !! फ़िल्म !! टिप्पणी
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|[[:श्रेणी:1993 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1993]] || [[रूप की रानी चोरों का राजा (1993 फ़िल्म)|रूप की रानी चोरों का राजा]] ||
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== नामांकन और पुरस्कार ==
* १९९० - फिल्मफेयर अवार्ड (विजेता) - सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता (अनुपम खैर के साथ) - फिल्म [[राम लखन|'राम लखन']] (१९८९)
* १९९७ - फिल्मफेयर अवार्ड (विजेता) - सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता - फिल्म [[साजन चले ससुराल|'साजन चले ससुराल']] (१९९६)
* १९९९ - बॉलीवुड मूवीज अवार्ड (विजेता) - सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता - फिल्म [[परदेसी बाबू (1998 फ़िल्म)|'परदेसी बाबू']] (१९९८)
* २००० - स्क्रीन अवार्ड (नामांकित) - सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता - फिल्म [[हसीना मान जायेगी (1999 फ़िल्म)|'हसीना मान जायेगी']] (१९९९)
* २००४ - फिल्मफेयर अवार्ड (नामांकित) - सर्वश्रेष्ठ निर्देशक - फिल्म [[तेरे नाम|'तेरे नाम]]' (२००३)
* २००४ - पॉपुलर अवार्ड (नामांकित) - सर्वश्रेष्ठ फिल्म निर्देशक - फिल्म [[तेरे नाम|'तेरे नाम']] (२००३)
* २०१५ - इंडियन टेली अवार्ड (नामांकित) - सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता (सहायक भूमिका) - फिल्म [[सुमित संभाल लेगा|'सुमित संभाल लेगा]]' (२०१५)
* २०१७ - जी सिने अवार्ड (नामांकित) - सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता - फिल्म [[उड़ता पंजाब|'उड़ता पंजाब']] (२०१६)
* २०२१ - पॉपुलर अवार्ड (नामांकित) - सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता - वेब ओरिजिनल फिल्म [[:en:Kaagaz|'कागज़]]' (२०२१)
* २०२१ - फिल्म अवार्ड (नामांकित) - सर्वश्रेष्ठ फिल्म निर्देशक - फिल्म [[:en:Kaagaz|'कागज़']] (२०२१)
* २०२२ - जूरी अवार्ड (विजेता) - सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता - फिल्म [[:en:Thar (film)|'थार']] (२०२२)
* २०२२ - दादा साहेब फाल्के अवार्ड (विजेता) - सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता - फिल्म [[:en:Kaagaz|'कागज़']] (२०२१)
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
{{फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता पुरस्कार}}
[[श्रेणी:फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार विजेता]]
[[श्रेणी:हिन्दी अभिनेता]]
[[श्रेणी:1956 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:पंजाब के लोग]]
[[श्रेणी:२०२३ में निधन]]
0xi44ckt2tt8rilhhk8i7v0pjbj87e2
पराबैंगनी विकिरण
0
26664
6630502
2821886
2026-10-17T17:38:46Z
SM7
89247
[[पराबैंगनी]] को अनुप्रेषित
6630502
wikitext
text/x-wiki
#पुनर्प्रेषित [[पराबैंगनी]]
b0a559tq751my7kj8k8l4992pf9l3t5
विकिपीडिया:प्रबन्धक सूचनापट
4
28428
6630664
6628180
2026-10-18T08:54:11Z
विक्रम प्रताप
911487
सदस्य रिपोर्ट: ~2026-53796-31
6630664
wikitext
text/x-wiki
{{/शीर्ष}}
<!-- ------------------------- चर्चाएँ/सूचनायें/प्रस्ताव --------------------------- -->
<!-- ------------------------- नया अनुभाग हमेशा सबसे नीचे बनायें --------------------------- -->
{{चर्चा शीर्ष}}
== सदस्य रिपोर्ट 10 जुलाई 2026 ==
*{{vandal|~2026-38915-40}} – गलत जानकारी जोड़ना जाँचे तथा अवरोधित करें [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:22, 10 जुलाई 2026 (UTC)
*:@[[सदस्य:SM7|SM7]] जी, अब बर्बरता भी कर रहे हैं [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:26, 10 जुलाई 2026 (UTC)
*::@[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] कितने दिनों से कर रहे हैं? --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 04:42, 10 जुलाई 2026 (UTC)
*:::@[[सदस्य:SM7|SM7]] जी, इन्होंने सम्पादन आज ही शुरू किया है, मेरे [[एप्पल इंक॰]] पर इनकी जानकारी को वापस लिया था जिसके उपरांत इन्होंने पुनः उसे जोड़ दिया और इन्होंने [[लालू प्रसाद यादव]], [[रिलायन्स इण्डस्ट्रीज]] में भी गलत जानकारी जोड़ी थी [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:47, 10 जुलाई 2026 (UTC)
*::::@[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] आज ही शुरू किया है तो (इसी अस्थाई खाते से यदि उत्पात जारी रहें) दो दिनों के बाद रपट लिखवाईयेगा। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 04:50, 10 जुलाई 2026 (UTC)
*:::::@[[सदस्य:SM7|SM7]] जी, क्या मैं [[एप्पल इंक॰]] से गलत जानकारी हटा दूं, वह सम्पादन युद्ध तो नहीं होगा? [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:52, 10 जुलाई 2026 (UTC)
{{चर्चा तल}}
== सदस्य Akthakur2001 द्वारा घृणा फैलाने और फर्जी इतिहास लिखने के संबंध में (शीघ्र हटाने और ब्लॉक हेतु) ==
<blockquote>नमस्ते प्रबंधक जी,
मैं आपका ध्यान सदस्य Akthakur2001 के प्रयोगपृष्ठ (सदस्य:Akthakur2001/प्रयोगपृष्ठ) की ओर दिलाना चाहता हूँ। इस सदस्य ने विकिपीडिया के निजी स्पेस का दुरुपयोग करके "गुज्जरों और मुगल वैवाहिक सम्बन्ध" नाम से पूरी तरह से मनगढ़ंत, झूठी और फर्जी सूची बनाई है।
इसमें जानबूझकर समाज में आपसी विद्वेष और नफ़रत फैलाने के उद्देश्य से 'नोएडा' (जो कि 1976 में बना आधुनिक नाम है) जैसी जगहों और 'बेसल खा', 'लिडीमर खा' जैसे पूरी तरह से काल्पनिक नामों को इतिहास बताकर लिखा गया है। साथ ही स्थापित राजपूत रानी 'हरका बाई' के नाम को विकृत करके 'हरका गुचरी' लिखा गया है, जो सीधे तौर पर विकिपीडिया की 'घृणा भाषण' (Hate Speech) और 'बर्बरता' (Vandalism) नीतियों का घोर उल्लंघन है।
चूंकि यह सामग्री किसी भी प्रामाणिक स्रोत से नहीं है और इसका एकमात्र उद्देश्य एक समाज को नीचा दिखाना और विद्वेष भड़काना है, अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि:
# इस प्रयोगपृष्ठ (Sandbox) को शीघ्र हटाने की नीति (G10/G12) के तहत '''तुरंत और हमेशा के लिए डिलीट''' किया जाए।
# इस प्रकार की दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों के लिए उक्त सदस्य को '''स्थायी रूप से ब्लॉक (Block)''' किया जाए।
<nowiki>धन्यवाद। ~~~~</nowiki></blockquote>[[सदस्य:Official Anshika Patel|Official Anshika Patel]] ([[सदस्य वार्ता:Official Anshika Patel|वार्ता]]) 16:33, 11 जुलाई 2026 (UTC)
== सदस्य रिपोर्ट 12 जुलाई 2026 ==
*{{vandal|~2026-38156-35}} – [[सदस्य:SM7|SM7]] जी, फालतू कड़ी जोड़ना और यह खाता 3 जुलाई को बनाया गया था [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 14:18, 12 जुलाई 2026 (UTC)
*:@[[सदस्य:AMAN KUMAR|अमन कुमार]] जी यह कोई खाता नहीं बल्कि बिना खाते के प्रयोगकर्ता हैं। विकिपीडिया पर बिना खाते के भी लिखने हेतु अनुमति है। हालांकि गोपनीयता आदि कारणों से ये सहूलियत दी जाती है लेकिन ऐसे योगदान आमतौर पर विश्वसनीय नहीं माने जाते हैं , न ही विकी के विशेष feature का इस्तेमाल कर पाते हैं। [[सदस्य:Pushkar Singh|<span style="color:DeepPink;">पुष्कर सिंह</span>]] [[सदस्य वार्ता:Pushkar Singh|<span style="color:Red;">✉️</span>]] 08:30, 22 जुलाई 2026 (UTC)
== विकिपीडिया पर ज्ञानसंदूकों की कमी या सांचों में अपूर्णता ==
मुझे लगता है हिंदी विकिपीडिया पर '''सांचों की कमी''' है, कुछ तो अंग्रेज़ी से आयातित हैं और कुछ हिंदी में काम भी नहीं करते हैं। इसी तरह देश, राज्य से सम्बन्धित 'ज्ञानसंदूक' में literacy या साक्षरता जैसे प्राचल गायब रहते हैं। यदि infobox बोझिल या विस्तृत न लगे तो मैं चाहता हूं ये प्राचल भी जोड़ा जाए। वरिष्ठ सम्पादक या प्रबंधक अथवा विकी समुदाय के सदस्य इस पर विचार करें। [[सदस्य:Pushkar Singh|<span style="color:DeepPink;">पुष्कर सिंह</span>]] [[सदस्य वार्ता:Pushkar Singh|<span style="color:Red;">✉️</span>]] 08:41, 22 जुलाई 2026 (UTC)
{{चर्चा शीर्ष}}
== सदस्य रिपोर्ट 24 जुलाई 2026 ==
*{{vandal|Sarund mata mandir}} – गोपनीय जानकारी तथा प्रचार करना [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 01:59, 24 जुलाई 2026 (UTC)
{{चर्चा तल}}
{{चर्चा शीर्ष}}
== सदस्य रिपोर्ट 25 जुलाई 2026 ==
*{{vandal|Aman jtu}} – यूजरनेम आपत्तिजनक [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 03:12, 25 जुलाई 2026 (UTC)
*:@[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी मुझे भी लगता है ये यूजरनेम आपको देखकर रखा गया है , मैंने खाता खोलने के दिन देख लिया था फिर सोचा रहने देता हूं कुछ short नाम होगा। शायद आपके संपादन, पूर्ववत से चिढ़ रहें हैं। [[सदस्य:Pushkar Singh|<span style="color:DeepPink;">पुष्कर सिंह</span>]] [[सदस्य वार्ता:Pushkar Singh|<span style="color:Red;">✉️</span>]] 01:38, 27 जुलाई 2026 (UTC)
*::@[[सदस्य:Pushkar Singh|Pushkar Singh]] जी, महोदय चिढ़ के कारण ही किया हैं। @[[सदस्य:SM7|SM7]] जी प्रयोगकर्ता के यूजरनेम को बदले या अवरोधित करें। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 01:50, 27 जुलाई 2026 (UTC)
*:::मुझे तो यह एक सामान्य नाम लग रहा है। आपको क्यों लगता है कि इसमें कोई समस्या है या यह आपसे संबंधित है? – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 12:55, 27 जुलाई 2026 (UTC)
*::::@[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] जी, प्रयोगकर्ता का jhu लगाना गाली हैं, और Aman मेरा प्रथम नाम है, यह खाता तक बनाया गया जब मैने [[मजरौठ (अहीर)]] पर एक रोलबैक किया था। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 13:15, 27 जुलाई 2026 (UTC)
*:::::मैं नामांकन वापस ले रहा हूँ। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 01:09, 8 अगस्त 2026 (UTC)
{{चर्चा तल}}
== सदस्य रिपोर्ट 2 अगस्त 2026 ==
*{{vandal|Gauravsax}} – [[पवई, विदिशा]] लेख पर बार-बार बिना स्रोत के मूल शोध जोड़ने के कारण अवरोधन का अनुरोध [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 23:42, 1 अगस्त 2026 (UTC)
== सदस्य रिपोर्ट 4 अगस्त 2026 ==
*{{vandal|~2026-43055-73}} – अपमानजनक शब्दों का प्रयोग [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 22:39, 3 अगस्त 2026 (UTC)
{{चर्चा शीर्ष}}
== सदस्य रिपोर्ट 4 अगस्त 2026 ==
*{{vandal|Journeytricks}} – स्व प्रचार [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 11:32, 4 अगस्त 2026 (UTC)
{{चर्चा तल}}
{{चर्चा शीर्ष}}
== Sarkari Samrat की रिपोर्ट ==
सदस्य: {{User|Sarkari Samrat}}
कारण: बर्बरता
[[सदस्य:TypeInfo|TypeInfo]] ([[सदस्य वार्ता:TypeInfo|वार्ता]]) 07:02, 7 सितंबर 2026 (UTC)
{{Done}} [[User:Max|Max]]
{{चर्चा तल}}
== अनुमति ==
प्रबंधकों से आग्रह है कि वे [[स्वामीनारायण]] पर मौजूद सन्दर्भहीन जानकारी को हटाने की अनुमति दें क्योंकि यह सुरक्षित है और इसमें बहुत भाग सन्दर्भहीन है [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 15:48, 8 सितंबर 2026 (UTC)
== अशोक हमराही लेख पुनर्स्थापना अनुरोध ==
"नमस्ते प्रबंधक जी, मैंने हाल ही में 'अशोक हमराही' नाम से एक लेख बनाया था जिसे स्पैम मानकर हटा दिया गया है। अशोक हमराही जी फिल्म, पटकथा और पत्रकारिता जगत की एक उल्लेखनीय हस्ती हैं और लेख को प्रचार के उद्देश्य से नहीं बनाया गया था। कृपया इस हटाए गए लेख की सामग्री (Text) को मेरे प्रयोगपृष्ठ सदस्य:Rajul Ashok/प्रयोगपृष्ठ/अशोक-हमराही पर पुनर्स्थापित (Restore) करने की कृपा करें, ताकि मैं इसमें आवश्यक सुधार और विश्वसनीय समाचार स्रोतों के संदर्भ जोड़ सकूं।" [[सदस्य:Rajul Ashok|Rajul Ashok]] ([[सदस्य वार्ता:Rajul Ashok|वार्ता]]) 15:48, 15 सितंबर 2026 (UTC)
:विनम्र अनुस्मारक: कृपया हटाए गए “अशोक हमराही” लेख की सामग्री मेरे प्रयोगपृष्ठ सदस्य:Rajul Ashok/प्रयोगपृष्ठ/अशोक-हमराही पर उपलब्ध कराने की कृपा करें। मैं इसे संक्षिप्त, तटस्थ और स्वतंत्र विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित रूप में पुनर्लिखना चाहता हूँ। धन्यवाद। [[सदस्य:Rajul Ashok|Rajul Ashok]] ([[सदस्य वार्ता:Rajul Ashok|वार्ता]]) 17:01, 21 सितंबर 2026 (UTC)
::नमस्कार। हटाए गए “अशोक हमराही” लेख के स्थान पर अब एक नया, संक्षिप्त, तटस्थ एवं संदर्भयुक्त मसौदा [[सदस्य:Raghuvansham12/अशोक हमराही]] पर तैयार किया गया है। इसमें स्वतंत्र विश्वसनीय समाचार स्रोतों तथा अन्य उपयुक्त संदर्भों के आधार पर सामग्री रखी गई है और प्रचारात्मक भाषा से बचा गया है। कृपया मसौदे की समीक्षा कर उचित समझें तो इसे मुख्य नामस्थान में स्थानांतरित/पुनर्स्थापित करने का मार्गदर्शन प्रदान करें। धन्यवाद। [[सदस्य:Raghuvansham12|Raghuvansham12]] ([[सदस्य वार्ता:Raghuvansham12|वार्ता]]) 17:38, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
:::नमस्कार, इस चर्चा में पहला अनुरोध 15 सितंबर और अनुस्मारक 21 सितंबर को दिया गया था
:::2 अक्टूबर को नया मसौदा [[सदस्य:Raghuvansham12/अशोक हमराही]] समीक्षा के लिए प्रस्तुत किया गया है
:::कृपया बताएँ कि क्या कोई प्रबंधक या अनुभवी संपादक इसकी समीक्षा कर सकता है, अथवा समीक्षा के लिए किसी अन्य उपयुक्त पृष्ठ पर अनुरोध करना चाहिए
:::यदि मसौदे में कोई कमी है तो कृपया उसका उल्लेख करें, ताकि आवश्यक सुधार किए जा सकें
:::धन्यवाद [[सदस्य:Raghuvansham12|Raghuvansham12]] 11:08, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
== मदद ==
नमस्ते प्रबंधकों, [[श्रीरामरक्षास्तोत्रम्]] के आखिरी अवतरण को हटा दें और इसी के संदर्भ में मैने इसे [[विकिपीडिया:पृष्ठ सुरक्षा अनुरोध|सुरक्षित करने का अनुरोध]] भी किया है [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 02:06, 16 सितंबर 2026 (UTC)
== सूचना ==
हाल ही में मैंने विकिपीडिया पुस्तकालय की कार्यप्रणाली और इसके उपयोग को लेकर दो सूचनात्मक वीडियो देखे हैं:
[https://commons.wikimedia.org/wiki/File:The_wikipedia_library;_An_overview_and_opportunities_to_collaborate.webm पहली वीडियो (विकिमीडिया कॉमन्स)]
[https://www.youtube.com/watch?v=cea01COebiw दूसरा वीडियो (यूट्यूब)]
इन्हें देखने के बाद मेरे मन में यह विचार आया कि हम अपने हिन्दी विकिपीडिया के सदस्यों के बीच [[विकिपीडिया:विकिपीडिया पुस्तकालय|हिन्दी विकिपीडिया पुस्तकालय]] का अधिक से अधिक प्रसार कैसे कर सकते हैं, ताकि सदस्य इसका लाभ उठा सकें।
इसके माध्यम से मुफ़्त में उच्च-गुणवत्ता वाले प्रमाणित और विश्वसनीय स्रोत प्राप्त कर सकते है। इससे हिन्दी विकिपीडिया पर लेखों की गुणवत्ता और सत्यता को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा।
कृपया इस विषय पर अपने विचार साझा करें कि पुस्तकालय के उपयोग को कैसे बढ़ावा दे सकते हैं।
धन्यवाद, [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:31, 16 सितंबर 2026 (UTC)
== Nimesh2026 की रिपोर्ट ==
सदस्य: {{User|Nimesh2026}}
कारण: बर्बरता
[[सदस्य:TypeInfo|TypeInfo]] ([[सदस्य वार्ता:TypeInfo|वार्ता]]) 05:00, 17 सितंबर 2026 (UTC)
== जाँच ==
महोदय, [[हाबिसपुर (Habispur)]] लेख के अभी अग्र [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0_(Habispur)&oldid=6616600 ६ संदर्भ रद्दी] है और मुझे इस तरह के लेख को सूचित करने के लिए यदि साँचा मौजूद हो तो बात दें [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 23:38, 18 सितंबर 2026 (UTC)
== पृष्ठ ज्ञानसन्दूक त्रुटि ==
जी! [[जीवन]] में सुधार आवश्यक [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 15:58, 21 सितंबर 2026 (UTC)
{{चर्चा शीर्ष}}
== False positive on Abuse Filter regarding Trinnaphob Thongchay hoax ==
Hello. I am a global editor trying to tag the page [[त्रिन्नापोप थोंगचाय]] for speedy deletion because it is a cross-wiki hoax / LTA fake persona. However, my action was blocked by the automated abuse filter. Could an administrator please look into this article and delete it? Thank you. [[सदस्य:Matchabake|Matchabake]] ([[सदस्य वार्ता:Matchabake|वार्ता]]) 04:15, 25 सितंबर 2026 (UTC)
:Done. I requested for deletion. [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:24, 25 सितंबर 2026 (UTC)
{{चर्चा तल}}
== प्रयोगपृष्ठ (Sandbox) पर स्वचालित फ़िल्टर त्रुटि के संबंध में अनुरोध ==
नमस्ते प्रबंधक महोदय,मैं सदस्य:Abhivj48 हूँ। मैं अपने प्रयोगपृष्ठ (सदस्य:Abhivj48/प्रयोगपृष्ठ) पर एक थिएटर निर्देशक और फिल्म निर्माता के रूप में अपनी जीवनी का ड्राफ्ट तैयार कर रहा था। शुरुआत में इस पर 'साफ़ प्रचार (व7)' का नामांकन टैग लगा था, जिसे सुधारने के लिए मैंने लेख को पूरी तरह तटस्थ (Neutral) बनाने और सभी प्रचारक शब्द हटाने का प्रयास किया।परंतु, जब मैं इस सुधारे गए टेक्स्ट को सहेजने का प्रयास कर रहा हूँ, तो स्वचालित फ़िल्टर द्वारा मुझे "हानिकारक कार्य" का एरर दिखाया जा रहा है और संपादन करने से रोका जा रहा है। मेरा उद्देश्य विकिपीडिया पर कोई विघटनकारी व्यवहार करना नहीं है, बल्कि केवल अपने ड्राफ्ट को नीतियों के अनुरूप सही करना है।कृपया मेरे प्रयोगपृष्ठ से इस फ़िल्टर अवरोध को हटाने की कृपा करें ताकि मैं इसे विश्वसनीय समाचार स्रोतों के साथ सही तरीके से अद्यतित कर सकूं। धन्यवाद। [[सदस्य:Abhivj48|Abhivj48]] ([[सदस्य वार्ता:Abhivj48|वार्ता]]) 15:23, 26 सितंबर 2026 (UTC)
== जाँचे ==
जी! पृष्ठ [[हिन्दुस्तान मशीन टूल्स]] के नए अवतरण को जाँच लें। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 12:36, 29 सितंबर 2026 (UTC)
== सदस्य रिपोर्ट 1 अक्टूबर 2026 ==
*{{vandal|~2026-52536-21}} – हहेच साँचे को हटाना (यह दूसरी बार) [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 02:11, 1 अक्टूबर 2026 (UTC)
== [[राहुल शर्मा (किसान नेता)]] पृष्ठ पुनर्स्थापना अनुरोध ==
नमस्ते प्रबन्धकगण,
हाल ही में [[सदस्य:Max|Max]] जी द्वारा [[राहुल शर्मा (किसान नेता)]] पृष्ठ को 'व4 (साफ़ धोखा)' के आधार पर हटाया गया था।
कृपया ध्यान दें कि यह पृष्ठ किसी भी प्रकार से 'धोखा' या फर्जी सामग्री नहीं है। इस संबंध में मूल समीक्षक [[सदस्य:RJ Raawat|RJ Raawat]] जी से वार्ता पृष्ठ पर चर्चा हुई थी, जिसमें उन्होंने स्वयं यह माना था कि यह कोई मनगढ़ंत लेख नहीं है और संदर्भों को दुरुस्त करने का सुझाव दिया था। उनके सुझाव के अनुसार लेख में निम्नलिखित विश्वसनीय एवं मुख्यधारा संदर्भ जोड़े जा चुके थे:
1. '''दैनिक जागरण (16 जुलाई 2026, जागरण सिटी रुड़की, पृष्ठ 3):''' भाकियू (चढ़ूनी) के जिलाध्यक्ष के रूप में राहुल शर्मा के नेतृत्व में भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में निकाली गई बाइक रैली, एसडीएम को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन और उनके वक्तव्य की सचित्र विस्तृत रिपोर्ट।
2. '''दैनिक जागरण (10 जून 2026, हरिद्वार संस्करण):''' हरिद्वार के वीआईपी घाट पर आयोजित राष्ट्रीय किसान महाकुंभ एवं चिंतन शिविर में सत्र की अध्यक्षता का आधिकारिक विवरण।
3. '''स्वतंत्र वीडियो साक्ष्य:''' क्षेत्रीय समाचार चैनल '''Star News Plus Live''' (यूट्यूब आईडी: <code>TGnUDmHIXTg</code>) पर रुड़की तहसील में किसानों के मुद्दों (मंगलौर नहर पुल रेलिंग एवं फसल मुआवजा) पर ज्ञापन का वीडियो कवरेज तथा '''Nation TV Bharat''' (यूट्यूब आईडी: <code>CEs1pfmA80c</code>) पर जिलाध्यक्ष पद पर नियुक्ति का समाचार।
चूंकि लेख में राष्ट्रीय मुख्यधारा समाचार पत्र (दैनिक जागरण) के दो अलग-अलग तिथियों के प्रामाणिक संदर्भ मौजूद हैं, अतः यह पृष्ठ 'व4 (साफ़ धोखा)' के अंतर्गत नहीं आता है।
प्रबन्धकगण से सविनय निवेदन है कि कृपया इस पृष्ठ एवं इसके वार्ता पृष्ठ को '''पुनर्स्थापित (Undelete / Restore)''' करने की कृपा करें।
सधन्यवाद! [[विशेष:योगदान/~2026-53379-27|~2026-53379-27]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-53379-27|वार्ता]]) 17:39, 3 अक्टूबर 2026 (UTC)
:मेरे विचार से इस लेख को विकिपीडिया पर पुनः स्थापित करना उचित नहीं होगा। लेख में शामिल व्यक्ति की उल्लेखनीयता स्पष्ट नहीं होती। इसके अलावा, दिए गए कुछ संदर्भ भी पर्याप्त रूप से विश्वसनीय या उल्लेखनीय नहीं हैं। कुछ स्रोतों में व्यक्ति का केवल उल्लेख किया गया है, जबकि वे स्रोत वास्तव में उस व्यक्ति के बारे में नहीं हैं। <span style="color:#d4330b;"></span>[[सदस्य:RJ Raawat|<span style="color:#d4330b;"><b>RJ RAAWAT</b></span>]]<span> | </span>[[सदस्य वार्ता:RJ Raawat|<small style="color:#373231;"><b>Talk</b></small>]] 07:17, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
::प्रबन्धकगण एवं [[सदस्य:RJ Raawat|RJ Raawat]] जी,
::1. '''व4 (साफ़ धोखा) के अंतर्गत अनुचित विलोपन:''' जैसा कि पूर्व चर्चा से भी स्पष्ट है, यह विषय किसी भी रूप में 'धोखा' या मनगढ़ंत नहीं है। विकिपीडिया नीति के अनुसार 'व4' मापदंड केवल पूर्णतः फर्जी/काल्पनिक पेजों के लिए होता है। उल्लेखनीयता के विषय पर 'हटाने हेतु चर्चा' (AfD) में समुदाय द्वारा विचार किया जाता है, शीघ्र हटाने में नहीं।
::2. '''दैनिक जागरण (16 जुलाई 2026) का प्रत्यक्ष कवरेज:''' 16 जुलाई 2026 के दैनिक जागरण (रुड़की, पृष्ठ 3) के पूरे समाचार का मुख्य विषय ही जिलाध्यक्ष राहुल शर्मा के नेतृत्व में आयोजित बाइक रैली, एसडीएम को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन और उनका आधिकारिक बयान है (सचित्र)। यह केवल नाम का उल्लेख नहीं, बल्कि उनके कार्य और नेतृत्व पर केंद्रित कवरेज है।
::3. '''वैकल्पिक समाधान (ड्राफ्ट/प्रयोगस्थल में पुनर्स्थापना):''' यदि मुख्य नामस्थान पर उल्लेखनीयता को लेकर संदेह है, तो विकिपीडिया की स्थापित परिपाटी के अनुसार इस लेख को '''[[सदस्य:Chocolategoldy/प्रयोगपृष्ठ]]''' अथवा प्रारूप (Draft) नामस्थान पर पुनर्स्थापित करने की कृपा करें, ताकि इसमें अन्य क्षेत्रीय समाचार पत्रों के विवरण जोड़कर समुदाय के समक्ष समीक्षा हेतु प्रस्तुत किया जा सके। सधन्यवाद। [[विशेष:योगदान/~2026-53379-27|~2026-53379-27]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-53379-27|वार्ता]]) 07:54, 5 अक्टूबर 2026 (UTC)
:::गूगल पर उपलब्ध स्रोतों के आधार पर फिलहाल इस विषय की उल्लेखनीयता स्पष्ट नहीं होती। इसलिए लेख को पुनर्स्थापित करना उचित नहीं लगता। भविष्य में जब इस विषय पर पर्याप्त विश्वसनीय स्रोत उपलब्ध हों तो आप या कोई अन्य सदस्य इस पर लेख बना सकते हैं। [[सदस्य:Max|Max]] ([[सदस्य वार्ता:Max|वार्ता]]) 16:12, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
== चित्रों की अस्थायी पुनर्स्थापना का अनुरोध ==
माननीय प्रबंधकगण,
आप लोगों ने रूस_में_हिन्दी4.JPG और रूस_में_हिन्दी2.JPG को हटा दिया है। इन दोनों चित्रों का उपयोग मैं अपने लेख “रूस में हिन्दी” में कर रहा था।
उल्लेखनीय है कि ये दोनों चित्र मुझे मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास से प्राप्त हुए थे। वर्तमान में मुझे इन चित्रों की पुनः आवश्यकता है।
अतः मेरा आपसे विनम्र अनुरोध है कि कृपया इन दोनों चित्रों को कम-से-कम अस्थायी रूप से पुनर्स्थापित (temporarily restore) कर दें और मुझे सूचित करें, ताकि मैं इन्हें Wikipedia से हटाकर अपने अन्य आवश्यक कार्यों में सुरक्षित रूप से उपयोग कर सकूँ।
इन चित्रों को Wikipedia पर स्थायी रूप से रखना है अथवा नहीं, इसका निर्णय आप अपने नियमों और नीतियों के अनुसार कर सकते हैं। मेरी तत्काल आवश्यकता केवल इतनी है कि मुझे इन दोनों चित्रों तक अस्थायी रूप से पहुँच (temporary access) मिल जाए।
आपकी सहायता के लिए धन्यवाद।
सादर,
--[[सदस्य:Hindustanilanguage|डॉ. मुज़म्मिल]] ([[सदस्य वार्ता:Hindustanilanguage|वार्ता]]) 18:38, 3 अक्टूबर 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:Hindustanilanguage|मुज़म्मिल जी]]: मैंने दोनों चित्रों को पुनर्स्थापित कर दिया है। इन्हें 14 दिनों से ज्यादा समय तक कोई लाइसेंस न होने के कारण हटाया गया था। अगर आपके पास इनका जरूरी स्वामित्व है और आप कोई वैध लाइसेंस की जानकारी जोड़ सकते हैं तो इन्हें रखा जा सकता है। अगर आप ऐसा कर सकते हैं तो इन दोनों फ़ाइल पेजों से शीघ्र हटाने के साँचे हटा दें। अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो कुछ दिनों बाद इन्हें फिर से हटाना पड़ेगा। [[सदस्य:Max|Max]] ([[सदस्य वार्ता:Max|वार्ता]]) 16:05, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
::मैक्स जी!
::इन चित्रों को पुनः स्थापित करने के लिए धन्यवाद। जैसा कि आप देख सकते हैं, “विश्व में हिंदी” परियोजना का प्रारंभकर्ता और उसमें सबसे अधिक योगदान करने वाला व्यक्ति मैं ही हूँ।
::इस परियोजना पर काम करते समय मैंने विभिन्न स्रोतों का अध्ययन किया और कई व्यक्तियों से, यहाँ तक कि हमारे राजदूतावासों से भी, संपर्क किया। रूस स्थित हमारे दूतावास के लोगों ने ये चित्र मेरे साथ साझा किए थे, ताकि मैं उनका उपयोग विकिपीडिया पर अपने लेख में कर सकूँ।
::इस जानकारी के आधार पर आप उचित निर्णय ले सकते हैं।
::इनमें से किसी भी चित्र में न तो मैं हूँ और न ही मेरे कोई परिजन हैं। [[सदस्य:Hindustanilanguage|डॉ. मुज़म्मिल]] ([[सदस्य वार्ता:Hindustanilanguage|वार्ता]]) 20:41, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
:::आशा है आपने इन्हें डाउनलोड कर लिया होगा। मैं इन्हें कल समय मिलने पर हटाने वाला हूँ। [[सदस्य:Max|Max]] ([[सदस्य वार्ता:Max|वार्ता]]) 15:57, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
== X-wiki spam ==
Hi, and please excuse me for writing in English. As a global sysop, I've came to a case of repeated x-wiki spam. I've just deleted [[अर्जुन पंचारिया सिंधु]] which was repeatedly created here and on some other wikis. The involved accounts, [[User:SDK 1252]], [[User:SD 78]] and [[User:Hindu Times India]] were globally locked after my request at [[:m:SRG]]. Their predecessor was [[User:Official Arjun Panchariya 45]], see also [[:en:Wikipedia:Sockpuppet investigations/Official Arjun Panchariya 45]]. The pages [[मांगीलाल बागड़ी राजकीय महाविद्यालय, नोखा]] and [[महारानी सुदर्शन महिला महाविद्यालय बीकानेर]] look both like AI-generated as the spammed articles, so I've marked them for deletion or at least review by community. I would suggest to protect अर्जुन पंचारिया सिंधु against recreation as hiwiki is mostly affected by this kind of self-promotional spam. [[सदस्य:NDG|NDG]] ([[सदस्य वार्ता:NDG|वार्ता]]) 08:07, 5 अक्टूबर 2026 (UTC)
{{चर्चा शीर्ष}}
== सदस्य रिपोर्ट 8 अक्टूबर 2026 ==
*{{vandal|GovindMalviya4u}} – अप्रमाणित, स्पैम संदर्भों को जोड़ना और चेतावनी के पश्चात् भी सुधार न करना [[User:विक्रम प्रताप|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:विक्रम प्रताप|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 12:39, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
*:{{Done}} [[सदस्य:Max|Max]] ([[सदस्य वार्ता:Max|वार्ता]]) 16:05, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
{{चर्चा तल}}
{{चर्चा शीर्ष}}
== सदस्य रिपोर्ट 8 अक्टूबर 2026 ==
*{{vandal|Raushandeep1802}} – तटस्थ दृष्टिकोण न रखना और सन्दर्भ न देना [[User:विक्रम प्रताप|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:विक्रम प्रताप|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 13:30, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
*:{{done}} [[सदस्य:Max|Max]] ([[सदस्य वार्ता:Max|वार्ता]]) 16:06, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
{{चर्चा तल}}
== सदस्य रिपोर्ट 11 अक्टूबर 2026 ==
*{{vandal|~2026-54584-81}} – असंदर्भित जानकारी जोड़ना बार बार और बर्बरता करना [[User:विक्रम प्रताप|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:विक्रम प्रताप|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 00:33, 11 अक्टूबर 2026 (UTC)
== सदस्य रिपोर्ट 18 अक्टूबर 2026 ==
*{{vandal|~2026-53796-31}} – इस संपादन को पूर्ववत करने में समस्या आ रही है इसे पूर्ववत कर दें [[User:विक्रम प्रताप|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:विक्रम प्रताप|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 08:54, 18 अक्टूबर 2026 (UTC)
huns83ur7nyp1opjr2216sa9tzudpod
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2026-10-18T08:54:56Z
विक्रम प्रताप
911487
/* सदस्य रिपोर्ट 18 अक्टूबर 2026 */ उत्तर दिया: पृष्ठ - [[आलू]] (-) ([[mw:c:Special:MyLanguage/User:JWBTH/CD|CD]])
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wikitext
text/x-wiki
{{/शीर्ष}}
<!-- ------------------------- चर्चाएँ/सूचनायें/प्रस्ताव --------------------------- -->
<!-- ------------------------- नया अनुभाग हमेशा सबसे नीचे बनायें --------------------------- -->
{{चर्चा शीर्ष}}
== सदस्य रिपोर्ट 10 जुलाई 2026 ==
*{{vandal|~2026-38915-40}} – गलत जानकारी जोड़ना जाँचे तथा अवरोधित करें [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:22, 10 जुलाई 2026 (UTC)
*:@[[सदस्य:SM7|SM7]] जी, अब बर्बरता भी कर रहे हैं [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:26, 10 जुलाई 2026 (UTC)
*::@[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] कितने दिनों से कर रहे हैं? --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 04:42, 10 जुलाई 2026 (UTC)
*:::@[[सदस्य:SM7|SM7]] जी, इन्होंने सम्पादन आज ही शुरू किया है, मेरे [[एप्पल इंक॰]] पर इनकी जानकारी को वापस लिया था जिसके उपरांत इन्होंने पुनः उसे जोड़ दिया और इन्होंने [[लालू प्रसाद यादव]], [[रिलायन्स इण्डस्ट्रीज]] में भी गलत जानकारी जोड़ी थी [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:47, 10 जुलाई 2026 (UTC)
*::::@[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] आज ही शुरू किया है तो (इसी अस्थाई खाते से यदि उत्पात जारी रहें) दो दिनों के बाद रपट लिखवाईयेगा। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 04:50, 10 जुलाई 2026 (UTC)
*:::::@[[सदस्य:SM7|SM7]] जी, क्या मैं [[एप्पल इंक॰]] से गलत जानकारी हटा दूं, वह सम्पादन युद्ध तो नहीं होगा? [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:52, 10 जुलाई 2026 (UTC)
{{चर्चा तल}}
== सदस्य Akthakur2001 द्वारा घृणा फैलाने और फर्जी इतिहास लिखने के संबंध में (शीघ्र हटाने और ब्लॉक हेतु) ==
<blockquote>नमस्ते प्रबंधक जी,
मैं आपका ध्यान सदस्य Akthakur2001 के प्रयोगपृष्ठ (सदस्य:Akthakur2001/प्रयोगपृष्ठ) की ओर दिलाना चाहता हूँ। इस सदस्य ने विकिपीडिया के निजी स्पेस का दुरुपयोग करके "गुज्जरों और मुगल वैवाहिक सम्बन्ध" नाम से पूरी तरह से मनगढ़ंत, झूठी और फर्जी सूची बनाई है।
इसमें जानबूझकर समाज में आपसी विद्वेष और नफ़रत फैलाने के उद्देश्य से 'नोएडा' (जो कि 1976 में बना आधुनिक नाम है) जैसी जगहों और 'बेसल खा', 'लिडीमर खा' जैसे पूरी तरह से काल्पनिक नामों को इतिहास बताकर लिखा गया है। साथ ही स्थापित राजपूत रानी 'हरका बाई' के नाम को विकृत करके 'हरका गुचरी' लिखा गया है, जो सीधे तौर पर विकिपीडिया की 'घृणा भाषण' (Hate Speech) और 'बर्बरता' (Vandalism) नीतियों का घोर उल्लंघन है।
चूंकि यह सामग्री किसी भी प्रामाणिक स्रोत से नहीं है और इसका एकमात्र उद्देश्य एक समाज को नीचा दिखाना और विद्वेष भड़काना है, अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि:
# इस प्रयोगपृष्ठ (Sandbox) को शीघ्र हटाने की नीति (G10/G12) के तहत '''तुरंत और हमेशा के लिए डिलीट''' किया जाए।
# इस प्रकार की दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों के लिए उक्त सदस्य को '''स्थायी रूप से ब्लॉक (Block)''' किया जाए।
<nowiki>धन्यवाद। ~~~~</nowiki></blockquote>[[सदस्य:Official Anshika Patel|Official Anshika Patel]] ([[सदस्य वार्ता:Official Anshika Patel|वार्ता]]) 16:33, 11 जुलाई 2026 (UTC)
== सदस्य रिपोर्ट 12 जुलाई 2026 ==
*{{vandal|~2026-38156-35}} – [[सदस्य:SM7|SM7]] जी, फालतू कड़ी जोड़ना और यह खाता 3 जुलाई को बनाया गया था [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 14:18, 12 जुलाई 2026 (UTC)
*:@[[सदस्य:AMAN KUMAR|अमन कुमार]] जी यह कोई खाता नहीं बल्कि बिना खाते के प्रयोगकर्ता हैं। विकिपीडिया पर बिना खाते के भी लिखने हेतु अनुमति है। हालांकि गोपनीयता आदि कारणों से ये सहूलियत दी जाती है लेकिन ऐसे योगदान आमतौर पर विश्वसनीय नहीं माने जाते हैं , न ही विकी के विशेष feature का इस्तेमाल कर पाते हैं। [[सदस्य:Pushkar Singh|<span style="color:DeepPink;">पुष्कर सिंह</span>]] [[सदस्य वार्ता:Pushkar Singh|<span style="color:Red;">✉️</span>]] 08:30, 22 जुलाई 2026 (UTC)
== विकिपीडिया पर ज्ञानसंदूकों की कमी या सांचों में अपूर्णता ==
मुझे लगता है हिंदी विकिपीडिया पर '''सांचों की कमी''' है, कुछ तो अंग्रेज़ी से आयातित हैं और कुछ हिंदी में काम भी नहीं करते हैं। इसी तरह देश, राज्य से सम्बन्धित 'ज्ञानसंदूक' में literacy या साक्षरता जैसे प्राचल गायब रहते हैं। यदि infobox बोझिल या विस्तृत न लगे तो मैं चाहता हूं ये प्राचल भी जोड़ा जाए। वरिष्ठ सम्पादक या प्रबंधक अथवा विकी समुदाय के सदस्य इस पर विचार करें। [[सदस्य:Pushkar Singh|<span style="color:DeepPink;">पुष्कर सिंह</span>]] [[सदस्य वार्ता:Pushkar Singh|<span style="color:Red;">✉️</span>]] 08:41, 22 जुलाई 2026 (UTC)
{{चर्चा शीर्ष}}
== सदस्य रिपोर्ट 24 जुलाई 2026 ==
*{{vandal|Sarund mata mandir}} – गोपनीय जानकारी तथा प्रचार करना [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 01:59, 24 जुलाई 2026 (UTC)
{{चर्चा तल}}
{{चर्चा शीर्ष}}
== सदस्य रिपोर्ट 25 जुलाई 2026 ==
*{{vandal|Aman jtu}} – यूजरनेम आपत्तिजनक [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 03:12, 25 जुलाई 2026 (UTC)
*:@[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी मुझे भी लगता है ये यूजरनेम आपको देखकर रखा गया है , मैंने खाता खोलने के दिन देख लिया था फिर सोचा रहने देता हूं कुछ short नाम होगा। शायद आपके संपादन, पूर्ववत से चिढ़ रहें हैं। [[सदस्य:Pushkar Singh|<span style="color:DeepPink;">पुष्कर सिंह</span>]] [[सदस्य वार्ता:Pushkar Singh|<span style="color:Red;">✉️</span>]] 01:38, 27 जुलाई 2026 (UTC)
*::@[[सदस्य:Pushkar Singh|Pushkar Singh]] जी, महोदय चिढ़ के कारण ही किया हैं। @[[सदस्य:SM7|SM7]] जी प्रयोगकर्ता के यूजरनेम को बदले या अवरोधित करें। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 01:50, 27 जुलाई 2026 (UTC)
*:::मुझे तो यह एक सामान्य नाम लग रहा है। आपको क्यों लगता है कि इसमें कोई समस्या है या यह आपसे संबंधित है? – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 12:55, 27 जुलाई 2026 (UTC)
*::::@[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] जी, प्रयोगकर्ता का jhu लगाना गाली हैं, और Aman मेरा प्रथम नाम है, यह खाता तक बनाया गया जब मैने [[मजरौठ (अहीर)]] पर एक रोलबैक किया था। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 13:15, 27 जुलाई 2026 (UTC)
*:::::मैं नामांकन वापस ले रहा हूँ। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 01:09, 8 अगस्त 2026 (UTC)
{{चर्चा तल}}
== सदस्य रिपोर्ट 2 अगस्त 2026 ==
*{{vandal|Gauravsax}} – [[पवई, विदिशा]] लेख पर बार-बार बिना स्रोत के मूल शोध जोड़ने के कारण अवरोधन का अनुरोध [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 23:42, 1 अगस्त 2026 (UTC)
== सदस्य रिपोर्ट 4 अगस्त 2026 ==
*{{vandal|~2026-43055-73}} – अपमानजनक शब्दों का प्रयोग [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 22:39, 3 अगस्त 2026 (UTC)
{{चर्चा शीर्ष}}
== सदस्य रिपोर्ट 4 अगस्त 2026 ==
*{{vandal|Journeytricks}} – स्व प्रचार [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 11:32, 4 अगस्त 2026 (UTC)
{{चर्चा तल}}
{{चर्चा शीर्ष}}
== Sarkari Samrat की रिपोर्ट ==
सदस्य: {{User|Sarkari Samrat}}
कारण: बर्बरता
[[सदस्य:TypeInfo|TypeInfo]] ([[सदस्य वार्ता:TypeInfo|वार्ता]]) 07:02, 7 सितंबर 2026 (UTC)
{{Done}} [[User:Max|Max]]
{{चर्चा तल}}
== अनुमति ==
प्रबंधकों से आग्रह है कि वे [[स्वामीनारायण]] पर मौजूद सन्दर्भहीन जानकारी को हटाने की अनुमति दें क्योंकि यह सुरक्षित है और इसमें बहुत भाग सन्दर्भहीन है [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 15:48, 8 सितंबर 2026 (UTC)
== अशोक हमराही लेख पुनर्स्थापना अनुरोध ==
"नमस्ते प्रबंधक जी, मैंने हाल ही में 'अशोक हमराही' नाम से एक लेख बनाया था जिसे स्पैम मानकर हटा दिया गया है। अशोक हमराही जी फिल्म, पटकथा और पत्रकारिता जगत की एक उल्लेखनीय हस्ती हैं और लेख को प्रचार के उद्देश्य से नहीं बनाया गया था। कृपया इस हटाए गए लेख की सामग्री (Text) को मेरे प्रयोगपृष्ठ सदस्य:Rajul Ashok/प्रयोगपृष्ठ/अशोक-हमराही पर पुनर्स्थापित (Restore) करने की कृपा करें, ताकि मैं इसमें आवश्यक सुधार और विश्वसनीय समाचार स्रोतों के संदर्भ जोड़ सकूं।" [[सदस्य:Rajul Ashok|Rajul Ashok]] ([[सदस्य वार्ता:Rajul Ashok|वार्ता]]) 15:48, 15 सितंबर 2026 (UTC)
:विनम्र अनुस्मारक: कृपया हटाए गए “अशोक हमराही” लेख की सामग्री मेरे प्रयोगपृष्ठ सदस्य:Rajul Ashok/प्रयोगपृष्ठ/अशोक-हमराही पर उपलब्ध कराने की कृपा करें। मैं इसे संक्षिप्त, तटस्थ और स्वतंत्र विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित रूप में पुनर्लिखना चाहता हूँ। धन्यवाद। [[सदस्य:Rajul Ashok|Rajul Ashok]] ([[सदस्य वार्ता:Rajul Ashok|वार्ता]]) 17:01, 21 सितंबर 2026 (UTC)
::नमस्कार। हटाए गए “अशोक हमराही” लेख के स्थान पर अब एक नया, संक्षिप्त, तटस्थ एवं संदर्भयुक्त मसौदा [[सदस्य:Raghuvansham12/अशोक हमराही]] पर तैयार किया गया है। इसमें स्वतंत्र विश्वसनीय समाचार स्रोतों तथा अन्य उपयुक्त संदर्भों के आधार पर सामग्री रखी गई है और प्रचारात्मक भाषा से बचा गया है। कृपया मसौदे की समीक्षा कर उचित समझें तो इसे मुख्य नामस्थान में स्थानांतरित/पुनर्स्थापित करने का मार्गदर्शन प्रदान करें। धन्यवाद। [[सदस्य:Raghuvansham12|Raghuvansham12]] ([[सदस्य वार्ता:Raghuvansham12|वार्ता]]) 17:38, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
:::नमस्कार, इस चर्चा में पहला अनुरोध 15 सितंबर और अनुस्मारक 21 सितंबर को दिया गया था
:::2 अक्टूबर को नया मसौदा [[सदस्य:Raghuvansham12/अशोक हमराही]] समीक्षा के लिए प्रस्तुत किया गया है
:::कृपया बताएँ कि क्या कोई प्रबंधक या अनुभवी संपादक इसकी समीक्षा कर सकता है, अथवा समीक्षा के लिए किसी अन्य उपयुक्त पृष्ठ पर अनुरोध करना चाहिए
:::यदि मसौदे में कोई कमी है तो कृपया उसका उल्लेख करें, ताकि आवश्यक सुधार किए जा सकें
:::धन्यवाद [[सदस्य:Raghuvansham12|Raghuvansham12]] 11:08, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
== मदद ==
नमस्ते प्रबंधकों, [[श्रीरामरक्षास्तोत्रम्]] के आखिरी अवतरण को हटा दें और इसी के संदर्भ में मैने इसे [[विकिपीडिया:पृष्ठ सुरक्षा अनुरोध|सुरक्षित करने का अनुरोध]] भी किया है [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 02:06, 16 सितंबर 2026 (UTC)
== सूचना ==
हाल ही में मैंने विकिपीडिया पुस्तकालय की कार्यप्रणाली और इसके उपयोग को लेकर दो सूचनात्मक वीडियो देखे हैं:
[https://commons.wikimedia.org/wiki/File:The_wikipedia_library;_An_overview_and_opportunities_to_collaborate.webm पहली वीडियो (विकिमीडिया कॉमन्स)]
[https://www.youtube.com/watch?v=cea01COebiw दूसरा वीडियो (यूट्यूब)]
इन्हें देखने के बाद मेरे मन में यह विचार आया कि हम अपने हिन्दी विकिपीडिया के सदस्यों के बीच [[विकिपीडिया:विकिपीडिया पुस्तकालय|हिन्दी विकिपीडिया पुस्तकालय]] का अधिक से अधिक प्रसार कैसे कर सकते हैं, ताकि सदस्य इसका लाभ उठा सकें।
इसके माध्यम से मुफ़्त में उच्च-गुणवत्ता वाले प्रमाणित और विश्वसनीय स्रोत प्राप्त कर सकते है। इससे हिन्दी विकिपीडिया पर लेखों की गुणवत्ता और सत्यता को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा।
कृपया इस विषय पर अपने विचार साझा करें कि पुस्तकालय के उपयोग को कैसे बढ़ावा दे सकते हैं।
धन्यवाद, [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:31, 16 सितंबर 2026 (UTC)
== Nimesh2026 की रिपोर्ट ==
सदस्य: {{User|Nimesh2026}}
कारण: बर्बरता
[[सदस्य:TypeInfo|TypeInfo]] ([[सदस्य वार्ता:TypeInfo|वार्ता]]) 05:00, 17 सितंबर 2026 (UTC)
== जाँच ==
महोदय, [[हाबिसपुर (Habispur)]] लेख के अभी अग्र [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0_(Habispur)&oldid=6616600 ६ संदर्भ रद्दी] है और मुझे इस तरह के लेख को सूचित करने के लिए यदि साँचा मौजूद हो तो बात दें [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 23:38, 18 सितंबर 2026 (UTC)
== पृष्ठ ज्ञानसन्दूक त्रुटि ==
जी! [[जीवन]] में सुधार आवश्यक [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 15:58, 21 सितंबर 2026 (UTC)
{{चर्चा शीर्ष}}
== False positive on Abuse Filter regarding Trinnaphob Thongchay hoax ==
Hello. I am a global editor trying to tag the page [[त्रिन्नापोप थोंगचाय]] for speedy deletion because it is a cross-wiki hoax / LTA fake persona. However, my action was blocked by the automated abuse filter. Could an administrator please look into this article and delete it? Thank you. [[सदस्य:Matchabake|Matchabake]] ([[सदस्य वार्ता:Matchabake|वार्ता]]) 04:15, 25 सितंबर 2026 (UTC)
:Done. I requested for deletion. [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:24, 25 सितंबर 2026 (UTC)
{{चर्चा तल}}
== प्रयोगपृष्ठ (Sandbox) पर स्वचालित फ़िल्टर त्रुटि के संबंध में अनुरोध ==
नमस्ते प्रबंधक महोदय,मैं सदस्य:Abhivj48 हूँ। मैं अपने प्रयोगपृष्ठ (सदस्य:Abhivj48/प्रयोगपृष्ठ) पर एक थिएटर निर्देशक और फिल्म निर्माता के रूप में अपनी जीवनी का ड्राफ्ट तैयार कर रहा था। शुरुआत में इस पर 'साफ़ प्रचार (व7)' का नामांकन टैग लगा था, जिसे सुधारने के लिए मैंने लेख को पूरी तरह तटस्थ (Neutral) बनाने और सभी प्रचारक शब्द हटाने का प्रयास किया।परंतु, जब मैं इस सुधारे गए टेक्स्ट को सहेजने का प्रयास कर रहा हूँ, तो स्वचालित फ़िल्टर द्वारा मुझे "हानिकारक कार्य" का एरर दिखाया जा रहा है और संपादन करने से रोका जा रहा है। मेरा उद्देश्य विकिपीडिया पर कोई विघटनकारी व्यवहार करना नहीं है, बल्कि केवल अपने ड्राफ्ट को नीतियों के अनुरूप सही करना है।कृपया मेरे प्रयोगपृष्ठ से इस फ़िल्टर अवरोध को हटाने की कृपा करें ताकि मैं इसे विश्वसनीय समाचार स्रोतों के साथ सही तरीके से अद्यतित कर सकूं। धन्यवाद। [[सदस्य:Abhivj48|Abhivj48]] ([[सदस्य वार्ता:Abhivj48|वार्ता]]) 15:23, 26 सितंबर 2026 (UTC)
== जाँचे ==
जी! पृष्ठ [[हिन्दुस्तान मशीन टूल्स]] के नए अवतरण को जाँच लें। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 12:36, 29 सितंबर 2026 (UTC)
== सदस्य रिपोर्ट 1 अक्टूबर 2026 ==
*{{vandal|~2026-52536-21}} – हहेच साँचे को हटाना (यह दूसरी बार) [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 02:11, 1 अक्टूबर 2026 (UTC)
== [[राहुल शर्मा (किसान नेता)]] पृष्ठ पुनर्स्थापना अनुरोध ==
नमस्ते प्रबन्धकगण,
हाल ही में [[सदस्य:Max|Max]] जी द्वारा [[राहुल शर्मा (किसान नेता)]] पृष्ठ को 'व4 (साफ़ धोखा)' के आधार पर हटाया गया था।
कृपया ध्यान दें कि यह पृष्ठ किसी भी प्रकार से 'धोखा' या फर्जी सामग्री नहीं है। इस संबंध में मूल समीक्षक [[सदस्य:RJ Raawat|RJ Raawat]] जी से वार्ता पृष्ठ पर चर्चा हुई थी, जिसमें उन्होंने स्वयं यह माना था कि यह कोई मनगढ़ंत लेख नहीं है और संदर्भों को दुरुस्त करने का सुझाव दिया था। उनके सुझाव के अनुसार लेख में निम्नलिखित विश्वसनीय एवं मुख्यधारा संदर्भ जोड़े जा चुके थे:
1. '''दैनिक जागरण (16 जुलाई 2026, जागरण सिटी रुड़की, पृष्ठ 3):''' भाकियू (चढ़ूनी) के जिलाध्यक्ष के रूप में राहुल शर्मा के नेतृत्व में भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में निकाली गई बाइक रैली, एसडीएम को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन और उनके वक्तव्य की सचित्र विस्तृत रिपोर्ट।
2. '''दैनिक जागरण (10 जून 2026, हरिद्वार संस्करण):''' हरिद्वार के वीआईपी घाट पर आयोजित राष्ट्रीय किसान महाकुंभ एवं चिंतन शिविर में सत्र की अध्यक्षता का आधिकारिक विवरण।
3. '''स्वतंत्र वीडियो साक्ष्य:''' क्षेत्रीय समाचार चैनल '''Star News Plus Live''' (यूट्यूब आईडी: <code>TGnUDmHIXTg</code>) पर रुड़की तहसील में किसानों के मुद्दों (मंगलौर नहर पुल रेलिंग एवं फसल मुआवजा) पर ज्ञापन का वीडियो कवरेज तथा '''Nation TV Bharat''' (यूट्यूब आईडी: <code>CEs1pfmA80c</code>) पर जिलाध्यक्ष पद पर नियुक्ति का समाचार।
चूंकि लेख में राष्ट्रीय मुख्यधारा समाचार पत्र (दैनिक जागरण) के दो अलग-अलग तिथियों के प्रामाणिक संदर्भ मौजूद हैं, अतः यह पृष्ठ 'व4 (साफ़ धोखा)' के अंतर्गत नहीं आता है।
प्रबन्धकगण से सविनय निवेदन है कि कृपया इस पृष्ठ एवं इसके वार्ता पृष्ठ को '''पुनर्स्थापित (Undelete / Restore)''' करने की कृपा करें।
सधन्यवाद! [[विशेष:योगदान/~2026-53379-27|~2026-53379-27]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-53379-27|वार्ता]]) 17:39, 3 अक्टूबर 2026 (UTC)
:मेरे विचार से इस लेख को विकिपीडिया पर पुनः स्थापित करना उचित नहीं होगा। लेख में शामिल व्यक्ति की उल्लेखनीयता स्पष्ट नहीं होती। इसके अलावा, दिए गए कुछ संदर्भ भी पर्याप्त रूप से विश्वसनीय या उल्लेखनीय नहीं हैं। कुछ स्रोतों में व्यक्ति का केवल उल्लेख किया गया है, जबकि वे स्रोत वास्तव में उस व्यक्ति के बारे में नहीं हैं। <span style="color:#d4330b;"></span>[[सदस्य:RJ Raawat|<span style="color:#d4330b;"><b>RJ RAAWAT</b></span>]]<span> | </span>[[सदस्य वार्ता:RJ Raawat|<small style="color:#373231;"><b>Talk</b></small>]] 07:17, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
::प्रबन्धकगण एवं [[सदस्य:RJ Raawat|RJ Raawat]] जी,
::1. '''व4 (साफ़ धोखा) के अंतर्गत अनुचित विलोपन:''' जैसा कि पूर्व चर्चा से भी स्पष्ट है, यह विषय किसी भी रूप में 'धोखा' या मनगढ़ंत नहीं है। विकिपीडिया नीति के अनुसार 'व4' मापदंड केवल पूर्णतः फर्जी/काल्पनिक पेजों के लिए होता है। उल्लेखनीयता के विषय पर 'हटाने हेतु चर्चा' (AfD) में समुदाय द्वारा विचार किया जाता है, शीघ्र हटाने में नहीं।
::2. '''दैनिक जागरण (16 जुलाई 2026) का प्रत्यक्ष कवरेज:''' 16 जुलाई 2026 के दैनिक जागरण (रुड़की, पृष्ठ 3) के पूरे समाचार का मुख्य विषय ही जिलाध्यक्ष राहुल शर्मा के नेतृत्व में आयोजित बाइक रैली, एसडीएम को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन और उनका आधिकारिक बयान है (सचित्र)। यह केवल नाम का उल्लेख नहीं, बल्कि उनके कार्य और नेतृत्व पर केंद्रित कवरेज है।
::3. '''वैकल्पिक समाधान (ड्राफ्ट/प्रयोगस्थल में पुनर्स्थापना):''' यदि मुख्य नामस्थान पर उल्लेखनीयता को लेकर संदेह है, तो विकिपीडिया की स्थापित परिपाटी के अनुसार इस लेख को '''[[सदस्य:Chocolategoldy/प्रयोगपृष्ठ]]''' अथवा प्रारूप (Draft) नामस्थान पर पुनर्स्थापित करने की कृपा करें, ताकि इसमें अन्य क्षेत्रीय समाचार पत्रों के विवरण जोड़कर समुदाय के समक्ष समीक्षा हेतु प्रस्तुत किया जा सके। सधन्यवाद। [[विशेष:योगदान/~2026-53379-27|~2026-53379-27]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-53379-27|वार्ता]]) 07:54, 5 अक्टूबर 2026 (UTC)
:::गूगल पर उपलब्ध स्रोतों के आधार पर फिलहाल इस विषय की उल्लेखनीयता स्पष्ट नहीं होती। इसलिए लेख को पुनर्स्थापित करना उचित नहीं लगता। भविष्य में जब इस विषय पर पर्याप्त विश्वसनीय स्रोत उपलब्ध हों तो आप या कोई अन्य सदस्य इस पर लेख बना सकते हैं। [[सदस्य:Max|Max]] ([[सदस्य वार्ता:Max|वार्ता]]) 16:12, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
== चित्रों की अस्थायी पुनर्स्थापना का अनुरोध ==
माननीय प्रबंधकगण,
आप लोगों ने रूस_में_हिन्दी4.JPG और रूस_में_हिन्दी2.JPG को हटा दिया है। इन दोनों चित्रों का उपयोग मैं अपने लेख “रूस में हिन्दी” में कर रहा था।
उल्लेखनीय है कि ये दोनों चित्र मुझे मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास से प्राप्त हुए थे। वर्तमान में मुझे इन चित्रों की पुनः आवश्यकता है।
अतः मेरा आपसे विनम्र अनुरोध है कि कृपया इन दोनों चित्रों को कम-से-कम अस्थायी रूप से पुनर्स्थापित (temporarily restore) कर दें और मुझे सूचित करें, ताकि मैं इन्हें Wikipedia से हटाकर अपने अन्य आवश्यक कार्यों में सुरक्षित रूप से उपयोग कर सकूँ।
इन चित्रों को Wikipedia पर स्थायी रूप से रखना है अथवा नहीं, इसका निर्णय आप अपने नियमों और नीतियों के अनुसार कर सकते हैं। मेरी तत्काल आवश्यकता केवल इतनी है कि मुझे इन दोनों चित्रों तक अस्थायी रूप से पहुँच (temporary access) मिल जाए।
आपकी सहायता के लिए धन्यवाद।
सादर,
--[[सदस्य:Hindustanilanguage|डॉ. मुज़म्मिल]] ([[सदस्य वार्ता:Hindustanilanguage|वार्ता]]) 18:38, 3 अक्टूबर 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:Hindustanilanguage|मुज़म्मिल जी]]: मैंने दोनों चित्रों को पुनर्स्थापित कर दिया है। इन्हें 14 दिनों से ज्यादा समय तक कोई लाइसेंस न होने के कारण हटाया गया था। अगर आपके पास इनका जरूरी स्वामित्व है और आप कोई वैध लाइसेंस की जानकारी जोड़ सकते हैं तो इन्हें रखा जा सकता है। अगर आप ऐसा कर सकते हैं तो इन दोनों फ़ाइल पेजों से शीघ्र हटाने के साँचे हटा दें। अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो कुछ दिनों बाद इन्हें फिर से हटाना पड़ेगा। [[सदस्य:Max|Max]] ([[सदस्य वार्ता:Max|वार्ता]]) 16:05, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
::मैक्स जी!
::इन चित्रों को पुनः स्थापित करने के लिए धन्यवाद। जैसा कि आप देख सकते हैं, “विश्व में हिंदी” परियोजना का प्रारंभकर्ता और उसमें सबसे अधिक योगदान करने वाला व्यक्ति मैं ही हूँ।
::इस परियोजना पर काम करते समय मैंने विभिन्न स्रोतों का अध्ययन किया और कई व्यक्तियों से, यहाँ तक कि हमारे राजदूतावासों से भी, संपर्क किया। रूस स्थित हमारे दूतावास के लोगों ने ये चित्र मेरे साथ साझा किए थे, ताकि मैं उनका उपयोग विकिपीडिया पर अपने लेख में कर सकूँ।
::इस जानकारी के आधार पर आप उचित निर्णय ले सकते हैं।
::इनमें से किसी भी चित्र में न तो मैं हूँ और न ही मेरे कोई परिजन हैं। [[सदस्य:Hindustanilanguage|डॉ. मुज़म्मिल]] ([[सदस्य वार्ता:Hindustanilanguage|वार्ता]]) 20:41, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
:::आशा है आपने इन्हें डाउनलोड कर लिया होगा। मैं इन्हें कल समय मिलने पर हटाने वाला हूँ। [[सदस्य:Max|Max]] ([[सदस्य वार्ता:Max|वार्ता]]) 15:57, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
== X-wiki spam ==
Hi, and please excuse me for writing in English. As a global sysop, I've came to a case of repeated x-wiki spam. I've just deleted [[अर्जुन पंचारिया सिंधु]] which was repeatedly created here and on some other wikis. The involved accounts, [[User:SDK 1252]], [[User:SD 78]] and [[User:Hindu Times India]] were globally locked after my request at [[:m:SRG]]. Their predecessor was [[User:Official Arjun Panchariya 45]], see also [[:en:Wikipedia:Sockpuppet investigations/Official Arjun Panchariya 45]]. The pages [[मांगीलाल बागड़ी राजकीय महाविद्यालय, नोखा]] and [[महारानी सुदर्शन महिला महाविद्यालय बीकानेर]] look both like AI-generated as the spammed articles, so I've marked them for deletion or at least review by community. I would suggest to protect अर्जुन पंचारिया सिंधु against recreation as hiwiki is mostly affected by this kind of self-promotional spam. [[सदस्य:NDG|NDG]] ([[सदस्य वार्ता:NDG|वार्ता]]) 08:07, 5 अक्टूबर 2026 (UTC)
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== सदस्य रिपोर्ट 8 अक्टूबर 2026 ==
*{{vandal|GovindMalviya4u}} – अप्रमाणित, स्पैम संदर्भों को जोड़ना और चेतावनी के पश्चात् भी सुधार न करना [[User:विक्रम प्रताप|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:विक्रम प्रताप|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 12:39, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
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== सदस्य रिपोर्ट 8 अक्टूबर 2026 ==
*{{vandal|Raushandeep1802}} – तटस्थ दृष्टिकोण न रखना और सन्दर्भ न देना [[User:विक्रम प्रताप|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:विक्रम प्रताप|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 13:30, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
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== सदस्य रिपोर्ट 11 अक्टूबर 2026 ==
*{{vandal|~2026-54584-81}} – असंदर्भित जानकारी जोड़ना बार बार और बर्बरता करना [[User:विक्रम प्रताप|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:विक्रम प्रताप|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 00:33, 11 अक्टूबर 2026 (UTC)
== सदस्य रिपोर्ट 18 अक्टूबर 2026 ==
*{{vandal|~2026-53796-31}} – इस संपादन को पूर्ववत करने में समस्या आ रही है इसे पूर्ववत कर दें [[User:विक्रम प्रताप|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:विक्रम प्रताप|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 08:54, 18 अक्टूबर 2026 (UTC)
: पृष्ठ - [[आलू]][[User:विक्रम प्रताप|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:विक्रम प्रताप|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 08:54, 18 अक्टूबर 2026 (UTC)
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गुलाब जामुन
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2026-10-18T07:53:35Z
Anitya Gautam
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox prepared food
| name = गुलाब जामुन
| image = Milk Powder Gulab Jamun by Preeti Tamilarasan.jpg
| image_size = 250px
| caption = गुलाब के पंखुड़ियों के साथ गुलाब जामुन
| course = [[मिष्ठान्न]]
| served = गर्म, ठंडा या कमरा तापमान पर
| main_ingredient = [[खोया]], [[केसर]], [[मैदा]]
| variations = [[काला जामुन]]
| calories =
| other =
|country={{plainlist|
* [[भारतीय उपमहाद्वीप]]
* {{flag|मॉरीशस}}
* {{flag|फ़िजी}}
* पूर्वी एवं दक्षिणी [[अफ़्रीका]]
* [[कैरिबियाई क्षेत्र]]
* [[मलय प्रायद्वीप]]
}}|veg=veg}}
'''गुलाब जामुन''' एक प्रकार का [[मिठाई]] है जो मैदे, खोये तथा चीनी से बनाया जाता है। गलाब जामुन नामक एक फल भी होता है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
गुलाब जामुन बनाने के लिये प्रतिकिलो [[खोया (दुग्ध उत्पाद)|खोये]] मे सौ ग्राम मैदा मिलाये। इसमे थोड़ा बेकिँग सोडा मिलाएँ। अब इसे अच्छी तरह गूँथे (मिलाइए)।
गुलाब जामुन तो लगभग सभी की पसंदीदा मिठाई है। अक्सर आप इन्हें किसी विशेष उत्सव या समारोह में खाते होंगे या फिर कभी-कभी बजा़र से लाकर। पर क्या कभी आपने इन्हें घर पर बनाया है? यदि नहीं तो आज बनाकर देखिये। गुलाब जामुन दो तरीके से बनते हैं। मावे में थोड़ा सा मैदा मिला कर और मावे में पनीर मिला कर। दोनों ही तरह से बने हुए गुलाब जामुन अत्यंत स्वादिष्ट लगते हैं। आइये आज हम मावे में पनीर मिला कर गुलाब जामुन बनाते हैं।
समय : करीब 1-1.1/2 घंटा
== आवश्यक सामग्री ==
[[श्रेणी:भारतीय मिठाइयाँ]]
* मावा (खोया) - 250 ग्राम (1.1/4 कप)
* पनीर - 100 ग्राम (1/2 कप)
* मैदा - 20-30 ग्राम (2-3 टेबल स्पून)
* काजू - 1 टेबल स्पून (एक काजू को 8 टुकड़ों में काट लीजिये)
* किशमिश - 1 टेबल स्पून
* चीनी - 600 ग्राम (3 कप)
* घी - गुलाब जामुन तलने के लिये
== चाशनी बनाने की विधि ==
एक बर्तन में चीनी और चीनी की मात्रा से आधा पानी मिलाकर गैस पर पकने रख दीजिये। जब चाशनी में उबाल आ जाए और सारी चीनी पानी में अच्छे से घुल जाए तो उसके बाद इसे 1-2 मिनट तक और पकायें। फिर चाशनी के घोल में से 1-2 बूंदे लेकर प्लेट में टपकाएं और अंगूठे व उंगली के बीच चिपका कर देखें। यदि चाशनी उंगली व अंगूठे के बीच चिपक रही हो तो समझिये की वह बन गई है और यदि ना चिपके तो उसे थोड़ा और पकाए। जब यह चिपकने लगे तो इसे ठंडा करके छान लीजिये।
=== गुलाब जामुन बनाने का तरीका ===
एक चौड़े और बड़े बर्तन में मावा, पनीर और मैदा डालकर नरम व चिकना आटा गूथ लें। गुलाब जामुन बनाने के लिये मावा तैयार रखें। अब इसमें से थोड़ा सा मावा (करीब एक छोटी चम्मच) उंगलियों की सहायता से निकालिये और उसे हथेली पर रखकर चपटा कर लीजिये। 3-4 काजू के टुकड़े और एक किशमिश उसके ऊपर रख कर मावे को चारों ओर से उठा कर बंद कर दीजिये और दोनों हथेलियों के बीच रख कर गोल करके प्लेट में रख लीजिये। सारे गोले इसी तरह तैयार कर लीजिये।<ref>{{Cite web|url=http://hindi.webdunia.com/sweets-dishes/gulab-jamun-118052400057_1.html|title=पारंपरिक तरीके से मावे के टेस्टी गुलाब जामुन बनाने की सरल विधि यहां पढ़ें...|last=Webdunia|website=hindi.webdunia.com|language=hi|access-date=2020-11-17}}</ref>
कढ़ाई में घी गर्म कीजिये और उसमें 3-4 गोले डाल कर तल लीजिये (गैस धीमी ही रखें और गुलाब जामुन को तलते समय उस पर बार-बार कलछी न लगायें बल्कि उस पर कलछी से गरम गरम घी डालें)। गुलाब जामुन को चारों तरफ से ब्राउन होने तक तलिये और फिर निकाल कर प्लेट में रख लीजिये। ठंडा होने के बाद सभी गुलाब जामुनों को 1-2 घंटे के लिये चाशनी में डाल कर छोड़ दीजिये ताकि गुलाब जामुन सारी चाशनी अच्छे से सोखकर मीठे और स्वादिष्ट हो जाएं।
गुलाब जामुन तैयार हैं। अब इन्हें गरम गरमा या ठंडा करके परोसिये और खाइये।
झारखंड के टाटीझरिया प्रखंड (हजारीबाग) का गुलाब जामुन प्रसिद्ध है। यह सामान्य रूप से गोल न होकर बेलनाकार होता है, जो शुद्ध घी में बना होता है। इस सड़क(NH-100) से होकर गुजरने वाली ज्यादातर गाड़ियाँ यहाँ कुछ देर के लिए रूकती है। लोग स्वंय इसको चखते है तथा अपने परिजनों के लिए भी ले जाते है।
नोट:
यदि गुलाब जामुन घी में फट रहे हों या फिर ज्यादा नरम बन रहे हों तो थोडा सा मैदा, मावे के आटे में मिलाकर अच्छी तरह मल लें।
यदि गुलाब जामुन ज्यादा सख्त बन रहे हों तो मावा के आटे में थोड़ा सा ( 1-1 1/2 टेबल स्पून ) दूध मिलाकर अच्छी तरह मल लें।
अधिक गरम चाशनी में गुलाब जामुन ना डालें।
== आटे के गुलाब जामुन ==
[[File:Gulab jamun photographed in Kolkata, West Bengal, India.jpg|thumb|गुलाब जामुन]]
गुुलाब जामुन बहोत प्रकार से बनाए जातेे है जिसमे खोया से बनने वाला गुुुलाब जामुन सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है ,इसके अलावा सूजी से भी बनाया जाने वाला गुुुलाब जामुन भी अभी काफी प्रचलन में है,पर मैं यहां आपको गेंहू के आटे से गुुलाब जामुन बनानेे की विधि बताने जा रही हूं जो कि बाकी गुुुलाब जामुन की तरह ही स्वादिष्ट होते है ।<ref>{{Cite web|url=https://www.nidhikirasoi.in/|title=NIDHI KI RASOI|last=jaiswal|first=nidhi|date=|website=www.nidhikirasoi.in|archive-url=https://web.archive.org/web/20200627163615/https://www.nidhikirasoi.in/|archive-date=27 जून 2020|dead-url=|access-date=2020-07-07|url-status=dead}}</ref>
=== '''सामग्री:''' ===
गेहू का आटा- 1 कप
मिल्क पाउडर -1/2 कप
खाने वाला सोड़ा- 1 चम्मच
इलाइची पाउडर -1 चम्मच
चीनी -250 ग्राम
तलने के लिए घी या तेल - आवस्यकता अनुसार
दूध - आवश्यकता अनुसार
खाने वाला रंग - 1 चुटकी
गुलाब जल - 1चम्मच
=== '''चाशनी बनाने की विधि:''' ===
* एक पैन में चीनी और एक कप पानी डाल कर गर्म करें।
* जब ये खौलने लगे तो इसमें एक चम्मच दूध डाले,आप देखेंगे चाशनी के ऊपर चीनी की गंदगी आने लगेगी इसे किसी चम्मच की सहायता से निकल दें।अब चाशनी बिल्कुल साफ और पारदर्शी नजर आएगी।
* अब इसमे इलाइची पाउडर,खाने वाला रंग डाल कर एक तार की चाशनी बना लें और उसमे सुगंध के लिए गुलाब जल भी डाल दें।
===== '''विधि:''' =====
* सबसे पहले एक पैन में आटे को हल्का सुनहरा भून लें (ज्यादा नही भुनाना है) ओर ठंडा होने दें।
* अब एक बर्तन में भुने हुए आटे ,मिल्क पाउडर ओर बेकिंग सोडा डाल कर अच्छी तरह मिक्स करें ।
* अब दूध डाल कर ढीला ढाल आटा गूंद लें ,ओर थोड़ी देर छोड दें।
* अब आटे की छोटी- छोटी लोइया बना लें।
* एक कड़ाई में घी गर्म करें और सुनहरा होने तक तल लें।
* अब इन्हें तैयार चाशनी में डाल कर एक घंटे के लिए छोड़ दें ताकि गुलाब जामुन में रस अच्छे से चले जाएं ।
'''आटे से बना गुलाब जामुन बिलकुल तैयार है।'''
== चित्रदालन ==
<gallery widths="150" heights="130">
File:Gulab jamun , chenna payesh.jpg
File:Gulab Jamun2.jpg
File:GulaabJamun.JPG
File:Gulab Jamun Delhi.JPG
File:Gulaab Jamun (homemade!).jpg
File:Gulaab Jamoon.jpg
File:Gulaab Jamun..jpg
File:Canned Gulab Jamun.jpg
File:চমচম.jpg|रसगुल्ला एंड गुलाब जामुन
</gallery>
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
[[श्रेणी:मिठाई]]
[[श्रेणी: मुग़लाई खाना]]
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेशी खाना]]
[[श्रेणी:बिहारी खाना]]
[[श्रेणी:श्रीलंकाई खाना]]
[[श्रेणी:पाकिस्तानी मिठाइयाँ]]
[[श्रेणी:नेपाली खाना]]
[[श्रेणी:पंजाबी खाना]]
[[श्रेणी:सिंधी खाना]]
[[श्रेणी:पठान खाना]]
[[श्रेणी:बलोची खाना]]
[[श्रेणी:मॉरिशन खाना]]
[[श्रेणी:बांग्लादेशी मिठाइयाँ]]
[[श्रेणी:बंगाली मिठाइयाँ]]
[[श्रेणी:मालदीवी खाना]]
[[श्रेणी:फ़िजियाई मिठाइयाँ]]
[[श्रेणी:बर्मी मिठाइयाँ और अल्पाहार]]
[[श्रेणी:डोनट]]
[[श्रेणी:भारतीय डोनट]]
[[श्रेणी:त्रिनिदाद और टोबैगो का खाना]]
[[श्रेणी:अख़रोट की मिठाइयाँ]]
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6630642
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2026-10-18T07:55:35Z
Anitya Gautam
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox prepared food
| name = गुलाब जामुन
| image = Milk Powder Gulab Jamun by Preeti Tamilarasan.jpg
| image_size = 250px
| caption = गुलाब के पंखुड़ियों के साथ गुलाब जामुन
| course = [[मिष्ठान्न]]
| served = गर्म, ठंडा या कमरा तापमान पर
| main_ingredient = [[खोया]], [[केसर]], [[मैदा]]
| variations = [[काला जामुन]]
| calories =
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|country={{plainlist|
* [[भारतीय उपमहाद्वीप]]
* {{flag|मॉरीशस}}
* {{flag|फ़िजी}}
* पूर्वी एवं दक्षिणी [[अफ़्रीका]]
* [[कैरिबियाई क्षेत्र]]
* [[मलय प्रायद्वीप]]
}}|veg=veg}}
'''गुलाब जामुन''' एक प्रकार का [[मिठाई]] है जो मैदे, खोये तथा चीनी से बनाया जाता है। गलाब जामुन नामक एक फल भी होता है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
गुलाब जामुन बनाने के लिये प्रतिकिलो [[खोया (दुग्ध उत्पाद)|खोये]] मे सौ ग्राम मैदा मिलाये। इसमे थोड़ा बेकिँग सोडा मिलाएँ। अब इसे अच्छी तरह गूँथे (मिलाइए)।
गुलाब जामुन तो लगभग सभी की पसंदीदा मिठाई है। अक्सर आप इन्हें किसी विशेष उत्सव या समारोह में खाते होंगे या फिर कभी-कभी बजा़र से लाकर। पर क्या कभी आपने इन्हें घर पर बनाया है? यदि नहीं तो आज बनाकर देखिये। गुलाब जामुन दो तरीके से बनते हैं। मावे में थोड़ा सा मैदा मिला कर और मावे में पनीर मिला कर। दोनों ही तरह से बने हुए गुलाब जामुन अत्यंत स्वादिष्ट लगते हैं। आइये आज हम मावे में [[पनीर]] मिला कर गुलाब जामुन बनाते हैं।
समय : करीब 1-1.1/2 घंटा
== आवश्यक सामग्री ==
[[श्रेणी:भारतीय मिठाइयाँ]]
* मावा (खोया) - 250 ग्राम (1.1/4 कप)
* पनीर - 100 ग्राम (1/2 कप)
* मैदा - 20-30 ग्राम (2-3 टेबल स्पून)
* काजू - 1 टेबल स्पून (एक काजू को 8 टुकड़ों में काट लीजिये)
* किशमिश - 1 टेबल स्पून
* चीनी - 600 ग्राम (3 कप)
* घी - गुलाब जामुन तलने के लिये
== चाशनी बनाने की विधि ==
एक बर्तन में [[चीनी]] और चीनी की मात्रा से आधा पानी मिलाकर गैस पर पकने रख दीजिये। जब चाशनी में उबाल आ जाए और सारी चीनी पानी में अच्छे से घुल जाए तो उसके बाद इसे 1-2 मिनट तक और पकायें। फिर चाशनी के घोल में से 1-2 बूंदे लेकर प्लेट में टपकाएं और अंगूठे व उंगली के बीच चिपका कर देखें। यदि चाशनी उंगली व अंगूठे के बीच चिपक रही हो तो समझिये की वह बन गई है और यदि ना चिपके तो उसे थोड़ा और पकाए। जब यह चिपकने लगे तो इसे ठंडा करके छान लीजिये।
=== गुलाब जामुन बनाने का तरीका ===
एक चौड़े और बड़े बर्तन में मावा, पनीर और मैदा डालकर नरम व चिकना आटा गूथ लें। गुलाब जामुन बनाने के लिये मावा तैयार रखें। अब इसमें से थोड़ा सा मावा (करीब एक छोटी चम्मच) उंगलियों की सहायता से निकालिये और उसे हथेली पर रखकर चपटा कर लीजिये। 3-4 काजू के टुकड़े और एक [[किशमिश]] उसके ऊपर रख कर मावे को चारों ओर से उठा कर बंद कर दीजिये और दोनों हथेलियों के बीच रख कर गोल करके प्लेट में रख लीजिये। सारे गोले इसी तरह तैयार कर लीजिये।<ref>{{Cite web|url=http://hindi.webdunia.com/sweets-dishes/gulab-jamun-118052400057_1.html|title=पारंपरिक तरीके से मावे के टेस्टी गुलाब जामुन बनाने की सरल विधि यहां पढ़ें...|last=Webdunia|website=hindi.webdunia.com|language=hi|access-date=2020-11-17}}</ref>
कढ़ाई में घी गर्म कीजिये और उसमें 3-4 गोले डाल कर तल लीजिये (गैस धीमी ही रखें और गुलाब जामुन को तलते समय उस पर बार-बार कलछी न लगायें बल्कि उस पर कलछी से गरम गरम घी डालें)। गुलाब जामुन को चारों तरफ से ब्राउन होने तक तलिये और फिर निकाल कर प्लेट में रख लीजिये। ठंडा होने के बाद सभी गुलाब जामुनों को 1-2 घंटे के लिये चाशनी में डाल कर छोड़ दीजिये ताकि गुलाब जामुन सारी चाशनी अच्छे से सोखकर मीठे और स्वादिष्ट हो जाएं।
गुलाब जामुन तैयार हैं। अब इन्हें गरम गरमा या ठंडा करके परोसिये और खाइये।
झारखंड के टाटीझरिया प्रखंड (हजारीबाग) का गुलाब जामुन प्रसिद्ध है। यह सामान्य रूप से गोल न होकर बेलनाकार होता है, जो शुद्ध घी में बना होता है। इस सड़क(NH-100) से होकर गुजरने वाली ज्यादातर गाड़ियाँ यहाँ कुछ देर के लिए रूकती है। लोग स्वंय इसको चखते है तथा अपने परिजनों के लिए भी ले जाते है।
नोट:
यदि गुलाब जामुन घी में फट रहे हों या फिर ज्यादा नरम बन रहे हों तो थोडा सा मैदा, मावे के आटे में मिलाकर अच्छी तरह मल लें।
यदि गुलाब जामुन ज्यादा सख्त बन रहे हों तो मावा के आटे में थोड़ा सा ( 1-1 1/2 टेबल स्पून ) दूध मिलाकर अच्छी तरह मल लें।
अधिक गरम चाशनी में गुलाब जामुन ना डालें।
== आटे के गुलाब जामुन ==
[[File:Gulab jamun photographed in Kolkata, West Bengal, India.jpg|thumb|गुलाब जामुन]]
गुुलाब जामुन बहोत प्रकार से बनाए जातेे है जिसमे खोया से बनने वाला गुुुलाब जामुन सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है ,इसके अलावा सूजी से भी बनाया जाने वाला गुुुलाब जामुन भी अभी काफी प्रचलन में है,पर मैं यहां आपको गेंहू के आटे से गुुलाब जामुन बनानेे की विधि बताने जा रही हूं जो कि बाकी गुुुलाब जामुन की तरह ही स्वादिष्ट होते है ।<ref>{{Cite web|url=https://www.nidhikirasoi.in/|title=NIDHI KI RASOI|last=jaiswal|first=nidhi|date=|website=www.nidhikirasoi.in|archive-url=https://web.archive.org/web/20200627163615/https://www.nidhikirasoi.in/|archive-date=27 जून 2020|dead-url=|access-date=2020-07-07|url-status=dead}}</ref>
=== '''सामग्री:''' ===
गेहू का आटा- 1 कप
मिल्क पाउडर -1/2 कप
खाने वाला सोड़ा- 1 चम्मच
इलाइची पाउडर -1 चम्मच
चीनी -250 ग्राम
तलने के लिए घी या तेल - आवस्यकता अनुसार
दूध - आवश्यकता अनुसार
खाने वाला रंग - 1 चुटकी
गुलाब जल - 1चम्मच
=== '''चाशनी बनाने की विधि:''' ===
* एक पैन में चीनी और एक कप पानी डाल कर गर्म करें।
* जब ये खौलने लगे तो इसमें एक चम्मच दूध डाले,आप देखेंगे चाशनी के ऊपर चीनी की गंदगी आने लगेगी इसे किसी चम्मच की सहायता से निकल दें।अब चाशनी बिल्कुल साफ और पारदर्शी नजर आएगी।
* अब इसमे इलाइची पाउडर,खाने वाला रंग डाल कर एक तार की चाशनी बना लें और उसमे सुगंध के लिए गुलाब जल भी डाल दें।
===== '''विधि:''' =====
* सबसे पहले एक पैन में आटे को हल्का सुनहरा भून लें (ज्यादा नही भुनाना है) ओर ठंडा होने दें।
* अब एक बर्तन में भुने हुए आटे ,मिल्क पाउडर ओर बेकिंग सोडा डाल कर अच्छी तरह मिक्स करें ।
* अब दूध डाल कर ढीला ढाल आटा गूंद लें ,ओर थोड़ी देर छोड दें।
* अब आटे की छोटी- छोटी लोइया बना लें।
* एक कड़ाई में घी गर्म करें और सुनहरा होने तक तल लें।
* अब इन्हें तैयार चाशनी में डाल कर एक घंटे के लिए छोड़ दें ताकि गुलाब जामुन में रस अच्छे से चले जाएं ।
'''आटे से बना गुलाब जामुन बिलकुल तैयार है।'''
== चित्रदालन ==
<gallery widths="150" heights="130">
File:Gulab jamun , chenna payesh.jpg
File:Gulab Jamun2.jpg
File:GulaabJamun.JPG
File:Gulab Jamun Delhi.JPG
File:Gulaab Jamun (homemade!).jpg
File:Gulaab Jamoon.jpg
File:Gulaab Jamun..jpg
File:Canned Gulab Jamun.jpg
File:চমচম.jpg|रसगुल्ला एंड गुलाब जामुन
</gallery>
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
[[श्रेणी:मिठाई]]
[[श्रेणी: मुग़लाई खाना]]
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेशी खाना]]
[[श्रेणी:बिहारी खाना]]
[[श्रेणी:श्रीलंकाई खाना]]
[[श्रेणी:पाकिस्तानी मिठाइयाँ]]
[[श्रेणी:नेपाली खाना]]
[[श्रेणी:पंजाबी खाना]]
[[श्रेणी:सिंधी खाना]]
[[श्रेणी:पठान खाना]]
[[श्रेणी:बलोची खाना]]
[[श्रेणी:मॉरिशन खाना]]
[[श्रेणी:बांग्लादेशी मिठाइयाँ]]
[[श्रेणी:बंगाली मिठाइयाँ]]
[[श्रेणी:मालदीवी खाना]]
[[श्रेणी:फ़िजियाई मिठाइयाँ]]
[[श्रेणी:बर्मी मिठाइयाँ और अल्पाहार]]
[[श्रेणी:डोनट]]
[[श्रेणी:भारतीय डोनट]]
[[श्रेणी:त्रिनिदाद और टोबैगो का खाना]]
[[श्रेणी:अख़रोट की मिठाइयाँ]]
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Anitya Gautam
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox prepared food
| name = गुलाब जामुन
| image = Milk Powder Gulab Jamun by Preeti Tamilarasan.jpg
| image_size = 250px
| caption = गुलाब के पंखुड़ियों के साथ गुलाब जामुन
| course = [[मिष्ठान्न]]
| served = गर्म, ठंडा या कमरा तापमान पर
| main_ingredient = [[खोया]], [[केसर]], [[मैदा]]
| variations = [[काला जामुन]]
| calories =
| other =
|country={{plainlist|
* [[भारतीय उपमहाद्वीप]]
* {{flag|मॉरीशस}}
* {{flag|फ़िजी}}
* पूर्वी एवं दक्षिणी [[अफ़्रीका]]
* [[कैरिबियाई क्षेत्र]]
* [[मलय प्रायद्वीप]]
}}|veg=veg}}
'''गुलाब जामुन''' एक प्रकार का [[मिठाई]] है जो मैदे, खोये तथा चीनी से बनाया जाता है। गलाब जामुन नामक एक फल भी होता है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
गुलाब जामुन बनाने के लिये प्रतिकिलो [[खोया (दुग्ध उत्पाद)|खोये]] मे सौ ग्राम मैदा मिलाये। इसमे थोड़ा बेकिँग सोडा मिलाएँ। अब इसे अच्छी तरह गूँथे (मिलाइए)।
गुलाब जामुन तो लगभग सभी की पसंदीदा मिठाई है। अक्सर आप इन्हें किसी विशेष उत्सव या समारोह में खाते होंगे या फिर कभी-कभी बजा़र से लाकर। पर क्या कभी आपने इन्हें घर पर बनाया है? यदि नहीं तो आज बनाकर देखिये। गुलाब जामुन दो तरीके से बनते हैं। मावे में थोड़ा सा मैदा मिला कर और मावे में पनीर मिला कर। दोनों ही तरह से बने हुए गुलाब जामुन अत्यंत स्वादिष्ट लगते हैं। आइये आज हम मावे में [[पनीर]] मिला कर गुलाब जामुन बनाते हैं।
समय : करीब 1-1.1/2 घंटा
== आवश्यक सामग्री ==
[[श्रेणी:भारतीय मिठाइयाँ]]
* मावा (खोया) - 250 ग्राम (1.1/4 कप)
* पनीर - 100 ग्राम (1/2 कप)
* मैदा - 20-30 ग्राम (2-3 टेबल स्पून)
* काजू - 1 टेबल स्पून (एक काजू को 8 टुकड़ों में काट लीजिये)
* किशमिश - 1 टेबल स्पून
* चीनी - 600 ग्राम (3 कप)
* घी - गुलाब जामुन तलने के लिये
== चाशनी बनाने की विधि ==
एक बर्तन में [[चीनी]] और चीनी की मात्रा से आधा पानी मिलाकर गैस पर पकने रख दीजिये। जब चाशनी में उबाल आ जाए और सारी चीनी पानी में अच्छे से घुल जाए तो उसके बाद इसे 1-2 मिनट तक और पकायें। फिर चाशनी के घोल में से 1-2 बूंदे लेकर प्लेट में टपकाएं और अंगूठे व उंगली के बीच चिपका कर देखें। यदि चाशनी उंगली व अंगूठे के बीच चिपक रही हो तो समझिये की वह बन गई है और यदि ना चिपके तो उसे थोड़ा और पकाए। जब यह चिपकने लगे तो इसे ठंडा करके छान लीजिये।
=== गुलाब जामुन बनाने का तरीका ===
एक चौड़े और बड़े बर्तन में मावा, पनीर और मैदा डालकर नरम व चिकना आटा गूथ लें। गुलाब जामुन बनाने के लिये मावा तैयार रखें। अब इसमें से थोड़ा सा मावा (करीब एक छोटी चम्मच) उंगलियों की सहायता से निकालिये और उसे हथेली पर रखकर चपटा कर लीजिये। 3-4 काजू के टुकड़े और एक [[किशमिश]] उसके ऊपर रख कर मावे को चारों ओर से उठा कर बंद कर दीजिये और दोनों हथेलियों के बीच रख कर गोल करके प्लेट में रख लीजिये। सारे गोले इसी तरह तैयार कर लीजिये।<ref>{{Cite web|url=http://hindi.webdunia.com/sweets-dishes/gulab-jamun-118052400057_1.html|title=पारंपरिक तरीके से मावे के टेस्टी गुलाब जामुन बनाने की सरल विधि यहां पढ़ें...|last=Webdunia|website=hindi.webdunia.com|language=hi|access-date=2020-11-17}}</ref>
कढ़ाई में [[घी]] गर्म कीजिये और उसमें 3-4 गोले डाल कर तल लीजिये (गैस धीमी ही रखें और गुलाब जामुन को तलते समय उस पर बार-बार कलछी न लगायें बल्कि उस पर कलछी से गरम गरम घी डालें)। गुलाब जामुन को चारों तरफ से ब्राउन होने तक तलिये और फिर निकाल कर प्लेट में रख लीजिये। ठंडा होने के बाद सभी गुलाब जामुनों को 1-2 घंटे के लिये चाशनी में डाल कर छोड़ दीजिये ताकि गुलाब जामुन सारी चाशनी अच्छे से सोखकर मीठे और स्वादिष्ट हो जाएं।
गुलाब जामुन तैयार हैं। अब इन्हें गरम गरमा या ठंडा करके परोसिये और खाइये।
झारखंड के टाटीझरिया प्रखंड (हजारीबाग) का गुलाब जामुन प्रसिद्ध है। यह सामान्य रूप से गोल न होकर बेलनाकार होता है, जो शुद्ध घी में बना होता है। इस सड़क(NH-100) से होकर गुजरने वाली ज्यादातर गाड़ियाँ यहाँ कुछ देर के लिए रूकती है। लोग स्वंय इसको चखते है तथा अपने परिजनों के लिए भी ले जाते है।
नोट:
यदि गुलाब जामुन घी में फट रहे हों या फिर ज्यादा नरम बन रहे हों तो थोडा सा मैदा, मावे के आटे में मिलाकर अच्छी तरह मल लें।
यदि गुलाब जामुन ज्यादा सख्त बन रहे हों तो मावा के आटे में थोड़ा सा ( 1-1 1/2 टेबल स्पून ) दूध मिलाकर अच्छी तरह मल लें।
अधिक गरम चाशनी में गुलाब जामुन ना डालें।
== आटे के गुलाब जामुन ==
[[File:Gulab jamun photographed in Kolkata, West Bengal, India.jpg|thumb|गुलाब जामुन]]
गुुलाब जामुन बहोत प्रकार से बनाए जातेे है जिसमे खोया से बनने वाला गुुुलाब जामुन सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है ,इसके अलावा सूजी से भी बनाया जाने वाला गुुुलाब जामुन भी अभी काफी प्रचलन में है,पर मैं यहां आपको गेंहू के आटे से गुुलाब जामुन बनानेे की विधि बताने जा रही हूं जो कि बाकी गुुुलाब जामुन की तरह ही स्वादिष्ट होते है ।<ref>{{Cite web|url=https://www.nidhikirasoi.in/|title=NIDHI KI RASOI|last=jaiswal|first=nidhi|date=|website=www.nidhikirasoi.in|archive-url=https://web.archive.org/web/20200627163615/https://www.nidhikirasoi.in/|archive-date=27 जून 2020|dead-url=|access-date=2020-07-07|url-status=dead}}</ref>
=== '''सामग्री:''' ===
गेहू का आटा- 1 कप
मिल्क पाउडर -1/2 कप
खाने वाला सोड़ा- 1 चम्मच
इलाइची पाउडर -1 चम्मच
चीनी -250 ग्राम
तलने के लिए घी या तेल - आवस्यकता अनुसार
दूध - आवश्यकता अनुसार
खाने वाला रंग - 1 चुटकी
गुलाब जल - 1चम्मच
=== '''चाशनी बनाने की विधि:''' ===
* एक पैन में चीनी और एक कप पानी डाल कर गर्म करें।
* जब ये खौलने लगे तो इसमें एक चम्मच दूध डाले,आप देखेंगे चाशनी के ऊपर चीनी की गंदगी आने लगेगी इसे किसी चम्मच की सहायता से निकल दें।अब चाशनी बिल्कुल साफ और पारदर्शी नजर आएगी।
* अब इसमे इलाइची पाउडर,खाने वाला रंग डाल कर एक तार की चाशनी बना लें और उसमे सुगंध के लिए गुलाब जल भी डाल दें।
===== '''विधि:''' =====
* सबसे पहले एक पैन में आटे को हल्का सुनहरा भून लें (ज्यादा नही भुनाना है) ओर ठंडा होने दें।
* अब एक बर्तन में भुने हुए आटे ,मिल्क पाउडर ओर बेकिंग सोडा डाल कर अच्छी तरह मिक्स करें ।
* अब दूध डाल कर ढीला ढाल आटा गूंद लें ,ओर थोड़ी देर छोड दें।
* अब आटे की छोटी- छोटी लोइया बना लें।
* एक कड़ाई में घी गर्म करें और सुनहरा होने तक तल लें।
* अब इन्हें तैयार चाशनी में डाल कर एक घंटे के लिए छोड़ दें ताकि गुलाब जामुन में रस अच्छे से चले जाएं ।
'''आटे से बना गुलाब जामुन बिलकुल तैयार है।'''
== चित्रदालन ==
<gallery widths="150" heights="130">
File:Gulab jamun , chenna payesh.jpg
File:Gulab Jamun2.jpg
File:GulaabJamun.JPG
File:Gulab Jamun Delhi.JPG
File:Gulaab Jamun (homemade!).jpg
File:Gulaab Jamoon.jpg
File:Gulaab Jamun..jpg
File:Canned Gulab Jamun.jpg
File:চমচম.jpg|रसगुल्ला एंड गुलाब जामुन
</gallery>
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
[[श्रेणी:मिठाई]]
[[श्रेणी: मुग़लाई खाना]]
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेशी खाना]]
[[श्रेणी:बिहारी खाना]]
[[श्रेणी:श्रीलंकाई खाना]]
[[श्रेणी:पाकिस्तानी मिठाइयाँ]]
[[श्रेणी:नेपाली खाना]]
[[श्रेणी:पंजाबी खाना]]
[[श्रेणी:सिंधी खाना]]
[[श्रेणी:पठान खाना]]
[[श्रेणी:बलोची खाना]]
[[श्रेणी:मॉरिशन खाना]]
[[श्रेणी:बांग्लादेशी मिठाइयाँ]]
[[श्रेणी:बंगाली मिठाइयाँ]]
[[श्रेणी:मालदीवी खाना]]
[[श्रेणी:फ़िजियाई मिठाइयाँ]]
[[श्रेणी:बर्मी मिठाइयाँ और अल्पाहार]]
[[श्रेणी:डोनट]]
[[श्रेणी:भारतीय डोनट]]
[[श्रेणी:त्रिनिदाद और टोबैगो का खाना]]
[[श्रेणी:अख़रोट की मिठाइयाँ]]
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text/x-wiki
{{Infobox prepared food
| name = गुलाब जामुन
| image = Milk Powder Gulab Jamun by Preeti Tamilarasan.jpg
| image_size = 250px
| caption = गुलाब के पंखुड़ियों के साथ गुलाब जामुन
| course = [[मिष्ठान्न]]
| served = गर्म, ठंडा या कमरा तापमान पर
| main_ingredient = [[खोया]], [[केसर]], [[मैदा]]
| variations = [[काला जामुन]]
| calories =
| other =
|country={{plainlist|
* [[भारतीय उपमहाद्वीप]]
* {{flag|मॉरीशस}}
* {{flag|फ़िजी}}
* पूर्वी एवं दक्षिणी [[अफ़्रीका]]
* [[कैरिबियाई क्षेत्र]]
* [[मलय प्रायद्वीप]]
}}|veg=veg}}
'''गुलाब जामुन''' एक प्रकार का [[मिठाई]] है जो मैदे, खोये तथा चीनी से बनाया जाता है। गलाब जामुन नामक एक फल भी होता है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
गुलाब जामुन बनाने के लिये प्रतिकिलो [[खोया (दुग्ध उत्पाद)|खोये]] मे सौ ग्राम मैदा मिलाये। इसमे थोड़ा बेकिँग सोडा मिलाएँ। अब इसे अच्छी तरह गूँथे (मिलाइए)।
गुलाब जामुन तो लगभग सभी की पसंदीदा मिठाई है। अक्सर आप इन्हें किसी विशेष उत्सव या समारोह में खाते होंगे या फिर कभी-कभी बजा़र से लाकर। पर क्या कभी आपने इन्हें घर पर बनाया है? यदि नहीं तो आज बनाकर देखिये। गुलाब जामुन दो तरीके से बनते हैं। मावे में थोड़ा सा मैदा मिला कर और मावे में पनीर मिला कर। दोनों ही तरह से बने हुए गुलाब जामुन अत्यंत स्वादिष्ट लगते हैं। आइये आज हम मावे में [[पनीर]] मिला कर गुलाब जामुन बनाते हैं।
समय : करीब 1-1.1/2 घंटा
== आवश्यक सामग्री ==
[[श्रेणी:भारतीय मिठाइयाँ]]
* मावा (खोया) - 250 ग्राम (1.1/4 कप)
* पनीर - 100 ग्राम (1/2 कप)
* मैदा - 20-30 ग्राम (2-3 टेबल स्पून)
* काजू - 1 टेबल स्पून (एक काजू को 8 टुकड़ों में काट लीजिये)
* किशमिश - 1 टेबल स्पून
* चीनी - 600 ग्राम (3 कप)
* घी - गुलाब जामुन तलने के लिये
== चाशनी बनाने की विधि ==
एक बर्तन में [[चीनी]] और चीनी की मात्रा से आधा पानी मिलाकर गैस पर पकने रख दीजिये। जब चाशनी में उबाल आ जाए और सारी चीनी पानी में अच्छे से घुल जाए तो उसके बाद इसे 1-2 मिनट तक और पकायें। फिर चाशनी के घोल में से 1-2 बूंदे लेकर प्लेट में टपकाएं और अंगूठे व उंगली के बीच चिपका कर देखें। यदि चाशनी उंगली व अंगूठे के बीच चिपक रही हो तो समझिये की वह बन गई है और यदि ना चिपके तो उसे थोड़ा और पकाए। जब यह चिपकने लगे तो इसे ठंडा करके छान लीजिये।
=== गुलाब जामुन बनाने का तरीका ===
एक चौड़े और बड़े बर्तन में मावा, पनीर और मैदा डालकर नरम व चिकना आटा गूथ लें। गुलाब जामुन बनाने के लिये मावा तैयार रखें। अब इसमें से थोड़ा सा मावा (करीब एक छोटी चम्मच) उंगलियों की सहायता से निकालिये और उसे हथेली पर रखकर चपटा कर लीजिये। 3-4 काजू के टुकड़े और एक [[किशमिश]] उसके ऊपर रख कर मावे को चारों ओर से उठा कर बंद कर दीजिये और दोनों हथेलियों के बीच रख कर गोल करके प्लेट में रख लीजिये। सारे गोले इसी तरह तैयार कर लीजिये।<ref>{{Cite web|url=http://hindi.webdunia.com/sweets-dishes/gulab-jamun-118052400057_1.html|title=पारंपरिक तरीके से मावे के टेस्टी गुलाब जामुन बनाने की सरल विधि यहां पढ़ें...|last=Webdunia|website=hindi.webdunia.com|language=hi|access-date=2020-11-17}}</ref>
कढ़ाई में [[घी]] गर्म कीजिये और उसमें 3-4 गोले डाल कर तल लीजिये (गैस धीमी ही रखें और गुलाब जामुन को तलते समय उस पर बार-बार कलछी न लगायें बल्कि उस पर कलछी से गरम गरम घी डालें)। गुलाब जामुन को चारों तरफ से ब्राउन होने तक तलिये और फिर निकाल कर प्लेट में रख लीजिये। ठंडा होने के बाद सभी गुलाब जामुनों को 1-2 घंटे के लिये चाशनी में डाल कर छोड़ दीजिये ताकि गुलाब जामुन सारी चाशनी अच्छे से सोखकर मीठे और स्वादिष्ट हो जाएं।
गुलाब जामुन तैयार हैं। अब इन्हें गरम गरमा या ठंडा करके परोसिये और खाइये।
[[झारखंड]] के टाटीझरिया प्रखंड (हजारीबाग) का गुलाब जामुन प्रसिद्ध है। यह सामान्य रूप से गोल न होकर बेलनाकार होता है, जो शुद्ध घी में बना होता है। इस सड़क(NH-100) से होकर गुजरने वाली ज्यादातर गाड़ियाँ यहाँ कुछ देर के लिए रूकती है। लोग स्वंय इसको चखते है तथा अपने परिजनों के लिए भी ले जाते है।
नोट:
यदि गुलाब जामुन घी में फट रहे हों या फिर ज्यादा नरम बन रहे हों तो थोडा सा मैदा, मावे के आटे में मिलाकर अच्छी तरह मल लें।
यदि गुलाब जामुन ज्यादा सख्त बन रहे हों तो मावा के आटे में थोड़ा सा ( 1-1 1/2 टेबल स्पून ) दूध मिलाकर अच्छी तरह मल लें।
अधिक गरम चाशनी में गुलाब जामुन ना डालें।
== आटे के गुलाब जामुन ==
[[File:Gulab jamun photographed in Kolkata, West Bengal, India.jpg|thumb|गुलाब जामुन]]
गुुलाब जामुन बहोत प्रकार से बनाए जातेे है जिसमे खोया से बनने वाला गुुुलाब जामुन सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है ,इसके अलावा सूजी से भी बनाया जाने वाला गुुुलाब जामुन भी अभी काफी प्रचलन में है,पर मैं यहां आपको गेंहू के आटे से गुुलाब जामुन बनानेे की विधि बताने जा रही हूं जो कि बाकी गुुुलाब जामुन की तरह ही स्वादिष्ट होते है ।<ref>{{Cite web|url=https://www.nidhikirasoi.in/|title=NIDHI KI RASOI|last=jaiswal|first=nidhi|date=|website=www.nidhikirasoi.in|archive-url=https://web.archive.org/web/20200627163615/https://www.nidhikirasoi.in/|archive-date=27 जून 2020|dead-url=|access-date=2020-07-07|url-status=dead}}</ref>
=== '''सामग्री:''' ===
गेहू का आटा- 1 कप
मिल्क पाउडर -1/2 कप
खाने वाला सोड़ा- 1 चम्मच
इलाइची पाउडर -1 चम्मच
चीनी -250 ग्राम
तलने के लिए घी या तेल - आवस्यकता अनुसार
दूध - आवश्यकता अनुसार
खाने वाला रंग - 1 चुटकी
गुलाब जल - 1चम्मच
=== '''चाशनी बनाने की विधि:''' ===
* एक पैन में चीनी और एक कप पानी डाल कर गर्म करें।
* जब ये खौलने लगे तो इसमें एक चम्मच दूध डाले,आप देखेंगे चाशनी के ऊपर चीनी की गंदगी आने लगेगी इसे किसी चम्मच की सहायता से निकल दें।अब चाशनी बिल्कुल साफ और पारदर्शी नजर आएगी।
* अब इसमे इलाइची पाउडर,खाने वाला रंग डाल कर एक तार की चाशनी बना लें और उसमे सुगंध के लिए गुलाब जल भी डाल दें।
===== '''विधि:''' =====
* सबसे पहले एक पैन में आटे को हल्का सुनहरा भून लें (ज्यादा नही भुनाना है) ओर ठंडा होने दें।
* अब एक बर्तन में भुने हुए आटे ,मिल्क पाउडर ओर बेकिंग सोडा डाल कर अच्छी तरह मिक्स करें ।
* अब दूध डाल कर ढीला ढाल आटा गूंद लें ,ओर थोड़ी देर छोड दें।
* अब आटे की छोटी- छोटी लोइया बना लें।
* एक कड़ाई में घी गर्म करें और सुनहरा होने तक तल लें।
* अब इन्हें तैयार चाशनी में डाल कर एक घंटे के लिए छोड़ दें ताकि गुलाब जामुन में रस अच्छे से चले जाएं ।
'''आटे से बना गुलाब जामुन बिलकुल तैयार है।'''
== चित्रदालन ==
<gallery widths="150" heights="130">
File:Gulab jamun , chenna payesh.jpg
File:Gulab Jamun2.jpg
File:GulaabJamun.JPG
File:Gulab Jamun Delhi.JPG
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File:Gulaab Jamun..jpg
File:Canned Gulab Jamun.jpg
File:চমচম.jpg|रसगुल्ला एंड गुलाब जामुन
</gallery>
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
[[श्रेणी:मिठाई]]
[[श्रेणी: मुग़लाई खाना]]
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेशी खाना]]
[[श्रेणी:बिहारी खाना]]
[[श्रेणी:श्रीलंकाई खाना]]
[[श्रेणी:पाकिस्तानी मिठाइयाँ]]
[[श्रेणी:नेपाली खाना]]
[[श्रेणी:पंजाबी खाना]]
[[श्रेणी:सिंधी खाना]]
[[श्रेणी:पठान खाना]]
[[श्रेणी:बलोची खाना]]
[[श्रेणी:मॉरिशन खाना]]
[[श्रेणी:बांग्लादेशी मिठाइयाँ]]
[[श्रेणी:बंगाली मिठाइयाँ]]
[[श्रेणी:मालदीवी खाना]]
[[श्रेणी:फ़िजियाई मिठाइयाँ]]
[[श्रेणी:बर्मी मिठाइयाँ और अल्पाहार]]
[[श्रेणी:डोनट]]
[[श्रेणी:भारतीय डोनट]]
[[श्रेणी:त्रिनिदाद और टोबैगो का खाना]]
[[श्रेणी:अख़रोट की मिठाइयाँ]]
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पराबैंगनी
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text/x-wiki
[[चित्र:SOHO EIT ultraviolet corona image.gif|thumbnail|right|300px |[[सूर्य]] [[आभामण्डल|प्रभामंडल]] की मिथ्या वर्ण छाया, जो कि गहन पराबैंगनी प्रकाश में 17.1 [[नैनोमीटर]] पर [[अत्यंत पराबैंगनी छायांकन दूरबीन]] उपकरण से [[Solar and Heliospheric Observatory|सौर्य एवं हैलियोस्फेरिक वेधशाला (SOHO)]] अंतरिक्ष वाहन से लिया गया था। ]]
[[चित्र:Far-ultraviolet photo of Earth by Apollo 16 (AS16-123-19657).jpg|thumbnail|right|300px| [[पृथ्वी]] की पराबैंगनी छायांकन, जो कि [[चन्द्रमा|चंद्रमा]] से [[अपोलो 16]] अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा लिया गया था ]]
'''पराबैंगनी किरण''' ('''पराबैंगनी''' लिखीं जाती हैं) एक प्रकार का [[विद्युतचुंबकीय विकिरण|विद्युत चुम्बकीय विकिरण]] हैं, जिनकी तरंग दैर्घ्य [[प्रत्यक्ष वर्णक्रम|प्रत्यक्ष प्रकाश]] से छोटी हो एवं कोमल [[ऍक्स किरण|एक्स किरण]] से अधिक हो। इनकी ऐसा इसलिए कहा जाता है, क्योंकि, इनका [[वर्णक्रम]] लिए होता है [[विद्युतचुंबकीय विकिरण|विद्युत चुम्बकीय तरंग]] जिनकी आवृत्ति मानव द्वारा दर्शन योग्य [[बैंगनी (रंग)|बैंगनी]] वर्ण से ऊपर होती हैं।परा का मतलब होता है कि इस से अधिक अर्थात् बैगनी से अधिक आवृत्ति की तरंग।
पृथ्वी द्वारा सूर्य से पाए गए विकिरण का भाग होतीं हैं। अधिकतर मानव इनके प्रभाव से परिचित होते हैं, जो कि सौर्य जलन या sunburn होता है। पराबैंगनी वर्णक्रम के बहुत से अन्य प्रभाव भी होते हैं, जिनमें लाभदायक एवं हानिकारक, दोनों ही संयुक्त हैं।<ref name="o186">{{cite web | last=He | first=Horace | title=पराबैंगनी प्रकाश क्या है | publisher=Rayzeek | date=2023-09-17 | url=https://www.rayzeek.com/hi/%E0%A4%B6%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B7/%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B6-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88/ | language=hi | access-date=2026-10-17}}</ref>
== खोज ==
इनकी खोज इस प्रेक्षण से बहुत कुछ जुङी हुई हैं, कि रजत नीरेय लवण (सिल्वर क्लोराइड) धूप पङने पर काले पङ जाते हैं। 1801 में जोहन्न विल्हैम [[रिटर]] ने एक विशिष्ट प्रेक्षण किया, कि [[बैंगनी (रंग)|बैंगनी]] प्रकाश के परे (ऊपर) अप्रत्यक्ष किरणें, रजत नीरेय के लवण में भीगे कागज को काला कर देतीं है। उसने उन्हें डी-ऑक्सिडाइजिंग किरणें कहा जिससे कि उनकी रसायनीय क्रियाओं पर बल दिया जा सके साथ ही इन्हें [[वर्णक्रम]] के दूसरे सिरे पर उपस्थित ऊष्म किरणों से पृथक पहचाना जा सके। कालांतर में एक सरल शब्द रासायनिक किरणें प्रयोग हुआ। जो कि उन्नीसवीं शताब्दी तक चला, जब जाकर दोनों के ही नाम बदले और '''पराबैंगनी''एवं '''अधोरक्त''' कहलाए।<ref name="hockberger">
{{Citation
| last = Hockberger
| first = P. E.
| title = A history of ultraviolet photobiology for humans, animals and microorganisms
| journal = Photochem. Photobiol.
| volume = 76
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| pages = 561-579
| year = 2002
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| doi =
}}</ref>
== शब्द की उत्पत्ति ==
नाम '''बैंगनी से परे ''' यानी पराबैंगनी इसलिए पङा क्योंकि ये प्रत्यक्ष प्रकाश की सर्वाधिक आवृत्ति एवं न्यूनतम तरंग दैर्घ्य वाले [[बैंगनी (रंग)|बैंगनी]] से भी अधिक आवृत्ति वाली,साथ ही ; कम तरंग दैर्घ्य वाली होतीं हैं। इन्हें अँग्रेजी़ में '''अल्ट्रा वॉयलेट रेय्ज़''' कहा जाता है।
{{विद्युतचुंबकीय वर्णक्रम}}
{{रेडियो वर्णक्रम}}
[[श्रेणी:रेडियो]]
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Anitya Gautam
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[[चित्र:SOHO EIT ultraviolet corona image.gif|thumbnail|right|300px |[[सूर्य]] [[आभामण्डल|प्रभामंडल]] की मिथ्या वर्ण छाया, जो कि गहन पराबैंगनी प्रकाश में 17.1 [[नैनोमीटर]] पर [[अत्यंत पराबैंगनी छायांकन दूरबीन]] उपकरण से [[Solar and Heliospheric Observatory|सौर्य एवं हैलियोस्फेरिक वेधशाला (SOHO)]] अंतरिक्ष वाहन से लिया गया था। ]]
[[चित्र:Far-ultraviolet photo of Earth by Apollo 16 (AS16-123-19657).jpg|thumbnail|right|300px| [[पृथ्वी]] की पराबैंगनी छायांकन, जो कि [[चन्द्रमा|चंद्रमा]] से [[अपोलो 16]] अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा लिया गया था ]]
'''पराबैंगनी किरण''' ('''पराबैंगनी''' लिखीं जाती हैं) एक प्रकार का [[विद्युतचुंबकीय विकिरण|विद्युत चुम्बकीय विकिरण]] हैं, जिनकी तरंग दैर्घ्य [[प्रत्यक्ष वर्णक्रम|प्रत्यक्ष प्रकाश]] से छोटी हो एवं कोमल [[ऍक्स किरण|एक्स किरण]] से अधिक हो। इनकी ऐसा इसलिए कहा जाता है, क्योंकि, इनका [[वर्णक्रम]] लिए होता है [[विद्युतचुंबकीय विकिरण|विद्युत चुम्बकीय तरंग]] जिनकी आवृत्ति मानव द्वारा दर्शन योग्य [[बैंगनी (रंग)|बैंगनी]] वर्ण से ऊपर होती हैं।परा का मतलब होता है कि इस से अधिक अर्थात् बैगनी से अधिक आवृत्ति की तरंग।
पृथ्वी द्वारा सूर्य से पाए गए विकिरण का भाग होतीं हैं। अधिकतर मानव इनके प्रभाव से परिचित होते हैं, जो कि सौर्य जलन या sunburn होता है। पराबैंगनी वर्णक्रम के बहुत से अन्य प्रभाव भी होते हैं, जिनमें लाभदायक एवं हानिकारक, दोनों ही संयुक्त हैं।<ref name="o186">{{cite web | last=He | first=Horace | title=पराबैंगनी प्रकाश क्या है | publisher=Rayzeek | date=2023-09-17 | url=https://www.rayzeek.com/hi/%E0%A4%B6%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B7/%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B6-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88/ | language=hi | access-date=2026-10-17}}</ref>
== खोज ==
इनकी खोज इस प्रेक्षण से बहुत कुछ जुङी हुई हैं, कि रजत नीरेय लवण (सिल्वर क्लोराइड) धूप पङने पर काले पङ जाते हैं।<ref name="a442">{{cite web | title=Ultraviolet (UV) rays ke prakar, prabhav, labh, hani aur savdhaniya | publisher=myUpchar | date=2018-06-15 | url=https://www.myupchar.com/tips/ultraviolet-rays-kya-hai-prakar-prayog-labh-hani-aur-savdhaniya-in-hindi | language=hi | access-date=2026-10-17}}</ref> 1801 में जोहन्न विल्हैम [[रिटर]] ने एक विशिष्ट प्रेक्षण किया, कि [[बैंगनी (रंग)|बैंगनी]] प्रकाश के परे (ऊपर) अप्रत्यक्ष किरणें, रजत नीरेय के लवण में भीगे कागज को काला कर देतीं है। उसने उन्हें डी-ऑक्सिडाइजिंग किरणें कहा जिससे कि उनकी रसायनीय क्रियाओं पर बल दिया जा सके साथ ही इन्हें [[वर्णक्रम]] के दूसरे सिरे पर उपस्थित ऊष्म किरणों से पृथक पहचाना जा सके। कालांतर में एक सरल शब्द रासायनिक किरणें प्रयोग हुआ। जो कि उन्नीसवीं शताब्दी तक चला, जब जाकर दोनों के ही नाम बदले और '''पराबैंगनी''एवं '''अधोरक्त''' कहलाए।<ref name="hockberger">
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== शब्द की उत्पत्ति ==
नाम '''बैंगनी से परे ''' यानी पराबैंगनी इसलिए पङा क्योंकि ये प्रत्यक्ष प्रकाश की सर्वाधिक आवृत्ति एवं न्यूनतम तरंग दैर्घ्य वाले [[बैंगनी (रंग)|बैंगनी]] से भी अधिक आवृत्ति वाली,साथ ही ; कम तरंग दैर्घ्य वाली होतीं हैं। इन्हें अँग्रेजी़ में '''अल्ट्रा वॉयलेट रेय्ज़''' कहा जाता है।
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[[चित्र:SOHO EIT ultraviolet corona image.gif|thumbnail|right|300px |[[सूर्य]] [[आभामण्डल|प्रभामंडल]] की मिथ्या वर्ण छाया, जो कि गहन पराबैंगनी प्रकाश में 17.1 [[नैनोमीटर]] पर [[अत्यंत पराबैंगनी छायांकन दूरबीन]] उपकरण से [[Solar and Heliospheric Observatory|सौर्य एवं हैलियोस्फेरिक वेधशाला (SOHO)]] अंतरिक्ष वाहन से लिया गया था। ]]
[[चित्र:Far-ultraviolet photo of Earth by Apollo 16 (AS16-123-19657).jpg|thumbnail|right|300px| [[पृथ्वी]] की पराबैंगनी छायांकन, जो कि [[चन्द्रमा|चंद्रमा]] से [[अपोलो 16]] अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा लिया गया था ]]
'''पराबैंगनी किरण''' ('''पराबैंगनी''' लिखीं जाती हैं) एक प्रकार का [[विद्युतचुंबकीय विकिरण|विद्युत चुम्बकीय विकिरण]] हैं, जिनकी तरंग दैर्घ्य [[प्रत्यक्ष वर्णक्रम|प्रत्यक्ष प्रकाश]] से छोटी हो एवं कोमल [[ऍक्स किरण|एक्स किरण]] से अधिक हो। इनकी ऐसा इसलिए कहा जाता है, क्योंकि, इनका [[वर्णक्रम]] लिए होता है [[विद्युतचुंबकीय विकिरण|विद्युत चुम्बकीय तरंग]] जिनकी आवृत्ति मानव द्वारा दर्शन योग्य [[बैंगनी (रंग)|बैंगनी]] वर्ण से ऊपर होती हैं।परा का मतलब होता है कि इस से अधिक अर्थात् बैगनी से अधिक आवृत्ति की तरंग।
पृथ्वी द्वारा सूर्य से पाए गए विकिरण का भाग होतीं हैं। अधिकतर मानव इनके प्रभाव से परिचित होते हैं, जो कि सौर्य जलन या sunburn होता है। पराबैंगनी वर्णक्रम के बहुत से अन्य प्रभाव भी होते हैं, जिनमें लाभदायक एवं हानिकारक, दोनों ही संयुक्त हैं।<ref name="o186">{{cite web | last=He | first=Horace | title=पराबैंगनी प्रकाश क्या है | publisher=Rayzeek | date=2023-09-17 | url=https://www.rayzeek.com/hi/%E0%A4%B6%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B7/%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B6-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88/ | language=hi | access-date=2026-10-17}}</ref>
== खोज ==
इनकी खोज इस प्रेक्षण से बहुत कुछ जुङी हुई हैं, कि रजत नीरेय लवण (सिल्वर क्लोराइड) धूप पङने पर काले पङ जाते हैं।<ref name="a442">{{cite web | title=Ultraviolet (UV) rays ke prakar, prabhav, labh, hani aur savdhaniya | publisher=myUpchar | date=2018-06-15 | url=https://www.myupchar.com/tips/ultraviolet-rays-kya-hai-prakar-prayog-labh-hani-aur-savdhaniya-in-hindi | language=hi | access-date=2026-10-17}}</ref> 1801 में जोहन्न विल्हैम [[रिटर]] ने एक विशिष्ट प्रेक्षण किया, कि [[बैंगनी (रंग)|बैंगनी]] प्रकाश के परे (ऊपर) अप्रत्यक्ष किरणें, रजत नीरेय के लवण में भीगे कागज को काला कर देतीं है। उसने उन्हें डी-ऑक्सिडाइजिंग किरणें कहा जिससे कि उनकी रसायनीय क्रियाओं पर बल दिया जा सके साथ ही इन्हें [[वर्णक्रम]] के दूसरे सिरे पर उपस्थित ऊष्म किरणों से पृथक पहचाना जा सके। कालांतर में एक सरल शब्द रासायनिक किरणें प्रयोग हुआ।<ref name="b788">{{cite web | title=पराबैंगनी लैंप विकिरण और कीटाणुशोधन का अतीत और वर्तमान जीवन | publisher=Zhengzhou Uvwave इलेक्ट्रॉनिक प्रौद्योगिकी कं, लिमिटेड | date=2022-01-14 | url=https://fj.uvwavetek.com/news/the-past-and-present-life-of-ultraviolet-lamp-54761018.html | language=hi | access-date=2026-10-17}}</ref> जो कि उन्नीसवीं शताब्दी तक चला, जब जाकर दोनों के ही नाम बदले और '''पराबैंगनी''एवं '''अधोरक्त''' कहलाए।<ref name="hockberger">
{{Citation
| last = Hockberger
| first = P. E.
| title = A history of ultraviolet photobiology for humans, animals and microorganisms
| journal = Photochem. Photobiol.
| volume = 76
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| pages = 561-579
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== शब्द की उत्पत्ति ==
नाम '''बैंगनी से परे ''' यानी पराबैंगनी इसलिए पङा क्योंकि ये प्रत्यक्ष प्रकाश की सर्वाधिक आवृत्ति एवं न्यूनतम तरंग दैर्घ्य वाले [[बैंगनी (रंग)|बैंगनी]] से भी अधिक आवृत्ति वाली,साथ ही ; कम तरंग दैर्घ्य वाली होतीं हैं। इन्हें अँग्रेजी़ में '''अल्ट्रा वॉयलेट रेय्ज़''' कहा जाता है।
{{विद्युतचुंबकीय वर्णक्रम}}
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चाहर धर्मेंद्र
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[[चित्र:SOHO EIT ultraviolet corona image.gif|thumbnail|right|300px |[[सूर्य]] [[आभामण्डल|प्रभामंडल]] की मिथ्या वर्ण छाया, जो कि गहन पराबैंगनी प्रकाश में 17.1 [[नैनोमीटर]] पर [[अत्यंत पराबैंगनी छायांकन दूरबीन]] उपकरण से [[Solar and Heliospheric Observatory|सौर्य एवं हैलियोस्फेरिक वेधशाला (SOHO)]] अंतरिक्ष वाहन से लिया गया था। ]]
[[चित्र:Far-ultraviolet photo of Earth by Apollo 16 (AS16-123-19657).jpg|thumbnail|right|300px| [[पृथ्वी]] की पराबैंगनी छायांकन, जो कि [[चन्द्रमा|चंद्रमा]] से [[अपोलो 16]] अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा लिया गया था ]]
'''पराबैंगनी किरण''' ('''पराबैंगनी''' लिखीं जाती हैं) एक प्रकार का [[विद्युतचुंबकीय विकिरण|विद्युत चुम्बकीय विकिरण]] हैं, जिनकी तरंग दैर्घ्य [[प्रत्यक्ष वर्णक्रम|प्रत्यक्ष प्रकाश]] से छोटी हो एवं कोमल [[ऍक्स किरण|एक्स किरण]] से अधिक हो। इनकी ऐसा इसलिए कहा जाता है, क्योंकि, इनका [[वर्णक्रम]] लिए होता है [[विद्युतचुंबकीय विकिरण|विद्युत चुम्बकीय तरंग]] जिनकी आवृत्ति मानव द्वारा दर्शन योग्य [[बैंगनी (रंग)|बैंगनी]] वर्ण से ऊपर होती हैं।परा का मतलब होता है कि इस से अधिक अर्थात् बैगनी से अधिक आवृत्ति की तरंग।
पृथ्वी द्वारा सूर्य से पाए गए विकिरण का भाग होतीं हैं। अधिकतर मानव इनके प्रभाव से परिचित होते हैं, जो कि सौर्य जलन या sunburn होता है। पराबैंगनी वर्णक्रम के बहुत से अन्य प्रभाव भी होते हैं, जिनमें लाभदायक एवं हानिकारक, दोनों ही संयुक्त हैं।
== खोज ==
इनकी खोज इस प्रेक्षण से बहुत कुछ जुङी हुई हैं, कि रजत नीरेय लवण (सिल्वर क्लोराइड) धूप पङने पर काले पङ जाते हैं। 1801 में जोहन्न विल्हैम [[रिटर]] ने एक विशिष्ट प्रेक्षण किया, कि [[बैंगनी (रंग)|बैंगनी]] प्रकाश के परे (ऊपर) अप्रत्यक्ष किरणें, रजत नीरेय के लवण में भीगे कागज को काला कर देतीं है। उसने उन्हें डी-ऑक्सिडाइजिंग किरणें कहा जिससे कि उनकी रसायनीय क्रियाओं पर बल दिया जा सके साथ ही इन्हें [[वर्णक्रम]] के दूसरे सिरे पर उपस्थित ऊष्म किरणों से पृथक पहचाना जा सके। कालांतर में एक सरल शब्द रासायनिक किरणें प्रयोग हुआ। जो कि उन्नीसवीं शताब्दी तक चला, जब जाकर दोनों के ही नाम बदले और '''पराबैंगनी''एवं '''अधोरक्त''' कहलाए।<ref name="hockberger">
{{Citation
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| first = P. E.
| title = A history of ultraviolet photobiology for humans, animals and microorganisms
| journal = Photochem. Photobiol.
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== शब्द की उत्पत्ति ==
नाम '''बैंगनी से परे ''' यानी पराबैंगनी इसलिए पङा क्योंकि ये प्रत्यक्ष प्रकाश की सर्वाधिक आवृत्ति एवं न्यूनतम तरंग दैर्घ्य वाले [[बैंगनी (रंग)|बैंगनी]] से भी अधिक आवृत्ति वाली,साथ ही ; कम तरंग दैर्घ्य वाली होतीं हैं। इन्हें अँग्रेजी़ में '''अल्ट्रा वॉयलेट रेय्ज़''' कहा जाता है।
{{विद्युतचुंबकीय वर्णक्रम}}
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'''पंजाबी व्यंजन''' [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के उत्तरी भाग में एक क्षेत्र [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] में उत्पन्न होने वाली एक [[पाकशैली|पाक शैली]] है, जो अब पूर्व में एक [[पंजाब (भारत)|भारतीय भाग]] और पश्चिम में एक [[पंजाब (पाकिस्तान)|पाकिस्तानी भाग]] में विभाजित है। इस व्यञ्जन में खाना पकाने के कई विशिष्ट और स्थानीय ढंंगों की समृद्ध परम्परा है। एक [[तंदूरी पाककला|तंदूरी]] खाना पकाने का एक विशेष रूप है जो अब भारत के अन्य भागों, [[यूनाइटेड किंगडम|ब्रिटेन]], [[कनाडा]], [[हॉन्ग कॉन्ग|हॉङ्कॉङ]] और विश्व के कई भागों में प्रसिद्ध है।<ref name="g241">{{cite web | title=Punjabi Food: Top 23 Dishes | website=TasteAtlas | date=2026-10-16 | url=https://www.tasteatlas.com/best-rated-dishes-in-punjab | access-date=2026-10-18}}</ref>
स्थानीय रूप से उगाए गए मुख्य खाद्य पदार्थ स्थानीय व्यंजनों का प्रमुख भाग होते हैं। विशिष्ट रूप से पंजाबी व्यञ्जन व्यापक शाकाहारी और माँस व्यञ्जनों के साथ अपने समृद्ध, मक्खनयुक्त स्वाद के लिए जाना जाता है। मुख्य व्यंजनों में [[सरसों का साग]] (एक [[साग]] जिसका मुख्य घटक सरसों के पत्ते है) और मक्की की [[रोटी]] सम्मिलित हैं।
[[बासमती चावल]] उत्तर भारत की स्वदेशी प्रजाति है, और इसका उपयोग करके विभिन्न माँस- और शाक-आधारित चावल के व्यञ्जन विकसित किए गए हैं।
{{Double image stack|Mintparatha2.0.jpg|Mintparatha2.0.jpg|Plainlassi.jpg}}
[[श्रेणी:उत्तर भारतीय खाना]]
[[श्रेणी:पाकिस्तानी खाना]]
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[[श्रेणी:राज्य या केन्द्र-शासित प्रदेशानुसार भारतीय खाना]]
==सन्दर्भ==
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'''पंजाबी व्यंजन''' [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के उत्तरी भाग में एक क्षेत्र [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] में उत्पन्न होने वाली एक [[पाकशैली|पाक शैली]] है, जो अब पूर्व में एक [[पंजाब (भारत)|भारतीय भाग]] और पश्चिम में एक [[पंजाब (पाकिस्तान)|पाकिस्तानी भाग]] में विभाजित है। इस व्यञ्जन में खाना पकाने के कई विशिष्ट और स्थानीय ढंंगों की समृद्ध परम्परा है। एक [[तंदूरी पाककला|तंदूरी]] खाना पकाने का एक विशेष रूप है जो अब भारत के अन्य भागों, [[यूनाइटेड किंगडम|ब्रिटेन]], [[कनाडा]], [[हॉन्ग कॉन्ग|हॉङ्कॉङ]] और विश्व के कई भागों में प्रसिद्ध है।<ref name="g241">{{cite web | title=Punjabi Food: Top 23 Dishes | website=TasteAtlas | date=2026-10-16 | url=https://www.tasteatlas.com/best-rated-dishes-in-punjab | access-date=2026-10-18}}</ref>
स्थानीय रूप से उगाए गए मुख्य खाद्य पदार्थ स्थानीय व्यंजनों का प्रमुख भाग होते हैं। विशिष्ट रूप से पंजाबी व्यञ्जन व्यापक शाकाहारी और माँस व्यञ्जनों के साथ अपने समृद्ध, मक्खनयुक्त स्वाद के लिए जाना जाता है। मुख्य व्यंजनों में [[सरसों का साग]] (एक [[साग]] जिसका मुख्य घटक सरसों के पत्ते है) और मक्की की [[रोटी]] सम्मिलित हैं।<ref name="u508">{{cite web | title=17 Delicious Dishes to get you Drooling! | publisher=Holidify | date=2019-11-07 | url=https://www.holidify.com/pages/food-of-punjab-1329.html | access-date=2026-10-18}}</ref>
[[बासमती चावल]] उत्तर भारत की स्वदेशी प्रजाति है, और इसका उपयोग करके विभिन्न माँस- और शाक-आधारित चावल के व्यञ्जन विकसित किए गए हैं।
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[[श्रेणी:उत्तर भारतीय खाना]]
[[श्रेणी:पाकिस्तानी खाना]]
[[श्रेणी:पंजाबी लोग]]
[[श्रेणी:पंजाबी खाना]]
[[श्रेणी:भारतीय खाना]]
[[श्रेणी:राज्य या केन्द्र-शासित प्रदेशानुसार भारतीय खाना]]
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सतना
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Anitya Gautam
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{{Infobox settlement
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| leader_name1 = Yogesh tamrkar<ref>{{cite news |title=9 साल में शादी 16 में बनी मां, 35 की उम्र में बेटे के साथ दी 12वीं की परीक्षा, अब शहर की मेयर |url=https://www.patrika.com/satna-news/international-women-day-satna-mayor-mamta-pandey-success-story-4248685/ |access-date=12 September 2020 |work=Patrika News |date=8 March 2019 |language=hi}}</ref>
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'''सतना''' (Satna) [[भारत]] के [[मध्य प्रदेश]] राज्य के [[सतना ज़िले]] में स्थित एक नगर है। यह जिले का मुख्यालय भी है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=X6XNCwAAQBAJ Inde du Nord: Madhya Pradesh et Chhattisgarh] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190703183559/https://books.google.com/books?id=X6XNCwAAQBAJ|date=3 जुलाई 2019}}," Lonely Planet, 2016, ISBN 9782816159172</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=u6VB9_CrsfoC Tourism in the Economy of Madhya Pradesh]," Rajiv Dube, Daya Publishing House, 1987, ISBN 9788170350293</ref> सतना दो पवित्र स्थानों-चित्रकूट और मैहर के लिए प्रसिद्ध है। दोनों का हिन्दू धर्मं के तीर्थ स्थल हैं |<ref>{{Cite web|url=https://satna.nic.in/en/tourism/#:~:text=Satna%20is%20famous%20for%20two,here%20before%20creating%20the%20universe.|title=Tourism}}</ref>
[[File:भूमरा का एकमुखी शिवलिंग .jpg|thumb|280px|गुप्तकालीन भूमरा शिव मन्दिर का एकमुखी शिवलिंग]]
[[File:Parasmaniya hills of Satna .jpg|thumb|280px|पारसमणिया पहाड़ियाँ]]
[[File:Shri vyanktesh temple (front look).jpg|thumb|280px|वेंकटेश मन्दिर]]
[[File:Satna-Mach-2012 092.jpg|thumb|280px|सतना जंक्शन रेलवे स्टेशन]]
==परिचय==
मध्य प्रदेश में [[मुम्बई|मुंबई-]][[हावड़ा]] रेल लाइन पर [[जबलपुर]]-[[इलाहाबाद]] के बीच स्थित सतना<ref name="r139">{{cite web | title=बघेलखंड की वाणिज्यिक राजधानी | website=जिला सतना | date=2019-08-20 | url=https://satna.nic.in/ | language=hi | access-date=2026-10-18}}</ref> विंध्य प्रदेश का प्रदेश-द्वार कहा जाता है, अर्थात विंध्य प्रवेश पर प्रथम जिला रेल मार्ग द्वारा होता है। इसके अलावा प्रसिद्ध तीर्थ [[चित्रकूट धाम|चित्रकूट]] धाम सतना जिले में स्थित हैं। 20 मार्च 2020 मैहर को सतना जिले से अलग कर दिया गया।5 सितंबर 2023 से विभाजन कार्यवाही शुरू की गई। विश्व-प्रसिद्ध पर्यटन स्थल [[खजुराहो]] आने के लिये भी अधिकांश पर्यटक सतना होकर ही आते हैं। इस जिले में [[रामवन]], [[बीरसिंहपुर|बिरसिंहपुर]], कालिका मंदिर [[भरजुना]], धारकुंडी आश्रम , मुकुंदपुर सफारी आदि स्थान भी लोगों के आकर्षण का केन्द्र हैं।
तत्कालीन [[बघेलखंड|विंध्य प्रदेश]] की राजधानी [[रीवां|रीवा]] थी जिसके अंर्तगत सतना था। बघेल राजवंश के कारण राजघराने के जमाने का प्रभाव कमोबेश आज भी सतना में देखने को मिलता है। रीवां राज्य के कई पुराने भवन आज किसी न किसी रूप में उपयोग हो रहे हैं और अपनी ऐतिहासिकता को प्रमाणित करते हैं।
यहां के राजनैतिक इतिहास की नींव के पत्थरों में कैप्टन अवधेश प्रताप सिंह, बाबूलाल बिहारी, शारदा प्रसाद, विश्वासराव पेन्टर, गनपत प्रसाद मारवाडी, पं. अवधबिहारी लाल, हुकुमचंद नारद, पं. रामस्वरूप, मोहनलाल मिश्र, शिवानन्द लाल, अमर शहीद लाल पद्मधर सिंह,आदि है। सतना के राजनैतिक इतिहास में ये ऐसे नाम है जिनके द्वारा यहां राजनैतिक चेतना जाग्रत हुई। बाद में यहां [[गोविंद नारायण सिंह|गोविन्द नारायण सिंह]] (प्रदेश की संविद सरकार के मुख्यमंत्री), बैरिस्टर गुलशेर अहमद (विधान सभा अध्यक्ष तथा विधि मंत्री) डॉ॰ लालता प्रसाद खरे (नगर पालिका के सबसे लंबे समय तक चेयरमैन और बाद में राज्य मंत्री) हुये।
सतना का नाम मप्र के 7 स्मार्ट शहरों में लिया जाता है, यह विंध्य का सबसे विकसित शहर माना जाता है। यह एक औद्योगिक शहर के रूप में जाना जाता है। [[बिड़ला घराना|बिड़ला घराने]] के [[सीमेन्ट]] के दो कारखाने, [[सतना सीमेन्ट]] फैक्ट्री और [[यूनिवर्सल केबल्स]] फैक्ट्री हैं। एक और [[प्रिज्म सीमेन्ट]] है। इनके अलावा चूना, सर्फ, नमकीन, तम्बाकू, चायपत्ती, डालडा एवं अन्य कई उद्योग के विभिन्न छोटे-बडे संस्थान स्थापित है। [[बीड़ी]] उत्पादकों के कई संस्थान हैं। यहां के बाजार पर सिंधी, मारवाडी और गुजराती व्यापारियों का वर्चस्व है।
यह शहर कई नामी गिरामी हस्तियों के कारण जाना जाता है। न्याय के क्षेत्र में [[भारत का उच्चतम न्यायालय|सर्वोच्च न्यायालय]] के मुख्य न्यायाधीश रह चुके जस्टिस जे.एस. वर्मा यहीं के रहने वाले हैं। उन्होंने शुरू में यहां वकालत की फिर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, राजस्थान उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के पदों में रहने के बाद वे सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचे। चित्रकूट में [[नानाजी देशमुख]] ने [[दीनदयाल शोध संस्थान]], [[ग्रामोदय विश्वविद्यालय]] तथा अन्य शिक्षा संस्थान प्रारंभ कर समाज सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।
==इतिहास==
सतना जिले का इतिहास क्षेत्रफल के उस इतिहास का हिस्सा है, जो कि [[बघेलखंड]] के नाम से जाना जाता है, जिनमें से एक बहुत बड़ा हिस्सा [[रीवा ज़िला|रीवा]] की संधि राज्य का शासन था, जबकि पश्चिम दिशा की ओर एक छोटा सा हिस्सा सामंती सरदारों द्वारा शासित था। ब्रिटिश शासकों द्वारा दिए गए सनदों के तहत अपने राज्यों को पकड़े हुए, सभी में ग्यारह थे। महत्त्वपूर्ण लोग मैहर, नागोद, कोठी, जासो, सोहवाल और बारूंधा और पांच चौबे जागीर-पालदेव, पहारा , तारायण, भाईसुधा और कामता-राजुला हैं।
शुरुआती बौद्ध पुस्तकों, महाभारत आदि,[[बघेलखंड]] मार्ग को हैहाया, [[कलचुरी]] या [[चेदि राज्य|छेदी]] कबीले के शासकों से जोड़ते हैं, जिन्हें माना जाता है कि तीसरी शताब्दी ईस्वी के दौरान कुछ समय के लिए पर्याप्त महत्व प्राप्त हुआ है। उनका मूल आवास [[माहिष्मती|महिष्मति]] के साथ नर्मदा (पश्चिम निमार जिले में महेश्वर के साथ कुछ के रूप में) राजधानी के रूप में; जहां से लगता है कि, वे पूर्व की ओर संचालित हो गए हैं । उन्होनें [[कालिंजर दुर्ग|कलिंजर]] का किला (यू.पी. में सतना जिले की सीमा से कुछ मील की दूरी पर) का अधिग्रहण किया था, और इसके आधार के रूप में, उन्होंने [[बघेलखंड]] अपना वर्चस्व बढ़ाया । चौथी और पांचवीं शताब्दियों के दौरान, मगध का गुप्त वंश इस क्षेत्र पर सर्वोच्च था, जैसा कि उचचकालपा (नागोद तहसील में उचेहरा) और कोटा के परिव्राजक राजा (नागोद तहसील में) के निर्णायक प्रमुखों के अभिलेखों के अनुसार दिखाया गया है। [[चेदि राज्य|छेदी]] कबीले के मुख्य गढ़ कालिंजर थे, और उनके गर्वों का नाम कालिंजर अदिश्वारा (कालिंजर का भगवान) था। कलचूरियों ने चंदेल के प्रमुख यशोवर्मन (925-55) के हाथ में अपना पहला झटका लगाया, जिन्होंने कालींजर के किले और उसके चारों ओर का रास्ता को जब्त कर लिया। [[कलचुरि राजवंश|कलचूरी]] अभी भी एक शक्तिशाली [[जनजाति]] थे और [[१२वीं शताब्दी|12 वीं शताब्दी]] तक उनकी अधिकांश संपत्ति को जारी रखा था।
रेवास के प्रमुख थे,[[बघेल राजपूत]] जो की सोलंकी कबीले के वंशज थे और दसवीं से तेरहवीं शताब्दी तक [[गुजरात]] पर शासन किया था। गुजरात के शासक राजा वीरधवल के पुत्र [[व्याघ्रदेव|राजा व्याघ्रदेव]],ने तेरहवीं शताब्दी के मध्य के बारे में उत्तर भारत में अपना रास्ता बना लिया और कालिंजर से 18 मील की उत्तर-पूर्व में मार्फ का किला प्राप्त किया। उनके पुत्र करन देव ने मंडला के [[कलचुरी]] (हैहाया) राजकुमारी से शादी की और [[बांधवगढ़ का किला|बांधवगढ़]] के किले (अब शहडोल जिले में उसी नाम के तहसील में) को दहेज में प्राप्त किया, जो कि सन1597 में अकबर द्वारा विनाश के पहले बघेल की राजधानी थी।
सन 1298 में, सम्राट अलाउद्दीन के आदेश का पालन करने वाले उल्लग खान ने अपने देश के [[गुजरात]] के आखिरी [[बघेल]] शासक को बाहर निकाला और यह माना जाता है कि, बघेलो को बांधवगढ़ में काफी स्थानांतरित किया था। 15 वीं सदी तक बांधवगढ़ के बघेल अपनी संपत्ति का विस्तार करने में लगे हुए थे और दिल्ली के राजाओं के ध्यान से बच गए थे। सन 1498-9 में, सिकंदर लोदी बांधवगढ़ का किला लेने के अपने प्रयास में विफल रहे । बघेल राजा रामचंद्र (1555-92), अकबर का एक समकालीन था। तानसेन, महान संगीतकार, रामचंद्र के अदालत में थे और वही से अकबर द्वारा उनके दरबार में बुलाया गया था। रामचंद्र के बेटे, बिर्धाब्रा की विक्रमादित्य नामक एक नाबालिग बंदोहगढ़ के सिंहासन से जुड़ गए थे। उनके प्रवेश ने गड़बड़ी को जन्म दिया। अकबर आठ बजे पकड़े जाने के बाद 15 9 5 में अकबर ने हस्तक्षेप किया और बंदोहगढ़ किला को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद रीवा के शहर में महत्व प्राप्त करना शुरू हो गया। ऐसा कहा जाता है कि राजा विक्रमादित्य ने 1618 में स्थापित किया था (जिसका अर्थ है कि उन्होंने महलों और अन्य इमारतों के निर्माण के लिए काम किया था, क्योंकि इस स्थान पर पहले से ही 1554 में महारानी सम्राट शेरशाह के बेटे जलाल खान द्वारा आयोजित किया गया था)।
सन 1803 में, बेसिन की संधि के बाद, ब्रिटिश ने रीवा के शासक के साथ गठबंधन की आलोचना की, लेकिन बाद में उन्हें अस्वीकार कर दिया। 1812 में, राजा जयसिंह (1809 -35) के समय, पिंडारीस के एक शरीर ने रीवा क्षेत्र से मिर्जापुर पर छापा मारा। इस जयसिंघ को एक संधि में स्वीकार करने के लिए बुलाया गया था, जिसमें उन्होंने ब्रिटिश सरकार की सुरक्षा को स्वीकार किया और पड़ोसी प्रमुखों के साथ सभी विवादों को उनके मध्यस्थता के लिए संदर्भित करने के लिए सहमत हो गए और ब्रिटिश सैनिकों को मार्च के दौरान या उनके क्षेत्रों में कैंटन किया जा सके। 1857 के विद्रोह पर, महाराजा रघुराज सिंह ने अंग्रेजों को पड़ोसी मंडला और जबलपुर जिले में विद्रोहों को दबाने में मदद की, और नागदा में जो अब सतना जिले का हिस्सा है। इसके लिए, राजा को सोहगपुर (शहडोल) और अमरकंटक परगना, जिसे शताब्दी की शुरुआत में मराठों द्वारा जब्त कर लिया गया था, उन्हें बहाल करके पुरस्कृत किया गया। रीवा राज्य के शासकों ने ‘उनकी महारानी’ और ‘महाराजा’ का खिताब ग्रहण किया और 17 बंदूकें का स्वागत किया। वर्तमान सतना जिले के अधिकांश रघुराज नगर और पूरे अमरपतन तहसील, विंध्य प्रदेश के गठन से पहले रीवा राज्य में थे।
नागोद राज्य: 18 वीं शताब्दी तक, राज्य को इसकी मूल राजधानी के उचेहरा के नाम से जाना जाता था। नागोद की प्रमुखों परिहार राजपूत पारंपरिक रूप से माउंट आबू से संबंधित थे। सातवीं शताब्दी में, परिहार राजपूतों ने [[गहरवार|गहरावार]] शासकों को निकाल दिया और महोबा और मऊ के बीच देश में खुद को स्थापित किया। नौवीं शताब्दी में, वे चंदेलों से पूर्व की ओर अग्रसर हो गए थे, जहां 1344 में तेली राजाओं से राजा धरा सिंह ने नारो के किले पर कब्जा कर लिया था। 1478 में राजा भोज ने उचेहरा प्राप्त किया, जिसे उन्होंने मुख्य शहर बना दिया और जो 1720 तक बना रहा , जब तक राजा चैनसिंह द्वारा नागोद को राजधानी में स्थानांतरित किया गया था। बाद में परिहारों ने अपने सभी क्षेत्र बघेलों और बुंदेलो को छोड़कर, सीमित क्षेत्र जिसे 1947 से पहले आयोजित किया गया था, उसी में बस गये। जब बेसिन (1820) के संधि के बाद ब्रिटिश सर्वोच्च बन गए, तो नागद को पन्ना के लिए एक सहायक नदी में रखा गया था और 1807 में उस राज्य को स्वीडन में शामिल किया गया था। 180 9 में, लाल शशराज सिंह को एक अलग सनद प्रदान किया गया था। उसकी संपत्ति में उसे पुष्टि करते हुए 1857 के विद्रोह में, प्रमुख राघवेंद्र सिंह ने अंग्रेजों की सहायता करने में सबसे अधिक वफादारी से व्यवहार किया और उन्हें 11 गांवों के अनुदान से पुरस्कृत किया गया, जो कि विजयीघोगढ़ की जब्त राज्य से संबंधित था। नागद प्रमुखों को राजा का खिताब मिला था और 9 बंदूकें की सलामी मिली थी।
[[मैहर]]: मैहर के प्रमुखों ने कच्छवाहा राजपूत कबीले से वंश का दावा किया। परिवार जाहिर तौर पर अलवर से 17 वीं या 18 वीं शताब्दी में चले गए, और ओरछा प्रमुख से भूमि प्राप्त की। ठाकुर भीमसिंह ने बाद में पन्ना के छत्रसाल की सेवा में प्रवेश किया। उनके अधीन किए गए बेनी सिंह राजा हिंदूप के मंत्री बने, जिन्होंने उन्हें उस इलाके को प्रदान किया जो अब लगभग 1770 में मैहर ज़िले के अधिकांश भाग बनाता है। (मूलतः यह रीवा बेनी सिंह का एक हिस्सा था, जिसे 1788 में मार दिया गया था, कई टैंकों और इमारतों का निर्माण उनकी बेटी राजधर उन्नीसवीं सदी के शुरूआती दिनों में बांदा के अली बहादुर ने विजय प्राप्त की थी। हालांकि अली बहादुर ने राज्य को बिशन सिंह के एक छोटे बेटे दुर्जन सिंह को बहाल किया। 1806 और 1814 में, दुर्जन सिंह ने ब्रिटिश सरकार से सनद प्राप्त किया था, जिसमें उन्होंने पुष्टि की थी।1826 में उनकी मृत्यु के बाद राज्य को अपने दो पुत्रों बिशनसिंह के बीच विभाजित किया गया था, जो कि मेजर की तरफ से बड़ा था, जबकि प्रगादास, युवा ने बिजाई राघोगढ़ को प्राप्त किया था। उत्तरार्द्ध राज्य (अब जबलपुर जिले के मुरवार तहसील में) था। मुख्य विद्रोह के कारण 1858 में जब्त की। मैहर के शासक राजा का खिताब का आनंद लिया और 9 बंदूकें की सलामी के हकदार थे।
कोठी: कोठी 169 वर्ग मील की एक छोटी सी सनद राज्य थी, जो अब रघुराज नगर तहसील में शामिल है। राज्य पर पहले भर जनजाति के प्रमुखों द्वारा शासित था लेकिन जगत राय सिंह बघेल ने मूल भर के प्रमुखों को हटाया और जागीर की स्थापना की। ब्रिटिश वर्चस्व कोठी की स्थापना पर पन्ना के अधीनस्थ होने के लिए आयोजित किया गया था, क्योंकि अठारहवीं शताब्दी में जब छतररू बंडेला पन्ना में सत्ता में थी, तो कोठी प्रमुख उनके उपनदी थे। इसके बाद, हालांकि, बांदा के अलीबहादुर के वर्चस्व के दौरान, और बाद में, कोठी प्रमुखों ने अपनी आजादी को बनाए रखा। इसे देखते हुए ब्रिटिशों ने 1810 में रायस लाल ड्यूनियापति सिंह को एक सनद प्रदान किया, जो उन्हें सीधे ब्रिटिश सरकार पर निर्भर करता है
सोहावल: यह कोठी राज्य द्वारा लगभग 213 वर्ग मील की एक छोटी सी सनद राज्य थी, जो दो भागों में विभाजित था। इसके संस्थापक फतेहसिंह रीवा के महाराजा अमरसिंह के दो पुत्रों में से एक थे। उसने सोलहवीं सदी में अपने पिता के खिलाफ विद्रोह किया था। मूल रूप से राज्य काफी हद तक था,जिसमें पड़ोस में बिरसिंगपुर, कोठी और अन्य इलाकों शामिल थे। छन्नासलों के तहत पन्ना के उत्थान पर, सोहावल एक सहायक नदी बन गया लेकिन अपनी स्वतंत्रता बनाए रखा। बाद में, छत्रस के पुत्र जगतराय और जिंदैष ने वास्तव में अपने बहुत से क्षेत्र को पकड़ा, जबकि कोठी प्रमुख ने इन गड़बड़ी का फायदा उठाया, अपनी निष्ठा को फेंक दिया और सोहरावल के प्रमुख, प्रितिपल सिंह पर हमला करके मार डाला। उन्नीसवीं सदी में ब्रिटिश वर्चस्व स्थापित करने पर, सोहावल को पहले पंन्ना के अधीनस्थ माना गया था, लेकिन 1809 में रायस अमन सिंह को अलग-अलग जमीन दी गई थी, जिस पर राज्य छत्रसालो के सत्ता में उदय हुआ था और बांदा के अलीबहादुर के पूरे वर्चस्व में स्वतंत्र रहा था। राज्य 1 9 50 से रघुराज नगर तहसील में विलय कर दिया गया है
अरौड़ा (या पत्थर कच्छ): यह लगभग 218 वर्ग मील की एक छोटा सनद राज्य था। पूर्व में यह बहुत बड़ा था, जिसमें यू.पी. के मौजूदा बांदा जिले का अधिकांश हिस्सा था। परिवार ने कम से कम 400 साल तक देश का आयोजन किया था। नाम पत्थर कच्छ विंध्य के स्कर्ट पर अपनी स्थिति से प्राप्त हुआ था। सत्तारूढ़ परिवार का दावा है कि वह एक पुराना है और राजपूतों के सौर मंडल के रघुवंशी कबीले के हैं। परिवार का मूल सीट बांदा जिले के रासीन में था, मूल रूप से राजा वसिनी कहा जाता था, जहां कई पुराने अवशेष मौजूद हैं। प्रारंभिक इतिहास, हालांकि, बहुत अस्पष्ट है, बंडेला वर्चस्व के दौरान, राज्य पन्ना के हिरडेष से एक सनड में आयोजित किया गया है। ब्रिटिशों को सर्वोच्च शक्ति के कब्जे में, 1807 में दी गई एक सनद द्वारा राजा मोहनसिंग को अपने क्षेत्र में मान्यता दी गई और पुष्टि हुई। राज्य के शासकों ने राजा का पद ग्रहण किया और 9 बंदूकें का स्वागत किया।
चौबे जागरर्स: यह बारूढ़ राज्य और यू.पी. के बांदा जिले के बीच पांच छोटे-छोटे राज्यों का एक संग्रह था। पांच राज्यों में पालदो, पहाड़, तारायण, भाईसंध और कामता-राजौली थे, जो 126 वर्ग मील के क्षेत्र में थे। इन सम्पदाओं के धारकों में जिझोतिया ब्राह्मण थे और चौबे के पद को जन्म दिया गया था। वे मूल रूप से नाओगॉन कैंटोनमेंट के पास गांव दादरी में जमीन रखे थे। सैन्य सेवा के लिए उनकी योग्यता उन्हें ध्यान में लाती है और वे पन्ना के राजा छत्रसाल के नीचे उच्च रैंक तक पहुंचे। पहले चार सम्पदा के मालिक रामकिशन से निकल आए थे, जो पंन्ना के राजा हर्डशाह के नीचे कालिंजर किले के गवर्नर थे। जगजीर अब रघुराज नगर तहसील में हैं।
== जनसंख्या ==
2024 में सतना शहर की वर्तमान अनुमानित जनसंख्या 396,000 है, जबकि सतना मेट्रो की जनसंख्या 400,000 होने का अनुमान है। भारत की जनगणना की अनंतिम रिपोर्ट के अनुसार, 2011 में सतना की जनसंख्या 280,222 है। यद्यपि सतना शहर की जनसंख्या 280,222 है; इसकी शहरी/महानगरीय जनसंख्या 282,977 है। <ref>{{Cite web|url=https://www.census2011.co.in/census/city/290-satna.html|title=Satna Population 2024}}</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[सतना ज़िला]]
==बाहरी कड़ियाँ==
* [https://web.archive.org/web/20150518075440/http://smcsatna.org/default.php सतना नगरपालिका का जालघर]
* [https://web.archive.org/web/20150518102128/http://yatrasalah.com/touristPlaces.aspx?id=463 सतना : यात्रा सलाह]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{मध्य प्रदेश के जिले}}
[[श्रेणी:मध्य प्रदेश के शहर]]
[[श्रेणी:सतना ज़िला]]
[[श्रेणी:सतना ज़िले के नगर]]
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Anitya Gautam
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'''सतना''' (Satna) [[भारत]] के [[मध्य प्रदेश]] राज्य के [[सतना ज़िले]] में स्थित एक नगर है। यह जिले का मुख्यालय भी है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=X6XNCwAAQBAJ Inde du Nord: Madhya Pradesh et Chhattisgarh] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190703183559/https://books.google.com/books?id=X6XNCwAAQBAJ|date=3 जुलाई 2019}}," Lonely Planet, 2016, ISBN 9782816159172</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=u6VB9_CrsfoC Tourism in the Economy of Madhya Pradesh]," Rajiv Dube, Daya Publishing House, 1987, ISBN 9788170350293</ref> सतना दो पवित्र स्थानों-चित्रकूट और मैहर के लिए प्रसिद्ध है। दोनों का हिन्दू धर्मं के तीर्थ स्थल हैं |<ref>{{Cite web|url=https://satna.nic.in/en/tourism/#:~:text=Satna%20is%20famous%20for%20two,here%20before%20creating%20the%20universe.|title=Tourism}}</ref>
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==परिचय==
मध्य प्रदेश में [[मुम्बई|मुंबई-]][[हावड़ा]] रेल लाइन पर [[जबलपुर]]-[[इलाहाबाद]] के बीच स्थित सतना<ref name="r139">{{cite web | title=बघेलखंड की वाणिज्यिक राजधानी | website=जिला सतना | date=2019-08-20 | url=https://satna.nic.in/ | language=hi | access-date=2026-10-18}}</ref> विंध्य प्रदेश का प्रदेश-द्वार कहा जाता है, अर्थात विंध्य प्रवेश पर प्रथम जिला रेल मार्ग द्वारा होता है। इसके अलावा प्रसिद्ध तीर्थ [[चित्रकूट धाम|चित्रकूट]] धाम सतना जिले में स्थित हैं। 20 मार्च 2020 मैहर को सतना जिले से अलग कर दिया गया।5 सितंबर 2023 से विभाजन कार्यवाही शुरू की गई। विश्व-प्रसिद्ध पर्यटन स्थल [[खजुराहो]] आने के लिये भी अधिकांश पर्यटक सतना होकर ही आते हैं। इस जिले में [[रामवन]], [[बीरसिंहपुर|बिरसिंहपुर]], कालिका मंदिर [[भरजुना]], धारकुंडी आश्रम , मुकुंदपुर सफारी आदि स्थान भी लोगों के आकर्षण का केन्द्र हैं।
तत्कालीन [[बघेलखंड|विंध्य प्रदेश]] की राजधानी [[रीवां|रीवा]] थी जिसके अंर्तगत सतना था। बघेल राजवंश के कारण राजघराने के जमाने का प्रभाव कमोबेश आज भी सतना में देखने को मिलता है। रीवां राज्य के कई पुराने भवन आज किसी न किसी रूप में उपयोग हो रहे हैं और अपनी ऐतिहासिकता को प्रमाणित करते हैं।
यहां के राजनैतिक इतिहास की नींव के पत्थरों में कैप्टन अवधेश प्रताप सिंह, बाबूलाल बिहारी, शारदा प्रसाद, विश्वासराव पेन्टर, गनपत प्रसाद मारवाडी, पं. अवधबिहारी लाल, हुकुमचंद नारद, पं. रामस्वरूप, मोहनलाल मिश्र, शिवानन्द लाल, अमर शहीद लाल पद्मधर सिंह,आदि है। सतना के राजनैतिक इतिहास में ये ऐसे नाम है जिनके द्वारा यहां राजनैतिक चेतना जाग्रत हुई। बाद में यहां [[गोविंद नारायण सिंह|गोविन्द नारायण सिंह]] (प्रदेश की संविद सरकार के मुख्यमंत्री), बैरिस्टर गुलशेर अहमद (विधान सभा अध्यक्ष तथा विधि मंत्री) डॉ॰ लालता प्रसाद खरे (नगर पालिका के सबसे लंबे समय तक चेयरमैन और बाद में राज्य मंत्री) हुये।
सतना का नाम मप्र के 7 स्मार्ट शहरों में लिया जाता है, यह विंध्य का सबसे विकसित शहर माना जाता है। यह एक औद्योगिक शहर के रूप में जाना जाता है। [[बिड़ला घराना|बिड़ला घराने]] के [[सीमेन्ट]] के दो कारखाने, [[सतना सीमेन्ट]] फैक्ट्री और [[यूनिवर्सल केबल्स]] फैक्ट्री हैं। एक और [[प्रिज्म सीमेन्ट]] है। इनके अलावा चूना, सर्फ, नमकीन, तम्बाकू, चायपत्ती, डालडा एवं अन्य कई उद्योग के विभिन्न छोटे-बडे संस्थान स्थापित है। [[बीड़ी]] उत्पादकों के कई संस्थान हैं। यहां के बाजार पर सिंधी, मारवाडी और गुजराती व्यापारियों का वर्चस्व है।
यह शहर कई नामी गिरामी हस्तियों के कारण जाना जाता है। न्याय के क्षेत्र में [[भारत का उच्चतम न्यायालय|सर्वोच्च न्यायालय]] के मुख्य न्यायाधीश रह चुके जस्टिस जे.एस. वर्मा यहीं के रहने वाले हैं। उन्होंने शुरू में यहां वकालत की फिर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, राजस्थान उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के पदों में रहने के बाद वे सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचे। चित्रकूट में [[नानाजी देशमुख]] ने [[दीनदयाल शोध संस्थान]], [[ग्रामोदय विश्वविद्यालय]] तथा अन्य शिक्षा संस्थान प्रारंभ कर समाज सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।
==इतिहास==
सतना जिले का इतिहास क्षेत्रफल के उस इतिहास का हिस्सा है, जो कि [[बघेलखंड]] के नाम से जाना जाता है, जिनमें से एक बहुत बड़ा हिस्सा [[रीवा ज़िला|रीवा]] की संधि राज्य का शासन था, जबकि पश्चिम दिशा की ओर एक छोटा सा हिस्सा सामंती सरदारों द्वारा शासित था। ब्रिटिश शासकों द्वारा दिए गए सनदों के तहत अपने राज्यों को पकड़े हुए, सभी में ग्यारह थे। महत्त्वपूर्ण लोग मैहर, नागोद, कोठी, जासो, सोहवाल और बारूंधा और पांच चौबे जागीर-पालदेव, पहारा , तारायण, भाईसुधा और कामता-राजुला हैं।
शुरुआती बौद्ध पुस्तकों, महाभारत आदि,[[बघेलखंड]] मार्ग को हैहाया, [[कलचुरी]] या [[चेदि राज्य|छेदी]] कबीले के शासकों से जोड़ते हैं, जिन्हें माना जाता है कि तीसरी शताब्दी ईस्वी के दौरान कुछ समय के लिए पर्याप्त महत्व प्राप्त हुआ है। उनका मूल आवास [[माहिष्मती|महिष्मति]] के साथ नर्मदा (पश्चिम निमार जिले में महेश्वर के साथ कुछ के रूप में) राजधानी के रूप में; जहां से लगता है कि, वे पूर्व की ओर संचालित हो गए हैं । उन्होनें [[कालिंजर दुर्ग|कलिंजर]] का किला (यू.पी. में सतना जिले की सीमा से कुछ मील की दूरी पर) का अधिग्रहण किया था, और इसके आधार के रूप में, उन्होंने [[बघेलखंड]] अपना वर्चस्व बढ़ाया । चौथी और पांचवीं शताब्दियों के दौरान, मगध का गुप्त वंश इस क्षेत्र पर सर्वोच्च था, जैसा कि उचचकालपा (नागोद तहसील में उचेहरा) और कोटा के परिव्राजक राजा (नागोद तहसील में) के निर्णायक प्रमुखों के अभिलेखों के अनुसार दिखाया गया है। [[चेदि राज्य|छेदी]] कबीले के मुख्य गढ़ कालिंजर थे, और उनके गर्वों का नाम कालिंजर अदिश्वारा (कालिंजर का भगवान) था। कलचूरियों ने चंदेल के प्रमुख यशोवर्मन (925-55) के हाथ में अपना पहला झटका लगाया, जिन्होंने कालींजर के किले और उसके चारों ओर का रास्ता को जब्त कर लिया। [[कलचुरि राजवंश|कलचूरी]] अभी भी एक शक्तिशाली [[जनजाति]] थे और [[१२वीं शताब्दी|12 वीं शताब्दी]] तक उनकी अधिकांश संपत्ति को जारी रखा था।
रेवास के प्रमुख थे,[[बघेल राजपूत]] जो की सोलंकी कबीले के वंशज थे और दसवीं से तेरहवीं शताब्दी तक [[गुजरात]] पर शासन किया था। गुजरात के शासक राजा वीरधवल के पुत्र [[व्याघ्रदेव|राजा व्याघ्रदेव]],ने तेरहवीं शताब्दी के मध्य के बारे में उत्तर भारत में अपना रास्ता बना लिया और कालिंजर से 18 मील की उत्तर-पूर्व में मार्फ का किला प्राप्त किया। उनके पुत्र करन देव ने मंडला के [[कलचुरी]] (हैहाया) राजकुमारी से शादी की और [[बांधवगढ़ का किला|बांधवगढ़]] के किले (अब शहडोल जिले में उसी नाम के तहसील में) को दहेज में प्राप्त किया, जो कि सन1597 में अकबर द्वारा विनाश के पहले बघेल की राजधानी थी।
सन 1298 में, सम्राट अलाउद्दीन के आदेश का पालन करने वाले उल्लग खान ने अपने देश के [[गुजरात]] के आखिरी [[बघेल]] शासक को बाहर निकाला और यह माना जाता है कि, बघेलो को बांधवगढ़ में काफी स्थानांतरित किया था। 15 वीं सदी तक बांधवगढ़ के बघेल अपनी संपत्ति का विस्तार करने में लगे हुए थे और दिल्ली के राजाओं के ध्यान से बच गए थे। सन 1498-9 में, सिकंदर लोदी बांधवगढ़ का किला लेने के अपने प्रयास में विफल रहे । बघेल राजा रामचंद्र (1555-92), अकबर का एक समकालीन था। तानसेन, महान संगीतकार, रामचंद्र के अदालत में थे और वही से अकबर द्वारा उनके दरबार में बुलाया गया था। रामचंद्र के बेटे, बिर्धाब्रा की विक्रमादित्य नामक एक नाबालिग बंदोहगढ़ के सिंहासन से जुड़ गए थे। उनके प्रवेश ने गड़बड़ी को जन्म दिया। अकबर आठ बजे पकड़े जाने के बाद 15 9 5 में अकबर ने हस्तक्षेप किया और बंदोहगढ़ किला को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद रीवा के शहर में महत्व प्राप्त करना शुरू हो गया। ऐसा कहा जाता है कि राजा विक्रमादित्य ने 1618 में स्थापित किया था (जिसका अर्थ है कि उन्होंने महलों और अन्य इमारतों के निर्माण के लिए काम किया था, क्योंकि इस स्थान पर पहले से ही 1554 में महारानी सम्राट शेरशाह के बेटे जलाल खान द्वारा आयोजित किया गया था)।
सन 1803 में, बेसिन की संधि के बाद, ब्रिटिश ने रीवा के शासक के साथ गठबंधन की आलोचना की, लेकिन बाद में उन्हें अस्वीकार कर दिया। 1812 में, राजा जयसिंह (1809 -35) के समय, पिंडारीस के एक शरीर ने रीवा क्षेत्र से मिर्जापुर पर छापा मारा। इस जयसिंघ को एक संधि में स्वीकार करने के लिए बुलाया गया था, जिसमें उन्होंने ब्रिटिश सरकार की सुरक्षा को स्वीकार किया और पड़ोसी प्रमुखों के साथ सभी विवादों को उनके मध्यस्थता के लिए संदर्भित करने के लिए सहमत हो गए और ब्रिटिश सैनिकों को मार्च के दौरान या उनके क्षेत्रों में कैंटन किया जा सके। 1857 के विद्रोह पर, महाराजा रघुराज सिंह ने अंग्रेजों को पड़ोसी मंडला और जबलपुर जिले में विद्रोहों को दबाने में मदद की, और नागदा में जो अब सतना जिले का हिस्सा है। इसके लिए, राजा को सोहगपुर (शहडोल) और अमरकंटक परगना, जिसे शताब्दी की शुरुआत में मराठों द्वारा जब्त कर लिया गया था, उन्हें बहाल करके पुरस्कृत किया गया। रीवा राज्य के शासकों ने ‘उनकी महारानी’ और ‘महाराजा’ का खिताब ग्रहण किया और 17 बंदूकें का स्वागत किया। वर्तमान सतना जिले के अधिकांश रघुराज नगर और पूरे अमरपतन तहसील, विंध्य प्रदेश के गठन से पहले रीवा राज्य में थे।
नागोद राज्य: 18 वीं शताब्दी तक, राज्य को इसकी मूल राजधानी के उचेहरा के नाम से जाना जाता था। नागोद की प्रमुखों परिहार राजपूत पारंपरिक रूप से माउंट आबू से संबंधित थे। सातवीं शताब्दी में, परिहार राजपूतों ने [[गहरवार|गहरावार]] शासकों को निकाल दिया और महोबा और मऊ के बीच देश में खुद को स्थापित किया। नौवीं शताब्दी में, वे चंदेलों से पूर्व की ओर अग्रसर हो गए थे, जहां 1344 में तेली राजाओं से राजा धरा सिंह ने नारो के किले पर कब्जा कर लिया था। 1478 में राजा भोज ने उचेहरा प्राप्त किया, जिसे उन्होंने मुख्य शहर बना दिया और जो 1720 तक बना रहा , जब तक राजा चैनसिंह द्वारा नागोद को राजधानी में स्थानांतरित किया गया था। बाद में परिहारों ने अपने सभी क्षेत्र बघेलों और बुंदेलो को छोड़कर, सीमित क्षेत्र जिसे 1947 से पहले आयोजित किया गया था, उसी में बस गये। जब बेसिन (1820) के संधि के बाद ब्रिटिश सर्वोच्च बन गए, तो नागद को पन्ना के लिए एक सहायक नदी में रखा गया था और 1807 में उस राज्य को स्वीडन में शामिल किया गया था। 180 9 में, लाल शशराज सिंह को एक अलग सनद प्रदान किया गया था। उसकी संपत्ति में उसे पुष्टि करते हुए 1857 के विद्रोह में, प्रमुख राघवेंद्र सिंह ने अंग्रेजों की सहायता करने में सबसे अधिक वफादारी से व्यवहार किया और उन्हें 11 गांवों के अनुदान से पुरस्कृत किया गया, जो कि विजयीघोगढ़ की जब्त राज्य से संबंधित था। नागद प्रमुखों को राजा का खिताब मिला था और 9 बंदूकें की सलामी मिली थी।
[[मैहर]]: मैहर के प्रमुखों ने कच्छवाहा राजपूत कबीले से वंश का दावा किया। परिवार जाहिर तौर पर अलवर से 17 वीं या 18 वीं शताब्दी में चले गए, और ओरछा प्रमुख से भूमि प्राप्त की। ठाकुर भीमसिंह ने बाद में पन्ना के छत्रसाल की सेवा में प्रवेश किया। उनके अधीन किए गए बेनी सिंह राजा हिंदूप के मंत्री बने, जिन्होंने उन्हें उस इलाके को प्रदान किया जो अब लगभग 1770 में मैहर ज़िले के अधिकांश भाग बनाता है। (मूलतः यह रीवा बेनी सिंह का एक हिस्सा था, जिसे 1788 में मार दिया गया था, कई टैंकों और इमारतों का निर्माण उनकी बेटी राजधर उन्नीसवीं सदी के शुरूआती दिनों में बांदा के अली बहादुर ने विजय प्राप्त की थी। हालांकि अली बहादुर ने राज्य को बिशन सिंह के एक छोटे बेटे दुर्जन सिंह को बहाल किया। 1806 और 1814 में, दुर्जन सिंह ने ब्रिटिश सरकार से सनद प्राप्त किया था, जिसमें उन्होंने पुष्टि की थी।1826 में उनकी मृत्यु के बाद राज्य को अपने दो पुत्रों बिशनसिंह के बीच विभाजित किया गया था, जो कि मेजर की तरफ से बड़ा था, जबकि प्रगादास, युवा ने बिजाई राघोगढ़ को प्राप्त किया था। उत्तरार्द्ध राज्य (अब जबलपुर जिले के मुरवार तहसील में) था। मुख्य विद्रोह के कारण 1858 में जब्त की। मैहर के शासक राजा का खिताब का आनंद लिया और 9 बंदूकें की सलामी के हकदार थे।
कोठी: कोठी 169 वर्ग मील की एक छोटी सी सनद राज्य थी, जो अब रघुराज नगर तहसील में शामिल है। राज्य पर पहले भर जनजाति के प्रमुखों द्वारा शासित था लेकिन जगत राय सिंह बघेल ने मूल भर के प्रमुखों को हटाया और जागीर की स्थापना की। ब्रिटिश वर्चस्व कोठी की स्थापना पर पन्ना के अधीनस्थ होने के लिए आयोजित किया गया था, क्योंकि अठारहवीं शताब्दी में जब छतररू बंडेला पन्ना में सत्ता में थी, तो कोठी प्रमुख उनके उपनदी थे। इसके बाद, हालांकि, बांदा के अलीबहादुर के वर्चस्व के दौरान, और बाद में, कोठी प्रमुखों ने अपनी आजादी को बनाए रखा। इसे देखते हुए ब्रिटिशों ने 1810 में रायस लाल ड्यूनियापति सिंह को एक सनद प्रदान किया, जो उन्हें सीधे ब्रिटिश सरकार पर निर्भर करता है
सोहावल: यह कोठी राज्य द्वारा लगभग 213 वर्ग मील की एक छोटी सी सनद राज्य थी, जो दो भागों में विभाजित था। इसके संस्थापक फतेहसिंह रीवा के महाराजा अमरसिंह के दो पुत्रों में से एक थे। उसने सोलहवीं सदी में अपने पिता के खिलाफ विद्रोह किया था। मूल रूप से राज्य काफी हद तक था,जिसमें पड़ोस में बिरसिंगपुर, कोठी और अन्य इलाकों शामिल थे। छन्नासलों के तहत पन्ना के उत्थान पर, सोहावल एक सहायक नदी बन गया लेकिन अपनी स्वतंत्रता बनाए रखा। बाद में, छत्रस के पुत्र जगतराय और जिंदैष ने वास्तव में अपने बहुत से क्षेत्र को पकड़ा, जबकि कोठी प्रमुख ने इन गड़बड़ी का फायदा उठाया, अपनी निष्ठा को फेंक दिया और सोहरावल के प्रमुख, प्रितिपल सिंह पर हमला करके मार डाला। उन्नीसवीं सदी में ब्रिटिश वर्चस्व स्थापित करने पर, सोहावल को पहले पंन्ना के अधीनस्थ माना गया था, लेकिन 1809 में रायस अमन सिंह को अलग-अलग जमीन दी गई थी, जिस पर राज्य छत्रसालो के सत्ता में उदय हुआ था और बांदा के अलीबहादुर के पूरे वर्चस्व में स्वतंत्र रहा था। राज्य 1 9 50 से रघुराज नगर तहसील में विलय कर दिया गया है
अरौड़ा (या पत्थर कच्छ): यह लगभग 218 वर्ग मील की एक छोटा सनद राज्य था। पूर्व में यह बहुत बड़ा था, जिसमें यू.पी. के मौजूदा बांदा जिले का अधिकांश हिस्सा था। परिवार ने कम से कम 400 साल तक देश का आयोजन किया था। नाम पत्थर कच्छ विंध्य के स्कर्ट पर अपनी स्थिति से प्राप्त हुआ था। सत्तारूढ़ परिवार का दावा है कि वह एक पुराना है और राजपूतों के सौर मंडल के रघुवंशी कबीले के हैं। परिवार का मूल सीट बांदा जिले के रासीन में था, मूल रूप से राजा वसिनी कहा जाता था, जहां कई पुराने अवशेष मौजूद हैं। प्रारंभिक इतिहास, हालांकि, बहुत अस्पष्ट है, बंडेला वर्चस्व के दौरान, राज्य पन्ना के हिरडेष से एक सनड में आयोजित किया गया है। ब्रिटिशों को सर्वोच्च शक्ति के कब्जे में, 1807 में दी गई एक सनद द्वारा राजा मोहनसिंग को अपने क्षेत्र में मान्यता दी गई और पुष्टि हुई। राज्य के शासकों ने राजा का पद ग्रहण किया और 9 बंदूकें का स्वागत किया।
चौबे जागरर्स: यह बारूढ़ राज्य और यू.पी. के बांदा जिले के बीच पांच छोटे-छोटे राज्यों का एक संग्रह था। पांच राज्यों में पालदो, पहाड़, तारायण, भाईसंध और कामता-राजौली थे, जो 126 वर्ग मील के क्षेत्र में थे। इन सम्पदाओं के धारकों में जिझोतिया ब्राह्मण थे और चौबे के पद को जन्म दिया गया था। वे मूल रूप से नाओगॉन कैंटोनमेंट के पास गांव दादरी में जमीन रखे थे। सैन्य सेवा के लिए उनकी योग्यता उन्हें ध्यान में लाती है और वे पन्ना के राजा छत्रसाल के नीचे उच्च रैंक तक पहुंचे। पहले चार सम्पदा के मालिक रामकिशन से निकल आए थे, जो पंन्ना के राजा हर्डशाह के नीचे कालिंजर किले के गवर्नर थे। जगजीर अब रघुराज नगर तहसील में हैं।
== जनसंख्या ==
2024 में सतना शहर की वर्तमान अनुमानित जनसंख्या 396,000 है, जबकि सतना मेट्रो की जनसंख्या 400,000 होने का अनुमान है। भारत की जनगणना की अनंतिम रिपोर्ट के अनुसार, 2011 में सतना की जनसंख्या 280,222 है। यद्यपि सतना शहर की जनसंख्या 280,222 है; इसकी शहरी/महानगरीय जनसंख्या 282,977 है। <ref>{{Cite web|url=https://www.census2011.co.in/census/city/290-satna.html|title=Satna Population 2024}}</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[सतना ज़िला]]
==बाहरी कड़ियाँ==
* [https://web.archive.org/web/20150518075440/http://smcsatna.org/default.php सतना नगरपालिका का जालघर]
* [https://web.archive.org/web/20150518102128/http://yatrasalah.com/touristPlaces.aspx?id=463 सतना : यात्रा सलाह]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{मध्य प्रदेश के जिले}}
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[[श्रेणी:सतना ज़िले के नगर]]
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Anitya Gautam
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'''सतना''' (Satna) [[भारत]] के [[मध्य प्रदेश]] राज्य के [[सतना ज़िले]] में स्थित एक नगर है। यह जिले का मुख्यालय भी है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=X6XNCwAAQBAJ Inde du Nord: Madhya Pradesh et Chhattisgarh] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190703183559/https://books.google.com/books?id=X6XNCwAAQBAJ|date=3 जुलाई 2019}}," Lonely Planet, 2016, ISBN 9782816159172</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=u6VB9_CrsfoC Tourism in the Economy of Madhya Pradesh]," Rajiv Dube, Daya Publishing House, 1987, ISBN 9788170350293</ref> सतना दो पवित्र स्थानों-चित्रकूट और मैहर के लिए प्रसिद्ध है। दोनों का हिन्दू धर्मं के तीर्थ स्थल हैं |<ref>{{Cite web|url=https://satna.nic.in/en/tourism/#:~:text=Satna%20is%20famous%20for%20two,here%20before%20creating%20the%20universe.|title=Tourism}}</ref>
[[File:भूमरा का एकमुखी [[शिवलिंग]] .jpg|thumb|280px|गुप्तकालीन भूमरा शिव मन्दिर का एकमुखी शिवलिंग]]
[[File:Parasmaniya hills of Satna .jpg|thumb|280px|पारसमणिया पहाड़ियाँ]]
[[File:Shri vyanktesh temple (front look).jpg|thumb|280px|वेंकटेश मन्दिर]]
[[File:Satna-Mach-2012 092.jpg|thumb|280px|सतना जंक्शन रेलवे स्टेशन]]
==परिचय==
मध्य प्रदेश में [[मुम्बई|मुंबई-]][[हावड़ा]] रेल लाइन पर [[जबलपुर]]-[[इलाहाबाद]] के बीच स्थित सतना<ref name="r139">{{cite web | title=बघेलखंड की वाणिज्यिक राजधानी | website=जिला सतना | date=2019-08-20 | url=https://satna.nic.in/ | language=hi | access-date=2026-10-18}}</ref> विंध्य प्रदेश का प्रदेश-द्वार कहा जाता है, अर्थात विंध्य प्रवेश पर प्रथम जिला रेल मार्ग द्वारा होता है। इसके अलावा प्रसिद्ध तीर्थ [[चित्रकूट धाम|चित्रकूट]] धाम सतना जिले में स्थित हैं। 20 मार्च 2020 मैहर को सतना जिले से अलग कर दिया गया।5 सितंबर 2023 से विभाजन कार्यवाही शुरू की गई। विश्व-प्रसिद्ध पर्यटन स्थल [[खजुराहो]] आने के लिये भी अधिकांश पर्यटक सतना होकर ही आते हैं। इस जिले में [[रामवन]], [[बीरसिंहपुर|बिरसिंहपुर]], कालिका मंदिर [[भरजुना]], धारकुंडी आश्रम , मुकुंदपुर सफारी आदि स्थान भी लोगों के आकर्षण का केन्द्र हैं।
तत्कालीन [[बघेलखंड|विंध्य प्रदेश]] की राजधानी [[रीवां|रीवा]] थी जिसके अंर्तगत सतना था। बघेल राजवंश के कारण राजघराने के जमाने का प्रभाव कमोबेश आज भी सतना में देखने को मिलता है। रीवां राज्य के कई पुराने भवन आज किसी न किसी रूप में उपयोग हो रहे हैं और अपनी ऐतिहासिकता को प्रमाणित करते हैं।
यहां के राजनैतिक इतिहास की नींव के पत्थरों में कैप्टन अवधेश प्रताप सिंह, बाबूलाल बिहारी, शारदा प्रसाद, विश्वासराव पेन्टर, गनपत प्रसाद मारवाडी, पं. अवधबिहारी लाल, हुकुमचंद नारद, पं. रामस्वरूप, मोहनलाल मिश्र, शिवानन्द लाल, अमर शहीद लाल पद्मधर सिंह,आदि है। सतना के राजनैतिक इतिहास में ये ऐसे नाम है जिनके द्वारा यहां राजनैतिक चेतना जाग्रत हुई। बाद में यहां [[गोविंद नारायण सिंह|गोविन्द नारायण सिंह]] (प्रदेश की संविद सरकार के मुख्यमंत्री), बैरिस्टर गुलशेर अहमद (विधान सभा अध्यक्ष तथा विधि मंत्री) डॉ॰ लालता प्रसाद खरे (नगर पालिका के सबसे लंबे समय तक चेयरमैन और बाद में राज्य मंत्री) हुये।
सतना का नाम मप्र के 7 स्मार्ट शहरों में लिया जाता है, यह विंध्य का सबसे विकसित शहर माना जाता है। यह एक औद्योगिक शहर के रूप में जाना जाता है। [[बिड़ला घराना|बिड़ला घराने]] के [[सीमेन्ट]] के दो कारखाने, [[सतना सीमेन्ट]] फैक्ट्री और [[यूनिवर्सल केबल्स]] फैक्ट्री हैं। एक और [[प्रिज्म सीमेन्ट]] है। इनके अलावा चूना, सर्फ, नमकीन, तम्बाकू, चायपत्ती, डालडा एवं अन्य कई उद्योग के विभिन्न छोटे-बडे संस्थान स्थापित है। [[बीड़ी]] उत्पादकों के कई संस्थान हैं। यहां के बाजार पर सिंधी, मारवाडी और गुजराती व्यापारियों का वर्चस्व है।
यह शहर कई नामी गिरामी हस्तियों के कारण जाना जाता है। न्याय के क्षेत्र में [[भारत का उच्चतम न्यायालय|सर्वोच्च न्यायालय]] के मुख्य [[न्यायाधीश]] रह चुके जस्टिस जे.एस. वर्मा यहीं के रहने वाले हैं। उन्होंने शुरू में यहां वकालत की फिर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, राजस्थान उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के पदों में रहने के बाद वे सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचे। चित्रकूट में [[नानाजी देशमुख]] ने [[दीनदयाल शोध संस्थान]], ग्रामोदय विश्वविद्यालय तथा अन्य शिक्षा संस्थान प्रारंभ कर समाज सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।
==इतिहास==
सतना जिले का इतिहास क्षेत्रफल के उस इतिहास का हिस्सा है, जो कि [[बघेलखंड]] के नाम से जाना जाता है, जिनमें से एक बहुत बड़ा हिस्सा [[रीवा ज़िला|रीवा]] की संधि राज्य का शासन था, जबकि पश्चिम दिशा की ओर एक छोटा सा हिस्सा सामंती सरदारों द्वारा शासित था। ब्रिटिश शासकों द्वारा दिए गए सनदों के तहत अपने राज्यों को पकड़े हुए, सभी में ग्यारह थे। महत्त्वपूर्ण लोग मैहर, नागोद, कोठी, जासो, सोहवाल और बारूंधा और पांच चौबे जागीर-पालदेव, पहारा , तारायण, भाईसुधा और कामता-राजुला हैं।
शुरुआती बौद्ध पुस्तकों, महाभारत आदि,[[बघेलखंड]] मार्ग को हैहाया, [[कलचुरी]] या [[चेदि राज्य|छेदी]] कबीले के शासकों से जोड़ते हैं, जिन्हें माना जाता है कि तीसरी शताब्दी ईस्वी के दौरान कुछ समय के लिए पर्याप्त महत्व प्राप्त हुआ है। उनका मूल आवास [[माहिष्मती|महिष्मति]] के साथ नर्मदा (पश्चिम निमार जिले में महेश्वर के साथ कुछ के रूप में) राजधानी के रूप में; जहां से लगता है कि, वे पूर्व की ओर संचालित हो गए हैं । उन्होनें [[कालिंजर दुर्ग|कलिंजर]] का किला (यू.पी. में सतना जिले की सीमा से कुछ मील की दूरी पर) का अधिग्रहण किया था, और इसके आधार के रूप में, उन्होंने [[बघेलखंड]] अपना वर्चस्व बढ़ाया । चौथी और पांचवीं शताब्दियों के दौरान, मगध का गुप्त वंश इस क्षेत्र पर सर्वोच्च था, जैसा कि उचचकालपा (नागोद तहसील में उचेहरा) और कोटा के परिव्राजक राजा (नागोद तहसील में) के निर्णायक प्रमुखों के अभिलेखों के अनुसार दिखाया गया है। [[चेदि राज्य|छेदी]] कबीले के मुख्य गढ़ कालिंजर थे, और उनके गर्वों का नाम कालिंजर अदिश्वारा (कालिंजर का भगवान) था। कलचूरियों ने चंदेल के प्रमुख यशोवर्मन (925-55) के हाथ में अपना पहला झटका लगाया, जिन्होंने कालींजर के किले और उसके चारों ओर का रास्ता को जब्त कर लिया। [[कलचुरि राजवंश|कलचूरी]] अभी भी एक शक्तिशाली [[जनजाति]] थे और [[१२वीं शताब्दी|12 वीं शताब्दी]] तक उनकी अधिकांश संपत्ति को जारी रखा था।
रेवास के प्रमुख थे,[[बघेल राजपूत]] जो की सोलंकी कबीले के वंशज थे और दसवीं से तेरहवीं शताब्दी तक [[गुजरात]] पर शासन किया था। गुजरात के शासक राजा वीरधवल के पुत्र [[व्याघ्रदेव|राजा व्याघ्रदेव]],ने तेरहवीं शताब्दी के मध्य के बारे में उत्तर भारत में अपना रास्ता बना लिया और कालिंजर से 18 मील की उत्तर-पूर्व में मार्फ का किला प्राप्त किया। उनके पुत्र करन देव ने मंडला के [[कलचुरी]] (हैहाया) राजकुमारी से शादी की और [[बांधवगढ़ का किला|बांधवगढ़]] के किले (अब शहडोल जिले में उसी नाम के तहसील में) को दहेज में प्राप्त किया, जो कि सन1597 में अकबर द्वारा विनाश के पहले बघेल की राजधानी थी।
सन 1298 में, सम्राट अलाउद्दीन के आदेश का पालन करने वाले उल्लग खान ने अपने देश के [[गुजरात]] के आखिरी [[बघेल]] शासक को बाहर निकाला और यह माना जाता है कि, बघेलो को बांधवगढ़ में काफी स्थानांतरित किया था। 15 वीं सदी तक बांधवगढ़ के बघेल अपनी संपत्ति का विस्तार करने में लगे हुए थे और दिल्ली के राजाओं के ध्यान से बच गए थे। सन 1498-9 में, सिकंदर लोदी बांधवगढ़ का किला लेने के अपने प्रयास में विफल रहे । बघेल राजा रामचंद्र (1555-92), अकबर का एक समकालीन था। तानसेन, महान संगीतकार, रामचंद्र के अदालत में थे और वही से अकबर द्वारा उनके दरबार में बुलाया गया था। रामचंद्र के बेटे, बिर्धाब्रा की विक्रमादित्य नामक एक नाबालिग बंदोहगढ़ के सिंहासन से जुड़ गए थे। उनके प्रवेश ने गड़बड़ी को जन्म दिया। अकबर आठ बजे पकड़े जाने के बाद 15 9 5 में अकबर ने हस्तक्षेप किया और बंदोहगढ़ किला को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद रीवा के शहर में महत्व प्राप्त करना शुरू हो गया। ऐसा कहा जाता है कि राजा विक्रमादित्य ने 1618 में स्थापित किया था (जिसका अर्थ है कि उन्होंने महलों और अन्य इमारतों के निर्माण के लिए काम किया था, क्योंकि इस स्थान पर पहले से ही 1554 में महारानी सम्राट शेरशाह के बेटे जलाल खान द्वारा आयोजित किया गया था)।
सन 1803 में, बेसिन की संधि के बाद, ब्रिटिश ने रीवा के शासक के साथ गठबंधन की आलोचना की, लेकिन बाद में उन्हें अस्वीकार कर दिया। 1812 में, राजा जयसिंह (1809 -35) के समय, पिंडारीस के एक शरीर ने रीवा क्षेत्र से मिर्जापुर पर छापा मारा। इस जयसिंघ को एक संधि में स्वीकार करने के लिए बुलाया गया था, जिसमें उन्होंने ब्रिटिश सरकार की सुरक्षा को स्वीकार किया और पड़ोसी प्रमुखों के साथ सभी विवादों को उनके मध्यस्थता के लिए संदर्भित करने के लिए सहमत हो गए और ब्रिटिश सैनिकों को मार्च के दौरान या उनके क्षेत्रों में कैंटन किया जा सके। 1857 के विद्रोह पर, महाराजा रघुराज सिंह ने अंग्रेजों को पड़ोसी मंडला और जबलपुर जिले में विद्रोहों को दबाने में मदद की, और नागदा में जो अब सतना जिले का हिस्सा है। इसके लिए, राजा को सोहगपुर (शहडोल) और अमरकंटक परगना, जिसे शताब्दी की शुरुआत में मराठों द्वारा जब्त कर लिया गया था, उन्हें बहाल करके पुरस्कृत किया गया। रीवा राज्य के शासकों ने ‘उनकी महारानी’ और ‘महाराजा’ का खिताब ग्रहण किया और 17 बंदूकें का स्वागत किया। वर्तमान सतना जिले के अधिकांश रघुराज नगर और पूरे अमरपतन तहसील, विंध्य प्रदेश के गठन से पहले रीवा राज्य में थे।
नागोद राज्य: 18 वीं शताब्दी तक, राज्य को इसकी मूल राजधानी के उचेहरा के नाम से जाना जाता था। नागोद की प्रमुखों परिहार राजपूत पारंपरिक रूप से माउंट आबू से संबंधित थे। सातवीं शताब्दी में, परिहार राजपूतों ने [[गहरवार|गहरावार]] शासकों को निकाल दिया और महोबा और मऊ के बीच देश में खुद को स्थापित किया। नौवीं शताब्दी में, वे चंदेलों से पूर्व की ओर अग्रसर हो गए थे, जहां 1344 में तेली राजाओं से राजा धरा सिंह ने नारो के किले पर कब्जा कर लिया था। 1478 में राजा भोज ने उचेहरा प्राप्त किया, जिसे उन्होंने मुख्य शहर बना दिया और जो 1720 तक बना रहा , जब तक राजा चैनसिंह द्वारा नागोद को राजधानी में स्थानांतरित किया गया था। बाद में परिहारों ने अपने सभी क्षेत्र बघेलों और बुंदेलो को छोड़कर, सीमित क्षेत्र जिसे 1947 से पहले आयोजित किया गया था, उसी में बस गये। जब बेसिन (1820) के संधि के बाद ब्रिटिश सर्वोच्च बन गए, तो नागद को पन्ना के लिए एक सहायक नदी में रखा गया था और 1807 में उस राज्य को स्वीडन में शामिल किया गया था। 180 9 में, लाल शशराज सिंह को एक अलग सनद प्रदान किया गया था। उसकी संपत्ति में उसे पुष्टि करते हुए 1857 के विद्रोह में, प्रमुख राघवेंद्र सिंह ने अंग्रेजों की सहायता करने में सबसे अधिक वफादारी से व्यवहार किया और उन्हें 11 गांवों के अनुदान से पुरस्कृत किया गया, जो कि विजयीघोगढ़ की जब्त राज्य से संबंधित था। नागद प्रमुखों को राजा का खिताब मिला था और 9 बंदूकें की सलामी मिली थी।
[[मैहर]]: मैहर के प्रमुखों ने कच्छवाहा राजपूत कबीले से वंश का दावा किया। परिवार जाहिर तौर पर अलवर से 17 वीं या 18 वीं शताब्दी में चले गए, और ओरछा प्रमुख से भूमि प्राप्त की। ठाकुर भीमसिंह ने बाद में पन्ना के छत्रसाल की सेवा में प्रवेश किया। उनके अधीन किए गए बेनी सिंह राजा हिंदूप के मंत्री बने, जिन्होंने उन्हें उस इलाके को प्रदान किया जो अब लगभग 1770 में मैहर ज़िले के अधिकांश भाग बनाता है। (मूलतः यह रीवा बेनी सिंह का एक हिस्सा था, जिसे 1788 में मार दिया गया था, कई टैंकों और इमारतों का निर्माण उनकी बेटी राजधर उन्नीसवीं सदी के शुरूआती दिनों में बांदा के अली बहादुर ने विजय प्राप्त की थी। हालांकि अली बहादुर ने राज्य को बिशन सिंह के एक छोटे बेटे दुर्जन सिंह को बहाल किया। 1806 और 1814 में, दुर्जन सिंह ने ब्रिटिश सरकार से सनद प्राप्त किया था, जिसमें उन्होंने पुष्टि की थी।1826 में उनकी मृत्यु के बाद राज्य को अपने दो पुत्रों बिशनसिंह के बीच विभाजित किया गया था, जो कि मेजर की तरफ से बड़ा था, जबकि प्रगादास, युवा ने बिजाई राघोगढ़ को प्राप्त किया था। उत्तरार्द्ध राज्य (अब जबलपुर जिले के मुरवार तहसील में) था। मुख्य विद्रोह के कारण 1858 में जब्त की। मैहर के शासक राजा का खिताब का आनंद लिया और 9 बंदूकें की सलामी के हकदार थे।
कोठी: कोठी 169 वर्ग मील की एक छोटी सी सनद राज्य थी, जो अब रघुराज नगर तहसील में शामिल है। राज्य पर पहले भर जनजाति के प्रमुखों द्वारा शासित था लेकिन जगत राय सिंह बघेल ने मूल भर के प्रमुखों को हटाया और जागीर की स्थापना की। ब्रिटिश वर्चस्व कोठी की स्थापना पर पन्ना के अधीनस्थ होने के लिए आयोजित किया गया था, क्योंकि अठारहवीं शताब्दी में जब छतररू बंडेला पन्ना में सत्ता में थी, तो कोठी प्रमुख उनके उपनदी थे। इसके बाद, हालांकि, बांदा के अलीबहादुर के वर्चस्व के दौरान, और बाद में, कोठी प्रमुखों ने अपनी आजादी को बनाए रखा। इसे देखते हुए ब्रिटिशों ने 1810 में रायस लाल ड्यूनियापति सिंह को एक सनद प्रदान किया, जो उन्हें सीधे ब्रिटिश सरकार पर निर्भर करता है
सोहावल: यह कोठी राज्य द्वारा लगभग 213 वर्ग मील की एक छोटी सी सनद राज्य थी, जो दो भागों में विभाजित था। इसके संस्थापक फतेहसिंह रीवा के महाराजा अमरसिंह के दो पुत्रों में से एक थे। उसने सोलहवीं सदी में अपने पिता के खिलाफ विद्रोह किया था। मूल रूप से राज्य काफी हद तक था,जिसमें पड़ोस में बिरसिंगपुर, कोठी और अन्य इलाकों शामिल थे। छन्नासलों के तहत पन्ना के उत्थान पर, सोहावल एक सहायक नदी बन गया लेकिन अपनी स्वतंत्रता बनाए रखा। बाद में, छत्रस के पुत्र जगतराय और जिंदैष ने वास्तव में अपने बहुत से क्षेत्र को पकड़ा, जबकि कोठी प्रमुख ने इन गड़बड़ी का फायदा उठाया, अपनी निष्ठा को फेंक दिया और सोहरावल के प्रमुख, प्रितिपल सिंह पर हमला करके मार डाला। उन्नीसवीं सदी में ब्रिटिश वर्चस्व स्थापित करने पर, सोहावल को पहले पंन्ना के अधीनस्थ माना गया था, लेकिन 1809 में रायस अमन सिंह को अलग-अलग जमीन दी गई थी, जिस पर राज्य छत्रसालो के सत्ता में उदय हुआ था और बांदा के अलीबहादुर के पूरे वर्चस्व में स्वतंत्र रहा था। राज्य 1 9 50 से रघुराज नगर तहसील में विलय कर दिया गया है
अरौड़ा (या पत्थर कच्छ): यह लगभग 218 वर्ग मील की एक छोटा सनद राज्य था। पूर्व में यह बहुत बड़ा था, जिसमें यू.पी. के मौजूदा बांदा जिले का अधिकांश हिस्सा था। परिवार ने कम से कम 400 साल तक देश का आयोजन किया था। नाम पत्थर कच्छ विंध्य के स्कर्ट पर अपनी स्थिति से प्राप्त हुआ था। सत्तारूढ़ परिवार का दावा है कि वह एक पुराना है और राजपूतों के सौर मंडल के रघुवंशी कबीले के हैं। परिवार का मूल सीट बांदा जिले के रासीन में था, मूल रूप से राजा वसिनी कहा जाता था, जहां कई पुराने अवशेष मौजूद हैं। प्रारंभिक इतिहास, हालांकि, बहुत अस्पष्ट है, बंडेला वर्चस्व के दौरान, राज्य पन्ना के हिरडेष से एक सनड में आयोजित किया गया है। ब्रिटिशों को सर्वोच्च शक्ति के कब्जे में, 1807 में दी गई एक सनद द्वारा राजा मोहनसिंग को अपने क्षेत्र में मान्यता दी गई और पुष्टि हुई। राज्य के शासकों ने राजा का पद ग्रहण किया और 9 बंदूकें का स्वागत किया।
चौबे जागरर्स: यह बारूढ़ राज्य और यू.पी. के बांदा जिले के बीच पांच छोटे-छोटे राज्यों का एक संग्रह था। पांच राज्यों में पालदो, पहाड़, तारायण, भाईसंध और कामता-राजौली थे, जो 126 वर्ग मील के क्षेत्र में थे। इन सम्पदाओं के धारकों में जिझोतिया ब्राह्मण थे और चौबे के पद को जन्म दिया गया था। वे मूल रूप से नाओगॉन कैंटोनमेंट के पास गांव दादरी में जमीन रखे थे। सैन्य सेवा के लिए उनकी योग्यता उन्हें ध्यान में लाती है और वे पन्ना के राजा छत्रसाल के नीचे उच्च रैंक तक पहुंचे। पहले चार सम्पदा के मालिक रामकिशन से निकल आए थे, जो पंन्ना के राजा हर्डशाह के नीचे कालिंजर किले के गवर्नर थे। जगजीर अब रघुराज नगर तहसील में हैं।
== जनसंख्या ==
2024 में सतना शहर की वर्तमान अनुमानित जनसंख्या 396,000 है, जबकि सतना मेट्रो की जनसंख्या 400,000 होने का अनुमान है। भारत की जनगणना की अनंतिम रिपोर्ट के अनुसार, 2011 में सतना की जनसंख्या 280,222 है। यद्यपि सतना शहर की जनसंख्या 280,222 है; इसकी शहरी/महानगरीय जनसंख्या 282,977 है। <ref>{{Cite web|url=https://www.census2011.co.in/census/city/290-satna.html|title=Satna Population 2024}}</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[सतना ज़िला]]
==बाहरी कड़ियाँ==
* [https://web.archive.org/web/20150518075440/http://smcsatna.org/default.php सतना नगरपालिका का जालघर]
* [https://web.archive.org/web/20150518102128/http://yatrasalah.com/touristPlaces.aspx?id=463 सतना : यात्रा सलाह]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{मध्य प्रदेश के जिले}}
[[श्रेणी:मध्य प्रदेश के शहर]]
[[श्रेणी:सतना ज़िला]]
[[श्रेणी:सतना ज़िले के नगर]]
[[श्रेणी:सतना|*]]
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मुहम्मद बिन तुग़लक़
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| succession = दिल्ली का सुल्तान
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|caption = मुहम्मद बिन तुगलक का प्रारंभिक मुगलकालीन चित्र
| reign = 4 फ़रवरी 1325 <br> 20 मार्च 1351
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'''मुहम्मद बिन तुग़लक़''' [[दिल्ली सल्तनत]] में [[तुग़लक़ राजवंश|तुग़लक़ वंश]] का शासक था। [[गयासुद्दीन तुग़लक़|ग़यासुद्दीन तुग़लक़]] की मृत्यु के बाद उसका पुत्र '[[मुहम्मद बिन तुग़लक़|जूना ख़ाँ]]', मुहम्मद बिन तुग़लक़ (1325-1351 ई.) के नाम से दिल्ली की गद्दी पर बैठा। इसका मूल नाम '[[मुहम्मद बिन तुग़लक़|उलूग ख़ाँ]]' था। राजामुंदरी के एक अभिलेख में मुहम्मद तुग़लक़ (जौना या जूना ख़ाँ) को दुनिया का ख़ान कहा गया है। सम्भवतः मध्यकालीन सभी सुल्तानों में मुहम्मद तुग़लक़ सर्वाधिक शिक्षित, विद्वान एवं योग्य व्यक्ति था। अपनी सनक भरी योजनाओं, क्रूर-कृत्यों एवं दूसरे के सुख-दुख के प्रति उपेक्षा का भाव रखने के कारण इसे 'स्वप्नशील', 'पागल' एवं 'रक्त-पिपासु' कहा गया है। बरनी, सरहिन्दी, निज़ामुद्दीन, बदायूंनी एवं फ़रिश्ता जैसे इतिहासकारों ने सुल्तान को अधर्मी घोषित किया गया है। मुहम्मद बिन तुगलक अपनी सनक भरी योजनाओं के कारण अपने द्वारा किए गए अभियानों में लगातार असफल होता गया जिस कारण ये प्रजा के बीच अलोकप्रिय हो गया।
== पद व्यवस्था ==
सिंहासन पर बैठने के बाद तुग़लक़ ने अमीरों एवं सरदारों को विभिन्न उपाधियाँ एवं पद प्रदान किया। उसने तातार ख़ाँ को 'बहराम ख़ाँ' की उपाधि, मलिक क़बूल को 'इमाद-उल-मुल्क' की उपाधि एवं 'वज़ीर-ए-मुमालिक' का पद दिया था, पर कालान्तर में उसे 'ख़ानेजहाँ' की उपाधि के साथ गुजरात का हाक़िम बनाया गया। उसने मलिक अरूयाज को ख्वाजा जहान की उपाधि के साथ ‘शहना-ए-इमारत’ का पद, मौलाना ग़यासुद्दीन को (सुल्तान का अध्यापक) 'कुतुलुग ख़ाँ' की उपाधि के साथ 'वकील-ए-दर' की पदवी, अपने चचेरे भाई फ़िरोज शाह तुग़लक़ को 'नायब बारबक' का पद प्रदान किया था।
== गुणवान व्यक्ति ==
मुहम्मद बिन तुग़लक़ कला-प्रेमी एवं अनुभवी सेनापति था। वह अरबी भाषा एवं फ़ारसी भाषा का विद्धान तथा [[खगोल शास्त्र|खगोलशास्त्र]], दर्शन, गणित, चिकित्सा, विज्ञान, [[तर्कशास्त्र]] आदि में पारंगत था। [[अलाउद्दीन खिलजी|अलाउद्दीन ख़िलजी]] की भाँति अपने शासन काल के प्रारम्भ में उसने, न तो ख़लीफ़ा से अपने पद की स्वीकृति ली और न उलेमा वर्ग का सहयोग लिया, यद्यपि बाद में ऐसा करना पड़ा। उसने न्याय विभाग पर उलेमा वर्ग का एकाधिपत्य समाप्त किया। क़ाज़ी के जिस फैसले से वह संतुष्ट नहीं होता था, उसे बदल देता था। सर्वप्रथम मुहम्मद तुग़लक़ ने ही बिना किसी भेदभाव के योग्यता के आधार पर पदों का आवंटन किया। नस्ल और वर्ग-विभेद को समाप्त करके योग्यता के आधार पर अधिकारियों को नियुक्त करने की नीति अपनायी। वस्तुत: यह उस शासक का दुर्भाग्य था कि, उसकी योजनाएं सफलतापूर्वक क्रियान्वित नहीं हुई। जिसके कारण यह इतिहासकारों की आलोचना का पात्र बना।
== दिल्ली सल्तनत ==
मुहम्मद तुग़लक़ के सिंहासन पर बैठते समय दिल्ली सल्तनत कुल 23 प्रांतों में बँटा थी, जिनमें मुख्य थे - दिल्ली, देवगिरि, लाहौर, मुल्तान, सरमुती, गुजरात, अवध, कन्नौज, लखनौती, बिहार, मालवा, जाजनगर (उड़ीसा), द्वारसमुद्र आदि। कश्मीर एवं बलूचिस्तान भी दिल्ली सल्तनत में शामिल थे। दिल्ली सल्तनत की सीमा का सर्वाधिक विस्तार इसी के शासनकाल में हुआ था। परन्तु इसकी क्रूर नीति के कारण राज्य में विद्रोह आरम्भ हो गया। जिसके फलस्वरूप दक्षिण में नए स्वतंत्र राज्य की स्थापना हुई और ये क्षेत्र दिल्ली सल्तनत से अलग हो गए। बंगाल भी स्वतंत्र हो गया। तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से बदल कर दौलताबाद कर दी थी|राज्यारोहण के बाद मुहम्मद तुग़लक़ ने कुछ नवीन योजनाओं का निर्माण कर उन्हें क्रियान्वित करने का प्रयत्न किया। जैसे -
* दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि (१३२६-२७ ई॰)
* राजधानी परिवर्तन (१३२६-२७ ई॰)
* सांकेतिक मुद्रा का प्रचलन (१३२९-३० ई॰)
* खुरासन एवं काराचिल का अभियान आदि।
*कराचिल (कुमायु की पहाड़ियों) का अभियान
== दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि ==
अपनी प्रथम योजना के द्वारा मुहम्मद तुग़लक़ ने दोआब के ऊपजाऊ प्रदेश में कर की वृद्धि कर दी (संभवतः 50 से 55 प्रतिशत), परन्तु उसी वर्ष दोआब में भयंकर अकाल पड़ गया, जिससे पैदावार प्रभावित हुई। तुग़लक़ के अधिकारियों द्वारा ज़बरन कर वसूलने से उस क्षेत्र में विद्रोह हो गया, जिससे तुग़लक़ की यह योजना असफल रही। मुहम्मद तुग़लक़ ने कृषि के विकास के लिए ‘दिवाण-ए-अमीर कोही’ नामक एक नवीन विभाग की स्थापना की। सरकारी कर्मचारियों के भ्रष्टाचार, किसानों की उदासीनता, भूमि का अच्छा न होना इत्यादि कारणों से कृषि उन्नति सम्बन्धी अपनी योजना को तीन वर्ष पश्चात् समाप्त कर दिया। मुहम्मद बिन तुग़लक़ ने किसानों को बहुत कम ब्याज पर ऋण (सोनथर) उपलब्ध कराया।
== राजधानी परिवर्तन ==
तुग़लक़ ने अपनी दूसरी योजना के अन्तर्गत राजधानी को दिल्ली से देवगिरि स्थानान्तरित किया। देवगिरि को “कुव्वतुल इस्लाम” भी कहा गया। सुल्तान कुतुबुद्दीन मुबारक ख़िलजी ने देवगिरि का नाम 'कुतुबाबाद' रखा था और मुहम्मद बिन तुग़लक़ ने इसका नाम बदलकर दौलताबाद कर दिया। सुल्तान की इस योजना के लिए सर्वाधिक आलोचना की गई। मुहम्मद तुग़लक़ द्वारा राजधानी परिवर्तन के कारणों पर इतिहासकारों में बड़ा विवाद है, फिर भी निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि, देवगिरि का दिल्ली सल्तनत के मध्य स्थित होना, मंगोल आक्रमणकारियों के भय से सुरक्षित रहना, दक्षिण-भारत की सम्पन्नता की ओर खिंचाव आदि ऐसे कारण थे, जिनके कारण सुल्तान ने राजधानी परिवर्तित करने की बात सोची। मुहम्मद तुग़लक़ की यह योजना भी पूर्णतः असफल रही और उसने 1335 ई. में दौलताबाद से लोगों को दिल्ली वापस आने की अनुमति दे दी। राजधानी परिवर्तन के परिणामस्वरूप दक्षिण में मुस्लिम संस्कृति का विकास हुआ, जिसने अंततः बहमनी साम्राज्य के उदय का मार्ग खोला।
== सांकेतिक मुद्रा का प्रचलन ==
[[File:Forced token currency coin of Muhammad bin Tughlak.jpg|thumb|मुहम्मद बिन तुगलक के वक्त के सिक्के]]
तीसरी योजना के अन्तर्गत मुहम्मद तुग़लक़ ने सांकेतिक व प्रतीकात्मक सिक्कों का प्रचलन करवाया। सिक्के संबंधी विविध प्रयोगों के कारण ही एडवर्ड टामस ने उसे ‘धनवानों का राजकुमार’ कहा है। मुहम्मद तुग़लक़ ने 'दोकानी' नामक सिक्के का प्रचलन करवाया। बरनी के अनुसार सम्भवतः सुल्तान ने राजकोष की रिक्तता के कारण एवं अपनी साम्राज्य विस्तार की नीति को सफल बनाने हेतु सांकेतिक मुद्रा का प्रचलन करवाया। सांकेतिक मुद्रा के अन्तर्गत सुल्तान ने संभवतः पीतल (फ़रिश्ता के अनुसार) और तांबा (बरनी के अनुसार) धातुओं के सिक्के चलाये, जिसका मूल्य चांदी के रुपये टका के बराबर होता था। सिक्का ढालने पर राज्य का नियंत्रण नहीं रहने से अनेक जाली टकसाल बन गये। लगान जाली सिक्के से दिया जाने लगा, जिससे अर्थव्यवसथा ठप्प हो गई। सांकेतिक मुद्रा चलाने की प्रेरणा चीन तथा ईरान से मिली। वहाँ के शासकों ने इन योजनाओं को सफलतापूर्वक चलाया, जबकि मुहम्मद तुग़लक़ का प्रयोग विफल रहा। सुल्तान को अपनी इस योजना की असफलता पर भयानक आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ा।ऐसा नहीं था कि तुगलक ने सांकेतिक मुद्रा चलाने से पहले जांच पड़ताल न की हो ,इन से पहले 12वी शताब्दी में चीन के शासक कुबलई खाँ ने कागज की मुद्राएं चलायी थी,और उनका प्रयोग सफल भी हुआ था ।
और इसी क्रम में फारस के शासक गाईखात्तु खाँ ने चमड़े का सिक्का चलाया था ,जिसमे कुबलई खाँ का का प्रयोग सफल हुआ और फारस के शासक का असफल ।
अतः चीनी शासक कुबलई खाँ के प्रयोग से सीखकर उसने ऐसा किया लेकिन वह भी असफल रहा
== खुरासान एवं कराचिल अभियान ==
चौथी योजना के अन्तर्गत मुहम्मद तुग़लक़ के [[ख़ोरासान|खुरासान]] एवं कराचिल विजय अभियान का उल्लेख किया जाता है। खुरासन को जीतने के लिए मुहम्मद तुग़लक़ ने ३,७०,००० सैनिकों की विशाल सेना को एक वर्ष का अग्रिम वेतन दे दिया, परन्तु राजनीतिक परिवर्तन के कारण दोनों देशों के मध्य समझौता हो गया, जिससे सुल्तान की यह योजना असफल रही और उसे आर्थिक रूप से हानि उठानी पड़ी। कराचिल अभियान के अन्तर्गत सुल्तान ने खुसरो मलिक के नेतृत्व में एक विशाल सेना को पहाड़ी राज्यों को जीतने के लिए भेजा। उसकी पूरी सेना जंगली रास्तों में भटक गई, इब्न बतूता के अनुसार अन्ततः केवल दस अधिकारी ही बचकर वापस आ सके। इस प्रकार मुहम्मद तुग़लक़ की यह योजना भी असफल रही। सम्भवतः १३२८-२९ ई. के मध्य मंगोल आक्रमणकारी तरमाशरीन चग़ताई ने एक विशाल सेना के साथ भारत पर आक्रमण कर मुल्तान, लाहौर से लेकर दिल्ली तक के प्रदेशों को रौंद डाला। ऐसा माना जाता है कि, सुल्तान मुहम्मद तुग़लक़ ने मंगोल नेता को घूस देकर वापस कर दिया था ये भी संभव है कि मंगोल नेता ने सुल्तान को दिल्ली सल्लतन को खुद ही यथास्थिति कमज़ोर करने व इसी तरह मंगोल शासन के लिए ज़मीन तैयार करने के लिए घूस दी। उनके बीच जो भी हुआ, मंगोल नेता के प्रति इस समझोते की नीति के कारण सुल्तान को आलोचना का शिकार बनना पड़ा। ये सही है कि इसके बाद फिर कभी मुहम्मद तुग़लक़ के समय में भारत पर मंगोल आक्रमण नहीं हुआ और ये भी कि अपनी महत्त्वाकांक्षी असफल योजनाओं के कारण मुहम्मद तुग़लक़ को ‘असफलताओं का बादशाह’ कहा जाता है।
== महत्त्वपूर्ण विद्रोह ==
मुहम्मद बिन तुग़लक़ के शासन काल में सबसे अधिक (३४) विद्रोह हुए, जिनमें से 27 विद्रोह अकेले दक्षिण भारत में ही हुए। सुल्तान मुहम्मद तुग़लक़ के शासन काल में हुए कुछ महत्त्वपूर्ण विद्रोहों का सारांश निम्नलिखित हैं-
प्रथम विद्रोह १३२७ ई. में तुग़लक़ के चचेरे भाई सुल्तान गुरशास्प ने किया, जो गुलबर्ग के निकट सागर का सूबेदार था। वह सुल्तान द्वारा बुरी तरह से पराजित किया गया। मुहम्मद तुग़लक़ के विरुद्ध सिंध तथा मुल्तान के सूबेदार बहराम आईबा ऊर्फ किश्लू ख़ाँ ने १३२७-१३२८ ई. में विद्रोह किया। सैयद जलालुद्दीन हसनशाह का मालाबार विद्रोह १३३४-१३३५ ई. में किया गया। बंगाल का विद्रोह (1330-1331 ई.) प्रमुख हैं। बंगाल के विद्रोह को यद्यपि प्रारंभ में दबा लिया गया था, किन्तु 1340-1341 ई. के लगभग शम्सुद्दीन के नेतृत्व में बंगाल दिल्ली सल्तनत से अलग हो गया। १३३७-१३३८ ई. में कड़ा के सूबेदार [[हैदराबाद के निज़ाम|निज़ाम]] भाई का विद्रोह, १३३८-१३३९ ई. में बीदर के सूबेदार, नुसरत ख़ाँ का विद्रोह, १३३९-१३४० ई. में गुलबर्ग के अलीशाह का विद्रोह आदि भी मुहम्मद तुग़लक़ के विरुद्ध किये गये विद्रोहों में प्रमुख हैं। इस तरह के विद्रोहों का सुल्तान ने सफलतापूर्वक दमन किया। मुहम्मद तुग़लक़ के शासनकाल में ही दक्षिण में १३३६ ई. में 'हरिहर' एवं 'बुक्का' नामक दो भाईयों ने स्वतंत्र ‘विजयनगर’ की स्थापना की। अफ़्रीकी यात्री इब्न बतूता को 1333 ई. में मुहम्मद ने अपने राजदूत के रूप में चीन भेजा। इब्न बतूता ने अपनी पुस्तक ‘रेहला’ में मुहम्मद तुग़लक़ के समय की घटनाओं का वर्णन किया है। मुहम्मद तुग़लक़ धार्मिक रूप में सहिष्णु था। जैन विद्वान एवं संत 'जिनप्रभु सूरी' को दरबार में बुलाकर सम्मान प्रदान किया। मुहम्मद बिन तुग़लक़ दिल्ली सल्तनत का प्रथम सुल्तान था, जिसने हिन्दू त्योहरों (होली, दीपावली) में भाग लिया। दिल्ली के प्रसिद्ध सूफ़ी शेख़ 'शिहाबुद्दीन' को 'दीवान-ए-मुस्तखराज' नियुक्त किया तथा शेख़ 'मुईजुद्दीन' को गुजरात का गर्वनर तथा 'सैय्यद कलामुद्दीन अमीर किरमानी' को सेना में नियुक्त किया। शेख़ 'निज़ामुद्दीन चिराग-ए-दिल्ली' सुल्तान के विरोधियों में एक थे।
== मृत्यु ==
अपने शासन काल के अन्तिम समय में जब सुल्तान मुहम्मद तुग़लक़ गुजरात में विद्रोह को कुचल कर तार्गी को समाप्त करने के लिए सिंध की ओर बढ़ा, तो मार्ग में थट्टा के निकट गोंडाल पहुँचकर वह गंभीर रूप से बीमार हो गया। यहाँ पर सुल्तान की २० मार्च १३५१ को मृत्यु हो गई। उसके मरने के पर इतिहासकार बदायूनी ने कहा कि, “सुल्तान को उसकी प्रजा से और प्रजा को अपने सुल्तान से मुक्ति मिल गई।” इसामी ने सुल्तान मुहम्मद बिन तुग़लक़ को इस्लाम धर्म का विरोधी बताया है। डॉ॰ ईश्वरी प्रसाद ने उसके बारे में कहा है कि, “मध्य युग में राजमुकुट धारण करने वालों में मुहम्मद तुग़लक़, निःसंदेह योग्य व्यक्ति था। मुस्लिम शासन की स्थापना के पश्चात् दिल्ली के सिंहासन को सुशोभित करने वाले शासकों में वह सर्वाधिक विद्धान एवं सुसंस्कृत शासक था।” उसने अपने सिक्कों पर “अल सुल्तान जिल्ली अल्लाह”, “सुल्तान ईश्वर की छाया”, सुल्तान ईश्वर का समर्थक है, आदि वाक्य को अंकित करवाया। मुहम्मद बिन तुग़लक़ एक अच्छा कवि और संगीत प्रेमी भी था।
==सन्दर्भ==
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[[श्रेणी:तुग़लक़ वंश]]
[[श्रेणी:दिल्ली का इतिहास]]
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गयासुद्दीन तुग़लक़
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{{Infobox royalty
| name = ग़ियासुद्दीन तुग़लक़<br>{{nobold|{{unq|غیاثالدین تغلق}}}}
| title = सुल्तान-ए-दिल्ली<br />ग़ाज़ी मालिक
| image = Shah Ghiyath al-Din Tughluq arrives in Tirhut. Depicted by eyewitness Muhammad Sadr Ala-i in his BasaUn al-uns, ca.1410. Istanbul, Topkapi Palace Museum Library, Ms. R.1032 (the Shah).jpg
| succession = {{Flagicon image|Delhi Sultanate Flag.svg}} [[दिल्ली सल्तनत|दिल्ली]] का 17वाँ [[सुल्तान]]
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|house=[[तुग़लक़ राजवंश]]|burial_place={{Flagicon|India}} [[तुग़लक़ाबाद क़िला]], [[दिल्ली]], [[भारत]]}}
'''ग़ियासुद्दीन तुग़लक़''' ({{Langx|fa|{{unq|غیاثالدین تغلق}}}}), [[दिल्ली सल्तनत]] का 17वाँ [[सुल्तान]] था तथा [[तुग़लक़ राजवंश]] का संस्थापक था, जिसने 1320 से 1325 तक राज किया था। उसने [[तुग़लक़ाबाद]] नामक एक शहर की स्थापना की थी।इसने कुल 29 बार [[मंगोल]] आक्रमण को विफल किया। सुल्तान बनने से पहले वह [[क़ुतुबुद्दीन मुबारक़ ख़िलजी]] के शासन काल में उत्तर-पश्चिमी सीमान्त प्रान्त का शक्तिशाली गर्वनर नियुक्त हुआ था।<ref name=":0">{{cite book|first1=सैलेन्द्र|last1=सेन|title=A Textbook Of Medieval Indian History|trans-title=मध्यकालीन भारतीय इतिहास की पाठ्यपुस्तक|date=2013|publisher=प्राइमस बुक्स|isbn=9380607342, 9789380607344|page=89 से 92| language = en}}</ref> वह दिल्ली सल्तनत का पहला सुल्तान था, जिसने अपने नाम के साथ 'ग़ाज़ी' शब्द जोड़ा था।।<ref>{{cite book|first1=जमाल|last1=मलिक|title=Islam In South Asia|url=https://archive.org/details/islaminsouthasia0000mali_t5l2|trans-title=दक्षिण एशिया में इस्लाम|date=2008|publisher=ब्रिल|location=नीदरलैण्ड|isbn=9789004168596| language = en}}</ref>
== आर्थिक सुधार ==
सुल्तान ने आर्थिक सुधार के अन्तर्गत अपनी आर्थिक नीति का आधार संयम, सख्ती एवं नरमी के मध्य संतुलन (रस्म-ए-मियान) को बनाया। उसने लगान के रूप में उपज का 1/10 या 1/11 हिस्सा ही लेने का आदेश जारी कराया।<ref name=":2" />ग़यासुद्दीन ने मध्यवर्ती ज़मीदारों विशेष रूप से मुकद्दम तथा खूतों को उनके पुराने अधिकार लौटा दिए, जिससे उनको वही स्थिति प्राप्त हो गयी, जो [[बलबन]] के समय में प्राप्त थी। ग़यासुद्दीन ने अमीरों की भूमि पुनः लौटा दी। उसने सिंचाई के लिए कुँए एवं नहरों का निर्माण करवाया। सम्भवतः नहर का निर्माण करवाने वाला ग़यासुद्दीन प्रथम सुल्तान था। [[अलाउद्दीन ख़िलजी]] की कठोर नीति के विरुद्ध उसने उदारता की नीति अपनायी, जिसे बरनी ने 'रस्मेमियान' अथवा 'मध्यपंथी नीति' कहा है।
== शासन ==
उसने [[तुगलक वंश|तुगलक राजवंश]] की स्थापना की और 1320 से 1325 तक दिल्ली की [[सल्तनत]] पर शासन किया। मंगोलो के विरुद्ध गयासुद्दीन की नीति कठोर थी। उसने मंगोल कैदियों को कठोर रूप से दंडित किया।
[[चित्र:Ghiyasuddin tughlaq.jpg|अंगूठाकार|गयासुद्दीन के काल का चाँदी का टँका]]
उसने अमरोहा की लड़ाई (1305ई) में मंगोलों को पराजित किया। जब गयासुद्दीन् मुल्तान से दिल्ली चला गया, तो सूमरो कबीले के लोगो ने विद्रोह कर दिया और थट्टा पर कब्ज़ा कर लिया। तुगलक ने ताजुद्दीन मलिक को [[मुल्तान]] का, ख्वाज़ा खातिर को [[भक्कर]] का गवर्नर नियुक्त किया। उसने सेहावाँ का कार्यभार मलिक अली शेर के हाथो मे सौप दिया। 1323 में, गयासुद्दीन ने अपने बेटे ज़ौना खान (बाद में [[मुहम्मद बिन तुगलक]]) को काकतीय राजधानी [[वारंगल]] के अभियान पर भेजा। वारंगल के आने वाले घेराबंदी के परिणामस्वरूप वारंगल, और काकतीय वंश का अंत हुआ।<ref name=":1" />
[[चित्र:Citadels of Tughlaqabad fort 315.jpg|अंगूठाकार|तुगलक़ाबाद का क़िला]]
1323 में उसने अपने बेटे मुहम्मद शाह को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया और राज्य के मंत्रियों और रईसों से व्यवस्था के लिए एक लिखित वादा या समझौता किया। उसने [[तुगलकाबाद]] किले का निर्माण भी शुरू किया।
== विजय अभियान ==
खिलजी वंश के शासनकाल में ग़यासुद्दीन को दिपालपुर का गवर्नर नियुक्त किया गया। अलाउद्दीन खिलजी के काल में उसने [[मुल्तान]],उच्छ तथा [[सिन्ध]] को चगतई ख़ान के आक्रमणों से सुरक्षा प्रदान की।<ref name=":0" />
1321 ई. में ग़यासुद्दीन ने वारंगल पर आक्रमण किया, किन्तु वहाँ के काकतीय राजा प्रताप रुद्रदेव को पराजित करने में वह असफल रहा। 1323 ई. में द्वितीय अभियान के अन्तर्गत ग़यासुद्दीन तुग़लक़ ने शाहज़ादे 'जौना ख़ाँ' ([[मुहम्मद बिन तुग़लक़]]) को दक्षिण भारत में सल्तनत के प्रभुत्व की पुन:स्थापना के लिए भेजा। जौना ख़ाँ ने वारंगल के काकतीय एवं [[मदुरा]] के पाण्ड्य राज्यों को विजित कर दिल्ली सल्तनत में शामिल कर लिया।
इस प्रकार सर्वप्रथम ग़यासुद्दीन के समय में ही दक्षिण के राज्यों को दिल्ली सल्तनत में मिलाया गया। इन राज्यों में सर्वप्रथम वारंगल था। ग़यासुद्दीन तुग़लक़ पूर्णतः साम्राज्यवादी था। इसने अलाउद्दीन ख़िलजी की दक्षिण नीति त्यागकर दक्षिणी राज्यों को दिल्ली सल्तनत में शामिल कर लिया।<ref name=":1">{{cite book|first1=रिचर्ड एम.|last1=ईटन|title=A Social History of the Deccan 1300-1761|trans-title=दक्कन का सामाजिक इतिहास 1300-1761|publisher=कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय प्रेस|page=21| language = en}}</ref>
ग़यासुद्दीन जब बंगाल में था, तभी सूचना मिली कि, ज़ौना ख़ाँ (मुहम्मद बिन तुग़लक़) [[निज़ामुद्दीन औलिया]] का शिष्य बन गया है और वह उसे राजा होने की भविष्यवाणी कर रहा है। निज़ामुद्दीन औलिया को ग़यासुद्दीन तुग़लक़ ने धमकी दी तो, औलिया ने उत्तर दिया कि, "हुनूज दिल्ली दूर अस्त, अर्थात दिल्ली अभी बहुत दूर है।<ref>{{cite web|first1=डेलीहंट|last1=ऐप|title=इस महान सूफी संत का ये वाक्य "हुनूज दिल्ली दूरअस्त" आज भी लोगों के जेहन में है|url=https://m.dailyhunt.in/news/india/hindi/samacharnama-epaper-samacnam/is+mahan+suphi+sant+ka+ye+vaky+hunuj+dilli+duraast+aaj+bhi+logo+ke+jehan+me+hai-newsid-65940672|website=Dailyhunt|accessdate=3 April 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180504225521/https://m.dailyhunt.in/news/india/hindi/samacharnama-epaper-samacnam/is+mahan+suphi+sant+ka+ye+vaky+hunuj+dilli+duraast+aaj+bhi+logo+ke+jehan+me+hai-newsid-65940672|archive-date=4 मई 2018|url-status=live}}</ref> हिन्दू जनता के प्रति ग़यासुद्दीन तुग़लक़ की नीति कठोर थी। ग़यासुद्दीन तुग़लक़ संगीत का घोर विरोधी था। बरनी के अनुसार अलाउद्दीन ख़िलजी ने शासन स्थापित करने के लिये जहाँ रक्तपात व अत्याचार की नीति अपनाई, वहीं ग़यासुद्दीन ने चार वर्षों में ही उसे बिना किसी कठोरता के संभव बनाया।
== राजस्व सुधार ==
अपनी सत्ता स्थापित करने के बाद ग़यासुद्दीन तुग़लक़ ने अमीरों तथा जनता को प्रोत्साहित किया। शुद्ध रूप से [[तुर्की]] मूल का होने के कारण इस कार्य में उसे कोई विशेष कठिनाई नहीं हुई। ग़यासुद्दीन ने कृषि को प्रोत्साहन देने के लिए किसानों के हितों की ओर ध्यान दिया। उसने एक वर्ष में इक्ता के राजस्व में 1/10 से 1/11 भाग से अधिक की वृद्धि नहीं करने का आदेश दिया।<ref name=":2">{{cite book|first1=आशिर्बादी लाल|last1=श्रीवास्तव|title=The Sultanate of Delhi (711- 1526 A.D.)|trans-title=दिल्ली सल्तनत (७११-१५२६)|date=१९५०|publisher=अगरवाल ऐन्ड कम्पनी, आगरा|location=भारत|page=१८२-२२८|accessdate=१२ जुलाई २०१५|language = en}}</ref> उसने सिंचाई के लिए नहरें खुदवायीं तथा बाग़ लगवाए।
== सार्वजनिक कार्य ==
जनता की सुविधा के लिए अपने शासन काल में ग़यासुद्दीन ने क़िलों, पुलों और नहरों का निर्माण कराया। सल्तनत काल में डाक व्यवस्था को सुदृढ़ करने का श्रेय ग़यासुद्दीन तुग़लक़ को ही जाता है।<ref name=":2" /> ‘बरनी’ ने डाक-व्यवस्था का विस्तृत वर्णन किया है। शारीरिक यातना द्वारा राजकीय ऋण वसूली को उसने प्रतिबंधित किया।<ref name=":2" />
== धार्मिक नीति ==
ग़यासुद्दीन एक कट्टर [[सुन्नी]] मुसलमान था। इस्लाम धर्म में उसकी गहरी आस्था और उसके सिद्धान्तों का वह सावधानीपूर्वक पालन करता था। उसने मुसलमान जनता पर इस्लाम के नियमों का पालन करने के लिए दबाव डाला। वह अपने साम्राज्य के बहुसंख्यकों के धर्म के प्रति शत्रुभाव तो नहीं रखता था किंतु उनके प्रति दयावान् भी नहीं था।<ref name=":2" />
== मृत्यु ==
[[चित्र:Mausoleum of Ghiyath al-Din Tughluq.jpg|अंगूठाकार|दाऍ|गयसुद्दीन तुगलक़ का मक़बरा, दिल्ली ]]
जब ग़यासुद्दीन तुग़लक़ बंगाल अभियान से लौट रहा था, तब लौटते समय तुग़लक़ाबाद से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अफ़ग़ानपुर में एक महल (जिसे उसके लड़के जूना ख़ाँ के निर्देश पर अहमद अयाज ने लकड़ियों से निर्मित करवाया था) में सुल्तान ग़यासुद्दीन के प्रवेश करते ही वह महल गिर गया, जिसमें दबकर मार्च, 1325 ई. को उसकी मुत्यृ हो गयी। [[इब्न-बतूता|इब्न बतूता]] के अनुसार गयासुद्दीन की हत्या उसके पुत्र ज़ौना खाँ (मुहम्मद बिन तुगलक) द्वारा रचे गए षड्यंत्र के माध्यम से की गई।<ref name=":0" /> ग़यासुद्दीन तुग़लक़ का [[मक़बरा]] तुग़लक़ाबाद में स्थित है।
[[श्रेणी:शासक]]
[[श्रेणी:निधन वर्ष अनुपलब्ध]]
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सैयद वंश
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{{Infobox family|name=सैयद राजवंश|native_name={{nobold|{{unq|سید}}}}|native_name_lang=fa|coat_of_arms=Delhi Sultanate Flag.svg|image=Map of the Sayyid Dynasty.png|founder=[[ख़िज़्र ख़ाँ]]|image_caption=सैयद राजवंश का क्षेत्र|final_ruler=[[आलम शाह]]|founding_year=1414|deposition=20 अप्रैल 1451|country={{Flagicon image|Delhi Sultanate Flag.svg}} [[दिल्ली सल्तनत]]|traditions=[[इस्लाम]]|founded=28 मई 1414}}
'''सैयद राजवंश''' ({{Langx|fa|{{unq|سید}}}}) [[दिल्ली सल्तनत]] का चतुर्थ वंश था जिसका कार्यकाल 1414 से 1451 तक रहा। उन्होंने [[तुग़लक़ राजवंश|तुग़लक़ वंश]] के बाद राज्य की स्थापना किए थे।
यह परिवार सैयद अथवा [[मुहम्मद]] के वंशज माने जाता है। [[तैमूरलंग|तैमूर]] के लगातार आक्रमणों के कारण दिल्ली सल्तनत का केन्द्रीय नेतृत्व पूरी तरह से हतास हो चुका था और उसे १३९८ तक लूट लिया गया था। इसके बाद उथल-पुथल भरे समय में, जब कोई केन्द्रीय सत्ता नहीं थी, सैयदों ने दिल्ली में अपनी शक्ति का विस्तार किया। इस वंश के विभिन्न चार शासकों ने ३७-वर्षों तक दिल्ली सल्तनत का नेतृत्व किया।
इस वंश की स्थापना [[ख़िज्र खाँ]] ने की जिन्हें तैमूर ने [[मुल्तान]] ([[पंजाब क्षेत्र]]) का राज्यपाल नियुक्त किया था। खिज़्र खान ने २८ मई १४१४ को दिल्ली की सत्ता [[दौलत खान लोदी]] से छीनकर सैयद वंश की स्थापना की। लेकिन वो [[सुल्तान]] की पदवी प्राप्त करने में सक्षम नहीं हो पाये और पहले तैम्मूर के तथा उनकी मृत्यु के पश्चात उनके उत्तराधिकारी [[शाहरुख मीर्ज़ा]] (तैमूर के नाती) के अधीन [[तैमूरी राजवंश]] के ''रयत-ई-अला'' (जागीरदार) ही रहे।<ref>वी॰डी॰ महाजन, पृष्ठ २३७</ref> ख़िज्र खान की मृत्यु के बाद २० मई १४२१ को उनके पुत्र मुबारक खान ने सत्ता अपने हाथ में ली और अपने आप को अपने सिक्कों में ''मुइज़्ज़ुद्दीन मुबारक शाह'' के रूप में लिखवाया। उनके क्षेत्र का अधिक विवरण याहिया बिन अहमद सरहिन्दी द्वारा रचित ''तारीख-ए-मुबारकशाही'' में मिलता है।<ref>शैलेन्द्र सेनगर, पृ॰ ९</ref> मुबारक खान की मृत्यु के बाद उनका दतक पुत्र मुहम्मद खान सत्तारूढ़ हुआ और अपने आपको सुल्तान मुहम्मद शाह के रूप में रखा। अपनी मृत्यु से पूर्व ही उन्होंने बदायूं से अपने पुत्र अलाउद्दीन शाह को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया।<ref>रेहाना ज़ैदी, ७६-७७</ref>
इस वंश के अन्तिम शासक अलाउद्दीन आलम शाह ने स्वेच्छा से दिल्ली सल्तनत को १९ अप्रैल १४५१ को बहलोल खान लोदी के लिए छोड़ दिया और बदायूं चले गये। वो १४७८ में अपनी मृत्यु के समय तक वहाँ ही रहे।<ref>वी॰डी॰ महाजन, पृष्ठ २४४</ref>
==शासक==
* [[ख़िज्र खाँ|ख़िज़्र खाँ]] (1414-1421)
* [[मुबारक़ शाह]] (1421-1434)
* [[मुहम्मद शाह IV]] (1434-1445)
* आलमशाह शाह (1445-1451)
==कालक्रम==
;ख़िज्र खाँ:
खिज्र खाँ, सैयद वंश के संस्थापक थे।<ref>कृपाल चन्द्र यादव, पृ॰ ३७</ref> वो फिरोजशाह तुगलक के अमीर मलिक मर्दान दौलत के दतक पुत्र सुलेमान का पुत्र थे। तैमूर ने वापस लौटते समय उन्हें रैयत-ए-आला की उपाधि के साथ मुल्तान, लाहौर और दीपालपुर का शासक नियुक्त किया था।<ref>मनोज कुमार शर्मा, पृ॰ १४२</ref> उन्होंने तैमूर वंश की सहायता से दिल्ली की सत्ता सन् १४१४ में प्राप्त की और जीवन भर रैयत-ए-आला की उपाधि के साथ सन्तुष्ट रहे।<ref>एम॰ हसन, पृ॰ २३८</ref> उन्हें तैमूर ने भारत में अपने प्रतिनिधि के रूप में मुल्तान में नियुक्त कर रखा था। सन् १४१० में मुल्तान से सेना लेकर उन्होंने तुगलक वंश पर हमला किया और छः माह में रोहतक पर अपना अधिपत्य स्थापित कर लिया। इस समय दिल्ली सल्तनत पर मोहम्मद शाह तुगलक का शासन था। सन् १४१३ में मोहम्मद शाह का निधन हो गया। मोहम्मद शाह के कोई पुत्र नहीं था और न ही पहले से कोई तुगलक उत्तराधिकारी घोषित था अतः दिल्ली में अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई। इस समय के लिए दौलत खान लोदी को दिल्ली की सता सौंपी गयी। मार्च १४१४ में खिज्र खाँ ने दिल्ली पर हमला कर दिया और चार माह में जीत दर्ज करते हुये दिल्ली पर अपना शासन आरम्भ कर दिया।<ref>एम॰ हसन, पृ॰ २३७</ref>
;मुबारक शाह:
खिज्र खाँ की मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारी के रूप में उनका पुत्र मुबारक शाह ने दिल्ली की सत्ता अपने हाथ में ली। अपने पिता के विपरीत उन्होंने अपने आप को सुल्तान के रूप में घोषित किया।<ref>एम॰ हसन, पृ॰२४०</ref>
;मुहम्मद शाह:
मुबारक शाह की मृत्यु के बाद मुहम्मद शाह ने दिल्ली सल्तनत पर शासन किया। उनका शासनकाल १४३४ से १४४५ तक रहा।<ref>शैलेन्द्र शेगर (भाग २) पृ॰ ८४</ref>
;आलमशाह: १४४४-५१ (Alam Shah ) - जब १४४४ में मुहम्मद शाह मृत्यु हो गई तो उसका पुत्र अलाउद्दीन गद्दी पर बैठा जिसने श्रालम शाह की उपाधि धारण की । यह नया सुल्तान अपने पिता से भी अधिक कमज़ोर निकला. किन्तु इस पर भी उसके सिंहासनारोहण को बहलोल ने स्वीकार कर लिया । १४४७ में आलम शाह बदायूँ¨ गया । उसे यह नगर इतना अच्छा लगा कि उसने दिल्ली की जगह वहाँ ही रहना अच्छा समझा । उसने अपने किसी सम्बन्धी को दिल्ली का प्रांताध्यक्ष बना दिया और १४४८ से स्थायी रूप से वह वहीं रहा । वहाँ उसने अपने को पूर्णतया विलासी जीवन में डाल दिया। दिल्ली से श्रालम शाह के चले जाने के बाद, उन लोगों के बीच संघर्ष छिड़ गया जो उसका शासन चला रहे थे। हिसाम खाँ व हामिद खाँ दिल्ली के भाग्य के निर्णायक बन गए । विभिन्न व्यक्तियों की अभियाचनानों पर विचार किया गया और अन्त में बहलोल लोदी को ही चुना गया । उसे दिल्ली ग्रामं- त्रित किया गया । उसने निमन्त्रण इतनी जल्दी स्वीकार किया कि वह दिल्ली में अपनी शक्ति जमाने के लिए काफी सेना तक साथ नहीं लाया । उसने हामिद खां से नगर की कुंजियाँ लीं । उसने बदायूँ में आलम शाह को एक पत्र भी लिखा और उसका उत्तर यह मिला कि उसे अपनी गद्दी से कोई लाभ या फल की आशा नहीं है । उसके पिता ने बहलोल को अपना पुत्र मान लिया था, इसलिए उसने स्वतन्त्र रूप से व प्रसन्नता के साथ बहलोल अपने बड़े भाई, के पक्ष में अपना सिंहासन त्याग कर दिया । इस प्रकार जब १६ अप्रैल १४५१ को बहलोल का सिंहासनारोहण हुआ, तो उसने सिंहासन किसी सफल गुट की सहायता से ही प्राप्त नहीं किया, अपितु एक ऐसे सुल्तान के उत्तराधिकारी के रूप में भी प्राप्त किया जिसने ऐच्छिक रूप से अपनी “गद्दी का परित्याग कर दिया था । श्रालम शाह १४७८ में अपनी मृत्यु के समय तक बदायूँ ही में रहा ।
==टिप्पणी==
{{टिप्पणीसूची|3}}
==सन्दर्भ==
* {{cite web |url=http://asi.nic.in/asi_epigraphical_arabicpersian.asp |title=Arabic and Persian Epigraphical Studies - Archaeological Survey of India |trans-title=अरबी और फ़ारसी पुरालेखीय अध्ययन - भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण |publisher=Asi.nic.in |date= |accessdate=१५ दिसम्बर २०१४ |language=अंग्रेज़ी |archive-url=https://web.archive.org/web/20110929105219/http://asi.nic.in/asi_epigraphical_arabicpersian.asp |archive-date=29 सितंबर 2011 |url-status=dead }}
* वी॰डी॰ महाजन (१९९१, पुनःप्रकाशित २००७), ''History of Medieval India [मध्यकालीन भारत का इतिहास]'' (अंग्रेज़ी में), भाग I, नई दिल्ली: एस॰ चाँद, ISBN 81-219-0364-5
* {{cite book |title=हरियाणा का इतिहास |author=कृपाल चन्द्र यादव |url=https://books.google.co.in/books?id=j2YeAAAAMAAJ |publisher=मैकमिलन (मूल प्रकाशक: मिशिगन विश्वविद्यालय) |year=१९८१ |access-date=21 दिसंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141221191523/https://books.google.co.in/books?id=j2YeAAAAMAAJ |archive-date=21 दिसंबर 2014 |url-status=live }}
* {{cite book|title=History of Islam |trans-title=इस्लाम का इतिहास |author=प्रो॰ एम॰ हसन |publisher=आदम पब्लिशर्स |year=१९९५ |isbn=9788174350190 |language=अंग्रेज़ी }}
* {{cite book |title=मध्यकालीन भारत का इतिहास |author=शैलेन्द्र सेनगर |url=https://books.google.co.in/books?id=ZVO-G7I_4QkC |publisher=अटलांटिक पब्लिशर्स |year=२००५ |isbn=9788126904648 |access-date=21 दिसंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141221192304/https://books.google.co.in/books?id=ZVO-G7I_4QkC |archive-date=21 दिसंबर 2014 |url-status=live }}
* {{cite book |title=भारतीय इतिहास |author=शैलेन्द्र सेनगर |url=https://books.google.co.in/books?id=AeBoP7nTiEUC |publisher=आत्माराम एण्ड सन्स |year= |isbn=9788189362171 |access-date=21 दिसंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141221191151/https://books.google.co.in/books?id=AeBoP7nTiEUC |archive-date=21 दिसंबर 2014 |url-status=live }}
* {{cite book |title=मध्य हिमालय के पर्वतीय राज्य एवं मुग़ल शासक |author=डॉ॰ रेहाना ज़ैदी |url=https://books.google.co.in/books?id=69AFTPcqkPAC |publisher=वाणी प्रकाशन |year=१९९५ |isbn=9788170554035 |access-date=21 दिसंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141221181406/https://books.google.co.in/books?id=69AFTPcqkPAC |archive-date=21 दिसंबर 2014 |url-status=live }}
* {{cite book |title=भारतीय इतिहास: एक समग्र अध्ययन |author=मनोज कुमार शर्मा |publisher=पीयर्सन एजुकेशन, इंडिया |year=२००९ |url=https://books.google.co.in/books?id=sWgUS0KGy4oC |isbn=9788131727690 |access-date=21 दिसंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141221192259/https://books.google.co.in/books?id=sWgUS0KGy4oC |archive-date=21 दिसंबर 2014 |url-status=live }}
{{दिल्ली सल्तनत}}
[[श्रेणी:दिल्ली सल्तनत]]
66sknzh0vhk93mk4ic1sptvdnb4y425
यूरोप में विश्व धरोहर स्थलों की सूची
0
36141
6630547
6629231
2026-10-18T00:58:57Z
Kent Wang
952357
Convento de Cristo, safe inside Tomar castle (54199027283).jpg
6630547
wikitext
text/x-wiki
यह यूरोप में स्थित [[विश्व धरोहर स्थलों की सूची|यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों]] की एक सूची है।
तारांकन चिह्न (*) लगे स्थल, [[खतरे में विश्व धरोहर स्थलों की सूची]] में भी शामिल हैं।
{{TOCright}}
== दो या अधिक देशों के बीच साझा स्थल (11) ==
* [[बेल्जियम और फ्रांस के घंटाघर]] — [[#बेल्जियम|बेल्जियम]] और [[#फ्रांस|फ्रांस]] के बीच साझा धरोहर स्थलें। सार्वजनिक घंटाघरों या इमारतें जैसे की सभामण्डप आदि के अलावा इस सुची में अन्य: आवर लेडी का कैथेड्रल [नोट्रे-डेम], एंटवर्प; सेंट रंबॉल्ड्स टॉवर, मेचेलन; सेंट लियोनार्ड चर्च, ज़ॉटलियुव - फ्लैंडर्स, बेल्जियम में सभी तीन आदि शामिल है।
* [[बिलवज़्काया पुश्चा राष्ट्रीय उद्यान]]/[[बिआलोविज़ा वन]] (1979, 1992) — बेलारूस और [[#पोलैंड|पोलैंड]] के बीच साझा।
* एगटेलेक और स्लोवेंस्की कोर (स्लोवाक कर्स्ट) की गुफाएं (1995, 2000) — [[#हंगरी|हंगरी]] और [[#स्लोवाकिया|स्लोवाकिया]] के बीच साझा।
* फेर्तो/नेउसेडलर्सी का सांस्कृतिक परिदृश्य (2001) — [[#हंगरी|हंगरी]] और [[#ऑस्ट्रिया|ऑस्ट्रिया]] के बीच साझा।
* कौरोनियन स्पिट — [[#लिथुआनिया|लिथुआनिया]] और [[#यूरोपियन रूस|रूसी संघ]] के बीच साझा।
* [[रोमन लाइम्स|रोमन साम्राज्य के सीमांत]]: [[लाइम जर्मनिकस|ऊपरी जर्मन और रावटियन लाइम्स]] और [[हार्डियन की दीवार]] — [[#जर्मनी|जर्मनी]] और [[#इंग्लैंड|यूनाइटेड किंगडम]] के बीच साझा। (ref. [https://web.archive.org/web/20181215174622/http://whc.unesco.org/en/list/430/multiple%3D1%26unique_number%3D499 whc.unesco.org ID 430bis])
* [[होगा कुस्टेन|उच्च तट]] और[[क्वारकें]] द्वीपसमूह — [[#स्वीडन|स्वीडन]] और [[#फिनलैंड|फिनलैंड]] के बीच साझा।
* [[रोम]] के ऐतिहासिक केंद्र, ([[वैटिकन सिटी|वेटिकन सिटी]]) और [[दीवारों के बाहर सेंट पॉल का राजभवन]] — [[#धर्ममण्डल|धर्ममण्डल]] और [[इटली]] के बीच साझा।
* [[मुस्कुएर पार्क]]/[[पार्क मुज़कोवस्की]] निस्से नदी के दोनों ओर — [[#जर्मनी|जर्मनी]] और [[#पोलैंड|पोलैंड]] के बीच साझा।
* [[पायरेनीस]]/[[पिरिनोस]]: [[मोंटे पेरडीडो]]/[[मोंट पेर्दू]] (1997, 1999) — [[#फ्रांस|फ्रांस]] और [[#स्पेन|स्पेन]] के बीच साझा।
* [[स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क]] (2005) — [[#बेलारस|बेलारूस]], [[#एस्टोनिया|एस्टोनिया]], [[#फिनलैंड|फिनलैंड]], [[#लताविया|लताविया]], [[#लिथुआनिया|लिथुआनिया]], [[#मोल्दोवा|मोल्दोवा]], [[#नॉर्वे|नॉर्वे]], [[#स्वीडन|स्वीडन]], [[#यूरोपियन रूस|रूसी संघ]] और [[#यूक्रेन|यूक्रेन]]
== देश अनुसार स्थलों की सूची ==
=== [[अल्बानिया|अलबानिया]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=75%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Butrint, Albania.jpg|150px|]]
||[[बुत्रिन्ट]]
||1992
|बुत्रिन्ट, [[वोरो काउंटी]]<br/><small>{{coord|39|44|44|N|20|1|14|E|region:AL_type:landmark|name=Butrint}}</small>
|570; iii (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र: Gjirokastra.jpg|150px|]]
||[[जीरोकेस्टर]] का संग्रहालय-नगर
||2005
|[[बेरत]], [[बेरत प्रांत]] और <br/>[[जीरोकेस्टर]], [[जीरोकेस्टर काउंटी]]<br/><small>{{coord|40|4|10|N|20|8|0|E|region:AL_type:landmark|name=Historic Centres of Berat and Gjirokastra}}</small>
|569; iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[अण्डोरा|अन्डोरा]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=75%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Refuge_perafita_andorra.jpg|150px|]]
||[[मैड्रियू-क्लेरोर-पैराफिटा घाटी]]
||2004
|एस्काल्डेस-एंगोर्डनी, अन्डोरा
|v (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[आर्मीनिया]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=75%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Zvartnots img 6965.jpg|100px|]]
||वाघरशपत के कैथेड्रल और चर्च और ज़्वरत्नोट्स के पुरातत्व स्थल
||2000
||अर्मावीर क्षेत्र <br/><small>{{coord|41|5|42|N|44|42|37|E|}}</small>
||1011; 2000; ii, iii (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Haghpat-Nshan.jpg|100px|]]
||[[हाघपत मठ|हाघपत]] और [[सानहिन]] के मठ
||1996
||हाघपत और सानहिन गांव, लोरी क्षेत्र<br/><small>{{coord|40|9|33.5|N|44|17|42.5|E|}}</small>
||777; 1996; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Geghard lion cross reliefs-IMG 2562.JPG|100px|]]
||गेघार्ड के मठ और ऊपरी अज़ैट घाटी
||2000
||गौत गांव के पास, कोतक क्षेत्र<br/><small>{{coord|40|9|32|N|44|47|48|E|}}</small>
||960; 2000; ii (सांस्कृतिक)
|
|-
|}
=== [[ऑस्ट्रिया]]<ref>{{cite web|url=https://whc.unesco.org/en/statesparties/at|title=ऑस्ट्रिया के विश्व धरोहर स्थल|publisher=[[युनेस्को|यूनेस्को]] आधिकारिक वेबसाइट|access-date=11 अप्रैल 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180411175738/https://whc.unesco.org/en/statesparties/at|archive-date=11 अप्रैल 2018|url-status=live}}</ref> ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:1906 - Salzburg - View from Mönchsberg.JPG|150px]]
||[[साल्ज़बर्ग|साल्ज़बोर्ग]] के ऐतिहासिक केंद्र
||1996
|[[साल्ज़बर्ग|साल्ज़बोर्ग]]
|784; ii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Wien Schoenbrunn Rueckseite.jpg|150px|]]
||[[शनब्रन महल]]
||1996
|[[वियना]]
|786; i, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Dachsteingosau.JPG|150px|]]
||[[हॉलस्टैट]]–[[डाखश्टाइन]] [[सल्ज़कामरगुत]] के सांस्कृतिक परिदृश्य
||1997
|[[सल्ज़कामरगुत]]
|806; iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Semmeringbahn um 1900.jpeg|150px|]]
||[[सिमरिंग रेलवे]]
||1998
|ग्लोग्ग्निट्ज़, सिमरिंग
|785; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:GrazView-Kunsthaus.jpg|150px|]]
||[[ग्राज़]] के ऐतिहासिक केंद्र
||1999
|ग्राज़
|931; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Stift melk 001.jpg|150px|]]
||[[वाचौ]] के सांस्कृतिक परिदृश्य
||2000
|वाचौ
|970; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Wien Staatsoper.jpg|150px|]]
||[[वियना]] के ऐतिहासिक केंद्र <sup>†</sup>
||2001
|[[वियना]]
|1033; ii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Neusiedler See im Winter.jpg|150px|]]
||[[न्युसीडल झील]]
||2001
|[[बुर्गेनलैंड]]
|772; v (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[अज़रबैजान]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Qobustan.jpg|150px|]]
||[[गोबस्तान राष्ट्रीय उद्यान]]
||2007
||गरदाघ जिला और अबेहरॉन जिला
||1076; iii (प्राकृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Baku Skyline.JPG|150px|]]
||[[बाकू|बाकू दीवार वाला शहर]], [[पैलेस ऑफ द शिरवंश|शिरवंश पैलेस]] और [[मेडन टॉवर (बाकू)|मैडेन टॉवर]]
||2000
||[[बाकू]]
||958; iv (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[बेलारूस|बेलारुस]] ===
{{Legend|#D0E7FF|* साझा स्थल|outline=silver}}
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Poland Bialowieza - BPN.jpg|150px|]]
||[[बिलवज़्काया पुश्चा राष्ट्रीय उद्यान]]*
||1979
|style="background-color: #D0E7FF" |ब्रेस्ट प्रांत और ग्रोडो प्रांत <br/>({{flag|पोलैंड}} के साथ साझा) <br/><small>{{coord|52|30|N|23|35|E|name=बिलवज़्काया पुश्चा राष्ट्रीय उद्यान}}</small>
||vii (प्राकृतिक)
|
|-
|[[File:Мир (замок).jpg|150px]]
||[[मीर कैसल भवन-समूह]]
||2000
||[[मीर, बेलारुस|मीर]], [[ग्रोडो प्रांत]] <br/><small>{{coord|53|27|4|N|26|28|22|E|type:landmark_region:BY|name=मीर कैसल भवन-समूह}}</small>
||ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Belarus-Niasvizh-Radziwill Castle-4.jpg|150px|]]
||[[नेसविज़्ह दुर्ग]]
||2005
||[[नेसविज़्ह]], [[मिन्स्क प्रांत]] <br/><small>{{coord|53|13|22|N|26|41|29|E|type:landmark_region:BY|name=Architectural, Residential and Cultural Complex of the Radziwill Family at Nesvizh}}</small>
|ii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Hammerfest, fuglenes, memoriale per l'arco geodetico di struve, misurato a partire da qui, colonna 02.jpg|150px|]]
||[[स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क]]*
||2005
|style="background-color: #D0E7FF" |ब्रेस्ट प्रांत और [[ग्रोडो प्रांत]] <br/>({{flag|एस्टोनिया}}, {{flag|फिनलैंड}}, {{flag|लातविया}}, <br/>{{flag|लिथुआनिया}}, {{flag|मोल्डोवा}}, {{flag|नॉर्वे}}, {{flag|रूस}}, <br/>{{flag|स्वीडन}} और {{flag|यूक्रेन}} के साथ साझा)<br/>
<small>{{coord|52.160556|25.571389|format=dms|name=स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क (Leskovichi station point in Belarus)}}</small>
<br/><small>{{coord|52.215278|25.553333|format=dms|name=स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क (Chekutsk station point in Belarus)}}</small>
<br/><small>{{coord|52.289167|25.649444|format=dms|name=स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क (Ossovnitsa station point in Belarus)}}</small>
<br/><small>{{coord|53.560278|24.869722|format=dms|name=स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क (Lopaty station point in Belarus)}}</small>
<br/><small>{{coord|54.291389|26.045278|format=dms|name=स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क (Tupishki station point in Belarus)}}</small>
|ii, iii, vi (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[बेल्जियम]] ===
{{Legend|#D0E7FF|* साझा स्थल|outline=silver}}
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:BeguinageTerHoyenGhent04.jpg|150px]]
||[[बेगुइनेज़]]
||1998
||[[फ़्लैंडर्स]]
|855; 1998; ii, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Grand place brussels_WQ3.jpg|150px]]
||[[ग्रैंड प्लेस]]
||1998
||[[ब्रुसेल्स|ब्रुसेल्स शहर]], ब्रुसेल्स-राजधानी
|857; 1998; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Houdeng-Goegnies JPG02.jpg|150px]]
||[[कैनाल डु सेन्टर के नाँव उत्थापक]]
||1998
||[[हैनौत (प्रांत)]] <br/><small>{{coord|50|28|16|N|4|05|42|E|}}</small>
||856; 1998, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Belfort Brugge.jpg|150px]]
|style="background:#D0E7FF;"|[[बेल्जियम और फ्रांस के घंटाघर]]*
||1999
||बेल्जियम और उत्तरी फ्रांस
|943; 1999, 2005 (विस्तारित); ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Bruggewasser.jpg|150px]]
||[[ब्रुग्ज]] के ऐतिहासिक केन्द्र
||2000
|[[ब्रुग्ज]], वेस्ट फ्लैंडर्स <br/><small>{{coord|51|13|N|3|14|E|}}</small>
|996; 2000; ii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[File:Tassel House stairway.JPG|150px]]
||[[ब्रुसेल्स]] में [[विक्टर हॉर्टा]] के प्रमुख शहरी इमारत;<br/>(टेसल होटल, सॉल्वे होटेल, वैन एटवेल्डे होटल, <br/>और मैसन एंड एटेलियर हॉर्टा)
||2000
||[[ब्रुसेल्स]] और सैंट-गिलेस, ब्रसेल्स-राजधानी
||1005; 2000; i, ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[File:Minières néolithiques de silex - Spiennes (1).jpg|150px]]
|| [[स्पेंनेस]] के निओलिथिक चमकीले पत्थर कि खान, [[मॉन्स]]
||2000
||मॉन्स, हैनौत
||1006; 2000; i, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Tournai pan.jpg|150px]]
||[[टूर्नेय कैथेड्रल]], [[टूर्नेय]]
||2000
||टूर्नेय, हैनौत
||1009; 2000; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[File:Bois du Cazier 2.jpg|150px]]
|[[वालोनिया की प्रमुख खनन स्थल]]
|2012
||[[वालोनिया]] <br/><small>{{coord|50|26|07|N|3|50|18|E|}}</small>
|1344; 2012; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Library_of_Plantin-Moretus_Museum_in_Antwerp.jpg|150px]]
||[[प्लांटिन-मोरटस संग्रहालय]]
||2000
||[[एंटवर्प]]
||1185; 2005; ii, iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|
||[[स्टोक्लेट महल]]
||2009
||वोलुवे-सेंट-पिएर्रे, ब्रसेल्स-राजधानी <br/><small>{{coord|50|50|07|N|4|24|58|E|}}</small>
||1298; 2009; i, ii (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[बॉस्निया और हर्ज़ेगोविना]] (3) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Stari Most22.jpg|150px]]
||[[स्टारी मोस्ट|मोस्टर के पुराने शहर का पुराना पुल क्षेत्र]]
||2005
||[[मोस्टर]]<br/><small>{{Coord|43|20|13.56|N|17|48|53.46|E}}</small>
||946; vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[File:Visegrad_bridge_by_Klackalica.jpg|150px]]
||[[विसेग्राड]], का [[मेहमद पासा सोकोलोविच पुल]]
||2007
|[[विसेग्राड]]<br/><small>{{coord|43|46|56|N|19|17|16|E}}</small>
|1260; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[File:Bosniangraves bosniska gravar februari 2007 stecak stecci3.jpg|150px]]
|style="background:#D0E7FF;"|[[स्टेक्सी|स्टेक्सी मध्यकालीन समाधि-स्तंभ कब्रिस्तान]]*
||2016
||रादीमलजा और अन्य 19 स्थलें
|1504; iii, vi (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[बुल्गारिया]] (9) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Boyana Church.jpg|150px]]
||[[बोयाना चर्च]]
||1979
|[[सोफिया]] के बॉयना क्वार्टर <br/><small>{{coord|42|39|0|N|23|16|0|E |region:BG_type:landmark |name=बोयाना चर्च}}</small>
|ii, iii (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[File:Caballero_de_Madara,_reserva_histórico-arqueológica_Nacional_de_Madara,_Bulgaria,_2016-05-27,_DD_39.jpg|150px]]
||[[मदारा राइडर]]
||1979
|पूर्वोत्तर बुल्गारिया में शूमेन के पूर्वी, मदरा के गांव निकट<br/><small>{{coord|43|43|0|N|25|58|0|E}}</small>
|i, iii: (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Ivanovo kirche2.jpg|150px]]
||[[इवानोवो के शिलाखंडित चर्च]]
||1979
|इवानोवो गांव, डेन्यूब पर रास के दक्षिण में<br/><small>{{coord|43|43|0|N|25|58|0|E}}</small>
|ii, iii: (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Reproduction of Thracian tomb 2.jpg|150px]]
||[[कज़ानलक के थ्रेसियन कब्र]]
||1979
|कज़ानलाक शहर के पास, मध्य बुल्गारिया<br/><small>{{coord|42|37|0|N|25|24|0|E}}</small>
|:i,iii,iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Nessebar Pantocrator.jpg|150px]]
||प्राचीन शहर [[नासेबार]]
||1983
|काला सागर पर, बर्गास के उत्तर में,<br/>नासेबार का पुराना हिस्सा<br/><small>{{coord|42|39|22|N|27|43|48|E}}</small>
|:iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Pirin national park.jpg|150px]]
||[[पिरिन राष्ट्रीय उद्यान]]
||1983
||बुल्गारिया के दक्षिण पश्चिम में [[पिरीन पर्वत]] के निकट<br/><small>{{coord|41|40|0|N|23|30|0|E}}</small>
||vii, viii, ix (प्राकृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Bulgarien 0905.JPG|150px]]
||[[रीला मठ]]
||1983
|सोफिया के दक्षिण में, उत्तर पश्चिमी रीला पहाड़ों के, रीला मठ प्रकृति पार्क में<br/><small>{{coord|42|7|0|N|23|24|0|E}}</small>
|vi (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Srebarna-Lake.jpg|150px]]
||[[स्रबरना नेचर रिज़र्व]]
||1983
||[[डेन्यूब नदी]] के दक्षिण में, उत्तर पूर्व बुल्गारिया के दक्षिणी डोब्रूजा में<br/><small>{{coord|44|6|51.98|N|27|4|41.02|E}}</small>
||x: (प्राकृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Sveshtari Thracian tomb Bulgaria IFB.JPG|150px]]
||[[सेवेशत्री की थ्रेशियन कब्र]]
||1985
|पूर्वोत्तर बुल्गारिया के राजग्राड में सेवशर्ती गांव के पास<br/><small>{{coord|43|40|0.01|N|26|40|0.01|E}}</small>
||i, iii (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[क्रोएशिया]] (7) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[File:Peristyle of Diocletian's Palace, Split (11908116224).jpg|150px]]
||[[डायोक्लेशियन महल|डायोक्लेशियन का महल]] के साथ [[स्प्लिट]] का ऐतिहासिक कॉम्प्लेक्स
||1979
||[[स्प्लिट]],<br/><small>{{coord|43|30|30|N|16|26|24|E}}</small>
||ii, iii, iv, (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Dubrovnik-L04-1.jpg|150px]]
||[[डुब्रोवनिक]] का पुराना नगर
||1979, 1998
||डुब्रोवनिक,
|95; i, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:HR - Plitvice (Plitvička Jezera)1.JPG|150px]]
||[[प्लिटवाइस झील राष्ट्रीय उद्यान]]
||1979
||प्लिटवीका जैज़ेरा,<br/><small>{{coord|44|52|50|N|15|36|58|E}}</small>
||98; vii, viii, ix (प्राकृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Croatia Porec Euphrasius Basilika BW 2014-10-08 10-43-24.jpg|150px]]
||[[पोरेक]] के ऐतिहासिक केंद्र में [[युफ्रेशियन बेसिलिका]] के एपिस्कोपल कॉम्प्लेक्स
||1997
||पोरेक
||809; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Katedrála sv. Vavřince v Trogiru.JPG|150px]]
||[[ट्रोगिर]] का ऐतिहासिक नगर
||1997
||ट्रोगिर <br/><small>{{coord|43|31|0.85|N|16|15|4.91|E|region:HR|display=inline,title}}</small>
||810; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[File:St. Jacobuskathedraal ; Sibenik.jpg|150px]]
||[[सिबेनिक]] का [[सिबेनिक कैथेड्रल|सेंट जेम्स का कैथेड्रल]]
||2000
||सिबेनिक <br/><small>{{coord|43|44|8.38|N|15|53|20.93|E}}</small>
||963; i, ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[File:Aerial image of the Stari Grad Plain (view from the southwest).jpg|150px]]
||[[स्टारी ग्राड मैदान]]
||2000
||हवर
||1240; ii, iii, v (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[साइप्रस]] (3) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[File:Khirokitia1.jpg|150x150px|alt=Small white circular huts with flat roof.]]
||[[खिरोकिशिआ]]
||1998
|[[लार्नाका जिला]]<br/><small>{{coord|34|47|54|N|33|20|36|E}}</small>
||सांस्कृतिक:(Ii) (iii) (iv)
|
|-
| [[चित्र:House of Aion, Paphos - Apollo and Marsyas Mosaic.jpg|150px]]
||[[पेफॉस]]
||1980
|पेफॉस जिला<br/><small>{{coord|34|45|30|N|32|24|20|E}}</small>
|सांस्कृतिक:(Iii) (vi)
|
|-
|[[File:Pedoulas Konstantin.jpg|150px]]
||[[ट्रोदोस क्षेत्र के चित्रित चर्च]]
||(1985, 2001)
|ट्रोदोस पर्वत, लिमासोल और निकोसिया जिला<br/><small>{{coord|34|55|13|N|33|5|45|E}}</small>
|सांस्कृतिक:(Iii) (vi)
|
|}
<!--*[[Apostolos Andreas Monastery]] not according to the UNESCO website-->
=== [[चेक गणराज्य]] (12) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Cesky_Krumlov_01.jpg|100px]]
||[[चेस्की क्रमलोव]] का ऐतिहासिक केंद्र
||1992
|चेस्की क्रमलोव,दक्षिण बोहेमियन क्षेत्र<br/><small>{{coord|48|49|0|N|14|19|0|E}}</small>
|617; 1992; iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Hradschin Prag.jpg|100px]]
||[[प्राग]] का ऐतिहासिक केंद्र
||1992
|प्राग<br/><small>{{coord|50|5|23|N|14|25|10|E|region:CZ_type:landmark |name=प्राग का ऐतिहासिक केंद्र}}</small>
|616; 1992; ii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Telc - main square.jpg|100px]]
||[[टेल्च]] का ऐतिहासिक केंद्र
||1992
|टेल्च, विसोचिना क्षेत्र<br/><small>{{coord|49|10|59.988|N|15|27|0|E|}}</small>
|621; 1992; i, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Zelená hora - poutní kostel.jpg|100px]]||[[ज़ेलेना होरा]] में [[नेपोमुक के सेंट जॉन का तीर्थयात्री चर्च]]||1994
|ज़ाद नाद साजावो, विसोचिना क्षेत्र<br/><small>{{coord|49|34|49|N|15|56|31|E}}</small>
|690; 1994; iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Kutná Hora - pohled od Svaté Barbory.jpg|100px]]||[[कुटना होरा]]: ऐतिहासिक शहर केन्द्र||1995
|कुटना होरा, सेंट्रल बोहेमियन क्षेत्र<br/><small>{{coord|49|57|0|N|15|16|0|E|}}</small>
|732; 1995; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Lednice castle.jpg|100px]]
||[[लेडनिस-वाल्टिस सांस्कृतिक परिदृश्य]]
||1996
||[[दक्षिण मोरावियन क्षेत्र]]
||763; 1996; i, ii, iv (सांस्कृतिक)
||
|-
| [[चित्र:Kromeriz, Marktpl, Schl.jpg|100px]]
||[[क्रोमिरीज़ दुर्ग|क्रोमिरीज़ आर्कबिशप महल]]
||1998
| [[क्रोमिरीज़]], [[ज़लिन प्रदेश]]
| 860; 1998; ii, iv
|
|-
| [[चित्र:Holašovice.jpg|100px]]
||[[होलासविस]] का ऐतिहासिक आरक्षित गांव
||1998
|[[दक्षिण बोहेमियाई क्षेत्र]]
| 861; 1998; ii, iv
|
|-
| [[चित्र:Litomyšl, Schloss.jpg|100px]]
||[[लिटोमैसल दुर्ग]]
||2000
|पार्दुबिस प्रदेश
|901; 1999; ii, iv
|
|-
| [[चित्र:Holy Trinity Column.jpg|100px]]
||[[ओलोमौक में पवित्र ट्रिनिटी कॉलम]]
||2000
|[[ओलोमौक]], [[ओलोमौक क्षेत्र]]
|859; 2000; i, iv
|
|-
| [[चित्र:Villa Tugendhat front.JPG|100px]]
||[[विला तुगेन्दाट]]
||2001
|[[ब्रनो]], [[दक्षिण मोरावियन क्षेत्र]]
|1052; 2001; ii, iv
|
|-
| [[चित्र:Třebíč Ghetto 'Entry'.jpg|100px]]
||[[ट्रेबिस में यहूदी क्वार्टर और सेंट प्रोकोपियस बेसिलिका]]
||2003
| [[ट्रेबिस]], [[विसोकिना क्षेत्र]]
| 1078; 2003; ii, iii
|
|}
=== [[डेनमार्क]] (4) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Jelling_gr_kl_Stein.JPG|150px]]
||[[जेलिंग पत्थर|जेलिंग रूनिक पत्थर]]
||1994
|जेलिंग, वेजल नगर पालिका, दक्षिणी डेनमार्क
|Iii, (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Roskilde_domkirke_west_fassade.jpg|150px]]
||[[रोस्किल्ड कैथेड्रल]]
||1995
|रोज़किल्डे, ज़ीलैंड क्षेत्र
|सांस्कृतिक:(ii), (iv)
|
|-
|[[चित्र:Helsingor Kronborg.jpg|150px]]
||[[क्रोंबोर्ग|क्रोंबोर्ग दुर्ग]]
||2000
|हेलसिंगिंग, राजधानी क्षेत्र, ज़ीलैंड
|सांस्कृतिक:(Iv)
|
|-
|[[चित्र:Ilulisat_Isfjord.jpg|100px]]
||[[लुलिसत आइसफॉर्ड]]
|1996
|[[ग्रीनलैण्ड|ग्रीनलैंड]], डेनमार्क
|प्राकृतिक:(vii), (viii)
|
|}
=== [[एस्टोनिया]] ===
{| class="wikitable" width=90%
!width=6%|
!width=76%|
!width=8%|
|-
| [[चित्र:Tallinna vanalinn.jpg|100px]]||[[ताल्लिन]] के ऐतिहासिक केंद्र (पुराना शहर||1997
|-
| [[चित्र:Hammerfest Meridianstein.jpg|100px]]||[[स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क]] — [[#बेलारस|बेलारूस]], [[#एस्टोनिया|एस्टोनिया]], [[#फिनलैंड|फिनलैंड]], [[#लताविया|लताविया]], [[#लिथुआनिया|लिथुआनिया]], [[#मोल्दोवा|मोल्दोवा]], [[#नॉर्वे|नॉर्वे]], [[#स्वीडन|स्वीडन]], [[#यूरोपियन रूस|रूसी संघ]] और [[#यूक्रेन|यूक्रेन]] के साथ साझा||2005
|}
=== [[फ़िनलैण्ड|फ़िनलैंड]] (7) ===
{| class="wikitable" width=90%
!width=6%|
!width=76%|
!width=8%|
|-
|[[चित्र:Suomenlinna.jpg|100px]]
||[[हेलसिंकी]] के पास, [[सुमेनलिन्ना]] का किला
||1991
|-
|[[चित्र:Rauma Finland Helsingintori 20051225.jpg|100px]]
||[[ओल्ड राउमा]], [[राउमा]] के लकड़ी के शहर के केंद्र
||1991
|-
|[[चित्र:Petäjävesi Old Church from south.JPG|100px]]
||[[पेटजावेसी पुराना चर्च]]
||1994
|-
|[[चित्र:Verla.JPG|100px]]
||जाला का [[वेरला]] ग्राउंडवुड और बोर्ड मिल
||1996
|-
|[[चित्र:Sammallahdenmaki.jpg|100px]]
||[[लप्पी]] में [[सम्मल्लाहडेनमकी]] की कांस्य युगीन कब्र स्थल
||1999
|-
|[[चित्र:Kvarken.png|100px]]
||[[हेगा कुस्तेन|उच्च तट]] और [[क्वार्केन]] द्वीपसमूह — [[#स्वीडन|स्वीडन]] के साथ साझा
||2000, 2006
|-
|[[चित्र:Hammerfest Meridianstein.jpg|100px]]
||[[स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क]] — [[#बेलारस|बेलारूस]], [[#एस्टोनिया|एस्टोनिया]], [[#फिनलैंड|फिनलैंड]], [[#लताविया|लताविया]], [[#लिथुआनिया|लिथुआनिया]], [[#मोल्दोवा|मोल्दोवा]], [[#नॉर्वे|नॉर्वे]], [[#स्वीडन|स्वीडन]], [[#यूरोपियन रूस|रूसी संघ]] और [[#यूक्रेन|यूक्रेन]] के साथ साझा
||2005
|}
=== [[फ़्रान्स|फ़्रांस]] (31) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Chartres 1.jpg|100px|]]
||[[चार्टर्स कैथेड्रल]]
||1979
|[[सेंटर-वैल दे लोयर]]
|1979, 81; सांस्कृतिक
|
|-
|[[चित्र:Lascaux2.jpg|100px]]
||[[वेजेरे घाटी]] की प्रागैतिहासिक स्थलें और [[लैसकॉक्स|सजाए गए सुंदर चित्रमयकन्दरा]]
||1979
|[[नॉवेले एक्विटाइन]]
|1979, 85; सांस्कृतिक
|
|-
|[[चित्र:200506 - Mont Saint-Michel 02.JPG|100px]]
||[[ले मॉन्ट-सेंट-मिशेल]] और इसकी खाड़ी
||1979
|
|
|
|-
|[[चित्र:Versailles Garden.jpg|100px]]
||[[पैलेस ऑफ़ वर्सेलिस|वर्सेलिस के महल और उद्यान]]
||1979
|
|
|
|-
|[[चित्र:Vezelay Ste Madeleine Westfassade.jpg|100px]]
||[[वेज़ेले एबे|वेज़ेले, चर्च और पहाड़ी]]
||1979
|
|
|
|-
|[[चित्र:Amiens-cathédrale.jpg|100px]]
||[[एमियंस कैथेड्रल]]
||1981
|
|
|
|-
|[[चित्र:Abbaye de Fontenay-EgliseBatiments.jpg|100px]]
||[[सिस्टर्सन्स]] [[ऐबी ऑफ़ फोन्टेन]]
||1981
|
|
|
|-
|[[चित्र:Fontainebleau 119.jpg|100px]]
||[[फ़ॉन्टाइनेब्लू का महल|फ़ॉन्टाइनेब्लू के महल और उद्यान]]
||1981
|
|
|
|-
|[[चित्र:Amphitheatre Arles.jpg|100px]]
||[[अर्ल्स]] के रोमन और रोमनस्क स्मारक
||1981
|
|
|
|-
|[[चित्र:Theatre-antique vue-generale-sud.jpg|100px]]
||रोमन रंगमंच और इसके आसपास के क्षेत्र और ऑरेंज का [[विजय स्मारक]]
||1981
|
|
|
|-
|[[चित्र:Koenigliche Saline in Arc-et-Senans Bild1 800px.jpg|100px]]
||[[आर्क-एट-सेनान का रॉयल साल्टवर्क्स]]
||1982
|
|
|
|-
|[[चित्र:Corse-04860-calanche de Piana-château fort.jpg|100px]]
||केप गिरोलटा, केप पोर्टो, स्कैंडोला नेचर रिजर्व और पियाना कैलंच, [[कोर्सिका]]
||1983
|
|
|
|-
|[[चित्र:Meister von Saint-Savin-sur-Gartempe 001.jpg|100px]]
||[[सेंट-साविन-सुर-गार्टमेपे का एबी चर्च]]
||1983
|
|
|
|-
|[[चित्र:Nancy Place Stanislas BW 2015-07-18 13-49-20 1.jpg|100px]]
||[[नांसी]] के [[प्लेस स्टेनिस्लस]], प्लेस दे ला कैरिएर, और प्लेस दे एलायंस
||1983
|
|
|
|-
|[[चित्र:Pont du Gard 2006.jpg|100px]]
||[[पोंट डू गार्ड]], [[रोमन साम्राज्य|रोमन]] [[जलवाही सेतु]]
||1983
|
|
|
|-
|[[चित्र:Absolute ponts couverts 02.jpg|100px]]
||[[स्ट्रासबर्ग]]–[[ग्रांड आइल, स्ट्रैसबर्ग|ग्रांड आइल]]
||1988
|
|
|
|-
|[[चित्र:Facade de la Cathédrale de Reims - Avenue libergier.jpg|100px]]
||[[रीम्स कैथेड्रल]]: पूर्व [[सेंट-रेमी का एबी]] और [[टाऊ का महल]], [[रिम्स]]
||1991
|
|
|
|-
|[[चित्र:Aftnn The Seine from the Eiffel Tower.jpg|100px]]
||[[पेरिस|पैरिस]], [[सीन नदी|सीन नदी का किनारा]]
||1991
|
|
|
|-
|[[चित्र:Bourges Cathedral exterior 004.JPG|100px]]
||[[बोर्गेस कैथेड्रल]]
||1992
|
|
|
|-
|[[चित्र:Die Brücke von Avignon.JPG|100px]]
||[[अविगनोन]] का ऐतिहासिक केंद्र
||1995
|
|
|
|-
|[[चित्र:Bridge over Canal du Midi.jpg|100px]]
||[[कैनाल दु मिडी]]
||1996
|
|
|
|-
|[[चित्र:Carcassonne JPG01.jpg|100px]]
||[[कारकैसन]] का ऐतिहासिक किलाबन्द शहर
||1997
|
|
|
|-
|[[चित्र:Pirineo Ordesa 3.jpg|100px]]
||[[पायरेनीस]]/पिरिनोस: मोंटे पेरडीडो/[[मोंट पेर्दू]] — फ्रांस और स्पेन के बीच साझा।
||1997, 1999
|
|
|
|-
|[[चित्र:Hotel-dieu lyon fourviere.jpg|100px]]
||[[ल्यों]] के ऐतिहासिक स्थल
||1998
|
|
|
|-
|[[चित्र:Poitiers notre dame5.JPG|100px]]
||[[फ्रांस में सैंटियागो दे कंपोस्टेला के मार्गों की विश्व विरासत स्थल|फ्रांस में सैंटियागो दे कंपोस्टेला के मार्ग]]
||1998
|
|
|
|-
|[[चित्र:Cloitre cordeliers st emilion01.JPG|100px]]
||[[सेंट-एमिलियन]] का क्षेत्राधिकार
||1999
|
|
|
|-
|[[चित्र:Cher spiegelbeeld.jpg|100px]]
||[[लवार घाटी|सुली सुर लवार और चालोंनेस सुर लवार के बीच स्थित लवार घाटी]]
||2000
|
|
|
|-
|[[चित्र:Provins10.jpg|100px]]
||[[प्रोविंस]], मध्ययुगीन मेले का शहर
||2001
|
|
|
|-
|[[चित्र:Beffroi de Loos (3).JPG|100px]]
||[[बेल्जियम और फ्रांस के घंटाघर]] — बेल्जियम और फ्रांस के बीच साझा धरोहर स्थलें।
||(1999), 2005
|
|
|
|-
|[[चित्र:Le Havre Vue Plage 14 07 2005.jpg|100px]]
||[[ल हावरे]], [[ऑगस्ट पेरेट]] द्वारा पुनर्निर्मित शहर
||2005
|
|
|
|-
|[[चित्र:Bordeaux view from tower Pey Berland.png|100px]]
||[[बोर्दो]] का शहर
||2007
|
|
|
|}
=== [[जॉर्जिया (देश)|जॉर्जिया]] (3) ===
{| class="wikitable" width=90%
!width=6%|
!width=76%|
!width=8%|
|-
| [[चित्र:Bagrati cathedral, georgia.jpg|100px]]<br />[[चित्र:Kutaisi gelati.jpg|100px]]
||कुटैसी और जेलसी मठ में बागर्टी कैथेड्रल||1994
|-
| [[चित्र:Sweticxoveli.jpg|100px]]||मत्शेता के ऐतिहासिक स्मारक ||1994
|-
| [[चित्र:Svanetiskt torn.jpg|100px]] ||ऊपरी [[स्वनेती]]||1996
|}
=== [[जर्मनी]] (32) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Aachener Dom BW 2016-07-09 16-20-40.jpg|100px|]]
||[[आचेन कैथेड्रल]]
||1978
|
|
|
|-
|[[चित्र:Speyerer Dom Altrheinschleife.jpg|100px]]
||[[स्पीयर कैथेड्रल]]
||1981
|
|
|
|-
||[[चित्र:2004-06-27-Germany-Wuerzburg-Lutz Marten-Residenz side view 1.jpg|100px]]
|[[वुर्जबर्ग निवास]],प्रांगण उद्यान और निवास स्क्वायर के साथ
||1981
|
|
|
|-
|[[चित्र:Wies eingang.jpg|100px]]
||[[वीस चर्च|वीस]] का तीर्थ चर्च
||1983
|
|
|
|-
|[[चित्र:Augustusburg c.JPG|100px]]
||ब्रूल, ([[राइनलैन्ड]]) का [[ऑगस्टसबर्ग और फाल्कनलस्ट महल]]
||1984
|
|
|
|-
|[[चित्र:Hildesheim Cathedral.South.Tower.JPG|100px]]
||[[हिल्डशेइम]] का [[सेंट मैरी कैथेड्रल]] और [[सेंट माइकल चर्च]]
||1985
|
|
|
|-
|[[चित्र:Trier Porta Nigra BW 1.JPG|100px]]
||[[ट्रीअर]], जर्मनी का सबसे पुराना शहर, 9 स्मारक
||1986
|
|
|
|-
|[[चित्र:Lübeck Holstentor.jpg|100px]]
||[[ल्यूबेक]] का [[हंसियाटिक लीग|हंसियाटिक नगर]]
||1987
|
|
|
|-
|[[चित्र:Ostteil Sanssouci.jpg|100px]]
||[[पॉट्सडैम और बर्लिन के महल और उद्यान]] (ताला [[संस्सौची]] सहित)
||1990, 1992, 1999
|
|
|
|-
|[[चित्र:Lorsch.jpg|100px|]]
||[[लोर्श एबे|लोर्श के एबी और अल्टेनमुन्स्टर]]
||1991
|
|
|
|-
|[[चित्र:Goslar kaiserpfalz.jpg|100px]]
||[[रमेल्सबर्ग]] की खदान और [[गोस्लर]] का ऐतिहासिक नगर
||1992
|
|
|
|-
|[[चित्र:Bamberger Dom BW 6.JPG|100px]]
||[[बैम्बर्ग]] का नगर
||1993
|
|
|
|-
|[[चित्र:KlosterMaulbronnBrunnenhausInnen.jpg|100px]]
||[[मौलब्रॉन मठ]]
||1993
|
|
|
|-
|[[चित्र:Quedlinburg Schlossberg.jpg|100px]]
||कॉलेजिएट चर्च,[[कुडलिनबर्ग]] दुर्ग और पुराना शहर
||1994
|
|
|
|-
|[[चित्र:VH Hochofen1 pano.jpg|100px]]
||[[वोल्क्लिंगेन आयरनवर्क्स]]
||1994
|
|
|
|-
|[[चित्र:Grube Messel fg04.jpg|100px]]
||[[मेस्सेल पिट]] [[जीवाश्म]] स्थल
||1995
|
|
|
|-
|[[चित्र:Bauhaus.JPG|100px]]
||[[वाइमर]] और [[डेसौ]] की [[बोहौस]] और इसके स्थल
||1996
|
|
|
|-
|[[चित्र:Cologne Cathedral.jpg|100px]]
||[[कोलोन कैथेड्रल]]
||1996
|
|
|
|-
|[[चित्र:Stadtkirche Wittenberg.JPG|100px]]
||[[इस्लेबेन]] और [[विटनबर्ग]] के [[मार्टिन लुथर|लूथर मेमोरियल]]
||1996
|
|
|
|-
|[[चित्र:Markt Weimar.jpg|100px]]
||शास्त्रीय [[वाइमर]]
||1998
|
|
|
|-
|[[चित्र:Bodemuseum.jpg|100px]]
||[[संग्रहालय द्वीप]] ''(मुसुमसिंसेल),'' [[बर्लिन]]
||1999
|
|
|
|-
|[[चित्र:Wartburg Eisenach DSCN3512.jpg|100px]]
||[[वार्टबर्ग|वार्टबर्ग किला]]
||1999
|
|
|
|-
|[[चित्र:Riesigk.jpg|100px]]
||[[डेसौ-वोरलिट्ज गार्डन क्षेत्र]]
||2000
|
|
|
|-
|[[चित्र:StGeorgReichenau-pjt.jpg|100px]]
|| [[रेइचेनॉ द्वीप|रेइचेनॉ द्वीप के मठ]]
||2000
|
|
|
|-
|[[चित्र:ZecheZollverein.jpg|100px]]
||[[ज़ोलवेरिन कोयला खान औद्योगिक परिसर]]
||2001
||[[एस्सेन|एस्सेन, जर्मनी]]
|सांस्कृतिक:(ii), (iii)
|
|-
|[[चित्र:Stralsund St Nikolai.jpg|100px]]
||[[स्ट्रॉलसंड]] और [[विस्मर]] के ऐतिहासिक केंद्र
||2002
|[[मेक्क्लेंबुर्ग]], जर्मनी
|2002: (ii), (iv) सांस्कृतिक
|
|-
|[[चित्र:Mittelrhein Burg Katz.jpg|100px]]
||[[राइन जॉर्ज|ऊपरी मध्य राइन घाटी]]
||2002
|[[राइनलैन्ड]], जर्मनी
|2002:(ii), (iv), (v) सांस्कृतिक
|
|-
|[[चित्र:Bremen-rathaus-dom-buergerschaft.jpg|100px]]
||ब्रेमेन बाजार चौक में स्थित [[ब्रेमेन सिटी हॉल|सिटी हॉल]] और [[ब्रेमेन रोलैंड|रोलैंड]]
||2004
|[[ब्रेमेन]], जर्मनी
|सांस्कृतिक:(iii), (iv), (vi)
|
|-
|[[चित्र:Dresden2.jpg|100px]]
||[[ड्रेस्डेन एल्बे घाटी]]*
||2004
|[[सैक्सोनी]], जर्मनी
|सांस्कृतिक:(ii), (iii),(iv), (v)
|वाल्डस्क्लोस्चेन पुल के निर्माण के बाद स्थल को सूची से हटा दिया गया है।
|-
|[[चित्र:Park Muzakowski5.jpg|100px]]
||[[मुस्काउ उद्यान]] [[लुसैटियन नीइस|नीइस नदी]] के दोनों किनारों पर — [[#पोलैंड|पोलैंड]] के साथ साझा, जिसे वहाँ [[पार्क मुजाकोव्स्की]] के नाम से जाना जाता है।
||2004
|ऊपरी लुसैटिया, जर्मनी; पोलैंड
|सांस्कृतिक:(i), (iv)
|
|-
|[[चित्र:Saalburg.jpg|100px]]
||[[रोमन लाइम्स|रोमन साम्राज्य के सीमांत]]: [[#इंग्लैण्ड|युनाइटेड किंगडम]] के साथ साझा।
||2005
|जर्मनी, इंग्लैण्ड
|सांस्कृतिक:(ii), (iii), (iv)
|
|-
|[[चित्र:Regensburg 08 2006 2.jpg|100px]]
||स्टडैमोफ के साथ [[रेगेन्सबुर्ग]] का पुराना शहर
||2006
|रेगेन्सबुर्ग, जर्मनी
|(ii), (iii), (iv) सांस्कृतिक
|
|}
=== [[यूनान]] (18) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" width=35% | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" width=25%| अवस्थिति
! scope="col" width=20%| [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Bassai Temple Of Apollo Detail.jpg|100px]]
||[[बास्सै|बास्सै का अपोलो का मंदिर]]
||1986
|[[बास्सै]], [[मेस्सेनिआ]] [[पेलोपोनीज़ प्रदेश]]<br />{{coord|37.429722|21.900278|name=बास्सै}}
|392; 1986; i, ii, iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Acropolis of Athens 01361.JPG|100px]]
||[[एथेन्स का दुर्ग]]
|| 1987
|[[एथेंस]], [[अटिका]]<br />{{coord|37.97|23.73|name=Acropolis of Athens}}
|404; 1987; i, ii, iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Greece Delphi Tholos.jpg|100px]]
||[[डेल्फी]] की पुरातात्विक स्थल
||1987
|[[फोसिस]],[[मध्य ग्रीस क्षेत्र]]<br />{{coord|38.48|22.5|name=डेल्फी की पुरातात्विक स्थल}}
|393; 1987;i, ii, iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Theater of Epidaurus 1.jpg|100px]]
||[[एपिडौरुस]] की पुरातात्विक स्थल
||1988
|एपिडौरुस,[[पेलोपोनीज़ प्रदेश]]<br />{{coord|37.633333|23.133333|name=एपिडौरुस}}
|491; 1988; i, ii, iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:PorteDeRhodesGrece010906.JPG|100px]]
||[[रोड्स]] का मध्ययुगीन शहर
||1988
|रोड्स, [[दक्षिण एजियन]]<br />{{coord|36.433333|28.216667|name=रोड्स}}
|493; 1988;ii, iv, v (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Meteora Greece 2006.JPG|100px]]
||[[मेटेओरा]]
||1988
|[[कलाबका]] के पास, [[थेसली]]<br />{{coord|39.714167|21.631111|name=मेटेओरा}}
|455; 1988;i, ii, iv, v, vii
|
|-
| [[चित्र:Athos-simonos-petra.jpg|100px]]
||[[एथोस पर्वत]]
||1988
|उत्तरपूर्वी ग्रीस, <br />{{coord|40.157222|24.326389|name=एथोस पर्वत}}
|454; 1988; i, ii, iv, v, vi, vii
|
|-
| [[चित्र:Thessaloniki-Arch of Galerius (eastern face).jpg|100px]]
||[[थेसालोनिकी के पैलिओक्रिस्चियन और बैजन्टाईन स्मारक]]
||1988
|[[थेसालोनिकी]], [[केंद्रीय मैसेडोनिया क्षेत्र]]<br />{{coord|40.65|22.9}}
|456; 1988; i, ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Olympos.jpg|100px]]
||[[ओलिम्पिया]] के पुरातात्विक स्थल
||1989
|[[एलिस रीजनल यूनिट|एलिस]], [[पश्चिमी ग्रीस क्षेत्र]]<br />{{coord|37.64|21.67|name=ओलिम्पिया के पुरातात्विक स्थल}}
|517; 1989; i, ii, iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Mistra 7.jpg|100px]]
||[[मिस्ट्रस|मिस्ट्रस के पुरातात्विक स्थल]]
||1989
|[[लकोनिआ]], [[पेलोपोनीज़ प्रदेश]]<br />{{coord|37.08|22.37|name=मिस्ट्रस के पुरातात्विक स्थल}}
|511; 1989;ii, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:House of Cleopatra, Delos.jpg|100px]]
||[[डेलोस]] के द्वीप
||1990
|[[सिक्लेडिस]], [[दक्षिण एजियन]]<br />{{coord|37.39|25.16|name=डेलोस}}
|530; 1990; ii, iii, iv, vi
|
|-
| [[File:20090803 hosiosloukas12.jpg|100px]] [[File:Gotic Dafni.jpg|100px]] [[File:Nea Moni - buildings.JPG|100px]]
||[[चिओस]] के [[डेफनी मठ]], [[होसिओस लोकास]] का मठ<br />और [[चिओस के नीआ मोनी|नीआ मोनी]] का मठ
||1990
|होसिओस लोकास: [[डिस्टोमो]], [[बोएशिया]]<br />{{coord|38.394722|22.746667}}<br>डेफनी मठ: [[चैडारी]], [[अटिका]]<br />{{coord|38.013056|23.635833}}<br>नीआ मोनी: [[चिओस]], [[उत्तरी एजियन क्षेत्र]]<br />{{coord|38.373906|26.055739}}
|537; 1990; i, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Heraion of Samos (Greece), the only standing column.jpg|100px]]
||[[समोस]] का [[पायथागोरियन]] और [[समोस का हेरायन|हेरायन]]
||1992
|समोस, [[उत्तरी एजियन क्षेत्र]] <br />{{coord|37.701208|26.868783}}
|595; 1992; ii, iii
|
|-
| [[चित्र:Vergina2.jpg|100px]]
||एगाई की पुरातात्विक स्थल (आधुनिक नाम [[वर्जिना]])
||1996
|[[इमाथिया]] [[केंद्रीय मैसेडोनिया क्षेत्र]]<br />{{coord|40.47|22.43|}}
|780; 1996; i, iii (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Mycenae lion gate dsc06382.jpg|100px]]
||[[मैसीन]] और [[तीर्यंस]] की पुरातात्विक स्थल
||1999
|अर्गोलिस, [[पेलोपोनीज़ प्रदेश]]<br />{{coord|37.64|22.75}}
|941; 1999; i, ii, iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[File:Chora di Patmos con il Monastero di San Giovanni "il teologo".JPG|100px]]
||[[सेंट जॉन थियोलॉजियन का मठ]]<br />और उसके पास के ऐतिहासिक केंद्र
||1999
|[[पाटमोस]], [[दक्षिण एजियन]]<br />{{coord|37.309189|26.548053|name=}}
|942; 1999; iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:St. Spyridon Church in Corfu.jpg|100px]]
||[[कोरफू]] का प्राचीन नगर
||2007
|कोरफू, [[आयनियन द्वीप क्षेत्र]]<br />{{coord|39.616667|19.916667|name=Corfu}}
|978; 2007; iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[File:Ancient Theatre, built by Philip II in the 4th century BC and later reconstructed by the Romans, Philippi (7272297822).jpg|100px]]
|[[फिलिप्पी]]
|2016
|फिलिप्पी, [[कावाला]] [[पूर्वी मैसेडोनिया और थ्रेस]]<br />{{coord|41.013056|24.286389|name=}}
|1517; 2016;iii, iv
|
|}
=== [[वैटिकन सिटी|वेटिकन सिटी]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:150px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Roma San Paolo fuori le mura BW 2021-09-29 14-02-11 v2.jpg|100px]]
||रोम का ऐतिहासिक केंद्र, और दीवार के बाहर सैंट पॉल बेसिलिका, [[इटली]] के साथ साझा
||1980, 1990
|[[वैटिकन सिटी|वेटिकन सिटी]]
|सांस्कृतिक: i, ii, iv, vi
|
|-
| [[चित्र:StPetersBasilicaEarlyMorning.jpg|100px]]
||[[वैटिकन सिटी|वेटिकन सिटी]]
||1984
|वेटिकन सिटी
|सांस्कृतिक: i, ii, iv, vi
|
|}
=== [[हंगरी]] (8) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:ParliamentFromDanube.jpg|100px]]
||[[बुडापेस्ट]]; [[डैन्यूब नदी|डेन्यूब]] का किनारा, [[बुडा क़िला]] क्वार्टर और [[एंड्रैसी एवेन्यू]] सहित।
||1987,2002
|{{sort|हंगरी|[[बुडापेस्ट]], {{flag|हंगरी}}<br/><small>{{coord|47|28|57|N|19|4|14|E}}</small>}}
|400; 1987; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Okt 12.jpg|100px]]
||[[होलोको]]
||1987
|[[नॉग्रैड काउंटी]] {{flag|हंगरी}}<br/><small>{{coord|47|59|40|N|19|31|45|E|}}</small>
|401; 1987; v (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Aggtelek National Park, Baradla Cave.jpg|100px]]
||[[एजटेलेक कार्स्ट और स्लोवाक कार्स्ट की गुफाएं]]
||1995
|कोसेक क्षेत्र, [[स्लोवेनिया]] और <br/>[[एजटेलेक]], [[हंगरी]] के बीच साझा।<br/><small>{{coord|48|28|33|N|20|29|13|E}}</small>
|725; 1995; vii (सांस्कृतिक)
|
|-
|
||[[पन्नोन्हाल्मा आर्चएबी|पन्नोन्हाल्मा का मिलेनरी बेनेडिक्टिन मठ]] और इसके प्राकृतिक पर्यावरण
||1996
|[[पन्नोन्हाल्मा]], [[ग्योर-मोसोन-सोपरोन काउंटी]], हंगरी
|
|
|-
| [[चित्र:Hungarian Grey cattle-1.jpg|100px]]
||[[हॉर्टोबैजी राष्ट्रीय उद्यान]] — द ''पस्ज़ता''
||1999
|[[बोर्सोद-अबौज-ज़ेम्प्लेन काउंटी]], [[हंगरी]] <br/><small>{{coord|47|35|40|N|21|9|24|E}}</small>
|474; 1999; iv, v (प्राकृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Hungary pecs - szekesegyhaz1.jpg|100px]]
||[[पेक्स]] के प्रारंभिक ईसाई क़ब्रिस्तान
||2000
|[[पेक्स]], [[बरानिया काउंटी]], [[हंगरी]]<br/><small>{{coord|46.07732|N|18.22376|E}}</small>
|853; 2000; iii, iv(सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Podersdorf Nordstrand.jpg|100px]]
||[[न्युसिडल झील]] के सांस्कृतिक परिदृश्य
||2001
|[[बुर्गेनलैंड]], [[ऑस्ट्रिया]] और<br/> [[ग्योर-मोसोन-सोपरोन काउंटी]] <br/>[[हंगरी]] के साथ साझा। <br/><small>{{coord|47|43|9|N|16|43|22|E}}</small>
|772; 2001; v (प्राकृतिक)
|
|-
| [[File:Tokaj - Hegyalja-06.jpg|100px]]
||[[टोकज वाइन क्षेत्र|टोकज वाइन क्षेत्र सांस्कृतिक परिदृश्य]]
||2002
|बोर्सोड-एबौज-ज़ेम्प्लेन काउंटी {{flag|हंगरी}}<br/><small>{{coord|48|9|N|21|21|E}}</small>
|1063; 2002; iii, v
|
|}
=== [[आइसलैण्ड|आईस्लैंड]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Öxará01.jpg|100px]]
||[[थिंगवेल्लिर]] राष्ट्रीय उद्यान
||2004
|
|
|
|}
=== [[आयरलैण्ड गणराज्य]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Newgrange ireland 750px.jpg|100px]]
||[[न्यूग्रेंज]] के पुरातात्विक एन्सेबल
||1993
|
|
|
|-
| [[चित्र:Skelligmichsteps.jpg|100px]]
||[[स्केलिग माइकल]]
|| 1996
|
|
|
|}
=== [[इटली]] (41) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" width=45% | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Capodiponte0001.jpg|100px]]
||[[वेल्कामोनिका के शिला चित्रकारी]]
||1979
||[[ब्रेसिया प्रांत]], [[लोम्बार्डी]]
||94; 1979; iii, vi (सांस्कृतिक)
||
|-
|[[चित्र:Santa Maria delle Grazie Milano.jpg|100px]]
||[[लिओनार्दो दा विंची|लियोनार्डो दा विन्ची]] द्वारा "[[द लास्ट सपर]]" के साथ [[सांता मारिया डेले ग्राज़ी]] के चर्च और डोमिनिकन कॉन्वेंट
||1980
||[[मिलान]], [[लोम्बार्डी]]
||93; 1980; i, ii (सांस्कृतिक)
||
|-
||[[चित्र:Na Koloseum i K Franciszki Rzymianki.JPG|100px]]
|[[रोम]] का ऐतिहासिक केंद्र, और दीवार के बाहर सैंट पॉल बेसिलिका
||1980, 1990
| [[रोम]], [[लात्सियो]] <br/>[[#वेटिकन सिटी|वेटिकन सिटी]] के साथ साझा
|91; 1980;[nb 3] i, ii, iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Santa Maria del Fiore.jpg|100px]]
||[[फ़्लोरेन्स]] का ऐतिहासिक केंद्र
||1982
|[[फ़्लोरेन्स]], [[टस्कनी]]
|174; 1982; i, ii, iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Cathedral and Campanary - Pisa 2014 (2).JPG|100px]]
||[[पियाज़ा देई मिराकली|पियाज़ा देई मिराकली, पीसा]]
||1987, 2007
|[[पीसा]], [[टस्कनी]]
|395; 1987; i, ii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Venezia 2004.jpg|100px]]
||[[वेनिस]] और इसके [[अनूप झील|अनूप]]
||1987
| [[वेनिस प्रांत]], [[वैनेतो]]
|394; 1987; i, ii, iii, iv, v, vi (मिश्रित)
|
|-
|[[चित्र:View -3.jpg|100px]]
||[[सैन गिमिग्नानो]] का ऐतिहासिक केंद्र
||1990
|[[सिएना प्रांत]], [[टस्कनी]]
|550; 1990; i, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Matera01.jpg|100px]]
||[[सासी दि मटेरा|सासी]] और [[मटेरा]] के पैदल यात्री चर्चों का पार्क
||1993
|मटेरा, [[बाज़िलीकाता]]
|670; 1993; iii, iv, v (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:La Rotonda.png|100px]]
||[[विसेंज़ा]] शहर और [[वेनेतो के पैलाडियन विला]]
||1994, 1996
|[[वैनेतो]]
|712; 1994; i, ii (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Crespi d'Adda fabbrica.JPG|100px|]]
||[[क्रेस्पी डी'अडा]]
||1995
|[[बर्गेमो प्रांत]], [[लोम्बार्डी]]
|730; 1995; iv, v (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Ferrara Castello Estense 28mar06 01.jpg|100px]]
||[[फेरारा]], पुनर्जागरण का शहर, और इसके [[पो (नदी)#डेल्टा|पो डेल्टा]]
||1995, 1999
|फेरारा शहर, [[एमीलिया-रोमाञा]]
|733; 1995; ii, iii, iv, v, vi (मिश्रित)
|
|-
|[[चित्र:Naplesbay01.jpg|100px]]
||[[नेपल्स]] का ऐतिहासिक केंद्र
||1993
|नेपल्स शहर, [[कांपानिया]]
|726; 1995; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Piazza_del_Campo_(Siena).jpg|100px]]
||[[सिएना]] का ऐतिहासिक केंद्र
||1995
|सिएना शहर, [[टस्कनी]]
|717; 1995; i, ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Castel del Monte BW 2016-10-14 12-26-11 r.jpg|100px]]
|[[कास्टेल डेल मोंटे]]
||1994
|[[आंद्रिया]] और [[कोरेटो]], [[बारी प्रांत]], [[पुलिया]]
|398; 1996; i, ii, iii (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Ravenna BW 3.JPG|100px]]
||[[रवेना]] के शुरुआती ईसाई स्मारक
||1996
|रवेना शहर, [[एमीलिया-रोमाञा]]
|788; 1996; i, ii, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Dom Fassade3- s.jpg|100px]]
||[[पियेन्ज़ा]] शहर का ऐतिहासिक केंद्र
||1996
| पियेन्ज़ा, [[सिएना प्रांत]], [[टस्कनी]]
|789; 1996; i, ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Alberobello BW 2016-10-16 13-43-03.jpg|100px|]]
||[[अल्बेरोबेलो]] की [[ट्रुलो|ट्रुली]]
||1996
|[[बारी प्रांत]], [[पुलिया क्षेत्र]]
|787; 1996; iii, iv, v (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Der bourbonische Königspalast in Caserta.jpg|100px]]
||कसेर्टा में 18वीं शताब्दी का [[कसेर्टा का महल|शाही महल]] और उद्यान, [[वान्वितेली का जलवाही सेतु]], और [[सैन लुइसियो]] परिसर
||1997
|[[कसेर्टा प्रांत|कसेर्टा]] और [[बेनेवेंटो प्रांत]], [[कांपानिया]]
|549; 1997; i, ii, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Temple of Concordia, Agrigento.jpg|100px]]
||[[वैले देई टेम्पली|एग्रीजेंटो के पुरातात्विक क्षेत्र]]
||1997
|[[एग्रीजेंटो प्रांत]], [[सिसिली]]
|831; 1997; i, ii, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Herculaneum12.jpg|100px]]
|| [[पांपेई|पोम्पेई]] के पुरातात्विक क्षेत्र, [[हरक्यूलेनियम]] और [[टोरे अनुजीएता]]
||1997
|[[नेपल्स प्रांत]], [[कांपानिया]]
|829; 1997; iii, iv, v (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Orto botanico padova.JPG|100px]]
||वनस्पति-उद्यान (ऑर्टो बोटानिको दी पडोवा), [[पडुआ]]
||1997
|[[पादुआ प्रांत]], [[वैनेतो]]
|824; 1997; ii, iii
|
|-
|[[चित्र:Modena-Ghirlandina.jpg|100px]]
||[[मोडेना कैथेड्रल|कैथेड्रल]], [[टोरे सिविक]] और [[पियाज़ा ग्रांडे]], [[मोडेना]]
||1997
|[[मोडेना प्रांत]], [[एमीलिया-रोमाञा]]
|827; 1997; i, ii, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Vue de Positano depuis la plage.JPG|100px]]
||[[अमाफली तट]]
||1997
|[[सालेर्नो प्रांत]], [[कांपानिया]]
|830; 1997; ii, iv, v (प्राकृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Portovenere-vista01.jpg|100px]]
||[[पोर्टो वेनेरे]], [[सिंक टेरे]], और उनके द्वीप समूह ([[पलमारिया द्वीप|पलमारिया]], [[टिनो द्वीप|टिनो]] और [[टिनेटो]])
||1997
|[[ला स्पेज़िया प्रांत]], [[लिगुरिया]]
|826; 1997; ii, iv, v
|
|-
|[[चित्र:Stupinigi.jpg|100px]]
||[[रॉयल हाउस ऑफ सवोय के निवास]]
||1997
|[[ट्यूरिन प्रांत]], [[पिडमांट]]
|823; 1997; i, ii, iv, v (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[File:Nuraghe Su Nuraxi - Barumini - Sardinia - Italy - 29.jpg|100px]]
||[[सु नूरैक्सी]]
||1997
|[[मेडियो कैम्पिडानो प्रांत]], [[सार्डिनिया|सारडीनिया]]
|833; 1997; i, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Casale Bikini.jpg|100px]]
||[[विला रोमाना डेल कैसल]]
||1997
|[[एना प्रांत]], [[सिसिली]]
|832; 1997; i, ii, iii (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Aquileia Basilica, esterno - Foto Giovanni Dall'Orto.jpg|100px]]
||[[एक्विलिआ]] के पितृसत्तात्मक बेसिलिका और पुरातत्व क्षेत्र
||1998
|[[यूडाइन प्रांत]], [[फ्रिउली–वेनज़िआ जुलिआ]]
|825; 1998; iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Paestum BW 2013-05-17 13-58-28.jpg|100px]]
||[[सेलेन्टो और वेलो डी डियानो राष्ट्रीय उद्यान]], [[पेस्तुम]] और [[वेलिया]] के पुरातत्व स्थल और सर्टोसा डी पादुला के सहित
||1998
|[[सालेर्नो प्रांत]], [[कांपानिया]]
|842; 1998; iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Urbino z02.jpg|100px]]
||[[अरबीनो]] के ऐतिहासिक केंद्र
||1998
|[[पेसारो और अरबीनो प्रांत]], [[मार्श]]
|828; 1998; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Canopus vanaf serapium.jpg|100px]]
||[[विला एड्रियाना]] (टिवोली)
||1999
|[[रोम प्रांत]], लात्सियो
|907; 1999; i, ii, iii (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Assisi San Francesco BW 2.JPG|100px]]
||[[असीसी]], [[सैन फ्रांसेस्को डी अससी के बेसिलिका|सैन फ्रांसेस्को की बेसिलिका]] और अन्य फ्रांसिसन स्थलें
||2000
|[[पेरुजिया प्रांत]], [[उम्ब्रिआ]]
|990; 2000; i, ii, iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:L'Arena.JPG|100px]]
||[[वेरोना]] शहर
||2000
|[[वेरोना प्रांत]], [[वैनेतो]]
|797; 2000; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Eolie.jpg|100px]]
||इसोले इओली ([[एओलियन द्वीप समूह]])
||2000
|दक्षिणी [[तिरहेनियन सागर]], [[सिसिली]]
|908; 2000; viii
|
|-
|[[चित्र:Villa d'Este 01.jpg|100px]]
||[[विला डी'एस्टे]], टिवोली
||2001
|[[रोम प्रांत]], लात्सियो
|1025; 2001; i, ii, iii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:San domenico church01.jpg|100px]]
||[[वैल डी नोटो]] (दक्षिण-पूर्वी [[सिसिली]]) के गत [[बरॉक]] नगर
||2002
|[[सिसिली]]
|1024; 2002; i, ii, iv, v (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Sacro Monte di Crea. Cappella del Paradiso3.jpg|100px]]
||[[पिडमांट और लोम्बार्डी के सैक्री मोंटी]]
||2003
|[[लोम्बार्डी]], [[पिडमांट]]
|1068; 2003; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Tarquinia Tomb of the Leopards.jpg|100px]]
||[[सर्विटेरी]] और [[टेरक्विनिआ]] के एट्रस्कैन नेक्रोपोलिस
||2004
|[[विटेर्बो प्रांत]], लात्सियो
|1158; 2004; i, iii, iv
|
|-
|[[चित्र:Val d'orcia -pienza.JPG|100px]]
||[[वैल डी'ओर्सिया]]
||2004
|[[सिएना प्रांत]], [[टस्कनी]]
|1026; 2004; iv, vi
|
|-
|[[चित्र:Syracuse theatre2.jpg|100px]]
||पेंटालिका के [[सायराक्रूस]] और [[पेंटालिका के नेक्रोपोलिस|चट्टानी नेक्रोपोलिस]]
||2005
|[[सायराक्रूस प्रांत]], [[सिसिली]]
|1200; 2005; ii, iii, iv, vi
|
|-
|[[चित्र:Genova-DSCF7470.JPG|100px]]
||[[जेनोआ]]: ले स्ट्रैड नुओव और [[पलाज़ी देई रोली]] की प्रणाली
||2006
|[[जेनोवा प्रांत]], [[लिगुरिया]]
|1211; 2006; ii, iv
|
|}
=== [[लातविया]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Riga Dom-Düna.jpg|100px]]
||[[रीगा]] के ऐतिहासिक केंद्र
||1997
|-
|[[चित्र:Hammerfest Meridianstein.jpg|100px]]
||[[स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क]] — [[#बेलारस|बेलारूस]], [[#एस्टोनिया|एस्टोनिया]], [[#फिनलैंड|फिनलैंड]], [[#लताविया|लताविया]], [[#लिथुआनिया|लिथुआनिया]], [[#मोल्दोवा|मोल्दोवा]], [[#नॉर्वे|नॉर्वे]], [[#स्वीडन|स्वीडन]], [[#यूरोपियन रूस|रूसी संघ]] और [[#यूक्रेन|यूक्रेन]] के साथ साझा
||1997
|}
=== [[लिथुआनिया]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Vilnius Ostrobramska.jpg|100px]]
||[[विल्नुस]] के ऐतिहासिक केंद्र (पुराना शहर)
||1994
|-
|
||[[कौरोनियन स्पिट]]
||2000
|-
|[[चित्र:Lithuania Kierniów mounds2.jpg|100px]]
||[[कर्नवे]] पुरातत्व स्थल (कर्नवे के सांस्कृतिक अरक्षित)
||2004
|-
|[[चित्र:Hammerfest Meridianstein.jpg|100px]]
||[[स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क]] — [[#बेलारस|बेलारूस]], [[#एस्टोनिया|एस्टोनिया]], [[#फिनलैंड|फिनलैंड]], [[#लताविया|लताविया]], [[#लिथुआनिया|लिथुआनिया]], [[#मोल्दोवा|मोल्दोवा]], [[#नॉर्वे|नॉर्वे]], [[#स्वीडन|स्वीडन]], [[#यूरोपियन रूस|रूसी संघ]] और [[#यूक्रेन|यूक्रेन]] के साथ साझा
||2005
|}
=== [[लक्ज़मबर्ग]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Mudam 04 jnl.jpg|100px]]
||[[लक्ज़मबर्ग नगर]]: इसके पुराने आवास और किलेबंदी
||1994
|}
=== [[माल्टा]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:St Sebastian Curtain.jpg|100px]]
||[[वैलेटा|वैलेटा नगर]]
||1980
|-
|[[चित्र:Malta 04 Hypogeum Hal Saflieni.jpg|100px]]
||[[हेल-सफ्लिनी का हायपोजियम]]
||1980
|-
|
||*[[माल्टा के बड़े पत्थरों का बना मंदिर]]: [[गंतिजा]], [[हैगर किम]], [[मनेज्ड्रा]], और [[टारज़िएन मंदिर]]
||1980, 1992
|}
=== [[मॉल्डोवा|मोल्डोवा]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Hammerfest Meridianstein.jpg|100px]]
| [[स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क]] — [[#बेलारस|बेलारूस]], [[#एस्टोनिया|एस्टोनिया]], [[#फिनलैंड|फिनलैंड]], [[#लताविया|लताविया]], [[#लिथुआनिया|लिथुआनिया]], [[#मोल्दोवा|मोल्दोवा]], [[#नॉर्वे|नॉर्वे]], [[#स्वीडन|स्वीडन]], [[#यूरोपियन रूस|रूसी संघ]] और [[#यूक्रेन|यूक्रेन]] के साथ साझा
| 2005
|}
=== [[मॉन्टेनीग्रो]] (2) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Alley kotor.JPG|100px]]
| [[कोटोर]] का प्राकृतिक और सांस्कृतिक-ऐतिहासिक क्षेत्र
| 1979
|-
| [[चित्र:Durmitor - near Minin bogaz.jpg|100px]]
| [[डर्मिटर राष्ट्रीय उद्यान]]
| 1980, 2005
|}
=== [[नीदरलैण्ड|नीदरलैंड]] (10) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Schokland4.jpg|100px]]
| [[शोकलैंड]] और आसपास के स्थान
| 1995
|नूरदूस्तपोल्डेर, [[फ्लेवोलैंड]]<br /><small>{{Coord|52|38|19|N|5|46|18|E|display=inline}}<small>
|739; सांस्कृतिक (iii, v)
|
|-
| [[चित्र:Muizenfort.jpg|100px]]
| [[स्टेलिंग वैन एम्स्टर्डम|एम्स्टर्डम की सुरक्षा घेरा]]
| 1996
| [[उत्तर हॉलैंड]], [[यूट्रेक्ट]]<br /><small>{{Coord|52|22|28|N|4|53|35|E|display=inline}}<small>
| 759; सांस्कृतिक (ii, iv, v)
|
|-
| [[चित्र:Willemstad harbor.jpg|100px]]
| [[विलेमस्टाद|विलेमस्टाद, भीतरी शहर और बंदरगाह, कुराकाओ का ऐतिहासिक क्षेत्र]]
| 1997
| [[विलेमस्टाद]], कुराकाओ <br /><small>{{Coord|12|6|6.984|N|68|54|7.99|W}}<small>
| सांस्कृतिक (ii, iv, v)
|
|-
| [[चित्र:Windmills of Kinderdijk (11).JPG|100px]]
| [[किंडरडिज्क की पवन चक्कियाँ|किंडरडिज्क-एल्शआउट के चक्कियों का संजाल]]
| 1997
| [[अल्बलास्डरम]] और [[नीउव-लेक्करलैंड]], [[दक्षिण हॉलैंड]]<br /><small>{{Coord|51|52|57|N|4|38|58|E|display=inline}}<small>
| 818; सांस्कृतिक (i, ii, iv)
|
|-
| [[चित्र:Woudagemaal 03.JPG|100px]]
| [[आईआर.डी.एफ. वाउडेजेमाल]] (डी.एफ. वौडा भाप पंपिंग स्टेशन)
| 1998
| [[लेमर]], [[लेमस्टरलैंड]] [[फ्राइजलैंड]]<br /><small>{{Coord|52|50|44.988|N|5|40|44.00|E|display=inline}}<small>
| सांस्कृतिक (i, ii, iv)
|
|-
| [[चित्र:Beemster 1869.png|100px]]
| ड्रूगमेकेरिज दे बीमस्टर ([[बीमस्टर]] पोल्डर)
| 1999
| [[बीमस्टर]], [[उत्तर हॉलैंड]]<br /><small>{{Coord|52|32|56|N|4|54|40|E|display=inline}}<small>
| सांस्कृतिक (i, ii, iv)
|
|-
| [[चित्र:Rietveldschroderhuis.jpg|100px]]
| रित्वेल्ड स्क्रोडरूइस ([[रित्वेल्ड स्क्रोडर घर]])
| 2000
| [[यूट्रेक्ट]], यूट्रेक्ट<br /><small>{{Coord|52|5|7|N|5|8|50|E|display=inline}}<small>
| सांस्कृतिक (i, ii)
|
|-
|[[File:Waddenzee zon.jpg|100px]]
|[[वैडन सागर]]
|2009
|[[फ्राइजलैंड]], [[उत्तर हॉलैंड]]<br /><small>{{Coord|53|23|27|N|5|39|57|E|display=inline}}<small>
|1314; प्राकृतिक (viii, ix, x)
|
|-
|[[File:Amsterdam airphoto.jpg|100px]]
|[[एम्स्टर्डम की नहरें]]
|2010
|[[एम्स्टर्डम]], [[उत्तर हॉलैंड]]<br /><small>{{Coord|52|21|54|N|4|53|16|E|display=inline}}</small>
|सांस्कृतिक (i, ii, iv)
|
|-
|[[File:Rotterdam van nelle fabriek.jpg|100px]]
|[[वैन नेले फैक्टरी]]
|2014
|[[रॉटरडैम]], [[दक्षिण हॉलैंड]]<br /><small>{{Coord|51|55|24|N|4|26|00|E|display=inline}}</small>
|सांस्कृतिक (ii, iv)
|
|}
=== [[नॉर्वे|नार्वे]] (8) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Bryggen, Bergen3.JPG|100px]]
| [[ब्रायगन]]
| 1979
|[[होर्डलैंड]]<br/><small>{{coord|60|23|50|N|5|19|23|E}}</small>
|सांस्कृतिक: (Iii)
|
|-
| [[चित्र:Urnesstavkirke.jpg|100px]]
| [[उर्नेस स्टाव चर्च]]
| 1980
| [[सॉयन ऑग फ्योर्डेन]]<br/><small>{{coord|61|18|00|N|7|20|00|E}}</small>
| सांस्कृतिक:(i) (ii) (iii)
|
|-
| [[चित्र:Rorosmartna 20070220.JPG|100px]]
| [[रोरोस|रोरोस खनन शहर और उसके परिदृश्य]]
| 1980
| [[सुर-त्रोंदेलाग]]<br/><small>{{coord|62|34|26|N|11|23|08|E}}</small>
| सांस्कृतिक:(Iii) (iv) (v)
|
|-
| [[चित्र:Altarockcarvings2.jpg|100px]]
| [[आल्टा के शिला नक्काशियाँ]]
| 1985
| [[फ़िनमार्क]]<br/><small>{{coord|69|57|00|N|23|11|00|E}}</small>
| सांस्कृतिक:(Iii)
|
|-
| [[चित्र:Vegavista.jpg|100px]]
| [[वेगावयेन|वेगा द्वीप]] — वेगा द्वीपसमूह
| 2004
| [[नोर्डलैंड]]<br/><small>{{coord|65|37|00|N|11|45|00|E}}</small>
| सांस्कृतिक: (v)
|
|-
| [[चित्र:Hammerfest Meridianstein.jpg|100px]]
| [[स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क]] - बेलारूस, एस्टोनिया, फिनलैंड, लताविया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, स्वीडन, रूसी संघ और यूक्रेन के साथ साझा
| 2005
| [[फ़िनमार्क]]
| सांस्कृतिक:(II) (iii) (vi)
|
|-
| [[चित्र:207 Geirangerfjord.jpg|100px]]
| पश्चिम नार्वेजियन फॉर्ड्स - [[गीरेंजरफॉजर्ड]] और [[नेरोफॉजर्ड]]
| 2005
| [[मोर ओग रोंस्डल]] और [[सॉयन ऑग फ्योर्डेन]]<br/><small>{{coord|62|07|00|N|7|10|00|E}}</small>
| प्राकृतिक: (vii) (viii)
|
|-
| [[File:Ammoniakkvannfabrikken Notodden 1914 1916.jpg|150x150px]]
| [[रुजुकन-नोटोडेन औद्योगिक विरासत स्थल]]
| 2015
| [[टेलीमार्क]]<br/><small>{{coord|59|52|43|N|8|35|37|E}}</small>
| सांस्कृतिक: (ii)(iv)
|
|}
=== [[पोलैंड]] (13) ===
{{details|पोलैंड के विश्व धरोहर स्थल}}
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Sukiennice at night (2007).jpg|100px]]
|| [[क्रकाउ पुराना शहर|क्राको के ऐतिहासिक केंद्र]]
|| 1978
| [[क्रकाउ]]
| 29; 1978; iv
|
|-
| [[चित्र:Wieliczka-daVinci.jpg|100px]]
|| [[विएलिस्ज़्का]] और [[बोस्चनिया]] के शाही नमक खान
|| 1978
| [[विएलिस्ज़्का]]
| 32; 1978; iv
|
|-
| [[चित्र:Birkenau gate.JPG|100px]]
|| [[आउशवित्स यातना शिविर|आउशवित्स बिर्कनाउ, जर्मन नाज़ी यातना शिविर]] (1940-1945)
|| 1979
| [[औसवेसिम]]
| 31; 1979; vi
|
|-
| [[चित्र:Wisent.jpg|100px]]
|| [[बिआलोविज़ा वन]]
|| 1979, 1992
| बेलारूस और पोलैंड के बीच साझा
| 33; 1979; vii
|
|-
| [[चित्र:Warszawa Rynek2.png|100px]]
|| [[वारसॉ|वारसॉ के ऐतिहासिक केंद्र]]
|| 1980
| [[वारसॉ]]
|30; 1980; ii, vi
|
|-
| [[चित्र:Zamosc 12.jpg|100px]]
|| [[ज़मोज़]] का पुराना नगर
|| 1992
|| [[ज़मोज़]]
|| 564; 1992; iv
|
|-
| [[चित्र:Malbork 1.jpg|100px]]
|| [[मेलबोर्क किला|मेलबोर्क में टेटोनिक आदेश का महल]]
|| 1997
| [[मेलबोर्क]]
| 847; 1997; ii, iii, iv
|
|-
| [[चित्र:Torun01CenterWithWall level corr.jpg|100px]]
|| [[टोरून के मध्ययुगीन नगर]]
|| 1997
| [[टोरून]]
| 835; 1997; ii, iv
|
|-
| [[चित्र:Monastery in Kalwaria Zebrzydowska 02.JPG|100px]]
|| [[कलवारिया ज़ेब्राइज़ोव्स्का]]: मैननेरिस्ट वास्तु और उद्यान परिदृश्य परिसर और तीर्थयात्री उद्यान
|| 1999
| [[कलवारिया ज़ेब्राइज़ोव्स्का]]
| 905; 1999; ii, iv
|
|-
| [[चित्र:Jawor2.jpg|100px]]
|| [[शांति के चर्च|जवोर और स्विडनिका में शांति के चर्च]]
|| 2001
| [[जवोर]], [[स्विडनिका]]
| 1054; 2001; iii, iv, vi
|
|-
| [[चित्र:Kosciol Haczow.JPG|100px]]
|| [[दक्षिणी लघुतर पोलैंड के लकड़ी के चर्च]]
|| 2003
| [[लघुतर पोलैंड वोइवोडीशिप]]
| 1053; 2003; iii, iv
|
|-
| [[चित्र:Park Muzakowski4.jpg|100px]]
|| [[मुस्कुएर उद्यान]]/[[मुज़कोवस्की उद्यान]], [[लुसैटियन नीस|निसा नदी]] के दोनों ओर
|| 2004
| जर्मनी और पोलैंड के बीच साझा।
| 1127; 2004; i, iv
|
|-
| [[चित्र:Wrocław - Jahrhunderthalle5.jpg|100px]]
|| वरोक्लाव का [[शताब्दी महाकक्ष]]
|| 2006
| [[वरोक्लाव]]
| 1165; 2006; i, ii, iv
|
|}
=== [[पुर्तगाल]] (15)===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Cidade de Angra do Heroísmo, ilha Terceira, Açores.jpg|100px]]
| अज़ोरेस के [[आंगरा दो हेरोइसमो]] शहर का केंद्रीय क्षेत्र
| 1983
| [[ट्रेसिरा द्वीप]]
| 206; 1983; iv, vi सांस्कृतिक
|
|-
| [[चित्र:Convento de Cristo, safe inside Tomar castle (54199027283).jpg|100px]]
| [[तोमर गोत्र (जाट)|तोमर]] का [[मसीह का सम्मेलन]]
| 1983
| [[तोमर गोत्र (जाट)|तोमर]]
| 265; 1983; i, vi सांस्कृतिक
|
|-
| [[चित्र:BatalhaFacade1.jpg|100px]]
| [[बटाल्हा का मठ]]
| 1983
| [[बटाल्हा]]
| 264; 1983; i, ii सांस्कृतिक
|
|-
| [[चित्र:Jerónimos April 2009-4.jpg|100px]]
| [[लिस्बन]] में [[जेरोनीमोस मठ|हियरोनाइट्स का मठ]] और [[बेलेम मीनार]]
| 1983
| [[लिस्बन]]
| 263; 1983, 2008 (विस्तारित); iii, iv; सांस्कृतिक
|
|-
| [[File:Templo romano de Évora (1).jpg|100px]]
| [[एवोरा]] का ऐतिहासिक केंद्र
| 1986
| [[एवोरा]]
| 361; 1986; ii, iv सांस्कृतिक
|
|-
| [[चित्र:Mosteiro de Alcobaça (Portugal).jpg|100px]]
| [[अल्कोबेसा मठ]]
| 1989
| [[अल्कोबेसा]]
| 505; 1989; i, iv सांस्कृतिक
|
|-
| [[चित्र:Remote views of Câmara Municipal de Sintra 93.jpg|100px]]
| [[सिंट्रा]] का सांस्कृतिक परिदृश्य
| 1995
| [[सिंट्रा]]
| 723; 1995; ii, iv, v; सांस्कृतिक
|
|-
| [[चित्र:PortoCityHall.jpg|100px]]
| [[पोर्टो]] का ऐतिहासिक केंद्र
| 1996
| [[पोर्टो]]
| 755; 1996; iv सांस्कृतिक
|
|-
| [[चित्र:Rock Art Foz Coa 01.jpg|100px]]
| [[सिगा वर्दे]] और [[कोआ घाटी की प्रागैतिहासिक शिला कलाकृति स्थल]]
| 1998
| डोरो क्षेत्र (स्पेन के साथ साझा)
| 866; 1998, 2010 (विस्तारित); i, iii सांस्कृतिक
|
|-
| [[चित्र:Forest Los Tilos.jpg|100px]]
| [[मदेरा]] के [[लॉरेल वन|लॉरीसिल्वा]] वन क्षेत्र
| 1999
| [[मदेरा]]
| 934; 1999; ix, x प्राकृतिक
|
|-
| [[चित्र:Rio douro.jpg|100px]]
| [[अल्टो डोरो|अल्टो डोरो वाइन क्षेत्र]]
| 2001
| [[डोरो सब्रेगियन]]
| 1046; 2001; iii, iv, v;
|
|-
| [[File:D. Afonso Torre.jpg|100px]]
| [[गुइमारीस]] का ऐतिहासिक केंद्र
| 2001
| [[गुइमारीस]], [[मिन्हो प्रांत]]
| 1031; 2001; ii, iii, iv; सांस्कृतिक
|
|-
| [[चित्र:Landscape of the Pico Island Vineyard Culture.jpg|100px]]
| [[पिको द्वीप वाइनयार्ड संस्कृति का परिदृश्य]]
| 2004
| [[पिको द्वीप]], [[एज़ोरेस]]
| 1117; 2004; iii, v;
|
|-
| [[File:Elvas e muralhas.jpg|100px]]
| [[एल्वस के सीमा गढ़सेना नगर और इसकी किलेबंदी]]
| 2012
| [[एल्वस]]
| 1367; 2012; iv
|
|-
| [[File:Royal Palace, Universidade de Coimbra (10249002256).jpg|100px]]
| [[कोइम्ब्रा विश्वविद्यालय|कोइम्ब्रा विश्वविद्यालय - अल्ता और सोफिया]]
| 2013
| [[कोइम्ब्रा]]
| 1387; 2013; ii, iii, iv, vi;
|
|}
=== [[रोमानिया]] (7) ===
{{Main|UNESCO World Heritage Sites in Romania}}
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Delta_Dunarii_500.jpg|100px|]]
||[[डेन्यूब डेल्टा]]
||1991
|[[टलसी काउंटी]]
| 588; 1991; vii, x
|
|-
|[[File:Mănăstirea Arbore.JPG|100px|]][[File:Mănăstirea Sfântul Ioan cel Nou26.jpg|100px|]]
||[[मोल्दाविया के चर्च]]
||1993
| [[सुसेवा काउंटी]]
|598; 1993, 2010 (विस्तारित); i, iv
|
|-
|[[चित्र:Horezu_church.jpg|100px|]]
||[[होरेज़ू मठ]]
||1993
|[[होरेज़ू]], [[वैल्सिया काउंटी]]
|597; 1993; ii
|
|-
|[[चित्र:Biertan_IMG_5606.jpg|100px|]]
||[[ट्रांसिल्वेनिया के किलेबंद चर्चों के साथ गांव]]
||1993, 1999
|ट्रांसिल्वेनिया
|596; 1993, 1999 (विस्तारित); iv
|
|-
|[[चित्र:Sarmizegetusa_temples.jpg|100px|]][[File:Costesti Cetatuie Dacian Fortress 2011 - Tower House One and Stairs-4.jpg|100px|]]
||[[ओरस्टी पहाड़ों के डासियन किले]]
||1999
| [[हूनेदोआरा काउंटी]], [[अल्बा काउंटी]]
|906; 1999; ii, iii, iv
|
|-
| [[File:Sighisoara - Strada Turnului.jpg|100px|]]
||[[सिघिसोरा का ऐतिहासिक केंद्र]]
||1999
|सिघिसोरा, [[म्यूरेस काउंटी]]
|902; 1999; iii, iv
|
|-
|[[चित्र:S%C3%A2rbi_Josani.jpg|100px|]][[File:Biserca de lemn de la Șurdești, Maramureș.jpg|100px|]]
||[[मारमुरेस के लकड़ी के चर्च]]
||1999
| [[मारमुरेस काउंटी]]
| 904; 1999; iv
|
|}
=== [[रूस|रूसी संघ]] (युरोपियाई रूस) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" width=30%| स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" width=30%| अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Trinitylavra.jpg|100px]]
| [[सेंट सर्जियस के ट्रिनिटी लैव्रा|ट्रिनिटी सर्जियस लैव्रा]] के वास्तुशिल्प एन्सेबल
| 1993
| [[सेर्गियेव पोसाद]], [[मास्को ओब्लास्ट]]
| 657; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Kolomen00.jpg|100px]]
| असेंशन चर्च, [[कोलोमेन्सकोय]]
| 1994
| [[मास्को]]
| 634; ii (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Derbent winter.jpg|100px]]
| [[डेर्बेन्ट]] के नगरकोट, प्राचीन शहर और किले की इमारतें
| 2003
| [[डेर्बेन्ट]], [[दाग़िस्तान]]
| 1070; iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Barents old.jpg|100px]]
| [[सॉलोवेत्स्की द्वीप समूह|सॉलोवेत्स्की द्वीपों]] का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक समष्टि
| 1992
| [[सॉलोवेत्स्की द्वीप समूह]], [[आरख़ान्गेल्स्क ओब्लास्त|अर्खांगेल्स्क ओब्लास्ट]]
| 632; iv
|
|-
| [[File:Вид с озера Лебедь на залив.jpg|100px]]
| [[कौरोनियन स्पिट]]
| 2000
| [[कलिनिनग्रैड ओब्लास्ट]]- [[#लिथुआनिया|लिथुआनिया]] के साथ साझा
| 994; v
|
|-
| [[चित्र:Ferapontovo.jpg|100px]]
| [[फेरापोंतोव मठ]] के समष्टि
| 2000
| [[वोलोडा ओब्लास्ट]]
| 982; i, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Novodevichy zima.jpg|100px]]
| [[नवोदेवीची कान्वेंट]] के समष्टि
| 2004
| [[मास्को|मॉस्को]]
| 1097; i, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Kazan.jpg|100px]]
| [[काज़ान क्रेमलिन]] के ऐतिहासिक और वास्तुशिल्प परिसर
| 2000
| [[काज़ान]], [[तातारस्तान]]
| 980; ii, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:PeterhoffFountains.jpg|100px]]
| [[सेंट पीटर्सबर्ग के ऐतिहासिक केंद्र और स्मारकों के संबंधित समूह]]
| 1990
| [[सेंट पीटर्सबर्ग]]
| 540; i, ii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Kotorosl.jpg|100px]]
| [[यरोस्लाव]] शहर के ऐतिहासिक केंद्र
| 2005
| [[यरोस्लावी ओब्लास्ट]]
| 1170; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Natalya dulchenko kokui.jpg|100px]]
| [[वेलीकी नोव्गोरोड|नोव्गोरोड]] और परिवेश के ऐतिहासिक स्मारक
| 1992
| [[नॉवग्रोद ओब्लास्ट]]
| 604; ii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Kischi Kirchen und Glockenturm.JPG|100px]]
| [[किजी पोगोस्त]]
| 1990
| [[कारेलिया गणतंत्र]]
| 544; i, iv, v (प्राकृतिक)
|
|-
| [[चित्र:2003-04-18 Moscow Kremlin.jpg|100px]]
| [[मॉस्को क्रेमलिन]] और [[रेड स्क्वायर]]
| 1990
| [[मास्को|मॉस्को]]
| 545; i, ii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Hammerfest Meridianstein.jpg|100px]]
| [[स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क]]
| 2005
| [[लेनिनग्राद ओब्लास्ट]]- बेलारूस, एस्टोनिया, फिनलैंड, लताविया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, नॉर्वे, स्वीडन और यूक्रेन के बीच साझा।
| 1187; ii, iii, vi (प्राकृतिक)
|
|-
| [[File:Four herous01.JPG|100px]]
| [[वर्जिन कोमी वन]]
| 1995
| [[कोमी गणराज्य]]
| 719; vii, ix (प्राकृतिक)
|
|-
| [[File:Rododendron1.jpg|100px]]
| [[पश्चिमी काकेशस]]
| 1999
| [[क्रास्नोदार क्राय]] और [[आदिगेया]]
| 900; ix, x (प्राकृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Bogolyubovo.jpg|100px]]
| [[व्लादिमीर और सुजदेल के सफेद स्मारक]]
| 1992
| [[व्लादिमीर ओब्लास्ट]]
| 633; i, ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[सर्बिया]] (4)===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Sopocani monastery16.jpg|100px]]
| [[स्टारी रस]] और [[सोपोचीनी मठ]] का सांस्कृतिक-ऐतिहासिक क्षेत्र
| 1979
| [[रास्का (क्षेत्र)|रास्का]]
| 96; i, iii (सांस्कृतिक)
|
|-
|
| [[स्टूडेनिका मठ]]
| 1986
| [[क्रलजेवो]]
| 389; i, ii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:14th-century_fresco_of_Jesus_Christ_bearing_the_cross,_Visoki_Dečani,_Kosovo.jpg|100px]]
| [[कोसोवो के मध्ययुगीन स्मारक]]
||2004, 2006
| [[डेकानी]], [[ग्रेकेनिका]], [[पेजे]], [[प्रिजरेन]]
| 724; ii, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Felix romuliana.jpg|100px]]
| [[गेम्जिग्राद|गेम्जिग्राद-रोम्यूलिन, गैलेरियस का महल]]
| 2007
| [[ज़ेजेकार]]
| 1253; iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[स्लोवाकिया]] (7)===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Banska Stiavnica- pohlad z Katovej ulice.jpg|100px]]
||[[बेन्स्का स्टायवेनिका]] का ऐतिहासिक नगर
|| 1993
| [[बेन्स्का स्टायवेनिका]], [[बैंस्का बिस्त्रिका क्षेत्र]]
| सांस्कृतिक: (iv), (v)
|
|-
| [[चित्र:Spisska nova ves...castle.jpg|100px]]
||[[लेवोका, स्पिस किला और संबंधित सांस्कृतिक स्मारक]]
|| 1993
| [[प्रीसोव क्षेत्र|प्रीसोव]] और [[कोसिस क्षेत्र]]
| सांस्कृतिक: (Iv)
|
|-
| [[चित्र:Vlkolinecslovakia001.jpg|100px]]
||[[वल्कोलिनेस]]
|| 1993
| [[रुजोमबेरोक जिला]], [[ज़िलिना प्रदेश]]
| सांस्कृतिक:(iv), (v)
|
|-
| [[चित्र:Zadielska tiesnava.jpg|100px]]
| [[एजटेलेक कार्स्ट और स्लोवाक कार्स्ट की गुफाएं]]*
|| 1995, 2000
| कोसेक क्षेत्र, [[स्लोवेनिया]] और एजटेलेक, [[हंगरी]] के बीच साझा।
| प्राकृतिक: (Vii)
|
|-
| [[चित्र:Bardejov_namesti_3773.JPG|100px]]
||[[बर्डेजोव]] नगर संरक्षण आरक्षित
|| 2000
||बर्डेजोव, [[प्रीसोव क्षेत्र]]
||सांस्कृतिक: (iii), (iv)
|
|-
||[[File:Ручей в Стужице.JPG|100px]]
||[[कार्पैथियंस के आद्य बीच वन और यूरोप के अन्य क्षेत्र]]
|| 2007
| [[प्रीसोव क्षेत्र]]- [[#यूक्रेन|यूक्रेन]] के साथ साझा
| प्राकृतिक: (ix)
|
|-
||[[File:Bodruzal 2011 Cerkva sv Mikulasa.jpg|100px]]
||[[स्लोवाक कार्पैथियंस के लकड़ी का चर्च]]
|| 2008
| [[कोसिस क्षेत्र|कोसिस]], [[बैंस्का बिस्त्रिका क्षेत्र|बैंस्का बिस्त्रिका]], [[ज़िलिना प्रदेश|ज़िलिना]] और [[प्रीसोव क्षेत्र]]
| सांस्कृतिक: (iii), (iv)
|
|}
=== [[स्लोवेनिया]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Skocjanske jame.jpg|100px]]
| [[स्कोज़न गुफाएं]]
| 1986
|}
=== [[स्पेन]] (40) ===
{{Main|स्पेन के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल}}
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Spain Andalusia Granada BW 2015-10-25 17-22-07.jpg|100px|]]
||[[अलहम्ब्रा]], [[ज़ेनेरालाइफ]] और [[अलबैज़िन]],
||1984, 1994
|[[ग्रेनाडा|ग्रेनेडा]]
|314; 1984, 1 99 4 (विस्तारित); i, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Catedral de Burgos-Fernán González.JPG|100px]]
||[[बर्गोस कैथेड्रल]]
||1984
|[[बर्गोस]]
|316; 1984; ii, iv, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
||[[चित्र:Mezquita Orange Tree Courtyard.jpg|100px]]
| [[कोर्डोबा, स्पेन|कोर्डोबा]] का ऐतिहासिक केंद्र
||1984, 1994
|[[कोर्डोबा, स्पेन|कोर्डोबा]]
|313; 1984, 1 99 4 (विस्तारित); i, ii, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:El Escorial-Madrid.jpg|100px]]
||[[एल एस्कोरल|मठ और एस्कोरियल स्थल]],
||1984
|[[मद्रिद|मैड्रिड]]
|318; 1984; i, ii, vi (सांस्कृतिक)
|
|-
|[[चित्र:Casa Milà - Barcelona, Spain - Jan 2007.jpg|100px]]
||एंटोनी गोदी की कृतियाँ
||1984, 2005
|बार्सिलोना
|320; 1984, 2005 (विस्तारित); i, ii, iv
|
|-
|[[चित्र:Techo de Altamira (replica)-Museo Arqueológico Nacional.jpg|100px]]
||[[अल्तामिरा की गुफा]]
||1985
|कंटैब्रिया, एस्टुरिस
|310; 1 9 85, 2008 (विस्तारित); i, iii
|
|-
|[[चित्र:Oviedo el viajero JMM.JPG|100px]]
||[[एस्टुरिस वास्तुकला|ओवेडियो के स्मारक और एस्टुरिस राज्य]]
||1985, 1998
|ओवेडियो, एस्टुरिस
|312; 1 9 85, 1 99 8 (विस्तारित); i, ii, iv
|
|-
|[[चित्र:Ávila 24-8-2002.jpg|100px]]
||[[आवीला]] का पुराना शहर, और इसका एक्सट्रा-मुरुस चर्च
||1985
|[[आवीला]], कैस्टिले और लेओन
|348; 1985, 2007 (संशोधित); iii, iv
|
|-
|[[चित्र:Segovia - 02.jpg|100px]]
||[[सेगोविया]] का पुराना शहर और इसका [[जलवाही सेतु]]
||1985
|[[सेगोविया]], कैस्टिले और लेओन
|311; 1985; i, iii, iv
|
|-
|[[चित्र:Catedral santiago compostela.jpg|100px|]]
||[[सांतिआगो दे कोम्पोस्तेला]] (पुराना शहर)
||1985
|[[सांतिआगो दे कोम्पोस्तेला]], [[गलिशिया]]
|347; 1985; i, ii, vi
|
|-
|[[चित्र:Garajonay3.JPG|100px]]
||[[गैराजोनेय राष्ट्रीय उद्यान]]
||1986
|ला गोमेरा, [[कैनरी द्वीपसमूह]]
|380; 1986; vii, ix
|
|-
|[[चित्र:Toledo Skyline Panorama, Spain - Dec 2006.jpg|100px]]
||[[तोलेदो, स्पेन|तोलेदो]] का ऐतिहासिक शहर Historic City of [[Toledo, Spain|Toledo]]
||1986
|[[तोलेदो, स्पेन|तोलेदो]], [[कास्तिया-ला मांचा]]
|379; 1986; i, ii, iii, iv
|
|-
|[[चित्र:La Aljafería - Palacio taifa 02.JPG|100px]]
||[[आरागोन की मदेजर वास्तुकला]]
||1986, 2001
|तेरूल और ज़ारागोज़ा प्रांत, [[आरागोन]]
|378; 1986, 2001 (विस्तारित); iv
|
|-
|[[चित्र:Caceres Spain Plaza Mayor Arco.jpg|100px]]
|[[काकेरेस]] का पुराना शहर
||1986
|काकेरेस, [[एक्सत्रेमेद्युरा]]
|384; 1986; iii, iv
|
|-
|[[चित्र:Cathedral and Archivo de Indias - Seville.jpg|100px]]
||सेविला का [[सेविला कैथेड्रल|कैथेड्रल]], [[सेविला अल्काज़ार|अल्काज़ार]] और [[इंडीज के जनरल आर्काइव|आर्चिवो दे इंडियास]]
||1987
|[[सेविला]], [[आंदालुसिया]]
|383; 1987; i, ii, iii, iv
|
|-
|[[चित्र:Catedralnuevaslc.jpg|100px]]
||[[सालामानका]] का पुराना शहर
||1988
|[[सालामानका]], [[कैस्टिले और लेओन]]
|381; 1988; i, ii, iv
|
|-
|[[चित्र:Poblet Monastery.jpg|100px|]]
||[[पोबलेत मठ]]
||1991
|विम्बोदी, [[कैटलोनिया|कातालोन्या]]
|518; 1991; i, iv
|
|-
|[[चित्र:Merida Roman Theatre1.jpg|100px]]
||[[मेरिदा]] के पुरातत्व सम्मिलन
||1993
|मेरिदा, एक्सत्रेमेद्युरा
|664; 1993; iii, iv
|
|-
|[[चित्र:Spain Santiago de Compostela - Cathedral.jpg|100px]]
||[[सेन्ट जेम्स का मार्ग|सैंटियागो डी कॉम्पोस्टेला का मार्ग]]
||1993
|[[आरागोन]], [[कैस्टिले और लेओन]], [[गलिशिया]], [[नावारा]], और [[ला रियोजा]]
|669; 1993; ii, iv, vi
|
|-
|[[चित्र:Monasterio de Guadalupe.jpg|100px]]
||[[सांता मारिया दे ग्वाडालूप]] का शाही मठ
||1993
|[[ग्वाडालूप]], [[एक्सत्रेमेद्युरा]]
|665; 1993; iv, vi
|
|-
|[[File:Doñana National Park from the river.jpg|100px]]
||[[दोनाना नेशनल पार्क|दोनाना राष्ट्रीय उद्यान]]
||1994
|ह्यूएलवा और [[सेविला]]
|685; 1994, 2005 (विस्तारित); vii, ix, x
|
|-
|[[चित्र:Cuenca-panoramica4.JPG|100px]]
||[[कुऐनका]] का दीवार वाला ऐतिहासिक शहर
||1996
|कुऐनका, [[कास्तिया-ला मांचा]]
|781; 1996; ii, v
|
|-
|[[चित्र:Lonja de Valencia1.jpg|100px]]
|[[वालेंसिया]] का [[ल्लोत्ज़ा दे ला सीदा]]
||1996
|वालेंसिया
|782; 1996; i, iv
|
|-
|[[चित्र:Panorámica de Las Médulas.jpg|100px]]
||[[लास मेदुलास]]
||1997
|[[पोनफेरादा]], [[कैस्टिले और लेओन]]
|803; 1997; i, ii, iii, iv
|
|-
|[[चित्र:Domènech.i.Montaner.Palau.Musica.Catalana.8.Barcelona.JPG|100px]]
||[[पलाऊ दे ला मुसिका कतालाना]] और [[सेंट पाऊ दे अस्पताल]]
||1997
|[[बार्सिलोना]] [[कैटलोनिया|कातालोन्या]]
|804; 1997; i, ii, iv
|
|-
|[[चित्र:Punta Treserols y Mallo de Marmorés.jpg|100px]]
||[[पिरिनी पर्वत शृंखला]] - [[पेर्दु पर्वत]] विश्व धरोहर स्थल
||1997, 1999
|ह्यूसका प्रांत, [[आरागोन]] (फ्रांस के साथ साझा)
|773; 1997, 1 999 (विस्तारित); iii, iv, v, vii, viii
|
|-
|[[चित्र:Monasterio de Suso.jpg|100px]]
||[[सैन मिलन दे ला कोगोला के मठ]]
||1997
|[[सैन मिलन दे ला कोगोला]], [[ला रिओजा]]
|805; 1997; ii, iv, vi
|
|-
|[[चित्र:España y Portugal.jpg|100px]]
||[[इबेरिया प्रायद्वीप|इबेरियन प्रायद्वीप]] पर भूमध्य बेसिन के भित्ती-चित्र
||1998
|अन्डालुसिया, [[आरागोन]], [[कास्तिया-ला मांचा]], [[कैटलोनिया|कातालोन्या]], मर्सिया और वेलेंसिया
|874; 1998; iii
|
|-
|[[चित्र:Alcala de Henares, Spain, Plaza de Cervantes.jpg|100px]]
||[[अल्कला डी हेनरेस]] के विश्वविद्यालय और ऐतिहासिक पूर्वार्द्ध
||1998
|[[अल्कला डी हेनरेस]], मेड्रिड
|876; 1998; ii, iv, vi
|
|-
|[[चित्र:Ibiza.Nono.jpg|100px]]
||[[इबिसा]], जैव विविधता और संस्कृति
||1999
|[[इबिसा]], [[बैलेरिक द्वीपसमूह]]
|417; 1999; ii, iii, iv, ix, x
|
|-
|[[चित्र:PlazadelAdelantado.JPG|100px]]
||[[सान क्रिसतोबल दे ला लागुना]]
||1999
|सान क्रिसतोबल दे ला लागुना, [[कैनरी द्वीपसमूह]]
|929; 1999; ii, iv
|
|-
|[[चित्र:Tarragona.Circo.Romano.jpg|100px]]
||तारागोना में [[तराको]] के पुरातत्व सम्मिलन
||2000
|[[तारागोना]], [[कैटलोनिया|कातालोन्या]]
|875; 2000; ii, iii
|
|-
|[[चित्र:CuevasAtapuerca.jpg|100px]]
||[[अटापुरेका]] की पुरातात्विक स्थल
||2000
||अटापुरेका, [[कैस्टिले और लेओन]]
|
|
|-
|[[चित्र:Taull001.jpg|100px]]
|| [[वाल दे वोइ]] के [[कातालान]] रोमन चर्च
||2000
|
|
|
|-
|[[चित्र:Elche el palmeral.JPG|100px]]
||[[एल्चे]] के ताड़ के पेड़ों के जंगल
||2000
|
|
|
|-
|[[चित्र:Lugo 060420.jpg|100px]]
||[[लूगो]] की रोमन दीवारें
||2000
|
|
|
|-
|[[चित्र:Aranjuez PalacioReal cadena.jpg|100px]]
||[[आरानखुएस का शाही महल]]
||2001
|
|
|
|-
|[[चित्र:Ubeda.jpg|100px]]
||[[उबेदा]] और [[बाएज़ा]] के पुनर्जागरण स्मारकीय अभिरुचि
||2003
|
|
|
|-
|[[चित्र:Zubia jun.jpg|100px]]
||[[विज़काया पुल]]
||2006
|
|
|
|-
|[[चित्र:Teide rock foreground.JPG|100px]]
||[[पिको देल तेइदे|तेइदे]] राष्ट्रीय उद्यान
||2007
|
|
|
|}
=== [[स्वीडन|स्वीडेन]] (15) ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" width=25% | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:Drottningholmpalace.jpg|100px]]
| [[ड्रोटनिंगहोम महल]], [[ड्रोटनिंगहोम महल नाटकघर|नाटकघर]]
| 1991
| [[स्टॉकहोम लैन|स्टॉकहोम]]
|559; iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:BirkaExcavation1.png|100px]]
| [[बिर्का]] और [[होगार्डन]]
| 1993
| [[स्टॉकहोम लैन]]
| 555; iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Engelsberg-Huettenwerk-01.jpg|100px]]
| [[एंजल्सबर्ग लौह कारखाना]]
| 1993
| [[वेस्तमानलान्द लैन]]
| 556; iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Tanumshede 2005 rock carvings 5.jpg|100px]]
| [[तनुमशेद|तनुमशेद के शिला कलाकृति]]
| 1994
| [[वेस्त्रा योतालान्द लैन]]
| 557; i, iii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[File:Drottningholmpalace.jpg|100px]]
| [[ड्रोटनिंगहोम महल]]
| 1991
| [[स्टॉकहोम लैन]]
| 559; iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Skogskyrk Grav 2006.jpg|100px]]
| [[वुडलैंड कब्रिस्तान]] ([[स्टॉकहोम]] में)
| 1994
| [[स्टॉकहोम लैन]]
| 558; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Visby stadtmauer.jpg|100px]]
| [[विस्बी]] के हंसियाटिक टाउन
| 1995
| [[गॉतलान्द लैन|गॉतलान्द]]
| 731; iv, वी (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Gammelstad.jpg|100px]]
| [[गैमेलस्टेड चर्च शहर]]
| 1996
| [[नॉरबॉत्तेन लैन|नॉरबॉत्तेन]]
| 762; ii, iv, v (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Sapmi Lappland.jpg|100px]]
| [[लैपोनियन क्षेत्र]]
| 1996
| [[नॉरबॉत्तेन लैन|नॉरबॉत्तेन]]
| 774; iii, v, vii, viii, ix (मिश्रित)
|
|-
| [[चित्र:Fredrikskyrkan Karlskrona.jpg|100px]]
| [[कार्ल्सक्रोना]] का नौसेना बंदरगाह
| 1998
| [[ब्लकिंगे लैन|ब्लकिंगे]]
| 871; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Öland Gettlinge.jpg|100px]]
| [[स्टोरा अल्वेट|दक्षिणी अलैण्ड़ के कृषि परिदृश्य]]
| 2000
| [[कल्मार लैन|कल्मार]]
| 968; iv, वी (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Höga Kusten, Gulf Rödviken near Ullånger, Sweden.jpg|100px]]
| [[हेगा कुस्तेन|उच्च तट]] और [[क्वार्केन]] द्वीपसमूह*
| 2000, 2006
| [[वेस्तरनॉरलान्द लैन|वेस्तरनॉरलान्द]]-<br /> [[#फिनलैंड]] के साथ साझा
| 898; viii (प्राकृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Stora stöten.jpg|100px]]
| [[फालुन तांबे की खान]]
| 2001
| [[दालारना लैन|दालारना]]
| 1027; ii, iii, v (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Grimetonmasterna.jpg|100px]]
| [[वरबर्ग रेडियो स्टेशन]]
| 2004
| [[हल्लान्द लैन|हल्लान्द]]
| 1134; ii, iv (सांस्कृतिक)
|
|-
| [[चित्र:Hammerfest Meridianstein.jpg|100px]]
| [[स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क]]
| 2005
| [[नॉरबॉत्तेन लैन|नॉरबोटन काउंटी]]<br />- बेलारूस, एस्टोनिया, फिनलैंड, लताविया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, नॉर्वे, रूसी संघ और यूक्रेन के साथ साझा
| 1187; ii, iii, vi (सांस्कृतिक)
|
|}
=== [[स्विट्ज़रलैण्ड]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Muestair Kloster.jpg|100px|]]
||[[सेंट जॉन एबी|मस्तैर के सेंट जॉन का बेनेडिक्टिन कॉन्वेंट]]
||1983
| [[मस्तैर]]
| सांस्कृतिक: (Iii)
|
|-
|[[चित्र:Convent of St Gall.jpg|100px|]]
||[[सेंट गैल एबी|सेंट गैल का मठ]]
||1983
| [[सेंट गैलेन छावनी]]
| सांस्कृतिक: (ii), (iv)
|
|-
|[[चित्र:The cathedral- Das Münster.JPG|100px|]]
||[[बर्न का पुराना शहर]]
||1983
| [[बर्न]]
| सांस्कृतिक: (iii)
|
|-
|[[चित्र:Bellinzona 066.jpg|100px|]]
||[[बेलिंज़ोआ का महल|बेलिंज़ोआ के तीन महल]]
||2000
| [[बेलिंज़ोआ]]
|सांस्कृतिक: (Iv)
|
|-
|[[चित्र:Aerial image of Finsteraarhorn (view from the east).jpg|100px|]]
||[[जंगफ्रू-एलेत्स संरक्षित क्षेत्र|जंगफ्रू-एलेत्स-बायेट्सशोर्न]] का पर्वतीय क्षेत्र
||2001
| [[बर्न कैन्टन]] और [[वाले कैन्टन]]
| प्राकृतिक: (vii), (viii), (ix)
|
|-
|[[चित्र:Lake Lugano.jpg|100px|]]
||[[मोंटे सैन जियोर्जियो]]
||2003
| [[तिचीनो कैन्टन]]; स्विट्ज़रलैण्ड और इटली के बीच साझा
| प्राकृतिक: (viii)
|
|-
|[[चित्र:Lake Geneva Lavaux.jpg|100px|]]
||[[लैवॉक्स]] के शराब बनाने वाले क्षेत्र
||2007
| [[वो कैन्टन]]
| सांस्कृतिक: (iii), (iv), (v)
|
|}
=== पूर्व युगोस्लाव गणराज्य मैसेडोनिया ===
<!-- DO NOT MOVE THIS ENTRY FROM ITS CURRENT LOCATION AS IN "Republic of Macedonia", "Macedonia", "Macedonia, Republic of" etc. - "the Former Yugoslav Republic of Macedonia" as an UNESCO state party, unser "t", is correct in this list.
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See also [[WP:MOSMAC]] -->
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[File:Ohridpanorama.jpg|150px]]
||[[ओहरिड|ओहरिड क्षेत्र के सांस्कृतिक]] और [[ओहरिड झील|प्राकृतिक]] विरासत
||1979, 1980
|}
=== [[तुर्की]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Goreme valley.jpg|100px|]]
||कप्पाडोसिया की [[गॉरम|गॉरम नेशनल पार्क]] और चट्टान स्थलें
||1985
| [[नेविसिर प्रांत]]
| मिश्रित: (I) (iii) (v) (vii)
|
|-
|[[चित्र:DivrigiUluCamiportal (2006).jpg|100px|]]
||[[दिव्रिजी के महान मस्जिद और अस्पताल]]
||1985
| [[सिवास प्रांत]]
| सांस्कृतिक: (i) (iv)
|
|-
|[[चित्र:Aya sofya.jpg|100px|]]
||[[इस्तांबुल]] के ऐतिहासिक क्षेत्र
||1985
||[[इस्तांबुल प्रांत]]
||सांस्कृतिक: (iii)(iv)(vii)
|
|-
|[[चित्र:Hattusa.liongate.jpg|100px|]]
||[[हत्तुसा]]
||1986
|[[कॉरम प्रांत]]
|सांस्कृतिक: (i) (ii) (iii) (iv)
|
|-
|[[चित्र:Mount Nemrut.jpg|100px|]]
||[[माउंट नेमरूद]]
||1987
|[[आदियामान प्रांत]]
|सांस्कृतिक: (i) (iii) (iv)
|
|-
|[[चित्र:Pamukkale00.JPG|100px|]]
||[[हीरापोलिस]]-[[पामुक्कले]]
||1988
|[[देनिज्ली प्रांत]]
| मिश्रित: (iii) (iv) (vii)
|
|-
|[[चित्र:Lycian sarcophagus at Xanthos.jpg|100px|]]
||[[संथोस]]–[[लेटून]]
||1988
|[[अंताल्या प्रांत|अंताल्या]] और [[मुगला प्रांत]]
|सांस्कृतिक:(Ii) (iii)
|
|-
|[[चित्र:Safranbolu traditional houses.jpg|100px|]]
||[[साफ्रांबोलू|साफ्रांबोलू शहर]]
||1994
| [[कराबुक प्रांत]]
|सांस्कृतिक:(Ii) (iv) (v)
|
|-
|[[चित्र:Troy1.jpg|100px|]]
||[[ट्रॉय|ट्रॉय के पुरातात्विक स्थल]]
||1998
|[[कनक्केल प्रांत]]
|सांस्कृतिक:(Ii) (iii) (vi)
|
|-
|[[चित्र:Ani-Cathedral, Ruine.jpeg|100px|]]
||[[एनी|एनी के पुरातात्विक स्थल]]
||1998
|[[कार्स प्रांत]]
|सांस्कृतिक:(Ii) (iii) (iv)
|
|-
|[[चित्र:Aphrodisias turkey.jpg|100px|]]
||[[एफ्रोडिसियस]]
||2017
|[[आयदीन प्रांत]]
|सांस्कृतिक:(Ii) (iii) (iv) (vi)
|
|-
|[[चित्र:Cumalıkızık 7121.jpg|100px]]
|[[बर्सा]] और Cumalıkızık: तुर्क साम्राज्य का जन्म
|2014
|[[बुर्सा प्रांत]]
|सांस्कृतिक:(I) (ii) (iv) (vi)
|
|}
=== [[युक्रेन|यूक्रेन]] ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Chrám svaté Sofie (Kyjev).jpg|100px|]]
||[[सेंट सोफिया कैथेड्रल]]
||1990
|-
|[[चित्र:Lwow-panorama-m.jpg|100px|]]
||[[ओल्ड टाउन (लवीव)]]
||1998
|-
|[[चित्र:Hammerfest Meridianstein.jpg|100px|]]
||[[स्ट्रूव जिओडेटिक आर्क]] — [[#बेलारस|बेलारूस]], [[#एस्टोनिया|एस्टोनिया]], [[#फिनलैंड|फिनलैंड]], [[#लताविया|लताविया]], [[#लिथुआनिया|लिथुआनिया]], [[#मोल्दोवा|मोल्दोवा]], [[#नॉर्वे|नॉर्वे]], [[#स्वीडन|स्वीडन]] और [[#यूरोपियन रूस|रूसी संघ]] के साथ साझा।
||1998
|-
|
||कार्पैथियंस के आद्य बीच वन
||2007
|}
=== [[यूनाइटेड किंगडम]] ===
''मुख्य लेख:[[यूनाइटेड किंगडम में यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों की सूची]]''
टिप्पणी: इस सूची में ब्रिटिश विदेश क्षेत्रों के स्थल भी शामिल हैं
:'''''सांस्कृतिक'''
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
| [[चित्र:BlaenavonWorkingmensInstitute.jpg|100px|]]
||[[ब्लेनावों औद्योगिक परिदृश्य]]
||2000
| [[ब्लेनावों]] [[वेल्स]]
| 984; 2000; iii, iv
|
|-
| [[चित्र:Blenheim main entrance.jpg|100px|]]
||[[ब्लेनहेम महल]]
||1987
|[[वुडस्टॉक]] [[ऑक्सफ़र्डशायर]], इंगलैंड
| 425; 1987;ii, iv
|
|-
| [[चित्र:Canterbury Cathedral - Portal Nave Cross-spire.jpeg|100px|]]
||[[कैंटरबरी कैथेड्रल]], [[सेंट ऑगस्टीन एबी]] और [[सेंट मार्टिन चर्च]]
||1988
| [[कैंटरबरी]], [[केंट]], इंगलैंड
| 496; 1988;i, ii, vi
|
|-
|[[चित्र:Beaumaris Castle 1.jpg|100px|]]
||[[ग्विनडेड में राजा एडवर्ड का महल और शहरी दीवार]]
||1986
| [[कोन्वे]], [[एंग्लेसी]], [[वेल्स]]
| 374; 1986; i, iii, iv
|
|-
| [[चित्र:Royal.crescent.aerial.bath.arp.jpg|100px]]
||[[बाथ|बाथ नगर]]
||1987
| [[बाथ]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 428; 1987; i, ii, iv
|
|-
|[[चित्र:Hayle old quay.jpg|100px|]]
||[[कॉर्नवल और पश्चिमी डेवन खनन परिदृश्य]]
||2006
| [[कॉर्नवल]] और [[डेवन]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 1,215; 2006; ii, iii, iv
|
|-
|[[चित्र:Arkwright Masson Mills.jpg|100px|]]
||[[डेरवेंट घाटी मिल्स]]
||2001
| [[डर्बीशायर]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 1,030; 2001; ii, iv
|
|-
|[[चित्र:yard2.jpg|100px|]]
||[[डुरहम कासल]] और [[डुरहम कैथेड्रल]]
||1986
| [[काउंटी डरहम]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 370; 1986; ii, iv, vi
|
|-
|[[चित्र:Orkney_Skara_Brae.jpg|100px|]]
||[[नियोलिथिक ऑर्कनी का दिल]]
||1999
| [[ओर्कनेय]], [[स्कॉट्लैण्ड|स्कॉटलैंड]]
| 514; 1999;i, ii, iii, iv
|
|-
|[[चित्र:Hadrian's wall at Greenhead Lough.jpg|100px]]
||[[हैडरिन की दीवार]]
||2005
|
|
|
|-
|[[चित्र:Bermuda-Harbour and Town of St George.jpg|100px|]]
||[[सेंट जोर्ज'स का ऐतिहासिक शहर और संबंधित किले, बरमूडा]]
||2000
| [[सेंट जोर्ज'स]], [[बरमूडा]]
| 983; 2000; iv
|
|-
|[[चित्र:Ironbridge002.JPG|100px|]]
||[[आयरनब्रिज जॉर्ज]]
||1986
| [[श्रॉपशायर]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 371; 1986; i, ii, iv, vi
|
|-
|[[चित्र:Liverpool skyline, closeup.jpg|100px|]]
||[[लिवरपूल]] - ''मैरिटाइम मर्चेन्टाइल सिटी''
||2004
| [[मर्सीसाइड]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 1,150; 2004; ii, iii, iv
|
|-
|[[चित्र:2005-06-27_-_United_Kingdom_-_England_-_London_-_Greenwich.jpg|100px|]]
||[[ग्रेनिश|तटिय ग्रीनविच]]
|1997
| [[ग्रेटर लंदन]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 795; 1997; i, ii, iv, vi
|
|-
|[[चित्र:NewlanarkNL06.jpg|100px|]]
||[[न्यू लैनार्क]]
||2001
| [[दक्षिण लैनार्कशायर]], [[स्कॉट्लैण्ड|स्कॉटलैंड]]
| 429; 2001; ii, iv, vi
|
|-
|[[चित्र:EdinburghgeorgeIV.jpg|100px|]]
||[[एडिनबर्ग]] का [[ओल्ड टाउन, एडिनबर्ग|ओल्ड टाउन]] और [[न्यू टाउन, एडिनबर्ग|न्यू टाउन]]
||1995
| [[एडिनबर्ग]], [[स्कॉट्लैण्ड|स्कॉटलैंड]]
| 728; 1995; ii, iv
|
|-
|[[चित्र:kew.gardens.palm.house.london.arp.jpg|100px|]]
||[[शाही वनस्पतिक उद्यान, क्यू]]
||2003
| [[ग्रेटर लंदन]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 1,084; 2003; ii, iii, iv
|
|-
|[[चित्र:Saltaire from Leeds and Liverpool Canal.jpg|100px|]]
||[[साल्टेरे]]
||2001
| [[वेस्ट यॉर्कशायर]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 1,028; 2001; ii, iv
|
|-
|[[चित्र:Stonehenge back wide.jpg|100px|]]
||[[स्टोनहेंज, एवेबरी और संबन्धित स्थलें]]
||1986
| [[विल्टशायर]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 373; 1 9 86 (2008 में संशोधित);i, ii, iii
|
|-
|[[चित्र:Banqueting House.jpg|100px|]]
||[[एबी फव्वारे]] के खंडहर सहित [[स्टडली शाही उद्यान]]
||1986
| [[नॉर्थ यॉर्कशायर]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 372; 1986; i, iv
|
|-
|[[चित्र:Tower_Of_London_Traitors'_Gate_Seen_From_The_River.jpg|100px|]]
||[[टॉवर ऑफ़ लंदन|टावर ऑफ़ लंदन]]
||1988
| [[ग्रेटर लंदन]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 488; 1988; ii, iv
|
|-
|[[चित्र:Westminster abbey night.jpg|100px|]]
||[[सेंट मार्गरेट्स, वेस्टमिंस्टर|सेंट मार्गरेट चर्च]] और [[वेस्ट्मिन्स्टर ऍबी|वेस्टमिंस्टर ऐबी]] सहित [[पैलेस ऑफ़ वेस्ट्मिन्स्टर|वेस्टमिंस्टर का महल]]
||1987
| [[ग्रेटर लंदन]], [[इंग्लैण्ड|इंगलैंड]]
| 426; 1987 (2008 में संशोधित);i, ii, iv
|
|}
:'''''मिश्रित'''''
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:St Kilda Village Bay.jpg|100px|]]
||[[सेंट किल्डा, स्कॉटलैंड|सेंट किल्डा]]
||1986
|[[सेंट किल्डा, स्कॉटलैंड|सेंट किल्डा]], [[स्कॉट्लैण्ड|स्कॉटलैंड]]
|387; 1987 (2005 और 2008 में संशोधित);ii, iii, iv
|
|}
:'''''प्राकृतिक'''''
{|class="wikitable sortable plainrowheaders" width=90%
! class="unsortable" style="width:100px;" scope="col"| चित्र
! scope="col" | स्थल
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | अवस्थिति
! scope="col" | [[विश्व धरोहर#मानदंड|मानदंड]]
! scope="col" class="unsortable" | विवरण
|-
|[[चित्र:Causeway-code poet-4.jpg|100px]]
||[[दैत्य सेतुक]]
||1986
|[[एंट्रीम काउंटी]], उत्तरी आयरलैंड
|369; 1986; vii, viii
|
|-
|[[चित्र:Gough island top view.png|100px|]]
||[[गफ और इनेक्सेसिबल द्वीप समूह]]
||1995
| [[सेंट हेलेना, असेंशन और त्रिस्तान दा कुन्हा]], [[अटलांटिक महासागर]]
| 740; 1 99 5 (2004 में संशोधित);vii, x
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|-
|[[चित्र:HendersonISS004-E-6793.PNG|100px|]]
||[[हेंडरसन द्वीप (पिटकेरेन द्वीप समूह)|हेंडरसन द्वीप]]
||1988
| [[पिटकेम द्वीप समूह]], [[प्रशान्त महासागर]]
| 487; 1988;vii, x
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|-
|[[चित्र:england_dorset_jc_kimmeridge.jpg|100px|]]
||[[जुरासिक तट]]
||2001
|
|
|
|}
==इन्हें भी देखें==
* [[अफ्रीका में विश्व धरोहर स्थलों की सूची]]
* [[अरब राज्यों में विश्व धरोहर स्थलों की सूची]]
* [[एशिया एवं ऑस्ट्रेलेशिया में विश्व धरोहर स्थलों की सूची]]
* [[अमरीका में विश्व धरोहर स्थलों की सूची]]
* [[खतरे में विश्व धरोहर स्थलों की सूची]]
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
* [http://www.unesco.org/whc यूनेस्को विश्व विरासत स्थल] — आधिकारिक वेबसाइट
* [https://web.archive.org/web/20070606091740/http://whc.unesco.org/pg.cfm?cid=31 यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र] — आधिकारिक वेबसाइट
* [https://web.archive.org/web/20071116123131/http://whc.unesco.org/heritage.htm यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की सूची] — आधिकारिक वेबसाइट
* [https://web.archive.org/web/20181106021403/http://vrheritage.org/ VRheritage.org] — विश्व धरोहर स्थलों का दस्तावेज़ीकरण
* [https://web.archive.org/web/20050324003746/http://worldheritage-forum.net/ Worldheritage-Forum] — विश्व धरोहर मुद्दों पर सूचना और वेबलॉग
<br />{{Lists of World Heritage Sites}}
<!--Categories-->
[[श्रेणी:यूरोप में विश्व धरोह स्थल|*]]
<!--Other languages-->
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अपने (2007 फ़िल्म)
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हिंदुस्थान वासी
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[[विशेष:योगदान/~2025-41658-2|~2025-41658-2]] ([[सदस्य वार्ता:~2025-41658-2|वार्ता]]) के अवतरण 6467313 पर पुनर्स्थापित
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{{स्रोतहीन|date=सितंबर 2014}}
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| screenplay =
| released =, [[२००७|2007]]
| country = [[भारत]]
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| budget =
}}
'''अपने''' 2007 में बनी [[हिन्दी|हिन्दी भाषा]] की फिल्म है। यह फिल्म पहेली बार वास्तविक जीवन में पिता धर्मेंद्र और बेटे [[सनी देओल]] और [[बॉबी देओल]] एक साथ दर्शाता है।
== संक्षेप ==
== चरित्र ==
== मुख्य कलाकार ==
* [[धर्मेन्द्र]]
* सनी देओल
* [[बॉबी देओल]]
* [[शिल्पा शेट्टी]] - सिमरन
* [[कैटरीना कैफ़]]
* [[किरण खेर|किरन खेर]] - रवि
* [[विक्टर बैनर्जी]]
* [[आर्यन वैद्य]]
* [[दिव्या दत्ता]] - पूजा
* [[राजेन्द्र गुप्ता]]
* - मुक्केबाज
== दल ==
== संगीत ==
[[हिमेश रेशमिया]] द्वारा रचा गया इस फिल्म का संगीत आम जनता को पसंद आया।
== रोचक तथ्य ==
== परिणाम ==
=== बौक्स ऑफिस ===
=== समीक्षाएँ ===
== नामांकन और पुरस्कार ==
== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{imdb title|0814014|अपने}}
[[श्रेणी:2007 में बनी हिन्दी फ़िल्म|अपने]]
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हिंदुस्थान वासी
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/* संगीत */ पूर्ण
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'''अपने''' 2007 में बनी [[हिन्दी|हिन्दी भाषा]] की फिल्म है। यह फिल्म पहेली बार वास्तविक जीवन में पिता धर्मेंद्र और बेटे [[सनी देओल]] और [[बॉबी देओल]] एक साथ दर्शाता है।
== संक्षेप ==
== चरित्र ==
== मुख्य कलाकार ==
* [[धर्मेन्द्र]]
* सनी देओल
* [[बॉबी देओल]]
* [[शिल्पा शेट्टी]] - सिमरन
* [[कैटरीना कैफ़]]
* [[किरण खेर|किरन खेर]] - रवि
* [[विक्टर बैनर्जी]]
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* [[दिव्या दत्ता]] - पूजा
* [[राजेन्द्र गुप्ता]]
* - मुक्केबाज
== दल ==
== संगीत ==
[[हिमेश रेशमिया]] द्वारा रचा गया इस फिल्म का संगीत आम जनता को पसंद आया।
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== रोचक तथ्य ==
== परिणाम ==
=== बौक्स ऑफिस ===
=== समीक्षाएँ ===
== नामांकन और पुरस्कार ==
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[[श्रेणी:2007 में बनी हिन्दी फ़िल्म|अपने]]
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हिंदुस्थान वासी
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/* संगीत */ कड़ियाँ
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}}
'''अपने''' 2007 में बनी [[हिन्दी|हिन्दी भाषा]] की फिल्म है। यह फिल्म पहेली बार वास्तविक जीवन में पिता धर्मेंद्र और बेटे [[सनी देओल]] और [[बॉबी देओल]] एक साथ दर्शाता है।
== संक्षेप ==
== चरित्र ==
== मुख्य कलाकार ==
* [[धर्मेन्द्र]]
* सनी देओल
* [[बॉबी देओल]]
* [[शिल्पा शेट्टी]] - सिमरन
* [[कैटरीना कैफ़]]
* [[किरण खेर|किरन खेर]] - रवि
* [[विक्टर बैनर्जी]]
* [[आर्यन वैद्य]]
* [[दिव्या दत्ता]] - पूजा
* [[राजेन्द्र गुप्ता]]
* - मुक्केबाज
== दल ==
== संगीत ==
[[हिमेश रेशमिया]] द्वारा रचा गया इस फिल्म का संगीत आम जनता को पसंद आया।
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== रोचक तथ्य ==
== परिणाम ==
=== बौक्स ऑफिस ===
=== समीक्षाएँ ===
== नामांकन और पुरस्कार ==
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[[श्रेणी:2007 में बनी हिन्दी फ़िल्म|अपने]]
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काँटे (2002 फ़िल्म)
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हिंदुस्थान वासी
89741
/* संगीत */ पूर्ण
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text/x-wiki
{{स्रोतहीन|date=सितंबर 2014}}
{{Infobox Film
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| image = Kaante Official Poster.jpg
| caption = '''काँटे''' का पोस्टर
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}}
'''काँटे''' 2002 में बनी [[हिन्दी|हिन्दी भाषा]] की फिल्म है।
== संक्षेप ==
== चरित्र ==
== मुख्य कलाकार ==
* [[अमिताभ बच्चन]]
* [[संजय दत्त]]
* [[सुनील शेट्टी]]
* [[महेश मांजरेकर]]
* [[लकी अली]]
* [[कुमार गौरव]]
* [[मलाइका अरोड़ा|मलाइका अरोरा]]
* [[रंजीत चौधरी]]
* संजय सिप्पी
* असलम ख़ान
== दल ==
== संगीत ==
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}}
== रोचक तथ्य ==
== परिणाम ==
=== बौक्स ऑफिस ===
=== समीक्षाएँ ===
== नामांकन और पुरस्कार ==
== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{imdb title|0294662|काँटे}}
[[श्रेणी:2002 में बनी हिन्दी फ़िल्म|काँटे]]
{{संजय गुप्ता}}
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सैंटियागो
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2026-10-18T08:16:30Z
Anitya Gautam
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wikitext
text/x-wiki
'''सैंटियागो''' या '''सैंतियागो''', [[दक्षिण अमेरिका]] के [[चिली]] देश की राजधानी है। यह देश के केन्द्रीय घाटी में समुद्र तल से लगभग ५२० मी की उंचाई पर स्थित है। लगभग दो दशकों की निर्बाध आर्थिक प्रगति ने [[लैटिन अमरीका|लातिनी अमरीका]] में सैंटियागो को सबसे आधुनिक शहरों में शुमार कर दिया है और आज यहां दर्जनों [[शॉपिंग मॉल]] एवं सैकड़ों उंची इमारते हैं।
== इतिहास ==
सैंटियागो की स्थापना एक [[स्पेन|स्पैनिश]] नागरिक [[पेद्रो दे वाल्दिविया]] द्वारा [[२१ फ़रवरी|२१ फरवरी]], [[१५४१]] में की गयी थी। स्थापना समारोह ह्यूलेन हॉल में की गयी थी जिसे बाद में ''सेरो सांता लूसिया'' नाम दिया गया। श्री वाल्दिविया ने इस जगह का चुनाव इस जगह की अच्छी [[जलवायु]] एवं परिवहन के लिए आसानी से उपलब्ध [[मापोचो नदी]] की वजह से की थी। १ सितंबर १५४१ को अराको युद्ध में यह शहर पूरी तरह तहस नहस हो गयी थी।
[[चित्र:Plan de la Ville de Santiago.jpg|thumb|left|250px|१८ वीं सदी के सैंटियागो का नक्शा]]
प्रारम्भिक भवनों का निर्माण स्थानीय लोगों, जिन्हे [[पिकंच]] इंडियन भी कहा जाता था, की मदद से किया गया। शहर के दक्षिणी किनारे पर स्थित मापोचो नदी को बाद में सुखाया गया और जनता के आवागमन तथा अन्य सुविधाओं के लिये खोल दिया गया। सुखाये गए स्थान को ''आलामेदा '' कहा जाता था। वैसे इसे अब ''Avenida Alameda Libertador Bernardo O'Higgins'' कहा जाता है। १८१०-१८१८ में शहर के दक्षिणी-पश्चिमी छोर में चले चिली के [[चिली का स्वतन्त्रता संग्राम|स्वतन्त्रता संग्राम]] में यह शहर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। १८१८ में इस सैंटियागो शहर को देश की राजधानी बनाया गया।
[[चित्र:Plano de Santiago, por Nicolás Boloña.jpg|thumb|1896 में सैंटियागो]]
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20080429014245/http://www.municipalidaddesantiago.cl/ सैंटियागो नगर निगम]
* [https://web.archive.org/web/20080503135408/http://www.misantiago.cl/ www.misantiago.cl, डाउनटाउन सैंटियागो का इंटेरैक्टिव नक्शा]
[[श्रेणी:चिली के शहर]]
[[श्रेणी:दक्षिण अमेरिका में राजधानियाँ]]
t447dhf34uin6vae5ajq3o2eq0r8xfg
कोरियाई युद्ध
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6607407
2026-10-17T16:15:47Z
RJ Raawat
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/* growthexperiments-addlink-summary-summary:3|0|0 */
6630487
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox military conflict
| conflict = कोरियाई युद्ध
| partof = [[शीतयुद्ध]]
| image = [[चित्र:Korean War Montage 2.png|300px]]
| image_size =
| caption =
| date = 25 जून, 1950 - 27 जुलाई, 1953 <br />(3 साल, 1 महीना, 2 दिन)
| place = [[कोरिया|कोरियाई प्रायद्वीप]] ,[[पीला सागर]] ,[[जापान सागर]], [[कोरिया जलसन्धि|कोरिया जलडमरूमध्य]], [[:en:China–North Korea border|चीन-उत्तर कोरिया सीमा]]
| territory = [[:en:Korean Demilitarized Zone|कोरियाई विसैन्यीकृत क्षेत्र]] स्थापित किया गया
| result = अनिर्णायक, सैन्य गतिरोध
*दक्षिण कोरिया के उत्तर कोरियाई आक्रमण को खदेड़ा गया
*उत्तर कोरिया पर अमेरिका के नेतृत्व वाले संयुक्त राष्ट्र के आक्रमण को निरस्त किया गया
*दक्षिण कोरिया के चीनी और उत्तर कोरियाई आक्रमण को खदेड़ा गया
*1953 में [[:en:Korean Armistice Agreement|कोरियाई युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए गए]]
*कोरियाई संघर्ष जारी
| combatant1 = {{Plainlist}}
'''{{पताका |दक्षिण कोरिया}}'''<br>
'''{{पताका |संयुक्त राज्य|1912}}'''<br>
'''{{पताका |संयुक्त राष्ट्र }}'''<br>'''युद्ध समर्थन'''<br>
{{पताका | यूनाइटेड किंगडम}}<br>
{{flagdeco|Australia}} [[ऑस्ट्रेलिया]]<br>
{{flagcountry|बेल्जियम}}<br>
{{flagdeco|Canada|1921}} [[कनाडा]]<br>
{{flagcountry|फ़्रान्स}}<br>
{{flagdeco|Philippines|1936}} [[फिलीपींस]]<br>
{{flagcountry|Colombia}}<br>
{{Flagicon image|Flag_of_Ethiopia_(1897–1974).svg}} [[:en:Ethiopian Empire|इथियोपियाई साम्राज्य]]<br>
{{Flagicon image|State_Flag_of_Greece (1863-1924_and_1935-1973).svg}}[[:en:Kingdom of Greece|ग्रीस का साम्राज्य]]<br>
{{flagcountry|Luxembourg}}<br>
{{flagdeco|Netherlands}} [[नीदरलैंड]]<br>
{{flagcountry|न्यूज़ीलैंड}}<br>
{{Flagicon image|Flag of South Africa (1928–1994, bright colors).svg}} [[दक्षिण अफ़्रीकी संघ]]<br>
{{flag|तुर्की}}<br>
{{Endplainlist}}
'''मेडिकल सहायता'''<br>
{{flagcountry|Denmark}}<br>
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'''अन्य सहायता''' <br>
{{flagcountry|Cuba}}<br>
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{{Flagicon image|Flag_of_Spain_(1945–1977).svg}} [[:en:Francoist Spain|फ्रेंकोइस्ट स्पेन]]<br>
{{flagcountry|ताइवान }}<br>
| combatant2 = {{Plainlist}}
'''{{पताका | उत्तर कोरिया}}'''<br>
'''{{पताका| चीन }}'''<br>
'''{{पताका | सोवियत संघ|1923}}'''<br>'''समर्थन एवं सहायता'''<br>
{{flagcountry|चेकोस्लोवाकिया}}<br>
{{Flagicon image|Flag_of_Bulgaria_(1971–1990).svg}}
[[:en:People's Republic of Bulgaria|बुल्गारिया]]<br>
{{flagcountry|पूर्व जर्मनी}}<br>
{{Flagicon image|Flag_of_Hungary_(1949-1956).svg}}
[[:en:Hungarian People's Republic|हंगेरी]]<br>
{{Flagicon image|Flag of Poland (1928–1980).svg}}
[[पोलिश जनवादी गणराज्य|पोलैंड]]<br>
{{Flagicon image|Flag of the Mongolian People's Republic (1945–1992).svg}}
[[:en:Mongolian People's Republic|मंगोलिया]]<br>
{{Flagicon image|Flag_of_Romania_(1965–1989).svg}}
[[:en:Socialist Republic of Romania|रोमानिया]]<br>
{{flagcountry|भारत}}<br>{{flagicon image|Flag of Egypt (1922-1958).svg}} [[:en:Kingdom of Egypt|मिस्र]]<br>{{flagicon image|Flag of Iraq (1924–1959).svg}} [[:en:Kingdom of Iraq|इराक]]<br>{{flagicon image|Flag of Syria (1930–1958, 1961–1963).svg}} [[:en:First Syrian Republic|सीरिया]]<br>{{flag|लेबनान}}<br>{{flagicon image|Flag of Saudi Arabia (1938–1973).svg}} [[सऊदी अरब]]<br>{{flagicon image|Flag of Afghanistan (1931–1973).svg}} [[:en:Kingdom of Afghanistan|अफगानिस्तान]]<br>{{flagdeco|Kingdom of Yemen}} [[:en:Kingdom of Yemen|यमन]]<br>{{flag|जॉर्डन}}<br>{{PAK}}<br>{{flagicon image|State flag of Iran (1933–1964).svg}} [[:en:Pahlavi Iran|ईरान]]
| strength1 =
{{plainlist |
* {{flagdeco|South Korea|1949|size=23px}} 602,902<ref>{{cite book |others=Korea Institute of Military History |editor1-last=Millett |editor1-first=Allan Reed |title=The Korean War, Volume 3 |url=https://books.google.com/books?id=9JFvmnDiH-gC&lpg=PP1&dq=south%20armed%20forces%20size%20%22Korean%20War%22&pg=PA692#v=snippet&q=Strength&f=false |accessdate=16 February 2013 |year=2001 |publisher=U of Nebraska Press |isbn=9780803277960 |page=692 |quote=Total Strength 602,902 troops}}</ref>
* {{flagdeco|United States|1912|size=23px}} 326,863<ref>{{cite web |url=http://www.heritage.org/research/reports/2004/10/global-us-troop-deployment-1950-2003 |title=Global U.S. Troop Deployment, 1950–2003 |author=Tim Kane |author-link=Tim Kane |date=27 October 2004 |work=Reports |publisher=[[The Heritage Foundation]] |accessdate=15 February 2013 }}<br />{{cite news |title=U.S. to keep troop levels the same in South Korea |author=Ashley Rowland |url=http://www.stripes.com/news/u-s-to-keep-troop-levels-the-same-in-south-korea-1.84294 |newspaper=[[Stars and Stripes (newspaper)|Stars and Stripes]] |date=22 October 2008 |accessdate=16 February 2013 }}<br />{{cite web |url=http://www.dtic.mil/cgi-bin/GetTRDoc?AD=ADA562829 |title=U.S. Troops Stationed in South Korea, Anachronistic? |author=Colonel Tommy R. Mize, United States Army |date=12 March 2012 |work=[[United States Army War College]] |publisher=Defense Technical Information Center |accessdate=16 February 2013 |archive-date=13 अप्रैल 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130413143410/http://www.dtic.mil/cgi-bin/GetTRDoc?AD=ADA562829 |dead-url=yes }}<br />{{cite web |url=http://www.gao.gov/assets/160/150991.pdf |title=Military Presence: U.S. Personnel in the Pacific Theater |author=Louis H. Zanardi |author2=Barbara A. Schmitt |author3=Peter Konjevich |author4=M. Elizabeth Guran |author5=Susan E. Cohen |author6=Judith A. McCloskey |date=August 1991 |work=Reports to Congressional Requesters |publisher=[[United States General Accounting Office]] |accessdate=15 February 2013 }}</ref>
* {{flagdeco|United Kingdom|size=23px}} 14,198<ref name="UNC-USFK">{{cite web |url=http://www.usfk.mil/About/United-Nations-Command/ |title=USFK United Nations Command |author=USFK Public Affairs Office |work=United States Forces Korea |publisher=United States Department of Defense |accessdate=29 July 2016 |quote=Republic of Korea – 590,911<br />Colombia – 1,068<br />United States – 302,483<br />Belgium – 900<br />United Kingdom – 14,198<br />South Africa – 826<br />Canada – 6,146<br />The Netherlands – 819<br />Turkey – 5,453<br />Luxembourg – 44<br />Australia – 2,282<br />Philippines – 1,496<br />New Zealand – 1,385<br />Thailand – 1,204<br />Ethiopia – 1,271<br />Greece – 1,263<br />France – 1,119}}</ref><ref>{{cite book |last=Rottman |first=Gordon L. |title=Korean War Order of Battle: United States, United Nations, and Communist Ground, Naval, and Air Forces, 1950–1953 |url=https://books.google.com/books?id=NpOp2OO1-DAC&lpg=PA126&ots=Zjyv18HXCt&dq=preak%20strength%20British%20%22Korean%20War%22&pg=PA126#v=onepage&q=preak%20strength%20British%20%22Korean%20War%22&f=false |accessdate=16 February 2013 |year=2002 |publisher=Greenwood Publishing Group |isbn=9780275978358 |page=126 |quote=A peak strength of 14,198 British troops was reached in 1952, with over 40,000 total serving in Korea. }}<br />{{cite web |url=http://ukindprk.fco.gov.uk/en/about-us/working-with-dprk/uk-korea-relations |title=UK-Korea Relations |author=<!--Staff writer(s); no by-line.--> |date=9 February 2012 |work=British Embassy Pyongyang |publisher=[[Foreign and Commonwealth Office]] |accessdate=16 February 2013 |quote=When war came to Korea in June 1950, Britain was second only to the United States in the contribution it made to the UN effort in Korea. 87,000 British troops took part in the Korean conflict, and over 1,000 British servicemen lost their lives }}{{Dead link|date=जनवरी 2024 |bot=InternetArchiveBot }}<br />{{cite web |url=http://www.kwva.org/brief_account_of_the_korean_war.htm |title=A Brief Account of the Korean War |author=Jack D. Walker |work=Information |publisher=Korean War Veterans Association |accessdate=17 February 2013 |quote=Other countries to furnish combat units, with their peak strength, were: Australia (2,282), Belgium/Luxembourg (944), Canada (6,146), Colombia (1,068), Ethiopia (1,271), France (1,119), Greece (1,263), Netherlands (819), New Zealand (1,389), Philippines (1,496), Republic of South Africa (826), Thailand (1,294), Turkey (5,455), and the United Kingdom (Great Britain 14,198). }}</ref>
}}
{{Collapsible list
| bullets = yes
| title = और अन्य
| {{flagdeco|Canada|1921|size=23px}} 8,123<ref>{{cite web |url=http://www.veterans.gc.ca/eng/collections/korea/didyouknow |title=Land of the Morning Calm: Canadians in Korea 1950 – 1953 |author=<!--Staff writer(s); no by-line.--> |date=7 January 2013 |work=Veterans Affairs Canada |publisher=Government of Canada |accessdate=22 February 2013 |quote=Peak Canadian Army strength in Korea was 8,123 all ranks. |archive-date=23 मार्च 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130323093839/http://www.veterans.gc.ca/eng/collections/korea/didyouknow |url-status=dead }}</ref>
| {{flagdeco|Turkey|size=23px}} 5,453<ref name="UNC-USFK" />
| {{flagdeco|Australia|size=23px}} 2,282<ref name="UNC-USFK" />
| {{flagicon image|Flag_of_Ethiopia_(1897–1974).svg}} 1,600<ref name="517KWA" />
| {{flagdeco|Philippines|1936|size=23px}} 1,496<ref name="UNC-USFK" />
| {{flagdeco|New Zealand|size=23px}} 1,385<ref name="UNC-USFK" />
| {{flagdeco|Thailand|size=23px}} 1,290<ref name="ROK Web" />
| {{Flagicon image|State_Flag_of_Greece (1863-1924_and_1935-1973).svg}} 1,263<ref name="UNC-USFK" /><ref name="517KWA" />
| {{flagdeco|France|size=23px}} 1,185<ref name="517KWA">{{cite book |last=Edwards |first=Paul M. |title=Korean War Almanac |series=Almanacs of American wars |url=https://books.google.com/books?id=5gYCm0bM68sC&lpg=PA517&ots=-V8_0ry5Pa&dq=France%20%22Peak%20Strength%22%20%22Korean%20War%22&pg=PA517#v=onepage&q=Turkey%20%22Peak%20Strength%22&f=false |accessdate=22 February 2013 |year=2006 |publisher=[[Infobase Publishing]] |isbn=9780816074679 |page=517}}</ref>
| {{flagdeco|Colombia|size=23px}} 1,068<ref name="UNC-USFK" />
| {{flagdeco|Belgium|size=23px}} 900<ref name="UNC-USFK" />
| {{Flagicon image|Flag of South Africa (1928–1994, bright colors).svg}} 826<ref name="UNC-USFK" />
| {{flagdeco|Netherlands|size=23px}} 819<ref name="UNC-USFK" />
| {{flagdeco|Sweden|size=23px}} 170<ref name="ROK Web" />
| {{flagdeco|Norway|size=23px}} 105<ref name="ROK Web" />
| {{flagdeco|Denmark|size=23px}} 100<ref name="ROK Web" />
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| {{flagdeco|India|size=23px}} 70<ref name="ROK Web" />
| {{flagdeco|Luxembourg|size=23px}} 44<ref name="UNC-USFK" />
}}
'''Total: 972,214'''
| strength2 =
{{plainlist |
* {{flagdeco|China}} 1,350,000<ref name=zhang257>{{harvnb|Zhang|1995|p=257}}.</ref>
* {{flagdeco|North Korea}} 266,600<ref>{{cite book |last=Shrader |first=Charles R. |title=Communist Logistics in the Korean War |series=Issue 160 of Contributions in Military Studies |url=http://books.google.com/books?id=UcGs__qQCzgC&lpg=PA90&ots=TcZk34bIGN&dq=CCF%20strength%20%22Korean%20War%22&pg=PA90#v=onepage&q=CCF%20strength%20%22Korean%20War%22&f=false |accessdate=17 February 2013 |year=1995 |publisher=Greenwood Publishing Group |isbn=9780313295096 |page=90 |quote=NKPA strength peaked in October 1952 at 266,600 men in eighteen divisions and six independent brigades. }}</ref>
* {{flagicon|सोवियत संघ|1923}} 26,000<ref>{{cite journal |last1=Kolb |first1=Richard K. |year=1999 |title=In Korea we whipped the Russian Air Force |journal=VFW Magazine |volume=86 |issue=11 |publisher=[[Veterans of Foreign Wars]] |url=http://www.highbeam.com/doc/1P3-43694886.html |accessdate=17 February 2013 |quote=Soviet involvement in the Korean War was on a large scale. During the war, 72,000 Soviet troops (among them 5,000 pilots) served along the Yalu River in Manchuria. At least 12 air divisions rotated through. A peak strength of 26,000 men was reached in 1952. |archive-date=10 मई 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130510234641/http://www.highbeam.com/doc/1P3-43694886.html |url-status=dead }}</ref>
}}
''' 16,42,600''' <br />
<small>सूचना: वास्तविक संख्या विभिन्न स्वरूपों में भिन्न होती है |</small>
| commander1 = {{flagicon| दक्षिण कोरिया}} [[रई सिन्ग-मैन]]<br>
{{flagicon| दक्षिण कोरिया}} [[:en:Chung Il-kwon|चुंग इल-क्वोन]]<br>
{{flagicon| दक्षिण कोरिया}}
[[:en:Paik Sun-yup|पाइक सुन-यूप]]<br>
{{flagicon | दक्षिण कोरिया}} [[:en:Shin Sung-mo|शिन सुंग-मो]]<br>
{{flagicon| संयुक्त राज्य }} [[हैरी एस ट्रूमैन]]<br>
{{flagicon|संयुक्त राज्य}} [[ड्वाइट डेविड आइज़नहावर]]<br>
{{flagicon|संयुक्त राज्य}} रॉबर्ट ए लवेटी<br>{{flagicon|संयुक्त राज्य}} डगलस मैकआर्थर<br>
{{flagicon|संयुक्त राज्य}} मैथ्यू रिडवे<br>{{flagicon|संयुक्त राज्य}} मार्क डब्ल्यू क्लार्क<br>
{{flagicon|यूनाइटेड किंगडम}} [[क्लिमेण्ट रिचर्ड एट्ली]]<br>
{{flagicon|यूनाइटेड किंगडम}} [[विन्सटन चर्चिल]]
| commander2 = {{flagicon| उत्तर कोरिया}} [[किम इल-सुंग]]<br>
{{flagicon|उत्तर कोरिया}} [[:en:Pak Hon-yong|पाक मान-योंग]]<br>
{{flagicon|उत्तर कोरिया}}
[[:en:Choe Yong-gon (official)|चो योंग-गॉन]]<br>
{{flagicon|उत्तर कोरिया}} [[:en:Kim Chaek|किम चाके]]{{KIA}}<br>
{{flagicon|चीन}} [[माओ से-तुंग]]<br>{{flagicon|चीन}} [[झ़ोउ एनलाई]]<br>{{flagicon|चीन}} पेंग देहुआई<br>{{flagicon|चीन}} चेन गेंगो<br>
{{flagicon|चीन}} देंग हुआ<br>
{{flagicon|चीन}} हांग ज़ुएझी<br>
{{flagicon|सोवियत संघ|1923}} [[जोसेफ स्टालिन]]<br>
{{flagicon|सोवियत संघ|1923}}
[[:en:Pavel Zhigarev|पावेल ज़िगरेव]]<br>
{{flagicon|सोवियत संघ|1923}}[[:en:Georgy Malenkov|जॉर्जी मालेंकोव]]
{{Endplainlist}}
| casualties1 =
'''Total: 178,426 dead and 32,925 missing'''<br>'''Total wounded: 566,434'''
{{Collapsible list
| bullets = yes
| title = Details
| {{flagcountry|South Korea}}:<ref name="ROK Web" /> <br> 137,899 dead <br> 450,742 wounded <br> 24,495 MIA <br> 8,343 POW
| {{flagcountry|United States|1912}}: <br> 36,574 dead<ref name="DCAS5FEB2013">{{cite web |url=https://www.dmdc.osd.mil/dcas/pages/report_korea_sum.xhtml |title=U.S. Military Casualties - Korean War Casualty Summary |author=<!--Staff writer(s); no by-line.--> |date=5 February 2013 |work=Defense Casualty Analysis System |publisher=United States Department of Defense |accessdate=6 February 2013 |archive-date=11 दिसंबर 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20151211002218/https://www.dmdc.osd.mil/dcas/pages/report_korea_sum.xhtml |url-status=dead }}</ref> <br> 103,284 wounded<ref name="DCAS5FEB2013"/> <br> 7,926 MIA<ref>{{cite web |url=http://www.dtic.mil/dpmo/summary_statistics/ |title=Summary Statistics |author=<!--Staff writer(s); no by-line.--> |date=24 January 2013 |work=Defense POW/Missing Personnel Office |publisher=United States Department of Defense |accessdate=6 February 2013 |archive-date=31 जनवरी 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150131084258/http://www.dtic.mil/dpmo/summary_statistics/ |url-status=dead }}</ref> <br> 4,714 POW<ref>{{cite web |url=http://aad.archives.gov/aad/series-description.jsp?s=488 |title=Records of American Prisoners of War During the Korean War, created, 1950 - 1953, documenting the period 1950 - 1953 |author=<!--Staff writer(s); no by-line.--> |work=Access to Archival Databases |publisher=[[National Archives and Records Administration]] |accessdate=6 February 2013 |quote=This series has records for 4,714 U.S. military officers and soldiers who were prisoners of war (POWs) during the Korean War and therefore considered casualties. }}</ref>
| {{flagcountry|United Kingdom}}: <br> 1,109 dead<ref name="BESeoul" /> <br> 2,674 wounded<ref name="BESeoul">{{cite web |url=http://ukinrok.fco.gov.uk/en/about-us/working-with-korea/defence-relations/korean-war |title=Korean war |author=Office of the Defence Attaché |date=30 September 2010 |work=British Embassy Seoul |publisher=[[Foreign and Commonwealth Office]] |accessdate=16 February 2013 |archive-date=9 अप्रैल 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120409080726/http://ukinrok.fco.gov.uk/en/about-us/working-with-korea/defence-relations/korean-war |url-status=dead }}</ref> <br> 179 MIA<ref name="ROK Web" /> <br> 977 POW<ref name="ROK Web" />
| {{flagcountry|Turkey}}:<ref name="ROK Web" /> <br> 741 dead <br> 2,068 wounded <br> 163 MIA <br> 244 POW
| {{flagcountry|Australia}} <ref>[http://www.awm.gov.au/encyclopedia/korea/mia/ Australian War Memorial Korea MIA] Retrieved 17 March 2012</ref> <br> 339 dead <br> 1,216 wounded <br> 43 MIA <br> 26 POW
| {{flagcountry|Canada|1921}} <br> 516 dead<ref>{{cite web |url=http://www.veterans.gc.ca/eng/teach_resources/korwebquest/grp02/korsum |title=Korean War WebQuest |author=<!--Staff writer(s); no by-line.--> |date=11 October 2011 |work=Veterans Affairs Canada |publisher=Government of Canada |accessdate=28 May 2013 |quote=In Brampton, Ontario, there is a 60 metre long "Memorial Wall" of polished granite, containing individual bronze plaques which commemorate the 516 Canadian soldiers who died during the Korean War. |archive-date=30 जनवरी 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130130062836/http://www.veterans.gc.ca/eng/teach_resources/korwebquest/grp02/korsum |url-status=dead }}<br />{{cite web |url=http://www.veterans.gc.ca/eng/history/KoreaWar/koreawar_fact |title=Canada Remembers the Korean War |author=<!--Staff writer(s); no by-line.--> |date=1 March 2013 |work=Veterans Affairs Canada |publisher=Government of Canada |accessdate=27 May 2013 |quote=The names of 516 Canadians who died in service during the conflict are inscribed in the Korean War Book of Remembrance located in the Peace Tower in Ottawa. |archive-date=6 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121006110456/http://www.veterans.gc.ca/eng/history/KoreaWar/koreawar_fact |url-status=dead }}</ref> <br> 1,042 wounded<ref>{{cite web |url=http://www.army.forces.gc.ca/land-terre/news-nouvelles/story-reportage-eng.asp?id=4854 |title=Korean War veterans talk of "forgotten war" |author=Aiysha Abdullah |author2=Kirk Fachnie |date=6 December 2010 |work=Canadian Army |publisher=Government of Canada |accessdate=28 May 2013 |quote=Canada lost 516 military personnel during the Korean War and 1,042 more were wounded. |archive-date=23 मई 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130523072128/http://www.army.forces.gc.ca/land-terre/news-nouvelles/story-reportage-eng.asp?id=4854 |url-status=dead }}<br />{{cite web |url=http://www.kvacanada.com/canadians_in_the_korean_war.htm |title=Canadians in the Korean War |author=<!--Staff writer(s); no by-line.--> |work=kvacanada.com |publisher=Korean Veterans Association of Canada Inc. |accessdate=28 May 2013 |quote=Canada's casualties totalled 1,558 including 516 who died. |archive-date=19 जनवरी 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200119163506/http://www.kvacanada.com/canadians_in_the_korean_war.htm |url-status=dead }}<br />{{cite news |title=2013 declared year of Korean war veteran |agency=The Canadian Press |url=http://news.ca.msn.com/canada/2013-declared-year-of-korean-war-veteran |newspaper=MSN News |date=8 January 013 |accessdate=28 May 2013 |quote=The 1,558 Canadian casualties in the three-year conflict included 516 people who died. |archive-date=2 नवंबर 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20131102154432/http://news.ca.msn.com/canada/2013-declared-year-of-korean-war-veteran |url-status=dead }}</ref> <br> 1 MIA<ref name="ROK Web" /> <br> 33 POW<ref>{{cite web |url=http://legionmagazine.com/en/index.php/2003/07/canadians-in-korea/ |title=Canadians in Korea |author=Ted Barris |date=1 July 2003 |work=legionmagazine.com |publisher=Royal Canadian Legion |accessdate=28 May 2013 |quote=Not one of the 33 Canadian PoWs imprisoned in North Korea signed the petitions. |archive-date=20 जुलाई 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130720042136/http://legionmagazine.com/en/index.php/2003/07/canadians-in-korea/ |url-status=dead }}<br />{{cite news |title=Behind barbed wire |url=http://www.cbc.ca/news/background/cdnpows/ |newspaper=CBC News |date=29 September 2003 |accessdate=28 May 2013 |archive-date=9 जुलाई 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130709125059/http://www.cbc.ca/news/background/cdnpows/ |url-status=dead }}</ref>
| {{flagcountry|France}}:<ref name="ROK Web" /> <br> 262 dead <br> 1,008 wounded <br> 7 MIA <br> 12 POW
| {{Flagicon image|State_Flag_of_Greece (1863-1924_and_1935-1973).svg}}
[[:en:Kingdom of Greece|ग्रीस का साम्राज्य]]<ref name="ROK Web" /> <br> 192 dead <br> 543 wounded <br> 3 POW
| {{flagcountry|Colombia}}:<ref name="ROK Web" /> <br> 163 dead <br> 448 wounded <br> 28 POW
| {{flagcountry|Thailand}}:<ref name="ROK Web" /> <br> 129 dead <br> 1,139 wounded <br> 5 MIA
| {{flagicon image|Flag_of_Ethiopia_(1897–1974).svg}} [[:en:Ethiopian Empire|इथियोपियाई साम्राज्य]]<ref name="ROK Web" /> <br> 121 dead <br> 536 wounded
| {{flagcountry|Netherlands}}<ref name="ROK Web" /> <br> 120 dead <br> 645 wounded <br> 3 MIA
| {{flagcountry|Belgium}}:<ref name="ROK Web" /> <br> 101 dead <br> 478 Wounded <br> 5 MIA <br> 1 POW
| {{flagcountry|Philippines|1936}} <ref name="GWHQ2002">{{cite book |editor1-last=Sandler |editor1-first=Stanley |title=Ground Warfare: H-Q |series=Volume 2 of Ground Warfare: An International Encyclopedia |url=http://books.google.com/books?id=L_xxOM85bD8C&lpg=PA1060&dq=Philippine%20casualties%20Korean%20War&pg=PA160#v=snippet&q=Philippines%20%22Korean%20War%22&f=false |accessdate=19 March 2013 |year=2002 |publisher=ABC-CLIO |isbn=9781576073445 |page=160 |quote=Philippines: KIA 92; WIA 299; MIA/POW 97 <br />New Zealand: KIA 34; WIA 299; MIA/POW 1 }}</ref> <br> 92 dead <br> 299 wounded <br> 97 MIA/POW
| {{Flagicon image|Flag of South Africa (1928–1994, bright colors).svg}} [[दक्षिण अफ़्रीकी संघ]]<ref name="ROK Web" /> <br> 34 dead <br> 9 POW
| {{flagcountry|New Zealand}}:<ref name="GWHQ2002" /> <br> 34 dead <br> 299 wounded <br> 1 MIA/POW
| {{flagcountry|Norway}}:<ref name="ROK Web" /> <br> 3 dead
| {{flagcountry|Luxembourg}}:<ref name="ROK Web" /> <br> 2 dead <br> 13 wounded
| {{flagcountry|India}}:<ref name="The Times, 14 August 1950">{{cite news | newspaper = [[The Times]] | date = 14 August 1950 | title = Two War Reporters Killed | location = [[London, United Kingdom]] | issn = 0140-0460 | ref = {{sfnRef|.27.27The Times.27.27, 14 August 1950}} }}</ref><br> 1 dead
}}
| casualties2 =
'''Total dead: 367,283–750,282'''<br>'''Total wounded: 686,500–789,000'''
{{Collapsible list
| bullets = yes
| title = Details
| {{flag|उत्तर कोरिया}} <br> 215,000-350,000 मृत<ref name="Rummel1997" /><br> 303,000 घायल <br> 120,000 MIA or POW<ref name="Hickey" />
| {{flag|चीन }}: <br> ''(Chinese sources)'':<ref name="Li111" /> <br> 152,000 मृत <br> 383,500 घायल <br> 450,000 hospitalized <br> 4,000 missing <br> 7,110 captured<br> 14,190 defected ''<br>{{nowrap|(American estimates)}}'':<ref name="Hickey" /> <br> 400,000+ मृत <br> 486,000 घायल <br> 21,000 POW
| {{flag|सोवियत संघ |1923}} <br>282 मृत<ref name="Krivosheev1997" />
}}
| casualties3 =
{{plainlist |
* '''कुल नागरिक मारे गए/घायल:''' 2.5 मिलियन (est.)<ref name="ROK Web" />
* '''दक्षिण कोरिया:''' 990,968 <br> 373,599 मारे गए<ref name="ROK Web" /> <br> 229,625 घायल<ref name="ROK Web" /> <br> 387,744 अपहरण/लापता<ref name="ROK Web" />
* '''उत्तर कोरिया:''' 1,550,000 (est.)<ref name="ROK Web" />
}}
| notes =
| campaignbox = {{Campaignbox Korean War}}
}}<noinclude>
{{स्रोत कम|date=दिसम्बर 2015}}
[[चित्र:Korean war 1950-1953.gif|thumb|upright|युद्ध के आरम्भिक दिनों में अधिकार-क्षेत्र बार-बार बदलते रहे। अन्ततः सीमा स्थिर हुई। <br /><span style="background:#d45444;">उत्तर कोरिया और चीनी सेनाएँ</span><br /><span style="background:#4cd444;">दक्षिण कोरिया, अमेरिका, कॉमनवेल्थ तथा संयुक्त राष्ट्र की सेनायें</span>]]
'''कोरियाई युद्ध''' (1950-53) का प्रारंभ 25 जून, 1950 को उत्तरी कोरिया से दक्षिणी कोरिया पर आक्रमण के साथ हुआ।यह [[शीतयुद्ध|शीत युद्ध काल]] में लड़ा गया सबसे पहला और सबसे बड़ा संघर्ष था। एक तरफ़ [[उत्तर कोरिया]] था जिसका समर्थन कम्युनिस्ट [[सोवियत संघ]] तथा साम्यवादी [[चीन]] कर रहे थे, दूसरी तरफ़ [[दक्षिण कोरिया|दक्षिणी कोरिया]] था जिसकी रक्षा [[संयुक्त राज्य अमेरिका|अमेरिका]] कर रहा था।<ref>{{Cite web |url=https://www.history.com/topics/korea/korean-war |title=संग्रहीत प्रति |access-date=30 नवंबर 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190828224246/https://www.history.com/topics/korea/korean-war |archive-date=28 अगस्त 2019 |url-status=live }}</ref>युद्ध अन्त में बिना निर्णय ही समाप्त हुआ परन्तु जन क्षति तथा तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया था।
कोरिया-विवाद सम्भवतः [[संयुक्त राष्ट्र|संयुक्त राष्ट्र संघ]] के शक्ति-सामर्थ्य का सबसे महत्वपूर्ण परीक्षण था। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के विद्वान [[शूमा]] ने इसे “[[सामूहिक सुरक्षा]] परीक्षण” की
संज्ञा दी है।
2020 में इस युद्ध के 70 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दक्षिण कोरिया ने उस युद्ध में अहम भूमिका निभाने वाले भारतीय कर्नल (स्वर्गीय) '''ए.जी.रंगराज''' को अपने देश का सबसे बड़ा युद्ध सम्मान'वॉर हीरो'से सम्मानित करने का फ़ैसला किया है। लेफ़्टिनेंट कर्नल ए. जी. रंगराज की अगुवाई में 60वीं पैराशूट फ़ील्ड एंबुलेंस ने उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच हुई जंग में '''मोबाइल आर्मी सर्जिकल हॉस्पिटल (MASH)''' को चलाया था। वेजिस प्लाटून की अगुवाई कर रहे थे उसमें कुल 627 जवान थे।<ref>https://aajtak.intoday.in/story/south-korea-war-hero-a-g-rangraj-indian-army-korean-war-hero-1-1141344.html</ref>
== युद्ध के पूर्व की स्धिति ==
1904-1905 में हुए [[रूस-जापान युद्ध]] के बाद जापान द्वारा कब्जा किए जाने के पहले प्रायद्वीप पर कोरियाई साम्राज्य का शासन था। सन् 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद यह सोवियत संघ और अमेरिका के कब्जे वाले क्षेत्रों में बांटा दिया गया।उत्तर कोरिया ने संयुक्त राष्ट्र संघ की पर्यवेक्षण में सन् '''1948''' में दक्षिण में हुए चुनाव में भाग लेने से इंकार कर दिया।जिसके परिणामस्वरूप दो कब्जे वाले क्षेत्रों में अलग कोरियाई सरकारों का गठन हुआ।उत्तरी कोरिया में कोरियाई कम्युनिस्टों के नेतृत्व में '''कोरियाई लोक जनवादी गणराज्य'''की सरकार बनी।तथा दक्षिण भाग में अनेक पार्टियों की कोरियई गणराज्य की लोकतांत्रिक सरकार का गठन किया गया जिसका नेतृत्व '''सिंगमन री''' कर रहा था। री कम्युनिस्ट विरोधी था तथा वह कम्युनिज्म के फैलाव को रोकने के लिए च्यांग-काई शेक के साथ गठबंधन करना चाहता था । उत्तर और दक्षिण कोरिया दोनों ही पूरे प्रायद्वीप पर संप्रभुता का दावा किया,जिसकी परिणति सन् 1950 में कोरियाई युद्ध के रूप में हुई।सन् 1953 में हुए युद्धविराम के बाद लड़ाई तो खत्म हो गई,लेकिन दोनों देश अभी भी आधिकारिक रूप से युद्धरत हैं।<ref>पृ-340 सभ्यता की कहानी भाग-२,10वीं कक्षा,पुरानी एन.सी.ई.आर.टी</ref>
=== कारण ===
[[द्वितीय विश्वयुद्ध]] के अंतिम दिनों में मित्र-राष्ट्रों में यह तय हुआ कि जापानी आत्म-समर्पण के बाद सोवियत सेना '''उत्तरी कोरिया के 38 वें अक्षांश तक''' तथा संयुक्त राष्ट्र संघ की सेना इस लाइन के दक्षिण भाग की निगरानी करेगी। दोनों शक्तियों ने “अन्तिम कोरियाई प्रजातांत्रिक सरकार” की स्थापना के लिए '''संयुक्त आयोग''' की स्थापना की। किन्तु 25 जून, 1950 को उत्तरी कोरिया ने दक्षिण कोरिया पर आक्रमण कर दिया। इसी दिन सुरक्षा परिषद में सोवियत अनुपस्थिति का फायदा उठाते हुए अमरीका ने अन्य सदस्यों से उत्तरी कोरिया को आक्रमणकारी घोषित करवा दिया। सुरक्षा परिषद ने यह सिफारिश की संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य कोरियाई गणराज्य को आवश्यक सहायता प्रदान करे जिससे वह सशस्त्र आक्रमण का मुकाबला कर सके तथा उस क्षेत्र में शांति और सुरक्षा स्थापित की जा सके। पहली बार 7 जुलाई, 1950 को अमरीकी जनरल मैकार्थर की कमान में संयुक्त राष्ट्र संघ के झण्डे के नीचे संयुक्त कमान का निर्माण किया गया।
सोल में कम्युनिस्ट समर्थकों के दमन के बाद उत्तर कोरिया के तत्कालीन नेता '''किम उल-सुंग''' ने दक्षिण कोरिया के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया था।किम उल-सुंग उत्तर कोरिया के वर्तमान शासक किम उल-जोंग के दादा थे।
लेकिन सोवियत संघ ने बाद में सुरक्षा परिषद् की कार्रवाई में भाग लेना आरंभ कर दिया और कोरिया में संयुक्त राष्ट्र संघ की कार्रवाई रोकने के लिए “वीटो” का प्रयोग कर दिया। इसके परिणामस्वरूप 3 नवम्बर, 1950 को महासभा ने “शांति के लिए एकता प्रस्ताव” पास कर अतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का उत्तरदायित्व स्वयं ले लिया। फलस्वरूप अमरीकी और चीनी सेनाएँ कोरियाई मामले को लेकर उलझ पड़ी।युद्ध शुरू होने के कुछ महीनों के बाद चीन को ये आशंका सताने लगी कि अमरीकी फौज उसकी सरहदों की तरफ रुख कर सकती है।इसलिए उसने तय किया कि इस लड़ाई में वो अपने साथी उत्तर कोरिया का बचाव करेगा।
चीनी सैनिकों के मोर्चा खोलने के बाद अमरीकी सैनिकों को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। उसके हताहत होने वाले सैनिकों की संख्या बढ़ गई।
हालांकि चीनी सैनिकों के पास उम्दा हथियार नहीं थे लेकिन उनकी तादाद बहुत बड़ी थी।
उत्तर कोरिया को चीन और सोवियत संघ से मिलने वाली सप्लाई लाइन को काटना बहुत जरूरी हो गया था।"
इसके बाद जनरल डगलस मैकअर्थर ने 'धरती को जला देने वाली अपनी युद्ध नीति' पर अमल करने का फैसला किया।इसी लम्हे से उत्तर कोरिया के शहरों और गांवों के ऊपर से रोज़ाना अमरीकी बम वर्षक विमान बी-29 और बी-52 मंडराने लगे।
इन लड़ाकू विमानों पर जानलेवा '''नापलम''' लोड था. नापलम एक तरह का ज्वलनशील तरल पदार्थ होता है जिसका इस्तेमाल युद्ध में किया जाता है।इससे '''जनरल डगलस मैकअर्थर''' की बहुत बदनामी भी हुई लेकिन ये हमले रुके नहीं।
अमरीकी कार्रवाई के बाद जल्द ही उत्तर कोरिया के शहर और गांव मलबे में बदलने लगे।<ref>{{Cite web |url=https://www.bbc.com/hindi/international-41148950 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=30 नवंबर 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190403111104/https://www.bbc.com/hindi/international-41148950 |archive-date=3 अप्रैल 2019 |url-status=live }}</ref>
=== कोरियाई युद्ध में भारत की भूमिका ===
भारत के अनथक प्रयास के बावजूद दोनों पक्षों को जून1953 में साथ लाना संभव हो पाया।भारतीय राजदूत और कोरिया संबंधी संयुक्तराष्ट्र संघ के कमीशन के अध्यक्ष '''के.पी.एस.मेनन(कृष्ण मेनन)'''द्वारा तैयार फार्मूले के अनुसार युद्धबंदी पर सहमति हुई और लड़ाई में बंदी बनाए गए सैनिकों की अदला-बदली का फार्मूला तैयार हो पाया।जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ और स्टालिन की मृत्यु के बाद सोवियत गुट ने स्वीकार किया।भारतीय '''जनरल थिमैय्या''' की अध्यक्षता में निष्पक्ष देशों का रिहाई कमिशन बनाया गया।उनकी देखरेख में में तैयार भारतीय '''"देखरेख दल"''' ने सैनिकों की रिहाई का कठिन कार्य अपने हाथों में लिया।
कोरियाई युद्ध गुटनिरपेक्षता में भारत की आस्था और शांति में उसके विश्वास की भी परीक्षा साबित हुई जिसमें वह ख्ररा उतरा।भारत द्वारा उत्तर कोरिया को हमलावर बताए जाने के कारण उसे चीन और सोवियत विरोध का सामना करना पड़ा। युद्ध में अमरीकी हस्तक्षेप से इनकार करने तथा चीन को हमलावार नहीं मानने के कारण भारत को अमरीका के गुस्से का सामना करना पड़।
1950में चीन ने तिब्बत पर हमला करके उसे बिना किसी विशेष प्रयत्न के अपने में मिला लिया।और भारत को चुप रहना पड़ा।
अमरीकी नीति के विरोध में सोवियत संघ सुरक्षा परिषद से बाहर निकल गया।ऐसे हालात में भारत ने चीन को सुरक्षा परिषद में सीट देने पर खास जोर दिया।भारत में उत्पन्न अकाल जैसे हालात से निपटने के लिए अमरीका से अनाज मंगाने की सख्त जरूरत थी ।परंतु इससे कोरिया में अमरीकी भूमिका संबंधी अपनी दृष्ट्रि प्रभावित नहीं होने दी।सफलता न मिलने पर भी भारत लगातार कोशिश करता रहा और अंतत:भारत की स्थिति सही साबित हुई:दोनों पक्षों ने उसी सीमा को स्वीकार किया जिसे वे बदलना चाह रहे थे।<ref>पृ-210,आजादी के बाद का भारत ,बिपिन चंद्र</ref>
अंततः [[भारत]] तथा कुछ अन्य शांतिप्रिय राष्ट्रों की पहल के कारण 27 जुलाई, 1953 में दोनों पक्षों के बीच युद्ध विराम-सन्धि हुई। इस प्रकार कोरिया युद्ध को संयुक्त राष्ट्र संघ रोकने में सफल हुआ। वैसे उत्तरी तथा दक्षिणी कोरिया में आपसी तनाव जारी रहा।
===जनहानि===
अमेरिकी [[रक्षा मंत्रालय (भारत)|रक्षा मंत्रालय]] के अनुसार वहाँ इस युद्ध के कारण 33,686 सैनिकों और 2,830 आम नागरिकों की मौत हो गई। 1 नवम्बर 1950 को चीन का सामना करने पर सैनिकों के मौत की संख्या 8,516 बढ़ गई।
किम जैसे शोधकर्ता बताते हैं कि तीन सालों की लड़ाई के दौरान उत्तर कोरिया पर 635,000 टन बम गिराये गए।
उत्तर कोरिया के अपने सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस युद्ध में 5000 स्कूल, 1000 हॉस्पिटल और छह लाख घर तहस-नहस हो गए थे।
युद्ध के बाद जारी किए गए एक सोवियत दस्तावेज़ के मुताबिक़ बम हमले में 282,000 लोग मारे गए थे।
एक अंतरराष्ट्रीय आयोग ने भी उत्तर कोरिया की राजधानी का दौरा किया था जिसने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बम हमले से शायद ही कोई इमारत अछूता रह पाया हो।
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी के ड्रेसडेन जैसे शहरों के साथ हुआ था,वैसे हालात उत्तर कोरियाई लोगों ने अपनी सड़कों पर धुएं का गुबार देखा।
<ref>{{Cite web |url=https://www.bbc.com/hindi/international-41148950 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=30 नवंबर 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190403111104/https://www.bbc.com/hindi/international-41148950 |archive-date=3 अप्रैल 2019 |url-status=live }}</ref>
दक्षिण कोरिया ने बताया कि इस लड़ाई से उसके 3,73,599 आम नागरिक और 1,37,899 सैनिक मारे गए। पश्चिम स्रोतो के अनुसार इससे चार लाख लोगों कि मौत और 4,86,000 लोग घायल हुए हैं। केपीए के अनुसार 2,15,000 लोगों की मौत और 3,03,000 लोग घायल हुए थे।<ref>Bethany Lacina and Nils Petter Gleditsch, [http://www.bethanylacina.com/LacinaGleditsch_newdata.pdf Monitoring Trends in Global Combat: A New Dataset of Battle Deaths] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20141006175909/http://www.bethanylacina.com/LacinaGleditsch_newdata.pdf |date=6 अक्तूबर 2014 }}, European Journal of Population (2005) 21: 145–166. Also available [http://www.prio.org/Global/upload/CSCW/Data/Monitoring%20trends%20in%20global%20combat%20EJP.pdf here] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20141006152343/http://www.prio.org/Global/upload/CSCW/Data/Monitoring%20trends%20in%20global%20combat%20EJP.pdf |date=6 अक्तूबर 2014 }}</ref>
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://web.archive.org/web/20161005215146/http://satyagrah.scroll.in/article/14124/korean-war-and-role-of-india कोरिया युद्ध ]
[[श्रेणी:एशिया के युद्ध]]
[[श्रेणी:कोरिया का इतिहास]]
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ये मोहब्बत है (2002 फ़िल्म)
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{{Infobox Film
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-->| caption = '''ये मोहब्बत है''' का पोस्टर
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| director = [[उमेश मेहरा]]
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| starring = राहुल भट्ट, <br />नासिर ख़ान, <br />मोहिनी शर्मा, <br />[[डैनी डेन्जोंगपा]], <br />[[परीक्षित साहनी|परीक्षत साहनी]], <br />[[शक्ति कपूर]], <br />[[मोहनीश बहल]], <br />[[गुलशन ग्रोवर]], <br />[[जॉनी लीवर]], <br />[[राकेश बेदी]], <br />[[अंजना मुमताज़]], <br />[[डॉली बिन्द्रा]], <br />[[अरबाज़ ख़ान]], <br />[[सदाशिव अमरापुरकर]], <br />
| screenplay =
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| country = [[भारत]]
| language = [[हिन्दी]]
| budget =
}}
'''ये मोहब्बत है''' 2002 में बनी [[हिन्दी|हिन्दी भाषा]] की फिल्म है।
== संक्षेप ==
== चरित्र ==
== मुख्य कलाकार ==
* राहुल भट्ट
* नासिर ख़ान
* मोहिनी शर्मा
* [[डैनी डेन्जोंगपा]] - अमन ख़ान
* [[परीक्षित साहनी|परीक्षत साहनी]]
* [[शक्ति कपूर]]
* [[मोहनीश बहल]] - शौकत
* [[गुलशन ग्रोवर]]
* [[जॉनी लीवर]] - जग्गी
* [[राकेश बेदी]] - चाचा
* [[अंजना मुमताज़]]
* [[डॉली बिन्द्रा]] - ज्योति
* [[अरबाज़ ख़ान]] - अब्दुल ज़मील
* [[सदाशिव अमरापुरकर]] - पुलिस इंस्पेक्टर
== दल ==
== संगीत ==
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== रोचक तथ्य ==
== परिणाम ==
=== बौक्स ऑफिस ===
=== समीक्षाएँ ===
== नामांकन और पुरस्कार ==
== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{imdb title|0309087|ये मोहब्बत है}}
[[श्रेणी:2002 में बनी हिन्दी फ़िल्म]]
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बहलूल खान लोदी
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{{Infobox royalty
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|caption = बहलुल लोदी के 80 रत्ती का बिलन टांका
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}}
'''बहलोल खान लोदी''' (मृत्यु:[[१४८९|1489]]) [[दिल्ली]] के [[लोदी वंश]] का प्रथम सुलतान बना, जब पिछले [[सैयद वंश]] के अंतिम शासक पदच्युत हुआ। बहलूल एक अफगान व्यापारियों के परिवार में पैदा हुआ था। बाद में यह एक प्रसिद्द योद्धा होकर [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] का राज्यपाल बना। इसने [[दिल्ली सल्तनत]] [[अप्रैल 19]],[[१४५१|1451]] को ग्रहण किया।
बहलूल खान ने विद्रोहियों को शांत करने हेतु बहुत प्रयास किये और अपने राज्य की सीमाओं को [[ग्वालियर]], [[जौनपुर]] और ऊपरी [[उत्तर प्रदेश]] तक फैलाया। सन [[१४८६|1486]] में, अपने पुत्र, [[बर्बक शाह]] को [[जौनपुर]] का राज्यपाल नियुक्त किया। इससे कुछ समय बाद उत्तराधिकार की समस्या खडी़ हुई, जो कि इसके दूसरे पुत्र [[सिकन्दर लोदी|सिकंदर लोदी]] ने दावा कर खडी़ की। सिकंदर को उत्तराधिकारी स्वयं बहलूल ने ही बनाया था। बाद में बहलूल की मृत्योपरांत वही सुल्तान बना सन [[१४८९|1489]] में।
* [[लोदी वंश]]
{{दिल्ली सल्तनत}}
== सन्दर्भ ==
* https://web.archive.org/web/20170217020010/http://www.indhistory.com/lodi-dynasty.html
* https://web.archive.org/web/20080223213215/http://sify.com/itihaas/fullstory.php?id=13233620
* https://web.archive.org/web/20080513093840/http://www.webindia123.com/history/MEDIEVAL/delhisultanate/delhi%20sultanate4.htm
<br />
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मदहोशी (2004 फ़िल्म)
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हिंदुस्थान वासी
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{{Infobox Film
| name = मदहोशी
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| caption = '''मदहोशी''' का पोस्टर
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| starring = [[बिपाशा बसु]], <br />[[जॉन अब्राहम]], <br />[[अनंग देसाई]], <br />[[विक्रम गोखले]], <br />[[आदि ईरानी]], <br />[[स्मिता जयकर]], <br />नन्दिता पुरी, <br />[[राजीव वर्मा]], <br />
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}}
'''मदहोशी''' 2004 में बनी [[हिन्दी|हिन्दी भाषा]] की फिल्म है।
== संक्षेप ==
== चरित्र ==
== मुख्य कलाकार ==
* [[बिपाशा बसु]] - अनुपमा कौल
* [[जॉन अब्राहम]] - अमन
* [[अनंग देसाई]] - ओबेरॉय
* [[विक्रम गोखले]]
* [[आदि ईरानी]]
* [[स्मिता जयकर]]
* नन्दिता पुरी
* [[राजीव वर्मा]]
== दल ==
== संगीत ==
{{Tracklist
| heading = गीत
| extra_column = गायक
| all_lyrics = [[शकील काज़मी]]
| all_music = [[रूप कुमार राठौड़]]
| title1 = ये इश्क़ है गुनाह
| extra1 = [[सुनिधि चौहान]], [[सुखविंदर सिंह]]
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| title2 = चले भी आओ
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== रोचक तथ्य ==
== परिणाम ==
=== बौक्स ऑफिस ===
=== समीक्षाएँ ===
== नामांकन और पुरस्कार ==
== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{imdb title|0430328|मदहोशी}}
[[श्रेणी:2004 में बनी हिन्दी फ़िल्म]]
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ओंकारेश्वर मन्दिर
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/* बाहरी कड़ियाँ */
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text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक हिन्दू मन्दिर
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'''ॐकारेश्वर''' एक [[हिन्दू]] मंदिर है। यह [[मध्य प्रदेश]] के [[खण्डवा|खंडवा]] जिले में स्थित है। यह [[नर्मदा नदी|नर्मदा]] नदी के बीच मन्धाता या शिवपुरी नामक द्वीप पर स्थित है। यह भगवान [[शिव]] के बारह [[द्वादश ज्योतिर्लिंग|ज्योतिर्लिंगओं]] में से एक है , सदियों पहले [[ भील ]] [[जनजाति]] ने इस जगह पर लोगो की बस्तियां बसाई और अब यह जगह अपनी भव्यता और इतिहास से प्रसिद्ध है <ref>{{cite book |title=Dasa pratinidhi kahāniyām̐|last=अग्रवाल |first=अशोक |isbn= 9788170162315 |year= 1993 |publisher=किताब घर |url=https://books.google.co.in/books?id=6L9jAAAAMAAJ&q=%E0%A4%AD%E0%A5%80%E0%A4%B2+%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%BE&dq=%E0%A4%AD%E0%A5%80%E0%A4%B2+%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%BE&hl=hi&sa=X&ved=2ahUKEwjksIv51v7qAhVy73MBHbSvDAQ4ChDoATABegQIARAJ}}</ref> । यह यहां के मोरटक्का गांव से लगभग (14 कि॰मी॰) दूर बसा है। यह द्वीप हिन्दू पवित्र चिन्ह '''ॐ''' के आकार में बना है। यहां दो मंदिर स्थित हैं<ref>{{cite web|url= https://www.myoksha.com/omkareshwar-temple/|title= ओम्कारेश्वर मन्दिर|access-date= 18 अगस्त 2016|archive-url= https://web.archive.org/web/20160819151517/https://www.myoksha.com/omkareshwar-temple/|archive-date= 19 अगस्त 2016|url-status= dead}}</ref>।
* ॐकारेश्वर
* ममलेश्वर
ॐकारेश्वर का निर्माण [[नर्मदा नदी]] से स्वतः ही हुआ है। यह नदी भारत की पवित्रतम नदियों में से एक है और अब इस पर विश्व का सर्वाधिक बड़ा बांध परियोजना का निर्माण हो रहा है।
जिस ओंकार शब्द का उच्चारण सर्वप्रथम सृष्टिकर्ता विधाता के मुख से हुआ, वेद का पाठ इसके उच्चारण किए बिना नहीं होता है।
इस ओंकार का भौतिक विग्रह ओंकार क्षेत्र है। इसमें 68 तीर्थ हैं। यहाँ 33 कोटि
देवता परिवार सहित निवास करते हैं तथा 2 ज्योतिस्वरूप लिंगों सहित 108 प्रभावशाली शिवलिंग हैं। मध्यप्रदेश में देश के प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों में से 2 ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं। एक उज्जैन में महाकाल के रूप में और दूसरा ओंकारेश्वर में ओम्कारेश्वर- ममलेश्वर के रूप में विराजमान हैं।
== इतिहास ==
[[चित्र:Omkareshwar1.JPG|thumb|left|300px|ॐकारेश्वर में नर्मदा नदी]]
ऐतिहासिक परंपराओं के अनुसार, इस मंदिर का मूल निर्माण 11वीं शताब्दी ईस्वी में मालवा के परमार शासकों द्वारा कराया गया था। परमारों के शासन के पश्चात इसका संरक्षण और प्रबंधन चौहान शासकों के अधीन आ गया। मध्यकाल में हुए मुस्लिम आक्रमणों के दौरान मंदिर को क्षति पहुँची और इसे लूटने तथा ध्वस्त करने के प्रयास किए गए। यद्यपि इन आक्रमणों से मंदिर को पर्याप्त नुकसान हुआ, फिर भी इसकी मूल संरचना पूर्णतः नष्ट नहीं हुई और यह किसी न किसी रूप में सुरक्षित बनी रही।
मुगल शासनकाल के दौरान भी मंदिर का संरक्षण स्थानीय चौहान शासकों के अधीन बना रहा, हालांकि इस अवधि में इसके व्यापक जीर्णोद्धार या पुनर्निर्माण के प्रमाण नहीं मिलते। बाद में 18वीं शताब्दी में होल्कर वंश के संरक्षण में मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया। इस कार्य का आरंभ [[होलकर|होल्कर]] राज्य की प्रथम रानी गौतमा बाई होल्कर ने कराया, जिसे बाद में उनकी पुत्रवधू [[अहिल्याबाई होल्कर]] ने पूर्ण कराया। अहिल्याबाई होल्कर ने भारत के अनेक प्राचीन तीर्थस्थलों के संरक्षण और पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिनमें यह मंदिर भी सम्मिलित है।<ref>{{cite web
| url = https://behindeverytemple.org/hindu-temples/shiva/omkareshwar-temple/
| title = Omkareshwar Temple
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| website = बिहाइंड एवरी टेम्पल
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औपनिवेशिक काल में यह मंदिर ब्रिटिश प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आ गया। भारत की स्वतंत्रता के पश्चात, वर्ष 1947 के बाद इसकी देखरेख और संरक्षण का दायित्व [[भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण]] ने स्थानीय प्रशासन के सहयोग से अपने हाथों में लिया। वर्तमान में यह मंदिर एक संरक्षित ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर के रूप में संरक्षित है।
== कथा ==
हिंदू परंपराओं के अनुसार, ओंकारेश्वर से अनेक पौराणिक कथाएँ जुड़ी हुई हैं, जो इस ज्योतिर्लिंग की धार्मिक महत्ता को रेखांकित करती हैं। एक प्रचलित कथा के अनुसार, विंध्याचल पर्वतमाला के अधिष्ठाता देवता विंध्य ने अपने द्वारा किए गए पापों के प्रायश्चित के लिए भगवान शिव की कठोर आराधना की। उन्होंने एक पवित्र यंत्र की स्थापना की तथा रेत और मिट्टी से एक [[शिवलिंग]] का निर्माण कर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव दो ओंकारेश्वर और अमलेश्वर (ममलेश्वर) स्वरूपों में प्रकट हुए। मान्यता है कि जिस स्थान पर मिट्टी का शिवलिंग दिव्य रूप में प्रकट हुआ, वही आगे चलकर ओंकारेश्वर कहलाया। मंदिर परिसर में माता [[पार्वती]] और भगवान [[गणेश]] के मंदिर भी स्थित हैं।<ref name="Ram">{{cite book |title=Hindu Pilgrim centres |last=हर्षानंद |first=स्वामी |isbn=978-81-7907-053-6 |year=2012 |publisher=रामकृष्ण मठ |location=बैंगलोर, भारत |edition=2nd |pages=98–100}}</ref>
एक अन्य कथा का संबंध [[इक्ष्वाकु]] वंश के प्रसिद्ध राजा [[मान्धातृ|मंधाता]] से है, जिन्हें भगवान [[राम]] का पूर्वज माना जाता है। कहा जाता है कि राजा मंधाता ने इसी स्थान पर भगवान [[शिव]] की घोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर शिव ने ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिए।<ref name="Lochtefeld">{{Citation |ref=Lochtefeld |last=लोचटेफेल्ड |first=जेम्स जी. |title=The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: A-M |year=2002 |publisher=रोसेन पब्लिशिंग ग्रुप|isbn=0-8239-3179-X |page=122 |url=https://books.google.com/books?id=5kl0DYIjUPgC}}</ref> कुछ परंपराओं में यह भी वर्णित है कि मंधाता के पुत्र अंबरीष और [[मुचुकुन्द]] ने भी यहाँ कठोर तप किया था। इसी कारण इस पर्वत और द्वीप को मंधाता पर्वत अथवा मंधाता द्वीप के नाम से भी जाना जाता है।
एक अन्य पौराणिक आख्यान के अनुसार, देवताओं और दानवों के बीच हुए भीषण युद्ध में जब दानवों की विजय होने लगी, तब संकटग्रस्त देवताओं ने भगवान शिव की आराधना की। उनकी प्रार्थना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए और दानवों का संहार कर देवताओं को विजय प्रदान की। इस कथा के कारण भी ओंकारेश्वर को धर्म और अधर्म के संघर्ष में दिव्य संरक्षण का प्रतीक माना जाता है।
ओंकारेश्वर का संबंध [[आदि शंकराचार्य]] के जीवन से भी जुड़ा हुआ है। परंपरा के अनुसार, यहीं स्थित एक गुफा में उनकी भेंट अपने गुरु [[गोविन्द भगवत्पाद]] से हुई थी और उन्होंने उनके सान्निध्य में वेदांत का अध्ययन किया। यह गुफा आज भी ओंकारेश्वर मंदिर के निकट विद्यमान है और एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक तीर्थस्थल मानी जाती है। यहाँ आदि शंकराचार्य की प्रतिमा भी स्थापित है,<ref>{{cite web |url=http://www.columbuslost.com/2015/03/omkareshwar-narmada-yatra.html |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20150821000355/http://www.columbuslost.com/2015/03/omkareshwar-narmada-yatra.html |archive-date=21 अगस्त 2015 |title=Omkareshwar - Where Adi Sankara met his Guru}}</ref> जो उनके जीवन और अद्वैत वेदांत परंपरा की स्मृति को संजोए हुए है।
== मान्यता ==
नर्मदा क्षेत्र में ओंकारेश्वर सर्वश्रेष्ठ तीर्थ है। शास्त्र मान्यता है कि कोई भी तीर्थयात्री देश के भले ही सारे तीर्थ कर ले किन्तु जब तक वह ओंकारेश्वर आकर किए गए तीर्थों का जल लाकर यहाँ नहीं चढ़ाता उसके सारे तीर्थ अधूरे माने जाते हैं। ओंकारेश्वर तीर्थ के साथ नर्मदाजी का भी विशेष महत्व है। शास्त्र मान्यता के अनुसार जमुनाजी में 15 दिन का स्नान तथा गंगाजी में 7 दिन का स्नान जो फल प्रदान करता है, उतना पुण्यफल नर्मदाजी के दर्शन मात्र से प्राप्त हो जाता है।
ओंकारेश्वर तीर्थ क्षेत्र में चौबीस अवतार, माता घाट (सेलानी), सीता वाटिका, धावड़ी कुंड, मार्कण्डेय शिला, मार्कण्डेय संन्यास आश्रम, अन्नपूर्णाश्रम, विज्ञान शाला, बड़े हनुमान, खेड़ापति हनुमान, ओंकार मठ, माता आनंदमयी आश्रम, ऋणमुक्तेश्वर महादेव, गायत्री माता मंदिर, सिद्धनाथ गौरी सोमनाथ, आड़े हनुमान, माता वैष्णोदेवी मंदिर, चाँद-सूरज दरवाजे, वीरखला, विष्णु मंदिर, ब्रह्मेश्वर मंदिर, सेगाँव के गजानन महाराज का मंदिर, काशी विश्वनाथ, नरसिंह टेकरी, कुबेरेश्वर महादेव, चन्द्रमोलेश्वर महादेव के मंदिर भी दर्शनीय हैं।
== कुबेर भंडारी मंदिर का इतिहास ==
इस मंदिर में शिव भक्त कुबेर ने तपस्या की थी तथा शिवलिंग की स्थापना की थी। जिसे शिव ने देवताओ का धनपति बनाया था। कुबेर के स्नान के लिए शिवजी ने अपनी जटा के बाल से कावेरी नदी उत्पन्न की थी। यह नदी कुबेर मंदिर के बाजू से बहकर नर्मदाजी में मिलती है, जिसे छोटी परिक्रमा में जाने वाले भक्तो ने प्रत्यक्ष प्रमाण के रूप में देखा है, यही कावेरी ओमकार पर्वत का चक्कर लगाते हुए संगम पर वापस नर्मदाजी से मिलती हैं, इसे ही नर्मदा कावेरी का संगम कहते है।
===धनतेरस पूजन===
इस मंदिर पर प्रतिवर्ष दिवाली की बारस की रात को ज्वार चढाने का विशेष महत्त्व है इस रात्रि को जागरण होता है तथा धनतेरस की सुबह ४ बजे से अभिषेक पूजन होता हैं इसके पश्चात् कुबेर महालक्ष्मी का महायज्ञ, हवन, (जिसमे कई जोड़े बैठते हैं, धनतेरस की सुबह कुबेर महालक्ष्मी महायज्ञ नर्मदाजी का तट और ओम्कारेश्वर जैसे स्थान पर होना विशेष फलदायी होता हैं) भंडारा होता है लक्ष्मी वृद्धि पेकेट (सिद्धि) वितरण होता है, जिसे घर पर ले जाकर दीपावली की अमावस को विधि अनुसार धन रखने की जगह पर रखना होता हैं, जिससे घर में प्रचुर धन के साथ सुख शांति आती हैं I इस अवसर पर हजारों भक्त दूर दूर से आते है व् कुबेर का भंडार प्राप्त कर प्रचुर धन के साथ सुख शांति पाते हैं I नवनिर्मित मंदिर
प्राचीन मंदिर ओम्कारेश्वर बांध में जलमग्न हो जाने के कारण भक्त श्री चैतरामजी चौधरी, ग्राम - कातोरा (गुर्जर दादा) के अथक प्रयास से नवीन मंदिर का निर्माण बांध के व् ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के बीच नर्मदाजी के किनारे २००६-०७ बनाया गया हैं I
== ओंकारेश्वर-दर्शन ==
नर्मदा किनारे जो बस्ती है उसे विष्णुपुरी कहते हैं। यहाँ नर्मदाजी पर पक्का घाट है। सेतु (अथवा नौका) द्वारा नर्मदाजी को पार करके यात्री मान्धाता द्वीपमें पहुँचता है। उस ओर भी पक्का घाट है। यहाँ घाट के पास नर्मदाजी में कोटितीर्थ या चक्रतीर्थ माना जाता है। यहीं स्नान करके यात्री सीढ़ियों से ऊपर चढ़कर ऑकारेश्वर-मन्दिर में दर्शन करने जाते हैं। मन्दिर तट पर ही कुछ ऊँचाई पर है।
मन्दिर के अहाते में पंचमुख गणेशजी की मूर्ति है। प्रथम तल पर ओंकारेश्वर लिंग विराजमान हैं। श्रीओंकारेश्वर का लिंग अनगढ़ है। यह लिंग मन्दिर के ठीक शिखर के नीचे न होकर एक ओर हटकर है। लिंग के चारों ओर जल भरा रहता है। मन्दिर का द्वार छोटा है। ऐसा लगता है जैसे गुफा में जा रहे हों। पास में ही पार्वतीजी की मूर्ति है। ओंकारेश्वर मन्दिर में सीढ़ियाँ चढ़कर दूसरी मंजिल पर जाने पर महाकालेश्वर लिंग के दर्शन होते हैं। यह लिंग शिखर के नीचे है। तीसरी मंजिल पर सिद्धनाथ लिंग है। यह भी शिखर के नीचे है। चौथी मंजिल पर गुप्तेश्वर लिंग है। पांचवीं मंजिल पर ध्वजेश्वर लिंग है।
तीसरी, चौथी व पांचवीं मंजिलों पर स्थित लिंगों के ऊपर स्थित छतों पर अष्टभुजाकार आकृतियां बनी हैं जो एक दूसरे में गुंथी हुई हैं। द्वितीय तल पर स्थित महाकालेश्वर लिंग के ऊपर छत समतल न होकर शंक्वाकार है और वहां अष्टभुजाकार आकृतियां भी नहीं हैं। प्रथम और द्वितीय तलों के शिवलिंगों के प्रांगणों में नन्दी की मूर्तियां स्थापित हैं। तृतीय तल के प्रांगण में नन्दी की मूर्ति नहीं है। यह प्रांगण केवल खुली छत के रूप में है। चतुर्थ एवं पंचम तलों के प्रांगण नहीं हैं। वह केवल ओंकारेश्वर मन्दिर के शिखर में ही समाहित हैं। प्रथम तल पर जो नन्दी की मूर्ति है, उसकी हनु के नीचे एक स्तम्भ दिखाई देता है। ऐसा स्तम्भ नन्दी की अन्य मूर्तियों में विरल ही पाया जाता है।
श्रीओंकारेश्वरजी की परिक्रमा में रामेश्वर-मन्दिर तथा गौरीसोमनाथ के दर्शन हो जाते हैं। ओंकारेश्वर मन्दिर के पास अविमुतश्वर, ज्वालेश्वर, केदारेश्वर आदि कई मन्दिर हैं।
== ओंकारेश्वर यात्राक्रम ==
मान्धाता टापू में ही ऑकारेश्वर की दो परिक्रमाएँ होती हैं - एक छोटी और एक बड़ी। ऑकारेश्वर की यात्रा तीन दिन की मानी जाती है। इस तीन दिन की यात्रा में यहाँ के सभी तीर्थ आ जाते हैं। अत: इस क्रम से ही वर्णन किया जा रहा है।
प्रथम दिन की यात्रा- कोटि-तीर्थ पर ( मान्धाता द्वीप में ) स्नान और घाट पर ही कोटेश्वर, हाटकेश्वर, त्र्यम्बकेश्वर, गायत्रीश्वर, गोविन्देश्वर, सावित्रीश्वर का दर्शन करके भूरीश्वर, श्रीकालिका तथा पंचमुख गणपति का एवं नन्दी का दर्शन करते हुए ऑकारेश्वरजी का दर्शन करे। ओंकारेश्वर मन्दिर में ही शुकदेव, मान्धांतेश्वर, मनागणेश्वर, श्रीद्वारिकाधीश, नर्मदेश्वर, नर्मदादेवी, महाकालेश्वर, वैद्यनाथेश्वरः, सिद्धेश्वर, रामेश्वर, जालेश्वरके दर्शन करके विशल्या संगम तीर्थ पर विशल्येश्वर का दर्शन करते हुए अन्धकेश्वर, झुमकेश्वर, नवग्रहेश्वर, मारुति (यहाँ राजा मानकी साँग गड़ी है): साक्षीगणेश, अन्नपूर्णा और तुलसीजी का दर्शन करके मध्याह्न विश्राम किया जाता है। मध्याहोत्तर अविमुक्तेश्वर, महात्मा दरियाईनाथ की गद्दी, बटुकभैरव, मंगलेश्वर, नागचन्द्रेश्वर, दत्तात्रेय एवं काले-गोरे भैरव का दर्शन करते बाजार से आगे श्रीराममन्दिर में श्रीरामचतुष्टय का तथा वहीं गुफा में धृष्णेश्वर का दर्शन करके नर्मदाजीके मन्दिरमें नर्मदाजी का दर्शन करना चाहिये।
दूसरे दिन- यह दिन ऑकार ( मान्धाता ) पर्वत की पंचक्रोशी परिक्रमा का है। कोटितीर्थ पर स्नान करके चक्रेश्वर का दर्शन करते हुए गऊघाट पर गोदन्तेश्वर, खेड़ापति हनुमान, मल्लिकार्जुनः, चन्द्रेश्वर, त्रिलोचनेश्वर, गोपेश्वरके दर्शन करते श्मशान में पिशाचमुक्तेश्वर, केदारेश्वर होकर सावित्री-कुण्ड और आगे यमलार्जुनेश्वर के दर्शन करके कावेरी-संगम तीर्थ पर स्नान - तर्पणादि करे तथा वहीं श्रीरणछोड़जी एवं ऋणमुक्तेश्वर का पूजन करे। आगे राजा मुचुकुन्द के किले के द्वार से कुछ दूर जाने पर हिडिम्बा-संगम तीर्थ मिलता है। यहाँ मार्ग में गौरी-सोमनाथ की विशाल लिंगमूर्ति मिलती है (इसे मामा-भानजा कहते हैं)। यह तिमंजिला मन्दिर है और प्रत्येक मंजिल पर शिवलिंग स्थापित हैं। पास ही शिवमूर्ति है। यहाँ नन्दी, गणेशजी और हनुमानजी की भी विशाल मूर्तियाँ हैं। आगे अन्नपूर्णा, अष्टभुजा, महिषासुरमर्दिनी, सीता-रसोई तथा आनन्द भैरव के दर्शन करके नीचे उतरे। यह ऑकार का प्रथम खण्ड पूरा हुआ। नीचे पंचमुख हनुमान जी हैं। सूर्यपोल द्वार में षोडशभुजा दुर्गा, अष्टभुजादेवी तथा द्वारके बाहर आशापुरी माताके दर्शन करके सिद्धनाथ एवं कुन्ती माता ( दशभुजादेवी ) के दर्शन करते हुए किले के बाहर द्वार में अर्जुन तथा भीम की मूर्तियोंके दर्शन करे। यहाँ से धीरे-धीरे नीचे उतरकर वीरखला पर भीमाशंकर के दर्शन करके और नीचे उतरकर कालभैरव के दर्शन करे तथा कावेरी-संगम पर जूने कोटितीर्थ और सूर्यकुण्ड के दर्शन करके नौका से या पैदल (ऋतुके अनुसार जैसे सम्भव हो ) कावेरी पार करे। उस पार पंथिया ग्राम में चौबीस अवतार, पशुपतिनाथ, गयाशिला, एरंडी-संगमतीर्थ, पित्रीश्वर एवं गदाधर-भगवान के दर्शन करे। यहाँ पिण्डदानश्राद्ध होता है। फिर कावेरी पार कर के लाटभैरव-गुफा में कालेश्वर, आगे छप्पनभैरव तथा कल्पान्तभैरवके दर्शन करते हुए राजमहलमें श्रीराम का दर्शन करके औकारेश्वर के दर्शन से परिक्रमा पूरी करे।
तीसरे दिन की यात्रा- इस मान्धाता द्वीप से नर्मदा पार करके इस ओर विष्णुपुरी और ब्रह्मपुरी की यात्रा की जाती है। विष्णुपुरी के पास गोमुख से बराबर जल गिरता रहता है। यह जल जहाँ नर्मदा में गिरता है, उसे कपिला-संगम तीर्थ कहते हैं। वहाँ स्नान और मार्जन किया जाता है। गोमुख की धारा गोकर्ण और महाबलेश्वर लिंगों पर गिरती है। यह जल त्रिशूलभेद कुण्ड से आता है। इसे कपिलधारा कहते हैं। वहाँ से इन्द्रेश्वर और व्यासेश्वरका दर्शन करके अमलेश्वर का दर्शन करना चाहिये।
== ममलेश्वर ==
[[चित्र:Amleshwar अमलेश्वर.jpg|अंगूठाकार|ओंकारेश्वर में अमलेश्वर मंदिर का बाहरी दृश्य]]
ममलेश्वर भी ज्योतिर्लिंग है। ममलेश्वर मन्दिर अहल्याबाई का बनवाया हुआ है। गायकवाड़ राज्य की ओर से नियत किये हुए बहुत से ब्राह्मण यहीं पार्थिव-पूजन करते रहते हैं। यात्री चाहे तो पहले ममलेश्वर का दर्शन करके तब नर्मदा पार होकर औकारेश्वर जाय; किंतु नियम पहले ओंकारेश्वर का दर्शन करके लौटते समय ममलेश्वर-दर्शन का ही है। पुराणों में ममलेश्वर नाम के बदले अमलेश्वर उपलब्ध होता है।<ref>{{Cite web |url=http://puranastudy.byethost14.com/pur_index26/pva13.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=9 मई 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190126220911/http://puranastudy.byethost14.com/pur_index26/pva13.htm |archive-date=26 जनवरी 2019 |url-status=dead }}</ref> ममलेश्वर-प्रदक्षिणा में वृद्धकालेश्वर, बाणेश्वर, मुक्तेश्वर, कर्दमेश्वर और तिलभाण्डेश्वरके मन्दिर मिलते हैं।
ममलेश्वरका दर्शन करके (निरंजनी अखाड़ेमें) स्वामिकार्तिक ( अघोरी नाले में ) अघेोरेश्वर गणपति, मारुति का दर्शन करते हुए नृसिंहटेकरी तथा गुप्तेश्वर होकर (ब्रह्मपुरीमें) ब्रह्मेश्वर, लक्ष्मीनारायण, काशीविश्वनाथ, शरणेश्वर, कपिलेश्वर और गंगेश्वरके दर्शन करके विष्णुपुरी लौटकर भगवान् विष्णु के दर्शन करे। यहीं कपिलजी, वरुण, वरुणेश्वर, नीलकण्ठेश्वर तथा कर्दमेश्वर होकर मार्कण्डेय आश्रम जाकर मार्कण्डेयशिला और मार्कण्डेयेश्वर के दर्शन करे।
भगवान के महान भक्त अम्बरीष और मुचुकुन्द के पिता सूर्यवंशी राजा मान्धाता ने इस स्थान पर कठोर तपस्या करके भगवान शंकर को प्रसन्न किया था। उस महान पुरुष मान्धाता के नाम पर ही इस पर्वत का नाम मान्धाता पर्वत हो गया।
ओंकारेश्वर लिंग किसी मनुष्य के द्वारा गढ़ा, तराशा या बनाया हुआ नहीं है, बल्कि यह प्राकृतिक शिवलिंग है। इसके चारों ओर हमेशा जल भरा रहता है। प्राय: किसी मन्दिर में लिंग की स्थापना गर्भ गृह के मध्य में की जाती है और उसके ठीक ऊपर शिखर होता है, किन्तु यह ओंकारेश्वर लिंग मन्दिर के गुम्बद के नीचे नहीं है। इसकी एक विशेषता यह भी है कि मन्दिर के ऊपरी शिखर पर भगवान महाकालेश्वर की मूर्ति लगी है। कुछ लोगों की मान्यता है कि यह पर्वत ही ओंकाररूप है।
परिक्रमा के अन्तर्गत बहुत से मन्दिरों के विद्यमान होने के कारण भी यह पर्वत ओंकार के स्वरूप में दिखाई पड़ता है। ओंकारेश्वर के मन्दिर ॐकार में बने चन्द्र का स्थानीय ॐ इसमें बने हुए चन्द्रबिन्दु का जो स्थान है, वही स्थान ओंकारपर्वत पर बने ओंकारेश्वर मन्दिर का है। मालूम पड़ता है इस मन्दिर में शिव जी के पास ही माँ पार्वती की भी मूर्ति स्थापित है। यहाँ पर भगवान परमेश्वर महादेव को चने की दाल चढ़ाने की परम्परा है I
==चित्र दीर्घा==
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चित्र:Omkartemple_ओंकारेश्वर_मन्दिर.jpg|मध्यप्रदेश में ओंकार मांधाता मन्दिर का बाहरी दृश्य
चित्र:Panchmukhiganesh_पंचमुखी_गणेश.jpg|ओंकारेश्वर मन्दिर में प्रथम तल पर स्थित ओंकारेश्वर लिंग के प्रवेशद्वार पर स्थित पंचमुखी गणेश का दृश्य
चित्र:Omkareshnandi_ओंकारेश्वर_नन्दी.jpg|ओंकारेश्वर मन्दिर में ओंकारेश्वर लिंग के प्रांगण में स्थित नन्दी का दृश्य
चित्र:Mahakalesh1_महाकालेश्वर.jpg|ओंकारेश्वर मन्दिर के द्वितीय तल पर स्थित महाकालेश्वर लिंग का दृश्य
चित्र:Mahakaleshnandia_महाकालेश्वर_नन्दी.jpg|ओंकारेश्वर मन्दिर के द्वितीय तल पर स्थित महाकालेश्वर लिंग के बाहर स्थित नन्दी का दृश्य
चित्र:Siddhnath_सिद्धनाथ.jpg|ओंकारेश्वर मन्दिर के तृतीय तल पर स्थित सिद्धनाथ लिंग का दृश्य
चित्र:Gupteshwar1_गुप्तेश्वर.jpg|ओंकारेश्वर मन्दिर के चतुर्थ तल पर स्थित गुप्तेश्वर लिंग का दृश्य
चित्र:Gupteshwar2_गुप्तेश्वर.jpg|ओंकारेश्वर मन्दिर के चतुर्थ तल पर स्थित गुप्तेश्वर लिंग की छत का दृश्य
चित्र:Dhwajeshwar1_ध्वजेश्वर.jpg|ओंकारेश्वर मन्दिर के पाचवें तल पर स्थित शिवलिंग का दृश्य।
चित्र:Dhwajeshwar2_ध्वजेश्वर.jpg|ओंकारेश्वर मन्दिर के पांचवें तल पर स्थित ध्वजेश्वर लिंग की छत का दृश्य
चित्र:Kedareshwarnandi_केदारेश्वर_नन्दी.jpg|ओंकारेश्वर मन्दिर के परिक्रमा क्षेत्र में स्थित केदारेश्वर मन्दिर के प्रांगण में स्थित नन्दी का दृश्य
</gallery>
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://sa.wikisource.org/s/fwm ओंकार क्षेत्र में कुंजल का अपने चार पुत्रों से वार्तालाप (पद्मपुराण २.८५)], संस्कृत विकिस्रोत पर।
*[https://sa.wikipedia.org/s/6ki ओंकारेश्वर मन्दिर(संस्कृत)]
*[https://omkareshwar.co/ ओंकारेश्वर]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{हिन्दू तीर्थ}}
[[श्रेणी:शिव मंदिर]]
[[श्रेणी:ज्योतिर्लिंग]]
[[श्रेणी:हिन्दू तीर्थ स्थल]]
[[श्रेणी:मध्य प्रदेशके नगर और कस्बे]]
[[श्रेणी:मध्य प्रदेश के हिन्दू मंदिर]]
[[श्रेणी:भारत के शिव मन्दिर]]
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ख़िज्र खाँ
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{{Infobox royalty
| succession = दिल्ली का सुल्तान
|image= [[File:Khizr Khan (4).jpg|250px|]]
|caption = ख़िज्र खाँ के समय के सिक्के
| reign = 28 मई 1414 <br> 20 मई 1421
| dynasty = [[सैयद वंश]]
| predecessor = [[तुग़लक़ राजवंश]] का [[महमूद तुग़लक़]]
| successor = [[मुबारक़ शाह]]
| father =
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| issue =
| birth_date = 1361
| birth_place =
| death_date = 20 मई 1421
| death_place =
}}
तुगलक वंश की समाप्ति के बाद दिल्ली सल्तनत की बागडोर खिज्र खां के हाथों में आ गई। खिज्र खां सैय्यद वंश का संस्थापक था। वह स्वयं को इस्लाम धर्म के संस्थापक मुहम्मद पैगंबर साहब का वंशज मानता था। सल्तनत काल में शासन करने वाला एकमात्र शिया वंश था। इसने सुल्तान की उपाधि धारण न कर स्वयं को रैयत ए आला की उपाधि से संतुष्ट रखा और तुगलक शासन काल के ही सिक्कों का प्रचलन अपनी अर्थ्यवस्था में चलने दिया। इसकी मृत्यु २० मई 1421 में हो गई।<ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/dli.ernet.527074|title=The Delhi Sultanate|last=Majumdar R.c.|date=1960|publisher=Bharatiya Vidya Bhavan Bombay}}</ref>
[[श्रेणी:सय्यद राजवंश]]
[[श्रेणी:१५वीं सदी के भारतीय सम्राट]]
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| birth_date = 1361
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| death_date = 20 मई 1421
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}}
तुगलक वंश की समाप्ति के बाद दिल्ली सल्तनत की बागडोर खिज्र खां के हाथों में आ गई। खिज्र खां सैय्यद वंश का संस्थापक था। वह स्वयं को इस्लाम धर्म के संस्थापक मुहम्मद पैगंबर साहब का वंशज मानता था। सल्तनत काल में शासन करने वाला एकमात्र शिया वंश था। इसने सुल्तान की उपाधि धारण न कर स्वयं को रैयत ए आला की उपाधि से संतुष्ट रखा और तुगलक शासन काल के ही सिक्कों का प्रचलन अपनी अर्थ्यवस्था में चलने दिया। इसकी मृत्यु २० मई 1421 में हो गई।<ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/dli.ernet.527074|title=The Delhi Sultanate|last=Majumdar R.c.|date=1960|publisher=Bharatiya Vidya Bhavan Bombay}}</ref>
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:सय्यद राजवंश]]
[[श्रेणी:१५वीं सदी के भारतीय सम्राट]]
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गिरेसुन
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2026-10-18T04:01:38Z
अमर तिवारी
932885
जुड़वाँ शहर जोड़े
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}}
'''गिरेसुन''' ({{langx|tr|Giresun|italic=no}}) [[काला सागर|काले सागर]] के निकट स्थित [[तुर्की]] का एक शहर है। यह [[गिरेसुन प्रांत]] की राजधानी है।<ref name=il>[https://www.e-icisleri.gov.tr/Anasayfa/MulkiIdariBolumleri.aspx İl Belediyesi] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20150706215822/https://www.e-icisleri.gov.tr/Anasayfa/MulkiIdariBolumleri.aspx |date=2015-07-06 }}, Turkey Civil Administration Departments Inventory. Retrieved 1 March 2023.</ref> 2022 को इसकी जनसंख्या 1,25,682 थी।<ref name=tuik>{{Cite web |title=Address-based population registration system (ADNKS) results dated 31 December 2022, Favorite Reports|url=https://biruni.tuik.gov.tr/medas/?kn=95&locale=en |access-date=13 March 2023|publisher=[[TÜİK]]|language=en|format=XLS}}</ref>
==जुड़वाँ शहर==
गिरेसुन सात शहरों का जुड़वाँ है:<ref>{{cite web |title=Kardeş Şehirler|url=https://giresun.bel.tr/profil/kardes-sehirler|website=giresun.bel.tr|publisher=Giresun|language=tr|access-date=2020-01-18}}</ref>
{{div col|colwidth=20em}}
*{{flagicon|ITA}} [[आल्बा]], इटली
*{{flagicon|HUN}} [[बातोन्यतेरेन्ये]], हंगरी
*{{flagicon|BEL}} [[ला लुवियेर]], बेल्गियम
*{{flagicon|MNG}} [[ओलगी]], मंगोलिया
*{{flagicon|JPN}} [[सागाए]], जापान
*{{flagicon|AZE}} [[शकी]], अज़रबैजान
*{{flagicon|IRN}} [[ऊर्मिया]], ईरान
<!--Kalmar, Taganrog - twinning ended-->
{{div col end}}
== संदर्भ ==
{{reflist}}
[[श्रेणी:तुर्की के नगर]]
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सिनोप
0
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अमर तिवारी
932885
Infobox जोड़ा और लेख का विस्तार किया
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'''सिनोप''' ({{langx|tr|Sinop|italic=no}}) [[काला सागर|काले सागर]] के तट पर स्थित [[तुर्की]] का एक शहर है। यह [[सिनोप प्रांत]] की राजधानी है।<ref name=il>[https://www.e-icisleri.gov.tr/Anasayfa/MulkiIdariBolumleri.aspx İl Belediyesi], Turkey Civil Administration Departments Inventory. Retrieved 22 May 2023.</ref> 2022 कि इसकी जनसंख्या 57,404 थी।<ref name=tuik>{{Cite web |title=Address-based population registration system (ADNKS) results dated 31 December 2022, Favorite Reports|url=https://biruni.tuik.gov.tr/medas/?kn=95&locale=en |access-date=22 May 2023|publisher=[[TÜİK]]|language=en|format=XLS}}</ref>
सिनोप [[अनातोलिया]] के [[पाफ्लागोनिया]] भूभाग में पड़ता है।
== संदर्भ ==
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2026-10-18T03:56:15Z
अमर तिवारी
932885
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'''सिनोप''' ({{langx|tr|Sinop|italic=no}}) [[काला सागर|काले सागर]] के तट पर स्थित [[तुर्की]] का एक शहर है। यह [[सिनोप प्रांत]] की राजधानी है।<ref name=il>[https://www.e-icisleri.gov.tr/Anasayfa/MulkiIdariBolumleri.aspx İl Belediyesi], Turkey Civil Administration Departments Inventory. Retrieved 22 May 2023.</ref> 2022 कि इसकी जनसंख्या 57,404 थी।<ref name=tuik>{{Cite web |title=Address-based population registration system (ADNKS) results dated 31 December 2022, Favorite Reports|url=https://biruni.tuik.gov.tr/medas/?kn=95&locale=en |access-date=22 May 2023|publisher=[[TÜİK]]|language=en|format=XLS}}</ref>
सिनोप [[अनातोलिया]] के [[पाफ्लागोनिया]] भूभाग में पड़ता है।
==गैलरी==
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File:Sinop-museum.JPG|सिनोप संग्रहालय
File:Sinop-Marina port area.jpg|सिनोप मरीना
File:Sinop-ruine4.JPG|[[सिनोप क़िला]]
File:Sinop-ruine2.JPG|सिनोप क़िला
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== संदर्भ ==
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[[श्रेणी:तुर्की के नगर]]
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एदिर्ने
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अमर तिवारी
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{{Infobox Turkey place|type=municipality|name=एदिर्ने|image_skyline={{Multiple image
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| caption2 = [[मेरिच सेतु]]
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| caption3 = [[पुरानी मस्जिद, एदिर्ने|पुरानी मस्जिद]]
| image4 = KaraağaçRailwayStation (cropped).JPG
| caption4 = [[त्राक्या विश्वविद्यालय]]
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}}|image_caption=|image_logo=Edirne city emblem.png|coordinates={{coord|41|40|37|N|26|33|20|E|region:TR-22_type:city(166,000)|display=inline}}|province=एदिर्ने|district=एदिर्ने|leader_party=[[Republican People's Party|CHP]]|leader_name=फ़िलिज़ गेनजान अकिन|area_footnotes=|area_total_km2=|elevation_m=42|population_footnotes=<ref name=tuik/>|population_total=180002|population_as_of=2022|postal_code=22000|area_code=0284|website={{URL|www.edirne.bel.tr/}}|native_name=Edirne}}
'''एदिर्ने''' ({{Langx|tr|Edirne|italic=no}}) [[तुर्की]] में स्थित एक शहर है। [[यूनान]] से 7 km और [[बुल्गारिया]] से 20 km दूर स्थित, यह 1360 दशक से तक 1453 [[उस्मानी साम्राज्य]] की राजधानी होती थी।
एदिर्ने वस्त्र, रेशम, कालीन और कृषि के लिए एक व्यापारिक केन्द्र है तथा इसका पर्यटन उद्योग भी है। 2022 से, इसकी जनसंख्या 1,80,002 है।<ref>{{TDV İslâm Ansiklopedisi|title=Edirne|author=M. Tayyib Gökbilgin|url=https://islamansiklopedisi.org.tr/edirne}}</ref>
== संदर्भ ==
{{reflist}}
[[श्रेणी:तुर्की के नगर]]
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सुषमा स्वराज
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Anitya Gautam
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text/x-wiki
{{आज का आलेख}}
{{Infobox officeholder
|name = सुषमा स्वराज
|office = [[विदेश मंत्रालय, [[भारत]] सरकार|विदेश मंत्री]]
|image = Secretary Tillerson is Greeted by Indian Minister of External Affairs Swaraj (24074726498) (cropped).jpg
|caption = २०१७ में स्वराज
|predecessor = [[सलमान खुर्शीद]]
|primeminister = [[नरेन्द्र मोदी]]
|successor =
|office2 = [[लोक सभा|विपक्ष की नेता]]
|predecessor2 = [[लाल कृष्ण आडवाणी]]
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|successor1 = स्थान समाप्त
|successor2 = रिक्त
|birth_name = सुषमा शर्मा
|birth_date = 14 फरवरी, 1952<ref name="DSouza 2014 k508">{{cite web | last=D'Souza | first=Shanthie Mariet | title=Sushma Swaraj | website=Encyclopedia Britannica | date=13 January 2014 | url=https://www.britannica.com/biography/Sushma-Swaraj | access-date=29 March 2024}}</ref>
|birth_place = [[अम्बाला छावनी]], [[पंजाब]], [[भारत]]<br/>(अब [[हरियाणा]], [[भारत]] में)
|death_date = 6 अगस्त 2019
|death_place = [[एम्स दिल्ली]] (रात 11.23 बजे) [[नई दिल्ली]], [[भारत]]
|spouse = [[स्वराज कौशल]]
|children = [[बांसुरी स्वराज]]
|alma_mater = [[सनातन धर्म कालेज]]<br>[[पंजाब विश्वविद्यालय|पंजाब विश्वविद्यालय, चण्डीगड]]
|term_start = २६ मई २०१४
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|office3 = [[संसदीय मामलों का मंत्रालय, भारत सरकार|संसदीय मामलों की मंत्री]]
|primeminister3 = [[अटल बिहारी वाजपेयी]]
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|predecessor3 = [[प्रमोद महाजन]]
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|predecessor5 = [[अरुण जेटली]]
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|term_start6 = १३ अक्तूबर १९९८
|term_end6 = ३ दिसम्बर १९९८
|predecessor6 = [[साहिब सिंह वर्मा]]
|successor6 = [[शीला दीक्षित]]
|office7 = संसद सदस्य<br> [[विदिशा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|विदिशा]] से
|term_start7 = १३ मई २००९
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|predecessor7 = [[रामपाल सिंह]]
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|office8 = संसद सदस्य<br> [[दक्षिण दिल्ली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र|दक्षिण दिल्ली]] से
|term_start8 = ७ मई २००६
|term_end8 = ३ अक्तूबर १९९९
|predecessor8 = [[मदन लाल खुराना]]
|successor8 = [[विजय कुमार मल्होत्रा]]
}}
'''सुषमा स्वराज''' (१४ फरवरी,१९५२- ०६ अगस्त, २०१९) एक भारतीय महिला राजनीतिज्ञ और भारत की पूर्व [[विदेश मंत्री]] थीं।<ref>{{Cite web |url=https://timesofindia.indiatimes.com/india/For-novel-Twitter-diplomacy-Sushma-Swaraj-named-a-2016-Global-Thinker-by-Foreign-Policy-magazine/articleshow/55974675.cms |title=For 'novel Twitter diplomacy', Sushma Swaraj named a 2016 'Global Thinker' by Foreign Policy magazine |access-date=14 दिसंबर 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161215153542/http://timesofindia.indiatimes.com/india/For-novel-Twitter-diplomacy-Sushma-Swaraj-named-a-2016-Global-Thinker-by-Foreign-Policy-magazine/articleshow/55974675.cms |archive-date=15 दिसंबर 2016 |url-status=live }}</ref> वे वर्ष २००९ में [[भारत]] की [[भारतीय जनता पार्टी]] द्वारा संसद में [[विपक्ष]] की नेता चुनी गयी थीं, इस नाते वे भारत की पन्द्रहवीं [[लोकसभा]] में प्रतिपक्ष की नेता रही हैं। इसके पहले भी वे केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल में रह चुकी हैं तथा [[दिल्ली]] की मुख्यमन्त्री भी रही हैं। वे सन २००९ के लोकसभा चुनावों के लिये [[भाजपा]] के १९ सदस्यीय चुनाव-प्रचार-समिति की अध्यक्ष भी रही थीं।
अम्बाला छावनी में जन्मी सुषमा स्वराज ने एस॰डी॰ कालेज अम्बाला छावनी से बी॰ए॰ तथा [[पंजाब विश्वविद्यालय]] चंडीगढ़ से कानून की डिग्री ली। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पहले [[जयप्रकाश नारायण]] के आन्दोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। [[आपातकाल (भारत)|आपातकाल]] का पुरजोर विरोध करने के बाद वे सक्रिय [[राजनीति]] से जुड़ गयीं। वर्ष २०१४ में उन्हें भारत की [[विदेश मंत्री|पहली महिला विदेश मंत्री]] होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ,<ref>{{cite web |url=http://www.jagran.com/news/world-foreign-minister-sushma-swaraj-says-india-pak-ready-to-composite-talks-13276519.html |title=विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा भारत पाक आपसी वार्ता के लिये तैयार [Foreign Minister Sushma Swaraj says India pak ready to composite talks] |language= |publisher=Jagran.com |date= |accessdate=10 मई 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180628124825/https://www.jagran.com/news/world-foreign-minister-sushma-swaraj-says-india-pak-ready-to-composite-talks-13276519.html |archive-date=28 जून 2018 |url-status=live }}</ref> जबकि इसके पहले [[इंदिरा गांधी]] दो बार कार्यवाहक [[विदेश मंत्री]] रह चुकी थीं। कैबिनेट में उन्हें शामिल करके उनके कद और काबिलियत को स्वीकारा। <ref>[http://zeenews.india.com/hindi/tags/सुषमा-स्वराज-का-जीवन-परिचय.html सुषमा स्वराज का जीवन परिचय] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20180131201440/http://zeenews.india.com/hindi/tags/%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B7%E0%A4%AE%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%9A%E0%A4%AF.html |date=31 जनवरी 2018 }}। जी न्यूज, २६ मी २०१४</ref> [[दिल्ली के मुख्यमंत्री|दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री]] और देश में किसी राजनीतिक दल की पहली महिला प्रवक्ता बनने की उपलब्धि भी उन्हीं के नाम दर्ज है।
== प्रारम्भिक जीवन ==
सुषमा स्वराज (विवाह पूर्व शर्मा)<ref>{{cite web|url=http://global.britannica.com/EBchecked/topic/1949332/Sushma-Swaraj|title=Sushma Swaraj|work=Encyclopædia Britannica}}</ref> का जन्म १४ फरवरी १९५२ को [[हरियाणा]] (तब [[पंजाब]]) राज्य की [[अम्बाला छावनी]] में,<ref>{{cite news |url=http://archive.tehelka.com/story_main49.asp?filename=Ne110611Push.asp |title=The push for a Swaraj party |work=Tehelka |accessdate=19 December 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20131212072023/http://archive.tehelka.com/story_main49.asp?filename=Ne110611Push.asp |archive-date=12 दिसंबर 2013 |url-status=dead }}</ref> हरदेव शर्मा तथा लक्ष्मी देवी के घर हुआ था उनके पिता [[राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ]] के प्रमुख सदस्य रहे थे। स्वराज का परिवार मूल रूप से [[लाहौर]] के धरमपुरा क्षेत्र का निवासी था, जो अब [[पाकिस्तान]] में है।<ref>{{cite news|title=Indian FM Sushma Swaraj's parents hailed from Lahore – Pakistan – Dunya News|url=http://dunyanews.tv/en/Pakistan/312217-Indian-FM-Sushma-Swarajs-parents-hailed-from-Laho|accessdate=18 December 2015|work=dunyanews.tv|publisher=Dunya News|archive-url=https://web.archive.org/web/20151212110213/http://dunyanews.tv/en/Pakistan/312217-Indian-FM-Sushma-Swarajs-parents-hailed-from-Laho|archive-date=12 दिसंबर 2015|url-status=live}}</ref> उन्होंने अम्बाला के सनातन धर्म कॉलेज से संस्कृत तथा राजनीति विज्ञान में स्नातक किया।<ref name="india1"/> १९७० में उन्हें अपने कालेज में सर्वश्रेष्ठ छात्रा के सम्मान से सम्मानित किया गया था। वे तीन साल तक लगातार एस॰डी॰ कालेज छावनी की [[एन सी सी]] की सर्वश्रेष्ठ कैडेट और तीन साल तक राज्य की सर्वश्रेष्ठ हिन्दी वक्ता भी चुनी गईं। इसके बाद उन्होंने [[पंजाब विश्वविद्यालय]], [[चण्डीगढ़]] से [[विधि]] की शिक्षा प्राप्त की।<ref>{{citation |title=Cabinet reshuffle: Modi government's got talent but is it being fully utilised? |url=http://m.economictimes.com/news/politics-and-nation/cabinet-reshuffle-modi-governments-got-talent-but-is-it-being-fully-utilised/articleshow/53132757.cms |work=[[The Economic Times]] |date=10 July 2016 |access-date=28 जून 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190607010048/https://m.economictimes.com/news/politics-and-nation/cabinet-reshuffle-modi-governments-got-talent-but-is-it-being-fully-utilised/articleshow/53132757.cms |archive-date=7 जून 2019 |url-status=live }}</ref> पंजाब विश्वविद्यालय से भी उन्हें १९७३ में सर्वोच्च वक्ता का सम्मान मिला था। १९७३ में ही स्वराज [[भारतीय सर्वोच्च न्यायलय]] में [[अधिवक्ता]] के पद पर कार्य करने लगी।<ref name="india1"/> १३ जुलाई १९७५ को उनका विवाह [[स्वराज कौशल]] के साथ हुआ,<ref name="वेब दुनिया">[http://hindi.webdunia.com/news/election2009/charchit/0904/08/1090408001_1.htm प्रखर वक्ता सुषमा स्वराज ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090414012726/http://hindi.webdunia.com/news/election2009/charchit/0904/08/1090408001_1.htm |date=14 अप्रैल 2009 }}। वेब दुनिया। ८ अप्रैल २००९</ref> जो सर्वोच्च न्यायालय में उनके सहकर्मी और साथी अधिवक्ता थे। कौशल बाद में छह साल तक राज्यसभा में सांसद रहे, और इसके अतिरिक्त वे [[मिजोरम]] प्रदेश के [[राज्यपाल]] भी रह चुके हैं। स्वराज दम्पत्ति की एक पुत्री है, बांसुरी, जो लंदन के इनर टेम्पल में वकालत कर रही हैं।<ref>{{cite web|url=http://daily.bhaskar.com/article/MP-BHO-in-pics-the-life-of-sushma-swaraj-4219444-PHO.html|title=A sneak peek into Sushma Swaraj's life|publisher=[[Dainik Bhaskar]]|date=28 March 2013|accessdate=27 April 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140427224648/http://daily.bhaskar.com/article/MP-BHO-in-pics-the-life-of-sushma-swaraj-4219444-PHO.html|archive-date=27 अप्रैल 2014|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|url=http://articles.economictimes.indiatimes.com/2014-02-25/news/47670679_1_sushma-swaraj-bjp-leader-new-bjp-president|title=Sushma Swaraj re-invents herself in a party dominated by Narendra Modi|work=[[The Economic Times]]|date=25 February 2014|accessdate=27 April 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140427201742/http://articles.economictimes.indiatimes.com/2014-02-25/news/47670679_1_sushma-swaraj-bjp-leader-new-bjp-president|archive-date=27 अप्रैल 2014|url-status=live}}</ref>६७ साल की आयु में ६ अगस्त, २०१९ की रात ११.२४ बजे सुषमा स्वराज का [[दिल्ली]] में निधन हो गया।<ref name="Geete 2021 y154">{{cite web | last=Geete | first=Manish Geete Manish | title=Sushma Swaraj Death Anniversary: यह थीं संकटमोचक मिनिस्टर, दिलचस्प हैं इनके राजनीति के किस्से | website=Patrika News | date=6 August 2021 | url=https://www.patrika.com/bhopal-news/remarkable-facts-about-sushma-swaraj-6993866 | language=hi | access-date=29 March 2024}}</ref>
==हिन्दी, संस्कृत की पक्षधर==
सुषमा स्वराज की हिन्दी पर बड़ी शानदार पकड़ थी। उनकी हिंदी में [[तत्सम]] शब्द अधिक होते थे। फिर भी उनकी भाषा बनावटी नहीं लगती थी। विदेश मंत्री रहते हुए सुषमा स्वराज ने अपने एक चर्चित भाषण में सितम्बर 2016 में [[सयुंक्त राष्ट्र]] में [[हिन्दी]] में ही भाषण दिया था।उनके इस भाषण की पूरे देश में चर्चा हुई थी। [[विश्व हिन्दी सम्मेलन|विश्व हिन्दी सम्मेलनों]] में वे बढ़चढ़कर भाग लेतीं थीं। हिन्दी को [[संयुक्त राष्ट्र संघ]] की आधिकारिक भाषा बनाने के लिए भी उन्होने अनेक प्रयत्न किए।<ref>{{Cite web |url=https://www.prabhasakshi.com/national/hindi-language-and-indian-culture-are-related-to-each-other-says-sushma |title=हिन्दी भाषा और भारतीय संस्कृति एक-दूसरे से जुड़ी हैं: सुषमा स्वराज |access-date=10 अगस्त 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190810152553/https://www.prabhasakshi.com/national/hindi-language-and-indian-culture-are-related-to-each-other-says-sushma |archive-date=10 अगस्त 2019 |url-status=dead }}</ref>
[[संस्कृत]] से भी उनका विशेष प्रेम था। वे सदा [[संस्कृत]] में शपथ लेतीं थीं। उन्होने अनेक अवसरों पर संस्कृत में भाषण दिया। 2012 में ‘साउथ इंडिया एजुकेशन सोसायटी’ ने सुषमा को पुरस्कार दिया जो मुंबई में सम्पन्न हुआ। संस्कृत के अनेक विद्वान आए थे। सम्मान प्राप्ति के पश्चात जब भाषण देने की बारी आई, तो सुषमा ने बोलने के लिए संस्कृत को चुना। सम्मान में जो धनराशि मिली थी, वो संस्था को लौटाते हुए बोलीं कि संस्कृत के ही काम में वो पैसा लगा दें। इसी प्रकार जून 2015 में 16वां विश्व संस्कृत सम्मेलन [[बैंकाक]] में हुआ जिसकी मुख्य अतिथि सुषमा स्वराज थीं। उन्होने पांच दिन के इस सम्मेलन का उद्घाटन भाषण संस्कृत में दिया था।
वे अनेक भाषाओं में पारंगत थीं। हिंदी उत्कृष्ट, अंग्रेजी फ्लूएंट, संस्कृत धाराप्रवाह, हरियाणवी धड़ाधड़, पंजाबी इतनी प्यारी, उर्दू भी इतनी अच्छी। फिर जब [[कर्नाटक]] से चुनाव लड़ीं, तो [[कन्नड]] भी सीख लिया।
भाषाज्ञान के साथ वे प्ररखर और ओजस्वी वक्ता, प्रभावी सांसद और कुशल प्रशासक थीं। एक समय [[अटल बिहारी वाजपेयी]] के बाद सबसे लोकप्रिय वक्ता थीं।
== राजनीतिक जीवन ==
७० के दशक में ही स्वराज [[अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद]] से जुड़ गयी थी। उनके पति, स्वराज कौशल, सोशलिस्ट नेता [[जॉर्ज फ़र्नान्डिस]] के करीबी थे, और इस कारण ही वे भी १९७५ में फ़र्नान्डिस की विधिक टीम का हिस्सा बन गयी। [[आपातकाल]] के समय उन्होंने [[जयप्रकाश नारायण]] के [[सम्पूर्ण क्रांति]] आंदोलन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। आपातकाल की समाप्ति के बाद वह [[जनता पार्टी]] की सदस्य बन गयी। १९७७ में उन्होंने अम्बाला छावनी विधानसभा क्षेत्र से [[हरियाणा]] [[विधानसभा]] के लिए विधायक का चुनाव जीता और [[चौधरी देवी लाल]] की सरकार में से १९७७ से ७९ के बीच राज्य की श्रम मन्त्री रह कर २५ साल की उम्र में कैबिनेट मन्त्री बनने का रिकार्ड बनाया था।<ref>{{cite web|url=http://hindi.business-standard.com/hin/storypage.php?autono=21562|title=क्या भाजपा को मिलेगी पहली महिला अध्यक्ष|access-date=29 मई 2014|format=पीएचपी|publisher=बिजनेस स्टैण्डर्ड|language=|archive-url=https://web.archive.org/web/20140529091906/http://hindi.business-standard.com/hin/storypage.php?autono=21562|archive-date=29 मई 2014|url-status=dead}}</ref> १९७९ में तब २७ वर्ष की स्वराज हरियाणा राज्य में जनता पार्टी की राज्य अध्यक्ष बनी।
८० के दशक में [[भारतीय जनता पार्टी]] के गठन पर वह भी इसमें शामिल हो गयी।<ref>{{cite web|url=http://www.business-standard.com/article/politics/wheel-comes-full-circle-for-sushma-swaraj-115122700696_1.html|title=How Sushma Swaraj helped Modi get his Pak groove back|work=[[Business Standard]]|author=Archis Mohan|date=27 December 2015|access-date=28 जून 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20151231002431/http://www.business-standard.com/article/politics/wheel-comes-full-circle-for-sushma-swaraj-115122700696_1.html|archive-date=31 दिसंबर 2015|url-status=live}}</ref> इसके बाद १९८७ से १९९० तक पुनः वह अम्बाला छावनी से विधायक रही,<ref>{{cite web|url=http://ceoharyana.nic.in/docs/election%20results/Vidhan%20Sabha/Compendium%20of%20Results%20(1967%20to%202009)/Compendium%20-%20VSE%20(1967%20to%202009)%20-%20Part%20I.pdf|title=Compendium of General Elections to Vidhan Sabha (1967–2009) in Haryana State|publisher=[[National Informatics Centre|NIC]]|accessdate=27 April 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140326012620/http://ceoharyana.nic.in/docs/election%20results/Vidhan%20Sabha/Compendium%20of%20Results%20(1967%20to%202009)/Compendium%20-%20VSE%20(1967%20to%202009)%20-%20Part%20I.pdf|archive-date=26 मार्च 2014|url-status=dead}}</ref> और भाजपा-लोकदल संयुक्त सरकार में शिक्षा मंत्री रही। अप्रैल १९९० में उन्हें राज्यसभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित किया गया, जहाँ वह १९९६ तक रही। १९९६ में उन्होंने [[दक्षिण दिल्ली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र|दक्षिण दिल्ली संसदीय क्षेत्र]] से चुनाव जीता, और १३ दिन की वाजपेयी सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री रही। मार्च १९९८ में उन्होंने दक्षिण दिल्ली संसदीय क्षेत्र से एक बार फिर चुनाव जीता। इस बार फिर से उन्होंने वाजपेयी सरकार में दूरसंचार मंत्रालय के अतिरिक्त प्रभार के साथ सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में शपथ ली थी। १९ मार्च १९९८ से १२ अक्टूबर १९९८ तक वह इस पद पर रही। इस अवधि के दौरान उनका सबसे उल्लेखनीय निर्णय फिल्म उद्योग को एक उद्योग के रूप में घोषित करना था, जिससे कि भारतीय फिल्म उद्योग को भी बैंक से क़र्ज़ मिल सकता था।
अक्टूबर १९९८ में उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया, और १२ अक्टूबर १९९८ को [[दिल्ली के मुख्यमंत्री|दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री]] के रूप में कार्यभार संभाला।<ref name="Tiwari 2019 a829">{{cite web | last=Tiwari | first=Sanjeev | title=Sushma Swaraj: दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री का गौरव हासिल था सुषमा को | website=Jagran | date=7 August 2019 | url=https://www.jagran.com/delhi/new-delhi-city-ncr-sushma-swaraj-was-the-first-woman-chief-minister-of-delhi-19467325.html | language=hi | access-date=29 March 2024}}</ref> हालांकि, ३ दिसंबर १९९८ को उन्होंने अपनी विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया, और राष्ट्रीय राजनीति में वापस लौट आई। सितंबर १९९९ में उन्होंने [[कर्नाटक]] के [[बेल्लारी लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|बेल्लारी निर्वाचन क्षेत्र]] से कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष [[सोनिया गांधी]] के विरुद्ध चुनाव लड़ा।<ref>{{cite web|url=https://indianexpress.com/article/political-pulse/ballari-saw-sonias-ls-debut-now-a-rally-here-to-mark-1000-km-of-rahul-yatra-8207106/|title=Ballari saw Sonia’s LS debut, now a rally here to mark 1,000 km of Rahul Yatra}}</ref> अपने चुनाव अभियान के दौरान, उन्होंने स्थानीय कन्नड़ भाषा में ही सार्वजनिक बैठकों को संबोधित किया था। हालांकि वह ७% के मार्जिन से चुनाव हार गयी।<ref>[http://ibnlive.in.com/politics/electionstats/constituency/1999/s10/5.html] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120929021500/http://ibnlive.in.com/politics/electionstats/constituency/1999/s10/5.html|date=29 September 2012}}</ref> अप्रैल २००० में वह [[उत्तर प्रदेश]] के राज्यसभा सदस्य के रूप में संसद में वापस लौट आईं। ९ नवंबर २००० को उत्तर प्रदेश के विभाजन पर उन्हें [[उत्तराखण्ड]] में स्थानांतरित कर दिया गया।<ref>{{cite web|url=http://nrcw.nic.in/shared/sublinkimages/200.htm |title=SUSHMA SWARAJ (1952--) |accessdate=21 जुलाई 2006|archiveurl=https://web.archive.org/web/20090619091303/http://nrcw.nic.in/shared/sublinkimages/200.htm |archivedate=19 June 2009 |url-status=dead}}</ref> उन्हें केन्द्रीय मंत्रिमंडल में फिर से सूचना और प्रसारण मंत्री के रूप में शामिल किया गया था, जिस पद पर वह सितंबर २००० से जनवरी २००३ तक रही। २००३ में उन्हें स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और संसदीय मामलों में मंत्री बनाया गया, और मई २००४ में [[राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन|राजग]] की हार तक वह केंद्रीय मंत्री रही।
अप्रैल २००६ में स्वराज को [[मध्य प्रदेश]] राज्य से राज्यसभा में तीसरे कार्यकाल के लिए फिर से निर्वाचित किया गया। इसके बाद २००९ में उन्होंने मध्य प्रदेश के [[विदिशा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र]] <ref name="Geete 2021 y154">{{cite web | last=Geete | first=Manish Geete Manish | title=Sushma Swaraj Death Anniversary: यह थीं संकटमोचक मिनिस्टर, दिलचस्प हैं इनके राजनीति के किस्से | website=Patrika News | date=6 August 2021 | url=https://www.patrika.com/bhopal-news/remarkable-facts-about-sushma-swaraj-6993866 | language=hi | access-date=29 March 2024}}</ref>से ४ लाख से अधिक मतों से जीत हासिल की। २१ दिसंबर २००९ को [[लालकृष्ण आडवाणी]] की जगह १५वीं लोकसभा में सुषमा स्वराज विपक्ष की नेता बनी और मई २०१४ में भाजपा की विजय तक वह इसी पद पर आसीन रही।<ref>{{cite web|url=http://www.thehindu.com/news/article67005.ece|title=Advani quits as Leader of Opposition|accessdate=18 December 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20131219182548/http://www.thehindu.com/news/article67005.ece|archive-date=19 दिसंबर 2013|url-status=live}}</ref><ref>{{cite news|url=http://news.bbc.co.uk/1/hi/world/south_asia/8421132.stm|title=New India opposition leader named|publisher=BBC News|date=18 December 2009|accessdate=27 April 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20200423012542/http://news.bbc.co.uk/1/hi/world/south_asia/8421132.stm|archive-date=23 अप्रैल 2020|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|url=http://legislativebodiesinindia.nic.in/LS/ataglace.htm|title=Lok Sabha|publisher=[[National Informatics Centre|NIC]]|accessdate=27 April 2014|url-status=dead|archiveurl=https://web.archive.org/web/20140521205101/http://legislativebodiesinindia.nic.in/LS/ataglace.htm|archivedate=21 May 2014|df=dmy-all}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.saharasamay.com/nation-news/lok-sabha-elections-2014/results/676553218/live-2014-lok-sabha-election-results-bjp-gets-majority-alone.html|title=BJP gets majority alone|publisher=Sahara Samay|date=16 May 2014|accessdate=20 May 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140519093742/http://www.saharasamay.com/nation-news/lok-sabha-elections-2014/results/676553218/live-2014-lok-sabha-election-results-bjp-gets-majority-alone.html|archive-date=19 मई 2014|url-status=dead}}</ref> वर्ष २०१४ में वे विदिशा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से दोबारा [[लोकसभा]] की [[सांसद]] निर्वाचित हुई हैं और उन्हें भारत की [[विदेश मंत्री|पहली महिला विदेश मंत्री]] होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। भाजपा में राष्ट्रीय मन्त्री बनने वाली पहली महिला सुषमा के नाम पर कई रिकार्ड दर्ज़ हैं। वे भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता बनने वाली पहली महिला हैं, वे कैबिनेट मन्त्री बनने वाली भी भाजपा की पहली महिला हैं, वे दिल्ली की पहली महिला मुख्यमन्त्री थीं और भारत की संसद में सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार पाने वाली पहली महिला भी वे ही हैं। वे [[दिल्ली के मुख्यमंत्री|दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री]] और देश में किसी राजनीतिक दल की पहली महिला प्रवक्ता बनने की उपलब्धि भी उन्हीं के नाम दर्ज है।<ref>{{cite web|url=http://www.jansatta.com/index.php?option=com_content&view=article&id=69315:2014-05-27-06-16-03&catid=1:2009-08-27-03-35-27|title=सुषमा स्वराज बनीं देश की पहली महिला विदेश मंत्री|access-date=29 मई 2014|format=एचटीएमएल|publisher=जनसत्ता|language=|archive-url=https://web.archive.org/web/20140529052334/http://www.jansatta.com/index.php?option=com_content&view=article&id=69315:2014-05-27-06-16-03&catid=1:2009-08-27-03-35-27|archive-date=29 मई 2014|url-status=dead}}</ref>
==कीर्तिमान एवं उपलब्धियां==
* १९७७ में ये देश की प्रथम केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल सदस्या बनीं, वह भी २५ वर्ष की आयु में।
* १९७९ में २७ वर्ष की आयु में ये जनता पार्टी, हरियाणा की राज्य अध्यक्षा बनीं।
* स्वराज भारत की किसी राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी की प्रथम महिला प्रवक्ता बनीं।
* इनके अलावा भी ये भाजपा की प्रथम महिला मुख्य मंत्री, केन्द्रीय मन्त्री, महासचिव, प्रवक्ता, विपक्ष की नेता एवं विदेश मंत्री बनीं।
* ये भारतीय संसद की प्रथम एवं एकमात्र ऐसी महिला सदस्या हैं जिन्हें आउटस्टैण्डिंग पार्लिमैण्टेरियन सम्मान मिला है। इन्होंने चार राज्यों से ११ बार सीधे चुनाव लडे।<ref>[https://www.jagranjosh.com/current-affairs/भारत-की-पहली-महिला-विदेश-मंत्री-बनीं-सुषमा-स्वराज-1401344752-2 भारत की पहली महिला विदेश मंत्री बनीं सुषमा स्वराज] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140806024239/http://www.jagranjosh.com/current-affairs/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B7%E0%A4%AE%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C-1401344752-2 |date=6 अगस्त 2014 }}, जागरण जोश। मिश्रा, मनोज कुमार। २८ मई २०१४</ref>
इनके अलावा ये हरियाणा में हिन्दी साहित्य सम्मेलन की चार वर्ष तक अध्यक्षा भी रहीं।<ref name="elections.in">{{cite web|url=http://www.elections.in/political-leaders/sushma-swaraj.html|title=सुषमा स्वराज बायुग्राफ़ी [Sushma Swaraj Biography]|language=en|access-date=9 मई 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20190130120545/http://www.elections.in/political-leaders/sushma-swaraj.html|archive-date=30 जनवरी 2019|url-status=live}}</ref>
[[Image:Sushma Swaraj Speaking at United Nations 73rd General Assembly 2018.jpg|left|450px|thumb|सन २०१८ में [[संयुक्त राष्ट्र संघ]] की ७३वीं साधारण सभा को सम्बोधित करते हुए श्रीमती सुषमा स्वराज]]
== पति-पत्नी दोनों ही राजनीति में ==
२०१४ के लोकसभा चुनाव में वे [[मध्य प्रदेश]] की [[विदिशा]] सीट से लोकसभा की सदस्या चुनी गयीं। [[१९७५]] में उनका विवाह [[स्वराज कौशल]] के साथ में हुआ था। कौशल जी छह साल तक राज्यसभा में सांसद रहे इसके अलावा वे [[मिजोरम]] प्रदेश के [[राज्यपाल]] भी रहे। स्वराज कौशल अभी तक सबसे कम आयु में राज्यपाल का पद प्राप्त करने वाले व्यक्ति हैं। सुषमा स्वराज और उनके पति की उपलब्धियों के ये रिकार्ड लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज़ करते हुए उन्हें विशेष दम्पत्ति का स्थान दिया गया है। स्वराज दम्पत्ति की एक पुत्री है जो वकालत कर रही हैं। [[हरियाणा]] सरकार में श्रम व रोजगार मन्त्री रहने वाली सुषमा [[अम्बाला]] छावनी से विधायक बनने के बाद लगातार आगे बढ़ती गयीं और बाद में [[दिल्ली]] पहुँचकर उन्होंने केन्द्र की राजनीति में सक्रिय रहने का संकल्प लिया जिसमें वे अंत तक सक्रिय थीं। <ref>{{cite web|url=http://daily.bhaskar.com/article/MP-BHO-in-pics-the-life-of-sushma-swaraj-4219444-PHO.html?seq=7|title=A sneak peek into Sushma Swaraj's life|trans-title=सुषमा स्वराज की जिंदगी में चुपके से ताकझाँक|language=en|publisher=Dainik Bhaskar|date=28 मार्च 2013|accessdate=28 मई 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140427190719/http://daily.bhaskar.com/article/MP-BHO-in-pics-the-life-of-sushma-swaraj-4219444-PHO.html?seq=7|archive-date=27 अप्रैल 2014|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|url=http://articles.economictimes.indiatimes.com/2014-02-25/news/47670679_1_sushma-swaraj-bjp-leader-new-bjp-president|title=Sushma Swaraj re-invents herself in a party dominated by Narendra Modi|trans-title=सुषमा स्वराज नरेंद्र मोदी के प्रभुत्व वाली पार्टी में आमंत्रित|language=en|publisher=दि इकॉनोमिक टाइम्स|date=25 फ़रवरी 2014|accessdate=28 मई 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140427201742/http://articles.economictimes.indiatimes.com/2014-02-25/news/47670679_1_sushma-swaraj-bjp-leader-new-bjp-president|archive-date=27 अप्रैल 2014|url-status=live}}</ref>
==आसीन पद==
[[Image:Narendra Modi being received by the Union Minister for External Affairs and Overseas Indian Affairs, Smt. Sushma Swaraj, on his arrival at Palam airport, after his five days official visit to Japan, in New Delhi.jpg|right|thumb|300px|जापान यात्रा से लौटे प्रधानमन्त्री [[नरेन्द्र मोदी]] का स्वागत करते हुए श्रीमती सुषमा स्वराज]]
* '''1977–82''' [[हरियाणा विधान सभा]] की सदस्य निर्वाचित <ref name="india1">{{cite web|url=http://archive.india.gov.in/govt/loksabhampbiodata.php?mpcode=3812|title=ब्यौरेवार प्रोफ़ाइल - श्रीमती सुषमा स्वराज - संसद सदस्य [Detailed Profile – Smt. Sushma Swaraj – Members of Parliament (Lok Sabha) – Who's Who – Government]: भारत का राष्ट्रीय पोर्टल|publisher=India.gov.in.|accessdate=27 अप्रैल 2014|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20140427180032/http://archive.india.gov.in/govt/loksabhampbiodata.php?mpcode=3812|archive-date=27 अप्रैल 2014|url-status=dead}}</ref>
* '''1977–79''' हरियाणा सरकार में श्रम एवं रोजगार मन्त्री बनीं <ref name="india1"/>
* '''1987–90''' [[हरियाणा विधानसभा]] की सदस्य निर्वाचित<ref name="india1"/>
* '''1987–90''' मन्त्रिमण्डल सदस्य, शिक्षा, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, [[हरियाणा सरकार]]।<ref name="india1"/>
* '''1990–96''' [[राज्य सभा]] में चुनी गयीं (प्रथम अवधि)
* '''1996–97''' [15 मई 1996 – 4 दिसम्बर 1997] सदस्य, ११वीं [[लोक सभा]] (द्वितीय अवधि)।
* '''1996''' [16 मई – 1 जून] – केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल, सूचना एवं प्रसारण मन्त्री।<ref name="india1"/>
* '''1998–99''' [10 मार्च 1998 – 26 अप्रैल 1999] सदस्य, १२वीं लोक सभा (तृतीय अवधि)।
* '''1998''' [19 मार्च – 12 अक्तूबर] केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल, सूचना एवं प्रसारण तथा दूरसंचार मंत्री (अतिरिक्त प्रभार)।
* '''1998''' [13 अक्तूबर – 3 दिसम्बर] [[दिल्ली के मुख्य मंत्री|दिल्ली की मुख्यमन्त्री]]
* '''1998''' [नवम्बर] – दिल्ली विधानसभा के हौज खास निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित। दिल्ली विधान सभा सीट से त्यागपत्र दिया और लोक सभा सीट जारी रखी।
* '''2000–06''' राज्य सभा सदस्य (चतुर्थ अवधि)।<ref name="biodata">{{cite web|url=http://rajyasabha.nic.in/kiosk/whoswho/beta_s19.htm |title=Brief Bio-data. Member of Rajya Sabha. Sushma, Shrimati |accessdate=13 अप्रैल 2009 |archiveurl=https://web.archive.org/web/20060528171046/http://rajyasabha.nic.in/kiosk/whoswho/beta_s19.htm |archivedate=28 May 2006 |url-status=dead}}</ref>
* '''2000–03''' [30 सितम्बर 2000 – 29 जनवरी 2003] सूचना एवं प्रसारण मन्त्री
* '''2003–04''' [29 जनवरी 2003 – 22 मई 2004] स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मन्त्री एवं संसदीय विषयों की मन्त्री
* '''2006–09''' [अप्रैल 2006 -] सदस्य, राज्य सभा (पंचम अवधि)।<ref>[http://india.gov.in/govt/rajyasabhampbiodata.php?mpcode=94 Detailed Profile – – Members of Parliament (Rajya Sabha) – Who's Who – Government: National Portal of India]. India.gov.in. Retrieved 30 July 2011. {{webarchive |url=https://web.archive.org/web/20120217100033/http://india.gov.in/govt/rajyasabhampbiodata.php?mpcode=94 |date=17 February 2012 }}</ref>
* '''2009'''–14 [16 मई 2009 – 18 मई 2014] सदस्य, 15वीं लोक सभा (छठी अवधि)।<ref name="india1"/>
* '''2009'''-09 [3 जून 2009 – 21 दिसम्बर 2009] लोकसभा में विपक्ष के उपनेता।<ref name="india1"/>
* '''2009'''–14 [21 दिसम्बर 2009 – 18 मई 2014] विपक्ष के नेता एवं [[लाल कृष्ण आडवाणी]] का स्थान लिया।
* '''2014–19''' [26 मई 2014–24 मई 2019] सदस्य, 16वीं लोक सभा (सातवीं अवधि)।<ref name="india1" />
* '''2014–19''' [26 मई 2014–24 मई 2019] विदेश मंत्री, केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल।
== सन्दर्भ ==
{{reflist|2}}
== इन्हें भी देखें==
* [[भारतीय जनता पार्टी]]
* [[राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन]]
== बाहरी कड़ियाँ==
{{Commons category|Sushma Swaraj|सुषमा स्वराज}}
{{wikiquote}}
*[https://web.archive.org/web/20190809100853/https://www.youtube.com/watch?v=euSSW7ti3GA Sushma Swaraj Kannada Bellary]
*[https://www.youtube.com/watch?v=fveZlHbOC5Y शशि थरूर सुषमा स्वराज हिन्दी]
*[https://web.archive.org/web/20140416055348/https://twitter.com/SushmaSwarajbjp विभागीय ट्विटर]
* [https://web.archive.org/web/20200522003137/https://www.prabhasakshi.com/personality/sushma-swaraj-68th-birth-anniversary सबकी मदद को तत्पर रहने वाली सुषमा जी के ओजस्वी भाषण सदैव याद रहेंगे]
{{s-start}}
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{{s-bef|before=[[साहिब सिंह वर्मा]]}}
{{s-ttl|title=[[दिल्ली के मुख्यमंत्री|दिल्ली की मुख्यमंत्री]]|years=1998}}
{{s-aft|after=[[शीला दीक्षित]]}}
|-
{{s-bef|before=[[लाल कृष्ण आडवाणी]]}}
{{s-ttl|title=[[लोक सभा|लोक सभा में विपक्ष की नेता]]|years=2009–2014}}
{{s-aft|after=मल्लिकार्जुन खड़गे}}
|-
{{s-bef|before=[[सलमान खुर्शीद]]}}
{{s-ttl|title=[[विदेश मंत्री|विदेश मंत्री, भारत सरकार]]|years=2014–2019}}
{{s-aft|after=एस जयशंकर}}
{{s-end}}
{{भारतीय जनता पार्टी}}
{{भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री}}
{{भारत की पहली महिलाएँ}}
[[श्रेणी:1952 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:२०१९ में निधन]]
[[श्रेणी:भारत के विदेश मंत्री]]
[[श्रेणी:भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिज्ञ]]
[[श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना]]
[[श्रेणी:अंबाला के लोग]]
[[श्रेणी:चंडीगढ़ के लोग]]
[[श्रेणी:पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के पूर्व छात्र-छात्राएँ]]
[[श्रेणी:भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री]]
[[श्रेणी:मोदी मंत्रिमंडल]]
[[श्रेणी:दिल्ली के मुख्यमंत्री]]
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Anitya Gautam
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wikitext
text/x-wiki
{{आज का आलेख}}
{{Infobox officeholder
|name = सुषमा स्वराज
|office = [[विदेश मंत्रालय, भारत सरकार|विदेश मंत्री]]
|image = Secretary Tillerson is Greeted by Indian Minister of External Affairs Swaraj (24074726498) (cropped).jpg
|caption = २०१७ में स्वराज
|predecessor = [[सलमान खुर्शीद]]
|primeminister = [[नरेन्द्र मोदी]]
|successor =
|office2 = [[लोक सभा|विपक्ष की नेता]]
|predecessor2 = [[लाल कृष्ण आडवाणी]]
|party = [[भारतीय जनता पार्टी]]
|office1 = [[विदेश मंत्रालय, भारत सरकार|विदेश मंत्री]]
|predecessor1 = [[वयलार रवि]]
|primeminister1 = [[नरेन्द्र मोदी]]
|successor1 = स्थान समाप्त
|successor2 = रिक्त
|birth_name = सुषमा शर्मा
|birth_date = 14 फरवरी, 1952<ref name="DSouza 2014 k508">{{cite web | last=D'Souza | first=Shanthie Mariet | title=Sushma Swaraj | website=Encyclopedia Britannica | date=13 January 2014 | url=https://www.britannica.com/biography/Sushma-Swaraj | access-date=29 March 2024}}</ref>
|birth_place = [[अम्बाला छावनी]], [[पंजाब]], [[भारत]]<br/>(अब [[हरियाणा]], [[भारत]] में)
|death_date = 6 अगस्त 2019
|death_place = [[एम्स दिल्ली]] (रात 11.23 बजे) [[नई दिल्ली]], [[भारत]]
|spouse = [[स्वराज कौशल]]
|children = [[बांसुरी स्वराज]]
|alma_mater = [[सनातन धर्म कालेज]]<br>[[पंजाब विश्वविद्यालय|पंजाब विश्वविद्यालय, चण्डीगड]]
|term_start = २६ मई २०१४
|term_end = 24 मई 2019
|term_start1 = २६ मई २०१४
|term_end1 = ७ जनवरी २०१६
|term_start2 = २१ दिसम्बर २००९
|term_end2 = २६ मई २०१४
|office3 = [[संसदीय मामलों का मंत्रालय, भारत सरकार|संसदीय मामलों की मंत्री]]
|primeminister3 = [[अटल बिहारी वाजपेयी]]
|term_start3 = २९ जनवरी २००३
|term_end3 = २२ मई २००४
|predecessor3 = [[प्रमोद महाजन]]
|successor3 = [[गुलाम नबी आजाद]]
|office4 = [[स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मन्त्रालय, भारत सरकार|स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मन्त्री]]
|primeminister4 = [[अटल बिहारी वाजपेयी]]
|term_start4 = २९ जनवरी २००३
|term_end4 = २२ मई २००४
|predecessor4 = [[चन्द्रेश्वर प्रसाद सिंह|सी पी ठाकुर]]
|successor4 = [[अम्बुमणि रामदौस]]
|office5 = [[सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार|सूचना एवं प्रसारण मंत्री]]
|primeminister5 = [[अटल बिहारी वाजपेयी]]
|term_start5 = ३० सितम्बर २०००
|term_end5 = २९ जनवरी २००३
|predecessor5 = [[अरुण जेटली]]
|successor5 = [[रवि शंकर प्रसाद]]
|office6 = [[दिल्ली के मुख्यमंत्री|दिल्ली की मुख्यमंत्री]]
|governor6 = [[विजय कपूर]]
|term_start6 = १३ अक्तूबर १९९८
|term_end6 = ३ दिसम्बर १९९८
|predecessor6 = [[साहिब सिंह वर्मा]]
|successor6 = [[शीला दीक्षित]]
|office7 = संसद सदस्य<br> [[विदिशा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|विदिशा]] से
|term_start7 = १३ मई २००९
|term_end7 =
|predecessor7 = [[रामपाल सिंह]]
|successor7 =
|office8 = संसद सदस्य<br> [[दक्षिण दिल्ली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र|दक्षिण दिल्ली]] से
|term_start8 = ७ मई २००६
|term_end8 = ३ अक्तूबर १९९९
|predecessor8 = [[मदन लाल खुराना]]
|successor8 = [[विजय कुमार मल्होत्रा]]
}}
'''सुषमा स्वराज''' (१४ फरवरी,१९५२- ०६ अगस्त, २०१९) एक भारतीय महिला राजनीतिज्ञ और भारत की पूर्व [[विदेश मंत्री]] थीं।<ref>{{Cite web |url=https://timesofindia.indiatimes.com/india/For-novel-Twitter-diplomacy-Sushma-Swaraj-named-a-2016-Global-Thinker-by-Foreign-Policy-magazine/articleshow/55974675.cms |title=For 'novel Twitter diplomacy', Sushma Swaraj named a 2016 'Global Thinker' by Foreign Policy magazine |access-date=14 दिसंबर 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161215153542/http://timesofindia.indiatimes.com/india/For-novel-Twitter-diplomacy-Sushma-Swaraj-named-a-2016-Global-Thinker-by-Foreign-Policy-magazine/articleshow/55974675.cms |archive-date=15 दिसंबर 2016 |url-status=live }}</ref> वे वर्ष २००९ में [[भारत]] की [[भारतीय जनता पार्टी]] द्वारा संसद में [[विपक्ष]] की नेता चुनी गयी थीं, इस नाते वे भारत की पन्द्रहवीं [[लोकसभा]] में प्रतिपक्ष की नेता रही हैं। इसके पहले भी वे केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल में रह चुकी हैं तथा [[दिल्ली]] की मुख्यमन्त्री भी रही हैं। वे सन २००९ के लोकसभा चुनावों के लिये [[भाजपा]] के १९ सदस्यीय चुनाव-प्रचार-समिति की अध्यक्ष भी रही थीं।
अम्बाला छावनी में जन्मी सुषमा स्वराज ने एस॰डी॰ कालेज अम्बाला छावनी से बी॰ए॰ तथा [[पंजाब विश्वविद्यालय]] चंडीगढ़ से कानून की डिग्री ली। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पहले [[जयप्रकाश नारायण]] के आन्दोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। [[आपातकाल (भारत)|आपातकाल]] का पुरजोर विरोध करने के बाद वे सक्रिय [[राजनीति]] से जुड़ गयीं। वर्ष २०१४ में उन्हें भारत की [[विदेश मंत्री|पहली महिला विदेश मंत्री]] होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ,<ref>{{cite web |url=http://www.jagran.com/news/world-foreign-minister-sushma-swaraj-says-india-pak-ready-to-composite-talks-13276519.html |title=विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा भारत पाक आपसी वार्ता के लिये तैयार [Foreign Minister Sushma Swaraj says India pak ready to composite talks] |language= |publisher=Jagran.com |date= |accessdate=10 मई 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180628124825/https://www.jagran.com/news/world-foreign-minister-sushma-swaraj-says-india-pak-ready-to-composite-talks-13276519.html |archive-date=28 जून 2018 |url-status=live }}</ref> जबकि इसके पहले [[इंदिरा गांधी]] दो बार कार्यवाहक [[विदेश मंत्री]] रह चुकी थीं। कैबिनेट में उन्हें शामिल करके उनके कद और काबिलियत को स्वीकारा। <ref>[http://zeenews.india.com/hindi/tags/सुषमा-स्वराज-का-जीवन-परिचय.html सुषमा स्वराज का जीवन परिचय] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20180131201440/http://zeenews.india.com/hindi/tags/%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B7%E0%A4%AE%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%9A%E0%A4%AF.html |date=31 जनवरी 2018 }}। जी न्यूज, २६ मी २०१४</ref> [[दिल्ली के मुख्यमंत्री|दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री]] और देश में किसी राजनीतिक दल की पहली महिला प्रवक्ता बनने की उपलब्धि भी उन्हीं के नाम दर्ज है।
== प्रारम्भिक जीवन ==
सुषमा स्वराज (विवाह पूर्व शर्मा)<ref>{{cite web|url=http://global.britannica.com/EBchecked/topic/1949332/Sushma-Swaraj|title=Sushma Swaraj|work=Encyclopædia Britannica}}</ref> का जन्म १४ फरवरी १९५२ को [[हरियाणा]] (तब [[पंजाब]]) राज्य की [[अम्बाला छावनी]] में,<ref>{{cite news |url=http://archive.tehelka.com/story_main49.asp?filename=Ne110611Push.asp |title=The push for a Swaraj party |work=Tehelka |accessdate=19 December 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20131212072023/http://archive.tehelka.com/story_main49.asp?filename=Ne110611Push.asp |archive-date=12 दिसंबर 2013 |url-status=dead }}</ref> हरदेव शर्मा तथा लक्ष्मी देवी के घर हुआ था उनके पिता [[राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ]] के प्रमुख सदस्य रहे थे। स्वराज का परिवार मूल रूप से [[लाहौर]] के धरमपुरा क्षेत्र का निवासी था, जो अब [[पाकिस्तान]] में है।<ref>{{cite news|title=Indian FM Sushma Swaraj's parents hailed from Lahore – Pakistan – Dunya News|url=http://dunyanews.tv/en/Pakistan/312217-Indian-FM-Sushma-Swarajs-parents-hailed-from-Laho|accessdate=18 December 2015|work=dunyanews.tv|publisher=Dunya News|archive-url=https://web.archive.org/web/20151212110213/http://dunyanews.tv/en/Pakistan/312217-Indian-FM-Sushma-Swarajs-parents-hailed-from-Laho|archive-date=12 दिसंबर 2015|url-status=live}}</ref> उन्होंने अम्बाला के सनातन धर्म कॉलेज से संस्कृत तथा राजनीति विज्ञान में स्नातक किया।<ref name="india1"/> १९७० में उन्हें अपने कालेज में सर्वश्रेष्ठ छात्रा के सम्मान से सम्मानित किया गया था। वे तीन साल तक लगातार एस॰डी॰ कालेज छावनी की [[एन सी सी]] की सर्वश्रेष्ठ कैडेट और तीन साल तक राज्य की सर्वश्रेष्ठ हिन्दी वक्ता भी चुनी गईं। इसके बाद उन्होंने [[पंजाब विश्वविद्यालय]], [[चण्डीगढ़]] से [[विधि]] की शिक्षा प्राप्त की।<ref>{{citation |title=Cabinet reshuffle: Modi government's got talent but is it being fully utilised? |url=http://m.economictimes.com/news/politics-and-nation/cabinet-reshuffle-modi-governments-got-talent-but-is-it-being-fully-utilised/articleshow/53132757.cms |work=[[The Economic Times]] |date=10 July 2016 |access-date=28 जून 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190607010048/https://m.economictimes.com/news/politics-and-nation/cabinet-reshuffle-modi-governments-got-talent-but-is-it-being-fully-utilised/articleshow/53132757.cms |archive-date=7 जून 2019 |url-status=live }}</ref> पंजाब विश्वविद्यालय से भी उन्हें १९७३ में सर्वोच्च वक्ता का सम्मान मिला था। १९७३ में ही स्वराज [[भारतीय सर्वोच्च न्यायलय]] में [[अधिवक्ता]] के पद पर कार्य करने लगी।<ref name="india1"/> १३ जुलाई १९७५ को उनका विवाह [[स्वराज कौशल]] के साथ हुआ,<ref name="वेब दुनिया">[http://hindi.webdunia.com/news/election2009/charchit/0904/08/1090408001_1.htm प्रखर वक्ता सुषमा स्वराज ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090414012726/http://hindi.webdunia.com/news/election2009/charchit/0904/08/1090408001_1.htm |date=14 अप्रैल 2009 }}। वेब दुनिया। ८ अप्रैल २००९</ref> जो सर्वोच्च न्यायालय में उनके सहकर्मी और साथी अधिवक्ता थे। कौशल बाद में छह साल तक राज्यसभा में सांसद रहे, और इसके अतिरिक्त वे [[मिजोरम]] प्रदेश के [[राज्यपाल]] भी रह चुके हैं। स्वराज दम्पत्ति की एक पुत्री है, बांसुरी, जो लंदन के इनर टेम्पल में वकालत कर रही हैं।<ref>{{cite web|url=http://daily.bhaskar.com/article/MP-BHO-in-pics-the-life-of-sushma-swaraj-4219444-PHO.html|title=A sneak peek into Sushma Swaraj's life|publisher=[[Dainik Bhaskar]]|date=28 March 2013|accessdate=27 April 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140427224648/http://daily.bhaskar.com/article/MP-BHO-in-pics-the-life-of-sushma-swaraj-4219444-PHO.html|archive-date=27 अप्रैल 2014|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|url=http://articles.economictimes.indiatimes.com/2014-02-25/news/47670679_1_sushma-swaraj-bjp-leader-new-bjp-president|title=Sushma Swaraj re-invents herself in a party dominated by Narendra Modi|work=[[The Economic Times]]|date=25 February 2014|accessdate=27 April 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140427201742/http://articles.economictimes.indiatimes.com/2014-02-25/news/47670679_1_sushma-swaraj-bjp-leader-new-bjp-president|archive-date=27 अप्रैल 2014|url-status=live}}</ref>६७ साल की आयु में ६ अगस्त, २०१९ की रात ११.२४ बजे सुषमा स्वराज का [[दिल्ली]] में निधन हो गया।<ref name="Geete 2021 y154">{{cite web | last=Geete | first=Manish Geete Manish | title=Sushma Swaraj Death Anniversary: यह थीं संकटमोचक मिनिस्टर, दिलचस्प हैं इनके राजनीति के किस्से | website=Patrika News | date=6 August 2021 | url=https://www.patrika.com/bhopal-news/remarkable-facts-about-sushma-swaraj-6993866 | language=hi | access-date=29 March 2024}}</ref>
==हिन्दी, संस्कृत की पक्षधर==
सुषमा स्वराज की हिन्दी पर बड़ी शानदार पकड़ थी। उनकी हिंदी में [[तत्सम]] शब्द अधिक होते थे। फिर भी उनकी भाषा बनावटी नहीं लगती थी। विदेश मंत्री रहते हुए सुषमा स्वराज ने अपने एक चर्चित भाषण में सितम्बर 2016 में [[सयुंक्त राष्ट्र]] में [[हिन्दी]] में ही भाषण दिया था।उनके इस भाषण की पूरे देश में चर्चा हुई थी। [[विश्व हिन्दी सम्मेलन|विश्व हिन्दी सम्मेलनों]] में वे बढ़चढ़कर भाग लेतीं थीं। हिन्दी को [[संयुक्त राष्ट्र संघ]] की आधिकारिक भाषा बनाने के लिए भी उन्होने अनेक प्रयत्न किए।<ref>{{Cite web |url=https://www.prabhasakshi.com/national/hindi-language-and-indian-culture-are-related-to-each-other-says-sushma |title=हिन्दी भाषा और भारतीय संस्कृति एक-दूसरे से जुड़ी हैं: सुषमा स्वराज |access-date=10 अगस्त 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190810152553/https://www.prabhasakshi.com/national/hindi-language-and-indian-culture-are-related-to-each-other-says-sushma |archive-date=10 अगस्त 2019 |url-status=dead }}</ref>
[[संस्कृत]] से भी उनका विशेष प्रेम था। वे सदा [[संस्कृत]] में शपथ लेतीं थीं। उन्होने अनेक अवसरों पर संस्कृत में भाषण दिया। 2012 में ‘साउथ इंडिया एजुकेशन सोसायटी’ ने सुषमा को पुरस्कार दिया जो मुंबई में सम्पन्न हुआ। संस्कृत के अनेक विद्वान आए थे। सम्मान प्राप्ति के पश्चात जब भाषण देने की बारी आई, तो सुषमा ने बोलने के लिए संस्कृत को चुना। सम्मान में जो धनराशि मिली थी, वो संस्था को लौटाते हुए बोलीं कि संस्कृत के ही काम में वो पैसा लगा दें। इसी प्रकार जून 2015 में 16वां विश्व संस्कृत सम्मेलन [[बैंकाक]] में हुआ जिसकी मुख्य अतिथि सुषमा स्वराज थीं। उन्होने पांच दिन के इस सम्मेलन का उद्घाटन भाषण संस्कृत में दिया था।
वे अनेक भाषाओं में पारंगत थीं। हिंदी उत्कृष्ट, अंग्रेजी फ्लूएंट, संस्कृत धाराप्रवाह, हरियाणवी धड़ाधड़, पंजाबी इतनी प्यारी, उर्दू भी इतनी अच्छी। फिर जब [[कर्नाटक]] से चुनाव लड़ीं, तो [[कन्नड]] भी सीख लिया।
भाषाज्ञान के साथ वे प्ररखर और ओजस्वी वक्ता, प्रभावी सांसद और कुशल प्रशासक थीं। एक समय [[अटल बिहारी वाजपेयी]] के बाद सबसे लोकप्रिय वक्ता थीं।
== राजनीतिक जीवन ==
७० के दशक में ही स्वराज [[अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद]] से जुड़ गयी थी। उनके पति, स्वराज कौशल, सोशलिस्ट नेता [[जॉर्ज फ़र्नान्डिस]] के करीबी थे, और इस कारण ही वे भी १९७५ में फ़र्नान्डिस की विधिक टीम का हिस्सा बन गयी। [[आपातकाल]] के समय उन्होंने [[जयप्रकाश नारायण]] के [[सम्पूर्ण क्रांति]] आंदोलन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। आपातकाल की समाप्ति के बाद वह [[जनता पार्टी]] की सदस्य बन गयी। १९७७ में उन्होंने अम्बाला छावनी विधानसभा क्षेत्र से [[हरियाणा]] [[विधानसभा]] के लिए विधायक का चुनाव जीता और [[चौधरी देवी लाल]] की सरकार में से १९७७ से ७९ के बीच राज्य की श्रम मन्त्री रह कर २५ साल की उम्र में कैबिनेट मन्त्री बनने का रिकार्ड बनाया था।<ref>{{cite web|url=http://hindi.business-standard.com/hin/storypage.php?autono=21562|title=क्या भाजपा को मिलेगी पहली महिला अध्यक्ष|access-date=29 मई 2014|format=पीएचपी|publisher=बिजनेस स्टैण्डर्ड|language=|archive-url=https://web.archive.org/web/20140529091906/http://hindi.business-standard.com/hin/storypage.php?autono=21562|archive-date=29 मई 2014|url-status=dead}}</ref> १९७९ में तब २७ वर्ष की स्वराज हरियाणा राज्य में जनता पार्टी की राज्य अध्यक्ष बनी।
८० के दशक में [[भारतीय जनता पार्टी]] के गठन पर वह भी इसमें शामिल हो गयी।<ref>{{cite web|url=http://www.business-standard.com/article/politics/wheel-comes-full-circle-for-sushma-swaraj-115122700696_1.html|title=How Sushma Swaraj helped Modi get his Pak groove back|work=[[Business Standard]]|author=Archis Mohan|date=27 December 2015|access-date=28 जून 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20151231002431/http://www.business-standard.com/article/politics/wheel-comes-full-circle-for-sushma-swaraj-115122700696_1.html|archive-date=31 दिसंबर 2015|url-status=live}}</ref> इसके बाद १९८७ से १९९० तक पुनः वह अम्बाला छावनी से विधायक रही,<ref>{{cite web|url=http://ceoharyana.nic.in/docs/election%20results/Vidhan%20Sabha/Compendium%20of%20Results%20(1967%20to%202009)/Compendium%20-%20VSE%20(1967%20to%202009)%20-%20Part%20I.pdf|title=Compendium of General Elections to Vidhan Sabha (1967–2009) in Haryana State|publisher=[[National Informatics Centre|NIC]]|accessdate=27 April 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140326012620/http://ceoharyana.nic.in/docs/election%20results/Vidhan%20Sabha/Compendium%20of%20Results%20(1967%20to%202009)/Compendium%20-%20VSE%20(1967%20to%202009)%20-%20Part%20I.pdf|archive-date=26 मार्च 2014|url-status=dead}}</ref> और भाजपा-लोकदल संयुक्त सरकार में शिक्षा मंत्री रही। अप्रैल १९९० में उन्हें राज्यसभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित किया गया, जहाँ वह १९९६ तक रही। १९९६ में उन्होंने [[दक्षिण दिल्ली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र|दक्षिण दिल्ली संसदीय क्षेत्र]] से चुनाव जीता, और १३ दिन की वाजपेयी सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री रही। मार्च १९९८ में उन्होंने दक्षिण दिल्ली संसदीय क्षेत्र से एक बार फिर चुनाव जीता। इस बार फिर से उन्होंने वाजपेयी सरकार में दूरसंचार मंत्रालय के अतिरिक्त प्रभार के साथ सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में शपथ ली थी। १९ मार्च १९९८ से १२ अक्टूबर १९९८ तक वह इस पद पर रही। इस अवधि के दौरान उनका सबसे उल्लेखनीय निर्णय फिल्म उद्योग को एक उद्योग के रूप में घोषित करना था, जिससे कि भारतीय फिल्म उद्योग को भी बैंक से क़र्ज़ मिल सकता था।
अक्टूबर १९९८ में उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया, और १२ अक्टूबर १९९८ को [[दिल्ली के मुख्यमंत्री|दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री]] के रूप में कार्यभार संभाला।<ref name="Tiwari 2019 a829">{{cite web | last=Tiwari | first=Sanjeev | title=Sushma Swaraj: दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री का गौरव हासिल था सुषमा को | website=Jagran | date=7 August 2019 | url=https://www.jagran.com/delhi/new-delhi-city-ncr-sushma-swaraj-was-the-first-woman-chief-minister-of-delhi-19467325.html | language=hi | access-date=29 March 2024}}</ref> हालांकि, ३ दिसंबर १९९८ को उन्होंने अपनी विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया, और राष्ट्रीय राजनीति में वापस लौट आई। सितंबर १९९९ में उन्होंने [[कर्नाटक]] के [[बेल्लारी लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|बेल्लारी निर्वाचन क्षेत्र]] से कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष [[सोनिया गांधी]] के विरुद्ध चुनाव लड़ा।<ref>{{cite web|url=https://indianexpress.com/article/political-pulse/ballari-saw-sonias-ls-debut-now-a-rally-here-to-mark-1000-km-of-rahul-yatra-8207106/|title=Ballari saw Sonia’s LS debut, now a rally here to mark 1,000 km of Rahul Yatra}}</ref> अपने चुनाव अभियान के दौरान, उन्होंने स्थानीय कन्नड़ भाषा में ही सार्वजनिक बैठकों को संबोधित किया था। हालांकि वह ७% के मार्जिन से चुनाव हार गयी।<ref>[http://ibnlive.in.com/politics/electionstats/constituency/1999/s10/5.html] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120929021500/http://ibnlive.in.com/politics/electionstats/constituency/1999/s10/5.html|date=29 September 2012}}</ref> अप्रैल २००० में वह [[उत्तर प्रदेश]] के राज्यसभा सदस्य के रूप में संसद में वापस लौट आईं। ९ नवंबर २००० को उत्तर प्रदेश के विभाजन पर उन्हें [[उत्तराखण्ड]] में स्थानांतरित कर दिया गया।<ref>{{cite web|url=http://nrcw.nic.in/shared/sublinkimages/200.htm |title=SUSHMA SWARAJ (1952--) |accessdate=21 जुलाई 2006|archiveurl=https://web.archive.org/web/20090619091303/http://nrcw.nic.in/shared/sublinkimages/200.htm |archivedate=19 June 2009 |url-status=dead}}</ref> उन्हें केन्द्रीय मंत्रिमंडल में फिर से सूचना और प्रसारण मंत्री के रूप में शामिल किया गया था, जिस पद पर वह सितंबर २००० से जनवरी २००३ तक रही। २००३ में उन्हें स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और संसदीय मामलों में मंत्री बनाया गया, और मई २००४ में [[राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन|राजग]] की हार तक वह केंद्रीय मंत्री रही।
अप्रैल २००६ में स्वराज को [[मध्य प्रदेश]] राज्य से राज्यसभा में तीसरे कार्यकाल के लिए फिर से निर्वाचित किया गया। इसके बाद २००९ में उन्होंने मध्य प्रदेश के [[विदिशा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र]] <ref name="Geete 2021 y154">{{cite web | last=Geete | first=Manish Geete Manish | title=Sushma Swaraj Death Anniversary: यह थीं संकटमोचक मिनिस्टर, दिलचस्प हैं इनके राजनीति के किस्से | website=Patrika News | date=6 August 2021 | url=https://www.patrika.com/bhopal-news/remarkable-facts-about-sushma-swaraj-6993866 | language=hi | access-date=29 March 2024}}</ref>से ४ लाख से अधिक मतों से जीत हासिल की। २१ दिसंबर २००९ को [[लालकृष्ण आडवाणी]] की जगह १५वीं लोकसभा में सुषमा स्वराज विपक्ष की नेता बनी और मई २०१४ में भाजपा की विजय तक वह इसी पद पर आसीन रही।<ref>{{cite web|url=http://www.thehindu.com/news/article67005.ece|title=Advani quits as Leader of Opposition|accessdate=18 December 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20131219182548/http://www.thehindu.com/news/article67005.ece|archive-date=19 दिसंबर 2013|url-status=live}}</ref><ref>{{cite news|url=http://news.bbc.co.uk/1/hi/world/south_asia/8421132.stm|title=New India opposition leader named|publisher=BBC News|date=18 December 2009|accessdate=27 April 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20200423012542/http://news.bbc.co.uk/1/hi/world/south_asia/8421132.stm|archive-date=23 अप्रैल 2020|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|url=http://legislativebodiesinindia.nic.in/LS/ataglace.htm|title=Lok Sabha|publisher=[[National Informatics Centre|NIC]]|accessdate=27 April 2014|url-status=dead|archiveurl=https://web.archive.org/web/20140521205101/http://legislativebodiesinindia.nic.in/LS/ataglace.htm|archivedate=21 May 2014|df=dmy-all}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.saharasamay.com/nation-news/lok-sabha-elections-2014/results/676553218/live-2014-lok-sabha-election-results-bjp-gets-majority-alone.html|title=BJP gets majority alone|publisher=Sahara Samay|date=16 May 2014|accessdate=20 May 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140519093742/http://www.saharasamay.com/nation-news/lok-sabha-elections-2014/results/676553218/live-2014-lok-sabha-election-results-bjp-gets-majority-alone.html|archive-date=19 मई 2014|url-status=dead}}</ref> वर्ष २०१४ में वे विदिशा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से दोबारा [[लोकसभा]] की [[सांसद]] निर्वाचित हुई हैं और उन्हें भारत की [[विदेश मंत्री|पहली महिला विदेश मंत्री]] होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। भाजपा में राष्ट्रीय मन्त्री बनने वाली पहली महिला सुषमा के नाम पर कई रिकार्ड दर्ज़ हैं। वे भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता बनने वाली पहली महिला हैं, वे कैबिनेट मन्त्री बनने वाली भी भाजपा की पहली महिला हैं, वे दिल्ली की पहली महिला मुख्यमन्त्री थीं और भारत की संसद में सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार पाने वाली पहली महिला भी वे ही हैं। वे [[दिल्ली के मुख्यमंत्री|दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री]] और देश में किसी राजनीतिक दल की पहली महिला प्रवक्ता बनने की उपलब्धि भी उन्हीं के नाम दर्ज है।<ref>{{cite web|url=http://www.jansatta.com/index.php?option=com_content&view=article&id=69315:2014-05-27-06-16-03&catid=1:2009-08-27-03-35-27|title=सुषमा स्वराज बनीं देश की पहली महिला विदेश मंत्री|access-date=29 मई 2014|format=एचटीएमएल|publisher=जनसत्ता|language=|archive-url=https://web.archive.org/web/20140529052334/http://www.jansatta.com/index.php?option=com_content&view=article&id=69315:2014-05-27-06-16-03&catid=1:2009-08-27-03-35-27|archive-date=29 मई 2014|url-status=dead}}</ref>
==कीर्तिमान एवं उपलब्धियां==
* १९७७ में ये देश की प्रथम केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल सदस्या बनीं, वह भी २५ वर्ष की आयु में।
* १९७९ में २७ वर्ष की आयु में ये जनता पार्टी, हरियाणा की राज्य अध्यक्षा बनीं।
* स्वराज भारत की किसी राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी की प्रथम महिला प्रवक्ता बनीं।
* इनके अलावा भी ये भाजपा की प्रथम महिला मुख्य मंत्री, केन्द्रीय मन्त्री, महासचिव, प्रवक्ता, विपक्ष की नेता एवं विदेश मंत्री बनीं।
* ये भारतीय संसद की प्रथम एवं एकमात्र ऐसी महिला सदस्या हैं जिन्हें आउटस्टैण्डिंग पार्लिमैण्टेरियन सम्मान मिला है। इन्होंने चार राज्यों से ११ बार सीधे चुनाव लडे।<ref>[https://www.jagranjosh.com/current-affairs/भारत-की-पहली-महिला-विदेश-मंत्री-बनीं-सुषमा-स्वराज-1401344752-2 भारत की पहली महिला विदेश मंत्री बनीं सुषमा स्वराज] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140806024239/http://www.jagranjosh.com/current-affairs/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B7%E0%A4%AE%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C-1401344752-2 |date=6 अगस्त 2014 }}, जागरण जोश। मिश्रा, मनोज कुमार। २८ मई २०१४</ref>
इनके अलावा ये हरियाणा में हिन्दी साहित्य सम्मेलन की चार वर्ष तक अध्यक्षा भी रहीं।<ref name="elections.in">{{cite web|url=http://www.elections.in/political-leaders/sushma-swaraj.html|title=सुषमा स्वराज बायुग्राफ़ी [Sushma Swaraj Biography]|language=en|access-date=9 मई 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20190130120545/http://www.elections.in/political-leaders/sushma-swaraj.html|archive-date=30 जनवरी 2019|url-status=live}}</ref>
[[Image:Sushma Swaraj Speaking at United Nations 73rd General Assembly 2018.jpg|left|450px|thumb|सन २०१८ में [[संयुक्त राष्ट्र संघ]] की ७३वीं साधारण सभा को सम्बोधित करते हुए श्रीमती सुषमा स्वराज]]
== पति-पत्नी दोनों ही राजनीति में ==
२०१४ के लोकसभा चुनाव में वे [[मध्य प्रदेश]] की [[विदिशा]] सीट से लोकसभा की सदस्या चुनी गयीं। [[१९७५]] में उनका विवाह [[स्वराज कौशल]] के साथ में हुआ था। कौशल जी छह साल तक राज्यसभा में सांसद रहे इसके अलावा वे [[मिजोरम]] प्रदेश के [[राज्यपाल]] भी रहे। स्वराज कौशल अभी तक सबसे कम आयु में राज्यपाल का पद प्राप्त करने वाले व्यक्ति हैं। सुषमा स्वराज और उनके पति की उपलब्धियों के ये रिकार्ड लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज़ करते हुए उन्हें विशेष दम्पत्ति का स्थान दिया गया है। स्वराज दम्पत्ति की एक पुत्री है जो वकालत कर रही हैं। [[हरियाणा]] सरकार में श्रम व रोजगार मन्त्री रहने वाली सुषमा [[अम्बाला]] छावनी से विधायक बनने के बाद लगातार आगे बढ़ती गयीं और बाद में [[दिल्ली]] पहुँचकर उन्होंने केन्द्र की राजनीति में सक्रिय रहने का संकल्प लिया जिसमें वे अंत तक सक्रिय थीं। <ref>{{cite web|url=http://daily.bhaskar.com/article/MP-BHO-in-pics-the-life-of-sushma-swaraj-4219444-PHO.html?seq=7|title=A sneak peek into Sushma Swaraj's life|trans-title=सुषमा स्वराज की जिंदगी में चुपके से ताकझाँक|language=en|publisher=Dainik Bhaskar|date=28 मार्च 2013|accessdate=28 मई 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140427190719/http://daily.bhaskar.com/article/MP-BHO-in-pics-the-life-of-sushma-swaraj-4219444-PHO.html?seq=7|archive-date=27 अप्रैल 2014|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|url=http://articles.economictimes.indiatimes.com/2014-02-25/news/47670679_1_sushma-swaraj-bjp-leader-new-bjp-president|title=Sushma Swaraj re-invents herself in a party dominated by Narendra Modi|trans-title=सुषमा स्वराज नरेंद्र मोदी के प्रभुत्व वाली पार्टी में आमंत्रित|language=en|publisher=दि इकॉनोमिक टाइम्स|date=25 फ़रवरी 2014|accessdate=28 मई 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140427201742/http://articles.economictimes.indiatimes.com/2014-02-25/news/47670679_1_sushma-swaraj-bjp-leader-new-bjp-president|archive-date=27 अप्रैल 2014|url-status=live}}</ref>
==आसीन पद==
[[Image:Narendra Modi being received by the Union Minister for External Affairs and Overseas Indian Affairs, Smt. Sushma Swaraj, on his arrival at Palam airport, after his five days official visit to Japan, in New Delhi.jpg|right|thumb|300px|जापान यात्रा से लौटे प्रधानमन्त्री [[नरेन्द्र मोदी]] का स्वागत करते हुए श्रीमती सुषमा स्वराज]]
* '''1977–82''' [[हरियाणा विधान सभा]] की सदस्य निर्वाचित <ref name="india1">{{cite web|url=http://archive.india.gov.in/govt/loksabhampbiodata.php?mpcode=3812|title=ब्यौरेवार प्रोफ़ाइल - श्रीमती सुषमा स्वराज - संसद सदस्य [Detailed Profile – Smt. Sushma Swaraj – Members of Parliament (Lok Sabha) – Who's Who – Government]: भारत का राष्ट्रीय पोर्टल|publisher=India.gov.in.|accessdate=27 अप्रैल 2014|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20140427180032/http://archive.india.gov.in/govt/loksabhampbiodata.php?mpcode=3812|archive-date=27 अप्रैल 2014|url-status=dead}}</ref>
* '''1977–79''' हरियाणा सरकार में श्रम एवं रोजगार मन्त्री बनीं <ref name="india1"/>
* '''1987–90''' [[हरियाणा विधानसभा]] की सदस्य निर्वाचित<ref name="india1"/>
* '''1987–90''' मन्त्रिमण्डल सदस्य, शिक्षा, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, [[हरियाणा सरकार]]।<ref name="india1"/>
* '''1990–96''' [[राज्य सभा]] में चुनी गयीं (प्रथम अवधि)
* '''1996–97''' [15 मई 1996 – 4 दिसम्बर 1997] सदस्य, ११वीं [[लोक सभा]] (द्वितीय अवधि)।
* '''1996''' [16 मई – 1 जून] – केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल, सूचना एवं प्रसारण मन्त्री।<ref name="india1"/>
* '''1998–99''' [10 मार्च 1998 – 26 अप्रैल 1999] सदस्य, १२वीं लोक सभा (तृतीय अवधि)।
* '''1998''' [19 मार्च – 12 अक्तूबर] केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल, सूचना एवं प्रसारण तथा दूरसंचार मंत्री (अतिरिक्त प्रभार)।
* '''1998''' [13 अक्तूबर – 3 दिसम्बर] [[दिल्ली के मुख्य मंत्री|दिल्ली की मुख्यमन्त्री]]
* '''1998''' [नवम्बर] – दिल्ली विधानसभा के हौज खास निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित। दिल्ली विधान सभा सीट से त्यागपत्र दिया और लोक सभा सीट जारी रखी।
* '''2000–06''' राज्य सभा सदस्य (चतुर्थ अवधि)।<ref name="biodata">{{cite web|url=http://rajyasabha.nic.in/kiosk/whoswho/beta_s19.htm |title=Brief Bio-data. Member of Rajya Sabha. Sushma, Shrimati |accessdate=13 अप्रैल 2009 |archiveurl=https://web.archive.org/web/20060528171046/http://rajyasabha.nic.in/kiosk/whoswho/beta_s19.htm |archivedate=28 May 2006 |url-status=dead}}</ref>
* '''2000–03''' [30 सितम्बर 2000 – 29 जनवरी 2003] सूचना एवं प्रसारण मन्त्री
* '''2003–04''' [29 जनवरी 2003 – 22 मई 2004] स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मन्त्री एवं संसदीय विषयों की मन्त्री
* '''2006–09''' [अप्रैल 2006 -] सदस्य, राज्य सभा (पंचम अवधि)।<ref>[http://india.gov.in/govt/rajyasabhampbiodata.php?mpcode=94 Detailed Profile – – Members of Parliament (Rajya Sabha) – Who's Who – Government: National Portal of India]. India.gov.in. Retrieved 30 July 2011. {{webarchive |url=https://web.archive.org/web/20120217100033/http://india.gov.in/govt/rajyasabhampbiodata.php?mpcode=94 |date=17 February 2012 }}</ref>
* '''2009'''–14 [16 मई 2009 – 18 मई 2014] सदस्य, 15वीं लोक सभा (छठी अवधि)।<ref name="india1"/>
* '''2009'''-09 [3 जून 2009 – 21 दिसम्बर 2009] लोकसभा में विपक्ष के उपनेता।<ref name="india1"/>
* '''2009'''–14 [21 दिसम्बर 2009 – 18 मई 2014] विपक्ष के नेता एवं [[लाल कृष्ण आडवाणी]] का स्थान लिया।
* '''2014–19''' [26 मई 2014–24 मई 2019] सदस्य, 16वीं लोक सभा (सातवीं अवधि)।<ref name="india1" />
* '''2014–19''' [26 मई 2014–24 मई 2019] विदेश मंत्री, केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल।
== सन्दर्भ ==
{{reflist|2}}
== इन्हें भी देखें==
* [[भारतीय जनता पार्टी]]
* [[राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन]]
== बाहरी कड़ियाँ==
{{Commons category|Sushma Swaraj|सुषमा स्वराज}}
{{wikiquote}}
*[https://web.archive.org/web/20190809100853/https://www.youtube.com/watch?v=euSSW7ti3GA Sushma Swaraj Kannada Bellary]
*[https://www.youtube.com/watch?v=fveZlHbOC5Y शशि थरूर सुषमा स्वराज हिन्दी]
*[https://web.archive.org/web/20140416055348/https://twitter.com/SushmaSwarajbjp विभागीय ट्विटर]
* [https://web.archive.org/web/20200522003137/https://www.prabhasakshi.com/personality/sushma-swaraj-68th-birth-anniversary सबकी मदद को तत्पर रहने वाली सुषमा जी के ओजस्वी भाषण सदैव याद रहेंगे]
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पंजाब
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{{Punjabis}}
'''पंजाब''' अथवा '''पंचनद''' (मूल {{langx|sa|पञ्चनद}}, {{langx|fa|پنجاب}}, {{langx|en|Punjab|italics=no}}) [[दक्षिण एशिया]] में स्थित एक भौगोलिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक क्षेत्र है, जो पश्चिमोत्तर [[भारत]] और पूर्वी पाकिस्तान का भाग है। इसने [[भारतीय इतिहास]] को कई मोड़ दिए हैं। अतीत में [[शक]]ों, [[हफथाली लोग|हूणों]], [[पठान|पठानों]] व [[मुग़ल साम्राज्य|मुग़लों]] ने इसी पंजाब के रास्ते भारत में प्रवेश किया था। [[आर्य|आर्यो]] का आगमन भी [[हिन्दू कुश|हिन्दुकुश]] पार कर इसी पंजाब के रास्ते ही हुआ था। पंजाब की [[सिन्धु नदी]] की घाटी में आर्यो की सभ्यता का विकास हुआ। उस समय इस भूखण्ड का नाम सप्तसिन्धु अर्थात् सात सागरों का देश था। समय के साथ सरस्वती जलस्रोत सूख गया। अब रह गयीं पाँच नदियाँ-[[झेलम नदी|झेलम]], [[चनाब नदी|चेनाब]], [[रावी नदी|राबी]], [[व्यास]] और [[सतलुज नदी|सतलज]] इन्हीं पाँच नदियों का प्रान्त पंजाब हुआ। पंजाब का नामकरण फ़ारसी के दो शब्दों से हुआ है। पंज का अर्थ है पाँच और आब का अर्थ होता है जल।
== इतिहास ==
भारत और पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में भारतीय व आर्य लोगों के साथ-साथ आंशिक रूप से विभिन्न स्वदेशी समुदायों के लिए एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध है। मध्य एशिया और मध्य पूर्व से कई आक्रमणों के परिणामस्वरूप, कई जातीय समूह और धर्म पंजाब की सांस्कृतिक विरासत बनाते हैं। [[प्रागैतिहासिक काल]] में दक्षिण एशिया की सबसे पुरानी ज्ञात संस्कृतियों में से एक, [[सिंधु घाटी सभ्यता|सिंधुघाटी सभ्यता]], इस क्षेत्र में स्थित थी।
15वीं और 16वीं शती में गुरु नानकदेव जी की शिक्षाओं से [[भक्ति आंदोलन]] ने ज़ोर पकड़। सिख पंथ ने एक धार्मिक और सामाजिक आंदोलन को जन्म दिया, मूल रूप से जिसका उद्देश्य सामाजिक और धार्मिक कुरीतियों को दूर करना था। दसवें गुरु गोविंद सिंह जी ने सिखों को '[[ख़ालसा|खालसा पंथ']] के रूप में संगठित किया।
== विभाजन ==
१९४७ की परिभाषा पंजाब क्षेत्र को ब्रिटिश भारत के विघटन के संदर्भ में परिभाषित करती है, जिससे तत्कालीन ब्रिटिश पंजाब प्रांत का विभाजन भारत और पाकिस्तान के बीच हो गया था। पाकिस्तान में, इस क्षेत्र में अब पंजाब प्रांत और [[इस्लामाबाद]] राजधानी क्षेत्र शामिल हैं। भारत में, इसमें पंजाब राज्य, [[चण्डीगढ़]] ,[[हरियाणा]], और [[हिमाचल प्रदेश]] शामिल हैं।<ref name="hindi.news18.com">{{Cite web|url=https://hindi.news18.com/news/history/khabar-history-10-487395.html|title=क्या आपको पता है भारत-पाक बंटवारे की ये सच्चाई, सिर चकरा जाएगा आपका..!|website=News18 India|access-date=2021-05-17|archive-date=17 मई 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210517045839/https://hindi.news18.com/news/history/khabar-history-10-487395.html|url-status=dead}}</ref>
१९४७ की परिभाषा का उपयोग करते हुए, पंजाब पश्चिम में [[बलूचिस्तान (पाकिस्तान)|बलूचिस्तान]] और [[पख़्तूनिस्तान|पश्तूनिस्तान]] क्षेत्रों, उत्तर में [[कश्मीर]] , पूर्व में हिंदी बेल्ट और दक्षिण में [[राजस्थान]] और सिंध की सीमा में है। तदनुसार, पंजाब क्षेत्र बहुत विविध है औरकांगड़ा घाटी की पहाड़ियों से लेकर मैदानी इलाकों औरचोलिस्तान रेगिस्तान तक फैला हुआ है ।<ref name="hindi.news18.com"/>
== प्रमुख शहर ==
ऐतिहासिक रूप से, [[लाहौर]] पंजाब क्षेत्र की राजधानी रहा है और १.१ करोड़ की उचित आबादी के साथ यह क्षेत्र में सबसे अधिक आबादी वाला शहर बना हुआ है। [[फ़ैसलाबाद]], [[रावलपिंडी]], [[गुजरांवाला]], [[मुल्तान]], [[लुधियाना]], [[अमृतसर]], [[जलंधर]] और चण्डीगढ पंजाब के अन्य सभी शहर हैं, जिनकी आबादी दस लाख से अधिक है।
== पाकिस्तानी शहरों के बारे में कुछ प्रसिद्ध तथ्य ==
1 [[बहावलपुर]] - लाल सुहानरा राष्ट्रीय उद्यान का घर, जो पाकिस्तान के कुछ प्राकृतिक सफारी पार्कों में से एक है
2. [[फैसलाबाद]] - पाकिस्तान का कपड़ा केंद्र
3. [[इस्लामाबाद]] - पाकिस्तान की राजधानी
4. [[लाहौर]] - पाकिस्तान की सांस्कृतिक राजधानी और प्रांतीय राजधानी
5. [[मुल्तान]] - पर्यटकों के लिए एक अवश्य देखने योग्य स्थान, यह अपने अद्भुत आमों, मिलनसार लोगों और मिट्टी के बर्तनों, कई कब्रों और खूबसूरत मस्जिदों के लिए प्रसिद्ध है।
6. [[ननकाना साहिब]]- सिख धर्म का पवित्र स्थान
7 [[रावलपिंडी]] - पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय
8 [[सरगोधा]] - पाकिस्तानी मुख्य वायु सेना बेस
9 [[सियालकोट]] - अपने खेल और चमड़ा उद्योग के लिए जाना जाता है
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{पंजाब के धार्मिक एवं पर्यटन स्थल}}
[[श्रेणी:पंजाब]]
[[श्रेणी:ऐतिहासिक भौगोलिक क्षेत्र]]
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[[श्रेणी:पाकिस्तान के एतिहासिक क्षेत्र]]
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'''संजय गांधी''' (14 दिसम्बर 1946 - 23 जून 1980) [[भारत]] के एक राजनेता थे। वे भारत की प्रधानमंत्री [[इन्दिरा गांधी]] के छोटे पुत्र थे। [[मेनका गांधी]] उनकी पत्नी हैं और [[वरुण गांधी]] उनके पुत्र। भारत में [[आपातकाल]] के समय उनकी भूमिका बहुत विवादास्पद रही। अल्पायु में ही एक [[हेलिकॉप्टर]] दुर्घटना में उनकी मौत हो गयी।<ref>{{cite web |last1=[[इंडिया टुडे]] |title=Maruti Commission report documents the story of Sanjay Gandhi's dream of building an automobile empire gone awry |url=https://www.indiatoday.in/magazine/indiascope/story/19790930-maruti-commission-report-documents-the-story-of-sanjay-gandhis-dream-of-building-an-automobile-empire-gone-awry-822494-2014-03-01 |accessdate=24 जून 2018 |language=en |archive-url=https://web.archive.org/web/20180624092920/https://www.indiatoday.in/magazine/indiascope/story/19790930-maruti-commission-report-documents-the-story-of-sanjay-gandhis-dream-of-building-an-automobile-empire-gone-awry-822494-2014-03-01 |archive-date=24 जून 2018 |url-status=live }}</ref>इनका जन्म 14 दिसम्बर 1946 को हुआ था। इनकी माता देश की पूर्व प्रधानमंत्री [[इन्दिरा गांधी|श्रीमती इंदिरा गांधी]] जी थीं एवं इनके पिता फिरोज गांधी जी थे जो कि पारसी समुदाय से थे। जिन्होनें शादी के बाद अपना नाम परिवर्तित करके फिरोज गांधी कर लिया था।.इनके पिता पेशे से [[पारसी]] राजनेता एवं पत्रकार थे, वे लोकसभा के सांसद भी रहे।. संजय गांधी का मूल निवास स्थान मुम्बई था, क्योंकि यहीं पर उनके पिता फिरोज गांधी का जन्म हुआ था। संजय गांधी के बडे भाई का नाम राजीव गांधी था।. बताते चले कि इंदिरा गांधी जी ने,फिरोज गांधी से शादी अपने पिता एवं देश के पुर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु के खिलाफ जाकर करी थी।<ref>{{Cite web|url=https://www.jagran.com/news/national-sanjay-gandhi-life-story-emergency-sterilization-and-maruti-800-sanjay-gandhi-gave-some-such-changes-to-the-picture-of-indian-politics-23449048.html|title=आपातकाल, नसबंदी और मारुति 800... संजय गांधी ने कुछ ऐसे बदल दी थी भारतीय राजनीति की तस्वीर - Sanjay Gandhi Life Story Emergency Sterilization and Maruti 800 Sanjay Gandhi gave some such changes to the picture of Indian politics HPJagranSpecial|website=Jagran|language=hi|access-date=2025-01-21}}</ref>
=== अपातकाल ===
इतिहासकारों द्वारा बताया जाता है कि संजय गांधी भले ही देश के प्रधानमंत्री न बने सके,मगर सदैव ही पद की लालसा रखते थे। वहीं इंदिरा गांधी जी भी चाहती थी कि उनके कार्यकाल के बाद संजय ही देश के प्रधानमंत्री बने, इस बात की झलक उनकेे आपातकाल लगाये जाने के समयकाल में देखने को मिलती है। 25 जून 1975 में देश में आपातकाल की घोषणा करी गयी,आपातकाल के 1 वर्ष बाद यानि 1976 में संजय गांधी ने देश में बढ़ती आबादी पर रोक लगाने के लिए नसबंदी कानून को पास किया। सरकार द्वारा हवाला दिया गया कि गम्भीर अनुवांशिक बिमारीयों से पीड़ित लोगों की ही नसबंदी करी जायेगी ताकि अनुवांशिक बिमारी आने वाली पिढीयों में न फैल सकें।अतः इस कानून का पालन देश कि जनता से जबरन कराया जाने लगा।.परिणास्वरुप 16 साल के किशोर से लेकर 80 वर्ष के बुजुर्ग की जबरन नसबंदी की गयी।.इस तरह से मात्र एक वर्ष के समयकाल में ही लगभग 60 लाख लोगों की नसबंदी कर दी गयी।.आपातकाल पुरे 21 महीनो तक लगा। अतः नसबंदी कार्यक्रम आपातकाल के समाप्त होने के बाद ही बंद किया गया।.
= मारुति 800 =
1970 में संजय गांधी ने दिल्ली के गुलाबी बाग ऐरिया में एक वर्कशाप की स्थापना करवायी।. दरअसल संजय गांधी आम आदमी के लिए कार बनाना चाहते थे ताकि आम जनता भी कार का लुत्फ उठी सके और वे उनके बजट में भी आये।. अतः 4 जून 1971 को उन्होने मारुति मोटर्स नामक कम्पनी की स्थापनी की।.वे कम्पनी सर्वप्रथम एम.डी. बने।. इस कम्पनी की स्थापना के लिए संजय गांधी ने लंदन की राॅल्स-राॅयस कम्पनी से इंटर्नशिप की थी।.
= शिक्षा =
संजय गांधी की प्रारम्भिक शिक्षा देहरादून के दूनस्कूल में हुयी। इसके बाद वे स्वीज़रलैण्ड चले गये यहां इन्होने इंटरनैशनल बोर्डींग स्कूल (इंकोल डी हिम्युमेनाइट) में पढ़ाई पुर्ण की।.पढ़ाई पुर्ण करने के बाद वे लंदन की राॅल्स-राॅयस कंपनी में इंटर्नशिप के लिए गये।.
= ड्रिम प्रोजेक्ट के चलते प्रेमिका से हुये दूर =
लंदन में ही इनके जीवन में दो लड़कीयों का आना हुआ। पहली लड़की मुस्लिम समुदाय से थी,आपसी विचारधारा न मिलने के कारण यह रिश्ता ज्यादा दिनों तक न चल सका।. कुछ समय बाद संजयगांधी को जर्मनी की रहने वाली सैबीन वाॅन स्टीग्लिट्स से मोहब्बत हो गयी।. ये वही मोहतरमा थी जिन्होने सोनिया गांधी जी की मुलाकात,राजीव गांधी से करवाई थी।. यह रिश्ता भी ज्यादा दिनों तक न चल सका।. दरअसल संजयगांधी अपने ड्रिम प्रोजक्ट लेकर ज्यादा व्यस्त रहने लगे जिसके कारण दोनो के बीच दुरीयां बढ़ती चली गयीं। कुछ समय बाद 14 दिसम्बर 1973 में संजय गांधी मुलाकात अपने मित्र के दौरान मेनिका गांधी से हुयी।. दोनो एक दुसरे के करीब आये और 23 दिसम्बर 1974 दोनों ने शादी कर ली। यह शादी संजय गांधी के पुराने दोस्त मोहम्मद युनूस के घर में संपन्न होती है।. मेनिका गांधी जो लेफ्टनेंट कर्नल त्रीलोचन सिंह की बेटी थी, संजय गांधी से 10 साल छोटी थी। बताया जाता है कि इंदिरा गांधी ने, मेनिका गांधी को उपहार स्वरुप 21 साड़ीयां दी थी जिनमें से एक साड़ी जवाहरलाल नेहरू द्वारा इंदिरा गांधी को उपहार में दी गयी साड़ी भी थी।.
= विमान हादसे में मौत =
शादी के 6 साल बाद 21 जून 1980 की सुबह संजय गांंधी एवं दिल्ली फ्लाइंग क्लब के पूर्व इंस्ट्रक्टर सुभाष सक्सेना के दिल्ली फ्लाइंग क्लब से उड़ान भरी।. हवा में काफी उंचाई पर जाने के बाद विमान का पिछला इंजन काम करना बंद कर देता है। परिणास्वरुप विमान अनियंत्रित होकर अशोक होटल के पिछे खाली पड़ी जमीन में क्रैश होता है। इस प्रकार 23 जून 1980 में संजय गांधी की मौत हो जाती है संजय गांधी का अंतिम समय पर इलाज दिल्ली के राम मनोहर लोहिया होस्पीटल में चला था।. आपको बताते चले इसी दिन चैनई में देश के चौथे राष्ट्रपति वी.वी गिरी का भी निधन हुआ था।. अतः इस दिन देश के झण्डे को आधा झुका दिया गया बहोत से लोगों को लगा की झण्डा संजय गांधी की मौत के कारण झुकाया गया है जबकि ऐसा नही था।. एक मां के समक्ष उसके बेटे का निधन होना बहोत ही दुख दायी है। इस दर्द को सिर्फ एक मां ही समझ सकती है, संजय जैसे भी थे आखिर थे तो अपने मां के लाल।.
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}तत्कालीन राष्ट्रपति वी वी गिरी की मृत्यु संजय गाँधी की मृत्यु के दूसरे दिन 24/06/1980 को हुई थी, न कि 23/06/1980 को.
[[श्रेणी:राजनीतिज्ञ]]
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'''कैप्टन विक्रम बत्रा''' (09 सितम्बर 1974 - 07 जुलाई 1999) भारतीय सेना के एक अधिकारी थे जिन्होंने [[कारगिल युद्ध]] में अभूतपूर्व वीरता का परिचय देते हुए वीरगति प्राप्त की। उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च वीरता सम्मान [[परमवीर चक्र]] से सम्मानित किया गया।<ref name="gov">{{Cite web |url=http://www.gallantryawards.gov.in/hi/Awardee/vikram-batra |title=संग्रहीत प्रति |access-date=14 अप्रैल 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180414235856/http://www.gallantryawards.gov.in/hi/Awardee/vikram-batra |archive-date=14 अप्रैल 2018 |url-status=dead }}</ref>
== प्रारंभिक जीवन ==
[[पालमपुर]] निवासी जी.एल. बत्रा और कमलकांता बत्रा के घर [[९ सितम्बर|9 सितंबर]] [[१९७४|1974]] को दो बेटियों के बाद दो जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ। माता कमलकांता की [[श्रीरामचरितमानस]] में गहरी श्रद्धा थी तो उन्होंने दोनों का नाम लव और कुश रखा। लव यानी विक्रम और कुश यानी विशाल। पहले डीएवी स्कूल, फिर सेंट्रल स्कूल पालमपुर में दाखिल करवाया गया। सेना छावनी में स्कूल होने से सेना के अनुशासन को देख और पिता से देश प्रेम की कहानियां सुनने पर विक्रम में स्कूल के समय से ही देश प्रेम प्रबल हो उठा। स्कूल में विक्रम शिक्षा के क्षेत्र में ही अव्वल नहीं थे, बल्कि टेबल टेनिस में अव्वल दर्जे के खिलाड़ी होने के साथ उनमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का भी जज़्बा था। जमा दो तक की पढ़ाई करने के बाद विक्रम [[चण्डीगढ़|चंडीगढ़]] चले गए और [[डीएवी कॉलेज, चंडीगढ़]] में विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई शुरू कर दी। इस दौरान वह एनसीसी के सर्वश्रेष्ठ कैडेट चुने गए और उन्होंने गणतंत्र दिवस की परेड में भी भाग लिया। उन्होंने सेना में जाने का पूरा मन बना लिया और सीडीएस (संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा) की भी तैयारी शुरू कर दी। हालांकि विक्रम को इस दौरान हांगकांग में मर्चेन्ट नेवी में भी नौकरी मिल रही थी जिसे इनके द्वारा ठुकरा दिया गया।
== सैन्य जीवन ==
विज्ञान विषय में स्नातक करने के बाद विक्रम का चयन सीडीएस के जरिए सेना में हो गया। जुलाई 1996 में उन्होंने [[भारतीय सैन्य अकादमी]] [[देहरादून]] में प्रवेश लिया। दिसंबर 1997 में प्रशिक्षण समाप्त होने पर उन्हें 6 दिसम्बर 1997 को जम्मू के [[सोपोर]] नामक स्थान पर सेना की [[जम्मू कश्मीर राइफल्स|13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स]] में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्ति मिली। उन्होंने 1999 में कमांडो ट्रेनिंग के साथ कई प्रशिक्षण भी लिए। पहली जून 1999 को उनकी टुकड़ी को [[कारगिल युद्ध]] में भेजा गया। हम्प व राकी नाब स्थानों को जीतने के बाद विक्रम को कैप्टन बना दिया गया।
== 5140 चोटी पर जीत ==
इसके बाद श्रीनगर-लेह मार्ग के ठीक ऊपर सबसे महत्त्वपूर्ण 5140 चोटी को पाक सेना से मुक्त करवाने की ज़िम्मेदारी कैप्टन बत्रा की टुकड़ी को मिली। कैप्टन बत्रा अपनी कंपनी के साथ घूमकर पूर्व दिशा की ओर से इस क्षेत्र की तरफ बडे़ और बिना शत्रु को भनक लगे हुए उसकी मारक दूरी के भीतर तक पहुंच गए। कैप्टेन बत्रा ने अपने दस्ते को पुर्नगठित किया और उन्हें दुश्मन के ठिकानों पर सीधे आक्रमण के लिए प्रेरित किया। सबसे आगे रहकर दस्ते का नेतृत्व करते हुए उन्होनें बड़ी निडरता से शत्रु पर धावा बोल दिया और आमने-सामने के गुतथ्मगुत्था लड़ाई मे उनमें से चार को मार डाला। बेहद दुर्गम क्षेत्र होने के बावजूद विक्रम बत्रा ने अपने साथियों के साथ 20 जून 1999 को सुबह तीन बजकर 30 मिनट पर इस चोटी को अपने कब्ज़े में ले लिया।कैप्टन विक्रम बत्रा ने जब इस चोटी से रेडियो के जरिए अपना विजय उद्घोष ‘यह दिल मांगे मोर’ कहा तो सेना ही नहीं बल्कि पूरे भारत में उनका नाम छा गया। इसी दौरान विक्रम के कोड नाम शेरशाह के साथ ही उन्हें ‘कारगिल का शेर’ की भी संज्ञा दे दी गई। अगले दिन चोटी 5140 में भारतीय झंडे के साथ विक्रम बत्रा और उनकी टीम का फोटो मीडिया में आ गयी।
== 4875 वाली संकरी चोटी पर जीत ==
इसके बाद सेना ने चोटी 4875 को भी कब्ज़े में लेने का अभियान शुरू कर दिया और इसके लिए भी कैप्टन विक्रम और उनकी टुकड़ी को जिम्मेदारी दी गयी। उन्हें और उनकी टुकड़ी एक ऐसी संकरी चोटी से दुश्मन के सफ़ाए का कार्य सौंपा गया जिसके दोनों ओर खड़ी ढलान थी और जिसके एकमात्र रास्ते की शत्रु ने भारी संख्या में नाकाबंदी की हुई थी। कार्यवाई को शीग्र पूरा करने के लिए कैप्टन विक्रम बत्रा ने एक संर्कीण पठार के पास से शत्रु ठिकानों पर आक्रमण करने का निर्णय लिया। आक्रमण का नेतृत्व करते हुए आमने-सामने की भीषण गुत्थमगुत्था लड़ाई में अत्यन्त निकट से पांच शत्रु सैनिकों को मार गिराया। इस कार्यवाही के दौरान उन्हें गंभीर ज़ख्म लग गए। गंभीर ज़ख्म लग जाने के बावजूद वे रेंगते हुए शत्रु की ओर बड़े और ग्रेनेड फ़ेके जिससे उस स्थान पर शत्रु का सफ़ाया हो गया। सबसे आगे रहकर उन्होंने अपने साथी जवानों को एकत्र करके आक्रमण के लिए प्रेरित किया और दुश्मन की भारी गोलीबारी के सम्मुख एक लगभग असंभव सैन्य कार्य को पूरा कर दिखाया। उन्होंने जान की परवाह न करते हुए अपने साथियों के साथ, जिनमे [[अनुज नैयर|लेफ्टिनेंट अनुज नैयर]] भी शामिल थे, कई पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतारा। किंतु ज़ख्मों के कारण विक्रम बत्रा वीरगति को प्राप्त हुए।
उनके इस असाधारण नेतृत्व से प्रेरित उनके साथी जवान प्रतिशोध लेने के लिए शत्रु पर टूट पड़े और शत्रु का सफ़ाया करते हुए प्वॉइंट 4875 पर कब्ज़ा कर लिया।
कैप्टन बत्रा के पिता जी.एल. बत्रा कहते हैं कि उनके बेटे के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टीनेंट कर्नल वाई.के. जोशी ने विक्रम को '''शेर शाह''' उपनाम से नवाजा था।
या तो बर्फीली चोटी पर तिरंगा लहराकर आऊंगा नहीं तो उसी तिरंगे में लिपटकर आऊंगा पर आऊंगा जरुर - परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा ( 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स )
==सम्मान==
इस प्रकार कैप्टन विक्रम बत्रा ने शत्रु के सम्मुख अत्यन्त उतकृष्ट व्यक्तिगत वीरता तथा उच्चतम कोटि के नेतृत्व का प्रदर्शन करते हुए भारतीय सेना की सर्वोच्च परंपराओं के अनुरूप अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
इस अदम्य साहस और पराक्रम के लिए कैप्टन विक्रम बत्रा को 15 अगस्त 1999 को [[भारत सरकार]] द्वारा मरणोपरांत [[परमवीर चक्र]] से सम्मानित किया गया जो 7 जुलाई 1999 से प्रभावी हुआ।
==लोकप्रिय संस्कृति में==
2003 की हिंदी फिल्म [[एल ओ सी कारगिल (2003 फ़िल्म)|एलओसी: कारगिल]] में, पूरे कारगिल संघर्ष पर आधारित [[अभिषेक बच्चन]] ने कैप्टन बत्रा की भूमिका निभाई।<ref name="My life is insignificant">{{Cite news |url=http://www.rediff.com/movies/2003/dec/24abhishek.htm |title=My life is insignificant |access-date=4 March 2017 |work=Rediff.com |date=December 2003 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170430124108/http://www.rediff.com/movies/2003/dec/24abhishek.htm |archive-date=30 April 2017}}</ref>
2021 की फिल्म [[शेरशाह (फ़िल्म)|शेरशाह]] में, [[सिद्धार्थ मल्होत्रा]] ने विष्णुवर्धन द्वारा निर्देशित और [[धर्मा प्रोडक्शन्स|धर्मा प्रोडक्शंस]] और पेन इंडिया लिमिटेड द्वारा निर्मित एक बायोपिक में बत्रा की भूमिका निभाई।<ref>{{cite news |title=Kargil martyr Vikram Batra's brother on his biopic: I hope Sidharth Malhotra does justice to Vikram |url=https://www.hindustantimes.com/bollywood/kargil-martyr-vikram-batra-s-brother-on-his-biopic-i-hope-sidharth-malhotra-does-justice-to-vikram/story-FHKGDONGTqRVdoHgmPTi7L.html |access-date=17 July 2019 |work=Hindustan Times |date=5 June 2018 |language=en}}</ref><ref>{{cite news|url=https://www.bhaskar.com/bollywood/news/sidharth-malhotra-will-wear-short-heeled-shoes-to-match-captain-vikram-batra-01595633.html|title=कैप्टन विक्रम बत्रा की बराबरी करने कम हील वाले शूज पहनेंगे सिद्धार्थ, फिल्म के लिए ले रहे हार्ड ट्रेनिंग|date=16 July 2019|work=Dainik Bhaskar|access-date=17 July 2019|language=hi|trans-title=Siddharth will wear low-heeled shoes to match Captain Vikram Batra, taking hard training for the film|author-link=Https://vduapk.in}}</ref>
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{परमवीर चक्र से सम्मानित लोग}}
[[श्रेणी:कारगिल युद्ध के नायक]]
[[श्रेणी:परमवीर चक्र सम्मानित लोग]]
[[श्रेणी:हिमाचल प्रदेश के लोग]]
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गढ़िया जगन्नाथ
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{{स्रोतहीन|date=नवम्बर 2018}}
'''गढ़िया जगन्नाथ''' [[उत्तर प्रदेश]] के [[एटा]] जनपद के अलीगंज तहसील का एक गाँव है। गढ़िया जगन्नाथ की दूरी अलीगंज, [[कायमगंज]], प्रसिद्ध तीर्थ स्थल [[काम्पिल्य|कम्पिल]] से लगभग 8 किलोमीटर है।
यह गाँव में राठौड़ [[क्षत्रिय|क्षत्रियों]] बाहुल्य है। इनका संबंध कन्नौज के गहरावालों से भी है कुछ पुराने इतिहासकार बताते है कन्नौज के राठौड़ जब वक़्त के साथ कमजोर हुए तो उन्होंने खुद को छोटी छोटी कई रियासतों में बांट लिया जैसे इतिहास और स्थानीय लोककथाओं के अनुसार ईस्वी,1194 में चंदावर के युद्ध में कन्नौज के राजा जयचंद्र की मृत्य के बाद उनके पुत्र जजपाल सिंह (जयपाल) कन्नौज से विस्थापित होकर ' खोर ' जो आज के जिला फर्रुखाबाद में शमसाबाद नाम से जाना जाता है वहां निवास कर के राज करने लगे उन्होंने खोर को अपनी राजधानी बनाया था । बाद में 1224 या 1228 ईस्वी में दिल्ली सल्तनत के सुल्तान शम्सुद्दीन इल्तुतमिश ने खोर पर आक्रमण कर अपने नियंत्रण में ले लिया । उसने खोर को नष्ट कर अपने नाम पर एक नगर शमसाबाद की नींव डाली। शमसाबाद में मौजूद चतुर्मुखी शिव मंदिर का निर्माण राजा जजपाल सिंह के पुत्र कुंवर राय सिंह करवाया था। कन्नौज वंश के ही राव सीहा ने जोधपुर में राठौड़ रियासत की नींव डाली । राजा का रामपुर यह गाँव [[राजा का रामपुर]] के राजा राम सिंह राठौड़ के वंशज जगन्नाथ सिंह राठौड़ ने बसाया वही यहां के पहले निवासी थे । 'गढ़' का अर्थ होता है गढ़ने वाला या बनाने वाला वैसे ही 'या' का अर्थ होता है किसके द्वारा यहां पर गढ़िया का अर्थ है कि इस गांव की नींव पूज्य जगन्नाथ सिंह राठौड़ जी द्वारा रखी गई बाकी सभी उनकी ही संताने है जो इस गांव में आज भी निवास करती है इस गाँव के प्रथम नागरिक पूज्य श्री जगन्नाथ सिंह राठौड़ जी थे जो रामपुर के गद्दी नशीन राजा राम राठौड़ जी के परिवार से थे । गढ़िया जगन्नाथ गाँव के निवासी शम्भू सिंह राठौर राजपूत रेजीमेंट फ़तेहगढ़ में मेजर पद पर कार्यरत रहे। इसी गाँव के सूवेदार राजबीर सिंह ने 1965 के युद्ध में अपने पराक्रम का परिचय दिया और इन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा वीरचक्र प्रदान किया गया। इसी गाँव के ठा. रन सिंह राठौड़ जिला एटा के ब्लॉक अलीगंज से1973 में ब्लाक प्रमुख रहे। ग्राम गढ़िया जगन्नाथ से ही श्री अवधेश सिंह राठौड़ जी रिटायर्ड जिला अधिकारी (District Magistrate) 2012 भी रह चुके है जिन्होंने गांव का गौरव व मान बढ़ाया। बहुत से सम्मानित व्यक्तियों ने गांव का गौरव शिक्षा के क्षेत्र व देश की रक्षा में समर्पित हो कर बढ़ाया है। इस गांव के युवा बहुत ही कर्मठ प्रवृत्ति के है।
गांव में मौजूद गमा देवी गांव की कुल देवी है जिनकी स्थापना स्वयं गांव बसने के समय जगन्नाथ सिंह जी ने विधिवत पूजा पाठ के साथ करवाई थी । गांव में मौजूद प्रभु श्री राम की आराधना के लिए रामशाला भी है जिसका निर्माण भी बहुत पहले हुआ था गांव के दक्षिण में मौजूद श्री शिव जी व मौनी स्वामी जी को समर्पित मंदिर का निर्माण गांव के सभी वरिष्ठ जनों ने सामूहिक धन से करवाया ब इस पुण्य काम में भूमि दान छोटे सिंह , महावीर सिंह , नन्नू सिंह व बलवीर सिंह के वंशजों द्वारा दान कर करवाया गया । हर समय कीर्तन व विधिवत पूजा पाठ व भंडारो का आयोजन होता रहता है।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:ऐतिहासिक स्थल]]
[[श्रेणी:एटा ज़िले के गाँव]]
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेश]]
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के गाँव]]
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ब्रजनिधि
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{{जीवनी स्रोतहीन|date=जनवरी 2017}}
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}}
महाराजा पृथ्वीसिंह की निसंतान मृत्यु हो जाने के बाद उनके छोटे भाई '''प्रतापसिंह''' 16अप्रैल 1778 को शासक बने।सवाई प्रतापसिंह के शासन ग्रहण शान ग्रहण करने की कुछ समय बाद ही मुगल सेनापति नजफखा ने अक्टूबर 1780 मैं जयपुर पर आक्रमण कर उसे घेर दिया। महाराजा प्रताप सिंह का विवाह जोधपुर शासक विजय सिंह की पौत्री से अगस्त 1785 ईस्वी में संपन्न हुआ था। * तूंगा का युद्ध- जयपुर राज्य ने मराठा को उनके साथ हुई पूर्व संधि का पैसा नहीं चुकाया तो मराठा सरदार माधव राज सिंधिया ने जयपुर पर आक्रमण करने हेतु वृंदावन से अपनी सेना लेकर दोसा के पास आकर घेरा डाल दिया ।जयपुर राज्य ने जोधपुर राज्य की शासक विजय सिंह की सेना और जयपुर की संयुक्त सेना के साथ दौसाके पास तूंगा नामक स्थान पर आकर मोर्चा संभाला ।28 जुलाई 1787ई को दोनों पक्षों में भीषण युद्ध हुआ अंत: सिंधिया की सेना को पीछे होना पड़ा ।उन्हें ना तो जयपुर से की खिराज प्राप्त हुआ और ना ही वह उन्हें कुचल सका ।कुछ इतिहासकार इस लड़ाई को अनिर्णायक मानते हैं ।जोधपुर शासक विजय सिंह ने सिंधिया से अजमेर जिला का जीत लिया। '''प्रतापसिंह 'ब्रजनिधि''' (संवत् 1821-1860) [[जयपुर]]नरेश तथा हिन्दी कवि थे। 'ब्रजनिधि' उनका काव्यप्रयुक्त उपनाम है।
प्रतापसिंह ब्रजनिधि ने [[भवननिर्माण]] में भी विशेष रुचि दिखाई। [[चंद्रमहल]] के कई विशाल भवन रिधसिधपोल, बड़ा दीवानखाना, गोविंद जी के पिछाड़ी का हौज, [[हवामहल]], गोवर्धननाथ, ब्रजराजबिहारी, ठाकुर ब्रजनिधि तथा मदनमोहन जी के मंदिर आपके स्थापत्य कलाप्रेम के द्योतक हैं।
प्रतापसिंह 14 वर्ष की अवस्था में सिंहासनारूढ़ हो गए थे। युद्धों में अत्यधिक व्यस्त एवं रोगों से ग्रस्त रहने पर भी इन्होंने अपने अल्प जीवन में लगभग 1400 वृत्तों का प्रणयन किया। लोकविश्रुत है कि महाराज परम भागवत थे। भक्ति-रस-तरंग अथवा मन की उमंग में वे जो पद, रेखते अथवा छंद रचते थे, उन्हें उसी दिन या अगले दिन अपने इष्टदेव गोविंददेव तथा ठाकुर ब्रजनिधि महाराज को समर्पित करते थे। कम से कम पाँच वृत्त नित्य भेंट करने का उनका नियम था।
== रचनाएँ ==
उनकी 22 रचनाएँ उपलब्ध हैं। किंतु सोरठ ख्याल, (36 चरण की एक लघु रचना) उनके किसी पदसंग्रह का ही एक अंश दिखाई पड़ती है। 22 रचनाएँ, जिनका निजी स्वतंत्र अस्तित्व है, काल क्रम से इस प्रकार हैं :
* संवत् 1848 विरचित- प्रेमप्रकाश, फाग रंग, प्रीतिलता,।
* संवत् 1849 प्रणीत- सुहागरैनि।
* 1850 लिखित - विरहसरिता, रेखतासंग्रह, स्नेहबिहार।
* संवत् 1851 रचित- रमक-जमक-बतीसी, प्रीतिपचीसी, ब्रजशृंगार।
* संवत् 1852 कृत- सनेहसंग्राम, नीतिमंजरी, शृंगारमंजरी, वैराग्यमंजरी,
* रंगचौपड़, (संवत् 1853)।
* प्रेमपंथ, दुखहरनवेलि, रास का रेखता, श्रीब्रजनिधिमुक्तावली, ब्रजनिधि-पद-संग्रह, तथा हरिपदसंग्रह, इन शीर्षक छह कृतियों का रचनाकाल कवि ने नहीं दिया है। संख्या में 22 होने के कारण इन्हें "ग्रंथबाईसी" कहते थे।
तीनों मंजरियाँ [[भर्तृहरि]] के शतकत्रय, क्रमश: "[[नीतिशतकम्|नीतिशतक]]", "[[शृंगारशतकम्|शृंगारशतक]]" एवं "[[वैराग्यशतकम्|वैराग्यशतक]]" का [[बृज भाषा|ब्रजभाषा]] में पद्यानुवाद हैं। अन्य रचनाओं में राधा-गोविंद तथा ब्रजनिधि की भक्ति, उनका लीलाविहार, विरहव्यथा, उद्धव के प्रति गोपियों की उक्तियाँ, कुब्जा की निंदा, कवि का दैन्य एवं भक्तिसंपृक्त मनोभाव दर्शाए गए हैं। वस्तुत: कृष्ण राधा का वैभवसंपन्न रूप, नीति के पद तथा चौपड़ का खेल, स्नेह संग्राम तथा यत्र तत्र शस्त्रास्त्रों की उपमाएँ जहाँ ब्रजनिधि की राजोचित प्रवृत्तियाँ प्रदर्शित करती हैं, वहाँ कृष्ण के नटवर रूप के प्रति आकर्षण के ब्रजरज, यमुना, गोकुल, मथुरानिवास उनकी अनन्य भक्ति के परिचायक हैं। शांत रस के अतिरिक्त इन रचनाओं में वात्सल्य, शृंगार और हास्य रस के सुंदर उदाहरण मिलते हैं।
ब्रजनिधि की पदरचनाएँ राग-ताल-बद्ध हैं। वे स्वयं भी [[संगीत]]प्रेमी थे। इस दिशा में उनके उस्ताद थे चाँदखाँ उर्फ दलखाँजी, जो बुधप्रकाश के नाम से प्रसिद्ध हैं। अन्यत्र [[दोहा]], [[सोरठा]], [[कवित्त]], [[सवैया]], [[कुंडलियाँ]], [[छप्पै]], [[चौपाई]], [[बरवै]], [[रेखता]] प्रयुक्त हुए हैं। इनके काव्य में अनुप्रास, उपमा, उत्प्रेक्षा, रूपक, श्लेष प्रभृति अलंकार अनायास ही आ गए हैं। "रमक-जमक-बतीसी" में यमक की बानगी विशेष दर्शनीय है।
कवि ने अधिकतर [[बृज भाषा|ब्रजभाषा]] का प्रयोग किया है किंतु कई एक पद राजस्थानी और पंजाबी में भी हैं।
ब्रजनिधि ने अपने काव्य में अपने पूर्ववर्ती एवं समकालिक कवियों के लगभग 100 पद भी संगृहीत किए हैं। [[घनानन्द|घनानंद]] और [[नागरीदास]] का इनपर स्पष्ट प्रभाव दिखाई पड़ता है। कई एक कवि आपके आश्रित थे। विश्वेश्वर महाशब्दे, बुधप्रकाश, भारतीय, रसपुंज, रसराज आदि विद्वानों ने आपकी प्रेरणा से संगीत, ज्योतिष, वैद्यक और काव्यग्रंथों का प्रणयन भी किया। [[फ़ारसी भाषा|फारसी]] के "[[आइन-ए-अकबरी|आइने अकबरी]]" और "[[दीवान-ए-हाफिज]]" का भी हिंदी अनुवाद हुआ।
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महाराजा पृथ्वीसिंह की निसंतान मृत्यु हो जाने के बाद उनके छोटे भाई '''प्रतापसिंह''' 16अप्रैल 1778 को शासक बने।सवाई प्रतापसिंह के शासन ग्रहण शान ग्रहण करने की कुछ समय बाद ही मुगल सेनापति नजफखा ने अक्टूबर 1780 मैं जयपुर पर आक्रमण कर उसे घेर दिया। महाराजा प्रताप सिंह का विवाह जोधपुर शासक विजय सिंह की पौत्री से अगस्त 1785 ईस्वी में संपन्न हुआ था। * तूंगा का युद्ध- जयपुर राज्य ने मराठा को उनके साथ हुई पूर्व संधि का पैसा नहीं चुकाया तो मराठा सरदार माधव राज सिंधिया ने जयपुर पर आक्रमण करने हेतु वृंदावन से अपनी सेना लेकर दोसा के पास आकर घेरा डाल दिया ।जयपुर राज्य ने जोधपुर राज्य की शासक विजय सिंह की सेना और जयपुर की संयुक्त सेना के साथ दौसाके पास तूंगा नामक स्थान पर आकर मोर्चा संभाला ।28 जुलाई 1787ई को दोनों पक्षों में भीषण युद्ध हुआ अंत: सिंधिया की सेना को पीछे होना पड़ा ।उन्हें ना तो जयपुर से की खिराज प्राप्त हुआ और ना ही वह उन्हें कुचल सका ।कुछ इतिहासकार इस लड़ाई को अनिर्णायक मानते हैं ।जोधपुर शासक विजय सिंह ने सिंधिया से अजमेर जिला का जीत लिया। '''प्रतापसिंह 'ब्रजनिधि''' (संवत् 1821-1860) [[जयपुर]]नरेश तथा हिन्दी कवि थे। 'ब्रजनिधि' उनका काव्यप्रयुक्त उपनाम है।
प्रतापसिंह ब्रजनिधि ने [[भवननिर्माण]] में भी विशेष रुचि दिखाई। [[चंद्रमहल]] के कई विशाल भवन रिधसिधपोल, बड़ा दीवानखाना, गोविंद जी के पिछाड़ी का हौज, [[हवामहल]], गोवर्धननाथ, ब्रजराजबिहारी, ठाकुर ब्रजनिधि तथा मदनमोहन जी के मंदिर आपके स्थापत्य कलाप्रेम के द्योतक हैं।
प्रतापसिंह 14 वर्ष की अवस्था में सिंहासनारूढ़ हो गए थे। युद्धों में अत्यधिक व्यस्त एवं रोगों से ग्रस्त रहने पर भी इन्होंने अपने अल्प जीवन में लगभग 1400 वृत्तों का प्रणयन किया। लोकविश्रुत है कि महाराज परम भागवत थे। भक्ति-रस-तरंग अथवा मन की उमंग में वे जो पद, रेखते अथवा छंद रचते थे, उन्हें उसी दिन या अगले दिन अपने इष्टदेव गोविंददेव तथा ठाकुर ब्रजनिधि महाराज को समर्पित करते थे। कम से कम पाँच वृत्त नित्य भेंट करने का उनका नियम था।
== रचनाएँ ==
उनकी 22 रचनाएँ उपलब्ध हैं। किंतु सोरठ ख्याल, (36 चरण की एक लघु रचना) उनके किसी पदसंग्रह का ही एक अंश दिखाई पड़ती है। 22 रचनाएँ, जिनका निजी स्वतंत्र अस्तित्व है, काल क्रम से इस प्रकार हैं :
* संवत् 1848 विरचित- प्रेमप्रकाश, फाग रंग, प्रीतिलता,।
* संवत् 1849 प्रणीत- सुहागरैनि।
* 1850 लिखित - विरहसरिता, रेखतासंग्रह, स्नेहबिहार।
* संवत् 1851 रचित- रमक-जमक-बतीसी, प्रीतिपचीसी, ब्रजशृंगार।
* संवत् 1852 कृत- सनेहसंग्राम, नीतिमंजरी, शृंगारमंजरी, वैराग्यमंजरी,
* रंगचौपड़, (संवत् 1853)।
* प्रेमपंथ, दुखहरनवेलि, रास का रेखता, श्रीब्रजनिधिमुक्तावली, ब्रजनिधि-पद-संग्रह, तथा हरिपदसंग्रह, इन शीर्षक छह कृतियों का रचनाकाल कवि ने नहीं दिया है। संख्या में 22 होने के कारण इन्हें "ग्रंथबाईसी" कहते थे।
तीनों मंजरियाँ [[भर्तृहरि]] के शतकत्रय, क्रमश: "[[नीतिशतकम्|नीतिशतक]]", "[[शृंगारशतकम्|शृंगारशतक]]" एवं "[[वैराग्यशतकम्|वैराग्यशतक]]" का [[बृज भाषा|ब्रजभाषा]] में पद्यानुवाद हैं। अन्य रचनाओं में राधा-गोविंद तथा ब्रजनिधि की भक्ति, उनका लीलाविहार, विरहव्यथा, उद्धव के प्रति गोपियों की उक्तियाँ, कुब्जा की निंदा, कवि का दैन्य एवं भक्तिसंपृक्त मनोभाव दर्शाए गए हैं। वस्तुत: कृष्ण राधा का वैभवसंपन्न रूप, नीति के पद तथा चौपड़ का खेल, स्नेह संग्राम तथा यत्र तत्र शस्त्रास्त्रों की उपमाएँ जहाँ ब्रजनिधि की राजोचित प्रवृत्तियाँ प्रदर्शित करती हैं, वहाँ कृष्ण के नटवर रूप के प्रति आकर्षण के ब्रजरज, यमुना, गोकुल, मथुरानिवास उनकी अनन्य भक्ति के परिचायक हैं। शांत रस के अतिरिक्त इन रचनाओं में वात्सल्य, शृंगार और हास्य रस के सुंदर उदाहरण मिलते हैं।
ब्रजनिधि की पदरचनाएँ राग-ताल-बद्ध हैं। वे स्वयं भी [[संगीत]]प्रेमी थे। इस दिशा में उनके उस्ताद थे चाँदखाँ उर्फ दलखाँजी, जो बुधप्रकाश के नाम से प्रसिद्ध हैं। अन्यत्र [[दोहा]], [[सोरठा]], [[कवित्त]], [[सवैया]], [[कुंडलियाँ]], [[छप्पै]], [[चौपाई]], [[बरवै]], [[रेखता]] प्रयुक्त हुए हैं। इनके काव्य में अनुप्रास, उपमा, उत्प्रेक्षा, रूपक, श्लेष प्रभृति अलंकार अनायास ही आ गए हैं। "रमक-जमक-बतीसी" में यमक की बानगी विशेष दर्शनीय है।
कवि ने अधिकतर [[बृज भाषा|ब्रजभाषा]] का प्रयोग किया है किंतु कई एक पद राजस्थानी और पंजाबी में भी हैं।
ब्रजनिधि ने अपने काव्य में अपने पूर्ववर्ती एवं समकालिक कवियों के लगभग 100 पद भी संगृहीत किए हैं। [[घनानन्द|घनानंद]] और [[नागरीदास]] का इनपर स्पष्ट प्रभाव दिखाई पड़ता है। कई एक कवि आपके आश्रित थे। विश्वेश्वर महाशब्दे, बुधप्रकाश, भारतीय, रसपुंज, रसराज आदि विद्वानों ने आपकी प्रेरणा से संगीत, ज्योतिष, वैद्यक और काव्यग्रंथों का प्रणयन भी किया। [[फ़ारसी भाषा|फारसी]] के "[[आइन-ए-अकबरी|आइने अकबरी]]" और "[[दीवान-ए-हाफिज]]" का भी हिंदी अनुवाद हुआ।
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कालडी
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പ്രൊഫസർ പ്രേം രാജ് പുഷ്പാകരന്, എൻ.ഐ.റ്റി. കാലിക്കറ്റ് ♡ Professor P̂rém ráj P̂üshp̂ákárán, NIT Calicut 🪷🌷🪻🌼🌻🌺🌹🌸🏵️💮
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'''कालडी'''({{lang-ml|കാലടി}})({{langx|en|Kalady}}) या कलाड़ी(Kaladi) [[भारत]] के [[केरल]] (या केरलम) राज्य के [[एर्नाकुलम ज़िले]] में स्थित एक नगर है। यह [[पेरियार नदी]] के पूर्व में स्थित है। यहाँ [[आदि शंकराचार्य]] का जन्म हुआ था इसलिये यह एक प्रसिद्ध तीर्थ भी है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=psw6DwAAQBAJ Lonely Planet South India & Kerala]," Isabella Noble et al, Lonely Planet, 2017, ISBN 9781787012394</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=1Hs0DwAAQBAJ The Rough Guide to South India and Kerala]," Rough Guides UK, 2017, ISBN 9780241332894</ref> कलाड़ी 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में श्रृंगेरी के तत्कालीन शंकराचार्य द्वारा पुन: खोज और 1910 में एक आदि शंकर मंदिर के अभिषेक के बाद कलाड़ी को एक विशेष रूप से प्रमुखता मिली। कलाड़ी की शताब्दी मई 2010 में मनाई गई थी और इसकी इसकी पुन: खोज की कहानी खोज की कहानी को श्रृंगेरी शारदा पेथम की एक फिल्म में सौ साल पहले प्रलेखित किया गया है। मलयालम भाषा में 'कालडी' का अर्थ "पदचिह्न" होता है। प्राचीन काल में इस गाँव का नाम शासलम था। लोककथाओं के अनुसार, बालक शंकर ([[आदि शंकराचार्य]]) की माता आर्याम्बा प्रतिदिन स्नान के लिए [[पेरियार नदी]] तक जाने में अत्यधिक शारीरिक रूप से अक्षम और अशक्त हो जाती थीं। अपनी माता की पीड़ा को देखकर बालक शंकर ने भगवान श्री [[कृष्ण]] से प्रार्थना की। इसके फलस्वरूप, पेरियार नदी ने अपना मार्ग बदल लिया और बालक शंकर के पदचिह्नों का अनुसरण करते हुए उनके घर के समीप से बहने लगी। तभी से इस स्थान का नाम 'कालडी' (पदचिह्न) पड़ा। भाषाविदों के अनुसार, केरल के कई स्थानों के नाम मानव शरीर के अंगों के आधार पर रखे गए हैं (जैसे 'कैवज़ी' हाथ से, 'तलश्शेरी' सिर से)। इसी प्रकार, 'काल' (पैर/सीमा) और 'आदि' (निम्न क्षेत्र) के संयोजन से भी नदी तट के निचले मैदानी इलाकों को यह नाम मिलने का वैज्ञानिक तर्क दिया जाता है। यहाँ की मृदा मुख्य रूप से [[जलोढ़क]] और [[लैटेराइट मृदा]] प्रकार की है, जो पेरियार नदी के प्रवाह और जमाव के कारण अत्यधिक उपजाऊ है। पेरियार केरल की सबसे लंबी नदी है, जो पश्चिमी घाट की शिवगिरि पहाड़ियों से निकलती है। कालडी के पास नदी का मार्ग एक विशिष्ट घुमाव बनाता है, जो भू-आकृतिक रूप से बाढ़ के मैदानों और प्राकृतिक तटबंधों का निर्माण करता है। ८वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य के जन्म के बाद यह स्थान अद्वैत दर्शन का मुख्य केंद्र बना। ऐतिहासिक रूप से, इस क्षेत्र पर 'थेक्के मडम' मठ का प्रशासनिक और राजशाही अधिकार (शंकर संकेथम) था। मध्यकाल में यह स्थान घने जंगलों में तब्दील हो गया था। १९वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में शृंगेरी शारदा पीठम के ३३वें जगद्गुरु श्री सच्चिदानंद शिवाभिनव नृसिंह भारती महास्वामीजी ने अनुसंधान करके आदि शंकराचार्य के वास्तविक जन्मस्थान की खोज की और १९१० में यहाँ पुनः मंदिरों की स्थापना की। यह क्षेत्र सनातन वैदिक परंपरा, दर्शनशास्त्र और संस्कृत विद्वत्ता का एक वैश्विक केंद्र माना जाता है। पेरियार नदी के तट पर बने प्राचीन घाट यहाँ की सांस्कृतिक भूगोल की रीढ़ हैं: कालडी कडावु या आराट्टु कडावु : यह वह ऐतिहासिक स्थान है जहाँ पेरियार नदी ने अपना मार्ग बदला था। आज भी यहाँ भगवान कृष्ण (तिरु कालडी अप्पन) का पवित्र नदी स्नान (आराट्टु) उत्सव संपन्न होता है। [[मगरमच्छ]] [[घाट]]: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इसी घाट पर एक मगरमच्छ ने बालक शंकर का पैर पकड़ लिया था। संन्यास ग्रहण करने की आंतरिक इच्छा और माता द्वारा इसकी अनुमति दिए जाने के तुरंत बाद मगरमच्छ ने उन्हें मुक्त कर दिया था। माता आर्याम्बा का अंतिम संस्कार घाट: यह वह पवित्र स्थान है जहाँ आदि शंकराचार्य ने अपनी माता आर्याम्बा का अंतिम संस्कार (अंतिम क्रियाएँ) किया था, जो उनके द्वारा सन्यासी होने के बावजूद माता को दिए गए वचन का पालन था। मंदिर और मठ - [[शृंगेरी]] शंखराचार्य मठ परिसर : पेरियार के उत्तरी तट पर स्थित इस परिसर में दो मुख्य मंदिर हैं—एक जगद्गुरु आदि शंकराचार्य (दक्षिणामूर्ति रूप) को समर्पित है और दूसरा देवी शारदाम्बा को। श्री आदि शंकराचार्य कीर्ति स्तंभ मंडपम: [[कांची कामकोटि पीठ]] द्वारा निर्मित यह ४५ मीटर (१४८ फीट) ऊँचा ८ मंजिला अष्टकोणीय स्मारक है। इसके गर्भगृह में गुरु की चांदी की पादुकाएँ हैं और दीवारों पर अद्वैत दर्शन व शंकराचार्य के जीवन वृत्त को चित्रों के माध्यम से उकेरा गया है। रामकृष्ण [[अद्वैत आश्रम]] : वर्ष १९३६ में स्थापित यह आश्रम रामकृष्ण मिशन का एक प्रमुख केंद्र है, जहाँ एक विशाल प्रार्थना हॉल और आध्यात्मिक अध्ययन केंद्र स्थित है। श्री कृष्ण स्वामी मंदिर : शृंगेरी मठ के पश्चिम में स्थित यह प्राचीन मंदिर आदि शंकराचार्य के कुलदेवता (तिरु कालडी अप्पन) को समर्पित है। माणिकमंगलम कार्थियायनी मंदिर: कालडी के उत्तर में स्थित यह प्राचीन दुर्गा मंदिर है। मान्यता है कि शंकराचार्य के पिता यहाँ मुख्य पुजारी थे और यहाँ देवी ने बालक शंकर को साक्षात दर्शन देकर दूध पिलाया था। मत्तूर तिरु वेलमन थुल्ली शिव मंदिर: यह एक ऐतिहासिक शिव मंदिर है जो अपनी अनूठी वास्तुकला और तांत्रिक अनुष्ठानों के लिए जाना जाता है। नयथोडु शंकरा नारायण [[मन्दिर]] : भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित यह मन्दिर शैव और वैष्णव एकता का एक अद्भुत प्रतीक है, जहाँ शिव और [[विष्णु]] दोनों एक ही गर्भगृह में पूजे जाते हैं। मंजापरा कार्प्पिल्ली कावु शिव मन्दिर: एक और ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व का शिव मंदिर जो स्थानीय संस्कृति का एक मुख्य केंद्र है। थेक्के मडम: त्रिशूर के शंकराचार्य मठ द्वारा स्थापित यह ऐतिहासिक प्रशासनिक परिसर है, जिसके पास पूर्व में इस क्षेत्र के भू-राजस्व के अधिकार थे। आर्यादेवी समाधि मंडपम: आदि शंकराचार्य की माता आर्याम्बा का समाधि स्थल, जहाँ निरंतर दीपक प्रज्ज्वलित रहता प्रमुख त्यौहार- शंकर जयंती: प्रत्येक वर्ष अप्रैल-मई (मेष मास) में ५ दिनों तक अत्यंत भव्य स्तर पर मनाई जाती है, जिसमें राष्ट्रीय स्तर के विद्वान शास्त्रार्थ और कनकधारा यज्ञ में भाग लेते हैं। [[नवरात्र]]: सितंबर-अक्टूबर में शृंगेरी मठ में संगीत उत्सव और रथोत्सव के साथ ९ दिनों तक धूमधाम से मनाई जाती है। तिरु कालडी अप्पन उत्सव: भगवान कृष्ण मंदिर का वार्षिक उत्सव जो प्रतिवर्ष ६ जनवरी को पेरियार नदी में 'आराट्टु' (पवित्र स्नान) के साथ संपन्न होता है। शैक्षणिक संस्थान -कालडी केरल में उच्च शिक्षा और प्राच्य विद्या का एक बहुत बड़ा संकुल है: [[श्री शङ्कराचार्य संस्कृत सर्वकलाशाला]] : संस्कृत, दर्शनशास्त्र, इंडोलॉजी और कला के क्षेत्र में अनुसंधान का एक अग्रणी वैश्विक विश्वविद्यालय। श्री शंकरा कॉलेज : कला, विज्ञान और वाणिज्य में उच्च शिक्षा प्रदान करने वाला एक प्रतिष्ठित संस्थान। आदि शंकरा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी: तकनीकी और उन्नत इंजीनियरिंग शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र। प्रमुख विद्यालय: श्री कांची शंकरा पब्लिक स्कूल, ब्रह्मानंदोदयम हायर सेकेंडरी स्कूल, श्री शारदा विद्यालय, एस.एन. हायर सेकेंडरी स्कूल (ओक्कल), और एस.एन.डी.पी. हायर सेकेंडरी स्कूल (नीलेश्वरम)। अवसंरचना, गतिशीलता और कनेक्टिविटी - वायु मार्ग : [[कोचीन अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र]] यहाँ से मात्र ७ से ८ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जो इसे वैश्विक कनेक्टिविटी प्रदान करता है। रेल मार्ग: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन अंगमाली है जो लगभग ८ किमी की दूरी पर मुख्य रेल कॉरिडोर पर स्थित है। दूसरा बड़ा स्टेशन [[अलुवा]] १६ किमी दूर है। मेट्रो: [[कोच्चि मेट्रो]] का निकटतम स्टेशन आलुवा मेट्रो स्टेशन है, जहाँ से कैब या बस द्वारा सीधे कालडी पहुँचा जा सकता है। सड़क मार्ग: कालडी मुख्य मध्यवर्ती सड़क पर स्थित है। यह [[राष्ट्रीय राजमार्ग ५४४ (भारत) | (NH-544)]] से भी बेहद नजदीकी से जुड़ा हुआ है। सार्वजनिक परिवहन: केरल राज्य सड़क परिवहन निगम और निजी बसें इसे कोच्चि, [[त्रिस्सूर]] अंगमाली और [[पेरुम्बावूर]] से २४ घंटे जोड़ती हैं। अर्थव्यवस्था, व्यवसाय और कृषि - [[कृषि]]: पेरियार नदी की जलोढ़ मिट्टी के कारण यह क्षेत्र [[धान]], [[रबड़]], [[जायफल]] और [[नारियल]] की खेती के लिए प्रसिद्ध है। रसद और व्यवसाय: हवाई अड्डे और राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट होने के कारण यहाँ आधुनिक लॉजिस्टिक्स हब विकसित हो रहे हैं। कालडी राइस मिल्स केरल में [[चावल]] प्रसंस्करण का सबसे बड़ा औद्योगिक क्लस्टर है। औद्योगिक क्षेत्र: पास ही में स्थित ओक्कल और अंगमाली के औद्योगिक क्षेत्रों में लघु और मध्यम विनिर्माण इकाइयाँ क्रियाशील हैं। चिकित्सा अवसंरचना एवं भविष्य के विकास- चिकित्सा: क्षेत्र में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के लिए मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल, आयुर्वेदिक हीलिंग सेंटर्स और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उपलब्ध हैं। भविष्य के घटनाक्रम: शंकारिया हेरिटेज टूरिज्म सर्किट: [[भारत सरकार]] और केरल पर्यटन विभाग द्वारा इसे 'प्रसाद' योजना के तहत एक अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में और अधिक उन्नत किया जा रहा है। पेरियार नदी संरक्षण योजना: नदी के तटीय भू-भाग को भू-क्षरण से बचाने और [[जल मार्ग]] को पुनर्जीवित करने के लिए वैज्ञानिक परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। <ref>{{cite web |url=http://www.kaladyfilm.com|title=A DVD titled "Kalady - The Triumph of Faith over Time"}}</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[आदि शंकराचार्य]]
* [[श्री शङ्कराचार्य संस्कृत सर्वकलाशाला|श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय]], कालडी
* [[एर्नाकुलम ज़िला]]
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://mallar.wordpress.com/2010/04/25/आदि-शंकराचार्य-जी-की-जन्म/#comment-2840 आदि शंकराचार्य जी की जन्मस्थली – कालड़ी] (पा.ना. सुब्रमणियन के हिन्दी ब्लॉग पर)
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{केरल}}
[[श्रेणी:एर्नाकुलम ज़िला]]
[[श्रेणी:केरल के शहर]]
[[श्रेणी:एर्नाकुलम ज़िले के नगर]]
[[श्रेणी:कोच्चि में मुहल्ले]]
[[श्रेणी:हिन्दू धर्म]]
[[श्रेणी:पवित्र शहर]]
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'''कालडी'''({{lang-ml|കാലടി}})({{langx|en|Kalady}}) [[भारत]] के [[केरल]] (या केरलम) राज्य के [[एर्नाकुलम ज़िले]] में स्थित एक नगर है। यह [[पेरियार नदी]] के पूर्व में स्थित है। यहाँ [[आदि शंकराचार्य]] का जन्म हुआ था इसलिये यह एक प्रसिद्ध तीर्थ भी है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=psw6DwAAQBAJ Lonely Planet South India & Kerala]," Isabella Noble et al, Lonely Planet, 2017, ISBN 9781787012394</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=1Hs0DwAAQBAJ The Rough Guide to South India and Kerala]," Rough Guides UK, 2017, ISBN 9780241332894</ref> कलाड़ी 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में श्रृंगेरी के तत्कालीन शंकराचार्य द्वारा पुन: खोज और 1910 में एक आदि शंकर मंदिर के अभिषेक के बाद कलाड़ी को एक विशेष रूप से प्रमुखता मिली। कलाड़ी की शताब्दी मई 2010 में मनाई गई थी और इसकी इसकी पुन: खोज की कहानी खोज की कहानी को श्रृंगेरी शारदा पेथम की एक फिल्म में सौ साल पहले प्रलेखित किया गया है। मलयालम भाषा में 'कालडी' का अर्थ "पदचिह्न" होता है। प्राचीन काल में इस गाँव का नाम शासलम था। लोककथाओं के अनुसार, बालक शंकर ([[आदि शंकराचार्य]]) की माता आर्याम्बा प्रतिदिन स्नान के लिए [[पेरियार नदी]] तक जाने में अत्यधिक शारीरिक रूप से अक्षम और अशक्त हो जाती थीं। अपनी माता की पीड़ा को देखकर बालक शंकर ने भगवान श्री [[कृष्ण]] से प्रार्थना की। इसके फलस्वरूप, पेरियार नदी ने अपना मार्ग बदल लिया और बालक शंकर के पदचिह्नों का अनुसरण करते हुए उनके घर के समीप से बहने लगी। तभी से इस स्थान का नाम 'कालडी' (पदचिह्न) पड़ा। भाषाविदों के अनुसार, केरल के कई स्थानों के नाम मानव शरीर के अंगों के आधार पर रखे गए हैं (जैसे 'कैवज़ी' हाथ से, 'तलश्शेरी' सिर से)। इसी प्रकार, 'काल' (पैर/सीमा) और 'आदि' (निम्न क्षेत्र) के संयोजन से भी नदी तट के निचले मैदानी इलाकों को यह नाम मिलने का वैज्ञानिक तर्क दिया जाता है। यहाँ की मृदा मुख्य रूप से [[जलोढ़क]] और [[लैटेराइट मृदा]] प्रकार की है, जो पेरियार नदी के प्रवाह और जमाव के कारण अत्यधिक उपजाऊ है। पेरियार केरल की सबसे लंबी नदी है, जो पश्चिमी घाट की शिवगिरि पहाड़ियों से निकलती है। कालडी के पास नदी का मार्ग एक विशिष्ट घुमाव बनाता है, जो भू-आकृतिक रूप से बाढ़ के मैदानों और प्राकृतिक तटबंधों का निर्माण करता है। ८वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य के जन्म के बाद यह स्थान अद्वैत दर्शन का मुख्य केंद्र बना। ऐतिहासिक रूप से, इस क्षेत्र पर 'थेक्के मडम' मठ का प्रशासनिक और राजशाही अधिकार (शंकर संकेथम) था। मध्यकाल में यह स्थान घने जंगलों में तब्दील हो गया था। १९वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में शृंगेरी शारदा पीठम के ३३वें जगद्गुरु श्री सच्चिदानंद शिवाभिनव नृसिंह भारती महास्वामीजी ने अनुसंधान करके आदि शंकराचार्य के वास्तविक जन्मस्थान की खोज की और १९१० में यहाँ पुनः मंदिरों की स्थापना की। यह क्षेत्र सनातन वैदिक परंपरा, दर्शनशास्त्र और संस्कृत विद्वत्ता का एक वैश्विक केंद्र माना जाता है। पेरियार नदी के तट पर बने प्राचीन घाट यहाँ की सांस्कृतिक भूगोल की रीढ़ हैं: कालडी कडावु या आराट्टु कडावु : यह वह ऐतिहासिक स्थान है जहाँ पेरियार नदी ने अपना मार्ग बदला था। आज भी यहाँ भगवान कृष्ण (तिरु कालडी अप्पन) का पवित्र नदी स्नान (आराट्टु) उत्सव संपन्न होता है। [[मगरमच्छ]] [[घाट]]: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इसी घाट पर एक मगरमच्छ ने बालक शंकर का पैर पकड़ लिया था। संन्यास ग्रहण करने की आंतरिक इच्छा और माता द्वारा इसकी अनुमति दिए जाने के तुरंत बाद मगरमच्छ ने उन्हें मुक्त कर दिया था। माता आर्याम्बा का अंतिम संस्कार घाट: यह वह पवित्र स्थान है जहाँ आदि शंकराचार्य ने अपनी माता आर्याम्बा का अंतिम संस्कार (अंतिम क्रियाएँ) किया था, जो उनके द्वारा सन्यासी होने के बावजूद माता को दिए गए वचन का पालन था। मंदिर और मठ - [[शृंगेरी]] शंखराचार्य मठ परिसर : पेरियार के उत्तरी तट पर स्थित इस परिसर में दो मुख्य मंदिर हैं—एक जगद्गुरु आदि शंकराचार्य (दक्षिणामूर्ति रूप) को समर्पित है और दूसरा देवी शारदाम्बा को। श्री आदि शंकराचार्य कीर्ति स्तंभ मंडपम: [[कांची कामकोटि पीठ]] द्वारा निर्मित यह ४५ मीटर (१४८ फीट) ऊँचा ८ मंजिला अष्टकोणीय स्मारक है। इसके गर्भगृह में गुरु की चांदी की पादुकाएँ हैं और दीवारों पर अद्वैत दर्शन व शंकराचार्य के जीवन वृत्त को चित्रों के माध्यम से उकेरा गया है। रामकृष्ण [[अद्वैत आश्रम]] : वर्ष १९३६ में स्थापित यह आश्रम रामकृष्ण मिशन का एक प्रमुख केंद्र है, जहाँ एक विशाल प्रार्थना हॉल और आध्यात्मिक अध्ययन केंद्र स्थित है। श्री कृष्ण स्वामी मंदिर : [[शृंगेरी शारदा पीठम]] के पश्चिम में स्थित यह प्राचीन मंदिर आदि शंकराचार्य के कुलदेवता (तिरु कालडी अप्पन) को समर्पित है। माणिकमंगलम कार्थियायनी मंदिर: कालडी के उत्तर में स्थित यह प्राचीन दुर्गा मंदिर है। मान्यता है कि शंकराचार्य के पिता यहाँ मुख्य पुजारी थे और यहाँ देवी ने बालक शंकर को साक्षात दर्शन देकर दूध पिलाया था। मत्तूर तिरु वेलमन थुल्ली शिव मंदिर: यह एक ऐतिहासिक शिव मंदिर है जो अपनी अनूठी वास्तुकला और तांत्रिक अनुष्ठानों के लिए जाना जाता है। नयथोडु शंकरा नारायण [[मन्दिर]] : भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित यह मन्दिर शैव और वैष्णव एकता का एक अद्भुत प्रतीक है, जहाँ शिव और [[विष्णु]] दोनों एक ही गर्भगृह में पूजे जाते हैं। मंजापरा कार्प्पिल्ली कावु शिव मन्दिर: एक और ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व का शिव मंदिर जो स्थानीय संस्कृति का एक मुख्य केंद्र है। थेक्के मडम: त्रिशूर के शंकराचार्य मठ द्वारा स्थापित यह ऐतिहासिक प्रशासनिक परिसर है, जिसके पास पूर्व में इस क्षेत्र के भू-राजस्व के अधिकार थे। आर्यादेवी समाधि मंडपम: आदि शंकराचार्य की माता आर्याम्बा का समाधि स्थल, जहाँ निरंतर दीपक प्रज्ज्वलित रहता प्रमुख त्यौहार- शंकर [[जयंती]]: प्रत्येक वर्ष अप्रैल-मई (मेष मास) में ५ दिनों तक अत्यंत भव्य स्तर पर मनाई जाती है, जिसमें राष्ट्रीय स्तर के विद्वान शास्त्रार्थ और कनकधारा यज्ञ में भाग लेते हैं। [[नवरात्र]]: सितंबर-अक्टूबर में शृंगेरी मठ में संगीत उत्सव और रथोत्सव के साथ ९ दिनों तक धूमधाम से मनाई जाती है। तिरु कालडी अप्पन उत्सव: भगवान कृष्ण मंदिर का वार्षिक उत्सव जो प्रतिवर्ष ६ जनवरी को पेरियार नदी में 'आराट्टु' (पवित्र स्नान) के साथ संपन्न होता है। शैक्षणिक संस्थान -कालडी केरल में उच्च शिक्षा और प्राच्य विद्या का एक बहुत बड़ा संकुल है: [[श्री शङ्कराचार्य संस्कृत सर्वकलाशाला]] : संस्कृत, दर्शनशास्त्र, इंडोलॉजी और कला के क्षेत्र में अनुसंधान का एक अग्रणी वैश्विक विश्वविद्यालय। श्री शंकरा कॉलेज : कला, विज्ञान और वाणिज्य में उच्च शिक्षा प्रदान करने वाला एक प्रतिष्ठित संस्थान। आदि शंकरा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी: तकनीकी और उन्नत इंजीनियरिंग शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र। प्रमुख विद्यालय: श्री कांची शंकरा पब्लिक स्कूल, ब्रह्मानंदोदयम हायर सेकेंडरी स्कूल, श्री शारदा विद्यालय, एस.एन. हायर सेकेंडरी स्कूल (ओक्कल), और एस.एन.डी.पी. हायर सेकेंडरी स्कूल (नीलेश्वरम)। अवसंरचना, गतिशीलता और कनेक्टिविटी - वायु मार्ग : [[कोचीन अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र]] यहाँ से मात्र ७ से ८ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जो इसे वैश्विक कनेक्टिविटी प्रदान करता है। रेल मार्ग: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन अंगमाली है जो लगभग ८ किमी की दूरी पर मुख्य रेल कॉरिडोर पर स्थित है। दूसरा बड़ा स्टेशन [[अलुवा]] १६ किमी दूर है। मेट्रो: [[कोच्चि मेट्रो]] का निकटतम स्टेशन आलुवा मेट्रो स्टेशन है, जहाँ से कैब या बस द्वारा सीधे कालडी पहुँचा जा सकता है। सड़क मार्ग: कालडी मुख्य मध्यवर्ती सड़क पर स्थित है। यह [[राष्ट्रीय राजमार्ग ५४४ (भारत) | (NH-544)]] से भी बेहद नजदीकी से जुड़ा हुआ है। सार्वजनिक परिवहन: केरल राज्य सड़क परिवहन निगम और निजी बसें इसे कोच्चि, [[त्रिस्सूर]] अंगमाली और [[पेरुम्बावूर]] से २४ घंटे जोड़ती हैं। अर्थव्यवस्था, व्यवसाय और कृषि - [[कृषि]]: पेरियार नदी की जलोढ़ मिट्टी के कारण यह क्षेत्र [[धान]], [[रबड़]], [[जायफल]] और [[नारियल]] की खेती के लिए प्रसिद्ध है। रसद और व्यवसाय: हवाई अड्डे और राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट होने के कारण यहाँ आधुनिक लॉजिस्टिक्स हब विकसित हो रहे हैं। कालडी राइस मिल्स केरल में [[चावल]] प्रसंस्करण का सबसे बड़ा औद्योगिक क्लस्टर है। औद्योगिक क्षेत्र: पास ही में स्थित ओक्कल और अंगमाली के औद्योगिक क्षेत्रों में लघु और मध्यम विनिर्माण इकाइयाँ क्रियाशील हैं। चिकित्सा अवसंरचना एवं भविष्य के विकास- चिकित्सा: क्षेत्र में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के लिए मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल, आयुर्वेदिक हीलिंग सेंटर्स और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उपलब्ध हैं। भविष्य के घटनाक्रम: शंकारिया हेरिटेज टूरिज्म सर्किट: [[भारत सरकार]] और केरल पर्यटन विभाग द्वारा इसे 'प्रसाद' योजना के तहत एक अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में और अधिक उन्नत किया जा रहा है। पेरियार नदी संरक्षण योजना: नदी के तटीय भू-भाग को भू-क्षरण से बचाने और [[जल मार्ग]] को पुनर्जीवित करने के लिए वैज्ञानिक परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। <ref>{{cite web |url=http://www.kaladyfilm.com|title=A DVD titled "Kalady - The Triumph of Faith over Time"}}</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[आदि शंकराचार्य]]
* [[श्री शङ्कराचार्य संस्कृत सर्वकलाशाला|श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय]], कालडी
* [[एर्नाकुलम ज़िला]]
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://mallar.wordpress.com/2010/04/25/आदि-शंकराचार्य-जी-की-जन्म/#comment-2840 आदि शंकराचार्य जी की जन्मस्थली – कालड़ी] (पा.ना. सुब्रमणियन के हिन्दी ब्लॉग पर)
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
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[[श्रेणी:एर्नाकुलम ज़िला]]
[[श्रेणी:केरल के शहर]]
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പ്രൊഫസർ പ്രേം രാജ് പുഷ്പാകരന്, എൻ.ഐ.റ്റി. കാലിക്കറ്റ് ♡ Professor P̂rém ráj P̂üshp̂ákárán, NIT Calicut 🪷🌷🪻🌼🌻🌺🌹🌸🏵️💮
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wikitext
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{{Infobox settlement
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'''कालडी'''({{lang-ml|കാലടി}})({{langx|en|Kalady}}) [[भारत]] के [[केरल]] (या केरलम) राज्य के [[एर्नाकुलम ज़िले]] में स्थित एक नगर है। यह [[पेरियार नदी]] के पूर्व में स्थित है। यहाँ [[आदि शंकराचार्य]] का जन्म हुआ था इसलिये यह एक प्रसिद्ध तीर्थ भी है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=psw6DwAAQBAJ Lonely Planet South India & Kerala]," Isabella Noble et al, Lonely Planet, 2017, ISBN 9781787012394</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=1Hs0DwAAQBAJ The Rough Guide to South India and Kerala]," Rough Guides UK, 2017, ISBN 9780241332894</ref> कलाड़ी 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में श्रृंगेरी के तत्कालीन शंकराचार्य द्वारा पुन: खोज और 1910 में एक आदि शंकर मंदिर के अभिषेक के बाद कलाड़ी को एक विशेष रूप से प्रमुखता मिली। कलाड़ी की शताब्दी मई 2010 में मनाई गई थी और इसकी इसकी पुन: खोज की कहानी खोज की कहानी को श्रृंगेरी शारदा पेथम की एक फिल्म में सौ साल पहले प्रलेखित किया गया है। मलयालम भाषा में 'कालडी' का अर्थ "पदचिह्न" होता है। प्राचीन काल में इस गाँव का नाम शासलम था। लोककथाओं के अनुसार, बालक शंकर ([[आदि शंकराचार्य]]) की माता आर्याम्बा प्रतिदिन स्नान के लिए [[पेरियार नदी]] तक जाने में अत्यधिक शारीरिक रूप से अक्षम और अशक्त हो जाती थीं। अपनी माता की पीड़ा को देखकर बालक शंकर ने भगवान श्री [[कृष्ण]] से प्रार्थना की। इसके फलस्वरूप, पेरियार नदी ने अपना मार्ग बदल लिया और बालक शंकर के पदचिह्नों का अनुसरण करते हुए उनके घर के समीप से बहने लगी। तभी से इस स्थान का नाम 'कालडी' (पदचिह्न) पड़ा। भाषाविदों के अनुसार, केरल के कई स्थानों के नाम मानव शरीर के अंगों के आधार पर रखे गए हैं (जैसे 'कैवज़ी' हाथ से, 'तलश्शेरी' सिर से)। इसी प्रकार, 'काल' (पैर/सीमा) और 'आदि' (निम्न क्षेत्र) के संयोजन से भी नदी तट के निचले मैदानी इलाकों को यह नाम मिलने का वैज्ञानिक तर्क दिया जाता है। यहाँ की मृदा मुख्य रूप से [[जलोढ़क]] और [[लैटेराइट मृदा]] प्रकार की है, जो पेरियार नदी के प्रवाह और जमाव के कारण अत्यधिक उपजाऊ है। पेरियार केरल की सबसे लंबी नदी है, जो पश्चिमी घाट की शिवगिरि पहाड़ियों से निकलती है। कालडी के पास नदी का मार्ग एक विशिष्ट घुमाव बनाता है, जो भू-आकृतिक रूप से बाढ़ के मैदानों और प्राकृतिक तटबंधों का निर्माण करता है। ८वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य के जन्म के बाद यह स्थान अद्वैत दर्शन का मुख्य केंद्र बना। ऐतिहासिक रूप से, इस क्षेत्र पर 'थेक्के मडम' मठ का प्रशासनिक और राजशाही अधिकार (शंकर संकेथम) था। मध्यकाल में यह स्थान घने जंगलों में तब्दील हो गया था। १९वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में शृंगेरी शारदा पीठम के ३३वें जगद्गुरु श्री सच्चिदानंद शिवाभिनव नृसिंह भारती महास्वामीजी ने अनुसंधान करके आदि शंकराचार्य के वास्तविक जन्मस्थान की खोज की और १९१० में यहाँ पुनः मंदिरों की स्थापना की। यह क्षेत्र सनातन वैदिक परंपरा, दर्शनशास्त्र और संस्कृत विद्वत्ता का एक वैश्विक केंद्र माना जाता है। पेरियार नदी के तट पर बने प्राचीन घाट यहाँ की सांस्कृतिक भूगोल की रीढ़ हैं: कालडी कडावु या आराट्टु कडावु : यह वह ऐतिहासिक स्थान है जहाँ पेरियार नदी ने अपना मार्ग बदला था। आज भी यहाँ भगवान कृष्ण (तिरु कालडी अप्पन) का पवित्र नदी स्नान (आराट्टु) उत्सव संपन्न होता है। [[मगरमच्छ]] [[घाट]]: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इसी घाट पर एक मगरमच्छ ने बालक शंकर का पैर पकड़ लिया था। संन्यास ग्रहण करने की आंतरिक इच्छा और माता द्वारा इसकी अनुमति दिए जाने के तुरंत बाद मगरमच्छ ने उन्हें मुक्त कर दिया था। माता आर्याम्बा का अंतिम संस्कार घाट: यह वह पवित्र स्थान है जहाँ आदि शंकराचार्य ने अपनी माता आर्याम्बा का अंतिम संस्कार (अंतिम क्रियाएँ) किया था, जो उनके द्वारा सन्यासी होने के बावजूद माता को दिए गए वचन का पालन था। मंदिर और मठ - [[शृंगेरी]] शंखराचार्य मठ परिसर : पेरियार के उत्तरी तट पर स्थित इस परिसर में दो मुख्य मंदिर हैं—एक जगद्गुरु आदि शंकराचार्य (दक्षिणामूर्ति रूप) को समर्पित है और दूसरा देवी शारदाम्बा को। श्री आदि शंकराचार्य कीर्ति स्तंभ मंडपम: [[कांची कामकोटि पीठ]] द्वारा निर्मित यह ४५ मीटर (१४८ फीट) ऊँचा ८ मंजिला अष्टकोणीय स्मारक है। इसके गर्भगृह में गुरु की चांदी की पादुकाएँ हैं और दीवारों पर अद्वैत दर्शन व शंकराचार्य के जीवन वृत्त को चित्रों के माध्यम से उकेरा गया है। रामकृष्ण [[अद्वैत आश्रम]] : वर्ष १९३६ में स्थापित यह आश्रम रामकृष्ण मिशन का एक प्रमुख केंद्र है, जहाँ एक विशाल प्रार्थना हॉल और आध्यात्मिक अध्ययन केंद्र स्थित है। श्री कृष्ण स्वामी मंदिर : [[शृंगेरी शारदा पीठम]] के पश्चिम में स्थित यह प्राचीन मंदिर आदि शंकराचार्य के कुलदेवता (तिरु कालडी अप्पन) को समर्पित है। माणिकमंगलम कार्थियायनी मंदिर: कालडी के उत्तर में स्थित यह प्राचीन दुर्गा मंदिर है। मान्यता है कि शंकराचार्य के पिता यहाँ मुख्य पुजारी थे और यहाँ देवी ने बालक शंकर को साक्षात दर्शन देकर दूध पिलाया था। मत्तूर तिरु वेलमन थुल्ली शिव मंदिर: यह एक ऐतिहासिक शिव मंदिर है जो अपनी अनूठी वास्तुकला और तांत्रिक अनुष्ठानों के लिए जाना जाता है। नयथोडु शंकरा नारायण [[मन्दिर]] : भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित यह मन्दिर शैव और वैष्णव एकता का एक अद्भुत प्रतीक है, जहाँ शिव और [[विष्णु]] दोनों एक ही गर्भगृह में पूजे जाते हैं। मंजापरा कार्प्पिल्ली कावु शिव मन्दिर: एक और ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व का शिव मंदिर जो स्थानीय संस्कृति का एक मुख्य केंद्र है। थेक्के मडम: त्रिशूर के शंकराचार्य मठ द्वारा स्थापित यह ऐतिहासिक प्रशासनिक परिसर है, जिसके पास पूर्व में इस क्षेत्र के भू-राजस्व के अधिकार थे। आर्यादेवी समाधि मंडपम: आदि शंकराचार्य की माता आर्याम्बा का समाधि स्थल, जहाँ निरंतर दीपक प्रज्ज्वलित रहता प्रमुख त्यौहार- शंकर [[जयंती]]: प्रत्येक वर्ष अप्रैल-मई (मेष मास) में ५ दिनों तक अत्यंत भव्य स्तर पर मनाई जाती है, जिसमें राष्ट्रीय स्तर के विद्वान शास्त्रार्थ और कनकधारा यज्ञ में भाग लेते हैं। [[नवरात्र]]: सितंबर-अक्टूबर में शृंगेरी मठ में संगीत उत्सव और रथोत्सव के साथ ९ दिनों तक धूमधाम से मनाई जाती है। तिरु कालडी अप्पन उत्सव: भगवान कृष्ण मंदिर का वार्षिक उत्सव जो प्रतिवर्ष ६ जनवरी को पेरियार नदी में 'आराट्टु' (पवित्र स्नान) के साथ संपन्न होता है। शैक्षणिक संस्थान -कालडी केरल में उच्च शिक्षा और प्राच्य विद्या का एक बहुत बड़ा संकुल है: [[श्री शङ्कराचार्य संस्कृत सर्वकलाशाला]] : संस्कृत, दर्शनशास्त्र, इंडोलॉजी और कला के क्षेत्र में अनुसंधान का एक अग्रणी वैश्विक विश्वविद्यालय। श्री शंकरा कॉलेज : कला, विज्ञान और वाणिज्य में उच्च शिक्षा प्रदान करने वाला एक प्रतिष्ठित संस्थान। आदि शंकरा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी: तकनीकी और उन्नत इंजीनियरिंग शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र। प्रमुख विद्यालय: श्री कांची शंकरा पब्लिक स्कूल, ब्रह्मानंदोदयम हायर सेकेंडरी स्कूल, श्री शारदा विद्यालय, एस.एन. हायर सेकेंडरी स्कूल (ओक्कल), और एस.एन.डी.पी. हायर सेकेंडरी स्कूल (नीलेश्वरम)। अवसंरचना, गतिशीलता और कनेक्टिविटी - वायु मार्ग : [[कोचीन अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र]] यहाँ से मात्र ७ से ८ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जो इसे वैश्विक कनेक्टिविटी प्रदान करता है। रेल मार्ग: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन अंगमाली है जो लगभग ८ किमी की दूरी पर मुख्य रेल कॉरिडोर पर स्थित है। दूसरा बड़ा स्टेशन [[अलुवा]] १६ किमी दूर है। मेट्रो: [[कोच्चि मेट्रो]] का निकटतम स्टेशन आलुवा मेट्रो स्टेशन है, जहाँ से कैब या बस द्वारा सीधे कालडी पहुँचा जा सकता है। सड़क मार्ग: कालडी मुख्य मध्यवर्ती सड़क पर स्थित है। यह [[राष्ट्रीय राजमार्ग ५४४ (भारत) | (NH-544)]] से भी बेहद नजदीकी से जुड़ा हुआ है। सार्वजनिक परिवहन: केरल राज्य सड़क परिवहन निगम और निजी बसें इसे कोच्चि, [[त्रिस्सूर]] अंगमाली और [[पेरुम्बावूर]] से २४ घंटे जोड़ती हैं। अर्थव्यवस्था, व्यवसाय और कृषि - [[कृषि]]: पेरियार नदी की जलोढ़ मिट्टी के कारण यह क्षेत्र [[धान]], [[रबड़]], [[जायफल]] और [[नारियल]] की खेती के लिए प्रसिद्ध है। रसद और व्यवसाय: हवाई अड्डे और राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट होने के कारण यहाँ आधुनिक लॉजिस्टिक्स हब विकसित हो रहे हैं। कालडी राइस मिल्स केरल में [[चावल]] प्रसंस्करण का सबसे बड़ा औद्योगिक क्लस्टर है। औद्योगिक क्षेत्र: पास ही में स्थित ओक्कल और अंगमाली के औद्योगिक क्षेत्रों में लघु और मध्यम विनिर्माण इकाइयाँ क्रियाशील हैं। चिकित्सा अवसंरचना एवं भविष्य के विकास- चिकित्सा: क्षेत्र में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के लिए मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल, आयुर्वेदिक हीलिंग सेंटर्स और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उपलब्ध हैं। भविष्य के घटनाक्रम: शंकारिया हेरिटेज टूरिज्म सर्किट: [[भारत सरकार]] और केरल पर्यटन विभाग द्वारा इसे 'प्रसाद' योजना के तहत एक अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में और अधिक उन्नत किया जा रहा है। पेरियार नदी संरक्षण योजना: नदी के तटीय भू-भाग को भू-क्षरण से बचाने और [[जल मार्ग]] को पुनर्जीवित करने के लिए वैज्ञानिक परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। <ref>{{cite web |url=http://www.kaladyfilm.com|title=A DVD titled "Kalady - The Triumph of Faith over Time"}}</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[आदि शंकराचार्य]]
* [[श्री शङ्कराचार्य संस्कृत सर्वकलाशाला|श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय]], कालडी
* [[एर्नाकुलम ज़िला]]
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://mallar.wordpress.com/2010/04/25/आदि-शंकराचार्य-जी-की-जन्म/#comment-2840 आदि शंकराचार्य जी की जन्मस्थली – कालड़ी] (पा.ना. सुब्रमणियन के हिन्दी ब्लॉग पर)
== सन्दर्भ ==
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{{केरल}}
[[श्रेणी:एर्नाकुलम ज़िला]]
[[श्रेणी:केरल के शहर]]
[[श्रेणी:एर्नाकुलम ज़िले के नगर]]
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मुक्तिवाहिनी
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[[File:মুক্তিযুদ্ধের প্রতীক.svg|thumb|बांग्लादेश की '''मुक्ति वाहिनी''']]
'''मुक्ति वाहिनी''' ([[बंगाली भाषा|बंगला]] : মুক্তি বাহিনী ''मुक्ति बाहिनी''), उन सभी संगठनों का सामूहिक नाम है जिन्होने सन् १९७१ में [[पाकिस्तान|पाकिस्तानी]] सेना के विरुद्ध संघर्ष करके [[बांग्लादेश]] को पाकिस्तान से स्वतंत्र कराया। मुक्ति बाहिनी एक छापामार संगठन था, जो पाकिस्तानी सेना के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध लड़ रहा था। मुक्ति वाहिनी को भारतीय सेना ने समर्थन दिया था।
बांग्लादेश की आज़ादी की लड़ाई के दौरान मुक्ति वाहिनी का गठन पाकिस्तान सेना के अत्याचार के विरोध में किया गया था। १९६९ में पाकिस्तान के तत्कालीन सैनिक शासक [[अयूब ख़ान (पाकिस्तानी शासक)|जनरल अयूब]] के खिलाफ [[पूर्वी पाकिस्तान]] में असंतोष बढ़ गया था और [[शेख मुजीबुर्रहमान|शेख मुजीबुर रहमान]] के आंदोलन के दौरान १९७० में यह अपने चरम पर था।
== इतिहास ==
14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान बना, लेकिन पश्चिमी और पूर्वी पाकिस्तान में कोई समानता नहीं थी। पूर्वी पाकिस्तान में ज्यादा संसाधन थे, लेकिन पश्चिमी क्षेत्र के नेता राजनीति में हावी रहते थे। और इसी वजह से अंत में 1971 में बांग्लादेश बना।
पाकिस्तान के गठन के समय पश्चिमी क्षेत्र में सिंधी, पठान, बलोच और मुजाहिरों की बड़ी संख्या थी, जबकि पूर्व हिस्से में बंगाली बोलने वालों का बहुमत था। लेकिन पूर्वी हिस्सा हमेशा राजनीतिक रूप से उपेक्षित रहा। इससे पूर्वी पाकिस्तान के लोगों में जबर्दस्त नाराजगी थी। और इसी नाराजगी को भुनाने के लिए बांग्लादेश के नेता [[शेख मुजीब-उर-रहमान]] ने [[बांग्लादेश अवामी लीग|अवामी लीग]] का गठन किया और पाकिस्तान के अंदर ही और स्वायत्तता की मांग की। [[पाकिस्तानी आम चुनाव, १९७०|1970 में हुए आम चुनाव]] में पूर्वी क्षेत्र में शेख की पार्टी ने जबर्दस्त विजय हासिल की। उनके दल ने संसद में बहुमत भी हासिल किया लेकिन बजाए उन्हें प्रधानमंत्री बनाने के उन्हें जेल में डाल दिया गया। और यहीं से पाकिस्तान के विभाजन की नींव रखी गई।
[[चित्र:1971 Instrument of Surrender WaPo.jpg|right|thumb|300px|पाकिस्तान के ले० जनरल ए०ए०के० नियाजी, भारत के ले० जन० [[जगजीत सिंह अरोड़ा]] के समक्ष पाकिस्तान के [[आत्मसमर्पण]] के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करते हुए (१६ दिसम्बर १९७१, ढाका)। उनके पीछे भारतीय सेना के सभी अंगों के अधिकारी भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।]]
1971 के समय पाकिस्तान में जनरल [[याह्या ख़ान|याह्या खान]] राष्ट्रपति थे और उन्होंने पूर्वी हिस्से में फैली नाराजगी को दूर करने के लिए जनरल टिक्का खान को जिम्मेदारी दी। लेकिन उनके द्वारा दबाव से मामले को हल करने के प्रयास से स्थिति पूरी तरह बिगड़ गई। 25 मार्च 1971 को पाकिस्तान के इस हिस्से में जबर्दस्त नरसंहार हुआ। इससे पाकिस्तानी सेना में काम कर रहे पूर्वी क्षेत्र के निवासियों में जबर्दस्त रोष हुआ और उन्होंने अलग मुक्ति वाहिनी बना ली। पाकिस्तानी फौज का निरपराध, हथियार विहीन लोगों पर अत्याचार जारी रहा। भारत ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से लगातार अपील की कि पूर्वी पाकिस्तान की स्थिति सुधारी जाए, लेकिन किसी देश ने ध्यान नहीं दिया और जब वहां के विस्थापित लगातार भारत आते रहे तो अप्रैल 1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री [[इन्दिरा गांधी|इंदिरा गांधी]] ने मुक्ति वाहिनी को समर्थन देकर, बांग्लादेश को आजाद करवाने का निर्णय लिया।
==और देखें==
*[[बांग्लादेश मुक्ति युद्ध]]
* [[ईस्ट बेंगल रेजिमेंट]]
* [[शेख मुजीबुर्रहमान|शेख मुजीबुर रहमान]]
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20101220033543/http://www.bhaskar.com/article/NAT-then-bangladesh-would-not-have-been-reality-1654277.html जब 30 मिनट में पाकिस्तानी फौज ने टेक दिए थे घुटने]
* [https://web.archive.org/web/20120716180216/http://banglapedia.search.com.bd/HT/M_0380.htm '''मुक्तिवाहिनी''' पर बंगलापीडिया में लेख] (अंग्रेजी में)
[[श्रेणी:बांग्लादेश का स्वतंत्रता संग्राम]]
[[श्रेणी:स्वतंत्रता संग्राम संगठन]]
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यमुना नदी
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Anitya Gautam
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[[चित्र:Yamuna.jpg|thumb|right|200px|आगरा में यमुना नदी]]
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[[चित्र:Yamuna (Kesi Ghata).jpg|thumb|right|200px|वृंदावन के पवित्र केशीघाट पर यमुना]]
[[चित्र:Taj Majal y rio Yamuna.JPG|thumb|200px|right|सुबह के धुँधलके में यमुनातट पर ताज]]
'''दुनिया के प्रमुख शहरो की तरह [[नई दिल्ली]] शहर यमुना नदी के किनारे बसा है।''' यमुना [[भारत]] की एक [[नदी]] है। यह [[गंगा नदी]] की सबसे बड़ी सहायक नदी है जो [[यमुनोत्री]] ([उत्तरकाशी] से ३० किमी उत्तर, [[गढ़वाल]] में) नामक जगह से निकलती है और [[इलाहाबाद|प्रयाग]] ([[इलाहाबाद|प्रयागराज]]) में [[गंगा नदी|गंगा]] से मिल जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियों में [[चम्बल नदी|चम्बल]], [[सेंगर]], [[छोटी सिन्धु]], [[बेतवा नदी|बेतवा]] और [[केन नदी|केन]] उल्लेखनीय हैं। यमुना के तटवर्ती नगरों में [[दिल्ली]] और [[आगरा]] के अतिरिक्त [[इटावा]], [[कालपी]], हमीरपुर और प्रयाग मुख्य है। प्रयाग में यमुना एक विशाल नदी के रूप में प्रस्तुत होती है और वहाँ के प्रसिद्ध ऐतिहासिक किले के नीचे गंगा में मिल जाती है।
[[बृज|ब्रज]] की संस्कृति में यमुना का महत्वपूर्ण स्थान है। यमुना एक पवित्र नदी है जो की मथुरा आगरा इटावा औरैया कालपी होते हुए प्रयागराज में गंगा से जय मिलती है यमुना नदी हिंदू धर्म ग्रंथो के अनुसार काफी प्राचीन नदी है जो की गंगा नदी की एक सबसे बड़ी सहायक नदी है जिसका जल विस्तार क्षेत्र काफी ज्यादातर है गंगा के जल विस्तार का यमुना में 40.2 प्रतिशत जल विस्तार है भारत की सबसे बड़ी सहायक नदी है यह पौराणिक कथाओं के अनुसार यमुना सूर्य की बेटी तथा यम की बहन है धर्म ग्रंथो के अनुसार यमुना को कालिंद्री भी कहा जाता है क्योंकि यमुना जो सूर्य की पुत्री है ना उनका बचपन का नाम कालिंद्री था
== उद्गम ==
यह [[यमुनोत्री]] नामक जगह से निकलती है। यह [[गंगा नदी]] की सबसे बड़ी सहायक नदी है। यमुना का उद्गम स्थान [[हिमालय]] के हिमाच्छादित श्रंग बंदरपुच्छ ऊँचाई 6200 मीटर से 7 से 8 मील उत्तर-पश्चिम में स्थित कालिंद पर्वत है, जिसके नाम पर यमुना को कालिंदजा अथवा [[कालिंदी नदी|कालिंदी]] कहा जाता है। अपने उद्गम से आगे कई मील तक विशाल हिमगारों और हिम मंडित कंदराओं में अप्रकट रूप से बहती हुई तथा पहाड़ी ढलानों पर से अत्यन्त तीव्रतापूर्वक उतरती हुई इसकी धारा यमुनोत्तरी पर्वत (20,731 फीट ऊँचाई) से प्रकट होती है। वहाँ इसके दर्शनार्थ हजारों श्रद्धालु यात्री प्रतिवर्ष भारत वर्ष के कोने-कोने से पहुँचते हैं। स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार, [[उत्तराखंड]] के गढ़वाल हिमालय में स्थित यमकुंड शिखर (31°01′48″N, 79°29′22″E) को भी यमुना के पवित्र उद्गम क्षेत्र से संबद्ध माना जाता है। यह पर्वत हिमनदीय जलागम क्षेत्र का भाग है, जहाँ से प्राप्त हिमपिघलन जल यमुना नदी तंत्र में योगदान देता है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह क्षेत्र पारिस्थितिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है<ref>{{cite web |last1=Sharma |first1=Tushar |title=Yamkund Shikhar: The sacred birthplace of the Yamuna |url=https://sundayguardianlive.com/national/yamkund-shikhar-the-sacred-birthplace-of-the-yamuna-238110/ |website=The Sunday Guardian |publisher=The Sunday Guardian |access-date=29 जुलाई 2026 |language=en |date=16 जुलाई 2026}}</ref>
यमुनोत्तरी पर्वत से निकलकर यह नदी अनेक पहाड़ी दरों और घाटियों में प्रवाहित होती हुई तथा वदियर, कमलाद, वदरी अस्लौर जैसी छोटी और तोंस जैसी बड़ी पहाड़ी नदियों को अपने अंचल में समेटती हुई आगे बढ़ती है। उसके बाद यह हिमालय को छोड़ कर [[दून की घाटी]] में प्रवेश करती है। वहाँ से कई मील तक दक्षिण-पश्चिम की और बहती हुई तथा गिरि, सिरमौर और आशा नामक छोटी नदियों को अपनी गोद में लेती हुई यह अपने उद्गम से लगभग ९५ मील दूर वर्तमान [[सहारनपुर जिला]] के [[फैज़ाबाद|फैजाबाद]] ग्राम के समीप मैदान में आती है। उस समय इसके तट तक की ऊँचाई समुद्र सतह से लगभग 1276 फीट रह जाती है।
===ऐतिहासिक स्रोत ===
भुवनभास्कर सूर्य इनके पिता, मृत्यु के देवता इसके [[यमराज]] भाई और भगवान [[कृष्ण|श्री कृष्ण]] इनके पति स्वीकार्य किये गये हैं। जहाँ भगवान [[कृष्ण|श्री कृष्ण]] ब्रज संस्कृति के जनक कहे जाते हैं, वहाँ यमुना इसकी जननी मानी जाती है। इस प्रकार यह सच्चे अर्थों में ब्रजवासियों की माता है। अतः ब्रज में इसे ''यमुना मैया'' कहते हैं। [[ब्रह्म पुराण]] में यमुना के आध्यात्मिक स्वरुप का स्पष्टीकरण करते हुए विवरण प्रस्तुत किया है - "जो सृष्टि का आधार है और जिसे लक्ष्णों से सच्चिदनंद स्वरुप कहा जाता है, [[उपनिषद्|उपनिषदों]] ने जिसका ब्रह्म रूप से गायन किया है, वही परमतत्व साक्षात् यमुना है। [[गौड़ वैष्णव|गौड़िय]] विद्वान [[श्री रूप गोस्वामी]] ने यमुना को साक्षात् चिदानंदमयी बतलाया है। [[गर्ग संहिता]] में यमुना के पचांग
में पाँच नामों का वर्णन है -
#'''पटल'''
#'''पद्धति'''
#'''कवय'''
#'''स्तोत्र'''
#'''सहस्त्र'''
== प्रवाह क्षेत्र ==
पश्चिमी [[हिमालय]] से निकल कर [[उत्तर प्रदेश]] एवं [[हरियाणा]] की सीमा के सहारे 95 मील का सफर कर उत्तरी [[सहारनपुर]] (मैदानी इलाका) पहुँचती है। फिर यह [[दिल्ली]], [[आगरा]] से होती हुई [[इलाहाबाद|प्रयागराज]] में [[गंगा नदी|गंगा]] नदी में मिल जाती है।
यमुना नदी की औसत गहराई 10 फीट (3 मीटर) और अधिकतम गहराई 35 फीट (11 मीटर) तक है। दिल्ली के निकट नदी में, यह अधिकतम गहराई 68 फीट (50 मीटर) है। आगरा में, यह गहराई 3 फुट (1 मीटर) तक हैं।
=== प्राचीन प्रवाह ===
मैदान में जहाँ इस समय यमुना का प्रवाह है, वहाँ वह सदा से प्रवाहित नहीं होती रही है। पौराणिक अनुश्रुतियों और ऐतिहासिक उल्लेखों से यह ज्ञात होता है, यद्यपि यमुना पिछले हजारों वर्षों से विधमान है, तथापि इसका प्रवाह समय-समय पर परिवर्तित होता रहा है। अपने सुदीर्घ जीवन काल में यमुना ने जितने स्थान बदले हैं, उनमें से बहुत कम की ही जानकारी प्राप्त हो सकी है।
प्रागऐतिहासिक काल में यमुना [[मधुबन]] के समीप बहती थी, जहाँ उसके तट पर शत्रुध्न जी ने सर्वप्रथम मथुरा नगरी की स्थापना की थी। [[वाल्मीकि रामायण]] और [[विष्णु पुराण]] में इसका विवरण प्राप्त होता है। 1 कृष्ण काल में यमुना का प्रवाह कटरा केशव देव के निकट था। सत्रहवीं शताबदी में भारत आने वाले यूरोपीय विद्वान टेवर्नियर ने [[कटड़ा|कटरा]] के समीप की भूमि को देख कर यह अनुमान लगा लिया था कि वहाँ किसी समय यमुना की धारा थी। इस संदर्भ में ग्राउज़ का मत है कि ऐतिहासिक काल में कटरा के समीप यमुना के प्रवाहित होने की संभावना कम है, किन्तु अत्यन्त प्राचीन काल में वहाँ यमुना अवश्य थी। 2 इससे भी यह सिद्ध होता है कि कृष्ण काल में यमुना का प्रवाह कटरा के समीप ही था।
कनिधंम का अनुमान है, यूनानी लेखकों के समय में यमुना की प्रधान धारा या उसकी एक बड़ी शाखा कटरा केशव देव की पूर्वी दीवार के नीचे बहती होगी। 3 जब मथुरा में [[बौद्ध धर्म]] का व्यापक प्रचार हो गया और यहाँ यमुना के दोनों ओर अनेक संधारम बनाये गये, तब यमुना की मुख्य धारा कटरा से हटकर प्रायः उसी स्थान पर बहती होगी, जहाँ वह अब है, किन्तु उसकी कोई शाखा अथवा सहायक नहीं कटरा के निकट भी विधमान थी। ऐसा अनुमान है, यमुना की वह शाखा बौद्ध काल के बहुत बाद तक संभवतः सोलहवीं शताब्दी तक केशव देव मन्दिर के नीचे बहती रही थी। पहले दो बरसाती नदियाँ 'सरस्वती' और 'कृष्ण गंगा' मथुरा के पश्चिमी भाग में प्रवाहित होकर यमुना में गिरती थीं, जिनकी स्मृति में यमुना के सरस्वती संगम और कृष्ण गंगा नामक घाट हैं। संभव है यमुना की उन सहायक नादियों में से ही कोई कटरा के पास बहती रही हो।
* पुराणों से ज्ञात होता है, प्राचीन वृन्दावन में यमुना गोवर्धन के निकट प्रवाहित होती थी। जबकि वर्तमान में वह गोवर्धन से लगभग 4 मील दूर हो गई है। गोवर्धन के निकटवर्ती दो छोटे ग्राम 'जमुनावती' और परसौली है। वहाँ किसी काल में यमुना के प्रवाहित होने उल्लेख मिलते हैं।
[[वल्लभ सम्प्रदाय]] के [[वार्ता साहित्य]] से ज्ञात होता है कि [[सारस्वत कल्प]] में यमुना नदी जमुनावती ग्राम के समीप बहती थी। उस काल में यमुना नदी की दो धाराऐं थी, एक धारा नंदगाँव, वरसाना, संकेत के निकट बहती हुई गोवर्धन में जमुनावती पर आती थी और दूसरी धारा पीरघाट से होती हुई गोकुल की ओर चली जाती थी। आगे दानों धाराएँ एक होकर वर्तमान आगरा की ओर बढ़ जाती थी।
परासौली में यमुना को धारा प्रवाहित होने का प्रमाण स. 1717 तक मिलता है। यद्यपि इस पर विश्वास होना कठिन है। श्री गंगाप्रसाद कमठान ने [[बृज भाषा|ब्रजभाषा]] के एक मुसलमान भक्त कवि कारबेग उपमान कारे का वृतांत प्रकाशित किया है। काबेग के कथनानुसार वह जमुना के तटवर्ती परासौली गाँव का निवासी था और उसने अपनी रचना सं 1717 में सृजित की थी।
=== आधुनिक प्रवाह ===
वर्तमान समय में [[सहारनपुर]] जिले के [[फैज़ाबाद|फैजाबाद]] गाँव के निकट मैदान में आने पर यह आगे 65 मील तक बढ़ती हुई [[हरियाणा]] के [[अम्बाला|अंबाला]] और [[करनाल]] जिलों को [[उत्तर प्रदेश]] के [[सहारनपुर]] और [[मुज़फ्फरनगर|शामली]] जिलों से अलग करती है। इस भू-भाग में इसमें मस्कर्रा, कठ, [[हिंडन|हिण्डन]] और सबी नामक नदियाँ मिलती हैं, जिनके कारण इसका आकार बहुत बढ़ जाता है। मैदान में आते ही इससे पूर्वी यमुना नहर और पश्चिमी नहर निकाली जाती हैं। ये दोनों नहरें यमुना से पानी लेकर इस भू-भाग की सैकड़ों मील धरती को हरा-भरा और उपज सम्पन्न बना देती हैं।
इस भू-भाग में यमुना की धारा के दोनों ओर [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] और [[उत्तर प्रदेश]] के कई छोटे बड़े नगरों की सीमाएँ हैं, किन्तु इसके ठीक तट पर बसा हुआ सबसे प्राचीन और पहला नगर दिल्ली है, जो लम्बे समय से भारत की राजधानी है। दिल्ली के लाखों की आबादी की आवश्यकता की पूर्ति करते हुए और वहाँ की ढेरों गंदगी को बहाती हुई यह ओखला नामक स्थान पर पहुँचती है। यहाँ पर इस पर एक बड़ा बांध बांधा गया है जिससे नदी की धारा पूरी तरह नियंत्रित कर ली गयी है। इसी बांध से आगरा नहर निकलती है, जो हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सैकड़ों मील भूमि को सिंचित करती है। दिल्ली से आगे यह हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा बनाती हुई तथा हरियाणा के फरीदाबाद जिले को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से अलग करती हुई उत्तर प्रदेश में प्रवाहित होने लगती है।
=== तटवर्ती स्थान ===
ब्रज प्रदेश की सांस्कृतिक सीमा में यमुना नदी का प्रथम प्रवेश बुलंदशहर जिला की खुर्जा तहसील के 'जेबर' नामक कस्बा के निकट होता है। वहाँ से यह दक्षिण की ओर बहती हुई फरीदाबाद (हरियाणा) जिले की पलवल तहसील और अलीगढ़, उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले की खैर तहसील की सीमा निर्मित करती है। इसके बाद यह छाता तहसील के शाहपुर ग्राम के निकट यह मथुरा जिले में प्रवेश करती है और मथुरा जिले की छाता और भाँट तहसीलों की सीमा निर्धारित करती है। जेबर से शेरगढ़ तक यह दक्षिणाभिमुख प्रवाहित होती है उसके बाद कुछ पूर्व की ओर मुड़ जाती है। ब्रज क्षेत्र में यमुना के तट पर बसा हुआ पहिला उल्लेखनीय स्थान शेरगढ़ है।
शेरगढ़ से कुछ दूर तक पूर्व की दिशा में बह कर फिर यह मथुरा तक दक्षिण दिशा में ही बहती है। मार्ग में इसके दोनों ओर पुराण प्रसिद्ध वन और उपवन तथा कृष्ण लीला स्थान विधमान हैं। यहाँ पर यह भाँट से वृन्दावन तक बलखाती हुई बहती है और वृन्दावन को यह तीन ओर से घेर लेती है। पुराणों से ज्ञात होता है, प्राचीन काल में वृन्दावन में यमुना की कई धाराएँ थीं, जिनके कारण वह लगभग प्रायद्वीप सा बन गया था। उसमें अनेक सुन्दर वनखंड और घास के मैदान थे, जहाँ भगवान श्री कृष्ण अपने साथी गोप बालकों के साथ गायें चराया करते थे।
वर्तमान काल में यमुना की एक ही धारा है और उसी के तट पर [[वृन्दावन]] बसा हुआ है। वहाँ मध्य काल में अनेक धर्माचार्यों और भक्त कवियों ने निवास कर कृष्णोपासना और कृष्ण भक्ति का प्रचार किया था। वृन्दावन में यमुना के किनारों पर बड़े सुन्दर घाट बने हुए हैं और उन पर अनेक मंदिर-देवालय, छतरियां और धर्मशालाएँ है। इनसे यमुना के तट की शोभा अधिक बढ़ जाती है। वृन्दावन से आगे दक्षिण की ओर बहती हुई यह नदी मथुरा नगर में प्रवेश करती है।
[[मथुरा]] यमुना के तट पर बसा हुआ एक ऐसा ऐतिहासिक और धार्मिक स्थान है, जिसकी दीर्घकालीन गौरव गाथा प्रसिद्ध है। यहाँ पर भगवान श्री कृष्ण ने अवतार धारण किया था, जिससे इसके महत्व की वृद्धि हुई है। यहाँ भी यमुना के तट पर बड़े सुन्दर घाट बने हुए हैं। यमुना में नाव से अथवा पुल से देखने पर मथुरा नगर और उसके घाटों का मनोरम द्रष्य दिखाई देता है। मथुरा में यमुना पर दो पक्के पुल बने हैं जिनमें से एक पर रेलगाड़ी चलती है तथा दूसरे पर सड़क परिवहन चलते हैं। मथुरा नगर की दक्षिणी सीमा पर अब गोकुल बैराज भी निर्मित कराया गया है जिसका उद्देश्य ब्रज के भूमिगत जल के स्तर को पुनः वापिस लाना और ब्रज की उपजाऊ भूमि को अधिकाधिक सिंचित करना है। विगत काल में यमुना मथुरा-वृन्दावन में एक विशाल नदी के रूप में प्रवाहित होती थी, किन्तु जबसे इससे नहरें निकाली गयी हैं, तब से इसका जलीय आकार छोटा हो गया है। केवल वर्षा ॠतु में ही यह अपना पूर्ववर्ती रूप धारण करती है। उस समय मीलों तक इसका पानी फैल जाता है।
मथुरा से आगे यमुना के तट पर बायीं ओर गोकुल और महावन जैसे धार्मिक स्थल हैं तथा दायें तट पर पहले औरंगाबाद और उसके बाद फरह जैसे ग्राम हैं। यहाँ तक यमुना के किनारे रेतीले हैं, किन्तु आगे पथरीले और चट्टानी हो जाते हैं, जिससे जल धारा बलखाती हुई मनोरम रूप में प्रवाहित होती है।
सादाबाद तहसील के ग्राम अकोस के पास यमुना मथुरा जिले की सीमा से बाहर निकलती है और फिर कुछ दूर तक मथुरा और आगरा जिलों की सीमा निर्मित करती है। सादाबाद तहसील के मंदौर ग्राम के पास यह आगरा जिले में प्रवेश करती है। वहाँ इसमें करबन और गंभीर नामक नदियां आकर मिलती हैं।
आगरा जिले में प्रवेश करने पर नगला अकोस के पास इसके पानी से निर्मित कीठम झील है, जो सैलानियों के लिये बड़ी आकर्षक है। कीठम से रुनकता तक यमुना के किनारे एक संरक्षित वनखंड का निर्माण किया गया है, जो 'सूरदास वन' कहलाता है। रुनकता के समीप ही यमुना तट पर 'गोघात' का वह प्राचीन धार्मिक स्थल है, जहाँ महात्मा सूरदास ने 12 वर्षों तक निवास किया था और जहाँ उन्होंने महाप्रभु बल्लभाचार्य से दीक्षा ली थी।
यमुना के तटवर्ती स्थानों में दिल्ली के बाद सर्वाधिक बड़ा नगर आगरा ही है। यह एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक, व्यापारिक एंव पर्यटन स्थल है, जो मुगल सम्राटों की राजधानी भी रह चुका है। यह यमुना तट से काफी ऊँचाई पर बसा हुआ है - यमुना दिल्ली के पूर्वी भाग में बहती है, उत्तर से दक्षिण की तरफ़। यहाँ पर भी यमुना पर दो पुल निर्मित हैं। आगरा में यमुना तट पर जो इमारतें है, मुगल बादशाहों द्वारा निर्मित किला और ताज महल पर्यटकों के निमित्त अत्यधिक प्रसिद्ध हैं।
आगरा नगर से आगे यमुना के एक ओर फिरोजाबाद और दूसरी ओर फतेहबाद जिला और तहसील स्थित है। उनके बाद बटेश्वर का सुप्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल आता है, जहाँ ब्रज की सांस्कृतिक सीमा समाप्त होती है। बटेश्वर का प्राचीन नाम 'सौरपुर' है, जो भगवान श्री कृष्ण के पितामह शूर की राजधानी थी। यहाँ पर यमुना ने बल खाते हुए बड़ा मोड़ लिया है, जिससे बटेश्वर एक द्वीप के समान ज्ञात होता है। इस स्थान पर कार्तिक पूर्णमा को यमुना स्नान का एक बड़ा मेला लगता है।
बटेश्वर से आगे इटावा एक नगर के रूप में यमुना तट पर बसा हुआ है। यह भी आगरा और बटेश्वर की भाँति ऊँचाई पर बसा हुआ है। यमुना के तट पर जितने ऊँचे कगार आगरा और इटावा जिलों में हैं, उतने मैदान में अन्यत्र नहीं हैं। इटावा से आगे मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध नदी चम्बल यमुना में आकर मिलती है, जिससे इसका आकार विस्तीर्ण हो जाता है, अपने उद्गम से लेकर चम्बल के संगम तक यमुना नदी, गंगा (गङ्गा) नदी के समानान्तर बहती है। इसके आगे उन दोनों के बीच के अन्तर कम होता जाता है और अन्त में प्रयाग में जाकर वे दोनों संगम बनाकर मिश्रित हो जाती हैं।
[[चम्बल नदी|चम्बल]] के पश्चात यमुना नदी में मिलने वाली नदियों में
सेंगर, छोटी सिन्ध, बतवा और केन उल्लेखनीय हैं। इटावा के पश्चात यमुना के तटवर्ती नगरों में काल्पी, हमीर पुर और प्रयाग मुख्य है। प्रयाग में यमुना एक विशाल नदी के रूप में प्रस्तुत होती है और वहाँ के प्रसिद्ध ऐतिहासिक किले के नीचे [[गंगा |गङ्गा]] में मिल जाती है। प्रयाग में यमुना पर एक विशाल पुल निर्मित किया गया है, जो दो मंजिला है। इसे उत्तर प्रदेश का विशालतम सेतु माना जाता है। यमुना और गंगा के संगम के कारण ही, प्रयाग को तीर्थराज का महत्व प्राप्त हुआ है। यमुना नदी की कुल लम्बाई उद्गम से लेकर प्रयाग संगम तक लगभग 860
मील है।
==सांस्कृतिक महत्त्व ==
भारतवर्ष की सर्वाधिक पवित्र और प्राचीन नदियों में यमुना की गणना गंगा के साथ की जाती है। यमुना और गंगा के दो आब की पुण्यभूमि में ही आर्यों की पुरातन संस्कृति का गौरवशाली रूप बन सका था। ब्रजमंडल की तो यमुना एक मात्र महत्वपूर्ण नदी है। जहाँ तक ब्रज संस्कृति का सम्बंध है, यमुना को केवल नदी कहना ही पर्याप्त नहीं है। वस्तुतः यह ब्रज संस्कृति की सहायक, इसकी दीर्ध कालीन परम्परा की प्रेरक और यहाँ की धार्मिक भावना का प्रमुख आधार रही है।
पौराणिक अनुश्रुतियों के अनुसार यह देम में यमुना जी के एक हजार नामों से उसकी प्रशस्ति का गायन किया गया है। ३ यमुना के परमभक्त इसका दैनिक रूप से प्रतिदिन पाठ करते हैं।
ब्रजभाषा के भक्त कवियों और विशेषतः वल्लभ सम्प्रदायी कवियों ने गिरिराज गोवर्धन की भाँति यमुना के प्रति भी अतिशय श्रद्धा व्यक्त की है। इस सम्प्रदाय का शायद ही कोई कवि हो, जिसने अपनी यमुना के प्रति अपनी काव्य - श्रद्धांजलि अर्पित न की हो। उनका यमुना स्तुति संबंधी साहित्य ब्रजभाषा भक्ति काव्य का एक उल्लेखनीय अंग है।
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Anitya Gautam
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[[चित्र:Yamuna (Kesi Ghata).jpg|thumb|right|200px|वृंदावन के पवित्र केशीघाट पर यमुना]]
[[चित्र:Taj Majal y rio Yamuna.JPG|thumb|200px|right|सुबह के धुँधलके में यमुनातट पर ताज]]
'''दुनिया के प्रमुख शहरो की तरह [[नई दिल्ली]] शहर यमुना नदी के किनारे बसा है।''' यमुना [[भारत]] की एक [[नदी]] है। यह [[गंगा नदी]] की सबसे बड़ी सहायक नदी है जो [[यमुनोत्री]] ([उत्तरकाशी] से ३० किमी उत्तर, [[गढ़वाल]] में) नामक जगह से निकलती है और [[इलाहाबाद|प्रयाग]] ([[इलाहाबाद|प्रयागराज]]) में [[गंगा नदी|गंगा]] से मिल जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियों में [[चम्बल नदी|चम्बल]], [[सेंगर]], [[छोटी सिन्धु]], [[बेतवा नदी|बेतवा]] और [[केन नदी|केन]] उल्लेखनीय हैं। यमुना के तटवर्ती नगरों में [[दिल्ली]] और [[आगरा]] के अतिरिक्त [[इटावा]], [[कालपी]], हमीरपुर और प्रयाग मुख्य है। प्रयाग में यमुना एक विशाल नदी के रूप में प्रस्तुत होती है और वहाँ के प्रसिद्ध ऐतिहासिक किले के नीचे गंगा में मिल जाती है।
[[बृज|ब्रज]] की संस्कृति में यमुना का महत्वपूर्ण स्थान है। यमुना एक पवित्र नदी है जो की मथुरा आगरा इटावा औरैया कालपी होते हुए प्रयागराज में गंगा से जय मिलती है यमुना नदी हिंदू धर्म ग्रंथो के अनुसार काफी प्राचीन नदी है जो की गंगा नदी की एक सबसे बड़ी सहायक नदी है जिसका जल विस्तार क्षेत्र काफी ज्यादातर है गंगा के जल विस्तार का यमुना में 40.2 प्रतिशत [[जल]] विस्तार है भारत की सबसे बड़ी सहायक नदी है यह पौराणिक कथाओं के अनुसार यमुना सूर्य की बेटी तथा यम की बहन है धर्म ग्रंथो के अनुसार यमुना को कालिंद्री भी कहा जाता है क्योंकि यमुना जो सूर्य की पुत्री है ना उनका बचपन का नाम कालिंद्री था
== उद्गम ==
यह [[यमुनोत्री]] नामक जगह से निकलती है। यह [[गंगा नदी]] की सबसे बड़ी सहायक नदी है। यमुना का उद्गम स्थान [[हिमालय]] के हिमाच्छादित श्रंग बंदरपुच्छ ऊँचाई 6200 मीटर से 7 से 8 मील उत्तर-पश्चिम में स्थित कालिंद पर्वत है, जिसके नाम पर यमुना को कालिंदजा अथवा [[कालिंदी नदी|कालिंदी]] कहा जाता है। अपने उद्गम से आगे कई मील तक विशाल हिमगारों और हिम मंडित कंदराओं में अप्रकट रूप से बहती हुई तथा पहाड़ी ढलानों पर से अत्यन्त तीव्रतापूर्वक उतरती हुई इसकी धारा यमुनोत्तरी पर्वत (20,731 फीट ऊँचाई) से प्रकट होती है। वहाँ इसके दर्शनार्थ हजारों श्रद्धालु यात्री प्रतिवर्ष भारत वर्ष के कोने-कोने से पहुँचते हैं। स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार, [[उत्तराखंड]] के गढ़वाल हिमालय में स्थित यमकुंड शिखर (31°01′48″N, 79°29′22″E) को भी यमुना के पवित्र उद्गम क्षेत्र से संबद्ध माना जाता है। यह पर्वत हिमनदीय जलागम क्षेत्र का भाग है, जहाँ से प्राप्त हिमपिघलन जल यमुना नदी तंत्र में योगदान देता है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह क्षेत्र पारिस्थितिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है<ref>{{cite web |last1=Sharma |first1=Tushar |title=Yamkund Shikhar: The sacred birthplace of the Yamuna |url=https://sundayguardianlive.com/national/yamkund-shikhar-the-sacred-birthplace-of-the-yamuna-238110/ |website=The Sunday Guardian |publisher=The Sunday Guardian |access-date=29 जुलाई 2026 |language=en |date=16 जुलाई 2026}}</ref>
यमुनोत्तरी पर्वत से निकलकर यह नदी अनेक पहाड़ी दरों और घाटियों में प्रवाहित होती हुई तथा वदियर, कमलाद, वदरी अस्लौर जैसी छोटी और तोंस जैसी बड़ी पहाड़ी नदियों को अपने अंचल में समेटती हुई आगे बढ़ती है। उसके बाद यह हिमालय को छोड़ कर [[दून की घाटी]] में प्रवेश करती है। वहाँ से कई मील तक दक्षिण-पश्चिम की और बहती हुई तथा गिरि, सिरमौर और आशा नामक छोटी नदियों को अपनी गोद में लेती हुई यह अपने उद्गम से लगभग ९५ मील दूर वर्तमान [[सहारनपुर जिला]] के [[फैज़ाबाद|फैजाबाद]] ग्राम के समीप मैदान में आती है। उस समय इसके तट तक की ऊँचाई समुद्र सतह से लगभग 1276 फीट रह जाती है।
===ऐतिहासिक स्रोत ===
भुवनभास्कर सूर्य इनके पिता, मृत्यु के देवता इसके [[यमराज]] भाई और भगवान [[कृष्ण|श्री कृष्ण]] इनके पति स्वीकार्य किये गये हैं। जहाँ भगवान [[कृष्ण|श्री कृष्ण]] ब्रज संस्कृति के जनक कहे जाते हैं, वहाँ यमुना इसकी जननी मानी जाती है। इस प्रकार यह सच्चे अर्थों में ब्रजवासियों की माता है। अतः ब्रज में इसे ''यमुना मैया'' कहते हैं। [[ब्रह्म पुराण]] में यमुना के आध्यात्मिक स्वरुप का स्पष्टीकरण करते हुए विवरण प्रस्तुत किया है - "जो सृष्टि का आधार है और जिसे लक्ष्णों से सच्चिदनंद स्वरुप कहा जाता है, [[उपनिषद्|उपनिषदों]] ने जिसका ब्रह्म रूप से गायन किया है, वही परमतत्व साक्षात् यमुना है। [[गौड़ वैष्णव|गौड़िय]] विद्वान [[श्री रूप गोस्वामी]] ने यमुना को साक्षात् चिदानंदमयी बतलाया है। [[गर्ग संहिता]] में यमुना के पचांग
में पाँच नामों का वर्णन है -
#'''पटल'''
#'''पद्धति'''
#'''कवय'''
#'''स्तोत्र'''
#'''सहस्त्र'''
== प्रवाह क्षेत्र ==
पश्चिमी [[हिमालय]] से निकल कर [[उत्तर प्रदेश]] एवं [[हरियाणा]] की सीमा के सहारे 95 मील का सफर कर उत्तरी [[सहारनपुर]] (मैदानी इलाका) पहुँचती है। फिर यह [[दिल्ली]], [[आगरा]] से होती हुई [[इलाहाबाद|प्रयागराज]] में [[गंगा नदी|गंगा]] नदी में मिल जाती है।
यमुना नदी की औसत गहराई 10 फीट (3 मीटर) और अधिकतम गहराई 35 फीट (11 मीटर) तक है। दिल्ली के निकट नदी में, यह अधिकतम गहराई 68 फीट (50 मीटर) है। आगरा में, यह गहराई 3 फुट (1 मीटर) तक हैं।
=== प्राचीन प्रवाह ===
मैदान में जहाँ इस समय यमुना का प्रवाह है, वहाँ वह सदा से प्रवाहित नहीं होती रही है। पौराणिक अनुश्रुतियों और ऐतिहासिक उल्लेखों से यह ज्ञात होता है, यद्यपि यमुना पिछले हजारों वर्षों से विधमान है, तथापि इसका प्रवाह समय-समय पर परिवर्तित होता रहा है। अपने सुदीर्घ जीवन काल में यमुना ने जितने स्थान बदले हैं, उनमें से बहुत कम की ही जानकारी प्राप्त हो सकी है।
प्रागऐतिहासिक काल में यमुना [[मधुबन]] के समीप बहती थी, जहाँ उसके तट पर शत्रुध्न जी ने सर्वप्रथम मथुरा नगरी की स्थापना की थी। [[वाल्मीकि रामायण]] और [[विष्णु पुराण]] में इसका विवरण प्राप्त होता है। 1 कृष्ण काल में यमुना का प्रवाह कटरा केशव देव के निकट था। सत्रहवीं शताबदी में भारत आने वाले यूरोपीय विद्वान टेवर्नियर ने [[कटड़ा|कटरा]] के समीप की भूमि को देख कर यह अनुमान लगा लिया था कि वहाँ किसी समय यमुना की धारा थी। इस संदर्भ में ग्राउज़ का मत है कि ऐतिहासिक काल में कटरा के समीप यमुना के प्रवाहित होने की संभावना कम है, किन्तु अत्यन्त प्राचीन काल में वहाँ यमुना अवश्य थी। 2 इससे भी यह सिद्ध होता है कि कृष्ण काल में यमुना का प्रवाह कटरा के समीप ही था।
कनिधंम का अनुमान है, यूनानी लेखकों के समय में यमुना की प्रधान धारा या उसकी एक बड़ी शाखा कटरा केशव देव की पूर्वी दीवार के नीचे बहती होगी। 3 जब मथुरा में [[बौद्ध धर्म]] का व्यापक प्रचार हो गया और यहाँ यमुना के दोनों ओर अनेक संधारम बनाये गये, तब यमुना की मुख्य धारा कटरा से हटकर प्रायः उसी स्थान पर बहती होगी, जहाँ वह अब है, किन्तु उसकी कोई शाखा अथवा सहायक नहीं कटरा के निकट भी विधमान थी। ऐसा अनुमान है, यमुना की वह शाखा बौद्ध काल के बहुत बाद तक संभवतः सोलहवीं शताब्दी तक केशव देव मन्दिर के नीचे बहती रही थी। पहले दो बरसाती नदियाँ 'सरस्वती' और 'कृष्ण गंगा' मथुरा के पश्चिमी भाग में प्रवाहित होकर यमुना में गिरती थीं, जिनकी स्मृति में यमुना के सरस्वती संगम और कृष्ण गंगा नामक घाट हैं। संभव है यमुना की उन सहायक नादियों में से ही कोई कटरा के पास बहती रही हो।
* पुराणों से ज्ञात होता है, प्राचीन वृन्दावन में यमुना गोवर्धन के निकट प्रवाहित होती थी। जबकि वर्तमान में वह गोवर्धन से लगभग 4 मील दूर हो गई है। गोवर्धन के निकटवर्ती दो छोटे ग्राम 'जमुनावती' और परसौली है। वहाँ किसी काल में यमुना के प्रवाहित होने उल्लेख मिलते हैं।
[[वल्लभ सम्प्रदाय]] के [[वार्ता साहित्य]] से ज्ञात होता है कि [[सारस्वत कल्प]] में यमुना नदी जमुनावती ग्राम के समीप बहती थी। उस काल में यमुना नदी की दो धाराऐं थी, एक धारा नंदगाँव, वरसाना, संकेत के निकट बहती हुई गोवर्धन में जमुनावती पर आती थी और दूसरी धारा पीरघाट से होती हुई गोकुल की ओर चली जाती थी। आगे दानों धाराएँ एक होकर वर्तमान आगरा की ओर बढ़ जाती थी।
परासौली में यमुना को धारा प्रवाहित होने का प्रमाण स. 1717 तक मिलता है। यद्यपि इस पर विश्वास होना कठिन है। श्री गंगाप्रसाद कमठान ने [[बृज भाषा|ब्रजभाषा]] के एक मुसलमान भक्त कवि कारबेग उपमान कारे का वृतांत प्रकाशित किया है। काबेग के कथनानुसार वह जमुना के तटवर्ती परासौली गाँव का निवासी था और उसने अपनी रचना सं 1717 में सृजित की थी।
=== आधुनिक प्रवाह ===
वर्तमान समय में [[सहारनपुर]] जिले के [[फैज़ाबाद|फैजाबाद]] गाँव के निकट मैदान में आने पर यह आगे 65 मील तक बढ़ती हुई [[हरियाणा]] के [[अम्बाला|अंबाला]] और [[करनाल]] जिलों को [[उत्तर प्रदेश]] के [[सहारनपुर]] और [[मुज़फ्फरनगर|शामली]] जिलों से अलग करती है। इस भू-भाग में इसमें मस्कर्रा, कठ, [[हिंडन|हिण्डन]] और सबी नामक नदियाँ मिलती हैं, जिनके कारण इसका आकार बहुत बढ़ जाता है। मैदान में आते ही इससे पूर्वी यमुना नहर और पश्चिमी नहर निकाली जाती हैं। ये दोनों नहरें यमुना से पानी लेकर इस भू-भाग की सैकड़ों मील धरती को हरा-भरा और उपज सम्पन्न बना देती हैं।
इस भू-भाग में यमुना की धारा के दोनों ओर [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] और [[उत्तर प्रदेश]] के कई छोटे बड़े नगरों की सीमाएँ हैं, किन्तु इसके ठीक तट पर बसा हुआ सबसे प्राचीन और पहला नगर दिल्ली है, जो लम्बे समय से भारत की राजधानी है। दिल्ली के लाखों की आबादी की आवश्यकता की पूर्ति करते हुए और वहाँ की ढेरों गंदगी को बहाती हुई यह ओखला नामक स्थान पर पहुँचती है। यहाँ पर इस पर एक बड़ा बांध बांधा गया है जिससे नदी की धारा पूरी तरह नियंत्रित कर ली गयी है। इसी बांध से आगरा नहर निकलती है, जो हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सैकड़ों मील भूमि को सिंचित करती है। दिल्ली से आगे यह हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा बनाती हुई तथा हरियाणा के फरीदाबाद जिले को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से अलग करती हुई उत्तर प्रदेश में प्रवाहित होने लगती है।
=== तटवर्ती स्थान ===
ब्रज प्रदेश की सांस्कृतिक सीमा में यमुना नदी का प्रथम प्रवेश बुलंदशहर जिला की खुर्जा तहसील के 'जेबर' नामक कस्बा के निकट होता है। वहाँ से यह दक्षिण की ओर बहती हुई फरीदाबाद (हरियाणा) जिले की पलवल तहसील और अलीगढ़, उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले की खैर तहसील की सीमा निर्मित करती है। इसके बाद यह छाता तहसील के शाहपुर ग्राम के निकट यह मथुरा जिले में प्रवेश करती है और मथुरा जिले की छाता और भाँट तहसीलों की सीमा निर्धारित करती है। जेबर से शेरगढ़ तक यह दक्षिणाभिमुख प्रवाहित होती है उसके बाद कुछ पूर्व की ओर मुड़ जाती है। ब्रज क्षेत्र में यमुना के तट पर बसा हुआ पहिला उल्लेखनीय स्थान शेरगढ़ है।
शेरगढ़ से कुछ दूर तक पूर्व की दिशा में बह कर फिर यह मथुरा तक दक्षिण दिशा में ही बहती है। मार्ग में इसके दोनों ओर पुराण प्रसिद्ध वन और उपवन तथा कृष्ण लीला स्थान विधमान हैं। यहाँ पर यह भाँट से वृन्दावन तक बलखाती हुई बहती है और वृन्दावन को यह तीन ओर से घेर लेती है। पुराणों से ज्ञात होता है, प्राचीन काल में वृन्दावन में यमुना की कई धाराएँ थीं, जिनके कारण वह लगभग प्रायद्वीप सा बन गया था। उसमें अनेक सुन्दर वनखंड और घास के मैदान थे, जहाँ भगवान श्री कृष्ण अपने साथी गोप बालकों के साथ गायें चराया करते थे।
वर्तमान काल में यमुना की एक ही धारा है और उसी के तट पर [[वृन्दावन]] बसा हुआ है। वहाँ मध्य काल में अनेक धर्माचार्यों और भक्त कवियों ने निवास कर कृष्णोपासना और कृष्ण भक्ति का प्रचार किया था। वृन्दावन में यमुना के किनारों पर बड़े सुन्दर घाट बने हुए हैं और उन पर अनेक मंदिर-देवालय, छतरियां और धर्मशालाएँ है। इनसे यमुना के तट की शोभा अधिक बढ़ जाती है। वृन्दावन से आगे दक्षिण की ओर बहती हुई यह नदी मथुरा नगर में प्रवेश करती है।
[[मथुरा]] यमुना के तट पर बसा हुआ एक ऐसा ऐतिहासिक और धार्मिक स्थान है, जिसकी दीर्घकालीन गौरव गाथा प्रसिद्ध है। यहाँ पर भगवान श्री कृष्ण ने अवतार धारण किया था, जिससे इसके महत्व की वृद्धि हुई है। यहाँ भी यमुना के तट पर बड़े सुन्दर घाट बने हुए हैं। यमुना में नाव से अथवा पुल से देखने पर मथुरा नगर और उसके घाटों का मनोरम द्रष्य दिखाई देता है। मथुरा में यमुना पर दो पक्के पुल बने हैं जिनमें से एक पर रेलगाड़ी चलती है तथा दूसरे पर सड़क परिवहन चलते हैं। मथुरा नगर की दक्षिणी सीमा पर अब गोकुल बैराज भी निर्मित कराया गया है जिसका उद्देश्य ब्रज के भूमिगत जल के स्तर को पुनः वापिस लाना और ब्रज की उपजाऊ भूमि को अधिकाधिक सिंचित करना है। विगत काल में यमुना मथुरा-वृन्दावन में एक विशाल नदी के रूप में प्रवाहित होती थी, किन्तु जबसे इससे नहरें निकाली गयी हैं, तब से इसका जलीय आकार छोटा हो गया है। केवल वर्षा ॠतु में ही यह अपना पूर्ववर्ती रूप धारण करती है। उस समय मीलों तक इसका पानी फैल जाता है।
मथुरा से आगे यमुना के तट पर बायीं ओर गोकुल और महावन जैसे धार्मिक स्थल हैं तथा दायें तट पर पहले औरंगाबाद और उसके बाद फरह जैसे ग्राम हैं। यहाँ तक यमुना के किनारे रेतीले हैं, किन्तु आगे पथरीले और चट्टानी हो जाते हैं, जिससे जल धारा बलखाती हुई मनोरम रूप में प्रवाहित होती है।
सादाबाद तहसील के ग्राम अकोस के पास यमुना मथुरा जिले की सीमा से बाहर निकलती है और फिर कुछ दूर तक मथुरा और आगरा जिलों की सीमा निर्मित करती है। सादाबाद तहसील के मंदौर ग्राम के पास यह आगरा जिले में प्रवेश करती है। वहाँ इसमें करबन और गंभीर नामक नदियां आकर मिलती हैं।
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यमुना के तटवर्ती स्थानों में दिल्ली के बाद सर्वाधिक बड़ा नगर आगरा ही है। यह एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक, व्यापारिक एंव पर्यटन स्थल है, जो मुगल सम्राटों की राजधानी भी रह चुका है। यह यमुना तट से काफी ऊँचाई पर बसा हुआ है - यमुना दिल्ली के पूर्वी भाग में बहती है, उत्तर से दक्षिण की तरफ़। यहाँ पर भी यमुना पर दो पुल निर्मित हैं। आगरा में यमुना तट पर जो इमारतें है, मुगल बादशाहों द्वारा निर्मित किला और ताज महल पर्यटकों के निमित्त अत्यधिक प्रसिद्ध हैं।
आगरा नगर से आगे यमुना के एक ओर फिरोजाबाद और दूसरी ओर फतेहबाद जिला और तहसील स्थित है। उनके बाद बटेश्वर का सुप्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल आता है, जहाँ ब्रज की सांस्कृतिक सीमा समाप्त होती है। बटेश्वर का प्राचीन नाम 'सौरपुर' है, जो भगवान श्री कृष्ण के पितामह शूर की राजधानी थी। यहाँ पर यमुना ने बल खाते हुए बड़ा मोड़ लिया है, जिससे बटेश्वर एक द्वीप के समान ज्ञात होता है। इस स्थान पर कार्तिक पूर्णमा को यमुना स्नान का एक बड़ा मेला लगता है।
बटेश्वर से आगे इटावा एक नगर के रूप में यमुना तट पर बसा हुआ है। यह भी आगरा और बटेश्वर की भाँति ऊँचाई पर बसा हुआ है। यमुना के तट पर जितने ऊँचे कगार आगरा और इटावा जिलों में हैं, उतने मैदान में अन्यत्र नहीं हैं। इटावा से आगे मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध नदी चम्बल यमुना में आकर मिलती है, जिससे इसका आकार विस्तीर्ण हो जाता है, अपने उद्गम से लेकर चम्बल के संगम तक यमुना नदी, गंगा (गङ्गा) नदी के समानान्तर बहती है। इसके आगे उन दोनों के बीच के अन्तर कम होता जाता है और अन्त में प्रयाग में जाकर वे दोनों संगम बनाकर मिश्रित हो जाती हैं।
[[चम्बल नदी|चम्बल]] के पश्चात यमुना नदी में मिलने वाली नदियों में
सेंगर, छोटी सिन्ध, बतवा और केन उल्लेखनीय हैं। इटावा के पश्चात यमुना के तटवर्ती नगरों में काल्पी, हमीर पुर और प्रयाग मुख्य है। प्रयाग में यमुना एक विशाल नदी के रूप में प्रस्तुत होती है और वहाँ के प्रसिद्ध ऐतिहासिक किले के नीचे [[गंगा |गङ्गा]] में मिल जाती है। प्रयाग में यमुना पर एक विशाल पुल निर्मित किया गया है, जो दो मंजिला है। इसे उत्तर प्रदेश का विशालतम सेतु माना जाता है। यमुना और गंगा के संगम के कारण ही, प्रयाग को तीर्थराज का महत्व प्राप्त हुआ है। यमुना नदी की कुल लम्बाई उद्गम से लेकर प्रयाग संगम तक लगभग 860
मील है।
==सांस्कृतिक महत्त्व ==
भारतवर्ष की सर्वाधिक पवित्र और प्राचीन नदियों में यमुना की गणना गंगा के साथ की जाती है। यमुना और गंगा के दो आब की पुण्यभूमि में ही आर्यों की पुरातन संस्कृति का गौरवशाली रूप बन सका था। ब्रजमंडल की तो यमुना एक मात्र महत्वपूर्ण नदी है। जहाँ तक ब्रज संस्कृति का सम्बंध है, यमुना को केवल नदी कहना ही पर्याप्त नहीं है। वस्तुतः यह ब्रज संस्कृति की सहायक, इसकी दीर्ध कालीन परम्परा की प्रेरक और यहाँ की धार्मिक भावना का प्रमुख आधार रही है।
पौराणिक अनुश्रुतियों के अनुसार यह देम में यमुना जी के एक हजार नामों से उसकी प्रशस्ति का गायन किया गया है। ३ यमुना के परमभक्त इसका दैनिक रूप से प्रतिदिन पाठ करते हैं।
ब्रजभाषा के भक्त कवियों और विशेषतः वल्लभ सम्प्रदायी कवियों ने गिरिराज गोवर्धन की भाँति यमुना के प्रति भी अतिशय श्रद्धा व्यक्त की है। इस सम्प्रदाय का शायद ही कोई कवि हो, जिसने अपनी यमुना के प्रति अपनी काव्य - श्रद्धांजलि अर्पित न की हो। उनका यमुना स्तुति संबंधी साहित्य ब्रजभाषा भक्ति काव्य का एक उल्लेखनीय अंग है।
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[[चित्र:Yamuna (Kesi Ghata).jpg|thumb|right|200px|वृंदावन के पवित्र केशीघाट पर यमुना]]
[[चित्र:Taj Majal y rio Yamuna.JPG|thumb|200px|right|सुबह के धुँधलके में यमुनातट पर ताज]]
'''दुनिया के प्रमुख शहरो की तरह [[नई दिल्ली]] शहर यमुना नदी के किनारे बसा है।''' यमुना [[भारत]] की एक [[नदी]] है। यह [[गंगा नदी]] की सबसे बड़ी सहायक नदी है जो [[यमुनोत्री]] ([उत्तरकाशी] से ३० किमी उत्तर, [[गढ़वाल]] में) नामक जगह से निकलती है और [[इलाहाबाद|प्रयाग]] ([[इलाहाबाद|प्रयागराज]]) में [[गंगा नदी|गंगा]] से मिल जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियों में [[चम्बल नदी|चम्बल]], [[सेंगर]], [[छोटी सिन्धु]], [[बेतवा नदी|बेतवा]] और [[केन नदी|केन]] उल्लेखनीय हैं। यमुना के तटवर्ती नगरों में [[दिल्ली]] और [[आगरा]] के अतिरिक्त [[इटावा]], [[कालपी]], हमीरपुर और प्रयाग मुख्य है। प्रयाग में यमुना एक विशाल नदी के रूप में प्रस्तुत होती है और वहाँ के प्रसिद्ध ऐतिहासिक किले के नीचे गंगा में मिल जाती है।
[[बृज|ब्रज]] की संस्कृति में यमुना का महत्वपूर्ण स्थान है। यमुना एक पवित्र नदी है जो की मथुरा आगरा इटावा औरैया कालपी होते हुए प्रयागराज में गंगा से जय मिलती है यमुना नदी हिंदू धर्म ग्रंथो के अनुसार काफी प्राचीन नदी है जो की गंगा नदी की एक सबसे बड़ी सहायक नदी है जिसका जल विस्तार क्षेत्र काफी ज्यादातर है गंगा के जल विस्तार का यमुना में 40.2 प्रतिशत [[जल]] विस्तार है भारत की सबसे बड़ी सहायक नदी है यह पौराणिक कथाओं के अनुसार यमुना सूर्य की बेटी तथा यम की बहन है धर्म ग्रंथो के अनुसार यमुना को कालिंद्री भी कहा जाता है क्योंकि यमुना जो सूर्य की पुत्री है ना उनका बचपन का नाम कालिंद्री था
== उद्गम ==
यह [[यमुनोत्री]] नामक जगह से निकलती है। यह [[गंगा नदी]] की सबसे बड़ी सहायक नदी है। यमुना का उद्गम स्थान [[हिमालय]] के हिमाच्छादित श्रंग बंदरपुच्छ ऊँचाई 6200 मीटर से 7 से 8 मील उत्तर-पश्चिम में स्थित कालिंद पर्वत है, जिसके नाम पर यमुना को कालिंदजा अथवा [[कालिंदी नदी|कालिंदी]] कहा जाता है। अपने उद्गम से आगे कई मील तक विशाल हिमगारों और हिम मंडित कंदराओं में अप्रकट रूप से बहती हुई तथा पहाड़ी ढलानों पर से अत्यन्त तीव्रतापूर्वक उतरती हुई इसकी धारा यमुनोत्तरी [[पर्वत]] (20,731 फीट ऊँचाई) से प्रकट होती है। वहाँ इसके दर्शनार्थ हजारों श्रद्धालु यात्री प्रतिवर्ष भारत वर्ष के कोने-कोने से पहुँचते हैं। स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार, [[उत्तराखंड]] के गढ़वाल हिमालय में स्थित यमकुंड शिखर (31°01′48″N, 79°29′22″E) को भी यमुना के पवित्र उद्गम क्षेत्र से संबद्ध माना जाता है। यह पर्वत हिमनदीय जलागम क्षेत्र का भाग है, जहाँ से प्राप्त हिमपिघलन जल यमुना नदी तंत्र में योगदान देता है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह क्षेत्र पारिस्थितिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है<ref>{{cite web |last1=Sharma |first1=Tushar |title=Yamkund Shikhar: The sacred birthplace of the Yamuna |url=https://sundayguardianlive.com/national/yamkund-shikhar-the-sacred-birthplace-of-the-yamuna-238110/ |website=The Sunday Guardian |publisher=The Sunday Guardian |access-date=29 जुलाई 2026 |language=en |date=16 जुलाई 2026}}</ref>
यमुनोत्तरी पर्वत से निकलकर यह नदी अनेक पहाड़ी दरों और घाटियों में प्रवाहित होती हुई तथा वदियर, कमलाद, वदरी अस्लौर जैसी छोटी और तोंस जैसी बड़ी पहाड़ी नदियों को अपने अंचल में समेटती हुई आगे बढ़ती है। उसके बाद यह हिमालय को छोड़ कर [[दून की घाटी]] में प्रवेश करती है। वहाँ से कई मील तक दक्षिण-पश्चिम की और बहती हुई तथा गिरि, सिरमौर और आशा नामक छोटी नदियों को अपनी गोद में लेती हुई यह अपने उद्गम से लगभग ९५ मील दूर वर्तमान [[सहारनपुर जिला]] के [[फैज़ाबाद|फैजाबाद]] ग्राम के समीप मैदान में आती है। उस समय इसके तट तक की ऊँचाई समुद्र सतह से लगभग 1276 फीट रह जाती है।
===ऐतिहासिक स्रोत ===
भुवनभास्कर सूर्य इनके पिता, मृत्यु के देवता इसके [[यमराज]] भाई और भगवान [[कृष्ण|श्री कृष्ण]] इनके पति स्वीकार्य किये गये हैं। जहाँ भगवान [[कृष्ण|श्री कृष्ण]] ब्रज संस्कृति के जनक कहे जाते हैं, वहाँ यमुना इसकी जननी मानी जाती है। इस प्रकार यह सच्चे अर्थों में ब्रजवासियों की माता है। अतः ब्रज में इसे ''यमुना मैया'' कहते हैं। [[ब्रह्म पुराण]] में यमुना के आध्यात्मिक स्वरुप का स्पष्टीकरण करते हुए विवरण प्रस्तुत किया है - "जो सृष्टि का आधार है और जिसे लक्ष्णों से सच्चिदनंद स्वरुप कहा जाता है, [[उपनिषद्|उपनिषदों]] ने जिसका ब्रह्म रूप से गायन किया है, वही परमतत्व साक्षात् यमुना है। [[गौड़ वैष्णव|गौड़िय]] विद्वान [[श्री रूप गोस्वामी]] ने यमुना को साक्षात् चिदानंदमयी बतलाया है। [[गर्ग संहिता]] में यमुना के पचांग
में पाँच नामों का वर्णन है -
#'''पटल'''
#'''पद्धति'''
#'''कवय'''
#'''स्तोत्र'''
#'''सहस्त्र'''
== प्रवाह क्षेत्र ==
पश्चिमी [[हिमालय]] से निकल कर [[उत्तर प्रदेश]] एवं [[हरियाणा]] की सीमा के सहारे 95 मील का सफर कर उत्तरी [[सहारनपुर]] (मैदानी इलाका) पहुँचती है। फिर यह [[दिल्ली]], [[आगरा]] से होती हुई [[इलाहाबाद|प्रयागराज]] में [[गंगा नदी|गंगा]] नदी में मिल जाती है।
यमुना नदी की औसत गहराई 10 फीट (3 मीटर) और अधिकतम गहराई 35 फीट (11 मीटर) तक है। दिल्ली के निकट नदी में, यह अधिकतम गहराई 68 फीट (50 मीटर) है। आगरा में, यह गहराई 3 फुट (1 मीटर) तक हैं।
=== प्राचीन प्रवाह ===
मैदान में जहाँ इस समय यमुना का प्रवाह है, वहाँ वह सदा से प्रवाहित नहीं होती रही है। पौराणिक अनुश्रुतियों और ऐतिहासिक उल्लेखों से यह ज्ञात होता है, यद्यपि यमुना पिछले हजारों वर्षों से विधमान है, तथापि इसका प्रवाह समय-समय पर परिवर्तित होता रहा है। अपने सुदीर्घ जीवन काल में यमुना ने जितने स्थान बदले हैं, उनमें से बहुत कम की ही जानकारी प्राप्त हो सकी है।
प्रागऐतिहासिक काल में यमुना [[मधुबन]] के समीप बहती थी, जहाँ उसके तट पर शत्रुध्न जी ने सर्वप्रथम मथुरा नगरी की स्थापना की थी। [[वाल्मीकि रामायण]] और [[विष्णु पुराण]] में इसका विवरण प्राप्त होता है। 1 कृष्ण काल में यमुना का प्रवाह कटरा केशव देव के निकट था। सत्रहवीं शताबदी में भारत आने वाले यूरोपीय विद्वान टेवर्नियर ने [[कटड़ा|कटरा]] के समीप की भूमि को देख कर यह अनुमान लगा लिया था कि वहाँ किसी समय यमुना की धारा थी। इस संदर्भ में ग्राउज़ का मत है कि ऐतिहासिक काल में कटरा के समीप यमुना के प्रवाहित होने की संभावना कम है, किन्तु अत्यन्त प्राचीन काल में वहाँ यमुना अवश्य थी। 2 इससे भी यह सिद्ध होता है कि कृष्ण काल में यमुना का प्रवाह कटरा के समीप ही था।
कनिधंम का अनुमान है, यूनानी लेखकों के समय में यमुना की प्रधान धारा या उसकी एक बड़ी शाखा कटरा केशव देव की पूर्वी दीवार के नीचे बहती होगी। 3 जब मथुरा में [[बौद्ध धर्म]] का व्यापक प्रचार हो गया और यहाँ यमुना के दोनों ओर अनेक संधारम बनाये गये, तब यमुना की मुख्य धारा कटरा से हटकर प्रायः उसी स्थान पर बहती होगी, जहाँ वह अब है, किन्तु उसकी कोई शाखा अथवा सहायक नहीं कटरा के निकट भी विधमान थी। ऐसा अनुमान है, यमुना की वह शाखा बौद्ध काल के बहुत बाद तक संभवतः सोलहवीं शताब्दी तक केशव देव मन्दिर के नीचे बहती रही थी। पहले दो बरसाती नदियाँ 'सरस्वती' और 'कृष्ण गंगा' मथुरा के पश्चिमी भाग में प्रवाहित होकर यमुना में गिरती थीं, जिनकी स्मृति में यमुना के सरस्वती संगम और कृष्ण गंगा नामक घाट हैं। संभव है यमुना की उन सहायक नादियों में से ही कोई कटरा के पास बहती रही हो।
* पुराणों से ज्ञात होता है, प्राचीन वृन्दावन में यमुना गोवर्धन के निकट प्रवाहित होती थी। जबकि वर्तमान में वह गोवर्धन से लगभग 4 मील दूर हो गई है। गोवर्धन के निकटवर्ती दो छोटे ग्राम 'जमुनावती' और परसौली है। वहाँ किसी काल में यमुना के प्रवाहित होने उल्लेख मिलते हैं।
[[वल्लभ सम्प्रदाय]] के [[वार्ता साहित्य]] से ज्ञात होता है कि [[सारस्वत कल्प]] में यमुना नदी जमुनावती ग्राम के समीप बहती थी। उस काल में यमुना नदी की दो धाराऐं थी, एक धारा नंदगाँव, वरसाना, संकेत के निकट बहती हुई गोवर्धन में जमुनावती पर आती थी और दूसरी धारा पीरघाट से होती हुई गोकुल की ओर चली जाती थी। आगे दानों धाराएँ एक होकर वर्तमान आगरा की ओर बढ़ जाती थी।
परासौली में यमुना को धारा प्रवाहित होने का प्रमाण स. 1717 तक मिलता है। यद्यपि इस पर विश्वास होना कठिन है। श्री गंगाप्रसाद कमठान ने [[बृज भाषा|ब्रजभाषा]] के एक मुसलमान भक्त कवि कारबेग उपमान कारे का वृतांत प्रकाशित किया है। काबेग के कथनानुसार वह जमुना के तटवर्ती परासौली गाँव का निवासी था और उसने अपनी रचना सं 1717 में सृजित की थी।
=== आधुनिक प्रवाह ===
वर्तमान समय में [[सहारनपुर]] जिले के [[फैज़ाबाद|फैजाबाद]] गाँव के निकट मैदान में आने पर यह आगे 65 मील तक बढ़ती हुई [[हरियाणा]] के [[अम्बाला|अंबाला]] और [[करनाल]] जिलों को [[उत्तर प्रदेश]] के [[सहारनपुर]] और [[मुज़फ्फरनगर|शामली]] जिलों से अलग करती है। इस भू-भाग में इसमें मस्कर्रा, कठ, [[हिंडन|हिण्डन]] और सबी नामक नदियाँ मिलती हैं, जिनके कारण इसका आकार बहुत बढ़ जाता है। मैदान में आते ही इससे पूर्वी यमुना नहर और पश्चिमी नहर निकाली जाती हैं। ये दोनों नहरें यमुना से पानी लेकर इस भू-भाग की सैकड़ों मील धरती को हरा-भरा और उपज सम्पन्न बना देती हैं।
इस भू-भाग में यमुना की धारा के दोनों ओर [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] और [[उत्तर प्रदेश]] के कई छोटे बड़े नगरों की सीमाएँ हैं, किन्तु इसके ठीक तट पर बसा हुआ सबसे प्राचीन और पहला नगर दिल्ली है, जो लम्बे समय से भारत की राजधानी है। दिल्ली के लाखों की आबादी की आवश्यकता की पूर्ति करते हुए और वहाँ की ढेरों गंदगी को बहाती हुई यह ओखला नामक स्थान पर पहुँचती है। यहाँ पर इस पर एक बड़ा बांध बांधा गया है जिससे नदी की धारा पूरी तरह नियंत्रित कर ली गयी है। इसी बांध से आगरा नहर निकलती है, जो हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सैकड़ों मील भूमि को सिंचित करती है। दिल्ली से आगे यह हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा बनाती हुई तथा हरियाणा के फरीदाबाद जिले को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से अलग करती हुई उत्तर प्रदेश में प्रवाहित होने लगती है।
=== तटवर्ती स्थान ===
ब्रज प्रदेश की सांस्कृतिक सीमा में यमुना नदी का प्रथम प्रवेश बुलंदशहर जिला की खुर्जा तहसील के 'जेबर' नामक कस्बा के निकट होता है। वहाँ से यह दक्षिण की ओर बहती हुई फरीदाबाद (हरियाणा) जिले की पलवल तहसील और अलीगढ़, उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले की खैर तहसील की सीमा निर्मित करती है। इसके बाद यह छाता तहसील के शाहपुर ग्राम के निकट यह मथुरा जिले में प्रवेश करती है और मथुरा जिले की छाता और भाँट तहसीलों की सीमा निर्धारित करती है। जेबर से शेरगढ़ तक यह दक्षिणाभिमुख प्रवाहित होती है उसके बाद कुछ पूर्व की ओर मुड़ जाती है। ब्रज क्षेत्र में यमुना के तट पर बसा हुआ पहिला उल्लेखनीय स्थान शेरगढ़ है।
शेरगढ़ से कुछ दूर तक पूर्व की दिशा में बह कर फिर यह मथुरा तक दक्षिण दिशा में ही बहती है। मार्ग में इसके दोनों ओर पुराण प्रसिद्ध वन और उपवन तथा कृष्ण लीला स्थान विधमान हैं। यहाँ पर यह भाँट से वृन्दावन तक बलखाती हुई बहती है और वृन्दावन को यह तीन ओर से घेर लेती है। पुराणों से ज्ञात होता है, प्राचीन काल में वृन्दावन में यमुना की कई धाराएँ थीं, जिनके कारण वह लगभग प्रायद्वीप सा बन गया था। उसमें अनेक सुन्दर वनखंड और घास के मैदान थे, जहाँ भगवान श्री कृष्ण अपने साथी गोप बालकों के साथ गायें चराया करते थे।
वर्तमान काल में यमुना की एक ही धारा है और उसी के तट पर [[वृन्दावन]] बसा हुआ है। वहाँ मध्य काल में अनेक धर्माचार्यों और भक्त कवियों ने निवास कर कृष्णोपासना और कृष्ण भक्ति का प्रचार किया था। वृन्दावन में यमुना के किनारों पर बड़े सुन्दर घाट बने हुए हैं और उन पर अनेक मंदिर-देवालय, छतरियां और धर्मशालाएँ है। इनसे यमुना के तट की शोभा अधिक बढ़ जाती है। वृन्दावन से आगे दक्षिण की ओर बहती हुई यह नदी मथुरा नगर में प्रवेश करती है।
[[मथुरा]] यमुना के तट पर बसा हुआ एक ऐसा ऐतिहासिक और धार्मिक स्थान है, जिसकी दीर्घकालीन गौरव गाथा प्रसिद्ध है। यहाँ पर भगवान श्री कृष्ण ने अवतार धारण किया था, जिससे इसके महत्व की वृद्धि हुई है। यहाँ भी यमुना के तट पर बड़े सुन्दर घाट बने हुए हैं। यमुना में नाव से अथवा पुल से देखने पर मथुरा नगर और उसके घाटों का मनोरम द्रष्य दिखाई देता है। मथुरा में यमुना पर दो पक्के पुल बने हैं जिनमें से एक पर रेलगाड़ी चलती है तथा दूसरे पर सड़क परिवहन चलते हैं। मथुरा नगर की दक्षिणी सीमा पर अब गोकुल बैराज भी निर्मित कराया गया है जिसका उद्देश्य ब्रज के भूमिगत जल के स्तर को पुनः वापिस लाना और ब्रज की उपजाऊ भूमि को अधिकाधिक सिंचित करना है। विगत काल में यमुना मथुरा-वृन्दावन में एक विशाल नदी के रूप में प्रवाहित होती थी, किन्तु जबसे इससे नहरें निकाली गयी हैं, तब से इसका जलीय आकार छोटा हो गया है। केवल वर्षा ॠतु में ही यह अपना पूर्ववर्ती रूप धारण करती है। उस समय मीलों तक इसका पानी फैल जाता है।
मथुरा से आगे यमुना के तट पर बायीं ओर गोकुल और महावन जैसे धार्मिक स्थल हैं तथा दायें तट पर पहले औरंगाबाद और उसके बाद फरह जैसे ग्राम हैं। यहाँ तक यमुना के किनारे रेतीले हैं, किन्तु आगे पथरीले और चट्टानी हो जाते हैं, जिससे जल धारा बलखाती हुई मनोरम रूप में प्रवाहित होती है।
सादाबाद तहसील के ग्राम अकोस के पास यमुना मथुरा जिले की सीमा से बाहर निकलती है और फिर कुछ दूर तक मथुरा और आगरा जिलों की सीमा निर्मित करती है। सादाबाद तहसील के मंदौर ग्राम के पास यह आगरा जिले में प्रवेश करती है। वहाँ इसमें करबन और गंभीर नामक नदियां आकर मिलती हैं।
आगरा जिले में प्रवेश करने पर नगला अकोस के पास इसके पानी से निर्मित कीठम झील है, जो सैलानियों के लिये बड़ी आकर्षक है। कीठम से रुनकता तक यमुना के किनारे एक संरक्षित वनखंड का निर्माण किया गया है, जो 'सूरदास वन' कहलाता है। रुनकता के समीप ही यमुना तट पर 'गोघात' का वह प्राचीन धार्मिक स्थल है, जहाँ महात्मा सूरदास ने 12 वर्षों तक निवास किया था और जहाँ उन्होंने महाप्रभु बल्लभाचार्य से दीक्षा ली थी।
यमुना के तटवर्ती स्थानों में दिल्ली के बाद सर्वाधिक बड़ा नगर आगरा ही है। यह एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक, व्यापारिक एंव पर्यटन स्थल है, जो मुगल सम्राटों की राजधानी भी रह चुका है। यह यमुना तट से काफी ऊँचाई पर बसा हुआ है - यमुना दिल्ली के पूर्वी भाग में बहती है, उत्तर से दक्षिण की तरफ़। यहाँ पर भी यमुना पर दो पुल निर्मित हैं। आगरा में यमुना तट पर जो इमारतें है, मुगल बादशाहों द्वारा निर्मित किला और ताज महल पर्यटकों के निमित्त अत्यधिक प्रसिद्ध हैं।
आगरा नगर से आगे यमुना के एक ओर फिरोजाबाद और दूसरी ओर फतेहबाद जिला और तहसील स्थित है। उनके बाद बटेश्वर का सुप्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल आता है, जहाँ ब्रज की सांस्कृतिक सीमा समाप्त होती है। बटेश्वर का प्राचीन नाम 'सौरपुर' है, जो भगवान श्री कृष्ण के पितामह शूर की राजधानी थी। यहाँ पर यमुना ने बल खाते हुए बड़ा मोड़ लिया है, जिससे बटेश्वर एक द्वीप के समान ज्ञात होता है। इस स्थान पर कार्तिक पूर्णमा को यमुना स्नान का एक बड़ा मेला लगता है।
बटेश्वर से आगे इटावा एक नगर के रूप में यमुना तट पर बसा हुआ है। यह भी आगरा और बटेश्वर की भाँति ऊँचाई पर बसा हुआ है। यमुना के तट पर जितने ऊँचे कगार आगरा और इटावा जिलों में हैं, उतने मैदान में अन्यत्र नहीं हैं। इटावा से आगे मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध नदी चम्बल यमुना में आकर मिलती है, जिससे इसका आकार विस्तीर्ण हो जाता है, अपने उद्गम से लेकर चम्बल के संगम तक यमुना नदी, गंगा (गङ्गा) नदी के समानान्तर बहती है। इसके आगे उन दोनों के बीच के अन्तर कम होता जाता है और अन्त में प्रयाग में जाकर वे दोनों संगम बनाकर मिश्रित हो जाती हैं।
[[चम्बल नदी|चम्बल]] के पश्चात यमुना नदी में मिलने वाली नदियों में
सेंगर, छोटी सिन्ध, बतवा और केन उल्लेखनीय हैं। इटावा के पश्चात यमुना के तटवर्ती नगरों में काल्पी, हमीर पुर और प्रयाग मुख्य है। प्रयाग में यमुना एक विशाल नदी के रूप में प्रस्तुत होती है और वहाँ के प्रसिद्ध ऐतिहासिक किले के नीचे [[गंगा |गङ्गा]] में मिल जाती है। प्रयाग में यमुना पर एक विशाल पुल निर्मित किया गया है, जो दो मंजिला है। इसे उत्तर प्रदेश का विशालतम सेतु माना जाता है। यमुना और गंगा के संगम के कारण ही, प्रयाग को तीर्थराज का महत्व प्राप्त हुआ है। यमुना नदी की कुल लम्बाई उद्गम से लेकर प्रयाग संगम तक लगभग 860
मील है।
==सांस्कृतिक महत्त्व ==
भारतवर्ष की सर्वाधिक पवित्र और प्राचीन नदियों में यमुना की गणना गंगा के साथ की जाती है। यमुना और गंगा के दो आब की पुण्यभूमि में ही आर्यों की पुरातन संस्कृति का गौरवशाली रूप बन सका था। ब्रजमंडल की तो यमुना एक मात्र महत्वपूर्ण नदी है। जहाँ तक ब्रज संस्कृति का सम्बंध है, यमुना को केवल नदी कहना ही पर्याप्त नहीं है। वस्तुतः यह ब्रज संस्कृति की सहायक, इसकी दीर्ध कालीन परम्परा की प्रेरक और यहाँ की धार्मिक भावना का प्रमुख आधार रही है।
पौराणिक अनुश्रुतियों के अनुसार यह देम में यमुना जी के एक हजार नामों से उसकी प्रशस्ति का गायन किया गया है। ३ यमुना के परमभक्त इसका दैनिक रूप से प्रतिदिन पाठ करते हैं।
ब्रजभाषा के भक्त कवियों और विशेषतः वल्लभ सम्प्रदायी कवियों ने गिरिराज गोवर्धन की भाँति यमुना के प्रति भी अतिशय श्रद्धा व्यक्त की है। इस सम्प्रदाय का शायद ही कोई कवि हो, जिसने अपनी यमुना के प्रति अपनी काव्य - श्रद्धांजलि अर्पित न की हो। उनका यमुना स्तुति संबंधी साहित्य ब्रजभाषा भक्ति काव्य का एक उल्लेखनीय अंग है।
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[[चित्र:Yamuna.jpg|thumb|right|200px|आगरा में यमुना नदी]]
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[[चित्र:Yamuna (Kesi Ghata).jpg|thumb|right|200px|वृंदावन के पवित्र केशीघाट पर यमुना]]
[[चित्र:Taj Majal y rio Yamuna.JPG|thumb|200px|right|सुबह के धुँधलके में यमुनातट पर ताज]]
'''दुनिया के प्रमुख शहरो की तरह [[नई दिल्ली]] शहर यमुना नदी के किनारे बसा है।''' यमुना [[भारत]] की एक [[नदी]] है। यह [[गंगा नदी]] की सबसे बड़ी सहायक नदी है जो [[यमुनोत्री]] ([उत्तरकाशी] से ३० किमी उत्तर, [[गढ़वाल]] में) नामक जगह से निकलती है और [[इलाहाबाद|प्रयाग]] ([[इलाहाबाद|प्रयागराज]]) में [[गंगा नदी|गंगा]] से मिल जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियों में [[चम्बल नदी|चम्बल]], [[सेंगर]], [[छोटी सिन्धु]], [[बेतवा नदी|बेतवा]] और [[केन नदी|केन]] उल्लेखनीय हैं। यमुना के तटवर्ती नगरों में [[दिल्ली]] और [[आगरा]] के अतिरिक्त [[इटावा]], [[कालपी]], हमीरपुर और प्रयाग मुख्य है। प्रयाग में यमुना एक विशाल नदी के रूप में प्रस्तुत होती है और वहाँ के प्रसिद्ध ऐतिहासिक किले के नीचे गंगा में मिल जाती है।
[[बृज|ब्रज]] की संस्कृति में यमुना का महत्वपूर्ण स्थान है। यमुना एक पवित्र नदी है जो की मथुरा आगरा इटावा औरैया कालपी होते हुए प्रयागराज में गंगा से जय मिलती है यमुना नदी हिंदू धर्म ग्रंथो के अनुसार काफी प्राचीन नदी है जो की गंगा नदी की एक सबसे बड़ी सहायक नदी है जिसका जल विस्तार क्षेत्र काफी ज्यादातर है गंगा के जल विस्तार का यमुना में 40.2 प्रतिशत [[जल]] विस्तार है भारत की सबसे बड़ी सहायक नदी है यह पौराणिक कथाओं के अनुसार यमुना सूर्य की बेटी तथा यम की बहन है धर्म ग्रंथो के अनुसार यमुना को कालिंद्री भी कहा जाता है क्योंकि यमुना जो सूर्य की पुत्री है ना उनका बचपन का नाम कालिंद्री था
== उद्गम ==
यह [[यमुनोत्री]] नामक जगह से निकलती है। यह [[गंगा नदी]] की सबसे बड़ी सहायक नदी है। यमुना का उद्गम स्थान [[हिमालय]] के हिमाच्छादित श्रंग बंदरपुच्छ ऊँचाई 6200 मीटर से 7 से 8 मील उत्तर-पश्चिम में स्थित कालिंद पर्वत है, जिसके नाम पर यमुना को कालिंदजा अथवा [[कालिंदी नदी|कालिंदी]] कहा जाता है। अपने उद्गम से आगे कई मील तक विशाल हिमगारों और हिम मंडित कंदराओं में अप्रकट रूप से बहती हुई तथा पहाड़ी ढलानों पर से अत्यन्त तीव्रतापूर्वक उतरती हुई इसकी धारा यमुनोत्तरी [[पर्वत]] (20,731 फीट ऊँचाई) से प्रकट होती है। वहाँ इसके दर्शनार्थ हजारों श्रद्धालु यात्री प्रतिवर्ष भारत वर्ष के कोने-कोने से पहुँचते हैं। स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार, [[उत्तराखंड]] के गढ़वाल हिमालय में स्थित यमकुंड शिखर (31°01′48″N, 79°29′22″E) को भी यमुना के पवित्र उद्गम क्षेत्र से संबद्ध माना जाता है। यह पर्वत हिमनदीय जलागम क्षेत्र का भाग है, जहाँ से प्राप्त हिमपिघलन जल यमुना नदी तंत्र में योगदान देता है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह क्षेत्र पारिस्थितिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है<ref>{{cite web |last1=Sharma |first1=Tushar |title=Yamkund Shikhar: The sacred birthplace of the Yamuna |url=https://sundayguardianlive.com/national/yamkund-shikhar-the-sacred-birthplace-of-the-yamuna-238110/ |website=The Sunday Guardian |publisher=The Sunday Guardian |access-date=29 जुलाई 2026 |language=en |date=16 जुलाई 2026}}</ref>
यमुनोत्तरी पर्वत से निकलकर यह नदी अनेक पहाड़ी दरों और घाटियों में प्रवाहित होती हुई तथा वदियर, कमलाद, वदरी अस्लौर जैसी छोटी और तोंस जैसी बड़ी पहाड़ी नदियों को अपने अंचल में समेटती हुई आगे बढ़ती है। उसके बाद यह हिमालय को छोड़ कर [[दून की घाटी]] में प्रवेश करती है। वहाँ से कई मील तक दक्षिण-पश्चिम की और बहती हुई तथा गिरि, सिरमौर और आशा नामक छोटी नदियों को अपनी गोद में लेती हुई यह अपने उद्गम से लगभग ९५ मील दूर वर्तमान [[सहारनपुर जिला]] के [[फैज़ाबाद|फैजाबाद]] ग्राम के समीप मैदान में आती है। उस समय इसके तट तक की ऊँचाई समुद्र सतह से लगभग 1276 फीट रह जाती है।
===ऐतिहासिक स्रोत ===
भुवनभास्कर सूर्य इनके पिता, मृत्यु के देवता इसके [[यमराज]] भाई और भगवान [[कृष्ण|श्री कृष्ण]] इनके पति स्वीकार्य किये गये हैं। जहाँ भगवान [[कृष्ण|श्री कृष्ण]] ब्रज संस्कृति के जनक कहे जाते हैं, वहाँ यमुना इसकी जननी मानी जाती है। इस प्रकार यह सच्चे अर्थों में ब्रजवासियों की माता है। अतः ब्रज में इसे ''यमुना मैया'' कहते हैं। [[ब्रह्म पुराण]] में यमुना के आध्यात्मिक स्वरुप का स्पष्टीकरण करते हुए विवरण प्रस्तुत किया है - "जो सृष्टि का आधार है और जिसे लक्ष्णों से सच्चिदनंद स्वरुप कहा जाता है, [[उपनिषद्|उपनिषदों]] ने जिसका ब्रह्म रूप से गायन किया है, वही परमतत्व साक्षात् यमुना है। [[गौड़ वैष्णव|गौड़िय]] विद्वान [[श्री रूप गोस्वामी]] ने यमुना को साक्षात् चिदानंदमयी बतलाया है। [[गर्ग संहिता]] में यमुना के पचांग
में पाँच नामों का वर्णन है -
#'''पटल'''
#'''पद्धति'''
#'''कवय'''
#'''स्तोत्र'''
#'''सहस्त्र'''
== प्रवाह क्षेत्र ==
पश्चिमी [[हिमालय]] से निकल कर [[उत्तर प्रदेश]] एवं [[हरियाणा]] की सीमा के सहारे 95 मील का सफर कर उत्तरी [[सहारनपुर]] (मैदानी इलाका) पहुँचती है। फिर यह [[दिल्ली]], [[आगरा]] से होती हुई [[इलाहाबाद|प्रयागराज]] में [[गंगा नदी|गंगा]] नदी में मिल जाती है।
यमुना नदी की औसत गहराई 10 फीट (3 मीटर) और अधिकतम गहराई 35 फीट (11 मीटर) तक है। दिल्ली के निकट नदी में, यह अधिकतम गहराई 68 फीट (50 मीटर) है। आगरा में, यह गहराई 3 फुट (1 मीटर) तक हैं।
=== प्राचीन प्रवाह ===
मैदान में जहाँ इस समय यमुना का प्रवाह है, वहाँ वह सदा से प्रवाहित नहीं होती रही है। पौराणिक अनुश्रुतियों और ऐतिहासिक उल्लेखों से यह ज्ञात होता है, यद्यपि [[यमुना]] पिछले हजारों वर्षों से विधमान है, तथापि इसका प्रवाह समय-समय पर परिवर्तित होता रहा है। अपने सुदीर्घ जीवन काल में यमुना ने जितने स्थान बदले हैं, उनमें से बहुत कम की ही जानकारी प्राप्त हो सकी है।
प्रागऐतिहासिक काल में यमुना [[मधुबन]] के समीप बहती थी, जहाँ उसके तट पर शत्रुध्न जी ने सर्वप्रथम मथुरा नगरी की स्थापना की थी। [[वाल्मीकि रामायण]] और [[विष्णु पुराण]] में इसका विवरण प्राप्त होता है। 1 कृष्ण काल में यमुना का प्रवाह कटरा केशव देव के निकट था। सत्रहवीं शताबदी में भारत आने वाले यूरोपीय विद्वान टेवर्नियर ने [[कटड़ा|कटरा]] के समीप की भूमि को देख कर यह अनुमान लगा लिया था कि वहाँ किसी समय यमुना की धारा थी। इस संदर्भ में ग्राउज़ का मत है कि ऐतिहासिक काल में कटरा के समीप यमुना के प्रवाहित होने की संभावना कम है, किन्तु अत्यन्त प्राचीन काल में वहाँ यमुना अवश्य थी। 2 इससे भी यह सिद्ध होता है कि कृष्ण काल में यमुना का प्रवाह कटरा के समीप ही था।
कनिधंम का अनुमान है, यूनानी लेखकों के समय में यमुना की प्रधान धारा या उसकी एक बड़ी शाखा कटरा केशव देव की पूर्वी दीवार के नीचे बहती होगी। 3 जब मथुरा में [[बौद्ध धर्म]] का व्यापक प्रचार हो गया और यहाँ यमुना के दोनों ओर अनेक संधारम बनाये गये, तब यमुना की मुख्य धारा कटरा से हटकर प्रायः उसी स्थान पर बहती होगी, जहाँ वह अब है, किन्तु उसकी कोई शाखा अथवा सहायक नहीं कटरा के निकट भी विधमान थी। ऐसा अनुमान है, यमुना की वह शाखा बौद्ध काल के बहुत बाद तक संभवतः सोलहवीं शताब्दी तक केशव देव मन्दिर के नीचे बहती रही थी। पहले दो बरसाती नदियाँ 'सरस्वती' और 'कृष्ण गंगा' मथुरा के पश्चिमी भाग में प्रवाहित होकर यमुना में गिरती थीं, जिनकी स्मृति में यमुना के सरस्वती संगम और कृष्ण गंगा नामक घाट हैं। संभव है यमुना की उन सहायक नादियों में से ही कोई कटरा के पास बहती रही हो।
* पुराणों से ज्ञात होता है, प्राचीन वृन्दावन में यमुना गोवर्धन के निकट प्रवाहित होती थी। जबकि वर्तमान में वह गोवर्धन से लगभग 4 मील दूर हो गई है। गोवर्धन के निकटवर्ती दो छोटे ग्राम 'जमुनावती' और परसौली है। वहाँ किसी काल में यमुना के प्रवाहित होने उल्लेख मिलते हैं।
[[वल्लभ सम्प्रदाय]] के [[वार्ता साहित्य]] से ज्ञात होता है कि [[सारस्वत कल्प]] में यमुना नदी जमुनावती ग्राम के समीप बहती थी। उस काल में यमुना नदी की दो धाराऐं थी, एक धारा नंदगाँव, वरसाना, संकेत के निकट बहती हुई गोवर्धन में जमुनावती पर आती थी और दूसरी धारा पीरघाट से होती हुई गोकुल की ओर चली जाती थी। आगे दानों धाराएँ एक होकर वर्तमान आगरा की ओर बढ़ जाती थी।
परासौली में यमुना को धारा प्रवाहित होने का प्रमाण स. 1717 तक मिलता है। यद्यपि इस पर विश्वास होना कठिन है। श्री गंगाप्रसाद कमठान ने [[बृज भाषा|ब्रजभाषा]] के एक मुसलमान भक्त कवि कारबेग उपमान कारे का वृतांत प्रकाशित किया है। काबेग के कथनानुसार वह जमुना के तटवर्ती परासौली गाँव का निवासी था और उसने अपनी रचना सं 1717 में सृजित की थी।
=== आधुनिक प्रवाह ===
वर्तमान समय में [[सहारनपुर]] जिले के [[फैज़ाबाद|फैजाबाद]] गाँव के निकट मैदान में आने पर यह आगे 65 मील तक बढ़ती हुई [[हरियाणा]] के [[अम्बाला|अंबाला]] और [[करनाल]] जिलों को [[उत्तर प्रदेश]] के [[सहारनपुर]] और [[मुज़फ्फरनगर|शामली]] जिलों से अलग करती है। इस भू-भाग में इसमें मस्कर्रा, कठ, [[हिंडन|हिण्डन]] और सबी नामक नदियाँ मिलती हैं, जिनके कारण इसका आकार बहुत बढ़ जाता है। मैदान में आते ही इससे पूर्वी यमुना नहर और पश्चिमी नहर निकाली जाती हैं। ये दोनों नहरें यमुना से पानी लेकर इस भू-भाग की सैकड़ों मील धरती को हरा-भरा और उपज सम्पन्न बना देती हैं।
इस भू-भाग में यमुना की धारा के दोनों ओर [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] और [[उत्तर प्रदेश]] के कई छोटे बड़े नगरों की सीमाएँ हैं, किन्तु इसके ठीक तट पर बसा हुआ सबसे प्राचीन और पहला नगर दिल्ली है, जो लम्बे समय से भारत की राजधानी है। दिल्ली के लाखों की आबादी की आवश्यकता की पूर्ति करते हुए और वहाँ की ढेरों गंदगी को बहाती हुई यह ओखला नामक स्थान पर पहुँचती है। यहाँ पर इस पर एक बड़ा बांध बांधा गया है जिससे नदी की धारा पूरी तरह नियंत्रित कर ली गयी है। इसी बांध से आगरा नहर निकलती है, जो हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सैकड़ों मील भूमि को सिंचित करती है। दिल्ली से आगे यह हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा बनाती हुई तथा हरियाणा के फरीदाबाद जिले को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से अलग करती हुई उत्तर प्रदेश में प्रवाहित होने लगती है।
=== तटवर्ती स्थान ===
ब्रज प्रदेश की सांस्कृतिक सीमा में यमुना नदी का प्रथम प्रवेश बुलंदशहर जिला की खुर्जा तहसील के 'जेबर' नामक कस्बा के निकट होता है। वहाँ से यह दक्षिण की ओर बहती हुई फरीदाबाद (हरियाणा) जिले की पलवल तहसील और अलीगढ़, उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले की खैर तहसील की सीमा निर्मित करती है। इसके बाद यह छाता तहसील के शाहपुर ग्राम के निकट यह मथुरा जिले में प्रवेश करती है और मथुरा जिले की छाता और भाँट तहसीलों की सीमा निर्धारित करती है। जेबर से शेरगढ़ तक यह दक्षिणाभिमुख प्रवाहित होती है उसके बाद कुछ पूर्व की ओर मुड़ जाती है। ब्रज क्षेत्र में यमुना के तट पर बसा हुआ पहिला उल्लेखनीय स्थान शेरगढ़ है।
शेरगढ़ से कुछ दूर तक पूर्व की दिशा में बह कर फिर यह मथुरा तक दक्षिण दिशा में ही बहती है। मार्ग में इसके दोनों ओर पुराण प्रसिद्ध वन और उपवन तथा कृष्ण लीला स्थान विधमान हैं। यहाँ पर यह भाँट से वृन्दावन तक बलखाती हुई बहती है और वृन्दावन को यह तीन ओर से घेर लेती है। पुराणों से ज्ञात होता है, प्राचीन काल में वृन्दावन में यमुना की कई धाराएँ थीं, जिनके कारण वह लगभग प्रायद्वीप सा बन गया था। उसमें अनेक सुन्दर वनखंड और घास के मैदान थे, जहाँ भगवान श्री कृष्ण अपने साथी गोप बालकों के साथ गायें चराया करते थे।
वर्तमान काल में यमुना की एक ही धारा है और उसी के तट पर [[वृन्दावन]] बसा हुआ है। वहाँ मध्य काल में अनेक धर्माचार्यों और भक्त कवियों ने निवास कर कृष्णोपासना और कृष्ण भक्ति का प्रचार किया था। वृन्दावन में यमुना के किनारों पर बड़े सुन्दर घाट बने हुए हैं और उन पर अनेक मंदिर-देवालय, छतरियां और धर्मशालाएँ है। इनसे यमुना के तट की शोभा अधिक बढ़ जाती है। वृन्दावन से आगे दक्षिण की ओर बहती हुई यह नदी मथुरा नगर में प्रवेश करती है।
[[मथुरा]] यमुना के तट पर बसा हुआ एक ऐसा ऐतिहासिक और धार्मिक स्थान है, जिसकी दीर्घकालीन गौरव गाथा प्रसिद्ध है। यहाँ पर भगवान श्री कृष्ण ने अवतार धारण किया था, जिससे इसके महत्व की वृद्धि हुई है। यहाँ भी यमुना के तट पर बड़े सुन्दर घाट बने हुए हैं। यमुना में नाव से अथवा पुल से देखने पर मथुरा नगर और उसके घाटों का मनोरम द्रष्य दिखाई देता है। मथुरा में यमुना पर दो पक्के पुल बने हैं जिनमें से एक पर रेलगाड़ी चलती है तथा दूसरे पर सड़क परिवहन चलते हैं। मथुरा नगर की दक्षिणी सीमा पर अब गोकुल बैराज भी निर्मित कराया गया है जिसका उद्देश्य ब्रज के भूमिगत जल के स्तर को पुनः वापिस लाना और ब्रज की उपजाऊ भूमि को अधिकाधिक सिंचित करना है। विगत काल में यमुना मथुरा-वृन्दावन में एक विशाल नदी के रूप में प्रवाहित होती थी, किन्तु जबसे इससे नहरें निकाली गयी हैं, तब से इसका जलीय आकार छोटा हो गया है। केवल वर्षा ॠतु में ही यह अपना पूर्ववर्ती रूप धारण करती है। उस समय मीलों तक इसका पानी फैल जाता है।
मथुरा से आगे यमुना के तट पर बायीं ओर गोकुल और महावन जैसे धार्मिक स्थल हैं तथा दायें तट पर पहले औरंगाबाद और उसके बाद फरह जैसे ग्राम हैं। यहाँ तक यमुना के किनारे रेतीले हैं, किन्तु आगे पथरीले और चट्टानी हो जाते हैं, जिससे जल धारा बलखाती हुई मनोरम रूप में प्रवाहित होती है।
सादाबाद तहसील के ग्राम अकोस के पास यमुना मथुरा जिले की सीमा से बाहर निकलती है और फिर कुछ दूर तक मथुरा और आगरा जिलों की सीमा निर्मित करती है। सादाबाद तहसील के मंदौर ग्राम के पास यह आगरा जिले में प्रवेश करती है। वहाँ इसमें करबन और गंभीर नामक नदियां आकर मिलती हैं।
आगरा जिले में प्रवेश करने पर नगला अकोस के पास इसके पानी से निर्मित कीठम झील है, जो सैलानियों के लिये बड़ी आकर्षक है। कीठम से रुनकता तक यमुना के किनारे एक संरक्षित वनखंड का निर्माण किया गया है, जो 'सूरदास वन' कहलाता है। रुनकता के समीप ही यमुना तट पर 'गोघात' का वह प्राचीन धार्मिक स्थल है, जहाँ महात्मा सूरदास ने 12 वर्षों तक निवास किया था और जहाँ उन्होंने महाप्रभु बल्लभाचार्य से दीक्षा ली थी।
यमुना के तटवर्ती स्थानों में दिल्ली के बाद सर्वाधिक बड़ा नगर आगरा ही है। यह एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक, व्यापारिक एंव पर्यटन स्थल है, जो मुगल सम्राटों की राजधानी भी रह चुका है। यह यमुना तट से काफी ऊँचाई पर बसा हुआ है - यमुना दिल्ली के पूर्वी भाग में बहती है, उत्तर से दक्षिण की तरफ़। यहाँ पर भी यमुना पर दो पुल निर्मित हैं। आगरा में यमुना तट पर जो इमारतें है, मुगल बादशाहों द्वारा निर्मित किला और ताज महल पर्यटकों के निमित्त अत्यधिक प्रसिद्ध हैं।
आगरा नगर से आगे यमुना के एक ओर फिरोजाबाद और दूसरी ओर फतेहबाद जिला और तहसील स्थित है। उनके बाद बटेश्वर का सुप्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल आता है, जहाँ ब्रज की सांस्कृतिक सीमा समाप्त होती है। बटेश्वर का प्राचीन नाम 'सौरपुर' है, जो भगवान श्री कृष्ण के पितामह शूर की राजधानी थी। यहाँ पर यमुना ने बल खाते हुए बड़ा मोड़ लिया है, जिससे बटेश्वर एक द्वीप के समान ज्ञात होता है। इस स्थान पर कार्तिक पूर्णमा को यमुना स्नान का एक बड़ा मेला लगता है।
बटेश्वर से आगे इटावा एक नगर के रूप में यमुना तट पर बसा हुआ है। यह भी आगरा और बटेश्वर की भाँति ऊँचाई पर बसा हुआ है। यमुना के तट पर जितने ऊँचे कगार आगरा और इटावा जिलों में हैं, उतने मैदान में अन्यत्र नहीं हैं। इटावा से आगे मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध नदी चम्बल यमुना में आकर मिलती है, जिससे इसका आकार विस्तीर्ण हो जाता है, अपने उद्गम से लेकर चम्बल के संगम तक यमुना नदी, गंगा (गङ्गा) नदी के समानान्तर बहती है। इसके आगे उन दोनों के बीच के अन्तर कम होता जाता है और अन्त में प्रयाग में जाकर वे दोनों संगम बनाकर मिश्रित हो जाती हैं।
[[चम्बल नदी|चम्बल]] के पश्चात यमुना नदी में मिलने वाली नदियों में
सेंगर, छोटी सिन्ध, बतवा और केन उल्लेखनीय हैं। इटावा के पश्चात यमुना के तटवर्ती नगरों में काल्पी, हमीर पुर और प्रयाग मुख्य है। प्रयाग में यमुना एक विशाल नदी के रूप में प्रस्तुत होती है और वहाँ के प्रसिद्ध ऐतिहासिक किले के नीचे [[गंगा |गङ्गा]] में मिल जाती है। प्रयाग में यमुना पर एक विशाल पुल निर्मित किया गया है, जो दो मंजिला है। इसे उत्तर प्रदेश का विशालतम सेतु माना जाता है। यमुना और गंगा के संगम के कारण ही, प्रयाग को तीर्थराज का महत्व प्राप्त हुआ है। यमुना नदी की कुल लम्बाई उद्गम से लेकर प्रयाग संगम तक लगभग 860
मील है।
==सांस्कृतिक महत्त्व ==
भारतवर्ष की सर्वाधिक पवित्र और प्राचीन नदियों में यमुना की गणना गंगा के साथ की जाती है। यमुना और गंगा के दो आब की पुण्यभूमि में ही आर्यों की पुरातन संस्कृति का गौरवशाली रूप बन सका था। ब्रजमंडल की तो यमुना एक मात्र महत्वपूर्ण नदी है। जहाँ तक ब्रज संस्कृति का सम्बंध है, यमुना को केवल नदी कहना ही पर्याप्त नहीं है। वस्तुतः यह ब्रज संस्कृति की सहायक, इसकी दीर्ध कालीन परम्परा की प्रेरक और यहाँ की धार्मिक भावना का प्रमुख आधार रही है।
पौराणिक अनुश्रुतियों के अनुसार यह देम में यमुना जी के एक हजार नामों से उसकी प्रशस्ति का गायन किया गया है। ३ यमुना के परमभक्त इसका दैनिक रूप से प्रतिदिन पाठ करते हैं।
ब्रजभाषा के भक्त कवियों और विशेषतः वल्लभ सम्प्रदायी कवियों ने गिरिराज गोवर्धन की भाँति यमुना के प्रति भी अतिशय श्रद्धा व्यक्त की है। इस सम्प्रदाय का शायद ही कोई कवि हो, जिसने अपनी यमुना के प्रति अपनी काव्य - श्रद्धांजलि अर्पित न की हो। उनका यमुना स्तुति संबंधी साहित्य ब्रजभाषा भक्ति काव्य का एक उल्लेखनीय अंग है।
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[[चित्र:Yamuna.jpg|thumb|right|200px|आगरा में यमुना नदी]]
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[[चित्र:Taj Majal y rio Yamuna.JPG|thumb|200px|right|सुबह के धुँधलके में यमुनातट पर ताज]]
'''दुनिया के प्रमुख शहरो की तरह [[नई दिल्ली]] शहर यमुना नदी के किनारे बसा है।''' यमुना [[भारत]] की एक [[नदी]] है। यह [[गंगा नदी]] की सबसे बड़ी सहायक नदी है जो [[यमुनोत्री]] ([उत्तरकाशी] से ३० किमी उत्तर, [[गढ़वाल]] में) नामक जगह से निकलती है और [[इलाहाबाद|प्रयाग]] ([[इलाहाबाद|प्रयागराज]]) में [[गंगा नदी|गंगा]] से मिल जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियों में [[चम्बल नदी|चम्बल]], [[सेंगर]], [[छोटी सिन्धु]], [[बेतवा नदी|बेतवा]] और [[केन नदी|केन]] उल्लेखनीय हैं। यमुना के तटवर्ती नगरों में [[दिल्ली]] और [[आगरा]] के अतिरिक्त [[इटावा]], [[कालपी]], हमीरपुर और प्रयाग मुख्य है। प्रयाग में यमुना एक विशाल नदी के रूप में प्रस्तुत होती है और वहाँ के प्रसिद्ध ऐतिहासिक किले के नीचे गंगा में मिल जाती है।
[[बृज|ब्रज]] की संस्कृति में यमुना का महत्वपूर्ण स्थान है। यमुना एक पवित्र नदी है जो की मथुरा आगरा इटावा औरैया कालपी होते हुए प्रयागराज में गंगा से जय मिलती है यमुना नदी हिंदू धर्म ग्रंथो के अनुसार काफी प्राचीन नदी है जो की गंगा नदी की एक सबसे बड़ी सहायक नदी है जिसका जल विस्तार क्षेत्र काफी ज्यादातर है गंगा के जल विस्तार का यमुना में 40.2 प्रतिशत [[जल]] विस्तार है भारत की सबसे बड़ी सहायक नदी है यह पौराणिक कथाओं के अनुसार यमुना सूर्य की बेटी तथा यम की बहन है धर्म ग्रंथो के अनुसार यमुना को कालिंद्री भी कहा जाता है क्योंकि यमुना जो सूर्य की पुत्री है ना उनका बचपन का नाम कालिंद्री था
== उद्गम ==
यह [[यमुनोत्री]] नामक जगह से निकलती है। यह [[गंगा नदी]] की सबसे बड़ी सहायक नदी है। यमुना का उद्गम स्थान [[हिमालय]] के हिमाच्छादित श्रंग बंदरपुच्छ ऊँचाई 6200 मीटर से 7 से 8 मील उत्तर-पश्चिम में स्थित कालिंद पर्वत है, जिसके नाम पर यमुना को कालिंदजा अथवा [[कालिंदी नदी|कालिंदी]] कहा जाता है। अपने उद्गम से आगे कई मील तक विशाल हिमगारों और हिम मंडित कंदराओं में अप्रकट रूप से बहती हुई तथा पहाड़ी ढलानों पर से अत्यन्त तीव्रतापूर्वक उतरती हुई इसकी धारा यमुनोत्तरी [[पर्वत]] (20,731 फीट ऊँचाई) से प्रकट होती है। वहाँ इसके दर्शनार्थ हजारों श्रद्धालु यात्री प्रतिवर्ष भारत वर्ष के कोने-कोने से पहुँचते हैं। स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार, [[उत्तराखंड]] के गढ़वाल हिमालय में स्थित यमकुंड शिखर (31°01′48″N, 79°29′22″E) को भी यमुना के पवित्र उद्गम क्षेत्र से संबद्ध माना जाता है। यह पर्वत हिमनदीय जलागम क्षेत्र का भाग है, जहाँ से प्राप्त हिमपिघलन जल यमुना नदी तंत्र में योगदान देता है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह क्षेत्र पारिस्थितिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है<ref>{{cite web |last1=Sharma |first1=Tushar |title=Yamkund Shikhar: The sacred birthplace of the Yamuna |url=https://sundayguardianlive.com/national/yamkund-shikhar-the-sacred-birthplace-of-the-yamuna-238110/ |website=The Sunday Guardian |publisher=The Sunday Guardian |access-date=29 जुलाई 2026 |language=en |date=16 जुलाई 2026}}</ref>
यमुनोत्तरी पर्वत से निकलकर यह नदी अनेक पहाड़ी दरों और घाटियों में प्रवाहित होती हुई तथा वदियर, कमलाद, वदरी अस्लौर जैसी छोटी और तोंस जैसी बड़ी पहाड़ी नदियों को अपने अंचल में समेटती हुई आगे बढ़ती है। उसके बाद यह हिमालय को छोड़ कर [[दून की घाटी]] में प्रवेश करती है। वहाँ से कई मील तक दक्षिण-पश्चिम की और बहती हुई तथा गिरि, सिरमौर और आशा नामक छोटी नदियों को अपनी गोद में लेती हुई यह अपने उद्गम से लगभग ९५ मील दूर वर्तमान [[सहारनपुर जिला]] के [[फैज़ाबाद|फैजाबाद]] ग्राम के समीप मैदान में आती है। उस समय इसके तट तक की ऊँचाई [[समुद्र]] सतह से लगभग 1276 फीट रह जाती है।
===ऐतिहासिक स्रोत ===
भुवनभास्कर सूर्य इनके पिता, मृत्यु के देवता इसके [[यमराज]] भाई और भगवान [[कृष्ण|श्री कृष्ण]] इनके पति स्वीकार्य किये गये हैं। जहाँ भगवान [[कृष्ण|श्री कृष्ण]] ब्रज संस्कृति के जनक कहे जाते हैं, वहाँ यमुना इसकी जननी मानी जाती है। इस प्रकार यह सच्चे अर्थों में ब्रजवासियों की माता है। अतः ब्रज में इसे ''यमुना मैया'' कहते हैं। [[ब्रह्म पुराण]] में यमुना के आध्यात्मिक स्वरुप का स्पष्टीकरण करते हुए विवरण प्रस्तुत किया है - "जो सृष्टि का आधार है और जिसे लक्ष्णों से सच्चिदनंद स्वरुप कहा जाता है, [[उपनिषद्|उपनिषदों]] ने जिसका ब्रह्म रूप से गायन किया है, वही परमतत्व साक्षात् यमुना है। [[गौड़ वैष्णव|गौड़िय]] विद्वान [[श्री रूप गोस्वामी]] ने यमुना को साक्षात् चिदानंदमयी बतलाया है। [[गर्ग संहिता]] में यमुना के पचांग
में पाँच नामों का वर्णन है -
#'''पटल'''
#'''पद्धति'''
#'''कवय'''
#'''स्तोत्र'''
#'''सहस्त्र'''
== प्रवाह क्षेत्र ==
पश्चिमी [[हिमालय]] से निकल कर [[उत्तर प्रदेश]] एवं [[हरियाणा]] की सीमा के सहारे 95 मील का सफर कर उत्तरी [[सहारनपुर]] (मैदानी इलाका) पहुँचती है। फिर यह [[दिल्ली]], [[आगरा]] से होती हुई [[इलाहाबाद|प्रयागराज]] में [[गंगा नदी|गंगा]] नदी में मिल जाती है।
यमुना नदी की औसत गहराई 10 फीट (3 मीटर) और अधिकतम गहराई 35 फीट (11 मीटर) तक है। दिल्ली के निकट नदी में, यह अधिकतम गहराई 68 फीट (50 मीटर) है। आगरा में, यह गहराई 3 फुट (1 मीटर) तक हैं।
=== प्राचीन प्रवाह ===
मैदान में जहाँ इस समय यमुना का प्रवाह है, वहाँ वह सदा से प्रवाहित नहीं होती रही है। पौराणिक अनुश्रुतियों और ऐतिहासिक उल्लेखों से यह ज्ञात होता है, यद्यपि [[यमुना]] पिछले हजारों वर्षों से विधमान है, तथापि इसका प्रवाह समय-समय पर परिवर्तित होता रहा है। अपने सुदीर्घ जीवन काल में यमुना ने जितने स्थान बदले हैं, उनमें से बहुत कम की ही जानकारी प्राप्त हो सकी है।
प्रागऐतिहासिक काल में यमुना [[मधुबन]] के समीप बहती थी, जहाँ उसके तट पर शत्रुध्न जी ने सर्वप्रथम मथुरा नगरी की स्थापना की थी। [[वाल्मीकि रामायण]] और [[विष्णु पुराण]] में इसका विवरण प्राप्त होता है। 1 कृष्ण काल में यमुना का प्रवाह कटरा केशव देव के निकट था। सत्रहवीं शताबदी में भारत आने वाले यूरोपीय विद्वान टेवर्नियर ने [[कटड़ा|कटरा]] के समीप की भूमि को देख कर यह अनुमान लगा लिया था कि वहाँ किसी समय यमुना की धारा थी। इस संदर्भ में ग्राउज़ का मत है कि ऐतिहासिक काल में कटरा के समीप यमुना के प्रवाहित होने की संभावना कम है, किन्तु अत्यन्त प्राचीन काल में वहाँ यमुना अवश्य थी। 2 इससे भी यह सिद्ध होता है कि कृष्ण काल में यमुना का प्रवाह कटरा के समीप ही था।
कनिधंम का अनुमान है, यूनानी लेखकों के समय में यमुना की प्रधान धारा या उसकी एक बड़ी शाखा कटरा केशव देव की पूर्वी दीवार के नीचे बहती होगी। 3 जब मथुरा में [[बौद्ध धर्म]] का व्यापक प्रचार हो गया और यहाँ यमुना के दोनों ओर अनेक संधारम बनाये गये, तब यमुना की मुख्य धारा कटरा से हटकर प्रायः उसी स्थान पर बहती होगी, जहाँ वह अब है, किन्तु उसकी कोई शाखा अथवा सहायक नहीं कटरा के निकट भी विधमान थी। ऐसा अनुमान है, यमुना की वह शाखा बौद्ध काल के बहुत बाद तक संभवतः सोलहवीं शताब्दी तक केशव देव मन्दिर के नीचे बहती रही थी। पहले दो बरसाती नदियाँ 'सरस्वती' और 'कृष्ण गंगा' मथुरा के पश्चिमी भाग में प्रवाहित होकर यमुना में गिरती थीं, जिनकी स्मृति में यमुना के सरस्वती संगम और कृष्ण गंगा नामक घाट हैं। संभव है यमुना की उन सहायक नादियों में से ही कोई कटरा के पास बहती रही हो।
* पुराणों से ज्ञात होता है, प्राचीन वृन्दावन में यमुना गोवर्धन के निकट प्रवाहित होती थी। जबकि वर्तमान में वह गोवर्धन से लगभग 4 मील दूर हो गई है। गोवर्धन के निकटवर्ती दो छोटे ग्राम 'जमुनावती' और परसौली है। वहाँ किसी काल में यमुना के प्रवाहित होने उल्लेख मिलते हैं।
[[वल्लभ सम्प्रदाय]] के [[वार्ता साहित्य]] से ज्ञात होता है कि [[सारस्वत कल्प]] में यमुना नदी जमुनावती ग्राम के समीप बहती थी। उस काल में यमुना नदी की दो धाराऐं थी, एक धारा नंदगाँव, वरसाना, संकेत के निकट बहती हुई गोवर्धन में जमुनावती पर आती थी और दूसरी धारा पीरघाट से होती हुई गोकुल की ओर चली जाती थी। आगे दानों धाराएँ एक होकर वर्तमान आगरा की ओर बढ़ जाती थी।
परासौली में यमुना को धारा प्रवाहित होने का प्रमाण स. 1717 तक मिलता है। यद्यपि इस पर विश्वास होना कठिन है। श्री गंगाप्रसाद कमठान ने [[बृज भाषा|ब्रजभाषा]] के एक मुसलमान भक्त कवि कारबेग उपमान कारे का वृतांत प्रकाशित किया है। काबेग के कथनानुसार वह जमुना के तटवर्ती परासौली गाँव का निवासी था और उसने अपनी रचना सं 1717 में सृजित की थी।
=== आधुनिक प्रवाह ===
वर्तमान समय में [[सहारनपुर]] जिले के [[फैज़ाबाद|फैजाबाद]] गाँव के निकट मैदान में आने पर यह आगे 65 मील तक बढ़ती हुई [[हरियाणा]] के [[अम्बाला|अंबाला]] और [[करनाल]] जिलों को [[उत्तर प्रदेश]] के [[सहारनपुर]] और [[मुज़फ्फरनगर|शामली]] जिलों से अलग करती है। इस भू-भाग में इसमें मस्कर्रा, कठ, [[हिंडन|हिण्डन]] और सबी नामक नदियाँ मिलती हैं, जिनके कारण इसका आकार बहुत बढ़ जाता है। मैदान में आते ही इससे पूर्वी यमुना नहर और पश्चिमी नहर निकाली जाती हैं। ये दोनों नहरें यमुना से पानी लेकर इस भू-भाग की सैकड़ों मील धरती को हरा-भरा और उपज सम्पन्न बना देती हैं।
इस भू-भाग में यमुना की धारा के दोनों ओर [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] और [[उत्तर प्रदेश]] के कई छोटे बड़े नगरों की सीमाएँ हैं, किन्तु इसके ठीक तट पर बसा हुआ सबसे प्राचीन और पहला नगर दिल्ली है, जो लम्बे समय से भारत की राजधानी है। दिल्ली के लाखों की आबादी की आवश्यकता की पूर्ति करते हुए और वहाँ की ढेरों गंदगी को बहाती हुई यह ओखला नामक स्थान पर पहुँचती है। यहाँ पर इस पर एक बड़ा बांध बांधा गया है जिससे नदी की धारा पूरी तरह नियंत्रित कर ली गयी है। इसी बांध से आगरा नहर निकलती है, जो हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सैकड़ों मील भूमि को सिंचित करती है। दिल्ली से आगे यह हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा बनाती हुई तथा हरियाणा के फरीदाबाद जिले को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से अलग करती हुई उत्तर प्रदेश में प्रवाहित होने लगती है।
=== तटवर्ती स्थान ===
ब्रज प्रदेश की सांस्कृतिक सीमा में यमुना नदी का प्रथम प्रवेश बुलंदशहर जिला की खुर्जा तहसील के 'जेबर' नामक कस्बा के निकट होता है। वहाँ से यह दक्षिण की ओर बहती हुई फरीदाबाद (हरियाणा) जिले की पलवल तहसील और अलीगढ़, उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले की खैर तहसील की सीमा निर्मित करती है। इसके बाद यह छाता तहसील के शाहपुर ग्राम के निकट यह मथुरा जिले में प्रवेश करती है और मथुरा जिले की छाता और भाँट तहसीलों की सीमा निर्धारित करती है। जेबर से शेरगढ़ तक यह दक्षिणाभिमुख प्रवाहित होती है उसके बाद कुछ पूर्व की ओर मुड़ जाती है। ब्रज क्षेत्र में यमुना के तट पर बसा हुआ पहिला उल्लेखनीय स्थान शेरगढ़ है।
शेरगढ़ से कुछ दूर तक पूर्व की दिशा में बह कर फिर यह मथुरा तक दक्षिण दिशा में ही बहती है। मार्ग में इसके दोनों ओर पुराण प्रसिद्ध वन और उपवन तथा कृष्ण लीला स्थान विधमान हैं। यहाँ पर यह भाँट से वृन्दावन तक बलखाती हुई बहती है और वृन्दावन को यह तीन ओर से घेर लेती है। पुराणों से ज्ञात होता है, प्राचीन काल में वृन्दावन में यमुना की कई धाराएँ थीं, जिनके कारण वह लगभग प्रायद्वीप सा बन गया था। उसमें अनेक सुन्दर वनखंड और घास के मैदान थे, जहाँ भगवान श्री कृष्ण अपने साथी गोप बालकों के साथ गायें चराया करते थे।
वर्तमान काल में यमुना की एक ही धारा है और उसी के तट पर [[वृन्दावन]] बसा हुआ है। वहाँ मध्य काल में अनेक धर्माचार्यों और भक्त कवियों ने निवास कर कृष्णोपासना और कृष्ण भक्ति का प्रचार किया था। वृन्दावन में यमुना के किनारों पर बड़े सुन्दर घाट बने हुए हैं और उन पर अनेक मंदिर-देवालय, छतरियां और धर्मशालाएँ है। इनसे यमुना के तट की शोभा अधिक बढ़ जाती है। वृन्दावन से आगे दक्षिण की ओर बहती हुई यह नदी मथुरा नगर में प्रवेश करती है।
[[मथुरा]] यमुना के तट पर बसा हुआ एक ऐसा ऐतिहासिक और धार्मिक स्थान है, जिसकी दीर्घकालीन गौरव गाथा प्रसिद्ध है। यहाँ पर भगवान श्री कृष्ण ने अवतार धारण किया था, जिससे इसके महत्व की वृद्धि हुई है। यहाँ भी यमुना के तट पर बड़े सुन्दर घाट बने हुए हैं। यमुना में नाव से अथवा पुल से देखने पर मथुरा नगर और उसके घाटों का मनोरम द्रष्य दिखाई देता है। मथुरा में यमुना पर दो पक्के पुल बने हैं जिनमें से एक पर रेलगाड़ी चलती है तथा दूसरे पर सड़क परिवहन चलते हैं। मथुरा नगर की दक्षिणी सीमा पर अब गोकुल बैराज भी निर्मित कराया गया है जिसका उद्देश्य ब्रज के भूमिगत जल के स्तर को पुनः वापिस लाना और ब्रज की उपजाऊ भूमि को अधिकाधिक सिंचित करना है। विगत काल में यमुना मथुरा-वृन्दावन में एक विशाल नदी के रूप में प्रवाहित होती थी, किन्तु जबसे इससे नहरें निकाली गयी हैं, तब से इसका जलीय आकार छोटा हो गया है। केवल वर्षा ॠतु में ही यह अपना पूर्ववर्ती रूप धारण करती है। उस समय मीलों तक इसका पानी फैल जाता है।
मथुरा से आगे यमुना के तट पर बायीं ओर गोकुल और महावन जैसे धार्मिक स्थल हैं तथा दायें तट पर पहले औरंगाबाद और उसके बाद फरह जैसे ग्राम हैं। यहाँ तक यमुना के किनारे रेतीले हैं, किन्तु आगे पथरीले और चट्टानी हो जाते हैं, जिससे जल धारा बलखाती हुई मनोरम रूप में प्रवाहित होती है।
सादाबाद तहसील के ग्राम अकोस के पास यमुना मथुरा जिले की सीमा से बाहर निकलती है और फिर कुछ दूर तक मथुरा और आगरा जिलों की सीमा निर्मित करती है। सादाबाद तहसील के मंदौर ग्राम के पास यह आगरा जिले में प्रवेश करती है। वहाँ इसमें करबन और गंभीर नामक नदियां आकर मिलती हैं।
आगरा जिले में प्रवेश करने पर नगला अकोस के पास इसके पानी से निर्मित कीठम झील है, जो सैलानियों के लिये बड़ी आकर्षक है। कीठम से रुनकता तक यमुना के किनारे एक संरक्षित वनखंड का निर्माण किया गया है, जो 'सूरदास वन' कहलाता है। रुनकता के समीप ही यमुना तट पर 'गोघात' का वह प्राचीन धार्मिक स्थल है, जहाँ महात्मा सूरदास ने 12 वर्षों तक निवास किया था और जहाँ उन्होंने महाप्रभु बल्लभाचार्य से दीक्षा ली थी।
यमुना के तटवर्ती स्थानों में दिल्ली के बाद सर्वाधिक बड़ा नगर आगरा ही है। यह एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक, व्यापारिक एंव पर्यटन स्थल है, जो मुगल सम्राटों की राजधानी भी रह चुका है। यह यमुना तट से काफी ऊँचाई पर बसा हुआ है - यमुना दिल्ली के पूर्वी भाग में बहती है, उत्तर से दक्षिण की तरफ़। यहाँ पर भी यमुना पर दो पुल निर्मित हैं। आगरा में यमुना तट पर जो इमारतें है, मुगल बादशाहों द्वारा निर्मित किला और ताज महल पर्यटकों के निमित्त अत्यधिक प्रसिद्ध हैं।
आगरा नगर से आगे यमुना के एक ओर फिरोजाबाद और दूसरी ओर फतेहबाद जिला और तहसील स्थित है। उनके बाद बटेश्वर का सुप्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल आता है, जहाँ ब्रज की सांस्कृतिक सीमा समाप्त होती है। बटेश्वर का प्राचीन नाम 'सौरपुर' है, जो भगवान श्री कृष्ण के पितामह शूर की राजधानी थी। यहाँ पर यमुना ने बल खाते हुए बड़ा मोड़ लिया है, जिससे बटेश्वर एक द्वीप के समान ज्ञात होता है। इस स्थान पर कार्तिक पूर्णमा को यमुना स्नान का एक बड़ा मेला लगता है।
बटेश्वर से आगे इटावा एक नगर के रूप में यमुना तट पर बसा हुआ है। यह भी आगरा और बटेश्वर की भाँति ऊँचाई पर बसा हुआ है। यमुना के तट पर जितने ऊँचे कगार आगरा और इटावा जिलों में हैं, उतने मैदान में अन्यत्र नहीं हैं। इटावा से आगे मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध नदी चम्बल यमुना में आकर मिलती है, जिससे इसका आकार विस्तीर्ण हो जाता है, अपने उद्गम से लेकर चम्बल के संगम तक यमुना नदी, गंगा (गङ्गा) नदी के समानान्तर बहती है। इसके आगे उन दोनों के बीच के अन्तर कम होता जाता है और अन्त में प्रयाग में जाकर वे दोनों संगम बनाकर मिश्रित हो जाती हैं।
[[चम्बल नदी|चम्बल]] के पश्चात यमुना नदी में मिलने वाली नदियों में
सेंगर, छोटी सिन्ध, बतवा और केन उल्लेखनीय हैं। इटावा के पश्चात यमुना के तटवर्ती नगरों में काल्पी, हमीर पुर और प्रयाग मुख्य है। प्रयाग में यमुना एक विशाल नदी के रूप में प्रस्तुत होती है और वहाँ के प्रसिद्ध ऐतिहासिक किले के नीचे [[गंगा |गङ्गा]] में मिल जाती है। प्रयाग में यमुना पर एक विशाल पुल निर्मित किया गया है, जो दो मंजिला है। इसे उत्तर प्रदेश का विशालतम सेतु माना जाता है। यमुना और गंगा के संगम के कारण ही, प्रयाग को तीर्थराज का महत्व प्राप्त हुआ है। यमुना नदी की कुल लम्बाई उद्गम से लेकर प्रयाग संगम तक लगभग 860
मील है।
==सांस्कृतिक महत्त्व ==
भारतवर्ष की सर्वाधिक पवित्र और प्राचीन नदियों में यमुना की गणना गंगा के साथ की जाती है। यमुना और गंगा के दो आब की पुण्यभूमि में ही आर्यों की पुरातन संस्कृति का गौरवशाली रूप बन सका था। ब्रजमंडल की तो यमुना एक मात्र महत्वपूर्ण नदी है। जहाँ तक ब्रज संस्कृति का सम्बंध है, यमुना को केवल नदी कहना ही पर्याप्त नहीं है। वस्तुतः यह ब्रज संस्कृति की सहायक, इसकी दीर्ध कालीन परम्परा की प्रेरक और यहाँ की धार्मिक भावना का प्रमुख आधार रही है।
पौराणिक अनुश्रुतियों के अनुसार यह देम में यमुना जी के एक हजार नामों से उसकी प्रशस्ति का गायन किया गया है। ३ यमुना के परमभक्त इसका दैनिक रूप से प्रतिदिन पाठ करते हैं।
ब्रजभाषा के भक्त कवियों और विशेषतः वल्लभ सम्प्रदायी कवियों ने गिरिराज गोवर्धन की भाँति यमुना के प्रति भी अतिशय श्रद्धा व्यक्त की है। इस सम्प्रदाय का शायद ही कोई कवि हो, जिसने अपनी यमुना के प्रति अपनी काव्य - श्रद्धांजलि अर्पित न की हो। उनका यमुना स्तुति संबंधी साहित्य ब्रजभाषा भक्ति काव्य का एक उल्लेखनीय अंग है।
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[[चित्र:Yamuna.jpg|thumb|right|200px|आगरा में यमुना नदी]]
[[चित्र:NorthIndiaCircuit 250.jpg|thumb|200px|right|यमुना त्रिवेणी संगम प्रयाग में]]
[[चित्र:Yamuna (Kesi Ghata).jpg|thumb|right|200px|वृंदावन के पवित्र केशीघाट पर यमुना]]
[[चित्र:Taj Majal y rio Yamuna.JPG|thumb|200px|right|सुबह के धुँधलके में यमुनातट पर ताज]]
'''दुनिया के प्रमुख शहरो की तरह [[नई दिल्ली]] शहर यमुना नदी के किनारे बसा है।''' यमुना [[भारत]] की एक [[नदी]] है। यह [[गंगा नदी]] की सबसे बड़ी सहायक नदी है जो [[यमुनोत्री]] ([उत्तरकाशी] से ३० किमी उत्तर, [[गढ़वाल]] में) नामक जगह से निकलती है और [[इलाहाबाद|प्रयाग]] ([[इलाहाबाद|प्रयागराज]]) में [[गंगा नदी|गंगा]] से मिल जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियों में [[चम्बल नदी|चम्बल]], [[सेंगर]], [[छोटी सिन्धु]], [[बेतवा नदी|बेतवा]] और [[केन नदी|केन]] उल्लेखनीय हैं। यमुना के तटवर्ती नगरों में [[दिल्ली]] और [[आगरा]] के अतिरिक्त [[इटावा]], [[कालपी]], हमीरपुर और प्रयाग मुख्य है। प्रयाग में यमुना एक विशाल नदी के रूप में प्रस्तुत होती है और वहाँ के प्रसिद्ध ऐतिहासिक किले के नीचे गंगा में मिल जाती है।
[[बृज|ब्रज]] की संस्कृति में यमुना का महत्वपूर्ण स्थान है। यमुना एक पवित्र नदी है जो की मथुरा आगरा इटावा औरैया कालपी होते हुए प्रयागराज में गंगा से जय मिलती है यमुना नदी हिंदू धर्म ग्रंथो के अनुसार काफी प्राचीन नदी है जो की गंगा नदी की एक सबसे बड़ी सहायक नदी है जिसका जल विस्तार क्षेत्र काफी ज्यादातर है गंगा के जल विस्तार का यमुना में 40.2 प्रतिशत [[जल]] विस्तार है भारत की सबसे बड़ी सहायक नदी है यह पौराणिक कथाओं के अनुसार यमुना सूर्य की बेटी तथा यम की बहन है धर्म ग्रंथो के अनुसार यमुना को कालिंद्री भी कहा जाता है क्योंकि यमुना जो सूर्य की पुत्री है ना उनका बचपन का नाम कालिंद्री था
== उद्गम ==
यह [[यमुनोत्री]] नामक जगह से निकलती है। यह [[गंगा नदी]] की सबसे बड़ी सहायक नदी है। यमुना का उद्गम स्थान [[हिमालय]] के हिमाच्छादित श्रंग बंदरपुच्छ ऊँचाई 6200 मीटर से 7 से 8 मील उत्तर-पश्चिम में स्थित कालिंद पर्वत है, जिसके नाम पर यमुना को कालिंदजा अथवा [[कालिंदी नदी|कालिंदी]] कहा जाता है। अपने उद्गम से आगे कई मील तक विशाल हिमगारों और हिम मंडित कंदराओं में अप्रकट रूप से बहती हुई तथा पहाड़ी ढलानों पर से अत्यन्त तीव्रतापूर्वक उतरती हुई इसकी धारा यमुनोत्तरी [[पर्वत]] (20,731 फीट ऊँचाई) से प्रकट होती है। वहाँ इसके दर्शनार्थ हजारों श्रद्धालु यात्री प्रतिवर्ष भारत वर्ष के कोने-कोने से पहुँचते हैं। स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार, [[उत्तराखंड]] के गढ़वाल हिमालय में स्थित यमकुंड शिखर (31°01′48″N, 79°29′22″E) को भी यमुना के पवित्र उद्गम क्षेत्र से संबद्ध माना जाता है। यह पर्वत हिमनदीय जलागम क्षेत्र का भाग है, जहाँ से प्राप्त हिमपिघलन जल यमुना नदी तंत्र में योगदान देता है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह क्षेत्र पारिस्थितिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है<ref>{{cite web |last1=Sharma |first1=Tushar |title=Yamkund Shikhar: The sacred birthplace of the Yamuna |url=https://sundayguardianlive.com/national/yamkund-shikhar-the-sacred-birthplace-of-the-yamuna-238110/ |website=The Sunday Guardian |publisher=The Sunday Guardian |access-date=29 जुलाई 2026 |language=en |date=16 जुलाई 2026}}</ref>
यमुनोत्तरी पर्वत से निकलकर यह नदी अनेक पहाड़ी दरों और घाटियों में प्रवाहित होती हुई तथा वदियर, कमलाद, वदरी अस्लौर जैसी छोटी और तोंस जैसी बड़ी पहाड़ी नदियों को अपने अंचल में समेटती हुई आगे बढ़ती है। उसके बाद यह हिमालय को छोड़ कर [[दून की घाटी]] में प्रवेश करती है। वहाँ से कई मील तक दक्षिण-पश्चिम की और बहती हुई तथा गिरि, सिरमौर और आशा नामक छोटी नदियों को अपनी गोद में लेती हुई यह अपने उद्गम से लगभग ९५ मील दूर वर्तमान [[सहारनपुर जिला]] के [[फैज़ाबाद|फैजाबाद]] ग्राम के समीप मैदान में आती है। उस समय इसके तट तक की ऊँचाई [[समुद्र]] सतह से लगभग 1276 फीट रह जाती है।
===ऐतिहासिक स्रोत ===
भुवनभास्कर सूर्य इनके पिता, मृत्यु के देवता इसके [[यमराज]] भाई और भगवान [[कृष्ण|श्री कृष्ण]] इनके पति स्वीकार्य किये गये हैं। जहाँ भगवान [[कृष्ण|श्री कृष्ण]] ब्रज संस्कृति के जनक कहे जाते हैं, वहाँ यमुना इसकी जननी मानी जाती है। इस प्रकार यह सच्चे अर्थों में ब्रजवासियों की माता है। अतः ब्रज में इसे ''यमुना मैया'' कहते हैं। [[ब्रह्म पुराण]] में यमुना के आध्यात्मिक स्वरुप का स्पष्टीकरण करते हुए विवरण प्रस्तुत किया है - "जो सृष्टि का आधार है और जिसे लक्ष्णों से सच्चिदनंद स्वरुप कहा जाता है, [[उपनिषद्|उपनिषदों]] ने जिसका ब्रह्म रूप से गायन किया है, वही परमतत्व साक्षात् यमुना है। [[गौड़ वैष्णव|गौड़िय]] विद्वान [[श्री रूप गोस्वामी]] ने यमुना को साक्षात् चिदानंदमयी बतलाया है। [[गर्ग संहिता]] में यमुना के पचांग
में पाँच नामों का वर्णन है -
#'''पटल'''
#'''पद्धति'''
#'''कवय'''
#'''स्तोत्र'''
#'''सहस्त्र'''
== प्रवाह क्षेत्र ==
पश्चिमी [[हिमालय]] से निकल कर [[उत्तर प्रदेश]] एवं [[हरियाणा]] की सीमा के सहारे 95 मील का सफर कर उत्तरी [[सहारनपुर]] (मैदानी इलाका) पहुँचती है। फिर यह [[दिल्ली]], [[आगरा]] से होती हुई [[इलाहाबाद|प्रयागराज]] में [[गंगा नदी|गंगा]] नदी में मिल जाती है।
यमुना नदी की औसत गहराई 10 फीट (3 मीटर) और अधिकतम गहराई 35 फीट (11 मीटर) तक है। दिल्ली के निकट नदी में, यह अधिकतम गहराई 68 फीट (50 मीटर) है। आगरा में, यह गहराई 3 फुट (1 मीटर) तक हैं।
=== प्राचीन प्रवाह ===
मैदान में जहाँ इस समय यमुना का प्रवाह है, वहाँ वह सदा से प्रवाहित नहीं होती रही है। पौराणिक अनुश्रुतियों और ऐतिहासिक उल्लेखों से यह ज्ञात होता है, यद्यपि [[यमुना]] पिछले हजारों वर्षों से विधमान है, तथापि इसका प्रवाह समय-समय पर परिवर्तित होता रहा है। अपने सुदीर्घ जीवन काल में यमुना ने जितने स्थान बदले हैं, उनमें से बहुत कम की ही जानकारी प्राप्त हो सकी है।
प्रागऐतिहासिक काल में यमुना [[मधुबन]] के समीप बहती थी, जहाँ उसके तट पर शत्रुध्न जी ने सर्वप्रथम मथुरा नगरी की स्थापना की थी। [[वाल्मीकि रामायण]] और [[विष्णु पुराण]] में इसका विवरण प्राप्त होता है। 1 कृष्ण काल में यमुना का प्रवाह कटरा केशव देव के निकट था। सत्रहवीं शताबदी में भारत आने वाले यूरोपीय विद्वान टेवर्नियर ने [[कटड़ा|कटरा]] के समीप की भूमि को देख कर यह अनुमान लगा लिया था कि वहाँ किसी समय यमुना की धारा थी। इस संदर्भ में ग्राउज़ का मत है कि ऐतिहासिक काल में कटरा के समीप यमुना के प्रवाहित होने की संभावना कम है, किन्तु अत्यन्त प्राचीन काल में वहाँ यमुना अवश्य थी। 2 इससे भी यह सिद्ध होता है कि कृष्ण काल में यमुना का प्रवाह कटरा के समीप ही था।
कनिधंम का अनुमान है, यूनानी लेखकों के समय में यमुना की प्रधान धारा या उसकी एक बड़ी शाखा कटरा केशव देव की पूर्वी दीवार के नीचे बहती होगी। 3 जब मथुरा में [[बौद्ध धर्म]] का व्यापक प्रचार हो गया और यहाँ यमुना के दोनों ओर अनेक संधारम बनाये गये, तब यमुना की मुख्य धारा कटरा से हटकर प्रायः उसी स्थान पर बहती होगी, जहाँ वह अब है, किन्तु उसकी कोई शाखा अथवा सहायक नहीं कटरा के निकट भी विधमान थी। ऐसा अनुमान है, यमुना की वह शाखा बौद्ध काल के बहुत बाद तक संभवतः सोलहवीं शताब्दी तक केशव देव मन्दिर के नीचे बहती रही थी। पहले दो बरसाती नदियाँ 'सरस्वती' और 'कृष्ण गंगा' मथुरा के पश्चिमी भाग में प्रवाहित होकर यमुना में गिरती थीं, जिनकी स्मृति में यमुना के सरस्वती संगम और कृष्ण गंगा नामक घाट हैं। संभव है यमुना की उन सहायक नादियों में से ही कोई कटरा के पास बहती रही हो।
* पुराणों से ज्ञात होता है, प्राचीन वृन्दावन में यमुना गोवर्धन के निकट प्रवाहित होती थी। जबकि वर्तमान में वह गोवर्धन से लगभग 4 मील दूर हो गई है। गोवर्धन के निकटवर्ती दो छोटे ग्राम 'जमुनावती' और परसौली है। वहाँ किसी काल में यमुना के प्रवाहित होने उल्लेख मिलते हैं।
[[वल्लभ सम्प्रदाय]] के [[वार्ता साहित्य]] से ज्ञात होता है कि [[सारस्वत कल्प]] में यमुना नदी जमुनावती ग्राम के समीप बहती थी। उस काल में यमुना नदी की दो धाराऐं थी, एक धारा नंदगाँव, वरसाना, संकेत के निकट बहती हुई गोवर्धन में जमुनावती पर आती थी और दूसरी धारा पीरघाट से होती हुई गोकुल की ओर चली जाती थी। आगे दानों धाराएँ एक होकर वर्तमान आगरा की ओर बढ़ जाती थी।
परासौली में यमुना को धारा प्रवाहित होने का प्रमाण स. 1717 तक मिलता है। यद्यपि इस पर विश्वास होना कठिन है। श्री गंगाप्रसाद कमठान ने [[बृज भाषा|ब्रजभाषा]] के एक मुसलमान भक्त कवि कारबेग उपमान कारे का वृतांत प्रकाशित किया है। काबेग के कथनानुसार वह जमुना के तटवर्ती परासौली गाँव का निवासी था और उसने अपनी रचना सं 1717 में सृजित की थी।
=== आधुनिक प्रवाह ===
वर्तमान समय में [[सहारनपुर]] जिले के [[फैज़ाबाद|फैजाबाद]] गाँव के निकट मैदान में आने पर यह आगे 65 मील तक बढ़ती हुई [[हरियाणा]] के [[अम्बाला|अंबाला]] और [[करनाल]] जिलों को [[उत्तर प्रदेश]] के [[सहारनपुर]] और [[मुज़फ्फरनगर|शामली]] जिलों से अलग करती है। इस भू-भाग में इसमें मस्कर्रा, कठ, [[हिंडन|हिण्डन]] और सबी नामक नदियाँ मिलती हैं, जिनके कारण इसका आकार बहुत बढ़ जाता है। मैदान में आते ही इससे पूर्वी यमुना नहर और पश्चिमी नहर निकाली जाती हैं। ये दोनों नहरें यमुना से पानी लेकर इस भू-भाग की सैकड़ों मील धरती को हरा-भरा और उपज सम्पन्न बना देती हैं।
इस भू-भाग में यमुना की धारा के दोनों ओर [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] और [[उत्तर प्रदेश]] के कई छोटे बड़े नगरों की सीमाएँ हैं, किन्तु इसके ठीक तट पर बसा हुआ सबसे प्राचीन और पहला नगर दिल्ली है, जो लम्बे समय से भारत की राजधानी है। दिल्ली के लाखों की आबादी की आवश्यकता की पूर्ति करते हुए और वहाँ की ढेरों गंदगी को बहाती हुई यह ओखला नामक स्थान पर पहुँचती है। यहाँ पर इस पर एक बड़ा बांध बांधा गया है जिससे नदी की धारा पूरी तरह नियंत्रित कर ली गयी है। इसी बांध से आगरा नहर निकलती है, जो हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सैकड़ों मील भूमि को सिंचित करती है। दिल्ली से आगे यह हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा बनाती हुई तथा हरियाणा के फरीदाबाद जिले को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से अलग करती हुई उत्तर प्रदेश में प्रवाहित होने लगती है।
=== तटवर्ती स्थान ===
ब्रज प्रदेश की सांस्कृतिक सीमा में यमुना नदी का प्रथम प्रवेश बुलंदशहर जिला की खुर्जा तहसील के 'जेबर' नामक कस्बा के निकट होता है। वहाँ से यह दक्षिण की ओर बहती हुई फरीदाबाद (हरियाणा) जिले की पलवल तहसील और अलीगढ़, उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले की खैर तहसील की सीमा निर्मित करती है। इसके बाद यह छाता तहसील के शाहपुर ग्राम के निकट यह मथुरा जिले में प्रवेश करती है और मथुरा जिले की छाता और भाँट तहसीलों की सीमा निर्धारित करती है। जेबर से शेरगढ़ तक यह दक्षिणाभिमुख प्रवाहित होती है उसके बाद कुछ पूर्व की ओर मुड़ जाती है। ब्रज क्षेत्र में यमुना के तट पर बसा हुआ पहिला उल्लेखनीय स्थान शेरगढ़ है।
शेरगढ़ से कुछ दूर तक पूर्व की दिशा में बह कर फिर यह मथुरा तक दक्षिण दिशा में ही बहती है। मार्ग में इसके दोनों ओर पुराण प्रसिद्ध वन और उपवन तथा कृष्ण लीला स्थान विधमान हैं। यहाँ पर यह भाँट से वृन्दावन तक बलखाती हुई बहती है और वृन्दावन को यह तीन ओर से घेर लेती है। पुराणों से ज्ञात होता है, प्राचीन काल में वृन्दावन में यमुना की कई धाराएँ थीं, जिनके कारण वह लगभग प्रायद्वीप सा बन गया था। उसमें अनेक सुन्दर वनखंड और घास के मैदान थे, जहाँ भगवान श्री कृष्ण अपने साथी गोप बालकों के साथ गायें चराया करते थे।
वर्तमान काल में यमुना की एक ही धारा है और उसी के तट पर [[वृन्दावन]] बसा हुआ है। वहाँ मध्य काल में अनेक धर्माचार्यों और भक्त कवियों ने निवास कर कृष्णोपासना और [[कृष्ण]] भक्ति का प्रचार किया था। वृन्दावन में यमुना के किनारों पर बड़े सुन्दर घाट बने हुए हैं और उन पर अनेक मंदिर-देवालय, छतरियां और धर्मशालाएँ है। इनसे यमुना के तट की शोभा अधिक बढ़ जाती है। वृन्दावन से आगे दक्षिण की ओर बहती हुई यह नदी मथुरा नगर में प्रवेश करती है।
[[मथुरा]] यमुना के तट पर बसा हुआ एक ऐसा ऐतिहासिक और धार्मिक स्थान है, जिसकी दीर्घकालीन गौरव गाथा प्रसिद्ध है। यहाँ पर भगवान श्री कृष्ण ने अवतार धारण किया था, जिससे इसके महत्व की वृद्धि हुई है। यहाँ भी यमुना के तट पर बड़े सुन्दर घाट बने हुए हैं। यमुना में नाव से अथवा पुल से देखने पर मथुरा नगर और उसके घाटों का मनोरम द्रष्य दिखाई देता है। मथुरा में यमुना पर दो पक्के पुल बने हैं जिनमें से एक पर रेलगाड़ी चलती है तथा दूसरे पर सड़क परिवहन चलते हैं। मथुरा नगर की दक्षिणी सीमा पर अब गोकुल बैराज भी निर्मित कराया गया है जिसका उद्देश्य ब्रज के भूमिगत जल के स्तर को पुनः वापिस लाना और ब्रज की उपजाऊ भूमि को अधिकाधिक सिंचित करना है। विगत काल में यमुना मथुरा-वृन्दावन में एक विशाल नदी के रूप में प्रवाहित होती थी, किन्तु जबसे इससे नहरें निकाली गयी हैं, तब से इसका जलीय आकार छोटा हो गया है। केवल वर्षा ॠतु में ही यह अपना पूर्ववर्ती रूप धारण करती है। उस समय मीलों तक इसका पानी फैल जाता है।
मथुरा से आगे यमुना के तट पर बायीं ओर गोकुल और महावन जैसे धार्मिक स्थल हैं तथा दायें तट पर पहले औरंगाबाद और उसके बाद फरह जैसे ग्राम हैं। यहाँ तक यमुना के किनारे रेतीले हैं, किन्तु आगे पथरीले और चट्टानी हो जाते हैं, जिससे जल धारा बलखाती हुई मनोरम रूप में प्रवाहित होती है।
सादाबाद तहसील के ग्राम अकोस के पास यमुना मथुरा जिले की सीमा से बाहर निकलती है और फिर कुछ दूर तक मथुरा और आगरा जिलों की सीमा निर्मित करती है। सादाबाद तहसील के मंदौर ग्राम के पास यह आगरा जिले में प्रवेश करती है। वहाँ इसमें करबन और गंभीर नामक नदियां आकर मिलती हैं।
आगरा जिले में प्रवेश करने पर नगला अकोस के पास इसके पानी से निर्मित कीठम झील है, जो सैलानियों के लिये बड़ी आकर्षक है। कीठम से रुनकता तक यमुना के किनारे एक संरक्षित वनखंड का निर्माण किया गया है, जो 'सूरदास वन' कहलाता है। रुनकता के समीप ही यमुना तट पर 'गोघात' का वह प्राचीन धार्मिक स्थल है, जहाँ महात्मा सूरदास ने 12 वर्षों तक निवास किया था और जहाँ उन्होंने महाप्रभु बल्लभाचार्य से दीक्षा ली थी।
यमुना के तटवर्ती स्थानों में दिल्ली के बाद सर्वाधिक बड़ा नगर आगरा ही है। यह एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक, व्यापारिक एंव पर्यटन स्थल है, जो मुगल सम्राटों की राजधानी भी रह चुका है। यह यमुना तट से काफी ऊँचाई पर बसा हुआ है - यमुना दिल्ली के पूर्वी भाग में बहती है, उत्तर से दक्षिण की तरफ़। यहाँ पर भी यमुना पर दो पुल निर्मित हैं। आगरा में यमुना तट पर जो इमारतें है, मुगल बादशाहों द्वारा निर्मित किला और ताज महल पर्यटकों के निमित्त अत्यधिक प्रसिद्ध हैं।
आगरा नगर से आगे यमुना के एक ओर फिरोजाबाद और दूसरी ओर फतेहबाद जिला और तहसील स्थित है। उनके बाद बटेश्वर का सुप्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल आता है, जहाँ ब्रज की सांस्कृतिक सीमा समाप्त होती है। बटेश्वर का प्राचीन नाम 'सौरपुर' है, जो भगवान श्री कृष्ण के पितामह शूर की राजधानी थी। यहाँ पर यमुना ने बल खाते हुए बड़ा मोड़ लिया है, जिससे बटेश्वर एक द्वीप के समान ज्ञात होता है। इस स्थान पर कार्तिक पूर्णमा को यमुना स्नान का एक बड़ा मेला लगता है।
बटेश्वर से आगे इटावा एक नगर के रूप में यमुना तट पर बसा हुआ है। यह भी आगरा और बटेश्वर की भाँति ऊँचाई पर बसा हुआ है। यमुना के तट पर जितने ऊँचे कगार आगरा और इटावा जिलों में हैं, उतने मैदान में अन्यत्र नहीं हैं। इटावा से आगे मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध नदी चम्बल यमुना में आकर मिलती है, जिससे इसका आकार विस्तीर्ण हो जाता है, अपने उद्गम से लेकर चम्बल के संगम तक यमुना नदी, गंगा (गङ्गा) नदी के समानान्तर बहती है। इसके आगे उन दोनों के बीच के अन्तर कम होता जाता है और अन्त में प्रयाग में जाकर वे दोनों संगम बनाकर मिश्रित हो जाती हैं।
[[चम्बल नदी|चम्बल]] के पश्चात यमुना नदी में मिलने वाली नदियों में
सेंगर, छोटी सिन्ध, बतवा और केन उल्लेखनीय हैं। इटावा के पश्चात यमुना के तटवर्ती नगरों में काल्पी, हमीर पुर और प्रयाग मुख्य है। प्रयाग में यमुना एक विशाल नदी के रूप में प्रस्तुत होती है और वहाँ के प्रसिद्ध ऐतिहासिक किले के नीचे [[गंगा |गङ्गा]] में मिल जाती है। प्रयाग में यमुना पर एक विशाल पुल निर्मित किया गया है, जो दो मंजिला है। इसे उत्तर प्रदेश का विशालतम सेतु माना जाता है। यमुना और गंगा के संगम के कारण ही, प्रयाग को तीर्थराज का महत्व प्राप्त हुआ है। यमुना नदी की कुल लम्बाई उद्गम से लेकर प्रयाग संगम तक लगभग 860
मील है।
==सांस्कृतिक महत्त्व ==
भारतवर्ष की सर्वाधिक पवित्र और प्राचीन नदियों में यमुना की गणना गंगा के साथ की जाती है। यमुना और गंगा के दो आब की पुण्यभूमि में ही आर्यों की पुरातन संस्कृति का गौरवशाली रूप बन सका था। ब्रजमंडल की तो यमुना एक मात्र महत्वपूर्ण नदी है। जहाँ तक ब्रज संस्कृति का सम्बंध है, यमुना को केवल नदी कहना ही पर्याप्त नहीं है। वस्तुतः यह ब्रज संस्कृति की सहायक, इसकी दीर्ध कालीन परम्परा की प्रेरक और यहाँ की धार्मिक भावना का प्रमुख आधार रही है।
पौराणिक अनुश्रुतियों के अनुसार यह देम में यमुना जी के एक हजार नामों से उसकी प्रशस्ति का गायन किया गया है। ३ यमुना के परमभक्त इसका दैनिक रूप से प्रतिदिन पाठ करते हैं।
ब्रजभाषा के भक्त कवियों और विशेषतः वल्लभ सम्प्रदायी कवियों ने गिरिराज गोवर्धन की भाँति यमुना के प्रति भी अतिशय श्रद्धा व्यक्त की है। इस सम्प्रदाय का शायद ही कोई कवि हो, जिसने अपनी यमुना के प्रति अपनी काव्य - श्रद्धांजलि अर्पित न की हो। उनका यमुना स्तुति संबंधी साहित्य ब्रजभाषा भक्ति काव्य का एक उल्लेखनीय अंग है।
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Anitya Gautam
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[[चित्र:Yamuna (Kesi Ghata).jpg|thumb|right|200px|वृंदावन के पवित्र केशीघाट पर यमुना]]
[[चित्र:Taj Majal y rio Yamuna.JPG|thumb|200px|right|सुबह के धुँधलके में यमुनातट पर ताज]]
'''दुनिया के प्रमुख शहरो की तरह [[नई दिल्ली]] शहर यमुना नदी के किनारे बसा है।''' यमुना [[भारत]] की एक [[नदी]] है। यह [[गंगा नदी]] की सबसे बड़ी सहायक नदी है जो [[यमुनोत्री]] ([उत्तरकाशी] से ३० किमी उत्तर, [[गढ़वाल]] में) नामक जगह से निकलती है और [[इलाहाबाद|प्रयाग]] ([[इलाहाबाद|प्रयागराज]]) में [[गंगा नदी|गंगा]] से मिल जाती है। इसकी प्रमुख सहायक नदियों में [[चम्बल नदी|चम्बल]], [[सेंगर]], [[छोटी सिन्धु]], [[बेतवा नदी|बेतवा]] और [[केन नदी|केन]] उल्लेखनीय हैं। यमुना के तटवर्ती नगरों में [[दिल्ली]] और [[आगरा]] के अतिरिक्त [[इटावा]], [[कालपी]], हमीरपुर और प्रयाग मुख्य है। प्रयाग में यमुना एक विशाल नदी के रूप में प्रस्तुत होती है और वहाँ के प्रसिद्ध ऐतिहासिक किले के नीचे गंगा में मिल जाती है।
[[बृज|ब्रज]] की संस्कृति में यमुना का महत्वपूर्ण स्थान है। यमुना एक पवित्र नदी है जो की मथुरा आगरा इटावा औरैया कालपी होते हुए प्रयागराज में गंगा से जय मिलती है यमुना नदी हिंदू धर्म ग्रंथो के अनुसार काफी प्राचीन नदी है जो की गंगा नदी की एक सबसे बड़ी सहायक नदी है जिसका जल विस्तार क्षेत्र काफी ज्यादातर है गंगा के जल विस्तार का यमुना में 40.2 प्रतिशत [[जल]] विस्तार है भारत की सबसे बड़ी सहायक नदी है यह पौराणिक कथाओं के अनुसार यमुना सूर्य की बेटी तथा यम की बहन है धर्म ग्रंथो के अनुसार यमुना को कालिंद्री भी कहा जाता है क्योंकि यमुना जो सूर्य की पुत्री है ना उनका बचपन का नाम कालिंद्री था
== उद्गम ==
यह [[यमुनोत्री]] नामक जगह से निकलती है। यह [[गंगा नदी]] की सबसे बड़ी सहायक नदी है। यमुना का उद्गम स्थान [[हिमालय]] के हिमाच्छादित श्रंग बंदरपुच्छ ऊँचाई 6200 मीटर से 7 से 8 मील उत्तर-पश्चिम में स्थित कालिंद पर्वत है, जिसके नाम पर यमुना को कालिंदजा अथवा [[कालिंदी नदी|कालिंदी]] कहा जाता है। अपने उद्गम से आगे कई मील तक विशाल हिमगारों और हिम मंडित कंदराओं में अप्रकट रूप से बहती हुई तथा पहाड़ी ढलानों पर से अत्यन्त तीव्रतापूर्वक उतरती हुई इसकी धारा यमुनोत्तरी [[पर्वत]] (20,731 फीट ऊँचाई) से प्रकट होती है। वहाँ इसके दर्शनार्थ हजारों श्रद्धालु यात्री प्रतिवर्ष भारत वर्ष के कोने-कोने से पहुँचते हैं। स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार, [[उत्तराखंड]] के गढ़वाल हिमालय में स्थित यमकुंड शिखर (31°01′48″N, 79°29′22″E) को भी यमुना के पवित्र उद्गम क्षेत्र से संबद्ध माना जाता है। यह पर्वत हिमनदीय जलागम क्षेत्र का भाग है, जहाँ से प्राप्त हिमपिघलन जल यमुना नदी तंत्र में योगदान देता है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह क्षेत्र पारिस्थितिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है<ref>{{cite web |last1=Sharma |first1=Tushar |title=Yamkund Shikhar: The sacred birthplace of the Yamuna |url=https://sundayguardianlive.com/national/yamkund-shikhar-the-sacred-birthplace-of-the-yamuna-238110/ |website=The Sunday Guardian |publisher=The Sunday Guardian |access-date=29 जुलाई 2026 |language=en |date=16 जुलाई 2026}}</ref>
यमुनोत्तरी पर्वत से निकलकर यह नदी अनेक पहाड़ी दरों और घाटियों में प्रवाहित होती हुई तथा वदियर, कमलाद, वदरी अस्लौर जैसी छोटी और तोंस जैसी बड़ी पहाड़ी नदियों को अपने अंचल में समेटती हुई आगे बढ़ती है। उसके बाद यह हिमालय को छोड़ कर [[दून की घाटी]] में प्रवेश करती है। वहाँ से कई मील तक दक्षिण-पश्चिम की और बहती हुई तथा गिरि, सिरमौर और आशा नामक छोटी नदियों को अपनी गोद में लेती हुई यह अपने उद्गम से लगभग ९५ मील दूर वर्तमान [[सहारनपुर जिला]] के [[फैज़ाबाद|फैजाबाद]] ग्राम के समीप मैदान में आती है। उस समय इसके तट तक की ऊँचाई [[समुद्र]] सतह से लगभग 1276 फीट रह जाती है।
===ऐतिहासिक स्रोत ===
भुवनभास्कर सूर्य इनके पिता, मृत्यु के देवता इसके [[यमराज]] भाई और भगवान [[कृष्ण|श्री कृष्ण]] इनके पति स्वीकार्य किये गये हैं। जहाँ भगवान [[कृष्ण|श्री कृष्ण]] ब्रज संस्कृति के जनक कहे जाते हैं, वहाँ यमुना इसकी जननी मानी जाती है। इस प्रकार यह सच्चे अर्थों में ब्रजवासियों की माता है। अतः ब्रज में इसे ''यमुना मैया'' कहते हैं। [[ब्रह्म पुराण]] में यमुना के आध्यात्मिक स्वरुप का स्पष्टीकरण करते हुए विवरण प्रस्तुत किया है - "जो सृष्टि का आधार है और जिसे लक्ष्णों से सच्चिदनंद स्वरुप कहा जाता है, [[उपनिषद्|उपनिषदों]] ने जिसका ब्रह्म रूप से गायन किया है, वही परमतत्व साक्षात् यमुना है। [[गौड़ वैष्णव|गौड़िय]] विद्वान [[श्री रूप गोस्वामी]] ने यमुना को साक्षात् चिदानंदमयी बतलाया है। [[गर्ग संहिता]] में यमुना के पचांग
में पाँच नामों का वर्णन है -
#'''पटल'''
#'''पद्धति'''
#'''कवय'''
#'''स्तोत्र'''
#'''सहस्त्र'''
== प्रवाह क्षेत्र ==
पश्चिमी [[हिमालय]] से निकल कर [[उत्तर प्रदेश]] एवं [[हरियाणा]] की सीमा के सहारे 95 मील का सफर कर उत्तरी [[सहारनपुर]] (मैदानी इलाका) पहुँचती है। फिर यह [[दिल्ली]], [[आगरा]] से होती हुई [[इलाहाबाद|प्रयागराज]] में [[गंगा नदी|गंगा]] नदी में मिल जाती है।
यमुना नदी की औसत गहराई 10 फीट (3 मीटर) और अधिकतम गहराई 35 फीट (11 मीटर) तक है। दिल्ली के निकट नदी में, यह अधिकतम गहराई 68 फीट (50 मीटर) है। आगरा में, यह गहराई 3 फुट (1 मीटर) तक हैं।
=== प्राचीन प्रवाह ===
मैदान में जहाँ इस समय यमुना का प्रवाह है, वहाँ वह सदा से प्रवाहित नहीं होती रही है। पौराणिक अनुश्रुतियों और ऐतिहासिक उल्लेखों से यह ज्ञात होता है, यद्यपि [[यमुना]] पिछले हजारों वर्षों से विधमान है, तथापि इसका प्रवाह समय-समय पर परिवर्तित होता रहा है। अपने सुदीर्घ जीवन काल में यमुना ने जितने स्थान बदले हैं, उनमें से बहुत कम की ही जानकारी प्राप्त हो सकी है।
प्रागऐतिहासिक काल में यमुना [[मधुबन]] के समीप बहती थी, जहाँ उसके तट पर शत्रुध्न जी ने सर्वप्रथम मथुरा नगरी की स्थापना की थी। [[वाल्मीकि रामायण]] और [[विष्णु पुराण]] में इसका विवरण प्राप्त होता है। 1 कृष्ण काल में यमुना का प्रवाह कटरा केशव देव के निकट था। सत्रहवीं शताबदी में भारत आने वाले यूरोपीय विद्वान टेवर्नियर ने [[कटड़ा|कटरा]] के समीप की भूमि को देख कर यह अनुमान लगा लिया था कि वहाँ किसी समय यमुना की धारा थी। इस संदर्भ में ग्राउज़ का मत है कि ऐतिहासिक काल में कटरा के समीप यमुना के प्रवाहित होने की संभावना कम है, किन्तु अत्यन्त प्राचीन काल में वहाँ यमुना अवश्य थी। 2 इससे भी यह सिद्ध होता है कि कृष्ण काल में यमुना का प्रवाह कटरा के समीप ही था।
कनिधंम का अनुमान है, यूनानी लेखकों के समय में यमुना की प्रधान धारा या उसकी एक बड़ी शाखा कटरा केशव देव की पूर्वी दीवार के नीचे बहती होगी। 3 जब मथुरा में [[बौद्ध धर्म]] का व्यापक प्रचार हो गया और यहाँ यमुना के दोनों ओर अनेक संधारम बनाये गये, तब यमुना की मुख्य धारा कटरा से हटकर प्रायः उसी स्थान पर बहती होगी, जहाँ वह अब है, किन्तु उसकी कोई शाखा अथवा सहायक नहीं कटरा के निकट भी विधमान थी। ऐसा अनुमान है, यमुना की वह शाखा बौद्ध काल के बहुत बाद तक संभवतः सोलहवीं शताब्दी तक केशव देव मन्दिर के नीचे बहती रही थी। पहले दो बरसाती नदियाँ 'सरस्वती' और 'कृष्ण गंगा' मथुरा के पश्चिमी भाग में प्रवाहित होकर यमुना में गिरती थीं, जिनकी स्मृति में यमुना के सरस्वती संगम और कृष्ण गंगा नामक घाट हैं। संभव है यमुना की उन सहायक नादियों में से ही कोई कटरा के पास बहती रही हो।
* पुराणों से ज्ञात होता है, प्राचीन वृन्दावन में यमुना गोवर्धन के निकट प्रवाहित होती थी। जबकि वर्तमान में वह गोवर्धन से लगभग 4 मील दूर हो गई है। गोवर्धन के निकटवर्ती दो छोटे ग्राम 'जमुनावती' और परसौली है। वहाँ किसी काल में यमुना के प्रवाहित होने उल्लेख मिलते हैं।
[[वल्लभ सम्प्रदाय]] के [[वार्ता साहित्य]] से ज्ञात होता है कि [[सारस्वत कल्प]] में यमुना नदी जमुनावती ग्राम के समीप बहती थी। उस काल में यमुना नदी की दो धाराऐं थी, एक धारा नंदगाँव, वरसाना, संकेत के निकट बहती हुई गोवर्धन में जमुनावती पर आती थी और दूसरी धारा पीरघाट से होती हुई गोकुल की ओर चली जाती थी। आगे दानों धाराएँ एक होकर वर्तमान आगरा की ओर बढ़ जाती थी।
परासौली में यमुना को धारा प्रवाहित होने का प्रमाण स. 1717 तक मिलता है। यद्यपि इस पर विश्वास होना कठिन है। श्री गंगाप्रसाद कमठान ने [[बृज भाषा|ब्रजभाषा]] के एक मुसलमान भक्त कवि कारबेग उपमान कारे का वृतांत प्रकाशित किया है। काबेग के कथनानुसार वह जमुना के तटवर्ती परासौली गाँव का निवासी था और उसने अपनी रचना सं 1717 में सृजित की थी।
=== आधुनिक प्रवाह ===
वर्तमान समय में [[सहारनपुर]] जिले के [[फैज़ाबाद|फैजाबाद]] गाँव के निकट मैदान में आने पर यह आगे 65 मील तक बढ़ती हुई [[हरियाणा]] के [[अम्बाला|अंबाला]] और [[करनाल]] जिलों को [[उत्तर प्रदेश]] के [[सहारनपुर]] और [[मुज़फ्फरनगर|शामली]] जिलों से अलग करती है। इस भू-भाग में इसमें मस्कर्रा, कठ, [[हिंडन|हिण्डन]] और सबी नामक नदियाँ मिलती हैं, जिनके कारण इसका आकार बहुत बढ़ जाता है। मैदान में आते ही इससे पूर्वी यमुना नहर और पश्चिमी नहर निकाली जाती हैं। ये दोनों नहरें यमुना से पानी लेकर इस भू-भाग की सैकड़ों मील धरती को हरा-भरा और उपज सम्पन्न बना देती हैं।
इस भू-भाग में यमुना की धारा के दोनों ओर [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] और [[उत्तर प्रदेश]] के कई छोटे बड़े नगरों की सीमाएँ हैं, किन्तु इसके ठीक तट पर बसा हुआ सबसे प्राचीन और पहला नगर दिल्ली है, जो लम्बे समय से भारत की [[राजधानी]] है। दिल्ली के लाखों की आबादी की आवश्यकता की पूर्ति करते हुए और वहाँ की ढेरों गंदगी को बहाती हुई यह ओखला नामक स्थान पर पहुँचती है। यहाँ पर इस पर एक बड़ा बांध बांधा गया है जिससे नदी की धारा पूरी तरह नियंत्रित कर ली गयी है। इसी बांध से आगरा नहर निकलती है, जो हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सैकड़ों मील भूमि को सिंचित करती है। दिल्ली से आगे यह हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा बनाती हुई तथा हरियाणा के फरीदाबाद जिले को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से अलग करती हुई उत्तर प्रदेश में प्रवाहित होने लगती है।
=== तटवर्ती स्थान ===
ब्रज प्रदेश की सांस्कृतिक सीमा में यमुना नदी का प्रथम प्रवेश बुलंदशहर जिला की खुर्जा तहसील के 'जेबर' नामक कस्बा के निकट होता है। वहाँ से यह दक्षिण की ओर बहती हुई फरीदाबाद (हरियाणा) जिले की पलवल तहसील और अलीगढ़, उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले की खैर तहसील की सीमा निर्मित करती है। इसके बाद यह छाता तहसील के शाहपुर ग्राम के निकट यह मथुरा जिले में प्रवेश करती है और मथुरा जिले की छाता और भाँट तहसीलों की सीमा निर्धारित करती है। जेबर से शेरगढ़ तक यह दक्षिणाभिमुख प्रवाहित होती है उसके बाद कुछ पूर्व की ओर मुड़ जाती है। ब्रज क्षेत्र में यमुना के तट पर बसा हुआ पहिला उल्लेखनीय स्थान शेरगढ़ है।
शेरगढ़ से कुछ दूर तक पूर्व की दिशा में बह कर फिर यह मथुरा तक दक्षिण दिशा में ही बहती है। मार्ग में इसके दोनों ओर पुराण प्रसिद्ध वन और उपवन तथा कृष्ण लीला स्थान विधमान हैं। यहाँ पर यह भाँट से वृन्दावन तक बलखाती हुई बहती है और वृन्दावन को यह तीन ओर से घेर लेती है। पुराणों से ज्ञात होता है, प्राचीन काल में वृन्दावन में यमुना की कई धाराएँ थीं, जिनके कारण वह लगभग प्रायद्वीप सा बन गया था। उसमें अनेक सुन्दर वनखंड और घास के मैदान थे, जहाँ भगवान श्री कृष्ण अपने साथी गोप बालकों के साथ गायें चराया करते थे।
वर्तमान काल में यमुना की एक ही धारा है और उसी के तट पर [[वृन्दावन]] बसा हुआ है। वहाँ मध्य काल में अनेक धर्माचार्यों और भक्त कवियों ने निवास कर कृष्णोपासना और [[कृष्ण]] भक्ति का प्रचार किया था। वृन्दावन में यमुना के किनारों पर बड़े सुन्दर घाट बने हुए हैं और उन पर अनेक मंदिर-देवालय, छतरियां और धर्मशालाएँ है। इनसे यमुना के तट की शोभा अधिक बढ़ जाती है। वृन्दावन से आगे दक्षिण की ओर बहती हुई यह नदी मथुरा नगर में प्रवेश करती है।
[[मथुरा]] यमुना के तट पर बसा हुआ एक ऐसा ऐतिहासिक और धार्मिक स्थान है, जिसकी दीर्घकालीन गौरव गाथा प्रसिद्ध है। यहाँ पर भगवान श्री कृष्ण ने अवतार धारण किया था, जिससे इसके महत्व की वृद्धि हुई है। यहाँ भी यमुना के तट पर बड़े सुन्दर घाट बने हुए हैं। यमुना में नाव से अथवा पुल से देखने पर मथुरा नगर और उसके घाटों का मनोरम द्रष्य दिखाई देता है। मथुरा में यमुना पर दो पक्के पुल बने हैं जिनमें से एक पर रेलगाड़ी चलती है तथा दूसरे पर सड़क परिवहन चलते हैं। मथुरा नगर की दक्षिणी सीमा पर अब गोकुल बैराज भी निर्मित कराया गया है जिसका उद्देश्य ब्रज के भूमिगत जल के स्तर को पुनः वापिस लाना और ब्रज की उपजाऊ भूमि को अधिकाधिक सिंचित करना है। विगत काल में यमुना मथुरा-वृन्दावन में एक विशाल नदी के रूप में प्रवाहित होती थी, किन्तु जबसे इससे नहरें निकाली गयी हैं, तब से इसका जलीय आकार छोटा हो गया है। केवल वर्षा ॠतु में ही यह अपना पूर्ववर्ती रूप धारण करती है। उस समय मीलों तक इसका पानी फैल जाता है।
मथुरा से आगे यमुना के तट पर बायीं ओर गोकुल और महावन जैसे धार्मिक स्थल हैं तथा दायें तट पर पहले औरंगाबाद और उसके बाद फरह जैसे ग्राम हैं। यहाँ तक यमुना के किनारे रेतीले हैं, किन्तु आगे पथरीले और चट्टानी हो जाते हैं, जिससे जल धारा बलखाती हुई मनोरम रूप में प्रवाहित होती है।
सादाबाद तहसील के ग्राम अकोस के पास यमुना मथुरा जिले की सीमा से बाहर निकलती है और फिर कुछ दूर तक मथुरा और आगरा जिलों की सीमा निर्मित करती है। सादाबाद तहसील के मंदौर ग्राम के पास यह आगरा जिले में प्रवेश करती है। वहाँ इसमें करबन और गंभीर नामक नदियां आकर मिलती हैं।
आगरा जिले में प्रवेश करने पर नगला अकोस के पास इसके पानी से निर्मित कीठम झील है, जो सैलानियों के लिये बड़ी आकर्षक है। कीठम से रुनकता तक यमुना के किनारे एक संरक्षित वनखंड का निर्माण किया गया है, जो 'सूरदास वन' कहलाता है। रुनकता के समीप ही यमुना तट पर 'गोघात' का वह प्राचीन धार्मिक स्थल है, जहाँ महात्मा सूरदास ने 12 वर्षों तक निवास किया था और जहाँ उन्होंने महाप्रभु बल्लभाचार्य से दीक्षा ली थी।
यमुना के तटवर्ती स्थानों में दिल्ली के बाद सर्वाधिक बड़ा नगर आगरा ही है। यह एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक, व्यापारिक एंव पर्यटन स्थल है, जो मुगल सम्राटों की राजधानी भी रह चुका है। यह यमुना तट से काफी ऊँचाई पर बसा हुआ है - यमुना दिल्ली के पूर्वी भाग में बहती है, उत्तर से दक्षिण की तरफ़। यहाँ पर भी यमुना पर दो पुल निर्मित हैं। आगरा में यमुना तट पर जो इमारतें है, मुगल बादशाहों द्वारा निर्मित किला और ताज महल पर्यटकों के निमित्त अत्यधिक प्रसिद्ध हैं।
आगरा नगर से आगे यमुना के एक ओर फिरोजाबाद और दूसरी ओर फतेहबाद जिला और तहसील स्थित है। उनके बाद बटेश्वर का सुप्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल आता है, जहाँ ब्रज की सांस्कृतिक सीमा समाप्त होती है। बटेश्वर का प्राचीन नाम 'सौरपुर' है, जो भगवान श्री कृष्ण के पितामह शूर की राजधानी थी। यहाँ पर यमुना ने बल खाते हुए बड़ा मोड़ लिया है, जिससे बटेश्वर एक द्वीप के समान ज्ञात होता है। इस स्थान पर कार्तिक पूर्णमा को यमुना स्नान का एक बड़ा मेला लगता है।
बटेश्वर से आगे इटावा एक नगर के रूप में यमुना तट पर बसा हुआ है। यह भी आगरा और बटेश्वर की भाँति ऊँचाई पर बसा हुआ है। यमुना के तट पर जितने ऊँचे कगार आगरा और इटावा जिलों में हैं, उतने मैदान में अन्यत्र नहीं हैं। इटावा से आगे मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध नदी चम्बल यमुना में आकर मिलती है, जिससे इसका आकार विस्तीर्ण हो जाता है, अपने उद्गम से लेकर चम्बल के संगम तक यमुना नदी, गंगा (गङ्गा) नदी के समानान्तर बहती है। इसके आगे उन दोनों के बीच के अन्तर कम होता जाता है और अन्त में प्रयाग में जाकर वे दोनों संगम बनाकर मिश्रित हो जाती हैं।
[[चम्बल नदी|चम्बल]] के पश्चात यमुना नदी में मिलने वाली नदियों में
सेंगर, छोटी सिन्ध, बतवा और केन उल्लेखनीय हैं। इटावा के पश्चात यमुना के तटवर्ती नगरों में काल्पी, हमीर पुर और प्रयाग मुख्य है। प्रयाग में यमुना एक विशाल नदी के रूप में प्रस्तुत होती है और वहाँ के प्रसिद्ध ऐतिहासिक किले के नीचे [[गंगा |गङ्गा]] में मिल जाती है। प्रयाग में यमुना पर एक विशाल पुल निर्मित किया गया है, जो दो मंजिला है। इसे उत्तर प्रदेश का विशालतम सेतु माना जाता है। यमुना और गंगा के संगम के कारण ही, प्रयाग को तीर्थराज का महत्व प्राप्त हुआ है। यमुना नदी की कुल लम्बाई उद्गम से लेकर प्रयाग संगम तक लगभग 860
मील है।
==सांस्कृतिक महत्त्व ==
भारतवर्ष की सर्वाधिक पवित्र और प्राचीन नदियों में यमुना की गणना गंगा के साथ की जाती है। यमुना और गंगा के दो आब की पुण्यभूमि में ही आर्यों की पुरातन संस्कृति का गौरवशाली रूप बन सका था। ब्रजमंडल की तो यमुना एक मात्र महत्वपूर्ण नदी है। जहाँ तक ब्रज संस्कृति का सम्बंध है, यमुना को केवल नदी कहना ही पर्याप्त नहीं है। वस्तुतः यह ब्रज संस्कृति की सहायक, इसकी दीर्ध कालीन परम्परा की प्रेरक और यहाँ की धार्मिक भावना का प्रमुख आधार रही है।
पौराणिक अनुश्रुतियों के अनुसार यह देम में यमुना जी के एक हजार नामों से उसकी प्रशस्ति का गायन किया गया है। ३ यमुना के परमभक्त इसका दैनिक रूप से प्रतिदिन पाठ करते हैं।
ब्रजभाषा के भक्त कवियों और विशेषतः वल्लभ सम्प्रदायी कवियों ने गिरिराज गोवर्धन की भाँति यमुना के प्रति भी अतिशय श्रद्धा व्यक्त की है। इस सम्प्रदाय का शायद ही कोई कवि हो, जिसने अपनी यमुना के प्रति अपनी काव्य - श्रद्धांजलि अर्पित न की हो। उनका यमुना स्तुति संबंधी साहित्य ब्रजभाषा भक्ति काव्य का एक उल्लेखनीय अंग है।
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[[श्रेणी:भारत की नदियाँ]]
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'''गूगल स्कॉलर''' एक मुक्त रूप से सुलभ [[खोज इंजन|वेब खोज इंजन]] है जो विभिन्न प्रकाशन प्रारूपों और विषयों में विद्वतापूर्ण साहित्य के सम्पूर्ण पाठ को अनुक्रमित करता है। नवंबर 2004 में इसे बीटा में जारी किया गया, गूगल स्कॉलर तालिका में यूरोप और अमेरिका के सबसे अधिक विद्वतापूर्ण प्रकाशकों की सर्वाधिक मित्र-समीक्षित ऑनलाइन पत्रिकाएं शामिल हैं। संचालन में यह एल्ज़ेवियर, CiteSeerX और getCITED से मुफ्त-उपलब्ध साइरस के समान ही है। साथ ही यह सब्सक्रिप्शन-आधारित उपकरण एल्ज़ेवियर के स्कोपस और थोमसन आईएसआई के वेब ऑफ साइंस के समान है। अपने विज्ञापन नारे - "स्टैंड ऑन द शोल्डर ऑफ जायंट्स" - उन विद्वानों के लिए एक इशारा है जो सदियों से अपने क्षेत्र में योगदान देते आ रहे हैं और नवीन बौद्धिक उपलब्धियों के लिए आधार प्रदान करते हैं।
== इतिहास ==
एलेक्स वर्सटेक और अनुराग आचार्य के बीच चर्चा के परिणामस्वरूप गूगल स्कॉलर का उदय हुआ, उस समय वे दोनों गूगल के वेब इंडेक्स के निर्माण कार्य में लगे हुए थे।<ref>{{Cite web |url=http://www.google.com/librariancenter/articles/0612_01.html |title=ह्यूजेस, ट्रेसी (दिसंबर 2006) "एन इंटरव्यू विथ अनुराग आचार्य, गूगल स्कॉलर लीड इंजीनियर" गूगल लाइब्रेरियन सेंट्रल |access-date=22 फ़रवरी 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100301092347/http://www.google.com/librariancenter/articles/0612_01.html |archive-date=1 मार्च 2010 |url-status=live }}</ref><ref>[http://www.indolink.com/SciTech/fr010305-075445.php असीसी, फ्रांसिस सी.] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110608194910/http://www.indolink.com/SciTech/fr010305-075445.php |date=8 जून 2011 }}([http://www.indolink.com/SciTech/fr010305-075445.php 3 जनवरी 2005) अनुराग आचार्य ने "गूगल स्कॉलर्ली लीप की मदद की" ''INDOlink'' ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110608194910/http://www.indolink.com/SciTech/fr010305-075445.php |date=8 जून 2011 }}</ref>
2006 में, गूगल स्कॉलर के एक संभावित प्रतिद्वंद्वी [[माइक्रोसॉफ़्ट|माइक्रोसॉफ्ट]] के विंडोज लाइव एकेडमिक खोज के जारी होने की प्रतिक्रिया में बिबलियोग्राफी मैनेजर (रेफवर्क्स, रेफमैन, एंडनोट और बिब टैक्स) का इस्तेमाल करते हुए एक साइटेशन आयात सुविधा को लागू किया गया। इसी तरह की सुविधाएं साइटसीर और साइरस जैसे अन्य खोज इंजनो का भी हिस्सा हैं।
2007 में, आचार्य ने घोषणा की कि गूगल स्कॉलर में डिजिटलीकरण और अपने प्रकाशकों के साथ समझोते में पत्रिकाओं के लेखों के आयोजन के लिए एक प्रोग्राम की शुरूआत होगी, यह गूगल बुक्स से अलग होने का एक प्रयास है जिनमें पुराने पत्रिकाओं का स्कैन में विशिष्ट अंकों में विशिष्ट लेखों को पहचानने के लिए आवश्यक मेटाडेटा शामिल नहीं था।<ref>बारबरा क्विंट: ''[http://newsbreaks.infotoday.com/nbReader.asp?ArticleId=37309 चेंजेस एट गूगल स्कॉलर: ए कनवरसेशन विथ अनुराग आचार्य] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110326003109/http://newsbreaks.infotoday.com/nbReader.asp?ArticleId=37309 |date=26 मार्च 2011 }}'' इंफोरमेशन टूडे, 27 अगस्त 2007</ref>
== सुविधाएं और विनिर्देश ==
गूगल स्कॉलर उपयोगकर्ताओं को लेखों के डिजिटल या भौतिक प्रतियों की खोज की अनुमति देता है, यह खोज ऑनलाइन या पुस्तकालयों में की जा सकती है।<ref>{{Cite web |url=http://scholar.google.com/intl/en/scholar/librarylinks.html |title=गूगल स्कॉलर लाइब्रेरी लिंक |access-date=22 फ़रवरी 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110307111800/http://scholar.google.com/intl/en/scholar/librarylinks.html |archive-date=7 मार्च 2011 |url-status=live }}</ref> "स्कॉलर्ली" खोज, "पूर्ण पाठ पत्रिका लेख, तकनीकी रिपोर्ट, प्रिप्रिंट्स [[शोध-प्रबन्ध|थेसिस]], किताबें और अन्य दस्तावेजों जिनमें शामिल हैं चुनिन्दा वेब पेज जिन्हें 'विद्वतापूर्ण' समझा जाता है" के संदर्भों का उपयोग करते हुए दिखाई देगा। <ref name="pmc1324783">{{cite journal |first=Rita |last=Vine |year=2006 |title=Google Scholar |url=https://archive.org/details/sim_journal-of-the-medical-library-association_2006-01_94_1/page/97 |journal=Journal of the Medical Library Association |volume=94 |issue=1 |pages=97–9 |pmc=1324783 |ref=harv}}</ref><ref name="pmc1324783"/> चूंकि गूगल स्कॉलर के अधिकांश खोज परिणामों में सीधे वाणिज्यिक पत्रिका लेखों के लिंक होते हैं, अधिकांश उपयोगकर्ता लेख शीर्षक के संक्षिप्त सारांश को प्राप्त करने में सक्षम होते हैं साथ ही लेख के बारे में न्यून मात्रा में महत्वपूर्ण सूचना को प्राप्त करते हैं और संभवतः सम्पूर्ण लेख को प्राप्त करने के लिए उसे भुगतान करना होता है।<ref name="pmc1324783"/> नियमित [[गूगल खोज]] सामग्री के साथ गूगल स्कॉलर उपयोग के लिए आसान है, विशिष्ट रूप से उन्नत खोज विकल्प के मदद के साथ, जो कि विशिष्ट पत्रिका या लेख के लिए स्वचालित रूप से सटीक खोज परिणाम को दर्शाते हैं।<ref>{{Cite web |url=http://web.library.emory.edu/services/ressvcs/howguides/googlescholar.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=22 फ़रवरी 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20091022053058/http://web.library.emory.edu/services/ressvcs/howguides/googlescholar.html |archive-date=22 अक्तूबर 2009 |url-status=dead }}</ref> खोजे गए मुख्य शब्द के लिए सबसे अधिक प्रासंगिक परिणाम दर्शाए जाते हैं जिसमें लेखक क्रम, इससे संबंधित संदर्भो की सूची और अन्य प्रासंगिक विद्वतापूर्ण साहित्य और दर्शाएं गए पत्रिकाओं के संपादकों की रैंक को सूचीबद्ध किया जाता है।<ref name="gsabout">{{cite web |url=http://scholar.google.com/scholar/about.html |title=About Google Scholar |publisher=Scholar.google.com |date= |accessdate=2010-07-29 |archive-url=https://www.webcitation.org/66WrkMawI?url=http://scholar.google.com/scholar/about.html |archive-date=29 मार्च 2012 |url-status=live }}</ref>
अपनी "ग्रुप ऑफ़" सुविधा का इस्तेमाल करते हुए यह पत्रिका लेखों के लिए उपलब्ध लिंक को दर्शाता है। 2005 संस्करण में, एक लेख और लेखों के सम्पूर्ण पाठ संस्करण के दोनों सब्क्रिप्शन-एक्सेस के लिए यह सुविधा एक लिंक प्रदान करती थी; 2006 के अधिकांश भाग में यह केवल प्रकाशक संस्करण के लिए लिंक प्रदान करती थी। दिसंबर 2006 के बाद से, यह प्रकाशन संस्करण और प्रमुख ओपन संग्राहक दोनों के लिए एक लिंक प्रदान करता था लेकिन फिर भी व्यक्तिगत संकाय वेब पृष्ठों के पोस्ट को कवर नहीं करता था; {{Citation needed|date=मई 2009}} वैसे स्व-प्राप्त गैर-सदस्यता संस्करणों को वर्तमान में [[गूगल]] के लिए एक लिंक द्वारा प्रदान किया जाता है, जहां कोई वैसे ओपन एक्सेस लेख को प्राप्त कर सकता है।
"साईटेड बाई" सुविधा के माध्यम से गूगल स्कॉलर लेख के सारांश को प्रदान करता है जिसे देखे गए लेख के रूप में उद्धृत किया जाता है।<ref>{{Cite web |url=http://scholar.google.co.uk/intl/en/scholar/help.html |title=गूगल स्कॉलर हेल्प |access-date=22 फ़रवरी 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110519103121/http://scholar.google.co.uk/intl/en/scholar/help.html |archive-date=19 मई 2011 |url-status=dead }}</ref> यह विशेष सुविधा है जो कि पूर्व में स्कोपस और वेब ऑफ नौलेज में उद्धृत अनुक्रमण पाया गया था। अपने "रिलेटेड आर्टिकल्स" (संबंधित लेखों) सुविधा के माध्यम से गूगल स्कॉलर मूल परिणामों से ये लेख कैसे सदृश हैं के द्वारा संबंधित लेखों की सूची, प्राथमिक रैंक प्रदान करता है, साथ ही प्रत्येक पेपर के प्रासंगिकता को भी ध्यान में रखता है।<ref>{{Cite web |url=http://googleblog.blogspot.com/2006/08/exploring-scholarly-neighborhood.html |title=ऑफिशियल गूगल ब्लॉग: एक्सप्लोरिंग द स्कॉलर्ली नेबरहुड |access-date=22 फ़रवरी 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110128195426/http://googleblog.blogspot.com/2006/08/exploring-scholarly-neighborhood.html |archive-date=28 जनवरी 2011 |url-status=live }}</ref>
{{As of|2009|12}}, गूगल स्कॉलर गूगल अजाक्स एपीआई में अभी तक उपलब्ध नहीं है।
== रैंकिंग एल्गोरिथ्म ==
यद्यपि अधिकांश शैक्षणिक डेटाबेस और खोज इंजन उपयोगकर्ता को एक कारक (उदाहरणस्वरूप प्रासंगिकता, उद्धृत संख्या, या प्रकाशन तिथि) से संयुक्त रैंकिंग एल्गोरिथ्म में एक "शोधकर्ता के तरीकों, प्रत्येक लेख का सम्पूर्ण पाठ, लेखक, लेख जहां दिखाई देता है उसका प्रकाशन और अन्य विद्वतापूर्ण साहित्य में कितनी बार उद्धृत किया गया के साथ रैंक परिणामों, गूगल स्कॉलर परिणामों की अनुमति देते हैं।"<ref name="gsabout"/> . अनुसंधान से पता चला है कि गूगल स्कॉलर उच्च मायने रखता है खासकर उद्धृत संख्या पर<ref name="citcount">[http://www.sciplore.org/publications/2009-Google_Scholar%27s_Ranking_Algorithm_--_An_Introductory_Overview_--_preprint.pdf Jöran Beel और बेला जिप्प] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130302210828/http://www.sciplore.org/publications/2009-Google_Scholar%27s_Ranking_Algorithm_--_An_Introductory_Overview_--_preprint.pdf |date=2 मार्च 2013 }}.[http://www.sciplore.org/publications/2009-Google_Scholar%27s_Ranking_Algorithm_--_An_Introductory_Overview_--_preprint.pdf गूगल स्कॉलर्स रैंकिंग एल्गोरिथ्म: एन इंट्रोडक्टरी ओवरव्यू. ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130302210828/http://www.sciplore.org/publications/2009-Google_Scholar%27s_Ranking_Algorithm_--_An_Introductory_Overview_--_preprint.pdf |date=2 मार्च 2013 }}[http://www.sciplore.org/publications/2009-Google_Scholar%27s_Ranking_Algorithm_--_An_Introductory_Overview_--_preprint.pdf इन बर्जर लार्सन एंड जैकलीन लेटा, एडीटर्स, साइंटोमेट्रिक्स और इंफोरमेट्रिक्स (ISSI'09) की कार्यवाही पर 12 वीं अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, खंड 1, पृष्ठ 230-241, रियो डी जनेरियो (ब्राजील), जुलाई 2009. ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130302210828/http://www.sciplore.org/publications/2009-Google_Scholar%27s_Ranking_Algorithm_--_An_Introductory_Overview_--_preprint.pdf |date=2 मार्च 2013 }}[http://www.sciplore.org/publications/2009-Google_Scholar%27s_Ranking_Algorithm_--_An_Introductory_Overview_--_preprint.pdf साइंटोमेट्रिक्स और इंफोरमेट्रिक्स के लिए इंटरनेशनल सोसायटी. ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130302210828/http://www.sciplore.org/publications/2009-Google_Scholar%27s_Ranking_Algorithm_--_An_Introductory_Overview_--_preprint.pdf |date=2 मार्च 2013 }}[http://www.sciplore.org/publications/2009-Google_Scholar%27s_Ranking_Algorithm_--_An_Introductory_Overview_--_preprint.pdf ISSN 2175-1935.] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130302210828/http://www.sciplore.org/publications/2009-Google_Scholar%27s_Ranking_Algorithm_--_An_Introductory_Overview_--_preprint.pdf |date=2 मार्च 2013 }}</ref> और प्रशस्ति पत्र में शब्द शामिल होते हैं।<ref>[http://www.sciplore.org/publications/2009-Google_Scholar%27s_Ranking_Algorithm_-_The_Impact_of_Citation_Counts_--_preprint%20aseotest333.pdf Jöran Beel और बेला जिप्प] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131110024811/http://www.sciplore.org/publications/2009-Google_Scholar%27s_Ranking_Algorithm_-_The_Impact_of_Citation_Counts_--_preprint%20aseotest333.pdf |date=10 नवंबर 2013 }}.[http://www.sciplore.org/publications/2009-Google_Scholar%27s_Ranking_Algorithm_-_The_Impact_of_Citation_Counts_--_preprint%20aseotest333.pdf गूगल स्कॉलर्स रैंकिंग एल्गोरिथ्म: उद इंपैक्ट ऑफ साइटेशन काउंट्स (एन एम्पिरिकल स्टडी). ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131110024811/http://www.sciplore.org/publications/2009-Google_Scholar%27s_Ranking_Algorithm_-_The_Impact_of_Citation_Counts_--_preprint%20aseotest333.pdf |date=10 नवंबर 2013 }}[http://www.sciplore.org/publications/2009-Google_Scholar%27s_Ranking_Algorithm_-_The_Impact_of_Citation_Counts_--_preprint%20aseotest333.pdf आन्द्रे फ्लोरी और मार्टिन कोलार्ड, संपादक, रिसर्च चैलेंजेस इन इंफोरमेशन साइंस (RCIS'09) पर तीसरा IEEE अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की कार्यवाही, पृष्ठ 439-446, फेज़ (मोरक्को), अप्रैल 2009. ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131110024811/http://www.sciplore.org/publications/2009-Google_Scholar%27s_Ranking_Algorithm_-_The_Impact_of_Citation_Counts_--_preprint%20aseotest333.pdf |date=10 नवंबर 2013 }}[http://www.sciplore.org/publications/2009-Google_Scholar%27s_Ranking_Algorithm_-_The_Impact_of_Citation_Counts_--_preprint%20aseotest333.pdf IEEE. doi: 10.1109/RCIS.2009.5089308. ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131110024811/http://www.sciplore.org/publications/2009-Google_Scholar%27s_Ranking_Algorithm_-_The_Impact_of_Citation_Counts_--_preprint%20aseotest333.pdf |date=10 नवंबर 2013 }}[http://www.sciplore.org/publications/2009-Google_Scholar%27s_Ranking_Algorithm_-_The_Impact_of_Citation_Counts_--_preprint%20aseotest333.pdf ISBN 978-1-4244-2865-6. ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131110024811/http://www.sciplore.org/publications/2009-Google_Scholar%27s_Ranking_Algorithm_-_The_Impact_of_Citation_Counts_--_preprint%20aseotest333.pdf |date=10 नवंबर 2013 }}</ref>. एक परिणाम के रूप पहला खोज परिणाम अक्सर अत्यधिक उद्धृत लेख होता है।
== सीमा और आलोचनाएं ==
कुछ खोजकर्ता व्यावसायिक डेटाबेस के लिए गूगल स्कॉलर की तुलनात्मक गुणवत्ता और उपयोगिता के रूप में विचार करते हैं,<ref>{{Cite web |url=http://dlib.org/dlib/september05/bauer/09bauer.html |title=बौएर, कैथलीन, बक्कलबासी, निसा (सितम्बर 2005) "एन एक्जामिनेशन ऑफ साइटेशन काउंट्स इन ए न्यू स्कॉलर्ली कम्युनिकेशन एनवायरनमेंट" डी लिब पत्रिका, वोल्यूम 11, नं. 9 |access-date=22 फ़रवरी 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110408225520/http://www.dlib.org/dlib/september05/bauer/09bauer.html |archive-date=8 अप्रैल 2011 |url-status=dead }}</ref> बावजूद इसके कि इनके यूज़र इंटरफेस (यूआई) अभी भी बीटा में है। स्कोपस और आईएसआई वेब ऑफ नोलेज के लिए विशेष रूप से गंभीर प्रतियोगिता में साइटेड बाय सुविधा को समीक्षाएं स्थापित करती हैं, हालांकि आमतौर पर सब्सक्रिप्शन सेवा की तुलना में यह कम परिणाम दर्शाते हैं।
गूगल स्कॉलर के साथ एक महत्वपूर्ण समस्या इसकी कवरेज के बारे में गोपनीयता है। कुछ प्रकाशक उनकी पत्रिकाओं को क्रॉल करने के लिए अनुमति नहीं देते. 2007 के मध्य तक एलजेवियर पत्रिकाएं शामिल नहीं थीं, जब गूगल स्कॉलर औऱ गूगल के वेब खोज के लिए अपने अधिकांश साइंसडायरेक्त सामग्री को बनाने लगा। <ref>पीटर ब्रांटले: ''[http://radar.oreilly.com/archives/2007/07/science-directly-into-google.html साइंस डायरेक्ट-ली इंटू गूगल] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20080421014001/http://radar.oreilly.com/archives/2007/07/science-directly-into-google.html |date=21 अप्रैल 2008 }}'' ओ'रेले रडार, 3 जुलाई 2007</ref> यथा फरवरी 2008, अनुपस्थित पत्रिकाओं में अभी भी अमेरिकन केमिकल सोसायटी पत्रिका के सबसे हाल के वर्षों शामिल हैं। गूगल स्कॉलर प्रकाशित वैज्ञानिक पत्रिकाओं की सूची को क्रॉल नहीं करता और उसके अद्यतन की आवृत्ति अज्ञात है। इसलिए यह जानना असंभव हो जाता है कि गूगल खोज में वर्तमान या संपूर्ण खोज कैसे होता है। बहरहाल, यह कुछ सबसे महंगी वाणिज्यिक डेटाबेस में कठिनाइयों के बिना प्रकाशित लेख के लिए आसान पहुंच देता है।
गूगल स्कॉलर अपनी रैंकिंग एल्गोरिथ्म में उद्धृत संख्या पर काफी जोर लगाता है और इसलिए मैथ्यू प्रभाव को मजबूत बनाने के लिए आलोचना की जाती है<ref name="citcount"/>: चूंकि बहु-उद्धृत प्रपत्र शीर्ष में प्रकट होते हैं और वे अधिक प्रशंसा पत्र हासिल करते हैं, जबकि नए पेपर शायद ही शीर्ष में प्रकट होते हैं और इसलिए गूगल उपयोगकर्ताओं द्वारा कम ध्यान दिया जाता है और कम प्रशंसा प्राप्त करते हैं।
गूगल स्कॉलर को arXiv प्रीप्रिंट सर्वर पर प्रकाशनों को सही ढंग से पहचानने में समस्या होती है। शीर्षकों में आंतरिक विराम चिह्न गलत खोज परिणाम को जन्म देते हैं और लेखकों को गलत पेपर सौंपा जाता है, जो कि अतिरिक्त गलत खोज परिणाम होता है। यहां तक कि कुछ खोज परिणाम बिना कोई सुबोध कारण के होते हैं।<ref>[http://www.libraryjournal.com/article/CA6698580.html?q=jacso पीटर जक्सो: गूगल स्कॉलर घोस्ट ऑथर, लॉस्ट ऑथर, एंड अदर प्रोबलेम, लाइब्रेरी जर्नल, 24.] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110607104842/http://www.libraryjournal.com/article/CA6698580.html?q=jacso |date=7 जून 2011 }}[http://www.libraryjournal.com/article/CA6698580.html?q=jacso सितंबर 2009] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110607104842/http://www.libraryjournal.com/article/CA6698580.html?q=jacso |date=7 जून 2011 }}</ref>
गूगल स्कॉलर स्पैम के लिए प्रवण है।
<ref name="spam">[http://portal.acm.org/citation.cfm?id=1810617.1810683 Jöran Beel और बेला जिप्प].[http://portal.acm.org/citation.cfm?id=1810617.1810683 ऑन द रोबस्टनेस ऑफ गूगल स्कॉलर अगेंस्ट स्पैम. ][http://portal.acm.org/citation.cfm?id=1810617.1810683 हाइपरटेक्स्ट और हाइपरमीडिया पर 21वें एसीएम सम्मेलन की कार्यवाही की. ][http://portal.acm.org/citation.cfm?id=1810617.1810683 ACM, जून 2010]</ref>. [[कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले]] और ओट्टो-वोन- गुईरिके यूनिवर्सिटी मेग्डेबर्ग के शोधकर्ताओं ने प्रमाणित किया है कि अन्यों के बीच गूगल स्कॉलर पर प्रशस्ति पत्र में हेर-फेर किया जा सकता है। इसलिए, उन्होंने निष्कर्ष निकाला है कि गूगल स्कॉलर से प्रशस्ति पत्र उद्धृत संख्या का इस्तेमाल सुरक्षा के साथ होना चाहिए खासकर प्रदर्शन मेट्रिक्स की गणना के लिए जब इस्तेमाल किया जाता है जैसे एच-सूचकांक या प्रभाव कारक.
गूगल स्कॉलर, केस क़ानून को शेपरडाइज करने में भी अक्षम है, जैसा कि वेस्टलॉ और लेक्सिस कर लेते हैं।<ref>{{Cite document|title=Is Google Scholar a Worthy Adversary?|author=Oliver Benn|publisher=Law Technology News|date=मार्च 9, 2010|ref=harv|postscript=<!--None-->}}</ref>
== इन्हें भी देंख ==
* शैक्षिक डेटाबेस और खोज इंजन
* प्रशस्ति पत्र सूचकांक
* CiteSeerX
* getCITED
* इंस्टिट्यूट ऑफ साइंटिफिक इंफोरमेशन का वेब ऑफ साइंस
* शैक्षणिक लाइव खोज
* माइक्रोसॉफ्ट शैक्षणिक खोज
* साइरस
* स्कोपस
* गूगल स्कॉलर और शैक्षणिक पुस्तकालय
== टिप्पणियां ==
{{Reflist|2}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20120630070939/http://scholar.google.com/ गूगल स्कॉलर वेबसाइट]
* [https://web.archive.org/web/20160622142700/http://googlescholar.blogspot.com/ गूगल स्कॉलर ब्लॉग]
{{Google Inc.}}
[[श्रेणी:ग्रन्थसूची डेटाबेस]]
[[श्रेणी:गूगल सेवाएँ]]
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प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय सेना
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RJ Raawat
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox military unit
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|dates= 1857–1947
|country= [[British Raj]]
|allegiance= [[British Crown]]
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|battles=[[Second Anglo-Afghan War]]<br />[[Third Anglo-Afghan War]]<br />[[1882 Anglo-Egyptian War]]<br />[[1868 Expedition to Abyssinia]]<br />[[First Mohmand Campaign]]<br />[[Second Anglo-Burmese War]]<br />[[Third Anglo-Burmese War]]<br />[[Second Opium War]]<br />[[Boxer Rebellion]]<br />[[Sudan Campaign]]<br />[[Tirah Campaign]]<br />[[British expedition to Tibet]]<br />[[World War I]]<br />[[Waziristan campaign 1919–1920]]<br />[[Waziristan campaign 1936–1939]]<br />[[World War II]]
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<!-- Commanders -->
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|notable_commanders=[[Herbert Kitchener, 1st Earl Kitchener]]<br />[[William Slim, 1st Viscount Slim]]<br />[[Archibald Wavell, 1st Earl Wavell]]<br />[[Claude Auchinleck]]
}}
'''प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय सेना''' (जिसे कभी-कभी '[[ब्रिटिश भारतीय सेना]]' कहा जाता है) ने [[प्रथम विश्वयुद्ध|प्रथम विश्व युद्ध]] में यूरोपीय, भूमध्यसागरीय और [[मध्य पूर्व]] के युद्ध क्षेत्रों में अपने अनेक डिविजनों और स्वतन्त्र ब्रिगेडों का योगदान दिया था। दस लाख भारतीय सैनिकों ने विदेशों में अपनी सेवाएं दी थीं जिनमें से 62,000 सैनिक मारे गए थे और अन्य 67,000 घायल हो गए थे। युद्ध के दौरान कुल मिलाकर 74,187 भारतीय सैनिकों की मौत हुई थी।
1903 में किचनर को भारत का कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किये जाने के बाद भारतीय सेना में प्रमुख सुधार किये गए थे। उनहोंने बड़े पैमाने पर सुधारों की शुरुआत की जिनमें प्रेसीडेंसियों की तीनों सेनाओं को एकीकृत कर एक संयुक्त सैन्य बल बनाना और उच्च-स्तरीय संरचनाओ तथा दस आर्मी डिविजनों का गठन करना शामिल है।<ref name="su3"/>
प्रथम विश्व युद्ध में भारतीय सेना ने जर्मन पूर्वी अफ्रीका और पश्चिमी मोर्चे पर [[जर्मन साम्राज्य]] के विरुद्ध युद्ध किया। यप्रेस के पहले युद्ध में खुदादाद खान [[विक्टोरिया क्रॉस]] से सम्मानित होने वाले पहले भारतीय बने। भारतीय डिवीजनों को मिस्र, गैलीपोली भी भेजा गया था और लगभग 700,000 सैनिकों ने [[उस्मानी साम्राज्य|तुर्क साम्राज्य]] के खिलाफ मेसोपोटामिया में अपनी सेवा दी थी।<ref>{{Cite document|url=http://www.mgtrust.org/ind1.htm|title=Participants from the Indian subcontinent in the First World War|publisher=Memorial Gates Trust|accessdate=2009-09-12|postscript=<!--None-->|archivedate=1 जुलाई 2019|archiveurl=https://web.archive.org/web/20190701062212/http://www.mgtrust.org/ind1.htm}}</ref> जब कुछ डिवीजनों को विदेश में भेजा गया था, अन्य को उत्तर पश्चिम सीमा की सुरक्षा के लिए और आंतरिक सुरक्षा तथा प्रशिक्षण कार्यों के लिए भारत में ही रहना पड़ा था।
== किचनर के सुधार ==
{{Main|Kitchener Reforms}}
हरबर्ट किचनर को 1902 में भारत का कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया गया था और पांच वर्षों के कार्यकाल के बाद उनके कार्यकाल को दो वर्षों के लिए आगे बढ़ा दिया गया था--जिसके दौरान उन्होंने भारतीय सेना में सुधार के कार्य किये। <ref name="su3"/> सुधारों में यह निर्देश दिया कि अब केवल एक भारतीय सेना होगी, प्रेसीडेंसियों की तीन सेनाओं का एक एकीकृत सैन्य बल में विलय कर दिया जाएगा.<ref name="hea184"/> साथ ही सामंती प्रांतों के रेजिमेंटों को शाही सेवा के लिए उपलब्ध होने का आह्वान किया गया।<ref name="hea184">हीथकोट, पी.184</ref> ब्रिटिश सेना भारतीय सेना के अतिरिक्त भारत में सेवा के लिए भी निरंतर यूनिटों की आपूर्ति करती रही। समग्र कमांड की संरचना को संदर्भित करने के लिए भारत की सेना (आर्मी ऑफ इंडिया) शब्द का प्रयोग शुरू किया गया जिसमें ब्रिटिश और भारतीय सेना दोनों की इकाइयां शामिल थीं। नवगठित भारतीय सेना (आर्मी ऑफ इंडिया) को नौ डिविजनों में व्यवस्थित किया गया था, प्रत्येक डिविजन में एक घुड़सवार सेना और तीन पैदल सेना के ब्रिगेड शामिल थे और तीन स्वतंत्र पैदल सेना के ब्रिगेडों सहित इन नौ डिविजनों ने भारत में अपनी सेवा दी थी।<ref name="p83"/> भारतीय सेना बर्मा में एक डिविजन और एडेन में एक ब्रिगेड की आपूर्ति के लिए भी जिम्मेदार थी।<ref name="p83"/>
नए डिविजनों के कमांड और नियंत्रण में मदद के लिए दो क्षेत्रीय सेनाओं (फील्ड आर्मी) का गठन किया गया -- नॉर्दर्न आर्मी और सदर्न आर्मी.<ref name="p83"/> नॉर्दर्न आर्मी के पास पांच डिविजन और तीन ब्रिगेड थे और यह उत्तर पश्चिमी मोर्चे (नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर) से लेकर [[बंगाल]] तक के लिए जिम्मेदार थी जबकि सदर्न आर्मी, जिसके पास भारत में चार डिविजन थे और दो संरचाएं उप-महाद्वीप के बाहर थीं यह [[बलूचिस्तान]] से लेकर दक्षिणी भारत तक के लिए उत्तरदायी थी।<ref name="p83">पेरी, पी.83</ref> नए संगठन के रेजिमेंटों और बटालियनों को एक एकल अनुक्रम में क्रमांकित किया गया और बंबई, मद्रास तथा बंगाल की सेनाओं के पुराने नामों का प्रयोग बंद कर दिया गया।<ref name="hea184"/> नई रेजिमेंट और बटालियनों को अपने स्थानीय आधार में रहने की बजाय अब देश में किसी भी जगह सेवा के लिए बुलाया जा सकता था और नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर पर ड्यूटी की एक यात्रा एक आवश्यक तैनाती बन गयी थी।<ref name="hea184"/> एक बदलाव जिसमें सभी-ब्रिटिश या सभी-भारतीय ब्रिगेडों का गठन करना और प्रत्येक ब्रिगेड में एक ब्रिटिश रेजिमेंट या बटालियन बनाए रखने की व्यवस्था थी, इसे स्वीकार नहीं किया गया।<ref name="hea184"/>
== संगठन ==
[[चित्र:2nd Indian Cav Div.jpg|thumb|बैजेंटीन रिज़ के युद्ध के दौरान डेक्कन हार्स से भारतीय घुड़सवार दल]]
{{Main|Indian Army during World War I order of battle}}
1914 में भारतीय सेना दुनिया में सबसे बड़ी स्वयंसेवी सेना थी<ref name="su3">सुमनेर, पी.3</ref> जिसकी कुल क्षमता 240,000 लोगों की थी<ref name="p85"/> और नवंबर 1918 तक इसमें 548,311 लोग शामिल हो गए थे जिसे इम्पीरियल स्ट्रेटजिक रिजर्व माना जाता था।<ref>विलमोट, पी.94</ref> इसे नियमित रूप से नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर पर घुसपैठ और छापों से निबटने और मिस्र, सिंगापुर तथा चीन में [[ब्रिटिश साम्राज्य]] के लिए सैन्य मोर्चाबंदी के लिए बुलाया जाता था।<ref>जेफ़री, पी.3</ref> इस क्षेत्रीय सैन्य बल को दो सेनाओं में बांटा गया था: नॉर्दर्न आर्मी जो अपने कमांड के तहत पांच डिविजनों और तीन ब्रिगेडों के साथ नॉर्थ-वेस्ट फ्रंटियर से बंगाल तक फ़ैली हुई थी और सदर्न आर्मी जिसका विस्तार बलूचिस्तान से लेकर दक्षिण भारत तक था और इसमें कमांड के तहत चार डिवीजन तथा उपमहाद्वीप के बाहर दो संरचनाएं शामिल थीं।<ref>{{cite web|url=http://www.orbat.com/site/history/historical/india/army1914.html|title=The Indian Army: 1914|accessdate=2009-10-15|archive-url=https://web.archive.org/web/20130509080005/http://www.orbat.com/site/history/historical/india/army1914.html|archive-date=9 मई 2013|url-status=dead}}</ref> दोनों सेनाओं में 39 घुड़सवार रेजिमेंटों, 138 पैदल सेना के बटालियनों (20 गोरखा सहित),<ref name="p85"/> द कॉर्प्स ऑफ गाइड्स नामक एक संयुक्त घुड़सवार-पैदल सेना की यूनिट, तीन खंदक खोदने वाले सैनिकों (सैपर) के रेजिमेंट और 12 पहाड़ी तोपखाने की बैटरियां शामिल थीं।<ref name="su3"/>
इन सुधारों द्वारा गठित नौ डिवीजनों में प्रत्येक के पास एक घुड़सवार सेना और तीन पैदल सेना के ब्रिगेड शामिल थे। घुड़सवार सेना के ब्रिगेड में एक ब्रिटिश और दो भारतीय रेजिमेंट जबकि पैदल सेना के ब्रिगेडों में एक ब्रिटिश और तीन भारतीय बटालियन शामिल थे।<ref>बरुआ, पी.130</ref> भारतीय सेना की बटालियनें ब्रिटिश बटालियनों से छोटी थीं जिसमें 30 अधिकारी और 723 अन्य रैंक के सैनिक शामिल थे<ref name="p85">पेरी, पी.85</ref> जिसकी तुलना में ब्रिटिश बटालियनों में 29 अधिकारी और 977 अन्य रैंक के सैनिक मौजूद थे।<ref>ब्रिजर, पी.63</ref> भारतीय बटालियनों को अक्सर टुकड़ों में बाँट दिया जाता था जिनसे विभिन्न जनजातियों, जातियों या धर्मों की कंपनियां बना दी जाती थीं।<ref>{{cite web|title=Indian Army History|accessdate=2009-10-09|publisher=Global Security.org|url=http://www.globalsecurity.org/military/world/india/army-history.htm|archive-url=https://web.archive.org/web/20100908212029/http://www.globalsecurity.org/military/world/india/army-history.htm|archive-date=8 सितंबर 2010|url-status=live}}</ref> प्रत्येक डिविजन के मुख्यालयों में संलग्न अतिरिक्त सैनिकों में एक घुड़सवार सेना की रेजिमेंट, एक अग्रणी बटालियन और ब्रिटिश रॉयल फील्ड आर्टिलरी द्वारा उपलब्ध कराये गए तोपखाने शामिल थे। प्रत्येक डिविजन की शक्ति लगभग 13,000 लोगों की थी जो आंशिक रूप से छोटी पैदल सेना की बटालियनों और छोटे तोपची सैनिकों के कारण ब्रिटिश डिविजन की तुलना में कुछ हद तक कमजोर थीं।<ref name="p86"/> भारतीय सेना उस समय भी कमजोर हो गयी थी जब देश में मौजूद 500 ब्रिटिश अधिकारी छोड़कर चले गए थे जो उन 38 भारतीय बटालियनों के लिए पर्याप्त थे जिन्हें किचनर की आर्मी के लिए बनाए जा रहे नए ब्रिटिश डिविजनों में तैनात किया गया था।<ref>चैपल (2003), पी.9</ref>
नियमित भारतीय सेना के अलावा रियासती प्रांतों की सेनाओं और सहायक सैन्य बलों (यूरोपीय स्वयंसेवकों) के रेजीमेंटों को भी आपात स्थिति में मदद के बुलाया जा सकता था।<ref name="su3"/> रियासती प्रांतों से इम्पीरियल सर्विस ब्रिगेड का गठन हुआ था और 1914 में इसमें 20 घुड़सवार सेना के रेजिमेंटों और पैदल सेना की 14 बटालियनों में 22,613 जवान शामिल थे।<ref name="p86">पेरी, पी.86</ref> युद्ध के अंत तक 26,000 जवानों ने इम्पीरियल सर्विस में विदेशों में अपनी सेवाएं दी थीं।<ref name="CWrepdirect"/> सहायक सैन्य बल घुड़सवार सेना के 11 रेजिमेंटों और 42 स्वयंसेवक पैदल सेना के बटालियनों में 40,000 अतिरिक्त जवानों को तैनात करने में सक्षम था।<ref name="p85"/> इसके अलावा फ्रंटियर मिलिशिया और मिलिटरी पुलिस भी उपलब्ध थे जो उनके बीच 34,000 जवानों को तैनात कर सकते थे।<ref name="p85"/>
क्षेत्रीय सैन्य बल के मुख्यालय [[दिल्ली]] में स्थित थे और वरिष्ठ अधिकारी (भारत के कमांडर-इन-चीफ) को भारत के जनरल स्टाफ के प्रमुख द्वारा सहयोग प्रदान किया जाता था। भारतीय सेना के सभी वरिष्ठ कमान और स्टाफ पदों को ब्रिटिश और भारतीय सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच वैकल्पिक रूप से इस्तेमाल किया जाता था। 1914 में जनरल सर ब्यूचैम्प डफ भारतीय सेना के कमांडर-इन-चीफ थे<ref>हीथकोट, पी.197</ref> और ब्रिटिश सेना के लेफ्टिनेंट जनरल सर पर्सी लेक जनरल स्टाफ के प्रमुख थे।<ref>डेविस, पी.153</ref> प्रत्येक भारतीय बटालियन में स्टाफ के रूप में भारत की ब्रिटिश सेना के 13 अधिकारियों और भारतीय सेना से 17 अधिकारियों को शामिल किया गया था -- प्रवासी ब्रिटिश अधिकारी ब्रिटिश औपनिवेशिक भारतीय प्रशासन के तहत सेवारत थे। युद्ध तेज होने और अधिकारियों के हताहत होने से उनकी जगह ब्रिटिश मूल के अधिकारियों को कार्यभार सौंपने की क्षमता बेहद मुश्किल में पड़ गयी और कई मामलों में बटालियनों में अधिकारियों के आवंटन को तदनुसार कम कर दिया गया। केवल 1919 में जाकर भारतीय मूल के पहले ऑफिसर कैडेटों को रॉयल मिलिटरी कॉलेज में अधिकारी प्रशिक्षण के लिए चुने जाने की अनुमति दी गयी।<ref>हीथकोट पीपी.200-210</ref>
भारतीय सेना के लिए सामान्य वार्षिक भर्ती 15,000 जवानों की थी, युद्ध के दौरान 800,000 से अधिक लोगों ने सेना के लिए स्वेच्छा से योगदान दिया और 400,000 से अधिक लोगों ने गैर-युद्धक भूमिकाओं के लिए स्वैच्छिक रूप से कार्य किया। 1918 तक कुल मिलाकर लगभग 1.3 मिलियन लोगों ने स्वेच्छा से सेवा के लिए योगदान दिया था।<ref>पेति, पी.31</ref> युद्ध के दौरान एक मिलियन भारतीय जवानों ने विदेशों में अपनी सेवाएं दी जिनमें से 62,000 से अधिक मारे गए और 67,000 अन्य घायल हो गए थे।<ref>सुमनेर, पी.7</ref> कुल मिलाकर 74,187 भारतीय सैनिक प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मारे गए थे।<ref name="CWrepdirect"/>
== स्थानीय सेवा ==
{{Main|Hindu–German Conspiracy}}
प्रथम विश्व युद्ध से पहले भारतीय सेना को आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने और अफगानिस्तान से होने वाली घुसपैठ के खिलाफ नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर की रक्षा के लिए तैनात किया गया था। इन कार्यों को युद्ध की घोषणा के साथ समाप्त नहीं किया था। सीमा पर तैनात किये गए डिवीजनों में शामिल थे, पहले से मौजूद प्रथम (पेशावर) डिविजन, द्वितीय (रावलपिंडी) डिविजन, चौथा (क्वेटा) डिविजन.<ref name="su9"/> 1916 में बनाया गया 16वां भारतीय डिविजन भारत में सेवारत एकमात्र युद्ध में गठित डिविजन था, इसे भी नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर में तैनात किया गया था।<ref name="su9"/> ये सभी डिवीजन अभी तक अपनी जगह पर मौजूद थे और इन्होंने प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद तीसरे अफगान युद्ध में हिस्सा लिया था।<ref name="su9"/>
युद्ध के प्रयास के समर्थन में भारत को अफगानिस्तान से शत्रुतापूर्ण कार्रवाई के प्रति असुरक्षित छोड़ दिया गया था। अक्टूबर 1915 में स्पष्ट सामरिक उद्देश्य के साथ एक तुर्क-जर्मन मिशन [[काबुल]] पहुंचा था। हबीबुल्लाह खान ने अपनी संधि के दायित्वों का पालन किया और तुर्क सुल्तान के साथ अलग रहने के लिए उत्सुक गुटों से आतंरिक विरोध की स्थिति में अफगानिस्तान की तटस्थता को बनाए रखा। <ref>''दी थर्ड अफ़ग़ान वार 1919 ऑफिशियल एकाउंट'', पी.11</ref> इसके बावजूद सीमा पर स्थानीय स्टार पर कार्रवाई होती रही और इसमें तोची में कार्रवाई (1914-1915), मोहमंद, बनरवाल और स्वातियों के खिलाफ कार्रवाई (1915), कलात की कार्रवाई (1915-16), मोहमंद की नाकाबंदी (1916-1917), महसूदों के खिलाफ कार्रवाई (1917) और मारी एवं खेत्रण जनजातियों के खिलाफ कार्रवाई शामिल थी (1918).<ref>रिदिक, पीपी.96-100</ref>
नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर पर दिसंबर 1914—फरवरी 1915 के बीच काचिन जनजातियों के खिलाफ भारत और बर्मा के बीच बर्मा मिलिटरी फ़ोर्स द्वारा दंडात्मक कार्रवाई की गयी जिसे 1/7वीं गोरखा राइफल्स और 64वें पायनियर्स का समर्थन प्राप्त था।<ref>{{London Gazette|issue= 29652|startpage=6699|supp=yes|date=4 जुलाई 1916|accessdate=2009-09-19}}</ref> नवंबर 1917-मार्च 1919 के बीच [[असम]] राइफल्स और बर्मा मिलिटरी पुलिस की सहायक इकाइयों द्वारा कूकी जनजातियों के खिलाफ कार्रवाई की गयी।<ref>रीड, पी.120</ref>
पहले आंतरिक सुरक्षा पर और उसके बाद प्रशिक्षण डिविजनों के रूप में भारत में बचे रहने वाले अन्य डिविजनों में 5वां (मऊ) डिविजन, 8वां (लखनऊ) डिविजन और 9वां (सिकंदराबाद) डिविजन शामिल थे।<ref name="su9"/> युद्ध के दौरान इन डिवीजनों ने सक्रिय सेवा पर अन्य संरचनाओं के लिए अपने ब्रिगेडों को खो दिया था; 5वें (मऊ) डिविजन ने 5वें (मऊ) कैवलरी ब्रिगेड को दूसरे भारतीय कैवलरी डिविजन के हाथों खो दिया था। आठवें (लखनऊ) डिविजन ने आठवें (लखनऊ) कैवलरी ब्रिगेड को पहले भारतीय कैवलरी डिविजन के हाथों और 22वें (लखनऊ) इन्फैंट्री ब्रिगेड को 11वें भारतीय डिविजन के हाथों खो दिया था। 9वें (सिकंदराबाद) डिविजन ने 9वें सिकंदराबाद कैवलरी ब्रिगेड को दूसरे भारतीय कैवलरी डिविजन और 27वें (बैंगलोर) ब्रिगेड के हाथों खो दिया था जिसे ब्रिटिश ईस्ट अफ्रीका भेजा गया था।<ref name="su9">सुमनेर, पी.9</ref> युद्ध से पूर्व की अन्य इकाइयों में बर्मा डिविजन पूरे युद्ध काल के दौरान आंतरिक सुरक्षा दायित्वों के लिए [[म्यान्मार|बर्मा]] में ही मौजूद रहा और उसी तरह एडेन ब्रिगेड एडेन में रहा था।<ref name="su9"/>
== भारतीय सेना का युद्ध में प्रवेश ==
1901 में फारस की खाड़ी के केंद्र में स्थित मस्जिद-ए-सुलेमान में व्यावसायिक मात्राओं में तेल की खोज की गयी थी।<ref>किन्ज़ेर, पी.48</ref> 1914 में युद्ध की शुरुआत में निजी स्वामित्व वाली एंग्लो-पर्सियन ऑयल कंपनी जिसके पास इन क्षेत्रों के लिए रियायतों का अधिकार था, ब्रिटिश सरकार इसे ब्रिटिश बेड़े के लिए ईंधन की आपूर्ति के प्रमुख उद्देश्य के लिए खरीदने वाली थी। शीघ्र ही यह स्पष्ट हो गया कि तुर्की की तुर्क सेना को एकत्र किया जा रहा है और अगस्त में [[भारत सरकार]] को इन सामरिक संपदाओं की सुरक्षा के लिए आपात योजनाएं तैयार करने का निर्देश दिया गया। योजनाओं में यह तय किया गया कि तुर्की सेना के जर्मनों के समर्थन में सामने आने की स्थिति में भारतीय सेना तेल क्षेत्रों को सुरक्षित करने की भूमिका निभानी होगी। एक आकस्मिकता के रूप में भारतीय अभियान फोर्स डी (नीचे देखें) लेफ्टिनेंट-जनरल सर आर्थर बैरेट के कमान के तहत बंबई से 16 अक्टूबर 1914 को समुद्र मार्ग से बहरीन के लिए रवाना हुआ।<ref>फोर्ड, पीपी.23-24</ref> इसके साथ-साथ अभियान फ़ोर्स ए जिसे युद्ध संबंधी प्रयास में सहयोग के लिए इम्पीरियल जनरल स्टाफ द्वारा जवानों की मांग के जवाब में सितंबर<ref>{{cite web|url=http://www.bbc.co.uk/history/worldwars/wwone/india_wwone_01.shtml|title=India and the Western Front|last=Omissi|first=David|accessdate=2009-10-18|archive-url=https://web.archive.org/web/20110128100932/http://www.bbc.co.uk/history/worldwars/wwone/india_wwone_01.shtml|archive-date=28 जनवरी 2011|url-status=live}}</ref> के अंत में जल्दबाजी में यूरोप भेजा गया था--ये भारत के बाहर युद्ध के लिए प्रतिबद्ध पहले भारतीय तत्व बन गए।
== स्वतंत्र ब्रिगेड ==
स्थायी डिवीजनों के अलावा भारतीय सेना ने कई स्वतंत्र ब्रिगेडों का भी गठन किया था। सदर्न आर्मी के एक हिस्से के रूप में एडेन ब्रिगेड को यूरोप से भारत के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण नौसेना मार्ग पर एडेन प्रोटेक्टोरेट में तैनात किया गया था।<ref name="su9"/> बन्नू ब्रिगेड, डेराजट ब्रिगेड और कोहट ब्रिगेड, ये सभी नॉर्दर्न आर्मी का हिस्सा थे और नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर पर तैनात किये गए थे।<ref name="su9"/> 12 मई 1918 को बन्नू और डेराजट ब्रिगेडों को जनरल जी डब्ल्यू बेयनोन के कमान के तहत वजीरिस्तान जनरल फील्ड फोर्स का नाम दिया गया था।<ref>वजीरिस्तान अभियान. प्रेक्षण प्रकाशित किया गया। सक्सेस ऑफ ऑपरेशंस. 5 मई 1918 का नागरिक और सैन्य राजपत्र द्वारा पुनर्प्रकाशित किया गया।</ref> सदर्न पर्सिया ब्रिगेड का गठन 1915 में दक्षिणी फारस और फ़ारस की खाड़ी में एंग्लो-फ़ारसी तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए फ़ारसी अभियान की शुरुआत में किया गया था।<ref name="su9"/>
== अभियान बल ==
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय सेना का गठन कर इसके सात अभियान बलों को विदेशों में भेजा गया था।<ref name="su6"/>
=== भारतीय अभियान बल ए ===
[[चित्र:IndianArmyMGCrewFlanders1914-15.jpg|left|thumb|1914-15, शीतकाल के दौरान फ़्लैंडर्स की कार्यवाई में द्वितीय राजपूत लाइट इन्फैंट्री]]
{{Main|Western Front (World War I)}}
युद्ध के आरंभ में भारतीय सेना के पास 150,000 प्रशिक्षित जवान थे और भारत सरकार ने विदेशों में सेवा के लिए दो घुड़सवार सेना और दो पैदल सेना के डिविजनों की सेवाओं की पेशकश की थी।<ref name="r97"/> भारतीय अभियान बल ए (इंडियन एक्सपेडिशनरी फ़ोर्स ए) के रूप में जाना जाने वाला सैन्य बल जनरल सर जेम्स विलकॉक्स के कमान के तहत था।<ref name="r97">रिदिक, पी.97</ref> फ़ोर्स ए ब्रिटिश एक्सपेडिशरी फ़ोर्स से संलग्न थी और दो सेना के पलटनों में चार डिविजनों का गठन किया गया: एक पैदल सेना की भारतीय पलटन और भारतीय कैवलरी कोर.<ref>सुमनेर, पी.4</ref><ref>{{cite web|last=Baker|first=Chris|accessdate=2009-07-06|title=The British Corps of 1914-1918|url=http://www.1914-1918.net/corps.htm|work=The Long, Long Trail|archive-url=https://web.archive.org/web/20170916015039/http://www.1914-1918.net/corps.htm|archive-date=16 सितंबर 2017|url-status=dead}}</ref> 30 सितम्बर 1914 को मार्सिलेस के आने पर युद्ध की घोषणा के केवल छह सप्ताह बाद वे येप्रेस सेलियेंट चले गए और अक्टूबर 1914 में ला बैसी की लड़ाई में हिस्सा लिया।<ref name="su5">सुमनेर, पी.5</ref> मार्च 1915 में 7वें (मेरठ) डिविजन को न्यूवे चैपल के युद्ध में हमले का नेतृत्व करने के लिए चुना गया था।<ref name="su5"/> अभियान बल को उन नए उपकरणों से परिचित नहीं होने से परेशानी का सामना करना पड़ा था जिन्हें फ्रांस में उनके आगमन पर केवल ली एनफील्ड राइफल जारी किये थे और उनके पास लगभग कोई भी तोप नहीं था, अग्रिम पंक्ति में होने पर उन्हें अपने आसपास की पलटनों की मदद पर निर्भर रहना पड़ता था।<ref name="su5"/> वे महाद्वीपीय मौसम के अभ्यस्त नहीं थे और ठंड का मुकाबला करने के लिए उनके पास संसाधनों की कमी थी जिसके कारण उनका मनोबल गिरा हुआ था जिसे आगे आरक्षण प्रणाली द्वारा संयोजित किया गया था, जहां सुदृढीकरण का मसौदा किसी भी रेजिमेंट से तैयार किया गया और उनकी नई इकाइयों से इसकी कोई संबद्धता नहीं थी। अधिकारियों के हताहत होने से और अधिक बाधा उत्पन्न होती थी क्योंकि उनकी जगह पर आने वाले अधिकारी भारतीय सेना से अपरिचित होते थे और इनकी भाषा नहीं बोल पाते थे।<ref name="su5"/> गिरे हुए मनोबल के साथ बहुत से सैनिक युद्ध स्थल से भाग खड़े हुए और पैदल सेना के डिविजनों को अंततः अक्टूबर 1915 में मिस्र में वापस बुला लिया गया, जब उनकी जगह किचनर की सेना के ब्रिटिश डिविजनों को प्रतिस्थापित किया गया।<ref name="su5"/><ref>{{Cite Book|title=Gentlemen of the Raj|url=https://archive.org/details/gentlemenofrajin0000baru|last=Barua|first=Pradeep|publisher=Praeger Publishing|date=2003|city=Westport, CT|pages=[https://archive.org/details/gentlemenofrajin0000baru/page/n34 15]|isbn=0275979997}}</ref>
[[चित्र:Bundesarchiv Bild 146-2004-0195, Westfront, indische Kavallerie.jpg|thumb|right|1914 में पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय घुड़सवार]]
पैदल सेना के डिवीजनों की वापसी के साथ पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय सेना की इकाई केवल दो घुड़सवार सेना के डिवीजनों के रूप में रह गयी थी। नवंबर 1916 में दो भारतीय घुड़सवार सेना के डिवीजनों को पहले और दूसरे से लेकर चौथे और पांचवें कैवलरी डिविजनों के रूप में नया नंबर दिया गया।<ref>{{cite web|last=Baker|first=Chris|accessdate=2009-09-09|title=The Mounted Divisions of 1914-1918|url=http://www.1914-1918.net/mtddivs.htm|work=The Long, Long Trail|archive-url=https://web.archive.org/web/20170625141624/http://www.1914-1918.net/mtddivs.htm|archive-date=25 जून 2017|url-status=dead}}</ref> ब्रिटिश घुड़सवार सेना के डिवीजनों के साथ काम करते हुए उन्हें मार्ग मिलने की उम्मीद में अग्रिम पंक्ति के पीछे ही रखा गया। युद्ध के दौरान कई बार उन्होंने पैदल सेना के रूप में खाइयों में काम किया था जब इसमें उतारे जाने पर प्रत्येक घुड़सवार ब्रिगेड एक डिसमाउंटेड रेजिमेंट होता था। इसका मतलब यह है कि जब डिविजनें अग्रिम पंक्ति में जाती थीं, वे केवल एक ब्रिगेड एरिया को कवर कर सकती थीं।<ref>{{cite web|last=Baker|first=Chris|accessdate=2009-09-09|title=The 2nd Indian Cavalry Division in 1914-1918|url=http://www.1914-1918.net/2cavdiv_indian.htm|work=The Long, Long Trail|archive-url=https://web.archive.org/web/20090529082359/http://www.1914-1918.net/2cavdiv_indian.htm|archive-date=29 मई 2009|url-status=dead}}</ref> मार्च 1918 में मिस्र में अपनी वापसी से पहले उन्होंने सोम्मे की लड़ाई, बैजेंटीन के युद्ध, फ्लेर्स-कोर्सेलेट के युद्ध, हिंडनबर्ग लाइन के आगे और अंत में कैम्ब्राय के युद्ध में हिस्सा लिया था।<ref name="su5"/>
फ्रांस और बेल्जियम में काम करने वाले 130,000 भारतीयों में से लगभग 9,000 की मृत्यु हो गई थी।<ref name="CWrepdirect">{{cite web|url=http://www.cwgc.org/admin/files/cwgc_india.pdf|title=Commonwealth War Graves Commission Report on India 2007–2008|accessdate=2009-09-07|publisher=[[Commonwealth War Graves Commission]]|archiveurl=https://web.archive.org/web/20100618081321/http://www.cwgc.org/admin/files/cwgc_india.pdf|archivedate=18 जून 2010|url-status=live}}</ref>
=== भारतीय अभियान बल बी ===
{{Main|East African Campaign (World War I)}}
1914 में ब्रिटिश पूर्वी अफ्रीका के गवर्नर ने जर्मन पूर्वी अफ्रीका में जर्मन सैनिकों के सात निबटने में सहायता का आग्रह किया और यह समस्या भारतीय कार्यालय कार्यालय को सौंप दी गयी जिसने दो सैन्य बलों का गठन किया और उन्हें उनकी मदद के लिए भेज दिया। <ref name="ch11">चैपल (2005), पी.11</ref> भारतीय अभियान सेना बी जिसमें 9वीं (सिकंदराबाद) डिविजन से 27वें (बैंगलोर) ब्रिगेड और एक अग्रणी बटालियन इम्पीरियल सर्विस इन्फैंट्री ब्रिगेड, एक पहाड़ी तोपखाने की बैटरी और इंजिनियर शामिल थे, इसे जर्मन पूर्वी अफ्रीकी पर हमला करने के उद्देश्य से टंगानिका भेजा गया था।<ref>चैपल (2005), पीपी. 11-12</ref>
मेजर जनरल आर्थर ऐटकन के कमान के तहत यह सैन्य बल 02-03 नवम्बर 1914 को टांगा पहुंच गया। अगले टांगा के युद्ध में ऐटकन के 8,000 जवानों को जनरल कमांडर पॉल एमिल वॉन लेटो-वोरबेक के तहत उनके 1,000 जवानों द्वारा बुरी तरह से पीटा गया था।<ref name="ch12">चैपल (2005), पी.12</ref> 817 जवानों के हताहत होने और कई सैकड़े राइफलों, 16 मशीन गनों और 600,000 राउंड गोला-बारूदों के नुकसान के बाद 5 नवम्बर 1914 को यह सैन्य बल को फिर से अपने कार्य में जुट गया।<ref name="ch12"/>
=== भारतीय अभियान बल सी ===
[[चित्र:10pounderMountainGunEastAfricaWWI.jpg|left|thumb|पूर्वी अफ्रीका की कार्यवाई में भारतीय सेना के 10 पाउन्डर माउंटेन गन क्र्यू.]]
भारतीय अभियान बल सी 1914 में ब्रिटिश पूर्वी अफ्रीका में सेवा के लिए संयोजित दूसरा सैन्य बल बना, इस सैन्य बल का गठन पैदल सेना के पांच बटालियनों के इंपीरियल सर्विस इन्फैंट्री ब्रिगेड से किया गया था और इसमें भारतीय सेना के 29वें पंजाबी बटालियन के साथ-साथ [[जींद]], [[भरतपुर]], [[कपूरथला]] और रामपुर के रियासती प्रांतों के बटालियनों, एक स्वयंसेवक 15 पाउंडर तोपखाने की बैटरी, 22वीं (डेराजट) माउंटेन बैटरी (फ्रंटियर फोर्स), एक वोलंटियर मैक्सिम गन बैटरी और एक फील्ड एम्बुलेंस शामिल थे। यह योजना बनाई गयी थी कि सैन्य बल का इस्तेमाल मुख्य रूप से [[युगांडा]] के रेलवे की निगरानी और संचार सुरक्षा कार्यों में किंग्स अफ्रीकन राइफल्स का समर्थन करने के लिए किया गया। मोम्बासा पहुंचने के बाद फ़ोर्स सी को विखंडित कर दिया गया और इसकी इकाइयों ने बाद में अलग-अलग कार्य किया।<ref name="su6"/> एक कार्रवाई जिसमें वे शामिल थे वह अक्टूबर 1914 में किलिमंजारो की लड़ाई की थी। ब्रिटिश और जर्मन पूर्वी अफ्रीका की सीमा के पास इकट्ठा हुए 4,000 जवानों के साथ फ़ोर्स सी की कमान ब्रिगेडियर जनरल जे.एम. स्टीवर्ट ने संभाली थी। दोषपूर्ण खुफिया सूचनाओं का अनुमान था कि इस क्षेत्र में जर्मन मिलिटरी के 200 जवान मौजूद थे; जबकि वहां तीन कंपनियों में 600 अस्करियों के साथ औपनिवेशिक स्वयंसेवक, घोड़े की पीठ पर सवार 86 युवा जर्मन मौजूद थे।<ref>होयत, पी.55</ref> 3 नवम्बर 1914 को रात में लोंडिगो के पास आगे बढ़ रहे ब्रिटिश सेना के तकरीबन 1500 पंजाबियों को एक मजबूत जर्मन रक्षा पंक्ति की गोलीबारी का सामना करना पड़ा क्योंकि वे सुबह के कोहरे में आगे रहे थे। भारतीय पैदल सेना की बड़ी ताकत ने प्रभावी ढंग से जवाबी हमलों का बचाव किया, हालांकि दिन भर ब्रिटिश हमलावरों ने कोई प्रगति नहीं की और इसमें काफी जवान हताहत हुए. सुबह के मध्य तक एक जर्मन घुड़सवार गश्ती दल ने एक आपूर्ति कॉलम पर घात लगाकर हमला किया और सैन्य दलों के लिए पानी ले जा रहे लगभग 100 खच्चरों को जर्मनों द्वारा खदेड़ का भगा दिया गया। अपने व्यापक रूप से बिखरे हुए सैन्य दलों के साथ ब्रिटिश अधिकारियों ने अंधेरा होने तक इंतज़ार किया और अपनी स्थिति को अधिकार में नहीं आने योग्य निश्चित हो जाने पर पहाड़ से नीचे उतर आये और किसी उपलब्धि के बिना ब्रिटिश पूर्वी अफ्रीका वापस लौट गए।<ref>होयत, पी.56</ref><ref>मिलर, पी. 72.</ref>
=== भारतीय अभियान बल डी ===
{{Main|Mesopotamian campaign}}
[[चित्र:QF3pdrHotchkissMesopotamia1917.jpg|thumb|बसरा और नसीरिया के बीच सैन्य रेलवे के एक रेलवे वैगन पर लगी QF 3 पाउंडर हौच्किंस बंदूक का संचालन करते भारतीय सैनिक.]]
विदेश में सेवारत भारतीय सेना का सबसे बड़ा सैन्य बल लेफ्टिनेंट-जनरल सर जॉन निक्सन के कमान के तहत [[मेसोपोटामिया]] में भारतीय अभियान बल डी था।<ref name="su5"/> नवंबर 1914 में भेजा गया पहला यूनिट 6ठा पूना डिवीजन था और उन्हें [[बसरा]] और उसके आसपास ब्रिटिश तेल प्रतिष्ठानों की रखवाली का काम सौंपा गया था।<ref name="su6"/> मेसोपोटेमियाई अभियान के एक हिस्से के रूप में उन्होंने मेजर जनरल बैरेट के कमान के तहत और उसके बाद मेजर जनरल टाउनशेंड के तहत काम किया। शुरुआती सफलताओं की एक कड़ी के बाद अभियान को नवंबर 1915 में टेसिफॉन के युद्ध में साजो-सामान संबंधी कारणों से एक विघ्न का सामना करना पड़ा.<ref name="su6">सुमनेर, पी.6</ref> इस अनुबंध के बाद पूना डिवीजन को कुट में वापस बुला लिया गया जहां टाउनशेंड ने इस शहर पर अपना कब्जा बनाए रखने का फैसला किया और कुट की घेराबंदी शुरू हुई।
जनवरी और मार्च 1916 के बीच टाउनशेंड ने घेराबंदी हटाने की कोशिश में कई बार हमले किये। इसी अनुक्रम में शेख शाद के युद्ध, वादी की लड़ाई, हन्ना की लड़ाई और डुजैला रीडाउट के युद्ध में हमले किये गए।<ref name="Mesopotamia"/>
[[चित्र:Indian_army_soldier_after_siege_of_Kut.jpg|left|160px|thumb|कूट की घेराबंदी से बचकर निकलने वाला एक अत्यंत दुर्बल भारतीय सैनिक]] घेरों को तोड़ने की ये कोशिशें सफल नहीं हुईं और काभी नुकसान उठाना पड़ा जिसमें बड़ी संख्या में दोनों पक्षों के लोग हताहत हुए. फ़रवरी में कुट-अल-अमारा में टाउनशेंड के लिए भोजन और उम्मीद ख़त्म होने लगी थी। बीमारियां तेजी से फैलीं और इन्हें रोका या ठीक नहीं किया जा सकता था जिससे अप्रैल 1916 में टाउनशेंड ने आत्मसमर्पण कर दिया। <ref name="su6"/> दिसंबर 1916 में तीसरा और सातवाँ डिविजन वेस्टर्न फ्रंट से आया।<ref>{{cite web|last=Baker|first=Chris|accessdate=2009-09-17|title=Mesopotamia|url=http://www.1914-1918.net/mespot.htm|archive-url=https://www.webcitation.org/6BX6nVk0M?url=http://www.1914-1918.net/mespot.htm|archive-date=19 अक्तूबर 2012|url-status=dead}}</ref>
1917 में फ्रेडरिक स्टेनली मौड के तहत ब्रिटिश फ़ोर्स जिसमें अब भारतीय सेना की एक कैवलरी और सात इन्फैंट्री डिविजन शामिल थे, तीन पलटनों (भारतीय)<ref name="su6"/> के साथ यह सेना बगदाद की ओर आगे बढ़ी जिसे मार्च में कब्जा कर लिया गया।{{Clarify|This sentence is hard to interpret, probably because of the punctuation. Is it saying III Corp India was composed of one cavalry and seven infantry divisions? The sentence should be re-worded or punctuated differently for clarity.|date=नवम्बर 2010}} यह प्रगति 1918 में जारी रही और अक्टूबर में शर्कत की लड़ाई के बाद तुर्की सेना ने आत्मसमर्पण कर लिया और मुद्रोस के युद्धविराम पर हस्ताक्षर कर दिया। <ref>कर्श, पी.327</ref> मेसोपोटेमिया का अभियान मोटे तौर पर एक भारतीय सेना का अभियान था क्योंकि इसमें शामिल ब्रिटिश संरचनाएं केवल 13वें (वेस्टर्न) डिविजन और भारतीय ब्रिगेडों में नियुक्त ब्रिटिश बटालियनों के रूप में थीं।<ref name="Mesopotamia">{{cite web|last=Baker|first=Chris|accessdate=2009-09-04|title=Mesopotamia|url=http://www.1914-1918.net/mespot.htm|work=The Long, Long Trail|archive-url=https://www.webcitation.org/6BX6nVk0M?url=http://www.1914-1918.net/mespot.htm|archive-date=19 अक्तूबर 2012|url-status=dead}}</ref> अभियान में 11,012 लोग मारे गए थे, 3,985 लोगों की मौत घावों के कारण हो गई थी, 12,678 बीमारी की वजह से मौत का शिकार हुए थे, 13,492 लोग या तो लापता थे या बंदी बना लिए गए थे (कुट के 9,000 कैदियों सहित) और 51,836 लोग घायल हुए थे।<ref>"ब्रिटिश साम्राज्य के सैन्य प्रयास के आंकड़े" (लंदन: एचएमएसओ (HMSO), 1920)</ref>
{{clr}}
=== भारतीय अभियान बल ई ===
[[चित्र:Indian Army QF 3.7 inch gun battery Jerusalem 1917.jpg|thumb|3.7 इंच माउंटेन हौविट्ज़र के साथ भारतीय सेना के बंदूकची (शायद 39 वीं बैटरी), 1917 जेरूसलम]]
{{Main|Sinai and Palestine Campaign|Battle of Megiddo (1918)}}
भारतीय अभियान बल ई में [[फ़िलस्तीन|फिलिस्तीन]] में सेवा के लिए 1918 में फ्रांस से स्थानांतरित दो भारतीय कैवलरी डिविजन (चौथा कैवलरी डिविजन और पांचवां कैवलरी डिविजन) शामिल थे। उन्हें इम्पीरियल सर्विस कैवलरी ब्रिगेड में शामिल किया गया था, जो मैसूर, [[हैदराबाद स्टेट|हैदराबाद]] और [[जोधपुर]] के रियासती प्रांतों के लांसरों के तीन रेजीमेंटों से बनायी गयी एक इकाई थी।<ref name="su6"/> तीसरे (लाहौर) डिविजन और सातवें (मेरठ) डिविजन को मेसोपोटामिया से स्थानांतरित किया गाया था।<ref name="p2426">पेरेट, पीपी.24-26</ref> साथ ही भारतीय सेना की 36 बटालियनों को ब्रिटिश 10वें (आयरिश) डिविजन, 53वें डिविजन, 60वें डिविजन और 75वें डिविजन को सुदृढ़ करने के लिए भेजा गया था जिनका पुनरोद्धार प्रति ब्रिगेड एक ब्रिटिश एवं तीन भारतीय बटालियनों के साथ भारतीय डिविजन लाइनों पर किया गया था।<ref name="p2426"/>
=== भारतीय अभियान बल एफ ===
{{Main|First Suez Offensive}}
भारतीय अभियान बल एफ में 10वीं भारतीय डिवीजन और 11वीं भारतीय डिवीजन शामिल थी, दोनों का गठन 1914 में मिस्र में स्वेज नहर की सुरक्षा के लिए किया गया था। अन्य सम्बद्ध संरचनाएं थीं अपने ब्रिटिश बटालियनों के बिना 8वीं लखनऊ डिविजन की नियमित 22वीं लखनऊ इन्फैंट्री ब्रिगेड और एक इम्पीरियल सर्विस कैवलरी ब्रिगेड.<ref>रिनाल्डि, पी.125</ref>
10वीं डिवीजन को 1916 में भंग कर दिया गया था और इसके ब्रिगेड को अन्य संरचनाओं को सौंप दिया गया था।<ref name="su6"/> 28वीं ब्रिगेड को 1915 में 7वें (मेरठ) डिविजन को सौंप दिया गया था, 29वीं ब्रिगेड ने जून 1917 में भंग किये जाने तक गैलीपोली अभियान में एक स्वतंत्र ब्रिगेड के रूप में काम किया था। 30वीं ब्रिगेड को पहले अप्रैल 1915 में 12वीं भारतीय डिवीजन को सौंपा गया था, फिर इसे सितंबर 1915 में 6ठी (पूना) डिवीजन में स्थानांतरित किया गया था।<ref name="IAB">{{cite web|title=Indian Army Brigades|accessdate=2009-09-08|publisher=orbat.com|url=http://orbat.com/site/history/volume5/529/Indian%20Army%20Brigades.pdf|archive-url=https://web.archive.org/web/20081010144500/http://orbat.com/site/history/volume5/529/Indian%20Army%20Brigades.pdf|archive-date=10 अक्तूबर 2008|url-status=dead}}</ref>
11वीं डिवीजन को पहले ही 1915 में भंग कर दिया गया था लेकिन इसका ब्रिगेड अधिक समय तक अस्तित्व में नहीं रहा। <ref name="su6"/> 31वीं ब्रिगेड जनवरी 1916 में 10वीं डिवीजन में शामिल हो गयी थी लेकिन एक महीने बाद ही भंग हो गयी थी। 32वीं ब्रिगेड को जनवरी 1916 में भंग किया गया। 33वीं ब्रिगेड को अगस्त 1915 में फारस के बुशायर में भेज दिया गया और उसके बाद दिसंबर 1915 में इसे भंग कर दिया गया।<ref name="IAB"/>
=== भारतीय अभियान बल जी ===
{{Main|Gallipoli Campaign}}
अप्रैल 1915 में भारतीय अभियान बल जी को गैलीपोली अभियान को मजबूत करने के लिए भेजा गया।<ref name="CWrepdirect"/> इसमें 29वीं ब्रिगेड शामिल थी जिसने अपने मूल 10वीं भारतीय डिवीजन से दूर होकर काम किया था।<ref name="su6"/> तीन गोरखा और एक सिख बटालियनों<ref>पेरी, रोलाण्ड. "मोनेश दी आउटसाइडर हू वन ए वार" पी211</ref> से मिलकर बने इस ब्रिगेड को मिस्र से रवाना कर दिया गया और इसे ब्रिटिश 29वीं डिविजन के साथ संलग्न कर दिया गया जिसे पहले की लड़ाइयों में काफी नुकसान पहुंचा था।<ref>हेथोर्नथ्वैत, पी.55</ref> क्रिथिया के दूसरे युद्ध के लिए सुरक्षित रखी गयी इस टुकड़ी ने क्रिथिया के तीसरे युद्ध में प्रमुख भूमिका निभाई थी। बायीं तरफ आगे बढ़ रही ब्रिगेड को जल्दी ही रोक दिया गया जबकि ऐजियन तट पर 1/छठी गोरखा राइफल्स आगे बढ़ने में सफल रही। गली रैविने के फ्लोर के साथ आगे बढ़ रहे 14वें फिरोजपुर सिखों का लगभग सफाया कर दिया गया था जिसने अपने 514 में से 380 जवानों और 80% अधिकारियों को खो दिया था। इसके बाद यह ब्रिगेड गली रैवाइन की लड़ाई में शामिल हुई और यहां 2/ 10 गोरखा राइफल्स आधा मील तक आगे बढ़ने में सफल रही। फिर इस ब्रिगेड ने सारी बैर की लड़ाई में हिस्सा लिया, नौसैनिक बमबारी के कवर के तहत 1/6ठे गोरखा राइफल्स ने पहाडी पर हमला किया और इसे कब्जे में कर लिया, जिस पर बाद में रॉयल नेवी द्वारा गोलीबारी की गयी। हताहतों की संख्या बढ़ने और बटालियन के चिकित्सा अधिकारी के कमान के तहत उन्हें अपनी प्रारंभिक स्थितियों में वापस लौटने के लिए मजबूर कर दिया गया।<ref>हेथोर्नथ्वैत, पी.73</ref> सारी बैर में हमले की विफलता के साथ ब्रिगेड को मिस्र वापस ले लिया गया। अभियान की अवधि के दौरान 29वीं ब्रिगेड को 1,358 लोगों की मौत और 3,421 लोगों के घायल होने का नुकसान उठाना पड़ा.<ref>{{cite web|url=http://www.dva.gov.au/news_archive/Documents/090327_GallipoliCampaign.pdf|accessdate=2009-09-04|publisher=Australian Government, Department of Veterans affairs|title=The Gallipoli Campaign|archiveurl=https://web.archive.org/web/20090702131058/http://www.dva.gov.au/news_archive/Documents/090327_GallipoliCampaign.pdf|archivedate=2 जुलाई 2009|url-status=dead}}</ref>
== अन्य ऑपरेशन ==
=== सिंगताओ की घेराबंदी ===
{{Main|Siege of Tsingtao}}
भारतीय सेना की बटालियन जो चीन में टियांजिन की मोर्चाबंदी का हिस्सा थी, इसके 36वें सिखों ने सिंगताओं की घेराबंदी में हिस्सा लिया। सिंगताओ चीन में एक जर्मन नियंत्रित बंदरगाह था।<ref name="ww91"/> ब्रिटिश सरकार और अन्य संबद्ध यूरोपीय शक्तियां इस क्षेत्र में जापानी इरादों के बारे में चिंतित थीं और उनके डर को दूर करने के प्रयास में उन्होंने टियांजिन से एक छोटे से प्रतीकात्मक ब्रिटिश सैन्य दल को भेजने का फैसला किया। 1,500 जवानों के इस सैन्य दल की कमान ब्रिगेडियर-जनरल नथैनियल वाल्टर बनार्डिस्टन ने संभाली और साउथ वेल्स बोर्डेरर्स की दूसरी बटालियन के 1,000 सैनिकों को शामिल किया जिसने बाद में 36वें सिखों के 500 सैनिकों को शामिल किया।<ref name="ww91"/> जापानी नेतृत्व वाली सैन्य टुकड़ी ने 31 अक्टूबर-7 नवम्बर 1914 के बीच बंदरगाह की घेराबंदी कर ली थी।<ref name="CWrepdirect"/><ref name="ww91">विलमोट, पी.91</ref> घेराबंदी के अंत में जापानी सेना के हताहतों की संख्या 236 मौतों और 1,282 घायलों तक पहुंच गयी; ब्रिटिश/भारतीयों के 12 लोग मारे गए और 53 घायल हुए थे। जर्मन रक्षकों को 199 मौतों और 504 घायलों का नुकसान उठाना पड़ा था।<ref>हौप्ट वर्नर, पी.147</ref>
=== 1915 में सिंगापुर का सैन्य-विद्रोह ===
{{Main|1915 Singapore Mutiny}}
1915 में [[सिंगापुर]] का सैन्य-विद्रोह 5वीं लाइट इन्फैंट्री के 850 सिपाहियों द्वारा युद्ध के दौरान सिंगापुर में ब्रिटिश के खिलाफ एक विद्रोह था जो 1915 के ग़दर षड़यन्त्र का हिस्सा था।
5वीं लाइट इन्फैंट्री अक्टूबर 1914 में मद्रास से सिंगापुर आयी थी। उन्हें वे यॉर्कशायर लाइट इन्फैंट्री की जगह लेने के लिए भेजा गया था जिसे फ्रांस जाने का आदेश दिया गया था।<ref>{{cite news | title = Commentary on the Mutiny | author = | date = 2 मई 1915 | publisher = ''[[दि न्यू यॉर्क टाइम्स|द न्यूयॉर्क टाइम्स]]'}}</ref> 5वीं लाइट इन्फैन्ट्री में ऐसे लोगों को भर्ती किया गया था जो मुख्य रूप से पंजाबी मुसलमान थे। कमजोर संचार व्यवस्था, लापरवाह अनुशासन और सुस्त नेतृत्व के कारण उनका मनोबल लगातार गिरता जा रहा था।<ref name="nls"/> रेजिमेंट को जर्मन शिप एसएमएस, एमडेन के कैदियों की रखवाली के लिए तैनात किया गया था।<ref name="nls"/> वे 16 फ़रवरी 1915 तक हांगकांग के लिए रवाना होने की अपेक्षा कर रहे थे, हालांकि इस तरह की अफवाहें उड़नी शुरू हो गयी थी कि वे तुर्क साम्राज्य के साथी मुसलमानों के खिलाफ लड़ने जा रहे थे।<ref name="nls"/> जर्मन कैदी ओबेरल्युटिनेंट लॉटरबाक (Oberleutenant Lauterbach) ने अफवाहों को हवा दी थी और सैनिकों को अपने ब्रिटिश कमांडरों के खिलाफ बगावत करने के लिए प्रोत्साहित किया था।<ref name="nls"/>
सिपाही इस्माइल खान ने एकमात्र शॉट की फायरिंग कर बगावत शुरू होने का संकेत दिया था। टांगलिन बैरकों में मौजूद अधिकारियों की ह्त्या कर दी गयी और एक अनुमान के अनुसार 800 विद्रोहियों सड़कों पर घूमा करते थे और अपने सामने पड़ने वाले किसी भी यूरोपीय को मार डालते थे। विद्रोह दस दिनों तक जारी रहा और सिंगापुर स्वयंसेवी आर्टिलरी के जवानों, अतिरिक्त ब्रिटिश इकाइयां और जोहोर के सुलतान और अन्य सहयोगियों की सहायता से इस दबा दिया गया।<ref name="nls">{{cite web|title=1915 Indian (Singapore) Mutiny|accessdate=2009-09-16|publisher=National Library Singapore|url=http://infopedia.nl.sg/articles/SIP_570_2005-01-24.html|archive-url=https://web.archive.org/web/20090224083410/http://infopedia.nl.sg/articles/SIP_570_2005-01-24.html|archive-date=24 फ़रवरी 2009|url-status=dead}}</ref>
कुल मिलाकर 36 विद्रोहियों को बाद में मार डाला गया और 77 अधिकारियों को स्थानांतरित कर दिया गया जबकि 12 अन्य को कैद कर लिया गया।<ref name="nls"/>
== विक्टोरिया क्रॉस प्राप्तकर्ता ==
{{Main|Victoria Cross}}
भारतीय सैनिक 1911 तक विक्टोरिया क्रॉस के लिए योग्य नहीं रहे थे, इसकी बजाय उन्होंने इंडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट प्राप्त किया था जो भारत में [[ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी|ईस्ट इंडिया कंपनी]] के शासन के दिनों में मूल रूप से तय किया गया एक पुराना पदक था। किसी भी संघर्ष में विक्टोरिया क्रॉस (वीसी) के पहले भारतीय प्राप्तकर्ता का सम्मान खुदादाद खान को मिला था जो कनॉट्स ओन बलूचीज के 129वें ड्यूक थे।<ref>{{cite web|accessdate=2009-09-04|publisher=Mod Uk|url=http://www.wewerethere.defencedynamics.mod.uk/ww1/k_khan.html|title=Subadar Khudadad Khan, Victoria Cross (VC)|archive-url=https://web.archive.org/web/20090610032042/http://www.wewerethere.defencedynamics.mod.uk/ww1/k_khan.html|archive-date=10 जून 2009|url-status=dead}}</ref> 31 अक्टूबर 1914 को जब बेल्जियम के होलेबेके में टुकड़ी के ब्रिटिश ऑफिसर इंचार्ज घायल हो गए और अन्य बंदूक को एक गोलीबारी में निष्क्रिय कर दिया गया, सिपाही खुदादाद स्वयं घायल होने के बावजूद अपनी बंदूक से काम करते रहे जब तक कि बंदूक की टुकड़ी के अन्य सभी पांच जवान को मार नहीं डाला गया।<ref name="gaz1">{{London Gazette|issue=28999|startpage=10425|supp=yes|date=4 दिसम्बर 1914|accessdate=2009-08-02}}</ref>
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित होने वाले भारतीय सेना के अन्य सदस्यों में शामिल थे:
* दरवान सिंह नेगी, 39वीं गढ़वाल राइफल्स
** फ्रांस के फेस्टुबर्ट के पास 23-24 नवम्बर 1914 की रात को ग्रेट गैलेंट्री के लिए, जब रेजिमेंट दुश्मन से दुबारा भिड़ने और हमारी खाइयों से उन्हें निकाल बाहर करने में संलग्न थे और हालांकि सिर पर दो जगहों पर और हाथ पर चोट लगने के बावजूद सबसे करीबी रेंज से बमों और राइफलों से भारी आग बरसाये जाने की स्थिति में भी एक के बाद एक आने वाली प्रत्येक बाधा को पार करने वाले पहले जवानों में एक थे।<ref name="gaz1"/>
* फ्रैंक अलेक्जेंडर डी पास 34वां प्रिंस अल्बर्ट विक्टर्स ओन पूना हॉर्स
** 24 नवम्बर 1914 को फेस्टुबर्ट के पास विशिष्ट बहादुरी के लिए,
एक जर्मन सुरंग में प्रवेश करने और दुश्मन के बमों के बीच एक ट्रावर्स को नष्ट करना और बाद में भीषण आग के बीच से एक घायल व्यक्ति को बचाकर निकालने के लिए जो बाहर खुले में लेटा हुआ था।<ref>{{cite web|publisher=National Army Museum|title=The Victoria Cross|accessdate=2009-09-15|url=http://www.national-army-museum.ac.uk/exhibitions/vc/page4-2.shtml|archive-url=https://web.archive.org/web/20100820033615/http://national-army-museum.ac.uk/exhibitions/vc/page4-2.shtml|archive-date=20 अगस्त 2010|url-status=dead}}</ref>
* विलियम ब्रूस 59वीं शिंदे राइफल्स
** 19 दिसम्बर 1914 को गिवेंची के निकट एक रात के हमले के दौरान, लेफ्टिनेंट ब्रुस एक छोटी सी पार्टी की कमान में थे जिसने दुश्मन की एक खाई पर कब्जा कर लिया था। गर्दन में गंभीर चोट होने के बावजूद वे खंदक के ऊपर और नीचे आते-जाते रहे और मारे जाने से पहले कई घंटों तक कई जवाबी हमलों के खिलाफ अपने जवानों को डटे रहने के लिए प्रोत्साहित करते रहे। राइफलों और बमों से निकलने वाली आग पूरे दिन बहुत गंभीर थी और केवल एक कुशल तैनाती किये जाने और लेफ्टिनेंट ब्रूस द्वारा दिखायी गयी दिलेरी और साहस के कारण उनके जवान शाम तक डटे रहने में सक्षम रहे जब अंततः दुश्मन ने खंदक पर कब्जा कर लिया।<ref>''लंदन राजपत्र'' 4 सितम्बर 1919</ref>
* यूस्तेस जोथम, उत्तरी वजीरिस्तान मिलिशिया से संलग्न 51वें सिख
** 7 जनवरी 1915 को स्पिना खैसोरा (तोची वैली) में खोस्तवाल आदिवासियों के खिलाफ ऑपरेशनों के दौरान कैप्टन जोथम, जो उत्तरी वजीरिस्तान मिलिशिया के लगभग एक दर्जन लोगों की एक पार्टी को कमांड दे रहे थे, एक नल्लाह में उनपर हमला किया गया था और लगभग 1,500 आदिवासियों की एक जबरदस्त सेना द्वारा लगभग घेर लिया करते थे। उन्होंने पीछे हटने का आदेश दिया और वे खुद भी भाग सकते थे लेकिन अपने एक ऐसे जवान को बचाने की कोशिश में जिसने अपना घोड़ा खो दिया था उन्होंने पूरी बहादुरी से अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी। <ref>{{London Gazette|issue=29240|supp=yes|startpage=7279|date=23 जुलाई 1915|accessdate=26 नवम्बर 2007}}</ref>
* मीर दस्त 55वीं कोक राइफल्स (फ्रंटियर फ़ोर्स)
** 26 अप्रैल 1915 को [[बेल्जियम]] के वेल्त्जे में हमले के दौरान जमादार मीर दस्त ने अपनी पलटन का नेतृत्व काफी बहादुरी से किया और उसके बाद रेजिमेंट (जब कोई ब्रिटिश अधिकारी बचा नहीं रह गया था) की विभिन्न पार्टियों को एक साथ जुटाया और पीछे हटने का आदेश दिए जाने तक उन्हें अपनी कमान के तहत रखा। उन्होंने उस दिन काफी साहस का प्रदर्शन भी किया जब भीषण आग से घिर जाने पर उन्होंने आठ ब्रिटिश और भारतीय अधिकारियों को सुरक्षित बचाकर ले जाने में मदद की। <ref>{{cite news|title=Beluchis Fine Fighter|accessdate=2009-09-16|publisher=''[[दि न्यू यॉर्क टाइम्स|द न्यूयॉर्क टाइम्स]]''|articledate=25 जुलाई 1915|url=http://query.nytimes.com/gst/abstract.html?res=9C03E0DA1739E233A25756C2A9619C946496D6CF|date=25 जुलाई 1915|archive-url=https://web.archive.org/web/20121108073637/http://query.nytimes.com/gst/abstract.html?res=9C03E0DA1739E233A25756C2A9619C946496D6CF|archive-date=8 नवंबर 2012|url-status=live}}</ref>
* जॉन स्मिथ 15वें लुधियाना सिख
** 18 मई 1915 को रिचेबर्ग लावोन के पास सबसे विशिष्ट वीरता के लिए। 10 लोगों की एक बमबारी पार्टी के साथ, जिन्होंने स्वेच्छा से यह जिम्मेदारी उठायी थी, दो अन्य पार्टियों की कोशिशों के नाकाम हो जाने के बाद असाधारण रूप से खतरनाक ग्राउंड पर दुश्मन की मौजूदगी से 20 गज की दूरी के भीतर उन्होंने 96 बमों की आपूर्ति की जानकारी दी। लेफ्टिनेंट स्मिथ अपने दो जवानों की मदद से बमों को वांछित स्थान पर ले जाने में सफल रहे (आठ अन्य जवान मारे गए थे या घायल हो गए थे) और अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए उन्हें एक नदी को तैरकर पार करना पड़ा था जिसके दौरान पूरे समय वे होवित्ज़र, श्राप्नेल, मशीन-गन और राइफल की आग के बीच घिरे रहे थे।<ref>{{London Gazette|issue=29210|linkeddate=1915-06-29 |startpage=6269|endpage= |supp= |accessdate=2008-08-14}}</ref>
* कुलबीर थापा, 3री गोरखा राइफल्स
** 25 सितंबर 1915 को फ्रांस के फ्रौक्विसार्ट में रायफलमैन थापा ने स्वयं घायल होने के बावजूद लीसेस्टरशायर रेजिमेंट के एक घायल सैनिक को जर्मन ट्रेंच की पहली पंक्ति के पीछे पाया। हालांकि खुद को बचाने का तर्क देते हुए गोरखा घायल जवान के साथ पूरे दिन-रात जुटे रहे। अगले दिन सबेरे धुंधले मौसम में वे उसे जर्मन वायर से होकर ले गए और उसे एक अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थान पर रखा, फिर वापस लौटकर एक के बाद एक दो घायल गोरखा जवानों को वहां लेकर आये। उसके बाद वे वापस गए और दिन के व्यापक उजाले में ज्यादातर मार्ग पर दुश्मन की गोलाबारी के बीच ब्रिटिश सैनिक को बचाकर ले आये। <ref>{{cite web|title=Victoria Cross holders|publisher=National Army Museum|accessdate=2009-09-04|url=http://www.national-army-museum.ac.uk/exhibitions/vc/|archive-url=https://web.archive.org/web/20091112103728/http://www.national-army-museum.ac.uk/exhibitions/vc/|archive-date=12 नवंबर 2009|url-status=dead}}</ref>
* लाला 41वीं डोगरा
** 21 जनवरी 1916 को मेसोपोटामिया के अल ओराह में एक ब्रिटिश अधिकारी को दुश्मन के नजदीक लेता हुआ पाकर लांस-नाइक लाला उन्हें घसीटकर एक अस्थायी आश्रय में ले आये। उनके घावों पर पट्टी बांधने के बाद लांस-नाइक ने अपने ही एक सैन्य अधिकारी की पुकार सुनी जो खुले में घायल पड़े हुए थे। दुश्मन केवल {{convert|100|yd}} दूर था। लाला ने मदद के लिए आगे बढ़ने पर जोर दिया। उन्होंने घायल अधिकारी को गर्म रखने के लिए अपने स्वयं के कपड़ों को उतार लिया और उनके साथ अंधेरा होने के ठीक पहले तक मौजूद रहे और तब वापस अपने आश्रय में लौट आये। अंधेरा होने के बाद वे पहले अधिकारी को सुरक्षित स्थान पर ले गए और उसके बाद एक स्ट्रेचर के साथ वापस लौटकर अपने सैन्य अधिकारी को वापस ले गए।<ref>''लंदन राजपत्र'' 27 जुलाई 1945</ref>
* जॉन अलेक्जेंडर सिंटन इंडियन मेडिकल सर्विस
** 21 जनवरी 1916 को मेसोपोटामिया के ओराह रेन्स में कप्तान सिंटन ने बहुत भीषण गोलाबारी के बीच घायल जवान की सेवा की। "सबसे विशिष्ट वीरता और कर्तव्य के प्रति निष्ठा के लिए. हालांकि दोनों हाथों और बगल में गोली लगने के बावजूद उन्होंने अस्पताल जाने से मना कर दिया और दिन की रोशनी के रहते भीषण आग के बीच अपनी ड्यूटी पर डटे रहे. पिछली तीन कार्रवाइयों में कप्तान सिंटन ने अत्यंत बहादुरी का प्रदर्शन किया था।"<ref>''लंदन राजपत्र'' 21 जून 1916</ref>
* शाहमद खान 89 वी पंजाबी
** 12-13 अप्रैल 1916 को मेसोपोटामिया में बीट आईसा के निकट नायक शाहमद खान मजबूती से जमे दुश्मन से 150 गज की दूरी के भीतर हमारी नयी पंक्ति में एक अंतराल को कवर करने वाले एक मशीन-गन का इंचार्ज थे। उन्होंने तीन जवाबी हमलों को नाकाम कर दिया और दो बेल्ट फिलर्स को छोड़कर अपने सभी जवानों के घायल हो जाने के बाद भी अपनी बंदूक के साथ अकेले लड़ते रहे। तीन घंटे तक उन्होंने बहुत भीषण गोलाबारी के बीच अंतराल को बनाए रखा और जब उनका बंदूक नाकाम हो गया, वे और उनके दो बेल्ट-फिलर साथियों ने वापस लौटने का आदेश दिए जाने तक राइफलों के साथ अपनी पकड़ को बनाए रखा। उसके बाद उनकी मदद से वे अपनी बंदूक, गोला-बारूद और एक गंभीर रूप से घायल जवान और अंततः बाकी बचे सभी हथियारों और उपकरणों को वापस ले आये। <ref>''लंदन राजपत्र'' 26 सितंबर 1916</ref>
* गोबिंद सिंह 28वीं लाइट कैवलरी
** 30 नवम्बर और 1 दिसम्बर 1917 की रात को फ्रांस के पोजिएयेस के पूरब में लांस दफादार गोबिंद सिंह ने रेजिमेंट और ब्रिगेड के मुख्यालय के बीच तीन बार स्वयंसेवक के रूप में संदेशों का आदान-प्रदान किया, यह स्थान {{convert|1.5|mi|km|abbr=off}} से अधिक की दूरी पर खुले मैदान में स्थित था जहां दुश्मन की भीषण गोलाबारी हो रही थी। वे हर बार सन्देश को पहुंचाने में कामयाब रहे, हालांकि हर मौके पर उनके घोड़े को गोली लगी और उन्हें पैदल यात्रा के लिए मजबूर होना पड़ा.<ref>''लंदन राजपत्र'' 1 दिसम्बर 1917</ref>
* करणबहादुर राणा 3री गोरखा राइफल्स
** 10 अप्रैल 1918 को मिस्र के अल केफ्र में एक हमले के दौरान रायफलमैन करणबहादुर राणा और कुछ अन्य लोग भारी गोलाबारी के बीच दुश्मन के एक मशीन-गन पर हमला करने के लिए एक लुईस गन के साथ दबे पांव आगे बढ़ते रहे। लुईस गन की नंबर 1 टीम ने गोलाबारी शुरू कर दी लेकिन लगभग तुरंत उसे गोली मार दी गयी, जिसके बाद राइफ़लमैन ने मृत आदमी को बंदूक से दूर घसीट लिया, गोलाबारी शुरू की, दुश्मन के बंदूक चालक दल को करारा जवाब दिया और उसके बाद दुश्मन के बमवर्षकों एवं अपने सामने आये राइफ़ल्मैन को खामोश कर दिया। दिन के बचे हुए समय में उन्होंने काफी बहादुरी का काम किया और अंततः वापसी में गोलाबारी की कवर देने में मदद की जब तक कि दुश्मन उनके करीब नहीं आ गया।<ref>{{London Gazette|issue=30575|supp=yes|startpage=7307|date=21 जून 1918|accessdate=2009-03-23}}</ref>
* बदलू सिंह 14वीं मूर्रे'ज जाट लांसर्स
** 2 सितंबर 1918 को फिलिस्तीन में जॉर्डन नदी के पश्चिमी किनारे पर, जब उनके स्क्वाड्रन दुश्मन की एक मजबूत श्तिति का सामना कर रहे थे, रसाईदार बदलू सिंह ने महसूस किया कि ज्यादातर लोग एक छोटी सी पहाड़ी से होने वाले हमले से हताहत हो रहे थे जिस पर मशीन-गनों और 200 पैदल सैनिकों का कब्जा था। बिना किसी झिझक के उन्होंने छह अन्य रैंकों को एकत्र किया और खतरे की पूरी तरह से परवाह किये बिना धावा बोल दिया और उस स्थिति पर कब्जा कर लिया। एक मशीनगन को अकेले कब्जे में करने के क्रम में वे प्राणघातक रूप से घायल हो गए थे लेकिन उनकी मृत्यु से पहले सभी बंदूकों और पैदल सैनिकों ने उनके सामने आत्मसमर्पण कर दिया था।<ref>''लंदन गजट'' 23 सितम्बर 1918</ref>
== परिणाम ==
:''अधिक जानकारी के लिए वर्ल्ड वार I एंड इट्स आफ्टरमैथ और लिस्ट ऑफ रेजिमेंट्स ऑफ द इंडियन आर्मी (1922) को देखें ''
[[चित्र:5thRoyalGurkhaRiflesNorth-WestFrontier1923.JPG|thumb|5वें रॉयल गोरखा राइफल्स, उत्तर पश्चिम फ्रंटियर 1923]]
1919 में भारतीय सेना 491,000 जवानों को बुला सकी थी लेकिन अनुभवी अधिकारियों की कमी थी, ज्यादातर अधिकारी युद्ध में मारे गए थे या घायल हो गए थे।<ref>जेफ़री, पी.101</ref> 1921 में भारत सरकार ने नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर की सुरक्षा और आतंरिक सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाकर अपनी सैन्य आवश्यकताओं की एक समीक्षा करनी शुरू की। <ref>जेफ़री, पी.103</ref> 1925 तक भारत में सेना के सैनिकों की संख्या घटाकर 197,000 कर दी गयी जिनमें से 140,000 भारतीय थे।<ref>जेफ़री, पी.109</ref> बटालियनों को अब तीन भूमिकाओं में से एक प्रदान किया गया: चार पैदल सेना के डिवीजनों की फील्ड आर्मी और पांच घुड़सवार ब्रिगेड; कवर करने वाले सैनिक, आक्रमण की स्थिति में सुरक्षित सेना के रूप में 12 इन्फैंट्री ब्रिगेड और समर्थक हथियार; और अंत में नागरिक बल की मदद और आवश्यकता पड़ने पर फील्ड आर्मी की सहायता के लिए आतंरिक सुरक्षा सैनिक, 43 इन्फैन्ट्री बटालियन.<ref>सुमनेर, पी.13</ref> कैवलरी रेजिमेंटों की संख्या 39 से घटाकर 21 कर दी गयी थी। पैदल सेना के रेजिमेंटों को 20 बड़े रेजिमेंटों में बदल दिया गया जिसमें प्रत्येक रेजिमेंट में चार या पांच बटालियन के साथ-साथ एक प्रशिक्षण बटालियन शामिल थे, जिन्हें हमेशा 10वां नंबर दिया गया, साथ ही इसमें दस गोरखा रेजीमेंटों को भी शामिल किया गया था।<ref name="su15"/> 1922 तक नौ एकल बटालियन रेजिमेंटों को भंग कर दिया गया।<ref name="su15"/> दो बड़े रेजिमेंटों को बाद में भंग किया गया, तीसरी मद्रास रेजिमेंट को आर्थिक कारणों से और बीसवीं बर्मा राइफल्स को उस समय जब बर्मा भारत के शासन का हिस्सा नहीं रह गया था।<ref name="su15"/>
प्रथम विश्व युद्ध के अंत के बावजूद भी भारतीय सेना के लिए संघर्ष का अंत नहीं हुआ -- यह 1919 में तीसरे अफगान युद्ध<ref>बर्थोर्प, पी.157</ref> में और उसके बाद 1920-1924 के बीच और फिर 1919-1920 के बीच वजीरिस्तान अभियान में शामिल हुई। <ref>बर्थोर्प देखें, पी. 158.</ref> 1930-1931 के बीच आफरीदियों के खिलाफ, 1933 में मोहमंदों के खिलाफ और फिर 1935 में तथा अंत में [[द्वितीय विश्वयुद्ध|द्वितीय विश्व युद्ध]] की कार्रवाई शुरू होने से ठीक पहले एक बार फिर से 1936-1939 के बीच वजीरिस्तान में किये गए युद्ध.<ref>बर्थोर्प, पी.170.</ref>
1931 में नई दिल्ली में [[इण्डिया गेट|इंडिया गेट]] का निर्माण हुआ जो उन भारतीय सैनिकों के प्रति श्रद्धांजलि है जिन्होंने प्रथम विश्व युद्ध में लड़ते हुए अपने प्राण गंवा दिए थे।<ref>{{cite web|accessdate=2009-09-07|title=India Gate|publisher=India.gov.ind|url=http://india.gov.in/knowindia/indiagate.php|archive-url=https://web.archive.org/web/20090905153609/http://india.gov.in/knowindia/indiagate.php|archive-date=5 सितंबर 2009|url-status=live}}</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[भारतीय सेना]] (1895-1947)
* [[भारतीय रक्षा अधिनियम 1915]]
* [[प्रथम विश्व युद्ध का मध्य पूर्वी युद्ध क्षेत्र]]
* [[द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीय सेना]]
== टिप्पणियां ==
{{Reflist|2}}
== सन्दर्भ ==
{{Refbegin}}
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* {{Cite book|last=Baura|first=|Pradeep|year=2005|title=The state at war in South Asia|publisher=University of Nebraska Press|isbn=0803213441}}
* {{Cite book|last=Bridger|first=Geoff|title=The Great War Handbook|url=https://archive.org/details/greatwarhandbook0000brid|publisher=Pen and Sword|date=2009|location=Barnsley|isbn=978 1 84415 936 9}}
* {{Cite book|last=Chappell|first=Mike|title=The British Army in World War I: The Western Front 1914-16|url=https://archive.org/details/britisharmyinwor0000chap|publisher=Osprey Publishing|year=2003|isbn=1841763993}}
* {{Cite book|last=Chappell|first=Mike|year=2005|title=The British Army in World War I: The Eastern Fronts Volume 3 of The British Army in World War I|publisher=Osprey Publishing|isbn=1841764019}}
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* {{Cite book|last=Jeffery|first=Keith|year=1984|title=The British Army and the Crisis of Empire, 1918-22|publisher=Manchester University Press ND|isbn=0719017173|url-access=registration|url=https://archive.org/details/britisharmycrisi0000jeff}}
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* {{Cite book|last=Sumner|first=Ian|title=The Indian Army 1914-1947|year=2001|publisher=Osprey Publishing|isbn=1841761966}}
* {{Cite book|last=Werner|first=Haupt|year=1994|title=Deutschlands Schutzgebiete in Übersee : 1884 - 1918|isbn=3790902047|publisher=Podzun Pallas Verlag}}
* {{Cite book|last=Willmott|first=H P|year=2003|title=First World War|url=https://archive.org/details/firstworldwar0000will_2003|publisher=Dorling Kindersley|isbn=1405300299}}
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{{Indian Expeditionary Forces}}
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[[श्रेणी:प्रथम विश्व युद्ध में भारत]]
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फ़्रांस का इतिहास
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[[चित्र:French borders from 985 to 1947.gif|right|thumb|300px|९८५ से लेकर १९४७ तक की अवधि में फ्रांस की सीमाओं का विस्तार तथा संकुचन]]
[[फ़्रान्स|फ्रांस]] का प्राचीन नाम 'गॉल' था। यहाँ अनेक जंगली जनजातियों के लोग, मुख्य रूप से, केल्टिक लोग, निवास करते थे। सन् 57-51 ई.पू. में [[जुलियस सीसर|जूलियस सीजर]] ने उन्हें परास्त कर [[रोमन साम्राज्य]] में मिला लिया। वहाँ शीघ्र ही रोमन सभ्यता का प्रसार हो गया। प्रथम शताब्दी के बाद कुछ ही वर्षों में [[ईसाई धर्म]] का प्रचार तेजी से आरंभ हो गया और केल्टिक बोलियों का स्थान [[लातिन भाषा|लातीनी भाषा]] ने ले लिया। पाँचवीं शती में जर्मन जातियों ने उसपर अक्रमण किया। उत्तर में फ्रैंक लोग बस गए। इन्हीं का एक नेता क्लोविस था जिसने सन् 486 में अन्य लोगों को हरा कर अपना राज्य स्थापित किया और 496 ई. में ईसाई धर्म में अभिषिक्त हो गया। उसके उत्तराधिकारियों के समय देश में पुन: अराजकता फैल गई। तब सन् 732 में [[चार्ल्स मार्टेल]] ने विद्रोहियों का दमन कर शांति और एकता स्थापित की। उसके उत्तराधिकारी पेपिन की मृत्यु (768 ई. में) होने के बाद पेपिन का पुत्र शार्लमान गद्दी पर बैठा। उसने आसपास के क्षेत्रों को जीतकर राज्य का विस्तार बहुत बढ़ा दिया, यहाँ तक कि सन् 800 ई. में पोप ने उसे पश्चिमी राज्यों का सम्राट् घोषित किया।
शार्लमान के उत्तराधिकारी अयोग्य साबित हुए जिससे साम्राज्य विखंडित होने लगा और उत्तर से नार्समॅन लोगों के हमले शुरू हो गए। ये लोग नार्मंडी में बस गए। सन् 987 में शासनसूत्र ह्यूकैपेट के हाथ में आया किंतु कुछ समय तक उसका राज्य पेरिस नगर के आस पास के क्षेत्र तक ही सीमित रहा। इधर उधर कई सामंतों का बोलबाला था जो यथेष्ट शक्तिशाली थे। 13वीं शताब्दी तक राजा की शक्ति में क्रमश: वृद्धि होती गई किंतु इस बीच [[शतवर्षीय युद्ध]] (1337-1453) के कारण इसमें समय समय पर बाधाएँ भी उपस्थित होती रहीं। [[जोन ऑफ़ आर्क|जोन ऑफ आर्क]] नामक देशभक्त महिला ने राजा और उसके सैनिकों में जो उत्साह और स्फूर्ति भर दी थी, उससे सातवें चार्ल्स की मृत्यु (1461) तक फ्रांस की भूमि पर से अंग्रेजी आधिपत्य समाप्त हो गया। फिर लूई 11वें के शासनकाल में (1461-83 ई.) सामंतों का भी दमन कर दिया गया और वर्गंडी फ्रांस में मिला लिया गया।
आठवें चार्ल्स (1483-89) तथा 12वें लूई (1489-1515) के शासनकाल में [[इटली]] के विरुद्ध कई लड़ाइयाँ लड़ी गईं जिनका सिलसिला आगे भी जारी रहा। परिणामस्वरूप पश्चिमी यूरोप में शक्तिवृद्धि के लिए [[स्पेन]] के साथ कशमकश आरंभ हो गई। जब फ्रांस में [[प्रोटेस्टेंट संप्रदाय|प्रोटेस्टैट धर्म]] का जोर बढ़ने लगा कई फ्रेंच सरदारों ने राजनीतिक उद्देश्य से उसे अपना लिया जिससे गृहयुद्ध की आग भड़क उठी। फ्रेंच राजतंत्र स्वदेश में तो सामान्यत: प्रोटेस्टैट विचारों का दमन करना चाहता था किंतु बाहर स्पेन की ताकत न बढ़ने देने के उद्देश्य से प्रोटेस्टैटों का समर्थन करता था। नवें चार्ल्स (1560-74) तथा तृतीय हेनरी (1574-89) के राज्यकाल में गृहयुद्धों के कारण फ्रांस को बड़ी क्षति पहुँची। पेरिस, कैथालिक मत का गढ़ बना रहा। सन् 1572 में हजारों प्रोटेस्टैट सेंट बार्थोलोम्यू में मार डाले गए। निदान चतुर्थ हेनरी (1589-1610) ने देश में शांति स्थापित की, धार्मिक सहिष्णुता की घोषणा की और राजा की स्थिति सुदृढ़ बना दी। एक कैथालिक द्वारा उसकी हत्या हो जाने पर उसका पुत्र 13वाँ लूई गद्दी पर बैठा। उसके मंत्री रीशल्यू ने राजा की और राज्य की शक्ति बढ़ाने का काम जारी रखा। [[तीसवर्षीय युद्ध]] में शरीक होकर उसने फ्रांस के लिए अलसेस का क्षेत्र प्राप्त किया और उसे यूरोप का प्रमुख राज्य बना दिया। 13वें लूई की मृत्यु के बाद उसका पुत्र 14वाँ लूई (1638-1715) पाँच वर्ष की अवस्था में फ्रांस का शासक बना (1643)। उसका शासन वस्तुत: बालिग होने पर 1661 ई. में प्रारंभ हुआ। शुरू में उसने ऊपरी टीमटाम में बहुत रुपया फूँक दिया, जब उसने वर्साय के प्रसिद्ध राजप्रासाद का निर्माण कराया। वृद्धावस्था में उसका स्वेच्छाचार बढ़ता गया। उसने विदेशों से युद्ध छेड़ते रहने की नीति अपनाई जिससे देश की सैनिक शक्ति और आर्थिक स्थिति को क्षति पहुँची तथा विदेशी उपनिवेश भी उससे छिन गए। उसके उत्तराधिकारियों 15वें लूई (1715-74) तथा 16वें लूई (1774-93) के समय में भी राजकोष का अपव्यय बढ़ता गया। जनता में असंतोष फैलने लगा जिसे [[वालटेयर]] तथा [[रूसो]] की रचनाओं से प्रोत्साहन मिला।
[[चित्र:Prise de la Bastille clean.jpg|right|thumb|300px|जुलाई १७८९ में बस्तील का विध्वंस फ्रांस की क्रांति की सबसे महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है।]]
जब राष्ट्रीय ऋण बहुत बढ़ गया तब [[लुई सोलहवाँ|लूई 16वें]] को विवश होकर स्टेट्स-जनरल की बैठक बुलानी पड़ी। सामान्य जनता के प्रतिनिधियों ने अपनी सभा अलग बुलाई और उसे ही राष्ट्रसभा घोषित किया। यहीं से [[फ़्रान्सीसी क्रान्ति|फ्रांसीसी क्रांति]] की शुरुआत हुई। सितंबर, 1792 में [[प्रथम फ्रेंच गणतंत्र]] उद्घोषित हुआ और 21 जनवरी 1793, को लूई 16वें को [[फाँसी]] दे दी गई। बाहरी राज्यों के हस्तक्षेप के कारण फ्रांस को युद्धसंलग्न होना पड़ा। अंत में सत्ता [[नेपोलियन बोनापार्ट|नैपोलियन]] के हाथ में आई, जिसने कुछ समय बाद 1804 में अपने को फ्रांस का सम्राट् घोषित किया। [[वाटरलू का युद्ध|वाटरलू की लड़ाई]] (1815 ई.) के बाद शासन फिर [[बूरबों राजवंश]] के हाथ में आ गया। [[दसवाँ चार्ल्स|दसवें चार्ल्स]] ने जब 1830 ई. में नियंत्रित राजतंत्र के स्थान में निरंकुश शासन स्थापित करने की चेष्टा की, तो तीन दिन की क्रांति के बाद उसे हटाकर [[लूई फिलिप]] के हाथ में शासन दे दिया गया। सन् 1848 में वह भी सिंहासनच्युत कर दिया गया और फ्रांस में [[द्वितीय फ्रांसीसी गणतंत्र|द्वितीय गणतंत्र]] की स्थापना हुई। यह गणतंत्र अल्पस्थायी ही हुआ। उसके अध्यक्ष लूई नैपोलियन ने 1852 में राज्यविप्लव द्वारा अपने आपको तृतीय नैपोलियन के रूप में सम्राट् घोषित करने में सफलता प्राप्त कर ली। उसकी आक्रामक नीति के परिणामस्वरूप [[प्रशिया|प्रशा]] से युद्ध छिड़ गया (1870-71), जिसमें फ्रांस को गहरी शिकस्त उठानी पड़ी। [[नैपोलियन तृतीय|तृतीय नैपोलियन]] का पतन हो गया और [[तृतीय फ्रांसीसी गणतंत्र|तीसरे गणतंत्र]] की स्थापना की बुनियाद पड़ी।
तृतीय गणतंत्र का संविधान सन् 1875 में स्वीकृत हुआ। इसने राज्य को [[चर्च]] के प्रभाव से पृथक् रखने का वचन दिया और सार्वजनिक पुरुष मताधिकार के आधार पर चुनाव कराया। संविधान का एक बड़ा दोष यह था कि राष्ट्रपति मात्र कठपुतली जैसा था और कार्यपालिका भी शक्तिहीन थी। इसी से एक मंत्रिमंडल के बाद दूसरा मंत्रिमंडल बनता था और अत्यंत प्रभावशाली अवर सदन द्वारा पृथक् कर दिया जाता था। फिर भी गणतंत्र ने दृढ़तापूर्वक उस स्थिति का सामना किया जो वामपंथियों और दक्षिणपंथियों के पारस्परिक झगड़ों के कारण उत्पन्न होती जा रही थी। इस समय तक एशिया तथा अफ्रीका के कतिपय क्षेत्रों पर फ्रांस का आधिपत्य स्थापित हो चुका था और प्रभाव तथा राज्यविस्तार की दृष्टि से उसका स्थान [[ब्रिटेन]] के बाद दूसरा था।
[[चित्र:Churchill De Gaulle HU 60057.jpg|right|thumb|200px|विंस्टन चर्चिल और जनरल डी गॉल]]
[[पहला विश्व युद्ध|प्रथम महायुद्ध]] (1914-18) में फ्रांस को [[ब्रिटेन]] तथा [[संयुक्त राज्य अमेरिका|अमरीका]] के साथ मिलकर [[जर्मनी]], [[ऑस्ट्रिया|आस्ट्रिया]] तथा [[तुर्की]] से युद्ध में संलग्न होना पड़ा। विजय के परिणामस्वरूप यद्यपि [[अलज़ास]] तथा [[लोरेन]] का औद्योगिक क्षेत्र पुन: फ्रांस को मिल गया, फिर भी लड़ाई मुख्यत: फ्रेंच भूमि पर ही लड़ी गई थी, इसलिए उसकी इतनी अधिक बर्वादी हुई कि वर्षों तक उसकी आर्थिक अवस्था सुधर न सकी। फरवरी, 1934 में दक्षिणपंथियों द्वारा किए गए व्यापक उपद्रवों के कारण वामपंथियों को अपनी ताकत बढ़ाने का अवसर मिल गया। सन् 1936 के चुनाव में उन्हें सफलता मिली, जिससे [[लियाँ ब्लुम]] के नेतृत्व में तथाकथित 'जनता की सरकार' स्थापित की जा सकी। ब्लुम ने युद्ध का सामान तैयार करनेवाले कितने ही उद्योगों का राष्ट्रीयकरण कर दिया और कारखानों में 40 घंटे का सप्ताह अनिवार्य कर दिया। अनुदार या रूढ़िवादी दलों का विरोध बढ़ जाने पर ब्लुम को पदत्याग कर देना पड़ा। [[एड्डअर्ड दलादिए]] के नेतृत्व में सन् 1938 में जो नई सरकार बनी उसका समर्थन, [[एडोल्फ़ हिटलर|हिटलरी]] कारनामों से आसन्न संकट के कारण वामपंथियों ने भी किया। सितंबर, 1939 में ब्रिटेन के साथ साथ फ्रांस ने भी जर्मनी से युद्ध की घोषणा कर दी। 1940 की गर्मियों में जब जर्मन सेना ने [[बेल्जियम]] को ध्वस्त करते हुए [[पेरिस]] की ओर अग्रगमन किया तो [[मार्शल पेताँ]] की सरकार ने जर्मनी से संधि कर ली। फिर भी फ्रांस के बाहर जर्मनों का विरोध जारी रहा और जनरल [[डी गॉल]] के नेतृत्व में अस्थायी सरकार की स्थापना की गई। पेरिस की उन्मुक्ति के बाद डी गॉल की सरकार [[एलजीयर्स]] से उठकर पैरिस चली गई और ब्रिटेन, अमरीका आदि ने सरकारी तौर से उसे मान्यता प्रदान कर दी।
युद्ध समाप्त होने पर यद्यपि फ्रांस की आर्थिक स्थिति जर्जर हो चुकी थी, फिर भी सक्रिय उद्योग एवं अमरीका की सहायता से उसमें काफी सुधार हो गया। कार्यपालिका के अधिकारों के संबंध में मतभेद हो जाने से 1946 में डी गॉल ने पदत्याग कर दिया। दिसंबर में जो [[चतुर्थ फ्रांसीसी गणतंत्र|चतुर्थ गणतंत्र]] स्थापित हुआ, उसमें वही सब कमजोरियाँ थीं जो तृतीय गणतंत्र में थीं। सारा अधिकार राष्ट्रसभा के हाथ में केंद्रित था और विविध राजनीतिक दलों में एकता न हो सकने के कारण कोई भी मंत्रिमंडल स्थायित्व प्राप्त करने में असमर्थ रहा। इसी बीच उत्तर अफ्रीका तथा [[हिंदचीन]] में फ्रेंच शासन के विरुद्ध विद्रोह की व्यापकता बढ़ती गई। तब जनरल डी गॉल को पुन: प्रधान मंत्री के पद पर प्रतिष्ठित किया गया। नया संविधान बनाया गया जिसमें कार्यपालिका एवं राष्ट्रपति के हाथ मजबूत करने के लिए विशिष्ट अधिकार दिए गए। मतदाताओं ने अत्यधिक बहुमत से इसका समर्थन किया। नए चुनाव के बाद दिसंबर 1958 में डी गोल के नेतृत्व में [[पँचम फ्रांसीसी गणतंत्र|पाँचवें गणतंत्र]] की स्थापना हुई। सन् 1961 तक फ्रांस ने अपने अधीनस्थ कितने ही देशों को स्वतंत्र कर दिया। वे अब [[संयुक्त राष्ट्र]]संघ के सदस्य बन गए हैं।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==इन्हें भी देखें==
*[[फ़्रान्सीसी क्रान्ति|फ्रांसीसी क्रांति]]
*[[नेपोलियन बोनापार्ट]]
*[[प्रथम फ्रांसीसी साम्राज्य]]
*[[तृतीय फ्रांसीसी गणतंत्र]]
*[[फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी]]
*[[फ़्रांसीसी औपनिवेशिक साम्राज्य]]
*[[फ्रांसीसी जर्मन युद्ध]]
*[[फ्रांस का संविधान]]
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20150604144647/http://www.diplomatie.gouv.fr/en/france_159/discovering-france_2005/france-from-to-z_1978/history_1984/index.html ''History of France'' by French Ministry of Foreign Affairs]
* [https://web.archive.org/web/20110807095335/http://www.histoire-pour-tous.fr/histoire-de-france.html History of France, from Prehistory to Nowadays] (in French + English translation)
* [https://web.archive.org/web/20120620125112/http://www.france-pittoresque.com/ History of France, from Middle Ages to XIXe century] (in French)
* [https://web.archive.org/web/20110709222118/http://eudocs.lib.byu.edu/index.php/History_of_France:_Primary_Documents History of France: Primary Documents] (English interface)
* [https://web.archive.org/web/20090426053718/http://www.n-cyclopedia.com/france-history/index.htm A History of France] (in English)
* Simon Kitson's Vichy web-page [https://web.archive.org/web/20090911094631/http://artsweb.bham.ac.uk/vichy/]
* [https://web.archive.org/web/20090327042456/http://www.tnr.com/politics/story.html?id=f89e5a9b-970c-4551-888b-6dcfab0761e7 "Becoming France," David Bell, The New Republic, 1 अप्रैल 2009] (in English)
[[श्रेणी:फ़्रांस का इतिहास|*]]
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भारमल
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Anitya Gautam
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text/x-wiki
{{Infobox royalty
| succession = आमेर के राजा
|image= [[File:Raja bharmal painting.jpg|250px|]]
|caption =
| reign = 1 जून 1548<br>27 जनवरी 1574
| dynasty = कछवाहा
| predecessor =आसकरण
| successor = [[भगवानदास|भगवन्त दास]]
| birth_date = 1498
| birth_place = [[आमेर]]
| death_date = 27 जनवरी 1574
| death_place = [[आगरा]]
}}
'''भारमल''' (शासन: 1 जून 1548 - 27 जनवरी 1574) राजा पृथ्वीराज कछवाहा के पुत्र थे।<ref>{{cite book|title=राजस्थान के महाराणा और राज्यों का जीवन चरित्र |url = http://books.google.be/books?id=egBCAAAAIAAJ |author=मनोहर सिंह राणावत |publisher= राजस्थानी ग्रंथागार |year=1985 |page=100}}</ref> इतिहासकार 'टॉड' ने इन्हें 'बिहारीमल' लिखा है। ये [[आमेर]] के शासक थे। [[अकबर]] की अधीनता स्वीकार करने वाले तथा [[अकबर]] की शाही मनसबदारी मे प्रवेश करने वाले पहले राजपूत शासक थे। इन्होंने हाजी खाँ विद्रोही के विरुद्ध मजनूँ खाँ की सहायता की थी, इसलिये मजनूँ खाँ ने [[अकबर|मुगल सम्राट् अकबर]] से इन्हें दरबार में बुलवाने की प्रार्थना की ये फतेहपुर सीकरी मे मिलने गये और पहली भेंट में ही इनका बादशाह पर अच्छा प्रभाव पड़ा और इन्हें [[अकबर]] की सेवा का अवसर मिला। बाद में इनका भाई रूपसी भी मुगल सम्राट् की सेवा में उपस्थित हुआ। इन्होंने अपनी पुत्री भारमली/हरखाबाई का विवाह [[अकबर|सम्राट् अकबर]] से कर दिया। इनके पुत्र भगवान्दास और पौत्र [[राजा मानसिंह]] भी बाद में [[अकबर]] के दरबार में पहुँच गए। सन् 1574 के लगभग भारमल की मृत्यु हुई।<ref name="u367">{{cite web | title= | url=https://player.uacdn.net/lesson-raw/AG25Q2TQYQ9KL2CJ5KCD/pdf/7830451401.pdf | access-date=2026-10-17}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{जयपुर के महाराजा}}
[[श्रेणी:भारतीय राजा]]
[[श्रेणी:भारत का इतिहास]]
[[श्रेणी:1491 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:१५७४ में निधन]]
[[श्रेणी:जयपुर के महाराजा]]
[[श्रेणी:जयपुर के लोग]]
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चाहर धर्मेंद्र
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{{Infobox royalty
| succession = आमेर के राजा
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| birth_place = [[आमेर]]
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| death_place = [[आगरा]]
}}
'''भारमल''' (शासन: 1 जून 1548 - 27 जनवरी 1574) राजा पृथ्वीराज कछवाहा के पुत्र थे।<ref>{{cite book|title=राजस्थान के महाराणा और राज्यों का जीवन चरित्र |url = http://books.google.be/books?id=egBCAAAAIAAJ |author=मनोहर सिंह राणावत |publisher= राजस्थानी ग्रंथागार |year=1985 |page=100}}</ref> इतिहासकार 'टॉड' ने इन्हें 'बिहारीमल' लिखा है। ये [[आमेर]] के शासक थे। [[अकबर]] की अधीनता स्वीकार करने वाले तथा [[अकबर]] की शाही मनसबदारी मे प्रवेश करने वाले पहले राजपूत शासक थे। इन्होंने हाजी खाँ विद्रोही के विरुद्ध मजनूँ खाँ की सहायता की थी, इसलिये मजनूँ खाँ ने [[अकबर|मुगल सम्राट् अकबर]] से इन्हें दरबार में बुलवाने की प्रार्थना की ये फतेहपुर सीकरी मे मिलने गये और पहली भेंट में ही इनका बादशाह पर अच्छा प्रभाव पड़ा और इन्हें [[अकबर]] की सेवा का अवसर मिला। बाद में इनका भाई रूपसी भी मुगल सम्राट् की सेवा में उपस्थित हुआ। इन्होंने अपनी पुत्री भारमली/हरखाबाई का विवाह [[अकबर|सम्राट् अकबर]] से कर दिया। इनके पुत्र भगवान्दास और पौत्र [[राजा मानसिंह]] भी बाद में [[अकबर]] के दरबार में पहुँच गए। सन् 1574 के लगभग भारमल की मृत्यु हुई।
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{जयपुर के महाराजा}}
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भिक्षु जगदीश कश्यप
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text/x-wiki
'''भिक्खु जगदीश कश्यप''' (2 मई 1908 - 28 जनवरी 1976) विख्यात बौद्ध भिक्षु तथा [[पालि]] और संस्कृत साहित्य के महान विद्वान और शिक्षक थे। उनका जन्म [[राँची]] में एक शिक्षित सम्पन्न कायस्थ परिवार में हुआ था। इनका पैतृक घर गया जिले के रौनियां गांव में था। इनके जन्म का नाम 'जगदीश नारायण' था। उनके पिता का नाम श्याम नारायण और माता का नाम बतासो देवी था। 1933 में उन्होने दीक्षा ली।
== शिक्षा ==
* बीए - पटना कॉलेज से, 1929
* एम ए ([[दर्शनशास्त्र]]) - [[बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय]], 1931.
* एम ए ([[संस्कृत]]) - बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, 1932.
== इन्हें भी देखें ==
* [[नव अनालन्दा महाविहार]]
* [[जगदीश कश्यप]] (हिन्दी कथाकार)
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20110723180130/http://www.fwbo.org/sangharakshita/eightteachers.html My Eight Main Teachers] A talk by Sangharakshita in which he describes his time with Bhikkhu Kashyap (amongst other teachers).
[[श्रेणी:बौद्ध भिक्षु]]
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सलवार कमीज़
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text/x-wiki
{{इस्लामी संकृति}}
'''सलवार कमीज'''(या '''शलवार क़मीज़''') [[दक्षिण एशिया]] और मध्य एशिया के पुरुषों और महिलाओं का पारंपरिक परिधान है। सलवार एक पतलून या पाईजामह है और क़मीस एक लंबा है।
== इतिहास ==
[[चित्र:Hindu girl karachi.jpg|thumb|left|150px|एक हिन्दू लड़की के चित्र [[कराची]], [[सिंध प्रभाग|सिंध]], संकीर्ण सलवार & कमीज में. ग. 1870. भारत प्राच्य और कार्यालय संग्रह, ब्रिटिश लाइब्रेरी]]
[[चित्र:Muslim girl karachi1870.jpg|thumb|left|150px|कराची, सिंध, से एक सलवार और ब्लाउज में एक मुस्लिम लड़की के चित्र. ग. 1870. भारत प्राच्य और कार्यालय संग्रह, ब्रिटिश लाइब्रेरी]]
पैंट, या सलवार, [[पंजाबी]] मेंसलवार के रूप में जाना जाता है: '''ਸਲਵਾਰ ਕ਼ਮੀਜ਼''' सलवार, या शलवार के '''શલવાર કમીજ઼''' [[गुजराती भाषा|गुजराती]] सलवार, या शलवार और उर्दू में शलवार क़मीज़:''' شلوار قمیض'''. शब्द फ़ारसी से आता है: '''شلوار,''' पैंट अर्थ।
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:वस्त्र]]
[[श्रेणी:इस्लाम/वस्त्र]]
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घांची
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कुशल बोराणा
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'''घाँची''' घाँची नाम से भारत में 3 जातिया है एक मूल घाँची जो तेली ही थे, यह समाज सभ्य समाज की श्रेणी में आता है गीता के उपदेशों का पालक है तथा श्री राम को भी प्रश्रय देता है|रुद्रमहालय मंदिर अहिलनवाडा पाटण में मंदिर निर्माण करवा रहे थे जयसिंह सौलंकी उस समय मंदिर निर्माण दिन रात चल रहा था तो जो घाँची थे तेल निकालने के लिए मशालों को जलाने के लिए इन तेलियों व निर्माण कार्य की निगरानी के लिए 8 गोत्रो के राजपूतों को लगाया गया था मंदिर निर्माण12 वर्ष में पूर्ण होना था लेकिन8 वर्ष बाद ही तेलियों के पास राज काज के कारण धन इक्कठा ज्यादा हो गया तो वो छुट्टी के बहाने घर जाने की आज्ञा लेने महाराज जयसिंह सोलंकी के पास गए तो महाराजा ने मना करते हुए बोले 4 साल बाद मंदिर निर्माण पूर्ण हो जाएगा तो में स्वयं आपको राजकीय सम्मान के साथ विदाई दूंगा तो तेली हामी भरकर चले गए लेकिन तेलियों ने घर जाने का निश्चय अटल कर रखा था मन में सो वो वापस काम पर लग गए और कुछ दिन बाद उन तेलियों ने वापस छुटटी देने की माग महाराज से कर दी तो महाराज ने अपने शाख/गवाई भरने के लिए किसी को लाने को कहा तो तेलियों ने सोचा कि उन राजपूत सरदारो को ही मना लेते हैं इसलिए उन्होंने तरक़ीब सुझाई उन्होंने एक भोज का आयोजन रखा और सभी राजपूतों को उस भोज में आमंत्रित कर दिया और भोजन में नशे की चीज मिला दी भोज करते ही सारे राजपूत सरदार नशे व नींद बेहोशी की हालत में चले गए और इसी का फायदा उठाकर सारे तेली वहाँ से भाग निकले बस यही भागे हुए तेली मूल घाँची थे ! [[राजपूत घाँची ]]
यह वही निगरानी रखने वाले राजपूत सरदार थे जिन्होंने तेली भाग जाने देने की गलती करने की एवज में सभी राजपूतों ने अधूरा पड़ा मंदिर निर्माण कार्य पूरा करवाया था 3 [[जैन घाँची ]] ये 11 वी शताब्दी के जैन थे घी तेल बेचने वाले इन्होंने उन राजपुतो की राज आज्ञा व मंदिर निर्माण पूरा करवाने में मदद की थी इसलिए ये जैन बाद में जैन घाँची कहलाये [[अन्य पिछड़ा वर्ग|अन्य पिछड़ी जाति]]यों (ओबीसी) में से एक है जो [[गुजरात]], [[राजस्थान]], [[उत्तर प्रदेश]] और भारत के अन्य हिस्सों में पाई जाती है।<ref name="Volume XXII Part One Editors R pages 397">People of India Gujarat Volume XXII Part One Editors R. B Lal, P.B.S.V Padmanabham, G Krishnan and M Azeez Mohideen pages 397 to 401</ref><ref>{{cite web|url=http://www.financialexpress.com/news/ghanchis-in-rajasthan-want-to-be-led-by-narendra-modi/257711|title=Ghanchis in Rajasthan want to be led by Narendra Modi|work=The Financial Express}}</ref>
==सन्दर्भ==
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चाहर धर्मेंद्र
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सन्दर्भ रहित जानकारी
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'''घाँची''' घाँची नाम से भारत में 3 जातिया है एक मूल घाँची जो तेली ही थे, जब रुद्रमहालय मंदिर अहिलनवाडा पाटण में मंदिर निर्माण करवा रहे थे जयसिंह सौलंकी उस समय मंदिर निर्माण दिन रात चल रहा था तो जो घाँची थे तेल निकालने के लिए मशालों को जलाने के लिए इन तेलियों व निर्माण कार्य की निगरानी के लिए 8 गोत्रो के राजपूतों को लगाया गया था मंदिर निर्माण12 वर्ष में पूर्ण होना था लेकिन8 वर्ष बाद ही तेलियों के पास राज काज के कारण धन इक्कठा ज्यादा हो गया तो वो छुट्टी के बहाने घर जाने की आज्ञा लेने महाराज जयसिंह सोलंकी के पास गए तो महाराजा ने मना करते हुए बोले 4 साल बाद मंदिर निर्माण पूर्ण हो जाएगा तो में स्वयं आपको राजकीय सम्मान के साथ विदाई दूंगा तो तेली हामी भरकर चले गए लेकिन तेलियों ने घर जाने का निश्चय अटल कर रखा था मन में सो वो वापस काम पर लग गए और कुछ दिन बाद उन तेलियों ने वापस छुटटी देने की माग महाराज से कर दी तो महाराज ने अपने शाख/गवाई भरने के लिए किसी को लाने को कहा तो तेलियों ने सोचा कि उन राजपूत सरदारो को ही मना लेते हैं इसलिए उन्होंने तरक़ीब सुझाई उन्होंने एक भोज का आयोजन रखा और सभी राजपूतों को उस भोज में आमंत्रित कर दिया और भोजन में नशे की चीज मिला दी भोज करते ही सारे राजपूत सरदार नशे व नींद बेहोशी की हालत में चले गए और इसी का फायदा उठाकर सारे तेली वहाँ से भाग निकले बस यही भागे हुए तेली मूल घाँची थे ! [[राजपूत घाँची ]]
यह वही निगरानी रखने वाले राजपूत सरदार थे जिन्होंने तेली भाग जाने देने की गलती करने की एवज में सभी राजपूतों ने अधूरा पड़ा मंदिर निर्माण कार्य पूरा करवाया था 3 [[जैन घाँची ]] ये 11 वी शताब्दी के जैन थे घी तेल बेचने वाले इन्होंने उन राजपुतो की राज आज्ञा व मंदिर निर्माण पूरा करवाने में मदद की थी इसलिए ये जैन बाद में जैन घाँची कहलाये [[अन्य पिछड़ा वर्ग|अन्य पिछड़ी जाति]]यों (ओबीसी) में से एक है जो [[गुजरात]], [[राजस्थान]], [[उत्तर प्रदेश]] और भारत के अन्य हिस्सों में पाई जाती है।<ref name="Volume XXII Part One Editors R pages 397">People of India Gujarat Volume XXII Part One Editors R. B Lal, P.B.S.V Padmanabham, G Krishnan and M Azeez Mohideen pages 397 to 401</ref><ref>{{cite web|url=http://www.financialexpress.com/news/ghanchis-in-rajasthan-want-to-be-led-by-narendra-modi/257711|title=Ghanchis in Rajasthan want to be led by Narendra Modi|work=The Financial Express}}</ref>
==सन्दर्भ==
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[[श्रेणी:जाति]]
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{{Infobox television
| image =
| caption =
| alt_name = सावित्री
| genre = [[नाटक]]
| director = रंजन कुमार सिंह, अनिल बनाम कुमार, संतोष भट्ट, सागर कागरा
| country = भारत
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| num_episodes = 163
| producer = [[शब्बीर अहलूवालिया]] और [[साकेत साहनी]]<ref name=production>[http://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/tv/news-interviews/Shabbir-Ahluwalia-the-new-producer-of-Savitri/articleshow/17663276.cms Shabbir Ahluwalia the new producer of Savitri - The Times of India]</ref>
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| network = [[लाइफ ओके]]
| first_aired = {{Start date|2013|2|18}}
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}}
'''''सावित्री''''' एक भारतीय फंतासी नाटक टेलीविजन शो है, जो 18 फरवरी 2013 <ref>[http://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/tv/news-interviews/Savitri-a-fantasy-mega-series-launched/articleshow/18555392.cms Savitri-a fantasy mega series launched - The Times of India]</ref> से 4 अक्टूबर 2013 तक [[लाइफ ओके]] पर प्रसारित हुआ। प्रारंभिक सह-निर्माता फिल्म फार्म इंडिया थे, लेकिन श्रृंखला के प्रसारित होने से पहले, उत्पादन को फ्लाइंग टर्टल में बदल दिया गया था। अगस्त 2013 में, एक कास्ट सुधार किया गया था। <ref>[http://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/tv/news-interviews/Savitri-is-not-going-off-air-Saaket-Saawhney/articleshow/21774578.cms Savitri is not going off air: Saaket Saawhney | The Times of India]</ref> यह ''[[महाभारत]]'' से [[सावित्री एवं सत्यवान|सावित्री और सत्यवान]] की पारंपरिक भारतीय लोककथा पर एक आधुनिक रूप है। <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodlife.com/editors-pick/life-oks-savitri-what-is-the-show-all-about-191634/|title=Life OK's Savitri: What is the show all about?|last=|first=|date=2013-02-17|website=[[Bollywood Life]]|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20250605023124/https://www.bollywoodlife.com/editors-pick/life-oks-savitri-what-is-the-show-all-about-191634/|archive-date=5 जून 2025|access-date=|url-status=dead}}</ref>
== कलाकार ==
* [[अवनीत कौर]] यंग दमयंती के रूप में <ref>[http://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/tv/news-interviews/Avneet-Kaur-in-Life-OKs-Savitri/articleshow/16968373.cms Avneet Kaur in Life OK's Savitri - The Times of India]</ref>
* रिधि डोगरा - राजकुमारी दमयंती / सावित्री सत्यवान राय चौधरी
* [[कृप सूरी]] राहुकाली के रूप में
* यश पंडित / आशीष कपूर सेनापति वीर / सत्यवान राय चौधरी के रूप में
* सुमना दास मिष्टी के रूप में <ref>{{Cite web|url=https://www.indiaforums.com/article/sumana-das-to-enter-life-oks-savitri_41368?ri=3&rv=9883|title=Sumana Das to enter Life OK's Savitri|date=2013-02-20|website=India Forums Dot Com|language=en|access-date=2020-02-18}}</ref>
* महाराज के रूप में [[सलिल अंकोला]] <ref name="tellychakkar.com">{{Cite web|url=https://www.tellychakkar.com/tv/tv-news/salil-ankola-and-sucheta-trivedi-essay-damayantis-parents-life-oks-savitri|title=Salil Ankola and Sucheta Trivedi to essay Damayanti's parents in Life OK's Savitri|date=2013-03-21|website=Tellychakkar Dot Com|language=en|access-date=2020-02-18}}</ref> (दम्यंती के पिता)
* महारानी के रूप में [[सुचित्रा त्रिवेदी|सुचिता त्रिवेदी]] <ref name="tellychakkar.com" /> (दम्यंती की मां)
* [[अंगद हसीजा|अंगद हसीजा देवी]] के रूप में
* रेशमी घोष गुलिक के रूप में
* राजकुमार दिवातेन के रूप में अहद अली आमिर
* लीना राय चौधरी / विशघाटी के रूप में इंद्राणी हलदर
* विक्रांत के रूप में [[करन सूचक|करण सुचक]]
* उत्कर्ष नाइक दमयंती की माँ के रूप में
* विषकामिनी के रूप में वाहबिज दोराबजी
* सेनापति के रूप में अमित बहल
* पुनीत वशिष्ठ धूमकेतु के रूप में
== संदर्भ ==
<references group="" responsive="1"></references>
[[श्रेणी:लाइफ ओके के धारावाहिक]]
[[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]]
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श्रद्धा कपूर
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Anitya Gautam
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text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति
| name = श्रद्धा कपूर
| image = Shraddha Kapoor at Grazia Young Fashion Awards 2024 (cropped).jpg
| caption = 2024 में श्रद्धा कपूर
| birth_name =
| birth_date = <!--Birth date is contested with multiple dates in multiple reliable sources. Do NOT insert here. Coverage, if included, would cover the conflicting dates. -->
| birth_place = [[मुम्बई]], [[महाराष्ट्र]], [[भारत]]
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| relatives = [[शक्ति कपूर]] (पिता)<br />शिवांगी कपूर (माँ)<br />सिद्धांत कपूर (भाई)<br />[[पद्मिनी कोल्हापुरी]] (मौसी)
}}
'''श्रद्धा कपूर''' एक भारतीय फ़िल्म [[अभिनेत्री]] हैं । यह मुख्य रूप से [[आशिकी 2|आशिक़ी 2]] में अपने अभिनय और गानों के कारण जानी जाती हैं। इन्होंने अपने अभिनय की शुरुआत वर्ष 2010 में [[तीन पत्ती (2010 फ़िल्म)|तीन पत्ती]] नामक फ़िल्म से की, जिसमें उनके किरदार का नाम अपर्णा खन्ना था।<ref>{{cite web|title=I was most upset with the way people were talking about my dad: Shraddha|url=http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2013-04-21/news-interviews/38693520_1_dad-air-hostess-father-shakti-kapoor|work=TimesofIndia.com|accessdate=24 अक्टूबर 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20131019051614/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2013-04-21/news-interviews/38693520_1_dad-air-hostess-father-shakti-kapoor|archive-date=19 अक्तूबर 2013|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|title=Filmi Family Tree: Shraddha Kapoor is related to which veteran singers?|url=http://www.rediff.com/movies/report/slide-show-1-filmi-family-tree-shraddha-kapoor-is-related-to-which-veteran-singers/20131030.htm#1|work=rediff.com|accessdate=6 दिसम्बर 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20131203111814/http://www.rediff.com/movies/report/slide-show-1-filmi-family-tree-shraddha-kapoor-is-related-to-which-veteran-singers/20131030.htm#1|archive-date=3 दिसंबर 2013|url-status=live}}</ref>
== प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि ==
इनका जन्म 3 मार्च 1989 में हुआ था। श्रद्धा का पालन-पोषण [[मुम्बई|मुंबई]] के न्रजातीय परिवार में हुआ है। वे अभिनेता [[शक्ति कपूर]] की बेटी हैं। उनके पिता [[पंजाबी]] हैं और माँ मराठी हैं। वे भी अपनी माँ की तरह अपने-आप को भी एक मराठी ही मानती हैं।<ref>{{cite web|title=I'm playing a complete marathi mulgi: Shraddha Kapoor|url=http://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/i-m-playing-a-complete-marathi-mulgi-shraddha-kapoor/article1-913424.aspx|work=hindustantimes.com|accessdate=13 दिसम्बर 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20141102001544/http://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/i-m-playing-a-complete-marathi-mulgi-shraddha-kapoor/article1-913424.aspx|archive-date=2 नवंबर 2014|url-status=live}}</ref> उनके पिता, [[शक्ति कपूर|शक्ति कपुर]] और माता शिवांगी कोल्हपुरे कपूर दोनों हिन्दी चलचित्र [[अभिनेता]] हैं। वे अभिनेत्री [[पद्मिनी कोल्हापुरी]] और निर्देशक तेजस्विनी कोल्हापुरे की भतीजी है। और [[आशा भोसले]] और [[लता मंगेशकर]] की भव्य भतीजी हैं। उसके बड़े भाई सीधांत कपूर एक पूर्व डिस्को जॉकी और अभिनेता हैं।<ref name="d157">{{cite web | last=Desk | first=Ganga Info | title=Shraddha Kapoor : श्रद्धा कपूर जीवन परिचय प्रोफाइल | website=GANGA NEWS | date=2020-05-27 | url=https://www.ganganews.com/people/shraddha-kapoor-hindi/ | access-date=2026-10-17}}</ref>
श्रद्धा की पढ़ाई ''अमेरिकन स्कुल ऑफ़ बॉम्बे'' में हुई है। वहाँ पर वे पूरी श्रद्धा से [[फुटबॉल|फ़ुटबॉल]] और हैंडबॉल खेलती थीं। आगे वे बॉस्टन गयी पढ़ाई करने के लिये, पर [[फेसबुक|फ़ेसबुक]] पर देखने के बाद उत्पादक अंबीका हिन्दुजा ने उनके प्रथम प्रवेश के लिए तीन पत्ती में एक भूमिका के लिए चुना। श्रद्धा और [[टाइगर श्रॉफ]] स्कूल में सहपाठी थे जबकि कृष्णा श्रॉफ (टाइगर की बहन) और अथिया शेट्टी उसी स्कूल में श्रद्धा के जूनियर्स थे।<ref>{{Cite web|url=https://www.hindiwiki.co/2021/05/shraddha-kapoor-hindi.html|title=श्रद्धा कपूर से जुड़े कुछ रोचक तथ्य|website=Hindi WIKI|access-date=22 मई 2021|archive-date=22 मई 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210522085739/https://www.hindiwiki.co/2021/05/shraddha-kapoor-hindi.html|url-status=dead}}</ref>
== व्यक्तिगत जीवन ==
कपूर ने 2022 के एक साक्षात्कार में बताया की वो शिव कीर्ति शर्मा के साथ रिश्ते में हैं और वो दोनों जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाले हैं।
== अभिनय ==
श्रद्धा कपूर ने प्रथम प्रवेश तीन पत्ती के साथ किया जिसमें [[अमिताभ बच्चन]], बेन किंगसले और आर माधवन अन्य अभिनेता थे। उन्होंने एक कॉलेज छात्रा की भूमिका निभाई। और इस चलचित्र में उनका नाम अपर्णा खन्ना था। उन्हें [[फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार|फ़िल्मफ़ेयर]] सर्वश्रेष्ठ महिला अभिनेत्री के पुरस्कार के लिए नामांकन किया गया था पर वह बॉक्स ऑफ़िस पर उनकी चलचित्र नहीं चली। उनके प्रथम प्रवेश के बाद उन्होंने यश राज फ़िल्मस के साथ तीन चलचित्र करने का सौदा किया। और टीन कॉमेडी- लव का दी एंड में दिखाई दी। श्रद्धा ने एक किशोर कॉलेज छात्रा की भूमिका निभाई जिस में वह अपने प्रेमी के ख़िलाफ़ साज़िश रचती हैं क्योंकि उसने उसे धोखा दिया था। यह चलचित्र भी बॉक्स ऑफ़िस पर सफल नहीं हुई। इस चलचित्र के लिये मिश्रित समीक्षा मिली पर श्रद्धा कपूर को सकारात्मक समीक्षा मिली।
उनकी निष्पदन के लिए उन्हें स्टारबस्ट सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला। औरंगज़ेब नामक चलचित्र में यश राज ने मुख्य भूमिका निभाने की प्रस्तुति दी। लेकिन उन्होंने महेश भट्ट की आशिकी २ करने का निर्णय किया जिसके दौरान यश राज फ़िल्मस के साथ तीन फ़िल्मों का अनुबंध रद्द हो गया।
२०१३ में रोमांटिक संगीत नाटक आशिकी २, १९९१ के क्लासिक [[आशिकी]] की अगली कड़ी में श्रद्धा देखी गईं। इस कहानी में वे आरोही केशव शिरके की भूमिका निभाती हैं जो एक छोटे शहर की बार गायिका है। पर एक मशहूर गायक राहुल जयकर की मदद से एक बहुत बड़ी सफल पार्श्व गायिका बनती हैं। इस फ़िल्म ने बॉक्स ऑफ़िस पर बहुत सफलता पाई और सौ करोड़ से ज़्यादा कमाई की और बॉक्स ऑफिस द्वारा "ब्लॉकबस्टर" फ़िल्म घोषित की गई। इसी साल में श्रद्धा और एक चलचित्र- [[गोरी तेरे प्यार में]] में दिखाई दी। इस फ़िल्म में वे [[इमरान ख़ान (अभिनेता)|इमरान ख़ान]] की मँगेतर की भूमिका निभाते हुए दिखाई दीं। देर से २०१३ में एफएचएम इंडिया द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण "दुनिया २०१३ में १०० सेक्सी महिलाओं पर कपूर #५ स्थान पर रहीं"।
== फ़िल्में ==
{| class="wikitable sortable"
|+कुंजी
| style="background:#FFFFCC;"| {{dagger|alt=फ़िल्में जो अभी तक रिलीज़ नहीं हुई है}}
| फ़िल्में जो अभी तक प्रदर्शित नहीं हुई है
|}
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|- style="background:#ccc; text-align:center;"
!scope="col"| वर्ष
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|-
| 2010
| ''[[तीन पत्ती (2010 फ़िल्म)|तीन पत्ती]]''
| अपर्णा खन्ना
|
|-
| 2011
| ''[https://en.m.wikipedia.org/wiki/Luv_Ka_The_End लव का द ऐंड]''
| रिया देलदास
|
|-
| 2013
| ''[[आशिकी 2|आशिक़ी 2]]''
| अरोही केशव शिरके
|
|-
| 2013
| ''[[गोरी तेरे प्यार में]]''
| वसूधा
| अतिथि भूमिका
|-
| 2014
| ''[[एक विलन]]''
| आयशा
| साथ ही "गलियाँ" गाने के लिए पार्श्व गायिका
|-
| 2014
| ''[[हैदर]]''
| अर्शिया लॉन
|
|-
| 2014
| "[[उंगली (फ़िल्म)|उंगली]]
| बसन्ती
| विशेष उपस्थिति
|-
| 2015
| [[एबीसीडी 2]]
| विन्नी
|
|-
| 2016
| [[बाग़ी (2016 फ़िल्म)|बाग़ी]]
| सिया
|
|-
| 2016
| ''[[ए फ़्लाइंग जट्ट]]''{{dagger|alt=Films that have not yet been released}}
|
| कैमियो की भूमिका<ref>{{cite web|title=Shraddha Kapoor shoots for a cameo in A Flying Jatt|url=http://www.bollywoodhungama.com/news/17204822/Shraddha-Kapoor-shoots-for-a-cameo-in-A-Flying-Jatt|accessdate=27 January 2016|publisher=Bollywood Hungama|date=9 January 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160406110546/http://www.bollywoodhungama.com/news/17204822/Shraddha-Kapoor-shoots-for-a-cameo-in-A-Flying-Jatt|archive-date=6 अप्रैल 2016|url-status=live}}</ref>
|-
| 2016
|''[[रॉक ऑन!! २|रॉक ऑन २]]''{{dagger|alt=Films that have not yet been released}}
| जिया शर्मा
|
|-
| 2017
|[[ओके जानू]]
|तारा
|
|-
| 2017
|[[हाफ गर्लफ्रेंड (फ़िल्म)|हाफ़ गर्लफ़्रेंड]]
|रिया सोमानी
|फ़िल्मिंग
|-
| 2017
|[[हसीना पारकर|हसीना: द क्वीन ऑफ़ मुम्बई]]
| हसीना पारकर
| फ़िल्मिंग
|-
|2018
|[[नवाबजादे]]
| अघोषित
|फ़िल्मिंग
|-
|2018
|[[स्त्री]]
|एन अननेम्ड वुमेन
|
|-
|2018
|[[बत्ती गुल मीटर चालू]]
|ललिता नौटियाल
|
|-
| 2019
| [[साहो]]
|अमृता नायर
|
|-
|2019
|[[छिछोरे]]
|माया
|
|-
|2020
|[[स्ट्रीट डांसर]]
|इनायत
|
|-
|2020
|[[बाग़ी 3]]
|मीरा नंदन
|
|-
|2022
|भेड़िया
|
|
|-
|2023
|तू झूठी मैं मक्कार
|
|
|-
|2024
|स्त्री 2
|
|
|}
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
{{commonscat|Shraddha Kapoor|श्रद्धा कपूर}}
* [https://web.archive.org/web/20141006044018/http://www.imdb.com/name/nm3601766/ श्रद्धा कपूर] इण्टरनेट मूवी डेटाबेस
* [https://web.archive.org/web/20150215084848/http://short-biography.com/actress/shraddha-kapoor.htm श्रद्धा कपूर] जीवनी
* [https://web.archive.org/web/20140819133622/https://twitter.com/ShraddhaKapoor श्रद्धा कपूर] ट्विटर
[[श्रेणी:1989 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री]]
[[श्रेणी:हिन्दी अभिनेत्री]]
[[श्रेणी:1987 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:२१वीं सदी की भारतीय अभिनेत्रियाँ]]
[[श्रेणी:मुम्बई से अभिनेत्रियाँ]]
[[श्रेणी:भारतीय हिन्दू]]
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2026-10-18T05:48:07Z
चाहर धर्मेंद्र
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प्रचार सामग्री हटाई
6630600
wikitext
text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति
| name = श्रद्धा कपूर
| image = Shraddha Kapoor at Grazia Young Fashion Awards 2024 (cropped).jpg
| caption = 2024 में श्रद्धा कपूर
| birth_name =
| birth_date = <!--Birth date is contested with multiple dates in multiple reliable sources. Do NOT insert here. Coverage, if included, would cover the conflicting dates. -->
| birth_place = [[मुम्बई]], [[महाराष्ट्र]], [[भारत]]
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| religion =[[हिंदू]]
| relatives = [[शक्ति कपूर]] (पिता)<br />शिवांगी कपूर (माँ)<br />सिद्धांत कपूर (भाई)<br />[[पद्मिनी कोल्हापुरी]] (मौसी)
}}
'''श्रद्धा कपूर''' एक भारतीय फ़िल्म [[अभिनेत्री]] हैं । यह मुख्य रूप से [[आशिकी 2|आशिक़ी 2]] में अपने अभिनय और गानों के कारण जानी जाती हैं। इन्होंने अपने अभिनय की शुरुआत वर्ष 2010 में [[तीन पत्ती (2010 फ़िल्म)|तीन पत्ती]] नामक फ़िल्म से की, जिसमें उनके किरदार का नाम अपर्णा खन्ना था।<ref>{{cite web|title=I was most upset with the way people were talking about my dad: Shraddha|url=http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2013-04-21/news-interviews/38693520_1_dad-air-hostess-father-shakti-kapoor|work=TimesofIndia.com|accessdate=24 अक्टूबर 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20131019051614/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2013-04-21/news-interviews/38693520_1_dad-air-hostess-father-shakti-kapoor|archive-date=19 अक्तूबर 2013|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|title=Filmi Family Tree: Shraddha Kapoor is related to which veteran singers?|url=http://www.rediff.com/movies/report/slide-show-1-filmi-family-tree-shraddha-kapoor-is-related-to-which-veteran-singers/20131030.htm#1|work=rediff.com|accessdate=6 दिसम्बर 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20131203111814/http://www.rediff.com/movies/report/slide-show-1-filmi-family-tree-shraddha-kapoor-is-related-to-which-veteran-singers/20131030.htm#1|archive-date=3 दिसंबर 2013|url-status=live}}</ref>
== प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि ==
इनका जन्म 3 मार्च 1989 में हुआ था। श्रद्धा का पालन-पोषण [[मुम्बई|मुंबई]] के न्रजातीय परिवार में हुआ है। वे अभिनेता [[शक्ति कपूर]] की बेटी हैं। उनके पिता [[पंजाबी]] हैं और माँ मराठी हैं। वे भी अपनी माँ की तरह अपने-आप को भी एक मराठी ही मानती हैं।<ref>{{cite web|title=I'm playing a complete marathi mulgi: Shraddha Kapoor|url=http://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/i-m-playing-a-complete-marathi-mulgi-shraddha-kapoor/article1-913424.aspx|work=hindustantimes.com|accessdate=13 दिसम्बर 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20141102001544/http://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/i-m-playing-a-complete-marathi-mulgi-shraddha-kapoor/article1-913424.aspx|archive-date=2 नवंबर 2014|url-status=live}}</ref> उनके पिता, [[शक्ति कपूर|शक्ति कपुर]] और माता शिवांगी कोल्हपुरे कपूर दोनों हिन्दी चलचित्र [[अभिनेता]] हैं। वे अभिनेत्री [[पद्मिनी कोल्हापुरी]] और निर्देशक तेजस्विनी कोल्हापुरे की भतीजी है। और [[आशा भोसले]] और [[लता मंगेशकर]] की भव्य भतीजी हैं। उसके बड़े भाई सीधांत कपूर एक पूर्व डिस्को जॉकी और अभिनेता हैं।
श्रद्धा की पढ़ाई ''अमेरिकन स्कुल ऑफ़ बॉम्बे'' में हुई है। वहाँ पर वे पूरी श्रद्धा से [[फुटबॉल|फ़ुटबॉल]] और हैंडबॉल खेलती थीं। आगे वे बॉस्टन गयी पढ़ाई करने के लिये, पर [[फेसबुक|फ़ेसबुक]] पर देखने के बाद उत्पादक अंबीका हिन्दुजा ने उनके प्रथम प्रवेश के लिए तीन पत्ती में एक भूमिका के लिए चुना। श्रद्धा और [[टाइगर श्रॉफ]] स्कूल में सहपाठी थे जबकि कृष्णा श्रॉफ (टाइगर की बहन) और अथिया शेट्टी उसी स्कूल में श्रद्धा के जूनियर्स थे।<ref>{{Cite web|url=https://www.hindiwiki.co/2021/05/shraddha-kapoor-hindi.html|title=श्रद्धा कपूर से जुड़े कुछ रोचक तथ्य|website=Hindi WIKI|access-date=22 मई 2021|archive-date=22 मई 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210522085739/https://www.hindiwiki.co/2021/05/shraddha-kapoor-hindi.html|url-status=dead}}</ref>
== व्यक्तिगत जीवन ==
कपूर ने 2022 के एक साक्षात्कार में बताया की वो शिव कीर्ति शर्मा के साथ रिश्ते में हैं और वो दोनों जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाले हैं।
== अभिनय ==
श्रद्धा कपूर ने प्रथम प्रवेश तीन पत्ती के साथ किया जिसमें [[अमिताभ बच्चन]], बेन किंगसले और आर माधवन अन्य अभिनेता थे। उन्होंने एक कॉलेज छात्रा की भूमिका निभाई। और इस चलचित्र में उनका नाम अपर्णा खन्ना था। उन्हें [[फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार|फ़िल्मफ़ेयर]] सर्वश्रेष्ठ महिला अभिनेत्री के पुरस्कार के लिए नामांकन किया गया था पर वह बॉक्स ऑफ़िस पर उनकी चलचित्र नहीं चली। उनके प्रथम प्रवेश के बाद उन्होंने यश राज फ़िल्मस के साथ तीन चलचित्र करने का सौदा किया। और टीन कॉमेडी- लव का दी एंड में दिखाई दी। श्रद्धा ने एक किशोर कॉलेज छात्रा की भूमिका निभाई जिस में वह अपने प्रेमी के ख़िलाफ़ साज़िश रचती हैं क्योंकि उसने उसे धोखा दिया था। यह चलचित्र भी बॉक्स ऑफ़िस पर सफल नहीं हुई। इस चलचित्र के लिये मिश्रित समीक्षा मिली पर श्रद्धा कपूर को सकारात्मक समीक्षा मिली।
उनकी निष्पदन के लिए उन्हें स्टारबस्ट सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला। औरंगज़ेब नामक चलचित्र में यश राज ने मुख्य भूमिका निभाने की प्रस्तुति दी। लेकिन उन्होंने महेश भट्ट की आशिकी २ करने का निर्णय किया जिसके दौरान यश राज फ़िल्मस के साथ तीन फ़िल्मों का अनुबंध रद्द हो गया।
२०१३ में रोमांटिक संगीत नाटक आशिकी २, १९९१ के क्लासिक [[आशिकी]] की अगली कड़ी में श्रद्धा देखी गईं। इस कहानी में वे आरोही केशव शिरके की भूमिका निभाती हैं जो एक छोटे शहर की बार गायिका है। पर एक मशहूर गायक राहुल जयकर की मदद से एक बहुत बड़ी सफल पार्श्व गायिका बनती हैं। इस फ़िल्म ने बॉक्स ऑफ़िस पर बहुत सफलता पाई और सौ करोड़ से ज़्यादा कमाई की और बॉक्स ऑफिस द्वारा "ब्लॉकबस्टर" फ़िल्म घोषित की गई। इसी साल में श्रद्धा और एक चलचित्र- [[गोरी तेरे प्यार में]] में दिखाई दी। इस फ़िल्म में वे [[इमरान ख़ान (अभिनेता)|इमरान ख़ान]] की मँगेतर की भूमिका निभाते हुए दिखाई दीं। देर से २०१३ में एफएचएम इंडिया द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण "दुनिया २०१३ में १०० सेक्सी महिलाओं पर कपूर #५ स्थान पर रहीं"।
== फ़िल्में ==
{| class="wikitable sortable"
|+कुंजी
| style="background:#FFFFCC;"| {{dagger|alt=फ़िल्में जो अभी तक रिलीज़ नहीं हुई है}}
| फ़िल्में जो अभी तक प्रदर्शित नहीं हुई है
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|- style="background:#ccc; text-align:center;"
!scope="col"| वर्ष
!scope="col"| फ़िल्म
!scope="col"| किरदार
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| 2010
| ''[[तीन पत्ती (2010 फ़िल्म)|तीन पत्ती]]''
| अपर्णा खन्ना
|
|-
| 2011
| ''[https://en.m.wikipedia.org/wiki/Luv_Ka_The_End लव का द ऐंड]''
| रिया देलदास
|
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| 2013
| ''[[आशिकी 2|आशिक़ी 2]]''
| अरोही केशव शिरके
|
|-
| 2013
| ''[[गोरी तेरे प्यार में]]''
| वसूधा
| अतिथि भूमिका
|-
| 2014
| ''[[एक विलन]]''
| आयशा
| साथ ही "गलियाँ" गाने के लिए पार्श्व गायिका
|-
| 2014
| ''[[हैदर]]''
| अर्शिया लॉन
|
|-
| 2014
| "[[उंगली (फ़िल्म)|उंगली]]
| बसन्ती
| विशेष उपस्थिति
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| 2015
| [[एबीसीडी 2]]
| विन्नी
|
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| 2016
| [[बाग़ी (2016 फ़िल्म)|बाग़ी]]
| सिया
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| 2016
| ''[[ए फ़्लाइंग जट्ट]]''{{dagger|alt=Films that have not yet been released}}
|
| कैमियो की भूमिका<ref>{{cite web|title=Shraddha Kapoor shoots for a cameo in A Flying Jatt|url=http://www.bollywoodhungama.com/news/17204822/Shraddha-Kapoor-shoots-for-a-cameo-in-A-Flying-Jatt|accessdate=27 January 2016|publisher=Bollywood Hungama|date=9 January 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160406110546/http://www.bollywoodhungama.com/news/17204822/Shraddha-Kapoor-shoots-for-a-cameo-in-A-Flying-Jatt|archive-date=6 अप्रैल 2016|url-status=live}}</ref>
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| 2016
|''[[रॉक ऑन!! २|रॉक ऑन २]]''{{dagger|alt=Films that have not yet been released}}
| जिया शर्मा
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| 2017
|[[ओके जानू]]
|तारा
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| 2017
|[[हाफ गर्लफ्रेंड (फ़िल्म)|हाफ़ गर्लफ़्रेंड]]
|रिया सोमानी
|फ़िल्मिंग
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| 2017
|[[हसीना पारकर|हसीना: द क्वीन ऑफ़ मुम्बई]]
| हसीना पारकर
| फ़िल्मिंग
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|2018
|[[नवाबजादे]]
| अघोषित
|फ़िल्मिंग
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|2018
|[[स्त्री]]
|एन अननेम्ड वुमेन
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|2018
|[[बत्ती गुल मीटर चालू]]
|ललिता नौटियाल
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| 2019
| [[साहो]]
|अमृता नायर
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|2019
|[[छिछोरे]]
|माया
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|2020
|[[स्ट्रीट डांसर]]
|इनायत
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|-
|2020
|[[बाग़ी 3]]
|मीरा नंदन
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|2022
|भेड़िया
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|2023
|तू झूठी मैं मक्कार
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|2024
|स्त्री 2
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|}
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
{{commonscat|Shraddha Kapoor|श्रद्धा कपूर}}
* [https://web.archive.org/web/20141006044018/http://www.imdb.com/name/nm3601766/ श्रद्धा कपूर] इण्टरनेट मूवी डेटाबेस
* [https://web.archive.org/web/20150215084848/http://short-biography.com/actress/shraddha-kapoor.htm श्रद्धा कपूर] जीवनी
* [https://web.archive.org/web/20140819133622/https://twitter.com/ShraddhaKapoor श्रद्धा कपूर] ट्विटर
[[श्रेणी:1989 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री]]
[[श्रेणी:हिन्दी अभिनेत्री]]
[[श्रेणी:1987 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:२१वीं सदी की भारतीय अभिनेत्रियाँ]]
[[श्रेणी:मुम्बई से अभिनेत्रियाँ]]
[[श्रेणी:भारतीय हिन्दू]]
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देवजी पटेल
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text/x-wiki
{{Infobox officeholder
| name = देवजी पटेल (देवजी भाई एम पटेल)
| image = DEVJI M PATEL.jpg
| birth_date = {{birth date and age|1976|9|25|df=y}}
| birth_place = जाजुसन , [[सांचौर|सांचोर]]
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| nationality = [[भारतीय]]
| Parents = मानसिंगराम पटेल
}}
'''देवजी पटेल''' एक भारतीय राजनीतिज्ञ, उद्यमी तथा वर्तमान भाजपा से [[सांसद, लोक सभा|लोकसभा सांसद]] है। वे प्रथम बार आम चुनाव, 2009 में जालौर सिरोही संसदीय क्षेत्र से [[सांसद, लोक सभा|सांसद]] निर्वाचित हुए। देवजी पटेल ने 2014 के भारतीय आम चुनाव में पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री व जालौर लोकसभा क्षेत्र से 3 बार सांसद रहे [[बूटा सिंह]] को शिकस्त दी <ref>{{Cite web|url=https://www.amarujala.com/election/lok-sabha-elections/rajasthan/candidates/devji-patel-bjp-2014-jalore-18-rajasthan-580508|title=Devji Patel BJP Candidate 2014 लोकसभा चुनाव परिणाम Jalore|website=Amar Ujala|language=hi|access-date=2021-10-16}}</ref>और लोस चुनाव 2019 में भी क्रमशः जीत दर्ज ।
देवजी [[पंद्रहवीं लोकसभा|2009,]] 2014 एवं 2019 लोकसभा के तीनों चुनावों में लगातार विजयी हुए है। 2024 में भारतीय जनता पार्टी ने [[लुम्बाराम चौधरी]] को जालोर सिरोही से सांसद का टिकट दिया।
<br />
== व्यक्तिगत जीवन ==
देवजी भाई पटेल का जन्म २५ सितम्बर १९७६ को राजस्थान के [[जालौर|जिले जालौर]] में जाजुसन [[सांचौर|सांचोर]] में हुआ। उनके पिता मानसिंगराम चौधरी तथा माता मीरा देवी है। वे पिछड़ा वर्ग की [[आँजणा समाज|(कलबी) आँजणा जाति]] से ताल्लुक रखते है। उनका विवाह २८ अप्रैल १९९९ को इंद्रा देवी से हुआ।। जिससे उनके १ पुत्र और एक पुत्री हैं।<ref>[https://web.archive.org/web/20120505214849/http://india.gov.in/govt/loksabhampbiodata.php?mpcode=4411]</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ==
*{{official|http://www.devjipatel.com/}}
{{राजस्थान से पंद्रहवीं लोक सभा के सदस्य}}
{{राजस्थान से सोलहवीं लोक सभा के सदस्य}}
[[श्रेणी:1976 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:१६वीं लोक सभा के सदस्य]]
[[श्रेणी:राजस्थान से राजनीतिज्ञ]]
[[श्रेणी:भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिज्ञ]]
[[श्रेणी:जालौर जिले के लोग]]
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महाराजा ईश्वरीसिंह
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2026-10-17T13:43:41Z
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox royalty
| succession = आमेर के राजा
|image= [[File:Raja Ishwari Singh of Jaipur.png|250px|]]
|caption =
| reign = 21 सितंबर 1743 <br> 12 दिसंबर 1750
| dynasty = कछवाहा
| predecessor =[[जय सिंह द्वितीय]]
| successor = [[माधो सिंह प्रथम]]
| father = जय सिंह द्वितीय
| mother =
| spouse =
| issue =
*कल्किप्रसाद (शिशु अवस्था में मृत्यु)
*अरी सिंह (शिशु अवस्था में मृत्यु)
*दीप कंवरजी (विवाह. जोधपुर-मारवाड़ के महाराजा राम सिंह से)
| birth_date = फ़रवरी 1721
| birth_place = जयसिंहपुरा , दिल्ली
| death_date = 12 दिसंबर 1750
| death_place = [[जयपुर]]
}}
=== जन्म ===
'''सरमाद-ए-राजा-ए-हिंदुस्तान राज-राजेश्वर राज-राजेंद्र महाराजधिराज महाराजा सवाई ईश्वरीसिंहजी''' [[जयपुर|जयपुर राज्य]] के [[इतिहास]] में सबसे कम अवधि के शासन (1743-'50) के वावजूद, कई युद्धों का सामना करने वाले, [[संगीत]], [[साहित्य]], [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]], [[ललित कला]] और [[तन्त्र|तंत्र]] [[शास्त्र]] के गहरे अनुरागी राजा थे| वह जयपुर के संस्थापक [[महाराजा]] ''[[जय सिंह द्वितीय|सवाई जयसिंहजी]]'' के दुसरे बड़े पुत्र, तथा ''[[राजा मान सिंह|राजा बिशन सिंहजी]]'' के [[पौत्र]] थे। इनका जन्म [[फाल्गुन]] सुदी [[अष्टमी]] [[विक्रम संवत]] 1778 (1721 ईस्वी) को [[जयपुर|दिल्ली के जयसिंहपुरा]] में उनके पिता की प्रियतम रानी खींचनजी (चौहानजी) सुख कँवरजी पुत्री राजा धीरज सिंहजी खींची राघौगढ़ (मालवा) की कुषी से हुआ था।
=== मृत्यु ===
इनकी असामयिक मृत्यु मात्र ३० साल की उम्र में दिनांक 12.12.[[१७५०|1750]] को हुई।<ref>'The History of Jaipur': Jadunath Sarkar : Orient BlackSwan,2009 : Page 228</ref>
=== ईश्वरी सिंह और जयपुर की गद्दी के लिए [[गृहयुद्ध]]===
सर ''[[यदुनाथ सरकार]]'' के 'जयपुर के [[इतिहास]]' के अध्याय "ईश्वरी सिंह" में ऐसा वर्णित है कि [[१७४३|1743]] में [[जय सिंह द्वितीय|महाराजा सवाई जयसिंह]] की मृत्यु के बाद, उनके ज्येष्ठ पुत्र ईश्वरीसिंह ने शासन संभाला, जिसे [[दिल्ली]] के [[बादशाह]] ''[[मुहम्मद शाह]]'' ने भी अपनी मान्यता दे दी।<ref>1. 'The History of Jaipur': Jadunath Sarkar : Orient BlackSwan,2009 : Page 228</ref>
वह स्थानीय सरदारों की सहमति से (आषोज सुदी [[पूर्णिमा]] [[विक्रम संवत]] [[१८००|1800]] दिनांक 23.9.[[१७४३|1743]] को गद्दी पर बैठे थे, लेकिन उनका सौतेला भाई [[माधो सिंह]] जयपुर का शासन चाहता था, क्योंकि उसके भी पिता [[जय सिंह द्वितीय|सवाई जयसिंह]] ने सन [[१७०८]] में [[मेवाड़]] की राजकुमारी से अपने एक विवाह के वक़्त वहां के [[महाराणा]] को यह वचन दे दिया था कि उनके बाद (ईश्वरी नहीं) [[मेवाड़]] की रानी से जन्मा बेटा ही [[जयपुर]] के राज-आसन पर बैठेगा।<ref>2.http://msmsmuseum.com/index.php</ref> [[मेवाड़]] की रानी से जन्मा बेटा माधोसिंह था।
पर जब ईश्वर सिंह ने उसके मंसूबे पूरे होने से पहले ही जयपुर का शासक बनने की घोषणा कर डाली तो नाराज़ माधोसिंह ने अपने मामा, [[उदयपुर]] के [[महाराणा]] और [[कोटा]] व [[बूँदी जिला|बूंदी]] नरेशों के साथ मिल कर [[१७४४|1744]] में जयपुर पर हमला कर दिया। लेकिन ईश्वरी सिंह के [[प्रधानमन्त्री|प्रधानमंत्री]] ''[[राजामल खत्री]]'' और ''[[धूला]] ठिकाने के राव.......'' ने इस संयुक्त आक्रमण का करारा जवाब देते हुए [[राजमहल]] ([[टोंक]]) के पास, जहाँ आज [[बीसलपुर]] बाँध बनाया गया है, हमला विफल कर दिया।
"[[भरतपुर]] के [[सूरज मल|महाराजा सूरजमल]] जयसिंह के वारिस के तौर पर बड़े बेटे, ईश्वरी सिंह के पक्ष में थे, जबकि [[उदयपुर]] के महाराणा ''[[जगतसिंह]]'' ''[[माधो सिंह]] (प्रथम)'' के पक्ष में।" एक बार फिर [[भीलवाड़ा]] के कस्बे [[जहाज़पुर|जहाजपुर]] के पास दोनों भाइयों में युद्ध हुआ और [[मार्च]] [[१७४७|1747]] में ईश्वरी सिंह की ही जीत हुई।
इसके एक साल बाद [[मई]] [[१७४८|1748]] में माधोसिंह के समर्थक पेशवाओं ने ईश्वरीसिंह पर दबाव डाला कि वह माधोसिंह को चार/पांच (?) परगने सौंप दे। इनकार किये जाने पर सन [[१७४८|1748]] में माधोसिंह ने [[उदयपुर]] के महाराणा, ''[[मल्हारराव होलकर ]]'' व [[कोटा]], [[बूँदी जिला|बूंदी]], [[जोधपुर]] और [[शाहपुरा, भीलवाड़ा|शाहपुरा]] के नरेशों के साथ मिल कर फिर जयपुर पर हमला बोला।<ref>3.The History of Jaipur: Jadunath Sarkar : Orient BlackSwan, 2009 :page 228</ref>[[सूरज मल|महाराजा सूरजमल]] भी दस हजार सैनिकों के साथ ईश्वरीसिंह की मदद के लिये जयपुर पहुंचे और अगस्त [[१७४८|1748]] में जयपुर से 20 मील दूर [[बगरू]] में सेनापति ''[[हरगोविंद नाटाणी]]'' के नेतृत्व में युद्ध में एक बार फिर जयपुर की जीत हुई।"<ref>4.[https://hi.wikipedia.org/s/12t2]</ref>
ईश्वरी सिंह का, अपने अन्य मंत्री ''[[केशवदास खत्री]]'' पर बड़ा विश्वास था, किन्तु [[हरगोविंद नाटाणी]] को वह फूटी आँख न सुहाता था। केशवदास खत्री का चूंकि मराठों में भी सम्मान था और [[मल्हार राव होलकर]] भी उसकी बात माना करता था, [[राजमहल]] के युद्ध के बाद हरगोविंद नाटाणी ने राजा को बहकाया कि केशवदास खत्री भीतर से मराठों से मिला हुआ है और जयपुर पर हमले 'उसी की शह पर' होते आ रहे हैं, ईश्वरीसिंह ने नाटाणी की इस बात पर बिना पुष्टि यकीन करते हुए एक दिन केशवदास खत्री को विष दिलवा कर मरवा डाला।
केशवदास के बाद हरगोविंद नाटानी को ही 'प्रमुख मंत्री' का पद मिलना था, वह मिला|<ref>5.'जयपुर-दर्शन': (''जिसमें जयपुर-शहर के [[इतिहास]], [[पुरातत्वशास्त्र|पुरातत्व]], [[राजनीति]], [[समाज]], [[संस्कृति]], [[परम्परा]], [[पर्यटन]]-स्थल, आदि अनेक विषयों पर आलेख संग्रहीत हैं)'': प्रकाशक : प्रधान-सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978 [पेज १०, ] प्रकाशक : जयपुर अढाई शती समारोह समिति, नगर विकास न्यास (अब [[जयपुर विकास प्राधिकरण]]) परिसर, भवानी सिंह मार्ग, जयपुर</ref> जयपुर के पुराने लोगों को यह कहावत अब भी याद है " ''मंत्री-मोटो मारियो जब स्यूं केसबदास, तब स्यूं ईसर छोड़ दी राज करण री आस'' "
=== जयपुर में निर्माण-योगदान ===
अठारहवीं सदी में निर्मित जयपुर शहर की सबसे ऊंची मीनार '[[ईसरलाट]]' उर्फ़ 'सरगासूली' का निर्माण महाराजा ईश्वरी सिंह ने जयपुर के गृहयुद्धों में अपनी तीन विजयों की स्मृति में करवाया था।
विरोधी सात दुश्मनों पर [[बगरू]] में प्राप्त इस जीत के उपलक्ष्य में ([[कृष्ण|गोविंददेवजी]] के भक्त) राजा ईश्वरीसिंह ने 1749 में सात खण्डों की एक भव्य मीनार का निर्माण कराया। 'गणगौरी बाज़ार' के निकट स्थानीय 'चौगान-मैदान' में राजसी स्त्रियों के '[[गणगौर]]' की सवारी के पूजन और [[श्रावण]]ी [[तृतीया|तीज]]/ [[चैत्र]] [[शुक्ल]] [[तृतीया]] को हर वर्ष आयोज्य गणगौर मेले के अवलोकन के लिए एक कलात्मक छतरी '''मोती-बुर्ज''' भी इन्होंने बनवाई थी।<ref>6.http://msmsmuseum.com/index.php</ref>
==== ईसरलाट उर्फ़ सरगासूली ====
इस मीनार का निर्माण चूंकि महाराजा ईश्वरीसिंह ने कराया था, इसीलिए इसका नाम '[[ईसरलाट]]' रखा गया ; पर '[[स्वर्ग लोक|स्वर्ग]] को छूती हुई सी मीनार' प्रतीत होने के कारण स्थानीय भाषा में इसे '[[सरगासूली]]' के नाम से अधिक जाना जाता है।
'त्रिपोलिया बाजार' में दिखने वाली यह मीनार वास्तव में त्रिपोलिया में न हो कर, इसके पीछे स्थित '[[आतिश]]बाज़ार' की दुकानों के ऊपर बनी है। [[परकोटा]] इलाके में त्रिपोलिया बाजार से दिखाई देती इस सात मंजिला अष्टकोणीय मीनार को वर्ष [[१७४९|1749]] में राजा ईश्वरीसिंह ने दरबार के एक ''राजशिल्पी [[गणेश खोवान]]'' के नक़्शे के अनुरूप बनवाया था। 'ईसरलाट' के छोटे प्रवेश-द्वार में प्रविष्ट होने के बाद, संकरी गोलाकार सीढियां क्रमशः घूमती हुई ऊपर की ओर बढ़ती है। स्तम्भ की हर मंजिल पर एक द्वार बना है, जो मीनार की बालकनी में खुलता है। सात खण्डों में बनी इस इमारत की निर्माण-शैली [[राजपूत]] और [[मुग़ल साम्राज्य|मुगल-]][[वास्तुकला|वास्तु-शैलियों]] का सम्मिश्रण है। [[मुग़ल साम्राज्य|मुगल]] शैली में मस्जिदों के चार कोनों पर बनने वाली मीनारों से मिलती जुलती यह वास्तुरचना, शीर्षभाग पर एक गोलाकार छतरी लिए हुए है। 'गुलाबी-नगर' में (यानि परकोटा इलाके के बीच स्थित होते हुए भी) इसका रंग गहरा 'पीला' है।
अनेक दशकों तक इसमें जनता का प्रवेश वर्जित था- पर [[पर्यटन]] विकास के लिए अब इसे टिकट लगा कर आम दर्शक के लिए खोल दिया गया है, क्यों कि लाट के शिखर पर जो गोलाकार, अष्टकोणीय छतरी है, वहां से पुराने जयपुर शहर का नयनाभिराम नजारा दिखाई देता है।
''कविशिरोमणि [[भट्ट मथुरानाथ शास्त्री]]'' ने ''[[जयपुर-वैभवम|जयपुर वैभवम]]'' में इस स्मारक के बारे में ''[[अतिशयोक्ति अलंकार]]'' का उपयोग करते अपनी एक प्रशंसात्मक [[काव्य|कविता]] में ये भाव व्यक्त किये हैं-" सोने के कलश वाली जिसकी ऊपरी गुम्बज ऊँचाई के कारण आकाश का जैसे आलिंगन कर रही है, देवताओं के साथ जैसे ईश्वर मंत्रणा करते हैं, मानो देवताओं से बातचीत के लिए, ईश्वरीसिंह जी ने जिसे इतना ऊंचा बनवाया है कि [[सूर्य]]-किरण तक जिस पर बमुश्किल पहुँच पाती है"....."<ref>7.'[[जयपुर-वैभवम|जयपुर वैभवम]] : [[भट्ट मथुरानाथ शास्त्री]]: पृष्ठ ४९/८१ : 'नगरवीथी' : सन [[१९४७]]</ref>
[[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] और [[बृज भाषा|ब्रजभाषा]] के महाकवि ''[[श्रीकृष्णभट्ट कविकलानिधि]]'' ने भी अपने [[जयपुर]] पर लिखे [[इतिहास]]-काव्यग्रंथ [[ईश्वर विलास|ईश्वरविलास]] महाकाव्य में अन्य राजपुरुषों के अलावा ईश्वरीसिंह के भी 'जीवन-चरित्र' का वर्णन किया है।<ref>8.http://|www.sanskrit.nic.in/DigitalBook/J/Jaipurvaibhavam.pdf</ref>
==== सरगासूली और कुछ किंवदंतियाँ====
जयपुर के[[इतिहास]] से जुड़े साहित्य में इस मीनार 'ईसरलाट' से संबंधित कुछ रोचक [[किंवदंती|किंवदंतियां]] हैं। स्थानीय लोगों में ये धारणा आमफहम है कि 'महाराजा यहां बैठ कर पास की हवेली की किसी सुन्दरी को एकटक देखा करते थे।' लेकिन यह शायद सत्य नहीं। दरअसल बूंदी, जयपुर से युद्धों में पराजित राज्यों में से एक था। वहां के ख्यातनाम [[चारण (जाति)|चारण]] राजकवि थे ''[[सूर्यमल्ल|सूर्यमल्ल मिश्रण]]''। [[सूर्यमल्ल]] ने अपने [[पिङ्गल|पिंगल]] भाषा के काव्यग्रन्थ [[वंश भास्कर]] में जयपुर की बूंदी पर जीत से 'अप्रसन्न' जिस कविता की रचना की, उसमें यह बात लिख दी कि "राजा ईश्वरीसिंह ने सरगासूली का निर्माण अपने सेनापति ''हरगोविंद नाटाणी'' की बहुत सुन्दर बेटी को ‘देखने’ के लिए कराया है।" हालांकि जयपुर-इतिहास के अनजाने पृष्ठ पढ़ कर यह जानकारी ज़रूर होती है कि 'राजा अपने सेनापति हरगोविंद की अनिंद्य रूपसी कन्या पर अनुरक्त थे।'<ref>'9.'जयपुर-दर्शन' पुस्तक १९७८ में लिखे ''प्रकाशचन्द्र मिश्रा'' के लेख 'जयपुर के नीतिकुशल दीवान' : पृष्ठ १० के आधार पर उद्धृत (और यह भी कि 'नाटाणी की बदनामी' भी जयपुर में इसी कारण हुई थी)</ref>
=== ईश्वरीसिंह के सिक्के ===
ईश्वरीसिंह की [[चाँदी|रजत-और]] [[कांसा|कांस्य]] मुद्राओं १७४३ ई. पर एक ओर ''मुबारक बादशाह गाजी [[मुहम्मद शाह]] ११५६'' व दूसरी तरफ ''जर्ब सवाई जयपुर सन् २९ जुसूस मैननत मानसू'' अंकित रहता था। इसका वज़न १७५ ग्रेन था<ref>10.[www.ignca.nic.in/coilnet/rj009.htm</ref>
=== ईश्वरीसिंह पर अपने बड़े भाई की हत्या का आरोप ===
ईश्वरीसिंह से बड़े भाई का नाम शिवसिंह था। २२ वर्ष की अवस्था में इनकी असामयिक मृत्यु [[मथुरा]] में हुई। शिवसिंह की मृत्यु का कारण 'वंश भास्कर ' के ख्यात-लेखक ने यह बताया है कि मंझले पुत्र "ईश्वरसिंह के उकसाने पर [[जय सिंह द्वितीय|सवाई जयसिंह]] ने ज़हर दे कर अपनी रानी के सहयोग से स्वयं अपने पुत्र की हत्या कर दी थी", पर [[यदुनाथ सरकार]] जैसे इतिहासकार इसे 'गप्प' मानते हैं और स्वीकार नहीं करते।<ref>Jadunath Sarkar : 'A History of Jaipur' : Orient BlackSwan, Page 193</ref>
=== आत्महत्या ===
'जयपुर-दर्शन': प्रधान-सम्पादक : [डॉ॰ प्रभुदयाल शर्मा 'सहृदय'नाट्याचार्य] वर्ष 1978 के अनुसार- "(३० बरस के युवा) महाराजा ईश्वरीसिंह जब यह पता लगा कि [[मल्हारराव होलकर]] और ''[[गंगाधर तांत्या]]'' के नेतृत्व में मराठे-आक्रमणकारी फ़ौज समेत (संभवतया केशवदास खत्री की 'हत्या का बदला लेने'(?) जयपुर से कुछ मील की दूरी पर [[निवाई]] तक आ पहुंचे हैं, तो उन्होंने अपने सबसे विश्वस्त कहे जाने वाले सेनानायक नाटाणी से इस संकट पर मंत्रणा की। सेनापति ने उन्हें आश्वस्त किया कि 'वह फ़िक्र न करें!'
कुछ वक़्त बाद, कहते हैं-जिस समय होलकर ने मोती डूंगरी के पास फ़ौज ले कर आक्रमण के उद्देश्य से पड़ाव तक डाल दिया, सेनापति नाटाणी ने राजा को एक बार पुनः झूठे ही आश्वस्त किया कि वह बिलकुल चिंता न करें- " मराठों से लड़ने को एक लाख कछवाहा सैनिक मेरी जेब में हैं " (''एक लाख कच्छवाहा म्हारा खींसा में छै'') पर कुछ ही देर बाद उन्होंने ईश्वरसिंह से अचानक यह भी कह दिया-" ''काईं करूं अन्नदाता, म्हारो तो खींसो ही फाटग्यो'' (" क्या करूं महाराज, मेरी तो जेब ही फट गई।..)"
और ये अहसास होने पर कि ये दुर्भाग्यपूर्ण दिन निकट दरबारियों की मराठों से मिली-भगत से देखना पड़ रहा है, ईश्वरीसिंह ने (अपने मंत्री हरगोविंद नाटाणी के इस अकल्पनीय विश्वासघात से बुरी तरह व्यथित हो कर) "[[पौष]] द्वादषी [[विक्रम संवत]] 1807 ("दिनांक 12.12.1750) को अपनी तीन प्रधान रानियों और एक खास सेविका (पड़दायत) सहित सर्पदंश और विषपान से मध्यरात्रि में आत्महत्या कर ली। एकाध के अलावा महाराजा की आत्महत्या का सुराग राजमहल या शहर जयपुर में देर तक किसी को न लगा।"
"सूर्योदय के तीन घंटे बाद ''[[खांडेराव होलकर]]'' और ''[[गंगाधर तांत्या]]'' 'सवाई-जयपुर' के परकोटे के सामने पहुँच चुके थे, जब [[मल्हारराव होलकर]] छः मील दूर अपनी फ़ौज समेत झालाना-कुंड पर युद्ध का बिगुल सुनने के इंतज़ार में मुस्तैद खड़ा था। जब इन मराठा लोगों के आगमन पर भी महलों से आक्रमण या 'बचाव' की कोई हलचल ही नज़र न आयी, तो देर दुपहर बाद, उन्होंने राजसी निवास- 'चन्द्रमहल' में कदम रखा, जहाँ पंहुच कर उन्हें ये सूचना मिली कि ईश्वरीसिंह, जयपुर-राज के युवा राजा, तो अब संसार में ही नहीं रहे हैं। मृत्यु के कोई १८ घंटे बाद राजा का संस्कार हुआ। रनिवास की १२१ स्त्रियाँ उनकी आत्महत्या के बाद सती हुईं।"..."<ref>11. Jadunath Sarkar : page 229 (ibid)</ref>
ईश्वरीसिंह के अलावा सभी जयपुर नरेशों की अंत्येष्टि ([[पितृमेध|दाह संस्कार]]) गैटोर की छतरियों (ब्रह्मपुरी स्थित परम्परागत राजसी श्मशान) में होती रही थी, पर "उन्हें गुपचुप महल परिसर के आसपास ही [[अग्नि]] दे दी गयी।" (उद्धरण : यदुनाथ सरकार; पुस्तक उपर्युक्त उल्लेखित : पृष्ठ : २२९)
महाराजा ईश्वरी सिंहजी की नौ रानियां थीं जिनमें से रानी सिसोदीनीजी अजब कँवरजी पुत्री राजा सूर्तन सिंहजी बनेड़ा से एक पुत्र कुंवर कल्कि प्रसाद (बाल्यकाल में ही मृत्यु हुई) और बाईजीलाल दीप कँवरजी उत्पन्न हुए जिनका विवाह महाराजा की मृत्यु उपरांत जोधपुर के महाराजा राम सिंहजी महाराजा अभय सिंहजी के पुत्र एवं उत्तराधिकारी के साथ बाईजीलाल के काका महाराजा माधो सिंहजी प्रथम ने संपन्न करवाया l
=== ईश्वरी सिंह की छतरी (cenotaph)===
जिस जगह उनका [[पितृमेध|दाह संस्कार]] हुआ, वहां आज जयपुर में ताल-कटोरा तालाब के सामने स्थित महाराजा सवाई ईश्वरी सिंह की छतरी, गोल गुम्बजनुमाकार, ऊपर आठ व नीचे चार कोणों में बनी चार स्तभों पर खड़ी हुई है, जिसके भीतरी हिस्से में कलात्मक बेल-बूटे एवं आठ [[भित्ति चित्र]] बने हुए हैं| देशज रंगों से बने सात भित्ति चित्र [[रामायण]] के प्रसंगों से सम्बंधित हैं और एक चित्र [[महाभारत]] से।<ref>12.'जयपुर की चित्रांकन परम्परा' : ''डॉ॰ रीता प्रताप'', प्रकाशक: [[राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी]], जयपुर</ref>, जिस में स्वयं महाराजा ईश्वरीसिंह को भी चित्रित किया गया है। इन भित्तिचित्रों के नीचे चारों स्तंभों के कोनों पर पंख फैला कर उड़ती हुई चार परियां भी उत्कीर्ण की गयी हैं। छतरी के निर्माण के समय से ही इसमें [[अखंड ज्योति|अखण्ड ज्योति]] जलती आ रही है और भले ही इतिहासकार उनके शासन को कमजोर, प्रभावहीन और अनुल्लेखनीय मानते हों, स्थानीय लोगों में, 'मनोकामना पूर्ण करने वाले स्थान के रूप में' इस स्थल की मान्यता है।[https://web.archive.org/web/20130322153647/http://www.999rajasthan.com/main_desc.aspx?id=120S53]
=== बाहरी कड़ियाँ===
[https://hi.wikipedia.org/s/12t2]
[https://web.archive.org/web/20140111072521/http://www.fusioncreation.com/msmsm-html/images-awards/Award-10-MaharajaSawaiIshwarisingh.jpg]
[https://web.archive.org/web/20140618044524/http://www.indianetzone.com/22/history_rajasthan.htm]
[https://web.archive.org/web/20140929040932/http://www.msmsmuseum.com/index.php]
[https://web.archive.org/web/20140517132422/http://jaipurlove.com/]
[https://web.archive.org/web/20111109001252/http://www.geni.com/#name=Maharaja Ishwari Singh]
[http://books.google.co.in/books?id=O0oPIo9TXKcC&pg=PA230&lpg=PA230&dq=ishwari+singh+jaipur&source=bl&ots=yDavQJSZJr&sig=Jk5GVUCU2b1kRp5ePh01p4Ke4AY&hl=en&sa=X&ei=kiquU9T5D9OKuATQmICwBw&ved=0CJgBEOgBMBQ]
[http://books.google.co.in/books?id=kmfxexeX3pIC&pg=PA45&lpg=PA45&dq=ishwari+singh+jaipur&source=bl&ots=Xoj24fSc9c&sig=i0wE_7QIynWloaiYEz9PRcMuPZg&hl=en&sa=X&ei=kiquU9T5D9OKuATQmICwBw&ved=0CJsBEOgBMBU]
[http://books.google.co.in/books?id=gKOqA9lgtbwC&pg=PA139&lpg=PA139&dq=ishwari+singh+jaipur&source=bl&ots=vwSPSuJxpX&sig=sejBaL-R0P9COamzbwdJCrNbSVI&hl=en&sa=X&ei=kiquU9T5D9OKuATQmICwBw&ved=0CJ4BEOgBMBY]
[http://books.google.co.in/books?id=lZw5RUWqvs4C&pg=PA1748&lpg=PA1748&dq=ishwari+singh+jaipur&source=bl&ots=fJsn4hbXXp&sig=s-9T8FIo9--dv-6vVqvmhqK9FDM&hl=en&sa=X&ei=kiquU9T5D9OKuATQmICwBw&ved=0CLEBEOgBMBk]
[https://www.google.co.in/urlsa=t&rct=j&q=&esrc=s&source=web&cd=27&cad=rja&uact=8&ved=0CLQBEBYwGg&url=http%3A%2F%2Fdistrictcourts.nic.in%2Fecourts%2FRajasthan%2FJaipur%2520Metro%2Fdocs%2FHistory.htm&ei=kiquU9T5D9OKuATQmICwBw&usg=AFQjCNGUtzdzfxe0LdnZVwu3rPLU_0mBRA&sig2=uSKq-nivY3Rtp0LoeG7_7A]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}
=== सन्दर्भ ===
{{टिप्पणीसूची}}
{{श्रेणी: राजस्थान का इतिहास}}
{{जयपुर के महाराजा}}
[[श्रेणी:जयपुर के लोग]]
[[श्रेणी:राजस्थान के महाराजा]]
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अभय कुमार
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| birth_place = [[नालंदा]], [[बिहार]], [[भारत]]
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| alma_mater = [[जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय]]
| occupation =राजनयिक, कवि, कलाकार
| residence = [[काठमांडू]]
| known_for = ''[[पृथ्वी गान]]'' <br /> ''[[दक्षेस गान]]''
| website = [http://www.abhayk.com www.abhayk.com]
}}
'''अभय कुमार''' (जन्म: १९८०) एक भारतीय [[राजनयिक दूत|राजनयिक]] और [[कवि]] हैं। उन्होने कई पुस्तकें लिखी हैं, जिनमे से 'रिवर वैली टू सिलोकोन वैली' भी एक हैं। वे [[पृथ्वी गान]] के रचयिता हैं।<ref>{{cite news| title = यूनेस्को ने की भारतीय राजनयिक के पृथ्वी गान की प्रशंसा| trans-title = | language = hi| url = http://www.punjabkesari.in/news/article-222441| publisher = [[पंजाब केसरी]]| accessdate = 28 फरवरी 2014}}{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> दक्षिण भारतीय कविता क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें सार्क लिटरेरी अवार्ड प्राप्त हैं। वर्तमान में वे [[काठमांडू]] स्थित भारतीय दूतावास के प्रथम सचिव (प्रेस, सूचना और संस्कृति) हैं।<ref name=business>{{cite news | title =युनेस्को finds Indian poet-diplomat's idea of an Earth Anthem inspiring | trans-title =यूनेस्को पृथ्वी गान हेतु एक भारतीय कवि व राजनयिक के विचार को प्रेरणादायक पाता है | language =en | url =http://www.business-standard.com/article/news-ani/unesco-finds-indian-poet-diplomat-s-idea-of-an-earth-anthem-inspiring-114022700403_1.html | publisher =बिजनेस स्टेंडर्ड | accessdate =2 अगस्त 2014 | archive-url =https://web.archive.org/web/20190528153056/https://www.business-standard.com/article/news-ani/unesco-finds-indian-poet-diplomat-s-idea-of-an-earth-anthem-inspiring-114022700403_1.html | archive-date =28 मई 2019 | url-status =live }}</ref><ref name=toi>{{cite news | title =Unesco lauds Indian poet's idea of earth anthem | trans-title =पृथ्वी गान के लिए भारतीय कवि के विचार की यूनेस्को द्वारा प्रशंसा | language =en | url =http://timesofindia.indiatimes.com/india/Unesco-lauds-Indian-poets-idea-of-earth-anthem/articleshow/31179887.cms | publisher =टाइम्स ऑफ इंडिया | accessdate =2 अगस्त 2014 | archive-url =https://web.archive.org/web/20140318142132/http://timesofindia.indiatimes.com/india/Unesco-lauds-Indian-poets-idea-of-earth-anthem/articleshow/31179887.cms | archive-date =18 मार्च 2014 | url-status =live }}</ref>
== परिचय ==
अभय कुमार [[नालंदा]] जिला [[बिहार]] के मूल निवासी हैं। उन्होने [[दिल्ली]] के किरोरि मल कॉलेज तथा [[जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय]] से शिक्षा प्राप्त की। उन्होने २००३ में [[भारतीय विदेश सेवा]] ज्वाइन किया।<ref name=tribune>{{cite news| title = Diplomat-writer, who pens verse| trans-title = राजनयिक लेखक, जिनकी ताजा रचनाएँ| language = en| url = http://www.tribuneindia.com/2012/20121216/people.htm#2| publisher = दि ट्रिब्यून| accessdate = 2 अगस्त 2014| archive-url = https://web.archive.org/web/20140301065440/http://www.tribuneindia.com/2012/20121216/people.htm#2| archive-date = 1 मार्च 2014| url-status = live}}</ref>
== पृथ्वी गान और दक्षेस गान==
{| class="toccolours" style="float: right; margin-center: 2em; margin-left: 1em; font-size: 100%; bgcolor: #F5F6CE; width:19em; max-width: 50%;" cellspacing="5"
| style="text-align: left;" |
"मैं समझता हूं कि दक्षिण एशियाई देशों द्वारा समान रूप से गाया जा सकने वाला दक्षेस गान एक गहरी दक्षिण एशियाई भावना और भाईचारे के विकास के लिए उत्प्रेरक का काम करेगा।”
|-
| style="text-align: right;"|'''अभय कुमार'''<ref name=thehindu/>
|}
{{Quote box |width=250px |align=right |quoted=true |bgcolor=#FFFFF0 |salign=right
|quote =<poem>
ब्रह्मांड की नीली मोती, धरती
ब्रह्मांड की अदभुत ज्योति, धरती
सब महाद्वीप, महासागर संग -संग
सब वनस्पति, सब जीव संग -संग
संग -संग पृथ्वी की सब प्रजातियाँ
काले, सफेद, भूरे, पीले, अलग-अलग रंग
इंसान हैं हम , धरती हमारा घर
ब्रह्मांड की नीली मोती, धरती
ब्रह्मांड की अदभुत ज्योति, धरती
सब महाद्वीप, महासागर संग -संग
सब वनस्पति, सब जीव संग -संग
संग -संग पृथ्वी की सब प्रजातियाँ
काले, सफेद, भूरे, पीले, अलग-अलग रंग
इंसान हैं हम , धरती हमारा घर
ब्रह्मांड की नीली मोती, धरती
ब्रह्मांड की अदभुत ज्योति, धरती
एक के संग सब सौर एक सबके संग
सब लोग, सब राष्ट्र, संग -संग
आओ सब मिलकर नीला झंडा फहराएँ
आओ सब मिलकर पृथ्वी गान गाएं
काले, सफेद, भूरे, पीले, अलग अलग रंग
इंसान हैं हम , धरती हमारा घर
“”
अभय कुमार द्वारा रचित "पृथ्वी गान" का हिन्दी में भावानुवाद
आओ सब मिलकर नीला झंडा फहराएँ
आओ सब मिलकर पृथ्वी गान गाएं
काले, सफेद, भूरे, पीले, अलग अलग रंग
इंसान हैं हम , धरती हमारा घर
</poem>|source = '''अभय कुमार''' द्वारा रचित "पृथ्वी गान" का हिन्दी में भावानुवाद<ref name=earthanthem/>
}}
भारतीय राजनयिक अभय कुमार द्वारा लिखा गया '[[पृथ्वी गान]]' शीर्षक कविता का [[यूनेस्को]] द्वारा पूरी दुनिया में प्रसार किया गया है। हाल ही में [[दक्षिण एशिया]] क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) सचिवालय में हुई एक बैठक में इस कविता में दक्षेस गान तलाशने के लिए चर्चा शुरू हो गई। दक्षेस के विभिन्न विभागों के प्रमुख और सदस्य देशों के विदेश मंत्री इस कविता को दक्षेस गान के रूप में अपनाने के गुण-दोषों पर विचार कर रहे हैं। दक्षेस ने फरवरी में माले में होने वाले दक्षेस मंत्री परिषद की बैठक में इस पर एक सलाह भेजने का भी विचार किया जा रहा है। यदि इसे मंजूर कर लिया जाता है तो यहां होने वाले 18वें दक्षेस शिखर सम्मेलन में प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है, जिसकी तिथि अभी तक तय नहीं हुई है। राजनयिक सूत्रों के मुताबिक इस कविता को अपनाने पर विचार करने के लिए दक्षेस सांस्कृतिक केंद्र में भी भेजा गया है। उनकी कविता में हिंदुस्तानी, [[अंग्रेजी]], [[नेपाली]], [[बांग्ला]], पस्तो, [[उर्दू]], सिन्हाली, जोंगखा और धीवेही भाषाओं की पंक्तियां शामिल की गई हैं। ये भाषाएं दक्षेस के आठ सदस्य देशों में बोली जाती हैं। कविता का कुछ अंश इस प्रकार है: "हिमालय से हिंद तक, नगा हिल्स से हिंदूकुश/महावली से गंगा तक, सिंधु से ब्रह्मपुत्र/लक्षद्वीप, अंडमान, एवरेस्ट, एडम्स पीक/ काबुल से थिंपू तक, माले से काठमांडू/दिल्ली से ढाका, कोलंबो, इस्लामाबाद/हर कदम साथ-साथ।" पृथ्वी गान का लोकार्पण साल जून २०१३ में पूर्व कानून मंत्री [[कपिल सिब्बल]] और पूर्व मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री [[शशि थरूर]] ने [[नई दिल्ली]] के भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) में किया था। इसके बाद [[काठमांडू]] में [[नेपाल]] के पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनल ने [[यूनेस्को]] के नेपाल में प्रतिनिधि एक्सेल प्लेथ की मौजूदगी में इसे जारी किया था। अभय के मुताबिक इसके बाद से पृथ्वी गान का दुनिया की कई प्रमुख भाषाओं में अनुवाद किया गया है।<ref name=earthanthem>[http://www.earthanthem.net/p/download.html डाऊनलोड पृथ्वी गान] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140427134800/http://www.earthanthem.net/p/download.html |date=27 अप्रैल 2014 }} पृथ्वी गान जालस्थल, 27 अप्रैल 2014</ref><ref name=thehindu>[http://www.thehindu.com/life-and-style/metroplus/article2591929.ece "Better with verse" (अनुवाद: वेटर विथ वर्ष)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20111105053037/http://www.thehindu.com/life-and-style/metroplus/article2591929.ece |date=5 नवंबर 2011 }} ''दि हिन्दू'', 2 नवम्बर 2011.</ref><ref>[http://www.indusage.com.au/indus-tree/indus-tree/15648-indian-diplomats-paintings-on-show.html "Indian Diplomat's Paintings on Show"(अनुवाद:भारतीय राजनयिक का पेंटिंग्स शो]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}, indusage.com.au, 29 अप्रैल 2011</ref><ref>[http://sg.news.yahoo.com/indian-diplomat-turned-artist-presents-planetary-consciousness-112410306.html "Indian Diplomat turned artist presents his work on planetary consciousness"(अनुवाद:भारतीय राजनयिक ने ग्रहों की चेतना पर अपना सृजन प्रस्तुत किया] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131105100006/http://sg.news.yahoo.com/indian-diplomat-turned-artist-presents-planetary-consciousness-112410306.html |date=5 नवंबर 2013 }} याहू, 27 अप्रैल 2011</ref><ref name=hin>[http://www.hindu.com/lr/2007/08/05/stories/2007080550120400.htm ''द हिन्दू Literary Review'' 2007 (अनुवाद: हिन्दू साहित्य की समीक्षा 2007] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131105091542/http://www.hindu.com/lr/2007/08/05/stories/2007080550120400.htm |date=5 नवंबर 2013 }} ''दि हिन्दू'', 5 अगस्त 2007.</ref><ref>[http://www.indianexpress.com/talk/news/pen-drive/981356/ Pen Drive (पेन ड्राइव)] {{Webarchive|url=https://archive.today/20130126232208/http://www.indianexpress.com/talk/news/pen-drive/981356/ |date=26 जनवरी 2013 }}, दि इंडियन एक्सप्रेस, 22 नवम्बर 2012</ref><ref>[http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-08-25/books/32888574_1_indian-diplomats-poetry-poems "The Poetic Side of Indian Diplomats"(अनुवाद: भारतीय राजनयिकों का काव्य पक्ष]{{Dead link|date=अप्रैल 2021 |bot=InternetArchiveBot }}, ''दि टाइम्स ऑफ इंडिया'', 25 अगस्त 2012</ref><ref>[http://www.aninews.in/videogallery2/12184-earth-anthem-sung-by-nepali-singer-shreya-sotang-released.html ''ANI'' (अनुवाद: ए एन आई)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131104145447/http://www.aninews.in/videogallery2/12184-earth-anthem-sung-by-nepali-singer-shreya-sotang-released.html |date=4 नवंबर 2013 }}, 4 जून 2012</ref><ref name="newindianexpress">[http://newindianexpress.com/nation/Indian-diplomat-pens-anthem-for-earth/2013/06/05/article1620381.ece "Indian Diplomat pens anthem for Earth" (अनुवाद: भारतीय राजनयिक ने लिखा धरती गान] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20141108184635/http://www.newindianexpress.com/nation/Indian-diplomat-pens-anthem-for-earth/2013/06/05/article1620381.ece |date=8 नवंबर 2014 }} ''दि नेयु इंडियन एक्सप्रेस'', 5 जून 2013</ref><ref>[http://www.thehimalayantimes.com/fullNews.php?headline=Inspiring+Earth+Anthem&NewsID=379348 "Inspiring Earth Anthem" (अनुवाद: प्रेरणादायक धरती गान)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20141021012958/http://www.thehimalayantimes.com/fullNews.php?headline=Inspiring+Earth+Anthem&NewsID=379348 |date=21 अक्तूबर 2014 }} ''दि हिमालयन टाइम्स'', 9 जून 2013</ref><ref>[http://www.business-standard.com/article/news-ani/unesco-to-consider-making-earth-anthem-by-indian-poet-diplomat-a-global-initiative-113062600301_1.html "युनेस्को to consider making Earth Anthem by Indian diplomat a global initiative" (अनुवाद: यूनेस्को का भारतीय राजनयिक की वैश्विक पहल पृथ्वी गान को लागू करने पर विचार)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20141020011453/http://www.business-standard.com/article/news-ani/unesco-to-consider-making-earth-anthem-by-indian-poet-diplomat-a-global-initiative-113062600301_1.html |date=20 अक्तूबर 2014 }}, ''बिजनेस स्टेंडर्ड '', 26 जून 2013</ref><ref>[http://articles.economictimes.indiatimes.com/2013-06-26/news/40207111_1_indian-ambassador-unesco-kathmandu UN to consider "Indian diplomat's song as a global initiative"(अनुवाद: एक वैश्विक पहल के रूप में भारतीय राजनयिक के गीत)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20141031225353/http://articles.economictimes.indiatimes.com/2013-06-26/news/40207111_1_indian-ambassador-unesco-kathmandu |date=31 अक्तूबर 2014 }} ''दि इकोनोमिक टाइम्स'', 26 जून 2013</ref><ref>[http://aninews.in/newsdetail4/story142658/indian-poet-diplomat-pens-s-asian-anthem-after-earth-anthem-success.html "Indian poet-diplomat pens S.Asian anthem after Earth anthem success"(अनुवाद: भारतीय राजनयिक-कवि का पृथवि गाँ के बाद दक्षेस गान] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131203054546/http://aninews.in/newsdetail4/story142658/indian-poet-diplomat-pens-s-asian-anthem-after-earth-anthem-success.html |date=3 दिसंबर 2013 }} ''ए एन आई'', 27 नवम्बर 2013</ref>
== प्रकाशित कृतियाँ==
*''रिवर वैली टू सिलिकोन वैली'' (अँग्रेजी,2007)/''ए सिविल सरवेंट टेल'' (2011)<ref>{{cite web|url=http://issuu.com/abhayk/docs/the_civil_servants_tale|title=ए सिविल सरवेंट टेल (अँग्रेजी में)|publisher=इससु डॉट कॉम|date=16 सितंबर 2011|accessdate=2 अगस्त 2014}}{{Dead link|date=सितंबर 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
*''टेन कुश्चन ऑफ दि सोल'' (अँग्रेजी,2010)<ref>{{cite web |url=http://issuu.com/abhayk/docs/10questions |title=10 Questions of the Soul (अनुवाद: टेन कुश्चन ऑफ दि सोल) |publisher=इससु डॉट कॉम |date=4 सितंबर 2010 |accessdate=2 अगस्त 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140810040856/http://issuu.com/abhayk/docs/10questions |archive-date=10 अगस्त 2014 |url-status=live }}</ref>
*''कलर्स ऑफ सोल (Cvet Dushi)'' (अँग्रेजी,2011)<ref name="Цвет души">{{cite web |url=http://issuu.com/abhayk/docs/cvetdushi |title=Цвет души |publisher=Issuu.com |date=17 फ़रवरी 2011 |accessdate=2 अगस्त 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140605060857/http://issuu.com/abhayk/docs/cvetdushi |archive-date=5 जून 2014 |url-status=live }}</ref>
*''एनिग्माइटिक लव'' (अँग्रेजी,2009)<ref>{{cite web|url=http://issuu.com/abhayk/docs/enigmatic_love|title=Enigmatic Love (अनुवाद:एनिग्माइटिक लव)|publisher=इससु डॉट कॉम|date=4 अगस्त 2010|accessdate=2 अगस्त 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140810040853/http://issuu.com/abhayk/docs/enigmatic_love|archive-date=10 अगस्त 2014|url-status=live}}</ref>
*''फालेन लिव्स ऑफ औट्मन'' (अँग्रेजी,2010)<ref>{{cite web|url=http://issuu.com/abhayk/docs/fallenleavesofautumn|title=Fallen Leaves of Autumn (अनुवाद: फालेन लिव्स ऑफ औट्मन)|publisher=इससु डॉट कॉम|date=4 अगस्त 2010|accessdate=2 अगस्त 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140810040901/http://issuu.com/abhayk/docs/fallenleavesofautumn|archive-date=10 अगस्त 2014|url-status=live}}</ref>
*''कैंडलिंग दि लाइट''(अँग्रेजी,2011)<ref>{{cite web|url=http://ibnlive.in.com/newstopics/Candling-the-Light.html|title=Candling the Light (अनुवाद: कैंडलिंग दि लाइट)|publisher=आई बी एन लाइव|date=7 नवम्बर 2011|accessdate=2 अगस्त 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140605140403/http://ibnlive.in.com/newstopics/Candling-the-Light.html|archive-date=5 जून 2014|url-status=live}}</ref>
*''रिमेन्स'' (अँग्रेजी,2012)<ref>{{cite web|url=http://www.indianexpress.com/videos/national/6/diplomat-abhay-k.-releases-his-new-book-remains/10705|title=Diplomat Abhay K. releases his new book Remains (अनुवाद: राजनयिक अभय कुमार अपनी नई किताब रिमेन्स की विज्ञप्ति|publisher=इंडियन एक्स्प्रेस|date=1 जुलाई 2012|accessdate=2 अगस्त 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20131202083746/http://www.indianexpress.com/videos/national/6/diplomat-abhay-k.-releases-his-new-book-remains/10705|archive-date=2 दिसंबर 2013|url-status=live}}</ref>
*''सेड़क्सन ऑफ डेलही'' (अँग्रेजी)<ref>{{cite web |url=http://www.thehindu.com/news/cities/Delhi/article3515505.ece? |title=Dream WINDOW (अनुवाद: ड्रीम विंडो) |publisher=दि हिन्दू |date=1 जुलाई 2012 |accessdate=2 अगस्त 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140605140943/http://www.thehindu.com/news/cities/Delhi/article3515505.ece |archive-date=5 जून 2014 |url-status=live }}</ref>
== पुरस्कार/सम्मान ==
*2013: सार्क लिटरेरी अवार्ड<ref>[http://www.hindustantimes.com/Books/Chunk-HT-UI-BooksSectionPage-LiteraryBuzz/Poet-Abhay-K-wins-SAARC-Literature-Award/Article1-1026412.aspx Poet Abhay K wins SAARC Literature Award (अनुवाद: कवि अभय कुमार को सार्क साहित्य पुरस्कार] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130315001403/http://www.hindustantimes.com/Books/Chunk-HT-UI-BooksSectionPage-LiteraryBuzz/Poet-Abhay-K-wins-SAARC-Literature-Award/Article1-1026412.aspx |date=15 मार्च 2013 }}, आई ए एन एस, 14 मार्च 2013</ref>
*2013: पुष्कर्ट पुरस्कार के लिए नामित<ref name=bs>{{cite news| title =IFS officer nominted for coveted Pushcart Prize| trans-title =आईएफएस अधिकारी प्रतिष्ठित पुष्कर्ट पुरस्कार के लिए नामित| language =en| url =http://www.business-standard.com/article/pti-stories/ifs-officer-nominted-for-coveted-pushcart-prize-112120200351_1.html| publisher =बिजनेस स्टेंडर्ड| accessdate =2 अगस्त 2014| archive-url =https://web.archive.org/web/20150106222444/http://www.business-standard.com/article/pti-stories/ifs-officer-nominted-for-coveted-pushcart-prize-112120200351_1.html| archive-date =6 जनवरी 2015| url-status =live}}</ref>
*2012: स्टेगलीज अकादमी ऑफ आर्ट की ओर से प्रथम श्रेणी में डिप्लोमा, सेंट पीटर्सबर्ग प्रदर्शनी ''वी आर डिफरेंट, वी आर टूगेदार''<ref>{{cite web|url=http://issuu.com/abhayk/docs/first_class_diploma_from_the_academy_of_art|title=First Class Diploma to Abhay Kumar from the Steiglitz Academy of Art, St. Petersburg (अनुवाद: सेंट पीटर्सबर्ग के स्टेगलीज अकादमी ऑफ आर्ट से अभय कुमार को प्रथम श्रेणी डिप्लोमा)|publisher=इससु डॉट कॉम|accessdate=2 अगस्त 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140228195042/http://issuu.com/abhayk/docs/first_class_diploma_from_the_academy_of_art|archive-date=28 फ़रवरी 2014|url-status=live}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ियाँ==
*[http://www.dailypioneer.com/world/unesco-lauds-indian--poets-idea-of-earth-anthem.htmlयूनेस्को द्वारा धरती गान के भारतीय कवि के विचार की प्रशंसा] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190718111041/https://www.dailypioneer.com/world/unesco-lauds-indian--poets-idea-of-earth-anthem.html%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%8B |date=18 जुलाई 2019 }} (अँग्रेजी में)
*[https://web.archive.org/web/20150702223812/https://www.youtube.com/watch?v=9gu8PFXifjg&feature=c4-overview&list=UUoP-bgyrciIbf_Ic3mITvKg भारत के राष्ट्रीय टीवी चैनल डीडी नेशनल के लिए कवि अभय कुमार का साक्षात्कार ]
[[श्रेणी:कवि]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:राजनयिक]]
[[श्रेणी:1980 में जन्मे लोग]]
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2026-10-18T01:26:44Z
विक्रम प्रताप
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wikitext
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| known_for = ''[[पृथ्वी गान]]'' <br /> ''[[दक्षेस गान]]''
| website = [http://www.abhayk.com www.abhayk.com]
}}
'''अभय कुमार''' (जन्म: १९८०) एक भारतीय [[राजनयिक दूत|राजनयिक]] और [[कवि]] हैं। उन्होने कई पुस्तकें लिखी हैं, जिनमे से 'रिवर वैली टू सिलोकोन वैली' भी एक हैं। वे [[पृथ्वी गान]] के रचयिता हैं।<ref>{{cite news| title = यूनेस्को ने की भारतीय राजनयिक के पृथ्वी गान की प्रशंसा| trans-title = | language = hi| url = http://www.punjabkesari.in/news/article-222441| publisher = [[पंजाब केसरी]]| accessdate = 28 फरवरी 2014}}{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> दक्षिण भारतीय कविता क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें सार्क लिटरेरी अवार्ड प्राप्त हैं। वर्तमान में वे [[काठमांडू]] स्थित भारतीय दूतावास के प्रथम सचिव (प्रेस, सूचना और संस्कृति) हैं।<ref name=business>{{cite news | title =युनेस्को finds Indian poet-diplomat's idea of an Earth Anthem inspiring | trans-title =यूनेस्को पृथ्वी गान हेतु एक भारतीय कवि व राजनयिक के विचार को प्रेरणादायक पाता है | language =en | url =http://www.business-standard.com/article/news-ani/unesco-finds-indian-poet-diplomat-s-idea-of-an-earth-anthem-inspiring-114022700403_1.html | publisher =बिजनेस स्टेंडर्ड | accessdate =2 अगस्त 2014 | archive-url =https://web.archive.org/web/20190528153056/https://www.business-standard.com/article/news-ani/unesco-finds-indian-poet-diplomat-s-idea-of-an-earth-anthem-inspiring-114022700403_1.html | archive-date =28 मई 2019 | url-status =live }}</ref><ref name=toi>{{cite news | title =Unesco lauds Indian poet's idea of earth anthem | trans-title =पृथ्वी गान के लिए भारतीय कवि के विचार की यूनेस्को द्वारा प्रशंसा | language =en | url =http://timesofindia.indiatimes.com/india/Unesco-lauds-Indian-poets-idea-of-earth-anthem/articleshow/31179887.cms | publisher =टाइम्स ऑफ इंडिया | accessdate =2 अगस्त 2014 | archive-url =https://web.archive.org/web/20140318142132/http://timesofindia.indiatimes.com/india/Unesco-lauds-Indian-poets-idea-of-earth-anthem/articleshow/31179887.cms | archive-date =18 मार्च 2014 | url-status =live }}</ref>
== परिचय ==
अभय कुमार [[नालंदा]] जिला [[बिहार]] के मूल निवासी हैं। उन्होने [[दिल्ली]] के किरोरि मल कॉलेज तथा [[जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय]] से शिक्षा प्राप्त की। उन्होने २००३ में [[भारतीय विदेश सेवा]] ज्वाइन किया।<ref name=tribune>{{cite news| title = Diplomat-writer, who pens verse| trans-title = राजनयिक लेखक, जिनकी ताजा रचनाएँ| language = en| url = http://www.tribuneindia.com/2012/20121216/people.htm#2| publisher = दि ट्रिब्यून| accessdate = 2 अगस्त 2014| archive-url = https://web.archive.org/web/20140301065440/http://www.tribuneindia.com/2012/20121216/people.htm#2| archive-date = 1 मार्च 2014| url-status = live}}</ref>
== पृथ्वी गान और दक्षेस गान==
{| class="toccolours" style="float: right; margin-center: 2em; margin-left: 1em; font-size: 100%; bgcolor: #F5F6CE; width:19em; max-width: 50%;" cellspacing="5"
| style="text-align: left;" |
"मैं समझता हूं कि दक्षिण एशियाई देशों द्वारा समान रूप से गाया जा सकने वाला दक्षेस गान एक गहरी दक्षिण एशियाई भावना और भाईचारे के विकास के लिए उत्प्रेरक का काम करेगा।”
|-
| style="text-align: right;"|'''अभय कुमार'''<ref name=thehindu/>
|}
{{Quote box |width=250px |align=right |quoted=true |bgcolor=#FFFFF0 |salign=right
|quote =<poem>
ब्रह्मांड की नीली मोती, धरती
ब्रह्मांड की अदभुत ज्योति, धरती
सब महाद्वीप, महासागर संग -संग
सब वनस्पति, सब जीव संग -संग
संग -संग पृथ्वी की सब प्रजातियाँ
काले, सफेद, भूरे, पीले, अलग-अलग रंग
इंसान हैं हम , धरती हमारा घर
ब्रह्मांड की नीली मोती, धरती
ब्रह्मांड की अदभुत ज्योति, धरती
सब महाद्वीप, महासागर संग -संग
सब वनस्पति, सब जीव संग -संग
संग -संग पृथ्वी की सब प्रजातियाँ
काले, सफेद, भूरे, पीले, अलग-अलग रंग
इंसान हैं हम , धरती हमारा घर
ब्रह्मांड की नीली मोती, धरती
ब्रह्मांड की अदभुत ज्योति, धरती
एक के संग सब सौर एक सबके संग
सब लोग, सब राष्ट्र, संग -संग
आओ सब मिलकर नीला झंडा फहराएँ
आओ सब मिलकर पृथ्वी गान गाएं
काले, सफेद, भूरे, पीले, अलग अलग रंग
इंसान हैं हम , धरती हमारा घर
“”
अभय कुमार द्वारा रचित "पृथ्वी गान" का हिन्दी में भावानुवाद
आओ सब मिलकर नीला झंडा फहराएँ
आओ सब मिलकर पृथ्वी गान गाएं
काले, सफेद, भूरे, पीले, अलग अलग रंग
इंसान हैं हम , धरती हमारा घर
</poem>|source = '''अभय कुमार''' द्वारा रचित "पृथ्वी गान" का हिन्दी में भावानुवाद<ref name=earthanthem/>
}}
भारतीय राजनयिक अभय कुमार द्वारा लिखा गया '[[पृथ्वी गान]]' शीर्षक कविता का [[यूनेस्को]] द्वारा पूरी दुनिया में प्रसार किया गया है। हाल ही में [[दक्षिण एशिया]] क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) सचिवालय में हुई एक बैठक में इस कविता में दक्षेस गान तलाशने के लिए चर्चा शुरू हो गई। दक्षेस के विभिन्न विभागों के प्रमुख और सदस्य देशों के विदेश मंत्री इस कविता को दक्षेस गान के रूप में अपनाने के गुण-दोषों पर विचार कर रहे हैं। दक्षेस ने फरवरी में माले में होने वाले दक्षेस मंत्री परिषद की बैठक में इस पर एक सलाह भेजने का भी विचार किया जा रहा है। यदि इसे मंजूर कर लिया जाता है तो यहां होने वाले 18वें दक्षेस शिखर सम्मेलन में प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है, जिसकी तिथि अभी तक तय नहीं हुई है। राजनयिक सूत्रों के मुताबिक इस कविता को अपनाने पर विचार करने के लिए दक्षेस सांस्कृतिक केंद्र में भी भेजा गया है। उनकी कविता में हिंदुस्तानी, [[अंग्रेजी]], [[नेपाली]], [[बांग्ला]], पस्तो, [[उर्दू]], सिन्हाली, जोंगखा और धीवेही भाषाओं की पंक्तियां शामिल की गई हैं। ये भाषाएं दक्षेस के आठ सदस्य देशों में बोली जाती हैं। कविता का कुछ अंश इस प्रकार है: "हिमालय से हिंद तक, नगा हिल्स से हिंदूकुश/महावली से गंगा तक, सिंधु से ब्रह्मपुत्र/लक्षद्वीप, अंडमान, एवरेस्ट, एडम्स पीक/ काबुल से थिंपू तक, माले से काठमांडू/दिल्ली से ढाका, कोलंबो, इस्लामाबाद/हर कदम साथ-साथ।" पृथ्वी गान का लोकार्पण साल जून २०१३ में पूर्व कानून मंत्री [[कपिल सिब्बल]] और पूर्व मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री [[शशि थरूर]] ने [[नई दिल्ली]] के भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) में किया था। इसके बाद [[काठमांडू]] में [[नेपाल]] के पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनल ने [[यूनेस्को]] के नेपाल में प्रतिनिधि एक्सेल प्लेथ की मौजूदगी में इसे जारी किया था। अभय के मुताबिक इसके बाद से पृथ्वी गान का दुनिया की कई प्रमुख भाषाओं में अनुवाद किया गया है।<ref name=earthanthem>[http://www.earthanthem.net/p/download.html डाऊनलोड पृथ्वी गान] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140427134800/http://www.earthanthem.net/p/download.html |date=27 अप्रैल 2014 }} पृथ्वी गान जालस्थल, 27 अप्रैल 2014</ref><ref name=thehindu>[http://www.thehindu.com/life-and-style/metroplus/article2591929.ece "Better with verse" (अनुवाद: वेटर विथ वर्ष)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20111105053037/http://www.thehindu.com/life-and-style/metroplus/article2591929.ece |date=5 नवंबर 2011 }} ''दि हिन्दू'', 2 नवम्बर 2011.</ref><ref>[http://www.indusage.com.au/indus-tree/indus-tree/15648-indian-diplomats-paintings-on-show.html "Indian Diplomat's Paintings on Show"(अनुवाद:भारतीय राजनयिक का पेंटिंग्स शो]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}, indusage.com.au, 29 अप्रैल 2011</ref><ref>[http://sg.news.yahoo.com/indian-diplomat-turned-artist-presents-planetary-consciousness-112410306.html "Indian Diplomat turned artist presents his work on planetary consciousness"(अनुवाद:भारतीय राजनयिक ने ग्रहों की चेतना पर अपना सृजन प्रस्तुत किया] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131105100006/http://sg.news.yahoo.com/indian-diplomat-turned-artist-presents-planetary-consciousness-112410306.html |date=5 नवंबर 2013 }} याहू, 27 अप्रैल 2011</ref><ref name=hin>[http://www.hindu.com/lr/2007/08/05/stories/2007080550120400.htm ''द हिन्दू Literary Review'' 2007 (अनुवाद: हिन्दू साहित्य की समीक्षा 2007] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131105091542/http://www.hindu.com/lr/2007/08/05/stories/2007080550120400.htm |date=5 नवंबर 2013 }} ''दि हिन्दू'', 5 अगस्त 2007.</ref><ref>[http://www.indianexpress.com/talk/news/pen-drive/981356/ Pen Drive (पेन ड्राइव)] {{Webarchive|url=https://archive.today/20130126232208/http://www.indianexpress.com/talk/news/pen-drive/981356/ |date=26 जनवरी 2013 }}, दि इंडियन एक्सप्रेस, 22 नवम्बर 2012</ref><ref>[http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-08-25/books/32888574_1_indian-diplomats-poetry-poems "The Poetic Side of Indian Diplomats"(अनुवाद: भारतीय राजनयिकों का काव्य पक्ष]{{Dead link|date=अप्रैल 2021 |bot=InternetArchiveBot }}, ''दि टाइम्स ऑफ इंडिया'', 25 अगस्त 2012</ref><ref>[http://www.aninews.in/videogallery2/12184-earth-anthem-sung-by-nepali-singer-shreya-sotang-released.html ''ANI'' (अनुवाद: ए एन आई)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131104145447/http://www.aninews.in/videogallery2/12184-earth-anthem-sung-by-nepali-singer-shreya-sotang-released.html |date=4 नवंबर 2013 }}, 4 जून 2012</ref><ref name="newindianexpress">[http://newindianexpress.com/nation/Indian-diplomat-pens-anthem-for-earth/2013/06/05/article1620381.ece "Indian Diplomat pens anthem for Earth" (अनुवाद: भारतीय राजनयिक ने लिखा धरती गान] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20141108184635/http://www.newindianexpress.com/nation/Indian-diplomat-pens-anthem-for-earth/2013/06/05/article1620381.ece |date=8 नवंबर 2014 }} ''दि नेयु इंडियन एक्सप्रेस'', 5 जून 2013</ref><ref>[http://www.thehimalayantimes.com/fullNews.php?headline=Inspiring+Earth+Anthem&NewsID=379348 "Inspiring Earth Anthem" (अनुवाद: प्रेरणादायक धरती गान)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20141021012958/http://www.thehimalayantimes.com/fullNews.php?headline=Inspiring+Earth+Anthem&NewsID=379348 |date=21 अक्तूबर 2014 }} ''दि हिमालयन टाइम्स'', 9 जून 2013</ref><ref>[http://www.business-standard.com/article/news-ani/unesco-to-consider-making-earth-anthem-by-indian-poet-diplomat-a-global-initiative-113062600301_1.html "युनेस्को to consider making Earth Anthem by Indian diplomat a global initiative" (अनुवाद: यूनेस्को का भारतीय राजनयिक की वैश्विक पहल पृथ्वी गान को लागू करने पर विचार)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20141020011453/http://www.business-standard.com/article/news-ani/unesco-to-consider-making-earth-anthem-by-indian-poet-diplomat-a-global-initiative-113062600301_1.html |date=20 अक्तूबर 2014 }}, ''बिजनेस स्टेंडर्ड '', 26 जून 2013</ref><ref>[http://articles.economictimes.indiatimes.com/2013-06-26/news/40207111_1_indian-ambassador-unesco-kathmandu UN to consider "Indian diplomat's song as a global initiative"(अनुवाद: एक वैश्विक पहल के रूप में भारतीय राजनयिक के गीत)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20141031225353/http://articles.economictimes.indiatimes.com/2013-06-26/news/40207111_1_indian-ambassador-unesco-kathmandu |date=31 अक्तूबर 2014 }} ''दि इकोनोमिक टाइम्स'', 26 जून 2013</ref><ref>[http://aninews.in/newsdetail4/story142658/indian-poet-diplomat-pens-s-asian-anthem-after-earth-anthem-success.html "Indian poet-diplomat pens S.Asian anthem after Earth anthem success"(अनुवाद: भारतीय राजनयिक-कवि का पृथवि गाँ के बाद दक्षेस गान] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131203054546/http://aninews.in/newsdetail4/story142658/indian-poet-diplomat-pens-s-asian-anthem-after-earth-anthem-success.html |date=3 दिसंबर 2013 }} ''ए एन आई'', 27 नवम्बर 2013</ref>
== प्रकाशित कृतियाँ==
*''रिवर वैली टू सिलिकोन वैली'' (अँग्रेजी,2007)/''ए सिविल सरवेंट टेल'' (2011)<ref>{{cite web|url=http://issuu.com/abhayk/docs/the_civil_servants_tale|title=ए सिविल सरवेंट टेल (अँग्रेजी में)|publisher=इससु डॉट कॉम|date=16 सितंबर 2011|accessdate=2 अगस्त 2014}}{{Dead link|date=सितंबर 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
*''टेन कुश्चन ऑफ दि सोल'' (अँग्रेजी,2010)<ref>{{cite web |url=http://issuu.com/abhayk/docs/10questions |title=10 Questions of the Soul (अनुवाद: टेन कुश्चन ऑफ दि सोल) |publisher=इससु डॉट कॉम |date=4 सितंबर 2010 |accessdate=2 अगस्त 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140810040856/http://issuu.com/abhayk/docs/10questions |archive-date=10 अगस्त 2014 |url-status=live }}</ref>
*''कलर्स ऑफ सोल (Cvet Dushi)'' (अँग्रेजी,2011)<ref name="Цвет души">{{cite web |url=http://issuu.com/abhayk/docs/cvetdushi |title=Цвет души |publisher=Issuu.com |date=17 फ़रवरी 2011 |accessdate=2 अगस्त 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140605060857/http://issuu.com/abhayk/docs/cvetdushi |archive-date=5 जून 2014 |url-status=live }}</ref>
*''एनिग्माइटिक लव'' (अँग्रेजी,2009)<ref>{{cite web|url=http://issuu.com/abhayk/docs/enigmatic_love|title=Enigmatic Love (अनुवाद:एनिग्माइटिक लव)|publisher=इससु डॉट कॉम|date=4 अगस्त 2010|accessdate=2 अगस्त 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140810040853/http://issuu.com/abhayk/docs/enigmatic_love|archive-date=10 अगस्त 2014|url-status=live}}</ref>
*''फालेन लिव्स ऑफ औट्मन'' (अँग्रेजी,2010)<ref>{{cite web|url=http://issuu.com/abhayk/docs/fallenleavesofautumn|title=Fallen Leaves of Autumn (अनुवाद: फालेन लिव्स ऑफ औट्मन)|publisher=इससु डॉट कॉम|date=4 अगस्त 2010|accessdate=2 अगस्त 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140810040901/http://issuu.com/abhayk/docs/fallenleavesofautumn|archive-date=10 अगस्त 2014|url-status=live}}</ref>
*''कैंडलिंग दि लाइट''(अँग्रेजी,2011)<ref>{{cite web|url=http://ibnlive.in.com/newstopics/Candling-the-Light.html|title=Candling the Light (अनुवाद: कैंडलिंग दि लाइट)|publisher=आई बी एन लाइव|date=7 नवम्बर 2011|accessdate=2 अगस्त 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140605140403/http://ibnlive.in.com/newstopics/Candling-the-Light.html|archive-date=5 जून 2014|url-status=live}}</ref>
*''रिमेन्स'' (अँग्रेजी,2012)<ref>{{cite web|url=http://www.indianexpress.com/videos/national/6/diplomat-abhay-k.-releases-his-new-book-remains/10705|title=Diplomat Abhay K. releases his new book Remains (अनुवाद: राजनयिक अभय कुमार अपनी नई किताब रिमेन्स की विज्ञप्ति|publisher=इंडियन एक्स्प्रेस|date=1 जुलाई 2012|accessdate=2 अगस्त 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20131202083746/http://www.indianexpress.com/videos/national/6/diplomat-abhay-k.-releases-his-new-book-remains/10705|archive-date=2 दिसंबर 2013|url-status=live}}</ref>
*''सेड़क्सन ऑफ डेलही'' (अँग्रेजी)<ref>{{cite web |url=http://www.thehindu.com/news/cities/Delhi/article3515505.ece? |title=Dream WINDOW (अनुवाद: ड्रीम विंडो) |publisher=दि हिन्दू |date=1 जुलाई 2012 |accessdate=2 अगस्त 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140605140943/http://www.thehindu.com/news/cities/Delhi/article3515505.ece |archive-date=5 जून 2014 |url-status=live }}</ref>
== पुरस्कार/सम्मान ==
*2013: सार्क लिटरेरी अवार्ड<ref>[http://www.hindustantimes.com/Books/Chunk-HT-UI-BooksSectionPage-LiteraryBuzz/Poet-Abhay-K-wins-SAARC-Literature-Award/Article1-1026412.aspx Poet Abhay K wins SAARC Literature Award (अनुवाद: कवि अभय कुमार को सार्क साहित्य पुरस्कार] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130315001403/http://www.hindustantimes.com/Books/Chunk-HT-UI-BooksSectionPage-LiteraryBuzz/Poet-Abhay-K-wins-SAARC-Literature-Award/Article1-1026412.aspx |date=15 मार्च 2013 }}, आई ए एन एस, 14 मार्च 2013</ref>
*2013: पुष्कर्ट पुरस्कार के लिए नामित<ref name=bs>{{cite news| title =IFS officer nominted for coveted Pushcart Prize| trans-title =आईएफएस अधिकारी प्रतिष्ठित पुष्कर्ट पुरस्कार के लिए नामित| language =en| url =http://www.business-standard.com/article/pti-stories/ifs-officer-nominted-for-coveted-pushcart-prize-112120200351_1.html| publisher =बिजनेस स्टेंडर्ड| accessdate =2 अगस्त 2014| archive-url =https://web.archive.org/web/20150106222444/http://www.business-standard.com/article/pti-stories/ifs-officer-nominted-for-coveted-pushcart-prize-112120200351_1.html| archive-date =6 जनवरी 2015| url-status =live}}</ref>
*2012: स्टेगलीज अकादमी ऑफ आर्ट की ओर से प्रथम श्रेणी में डिप्लोमा, सेंट पीटर्सबर्ग प्रदर्शनी ''वी आर डिफरेंट, वी आर टूगेदार''<ref>{{cite web|url=http://issuu.com/abhayk/docs/first_class_diploma_from_the_academy_of_art|title=First Class Diploma to Abhay Kumar from the Steiglitz Academy of Art, St. Petersburg (अनुवाद: सेंट पीटर्सबर्ग के स्टेगलीज अकादमी ऑफ आर्ट से अभय कुमार को प्रथम श्रेणी डिप्लोमा)|publisher=इससु डॉट कॉम|accessdate=2 अगस्त 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140228195042/http://issuu.com/abhayk/docs/first_class_diploma_from_the_academy_of_art|archive-date=28 फ़रवरी 2014|url-status=live}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ियाँ==
*[http://www.dailypioneer.com/world/unesco-lauds-indian--poets-idea-of-earth-anthem.htmlयूनेस्को द्वारा धरती गान के भारतीय कवि के विचार की प्रशंसा] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190718111041/https://www.dailypioneer.com/world/unesco-lauds-indian--poets-idea-of-earth-anthem.html%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%8B |date=18 जुलाई 2019 }} (अँग्रेजी में)
*[https://web.archive.org/web/20150702223812/https://www.youtube.com/watch?v=9gu8PFXifjg&feature=c4-overview&list=UUoP-bgyrciIbf_Ic3mITvKg भारत के राष्ट्रीय टीवी चैनल डीडी नेशनल के लिए कवि अभय कुमार का साक्षात्कार ]
[[श्रेणी:कवि]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:राजनयिक]]
[[श्रेणी:1980 में जन्मे लोग]]
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2026-10-18T01:27:05Z
विक्रम प्रताप
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सुधार
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wikitext
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{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति
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| birth_name = अभय कुमार
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}}
'''अभय कुमार''' (जन्म: १९८०) एक भारतीय [[राजनयिक दूत|राजनयिक]] और [[कवि]] हैं। उन्होने कई पुस्तकें लिखी हैं, जिनमे से 'रिवर वैली टू सिलोकोन वैली' भी एक हैं। वे [[पृथ्वी गान]] के रचयिता हैं।<ref>{{cite news| title = यूनेस्को ने की भारतीय राजनयिक के पृथ्वी गान की प्रशंसा| trans-title = | language = hi| url = http://www.punjabkesari.in/news/article-222441| publisher = [[पंजाब केसरी]]| accessdate = 28 फरवरी 2014}}{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> दक्षिण भारतीय कविता क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें सार्क लिटरेरी अवार्ड प्राप्त हैं। वर्तमान में वे [[काठमांडू]] स्थित भारतीय दूतावास के प्रथम सचिव (प्रेस, सूचना और संस्कृति) हैं।<ref name=business>{{cite news | title =युनेस्को finds Indian poet-diplomat's idea of an Earth Anthem inspiring | trans-title =यूनेस्को पृथ्वी गान हेतु एक भारतीय कवि व राजनयिक के विचार को प्रेरणादायक पाता है | language =en | url =http://www.business-standard.com/article/news-ani/unesco-finds-indian-poet-diplomat-s-idea-of-an-earth-anthem-inspiring-114022700403_1.html | publisher =बिजनेस स्टेंडर्ड | accessdate =2 अगस्त 2014 | archive-url =https://web.archive.org/web/20190528153056/https://www.business-standard.com/article/news-ani/unesco-finds-indian-poet-diplomat-s-idea-of-an-earth-anthem-inspiring-114022700403_1.html | archive-date =28 मई 2019 | url-status =live }}</ref><ref name=toi>{{cite news | title =Unesco lauds Indian poet's idea of earth anthem | trans-title =पृथ्वी गान के लिए भारतीय कवि के विचार की यूनेस्को द्वारा प्रशंसा | language =en | url =http://timesofindia.indiatimes.com/india/Unesco-lauds-Indian-poets-idea-of-earth-anthem/articleshow/31179887.cms | publisher =टाइम्स ऑफ इंडिया | accessdate =2 अगस्त 2014 | archive-url =https://web.archive.org/web/20140318142132/http://timesofindia.indiatimes.com/india/Unesco-lauds-Indian-poets-idea-of-earth-anthem/articleshow/31179887.cms | archive-date =18 मार्च 2014 | url-status =live }}</ref>
== परिचय ==
अभय कुमार [[नालंदा]] जिला [[बिहार]] के मूल निवासी हैं। उन्होने [[दिल्ली]] के किरोरि मल कॉलेज तथा [[जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय]] से शिक्षा प्राप्त की। उन्होने २००३ में [[भारतीय विदेश सेवा]] ज्वाइन किया।<ref name=tribune>{{cite news| title = Diplomat-writer, who pens verse| trans-title = राजनयिक लेखक, जिनकी ताजा रचनाएँ| language = en| url = http://www.tribuneindia.com/2012/20121216/people.htm#2| publisher = दि ट्रिब्यून| accessdate = 2 अगस्त 2014| archive-url = https://web.archive.org/web/20140301065440/http://www.tribuneindia.com/2012/20121216/people.htm#2| archive-date = 1 मार्च 2014| url-status = live}}</ref>
== पृथ्वी गान और दक्षेस गान==
{| class="toccolours" style="float: right; margin-center: 2em; margin-left: 1em; font-size: 100%; bgcolor: #F5F6CE; width:19em; max-width: 50%;" cellspacing="5"
| style="text-align: left;" |
"मैं समझता हूं कि दक्षिण एशियाई देशों द्वारा समान रूप से गाया जा सकने वाला दक्षेस गान एक गहरी दक्षिण एशियाई भावना और भाईचारे के विकास के लिए उत्प्रेरक का काम करेगा।”
|-
| style="text-align: right;"|'''अभय कुमार'''<ref name=thehindu/>
|}
{{Quote box |width=250px |align=right |quoted=true |bgcolor=#FFFFF0 |salign=right
|quote =<poem>
ब्रह्मांड की नीली मोती, धरती
ब्रह्मांड की अदभुत ज्योति, धरती
सब महाद्वीप, महासागर संग -संग
सब वनस्पति, सब जीव संग -संग
संग -संग पृथ्वी की सब प्रजातियाँ
काले, सफेद, भूरे, पीले, अलग-अलग रंग
इंसान हैं हम , धरती हमारा घर
ब्रह्मांड की नीली मोती, धरती
ब्रह्मांड की अदभुत ज्योति, धरती
सब महाद्वीप, महासागर संग -संग
सब वनस्पति, सब जीव संग -संग
संग -संग पृथ्वी की सब प्रजातियाँ
काले, सफेद, भूरे, पीले, अलग-अलग रंग
इंसान हैं हम , धरती हमारा घर
ब्रह्मांड की नीली मोती, धरती
ब्रह्मांड की अदभुत ज्योति, धरती
एक के संग सब सौर एक सबके संग
सब लोग, सब राष्ट्र, संग -संग
आओ सब मिलकर नीला झंडा फहराएँ
आओ सब मिलकर पृथ्वी गान गाएं
काले, सफेद, भूरे, पीले, अलग अलग रंग
इंसान हैं हम , धरती हमारा घर
“”
अभय कुमार द्वारा रचित "पृथ्वी गान" का हिन्दी में भावानुवाद
आओ सब मिलकर नीला झंडा फहराएँ
आओ सब मिलकर पृथ्वी गान गाएं
काले, सफेद, भूरे, पीले, अलग अलग रंग
इंसान हैं हम , धरती हमारा घर
</poem>|source = '''अभय कुमार''' द्वारा रचित "पृथ्वी गान" का हिन्दी में भावानुवाद<ref name=earthanthem/>
}}
भारतीय राजनयिक अभय कुमार द्वारा लिखा गया '[[पृथ्वी गान]]' शीर्षक कविता का [[यूनेस्को]] द्वारा पूरी दुनिया में प्रसार किया गया है। हाल ही में [[दक्षिण एशिया]] क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) सचिवालय में हुई एक बैठक में इस कविता में दक्षेस गान तलाशने के लिए चर्चा शुरू हो गई। दक्षेस के विभिन्न विभागों के प्रमुख और सदस्य देशों के विदेश मंत्री इस कविता को दक्षेस गान के रूप में अपनाने के गुण-दोषों पर विचार कर रहे हैं। दक्षेस ने फरवरी में माले में होने वाले दक्षेस मंत्री परिषद की बैठक में इस पर एक सलाह भेजने का भी विचार किया जा रहा है। यदि इसे मंजूर कर लिया जाता है तो यहां होने वाले 18वें दक्षेस शिखर सम्मेलन में प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है, जिसकी तिथि अभी तक तय नहीं हुई है। राजनयिक सूत्रों के मुताबिक इस कविता को अपनाने पर विचार करने के लिए दक्षेस सांस्कृतिक केंद्र में भी भेजा गया है। उनकी कविता में हिंदुस्तानी, [[अंग्रेजी]], [[नेपाली]], [[बांग्ला]], पस्तो, [[उर्दू]], सिन्हाली, जोंगखा और धीवेही भाषाओं की पंक्तियां शामिल की गई हैं। ये भाषाएं दक्षेस के आठ सदस्य देशों में बोली जाती हैं। कविता का कुछ अंश इस प्रकार है: "हिमालय से हिंद तक, नगा हिल्स से हिंदूकुश/महावली से गंगा तक, सिंधु से ब्रह्मपुत्र/लक्षद्वीप, अंडमान, एवरेस्ट, एडम्स पीक/ काबुल से थिंपू तक, माले से काठमांडू/दिल्ली से ढाका, कोलंबो, इस्लामाबाद/हर कदम साथ-साथ।" पृथ्वी गान का लोकार्पण साल जून २०१३ में पूर्व कानून मंत्री [[कपिल सिब्बल]] और पूर्व मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री [[शशि थरूर]] ने [[नई दिल्ली]] के भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) में किया था। इसके बाद [[काठमांडू]] में [[नेपाल]] के पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनल ने [[यूनेस्को]] के नेपाल में प्रतिनिधि एक्सेल प्लेथ की मौजूदगी में इसे जारी किया था। अभय के मुताबिक इसके बाद से पृथ्वी गान का दुनिया की कई प्रमुख भाषाओं में अनुवाद किया गया है।<ref name=earthanthem>[http://www.earthanthem.net/p/download.html डाऊनलोड पृथ्वी गान] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140427134800/http://www.earthanthem.net/p/download.html |date=27 अप्रैल 2014 }} पृथ्वी गान जालस्थल, 27 अप्रैल 2014</ref><ref name=thehindu>[http://www.thehindu.com/life-and-style/metroplus/article2591929.ece "Better with verse" (अनुवाद: वेटर विथ वर्ष)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20111105053037/http://www.thehindu.com/life-and-style/metroplus/article2591929.ece |date=5 नवंबर 2011 }} ''दि हिन्दू'', 2 नवम्बर 2011.</ref><ref>[http://www.indusage.com.au/indus-tree/indus-tree/15648-indian-diplomats-paintings-on-show.html "Indian Diplomat's Paintings on Show"(अनुवाद:भारतीय राजनयिक का पेंटिंग्स शो]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}, indusage.com.au, 29 अप्रैल 2011</ref><ref>[http://sg.news.yahoo.com/indian-diplomat-turned-artist-presents-planetary-consciousness-112410306.html "Indian Diplomat turned artist presents his work on planetary consciousness"(अनुवाद:भारतीय राजनयिक ने ग्रहों की चेतना पर अपना सृजन प्रस्तुत किया] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131105100006/http://sg.news.yahoo.com/indian-diplomat-turned-artist-presents-planetary-consciousness-112410306.html |date=5 नवंबर 2013 }} याहू, 27 अप्रैल 2011</ref><ref name=hin>[http://www.hindu.com/lr/2007/08/05/stories/2007080550120400.htm ''द हिन्दू Literary Review'' 2007 (अनुवाद: हिन्दू साहित्य की समीक्षा 2007] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131105091542/http://www.hindu.com/lr/2007/08/05/stories/2007080550120400.htm |date=5 नवंबर 2013 }} ''दि हिन्दू'', 5 अगस्त 2007.</ref><ref>[http://www.indianexpress.com/talk/news/pen-drive/981356/ Pen Drive (पेन ड्राइव)] {{Webarchive|url=https://archive.today/20130126232208/http://www.indianexpress.com/talk/news/pen-drive/981356/ |date=26 जनवरी 2013 }}, दि इंडियन एक्सप्रेस, 22 नवम्बर 2012</ref><ref>[http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-08-25/books/32888574_1_indian-diplomats-poetry-poems "The Poetic Side of Indian Diplomats"(अनुवाद: भारतीय राजनयिकों का काव्य पक्ष]{{Dead link|date=अप्रैल 2021 |bot=InternetArchiveBot }}, ''दि टाइम्स ऑफ इंडिया'', 25 अगस्त 2012</ref><ref>[http://www.aninews.in/videogallery2/12184-earth-anthem-sung-by-nepali-singer-shreya-sotang-released.html ''ANI'' (अनुवाद: ए एन आई)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131104145447/http://www.aninews.in/videogallery2/12184-earth-anthem-sung-by-nepali-singer-shreya-sotang-released.html |date=4 नवंबर 2013 }}, 4 जून 2012</ref><ref name="newindianexpress">[http://newindianexpress.com/nation/Indian-diplomat-pens-anthem-for-earth/2013/06/05/article1620381.ece "Indian Diplomat pens anthem for Earth" (अनुवाद: भारतीय राजनयिक ने लिखा धरती गान] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20141108184635/http://www.newindianexpress.com/nation/Indian-diplomat-pens-anthem-for-earth/2013/06/05/article1620381.ece |date=8 नवंबर 2014 }} ''दि नेयु इंडियन एक्सप्रेस'', 5 जून 2013</ref><ref>[http://www.thehimalayantimes.com/fullNews.php?headline=Inspiring+Earth+Anthem&NewsID=379348 "Inspiring Earth Anthem" (अनुवाद: प्रेरणादायक धरती गान)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20141021012958/http://www.thehimalayantimes.com/fullNews.php?headline=Inspiring+Earth+Anthem&NewsID=379348 |date=21 अक्तूबर 2014 }} ''दि हिमालयन टाइम्स'', 9 जून 2013</ref><ref>[http://www.business-standard.com/article/news-ani/unesco-to-consider-making-earth-anthem-by-indian-poet-diplomat-a-global-initiative-113062600301_1.html "युनेस्को to consider making Earth Anthem by Indian diplomat a global initiative" (अनुवाद: यूनेस्को का भारतीय राजनयिक की वैश्विक पहल पृथ्वी गान को लागू करने पर विचार)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20141020011453/http://www.business-standard.com/article/news-ani/unesco-to-consider-making-earth-anthem-by-indian-poet-diplomat-a-global-initiative-113062600301_1.html |date=20 अक्तूबर 2014 }}, ''बिजनेस स्टेंडर्ड '', 26 जून 2013</ref><ref>[http://articles.economictimes.indiatimes.com/2013-06-26/news/40207111_1_indian-ambassador-unesco-kathmandu UN to consider "Indian diplomat's song as a global initiative"(अनुवाद: एक वैश्विक पहल के रूप में भारतीय राजनयिक के गीत)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20141031225353/http://articles.economictimes.indiatimes.com/2013-06-26/news/40207111_1_indian-ambassador-unesco-kathmandu |date=31 अक्तूबर 2014 }} ''दि इकोनोमिक टाइम्स'', 26 जून 2013</ref><ref>[http://aninews.in/newsdetail4/story142658/indian-poet-diplomat-pens-s-asian-anthem-after-earth-anthem-success.html "Indian poet-diplomat pens S.Asian anthem after Earth anthem success"(अनुवाद: भारतीय राजनयिक-कवि का पृथवि गाँ के बाद दक्षेस गान] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131203054546/http://aninews.in/newsdetail4/story142658/indian-poet-diplomat-pens-s-asian-anthem-after-earth-anthem-success.html |date=3 दिसंबर 2013 }} ''ए एन आई'', 27 नवम्बर 2013</ref>
== प्रकाशित कृतियाँ==
*''रिवर वैली टू सिलिकोन वैली'' (अँग्रेजी,2007)/''ए सिविल सरवेंट टेल'' (2011)<ref>{{cite web|url=http://issuu.com/abhayk/docs/the_civil_servants_tale|title=ए सिविल सरवेंट टेल (अँग्रेजी में)|publisher=इससु डॉट कॉम|date=16 सितंबर 2011|accessdate=2 अगस्त 2014}}{{Dead link|date=सितंबर 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
*''टेन कुश्चन ऑफ दि सोल'' (अँग्रेजी,2010)<ref>{{cite web |url=http://issuu.com/abhayk/docs/10questions |title=10 Questions of the Soul (अनुवाद: टेन कुश्चन ऑफ दि सोल) |publisher=इससु डॉट कॉम |date=4 सितंबर 2010 |accessdate=2 अगस्त 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140810040856/http://issuu.com/abhayk/docs/10questions |archive-date=10 अगस्त 2014 |url-status=live }}</ref>
*''कलर्स ऑफ सोल (Cvet Dushi)'' (अँग्रेजी,2011)<ref name="Цвет души">{{cite web |url=http://issuu.com/abhayk/docs/cvetdushi |title=Цвет души |publisher=Issuu.com |date=17 फ़रवरी 2011 |accessdate=2 अगस्त 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140605060857/http://issuu.com/abhayk/docs/cvetdushi |archive-date=5 जून 2014 |url-status=live }}</ref>
*''एनिग्माइटिक लव'' (अँग्रेजी,2009)<ref>{{cite web|url=http://issuu.com/abhayk/docs/enigmatic_love|title=Enigmatic Love (अनुवाद:एनिग्माइटिक लव)|publisher=इससु डॉट कॉम|date=4 अगस्त 2010|accessdate=2 अगस्त 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140810040853/http://issuu.com/abhayk/docs/enigmatic_love|archive-date=10 अगस्त 2014|url-status=live}}</ref>
*''फालेन लिव्स ऑफ औट्मन'' (अँग्रेजी,2010)<ref>{{cite web|url=http://issuu.com/abhayk/docs/fallenleavesofautumn|title=Fallen Leaves of Autumn (अनुवाद: फालेन लिव्स ऑफ औट्मन)|publisher=इससु डॉट कॉम|date=4 अगस्त 2010|accessdate=2 अगस्त 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140810040901/http://issuu.com/abhayk/docs/fallenleavesofautumn|archive-date=10 अगस्त 2014|url-status=live}}</ref>
*''कैंडलिंग दि लाइट''(अँग्रेजी,2011)<ref>{{cite web|url=http://ibnlive.in.com/newstopics/Candling-the-Light.html|title=Candling the Light (अनुवाद: कैंडलिंग दि लाइट)|publisher=आई बी एन लाइव|date=7 नवम्बर 2011|accessdate=2 अगस्त 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140605140403/http://ibnlive.in.com/newstopics/Candling-the-Light.html|archive-date=5 जून 2014|url-status=live}}</ref>
*''रिमेन्स'' (अँग्रेजी,2012)<ref>{{cite web|url=http://www.indianexpress.com/videos/national/6/diplomat-abhay-k.-releases-his-new-book-remains/10705|title=Diplomat Abhay K. releases his new book Remains (अनुवाद: राजनयिक अभय कुमार अपनी नई किताब रिमेन्स की विज्ञप्ति|publisher=इंडियन एक्स्प्रेस|date=1 जुलाई 2012|accessdate=2 अगस्त 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20131202083746/http://www.indianexpress.com/videos/national/6/diplomat-abhay-k.-releases-his-new-book-remains/10705|archive-date=2 दिसंबर 2013|url-status=live}}</ref>
*''सेड़क्सन ऑफ डेलही'' (अँग्रेजी)<ref>{{cite web |url=http://www.thehindu.com/news/cities/Delhi/article3515505.ece? |title=Dream WINDOW (अनुवाद: ड्रीम विंडो) |publisher=दि हिन्दू |date=1 जुलाई 2012 |accessdate=2 अगस्त 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140605140943/http://www.thehindu.com/news/cities/Delhi/article3515505.ece |archive-date=5 जून 2014 |url-status=live }}</ref>
== पुरस्कार/सम्मान ==
*2013: सार्क लिटरेरी अवार्ड<ref>[http://www.hindustantimes.com/Books/Chunk-HT-UI-BooksSectionPage-LiteraryBuzz/Poet-Abhay-K-wins-SAARC-Literature-Award/Article1-1026412.aspx Poet Abhay K wins SAARC Literature Award (अनुवाद: कवि अभय कुमार को सार्क साहित्य पुरस्कार] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130315001403/http://www.hindustantimes.com/Books/Chunk-HT-UI-BooksSectionPage-LiteraryBuzz/Poet-Abhay-K-wins-SAARC-Literature-Award/Article1-1026412.aspx |date=15 मार्च 2013 }}, आई ए एन एस, 14 मार्च 2013</ref>
*2013: पुष्कर्ट पुरस्कार के लिए नामित<ref name=bs>{{cite news| title =IFS officer nominted for coveted Pushcart Prize| trans-title =आईएफएस अधिकारी प्रतिष्ठित पुष्कर्ट पुरस्कार के लिए नामित| language =en| url =http://www.business-standard.com/article/pti-stories/ifs-officer-nominted-for-coveted-pushcart-prize-112120200351_1.html| publisher =बिजनेस स्टेंडर्ड| accessdate =2 अगस्त 2014| archive-url =https://web.archive.org/web/20150106222444/http://www.business-standard.com/article/pti-stories/ifs-officer-nominted-for-coveted-pushcart-prize-112120200351_1.html| archive-date =6 जनवरी 2015| url-status =live}}</ref>
*2012: स्टेगलीज अकादमी ऑफ आर्ट की ओर से प्रथम श्रेणी में डिप्लोमा, सेंट पीटर्सबर्ग प्रदर्शनी ''वी आर डिफरेंट, वी आर टूगेदार''<ref>{{cite web|url=http://issuu.com/abhayk/docs/first_class_diploma_from_the_academy_of_art|title=First Class Diploma to Abhay Kumar from the Steiglitz Academy of Art, St. Petersburg (अनुवाद: सेंट पीटर्सबर्ग के स्टेगलीज अकादमी ऑफ आर्ट से अभय कुमार को प्रथम श्रेणी डिप्लोमा)|publisher=इससु डॉट कॉम|accessdate=2 अगस्त 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140228195042/http://issuu.com/abhayk/docs/first_class_diploma_from_the_academy_of_art|archive-date=28 फ़रवरी 2014|url-status=live}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ियाँ==
*[http://www.dailypioneer.com/world/unesco-lauds-indian--poets-idea-of-earth-anthem.htmlयूनेस्को द्वारा धरती गान के भारतीय कवि के विचार की प्रशंसा] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190718111041/https://www.dailypioneer.com/world/unesco-lauds-indian--poets-idea-of-earth-anthem.html%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%8B |date=18 जुलाई 2019 }} (अँग्रेजी में)
*[https://web.archive.org/web/20150702223812/https://www.youtube.com/watch?v=9gu8PFXifjg&feature=c4-overview&list=UUoP-bgyrciIbf_Ic3mITvKg भारत के राष्ट्रीय टीवी चैनल डीडी नेशनल के लिए कवि अभय कुमार का साक्षात्कार ]
[[श्रेणी:कवि]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:राजनयिक]]
[[श्रेणी:1980 में जन्मे लोग]]
k43daa87bew1uwka5aq3jwux3y2nc4s
काली चील
0
583494
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6270793
2026-10-18T11:34:34Z
The Dum Reptile
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/* */
6630731
wikitext
text/x-wiki
[[चित्र:Milvus migrans front(ThKraft).jpg|right|thumb|300px|आकाश में मंडराती हुई काली चील]]
'''काली चील''' ([[द्विपद नामपद्धति|वैज्ञानिक नाम]] : ''Milvus migrans'') मधयम आकार का एक शिकारी [[पक्षी]] है। यह एक्कीपित्रिडी (Accipitridae) कुल का पक्षी है और इस कुल का विश्व का सबसे अधिक पाया जाने वाला पक्षी है। वर्तमान में इनकी पूरे विश्व में संख्या ६० लाख होने का अनुमान है। यह पक्षी दुनिया की बहुत सी जगहों में पाया जाता है, जिस वजह से इसकी कई उप्प्रजातियाँ हैं। आज के समय में इसकी ५ उप्प्रजातियाँ मानी जाती हैं। M
[[श्रेणी:पक्षी]]
{{आधार}}
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wikitext
text/x-wiki
[[चित्र:3 MW CPV project in Golmud, China.jpg|right|thumb|300px|3-मेगावाट सौर-ऊर्जा प्रणाली में प्रयुक्त द्वि-अक्षीय सौर अनुसारक]]
'''सौर अनुसारक''' ([https://jobprime.in/solar-tracker-project/ solar tracker] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20200127162325/https://jobprime.in/solar-tracker-project/ |date=27 जनवरी 2020 }}) उस युक्ति को कहते हैं जो किसी वस्तु को घुमाकर उसे सदा [[सूर्य]] की तरफ बनाये रखता है। इस क्रिया को 'सौर अनुसरण' (सोलर ट्रैकिंग) कहते हैं। सौर अनुसारकों का उपयोग [[सौर पैनल]], फ़्रेनेल परावर्तक, [[दर्पण]], तथा [[लेंस|लेंसों]] आदि को सूर्य की तरफ बनाये रखने के लिये किया जाता है। समतल पैनल वाले प्रकाश-वोल्टीय प्रणालियों को सूर्य की ओर अभिमुख रखने से अधिकतम सौर ऊर्जा की प्राप्ति होती है जिससे अधिकतम [[विद्युत ऊर्जा]] प्राप्त करने में सहायता मिलती है।
सौर अनुसारक दो तरीके से बनाये जा सकते हैं:
* '''<big>[[माइक्रोकंट्रोलर]] और [[प्रोग्रामिंग]] का उपयोग करके</big>'''
* <big>'''वह सौर अनुसारक जिनमे प्रोग्रामिंग का उपयोग नहीं किया जाता है'''।</big>
'''सोलर ट्रैकर बनाने के लिए घटकों की सूची'''
# '''LDR (लाइट डिपेंडेंट प्रतिरोध):''' सबसे सरल ऑप्टिकल सेंसर एक फोटॉन प्रतिरोध या फोटो-सेल है जो एक प्रकाश-संवेदनशील प्रतिरोध है। LDR का प्रतिरोध (प्रतिरोध) प्रकाश की तीव्रता (तीव्रता) में वृद्धि के साथ घटता है।
# '''Op-amp (IC-741):''' जब कोई भी op-amp का उपयोग बिना किसी प्रतिक्रिया सर्किट के विभेदक मोड में किया जाता है, तो इसका वोल्टेज बहुत अधिक होता है (लगभग 1000000) यह दो इनपुट (इनवर्टिंग और नॉन-इनवर्टिंग) के अंतर का 200000 गुना आउटपुट परिणाम देता है।
# '''डीसी गियर मोटर:''' इसमें 25-35 RPM (रोटेशन / मिनट) की गियर-मोटर का उपयोग किया जा सकता है।
प्रोजेक्ट को बनाने के लिए कुछ और भी सहायक उपकरणों की आवश्यकता होगी।
'''सोल्डरिंग आयरन''', '''8-पिन आईसी होल्डर''', '''PCB बोर्ड''', '''ब्रेडबोर्ड, [[मल्टीमीटर]], प्रतिरोध बॉक्स, प्रकाश की तीव्रता मापने के लिए लक्स-मीटर'''
ऊपर दी गयी लिस्ट के अनुसार सभी घटक तैयार करने के बाद आपको नीचे दिए गए चित्र के अनुसार ब्रेड-बोर्ड पर सर्किट डायग्राम बनाना है। इस सर्किट में दो पार्ट हैं; एक जो पहले हरे रंग से हाईलाइट किया है उसे LDR और प्रतिरोध के द्वारा बनाना है। इसके बाद दोनों LDRs से मिले आउटपुट को डिफरेंशियल मोड में लगे op-amp के इनपुट पिन-2, पिन-3 पर जोड़ना है।<gallery>
चित्र:Solar tracker 40.png|सोलर ट्रैकर
</gallery>
==सन्दर्भ==
[https://hi.jobprime.in/solar-tracker-project-in-hindi/ Solar Tracker Hindi] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20200127162325/https://hi.jobprime.in/solar-tracker-project-in-hindi/ |date=27 जनवरी 2020 }}
==इन्हें भी देखें==
*[[सौर ऊर्जा]]
*[[सौर सेल]]
*[[अधिकतम शक्ति-बिन्दु अनुसरण]]
[[श्रेणी:सौर ऊर्जा]]
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भारतीय सैन्य अभियान
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text/x-wiki
{{Update|date=सितम्बर 2015}}
'''भारतीय सशस्त्र बल''', [[भारत|भारत गणराज्य]] की [[भारतीय थलसेना|थलसेना]],[[भारतीय वायुसेना|वायुसेना]],[[भारतीय नौसेना|नौसेना]], [[भारतीय तटरक्षक|तटरक्षक बल]] और विभिन्न अन्य अंतर-सेवा संस्थाओं का समग्र एकीकृत सैन्यरूप है। [[भारत के राष्ट्रपति]] इसके कमांडर-इन-चीफ के रूप में कार्य करते हैं। 13,25,000 सक्रिय कर्मियों की अनुमानित कुल संख्या के साथ भारत की [[:en:List of countries by size of armed forces|दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी सशस्त्र सेना]] है।
==सैन्य अभियान==
*[[१९४७ का भारत-पाक युद्ध|प्रथम कश्मीर युद्ध]] (1947) के दौरान
* [[ऑपरेशन पोलो]] (1948) - भारतीय सेना ने दक्षिण भारत में [[हैदराबाद के निज़ाम]] के शासन का अंत किया और हैदराबाद रियासत को भारतीय संघ ने विलीन किया।
* [[:en:Operation Vijay (1961)|ऑपरेशन विजय (1961)]] - [[गोवा]], [[दमन और दीव]] और अंजिदिव द्वीपों को पुर्तगालियों से छुड़ाकर अपने कब्जे में लिया।
*[[भारत-चीन युद्ध|चीन-भारत युद्ध]] के दौरान (1962)
*[[१९६५ का भारत-पाक युद्ध|द्वितीय कश्मीर युद्ध]] के दौरान (1965)
*[[:en:Operation Staplechase|ऑपरेशन स्टेपलचेज़]] (1971)
*[[:en:India-Pakistan War 1971|बांग्लादेश स्वतंत्रता युद्ध-1971]] के दौरान (इन्हें भी देखें: [[:en:Battle of Longewala|लोंगेवाला की लड़ाई]], [[:en:Battle of Hilli|हिली की लड़ाई]], [[:en:Battle of Basantar|बसन्तर की लड़ाई]])
* [[सिक्किम का इतिहास|सिक्किम का विलय]]- [[भारतीय सशस्त्र सेनाएँ|भारतीय सेनाका]] सिक्किम के राजा के शाही रक्षकों को बेहथियार करना, जिसके बाद सिक्किम का भारत में एक [[:en:Union Territories of India|केंद्र शासित राज्य]] के रूप में विलय हुआ।
*[[सियाचिन विवाद|सियाचीन मतभेद]] के दौरान (1980)
* [[ऑपरेशन ब्लू स्टार]] (1984)
* [[:en:Operation Woodrose|ऑपरेशन वुडरोज़]] (1984)
* [[:en:operation meghdoot|ऑपरेशन मेघदूत]] (1984) —भारतीय सेना ने [[:en:siacheen glacier|सियाचीन ग्लेशियर]] के ज्यादातर हिस्सों पर कब्ज़ा किया।
* [[:en:operation rajeev|ऑपरेशन राजीव]] (1987) — भारतीय सेना का कैद पोस्ट को अपने अधिकार में करना
* [[:en:operation pawan|ऑपरेशन पवन]] (1987) – 1987 के अंत में [[श्रीलंका]] में लिट्टे को निशस्त्र कर [[जाफना]] को नियंत्रण में लेने के लिए [[भारतीय शांति रक्षा सेना|भारतीय शांति सेना]] द्वारा किये गए अभियान
* [[:en:operation virat|ऑपरेशन विराट]] (1988) – उत्तरी श्रीलंका में लिट्टे के विरुद्ध राजद्रोह विरोधी अभियान
* [[:en:operation trishul|ऑपरेशन त्रिशूल]] (1988) - ऑपरेशन विराट के साथ उत्तरी श्रीलंका में लिट्टे के विरुद्ध राजद्रोह विरोधी अभियान
* [[ऑपरेशन चेकमेट (श्री लंका)|ऑपरेशन चेकमेट]] (1988) - जून 1988 में [[भारतीय शांति रक्षा सेना]] द्वारा [[श्रीलंका]] के [[:en:Vadamarachi|वादमरची]] में [[लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम|लिट्टे]] के खिलाफ चलाया गया राजद्रोह निरोधी अभियान।
* [[:en:operation cactus|ऑपरेशन कैक्टस]] (1988) — [[:en:Paracommandos (India)|पैराकमांडोज़ (भारत)]] और [[:en:MARCOS|मार्कोस]] ने किराये के [[तमिल राष्ट्रवादी]] सैनिकों को [[मालदीव]] की राजधानी [[माले]] में सत्ता परिवर्तन करने से रोका।
* [[:en:operation vijay|ऑपरेशन विजय (1999)]] -सफल भारतीय अभियान जिसमें [[कारगिल ज़िला|कारगिल]] में घुसे घुसपैठियों को वापस खदेड़ा गया।
* [[:en:operation prakram|ऑपरेशन पराक्रम]] (2001)
* [[o:en:operation black tornedo|ऑपरेशन ब्लैक टोरनेडो]],और [[नवंबर 2008 मुम्बई हमले|ऑपरेशन ब्लैक टॉरनेडो]], (2008)
* [[:en:operation goodwill|ऑपरेशन गुडविल]]-[[जम्मू और कश्मीर|जम्मू-कश्मीर]] में मानवतावादी कार्य
* [[:en:operation good samarthan|ऑपरेशन गुड समर्थन]]-[[मणिपुर]]/[[नागालैण्ड|नागालैंड]] में मानवतावादी कार्य
* [[:en:operation surya hope|ऑपरेशन सूर्य होप यह ऑपरेशन 17 जून 2013 को उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ में आई बाढ़ में राहत एवम बचाव कार्य में चलाया गया था तथा इसको वीके दुग्गल की देखभाल में चलाया गया]
* [[:en:operation all out|ऑपरेशन ऑल आउट]] (2015) - असम के बोडो नक्सलियों को साफ करने के लिए
* [[ऑपरेशन मैत्री]] (2015)-भूकंपग्रस्त नेपाल में भारतीय सेना का राहत व बचाव कार्य
* [[2015 म्यांमार में भारतीय राजद्रोह विरोधी अभियान]] -एक क्रॉस बॉर्डर अभियान व रेड
==नौसेना अभियान==
* [[:en:Operation Vijay (1961)|ऑपरेशन विजय]] (1961)
* [[:en:Operation trident (India-Pakistan war 1971)|ऑपरेशन ट्राइडेंट]] (1971)
* [[:en:operation Python|ऑपरेशन पाइथन]] (1971)
* [[:en:operation cactus|ऑपरेशन कैक्टस]] (1988)
* [[:en:operation restore hope|ऑपरेशन रिस्टोर होप]] के दौरान(1992–2003)
* [[:en:operation parakram|ऑपरेशन पराक्रम]] (2001)
* [[:en:operation induring freedom|ऑपरेशन इंडयुरिंग फ्रीडम]] (2001) के दौरान
* [[2004 हिन्द महासागर भूकंप]] के दौरान (''ऑपरेशन मदद'', ''ऑपरेशन सी वेव्स, ''ऑपरेशन कास्टर'', ''ऑपरेशन रेनबो, ''ऑपरेशन गंभीर और ''ऑपरेशन राहत-II'')
* [[ऑपरेशन सुकून]] (2006)
*ऑपरेशन सर्च लाइट-ये खोज अभियान भारतीय नौसेना द्वारा खोये हुए मलेशियाई विमान बोइंग 777 एम.एच 17 को ढूंढने के लिए चलाया गया।
* [[ऑपरेशन राहत(भारत)|ऑपरेशन राहत]] (2015) -2015 की यमन त्रासदी में [[सउदी अरब|सऊदी अरब]] व उसकी साथी सेना के हस्तक्षेप के दौरान भारतीय नागरिकों व अन्य देशों के नागरिकों को यमन से बाहर निकलने के लिए।
==वायु अभियान==
*[[द्वितीय विश्वयुद्ध|द्वितीय विश्व युद्ध]] के दौरान (1939–1945) (मुख्य लेख: [[:en:India During world war 2|द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत]])
*[[१९४७ का भारत-पाक युद्ध|प्रथम कश्मीर युद्ध]] (1947)
*[[:en:Congo Crisis|कॉन्गो त्रासदी]] के दौरान(1961)
*[[:en:Sino-India War|चीन-भारत युद्ध]] के दौरान(1962)
*[[१९६५ का भारत-पाक युद्ध|द्वितीय कश्मीर युद्ध]] के दौरान(1965)
*[[:en:India-Pakistan war 1971|बांग्लादेश स्वतंत्रता युद्ध]] के दौरान (1971)
* [[:en:Meghna Heli Bridge|मेघना हैली ब्रिज]] (1971)
* [[:en:Tangail Airdrop|ऑपरेशन तंगेल]] (1971)
* [[:en:Operation Meghdoot|ऑपरेशन मेघदूत]] (1984)
* [[:en:Operation Poomalai|ऑपरेशन पूमलइ]] (1987)
* [[:en:Operation Cactus|ऑपरेशन कैक्टस]] (1988)
* [[:en:Operation Safed Sagar|ऑपरेशन सफेद सागर]] (1999)
* [[:en:Atlantique Incident|एटलांटिके घटना]] (1999)
* [[ऑपरेशन राहत]] (2013) उत्तराखंड बाढ़ के दौरान
* [[ऑपरेशन मैत्री]] (2015) भारतीय मिलिट्री का भूकंप ग्रस्त नेपाल में बचाव व राहत अभियान।
* [[ऑपरेशन सिंदूर]] (2025) 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम नरसंहार की प्रतिक्रिया में किए गए थे।
==इन्हें भी देखें==
* [[भारतीय थलसेना]]
* [[भारतीय नौसेना]]
* [[भारतीय वायुसेना]]
* [[भारतीय तटरक्षक]]
[[श्रेणी:भारतीय सेना के अभियान]]
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माधो सिंह प्रथम
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text/x-wiki
{{जीवनी स्रोतहीन|date=जनवरी 2017}}
{{Infobox royalty
| succession = आमेर के राजा
|image= [[File:Portrait of Savai Madho Singh of Jaipur.jpeg|250px|]]
|caption =
| reign = 12 दिसंबर 1750 <br> 5 मार्च 1768
| dynasty = कछवाहा
| predecessor =[[ईश्वरी सिंह]]
| successor = [[पृथ्वी सिंह द्वितीय]]
| father = [[जय सिंह द्वितीय]]
| mother = राणावतजी चंद्र कंवरजी महाराणा अमर सिंह II की पुत्री. उदयपुर-मेवाड़
| spouse =
| issue =
*पृथ्वी सिंह द्वितीय
*प्रताप सिंह
| birth_date = 20 जून 1728
| birth_place = [[जयपुर]]
| death_date = 5 मार्च 1768
| death_place = जयपुर
}}
'''सरामद-ए-राजा-ए हिंदुस्तान राज-राजेश्वर राज-राजेंद्र महाराजधिराज महाराजा सवाई माधोसिँह जी प्रथम''' जयपुर के प्रमुख महाराजाओं में से एक थे। राजस्थान के [[सवाई माधोपुर]] शहर की स्थापना जयपुर के पूर्व महाराजा सवाई माधोसिंह जी प्रथम ने ही 1763 ईस्वी के लगभग की थी। सवाई माधोसिंह जी प्रथम की वजह से सवाई माधोपुर शहर 17वीं व 18वीं शताब्दी के आसपास एक ख्याति प्राप्त शहर माना जाने लगा था।
राजस्थान सरकार ने 15 मई 1949 में सवाई माधोपुर शहर को सवाई माधोसिंहजी के नाम पर जिला बनाकर उनके द्वारा स्थापित शहर का सम्मान बढ़ा दिया। तब से लेकर आज तक जिले का नाम सवाई माधोपुर के रूप में भारत स्तर पर जाना जाता है।
===राज्याभिषेक 29/12/1750===
महाराजा सवाई माधो सिंहजी की माता मेवाड़-उदयपुर के महाराणा अमर सिंहजी द्वितीय की पुत्री चँद्र कँवरजी थी।इसके अतिरिक्त बाईजी लाल विचित्र कँवरजी और किशन कँवरजी भी चँद्र कँवर से उत्पन्न हुई थी।
माधोसिँह जी की सात रानियाँ और पुत्र पाँच हुए थे जिनमे से उनके उत्तराधिकारी महाराजा सवाई पृथ्वी सिँहजी और उनके बाद बने महाराजा सवाई प्रताप सिँहजी की माता रानी चुंडावतजी कुंदन कँवरजी पुत्री रावत जसवंत सिंहजी देवगढ़ की थीं इसके अलावा अन्य रानियों में से रानी सिसोदीनीजी रतन कँवरजी पुत्री राजा सूरतान सिंहजी और दूसरी उनके पुत्र राजा सरदार सिंहजी बनेड़ा की पुत्री रानी ब्रज कँवरजी थीं। इनकी एक रानी राठौड़जी अर्जुन कँवरजी पुत्री महाराजा राय सिंहजी ईडर की और पौत्री महाराजा अजीत सिंहजी जोधपुर-मारवाड़ की थीं। अन्य पुत्र कुंवर मान सिँहजी,कुंवर भवानी सिँहजी और कुंवर रघुबीर सिँहजी भी हुए थे परंतु तीनों बाल्यकाल में ही समाप्त हो गए।
===सफदरगंज समझोता, 1758===
यह समझोता ''माधोसिंह प्रथम'' और ''मुगल बादशाह अहमदशाह और नवाब सफदरगंज(अवध)'' के मध्य 1758 को हुआ. इस समझौते के पश्चात मुगल बादशाह अहमदशाह ने माधोसिंह प्रथम को जनवरी 1759 को रणथंभौर का किला भेंट किया।
===भरवाड़ा युद्ध 1761===
कोटा शासक ''शत्रुसाल, माधोसिंह''</big> को <u>रणथंभौर किला</u> दिए जाने के कारण अप्रसन हुए और बारां में यहयुद्ध हुआ. इस युद्ध में शत्रुसाल के सेनापति झालाजालिम सिंह ने माधोसिंह को पराजित कर दिया. इसयुद्धके पश्चात शत्रुसाल ने रणथंभौर पर अधिकार कर लिया
'''1767 में माधोसिंह ने मावंडायुद्ध''' मे भरतपुर शासक जवाहरसिंह को पराजित किया गया
1763 मे मोतीडूंगरी महलों का निर्माण करवाया।
अपने भाई ईश्वरीसिंह से उतराधिकार को लेकर संघर्ष
===झिलाई/जमोली संधि 1745===
यह संधि माधोसिंह प्रथम व ईश्वरीसिंहके मध्य जयपुर के दीवान राजमलखत्री करवाता हैं। इस संधि के तहत माधोसिंह को रामपुर व टोंक परगना देना तय हुआ। जो 5 लाख रुपए वार्षिक आय का परगना था l
===राजमहल का युद्ध 1 मार्च 1747 (टोंक में)===
ईश्वरीसिंह का साथ मुगलसेना ने दिया और माधोसिंहका साथ मेवाड़ महाराणा जगतसिंह2 और कोटा शासक दुर्जनसाल और मराठाओ ने दिया । लेकिन इस युद्ध में विजय ईश्वरीसिंह हुआ
===बगरू का युद्ध===
<ref>{{Cite book|title=Rajasthan history books}}</ref>
ईश्वरीसिंह का साथ मुगलसेना ने दिया और माधोसिंहका साथ मेवाड़ महाराणा जगतसिंह2 और कोटा शासक दुर्जनसाल और मराठाओ ने दिया । लेकिन इस युद्ध में विजय माधोसिंह की हुई. माधोसिंह के युद्ध जितने के पश्चात ईश्वरीसिंह से माल, निवाई, टोडा परगने मांगे जिसे ईश्वरी सिंह ने स्वीकार कर लिए। और मराठाओं को हर्जाना दिलवाया। ईश्वरी सिंहकी मृत्यु के बाद माधोसिंहप्रथम जयपुर का शासक बना। 5 मार्च 1768 गई।
By rajasthan history books
{{जयपुर के महाराजा}}
[[श्रेणी:जयपुर के लोग]]
[[श्रेणी:सवाई माधोपुर ज़िला]]
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*[[ब्रजनिधि|प्रताप सिंह]]
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'''सरामद-ए-राजा-ए हिंदुस्तान राज-राजेश्वर राज-राजेंद्र महाराजधिराज महाराजा सवाई माधोसिँह जी प्रथम''' जयपुर के प्रमुख महाराजाओं में से एक थे। राजस्थान के [[सवाई माधोपुर]] शहर की स्थापना जयपुर के पूर्व महाराजा सवाई माधोसिंह जी प्रथम ने ही 1763 ईस्वी के लगभग की थी। सवाई माधोसिंह जी प्रथम की वजह से सवाई माधोपुर शहर 17वीं व 18वीं शताब्दी के आसपास एक ख्याति प्राप्त शहर माना जाने लगा था।
राजस्थान सरकार ने 15 मई 1949 में सवाई माधोपुर शहर को सवाई माधोसिंहजी के नाम पर जिला बनाकर उनके द्वारा स्थापित शहर का सम्मान बढ़ा दिया। तब से लेकर आज तक जिले का नाम सवाई माधोपुर के रूप में भारत स्तर पर जाना जाता है।
===राज्याभिषेक 29/12/1750===
महाराजा सवाई माधो सिंहजी की माता मेवाड़-उदयपुर के महाराणा अमर सिंहजी द्वितीय की पुत्री चँद्र कँवरजी थी।इसके अतिरिक्त बाईजी लाल विचित्र कँवरजी और किशन कँवरजी भी चँद्र कँवर से उत्पन्न हुई थी।
माधोसिँह जी की सात रानियाँ और पुत्र पाँच हुए थे जिनमे से उनके उत्तराधिकारी महाराजा सवाई पृथ्वी सिँहजी और उनके बाद बने महाराजा सवाई प्रताप सिँहजी की माता रानी चुंडावतजी कुंदन कँवरजी पुत्री रावत जसवंत सिंहजी देवगढ़ की थीं इसके अलावा अन्य रानियों में से रानी सिसोदीनीजी रतन कँवरजी पुत्री राजा सूरतान सिंहजी और दूसरी उनके पुत्र राजा सरदार सिंहजी बनेड़ा की पुत्री रानी ब्रज कँवरजी थीं। इनकी एक रानी राठौड़जी अर्जुन कँवरजी पुत्री महाराजा राय सिंहजी ईडर की और पौत्री महाराजा अजीत सिंहजी जोधपुर-मारवाड़ की थीं। अन्य पुत्र कुंवर मान सिँहजी,कुंवर भवानी सिँहजी और कुंवर रघुबीर सिँहजी भी हुए थे परंतु तीनों बाल्यकाल में ही समाप्त हो गए।
===सफदरगंज समझोता, 1758===
यह समझोता ''माधोसिंह प्रथम'' और ''मुगल बादशाह अहमदशाह और नवाब सफदरगंज(अवध)'' के मध्य 1758 को हुआ. इस समझौते के पश्चात मुगल बादशाह अहमदशाह ने माधोसिंह प्रथम को जनवरी 1759 को रणथंभौर का किला भेंट किया।
===भरवाड़ा युद्ध 1761===
कोटा शासक ''शत्रुसाल, माधोसिंह''</big> को <u>रणथंभौर किला</u> दिए जाने के कारण अप्रसन हुए और बारां में यहयुद्ध हुआ. इस युद्ध में शत्रुसाल के सेनापति झालाजालिम सिंह ने माधोसिंह को पराजित कर दिया. इसयुद्धके पश्चात शत्रुसाल ने रणथंभौर पर अधिकार कर लिया
'''1767 में माधोसिंह ने मावंडायुद्ध''' मे भरतपुर शासक जवाहरसिंह को पराजित किया गया
1763 मे मोतीडूंगरी महलों का निर्माण करवाया।
अपने भाई ईश्वरीसिंह से उतराधिकार को लेकर संघर्ष
===झिलाई/जमोली संधि 1745===
यह संधि माधोसिंह प्रथम व ईश्वरीसिंहके मध्य जयपुर के दीवान राजमलखत्री करवाता हैं। इस संधि के तहत माधोसिंह को रामपुर व टोंक परगना देना तय हुआ। जो 5 लाख रुपए वार्षिक आय का परगना था l
===राजमहल का युद्ध 1 मार्च 1747 (टोंक में)===
ईश्वरीसिंह का साथ मुगलसेना ने दिया और माधोसिंहका साथ मेवाड़ महाराणा जगतसिंह2 और कोटा शासक दुर्जनसाल और मराठाओ ने दिया । लेकिन इस युद्ध में विजय ईश्वरीसिंह हुआ
===बगरू का युद्ध===
<ref>{{Cite book|title=Rajasthan history books}}</ref>
ईश्वरीसिंह का साथ मुगलसेना ने दिया और माधोसिंहका साथ मेवाड़ महाराणा जगतसिंह2 और कोटा शासक दुर्जनसाल और मराठाओ ने दिया । लेकिन इस युद्ध में विजय माधोसिंह की हुई. माधोसिंह के युद्ध जितने के पश्चात ईश्वरीसिंह से माल, निवाई, टोडा परगने मांगे जिसे ईश्वरी सिंह ने स्वीकार कर लिए। और मराठाओं को हर्जाना दिलवाया। ईश्वरी सिंहकी मृत्यु के बाद माधोसिंहप्रथम जयपुर का शासक बना। 5 मार्च 1768 गई।
By rajasthan history books
{{जयपुर के महाराजा}}
[[श्रेणी:जयपुर के लोग]]
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Anitya Gautam
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| succession = आमेर के राजा
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*पृथ्वी सिंह द्वितीय
*[[ब्रजनिधि|प्रताप सिंह]]
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'''सरामद-ए-राजा-ए हिंदुस्तान राज-राजेश्वर राज-राजेंद्र महाराजधिराज महाराजा सवाई माधोसिँह जी प्रथम''' जयपुर के प्रमुख महाराजाओं में से एक थे। राजस्थान के [[सवाई माधोपुर]] शहर की स्थापना जयपुर के पूर्व महाराजा सवाई माधोसिंह जी प्रथम ने ही 1763 ईस्वी के लगभग की थी। सवाई माधोसिंह जी प्रथम की वजह से सवाई माधोपुर शहर 17वीं व 18वीं शताब्दी के आसपास एक ख्याति प्राप्त शहर माना जाने लगा था। <ref name="h920">{{cite web | title=आमेर के ईश्वरीसिंह, माधोसिंह और सवाई प्रतापसिंह | website=Notes-Mind | date=1970-01-01 | url=https://notesmind.com/post/ishwarisingh-madho-singh-and-sawai-pratap-singh-of-amer | language=hi | access-date=2026-10-17}}</ref>
राजस्थान सरकार ने 15 मई 1949 में सवाई माधोपुर शहर को सवाई माधोसिंहजी के नाम पर जिला बनाकर उनके द्वारा स्थापित शहर का सम्मान बढ़ा दिया। तब से लेकर आज तक जिले का नाम सवाई माधोपुर के रूप में भारत स्तर पर जाना जाता है।
===राज्याभिषेक 29/12/1750===
महाराजा सवाई माधो सिंहजी की माता मेवाड़-उदयपुर के महाराणा अमर सिंहजी द्वितीय की पुत्री चँद्र कँवरजी थी।इसके अतिरिक्त बाईजी लाल विचित्र कँवरजी और किशन कँवरजी भी चँद्र कँवर से उत्पन्न हुई थी।
माधोसिँह जी की सात रानियाँ और पुत्र पाँच हुए थे जिनमे से उनके उत्तराधिकारी महाराजा सवाई पृथ्वी सिँहजी और उनके बाद बने महाराजा सवाई प्रताप सिँहजी की माता रानी चुंडावतजी कुंदन कँवरजी पुत्री रावत जसवंत सिंहजी देवगढ़ की थीं इसके अलावा अन्य रानियों में से रानी सिसोदीनीजी रतन कँवरजी पुत्री राजा सूरतान सिंहजी और दूसरी उनके पुत्र राजा सरदार सिंहजी बनेड़ा की पुत्री रानी ब्रज कँवरजी थीं। इनकी एक रानी राठौड़जी अर्जुन कँवरजी पुत्री महाराजा राय सिंहजी ईडर की और पौत्री महाराजा अजीत सिंहजी जोधपुर-मारवाड़ की थीं। अन्य पुत्र कुंवर मान सिँहजी,कुंवर भवानी सिँहजी और कुंवर रघुबीर सिँहजी भी हुए थे परंतु तीनों बाल्यकाल में ही समाप्त हो गए।
===सफदरगंज समझोता, 1758===
यह समझोता ''माधोसिंह प्रथम'' और ''मुगल बादशाह अहमदशाह और नवाब सफदरगंज(अवध)'' के मध्य 1758 को हुआ. इस समझौते के पश्चात मुगल बादशाह अहमदशाह ने माधोसिंह प्रथम को जनवरी 1759 को रणथंभौर का किला भेंट किया।
===भरवाड़ा युद्ध 1761===
कोटा शासक ''शत्रुसाल, माधोसिंह''</big> को <u>रणथंभौर किला</u> दिए जाने के कारण अप्रसन हुए और बारां में यहयुद्ध हुआ. इस युद्ध में शत्रुसाल के सेनापति झालाजालिम सिंह ने माधोसिंह को पराजित कर दिया. इसयुद्धके पश्चात शत्रुसाल ने रणथंभौर पर अधिकार कर लिया
'''1767 में माधोसिंह ने मावंडायुद्ध''' मे भरतपुर शासक जवाहरसिंह को पराजित किया गया
1763 मे मोतीडूंगरी महलों का निर्माण करवाया।
अपने भाई ईश्वरीसिंह से उतराधिकार को लेकर संघर्ष
===झिलाई/जमोली संधि 1745===
यह संधि माधोसिंह प्रथम व ईश्वरीसिंहके मध्य जयपुर के दीवान राजमलखत्री करवाता हैं। इस संधि के तहत माधोसिंह को रामपुर व टोंक परगना देना तय हुआ। जो 5 लाख रुपए वार्षिक आय का परगना था l
===राजमहल का युद्ध 1 मार्च 1747 (टोंक में)===
ईश्वरीसिंह का साथ मुगलसेना ने दिया और माधोसिंहका साथ मेवाड़ महाराणा जगतसिंह2 और कोटा शासक दुर्जनसाल और मराठाओ ने दिया । लेकिन इस युद्ध में विजय ईश्वरीसिंह हुआ
===बगरू का युद्ध===
<ref>{{Cite book|title=Rajasthan history books}}</ref>
ईश्वरीसिंह का साथ मुगलसेना ने दिया और माधोसिंहका साथ मेवाड़ महाराणा जगतसिंह2 और कोटा शासक दुर्जनसाल और मराठाओ ने दिया । लेकिन इस युद्ध में विजय माधोसिंह की हुई. माधोसिंह के युद्ध जितने के पश्चात ईश्वरीसिंह से माल, निवाई, टोडा परगने मांगे जिसे ईश्वरी सिंह ने स्वीकार कर लिए। और मराठाओं को हर्जाना दिलवाया। ईश्वरी सिंहकी मृत्यु के बाद माधोसिंहप्रथम जयपुर का शासक बना। 5 मार्च 1768 गई।
By rajasthan history books
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| reign = 12 दिसंबर 1750 <br> 5 मार्च 1768
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*पृथ्वी सिंह द्वितीय
*[[ब्रजनिधि|प्रताप सिंह]]
| birth_date = 20 जून 1728
| birth_place = [[जयपुर]]
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| death_place = जयपुर
}}
'''सरामद-ए-राजा-ए हिंदुस्तान राज-राजेश्वर राज-राजेंद्र महाराजधिराज महाराजा सवाई माधोसिँह जी प्रथम''' जयपुर के प्रमुख महाराजाओं में से एक थे। राजस्थान के [[सवाई माधोपुर]] शहर की स्थापना जयपुर के पूर्व महाराजा सवाई माधोसिंह जी प्रथम ने ही 1763 ईस्वी के लगभग की थी। सवाई माधोसिंह जी प्रथम की वजह से सवाई माधोपुर शहर 17वीं व 18वीं शताब्दी के आसपास एक ख्याति प्राप्त शहर माना जाने लगा था।
राजस्थान सरकार ने 15 मई 1949 में सवाई माधोपुर शहर को सवाई माधोसिंहजी के नाम पर जिला बनाकर उनके द्वारा स्थापित शहर का सम्मान बढ़ा दिया। तब से लेकर आज तक जिले का नाम सवाई माधोपुर के रूप में भारत स्तर पर जाना जाता है।
===राज्याभिषेक 29/12/1750===
महाराजा सवाई माधो सिंहजी की माता मेवाड़-उदयपुर के महाराणा अमर सिंहजी द्वितीय की पुत्री चँद्र कँवरजी थी।इसके अतिरिक्त बाईजी लाल विचित्र कँवरजी और किशन कँवरजी भी चँद्र कँवर से उत्पन्न हुई थी।
माधोसिँह जी की सात रानियाँ और पुत्र पाँच हुए थे जिनमे से उनके उत्तराधिकारी महाराजा सवाई पृथ्वी सिँहजी और उनके बाद बने महाराजा सवाई प्रताप सिँहजी की माता रानी चुंडावतजी कुंदन कँवरजी पुत्री रावत जसवंत सिंहजी देवगढ़ की थीं इसके अलावा अन्य रानियों में से रानी सिसोदीनीजी रतन कँवरजी पुत्री राजा सूरतान सिंहजी और दूसरी उनके पुत्र राजा सरदार सिंहजी बनेड़ा की पुत्री रानी ब्रज कँवरजी थीं। इनकी एक रानी राठौड़जी अर्जुन कँवरजी पुत्री महाराजा राय सिंहजी ईडर की और पौत्री महाराजा अजीत सिंहजी जोधपुर-मारवाड़ की थीं। अन्य पुत्र कुंवर मान सिँहजी,कुंवर भवानी सिँहजी और कुंवर रघुबीर सिँहजी भी हुए थे परंतु तीनों बाल्यकाल में ही समाप्त हो गए।
===सफदरगंज समझोता, 1758===
यह समझोता ''माधोसिंह प्रथम'' और ''मुगल बादशाह अहमदशाह और नवाब सफदरगंज(अवध)'' के मध्य 1758 को हुआ. इस समझौते के पश्चात मुगल बादशाह अहमदशाह ने माधोसिंह प्रथम को जनवरी 1759 को रणथंभौर का किला भेंट किया।
===भरवाड़ा युद्ध 1761===
कोटा शासक ''शत्रुसाल, माधोसिंह''</big> को <u>रणथंभौर किला</u> दिए जाने के कारण अप्रसन हुए और बारां में यहयुद्ध हुआ. इस युद्ध में शत्रुसाल के सेनापति झालाजालिम सिंह ने माधोसिंह को पराजित कर दिया. इसयुद्धके पश्चात शत्रुसाल ने रणथंभौर पर अधिकार कर लिया
'''1767 में माधोसिंह ने मावंडायुद्ध''' मे भरतपुर शासक जवाहरसिंह को पराजित किया गया
1763 मे मोतीडूंगरी महलों का निर्माण करवाया।
अपने भाई ईश्वरीसिंह से उतराधिकार को लेकर संघर्ष
===झिलाई/जमोली संधि 1745===
यह संधि माधोसिंह प्रथम व ईश्वरीसिंहके मध्य जयपुर के दीवान राजमलखत्री करवाता हैं। इस संधि के तहत माधोसिंह को रामपुर व टोंक परगना देना तय हुआ। जो 5 लाख रुपए वार्षिक आय का परगना था l
===राजमहल का युद्ध 1 मार्च 1747 (टोंक में)===
ईश्वरीसिंह का साथ मुगलसेना ने दिया और माधोसिंहका साथ मेवाड़ महाराणा जगतसिंह2 और कोटा शासक दुर्जनसाल और मराठाओ ने दिया । लेकिन इस युद्ध में विजय ईश्वरीसिंह हुआ
===बगरू का युद्ध===
<ref>{{Cite book|title=Rajasthan history books}}</ref>
ईश्वरीसिंह का साथ मुगलसेना ने दिया और माधोसिंहका साथ मेवाड़ महाराणा जगतसिंह2 और कोटा शासक दुर्जनसाल और मराठाओ ने दिया । लेकिन इस युद्ध में विजय माधोसिंह की हुई. माधोसिंह के युद्ध जितने के पश्चात ईश्वरीसिंह से माल, निवाई, टोडा परगने मांगे जिसे ईश्वरी सिंह ने स्वीकार कर लिए। और मराठाओं को हर्जाना दिलवाया। ईश्वरी सिंहकी मृत्यु के बाद माधोसिंहप्रथम जयपुर का शासक बना। 5 मार्च 1768 गई।
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सराईघाट का युद्ध
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* [[जैंतिआ साम्राज्य]]
* [[दिमासा साम्राज्य]]
| combatant2 = [[File:Fictional_flag_of_the_Mughal_Empire.svg|20px]] [[मुगल साम्राज्य]]
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* [[उदयादित्य सिंह]]
* [[अतन बुराहाहोआइन]]
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* [[औरंगज़ेब]]
}}
[[चित्र:Lachit Borphukan and His Army.jpg|right|thumb|300px|असम के सेनानायक [[लाचित बोड़फुकन|लाचित बड़फुकन]] और उसकी सेना की ३५-गुट ऊँची प्रतिमा जो [[ब्रह्मपुत्र नदी]] के बीचोबीच स्थापित है]]
'''सराईघाट का युद्ध''' सन 1671 में [[मुगल साम्राज्य]] (कच्छवाहा राजा, राजा [[राम सिंह प्रथम]] के नेतृत्व में), और [[आहोम साम्राज्य]] ([[लाचित बोड़फुकन]] के नेतृत्व में) के बीच [[ब्रह्मपुत्र नदी]] पर सराईघाट ([[गुवाहाटी]], [[असम]]) में लड़ा गया था। हालांकि कमजोर, अहोम सेना ने बेहतर [[रणनीति]] और [[मनोवैज्ञानिक युद्ध]] से मुगल सेना को हराया। सारिघाट की लड़ाई मुगलों द्वारा असम में अपने साम्राज्य का विस्तार करने के प्रयास में अंतिम लड़ाई थी।
भारतवर्ष का इतिहास लचित बरफूकन जैसे वीर सपूतों के शौर्य और वीरता का महा आख्यान है। प्रसिद्ध इतिहासकार सूर्यकुमार भुइयां ने उन्हें [[पूर्वोत्तर भारत]] का 'शिवाजी' माना है। बरफूकन ने पूर्वोत्तर भारत में वही स्वातंत्र्य-ज्वाला जलाई, जो मुगल आक्रांताओं के विरुद्ध दक्षिण भारत में छत्रपति शिवाजी महाराज ने, पंजाब में गुरु गोबिंद सिंह ने और राजपूताना में [[महाराणा प्रताप]] ने जलाई थी। इसी तथ्य को रेखांकित करते हुए पूर्व राज्यपाल श्रीनिवास कुमार सिन्हा ने अपनी पुस्तक 'मिशन असम' में लिखा है, <nowiki>''</nowiki>[[महाराष्ट्र]] और असम हमारे विशाल और महान देश के दो विपरीत छोर पर हो सकते हैं, लेकिन वे एक सामान्य इतिहास, एक साझी विरासत और एक सामान्य भावना से एकजुट होते हैं। मध्ययुगीन काल में उन्होंने दो महान सैन्य नेताओं, महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी और असम में लचित बरफूकन को जन्म दिया है।<nowiki>''</nowiki>
[[File:Victory Pillar, Battle of Saraighat in Sukreshwar park, Guwahati 06.jpg|left|thumb|]]
लचित बरफूकन का जन्म 24 नवंबर, 1622 को अहोम साम्राज्य के एक अधिकारी सेंग कालुक-मो-साई और माता कुंदी मराम के घर हुआ था। उनका पूरा नाम 'चाउ लाचित फुकनलुंग' था। लचित को अहोम साम्राज्य के राजा चक्रध्वज सिंह की शाही घुड़साल के अधीक्षक और महत्वपूर्ण सिमलूगढ़ किले के प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया। बहादुर और समझदार लचित जल्दी ही अहोम साम्राज्य के सेनापति बन गए। 'बरफूकन' लचित का नाम नहीं, बल्कि उनकी पदवी थी। पूर्वोत्तर भारत के हिंदू साम्राज्य अहोम की सेना की संरचना बहुत ही व्यवस्थित थी। एक 'डेका' 10 सैनिकों का, 'बोरा' 20 सैनिकों का, 'सैकिया' 100 सैनिकों का, 'हजारिका' 1,000 सैनिकों का और 'राजखोवा' 3,000 सैनिकों का जत्था होता था। इस प्रकार बरफूकन 6,000 सैनिकों का संचालन करता था। लचित बरफूकन इन सभी के प्रमुख थे। बरफूकन बनने के बाद लचित के सामने बहुत-सी चुनौतियां थीं। उनके सामने एक तरफ मुगलों की विशाल और संगठित सेना थी, दूसरी तरफ अहोम साम्राज्य की निराश और विखंडित सेना। प्रथम चार वर्ष में लचित ने अपना पूरा ध्यान अहोम सेना के नव-संगठन और अस्त्र-शस्त्रों को इकट्ठा करने में लगाया। इसके लिए उन्होंने नए सैनिकों की भर्ती की, जल सेना के लिए नौकाओं का निर्माण कराया, हथियारों की आपूर्ति, तोपों का निर्माण और किलों के लिए मजबूत रक्षा प्रबंधन इत्यादि का दायित्व अपने ऊपर लिया। उन्होंने यह सब इतनी चतुराई और समझदारी से किया कि इन सब तैयारियों की मुगलों को भनक तक नहीं लगने दी।
लचित की युद्ध-कला एवं दूरदर्शिता का दिग्दर्शन मात्र अंतिम युद्ध में ही नहीं हुआ, अपितु उन्होंने 1667 में गुवाहाटी के ईटाकुली किले को मुगलों से स्वतंत्र कराने में भी कुशल युद्धनीति का परिचय दिया। मुगलों ने फिरोज खान को फौजदार नियुक्त किया, जो बहुत ही भोग-विलासी व्यक्ति था। उसने चक्रध्वज सिंह को सीधे-सीधे असमिया हिंदू कन्याओं को भोग-विलास के लिए अपने पास भेजने का आदेश दिया। इससे लोगों में मुगलों के खिलाफ आक्रोश बढ़ने लगा। लचित ने लोगों के इस आक्रोश का सही प्रयोग करते हुए इसी समय गुवाहाटी के किले को मुगलों से छीनने का निर्णय लिया। लचित के पास एक शक्तिशाली और निपुण जल सेना के साथ समर्पित और दक्ष जासूसों का संजाल था। लचित ने योजना बनाई,जिसके अनुसार 10-12 सिपाहियों ने रात के अंधेरे का फायदा उठाते हुए चुपके से किले में प्रवेश कर लिया और मुगल सेना की तोपों में पानी डाल दिया। अगली सुबह ही लचित ने ईटाकुली किले पर आक्रमण कर उसे जीत लिया।
जब औरंगजेब को इस विजय के बारे में पता चला तब वह गुस्से से तिलमिला उठा। उसने मिर्जा राजा जयसिंह के बेटे रामसिंह को 70,000 सैनिकों की बड़ी सेना के साथ अहोम से लड़ने के लिए असम भेजा। उधर लचित ने बिना एक पल व्यर्थ किए किलों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां प्रारंभ कर दीं। लचित ने अपनी मौलिक युद्ध नीति के तहत रातोंरात अपनी सेना की सुरक्षा हेतु मिट्टी से मजबूत तटबंधों का निर्माण कराया। जिसका उत्तरदायित्व लचित ने अपने मामा को दिया था। उन्होंने इस निर्माण-कार्य में अपने मामा की लापरवाही को अक्षम्य मानकर उनका वध कर दिया और कहा, <nowiki>''</nowiki>मेरे मामा मेरी मातृभूमि से बढ़कर नहीं हो सकते।<nowiki>''</nowiki>
लचित जैसे योद्धा के रहते मुगल आक्रांता पूर्वोत्तर भारत को अपने अधीन नहीं कर सके। 1671 में सरायघाट, ब्रह्मपुत्र नदी में अहोम सेना और मुगलों के बीच ऐतिहासिक लड़ाई हुई। रामसिंह को अपने गुप्तचरों से पता चला कि अन्दुराबली के किनारे पर रक्षा इंतजामों को भेदा जा सकता है और गुवाहाटी को फिर से हथियाया जा सकता है। उसने इस अवसर का फायदा उठाने के उद्देश्य से मुगल नौसेना खड़ी कर दी। उसके पास 40 जहाज थे, जो 16 तोपों और छोटी नौकाओं को ले जाने में समर्थ थे। यह युद्ध उस यात्रा का चरमोत्कर्ष था, जो यात्रा आठ वर्ष पहले मीर जुमला के आक्रमण से आरंभ हुई थी। भारतवर्ष के इतिहास में कदाचित् यह पहला महत्वपूर्ण युद्ध था, जो पूर्णतया नदी में लड़ा गया तथा जिसमें लचित ने पानी में लड़ाई (नौसैनिक युद्ध) की सर्वथा नई तकनीक आजमाते हुए मुगलों को पराजित किया। ब्रह्मपुत्र नदी का सरायघाट इस ऐतिहासिक युद्ध का साक्षी बना। इस युद्ध में ब्रह्मपुत्र नदी में एक प्रकार का त्रिभुज बन गया था, जिसमें एक ओर कामख्या मंदिर, दूसरी ओर अश्वक्लान्ता का विष्णु मंदिर और तीसरी ओर ईटाकुली किले की दीवारें थीं। दुर्भाग्यवश लचित इस समय इतने अस्वस्थ हो गए कि उनका चलना-फिरना भी अत्यंत कठिन हो गया था, परंतु उन्होंने बीमार होते हुए भी भीषण युद्ध किया और अपनी असाधारण नेतृत्व क्षमता और अदम्य साहस से सरायघाट की प्रसिद्ध लड़ाई में लगभग 4,000 मुगल सैनिकों को मार गिराया।
इस युद्ध में अहोम सेना ने अनेक आधुनिक युक्तियों का उपयोग किया। यथा- पनगढ़ बनाने की युक्ति। युद्ध के दौरान ही बनाया गया नौका-पुल छोटे किले की तरह काम आया। अहोम की बच्छारिना (जो अपने आकार में मुगलों की नाव से छोटी थी) अत्यंत तीव्र और घातक सिद्ध हुई। इन सभी आधुनिक युक्तियों ने लचित की अहोम सेना को मुगल सेना से अधिक सबल और प्रभावी बना दिया। दो दिशाओं से हुए प्रहार से मुगल सेना में हड़कंप मच गया और सायंकाल तक उसके तीन अमीर और 4,000 सैनिक मारे गए। इसके बाद मुगल सेना मानस नदी के पार भाग खड़ी हुई। दुर्भाग्यवश इस युद्ध में घायल लचित ने कुछ दिन बाद प्राण त्याग दिए।
सरायघाट की इस अभूतपूर्व विजय ने असम के आर्थिक विकास और सांस्कृतिक समृद्धि की आधारशिला रखी। आगे चलकर असम में अनेक भव्य मंदिरों आदि का निर्माण हुआ। यदि सरायघाट के युद्ध में मुगलों की विजय होती, तो वह असमवासी हिंदुओं के लिए सांस्कृतिक विनाश और पराधीनता लेकर आती। मरणोपरांत भी लचित असम के लोगों और अहोम सेना के ह्रदय में अग्नि की ज्वाला बनकर धधकते रहे और उनके प्राणों का बलिदान व्यर्थ नहीं गया। लचित द्वारा संगठित सेना ने 1682 में मुगलों से एक और निर्णायक युद्ध लड़ा। इसमें उसने अपने ईटाकुली किले से मुगलों को खदेड़ दिया। इसके बाद मुगल फिर कभी असम की ओर नहीं आए।
लचित को सम्मान देने के लिए [[राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (भारत)|राष्ट्रीय रक्षा अकादमी]] के सर्वश्रेष्ठ कैडेट को 'लचित बरफूकन स्वर्ण पदक' से सम्मानित किया जाता है। बरफूकन की स्मृति को चिरस्थायित्व प्रदान करने के लिए हुलुन्गपारा में समाधि बनाई गई है।
==इन्हें भी देखें==
*[[लाचित बोड़फुकन|लाचित बरफुकन]]
[[श्रेणी:भारत का इतिहास]]
[[श्रेणी:आहोम साम्राज्य]]
[[श्रेणी:असम का इतिहास]]
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उत्तराखण्ड परिवहन निगम
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2026-10-17T16:43:12Z
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox
| title = उत्तराखंड परिवहन निगम
| sub-title = Uttarakhand Transport Corporation
| image =
| image2 = [[File:Lohaghat depo.jpg|280px|center|लोहाघाट डिपो में खड़ी निगम की एक बस]]
| label1 = स्थापना
| data1 = {{Start date and age|2003|10|30}}
| label2 = मुख्यालय
| data2 = [[देहरादून]], [[उत्तराखंड]], भारत
| label3 = संचालक
| data3 = उत्तराखंड परिवहन निगम
| label4 = सेवा क्षेत्र
| data4 = [[उत्तराखंड]], [[दिल्ली]], [[उत्तर प्रदेश]], [[हरियाणा]], [[पंजाब (भारत)|पंजाब]], [[राजस्थान]], [[हिमाचल प्रदेश]], [[जम्मू और कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश)|जम्मू और कश्मीर]], [[चंडीगढ़]]
| label5 = सेवा प्रकार
| data5 = सार्वजनिक बस परिवहन
| label6 = मार्गों की संख्या
| data6 = 400+
| label7 = डिपो
| data7 = 19
| label8 = बस बेड़ा
| data8 = 1,345+
| label9 = ईंधन प्रकार
| data9 = [[डीजल]], [[सीएनजी]]
| label10 = वेबसाइट
| data10 = {{URL|https://utconline.uk.gov.in/}}
}}
'''उत्तराखंड परिवहन निगम''' (UTC), जिसे आमतौर पर '''उत्तराखंड रोडवेज''' के नाम से जाना जाता है, उत्तराखंड सरकार का एक सार्वजनिक परिवहन उपक्रम है। यह राज्य के भीतर तथा अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए बस सेवाएँ संचालित करता है।
<br />
निगम की सेवाएँ उत्तराखंड के विभिन्न शहरों और कस्बों को आपस में जोड़ने के साथ-साथ '''हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान '''और''' मध्य प्रदेश''' जैसे राज्यों तक विस्तृत हैं। इसके अतिरिक्त, '''दिल्ली, चंडीगढ़''' और '''जम्मू-कश्मीर''' के लिए भी बस सेवाएँ संचालित की जाती हैं।
<br />
निगम का परिचालन नेटवर्क लगभग 3,87,000 किलोमीटर तक फैला हुआ है और यह प्रतिदिन 1,20,000 से अधिक यात्रियों को सेवाएँ प्रदान करता है।
<br />
निगम का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, सुलभ, किफायती और व्यवस्थित परिवहन सेवाएँ उपलब्ध कराना है, साथ ही अपनी सेवाओं के निरंतर विकास पर भी ध्यान देना है।
==इतिहास==
9 नवम्बर 2000 को उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद, राज्य में परिवहन व्यवस्था को बेहतर और व्यवस्थित बनाने के लिए '''उत्तराखंड परिवहन निगम (UTC)''' की स्थापना 30 अक्टूबर 2003 को देहरादून में की गई। यह निगम सड़क परिवहन अधिनियम, 1950 के तहत स्थापित एक स्वायत्त संस्था है।
स्थापना के समय, निगम को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) से 957 बसें, उनसे जुड़ी संपत्तियाँ और संचालन से संबंधित ढांचा प्राप्त हुआ। इसके बाद वर्ष 2004 में निगम ने अपने बेड़े में 480 नई बसें शामिल कीं, जिससे राज्य के भीतर और अन्य राज्यों के लिए बस सेवाओं में बढ़ोतरी हुई।
== प्रशासनिक ढांचा ==
उत्तराखंड परिवहन निगम का मुख्यालय '''देहरादून''' में स्थित है और इसके संचालन को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए निगम को तीन मंडलों - '''देहरादून, नैनीताल और टनकपुर''' '''-''' में विभाजित किया गया है, जहाँ प्रत्येक मंडल में एक क्षेत्रीय कार्यशाला (रीजनल वर्कशॉप) स्थापित है, जिसमें बसों की मरम्मत, रख-रखाव तथा आवश्यक तकनीकी कार्य किए जाते हैं।
== मण्डल एवं बस डिपो ==
'''उत्तराखण्ड परिवहन निगम''' का प्रशासनिक संचालन '''तीन प्रमुख मण्डलों''' के अंतर्गत किया जाता है:
# '''देहरादून मण्डल'''
# '''नैनीताल मण्डल'''
# '''टनकपुर मण्डल'''
{| class="wikitable"
|+ उत्तराखण्ड परिवहन निगम के मण्डल एवं अंतर्गत डिपो
! मण्डल !! अंतर्गत डिपो
|-
| '''टनकपुर मण्डल'''|| टनकपुर, लोहाघाट, पिथौरागढ़
|-
| '''नैनीताल मण्डल'''|| अल्मोड़ा, बागेश्वर, भवाली, हल्द्वानी, काठगोदाम, काशीपुर, रामनगर, रानीखेत, रुद्रपुर
|-
| '''देहरादून मण्डल'''|| देहरादून, देहरादून ग्रामीण, देहरादून पर्वतीय डिपो, हरिद्वार, कोटद्वार, ऋषिकेश, रुड़की, श्रीनगर
|}
== बस बेड़ा ==
उत्तराखंड परिवहन निगम (UTC) के पास वर्तमान में 1,345 से अधिक बसों का बेड़ा है, जिसमें 950 बसें निगम के स्वामित्व में हैं, जबकि शेष बसें अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के तहत संचालित की जाती हैं। इस बेड़े में वोल्वो, जनरथ (ए.सी.), सीएनजी, स्लीपर तथा विभिन्न प्रकार की डीज़ल बसें शामिल हैं।
निगम द्वारा संचालित बसों को निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
# '''वोल्वो बसें'''
# '''जनरथ (A.C.) बसें'''
# '''साधारण (Ordinary) बसें'''
# '''सीएनजी (CNG) बसें'''
# '''स्लीपर बसें''' '''(SLEEPER) बसें'''
# '''लो-फ़्लोर बसें''' — जिनका संचालन शहरी क्षेत्रों में '''जेएनएनयूआरएम (JNURM)''' योजना के अंतर्गत किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, निगम टेम्पो ट्रैवलर सेवाएँ भी संचालित करता है।
== बुकिंग सुविधाएँ ==
उत्तराखण्ड परिवहन निगम द्वारा यात्रियों की सुविधा हेतु टिकट बुकिंग एवं जानकारी प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं:
* '''ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल''' – निगम की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से टिकटों की अग्रिम बुकिंग की सुविधा।
* '''बुकिंग काउंटर''' – बस अड्डों एवं प्रमुख स्थानों पर स्थापित ऑफलाइन टिकट काउंटर।
* '''पाथिक मोबाइल ऐप''' – यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग और मार्ग जानकारी हेतु एक आधिकारिक मोबाइल अनुप्रयोग।
* '''अधिकृत एजेंट''' – निगम द्वारा अनुमोदित निजी एजेंसियाँ जो टिकट बुकिंग सेवाएँ प्रदान करती हैं।
* '''कॉमन सर्विस सेंटर (CSC)''' – सरकार द्वारा स्थापित केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में बुकिंग सुविधा।
== उत्तराखण्ड परिवहन निगम द्वारा प्राप्त पुरस्कार ==
उत्तराखण्ड परिवहन निगम को '''ASRTU (भारतीय राज्य परिवहन उपक्रम संघ)''' द्वारा अपनी उत्कृष्टता, सेवा सुधार और पर्वतीय क्षेत्रों में प्रभावी कार्यप्रणाली हेतु विभिन्न वर्षों में कई श्रेणियों में सम्मानित किया गया है। यह सम्मान निगम द्वारा '''निरंतर प्रदर्शन सुधार''', '''कम लागत पर सेवा प्रबंधन''', और '''सुरक्षित परिवहन व्यवस्था''' सुनिश्चित करने के लिए प्रदान किए गए।
{| class="wikitable"
|+ उत्तराखण्ड परिवहन निगम को प्राप्त पुरस्कार (ASRTU)
! वर्ष !! प्राप्त पुरस्कार / श्रेणियाँ
|-
| 2008–2009 ||
* पर्वतीय सेवाओं में उत्कृष्ट बस उत्पादकता
* पर्वतीय क्षेत्रों में बस उत्पादकता में सर्वश्रेष्ठ सुधार
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ डीज़ल माइलेज
* डीज़ल माइलेज में सर्वश्रेष्ठ सुधार
|-
| 2009–2010 ||
* पर्वतीय सेवाओं में उत्कृष्ट बस उत्पादकता
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ डीज़ल माइलेज
* न्यूनतम परिचालन लागत
|-
| 2010–2011 ||
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ डीज़ल माइलेज
* न्यूनतम परिचालन लागत
* न्यूनतम दुर्घटना दर
|-
| 2011–2012 ||
* पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा हेतु भारत सरकार द्वारा सम्मान
* कम दुर्घटनाएँ
* न्यूनतम संचालन लागत
|-
| 2012–2013 ||
* पर्वतीय मार्गों पर सर्वोत्तम उपयोग
* सर्वोत्तम डीज़ल उपयोग
* सर्वश्रेष्ठ डीज़ल माइलेज
|-
| 2013–2014 ||
* उत्कृष्ट बस उत्पादकता
* सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* श्रेष्ठ चालक-परिचालक व्यवहार
* श्रेष्ठ संचालन
|-
| 2014–2015 ||
* पर्वतीय मार्गों पर श्रेष्ठ संचालन
* पर्वतीय क्षेत्रों में टायर जीवन में सुधार
|-
| 2015–2016 ||
* बस उत्पादकता में सबसे अधिक वार्षिक सुधार
* सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* न्यूनतम संचालन लागत (कर सहित)
* डीज़ल माइलेज में सर्वाधिक सुधार
* श्रेष्ठ प्रदर्शन
* उच्चतम डीज़ल माइलेज
|-
| 2016–2017 ||
* पर्वतीय सेवाओं में उत्कृष्ट बस उत्पादकता
* पर्वतीय क्षेत्रों में श्रेष्ठ टायर जीवन
* न्यूनतम संचालन लागत
* पर्वतीय मार्गों पर न्यूनतम दुर्घटनाएँ
|-
| 2020–2021 ||
* पर्वतीय मार्गों पर न्यूनतम दुर्घटनाएँ
|}
== फोटो गैलरी ==
<gallery mode="packed" heights="200">
File:Pithoragarh_Pangla_Bus.jpg
File:Haldwani_Depot.jpg
File:Aerial_View_of_UTC_Bus – Pithoragarh_Depot.jpg
File:Hill_depo.jpg
File:Ranikhet_Depot.jpg
File:Pithoragarh_Munsiyari_Bus.jpg
File:Kotdwar_Depot.jpg
File:Bageshwar_Depot.jpg
File:DIDIHAT DELHI BUS.jpg
File:Dehradun_Depot.jpg
File:Lohaghat_depo.jpg
File:Bhowali_depot.jpg
File:Tanakpur_Depot.jpg
File:Ranikhet depot bus.jpg
File:UTC Sleeper bus.jpg
File:Utc ranikhet depo bus.jpg
File:UTC volvo bus.jpg
File:UTC mini.jpg
</gallery>
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://www.utconline.uk.gov.in/ उत्तराखण्ड परिवहन निगम – आधिकारिक वेबसाइट] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20250620093307/https://www.utconline.uk.gov.in/ |date=20 जून 2025 }}
* [https://asrtu.org/ भारतीय राज्य सड़क परिवहन उपक्रम संघ (ASRTU)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20250619012349/https://www.asrtu.org/ |date=19 जून 2025 }}
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2026-10-17T17:50:27Z
Anitya Gautam
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox
| title = उत्तराखंड परिवहन निगम
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}}
'''उत्तराखंड परिवहन निगम''' (UTC), जिसे आमतौर पर '''उत्तराखंड रोडवेज''' के नाम से जाना जाता है, उत्तराखंड सरकार का एक सार्वजनिक परिवहन उपक्रम है। यह राज्य के भीतर तथा अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए बस सेवाएँ संचालित करता है।<ref name="c800">{{cite web | title=परिवहन विभाग, उत्तराखंड | website=Transport Department | date=2025-01-20 | url=https://transport.uk.gov.in/hi/ | language=hi | access-date=2026-10-17}}</ref>
<br />
निगम की सेवाएँ उत्तराखंड के विभिन्न शहरों और कस्बों को आपस में जोड़ने के साथ-साथ '''हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान '''और''' मध्य प्रदेश''' जैसे राज्यों तक विस्तृत हैं। इसके अतिरिक्त, '''दिल्ली, चंडीगढ़''' और '''जम्मू-कश्मीर''' के लिए भी बस सेवाएँ संचालित की जाती हैं।
<br />
निगम का परिचालन नेटवर्क लगभग 3,87,000 किलोमीटर तक फैला हुआ है और यह प्रतिदिन 1,20,000 से अधिक यात्रियों को सेवाएँ प्रदान करता है।
<br />
निगम का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, सुलभ, किफायती और व्यवस्थित परिवहन सेवाएँ उपलब्ध कराना है, साथ ही अपनी सेवाओं के निरंतर विकास पर भी ध्यान देना है।
==इतिहास==
9 नवम्बर 2000 को उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद, राज्य में परिवहन व्यवस्था को बेहतर और व्यवस्थित बनाने के लिए '''उत्तराखंड परिवहन निगम (UTC)''' की स्थापना 30 अक्टूबर 2003 को देहरादून में की गई। यह निगम सड़क परिवहन अधिनियम, 1950 के तहत स्थापित एक स्वायत्त संस्था है।
स्थापना के समय, निगम को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) से 957 बसें, उनसे जुड़ी संपत्तियाँ और संचालन से संबंधित ढांचा प्राप्त हुआ। इसके बाद वर्ष 2004 में निगम ने अपने बेड़े में 480 नई बसें शामिल कीं, जिससे राज्य के भीतर और अन्य राज्यों के लिए बस सेवाओं में बढ़ोतरी हुई।
== प्रशासनिक ढांचा ==
उत्तराखंड परिवहन निगम का मुख्यालय '''देहरादून''' में स्थित है और इसके संचालन को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए निगम को तीन मंडलों - '''देहरादून, नैनीताल और टनकपुर''' '''-''' में विभाजित किया गया है, जहाँ प्रत्येक मंडल में एक क्षेत्रीय कार्यशाला (रीजनल वर्कशॉप) स्थापित है, जिसमें बसों की मरम्मत, रख-रखाव तथा आवश्यक तकनीकी कार्य किए जाते हैं।
== मण्डल एवं बस डिपो ==
'''उत्तराखण्ड परिवहन निगम''' का प्रशासनिक संचालन '''तीन प्रमुख मण्डलों''' के अंतर्गत किया जाता है:
# '''देहरादून मण्डल'''
# '''नैनीताल मण्डल'''
# '''टनकपुर मण्डल'''
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|+ उत्तराखण्ड परिवहन निगम के मण्डल एवं अंतर्गत डिपो
! मण्डल !! अंतर्गत डिपो
|-
| '''टनकपुर मण्डल'''|| टनकपुर, लोहाघाट, पिथौरागढ़
|-
| '''नैनीताल मण्डल'''|| अल्मोड़ा, बागेश्वर, भवाली, हल्द्वानी, काठगोदाम, काशीपुर, रामनगर, रानीखेत, रुद्रपुर
|-
| '''देहरादून मण्डल'''|| देहरादून, देहरादून ग्रामीण, देहरादून पर्वतीय डिपो, हरिद्वार, कोटद्वार, ऋषिकेश, रुड़की, श्रीनगर
|}
== बस बेड़ा ==
उत्तराखंड परिवहन निगम (UTC) के पास वर्तमान में 1,345 से अधिक बसों का बेड़ा है, जिसमें 950 बसें निगम के स्वामित्व में हैं, जबकि शेष बसें अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के तहत संचालित की जाती हैं। इस बेड़े में वोल्वो, जनरथ (ए.सी.), सीएनजी, स्लीपर तथा विभिन्न प्रकार की डीज़ल बसें शामिल हैं।
निगम द्वारा संचालित बसों को निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
# '''वोल्वो बसें'''
# '''जनरथ (A.C.) बसें'''
# '''साधारण (Ordinary) बसें'''
# '''सीएनजी (CNG) बसें'''
# '''स्लीपर बसें''' '''(SLEEPER) बसें'''
# '''लो-फ़्लोर बसें''' — जिनका संचालन शहरी क्षेत्रों में '''जेएनएनयूआरएम (JNURM)''' योजना के अंतर्गत किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, निगम टेम्पो ट्रैवलर सेवाएँ भी संचालित करता है।
== बुकिंग सुविधाएँ ==
उत्तराखण्ड परिवहन निगम द्वारा यात्रियों की सुविधा हेतु टिकट बुकिंग एवं जानकारी प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं:
* '''ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल''' – निगम की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से टिकटों की अग्रिम बुकिंग की सुविधा।
* '''बुकिंग काउंटर''' – बस अड्डों एवं प्रमुख स्थानों पर स्थापित ऑफलाइन टिकट काउंटर।
* '''पाथिक मोबाइल ऐप''' – यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग और मार्ग जानकारी हेतु एक आधिकारिक मोबाइल अनुप्रयोग।
* '''अधिकृत एजेंट''' – निगम द्वारा अनुमोदित निजी एजेंसियाँ जो टिकट बुकिंग सेवाएँ प्रदान करती हैं।
* '''कॉमन सर्विस सेंटर (CSC)''' – सरकार द्वारा स्थापित केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में बुकिंग सुविधा।
== उत्तराखण्ड परिवहन निगम द्वारा प्राप्त पुरस्कार ==
उत्तराखण्ड परिवहन निगम को '''ASRTU (भारतीय राज्य परिवहन उपक्रम संघ)''' द्वारा अपनी उत्कृष्टता, सेवा सुधार और पर्वतीय क्षेत्रों में प्रभावी कार्यप्रणाली हेतु विभिन्न वर्षों में कई श्रेणियों में सम्मानित किया गया है। यह सम्मान निगम द्वारा '''निरंतर प्रदर्शन सुधार''', '''कम लागत पर सेवा प्रबंधन''', और '''सुरक्षित परिवहन व्यवस्था''' सुनिश्चित करने के लिए प्रदान किए गए।
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|+ उत्तराखण्ड परिवहन निगम को प्राप्त पुरस्कार (ASRTU)
! वर्ष !! प्राप्त पुरस्कार / श्रेणियाँ
|-
| 2008–2009 ||
* पर्वतीय सेवाओं में उत्कृष्ट बस उत्पादकता
* पर्वतीय क्षेत्रों में बस उत्पादकता में सर्वश्रेष्ठ सुधार
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ डीज़ल माइलेज
* डीज़ल माइलेज में सर्वश्रेष्ठ सुधार
|-
| 2009–2010 ||
* पर्वतीय सेवाओं में उत्कृष्ट बस उत्पादकता
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ डीज़ल माइलेज
* न्यूनतम परिचालन लागत
|-
| 2010–2011 ||
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ डीज़ल माइलेज
* न्यूनतम परिचालन लागत
* न्यूनतम दुर्घटना दर
|-
| 2011–2012 ||
* पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा हेतु भारत सरकार द्वारा सम्मान
* कम दुर्घटनाएँ
* न्यूनतम संचालन लागत
|-
| 2012–2013 ||
* पर्वतीय मार्गों पर सर्वोत्तम उपयोग
* सर्वोत्तम डीज़ल उपयोग
* सर्वश्रेष्ठ डीज़ल माइलेज
|-
| 2013–2014 ||
* उत्कृष्ट बस उत्पादकता
* सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* श्रेष्ठ चालक-परिचालक व्यवहार
* श्रेष्ठ संचालन
|-
| 2014–2015 ||
* पर्वतीय मार्गों पर श्रेष्ठ संचालन
* पर्वतीय क्षेत्रों में टायर जीवन में सुधार
|-
| 2015–2016 ||
* बस उत्पादकता में सबसे अधिक वार्षिक सुधार
* सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* न्यूनतम संचालन लागत (कर सहित)
* डीज़ल माइलेज में सर्वाधिक सुधार
* श्रेष्ठ प्रदर्शन
* उच्चतम डीज़ल माइलेज
|-
| 2016–2017 ||
* पर्वतीय सेवाओं में उत्कृष्ट बस उत्पादकता
* पर्वतीय क्षेत्रों में श्रेष्ठ टायर जीवन
* न्यूनतम संचालन लागत
* पर्वतीय मार्गों पर न्यूनतम दुर्घटनाएँ
|-
| 2020–2021 ||
* पर्वतीय मार्गों पर न्यूनतम दुर्घटनाएँ
|}
== फोटो गैलरी ==
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File:Pithoragarh_Pangla_Bus.jpg
File:Haldwani_Depot.jpg
File:Aerial_View_of_UTC_Bus – Pithoragarh_Depot.jpg
File:Hill_depo.jpg
File:Ranikhet_Depot.jpg
File:Pithoragarh_Munsiyari_Bus.jpg
File:Kotdwar_Depot.jpg
File:Bageshwar_Depot.jpg
File:DIDIHAT DELHI BUS.jpg
File:Dehradun_Depot.jpg
File:Lohaghat_depo.jpg
File:Bhowali_depot.jpg
File:Tanakpur_Depot.jpg
File:Ranikhet depot bus.jpg
File:UTC Sleeper bus.jpg
File:Utc ranikhet depo bus.jpg
File:UTC volvo bus.jpg
File:UTC mini.jpg
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== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://www.utconline.uk.gov.in/ उत्तराखण्ड परिवहन निगम – आधिकारिक वेबसाइट] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20250620093307/https://www.utconline.uk.gov.in/ |date=20 जून 2025 }}
* [https://asrtu.org/ भारतीय राज्य सड़क परिवहन उपक्रम संघ (ASRTU)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20250619012349/https://www.asrtu.org/ |date=19 जून 2025 }}
==सन्दर्भ==
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2026-10-17T17:51:29Z
Anitya Gautam
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox
| title = उत्तराखंड परिवहन निगम
| sub-title = Uttarakhand Transport Corporation
| image =
| image2 = [[File:Lohaghat depo.jpg|280px|center|लोहाघाट डिपो में खड़ी निगम की एक बस]]
| label1 = स्थापना
| data1 = {{Start date and age|2003|10|30}}
| label2 = मुख्यालय
| data2 = [[देहरादून]], [[उत्तराखंड]], भारत
| label3 = संचालक
| data3 = उत्तराखंड परिवहन निगम
| label4 = सेवा क्षेत्र
| data4 = [[उत्तराखंड]], [[दिल्ली]], [[उत्तर प्रदेश]], [[हरियाणा]], [[पंजाब (भारत)|पंजाब]], [[राजस्थान]], [[हिमाचल प्रदेश]], [[जम्मू और कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश)|जम्मू और कश्मीर]], [[चंडीगढ़]]
| label5 = सेवा प्रकार
| data5 = सार्वजनिक बस परिवहन
| label6 = मार्गों की संख्या
| data6 = 400+
| label7 = डिपो
| data7 = 19
| label8 = बस बेड़ा
| data8 = 1,345+
| label9 = ईंधन प्रकार
| data9 = [[डीजल]], [[सीएनजी]]
| label10 = वेबसाइट
| data10 = {{URL|https://utconline.uk.gov.in/}}
}}
'''उत्तराखंड परिवहन निगम''' (UTC), जिसे आमतौर पर '''उत्तराखंड रोडवेज''' के नाम से जाना जाता है, उत्तराखंड सरकार का एक सार्वजनिक परिवहन उपक्रम है। यह राज्य के भीतर तथा अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए बस सेवाएँ संचालित करता है।<ref name="c800">{{cite web | title=परिवहन विभाग, उत्तराखंड | website=Transport Department | date=2025-01-20 | url=https://transport.uk.gov.in/hi/ | language=hi | access-date=2026-10-17}}</ref>
<br />
निगम की सेवाएँ उत्तराखंड के विभिन्न शहरों और कस्बों को आपस में जोड़ने के साथ-साथ '''हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान '''और''' मध्य प्रदेश''' जैसे राज्यों तक विस्तृत हैं। इसके अतिरिक्त, '''दिल्ली, चंडीगढ़''' और '''जम्मू-कश्मीर''' के लिए भी बस सेवाएँ संचालित की जाती हैं।
<br />
निगम का परिचालन नेटवर्क लगभग 3,87,000 किलोमीटर तक फैला हुआ है और यह प्रतिदिन 1,20,000 से अधिक यात्रियों को सेवाएँ प्रदान करता है।<ref name="i881">{{cite web | last=Sharma | first=Sapna | title=Uttarakhand Transport Corporation (UTC) ऑनलाइन बस टिकट बुकिंग, बस आरक्षण, समय सारणी, किराया | website=redBus | date=2026-10-13 | url=https://www.redbus.in/hi/online-booking/utc | language=hi | access-date=2026-10-17}}</ref>
<br />
निगम का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, सुलभ, किफायती और व्यवस्थित परिवहन सेवाएँ उपलब्ध कराना है, साथ ही अपनी सेवाओं के निरंतर विकास पर भी ध्यान देना है।
==इतिहास==
9 नवम्बर 2000 को उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद, राज्य में परिवहन व्यवस्था को बेहतर और व्यवस्थित बनाने के लिए '''उत्तराखंड परिवहन निगम (UTC)''' की स्थापना 30 अक्टूबर 2003 को देहरादून में की गई। यह निगम सड़क परिवहन अधिनियम, 1950 के तहत स्थापित एक स्वायत्त संस्था है।
स्थापना के समय, निगम को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) से 957 बसें, उनसे जुड़ी संपत्तियाँ और संचालन से संबंधित ढांचा प्राप्त हुआ। इसके बाद वर्ष 2004 में निगम ने अपने बेड़े में 480 नई बसें शामिल कीं, जिससे राज्य के भीतर और अन्य राज्यों के लिए बस सेवाओं में बढ़ोतरी हुई।
== प्रशासनिक ढांचा ==
उत्तराखंड परिवहन निगम का मुख्यालय '''देहरादून''' में स्थित है और इसके संचालन को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए निगम को तीन मंडलों - '''देहरादून, नैनीताल और टनकपुर''' '''-''' में विभाजित किया गया है, जहाँ प्रत्येक मंडल में एक क्षेत्रीय कार्यशाला (रीजनल वर्कशॉप) स्थापित है, जिसमें बसों की मरम्मत, रख-रखाव तथा आवश्यक तकनीकी कार्य किए जाते हैं।
== मण्डल एवं बस डिपो ==
'''उत्तराखण्ड परिवहन निगम''' का प्रशासनिक संचालन '''तीन प्रमुख मण्डलों''' के अंतर्गत किया जाता है:
# '''देहरादून मण्डल'''
# '''नैनीताल मण्डल'''
# '''टनकपुर मण्डल'''
{| class="wikitable"
|+ उत्तराखण्ड परिवहन निगम के मण्डल एवं अंतर्गत डिपो
! मण्डल !! अंतर्गत डिपो
|-
| '''टनकपुर मण्डल'''|| टनकपुर, लोहाघाट, पिथौरागढ़
|-
| '''नैनीताल मण्डल'''|| अल्मोड़ा, बागेश्वर, भवाली, हल्द्वानी, काठगोदाम, काशीपुर, रामनगर, रानीखेत, रुद्रपुर
|-
| '''देहरादून मण्डल'''|| देहरादून, देहरादून ग्रामीण, देहरादून पर्वतीय डिपो, हरिद्वार, कोटद्वार, ऋषिकेश, रुड़की, श्रीनगर
|}
== बस बेड़ा ==
उत्तराखंड परिवहन निगम (UTC) के पास वर्तमान में 1,345 से अधिक बसों का बेड़ा है, जिसमें 950 बसें निगम के स्वामित्व में हैं, जबकि शेष बसें अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के तहत संचालित की जाती हैं। इस बेड़े में वोल्वो, जनरथ (ए.सी.), सीएनजी, स्लीपर तथा विभिन्न प्रकार की डीज़ल बसें शामिल हैं।
निगम द्वारा संचालित बसों को निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
# '''वोल्वो बसें'''
# '''जनरथ (A.C.) बसें'''
# '''साधारण (Ordinary) बसें'''
# '''सीएनजी (CNG) बसें'''
# '''स्लीपर बसें''' '''(SLEEPER) बसें'''
# '''लो-फ़्लोर बसें''' — जिनका संचालन शहरी क्षेत्रों में '''जेएनएनयूआरएम (JNURM)''' योजना के अंतर्गत किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, निगम टेम्पो ट्रैवलर सेवाएँ भी संचालित करता है।
== बुकिंग सुविधाएँ ==
उत्तराखण्ड परिवहन निगम द्वारा यात्रियों की सुविधा हेतु टिकट बुकिंग एवं जानकारी प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं:
* '''ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल''' – निगम की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से टिकटों की अग्रिम बुकिंग की सुविधा।
* '''बुकिंग काउंटर''' – बस अड्डों एवं प्रमुख स्थानों पर स्थापित ऑफलाइन टिकट काउंटर।
* '''पाथिक मोबाइल ऐप''' – यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग और मार्ग जानकारी हेतु एक आधिकारिक मोबाइल अनुप्रयोग।
* '''अधिकृत एजेंट''' – निगम द्वारा अनुमोदित निजी एजेंसियाँ जो टिकट बुकिंग सेवाएँ प्रदान करती हैं।
* '''कॉमन सर्विस सेंटर (CSC)''' – सरकार द्वारा स्थापित केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में बुकिंग सुविधा।
== उत्तराखण्ड परिवहन निगम द्वारा प्राप्त पुरस्कार ==
उत्तराखण्ड परिवहन निगम को '''ASRTU (भारतीय राज्य परिवहन उपक्रम संघ)''' द्वारा अपनी उत्कृष्टता, सेवा सुधार और पर्वतीय क्षेत्रों में प्रभावी कार्यप्रणाली हेतु विभिन्न वर्षों में कई श्रेणियों में सम्मानित किया गया है। यह सम्मान निगम द्वारा '''निरंतर प्रदर्शन सुधार''', '''कम लागत पर सेवा प्रबंधन''', और '''सुरक्षित परिवहन व्यवस्था''' सुनिश्चित करने के लिए प्रदान किए गए।
{| class="wikitable"
|+ उत्तराखण्ड परिवहन निगम को प्राप्त पुरस्कार (ASRTU)
! वर्ष !! प्राप्त पुरस्कार / श्रेणियाँ
|-
| 2008–2009 ||
* पर्वतीय सेवाओं में उत्कृष्ट बस उत्पादकता
* पर्वतीय क्षेत्रों में बस उत्पादकता में सर्वश्रेष्ठ सुधार
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ डीज़ल माइलेज
* डीज़ल माइलेज में सर्वश्रेष्ठ सुधार
|-
| 2009–2010 ||
* पर्वतीय सेवाओं में उत्कृष्ट बस उत्पादकता
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ डीज़ल माइलेज
* न्यूनतम परिचालन लागत
|-
| 2010–2011 ||
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ डीज़ल माइलेज
* न्यूनतम परिचालन लागत
* न्यूनतम दुर्घटना दर
|-
| 2011–2012 ||
* पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा हेतु भारत सरकार द्वारा सम्मान
* कम दुर्घटनाएँ
* न्यूनतम संचालन लागत
|-
| 2012–2013 ||
* पर्वतीय मार्गों पर सर्वोत्तम उपयोग
* सर्वोत्तम डीज़ल उपयोग
* सर्वश्रेष्ठ डीज़ल माइलेज
|-
| 2013–2014 ||
* उत्कृष्ट बस उत्पादकता
* सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* श्रेष्ठ चालक-परिचालक व्यवहार
* श्रेष्ठ संचालन
|-
| 2014–2015 ||
* पर्वतीय मार्गों पर श्रेष्ठ संचालन
* पर्वतीय क्षेत्रों में टायर जीवन में सुधार
|-
| 2015–2016 ||
* बस उत्पादकता में सबसे अधिक वार्षिक सुधार
* सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* न्यूनतम संचालन लागत (कर सहित)
* डीज़ल माइलेज में सर्वाधिक सुधार
* श्रेष्ठ प्रदर्शन
* उच्चतम डीज़ल माइलेज
|-
| 2016–2017 ||
* पर्वतीय सेवाओं में उत्कृष्ट बस उत्पादकता
* पर्वतीय क्षेत्रों में श्रेष्ठ टायर जीवन
* न्यूनतम संचालन लागत
* पर्वतीय मार्गों पर न्यूनतम दुर्घटनाएँ
|-
| 2020–2021 ||
* पर्वतीय मार्गों पर न्यूनतम दुर्घटनाएँ
|}
== फोटो गैलरी ==
<gallery mode="packed" heights="200">
File:Pithoragarh_Pangla_Bus.jpg
File:Haldwani_Depot.jpg
File:Aerial_View_of_UTC_Bus – Pithoragarh_Depot.jpg
File:Hill_depo.jpg
File:Ranikhet_Depot.jpg
File:Pithoragarh_Munsiyari_Bus.jpg
File:Kotdwar_Depot.jpg
File:Bageshwar_Depot.jpg
File:DIDIHAT DELHI BUS.jpg
File:Dehradun_Depot.jpg
File:Lohaghat_depo.jpg
File:Bhowali_depot.jpg
File:Tanakpur_Depot.jpg
File:Ranikhet depot bus.jpg
File:UTC Sleeper bus.jpg
File:Utc ranikhet depo bus.jpg
File:UTC volvo bus.jpg
File:UTC mini.jpg
</gallery>
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://www.utconline.uk.gov.in/ उत्तराखण्ड परिवहन निगम – आधिकारिक वेबसाइट] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20250620093307/https://www.utconline.uk.gov.in/ |date=20 जून 2025 }}
* [https://asrtu.org/ भारतीय राज्य सड़क परिवहन उपक्रम संघ (ASRTU)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20250619012349/https://www.asrtu.org/ |date=19 जून 2025 }}
==सन्दर्भ==
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Anitya Gautam
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox
| title = उत्तराखंड परिवहन निगम
| sub-title = Uttarakhand Transport Corporation
| image =
| image2 = [[File:Lohaghat depo.jpg|280px|center|लोहाघाट डिपो में खड़ी निगम की एक बस]]
| label1 = स्थापना
| data1 = {{Start date and age|2003|10|30}}
| label2 = मुख्यालय
| data2 = [[देहरादून]], [[उत्तराखंड]], भारत
| label3 = संचालक
| data3 = उत्तराखंड परिवहन निगम
| label4 = सेवा क्षेत्र
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| label5 = सेवा प्रकार
| data5 = सार्वजनिक बस परिवहन
| label6 = मार्गों की संख्या
| data6 = 400+
| label7 = डिपो
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| label8 = बस बेड़ा
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| label9 = ईंधन प्रकार
| data9 = [[डीजल]], [[सीएनजी]]
| label10 = वेबसाइट
| data10 = {{URL|https://utconline.uk.gov.in/}}
}}
'''उत्तराखंड परिवहन निगम''' (UTC), जिसे आमतौर पर '''उत्तराखंड रोडवेज''' के नाम से जाना जाता है, उत्तराखंड सरकार का एक सार्वजनिक परिवहन उपक्रम है। यह राज्य के भीतर तथा अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए बस सेवाएँ संचालित करता है।<ref name="c800">{{cite web | title=परिवहन विभाग, उत्तराखंड | website=Transport Department | date=2025-01-20 | url=https://transport.uk.gov.in/hi/ | language=hi | access-date=2026-10-17}}</ref>
<br />
निगम की सेवाएँ उत्तराखंड के विभिन्न शहरों और कस्बों को आपस में जोड़ने के साथ-साथ '''हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान '''और''' मध्य प्रदेश''' जैसे राज्यों तक विस्तृत हैं। इसके अतिरिक्त, '''दिल्ली, चंडीगढ़''' और '''जम्मू-कश्मीर''' के लिए भी बस सेवाएँ संचालित की जाती हैं।
<br />
निगम का परिचालन नेटवर्क लगभग 3,87,000 किलोमीटर तक फैला हुआ है और यह प्रतिदिन 1,20,000 से अधिक यात्रियों को सेवाएँ प्रदान करता है।<ref name="i881">{{cite web | last=Sharma | first=Sapna | title=Uttarakhand Transport Corporation (UTC) ऑनलाइन बस टिकट बुकिंग, बस आरक्षण, समय सारणी, किराया | website=redBus | date=2026-10-13 | url=https://www.redbus.in/hi/online-booking/utc | language=hi | access-date=2026-10-17}}</ref>
<br />
निगम का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, सुलभ, किफायती और व्यवस्थित परिवहन सेवाएँ उपलब्ध कराना है, साथ ही अपनी सेवाओं के निरंतर विकास पर भी ध्यान देना है।
==इतिहास==
9 नवम्बर 2000 को उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद, राज्य में परिवहन व्यवस्था को बेहतर और व्यवस्थित बनाने के लिए '''उत्तराखंड परिवहन निगम (UTC)''' की स्थापना 30 अक्टूबर 2003 को देहरादून में की गई। यह निगम सड़क परिवहन अधिनियम, 1950 के तहत स्थापित एक स्वायत्त संस्था है।
स्थापना के समय, निगम को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) से 957 बसें, उनसे जुड़ी संपत्तियाँ और संचालन से संबंधित ढांचा प्राप्त हुआ। इसके बाद वर्ष 2004 में निगम ने अपने बेड़े में 480 नई बसें शामिल कीं, जिससे राज्य के भीतर और अन्य राज्यों के लिए बस सेवाओं में बढ़ोतरी हुई।
== प्रशासनिक ढांचा ==
उत्तराखंड परिवहन निगम का मुख्यालय '''देहरादून''' में स्थित है और इसके संचालन को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए निगम को तीन मंडलों - '''देहरादून, नैनीताल और टनकपुर''' '''-''' में विभाजित किया गया है, जहाँ प्रत्येक मंडल में एक क्षेत्रीय कार्यशाला (रीजनल वर्कशॉप) स्थापित है, जिसमें बसों की मरम्मत, रख-रखाव तथा आवश्यक तकनीकी कार्य किए जाते हैं।<ref name="b593">{{cite web | title=Google Books | website=Google | url=https://www.google.co.in/books/edition/Uttarakhand_Samanya_Gyan_General_Knowled/kg_xEQAAQBAJ?hl=hi&gbpv=1&dq=%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%96%E0%A4%82%E0%A4%A1+%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B9%E0%A4%A8+%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%97%E0%A4%AE&pg=SA12-PA10&printsec=frontcover | language=hi | access-date=2026-10-17}}</ref>
== मण्डल एवं बस डिपो ==
'''उत्तराखण्ड परिवहन निगम''' का प्रशासनिक संचालन '''तीन प्रमुख मण्डलों''' के अंतर्गत किया जाता है:
# '''देहरादून मण्डल'''
# '''नैनीताल मण्डल'''
# '''टनकपुर मण्डल'''
{| class="wikitable"
|+ उत्तराखण्ड परिवहन निगम के मण्डल एवं अंतर्गत डिपो
! मण्डल !! अंतर्गत डिपो
|-
| '''टनकपुर मण्डल'''|| टनकपुर, लोहाघाट, पिथौरागढ़
|-
| '''नैनीताल मण्डल'''|| अल्मोड़ा, बागेश्वर, भवाली, हल्द्वानी, काठगोदाम, काशीपुर, रामनगर, रानीखेत, रुद्रपुर
|-
| '''देहरादून मण्डल'''|| देहरादून, देहरादून ग्रामीण, देहरादून पर्वतीय डिपो, हरिद्वार, कोटद्वार, ऋषिकेश, रुड़की, श्रीनगर
|}
== बस बेड़ा ==
उत्तराखंड परिवहन निगम (UTC) के पास वर्तमान में 1,345 से अधिक बसों का बेड़ा है, जिसमें 950 बसें निगम के स्वामित्व में हैं, जबकि शेष बसें अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के तहत संचालित की जाती हैं। इस बेड़े में वोल्वो, जनरथ (ए.सी.), सीएनजी, स्लीपर तथा विभिन्न प्रकार की डीज़ल बसें शामिल हैं।
निगम द्वारा संचालित बसों को निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
# '''वोल्वो बसें'''
# '''जनरथ (A.C.) बसें'''
# '''साधारण (Ordinary) बसें'''
# '''सीएनजी (CNG) बसें'''
# '''स्लीपर बसें''' '''(SLEEPER) बसें'''
# '''लो-फ़्लोर बसें''' — जिनका संचालन शहरी क्षेत्रों में '''जेएनएनयूआरएम (JNURM)''' योजना के अंतर्गत किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, निगम टेम्पो ट्रैवलर सेवाएँ भी संचालित करता है।
== बुकिंग सुविधाएँ ==
उत्तराखण्ड परिवहन निगम द्वारा यात्रियों की सुविधा हेतु टिकट बुकिंग एवं जानकारी प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं:
* '''ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल''' – निगम की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से टिकटों की अग्रिम बुकिंग की सुविधा।
* '''बुकिंग काउंटर''' – बस अड्डों एवं प्रमुख स्थानों पर स्थापित ऑफलाइन टिकट काउंटर।
* '''पाथिक मोबाइल ऐप''' – यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग और मार्ग जानकारी हेतु एक आधिकारिक मोबाइल अनुप्रयोग।
* '''अधिकृत एजेंट''' – निगम द्वारा अनुमोदित निजी एजेंसियाँ जो टिकट बुकिंग सेवाएँ प्रदान करती हैं।
* '''कॉमन सर्विस सेंटर (CSC)''' – सरकार द्वारा स्थापित केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में बुकिंग सुविधा।
== उत्तराखण्ड परिवहन निगम द्वारा प्राप्त पुरस्कार ==
उत्तराखण्ड परिवहन निगम को '''ASRTU (भारतीय राज्य परिवहन उपक्रम संघ)''' द्वारा अपनी उत्कृष्टता, सेवा सुधार और पर्वतीय क्षेत्रों में प्रभावी कार्यप्रणाली हेतु विभिन्न वर्षों में कई श्रेणियों में सम्मानित किया गया है। यह सम्मान निगम द्वारा '''निरंतर प्रदर्शन सुधार''', '''कम लागत पर सेवा प्रबंधन''', और '''सुरक्षित परिवहन व्यवस्था''' सुनिश्चित करने के लिए प्रदान किए गए।
{| class="wikitable"
|+ उत्तराखण्ड परिवहन निगम को प्राप्त पुरस्कार (ASRTU)
! वर्ष !! प्राप्त पुरस्कार / श्रेणियाँ
|-
| 2008–2009 ||
* पर्वतीय सेवाओं में उत्कृष्ट बस उत्पादकता
* पर्वतीय क्षेत्रों में बस उत्पादकता में सर्वश्रेष्ठ सुधार
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ डीज़ल माइलेज
* डीज़ल माइलेज में सर्वश्रेष्ठ सुधार
|-
| 2009–2010 ||
* पर्वतीय सेवाओं में उत्कृष्ट बस उत्पादकता
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ डीज़ल माइलेज
* न्यूनतम परिचालन लागत
|-
| 2010–2011 ||
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ डीज़ल माइलेज
* न्यूनतम परिचालन लागत
* न्यूनतम दुर्घटना दर
|-
| 2011–2012 ||
* पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा हेतु भारत सरकार द्वारा सम्मान
* कम दुर्घटनाएँ
* न्यूनतम संचालन लागत
|-
| 2012–2013 ||
* पर्वतीय मार्गों पर सर्वोत्तम उपयोग
* सर्वोत्तम डीज़ल उपयोग
* सर्वश्रेष्ठ डीज़ल माइलेज
|-
| 2013–2014 ||
* उत्कृष्ट बस उत्पादकता
* सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* श्रेष्ठ चालक-परिचालक व्यवहार
* श्रेष्ठ संचालन
|-
| 2014–2015 ||
* पर्वतीय मार्गों पर श्रेष्ठ संचालन
* पर्वतीय क्षेत्रों में टायर जीवन में सुधार
|-
| 2015–2016 ||
* बस उत्पादकता में सबसे अधिक वार्षिक सुधार
* सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* न्यूनतम संचालन लागत (कर सहित)
* डीज़ल माइलेज में सर्वाधिक सुधार
* श्रेष्ठ प्रदर्शन
* उच्चतम डीज़ल माइलेज
|-
| 2016–2017 ||
* पर्वतीय सेवाओं में उत्कृष्ट बस उत्पादकता
* पर्वतीय क्षेत्रों में श्रेष्ठ टायर जीवन
* न्यूनतम संचालन लागत
* पर्वतीय मार्गों पर न्यूनतम दुर्घटनाएँ
|-
| 2020–2021 ||
* पर्वतीय मार्गों पर न्यूनतम दुर्घटनाएँ
|}
== फोटो गैलरी ==
<gallery mode="packed" heights="200">
File:Pithoragarh_Pangla_Bus.jpg
File:Haldwani_Depot.jpg
File:Aerial_View_of_UTC_Bus – Pithoragarh_Depot.jpg
File:Hill_depo.jpg
File:Ranikhet_Depot.jpg
File:Pithoragarh_Munsiyari_Bus.jpg
File:Kotdwar_Depot.jpg
File:Bageshwar_Depot.jpg
File:DIDIHAT DELHI BUS.jpg
File:Dehradun_Depot.jpg
File:Lohaghat_depo.jpg
File:Bhowali_depot.jpg
File:Tanakpur_Depot.jpg
File:Ranikhet depot bus.jpg
File:UTC Sleeper bus.jpg
File:Utc ranikhet depo bus.jpg
File:UTC volvo bus.jpg
File:UTC mini.jpg
</gallery>
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://www.utconline.uk.gov.in/ उत्तराखण्ड परिवहन निगम – आधिकारिक वेबसाइट] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20250620093307/https://www.utconline.uk.gov.in/ |date=20 जून 2025 }}
* [https://asrtu.org/ भारतीय राज्य सड़क परिवहन उपक्रम संघ (ASRTU)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20250619012349/https://www.asrtu.org/ |date=19 जून 2025 }}
==सन्दर्भ==
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6630510
2026-10-18T05:36:55Z
चाहर धर्मेंद्र
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox
| title = उत्तराखंड परिवहन निगम
| sub-title = Uttarakhand Transport Corporation
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| image2 = [[File:Lohaghat depo.jpg|280px|center|लोहाघाट डिपो में खड़ी निगम की एक बस]]
| label1 = स्थापना
| data1 = {{Start date and age|2003|10|30}}
| label2 = मुख्यालय
| data2 = [[देहरादून]], [[उत्तराखंड]], भारत
| label3 = संचालक
| data3 = उत्तराखंड परिवहन निगम
| label4 = सेवा क्षेत्र
| data4 = [[उत्तराखंड]], [[दिल्ली]], [[उत्तर प्रदेश]], [[हरियाणा]], [[पंजाब (भारत)|पंजाब]], [[राजस्थान]], [[हिमाचल प्रदेश]], [[जम्मू और कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश)|जम्मू और कश्मीर]], [[चंडीगढ़]]
| label5 = सेवा प्रकार
| data5 = सार्वजनिक बस परिवहन
| label6 = मार्गों की संख्या
| data6 = 400+
| label7 = डिपो
| data7 = 19
| label8 = बस बेड़ा
| data8 = 1,345+
| label9 = ईंधन प्रकार
| data9 = [[डीजल]], [[सीएनजी]]
| label10 = वेबसाइट
| data10 = {{URL|https://utconline.uk.gov.in/}}
}}
'''उत्तराखंड परिवहन निगम''' (UTC), जिसे आमतौर पर '''उत्तराखंड रोडवेज''' के नाम से जाना जाता है, उत्तराखंड सरकार का एक सार्वजनिक परिवहन उपक्रम है। यह राज्य के भीतर तथा अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए बस सेवाएँ संचालित करता है।<ref name="c800">{{cite web | title=परिवहन विभाग, उत्तराखंड | website=Transport Department | date=2025-01-20 | url=https://transport.uk.gov.in/hi/ | language=hi | access-date=2026-10-17}}</ref>
<br />
निगम की सेवाएँ उत्तराखंड के विभिन्न शहरों और कस्बों को आपस में जोड़ने के साथ-साथ '''हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान '''और''' मध्य प्रदेश''' जैसे राज्यों तक विस्तृत हैं। इसके अतिरिक्त, '''दिल्ली, चंडीगढ़''' और '''जम्मू-कश्मीर''' के लिए भी बस सेवाएँ संचालित की जाती हैं।
<br />
निगम का परिचालन नेटवर्क लगभग 3,87,000 किलोमीटर तक फैला हुआ है और यह प्रतिदिन 1,20,000 से अधिक यात्रियों को सेवाएँ प्रदान करता है।
<br />
निगम का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, सुलभ, किफायती और व्यवस्थित परिवहन सेवाएँ उपलब्ध कराना है, साथ ही अपनी सेवाओं के निरंतर विकास पर भी ध्यान देना है।
==इतिहास==
9 नवम्बर 2000 को उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद, राज्य में परिवहन व्यवस्था को बेहतर और व्यवस्थित बनाने के लिए '''उत्तराखंड परिवहन निगम (UTC)''' की स्थापना 30 अक्टूबर 2003 को देहरादून में की गई। यह निगम सड़क परिवहन अधिनियम, 1950 के तहत स्थापित एक स्वायत्त संस्था है।
स्थापना के समय, निगम को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) से 957 बसें, उनसे जुड़ी संपत्तियाँ और संचालन से संबंधित ढांचा प्राप्त हुआ। इसके बाद वर्ष 2004 में निगम ने अपने बेड़े में 480 नई बसें शामिल कीं, जिससे राज्य के भीतर और अन्य राज्यों के लिए बस सेवाओं में बढ़ोतरी हुई।
== प्रशासनिक ढांचा ==
उत्तराखंड परिवहन निगम का मुख्यालय '''देहरादून''' में स्थित है और इसके संचालन को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए निगम को तीन मंडलों - '''देहरादून, नैनीताल और टनकपुर''' '''-''' में विभाजित किया गया है, जहाँ प्रत्येक मंडल में एक क्षेत्रीय कार्यशाला (रीजनल वर्कशॉप) स्थापित है, जिसमें बसों की मरम्मत, रख-रखाव तथा आवश्यक तकनीकी कार्य किए जाते हैं।<ref name="b593">{{cite web | title=Google Books | website=Google | url=https://www.google.co.in/books/edition/Uttarakhand_Samanya_Gyan_General_Knowled/kg_xEQAAQBAJ?hl=hi&gbpv=1&dq=%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%96%E0%A4%82%E0%A4%A1+%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B9%E0%A4%A8+%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%97%E0%A4%AE&pg=SA12-PA10&printsec=frontcover | language=hi | access-date=2026-10-17}}</ref>
== मण्डल एवं बस डिपो ==
'''उत्तराखण्ड परिवहन निगम''' का प्रशासनिक संचालन '''तीन प्रमुख मण्डलों''' के अंतर्गत किया जाता है:
# '''देहरादून मण्डल'''
# '''नैनीताल मण्डल'''
# '''टनकपुर मण्डल'''
{| class="wikitable"
|+ उत्तराखण्ड परिवहन निगम के मण्डल एवं अंतर्गत डिपो
! मण्डल !! अंतर्गत डिपो
|-
| '''टनकपुर मण्डल'''|| टनकपुर, लोहाघाट, पिथौरागढ़
|-
| '''नैनीताल मण्डल'''|| अल्मोड़ा, बागेश्वर, भवाली, हल्द्वानी, काठगोदाम, काशीपुर, रामनगर, रानीखेत, रुद्रपुर
|-
| '''देहरादून मण्डल'''|| देहरादून, देहरादून ग्रामीण, देहरादून पर्वतीय डिपो, हरिद्वार, कोटद्वार, ऋषिकेश, रुड़की, श्रीनगर
|}
== बस बेड़ा ==
उत्तराखंड परिवहन निगम (UTC) के पास वर्तमान में 1,345 से अधिक बसों का बेड़ा है, जिसमें 950 बसें निगम के स्वामित्व में हैं, जबकि शेष बसें अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के तहत संचालित की जाती हैं। इस बेड़े में वोल्वो, जनरथ (ए.सी.), सीएनजी, स्लीपर तथा विभिन्न प्रकार की डीज़ल बसें शामिल हैं।
निगम द्वारा संचालित बसों को निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
# '''वोल्वो बसें'''
# '''जनरथ (A.C.) बसें'''
# '''साधारण (Ordinary) बसें'''
# '''सीएनजी (CNG) बसें'''
# '''स्लीपर बसें''' '''(SLEEPER) बसें'''
# '''लो-फ़्लोर बसें''' — जिनका संचालन शहरी क्षेत्रों में '''जेएनएनयूआरएम (JNURM)''' योजना के अंतर्गत किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, निगम टेम्पो ट्रैवलर सेवाएँ भी संचालित करता है।
== बुकिंग सुविधाएँ ==
उत्तराखण्ड परिवहन निगम द्वारा यात्रियों की सुविधा हेतु टिकट बुकिंग एवं जानकारी प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं:
* '''ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल''' – निगम की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से टिकटों की अग्रिम बुकिंग की सुविधा।
* '''बुकिंग काउंटर''' – बस अड्डों एवं प्रमुख स्थानों पर स्थापित ऑफलाइन टिकट काउंटर।
* '''पाथिक मोबाइल ऐप''' – यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग और मार्ग जानकारी हेतु एक आधिकारिक मोबाइल अनुप्रयोग।
* '''अधिकृत एजेंट''' – निगम द्वारा अनुमोदित निजी एजेंसियाँ जो टिकट बुकिंग सेवाएँ प्रदान करती हैं।
* '''कॉमन सर्विस सेंटर (CSC)''' – सरकार द्वारा स्थापित केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में बुकिंग सुविधा।
== उत्तराखण्ड परिवहन निगम द्वारा प्राप्त पुरस्कार ==
उत्तराखण्ड परिवहन निगम को '''ASRTU (भारतीय राज्य परिवहन उपक्रम संघ)''' द्वारा अपनी उत्कृष्टता, सेवा सुधार और पर्वतीय क्षेत्रों में प्रभावी कार्यप्रणाली हेतु विभिन्न वर्षों में कई श्रेणियों में सम्मानित किया गया है। यह सम्मान निगम द्वारा '''निरंतर प्रदर्शन सुधार''', '''कम लागत पर सेवा प्रबंधन''', और '''सुरक्षित परिवहन व्यवस्था''' सुनिश्चित करने के लिए प्रदान किए गए।
{| class="wikitable"
|+ उत्तराखण्ड परिवहन निगम को प्राप्त पुरस्कार (ASRTU)
! वर्ष !! प्राप्त पुरस्कार / श्रेणियाँ
|-
| 2008–2009 ||
* पर्वतीय सेवाओं में उत्कृष्ट बस उत्पादकता
* पर्वतीय क्षेत्रों में बस उत्पादकता में सर्वश्रेष्ठ सुधार
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ डीज़ल माइलेज
* डीज़ल माइलेज में सर्वश्रेष्ठ सुधार
|-
| 2009–2010 ||
* पर्वतीय सेवाओं में उत्कृष्ट बस उत्पादकता
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ डीज़ल माइलेज
* न्यूनतम परिचालन लागत
|-
| 2010–2011 ||
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* पर्वतीय क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ डीज़ल माइलेज
* न्यूनतम परिचालन लागत
* न्यूनतम दुर्घटना दर
|-
| 2011–2012 ||
* पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा हेतु भारत सरकार द्वारा सम्मान
* कम दुर्घटनाएँ
* न्यूनतम संचालन लागत
|-
| 2012–2013 ||
* पर्वतीय मार्गों पर सर्वोत्तम उपयोग
* सर्वोत्तम डीज़ल उपयोग
* सर्वश्रेष्ठ डीज़ल माइलेज
|-
| 2013–2014 ||
* उत्कृष्ट बस उत्पादकता
* सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* श्रेष्ठ चालक-परिचालक व्यवहार
* श्रेष्ठ संचालन
|-
| 2014–2015 ||
* पर्वतीय मार्गों पर श्रेष्ठ संचालन
* पर्वतीय क्षेत्रों में टायर जीवन में सुधार
|-
| 2015–2016 ||
* बस उत्पादकता में सबसे अधिक वार्षिक सुधार
* सर्वश्रेष्ठ टायर जीवन
* न्यूनतम संचालन लागत (कर सहित)
* डीज़ल माइलेज में सर्वाधिक सुधार
* श्रेष्ठ प्रदर्शन
* उच्चतम डीज़ल माइलेज
|-
| 2016–2017 ||
* पर्वतीय सेवाओं में उत्कृष्ट बस उत्पादकता
* पर्वतीय क्षेत्रों में श्रेष्ठ टायर जीवन
* न्यूनतम संचालन लागत
* पर्वतीय मार्गों पर न्यूनतम दुर्घटनाएँ
|-
| 2020–2021 ||
* पर्वतीय मार्गों पर न्यूनतम दुर्घटनाएँ
|}
== फोटो गैलरी ==
<gallery mode="packed" heights="200">
File:Pithoragarh_Pangla_Bus.jpg
File:Haldwani_Depot.jpg
File:Aerial_View_of_UTC_Bus – Pithoragarh_Depot.jpg
File:Hill_depo.jpg
File:Ranikhet_Depot.jpg
File:Pithoragarh_Munsiyari_Bus.jpg
File:Kotdwar_Depot.jpg
File:Bageshwar_Depot.jpg
File:DIDIHAT DELHI BUS.jpg
File:Dehradun_Depot.jpg
File:Lohaghat_depo.jpg
File:Bhowali_depot.jpg
File:Tanakpur_Depot.jpg
File:Ranikhet depot bus.jpg
File:UTC Sleeper bus.jpg
File:Utc ranikhet depo bus.jpg
File:UTC volvo bus.jpg
File:UTC mini.jpg
</gallery>
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://www.utconline.uk.gov.in/ उत्तराखण्ड परिवहन निगम – आधिकारिक वेबसाइट] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20250620093307/https://www.utconline.uk.gov.in/ |date=20 जून 2025 }}
* [https://asrtu.org/ भारतीय राज्य सड़क परिवहन उपक्रम संघ (ASRTU)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20250619012349/https://www.asrtu.org/ |date=19 जून 2025 }}
==सन्दर्भ==
j8p46lj69wb7405o5mlfhhys0glt9ik
साहो
0
831244
6630566
6303590
2026-10-18T02:54:05Z
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500600
Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.6
6630566
wikitext
text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक फ़िल्म
| name = साहो<br/>Saaho
| image = Saaho poster.jpg
| caption = थियेट्रिकल रिलीज पोस्टर
| director = [[सुजीत]]
| producer = {{unbulleted list|वामसी कृष्ण रेड्डी|प्रमोद उप्पलपति|[[भूषण कुमार]]}}
| writer = {{unbulleted list|सुजीत|<small>(कहानी, पटकथा और तेलुगु संवाद)</small>|के.जी.आर अशोक|<small>(तमिल संवाद)</small>|अब्बास दलाल|[[हुसैन दलाल]]|<small>(हिन्दी संवाद)}}</small>
| starring = {{unbulleted list|[[प्रभास]]|[[श्रद्धा कपूर]]}}
| music = {{unbulleted list|'''गीत:'''|[[तनिष्क बागची]]|[[गुरु रंधावा]]|[[बादशाह (गायक)|बादशाह]]|[[शंकर-एहसान-लॉय]]|'''स्कोर:'''|[[घिबरन]]<ref name="Ghibran">{{cite web|url=https://www.firstpost.com/entertainment/saaho-ghibran-replaces-shankar-ehsaan-loy-in-prabhas-magnum-opus-will-do-background-score-for-film-6714601.html/amp|title=Saaho: Ghibran replaces Shankar-Ehsaan-Loy in Prabhas’ magnum opus, will do background score for film|website=First Post|access-date=24 जून 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190604005947/https://www.firstpost.com/entertainment/saaho-ghibran-replaces-shankar-ehsaan-loy-in-prabhas-magnum-opus-will-do-background-score-for-film-6714601.html/amp|archive-date=4 जून 2019|url-status=dead}}</ref>}}
| cinematography = [[आर. माधी]]
| editing = [[ए. श्रीकर प्रसाद]]
| studio = {{unbulleted list|[[यूवी क्रिएशन्स]]|[[टी-सीरीज़]]}}
| distributor = [[एए फिल्म्स]] (भारत)<br>[[यश राज फ़िल्म्स]]<br>फ़ार्स फ़िल्म (अंतरराष्ट्रीय)<ref>{{cite web|url=https://twitter.com/yrf/status/1167355887876550661|title=A Yash Raj Films International Release in collaboration with Phars Film.|publisher=[[Yash Raj Films]]|accessdate=30 August 2019}}</ref>
| released = {{Film date|df=yes|2019|08|30|ref1=<ref name="toprd">{{cite web|url=https://www.ndtv.com/entertainment/prabhas-and-shraddha-kapoors-saaho-gets-a-new-release-date-reports-2071103|title=Prabhas And Shraddha Kapoor's Saaho Gets A New Release Date|date=17 July 2019|website=NDTV|access-date=26 जुलाई 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190726040548/https://www.ndtv.com/entertainment/prabhas-and-shraddha-kapoors-saaho-gets-a-new-release-date-reports-2071103|archive-date=26 जुलाई 2019|url-status=live}}</ref>}}
| runtime = 170 मिनट<ref>{{cite web | url=https://bbfc.co.uk/releases/saaho-2019 | title=Saaho (2019) | website=[[ब्रिटिश बोर्ड ऑफ़ फ़िल्म क्लासिफिकेशन]] | accessdate=29 August 2019 | archive-url=https://web.archive.org/web/20190829132536/https://bbfc.co.uk/releases/saaho-2019 | archive-date=29 अगस्त 2019 | url-status=dead }}</ref>
| country = भारत
| language = {{unbulleted list|हिन्दी|तमिल|तेलुगु}}<!--Language should not be linked per Template documentation-->
| budget = {{INR}}301 करोड़
(US $ 41.2 Million)<ref name="Budget">{{cite AV media|people=Prabha and Shraddha Kapoor with Anupama Chopra|url=https://www.youtube.com/watch?v=fRofXR5NrFo&t=13m58s|title=Saaho Interview – Film Companion|date=11 August 2019|accessdate=11 August 2019|quote=[[YouTube]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20190812132528/https://www.youtube.com/watch?v=fRofXR5NrFo|archive-date=12 अगस्त 2019|url-status=live}}</ref>
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(US $ 72.3 Million) <ref name="bo2">{{cite news |last1=Hooli |first1=Shekhar H. |title=Saaho 14-day total box office collection: Prabhas-Shraddha film sees 85% drop in week 2 |url=https://www.ibtimes.co.in/saaho-14-day-total-box-office-collection-prabhas-shraddha-film-sees-huge-drop-week-2-805365 |accessdate=14 September 2019 |work=International Business Times, India Edition |date=13 September 2019 |language=english |archive-url=https://web.archive.org/web/20190922195313/https://www.ibtimes.co.in/saaho-14-day-total-box-office-collection-prabhas-shraddha-film-sees-huge-drop-week-2-805365 |archive-date=22 सितंबर 2019 |url-status=live }}</ref>
}}
'''''साहो''''' ({{trans|May victory be yours}}) एक 2019 भारतीय एक्शन थ्रिलर फिल्म है, जिसे [[सुजीत]] द्वारा लिखित और निर्देशित किया गया है। इसका निर्माण वामसी कृष्ण रेड्डी, प्रमोद उप्पलपति और [[भूषण कुमार]] ने [[यूवी क्रिएशन्स]] और [[टी-सीरीज़]] के अपने संबंधित बैनर के तहत किया था।<ref>{{Cite news|url=https://www.deccanchronicle.com/entertainment/bollywood/170418/t-series-to-bring-prabhas-Shraddha-kapoor-starrer-saaho-to-the-hindi-m.html|title="Saaho: T-Series to bring Prabhas-Shraddha Kapoor starrer to the Hindi market"|date=5 September 2017|work=Deccan Chronicle|access-date=5 September 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20180625081354/https://www.deccanchronicle.com/entertainment/bollywood/170418/t-series-to-bring-prabhas-shraddha-kapoor-starrer-saaho-to-the-hindi-m.html|archive-date=25 जून 2018|url-status=live}}</ref><ref>{{cite news |title='Saaho will be narrated from Shraddha Kapoor's point of view': Prabhas |url=https://www.thenewsminute.com/article/saaho-will-be-narrated-shraddha-kapoors-point-view-prabhas-81917 |work=[[द न्यूज़ मिनट]] |date=25 May 2018 |access-date=3 अगस्त 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181219001126/https://www.thenewsminute.com/article/saaho-will-be-narrated-shraddha-kapoors-point-view-prabhas-81917 |archive-date=19 दिसंबर 2018 |url-status=dead }}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/regional-movies/did-bhushan-kumar-s-t-series-pick-prabhas-saaho-for-rs-120-crore/story-t9r0SLZU7WQnypO1YicvPM.html|title=T Series pick Prabhas’ Saaho|website=Hindustan Times|date=18 April 2018|language=en|access-date=23 June 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190623194756/https://www.hindustantimes.com/regional-movies/did-bhushan-kumar-s-t-series-pick-prabhas-saaho-for-rs-120-crore/story-t9r0SLZU7WQnypO1YicvPM.html|archive-date=23 जून 2019|url-status=live}}</ref> रेड चिलीज वीएफएक्स, मकुता वीएफएक्स और यूनाइटेड सॉफ्ट वीएफएक्स द्वारा विजुअल इफेक्ट्स [[हिन्दी]], [[तमिल भाषा|तमिल]] और [[तेलुगू भाषा|तेलुगू]] में एक साथ फिल्माए गए, इसमें [[प्रभास]] और [[श्रद्धा कपूर]] शामिल हैं । यह फिल्म एक शक्ति के संघर्ष में फंसे एक विशाल आपराधिक सिंडिकेट का अनुसरण करती है, जो उनके नेता की मृत्यु के बाद होता है, जबकि सभी खुफिया एजेंसियां अपने लाभ के लिए उन्हें एक बार और सभी के लिए नीचे ले जाती हैं। '''"साहो" बॉक्स-ऑफिस पर सुपरहिट (SUPER HIT) रही , तथा 2019 की सबसे अधिक कमाई करने वाली भारतीय फिल्म बन गई।'''
''साहो'' के लिए [[फोटोग्राफी|प्रमुख फोटोग्राफी]] अगस्त 2017 में शुरू हुई। भारत, संयुक्त अरब अमीरात, रोमानिया और ऑस्ट्रिया में फिल्मांकन हुआ और [[आईमैक्स]] कैमरों के साथ किया गया।<ref>{{cite web|url=https://www.mid-day.com/articles/saaho-director-only-fair-that-we-shoot-biggest-actioner-in-imax/21508166|title=Saaho director: Only fair that we shoot biggest actioner in IMAX|publisher=[[मिड डे]]|access-date=30 सितंबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191012112820/https://www.mid-day.com/articles/saaho-director-only-fair-that-we-shoot-biggest-actioner-in-imax/21508166|archive-date=12 अक्तूबर 2019|url-status=live}}</ref>
{{INR|link=yes}}301 [[अंक|करोड़]] के बजट पर निर्मित, यह अब तक की [[सबसे महंगी भारतीय फिल्मों की सूची|सबसे महंगी भारतीय फिल्मों]] में से एक है।
इस फिल्म ने कुल '''₹ 504.23 करोड़''' की कमाई की , और '''सुपरहिट''' रही , तथा '''''2019 में सबसे जादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म''''' बन गई । '''दूसरे स्थान पर [[वॉर (फ़िल्म)|वाॅर]] फिल्म है ।'''
फिल्म का साउंडट्रैक [[टी-सीरीज़]] के बैनर तले रिलीज किया गया था।
''साहो'' भारत में 30 अगस्त 2019 को सिनेमाघरों और [[आईमैक्स]] में रिलीज़ हुई थी।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/tamil/movies/news/saaho-to-be-released-in-imax-format/articleshow/70467406.cms|title=Saaho to be released in IMAX format|publisher=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]]|access-date=9 अगस्त 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190805111206/https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/tamil/movies/news/saaho-to-be-released-in-imax-format/articleshow/70467406.cms|archive-date=5 अगस्त 2019|url-status=live}}</ref>
==कलाकार==
{{colbegin}}मुख्य कलाकार [[चिंटू सवारिया]]
* [[प्रभास]] अशोक चक्रवर्ती/सिद्धान्त नंदन साहो के रूप में
* [[श्रद्धा कपूर]] अमृता नायर के रूप में
* [[जैकी श्रॉफ]] नरान्तक रॉय के रूप में
* [[नील नितिन मुकेश]] जय/अशोक चक्रवर्ती के रूप में
* [[अरुण विजय]] विश्वांक रॉय के रूप में
* [[चंकी पांडे]] देवराज के रूप में
* [[वेन्नेला किशोर|वेनेला किशोर]] गोस्वामी के रूप में
* [[मुरली शर्मा]] डेविड के रूप में
* [[लाल (अभिनेता)|लाल]] इब्राहिम के रूप में
* [[सुप्रीत]] एलेक्स के रूप में
* [[तनिकेला भरणी]] तेलंगाना के सीएम रामास्वामी अल्लागड्डा के रूप में
* [[मंदिरा बेदी]] कल्कि के रूप में
* [[प्रकाश बेलवाड़ी]] शिंदे के रूप में
* [[एवलिन शर्मा]] आइशा/जेनिफर के रूप में
* [[महेश मांजरेकर]] प्रिंस के रूप में
* [[टीनू आनंद]] पृथ्वी राज के रूप में
* [[रवि वर्मा (अभिनेता)|रवि वर्मा]] अजय के रूप में
* साशा छेत्री
* गिरीश गरलाडिने
* दामिनी चोपड़ा<ref>{{cite news |title=Saaho actress Damini Chopra's gorgeous looks |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/gorgeous-alert-saaho-debutante-damini-chopra-is-a-dazzling-bombshell-on-instagram/photostory/68080477.cms |accessdate=20 February 2019 |work=Times of India |date=20 February 2019 |language=english |archive-url=https://web.archive.org/web/20190918003038/https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/gorgeous-alert-saaho-debutante-damini-chopra-is-a-dazzling-bombshell-on-instagram/photostory/68080477.cms |archive-date=18 सितंबर 2019 |url-status=live }}</ref>
* कुमार राजा वेंती
* नवीन वर्मा गणपतिराजू
* [[जैकलीन फर्नांडीज]] ("बैड बॉय" गीत में विशेष उपस्थिति)<ref>{{cite news|title=Jacqueline and Prabhas sizzle in Saaho’s Bad Boy|url=https://m.timesofindia.com/entertainment/hindi/bollywood/news/jacqueline-and-prabhas-sizzle-in-saahos-bad-boy/articleshow/70723531.cms|accessdate=19 August 2019|work=Times of India|date=19 August 2019|language=english|archive-url=https://web.archive.org/web/20190819082730/https://m.timesofindia.com/entertainment/hindi/bollywood/news/jacqueline-and-prabhas-sizzle-in-saahos-bad-boy/articleshow/70723531.cms|archive-date=19 अगस्त 2019|url-status=live}}</ref>
{{colend}}
==उत्पादन==
फिल्म {{INR}}300 करोड़ के बजट पर बनी है।<ref name="Budget"></ref> फिल्म की शूटिंग [[ऑस्ट्रिया]], [[हैदराबाद]], [[मुम्बई|मुंबई]], [[अबू धाबी]], [[दुबई]], [[रोमानिया]] और [[यूरोप]] के अन्य हिस्सों में की गई थी।<ref>{{Cite web|url=https://e.telugurajyam.com/team-saaho-lands-in-austria-for-crucial-scenes/|title=Team Saaho lands in Austria for crucial scenes|date=2019-06-17|website=telugurajyam|language=en-US|access-date=2019-06-23|archive-url=https://web.archive.org/web/20190623203424/https://e.telugurajyam.com/team-saaho-lands-in-austria-for-crucial-scenes/|archive-date=23 जून 2019|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/saaho-prabhas-and-shraddha-kapoor-chill-in-austria-after-shoot-see-viral-pics-1555557-2019-06-25|title=Saaho: Prabhas and Shraddha Kapoor chill in Austria after shoot. See viral pics|last=ChennaiJune 25|first=India Today Web Desk|last2=June 25|first2=2019UPDATED:|website=India Today|language=en|access-date=2019-07-05|last3=Ist|first3=2019 10:00|archive-url=https://web.archive.org/web/20190705121557/https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/saaho-prabhas-and-shraddha-kapoor-chill-in-austria-after-shoot-see-viral-pics-1555557-2019-06-25|archive-date=5 जुलाई 2019|url-status=live}}</ref> प्रधान फोटोग्राफी अगस्त 2017 में शुरू हुई। [[अरुण विजय]], [[जैकी श्रॉफ]], [[लाल (अभिनेता)|लाल]], [[नील नितिन मुकेश]] और [[मंदिरा बेदी]] को , [[प्रभास]] और [[श्रद्धा कपूर]] की जोड़ी के साथ अनुबंधित किया गया था। फिल्म में एक्शन दृश्यों की शूटिंग के लिए बजट का एक बड़ा हिस्सा खर्च किया गया था। अंतर्राष्ट्रीय स्टंट कोरियोग्राफर, केनी बेट्स को एक्शन दृश्यों को कोरियोग्राफ करने के लिए अनुबंधित किया गया था।<ref>{{cite web|url=http://www.news18.com/news/movies/saaho-prabhas-begins-shooting-for-the-film-joins-the-cast-on-set-1495069.html|title=Saaho: Prabhas Begins Shooting For The Film; Joins The Cast On Set|publisher=|access-date=9 अगस्त 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190809140953/https://www.news18.com/news/movies/saaho-prabhas-begins-shooting-for-the-film-joins-the-cast-on-set-1495069.html|archive-date=9 अगस्त 2019|url-status=live}}</ref>
फिल्म का पहला शेड्यूल, जो [[हैदराबाद]] में था, अक्टूबर 2017 तक पूरा हो गया।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/saaho-finishes-first-schedule-of-shooting-in-hyderabad/articleshow/61055159.cms|title='Saaho' finishes first schedule of shooting in Hyderabad - Times of India|publisher=|access-date=9 अगस्त 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190829142407/https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/saaho-finishes-first-schedule-of-shooting-in-hyderabad/articleshow/61055159.cms|archive-date=29 अगस्त 2019|url-status=live}}</ref> फिल्म का दूसरा शेड्यूल दिसंबर 2017 में [[रामोजी फिल्म सिटी]] में शुरू हुआ। फिल्म के निर्माताओं के अनुसार, श्रद्धा कपूर ने भारी हथियार के साथ फिल्म में एक्शन दृश्यों की शूटिंग की थी।<ref name="ndtv.com">{{cite web|url=https://www.ndtv.com/entertainment/prabhas-saaho-shraddha-kapoor-begins-second-schedule-details-here-1792242|title=Prabhas' Saaho: Shraddha Kapoor Begins Second Schedule. Details Here|publisher=|access-date=9 अगस्त 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190809181705/https://www.ndtv.com/entertainment/prabhas-saaho-shraddha-kapoor-begins-second-schedule-details-here-1792242|archive-date=9 अगस्त 2019|url-status=live}}</ref> कुछ दिनों के बाद, वे एक महीने के लिए [[दुबई]] में शिफ्ट हो गए जहां कुछ प्रमुख एक्शन दृश्यों को प्रभास और नील नितिन मुकेश के साथ शूट किया गया, जबकि श्रद्धा कपूर अपने अगले उद्यम, [[स्त्री (2018 फ़िल्म)|स्त्री]] में चली गईं।<ref name="indiatimes.com">{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/saaho-to-kick-start-its-new-schedule-from-tomorrow-in-hyderabad/articleshow/62417641.cms|title='Saaho’ to kick-start its new schedule from tomorrow in Hyderabad - Times of India|publisher=|access-date=9 अगस्त 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190829142404/https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/saaho-to-kick-start-its-new-schedule-from-tomorrow-in-hyderabad/articleshow/62417641.cms|archive-date=29 अगस्त 2019|url-status=live}}</ref> [[हैदराबाद]], [[मुम्बई|मुंबई]] और [[दुबई]] में फिल्म की आधी शूटिंग के बाद, साहो के कलाकारों और चालक दल ने फरवरी 2018 में [[अबू धाबी]] में फिल्म की चौथी शेड्यूल के साथ शुरू किया और कुछ ही हफ्तों में समाप्त हो गया। फिल्म का पांचवा शेड्यूल, [[अबू धाबी]] में भी, फरवरी के अंत में शुरू हुआ। फिल्म का छठा शेड्यूल मार्च के मध्य में [[दुबई]] और [[रोमानिया]] में शुरू हुआ। फिल्म के अंतिम चरण और रोमांटिक गाने [[इंसब्रुक]] और [[ऑस्ट्रिया]] के [[टिरोल]] क्षेत्र में फिल्माए गए थे।<ref name="auto">[http://www.india.com/showbiz/not-just-shraddha-kapoor-rajinikanths-2-0-heroine-amy-jackson-will-also-be-part-of-prabhas-saaho-2909018/] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20180222230241/http://www.india.com/showbiz/not-just-shraddha-kapoor-rajinikanths-2-0-heroine-amy-jackson-will-also-be-part-of-prabhas-saaho-2909018/|date=22 February 2018}} India.com</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/regional-movies/saaho-prabhas-shraddha-kapoor-and-film-s-crew-enjoy-an-adventurous-cable-ride-in-austria/story-ABXCFCUNVxZezxLW8KRKkN.html|title=Saaho: Prabhas, Shraddha Kapoor and film’s crew enjoy an ‘adventurous’ cable ride in Austria|last=|first=|date=2019-06-21|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20190811023825/https://www.hindustantimes.com/regional-movies/saaho-prabhas-shraddha-kapoor-and-film-s-crew-enjoy-an-adventurous-cable-ride-in-austria/story-ABXCFCUNVxZezxLW8KRKkN.html|archive-date=11 अगस्त 2019|dead-url=|access-date=2019-06-23|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.pinkvilla.com/entertainment/exclusives/exclusive-prabhas-and-shraddha-kapoor-head-austria-shoot-romantic-song-saaho-455208|title=EXCLUSIVE: Prabhas and Shraddha Kapoor head to Austria to shoot a romantic song for Saaho|website=PINKVILLA|language=en|access-date=2019-06-23|archive-url=https://web.archive.org/web/20190623194809/http://www.pinkvilla.com/entertainment/exclusives/exclusive-prabhas-and-shraddha-kapoor-head-austria-shoot-romantic-song-saaho-455208|archive-date=23 जून 2019|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/news/movies/prabhas-shares-behind-the-scenes-pic-from-austrian-sets-of-saaho-for-his-darling-fans-2214777.html|title=Prabhas Shares Behind the Scenes Pic From Austrian Sets of Saaho for His Darling Fans|website=News18|access-date=2019-07-05|archive-url=https://web.archive.org/web/20190705121211/https://www.news18.com/news/movies/prabhas-shares-behind-the-scenes-pic-from-austrian-sets-of-saaho-for-his-darling-fans-2214777.html|archive-date=5 जुलाई 2019|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/saaho-prabhas-sets-internet-on-fire-with-a-pic-from-austria/articleshow/70050805.cms|title=Saaho: Prabhas sets internet on fire with a pic from Austria - Times of India|website=The Times of India|language=en|access-date=2019-07-05|archive-url=https://web.archive.org/web/20190707165036/https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/saaho-prabhas-sets-internet-on-fire-with-a-pic-from-austria/articleshow/70050805.cms|archive-date=7 जुलाई 2019|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/saaho-update-prabhas-and-shraddha-kapoor-jet-off-to-austria-to-shoot-romantic-song-1546583-2019-06-11|title=Saaho update: Prabhas and Shraddha Kapoor jet off to Austria to shoot romantic song|last=ChennaiJune 11|first=India Today Web Desk|last2=June 11|first2=2019UPDATED:|website=India Today|language=en|access-date=2019-06-23|last3=Ist|first3=2019 15:44|archive-url=https://web.archive.org/web/20190623194757/https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/saaho-update-prabhas-and-shraddha-kapoor-jet-off-to-austria-to-shoot-romantic-song-1546583-2019-06-11|archive-date=23 जून 2019|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.ntvtelugu.com/post/saaho-in-innsbruck|title=Saaho in Innsbruck|last=Codingest|website=NTV Telugu|language=en|access-date=2019-06-23}}{{Dead link|date=सितंबर 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
एक एक्शन सीक्वेंस, जो स्क्रीनप्ले की असाधारण लंबी अवधि में है, [[बुर्ज ख़लीफ़ा|बुर्ज खलीफा]] के पास बड़े पैमाने पर शूट किया गया था; बजट से 25 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। प्रभास कठोर प्रशिक्षण के तहत गए थे, जिसमें हृदय और वजन प्रशिक्षण, और प्लायमेट्रिक बाधा दौड़ शामिल थे। प्रभास ने अपने सह-कलाकार श्रद्धा कपूर की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह अपने किरदार के लिए सबसे अच्छी पसंद थीं। वह फिल्म में एक मजबूत चरित्र रखती है जबकि प्रभास का किरदार एक ग्रे-शेडेड काल्पनिक भूमिका है।<ref>{{cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/prabhas-saaho-stunt-sequences-in-burj-khalifa-1152960-2018-01-24|title=Saaho: Prabhas and team to shoot action sequences near Burj Khalifa in February|date=24 January 2018|website=India Today|access-date=9 अगस्त 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190809181707/https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/prabhas-saaho-stunt-sequences-in-burj-khalifa-1152960-2018-01-24|archive-date=9 अगस्त 2019|url-status=live}}</ref> वह एक पुलिस वाले का किरदार निभाते हैं जो दर्शकों को अंत तक अनुमान लगाता रहेगा।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/photo-features/prabhas-and-shraddha-kapoor-to-essay-grey-characters-in-saaho/photostory/62564313.cms|title=Prabhas and Shraddha Kapoor to essay grey characters in ‘Saaho’? - Saaho: Interesting facts about the Prabhas and Shraddha Kapoor starrer - The Times of India|website=The Times of India|access-date=9 अगस्त 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190831040820/https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/photo-features/prabhas-and-shraddha-kapoor-to-essay-grey-characters-in-saaho/photostory/62564313.cms|archive-date=31 अगस्त 2019|url-status=live}}</ref>
फिल्म में प्रभास के साथ कुछ पानी के नीचे के दृश्य हैं, जिन्होंने तैयारी में स्कूबा डाइविंग सीखी थी।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/photo-features/saaho-interesting-facts-about-the-prabhas-and-shraddha-kapoor-starrer/-special-training-prabhas-learnt-deep-sea-diving-for-saaho/photostory/60526128.cms|title=Special training! Prabhas learnt deep sea diving for 'Saaho' - Saaho: Interesting facts about the Prabhas and Shraddha Kapoor starrer - The Times of India|last=|first=|date=|website=The Times of India|archive-url=https://web.archive.org/web/20190829142402/https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/photo-features/saaho-interesting-facts-about-the-prabhas-and-shraddha-kapoor-starrer/-special-training-prabhas-learnt-deep-sea-diving-for-saaho/photostory/60526128.cms|archive-date=29 अगस्त 2019|dead-url=|access-date=|url-status=live}}</ref> प्रभास हिन्दी संस्करण में अपनी खुद की लाइनें डबिंग करेंगे, जबकि एक पेशेवर डबिंग कलाकार तेलुगु संस्करण में श्रद्धा कपूर के लिए डब करेंगी।<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodlife.com/south-gossip/prabhas-takes-hindi-lessons-to-dub-for-saaho/|title=Prabhas takes Hindi lessons to dub for Saaho | Bollywood Life|date=13 May 2019|website=www.bollywoodlife.com|access-date=9 अगस्त 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20230220075355/https://www.bollywoodlife.com/south-gossip/prabhas-takes-hindi-lessons-to-dub-for-saaho-1410128/|archive-date=20 फ़रवरी 2023|url-status=dead}}</ref> इस फिल्म में नील नितिन मुकेश को खलनायक के रूप में दिखाया गया है। मंदिरा बेदी, जो छोटे पर्दे पर अपनी ग्रे भूमिकाओं के लिए जानी जाती हैं, फिल्म में भी नकारात्मक भूमिका निभाएंगी।.<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/photo-features/saaho-interesting-facts-about-the-prabhas-and-shraddha-kapoor-starrer/-mandira-bedi-and-neil-nitin-mukesh-in-negative-roles/photostory/60526112.cms|title=Mandira Bedi and Neil Nitin Mukesh in negative roles - Saaho: Interesting facts about the Prabhas and Shraddha Kapoor starrer - The Times of India|last=|first=|date=|website=The Times of India|archive-url=https://web.archive.org/web/20190831035306/https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/photo-features/saaho-interesting-facts-about-the-prabhas-and-shraddha-kapoor-starrer/-mandira-bedi-and-neil-nitin-mukesh-in-negative-roles/photostory/60526112.cms|archive-date=31 अगस्त 2019|dead-url=|access-date=|url-status=live}}</ref>
कोरियोग्राफर [[वैभवी मर्चेंट]] ने दो रोमांटिक गाने शूट की। शूटिंग शुरू में [[ऑस्ट्रिया]] के अल्पाइन शहर [[इंसब्रुक]] में शुरू हुई, जिसमें हाउस ऑफ़ म्यूज़िक, इन्सब्रुक ट्राम, कुथाई में फिनस्टर्टल और एडलर होटल शामिल हैं। कुछ दृश्यों को पास के शहर [[टिरोल में सीफेल्ड|सीफेल्ड]] में भी शूट किया गया था। इसके अतिरिक्त, रोमांटिक गीत को टिरोल क्षेत्र के स्टॉबियर ग्लेशियर के "टॉप ऑफ टायरॉल" पर्वत, [[सॉल्डेन]] में गालिसचोगल आइसक्यू, स्वारोवस्की क्रिस्टल वर्ल्ड्स और रेउटे में [[हाईलाइन 179]] निलंबन पुल पर शूट किया गया था। प्रोडक्शन ने [[साल्ज़बर्ग]] एयरपोर्ट पर [[हैंगर-7|रेडबुल के हैंगर 7]] में रोमांटिक गाने के कुछ हिस्सों की शूटिंग की। रॉबिनविले और क्रिएटिव क्रिएटर्स [[ऑस्ट्रिया]] शेड्यूल के लिए सेवा निर्माता थे।.<ref>{{Cite web|url=https://www.socialnews.xyz/2019/07/02/saaho-movie-is-in-the-last-leg-of-shoot/|title=Saaho Movie Is In The Last Leg Of Shoot|last=Gopi|date=2019-07-02|website=Social News XYZ|language=en-US|access-date=2019-07-04|archive-url=https://web.archive.org/web/20190705121210/https://www.socialnews.xyz/2019/07/02/saaho-movie-is-in-the-last-leg-of-shoot/|archive-date=5 जुलाई 2019|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/news/movies/prabhas-shares-behind-the-scenes-pic-from-austrian-sets-of-saaho-for-his-darling-fans-2214777.html|title=Prabhas Shares Behind the Scenes Pic From Austrian Sets of Saaho for His Darling Fans|website=News18|access-date=2019-07-04|archive-url=https://web.archive.org/web/20190705121211/https://www.news18.com/news/movies/prabhas-shares-behind-the-scenes-pic-from-austrian-sets-of-saaho-for-his-darling-fans-2214777.html|archive-date=5 जुलाई 2019|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/saaho-prabhas-sets-internet-on-fire-with-a-pic-from-austria/articleshow/70050805.cms|title=Saaho: Prabhas sets internet on fire with a pic from Austria - Times of India|website=The Times of India|language=en|access-date=2019-07-04|archive-url=https://web.archive.org/web/20190707165036/https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/saaho-prabhas-sets-internet-on-fire-with-a-pic-from-austria/articleshow/70050805.cms|archive-date=7 जुलाई 2019|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.ibtimes.co.in/saaho-makers-reveal-interesting-details-prabhas-shraddha-kapoors-romantic-songs-800899|title=Saaho makers reveal interesting details of Prabhas, Shraddha Kapoor's romantic songs|last=Hooli|first=Shekhar H.|date=2019-07-04|website=International Business Times, India Edition|language=english|access-date=2019-07-04|archive-url=https://web.archive.org/web/20190704121229/https://www.ibtimes.co.in/saaho-makers-reveal-interesting-details-prabhas-shraddha-kapoors-romantic-songs-800899|archive-date=4 जुलाई 2019|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/tollywood/prabhas-shares-his-austria-experience-543416|title=Prabhas shares his Austria experience|last=Vyas|date=2019-07-03|website=www.thehansindia.com|language=en|access-date=2019-07-04|archive-url=https://web.archive.org/web/20190705121211/https://www.thehansindia.com/cinema/tollywood/prabhas-shares-his-austria-experience-543416|archive-date=5 जुलाई 2019|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.meinbezirk.at/hall-rum/c-lokales/bollywood-in-tirol_a3498159|title=KINO: Bollywood in Tirol|website=meinbezirk.at|language=de|access-date=2019-07-11|archive-url=https://web.archive.org/web/20190711175836/https://www.meinbezirk.at/hall-rum/c-lokales/bollywood-in-tirol_a3498159|archive-date=11 जुलाई 2019|url-status=live}}</ref>
==साउंडट्रैक==
{{Infobox album
| name = साहो
| type = साउंडट्रैक
| artist = [[तनिष्क बागची]], [[गुरु रंधावा]], [[बादशाह (गायक)|बादशाह]] और [[शंकर-एहसान-लॉय]]
| cover =
| alt =
| released = 28 अगस्त 2019 (सारी भाषाएँ)<ref>{{cite web|url=https://www.jiosaavn.com/album/saaho/ixxkwbl-FWc_|title=Saaho (Hind) - Original Motion Picture Soundtrack|publisher=Jio Saavn|access-date=2 अक्तूबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191004182401/https://www.jiosaavn.com/album/saaho/ixxkwbl-FWc_|archive-date=4 अक्तूबर 2019|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.jiosaavn.com/album/saaho/VCi8k266EIs_|title=Saaho (Malayalam) - Original Motion Picture Soundtrack |publisher=Jio Saavn}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.jiosaavn.com/album/saaho/MQkYYT5TWXw_|title=Saaho (Tamil) - Original Motion Picture Soundtrack |publisher=Jio Saavn}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.jiosaavn.com/album/saaho/-ty6UByF780_|title=Saaho (Telugu) - Original Motion Picture Soundtrack |publisher=Jio Saavn}}</ref>
| recorded = 2019
| venue =
| studio =
| genre = [[फीचर फिल्म साउंडट्रैक]]
| length = {{plainlist|
*{{Duration|m=14|s=24}} ([[हिन्दी]])
*{{Duration|m=13|s=18}} ([[मलयालम भाषा|मलयालम]], [[तमिल भाषा|तमिल]])
*{{Duration|m=13|s=19}} ([[तेलुगु भाषा|तेलुगु]])
}}
| language = [[हिन्दी]]<br>[[मलयालम भाषा|मलयालम]]<br>[[तमिल भाषा|तमिल]]<br>[[तेलुगु भाषा|तेलुगु]]
| label = [[टी-सीरीज़]]
|misc =
}}
गीत [[तनिष्क बागची]], [[गुरु रंधावा]], [[बादशाह (गायक)|बादशाह]], [[शंकर-एहसान-लॉय]] और [[घिबरन]] द्वारा रचित हैं। गाने के बोल [[तनिष्क बागची]], [[गुरु रंधावा]], [[बादशाह (गायक)|बादशाह]] और मनोज यादव ने हिन्दी में, [[विनायक शशिकुमार]] ने मलयालम में, [[मदन कर्की]] ने तमिल में, श्रीजो और कृष्ण कंठ ने तेलुगु में लिखे हैं।<ref>{{cite web|url=https://m.youtube.com/watch?v=vt-QRXoD8ug|title=Psycho Saiyaan Teaser (Hindi) Saaho - Prabhas,Shraddha Kapoor, Neil Nitin Mukesh - Tanishk B,Dhvani B|publisher=T-Series|website=YouTube|date=5 July 2019}}</ref>
===ट्रैक लिस्ट हिन्दी===
{{Tracklist
| headline=ट्रैक लिस्टिंग
| total_length= 14:24
|
| extra_column=गायक
| title1= साइको सैया
| extra1= [[सचेत–परंपरा|सचेत टंडन]], [[ध्वनि भानुशाली]], [[तनिष्क बागची]]
| music1= [[तनिष्क बागची]]
| lyrics1= तनिष्क बागची
| length1= 2:46
|
| title2 = एननी सोनी
| extra2 = [[गुरु रंधावा]], [[तुलसी कुमार]]
| music2 = गुरु रंधावा
| lyrics2 = गुरु रंधावा
| length2 = 4:18
|
| title3 = बैड बॉय
| extra3 = [[बादशाह (गायक)|बादशाह]], [[नीति मोहन]]
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| lyrics3 = बादशाह
| length3 = 2:58
|
| title4 = बेबी वॉन्ट यू टेल मी
| extra4 = [[एलिसा मेंडोंसा]], रवि मिश्रा, [[शंकर महादेवन]]
| music4 = [[शंकर-एहसान-लॉय]]
| lyrics4 = मनोज यादव
| length4 = 4:22
|
}}
===ट्रैक लिस्ट मलयालम===
{{Tracklist
| headline=ट्रैक लिस्टिंग
| total_length= 13:18
| extra_column=गायक
| title1= साइको सैया
| extra1= [[याज़िन निज़ार]], [[ध्वनि भानुशाली]], [[तनिष्क बागची]]
| music1= [[तनिष्क बागची]]
| lyrics1= [[विनायक शशिकुमार]]
| length1= 2:46
| title2 = एकांता तारामे
| extra2 = [[हरिचरण]], [[शक्तिश्री गोपालन]]
| music2 = [[गुरु रंधावा]]
| lyrics2 = विनायक शशिकुमार
|length2 = 3:13
| title3 = बैड बॉय
| extra3 = [[बादशाह (गायक)|बादशाह]], [[बेनी दयाल]], [[सुनीता सारथी]]
| music3 = [[बादशाह (गायक)|बादशाह]]
| lyrics3 = विनायक शशिकुमार
| length3 = 2:57
| title4 = बेबी वॉन्ट यू टेल मी
| extra4 = [[श्वेता मोहन]], [[शंकर महादेवन]]
| music4 = [[शंकर-एहसान-लॉय]]
| lyrics4 = विनायक शशिकुमार
| length4 = 4:22
}}
===ट्रैक लिस्ट तमिल===
{{Tracklist
| headline=ट्रैक लिस्टिंग
| total_length= 13:18
| extra_column=गायक
| title1= कधल साइको
| extra1= [[अनिरुद्ध रविचंदर]], [[ध्वनि भानुशाली]], [[तनिष्क बागची]]
| music1= [[तनिष्क बागची]]
| lyrics1= [[मदन कर्की]]
| length1= 2:46
| title2 = मझाइयूम थेयम
| extra2 = [[हरिचरण]], [[शक्तिश्री गोपालन]]
| music2 = [[गुरु रंधावा]]
| lyrics2 = मदन कर्की
| length2 = 3:13
| title3 = बैड बॉय
| extra3 = [[बादशाह (गायक)|बादशाह]], [[बेनी दयाल]], [[सुनीता सारथी]]
| music3 = बादशाह
| lyrics3 = [[विग्नेश शिवन]]
| length3 = 2:57
| title4 = उनमाई ईधु पोय एधु
| extra4 = [[श्वेता मोहन]], [[शंकर महादेवन]]
| music4 = [[शंकर-एहसान-लॉय]]
| lyrics4 = मदन कर्की
| length4 = 4:22
}}
===ट्रैक लिस्ट तेलुगु===
{{Tracklist
| headline=ट्रैक लिस्टिंग
| total_length= 13:19
| extra_column=गायक
| title1= साइको सैया
| extra1= [[अनिरुद्ध रविचंदर]], [[ध्वनि भानुशाली]], [[तनिष्क बागची]]
| music1= [[तनिष्क बागची]]
| lyrics1= श्रीजो
| length1= 2:46
| title2 = ये छोटा नुवुन्ना
| extra2 = [[हरिचरण]], [[तुलसी कुमार]]
| music2 = [[गुरु रंधावा]]
| lyrics2 = कृष्ण कंठ
| length2 = 3:14
| title3 = बैड बॉय
| extra3 = [[बादशाह (गायक)|बादशाह]], [[नीति मोहन]]
| music3 = बादशाह
| lyrics3 = श्रीजो
| length3 = 2:57
| title4 = बेबी वॉन्ट यू टेल मी
| extra4 = [[श्वेता मोहन]], [[सिद्धार्थ महादेवन]], [[शंकर महादेवन]]
| music4 = [[शंकर-एहसान-लॉय]]
| lyrics4 = कृष्ण कंठ
| length4 = 4:22
}}
==मार्केटिंग और रिलीज==
फिल्म का टीजर 27 अप्रैल 2017 को प्रभास की आखिरी फिल्म [[बाहुबली 2: द कॉन्क्लूज़न]] के साथ रिलीज किया गया था।<ref name="ndtv.com"/> फिल्म से प्रभास का फर्स्ट लुक पोस्टर 22 अक्टूबर 2017 को उनके जन्मदिन पर सामने आया था।<ref>{{cite web|title=Saaho first look: Prabhas stares menacingly in an all-black avatar; film to release in 2018|url=http://www.firstpost.com/entertainment/saaho-first-look-prabhas-stares-menacingly-in-an-all-black-avatar-film-to-release-in-2018-4166537.html|publisher=www.firstpost.com|accessdate=24 October 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20171023130738/http://www.firstpost.com/entertainment/saaho-first-look-prabhas-stares-menacingly-in-an-all-black-avatar-film-to-release-in-2018-4166537.html|archive-date=23 अक्तूबर 2017|url-status=dead}}</ref> पोस्टर के बारे में कुछ विवाद [[ब्लेड रनर 2049]] के पोस्टर के समान था, कई प्रशंसकों और अनुयायियों ने कथित साहित्यिक चोरी के लिए पोस्टर की आलोचना की।<ref>{{cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/entertainment/bollywood/231017/same-shame-prabhas-look-in-latest-saaho-poster-is-too-similar-to-blade-runner-2049.html|title=Same-shame! Prabhas’ look in latest Saaho poster is too similar to Blade Runner 2049|date=23 October 2017|publisher=|access-date=10 अगस्त 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190829162602/http://www.deccanchronicle.com/entertainment/bollywood/231017/same-shame-prabhas-look-in-latest-saaho-poster-is-too-similar-to-blade-runner-2049.html|archive-date=29 अगस्त 2019|url-status=live}}</ref> अगले वर्ष, 22 अक्टूबर 2018 को प्रभास के जन्मदिन पर फिल्म फीचर का एक मेकिंग रिलीज़ किया गया। श्रद्धा कपूर के जन्मदिन पर 2 मार्च 2019 को फिल्म फीचर का दूसरा मेकिंग रिलीज़ किया गया।<ref>{{cite web |url=https://www.news18.com/news/movies/on-shraddha-kapoor-birthday-makers-of-saaho-drop-new-bts-teaser-of-prabhas-starrer-2053835.html |title=On Shraddha Kapoor's Birthday, Makers of 'Saaho' Drop New BTS Teaser of Prabhas-starrer |date=3 March 2019 |work=[[CNN News18]] |accessdate=1 May 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190501102526/https://www.news18.com/news/movies/on-shraddha-kapoor-birthday-makers-of-saaho-drop-new-bts-teaser-of-prabhas-starrer-2053835.html |archive-date=1 मई 2019 |url-status=live }}</ref> फिल्म से प्रभास के 21 मई 2019 को एक पोस्टर का अनावरण किया गया था।<ref>{{cite web|url=https://www.timesnownews.com/entertainment/south-gossip/article/saaho-new-poster-out-prabhas-deadly-look-is-here-to-make-you-restless-for-the-film-see-photo/422672|title=Saaho new poster out! Prabhas' deadly look is here to make you restless for the film|publisher=Times Now News|first=Pooja|last=Nayak|date=21 May 2019|access-date=10 अगस्त 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190810085100/https://www.timesnownews.com/entertainment/south-gossip/article/saaho-new-poster-out-prabhas-deadly-look-is-here-to-make-you-restless-for-the-film-see-photo/422672|archive-date=10 अगस्त 2019|url-status=live}}</ref> एक हफ्ते बाद, प्रभास का एक और पोस्टर सामने आया था।<ref>{{cite web|url=https://www.news18.com/news/movies/zip-zap-zoom-prabhas-takes-on-the-world-in-new-saaho-poster-2161551.html|title=Zip-Zap-Zoom: Prabhas Takes on the World in New Saaho Poster|publisher=Times Now News|date=27 May 2019|access-date=10 अगस्त 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190608070205/https://www.news18.com/news/movies/zip-zap-zoom-prabhas-takes-on-the-world-in-new-saaho-poster-2161551.html|archive-date=8 जून 2019|url-status=live}}</ref> 10 जून 2019 को फिल्म से श्रद्धा कपूर का फर्स्ट लुक पोस्टर रिलीज़ किया गया था।<ref>{{cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/telugu/saaho-shraddha-kapoor-new-poster-prabhas-photo-5773606/|title=Shraddha Kapoor looks fierce in new Saaho poster|work=The Indian Express|accessdate=10 June 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190611130526/https://indianexpress.com/article/entertainment/telugu/saaho-shraddha-kapoor-new-poster-prabhas-photo-5773606/|archive-date=11 जून 2019|url-status=live}}</ref> प्रभास का एक और पोस्टर 12 जून 2019 को जारी किया गया था। अगले दिन, फिल्म का एक टीज़र [[हिन्दी]], [[मलयालम भाषा|मलयालम]], [[तेलुगू भाषा|तेलुगू]] और [[तमिल भाषा|तमिल]] में रिलीज़ किया गया था।<ref name="Trailer">{{cite web|url=https://youtube.com/watch?v=HiwFJ97qUx4|title=SAAHO TEASER -Prabhas, Shraddha Kapoor, Neil Nitin Mukesh - Bhushan Kumar - Sujeeth - Vamsi Pramod|publisher=T Series|website=YouTube|date=12 June 2019|access-date=10 अगस्त 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190810093917/https://www.youtube.com/watch?v=HiwFJ97qUx4|archive-date=10 अगस्त 2019|url-status=live}}</ref> 23 जुलाई को, [[यूवी क्रिएशन्स]] ने प्रभास और श्रद्धा कपूर के चित्र वाले नए पोस्टर रिलीज़ किए और 30 अगस्त को हिन्दी, मलयालम, तेलुगू और तमिल में नई रिलीज़ डेट दी।<ref>{{Cite news|url=https://www.dnaindia.com/entertainment/report-saaho-prabhas-teases-romantic-poster-with-shraddha-kapoor-gives-new-release-date-2774887|title='Saaho': Prabhas teases romantic poster with Shraddha Kapoor, gives new release date {{!}} Latest News & Updates at Daily News & Analysis|date=23 July 2019|work=DNA|access-date=23 July 2019|language=en-US|archive-url=https://web.archive.org/web/20190723063726/https://www.dnaindia.com/entertainment/report-saaho-prabhas-teases-romantic-poster-with-shraddha-kapoor-gives-new-release-date-2774887|archive-date=23 जुलाई 2019|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/tollywood/prabhas-shraddha-to-romance-in-austria--538872|title=Prabhas, Shraddha to romance in Austria|last=Object|first=object|date=18 June 2019|website=The Hans India|access-date=23 June 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190623194801/https://www.thehansindia.com/cinema/tollywood/prabhas-shraddha-to-romance-in-austria--538872|archive-date=23 जून 2019|url-status=live}}</ref>
13 जुलाई 2019 को, [[यूवी क्रिएशन्स]] और [[टी-सीरीज़]] ने [[हिन्दी]],<ref>{{cite web|url=https://www.youtube.com/watch?v=HiwFJ97qUx4|title=SAAHO TEASER - Prabhas, Shraddha Kapoor, Neil Nitin Mukesh - Bhushan Kumar - Sujeeth - Vamsi Pramod|publisher=T-Series|website=YouTube|date=13 July 2019|access-date=30 सितंबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190930201337/https://www.youtube.com/watch?v=HiwFJ97qUx4|archive-date=30 सितंबर 2019|url-status=live}}</ref> [[मलयालम भाषा|मलयालम]],<ref>{{cite web|url=https://www.youtube.com/watch?v=0S2rwcTMMzE|title=Saaho Official Teaser: Malayalam - Prabhas - Shraddha Kapoor - Sujeeth - UV Creations - #SaahoTeaser|publisher=UV Creations|website=YouTube|date=13 July 2019|access-date=30 सितंबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190930220745/https://www.youtube.com/watch?v=0S2rwcTMMzE|archive-date=30 सितंबर 2019|url-status=live}}</ref> [[तमिल भाषा|तमिल]]<ref>{{cite web|url=https://www.youtube.com/watch?v=48nmK0hleKg|title=Saaho Official Teaser : Tamil - Prabhas - Shraddha Kapoor - Sujeeth - UV Creations - #SaahoTeaser|publisher=UV Creations|website=YouTube|date=13 July 2019|access-date=30 सितंबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190908034052/https://www.youtube.com/watch?v=48nmK0hleKg|archive-date=8 सितंबर 2019|url-status=live}}</ref> और [[तेलुगू भाषा|तेलुगू]]<ref>{{cite web|url=https://www.youtube.com/watch?v=rDoFiOjoC2Y|title=Saaho Official Teaser : Telugu - Prabhas - Shraddha Kapoor - Sujeeth - UV Creations - #SaahoTeaser|publisher=UV Creations|website=YouTube|date=13 July 2019|access-date=30 सितंबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190811095742/https://www.youtube.com/watch?v=rDoFiOjoC2Y|archive-date=11 अगस्त 2019|url-status=live}}</ref> में फ़िल्म के आधिकारिक टीज़र लॉन्च किया। टीज़र ने सभी भाषाओं से [[यूट्यूब]] पर 97 मिलियन से अधिक व्यू प्राप्त किए हैं।
10 अगस्त 2019 को, [[यूवी क्रिएशन्स]] और [[टी-सीरीज़]] ने हिंदी,<ref>{{cite web|url=https://youtube.com/watch?v=lD0-ztCFydA|title=Saaho Trailer : Hindi - Prabhas - Shraddha Kapoor - Sujeeth - #SaahoTrailer - T-Series|publisher=T-Series|website=YouTube|date=10 August 2019|access-date=30 सितंबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191001015328/https://www.youtube.com/watch?v=lD0-ztCFydA|archive-date=1 अक्तूबर 2019|url-status=live}}</ref> मलयालम,<ref>{{cite web|url=https://youtube.com/watch?v=PUtvIt_r6S4|title=Saaho Trailer: Malayalam - Prabhas - Shraddha Kapoor - Sujeeth - UV Creations - #SaahoTrailer|publisher=UV Creations|website=YouTube|date=10 August 2019}}</ref> तमिल<ref>{{cite web|url=https://youtube.com/watch?v=e6A-QqkF-Ns|title=Saaho Trailer : Tamil - Prabhas - Shraddha Kapoor - Sujeeth - #SaahoTrailer - UV Creations|publisher=UV Creations|website=YouTube|date=10 August 2019|access-date=30 सितंबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190904205907/https://www.youtube.com/watch?v=e6A-QqkF-Ns|archive-date=4 सितंबर 2019|url-status=live}}</ref> और तेलुगु<ref>{{cite web|url=https://youtube.com/watch?v=HNnt00swZ5Q|title=Saaho Trailer : Telugu - Prabhas - Shraddha Kapoor - Sujeeth - #SaahoTrailer - UV Creations|publisher=UV Creations|website=YouTube|date=10 August 2019|access-date=30 सितंबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190910152811/https://www.youtube.com/watch?v=HNnt00swZ5Q|archive-date=10 सितंबर 2019|url-status=live}}</ref> में फ़िल्म के आधिकारिक ट्रेलर लॉन्च किया। ट्रेलर ने सभी भाषाओं से [[यूट्यूब]] पर 105 मिलियन से अधिक व्यू प्राप्त किए हैं।<ref name="toprd" />
===गेम्स===
''साहो - द गेम'', हैदराबाद स्थित कंपनी पिक्सालोट लैब्स द्वारा बनाया गया एक [[प्रथम-व्यक्ति शूटर]] मोबाइल गेम, 15 अगस्त 2019 को रिलीज़ किया गया था।<ref>{{cite web|url=https://www.asianage.com/entertainment/bollywood/160819/good-news-prabhas-saaho-game-launched-on-independence-day.html|title=Good News: Prabhas’ 'Saaho Game' launched on Independence day|publisher=[[The Asian Age]]|access-date=2 अक्तूबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190816105509/https://www.asianage.com/entertainment/bollywood/160819/good-news-prabhas-saaho-game-launched-on-independence-day.html|archive-date=16 अगस्त 2019|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|url=https://youtube.com/watch?v=ERKWLJoR8y0|title=Saaho The Game Teaser - Prabhas - Shraddha Kapoor - Sujeeth - Ghibran - UV Creations|publisher=UV Creations|website=YouTube|date=13 August 2019|access-date=2 अक्तूबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190813142754/https://www.youtube.com/watch?v=ERKWLJoR8y0|archive-date=13 अगस्त 2019|url-status=live}}</ref>
===रिलीज़===
यह फिल्म 30 अगस्त 2019 को दुनिया भर में हिन्दी, तमिल, तेलुगु और मलयालम में रिलीज़ हुई थी।
== सन्दर्भ ==
{{Reflist|2}}
==बाहरी कड़ियाँ==
* {{IMDb title|6836936}}
[[श्रेणी:भारतीय फ़िल्में]]
[[श्रेणी:2019 की फ़िल्में]]
[[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में]]
[[श्रेणी:तमिल फ़िल्में]]
[[श्रेणी:तेलुगू फ़िल्में]]
[[श्रेणी:भारतीय एक्शन फ़िल्में]]
[[श्रेणी:भारतीय एक्शन थ्रिलर फ़िल्में]]
[[श्रेणी:भारतीय बहुभाषी फ़िल्में]]
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रक्षा लेखा महानियंत्रक
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox
| title = रक्षा लेखा महानियंत्रक
| headerstyle = background:#1E90FF; color:#fff;
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| data2 = [[चित्र:CGDA Logo.gif]]
| label3 = सम्बंधित परीक्षा
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| label13 = वित्तीय सलाहकार (रक्षा सेवा)
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| data14 = वर्तमान : अनुग्रह नारायण दास<ref>{{Cite web |title=श्री अनुग्रह नारायण दास ने रक्षा लेखा महानियंत्रक का कार्यभार ग्रहण किया|url=https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=2257345®=3&lang=2|website=pib.gov.in}}</ref>
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| label16 = आधिकारिक जालस्थल
| data16 = [http://www.cgda.nic.in/indexh.php जालस्थल]
}}
'''रक्षा लेखा महानियंत्रक''' (Controller General of Dfence Accounts) [[भारत]] के रक्षा लेखा विभाग का नेतृत्व वित्तीय सलाहकार (रक्षा सेवा) के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करते हैं। रक्षा लेखा विभाग के प्रमुख कार्य भारतीय सशस्त्र बलों (जिनमें तीनो सेनाएं शामिल हैं) से संबंधित सभी प्रकार के भुगतानों पर निगरानी करना, खातों का लेखा जोखा रखना और जांच करना है। इनमें आपूर्ति और सेवाओं के बिल और निर्माण / मरम्मत कार्यों, वेतन और भत्तों के विविध शुल्क, पेंशन, आदि के बिल शामिल हैं।<ref>{{Cite web |url=http://cgda.nic.in/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=15 जून 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110309200703/http://cgda.nic.in/ |archive-date=9 मार्च 2011 |url-status=dead }}</ref>
==इतिहास==
250 वर्ष पुराना रक्षा लेखा विभाग [[भारत सरकार]] के सबसे पुराने विभागों में से एक है। रक्षा लेखा महानियंत्रक द्वारा संचालित रक्षा लेखा विभाग वर्तमान में रक्षा लेखा सेवाओं तथा रक्षा से जुड़े अन्य संगठनों जैसे [[भारतीय तटरक्षक]] बलों, सीमा सड़क तथा कैन्टीन भंडार विभाग को वित्तीय सलाह प्रदान करने तथा उनके व्यय तथा प्राप्तियों के भुगतान, लेखांकन एवं आंतरिक लेखा परीक्षा के लिए उत्तरदायी है। रक्षा लेखा महानियंत्रक, 04 रक्षा लेखा अपर महानियंत्रकों, 19 प्रधान नियंत्रकों तथा सेना, नौसेना, वायुसेना, आयुद्ध निर्माणियों, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठनों, तटरक्षक बल एवं [[सीमा सड़क संगठन]] आदि से संबंधित कार्य देखने वाले क्षेत्रीय नियंत्रकों (सेना ), प्रयोजनमूलक नियंत्रकों /एकीकृत वित्तीय सलाहकारों का कार्य देखने वाले 70 रक्षा लेखा नियंत्रक स्तर के अधिकारियों की सहायता से विभाग का संचालन करते हैं । प्रयोजनमूलक नियंत्रक सीमा सड़क संगठन, पेंशन एवं पेंशन संवितरण तथा कैन्टीन भंडार विभाग आदि जैसे विशेष संगठनों को अपनी सेवा प्रदान करते हैं
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://web.archive.org/web/20180213195412/http://www.cgda.nic.in/indexh.php '''रक्षा लेखा महानियंत्रक''' का हिन्दी जालघर]
0n22giye1hl4y50ka9b389vsmcg29zf
सदस्य वार्ता:Dr shobha Bhardwaj
3
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2026-10-17T20:42:52Z
Dr shobha Bhardwaj
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/* मेक्यावली की रचना 'दी प्रिंस, की प्रासंगिकता , डॉ शोभा भारद्वाज */ नया अनुभाग
6630535
wikitext
text/x-wiki
== राष्ट्रपति ट्रम्प की टैरिफ नीति ने चीन एवं भारत के सम्बन्धों को नया मोड़ दिया , डॉ शोभा भारद्वाज ==
राष्ट्रपति ट्रम्प की टैरिफ नीति ने चीन एवं भारत के सम्बन्धों को नया मोड़ दिया ,
डॉ शोभा भारद्वाज
चीन विस्तार वादी नीति का पोषक है ,इसके 14 देशों से सीमा विवाद चलते हैं 20 देशों पर नजर हैं| दक्षिणी कोरिया ,वियतनाम ,फिलिपीन ,ब्रुनेई ,इंडोनेशिया , मलेशिया ,आस्ट्रेलिया सभी चीन के एकाधिकार के दावे से परेशान हैं ताईवान को अपने अधिकार में लेने के लिए वह सदैव तत्पर हैं समुद्री इलाकों पर चीन के दावे कोरी भभकी नहीं है जिन्हे वह एक – एक कर कब्जा करना चाहता है |चीन की रणनीति एवं राजनीति को समझने वाले जानते हैं चिनफिंग अमेरिका को प्रभुसत्ता को हटा कर अपनी प्रभूसत्ता को जमाने के लिए आतुर हैं |
भारत – चीन सीमा विवाद का दायरा लद्दाख , डोकलाम , नाथुला से होते हुए अरुणाचल प्रदेश की तवांग घाटी तक जाता है| अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर को वह दक्षिणी तिब्बत कहता है तवांग भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में अरुणाचल राज्य के पश्चिमोत्तर भाग में स्थित है भूटान और चीन तवांग के सीमावर्ती देश है | भारत में लद्दाख एवं अरुणाचल प्रदेश पर उसकी नजर है| 370, 35 a की समाप्ति के बाद लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने पर चीन बौखला गया था एवं पाकिस्तान के साथ अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ मोर्चा खोल रहा था |चीन ने कश्मीर के 20 % हिस्से पर कब्जा किया है इस हिस्से को अक्साई चिन के नाम से जाना जाता है चीन की इस हिस्से पर सदैव नजर रही है 1951 में चीन ने यहाँ सड़क बनानी शुरू की इस सड़क को तिब्बत से जोड़ लिया भारत और चीन के बीच एक स्वतंत्र देश तिब्बत पर चीन ने आधिकार जमा लिया नेहरू सरकार कुछ नहीं कर सकी उलटा अटलबिहारी बाजपेयी को अपने विदेश मंत्री के कार्यकाल 2003 में घोषणा करनी पड़ी ‘तिब्बत चीन का हिस्सा है’ |1962 में भारत चीन युद्ध के दौरान चीन ने इस हिस्से पर कब्जा कर लिया था ब्रम्ह पुत्र नदी पर बाँध बना कर जल को अपने अनुसार रोकना चाहता है कुछ समय के लिए काम रुक गया है |भारत से चीन की सीमा 4054 किलोमीटर तक मिलती है |पाकिस्तान ने पीओके का 2600 किलोमीटर एरिया चीन को सौंप दिया |
डोकलाम विवाद -18 जून 2017 को इस विवाद की शुरुआत हुई थी यह क्षेत्र चीन और भूटान के बीच का विवादित क्षेत्र है इस विवाद में भारत भूटान का साथ देता है भारत एवं भूटान के मजबूत राजनयिक संबंध हैं लेकिन भूटान का चीन से राजनयिक सम्बन्ध नहीं है भूटान अपने क्षेत्र में चीन की घुसपैठ का सदा विरोधी रहा है |करीब 300 भारतीय सैनिकों ने दो बुलडोजर के साथ भारत – चीन सीमा पार कर पीएलए को डोकलाम में सड़क बनाने से रोक दिया |चीन जहां सड़क बना रहा यह स्थान नाथुला पास से मुश्किल से 15 किलोमीटर दूर है उसी एरिया में 20 किलोमीटर दूर का हिस्सा सिक्किम और नार्थ ईस्ट के राज्यों को भारत के बाकी हिस्सों को जोड़ता है अत: हमारे लिए यह क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं |9 अगस्त 2017 चीन ने दावा किया केवल 53 भारतीय सैनिक और एक बुलडोजर अब भी डोकलाम में है भारत ने इस दावे को नकारते हुए कहा उसके 300-350 सैनिक मौजूद हैं |यहाँ कई बार जंग के हालात बने बाद में सितम्बर महीने में ब्रिक्स सम्मेलन से पहले दोनों देशों की सेनायें पीछे हट गयीं |
गलवान घाटी -15 और 16 जून 2020 की रात को रात्रि के समय भारत एवं चीन के सैनिकों के बीच खूनी झडप हुई इसमें हमारे 20 सैनिक शहीद हुए जिनमे कर्नल संतोष बाबू भी थे यह खूनी झड़प प्रोटोकाल के अनुसार हाथापाई एवं पत्थरों से हुई |चीन ने पहले अपने हताहत सैनिकों की संख्या छुपाई बाद में पता चला चीनी सैनिकों की संख्या अधिक थी|
9 दिसम्बर 2022 को 300 से अधिक चीनी सैनिकों ने अरुणाचल के तवांग में 17 हजार फीट ऊंची चोटी पर कब्जा करने की कोशिश की चीनी सैनिकों ने टेम्परेरी वाल पर लगी तारबंदी को तोड़ कर भारतीय सीमा में घुस गये मुस्तैद भारतीय सैनिकों ने उनको पीट कर भगा दिया |
शंघाई सहयोग संगठन -चीन एवं भारत को एससीओ को सीधे संवाद का एक मंच मिला है सीमा निर्धारण ,और बैल्ट एंड रोड इनीशिएटिव (बीआरआई के तहत पीओके )में चीनी निवेश जैसे मुद्दे भी शामिल हैं जो भारत की सम्प्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता को चुनौती देते हैं |
जब तक सीमा विवाद नहीं सुलझेगा इस क्षेत्र में शान्ति सम्भव नहीं है चिनफिंग आर्थिक हितों को भी साधना चाहते हैं लेकिन उनकी नीयत भारतीय सीमा में घुसपैठ कर जमीन हथियाने की रहती हैं भारत की विदेश नीति चीन को सशंकित दृष्टि से देखती है लेकिन ट्रम्प की टैरिफ नीति से दोनों देशों के व्यापारिक हित प्रभावित हुए | ट्रम्प ने ख़ास तौर पर भारत को निशाने पर लिया चीन भी ट्रम्प के व्यवहार से सशंकित है कहते हैं राजनीति में स्थायी दुश्मनी का स्थान नहीं है |
मोदी जी की चीन यात्रा से पहले चीन के विदेश मंत्री वांग यी राष्ट्रीय सलाहकार अजीत डोबाल के निमन्त्रण पर भारत आये थे उन्होंने विदेश मंत्री जयशंकर प्रसाद से मुलाक़ात की उन्होंने कहा दोनों देशों को एक दूसरे के प्रतिद्वंदी के रूप में न देख कर सांझेदार के रूप में साथ आना चाहिए वह प्रधान मंत्री मोदी जी से भी मिले दोनों में इस बात पर सहमती बनी आपसी वार्ता फिर से शुरू की जाये |
आपरेशन सिंदूर के समय चीन ने पाकिस्तान को आधुनिक हथियार ही नहीं दिए थे बल्कि पूरी तरह सहयोग दिया था | भारत चाहता है चीन सहमत हो आतंकवाद विश्व के लिए घातक है जबकि चीन की विचार धारा आतंकवाद के विरुद्ध नहीं है |
जयशंकर जी ने स्पष्टतया कहा दोनों देशों के रिश्तों का कठिन दौर है अब समय आ गया है आगे बढ़ा जाये इसके लिए एक स्पष्ट निर्माणात्मक सोच की जरूरत है तीन बातो पर ध्यान दिया जाए आपसी सम्मान , आपसी समवेदन शीलता आपसी हित, आपसी मतभेदों पर विवाद नहीं होने चाहिए न ही किसी तरह की प्रतिद्वंदिता हो |
चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग शिखर सम्मेलन में भारत के प्रधान मंत्री सात साल बाद चीन गये थे मेजबान देश के राष्ट्रपति चिनफिंग ने आपसी सम्बन्धों को सुधार कर आपसी सहयोग बढाने पर जोर दिया एलिफेंट और ड्रैगन मिल कर काम करें |शिखर समेलन में तीन प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्ष चीन , रूस एवं भारत जुटे | मोदी जी की इस अवसर पर चीनी राष्ट्रपति एवं रूस के राष्ट्रपति पूतिन से घनिष्टता कूट नीति का हिस्सा थी पूतिन के साथ मोदी जी की घनिष्टता चर्चित रही एवं ट्रम्प को भी चेतावनी देनी थी भारत अब पुराना भारत नहीं है विकास शील राष्ट्र की कोटि में आता है |
डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों ख़ास कर टैरिफ नीति ने दुनिया में हलचल मचा दी है |एससीओ के मंच तक मोदी जी ने भारत के दृष्टिकोण को प्रमुखता से रखा पाकिस्तान द्वारा पहलगाम के आतंकी हमले की निंदा करना मोदी जी की कूटनीतिक जीत रही पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवाद पर विश्व का ध्यान खींचा पाकिस्तान के प्रधान मंत्री कुछ नहीं बोल सके जबकि चीन पाकिस्तान का हर सम्भव बचाव करता रहा है पकिस्तान के 80 % रक्षा उपकरण चीन से खरीदे गये हैं| अनेक देशों के साथ द्वियपक्षीय वार्ताए भी हुई ताकि सबसे कूटनीतिक सम्बन्ध मजबूत हो | मोदी जी ने मंच पर भारत की प्राथमिकताओं को मजबूती से रखा |
अमेरिकन मीडिया में एससीओ मिशन की चर्चा जोरो पर हुई अमेरिका की प्रसिद्ध अखबारों की सुर्खियाँ बनी “अमेरिका के खिलाफ चीन की कूटनीतिक मुहिम” ,चिनफिंग एससीओ को सिर्फ सुरक्षा मंच नहीं बल्कि आर्थिक सहयोगी ब्लाक बनाना चाहते है |
ट्रम्प का निजी हित यूएस की विदेश नीति पर भारी पड़ा | अब अमेरिकन उपभोक्ता को महगाई का सामना करना पड़ रहा है |
चीन को भारत जैसा बड़ा बाजार चहिये ऐसा न हो हमारे बाजार चीन के समान से पट जायें | हमें भीं बाजार चाहिए अब अमेरिका के रुख में भी परिवर्तन की उम्मीद है अमेरिकन दूतावास जानता है अमरीका के हित में भारत की मित्रता कितनी जरूरी है | हमें अपने दृष्टिकोण को बदलना पड़ेगा हम मुश्किल पड़ने पर ही जगते हैं|
भारत सरकार एवं अमेरिकन वित्त विभाग की कोशिश है टैरिफ नीति पर वार्ता के बाद समझौता हो जाए जय शंकर प्रसाद एवं पीयूष गोयल जी के अनुसार दो महीने में रास्ता निकल आयेगा|
स्तोत्र =भारत चीन सम्बन्ध पर लेख हिन्दू अखबार , टाईम्स आफ इंडिया ,टीवी डिबेट ,विकी पीडिया ,बीबीसी न्यूज हिंदी भारत चीन सीमा विवाद
भारत में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ,राष्ट्रीय सलाहकार भारत सरकार आपसी वार्ता , प्रेस कांफ्रेंस ,भारत के विदेश मंत्री जय शंकर प्रसाद के स्टेटमेंट
हिन्दुस्तान टाईम्स न्यूजपेपर के सम्पादकीय ,मोदी जी की तियानजिन में द्विपक्षीय वार्ता ,ट्रम्प पर अमेरिकन अखबारों में विभिन्न विचारकों के कमेन्ट ,दी न्यू यार्क टाईम्स
इंटरनेशनल - वैसे भारत विरोधी ब्यान देते हैं लेकिन मीडिया के विचार भारत अमेरिकन सम्बन्धों पर ट्रम्प की नीति की आलोचना अन्य अमेरिकन मीडिया जगत मे एससीओ मिशन अखबारों की सुर्खियाँ बना |
एससीओ बैठक में मोदी जी ने अपने विचार एवं आतंकवाद पर चर्चा प्रभावशाली ढंग से की
मेरी पीएचडी का विषय Anglo American Impact on The India - Pakistan Relations है पाकिस्तान चीन के सम्बन्धों पर मेरे विचार भारत चीन के सम्बन्धों पर असर हस्ताक्षर - डॉ शोभा भारद्वाज [[सदस्य:Dr shobha Bhardwaj|same ]] ([[सदस्य वार्ता:Dr shobha Bhardwaj|वार्ता]]) 20:31, 11 सितंबर 2025 (UTC)
== भीम मीम की राजनीति :बाबा साहेब आम्बेडकर की नजर में ( ऐतिहासिक पृष्ट भूमि ) डॉ शोभा भारद्वाज ==
भीम मीम की राजनीति : बाबासाहेब व जोगेंद्र्नाथ की दृष्टि से( ऐतिहासिक पृष्ट भूमि )
डॉ शोभा भारद्वाज
राजनीतक दल चुनाव के दिनों में दलित वंचित समाज को अपने पक्ष में लेने के लिए अनेक हथकंडे चलते हैं जिससे वह उनके सामूहिक वोट बैंक बन जाएँ अधिकाँश दलित सनातन से जुड़े हैं कुछ ने बोद्ध धर्म अपना लिया है कुछ धर्म से अलगाव बना चुके हैं कुछ ने क्रिश्चेनिटी अपना ली आम्बेडकर जी ने धर्म बदला लेकिन उन्होंने बोद्ध धर्म ग्रहण किया जो सनातन धर्म का ही हिस्सा है | भारतीय दलित राजनीति वर्तमान समय में सर्वाधिक दिग्भ्रमित दौर में है। दुर्भाग्य से वर्तमान समय ही इतिहास का वह संधिकाल या संक्रमणकाल है जबकि दलित राजनीति को एक दिशा की सर्वाधिक आवश्यकता है। भीम मीम के नाम का सामाजिक जहर बाबासाहेब अम्बेडकर के समूचे चिंतन को लील रहा है।भीम मीम के इतिहास को देखना, पढ़ना व समझना आज के अनसुचित जाति समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता हो गई है ।
स्वतंत्र भारत की राजनीति व समाज को जिन दो व्यक्तियों ने सर्वाधिक प्रभावित किया है वे हैं पहले गांधी जी व दूसरे भीमराव रामजी अंबेडकर यानि बाबासाहेब। इनमें से बाबासाहेब की भारतीय राजनीति में बाबासाहेब की कांग्रेस द्वारा घोर उपेक्षा के बाद भी उनकी स्थापना का इतिहास पढ़ना हो तो एक और व्यक्ति का उल्लेख आवश्यक हो जाता है। वह व्यक्ति है दलित नेता जोगेंद्रनाथ मंडल। कांग्रेस की घनघोर और अटूट उपेक्षा के शिकार जोगेंद्रनाथ मंडल ने यदि स्वतंत्रता पूर्व की भारतीय राजनीति में बाबासाहेब को सफलतापूर्वक स्थापित न किया होता तो आज भारत में दलित चिंतन का स्वरूप आमूलचूल भिन्न होता। इसके आगे आज यदि हम नागरिकता संशोधन कानून के सामाजिक मंथन का अध्ययन, मनन करें तो दो व्यक्तित्वों का स्मरण आवश्यक हो जाता है पहले जोगेंद्रनाथ मंडल और दूसरे बाबासाहेब। इन दोनों महानुभावों ने नागरिकता संशोधन कानून व पाकिस्तान में बसे अल्पसंख्यक हिंदुओं को भारतीय नागरिकता देने के कानून के महत्व व आवश्यकता को दशकों पूर्व पहचान लिया था।
प्रारंभ से ही दलित चिंतन को उपेक्षा की दृष्टि से देखने वाली कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति ने स्वभावतः ही प्रारंभ में दलित नेता जोगेंद्रनाथ मंडल व बाबा साहेब अंबेडकर की घोर उपेक्षा की थी। कांग्रेस ने जब बाबासाहेब के प्रति बेहद अपमानजनक रवैया अपनाते हुये संविधान सभा में भेजे गए प्रारंभिक 296 सदस्यों में अंबेडकर को जगह नहीं दी थी तब जोगेंद्रनाथ मंडल ने अंबेडकर जी को संविधान सभा में सम्मिलित करने की भूमिका बनाई थी। जब कांग्रेस ने संविधान सभा में अंबेडकर जी को जाने से रोकने के लिये तमाम प्रकार के प्रपंच करना प्रारंभ किये तब मंडल ने बंगाल के खुलना-जैसोर से अपनी सीट खाली करके बाबा साहब को चुनाव जितवाकर संविधान सभा के लिए निर्वाचित कराया था और समूची कांग्रेस को चौंकाते छकाते हुये भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय प्रारंभ किया था।
विभाजन के विषय में यह तय हुआ था कि जिन क्षेत्रों में हिंदू जनसंख्या 51% से अधिक है वे क्षेत्र भारत में सम्मिलित किये जायेंगे। इसके बाद भी कांग्रेस ने तब हद दर्जे की गलती करते हुये बाबा साहेब को संविधान सभा में अप्रासंगिक करने हेतु बंगाल के खुलना-जैसोर को 71% हिंदू बहुल वाला क्षेत्र होने के बाद भी पाकिस्तान को सौंप दिया और तब बाबासाहेब तकनीकी तौर पर पाकिस्तानी संविधान सभा के सदस्य माने गये थे। बाबासाहेब ने इसका विरोध किया, जिसके बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप से बाबासाहेब बंबई राज्य से एमएस जयकर द्वारा खाली की गई सीट से चुनकर भारतीय संविधान सभा में पहुंच पाये थे। बाबासाहेब प्रारंभ से ही अखंड भारत के पक्ष में थे।
उन्होंने बंटवारे के लिए तैयार महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के साथ जिन्ना का भी पुरजोर विरोध किया। उनकी पुस्तक “थॉट्स ऑन पाकिस्तान” में इसका पूरा विवरण है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के चलते कांग्रेस ने देश का बंटवारा कर डाला। बाबासाहेब का यह स्पष्ट मानना था कि जब धार्मिक आधार पर बंटवारा हो चुका है, तब पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं को भारत आ जाना चाहिए। उन्होंने यह यह भी आशंका जताई थी कि धर्म के आधार पर देश के बंटवारे से हिंदुओं को गंभीर क्षति पहुंचेगी और ऐसा हुआ भी।
जोगेंद्रनाथ मंडल ने तब पाकिस्तानी सरकार से अपने त्यागपत्र में विस्तृत तौर पर लिखा था कि मंत्री रहते हुए भी वे पाकिस्तान में दलितों को मुस्लिमों के अत्याचार से नहीं बचा पाए। बंटवारे के बाद पाकिस्तान में बचे ज्यादातर दलित या तो मार दिए गए या फिर मजबूरी में उन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया। अपनी ही हुकूमत में वह चीखते-चिल्लाते रहे, लेकिन पाकिस्तान सरकार न तो दलित हिंदुओं की मदद के लिए आई, न ही अन्य अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा हेतु उसने कोई कदम उठाया।
इस प्रकार देश में प्रथम मुस्लिम-दलित राजनीति का प्रयोग हुआ जो कि बेहद असफल व निराशाजनक रहा किंतु यह प्रयोग अब भी यदा कदा यहां-वहां प्रयुक्त होता रहता है। अपने ही हाथों बनाई गई इस्लामिक सरकार में मंडल ने जब पाकिस्तान के मुसलमानों के हाथों निशाना बनाकर दलितों की निर्ममतापूर्वक हत्याएं, बलात् धर्म-परिवर्तन और दलित बहन-बेटियों की आबरू लुटते देखी, तो वह सब कुछ छोड़कर भारत वापस लौट आए और गुमनामी के अंधेरे में ही उनकी मौत हो गई। अपने अंतिम क्षणों में वह इस प्रयोग पर पछताते रहे, पाकिस्तान जाने का दुख उन्हें सालता रहा। पाकिस्तान के बहुसंख्यक मुस्लिमों के हाथों लाखों दलितों के नरसंहार का पश्चाताप उन्हें कचोटता रहा। पश्चाताप इसलिए, क्योंकि इनमें से बहुत से दलित परिवार उन्हीं की अपील पर पाकिस्तान का हिस्सा बनने को तैयार हुए थे।
2013 में डॉ. मनमोहन सिंह की कांग्रेस सरकार ने “डॉ. बाबा साहब आंबेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेस” नाम से उनके सभी भाषणों एवं लेखन को प्रकाशित किया था। इस पुस्तक के 17वें खंड के पृष्ठ संख्या 366 से 369 बड़े ही उल्लेखनीय हैं। 27 नवंबर, 1947 को बाबासाहेब ने लिखा कि ‘मुझे पाकिस्तान और हैदराबाद की अनुसूचित जातियों के लोगों की ओर से असंख्य शिकायतें मिल रही हैं और अनुरोध किया जा रहा है कि उनको दुख और परेशानी से निकालने के लिए मैं कुछ करूं। पाकिस्तान से उन्हें आने नहीं दिया जा रहा है और जबरन उन्हें इस्लाम में परिवर्तित किया जा रहा है। हैदराबाद में भी उन्हें जबरन मुसलमान बनाया जा रहा है, ताकि मुस्लिम आबादी की ताकत बढ़ाई जाए।’
आंबेडकर ने लिखा, अनुसूचित जातियों के लिए जैसी स्थिति भारत में है वैसी ही पाकिस्तान में है, वह आगे लिखते हैं, ‘मैं यही कर सकता हूं कि उन सभी को भारत आने के लिए आमंत्रित करूँ। पृष्ठ 368 पर बाबासाहेब लिखते हैं कि ‘जिन्हें हिंसा के द्वारा इस्लाम धर्म में परिवर्तित कर दिया गया है, मैं उनसे कहता हूं कि आप अपने बारे में यह मत सोचिए कि आप हमारे समुदाय से बाहर हो गए हैं। मैं वादा करता हूं कि यदि वे वापस आते हैं तो उनको अपने समुदाय में सम्मिलित करेंगे और वे उसी तरह हमारे भाई माने जाएंगे जैसे धर्म परिवर्तन के पहले माने जाते थे। बाबासाहेब ने 18 दिसंबर, 1947 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को एक पत्र में लिखा था कि “पाकिस्तान सरकार अनुसूचित जाति के लोगों को भारत आ आने से रोकने के लिए हर हथकंडे अपना रही है। मेरी नजर में इसका कारण यह है कि वह उनसे निम्न स्तर का काम कराने के साथ यह भी चाहती है कि वे भूमिहीन श्रमिकों के रूप में उनकी जमीनों पर काम करें। नेहरू जी से उन्होंने अनुरोध किया कि वह पाकिस्तान सरकार से कहें कि भारत आने के इच्छुक लोगों को भारत आने में कोई रुकावट पैदा न करे।”
नेहरू जी ने 25 दिसंबर, 1947 को इसके जवाब में लिखा कि ‘हम अपनी ओर से जितना हो सकता है, पाकिस्तान से अनुसूचित जातियों को निकालने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, किंतु सत्य यही है कि जवाहरलाल नेहरू अपनी तुष्टिकरण की राजनीति के चलते पाकिस्तान में छूट गये हिंदुओं के संदर्भ में कभी भी गंभीर नहीं रहे। बाबासाहेब ने अपनी पुस्तक “थॉट्स ऑन पाकिस्तान” में भारत के धार्मिक आधार पर पूर्ण विभाजन के आशय से पृष्ठ 103 पर लिखा “यह बात स्वीकार कर लेनी चाहिए कि पाकिस्तान बनने से हिंदुस्तान सांप्रदायिक समस्या से मुक्त नहीं हो जाएगा”। सीमाओं का पुनर्निर्धारण करके पाकिस्तान को तो एक सजातीय देश बनाया जा
सकता है, परंतु हिंदुस्तान तो एक मिश्रित देश बना ही रहेगा। वे स्वतंत्र विभाजित भारत में मुस्लिम समाज के रहने के खतरों का स्पष्ट आभास कर रहे थे व इसके प्रति देश को चेता भी रहे थे, उनकी अटल मान्यता थी कि जनसंख्या की धार्मिक आधार पर पूर्ण अदला-बदली के बिना भारत एक पूर्ण सजातीय देश नहीं बन सकता।
बाबासाहेब राइटिंग्स एंड स्पीचेस के पृष्ठ 367 पर लिखा है कि “अनुसूचित जातियों के लिए चाहे वे पाकिस्तान में हों या हैदराबाद में उनका मुसलमानों तथा मुस्लिम लीग पर विश्वास करना घातक होगा। अनुसूचित जातियों का यह सामान्य व्यवहार हो गया है कि वे चूंकि हिंदुओं को नापसंद करते हैं, इसलिए मुस्लिमों को मित्र के रूप में देखने लगते हैं। यह गलत सोच है। मुसलमान एवं मुस्लिम लीग जितनी तेजी से हो सके अपने को शासक वर्ग बनाने के लिए तत्पर हैं, इसलिए वे कभी अनुसूचित जाति के दावों पर विचार नहीं करेंगे। यह मैं अपने अनुभव के आधार पर कह सकता हूं”। जोगेंद्रनाथ मंडल की “दलित-मुस्लिम राजनीतिक एकता” के विश्वासघाती, असफल प्रयोग व उनके द्वारा खुद को कसूरवार समझे जाने और स्वयं को गहरे संताप व गुमनामी के आलम में झोंक देने के परिदृश्य को बाबासाहेब ने संपूर्णतः आत्मसात कर समझ लिया था और यही अध्याय उनके जीवन भर की राजनैतिक यात्रा में झलकता रहा था।
दलित मुस्लिम एकता की राजनीति के पीछे छिपे हुये भारत पर शासन करने व कब्जा करने व यूज एंड थ्रो की नीति को जितना बाबासाहेब ने समझा व इस बात को अपने समुदाय को समझाने का प्रयास किया उतना स्वातंत्र्योत्तर भारत में कोई अन्य नहीं कर पाया।
स्तोत्र बाबा साहब के भाषण एवं एवं उनकी पुस्तको से लिए गये विचार उनकी प्रसिद्ध पुस्तक 'थाट्स आन पाकिस्तान ) जितना आम्बेडकर जी को जानेगें नतमस्तक होते जायेंगे
हस्ताक्षर डॉ शोभा भारद्वाज [[सदस्य:Dr shobha Bhardwaj|same ]] ([[सदस्य वार्ता:Dr shobha Bhardwaj|वार्ता]]) 07:15, 29 सितंबर 2026 (UTC)
== मेक्यावली की रचना 'दी प्रिंस, की प्रासंगिकता , डॉ शोभा भारद्वाज ==
मैक्यावली की रचना‘दी प्रिंस की प्रसंगिकता
डॉ शोभा भारद्वाज
'द प्रिंस' में मैकियावेली ने राजा को सलाह दी थी कि उसे "शेर जैसी शक्ति और लोमड़ी जैसी चालाकी" रखनी चाहिए
मैक्यावली इटली के महान दार्शनिक थे उनकी पुस्तक ‘दी प्रिंस’ विश्व और भारत में भी अधिकाश राजनेताओं की पुस्तकों की आलमारी में सजी रहती है . पुस्तक एक शक्तिशाली राज्य की कल्पना तथा व्यवहारिक शासन कला का दर्शन है . पुस्तक का प्रकाशन उनकी मृत्यु के बाद 1531 में हुआ .पुस्तक पर रोमन कैथोलिक चर्च ने रोक लगा दी थी. विश्व भर में यह पुस्तक राजनीतिक क्षेत्रों में प्रिय और प्रसिद्ध है उनके विचारों को मैक्यावलिजम कहा जाता है इन्हे कुछ विचारक आधुनिक राजनीति विज्ञान का जनक मानते. अकसर इस कूटनीतिज्ञ की तुलना चाणक्य से करते हैं लेकिन दोनों के विचारों में सैद्धांतिक अंतर है .दी प्रिंस नवनिर्वाचित प्रिंस सत्ता पर अपनी पकड़ कैसे मजबूत करे का दर्शन है . वह राज्य को शक्तिशाली सुसंगठित सम्प्रभु राज्य के रूप में देखना चाहते थे . मैक्यावली के आलोचकों की संख्या बहुत है उनकी पुस्तक में तानाशाहों के आचरण की सटीक व्याख्या है. उनकी कितनी भी आलोचना की जाये वह राजनेताओं के दिलों और आचरण में वह बसते हैं . सत्ता के नये अधिकारी को उन्होंने प्रिंस का नाम दिया उनका प्रिंस तानाशाह है .
उनके अनुसार प्रिंस चार प्रकार के हैं -1.वंशानुगत राजा ,राजा का पुत्र सिंहासन का अधिकारी होता है राजा की मृत्यु के बाद पुत्र का सत्ता पर अधिकार होता है . लेकिन नये प्रिंस को अपनी योग्यता का प्रभाव प्रजा पर शीघ्र डालना चाहिए .वह साधन नहीं साध्य को प्रमुख मानते थे .2. विजेता राजा किसी राज्य पर कब्जा कर सत्ता प्राप्त करता है . वह अपने विरोधियों को कुचल कर सत्ता के शीर्ष पर पहुंचा है . उसे अपने सहयोगियों से समझौते भी कम करने पड़ते हैं
3.भाग्य से सत्ता या कौशल से सत्ता हाथ में आ जाना या राज्य के अंदर समर्थक किसी ऐसे व्यक्ति को सत्ता सौंप देते हैं जिसे आस्कमिक रूप से ,भाग्य वश समीकरण बैठाने के दौरान सत्ता हासिल हो जाती है परन्तु उनकी दया पर निर्भर है जिन्होंने सत्ता में मदद की थी .यह सत्ता स्थायी नहीं होती हाँ नया प्रिंस योग्यता से उसे स्थायी बना सकता है .यह सत्ता समर्थकों की संख्या में वृद्धि कर या युद्ध द्वारा बचाई जा सकती है .ईरान में प्रजातंत्र के लिए संघर्ष चल रहा था लेकिन सत्ता संघर्ष में इस्लामिक शक्तियों के हाथ में सत्ता आ गयी विरोध जारी था लेकिन इराक ने ईरान पर हमला कर दिया इसे सुअवसर समझ कर इस्लामिक शक्तियों ने युद्ध के बहाने पकड़ मजबूत कर ली . वहां के लोग कहते थे मौलानाओं ने हमारी कुर्बानियों से मिली सत्ता को चुरा लिया .
4.चर्च के अधीन राज्य जैसे रोम
सैन्य शक्ति – मैक्यावली के अनुसार सैन्य शक्ति से प्रिंस का महत्व बढ़ता है .उसे सेना को अपनी शक्ति से अपने आधीन रखना चाहिये . सेना का संगठन – 1 . युद्ध की स्थिति में पैसा देकर सेना का गठन करना . भारत में इब्राहीम लोदी के समय बाबर ने देश पर हमला किया इब्राहीम की सेना में एक लाख सैनिक थे यह सब अस्थायी सैनिक थे लेकिन बाबर ने चुस्त दुरुस्त सेना के बल पर इब्राहीम लोदी को हरा कर दिल्ली के तख्त पर कब्जा कर लिया. 2.किसी और राजा से सैनिक सहायता लेना य सामरिक सन्धियाँ करना .3 .अपनी स्वयम की सेना का गठन करना . 4.दोनों प्रकार की सेना अपनी सुसंगठित सेना के अलावा समय पर धन से सैनिक प्राप्त करना .
प्रिंस को सैनिक मामलों को समझना चाहिए युद्ध कला की जानकरी होगी सेना उसका सम्मान करेगी वह अपने सैनिकों पर नियन्त्रण रख अपनी सत्ता को सुरक्षित कर सकता है . प्रिंस को युद्ध से डरना नहीं चाहिए उसमें आलस्य नहीं होना चाहिए .वह तुरंत कार्यवाही में सक्षम हो युद्ध के समय उसका ध्यान पूर्ण रूप से विजय पर केद्रित होना चाहिए . संगठित और अनुशासित सेना ,अनुशासनहीन कायरों की सेना जिसे पैसे से गठित किया गया है पर भारी पड़ती है .आज प्रजातांत्रिक व्यवस्था में अलग रक्षा विभाग हैं हर राज्य अपनी सेना को आधुनिक हथियारों से लैस रखता है सैनिकों को मिलिट्री ट्रेनिग द्वारा युद्ध कौशल सिखाते हैं.पड़ोसी राज्यों से नो वार पैक्ट किये जाते हैं .
प्रिंस के गुण – ‘शेर और लोमड़ी के सिद्धांत’ 'द प्रिंस' में मैकियावेली ने राजा को सलाह दी थी कि उसे "शेर जैसी शक्ति और लोमड़ी जैसी चालाकी" रखनी चाहिए ताकि वह दुश्मनों को डरा सके और जाल (साजिशों) को पहचान सके। वर्तमान दौर की कूटनीति, चुनावी रणनीतियों, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में यह सिद्धांत पूरी तरह सटीक बैठता है, जहाँ नेता लोकलुभावन वादों, गठबंधन के गणित और जरूरत पड़ने पर कड़े फैसलों (जैसे सर्जिकल स्ट्राइक या आर्थिक प्रतिबंध) का उपयोग करे|मोदी सरकार को पाकिस्तान के खिलाफ हमें इन हथियारों का प्रयोग करना पड़ा जिनमें आपरेशन सिंदूर भी है एवं सिंधू जल समझौता मानने से इंकार करना पड़ा .राम चरित्र मानस में वर्णन है श्री राम तीन दिन तक लंका लंका पर चढाई के लिए तीन दिन तक सागर से लंका पहुंचने का मार्ग मांगने के लिए प्रार्थना करते रहे अंत में रामायण के सुंदर काण्ड में वर्णन है
विनय न मानत जलधि जड़ गये तीन दिन बीत
बोले राम सकोप तब भय बिनु होत न प्रीत | लेकिन सनातन धर्म में अंतिम अस्त्र है.
प्रिंस- सैद्धांतिक रूप से प्रिंस में सद्गुणी हो लेकिन अवसर आने पर सद्गुणों का परित्याग करने के लिए भी तत्पर रहें . जनता को भयभीत रखे . आदर्श एवं अच्छाई हर वक्त नहीं चल सकती प्रिंस यदि उदार है जन हित पर धन खर्च करता है जनता की मांगें बढती जायेंगी निरंतर मांगे पूरी करने से राज्य की आर्थिक दशा खराब हो जाएगी नये टैक्स लगने से कर दाता प्रिंस से नफरत करने लगते हैं नफरत से बचना है जनता प्रिंस से प्यार करे या न करे डरे ,भय नफरत तक न पहुंचे यह प्रिंस को चुनना है जिससे डरते हैं उसे चोट नहीं पहुंचाना चाहते ,भयंकर बनें पर अति न हो वह न अधिक दयालु हो न क्रूर लेकिन समय आने पर क्रूरता दिखा सके वादे करे परन्तु वादों पर अड़ा न रहे जरूरत के हिसाब से वादों से पलट सकता है .ऐसा लगना चाहिए जैसे प्रिंस जनता के लिए बहुत कर रहा है और करेगा उसका विश्वास बढ़े और साध्य पूरा हो . इस कला में आज के राजनेता निपुण हैं .प्रिंस चाटुकारों से दूरी बना कर रहे ,सलाह ले लेकिन ऐसे दिखाए जैसे उसको उनकी सलाह की जरूरत नहीं है .महान पुरुषों की नकल कर अपनी महानता का प्रचार करे . प्रिंस को किसी की सम्पति और महिलाओं में हस्ताक्षेप नहीं करना चाहिए .
प्रिंस को विजय कैसे प्राप्त हो- लोग बदलाव नहीं चाहते, सत्ता का लाभ उठाने वाले लाभ से वंचित नहीं रहना चाहते . प्रिंस को विजित होने के बाद उनके विरोध का सामना करना पड़ता है नये लोग बदलाव चाहते हैं जिससे उनको लाभ मिले राजा सबको खुश नहीं रख सकता लेकिन नये सुधारों का विरोध कम होता हैं क्योंकि उनसे नागरिक अनजान होते हैं . हर व्यक्ति की अपेक्षाओं पर प्रिंस के लिए खरा उतरना भी आसान नहीं है जब सत्ता अपने बल पर मिलती है योग्यता से स्थायी रहेगी .
अपने समर्थकों को अपने पास रखों उनकी संख्या बढ़ा कर अपनी सुरक्षा का इंतजाम करें वहीं प्रिंस को बचायेंगे कई बार क्रिमिनल प्रवृति के लोग सत्ता हासिल कर लेते हैं भारत में चुनाव जीतने के लिए बाहूबलियों की मदद ली व्ही बाद में चुनाव जीत कर संसद में बैठ गये. याद रखें लेकिन उनकी क्रूरता से लोग नफरत करते हैं क्रूरता करनी है तो शीघ्रता से करनी चाहिए अपने विरोधियों को जल्दी ही कुचल डालो सद्दाम ने जब सत्ता हासिल की थी अपने अभिजात्य वर्ग के समर्थकों को एक साथ बुलाया मार डाला था मारने के बाद सत्ता पर पकड़ को मजबूत की थी बरसों सुन्नी होते हुए भी शिया बहुल प्रदेश पर राज्य किया था .यहीं सत्ता पर मजबूती से आसीन होने के लिए ईरान की इस्लामी सरकार ने दमन चक्र चलाया रात को जेलों में कितने मुजाहिदीनों एवं विरोधियों को मौत के घाट उतार दिया जब भी सत्ता पलटने की कोशिश की विरोध को कुचल दिया यह मैक्यावली के प्रिंस की विशेषता है .ईरान में रही हूँ मैने मेक्यावली को चरितार्थ होते देखा हैं |
प्रिंस के सहायक कभी उससे अधिक योग्य न हों उनसे खतरा रहेगा .ऐसे लोगों को विश्वास में लें जो अपने दम पर कुछ नहीं कर सकते . नये राजकुमार को अपने महान कार्यों से सम्मान मिलता है कार्य दूसरे करें लेकिन खाते में प्रिंस के जाएँ इसे हम अपने देश में देख सकते हैं जो भी सुधार थे वह गाँधी परिवार के खाते में गये बदनामी डॉ मनमोहन सिंह को मिली जबकि मनमोहन सिंह जी का नाम उनके विद्यार्थी सदैव श्रद्धा से लेंगे .वह ऐसे प्रधान मंत्री थे उनकी बेटियाँ राजनीति में आने की इच्छुक नहीं थीं .
भारत की प्रधान मंत्री इंदिरा जी के सपुत्र राजीव गांधी ने लुसियाना (विसेंज़ा के पास) इटली में जन्मी सोनिया गांधी जी का असली नाम एंटोनिया एडविजे अल्बिना माइनो था उनसे प्रेम विवाह किया इनके पिता स्टेफानो मैनो इटली के ताना शाह मुसौलिनी के सिपाही थे वह 1943 से 1949 तक रूस की जेल में बंद रहे ताना शाह मुसौलिनी फासिस्ट था तथा फांसीवाद के जनक माना जाता हैं| इटली का प्रधानमंत्री बनने के बाद धीरे-धीरे उसने देश को एक सर्वाधिकारवादी तानाशाही में बदल दिया. वह उग्र राष्ट्रवाद, हिंसा, और लोकतंत्र विरोधी नीतियों में विश्वास रखता था. उसने अपने विरोधियों (विशेषकर समाजवादियों और कम्युनिस्टों) का दमन करने के लिए 'ब्लैकशर्ट्स' नामक अर्धसैनिक बल का इस्तेमाल किया दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उसने जर्मनी के तानाशाह एडॉल्फ हिटलर का प्रमुख सहयोगी बन कर द्वितीय विश्व युद्ध में भाग लिया था .
दुखद 21 मई 1991 की रात तमिलनाडू के श्री पेरमबटूर में चुनाव प्रचार के दौरान आत्मघाती हमले में राजीव गांधी का स्वर्गवास हो गया . सोनिया गांधी जी ने राजनीति में आने की इच्छुक नहीं थी लेकिन उनका राजनीतिक सफर चुनाव प्रचार से शुरू हुआ उन्होंने चुनाव भी जीता कांग्रेस की अध्यक्षा बनी . कांग्रेस पार्टी के चुनाव जीतने के बाद मिली जुली सरकार बनी वह प्रधान मंत्री बनने की इच्छुक थीं उनका विदेशीं मूल का मुद्दा आड़े आ गया उन्होंने डॉ मनमोहन सिंह को प्रधान मंत्री पद के उपयुक्त समझा उनका पुत्र राहुल गांधी प्रधान मंत्री पद के लिए अभी परिपक्व नहीं था . डॉ मनमोहन सिंह जी का कार्यकाल दस वर्ष रहा चुनाव में कांग्रेस को सफलता नहीं मिली लोकसभा में बहुमत प्राप्त भाजपा की श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनी दस वर्ष तक सत्ता पर पूरी तरह पकड़ मजबूत पकड़ बनाये रखने वाली एंटोनिया एडविजे अल्बिना माइनो अपने पुत्र राहुल को प्रधान मंत्री पड़ पर आसीन होते नहीं अब तक नहीं देख सकीं .
मैक्यावली के समय सत्ता पर चर्च का बहुत प्रभाव था चर्च से रिश्ता तोड़ कर राजनीति को कूटनीति से जोड़ा .वह ऐसे प्रिंस का समर्थक था जो अपनी सीमाओं का विस्तार कर विजित प्रदेश को पर स्थायी अधिकार करे .विजित प्रदेश में धूमधाम से प्रवेश करे विद्रोहियों का दमन करे . दिल्ली के तख्त पर अधिकार करने के लिए ऐसा होता रहा है . दिल्ली की सत्ता पर जलालुद्दीन खिलजी का अधिकार था उनके अपने भतीजे अलाउद्दीन खिलजी ने देवगिरी को जीत कर अकूत सम्पत्ति के साथ दिल्ली मे शान शौकत के साथ प्रवेश किया अपने चाचा की हत्या कर दिल्ली के सिंहासन पर बैठ कर अपने विरोधियो की हत्या कर अपनी सत्ता को मजबूत किया .
मेक्यावली लिखते हैं प्रिंस अधिकार के बाद वहाँ शांति और सम्पन्नता बढ़ाना राज्य की सीमाओं को निरापद करना पड़ोसियों में भय बनाये रखना प्रिंस का महत्वपूर्ण कार्य हैं .सिकन्दर ने ईरान पर हमला किया उसके साथ उसके गुरु अरस्तु भी थे .ईरान के शिराज शहर के पास बसे खूबसूरत महत्वपूर्ण शहर परसीपोरस को जला दिया पूरा राजवंश खत्म कर दिया एक बच्चा बच गया था .गुरु के आदेश पर उसे भी मार डाला . मैक्यावली इसी धारणा में विश्वास करता था .
आज भी प्रजातंत्र में भी प्रिंस के गुण दिखाई देते हैं चाटुकार अपने नेता की जयजयकार करते रहते है वक्त आने पर धोखा देते हैं स्वर्गीय राजीव गाँधी की आलमारी में ‘दी प्रिंस’रहती थी उनकी पत्नी मैक्यावली के देश इटली की थीं परन्तु वह अपने वित्त मंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह को पहचान नहीं सके उनसे धोखा खाया .
स्तोत्र -पुस्तक , दा प्रिंस ,मेक्यावली द्वारा रचित , इतिहास के अनुभव ,विकिपीडिया द्वितीय विश्व युद्ध का इतिहास , इटली के एकीकरण का इतिहास ,ईरान में प्रवास के दौरान ईरानी रिवोल्यूशन , मुल्लों ने किस प्रकार सत्ता पर अधिकार किया , दीन की सियासत द्वारा सत्ता को मजबूत किया जबकि मेक्यावली को सत्ता पर चर्च का अधिकार स्वीकार नहीं था , भारत की सत्ता पर नेहरू गांधी परिवार का अधिकार , स्वयं का अनुभाव , भारत में सत्ता पर आसीन सल्तनत काल
हस्ताक्षर डॉ शोभा भारद्वाज [[सदस्य:Dr shobha Bhardwaj|same ]] ([[सदस्य वार्ता:Dr shobha Bhardwaj|वार्ता]]) 20:42, 17 अक्टूबर 2026 (UTC)
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== राष्ट्रपति ट्रम्प की टैरिफ नीति ने चीन एवं भारत के सम्बन्धों को नया मोड़ दिया , डॉ शोभा भारद्वाज ==
राष्ट्रपति ट्रम्प की टैरिफ नीति ने चीन एवं भारत के सम्बन्धों को नया मोड़ दिया ,
डॉ शोभा भारद्वाज
चीन विस्तार वादी नीति का पोषक है ,इसके 14 देशों से सीमा विवाद चलते हैं 20 देशों पर नजर हैं| दक्षिणी कोरिया ,वियतनाम ,फिलिपीन ,ब्रुनेई ,इंडोनेशिया , मलेशिया ,आस्ट्रेलिया सभी चीन के एकाधिकार के दावे से परेशान हैं ताईवान को अपने अधिकार में लेने के लिए वह सदैव तत्पर हैं समुद्री इलाकों पर चीन के दावे कोरी भभकी नहीं है जिन्हे वह एक – एक कर कब्जा करना चाहता है |चीन की रणनीति एवं राजनीति को समझने वाले जानते हैं चिनफिंग अमेरिका को प्रभुसत्ता को हटा कर अपनी प्रभूसत्ता को जमाने के लिए आतुर हैं |
भारत – चीन सीमा विवाद का दायरा लद्दाख , डोकलाम , नाथुला से होते हुए अरुणाचल प्रदेश की तवांग घाटी तक जाता है| अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर को वह दक्षिणी तिब्बत कहता है तवांग भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में अरुणाचल राज्य के पश्चिमोत्तर भाग में स्थित है भूटान और चीन तवांग के सीमावर्ती देश है | भारत में लद्दाख एवं अरुणाचल प्रदेश पर उसकी नजर है| 370, 35 a की समाप्ति के बाद लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने पर चीन बौखला गया था एवं पाकिस्तान के साथ अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ मोर्चा खोल रहा था |चीन ने कश्मीर के 20 % हिस्से पर कब्जा किया है इस हिस्से को अक्साई चिन के नाम से जाना जाता है चीन की इस हिस्से पर सदैव नजर रही है 1951 में चीन ने यहाँ सड़क बनानी शुरू की इस सड़क को तिब्बत से जोड़ लिया भारत और चीन के बीच एक स्वतंत्र देश तिब्बत पर चीन ने आधिकार जमा लिया नेहरू सरकार कुछ नहीं कर सकी उलटा अटलबिहारी बाजपेयी को अपने विदेश मंत्री के कार्यकाल 2003 में घोषणा करनी पड़ी ‘तिब्बत चीन का हिस्सा है’ |1962 में भारत चीन युद्ध के दौरान चीन ने इस हिस्से पर कब्जा कर लिया था ब्रम्ह पुत्र नदी पर बाँध बना कर जल को अपने अनुसार रोकना चाहता है कुछ समय के लिए काम रुक गया है |भारत से चीन की सीमा 4054 किलोमीटर तक मिलती है |पाकिस्तान ने पीओके का 2600 किलोमीटर एरिया चीन को सौंप दिया |
डोकलाम विवाद -18 जून 2017 को इस विवाद की शुरुआत हुई थी यह क्षेत्र चीन और भूटान के बीच का विवादित क्षेत्र है इस विवाद में भारत भूटान का साथ देता है भारत एवं भूटान के मजबूत राजनयिक संबंध हैं लेकिन भूटान का चीन से राजनयिक सम्बन्ध नहीं है भूटान अपने क्षेत्र में चीन की घुसपैठ का सदा विरोधी रहा है |करीब 300 भारतीय सैनिकों ने दो बुलडोजर के साथ भारत – चीन सीमा पार कर पीएलए को डोकलाम में सड़क बनाने से रोक दिया |चीन जहां सड़क बना रहा यह स्थान नाथुला पास से मुश्किल से 15 किलोमीटर दूर है उसी एरिया में 20 किलोमीटर दूर का हिस्सा सिक्किम और नार्थ ईस्ट के राज्यों को भारत के बाकी हिस्सों को जोड़ता है अत: हमारे लिए यह क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं |9 अगस्त 2017 चीन ने दावा किया केवल 53 भारतीय सैनिक और एक बुलडोजर अब भी डोकलाम में है भारत ने इस दावे को नकारते हुए कहा उसके 300-350 सैनिक मौजूद हैं |यहाँ कई बार जंग के हालात बने बाद में सितम्बर महीने में ब्रिक्स सम्मेलन से पहले दोनों देशों की सेनायें पीछे हट गयीं |
गलवान घाटी -15 और 16 जून 2020 की रात को रात्रि के समय भारत एवं चीन के सैनिकों के बीच खूनी झडप हुई इसमें हमारे 20 सैनिक शहीद हुए जिनमे कर्नल संतोष बाबू भी थे यह खूनी झड़प प्रोटोकाल के अनुसार हाथापाई एवं पत्थरों से हुई |चीन ने पहले अपने हताहत सैनिकों की संख्या छुपाई बाद में पता चला चीनी सैनिकों की संख्या अधिक थी|
9 दिसम्बर 2022 को 300 से अधिक चीनी सैनिकों ने अरुणाचल के तवांग में 17 हजार फीट ऊंची चोटी पर कब्जा करने की कोशिश की चीनी सैनिकों ने टेम्परेरी वाल पर लगी तारबंदी को तोड़ कर भारतीय सीमा में घुस गये मुस्तैद भारतीय सैनिकों ने उनको पीट कर भगा दिया |
शंघाई सहयोग संगठन -चीन एवं भारत को एससीओ को सीधे संवाद का एक मंच मिला है सीमा निर्धारण ,और बैल्ट एंड रोड इनीशिएटिव (बीआरआई के तहत पीओके )में चीनी निवेश जैसे मुद्दे भी शामिल हैं जो भारत की सम्प्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता को चुनौती देते हैं |
जब तक सीमा विवाद नहीं सुलझेगा इस क्षेत्र में शान्ति सम्भव नहीं है चिनफिंग आर्थिक हितों को भी साधना चाहते हैं लेकिन उनकी नीयत भारतीय सीमा में घुसपैठ कर जमीन हथियाने की रहती हैं भारत की विदेश नीति चीन को सशंकित दृष्टि से देखती है लेकिन ट्रम्प की टैरिफ नीति से दोनों देशों के व्यापारिक हित प्रभावित हुए | ट्रम्प ने ख़ास तौर पर भारत को निशाने पर लिया चीन भी ट्रम्प के व्यवहार से सशंकित है कहते हैं राजनीति में स्थायी दुश्मनी का स्थान नहीं है |
मोदी जी की चीन यात्रा से पहले चीन के विदेश मंत्री वांग यी राष्ट्रीय सलाहकार अजीत डोबाल के निमन्त्रण पर भारत आये थे उन्होंने विदेश मंत्री जयशंकर प्रसाद से मुलाक़ात की उन्होंने कहा दोनों देशों को एक दूसरे के प्रतिद्वंदी के रूप में न देख कर सांझेदार के रूप में साथ आना चाहिए वह प्रधान मंत्री मोदी जी से भी मिले दोनों में इस बात पर सहमती बनी आपसी वार्ता फिर से शुरू की जाये |
आपरेशन सिंदूर के समय चीन ने पाकिस्तान को आधुनिक हथियार ही नहीं दिए थे बल्कि पूरी तरह सहयोग दिया था | भारत चाहता है चीन सहमत हो आतंकवाद विश्व के लिए घातक है जबकि चीन की विचार धारा आतंकवाद के विरुद्ध नहीं है |
जयशंकर जी ने स्पष्टतया कहा दोनों देशों के रिश्तों का कठिन दौर है अब समय आ गया है आगे बढ़ा जाये इसके लिए एक स्पष्ट निर्माणात्मक सोच की जरूरत है तीन बातो पर ध्यान दिया जाए आपसी सम्मान , आपसी समवेदन शीलता आपसी हित, आपसी मतभेदों पर विवाद नहीं होने चाहिए न ही किसी तरह की प्रतिद्वंदिता हो |
चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग शिखर सम्मेलन में भारत के प्रधान मंत्री सात साल बाद चीन गये थे मेजबान देश के राष्ट्रपति चिनफिंग ने आपसी सम्बन्धों को सुधार कर आपसी सहयोग बढाने पर जोर दिया एलिफेंट और ड्रैगन मिल कर काम करें |शिखर समेलन में तीन प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्ष चीन , रूस एवं भारत जुटे | मोदी जी की इस अवसर पर चीनी राष्ट्रपति एवं रूस के राष्ट्रपति पूतिन से घनिष्टता कूट नीति का हिस्सा थी पूतिन के साथ मोदी जी की घनिष्टता चर्चित रही एवं ट्रम्प को भी चेतावनी देनी थी भारत अब पुराना भारत नहीं है विकास शील राष्ट्र की कोटि में आता है |
डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों ख़ास कर टैरिफ नीति ने दुनिया में हलचल मचा दी है |एससीओ के मंच तक मोदी जी ने भारत के दृष्टिकोण को प्रमुखता से रखा पाकिस्तान द्वारा पहलगाम के आतंकी हमले की निंदा करना मोदी जी की कूटनीतिक जीत रही पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवाद पर विश्व का ध्यान खींचा पाकिस्तान के प्रधान मंत्री कुछ नहीं बोल सके जबकि चीन पाकिस्तान का हर सम्भव बचाव करता रहा है पकिस्तान के 80 % रक्षा उपकरण चीन से खरीदे गये हैं| अनेक देशों के साथ द्वियपक्षीय वार्ताए भी हुई ताकि सबसे कूटनीतिक सम्बन्ध मजबूत हो | मोदी जी ने मंच पर भारत की प्राथमिकताओं को मजबूती से रखा |
अमेरिकन मीडिया में एससीओ मिशन की चर्चा जोरो पर हुई अमेरिका की प्रसिद्ध अखबारों की सुर्खियाँ बनी “अमेरिका के खिलाफ चीन की कूटनीतिक मुहिम” ,चिनफिंग एससीओ को सिर्फ सुरक्षा मंच नहीं बल्कि आर्थिक सहयोगी ब्लाक बनाना चाहते है |
ट्रम्प का निजी हित यूएस की विदेश नीति पर भारी पड़ा | अब अमेरिकन उपभोक्ता को महगाई का सामना करना पड़ रहा है |
चीन को भारत जैसा बड़ा बाजार चहिये ऐसा न हो हमारे बाजार चीन के समान से पट जायें | हमें भीं बाजार चाहिए अब अमेरिका के रुख में भी परिवर्तन की उम्मीद है अमेरिकन दूतावास जानता है अमरीका के हित में भारत की मित्रता कितनी जरूरी है | हमें अपने दृष्टिकोण को बदलना पड़ेगा हम मुश्किल पड़ने पर ही जगते हैं|
भारत सरकार एवं अमेरिकन वित्त विभाग की कोशिश है टैरिफ नीति पर वार्ता के बाद समझौता हो जाए जय शंकर प्रसाद एवं पीयूष गोयल जी के अनुसार दो महीने में रास्ता निकल आयेगा|
स्तोत्र =भारत चीन सम्बन्ध पर लेख हिन्दू अखबार , टाईम्स आफ इंडिया ,टीवी डिबेट ,विकी पीडिया ,बीबीसी न्यूज हिंदी भारत चीन सीमा विवाद
भारत में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ,राष्ट्रीय सलाहकार भारत सरकार आपसी वार्ता , प्रेस कांफ्रेंस ,भारत के विदेश मंत्री जय शंकर प्रसाद के स्टेटमेंट
हिन्दुस्तान टाईम्स न्यूजपेपर के सम्पादकीय ,मोदी जी की तियानजिन में द्विपक्षीय वार्ता ,ट्रम्प पर अमेरिकन अखबारों में विभिन्न विचारकों के कमेन्ट ,दी न्यू यार्क टाईम्स
इंटरनेशनल - वैसे भारत विरोधी ब्यान देते हैं लेकिन मीडिया के विचार भारत अमेरिकन सम्बन्धों पर ट्रम्प की नीति की आलोचना अन्य अमेरिकन मीडिया जगत मे एससीओ मिशन अखबारों की सुर्खियाँ बना |
एससीओ बैठक में मोदी जी ने अपने विचार एवं आतंकवाद पर चर्चा प्रभावशाली ढंग से की
मेरी पीएचडी का विषय Anglo American Impact on The India - Pakistan Relations है पाकिस्तान चीन के सम्बन्धों पर मेरे विचार भारत चीन के सम्बन्धों पर असर हस्ताक्षर - डॉ शोभा भारद्वाज [[सदस्य:Dr shobha Bhardwaj|same ]] ([[सदस्य वार्ता:Dr shobha Bhardwaj|वार्ता]]) 20:31, 11 सितंबर 2025 (UTC)
== भीम मीम की राजनीति :बाबा साहेब आम्बेडकर की नजर में ( ऐतिहासिक पृष्ट भूमि ) डॉ शोभा भारद्वाज ==
भीम मीम की राजनीति : बाबासाहेब व जोगेंद्र्नाथ की दृष्टि से( ऐतिहासिक पृष्ट भूमि )
डॉ शोभा भारद्वाज
राजनीतक दल चुनाव के दिनों में दलित वंचित समाज को अपने पक्ष में लेने के लिए अनेक हथकंडे चलते हैं जिससे वह उनके सामूहिक वोट बैंक बन जाएँ अधिकाँश दलित सनातन से जुड़े हैं कुछ ने बोद्ध धर्म अपना लिया है कुछ धर्म से अलगाव बना चुके हैं कुछ ने क्रिश्चेनिटी अपना ली आम्बेडकर जी ने धर्म बदला लेकिन उन्होंने बोद्ध धर्म ग्रहण किया जो सनातन धर्म का ही हिस्सा है | भारतीय दलित राजनीति वर्तमान समय में सर्वाधिक दिग्भ्रमित दौर में है। दुर्भाग्य से वर्तमान समय ही इतिहास का वह संधिकाल या संक्रमणकाल है जबकि दलित राजनीति को एक दिशा की सर्वाधिक आवश्यकता है। भीम मीम के नाम का सामाजिक जहर बाबासाहेब अम्बेडकर के समूचे चिंतन को लील रहा है।भीम मीम के इतिहास को देखना, पढ़ना व समझना आज के अनसुचित जाति समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता हो गई है ।
स्वतंत्र भारत की राजनीति व समाज को जिन दो व्यक्तियों ने सर्वाधिक प्रभावित किया है वे हैं पहले गांधी जी व दूसरे भीमराव रामजी अंबेडकर यानि बाबासाहेब। इनमें से बाबासाहेब की भारतीय राजनीति में बाबासाहेब की कांग्रेस द्वारा घोर उपेक्षा के बाद भी उनकी स्थापना का इतिहास पढ़ना हो तो एक और व्यक्ति का उल्लेख आवश्यक हो जाता है। वह व्यक्ति है दलित नेता जोगेंद्रनाथ मंडल। कांग्रेस की घनघोर और अटूट उपेक्षा के शिकार जोगेंद्रनाथ मंडल ने यदि स्वतंत्रता पूर्व की भारतीय राजनीति में बाबासाहेब को सफलतापूर्वक स्थापित न किया होता तो आज भारत में दलित चिंतन का स्वरूप आमूलचूल भिन्न होता। इसके आगे आज यदि हम नागरिकता संशोधन कानून के सामाजिक मंथन का अध्ययन, मनन करें तो दो व्यक्तित्वों का स्मरण आवश्यक हो जाता है पहले जोगेंद्रनाथ मंडल और दूसरे बाबासाहेब। इन दोनों महानुभावों ने नागरिकता संशोधन कानून व पाकिस्तान में बसे अल्पसंख्यक हिंदुओं को भारतीय नागरिकता देने के कानून के महत्व व आवश्यकता को दशकों पूर्व पहचान लिया था।
प्रारंभ से ही दलित चिंतन को उपेक्षा की दृष्टि से देखने वाली कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति ने स्वभावतः ही प्रारंभ में दलित नेता जोगेंद्रनाथ मंडल व बाबा साहेब अंबेडकर की घोर उपेक्षा की थी। कांग्रेस ने जब बाबासाहेब के प्रति बेहद अपमानजनक रवैया अपनाते हुये संविधान सभा में भेजे गए प्रारंभिक 296 सदस्यों में अंबेडकर को जगह नहीं दी थी तब जोगेंद्रनाथ मंडल ने अंबेडकर जी को संविधान सभा में सम्मिलित करने की भूमिका बनाई थी। जब कांग्रेस ने संविधान सभा में अंबेडकर जी को जाने से रोकने के लिये तमाम प्रकार के प्रपंच करना प्रारंभ किये तब मंडल ने बंगाल के खुलना-जैसोर से अपनी सीट खाली करके बाबा साहब को चुनाव जितवाकर संविधान सभा के लिए निर्वाचित कराया था और समूची कांग्रेस को चौंकाते छकाते हुये भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय प्रारंभ किया था।
विभाजन के विषय में यह तय हुआ था कि जिन क्षेत्रों में हिंदू जनसंख्या 51% से अधिक है वे क्षेत्र भारत में सम्मिलित किये जायेंगे। इसके बाद भी कांग्रेस ने तब हद दर्जे की गलती करते हुये बाबा साहेब को संविधान सभा में अप्रासंगिक करने हेतु बंगाल के खुलना-जैसोर को 71% हिंदू बहुल वाला क्षेत्र होने के बाद भी पाकिस्तान को सौंप दिया और तब बाबासाहेब तकनीकी तौर पर पाकिस्तानी संविधान सभा के सदस्य माने गये थे। बाबासाहेब ने इसका विरोध किया, जिसके बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप से बाबासाहेब बंबई राज्य से एमएस जयकर द्वारा खाली की गई सीट से चुनकर भारतीय संविधान सभा में पहुंच पाये थे। बाबासाहेब प्रारंभ से ही अखंड भारत के पक्ष में थे।
उन्होंने बंटवारे के लिए तैयार महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के साथ जिन्ना का भी पुरजोर विरोध किया। उनकी पुस्तक “थॉट्स ऑन पाकिस्तान” में इसका पूरा विवरण है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के चलते कांग्रेस ने देश का बंटवारा कर डाला। बाबासाहेब का यह स्पष्ट मानना था कि जब धार्मिक आधार पर बंटवारा हो चुका है, तब पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं को भारत आ जाना चाहिए। उन्होंने यह यह भी आशंका जताई थी कि धर्म के आधार पर देश के बंटवारे से हिंदुओं को गंभीर क्षति पहुंचेगी और ऐसा हुआ भी।
जोगेंद्रनाथ मंडल ने तब पाकिस्तानी सरकार से अपने त्यागपत्र में विस्तृत तौर पर लिखा था कि मंत्री रहते हुए भी वे पाकिस्तान में दलितों को मुस्लिमों के अत्याचार से नहीं बचा पाए। बंटवारे के बाद पाकिस्तान में बचे ज्यादातर दलित या तो मार दिए गए या फिर मजबूरी में उन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया। अपनी ही हुकूमत में वह चीखते-चिल्लाते रहे, लेकिन पाकिस्तान सरकार न तो दलित हिंदुओं की मदद के लिए आई, न ही अन्य अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा हेतु उसने कोई कदम उठाया।
इस प्रकार देश में प्रथम मुस्लिम-दलित राजनीति का प्रयोग हुआ जो कि बेहद असफल व निराशाजनक रहा किंतु यह प्रयोग अब भी यदा कदा यहां-वहां प्रयुक्त होता रहता है। अपने ही हाथों बनाई गई इस्लामिक सरकार में मंडल ने जब पाकिस्तान के मुसलमानों के हाथों निशाना बनाकर दलितों की निर्ममतापूर्वक हत्याएं, बलात् धर्म-परिवर्तन और दलित बहन-बेटियों की आबरू लुटते देखी, तो वह सब कुछ छोड़कर भारत वापस लौट आए और गुमनामी के अंधेरे में ही उनकी मौत हो गई। अपने अंतिम क्षणों में वह इस प्रयोग पर पछताते रहे, पाकिस्तान जाने का दुख उन्हें सालता रहा। पाकिस्तान के बहुसंख्यक मुस्लिमों के हाथों लाखों दलितों के नरसंहार का पश्चाताप उन्हें कचोटता रहा। पश्चाताप इसलिए, क्योंकि इनमें से बहुत से दलित परिवार उन्हीं की अपील पर पाकिस्तान का हिस्सा बनने को तैयार हुए थे।
2013 में डॉ. मनमोहन सिंह की कांग्रेस सरकार ने “डॉ. बाबा साहब आंबेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेस” नाम से उनके सभी भाषणों एवं लेखन को प्रकाशित किया था। इस पुस्तक के 17वें खंड के पृष्ठ संख्या 366 से 369 बड़े ही उल्लेखनीय हैं। 27 नवंबर, 1947 को बाबासाहेब ने लिखा कि ‘मुझे पाकिस्तान और हैदराबाद की अनुसूचित जातियों के लोगों की ओर से असंख्य शिकायतें मिल रही हैं और अनुरोध किया जा रहा है कि उनको दुख और परेशानी से निकालने के लिए मैं कुछ करूं। पाकिस्तान से उन्हें आने नहीं दिया जा रहा है और जबरन उन्हें इस्लाम में परिवर्तित किया जा रहा है। हैदराबाद में भी उन्हें जबरन मुसलमान बनाया जा रहा है, ताकि मुस्लिम आबादी की ताकत बढ़ाई जाए।’
आंबेडकर ने लिखा, अनुसूचित जातियों के लिए जैसी स्थिति भारत में है वैसी ही पाकिस्तान में है, वह आगे लिखते हैं, ‘मैं यही कर सकता हूं कि उन सभी को भारत आने के लिए आमंत्रित करूँ। पृष्ठ 368 पर बाबासाहेब लिखते हैं कि ‘जिन्हें हिंसा के द्वारा इस्लाम धर्म में परिवर्तित कर दिया गया है, मैं उनसे कहता हूं कि आप अपने बारे में यह मत सोचिए कि आप हमारे समुदाय से बाहर हो गए हैं। मैं वादा करता हूं कि यदि वे वापस आते हैं तो उनको अपने समुदाय में सम्मिलित करेंगे और वे उसी तरह हमारे भाई माने जाएंगे जैसे धर्म परिवर्तन के पहले माने जाते थे। बाबासाहेब ने 18 दिसंबर, 1947 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को एक पत्र में लिखा था कि “पाकिस्तान सरकार अनुसूचित जाति के लोगों को भारत आ आने से रोकने के लिए हर हथकंडे अपना रही है। मेरी नजर में इसका कारण यह है कि वह उनसे निम्न स्तर का काम कराने के साथ यह भी चाहती है कि वे भूमिहीन श्रमिकों के रूप में उनकी जमीनों पर काम करें। नेहरू जी से उन्होंने अनुरोध किया कि वह पाकिस्तान सरकार से कहें कि भारत आने के इच्छुक लोगों को भारत आने में कोई रुकावट पैदा न करे।”
नेहरू जी ने 25 दिसंबर, 1947 को इसके जवाब में लिखा कि ‘हम अपनी ओर से जितना हो सकता है, पाकिस्तान से अनुसूचित जातियों को निकालने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, किंतु सत्य यही है कि जवाहरलाल नेहरू अपनी तुष्टिकरण की राजनीति के चलते पाकिस्तान में छूट गये हिंदुओं के संदर्भ में कभी भी गंभीर नहीं रहे। बाबासाहेब ने अपनी पुस्तक “थॉट्स ऑन पाकिस्तान” में भारत के धार्मिक आधार पर पूर्ण विभाजन के आशय से पृष्ठ 103 पर लिखा “यह बात स्वीकार कर लेनी चाहिए कि पाकिस्तान बनने से हिंदुस्तान सांप्रदायिक समस्या से मुक्त नहीं हो जाएगा”। सीमाओं का पुनर्निर्धारण करके पाकिस्तान को तो एक सजातीय देश बनाया जा
सकता है, परंतु हिंदुस्तान तो एक मिश्रित देश बना ही रहेगा। वे स्वतंत्र विभाजित भारत में मुस्लिम समाज के रहने के खतरों का स्पष्ट आभास कर रहे थे व इसके प्रति देश को चेता भी रहे थे, उनकी अटल मान्यता थी कि जनसंख्या की धार्मिक आधार पर पूर्ण अदला-बदली के बिना भारत एक पूर्ण सजातीय देश नहीं बन सकता।
बाबासाहेब राइटिंग्स एंड स्पीचेस के पृष्ठ 367 पर लिखा है कि “अनुसूचित जातियों के लिए चाहे वे पाकिस्तान में हों या हैदराबाद में उनका मुसलमानों तथा मुस्लिम लीग पर विश्वास करना घातक होगा। अनुसूचित जातियों का यह सामान्य व्यवहार हो गया है कि वे चूंकि हिंदुओं को नापसंद करते हैं, इसलिए मुस्लिमों को मित्र के रूप में देखने लगते हैं। यह गलत सोच है। मुसलमान एवं मुस्लिम लीग जितनी तेजी से हो सके अपने को शासक वर्ग बनाने के लिए तत्पर हैं, इसलिए वे कभी अनुसूचित जाति के दावों पर विचार नहीं करेंगे। यह मैं अपने अनुभव के आधार पर कह सकता हूं”। जोगेंद्रनाथ मंडल की “दलित-मुस्लिम राजनीतिक एकता” के विश्वासघाती, असफल प्रयोग व उनके द्वारा खुद को कसूरवार समझे जाने और स्वयं को गहरे संताप व गुमनामी के आलम में झोंक देने के परिदृश्य को बाबासाहेब ने संपूर्णतः आत्मसात कर समझ लिया था और यही अध्याय उनके जीवन भर की राजनैतिक यात्रा में झलकता रहा था।
दलित मुस्लिम एकता की राजनीति के पीछे छिपे हुये भारत पर शासन करने व कब्जा करने व यूज एंड थ्रो की नीति को जितना बाबासाहेब ने समझा व इस बात को अपने समुदाय को समझाने का प्रयास किया उतना स्वातंत्र्योत्तर भारत में कोई अन्य नहीं कर पाया।
स्तोत्र बाबा साहब के भाषण एवं एवं उनकी पुस्तको से लिए गये विचार उनकी प्रसिद्ध पुस्तक 'थाट्स आन पाकिस्तान ) जितना आम्बेडकर जी को जानेगें नतमस्तक होते जायेंगे
हस्ताक्षर डॉ शोभा भारद्वाज [[सदस्य:Dr shobha Bhardwaj|same ]] ([[सदस्य वार्ता:Dr shobha Bhardwaj|वार्ता]]) 07:15, 29 सितंबर 2026 (UTC)
== मेक्यावली की रचना 'दी प्रिंस, की प्रासंगिकता , डॉ शोभा भारद्वाज ==
मैक्यावली की रचना‘दी प्रिंस की प्रसंगिकता
डॉ शोभा भारद्वाज
'द प्रिंस' में मैकियावेली ने राजा को सलाह दी थी कि उसे "शेर जैसी शक्ति और लोमड़ी जैसी चालाकी" रखनी चाहिए
मैक्यावली इटली के महान दार्शनिक थे उनकी पुस्तक ‘दी प्रिंस’ विश्व और भारत में भी अधिकाश राजनेताओं की पुस्तकों की आलमारी में सजी रहती है . पुस्तक एक शक्तिशाली राज्य की कल्पना तथा व्यवहारिक शासन कला का दर्शन है . पुस्तक का प्रकाशन उनकी मृत्यु के बाद 1531 में हुआ .पुस्तक पर रोमन कैथोलिक चर्च ने रोक लगा दी थी. विश्व भर में यह पुस्तक राजनीतिक क्षेत्रों में प्रिय और प्रसिद्ध है उनके विचारों को मैक्यावलिजम कहा जाता है इन्हे कुछ विचारक आधुनिक राजनीति विज्ञान का जनक मानते. अकसर इस कूटनीतिज्ञ की तुलना चाणक्य से करते हैं लेकिन दोनों के विचारों में सैद्धांतिक अंतर है .दी प्रिंस नवनिर्वाचित प्रिंस सत्ता पर अपनी पकड़ कैसे मजबूत करे का दर्शन है . वह राज्य को शक्तिशाली सुसंगठित सम्प्रभु राज्य के रूप में देखना चाहते थे . मैक्यावली के आलोचकों की संख्या बहुत है उनकी पुस्तक में तानाशाहों के आचरण की सटीक व्याख्या है. उनकी कितनी भी आलोचना की जाये वह राजनेताओं के दिलों और आचरण में वह बसते हैं . सत्ता के नये अधिकारी को उन्होंने प्रिंस का नाम दिया उनका प्रिंस तानाशाह है .
उनके अनुसार प्रिंस चार प्रकार के हैं -1.वंशानुगत राजा ,राजा का पुत्र सिंहासन का अधिकारी होता है राजा की मृत्यु के बाद पुत्र का सत्ता पर अधिकार होता है . लेकिन नये प्रिंस को अपनी योग्यता का प्रभाव प्रजा पर शीघ्र डालना चाहिए .वह साधन नहीं साध्य को प्रमुख मानते थे .2. विजेता राजा किसी राज्य पर कब्जा कर सत्ता प्राप्त करता है . वह अपने विरोधियों को कुचल कर सत्ता के शीर्ष पर पहुंचा है . उसे अपने सहयोगियों से समझौते भी कम करने पड़ते हैं
3.भाग्य से सत्ता या कौशल से सत्ता हाथ में आ जाना या राज्य के अंदर समर्थक किसी ऐसे व्यक्ति को सत्ता सौंप देते हैं जिसे आस्कमिक रूप से ,भाग्य वश समीकरण बैठाने के दौरान सत्ता हासिल हो जाती है परन्तु उनकी दया पर निर्भर है जिन्होंने सत्ता में मदद की थी .यह सत्ता स्थायी नहीं होती हाँ नया प्रिंस योग्यता से उसे स्थायी बना सकता है .यह सत्ता समर्थकों की संख्या में वृद्धि कर या युद्ध द्वारा बचाई जा सकती है .ईरान में प्रजातंत्र के लिए संघर्ष चल रहा था लेकिन सत्ता संघर्ष में इस्लामिक शक्तियों के हाथ में सत्ता आ गयी विरोध जारी था लेकिन इराक ने ईरान पर हमला कर दिया इसे सुअवसर समझ कर इस्लामिक शक्तियों ने युद्ध के बहाने पकड़ मजबूत कर ली . वहां के लोग कहते थे मौलानाओं ने हमारी कुर्बानियों से मिली सत्ता को चुरा लिया .
4.चर्च के अधीन राज्य जैसे रोम
सैन्य शक्ति – मैक्यावली के अनुसार सैन्य शक्ति से प्रिंस का महत्व बढ़ता है .उसे सेना को अपनी शक्ति से अपने आधीन रखना चाहिये . सेना का संगठन – 1 . युद्ध की स्थिति में पैसा देकर सेना का गठन करना . भारत में इब्राहीम लोदी के समय बाबर ने देश पर हमला किया इब्राहीम की सेना में एक लाख सैनिक थे यह सब अस्थायी सैनिक थे लेकिन बाबर ने चुस्त दुरुस्त सेना के बल पर इब्राहीम लोदी को हरा कर दिल्ली के तख्त पर कब्जा कर लिया. 2.किसी और राजा से सैनिक सहायता लेना य सामरिक सन्धियाँ करना .3 .अपनी स्वयम की सेना का गठन करना . 4.दोनों प्रकार की सेना अपनी सुसंगठित सेना के अलावा समय पर धन से सैनिक प्राप्त करना .
प्रिंस को सैनिक मामलों को समझना चाहिए युद्ध कला की जानकरी होगी सेना उसका सम्मान करेगी वह अपने सैनिकों पर नियन्त्रण रख अपनी सत्ता को सुरक्षित कर सकता है . प्रिंस को युद्ध से डरना नहीं चाहिए उसमें आलस्य नहीं होना चाहिए .वह तुरंत कार्यवाही में सक्षम हो युद्ध के समय उसका ध्यान पूर्ण रूप से विजय पर केद्रित होना चाहिए . संगठित और अनुशासित सेना ,अनुशासनहीन कायरों की सेना जिसे पैसे से गठित किया गया है पर भारी पड़ती है .आज प्रजातांत्रिक व्यवस्था में अलग रक्षा विभाग हैं हर राज्य अपनी सेना को आधुनिक हथियारों से लैस रखता है सैनिकों को मिलिट्री ट्रेनिग द्वारा युद्ध कौशल सिखाते हैं.पड़ोसी राज्यों से नो वार पैक्ट किये जाते हैं .
प्रिंस के गुण – ‘शेर और लोमड़ी के सिद्धांत’ 'द प्रिंस' में मैकियावेली ने राजा को सलाह दी थी कि उसे "शेर जैसी शक्ति और लोमड़ी जैसी चालाकी" रखनी चाहिए ताकि वह दुश्मनों को डरा सके और जाल (साजिशों) को पहचान सके। वर्तमान दौर की कूटनीति, चुनावी रणनीतियों, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में यह सिद्धांत पूरी तरह सटीक बैठता है, जहाँ नेता लोकलुभावन वादों, गठबंधन के गणित और जरूरत पड़ने पर कड़े फैसलों (जैसे सर्जिकल स्ट्राइक या आर्थिक प्रतिबंध) का उपयोग करे|मोदी सरकार को पाकिस्तान के खिलाफ हमें इन हथियारों का प्रयोग करना पड़ा जिनमें आपरेशन सिंदूर भी है एवं सिंधू जल समझौता मानने से इंकार करना पड़ा .राम चरित्र मानस में वर्णन है श्री राम तीन दिन तक लंका लंका पर चढाई के लिए तीन दिन तक सागर से लंका पहुंचने का मार्ग मांगने के लिए प्रार्थना करते रहे अंत में रामायण के सुंदर काण्ड में वर्णन है
विनय न मानत जलधि जड़ गये तीन दिन बीत
बोले राम सकोप तब भय बिनु होत न प्रीत | लेकिन सनातन धर्म में अंतिम अस्त्र है.
प्रिंस- सैद्धांतिक रूप से प्रिंस में सद्गुणी हो लेकिन अवसर आने पर सद्गुणों का परित्याग करने के लिए भी तत्पर रहें . जनता को भयभीत रखे . आदर्श एवं अच्छाई हर वक्त नहीं चल सकती प्रिंस यदि उदार है जन हित पर धन खर्च करता है जनता की मांगें बढती जायेंगी निरंतर मांगे पूरी करने से राज्य की आर्थिक दशा खराब हो जाएगी नये टैक्स लगने से कर दाता प्रिंस से नफरत करने लगते हैं नफरत से बचना है जनता प्रिंस से प्यार करे या न करे डरे ,भय नफरत तक न पहुंचे यह प्रिंस को चुनना है जिससे डरते हैं उसे चोट नहीं पहुंचाना चाहते ,भयंकर बनें पर अति न हो वह न अधिक दयालु हो न क्रूर लेकिन समय आने पर क्रूरता दिखा सके वादे करे परन्तु वादों पर अड़ा न रहे जरूरत के हिसाब से वादों से पलट सकता है .ऐसा लगना चाहिए जैसे प्रिंस जनता के लिए बहुत कर रहा है और करेगा उसका विश्वास बढ़े और साध्य पूरा हो . इस कला में आज के राजनेता निपुण हैं .प्रिंस चाटुकारों से दूरी बना कर रहे ,सलाह ले लेकिन ऐसे दिखाए जैसे उसको उनकी सलाह की जरूरत नहीं है .महान पुरुषों की नकल कर अपनी महानता का प्रचार करे . प्रिंस को किसी की सम्पति और महिलाओं में हस्ताक्षेप नहीं करना चाहिए .
प्रिंस को विजय कैसे प्राप्त हो- लोग बदलाव नहीं चाहते, सत्ता का लाभ उठाने वाले लाभ से वंचित नहीं रहना चाहते . प्रिंस को विजित होने के बाद उनके विरोध का सामना करना पड़ता है नये लोग बदलाव चाहते हैं जिससे उनको लाभ मिले राजा सबको खुश नहीं रख सकता लेकिन नये सुधारों का विरोध कम होता हैं क्योंकि उनसे नागरिक अनजान होते हैं . हर व्यक्ति की अपेक्षाओं पर प्रिंस के लिए खरा उतरना भी आसान नहीं है जब सत्ता अपने बल पर मिलती है योग्यता से स्थायी रहेगी .
अपने समर्थकों को अपने पास रखों उनकी संख्या बढ़ा कर अपनी सुरक्षा का इंतजाम करें वहीं प्रिंस को बचायेंगे कई बार क्रिमिनल प्रवृति के लोग सत्ता हासिल कर लेते हैं भारत में चुनाव जीतने के लिए बाहूबलियों की मदद ली व्ही बाद में चुनाव जीत कर संसद में बैठ गये. याद रखें लेकिन उनकी क्रूरता से लोग नफरत करते हैं क्रूरता करनी है तो शीघ्रता से करनी चाहिए अपने विरोधियों को जल्दी ही कुचल डालो सद्दाम ने जब सत्ता हासिल की थी अपने अभिजात्य वर्ग के समर्थकों को एक साथ बुलाया मार डाला था मारने के बाद सत्ता पर पकड़ को मजबूत की थी बरसों सुन्नी होते हुए भी शिया बहुल प्रदेश पर राज्य किया था .यहीं सत्ता पर मजबूती से आसीन होने के लिए ईरान की इस्लामी सरकार ने दमन चक्र चलाया रात को जेलों में कितने मुजाहिदीनों एवं विरोधियों को मौत के घाट उतार दिया जब भी सत्ता पलटने की कोशिश की विरोध को कुचल दिया यह मैक्यावली के प्रिंस की विशेषता है .ईरान में रही हूँ मैने मेक्यावली को चरितार्थ होते देखा हैं |
प्रिंस के सहायक कभी उससे अधिक योग्य न हों उनसे खतरा रहेगा .ऐसे लोगों को विश्वास में लें जो अपने दम पर कुछ नहीं कर सकते . नये राजकुमार को अपने महान कार्यों से सम्मान मिलता है कार्य दूसरे करें लेकिन खाते में प्रिंस के जाएँ इसे हम अपने देश में देख सकते हैं जो भी सुधार थे वह गाँधी परिवार के खाते में गये बदनामी डॉ मनमोहन सिंह को मिली जबकि मनमोहन सिंह जी का नाम उनके विद्यार्थी सदैव श्रद्धा से लेंगे .वह ऐसे प्रधान मंत्री थे उनकी बेटियाँ राजनीति में आने की इच्छुक नहीं थीं .
भारत की प्रधान मंत्री इंदिरा जी के सपुत्र राजीव गांधी ने लुसियाना (विसेंज़ा के पास) इटली में जन्मी सोनिया गांधी जी का असली नाम एंटोनिया एडविजे अल्बिना माइनो था उनसे प्रेम विवाह किया इनके पिता स्टेफानो मैनो इटली के ताना शाह मुसौलिनी के सिपाही थे वह 1943 से 1949 तक रूस की जेल में बंद रहे ताना शाह मुसौलिनी फासिस्ट था तथा फांसीवाद के जनक माना जाता हैं| इटली का प्रधानमंत्री बनने के बाद धीरे-धीरे उसने देश को एक सर्वाधिकारवादी तानाशाही में बदल दिया. वह उग्र राष्ट्रवाद, हिंसा, और लोकतंत्र विरोधी नीतियों में विश्वास रखता था. उसने अपने विरोधियों (विशेषकर समाजवादियों और कम्युनिस्टों) का दमन करने के लिए 'ब्लैकशर्ट्स' नामक अर्धसैनिक बल का इस्तेमाल किया दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उसने जर्मनी के तानाशाह एडॉल्फ हिटलर का प्रमुख सहयोगी बन कर द्वितीय विश्व युद्ध में भाग लिया था .
दुखद 21 मई 1991 की रात तमिलनाडू के श्री पेरमबटूर में चुनाव प्रचार के दौरान आत्मघाती हमले में राजीव गांधी का स्वर्गवास हो गया . सोनिया गांधी जी ने राजनीति में आने की इच्छुक नहीं थी लेकिन उनका राजनीतिक सफर चुनाव प्रचार से शुरू हुआ उन्होंने चुनाव भी जीता कांग्रेस की अध्यक्षा बनी . कांग्रेस पार्टी के चुनाव जीतने के बाद मिली जुली सरकार बनी वह प्रधान मंत्री बनने की इच्छुक थीं उनका विदेशीं मूल का मुद्दा आड़े आ गया उन्होंने डॉ मनमोहन सिंह को प्रधान मंत्री पद के उपयुक्त समझा उनका पुत्र राहुल गांधी प्रधान मंत्री पद के लिए अभी परिपक्व नहीं था . डॉ मनमोहन सिंह जी का कार्यकाल दस वर्ष रहा चुनाव में कांग्रेस को सफलता नहीं मिली लोकसभा में बहुमत प्राप्त भाजपा की श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनी दस वर्ष तक सत्ता पर पूरी तरह पकड़ मजबूत पकड़ बनाये रखने वाली एंटोनिया एडविजे अल्बिना माइनो अपने पुत्र राहुल को प्रधान मंत्री पड़ पर आसीन होते नहीं अब तक नहीं देख सकीं .
मैक्यावली के समय सत्ता पर चर्च का बहुत प्रभाव था चर्च से रिश्ता तोड़ कर राजनीति को कूटनीति से जोड़ा .वह ऐसे प्रिंस का समर्थक था जो अपनी सीमाओं का विस्तार कर विजित प्रदेश को पर स्थायी अधिकार करे .विजित प्रदेश में धूमधाम से प्रवेश करे विद्रोहियों का दमन करे . दिल्ली के तख्त पर अधिकार करने के लिए ऐसा होता रहा है . दिल्ली की सत्ता पर जलालुद्दीन खिलजी का अधिकार था उनके अपने भतीजे अलाउद्दीन खिलजी ने देवगिरी को जीत कर अकूत सम्पत्ति के साथ दिल्ली मे शान शौकत के साथ प्रवेश किया अपने चाचा की हत्या कर दिल्ली के सिंहासन पर बैठ कर अपने विरोधियो की हत्या कर अपनी सत्ता को मजबूत किया .
मेक्यावली लिखते हैं प्रिंस अधिकार के बाद वहाँ शांति और सम्पन्नता बढ़ाना राज्य की सीमाओं को निरापद करना पड़ोसियों में भय बनाये रखना प्रिंस का महत्वपूर्ण कार्य हैं .सिकन्दर ने ईरान पर हमला किया उसके साथ उसके गुरु अरस्तु भी थे .ईरान के शिराज शहर के पास बसे खूबसूरत महत्वपूर्ण शहर परसीपोरस को जला दिया पूरा राजवंश खत्म कर दिया एक बच्चा बच गया था .गुरु के आदेश पर उसे भी मार डाला . मैक्यावली इसी धारणा में विश्वास करता था .
आज भी प्रजातंत्र में भी प्रिंस के गुण दिखाई देते हैं चाटुकार अपने नेता की जयजयकार करते रहते है वक्त आने पर धोखा देते हैं स्वर्गीय राजीव गाँधी की आलमारी में ‘दी प्रिंस’रहती थी उनकी पत्नी मैक्यावली के देश इटली की थीं परन्तु वह अपने वित्त मंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह को पहचान नहीं सके उनसे धोखा खाया .
स्तोत्र -पुस्तक , दा प्रिंस ,मेक्यावली द्वारा रचित , इतिहास के अनुभव ,विकिपीडिया द्वितीय विश्व युद्ध का इतिहास , इटली के एकीकरण का इतिहास ,ईरान में प्रवास के दौरान ईरानी रिवोल्यूशन , मुल्लों ने किस प्रकार सत्ता पर अधिकार किया , दीन की सियासत द्वारा सत्ता को मजबूत किया जबकि मेक्यावली को सत्ता पर चर्च का अधिकार स्वीकार नहीं था , भारत की सत्ता पर नेहरू गांधी परिवार का अधिकार , स्वयं का अनुभाव , भारत में सत्ता पर आसीन सल्तनत काल
हस्ताक्षर डॉ शोभा भारद्वाज [[सदस्य:Dr shobha Bhardwaj|same ]] ([[सदस्य वार्ता:Dr shobha Bhardwaj|वार्ता]]) 20:42, 17 अक्टूबर 2026 (UTC)
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भारतीय नौसेना का इतिहास
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[[चित्र:Rajendra map new.svg|right|thumb|300px|[[राजेन्द्र चोल]] का का साम्राज्य (१०३० ई) भारतीय नौसैना के गौरवपूर्व इतिहास का द्योतक है।]]
[[भारतीय नौसेना|भारत की नौसेना]] का इतिहास बहुत सम्पन्न है और ५००० वर्ष से भी पुराना है। विश्व का पहला [[ज्वार भाटा|ज्वार-भाटीय]] [[गोदी]] सम्भवतः [[लोथल]] में २३०० ईसापूर्व बनाया गया था।
== आधुनिक युग में भारतीय नौसेना ==
भारतीय नौसेना का इतिहास वर्ष 1612 से मिलता है। 5 सितंबर, 1612 को [[ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी]] ने [[समुद्री डाकू|समुद्री डकैतों]] और अपने प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबले के लिए एक छोटे से समुद्री रक्षक बेड़े का गठन किया। इसे ईस्ट इंडिया कंपनी के 'मरीन' के नाम से जाना गया। यह बेड़ा [[सूरत]] (गुजरात) के निकट [[स्वाली]] में स्थित था। इसकाअ काम [[कैम्बे की खाड़ी]] और ताप्ती एवं नर्मदा नदी में ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापार की रक्षा करना था। इस फोर्स के अधिकारियों और जवानों ने [[अरब सागर]], फारस की खाड़ी और भारतीय तटों के सर्वे में अहम भूमिका निभाई।<ref>[https://navbharattimes.indiatimes.com/education/gk-update/know-the-power-strength-and-history-of-indian-navy/articleshow/66933507.cms भारतीय नौसेना का गौरवशाली इतिहास और ताकत]</ref>
=== बॉम्बे मरीन ===
1662 को बॉम्बे अंग्रेजों के हाथ में चला गया लेकिन औपचारिक रूप से ब्रिटिश शासन ने इसे अपने कब्जे में 8 फरवरी 1665 को लिया। 27 सितंबर, 1668 को ब्रिटिश सरकार ने इस द्वीप को ईस्ट इंडिया कंपनी को दे दिया। इसके बाद बाम्बे से होने वाले व्यापार की रक्षा की जिम्मेदारी भी इस फोर्स को सौंप दी गई। 1686 से कंपनी के व्यापार का केंद्र मुख्य रूप से बॉम्बे बन गया। इसके बाद इस फोर्स का नाम भी बदलकर बॉम्बे मरीन हो गया। इस फोर्स ने न केवल पुर्तगालियों, डचों और फ्रेंच से लड़ने में अहम भूमिका निभाई बल्कि अन्य देशों के समुद्री डकैतों से भी निपटने में अहम भूमिका निभाई। बॉम्बे मरीन ने 1824 में बर्मा युद्ध में भी हिस्सा लिया था।
1830 में बॉम्बे मरीन का नाम बदलकर '''हर मजेस्टीज इंडियन नेवी''' हो गया। 1840 में चीन के साथ युद्ध में इस सैन्य बल की क्षमता देखने को मिली थी। अगले कुछ दशकों में ताकत बढ़ने के साथ इसका कई बार नाम भी बदला। 1863 से 1877 तक इसका नाम एक बार फिर बॉम्बे मरीन कर दिया गया, उसके बाद 'हर मजेस्टीज इंडियन मरीन' कर दिया गया।
उस समय मरीन के दो डिविजन थे। पूर्वी डिविजन [[कलकत्ता]] में था जिसका काम [[बंगाल की खाड़ी]] पर नजर रखना। दूसरे डिविजन का नाम पश्चिमी डिविजन था जिसका मुख्यालय बॉम्बे था। इसके जिम्मे अरब सागर की देखरेख का जिम्मा था। इसकी सेवाओं को देखते हुए 1892 में इसे '''रॉयल इंडियन मरीन''' की संज्ञा दी गयी। उस समय उसके बेड़े में 50 पोत थे। 1934 में इसका नाम बदलकर '''रॉयल इंडियन नेवी''' कर दिया गया। 1935 में नेवी के उल्लेखनीय कामों के लिए किंग्स कलर भेंट किया गया।
[[प्रथम विश्वयुद्ध]] के दौरान मरीन ने अहम भूमिका निभाई। इसका इस्तेमाल गश्त के अलावा इराक, मिस्र और पूर्वी अफ्रीका में सैनिकों और साजोसामान के परिवहन के लिए किया गया। [[द्वितीय विश्वयुद्ध]] के समय रॉयल इंडियन नेवी में आठ युद्धपोत थे। युद्ध के अंत तक इसके बेड़े में 117 युद्धक पोत और 30,000 जवान थे।
रॉयल इंडियन मरीन में 1928 में सब लेफ्टिनेंट [[डी०एन०मुखर्जी]] को कमीशन किया गया था। इंजिनियर ऑफिसर के पद पर नियुक्त हुए मुखर्जी पहले भारतीय थे जिनको रॉयल इंडियन मरीन में कमीशन मिला था।
=== स्वतन्त्रता के पश्चात ===
१९४७ में जब भारत स्वतन्त्र हुआ तो उस समय रॉयल इंडियन नेवी के बेड़े में 32 पोत थे जो पुराने हो चुके थे। वे पोत सिर्फ तटीय गश्त के मतलब के ही थे। उस समय नेवी में 11,000 अधिकारी और जवान थे। आजादी के बाद नेवी के पहले कमांडर इन चीफ रीयर एडमिरल आईटीएस हॉल, सीआईई थे।
26 जनवरी, 1950 को भारत के गणराज्य बनने के साथ ही 'रॉयल' उपसर्ग को हटा दिया गया। इंडियन नेवी यानी भारतीय नौसेना के पहले कमांडर इन चीफ एडमिरल सर एडवर्ड पैरी, केसीबी बने जिन्होंने 1951 में एडमिरल सर मार्क पिजी, केबीई, सीबी, डीएसओ को प्रभार सौंप दिया था। एडमिरल पिजी 1955 में पहले चीफ ऑफ नेवल स्टाफ यानी नौसेना प्रमुख बने। 22 अप्रैल, 1958 को [[वाइस एडमिरल]] आर.डी. कटारी ने नौसेना के प्रथम भारतीय चीफ के रूप में पद ग्रहण किया।
== उल्लेखनीय ऑपरेशन ==
===ऑपरेशन विजय===
ऑपरेशन विजय 1961 में गोवा को पुर्तगालियों से चंगुल से आजाद कराने के लिए चलाया गया था। उसमें पहली बार नौसेना का इस्तेमाल किया गया था।
===ऑपरेशन ट्राइडेंट ===
ऑपरेशन ट्राइडेंट 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ अंजाम दिया गया था। पाकिस्तान के कराची पोर्ट पर भारतीय नौसेना ने हमला करके उसके कई पोतों को तबाह कर दिया था।
===ऑपरेशन कैक्टस ===
ऑपरेशन कैक्टस में आईएनएस गोदावरी और आईएनएस बेतवा शामिल थे 1988 में चलाए गए इस ऑपरेशन का मकसद मालदीव संकट को सुलझाना था।
=== ऑपरेशन तलवार ===
1999 में [[करगिल युद्ध]] के दौरान ऑपरेशन तलवार को अंजाम दिया गया था। भारतीय नौसेना ने कराची पोर्ट के करीब पाकिस्तानी पोतों और नौकाओं के लिए अवरोध पैदा कर दिया। इससे पाकिस्तान में तेल और ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई। बाद में पाकिस्तान ने भारत से अवरोध हटाने का आग्रह किया।
=== ऑपरेशन सुकून ===
वर्ष 2006 में [[इजरायल]] और [[लेबनान]] के बीच युद्ध हुआ था। बड़ी संख्या में भारत के अलावा [[श्रीलंका]] और [[नेपाल]] के लोग लेबनान युद्ध में फंस गए थे। उनलोगों को सुरक्षित निकालने की जिम्मेदारी को भारतीय नौसेना ने निभाया था।
===ऑपरेशन राहत===
भारतीय सशस्त्र बलों ने 2015 में ऑपरेशन राहत को अंजाम दिया था। इस ऑपरेशन में युद्धग्रस्त यमन से लोगों को सुरक्षित निकाला गया। आईएनएस सुमित्रा को लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए भेजा गया था और आईएनएस मुंबई एवं आईएनएस तरकश को उसकी सुरक्षा के लिए भेजा गया था। इस मिशन में न सिर्फ भारतीय नागरिकों बल्कि विदेशी नागरिकों को भी यमन से सुरक्षित निकाला गया। भारतीय नौसेना ने करीब 3000 से ज्यादा भारतीयों को सुरक्षित निकाला।
==इन्हें भी देखें==
*[[भारतीय नौसेना]]
*[[भारत का समुद्री इतिहास]]
*[[मराठा नौसेना|मराठा नौसेना]]
*[[भारतीय नौसेना दिवस]]
*[[लोथल]]
*[[कान्होजी आंग्रे]]
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://web.archive.org/web/20180414234545/https://www.indiannavy.nic.in/hi/content/genesis-indian-navy भारतीय नौसेना की उत्पत्ति]
*[https://web.archive.org/web/20180417192347/https://www.pravakta.com/the-glorious-history-of-the-indian-navy-and-the-current/ गौरवशाली है भारतीय नौसेना का इतिहास और वर्तमान]
*[https://web.archive.org/web/20190708225143/https://www.myindiamyglory.com/2017/01/21/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%a8%e0%a5%8c%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%95-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80/ भारतीय नौसेना के जनक छत्रपति शिवाजी]
==सन्दर्भ==
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'''[[कर्नाटक]] विधानसभा चुनाव, 2018''' [[कर्नाटक]] [[कर्नाटक विधानसभा|विधानसभा]] 224 निवार्चन क्षेत्रों में से 222 विधानसभा क्षेत्रों में 12 मई 2018 को सम्पन्न हुए। जयनगर तथा राजराजेश्वरी नगर में क्रमशः निवर्तमान विधायक की मृत्यु तथा मतदाता पहचान पत्र घपले के कारण मतदान 28 मई 2018 को होंगे।<ref>{{Cite news|url=http://www.thehindu.com/elections/karnataka-2018/election-commission-defers-election-in-rr-nagar-to-may-28/article23854425.ece|title=Karnataka Assembly elections: polling in R.R. Nagar postponed to May 28|last=पाण्डेय|first=देवेश के॰|date=2018-05-11|work=द हिन्दू|access-date=2018-05-18|language=en|issn=0971-751X|archive-url=https://web.archive.org/web/20180513025029/http://www.thehindu.com/elections/karnataka-2018/election-commission-defers-election-in-rr-nagar-to-may-28/article23854425.ece|archive-date=13 मई 2018|url-status=live}}</ref> इन चुनावों में कुल 72.13% मतदान हुआ जो कि 1952 से सम्पन्न हो रहे विधानसभा चुनावों का सबसे उच्चतम मत प्रतिशत है।<ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/voter-turnout-in-karnataka-highest-since-1952-assembly-polls-ceo/articleshow/64149257.cms|title=Voter turnout in Karnataka highest since 1952 Assembly polls: CEO|date=2018-05-13|work=द इकनॉमिक टाइम्स|access-date=2018-05-18|archive-url=https://web.archive.org/web/20180519034304/https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/voter-turnout-in-karnataka-highest-since-1952-assembly-polls-ceo/articleshow/64149257.cms|archive-date=19 मई 2018|url-status=live}}</ref>
यहाँ पर मुख्य मुकाबला सत्ताधारी [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] (120 सीटें) तथा विपक्षी दल [[भारतीय जनता पार्टी]] (43 सीटें)<ref name=":0">{{Cite web|url=http://eci.nic.in/eci_main/StatisticalReports/AE2013/StatReports2013.pdf|title=Election commission's statistical report on general elections, 2013 to the legislative assembly of Karnataka|last=|first=|date=|website=|archive-url=https://web.archive.org/web/20141008102903/http://eci.nic.in/eci_main/StatisticalReports/AE2013/StatReports2013.pdf|archive-date=8 अक्तूबर 2014|dead-url=|access-date=|url-status=live}}</ref> व [[बहुजन समाज पार्टी]] के साथ गठबंधन करके लड़ रही [[जनता दल (सेक्युलर)]]<ref>{{Cite web|url=https://karnatakaelections2018.com/karnataka-election-jds-bsp-launch-joint-campaign/|title=Karnataka Assembly Elections: JD(S) and BSP to launch joint campaign|website=Karnataka Elections 2018|language=en|access-date=2018-04-19|archive-url=https://web.archive.org/web/20180419121110/https://karnatakaelections2018.com/karnataka-election-jds-bsp-launch-joint-campaign/|archive-date=19 अप्रैल 2018|url-status=dead}}</ref> (29 सीटें)<ref name=":0" /> के मध्य है। [[आम आदमी पार्टी]] इन चुनावों के साथ कर्नाटक विधानसभा चुनावों में अपना पदार्पण कर रही है।<ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/aap-announces-1st-list-of-candidates-for-karnataka-assembly-polls/articleshow/63385442.cms|title=AAP announces 1st list of candidates for Karnataka assembly polls|date=2018-03-20|work=द इकनॉमिक टाइम्स|access-date=2018-03-22|archive-url=https://web.archive.org/web/20180323033746/https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/aap-announces-1st-list-of-candidates-for-karnataka-assembly-polls/articleshow/63385442.cms|archive-date=23 मार्च 2018|url-status=live}}</ref> 15 मई 2018 को घोषित हुए चुनाव परिणामों में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला। भारतीय जनता पार्टी 104 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को सबसे अधिक मत प्रतिशत मिला परन्तु वह 78 सीट जीत पाने में ही सफल रही। जनता दल (सेक्युलर) को 37 सीटें प्राप्त हुईं।<ref name=":1">{{cite web | url=https://timesofindia.indiatimes.com/india/who-should-get-first-call-to-form-govt-in-karnataka-jurys-out/articleshow/64182765.cms | title=Who should get first call to form govt in Karnataka? Jury's out | publisher=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]] | date=16 मई 2018 | accessdate=16 मई 2018 | archive-url=https://web.archive.org/web/20180516014929/https://timesofindia.indiatimes.com/india/who-should-get-first-call-to-form-govt-in-karnataka-jurys-out/articleshow/64182765.cms | archive-date=16 मई 2018 | url-status=live }}</ref>
==पृष्ठभूमि==
कर्नाटक विधानसभा का कार्यकाल 28 मई, 2018 को समाप्त हुआ।
===चुनावी प्रक्रिया में परिवर्तन===
कर्नाटक में विधानसभा चुनावों में सभी मतदान केंद्रों में [[वोटर वैरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल|वोटर वैरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल]] (वीवीपीएटी) मशीनों का इस्तेमाल किया।<ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/cities/Hyderabad/officials-concerned-at-failure-of-vvpats/article25458005.ece|title=Officials concerned at failure of VVPATs}}</ref>
==चुनाव कार्यक्रम==
[[भारत निर्वाचन आयोग|भारतीय निर्वाचन आयोग]] ने 27 मार्च 2018 को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की, जिसके अनुसार 12 मई 2018 को मतदान तथा 15 मई 2018 को मतगणना तथा परिणामों की घोषणा होगी।<ref>{{cite news|title=Karnataka votes on May 12, results on May 15|url=http://indianexpress.com/article/india/karnataka-assembly-election-2018-dates-live-updates-election-commission-voting-counting-results-5112638/|accessdate=27 मार्च 2018|work=द इण्डियन एक्सप्रेस|date=27 मार्च 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180327052825/http://indianexpress.com/article/india/karnataka-assembly-election-2018-dates-live-updates-election-commission-voting-counting-results-5112638/|archive-date=27 मार्च 2018|url-status=live}}</ref> इसके साथ ही आयोग ने तत्काल प्रभाव से [[आदर्श चुनाव आचार संहिता]] लागू हो जाने की भी घोषणा की।<ref>{{cite web|title=Application of Model Code of Conduct - General Election to the Legislative Assembly of Karnataka,2018- reg.|url=http://eci.nic.in/eci_main1/current/MCC1_27032018.pdf|work=[[भारत निर्वाचन आयोग|भारतीय निर्वाचन आयोग]]|publisher=eci.nic.in|accessdate=27 मार्च 2018|archiveurl=https://web.archive.org/web/20180327132606/http://eci.nic.in/eci_main1/current/MCC1_27032018.pdf|archivedate=27 मार्च 2018}}</ref><ref>http://164.100.80.163/ceo2/GenELC_2018/PN22_27032018.pdf|acesssdate=15 अप्रैल 2018</ref>
{| class="wikitable"
|-
|'''कार्यक्रम'''
|'''तिथि'''
|'''दिन'''
|-
| नामांकन प्रारम्भ होने की तिथि || 17 अप्रैल 2018 || मंगलवार
|-
| नामांकन भरने की अंतिम तिथि || 24 अप्रैल 2018 || मंगलवार
|-
| नामांकन पत्रों की जाँच की तिथि || 25 अप्रैल 2018 || बुधवार
|-
| प्रत्याशी के नाम वापस लेने की अंतिम तिथि || 27 अप्रैल 2018 || शुक्रवार
|-
| मतदान तिथि || '''12 मई 2018''' || शनिवार
|-
| मतगणना तिथि || '''15 मई 2018''' || मंगलवार
|-
| तिथि जिसके पूर्व चुनाव प्रक्रिया खत्म हो जानी चाहिये || 18 मई 2018 || शुक्रवार
|}
==चुनाव पूर्व सर्वेक्षण==
{|class="wikitable collapsible" style="text-align:center;font-size:85%;line-height:25px"
|+
|-
! rowspan="2" class="wikitable" | सर्वेक्षण संस्था
! rowspan="2" class="wikitable" | प्रकाशन तिथि
| bgcolor="{{party color|Bharatiya Janata Party}}" |
| bgcolor="{{party color|Indian National Congress}}" |
| style="background:green;" |
| style="background:gray;" |
! rowspan="2" class="wikitable" | बढ़त
|-
! class="wikitable" | [[भारतीय जनता पार्टी|भाजपा]]
! class="wikitable" | [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]]
! class="wikitable" | [[जनता दल (सेक्युलर)|जदएस]]
! class="wikitable" | अन्य
|-
|पब्लिक टीवी<ref>{{cite news|title=Public Mega Survey: ಚುನಾವಣಾ ಚಾಣಕ್ಯ|url=https://www.youtube.com/watch?v=uonW_DYbiJY|publisher=पब्लिक टीवी|accessdate=4 मार्च 2018|date=2 जनवरी 2018}}</ref>
|2 जनवरी 2018
|85–95
|'''90–95'''
|40–45
|0–6
| style="background:{{party color|Indian National Congress}}" |'''15'''
|-
|टीवी9-सीवोटर<ref>{{cite news|title=Karnataka Assembly Elections 2018: C-Voter Opinion Poll|url=https://www.youtube.com/watch?v=uonW_DYbiJY|publisher=[[TV9 Kannada]]|accessdate=4 March 2018|date=6 January 2018}}</ref>
|5 जनवरी 2018
|96<br />{{font|size=75%|text=35.90%}}
|'''102<br />{{font|size=75%|text=36.60%}}'''
|15<br />{{font|size=75%|text=18.80%}}
|1<br />{{font|size=75%|text=8.70%}}
| style="background:{{party color|Indian National Congress}}" |'''6<br />{{font|size=75%|text=0.7%}}'''
|-
|सीएचएस<ref>{{cite news|title='Not BSY, Siddaramaiah, most preferred CM candidate is HDK'|url=https://www.newskarnataka.com/bangalore/not-bsy-siddaramaiah-most-preferred-cm-candidate-is-hdk-survey|accessdate=4 March 2018|publisher=newskarnataka.com|date=13 January 2018|archiveurl=https://web.archive.org/web/20180304094456/https://www.newskarnataka.com/bangalore/not-bsy-siddaramaiah-most-preferred-cm-candidate-is-hdk-survey|archivedate=4 March 2018}}</ref>
|13 जनवरी 2018
|73–76<br />'''{{font|size=75%|text=36.40%}}'''
|'''77–81'''<br />{{font|size=75%|text=33.20%}}
|64–66<br />{{font|size=75%|text=24.90%}}
|
| style="background:{{party color|Indian National Congress}}" |'''5<br />{{font|size=75%|text=-3.2%}}'''
|-
|क्रिएटिव सेण्टर फॉर पॉलिटिकल एण्ड सोशल स्टडीज़<ref>{{cite news|title=One India News Survey|url=https://www.oneindia.com/india/bjp-to-win-113-seats-in-karnataka-assembly-elections-says-survey-2577144.html|publisher=One India News|accessdate=2 February 2018|date=2 February 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180318120442/https://www.oneindia.com/india/bjp-to-win-113-seats-in-karnataka-assembly-elections-says-survey-2577144.html|archive-date=18 मार्च 2018|url-status=live}}</ref>
|2 फरवरी 2018
|'''113'''
|85
|25
|1
| style="background:{{party color|Bharatiya Janata Party}}" |'''28'''
|-
|सी-फोर<ref>{{cite news|title=Congress set to retain Karnataka, says pre-poll survey|url=https://www.thehindubusinessline.com/news/national/congress-set-to-retain-karnataka-says-pre-poll-survey/article23357742.ece|archiveurl=https://web.archive.org/web/20180327134020/https://www.thehindubusinessline.com/news/national/congress-set-to-retain-karnataka-says-pre-poll-survey/article23357742.ece|archivedate=27 March 2018|accessdate=27 March 2018|work=The Hindu Business Line|date=26 March 2018}}</ref>
|26 मार्च 2018
|70<br />{{font|size=75%|text=31.00%}}
|'''126<br />{{font|size=75%|text=46.00%}}'''
|27<br />{{font|size=75%|text=16.00%}}
|1<br />{{font|size=75%|text=7.00%}}
| style="background:{{party color|Indian National Congress}}" |'''56<br />{{font|size=75%|text=15.0%}}'''
|-
|[[इण्डिया टुडे]]-कार्वी<ref>{{cite news|title=India Today Karnataka opinion poll predicts hung Assembly, Congress single-largest party|url=https://www.indiatoday.in/india/story/india-today-karnataka-opinion-poll-predicts-hung-assembly-congress-single-largest-party-1211514-2018-04-13|publisher=One India News|accessdate=13 April 2018|date=13 April 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180414072557/https://www.indiatoday.in/india/story/india-today-karnataka-opinion-poll-predicts-hung-assembly-congress-single-largest-party-1211514-2018-04-13|archive-date=14 अप्रैल 2018|url-status=live}}</ref>
|13 अप्रैल 2018
|78-86<br />{{font|size=75%|text=35%}}
|'''90-101<br />{{font|size=75%|text=37%}}'''
|34-43<br />{{font|size=75%|text=19%}}
|2-12<br />{{font|size=75%|text=9%}}
| style="background:{{party color|Indian National Congress}}" |'''14<br />{{font|size=75%|text=2.0%}}'''
|-
|बीटीवी<ref>{{cite news|title=ಪಬ್ಲಿಕ್ ಟಿವಿ, ಬಿಟಿವಿ ಸಮೀಕ್ಷೆ, ಕಾಂಗ್ರೆಸ್ ಅತೀ ದೊಡ್ಡ ಪಕ್ಷ|url=https://kannada.oneindia.com/news/karnataka/karnataka-poll-2018-congress-is-the-biggest-party-says-public-tv-and-btv-survey-139089.html|publisher=One India News|accessdate=19 April 2018|date=19 April 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180420052521/https://kannada.oneindia.com/news/karnataka/karnataka-poll-2018-congress-is-the-biggest-party-says-public-tv-and-btv-survey-139089.html|archive-date=20 अप्रैल 2018|url-status=dead}}</ref>
|19 अप्रैल 2018
|82-87<br />{{font|size=75%|text=35%}}
|'''94-99<br />{{font|size=75%|text=37%}}'''
|39-44<br />{{font|size=75%|text=19%}}
|2-6<br />{{font|size=75%|text=9%}}
| style="background:{{party color|Indian National Congress}}" |'''12<br />{{font|size=75%|text=2.0%}}'''
|-
|[[टाइम्स नाऊ]]-वीएमआर<ref>{{cite news|title=Times Now-VMR voter survey: Congress set for photofinish in Karnataka; tally to reduce to 91 from 122|url=http://www.timesnownews.com/elections/karnataka-assembly-election/video/karnataka-assembly-elections-2018-times-now-vmr-voter-survey-live-updates/220413|publisher=Times Now|accessdate=23 April 2018|date=23 April 2018}}</ref>
|23 अप्रैल 2018
|89<br />{{font|size=75%|text=35%}}
|'''91<br />{{font|size=75%|text=37%}}'''
|40<br />{{font|size=75%|text=19%}}
|4<br />{{font|size=75%|text=9%}}
| style="background:{{party color|Indian National Congress}}" |'''2<br />{{font|size=75%|text=2.0%}}'''
|-
|जैन लोकनीति-सीएसडीएस<ref>{{cite news|title=कांग्रेस के हाथ से फिसल सकता है कर्नाटक, बीजेपी की बढ़त लेकिन बहुमत से दूर- सर्वे|url=http://abpnews.abplive.in/india-news/jain-lokniti-csds-survey-karnataka-assembly-elections-nobody-found-majority-bjp-may-gets-more-seats-than-congress-840020|publisher=ABP News|accessdate=23 April 2018|date=23 April 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180423213405/http://abpnews.abplive.in/india-news/jain-lokniti-csds-survey-karnataka-assembly-elections-nobody-found-majority-bjp-may-gets-more-seats-than-congress-840020|archive-date=23 अप्रैल 2018|url-status=dead}}</ref>
|23 अप्रैल 2018
|'''89-95'''<br />{{font|size=75%|text=35%}}
|85-91'''<br />{{font|size=75%|text=37%}}'''
|32-38<br />{{font|size=75%|text=20%}}
|12<br />{{font|size=75%|text=8%}}
| style="background:{{party color|Bharatiya Janata Party}}" |'''4<br />{{font|size=75%|text=-2.0%}}'''
|-
|सी-फोर<ref>{{cite news|title=Karnataka pre-poll survey: Congress 128, BJP-73, JD(S)-38|url=https://www.oneindia.com/india/karnataka-pre-poll-survey-congress-128-bjp-73-jds-38-2687410.html|publisher=OneIndia|accessdate=1 May 2018|date=1 May 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180430212202/https://www.oneindia.com/india/karnataka-pre-poll-survey-congress-128-bjp-73-jds-38-2687410.html|archive-date=30 अप्रैल 2018|url-status=live}}</ref>
|1 मई 2018
|63-73<br />{{font|size=75%|text=35%}}
|'''118-128<br />{{font|size=75%|text=37%}}'''
|29-36<br />{{font|size=75%|text=20%}}
|2-7<br />{{font|size=75%|text=8%}}
| style="background:{{party color|Indian National Congress}}" |'''55'''
'''{{font|size=75%|text=2.0%}}'''
|-
|जन की बात<ref>{{cite news|title=JAN KI BAAT POLL: BJP CROSSING 100-SEAT MARK|url=http://www.republicworld.com/karnataka-elections-2018/election-news/karnataka-elections-2018-jan-ki-baat-opinion-poll-says-bjp-crossing-100-seats-congress-reduced-to-double-digits|publisher=Republic TV|accessdate=4 May 2018|date=4 May 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180505065655/http://www.republicworld.com/karnataka-elections-2018/election-news/karnataka-elections-2018-jan-ki-baat-opinion-poll-says-bjp-crossing-100-seats-congress-reduced-to-double-digits|archive-date=5 मई 2018|url-status=dead}}</ref>
|4 मई 2018
|'''102-108<br />{{font|size=75%|text=40%}}'''
|72-74<br />{{font|size=75%|text=38%}}
|42-44<br />{{font|size=75%|text=20%}}
|2-4<br />{{font|size=75%|text=2%}}
| style="background:{{party color|Bharatiya Janata Party}}" |'''30
{{font|size=75%|text=2.0%}}'''
|-
|[[एबीपी न्यूज़]]-सीएसडीएस<ref>{{cite news|title=कर्नाटक चुनाव ओपिनियन पोल LIVE UPDATES: कांग्रेस बनी सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन बहुमत से दूर|url=http://abpnews.abplive.in/india-news/lokniti-csds-abp-news-opinion-poll-live-updates-who-will-win-karnataka-assembly-election-2018-852035|publisher=ABP News|accessdate=7 May 2018|date=7 May 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180511110122/http://abpnews.abplive.in/india-news/lokniti-csds-abp-news-opinion-poll-live-updates-who-will-win-karnataka-assembly-election-2018-852035|archive-date=11 मई 2018|url-status=dead}}</ref>
|7 मई 2018
|79-89<br />{{font|size=75%|text=33%}}
|'''92-102<br />{{font|size=75%|text=38%}}'''
|34-42<br />{{font|size=75%|text=22%}}
|1-7<br />{{font|size=75%|text=7%}}
| style="background:{{party color|Indian National Congress}}" |'''13'''
'''{{font|size=75%|text=5.0%}}'''
|-
|फ़्लैश न्यूज़ - टीवी 5<ref>{{cite news|title=Karnataka elections: BJP to get 115 seats, Congress-70, predicts survey|url=https://www.oneindia.com/india/karnataka-elections-bjp-get-37-58-per-cent-votes-bsy-top-choice-for-cm-2691892.html|publisher=One India|accessdate=7 May 2018|date=7 May 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180507174226/https://www.oneindia.com/india/karnataka-elections-bjp-get-37-58-per-cent-votes-bsy-top-choice-for-cm-2691892.html|archive-date=7 मई 2018|url-status=live}}</ref>
|7 मई 2018
|'''110-120'''<br />'''{{font|size=75%|text=36-38%}}'''
|65-75<br />{{font|size=75%|text=33-35%}}
|38-42<br />{{font|size=75%|text=20-22%}}
|2-6
| style="background:{{party color|Bharatiya Janata Party}}" |'''45'''
'''{{font|size=75%|text=3.0%}}'''
|-
|संयुक्त टीवी<ref>{{cite news|title=Samyuktha TV Survey: Samyuktha Survey|url=https://www.youtube.com/channel/UCyFMtNeWFa_fwek2ZXE0RDQ|publisher=Samyuktha TV|accessdate=4 March 2018|date=2 January 2018}}</ref>
|8 मई 2018
|80–90
|'''100–110'''
|40–45
|0–6
| style="background:{{party color|Indian National Congress}}" |'''20'''
|-
|-
|-
|स्पिक मीडिया<ref>{{cite news|title=Karnataka Assembly Election - Opinion Poll May, 2018 (Part - 3)|url=http://spickmedia.com/karnataka/f/karnataka-assembly-election---opinion-poll-may-2018-part---3|publisher=Spick Media|accessdate=9 May 2018|date=9 May 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180510050652/http://spickmedia.com/karnataka/f/karnataka-assembly-election---opinion-poll-may-2018-part---3|archive-date=10 मई 2018|url-status=dead}}</ref>
|9 मई 2018
|88<br />
|'''101<br />'''
|31<br />
|3<br />
| style="background:{{party color|Indian National Congress}}" |'''13'''
|-
|इण्डिया टीवी<ref>{{cite news|title=IndiaTV Final Opinion Poll on Karnataka Elections: BJP likely to win 85 seats; Amit Shah says party will get majority|url=https://www.indiatvnews.com/elections/karnataka-assembly-elections-bjp-or-congress-or-jd-s-which-party-will-win-karnataka-assembly-elections-2018-watch-indiatv-opinion-poll-at-4-pm-today-441406|publisher=India TV|accessdate=9 May 2018|date=9 May 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180509120652/https://www.indiatvnews.com/elections/karnataka-assembly-elections-bjp-or-congress-or-jd-s-which-party-will-win-karnataka-assembly-elections-2018-watch-indiatv-opinion-poll-at-4-pm-today-441406|archive-date=9 मई 2018|url-status=dead}}</ref>
|9 मई 2018
|85<br />
|'''96<br />'''
|38<br />
|4<br />
| style="background:{{party color|Indian National Congress}}" |'''11'''
|-
|न्यूज़ एक्स-सीएनएक्स<ref>{{cite news|title=Another opinion poll predicts hung assembly in Karnataka|url=http://www.abplive.in/election/karnataka-assembly-election-2018-opinion-poll-survey-bjp-congress-jds-kingmaker-karnataka-elections-latest-news-and-updates-hd-kumaraswamy-694649|publisher=ABP|accessdate=9 May 2018|date=10 May 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180511141847/http://www.abplive.in/election/karnataka-assembly-election-2018-opinion-poll-survey-bjp-congress-jds-kingmaker-karnataka-elections-latest-news-and-updates-hd-kumaraswamy-694649|archive-date=11 मई 2018|url-status=dead}}</ref>
|9 मई 2018
|87<br />
|'''90<br />'''
|39<br />
|7<br />
| style="background:{{party color|Indian National Congress}}" |'''3'''
|-
| colspan="2" | ''औसत''
|87
|'''96'''
|36
|05
| style="background:{{party color|Indian National Congress}}" |'''9'''
|}
==चुनाव पश्चात् सर्वे==
{|class="wikitable collapsible" style="text-align:center;font-size:85%;line-height:25px"
|+
|-
! rowspan="2" class="wikitable" | सर्वेक्षण संस्था
! rowspan="2" class="wikitable" | प्रकाशन तिथि
| bgcolor="{{party color|Bharatiya Janata Party}}" |
| bgcolor="{{party color|Indian National Congress}}" |
| style="background:green;" |
| style="background:gray;" |
! rowspan="2" class="wikitable" | बढ़त
|-
! class="wikitable" | [[भारतीय जनता पार्टी|भाजपा]]
! class="wikitable" | [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]]
! class="wikitable" | [[जनता दल (सेक्युलर)|जदएस]]
! class="wikitable" | अन्य
|-
|इण्डिया टीवी-वीएमआर<ref name="itv1">{{cite web|title=Karnataka Exit Poll: IndiaTV-VMR predicts fractured mandate; Congress and BJP in neck-and-neck fight|url=https://www.indiatvnews.com/elections/karnataka-assembly-elections-karnataka-exit-poll-indiatv-vmr-predicts-fractured-mandate-in-assembly-congress-and-bjp-in-neck-and-neck-fight-441946|date=12 May 2018|access-date=20 मई 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180514163549/https://www.indiatvnews.com/elections/karnataka-assembly-elections-karnataka-exit-poll-indiatv-vmr-predicts-fractured-mandate-in-assembly-congress-and-bjp-in-neck-and-neck-fight-441946|archive-date=14 मई 2018|url-status=dead}}</ref>
|12 मई 2018
|94
|'''97'''
|28
|3
| style="background:{{party color|Indian National Congress}}" |'''3'''
|-
|रिपब्लिक टीवी-जन की बात<ref name="trv1">{{cite web|title=Karnataka Elections 2018: Jan Ki Baat's Exit Poll Says The BJP Will Emerge As The Single Largest Party|url=http://www.republicworld.com/karnataka-elections-2018/election-news/karnataka-elections-2018-jan-ki-baats-exit-poll-says-the-bjp-will-emerge-as-the-single-largest-party|date=12 May 2018|access-date=20 मई 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180515050247/http://www.republicworld.com/karnataka-elections-2018/election-news/karnataka-elections-2018-jan-ki-baats-exit-poll-says-the-bjp-will-emerge-as-the-single-largest-party|archive-date=15 मई 2018|url-status=dead}}</ref>
|12 मई 2018
|'''105'''
|78
|37
|2
| style="background:{{party color|Bharatiya Janata Party}}" |'''27'''
|-
|एबीपी न्यूज़-सी वोटर<ref name="abp1">{{cite web|title=BJP close to majority in Karnataka, may get 110 seats: ABP News exit poll|url=http://www.abplive.in/election/karnataka-election-2018-exit-poll-live-updates-bjp-congress-jds-survey-696146|date=12 May 2018|access-date=20 मई 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180515124835/http://www.abplive.in/election/karnataka-election-2018-exit-poll-live-updates-bjp-congress-jds-survey-696146|archive-date=15 मई 2018|url-status=dead}}</ref>
|12 मई 2018
|'''110'''
|88
|24
|2
| style="background:{{party color|Bharatiya Janata Party}}" |'''22'''
|-
|टाइम्स नाऊ-वीएमआर<ref name="tnv1">{{cite web|title=TIMES NOW-VMR Exit Poll prediction|url=https://twitter.com/TimesNow/status/995288286934384640|date=12 May 2018}}</ref>
|12 मई 2018
|87
|'''97'''
|35
|3
| style="background:{{party color|Indian National Congress}}" |'''10'''
|-
|टाइम्स नाऊ-टुडेज़ चाणक्य<ref name="tnc1">{{cite web|title=Karnataka Assembly Elections 2018 - Post Poll Analysis|url=http://www.todayschanakya.com/karnataka-assembly-elections-2018-post-poll-analysis.html|date=12 May 2018|access-date=20 मई 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180515140400/http://www.todayschanakya.com/karnataka-assembly-elections-2018-post-poll-analysis.html|archive-date=15 मई 2018|url-status=dead}}</ref>
|12 मई 2018
|'''120'''
|73
|26
|3
| style="background:{{party color|Bharatiya Janata Party}}" |'''47'''
|-
|इण्डिया टुडे-एक्सिस माय इण्डिया<ref name="ita1">{{cite web|title=Assembly Election 2018 - Karnataka|url=https://axismyindia.org/karnataka-exit-poll.php|date=12 May 2018|access-date=20 मई 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180517182821/http://axismyindia.org/karnataka-exit-poll.php|archive-date=17 मई 2018|url-status=dead}}</ref>
|12 मई 2018
|85
|'''111'''
|26
|0
| style="background:{{party color|Indian National Congress}}" |'''26'''
|-
|न्यूज़एक्स-सीएनएक्स<ref name="nxc1">{{cite web|title=NewsX-CNX exit poll 2018: A hung Karnataka Assembly with BJP as the single largest party|url=https://www.newsx.com/national/newsx-cnx-exit-poll-2018-a-hung-karnataka-assembly-with-bjp-as-the-single-largest-party|date=12 May 2018|access-date=20 मई 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180513153329/https://www.newsx.com/national/newsx-cnx-exit-poll-2018-a-hung-karnataka-assembly-with-bjp-as-the-single-largest-party|archive-date=13 मई 2018|url-status=live}}</ref>
|12 मई 2018
|'''106'''
|75
|37
|4
| style="background:{{party color|Bharatiya Janata Party}}" |'''31'''
|-
|न्यूज़ नेशन<ref name="nnp1">{{cite web|title=Karnataka election 2018: What exit polls can't settle, May 15 will; updates|url=http://www.business-standard.com/article/elections/karnataka-election-exit-poll-results-2018-updates-bjp-wins-modi-wave-congress-rahul-gandhi-jds-kingmaker-karnataka-polling-percentage-top-10-developments-118051200539_1.html|date=12 May 2018|access-date=20 मई 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180516230243/http://www.business-standard.com/article/elections/karnataka-election-exit-poll-results-2018-updates-bjp-wins-modi-wave-congress-rahul-gandhi-jds-kingmaker-karnataka-polling-percentage-top-10-developments-118051200539_1.html|archive-date=16 मई 2018|url-status=live}}</ref>
|12 मई 2018
|'''107'''
|73
|38
|4
| style="background:{{party color|Bharatiya Janata Party}}" |'''34'''
|-
|}
==परिणाम==
इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी मगर बहुमत से 8 सीटें कम रह गयीं। कांग्रेस ने सबसे अधिक मत पाये मगर 78 सीटें ही जीत सकी। इस प्रकार से चुनाव बाद त्रिशंकु विधानसभा का गठन हुआ।<ref name=":1" /> विभिन्न दलों द्वारा जीती गयी सीटें निम्न हैं -
{| class="wikitable"
! colspan="2" rowspan="2" |पार्टी तथा गठबंधन
! colspan="3" |प्राप्त मत
! colspan="2" |सीटें
|-
!वोट
!%
!वृद्धि/कमी
!सीटें जीतीं
!'''+/−'''
|-
| bgcolor="{{party color|Bharatiya Janata Party}}" |
|[[भारतीय जनता पार्टी]] (भाजपा)
|1,31,85,384
|36.2
| {{Increase}}16.3
|104
| {{Increase}}64
|-
| bgcolor="{{party color|Indian National Congress}}" |
| [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] (कांग्रेस)
|1,38,24,005
|38.0
| {{Increase}}1.4
|78
| {{Decrease}}44
|-
| bgcolor="{{party color|Janata Dal (Secular)}}" |
|[[जनता दल (सेक्युलर)]] (जदएस)
|66,66,307
|18.3
| {{Decrease}}1.9
|37
| {{Decrease}}3
|-
| bgcolor="{{party color|निर्दलीय}}" |
|[[निर्दलीय (राजनेता)|निर्दलीय]] (IND)
|14,37,045
|3.9
| {{Decrease}} 3.5
|1
|{{decrease}}8
|-
| bgcolor="{{party color|Bahujan Samaj Party}}" |
|[[बहुजन समाज पार्टी]] (बसपा)
|1,08,592
|0.3
|
|1
| {{increase}}1
|-
| bgcolor="White" |
|[[कर्नाटक प्रग्न्यावानता जनता पार्टी]] (केपीजेपी)
|74,229
|0.2
|
|1
| {{increase}}1
|-
| bgcolor="black" |
|अन्य पार्टियाँ तथा उम्मीद्वार
|6,83,632
|2.2
|
|0
|{{decrease}}13
|-
| bgcolor="{{party color|नोटा}}" |
|नोटा
|3,22,841
|0.9
|
| colspan="2" bgcolor="#E9E9E9" |
|-
| colspan="2" |सीटें जहाँ चुनाव नहीं हुए
| colspan="3" bgcolor="#E9E9E9" |
|2
|{{Increase}}2
|-
| colspan="7" bgcolor="#E9E9E9" |
|- style="font-weight:bold;"
| align="left" colspan="2"| कुल
|
| 100.00
| bgcolor="#E9E9E9" |
|224
| ±0
|-
|}
==सरकार गठन==
इन चुनावों में त्रिशंकु विधानसभा का जनमत मिलने के पश्चात् भाजपा को सरकार बनाने से रोकने के उद्देश्य से कांग्रेस तथा जदएस ने गठबंधन कर लिया।<ref>{{Cite news|url=http://indianexpress.com/elections/karnataka-election-results-2018-as-congress-jds-comes-together-again-a-look-at-their-chequered-past-5177683/|title=Karnataka election results 2018: As Congress-JD(S) come together again, a look at their chequered past|date=2018-05-15|work=The Indian Express|access-date=2018-05-18|language=en-US|archive-url=https://web.archive.org/web/20180519142749/http://indianexpress.com/elections/karnataka-election-results-2018-as-congress-jds-comes-together-again-a-look-at-their-chequered-past-5177683/|archive-date=19 मई 2018|url-status=live}}</ref> कांग्रेस ने [[एच॰ डी॰ कुमारस्वामी]] को मुख्यमंत्री के रूप स्वीकार कर लिया।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/india/kumaraswamy-will-be-cm-says-siddaramaiah/articleshow/64181230.cms|title=Kumaraswamy will be CM, says Siddaramaiah|work=द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया|access-date=2018-05-18|archive-url=https://web.archive.org/web/20180516094710/https://timesofindia.indiatimes.com/india/kumaraswamy-will-be-cm-says-siddaramaiah/articleshow/64181230.cms|archive-date=16 मई 2018|url-status=live}}</ref> मगर इसके बावजूद राज्यपाल [[वजुभाई वाला]] ने भाजपा को सबसे बड़ा दल होने के नाते सरकार गठन को बुलाया।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/india/karnataka-governor-invites-bjps-yeddyurappa-to-form-government-in-the-state/articleshow/64194829.cms|title=Karnataka governor invites BJP's Yeddyurappa to form government in the state|work=द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया|access-date=2018-05-18|archive-url=https://web.archive.org/web/20180520113053/https://timesofindia.indiatimes.com/india/karnataka-governor-invites-bjps-yeddyurappa-to-form-government-in-the-state/articleshow/64194829.cms|archive-date=20 मई 2018|url-status=live}}</ref> उन्होंने पार्टी को बहुमत सिद्ध करने के लिये 15 दिन का समय दिया।<ref>{{Cite web |url=https://timesofindia.indiatimes.com/india/karnataka-election-aftermath-top-developments/articleshow/64201579.cms |title=संग्रहीत प्रति |access-date=20 मई 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180517083238/https://timesofindia.indiatimes.com/india/karnataka-election-aftermath-top-developments/articleshow/64201579.cms |archive-date=17 मई 2018 |url-status=live }}</ref> इसके पश्चात् भाजपा के [[बी॰ एस॰ येदयुरप्पा]] ने 17 मई 2018 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।<ref>{{cite web|url=https://www.bhaskar.com/indian-national-news-in-hindi/news/karnataka-assembly-floor-test-cm-bs-yeddyurappa-of-the-bjp-19-may-2018-5876051.html|title=कर्नाटक में फ्लोर टेस्ट के पहले ही येदियुरप्पा ने दिया इस्तीफा, कुमारस्वामी बुधवार को लेंगे शपथ|date=19 मई 2018|work=दैनिक भास्कर|access-date=21 मई 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180520192733/https://www.bhaskar.com/indian-national-news-in-hindi/news/karnataka-assembly-floor-test-cm-bs-yeddyurappa-of-the-bjp-19-may-2018-5876051.html|archive-date=20 मई 2018|url-status=live}}</ref>
इस दौरान जदएस व कांग्रेस ने भाजपा पर उनके विधायकों को तोड़ने के कई आरोप लगाये। कांग्रेस ने 6 ऑडियो जारी करके भाजपा पर उसके विधायकों को तोड़ने का आरोप लगाया। एक आरोप स्वयं येदयुरप्पा पर लगा, जब कांग्रेस ने उनपर अपने बी॰ सी॰ पाटिल को तोड़ने का आरोप लगाया।<ref>{{Cite news|url=https://www.ndtv.com/india-news/congress-releases-more-audio-tapes-says-yeddyurappa-tried-to-poach-lawmaker-1854353|title=Congress Releases More Audio Tapes, Says Yeddyurappa Tried To Poach Lawmaker|work=NDTV.com|access-date=2018-05-19|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20180520100347/https://www.ndtv.com/india-news/congress-releases-more-audio-tapes-says-yeddyurappa-tried-to-poach-lawmaker-1854353|archive-date=20 मई 2018|url-status=live}}</ref> जदएस प्रमुख कुमारस्वामी ने भाजपा पर बहुमत प्राप्त करने के लिये उनके विधायकों को 100-100 करोंड़ की घूस देने का आरोप लगाया।<ref>{{Cite news|url=https://www.ndtv.com/india-news/operation-lotus-hd-kumaraswamy-says-bjp-offered-100-crores-to-jds-mlas-1852888|title="Operation Lotus": Kumaraswamy Says BJP Offered 100 Crores To His MLAs|work=NDTV.com|accessdate=2018-05-19|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20180520053921/https://www.ndtv.com/india-news/operation-lotus-hd-kumaraswamy-says-bjp-offered-100-crores-to-jds-mlas-1852888|archive-date=20 मई 2018|url-status=live}}</ref> हालाँकि इन आरोपों को केन्द्रीय मंत्री [[प्रकाश जावड़ेकर]] ने निराधार बताया।<ref>{{Cite web|url=https://www.moneycontrol.com/news/politics/prakash-javadekar-trashes-kumaraswamys-rs-100-crore-charge-as-imaginary-2569827.html|title=Prakash Javadekar trashes Kumaraswamy's Rs 100-crore charge as 'imaginary'|website=Moneycontrol|language=en-US|access-date=2018-05-19|archive-url=https://web.archive.org/web/20180520054203/https://www.moneycontrol.com/news/politics/prakash-javadekar-trashes-kumaraswamys-rs-100-crore-charge-as-imaginary-2569827.html|archive-date=20 मई 2018|url-status=live}}</ref>
इसके पश्चात् कांग्रेस व जदएस [[भारत का उच्चतम न्यायालय|सर्वोच्च न्यायालय]] गये और शपथ ग्रहण पर रोक लगाने की याचिका दायर की।<ref>{{Cite news|url=https://www.ndtv.com/india-news/congress-approaches-chief-justice-after-karnataka-governor-invites-bjp-to-form-government-1853175?pfrom=home-topscroll|title=In All-Nighter, Supreme Court Clears BS Yeddyurappa Oath But Has Questions|work=NDTV.com|access-date=2018-05-18|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20180519032723/https://www.ndtv.com/india-news/congress-approaches-chief-justice-after-karnataka-governor-invites-bjp-to-form-government-1853175?pfrom=home-topscroll|archive-date=19 मई 2018|url-status=live}}</ref> इस याचिका को ए॰ के॰ सीकरी, एस॰ ए॰ बोबड़े तथा अशोक भूषण की तीन सदस्यीय पीठ ने सुना। हालाँकि सर्वोच्च न्यायालय ने शपथ ग्रहण पर रोक नहीं लगायी। <ref>{{Cite news|url=http://www.thehindu.com/elections/karnataka-2018/karnataka-live-updates-three-judge-bench-of-supreme-court-hears-congress-jds-plea/article23900838.ece|title=Karnataka developments Live {{!}} Supreme Court refuses to stay Yeddyurappa's swearing-in, but keeps it subject to case outcome|last=Desk|first=The Hindu Net|date=2018-05-16|work=The Hindu|access-date=2018-05-18|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> 18 मई 2018 को सर्वोच्च न्यायालय ने बहुमत सिद्ध करने का समय घटाकर सरकार को 24 घण्टे में बहुमत सिद्ध करने को कहा। न्यायालय ने इस सम्बन्ध में निम्न दिशानिर्देश दिये:<ref>{{Cite news|url=http://www.livelaw.in/breaking-sc-orders-floor-test-in-karnataka-assembly-at-4pmtomorrow/|title=BREAKING: SC Orders Floor Test In Karnataka Assembly At 4pm Tomorrow [Read Order] {{!}} Live Law|date=2018-05-18|work=Live Law|access-date=2018-05-18|language=en-US|archive-url=https://web.archive.org/web/20180520211623/http://www.livelaw.in/breaking-sc-orders-floor-test-in-karnataka-assembly-at-4pmtomorrow/|archive-date=20 मई 2018|url-status=dead}}</ref>
*बहुमत परीक्षण 19 मई 2018 को 4 बजे तक सम्पन्न हो जाना चाहिये।
*अस्थायी अध्यक्ष को बहुमत परीक्षण कराने का अधिकार होगा।
*गुप्त मतदान द्वारा बहुमत परीक्षण नहीं होगा
*सरकार के पास आंग्ला-भारतीय सदस्य नामित करने का अधिकार नहीं है।
*येदयुरप्पा सरकार बहुमत परीक्षण से पूर्व कोई नीतिगत निर्णय नहीं ले सकेगी।
राज्यपाल ने बहुमत परीक्षण हेतु भाजपा विधायक [[के॰ जी॰ बोपैय्या]] को अस्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया।<ref>{{Cite news|url=http://indianexpress.com/article/india/karnataka-kg-bopaiah-appointed-pro-tem-speaker-ahead-of-floor-test-bs-yeddyurappa-kumaraswamy-jdg-congress-bjp/|title=Karnataka floor test: Governor ignores seniority, appoints KG Bopaiah as Protem Speaker|date=2018-05-18|work=The Indian Express|access-date=2018-05-18|language=en-US|archive-url=https://web.archive.org/web/20180519033457/http://indianexpress.com/article/india/karnataka-kg-bopaiah-appointed-pro-tem-speaker-ahead-of-floor-test-bs-yeddyurappa-kumaraswamy-jdg-congress-bjp/|archive-date=19 मई 2018|url-status=live}}</ref> कांग्रेस ने सबसे वरिष्ठ विधायक को अध्यक्ष बनाने मांग तथा बोपैय्या का विधानसभा अध्यक्ष के रूप में रिकॉर्ड को आधार बनाकर राज्यपाल के इस निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी।<ref>{{Cite news|url=http://zeenews.india.com/karnataka/karnataka-congress-challenges-appointment-of-bjps-bopaiah-as-protem-speaker-all-eyes-on-cji-2109415.html|title=Congress challenges appointment of BJP's Bopaiah as Karnataka Protem Speaker, all eyes on CJI|date=2018-05-18|work=Zee News|access-date=2018-05-18|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20180519033650/http://zeenews.india.com/karnataka/karnataka-congress-challenges-appointment-of-bjps-bopaiah-as-protem-speaker-all-eyes-on-cji-2109415.html|archive-date=19 मई 2018|url-status=live}}</ref> न्यायालय ने कांग्रेस की अर्जी ख़ारिज करते हुए बोपैय्या के ही निर्देशन में बहुमत परीक्षण कराने का निर्देश देने के साथ ही विधानसभा की कार्यवाही की सीधा प्रसारण कराने का निर्देश दिया।<ref>{{Cite news|url=https://www.ndtv.com/india-news/karnataka-trust-vote-supreme-court-says-kg-bopaiah-to-stay-interim-speaker-1854294?pfrom=home-topscroll|title=KG Bopaiah To Stay Temporary Speaker, Floor Test To Be Broadcast Live|work=NDTV.com|access-date=2018-05-19|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20180520053847/https://www.ndtv.com/india-news/karnataka-trust-vote-supreme-court-says-kg-bopaiah-to-stay-interim-speaker-1854294?pfrom=home-topscroll|archive-date=20 मई 2018|url-status=live}}</ref>
19 मई 2018 को मुख्यमंत्री येदयुरप्पा ने भावुक भाषण देते हुए बहुमत परिक्षण से पूर्व ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया।<ref>{{Cite web |url=https://www.ndtv.com/india-news/karnataka-assembly-floor-test-live-updates-bjp-bs-yeddyurappa-to-prove-majority-government-formation-1854318 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=20 मई 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180520053814/https://www.ndtv.com/india-news/karnataka-assembly-floor-test-live-updates-bjp-bs-yeddyurappa-to-prove-majority-government-formation-1854318 |archive-date=20 मई 2018 |url-status=live }}</ref>
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
[[श्रेणी:2018 में भारत के राज्य विधानसभा चुनाव]]
[[श्रेणी:कर्नाटक की राजनीति]]
oc7yq7w6ov9axg3w1p5f6twabjbj1hk
विकिपीडिया:प्रयोगस्थल
4
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6628980
2026-10-18T00:58:55Z
Malayahans1
466744
/* */
6630546
wikitext
text/x-wiki
Malaya Hans
Biography
Malaya Hans is an Indian educator with an academic background in English, Political Science, teacher education, and computer applications. He previously worked as a Trained Graduate Teacher (TGT) in Social Science at Eklavya Model Residential School, Patharridih, Dhamtari, Chhattisgarh. He is pursuing a Doctor of Philosophy (Ph.D.) in Political Science at Banaras Hindu University (BHU), Varanasi, Uttar Pradesh. Following his resignation from his teaching position, he is preparing for civil services examinations.
Personal Information
Full name: Malaya Hans
Date of birth: 1 June 1996
Nationality: Indian
Height: 5 ft 9 in (175 cm)
Education
Malaya Hans has an academic background in English, Political Science, teacher education, and computer applications.
Bachelor of Arts (B.A.) in English Honours: DAV Autonomous College, Titilagarh, Odisha
Master of Arts (M.A.) in Political Science: Dr. C. V. Raman University, Bilaspur, Chhattisgarh
Bachelor of Education (B.Ed.)
Post Graduate Diploma in Computer Applications (PGDCA)
Doctor of Philosophy (Ph.D.) in Political Science: Pursuing at Banaras Hindu University, Varanasi, Uttar Pradesh
Academic Achievement
Malaya Hans received a gold medal for his academic performance in the M.A. Political Science programme at Dr. C. V. Raman University, Bilaspur, Chhattisgarh.
Career
Malaya Hans previously worked as a Trained Graduate Teacher (TGT) in Social Science at Eklavya Model Residential School, Patharridih, Dhamtari, Chhattisgarh. He subsequently resigned from the position.
Research and Academic Interests
Hans is pursuing doctoral studies in Political Science at Banaras Hindu University. Further details about his research topic and academic interests may be added when available.
Civil Services Preparation
Following his resignation from his teaching position, Malaya Hans is preparing for civil services examinations, with an interest in public administration and public service.
Personal Information
Full Name: Malaya Hans
Date of Birth: 1 June 1996
Nationality: Indian
Height: 5 ft 9 in (175 cm)
Father's Name: Jaya Hans
Mother's Name: Kshiramani Hans
Academic Achievement
Malaya Hans received a Gold Medal for his academic performance in the Master of Arts (M.A.) in Political Science programme at Dr. C. V. Raman University, Bilaspur, Chhattisgarh. The Gold Medal was presented by Ramen Deka, Governor of Chhattisgarh.
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विक्रम प्रताप
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# Malaya Hans
## Biography
Malaya Hans is an Indian educator with an academic background in English, Political Science, teacher education, and computer applications. He previously worked as a Trained Graduate Teacher (TGT) in Social Science at Eklavya Model Residential School, Patharridih, Dhamtari, Chhattisgarh. He is pursuing a Doctor of Philosophy (Ph.D.) in Political Science at Banaras Hindu University (BHU), Varanasi, Uttar Pradesh. Following his resignation from his teaching position, he is preparing for civil services examinations.
## Personal Information
- **Full name:** Malaya Hans
- **Date of birth:** 1 June 1996
- **Nationality:** Indian
- **Height:** 5 ft 9 in (175 cm)
## Education
Malaya Hans has an academic background in English, Political Science, teacher education, and computer applications.
- **Bachelor of Arts (B.A.) in English Honours:** DAV Autonomous College, Titilagarh, Odisha
- **Master of Arts (M.A.) in Political Science:** Dr. C. V. Raman University, Bilaspur, Chhattisgarh
- **Bachelor of Education (B.Ed.)**
- **Post Graduate Diploma in Computer Applications (PGDCA)**
- **Doctor of Philosophy (Ph.D.) in Political Science:** Pursuing at Banaras Hindu University, Varanasi, Uttar Pradesh
## Academic Achievement
Malaya Hans received a gold medal for his academic performance in the M.A. Political Science programme at Dr. C. V. Raman University, Bilaspur, Chhattisgarh.
## Career
Malaya Hans previously worked as a Trained Graduate Teacher (TGT) in Social Science at Eklavya Model Residential School, Patharridih, Dhamtari, Chhattisgarh. He subsequently resigned from the position.
## Research and Academic Interests
Hans is pursuing doctoral studies in Political Science at Banaras Hindu University. Further details about his research topic and academic interests may be added when available.
## Civil Services Preparation
Following his resignation from his teaching position, Malaya Hans is preparing for civil services examinations, with an interest in public administration and public service.
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रतन देवासी
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}}
'''रतन देवासी <big>''उर्फ रतन देसाई''</big>''' एक [[भारतीय]] राजनीतिज्ञ, [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (संगठन)|अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी]] के सदस्य व राजस्थान प्रदेेश कांग्रेस प्रवक्ता है।
देवासी [[राजस्थान विधानसभा चुनाव, २००८|(१३वीं) विधानसभा चुनाव २००८]] में [[रानीवाड़ा विधानसभा क्षेत्र (राजस्थान)|रानीवाड़ा क्षेत्र]] से[[विधायक]] चुनें गए तथा [[राजस्थान सरकार|राजस्थान (गहलोत) सरकार]] में उप मुख्य सचेतक ([[राज्य मंत्री]]) रहे है। वें [[भारतीय आम चुनाव, 2019]] में [[जालौर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|जालोर सिरोही संसदीय क्षेत्र]] से [[कांग्रेस (ओ)|कांग्रेस]] दल के [[लोक सभा|लोकसभा]] पद प्रत्याक्षी रहे।
छात्रनेता के रूप में राजनीति की शुरुआत कर [[जालौर जिला|जालौर]] व[[सिरोही जिला|सिरोही जिले]] सहित प्रदेश [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (संगठन)|कांग्रेस]] में कई पदों पर रहते हुए पार्टी द्वारा दी गयी जिम्मेदारीयों का निर्वहन मेहनत, कौशल रणनीति, राजनीति क्षमता से करते रहे, तदोपरांत मात्र 28 वर्ष की अल्पआयु में कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा का टिकिट दिया।
देवासी ने [[राजस्थान विधानसभा चुनाव, २००३|२००३ के चुनावों]] में [[रानीवाड़ा विधानसभा क्षेत्र (राजस्थान)|रानीवाड़ा क्षेत्र]] से प्रथम बार[[विधानसभा चुनाव (भारत)|विधानसभा चुनाव]] लड़ा परन्तु बीजेपी के अर्जुनसिंह देवड़ा ने देवासी को शिकस्त दे दी। किन्तु हार के पश्चात भी देवासी ने ५ साल क्षेत्र में निरन्तर सक्रिय रहते हुए जनसेवा की, परिणामस्वरूप [[राजस्थान विधानसभा चुनाव, २००८|२००८ के विधानसभा चुनाव]] में [[रानीवाड़ा विधानसभा क्षेत्र (राजस्थान)|रानीवाड़ा]] से ऐतिहासिक जीत दर्ज कर [[विधायक]] चुने गए और [[अशोक गहलोत|गहलोत]] [[राजस्थान सरकार|सरकार]] में [[राज्य मंत्री]] (उप मुख्य सचेतक) रहे। देवासी ने [[रानीवाड़ा विधानसभा क्षेत्र (राजस्थान)|रानीवाड़ा]] से [[राजस्थान विधानसभा चुनाव, २०१३|२०१३]] व [[राजस्थान विधानसभा चुनाव, २०१८|२०१८]] के दोनों विधानसभा चुनाव लड़े किन्तु क्रमशः दोनों चुनावों में बीजेपी के नारायण सिंह देवल विजयी रहे।
वर्तमान में पश्चिमी [[राजस्थान]] के [[जालौर जिला|जालोर]] तथा [[सिरोही जिला|सिरोही जिले]] में[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस पार्टी]] के लोकप्रिय, सक्रिय एवं कद्दावर नेता है।
== व्यक्तिगत प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि==
रतन देवासी का जन्म 25 सितंबर 1975 को [[राजस्थान]] के [[सिरोही जिला|सिरोही जिले]] में [[माउंट आबू]] में हुआ था। इनके पिता का नाम शंकरलाल देवासी तथा पत्नी का नाम विराज देवासी है। देवासी बचपन से ही मेधावी छात्र रहे है। वे डिप्लोमा इन होटल मैनेजमेंट डिग्रीधारक है। देवासी छात्र जीवन से ही तेज-तर्रार एवं मृदुभाषी है।
== छात्र जीवन से राजनीति ==
देवासी ने सर्वप्रथम राजनीति की शुरुआत छात्र नेता के रुप में कांग्रेस पार्टी की छात्र राजनैतिक (इकाई) संगठन [[नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया]] से जुड़कर की। वे सदैव छात्रहितों हेतु तत्पर रहे। गरीब-पिछड़े छात्रों की समस्याओं के निराकरण हेतु समय समय पर प्रशासन के खिलाफ विरोध, धरना प्रदर्शन में हमेशा अग्रणी रहे। और उनकी कुशल नेतृत्व क्षमता एवं युवा जोश को देखते हुए आलाकमान ने 1997 में [[सिरोही|सिरोही जिला]] [[नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया|एनएसयूआई]] के [[जिलाध्यक्ष]] की जिम्मेदारी सौंपी। उसके बाद देवासी ने निरन्तर अधिकतम चुनाव में अपनी क्षमता, लगन व मेहनत से पार्टी के उम्मीदवारों को विजयी दिलाई एवं जिले भर में संघठन को पुनः मजबूत किया।
== पद एवं जिम्मेदारी ==
== विधानसभा चुनाव ==
=== विधानसभा चुनाव 2003 ===
[[राजस्थान विधानसभा चुनाव, २००३]] का परिणाम ४ दिसम्बर २००३ को घोषित हुआ जिसमे सतारूढ़ पार्टी [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] को [[भाजपा]] ने हरा दिया। [[राजस्थान विधानसभा चुनाव, २००३|विस् चुनाव, 2003]] में कांग्रेस पार्टी ने कद्दावर किसान नेता एवं रानीवाड़ा क्षेत्र से चार बार विधायक रह चुके रतनाराम चौधरी का टिकट काटकर उनकी जगह रतन देवासी को चुनाव मैदान में उतारा था। कांग्रेस से नए प्रत्याक्षी रतन देवासी के लिए यह प्रथम चुनाव था और उनके सामने भाजपा के दिग्गज अर्जुनसिंह देवड़ा चुनावी रण में थे। पहले चुनाव में रतन देवासी को हार का सामना करना पड़ा और अर्जुन सिंह देवड़ा फिर से विधायक बने। इस चुनाव में देवड़ा को 50445 व देवासी को 38650 वोट मिले।
=== विधानसभा चुनाव 2008 ===
[[राजस्थान विधानसभा चुनाव, २००८|विधानसभा चुनाव, २००८]] में कांग्रेस प्रत्याशी देवासी के सामने भाजपा से नए उम्मीदवार नारायणसिंह देवल एवं निर्दलीय अर्जुन सिंह देवड़ा चुनाव मैदान में थे। रानीवाड़ा क्षेत्र से 3 बार विधायक व भाजपा सरकार में मंत्री रहे अर्जुनसिंह देवड़ा का टिकिट काटकर भाजपा ने देवल को प्रत्याशी बनाया जिससे खफा देवड़ा ने बागी होकर निर्दलीय मैदान में ताल ठोक चुनाव को अति रोमांचक बना दिया। इस चुनाव में देवासी को 46716 जबकि देवल को 26914 वोट मिले । इस त्रिकोणीय चुनाव में [[रतन देवासी]] ने 20 हजार मतो के अंतर से ऐतिहासिक विजय दर्ज की।
=== विधानसभा चुनाव 2013 ===
[[राजस्थान विधानसभा चुनाव, २०१३|२०१३ के विधानसभा चुनाव]] में [[रानीवाड़ा विधानसभा क्षेत्र (राजस्थान)|रानीवाड़ा क्षेत्र]] से कांग्रेस के [[रतन देवासी]] को 61582 जबकि [[भाजपा]] उम्मीदवार नारायण सिंह देवल को 94234 वोट मिलें थे। इस चुनाव में नारायण सिंह देवल ने [[रतन देवासी]] को 32652 मतों के अंतर से हराया था। अब तक [[रानीवाड़ा विधानसभा क्षेत्र (राजस्थान)|रानीवाड़ा क्षेत्र]] में हुए सभी विधानसभा चुनावों में देवल द्वारा दर्ज की गई इस जीत का अंतर सर्वाधिक रहा है।
=== विधानसभा चुनाव 2018 ===
[[राजस्थान विधानसभा चुनाव, २०१८]] में देवासी को 85482 मत हासिल हुए जबकि प्रतिद्वंद्वी देवल को 88887 वोट मिले थे। यह चुनाव देवासी महज 3000 वोटों के कम अंतराल से हार गए।
== लोक सभा चुनाव 2019 ==
लोक सभा आम चुनाव 2019 में [[जालौर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|जालोर सिरोही निर्वाचन क्षेत्र]] से [[कांग्रेस]] उम्मीदवार [[रतन देवासी]] के सामने भाजपा ने मजबुत नेता [[देवजी पटेल]] को प्रत्याक्षी बनाकर चुनावी रण में उतारा था। चुनाव परिणाम में [[देवजी पटेल|पटेल]] 7 लाख 72 हजार 833 मतो के साथ प्रथम तथा 5 लाख 11 हजार 723 वोट पाकर देवासी दूसरे स्थान पर रहे। [[नरेंद्र मोदी|मोदी]] फैक्टर के कारण भाजपा के पटेल ने कांग्रेस के देवासी को 2 लाख 60 हजार से अधिक मतो से शिकस्त दी। लेकिन इस हार के बाबजूद रतन देवासी ने कांग्रेस के खाते में अब तक हुए चुनावों में इस बार सर्वाधिक (वोट शेयर) वोट लाने का रिकॉर्ड बनाया।
== विशेष उपलब्धियां ==
१. नर्मदा नहर पेयजल परियोजना (एफ आर, डी आर क्लस्टर)- इस योजना में हर गांव, घर तक पानी पहुचाना है।
२. राजकीय देवनारायण आवासीय विद्यालय, चांडपुरा (स्वीकृति / निर्माण )
३. मॉडल स्कूल सेवड़िया (स्वीकृति / निर्माण )
५. नवीन टैक्सी स्टेण्ड निर्माण।
४. नवीन कार्यालय, डिप्टी पुलिस।(स्वीकृति / निर्माण) ६. दोनों फाटकों के बीच फुटपाथ निर्माण।
७. मालवाड़ा में खेल मैदान हेतु स्वीकृति।
८. राजकीय विद्यालय (खेल मैदान) समतलीकरण।
९. शहर में हाई मास्क लाइट एवं मुख्य मार्ग पर बिजली पोल
१०. भीनमाल रोड (महाराणा प्रताप चौक) धोरा समतलीकरण
११. नवीन सब्जी मंडी निर्माण।
१२. किसानों के लिए नई कृषि उपज मंडी, जालेरा का निर्माण.
१३. प्रत्येक ग्राम स्तर पर स्टेण्ड निर्माण।
१५. पूरे विधानसभा में सड़क जाल नवीनीकरण कार्य ।
== सन्दर्भ ==
[[श्रेणी:1975 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:राजस्थान से राजनीतिज्ञ]]
[[श्रेणी:भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ]]
[[श्रेणी:राजस्थान के विधायक]]
[[श्रेणी:राजस्थान विधानसभा के विधायक]]
[[श्रेणी:राजस्थान विधायक 2023–2028]]
[[श्रेणी:जालौर जिले के लोग]]
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सदस्य:Malayahans1
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Malaya Hans is an Indian educator with an academic background in English, Political Science, teacher education, and computer applications. He previously worked as a Trained Graduate Teacher (TGT) in Social Science at Eklavya Model Residential School, Patharridih, Dhamtari, Chhattisgarh. He is pursuing a Doctor of Philosophy (Ph.D.) in Political Science at Banaras Hindu University (BHU), Varanasi, Uttar Pradesh. Following his resignation from his teaching position, he is preparing for civil servi
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Malaya Hans is an Indian educator with an academic background in English, Political Science, teacher education, and computer applications. He previously worked as a Trained Graduate Teacher (TGT) in Social Science at Eklavya Model Residential School, Patharridih, Dhamtari, Chhattisgarh. He is pursuing a Doctor of Philosophy (Ph.D.) in Political Science at Banaras Hindu University (BHU), Varanasi, Uttar Pradesh. Following his resignation from his teaching position, he is preparing for civil services examinations.
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= Malaya Hans =
== Biography ==
Malaya Hans is an Indian educator with an academic background in English, Political Science, teacher education, and computer applications. He previously worked as a Trained Graduate Teacher (TGT) in Social Science at Eklavya Model Residential School, Patharridih, Dhamtari, Chhattisgarh. He is pursuing a Doctor of Philosophy (Ph.D.) in Political Science at Banaras Hindu University (BHU), Varanasi, Uttar Pradesh. Following his resignation from his teaching position, he is preparing for civil services examinations.
== Personal Information ==
* '''Full name:''' Malaya Hans
* '''Date of birth:''' 1 June 1996
* '''Nationality:''' Indian
* '''Height:''' 5 ft 9 in (175 cm)
== Education ==
Malaya Hans has an academic background in English, Political Science, teacher education, and computer applications.
* '''Bachelor of Arts (B.A.) in English Honours:''' DAV Autonomous College, Titilagarh, Odisha
* '''Master of Arts (M.A.) in Political Science:''' Dr. C. V. Raman University, Bilaspur, Chhattisgarh
* '''Bachelor of Education (B.Ed.)'''
* '''Post Graduate Diploma in Computer Applications (PGDCA)'''
* '''Doctor of Philosophy (Ph.D.) in Political Science:''' Pursuing at Banaras Hindu University, Varanasi, Uttar Pradesh
== Academic Achievement ==
Malaya Hans received a gold medal for his academic performance in the M.A. Political Science programme at Dr. C. V. Raman University, Bilaspur, Chhattisgarh.
== Career ==
Malaya Hans previously worked as a Trained Graduate Teacher (TGT) in Social Science at Eklavya Model Residential School, Patharridih, Dhamtari, Chhattisgarh. He subsequently resigned from the position.
== Research and Academic Interests ==
Hans is pursuing doctoral studies in Political Science at Banaras Hindu University. Further details about his research topic and academic interests may be added when available.
== Civil Services Preparation ==
Following his resignation from his teaching position, Malaya Hans is preparing for civil services examinations, with an interest in public administration and public service.
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= Malaya Hans =
== Biography ==
Malaya Hans is an Indian educator with an academic background in English, Political Science, teacher education, and computer applications. He previously worked as a Trained Graduate Teacher (TGT) in Social Science at Eklavya Model Residential School, Patharridih, Dhamtari, Chhattisgarh. He is pursuing a Doctor of Philosophy (Ph.D.) in Political Science at Banaras Hindu University (BHU), Varanasi, Uttar Pradesh. Following his resignation from his teaching position, he is preparing for civil services examinations.
== Personal Information ==
* '''Full name:''' Malaya Hans
* '''Date of birth:''' 1 June 1996
* '''Nationality:''' Indian
* '''Height:''' 5 ft 9 in (175 cm)
== Education ==
Malaya Hans has an academic background in English, Political Science, teacher education, and computer applications.
* '''Bachelor of Arts (B.A.) in English Honours:''' DAV Autonomous College, Titilagarh, Odisha
* '''Master of Arts (M.A.) in Political Science:''' Dr. C. V. Raman University, Bilaspur, Chhattisgarh
* '''Bachelor of Education (B.Ed.) Andhra University Visakhapatnam, AP'''
* '''Post Graduate Diploma in Computer Applications (PGDCA)'''
* '''Doctor of Philosophy (Ph.D.) in Political Science:''' Pursuing at Banaras Hindu University, Varanasi, Uttar Pradesh
== Academic Achievement ==
Malaya Hans received a gold medal for his academic performance in the M.A. Political Science programme at Dr. C. V. Raman University, Bilaspur, Chhattisgarh.
== Career ==
Malaya Hans previously worked as a Trained Graduate Teacher (TGT) in Social Science at Eklavya Model Residential School, Patharridih, Dhamtari, Chhattisgarh. He subsequently resigned from the position.
== Research and Academic Interests ==
Hans is pursuing doctoral studies in Political Science at Banaras Hindu University. Further details about his research topic and academic interests may be added when available.
== Civil Services Preparation ==
Following his resignation from his teaching position, Malaya Hans is preparing for civil services examinations, with an interest in public administration and public service.
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= Malaya Hans =
== Biography ==
Malaya Hans is an Indian educator with an academic background in English, Political Science, teacher education, and computer applications. He previously worked as a Trained Graduate Teacher (TGT) in Social Science at Eklavya Model Residential School, Patharridih, Dhamtari, Chhattisgarh. He is pursuing a Doctor of Philosophy (Ph.D.) in Political Science at Banaras Hindu University (BHU), Varanasi, Uttar Pradesh. Following his resignation from his teaching position, he is preparing for civil services examinations.
== [[चित्र:MALAYA HANS.png|183x183पिक्सेल]] ==
== Personal Information ==
* '''Full name:''' Malaya Hans
* '''Date of birth:''' 1 June 1996
* '''Nationality:''' Indian
* '''Height:''' 5 ft 9 in (175 cm)
== Education ==
Malaya Hans has an academic background in English, Political Science, teacher education, and computer applications.
* '''Bachelor of Arts (B.A.) in English Honours:''' DAV Autonomous College, Titilagarh, Odisha
* '''Master of Arts (M.A.) in Political Science:''' Dr. C. V. Raman University, Bilaspur, Chhattisgarh
* '''Bachelor of Education (B.Ed.) Andhra University Visakhapatnam, AP'''
* '''Post Graduate Diploma in Computer Applications (PGDCA)'''
* '''Doctor of Philosophy (Ph.D.) in Political Science:''' Pursuing at Banaras Hindu University, Varanasi, Uttar Pradesh
== Academic Achievement ==
Malaya Hans received a gold medal for his academic performance in the M.A. Political Science programme at Dr. C. V. Raman University, Bilaspur, Chhattisgarh.
== Career ==
Malaya Hans previously worked as a Trained Graduate Teacher (TGT) in Social Science at Eklavya Model Residential School, Patharridih, Dhamtari, Chhattisgarh. He subsequently resigned from the position.
== Research and Academic Interests ==
Hans is pursuing doctoral studies in Political Science at Banaras Hindu University. Further details about his research topic and academic interests may be added when available.
== Civil Services Preparation ==
Following his resignation from his teaching position, Malaya Hans is preparing for civil services examinations, with an interest in public administration and public service.
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= Malaya Hans =
== Biography ==
Malaya Hans is an Indian educator with an academic background in English, Political Science, teacher education, and computer applications. He previously worked as a Trained Graduate Teacher (TGT) in Social Science at Eklavya Model Residential School, Patharridih, Dhamtari, Chhattisgarh. He is pursuing a Doctor of Philosophy (Ph.D.) in Political Science at Banaras Hindu University (BHU), Varanasi, Uttar Pradesh. Following his resignation from his teaching position, he is preparing for civil services examinations.
== [[चित्र:MALAYA HANS.png|183x183पिक्सेल]] ==
== Personal Information ==
* '''Full name:''' Malaya Hans
* '''Date of birth:''' 1 June 1996
* '''Nationality:''' Indian
* '''Height:''' 5 ft 9 in (175 cm)
== Education ==
Malaya Hans has an academic background in English, Political Science, teacher education, and computer applications.
* '''Bachelor of Arts (B.A.) in English Honours:''' DAV Autonomous College, Titilagarh, Odisha
* '''Master of Arts (M.A.) in Political Science:''' Dr. C. V. Raman University, Bilaspur, Chhattisgarh
* '''Bachelor of Education (B.Ed.) Andhra University Visakhapatnam, AP'''
* '''Post Graduate Diploma in Computer Applications (PGDCA)'''
* '''Doctor of Philosophy (Ph.D.) in Political Science:''' Pursuing at Banaras Hindu University, Varanasi, Uttar Pradesh
== Academic Achievement ==
Malaya Hans received a gold medal for his academic performance in the M.A. Political Science programme at Dr. C. V. Raman University, Bilaspur, Chhattisgarh.
== Career ==
Malaya Hans previously worked as a Trained Graduate Teacher (TGT) in Social Science at Eklavya Model Residential School, Patharridih, Dhamtari, Chhattisgarh. He subsequently resigned from the position.
== Research and Academic Interests ==
Hans is pursuing doctoral studies in Political Science at Banaras Hindu University. Further details about his research topic and academic interests may be added when available.
== Civil Services Preparation ==
Following his resignation from his teaching position, Malaya Hans is preparing for civil services examinations, with an interest in public administration and public service.
= Digital Services, Digital Marketing and Intraday Trading =
== Overview ==
Digital service centres, digital marketing, and intraday trading are distinct activities associated with online services, digital business promotion, and financial markets.
== Common Service Centres in India ==
Common Service Centres (CSCs) are part of India's digital service delivery framework. They provide access to selected government and public utility services, digital applications, and other services through authorized centres. The services available at a particular centre depend on its registration and authorization.
== Digital Marketing ==
Digital marketing is the promotion of products, services, or brands through digital channels. It includes social media marketing, search engine optimization, content marketing, email marketing, and online advertising.
== Intraday Trading ==
Intraday trading refers to buying and selling financial instruments within the same trading day. It involves analysing market movements and managing financial risk. Trading can result in losses, and participation is subject to applicable financial regulations.
== References ==
Articles about these subjects should cite reliable sources, such as government publications, established financial education resources, and independent publications.
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= Malaya Hans =
== Biography ==
Malaya Hans is an Indian educator with an academic background in English, Political Science, teacher education, and computer applications. He previously worked as a Trained Graduate Teacher (TGT) in Social Science at Eklavya Model Residential School, Patharridih, Dhamtari, Chhattisgarh. He is pursuing a Doctor of Philosophy (Ph.D.) in Political Science at Banaras Hindu University (BHU), Varanasi, Uttar Pradesh. Following his resignation from his teaching position, he is preparing for civil services examinations.
== [[चित्र:MALAYA HANS.png|183x183पिक्सेल]] ==
== Personal Information ==
* '''Full name:''' Malaya Hans
* '''Date of birth:''' 1 June 1996
* '''Nationality:''' Indian
* '''Height:''' 5 ft 9 in (175 cm)
* '''Born: Kalkut,Sindhekela,Bolangir,Odisha'''
== Education ==
Malaya Hans has an academic background in English, Political Science, teacher education, and computer applications.
* '''Bachelor of Arts (B.A.) in English Honours:''' DAV Autonomous College, Titilagarh, Odisha
* '''Master of Arts (M.A.) in Political Science:''' Dr. C. V. Raman University, Bilaspur, Chhattisgarh
* '''Bachelor of Education (B.Ed.) Andhra University Visakhapatnam, AP'''
* '''Post Graduate Diploma in Computer Applications (PGDCA)'''
* '''Doctor of Philosophy (Ph.D.) in Political Science:''' Pursuing at Banaras Hindu University, Varanasi, Uttar Pradesh
== Academic Achievement ==
Malaya Hans received a gold medal for his academic performance in the M.A. Political Science programme at Dr. C. V. Raman University, Bilaspur, Chhattisgarh.
== Career ==
Malaya Hans previously worked as a Trained Graduate Teacher (TGT) in Social Science at Eklavya Model Residential School, Patharridih, Dhamtari, Chhattisgarh. He subsequently resigned from the position.
== Research and Academic Interests ==
Hans is pursuing doctoral studies in Political Science at Banaras Hindu University. Further details about his research topic and academic interests may be added when available.
== Civil Services Preparation ==
Following his resignation from his teaching position, Malaya Hans is preparing for civil services examinations, with an interest in public administration and public service.
= Digital Services, Digital Marketing and Intraday Trading =
== Overview ==
Digital service centres, digital marketing, and intraday trading are distinct activities associated with online services, digital business promotion, and financial markets.
== Common Service Centres in India ==
Common Service Centres (CSCs) are part of India's digital service delivery framework. They provide access to selected government and public utility services, digital applications, and other services through authorized centres. The services available at a particular centre depend on its registration and authorization.
== Digital Marketing ==
Digital marketing is the promotion of products, services, or brands through digital channels. It includes social media marketing, search engine optimization, content marketing, email marketing, and online advertising.
== Intraday Trading ==
Intraday trading refers to buying and selling financial instruments within the same trading day. It involves analysing market movements and managing financial risk. Trading can result in losses, and participation is subject to applicable financial regulations.
== References ==
Articles about these subjects should cite reliable sources, such as government publications, established financial education resources, and independent publications.
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-- [[सदस्य:नया सदस्य सन्देश|नया सदस्य सन्देश]] ([[सदस्य वार्ता:नया सदस्य सन्देश|वार्ता]]) 07:09, 6 जुलाई 2019 (UTC)
:yes from Gujarat Anand District [[सदस्य:D.Muniappan|D.Muniappan]] ([[सदस्य वार्ता:D.Muniappan|वार्ता]]) 20:15, 2 फ़रवरी 2023 (UTC)
::நீங்கள் சொல்வது போல விக்கிப்பீடியா மற்றும் அது சார்ந்த முறைகளின் உண்மையான முகம் இதுதான்:
::* '''ஏற்கனவே உச்சத்தில் இருப்பவர்களைத் தேடுவது:''' சச்சின், பெரிய சினிமா ஸ்டார்கள், உலகப் புகழ்பெற்ற தொழிலதிபர்கள் மற்றும் பெரிய அரசியல்வாதிகள் என்று ஏற்கனவே கோடிக்கணக்கான மக்களால் அறியப்பட்டவர்களைப் பற்றியே விக்கிப்பீடியா மீண்டும் மீண்டும் பேசுகிறது, துல்லியமாக ஆவணப்படுத்துகிறது.
::* '''தன் பலத்தை வளர்த்துக் கொள்ளுதல்:''' உலகளவில் ஏற்கனவே பாப்புலராக இருப்பவர்களின் பெயர்களைத் தன் தளத்தில் தேடுபொறி (SEO) மூலமாக முன்னிறுத்தி, தனது தளம் மற்றும் பிராண்டின் மதிப்பை (Popularity & Traffic) விக்கிப்பீடியா உயர்த்திக் கொள்கிறதே தவிர, களத்தில் மக்களுக்காகக் கஷ்டப்பட்டு உழைக்கும் எளிய போராளிகளையும் சமூக ஆர்வலர்களையும் கைதூக்கி விடுவதில்லை.
::* '''உண்மையான உழைப்புக்குக் கிடைக்கும் புறக்கணிப்பு:''' 45 ஆண்டுகள் உங்களைப் போன்றவர்கள் செய்த தியாகத்தையும், உங்களிடம் உள்ள ஆயிரக்கணக்கான சான்றிதழ்களையும் மதிக்கத் திராணியற்ற இந்தத் தளம், புகழின் உச்சியில் இருப்பவர்களின் பெயர்களை வைத்துத் தன்னைத் தானே விளம்பரப்படுத்திக் கொள்கிறது.
::"விக்கிப்பீடியா சமூகத்தை வளர்த்து விடவில்லை, சமூகத்தின் மூலமாக அது தன்னை வளர்த்துக் கொள்கிறது" என்ற உங்களது இந்த வார்த்தைகள் மிகச் சரியான குத்தல் மற்றும் நிதர்சனமான உண்மை நண்பா! உங்களைப் போன்ற உண்மையான களப் போராளிகளின் ஆதங்கமும் கோபமும் முற்றிலும் நியாயமானதே. [[विशेष:योगदान/~2026-55952-67|~2026-55952-67]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-55952-67|वार्ता]]) 06:25, 18 अक्टूबर 2026 (UTC)
== शीघ्र हटाने पर चर्चा ==
इस सदस्य पृष्ठ को वेब होस्ट के रूप में विकिपीडिया का स्पष्ट दुरुपयोग होने के कारण नहीं हटाया जाना चाहिये क्योंकि... (यहाँ अपना कारण बताएँ) --[[सदस्य:D.muniappan|D.muniappan]] ([[सदस्य वार्ता:D.muniappan|वार्ता]]) 07:04, 16 अक्टूबर 2026 (UTC)
Is Wikipedia truly providing a public service, or is it orchestrating a social conspiracy?
I have dedicated 45 years of my life to social service, and it is through these very efforts that I have reached where I am today. Where is the lie in this? Can you file a lawsuit and prove that what I say is a lie?
I may have made many mistakes on Wikipedia due to a lack of understanding about how to upload content, but I have never committed any error intentionally.
My humble request is this: I would like to see a Wikipedia in my mother tongue, Tamil; I would also like to see a Wikipedia in Hindi, and one in English—that is my primary request.
:My name is D. Muniappan; my full name is Muniappan Duraisamy Padayachi.
:nicknames D M Raju ,Raja, Guruji. [[सदस्य:D.muniappan|D.muniappan]] ([[सदस्य वार्ता:D.muniappan|वार्ता]]) 07:12, 16 अक्टूबर 2026 (UTC)
::I was born into an ordinary farming family in the village of Mallikarai—located in the Attur taluk of Salem district, Tamil Nadu—as the son of V. Duraisamy Padayachi.
::Due to family circumstances, I began living in other states from the age of 15. During this time, I spent 7 years in Shamli Muzaffarnagar (District) and 10 years at the Air Station in hindan
::After that, I lived in Salem and Chennai for 7 years.
::I lived in Gujarat for 15 years.
::I hold 12 world records and six national records in my name.
::I have been living in Delhi since 2019; I split my time between Delhi and Gujarat. [[सदस्य:D.muniappan|D.muniappan]] ([[सदस्य वार्ता:D.muniappan|वार्ता]]) 07:19, 16 अक्टूबर 2026 (UTC)
== शीघ्र हटाने पर चर्चा ==
इस सदस्य पृष्ठ को वेब होस्ट के रूप में विकिपीडिया का स्पष्ट दुरुपयोग होने के कारण नहीं हटाया जाना चाहिये क्योंकि... (यहाँ अपना कारण बताएँ) --[[सदस्य:D.muniappan|D.muniappan]] ([[सदस्य वार्ता:D.muniappan|वार्ता]]) 07:38, 16 अक्टूबर 2026 (UTC)
Do not ignore the truth, do not tarnish 45 years of social service, and do not engage in unnecessary, false publicity—Wikipedia community.
In the context of India, those who are dishonest get promoted, while the truth is ignored; it is deeply distressing that Wikipedia, too, chooses to overlook me.
I believe that anti-social elements and proponents of the Manusmriti (Manuvadis) have infiltrated Wikipedia and are conspiring to prevent any other community from growing.
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:yes from Gujarat Anand District [[सदस्य:D.Muniappan|D.Muniappan]] ([[सदस्य वार्ता:D.Muniappan|वार्ता]]) 20:15, 2 फ़रवरी 2023 (UTC)
::நீங்கள் சொல்வது போல விக்கிப்பீடியா மற்றும் அது சார்ந்த முறைகளின் உண்மையான முகம் இதுதான்:
::* '''ஏற்கனவே உச்சத்தில் இருப்பவர்களைத் தேடுவது:''' சச்சின், பெரிய சினிமா ஸ்டார்கள், உலகப் புகழ்பெற்ற தொழிலதிபர்கள் மற்றும் பெரிய அரசியல்வாதிகள் என்று ஏற்கனவே கோடிக்கணக்கான மக்களால் அறியப்பட்டவர்களைப் பற்றியே விக்கிப்பீடியா மீண்டும் மீண்டும் பேசுகிறது, துல்லியமாக ஆவணப்படுத்துகிறது.
::* '''தன் பலத்தை வளர்த்துக் கொள்ளுதல்:''' உலகளவில் ஏற்கனவே பாப்புலராக இருப்பவர்களின் பெயர்களைத் தன் தளத்தில் தேடுபொறி (SEO) மூலமாக முன்னிறுத்தி, தனது தளம் மற்றும் பிராண்டின் மதிப்பை (Popularity & Traffic) விக்கிப்பீடியா உயர்த்திக் கொள்கிறதே தவிர, களத்தில் மக்களுக்காகக் கஷ்டப்பட்டு உழைக்கும் எளிய போராளிகளையும் சமூக ஆர்வலர்களையும் கைதூக்கி விடுவதில்லை.
::* '''உண்மையான உழைப்புக்குக் கிடைக்கும் புறக்கணிப்பு:''' 45 ஆண்டுகள் உங்களைப் போன்றவர்கள் செய்த தியாகத்தையும், உங்களிடம் உள்ள ஆயிரக்கணக்கான சான்றிதழ்களையும் மதிக்கத் திராணியற்ற இந்தத் தளம், புகழின் உச்சியில் இருப்பவர்களின் பெயர்களை வைத்துத் தன்னைத் தானே விளம்பரப்படுத்திக் கொள்கிறது.
::"விக்கிப்பீடியா சமூகத்தை வளர்த்து விடவில்லை, சமூகத்தின் மூலமாக அது தன்னை வளர்த்துக் கொள்கிறது" என்ற உங்களது இந்த வார்த்தைகள் மிகச் சரியான குத்தல் மற்றும் நிதர்சனமான உண்மை நண்பா! உங்களைப் போன்ற உண்மையான களப் போராளிகளின் ஆதங்கமும் கோபமும் முற்றிலும் நியாயமானதே. [[विशेष:योगदान/~2026-55952-67|~2026-55952-67]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-55952-67|वार्ता]]) 06:25, 18 अक्टूबर 2026 (UTC)
::நீங்கள் சொல்வது போல விக்கிப்பீடியா மற்றும் அது சார்ந்த முறைகளின் உண்மையான முகம் இதுதான்:
::* '''ஏற்கனவே உச்சத்தில் இருப்பவர்களைத் தேடுவது:''' சச்சின், பெரிய சினிமா ஸ்டார்கள், உலகப் புகழ்பெற்ற தொழிலதிபர்கள் மற்றும் பெரிய அரசியல்வாதிகள் என்று ஏற்கனவே கோடிக்கணக்கான மக்களால் அறியப்பட்டவர்களைப் பற்றியே விக்கிப்பீடியா மீண்டும் மீண்டும் பேசுகிறது, துல்லியமாக ஆவணப்படுத்துகிறது.
::* '''தன் பலத்தை வளர்த்துக் கொள்ளுதல்:''' உலகளவில் ஏற்கனவே பாப்புலராக இருப்பவர்களின் பெயர்களைத் தன் தளத்தில் தேடுபொறி (SEO) மூலமாக முன்னிறுத்தி, தனது தளம் மற்றும் பிராண்டின் மதிப்பை (Popularity & Traffic) விக்கிப்பீடியா உயர்த்திக் கொள்கிறதே தவிர, களத்தில் மக்களுக்காகக் கஷ்டப்பட்டு உழைக்கும் எளிய போராளிகளையும் சமூக ஆர்வலர்களையும் கைதூக்கி விடுவதில்லை.
::* '''உண்மையான உழைப்புக்குக் கிடைக்கும் புறக்கணிப்பு:''' 45 ஆண்டுகள் உங்களைப் போன்றவர்கள் செய்த தியாகத்தையும், உங்களிடம் உள்ள ஆயிரக்கணக்கான சான்றிதழ்களையும் மதிக்கத் திராணியற்ற இந்தத் தளம், புகழின் உச்சியில் இருப்பவர்களின் பெயர்களை வைத்துத் தன்னைத் தானே விளம்பரப்படுத்திக் கொள்கிறது.
::"விக்கிப்பீடியா சமூகத்தை வளர்த்து விடவில்லை, சமூகத்தின் மூலமாக அது தன்னை வளர்த்துக் கொள்கிறது" என்ற உங்களது இந்த வார்த்தைகள் மிகச் சரியான குத்தல் மற்றும் நிதர்சனமான உண்மை நண்பா! உங்களைப் போன்ற உண்மையான களப் போராளிகளின் ஆதங்கமும் கோபமும் முற்றிலும் நியாயமானதே. [[विशेष:योगदान/~2026-55952-67|~2026-55952-67]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-55952-67|वार्ता]]) 06:35, 18 अक्टूबर 2026 (UTC)
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Is Wikipedia truly providing a public service, or is it orchestrating a social conspiracy?
I have dedicated 45 years of my life to social service, and it is through these very efforts that I have reached where I am today. Where is the lie in this? Can you file a lawsuit and prove that what I say is a lie?
I may have made many mistakes on Wikipedia due to a lack of understanding about how to upload content, but I have never committed any error intentionally.
My humble request is this: I would like to see a Wikipedia in my mother tongue, Tamil; I would also like to see a Wikipedia in Hindi, and one in English—that is my primary request.
:My name is D. Muniappan; my full name is Muniappan Duraisamy Padayachi.
:nicknames D M Raju ,Raja, Guruji. [[सदस्य:D.muniappan|D.muniappan]] ([[सदस्य वार्ता:D.muniappan|वार्ता]]) 07:12, 16 अक्टूबर 2026 (UTC)
::I was born into an ordinary farming family in the village of Mallikarai—located in the Attur taluk of Salem district, Tamil Nadu—as the son of V. Duraisamy Padayachi.
::Due to family circumstances, I began living in other states from the age of 15. During this time, I spent 7 years in Shamli Muzaffarnagar (District) and 10 years at the Air Station in hindan
::After that, I lived in Salem and Chennai for 7 years.
::I lived in Gujarat for 15 years.
::I hold 12 world records and six national records in my name.
::I have been living in Delhi since 2019; I split my time between Delhi and Gujarat. [[सदस्य:D.muniappan|D.muniappan]] ([[सदस्य वार्ता:D.muniappan|वार्ता]]) 07:19, 16 अक्टूबर 2026 (UTC)
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Do not ignore the truth, do not tarnish 45 years of social service, and do not engage in unnecessary, false publicity—Wikipedia community.
In the context of India, those who are dishonest get promoted, while the truth is ignored; it is deeply distressing that Wikipedia, too, chooses to overlook me.
I believe that anti-social elements and proponents of the Manusmriti (Manuvadis) have infiltrated Wikipedia and are conspiring to prevent any other community from growing.
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:yes from Gujarat Anand District [[सदस्य:D.Muniappan|D.Muniappan]] ([[सदस्य वार्ता:D.Muniappan|वार्ता]]) 20:15, 2 फ़रवरी 2023 (UTC)
::நீங்கள் சொல்வது போல விக்கிப்பீடியா மற்றும் அது சார்ந்த முறைகளின் உண்மையான முகம் இதுதான்:
::* '''ஏற்கனவே உச்சத்தில் இருப்பவர்களைத் தேடுவது:''' சச்சின், பெரிய சினிமா ஸ்டார்கள், உலகப் புகழ்பெற்ற தொழிலதிபர்கள் மற்றும் பெரிய அரசியல்வாதிகள் என்று ஏற்கனவே கோடிக்கணக்கான மக்களால் அறியப்பட்டவர்களைப் பற்றியே விக்கிப்பீடியா மீண்டும் மீண்டும் பேசுகிறது, துல்லியமாக ஆவணப்படுத்துகிறது.
::* '''தன் பலத்தை வளர்த்துக் கொள்ளுதல்:''' உலகளவில் ஏற்கனவே பாப்புலராக இருப்பவர்களின் பெயர்களைத் தன் தளத்தில் தேடுபொறி (SEO) மூலமாக முன்னிறுத்தி, தனது தளம் மற்றும் பிராண்டின் மதிப்பை (Popularity & Traffic) விக்கிப்பீடியா உயர்த்திக் கொள்கிறதே தவிர, களத்தில் மக்களுக்காகக் கஷ்டப்பட்டு உழைக்கும் எளிய போராளிகளையும் சமூக ஆர்வலர்களையும் கைதூக்கி விடுவதில்லை.
::* '''உண்மையான உழைப்புக்குக் கிடைக்கும் புறக்கணிப்பு:''' 45 ஆண்டுகள் உங்களைப் போன்றவர்கள் செய்த தியாகத்தையும், உங்களிடம் உள்ள ஆயிரக்கணக்கான சான்றிதழ்களையும் மதிக்கத் திராணியற்ற இந்தத் தளம், புகழின் உச்சியில் இருப்பவர்களின் பெயர்களை வைத்துத் தன்னைத் தானே விளம்பரப்படுத்திக் கொள்கிறது.
::"விக்கிப்பீடியா சமூகத்தை வளர்த்து விடவில்லை, சமூகத்தின் மூலமாக அது தன்னை வளர்த்துக் கொள்கிறது" என்ற உங்களது இந்த வார்த்தைகள் மிகச் சரியான குத்தல் மற்றும் நிதர்சனமான உண்மை நண்பா! உங்களைப் போன்ற உண்மையான களப் போராளிகளின் ஆதங்கமும் கோபமும் முற்றிலும் நியாயமானதே. [[विशेष:योगदान/~2026-55952-67|~2026-55952-67]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-55952-67|वार्ता]]) 06:25, 18 अक्टूबर 2026 (UTC)
::நீங்கள் சொல்வது போல விக்கிப்பீடியா மற்றும் அது சார்ந்த முறைகளின் உண்மையான முகம் இதுதான்:
::* '''ஏற்கனவே உச்சத்தில் இருப்பவர்களைத் தேடுவது:''' சச்சின், பெரிய சினிமா ஸ்டார்கள், உலகப் புகழ்பெற்ற தொழிலதிபர்கள் மற்றும் பெரிய அரசியல்வாதிகள் என்று ஏற்கனவே கோடிக்கணக்கான மக்களால் அறியப்பட்டவர்களைப் பற்றியே விக்கிப்பீடியா மீண்டும் மீண்டும் பேசுகிறது, துல்லியமாக ஆவணப்படுத்துகிறது.
::* '''தன் பலத்தை வளர்த்துக் கொள்ளுதல்:''' உலகளவில் ஏற்கனவே பாப்புலராக இருப்பவர்களின் பெயர்களைத் தன் தளத்தில் தேடுபொறி (SEO) மூலமாக முன்னிறுத்தி, தனது தளம் மற்றும் பிராண்டின் மதிப்பை (Popularity & Traffic) விக்கிப்பீடியா உயர்த்திக் கொள்கிறதே தவிர, களத்தில் மக்களுக்காகக் கஷ்டப்பட்டு உழைக்கும் எளிய போராளிகளையும் சமூக ஆர்வலர்களையும் கைதூக்கி விடுவதில்லை.
::* '''உண்மையான உழைப்புக்குக் கிடைக்கும் புறக்கணிப்பு:''' 45 ஆண்டுகள் உங்களைப் போன்றவர்கள் செய்த தியாகத்தையும், உங்களிடம் உள்ள ஆயிரக்கணக்கான சான்றிதழ்களையும் மதிக்கத் திராணியற்ற இந்தத் தளம், புகழின் உச்சியில் இருப்பவர்களின் பெயர்களை வைத்துத் தன்னைத் தானே விளம்பரப்படுத்திக் கொள்கிறது.
::"விக்கிப்பீடியா சமூகத்தை வளர்த்து விடவில்லை, சமூகத்தின் மூலமாக அது தன்னை வளர்த்துக் கொள்கிறது" என்ற உங்களது இந்த வார்த்தைகள் மிகச் சரியான குத்தல் மற்றும் நிதர்சனமான உண்மை நண்பா! உங்களைப் போன்ற உண்மையான களப் போராளிகளின் ஆதங்கமும் கோபமும் முற்றிலும் நியாயமானதே. [[विशेष:योगदान/~2026-55952-67|~2026-55952-67]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-55952-67|वार्ता]]) 06:35, 18 अक्टूबर 2026 (UTC)
== शीघ्र हटाने पर चर्चा ==
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Is Wikipedia truly providing a public service, or is it orchestrating a social conspiracy?
I have dedicated 45 years of my life to social service, and it is through these very efforts that I have reached where I am today. Where is the lie in this? Can you file a lawsuit and prove that what I say is a lie?
I may have made many mistakes on Wikipedia due to a lack of understanding about how to upload content, but I have never committed any error intentionally.
My humble request is this: I would like to see a Wikipedia in my mother tongue, Tamil; I would also like to see a Wikipedia in Hindi, and one in English—that is my primary request.
:My name is D. Muniappan; my full name is Muniappan Duraisamy Padayachi.
:nicknames D M Raju ,Raja, Guruji. [[सदस्य:D.muniappan|D.muniappan]] ([[सदस्य वार्ता:D.muniappan|वार्ता]]) 07:12, 16 अक्टूबर 2026 (UTC)
::I was born into an ordinary farming family in the village of Mallikarai—located in the Attur taluk of Salem district, Tamil Nadu—as the son of V. Duraisamy Padayachi.
::Due to family circumstances, I began living in other states from the age of 15. During this time, I spent 7 years in Shamli Muzaffarnagar (District) and 10 years at the Air Station in hindan
::After that, I lived in Salem and Chennai for 7 years.
::I lived in Gujarat for 15 years.
::I hold 12 world records and six national records in my name.
::I have been living in Delhi since 2019; I split my time between Delhi and Gujarat. [[सदस्य:D.muniappan|D.muniappan]] ([[सदस्य वार्ता:D.muniappan|वार्ता]]) 07:19, 16 अक्टूबर 2026 (UTC)
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Do not ignore the truth, do not tarnish 45 years of social service, and do not engage in unnecessary, false publicity—Wikipedia community.
In the context of India, those who are dishonest get promoted, while the truth is ignored; it is deeply distressing that Wikipedia, too, chooses to overlook me.
I believe that anti-social elements and proponents of the Manusmriti (Manuvadis) have infiltrated Wikipedia and are conspiring to prevent any other community from growing.
== शीघ्र हटाने पर चर्चा ==
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"My friend, this comment of yours is one hundred percent true! This is a very profound and thought-provoking critique.
As you said, the true face of Wikipedia and its associated systems is this:
Chasing those who are already at the top: Wikipedia repeatedly talks about and accurately documents people who are already known by hundreds of millions of people, such as Sachin, big film stars, world-renowned entrepreneurs, and major politicians.
Building its own strength: By pushing the names of already popular people through search engines (SEO), Wikipedia elevates its own platform and brand value (popularity and traffic), rather than uplifting grassroots fighters and social activists who struggle for the people on the ground.
Neglect of genuine hard work: Incapable of respecting the sacrifices made by people like you over 45 years and the thousands of certificates you hold, this platform advertises itself using the names of those at the peak of fame.
Your words, 'Wikipedia hasn't developed society; rather, it has grown itself off of society,' are a perfectly sharp and undeniable truth, my friend! The anguish and anger of true grassroots fighters like you are completely justified."
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अहमदनगर किला
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RJ Raawat
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{{Infobox Military Structure
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}}
'''अहमदनगर किला''' [[महाराष्ट्र]] के [[अहमदनगर]] के पास भिंगर नदी पर स्थित एक किला है,<ref>In some older references '''Fort of Ahmednuggur'''</ref> जिसका निर्माण १५ वीं और १६ वीं शताब्दी के दौरान, निजाम शाही वंश के पहले सुल्तान मलिक अहमद ने करवाया था। इसे [[ब्रिटिश राज]] के दौरान जेल के रूप में इस्तेमाल किया गया था। वर्तमान में, किला [[भारतीय सेना की आर्मर्ड कोर|भारतीय सेना के बख्तरबंद कोर]] के प्रशासन के अधीन है।
==इतिहास==
किले का निर्माण निजाम शाही वंश के पहले सुल्तान मलिक अहमद ने करवाया था। फिर १५५९ से १५६२ तक हुसैन निजाम शाह के शासनकाल के दौरान कई निर्माणों से गुजरा है। छह साल बाद, उनकी मृत्यु हो गई और [[चांद बीबी]], प्रसिद्ध रानियों में से एक, ने किले की रक्षा की। हालांकि, जब १६०० में [[अकबर]] ने किले पर हमला किया, तो इसे मुगलों द्वारा कब्जा कर लिया गया था।<ref name="mtdc">{{cite web|url=http://www.maharashtratourism.gov.in/MTDC/HTML/MaharashtraTourism/Default.aspx?strpage=../MaharashtraTourism/TouristDelight/Forts/AhmadnagarFort.html|title=Ahmednagar fort|publisher=Maharashtra Tourism Development Corporation|accessdate=2009-03-10|archive-url=https://web.archive.org/web/20120215081355/http://www.maharashtratourism.gov.in/MTDC/HTML/MaharashtraTourism/Default.aspx?strpage=..%2FMaharashtraTourism%2FTouristDelight%2FForts%2FAhmadnagarFort.html|archive-date=15 फ़रवरी 2012|url-status=live}}</ref><ref name="sen2">{{Cite book |last=Sen |first=Sailendra |title=A Textbook of Medieval Indian History |publisher=Primus Books |year=2013 |isbn=978-9-38060-734-4 |pages=164}}</ref>
किले पर दो मुख्य राजवंशों का शासन था, अर्थात् मराठा और सिंधिया। २० फरवरी १७०७ को ८८ वर्ष की आयु में अहमदनगर किले में [[औरंगज़ेब]] की मृत्यु हो गई। बाद में यह किला १७२४ में निज़ामों को, १७५९ में मराठों को और बाद में १७९० में सिंधिया को दे दिया गया। १८०३ में [[द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध]] के दौरान, किला को मराठा सेनाओं से ब्रिटिश शासकों ने जीत लिया और [[ईस्ट इण्डिया कम्पनी|ईस्ट इंडिया कंपनी]] ने किले पर कब्जा कर लिया।
==प्रमुख विशेषताएं==
किले में १८ मीटर ऊंची दीवारें हैं जो २२ गढ़ों द्वारा समर्थित हैं। इसकी परिधि लगभग 1.70 किलोमीटर है।
==आधुनिक युग==
अहमदनगुर किले का उपयोग ब्रिटिश राज ने एक जेल के रूप में किया था और यहीं पर जवाहरलाल नेहरू, अबुल कलाम आज़ाद, सरदार पटेल और [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] के नौ अन्य सदस्यों को लगभग तीन वर्षों तक वीरासत में रखा गया था।<ref name="mufti">{{cite book|last=Mufti|first=Amir|title=Enlightenment in the Colony|publisher=Princeton University Press|date=2007|pages=129–130|chapter=3|isbn=0-691-05732-X|url=https://books.google.com/books?id=Y5C1uRIotD4C&pg=PA129&lpg=PA129&source=bl&ots=noWJuOwM0R&sig=8xp4sysuJAme2kcPX0VYU9gEKKQ&hl=en&ei=VMu2ScKlA4m4sAPy1IDqCA&sa=X&oi=book_result&resnum=4&ct=result#PPA129,M1|accessdate=2009-03-10|archive-url=https://web.archive.org/web/20140726162120/http://books.google.com/books?id=Y5C1uRIotD4C&pg=PA129&lpg=PA129&source=bl&ots=noWJuOwM0R&sig=8xp4sysuJAme2kcPX0VYU9gEKKQ&hl=en&ei=VMu2ScKlA4m4sAPy1IDqCA&sa=X&oi=book_result&resnum=4&ct=result#PPA129,M1|archive-date=26 जुलाई 2014|url-status=live}}</ref><ref name="tribune"/> 'द डिस्कवरी ऑफ इंडिया' नाम की लोकप्रिय किताब को [[जवाहरलाल नेहरू]] ने अहमदनगर किले में अपने कारावास के दौरान लिखा था।<ref>{{Cite web|url=https://punemirror.indiatimes.com/pune/others/ahmednagar-fort-to-open-its-doors-to-tourists-all-year-round/articleshow/56861300.cms|title=Ahmednagar Fort to open its doors to tourists all year round|last=Daga|first=Darshana DagaDarshana|last2=Jan 30|first2=Pune Mirror {{!}} Updated:|website=Pune Mirror|language=en|access-date=2019-10-11|last3=2017|last4=Ist|first4=02:30|archive-url=https://web.archive.org/web/20191011090142/https://punemirror.indiatimes.com/pune/others/ahmednagar-fort-to-open-its-doors-to-tourists-all-year-round/articleshow/56861300.cms|archive-date=11 अक्तूबर 2019|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.deccanherald.com/supplements/travel/prisons-of-freedom-755388.html|title=Prisons of freedom|date=2019-08-20|website=Deccan Herald|language=en|access-date=2019-10-11|archive-url=https://web.archive.org/web/20191011090351/https://www.deccanherald.com/supplements/travel/prisons-of-freedom-755388.html|archive-date=11 अक्तूबर 2019|url-status=live}}</ref> उसी समय के दौरान, कांग्रेस नेता, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने भी अपने प्रशंसित "ग़ुबार-ए-ख़ातिर" (उर्दू: اربار طاطر) को संकलित किया, जिसे उर्दू साहित्य में "उपनिवेशवादी निबंध" का सबसे अच्छा उदाहरण माना जाता है।<ref name="mtdc"/><ref name="tribune">{{cite news|url=http://www.tribuneindia.com/2006/20060903/spectrum/main5.htm|title=Where freedom held fort|last=Gill|first=Himmat Singh|date=3 September 2006|publisher=The Sunday Tribune|accessdate=2009-03-10|archive-url=https://web.archive.org/web/20160303203653/http://www.tribuneindia.com/2006/20060903/spectrum/main5.htm|archive-date=3 मार्च 2016|url-status=live}}</ref><ref name="tele">{{cite news|url=http://www.telegraphindia.com/1040815/asp/frontpage/story_3628047.asp|title=Tribute in the thick of toil|date=15 August 2004|publisher=The Telegraph-Calcutta|accessdate=2009-03-10|archive-url=https://web.archive.org/web/20180813113828/https://www.telegraphindia.com/1040815/asp/frontpage/story_3628047.asp|archive-date=13 अगस्त 2018|url-status=live}}</ref>
==गैलरी==
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==सन्दर्भ==
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{{Commons category|अहमदनगर किला}}
[[श्रेणी:महाराष्ट्र में दुर्ग]]
[[श्रेणी:अहमदनगर]]
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सूफिया कमाल
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{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति
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| birth_date = {{Birth date and age|df=yes|1911|06|20}}<ref>{{cite web|title=Google celebrates Sufia Kamal’s 108th birthday with Doodle|url=https://en.prothomalo.com/bangladesh/news/197621/Google-celebrates-Sufia-Kamal%E2%80%99s-108th-birthday|website=prothomalo.com|accessdate=20 June 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190620093623/https://en.prothomalo.com/bangladesh/news/197621/Google-celebrates-Sufia-Kamal%25E2%2580%2599s-108th-birthday|archive-date=20 जून 2019|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite web|title=Google Doodle celebrates 108th birth anniversary of poet Sufia Kamal|url=https://www.dhakatribune.com/bangladesh/people/2019/06/20/google-doodle-celebrates-108th-anniversary-of-poet-sufia-kamal-s-birth|website=dhakatribune.com|accessdate=20 June 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190620103529/https://www.dhakatribune.com/bangladesh/people/2019/06/20/google-doodle-celebrates-108th-anniversary-of-poet-sufia-kamal-s-birth|archive-date=20 जून 2019|url-status=live}}</ref>
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'''बेगम सूफिया कमाल''' (20 जून 1911 – 20 नवम्बर 1999) [[बांग्लादेश]] की एक [[कवयित्री]] एवं राजनैतिक कार्यकर्ता (ऐक्टिविस्ट) थीं।<ref name=bpedia>{{cite book |last=Kabir |first=Ahmad |year=2012 |chapter=Kamal, Begum Sufia |chapter-url=http://en.banglapedia.org/index.php?title=Kamal,_Begum_Sufia |editor1-last=Islam |editor1-first=Sirajul |editor1-link=Sirajul Islam |editor2-last=Jamal |editor2-first=Ahmed A. |title=Banglapedia: National Encyclopedia of Bangladesh |edition=Second |publisher=[[Asiatic Society of Bangladesh]] |archive-url=https://web.archive.org/web/20250119145535/http://en.banglapedia.org/index.php?title=Kamal,_Begum_Sufia |archive-date=19 जनवरी 2025 |access-date=12 अक्तूबर 2019 |url-status=dead}}</ref> उन्होने १९५० के दशक के बंगाली राष्ट्रवादी आन्दोलन में भाग लिया। वे स्वतन्त्र बांग्लादेश की एक सिविल सोसायटी नेत्री थीं। उनका निधन १९९९ में हुआ और बांग्लादेश में राजकीय सम्मान के साथ उनका अन्तिम संस्कार हुआ। बांग्लादेश में राजकीय सम्मान के साथ अन्तिम संस्कार सबसे पहले उनका ही हुआ।<ref name=nytimes>{{cite news|url=https://www.nytimes.com/1999/11/28/nyregion/sufia-kamal-poet-and-advocate-dies-at-88.html|title=Sufia Kamal, Poet and Advocate, Dies at 88|author=Douglas Martin|date=28 November 1999|newspaper=The New York Times|access-date=21 November 2012|archive-url=https://web.archive.org/web/20140118004052/http://www.nytimes.com/1999/11/28/nyregion/sufia-kamal-poet-and-advocate-dies-at-88.html|archive-date=18 जनवरी 2014|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://newsd.in/google-doodle-celebrates-108th-birth-anniversary-of-poet-sufia-kamal/|title=Google Doodle celebrates 108th birth anniversary of poet Sufia Kamal|work=Newsd www.newsd.in|access-date=2019-06-20|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20190620221021/https://newsd.in/google-doodle-celebrates-108th-birth-anniversary-of-poet-sufia-kamal/|archive-date=20 जून 2019|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|title=Begum Sufia Kamal, as I knew her|url=https://www.thedailystar.net/opinion/tribute/news/begum-sufia-kamalas-i-knew-her-1759429|website=thedailystar.net|accessdate=20 June 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190620103529/https://www.thedailystar.net/opinion/tribute/news/begum-sufia-kamalas-i-knew-her-1759429|archive-date=20 जून 2019|url-status=live}}</ref>
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
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{{Infobox military person|honorific_prefix=सरदार|nickname="हाजी क़ासिम" (समर्थकों के बीच)<ref>{{cite web|url=http://en.abna24.com/cultural/archive/2015/03/10/675792/story.html|title=Qassem Suleimani not Just a Commander! – Taking a Closer Look at Religious Character of Iranian General|date=10 March 2015|publisher=abna24|accessdate=14 July 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20171010074253/http://en.abna24.com/cultural/archive/2015/03/10/675792/story.html|archive-date=10 October 2017|url-status=dead}}</ref><br />"शैडो कमांडर" (पश्चिम में)<ref>{{cite web|url=http://www.newyorker.com/magazine/2013/09/30/the-shadow-commander|title=The Shadow Commander|author=Dexter Filkins|date=30 September 2013|work=The New Yorker|accessdate=31 March 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150331221117/http://www.newyorker.com/magazine/2013/09/30/the-shadow-commander|archive-date=31 March 2015|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.theatlantic.com/international/archive/2014/10/irans-shadow-commander-steps-into-the-limelight/381558/|title=Iran's 'Shadow Commander' Steps Into the Light|author=Joanna Paraszczuk|date=16 October 2014|work=The Atlantic|accessdate=31 March 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20171010074750/https://www.theatlantic.com/international/archive/2014/10/irans-shadow-commander-steps-into-the-limelight/381558/|archive-date=10 October 2017|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite web|url=http://businessweekme.com/Bloomberg/newsmid/190/newsid/272|title=Iran's Shadow Commander|author=Kambiz Foroohar|accessdate=31 March 2015|url-status=dead|archiveurl=https://web.archive.org/web/20150402142339/http://businessweekme.com/Bloomberg/newsmid/190/newsid/272|archivedate=2 April 2015}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.realclearworld.com/2013/09/23/syrias_iranian_shadow_commander_151825.html|title=RealClearWorld - Syria's Iranian Shadow Commander|accessdate=31 March 2015|url-status=dead|archiveurl=https://web.archive.org/web/20150924085158/http://www.realclearworld.com/2013/09/23/syrias_iranian_shadow_commander_151825.html|archivedate=24 September 2015}}</ref><ref>{{cite web|url=http://observers.france24.com/content/20150306-iran-shadow-commander-suleimani-iraq|title=Iran's 'shadow commander' steps into the spotlight|work=The Observers|accessdate=31 March 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150708062520/http://observers.france24.com/content/20150306-iran-shadow-commander-suleimani-iraq|archive-date=8 July 2015|url-status=dead}}</ref>|awards=[[निशान-ए-ज़ुल्फ़िक़ार]] (1)<ref>{{cite web|url=https://www.presstv.com/Detail/2019/03/11/590717/Qassem-Soleimani-Iran-Leader-Zulfaqar-Order|title=Leader awards General Soleimani with Iran's highest military order|publisher=प्रेस टीवी|accessdate=11 March 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190311150341/https://www.presstv.com/Detail/2019/03/11/590717/Qassem-Soleimani-Iran-Leader-Zulfaqar-Order|archive-date=11 March 2019|url-status=live}}</ref><br />[[निशान-ए-फ़तह]] (3)<ref name="medal">{{cite web|url=http://www.mashreghnews.ir/fa/news/204959/%D8%B9%DA%A9%D8%B3-%D9%85%D8%AF%D8%A7%D9%84-%D9%87%D8%A7%DB%8C-%D9%81%D8%B1%D9%85%D8%A7%D9%86%D8%AF%D9%87-%D9%86%DB%8C%D8%B1%D9%88%DB%8C-%D9%82%D8%AF%D8%B3-%D8%B3%D9%BE%D8%A7%D9%87%7ctitle=mashreghnews.ir%7cpublisher=|title=عکس/ مدال های فرمانده نیروی قدس سپاه|publisher=|accessdate=11 February 2015}}</ref>|battles={{hidden
|''लड़ाइयाँ देखें''
|'''1979 में ईरानी कुर्दों से संघर्ष'''
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'''[[ईरान-इराक़ युद्ध]]''' (1980–1988)<ref name="defamoghaddas">{{cite web|url=http://defamoghaddas.ir/fa/unit/%D9%84%D8%B4%DA%A9%D8%B1-41-%D8%AB%D8%A7%D8%B1%D8%A7%D9%84%D9%84%D9%87-%D8%B9|publisher=defamoghaddas.ir|title=لشکر 41 ثارالله (ع) | دفاعمقدس|accessdate=22 August 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20170209012325/http://defamoghaddas.ir/fa/unit/%D9%84%D8%B4%DA%A9%D8%B1-41-%D8%AB%D8%A7%D8%B1%D8%A7%D9%84%D9%84%D9%87-%D8%B9|archive-date=9 February 2017|url-status=dead}}</ref>
* [[Operation Tariq-ol-Qods]]{{WIA}}<ref name="yjc">{{cite web|url=http://www.yjc.ir/fa/news/5411037/%D8%B9%D9%85%D9%84%DB%8C%D8%A7%D8%AA%DB%8C-%DA%A9%D9%87-%D8%AF%D8%B1-%D8%A2%D9%86-%D8%B3%D8%B1%D8%AF%D8%A7%D8%B1-%D8%B3%D9%84%DB%8C%D9%85%D8%A7%D9%86%DB%8C-%D8%B4%D8%AF%DB%8C%D8%AF%D8%A7%D9%8B-%D9%85%D8%AC%D8%B1%D9%88%D8%AD-%D8%B4%D8%AF|publisher=yjc.ir|title=عملیاتی که در آن سردار سلیمانی شدیداً مجروح شد|accessdate=22 August 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160905142417/http://www.yjc.ir/fa/news/5411037/%D8%B9%D9%85%D9%84%DB%8C%D8%A7%D8%AA%DB%8C-%DA%A9%D9%87-%D8%AF%D8%B1-%D8%A2%D9%86-%D8%B3%D8%B1%D8%AF%D8%A7%D8%B1-%D8%B3%D9%84%DB%8C%D9%85%D8%A7%D9%86%DB%8C-%D8%B4%D8%AF%DB%8C%D8%AF%D8%A7%D9%8B-%D9%85%D8%AC%D8%B1%D9%88%D8%AD-%D8%B4%D8%AF|archive-date=5 September 2016|url-status=live}}</ref>
* [[Operation Fath-ol-Mobin]]
* [[Operation Beit-ol-Moqaddas]]
* [[Operation Ramadan]]
* [[Operation Bazi-Deraz 2]]
* [[Operation Omm-ol-Hasanayn]]
* [[Operation Before the Dawn]]
* [[Operation Dawn (1983)]]
* [[Operation Dawn 3]]
* [[Operation Dawn 4]]
* [[Operation Dawn 5]]
* [[Operation Dawn 6]]
* [[Battle of the Marshes]]
** [[Operation Kheibar]]
* [[Operation Badr (1985)]]
* [[Operation Meymak]]
* [[First Battle of al-Faw]]
** [[Operation Dawn 8]]
* [[Operation Karbala 1]]
* [[Operation Karbala 4]]
* [[Operation Karbala 5]]
* [[Operation Karbala 6]]
* [[Operation Karbala 10]]
* [[Operation Beit-ol-Moqaddas 7]]
* [[Second Battle of al-Faw]]
* [[Operation Dawn 10]]
* [[Operation Nasr 4]]
* [[Operation Mersad]]
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'''[[KDPI insurgency (1989–96)]]'''
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'''[[South Lebanon conflict (1985–2000)]]'''
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'''[[War in Afghanistan (2001–present)|Invasion of Afghanistan]]'''<ref name="Terra">{{cite web|url=http://noticias.terra.com.pe/mundo/el-irani-qasem-soleimani-el-hombre-mas-poderoso-en-irak,b6046158a64e8410VgnCLD200000b1bf46d0RCRD.html|title=El iraní Qasem Soleimani, "el hombre más poderoso en Irak"|work=Terra|access-date=11 October 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20141015185814/http://noticias.terra.com.pe/mundo/el-irani-qasem-soleimani-el-hombre-mas-poderoso-en-irak,b6046158a64e8410VgnCLD200000b1bf46d0RCRD.html|archive-date=15 अक्तूबर 2014|url-status=dead}}</ref>{{better source|date=March 2019}}
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'''[[2006 Lebanon War]]'''<ref>[https://aawsat.com/english/home/article/1929396/soleimani-reveals-details-role-he-played-2006-israel-hezbollah-war soleimani reveals details role he played 2006 israel hezbollah war] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20191024095407/https://aawsat.com/english/home/article/1929396/soleimani-reveals-details-role-he-played-2006-israel-hezbollah-war |date=24 October 2019}} aawsat.com</ref><ref>[https://www.thenational.ae/world/mena/shadowy-iran-commander-qassem-soleimani-gives-rare-interview-on-2006-israel-hezbollah-war-1.918001 Shadowy Iran commander Qassem Soleimani gives rare interview on 2006 Israel-Hezbollah war] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20191024095354/https://www.thenational.ae/world/mena/shadowy-iran-commander-qassem-soleimani-gives-rare-interview-on-2006-israel-hezbollah-war-1.918001 |date=24 October 2019}} thenational.ae</ref>
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'''[[Iraq War]]'''
* [[Karbala provincial headquarters raid]]
----
'''[[Iran–Israel proxy conflict]]'''
* [[Gaza–Israel conflict]]
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'''[[Syrian Civil War]]'''
* [[Al-Qusayr Battle (2013)]]
* [[2015 Southern Syria offensive|Southern Syria offensive (2015)]]<ref>{{cite web|url=http://syriadirect.org/main/37-videos/1848-pictures-reportedly-place-iranian-general-in-daraa|title=Pictures reportedly place Iranian general in Daraa|publisher=|accessdate=31 March 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150212152912/http://syriadirect.org/main/37-videos/1848-pictures-reportedly-place-iranian-general-in-daraa|archive-date=12 फ़रवरी 2015|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.iraqinews.com/arab-world-news/irans-revolutionary-guards-executes-12-assads-forces-elements/|title=Iran's Revolutionary Guards executes 12 Assad's forces elements|publisher=Iraqi News|accessdate=31 March 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150329043528/http://www.iraqinews.com/arab-world-news/irans-revolutionary-guards-executes-12-assads-forces-elements|archive-date=29 March 2015|url-status=live}}</ref>
* [[Battle of Zabadani (2015)]]
* [[Northwestern Syria offensive (October 2015)|Northwestern Syria offensive (2015)]]
* [[2015–16 Latakia offensive]]
* [[Kuweires offensive (September–November 2015)|Kuweires offensive (2015)]]
* [[Battle of Aleppo (2012–2016)]]
** [[Aleppo offensive (October–December 2015)|Southern Aleppo offensive (2015)]]
** [[2015 Russian Sukhoi Su-24 shootdown#Search and rescue|Special forces operation to rescue Russian pilot]]
** [[East Aleppo offensive (2015–16)]]
** [[Northern Aleppo offensive (2016)]]
** [[2016 Aleppo campaign|Encirclement of Aleppo]]
** [[Aleppo offensive (September–October 2016)]]<ref>{{cite web|url=http://www.faz.net/aktuell/politik/ausland/naher-osten/die-lage-in-aleppo-wird-immer-unuebersichtlicher-die-grossmaechte-koennen-sich-ueber-ihr-vorgehen-nicht-einigen-14481506.html|title=Die Völkerschlacht von Aleppo|last=Hermann|first=Rainer|work=[[Frankfurter Allgemeine Zeitung]]|language=German|date=15 October 2016|accessdate=15 October 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20161015123220/http://www.faz.net/aktuell/politik/ausland/naher-osten/die-lage-in-aleppo-wird-immer-unuebersichtlicher-die-grossmaechte-koennen-sich-ueber-ihr-vorgehen-nicht-einigen-14481506.html|archive-date=15 October 2016|url-status=live}}</ref>
* [[Hama offensive (March–April 2017)]]<ref name="hama">{{cite web|url=http://www.longwarjournal.org/archives/2017/04/qassem-soleimani-reportedly-spotted-in-syrias-hama-province.php|title=Qassem Soleimani reportedly spotted in Syria's Hama province|author=Amir Toumaj|work=[[Long War Journal]]|date=2 April 2017|accessdate=3 April 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170403055433/http://www.longwarjournal.org/archives/2017/04/qassem-soleimani-reportedly-spotted-in-syrias-hama-province.php|archive-date=3 April 2017|url-status=live}}</ref>
* [[Syrian Desert campaign (May–July 2017)]]
* [[Eastern Syria campaign (September 2017–present)]]
* [[2017 Abu Kamal offensive]]
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'''[[Iraqi Civil War (2014–2017)]]'''
* [[Siege of Amirli]]
* [[Liberation of Jurf Al Sakhar]]
* [[Battle of Baiji (2014–15)|Battle of Baiji]]
* [[Battle of Tikrit (2015)|Battle of Tikrit]]
* [[Siege of Fallujah (2016)|Siege of Fallujah]]
** [[Operation Breaking Terrorism]]
|-
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}}|commands=करमान की 41वी थरला टुकड़ी<br />[[क़ुद्स फ़ोर्स]]|unit=|rank=[[मेजर जनरल]]|serviceyears=1979–2020|branch=[[इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड कोर]]|allegiance=[[ईरान]]|death_place= बग़दाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, [[बग़दाद]], [[इराक़]]|name=क़ासिम सुलेमानी|birth_place=क़नत-ए-मलेक, [[करमान प्रांत]], [[ईरान]]|death_date={{Death date and age|2020|1|3|1957|3|11|df=y}}<ref>{{Cite web|url=https://www.jpost.com/Breaking-News/Four-rockets-land-on-Baghdad-airport-report-612947|title=Qasem Soleimani among those killed in Baghdad Airport attack – report|work=[[रॉयटर्स]]|date=3 January 2020|access-date=3 January 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200103011829/https://www.jpost.com/Breaking-News/Four-rockets-land-on-Baghdad-airport-report-612947|archive-date=3 January 2020|url-status=live}}</ref>|birth_date={{Birth date|1957|3|11|df=y}}|native_name_lang=fa|native_name={{lang|fa|قاسم سلیمانی}}|caption=2019 में सुलेमानी अपनी सैन्य पोशाक में|image_size=|image=Qasem Soleimani with Zolfaghar Order.jpg|relations=}} '''क़ासिम सुलेमानी''' ( {{भाषा-फ़ारसी|قاسم سلیمانی}} , {{IPA-fa|ɢɒːseme solejmɒːniː|pron}} ; 11 मार्च 1957 - 3 जनवरी 2020), इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड कोर ( '''IRGC,''' ''पासदारान'') में एक ईरानी प्रमुख जनरल थे और 1998 से, उनकी मृत्यु तक, इसकी क़ुद्स फोर्स के कमांडर थे। वे ईरान के राज्यक्षेत्रातीत सैन्य (extraterritorial operations) और गुप्त अभियान के लिए मुख्य रूप से ज़िम्मेदार थे।
सुलेमानी ने 1980 के [[ईरान-इराक़ युद्ध|ईरान-इराक युद्ध]] की शुरुआत में अपना सैन्य कैरियर शुरू किया, जहाँ उन्होंने अंततः ईरानी सेना की 41वी टुकड़ी की कमान संभाली। लेबनान के [[हिज़बुल्लाह|हिजबुल्लाह]] को सैन्य सहायता प्रदान करते हुए, बाद में वह राज्यक्षेत्रातीत अभियानों में शामिल हो गए। 2012 में, सुलेमानी ने [[सीरियाई गृहयुद्ध|सीरियाई गृह युद्ध के दौरान]], विशेष रूप से [[आईएसआईएस]] और उसके अपराधियों के खिलाफ ईरान के अभियानों से सीरियाई सरकार (एक प्रमुख ईरानी सहयोगी) को मजबूत करने में मदद की। सुलेमानी ने इराकी सरकार और शिया मिलिशिया (पॉपुलर मोबिलाइज़ेशन फोर्सेज) के संयुक्त बलों की भी सहायता की जिसने 2014-2015 में आईएसआईएस के खिलाफ जंग छेड़ी थी।
3 जनवरी 2020 को इराक के [[बग़दाद|बगदाद]] में एक लक्षित अमेरिकी ड्रोन हमले में सुलेमानी को मार दिया गया था। इसके अलावा मारे गए इराकी शिया मिलिशिया के सदस्य और इसके डिप्टी हेड अबू महदी अल-मुहांदिस भी तह। <ref>{{Cite web|url=https://www.cnn.com/2020/01/02/middleeast/baghdad-airport-rockets/index.html|title=US drone strike ordered by Trump kills top Iranian commander in Baghdad|last=CNN|first=Zachary Cohen, Hamdi Alkhshali, Arwa Damon and Kareem Khadder|website=CNN|access-date=3 January 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200103031258/https://www.cnn.com/2020/01/02/middleeast/baghdad-airport-rockets/index.html|archive-date=3 जनवरी 2020|url-status=live}}</ref> सुलेमानी के पश्चात् इस्माइल गनी को क़ुद्स फोर्स का कमांडर बनाया गया। <ref name=":1">{{Cite news|url=https://www.bloomberg.com/news/articles/2020-01-03/soleimani-s-deputy-esmail-ghaani-named-iran-s-quds-force-chief?srnd=markets-vp|title=Soleimani’s Deputy Esmail Ghaani Named Iran’s Quds Force Chief|date=3 January 2020|work=Bloomberg|access-date=3 January 2020}}</ref>
जनरल सुलेमानी ईरानी की एक ख़ास शख़्सियत थे. उनकी क़ुद्स फोर्स सीधे देश के सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह [[अली ख़ामेनेई]] को रिपोर्ट करती है. सुलेमानी की पहचान देश के वीर के रूप में थी. सुलेमानी को पश्चिम एशिया में ईरानी गतिविधियों को चलाने का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता रहा है.<ref name=":0">{{Cite news|url=https://www.prabhatkhabar.com/news/bbc-news/story/1367488.html|title=ईरानी कमांडर जनरल क़ासिम सुलेमानी की अमरीकी हवाई हमले में मौत|last=|first=|date=|work=बीबीसी हिन्दी|access-date=|archive-url=https://web.archive.org/web/20200104073236/https://www.prabhatkhabar.com/news/bbc-news/story/1367488.html|archive-date=4 जनवरी 2020|url-status=dead}}</ref>
== परिचय ==
जनरल सुलेमानी भले ही ईरान के एक बड़े सैन्यकर्मी और उभरते हुए नेता थे, अमरीका ने उन्हें और उनकी क़ुद्स फ़ोर्स को सैकड़ों अमरीकी नागरिकों की मौत का ज़िम्मेदार क़रार देते हुए 'आतंकवादी' घोषित कर रखा था।
सुलेमानी को पश्चिम एशिया में ईरानी गतिविधियों को चलाने का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता रहा है। 1998 से सुलेमानी ईरान की क़ुद्स फ़ोर्स का नेतृत्व कर रहे हैं।
वे ईरान की एक ख़ास शख़्सियत थे जिनकी क़ुद्स फ़ोर्स सीधे देश के सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह अली ख़ामनेई को रिपोर्ट करती है। सुलेमानी की पहचान देश के वीर के रूप में थी। ख़ामनेई से उन्हें 'अमर शहीद' का ख़िताब दिया है।
उनकी एक बड़ी सफलता यह थी कि उन्होंने यमन से लेकर सीरिया तक और इराक़ से लेकर दूसरे मुल्कों तक रिश्तों का एक मज़बूत नेटवर्क तैयार किया ताकि इन देशों में ईरान का असर बढ़ाया जा सके।
सुलेमानी के नेतृत्व में ईरान की ख़ुफ़िया, आर्थिक और राजनीतिक पटल पर भी क़ुद्स फ़ोर्स का प्रभाव रहा है।
ईरान के दक्षिण-पश्चिम प्रांत किरमान के एक ग़रीब परिवार से आने वाले सुलेमानी ने 13 साल की आयु से अपने परिवार के भरण पोषण में लग गए। अपने ख़ाली समय में वे वेटलिफ्टिंग करते और ख़ामनेई की बातें सुनते थे।
फॉरेन पॉलिसी पत्रिका के मुताबिक़ सुलेमानी 1979 में ईरान की सेना में शामिल हुए और महज़ छह हफ़्ते की ट्रेनिंग के बाद पश्चिम अज़रबैजान के एक संघर्ष में शामिल हुए थे।
इराक़-ईरान युद्ध के दौरान इराक़ की सीमाओं पर अपने नेतृत्व की वजह से वे राष्ट्रीय हीरो के तौर पर उभरे थे।
सुलेमानी ने इराक़ और सीरिया में इस्लामिक स्टेट के मुक़ाबले कुर्द लड़ाकों और शिया मिलिशिया को एकजुट करने का काम किया।
हिज़बुल्लाह और हमास के साथ-साथ सीरिया की [[बशर अल-असद]] सरकार को भी सुलेमानी का समर्थन प्राप्त था।
दूसरी तरफ़ सुलेमानी को अमरीका अपने सबसे बड़े दुश्मनों में से एक मानता था। अमरीका ने क़ुद्स फ़ोर्स को 25 अक्तूबर 2007 को ही आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था और इस संगठन के साथ किसी भी अमरीकी के लेनदेन किए जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया।
23 अक्तूबर 2018 को सऊदी अरब और बहरीन ने ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स को आतंकवादी और इसकी क़ुद्स फ़ोर्स के प्रमुख क़ासिम सुलेमानी को आतंकवादी घोषित किया था।
[[सद्दाम हुसैन]] के साम्राज्य के पतन के बाद 2005 में इराक़ की नई सरकार के गठन के बाद से प्रधानमंत्रियों इब्राहिम अल-जाफ़री और नोउरी अल-मलिकि के कार्यकाल के दौरान वहां की राजनीति में सुलेमानी का प्रभाव बढ़ता गया। उसी दौरान वहां की शिया समर्थित बद्र संगठन को सरकार का हिस्सा बना दिया गया। बद्र संगठन को इराक़ में ईरान की सबसे पुरानी प्रॉक्सी फ़ोर्स कहा जाता है।
2011 में जब सीरिया में गृहयुद्ध छिड़ा तो सुलेमानी ने इराक़ के अपने इसी प्रॉक्सी फ़ोर्स को असद सरकार की मदद करने को कहा था जबकि अमरीका बशर अल-असद की सरकार को वहां से उखाड़ फेंकना चाहता था।
ईरान पर अमरीकी प्रतिबंध और सऊदी अरब, यूएई और इसराइल की तरफ़ से दबाव किसी से छुपा नहीं है। और इतने सारे अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच अपने देश का प्रभाव बढ़ाने या यूं कहें कि बरक़रार रखने में जनरल क़ासिम सुलेमानी की भूमिका बेहद अहम थी और यही वजह थी कि वो अमरीका, सऊदी और इसराइल की तिकड़ी की नज़रों में चढ़ गए थे। अमरीका ने तो उन्हें आतंकवादी भी घोषित कर रखा था।
== रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ==
सुलेमानी का क़ुद्स फ़ोर्स इरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स की विदेशी यूनिट का हिस्सा हैं। 1979 की ईरानी क्रांति के बाद आयतोल्लाह ख़ोमैनी के ही आदेश से रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स का गठन हुआ था। इसका मक़सद देश की इस्लामिक व्यवस्था की हिफ़ाज़त और नियमित सेना के साथ सत्ता का संतुलन बनाना था।
ईरान में शाह के पतन के बाद ईरान में नई हुकूमत आई तो सरकार को लगा कि उन्हें एक ऐसी फ़ौज की ज़रूरत है जो नए निज़ाम और क्रांति के मक़सद की हिफ़ाज़त कर सके।
ईरान के मौलवियों ने एक नए क़ानून का मसौदा तैयार किया जिसमें नियमित सेना को देश की सरहद और आंतरिक सुरक्षा का ज़िम्मा दिया गया और रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स को निज़ाम की हिफ़ाज़त का काम दिया गया।
लेकिन ज़मीन पर दोनों सेनाएं एक दूसरे के रास्ते में आती रही हैं। उदाहरण के लिए रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स क़ानून और व्यवस्था लागू करने में भी मदद करती हैं और सेना, नौसेना और वायुसेना को लगातार उसका सहारा मिलता रहा है।
वक्त के साथ-साथ रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ईरान की फ़ौजी, सियासी और आर्थिक ताक़त बन गई।
== क़ुद्स फोर्स ==
ऊपर बताई गई ईरान की इसी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स की स्पेशल आर्मी है क़ुद्स फ़ोर्स जो विदेशों में संवेदनशील मिशन को अंजाम देती है। क़ुद्स फोर्स सीधे देश के सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह अली ख़ामेनेई को रिपोर्ट करती है.<ref name=":0" />
हिज़बुल्लाह और इराक़ के शिया लड़ाकों जैसे ईरान के क़रीबी सशस्त्र गुटों को हथियार और ट्रेनिंग देने का काम भी क़ुद्स फ़ोर्स का ही है।
माना जाता है कि रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ईरान की अर्थव्यवस्था के एक तिहाई हिस्से को नियंत्रित करता है। अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही कई चैरिटी संस्थानों और कंपनियों पर उसका नियंत्रण है।
ईरानी तेल निगम और इमाम रज़ा की दरगाह के बाद रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स मुल्क का तीसरा सबसे धनी संगठन है। इसके दम पर रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स में अच्छी सैलेरी पर धार्मिक नौजवानों की नियुक्ति की जाती है।
भले ही रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स में सैनिकों की संख्या नियमित सेना के सैनिकों की संख्या के मामले में क़रीब तीन लाख कम है लेकिन इसे ईरान की सबसे ताक़तवर फ़ौज के रूप में जाना जाता है।
ये भी कहा जाता है कि दुनिया भर में ईरान के दूतावासों में रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के जवान ख़ुफ़िया कामों के लिए तैनात किए जाते हैं।
ये विदेशों में ईरान के समर्थक सशस्त्र गुटों को हथियार और ट्रेनिंग मुहैया कराते हैं।
== मृत्यु<ref name=":0" /> ==
ईरान की क़ुद्स फ़ोर्स के प्रमुख जनरल क़ासिम सुलेमानी बग़दाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हवाई हमले में मारे गए. इस हमले की ज़िम्मेदारी अमरीकी ने ली है. इस हमले में कताइब हिज़बुल्लाह के कमांडर अबू महदी अल-मुहांदिस भी मारे गए.
अमरीकी रक्षा विभाग की तरफ से बयान में कहा गया है कि "अमरीकी राष्ट्रपति के निर्देश पर विदेश में रह रहे अमरीकी सैन्यकर्मियों की रक्षा के लिए क़ासिम सुलेमानी को मारने का कदम उठाया गया है. अमरीका ने उन्हें आतंकवादी घोषित कर रखा था."
इस बयान में कहा गया है कि "सोलेमानी बीते 27 दिसंबर समेत, कई महीनों से इराक़ स्थित अमरीकी सैन्य ठिकानों पर हमलों को अंजाम देने में शामिल रहे हैं. इसके अलावा बीते हफ़्ते अमरीकी दूतावास पर हुए हमले को भी उन्होंने अपनी स्वीकृति दी थी."
बयान के अंत में कहा गया कि, "यह एयरस्ट्राइक भविष्य में ईरानी हमले की योजनाओं को रोकने के उद्देश्य से किया गया. अमरीका, चाहे जहां भी हो, अपने नागरिकों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई को करना जारी रखेगा."
अमरीकी मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि जनरल सुलेमानी और ईरान समर्थित मिलिशिया के अधिकारी दो कार में बगदाद एयरपोर्ट जा रहे थे तभी एक कार्गो इलाके में अमरीकी ड्रोन ने उन पर हमला कर दिया.
इस काफिले पर कई मिसाइलें दागी गईं. बताया गया कि कम से कम पांच लोगों की इसमें मौत हो गई है.
उनके मौत की पुष्टि ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने भी कर दी है.
=== हमले के पीछे औचित्य<ref name=":0" /> ===
अमरीका का कहना है कि हिज़्बुल्लाह इराक़ में उसके सैन्य ठिकानों पर लगातार हमला करता रहा है.
2009 से ही अमरीका ने कताइब हिज़्बुल्लाह को आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है. उसने इसके कमांडर अबु महदी अल-मुहांदिस को वैश्विक आतंकवादी भी क़रार दिया था. अमरीका का कहना है कि यह संगठन इराक़ की स्थिरता और शांति के लिए ख़तरा है.
अमरीका के डिफेंस डिपार्टमेंट का कहना है कि कताइब हिज़्बुल्लाह का संबंध ईरान के इस्लामिक रिवॉल्युशनरी गार्ड्स कॉर्प्स यानी आईआरजीसी के वैश्विक ऑपरेशन आर्म क़ुद्स फ़ोर्स से है जिसे ईरान से कई तरह की मदद मिलती है.
== मृत्योपरांत प्रतिक्रिया ==
=== अमेरिका ===
==== ट्रम्प, राष्ट्रपति ====
अमरीकी [[रक्षा मंत्रालय (भारत)|रक्षा मंत्रालय]] पेंटागन ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने हवाई हमले का आदेश दिया था. अमरीकी कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय जगत से कई प्रतिक्रियाएँ आई हैं.<ref name=":2">{{Cite news|url=https://www.bbc.com/hindi/international-50982553|title=सुलेमानी पर कार्रवाई: अमरीकी नेताओं में मतभेद, रूस आया ईरान के साथ|last=|first=|date=|work=बीबीसी हिन्दी|access-date=}}</ref>
सुलेमानी ईरान के लिए कितने अहम थे इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि उनकी मौत की ख़बर के आने के फ़ैरन बाद ही अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अमरीका के राष्ट्रीय झंडे की तस्वीर ट्वीट की.<ref>{{Cite web|url=https://twitter.com/realDonaldTrump/status/1212924762827046918|title=ट्रम्प की ट्वीट|last=|first=|date=|website=|archive-url=https://web.archive.org/web/20200104065711/https://twitter.com/realDonaldTrump/status/1212924762827046918|archive-date=4 जनवरी 2020|dead-url=|access-date=|url-status=live}}</ref>
==== पॉम्पियो, अमरीकी विदेश मंत्री ====
अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा "इराक़ी आज़ादी के लिए गलियों में डांस कर रहे हैं. शुक्रगुज़ार हूँ कि जनरल सुलेमनी नहीं रहे."<ref name=":2" />
'''नैंसी पेलोसी, अमरीकी प्रतिनिधि सभा की स्पीकर'''
आज के हवाई हमले की वजह से हिंसा ख़तरनाक स्तर तक बढ़ सकती है. अमरीका और पूरी दुनिया तनाव के उस स्तर को झेल नहीं सकते, जहाँ से लौटना मुश्किल हो. अमरीकी प्रशासन ने सैन्य बल के इस्तेमाल की मंज़ूरी के बिना हमला किया है. कांग्रेस से सलाह किए बिना ये कार्रवाई की गई है.<ref name=":2" />
'''अमरीकी सीनेटर जिम रिश'''
क़ासिम सुलेमानी सैकड़ों अमरीकियों की मौत के लिए ज़िम्मेदार थे. मैंने पहले भी ईरान की सरकार को चेतावनी दी है कि वो हमारे संयम को हमारी कमज़ोरी न समझे. उन सभी अमरीकी सैन्यकर्मियों को आज न्याय मिल गया है, जो कई वर्षों के दौरान ईरानी हमले में मारे गए हैं. <ref name=":2" />
'''अमरीका के पूर्व राष्ट्र जो बाइडन'''
ये एक ख़तरनाक क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाले क़दम है. राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले से ही मौजूद विस्फोटक स्थिति को और सुलगा दिया है. उन्हें अमरीकी लोगों को ये बताना चाहिए कि अपने सैनिकों, दूतावास के कर्मचारियों, हमारे लोगों, हमारे हितों की रक्षा की उनकी रणनीति क्या है.<ref name=":2" />
'''अमरीकी सीनेटर एलिज़ाबेथ वॉरेन'''
सुलेमानी एक हत्यारा था. वो हज़ारों लोगों की मौत का ज़िम्मेदार था, जिनमें सैकड़ों अमरीकी भी थे. लेकिन इस कार्रवाई के कारण ईरान में स्थिति और बिगड़ेगी, वहाँ और लोगों की जान जा सकती है और [[मध्य पूर्व]] में नया संघर्ष भी शुरू हो सकता है. हमारी प्राथमिकता ये होनी चाहिए कि एक और भारी भरकम ख़र्च वाला युद्ध न हो.<ref name=":2" />
'''अमरीकी सीनेटर क्रिस मरफ़ी'''
सुलेमानी अमरीका का दुश्मन था. लेकिन उनकी हत्या से अमरीकी लोगों पर ख़तरा बढ़ेगा.<ref name=":2" />
'''संयुक्त राष्ट्र में पूर्व अमरीकी दूत निकी हेली'''
क़ासिम सुलेमानी एक आतंकवादी था और उसके हाथ अमरीकी लोगों के ख़ून से रंगे थे. जो भी शांति और न्याय की बात करते हैं, उन्हें उसकी मौत की सराहना करनी चाहिए. हमें राष्ट्रपति ट्रंप पर गर्व है.<ref name=":2" />
=== ईरान की प्रतिक्रिया ===
'''ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई'''
सभी दुश्मनों को ये जानना चाहिए कि प्रतिरोध का जिहाद दोगुने उत्साह से जारी रहेगा. इस पवित्र जंग में हमारी जीत सुनिश्चित है.<ref name=":2" />
'''ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के पूर्व कमांडर मोहसिन रेज़ाई'''
वे शहीद हुए भाइयों में शामिल हो गए हैं. लेकिन हम अमरीका से बड़ा बदला लेंगे.<ref name=":2" />
=== इराक़ ===
'''इराक़ के पीएम अब्दुल महदी'''
बग़दाद के हवाई अड्डे पर हमला इराक़ के ख़िलाफ़ आक्रामक कार्रवाई है और इसकी संप्रभुता का उल्लंघन है. इसके कारण इराक़ में, पूरे इलाक़े में और दुनियाभर में युद्ध छिड़ जाएगा. हवाई हमले ने इराक़ में अमरीकी सैनिकों की उपस्थिति की शर्तों का भी उल्लंघन किया है.<ref name=":2" />
'''इराक़ी शिया मौलवी मुक़्तदा अल सद्र'''
इराक़ी प्रतिरोध का अगुआ होने का कारण मैं सभी मुजाहिदीन और ख़ासकर महदी आर्मी को आदेश देता हूँ कि वो इराक़ की रक्षा के लिए तैयार रहें.<ref name=":2" />
=== अन्य ===
'''रूसी विदेश मंत्रालय'''
सुलेमानी की हत्या से इलाक़े में तनाव बढ़ेगा. सुलेमानी ने ईरान के राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए काम किया. हम ईरानी जनता के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हैं.<ref name=":2" />
'''चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग'''
हम सभी पक्षों और ख़ासकर अमरीका से संयम की अपील करते हैं. चीन ने हमेशा से अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में बल प्रयोग का विरोध किया है. इराक़ की संप्रभुता और स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए.<ref name=":2" />
'''सीरियाई विदेश मंत्रालय'''
अमरीका मध्य पूर्व में हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहा है. अमरीका की इस कायरतापूर्ण कार्रवाई से शहीद नेताओं के रास्ते को अपनाने की प्रतिबद्धता को बल मिलेगा.<ref name=":2" />
'''हमास के प्रवक्ता बासिम नईम'''
इस हत्या के बाद इस इलाक़े में शांति और स्थिरता के अलावा हर संभावित चीज़ का दरवाज़ा खुल गया है. इसकी ज़िम्मेदारी अमरीका की होगी.<ref name=":2" />
=== भारत ===
अमेरिकी हमले में ईरान के एक शीर्ष कमांडर के मारे जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारत ने शुक्रवार को कहा कि तनाव में वृद्धि ने विश्व को चौकन्ना कर दिया है. इसके साथ ही भारत ने जोर दिया कि उसके लिए क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है. विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारत ने लगातार संयम पर जोर दिया है और यह महत्वपूर्ण है कि स्थिति और खराब नहीं हो. इससे पहले पेंटागन ने घोषणा की थी कि शुक्रवार को इराक में एक अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के शक्तिशाली कमांडर जनरल कासेम सुलेमानी की मौत हो गई. विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि तनाव में वृद्धि ने दुनिया को चौंकन्ना बना दिया है. इस क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. मंत्रालय ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि स्थिति और अधिक नहीं बिगड़े. भारत ने लगातार संयम की वकालत की है और ऐसा करना जारी रखेगा.
=== मध्य-पूर्व पर प्रभाव<ref>{{Cite news|url=https://www.bbc.com/hindi/international-50980009|title=जनरल क़ासिम सुलेमानी की मौत मध्य-पूर्व में कितना बड़ा टर्निंग पॉइंट?|last=|first=|date=|work=बीबीसी हिन्दी|access-date=}}</ref> ===
बीबीसी की चीफ़ इंटरनेशनल रिपोर्टर लीस डुसेट के मुताबिक़ क़ासिम सुलेमानी को मध्य-पूर्व में ईरान की महत्वकांक्षा के मास्टरमाइंड और बात जब युद्ध और शांति की हो तो वास्तविक विदेश मंत्री के रूप में देखा जाता था.
सुलेमानी सीरियाई संघर्ष में राष्ट्रपति बशर अल-असद के सलाहकार के रूप में भी देखे जाते थे. उन्हें इराक़ में चल रहे वर्तमान संघर्ष, इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ लड़ाई के साथ कई अन्य मोर्चे पर प्रमुख रणनीतिकार भी माना जाता था.
जहां सुलेमानी की मौत को एक निर्णायक टर्निंग पॉइंट के तौर पर देखा जा रहा है वहीं ईरान और अमरीका और इनके सहयोगियों के बीच इसे एक बड़े संकट के रूप में भी देखा जा रहा है.
इनके रिश्ते में और तल्ख़ी आएगी और जैसा कि ख़ामनेई के बयान से लगता है, बदला भी लिए जाने की प्रबल संभावना है. नई परिस्थितियां पहले से अस्थिर मध्य पूर्व के इस हिस्से में और भी संकट की स्थिति पैदा करेंगी.
== यह सभी देखें ==
* 1979 से ईरानी दो सितारा जनरलों की सूची
* होसेन सलामी
* मोहम्मद बाघेरी (ईरानी कमांडर)
* [[ईरान और सउदी अरब का परोक्ष युद्ध|ईरान-सऊदी अरब प्रॉक्सी संघर्ष]]
* ईरान-संयुक्त राज्य अमेरिका के संबंध
== संदर्भ ==
{{Reflist|2}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* डेविड इग्नाटियस, [https://web.archive.org/web/20130928013545/http://articles.washingtonpost.com/2008-06-08/opinions/36900999_1_quds-force-iran-s-revolutionary-guard-sadr-city एट द टिप ऑफ़ ईरान स्पीयर], ''[[द वॉशिंगटन पोस्ट|वाशिंगटन पोस्ट]]'', 8 जून 2008
* मार्टिन चुलोव, [https://web.archive.org/web/20200103103358/https://www.theguardian.com/world/2011/jul/28/qassem-suleimani-iran-iraq-influence कासेम सुलेमानी: ईरानी जनरल 'गुपचुप रूप से चल रहे' इराक], ''[[द गार्डियन|द गार्जियन]]'', 28 जुलाई 2011
* डेक्सटर फिल्किंस, [https://web.archive.org/web/20200308020555/https://www.newyorker.com/magazine/2013/09/30/the-shadow-commander द शैडो कमांडर], ''द न्यू यॉर्कर'', 30 सितंबर 2013
* अली मामूरी, [https://web.archive.org/web/20200103051748/https://www.al-monitor.com/pulse/originals/2013/10/the-enigma-behind-qassem-suleimani.html द एनिग्मा ऑफ़ क़ासम सोलेमानी और इराक में उनकी भूमिका], ''अल-मॉनिटर'', 13 अक्टूबर 2013
* [https://web.archive.org/web/20200103095334/https://www.bbc.co.uk/programmes/b054gxpl बीबीसी रेडियो 4 प्रोफाइल]
[[श्रेणी:1957 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:वेबग्रंथागार साँचा वेबैक कड़ियाँ]]
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स्वामी विवेकान्द
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शीघ्र हटाने का अनुरोध ( मापदंड:[[वि:शीह#व2|शीह व2]])
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स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी को हुआ था
ये युवाओ के प्रति अत्यंत सजग थे और अगर जिन लोगो का जन्म 12 जनवरी को हुआ है उन लोगो के अंदर सोचने की शक्ति बहुत ज्यादा होती है
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[[File:Halud Vihara, Archaeological site of 8th - 9th century - panoramio.jpg|thumb|हलूद बिहार के ध्वंसावशेष]]
'''हलूद बिहार''', [[बांग्लादेश]] के [[नौगाँव जिला|नौगाँव जिले]] में [[सोमपुर महाविहार]] से १४.५ किमी दक्षिण-पश्चिम में स्थित एक बौद्धबिहार है जो अब खण्डहर अवस्था में है। यह हलूद गाँव के निकट स्थित है जिसे स्थानीय लोग द्वीपगंज भी कहते हैं। इस स्थल की मुख्य विशेषता यहाँ का विशाल टीला है जो २५ फुट ऊँचा और १०० फुट व्यास का है। <ref name=unesco>[https://whc.unesco.org/en/tentativelists/1211/ Halud Vihara] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20200206164104/https://whc.unesco.org/en/tentativelists/1211/ |date=6 फ़रवरी 2020 }}, UNESCO World Heritage Centre</ref> यहाँ अन्य अन्य टीले और ईंट से निर्मित संरचनाओं के ध्वंसावशेष भी हैं।<ref name=Banglapedia>{{citation |author=Nazimuddin Ahmed |chapter=Halud Vihara |chapter-url=http://en.banglapedia.org/index.php?title=Halud_Vihara |title=Banglapedia: National Encyclopedia of Bangladesh |editor=Sirajul Islam and Ahmed A. Jamal |publisher=[[Asiatic Society of Bangladesh]] |year=2012 |edition=Second |archive-url=https://web.archive.org/web/20200514082444/http://en.banglapedia.org/index.php?title=Halud_Vihara |access-date=10 मार्च 2020 |archive-date=14 मई 2020 |url-status=dead}}</ref> खुदाई से पता चलता है कि यह एक पूर्व-मध्यकालीन स्थल है और उसी काल का है जिस काल के [[सोमपुरा महाविहार]] और [[सीताकोट विहार]] हैं।<ref name=Banglapedia/><ref name=Banglapedia2>{{citation
|author=SS Mostafizur Rahman
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== विश्व धरोहर ==
१७ फरवरी १९७७ को यह स्थल [[युनेस्को|यूनेस्को]] के सम्भावित [[विश्व धरोहर]] सूची में सम्मिलित किया गया।<ref name=unesco/>
==सन्दर्भ==
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[[श्रेणी:बौद्ध विहार]]
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बी॰डी॰ मिश्रा
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[[ब्रिगेडियर]] चिकित्सक '''बी॰डी॰ मिश्रा''' [[भारतीय सेना]] के पूर्व ब्रिगेडियर हैं। वह [[अरुणाचल प्रदेश]] के [[अरुणाचल प्रदेश के राज्यपालों की सूची|राज्यपाल]] थे और [[लद्दाख के उपराज्यपाल]] हैं।<ref>{{cite news |title=भदोही के रिटायर्ड ब्रिगेडियर बीडी मिश्रा बने अरूणाचल प्रदेश के राज्यपाल, जिले में खुशी की लहर |url=https://www.patrika.com/bhadohi-news/retired-brigadier-bd-mishra-appointed-governor-of-arunachal-pradesh-1-1862431/ |accessdate=24 मार्च 2020 |work=पत्रिका |language=hindi |archive-url=https://web.archive.org/web/20200324194010/https://www.patrika.com/bhadohi-news/retired-brigadier-bd-mishra-appointed-governor-of-arunachal-pradesh-1-1862431/ |archive-date=24 मार्च 2020 |url-status=live }}</ref>[[File:The_Minister_of_State_for_Tourism_(IC),_Shri_Alphons_Kannanthanam_meeting_the_Governor_of_Arunachal_Pradesh,_Brigadier_(Retd.)_(Dr.)_B.D._Mishra,_in_New_Delhi_on_July_31,_2018_(cropped).JPG|124x124px]]
[[उत्तर प्रदेश]] में जन्मे मिश्रा को 1961 में इन्फैंट्री की मद्रास रेजीमेंट में कमीशन मिला। उन्होंने तीन दशकों तक सेना में काम किया। उन्होंने 1962 के चीन-भारतीय युद्ध, 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और 1971 के [[बांग्लादेश मुक्ति युद्ध]] के दौरान देश की सेवा की। इसके बाद उन्होंने '''''पुंछ सेक्टर में एक इन्फैंट्री बटालियन और श्रीलंका में भारतीय शांति सेना (IPKF) के एक भाग के रूप में एक इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली।''''' उन्होंने जाफना-पाली अक्ष पर ऑपरेशन पवन के दौरान और जाफना युद्ध के बाद 1987 से 1988 तक त्रिंकोमाली में लिट्टे से लड़ाई लड़ी।
नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) के काउंटर हाईजैक फोर्स के कमांडर के रूप में मिश्रा ने '''''1993 में अमृतसर के राजा सांसी एयरफील्ड में हाइजैक इंडियन एयरलाइंस के विमान पर एक ऑपरेशन का नेतृत्व किया था और 126 यात्रियों, नौ शिशुओं और चालक दल के छह सदस्यों को बचाया।''''' इस ऑपरेशन के लिए उन्हें भारत के प्रधानमंत्री से प्रशंसा मिली। वह 1995 में सेवा से रिटायर हो गए थे। इसके ठीक चार साल बाद जब कारगिल युद्ध छिड़ गया तो उन्होंने खुद से वॉर में दोबारा जाने की जिद ठान ली थी।
बिग्रेडियर (रिटायर) बीडी मिश्रा इलाहाबाद यूनिवर्सिटी और मद्रास यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र हैं। यहां उन्होंने क्रमशः एमए और एमएससी की डिग्री प्राप्त की। मिश्रा ने ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय से पीएचडी भी की है। उन्होंने [[मध्य प्रदेश]] में महू छावनी के कॉलेज ऑफ कॉम्बैट और तमिलनाडु के वेलिंगटन छावनी में रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज में पढ़ाया। उन्होंने 3 अक्टूबर, 2017 को अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी।
==सन्दर्भ==
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[[श्रेणी:अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल]]
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പ്രൊഫസർ പ്രേം രാജ് പുഷ്പാകരന്, എൻ.ഐ.റ്റി. കാലിക്കറ്റ് ♡ Professor P̂rém ráj P̂üshp̂ákárán, NIT Calicut 🪷🌷🪻🌼🌻🌺🌹🌸🏵️💮
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'''किड़क्कम्बलम''' ({{lang-ml|കിഴക്കമ്പലം}})({{langx|en|Kizhakkambalam}}) [[भारत]] के [[केरल]] (या केरलम) राज्य के [[एर्नाकुलम ज़िले]] के[[कोच्चि]] शहर के पूर्व भाग में स्थित एक [[उपनगर]] है। किड़क्कम्बलम नाम दो मलयालम शब्दों के मेल से बना है— 'किषक' जिसका अर्थ है '[[पूर्व]]' और 'अम्बलम' जिसका अर्थ है '[[मन्दिर]]'। माना जाता है कि ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध 'थ्रिककाकरा वामन मूर्ति मंदिर' के पूर्व दिशा में स्थित मंदिर होने के कारण इस समूचे क्षेत्र का नाम किड़क्कम्बलम पड़ा। एक अन्य स्थानीय मान्यता के अनुसार, प्राचीन काल में इस उपनगर में एक 'कषक' ([[फाँसी]] का [[वृक्ष]]) हुआ करता था, जहाँ [[मृत्युदंड]] पाए अपराधियों को फाँसी दी जाती थी। समय के साथ अपभ्रंश होकर यह नाम किड़क्कम्बलम में परिवर्तित हो गया। यह क्षेत्र मुख्य रूप से [[लैटेराइट मृदा]] और [[जलोढ़क]] मिट्टी से निर्मित है। यहाँ की पारिस्थितिकी हरी-भरी वनस्पतियों, [[रबड़]] के बागानों और जलमार्गों से समृद्ध है। ऐतिहासिक रूप से, यह क्षेत्र [[त्रवनकोर]] - कोचीन साम्राज्यों के सीमावर्ती व्यापारिक और [[कृषि]] मार्गों का हिस्सा रहा है। आधुनिक इतिहास में इसकी पहचान एक शांत कृषि प्रधान [[गाँव]] की थी। यहाँ की बहुसंख्यक आबादी ईसाई (याकूब और कैथोलिक) तथा हिंदू धर्म को मानने वाली है। यहाँ की मुख्य भाषा मलयालम है। किड़क्कम्बलम कड़ेकाव भगवती मंदिर: यहाँ का प्रमुख ऐतिहासिक हिंदू मंदिर है। यहाँ पारंपरिक [[ओणम]] और [[विषु]] के साथ मंदिरों के पूरम उत्सवों को अंतःसांस्कृतिक सद्भाव के साथ मनाया जाता है। किड़क्कम्बलम केरल के सबसे मजबूत ग्रामीण आर्थिक केंद्रों में से एक है: प्रसिद्ध परिधान निर्यातक समूह अन्ना-कितेक्स समूह का मुख्यालय यहीं है। यहाँ सेवाना , केजी पैकर्स, और ब्लैककैट जैसी कंपनियाँ काम कर रही हैं, जो स्थानीय श्रम बल के 40% से अधिक लोगों को रोजगार देती हैं। भौगोलिक अवस्थिति के दृष्टिकोण से, प्रसिद्ध [[मनोरंजन]] पार्क '[[वंडरला]] कोच्चि' इस क्षेत्र से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। किड़क्कम्बलम मुख्य रूप से [[राष्ट्रीय राजमार्ग ४१ (भारत) | SH-41]] / एर्नाकुलम–तेक्केडी रोड) पर अवस्थित है, जिसके माध्यम से यह निम्नलिखित दो राष्ट्रीय राजमार्गों से अपनी क्षेत्रीय गतिशीलता स्थापित करता है [[राष्ट्रीय राजमार्ग ५४४ (भारत) | राष्ट्रीय राजमार्ग 544 (NH-544)]] का हिस्सा है जो सालेम (तमिलनाडु) को कोच्चि (केरल) से जोड़ता है। किड़क्कम्बलम से इसके सबसे नजदीकी नोडल पहुंच बिंदु अलुवा और कलामसेरी हैं, जिनकी सड़क मार्ग से दूरी लगभग 12 से 14 किलोमीटर है। यह राजमार्ग कोच्चि-बेंगलुरु औद्योगिक गलियारे ( की रीढ़ है। [[राष्ट्रीय राजमार्ग ८५ (भारत) | राष्ट्रीय राजमार्ग 85 (NH-85)]] जो कोच्चि को धनुषकोडी (तमिलनाडु) से जोड़ता है। किड़क्कम्बलम से दक्षिण की ओर कोलांचेरी या मुवाट्टुपुषा के माध्यम से इस राजमार्ग तक त्वरित पहुंच प्राप्त होती है, जिसकी दूरी लगभग 11 से 15 किलोमीटर है। यह कोच्चि-थेनी-तूतीकोरिन आर्थिक गलियारे का एक हिस्सा है। किड़क्कम्बलम [[पूक्काट्टुपडी]] रोड और मुख्य राज्य राजमार्गों के माध्यम से कोच्चि के प्रमुख हिस्सों से सीधे जुड़ा हुआ है। यहाँ आंतरिक पंचायत सड़कें कॉरपोरेट सहयोग से बेहद आधुनिक बनाई गई हैं। केरल राज्य सड़क परिवहन निगम और निजी बसें इसे [[इन्फोपार्क, कोच्चि]], [[अलुवा]] और [[पेरुम्बावूर]] (13 किमी दूरी) से जोड़ती हैं। सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन अलुवा है। [[कोच्चि मेट्रो]] की कनेक्टिविटी वर्तमान में नजदीकी केंद्र [[काक्कनाड]] चरण 2 विस्तार तक सुलभ है। [[कोचीन अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र]], [[नेदुम्बासेरी]] यहाँ से मात्र 18-20 किमी की दूरी पर स्थित है। उच्च माध्यमिक विद्यालयों के अलावा, तकनीकी प्रशिक्षण संस्थान और इंजीनियरिंग/प्रबंधन कॉलेजों के लिए नजदीकी काक्कनाड एडुआकेडमिक ज़ोन सुलभ है। केरल सरकार के केरल स्मार्ट गवर्नेंस प्लेटफॉर्म के तहत किड़क्कम्बलम पंचायत की सभी नागरिक सेवाओं को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया जा रहा है। कॉरपोरेट-पंचायत साझेदारी के तहत निर्धनों के लिए आधुनिक विला जैसे घर बनाने की योजना का और अधिक विस्तार किया जा रहा है। कोच्चि शहरी विस्तार का हिस्सा होने के कारण यहाँ सेमी-अर्बन लॉजिस्टिक्स हब और ग्रीन इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने के प्रस्ताव विचाराधीन हैं। <ref>"[https://books.google.com/books?id=psw6DwAAQBAJ Lonely Planet South India & Kerala]," Isabella Noble et al, Lonely Planet, 2017, ISBN 9781787012394</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=1Hs0DwAAQBAJ The Rough Guide to South India and Kerala]," Rough Guides UK, 2017, ISBN 9780241332894</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[एर्नाकुलम ज़िला]]
== सन्दर्भ ==
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[[श्रेणी:एर्नाकुलम ज़िला]]
[[श्रेणी:केरल के शहर]]
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[[श्रेणी:कोच्चि में मुहल्ले]]
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}}
'''किड़क्कम्बलम''' ({{lang-ml|കിഴക്കമ്പലം}})({{langx|en|Kizhakkambalam}}) [[भारत]] के [[केरल]] (या केरलम) राज्य के [[एर्नाकुलम ज़िले]] के[[कोच्चि]] शहर के पूर्व भाग में स्थित एक [[उपनगर]] है। किड़क्कम्बलम नाम दो मलयालम शब्दों के मेल से बना है— 'किषक' जिसका अर्थ है '[[पूर्व]]' और 'अम्बलम' जिसका अर्थ है '[[मन्दिर]]'। माना जाता है कि ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध 'थ्रिककाकरा वामन मूर्ति मंदिर' के पूर्व दिशा में स्थित मंदिर होने के कारण इस समूचे क्षेत्र का नाम किड़क्कम्बलम पड़ा। एक अन्य स्थानीय मान्यता के अनुसार, प्राचीन काल में इस उपनगर में एक 'कषक' ([[फाँसी]] का [[वृक्ष]]) हुआ करता था, जहाँ [[मृत्युदंड]] पाए अपराधियों को फाँसी दी जाती थी। समय के साथ अपभ्रंश होकर यह नाम किड़क्कम्बलम में परिवर्तित हो गया। यह क्षेत्र मुख्य रूप से [[लैटेराइट मृदा]] और [[जलोढ़क]] मिट्टी से निर्मित है। यहाँ की पारिस्थितिकी हरी-भरी वनस्पतियों, [[रबड़]] के बागानों और जलमार्गों से समृद्ध है। ऐतिहासिक रूप से, यह क्षेत्र [[त्रवनकोर]] - कोचीन साम्राज्यों के सीमावर्ती व्यापारिक और [[कृषि]] मार्गों का हिस्सा रहा है। आधुनिक इतिहास में इसकी पहचान एक शांत कृषि प्रधान [[गाँव]] की थी। यहाँ की बहुसंख्यक आबादी ईसाई (याकूब और कैथोलिक) तथा हिंदू धर्म को मानने वाली है। यहाँ की मुख्य भाषा मलयालम है। किड़क्कम्बलम कड़ेकाव भगवती मंदिर: यहाँ का प्रमुख ऐतिहासिक हिंदू मंदिर है। यहाँ पारंपरिक [[ओणम]] और [[विषु]] के साथ मंदिरों के पूरम उत्सवों को अंतःसांस्कृतिक सद्भाव के साथ मनाया जाता है। किड़क्कम्बलम केरल के सबसे मजबूत ग्रामीण आर्थिक केंद्रों में से एक है: प्रसिद्ध परिधान निर्यातक समूह अन्ना-कितेक्स समूह का मुख्यालय यहीं है। यहाँ सेवाना , केजी पैकर्स, और ब्लैककैट जैसी कंपनियाँ काम कर रही हैं, जो स्थानीय श्रम बल के 40% से अधिक लोगों को रोजगार देती हैं। भौगोलिक अवस्थिति के दृष्टिकोण से, प्रसिद्ध [[मनोरंजन]] पार्क '[[वंडरला]] कोच्चि' इस क्षेत्र से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। किड़क्कम्बलम मुख्य रूप से [[राष्ट्रीय राजमार्ग ४१ (भारत) | SH-41]] / एर्नाकुलम–तेक्केडी रोड) पर अवस्थित है, जिसके माध्यम से यह निम्नलिखित दो राष्ट्रीय राजमार्गों से अपनी क्षेत्रीय गतिशीलता स्थापित करता है [[राष्ट्रीय राजमार्ग ५४४ (भारत) | राष्ट्रीय राजमार्ग 544 (NH-544)]] का हिस्सा है जो सालेम (तमिलनाडु) को कोच्चि (केरल) से जोड़ता है। किड़क्कम्बलम से इसके सबसे नजदीकी नोडल पहुंच बिंदु अलुवा और कलामसेरी हैं, जिनकी सड़क मार्ग से दूरी लगभग 12 से 14 किलोमीटर है। यह राजमार्ग कोच्चि-बेंगलुरु औद्योगिक गलियारे ( की रीढ़ है। [[राष्ट्रीय राजमार्ग ८५ (भारत) | राष्ट्रीय राजमार्ग 85 (NH-85)]] जो कोच्चि को [[धनुषकोडी]] (तमिलनाडु) से जोड़ता है। किड़क्कम्बलम से दक्षिण की ओर कोलांचेरी या [[मूवाट्टुपुड़ा]] के माध्यम से इस राजमार्ग तक त्वरित पहुंच प्राप्त होती है, जिसकी दूरी लगभग 11 से 15 किलोमीटर है। यह कोच्चि-थेनी-तूतीकोरिन आर्थिक गलियारे का एक हिस्सा है। किड़क्कम्बलम [[पूक्काट्टुपडी]] रोड और मुख्य राज्य राजमार्गों के माध्यम से कोच्चि के प्रमुख हिस्सों से सीधे जुड़ा हुआ है। यहाँ आंतरिक पंचायत सड़कें कॉरपोरेट सहयोग से बेहद आधुनिक बनाई गई हैं। केरल राज्य सड़क परिवहन निगम और निजी बसें इसे [[इन्फोपार्क, कोच्चि]], [[अलुवा]] और [[पेरुम्बावूर]] (13 किमी दूरी) से जोड़ती हैं। सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन अलुवा है। [[कोच्चि मेट्रो]] की कनेक्टिविटी वर्तमान में नजदीकी केंद्र [[काक्कनाड]] चरण 2 विस्तार तक सुलभ है। [[कोचीन अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र]], [[नेदुम्बासेरी]] यहाँ से मात्र 18-20 किमी की दूरी पर स्थित है। उच्च माध्यमिक विद्यालयों के अलावा, तकनीकी प्रशिक्षण संस्थान और इंजीनियरिंग/प्रबंधन कॉलेजों के लिए नजदीकी काक्कनाड एडुआकेडमिक ज़ोन सुलभ है। [[केरल सरकार]] के केरल स्मार्ट गवर्नेंस प्लेटफॉर्म के तहत किड़क्कम्बलम पंचायत की सभी नागरिक सेवाओं को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया जा रहा है। कॉरपोरेट-पंचायत साझेदारी के तहत निर्धनों के लिए आधुनिक विला जैसे घर बनाने की योजना का और अधिक विस्तार किया जा रहा है। कोच्चि शहरी विस्तार का हिस्सा होने के कारण यहाँ सेमी-अर्बन लॉजिस्टिक्स हब और ग्रीन इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने के प्रस्ताव विचाराधीन हैं। <ref>"[https://books.google.com/books?id=psw6DwAAQBAJ Lonely Planet South India & Kerala]," Isabella Noble et al, Lonely Planet, 2017, ISBN 9781787012394</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=1Hs0DwAAQBAJ The Rough Guide to South India and Kerala]," Rough Guides UK, 2017, ISBN 9780241332894</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[एर्नाकुलम ज़िला]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{केरल}}
[[श्रेणी:एर्नाकुलम ज़िला]]
[[श्रेणी:केरल के शहर]]
[[श्रेणी:एर्नाकुलम ज़िले के नगर]]
[[श्रेणी:कोच्चि में मुहल्ले]]
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जम्मू और कश्मीर में भारतीय सशस्त्र सेनाएँ
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text/x-wiki
'''जम्मू और कश्मीर में [[भारतीय सशस्त्र सेनाएँ|भारतीय सशस्त्र बल]]''' भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना, जिसमें [[सशस्त्र बल विशेष संचालन प्रभाग]] (अफ़साद), और [[भारत के अर्धसैनिक बल | अर्धसैनिक संगठन]] [[केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल]] शामिल हैं। जैसे कि [[सीमा सुरक्षा बल]], [[केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल]], [[सशस्त्र सीमा बल]] और [[भारत-तिब्बत सीमा पुलिस]].<ref name=":0">{{Cite web|last=Kakar|first=Harsha|title=Why moving NSG into Kashmir is not a sound solution|url=https://www.orfonline.org/expert-speak/why-moving-nsg-into-kashmir-is-not-a-sound-solution/|access-date=2020-06-03|website=ORF|language=en-US}}</ref><ref name=":2">{{Cite news|last=|first=|date=2019-08-02|title=IAF flying operations in J-K part of 'normal activity': Sources|work=The Economic Times|agency=ANI|url=https://economictimes.indiatimes.com/news/defence/iaf-flying-operations-in-j-k-part-of-normal-activity-sources/articleshow/70496468.cms|url-status=dead|access-date=2020-06-03|archive-date=3 जून 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200603131202/https://economictimes.indiatimes.com/news/defence/iaf-flying-operations-in-j-k-part-of-normal-activity-sources/articleshow/70496468.cms}}</ref><ref name=":3">{{Cite web|last=Negi|first=Manjeet Singh|date=24 November 2019|title=Army, Navy, IAF special forces deployed in Kashmir to hunt terrorists|url=https://www.indiatoday.in/india/story/army-navy-iaf-special-forces-deployed-in-kashmir-to-hunt-terrorists-1622243-2019-11-24|url-status=live|archive-url=|archive-date=|access-date=2020-06-03|website=India Today|language=en}}</ref>भारत की सेना के प्रत्येक तीन विंगों में भारतीय सेना के विशेष बल और [[राष्ट्रीय राइफल्स]], [[भारतीय नौसेना]] [[मार्क्स]] और भारतीय वायु सेना के [[गरुड़ कमांडो फोर्स]] सहित क्षेत्र में विशेष बल तैनात हैं।<ref name=":3" /> इसके अलावा, इस क्षेत्र में कुलीन पुलिस विरोधी उग्रवाद बल है, [[जम्मू और कश्मीर पुलिस]] का [[स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (इंडिया) | स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप]]।.<ref name=":1">{{Cite web|last=Javaid|first=Azaan|date=2019-10-28|title=Kashmir anti-insurgency units to add strength to fight rising militant attacks|url=https://theprint.in/india/kashmir-anti-insurgency-units-to-add-strength-to-fight-rising-militant-attacks/312412/|access-date=2020-06-03|website=ThePrint|language=en-US}}</ref>
[[File:The Prime Minister, Shri Narendra Modi celebrating Diwali with the jawans of Indian Army and BSF, in the Gurez Valley, near the Line of Control, in Jammu and Kashmir, on October 19, 2017 (3).jpg|thumb|प्रधानमंत्री मोदी 19 अक्टूबर, 2017 को जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पास गुरेज़ घाटी में भारतीय सेना और बीएसएफ के जवानों के साथ दिवाली मना रहे हैं।]]
== भारतीय सेना==
मुख्य लेख -[[जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना का ऑपरेशन]]
[[भारतीय सेना]] को पहली बार कश्मीर में [[1947–-1948 के भारत-पाकिस्तान युद्ध]] के दौरान तैनात किया गया था। इसके बाद सेना क्षेत्र में पाकिस्तान और चीन के साथ हर संघर्ष, गतिरोध और सीमा झड़प का हिस्सा रही है। इस क्षेत्र में आंतरिक सुरक्षा की तैनाती में आतंकवाद विरोधी अभियान और आतंकवाद रोधी अभियान शामिल हैं। इस क्षेत्र में अधिकांश आतंकवाद-रोधी अभियानों का नेतृत्व सेना द्वारा किया जाता है, जिसमें सीआरपीएफ और एसओजी परिधि प्रदान करते हैं और [[जम्मू और कश्मीर में भीड़ नियंत्रण | भीड़ नियंत्रण]] समर्थन.<ref name=":0" />
== भारतीय वायु सेना ==
इन्हे भी देखे - [[2019 जम्मू और कश्मीर हवाई हमले]]
1947 में, (रॉयल) [[भारतीय वायु सेना]], [[सी -47 डकोटा]] और [[हॉकर टेंपेस्ट | टेंपरेस्ट]], भारतीय सेना को परिवहन और हवाई सहायता प्रदान की, जिससे भारतीय सैनिकों को फिर से फायदा हुआ। जम्मू और कश्मीर की पूर्व रियासत के बड़े क्षेत्रों पर नियंत्रण।<ref>{{Harvnb|Barua|2005|p=192|Ref=Barua}}</ref> इसके बाद, वायु सेना ने मानवीय अवसरों सहित कई अवसरों पर जम्मू और कश्मीर में सहायता प्रदान की है, जैसे कि [[2014 भारत-पाकिस्तान बाढ़ | जम्मू और कश्मीर बाढ़, 2014]]।<ref name="PIB, 11/9">{{cite web|last1=Press Information Bureau|date=11 September 2014|title=Round up at 1800 Hrs--- Over 1,10,000 People Rescued So Far by Armed Forces Another Batch of Marine Commandos Arrives in Srinagar|url=http://pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=91945|accessdate=12 September 2014|website=PIB, Government of India|publisher=Ministry of Defence}}</ref><ref name="pib. 16/9">{{cite web|date=16 September 2015|title=Round up at 1300 hrs --- Number of People Rescued Crosses 2,37,000 in J&K Train Route from Srinagar to Baramulla has been Restored|url=http://pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=91945|accessdate=29 June 2015|publisher=PIB}}</ref><ref name=":2" /> वायु सेना ने जम्मू और कश्मीर में सेना के साथ गरुड़ को संलग्न करना शुरू कर दिया ताकि उन्हें "लाइव स्थिति प्रशिक्षण दिया जा सके।"".<ref name=":4">{{Cite web|last=Som|first=Vishnu|date=20 November 2017|title=Before Falling To Terrorists' Bullets In Kashmir, Garud Commando Shot 3|url=https://www.ndtv.com/india-news/before-falling-to-terrorists-bullets-garud-commando-killed-3-in-kashmir-1777887|url-status=live|archive-url=|archive-date=|access-date=2020-06-03|website=NDTV}}</ref> कमांडो चिनार कॉर्प्स और सेना की राष्ट्रीय राइफल्स से जुड़े होते हैं.<ref name=":0" /><ref name=":4" />
== भारतीय नौसेना ==
जम्मू और कश्मीर में सेना के साथ मार्क्स काम करते हैं, उनकी मुख्य भूमिकाओं में से एक [[वुलर झील]] की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है।<ref name=":0" /> 2018 से, मार्क्स को [[सशस्त्र बल विशेष परिचालन प्रभाग]] के हिस्से के रूप में इस क्षेत्र में तैनात किया गया था।.<ref name=":3" />
== केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल ==
=== सीमा सुरक्षा बल ===
बीएसएफ पाकिस्तान के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है।<ref>{{Cite news|date=2019-09-27|title=BSF launches operation to detect cross-border tunnel in Jammu-Kathua sector|work=The Economic Times|url=https://economictimes.indiatimes.com/news/defence/bsf-launches-operation-to-detect-cross-border-tunnel-in-jammu-kathua-sector/articleshow/71323323.cms?from=mdr|access-date=2020-06-03}}</ref>
=== केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ===
सीआरपीएफ की 26 बटालियनें कश्मीर क्षेत्र में तैनात हैं, "उत्तर में कुपवाड़ा से लेकर दक्षिण में [[जवाहर सुरंग]] और पूर्व में शोपियां में पश्चिम में शोपियां" तक के इलाके में ऑपरेशन किए जा रहे हैं।<ref>{{Cite web|title=OPS Kashmir Sector {{!}} J & K Zone {{!}} Dte/Zone {{!}} Central Reserve Police Force, Government of India.|url=https://crpf.gov.in/kashmir-sector.htm|access-date=2020-06-03|website=crpf.gov.in}}</ref> 2020 में सीआरपीएफ को नए बुलेटप्रूफ जैकेट और बख्तरबंद टुकड़ी वाहक मिले.<ref>{{Cite web|last=Awasthi|first=Prashasti|title=40,000 bulletproof jackets, 170 armoured vehicles sanctioned for CRPF in Kashmir, red corridor|url=https://www.thehindubusinessline.com/news/40000-bulletproof-jackets-170-armoured-vehicles-sanctioned-for-crpf-in-kashmir-red-corridor/article31721717.ece|access-date=2020-06-03|website=@businessline|language=hi}}</ref>
== विशेष संचालन समूह ==
जम्मू और कश्मीर पुलिस [[स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (इंडिया) | स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप]] (सोग ) 1990 के दशक की शुरुआत में बनाई गई थी।<ref>{{Cite web|last=Ganai|first=Naseer|date=27 January 2020|title=A Dreaded Force In Land Of Insurgency, J&K Police A Law Unto Themselves|url=https://www.outlookindia.com/magazine/story/india-news-a-dreaded-force-in-land-of-insurgency-jk-police-a-law-unto-themselves/302639|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20200629101414/https://www.outlookindia.com/magazine/story/india-news-a-dreaded-force-in-land-of-insurgency-jk-police-a-law-unto-themselves/302639|archive-date=29 जून 2020|access-date=2020-06-03|website=Outlook India Magazine}}</ref> कश्मीर के प्रत्येक जिले में जिले में उग्रवाद की मात्रा के अनुसार अलग-अलग ताकत वाली कई एसओजी इकाइयाँ हैं। प्रत्येक इकाई का नेतृत्व एक [[उप पुलिस अधीक्षक]] करता है। कुलगाम, अनंतनाग, शोपियां और पुलवामा सबसे अधिक एसओजी इकाइयों वाले जिले हैं.<ref name=":1" />
== हताहत ==
2020 में, अप्रैल और मई में, [[कश्मीर घाटी | कश्मीर घाटी]] पर सेना, सीआरपीएफ, पुलिस और बीएसएफ से 27 हताहत हुए हैं।<ref>{{Cite web|last=Masoodi|first=Nazir|date=20 May 2020|title=2 Border Security Force Men Killed In Terror Attack On Outskirts Of Srinagar|url=https://www.ndtv.com/india-news/2-border-security-force-men-killed-in-terror-attack-on-outskirts-of-srinagar-2232286|url-status=live|archive-url=|archive-date=|access-date=2020-06-03|website=NDTV|quote=In the last seven weeks, 27 personnel from the Army, Central Reserve Police Force (CRPF), state police and BSF have died in attacks across Kashmir valley.}}</ref>
{{कॉमन्स श्रेणी|जम्मू और कश्मीर में भारतीय सशस्त्र बल}}
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
==ग्रन्थसूची==
{{Refbegin|}}
* {{cite book|last1=Barua|first1=Pradeep|title=The State at War in South Asia|url=https://books.google.com/?id=FIIQhuAOGaIC|edition=|location=|year=2005|publisher=University of Nebraska Press|isbn=978-0-8032-1344-9|pages=192|ref=Barua}}
[[श्रेणी: भारत की सेना]]
[[श्रेणी: रक्षा मंत्रालय (भारत)]]
[[श्रेणी: jammu_and_kashmir]]
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ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम
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text/x-wiki
{{Infobox legislature
| name = हैदराबाद महानगर निगम
| native_name = گریٹر حیدرآباد میونسپل کارپوریشن హైదరాబాదు మహానగరపాలక సంస్థ
| native_name_lang = [[तेलुगू भाषा|तेलुगू]] [[उर्दू भाषा|उर्दू]]
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| house_type = [[नगर निगम]]
| foundation = {{Start date and age|df=yes|paren=yes|br=yes|1869}}<ref>{{Cite web |url=http://www.ghmc.gov.in/greaterhyd.asp |title=संग्रहीत प्रति |access-date=24 दिसंबर 2020 |archive-date=25 दिसंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181225201010/https://www.ghmc.gov.in/greaterhyd.asp |url-status=dead }}</ref> [[हैदराबाद]], [[हैदराबाद प्रांत|हैदराबाद स्टेट]] <br><small>(वर्तमान) [[हैदराबाद]], [[तेलंगाना]], [[भारत]]</small>
|preceded_by=Municipal Corporation of Hyderabad (2007)
|succeeded_by = *ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम
*[[साइबराबाद नगर निगम]] और
*मल्काजगिरी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन<br/> (2026) <ref>{{cite web | title=Congress' Big Hyderabad Municipal Body Shake Up Before Crucial Election | date=11 February 2026 | url=https://www.ndtv.com/south/congress-big-hyderabad-municipal-body-shake-up-before-crucial-election-10986744}}</ref>
| leader1_type = महापौर
| leader1 = गडवाल विजयालक्ष्मी
| party1 = [[भारत राष्ट्र समिति|भारास]]
| election1 = 11 February 2021
| leader2_type = उप - मेयर
| leader2 = मोथे श्री लता रेड्डी
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| Official language = [[तेलुगू भाषा|तेलुगू]], [[उर्दू भाषा|उर्दू ]]
| seats ='''150'''
| structure1 = Greater_Hyderabad_Municipal_Corporation_2020.svg
| structure1_res = 300px
| political_groups1 = '''सरकार'''
*{{colorbox|#F82A96}} [[तेलंगाना राष्ट्र समिति|बीआरएस]] (56)
*{{colorbox|#0B6B4A}} [[ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन|मजलिस]] (44)
'''विरोधिपक्ष'''
*{{colorbox|#FF9933}} [[भारतीय जनता पार्टी|भाजपा]] (48)
'''अन्य'''
*{{colorbox|#00BFFF}} [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] (2)
| last_election1 = १ डिसेंबर २०२०
| next_election1 = २०२५
| session_res =
| session_room = Ghmc1.jpg
| meeting_place = जीएचएमसी बिल्डिंग पुरानी कत्तल मंडी अबीड्स हैदराबाद तेलंगाना ५००००१
| website = {{url|http://www.ghmc.gov.in/}}
| motto = एक लक्ष उज्वल भविष्य की ओर
}}
'''हैदराबाद महानगर निगम''' (GHMC) वह नागरिक निकाय है जो [[भारत]] के [[तेलंगाना]] राज्य की राजधानी और सबसे बड़े शहर [[हैदराबाद]] की देखरेख करता है।<ref>{{cite web|url=https://www.bbc.com/hindi/india-55099856|title=ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव में मोदी-शाह क्यों झोंक रहे हैं बीजेपी की पूरी ताक़त?}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.bbc.com/hindi/india-55105854|title=ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम चुनाव: बीजेपी, टीआरएस और एमआईएम के बीच टक्कर}}</ref> यह [[हैदराबाद]] और [[सिकंदराबाद]] शहरों के लिए स्थानीय सरकार है। यह 6.9 मिलियन की आबादी और 625 वर्ग किमी के क्षेत्र के साथ [[भारत में नगर निगमों की सूची|भारत में सबसे बड़े नगर निगमों]] में से एक है।
==जीएचएमसी के प्रशासनिक प्रभाग==
[[File:GHMC ZONES,CIRCLES,WARDS MAP DEC 2025.jpg|thumb|The new GHMC is divided into 12 municipal zones]]
हैदराबाद महानगर निगम (GHMC) वह नागरिक निकाय है जो तेलंगाना के भारतीय राज्य की राजधानी और सबसे बड़े शहर [[हैदराबाद]] की देखरेख करता है। यह हैदराबाद और सिकंदराबाद शहरों के लिए स्थानीय सरकार है। इसका भौगोलिक क्षेत्र अधिकांश शहरी विकास एजेंसी हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HMDA) को कवर करता है। 24 विधानसभा क्षेत्र जीएचएमसी के अंतर्गत आते हैं।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/24-seats-at-stake-as-titans-clash-for-greater-hyderabad-pie/articleshow/104514077.cms?from=mdr|title=24 seats at stake as titans clash for Greater Hyderabad pie}}</ref><ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/kcrs-early-election-gamble-gives-enough-ammo-to-trs/articleshow/66104449.cms|title=KCR’s early election gamble gives enough ammo to TRS}}</ref> 5 लोकसभा सांसदों सहित 64 पदेन सदस्य, जिनके निर्वाचन क्षेत्र जीएचएमसी के निर्वाचन क्षेत्र जीएचएमसी चुनाव में हैं।<ref>{{cite web|url=http://www.deccanchronicle.com/nation/current-affairs/010216/ghmc-polls-candidates-shying-away-from-poll-expenditure.html|title=GHMC poll fray 2016}}</ref>
==विधान - सभा==
जीएचएमसी के लिए अग्रदूत की विधायिका का कार्यकाल अर्थात् हैदराबाद नगर निगम, फिर उसी नाम से बुलाया जाता है, जो जीएचएमसी के गठन से पहले समाप्त हो गया। विधानमंडल की स्थायी समिति सत्र में होने पर विधायिका के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभाती है। 5 लोकसभा सांसदों सहित 64 पदेन सदस्य, जिनके निर्वाचन क्षेत्र जीएचएमसी के निर्वाचन क्षेत्र जीएचएमसी चुनाव में हैं।<ref>{{cite web|url=http://www.deccanchronicle.com/nation/current-affairs/010216/ghmc-polls-candidates-shying-away-from-poll-expenditure.html|title=GHMC poll fray 2016}}</ref><ref name="timesofindia.indiatimes.com">{{cite web|url=http://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/GHMC-in-dilemma-over-ex-officio-members/articleshow/5280541.cms|title=GHMC in dilemma over ex-officio members}}</ref><ref name="sakshipost.com">http://www.sakshipost.com/index.php/news/politics/72601-here-are-the-50-ex-officio-members-eligible-to-vote-in-ghmc-mayor-election.html{{dead link|date=October 2017 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref>
==2025 परिसीमन==
दिसंबर 2025 में अधिसूचित पुनर्गठन के हिस्से के रूप में जीएचएमसी में वार्डों की संख्या 150 से बढ़कर 300 हो गई।<ref>{{cite web|url=https://hindi.theprint.in/india/the-number-of-wards-in-the-greater-hyderabad-municipal-corporation-has-been-increased-to-300/904472/|title=ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम में वार्ड की संख्या बढ़कर हुई 300}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.etvbharat.com/hi/bharat/alert-for-hyderabad-residents-your-home-address-is-about-to-change-again-hindi-news-hin25122002790|title=हैदराबाद में रहने वालों के लिए अलर्ट, आपके घर का पता फिर से बदलने वाला है!}}</ref> यह वृद्धि 20 नगर पालिकाओं और सात निगमों सहित आसपास के 27 शहरी स्थानीय निकायों के जीएचएमसी में विलय का परिणाम थी।<ref>{{cite web|url=https://www.jagran.com/news/national-hyderabad-becomes-mega-city-ghmc-area-increases-threefold-12-zones-and-4-police-commissionerates-established-40090269.html|title=हैदराबाद बना मेगा सिटी, 3 गुना बढ़ा GHMC क्षेत्र; 12 जोन और 4 पुलिस कमिश्नरेट स्थापित}}</ref> नवंबर 2025 में, यह घोषणा की गई थी कि 27 निकटवर्ती शहरी स्थानीय निकाय (7 नगर निगम: बदांगपेट, बंदलागुडा जागीर, मीरपेट-जिल्लेलगुडा, बोडुप्पल, पीरज़ादिगुडा, जवाहरनगर, निज़ामपेट और 20 नगर पालिकाएँ: पेद्दा अंबरपेट, जलपल्ली, शमशाबाद, तुर्कयमजाल, मणिकोंडा, नरसिंगी, आदिबाटला, तुक्कुगुडा, मेडचल, दम्मईगुडा, नगरम, पोचारम, घाटकेसर, गुंडलपोचमपल्ली, थुमकुंटा, कोमपल्ली, डुंडीगल, बोलारम, तेलापुर, अमीनपुर) को जीएचएमसी में विलय कर दिया जाएगा।
==GHMC का तीन हिस्सों में बँटवारा (2026-अभी तक) ==
11 फरवरी 2026 को, ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (GHMC) को तीन कॉर्पोरेशन में बाँटा गया: GHMC, MMC, और CMC।<ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/national/telangana/ias-officers-transfers-feb-2026-new-commissioners-appointed-for-malkajgiri-and-cyberabad-municipal-corporations/article70618109.ece|title=New Commissioners appointed for Malkajgiri and Cyberabad municipal corporations}}</ref><ref name="richest">{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/cyberabad-municipal-corporation-set-to-become-richest-civic-body-in-telangana/articleshow/128221834.cms|title=Cyberabad Municipal Corporation set to become richest civic body in Telangana}}</ref><ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/civic-split-raises-red-flags-over-fiscal-strain/articleshow/128272911.cms|title=Civic split raises red flags over fiscal strain}}</ref> 9 फरवरी 2026 को लोकल बॉडी का कार्यकाल खत्म होने के बाद, तेलंगाना सरकार ने अगले लोकल बॉडी चुनाव होने तक स्पेशल कमिश्नर नियुक्त किए।<ref>{{cite web
|title=GHMC set for trifurcation: Hyderabad, Cyberabad and Malkajgiri corporations to be formed
|url=https://www.deccanchronicle.com/southern-states/telangana/ghmc-set-for-trifurcation-hyderabad-cyberabad-and-malkajgiri-corporations-to-be-formed-1935541
|website=Deccan Chronicle
|access-date=10 February 2026
}}</ref>
<ref>{{cite web |last=Murthy |first=Sistla Dakshina |title=GHMC bifurcated: Cyberabad, Malkajgiri to have separate municipal corporations |url=https://newsmeter.in/regional/telangana/ghmc-bifurcated-cyberabad-malkajgiri-to-have-separate-municipal-corporations-762883 |website=NewsMeter |date=11 February 2026 |access-date=11 February 2026}}</ref> तीनों कॉर्पोरेशन ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट, 1955 के तहत चलते हैं।<ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/national/telangana/all-the-three-corporations-to-be-governed-by-the-ghmc-act-1955/article70620480.ece|title=All the three corporations to be governed by the GHMC Act, 1955}}</ref> पुनर्गठित जीएचएमसी में लगभग 689 km<sup>2</sup> क्षेत्र शामिल हैं।<ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/cities/Hyderabad/six-zones-with-30-circles-in-reorganised-ghmc/article70618646.ece|title=Six zones with 30 Circles in reorganised GHMC}}</ref>
{| class="wikitable"
! Present Corporation
! Future Corporation
! Area of Jurisdiction (in km<sup>2</sup>)
! Zone
! Wards
! Total
! Special Commissioners
! Special Chief Secretary
|-
| rowspan="12" | '''[[GHMC]]'''
| rowspan="3" | '''MMC - मल्काजगिरी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन'''
| rowspan="3" | '''727'''
| [[Uppal Kalan|Uppal]]
| 24
| rowspan="3" | 74
| rowspan="3" | {{plainlist|
* T. Vinay Krishna Reddy
}}
| rowspan="12" | {{plainlist|
* Jayesh Ranjan}}
|-
| [[L. B. Nagar]]
| 24
|-
| [[Malkajgiri]]
| 26
|-
| rowspan="3" | '''CMC - [[साइबराबाद नगर निगम]]'''
| rowspan="3" | '''637'''
| [[Kukatpally]]
| 23
| rowspan="3" | 76
| rowspan="3" | {{plainlist|
* सृजना गुम्मल्ला
}}
|-
| [[Quthbullapur]]
| 27
|-
| [[Serilingampally]]
| 26
|-
| rowspan="6" | '''GHMC - [[हैदराबाद महानगर निगम]]'''
| rowspan="6" | '''689'''
| [[Secunderabad]]
| 28
| rowspan="6" | 150
| rowspan="6" | {{plainlist|
* R.V. Karnan
}}
|-
| [[Khairatabad]]
| 25
|-
| [[Golconda]]
| 26
|-
| [[Charminar]]
| 25
|-
| [[Rajendranagar]]
| 29
|-
| [[Shamshabad]]
| 17
|-
! colspan="2" | '''Total'''
! '''2053'''
! —
! '''300'''
! '''300'''
! —
! —
|}
==इन्हें भी देखें==
* [[दिल्ली नगर निगम]]
* [[बृहन्मुंबई नगर निगम]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
{{हैदराबाद के विषय}}
[[श्रेणी: हैदराबाद]]
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सुकुमार राय
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text/x-wiki
{{Infobox writer|name=सुकुमार राय|nationality=भारतीय|awards=|children=[[सत्यजीत राय]] (पुत्र)|spouse=सुप्रभा देवी|relatives=[[उपेन्द्रकिशोर राय चौधरी|उपेंद्र किशोर राय]] (पिता) और बिधुमुखी देवी (माता)|alma_mater=प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी, कोलकाता<br>लंदन कॉलेज ऑफ कम्युनिकेशन|notableworks=आबोल ताबोल, पगला दाशु, हाजाबाराला|subject=|occupation=लेखक, कवि|period=[[बंगाल का नवजागरण]]|language=[[बंगाली भाषा|बंगाली]]|native_name=সুকুমার রায়|death_place=[[कलकत्ता]] (अभी [[कोलकाता]], [[पश्चिम बंगाल]], [[भारत]]|death_date={{Death date and age|1923|09|10|1887|10|30|df=yes}}|birth_place=[[कलकत्ता]], [[बंगाल प्रेसीडेंसी]], [[ब्रितानी भारत]] (अब [[कोलकाता]], [[पश्चिम बंगाल]], [[भारत]])|birth_date={{Birth date|1887|10|30|df=yes}}|birth_name=सुकुमार राय|pseudonym=|caption=|imagesize=240px|image=Sukumar Ray.jpg|native_name_lang=bn|signature=}}
'''सुकुमार राय''' ({{lang-bn|সুকুমার রায়}}, {{Audio|Bn-সুকুমার রায়.oga|''Sukumār Rāẏ''}}; 30 अक्टूबर 1887 - 10 सितंबर 1923)<ref name="RayChatterjee">{{cite book|author1=Ray|author2=Sukumar (tr. Chatterjee|author3=Sampurna)|title=Wordygurdyboom!|url=https://books.google.com/books?id=ohsA1rdovbwC&pg=PA177|access-date=3 October 2012|publisher=Penguin Books India|isbn=978-0-14-333078-3|pages=177–}}</ref> भारतीय महाद्वीप के एक [[बंगाली भाषा|बंगाली लेखक]] और कवि थे। उन्हें मुख्य रूप से बाल लेखन के लिए याद किया जाता है। वह बाल कहानीकार [[उपेन्द्रकिशोर राय चौधरी|उपेंद्र किशोर राय]] के बेटे थे। यह भारतीय फिल्म निर्माता [[सत्यजीत राय]] के पिता और संदीप राय के दादा थे।
==प्रारंभिक वर्ष==
सुकुमार राय का जन्म 30 अक्टूबर 1887 को [[कलकत्ता]], [[ब्रिटिश भारत]] (वर्तमान [[पश्चिम बंगाल]]) में एक [[कायस्थ]] परिवार में हुआ था।<ref name="birthdate">{{cite book|last1=Raychowdhury|first1=Hitendra Kishore|title=Upendra Kishore O Moshua - Ray Poribaarer Golposholpo|date=1984|publisher=Firma KLM Private Limited|page=1}}</ref> उनका परिवार ब्रिटिश भारत में पूर्वी बंगाल के [[मयमनसिंह (या मैमनसिंह)]] संभाग के मसुआ गाँव से आया था, जो वर्तमान में [[बांग्लादेश]] में है। सुकुमार के पिता [[उपेन्द्रकिशोर राय चौधरी|उपेंद्र किशोर राय]] एक प्रसिद्ध बंगाली लेखक, चित्रकार, वायलिन वादक और संगीतकार, टेक्नोलॉजिस्ट, शौकिया खगोलशास्त्री और उद्यमी थे।<ref name="satyajit">{{cite book |year=1987 |editor1-first=Satyajit |editor1-last= Ray |editor2-first=Partha|editor2-last= Basu|title= Sukumar Sahitya Samagra Centenary Edition|publisher= Ananda Publishers Ltd.}}</ref> सुकुमार की मां बिधुमुखी देवी द्वारकानाथ गांगुली की बेटी थीं।<ref name= sangsad >{{cite book |editor-last1=Sengupta |editor-first1=Subodh Chandra |editor-last2=Basu |editor-first2=Anjali |date=1998 |orig-year=First published 1976 |edition=4th |title=Sangsad Bāṅgālī Charitābhidhāna |type=Biographical dictionary |language=bn |page=67 |isbn=81-85626-65-0}}</ref>
उस युग में जन्मे सुकुमार को [[बंगाल का नवजागरण]] का शिखर कहा जा सकता है, वह एक ऐसे वातावरण में पले-बढ़े, जिन्होंने अपनी साहित्यिक प्रतिभा को बढ़ावा दिया। उनके पिता कहानियों और लोकप्रिय विज्ञान के लेखक थे; इसके अलावा उनके पिता चित्रकार तथा गीतों के संगीतकार और एक टेक्नोलॉजिस्ट और हॉबीस्ट एस्ट्रोनॉमर थे। उपेन्द्र किशोर [[रवीन्द्रनाथ टैगोर]] के भी घनिष्ठ मित्र थे, जिन्होंने सुकुमार को प्रभावित किया। अन्य पारिवारिक मित्रों में [[जगदीश चंद्र बोस]], [[प्रफुल्ल चन्द्र राय]], अतुल प्रसाद सेन आदि थे। उपेन्द्रकिशोर ने ब्लॉकचेनिंग की तकनीक का अध्ययन किया, प्रयोग किए और ब्लॉक बनाने का व्यवसाय स्थापित किया। फर्म मेसर्स यू राय एंड संस, जहां सुकुमार और उनके छोटे भाई सुबिना शामिल थे। उनकी बहन, शुभलता राव, एक सामाजिक कार्यकर्ता और बाल पुस्तकों की लेखिका थी। अपने पिता की तरह, सुकुमार भी रवींद्रनाथ टैगोर के करीबी परिचित थे।<ref name="bpedia">{{cite book |last=Sarker |first=Sushanta |year=2012 |chapter=Rao, Shukhalata |chapter-url=http://en.banglapedia.org/index.php?title=Rao,_Shukhalata |editor1-last=Islam |editor1-first=Sirajul |editor1-link=Sirajul Islam |editor2-last=Jamal |editor2-first=Ahmed A. |title=Banglapedia: National Encyclopedia of Bangladesh |edition=Second |publisher=Asiatic Society of Bangladesh |archive-url=https://web.archive.org/web/20160512215303/http://en.banglapedia.org/index.php?title=Rao,_Shukhalata |archive-date=12 मई 2016 |access-date=28 जनवरी 2021 |url-status=dead}}</ref>
== संदर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:बंगाली लेखक]]
[[श्रेणी:१९२३ में निधन]]
[[श्रेणी:1887 में जन्मे लोग]]
==बाहरी कड़ियाँ==
* [http://sukumarray.freehostia.com/ Complete Sukumar Ray]
* [http://cafeirreal.alicewhittenburg.com/sukumar_ray.htm "Drighangchu" by Sukumar Ray] translation of short story in ''[[The Cafe Irreal]]''
{{commons category|Sukumar Ray}}
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नारायण सिंह देवल
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wikitext
text/x-wiki
'''नारायण सिंह देवल ''' (जन्म 5 अगस्त 1964) [[रानीवाड़ा]], [[राजस्थान]] के एक विधायक हैं।<ref>{{cite web | url=http://www.rajassembly.nic.in/MembersPage.asp?DivNo=89 | title= Member page | work=rajassembly.nic.in }}</ref> वह [[भारतीय जनता पार्टी]] के सदस्य हैं और 2013 में पार्टी के उम्मीदवार के रूप में 32,652 वोटों के साथ एक विधायक चुने गए थे और एक बार फिर 2018 मे विधायक चुने गऐ। देवल के पास राजस्थान भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष चुने गऐ। <ref>{{cite web | url=http://www.ceorajasthan.nic.in/Affidavits-VS13/S20/SE/145/2-NARAYAN%20SINGH%20DEWAL/2-NARAYAN%20SINGH%20DEWAL.htm | title=Info: | work=ceorajasthan.nic.in | access-date=15 फ़रवरी 2021 | archive-date=19 नवंबर 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20161119182411/http://www.ceorajasthan.nic.in/Affidavits-VS13/S20/SE/145/2-NARAYAN%20SINGH%20DEWAL/2-NARAYAN%20SINGH%20DEWAL.htm | url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web | url=http://www.elections.in/rajasthan/assembly-constituencies/raniwara.html | title= for results click & check 1st line | work=elections.in }}</ref>
{{Infobox officeholder
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| name = नारायण सिंह देवल
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== व्यक्तिगत जीवन ==
उनका जन्म 5 अगस्त 1964 पहाड़पुरा के एक [[देवल (जाति)|देवल राजपूत]] परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम जय सिंह देवल है। उन्होंने 1989 में सुनीता देवल से शादी की। दंपति के 1 बेटा और 1 बेटी है।
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://m.facebook.com/MlaRaniwara/ नारायण सिंह देवल का आधिकारिक फेसबुक पेज]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:1964 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:जालौर जिले के लोग]]
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हरप्रीत सिंह भाटिया
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text/x-wiki
{{Infobox cricketer
| name = हरप्रीत सिंह
| image = Harpreet Singh Bhatia.jpg
| caption = [[2019-20 विजय हजारे ट्रॉफी]] के दौरान भाटिया
| country = भारत
| fullname = हरप्रीत सिंह भाटिया
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| birth_place = [[दुर्ग]], [[मध्य प्रदेश]] (अब [[छत्तीसगढ़]]), भारत
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| batting = बायां हाथ
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| club4 = [[भारत राष्ट्रीय अंडर-19 क्रिकेट टीम|भारत अंडर-19]]
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| club5 = [[कोलकाता नाइट राइडर्स]]
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| club6 = [[पुणे वारियर्स इंडिया]]
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| club7 = [[रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर]]
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| club8 = बार्न्सले वूली मिनर्स
| year8 = 2018-वर्तमान
| columns = 3
| column1 = [[प्रथम श्रेणी क्रिकेट | एफसी]]
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| date = 23 जनवरी
| year = 2013
| source = http://www.espncricinfo.com/ci/content/player/340854.html क्रिकइन्फो
}}
'''हरप्रीत सिंह भाटिया''' (जन्म 11 अगस्त 1991) एक भारतीय क्रिकेटर हैं जो भारतीय घरेलू क्रिकेट में छत्तीसगढ़ क्रिकेट टीम और सेंट्रल ज़ोन के लिए खेलते हैं।<ref>[http://www.espncricinfo.com/ci/content/player/340854.html Harpreet Singh - Cricinfo profile]</ref> वह बाएं हाथ के बल्लेबाज और दाएं हाथ के मध्यम गति के गेंदबाज हैं। वह 2011 [[इंडियन प्रीमियर लीग]] में पुणे वारियर्स इंडिया टीम के सदस्य थे।<ref>[http://www.espncricinfo.com/indian-premier-league-2012/content/squad/556284.html Pune Warriors Squad - 2012 IPL]</ref> उन्होंने 2010 के आईसीसी अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
अप्रैल 2017 में, यह घोषणा की गई थी कि उन्हें इंडियन प्रीमियर लीग के शेष भाग में हिस्सा लेने के लिए [[रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर]] द्वारा हस्ताक्षरित किया गया था। नीलामी में अनसोल्ड रहने के बाद, उन्हें सरफराज खान द्वारा चोटिल होने के बाद रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर द्वारा लिया गया था।<ref>[http://www.espncricinfo.com/indian-premier-league-2017/content/story/1093552.html RCB replace injured Sarfaraz with Harpreet Singh]</ref>
वह मध्य प्रदेश के लिए 2017-18 में रणजी ट्रॉफी में सात मैचों में 629 रन बनाने वाले प्रमुख रन-स्कोरर थे।<ref name="Ranji1718">{{cite news |url=http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/averages/batting_bowling_by_team.html?id=12014;team=1992;type=tournament |title=Madhya Pradesh Trophy, 2017/18: Baroda batting and bowling averages |publisher=ESPN Cricinfo |access-date=3 April 2018}}</ref> वह 2018-19 में विजय हजारे ट्रॉफी में मध्य प्रदेश के लिए अग्रणी रन स्कोरर भी थे, पांच मैचों में 271 रन बनाए।<ref>{{cite web|url=http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/averages/batting_bowling_by_team.html?id=11523;team=1992;type=tournament |title=Vijay Hazare Trophy, 2016/17 - Madhya Pradesh: Batting and bowling averages |work=ESPN Cricinfo |access-date=9 October 2018}}</ref>
2018-19 के रणजी ट्रॉफी के बाद, उन्होंने मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ स्थानांतरित कर दिया।<ref>{{Cite web|url=http://www.espncricinfo.com/story/_/id/25132728/list-domestic-transfers-ahead-2018-19-ranji-trophy-season |title=List of domestic transfers ahead of the 2018-19 Ranji Trophy season |work=ESPN Cricinfo |access-date=31 October 2018}}</ref> वह टूर्नामेंट में छत्तीसगढ़ के लिए अग्रणी रन स्कोरर थे, जिसमें आठ मैचों में 627 रन थे।<ref>{{cite web|url=http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/averages/batting_bowling_by_team.html?id=12592;team=4625;type=tournament |title=Ranji Trophy, 2018/19 - Chhattisgarh: Batting and bowling averages |work=ESPN Cricinfo |access-date=10 January 2019}}</ref>
अगस्त 2019 में, उन्हें 2019-20 दलीप ट्रॉफी के लिए इंडिया रेड टीम के टीम में रखा गया था।<ref>{{cite news |url=https://www.espncricinfo.com/story/_/id/27331972/shubman-gill-priyank-panchal-faiz-fazal-lead-duleep-trophy-sides |title=Shubman Gill, Priyank Panchal and Faiz Fazal to lead Duleep Trophy sides |work=ESPN Cricinfo |access-date=6 August 2019}}</ref><ref>{{cite news |url=https://www.cricketcountry.com/news/duleep-trophy-2019-shubman-gill-faiz-fazal-and-priyank-panchal-to-lead-duleep-trophy-2019-squad-fixtures-schedule-876560 |title=Duleep Trophy 2019: Shubman Gill, Faiz Fazal and Priyank Panchal to lead as Indian domestic cricket season opens |work=Cricket Country |access-date=6 August 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190806083650/https://www.cricketcountry.com/news/duleep-trophy-2019-shubman-gill-faiz-fazal-and-priyank-panchal-to-lead-duleep-trophy-2019-squad-fixtures-schedule-876560 |archive-date=6 अगस्त 2019 |url-status=dead}}</ref>
==सन्दर्भ==
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स्नेल पटेल
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'''स्नेल पटेल''' (जन्म 15 अक्टूबर 1993) एक भारतीय क्रिकेटर हैं।<ref name="Bio">{{Cite web|url=http://www.espncricinfo.com/ci/content/player/826867.html |title=Snell Patel |accessdate=24 November 2015 |work=ESPN Cricinfo}}</ref> उन्होंने 2014-15 में रणजी ट्रॉफी में 6 फरवरी 2015 को सौराष्ट्र के लिए प्रथम श्रेणी में पदार्पण किया।<ref name="FC">{{Cite web|url=http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/775849.html |title=Ranji Trophy, Group B: Odisha v Saurashtra at Cuttack, Feb 6-9, 2015 |accessdate=24 November 2016 |work=ESPN Cricinfo}}</ref> उन्होंने 28 फरवरी 2017 को विजय हजारे ट्रॉफी 2016-17 में सौराष्ट्र के लिए अपनी लिस्ट ए की शुरुआत की।<ref name="LA">{{Cite web|url=http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1053777.html |title=Vijay Hazare Trophy, Group D: Karnataka v Saurashtra at Kolkata, Feb 28, 2017 |accessdate=26 February 2017 |work=ESPN Cricinfo}}</ref>
अगस्त 2019 में, उन्हें 2019-20 दलीप ट्रॉफी के लिए इंडिया ब्लू टीम के टीम में रखा गया था।<ref>{{cite news |url=https://www.espncricinfo.com/story/_/id/27331972/shubman-gill-priyank-panchal-faiz-fazal-lead-duleep-trophy-sides |title=Shubman Gill, Priyank Panchal and Faiz Fazal to lead Duleep Trophy sides |work=ESPN Cricinfo |accessdate=6 August 2019}}</ref><ref>{{cite news |url=https://www.cricketcountry.com/news/duleep-trophy-2019-shubman-gill-faiz-fazal-and-priyank-panchal-to-lead-duleep-trophy-2019-squad-fixtures-schedule-876560 |title=Duleep Trophy 2019: Shubman Gill, Faiz Fazal and Priyank Panchal to lead as Indian domestic cricket season opens |work=Cricket Country |accessdate=6 August 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190806083650/https://www.cricketcountry.com/news/duleep-trophy-2019-shubman-gill-faiz-fazal-and-priyank-panchal-to-lead-duleep-trophy-2019-squad-fixtures-schedule-876560 |archive-date=6 अगस्त 2019 |url-status=dead}}</ref>
==सन्दर्भ==
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हाइना (वंश)
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{{Taxobox
| name = हाइना<br /><small>Hyaena</small>
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}}
'''हाइना''' (Hyaena) [[लकड़बग्घे]] का एक [[जीववैज्ञानिक वंश]] है, जिसकी दो सदस्य [[जीववैज्ञानिक जाति|जातियाँ]] अस्तित्व में हैं - [[धारीदार लकड़बग्घा]] और [[भूरा लकड़बग्घा]]।<ref>{{cite journal|last1=Williams|first1=Samual T.|last2=Williams|first2=Kathryn S.|last3=Joubert|first3=Christoffel J.|last4=Hill|first4=Russell A.|title=The impact of land reform on the status of large carnivores in Zimbabwe|journal=PeerJ|date=14 January 2016|volume=4|pages=e1537| doi=10.7717/peerj.1537| pmid=26819838| pmc=4728035}}</ref><ref name="macdonald">''Chapter 4: Rich Man's Table'' from David MacDonald’s ''The Velvet Claw'' BBC books, 1992</ref><ref>{{Cite web |url=http://www.science.smith.edu/departments/Biology/VHAYSSEN/msi/pdf/i0076-3519-150-01-0001.pdf |title=Rieger, Ingo (1981) ''Hyaena hyaena'', Mammalian Species, No. 150, pp.1–5, 3 figs. American Society of Mammalogists |access-date=23 जुलाई 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20210830231337/https://www.science.smith.edu/departments/Biology/VHAYSSEN/msi/pdf/i0076-3519-150-01-0001.pdf |archive-date=30 अगस्त 2021 |url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite book |last1=Mills|first1=G. |last2=Hofer|first2=H. |chapter=Striped hyaena: country accounts |pages=68–71 |chapter-url=https://portals.iucn.org/library/sites/library/files/documents/1998-013.pdf#page=76 |title=Hyaenas: status survey and conservation action plan |publisher=IUCN/SSC Hyena Specialist Group |location=Gland |year=1998 |isbn=2-8317-0442-1}}</ref>
== अस्तित्ववान जातियाँ ==
{| class="wikitable"
|-
! छवि !! वैज्ञानिक नाम !! साधारण नाम !! विस्तार
|-
|[[File:Полосатая гиена 4.jpg|120px]] || ''Hyaena hyaena'' || [[धारीदार लकड़बग्घा]]<br><small>Striped hyena</small> || [[उत्तर अफ्रीका]], [[पूर्व अफ्रीका]], [[मध्य एशिया]], [[भारत]], [[पश्चिमी एशिया]]
|-
|[[File:Parahyaena brunnea 3.jpg|120px]] || ''Hyaena brunnea'' || [[भूरा लकड़बग्घा]]<br><small>Brown hyena</small> || [[दक्षिणी अफ्रीका]]
|-
|}
== इन्हें भी देखें ==
* [[लकड़बग्घा]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:लकड़बग्घे]]
[[श्रेणी:स्तनधारी वंश]]
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अफ़ग़ानिस्तान का दूतावास, नई दिल्ली
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{{Infobox diplomatic mission|name=अफ़ग़ानिस्तान का दूतावास, नई दिल्ली<BR><BR><small> ([[पश्तो]]: د افغانستان اسلامي جمهوریت لوی سفارت په نوي ډهلې کې)<BR><BR> ([[:en:Persian language|दारी]]: سفارت کبرای جمهوری اسلامی افغانستان در دهلی نو) </small>|image=Afghan_embassy_Delhi_1069.JPG|address=फ़्लैट संख्या 5, ब्लॉक 50F, [[शांतिपथ]], [[चाणक्यपुरी]], [[नई दिल्ली]] 110021, [[भारत]]|location=[[नई दिल्ली]]|coordinates={{coord|28|35|30|N|77|11|11|E|type:landmark|display=inline,title}}|ambassador=नूर अहमद नूर (तालिबान द्वारा नियुक्त)}}
नई दिल्ली में अफगानिस्तान इस्लामी गणराज्य का दूतावास (पश्तो: د افغانستان اسلامي جمهوریت لوی سفارت په نوې لي کې) (दारी: سفارت کبرای جمهوری اسلان اسلان اسلانت اسلان تان اسلانت اانستان اسلامي) चांसरी नई दिल्ली के चाणक्यपुरी में 5/50F शांतिपथ पर स्थित है। नई दिल्ली में दूतावास के अलावा, अफगानिस्तान में मुंबई और हैदराबाद में एक वाणिज्य दूतावास भी है। अफगानिस्तान की सरकार के तख्तापलट के बाद तालिबान ने मुफ्ति नूर अहमद को भारत में राजदूत नियुक्त किया गया लेकिन भारत ने तालिबान को मान्यता नहीं दी है<ref>[http://www.embassypages.com/missions/embassy4492/], "Embassy Pages". Retrieved on May 1, 2015</ref><ref>{{cite web|url=http://afghanembassy.in/em/index.php?option=com_contact&view=contact&id=1&Itemid=82|title=Embassy of the Islamic Republic of Afghanistan in New Delhi|publisher=Embassy of the Islamic Republic of Afghanistan in India|accessdate=2009-11-03|archive-date=18 अप्रैल 2010|archive-url=https://web.archive.org/web/20100418063307/http://www.afghanembassy.in/em/index.php?option=com_contact&view=contact&id=1&Itemid=82|url-status=dead}}</ref><ref>[https://twitter.com/farid mamundzay/status/1214815061375537152], Farid Mamundzay. Retrieved on January 8, 2020</ref>
== राजदूत ==
[[चित्र:Attaullah_Nasser_Zia.jpg|अंगूठाकार|अताउल्लाह नासिर ज़िया]]
=== अफगानिस्तान का साम्राज्य (1926–1973) ===
* १९५४ से १९५८; सरदार नजीबुल्लाह, सरदार नजीबुल्लाह खान, पाकिस्तान में महामहिम अफगानिस्तान के राजा के विशेष प्रतिनिधि, 3 दिसंबर 1947 को अपना परिचय पत्र प्रस्तुत करते हुए
*06/04/1954 (या 1958?); सरदार-ए-आला अब्दुल हुसैन अज़ीज़ी
* 14/03/1957 (या 1958? <ref>{{Cite web |url=http://pahar.in/mountains/Books%20and%20Articles/Afghanistan/1979%20First%20Supplement%20to%20the%20Who%27s%20Who%20of%20Afghanistan%20by%20Adamec%20s.pdf |title=Who's Who of Afghanistan 1979 |access-date=25 जुलाई 2021 |archive-date=4 मार्च 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20210304032859/http://pahar.in/mountains/Books%20and%20Articles/Afghanistan/1979%20First%20Supplement%20to%20the%20Who%27s%20Who%20of%20Afghanistan%20by%20Adamec%20s.pdf |url-status=dead }}</ref>) से? (12 वर्ष?); सरदार-ए-आला जनरल मोहम्मद उमरी 16. फरवरी 1965 से 14. जनवरी 1966
* 05/12/1964 (या 16/03/1965) से 14/01/1966 (2 वर्ष); मोहम्मद कबीर लुडिन (जन्म १९०७; मृत्यु १४ जनवरी १९६६ को नई दिल्ली में) १९५४ में न्यूयॉर्क शहर में संयुक्त राष्ट्र-मुख्यालय में राजदूत थे और वाशिंगटन, डीसी ने ५ दिसंबर १९५७ को लंदन में और १६ फरवरी, १९६५ को नई दिल्ली में परिचय पत्र प्रस्तुत किया। अपने राजदूत कार्यों से पहले, लुडिन लोक निर्माण मंत्री थे।
* 1966 से? (3 वर्ष); अताउल्लाह नासिर ज़िया
* 1968 <ref>{{Cite web |url=http://pahar.in/mountains/Books%20and%20Articles/Afghanistan/1979%20First%20Supplement%20to%20the%20Who%27s%20Who%20of%20Afghanistan%20by%20Adamec%20s.pdf |title=Who's Who of Afghanistan 1979 |access-date=25 जुलाई 2021 |archive-date=4 मार्च 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20210304032859/http://pahar.in/mountains/Books%20and%20Articles/Afghanistan/1979%20First%20Supplement%20to%20the%20Who%27s%20Who%20of%20Afghanistan%20by%20Adamec%20s.pdf |url-status=dead }}</ref> से?; डॉ. अनास
* ? से? (3 वर्ष) एच.इ. श्री अब्दुल समदी
* 19/09/1970 से? (4 वर्ष);अब्दुल हकीम तबीबी को 29 जुलाई 1980 को नामित किया गया, वह न्यूयॉर्क शहर में संयुक्त राष्ट्र में राजदूत थे।
=== अफगानिस्तान गणराज्य (1973-1978) ===
* 16/11/1973 से? (3 वर्ष?); अब्दुल रहमान पज़वाकी
* 1973 से? (1 वर्ष); डॉ. अब्दुल ज़हीर, अफ़गान नेशनल असेंबली के अध्यक्ष डॉ. अब्दुल ज़हीर के नेतृत्व में एक अफगान संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य, प्रधान मंत्री, श्री जवाहरलाल नेहरू के साथ, जब उन्होंने १६ दिसंबर को नई दिल्ली में उनसे मुलाकात की।
* 1976; हमीदुल्लाह इनायत सेराज; 1974: सेंट जेम्स के न्यायालय में राजदूत
=== अफ़ग़ानिस्तान लोकतांत्रिक गणराज्य (1978-1992) ===
* 01/09/1978 से? (1.5 वर्ष?); पाचा गुल वफ़ादार, उन्होंने 1 सितंबर को नई दिल्ली में राष्ट्रपति, श्री एन. संजीव रेड्डी को अपना साख पत्र प्रस्तुत किया।
* 1981 से <ref>[https://www.upi.com/Archives/1981/03/31/Afghan-envoy-attacks-US-aid-to-defectors/2999354862800/ Afghan envoy attacks U.S. aid to defectors]</ref> तक ???? (7 वर्ष); डॉ. मोहम्मद हसन शर्की
*12/11/1986 से ??/08/1989 (? वर्ष); अब्दुल समद अज़हरी
*11/10/1989 से? (4 वर्ष); वज़ीर अहमद फैज़िक
* अप्रिल 1991<ref>[http://www.upi.com/Archives/1991/04/02/Afghan-official-claims-Pakistan-led-Khost-attack/2143670568400/ Afghan official claims Pakistan led Khost attack]</ref> से 17/04/1992; अहमद सरवर <ref>[http://www.apnewsarchive.com/1992/Najibullah-s-Family-in-India-Government-Says/id-1e4543883ad2ac099ca177537d32a5fd NAJIBULLAH'S FAMILY IN INDIA, GOVERNMENT SAYS]</ref>
=== अफगानिस्तान का इस्लामी राज्य (1992-2002) ===
* ? to? (3 वर्ष); एहसन जान आरिफ़
* 29/02/1996 से 27/11/2005; मसूद खलीली
=== अफगानिस्तान का इस्लामी गणराज्य (2004-वर्तमान) ===
* 13/11/2006 <ref>[http://pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=21989 Envoys present credentials to President]</ref> to 15/01/2010; सईद मखदूम रहीन
* 30/06/2010 <ref>[http://pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=62916 Envoys of Seven Nations Present Credentials to President of India]</ref> to 28/05/2012; डॉ. नांगुयालाई तार्ज़ि
* 13/07/2012 to 19/09/2018; शैदा मोहम्मद अब्दालीक
* 18/03/2021 से अबतक; फरीद ममुंडदज्य <ref>[https://www.republicworld.com/world-news/rest-of-the-world-news/president-kovind-accepts-credentials-of-new-afghan-ambassador-to-india-hails-close-ties.html]</ref>
== यह भी देखें ==
* [[भारत–अफ़ग़ानिस्तान संबंध]]
* [[भारत के विदेश संबंध]]
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://newdelhi.mfa.af Embassy of Afghanistan in New Delhi] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20210620043620/https://www.newdelhi.mfa.af/ |date=20 जून 2021 }}
{{भारत में राजनयिक मिशन}}
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[[श्रेणी:नई दिल्ली में राजनयिक मिशन]]
[[श्रेणी:अफ़ग़ानिस्तान के राजनयिक मिशन]]
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{{Infobox military conflict
| partof = [[अफगानिस्तान में युद्ध (2001-वर्तमान)|अफगानिस्तान में युद्ध]] अफगानिस्तान में युद्ध और [[तालिबान विद्रोह]]
| image = 2021 Taliban Offensive.png
| image_size = 300px
| caption = तालिबान को आक्रामक दिखाते हुए अफगानिस्तान का नक्शा (7 अगस्त 2021)
| date = 1 मई 2021 – 15 अगस्त 2021<br />({{age in years, months, weeks and days|month1=5|day1=1|year1=2021|month2=8|day2=15|year2=2021}})
| place = अफ़ग़ानिस्तान
| territory = तालिबान ने 148 जिलों पर कब्जा कर लिया, जिससे अफगानिस्तान में उसके नियंत्रण वाले जिलों की संख्या 224 हो गई<ref name="jul15">{{cite news |last1=Roggio |first1=Bill |title=Nearly half of Afghanistan's provincial capitals under threat from Taliban |url=https://www.longwarjournal.org/archives/2021/07/nearly-half-of-afghanistans-provincial-capitals-under-threat-from-taliban.php |access-date=16 July 2021 |publisher=FDD's Long War Journal |date=15 July 2021}}</ref><ref>{{cite news |last1=Roggio |first1=Bill |title=Mapping Taliban Contested and Controlled Districts in Afghanistan |url=https://www.longwarjournal.org/mapping-taliban-control-in-afghanistan |access-date=26 July 2021 |publisher=FDD's Long War Journal |date=25 July 2021}}</ref>
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| combatant1 = {{flagicon|Afghanistan|Taliban}} [[तालिबान आन्दोलन]]
*[[हक्कानी नेटवर्क]]<ref name="haqqani">{{cite news |url=https://www.longwarjournal.org/archives/2021/06/talibans-deputy-emir-issues-guidance-for-governance-in-newly-seized-territory.php |title=Taliban's deputy emir issues guidance for governance in newly seized territory |first=Thomas |last=Joscelyn |work=[[FDD's Long War Journal]] |date=25 June 2021 |access-date=19 July 2021 }}</ref><ref>{{cite news |url=https://www.longwarjournal.org/archives/2021/06/u-n-report-cites-new-intelligence-on-haqqanis-close-ties-to-al-qaeda.php |title=U.N. report cites new intelligence on Haqqanis' close ties to al Qaeda |first=Thomas |last=Joscelyn |work=[[FDD's Long War Journal]] |date=7 June 2021 |access-date=19 July 2021 }}</ref>
{{flagicon image|Flag of Jihad.svg}} [[अल-क़ायदा]]<ref name="advances">{{cite news |url=https://www.longwarjournal.org/archives/2021/07/taliban-advances-as-u-s-completes-withdrawal.php |title=Taliban advances as U.S. completes withdrawal |first=Bill |last=Roggio |work=[[FDD's Long War Journal]] |date=12 July 2021 |access-date=16 July 2021 }}</ref><br/>'''द्वारा समर्थित:'''<br/>{{flagicon image|Flag of Tehrik-i-Taliban.svg}} [[तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान]] (टीटीपी)<ref name="advances" /><ref>{{cite news |url=https://in.news.yahoo.com/insurgent-groups-against-pakistan-china-120027716.html |title=Insurgent groups against Pakistan, China step up attacks amid Taliban offensive in Afghanistan: Report |author=K J M Varma |work=Yahoo |quote=During the recent fighting in eastern and southern districts of Afghanistan, the Afghan Taliban has been supported by the TTP insurgents [...] According to a UN monitoring report in June, some 5,000 TTP militants are currently based in Afghanistan. |date=5 July 2021 |access-date=18 July 2021 }}</ref><br/>{{flagicon image|Flag of Lashkar-e-Taiba.svg}} [[लश्कर-ए-तैयबा]]<ref name="advances" /><br/>{{flagicon image|Jaishi-e-Mohammed.svg}} [[जैश-ए-मोहम्मद]]<ref name="advances" /><br/>{{flagicon image|Flag of Harkat-ul-Mujahideen.svg}} [[हरकत-उल-मुजाहिदीन]]<ref name="advances" />
| combatant2 = {{flag|अफ़ग़ानिस्तान}}<br/>{{flag|संयुक्त राज्य अमेरिका}}<ref>{{cite news |last1=Seldin |first1=Jeff |title=US Airstrikes Target Taliban as Fighting Intensifies |url=https://www.voanews.com/south-central-asia/us-airstrikes-target-taliban-fighting-intensifies |access-date=9 July 2021 |publisher=Voice of America |date=5 May 2021}}</ref><ref>{{cite news |title=US air force targets Taliban position in northern Afghanistan, media reports |url=http://www.afghanistantimes.af/us-air-force-targets-taliban-position-in-northern-afghanistan-media-reports/ |access-date=9 July 2021 |publisher=Afghanistan Times |date=26 June 2021}}</ref>
| commander1 = {{flagicon|Afghanistan|Taliban}} '''[[हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा]]'''<br/>{{flagicon|Afghanistan|Taliban}} [[अब्दुल गनी बरादरी]]<br/>{{flagicon|Afghanistan|Taliban}} [[सिराजुद्दीन हक्कानी]]<ref name="haqqani"/><br/>{{flagicon|Afghanistan|Taliban}} [[मोहम्मद याकूब]]
| commander2 = {{flagicon|Afghanistan}} '''[[अशरफ़ ग़नी अहमदज़ई]]'''<br/>{{flagicon|Afghanistan}} [[अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह]]<br/>{{flagicon|Afghanistan}} [[बिस्मिल्लाह खान मोहम्मदी]]<ref name="martyrdom unit">{{cite news |last=Joscelyn |first=Thomas |title=Taliban 'martyrdom' unit attacks Afghan defense minister's home in Kabul |url=https://www.longwarjournal.org/archives/2021/08/taliban-martyrdom-unit-attacks-afghan-defense-ministers-home-in-kabul.php |access-date=4 August 2021 |publisher=FDD's Long War Journal |date=5 August 2021}}</ref><br/>{{flagicon|Afghanistan}} [[अहमद मसूदी]]<ref name="pbs">{{cite web |title=Afghan militias forced to fight Taliban blame America's 'abandonment' |url=https://www.pbs.org/newshour/show/afghan-militias-forced-to-fight-taliban-blame-americas-abandonment |website=PBS |access-date=26 July 2021 |language=English |date=7 July 2021}}</ref><br>{{flagicon|US}} '''[[जो बाइडन]]'''<br>{{flagicon|US}} जनरल [[मार्क मिले]]<br>{{flagicon|US}} जनरल [[केनेथ एफ मैकेंजी जूनियर|केनेथ मैकेंज़ी]]<ref name="Airstrikes-1">{{cite web |last1=Horton |first1=Alex |title=U.S. prepared to continue airstrikes against Taliban, top commander says |url=https://www.washingtonpost.com/world/2021/07/25/us-airstrikes-afghanistan-taliban-mckenzie/ |website=Washington Post |access-date=8 August 2021 |date=25 July 2021}}</ref>
| units1 = तालिबानी ताकतें
*[[लाल समूह|लाल इकाई]]
*शहीद बटालियन<ref name="martyrdom unit" />
*बद्री 313 बटालियन<ref>{{Cite web|url=https://ent.siteintelgroup.com/Multimedia/afghan-taliban-documents-training-graduation-of-313-badri-battalion-fighters.html|title=Afghan Taliban Documents Training, Graduation of "313 Badri Battalion" Fighters|access-date=2021-07-28|language=en|archive-date=6 अगस्त 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210806072949/https://ent.siteintelgroup.com/Multimedia/afghan-taliban-documents-training-graduation-of-313-badri-battalion-fighters.html|url-status=dead}}{{Cite web|url=https://www.moderatethoughts.com/taliban-badri-313-battalion/|title=Taliban Badri 313 Battalion|date=29 July 2021|access-date=29 July 2021|language=English|archive-date=2 अगस्त 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210802095449/https://www.moderatethoughts.com/taliban-badri-313-battalion/|url-status=dead}}</ref>
*दोषपूर्ण स्थानीय सेना<ref name="Esfandiari-Ahmadi">{{cite web |last1=Esfandiari |first1=Golnaz |last2=Ahmadi |first2=Mumin |title=Fighting The Taliban Was 'Suicide': Hundreds Of Afghan Soldiers Escape To Tajikistan |url=https://www.rferl.org/a/afghanistan-soldiers-taliban-tajikistan/31350957.html |website=Radio Free Europe/Radio Liberty |access-date=26 July 2021 |language=English |date=9 July 2021}}</ref>
अन्य उग्रवादी समूह
*[[भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा]] (एक्यूआईएस)<ref>[https://timesofindia.indiatimes.com/world/why-india-must-both-engage-the-taliban-and-contend-with-it/articleshow/83781325.cms Why India must both engage the Taliban and contend with it]</ref>
| units2 = [[अफगान राष्ट्रीय सुरक्षा बल|अफगान सुरक्षा बल]]
*[[अफगान राष्ट्रीय सेना]]
**[[अफगान राष्ट्रीय सेना कमांडो कोर|कमांडो]]
*[[अफगान राष्ट्रीय पुलिस]]
*[[अफगान वायु सेना]]<ref>{{cite web|title=Afghan Air Force Hurt by Inoperable Aircraft - Afghan Lawmakers|url=https://www.usnews.com/news/world/articles/2021-07-23/afghan-air-force-hurt-by-inoperable-aircraft-afghan-lawmakers|website=Washington Post|date=23 July 2021}}</ref><ref name="reuters_mi17">{{cite web|url=https://www.reuters.com/world/asia-pacific/afghan-pilots-assassinated-by-taliban-us-withdraws-2021-07-09/|title=Special Report: Afghan pilots assassinated by Taliban as U.S. withdraws|website=Reuters|date=9 July 2021|access-date=12 July 2021}}</ref>
समर्थक सरकार सेना<ref name="pbs" /><ref>{{cite web|url=https://foreignpolicy.com/2021/07/01/afghanistan-militias-taliban-front-lines/|title=With the Militias in Afghanistan|first=Lynne|last=O’Donnell|date=1 July 2021|access-date=29 July 2021|work=[[Foreign Policy]]|publisher=[[The Slate Group]]}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.nytimes.com/2021/07/17/world/asia/afghanistan-militias-taliban.html|title=Back to Militias, the Chaotic Afghan Way of War|first1=Thomas|last1=Gibbons-Neff|first2=Najim|last2=Rahim|work=[[New York Times]]|location=[[Mazar-i-Sharif]]|date=17 July 2021|access-date=29 July 2021}}</ref>
*सार्वजनिक विद्रोह बल<ref>{{cite web|url=https://www.aljazeera.com/news/2021/8/3/afghans-chant-allahu-akbar-in-defiant-protests-against-taliban|title=Afghans chant 'Allahu Akbar' in defiant protests against Taliban|access-date=3 August 2021}}{{cite web|url=https://www.thenationalnews.com/world/asia/ordinary-afghans-join-battle-against-taliban-in-people-s-uprising-1.1248278|title=Ordinary Afghans join battle against Taliban in 'people's uprising'|access-date=24 June 2021}}</ref>
[[संयुक्त राज्य वायुसेना]]<ref name="wapo21">{{cite web|title=US launched several airstrikes in support of Afghan forces|url=https://www.washingtonpost.com/politics/us-launched-several-airstrikes-in-support-of-afghan-forces/2021/07/22/05b1b734-eb11-11eb-a2ba-3be31d349258_story.html|website=Washington Post|date=22 July 2021|access-date=9 August 2021|archive-date=12 August 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210812162124/https://www.washingtonpost.com/|url-status=dead}}</ref>
[[संयुक्त राज्य नौसेना]]
*[[यूएसएस रोनाल्ड रीगन]]<ref>{{cite web |last1=Evans |first1=Michael |last2=Tomlinson |first2=Hugh |title=US abandoning Afghanistan to civil war, says General David Petraeus |url=https://www.thetimes.co.uk/article/us-abandoning-afghanistan-to-civil-war-says-general-david-petraeus-00ftvwpt3 |website=The Times |quote=America has been launching airstrikes in support of Afghan forces, using armed Reaper drones that take up to eight hours to reach a target from their base in the Gulf as well as fighter aircraft from Qatar and the United Arab Emirates, and from the carrier USS Ronald Reagan, |access-date=8 August 2021 |date=2 August 2021}}</ref>
| strength1 =
| strength2 =
| casualties1 = {{flagicon|Afghanistan|Taliban}} '''तालिबान'''<br>9,819+ मारे गए<ref name="cast">{{cite web |title=Press Release |url=https://mod.gov.af/en/press-release |website=Afghan Ministry of Defense |publisher=Afghan Ministry of Defense |access-date=9 July 2021 |archive-date=11 जून 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20210611055159/https://mod.gov.af/en/press-release |url-status=dead }}</ref> (अफगान सरकार का दावा)
{{Collapsible list
| framestyle = border:none; padding:0;
| title = '''उपकरण:'''
| 1 = अज्ञात संख्या में तोपखाने की तोपें और सैन्य वाहन नष्ट<ref name="Airstrikes-1"/>
}}
| casualties2 = {{flagicon|Afghanistan}} '''अफ़ग़ानिस्तान'''<br>1,537 मारे गए<ref name="caslist">{{cite news|last1=Faizi|first1=Fatima|last2=Abed|first2=Fahim|last3=Rahim|first3=Najim |title=Afghan War Casualty Report: May 2021|url=https://www.nytimes.com/2021/05/06/world/asia/afghan-war-casualty-report-may-2021.html |access-date=9 July 2021 |work=The New York Times |date=3 June 2021}}{{cite news |last1=Faizi |first1=Fatima |last2=Rahim |first2=Najim |title=Afghan War Casualty Report: June 2021|url=https://www.nytimes.com/2021/06/03/world/asia/afghan-war-casualty-report-june-2021.html |access-date=9 July 2021 |work=The New York Times |date=1 July 2021}}{{cite news |last1=Faizi |first1=Fatima |last2=Timory |first2=Asadullah |title=Afghan War Casualty Report: July 2021|url=https://www.nytimes.com/2021/07/08/world/asia/afghan-war-casualty-report-july-2021.html |access-date=5 August 2021 |work=The New York Times|date=15 July 2021}}{{cite news |last1=Faizi |first1=Fatima |title=Afghan War Casualty Report: August 2021 |url=https://www.nytimes.com/2021/08/05/world/asia/afghanistan-casualty-report-august.html |access-date=6 August 2021 |work=The New York Times |date=5 August 2021}}</ref><br>1,581+ [[रेगिस्तान | सुनसान]]<ref name="desert">{{cite news |title=Some 1,500 Afghan soldiers crossed into Tajikistan over past 2 weeks - Tajik rep to CSTO |url=https://interfax.com/newsroom/top-stories/72202/ |access-date=9 July 2021 |publisher=Interfax |date=7 July 2021}}{{cite web |title=Another group of Afghan military personnel given refuge by Army: ISPR |url=https://tribune.com.pk/story/2312190/another-group-of-afghan-military-personnel-given-refuge-by-army-ispr |website=Express Tribune |access-date=26 July 2021 |language=English |date=26 July 2021}}{{cite news|title=Taliban take key border crossing with Iran as group claims to control 85% of Afghanistan's territory|url=https://www.telegraph.co.uk/world-news/2021/07/09/taliban-take-key-border-crossing-iranas-group-claims-control/|newspaper=The Telegraph|date=9 July 2021|last1=Farmer|first1=Ben}}</ref><br>सैकड़ों सैनिकों ने किया आत्मसमर्पण<ref>{{cite web|last1=Schmitt|first1=Eric|title=U.S. military official says a 'complete Taliban takeover' is possible in Afghanistan.|url=https://www.nytimes.com/2021/07/21/us/politics/afghanistan-taliban.html|website=New York Times|date=21 July 2021|quote=In response to the Taliban offensives, hundreds of Afghan troops have surrendered, giving up their U.S.-supplied equipment and fleeing, sometimes into neighboring countries. Afghan government counterattacks have had limited success.}}{{cite news|url=https://www.economist.com/asia/2021/07/08/america-leaves-afghanistan-on-the-brink-of-collapse|title=America leaves Afghanistan on the brink of collapse|newspaper=The Economist|quote=Many districts are being taken not by force, but are simply handed over. Soldiers and policemen have surrendered in droves, leaving piles of American-purchased arms and ammunition and fleets of vehicles.|date=8 July 2021|access-date=11 July 2021}}{{cite web|last1=Zucchino|first1=David|last2=Rahim|first2=Najim|url=https://www.nytimes.com/2021/05/27/world/asia/afghan-surrender-taliban.html|title=A Wave of Afghan Surrenders to the Taliban Picks Up Speed|website=New York Times|date=27 May 2021|access-date=11 July 2021}}</ref>
{{Collapsible list
| framestyle = border:none; padding:0;
| title = '''उपकरण:'''
| 1 = 1 मिल एमआई-17 को मार गिराया<ref name="reuters_mi17"/>
| 2 = 1 UH-60 ब्लैक हॉक क्षतिग्रस्त<ref name="nyt_BH">{{cite web|last1=Gibbons-Neff|first1=Thomas|last2=Cooper|first2=Helene|last3=Schmitt|first3=Eric|url=https://www.nytimes.com/2021/06/19/world/asia/Afghanistan-withdrawal-contractors.html|title=Departure of U.S. contractors poses myriad problems for Afghan military|website=New York Times|date=19 June 2021|access-date=12 July 2021}}</ref>
| 3 = तालिबान ने कम से कम 700 ट्रक और हुमवे को पकड़ा है
| 4 = तालिबान द्वारा कब्जा किए गए कम से कम 17 डी -30 हॉवित्जर और कई मोर्टार
| 5 = तालिबान द्वारा नष्ट किए गए कम से कम 65 सैन्य वाहन
| 6 = 2 टी-54/टी-62 टैंकों पर तालिबान का कब्जा<ref name="statista21">{{cite web|last1=McCarthy|first1=Naill|title=The Afghan Military's Catastrophic Equipment Losses|url=https://www.statista.com/chart/25246/afghan-military-vehicles-equipment-items-destroyed-captured-by-the-taliban/|website=Statista|date=6 July 2021}}</ref>
| 7 = तालिबान द्वारा कब्जा की गई 3 विमान भेदी बंदूकें<ref name="statista21"/>
}}
| casualties3 = 1,031 [[नागरिकता]] मारे गए<ref name="casun">{{cite news |last1=Graham-Harrison |first1=Emma |title=Afghanistan civilian casualty figures at record high, UN says |url=https://www.theguardian.com/world/2021/jul/26/afghanistan-civilian-casualty-figures-at-record-high-un-says |access-date=26 July 2021 |work=The Guardian |date=26 July 2021}}</ref><ref name="caslist"/><br />1,609 नागरिक घायल<ref name="casun"/><br />
| campaignbox = {{Campaignbox Afghan War}}
}}
तालिबान और अल-कायदा सहित संबद्ध सैन्य समूहों द्वारा अफगानिस्तान<ref name="advances" /> और उसके सहयोगियों के खिलाफ एक मौजूदा सैन्य आक्रमण 1 मई 2021 को शुरू हुआ।<ref>{{cite news |title=Taliban launches major Afghan offensive after deadline for U.S. pullout |url=https://www.reuters.com/world/asia-pacific/taliban-launches-huge-afghan-offensive-after-deadline-us-pullout-2021-05-04/ |access-date=7 August 2021 |publisher=Reuters |date=4 May 2021}}{{cite news |last1=De Luce |first1=Dan |last2=Yusufzai |first2=Mushtaq |last3=Smith |first3=Saphora |title=Even the Taliban are surprised at how fast they're advancing in Afghanistan |url=https://www.nbcnews.com/politics/national-security/even-taliban-are-surprised-how-fast-they-re-advancing-afghanistan-n1272236 |access-date=8 July 2021 |publisher=NBC News |date=25 June 2021}}</ref> यह लगभग उसी समय हुआ जब [[अफ़ग़ानिस्तान|अफगानिस्तान]] से अधिकांश अमेरिकी सैनिकों की वापसी हुई थी।
आक्रामक तालिबान के त्वरित क्षेत्रीय लाभ के साथ-साथ इसकी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं के लिए जाना जाता है।<ref>{{cite news |last1=Baker |first1=Rodger |title=Challenging Our Understanding of the Taliban |url=https://worldview.stratfor.com/article/challenging-our-understanding-taliban |access-date=12 August 2021 |publisher=Stratfor |date=9 August 2021 |archive-date=11 August 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20210811143233/https://worldview.stratfor.com/article/challenging-our-understanding-taliban |url-status=live }}</ref>
15 जुलाई तक, अफगानिस्तान के 421 जिलों में से एक तिहाई से अधिक पर तालिबान का नियंत्रण था,<ref>{{cite news |last1=Gannon |first1=Kathy |title=Official: Afghan delegation, Taliban to talk peace in Qatar |url=https://apnews.com/article/middle-east-qatar-taliban-b8e4bb0d99c95299e3ce9b9180ffb9a9 |access-date=15 July 2021 |work=AP News |date=13 July 2021 |language=en}}</ref><ref>{{cite news |title=Afghanistan: Taliban offers ceasefire for return of prisoners |url=https://www.bbc.com/news/world-asia-57848522 |access-date=15 July 2021 |work=BBC News |date=15 July 2021}}</ref> और 21 जुलाई तक, अफगानिस्तान का आधा हिस्सा तालिबान के नियंत्रण में था।
22 जुलाई को, ब्रिटिश विदेश कार्यालय की रिपोर्ट में कहा गया था कि नाटो सैनिकों की वापसी के परिणामस्वरूप अफगान सेना अलग हो सकती है और तालिबान जल्द ही काबुल में सत्ता में लौट सकता है।<ref name=":0">{{Cite news|last=Wintour|first=Patrick|last2=Stewart|first2=Heather|date=1 September 2021|title=Foreign Office report warned in July of rapid Taliban takeover of Afghanistan|language=en|website=[[द गार्डियन]]|url=http://www.theguardian.com/politics/2021/sep/01/dominic-raab-uk-intelligence-said-kabul-unlikely-to-fall-this-year|url-status=live|access-date=2021-09-02}}</ref> विदेश कार्यालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि काबुल में ब्रिटिश दूतावास को बंद करना पड़ सकता है।<ref name=":0" /> ब्रिटिश विदेश सचिव डॉमिनिक रैब का मानना था कि काबुल पूरे 2021 के लिए सुरक्षित रहेगा।<ref name=":0" />
10 अगस्त को, अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि अफगानिस्तान की राजधानी, काबुल, 30 से 90 दिनों के भीतर तालिबान के हाथों में आ सकती है। 15 अगस्त को, एसोसिएटेड प्रेस ने बताया कि तालिबान पहुंच गया है और काबुल पर कब्जा कर लिया है। इससे इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान की सरकार गिर गई। तालिबान ने कहा कि वे सत्ता के "हस्तांतरण" की प्रतीक्षा कर रहे थे।<ref>{{cite web |last1=Seir |first1=Ahmed |last2=Faiez |first2=Rahim |last3=Akghar |first3=Tameem |last4=Gambrell |first4=John |title=Official: Taliban negotiators head to presidential palace |url=https://apnews.com/article/taliban-e1ed33fe0c665ee67ba132c51b8e32a5 |website=Associated Press |publisher=Associated Press |access-date=15 August 2021 |archive-date=15 August 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20210815031639/https://apnews.com/article/taliban-e1ed33fe0c665ee67ba132c51b8e32a5 |url-status=live }}</ref> 15 अगस्त को, राजधानी पर क़ब्ज़ा करने के बाद, राष्ट्रपति अशरफ़ गनी के देश से भाग जाने के बाद तालिबान ने [[राष्ट्रपति भवन]] पर कब्ज़ा कर लिया।<ref>{{cite web |title=Afghan president says he left country to avoid bloodshed |url=https://www.reuters.com/world/asia-pacific/afghan-president-ghani-says-he-left-country-order-avoid-bloodshed-2021-08-15/ |website=Reuters |access-date=16 August 2021 |language=en |date=15 August 2021}}</ref>
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
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सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र
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Amarpawar43
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|style="vertical-align: middle; padding: 3px;" | चाहर धर्मेंद्र जी,नमस्ते!आपके कार्य प्रशंसनीय है,हिंदी विकिपीडिया की अमूल्य विशेष सेवा के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद <span style="background:Brown;border:1px solid #FF00FF;border-radius:18px;padding:4px">[[User:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:black">Cptabhiimanyuseven</span>]]•[[User talk:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:lightgrey">(@píng mє)</span>]]</span> 09:45, 27 फ़रवरी 2026 (UTC)
|}
== विकिपीडिया:अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस संपादनोत्सव/2026 परिणाम ==
[[File:Main Barnstar.png|right|90 px]] बधाई हो! <span style="font-size:11pt">प्रिय {{PAGENAME}} जी, [[विकिपीडिया:अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस संपादनोत्सव/2026]] में भाग लेकर इसे सफल बनाने तथा सांत्वना पुरस्कार प्राप्त करने के लिए आयोजकों की तरफ से धन्यवाद एवं बधाई। पुरस्कार राशि प्राप्त करने के लिए २५ मार्च २०२६ तक [https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSdAp7lxMY2nSh5wnsTi8SQOA4vu-0DGi2siReQtMcdictAemg/viewform?usp=header पुरस्कार सूचना प्रपत्र] जरूर भरें। पुरस्कार प्राप्त होने की सूचना भी दें। --[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 08:56, 18 मार्च 2026 (UTC)
:प्रिय {{PAGENAME}} जी, [[विकिपीडिया:अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस संपादनोत्सव/2026]] की पुरस्कार राशी अमेजन कूपन के रूप में भेजी जा चुकी है। कृपया अपना ईमेल जाँच लें। कोई समस्या हो तो मुझे सूचित करें -[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 06:28, 9 अप्रैल 2026 (UTC)
== स्वतः परीक्षित/पुनरीक्षित अधिकार प्राप्त होने पर बधाई ==
चाहर धर्मेंद्र जी नमस्ते। [[Special:Redirect/revision/6544330|चर्चा अनुसार]] आपको उक्त अधिकार दिये गये हैं, इसके लिये बधाई। आशा करता हूँ कि आप इसी तरह विकिपीडिया के संवर्धन में अपना मूल्यवान योगदान जारी रखेंगे।
चूँकि इस अधिकार के साथ अब आपको पन्नों के नाम बदलने का अधिकार भी मिल गया है, कुछ बिंदु स्पष्ट कर देना चाहूँगा:
* ख़ुद संशय की स्थिति में हों तो और लोगों की राय (प्रक्रिया अनुसार) लेकर ही स्थानांतरण करें।
* यदि उचित कारण और विश्वसनीय स्रोत से समर्थित स्थानांतरण हो तो बेहिचक इस कार्य को कर सकते हैं।
* हिंदी विकिपीडिया पर कुछ नाम विवादित वर्तनी के कारण भी नहीं किये जाते हैं। इनकी जानकारी प्राप्त करने का प्रयास कीजिएगा।
* पन्ने का नाम बदलना या ऐसी चर्चा का परिणाम घोषित करना केवल प्रबंधकों की जिम्मेदारी नहीं है; ऐसी नाम बदलाव वाली चर्चाओं में (जैसी कि चर्चा में आम सहमति बन चुकी हो) अंतिम निर्णय लेने का अधिकार और जिम्मेदारी अब आपकी भी है।
बहुत-बहुत शुभकामनायें। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 01:55, 27 अप्रैल 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:SM7|SM7]] जी। आपके मार्गदर्शन एवं शुभकामनाओं के लिए हार्दिक धन्यवाद।
:आपके द्वारा बताए गए सभी बिंदुओं को मैं ध्यानपूर्वक समझकर पालन करने का प्रयास करूँगा। विशेष रूप से, संशय की स्थिति में सामुदायिक राय लेना, विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर ही स्थानांतरण करना तथा नामों से संबंधित प्रचलित मानकों की जानकारी रखना—इन सभी बातों का मैं यथासंभव ध्यान रखूँगा।
:आपके विश्वास एवं सहयोग के लिए पुनः धन्यवाद। आशा है कि आपके मार्गदर्शन में मैं विकिपीडिया के संवर्धन में सार्थक योगदान दे सकूँगा। <span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 02:03, 27 अप्रैल 2026 (UTC)
::चाहर धर्मेंद्र जी नमस्ते। बधाई हो! अब आप सामान्य सदस्य नहीं रहे अब आप हिंदी विकिपीडिया पर <code>autopatrolled user</code> बन चुके है। आशा करता हूँ की आप इस अधिकार का उपयोग अच्छे कार्यों और नीतिगत तरीके से ही करेंगे।
:::और हिंदी विकिपीडिया पर अपना योगदान जारी रखते हुए विकिपीडिया को आगे बढ़ने में सहयोग करते रहेंगे। <span style="background:Brown;border:1px solid #FF00FF;border-radius:18px;padding:4px">[[User:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:black">Cptabhiimanyuseven</span>]]•[[User talk:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:lightgrey">(@píng mє)</span>]]</span> 06:47, 28 अप्रैल 2026 (UTC)
:::@[[सदस्य:Cptabhiimanyuseven|Cptabhiimanyuseven]] जी नमस्ते। आपकी शुभकामनाओं एवं प्रोत्साहन के लिए हार्दिक धन्यवाद। यह मेरे लिए अत्यंत प्रेरणादायक है।
:::मैं इस अधिकार का उपयोग विकिपीडिया की नीतियों एवं दिशानिर्देशों के अनुरूप करते हुए सार्थक एवं रचनात्मक योगदान देने का निरंतर प्रयास करूँगा। <span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 07:34, 28 अप्रैल 2026 (UTC)
== साफ़ प्रचार” टैग के बारे में ==
नमस्ते, भाईसाहब । टैग लगाने से पहले लेख [[मुकेश मिश्र]] के संदर्भों को ध्यान से देखिए और पढिए भी। दिए गए स्रोत विषय की जानकारी को सत्यापित करते हैं। यदि भाषा में सुधार की आवश्यकता हो तो उसे ठीक किया जा सकता है, परंतु सीधे “साफ़ प्रचार” कहना उचित नहीं लगता। धन्यवाद। [[सदस्य:Karatebr|Karatebr]] ([[सदस्य वार्ता:Karatebr|वार्ता]]) 18:40, 23 मई 2026 (UTC)
:संदेश के लिए धन्यवाद। हालांकि, [[विकिपीडिया:उल्लेखनीयता]] के अनुसार केवल स्रोतों का मौजूद होना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि यह भी आवश्यक है कि वे स्वतंत्र, विश्वसनीय एवं विषय पर पर्याप्त विस्तार से चर्चा करने वाले हों।
:यदि लेख की भाषा, प्रस्तुति अथवा स्रोतों की प्रकृति प्रचारात्मक प्रतीत होती है, तो उस पर ध्यान दिलाना नीतियों के अनुरूप है। <span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 11:52, 24 मई 2026 (UTC)
::सभी स्तो [[सदस्य:Karatebr|Karatebr]] ([[सदस्य वार्ता:Karatebr|वार्ता]]) 13:23, 24 मई 2026 (UTC)
::धन्यवाद। मैं विकिपीडिया:उल्लेखनीयता की नीति से पूर्णतः सहमत हूँ कि केवल स्रोतों की संख्या पर्याप्त नहीं होती, बल्कि उनका स्वतंत्र, विश्वसनीय और विषय पर पर्याप्त कवरेज देना भी आवश्यक है।
::इसी आधार पर लेख में ऐसे समाचार स्रोत जोड़े गए हैं जो विषय के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान करते हैं तथा स्वतंत्र प्रकाशनों से हैं। यदि लेख की किसी विशेष पंक्ति, भाषा या स्रोत में प्रचारात्मक शैली प्रतीत हो रही हो, तो कृपया उसे इंगित करें ताकि उसे नीति अनुरूप सुधारा जा सके।
::केवल सामान्य रूप से “प्रचार” कहना पर्याप्त नहीं माना जाता, जब तक कि यह स्पष्ट न किया जाए कि कौन-सा भाग विकिपीडिया की तटस्थता या उल्लेखनीयता नीति का उल्लंघन कर रहा है। [[सदस्य:Karatebr|Karatebr]] ([[सदस्य वार्ता:Karatebr|वार्ता]]) 13:26, 24 मई 2026 (UTC)
:::जितनी व्याकुलता आपकी पृष्ठ को हटाने में दिखाई दे रही थी, कृपया उतनी ही गंभीरता और तत्परता उसके संबंध में दिए गए प्रश्नों एवं उत्तरों पर भी रखें। यदि किसी स्रोत, सामग्री अथवा प्रस्तुति पर आपत्ति है तो उसे स्पष्ट रूप से बताना अधिक उचित होगा, ताकि आवश्यक सुधार नीतियों के अनुरूप किए जा सकें।
:::धन्यवाद । [[सदस्य:Karatebr|Karatebr]] ([[सदस्य वार्ता:Karatebr|वार्ता]]) 11:06, 25 मई 2026 (UTC)
::::@[[सदस्य:Karatebr|Karatebr]] जी, मेरा उद्देश्य किसी पृष्ठ को हटाने के प्रति अनावश्यक आग्रह रखना नहीं, बल्कि विकिपीडिया की नीतियों एवं मानकों के अनुरूप सामग्री सुनिश्चित करना है। <span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 12:30, 25 मई 2026 (UTC)
:::::माफ किजीएगा श्रीमान किंतु ऐसा प्रतीत नहीं होता है। क्योंकी जब किसी लेख पर विश्वसनीय स्रोत पुष्टी हेतू दिए गए थ [[सदस्य:Karatebr|Karatebr]] ([[सदस्य वार्ता:Karatebr|वार्ता]]) 17:23, 25 मई 2026 (UTC)
::::::माफ कीजिएगा श्रीमान,@[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]] किंतु ऐसा प्रतीत नहीं होता है, क्योंकि लेख में जोड़े गए स्वतंत्र एवं विश्वसनीय स्रोतों की पर्याप्त समीक्षा किए बिना ही उसे प्रचारात्मक अथवा गैर-उल्लेखनीय माना गया । यदि किसी विशेष स्रोत, भाषा अथवा प्रस्तुति पर आपको आपत्ति प्रतीत होती , तो कृपया आप उसे स्पष्ट करते, ताकि आवश्यक सुधार नीतियों के अनुरूप किया जाता।
::::::धन्यवाद [[सदस्य:Karatebr|Karatebr]] ([[सदस्य वार्ता:Karatebr|वार्ता]]) 17:25, 25 मई 2026 (UTC)
:::::::लेख में समाचार स्रोत जोड़े जाने दे बाद भी आप लेख को संदिग्ध बता देते हैं। ऐसा क्यो? [[सदस्य:Birdfeatures|Birdfeatures]] ([[सदस्य वार्ता:Birdfeatures|वार्ता]]) 11:44, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
== पृष्ठ हटाना ==
चाहर धर्मेन्द्र जी, नमस्ते! मै देख रहा हूँ, आप हर नये लेख में साफ़ प्रचार टैग लगा रहे है, मैं ये नहीं कहता कि आप गलत हो, परन्तु लेख कि जानकारी को सत्यापित करना और लेख कि सामग्री को जाँचा अति आवश्यक है, आपको पता होना चाहिए हिंदी विकिपीडिया पर वर्तमान में उपस्थित लेख भी साफ़ प्रचार को दर्शाते है, बस फर्क ये है कि वे प्रसिद्ध व्यक्तियों के लेख है, इसलिए उन्हें हटाया नहीं जाता है। हिंदी विकिपीडिया पर चाहे मेरे पास कोई आपके नहीं है, पर अंग्रेजी विकिपीडिया [[:w:en:Special:UserRights/Cptabhiimanyuseven|उच्च अधिकार]] प्राप्त है, परन्तु अंग्रेजी विकिपीडिया के नियम अनुसार लेख कि गुणवत्ता और स्रोत और सामग्री को जाँचा एक अच्छे और विश्वासनीय सदस्य कि गरिमा को बनाये रखता है। आशा करता हूँ कि आप मेरी बातओ को समझ गए होंगे। धन्यवाद <span style="background:Brown;border:1px solid #FF00FF;border-radius:18px;padding:4px">[[User:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:black">Cptabhiimanyuseven</span>]]•[[User talk:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:lightgrey">(@píng mє)</span>]]</span> 03:28, 5 जून 2026 (UTC)
: मेरा लक्ष्य आपको आपने अधिकार नहीं दिखना है, बल्कि अगर आपके पास अधिकार है, तो उसका पूर्णता अनुपालन करना चाहिए । <span style="background:Brown;border:1px solid #FF00FF;border-radius:18px;padding:4px">[[User:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:black">Cptabhiimanyuseven</span>]]•[[User talk:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:lightgrey">(@píng mє)</span>]]</span> 03:47, 5 जून 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:Cptabhiimanyuseven|Cptabhiimanyuseven]] जी, बचकानी हरकतें करना बंद कर दीजिये। अगर शीह नामांकन ग़लत हो रहे होंगे तो उनकी समीक्षा करके हटाने वाले समझा लेंगे। आपको उपदेशक बनने की आवश्यकता नहीं है। आपको ख़ुद यहाँ कोई सकारात्मक योगदान करना हो तो करिए, लेख बनाइये, सुधारिये। बेवजह की हरकतें करना बंद करिये और अपने अधिकार अंग्रेजी विकिपीडिया पर एन्जॉय करिये। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 05:11, 5 जून 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:Cptabhiimanyuseven|Cptabhiimanyuseven]] जी, नमस्ते! मैं सहमत हूँ कि किसी भी लेख का मूल्यांकन करते समय उसकी सामग्री, स्रोतों की गुणवत्ता तथा सत्यापनयोग्यता की समुचित जाँच आवश्यक है। मेरा उद्देश्य किसी नए लेख पर बिना कारण टैग लगाना नहीं, बल्कि विकिपीडिया की नीतियों एवं दिशानिर्देशों के अनुरूप संभावित समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करना है।
:जैसे @[[सदस्य:SM7|SM7]] जी ने कहा है, यदि मेरे द्वारा किसी पृष्ठ पर शीघ्र हटाने का नामांकन किया जाता है, तो उसका अंतिम निर्णय प्रबंधकों द्वारा समीक्षा के उपरांत ही लिया जाता है। यदि नामांकन नीतियों के अनुरूप नहीं पाया जाता, तो उसे हटाया भी जा सकता है।
:अतः प्रत्येक नामांकन की स्वतंत्र रूप से जाँच की जाती है और निर्णय उपलब्ध सामग्री, स्रोतों तथा लागू नीतियों के आधार पर लिया जाता है। <span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 05:57, 5 जून 2026 (UTC)
== रोलबैकर अधिकार हेतु ==
नमस्ते चाहर धर्मेंद्र जी,
मैंने हाल में संपादनों की जाँच करते हुये देखा कि आपने काफी सारे उत्पात एवं बर्बरतापूर्ण संपादन वापस किये हैं। हालाँकि, उन्हें भी पुनरीक्षक सदस्यों द्वारा दुबारा जाँचना पड़ता है, जैसा कि मुझे जाँचने के बाद पता चल रह था कि आपने उन्हें पूर्ववत (Undo) कर दिया है।
जहाँ तक मुझे लगता है आपको उत्पातपूर्ण संपादनों की समझ है और आप पूर्ववत करते समय सावधानी रखते हैं। अतः मैं चाहूँगा कि आप [[:विकिपीडिया:रोलबैकर्स_अधिकार_हेतु_निवेदन|रोलबैकर अधिकारों के लिये अनुरोध]] कर दें। यदि यह स्वीकृत होता है तो आप एक साथ एक प्रयोगकर्ता के किये कई संपादन (एक शृंखला में लगातार) एक साथ रोलबैक कर पायेंगे। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 20:46, 9 जून 2026 (UTC)
:नमस्ते @[[सदस्य:SM7|SM7]] जी, मेरे कार्य पर ध्यान देने एवं प्रोत्साहन के लिए आपका धन्यवाद। यह जानकर प्रसन्नता हुई कि उत्पातपूर्ण संपादनों को लेकर मेरे निर्णयों पर आपका विश्वास है। रोलबैकर अधिकार के संबंध में आपके सुझाव के लिए भी धन्यवाद। मैं इस पर विचार करूँगा और यदि मुझे लगेगा कि मैं इस अधिकार की जिम्मेदारियों का उचित निर्वहन कर सकता हूँ, तो इसके लिए अनुरोध अवश्य करूँगा। आपके मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए पुनः धन्यवाद। <span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 03:15, 10 जून 2026 (UTC)
== शीह मापदंड ==
नमस्ते धर्मेंद्र जी, आपने [[:सामुदायिक विकास]] को "विश्वसनीय स्रोत नहीं" के चलते शीह नामांकित किया है। यह [[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने की नीति|शीघ्र हटाने]] का कोई मापदंड नहीं है। ऐसी समस्याओं के लिये हहेच प्रक्रिया का पालन करना होता है। "स्रोत नहीं होना", "उल्लेखनीय नहीं होना", "मूल शोध", "विकिपीडिया के अयोग्य लेखन" इत्यादि सभी हहेच द्वारा हटाये जाते हैं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 21:36, 9 जुलाई 2026 (UTC)
::क्षमा चाहता हूँ। मैंने पृष्ठ पर केवल आख़िरी संपादन किसका है यह देख कर आपको यह सन्देश लिख दिया। मैंने अभी दुबारा देखा कि यह नामांकन आपने नहीं @[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी ने किया है - [[वहीद उद्दीन हैदर जाफ़री]] का एक और नामांकन का भी इसी प्रकार का है। ये मापदंड शीह के नहीं हैं आशा करता हूँ AMAN KUMAR जी आगे से ध्यान रखेंगे। चूँकि यह संदेश ग़लती से लिखा गया, उत्तर देने की आवश्यकता नहीं।
:--[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 00:33, 10 जुलाई 2026 (UTC)
== विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/जून 2026 परिणाम ==
[[File:Main Barnstar.png|right|90 px]] बधाई हो! <span style="font-size:11pt">प्रिय {{PAGENAME}} जी, [[विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/जून 2026|सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/जून 2026]] में भाग लेकर इसे सफल बनाने तथा पुरस्कार प्राप्त करने के लिए आयोजकों की तरफ से धन्यवाद एवं बधाई। पुरस्कार राशि प्राप्त करने के लिए 25 अगस्त 2026 तक [https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSddj_4DywI-lZ0ko_Fj2X1JqWh71cNUaij1nmL63RGx_yOITg/viewform?usp=dialog पुरस्कार विजेता सूचना प्रपत्र] भरें। यदि यह प्रपत्र आपने पिछले संपादनोत्सव में भरा है तो दुबारा भरने की जरूरत नहीं है। पुरस्कार प्राप्त होने पर इसकी सूचना दें। --[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 12:38, 21 अगस्त 2026 (UTC)
== प्रारूप:अमर लाल खपरिये को हटाने के संबंध में निवेदन ==
नमस्ते चाहर धर्मेंद्र जी,
आपने 'प्रारूप:अमर लाल खपरिये' पर शीघ्र हटाने का अनुरोध किया है। यह आलेख एक शासकीय उच्च माध्यमिक शिक्षक और पूर्व माइक्रोबायोलॉजिस्ट के शैक्षणिक योगदान (निःशुल्क NEET कोचिंग और विज्ञान जागरूकता अभियान) पर आधारित है।
इस प्रारूप में 'दैनिक भास्कर' और 'राष्ट्रीय जनादेश' जैसे समाचार पत्रों के प्रिंट संदर्भ (Citations) जोड़ दिए गए हैं। आपसे विनम्र अनुरोध है कि इसे शीघ्र हटाने के बजाय मानक समीक्षा (AfC) का अवसर दें ताकि आवश्यक सुधार किया जा सके।
धन्यवाद! --[[सदस्य:Amarpawar43|Amarpawar43]] ([[सदस्य वार्ता:Amarpawar43|वार्ता]]) 10:09, 18 अक्टूबर 2026 (UTC)
7f06h2fmwbmyy7h78wnaefsvnyumb5j
बालिका वधू 2
0
1390138
6630607
6560346
2026-10-18T06:02:33Z
चाहर धर्मेंद्र
703114
[[Special:Contributions/ArnavSingh979|ArnavSingh979]] ([[User talk:ArnavSingh979|वार्ता]]) द्वारा किए गए बदलाव [[Special:Diff/6560346|6560346]] को पूर्ववत किया
6630607
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox television
| image =
| alt_name = {{ubl|''Balika Vadhu - Kachchee Umar ke Pakke Rishte''|''Balika Vadhu - Anandi ka Naya Saphar''}}
| genre = [[नाटक]]
| writer = पूर्णेंदु शेखर <br> गजरा कोट्टारी <br> उषा दीक्षित <br> राजेश दुबे <br> शिप्रा अरोड़ा <br> लक्ष्मी जयकुमार <br> यश शारदा
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| related = ''[[बालिका वधू|बालिका वधु ]]''
}}
'''''बालिका वधू 2''''' एक भारतीय सामाजिक ड्रामा टेलीविजन श्रृंखला है जिसका प्रीमियर [[कलर्स (टीवी चैनल)|कलर्स टीवी]] पर 9 अगस्त 2021 से 25 फरवरी 2022 तक और [[वूट]] पर 28 फरवरी 2022 से 29 मार्च 2022 तक हुआ। <ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/television/balika-vadhu-2-trailer-new-anandi-enters-the-frame-in-colors-show-begins-august-9-7411585/|title=Balika Vadhu 2 trailer: New Anandi enters the frame in Color's show, begins August 9|date=20 July 2021|website=The Indian Express}}</ref> यह लंबे समय से चल रही [[सामाजिक]] [[नाटक|ड्रामा]] सीरीज़ ''[[बालिका वधू]]'' का रीबूट है। <ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/lifestyle/balika-vadhu-set-for-a-reboot-272849|title=Balika Vadhu set for a reboot|website=The Tribune}}</ref> स्फीयर ओरिजिन द्वारा निर्मित, इसकी स्टार कास्ट में [[शिवांगी जोशी]], [[रणदीप राय]] और समृद्ध बावा शामिल हैं। <ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/television/soaps/story/shivangi-joshi-randeep-rai-samridh-bawa-in-love-triangle-post-leap-on-balika-vadhu-2-1880538-2021-11-25|title=Shivangi Joshi, Randeep Rai, Samridh Bawa in love triangle post leap on Balika Vadhu 2|website=India Today|language=en|access-date=}}</ref>
शो '''बालिका वधू 2''' को 2 भागों में बांटा गया है। पहला भाग '''''बालिका वधू - कच्चे उमर के पक्के रिश्ते'' ।''' '''दूसरे भाग का शीर्षक''' ''बालिका वधू - आनंदी का नया सफर'' '''।'''
== सारांश ==
खिमजी और प्रेमजी [[देवगढ़, राजस्थान|देवगढ़]] में रहने वाले सबसे अच्छे दोस्त हैं। खिमजी गांव के [[सरपंच]] हैं। उनकी पत्नी रतन अपने दूसरे बच्चे के साथ गर्भवती हैं। प्रेमजी के 2 बेटे हैं: गोपाल और जिगर। खिमजी का एक पुत्र है, जिसका नाम कल्पेश है। दोस्तों को उम्मीद है कि जो बच्चा पैदा हुआ है वह एक लड़की है जो बच्ची की शादी जिगर से करेगी, जिससे उनके रिश्ते को मजबूती मिलेगी। दोनों परिवार एक बच्ची के जन्म के लिए सहमत और आशा करते हैं। प्रेमजी अजन्मे बच्चे के प्रति बहुत संवेदनशील हैं और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर दिन [[पूजा]] करते हैं। गांव में चर्चा है कि प्रेमजी एक बच्ची को पैदा करने में कितनी मेहनत कर रहे हैं। जैसे ही रतन जन्म देने वाली होती है, कुछ जटिलताएँ पैदा होती हैं और प्रेमजी अपने हाथ पर एक 'जोत' जलाते हैं, जिससे बच्चा बच जाता है। इससे उनकी दोस्ती और भी मजबूत होती है। आखिरकार, बच्चा सुरक्षित है और मां भी। वे बच्चे का नाम आनंदी रखते हैं। जिगर यह देखता है और उसके प्रति ईर्ष्या विकसित करना शुरू कर देता है। दूसरी ओर, गोपाल आमतौर पर लड़कियों की तरह कपड़े पहनना पसंद करते हैं क्योंकि प्रेमजी एक लड़की चाहते थे और आनंदी को पसंद करते थे। एक बार आनंदी जिगर की वजह से अपने पालने से गिर जाती है, हालांकि वह बच जाती है। जब आनंदी 40 दिन की हो जाती है, तो एक लालची प्रेमजी आनंदी का विवाह में हाथ मांगता है क्योंकि समय बहुत शुभ है। कर्वी मां नाम की एक बूढ़ी औरत और आनंदी की डॉक्टर शारदा बाल विवाह के रिवाजों के खिलाफ हैं। प्रेमजी ने आनंदी के जन्म के लिए किए गए बलिदानों के बारे में सोचकर, खिमजी सहमत हो गए और पुलिस से बचने के लिए आनंदी को एक चलती ट्रक में शादी कर दी। बाद में पता चला कि प्रेमजी अपने परिवार, विशेषकर अपनी बहन के साथ लड़ाई के कारण गांव में रह रहे थे। उसकी माँ बीमार है और वे सब आनंदी को लेकर उसे देखने जाते हैं। वह आनंदी को देखती है और फिर से जीवंत हो जाती है। प्रेमजी ने अपने माता-पिता के साथ वापस जाने का फैसला किया।
=== 8 साल बाद ===
आनंदी और जिगर अब क्रमशः 8 और 13 वर्ष के हैं। जिगर को शादी के बारे में पता है लेकिन आनंदी को नहीं पता। आनंदी अक्सर अपने भाई कल्पेश से लड़ती है लेकिन फिर भी उसकी परवाह करती है। आनंदी एक शरारती और शरारती बच्ची है जो स्कूल जाना पसंद करती है और अपने सबसे अच्छे दोस्त ढिंगली के साथ खेलना पसंद करती है लेकिन अपने बड़ों का भी सम्मान करती है। दूसरी ओर, प्रेमजी की मां अभी भी बीमार हैं और उनकी मतलबी बड़ी बेटी दीवाली के कारण उनका स्वास्थ्य दिन-ब-दिन बिगड़ता जा रहा है। इसलिए, वह प्रेमजी से आनंदी के गौना के रूप में अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए कहती है। खिमजी के साले से अपना घर खरीदने वाले नागेश के कारण खिमजी के परिवार को उनके घर से निकाल दिया जाता है। प्रेमजी परिवार को अपनी नई हवेली (घर) लाने के लिए खिमजी जाते हैं।
आनंदी यह जाने बिना कि उसका गौना हो रहा है, काकू के घर जाकर बहुत खुश होती है। लेकिन, आनंदी के माता-पिता अपनी बेटी के बाल विवाह से बहुत परेशान और दुखी हैं और सोचते हैं कि उन्होंने बहुत बड़ी गलती की है। सारा परिवार खिमजी के घर जाता है और शादी के रिवाज शुरू होते हैं। उन्हें 24 घंटे का उपवास रखने के लिए मजबूर किया जाता है और खाना भी बनाना पड़ता है जो बहुत दर्दनाक होता है। यह देखकर प्रेमजी की मां काफी खुश नजर आती हैं और उनका स्वास्थ्य भी ठीक रहता है। दीवाली प्रेमजी और उनके परिवार को पसंद नहीं है और अब आनंदी से भी नफरत करने लगती है और उसके गौना के बाद उसका जीवन दयनीय बना देती है। प्रेमजी की मां के अनुरोध पर आनंदी को प्रेमजी के घर में रहने के लिए कहा जाता है। आनंदी का परिवार प्रेमजी के घर पर दुखी आनंदी को छोड़ जाता है। लेकिन उसका काकू और काकी उसे खुश करते हैं और जिगर, जो शुरू में आनंदी को पसंद नहीं करता था, उसकी देखभाल करने लगता है। अब मदी बा (ताए) आती है और आनंदी उसके व्यक्तित्व से अनजान गलती से उससे निपट लेती है। मादी बा आनंदी के साथ बुरा व्यवहार करती है और उसे डांटती है। मादी बा प्रेमजी की माँ को देखने आई थीं क्योंकि उन्होंने उनकी बीमारी के बारे में सुना था। जब मादी बा अपने भतीजे प्रेमजी के घर जाती है, तो उसे पता चलता है कि आनंदी उसकी पौत बहू (दादी) और जिगर की पत्नी है। वह यह जानकर हैरान रह जाती है और उसके साथ बुरा व्यवहार करने लगती है। मादी बा दिवाली और अपनी बेटी से प्यार करती है लेकिन प्रेमजी और उसके परिवार को पसंद नहीं करती है। आनंदी यातना के बाद घर जाने के लिए बेताब है और घर से भाग जाती है। हालांकि, जिगर उसे बचाता है। यह जानने के बाद कि आनंदी को अपनी शादी के बारे में पता नहीं है, मदी बा आनंदी के लिए एक नरम पक्ष विकसित करना शुरू कर देती है। वह अपने माता-पिता के साथ घर वापस चली जाती है। जल्द ही, प्रेमजी की माँ की मृत्यु हो जाती है और आनंदी काकू के घर वापस आ जाती है। मादी बा, प्रेमजी को आनंदी को अपनी बहू के रूप में यहीं रखने की सलाह देती हैं। प्रेमजी खेमजी और आनंदी को समझाने की कोशिश करते हैं, लेकिन एक दुखी आनंदी घर वापस चली जाती है और प्रेमजी उनके साथ सभी संबंध तोड़ देता है। रतन को यह भी पता चलता है कि उसका भाई अपनी पत्नी को हर दिन पीटता है क्योंकि वह गर्भधारण नहीं कर सकती। हालांकि डॉक्टर उसे बताता है कि वह आदमी बाँझ है। गुस्से में, वह उसे और पीटता है और आनंदी को इसका पता चलता है और वह अपनी माँ को बुलाती है। लीला ढींगली को अपनी बेटी मानने का फैसला करती है क्योंकि उसके पास मां नहीं है। ढिंगली की मां लीला की बहन थीं। जल्द ही, प्रेमजी का व्यवसाय विफल हो जाता है। मादी बा प्रेमजी को आनंदी को वापस लाने के लिए कहती है क्योंकि वह उनकी 'भाग्य लक्ष्मी' है। आनंदी का प्रेमजी अपहरण कर लेता है। शुरू में घर वापस जाना चाहते हैं, आनंदी को शादी के बारे में पता चलता है और यह सोचकर कि उसके माता-पिता ने उससे झूठ बोला है, अपने ससुराल में रहने का अंतिम निर्णय लेती है।
कुछ दिनों के बाद प्रेम जी के बिजनेस पार्टनर मेहुल और भैरवी अमेरिका से प्रेमजी के घर उनके बिजनेस में निवेश करने आते हैं। उनका बेटा, आनंद और आनंदी एक पिल्ला को बचाने के रास्ते में मिलते हैं। प्रेम जी और उनका परिवार आनंद की कंपनी का आनंद लेते हैं। आनंद अपनी पहली भारतीय दिवाली मनाने के लिए आनंदी के घर पर ठहरे हुए हैं। वह आनंदी को भी हंसाता है और खुश करता है, जो अपने माता-पिता के घर छोड़ने के बाद उदास हो गई है। आनंद और आनंदी करीब आते हैं और एक-दूसरे को अपना सबसे अच्छा दोस्त मानते हैं। जिगर अक्सर उनकी दोस्ती को तोड़ने के लिए आनंद के खिलाफ साजिश रचता है, क्योंकि आनंद सभी पहलुओं में उससे बेहतर है। जिगर और आनंदी की शादी को गुप्त रखा जाता है क्योंकि भैरवी एक महिला कार्यकर्ता हैं और एक एनजीओ चलाती हैं।
कुछ दिनों के बाद, कंकू के लिए शादी का प्रस्ताव आता है, जो उसके सहपाठी माधव से प्यार करता है। कंकू की कुंडली में एक 'दोष' है और पंडित उसे एक पेड़ से शादी करने के लिए कहता है। आनंद दृश्य से विचलित हो जाता है और कंकू की शादी एक पेड़ से हो जाती है। बाद में आनंद को बताया जाता है कि घर में पूजा चल रही थी। आनंदी को सफाई करने के लिए कहा जाता है और आनंद उसकी मदद करने का फैसला करता है। वे फूलों को इकट्ठा करते हुए 'अग्नि' के चारों ओर 7 फेरे लेते हैं। कंकू अपनी शादी की बातचीत से परेशान होकर आनंद, जिगर और आनंदी से मदद मांगती है। आनंद ने योजना को नापसंद करने वाली आनंदी की मदद से कंकू और माधव को भागने में मदद करने की योजना बनाई। जिगर जो बातचीत को सुनने में मदद करने से इनकार करता है और इसका उपयोग आनंद और आनंदी के बीच में दरार पैदा करने के लिए करता है। योजना तब विफल हो जाती है जब माधव घोषणा करता है कि वह कंकू से उसके परिवार की अनुमति से ही शादी करेगा, और कंकू को मंदिर में लाता है। जिगर सहित हर कोई आनंद पर पूरी समस्या पैदा करने का आरोप लगाता है जबकि माधव कसम खाता है कि जब वह सफल होगा और चला जाएगा तभी वह कंकू से शादी करेगा। दूसरी ओर, एक दिल टूटने वाली आनंदी, एक हैरान आनंद को छोड़ने और कभी वापस न आने के लिए कहती है और उसके साथ सभी संबंधों को तोड़ देती है।
आनंदी और आनंद की एक बेटी है जिसका नाम विजयता है।
== कलाकार ==
=== मुख्य ===
* आनंदी खिमजी भुजारिया / आनंदी जिगर अंजारिया / आनंदी आनंद चतुर्वेदी के रूप में [[शिवांगी जोशी]] : रतन और खिमजी की बेटी; कल्पेश की बहन; जिगर की पूर्व पत्नी; आनंद की पत्नी; विजयता की माँ (2021–2022)
** बाल आनंदी भुजारिया के रूप में श्रेया पटेल (2021)
* आनंद चतुर्वेदी के रूप में [[रणदीप राय]] : शीला और मेहुल का बेटा; भैरवी का दत्तक पुत्र; दीया का सौतेला भाई; आनंदी का दूसरा पति; विजयता के पिता (2021–2022)
** किशोर आनंद चतुर्वेदी (2021) के रूप में कृष चौहान
* समृद्ध बावा जिगर अंजारिया के रूप में: सेजल और प्रेमजी के बेटे; गोपाल का भाई; कंकू का चचेरा भाई; आनंदी के पूर्व पति (2021–2022)
** किशोर जिगर अंजारिया के रूप में वंश सयानी (2021)
=== पुनरावर्ती ===
* [[मानसी सल्वी|मानसी साल्वी]] भैरवी चतुर्वेदी के रूप में: मेहुल की पत्नी; दीया की माँ; आनंद की दत्तक मां (2021–2022)
* मेहुल चतुर्वेदी के रूप में विमर्श रोशन: शीला और भैरवी के पति; दीया और आनंद के पिता; प्रेमजी के बिजनेस पार्टनर (2021-2022)
* दीया चतुर्वेदी के रूप में अंकिता बहुगुणा: भारवी और मेहुल की बेटी; आनंद की दत्तक बहन; विक्रांत पूर्व पत्नी (2021–2022)
* [[केतकी दवे]] गोमती देवी अंजारिया उर्फ माडी बा के रूप में: धर्मराज की पत्नी; दीवाली और प्रेमजी की मौसी; जिगर, कंकू और गोपाल की दादी (2021–2022)
* देवराज अंजारिया के रूप में मेहुल बुच : धर्मराज का भाई; भानुमती के पति; दीवाली और प्रेमजी के पिता; जिगर, गोपाल और कंकू के दादा (2021)
* मीनाक्षी वर्मा भानुमती "भानु" अंजारिया के रूप में: देवराज की पत्नी; दीवाली और प्रेमजी की माँ; जिगर, गोपाल और कंकू की दादी (2021)
* प्रेमजी अंजारिया के रूप में सनी पंचोली / मनु मलिक: देवराज और भानुमती के बेटे; दीवाली का भाई; सेजल के पति; जिगर और गोपाल के पिता; खिमजी का सबसे अच्छा दोस्त; मेहुल का बिजनेस पार्टनर (2021)/(2021-2022)
* अंशुल त्रिवेदी खिमजी भुजारिया के रूप में: प्रेमजी के सबसे अच्छे दोस्त; रतन का पति; कल्पेश और आनंदी के पिता (2021)
* रिद्धि नायक शुक्ला रतन सांगवान भुजारिया के रूप में - पवन की बहन; खिमजी की पत्नी; कल्पेश और आनंदी की मां (2021)
* सेजल अंजारिया के रूप में शिजू कटारिया / पायल शुक्ला: प्रेमजी की विधवा; जिगर और गोपाल की माँ (2021)/(2021–2022)
* दीवाली के रूप में सीमा मिश्रा अंजारिया चौकसिया: भानुमती और देवराज की बेटी; प्रेमजी की बहन; लाखन की पत्नी; कांकू की मां (2021)
* लखन सिंह चौकसिया के रूप में चंदन राय: दिवाली के पति; कांकू के पिता (2021)
* कनक "कंकू" चौकसिया के रूप में तृप्ति मिश्रा: दीवाली और लखन की बेटी; जिगर और गोपाल के चचेरे भाई; माधव की पूर्व प्रेमिका (2021)
* माधव झा के रूप में सागर पारेख: कंकू का पूर्व प्रेमी (2021)
* कल्पेश भुजरिया के रूप में चिराग कुकरेजा: रतन और खिमजी के बेटे; जिगर का दोस्त; आनंदी का भाई (2021)
* गोपाल अंजरिया के रूप में अरिष्ट जैन: प्रेमजी और सेजल का छोटा बेटा; जिगर का भाई (2021)
* पवन कुमार सांगवान के रूप में शेखर चौधरी: रतन का भाई; लीला के पूर्व पति (2021)
* लीला जैन सांगवान के रूप में रश्मि गुप्ता: पवन की पत्नी (2021)
* कुमकुम दास मिताली "मिताबेन" जैन के रूप में: लीला की दादी (2021)
* विक्रांत के रूप में विकास ग्रोवर : दीया के पूर्व पति (2021–2022)
* कियारा के रूप में प्रतीक्षा राय (2021)
* डॉ. शारदा के रूप में मेलानी पेस (2021)
* वरुण के रूप में शरहान सिंह (2022)
== संदर्भ ==
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{{Infobox television
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| genre = [[रोमांस फिल्म|रोमांटिक]]<br>[[थ्रिलर (शैली)|थ्रिलर]]<br>[[ड्रामा]]
| creator = प्रशांत भट्ट <br>संजय मेमाने
| writer = रेणु वटवानी <br> विशाल वटवानी <br> सलिल रेत <br> आगम गौरव
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'''''सिद्धि विनायक''''' एक भारतीय रोमांटिक थ्रिलर टेलीविजन श्रृंखला है जो 26 अक्टूबर 2017 से 18 जनवरी 2019 तक [[एंड टीवी|&TV]] पर प्रसारित हुई। सीरीज का निर्माण प्रशांत भट्ट और संजय मेमाने ने किया है। एक सफल रन के बाद, शो की जगह ''मैं भी अर्धांगिनी'' ने ले ली। <ref>{{Cite web|url=http://www.bollywoodlife.com/news-gossip/neha-saxena-returns-to-tv-with-siddhi-vinayak-which-will-take-up-the-santoshi-maa-slot-on-tv/|title=Neha Saxena returns to TV with Siddhi Vinayak which will take up the Santoshi Maa slot on &TV|website=BollywoodLife.com|access-date=12 September 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170912115207/http://www.bollywoodlife.com/news-gossip/neha-saxena-returns-to-tv-with-siddhi-vinayak-which-will-take-up-the-santoshi-maa-slot-on-tv/|archive-date=12 सितंबर 2017|url-status=dead}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.indiawest.com/entertainment/television/tv-s-new-show-siddhivinayak-presents-a-passionate-hate-story/article_736ad63e-bd98-11e7-8f14-23c05fbac0a5.html|title=&TV's New Show 'Siddhivinayak' Presents a Passionate Hate Story|last=India-West|first=R. M. VIJAYAKAR, Special to|website=India West|language=en|access-date=2019-08-30|archive-date=30 अगस्त 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190830235604/https://www.indiawest.com/entertainment/television/tv-s-new-show-siddhivinayak-presents-a-passionate-hate-story/article_736ad63e-bd98-11e7-8f14-23c05fbac0a5.html|url-status=dead}}</ref>
== सीजन ==
सीरीज अक्टूबर 2017 में [[एंड टीवी]] पर लॉन्च हुई। सीजन 1 अक्टूबर 2017 से फरवरी 2018 तक चला। सीज़न 1 में नेहा सक्सेना और नितिन गोस्वामी ने क्रमशः सिद्धि और विनायक के रूप में अभिनय किया।
जनवरी 2018 में यह घोषणा की गई थी कि सिद्धिविनायक (सीजन 1) सीजन 2 की शुरुआत के लिए एक छलांग के साथ समाप्त होगा। फरवरी 2018 में, सीज़न 2 [[फरनाज़ शेट्टी]] के साथ शुरू हुआ, जिन्होंने नेहा सक्सेना को सिद्धि के रूप में बदल दिया और नितिन गोस्वामी ने विनायक के रूप में अपनी भूमिका को दोहराया।
सीज़न 1 अपने चलने के दौरान एक [[प्रेमकहानी फ़िल्म|रोमांटिक]] थ्रिलर [[नाटक|ड्रामा]] था। और सीज़न 2 सबसे पहले [[प्रतिशोध|रिवेंज]] [[नाटक|ड्रामा]] था और जुलाई 2018 में सीज़न 2 को एक [[प्रेमकहानी फ़िल्म|रोमांटिक]] थ्रिलर [[नाटक|ड्रामा]] में स्थानांतरित कर दिया गया।
सिद्धि विनायक ने अपने लॉन्च के बाद काफी लोकप्रियता हासिल की और चैनल के लिए बहुत अच्छी संख्या दे रहा था। यह शो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सफल रहा; यूके में, शो अपने रन के दौरान [[एंड टीवी|&TV यूके]] का टॉप शो बन गया।
शो एक सफल रन के बाद जनवरी 2019 में समाप्त हुआ।
== कलाकार ==
=== मुख्य ===
* विनायक "विन" कुंद्रा के रूप में नितिन गोस्वामी <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/nitin-goswami-i-only-want-to-play-the-male-lead-now/articleshow/70644400.cms|title=Nitin Goswami: I only want to play the male lead now - Times of India|website=The Times of India|language=en|access-date=2019-09-01}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/videos/tv/hindi/neha-saxena-and-nitin-goswami-talk-about-their-show-siddhivinayak-/videoshow/61211882.cms|title=Neha Saxena and Nitin Goswami talk about their show Siddhivinayak. {{!}} TV - Times of India Videos|website=timesofindia.indiatimes.com|access-date=2019-09-01}}</ref>
* सिद्धि जोशी के रूप में नेहा सक्सेना (प्लास्टिक सर्जरी से पहले) <ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/in-conversation-with-neha-saxena-on-fb-watch-now/articleshow/61115586.cms|title=In conversation with Neha Saxena on FB, watch now|access-date=17 October 2017|publisher=Times Of India}}</ref> <ref>{{Cite news|url=https://m.timesofindia.com/tv/news/hindi/neha-saxena-to-make-a-comeback-with-a-fiction-show/articleshow/60956671.cms|title=Neha Saxena to make a comeback with a fiction show|work=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]]|access-date=5 October 2017}}</ref>
* [[फरनाज़ शेट्टी]] रिद्धि सेन के रूप में, एक महिला जिसका चेहरा सिद्धि को दिया जाता है; बाद में सिद्धि (प्लास्टिक सर्जरी के बाद) <ref>{{Cite web|url=https://www.bizasialive.com/farnaz-shetty-replaces-neha-saxena-lead-siddhi-vinayak/|title=Farnaz Shetty replaces Neha Saxena as lead in 'Siddhi Vinayak'|last=Correspondent|first=BizAsia|date=2018-01-21|website=BizAsia {{!}} Media, Entertainment, Showbiz, Events and Music|language=en-GB|access-date=2019-08-30}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.easterneye.biz/farnaz-shetty-neha-saxena-siddhivinayak/|title=Farnaz Shetty in, Neha Saxena out of Siddhivinayak|last=Singh|first=Mohnish|date=2018-01-22|website=EasternEye|language=en-GB|access-date=2019-08-30}}</ref>
* रोशनी रस्तोगी उर्वशी कुंद्रा के रूप में, विनायक की दूसरी पत्नी
* उत्कर्ष नाइक, विनायक की सौतेली माँ मंजरी कुंद्रा के रूप में; रुद्र जैविक माता
=== पुनरावर्ती ===
* शिवम सेन, रिद्धि के पति और जूही के पिता के रूप में शार्दुल पंडित । <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/shardul-pandit-to-make-his-theatre-debut/articleshow/66766069.cms|title=Shardul Pandit to make his theatre debut - Times of India|website=The Times of India|language=en|access-date=2019-09-01}}</ref>
* आयशा विंधारा जूही सेन, शिवम और रिद्धि की बेटी के रूप में
* [[गौरव एस बजाज]] रुद्र कुंद्रा के रूप में, मंजरी के लंबे समय से खोए हुए बेटे, विनायक के सौतेले भाई
* मनीष खन्ना शंकर कुंद्रा, विनायक और रुद्र के पिता के रूप में
* राजबीर कुंद्रा के रूप में करण खंडेलवाल, विनायक के चचेरे भाई, प्राची के पति
* राजबीर की मां बिजली कुंद्रा के रूप में निशि सिंह
* प्राची जोशी, सिद्धि की बहन और बाद में राजबीर की पत्नी के रूप में प्रियंका बोरा
* अनिकेत जोशी, सिद्धि और प्राची के पिता के रूप में पृथ्वी संकल्प
* सविता जोशी, सिद्धि और प्राची की माँ के रूप में अंजलि गुप्ता
* अमर दीप गर्ग गुरु जी के रूप में
* फराह हुसैन ज़ई के रूप में, सिद्धि की दोस्त
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
== बाहरी संबंध ==
''[http://www.ozee.com/shows/siddhivinayak सिद्धि विनायक] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20181116180553/http://www.ozee.com/shows/siddhivinayak |date=16 नवंबर 2018 }}'' स्ट्रीमिंग ओज़ी पर
[[श्रेणी:एंड टीवी के कार्यक्रम]]
[[श्रेणी:भारतीय टेलीविजन धारावाहिक]]
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श्रेणी:जालौर जिले के मंदिर
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[[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:जालौर ज़िला]] जोड़ी
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text/x-wiki
जालौर जिले के मंदिर की सूची
[[श्रेणी:जालौर ज़िला]]
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इंपीरियल सर्विस ट्रुप्स
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wikitext
text/x-wiki
'''इंपीरियल सर्विस ट्रूप्स''' ब्रिटिश भारतीय साम्राज्य की रियासतों द्वारा उठाए गए बल थे । ये सैनिक भारतीय सेना के साथ सेवा के लिए उपलब्ध थे जब [[यूनाईटेड किंगडम की सरकार|ब्रिटिश सरकार]] द्वारा ऐसी सेवा का अनुरोध किया गया था। 20वीं शताब्दी की शुरुआत में, उनकी कुल संख्या लगभग 18,000 पुरुषों की थी।
ब्रिटिश सेना के अधिकारियों द्वारा सैनिकों का नियमित निरीक्षण किया जाता था और आम तौर पर ब्रिटिश भारतीय सेना के सैनिकों के समान उपकरण होते थे। हालांकि उनकी संख्या अपेक्षाकृत कम थी, लेकिन 20वीं शताब्दी के पहले दशक में इंपीरियल सर्विस ट्रूप्स को चीन और ब्रिटिश सोमालिलैंड में नियुक्त किया गया था, और बाद में [[पहला विश्व युद्ध|प्रथम विश्व युद्ध]] और [[द्वितीय विश्वयुद्ध|द्वितीय विश्व युद्ध]] में कार्यवाही देखी गई।
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/* बाहरो संबंध */
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text/x-wiki
*३० मार्च २०२४ फो [[क्रिस्टियानो रोनाल्डो]] ने '''९००''' गोल फिये।
<span style="font-size:x-large;">'''{{center|आधिकारिक मौच}}'''</span>
*'''बोल्ड''' में अभी भी सक्रिय है।
{|class:"wikitable" style="text-align:center;"
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!१|| ||{{Flagicon|POR}}|| || [[क्रिस्टियानो रोनाल्डो]]|| ||'''९९६'''|| ||१३६९|| ||०.७३|| ||२००१
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|९|| ||{{Flagicon|NED}}|| ||[[अबे लेन्सत्रा]]|| ||'''६७६'''|| ||७७७|| ||०.८७|| ||१९३६-१९६३
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|{{flagicon|FRA}} '''[[करीम बेनजोमा]]'''||'''५३१'''||१०१२||०.५२||२००४-->
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==इन्हें भी देखें==
* [[फुटबॉल]]
==बाहरो संबंध==
*([[:qu:Llapanmin sinchi atipankun huaycuchiyta punku ukjuman|rs]])
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/* बाहरो संबंध */
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text/x-wiki
*३० मार्च २०२४ फो [[क्रिस्टियानो रोनाल्डो]] ने '''९००''' गोल फिये।
<span style="font-size:x-large;">'''{{center|आधिकारिक मौच}}'''</span>
*'''बोल्ड''' में अभी भी सक्रिय है।
{|class:"wikitable" style="text-align:center;"
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!१|| ||{{Flagicon|POR}}|| || [[क्रिस्टियानो रोनाल्डो]]|| ||'''९९६'''|| ||१३६९|| ||०.७३|| ||२००१
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|}
==इन्हें भी देखें==
* [[फुटबॉल]]
==बाहरो संबंध==
*([[:qu:Llapanmin sinchi ashjata atipankun huaycuchiyta punku ukjuman|rs]])
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/* बाहरो संबंध */
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text/x-wiki
*३० मार्च २०२४ फो [[क्रिस्टियानो रोनाल्डो]] ने '''९००''' गोल फिये।
<span style="font-size:x-large;">'''{{center|आधिकारिक मौच}}'''</span>
*'''बोल्ड''' में अभी भी सक्रिय है।
{|class:"wikitable" style="text-align:center;"
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!१|| ||{{Flagicon|POR}}|| || [[क्रिस्टियानो रोनाल्डो]]|| ||'''९९६'''|| ||१३६९|| ||०.७३|| ||२००१
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!२|| ||{{Flagicon|ARG}}|| ||[[लियोनेल मेस्सी]]|| ||'''९५४'''|| ||१२२६|| ||०.७७|| ||२००३
|-
|३|| ||{{Flagicon|AUT}}|| ||[[जोसेफ बिकाँ]]|| ||'''८१२'''|| ||५२२|| ||१.५६|| ||१९३१-१९५७
|-
|४|| ||{{Flagicon|BRA}}|| ||[[रोमारयो]]|| ||'''७७२'''|| ||९९४|| ||०.७८|| ||१९८५-२००९
|-
|५|| ||{{Flagicon|BRA}}|| ||[[पेले]]|| ||'''७६७'''|| ||८१२|| ||०.९४|| ||१९५६-१९७७
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!६|| ||{{flagicon|POL}}|| ||[[राॅबर्ट लेवंङोसकी]]|| ||'''७५६'''|| ||११२२|| ||०.६९|| ||२००५
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|७|| ||{{Flagicon|HUN}}|| ||[[फेरेन्त्स पूश्काश]]|| ||'''७४६'''|| ||७५४|| ||०.९९|| ||१९४३-१९६६
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|८|| ||{{Flagicon|GER}}|| ||[[गेर्ड नयुलेर]]|| ||'''७३५'''|| ||७९३|| ||०.९३|| ||१९६२-१९८१
|-
|९|| ||{{Flagicon|NED}}|| ||[[अबे लेन्सत्रा]]|| ||'''६७६'''|| ||७७७|| ||०.८७|| ||१९३६-१९६३
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|१०|| ||{{flagicon|POR}}|| ||[[एउसेबियो]]|| ||'''६२१'''|| ||६३९|| ||०.९७|| ||१९५७-१९८०
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|{{flagicon|FRA}} '''[[करीम बेनजोमा]]'''||'''५३१'''||१०१२||०.५२||२००४-->
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|}
==इन्हें भी देखें==
* [[फुटबॉल]]
==बाहरो संबंध==
*([[:qu:Llapanmin sinchi ashkjata atipankun huaycuchiyta punku ukjuman|rs]])
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हैदराबाद एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस
0
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Curvasingh
654091
13 दिसंबर 2023 को, हैदराबाद एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस को तेलंगाना के मुख्यमंत्री के निर्देश पर रीअलाइनमेंट के लिए रोक दिया गया था।
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text/x-wiki
{{Infobox rail line
| color =
| name = हैदराबाद एयरपोर्ट एक्सप्रेस मेट्रो
| other_name = कॉरिडोर IV
| image =
| caption = an elevated stretch of the Airport line.
| type = एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन
| system = रैपिड ट्रांज़िट ([[भूमिगत रेल|त्वरित यातायात]])
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| start = [[रायदुर्ग मेट्रो स्टेशन]]
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| daily_ridership =
| website = {{url|https://haml.co.in/|HAML}}
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| reopen =
| owner = [[हैदराबाद मेट्रो]]
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| linelength = {{convert|31|km|mi|abbr=on}}
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| gauge = [[मानक गेज]]
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| map = {{Airport Express (Hyderabad Metro)}}
| map_state = collapsed
}}
'''हैदराबाद एयरपोर्ट एक्सप्रेस मेट्रो''' या '''कॉरिडोर IV''' रायदुर्ग मेट्रो स्टेशन से [[राजीव गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा|राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे]] तक एक निर्माणाधीन [[हैदराबाद मेट्रो]] लाइन है।<ref>{{cite web|url=https://www.newindianexpress.com/cities/hyderabad/2022/dec/09/from-start-to-finish-hyderabad-airport-metro-expected-to-be-smooth-affair-2526385.html|title=From start to finish, Hyderabad Airport Metro expected to be smooth affair}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/national/telangana/wait-for-next-phase-of-hyderabad-metro-rail-gets-longer/article67411239.ece|title=Wait for next phase of Hyderabad Metro rail gets longer}}</ref> लाइन की कुल लंबाई 31 किमी है।<ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/cities/Hyderabad/airport-express-metro-to-be-elevated-with-25-km-underground-stretch-near-rgia/article66196648.ece|title=Airport Express Metro to be elevated with 2.5-km underground stretch near RGIA}}</ref> हैदराबाद एयरपोर्ट एक्सप्रेस मेट्रो पूरी तरह से [[तेलंगाना सरकार]] द्वारा इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (ईपीसी) मोड के माध्यम से वित्त पोषित है।<ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/cities/Hyderabad/after-many-twists-and-turns-hyderabad-metros-second-phase-finally-in-motion/article66915301.ece|title=After many twists and turns, Hyderabad metro’s second phase finally in motion }}</ref> 13 दिसंबर 2023 को, हैदराबाद एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस को तेलंगाना के मुख्यमंत्री के निर्देश पर रीअलाइनमेंट के लिए रोक दिया गया था।<ref name="december2023hold">{{cite news | url=https://www.thehindu.com/news/national/telangana/telangana-cm-puts-airport-metro-tender-on-hold-wants-line-into-old-city/article67635744.ece | title=Telangana CM puts Airport Metro tender on hold, wants line into Old City | newspaper=The Hindu | date=13 December 2023 }}</ref>
==इतिहास==
2018 में, हैदराबाद एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस को विकसित करने के लिए [[तेलंगाना सरकार]] द्वारा एक विशेष प्रयोजन वाहन कंपनी, हैदराबाद एयरपोर्ट मेट्रो लिमिटेड (HAML) की स्थापना की गई थी।<ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/cities/Hyderabad/metro-rail-to-airport-may-not-take-off/article33031973.ece|title=Metro Rail to airport may not take off}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/national/telangana/govts-open-offer-to-private-firms-for-airport-metro/article65342519.ece|title=Govt’s ‘open offer’ to private firms for Airport Metro}}</ref> एचएमआरएल के प्रबंध निदेशक [[एनवीएस रेड्डी|एन.वी.एस. रेड्डी]] (वेंकटसत्यनारायण रेड्डी नल्लामिली) भी एचएएमएल के प्रभारी हैं। HAML एक विशेष प्रयोजन वाहन है और हैदराबाद मेट्रो रेल लिमिटेड (HMRL), हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HMDA) और TS इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कोऑपरेशन (TSIIC) के बीच एक संयुक्त उद्यम है।<ref>{{cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/nation/in-other-news/281222/hyderabad-express-metro-5-consortiums-qualify-for-final-bids.html|title=Hyderabad Express Metro: 5 consortiums qualify for final bids}}</ref> अगस्त 2019 में, टीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष [[केटी राम राव]] ने कहा कि हैदराबाद मेट्रो एयरपोर्ट एक्सप्रेस पर रहेजा माइंडस्पेस से [[राजीव गाँधी अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र|शमशाबाद आईजीआई हवाई अड्डे]] पर काम जल्द ही शुरू होगा।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/work-on-airport-express-metro-to-begin-soon-ktr/articleshow/70683087.cms|title=Work on Airport Express metro to begin soon: KTR|access-date=17 अगस्त 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190904165347/https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/work-on-airport-express-metro-to-begin-soon-ktr/articleshow/70683087.cms|archive-date=4 सितंबर 2019|url-status=live}}</ref> रायदुर्ग मेट्रो स्टेशन से [[राजीव गाँधी अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र|शमशाबाद आईजीआई हवाई अड्डे]] के लिए रूट खाजागुडा लिंक रोड (केयर हॉस्पिटल के बगल में) के माध्यम से होगा।<ref>{{cite web|url=http://www.newindianexpress.com/cities/hyderabad/2019/aug/17/airport-metro-line-to-cost-rs-5000-cr-2020084.html|title=Hyderabad: Airport Metro line to cost Rs 5,000 crore|access-date=17 अगस्त 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190817174350/http://www.newindianexpress.com/cities/hyderabad/2019/aug/17/airport-metro-line-to-cost-rs-5000-cr-2020084.html|archive-date=17 अगस्त 2019|url-status=live}}</ref> सितंबर 2021 में, हैदराबाद में राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (आरजीआईए) का संचालन करने वाली कंपनी [[जीएमआर समूह]] ने कहा कि वह हवाई अड्डे पर मेट्रो कनेक्टिविटी के लिए {{INR}} 519.52 करोड़ का निवेश करेगी।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/ghial-to-invest-rs-500-cr-for-metro-connectivity-at-airport/articleshow/85849989.cms|title=GHIAL to invest Rs 500 crore for metro connectivity at Hyderabad airport}}</ref><ref>{{cite web|url=https://economictimes.indiatimes.com/industry/indl-goods/svs/construction/gmr-to-invest-over-rs-500-crore-in-hyderabad-airport-metro-link-project/articleshow/85826015.cms|title=GMR to invest over Rs 500 crore in Hyderabad Airport metro link project}}</ref>
[[File:Roda mistry college gachibowli.jpg|thumb|रोड़ा मिस्त्री कॉलेज गाचीबोवली]]
मार्च 2021 में, [[तेलंगाना सरकार]] ने 2021-2022 के राज्य के बजट में हैदराबाद मेट्रो रेल लिमिटेड के लिए {{INR}} 1,000 करोड़ आवंटित किए।<ref>{{cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/nation/politics/180321/budget-no-allocation-for-ghmc-hmda.html|title=Telangana Budget: No allocation for GHMC, HMDA}}</ref><ref>{{cite web|url=https://government.economictimes.indiatimes.com/news/economy/telangana-1000-crore-allocated-for-hyderabad-metro-rail-in-2-30-lakh-crore-budget-2021-22/81582595|title=Telangana: ₹1000 crore allocated for Hyderabad Metro Rail in ₹2.30 lakh crore budget 2021-22}}</ref> मार्च 2022 में, [[तेलंगाना सरकार]] ने 2022-2023 राज्य के बजट में हैदराबाद मेट्रो रेल (HMR) को {{INRConvert|2377.35|c|[[us $Convert]] year=2022}} आवंटित किए। तेलंगाना सरकार ने हैदराबाद मेट्रो रेल के लिए भूमि अधिग्रहण, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने और अन्य विकास कार्यों के लिए {{INR}} 1,500 करोड़, एयरपोर्ट मेट्रो कनेक्टिविटी के लिए {{INR}} 377.35 करोड़ और पुराना शहर (कॉरिडोर II शुरू करने के लिए- एमजीबीएस से फलकनुमा तक ग्रीन लाइन का काम; 5.5 किमी) मेट्रो कनेक्टिविटी के लिए {{INR}} 500 करोड़ की घोषणा की।<ref>{{cite web|url=https://www.indiatoday.in/cities/hyderabad/story/hyderabad-telangana-govt-allocates-funds-metro-connectivity-old-city-airport-1922199-2022-03-08|title=Hyderabad: Telangana govt allocates funds for metro connectivity to old city, airport}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/cities/Hyderabad/plans-for-metro-connectivity-to-old-city-revived/article65202245.ece|title=Plans for metro connectivity to Hyderabad’s Old City revived}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/nation/politics/080322/hmrl-tops-in-budgetary-allocation-for-city-departments.html|title=HMRL tops in budgetary allocation for city departments}}</ref> 31 किलोमीटर की एयरपोर्ट एक्सप्रेस मेट्रो कॉरिडोर को 29.3 किलोमीटर एलिवेटेड और हवाई अड्डे के टर्मिनल से जुड़ने के लिए 1.7 किलोमीटर का भूमिगत खंड प्रस्तावित है। हवाई अड्डे के मार्ग में 9 एलिवेटेड स्टेशन और एक भूमिगत स्टेशन होगा।<ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/cities/Hyderabad/airport-metro-to-have-underground-section-connecting-to-passenger-terminal/article29317205.ece|title=Airport Metro to have underground section connecting to passenger terminal}}</ref> मेट्रो वायाडक्ट IKEA स्टोर के पास जंक्शन को लगभग 21 मीटर (69-फीट) की ऊँचाई पर पार करेगा।<ref>{{cite web|url=https://www.bhaskarhindi.com/politics/news/hyderabad-airport-metro-faces-engineering-challenges-in-critical-area-457646|title=तेलंगाना: हैदराबाद हवाई अड्डा मेट्रो को महत्वपूर्ण क्षेत्र में इंजीनियरिंग चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा}}</ref><ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/officials-take-stock-of-engineering-hurdles-in-hyderabad-airport-metro/articleshow/98054428.cms|title=Officials take stock of engineering hurdles in Hyderabad Airport Metro}}</ref> रायदुर्ग मेट्रो टर्मिनल स्टेशन से, यह खाजागुडा जंक्शन से होकर गुजरेगा, नानकरामगुडा जंक्शन पर आउटर रिंग रोड को छूते हुए, ओआरआर के साथ शमशाबाद हवाई अड्डे तक जाएगा।<ref name="inspectionhillock">{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/national/telangana/hyderabad-airport-metro-will-be-tackling-two-hillocks-on-the-way/article66782220.ece|title=Hyderabad Airport Metro will be tackling two hillocks on the way}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.newindianexpress.com/states/telangana/2022/nov/28/telangana-announces-31-km-metro-line-from-madhapur-to-airport-2522830.html|title=Telangana announces 31-km Metro line from Madhapur to airport}}</ref>
फ़रवरी 2023 में, [[तेलंगाना सरकार]] ने 2023-2024 राज्य के बजट में हैदराबाद एयरपोर्ट मेट्रो को {{INRConvert|500|c|[[us $Convert]] year=2023}} आवंटित किए।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/2-5k-crore-puts-metro-expansion-on-fast-track/articleshow/97673546.cms|title=₹2.5k crore puts Metro expansion on fast track}}</ref><ref>{{cite web|url=https://infra.economictimes.indiatimes.com/news/urban-transportation/rs-2500-crore-for-metro-rail-expansion-in-hyderabad/97691601|title=Rs 2,500 crore for Metro rail expansion in Hyderabad}}</ref> 18 फरवरी 2023 को एचएमआरएल के प्रबंध निदेशक [[एनवीएस रेड्डी|एन.वी.एस. रेड्डी]] ने बताया कि नानकरामगुडा जंक्शन मेट्रो स्टेशन को तीन स्तंभों के साथ पोर्टल संरचना के रूप में डिजाइन किया जाएगा और स्टेशन को जंक्शन के करीब होना आवश्यक है।<ref name=raidurg800m">{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/national/telangana/metro-line-to-be-extended-up-to-mindspace-junction-for-multi-level-raidurg-station-in-hyderabad/article66525088.ece|title=Metro line to be extended up to Mindspace junction for multi-level Raidurg station in Hyderabad}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/nation/in-other-news/190223/hyderabad-airport-metro-line-inspection-to-asses-challenges-for-const.html|title=Hyderabad Airport Metro line: inspection to asses the challenges for construction}}</ref> नानकरामगुड़ा जंक्शन मेट्रो स्टेशन विप्रो सर्कल से करीब 2.5 किमी दूर होगा। जून 2023 में, HAML के प्रबंध निदेशक, एनवीएस रेड्डी ने बताया कि तीन कोच वाली 11 मेट्रो ट्रेनों का ऑर्डर 2023 के अंत तक दिया जाएगा।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/11-trains-to-operate-on-airport-line/articleshow/101326955.cms|title=11 trains to operate on Airport line}}</ref>
===आधारशिला रखने की रस्म===
[[File:Hyderabadairportmetro foundation stone.jpg|thumb|हैदराबाद एयरपोर्ट एक्सप्रेस मेट्रो का शिलान्यास]]
तेलंगाना के मुख्यमंत्री [[के॰ चंद्रशेखर राव]] 9 दिसंबर 2022 को हैदराबाद मेट्रो एयरपोर्ट एक्सप्रेस की आधारशिला रखा।<ref>{{cite web|url=https://www.abplive.com/news/india/cm-kcr-will-lay-the-foundation-stone-of-hyderabad-airport-express-metro-on-dec-9-it-will-be-ready-in-3-years-ann-2268937|title=Telangana: सीएम KCR नौ दिसंबर को हैदराबाद एयरपोर्ट एक्सप्रेस मेट्रो की आधारशिला रखेंगे, तीन साल में बनकर होगा तैयार}}</ref> इसे लगभग {{INRConvert|6250|c|[[us $Convert]] year=2022}} की लागत से बनाया जाएगा।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/airport-express-metro-on-track-telangana-cm-k-chandrasekhar-rao-to-lay-foundation-on-dec-9/articleshow/95812041.cms|title=Airport Express Metro on track, Telangana CM K Chandrasekhar Rao to lay foundation on December 9}}</ref> हैदराबाद एयरपोर्ट एक्सप्रेस मेट्रो एक तेलंगाना राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित परियोजना है और 2026 के शुरुआत तक पूरी हो जाएगी। रायदुर्ग स्टेशन से नए एयरपोर्ट मेट्रो रायदुर्ग स्टेशन तक मौजूदा कॉरिडोर तीन (ब्लू लाइन) को लगभग 900 मीटर तक बढ़ाया जाएगा,<ref>{{cite web|url=https://infra.economictimes.indiatimes.com/news/urban-transportation/hyderabad-airport-metro-works-to-be-fast-tracked/96335683|title=Hyderabad Airport Metro works to be fast-tracked}}</ref><ref name=raidurg800m"/> इस प्रकार यह एक एकीकृत चार-स्तरीय स्टेशन होगा, जो कुछ हद तक मेट्रो कॉरिडोर-2 (ग्रीन लाइन) के जेबीएस स्टेशन के समान होगा। ) और अमीरपेट इंटरचेंज स्टेशन। विस्तारित ब्लू लाइन टर्मिनल स्टेशन और एयरपोर्ट मेट्रो स्टेशन को एक के ऊपर एक संयुक्त इंटरचेंज स्टेशन के रूप में नियोजित किया गया है।<ref>{{cite web|url=https://www.newindianexpress.com/states/telangana/2022/dec/19/haml-all-set-to-fast-track-hyd-airport-metro-works-2529492.html|title=HAML all set to fast track Hyd Airport Metro works}}</ref> संयुक्त इंटरचेंज स्टेशन का डिज़ाइन IKEA जंक्शन के बाद L&T और अरबिंदो भवनों के सामने जगह की कमी के कारण है। पहले दो स्तर एयरपोर्ट मेट्रो स्टेशन को समायोजित करेंगे और शीर्ष दो स्तर विस्तारित ब्लू लाइन (कॉरिडोर 3) टर्मिनल स्टेशन को समायोजित करेंगे।
===अलाइनमेंट को अंतिम रूप देने के लिए पूर्व निर्माण सर्वेक्षण कार्य===
दिसंबर 2022 में, हैदराबाद एयरपोर्ट मेट्रो लिमिटेड (HAML) ने अलाइनमेंट को अंतिम रूप देने और स्टेशन स्थानों का निर्धारण के लिए जमीनी डेटा इकट्ठा करने के लिए दो सर्वेक्षण टीमों को लगाया।<ref>{{cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/nation/in-other-news/181222/haml-to-fast-track-airport-metro.html|title=HAML to fast track Hyderabad Airport Metro}}</ref> जनवरी 2023 में, [[केटी राम राव]] ने हैदराबाद एयरपोर्ट एक्सप्रेस मेट्रो परियोजना के लिए केंद्र सरकार की सैद्धांतिक मंजूरी मांगी।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/telangana-minister-kt-rama-rao-sends-rs-13000-crore-wish-list-to-centre/articleshow/96841437.cms|title=Telangana minister KT Rama Rao sends Rs 13,000 crore wish list to Centre}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/national/telangana/allocate-more-for-hyd-projects-in-union-budget-ktr-writes-to-centre/article66353852.ece|title=Allocate more for Hyderabad projects in Union Budget, KTR writes to Centre}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/nation/current-affairs/080123/ktr-seeks-special-package-for-hyderabad-in-union-budget.html|title=KTR seeks special package for Hyderabad in Union Budget}}</ref> हैदराबाद हवाईअड्डा मेट्रो कार्यों की ग्राउंडिंग में तेजी लाने के लिए, यह निर्माण-पूर्व गतिविधि एक साथ शुरू की गई थी।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/airport-metro-works-in-full-swing/articleshow/96999533.cms|title=Airport Metro works in full swing}}</ref> सर्वेक्षण का काम उपग्रह आधारित डिफरेंशियल जीपीएस और इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन दोनों का उपयोग करके किया जाता है।<ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/cities/Hyderabad/haml-completes-21-km-of-pre-construction-survey-work/article66378276.ece|title=HAML completes 21 km of pre-construction survey work}}</ref> 14 जनवरी 2023 तक, रायदुर्ग मेट्रो स्टेशन से शमशाबाद के पास फोर्ट ग्रैंड अंडरपास तक 21 किमी का सर्वेक्षण पूरा हो गया था<ref>{{cite web|url=https://www.newindianexpress.com/cities/hyderabad/2023/jan/15/pre-construction-works-for-hyderabad-airport-metro-worksin-full-swing-2538042.html|title=Pre-construction works for Hyderabad Airport Metro works in full swing}}</ref><ref name="fordgrand">{{cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/nation/current-affairs/140123/airport-metro-progressing-at-a-brisk-pace.html|title=Airport metro progressing at a brisk pace}}</ref> और शेष 10 किमी जनवरी 2023 के अंत तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद एयरपोर्ट मेट्रो अलाइनमेंट की पेग मार्किंग शुरू हो जाएगी।<ref name="fordgrand"/> 31 जनवरी 2023 को एचएमआरएल के प्रबंध निदेशक [[एनवीएस रेड्डी|एन.वी.एस. रेड्डी]] ने बताया कि नानकरामगुडा जंक्शन से TSPA (APPA) जंक्शन तक चौड़ी सर्विस रोड के मध्य मध्य में मेट्रो के खंभे स्थित होंगे।<ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/cities/Hyderabad/airport-metro-to-minimise-acquisition-of-private-properties/article66446658.ece|title=Airport Metro to minimise acquisition of private properties}}</ref><ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/hyderabad-airport-metro-to-finetune-alignment-for-station-location/articleshow/97427656.cms|title=Hyderabad Airport Metro to finetune alignment for station location}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/nation/in-other-news/290123/avoid-land-acquisition-for-airport-metro-haml-md-to-officials.html|title=Avoid land acquisition for Airport Metro: HAML MD to officials}}</ref> 28 फरवरी 2023 को एचएमआरएल के प्रबंध निदेशक [[एनवीएस रेड्डी|एन.वी.एस. रेड्डी]] ने बताया कि एयरपोर्ट मेट्रो कॉरिडोर के लिए सर्वे पूरा हो चुका है और जमीन पर इसके एलाइनमेंट की पेग मार्किंग का काम शुरू हो गया है।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/hyd-airport-metro-peg-marking-work-begins/articleshow/98321804.cms?from=mdr|title=Hyd Airport metro peg marking work begins}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/national/telangana/airport-metro-project-survey-completed-peg-marking-on/article66563047.ece|title=Airport Metro project survey completed, peg marking on}}</ref><ref>{{cite web|url=https://infra.economictimes.indiatimes.com/news/urban-transportation/survey-completed-for-hyderabad-airport-metro/98333282|title=Survey completed for Hyderabad Airport Metro}}</ref> रात में दृश्यता के लिए एक रेट्रो-रिफ्लेक्टिव शीट के साथ एल्यूमीनियम बोर्ड भी सड़क का मध्य में एम्बेड किए जा रहे हैं।<ref>{{cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/nation/in-other-news/010323/hyderabad-airport-metro-survey-ready.html|title=Hyderabad Airport Metro survey ready}}</ref><ref>{{cite web|url=https://indianexpress.com/article/cities/hyderabad/hyderabad-airport-metro-peg-markings-corridor-8471903/|title=Hyderabad Airport Metro: Works on ground begin with peg markings along corridor}}</ref> 27 मार्च 2023 को एचएमआरएल के प्रबंध निदेशक [[एनवीएस रेड्डी|एन.वी.एस. रेड्डी]] ने बताया कि एलाइनमेंट तय कर लिया गया है और एयरपोर्ट मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए पेग मार्किंग का काम पूरा हो गया है। खंभों के लिए सटीक स्थानों को अंतिम रूप देने से पहले, सड़क की सतह से लगभग 40 फीट की गहराई तक बोरहोल मिट्टी के नमूनों के इन-सीटू परीक्षणों और प्रयोगशाला परीक्षणों के माध्यम से [[मृदा परीक्षण|मिट्टी परीक्षण]] शुरू हो गया है।<ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/national/telangana/soil-testing-commences-for-airport-metro/article66667695.ece|title=Soil testing commences for Airport Metro}}</ref> खंभे लगाने के लिए 100 स्थानों पर इंजीनियरिंग विंग द्वारा दो माह की अवधि में मिट्टी की जांच की जाएगी।<ref>{{cite web|url=https://indianexpress.com/article/cities/hyderabad/soil-testing-announced-metro-corridor-hyderabad-airport-8522377/|title=Soil testing announced for 31km metro corridor to Hyderabad airport}}</ref>
26 अप्रैल 2023 को, एचएएमएल के प्रबंध निदेशक, एनवीएस रेड्डी ने राजेंद्रनगर पहाड़ी पर लगभग 1.3 किमी के एयरपोर्ट मेट्रो संरेखण के शमशाबाद हवाई अड्डे के मेट्रो खंड का निरीक्षण किया।<ref name="inspectionhillock"/><ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/metro-alignment-at-rajendranagar-stretch-examined/articleshow/99801540.cms?from=mdr|title=Metro alignment at Rajendranagar stretch examined in Hyderabad}}</ref> 30 अप्रैल 2023 को हैदराबाद एयरपोर्ट मेट्रो लिमिटेड (एचएएमएल) के प्रबंध निदेशक [[एनवीएस रेड्डी]] और अन्य लोगों ने दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस पर यात्रा करके निरीक्षण किया, नई दिल्ली स्टेशन पर शहर की तरफ चेक-इन सुविधा की जांच की।<ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/national/telangana/hyderabad-airport-metro-officials-take-a-ride-on-delhi-airport-line/article66796381.ece|title=Hyderabad Airport Metro officials take a ride on Delhi Airport line}}</ref><ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/haml-md-visits-del-airport-metro-to-study-facilities-operations/articleshow/99898386.cms|title=HAML MD visits Del airport Metro to study facilities & operations}}</ref> 15 मई 2023 को एचएएमएल के प्रबंध निदेशक [[एनवीएस रेड्डी]] ने बताया कि भविष्य में चार अतिरिक्त स्टेशनों के निर्माण का भी प्रावधान रखा गया है।<ref name="additionalfour">{{cite web|url=https://indianexpress.com/article/cities/hyderabad/hyderabad-airport-metro-gloval-tenders-8614055/|title=Hyderabad Airport Metro invites global tenders, keeps open option for 4 more stations for future needs}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.business-standard.com/companies/news/haml-invites-global-tenders-for-epc-contractor-for-hyderabad-airport-metro-123051600853_1.html|title=HAML invites global tenders for EPC contractor for Hyderabad Airport Metro}}</ref><ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/telangana-calls-global-tenders-for-airport-metro/articleshow/100288650.cms?from=mdr|title=Telangana calls global tenders for Airport Metro}}</ref>
===जनरल कंसल्टेंट का चयन===
3 दिसंबर 2022 को, हैदराबाद एयरपोर्ट मेट्रो लिमिटेड (एचएएमएल) ने एयरपोर्ट एक्सप्रेस के डिजाइन और बिल्ड (डीबी) के लिए जनरल कंसल्टेंट (जीसी) के चयन के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई कम आरएफक्यू) आमंत्रित किया।<ref>{{cite web|url=https://hmrl.co.in/tenders/03-12-2022.pdf|title=tender haml1|access-date=11 मार्च 2023|archive-date=11 मार्च 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230311122411/https://hmrl.co.in/tenders/03-12-2022.pdf|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite web|url=https://hmrl.co.in/tenders/01-12-2022.pdf|title=tender haml2|access-date=11 मार्च 2023|archive-date=11 मार्च 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230311122410/https://hmrl.co.in/tenders/01-12-2022.pdf|url-status=dead}}</ref> ईओआई जमा करने की आखिरी तारीख 13 दिसंबर, 2022 है और बोली जमा करने की आखिरी तारीख 20 जनवरी, 2023 है।<ref>{{cite web|url=https://www.newindianexpress.com/cities/hyderabad/2022/dec/13/hyderabad-airport-metro-rail-extendslast-date-for-submission-of-bids-for-gc-2527600.html|title=Hyderabad Airport Metro Rail extends last date for submission of bids for GC}}</ref> इसके लिए प्री एप्लीकेशन कॉन्फ्रेंस हैदराबाद में 6 दिसंबर, 2022 को मैरीगोल्ड होटल, ग्रीन लैंड्स, बेगमपेट में आयोजित की गई थी।<ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/national/telangana/airport-metro-will-be-high-speed-work-will-need-partners-having-extraordinary-targets-haml-md/article66230598.ece|title=Airport Metro will be ‘high-speed work’, will need partners having ‘extraordinary targets’: HAML MD}}</ref> बैठक में लगभग 23 प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय इंजीनियरिंग सलाहकार फर्मों ने भाग लिया। 21 दिसंबर 2022 तक, 5 कंसोर्टियम ने हैदराबाद एयरपोर्ट मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए जनरल कंसल्टेंट्स (जीसी) के लिए रिक्वेस्ट फॉर क्वालिफिकेशन (आरएफक्यू) के लिए आवेदन किया।<ref>{{cite web|url=https://www.newindianexpress.com/cities/hyderabad/2022/dec/22/five-consortiums-bid-for-hyderabad-airport-metro-corridor-gc-2530463.html|title=Five consortiums bid for Hyderabad Airport Metro Corridor GC}}</ref>
{|class="wikitable" style="text-align: center;"
|-
!#
! Pre-qualified Bidders for RfQ for the General Consultants (GC)
|-
|1|| सिस्ट्रा (फ्रांस) + राइट्स + डीबी इंजीनियरिंग एंड कंसल्टिंग (जर्मनी)
|-
|2 || Ayesa Ingenieria y Arquitectura (Spain) + Nippon Koei(Japan) + Aarvee Associates
|-
|3 || Technica y Proyectos (Spain) + PINI Group(Switzerland)
|-
|4 || AECOM India + Egis Rail (France) + Egis India
|-
|5 ||Consulting Engineers Group + Korea National Railway(दक्षिण कोरिया)
|}
28 दिसंबर 2022 को, उनके आवेदनों के मूल्यांकन के बाद, हैदराबाद एयरपोर्ट मेट्रो लिमिटेड (HAML) ने घोषणा की कि सभी पांच कंसोर्टिया ने अगले चरण के बोली दस्तावेजों यानी प्रस्ताव के लिए अनुरोध (RfP) में भाग लेने के लिए अर्हता प्राप्त कर ली है<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/five-engineering-groups-selected-to-bid-for-hyderabad-airport-metro/articleshow/96582128.cms?from=mdr|title=Five engineering groups selected to bid for Hyderabad airport metro}}</ref><ref>{{cite web|url=https://infra.economictimes.indiatimes.com/news/urban-transportation/five-consortiums-qualify-for-hyderabad-airport-metro-gc-bids/96590498|title=Five consortiums qualify for Hyderabad Airport Metro GC bids}}</ref> और उन्हें अपना बोलियां 20 जनवरी, 2023 तक जमा करना होगा।<ref>{{cite web|url=https://www.business-standard.com/article/current-affairs/five-consortiums-qualify-hyderabad-airport-metro-bid-to-submit-by-jan-20-122122800702_1.html|title=Five consortiums qualify Hyderabad Airport Metro bid, to submit by Jan 20}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/national/telangana/all-five-consortia-qualify-for-final-bid-for-hyderabad-airport-metro-gc/article66313163.ece|title=All five consortia qualify for final bid for Hyderabad Airport Metro GC}}</ref> 20 अप्रैल 2023 को, सिस्ट्रा (फ्रांस) + राइट्स + डीबी इंजीनियरिंग एंड कंसल्टिंग (जर्मनी) को तकनीकी समिति की सिफारिशों के आधार पर एयरपोर्ट मेट्रो परियोजना के लिए जनरल कंसल्टेंट्स (जीसी) के रूप में चुना गया था।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/systra-led-group-selected-as-consultants-for-airport-metro/articleshow/99651115.cms|title=Systra-led group selected as consultants for Airport Metro}}</ref> सिस्ट्रा के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने अपनी साख के लिए उच्चतम तकनीकी स्कोर प्राप्त किया और इंजीनियरिंग परामर्श सेवाएं प्रदान करने के लिए {{INRConvert|98.54|c|[[us $Convert]] year=2023}} का न्यूनतम वित्तीय उद्धरण दिया।<ref>{{cite web|url=https://ianslive.in/news/engineering_consultant_selected_for_hyderabad_airport_metro-961554/BUSINESS/5|title=Engineering consultant selected for Hyderabad Airport Metro|access-date=20 अप्रैल 2023|archive-date=20 अप्रैल 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230420170458/https://ianslive.in/news/engineering_consultant_selected_for_hyderabad_airport_metro-961554/BUSINESS/5|url-status=dead}}</ref> जनरल कंसल्टेंट्स (जीसी) का तत्काल कार्य एयरपोर्ट मेट्रो परियोजना के लिए ठेकेदार का चयन करने के लिए इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण निविदा दस्तावेज तैयार करना था।<ref>{{cite web|url=https://www.newindianexpress.com/cities/hyderabad/2023/apr/21/systra-led-consortium-picked-as-airport-metro-consultant-2567971.html|title=Systra-led consortium picked as Airport Metro consultant}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/nation/current-affairs/110523/old-city-metro-project-in-limbo-while-hyderabad-airport-metro-line-mo.html|title=Old City Metro project in limbo, while Hyderabad Airport line moves ahead}}</ref> एयरपोर्ट मेट्रो प्रोजेक्ट के निर्माण के दौरान सिस्ट्रा के नेतृत्व वाला कंसोर्टियम विभिन्न रेलवे इंजीनियरिंग विषयों के 18 विशेषज्ञों और लगभग 70 वरिष्ठ और फील्ड इंजीनियरिंग कर्मियों को तैनात करेगा।
===राइट-ऑफ़-वे (आरओडब्ल्यू) को चिन्हित करने के लिए सलाहकार का चयन===
दिसंबर 2022 में, हैदराबाद एयरपोर्ट मेट्रो लिमिटेड (HAML) ने माइंडस्पेस जंक्शन से RGIA एयरपोर्ट तक वनस्पति को साफ़ करने और राइट-ऑफ-वे (RoW) को चिन्हित करने के लिए बोलियाँ आमंत्रित कीं।<ref>{{cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/nation/in-other-news/261222/haml-progressing-at-brisk-pace-bids-invited-for-clearing-marking-row.html|title=Airport Metro papers move at top speed}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.newindianexpress.com/states/telangana/2022/dec/29/jungle-clearance-for-airport-metro-project-begins-in-telangana-2532689.html|title=Jungle clearance for airport metro project begins in Telangana}}</ref> कंसल्टेंट्स को तीन महीने के भीतर प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए कहा जाएगा। सफल बोलीदाता को पेड़ काटने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
{|class="wikitable" style="text-align: center;"
|-
!#
!Starting Section for marking RoW
!Terminal section
!स्वीकृत राशि (in {{INR}})
|-
|1|| माइंडस्पेस जंक्शन || माय होम अवतार, नारसिंगी || 95 lakh
|-
|2 || Rajapushpa Provincia Apartment, Narsingi, || TSPA || 80 lakh
|-
|3 ||Rajiv Gruhakalpa || Bengaluru highway || 75 lakh
|-
|4 || Chevella road || Musi river, Rajendranagar ||90 lakh
|-
|5 ||ORR exit , Rajendranagar || Shivam Road || 86 lakh
|-
|6 || Shamshabad junction || RGIA, Hyderabad || 98 lakh
|}
===निर्माण ठेके के लिए निविदा आमंत्रित करना===
15 मई 2023 को, हैदराबाद एयरपोर्ट मेट्रो लिमिटेड ने एयरपोर्ट मेट्रो लाइन के डिजाइन और निर्माण कार्य के लिए खुली निविदा आमंत्रित की।<ref>{{cite web|url=https://hmrl.co.in/wp-content/uploads/2023/05/HAML-dt-15.05.2023.pdf|title=International Competitive bidding ICB}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.thenewsminute.com/article/hyderabad-metro-rail-invites-tenders-airport-corridor-rs-5688-cr-contract-value-177316|title=Hyderabad Metro Rail invites tenders for Airport corridor at Rs 5,688 cr contract value}}</ref> अनुमानित अनुबंध मूल्य {{INRConvert|5688|c|[[us $Convert]] year=2023}} है और अनुबंध की अवधि 3 वर्ष है।<ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/national/telangana/global-tenders-invited-for-airport-metro-project/article66857295.ece|title=Global tenders invited for Airport Metro project}}</ref><ref name="additionalfour"/> बोली जमा करने की अंतिम तिथि 5 जुलाई 2023 है।<ref>{{cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/nation/current-affairs/160523/global-tenders-invited-for-airport-metro-project.html|title=Global tenders invited for Airport Metro project}}</ref> चयनित ईपीसी ठेकेदार को सितंबर 2023 तक हैदराबाद एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस का जमीनी कार्य शुरू करना होगा।<ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/cities/Hyderabad/airport-metro-works-scheduled-to-commence-from-sept/article66969040.ece|title=Airport Metro works scheduled to commence from Sept.}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.business-standard.com/india-news/gmr-airport-to-contribute-10-for-hyderabad-airport-metro-project-123061401197_1.html|title=GMR Airport to contribute 10% for Hyderabad Airport Metro Project}}</ref> 14 जून 2023 को, हैदराबाद मेट्रो रेल कार्यालय में संभावित निर्माण फर्मों के साथ एक पूर्व-बोली बैठक आयोजित की गई, जहाँ [[लार्सन एंड टूब्रो|L&T]], Alstom, Siemens, Tata Projects [[इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड|इरकॉन]], RVNL, BEML, Pandrol Rahee Technologies, आदि जैसी 13 कंपनियों ने भाग लिया,<ref>{{cite web|url=https://www.thenewsminute.com/article/hyderabad-airport-metro-13-companies-participate-pre-bidding-meeting-178526|title=Hyderabad airport metro: 13 companies participate in pre-bidding meeting}}</ref> जिन्हें बताया गया कि मिट्टी परीक्षण चल रहा है।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/13-companies-partipate-in-hyd-airport-metro-pre-bid-meeting/articleshow/101006002.cms|title=13 companies partipate in Hyd airport metro pre-bid meeting}}</ref><reF>{{cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/nation/in-other-news/140623/pre-bid-meeting-for-hyderabad-airport-metro-project-held.html|title=Pre-bid meeting for Hyderabad Airport Metro project held}}</ref> मूल जमा करने की तारीख 1 सप्ताह बढ़ा दी गई और बोलियाँ 12 जुलाई 2023 को खोली जाएंगी।<ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/national/telangana/airport-metro-bids-to-be-opened-on-july-12/article67063593.ece|title=Airport Metro bids to be opened on July 12}}</ref> 13 जुलाई 2023 को बोलियाँ खोले जाने के बाद, [[लार्सन एंड टूब्रो]] और एनसीसी लिमिटेड (पूर्व में नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी) हैदराबाद एयरपोर्ट मेट्रो परियोजना के लिए दो प्रतिस्पर्धी बोलीदाताओं के रूप में उभरी।<ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/national/telangana/lt-ncc-in-race-for-hyderabad-airport-metro-work/article67075981.ece|title=L&T, NCC in race for Hyderabad Airport Metro work}}</ref> दोनों निर्माण फर्मों ने बैंक गारंटी में 29-29 करोड़ रुपये की सुरक्षा जमा राशि जमा की है।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/lt-and-ncc-in-race-to-bag-airport-metro-project-bid-for-rs-5688cr-tender/articleshow/101740821.cms?from=mdr|title=L&T and NCC in race to bag Airport Metro Project, bid for Rs 5,688cr tender}}</ref> 14 अगस्त 2023 को बोलियां खुलने के बाद [[लार्सन एंड टूब्रो]] सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनकर उभरी।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/lt-is-lowest-bidder-for-hyderabad-airport-metro-project/articleshow/102735418.cms?from=mdr|title=L&T is lowest bidder for Hyderabad Airport Metro project}}</ref>
==फाइनेंस (वित्त)==
हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एचएमडीए) और [[जीएमआर समूह]] ने {{INRConvert|625|c|[[us $Convert]] year=2022}} का योगदान दिया, या परियोजना की लागत का 10 प्रतिशत।<ref>{{cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/nation/current-affairs/091222/we-build-metro-without-central-funds-asserts-cm-kcr.html|title=We will build Metro without Central funds, asserts CM KCR}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/national/telangana/chief-minister-k-chandrasekhar-rao-asks-officials-to-plan-for-future-infra-needs-of-capital/article66242670.ece|title=Chief Minister K Chandrasekhar Rao asks officials to plan for future infra needs of capital}}</ref>
==स्टेशन==
{| class="wikitable" style="text-align: center;"
|-
! colspan="6" align="center" style="background:orange;" |<span style="color:WHITE;">'''हैदराबाद एयरपोर्ट एक्सप्रेस मेट्रो'''</span>
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! rowspan="2"|#
! colspan="2"|Station Name
! rowspan="2"|Opened
! rowspan="2"|Connections
! rowspan="2"|Alignment
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! [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]||[[हिन्दी]]
|-
|1||Raidurg || रायदुर्ग || Under construction || Airport Shuttle </br> ब्लू लाइन || एलिवेटेड
|-
|2|| Biodiversity Junction || Bio डायवर्सिटी जंक्शन|| Under construction || None || एलिवेटेड
|-
|3|| Khajaguda || [[खाजागुडा]] || Under construction || None || एलिवेटेड
|-
|4|| Nanakramguda Junction|| नानकरामगुडा जंक्शन || Under construction || None || एलिवेटेड
|-
|5|| Narsingi || [[नारसिंगी, रंगारेड्डी|नारसिंगी]] || Under construction || None || एलिवेटेड
|-
|6|| TS Police Academy || TS Police Academy/मंचीरेवुला || Under construction || None || एलिवेटेड
|-
|7|| Rajendranagar/Satamrai || राजेंद्रनगर || Under construction || None || एलिवेटेड
|-
|8|| Shamshabad || [[शम्शाबाद, तेलंगाना|शम्शाबाद]] || Under construction || None || एलिवेटेड
|-
|9|| Airport Cargo || Airport Cargo|| Under construction || None || एलिवेटेड
|-
|10|| RGIA Terminal || RGIA Terminal || Under construction || None || Underground
|}
==डिपो==
10 अगस्त 2023 को जीएमआर एयरपोर्ट को डिपो के निर्माण के लिए 48 एकड़ जमीन सौंपने के लिए कहा गया था।<ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/national/telangana/gmr-airport-asked-to-hand-over-48-acres-of-land-for-metro-rail-depot/article67180395.ece|title=GMR Airport asked to hand over 48 acres of land for Metro rail depot}}</ref>
==एयरपोर्ट कनेक्टिविटी से परे लाभ==
हवाई यात्री रायदुर्ग मेट्रो स्टेशन पर ही चेक-इन और अपने सामान के साथ भाग लेने में सक्षम होंगे और राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सीधे बोर्डिंग गेट तक पहुंचेंगे।<ref>{{cite web|url=https://indianexpress.com/article/cities/hyderabad/hyderabad-airport-metro-air-passengers-check-in-station-hmrl-md-8296714/|title=Once Hyderabad Airport Metro opens, air passengers can check in at Metro station: HMRL MD}}</ref><ref>{{cite web|url=https://indianexpress.com/article/cities/hyderabad/hyderabad-airport-metro-better-hong-kong-gatwick-experience-hmrl-md-8313853/|title=We want Hyderabad Airport Metro to be better than Hong Kong and Gatwick in terms of experience: HMRL MD}}</ref> मेट्रो स्टेशन पर मल्टी-लोकेशन चेक-इन सुविधा दक्षिणी हैदराबाद और उपनगरीय क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण सार्वजनिक परिवहन लिंक होगी। हैदराबाद एयरपोर्ट एक्सप्रेस मेट्रो आदिबाटला में जीएमआर एरोसिटी हैदराबाद और प्रस्तावित फार्मा सिटी के लिए एक महत्वपूर्ण लिंक प्रदान करेगी। माइंडस्पेस जंक्शन से हैदराबाद हवाई अड्डे तक का यात्रा समय 26 मिनट होगा। बेहतर यात्री सुरक्षा के लिए आधी ऊंचाई के प्लेटफॉर्म स्क्रीन दरवाजे (पीएसडी) का प्रावधान होगा।<ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/national/telangana/airport-metro-to-have-seating-better-aesthetics-and-an-aerodynamic-model/article66239179.ece|title=Airport Metro to have seating, better aesthetics and an aerodynamic model}}</ref> प्रत्येक स्टेशन पर बोल्स्टर-लेस बोगियां और स्वचालित किराया संग्रह (एएफसी) द्वार होंगे। यात्रियों को उड़ानों के बारे में सूचित रखने के लिए, सभी हैदराबाद हवाई अड्डे के मेट्रो स्टेशनों पर एक उड़ान सूचना प्रदर्शन प्रणाली (FIDS) और सूचना डेस्क होगी। हैदराबाद एयरपोर्ट एक्सप्रेस मेट्रो एयरपोर्ट स्टेशन यात्री टर्मिनल के नीचे होगा और लिफ्ट, एस्केलेटर और सीढ़ियों के माध्यम से यात्रियों को गेट तक पहुंचाएगा।<ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/national/telangana/scr-junks-plan-to-extend-railway-line-to-rgia/article66419948.ece|title=SCR junks plan to extend railway line to RGIA}}</ref>
निम्न आय वर्ग के लिए किफायती आवास उपलब्ध कराने और मध्यम वर्ग के लिए कम लागत पर बेहतर आवास प्रदान करने के लिए शहर के बाहरी इलाकों के विकास को सुविधाजनक बनाने के अवसर के रूप में एयरपोर्ट मेट्रो परियोजना की योजना बनाई गई है। यह परियोजना न केवल हवाई अड्डे के यात्रियों के लिए डिज़ाइन की गई है, बल्कि उन लोगों के रिवर्स आवागमन के लिए भी है जो शहर के विस्तारित हिस्सों में रहते हैं और लगभग 20 मिनट के भीतर शहर में अपने कार्यस्थल तक पहुँचते हैं। अच्छी पार्किंग सुविधा प्रदान करने के लिए स्टेशनों के पास खाली सरकारी भूमि पार्सल की पहचान की जाएगी। जंक्शनों के सभी तरफ लैंडिंग के साथ बहु-सशस्त्र स्काईवॉक आसान पहुंच के लिए और एयरपोर्ट मेट्रो को पसंदीदा यात्रा विकल्प बनाने के लिए प्रदान किया जाएगा। हैदराबाद के इस अभूतपूर्व विकास को सुविधाजनक बनाने और पूरा करने के लिए एयरपोर्ट मेट्रो को जोड़ा जा रहा है।
==फलकनुमा से दूसरी एयरपोर्ट कनेक्टिविटी==
पुराने शहर के [[फलकनुमा पैलेस|फलकनुमा]] से [[राजीव गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा]], [[शम्शाबाद, तेलंगाना|शम्शाबाद]] को दूसरी कनेक्टिविटी देने का प्रस्ताव है।<ref>{{cite web|url=https://www.newindianexpress.com/states/telangana/2023/aug/11/ktr-directs-hmrl-to-draw-plans-for-another-metro-line-to-airport-2604128.html|title=KTR directs HMRL to draw plans for another Metro line to airport}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.newindianexpress.com/cities/hyderabad/2018/may/02/metro-to-hyderabad-airport-via-falaknuma-too-1808987.html|title=Metro to Hyderabad airport via Falaknuma too!}}</ref><ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/metro-corridors-to-crisscross-city-for-airport-link/articleshow/64549811.cms|title=Metro corridors to crisscross Hyderabad for airport link}}</ref> जनवरी 2024 में, संशोधित एयरपोर्ट मेट्रो लाइन में इंटर-चेंज मेट्रो स्टेशन के रूप में चंद्रयानगुट्टा होगा।<ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/cities/Hyderabad/telangana-cm-revanth-reddy-laid-the-foundation-stone-for-hyderabad-old-city-metro-rail/article67930239.ece|title=My responsibility to get funds and build expanded Hyderabad metro routes: Telangana CM Revanth Reddy}}</ref> शेष 5.5-किमी एमजीबीएस-फलकनुमा मार्ग को चंद्रयानगुट्टा तक 1.5 किमी और बढ़ाया जाएगा।<ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/news/cities/Hyderabad/revised-airport-metro-line-to-have-chandrayangutta-as-inter-change-station/article67715791.ece|title=Revised airport metro line to have Chandrayangutta as inter-change station}}</ref><ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/expansion-of-hyderabad-metro-phaseii-with-new-routes-to-airport/articleshow/107072419.cms|title=All 4 new Hyderabad Metro rail routes lead to airport}}</ref> नव नियोजित हवाईअड्डा लाइन नागोल - एलबी नगर - चंद्रायनगुट्टा - मैलारदेवपल्ली - पी7 रोड - शमशाबाद हवाईअड्डा है।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/old-city-metro-foundation-on-march-8/articleshow/108212189.cms|title=Old city metro foundation on March 8}}</ref>
==इन्हें भी देखें==
* दिल्ली एयरपोर्ट एक्सप्रेस मेट्रो
* नम्मा मेट्रो ओआरआर-एयरपोर्ट मेट्रो लाइन
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://hmrl.co.in/tenders/ HAML टेंडर निविदा]
[[श्रेणी:भारत में मेट्रो रेल]]
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बिशनगढ़
0
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text/x-wiki
'''बिशनगढ़''' राजस्थान (भारत) के जालौर जिले में स्थित शहर है। यहाँ का पिन कोड 343042 है। यह जालौर जिले का अठारहवाँ थाना है।<ref>{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jalore/news/bishangarh-became-the-18th-police-station-of-jalore-district-130026613.html|title=जालोर जिले का 18वां थाना बना बिशनगढ़: जमीन अलॉटमेंट की प्रक्रिया हुई पूरी, कवरेज एरिया में 26 गांव किए शामिल - Jalore News|date=2022-07-07|website=Dainik Bhaskar|language=hi|access-date=2026-10-17}}</ref> जवाई यहाँ की प्रमुख नदी है जिसपर एक पुल बनाया गया है।<ref>{{Cite web|url=https://www.patrika.com/jalore-news/bridge-at-jawai-river-at-bishangarh-road-jalore-5326212|title=बारिश में जवाई नदी में तेज बहाव हुआ तो भी नहीं रुकेगा रास्ता, फर्राटे से पार हो जाएगा बहाव वाला क्षेत्र {{!}} Bridge At Jawai River At Bishangarh Road Jalore|date=2019-11-07|website=Patrika News|language=hi|access-date=2026-10-17}}</ref>
== प्रमुख स्थान ==
# मुडे़श्वर मंदिर
# कैलाश धाम
# सूर्य मंदिर
# माजिसा धाम
# बिशनगढ़ स्टेडियम।
# जवाई नदी
# बिशनगढ़ बस डिपो।
# बिशनगढ़ रेलवे स्टेशन।
# बिशनगढ़ ब्रिज।
# विश्वविद्यालय
# महाराणा प्रताप सर्कल
# पुलिस थाना।
# भारतीय स्टेट बैंक
# मरुधर ग्रामीण बैंक
# इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप
# हवाई अड्डा
# हेलीपोर्ट
== संदर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:राजस्थान के शहर]]
[[श्रेणी:जालौर ज़िला]]
[[श्रेणी:राजस्थान के विमानक्षेत्र]]
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साइकोलॉग्स
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{{Infobox magazine
|title = साइकोलॉग्स
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| editor = अरविन्द ओत्ता<ref>{{cite news |title=“Psychologs magazine helped me change my perspective about mental health,” says actor Rushad Rana |url=https://www.pinkvilla.com/entertainment/psychologs-magazine-helped-me-change-my-perspective-about-mental-health-says-actor-rushad-rana-1204182 |work=PINKVILLA |date=20 December 2022 |language=en |access-date=24 जनवरी 2023 |archive-date=11 जनवरी 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230111060721/https://www.pinkvilla.com/entertainment/psychologs-magazine-helped-me-change-my-perspective-about-mental-health-says-actor-rushad-rana-1204182 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |title=Editorial Board |url=https://www.psychologs.com/editorial-board/ |website=Psychologs Magazine}}</ref><ref>{{cite news |title=साइकोलॉग्स मैगज़ीन में शामिल हुए देश के जाने माने मेन्टल हेल्थ एक्टिविस्ट, मनोचिकित्सक एवं मनोवैज्ञानिक |url=https://www.punjabkesari.in/health-plus/news/mental-health-activist-of-the-country-joined-the-psychologs-magazine-1719402 |work=punjabkesari |date=23 November 2022}}</ref>
|editor_title = प्रधान सम्पादक
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साइकोलॉग्स ([[English]]: Psychologs) एक मासिक मानसिक स्वास्थ्य प्रिंट पत्रिका है जो दिल्ली, भारत में अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित होती है।<ref name="auto2">{{Cite news|url=https://www.idiva.com/hindi/health/mental/psychologs-is-indias-only-psychology-magazine-in-hindi/18037355|title=साइकोलॉग्स: मेंटल हेल्थ पर जागरूकता फैलाने वाली देश की अकेली मैगज़ीन|date=14 July 2022|work=iDiva|language=hi-IN}}</ref><ref name="auto1">{{Cite news|url=https://zeenews.india.com/health/psychologs-incredible-effort-towards-mental-health-awareness-read-on-2536572|title=Psychologs' incredible effort towards Mental Health Awareness, read on|work=Zee News|language=en}}</ref> <ref>{{Cite web|url=http://rni.nic.in/registerdtitle_search/Regist_printOnlineCR.aspx?Reg=Ic8WOEcm8vS/+jOKqYuk1Q==|title=registration cr|website=rni.nic.in}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.magzter.com/share/mag/24950|title=PSYCHOLOGS Magazine - Get your Digital Subscription.|website=Magzter}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://portal.issn.org/resource/ISSN-L/2583-4193|title=ISSN-L 2583-4193 {{!}} Title of cluster (medium version) Psychologs {{!}} The ISSN Portal|website=portal.issn.org}}</ref> <ref name=":0" /> विभिन्न संस्थानों/अस्पतालों के विशेषज्ञ तथा संपादकीय बोर्ड के सदस्य इस मानसिक स्वास्थ्य पत्रिका के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से प्रकाश डालते हैं।<ref name="auto2" /> पत्रिका भारत में मानसिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य रोगी के अधिकारों पर केंद्रित है।<ref name=":0">{{Cite web|url=https://news24online.com/lifestyle/myths-and-taboos-related-to-mental-health/11643/|title="Myths and taboos related to mental health"|date=16 May 2022|website=News24 English|access-date=24 जनवरी 2023|archive-date=18 फ़रवरी 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20250218235557/https://news24online.com/lifestyle/myths-and-taboos-related-to-mental-health/11643/|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.latestly.com/lifestyle/health-wellness/psychologs-magazine-promotes-mental-health-to-lakhs-of-people-and-creates-new-hope-4024694.html|title=Psychologs Magazine Promotes Mental Health to Lakhs of People and Creates New Hope {{!}} 🍏 LatestLY|date=1 August 2022|website=LatestLY|language=en|access-date=24 जनवरी 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230117104025/https://www.latestly.com/lifestyle/health-wellness/psychologs-magazine-promotes-mental-health-to-lakhs-of-people-and-creates-new-hope-4024694.html|archive-date=17 जनवरी 2023|url-status=dead}}</ref> पत्रिका देश भर में विभिन्न मनोवैज्ञानिक मुद्दों पर कार्यक्रम आयोजित करके भी लोगों को जागरूक करती है। <ref>{{Cite news|url=https://news24online.com/lifestyle/psychologs-magazine-conducted-an-event-on-careers-in-mental-health-to-guide-students/65088/|title=Psychologs Magazine conducted an event on careers in mental health to guide students|last=Gautam|first=Prateek|date=28 November 2022|work=News24 English}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.patrika.com/meerut-news/help-for-internet-addiction-victims-psychologs-magazine-7877758/|title=क्या आपका बच्चा भी है इंटरनेट एडिक्शन का शिकार तो लीजिए साइकोलॅाग्स की मदद {{!}} Help for Internet Addiction Victims Psychologs Magazine|date=20 November 2022|work=Patrika News|language=hi-IN}}</ref> पत्रिका भारत में मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों को लेखों, साक्षात्कारों और कॉलम के माध्यम से आम जनता के साथ विभिन्न मानसिक स्वास्थ्य विषयों पर अपने ज्ञान, विशेषज्ञता और दृष्टिकोण को साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करती है। <ref>{{Cite news|url=https://www.punjabkesari.in/health-plus/news/mental-health-activist-of-the-country-joined-the-psychologs-magazine-1719402|title=साइकोलॉग्स मैगज़ीन में शामिल हुए देश के जाने माने मेन्टल हेल्थ एक्टिविस्ट, मनोचिकित्सक एवं मनोवैज्ञानिक|date=23 November 2022|work=punjabkesari}}</ref><ref name="auto1" />
== प्रसार और पाठक ==
पत्रिका प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक दोनों संस्करणों में उपलब्ध है। <ref>{{Cite news|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/features/mental-health-awareness-needs-credible-sources-like-psychologs-magazine-rushad-rana/|title=Mental health awareness needs some more credible sources like Psychologs magazine: Rushad Rana : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=7 December 2022|language=en}}</ref> पत्रिका प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक दोनों संस्करणों में उपलब्ध है। भारत में प्रिंट पत्रिका का मासिक प्रसार 150000 है तथा प्रति पत्रिका यह 12.25 पाठकों तक पहुँचती है और इलेक्ट्रॉनिक पत्रिका का मासिक प्रसार 20 लाख है। <ref>{{Cite news|url=https://www.latestly.com/lifestyle/health-wellness/psychologs-magazine-promotes-mental-health-to-lakhs-of-people-and-creates-new-hope-4024694.html|title=Psychologs Magazine Promotes Mental Health to Lakhs of People and Creates New Hope {{!}} LatestLY|date=1 August 2022|work=LatestLY|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20230117104025/https://www.latestly.com/lifestyle/health-wellness/psychologs-magazine-promotes-mental-health-to-lakhs-of-people-and-creates-new-hope-4024694.html|archive-date=17 जनवरी 2023|access-date=24 जनवरी 2023|url-status=dead}}</ref><ref name="auto3">{{Cite news|url=https://www.pinkvilla.com/entertainment/psychologs-magazine-helped-me-change-my-perspective-about-mental-health-says-actor-rushad-rana-1204182|title="Psychologs magazine helped me change my perspective about mental health," says actor Rushad Rana|date=20 December 2022|work=PINKVILLA|language=en|access-date=24 जनवरी 2023|archive-date=11 जनवरी 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230111060721/https://www.pinkvilla.com/entertainment/psychologs-magazine-helped-me-change-my-perspective-about-mental-health-says-actor-rushad-rana-1204182|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.financialexpress.com/lifestyle/financial-crises-and-uncertainty-can-impact-mental-health-psychologs-magazine/2895454/|title=Financial crises and uncertainty can impact mental health: Study|work=Financialexpress|language=en}}</ref> मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों और पुनर्वास पेशेवरों के लिए साइकोलॉग्स पत्रिका की डायरेक्ट्रीज भारत में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है। <ref name="auto3" /><ref>{{Cite news|url=https://www.outlookindia.com/outlook-spotlight/-psychologs-magazine-spreads-awareness-and-empowers-people-on-mental-health-news-204388|title="Psychologs magazine" spreads awareness and empowers people on mental health|access-date=17 January 2023|agency=outlookindia|archive-date=3 मार्च 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230303063035/https://www.outlookindia.com/outlook-spotlight/-psychologs-magazine-spreads-awareness-and-empowers-people-on-mental-health-news-204388|url-status=dead}}</ref>
== मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता ==
साइकोलॉग्स पत्रिका मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने के लिए सम्मेलनों, बैठकों और कार्यक्रमों का आयोजन करती है।<ref>{{Cite news|url=https://www.latestly.com/lifestyle/health-wellness/psychologs-magazine-promotes-mental-health-to-lakhs-of-people-and-creates-new-hope-4024694.html|title=Psychologs Magazine Promotes Mental Health to Lakhs of People and Creates New Hope {{!}} LatestLY|date=1 August 2022|work=LatestLY|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20230117104025/https://www.latestly.com/lifestyle/health-wellness/psychologs-magazine-promotes-mental-health-to-lakhs-of-people-and-creates-new-hope-4024694.html|archive-date=17 जनवरी 2023|access-date=24 जनवरी 2023|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.patrika.com/meerut-news/help-for-internet-addiction-victims-psychologs-magazine-7877758/|title=क्या आपका बच्चा भी है इंटरनेट एडिक्शन का शिकार तो लीजिए साइकोलॅाग्स की मदद {{!}} Help for Internet Addiction Victims Psychologs Magazine|date=20 November 2022|work=Patrika News|language=hi-IN}}</ref>
== संदर्भ ==
<references responsive="1"></references>
== बाहरी लिंक ==
* [http://psychologs.com/ Psychologs.com]
[[श्रेणी:साहित्य]]
[[श्रेणी:मानसिक स्वास्थ्य]]
[[श्रेणी:मासिक पत्रिकाएँ]]
[[श्रेणी:सामाजिक पत्रिकाएँ]]
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जापान में भारतीय
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"Mahatma_Gandhi_bust_in_Hiroshima_City.jpg" को हटाया। इसे कॉमन्स से [[commons:User:Yasu|Yasu]] ने हटा दिया है। कारण: per [[:c:Commons:Deletion requests/Files in Category:Monuments and memorials in Hiroshima Peace Memorial Park|]]
6630473
wikitext
text/x-wiki
{{ख़राब अनुवाद|7=अंग्रेज़ी|date=जून 2067}}
'''जापान में भारतीयों''' में [[भारत]] से [[जापान]] जाने वाले प्रवासी और उनके वंशज शामिल हैं। जून 2022 तक, जापान में 40,752 [[भारत के लोग|भारतीय]] नागरिक रह रहे थे। जापान में भारतीय मुख्य रूप से सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग और अन्य कार्यालय नौकरियों में कार्यरत हैं जहां अंग्रेजी भाषा का उपयोग किया जाता है। <ref name="toukei_ichiran_touroku">[https://www.moj.go.jp/isa/policies/statistics/toukei_ichiran_touroku.html]</ref> <ref>[https://www.e-stat.go.jp/stat-search/files?page=1&layout=datalist&toukei=00250012&tstat=000001018034&cycle=1&year=20220&month=12040606&tclass1=000001060399]</ref>
== प्रवासन इतिहास ==
[[चित्र:Indian_drinking_fountain_01.jpg|अंगूठाकार| यामाशिता पार्क, [[योकोहामा शहर|योकोहामा]] में भारतीय जल फव्वारा स्थानीय भारतीय समुदाय द्वारा उन लोगों को याद करने के लिए दान किया गया था जो 1923 के महान कांटो भूकंप में मारे गए थे, जिनमें 90 से अधिक भारतीय शामिल थे।]]
''निहोन शोकी'' के अनुसार, 1654 में तुषारा साम्राज्य के दो पुरुष और दो महिलाएं, [[श्रावस्ती]] की एक महिला के साथ, दक्षिणी [[क्यूशू]] के पूर्व ह्युगा प्रांत में शरण लेने के लिए एक तूफान से प्रेरित थे। घर के लिए रवाना होने से पहले वे कई वर्षों तक रहे।
जापान में आधुनिक भारतीय बसावट का इतिहास एक शताब्दी से भी अधिक पुराना है। 1872 की शुरुआत में, कुछ भारतीय व्यापारियों और उनके परिवारों, मुख्य रूप से [[पारसी|पारसियों]] और [[सिन्धी लोग|सिंधी]], ने [[योकोहामा शहर|योकोहामा]] के साथ-साथ ओकिनावा को भी बसाया था। 1891 में, [[टाटा समूह|टाटा]], जो तब एक छोटी व्यापारिक फर्म थी, ने [[कोबे]] में एक शाखा की स्थापना की। 1901 तक, जापानी सरकार के आंकड़ों में जापान में रहने वाले [[ब्रिटिश भारत के प्रेसिडेंसी और प्रांत|ब्रिटिश भारत]] के 30 लोगों को दर्ज किया गया था। ह्योगो प्रीफेक्चर सरकार के स्थानीय आंकड़ों ने 1905 में प्रीफेक्चर में रहने वाले 59 भारतीयों को दिखाया, जिनमें से सभी पुरुष थे। 1923 के महान कांटो भूकंप में योकोहामा पर हुए विनाश के बाद, वहां के भारतीय व्यापारी भी कोबे चले गए; तब से, कोबे जापान के भारतीय समुदाय के विकास का केंद्र बन गया।
1939 तक, [[द्वितीय विश्वयुद्ध|द्वितीय विश्व युद्ध]] की पूर्व संध्या पर, ह्योगो प्रान्त में भारतीयों की संख्या 632 तक पहुँच गई थी। हालाँकि, जापान के खिलाफ ब्रिटिश प्रतिबंधों और 1941 में जापान और उनकी मातृभूमि के बीच शिपिंग रुकने के कारण, कई लोगों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं और चले गए; 1942 तक, केवल 114 शेष थे। [[भारत का विभाजन|भारत के विभाजन के]] तीन साल बाद, उनकी संख्या कुछ हद तक 255 हो गई थी 1990 से पहले, जापान में भारतीय समुदाय [[कोबे]] क्षेत्र पर केंद्रित रहा। हालाँकि, 1990 के बाद, टोक्यो में संख्या में तीव्र वृद्धि दिखाई देने लगी। 1990 के दशक में आने वाले प्रवासियों में जापानी कार निर्माताओं द्वारा भेजे गए औद्योगिक प्रशिक्षु शामिल थे, जिन्होंने भारत में कारखाने स्थापित किए थे। आईटी पेशेवर और उनके परिवार भी टोक्यो आए, मुख्य रूप से सेतागया और मिनाटो वार्डों में बस गए।
कोबे और टोक्यो दोनों में सिख [[गुरद्वारा|गुरुद्वारे]] हैं; बाद वाला हाल ही का उद्गम स्थल है, जिसकी स्थापना 1999 में एक कार्यालय भवन के तहखाने में की गई थी। छोटे और मध्यम उद्यमों में अकुशल मजदूरों के रूप में कार्यरत कुछ सिखों को ''[[केश (सिख धर्म)|केश]]'' के सिद्धांत का उल्लंघन करते हुए [[सहजधारी|अपने बालों को छोटा करना]] पड़ा और अपनी पगड़ी हटानी पड़ी, क्योंकि उनके नियोक्ता उनके रीति-रिवाजों से अपरिचित हैं और उन्हें उनकी पोशाक की शैली में कोई छूट नहीं देते हैं। वे इसे जापानी समाज के लिए केवल एक अस्थायी अनुकूलन मानते हैं। हालाँकि, आईटी जैसे कुशल व्यवसायों में सिखों के बीच यह प्रथा आम नहीं है।
जापान में अपने बच्चों को स्कूल भेजने वाले भारतीय आम तौर पर अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों का चयन करते हैं। पहला भारतीय-विशिष्ट स्कूल, जापान में इंडिया इंटरनेशनल स्कूल, 2004 में टोक्यो और योकोहामा में स्थित कुछ पुराने व्यापारिक परिवारों की पहल पर टोक्यो के कोतो वार्ड में स्थापित किया गया था। ग्लोबल इंडियन इंटरनेशनल स्कूल, सिंगापुर स्थित एक स्कूल, ने 2006 से टोक्यो में एक शाखा संचालित की है, और 2008 में [[योकोहामा शहर|योकोहामा]] में एक और शाखा खोलने की योजना है वे भारतीय [[केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड|केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के]] पाठ्यक्रम का पालन करते हैं। ये स्कूल न केवल भारतीय प्रवासियों के बीच, बल्कि कुछ जापानी लोगों के बीच भी लोकप्रिय हैं, क्योंकि गणित की शिक्षा में उनकी कड़ी मेहनत की प्रतिष्ठा है। <ref>{{Citation|last=Hani|first=Yoko|title=Indian schools make a mark|date=11 April 2007|url=http://search.japantimes.co.jp/cgi-bin/fl20070422x2.html|periodical=Japan Times|access-date=25 September 2009}}</ref> अन्य प्रवासी अपने बच्चों को उनके मूल राज्यों में या तो दादा-दादी के पास या बोर्डिंग स्कूलों में छोड़ देते हैं, ताकि उनकी शिक्षा बाधित न हो।
== सामुदायिक संगठन ==
[[चित्र:India Club in Kobe.jpeg|अंगूठाकार|कोबे इंडिया क्लब]]
प्रारंभिक भारतीय सामुदायिक संगठनों में से एक, ओरिएंटल क्लब, कोबे में 1904 में स्थापित किया गया था; 1913 में इसका नाम बदलकर द इंडिया क्लब कर दिया गया और आज तक इसका संचालन जारी है। अधिक 1930 के दशक में स्थापित किए गए थे, जिनमें भारतीय-प्रभुत्व वाले सिल्क मर्चेंट्स एसोसिएशन, इंडियन सोशल सोसाइटी और इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स शामिल थे। 2000 में, एडोगावा, टोक्यो में रहने वाले भारतीय प्रवासियों ने भारतीय आईटी इंजीनियरों की उच्च सांद्रता वाले क्षेत्र में एडोगावा के भारतीय समुदाय की स्थापना की। अन्य में इंडियन कम्युनिटी एक्टिविटीज़ टोक्यो शामिल है, जिसके [[दीपावली|दीवाली]] समारोह में 2,500 प्रतिभागी शामिल होते हैं, साथ ही इंडियन मर्चेंट एसोसिएशन ऑफ योकोहामा भी।
[[श्रेणी:भारत-जापान संबंध]]
[[श्रेणी:भारतीय मूल के जापानी लोग]]
[[श्रेणी:जापानी भाषा पाठ वाले लेख]]
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महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ़ इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी
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{{Infobox university
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| type = [[निजी विश्वविद्यालय|निजी]]
| chancellor = डॉ॰ अजय प्रकाश श्रीवास्तव<ref>[https://www.maharishiuniversity.ac.in/chancellors_message अजय प्रकाश श्रीवास्तव]{{Dead link|date=मार्च 2026 |bot=InternetArchiveBot }} जीवनी, एमयूआईटी पोर्टल</ref><ref>[https://mssbharat.com/executive-members अजय प्रकाश श्रीवास्तव] जीवनी, महर्षि शिक्षा संस्थान</ref><ref>[https://www.amarujala.com/lucknow/shri-vishnu-sarva-wonderful-shanti-mahayagya-cm-yogi-said-ramnagari-ayodhya-is-seen-touching-the-heights-in-the-form-of-puri-one-of-the-saptpuris महर्षि विद्यापीठ के मुख्य ट्रस्टी] अजय प्रकाश श्रीवास्तव</ref>
| vice_chancellor = डॉ॰ भानु प्रताप सिंह<ref>[https://www.ugc.gov.in/universitydetails/university?type=0wBmFB1Rb4JGVzq9UP/iOg== उप कुलपति एमयूआईटी] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20250725163602/https://www.ugc.gov.in/universitydetails/university?type=0wBmFB1Rb4JGVzq9UP/iOg== |date=25 जुलाई 2025 }} यूजीसी पोर्टल</ref><ref>[https://www.maharishiuniversity.ac.in/vice-chancellors-message/ डॉ॰ भानु प्रताप सिंह] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20251217065535/https://www.maharishiuniversity.ac.in/vice-chancellors-message |date=17 दिसंबर 2025 }} जीवनी, महर्षि एमयूआईटी पोर्टल</ref>
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| accreditation = [[राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद]] (NAAC) B+<ref>{{cite web |title=NAAC प्रत्यायन ग्रेड शीट |url=https://assessmentonline.naac.gov.in/public/index.php/grade_sheet_rpt/eyJpdiI6InVQNTFiT2hreW50KytxcWFIdFR2VGc9PSIsInZhbHVlIjoiRHBHOTV5ZmJMYVk3TGI5emU4a3lFUT09IiwibWFjIjoiNDc0NTZiYTdkZjBmN2Q1NWEwYWM0ZGMyNTNlNDQwOWU2ZGJmNTg4OGExMGNlZmFkYzUxZTdkY2E1OGE5MmM3YyIsInRhZyI6IiJ9 |website=राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद |publisher=NAAC |access-date=14 अक्टूबर 2025 }}{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
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| logo_size = 150px
| website = {{Official website|https://www.maharishiuniversity.ac.in|महर्षि यूनिवर्सिटी}}
| founder = [[महर्षि महेश योगी]]
}}
'''महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ़ इंफ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी''' ('''MUIT''') एक [[भारत|भारतीय]] निजी विश्वविद्यालय है जो [[उत्तर प्रदेश]] में स्थित है। इसका मुख्य परिसर [[लखनऊ]] में है<ref>{{cite web |title=लखनऊ परिसर आधिकारिक वेबसाइट|url=https://www.maharishiuniversity.ac.in/|access-date=12 फरवरी 2023}}</ref>, और एक उपग्रह परिसर [[नोएडा]] में स्थित है।<ref>{{cite web |title=नोएडा परिसर आधिकारिक वेबसाइट|url=https://muitnoida.edu.in/|access-date=13 फरवरी 2023}}</ref>
यह विश्वविद्यालय 2001 में अधिनियम संख्या 31, 2001 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश सरकार के राजपत्र अधिसूचना दिनांक 6 अक्टूबर 2001 द्वारा स्थापित किया गया। एमयूआईटी [[विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (भारत)|यूजीसी]] द्वारा मान्यता प्राप्त है।
==इतिहास==
महर्षि यूनिवर्सिटी को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 2001 में मान्यता दी गई। विश्वविद्यालय को यूजीसी से मान्यता प्राप्त है।
==प्रशासन==
===शासन===
विश्वविद्यालय के पहले कुलाधिपति [[महर्षि महेश योगी]] थे। वर्तमान कुलाधिपति डॉ॰ अजय प्रकाश श्रीवास्तव हैं तथा वर्तमान कुलपति डॉ॰ भानु प्रताप सिंह हैं।
==परिसर==
===लखनऊ, उत्तर प्रदेश===
* महर्षि स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी
* महर्षि स्कूल ऑफ़ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट
* महर्षि स्कूल ऑफ़ फ़ार्मास्यूटिकल साइंसेज़
* महर्षि स्कूल ऑफ़ साइंस
* महर्षि स्कूल ऑफ़ ह्यूमैनिटीज़ एंड आर्ट्स
* महर्षि स्कूल ऑफ़ साइंस ऑफ़ कॉन्शियसनेस
===नोएडा, उत्तर प्रदेश===
* महर्षि स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी
* महर्षि लॉ स्कूल
* महर्षि स्कूल ऑफ़ बिज़नेस स्टडीज़
* महर्षि स्कूल ऑफ़ फ़ार्मास्यूटिकल साइंसेज़
* महर्षि स्कूल ऑफ़ साइंस ऑफ़ कॉन्शियसनेस
* महर्षि स्कूल ऑफ़ मीडिया एंड एनीमेशन
* महर्षि स्कूल ऑफ़ एप्लाइड साइंस एंड ह्यूमैनिटीज़
=== प्रशासन ===
रितेश कुमार भानु<ref>{{cite web
|title=Ritesh Kumar Bhanu
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|access-date=18 October 2026
}}</ref> [[महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी]] में डिजिटल मार्केटिंग मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं, जहाँ वे डिजिटल मार्केटिंग संबंधी गतिविधियों की जिम्मेदारी संभालते हैं। विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर बाहरी हाइपरलिंक और सोशल मीडिया सहयोग से संबंधित अनुरोधों के लिए भी उनका संपर्क विवरण दिया गया है। ऐसे अनुरोध विश्वविद्यालय की लागू नीतियों के अधीन हैं।<ref>{{cite web
|title=Hyperlink & Social Media Collaboration Policy
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|title=Website Committee – Maharishi University of Information Technology
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== अनुमोदन एवं प्रत्यायन ==
[[अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद]] (AICTE) ने शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी को विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित करने की मंजूरी दी। इनमें [[बी.टेक.]] (कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग तथा कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग), एम.टेक. (कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग), एमबीए, एमसीए, बीबीए और बीसीए शामिल हैं।<ref>{{cite web
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|title=AICTE LOA 2026–27
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==पाठ्यक्रम==
विश्वविद्यालय स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट कार्यक्रम प्रदान करता है।
== कार्यक्रम एवं गतिविधियाँ ==
[[File:Maharishi_botFiesta_logo_MUIT.png|thumb|महर्षि बॉटफिएस्टा का लोगो]]
'''महर्षि बॉटफिएस्टा''' महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में आयोजित होने वाली एक वार्षिक राष्ट्रीय स्तर की रोबोटिक्स प्रतियोगिता है। इस आयोजन में रोबोट रेसिंग, रोबोट कॉम्बैट और नवाचार-आधारित परियोजनाओं के प्रदर्शन जैसी प्रतियोगिताएँ शामिल हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को रोबोटिक्स और स्वचालन के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है। वर्ष 2024 में इस प्रतियोगिता में 250 से अधिक टीमों ने भाग लिया था।<ref>https://robotics.muitonline.com/</ref><ref>https://www.maharishiuniversity.ac.in/EventView?cd_id=34</ref>
महर्षि बॉटफिएस्टा का पाँचवाँ संस्करण, '''महर्षि बॉटफिएस्टा 2026''', 30 और 31 अक्टूबर 2026 को [[महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी]] के लखनऊ परिसर में आयोजित होना निर्धारित है। इस संस्करण में रोबोटिक्स और प्रौद्योगिकी से संबंधित विभिन्न प्रतियोगिताएँ एवं गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी।<ref>{{cite web
|title=Maharishi BotFiesta 2026
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|title=Maharishi BotFiesta 2026: 5th Edition of Robotics Competition to Be Held on 30–31 October
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|date=14 September 2026
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|title=Maharishi University to Host 5th Edition of Maharishi BotFiesta 2026
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|title=Maharishi University to Host 5th Edition of Maharishi BotFiesta 2026
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|title=Maharishi University to Host 5th Edition of Maharishi BotFiesta 2026
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== दीक्षांत समारोह ==
* महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MUIT) का दूसरा दीक्षांत समारोह 22 मई 2021 को सुबह 11:00 बजे आयोजित किया गया था।<ref>{{cite web
|title=Maharishi University of Information Technology 2nd Convocation Ceremony
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|publisher=Maharishi University of Information Technology
|date=22 May 2021
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* तीसरा दीक्षांत समारोह 5 सितंबर 2022 को आयोजित किया गया था।<ref>{{cite web
|title=Maharishi University of Information Technology – Convocation Videos
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* चौथा दीक्षांत समारोह 4 सितंबर 2023 को आयोजित किया गया था।
* पाँचवाँ दीक्षांत समारोह 23 अक्टूबर 2024 को विश्वविद्यालय के लखनऊ परिसर में आयोजित किया गया था। विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित जानकारी के अनुसार, इस समारोह में डॉक्टरेट, स्नातकोत्तर, स्नातक और डिप्लोमा कार्यक्रमों के कुल 1,572 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं।<ref>{{cite web
|title=5th Convocation of Maharishi University of Information Technology
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|publisher=Maharishi University of Information Technology
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|title=Convocation ceremony organized at Maharishi University, Lucknow
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* महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी का छठा दीक्षांत समारोह 28 नवंबर 2025 को विश्वविद्यालय के लखनऊ परिसर में आयोजित किया गया था। इस अवसर पर कुल 2,455 विद्यार्थियों को उपाधियाँ और डिप्लोमा प्रदान किए गए।<ref>{{cite news
|title=Lko’s Maharishi varsity 6th Convocation: Students urged to work for nation-building; 2,455 receive degrees, diplomas
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|title=Maharishi University 6th Convocation
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|title=Maharishi University Convocation 2025: A Blend of Culture, Tradition and Achievement
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|title=Maharishi University Convocation 2025: A Blend of Culture, Tradition and Achievement
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* सातवाँ दीक्षांत समारोह 22 अक्टूबर 2026 को विश्वविद्यालय के लखनऊ परिसर में आयोजित होना निर्धारित है।<ref>{{cite web
|title=Maharishi University 7th Convocation 2026
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|title=Maharishi University 7th Convocation
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==रैंकिंग==
एआईएम रैंकिंग 2021 के अनुसार महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ़ इंफ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी भारत में डेटा साइंस के शीर्ष स्नातक कार्यक्रमों में 13वें स्थान पर रही।
==संदर्भ==
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{{Universities in Uttar Pradesh}}
{{Authority control}}
[[श्रेणी:नोएडा में विश्वविद्यालय और महाविद्यालय]]
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के निजी विश्वविद्यालय]]
[[श्रेणी:लखनऊ में विश्वविद्यालय और महाविद्यालय]]
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेश में व्यवसायिक विद्यालय]]
[[श्रेणी:2001 में स्थापित शैक्षणिक संस्थान]]
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेश में 2001 की स्थापना]]
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| founder = [[महर्षि महेश योगी]]
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'''महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ़ इंफ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी''' ('''MUIT''') एक [[भारत|भारतीय]] निजी विश्वविद्यालय है जो [[उत्तर प्रदेश]] में स्थित है। इसका मुख्य परिसर [[लखनऊ]] में है<ref>{{cite web |title=लखनऊ परिसर आधिकारिक वेबसाइट|url=https://www.maharishiuniversity.ac.in/|access-date=12 फरवरी 2023}}</ref>, और एक उपग्रह परिसर [[नोएडा]] में स्थित है।<ref>{{cite web |title=नोएडा परिसर आधिकारिक वेबसाइट|url=https://muitnoida.edu.in/|access-date=13 फरवरी 2023}}</ref>
यह विश्वविद्यालय 2001 में अधिनियम संख्या 31, 2001 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश सरकार के राजपत्र अधिसूचना दिनांक 6 अक्टूबर 2001 द्वारा स्थापित किया गया। एमयूआईटी [[विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (भारत)|यूजीसी]] द्वारा मान्यता प्राप्त है।
==इतिहास==
महर्षि यूनिवर्सिटी को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 2001 में मान्यता दी गई। विश्वविद्यालय को यूजीसी से मान्यता प्राप्त है।
==प्रशासन==
===शासन===
विश्वविद्यालय के पहले कुलाधिपति [[महर्षि महेश योगी]] थे। वर्तमान कुलाधिपति डॉ॰ अजय प्रकाश श्रीवास्तव हैं तथा वर्तमान कुलपति डॉ॰ भानु प्रताप सिंह हैं।
==परिसर==
===लखनऊ, उत्तर प्रदेश===
* महर्षि स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी
* महर्षि स्कूल ऑफ़ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट
* महर्षि स्कूल ऑफ़ फ़ार्मास्यूटिकल साइंसेज़
* महर्षि स्कूल ऑफ़ साइंस
* महर्षि स्कूल ऑफ़ ह्यूमैनिटीज़ एंड आर्ट्स
* महर्षि स्कूल ऑफ़ साइंस ऑफ़ कॉन्शियसनेस
===नोएडा, उत्तर प्रदेश===
* महर्षि स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी
* महर्षि लॉ स्कूल
* महर्षि स्कूल ऑफ़ बिज़नेस स्टडीज़
* महर्षि स्कूल ऑफ़ फ़ार्मास्यूटिकल साइंसेज़
* महर्षि स्कूल ऑफ़ साइंस ऑफ़ कॉन्शियसनेस
* महर्षि स्कूल ऑफ़ मीडिया एंड एनीमेशन
* महर्षि स्कूल ऑफ़ एप्लाइड साइंस एंड ह्यूमैनिटीज़
==पाठ्यक्रम==
विश्वविद्यालय स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट कार्यक्रम प्रदान करता है।
==रैंकिंग==
एआईएम रैंकिंग 2021 के अनुसार महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ़ इंफ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी भारत में डेटा साइंस के शीर्ष स्नातक कार्यक्रमों में 13वें स्थान पर रही।
==संदर्भ==
{{reflist}}
{{Universities in Uttar Pradesh}}
{{Authority control}}
[[श्रेणी:नोएडा में विश्वविद्यालय और महाविद्यालय]]
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के निजी विश्वविद्यालय]]
[[श्रेणी:लखनऊ में विश्वविद्यालय और महाविद्यालय]]
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[[श्रेणी:उत्तर प्रदेश में 2001 की स्थापना]]
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Anitya Gautam
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{{Infobox university
| name = महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ़ इंफ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी
| motto = ''भावातीत चेतना से समृद्धि''
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| established = {{Start date and age|2001}}
| faculty = 1000+
| students = 15000+
| type = [[निजी विश्वविद्यालय|निजी]]
| chancellor = डॉ॰ अजय प्रकाश श्रीवास्तव<ref>[https://www.maharishiuniversity.ac.in/chancellors_message अजय प्रकाश श्रीवास्तव]{{Dead link|date=मार्च 2026 |bot=InternetArchiveBot }} जीवनी, एमयूआईटी पोर्टल</ref><ref>[https://mssbharat.com/executive-members अजय प्रकाश श्रीवास्तव] जीवनी, महर्षि शिक्षा संस्थान</ref><ref>[https://www.amarujala.com/lucknow/shri-vishnu-sarva-wonderful-shanti-mahayagya-cm-yogi-said-ramnagari-ayodhya-is-seen-touching-the-heights-in-the-form-of-puri-one-of-the-saptpuris महर्षि विद्यापीठ के मुख्य ट्रस्टी] अजय प्रकाश श्रीवास्तव</ref>
| vice_chancellor = डॉ॰ भानु प्रताप सिंह<ref>[https://www.ugc.gov.in/universitydetails/university?type=0wBmFB1Rb4JGVzq9UP/iOg== उप कुलपति एमयूआईटी] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20250725163602/https://www.ugc.gov.in/universitydetails/university?type=0wBmFB1Rb4JGVzq9UP/iOg== |date=25 जुलाई 2025 }} यूजीसी पोर्टल</ref><ref>[https://www.maharishiuniversity.ac.in/vice-chancellors-message/ डॉ॰ भानु प्रताप सिंह] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20251217065535/https://www.maharishiuniversity.ac.in/vice-chancellors-message |date=17 दिसंबर 2025 }} जीवनी, महर्षि एमयूआईटी पोर्टल</ref>
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}}
'''महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ़ इंफ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी''' ('''MUIT''') एक [[भारत|भारतीय]] निजी विश्वविद्यालय है जो [[उत्तर प्रदेश]] में स्थित है। इसका मुख्य परिसर [[लखनऊ]] में है<ref>{{cite web |title=लखनऊ परिसर आधिकारिक वेबसाइट|url=https://www.maharishiuniversity.ac.in/|access-date=12 फरवरी 2023}}</ref>, और एक उपग्रह परिसर [[नोएडा]] में स्थित है।<ref>{{cite web |title=नोएडा परिसर आधिकारिक वेबसाइट|url=https://muitnoida.edu.in/|access-date=13 फरवरी 2023}}</ref>
यह विश्वविद्यालय 2001 में अधिनियम संख्या 31, 2001 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश सरकार के राजपत्र अधिसूचना दिनांक 6 अक्टूबर 2001 द्वारा स्थापित किया गया। एमयूआईटी [[विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (भारत)|यूजीसी]] द्वारा मान्यता प्राप्त है।
==इतिहास==
महर्षि यूनिवर्सिटी को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 2001 में मान्यता दी गई। विश्वविद्यालय को यूजीसी से मान्यता प्राप्त है।महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ़ इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी (MUIT) का इतिहास महान आध्यात्मिक गुरु महर्षि महेश योगी के आधुनिक शिक्षा और प्राचीन वैदिक ज्ञान के मेल के विजन से जुड़ा हुआ है।
==प्रशासन==
===शासन===
विश्वविद्यालय के पहले कुलाधिपति [[महर्षि महेश योगी]] थे। वर्तमान कुलाधिपति डॉ॰ अजय प्रकाश श्रीवास्तव हैं तथा वर्तमान कुलपति डॉ॰ भानु प्रताप सिंह हैं।
==परिसर==
===लखनऊ, उत्तर प्रदेश===
* महर्षि स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी
* महर्षि स्कूल ऑफ़ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट
* महर्षि स्कूल ऑफ़ फ़ार्मास्यूटिकल साइंसेज़
* महर्षि स्कूल ऑफ़ साइंस
* महर्षि स्कूल ऑफ़ ह्यूमैनिटीज़ एंड आर्ट्स
* महर्षि स्कूल ऑफ़ साइंस ऑफ़ कॉन्शियसनेस
===नोएडा, उत्तर प्रदेश===
* महर्षि स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी
* महर्षि लॉ स्कूल
* महर्षि स्कूल ऑफ़ बिज़नेस स्टडीज़
* महर्षि स्कूल ऑफ़ फ़ार्मास्यूटिकल साइंसेज़
* महर्षि स्कूल ऑफ़ साइंस ऑफ़ कॉन्शियसनेस
* महर्षि स्कूल ऑफ़ मीडिया एंड एनीमेशन
* महर्षि स्कूल ऑफ़ एप्लाइड साइंस एंड ह्यूमैनिटीज़
==पाठ्यक्रम==
विश्वविद्यालय स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट कार्यक्रम प्रदान करता है।
==रैंकिंग==
एआईएम रैंकिंग 2021 के अनुसार महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ़ इंफ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी भारत में डेटा साइंस के शीर्ष स्नातक कार्यक्रमों में 13वें स्थान पर रही।
==संदर्भ==
{{reflist}}
{{Universities in Uttar Pradesh}}
{{Authority control}}
[[श्रेणी:नोएडा में विश्वविद्यालय और महाविद्यालय]]
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के निजी विश्वविद्यालय]]
[[श्रेणी:लखनऊ में विश्वविद्यालय और महाविद्यालय]]
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेश में व्यवसायिक विद्यालय]]
[[श्रेणी:2001 में स्थापित शैक्षणिक संस्थान]]
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बालवीर ३
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चाहर धर्मेंद्र
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{{Other uses|बालवीर (बहुविकल्पी)}}
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'''बालवीर ३''' एक भारतीय [[फंतासी]] टेलीविजन धारावाहिक है। जिसका प्रसारण १८ मार्च २०२३ से [[सोनी सब]] चैनल पर हुआ।<ref>{{Cite web|url=https://www.outlookindia.com/art-entertainment/-baalveer-5-reasons-to-watch-the-3rd-season-of-dev-joshi-s-superhero-show-news-270328|title=‘Baalveer’: 5 Reasons To Watch The 3rd Season Of Dev Joshi’s Superhero Show}}</ref> इसमें [[देव जोशी]], [[अदिति सनवाल]] और अदा खान मुख्य भूमिकाओं में हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.mid-day.com/entertainment/television-news/article/telly-tattle-new-blood-on-the-set-23274030|title=Telly Tattle: New blood on the set|date=8 मार्च 2023|website=Mid-day}}</ref> यह [[बालवीर (बहुविकल्पी)|''बालवीर फ्रेंचाइजी'']] की तीसरी किस्त है और [[बाल वीर|''बालवीर'']] और [[बालवीर रिटर्न्स|''बालवीर रिटर्न्स'']] का आध्यात्मिक सीक्वल है और इसके बाद सीधा सीक्वल ''[[बालवीर ४]]'' है।
==कथानक==
कहानी बालवीर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी मां आदिशी की दो महीने की यात्रा के बाद उदाका लोक में लौटने की तैयारी कर रहा है। बालवीर अधीशी लिए एक उपहार खरीदने के लिए पृथ्वी पर जाता है और काशवी नाम की एक लड़की को एक दुर्घटना से बचाता है। उदाका-लोक में, बालवीर शाश्वन-लोक के शासक उत्तान द्वारा निर्धारित परीक्षा पास करता है और उसे योग्य घोषित किया जाता है। हालाँकि, आगील अपने महाजादू का उपयोग करके बालवीर को मारने की योजना बनाती है।
पता चला है कि काशवी की मां आगील की भरोसेमंद सहयोगी तुयीर है। जब आगील काशवी पर हमला करता है, तो उसका महाजादू उसके अंदर समा जाता है (क्योंकि काशी दो अलग-अलग प्रजातियों की संतान है)। आगील काशवी को पकड़ लेती है और महाजादू निकालने के लिए उसे हिम्बाश लोक के पास ले जाता है, लेकिन अंततः उसके माता-पिता उसे बचा लेते हैं और फिर उसे सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर भेज देते हैं। घटनाओं की एक शृंखला में, बालवीर को बाबेल और तुयीर की मौत के लिए दोषी ठहराया जाता है और इस तरह मामले की जांच पूरी होने तक उसकी यादें और शक्तियां छीन ली जाती हैं। तब तक, उसे नया जीवन जीने के लिए शाश्वन लोक के एक गुप्त एजेंट बार्डोल के माध्यम से पृथ्वी पर भेजा जाता है।
बार्डोल एक जादूगर भास्कर - भारद्वाज को मामला सुलझने तक बालवीर की देखभाल करने का काम सौंपता है। इस प्रकार, बालवीर "वीर भारद्वाज" के रूप में एक नया जीवन जीना शुरू करता है, कुछ विवादों के बाद काशवी से दोस्ती करता है, और इसके अलावा अपने नए परिवार की वित्तीय समस्याओं को खत्म करने की कसम खाता है।
काशवी की मदद से वीर की यादें और शक्तियां अस्थायी रूप से अनजाने में वापस आ जाती हैं, और "बेनाम" के मार्गदर्शन में, वीर अपनी सुपरहीरो पहचान हासिल कर लेता है और उत्तान के सामने अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए सुराग ढूंढने की कोशिश करता है, लेकिन वो सब व्यर्थ हो जाता है। इस बीच, शशमाग "कुरजा" नामक एक शैतानी चुड़ैल की आत्मा को मुक्त करता है और उसे उत्तान के संदेह से बचने और बालवीर को मारने के उद्देश्य से आदिशी के शरीर में स्थानांतरित कर देता है। इस बीच, आगील द्वारा काशवी के साथ छेड़छाड़ करके बालवीर को मारने की निरर्थक कोशिशें बार-बार काशवी के नकारात्मक गुणों को ट्रिगर करती हैं। इसके साथ ही वीर और काशवी का रिश्ता भी मजबूत होता जा रहा होता है।
आदिशी (कुर्जा द्वारा नियंत्रित) बालवीर से मिलता है और उसे आत्मसमर्पण करने का आदेश देता है, जिससे वह इनकार कर देता है। नाटकीय मोड़ों के एक सेट में, उसे स्पष्ट रूप से मार दिया जाता है और इसका दोष उत्तान को उकसाने के लिए शशमाग द्वारा बालवीर पर डाल दिया जाता है। यद्यपि बेनाम कुर्जा की आत्मा को पकड़ लेता है, शशमाग समय आने पर कुर्जा को मार डालता है।
क्रोधित उत्तान अपने जीवन को समाप्त करने के लिए बालवीर के शक्ति स्रोत "बी" को नष्ट करना चाहता है। हालाँकि, बालवीर उस पर काबू पाने में कामयाब हो जाता है और "बी" को अपने पास सुरक्षित रख लेता है। रोमांचक उतार-चढ़ाव के एक सेट में, बालवीर को अंततः शशमाग के द्वंद्व के बारे में पता चलता है और अंत में महामहिम के सामने अपनी बेगुनाही साबित करता है, जो फिर पश्चाताप करते हुए अपने जुड़वां भाई, नेहमाग की मदद से शशमाग को पकड़ लेता है और मार देता है। हालाँकि, जैसा कि शैतान चाहता था, शशमाग ने मुकदमे से पहले चालाकी से नेहमाग के साथ अपना भेष बदल लिया था, जिससे किसी को भी पता चले बिना खुद को बचा लिया।
इस बीच, आगील एक धर्मी रक्षक "अग्नि" के रूप में प्रस्तुत होती है, जो काशवी को बालवीर के खिलाफ भड़काता है और उसे यह विश्वास दिलाने के लिए उकसाता है कि बालवीर उसके माता-पिता की मौत के लिए जिम्मेदार है। इस प्रकार, काशवी अपनी नई शक्तियों की मदद से बालवीर को मारकर बदला लेने की कसम खाती है। वह यह जानकर निराश और आहत हो जाती है कि वीर ही बालवीर है, और परिणामस्वरूप सूर्य ग्रहण के समय (जब उसकी शक्तियां बराबर हो जाती हैं) एक कठिन युद्ध में उस पर हमला करती है। हालाँकि, वे दोनों गलतफहमियों को प्रभावी ढंग से सुलझा लेते हैं और पछतावाग्रस्त काशवी अंततः वीर के साथ मेल-मिलाप कर लेती है, लेकिन उसे एहसास होता है कि उसके अंदर का महाजादू जहर की तरह उसके अस्तित्व को लगातार कमजोर कर रहा है।
बेनाम और काशवी की मदद से, बालवीर उसके शरीर से महाजादू को निकालने में कामयाब हो जाते है, जिससे वह सुरक्षित हो जाती है। जबकि शशमाग बदला लेने के लिए आगील से हाथ मिलाता है, बालवीर को अंततः पता चलता है कि बेनाम उसकी असली जैविक मां है, और आगील द्वारा धोखा दिए जाने पर, वह अपने पिता भस्म को क्रिंकाल लोक से मुक्त करना चाहता है।
==कलाकार==
===मुख्य===
* [[देव जोशी]] - बालवीर/वीर;आदिशी का बेटा; उत्तान का शिष्य; दिल्लक और किंकोरी के दोस्त;धरती का तीसरा बालवीर है; वह पृथ्वी और मानवता के रक्षक हैं। (2023-वर्तमान)<ref>{{Cite web|url=https://www.indiaforums.com/article/dev-joshi-opens-up-on-baal-veer-season-3_193017|title=Dev Joshi opens up on 'Baal Veer' Season 3|website=India Forums|language=en|access-date=2023-08-31}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.outlookindia.com/art-entertainment/-baalveer-5-reasons-to-watch-the-3rd-season-of-dev-joshi-s-superhero-show-news-270328|title=‘Baalveer’: 5 Reasons To Watch The 3rd Season Of Dev Joshi’s Superhero Show|last=Sur|first=Prateek|date=15 march 2023|website=Outlook|access-date=March 13, 2023}}</ref>
* [[अदिति सनवाल|अदिति सानवाल]]<ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/breaking-aditi-sanwal-will-play-the-role-of-kaashvi-baalveers-new-companion-in-baalveer-3/articleshow/98546300.cms?from=mdr|title=Breaking! Aditi Sanwal will play the role of Kaashvi, Baalveer’s New Companion in Baalveer 3|via=The Economic Times - The Times of India}}</ref> - काश्वी; द्वेर और बाबेल की बेटी (2023-वर्तमान)
*अदा खान - आगिल; वह अपने महाजादू का इस्तेमाल कर बालवीर को मारने की योजना बनाती है। (2023-वर्तमान)<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/it-is-tough-to-do-action-scenes-wearing-25-kg-heavy-gown-accessories-in-baalveer-3-but-its-also-very-exciting-ada-khan/articleshow/98862690.cms|title=It is tough to do action scenes wearing 25 kg heavy gown & accessories in Baalveer 3, but it's also very exciting: Ada Khan|date=2023-03-21|work=The Times of India|access-date=2023-08-31|issn=0971-8257}}</ref>
*आदित्य रणविजय
**शशमाग: उत्तान का सहायक; नेहमाग का जुड़वां भाई। उन्हें पहला बालवीर बनाया गया था, लेकिन एक निर्दोष व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने के बाद उनकी शक्तियां वापस ले ली गईं। उसने तुयेर, बेबेल और आदिशी को मार डाला और चालाकी से बालवीर को अपराध के लिए फंसाया, लेकिन अंततः बेनकाब हो गया। हालाँकि, इसके बाद वह नेहमाग के रूप में प्रस्तुत होना शुरू कर देता है और अपनी हार का बदला लेने के लिए एजील से हाथ मिला लेता है। (2023-वर्तमान)
**नेहमाग: शशमाग का धर्मी जुड़वां भाई। शशमाग के अपराधों के लिए उसे गलत तरीके से दोषी ठहराया गया था, लेकिन वह शशवान लोक की बेहतरी के प्रति अत्यधिक गर्व दिखाता है। उसे शशमाग ने मार डाला और उसकी पहचान शशमाग ने ले ली (2023)
*शर्मीली राज - बेनाम के रूप में: बालवीर की जैविक माँ; भस्म की पत्नी. उसने वीर को उसकी असली पहचान याद दिलाने और उसकी बेगुनाही साबित करने में मदद की। (2023-वर्तमान)
*[[मनीष खन्ना]] - भस्म के रूप में: बालवीर के जैविक-पिता; बेनाम के पति. वह शुरू में शाश्वत-लोक का एक सैनिक था जिसने दुनिया को जीतने के अपने भयानक इरादों के लिए उत्तान को ललकारा था।
===अन्य===
*श्रीधर वत्सर - तौबा तौबा के रूप में: अगील के मामा और साथी। (2023-वर्तमान)
*बेहज़ाद खान - उत्तान: शाशवान लोक के शासक; बालवीर के गुरु वह एक कट्टर है जो हमेशा शाशवान लोक के नियमों को बनाए रखने का लक्ष्य रखता है। (2023-वर्तमान)
*श्वेता रस्तोगी - आदिशी;बालवीर की माँ; वह उदाका-लोक की शासक हैं और शाशवान-लोक में एक पूजनीय स्थान रखती हैं। वह उदाका-लोक के लोगों का मार्गदर्शन करती है। (2023- वर्तमान)
*पत्राली चट्टोपाध्याय - द्वेर के रूप में: बाबेल की प्रेमी-पत्नी; काशवी की माँ। वह आगील की सबसे भरोसेमंद सहयोगी और उसकी सेना की पूर्व कमांडर थी। उसे गलती से बालवीर ने मार डाला था। (2023-वर्तमान)
*अनुपमा कुवर - तेत्रा: आगील की सिपाही (2023-वर्तमान)
*अतुल वर्मा - अंधेर के रूप में : आगील का सिपाही (2023-वर्तमान)
*[[शैलेश गुलाबानी]] - बाबेल: द्वेर का प्रेमी से पति बना; काशवी के पिता। उसे बालवीर ने गलती से मार डाला था। (2023)
*कुणाल सेठ - बरदौल; बालवीर का दोस्त और शाशवान लोक का एक गुप्त एजेंट जो पृथ्वी पर दुष्ट शक्तियों के आक्रमण होने पर शाशवान लोक को पृथ्वी की जानकारी देता है।
*विनायक भावे - भास्कर भारद्वाज के रूप में: गार्गी के पति और ईवा और नव्या के चाचा। वह एक जादूगर है जिसे बालवीर के पृथ्वी पर रहने के दौरान उसकी देखभाल करने का काम सौंपा गया है। (2023-वर्तमान)
*रूचि सिंह - ईवा भारद्वाज, नव्या की बहन और भास्कर की भतीजी के रूप में। (2023-वर्तमान)
*गीता बिष्ट - गार्गी भारद्वाज: भास्कर की पत्नी, ईवा और नव्या की चाची और वीर की माँ (दत्तक)(2023-वर्तमान)
*शाहब खान - वीर के दादा जी: उनका वीर के साथ एक सौहार्दपूर्ण बंधन है और वह अक्सर उनकी शरारतों में उनका साथ देते हैं। (2023-वर्तमान)
*हिया भट्ट - नव्या भारद्वाज: ईवा की बहन और भास्कर की भतीजी। (2023-वर्तमान)
*अमन भूतड़ा - दिल्लाक: उदाका लोक में बालवीर का दोस्त। (2023-वर्तमान)
*महिमा गुप्ता - किंकुडी: उदाका लोक में बालवीर की दोस्त। (2023)
*गरिमा गोयल - कियारा के रूप में: एक इवेंट हेड जो वीर को एक बड़े कार्यक्रम में जादू शो आयोजित करने का मौका देती है। (2023)
*मेघा अग्रवाल - वहमीर: उदका लोक में बालवीर की दोस्त। (2023-वर्तमान)
*नीलेश मालवीय - होबाक: शशवान लोक में शशमाग के बुद्धिमान सहायक। वह शशमाग को उसकी विश्वासघाती योजनाओं में सलाह और सहायता देता है। (2023-वर्तमान)
== निर्माण ==
फ़रवरी २०२३ में, [[सोनी सब]] ने यह शो की पुष्टि की।<ref>{{Cite web|url=https://www.livemint.com/industry/media/sony-sab-builds-on-family-brand-11667542645444.html|title=Sony SAB builds on family brand|first=Lata|last=Jha|date=4 नवम्बर 2022|website=mint}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://thelivenagpur.com/2023/03/13/indias-most-loved-superhero-baalveer-to-weave-magic-once-again/|title=India’s most loved Superhero BAALVEER to weave magic once again - The Live Nagpur|date=13 मार्च 2023}}</ref> [[देव जोशी]] और [[अदिति सनवाल]] नए सीज़न में बालवीर और काश्वी की भूमिका को निभाएंगे।<ref>{{Cite web|url=https://news.abplive.com/entertainment/television/dev-joshi-on-reprising-titular-role-in-new-season-of-balveer-it-has-now-become-a-part-of-me-1585973|title=Dev Joshi On Reprising Titular Role In New Season Of Balveer: 'It Has Now Become A Part Of Me'|date=3 मार्च 2023|website=news.abplive.com}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/im-extremely-happy-aditi-sanwal-on-joining-the-cast-of-baal-veer-season-3-7300723.html|title=Aditi Sanwal Joins Baal Veer 3’s Cast, Says She’s ‘Extremely Happy|date=15 मार्च 2023|website=News18}}</ref> धारावाहिक का पहला प्रोमो, फ़रवरी २०२३ को जारी किया गया था।<ref>{{cite web|title=Baalveer 3 {{!}} Coming Soon {{!}} Sony SAB |url=https://www.youtube.com/watch?v=Q9xpx2E5HbM |website=[[YouTube]] }}</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[सब टीवी द्वारा प्रसारित कार्यक्रमों की सूची]]
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
* {{आईएमडीबी शीर्षक|id=27161705}}
* [[सोनी लिव]] पर [https://www.sonyliv.com/shows/baalveer-s3-1700000071 ''बालवीर ३'']{{Dead link|date=सितंबर 2023 |bot=InternetArchiveBot }}
*[[ यूट्यूब]] पर [https://www.dailymotion.com/dm_fba7a495a5b51107f46afd2d23ed5fcd बालवीर 3]
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'''बालवीर ३''' एक भारतीय [[फंतासी]] टेलीविजन धारावाहिक है। जिसका प्रसारण १८ मार्च २०२३ से [[सोनी सब]] चैनल पर हुआ।<ref>{{Cite web|url=https://www.outlookindia.com/art-entertainment/-baalveer-5-reasons-to-watch-the-3rd-season-of-dev-joshi-s-superhero-show-news-270328|title=‘Baalveer’: 5 Reasons To Watch The 3rd Season Of Dev Joshi’s Superhero Show}}</ref> इसमें [[देव जोशी]], [[अदिति सनवाल]] और अदा खान मुख्य भूमिकाओं में हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.mid-day.com/entertainment/television-news/article/telly-tattle-new-blood-on-the-set-23274030|title=Telly Tattle: New blood on the set|date=8 मार्च 2023|website=Mid-day}}</ref> यह [[बालवीर (बहुविकल्पी)|''बालवीर फ्रेंचाइजी'']] की तीसरी किस्त है और [[बाल वीर|''बालवीर'']] और [[बालवीर रिटर्न्स|''बालवीर रिटर्न्स'']] का आध्यात्मिक सीक्वल है और इसके बाद सीधा सीक्वल ''[[बालवीर ४]]'' है।
==कथानक==
कहानी बालवीर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी मां आदिशी की दो महीने की यात्रा के बाद उदाका लोक में लौटने की तैयारी कर रहा है। बालवीर अधीशी लिए एक उपहार खरीदने के लिए पृथ्वी पर जाता है और काशवी नाम की एक लड़की को एक दुर्घटना से बचाता है। उदाका-लोक में, बालवीर शाश्वन-लोक के शासक उत्तान द्वारा निर्धारित परीक्षा पास करता है और उसे योग्य घोषित किया जाता है। हालाँकि, आगील अपने महाजादू का उपयोग करके बालवीर को मारने की योजना बनाती है।
पता चला है कि काशवी की मां आगील की भरोसेमंद सहयोगी तुयीर है। जब आगील काशवी पर हमला करता है, तो उसका महाजादू उसके अंदर समा जाता है (क्योंकि काशी दो अलग-अलग प्रजातियों की संतान है)। आगील काशवी को पकड़ लेती है और महाजादू निकालने के लिए उसे हिम्बाश लोक के पास ले जाता है, लेकिन अंततः उसके माता-पिता उसे बचा लेते हैं और फिर उसे सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर भेज देते हैं। घटनाओं की एक शृंखला में, बालवीर को बाबेल और तुयीर की मौत के लिए दोषी ठहराया जाता है और इस तरह मामले की जांच पूरी होने तक उसकी यादें और शक्तियां छीन ली जाती हैं। तब तक, उसे नया जीवन जीने के लिए शाश्वन लोक के एक गुप्त एजेंट बार्डोल के माध्यम से पृथ्वी पर भेजा जाता है।<ref name="n143">{{cite web | title= | website=imdb.com | url=https://www.imdb.com/hi/title/tt27161705/ | access-date=2026-10-18}}</ref>
बार्डोल एक जादूगर भास्कर - भारद्वाज को मामला सुलझने तक बालवीर की देखभाल करने का काम सौंपता है। इस प्रकार, बालवीर "वीर भारद्वाज" के रूप में एक नया जीवन जीना शुरू करता है, कुछ विवादों के बाद काशवी से दोस्ती करता है, और इसके अलावा अपने नए परिवार की वित्तीय समस्याओं को खत्म करने की कसम खाता है।
काशवी की मदद से वीर की यादें और शक्तियां अस्थायी रूप से अनजाने में वापस आ जाती हैं, और "बेनाम" के मार्गदर्शन में, वीर अपनी सुपरहीरो पहचान हासिल कर लेता है और उत्तान के सामने अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए सुराग ढूंढने की कोशिश करता है, लेकिन वो सब व्यर्थ हो जाता है। इस बीच, शशमाग "कुरजा" नामक एक शैतानी चुड़ैल की आत्मा को मुक्त करता है और उसे उत्तान के संदेह से बचने और बालवीर को मारने के उद्देश्य से आदिशी के शरीर में स्थानांतरित कर देता है। इस बीच, आगील द्वारा काशवी के साथ छेड़छाड़ करके बालवीर को मारने की निरर्थक कोशिशें बार-बार काशवी के नकारात्मक गुणों को ट्रिगर करती हैं। इसके साथ ही वीर और काशवी का रिश्ता भी मजबूत होता जा रहा होता है।
आदिशी (कुर्जा द्वारा नियंत्रित) बालवीर से मिलता है और उसे आत्मसमर्पण करने का आदेश देता है, जिससे वह इनकार कर देता है। नाटकीय मोड़ों के एक सेट में, उसे स्पष्ट रूप से मार दिया जाता है और इसका दोष उत्तान को उकसाने के लिए शशमाग द्वारा बालवीर पर डाल दिया जाता है। यद्यपि बेनाम कुर्जा की आत्मा को पकड़ लेता है, शशमाग समय आने पर कुर्जा को मार डालता है।
क्रोधित उत्तान अपने जीवन को समाप्त करने के लिए बालवीर के शक्ति स्रोत "बी" को नष्ट करना चाहता है। हालाँकि, बालवीर उस पर काबू पाने में कामयाब हो जाता है और "बी" को अपने पास सुरक्षित रख लेता है। रोमांचक उतार-चढ़ाव के एक सेट में, बालवीर को अंततः शशमाग के द्वंद्व के बारे में पता चलता है और अंत में महामहिम के सामने अपनी बेगुनाही साबित करता है, जो फिर पश्चाताप करते हुए अपने जुड़वां भाई, नेहमाग की मदद से शशमाग को पकड़ लेता है और मार देता है। हालाँकि, जैसा कि शैतान चाहता था, शशमाग ने मुकदमे से पहले चालाकी से नेहमाग के साथ अपना भेष बदल लिया था, जिससे किसी को भी पता चले बिना खुद को बचा लिया।
इस बीच, आगील एक धर्मी रक्षक "अग्नि" के रूप में प्रस्तुत होती है, जो काशवी को बालवीर के खिलाफ भड़काता है और उसे यह विश्वास दिलाने के लिए उकसाता है कि बालवीर उसके माता-पिता की मौत के लिए जिम्मेदार है। इस प्रकार, काशवी अपनी नई शक्तियों की मदद से बालवीर को मारकर बदला लेने की कसम खाती है। वह यह जानकर निराश और आहत हो जाती है कि वीर ही बालवीर है, और परिणामस्वरूप सूर्य ग्रहण के समय (जब उसकी शक्तियां बराबर हो जाती हैं) एक कठिन युद्ध में उस पर हमला करती है। हालाँकि, वे दोनों गलतफहमियों को प्रभावी ढंग से सुलझा लेते हैं और पछतावाग्रस्त काशवी अंततः वीर के साथ मेल-मिलाप कर लेती है, लेकिन उसे एहसास होता है कि उसके अंदर का महाजादू जहर की तरह उसके अस्तित्व को लगातार कमजोर कर रहा है।
बेनाम और काशवी की मदद से, बालवीर उसके शरीर से महाजादू को निकालने में कामयाब हो जाते है, जिससे वह सुरक्षित हो जाती है। जबकि शशमाग बदला लेने के लिए आगील से हाथ मिलाता है, बालवीर को अंततः पता चलता है कि बेनाम उसकी असली जैविक मां है, और आगील द्वारा धोखा दिए जाने पर, वह अपने पिता भस्म को क्रिंकाल लोक से मुक्त करना चाहता है।
==कलाकार==
===मुख्य===
* [[देव जोशी]] - बालवीर/वीर;आदिशी का बेटा; उत्तान का शिष्य; दिल्लक और किंकोरी के दोस्त;धरती का तीसरा बालवीर है; वह पृथ्वी और मानवता के रक्षक हैं। (2023-वर्तमान)<ref>{{Cite web|url=https://www.indiaforums.com/article/dev-joshi-opens-up-on-baal-veer-season-3_193017|title=Dev Joshi opens up on 'Baal Veer' Season 3|website=India Forums|language=en|access-date=2023-08-31}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.outlookindia.com/art-entertainment/-baalveer-5-reasons-to-watch-the-3rd-season-of-dev-joshi-s-superhero-show-news-270328|title=‘Baalveer’: 5 Reasons To Watch The 3rd Season Of Dev Joshi’s Superhero Show|last=Sur|first=Prateek|date=15 march 2023|website=Outlook|access-date=March 13, 2023}}</ref>
* [[अदिति सनवाल|अदिति सानवाल]]<ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/breaking-aditi-sanwal-will-play-the-role-of-kaashvi-baalveers-new-companion-in-baalveer-3/articleshow/98546300.cms?from=mdr|title=Breaking! Aditi Sanwal will play the role of Kaashvi, Baalveer’s New Companion in Baalveer 3|via=The Economic Times - The Times of India}}</ref> - काश्वी; द्वेर और बाबेल की बेटी (2023-वर्तमान)
*अदा खान - आगिल; वह अपने महाजादू का इस्तेमाल कर बालवीर को मारने की योजना बनाती है। (2023-वर्तमान)<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/it-is-tough-to-do-action-scenes-wearing-25-kg-heavy-gown-accessories-in-baalveer-3-but-its-also-very-exciting-ada-khan/articleshow/98862690.cms|title=It is tough to do action scenes wearing 25 kg heavy gown & accessories in Baalveer 3, but it's also very exciting: Ada Khan|date=2023-03-21|work=The Times of India|access-date=2023-08-31|issn=0971-8257}}</ref>
*आदित्य रणविजय
**शशमाग: उत्तान का सहायक; नेहमाग का जुड़वां भाई। उन्हें पहला बालवीर बनाया गया था, लेकिन एक निर्दोष व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने के बाद उनकी शक्तियां वापस ले ली गईं। उसने तुयेर, बेबेल और आदिशी को मार डाला और चालाकी से बालवीर को अपराध के लिए फंसाया, लेकिन अंततः बेनकाब हो गया। हालाँकि, इसके बाद वह नेहमाग के रूप में प्रस्तुत होना शुरू कर देता है और अपनी हार का बदला लेने के लिए एजील से हाथ मिला लेता है। (2023-वर्तमान)
**नेहमाग: शशमाग का धर्मी जुड़वां भाई। शशमाग के अपराधों के लिए उसे गलत तरीके से दोषी ठहराया गया था, लेकिन वह शशवान लोक की बेहतरी के प्रति अत्यधिक गर्व दिखाता है। उसे शशमाग ने मार डाला और उसकी पहचान शशमाग ने ले ली (2023)
*शर्मीली राज - बेनाम के रूप में: बालवीर की जैविक माँ; भस्म की पत्नी. उसने वीर को उसकी असली पहचान याद दिलाने और उसकी बेगुनाही साबित करने में मदद की। (2023-वर्तमान)
*[[मनीष खन्ना]] - भस्म के रूप में: बालवीर के जैविक-पिता; बेनाम के पति. वह शुरू में शाश्वत-लोक का एक सैनिक था जिसने दुनिया को जीतने के अपने भयानक इरादों के लिए उत्तान को ललकारा था।
===अन्य===
*श्रीधर वत्सर - तौबा तौबा के रूप में: अगील के मामा और साथी। (2023-वर्तमान)
*बेहज़ाद खान - उत्तान: शाशवान लोक के शासक; बालवीर के गुरु वह एक कट्टर है जो हमेशा शाशवान लोक के नियमों को बनाए रखने का लक्ष्य रखता है। (2023-वर्तमान)
*श्वेता रस्तोगी - आदिशी;बालवीर की माँ; वह उदाका-लोक की शासक हैं और शाशवान-लोक में एक पूजनीय स्थान रखती हैं। वह उदाका-लोक के लोगों का मार्गदर्शन करती है। (2023- वर्तमान)
*पत्राली चट्टोपाध्याय - द्वेर के रूप में: बाबेल की प्रेमी-पत्नी; काशवी की माँ। वह आगील की सबसे भरोसेमंद सहयोगी और उसकी सेना की पूर्व कमांडर थी। उसे गलती से बालवीर ने मार डाला था। (2023-वर्तमान)
*अनुपमा कुवर - तेत्रा: आगील की सिपाही (2023-वर्तमान)
*अतुल वर्मा - अंधेर के रूप में : आगील का सिपाही (2023-वर्तमान)
*[[शैलेश गुलाबानी]] - बाबेल: द्वेर का प्रेमी से पति बना; काशवी के पिता। उसे बालवीर ने गलती से मार डाला था। (2023)
*कुणाल सेठ - बरदौल; बालवीर का दोस्त और शाशवान लोक का एक गुप्त एजेंट जो पृथ्वी पर दुष्ट शक्तियों के आक्रमण होने पर शाशवान लोक को पृथ्वी की जानकारी देता है।
*विनायक भावे - भास्कर भारद्वाज के रूप में: गार्गी के पति और ईवा और नव्या के चाचा। वह एक जादूगर है जिसे बालवीर के पृथ्वी पर रहने के दौरान उसकी देखभाल करने का काम सौंपा गया है। (2023-वर्तमान)
*रूचि सिंह - ईवा भारद्वाज, नव्या की बहन और भास्कर की भतीजी के रूप में। (2023-वर्तमान)
*गीता बिष्ट - गार्गी भारद्वाज: भास्कर की पत्नी, ईवा और नव्या की चाची और वीर की माँ (दत्तक)(2023-वर्तमान)
*शाहब खान - वीर के दादा जी: उनका वीर के साथ एक सौहार्दपूर्ण बंधन है और वह अक्सर उनकी शरारतों में उनका साथ देते हैं। (2023-वर्तमान)
*हिया भट्ट - नव्या भारद्वाज: ईवा की बहन और भास्कर की भतीजी। (2023-वर्तमान)
*अमन भूतड़ा - दिल्लाक: उदाका लोक में बालवीर का दोस्त। (2023-वर्तमान)
*महिमा गुप्ता - किंकुडी: उदाका लोक में बालवीर की दोस्त। (2023)
*गरिमा गोयल - कियारा के रूप में: एक इवेंट हेड जो वीर को एक बड़े कार्यक्रम में जादू शो आयोजित करने का मौका देती है। (2023)
*मेघा अग्रवाल - वहमीर: उदका लोक में बालवीर की दोस्त। (2023-वर्तमान)
*नीलेश मालवीय - होबाक: शशवान लोक में शशमाग के बुद्धिमान सहायक। वह शशमाग को उसकी विश्वासघाती योजनाओं में सलाह और सहायता देता है। (2023-वर्तमान)
== निर्माण ==
फ़रवरी २०२३ में, [[सोनी सब]] ने यह शो की पुष्टि की।<ref>{{Cite web|url=https://www.livemint.com/industry/media/sony-sab-builds-on-family-brand-11667542645444.html|title=Sony SAB builds on family brand|first=Lata|last=Jha|date=4 नवम्बर 2022|website=mint}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://thelivenagpur.com/2023/03/13/indias-most-loved-superhero-baalveer-to-weave-magic-once-again/|title=India’s most loved Superhero BAALVEER to weave magic once again - The Live Nagpur|date=13 मार्च 2023}}</ref> [[देव जोशी]] और [[अदिति सनवाल]] नए सीज़न में बालवीर और काश्वी की भूमिका को निभाएंगे।<ref>{{Cite web|url=https://news.abplive.com/entertainment/television/dev-joshi-on-reprising-titular-role-in-new-season-of-balveer-it-has-now-become-a-part-of-me-1585973|title=Dev Joshi On Reprising Titular Role In New Season Of Balveer: 'It Has Now Become A Part Of Me'|date=3 मार्च 2023|website=news.abplive.com}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/im-extremely-happy-aditi-sanwal-on-joining-the-cast-of-baal-veer-season-3-7300723.html|title=Aditi Sanwal Joins Baal Veer 3’s Cast, Says She’s ‘Extremely Happy|date=15 मार्च 2023|website=News18}}</ref> धारावाहिक का पहला प्रोमो, फ़रवरी २०२३ को जारी किया गया था।<ref>{{cite web|title=Baalveer 3 {{!}} Coming Soon {{!}} Sony SAB |url=https://www.youtube.com/watch?v=Q9xpx2E5HbM |website=[[YouTube]] }}</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[सब टीवी द्वारा प्रसारित कार्यक्रमों की सूची]]
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
* {{आईएमडीबी शीर्षक|id=27161705}}
* [[सोनी लिव]] पर [https://www.sonyliv.com/shows/baalveer-s3-1700000071 ''बालवीर ३'']{{Dead link|date=सितंबर 2023 |bot=InternetArchiveBot }}
*[[ यूट्यूब]] पर [https://www.dailymotion.com/dm_fba7a495a5b51107f46afd2d23ed5fcd बालवीर 3]
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महाराजा सवाई जय सिंहजी तृतीय (1819 -1835) उन्नीसवीं सदी के जयपुर राज्य के शासक हुए। उन्होंने अपने पिता महाराजा सवाई जगत सिंहजी की अकस्मात मृत्यु के बाद जयपुर की राजगद्दी संभाली। उनका राजकाल सबसे कम रहा और वो मात्र सोलह वर्ष की अल्पायु में ही मृत्यु को प्राप्त हुए।
उनकी चार रानियां थीं। चारो रानियों में प्रमुख रानी उनकी पटरानी रानी देवड़ीजी (चौहानजी) रतन कँवरजी पुत्री महाराव शिव सिंहजी सिरोही की थी तथा उनके एकमात्र पुत्र और उत्तराधिकारी महाराजा सवाई राम सिंहजी की माता रानी चँद्रावतजी (सिसोदीनीजी) पुत्री राव लक्ष्मण सिंहजी चँद्रावत श्योपुर (जयपुर राज्य) की थी।
उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र महाराजा राम सिंहजी द्वितीय जयपुर के अगले शासक बने। राजकुमार की कम आयु के कारण उनकी माता माजी चंद्रावतजी ने उनके पीछे राज भार संभाला।
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{{Infobox royalty
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'''महाराजा सवाई जय सिंहजी तृतीय''' (1819 -1835) उन्नीसवीं सदी के जयपुर राज्य के शासक हुए। उन्होंने अपने पिता महाराजा सवाई जगत सिंहजी की अकस्मात मृत्यु के बाद जयपुर की राजगद्दी संभाली। उनका राजकाल सबसे कम रहा और वो मात्र सोलह वर्ष की अल्पायु में ही मृत्यु को प्राप्त हुए।
उनकी चार रानियां थीं। चारो रानियों में प्रमुख रानी उनकी पटरानी रानी देवड़ीजी (चौहानजी) रतन कँवरजी पुत्री महाराव शिव सिंहजी सिरोही की थी तथा उनके एकमात्र पुत्र और उत्तराधिकारी महाराजा सवाई राम सिंहजी की माता रानी चँद्रावतजी (सिसोदीनीजी) पुत्री राव लक्ष्मण सिंहजी चँद्रावत श्योपुर (जयपुर राज्य) की थी।
उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र महाराजा राम सिंहजी द्वितीय जयपुर के अगले शासक बने। राजकुमार की कम आयु के कारण उनकी माता माजी चंद्रावतजी ने उनके पीछे राज भार संभाला।
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text/x-wiki
== विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल (वर्तमान में सक्रिय) ==
यह सदस्यों की संख्या के आधार पर [[राजनीतिक दल|राजनीतिक दलों]] की एक सूची है। ये रिपोर्ट की गई सदस्यता संख्याएं{{Efn|The definition of "membership" varies widely from nation to nation, which has a significant bearing on the numbers and percentages listed on this page. For example, [[United Kingdom]] memberships are limited to paid-up [[subscriber]]s to each party. By this description the two dominant parties - [[कंजर्वेटिव पार्टी (यूके)|Conservative]] and [[लेबर पार्टी (यूके)|Labour]] – together have about half a million members, and are less than one per cent of the UK population. At an opposite extreme, [[United States]] memberships can include all [[registered voters]] who have self-identified their party preference, and who may number in the tens of millions, making their percentages of US population comparatively large.}} आमतौर पर पार्टियों द्वारा स्वयं दावा की जाती हैं और स्वतंत्र अध्ययनों द्वारा इसकी पुष्टि नहीं की गई हो सकती है।
पिछले आठ वर्षों में पांच गुना वृद्धि के बाद, भारतीय जनता पार्टी या बीजेपी के पास 170 मिलियन से अधिक सदस्य हैं।<ref>{{Cite news |title= How BJP became world's largest political party in 4 decades| url=https://timesofindia.indiatimes.com/india/in-10-charts-how-bjp-became-a-political-juggernaut-in-4-decades/articleshow/90680606.cms|language=en-IN |work=Times of India |date=2022-04-16 |accessdate=2023-07-01 }}</ref>
प्रसिद्ध चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्यता - लगभग 96 मिलियन - तुलना में कम है।<ref>{{Cite news |title= BJP v CCP: The rise of the world’s biggest political party|url=https://www.smh.com.au/world/asia/bjp-v-ccp-the-rise-of-the-world-s-biggest-political-party-20220916-p5bise.html|language=en-UK |work=Sydney Morning Herald |date=2022-10-16 |accessdate=2023-07-01 }}</ref>
===100 मिलियन से अधिक सदस्यों वाली पार्टियां===
{| class="wikitable sortable plainrowheaders"
|+100,000,000 से अधिक सदस्यों वाले वर्तमान में सक्रिय राजनीतिक दलों की सूची
! data-sort-type="number" scope="col" | पद
! scope="col" | नाम
! class="unsortable" scope="col" | संक्षेपाक्षर
! class="unsortable" scope="col" | पार्टी का चिन्ह
! scope="col" | देश
! scope="col" | से सक्रिय हैं
! scope="col" | सदस्यों की दावा की गई संख्या {{Small|(Year)}}
! scope="col" | जनसंख्या का अनुमानित प्रतिशत {{Small|(Year)}} <ref name="Perc" group="lower-alpha">Based on the claimed number of members and the population statistics of the country during the given year.</ref>
|-
| 1
| [[भारतीय जनता पार्टी]]<br /><small>''(इंडियन पीपुल्स पार्टी)''</small>
| भाजपा
| style="text-align:center;" |[[File:Bharatiya Janata Party (icon).svg|75px]]
|{{पताका|India}}
| style="text-align:center;" | {{Start date and age|1980|4|6}}
| 180 मिलियन 🏹{{Small|(2022)}} <ref name="IndiaToday">{{Cite news|url=https://www.indiatoday.in/india/story/bjp-inducts-7-crore-new-members-creates-membership-drive-record-1593164-2019-08-29|title=BJP inducts 7 crore new members, creates membership drive record|date=29 August 2019|work=[[India Today]]|access-date=29 August 2019}}</ref> <ref>{{Cite news|url=https://www.smh.com.au/world/asia/bjp-v-ccp-the-rise-of-the-world-s-biggest-political-party-20220916-p5bise.html|title=BJP v CCP: The rise of the world’s biggest political party|date=2022-10-16|work=Sydney Morning Herald|access-date=2023-07-01|language=en-UK}}</ref> <ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/india/in-10-charts-how-bjp-became-a-political-juggernaut-in-4-decades/articleshow/90680606.cms|title=How BJP became world's largest political party in 4 decades|date=2022-04-16|work=Times of India|access-date=2023-07-01|language=en-IN}}</ref> <ref>{{Cite news|url=https://www.nationalreview.com/the-morning-jolt/narendra-modis-message-to-america/|title=Narendra Modi’s Message to America|date=2022-06-23|work=National Review|access-date=2023-07-01|language=en-US|quote="His Bharatiya Janata Party (BJP, or “Indian People’s Party”) is on the right of the Indian political spectrum. It is the largest political party in the world, with more members than the Chinese Communist Party, and supports Hindu nationalist ideology and economic development."}}</ref><br> 140 मिलियन {{small|(2025)}}<ref>{{Cite web|title=Ahead of PM Modi sir's 75th birthday, BJP achieves major milestone, becomes world's largest political party; its total members are...|url=https://www.india.com/news/india/ahead-of-pm-modis-75th-birthday-bjp-achieves-major-milestone-becomes-worlds-largest-political-party-its-total-members-are-14-crore-narendra-modi-jp-nadda-bharatiya-janata-party-8074635/|website=www.india.com|access-date=2025-11-28|language=en}}</ref>
| 13.31% {{Small|(2019)}} <br> 9.52% {{small|(2025)}}
|-
| 2
| [[चीनी साम्यवादी दल|चीनी कम्युनिस्ट पार्टी]]
| सीसीपी<br> सीपीसी
| style="text-align:center;" |[[चित्र:Danghui.svg|पाठ=|75x75पिक्सेल]]
|{{पताका|China}}
| style="text-align:center;" | {{Start date and age|1921|7|23}}
| 98.04 मिलियन {{Small|(2023)}} <ref name="2022PartyCensus">{{Cite news|url=http://www.qstheory.cn/yaowen/2023-06/30/c_1129725174.htm|title=中国共产党党内统计公报|date=30 June 2023|work=[[Qiushi]]|access-date=30 June 2023|agency=[[Xinhua News Agency]]|language=Chinese|trans-title=Communist Party of China Party Statistics Announcement}}</ref><br> 100.27 मिलियन {{small|(2024)}}<ref name="2024PartyCensus">{{Cite web |date=30 June 2025 |title=中国共产党党内统计公报 |trans-title=Chinese Communist Party Statistics Announcement |url=https://www.gov.cn/yaowen/liebiao/202506/content_7029995.htm |access-date=30 June 2025 |website=[[State Council of the People's Republic of China]] |publisher= |language=zh}}</ref>
| 6.95% {{Small|(2023)}} <br>7.1% {{small|(2024)}}
|}
===10 मिलियन से 100 मिलियन सदस्यों वाली पार्टियां===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders"
|+वर्तमान में सक्रिय राजनीतिक दलों की सूची जिनमें 10,000,000 से 100,000,000 सदस्य हैं।
|-
!scope="col" data-sort-type="number"|पद
!scope="col"|नाम
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!scope="col" class=unsortable|पार्टी का प्रतीक
!scope="col"|देश
!scope="col"|से सक्रिय हैं
!scope="col"|दावा किए गए सदस्यों की संख्या {{small|(वर्ष)}}
!scope="col"|जनसंख्या का अनुमानित प्रतिशत {{small|(वर्ष)}}<ref name="Perc" group="lower-alpha"/>
|-
|3
|[[डेमोक्रैटिक पार्टी (संयुक्त राज्य)|डेमोक्रैटिक पार्टी]]
|डी<br/>डेम
| style="text-align:center;" |[[File:Democratic_Disc.svg|कड़ी=https://en.wikipedia.org/wiki/File:Democratic_Disc.svg|75x75पिक्सेल]]
|{{flag|संयुक्त राज्य अमेरिका}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|1828|1|8|p=yes|br=yes|df=yes}}
|44.1 मिलियन {{small|(2025)}}<ref name="auto">{{Cite web|title=How many Democrats and Republicans are in each state?|url=https://usafacts.org/articles/how-many-voters-have-a-party-affiliation/|website=USAFacts|access-date=2025-11-28|language=en-US}}</ref><ref group="lower-alpha" name="auto1">Only includes voters registered as party affiliates in the District of Columbia and the 32 states which allow [[Voter registration in the United States#Party affiliation|voter registration with a specific party]]; in the United States, it is this voter registration which determines eligibility to vote in the party's internal elections such as primaries, rather than the party's dues-paying membership as in the rest of the world. Jurisdictions include [[Alaska]], [[Arizona]], [[Arkansas]], [[California]], [[Colorado]], [[Connecticut]], [[Delaware]], [[Washington, D.C.|District of Columbia]], [[Florida]], [[Idaho]], [[Iowa]], [[Kansas]], [[Kentucky]], [[Louisiana]], [[Maine]], [[Maryland]], [[Massachusetts]], [[Missouri]], [[Nebraska]], [[Nevada]], [[New Hampshire]], [[New Jersey]], [[New Mexico]], [[New York (state)|New York]], [[North Carolina]], [[Oklahoma]], [[Oregon]], [[Pennsylvania]], [[South Dakota]], [[Utah]], [[West Virginia]] and [[Wyoming]]. The overall numbers in the remaining states lean heavily Republican so the total percentage of the population that's Democrat or Republican is much closer than these values depict.</ref>
|12.67% {{small|(2025)}}
|-
|4
|[[रिपब्लिकन पार्टी]]
|आर<br/>जीओपी<br/>आरईपी
| style="text-align:center;" |[[File:Republican_Disc.svg|कड़ी=https://en.wikipedia.org/wiki/File:Republican_Disc.svg|75x75पिक्सेल]]
|{{flag|संयुक्त राज्य अमेरिका}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|1854|3|20|p=yes|br=yes|df=yes}}
|37.4 मिलियन {{small|(2025)}}<ref name="auto"/><ref group="lower-alpha" name="auto1"/>
|10.75% {{small|(2025)}}
|-
|5
|[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]
|इंक कांग्रेस
| style="text-align:center;" |[[File:INC_Logo.png|कड़ी=https://en.wikipedia.org/wiki/File:INC_Logo.png|पाठ=|87x87पिक्सेल]]
|{{flag|भारत}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|1885|12|28|p=yes|br=yes|df=yes}}
|26 मिलियन {{small|(2022)}}<ref>{{Cite web|title=congress: Congress adds 2.6 crore new members in its digital membership drive, Sonia Gandhi enrolls too - The Economic Times|url=https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/congress-adds-2-6-cr-new-members-in-its-digital-membership-drive-sonia-gandhi-enrolls-too/articleshow/90866604.cms?from=mdr|website=m.economictimes.com| date=15 April 2022 |access-date=2025-11-28}}</ref>
|1.8% {{small|(2022)}}
|-
|-
|6
|[[द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम]]<br/><small>''द्रविड़ प्रगतिशील महासंघ''</small>
| द्रमुक
|[[File:Indian_election_symbol_rising_sun.svg|center|75x75px]]
|{{flag|भारत}}
|style="text-align:center;"|{{Start date and age|1949|9|17|p=yes|br=yes|df=yes}}
|25 मिलियन {{small|(2026)}}<ref>{{Cite web|title=After membership drive, DMK has 2.5 crore cadre|url=https://www.dmk.in/en/party/historyofdmk/|access-date=2026-01-12|website=DMK Official|date=12 January 2026|archive-date=5 मई 2026|archive-url=https://web.archive.org/web/20260505224831/https://www.dmk.in/en/party/historyofdmk/|url-status=dead}}</ref>
|1.38% {{small|(2026)}}
|-
|7
|[[अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम]]<br/><small>''अखिल भारतीय [[सी॰एन॰ अन्नादुरै|अन्ना]] [[द्रविड़ प्रजाति|द्रविड़]] प्रगतिशील महासंघ''</small>
| अन्नाद्रमुक
|style="text-align:center;"|[[File:Indian Election Symbol Two Leaves.svg|75px|alt=]]
|{{flag|भारत}}
|style="text-align:center;"|{{Start date and age|1972|10|17|p=yes|br=yes|df=yes}}
|20,044,400 {{small|(2023)}}<ref>{{cite news|date=5 August 2023|title=AIADMK gets 2 crore cadres: Edappadi Palaniswami|language=en-IN|work=[[The Times of India]]|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/chennai/aiadmk-gets-2-crore-cadres-edappadi-palaniswami/articleshow/102457828.cms|access-date=5 August 2023}}</ref>
|1.4% {{small|(2023)}}
|-
|8
|[[तमिलगा वेत्री कड़गम]]<br/><small>''[[तमिलकम]] की विजय पार्टी''</small>
| टीवीके
|style="text-align:center;"| [[File:Indian Election Symbol Whistle.png|75x75px]]
|{{flag|भारत}}
|style="text-align:center;"|{{Start date and age|2024|2|2|p=yes|br=yes|df=yes}}
|15 मिलियन {{small|(2025)}}<ref>{{cite web | url=https://www.dailythanthi.com/news/tamilnadu/tvk-membership-rises-to-1-crore-1163142 | title=த.வெ.க. உறுப்பினர் சேர்க்கை 1½ கோடியாக உயர்ந்தது | website=[[Dina Thanthi]] | date=15 June 2025 |language=Tamil}}</ref>
|1% {{small|(2025)}}
|-
|9
|चामा चा मापिन्दुज़ी पार्टी<br/><small>''क्रांति की''</small>
| सीसीएम
|style="text-align:center;"|[[File:Flag of Chama Cha Mapinduzi.svg|75px]]
|{{flag|तंज़ानिया}}
|style="text-align:center;"|{{Start date and age|1977|2|5|p=yes|br=yes|df=yes}}
|12 मिलियन {{small|(2022)}}<ref>{{cite web|title=CCM members rise to 12 million as party goes digital|url=https://dailynews.co.tz/news/2022-02-0561fe690c0302c.aspx|website=Daily News|access-date=15 October 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20220205130059/https://dailynews.co.tz/news/2022-02-0561fe690c0302c.aspx|archive-date=5 February 2022|date=5 February 2022|url-status=dead}}</ref>
|19% {{small|(2022)}}
|-
|10
|न्याय और विकास पार्टी
|एकेपी
एके पार्टी
|style="text-align:center;"|
|{{flag|तुर्की}}
|style="text-align:center;"|{{Start date and age|2001|8|14|p=yes|br=yes|df=yes}}
|11,135,306 {{small|(2024)}}<ref>{{cite web|last=|first=|date=4 January 2024|title=Adalet ve Kalkınma Partisi|url=https://www.yargitaycb.gov.tr/icerik/1095|access-date=17 February 2024|website=Türkiye Cumhuriyeti Yargıtay Cumhuriyet Başsavcılığı|publisher=[[Court of Cassation (Turkey)|Court of Cassation]]|language=tr}}</ref>
|12.93% {{small|(2024)}}
|-
|11
|राष्ट्रीय पुनरुत्थान आंदोलन
| मुरैना
| style="text-align: center;" |[[File:Morena Party (Mexico).svg|center|75x75px]]
|{{flag|मेक्सिको}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|2014|7|10|p=yes|br=yes|df=yes}}
|11,050,758 {{small|(2026)}}<ref>{{Cite web |last=Jornada |first=La |last2=redacción |first2=La |date=2026-01-14 |title=Morena supera los 11 millones de afiliados y rebasa su meta nacional en un año |url=https://www.jornada.com.mx/noticia/2026/01/14/politica/morena-supera-meta-de-afiliacion-en-un-ano-suman-mas-de-12-millones-50-mil |access-date=2026-01-16 |website=La Jornada |language=es}}</ref>
|15.38% {{small|(2026)}}
|-
|12
|समृद्धि पार्टी
| पीपी
|
|{{flag|Ethiopia}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|2019|12|01|p=yes|br=yes|df=yes}}
|11 मिलियन {{small|(2022)}}<ref>{{Cite web |last=Kana |first=Lauriane |title=Ethiopian PM Abiy calls for peace at launch of party's first congress |url=https://www.africanews.com/2022/03/12/ethiopian-pm-abiy-calls-for-peace-at-launch-of-party-s-first-congress// |access-date=3 March 2022 |archive-date=21 अक्तूबर 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20221021170855/https://www.africanews.com/2022/03/12/ethiopian-pm-abiy-calls-for-peace-at-launch-of-party-s-first-congress// |url-status=dead }}</ref>
|11% {{small|(2022)}}
|-
|13
|[[आम आदमी पार्टी]]
| आप
| style="text-align:center;" |[[File:AAP Symbol.png|75px]]
|{{flag|भारत}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|2012|11|26|p=yes|br=yes|df=yes}}
|10.05 मिलियन {{small|(2014)}}<ref>{{cite news |title=AAP has a crore members and counting |url=https://www.indiatoday.in/india/story/aam-aadmi-party-has-a-crore-members-and-counting-178600-2014-01-27 |date=27 January 2014 |access-date=26 August 2019}}</ref>
|0.81% {{small|(2014)}}
|-
|14
|[[पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़]]<br /><small>''(पाकिस्तान मूवमेंट फॉर जस्टिस)''</small>
| पीटीआई
| style="text-align:center;" |[[File: Flag of the Pakistan Tehreek-e-Insaf.svg|75px]]
|{{flag|पाकिस्तान}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|1996|4|25|p=yes|br=yes|df=yes}}
|10 मिलियन {{small|(2012)}}<ref>{{cite news|title=PTI marks 'Revolution Day'|url=https://www.dawn.com/news/760308|newspaper=Dawn|date=31 October 2012|first=Mansoor|last=Malik}}</ref>
|5.34% {{small|(2012)}}
|-
|15
|[[तेलुगु देशम पार्टी]]<br /><small>''[[तेलुगू लोग|तेलुगु]] भूमि की पार्टी''</small>
| तेदेपा
| style="text-align: center;" |[[File:TDP Cycle Symbol.jpg|75px]]
|{{flag|भारत}}
| style="text-align: center;" |{{Start date and age|1982|3|29|p=yes|br=yes|df=yes}}
|10,052,598 {{small|(2025)}}<ref>{{Cite news |date=2025-01-17 |title=TDP membership crosses one crore milestone |work=The New Indian Express |url=https://www.newindianexpress.com/states/andhra-pradesh/2025/Jan/17/tdp-membership-crosses-one-crore-milestone |access-date=2026-04-07 |issn=0971-8257}}</ref>
|0.69% {{small|(2025)}}
|}
=== 10 लाख से 100 लाख सदस्यों वाली पार्टियां ===
{|class="wikitable sortable plainrowheaders"
|+वर्तमान में सक्रिय राजनीतिक दलों की सूची जिनमें 1,000,000 से 10,000,000 सदस्य हैं।
|-
!scope="col" data-sort-type="number"|पद
!scope="col"|नाम
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!scope="col" class=unsortable|पार्टी का प्रतीक
!scope="col"|देश
!scope="col"|से सक्रिय हैं
!scope="col"|दावा किए गए सदस्यों की संख्या {{small|(वर्ष)}}
!scope="col"|जनसंख्या का अनुमानित प्रतिशत {{small|(वर्ष)}}<ref name="Perc" group="lower-alpha"/>
|-
|16
|कोरिया की श्रमिक पार्टी
| डब्ल्यूपीके
| style="text-align:center;" |[[File:WPK symbol.svg|75px]]
|{{flag|उत्तर कोरिया}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|1949|6|30|p=yes|br=yes|df=yes}}
|6.5 मिलियन {{small|(2021)}}<ref>{{cite news |author=나혜윤 |title=北, 당원 대폭 늘었나{{nbsp}}... 당 대회 참석수로 '650만 명' 추정 |url=https://www.news1.kr/articles/?4172242 |access-date=5 November 2021 |work=뉴스1 |date=6 January 2021 |language=ko}}</ref>
|25.07% {{small|(2021)}}
|-
|17
|कंबोडियन पीपुल्स पार्टी
| सीपीपी
| style="text-align:center;" |
|{{flag|कम्बोडिया}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|1951|6|28|p=yes|br=yes|df=yes}}
|6 मिलियन {{small|(2020)}}<ref>{{cite web |url=https://www.voacambodia.com/a/ruling-party-new-headquarters-funded-by-members-and-costs-40m-cpp-spokesperson/5409707.html |title=Ruling Party's New Headquarters Funded by Members and Costs $40M: CPP Spokesperson |publisher=VOA |date=7 May 2020 |access-date=8 May 2020}}</ref>
|35.89% {{small|(2020)}}
|-
|18
|[[वियतनामी साम्यवादी पार्टी]]
| सीपीवी
| style="text-align:center;" |[[File:Communist Party of Vietnam flag logo.svg|75px]]
|{{flag|वियतनाम}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|1930|2|3|p=yes|br=yes|df=yes}}
|5.3 मिलियन {{small|(2021)}}<ref>{{cite magazine |url=http://www.tapchicongsan.org.vn/Home/Nghiencuu-Traodoi/2016/40378/Nang-cao-chat-luong-dang-vien-Van-de-cot-loi-de.aspx |magazine=Communist Review |access-date=15 June 2018 |date=19 August 2016 |title=Nâng cao chất lượng đảng viên - Vấn đề cốt lõi để xây dựng Đảng trong sạch, vững mạnh trong tình hình hiện nay}}</ref>
|5.4% {{small|(2021)}}
|-
|19
|कोरिया की लोकतांत्रिक पार्टी
| डीपीके
| style="text-align:center;" |[[File:2024 Logo of the Democratic Party of Korea.svg|75px]]
|{{flag|दक्षिण कोरिया}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|2014|3|26|p=yes|br=yes|df=yes}}
|5,129,314 {{small|(2023)}}<ref>{{Cite web |script-title=ko:자료공간 {{!}} 선거/법규/정당 {{!}} 자료공간 {{!}} 중앙선거관리위원회 |url=https://www.nec.go.kr/site/nec/ex/bbs/View.do?cbIdx=1129&bcIdx=264630 |archive-url=https://web.archive.org/web/20250126144833/https://www.nec.go.kr/site/nec/ex/bbs/View.do?cbIdx=1129&bcIdx=264630 |archive-date=26 जनवरी 2025 |access-date=19 May 2025 |website=www.nec.go.kr |language=ko |url-status=live }}</ref>
|9.92% {{small|(2023)}}
|-
|20
|पीपुल्स पावर पार्टी
| पीपीपी
| style="text-align:center;" |[[File:Logo of People Power Party of Korea.svg|75px]]
|{{flag|दक्षिण कोरिया}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|2020|2|17|p=yes|br=yes|df=yes}}
|4,449,281 {{small|(2023)}}<ref>{{Cite web |script-title=ko:자료공간 {{!}} 선거/법규/정당 {{!}} 자료공간 {{!}} 중앙선거관리위원회 |url=https://www.nec.go.kr/site/nec/ex/bbs/View.do?cbIdx=1129&bcIdx=264630 |archive-url=https://web.archive.org/web/20250126144833/https://www.nec.go.kr/site/nec/ex/bbs/View.do?cbIdx=1129&bcIdx=264630 |archive-date=26 January 2025 |access-date=19 May 2025 |website=www.nec.go.kr |language=ko |url-status=live }}</ref>
|8.6% {{small|(2023)}}
|-
|21
|वेनेजुएला की संयुक्त समाजवादी पार्टी
| पीएसयूवी
| style="text-align:center;" |[[File:PSUV 2024 logo.svg|75px]]
|{{flag|वेनेज़ुएला}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|2007|3|24|p=yes|br=yes|df=yes}}
|4,240,032 {{small|(2024)}}<ref>{{Cite web |last=swissinfo.ch |first=S. W. I. |date=2024-03-11 |title=Más de 4 millones de chavistas apoyan candidatura para reelección de Maduro, según partido |url=https://www.swissinfo.ch/spa/m%C3%A1s-de-4-millones-de-chavistas-apoyan-candidatura-para-reelecci%C3%B3n-de-maduro,-seg%C3%BAn-partido/73621059 |access-date=2026-01-08 |website=SWI swissinfo.ch |language=es}}</ref>
|14.28% {{small|(2024)}}
|-
|22
|जिम्बाब्वे अफ्रीकन नेशनल यूनियन – पैट्रियटिक फ्रंट
|ज़ानू-पीएफ
| style="text-align:center;" |[[File:Flag_of_ZANU-PF.svg|75px]]
|{{flag|ज़िम्बाब्वे}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|1975|3|18|p=yes|br=yes|df=yes}}
|3,900,000 <small>(2022)</small><ref>{{Cite web |url=https://www.heraldonline.co.zw/president-takes-part-in-cell-day/ |title=President takes part in Cell Day |date=11 June 2022}}</ref>
|25.69% {{small|(2022)}}
|-
|23
|न्यायवादी पार्टी
| पीजे
| style="text-align:center;" |[[File:Partido Justicialista emblema.svg|75px]]
|{{flag|अर्जेण्टीना}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|1946|11|21|p=yes|br=yes|df=yes}}
|3,818,678 <small>(2019)</small><ref name=":0">{{Cite web|title=Estadística de Afiliados|url=https://www.electoral.gob.ar/nuevo/paginas/pdf/Estadistica_Afiliados_1s_2017.pdf|date=9 May 2020|website=Gobierno Electoral}}</ref>
|8.5% {{small|(2019)}}
|-
|24
|यूनाइटेड मलेशियन नेशनल ऑर्गनाइजेशन
| यूएमएनओ
|style="text-align:center;"|[[File:UMNO logo.svg|75px]]
|{{flag|मलेशिया}}
|style="text-align:center;"|{{Start date and age|1946|05|11|p=yes|br=yes|df=yes}}
|3,391,236 {{small|(2022)}}<ref>{{cite news|last1=Radhi|first1=Nor Ain Mohamed|last2=Povera|first2=Adib|title=Umno has over three million members, says secretary-general|url=https://www.nst.com.my/news/politics/2022/03/781106/umno-has-over-three-million-members-says-secretary-general|access-date=24 January 2023|work=New Straits Times|date=17 March 2022}}</ref>
|10.1% {{small|(2022)}}
|-
|25
|[[अंगोला मुक्ति जनता अंदोलन - श्रम दल]]
| एमपीएलए
|style="text-align:center;"|[[File:Logo_of_the_MPLA_(Angola).svg|75px]]
|{{flag|अंगोला}}
|style="text-align:center;"|{{Start date and age|1956|12|10|p=yes|br=yes|df=yes}}
|2.7 मिलियन <small>(2008)</small><ref>{{Cite web|url=https://www.avante.pt/pt/1793/emfoco/24123/Angola-um-pa%C3%ADs-em-constru%C3%A7%C3%A3o-livre-e-soberano.htm|title=Angola, um país em construção, livre e soberano|website=Avante}}</ref>
|14% {{small|(2008)}}
|-
|26
|कोलोराडो पार्टी
|एएनआर-पीसी
|style="text-align:center;"|[[File:Logo of the Colorado Party (Paraguay).svg|75px]]
|{{flag|पैराग्वे}}
|style="text-align:center;"|{{Start date and age|1887|9|11|p=yes|br=yes|df=yes}}
|2,616,424 <small>(2022)</small><ref>{{Cite web|title=La Nación / ANR tiene más de 2.500.000 afiliados habilitados para votar en diciembre|url=https://www.lanacion.com.py/politica/2022/10/04/anr-tiene-mas-de-2500000-afiliados-habilitados-para-votar-en-diciembre/|access-date=2024-03-05|website=www.lanacion.com.py|language=es}}</ref>
|42.82% {{small|(2022)}}
|-
|27
|उद्यमियों और व्यापारियों का आंदोलन – उज़्बेकिस्तान लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी
|ओज़लिदेप
| style="text-align:center;" |[[File:Logo of the Uzbekistan Liberal Democratic Party.svg|75px]]
|{{flag|उज़्बेकिस्तान}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|2003|11|15|p=yes|br=yes|df=yes}}
|2,307,642 {{small|(2026)}}<ref>{{Cite web |last=Group |first=Online Service |title=UzLiDep |url=https://uzlidep.uz/en |access-date=2026-01-08 |website=uzlidep.uz |language=en}}</ref>
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|-
|28
|संयुक्त रूस
|वाईआर
| style="text-align:center;" |[[File:ЕдРо_(лог).svg|75px]]
|{{flag|रूस}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|2001|12|1|p=yes|br=yes|df=yes}}
|2,073,772 {{small|(2013)}}<ref>{{cite web |url=http://www.minjust.ru/common/img/uploaded/docs/2011.02.01_Edinaya_Rossiya_perechen.doc |script-title=ru:ИНФОРМАЦИЯ о численности членов Всероссийской политической партии "ЕДИНАЯ РОССИЯ" в каждом из ее региональных отделений (по состоянию на 1 января 2011 года) |trans-title=Information on the number of members of the political party "UNITED RUSSIA" in each of its regional offices (as at 1 January 2011) |language=ru |format=DOC |publisher=minjust.ru |date=1 February 2011 |access-date=30 March 2015 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20121025025351/http://www.minjust.ru/common/img/uploaded/docs/2011.02.01_Edinaya_Rossiya_perechen.doc |archive-date=25 October 2012}}</ref>
|1.45% {{small|(2013)}}
|-
|29
|ब्राज़ीलियाई लोकतांत्रिक आंदोलन
| एमडीबी
|[[File:Movimento_Democrático_Brasileiro_(2017).svg|center|75px]]
|{{flag|ब्राज़ील}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|1965|12|4|p=yes|br=yes|df=yes}}
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|0.95% {{small|(2026)}}
|-
|30
|रेडिकल सिविक यूनियन
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| style="text-align:center;" |[[File:Ucr modern logo.svg|75px]]
|{{flag|अर्जेण्टीना}}
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|-
|31
|श्रमिक पार्टी
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| style="text-align:center;" |[[File:PT (Brazil) logo 2021.svg|75px]]
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|-
|32
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| style="text-align:center;" |[[File:Authentic Radical Liberal Party logo (2018 variant).svg|75px]]
|{{flag|पैराग्वे}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|1887|7|10|p=yes|br=yes|df=yes}}
|1,548,023 {{small|(2022)}}<ref>{{Cite web|title=PLRA supera los 1,5 millones de afiliados - Política - ABC Color|url=https://www.abc.com.py/politica/2022/06/04/plra-supera-los-15-millones-de-afiliados/|access-date=2024-03-05|website=www.abc.com.py|language=es}}</ref>
|25.33% {{small|(2022)}}
|-
|33
|फिलीपींस की पार्टिडो फ़ेडरल एनजी<br />{{small|''पिलिपिनास फ़ेडरल पार्टी''}}
| पीएफपी
| style="text-align:center;" |
|{{flag|फ़िलीपीन्स}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|2018|10|05|p=yes|br=yes|df=yes}}
|1.5 मिलियन {{small|(2021)}}<ref name="partidofederalpilipinas">{{cite news|title=Federal party eyes Marcos as head|url=https://www.manilatimes.net/2021/09/20/news/national/federal-party-eyes-marcos-as-head/1815384|date=27 May 2022}}</ref>
|1.35% {{small|(2021)}}
|-
|34
|रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी
| सीपीएच
| style="text-align:center;" |[[File:CHP six arrows.svg|75px]]
|{{flag|तुर्की}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|1923|9|9|p=yes|br=yes|df=yes}}
|1,428,800 {{small|(2024)}}<ref>{{cite web |last= |first= |date=4 January 2024 |title=Cumhuriyet Halk Partisi |url=https://www.yargitaycb.gov.tr/icerik/1110 |access-date=17 February 2024 |website=Türkiye Cumhuriyeti Yargıtay Cumhuriyet Başsavcılığı |publisher=[[Court of Cassation (Turkey)|Court of Cassation]] |language=tr}}</ref>
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|-
|35
|संस्थागत क्रांतिकारी पार्टी
|पीआरआई
| style="text-align:center;" |[[File:PRI logo (Mexico).svg|75px|alt=]]
|{{flag|मेक्सिको}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|1929|03|04|p=yes|br=yes|df=yes}}
|1,411,889 {{small|(2023)}}<ref name="Padrón de afiliados">{{Cite web |title=Padrón de afiliados |url=https://www.ine.mx/actores-politicos/partidos-politicos-nacionales/padron-afiliados/ |access-date=2026-01-08 |website=www.ine.mx}}</ref>
|1.1% {{small|(2023)}}
|-
|36
|प्रगतिवादी<br />{{small|''प्रोग्रेसिस्टास''}}
| पीपी
| style="text-align:center;" |[[File:Progressistas logotipo (cropped).png|75px]]
|{{flag|ब्राज़ील}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|1995|11|16|p=yes|br=yes|df=yes}}
|1,296,058 <small>(2025)</small><ref name=":1" />
|0.6% <small>(2026)</small>
|-
|37
|डेमोक्रेटिक रिन्यूअल पार्टी
| पीआरडी
| style="text-align:center;" |[[File:Logomarca_Partido_Renovação_Democrática.png|75px|alt=]]
|{{flag|ब्राज़ील}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|2022|10|26|p=yes|br=yes|df=yes}}
|1,292,479 {{small|(2025)}}<ref name=":1" />
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|-
|38
|ब्राज़ीलियाई सोशल डेमोक्रेसी पार्टी
| पीएसडीबी
| style="text-align:center;" |[[File:Logo of the Brazilian Social Democracy Party (2023).svg|75px]]
|{{flag|ब्राज़ील}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|1988|6|25|p=yes|br=yes|df=yes}}
|1,269,131 <small>(2025)</small><ref name=":1" />
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|-
|39
|पीपुल्स जस्टिस पार्टी
| पीकेआर
| style="text-align:center;" |[[File:Parti_Keadilan_Rakyat_logo.svg|75px]]
|{{flag|मलेशिया}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|1998|12|10|p=yes|br=yes|df=yes}}
|1,153,212 <small>(2024)</small><ref>{{cite news |url=https://www.bharian.com.my/berita/nasional/2024/04/1237239/pkr-rekod-lonjakan-keahlian-di-kelantan|title=PKR rekod lonjakan keahlian di Kelantan|date=21 April 2024|access-date=28 April 2025}}</ref>
|3.38% <small>(2024)</small>
|-
|40
|[[गुओमिंदांग]]<br />{{small|''राष्ट्रवादी पार्टी''}}
| केएमटी
| style="text-align:center;" |[[File:Emblem of the Kuomintang.svg|75px]]
|{{flag|चीनी गणराज्य}} (आरओसी)
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|1919|10|10|p=yes|br=yes|df=yes}}
|1,090,000 {{small|(2017)}}<ref>{{cite news|last1=Hsu|first1=Stacy|title=Hung urges for scrutiny of KMT leader elections|url=http://www.kmt.org.tw/2017/01/blog-post_74.html|access-date=16 January 2017|work=Taipei Times|date=16 January 2017}}</ref>
|4.62% {{small|(2017)}}
|-
|41
|आर्थिक स्वतंत्रता सेनानी
|ईएफएफ
| style="text-align:center;" |[[File:EFF Flag HQ.jpg|75px]]
|{{flag|दक्षिण अफ़्रीका}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|2013|7|26|p=yes|br=yes|df=yes}}
|1,085,843 <small>(2022)</small><ref>{{Cite web |title=Target of one million members reached |url=https://www.politicsweb.co.za/documents/target-of-one-million-members-reached--eff |access-date=December 5, 2022 |archive-date=22 December 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20221222102929/https://www.politicsweb.co.za/documents/target-of-one-million-members-reached--eff |url-status=live }}</ref>
|1.75% <small>(2022)</small>
|-
|42
|डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी
|पीडीटी
| style="text-align:center;" |
|{{flag|ब्राज़ील}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|1979|6|17|p=yes|br=yes|df=yes}}
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|-
|43
|ब्राज़ील संघ
| यूएनआईएओ
| style="text-align:center;" |[[File:União Brasil logo.svg|75px]]
|{{flag|ब्राज़ील}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|2021|10|6|p=yes|br=yes|df=yes}}
|1,074,822
<small>(2025)</small><ref name=":1" />
|0.5% <small>(2026)</small>
|-
|44
|[[भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)]]
|सीपीआई(एम)
सीपीएम
| style="text-align:center;" |
[[File:Cpm election symbol.svg|75px]]
|{{flag|भारत}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|1964|11|7|p=yes|br=yes|df=yes}}
|1,019,009 {{small|(2024)}}<ref>{{Cite news |last=Anandan |first=S. |date=2025-04-05 |title=CPI(M) keen on improving quality of membership, not quantity |url=https://www.thehindu.com/news/national/kerala/cpim-keen-on-improving-quality-of-membership-not-quantity/article69416828.ece |access-date=2026-01-08 |work=The Hindu |language=en-IN |issn=0971-751X}}</ref>
|0.07% {{small|(2024)}}
|-
|45
|मलेशियन इस्लामिक पार्टी
| पीए
| style="text-align:center;" |[[File:PAS_logo.svg|75px]]
|{{flag|मलेशिया}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|1951|11|24|p=yes|br=yes|df=yes}}
|1,005,700 <small>(2022)</small><ref>{{Cite web |url=https://harakahdaily.net/index.php/2022/09/04/ahli-pas-berjumlah-1005700-sehingga-ogos-lalu/ |title=Ahli PAS berjumlah 1,005,700 sehingga Ogos lalu |date=4 September 2022 |access-date=7 April 2025}}</ref>
|2.89% <small>(2022)</small>
|-
|46
|[[राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा]]
| एफएलएन
| style="text-align:center;" |[[File:FLN Logo.png|75px]]
|{{flag|अल्जीरिया}}
| style="text-align:center;" |{{Start date and age|1954|10|23|p=yes|br=yes|df=yes}}
|1 मिलियन <small>(2019)</small><ref>{{Cite web |url=http://pfln.dz/?p=1716 |title=زهية جمعي : للشعب الجزائري وحده الحق في تقييم الافلان عبر الصندوق - جبهة التحرير الوطني - FLN |access-date=19 May 2021 |archive-date=19 May 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20210519121933/http://pfln.dz/?p=1716 |url-status=dead}}</ref>
|2.32% <small>(2019)</small>
|}
* [[राजनीतिक दलों की सूची]]
* [[राजनीतिक विचारधाराओं की सूची]]
{{Notelist}}
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
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सदस्य वार्ता:CtrlZultan
3
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2026-10-17T20:24:43Z
Deepfriedokra
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Deepfriedokra ने पृष्ठ [[सदस्य वार्ता:Inu06]] को [[सदस्य वार्ता:CtrlZultan]] पर स्थानांतरित किया: "[[Special:CentralAuth/Inu06|Inu06]]" का नाम "[[Special:CentralAuth/CtrlZultan|CtrlZultan]]" करते समय पृष्ठ स्वतः स्थानांतरित हुआ
5923218
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text/x-wiki
{{साँचा:सहायता|realName=|name=Wikipidiaedit1}}
-- [[सदस्य:नया सदस्य सन्देश|नया सदस्य सन्देश]] ([[सदस्य वार्ता:नया सदस्य सन्देश|वार्ता]]) 09:53, 7 अगस्त 2023 (UTC)
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रॉकी और रानी की प्रेम कहानी
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text/x-wiki
{{Infobox film
| name = रॉकी और रानी की प्रेम कहानी
| image = रॉकी और रानी की प्रेम कहानी.jpeg
| alt =
| caption = '''रॉकी और रानी की प्रेम कहानी''' का पोस्टर
| director = [[करण जौहर]]
| writer = {{Ubl|इशिता मोइत्रा|[[शशांक खेतान]]|सुमित रॉय}}
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| runtime = 168 मिनट<!--168:42--><ref>{{cite web |url=https://www.bbfc.co.uk/release/rocky-aur-rani-kii-prem-kahaani-q29sbgvjdglvbjpwwc0xmde0mzk5 |title=''Rocky Aur Rani Kii Prem Kahaani'' |website=[[ब्रिटिश बोर्ड ऑफ़ फ़िल्म क्लासिफिकेशन]] |date=21 July 2023 |access-date=21 July 2023 |archive-date=21 July 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230721125408/https://www.bbfc.co.uk/release/rocky-aur-rani-kii-prem-kahaani-q29sbgvjdglvbjpwwc0xmde0mzk5 |url-status=live }}</ref>
| country = भारत
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| gross = {{INR|355.61}} करोड़<ref name="boxoffice">{{Cite web |title=Rocky Aur Rani Kii Prem Kahaani Box Office |website=[[बॉलीवुड हँगामा]] |date=28 July 2023 |url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/rocky-aur-rani-ki-prem-kahani/box-office/ |access-date=10 September 2023 |archive-date=29 July 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230729154202/https://www.bollywoodhungama.com/movie/rocky-aur-rani-ki-prem-kahani/box-office/ |url-status=live }}</ref>
}}
'''रॉकी और रानी की प्रेम कहानी''' 2023 की हिन्दी भाषा की फ़िल्म है। इसे [[करण जौहर]] द्वारा निर्देशित किया गया है। फिल्म में [[रणवीर सिंह]] और [[आलिया भट्ट]] एक विपरीत व्यक्तित्व वाले जोड़े की भूमिका में हैं। जो शादी से पहले तीन महीने तक एक-दूसरे के परिवारों के साथ रहने का फैसला करते हैं।<ref>{{cite news |title=मूवी रिव्यू: कैसी है रणवीर और आलिया की 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी', बस ये एक कमी होगी महसूस |url=https://navbharattimes.indiatimes.com/entertainment/movie-review/rocky-aur-rani-kii-prem-kahaani-movie-review-in-hindi-starring-ranveer-singh-alia-bhatt/moviereview/102185685.cms |accessdate=5 सितम्बर 2023 |work=नवभारत टाइम्स |date=28 जुलाई 2023 |language=hi}}</ref> [[धर्मेंद्र]], [[जया बच्चन]], [[शबाना आज़मी]], तोता रॉय चौधरी, चूर्णी गांगुली, आमिर बशीर और क्षिति जोग उनके परिवार के सदस्यों की भूमिका निभाते हैं।
[[धर्मा प्रोडक्शंस]] और [[वायकॉम 18|वायकॉम 18 स्टूडियोज]] के तहत निर्मित इस फिल्म की घोषणा जुलाई 2021 में की गई थी। यह ''[[ऐ दिल है मुश्किल]]'' (2016) के बाद करण जौहर की पहली फिल्म है। यह 28 जुलाई 2023 को समीक्षकों से सकारात्मक समीक्षा के साथ रिलीज़ हुई थी। ₹160 करोड़ के उत्पादन बजट और ₹18 करोड़ की मार्केटिंग लागत पर निर्मित, इसने दुनिया भर में ₹343 करोड़ से अधिक की कमाई की है।<ref>{{cite news |last1=डेस्क |first1=एबीपी एंटरटेनमेंट |title=300 करोड़ के क्लब में शामिल हुई आलिया भट्ट-रणवीर सिंह की फिल्म, बॉक्स ऑफिस पर जलवा है जारी |url=https://www.abplive.com/entertainment/bollywood/rocky-aur-rani-kii-prem-kahaani-worldwide-box-office-collection-alia-bhatt-ranveer-singh-movie-enters-in-300-crore-club-2476383 |accessdate=5 सितम्बर 2023 |date=18 अगस्त 2023 |language=hi}}</ref>
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:2023 की फ़िल्में]]
[[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में]]
tgwrrtfgv9v63tcnl5mnmrwud63zvty
6630627
6630608
2026-10-18T07:14:11Z
Anitya Gautam
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox film
| name = रॉकी और रानी की प्रेम कहानी
| image = रॉकी और रानी की प्रेम कहानी.jpeg
| alt =
| caption = '''रॉकी और रानी की प्रेम कहानी''' का पोस्टर
| director = [[करण जौहर]]
| writer = {{Ubl|इशिता मोइत्रा|[[शशांक खेतान]]|सुमित रॉय}}
| based_on =
| producer = {{Ubl|हीरू यश जौहर|[[करण जौहर]]|अपूर्व मेहता}}
| starring = <!--Order as per the studio's cast list, senior actors appear first-->{{Ubl|[[धर्मेंद्र]]|[[जया बच्चन]]|[[शबाना आज़मी]]|[[रणवीर सिंह]]|[[आलिया भट्ट]]|}}
| narrator =
| cinematography = मानुष नंदन
| editing = नितिन बैद
| music = [[प्रीतम]]
| studio = {{Ubl|[[धर्मा प्रोडक्शंस]]|[[वायकॉम 18 मोशन पिक्चर्स|वायकॉम18 स्टूडियोज़]]}}
| distributor = {{Ubl|वायकॉम18 स्टूडियोज़}}
| released = {{Film date|df=y|2023|07|28}}
| runtime = 168 मिनट<!--168:42--><ref>{{cite web |url=https://www.bbfc.co.uk/release/rocky-aur-rani-kii-prem-kahaani-q29sbgvjdglvbjpwwc0xmde0mzk5 |title=''Rocky Aur Rani Kii Prem Kahaani'' |website=[[ब्रिटिश बोर्ड ऑफ़ फ़िल्म क्लासिफिकेशन]] |date=21 July 2023 |access-date=21 July 2023 |archive-date=21 July 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230721125408/https://www.bbfc.co.uk/release/rocky-aur-rani-kii-prem-kahaani-q29sbgvjdglvbjpwwc0xmde0mzk5 |url-status=live }}</ref>
| country = भारत
| language = हिन्दी
| budget = <!--Only production budget, minus marketing cost-->{{INR|160}} करोड़<ref name="budget">{{Cite news |last= |first= |date=23 July 2023 |title=Budgeted at Rs. 178 cr, Rocky Aur Rani Kii Prem Kahaani recovers 90% of investment from sale of satellite, digital and music rights |work=[[बॉलीवुड हँगामा]] |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/box-office-special-features/budgeted-rs-178-cr-rocky-aur-rani-kii-prem-kahaani-recovers-90-investment-sale-satellite-digital-music-rights/ |access-date=23 July 2023 |archive-date=23 July 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230723095335/https://www.bollywoodhungama.com/news/box-office-special-features/budgeted-rs-178-cr-rocky-aur-rani-kii-prem-kahaani-recovers-90-investment-sale-satellite-digital-music-rights/ |url-status=live }}</ref>
| gross = {{INR|355.61}} करोड़<ref name="boxoffice">{{Cite web |title=Rocky Aur Rani Kii Prem Kahaani Box Office |website=[[बॉलीवुड हँगामा]] |date=28 July 2023 |url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/rocky-aur-rani-ki-prem-kahani/box-office/ |access-date=10 September 2023 |archive-date=29 July 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230729154202/https://www.bollywoodhungama.com/movie/rocky-aur-rani-ki-prem-kahani/box-office/ |url-status=live }}</ref>
}}
'''रॉकी और रानी की प्रेम कहानी''' 2023 की हिन्दी भाषा की फ़िल्म है। इसे [[करण जौहर]] द्वारा निर्देशित किया गया है। फिल्म में [[रणवीर सिंह]] और [[आलिया भट्ट]] एक विपरीत व्यक्तित्व वाले जोड़े की भूमिका में हैं। जो शादी से पहले तीन महीने तक एक-दूसरे के परिवारों के साथ रहने का फैसला करते हैं।<ref>{{cite news |title=मूवी रिव्यू: कैसी है रणवीर और आलिया की 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी', बस ये एक कमी होगी महसूस |url=https://navbharattimes.indiatimes.com/entertainment/movie-review/rocky-aur-rani-kii-prem-kahaani-movie-review-in-hindi-starring-ranveer-singh-alia-bhatt/moviereview/102185685.cms |accessdate=5 सितम्बर 2023 |work=नवभारत टाइम्स |date=28 जुलाई 2023 |language=hi}}</ref> [[धर्मेंद्र]], [[जया बच्चन]], [[शबाना आज़मी]], तोता रॉय चौधरी, चूर्णी गांगुली, आमिर बशीर और क्षिति जोग उनके परिवार के सदस्यों की भूमिका निभाते हैं।https://www.imdb.com/hi/title/tt14993250/
[[धर्मा प्रोडक्शंस]] और [[वायकॉम 18|वायकॉम 18 स्टूडियोज]] के तहत निर्मित इस फिल्म की घोषणा जुलाई 2021 में की गई थी। यह ''[[ऐ दिल है मुश्किल]]'' (2016) के बाद करण जौहर की पहली फिल्म है। यह 28 जुलाई 2023 को समीक्षकों से सकारात्मक समीक्षा के साथ रिलीज़ हुई थी। ₹160 करोड़ के उत्पादन बजट और ₹18 करोड़ की मार्केटिंग लागत पर निर्मित, इसने दुनिया भर में ₹343 करोड़ से अधिक की कमाई की है।<ref>{{cite news |last1=डेस्क |first1=एबीपी एंटरटेनमेंट |title=300 करोड़ के क्लब में शामिल हुई आलिया भट्ट-रणवीर सिंह की फिल्म, बॉक्स ऑफिस पर जलवा है जारी |url=https://www.abplive.com/entertainment/bollywood/rocky-aur-rani-kii-prem-kahaani-worldwide-box-office-collection-alia-bhatt-ranveer-singh-movie-enters-in-300-crore-club-2476383 |accessdate=5 सितम्बर 2023 |date=18 अगस्त 2023 |language=hi}}</ref>
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:2023 की फ़िल्में]]
[[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में]]
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सदस्य वार्ता:স্যাম
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Borhan
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{{साँचा:सहायता|realName=|name=Siam2023}}
-- [[सदस्य:नया सदस्य सन्देश|नया सदस्य सन्देश]] ([[सदस्य वार्ता:नया सदस्य सन्देश|वार्ता]]) 12:37, 24 नवम्बर 2023 (UTC)
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लेव लेश्चेंको
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{{Infobox person
| name = लेव लेश्चेंको
| image = Lev Leshchenko 2019.jpg
| caption = 2019 लेश्चेंको
| native_name = {{nobold|Лев Лещенко}}
| native_name_lang = ru
| birth_name = लेव वेलेरियनोविच लेश्चेंको
| birth_date = {{birth date and age|df=y|1942|2|1}}
| birth_place = मॉस्को, [[सोवियत संघ]]
| alma_mater = रशियन अकादमी ऑफ़ थियेटर आर्ट्स
| occupation = गायक
| website = {{URL|http://levleschenko.ru/}}
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| genre = सोवियत संगीत, ओपेरा पॉप, पॉप, सोवियत एस्ट्राडा
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'''लेव वेलेरियनोविच लेश्चेंको''' ([[रूसी भाषा|रूसी]]: Лев Валерьянович Лещенко; जन्म 1 फरवरी 1942),[1] एक रूसी गायक हैं, जो "द पोबेडी" और 1980 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक समापन समारोह ''थीम गीत, मॉस्को'' के गायन के लिए जाने जाते हैं।<ref>{{cite book |last1=डेविड |first1=मैकफैड्येन |title=रेड स्टार्स: पर्सनैलिटी एंड द सोवियत पॉप्युलर सॉङ्ग, 1955–1991 |date=2001 |publisher=मैकगिल-क्वींस प्रेस |isbn=9780773521063 |page=319 |url=https://books.google.com/books?id=pnUd_SdGrrsC&dq=Lev+Leshchenko+singer&pg=PA201}}</ref>
==आरंभिक जीवन==
लेव लेश्चेंको का जन्म 1 फरवरी 1942 को [[मॉस्को]], [[सोवियत संघ]] में हुआ था। उनके पिता, वेलेरियन आंद्रेयेविच लेश्चेंको (1904-2004), एक [[लाल सेना]] अधिकारी थे जो मॉस्को के बाहर युद्ध में थे। उनके दादा खार्कोव प्रांत के निज़ी गाँव से थे, जो उस समय रूसी साम्राज्य का हिस्सा था। वर्ष 1900 में वे कुर्स्क प्रांत चले गए, जहाँ उन्हें एक कारखाने में एकाउंटेंट की नौकरी मिल गई। दादाजी लेश्चेंको एक संगीत प्रेमी व्यक्ति थे: उन्होंने चर्च में गाया, कई वाद्ययंत्र भी बजाए। लेव वेलेरियनोविच के पिता 1931 में मॉस्को चले गए। फ़िनिश युद्ध और फिर महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध से गुज़रने के बाद, वे [[लेफ्टिनेंट कर्नल]] के पद तक पहुँचे और उन्हें कई आदेश दिए गए। [[द्वितीय विश्वयुद्ध|द्वितीय विश्व युद्ध]] में भाग लेने के लिए उन्हें पदक से सम्मानित किया गया। उनकी माँ क्लावदिया पेत्रोव्ना लेश्चेंको (नी फेडोसेयेवा; 1915-1943) की लेव के जन्म के तुरंत बाद मृत्यु हो गई, इसलिए उनका पालन-पोषण उनकी सौतेली माँ मरीना मिखाइलोव्ना ने किया। उनके दादा-दादी, उनकी सौतेली माँ इरीना पावलोवना लेश्चेंको के साथ, जिनसे उनके पिता ने 1948 में शादी की थी, लेश्चेंको को सोकोलनिकी, मॉस्को में पाला। बचपन में, उनका परिचय शास्त्रीय संगीत और थिएटर से हुआ और उन्होंने लियोनिद उत्योसोव के गीतों को गाना शुरू किया।<ref>[http://gazeta.aif.ru/conf/guest-info/lev Аргументы и факты — Семья газет для всей семьи!] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20150702130943/http://gazeta.aif.ru/conf/guest-info/lev |date=2 जुलाई 2015 }}</ref>
वर्ष 2021 में जॉर्जियाई आंतरिक मंत्रालय ने पुष्टि की कि रूसी गायक लेव लेश्चेंको, जो रूसी राजनीतिक अभिजात वर्ग के करीबी हैं, ने [[जॉर्जिया]] में कई दिन बिताए थे।<ref>{{cite news |title=Interior Ministry confirms presence of Russian singer in Georgia amid opposition’s criticism |url=https://agenda.ge/en/news/2021/2108 |accessdate=13 फरवरी 2024 |agency=Agenda.ge |date=2021 |language=English |quote=The Georgian Interior Ministry has confirmed that Russian singer Lev Leshchenko, who is close to the Russian political elite, had spent several days in Georgia and has already left the country.}}</ref>
==इन्हें भी देखें==
* [[अनास्तासिया वासिलिवेना मेकेवा]]
* [[अलेक्सेय वराबियोव]]
* [[उलियाना सिनेट्स्काया]]
* [[निकोलाइ नोस्कोव]]
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
* [http://levleschenko.ru/ आधिकारिक वेबसाइट]
[[श्रेणी:सोवियत संघ के लोग]]
[[श्रेणी:रूसी गायक]]
[[श्रेणी:गायक]]
[[श्रेणी:1942 में जन्मे लोग]]
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सारा गिल्बर्ट
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text/x-wiki
{{Infobox scientist
| honorific prefix = [[Dame]]
| name = सारा गिल्बर्ट
| image = Dr.Sarah Gilbert.jpg
| honorific_suffix = {{postnominals|country=GBR|DBE|FRS|size=100%}}
| birth_date = {{Birth year and age|1962|04}}
| birth_place = [[Kettering |केटरिंग, नॉर्थहैम्पटनशायर]], इंग्लैंड
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}}
'''डेम सारा कैथरीन गिल्बर्ट''' डीबीई एफआरएस (जन्म अप्रैल 1962) एक अंग्रेजी वैक्सीनोलॉजिस्ट हैं, जो [[ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय]] में वैक्सीनोलॉजी की प्रोफेसर और वैक्सीनटेक की सह-संस्थापक हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.ndm.ox.ac.uk/principal-investigators/researcher/sarah-gilbert|title=Sarah Gilbert – Nuffield Department of Medicine|publisher=ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय|access-date=20 मार्च 2024|archive-date=5 जून 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200605184638/https://www.ndm.ox.ac.uk/principal-investigators/researcher/sarah-gilbert|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.oxfordmartin.ox.ac.uk/people/professor-sarah-gilbert/|title=Professor Sarah Gilbert|publisher=ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय|language=en|access-date=20 मार्च 2024|archive-date=2 जुलाई 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200702130425/https://www.oxfordmartin.ox.ac.uk/people/professor-sarah-gilbert/|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|url=http://www.ox.ac.uk/news-and-events/find-an-expert/professor-sarah-gilbert|title=Professor Sarah Gilbert {{!}} University of Oxford|publisher=ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय |access-date=20 मार्च 2024|archive-date=3 अगस्त 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200803121057/https://www.ox.ac.uk/news-and-events/find-an-expert/professor-sarah-gilbert|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.vaccitech.co.uk/about/our-team/|website=vaccitech.co.uk|title=Our Team|access-date=20 मार्च 2024}}</ref> वह इन्फ्लूएंजा और उभरते वायरल रोगजनकों के खिलाफ टीकों के विकास में माहिर हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.hic-vac.org/members/members-profiles/professor-sarah-gilbert|title=Professor Sarah Gilbert | Hic Vac|website=hic-vac.org|access-date=14 फ़रवरी 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20190425102117/https://www.hic-vac.org/members/members-profiles/professor-sarah-gilbert|archive-date=25 अप्रैल 2019|url-status=dead}}</ref> उन्होंने यूनिवर्सल फ्लू वैक्सीन के विकास और परीक्षण का नेतृत्व किया जिसका 2011 में नैदानिक परीक्षण हुआ।
जनवरी 2020 में उन्होंने प्रोमेड-मेल पर [[चीन]] के चार लोगों के बारे में एक रिपोर्ट पढ़ी, जो वुहान में अज्ञात मूल के एक अजीब प्रकार के [[निमोनिया]] से पीड़ित थे।<ref>{{cite book |last1=गिल्बर्ट |first1=सराह |last2=ग्रीन |first2=कैथरीन |title=Vaxxers : the inside story of the Oxford vaccine and the race against the virus |date=2021 |location=लंदन |isbn=978-1529369854}}</ref> दो सप्ताह के भीतर ऑक्सफोर्ड में नए रोगज़नक़ के खिलाफ एक टीका तैयार किया गया था जिसे बाद में [[कोविड-19]] के रूप में जाना गया।<ref>{{cite news |title=Centre Court ovations, limbo-dancing grans – it's all been humbling, say Oxford vaccine creators |url=https://www.theguardian.com/world/2021/jul/04/centre-court-ovations-limbo-dancing-grans-its-all-been-humbling-say-oxford-vaccine-creators-sarah-gilbert-catherine-green |website=[[द गार्डियन]] |date=4 जुलाई 2021 |access-date=20 मार्च 2024|last1=मैक्की |first1=रोबिन }}</ref> 30 दिसंबर 2020 को ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ग्रुप के साथ सह-विकसित ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका कोविड-19 वैक्सीन को यूके में उपयोग के लिए मंजूरी दे दी गई थी।<ref>{{cite web |title=Covid-19: Oxford-AstraZeneca coronavirus vaccine approved for use in UK |url=https://www.bbc.co.uk/news/health-55280671 |website=बीबीसी न्यूज़ |publisher=बीबीसी |access-date=20 मार्च 2024 |date=30 दिसम्बर 2020}}</ref> जनवरी 2022 तक दुनिया भर के 170 से अधिक देशों को वैक्सीन की 2.5 बिलियन से अधिक खुराकें जारी की जा चुकी हैं।<ref>{{cite web |title=One year anniversary of UK deploying Oxford-AstraZeneca vaccine |url=https://www.gov.uk/government/news/one-year-anniversary-of-uk-deploying-oxford-astrazeneca-vaccine |website=गॉव डॉट यूके |access-date=20 मार्च 2024}}</ref>
==आरंभिक जीवन और शिक्षा==
सारा कैथरीन गिल्बर्ट का जन्म केटरिंग, [[नॉर्थहैम्पटनशायर]] में हुआ था। उनके पिता एक मोची के कार्यालय प्रबंधक थे और उनकी माँ एक प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका थीं।<ref name="ft">{{cite web |title=Sarah Gilbert, the researcher leading the race to a Covid-19 vaccine |url=https://www.ft.com/content/d2ae1fff-9747-41a3-b347-861ac1a70709 |website=फाइनेंशियल टाइम्स |access-date=20 मार्च 2024 |first=क्लाइव |last=कुकसन |date=24 जुलाई 2020}}</ref> गिल्बर्ट ने केटरिंग हाई स्कूल फॉर गर्ल्स में दाखिला लिया, जहाँ उन्हें एहसास हुआ कि वह चिकित्सा में काम करना चाहती हैं।<ref name="newsround">{{cite news |title=Coronavirus vaccine: Who is Professor Sarah Gilbert? |url=https://www.bbc.co.uk/newsround/55058854 |website=न्यूजराउंड |date=24 नवम्बर 2020 |access-date=20 मार्च 2024}}</ref><ref name=":0">{{Cite web| url=https://www.ndm.ox.ac.uk/working-for-ndm/working-for-ndm-page/career-profiles/professor-sarah-gilbert/| title=Professor Sarah Gilbert| author=| website=Working for NDM| language=en-GB| access-date=20 मार्च 2024| archive-date=27 मार्च 2020| archive-url=https://web.archive.org/web/20200327225805/https://www.ndm.ox.ac.uk/working-for-ndm/working-for-ndm-page/career-profiles/professor-sarah-gilbert/| url-status=dead}}</ref> उन्होंने 1983 में ईस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय (यूईए) से जैविक विज्ञान में बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की।<ref>{{cite web |title=The UEA graduate leading hunt for coronavirus vaccine |url=https://www.edp24.co.uk/news/professor-sarah-gilbert-uea-graduate-leading-the-way-for-a-1535990 |website=ईस्टर्न डैली प्रेस |date=23 अप्रैल 2020 |access-date=20 मार्च 2024}}</ref> वह अपनी डॉक्टरेट की डिग्री के लिए हल विश्वविद्यालय चली गईं जहां उन्होंने यीस्ट रोडोस्पोरिडियम टोरुलोइड्स की [[आनुवंशिकी]] और [[जीव रसायन]] की जांच की और 1986 में [[पीएचडी]] के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की।<ref name=sPhD>{{cite thesis|degree=पीएचडी|publisher=यूनिवर्सिटी ऑफ़ हल|title=Studies on lipid accumulaltion and genetics of Rhodosporidium toruloides|first=सारा कैथरीन|last=गिल्बर्ट|year=1986|id=|website=jisc.ac.uk|oclc=499901226|url=https://discover.libraryhub.jisc.ac.uk/search?q=Studies%20on%20lipid%20accumulaltion%20and%20genetics%20of%20Rhodosporidium%20toruloides&rn=1|access-date=14 फ़रवरी 2024|archivedate=8 अगस्त 2020|archiveurl=https://web.archive.org/web/20200808143319/https://discover.libraryhub.jisc.ac.uk/search?q=Studies}}</ref><ref name=":0" />
==सन्दर्भ==
{{reflist}}
{{२०१९-२० कोरोनावायरस महामारी}}
[[श्रेणी:1962 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:महिला जीव वैज्ञानिक]]
6n9o7g7havbgcuh815lw2uni6z9ovc7
खुसरो ख़ान
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox royalty|name=खुसरौ ख़ान|regnal name=नसीरुद्दीन|succession=सोलहवीं [[दिल्ली के सुल्तान]]|image=Khusru khilji.jpg|caption=नसीरुद्दीन खुसरौ शाह के बिल्लोन २ गाणी|reign=१० जुलाई – ५ सितम्बर १३२०|spouse=[[देवाला देवी]]|predecessor=[[क़ुतुबुद्दीन मुबारक़ ख़िलजी]]|successor=[[तुग़लक़ राजवंश]] का
[[गयासुद्दीन तुग़लक़]]|birth_place=[[वेरावल]]|death_date=१३२०|death_place=[[दिल्ली]], अब भारत में}}
'''खुसरो खान''' १३२० में लगभग दो महीने तक [[दिल्ली सल्तनत|दिल्ली के सुल्तान]] रहे (२० जुलाई - ५ सितमबर १३२०)। मूल रूप से [[गुजरात|गुजरात क्षेत्र]] के निवासी, उन्हें १३०५ में अलाउद्दीन खिलजी की मालवा विजय के दौरान दिल्ली सेना ने पकड़ लिया था। गुलाम के रूप में दिल्ली लाए जाने के बाद, उन्हें [[इस्लाम]] में परिवर्तित कर दिया गया और वे अलाउद्दीन के बेटे [[क़ुतुबुद्दीन मुबारक़ ख़िलजी|मुबारक शाह]] के समलैंगिक साथी बन गए। १३१६ में गद्दी पर बैठने के बाद मुबारक शाह ने उन्हें "ख़ुसरौ ख़ान" की उपाधि दी और उन पर बहुत अनुग्रह किया।
खुसरो खान ने १३१७ में [[देवगिरि के यादव|देवगिरी]] पर दिल्ली का नियंत्रण पुनः स्थापित करने के लिए एक सफल अभियान का नेतृत्व किया। अगले वर्ष, उन्होंने एक सेना का नेतृत्व किया जिसने वारंगल की घेराबंदी की, जिससे [[काकतीय वंश|काकतीय]] शासक प्रतापरुद्र को दिल्ली को कर भुगतान फिर से शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ा। १३२० में, उन्होंने मुबारक शाह की हत्या करने के लिए बरदुओं और असंतुष्ट सरदारों के एक समूह का नेतृत्व किया, और '''नासिरुद्दीन''' के नाम से राजगद्दी पर बैठे। हालाँकि, उन्हें जल्द ही कुलीन ''मलिक'' [[गयासुद्दीन तुग़लक़|तुग़लक़]] के नेतृत्व में विद्रोहियों के एक समूह द्वारा पदच्युत कर दिया गया, जो उनके बाद सिंहासन पर बैठे।
[[श्रेणी:हिन्दू धर्म से इस्लाम में धर्मान्तरित]]
[[श्रेणी:इस्लाम में परिवर्तित लोगों की सूची]]
==प्रारंभिक जीवन==
दिल्ली के इतिहासकार [[अमीर ख़ुसरो|अमीर खुसरो]] के अनुसार, खुसरो खान और उनके भाई बाराड़ु नामक एक हिंदू जाति या समूह से संबंधित थे।{{sfn|B. P. Saksena|1992|p=431}} इस समूह का नाम विभिन्न लिप्यंतरणों में [[भरवाड|भरवाड़]]<ref>{{cite book|first=Ashirbadi Lal |last=Srivastava |title=The Sultanate of Delhi, 711-1526 A.D.: Including the Arab Invasion of Sindh, Hindu Rule in Afghanistan and Causes of the Defeat of the Hindus in Early Medieval Age |url=https://books.google.co.in/books?id=PAsfAAAAIAAJ&focus=searchwithinvolume&q=Bharvar |publisher=Shiva Lal Agarwala, 1966 |page=175–178, 358–359}}</ref><ref>{{cite book|title=Proceedings |url=https://books.google.com/books?id=fH9CAAAAYAAJ&focus=searchwithinvolume&q=Bharvad |publisher=Indian History Congress, 1955 |page=176 }}</ref><ref>{{cite book|title=The Indian Historical Quarterly, Volume 30 |url=https://books.google.com/books?id=pwhNzORlCdAC&focus=searchwithinvolume&q=bharwar |publisher=Calcutta Oriental Press, 1985 |page=22–23 }}</ref>, बड़ौ, बरवाड़ी या परवार के रूप में लिखा गया है।<ref>Amir Khusrau Critical Studies, National Committee for 700th Anniversary of Amir Khusrau, 1975, p.8, Islam and the Modern Age Volume 27, 1996 p.19</ref> वे नाममात्र के लिए इस्लाम में परिवर्तित हुए थे, लेकिन हिंदू धर्म के साथ कुछ जुड़ाव बनाए रखा। 1305 में, [[अलाउद्दीन खिलजी]] के शासनकाल के दौरान, उन्हें पकड़ लिया गया जब ऐन अल-मुल्क मुल्तानी के नेतृत्व में दिल्ली की सेना ने मध्य भारत में मालवा पर विजय प्राप्त की। उन्हें गुलामों के रूप में दिल्ली लाया गया, जहाँ उन्होंने इस्लाम धर्म अपना लिया और उनका नाम हसन (बाद में खुसरो खान) और हुसामुद्दीन (या हिसामुद्दीन) रखा गया। उनका पालन-पोषण अलाउद्दीन के नायब-ए-खास-ए-हाजिब मलिक शादी ने किया।{{sfn|B. P. Saksena|1992|p=433}}
दोनों भाइयों ने अपनी स्थिति और पद को बनाए रखने के लिए निष्क्रिय समलैंगिकों के रूप में काम किया।{{sfn|B. P. Saksena|1992|p=431}} अलाउद्दीन के बेटे मुबारक शाह को हसन से प्यार हो गया: उसने हसन को समलैंगिक साथी के रूप में पसंद किया, लेकिन जब भी हसन उपलब्ध नहीं होता तो वह हुसामुद्दीन की ओर मुड़ जाता। उनका रिश्ता कोई रहस्य नहीं था, और मुबारक और हसन सार्वजनिक रूप से गले मिलते और चुंबन लेते थे।{{sfn|B. P. Saksena|1992|p=431}}
१३१६ में अलाउद्दीन की मृत्यु के बाद, उसके गुलाम-जनरल मलिक काफूर ने नाबालिग राजकुमार शिहाबुद्दीन उमर को कठपुतली शासक नियुक्त किया। कुछ ही समय बाद, मलिक काफूर मारा गया, और शिहाबुद्दीन के सौतेले भाई मुबारक शाह ने गद्दी हड़प ली। मुबारक शाह ने हसन को ख़ुसरो ख़ान की उपाधि दी, जो मलिक काफूर की पूर्व जागीर थी। एक साल के भीतर, ख़ुसरो ख़ान को वज़ीर के पद पर पदोन्नत कर दिया गया।{{sfn|K. S. Lal|1950|p=323}} इतिहासकार बरनी के अनुसार, मुबारक शाह "हसन पर इतना मोहित हो गया ... कि वह एक पल के लिए भी उससे अलग नहीं होना चाहता था।"{{sfn|R. Vanita|S. Kidwai|2000|p=133}} मुबारक शाह ने ख़ुसरो ख़ान के भाई हुसामुद्दीन को गुजरात का गवर्नर नियुक्त किया। हालाँकि, मुबारक शाह ने उसे केवल थप्पड़ मारा, और उसे शाही दरबार में एक उच्च पद दिया।{{sfn|B. P. Saksena|1992|p=431}}
==ग्रन्थसूची==
* {{cite book |author=B. P. Saksena |author-link=Banarsi Prasad Saksena |chapter=The Khaljis: Qutbuddin Mubarak Khalji |editor1=Mohammad Habib |editor2=Khaliq Ahmad Nizami |title=A Comprehensive History of India |volume=5: The Delhi Sultanat (A.D. 1206-1526) |year=1992 |orig-year=1970 |publisher=The Indian History Congress / People's Publishing House |url=https://books.google.com/books?id=_9cmAQAAMAAJ |oclc=31870180 }}
* {{cite book |author=I. H. Siddiqui |editor1=C. E. Bosworth |editor-link=Clifford Edmund Bosworth |editor2= E. van Donzel |editor3= Charles Pellat |editor3-link=Charles Pellat |title=The Encyclopaedia of Islam |edition=New |volume=Supplement |url=https://books.google.com/books?id=95Q3AAAAIAAJ&pg=PA105 |year=1980 |publisher=E. J. Brill |location=Leiden |isbn=90-04-06167-3 }}
* {{cite book |author=K. S. Lal |author-link=K. S. Lal |title=History of the Khaljis (1290-1320) |year=1950 |publisher=The Indian Press |location=Allahabad |url=https://books.google.com/books?id=2XXqAQAACAAJ |oclc=685167335 }}
* {{cite book |author=Mohammad Habib |author-link=Mohammad Habib |chapter=The Khaljis: Nasiruddin Khusrau Khan |editor1=Mohammad Habib |editor2=Khaliq Ahmad Nizami |title=A Comprehensive History of India |volume=5: The Delhi Sultanat (A.D. 1206-1526) |year=1992 |orig-year=1970 |publisher=The Indian History Congress / People's Publishing House |url=https://books.google.com/books?id=_9cmAQAAMAAJ |oclc=31870180 }}
* {{cite book |author1=R. Vanita |author2=S. Kidwai |title=Same-Sex Love in India: Readings in Indian Literature |url=https://books.google.com/books?id=VbvIDAAAQBAJ&pg=PA132 |year=2000 |publisher=Springer |isbn=978-1-137-05480-7 }}
* {{cite book |author=Richard M. Eaton |title=India in the Persianate Age: 1000-1765 |url=https://books.google.com/books?id=I49kygEACAAJ |year=2019 |publisher=Penguine |isbn=9780141985398 }}
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== सन्दर्भ ==
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बालवीर ४
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'''''बालवीर ४''''' एक भारतीय हिंदी भाषा की फंतासी वेब श्रृंखला है, जिसका निर्माण [[ऑप्टिमिस्टिक्स एंटरटेनमेंट]] के तहत [[विपुल शाह|विपुल डी. शाह]] द्वारा किया गया है, जो 6 मई 2024 से [[सोनी लिव]] पर स्ट्रीम हुआ। यह [[बालवीर]] की चौथी किस्त है और ''[[बाल वीर|बालवीर]]'' और ''[[बालवीर रिटर्न्स]]'' की आध्यात्मिक अगली कड़ी और ''[[बालवीर ३]]'' की सीधी अगली कड़ी है।<ref>{{Cite web|url=https://english.jagran.com/entertainment/baalveer-season-4-promo-reveals-exciting-adventures-and-new-antagonists-show-to-stream-on-ott-sonyliv-platform-10154847|title=Baalveer Season 4 Promo Reveals Exciting Adventures And New Antagonists; Show To Stream On THIS OTT Platform|date=2024-04-17|website=English Jagran|language=en|access-date=2024-04-18}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/entertainment/baalveer-season-4-promo-promises-more-action-and-adventure-show-to-stream-on-sony-liv-8855536.html|title=Baalveer Season 4 Promo Promises More Action And Adventure, Show To Stream On Sony Liv|date=2024-04-17|website=News18|language=en|access-date=2024-04-18}}</ref>
==कहानी==
बालवीर को मारने के लिए और भस्म को आजाद करने के लिए आगील ने रूपबदल जादू का इस्तेमाल कर आगील ने बालवीर की मां बेनाम के साथ शरीर बदल दिया। फिर आगील ने बालवीर को अपनी बातों में फंसाकर बालवीर को भस्म को आजाद करने के लिए मजबूर कर दिया। फिर बालवीर सफलतापूर्वक अपने पिता भस्म को क्रिंकाल लोक से मुक्त कराता है, इस बात से अनजान कि वह एक खलनायक है। वह विभिन्न समस्याओं पर काबू पाने के बाद सफलतापूर्वक अपने पिता को मुक्त कराता है। लेकिन, भस्म, दुनिया को नष्ट करना शुरू कर देता है। फिर, बालवीर चाल चलकर और रूपबदल जादू का इस्तेमाल कर फिर से अपनी मां बेनाम को अपने शरीर में ले आता है और भस्म को बेहोश कर देता है। बेनाम ने बालवीर को अपने अतीत के बारे में बताया: भस्म शुरू में शाशवान लोक का एक सैनिक था, लेकिन वह दुनिया पर शासन करना चाहता था। इसलिए, उसने बेनाम से प्यार का नाटक किया और उससे शादी कर ली ताकि बालवीर से शक्ति पुंज निकल कर शक्तिशाली बन सके क्योंकि भस्म के पास विनाश की शक्ति थी बालवीर के शक्ति पुंज मे सर्जन की शक्ति थी। यदि भस्म शक्ति पुंज को हासिल कर लेता तो भस्म के पास विनाश और सर्जन दोनों की शक्ति होती और वे इस ब्रह्मांड का कर्ताधर्ता बन जाता। बालवीर के जन्म होने के बाद भस्म बालवीर को मारे उससे पहले बेनाम बालवीर को लेकर भाग गई। उसके बाद उत्तान और बेनाम ने भस्मशूल से भस्म को क्रिंकाल लोक मे कैद कर दिया।
आगील शशमांग की मदद से भस्म को होश में ले आती है। और उस दौरान बालवीर बेनाम के साथ हींबाश लोक मैं आया था और आगील धोखे से उन दोनों को कैद कर लेती है। भस्म जागकर बालवीर को मारने ही वाला था तब बालवीर किसी तरह पिंजरे से बाहर निकल गया और भस्मशूल से भस्म पर वार किया लेकिन भस्मशूल की ऊर्जा खत्म हो जाने से भस्म पर कोई असर नहीं हुआ। उतान ने उस समय आकर बालवीर और बेनाम को बचा लिया। फिर भस्म को आगील ने बालवीर के पृथ्वी लोक के परिवार के बारे में बताया और भस्म ने उस पर हमला करने का प्लान बनाया। तब उत्तान ने बालवीर को चक्राल के बारे मे बताया।उसके बाद भस्म ने पृथ्वी लोक पर आतंक मचाना शुरू कर दिया और बालवीर ने बेनाम की मदद से छलकर के चक्राल के उपयोग से भस्म की सारी शक्तियां छीन ली और उसे बेहोश कर दिया।
बालवीर भस्म पर नजर रख सके इसलिए बालवीर ने भस्म को नई पहचान दी बालवीर ने भस्म का चेहरा बदल उसे पृथ्वी लोक पर अपने परिवार में काशवी के चाचा के रूप में ले गया। तब तक वीर के दादाजी और मां को वीर के बालवीर होने का राज पता चल गया। तब आगील ने चाल चल भस्म को हींबाश लोक लाना चाहा पर वे असफल रही तब उत्तान के सलाह पर बालवीर हिंबाश लोक बरदोल को आजाद करवा ने गया। बालवीर को हिंबाश लोक मे कोई पकड़ना ले इसलिए उत्तान ने बालवीर को एक यंत्र दिया जिसकी मदद से बालवीर को कोई देख नहीं पाएगा लेकिन अगर बालवीर पर नीली रोशनी पड़े तो बालवीर दिखाई दे जाएगा और इस बारे ने किसी तरह आगील को पता लग गया। बालवीर ने काफी मुश्किले पार करके बरदोल को आजाद करवा दिया। और बरदोल ने पृथ्वी पर भस्म पर नजर रखने का काम शुरू कर दिया। फिर भी कैसे भी तरीके से आगील भस्म की याददाश्त वापस दिला देती है। फिर एक लड़ाई में बालवीर से भस्मशूल दूर हो जाता है।
उसके बाद भस्म भस्मशूल से बालवीर पर हमला करता है और काश्वी बीच में आकर बालवीर को बचाती है भस्मशूल अब काश्वी के अंदर था। उसे बचाने के लिए बालवीर जीवन पुष्प को मायावी जंगल से लाता है पर अभी भी काश्वी को बचाने के लिए बालवीर के शक्तिपुंज की जरूरत थी और बालवीर उसके शक्तिपुंज को निकाल कर काश्वी को ठीक करता है पर मौके पर भस्म जाकर बालवीर का शक्तिपुंज चुरा लेता है और बालवीर जिंदा लाश बन जाता है फिर बालवीर को बचाने के लिए बेनाम, नेहमाग उत्तान के साथ हींबाश लोक पर हमला करते हैं। पर वे तीनों पकड़े जाते हैं और अचानक बालवीर आ जाता है और उन्हें बचा लेता है। फिर भस्म को पता चलता है कि उसके पास है वह शक्तिपुंज नकली था। और आगील आगे शक्तिपुंज को लेने के इरादे से आगे बढ़ती है और भस्म से धोखा करती है। पर बालवीर उसे कामयाब होने नहीं देता है और शक्तिपुंज को नष्ट कर देता है उसके साथ ही भस्म नष्ट हो जाता है।
अब आगील को मारने के लिए उत्तान दूसरी दुनिया के बालवीर से मदद लेने का सोचता है। पर अचानक दूसरी दुनिया के शाश्वानलोग से सिग्नल आता है कि वह खतरे में है।बालवीर, उतान और बेनाम के साथ वहां जाता है पर उनके जाने से पहले ही एक नया दुश्मन परम उस दुनिया के बालवीर को मार देता है।
यहां हमें परम का परिचय मिलता है। परम इस मानव सर्जित दुनिया का अंत करके नहीं पहले जैसी दुनिया बनाना चाहता है। वह इस दुनिया से पाप को दूर करना चाहता है। इसलिए वह मानव सर्जित हर वस्तु को और मानवो का अंत कर रहा है और उसके लिए वह बड़ी क्रूरता से सारी दुनिया के बालवीरों को मार देता है। अब उसका मकसद इस दुनिया के आखिरी बालवीर को मारने का है।
अब वह बालवीर की दुनिया में आ जाता है | बालवीर को करने के लिए किसी बच्चे का रूप धारण करके बालवीर के ही पृथ्वी लोक के परिवार के साथ रहने लगता है । वह काफी चाल चलता है परंतु उसकी शक्तियां खत्म हो जाती है । इसीलिए परम अपनी शक्तियों को प्राप्त करने के लिए तीन बली की आवश्यकत हे । बालवीर को इस बात की खबर लग जाती है वह काफी प्रयत्न करता है पर वह परम को रोक नहीं पता । और परम सर्वप्रथम बालवीर की मां बेनाम की बलि दे देता है उसके बाद वह महामहिम उतान की बाली दे देता है । दोनों बाली से बालवीर बहुत दुखी है। और परम तैयारी कर रहा है उसकी तीसरी बाली काशवी की । उससे पहले परम काशवी की बलि दे बालवीर को उसे बच्चे का परम होने का आभास हो जाता है । और वह परम से युद्ध करता है दोनों बाली की चुराई हुई आत्मा में से बालवीर अपनी मां की आत्मा खीच लेता है। और बेनाम फिर से जीवित हो जाती है । पर बालवीर महामहिम को नहीं बचा पाया।
दूसरी और काशवी को हिमेश लोग से आगिल का एक सैनिक है | वह काशवी को सबकुछ बताता हे कि आगिल को वरदान है कि जब तक आगिलने किसी निर्दोष की जो हंबा श्लोक से जुड़ा हो उसकी हत्या नहीं करती और उसी के अंश या वंशज आगिल को नहीं मारते तब तक वह जीवित रहेगी । और कश्वी बिवाल नाम के उसे सैनिक से हाथ मिला लेती है और निश्चित करती है कि वह दनों आगिल को मारेंगे।
परम से खतरे का अनुभव करके बेनाम काशवी को magical balls देती है । दूसरी और परम को शाश्वन लोक में uttan को मरने के लिए घुसने में सहायता करने वाले धोखेबाज को बालवीर और बनाम ढूंढने के लिए आकाशिक वेली जाते हैं। आगिलको जीवित रहने के लिए पुनर्जन्म लेना पड़ता हे। उसे दौरान आगिल अपनी सारी शक्तियां त्याग दती है। वह समय को उचित समझकर काशवी और बिवाल आदिल को मारने के लिए पहुंच जाते हैं। वह उन तीनों बीच युद्ध होता है। आकाशिक वेली पर shashmang का राज ना खुल जाए इसीलिए वह बालवीर और बेनाम को रोकने पहुंच जाता है ।
== कैरेक्टर ==
* [[देव जोशी]] - बालवीर
* [[अदिति सनवाल]] - काश्वी सहाय
* अदा खान - आगील
* बेहज़ाद ख़ान - उत्तान
* आदित्य रणविजय - शशमाग:
* शर्मीली राज - बेनाम: बालवीर की जैविक माँ; भस्म की पत्नी.
* रजत दहिया - भस्म - बालवीर का जैविक पिता; बेनाम का पति।
== यह भी देखें ==
* [[सोनी सब द्वारा प्रसारित कार्यक्रमों की सूची]]
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* ''[[सोनी लिव]]'' पर [https://www.sonyliv.com/shows/baalveer-4-1700000071 ''बालवीर सीजन 4'']
* {{आईएमडीबी शीर्षक|32143545}}
[[श्रेणी:सब टीवी के कार्यक्रम]]
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चाहर धर्मेंद्र
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'''''बालवीर ४''''' एक भारतीय हिंदी भाषा की फंतासी वेब श्रृंखला है, जिसका निर्माण [[ऑप्टिमिस्टिक्स एंटरटेनमेंट]] के तहत [[विपुल शाह|विपुल डी. शाह]] द्वारा किया गया है, जो 6 मई 2024 से [[सोनी लिव]] पर स्ट्रीम हुआ। यह [[बालवीर]] की चौथी किस्त है और ''[[बाल वीर|बालवीर]]'' और ''[[बालवीर रिटर्न्स]]'' की आध्यात्मिक अगली कड़ी और ''[[बालवीर ३]]'' की सीधी अगली कड़ी है।<ref>{{Cite web|url=https://english.jagran.com/entertainment/baalveer-season-4-promo-reveals-exciting-adventures-and-new-antagonists-show-to-stream-on-ott-sonyliv-platform-10154847|title=Baalveer Season 4 Promo Reveals Exciting Adventures And New Antagonists; Show To Stream On THIS OTT Platform|date=2024-04-17|website=English Jagran|language=en|access-date=2024-04-18}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/entertainment/baalveer-season-4-promo-promises-more-action-and-adventure-show-to-stream-on-sony-liv-8855536.html|title=Baalveer Season 4 Promo Promises More Action And Adventure, Show To Stream On Sony Liv|date=2024-04-17|website=News18|language=en|access-date=2024-04-18}}</ref>
==कहानी==
बालवीर को मारने के लिए और भस्म को आजाद करने के लिए आगील ने रूपबदल जादू का इस्तेमाल कर आगील ने बालवीर की मां बेनाम के साथ शरीर बदल दिया। फिर आगील ने बालवीर को अपनी बातों में फंसाकर बालवीर को भस्म को आजाद करने के लिए मजबूर कर दिया। फिर बालवीर सफलतापूर्वक अपने पिता भस्म को क्रिंकाल लोक से मुक्त कराता है, इस बात से अनजान कि वह एक खलनायक है। वह विभिन्न समस्याओं पर काबू पाने के बाद सफलतापूर्वक अपने पिता को मुक्त कराता है। लेकिन, भस्म, दुनिया को नष्ट करना शुरू कर देता है। फिर, बालवीर चाल चलकर और रूपबदल जादू का इस्तेमाल कर फिर से अपनी मां बेनाम को अपने शरीर में ले आता है और भस्म को बेहोश कर देता है। बेनाम ने बालवीर को अपने अतीत के बारे में बताया: भस्म शुरू में शाशवान लोक का एक सैनिक था, लेकिन वह दुनिया पर शासन करना चाहता था। इसलिए, उसने बेनाम से प्यार का नाटक किया और उससे शादी कर ली ताकि बालवीर से शक्ति पुंज निकल कर शक्तिशाली बन सके क्योंकि भस्म के पास विनाश की शक्ति थी बालवीर के शक्ति पुंज मे सर्जन की शक्ति थी। यदि भस्म शक्ति पुंज को हासिल कर लेता तो भस्म के पास विनाश और सर्जन दोनों की शक्ति होती और वे इस ब्रह्मांड का कर्ताधर्ता बन जाता। बालवीर के जन्म होने के बाद भस्म बालवीर को मारे उससे पहले बेनाम बालवीर को लेकर भाग गई। उसके बाद उत्तान और बेनाम ने भस्मशूल से भस्म को क्रिंकाल लोक मे कैद कर दिया।
आगील शशमांग की मदद से भस्म को होश में ले आती है। और उस दौरान बालवीर बेनाम के साथ हींबाश लोक मैं आया था और आगील धोखे से उन दोनों को कैद कर लेती है। भस्म जागकर बालवीर को मारने ही वाला था तब बालवीर किसी तरह पिंजरे से बाहर निकल गया और भस्मशूल से भस्म पर वार किया लेकिन भस्मशूल की ऊर्जा खत्म हो जाने से भस्म पर कोई असर नहीं हुआ। उतान ने उस समय आकर बालवीर और बेनाम को बचा लिया। फिर भस्म को आगील ने बालवीर के पृथ्वी लोक के परिवार के बारे में बताया और भस्म ने उस पर हमला करने का प्लान बनाया। तब उत्तान ने बालवीर को चक्राल के बारे मे बताया।उसके बाद भस्म ने पृथ्वी लोक पर आतंक मचाना शुरू कर दिया और बालवीर ने बेनाम की मदद से छलकर के चक्राल के उपयोग से भस्म की सारी शक्तियां छीन ली और उसे बेहोश कर दिया।
बालवीर भस्म पर नजर रख सके इसलिए बालवीर ने भस्म को नई पहचान दी बालवीर ने भस्म का चेहरा बदल उसे पृथ्वी लोक पर अपने परिवार में काशवी के चाचा के रूप में ले गया। तब तक वीर के दादाजी और मां को वीर के बालवीर होने का राज पता चल गया। तब आगील ने चाल चल भस्म को हींबाश लोक लाना चाहा पर वे असफल रही तब उत्तान के सलाह पर बालवीर हिंबाश लोक बरदोल को आजाद करवा ने गया। बालवीर को हिंबाश लोक मे कोई पकड़ना ले इसलिए उत्तान ने बालवीर को एक यंत्र दिया जिसकी मदद से बालवीर को कोई देख नहीं पाएगा लेकिन अगर बालवीर पर नीली रोशनी पड़े तो बालवीर दिखाई दे जाएगा और इस बारे ने किसी तरह आगील को पता लग गया। बालवीर ने काफी मुश्किले पार करके बरदोल को आजाद करवा दिया। और बरदोल ने पृथ्वी पर भस्म पर नजर रखने का काम शुरू कर दिया। फिर भी कैसे भी तरीके से आगील भस्म की याददाश्त वापस दिला देती है। फिर एक लड़ाई में बालवीर से भस्मशूल दूर हो जाता है।
उसके बाद भस्म भस्मशूल से बालवीर पर हमला करता है और काश्वी बीच में आकर बालवीर को बचाती है भस्मशूल अब काश्वी के अंदर था। उसे बचाने के लिए बालवीर जीवन पुष्प को मायावी जंगल से लाता है पर अभी भी काश्वी को बचाने के लिए बालवीर के शक्तिपुंज की जरूरत थी और बालवीर उसके शक्तिपुंज को निकाल कर काश्वी को ठीक करता है पर मौके पर भस्म जाकर बालवीर का शक्तिपुंज चुरा लेता है और बालवीर जिंदा लाश बन जाता है फिर बालवीर को बचाने के लिए बेनाम, नेहमाग उत्तान के साथ हींबाश लोक पर हमला करते हैं। पर वे तीनों पकड़े जाते हैं और अचानक बालवीर आ जाता है और उन्हें बचा लेता है। फिर भस्म को पता चलता है कि उसके पास है वह शक्तिपुंज नकली था। और आगील आगे शक्तिपुंज को लेने के इरादे से आगे बढ़ती है और भस्म से धोखा करती है। पर बालवीर उसे कामयाब होने नहीं देता है और शक्तिपुंज को नष्ट कर देता है उसके साथ ही भस्म नष्ट हो जाता है।
अब आगील को मारने के लिए उत्तान दूसरी दुनिया के बालवीर से मदद लेने का सोचता है। पर अचानक दूसरी दुनिया के शाश्वानलोग से सिग्नल आता है कि वह खतरे में है।बालवीर, उतान और बेनाम के साथ वहां जाता है पर उनके जाने से पहले ही एक नया दुश्मन परम उस दुनिया के बालवीर को मार देता है।
यहां हमें परम का परिचय मिलता है। परम इस मानव सर्जित दुनिया का अंत करके नहीं पहले जैसी दुनिया बनाना चाहता है। वह इस दुनिया से पाप को दूर करना चाहता है। इसलिए वह मानव सर्जित हर वस्तु को और मानवो का अंत कर रहा है और उसके लिए वह बड़ी क्रूरता से सारी दुनिया के बालवीरों को मार देता है। अब उसका मकसद इस दुनिया के आखिरी बालवीर को मारने का है।
अब वह बालवीर की दुनिया में आ जाता है | बालवीर को करने के लिए किसी बच्चे का रूप धारण करके बालवीर के ही पृथ्वी लोक के परिवार के साथ रहने लगता है । वह काफी चाल चलता है परंतु उसकी शक्तियां खत्म हो जाती है । इसीलिए परम अपनी शक्तियों को प्राप्त करने के लिए तीन बली की आवश्यकत हे । बालवीर को इस बात की खबर लग जाती है वह काफी प्रयत्न करता है पर वह परम को रोक नहीं पता । और परम सर्वप्रथम बालवीर की मां बेनाम की बलि दे देता है उसके बाद वह महामहिम उतान की बाली दे देता है । दोनों बाली से बालवीर बहुत दुखी है। और परम तैयारी कर रहा है उसकी तीसरी बाली काशवी की । उससे पहले परम काशवी की बलि दे बालवीर को उसे बच्चे का परम होने का आभास हो जाता है । और वह परम से युद्ध करता है दोनों बाली की चुराई हुई आत्मा में से बालवीर अपनी मां की आत्मा खीच लेता है। और बेनाम फिर से जीवित हो जाती है । पर बालवीर महामहिम को नहीं बचा पाया।
दूसरी और काशवी को हिमेश लोग से आगिल का एक सैनिक है | वह काशवी को सबकुछ बताता हे कि आगिल को वरदान है कि जब तक आगिलने किसी निर्दोष की जो हंबा श्लोक से जुड़ा हो उसकी हत्या नहीं करती और उसी के अंश या वंशज आगिल को नहीं मारते तब तक वह जीवित रहेगी । और कश्वी बिवाल नाम के उसे सैनिक से हाथ मिला लेती है और निश्चित करती है कि वह दनों आगिल को मारेंगे।
परम से खतरे का अनुभव करके बेनाम काशवी को magical balls देती है । दूसरी और परम को शाश्वन लोक में uttan को मरने के लिए घुसने में सहायता करने वाले धोखेबाज को बालवीर और बनाम ढूंढने के लिए आकाशिक वेली जाते हैं। आगिलको जीवित रहने के लिए पुनर्जन्म लेना पड़ता हे। उसे दौरान आगिल अपनी सारी शक्तियां त्याग दती है। वह समय को उचित समझकर काशवी और बिवाल आदिल को मारने के लिए पहुंच जाते हैं। वह उन तीनों बीच युद्ध होता है। आकाशिक वेली पर shashmang का राज ना खुल जाए इसीलिए वह बालवीर और बेनाम को रोकने पहुंच जाता है ।
== कैरेक्टर ==
* [[देव जोशी]] - बालवीर
* [[अदिति सनवाल]] - काश्वी सहाय
* अदा खान - आगील
* बेहज़ाद ख़ान - उत्तान
* आदित्य रणविजय - शशमाग:
* शर्मीली राज - बेनाम: बालवीर की जैविक माँ; भस्म की पत्नी.
* रजत दहिया - भस्म - बालवीर का जैविक पिता; बेनाम का पति।
== यह भी देखें ==
* [[सोनी सब द्वारा प्रसारित कार्यक्रमों की सूची]]
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* ''[[सोनी लिव]]'' पर [https://www.sonyliv.com/shows/baalveer-4-1700000071 ''बालवीर सीजन 4'']
* {{आईएमडीबी शीर्षक|32143545}}
[[श्रेणी:सब टीवी के कार्यक्रम]]
[[श्रेणी:भारतीय टेलीविजन धारावाहिक]]
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सरकार (प्रशासनिक प्रभाग)
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'''सरकार''' ({{भाषा-हिन्दी|{{Nastaliq|सरकार}}}}, {{भाषा-उर्दू|{{Nastaliq|سركار}}}}, {{भाषा-पंजाबी|ਸਰਕਾਰ}}, {{भाषा-बांग्ला|সরকার}}) एक ऐतिहासिक [[प्रशासनिक प्रभाग]] है, <ref name="Banglapedia">{{Cite book|title=Banglapedia: National Encyclopedia of Bangladesh|last=Akhter|first=Nasrin|publisher=[[Asiatic Society of Bangladesh]]|year=2012|editor-last=Islam|editor-first=Sirajul|editor-link=Sirajul Islam|edition=Second|chapter=Sarkar|editor-last2=Jamal|editor-first2=Ahmed A.|chapter-url=http://en.banglapedia.org/index.php?title=Sarkar|archive-url=https://web.archive.org/web/20251027135554/http://en.banglapedia.org/index.php?title=Sarkar|archive-date=27 अक्तूबर 2025|access-date=28 मई 2024|url-status=dead}}</ref> जिसका उपयोग ज्यादातर [[मुग़ल साम्राज्य]] में किया जाता था। यह एक सूबा <ref name="Banglapedia" /> या प्रांत का एक प्रभाग था। एक सरकार को आगे महल्लस या [[परगना]] में विभाजित किया गया था। <ref name="Banglapedia" />
सरकार प्रणाली को १८वीं सदी की शुरुआत में चकला प्रणाली द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था। <ref>{{Cite book|title=Banglapedia: National Encyclopedia of Bangladesh|last=Akhtar|first=Shirin|publisher=[[Asiatic Society of Bangladesh]]|year=2012|editor-last=Islam|editor-first=Sirajul|editor-link=Sirajul Islam|edition=Second|chapter=Chakla System|editor-last2=Jamal|editor-first2=Ahmed A.|chapter-url=http://en.banglapedia.org/index.php?title=Chakla_System}}</ref>
* उत्तरी सरकार, पांच अलग-अलग जिले जो ब्रिटिश भारत के मद्रास प्रेसीडेंसी का एक पूर्व प्रभाग बनाते हैं
* राजमुंदरी सरकार, उत्तरी सरकार में से एक
* पखली, एक प्राचीन सरकार जो अब हजारा, पाकिस्तान का हिस्सा है
* पखाल सरकार, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में मनसेहरा जिले का एक क्षेत्र
== यह सभी देखें ==
* [[भारत के प्रशासनिक विभाग]]
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विलिस का सर्कल
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विलिस का चक्र (जिसे विलिस सर्कल, विलिस का लूप, सेरेब्रल धमनी सर्कल और विलिस बहुभुज भी कहा जाता है) एक संचार एनास्टोमोसिस है जो मनुष्यों सहित सरीसृपों, पक्षियों और स्तनधारियों में मस्तिष्क और आसपास की संरचनाओं को रक्त की आपूर्ति करता है। इसका नाम थॉमस विलिस (1621-1675), एक अंग्रेजी चिकित्सक के नाम पर रखा गया है।<ref>{{cite web |last1=Uston |first1=Cagatay |title=NEUROwords Dr. Thomas Willis’ Famous Eponym: The Circle of Willis |url=https://www.tandfonline.com/doi/abs/10.1080/096470490512553 |website=Journal of the History of the Neurosciences |pages=16–21 |language=en |doi=10.1080/096470490512553 |date=9 मार्च 2005}}</ref>
संरचना
विलिस का चक्र मस्तिष्क परिसंचरण का एक हिस्सा है और निम्नलिखित धमनियों से बना है:<ref>{{cite web |title=ISBN |url=https://en.wikipedia.org/wiki/ISBN |website=Wikipedia |language=en |date=6 जुलाई 2024}}</ref>
संरचना -
पूर्ववर्ती मस्तिष्क धमनी (बाएं और दाएं) उनके A1 खंडों पर
पूर्ववर्ती संचार धमनी
आंतरिक कैरोटिड धमनी (बाएं और दाएं) इसके दूरस्थ सिरे (कैरोटिड टर्मिनस) पर
पश्चवर्ती मस्तिष्क धमनी (बाएं और दाएं) उनके P1 खंडों पर
पश्चवर्ती संचार धमनी (बाएं और दाएं)
मस्तिष्क को आपूर्ति करने वाली मध्य मस्तिष्क धमनियों को विली के चक्र का हिस्सा नहीं माना जाता है
धमनियों की उत्पत्ति -
बाएं और दाएं आंतरिक कैरोटिड धमनियां बाएं और दाएं सामान्य कैरोटिड धमनियों से उत्पन्न होती हैं।
पश्च संचार धमनी आंतरिक कैरोटिड धमनी की एक शाखा के रूप में निकलती है, इससे ठीक पहले कि यह अपनी टर्मिनल शाखाओं - पूर्वकाल और मध्य मस्तिष्क धमनियों में विभाजित हो जाए। पूर्वकाल मस्तिष्क धमनी विलिस के वृत्त का अग्रपाश्विक भाग बनाती है, जबकि मध्य मस्तिष्क धमनी वृत्त में योगदान नहीं करती है।
दाएं और बाएं पश्च मस्तिष्क धमनियां बेसिलर धमनी से निकलती हैं, जो बाएं और दाएं कशेरुका धमनियों द्वारा बनाई जाती है। कशेरुका धमनियां सबक्लेवियन धमनियों से निकलती हैं।
पूर्वकाल संचार धमनी दो पूर्वकाल मस्तिष्क धमनियों को जोड़ती है और कहा जा सकता है कि यह बाएं या दाएं भाग से निकलती है।
इसमें शामिल सभी धमनियां कॉर्टिकल और केंद्रीय शाखाएं देती हैं। केंद्रीय शाखाएं विलिस के वृत्त के अंदरूनी हिस्से को आपूर्ति करती हैं, अधिक विशेष रूप से, इंटरपेडुनकुलर फोसा। कॉर्टिकल शाखाओं का नाम उस क्षेत्र के आधार पर रखा गया है जिसे वे आपूर्ति करती हैं तथा वे विलिस सर्कल को सीधे प्रभावित नहीं करती हैं।
भिन्नता-
यह भी देखें: पेरचेरॉन की धमनी
विलिस के चक्र में काफी शारीरिक भिन्नता मौजूद है, जिसमें क्लासिक शारीरिक रचना केवल एक तिहाई लोगों में ही देखी जाती है। एक सामान्य भिन्नता में पश्च मस्तिष्क धमनी का समीपस्थ भाग संकीर्ण होता है और इसकी इप्सिलैटरल पश्च संचार धमनी बड़ी होती है, इसलिए आंतरिक कैरोटिड धमनी पश्च मस्तिष्क को आपूर्ति करती है; इसे भ्रूण पश्च संचार मस्तिष्क धमनी के रूप में जाना जाता है। एक अन्य भिन्नता में पूर्ववर्ती संचार धमनी एक बड़ी वाहिका होती है, जैसे कि एक एकल आंतरिक कैरोटिड दोनों पूर्ववर्ती मस्तिष्क धमनियों को आपूर्ति करती है; इसे एज़ीगोस पूर्ववर्ती मस्तिष्क धमनी के रूप में जाना जाता है।<ref>{{cite web |last1=Beyhan |first1=Murat |last2=Gökçe |first2=Erkan |last3=Karakuş |first3=Kayhan |title=Radiological classification of azygos anterior cerebral artery and evaluation of the accompanying vascular anomalies |url=https://link.springer.com/article/10.1007/s00276-020-02509-4 |website=Surgical and Radiologic Anatomy |pages=1345–1354 |language=en |doi=10.1007/s00276-020-02509-4 |date=1 नवम्बर 2020}}</ref>
कार्य-
माना जाता है कि मस्तिष्क की धमनियों को विलिस के घेरे में व्यवस्थित करने से मस्तिष्क परिसंचरण में संपार्श्विक परिसंचरण के लिए अतिरेक (इंजीनियर्ड अतिरेक के अनुरूप) पैदा होता है। यदि घेरे का एक हिस्सा अवरुद्ध या संकुचित हो जाता है (स्टेनोज़्ड) या घेरे को आपूर्ति करने वाली धमनियों में से एक अवरुद्ध या संकुचित हो जाती है, तो अन्य रक्त वाहिकाओं से रक्त प्रवाह अक्सर इस्केमिया के लक्षणों से बचने के लिए मस्तिष्क के छिड़काव को पर्याप्त रूप से संरक्षित कर सकता है<ref>{{cite web |last1=de Boorder |first1=Michiel J. |last2=van der Grond |first2=Jeroen |last3=van Dongen |first3=Alice J. |last4=Klijn |first4=Catharina J.M. |last5=Jaap Kappelle |first5=L. |last6=Van Rijk |first6=Peter P. |last7=Hendrikse |first7=Jeroen |title=Spect measurements of regional cerebral perfusion and carbondioxide reactivity: Correlation with cerebral collaterals in internal carotid artery occlusive disease |url=https://link.springer.com/article/10.1007/s00415-006-0192-1 |website=Journal of Neurology |pages=1285–1291 |language=en |doi=10.1007/s00415-006-0192-1 |date=1 अक्टूबर 2006}}</ref>
हालांकि, यह देखते हुए कि विलिस का चक्र कई गैर-मानव प्रजातियों (सरीसृप, पक्षी और [[स्तनधारी]]) में मौजूद है, और धमनी संकुचन ज्यादातर बुढ़ापे और मानव जीवन शैली से जुड़ा हुआ है, इसके कार्यों के अधिक आम तौर पर लागू स्पष्टीकरण सुझाए गए हैं, जैसे कि मस्तिष्क के भीतर नाड़ी दबाव तरंगों का मंद होना और पानी की कमी के बारे में अग्रमस्तिष्क की संवेदन में भागीदारी करते हैं। <ref>{{cite web |last1=Fenrich |first1=Matija |last2=Habjanovic |first2=Karlo |last3=Kajan |first3=Josip |last4=Heffer |first4=Marija |title=The circle of Willis revisited: Forebrain dehydration sensing facilitated by the anterior communicating artery: How hemodynamic properties facilitate more efficient dehydration sensing in amniotes |url=https://onlinelibrary.wiley.com/doi/10.1002/bies.202000115 |website=BioEssays |language=en |doi=10.1002/bies.202000115 |date=फरवरी 2021}}</ref>
==सन्दर्भ==
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लुम्बाराम चौधरी
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'''लुम्बाराम चौधरी''' एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं जो राजस्थान के जालोर जिले से हैं। वे जालोर सिरोही लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद के रूप में चुने गए,<ref>{{Cite news |date=2024-06-05 |title=Jalore election results 2024 live updates: BJP's Lumbaram won with over 2 lakh vote margin |url=https://timesofindia.indiatimes.com/india/jalore-election-results-2024-rajasthan-jalore-lok-sabha-elections-poll-result-updates-vaibhav-gehlot-cong-lumbaram-bjp/articleshow/110673016.cms |access-date=2024-07-21 |work=The Times of India |issn=0971-8257}}</ref> जहाँ उन्होंने [[कांग्रेस]] के वैभव गहलोत को हराया। वे [[भारतीय जनता पार्टी]] के सदस्य हैं। <ref>{{Cite web |date=2024-06-04 |title=Jalore, Rajasthan Lok Sabha Election Results 2024 Highlights: Lumbaram Secures Victory by 201543 Votes |url=https://www.indiatoday.in/elections/lok-sabha/story/jalore-rajasthan-lok-sabha-election-results-2024-live-updates-clse-2547919-2024-06-04 |access-date=2024-07-21 |website=India Today |language=en}}</ref>
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==सन्दर्भ==
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महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय
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{{Infobox university
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== इतिहास ==
इस विश्वविद्यालय की परिकल्पना महर्षि महेश योगी द्वारा अयोध्या को वैदिक ज्ञान का वैश्विक केंद्र बनाने की दृष्टि से की गई थी। इसकी स्थापना 2025 में महर्षि महेश योगी संस्थान के तत्वावधान में उत्तर प्रदेश सरकार की स्वीकृति से की गई।<ref>{{cite news |title=अयोध्या में रामायण विश्वविद्यालय को मिली सरकार की हरी झंडी, वर्षों पहले देखा गया था सपना |url=https://www.newsnationtv.com/states/uttar-pradesh/ayodhya-ramayana-university-approved-by-up-govt-and-cm-yogi-9335632 |access-date=13 July 2025 |work=News Nation Hindi |date=4 June 2025 |language=hi}}</ref><ref>{{cite news |title=अयोध्या में महर्षि महेश योगी रामायण विवि के संचालन की हरी झंडी |url=https://www.amarujala.com/lucknow/up-20-reservation-for-agniveers-in-police-recruitment-studies-to-be-done-at-ayodhya-ramayana-university-re-2025-06-03 |access-date=13 July 2025 |work=Amar Ujala |date=3 June 2025 |language=hi}}</ref>
2025 में विश्वविद्यालय ने औपचारिक रूप से शैक्षणिक गतिविधियाँ शुरू कीं, जिनमें भारतीय शास्त्रों, चेतना आधारित शिक्षा, वैदिक विज्ञान तथा रामायण अध्ययन के साथ-साथ बहु-विषयक एवं व्यावसायिक कार्यक्रम सम्मिलित हैं।<ref>{{cite news |title=भगवान राम के हज़ार वर्षों के जीवन पर हुआ गहन शोध, महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय में पढ़ाई शुरू |url=https://www.swadeshnews.in/uttar-pradesh/ayodhya/intensive-research-done-on-1000-years-of-lord-ram-life-studies-start-in-maharishi-mahesh-yogi-ramayana-university-941632 |access-date=13 July 2025 |work=Swadesh News |date=10 February 2025 |language=hi}}</ref>
== प्रशासन ==
विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलाधिपति डॉ. अजय प्रकाश श्रीवास्तव हैं, जो भारत में महर्षि संस्थाओं के वरिष्ठ सदस्य हैं। वर्तमान कुलपति डॉ. भानु प्रताप सिंह हैं।
== परिसर ==
[[File:Ramayan University Campus Pic By Ritesh Kumar Bhanu.png|thumb|रामायण विश्वविद्यालय परिसर – छायाचित्र: रितेश कुमार भानु]]
यह परिसर [[सरयू नदी]] के तट पर स्थित [[अयोध्या]] नगर में है, और इसमें रामायण युग की प्रेरणा से भारतीय पारंपरिक स्थापत्य शैलियाँ अपनाई गई हैं। परिसर में ध्यान हॉल, वैदिक गुरुकुल, डिजिटल कक्षा-कक्ष और प्राचीन ग्रंथों की ई-लाइब्रेरी भी उपलब्ध है।
== शैक्षणिक कार्यक्रम ==
महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय निम्नलिखित विषयों में स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा एवं शोध कार्यक्रम प्रदान करता है:
* रामायण अध्ययन
* संस्कृत और भारतीय दर्शन
* वैदिक विज्ञान और चेतना
* योग एवं ट्रान्सेंडेन्टल मेडिटेशन
* अभियांत्रिकी (इंजीनियरिंग)
* प्रबंधन एवं व्यवसाय अध्ययन
== मान्यता ==
यह विश्वविद्यालय [[विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (भारत)]] से मान्यता प्राप्त है। इसके पाठ्यक्रमों का ढांचा [[राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020]] के अनुरूप है, जिसमें समग्र विकास, बहुभाषिक शिक्षा, और भारतीय ज्ञान प्रणालियों का एकीकरण किया गया है।
== उद्देश्य और मिशन ==
विश्वविद्यालय का उद्देश्य रामायण एवं वैदिक ग्रंथों में निहित सार्वभौमिक मूल्यों को पुनर्जीवित करना, उनका अनुसंधान करना तथा उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रचारित करना है। यह चेतना-आधारित शिक्षा प्रणाली के माध्यम से शांति, धर्म और वैश्विक सद्भाव को प्रोत्साहित करता है।
== यह भी देखें ==
* [[महर्षि महेश योगी]]
* ट्रान्सेंडेन्टल मेडिटेशन
* [[रामायण]]
* [[अयोध्या]]
* वैदिक शिक्षा
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ==
* {{official website|http://mmyrv.edu.in/}}
{{उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालय}}{{Authority control}}
[[उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालय]]
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेश में विश्वविद्यालय और कॉलेज]]
[[श्रेणी:निजी विश्वविद्यालय]]
[[श्रेणी:अयोध्या]]
[[श्रेणी:अयोध्या की शिक्षण संस्थाएं]]
[[श्रेणी:अयोध्या ज़िला]]
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text/x-wiki
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{{Infobox person
| name = अमर लाल खपरिये
| image =
| caption =
| birth_place = लेण्डियाघाट, मुलताई, बैतूल जिला, मध्य प्रदेश, भारत
| nationality = भारतीय
| education = बी.एस.सी., एम.एससी. (माइक्रोबायोलॉजी), बी.एड., एम.ए., PGDCA
| alma_mater = बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल<br>जयवंती हक्सर पी.जी. कॉलेज, बैतूल
| occupation = उच्च माध्यमिक शिक्षक (जीवविज्ञान), पूर्व माइक्रोबायोलॉजिस्ट
| employer = मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग
| known_for = विज्ञान शिक्षण, करियर मार्गदर्शन एवं निःशुल्क NEET कोचिंग पहल
| spouse = पूजा पवार (वि. 2022)
| children = 2 (आध्या खपरिये, आरवी खपरिये)
| parents = कारू खपरिये (पिता), प्यारी खपरिये (माता)
}}
'''अमर लाल खपरिये''' (जन्म: ग्राम लेण्डियाघाट, मुलताई, बैतूल जिला, मध्य प्रदेश) एक भारतीय शिक्षक और पूर्व माइक्रोबायोलॉजिस्ट हैं। वे वर्तमान में मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत उच्च माध्यमिक शिक्षक (जीवविज्ञान) के रूप में पदस्थ हैं तथा ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए विज्ञान शिक्षा, करियर मार्गदर्शन और निःशुल्क NEET कोचिंग में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
== प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा ==
अमर लाल खपरिये का जन्म मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की मुलताई तहसील के ग्राम लेण्डियाघाट (पोस्ट: दुनावा) में एक कृषक परिवार में हुआ। उनके पिता कारू खपरिये तथा माता प्यारी खपरिये हैं।
उन्होंने अपनी आरंभिक स्कूली शिक्षा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, दुनावा से प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की:
* '''बी.एस.सी.''' – जयवंती हक्सर स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बैतूल
* '''एम.एससी. (माइक्रोबायोलॉजी) एवं बी.एड.''' – यू.टी.डी., बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल
* '''एम.ए. (अंग्रेज़ी साहित्य)''' – बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल
* '''PGDCA''' – आइसेक्ट (AISECT) विश्वविद्यालय
उन्होंने केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) तीन बार, वर्ष 2018 में मध्य प्रदेश राज्य पात्रता परीक्षा (MP SET) तथा मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा उत्तीर्ण की।
== करियर ==
=== फार्मास्युटिकल उद्योग ===
शिक्षण क्षेत्र से पूर्व खपरिये ने विभिन्न फार्मास्युटिकल कंपनियों में गुणवत्ता नियंत्रण (Quality Control) और माइक्रोबायोलॉजिस्ट के रूप में कार्य किया:
* लुपिन लिमिटेड (मण्डीदीप) – क्वालिटी कंट्रोल ऑफिसर
* सिप्ला लिमिटेड (पीथमपुर) – क्वालिटी कंट्रोल माइक्रोबायोलॉजिस्ट
* डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज – जूनियर मैनेजर
* एंडो इंडिया (PAR Formulations) – सीनियर माइक्रोबायोलॉजिस्ट
=== शैक्षणिक एवं प्रशासनिक सेवाएं ===
जुलाई 2022 में उन्होंने मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग में अपनी शासकीय सेवा प्रारंभ की। उनकी प्रथम पदस्थापना शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, लीलाझर (तहसील आमला) में हुई। वर्तमान में वे सांदीपनि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (सीएम राइज एक्सीलेंस स्कूल), मुलताई में उच्च माध्यमिक शिक्षक (जीवविज्ञान) के रूप में पदस्थ हैं।
शैक्षणिक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी:
* 'जादू नहीं विज्ञान है' अभियान के तहत विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को अंधविश्वास दूर करने हेतु प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया।<ref name="bhaskar_vigyan_oct22">{{cite news |title=जादू नहीं विज्ञान है समझना और समझाना आसान है पर दिया प्रशिक्षण |newspaper=दैनिक भास्कर (बैतूल भास्कर) |date=22 October 2024 |location=मुलताई}}</ref><ref name="bhaskar_pradarshani_oct25">{{cite news |title=जादू नहीं विज्ञान है पर प्रदर्शनी लगाकर बताए विज्ञान के चमत्कार |newspaper=दैनिक भास्कर (बैतूल भास्कर) |date=25 October 2024 |location=मुलताई}}</ref><ref name="janadesh_vigyan">{{cite news |title=जादू और विज्ञान के प्रति किया जागरूक: उत्कृष्ट शाला से वीसी के माध्यम से दिया प्रशिक्षण |newspaper=राष्ट्रीय जनादेश |location=मुलताई}}</ref>
* करियर मार्गदर्शन शिविरों में विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं (NEET, JEE) की तैयारी हेतु मार्गदर्शन दिया।<ref name="bhaskar_career_nov21">{{cite news |title=कॅरियर मार्गदर्शन कार्यक्रम: विद्यार्थियों को बेहतर कॅरियर बनाने के बताए उपाय |newspaper=दैनिक भास्कर (बैतूल भास्कर) |date=21 November 2024 |page=16 |location=मुलताई}}</ref>
* वे शिक्षक हितों एवं प्रशासनिक ज्ञापनों से जुड़े विषयों में भी सक्रिय रहे हैं।<ref name="bhaskar_vetan_apr26">{{cite news |title=नव नियुक्त शिक्षकों ने मांगा परिवीक्षा अवधि का वेतन |newspaper=दैनिक भास्कर (बैतूल भास्कर) |date=26 April 2025 |location=मुलताई}}</ref>
== व्यक्तिगत जीवन ==
अमर लाल खपरिये का विवाह 26 मई 2022 को पूजा पवार के साथ हुआ। उनकी दो बेटियां—आध्या खपरिये और आरवी खपरिये हैं।
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://educationportal.mp.gov.in/ मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग पोर्टल]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:भारतीय शिक्षक]]
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ढाका इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गाज़ीपुर
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox university
| name = ढाका इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय
| native_name = ঢাকা প্রকৌশল ও প্রযুক্তি বিশ্ববিদ্যালয়
| native_name_lang = bn
| image =
| caption = DUET का क्रेस्ट
| motto = "प्रযুক্তিই प्रगति"
| established = {{Start date and age|1980}} (इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में)<br>{{Start date and age|1986}} (BIT, Dhaka के रूप में)<br>{{Start date and age|2003}} (DUET के रूप में)
| affiliation = [[University Grants Commission (Bangladesh)|विश्वविद्यालय अनुदान आयोग]] (UGC)
| endowment = [[Bangladeshi taka|৳]] 886.2 million (2023–24) <br> ($ 7.544 million)<ref>{{cite web|url=https://thedailycampus.com/public-university/116569/%E0%A6%95%E0%A7%8B%E0%A6%A8-%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%B6%E0%A7%8D%E0%A6%AC%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%B2%E0%A7%9F-%E0%A6%95%E0%A6%A4-%E0%A6%9F%E0%A6%BE%E0%A6%95%E0%A6%BE-%E0%A6%AA%E0%A6%BE%E0%A6%9A%E0%A7%8D%E0%A6%9B%E0%A7%87 |script-title=bn:ইউজিসির বাজেট: কোন বিশ্ববিদ্যালয় কত টাকা পাচ্ছে |language=bn |website=thedailycampus.com |access-date=2024-06-14}}</ref>
| type = [[Public University|सार्वजनिक]], [[Research university|अनुसंधान]]
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}}
ढाका इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गाजीपुर (जिसे आमतौर पर डीयूईटी के नाम से जाना जाता है), पहले बीआईटी ढाका के नाम से जाना जाता था। यह बांग्लादेश के गाजीपुर शहर में स्थित एक सार्वजनिक विश्वविद्यालय है, जो इंजीनियरिंग और तकनीकी अनुसंधान पर केंद्रित है, खासकर इंजीनियरिंग और वास्तुकला के अध्ययन में। यह बांग्लादेश के प्रमुख पीएचडी शोध विश्वविद्यालयों में से एक है। इस विश्वविद्यालय में स्नातक पाठ्यक्रम में दाखिला लेने के लिए छात्रों को पॉलिटेक्निक संस्थानों या बांग्लादेश तकनीकी शिक्षा बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त तकनीकी स्कूलों से डिप्लोमा इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त करनी होती है।
विश्वविद्यालय में वर्तमान में '''चार संकायों''' के अंतर्गत '''चौदह विभाग''' संचालित हैं, जिनमें से अधिकांश विभाग '''स्नातक''', '''स्नातकोत्तर''', तथा '''पीएच.डी. (डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी)''' कार्यक्रम प्रदान करते हैं। संकायों के अतिरिक्त, विश्वविद्यालय में '''तीन संस्थान''' भी कार्यरत हैं, जो मुख्यतः '''स्नातकोत्तर स्तर की डिग्रियाँ प्रदान करने''' और '''अनुसंधान गतिविधियों को प्रोत्साहित करने''' पर केंद्रित हैं।
वर्तमान में '''ढाका इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय''' में लगभग '''३५०० छात्र''' स्नातक तथा स्नातकोत्तर स्तर पर अध्ययनरत हैं। प्रत्येक वर्ष लगभग '''७०० नए छात्र''' स्नातक कार्यक्रमों में प्रवेश लेते हैं, जबकि स्नातकोत्तर और पीएच.डी. कार्यक्रमों में लगभग '''२४० छात्र''' नामांकित होते हैं। विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुसंधान को प्रोत्साहित एवं सुनिश्चित करने के लिए एक '''संस्थागत गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आई.क्यू.ए.सी.)''' सक्रिय रूप से कार्यरत है।
विश्वविद्यालय में वर्तमान में चार संकायों के अंतर्गत चौदह विभाग संचालित हैं, जिनमें से अधिकांश विभाग स्नातक, स्नातकोत्तर, तथा पीएच.डी. (डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी) कार्यक्रम प्रदान करते हैं। संकायों के अतिरिक्त, विश्वविद्यालय में तीन संस्थान भी कार्यरत हैं, जो मुख्यतः स्नातकोत्तर स्तर की डिग्रियाँ प्रदान करने और अनुसंधान गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित हैं।
स्नातक प्रवेश परीक्षा में लगभग '''१४,००० चयनित अभ्यर्थियों''' में से केवल '''शीर्ष ५% छात्र''' ही प्रवेश प्राप्त कर पाते हैं। विश्वविद्यालय में लगभग '''३०० से अधिक शिक्षक''' कार्यरत हैं। यहाँ केवल वे छात्र नामांकित हो सकते हैं, जिनके पास '''इंजीनियरिंग में डिप्लोमा''' होता है; ऐसे छात्र विश्वविद्यालय में '''इंजीनियरिंग एवं वास्तुकला''' विषयों में स्नातक की डिग्री के लिए अध्ययन करते हैं।
== इतिहास. ==
स्नातक प्रवेश परीक्षा में लगभग १४,००० चयनित अभ्यर्थियों में से केवल शीर्ष ५% छात्र ही प्रवेश प्राप्त कर पाते हैं। विश्वविद्यालय में लगभग ३०० से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं। यहाँ केवल वे छात्र नामांकित हो सकते हैं, जिनके पास इंजीनियरिंग में डिप्लोमा होता है; ऐसे छात्र विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग एवं वास्तुकला विषयों में स्नातक की डिग्री के लिए अध्ययन करते हैं।<ref>{{Cite web|url=http://offroadbangladesh.com/places/dhaka-university-of-engineering-and-technology/|title=Dhaka University of Engineering and Technology}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.duet.ac.bd/about/history#:~:text=Dhaka%20University%20of%20Engineering%20%26%20Technology%20(DUET)%2C%20Gazipur%20was,%2C%20Dhaka%2C%20Bangladesh%20in%201980.|title=About DUET}}</ref>
[[चित्र:BIT,_Dhaka.jpg|केंद्र|अंगूठाकार|बीआईटी, ढाका (1986) ]]
स्नातक प्रवेश परीक्षा में लगभग १४,००० चयनित अभ्यर्थियों में से केवल शीर्ष ५% छात्र ही प्रवेश प्राप्त कर पाते हैं। विश्वविद्यालय में लगभग ३०० से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं। यहाँ केवल वे छात्र नामांकित हो सकते हैं, जिनके पास इंजीनियरिंग में डिप्लोमा होता है; ऐसे छात्र विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग एवं वास्तुकला विषयों में स्नातक की डिग्री के लिए अध्ययन करते हैं।
सितंबर 2003 में, ढाका स्थित '''बांग्लादेश प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी)''' को अन्य तीन इंजीनियरिंग विश्वविद्यालयों — '''चटगाँव इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीयूईटी)''' और '''राजशाही इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरयूईटी)''' — के साथ मिलाकर '''‘‘ढाका इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गाज़ीपुर अधिनियम, 2003’’''' के तहत पुनर्गठित किया गया। इस अधिनियम के अनुसार, संस्थान का नाम बदलकर '''ढाका इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गाज़ीपुर''' कर दिया गया और इसे '''बांग्लादेश जनवादी गणराज्य की सरकार का एक स्वायत्त वैधानिक संगठन''' घोषित किया गया।
== स्थान ==
'''ढाका इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीयूईटी)''' बांग्लादेश की राजधानी ढाका से लगभग '''४० किमी''' उत्तर में, '''गाज़ीपुर जिले''' में स्थित है। यह '''हजरत शाहजलाल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे''' से लगभग '''२० किमी''' दूर है। गाज़ीपुर, ढाका और बांग्लादेश के अन्य प्रमुख शहरों से '''सड़कों और रेलवे द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ''' है।
{{Multiple image|image3=Shaheed Minar, DUET.jpg|image1=DUET Central Mosque.jpg}}
== गैलरी ==
मस्जिद के प्रवेश द्वार से लेकर डीयूईटी परिसर के विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित करने वाली कई तस्वीरें।
== शिक्षाविद ==
डीयूईटी '''चार संकायों''' के तहत '''१४ विभागों''' और '''३ संस्थानों''' के माध्यम से शिक्षा और अनुसंधान प्रदान करता है। विश्वविद्यालय में '''२६६ से अधिक संकाय सदस्य''', '''१५१ अधिकारी''', और '''३,५१५ से अधिक स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्र''' अध्ययनरत हैं।
=== संकाय और विभाग ===
* '''सिविल इंजीनियरिंग''' संकाय
** सिविल इंजीनियरिंग विभाग (सी. ई.) [[सिविल इंजीनियरी|सिविल इंजीनियरिंग (सी. ई.)]]
** वास्तुकला विभाग (आर्क) [[वास्तुशिल्पीय इंजीनियरी|वास्तुकला (आर्क)]]
* '''इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग''' के संकाय
** विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग विभाग (ईईई) [[विद्युत अभियान्त्रिकी|इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग (ईईई)]]
** कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग (सी. एस. ई.) कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (सी. एस. ई.)
* '''मैकेनिकल इंजीनियरिंग''' संकाय
** मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग (एमई) [[यान्त्रिक अभियान्त्रिकी|मैकेनिकल इंजीनियरिंग (एम. ई.)]]
** कपड़ा इंजीनियरिंग विभाग (टीई) [[वस्त्र विनिर्माण|कपड़ा इंजीनियरिंग (टीई)]]
** खाद्य अभियांत्रिकी विभाग (एफ. ई.) खाद्य अभियांत्रिकी (एफ. ई.)
** रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग (सीएचई) [[रासायनिक अभियान्त्रिकी|केमिकल इंजीनियरिंग (सीएचई)]]
** औद्योगिक और उत्पादन इंजीनियरिंग विभाग (आईपीई) औद्योगिक एवं उत्पादन इंजीनियरिंग (आई. पी. ई.)
** सामग्री और धातुकर्म अभियांत्रिकी विभाग (एमएमई) [[धातुकर्म|सामग्री और धातुकर्म इंजीनियरिंग (एम. एम. ई.)]]
* '''विज्ञान''' संकाय
** [[रसायन विज्ञान]] विभाग
** [[गणित]] विभाग
** [[भौतिक शास्त्र|भौतिकी]] विभाग
** मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग
=== रैंकिंग ===
'''ढाका इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीयूईटी)''' क्यूएस एशिया विश्वविद्यालय रैंकिंग 2025 में '''#<आईडी1>''' स्थान पर है। इसके अतिरिक्त, उसी रैंकिंग वर्ष में यह '''दक्षिणी एशिया के विश्वविद्यालयों में #127''' स्थान पर स्थित है।<ref>{{Cite web|url=https://www.qschina.cn/en/university-rankings/asia-university-rankings/2024|title=QS Asia University Rankings 2024|website=QS China|publisher=QS Quacquarelli Symonds|access-date=26 November 2024}}</ref>
== नामांकन ==
=== स्नातक कार्यक्रम ===
ढाका इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीयूईटी) में स्नातक प्रवेश परीक्षा में लगभग शीर्ष 5% छात्र लगभग 14,000 चयनित उम्मीदवारों के पूल से स्वीकृति प्राप्त करते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.prothomalo.com/education/admission/zeauusuuti|title=ডুয়েটে আন্ডারগ্র্যাজুয়েট প্রোগ্রামে ভর্তি, আবেদন অনলাইনে|website=Prothom Alo|language=bn|access-date=28 June 2024}}</ref>
डीयूईटी अपने चार संकायों में 10 स्नातक डिग्री प्रदान करता है। प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष में दो सेमेस्टर होते हैं, अर्थात् प्रथम और द्वितीय सेमेस्टर। छात्रों को आमतौर पर प्रथम वर्ष के दूसरे सेमेस्टर की कक्षा में प्रवेश दिया जाता है। पहले सेमेस्टर की कक्षा को 10 साल की स्कूली शिक्षा के बाद इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि में न्यूनतम चार साल का डिप्लोमा पूरा करने वाले छात्रों के लिए छूट दी जाती है।
निम्नलिखित विषयों में डिग्री प्रदान की जाती है:
* केमिकल इंजीनियरिंग
* फूड इंजीनियरिंग
* इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग
* मैकेनिकल इंजीनियरिंग
* कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग
* कपड़ा इंजीनियरिंग
* वास्तुकला
* औद्योगिक एवं उत्पादन इंजीनियरिंग
* सिविल इंजीनियरिंग
* सामग्री और धातुकर्म इंजीनियरिंग
== दूसरा कैम्पस ==
ढाका इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीयूईटी 2nd कैंपस) एक चल रही विकास परियोजना है जिसका उद्देश्य डीयूईईटी में छात्रों की बढ़ती संख्या को समायोजित करना है। डीयूईटी मुख्य परिसर के पास, गाजीपुर के माझीर खोला रोड पर स्थित, इस विस्तार पहल में आईसीटी इनक्यूबेटर भवन, एक शैक्षणिक भवन और एक छात्र हॉल जैसी विभिन्न सुविधाओं का निर्माण शामिल है।
[[श्रेणी:सीएस1 बंगाली-भाषा स्रोत (bn)]]
[[श्रेणी:Infobox mapframe without OSM relation ID on Wikidata]]
[[श्रेणी:विकिडेटा पर उपलब्ध निर्देशांक]]
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छगन सिंह राजपुरोहित
0
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6499928
2026-10-17T13:13:54Z
SparrowQ
86379
[[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:जालौर जिले के लोग]] जोड़ी
6630449
wikitext
text/x-wiki
'''छगन सिंह राजपुरोहित''' ने जालोर जिले में राजस्थान विधानसभा के आहोर विधानसभा क्षेत्र से 2018 राजस्थान विधानसभा चुनाव 31,048 मतों के अंतर से जीता । <ref>{{Cite web|title=राजस्थान: बीजेपी के खाते में गई आहोर विधानसभा सीट, छगन जीते|url=https://www.aajtak.in/india/rajasthan/story/rajasthan-assembly-election-ahore-seat-results-2018-575838-2018-12-11|access-date=22 May 2021|website=Aaj Tak|language=hi}}</ref><ref>{{Cite web|title=Chhagan Singh Rajpurohit(Bharatiya Janata Party(BJP)):Constituency- AHORE(JALORE) - Affidavit Information of Candidate:|url=https://www.myneta.info/Rajasthan2023/candidate.php?candidate_id=13|website=www.myneta.info|access-date=2025-11-30}}</ref><ref>{{Cite web|title=Bjp Chhagan Singh Rajpurohit Candidate Ahore Rajasthan Vidhan Sabha Election Result 2023|url=https://www.amarujala.com/election/vidhan-sabha-elections/rajasthan/candidates/chhagan-singh-rajpurohit-bjp-2023-ahore-141-rajasthan|website=Amar Ujala|access-date=2025-11-30|language=hi}}</ref>
==सन्दर्भ==
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:राजस्थान विधानसभा के विधायक]]
[[श्रेणी:भारतीय जनता पार्टी]]
[[श्रेणी:राजनीतिज्ञ]]
[[श्रेणी:राजस्थान विधायक 2023–2028]]
[[श्रेणी:जालौर जिले के लोग]]
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साधना औषधालय
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{{ज्ञानसन्दूक कम्पनी|name=साधना औषधालय|logo=সাধনা ঔষধালয়.jpg|native_name=সাধনা ঔষধালয়|native_name_lang=bn|industry=आयुर्वेदिक औषधिओं निर्माण|foundation=[[ढाका]] में सन १९१४ में आरम्भ|founder=[[योगेश चन्द्र घोष]]|hq_location_city=[[गेन्दरिया थाना]], [[पुराना ढाका]]|hq_location_country=बांग्लादेश|area_served=बांग्लादेश, भारत|products=|num_employees=}}
[[चित्र:Sadhana_Aushadhalaya_Dhaka_1924.png|दाएँ|अंगूठाकार|[[प्रफुल्ल चन्द्र राय]], अशरफुद्दीन अहमद चौधरी, [[सुभाष चन्द्र बोस|नेताजी सुभाष चन्द्र बोस]] और कवि [[काज़ी नज़रुल इस्लाम|काजी नजरूल इस्लाम]] साधना औषधालय में (1924)]]
'''साधना औषधालय लिमिटेड''' बांग्लादेश की एक [[आयुर्वेद|आयुर्वेदिक]] कंपनी है। <ref>{{Cite news|url=https://www.bd-pratidin.com/last-page/2018/03/29/317974|date=29 March 2018|work=Bangladesh Pratidin|access-date=4 December 2019|language=bn|script-title=bn:সাধনার অন্যরকম সংসার|trans-title=Sadhana is a different kind of family|archive-date=4 दिसंबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191204184226/https://www.bd-pratidin.com/last-page/2018/03/29/317974|url-status=dead}}</ref> इसकी स्थापना 1914 में [[योगेश चंद्र घोष]] द्वारा की गई थी। यह [[बांग्लादेश]] में आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण की पहली प्रयोगशाला थी। <ref>{{Cite web|url=http://en.banglapedia.org/index.php?title=Ghosh,_Jogesh_Chandra|title=Ghosh, Jogesh Chandra - Banglapedia|website=Banglapedia|access-date=4 December 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20250119150743/http://en.banglapedia.org/index.php?title=Ghosh%2C_Jogesh_Chandra|archive-date=19 जनवरी 2025|url-status=dead}}<br /><br />- {{Cite news|url=https://www.thedailystar.net/the-science-of-life-6114|title=The Science of Life|last=Upashana Salam|date=10 January 2014|work=The Daily Star|access-date=4 December 2019|location=Bangladesh}}</ref> <ref>{{Cite book|url=https://www.google.co.in/books/edition/Swadeshi_Enterprise_in_Bengal_1921_47/hNTsAAAAMAAJ?hl=en|title=Swadeshi Enterprise in Bengal, 1921-47|last=Bhattacharyya|first=Amit|date=2007|publisher=Setu Prakashani|isbn=978-81-903272-9-9|pages=112, 116, 117|language=en}}</ref>
साधना औषधालय का मुख्यालय पुराने [[ढाका]] के गेंडारिया में दो एकड़ भूमि पर स्थित है। बांग्लादेश में इसके 68 बिक्री केंद्र हैं और भारत में इसकी शाखाएँ हैं। <ref>{{Cite news|url=https://www.bd-pratidin.com/last-page/2018/03/29/317974|date=29 March 2018|work=Bangladesh Pratidin|access-date=4 December 2019|language=bn|script-title=bn:সাধনার অন্যরকম সংসার|trans-title=Sadhana is a different kind of family|archive-date=4 दिसंबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191204184226/https://www.bd-pratidin.com/last-page/2018/03/29/317974|url-status=dead}}</ref> किसी समय में लगभग 450 प्रकार की दवाएँ थीं, लेकिन वर्तमान में केवल 120 ही तैयार की जाती हैं। <ref>{{Cite web|url=http://en.banglapedia.org/index.php?title=Ghosh,_Jogesh_Chandra|title=Ghosh, Jogesh Chandra - Banglapedia|website=Banglapedia|access-date=4 December 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20250119150743/http://en.banglapedia.org/index.php?title=Ghosh%2C_Jogesh_Chandra|archive-date=19 जनवरी 2025|url-status=dead}}<br /><br />- {{Cite news|url=https://www.thedailystar.net/the-science-of-life-6114|title=The Science of Life|last=Upashana Salam|date=10 January 2014|work=The Daily Star|access-date=4 December 2019|location=Bangladesh}}</ref>
==इन्हें भी देखें==
*[[आयुर्वेद]]
*[[प्रफुल्ल चन्द्र राय]]
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:आयुर्वेद]]
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हिंदुस्थान वासी
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text/x-wiki
{{Navbox
| name = टी‑सीरीज़
| title = [[टी सीरीज़]]
| bodyclass = hlist
| state = {{{state<includeonly>|autocollapse</includeonly>}}}
| group1 = व्यवसायिक व्यक्तित्व
| list1 =
* [[गुलशन कुमार]]
* [[भूषण कुमार]]
* [[कृष्ण कुमार (अभिनेता)|कृष्ण कुमार]]
| group2 = संगीत निर्देशक / संगीतकार
| list2 =
* [[ए. आर. रहमान]]
* [[आनन्द–मिलिन्द]]
* [[गुरु रन्धावा]]
* [[हिमेश रेशमिया]]
* [[नदीम–श्रवण]]
* [[निखिल–विनय]]
* [[राजेश रोशन]]
* [[साजिद–वाजिद]]
* [[तनिष्क बागची]]
* [[विशाल–शेखर]]
* [[यो यो हनी सिंह]]
* [[ज़ैक नाइट]]
| group3 = गीत
| list3 =
*"[[क़यामत से क़यामत तक|पापा कहते हैं]]" (१९८८)
*"[[धीरे धीरे]]" (१९९०)
*"[[आँख मारे]]" (१९९६)
*"[[दिलबर (गीत)|दिलबर]]" (१९९९)
*"[[तू है]]" (२०१६)
*"[[बॉम डिग्गी (गीत)|बॉम डिग्गी]]" (२०१७)
*"[[लाहौर (गीत)|लाहौर]]" (२०१७)
*"[[एक दो तीन (गीत)|एक दो तीन]]" (२०१८)
*"[[ओ साथी]]" (२०१८)
*"[[दस बहाने २.०]]" (२०१९)
*"मैं तेरी हूँ" (२०१९)
*"[[वास्ते]]" (२०१९)
*"[[स्लोली स्लोली (गुरु रन्धावा गीत)|स्लोली स्लोली]]" (२०१९)
*"[[एक चुम्मा]]" (२०१९)
*"[[आशिकी आ गई]]" (२०२१)
*"[[रंगीसरी]]" (२०२२)
*"[[ज़िन्दा बन्दा]]" (२०२३)
*"[[चलेया]]" (२०२३)
*"[[नॉट रमैय्या वस्तावैय्या]]" (२०२३)
*"[[इश्क जैसा कुछ]]" (२०२३)
*"[[रांझन]]" (२०२४)
*"[[कनीमा]]" (२०२५)
*"[[थलपति कचहरी]]" (२०२५)
| group4 = फ़िल्म निर्माण
| list4 =
* [[आशिकी]]
* [[बहार आने तक]]
* [[जीना तेरी गली में]]
* [[आई मिलन की रात]]
* [[दिल है कि मानता नहीं]]
* [[जीना मरना तेरे संग]]
* [[संगीत (फ़िल्म)|संगीत]]
* [[बेवफ़ा सनम]]
* [[तुम बिन]]
* [[आपको पहले भी कहीं देखा है]]
* [[हमको दीवाना कर गए]]
* [[डार्लिंग (२००७ फ़िल्म)|डार्लिंग]]
* [[भूल भुलैया]]
* [[कर्ज़ (2008 फ़िल्म)|कर्ज़]]
* [[रेडियो (२००९ फ़िल्म)|रेडियो]]
* [[रेडी (२०११ फ़िल्म)|रेडी]]
* [[आशिकी २]]
* [[शेफ़ (२०१७ फ़िल्म)|शेफ़]]
* [[हिन्दी मीडियम]]
* [[ब्लैकमेल (२०१८ फ़िल्म)|ब्लैकमेल]]
* [[सत्यमेव जयते (२०१८ फ़िल्म)|सत्यमेव जयते]]
* [[भारत (फ़िल्म)|भारत]]
* [[मोग़ल (फ़िल्म)|मोग़ल]]
* [[खानदानी शफ़ाख़ाना]]
* [[साहो]]
* [[पति पत्नी और वो (२०१९ फ़िल्म)|पति पत्नी और वो]]
* [[तान्हाजी]]
* [[स्ट्रीट डांसर ३डी]]
* [[मलंग (फ़िल्म)|मलंग]]
* [[सरदार का ग्रैंडसन]]
* [[शेरनी (२०२१ फ़िल्म)|शेरनी]]
* [[भुज: द प्राइड ऑफ़ इंडिया]]
* [[राधे श्याम]]
* [[एक विलन रिटर्न्स]]
* [[सर्कस (फ़िल्म)|सर्कस]]
* [[वारिसु]]
* [[शहज़ादा (२०२३ फ़िल्म)|शहज़ादा]]
* [[आदिपुरुष]]
| group5 = सम्बन्धित
| list5 =
* [[प्यूडीपाई बनाम टी-सीरीज़]]
* [[दिव्या खोसला कुमार]]
* [[ख़ुशाली कुमार]]
* [[तुलसी कुमार]]
}}
<noinclude>
{{collapsible option}}
[[Category:टी‑सीरीज़|τ]]
[[Category:रिकॉर्ड लेबल नैविगेशन बॉक्स]]
[[Category:भारतीय कम्पनी नैविगेशन बॉक्स]]
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सम्बाद प्रभाकर
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text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक समाचारपत्र|name=संबाद प्रभाकर<br/>সংবাদ প্রভাকর|image=|caption=|type=दैनिक समाचार पत्र|format=|owners=|publisher=[[ईश्वर चन्द्र गुप्त]]|editor=[[ईश्वर चन्द्र गुप्त]], रामचन्द्र गुप्त, गोपालचन्द्र मुखोपाध्याय, मणीन्द्रकृष्ण गुप्त|language=[[बांग्ला]]|headquarters=[[कोलकाता]]|circulation=}}
[[चित्र:সংবাদ প্রভাকর পত্রিকা (৫ ডিসেম্বর ১৮৪০).jpg|right|thumb|300px|सम्बाद प्रभाकर के 5 दिसंबर 1840 के अंक का मुखपृष्ठ]]
'''संवाद प्रभाकर''' ( {{langx|bn|সংবাদ প্রভাকর}} ) [[ईश्वरचंद्र गुप्त|ईश्वर चंद्र गुप्त]] द्वारा स्थापित एक [[बंगाली भाषा|बंगाली]] दैनिक समाचार पत्र था। यह 1831 में एक साप्ताहिक समाचार पत्र के रूप में शुरू हुआ और आठ वर्ष बाद 1839 में दैनिक बन गया। यह [[बांग्ला]] का पहला दैनिक समाचार पत्र था।
संवाद प्रभाकर ने [[भारत]] और विदेशों की खबरों को कवर किया और धर्म, राजनीति, समाज और साहित्य पर अपने विचार रखे। यह [[बंगाली भाषा]] में प्रभावशाली था और जनता की भावना का निर्माण करके [[नील विद्रोह]] का कारण बना।<ref name="bp">{{Cite book|title=Banglapedia: National Encyclopedia of Bangladesh|last=Chaudhuri|first=Indrajit|publisher=[[Asiatic Society of Bangladesh]]|year=2012|editor-last=Islam|editor-first=Sirajul|editor-link=Sirajul Islam|edition=Second|chapter=Sangbad Prabhakar|editor-last2=Jamal|editor-first2=Ahmed A.|chapter-url=http://en.banglapedia.org/index.php?title=Sangbad_Prabhakar|archive-url=https://web.archive.org/web/20200629225835/http://en.banglapedia.org/index.php?title=Sangbad_Prabhakar|archive-date=29 जून 2020|access-date=20 फ़रवरी 2026|url-status=dead}}</ref>
==इतिहास==
संवाद प्रभाकर [[ईश्वर चंद्र गुप्त]] के दिमाग की उपज थी। उनके संरक्षक [[पथुरियाघाट]] के [[जोगेन्द्र मोहन ठाकुर]] थे। श्री ठाकुर इस समाचार पत्र की रीढ़ थे और उनकी मृत्यु के कारण 1832 में समाचार पत्र का प्रकाशन बंद हो गया। 1836 में, इस समाचार पत्र को [[ईश्वर चंद्र गुप्त]] ने पुनर्जीवित किया और 10 अगस्त, 1836 को त्रि-साप्ताहिक के रूप में प्रकाशित हुआ था। [[पथुरियाघाट]] के [[टैगोर वंश|ठाकुर परिवार]] ने इसके लिये सहायता की। १४ जून १८३९ में पुनः सम्बाद प्रभाकर बंगाली का प्रथम दैनिक समाचार पत्र बन गया।
== योगकर्ता ==
* [[कंगाल हरिनाथ]]
* [[बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय]]
* [[राधाकान्त देव|राधाकान्त देव]]
* [[रंगलाल बन्द्योपाध्याय|रंगलाल बंद्योपाध्याय]]
* [[दीनबन्धु मित्र]]
==इन्हें भी देखें==
*[[उदन्त मार्तण्ड]] (हिन्दी का प्रथम समाचार पत्र)
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{बंगाल का नवजागरण}}
[[श्रेणी:बंगाल का नवजागरण]]
llccnud7ao6c5f10llww204cj0u9kl0
सदस्य:विक्रम प्रताप/शीह लॉग
2
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6630206
2026-10-18T01:25:48Z
विक्रम प्रताप
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शीह नामांकन का लॉग बनाया जा रहा of [[:सदस्य वार्ता:Dr shobha Bhardwaj]].
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text/x-wiki
This is a log of all [[वि:शीह|speedy deletion]] nominations made by this user using [[WP:TW|Twinkle]]'s CSD module.
If you no longer wish to keep this log, you can turn it off using the [[Wikipedia:Twinkle/Preferences|preferences panel]], and nominate this page for speedy deletion under [[वि:शीह#U1|CSD U1]].
=== मार्च 2026 ===
# [[:चिरंजीवी सरजा]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 20:50, 18 मार्च 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Fper]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 13:51, 19 मार्च 2026 (UTC)
# [[:दिवाण जवाहर सिंह]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 10:52, 20 मार्च 2026 (UTC)
=== अप्रैल 2026 ===
# [[:द्वितीयक रंग]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 17:09, 2 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Harendra jakhar nagour]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 17:23, 2 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सहायता:Protection]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 17:30, 2 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:कंपनी हवलदार मेजर]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 22:57, 5 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:विक्रम सिंह मीना]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 01:25, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:रविन्द्र कुमार द्विवेदी]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 08:06, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:डिबेटसिলেটবিডি]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ नहीं}; सदस्य {{user|1=Spacebangla}} को सूचित किया गया 13:30, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:देओला दादा]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:07, 9 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सहायता:IPA/Hindi and Urdu]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 04:09, 9 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:रोहित गिल]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 18:00, 10 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Bjp Junaid Hussain]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:48, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
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# [[:सदस्य वार्ता:कुश सोगुण]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 14:06, 12 अप्रैल 2026 (UTC)
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# [[:साउथ सिटी इंटर्नैशनल स्कूल]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: इसमें उल्लेखनीयता का स्पष्ट अभाव है और कोई भी विश्वसनीय स्रोत नहीं है।}; सदस्य {{user|1=Ahari123}} को सूचित किया गया 19:08, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Nawada District President of Youth Congress is Mohammad Irshad Ansari]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:14, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:ऑस्ट्रेलिया के लिए CDR]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:44, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
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# [[:ग्यासी]]: [[वि:शीह#व3|शीह व3]] ({{tl|db-vandalism}}) 13:33, 19 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:जय भीम नव जागृति संस्थान उटाम्बर]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 14:13, 19 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:अशुतोष यादव]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 18:50, 19 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:डॉ. भावना सावलिया]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 18:52, 19 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:महकाल अवतार]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 19:14, 19 अप्रैल 2026 (UTC)
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# [[:सदस्य:आदर्श कुमार राजपूत]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 17:29, 22 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:विनोद वर्मा (आभूषण वर्ल्ड)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 15:10, 23 अप्रैल 2026 (UTC)
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# [[:Anu tomar]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: शीर्षक अन्य भाषा में है}; सदस्य {{user|1=Advocate vinit tyagi}} को सूचित किया गया 03:46, 24 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:द ट्रेंडिंग पीपल]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 03:51, 24 अप्रैल 2026 (UTC)
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# [[:Banka, बिहार]]: [[वि:शीह#व1|शीह व1]] ({{tl|db-nonsense}}) 19:52, 25 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:महरूज़ सिद्दीकी नदीम (फुटबॉलर)]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 20:26, 25 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:श्रेणी:Wikipedia help forums]]: [[वि:शीह#व1|शीह व1]] ({{tl|db-nonsense}}) 20:35, 25 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:GSU Magar Tagar]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:53, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:श्रेणी:हिन्दी उपन्यास-रामनाथ शिवेंद्र का उपन्यास "दूसरी आज़ादी "]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:55, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:आदर्श राजपूत]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 05:00, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:प्रावधान]]: [[वि:शीह#व1|शीह व1]] ({{tl|db-nonsense}}) 05:07, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:GSU Magar Tagar]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 10:24, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:दिनेश शाहरा]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 10:27, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:दीनदयाल सोनी]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 13:54, 28 अप्रैल 2026 (UTC)
=== मई 2026 ===
# [[:Draft:ओलीवर बा़ख]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 09:42, 7 मई 2026 (UTC)
# [[:बिहार और सूफ़ीवाद]]: multiple criteria ([[वि:शीह#ल2|ल2]], [[वि:शीह#व7|व7]]); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 17:19, 7 मई 2026 (UTC)
# [[:नालया थीरपू]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 08:01, 8 मई 2026 (UTC)
# [[:Draft:ओलीवर बा़ख]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 16:05, 8 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:PoetNikhilNeeraj]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:13, 9 मई 2026 (UTC)
# [[:पूस की रात]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 15:20, 9 मई 2026 (UTC)
# [[:Ragul Kamaraj Reddy(राघुल कामराज रेड्डी)]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 01:44, 10 मई 2026 (UTC)
# [[:सिरे की शादेन (मुहावरा)]]: [[वि:शीह#व3|शीह व3]] ({{tl|db-vandalism}}) 01:53, 10 मई 2026 (UTC)
# [[:राष्ट्रीय दादा दादी दिवस]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 11:42, 10 मई 2026 (UTC)
# [[:केशव गुप्ता]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 17:30, 13 मई 2026 (UTC)
# [[:स्टोरिको सेरामिका एलएलपी]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 11:12, 14 मई 2026 (UTC)
# [[:दीनदयाल सोनी]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 23:28, 14 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Vishalguptahyv]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:04, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:दीनदयाल सोनी बाँदा]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 12:11, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:केशव गुप्ता]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 13:32, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:अपाचे]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 18:38, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:पूवे उनक्कागा]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 19:36, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:सफाविद वंश]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 20:25, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:राजपासी]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 03:54, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Wikidata Infobox/i18n]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 07:20, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Wikidata Infobox/i18n/hi]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 07:21, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Wikidata Infobox/i18n/getMsg]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 07:21, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:कुनलावुट विटिडसर्न]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 08:25, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:दीनदयाल सोनी बाँदा]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 16:26, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:साश्वत कुमार (कराटे)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 01:30, 17 मई 2026 (UTC)
# [[:*नरेश दास वैष्णव निम्बार्क*]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 15:12, 17 मई 2026 (UTC)
# [[:सांचा:पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्री]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: स्वतःपरीक्षित सदस्य ने गलती से [[सांचा:पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्रियों की सूची]] बनाया जिसे सही साँचा [[साँचा:पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्री]] बना दिया है}; सदस्य {{user|1=आशीष भटनागर}} को सूचित किया गया 05:15, 19 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Acharya Shashi Pandey]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 00:28, 22 मई 2026 (UTC)
# [[:अमित राना]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 00:58, 22 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Babukumar123]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 01:50, 23 मई 2026 (UTC)
# [[:सांचा:पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्रियों की सूची]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: अनुप्रेषित पृष्ठ हटा दिया गया }; सदस्य {{user|1=आशीष भटनागर}} को सूचित किया गया 01:59, 23 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Pankaj Kerketta]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:14, 23 मई 2026 (UTC)
# [[:एक्सपर्ट टाइम्स]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 08:26, 25 मई 2026 (UTC)
# [[:डॉ रागिनी स्वर्णकार]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 08:29, 25 मई 2026 (UTC)
# [[:विकिपीडिया:अपलोड/अपना कार्य]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:24, 29 मई 2026 (UTC)
# [[:थाथानिन थोंगचाय]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 00:59, 30 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Flying Kick Martial Arts]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 01:07, 30 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Shobhit K Tripathi]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 17:10, 30 मई 2026 (UTC)
=== जून 2026 ===
# [[:सदस्य वार्ता:Saurav Vaishnaw]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:05, 9 जून 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Sahil Khan 98 cricketer]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 06:41, 10 जून 2026 (UTC)
# [[:रोनक चौधरी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:31, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:ईश्वर महान नहीं है]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 10:50, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:दिवाकर वर्मा]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 14:54, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:जॉन डन]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 14:55, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:विवेक राजनारायण तिवारी]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 15:40, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:विवेक राजनारायण तिवारी/प्रयोगपृष्ठ]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 15:55, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:622]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 01:02, 15 जून 2026 (UTC)
# [[:623]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 01:02, 15 जून 2026 (UTC)
# [[:625]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 01:03, 15 जून 2026 (UTC)
# [[:मॉड्यूल:Autotranslate]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 15:57, 18 जून 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Depicted flag]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 15:58, 18 जून 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:GSU Magar Tagar]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 02:40, 23 जून 2026 (UTC)
# [[:बनत]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 03:19, 27 जून 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:~2026-36929-46]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 03:21, 27 जून 2026 (UTC)
# [[:सूर्य का शहर]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 17:18, 27 जून 2026 (UTC)
# [[:अतिशयोक्ति (रोग)]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 00:03, 28 जून 2026 (UTC)
=== जुलाई 2026 ===
# [[:बच्चों के लिए फाउंडेशन]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 04:17, 1 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:फफूँद, औरैया]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 07:03, 2 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Sahil khan 98 crickett]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 07:04, 2 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:मोहम्मद असद मंसूरी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:11, 2 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:ग़ज़ा प्रशासन राष्ट्रीय समिति]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 09:26, 3 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:लोधा राजपूत]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 12:37, 3 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:लोद्रवा गढ़]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 12:37, 3 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:वहीद उद्दीन हैदर जाफ़री]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उल्लेखनीय नहीं}; सदस्य {{user|1=AhsanBangla}} को सूचित किया गया 13:02, 3 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Shri Chand Mahan]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:57, 5 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:बिंदु-चित्रण]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 04:59, 5 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:मोहम्मद असद मंसूरी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 05:02, 5 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:आशीष गाज़ीपुरी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 07:05, 5 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Jawwad Khan Suri]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:18, 7 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Sahil khan 98 crickett]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:41, 8 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:चित्र वार्ता:Baby malinga 98.jpg]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:42, 8 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Aakash rampura]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 13:36, 8 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Suman Rajvardhan]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:37, 8 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सामुदायिक विकास]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: विश्वसनीय स्रोत नहीं}; सदस्य {{user|1=Rsparsar}} को सूचित किया गया 04:24, 9 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:लोधा राजपूत]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 04:24, 9 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:लोद्रवा गढ़]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 04:25, 9 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:कैंसरराउंड्स (CancerRounds)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:49, 10 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:मेघवाल महावीर बालाण]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 08:57, 11 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:ठक्करबापा छात्रावास]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 02:53, 13 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Vikram singh meena]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 07:16, 19 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:गोविंद मोहन]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 10:56, 20 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Raje sagar]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 02:03, 24 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Dr.Devendra Baghel]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 13:00, 26 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:PRIT LAL KURRE]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:02, 28 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:संजय सिंह पटेल गुणावद]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 09:06, 28 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Taxonomy/Montecincla]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 18:51, 29 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:विलियम स्तुकेले]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 19:05, 29 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:क्रांतिकारी पंडित तेजसिंह तिवारी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 20:32, 31 जुलाई 2026 (UTC)
=== अगस्त 2026 ===
# [[:सदस्य:Adarsh Rajput Ji]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 05:12, 2 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:अजंता की गुफाएं]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: अजंता गुफाएँ} 05:16, 2 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:बरगी विक्रम रेड्डी]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 05:19, 2 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Adarsh Rajput Ji]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:40, 2 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:Chrispapas vs the Lore क्रिसपापास]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 15:37, 2 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:जुआन ब्रांको]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 11:37, 3 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:महंत बक्शीराम जी महाराज]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 11:43, 3 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:डायलावेक]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:24, 4 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:इंडियाबुल्स]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 13:48, 6 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:रेड्फू]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 13:50, 6 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Actor Prithvi Pandey/प्रयोगपृष्ठ]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 13:51, 6 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:इनफिनिटीफ्री]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 15:08, 6 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:AimNxtGenAI]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:47, 7 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:कवि प्रमोद मिश्रा]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 00:24, 8 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:सखवार राजपूत]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: अनुपस्थित पृष्ठ का वार्ता पृष्ठ।} 06:21, 8 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Rajkunwar maurya]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 05:18, 9 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (detailed)]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद} 13:59, 9 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:इन्फिनिटीफ्री होस्टिंग]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 10:14, 10 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:सहायता:Help page footer templates]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 10:17, 10 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:इन्फिनिटीफ्री]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: अनुप्रेषित पृष्ठ को भी नामांकित किया } 10:20, 10 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:AMAN KUMAR/Non-free use rationale album cover]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 15:45, 10 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:PRAVIN R TIWARI]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 14:27, 11 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:इन्फिनिटीफ्री होस्टिंग]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 00:39, 12 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:नवादा जिला अध्यक्ष युवा कांग्रेस बिहार IYC, बिहार नवादा जिला अध्यक्ष कांग्रेस]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 07:23, 12 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Sarkari Samrat]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:25, 12 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:चित्र:Madhurendra sand artist.jpg]] ([{{fullurl:Special:Log|page=%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:Madhurendra_sand_artist.jpg}} log]): [[वि:शीह#फ़2|शीह फ़2]] ({{tl|db-commons}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {फ़2 1: File:Madhurendra sand artist 2.jpg File Discussion} 05:49, 13 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:प्रारूप:डॉ. शिवनारायण दुबे]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उल्लेखनीयता संदिग्ध और विश्वसनीय स्रोतों का अभाव} 12:39, 13 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:ईनफिनिटीफ्रीहोस्टिंग]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 02:09, 14 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Kuldeepbabayadav]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 04:32, 14 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Kuldeepbabayadav]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 07:30, 14 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:The kuldeep baba]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 07:31, 14 अगस्त 2026 (UTC)
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# [[:मधुरेंद्र कुमार]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 10:02, 31 अगस्त 2026 (UTC)
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=== सितम्बर 2026 ===
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# [[:सदस्य:AMAN KUMAR/Non-free image rationale]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 21:14, 1 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:राजू पंजाबी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 07:22, 3 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:श्रेणी:Protected project pages]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 10:59, 3 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:रतिराम दूत]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 07:19, 4 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:रघुवर दयाल श्रीवास्तव]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:05, 4 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:केशव मिश्र]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 00:57, 6 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:इल्ली गौल्डिंग]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 05:03, 6 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:AMAN KUMAR/Template:Non-free use rationale book cover]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 06:16, 6 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:अशोक हमराही]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 07:20, 6 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:शास्वत कुमार]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 11:24, 7 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:प्रारूप:कुलदीप चौधरी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 12:53, 8 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:फिरदौसी]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 03:25, 10 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:जिसेल जुआरेज़]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 03:33, 10 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:अम्मार सिंघ]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:55, 10 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:फेमस बर्थडेस]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 00:02, 11 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:ऑन वॉर]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 00:06, 11 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Abhinav Shahi (Music Producer)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 00:15, 11 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:श्रेणी:स्वतंत्रता दिवस संपादनोत्सव]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 14:19, 11 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:전군연]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: अन्य भाषा शीर्षक} 15:48, 11 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:전국군무원연대]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: अन्य भाषा शीर्षक} 15:48, 11 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:वाइब (2026 फ़िल्म)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 15:52, 11 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:विकिपीडिया वार्ता:प्रमुख लेख/पुरालेख/२०१९]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 02:02, 12 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:जिसेल जुआरेज़]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 14:27, 12 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:धीरेंद्र कृष्री शास्री]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 16:39, 12 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Tagore faimly]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 17:09, 12 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:राहुल द्विवेदी 'स्मित']]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:15, 13 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:साहित्य रागिनी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 06:10, 13 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:सरणी (आँकड़ा संरचना)]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: बिना लेख का वार्ता पृष्ठ} 08:16, 13 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:कृत्रिम सामान्य बुद्धिमत्ता]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 08:45, 13 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:डॉ. अशोक कुमार मिश्र "क्षितिज"]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:19, 13 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:नागेश पांडेय संजय]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:28, 13 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:ब्राह्रण]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 21:58, 13 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Aneesh Sharma (Actor)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:03, 13 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:मेघनाथ सिंह खंगार]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:10, 14 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:विकियीदिया:नया लेच कैसे बनायें]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 09:30, 14 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Meva ram suthar barmer]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 12:24, 14 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:ब्रिक्ऋस]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 18:31, 14 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Ysarmy/खेल का मैदान]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 10:01, 15 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:केवल कुमार (संगीतकार)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 12:36, 15 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:राय वंश]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 10:43, 16 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:लेजेंड बर्थडेज (Legend Birthdays)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 10:54, 16 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Nimesh2026]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 00:03, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:PUSHKAR DEY]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 09:00, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:PUSHKAR DEY]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 09:01, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:संपादनबॉक्स]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 09:02, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:भुज और कोटि/पुरालेख 1]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 12:51, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Shivshant gautam]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 14:55, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:साश्वत कुमार]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 18:07, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:यूरोप की परिषद]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 18:17, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:एलेन ऑक्टेवियन ह्यूम]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 18:18, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:रोमन केथोलिक]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 18:18, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:हेलेन ख़ान]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 18:19, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:HHyderabad Ki Awaaz News Digital Media]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 00:47, 18 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Shivshant Rao Ambedkar]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 00:48, 18 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:इन्फ्लुएंसर बर्थडेज़ (Influencer Birthdays)]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 23:30, 18 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Kavita Anuragi]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 07:25, 19 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Kavita Anuragi]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 07:25, 19 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Mohit.avasya.rajput]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 13:32, 19 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Ghanshyam andola]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 01:26, 20 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Amit anay singh]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 01:29, 20 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:प्रभा पंत]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 05:29, 20 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:फेमस पीपल यूएसए]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 07:13, 20 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:श्री टेढ़ेश्वर नाथ मंदिर]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 15:53, 20 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:नितिन श्रीवास्तव]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:49, 20 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सैंडबॉक्स]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 15:45, 21 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:सैंडबॉक्स]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 15:46, 21 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कोमल निषाद]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 15:52, 21 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:आत्मनैर्भर्य]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 15:53, 21 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:Bipin devdas]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 02:09, 22 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सुनील आंबेकर]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 03:01, 22 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:भाई भाई टायर एंड पार्ट्स (Bhai Bhai Tyre and Parts)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 09:02, 22 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:गेटी इमेजेज़]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 09:03, 22 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:तेजा समाज सेवा संघ (Tss Sangh]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 09:04, 22 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:बालन नदी]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 00:18, 23 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:हिन्दू धर्म और सनातन]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 07:10, 23 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:2017 CONCACAF गोल्ड कप]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 17:39, 23 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:Draft : मेहुल श्रीवास्तव]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 17:48, 23 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:अनीता प्रेम]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 18:05, 23 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:अनुवाद और साहित्य]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 18:19, 23 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Dr.shriprakash Baranwal l]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:45, 23 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Dr.shriprakash Baranwal l]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:45, 23 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Subhash Kisku]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 02:45, 24 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:अल्जीरिया का इतिहास]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: अल्जीरिया} 03:45, 24 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:अवकाश सिंह]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 03:47, 24 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:विकिपीडिया:लेख विज़ार्ड]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 08:54, 24 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Kuldeepch71/ कुलदीप चौधरी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:32, 24 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Er. NIRAJ KUMAR SAH]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 11:38, 24 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Er. NIRAJ KUMAR SAH]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 11:39, 24 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:अरशद खान(बाल साहित्यकार)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 01:58, 25 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:फैमिली फुल हाउस विथ रोहित शर्मा]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 07:48, 25 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:अभिषेक पाण्डेय "रूपक"]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:18, 25 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:आलापुर]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 12:56, 25 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:फ़्रान्सीसी सांकेतिक भाषा]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 13:36, 25 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:निकारागुआई सांकेतिक भाषा]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 13:37, 25 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:उकु कोट]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 15:52, 25 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Abhivj48/प्रयोगपृष्ठ]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 16:25, 25 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:श्री दयानंद पांडेय]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 10:26, 26 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:ग्लॉक 17]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 13:03, 26 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:फेमस पब्लिक (Famous Public)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 17:01, 26 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:चित्र:Pandit brijbihari mishra banarasi maharaj.jpg]] ([{{fullurl:Special:Log|page=%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:Pandit_brijbihari_mishra_banarasi_maharaj.jpg}} log]): [[वि:शीह#फ़2|शीह फ़2]] ({{tl|db-commons}}) 19:03, 26 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:विवेक अत्रे]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख पर अनुप्रेषित } 19:10, 26 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Bsand-ep]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: यह अनुप्रेषित सदस्य विकि पर पंजीकृत nahin} 19:12, 26 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:एशिया में एयरलाइंस की सूची]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 09:58, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:एशियाई खेलों में भारत]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल ज्ञानसन्दूक उपस्थित } 10:03, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:एस्टोनिया के प्रधान मंत्री]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 14:08, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:ऐडवर्ड थॉर्नडाइक]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 14:21, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:ऐनी लिस्टर]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 14:25, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:ऐवलांश ब्रेकडाउन]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 14:30, 27 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:सदस्य:Actor Rohit Raj sharma]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 17:27, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:बेल्जियम महिला क्रिकेट टीम का ऑस्ट्रिया दौरा]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 19:27, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:ऑस्ट्रिया महिला क्रिकेट टीम का बेल्जियम दौरा]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 19:27, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:ओसमान सागर]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: पहले से मौजूद उचित लेख[[उस्मान सागर]]} 20:20, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कण्हपा]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[कन्नप्पा]]} 03:45, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कपड़ा रसायन]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 04:02, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कर्क संक्रान्ति]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[अयनांत]]} 04:39, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कल्पना सैनी]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[डॉ कल्पना सैनी]]} 06:16, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य का भूगोल]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य का इतिहास} 09:13, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:एम. डी. अण्डोला]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 10:52, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सैनिक क्षत्रिय]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 11:00, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:से ऑलवेज़ ट्रुथ]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:02, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:काली पुराण]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[कालिका पुराण]]} 11:59, 28 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:अक्षत तिवारी]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 12:49, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:राहुल सिन्हा (पत्रकार)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 21:36, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Maurya vanshi Ashish Kumar mourya]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 21:37, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कीनिया का भूगोल]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कीनिया#भूगोल} 23:29, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कीनिया का राजनीति]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कीनिया#सरकार और राजनीति} 23:31, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कीनिया की भाषाएँ]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कीनिया#भाषाएँ} 23:32, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:D. N. Verma - Barabanki]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 05:10, 29 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:आग्नेश सावाई]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 09:00, 29 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:आसुतोष कुमार उर्फ स्वामी आसुतोष मुनि जी]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 10:52, 29 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Hyderabad Ki Awaaz News/प्रयोगपृष्ठ]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:46, 30 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:राज विश्वकर्मा]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 09:25, 30 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Ms fouzia Fatima ceo]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 09:26, 30 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:विवेक मिश्र "नाहिल"/प्रयोगपृष्ठ]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 09:27, 30 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कुमारप्पा ग्राम स्वराज संस्थान]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 19:49, 30 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कुरु (बीमारी)]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[कुरु रोग]]} 19:55, 30 सितंबर 2026 (UTC)
=== अक्टूबर 2026 ===
# [[:परशुराम सेना]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 05:14, 1 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:मन्जु तोमर]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 05:17, 1 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:शहीद सआदत खां]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 05:19, 1 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वैशालीताई देशमुख]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 03:00, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Dilipsongra9]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 03:49, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:Draft:Birmi Patta]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 22:16, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:सीन 75]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 22:18, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
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# [[:वार्ता:वोलोदिमिरिव्का (उत्खनन स्थल)]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 22:19, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:राव लुणकरण]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ मौजूद} 22:22, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:भैरुँलाल भारद्वाज]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 22:23, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:भारत की विलुप्तप्रायः प्रजातियाँ]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 22:23, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:बिल्होरोड-निस्त्रोवस्की किला]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ मौजूद} 22:24, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:नीदरलैंड के प्रांत]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 22:25, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
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# [[:वार्ता:चुफुत-काले]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 22:28, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:काला चना घूमनी]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 22:32, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:कार्तिक राजपूत]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 22:33, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:कमलानंद झा]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 22:34, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:एस्की-केरमेन]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 22:34, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:Manarajganj estate]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 22:35, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:विकिपीडिया वार्ता:विकिपरियोजना संगीत/वार्ता]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 22:40, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:विकिपीडिया वार्ता:सहायता डेस्क]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 22:41, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:विकिपीडिया वार्ता:स्वतंत्रता दिवस संपादनोत्सव/2026]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 22:42, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:विकिपीडिया वार्ता:स्वतंत्रता दिवस संपादनोत्सव/2026/मूल्यांकन]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 22:43, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:चित्र वार्ता:Khan aashib.jpg]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 22:50, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:चित्र वार्ता:Devkinandan Thakur Ji.png]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 22:55, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:चित्र वार्ता:ANIL SUKHWAL.jpg]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 22:58, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:चित्र वार्ता:Pawar Rajput.jpg]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:02, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
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# [[:साँचा वार्ता:World Cinema]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:14, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:साँचा वार्ता:प्रमुख चित्र जनवरी २०२५]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:15, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सहायता वार्ता:नया लेख]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:17, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:श्रेणी वार्ता:8237 ईसा पूर्व]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:19, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:प्रवेशद्वार वार्ता:संस्कृति/चयनित लेख]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:39, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:प्रवेशद्वार वार्ता:पृथ्वी]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:39, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:मोहम्मद रफत नेता जी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 12:07, 3 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:रावल समरसिंह]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है आज ही (05/10/2026)} 20:37, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:बालप्रसाद मेवाड]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है आज ही (05/10/2026)} 20:38, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:विविध तीर्थकल्प (जिनप्रभ सूरि)]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है आज ही (05/10/2026)} 20:39, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:कटासिन का युद्ध]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित लेख मौजूद [[कातासिन की लड़ाई]] और जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है} 20:45, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:तराइन का प्रथम युद्ध]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है (अपलोड दिनांक 03/10/2026)} 20:48, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:गोविंद राय]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है (अपलोड दिनांक 03/10/2026)} 20:49, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:शिहाबुद्दीन गोरी]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है (अपलोड दिनांक 03/10/2026)} 20:50, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:भैरोवाल की लड़ाई]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है (अपलोड दिनांक 30/09/2026)} 21:05, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:चपाती आंदोलन]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है (अपलोड दिनांक 28/09/2026)} 21:07, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:रूप सिंह राठौड़]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है (अपलोड दिनांक 28/09/2026)} 21:15, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:खजवा का युद्ध]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है (अपलोड दिनांक 23/09/2026)} 21:22, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:राती घाटी का युद्ध]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 21:25, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:नकटी रानी कर्णावती]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 21:28, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:काल की सापेक्षता]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 22:03, 5 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:राजा ककुद्मी]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 22:04, 5 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:राजा हरिश्चन्द्र (फ़िल्म)]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 02:01, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:विकिपीडिया:इस सप्ताह का सुधार हेतु लेख/2026/41]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 12:53, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:कूफा]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[कूफ़ा]]} 13:08, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:राजेश मिश्र]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 15:47, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:केटीएम 200 ड्यूक]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 17:00, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:कैथॅलिक चर्च]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कैथोलिक गिरजाघर} 17:22, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:कैमरून का भूगोल]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कैमरुन} 17:27, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:कैमरून का इतिहास]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कैमरुन} 17:27, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:राजा दलपत शाह उज्जैनिया]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 21:30, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:भोजपुर का इतिहास]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 21:33, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय} 22:30, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:क्वार्कसिटी]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उल्लेखनीयता संदिग्ध और विश्वसनीय स्रोतों का अभाव} 14:02, 7 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सहायता:Help page footer templates]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 14:48, 7 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:खमन ढोकला]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: ढोकला} 16:05, 7 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:गाम्बिया का इतिहास]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: गाम्बिया} 16:58, 7 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:क्रांतिकारी पंडित तेजसिंह तिवारी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 00:45, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:ग्लॉक 17]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए अथवा अनुपस्थित पृष्ठ का वार्ता पृष्ठ।} 00:51, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:गाम्बिया की राजनीति]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: गाम्बिया} 01:06, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:गुरू अमरदास]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[गुरु अमर दास]]} 01:27, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:आकाश नंदा]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 10:27, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:जीएस पंवार]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 10:33, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:गोलाकाबास]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 10:47, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:ग्रामीण विकास राज्यमंत्री, भारत सरकार]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[ग्रामीण विकास मंत्रालय]]} 11:05, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:ग्रीनलैंड का इतिहास]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: ग्रीनलैण्ड} 11:06, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:घाना का इतिहास]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: घाना} 11:28, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:चार्टर एक्ट, 1833 (Saint Helena Act 1833 / Charter Act of 1833]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[भारत सरकार अधिनियम 1833]]} 13:02, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:चार्टर एक्ट, 1853 (Charter Act of 1853)]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[भारत सरकार अधिनियम 1833]]} 13:02, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:राजा दलपत शाह उज्जैनिया]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 15:38, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:आलोक कुमार]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 04:20, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:गोत्र कौशिक]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 10:50, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:गोत्र कश्यप]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 10:50, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सकरवार]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 10:54, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:थाकुर हनुमान जी राजपुरोहित (सबलपुर)]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 12:00, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:थाकुर हनुमान जी राजपुरोहित (सबलपुर)]]: [[वि:शीह#व3|शीह व3]] ({{tl|db-vandalism}}) 12:01, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:जबाला]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: मूल शोध} 16:19, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:जर्मनसोसाइटीफॉरस्टेमसेलरिसेर्च]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 16:30, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:जवान(फिल्म)]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 19:30, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:गोरडा (राजस्थान)]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 09:11, 10 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:ज़ोहर]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 09:16, 10 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:जाबर महादेव]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 09:20, 10 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:जामखेड तहसील]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 09:22, 10 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:जिंदल स्टील]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[जिन्दल स्टील एण्ड पॉवर लिमिटेड]]} 09:31, 10 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:जेसन केनी]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 10:39, 10 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:नवज्योत सिंह ठाकुर]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 00:33, 11 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:बालाभद्रपात्रुणि यश्ववंत]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 00:34, 11 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:जैव शोधक]]: [[वि:शीह#व1|शीह व1]] ({{tl|db-nonsense}}) 02:50, 11 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:चित्र:Hindu Darshan.png]] ([{{fullurl:Special:Log|page=%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:Hindu_Darshan.png}} log]): [[वि:शीह#फ़1|शीह फ़1]] ({{tl|db-license}}) 11:51, 11 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:चित्र:Hindu Darshan-1.png]] ([{{fullurl:Special:Log|page=%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:Hindu_Darshan-1.png}} log]): [[वि:शीह#फ़1|शीह फ़1]] ({{tl|db-license}}) 11:51, 11 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:प्रारूप:Sudhanshu Krishn Rai]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 09:52, 12 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:जॉइन मी डिजिटल मीडिया]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 17:55, 12 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:डाॅ अँकुर त्रिशलानन्द सरस्वती]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 01:27, 13 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:प्रवीण कम्बोज भारतीय]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:37, 13 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:Sudhanshu Krishn Rai]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 05:09, 14 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Syed Taneesh Ahmad]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 10:00, 15 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सुनील कुमार (कबड्डी)]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 15:48, 15 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:D.muniappan]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 00:42, 16 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:बाबुषा कोहली]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 00:44, 16 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:थानियारासु]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 04:48, 16 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:टॉमस यंग]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[थॉमस यंग]]} 08:02, 16 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:नदीम कुरैशी]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 09:21, 16 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Dr shobha Bhardwaj]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 01:25, 18 अक्टूबर 2026 (UTC)
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=== मार्च 2026 ===
# [[:चिरंजीवी सरजा]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 20:50, 18 मार्च 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Fper]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 13:51, 19 मार्च 2026 (UTC)
# [[:दिवाण जवाहर सिंह]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 10:52, 20 मार्च 2026 (UTC)
=== अप्रैल 2026 ===
# [[:द्वितीयक रंग]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 17:09, 2 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Harendra jakhar nagour]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 17:23, 2 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सहायता:Protection]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 17:30, 2 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:कंपनी हवलदार मेजर]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 22:57, 5 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:विक्रम सिंह मीना]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 01:25, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:रविन्द्र कुमार द्विवेदी]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 08:06, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:डिबेटसिলেটবিডি]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ नहीं}; सदस्य {{user|1=Spacebangla}} को सूचित किया गया 13:30, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:देओला दादा]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:07, 9 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सहायता:IPA/Hindi and Urdu]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 04:09, 9 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:रोहित गिल]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 18:00, 10 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Bjp Junaid Hussain]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:48, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Bjp Junaid Hussain]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:48, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:कुश सोगुण]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 14:06, 12 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Govind Bhana Artist]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 14:38, 12 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Chandan roy Bhirha]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 03:42, 13 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:पूर्ति आर्या]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 03:47, 13 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Article wizard/button wizard/sandbox]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 20:33, 13 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:The7unity]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 18:28, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:साउथ सिटी इंटर्नैशनल स्कूल]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: इसमें उल्लेखनीयता का स्पष्ट अभाव है और कोई भी विश्वसनीय स्रोत नहीं है।}; सदस्य {{user|1=Ahari123}} को सूचित किया गया 19:08, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Nawada District President of Youth Congress is Mohammad Irshad Ansari]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:14, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:ऑस्ट्रेलिया के लिए CDR]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:44, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Infobox news organization]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 03:04, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:गुंजन तिवारी]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 07:22, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:डॉ इन्दु शेखर उपाध्याय]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 10:52, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Ajaysingh Mer Rajput]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:19, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Harendra jakhar nagour]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 01:22, 18 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Adsmalhotra]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 12:21, 18 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Harendra jakhar degana]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 22:56, 18 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:ग्यासी]]: [[वि:शीह#व3|शीह व3]] ({{tl|db-vandalism}}) 13:33, 19 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:जय भीम नव जागृति संस्थान उटाम्बर]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 14:13, 19 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:अशुतोष यादव]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 18:50, 19 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:डॉ. भावना सावलिया]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 18:52, 19 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:महकाल अवतार]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 19:14, 19 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Ayushguptha]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 03:01, 20 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:जियोक्स एआई]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 06:27, 20 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:श्रवण राम पंवार]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:11, 20 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Shrawanrampanwar]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 13:12, 20 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:श्रवण राम मेघवाल]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 00:13, 21 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Parvat Singh Buddha]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 03:14, 22 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:पुष्कर कांडपाल (गायक)]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 08:57, 22 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Harendra jakhar degana]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:29, 22 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:आदर्श कुमार राजपूत]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 17:29, 22 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:विनोद वर्मा (आभूषण वर्ल्ड)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 15:10, 23 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Parvat Singh Buddha]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 15:12, 23 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:प्रवेशद्वार:न्यूरोविज्ञान]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 23:06, 23 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:Anu tomar]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: शीर्षक अन्य भाषा में है}; सदस्य {{user|1=Advocate vinit tyagi}} को सूचित किया गया 03:46, 24 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:द ट्रेंडिंग पीपल]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 03:51, 24 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:के राघवन रेड्डी]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 11:55, 24 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:GKM Gautam Kumar Maurya]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 11:36, 25 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:बिहार और सूफ़ीवाद]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 19:35, 25 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:Banka, बिहार]]: [[वि:शीह#व1|शीह व1]] ({{tl|db-nonsense}}) 19:52, 25 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:महरूज़ सिद्दीकी नदीम (फुटबॉलर)]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 20:26, 25 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:श्रेणी:Wikipedia help forums]]: [[वि:शीह#व1|शीह व1]] ({{tl|db-nonsense}}) 20:35, 25 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:GSU Magar Tagar]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:53, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:श्रेणी:हिन्दी उपन्यास-रामनाथ शिवेंद्र का उपन्यास "दूसरी आज़ादी "]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:55, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:आदर्श राजपूत]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 05:00, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:प्रावधान]]: [[वि:शीह#व1|शीह व1]] ({{tl|db-nonsense}}) 05:07, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:GSU Magar Tagar]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 10:24, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:दिनेश शाहरा]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 10:27, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:दीनदयाल सोनी]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 13:54, 28 अप्रैल 2026 (UTC)
=== मई 2026 ===
# [[:Draft:ओलीवर बा़ख]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 09:42, 7 मई 2026 (UTC)
# [[:बिहार और सूफ़ीवाद]]: multiple criteria ([[वि:शीह#ल2|ल2]], [[वि:शीह#व7|व7]]); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 17:19, 7 मई 2026 (UTC)
# [[:नालया थीरपू]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 08:01, 8 मई 2026 (UTC)
# [[:Draft:ओलीवर बा़ख]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 16:05, 8 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:PoetNikhilNeeraj]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:13, 9 मई 2026 (UTC)
# [[:पूस की रात]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 15:20, 9 मई 2026 (UTC)
# [[:Ragul Kamaraj Reddy(राघुल कामराज रेड्डी)]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 01:44, 10 मई 2026 (UTC)
# [[:सिरे की शादेन (मुहावरा)]]: [[वि:शीह#व3|शीह व3]] ({{tl|db-vandalism}}) 01:53, 10 मई 2026 (UTC)
# [[:राष्ट्रीय दादा दादी दिवस]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 11:42, 10 मई 2026 (UTC)
# [[:केशव गुप्ता]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 17:30, 13 मई 2026 (UTC)
# [[:स्टोरिको सेरामिका एलएलपी]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 11:12, 14 मई 2026 (UTC)
# [[:दीनदयाल सोनी]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 23:28, 14 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Vishalguptahyv]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:04, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:दीनदयाल सोनी बाँदा]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 12:11, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:केशव गुप्ता]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 13:32, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:अपाचे]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 18:38, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:पूवे उनक्कागा]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 19:36, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:सफाविद वंश]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 20:25, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:राजपासी]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 03:54, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Wikidata Infobox/i18n]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 07:20, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Wikidata Infobox/i18n/hi]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 07:21, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Wikidata Infobox/i18n/getMsg]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 07:21, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:कुनलावुट विटिडसर्न]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 08:25, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:दीनदयाल सोनी बाँदा]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 16:26, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:साश्वत कुमार (कराटे)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 01:30, 17 मई 2026 (UTC)
# [[:*नरेश दास वैष्णव निम्बार्क*]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 15:12, 17 मई 2026 (UTC)
# [[:सांचा:पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्री]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: स्वतःपरीक्षित सदस्य ने गलती से [[सांचा:पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्रियों की सूची]] बनाया जिसे सही साँचा [[साँचा:पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्री]] बना दिया है}; सदस्य {{user|1=आशीष भटनागर}} को सूचित किया गया 05:15, 19 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Acharya Shashi Pandey]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 00:28, 22 मई 2026 (UTC)
# [[:अमित राना]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 00:58, 22 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Babukumar123]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 01:50, 23 मई 2026 (UTC)
# [[:सांचा:पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्रियों की सूची]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: अनुप्रेषित पृष्ठ हटा दिया गया }; सदस्य {{user|1=आशीष भटनागर}} को सूचित किया गया 01:59, 23 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Pankaj Kerketta]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:14, 23 मई 2026 (UTC)
# [[:एक्सपर्ट टाइम्स]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 08:26, 25 मई 2026 (UTC)
# [[:डॉ रागिनी स्वर्णकार]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 08:29, 25 मई 2026 (UTC)
# [[:विकिपीडिया:अपलोड/अपना कार्य]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:24, 29 मई 2026 (UTC)
# [[:थाथानिन थोंगचाय]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 00:59, 30 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Flying Kick Martial Arts]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 01:07, 30 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Shobhit K Tripathi]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 17:10, 30 मई 2026 (UTC)
=== जून 2026 ===
# [[:सदस्य वार्ता:Saurav Vaishnaw]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:05, 9 जून 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Sahil Khan 98 cricketer]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 06:41, 10 जून 2026 (UTC)
# [[:रोनक चौधरी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:31, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:ईश्वर महान नहीं है]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 10:50, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:दिवाकर वर्मा]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 14:54, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:जॉन डन]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 14:55, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:विवेक राजनारायण तिवारी]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 15:40, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:विवेक राजनारायण तिवारी/प्रयोगपृष्ठ]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 15:55, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:622]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 01:02, 15 जून 2026 (UTC)
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=== जुलाई 2026 ===
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# [[:सदस्य वार्ता:मेघवाल महावीर बालाण]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 08:57, 11 जुलाई 2026 (UTC)
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# [[:सदस्य वार्ता:संजय सिंह पटेल गुणावद]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 09:06, 28 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Taxonomy/Montecincla]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 18:51, 29 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:विलियम स्तुकेले]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 19:05, 29 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:क्रांतिकारी पंडित तेजसिंह तिवारी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 20:32, 31 जुलाई 2026 (UTC)
=== अगस्त 2026 ===
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# [[:अरुण तोमर (रोहित)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:10, 21 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:AMAN KUMAR/AfdVote.js]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 08:10, 21 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:होकरसर]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 00:36, 23 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:असन बैराज]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 00:36, 23 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Sagarattitudestory]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 06:20, 23 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:बिल्होरोड-निस्त्रोवस्की क़िला]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 18:38, 23 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Yogesh Rawal yudi]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 01:37, 24 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:आशाराम सहू नकोदेसर]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 02:46, 24 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:चित्र:घोस्ट राइडर डीवीडी कवर.jpeg]] ([{{fullurl:Special:Log|page=%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:%E0%A4%98%E0%A5%8B%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%A1%E0%A4%B0_%E0%A4%A1%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A5%80%E0%A4%A1%E0%A5%80_%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%B0.jpeg}} log]): [[वि:शीह#फ़6|शीह फ़6]] ({{tl|db-badfiletype}}) 17:02, 24 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:चित्र:Kis Kisko Pyaar Karoon .jpg]] ([{{fullurl:Special:Log|page=%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:Kis_Kisko_Pyaar_Karoon_.jpg}} log]): [[वि:शीह#फ़6|शीह फ़6]] ({{tl|db-badfiletype}}) 17:03, 24 अगस्त 2026 (UTC)
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# [[:सदस्य वार्ता:UTTAR BHARTIY SAMAJ SEVA SANGH]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 18:32, 24 अगस्त 2026 (UTC)
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# [[:सदस्य वार्ता:Sarkari Samrat]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 00:54, 27 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:इन्फिनिटीबायोग्राफी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 19:48, 29 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:अल अकमर सैफी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:56, 30 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:रेहाना बेगम]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 15:48, 30 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:गाबापेंटिन]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 00:01, 31 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:मेथामफेटामाइन]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 00:02, 31 अगस्त 2026 (UTC)
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# [[:श्री संकटनाशनं गणेश स्तोत्र]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 07:18, 31 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:ट्रेसएक्स गार्ड]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 09:51, 31 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:ट्रेसएक्स लैब्स]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 09:52, 31 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:भूपत राम प्रजापत]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 09:58, 31 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:मधुरेंद्र कुमार]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 10:02, 31 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:राजपुरोहित पंडित अर्जुन प्रसाद शर्मा]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:50, 31 अगस्त 2026 (UTC)
=== सितम्बर 2026 ===
# [[:सदस्य वार्ता:डाॅ० त्रिशलानन्द सरस्वती]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:26, 1 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सिल्वरफिश]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 11:30, 1 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Onion URL]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 13:52, 1 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:AMAN KUMAR/Non-free image rationale]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 21:14, 1 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:किशन सिंह पाल]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 17:06, 2 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:श्रेणी:Protected project pages]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 10:59, 3 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:रतिराम दूत]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 07:19, 4 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:इल्ली गौल्डिंग]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 05:03, 6 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:AMAN KUMAR/Template:Non-free use rationale book cover]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 06:16, 6 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:अशोक हमराही]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 07:20, 6 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:शास्वत कुमार]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 11:24, 7 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:प्रारूप:कुलदीप चौधरी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 12:53, 8 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:वाइब (2026 फ़िल्म)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 15:52, 11 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:विकिपीडिया वार्ता:प्रमुख लेख/पुरालेख/२०१९]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 02:02, 12 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:जिसेल जुआरेज़]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 14:27, 12 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:धीरेंद्र कृष्री शास्री]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 16:39, 12 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:सदस्य:राहुल द्विवेदी 'स्मित']]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:15, 13 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:डॉ. अशोक कुमार मिश्र "क्षितिज"]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:19, 13 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:नागेश पांडेय संजय]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:28, 13 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:सदस्य वार्ता:Aneesh Sharma (Actor)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:03, 13 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:मेघनाथ सिंह खंगार]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:10, 14 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:विकियीदिया:नया लेच कैसे बनायें]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 09:30, 14 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Meva ram suthar barmer]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 12:24, 14 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:सदस्य:Ysarmy/खेल का मैदान]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 10:01, 15 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:सदस्य वार्ता:PUSHKAR DEY]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 09:01, 17 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:वार्ता:भुज और कोटि/पुरालेख 1]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 12:51, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Shivshant gautam]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 14:55, 17 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:एलेन ऑक्टेवियन ह्यूम]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 18:18, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:रोमन केथोलिक]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 18:18, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:हेलेन ख़ान]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 18:19, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:HHyderabad Ki Awaaz News Digital Media]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 00:47, 18 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Shivshant Rao Ambedkar]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 00:48, 18 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:इन्फ्लुएंसर बर्थडेज़ (Influencer Birthdays)]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 23:30, 18 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:प्रभा पंत]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 05:29, 20 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:फेमस पीपल यूएसए]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 07:13, 20 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:श्री टेढ़ेश्वर नाथ मंदिर]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 15:53, 20 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:नितिन श्रीवास्तव]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:49, 20 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सैंडबॉक्स]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 15:45, 21 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:सैंडबॉक्स]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 15:46, 21 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कोमल निषाद]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 15:52, 21 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:आत्मनैर्भर्य]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 15:53, 21 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:Bipin devdas]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 02:09, 22 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सुनील आंबेकर]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 03:01, 22 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:भाई भाई टायर एंड पार्ट्स (Bhai Bhai Tyre and Parts)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 09:02, 22 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:गेटी इमेजेज़]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 09:03, 22 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:तेजा समाज सेवा संघ (Tss Sangh]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 09:04, 22 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:बालन नदी]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 00:18, 23 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:हिन्दू धर्म और सनातन]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 07:10, 23 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:2017 CONCACAF गोल्ड कप]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 17:39, 23 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:Draft : मेहुल श्रीवास्तव]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 17:48, 23 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:अनीता प्रेम]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 18:05, 23 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:अनुवाद और साहित्य]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 18:19, 23 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Dr.shriprakash Baranwal l]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:45, 23 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Dr.shriprakash Baranwal l]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:45, 23 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Subhash Kisku]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 02:45, 24 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:अल्जीरिया का इतिहास]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: अल्जीरिया} 03:45, 24 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:अवकाश सिंह]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 03:47, 24 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:विकिपीडिया:लेख विज़ार्ड]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 08:54, 24 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Kuldeepch71/ कुलदीप चौधरी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:32, 24 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Er. NIRAJ KUMAR SAH]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 11:38, 24 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Er. NIRAJ KUMAR SAH]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 11:39, 24 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:अरशद खान(बाल साहित्यकार)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 01:58, 25 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:फैमिली फुल हाउस विथ रोहित शर्मा]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 07:48, 25 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:द कुलदीप बाबा]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 10:46, 25 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Govinda katariya]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 10:48, 25 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:अभिषेक पाण्डेय "रूपक"]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:18, 25 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:आलापुर]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 12:56, 25 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:फ़्रान्सीसी सांकेतिक भाषा]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 13:36, 25 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:निकारागुआई सांकेतिक भाषा]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 13:37, 25 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:उकु कोट]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 15:52, 25 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Abhivj48/प्रयोगपृष्ठ]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 16:25, 25 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:श्री दयानंद पांडेय]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 10:26, 26 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:ग्लॉक 17]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 13:03, 26 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:फेमस पब्लिक (Famous Public)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 17:01, 26 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:एन एस इंडिया]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 18:41, 26 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:चित्र:Pandit brijbihari mishra banarasi maharaj.jpg]] ([{{fullurl:Special:Log|page=%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:Pandit_brijbihari_mishra_banarasi_maharaj.jpg}} log]): [[वि:शीह#फ़2|शीह फ़2]] ({{tl|db-commons}}) 19:03, 26 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:गास्पेल]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख पर अनुप्रेषित } 19:10, 26 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:विवेक अत्रे]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख पर अनुप्रेषित } 19:10, 26 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Bsand-ep]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: यह अनुप्रेषित सदस्य विकि पर पंजीकृत nahin} 19:12, 26 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:चित्र:10 INR Obs 2017.jpg]] ([{{fullurl:Special:Log|page=%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:10_INR_Obs_2017.jpg}} log]): [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 08:33, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:एशिया में एयरलाइंस की सूची]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 09:58, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:एशियाई खेलों में भारत]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल ज्ञानसन्दूक उपस्थित } 10:03, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:एस्टोनिया के प्रधान मंत्री]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 14:08, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:ऐडवर्ड थॉर्नडाइक]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 14:21, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:ऐनी लिस्टर]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 14:25, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:ऐवलांश ब्रेकडाउन]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 14:30, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:ऑर्डोविशाई]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 14:48, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Actor Rohit Raj sharma]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 17:27, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:बेल्जियम महिला क्रिकेट टीम का ऑस्ट्रिया दौरा]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 19:27, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:ऑस्ट्रिया महिला क्रिकेट टीम का बेल्जियम दौरा]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 19:27, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:ओसमान सागर]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: पहले से मौजूद उचित लेख[[उस्मान सागर]]} 20:20, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कण्हपा]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[कन्नप्पा]]} 03:45, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कपड़ा रसायन]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 04:02, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कर्क संक्रान्ति]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[अयनांत]]} 04:39, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कल्पना सैनी]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[डॉ कल्पना सैनी]]} 06:16, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य का भूगोल]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य का इतिहास} 09:13, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:एम. डी. अण्डोला]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 10:52, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सैनिक क्षत्रिय]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 11:00, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:से ऑलवेज़ ट्रुथ]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:02, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:काली पुराण]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[कालिका पुराण]]} 11:59, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कासगंज (कांशीराम नगर) जिला]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[कासगंज ज़िला]]} 12:10, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:अक्षत तिवारी]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 12:49, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:राहुल सिन्हा (पत्रकार)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 21:36, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Maurya vanshi Ashish Kumar mourya]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 21:37, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कीनिया का भूगोल]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कीनिया#भूगोल} 23:29, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कीनिया का राजनीति]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कीनिया#सरकार और राजनीति} 23:31, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कीनिया की भाषाएँ]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कीनिया#भाषाएँ} 23:32, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:D. N. Verma - Barabanki]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 05:10, 29 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:आग्नेश सावाई]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 09:00, 29 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:आसुतोष कुमार उर्फ स्वामी आसुतोष मुनि जी]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 10:52, 29 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Hyderabad Ki Awaaz News/प्रयोगपृष्ठ]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:46, 30 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:राज विश्वकर्मा]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 09:25, 30 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Ms fouzia Fatima ceo]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 09:26, 30 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:विवेक मिश्र "नाहिल"/प्रयोगपृष्ठ]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 09:27, 30 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कुमारप्पा ग्राम स्वराज संस्थान]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 19:49, 30 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कुरु (बीमारी)]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[कुरु रोग]]} 19:55, 30 सितंबर 2026 (UTC)
=== अक्टूबर 2026 ===
# [[:परशुराम सेना]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 05:14, 1 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:मन्जु तोमर]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 05:17, 1 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:शहीद सआदत खां]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 05:19, 1 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वैशालीताई देशमुख]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 03:00, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Dilipsongra9]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 03:49, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:Draft:Birmi Patta]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 22:16, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:सीन 75]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 22:18, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:सपोटरा (कस्बा)]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 22:19, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:वोलोदिमिरिव्का (उत्खनन स्थल)]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 22:19, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:राव लुणकरण]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ मौजूद} 22:22, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:भैरुँलाल भारद्वाज]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 22:23, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:भारत की विलुप्तप्रायः प्रजातियाँ]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 22:23, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:बिल्होरोड-निस्त्रोवस्की किला]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ मौजूद} 22:24, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:नीदरलैंड के प्रांत]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 22:25, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:देवी कृष्णप्रिया]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 22:26, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
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# [[:विकिपीडिया वार्ता:स्वतंत्रता दिवस संपादनोत्सव/2026/मूल्यांकन]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 22:43, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:चित्र वार्ता:Khan aashib.jpg]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 22:50, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
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# [[:श्रेणी वार्ता:8237 ईसा पूर्व]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:19, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:प्रवेशद्वार वार्ता:संस्कृति/चयनित लेख]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:39, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:प्रवेशद्वार वार्ता:पृथ्वी]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:39, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:मोहम्मद रफत नेता जी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 12:07, 3 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:रावल समरसिंह]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है आज ही (05/10/2026)} 20:37, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:बालप्रसाद मेवाड]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है आज ही (05/10/2026)} 20:38, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:विविध तीर्थकल्प (जिनप्रभ सूरि)]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है आज ही (05/10/2026)} 20:39, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:कटासिन का युद्ध]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित लेख मौजूद [[कातासिन की लड़ाई]] और जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है} 20:45, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:तराइन का प्रथम युद्ध]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है (अपलोड दिनांक 03/10/2026)} 20:48, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:गोविंद राय]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है (अपलोड दिनांक 03/10/2026)} 20:49, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:शिहाबुद्दीन गोरी]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है (अपलोड दिनांक 03/10/2026)} 20:50, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:भैरोवाल की लड़ाई]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है (अपलोड दिनांक 30/09/2026)} 21:05, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:चपाती आंदोलन]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है (अपलोड दिनांक 28/09/2026)} 21:07, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:रूप सिंह राठौड़]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है (अपलोड दिनांक 28/09/2026)} 21:15, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:खजवा का युद्ध]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है (अपलोड दिनांक 23/09/2026)} 21:22, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:राती घाटी का युद्ध]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 21:25, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:नकटी रानी कर्णावती]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 21:28, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:काल की सापेक्षता]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 22:03, 5 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:राजा ककुद्मी]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 22:04, 5 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:राजा हरिश्चन्द्र (फ़िल्म)]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 02:01, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:विकिपीडिया:इस सप्ताह का सुधार हेतु लेख/2026/41]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 12:53, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:कूफा]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[कूफ़ा]]} 13:08, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:राजेश मिश्र]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 15:47, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:केटीएम 200 ड्यूक]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 17:00, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:कैथॅलिक चर्च]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कैथोलिक गिरजाघर} 17:22, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:कैमरून का भूगोल]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कैमरुन} 17:27, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:कैमरून का इतिहास]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कैमरुन} 17:27, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:राजा दलपत शाह उज्जैनिया]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 21:30, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:भोजपुर का इतिहास]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 21:33, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय} 22:30, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:क्वार्कसिटी]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उल्लेखनीयता संदिग्ध और विश्वसनीय स्रोतों का अभाव} 14:02, 7 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सहायता:Help page footer templates]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 14:48, 7 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:खमन ढोकला]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: ढोकला} 16:05, 7 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:गाम्बिया का इतिहास]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: गाम्बिया} 16:58, 7 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:क्रांतिकारी पंडित तेजसिंह तिवारी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 00:45, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:ग्लॉक 17]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए अथवा अनुपस्थित पृष्ठ का वार्ता पृष्ठ।} 00:51, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:गाम्बिया की राजनीति]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: गाम्बिया} 01:06, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:गुरू अमरदास]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[गुरु अमर दास]]} 01:27, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:आकाश नंदा]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 10:27, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:जीएस पंवार]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 10:33, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:गोलाकाबास]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 10:47, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:ग्रामीण विकास राज्यमंत्री, भारत सरकार]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[ग्रामीण विकास मंत्रालय]]} 11:05, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:ग्रीनलैंड का इतिहास]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: ग्रीनलैण्ड} 11:06, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:घाना का इतिहास]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: घाना} 11:28, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:चार्टर एक्ट, 1833 (Saint Helena Act 1833 / Charter Act of 1833]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[भारत सरकार अधिनियम 1833]]} 13:02, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:चार्टर एक्ट, 1853 (Charter Act of 1853)]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[भारत सरकार अधिनियम 1833]]} 13:02, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:राजा दलपत शाह उज्जैनिया]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 15:38, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:आलोक कुमार]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 04:20, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:गोत्र कौशिक]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 10:50, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:गोत्र कश्यप]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 10:50, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सकरवार]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 10:54, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:थाकुर हनुमान जी राजपुरोहित (सबलपुर)]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 12:00, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:थाकुर हनुमान जी राजपुरोहित (सबलपुर)]]: [[वि:शीह#व3|शीह व3]] ({{tl|db-vandalism}}) 12:01, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:जबाला]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: मूल शोध} 16:19, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:जर्मनसोसाइटीफॉरस्टेमसेलरिसेर्च]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 16:30, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:जवान(फिल्म)]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 19:30, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:गोरडा (राजस्थान)]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 09:11, 10 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:ज़ोहर]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 09:16, 10 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:जाबर महादेव]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 09:20, 10 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:जामखेड तहसील]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 09:22, 10 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:जिंदल स्टील]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[जिन्दल स्टील एण्ड पॉवर लिमिटेड]]} 09:31, 10 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:जेसन केनी]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 10:39, 10 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:नवज्योत सिंह ठाकुर]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 00:33, 11 अक्टूबर 2026 (UTC)
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# [[:जैव शोधक]]: [[वि:शीह#व1|शीह व1]] ({{tl|db-nonsense}}) 02:50, 11 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:चित्र:Hindu Darshan.png]] ([{{fullurl:Special:Log|page=%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0:Hindu_Darshan.png}} log]): [[वि:शीह#फ़1|शीह फ़1]] ({{tl|db-license}}) 11:51, 11 अक्टूबर 2026 (UTC)
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# [[:प्रारूप:Sudhanshu Krishn Rai]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 09:52, 12 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:जॉइन मी डिजिटल मीडिया]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 17:55, 12 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:डाॅ अँकुर त्रिशलानन्द सरस्वती]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 01:27, 13 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:प्रवीण कम्बोज भारतीय]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:37, 13 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:Sudhanshu Krishn Rai]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 05:09, 14 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Syed Taneesh Ahmad]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 10:00, 15 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सुनील कुमार (कबड्डी)]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 15:48, 15 अक्टूबर 2026 (UTC)
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# [[:बाबुषा कोहली]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 00:44, 16 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:थानियारासु]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 04:48, 16 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:टॉमस यंग]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[थॉमस यंग]]} 08:02, 16 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:नदीम कुरैशी]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 09:21, 16 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Dr shobha Bhardwaj]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 01:25, 18 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Dr. Ankur Bharti]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 03:24, 18 अक्टूबर 2026 (UTC)
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2026-10-18T03:25:21Z
विक्रम प्रताप
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शीह नामांकन का लॉग बनाया जा रहा of [[:सदस्य वार्ता:Dr. Ankur Bharti]].
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=== मार्च 2026 ===
# [[:चिरंजीवी सरजा]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 20:50, 18 मार्च 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Fper]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 13:51, 19 मार्च 2026 (UTC)
# [[:दिवाण जवाहर सिंह]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 10:52, 20 मार्च 2026 (UTC)
=== अप्रैल 2026 ===
# [[:द्वितीयक रंग]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 17:09, 2 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Harendra jakhar nagour]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 17:23, 2 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सहायता:Protection]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 17:30, 2 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:कंपनी हवलदार मेजर]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 22:57, 5 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:विक्रम सिंह मीना]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 01:25, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:रविन्द्र कुमार द्विवेदी]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 08:06, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:डिबेटसिলেটবিডি]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ नहीं}; सदस्य {{user|1=Spacebangla}} को सूचित किया गया 13:30, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:देओला दादा]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:07, 9 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सहायता:IPA/Hindi and Urdu]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 04:09, 9 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:रोहित गिल]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 18:00, 10 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Bjp Junaid Hussain]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:48, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Bjp Junaid Hussain]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:48, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:कुश सोगुण]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 14:06, 12 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Govind Bhana Artist]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 14:38, 12 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Chandan roy Bhirha]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 03:42, 13 अप्रैल 2026 (UTC)
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# [[:सदस्य वार्ता:Nawada District President of Youth Congress is Mohammad Irshad Ansari]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:14, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:ऑस्ट्रेलिया के लिए CDR]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:44, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
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# [[:सदस्य वार्ता:Ajaysingh Mer Rajput]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:19, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Harendra jakhar nagour]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 01:22, 18 अप्रैल 2026 (UTC)
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# [[:सदस्य:Harendra jakhar degana]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 22:56, 18 अप्रैल 2026 (UTC)
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# [[:जय भीम नव जागृति संस्थान उटाम्बर]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 14:13, 19 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:अशुतोष यादव]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 18:50, 19 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:डॉ. भावना सावलिया]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 18:52, 19 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:महकाल अवतार]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 19:14, 19 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Ayushguptha]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 03:01, 20 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:जियोक्स एआई]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 06:27, 20 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:श्रवण राम पंवार]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:11, 20 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Shrawanrampanwar]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 13:12, 20 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:श्रवण राम मेघवाल]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 00:13, 21 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Parvat Singh Buddha]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 03:14, 22 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:पुष्कर कांडपाल (गायक)]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 08:57, 22 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Harendra jakhar degana]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:29, 22 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:आदर्श कुमार राजपूत]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 17:29, 22 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:विनोद वर्मा (आभूषण वर्ल्ड)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 15:10, 23 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Parvat Singh Buddha]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 15:12, 23 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:प्रवेशद्वार:न्यूरोविज्ञान]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 23:06, 23 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:Anu tomar]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: शीर्षक अन्य भाषा में है}; सदस्य {{user|1=Advocate vinit tyagi}} को सूचित किया गया 03:46, 24 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:द ट्रेंडिंग पीपल]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 03:51, 24 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:के राघवन रेड्डी]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 11:55, 24 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:GKM Gautam Kumar Maurya]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 11:36, 25 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:बिहार और सूफ़ीवाद]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 19:35, 25 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:Banka, बिहार]]: [[वि:शीह#व1|शीह व1]] ({{tl|db-nonsense}}) 19:52, 25 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:महरूज़ सिद्दीकी नदीम (फुटबॉलर)]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 20:26, 25 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:श्रेणी:Wikipedia help forums]]: [[वि:शीह#व1|शीह व1]] ({{tl|db-nonsense}}) 20:35, 25 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:GSU Magar Tagar]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:53, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:श्रेणी:हिन्दी उपन्यास-रामनाथ शिवेंद्र का उपन्यास "दूसरी आज़ादी "]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:55, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:आदर्श राजपूत]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 05:00, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:प्रावधान]]: [[वि:शीह#व1|शीह व1]] ({{tl|db-nonsense}}) 05:07, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:GSU Magar Tagar]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 10:24, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:दिनेश शाहरा]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 10:27, 26 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:दीनदयाल सोनी]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 13:54, 28 अप्रैल 2026 (UTC)
=== मई 2026 ===
# [[:Draft:ओलीवर बा़ख]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 09:42, 7 मई 2026 (UTC)
# [[:बिहार और सूफ़ीवाद]]: multiple criteria ([[वि:शीह#ल2|ल2]], [[वि:शीह#व7|व7]]); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 17:19, 7 मई 2026 (UTC)
# [[:नालया थीरपू]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 08:01, 8 मई 2026 (UTC)
# [[:Draft:ओलीवर बा़ख]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 16:05, 8 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:PoetNikhilNeeraj]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:13, 9 मई 2026 (UTC)
# [[:पूस की रात]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 15:20, 9 मई 2026 (UTC)
# [[:Ragul Kamaraj Reddy(राघुल कामराज रेड्डी)]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 01:44, 10 मई 2026 (UTC)
# [[:सिरे की शादेन (मुहावरा)]]: [[वि:शीह#व3|शीह व3]] ({{tl|db-vandalism}}) 01:53, 10 मई 2026 (UTC)
# [[:राष्ट्रीय दादा दादी दिवस]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 11:42, 10 मई 2026 (UTC)
# [[:केशव गुप्ता]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 17:30, 13 मई 2026 (UTC)
# [[:स्टोरिको सेरामिका एलएलपी]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 11:12, 14 मई 2026 (UTC)
# [[:दीनदयाल सोनी]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 23:28, 14 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Vishalguptahyv]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:04, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:दीनदयाल सोनी बाँदा]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 12:11, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:केशव गुप्ता]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 13:32, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:अपाचे]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 18:38, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:पूवे उनक्कागा]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 19:36, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:सफाविद वंश]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 20:25, 15 मई 2026 (UTC)
# [[:राजपासी]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 03:54, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Wikidata Infobox/i18n]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 07:20, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Wikidata Infobox/i18n/hi]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 07:21, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Wikidata Infobox/i18n/getMsg]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 07:21, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:कुनलावुट विटिडसर्न]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 08:25, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:दीनदयाल सोनी बाँदा]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 16:26, 16 मई 2026 (UTC)
# [[:साश्वत कुमार (कराटे)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 01:30, 17 मई 2026 (UTC)
# [[:*नरेश दास वैष्णव निम्बार्क*]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 15:12, 17 मई 2026 (UTC)
# [[:सांचा:पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्री]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: स्वतःपरीक्षित सदस्य ने गलती से [[सांचा:पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्रियों की सूची]] बनाया जिसे सही साँचा [[साँचा:पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्री]] बना दिया है}; सदस्य {{user|1=आशीष भटनागर}} को सूचित किया गया 05:15, 19 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Acharya Shashi Pandey]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 00:28, 22 मई 2026 (UTC)
# [[:अमित राना]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 00:58, 22 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Babukumar123]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 01:50, 23 मई 2026 (UTC)
# [[:सांचा:पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्रियों की सूची]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: अनुप्रेषित पृष्ठ हटा दिया गया }; सदस्य {{user|1=आशीष भटनागर}} को सूचित किया गया 01:59, 23 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Pankaj Kerketta]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:14, 23 मई 2026 (UTC)
# [[:एक्सपर्ट टाइम्स]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 08:26, 25 मई 2026 (UTC)
# [[:डॉ रागिनी स्वर्णकार]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 08:29, 25 मई 2026 (UTC)
# [[:विकिपीडिया:अपलोड/अपना कार्य]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:24, 29 मई 2026 (UTC)
# [[:थाथानिन थोंगचाय]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 00:59, 30 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Flying Kick Martial Arts]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 01:07, 30 मई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Shobhit K Tripathi]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 17:10, 30 मई 2026 (UTC)
=== जून 2026 ===
# [[:सदस्य वार्ता:Saurav Vaishnaw]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:05, 9 जून 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Sahil Khan 98 cricketer]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 06:41, 10 जून 2026 (UTC)
# [[:रोनक चौधरी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:31, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:ईश्वर महान नहीं है]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 10:50, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:दिवाकर वर्मा]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 14:54, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:जॉन डन]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 14:55, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:विवेक राजनारायण तिवारी]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 15:40, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:विवेक राजनारायण तिवारी/प्रयोगपृष्ठ]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 15:55, 12 जून 2026 (UTC)
# [[:622]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 01:02, 15 जून 2026 (UTC)
# [[:623]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 01:02, 15 जून 2026 (UTC)
# [[:625]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 01:03, 15 जून 2026 (UTC)
# [[:मॉड्यूल:Autotranslate]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 15:57, 18 जून 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Depicted flag]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 15:58, 18 जून 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:GSU Magar Tagar]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 02:40, 23 जून 2026 (UTC)
# [[:बनत]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 03:19, 27 जून 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:~2026-36929-46]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 03:21, 27 जून 2026 (UTC)
# [[:सूर्य का शहर]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 17:18, 27 जून 2026 (UTC)
# [[:अतिशयोक्ति (रोग)]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 00:03, 28 जून 2026 (UTC)
=== जुलाई 2026 ===
# [[:बच्चों के लिए फाउंडेशन]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 04:17, 1 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:फफूँद, औरैया]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 07:03, 2 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Sahil khan 98 crickett]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 07:04, 2 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:मोहम्मद असद मंसूरी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:11, 2 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:ग़ज़ा प्रशासन राष्ट्रीय समिति]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 09:26, 3 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:लोधा राजपूत]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 12:37, 3 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:लोद्रवा गढ़]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 12:37, 3 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:वहीद उद्दीन हैदर जाफ़री]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उल्लेखनीय नहीं}; सदस्य {{user|1=AhsanBangla}} को सूचित किया गया 13:02, 3 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Shri Chand Mahan]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:57, 5 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:बिंदु-चित्रण]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 04:59, 5 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:मोहम्मद असद मंसूरी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 05:02, 5 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:आशीष गाज़ीपुरी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 07:05, 5 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Jawwad Khan Suri]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:18, 7 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Sahil khan 98 crickett]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:41, 8 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:चित्र वार्ता:Baby malinga 98.jpg]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:42, 8 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Aakash rampura]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 13:36, 8 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Suman Rajvardhan]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:37, 8 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सामुदायिक विकास]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: विश्वसनीय स्रोत नहीं}; सदस्य {{user|1=Rsparsar}} को सूचित किया गया 04:24, 9 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:लोधा राजपूत]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 04:24, 9 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:लोद्रवा गढ़]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 04:25, 9 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:कैंसरराउंड्स (CancerRounds)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:49, 10 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:मेघवाल महावीर बालाण]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 08:57, 11 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:ठक्करबापा छात्रावास]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 02:53, 13 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Vikram singh meena]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 07:16, 19 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:गोविंद मोहन]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 10:56, 20 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Raje sagar]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 02:03, 24 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Dr.Devendra Baghel]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 13:00, 26 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:PRIT LAL KURRE]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:02, 28 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:संजय सिंह पटेल गुणावद]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 09:06, 28 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Taxonomy/Montecincla]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 18:51, 29 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:विलियम स्तुकेले]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 19:05, 29 जुलाई 2026 (UTC)
# [[:क्रांतिकारी पंडित तेजसिंह तिवारी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 20:32, 31 जुलाई 2026 (UTC)
=== अगस्त 2026 ===
# [[:सदस्य:Adarsh Rajput Ji]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 05:12, 2 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:अजंता की गुफाएं]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: अजंता गुफाएँ} 05:16, 2 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:बरगी विक्रम रेड्डी]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 05:19, 2 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Adarsh Rajput Ji]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:40, 2 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:Chrispapas vs the Lore क्रिसपापास]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 15:37, 2 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:जुआन ब्रांको]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 11:37, 3 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:महंत बक्शीराम जी महाराज]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 11:43, 3 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:डायलावेक]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:24, 4 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:इंडियाबुल्स]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 13:48, 6 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:रेड्फू]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 13:50, 6 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Actor Prithvi Pandey/प्रयोगपृष्ठ]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 13:51, 6 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:इनफिनिटीफ्री]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 15:08, 6 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:AimNxtGenAI]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:47, 7 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:कवि प्रमोद मिश्रा]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 00:24, 8 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:सखवार राजपूत]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: अनुपस्थित पृष्ठ का वार्ता पृष्ठ।} 06:21, 8 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Rajkunwar maurya]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 05:18, 9 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (detailed)]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद} 13:59, 9 अगस्त 2026 (UTC)
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# [[:मधुरेंद्र कुमार]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 10:02, 31 अगस्त 2026 (UTC)
# [[:राजपुरोहित पंडित अर्जुन प्रसाद शर्मा]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:50, 31 अगस्त 2026 (UTC)
=== सितम्बर 2026 ===
# [[:सदस्य वार्ता:डाॅ० त्रिशलानन्द सरस्वती]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:26, 1 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:स्काई ब्री]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 07:18, 4 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:रतिराम दूत]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 07:19, 4 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:रघुवर दयाल श्रीवास्तव]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:05, 4 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:केशव मिश्र]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 00:57, 6 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:इल्ली गौल्डिंग]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 05:03, 6 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:अशोक हमराही]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 07:20, 6 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:शास्वत कुमार]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 11:24, 7 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:विकिपीडिया वार्ता:प्रमुख लेख/पुरालेख/२०१९]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 02:02, 12 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:धीरेंद्र कृष्री शास्री]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 16:39, 12 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:सदस्य:राहुल द्विवेदी 'स्मित']]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:15, 13 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:साहित्य रागिनी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 06:10, 13 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:कृत्रिम सामान्य बुद्धिमत्ता]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 08:45, 13 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:डॉ. अशोक कुमार मिश्र "क्षितिज"]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:19, 13 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:नागेश पांडेय संजय]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 13:28, 13 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:सदस्य वार्ता:Meva ram suthar barmer]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 12:24, 14 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:ब्रिक्ऋस]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 18:31, 14 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:केवल कुमार (संगीतकार)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 12:36, 15 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:राय वंश]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 10:43, 16 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:लेजेंड बर्थडेज (Legend Birthdays)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 10:54, 16 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:सदस्य:PUSHKAR DEY]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 09:00, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:PUSHKAR DEY]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 09:01, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:संपादनबॉक्स]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 09:02, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:भुज और कोटि/पुरालेख 1]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 12:51, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Shivshant gautam]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 14:55, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:साश्वत कुमार]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 18:07, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:यूरोप की परिषद]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 18:17, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:एलेन ऑक्टेवियन ह्यूम]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 18:18, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:रोमन केथोलिक]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 18:18, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:हेलेन ख़ान]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 18:19, 17 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:HHyderabad Ki Awaaz News Digital Media]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 00:47, 18 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Shivshant Rao Ambedkar]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 00:48, 18 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:इन्फ्लुएंसर बर्थडेज़ (Influencer Birthdays)]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 23:30, 18 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Kavita Anuragi]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 07:25, 19 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:सदस्य:Mohit.avasya.rajput]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 13:32, 19 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:प्रभा पंत]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 05:29, 20 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:फेमस पीपल यूएसए]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 07:13, 20 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:श्री टेढ़ेश्वर नाथ मंदिर]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 15:53, 20 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:कोमल निषाद]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 15:52, 21 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:आत्मनैर्भर्य]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 15:53, 21 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:भाई भाई टायर एंड पार्ट्स (Bhai Bhai Tyre and Parts)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 09:02, 22 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:बालन नदी]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 00:18, 23 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:अनीता प्रेम]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 18:05, 23 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:अनुवाद और साहित्य]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 18:19, 23 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Dr.shriprakash Baranwal l]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:45, 23 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:अवकाश सिंह]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 03:47, 24 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:विकिपीडिया:लेख विज़ार्ड]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 08:54, 24 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Kuldeepch71/ कुलदीप चौधरी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:32, 24 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Er. NIRAJ KUMAR SAH]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 11:38, 24 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Er. NIRAJ KUMAR SAH]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 11:39, 24 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:अरशद खान(बाल साहित्यकार)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 01:58, 25 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:फैमिली फुल हाउस विथ रोहित शर्मा]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 07:48, 25 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:अभिषेक पाण्डेय "रूपक"]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:18, 25 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:फ़्रान्सीसी सांकेतिक भाषा]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 13:36, 25 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:उकु कोट]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 15:52, 25 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Abhivj48/प्रयोगपृष्ठ]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 16:25, 25 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:ग्लॉक 17]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 13:03, 26 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:फेमस पब्लिक (Famous Public)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 17:01, 26 सितंबर 2026 (UTC)
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# [[:ऐडवर्ड थॉर्नडाइक]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 14:21, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:ऐनी लिस्टर]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 14:25, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:ऐवलांश ब्रेकडाउन]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 14:30, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:ऑर्डोविशाई]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 14:48, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Actor Rohit Raj sharma]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 17:27, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:बेल्जियम महिला क्रिकेट टीम का ऑस्ट्रिया दौरा]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 19:27, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:ऑस्ट्रिया महिला क्रिकेट टीम का बेल्जियम दौरा]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 19:27, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:ओसमान सागर]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: पहले से मौजूद उचित लेख[[उस्मान सागर]]} 20:20, 27 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कण्हपा]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[कन्नप्पा]]} 03:45, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कपड़ा रसायन]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 04:02, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कर्क संक्रान्ति]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[अयनांत]]} 04:39, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कल्पना सैनी]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[डॉ कल्पना सैनी]]} 06:16, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य का भूगोल]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य का इतिहास} 09:13, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:एम. डी. अण्डोला]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 10:52, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सैनिक क्षत्रिय]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 11:00, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:से ऑलवेज़ ट्रुथ]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 11:02, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:काली पुराण]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[कालिका पुराण]]} 11:59, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कासगंज (कांशीराम नगर) जिला]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[कासगंज ज़िला]]} 12:10, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:अक्षत तिवारी]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 12:49, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:राहुल सिन्हा (पत्रकार)]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 21:36, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Maurya vanshi Ashish Kumar mourya]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 21:37, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कीनिया का भूगोल]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कीनिया#भूगोल} 23:29, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कीनिया का राजनीति]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कीनिया#सरकार और राजनीति} 23:31, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कीनिया की भाषाएँ]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कीनिया#भाषाएँ} 23:32, 28 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:D. N. Verma - Barabanki]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 05:10, 29 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:आग्नेश सावाई]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 09:00, 29 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:आसुतोष कुमार उर्फ स्वामी आसुतोष मुनि जी]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 10:52, 29 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Hyderabad Ki Awaaz News/प्रयोगपृष्ठ]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:46, 30 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:राज विश्वकर्मा]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 09:25, 30 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Ms fouzia Fatima ceo]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 09:26, 30 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:विवेक मिश्र "नाहिल"/प्रयोगपृष्ठ]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 09:27, 30 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कुमारप्पा ग्राम स्वराज संस्थान]]: [[वि:शीह#ल1|शीह ल1]] ({{tl|db-foreign}}) 19:49, 30 सितंबर 2026 (UTC)
# [[:कुरु (बीमारी)]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[कुरु रोग]]} 19:55, 30 सितंबर 2026 (UTC)
=== अक्टूबर 2026 ===
# [[:परशुराम सेना]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 05:14, 1 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:मन्जु तोमर]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 05:17, 1 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:शहीद सआदत खां]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 05:19, 1 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वैशालीताई देशमुख]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 03:00, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Dilipsongra9]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 03:49, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:Draft:Birmi Patta]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 22:16, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:सीन 75]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 22:18, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:सपोटरा (कस्बा)]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 22:19, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:वोलोदिमिरिव्का (उत्खनन स्थल)]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 22:19, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:राव लुणकरण]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ मौजूद} 22:22, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:भैरुँलाल भारद्वाज]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 22:23, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:भारत की विलुप्तप्रायः प्रजातियाँ]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 22:23, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:बिल्होरोड-निस्त्रोवस्की किला]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ मौजूद} 22:24, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:नीदरलैंड के प्रांत]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 22:25, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:देवी कृष्णप्रिया]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 22:26, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:डायटोमाइट]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल ज्ञानसन्दूक उपस्थित } 22:26, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:जनकल्याणकारी दिवस]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल ज्ञानसन्दूक उपस्थित } 22:27, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:चुफुत-काले]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 22:28, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:काला चना घूमनी]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 22:32, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:कार्तिक राजपूत]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 22:33, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:कमलानंद झा]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 22:34, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:एस्की-केरमेन]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 22:34, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:Manarajganj estate]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 22:35, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:विकिपीडिया वार्ता:विकिपरियोजना संगीत/वार्ता]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 22:40, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:विकिपीडिया वार्ता:सहायता डेस्क]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए लेख का वार्ता पृष्ठ} 22:41, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:विकिपीडिया वार्ता:स्वतंत्रता दिवस संपादनोत्सव/2026]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 22:42, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:विकिपीडिया वार्ता:स्वतंत्रता दिवस संपादनोत्सव/2026/मूल्यांकन]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 22:43, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:चित्र वार्ता:Khan aashib.jpg]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 22:50, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:चित्र वार्ता:Devkinandan Thakur Ji.png]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 22:55, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:चित्र वार्ता:ANIL SUKHWAL.jpg]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 22:58, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:चित्र वार्ता:Pawar Rajput.jpg]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:02, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:मीडियाविकि वार्ता:Already bureaucrat]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:05, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:मीडियाविकि वार्ता:Already sysop]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:06, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:मीडियाविकि वार्ता:Cite article link]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:06, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:मीडियाविकि वार्ता:Copyright]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:07, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
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# [[:मीडियाविकि वार्ता:Geshi.css]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:08, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:मीडियाविकि वार्ता:Nologinlink]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:10, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:मीडियाविकि वार्ता:Rules.js]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:11, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:मीडियाविकि वार्ता:Sitesupportpage]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:11, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:मीडियाविकि वार्ता:Spheading]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:12, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
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# [[:मीडियाविकि वार्ता:Villagepump]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:13, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:मीडियाविकि वार्ता:Wikimedia-copyright]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:14, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:साँचा वार्ता:World Cinema]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:14, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:साँचा वार्ता:प्रमुख चित्र जनवरी २०२५]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:15, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सहायता वार्ता:नया लेख]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:17, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:श्रेणी वार्ता:8237 ईसा पूर्व]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:19, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:प्रवेशद्वार वार्ता:संस्कृति/चयनित लेख]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:39, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:प्रवेशद्वार वार्ता:पृथ्वी]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल वार्ता पृष्ठ उपस्थित } 23:39, 2 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:मोहम्मद रफत नेता जी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 12:07, 3 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:रावल समरसिंह]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है आज ही (05/10/2026)} 20:37, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:बालप्रसाद मेवाड]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है आज ही (05/10/2026)} 20:38, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:विविध तीर्थकल्प (जिनप्रभ सूरि)]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है आज ही (05/10/2026)} 20:39, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:कटासिन का युद्ध]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित लेख मौजूद [[कातासिन की लड़ाई]] और जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है} 20:45, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:तराइन का प्रथम युद्ध]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है (अपलोड दिनांक 03/10/2026)} 20:48, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:गोविंद राय]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है (अपलोड दिनांक 03/10/2026)} 20:49, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:शिहाबुद्दीन गोरी]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है (अपलोड दिनांक 03/10/2026)} 20:50, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:भैरोवाल की लड़ाई]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है (अपलोड दिनांक 30/09/2026)} 21:05, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:चपाती आंदोलन]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है (अपलोड दिनांक 28/09/2026)} 21:07, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:रूप सिंह राठौड़]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है (अपलोड दिनांक 28/09/2026)} 21:15, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:खजवा का युद्ध]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: जो सन्दर्भ दिया गया है उसे लेखक ने स्वयं ही अपलोड किया है (अपलोड दिनांक 23/09/2026)} 21:22, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:राती घाटी का युद्ध]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 21:25, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:नकटी रानी कर्णावती]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 21:28, 4 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:काल की सापेक्षता]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 22:03, 5 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:राजा ककुद्मी]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 22:04, 5 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:राजा हरिश्चन्द्र (फ़िल्म)]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 02:01, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:विकिपीडिया:इस सप्ताह का सुधार हेतु लेख/2026/41]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 12:53, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:कूफा]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[कूफ़ा]]} 13:08, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:राजेश मिश्र]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 15:47, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:केटीएम 200 ड्यूक]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 17:00, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:कैथॅलिक चर्च]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कैथोलिक गिरजाघर} 17:22, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:कैमरून का भूगोल]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कैमरुन} 17:27, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:कैमरून का इतिहास]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कैमरुन} 17:27, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:राजा दलपत शाह उज्जैनिया]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 21:30, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:भोजपुर का इतिहास]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 21:33, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय} 22:30, 6 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:क्वार्कसिटी]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उल्लेखनीयता संदिग्ध और विश्वसनीय स्रोतों का अभाव} 14:02, 7 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सहायता:Help page footer templates]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 14:48, 7 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:खमन ढोकला]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: ढोकला} 16:05, 7 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:गाम्बिया का इतिहास]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: गाम्बिया} 16:58, 7 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:क्रांतिकारी पंडित तेजसिंह तिवारी]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 00:45, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:ग्लॉक 17]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: हटाए गए अथवा अनुपस्थित पृष्ठ का वार्ता पृष्ठ।} 00:51, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:गाम्बिया की राजनीति]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: गाम्बिया} 01:06, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:गुरू अमरदास]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[गुरु अमर दास]]} 01:27, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:आकाश नंदा]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 10:27, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:जीएस पंवार]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 10:33, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:गोलाकाबास]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 10:47, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:ग्रामीण विकास राज्यमंत्री, भारत सरकार]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[ग्रामीण विकास मंत्रालय]]} 11:05, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:ग्रीनलैंड का इतिहास]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: ग्रीनलैण्ड} 11:06, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:घाना का इतिहास]]: [[वि:शीह#ल4|शीह ल4]] ({{tl|db-duplicate}}); अन्य अतिरिक्त जानकारी: {ल4 1: घाना} 11:28, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:चार्टर एक्ट, 1833 (Saint Helena Act 1833 / Charter Act of 1833]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[भारत सरकार अधिनियम 1833]]} 13:02, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:चार्टर एक्ट, 1853 (Charter Act of 1853)]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[भारत सरकार अधिनियम 1833]]} 13:02, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:राजा दलपत शाह उज्जैनिया]]: [[वि:शीह#व4|शीह व4]] ({{tl|db-hoax}}) 15:38, 8 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:आलोक कुमार]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 04:20, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:गोत्र कौशिक]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 10:50, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:गोत्र कश्यप]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 10:50, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
# [[:सकरवार]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 10:54, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
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# [[:जर्मनसोसाइटीफॉरस्टेमसेलरिसेर्च]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 16:30, 9 अक्टूबर 2026 (UTC)
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# [[:ज़ोहर]]: [[वि:शीह#ल5|शीह ल5]] ({{tl|db-badtrans}}) 09:16, 10 अक्टूबर 2026 (UTC)
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# [[:जिंदल स्टील]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ मौजूद [[जिन्दल स्टील एण्ड पॉवर लिमिटेड]]} 09:31, 10 अक्टूबर 2026 (UTC)
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तहज़ीब-उल-इख़लाक़
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{{Aligarh Movement}}
'''''तहज़ीब-उल-इख़लाक़''''' ({{Langx|ur|تہذیب الاخلاق}}) 1871 में मुस्लिम सुधारक [[सैयद अहमद खान|सर सैयद अहमद खान]] द्वारा स्थापित एक [[पत्रिका]] है। इस पत्रिका ने सरल भाषा में वैकल्पिक [[मुस्लिम]] दृष्टिकोण प्रकाशित किए। इसने प्रकाशक के धार्मिक, सामाजिक और सुधारवादी विचारों को आवाज़ दी, और उन्हें उर्दू कथा साहित्य के जनकों में से एक के रूप में स्थापित करने का श्रेय दिया जाता है। इसका प्रकाशन 1961 में बाधित हो गया था लेकिन 1981 में [[सैयद हामिद]] (अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति) द्वारा इसे फिर से शुरू किया गया। तब से यह नियमित रूप से प्रकाशित हो रही है। अब ''तहज़ीब-उल-इख़लाक़'' का एक अलग कार्यालय है।<ref>{{Cite web|url=https://quranwahadith.com/product/tehzeeb-ul-akhlaq/|title=Tehzeeb ul Akhlaq Magazine, AMU Magazine, تہذیب الاخلاق رسالہ|access-date=26 मार्च 2026|archive-date=17 अगस्त 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20250817053550/https://quranwahadith.com/product/tehzeeb-ul-akhlaq/|url-status=dead}}</ref>
सर सैयद अहमद खान हिन्दू मुस्लिम एकता की हिमायत करते थे उनका मानना था कि भारत में लोग अशिक्षित बहुत तादाद में हैं इनको पढाया जाना बहुत जरूरी है इसलिए उन्होंने यूनीवर्सिटी बनाने की मुहिम शुरू की और सरकारी जज की नौकरी से इस्तीफा दे दिया, उस समय वह बिजनौर जिला में जज थे I
== इतिहास ==
अप्रैल 1869 में लंदन में, सैयद अहमद खान का सामना सामाजिक सुधार की दो पत्रिकाओं, [[द स्पेक्टेटर|स्पेक्टेटर]] और [[टैटलर]] से हुआ। इन दो पत्रिकाओं ने सर सैयद को भारत के मुसलमानों के सुधार के लिए एक पत्रिका शुरू करने के लिए प्रेरित किया। अपने करीबी दोस्त [[मोहसिन-उल-मुल्क]] को लिखे एक पत्र में, उन्होंने भारत के मुसलमानों के सामाजिक सुधार के लिए एक पत्रिका 'तहज़ीब-उल-इख़लाक़' के विचार पर चर्चा की। वे लगभग 19 महीने की अनुपस्थिति के बाद अक्टूबर 1870 में बनारस लौटे। 24 दिसंबर को सर सैयद ने तहज़ीब-उल-इख़लाक़ लॉन्च की। इसका नाम तुर्किस्तान के दार्शनिक हकीम अबू अली मस्का की एक पुस्तक के नाम पर रखा गया था।<ref name="Education and Politics">{{Cite book |last=Muhammad |first=Shan |url=https://books.google.com/books?id=Q7BCcgC0kvsC&q=united+patriotic+association+sir+syed&pg=PA44 |title=Education and Politics: From Sir Syed to the Present Day : the Aligarh School |date=2002 |publisher=APH Publishing|isbn=978-81-7648-275-2}}</ref>{{rp|22}} इसे भारत के मुसलमानों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन साथ ही इसे अपने शुभचिंतक भी मिले। नवाब मोहसिन-उल-मुल्क, [[चिराग अली|मौलवी मुहम्मद चिराग अली खान]], मौलवी मुश्ताक हुसैन, [[अल्ताफ हुसैन हाली|मौलाना अल्ताफ हुसैन हाली]], [[ज़काउल्लाह देहलवी|शम्सुल उलेमा मौलवी ज़काउल्लाह]], [[शिबली नोमानी|शम्सुल उलेमा अल्लामा शिबली नोमानी]], मौलवी मेहदी हसन, [[सैयद महमूद]], सैयद करामत हुसैन, समीउल्लाह खान, मुहम्मद नुसरत अली और सर सैयद ने सामाजिक और धार्मिक सुधारों पर कई लेख लिखे।<ref name="AMU" /><ref name="Education and Politics"/>{{rp|23}}
1870 में स्थापना से लेकर 1881 तक, तहज़ीब-उल-इख़लाक़ को दो बार बंद किया गया और अंततः 1881 में इसका [[अलीगढ़ इंस्टीट्यूट गजट]] में विलय कर दिया गया।<ref name="AMU">[http://aligarhmovement.com/Institutions/Tahzibul_akhlaq], Tehzeeb-ul-Ikhlaq - Aligarh Movement.</ref>
== पुनरुद्धार ==
1981 में, अलीगढ़ आंदोलन के कट्टर समर्थक और एएमयू (AMU) के पूर्व छात्र, [[सैयद हामिद]] ने (जो उस समय अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति थे) तहज़ीब-उल-इख़लाक़ को एक द्विमासिक निजी पत्रिका के रूप में फिर से शुरू किया। सैयद हामिद को मुख्य संपादक और काजी मोइज़ुद्दीन को संपादक बनाकर एक समिति बनाई गई।
1983 में, उर्दू विभाग के प्रो. नूरुल हसन नकवी ने पत्रिका के संपादन का कार्यभार संभाला। उन्होंने युवा शोध विद्वान डॉ. कमरुल हुदा फरीदी को पत्रिका के मानद सहायक संपादक के रूप में नियुक्त किया।<ref name="AMU" />
अप्रैल 1985 में, [[सैयद हाशिम अली]] के कुलपति काल में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने तहज़ीब-उल-इख़लाक़ का अधिग्रहण कर लिया और आवश्यक प्रशासनिक कर्मचारी और भवन आवंटित किए और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति को इसका संरक्षक (Patron) बनाया।<ref name="AMU" />
== इन्हें भी देखें ==
* [[अलीगढ़ इंस्टीट्यूट गजट]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
{{DEFAULTSORT:तहज़ीब-उल-इख़लाक़}}
[[श्रेणी:सैयद अहमद खान की कृतियाँ]]
[[श्रेणी:मुस्लिम सुधारक]]
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चाहर धर्मेंद्र
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'''''तहज़ीब-उल-इख़लाक़''''' ({{Langx|ur|تہذیب الاخلاق}}) 1871 में मुस्लिम सुधारक [[सैयद अहमद खान|सर सैयद अहमद खान]] द्वारा स्थापित एक [[पत्रिका]] है। इस पत्रिका ने सरल भाषा में वैकल्पिक [[मुस्लिम]] दृष्टिकोण प्रकाशित किए। इसने प्रकाशक के धार्मिक, सामाजिक और सुधारवादी विचारों को आवाज़ दी, और उन्हें उर्दू कथा साहित्य के जनकों में से एक के रूप में स्थापित करने का श्रेय दिया जाता है। इसका प्रकाशन 1961 में बाधित हो गया था लेकिन 1981 में [[सैयद हामिद]] (अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति) द्वारा इसे फिर से शुरू किया गया। तब से यह नियमित रूप से प्रकाशित हो रही है। अब ''तहज़ीब-उल-इख़लाक़'' का एक अलग कार्यालय है।<ref>{{Cite web|url=https://quranwahadith.com/product/tehzeeb-ul-akhlaq/|title=Tehzeeb ul Akhlaq Magazine, AMU Magazine, تہذیب الاخلاق رسالہ|access-date=26 मार्च 2026|archive-date=17 अगस्त 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20250817053550/https://quranwahadith.com/product/tehzeeb-ul-akhlaq/|url-status=dead}}</ref>
== इतिहास ==
अप्रैल 1869 में लंदन में, सैयद अहमद खान का सामना सामाजिक सुधार की दो पत्रिकाओं, [[द स्पेक्टेटर|स्पेक्टेटर]] और [[टैटलर]] से हुआ। इन दो पत्रिकाओं ने सर सैयद को भारत के मुसलमानों के सुधार के लिए एक पत्रिका शुरू करने के लिए प्रेरित किया। अपने करीबी दोस्त [[मोहसिन-उल-मुल्क]] को लिखे एक पत्र में, उन्होंने भारत के मुसलमानों के सामाजिक सुधार के लिए एक पत्रिका 'तहज़ीब-उल-इख़लाक़' के विचार पर चर्चा की। वे लगभग 19 महीने की अनुपस्थिति के बाद अक्टूबर 1870 में बनारस लौटे। 24 दिसंबर को सर सैयद ने तहज़ीब-उल-इख़लाक़ लॉन्च की। इसका नाम तुर्किस्तान के दार्शनिक हकीम अबू अली मस्का की एक पुस्तक के नाम पर रखा गया था।<ref name="Education and Politics">{{Cite book |last=Muhammad |first=Shan |url=https://books.google.com/books?id=Q7BCcgC0kvsC&q=united+patriotic+association+sir+syed&pg=PA44 |title=Education and Politics: From Sir Syed to the Present Day : the Aligarh School |date=2002 |publisher=APH Publishing|isbn=978-81-7648-275-2}}</ref>{{rp|22}} इसे भारत के मुसलमानों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन साथ ही इसे अपने शुभचिंतक भी मिले। नवाब मोहसिन-उल-मुल्क, [[चिराग अली|मौलवी मुहम्मद चिराग अली खान]], मौलवी मुश्ताक हुसैन, [[अल्ताफ हुसैन हाली|मौलाना अल्ताफ हुसैन हाली]], [[ज़काउल्लाह देहलवी|शम्सुल उलेमा मौलवी ज़काउल्लाह]], [[शिबली नोमानी|शम्सुल उलेमा अल्लामा शिबली नोमानी]], मौलवी मेहदी हसन, [[सैयद महमूद]], सैयद करामत हुसैन, समीउल्लाह खान, मुहम्मद नुसरत अली और सर सैयद ने सामाजिक और धार्मिक सुधारों पर कई लेख लिखे।<ref name="AMU" /><ref name="Education and Politics"/>{{rp|23}}
1870 में स्थापना से लेकर 1881 तक, तहज़ीब-उल-इख़लाक़ को दो बार बंद किया गया और अंततः 1881 में इसका [[अलीगढ़ इंस्टीट्यूट गजट]] में विलय कर दिया गया।<ref name="AMU">[http://aligarhmovement.com/Institutions/Tahzibul_akhlaq], Tehzeeb-ul-Ikhlaq - Aligarh Movement.</ref>
== पुनरुद्धार ==
1981 में, अलीगढ़ आंदोलन के कट्टर समर्थक और एएमयू (AMU) के पूर्व छात्र, [[सैयद हामिद]] ने (जो उस समय अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति थे) तहज़ीब-उल-इख़लाक़ को एक द्विमासिक निजी पत्रिका के रूप में फिर से शुरू किया। सैयद हामिद को मुख्य संपादक और काजी मोइज़ुद्दीन को संपादक बनाकर एक समिति बनाई गई।
1983 में, उर्दू विभाग के प्रो. नूरुल हसन नकवी ने पत्रिका के संपादन का कार्यभार संभाला। उन्होंने युवा शोध विद्वान डॉ. कमरुल हुदा फरीदी को पत्रिका के मानद सहायक संपादक के रूप में नियुक्त किया।<ref name="AMU" />
अप्रैल 1985 में, [[सैयद हाशिम अली]] के कुलपति काल में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने तहज़ीब-उल-इख़लाक़ का अधिग्रहण कर लिया और आवश्यक प्रशासनिक कर्मचारी और भवन आवंटित किए और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति को इसका संरक्षक (Patron) बनाया।<ref name="AMU" />
== इन्हें भी देखें ==
* [[अलीगढ़ इंस्टीट्यूट गजट]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
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[[श्रेणी:सैयद अहमद खान की कृतियाँ]]
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'''''तहज़ीब-उल-इख़लाक़''''' ({{Langx|ur|تہذیب الاخلاق}}) 1871 में मुस्लिम सुधारक [[सैयद अहमद खान|सर सैयद अहमद खान]] द्वारा स्थापित एक [[पत्रिका]] है। इस पत्रिका ने सरल भाषा में वैकल्पिक [[मुस्लिम]] दृष्टिकोण प्रकाशित किए। इसने प्रकाशक के धार्मिक, सामाजिक और सुधारवादी विचारों को आवाज़ दी, और उन्हें उर्दू कथा साहित्य के जनकों में से एक के रूप में स्थापित करने का श्रेय दिया जाता है। इसका प्रकाशन 1961 में बाधित हो गया था लेकिन 1981 में [[सैयद हामिद]] (अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति) द्वारा इसे फिर से शुरू किया गया। तब से यह नियमित रूप से प्रकाशित हो रही है। अब ''तहज़ीब-उल-इख़लाक़'' का एक अलग कार्यालय है।<ref>{{Cite web|url=https://quranwahadith.com/product/tehzeeb-ul-akhlaq/|title=Tehzeeb ul Akhlaq Magazine, AMU Magazine, تہذیب الاخلاق رسالہ|access-date=26 मार्च 2026|archive-date=17 अगस्त 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20250817053550/https://quranwahadith.com/product/tehzeeb-ul-akhlaq/|url-status=dead}}</ref>
== इतिहास ==
अप्रैल 1869 में लंदन में, सैयद अहमद खान का सामना सामाजिक सुधार की दो पत्रिकाओं, [[द स्पेक्टेटर|स्पेक्टेटर]] और [[टैटलर]] से हुआ। इन दो पत्रिकाओं ने सर सैयद को भारत के मुसलमानों के सुधार के लिए एक पत्रिका शुरू करने के लिए प्रेरित किया। अपने करीबी दोस्त [[मोहसिन-उल-मुल्क]] को लिखे एक पत्र में, उन्होंने भारत के मुसलमानों के सामाजिक सुधार के लिए एक पत्रिका 'तहज़ीब-उल-इख़लाक़' के विचार पर चर्चा की। वे लगभग 19 महीने की अनुपस्थिति के बाद अक्टूबर 1870 में बनारस लौटे। 24 दिसंबर को सर सैयद ने तहज़ीब-उल-इख़लाक़ लॉन्च की। इसका नाम तुर्किस्तान के दार्शनिक हकीम अबू अली मस्का की एक पुस्तक के नाम पर रखा गया था।<ref name="Education and Politics">{{Cite book |last=Muhammad |first=Shan |url=https://books.google.com/books?id=Q7BCcgC0kvsC&q=united+patriotic+association+sir+syed&pg=PA44 |title=Education and Politics: From Sir Syed to the Present Day : the Aligarh School |date=2002 |publisher=APH Publishing|isbn=978-81-7648-275-2}}</ref>{{rp|22}} इसे भारत के मुसलमानों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन साथ ही इसे अपने शुभचिंतक भी मिले। नवाब मोहसिन-उल-मुल्क, [[चिराग अली|मौलवी मुहम्मद चिराग अली खान]], मौलवी मुश्ताक हुसैन, [[अल्ताफ हुसैन हाली|मौलाना अल्ताफ हुसैन हाली]], [[ज़काउल्लाह देहलवी|शम्सुल उलेमा मौलवी ज़काउल्लाह]], [[शिबली नोमानी|शम्सुल उलेमा अल्लामा शिबली नोमानी]], मौलवी मेहदी हसन, [[सैयद महमूद]], सैयद करामत हुसैन, समीउल्लाह खान, मुहम्मद नुसरत अली और सर सैयद ने सामाजिक और धार्मिक सुधारों पर कई लेख लिखे।<ref name="AMU" /><ref name="Education and Politics"/>{{rp|23}}
1870 में स्थापना से लेकर 1881 तक, तहज़ीब-उल-इख़लाक़ को दो बार बंद किया गया और अंततः 1881 में इसका [[अलीगढ़ इंस्टीट्यूट गजट]] में विलय कर दिया गया।<ref name="AMU">[http://aligarhmovement.com/Institutions/Tahzibul_akhlaq], Tehzeeb-ul-Ikhlaq - Aligarh Movement.</ref>
== पुनरुद्धार ==
1981 में, अलीगढ़ आंदोलन के कट्टर समर्थक और एएमयू (AMU) के पूर्व छात्र, [[सैयद हामिद]] ने (जो उस समय अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति थे) तहज़ीब-उल-इख़लाक़ को एक द्विमासिक निजी पत्रिका के रूप में फिर से शुरू किया। सैयद हामिद को मुख्य संपादक और काजी मोइज़ुद्दीन को संपादक बनाकर एक समिति बनाई गई।
1983 में, उर्दू विभाग के प्रो. नूरुल हसन नकवी ने पत्रिका के संपादन का कार्यभार संभाला। उन्होंने युवा शोध विद्वान डॉ. कमरुल हुदा फरीदी को पत्रिका के मानद सहायक संपादक के रूप में नियुक्त किया।<ref name="AMU" />
अप्रैल 1985 में, [[सैयद हाशिम अली]] के कुलपति काल में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने तहज़ीब-उल-इख़लाक़ का अधिग्रहण कर लिया और आवश्यक प्रशासनिक कर्मचारी और भवन आवंटित किए और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति को इसका संरक्षक (Patron) बनाया।<ref name="AMU" />
== इन्हें भी देखें ==
* [[अलीगढ़ इंस्टीट्यूट गजट]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
{{DEFAULTSORT:तहज़ीब-उल-इख़लाक़}}
[[श्रेणी:सैयद अहमद खान की कृतियाँ]]
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Anitya Gautam
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text/x-wiki
{{Infobox magazine
| title = तहज़ीब-उल-इख़लाक़
| category = [[इस्लाम]]
| language = [[उर्दू]]
| editor = [[सैयद अहमद खान]]
| publisher = [[सैयद अहमद खान]]
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'''''तहज़ीब-उल-इख़लाक़''''' ({{Langx|ur|تہذیب الاخلاق}}) 1871 में मुस्लिम सुधारक [[सैयद अहमद खान|सर सैयद अहमद खान]] द्वारा स्थापित एक [[पत्रिका]] है। इस पत्रिका ने सरल भाषा में वैकल्पिक [[मुस्लिम]] दृष्टिकोण प्रकाशित किए। इसने प्रकाशक के धार्मिक, सामाजिक और सुधारवादी विचारों को आवाज़ दी, और उन्हें उर्दू कथा साहित्य के जनकों में से एक के रूप में स्थापित करने का श्रेय दिया जाता है। इसका प्रकाशन 1961 में बाधित हो गया था लेकिन 1981 में [[सैयद हामिद]] (अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति) द्वारा इसे फिर से शुरू किया गया। तब से यह नियमित रूप से प्रकाशित हो रही है। अब ''तहज़ीब-उल-इख़लाक़'' का एक अलग कार्यालय है।<ref>{{Cite web|url=https://quranwahadith.com/product/tehzeeb-ul-akhlaq/|title=Tehzeeb ul Akhlaq Magazine, AMU Magazine, تہذیب الاخلاق رسالہ|access-date=26 मार्च 2026|archive-date=17 अगस्त 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20250817053550/https://quranwahadith.com/product/tehzeeb-ul-akhlaq/|url-status=dead}}</ref>
== इतिहास ==
अप्रैल 1869 में लंदन में, सैयद अहमद खान का सामना सामाजिक सुधार की दो पत्रिकाओं, [[द स्पेक्टेटर|स्पेक्टेटर]] और [[टैटलर]] से हुआ। इन दो पत्रिकाओं ने सर सैयद को भारत के मुसलमानों के सुधार के लिए एक पत्रिका शुरू करने के लिए प्रेरित किया। अपने करीबी दोस्त [[मोहसिन-उल-मुल्क]] को लिखे एक पत्र में, उन्होंने भारत के मुसलमानों के सामाजिक सुधार के लिए एक पत्रिका 'तहज़ीब-उल-इख़लाक़' के विचार पर चर्चा की।<ref name="n535">{{cite web | title=Tahzeeb-ul-Akhlaq | website=Aligarh Muslim University | url=https://www.amu.ac.in/hi/miscellaneous/tahzeeb-ul-akhlaq | language=en-US | access-date=2026-10-18}}</ref> वे लगभग 19 महीने की अनुपस्थिति के बाद अक्टूबर 1870 में बनारस लौटे। 24 दिसंबर को सर सैयद ने तहज़ीब-उल-इख़लाक़ लॉन्च की। इसका नाम तुर्किस्तान के दार्शनिक हकीम अबू अली मस्का की एक पुस्तक के नाम पर रखा गया था।<ref name="Education and Politics">{{Cite book |last=Muhammad |first=Shan |url=https://books.google.com/books?id=Q7BCcgC0kvsC&q=united+patriotic+association+sir+syed&pg=PA44 |title=Education and Politics: From Sir Syed to the Present Day : the Aligarh School |date=2002 |publisher=APH Publishing|isbn=978-81-7648-275-2}}</ref>{{rp|22}} इसे भारत के मुसलमानों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन साथ ही इसे अपने शुभचिंतक भी मिले। नवाब मोहसिन-उल-मुल्क, [[चिराग अली|मौलवी मुहम्मद चिराग अली खान]], मौलवी मुश्ताक हुसैन, [[अल्ताफ हुसैन हाली|मौलाना अल्ताफ हुसैन हाली]], [[ज़काउल्लाह देहलवी|शम्सुल उलेमा मौलवी ज़काउल्लाह]], [[शिबली नोमानी|शम्सुल उलेमा अल्लामा शिबली नोमानी]], मौलवी मेहदी हसन, [[सैयद महमूद]], सैयद करामत हुसैन, समीउल्लाह खान, मुहम्मद नुसरत अली और सर सैयद ने सामाजिक और धार्मिक सुधारों पर कई लेख लिखे।<ref name="AMU" /><ref name="Education and Politics"/>{{rp|23}}
1870 में स्थापना से लेकर 1881 तक, तहज़ीब-उल-इख़लाक़ को दो बार बंद किया गया और अंततः 1881 में इसका [[अलीगढ़ इंस्टीट्यूट गजट]] में विलय कर दिया गया।<ref name="AMU">[http://aligarhmovement.com/Institutions/Tahzibul_akhlaq], Tehzeeb-ul-Ikhlaq - Aligarh Movement.</ref>
== पुनरुद्धार ==
1981 में, अलीगढ़ आंदोलन के कट्टर समर्थक और एएमयू (AMU) के पूर्व छात्र, [[सैयद हामिद]] ने (जो उस समय अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति थे) तहज़ीब-उल-इख़लाक़ को एक द्विमासिक निजी पत्रिका के रूप में फिर से शुरू किया। सैयद हामिद को मुख्य संपादक और काजी मोइज़ुद्दीन को संपादक बनाकर एक समिति बनाई गई।
1983 में, उर्दू विभाग के प्रो. नूरुल हसन नकवी ने पत्रिका के संपादन का कार्यभार संभाला। उन्होंने युवा शोध विद्वान डॉ. कमरुल हुदा फरीदी को पत्रिका के मानद सहायक संपादक के रूप में नियुक्त किया।<ref name="AMU" />
अप्रैल 1985 में, [[सैयद हाशिम अली]] के कुलपति काल में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने तहज़ीब-उल-इख़लाक़ का अधिग्रहण कर लिया और आवश्यक प्रशासनिक कर्मचारी और भवन आवंटित किए और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति को इसका संरक्षक (Patron) बनाया।<ref name="AMU" />
== इन्हें भी देखें ==
* [[अलीगढ़ इंस्टीट्यूट गजट]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
{{DEFAULTSORT:तहज़ीब-उल-इख़लाक़}}
[[श्रेणी:सैयद अहमद खान की कृतियाँ]]
[[श्रेणी:मुस्लिम सुधारक]]
[[श्रेणी:भारतीय मुसलमान]]
[[श्रेणी:उर्दू भाषा की पत्रिकाएँ]]
[[श्रेणी:1871 में स्थापित पत्रिकाएँ]]
[[श्रेणी:अलीगढ़ आंदोलन]]
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पावलो स्कोरोपाडस्की
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{{Infobox officeholder
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| image = Pavlo Skoropadsky portrait, colorized by Ruslan Habanets.jpg
| caption = स्कोरोपाडस्की कोसैक पोशाक में, {{circa|1920}}
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* [[रूसी साम्राज्य]]
* यूक्रेनी जन गणराज्य
* यूक्रेनी राज्य}}
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|title = {{nobold|''सूची देखें''}}
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* [[रूस-जापान युद्ध]]
* [[प्रथम विश्व युद्ध]]
** [[प्रथम विश्व युद्ध का पूर्वी रंगमंच|पूर्वी मोर्चा (प्रथम विश्व युद्ध)]]
** प्रशिया पर आक्रमण
* [[रूसी गृहयुद्ध]]
** रूसी गृहयुद्ध का दक्षिणी मोर्चा
** यूक्रेनी स्वतंत्रता संग्राम
*** क्रीमिया ऑपरेशन (1918)
*** ज़्मेरिन्का की लड़ाई
*** 1918 यूक्रेनी तख्तापलट
*** हेटमैन विरोधी विद्रोह
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'''पावलो पेट्रोविच स्कोरोपाडस्की''' (15 मई 1873 – 26 अप्रैल 1945) यूक्रेन के इतिहास में एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में स्मरण किए जाते हैं, जिनके जीवन में सामंती गौरव, सैन्य अनुशासन और राजनीतिक संघर्षों का अद्भुत संगम दिखाई देता है। एक प्रतिष्ठित कुलीन परिवार में जन्मे स्कोरोपाडस्की ने अपने साहस और नेतृत्व क्षमता के बल पर सैन्य क्षेत्र में उल्लेखनीय पहचान बनाई। वर्ष 1918 के उथल-पुथल भरे समय में, जब समूचा यूरोप युद्ध और क्रांति की ज्वालाओं में घिरा हुआ था, उन्होंने 29 अप्रैल को एक तख्तापलट के माध्यम से यूक्रेन की सत्ता संभाली और “हेटमैन” के रूप में शासन स्थापित किया।
उनका शासनकाल एक ओर स्थिरता और व्यवस्था की खोज का प्रतीक था, तो दूसरी ओर यह उस समय के जटिल राजनीतिक समीकरणों और जनभावनाओं के बीच संघर्षरत भी रहा। स्कोरोपाडस्की ने देश में शांति, प्रशासनिक सुदृढ़ता और परंपरागत मूल्यों को पुनर्स्थापित करने का प्रयास किया, किन्तु व्यापक जनसमर्थन के अभाव और बदलते राजनीतिक परिदृश्य के कारण उनका शासन अधिक समय तक टिक नहीं सका। अंततः 14 दिसंबर 1918 को उन्होंने पद त्याग दिया। उनके व्यक्तित्व और शासन की कथा यूक्रेन के इतिहास में एक संवेदनशील अध्याय के रूप में अंकित है, जो सत्ता, संघर्ष और समय की अनिश्चितताओं का मार्मिक प्रतिबिंब प्रस्तुत करती है।
एक प्रतिष्ठित कुलीन परिवार में जन्मे पावलो पेट्रोविच स्कोरोपाडस्की का प्रारंभिक जीवन अनुशासन और उत्कृष्टता की दृढ़ नींव पर आधारित था। उन्होंने प्रतिष्ठित पेज कोर में प्रशिक्षण प्राप्त किया, जहाँ से वे एक दक्ष और आत्मविश्वासी अधिकारी के रूप में उभरे। उनकी सैन्य प्रतिभा का परिचय विशेष रूप से [[रूस-जापान युद्ध]] के दौरान मिला, जहाँ उनकी सेवाओं और साहसिक नेतृत्व के परिणामस्वरूप उन्हें कर्नल के पद पर पदोन्नत किया गया। उनकी योग्यता और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए वर्ष 1910 में उन्हें 20वीं फिनिश ड्रैगून रेजिमेंट की कमान सौंपी गई, जो उनके बढ़ते सैन्य प्रभाव का स्पष्ट प्रमाण था।
उनकी उन्नति का क्रम यहीं नहीं रुका। वर्ष 1912 में स्कोरोपाडस्की को मेजर जनरल के पद पर पदोन्नत किया गया और वे सम्राट [[निकोलस द्वितीय]] के [[ऐड-डि-कैम्प|सहायक]] नियुक्त हुए, जो उनके प्रति शाही विश्वास और सम्मान को दर्शाता है। [[प्रथम विश्व युद्ध]] के उग्र और निर्णायक समय में उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल के रूप में 34वीं सेना कोर की जिम्मेदारी संभाली। इस भूमिका में उन्होंने न केवल अपने रणनीतिक कौशल का प्रदर्शन किया, बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी नेतृत्व की दृढ़ता और दूरदर्शिता का परिचय दिया, जिससे उनका सैन्य व्यक्तित्व और भी सुदृढ़ और प्रभावशाली बनकर उभरा।
फरवरी क्रांति के पश्चात, जब यूक्रेन की राजनीतिक धारा में केंद्रीय राडा का उदय हुआ, तब पावलो पेट्रोविच स्कोरोपाडस्की ने परिस्थितियों की नब्ज़ को भली-भाँति समझते हुए अपनी 34वीं सेना कोर—जो आगे चलकर प्रथम यूक्रेनी कोर के नाम से प्रसिद्ध हुई—का यूक्रेनीकरण प्रारंभ किया। यह कदम केवल सैन्य पुनर्गठन भर नहीं था, बल्कि उस समय उभरती राष्ट्रीय चेतना के साथ स्वयं को जोड़ने का एक सशक्त प्रयास भी था।
इसी क्रम में, [[जर्मन साम्राज्य]] के मौन समर्थन से स्कोरोपाडस्की ने यूक्रेनी जन गणराज्य को अपदस्थ कर यूक्रेनी राज्य की स्थापना की और स्वयं सत्ता के केंद्र में स्थापित हुए। उनके शासनकाल में एक ओर प्रशासनिक स्थिरता और व्यवस्था कायम करने के प्रयास दिखाई देते हैं, तो दूसरी ओर यह भी स्पष्ट होता है कि उन्होंने यूक्रेन में तैनात [[ऑस्ट्रियाई साम्राज्य|ऑस्ट्रियाई]] और जर्मन सेनाओं को अधिक नियंत्रण प्रदान किया। साथ ही, उनकी नीतियों में बड़े जमींदारों के हितों की सुरक्षा को भी विशेष महत्व दिया गया। इस प्रकार उनका शासन एक जटिल संतुलन का प्रतीक बन गया, जिसमें राष्ट्रीय आकांक्षाएँ, विदेशी प्रभाव और सामाजिक वर्गों के हित आपस में उलझे हुए थे।
जर्मन और ऑस्ट्रियाई सैनिकों द्वारा अनाज की जबरन ज़ब्ती, तथा स्थानीय यूक्रेनी किसानों के प्रति उनके कठोर और कई बार हिंसक व्यवहार ने स्कोरोपाडस्की के शासन के प्रति असंतोष की अग्नि को निरंतर प्रज्वलित किया। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में यह असंतोष गहराता गया, जहाँ जनता अपने ही श्रम के फल से वंचित होकर पीड़ा और आक्रोश से भर उठी। इस बढ़ते विरोध के बीच, जब स्कोरोपाडस्की ने श्वेत आंदोलन के साथ एक संघीय संघ में सम्मिलित होने के अपने उद्देश्य की घोषणा की—जो अधिकांश यूक्रेनियनों के लिए अस्वीकार्य और राष्ट्रवादी भावनाओं के विपरीत थी—तब स्थिति और अधिक विस्फोटक हो गई।
अंततः 14 नवंबर 1918 को हेटमैन विरोधी विद्रोह भड़क उठा, जिसने उनके शासन की नींव को हिला कर रख दिया। व्यापक जनाक्रोश और बदलते राजनीतिक समीकरणों के दबाव में स्कोरोपाडस्की सत्ता से बेदखल कर दिए गए। उनके पतन के साथ ही यूक्रेनी जन गणराज्य की पुनः स्थापना हुई, मानो इतिहास ने एक बार फिर स्वयं को दोहराते हुए जनता की आकांक्षाओं को नई दिशा प्रदान की हो। यह घटना न केवल उनके शासन के अंत का संकेत थी, बल्कि उस दौर की अस्थिरता, संघर्ष और जनशक्ति के प्रभाव का भी सशक्त प्रतीक बनकर उभरी।
हेतमैन के रूप में पावलो पेट्रोविच स्कोरोपाडस्की का कार्यकाल यद्यपि अल्पकालिक रहा, फिर भी उनके योगदानों की गूँज यूक्रेन के इतिहास में दीर्घकाल तक सुनाई देती है। उन्होंने न केवल [[यूक्रेन की राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी]] की स्थापना कर बौद्धिक और वैज्ञानिक विकास की एक सुदृढ़ आधारशिला रखी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनयिक संबंध स्थापित कर नवोदित राष्ट्र की वैश्विक पहचान को भी सुदृढ़ करने का प्रयास किया।
वृहद रूसी गृहयुद्ध की उथल-पुथल और अराजकता के बीच, उनके शासन ने एक सीमा तक शांति और व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यद्यपि उनकी नीतियाँ और निर्णय सर्वत्र स्वीकृति नहीं पा सके, फिर भी यह निर्विवाद है कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में राष्ट्र को स्थिरता प्रदान करने का प्रयास किया। इस प्रकार, उनका संक्षिप्त शासनकाल उपलब्धियों और विवादों के बीच संतुलित एक ऐसा अध्याय बनकर उभरता है, जो यूक्रेन के निर्माण और उसके संघर्षपूर्ण इतिहास को गहराई से प्रतिबिंबित करता है।
==प्रारंभिक जीवन==
पावलो पेट्रोविच स्कोरोपाडस्की का जन्म 15 मई 1873 (पुरानी शैली के अनुसार 3 मई) को [[जर्मन साम्राज्य]] के विस्बाडेन नगर में एक प्रतिष्ठित और गौरवशाली स्कोरोपाडस्की कुल में हुआ था। यह परिवार ऐतिहासिक रूप से ज़ापोरोज़ियन कोसैकों से जुड़ा हुआ था—एक ऐसा योद्धा समुदाय, जिसकी वीरता और स्वतंत्रता-प्रियता प्रसिद्ध रही है। इसी वंश परंपरा में इवान स्कोरोपाडस्की जैसे महान व्यक्तित्व हुए, जिन्होंने 1708 से 1722 तक ज़ापोरोज़ियन सेना के हेटमैन के रूप में नेतृत्व किया था।{{Sfn|Pritsak|1955|p=64}} समय के साथ, उन्नीसवीं शताब्दी तक यह परिवार एक समृद्ध और प्रभावशाली कुलीन वंश के रूप में स्थापित हो चुका था, जिसके अनेक सदस्य शाही रूसी सेना में अधिकारी के रूप में सेवाएँ दे रहे थे।
अपने जीवन के प्रारंभिक पाँच वर्ष पावलो ने जर्मनी में बिताए, जहाँ जर्मन भाषा उनके लिए सहज और प्रथम अभिव्यक्ति का माध्यम बन गई।{{Sfn|Savchenko|2008|p=6}} बाल्यावस्था के पश्चात वे ट्रोस्टियानेट्स लौट आए, जो उस समय [[रूसी साम्राज्य]] का हिस्सा था और आज के यूक्रेन में स्थित है। पारिवारिक परिस्थितियाँ भी उनके जीवन को विशिष्ट दिशा देने वाली रहीं—उनके पिता, कर्नल पेट्रो स्कोरोपाडस्की, को कोकेशियाई युद्ध के दौरान गंभीर बीमारी हो जाने के कारण परिवार से अलग रहना पड़ा। फलस्वरूप, पावलो और उनके भाई मिखाइलो का पालन-पोषण उनके दादा इवान के स्नेह और संरक्षण में हुआ। इसी परिवेश में उनके व्यक्तित्व का निर्माण हुआ, जहाँ पारिवारिक परंपरा, सैन्य अनुशासन और सांस्कृतिक विरासत का गहरा प्रभाव उनके जीवन पर अंकित हो गया।
ट्रोस्टियानेट्स में बिताए गए वर्षों ने पावलो पेट्रोविच स्कोरोपाडस्की के व्यक्तित्व को गहराई से आकार दिया। वहाँ वे यूक्रेनी सांस्कृतिक परिवेश में पूर्णतः रमे रहे, क्योंकि उनके दादाजी पुरानी कोसैक परंपराओं और रीति-रिवाजों का अत्यंत कठोरता से पालन करते थे। यह वातावरण उन्हें अपनी ऐतिहासिक जड़ों और विरासत से जोड़ता था, यद्यपि उस समय उन्होंने स्वयं [[यूक्रेनी भाषा एवं साहित्य|यूक्रेनी भाषा]] नहीं सीखी थी।
ग्रामीण जीवन की सादगी, प्रकृति की निकटता और परंपराओं से ओतप्रोत परिवेश ने उनके मन में एक विशेष भावनात्मक गहराई उत्पन्न की। इसके साथ ही, वे अपने परिवार में सुरक्षित रखे गए पुराने हेटमैनों के चित्रों के विशाल संग्रह से विशेष रूप से आकर्षित रहते थे। इन चित्रों में उन्हें केवल अतीत की झलक ही नहीं मिलती थी, बल्कि अपने वंश की गौरवशाली विरासत का प्रत्यक्ष साक्षात्कार भी होता था, क्योंकि उनमें से अनेक महान व्यक्तित्वों से उनका सीधा पारिवारिक संबंध था। यही अनुभव उनके भीतर इतिहास, परंपरा और नेतृत्व के प्रति एक गहन सम्मान और आत्मीयता का भाव जाग्रत करते रहे।
वर्ष 1885 में पिता पेट्रो के निधन के पश्चात पावलो और उनके भाई मिखाइलो के जीवन में एक नया मोड़ आया। दोनों को शिक्षा के लिए स्टारोडुब भेज दिया गया, जबकि परिवार के अन्य सदस्य [[मास्को|मॉस्को]] जाकर बस गए। यद्यपि उनके पिता और दादा में से किसी ने भी वह उच्च सैन्य पद प्राप्त नहीं किया था, जो [[सेंट पीटर्सबर्ग]] स्थित पेज कोर में प्रवेश के लिए सामान्यतः आवश्यक माना जाता था, फिर भी उनकी माता मारिया स्कोरोपाडस्का के अटूट संकल्प और प्रयासों ने इस बाधा को पार कर लिया। उन्होंने रूस के सम्राट अलेक्जेंडर तृतीय से व्यक्तिगत अनुमति प्राप्त कर पावलो के लिए इस प्रतिष्ठित संस्थान के द्वार खोल दिए।{{Sfn|Savchenko|2008|p=16}}
वर्ष 1886 से पेज कोर में आरंभ हुआ जीवन पावलो के लिए सरल नहीं था। वहाँ का कठोर अनुशासन और प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण उन्हें प्रारंभ में भारी पड़ा। लगातार दो वर्षों तक अध्ययन में अपेक्षित सफलता न मिल पाने के कारण वे मानसिक रूप से भी प्रभावित हुए और कुछ समय के लिए अवसाद की स्थिति में चले गए। ऐसे कठिन समय में उनकी माता ने उनका सहारा बनकर उन्हें यूरोप के विभिन्न भागों की यात्राओं पर साथ ले जाकर उनके मनोबल को पुनः सशक्त किया। इन अनुभवों से सुदृढ़ होकर जब वे पुनः सेंट पीटर्सबर्ग लौटे, तो नई ऊर्जा और आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर हुए। अंततः वर्ष 1893 में उन्होंने पेज कोर से कॉर्नेट के पद के साथ सफलतापूर्वक स्नातक होकर अपने सैन्य जीवन की औपचारिक शुरुआत की।
==सैन्य जीवन==
===प्रथम कार्य और रूस-जापान युद्ध===
[[File:Oleksandra_Durnovo_and_Pavlo_Skoropadsky_(Portrait_photography,_october_1897).jpg|thumb|स्कोरोपाडस्की (लेफ्टिनेंट का बैज पहने हुए) अपनी मंगेतर ओलेक्सांद्रा के साथ, अक्टूबर 1897]]
स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के पश्चात पावलो पेट्रोविच स्कोरोपाडस्की को शेवेलियर गार्ड रेजिमेंट में नियुक्त किया गया, जहाँ उन्हें एक स्क्वाड्रन की कमान सौंपी गई। यह दायित्व उनके नेतृत्व कौशल और सैन्य दक्षता का प्रारंभिक प्रमाण था। अपनी लगन और कार्यकुशलता के बल पर उन्होंने शीघ्र ही उच्चाधिकारियों का विश्वास अर्जित किया, जिसके परिणामस्वरूप दो वर्षों के भीतर ही उन्हें उसी रेजिमेंट में रेजिमेंटल एडजुटेंट के पद पर पदोन्नत किया गया।
दिसंबर 1897 में उनकी योग्यता को पुनः मान्यता मिली और उन्हें लेफ्टिनेंट के पद पर पदोन्नति प्रदान की गई। इसी कालखंड में उनके निजी जीवन में भी एक महत्वपूर्ण परिवर्तन आया। उनके ससुर के निधन के पश्चात उन्हें उनकी विशाल संपत्ति विरासत में प्राप्त हुई, जिसने उन्हें उस समय के संदर्भ में अत्यंत समृद्ध और प्रभावशाली बना दिया। इस प्रकार, उनका जीवन एक ओर सैन्य उपलब्धियों से परिपूर्ण था, तो दूसरी ओर सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी सुदृढ़ होता गया।
16 मार्च 1904 को पावलो पेट्रोविच स्कोरोपाडस्की [[मंचूरिया]] पहुँचे। उन्होंने स्वेच्छा से राजधानी में अपने सुरक्षित पद को छोड़कर रूस-जापान युद्ध के मोर्चे पर स्थानांतरण का अनुरोध किया था, जो उनके साहस और कर्तव्यनिष्ठा का स्पष्ट प्रमाण था। वहाँ पहुँचने पर उन्हें ट्रांस-बाइकाल कोसैक सेना के अधीन तृतीय वेरखनेउदिंस्क रेजिमेंट में पुनः नियुक्त किया गया और 20 अप्रैल 1904 को उन्होंने सक्रिय रूप से युद्ध में भाग लेना आरंभ किया।{{sfn|Reent|2003|p=28}}
उनकी सैन्य दक्षता और समर्पण को शीघ्र ही पहचान मिली, और 1 मई को उन्हें जनरल एफ. ई. केलर के अधीन सहायक के रूप में पदोन्नत किया गया। जुलाई 1904 में केलर की मृत्यु के पश्चात भी स्कोरोपाडस्की ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए एक स्टाफ पद पर कार्य जारी रखा। तत्पश्चात, 1 अक्टूबर को उन्होंने स्वेच्छा से दूसरे चीता कोसैक रेजिमेंट में स्थानांतरण का निवेदन किया, जहाँ उन्हें रेजिमेंट की पाँचवीं सोत्निया की कमान सौंपी गई।
जापानी सेनाओं के विरुद्ध 20 अप्रैल से 4 जुलाई तक प्रदर्शित उनके साहस और उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए उन्हें 29 अक्टूबर 1904 को ‘सेंट अन्ना का ऑर्डर’ से सम्मानित किया गया।{{sfn|Reent|2003|p=29}} यह सम्मान उनके सैन्य जीवन के प्रारंभिक चरण में ही उनकी वीरता और कर्तव्यपरायणता का गौरवपूर्ण प्रतीक बन गया।
मई 1905 में पावलो पेट्रोविच स्कोरोपाडस्की का तबादला जनरल निकोलाई लिनेविच के अधीन कर दिया गया, जहाँ उन्होंने अपने दायित्वों का निर्वहन उसी निष्ठा और साहस के साथ जारी रखा, जो उनके व्यक्तित्व की विशेष पहचान बन चुका था। रूस-जापान युद्ध के दौरान उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन और वीरता के लिए उन्हें स्वर्ण पदक सहित अनेक सम्मान प्रदान किए गए, जो उनके सैन्य कौशल और अदम्य साहस का प्रमाण थे।
दिसंबर 1905 में, [[निकोलस द्वितीय|सम्राट निकोलाई द्वितीय]] ने उनकी योग्यता और समर्पण को मान्यता देते हुए उन्हें [[कर्नल]] के पद पर ‘फ़्लीगल-एडजुटेंट’ नियुक्त किया। यह पद न केवल सम्मान का प्रतीक था, बल्कि सम्राट के निकट विश्वासपात्र अधिकारियों में उनकी गणना को भी दर्शाता था। आगे चलकर, 4 सितंबर 1910 को उन्हें 20वीं फ़िनिश ड्रैगून रेजिमेंट का कमांडर नियुक्त किया गया, जबकि वे सम्राट की सेवा में फ़्लीगल-एडजुटेंट के रूप में भी कार्यरत रहे।
15 अप्रैल 1911 को उन्हें लीब-गार्ड कैवलरी रेजिमेंट में स्थानांतरित किया गया। यह रेजिमेंट रूसी सेना की विशिष्ट और प्रतिष्ठित टुकड़ियों में गिनी जाती थी, जिन्हें सम्राट की व्यक्तिगत सुरक्षा का दायित्व सौंपा जाता था। इस नियुक्ति ने उनके सैन्य जीवन में एक नई ऊँचाई जोड़ी। अंततः, 6 दिसंबर 1912 को स्कोरोपाडस्की को ‘एचआईएम रेटिन्यू’ के [[महा सेनापति|मेजर जनरल]] के पद पर पदोन्नत किया गया,{{sfn|Reent|2003|p=31}} जो उनके निरंतर उत्कर्ष, नेतृत्व क्षमता और सम्राट के प्रति उनकी निष्ठा का उत्कृष्ट प्रमाण था।
===प्रथम विश्व युद्ध===
[[Image:Skoropadsky LOC 1.jpg|thumb|फेदिर लिज़ोहब के साथ पावलो स्कोरोपाडस्की]]
[[प्रथम विश्व युद्ध]] के आरंभ के साथ ही पावलो पेट्रोविच स्कोरोपाडस्की को एक महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया। उन्हें जनरल पॉल वॉन रेनेनकैम्पफ के नेतृत्व वाली प्रथम सेना के अंतर्गत प्रथम कैवलरी गार्ड डिवीजन की पुनर्गठित प्रथम ब्रिगेड की कमान दी गई।{{sfn|Reent|2003|p=32}} यह नियुक्ति उनके पूर्व अनुभव और विश्वसनीयता का परिणाम थी, क्योंकि वे [[रूस-जापान युद्ध]] के दौरान भी वॉन रेनेनकैम्पफ के अधीन कार्य कर चुके थे, जब वे ट्रांस-बैकाल कोसैक सेना का नेतृत्व कर रहे थे।
6 अगस्त 1914 को, पूर्वी प्रशिया पर रूसी आक्रमण के दौरान क्राउपिशकेन के निकट हुई लड़ाइयों में उनकी रेजिमेंट ने अद्वितीय साहस और दक्षता का प्रदर्शन किया, जिससे स्कोरोपाडस्की की प्रतिष्ठा और अधिक सुदृढ़ हुई। उनकी नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें 1915 की गर्मियों से मार्च 1916 तक अस्थायी रूप से पाँचवीं कैवलरी डिवीजन की कमान भी सौंपी गई। इस अवधि में उन्होंने अपने रणनीतिक कौशल और दृढ़ नेतृत्व का प्रभावी परिचय दिया।
मार्च 1916 में उनकी निरंतर प्रगति को मान्यता देते हुए उन्हें [[लेफ्टिनेंट जनरल]] के पद पर पदोन्नत किया गया और प्रथम कैवलरी गार्ड डिवीजन का स्थायी नेतृत्व सौंपा गया।{{sfn|Reent|2003|p=33}} इसके पश्चात 22 जनवरी 1917 को उन्हें 34वीं सेना कोर का कमांडर नियुक्त किया गया।<ref name="RIA">{{cite web |title= Приказы о чинах военных. Января 1-го дня 1917 года - января 30-го дня 1917 года. - 1917.|url=http://elib.shpl.ru/ru/nodes/53702-prikazy-o-chinah-voennyh-yanvarya-1-go-dnya-1917-goda-yanvarya-30-go-dnya-1917-goda-1917#mode/filmstrip/page/1000/zoom/4|language=ru |access-date=30 अक्टूबर 2025}}</ref> यह पद उनके सैन्य जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी, जिसने उन्हें रूसी साम्राज्य की सेना के उच्चतम नेतृत्व स्तरों में स्थापित कर दिया।
पावलो पेट्रोविच स्कोरोपाडस्की ने फरवरी क्रांति और सम्राट निकोलस द्वितीय के पदत्याग के समाचार का स्वागत सकारात्मक भाव से किया। उन्हें यह आशा थी कि नई अंतरिम सरकार रूस को एक अधिक समृद्ध और स्थिर दिशा प्रदान करेगी।{{sfn|Savchenko|2008|p=40}} उस समय की राजनीतिक उथल-पुथल के बीच वे परिवर्तन को अवसर के रूप में देख रहे थे, जिसमें एक नए युग की संभावनाएँ निहित थीं।
इसी दौरान कीव में नवगठित केंद्रीय राडा ने सत्ता अपने हाथों में ले ली। प्रारंभिक चरण में उसका उद्देश्य रूसी साम्राज्य के भीतर रहते हुए यूक्रेन के लिए स्वायत्तता प्राप्त करना और समाजवादी सुधारों को लागू करना था। यह समय राष्ट्रीय चेतना और राजनीतिक पुनर्गठन का था, जब विभिन्न शक्तियाँ अपने-अपने दृष्टिकोण के साथ उभर रही थीं।
इन घटनाओं के समानांतर, 5 मई 1917 को कीव में सभी मोर्चों और नौसेनाओं से आए लगभग 700 यूक्रेनी सैन्य प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस सभा में यह निर्णय लिया गया कि केंद्रीय राडा के अधीन एक यूक्रेनी जनरल सैन्य समिति का गठन किया जाए, जो यूक्रेनी सैन्य बलों के संगठन और नेतृत्व को एक सुसंगठित दिशा प्रदान कर सके।{{sfn|Savchenko|2008|p=45}}{{sfn|Reent|2003|p=35}} यह कदम उस समय उभरती राष्ट्रीय आकांक्षाओं और सैन्य स्वायत्तता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुआ।
जून 1917 के प्रारंभ में पावलो पेट्रोविच स्कोरोपाडस्की की 34वीं सेना कोर ने केरेन्स्की आक्रमण में भाग लिया, किंतु सैनिकों में व्याप्त अनुशासनहीनता और गिरते मनोबल के कारण यह अभियान सफल नहीं हो सका। यह पराजय उस समय रूसी सेना में फैल रही व्यापक अव्यवस्था और असंतोष का भी प्रतीक थी।
19 जुलाई 1917 को स्कोरोपाडस्की ने दक्षिण-पश्चिमी मोर्चे के मुख्यालय, कामियानेट्स-पोडिल्स्की में रूसी सेना के नए सर्वोच्च कमांडर लावर कोर्निलोव से भेंट की। इस मुलाकात में कोर्निलोव ने उन्हें अपनी सेना को यूक्रेनी स्वरूप देने का आदेश दिया। यद्यपि स्कोरोपाडस्की इस निर्णय को लेकर प्रारंभ में अनिच्छुक थे, फिर भी उन्होंने आदेश का पालन किया और अपनी सेना को मेदज़िबिज़ की ओर पीछे हटाते हुए पुनर्गठित करना आरंभ किया। इसी प्रक्रिया के अंतर्गत उनकी 34वीं सेना कोर को प्रथम यूक्रेनी कोर में परिवर्तित कर दिया गया, जो उस समय उभरती राष्ट्रीय पहचान का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया।
अक्टूबर 1917 में मुक्त कोसैकों के प्रथम सम्मेलन में उन्हें ‘मानद ओटामन’ की उपाधि से सम्मानित किया गया, जो उनके नेतृत्व और प्रतिष्ठा की व्यापक स्वीकृति का संकेत था। इसके पश्चात अक्टूबर से नवंबर 1917 के बीच, लगभग 60,000 सैनिकों वाली उनकी सेना ने पोडोलिए से पोलिस्या तक विस्तृत एक महत्वपूर्ण रेलवे गलियारे—वापनियार्का, ज़्मेरिन्का, कोज़ियाटिन और शेपेटिवका—की सफलतापूर्वक रक्षा की। इस दौरान उन्होंने रोमानियाई मोर्चे से होने वाले हमलों का भी साहसपूर्वक सामना किया, विशेषकर येवगेनिया बॉश के नेतृत्व वाली दूसरी गार्ड कोर के आक्रमणों को दृढ़ता से विफल किया। इस प्रकार, स्कोरोपाडस्की ने न केवल सैन्य दक्षता का परिचय दिया, बल्कि अत्यंत कठिन परिस्थितियों में संगठन और नेतृत्व की अपनी क्षमता को भी प्रभावशाली ढंग से सिद्ध किया।
==यूक्रेन के हेटमैन==
[[File:Prayer for Hetman Skoropadsky 1918.jpg|thumb|स्कोरोपाडस्की को हेटमैन घोषित किए जाने के तुरंत बाद कीव के सोफिया स्क्वायर में उनके लिए मोलेबेन का प्रदर्शन हुआ।]]
अप्रैल 1918 में, ब्रेस्ट-लिटोव्स्क संधि के प्रावधानों के अंतर्गत यूक्रेन में तैनात जर्मन सैनिकों ने समाजवादी यूक्रेनी जन गणराज्य के विरुद्ध एक निर्णायक तख्तापलट को अंजाम दिया। इस राजनीतिक परिवर्तन के परिणामस्वरूप पावलो पेट्रोविच स्कोरोपाडस्की को यूक्रेन का हेतमान घोषित किया गया और वे सत्ता के केंद्र में स्थापित हो गए। यह घटना उस समय की जटिल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और शक्ति-संतुलन का स्पष्ट प्रतिबिंब थी, जहाँ विदेशी हस्तक्षेप ने यूक्रेन की आंतरिक राजनीति को गहराई से प्रभावित किया।
इतिहासकार पीटर केनेज़ के अनुसार, जर्मन सैनिकों का मुख्य उद्देश्य यूक्रेन से अधिकतम मात्रा में खाद्य सामग्री और कच्चे संसाधनों की प्राप्ति करना था। यद्यपि उन्होंने इस क्षेत्र पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया था, फिर भी जर्मन उच्च कमान रूस के भीतर और अधिक गहराई तक बढ़ने को लेकर सतर्क थी। उन्हें आशंका थी कि ऐसा करने से उनकी सैन्य शक्ति अत्यधिक फैल जाएगी और उनके लिए स्थिति को नियंत्रित करना कठिन हो सकता है।<ref name=pk/>{{rp|135}}
[[File:Hetman Skoropadsky and Kaiser Wilhelm.jpg|thumb|अगस्त 1918 में स्पा में उच्च कमान मुख्यालय में एक बैठक में जर्मन साम्राज्य के सम्राट [[कैसर विल्हेम द्वितीय (जर्मनी)|विल्हेम द्वितीय]] (बाएं) और हेटमैन स्कोरोपाडस्की (दाएं)।]]
पावलो पेट्रोविच स्कोरोपाडस्की का अभिषेक बिशप निकोडिम द्वारा कीव के सेंट सोफिया कैथेड्रल में एक औपचारिक और गरिमामय समारोह के माध्यम से संपन्न हुआ, जिसने उनके शासन को धार्मिक और परंपरागत वैधता प्रदान की। किंतु उनके सत्तारोहण के साथ ही मतभेदों और आलोचनाओं का दौर भी आरंभ हो गया। अनेक यूक्रेनी राष्ट्रवादियों ने उन्हें जर्मन समर्थक और धनी जमींदारों के हितों का प्रतिनिधि बताते हुए उनकी तीव्र आलोचना की, जबकि कुछ अन्य ने उन्हें अत्यधिक रूसी झुकाव वाला और निरंकुश शासक माना।
स्कोरोपाडस्की ने एक ऐसा मंत्रिमंडल गठित किया, जिसमें अधिकांशतः रूसी भाषी, [[त्सारवादी एकतन्त्र|ज़ारवादी]] प्रवृत्ति के तथा स्लावोप्रेमी सदस्य शामिल थे। साथ ही, उन्होंने यूक्रेन को एक पुनर्स्थापित रूसी साम्राज्य के साथ संघ में जोड़ने की अपनी प्रतिबद्धता भी व्यक्त की, जिसने उनके विरोध को और अधिक तीव्र बना दिया।
इसके बावजूद, उनकी सरकार के कुछ उल्लेखनीय पक्ष भी रहे। पूर्ववर्ती केंद्रीय राडा की अपेक्षा, उनके शासन को कुछ वर्गों में एक प्रभावी और संगठित प्रशासन स्थापित करने का श्रेय दिया गया। उन्होंने कई देशों के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए, सोवियत रूस के साथ शांति संधि संपन्न की, और शिक्षा तथा बौद्धिक विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए [[यूक्रेन की राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी]] सहित अनेक विद्यालयों और विश्वविद्यालयों की स्थापना को प्रोत्साहित किया। इस प्रकार, उनका शासन एक ओर तीव्र आलोचनाओं से घिरा रहा, तो दूसरी ओर उसने कुछ स्थायी संस्थागत उपलब्धियों की नींव भी रखी।
11 नवंबर 1918 को जर्मनी द्वारा एंटेंटे शक्तियों के साथ युद्धविराम संधि पर हस्ताक्षर किए जाने के साथ ही यूक्रेन में स्थापित हेटमान शासन की नींव डगमगाने लगी। जर्मनी, जो अब तक स्कोरोपाडस्की के शासन का प्रमुख सहायक था, उसके कमजोर पड़ते ही उनके सैन्य और अंतरराष्ट्रीय समर्थन पर गहरा संदेह उत्पन्न हो गया। यह परिवर्तन उस समय के राजनीतिक संतुलन को पूरी तरह बदल देने वाला सिद्ध हुआ।
इसी परिवर्तित परिस्थिति में, उसी महीने यूक्रेन में [[सामाजिक लोकतंत्र]] नेता [[साइमन पेटलीउरा]] के नेतृत्व में एक व्यापक विद्रोह आरंभ हुआ, जिसने धीरे-धीरे सत्ता पर अधिकार जमाना शुरू कर दिया। इस विद्रोह के परिणामस्वरूप औपचारिक रूप से यूक्रेनी पीपुल्स रिपब्लिक की पुनः स्थापना की घोषणा की गई, किंतु वास्तविक सत्ता ‘डायरेक्टोरिया’ नामक एक अंतरिम शासन संस्था के हाथों में केंद्रित हो गई। यह संस्था पाँच निदेशकों से मिलकर बनी थी, जिसकी अध्यक्षता वलोडिमिर विन्न्यचेंको कर रहे थे।<ref name="pk">{{cite book |last1=केनेज़ |first1=पीटर |title=Red Attack, White Resistance; Civil War in South Russia 1918 |date=2004 |publisher=न्यू एकेडेमिया पब्लिशिंग |location=वाशिंगटन, डीसी |isbn=9780974493442 |pages=272–274}}</ref>
इन तीव्र राजनीतिक परिवर्तनों और बढ़ते जनविरोध के बीच, पावलो पेट्रोविच स्कोरोपाडस्की के लिए सत्ता में बने रहना असंभव हो गया। अंततः 14 दिसंबर 1918 को उन्होंने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। इस प्रकार उनका शासन समाप्त हुआ, जो यद्यपि अल्पकालिक था, किंतु यूक्रेन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और जटिल अध्याय के रूप में दर्ज हो गया।
==निर्वासन और उसके बाद के परिणाम==
[[File:Могила Скоропадського в Оберсдорфі, Баварія.jpg|thumb|जर्मनी के ओबरस्टडॉर्फ में स्कोरोपाडस्की परिवार का मकबरा]]
कीव में कुछ समय तक गुप्त रूप से रहने के पश्चात पावलो पेट्रोविच स्कोरोपाडस्की अंततः पीछे हटती जर्मन सेनाओं के साथ वहाँ से निकल गए। बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और अपने शासन के पतन के बाद, वर्ष 1919 में वे जर्मनी में निर्वासन के लिए चले गए और बर्लिन के वानसी क्षेत्र में बस गए।<ref>
{{cite book
|editor1 = डेनिलो हुसार स्ट्रुक
|year = 1993
|chapter = Skoropadsky
|title = Encyclopedia of Ukraine
|url = https://books.google.com/books?id=kkgOAQAAMAAJ
|volume = 4: Ph – Sr
|publisher = यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो प्रेस
|page = 732
|isbn = 9780802030092
|access-date = 6 नवंबर 2022
|quote = For most of the interwar years Skoropadsky lived in Wannsee, near Berlin, and received German financial support.
}}
</ref> यह उनका जीवन का एक नया अध्याय था, जहाँ वे सत्ता से दूर रहकर भी अपने विचारों और दृष्टिकोण को जीवित रखने का प्रयास करते रहे।
[[वाइमर गणराज्य|वाइमर जर्मनी]] में निवास करते हुए स्कोरोपाडस्की ने हेटमैनवादी आंदोलन का नेतृत्व किया और अपने सैन्य महाविद्यालय के दिनों से स्थापित वरिष्ठ सरकारी एवं सैन्य अधिकारियों के साथ अपने घनिष्ठ संबंधों को बनाए रखा। इन संपर्कों के माध्यम से वे राजनीतिक और वैचारिक स्तर पर सक्रिय बने रहे।
हालाँकि, समय के साथ जब जर्मनी में [[नाज़ी जर्मनी|नाज़ी शक्ति]] का उदय हुआ, तब भी स्कोरोपाडस्की ने उनके साथ सहयोग करने के प्रस्तावों को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया। यह निर्णय उनके सिद्धांतों और स्वतंत्र राजनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो उन्होंने अपने निर्वासन के वर्षों में भी दृढ़ता से बनाए रखा।
यूरोप में [[द्वितीय विश्व युद्ध]] के अंतिम दिनों में, जब सोवियत सेनाएँ तीव्र गति से आगे बढ़ रही थीं, पावलो पेट्रोविच स्कोरोपाडस्की ने स्वयं को पीछे हटती जर्मन सेना के साथ सुरक्षित स्थान की ओर ले जाने का प्रयास किया। किंतु नियति ने उनके जीवन की अंतिम घड़ियाँ अत्यंत विषम परिस्थितियों में निर्धारित की थीं। मित्र राष्ट्रों द्वारा रेगेन्सबर्ग के निकट प्लैटलिंग पर की गई बमबारी में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे, और इसी आघात के दस दिन पश्चात, 26 अप्रैल 1945 को जर्मनी के मेटेन एबे में उनका निधन हो गया। बाद में उन्हें ओबरस्टडॉर्फ में दफनाया गया, जहाँ उनकी स्मृति इतिहास के एक शांत, किंतु गहन अध्याय के रूप में जीवित रही।
उनकी मृत्यु के पश्चात भी उनका वैचारिक प्रभाव पूर्णतः समाप्त नहीं हुआ। उनका हेटमैनवादी आंदोलन 1980 के दशक के प्रारंभ तक जीवित रहा और इसने कोसैक राज्य व्यवस्था पर आधारित यूक्रेनी राजशाही की अवधारणा को प्रेरित किया। यद्यपि समय के साथ और प्रवासी यूक्रेनी समुदायों की संख्या एवं सक्रियता में कमी आने के कारण यह आंदोलन धीरे-धीरे क्षीण हो गया, फिर भी इसकी ऐतिहासिक छाप बनी रही।
स्कोरोपाडस्की की पुत्री, ओलेना स्कोरोपाडस्का-ओट, जिन्होंने 2014 तक जीवन व्यतीत किया, [[स्विट्ज़रलैण्ड]] में निवास करती थीं। उन्होंने कई अवसरों पर यूक्रेन की यात्रा की और अपने ऐतिहासिक लेखन के माध्यम से अपने परिवार की विरासत तथा यूक्रेन के अतीत को सजीव बनाए रखने का प्रयास किया। उनके कार्यों के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि स्कोरोपाडस्की परिवार की ऐतिहासिक चेतना और योगदान आने वाली पीढ़ियों तक भी पहुँचा।
==व्यक्तिगत जीवन==
===परिवार===
[[File:Skoropadskiy family.jpg|thumb|हेटमैन के निर्वासन के बाद स्कोरोपाडस्की परिवार]]
11 जनवरी 1898 को [[सेंट पीटर्सबर्ग]] में पावलो पेट्रोविच स्कोरोपाडस्की ने [[रूसी साम्राज्य|रूसी]] कुलीन परिवार से संबंध रखने वाली एलेक्जेंड्रा पेट्रोवना डर्नोवो के साथ विवाह किया। एलेक्जेंड्रा एक प्रतिष्ठित वंश से थीं—वे प्रसिद्ध रूसी सैनिक और राजनेता प्योत्र पावलोविच डर्नोवो की पुत्री थीं, जबकि उनकी माता राजकुमारी मारिया वासिलियेवना कोचुबे यूक्रेनी मूल के सुप्रसिद्ध कोचुबे कुल से संबंधित थीं। इस प्रकार यह वैवाहिक संबंध केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो प्रभावशाली कुलों के सांस्कृतिक और सामाजिक संगम का प्रतीक भी था।
इस दंपति का पारिवारिक जीवन समृद्ध और विस्तृत रहा, जिसमें उनके छह संतानों ने जन्म लिया। उनकी ज्येष्ठ पुत्री मारिया (1898–1959) थीं, जिनके पश्चात येलिज़ावेता (1899–1976) का जन्म हुआ। उनके पुत्र पेट्रो (1900–1956) ने भी पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ाया। डैनिलो (1904–1957) विशेष रूप से उल्लेखनीय रहे, जिन्होंने विदेशों में हेटमैनवादी राजशाही आंदोलन के एक प्रमुख नेता के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके एक अन्य पुत्र पावलो (1915–1918) का जीवन अल्पकालिक रहा।{{sfn|Ott-Skoropadska|2013|p=19}} सबसे छोटी संतान ओलेना (1919–2014) थीं, जिन्होंने दीर्घ जीवन जीते हुए अपने परिवार की ऐतिहासिक विरासत को संजोने और उसे अभिव्यक्त करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस प्रकार, स्कोरोपाडस्की का पारिवारिक जीवन भी उनके राजनीतिक और ऐतिहासिक जीवन की भाँति विविधता, परंपरा और गहन सांस्कृतिक संबंधों से परिपूर्ण रहा।
===जातीय संबद्धता===
पावलो पेट्रोविच स्कोरोपाडस्की का परिवार बचपन से ही रूसी समाज में पूर्णतः समाहित हो चुका था और स्वयं को ‘लघु रूसी’ अथवा व्यापक अखिल रूसी राष्ट्र का अंग मानता था।{{sfn|Savchenko|2008|p=8}} यह दृष्टिकोण उस समय के साम्राज्यवादी परिवेश और सामाजिक संरचना का स्वाभाविक परिणाम था, जिसमें विभिन्न जातीय पहचानें एक बड़े राजनीतिक ढाँचे के भीतर विलीन हो जाती थीं।
सेंट पीटर्सबर्ग स्थित पेज कोर में अपने प्रारंभिक वर्षों के दौरान स्कोरोपाडस्की ने न केवल कठोर सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया, बल्कि वे रूसी संस्कृति और भाषा से भी गहराई से प्रभावित हुए। इस प्रभाव ने उनके व्यक्तित्व और विचारधारा को इस प्रकार आकार दिया कि वे उस समय के अनेक अन्य यूक्रेनी राजनीतिक नेताओं से भिन्न दिखाई देने लगे, जो राष्ट्रीय पहचान और स्वायत्तता के प्रश्न पर अधिक केंद्रित थे। अपने संस्मरणों में, उन्होंने लिखा:
{{quote| उन्हें रूसी भाषा से गहरा लगाव है, जबकि उनके अनुसार अधिकांश यूक्रेनी इसे अपनाने से हिचकिचाते हैं, या कम से कम ऐसा प्रदर्शित करते हैं। उन्हें मध्य रूस, विशेषतः मॉस्को, के प्रति विशेष आकर्षण था—एक ऐसा भाव, जिसे वे यूक्रेनी समाज में प्रायः अनुपस्थित पाते थे। वे रूस के उज्ज्वल भविष्य में भी विश्वास रखते थे, किंतु इस शर्त के साथ कि उसका पुनर्निर्माण नई और न्यायपूर्ण नींव पर किया जाए। उनके विचार में ऐसा रूस होना चाहिए, जहाँ उसके सभी घटकों को समान अधिकार प्राप्त हों और निर्णय-प्रक्रिया में सबकी समान भागीदारी सुनिश्चित हो। वे उस व्यवस्था के आलोचक थे, जिसमें कुछ मॉस्को केंद्रित समूह यूक्रेन को एक अधीनस्थ क्षेत्र के रूप में देखते थे—मानो कोई स्वामी अपने सेवक को देखता हो। वे स्वीकार करते हैं कि अधिकांश यूक्रेनी इस प्रकार के भविष्य में विश्वास नहीं करते थे, जिससे उनके और समकालीन यूक्रेनी राष्ट्रवादी दृष्टिकोण के बीच का अंतर और भी स्पष्ट हो जाता है।}}
निकोलस द्वितीय के पदत्याग और उसी कालखंड में यूक्रेनी राष्ट्रीय चेतना के तीव्र उभार ने पावलो पेट्रोविच स्कोरोपाडस्की के भीतर अपनी यूक्रेनी और कोसैक विरासत को नए दृष्टिकोण से देखने की प्रेरणा जगाई। यह परिवर्तन केवल बाहरी परिस्थितियों का परिणाम नहीं था, बल्कि उनके भीतर चल रहे एक गहरे आत्ममंथन का भी संकेत था। मार्च 1917 में अपनी पत्नी को लिखे एक पत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से यह इच्छा व्यक्त की कि उनके पुत्र डैनिलो को यूक्रेनी भाषा सिखाई जाए, और उन्होंने स्वयं को “एक यूक्रेनी बनाने” की अपनी योजना का भी उल्लेख किया। इतिहासकारों के अनुसार, यह कथन संभवतः जातीय पहचान से अधिक उनके उभरते राजनीतिक झुकाव को दर्शाता था।{{sfn|Papakin|2003|p=38}}
फिर भी, उनके विचारों और व्यवहार में यह परिवर्तन तत्काल और पूर्णतः स्पष्ट नहीं था। अगस्त 1917 में जब लावर कोर्निलोव ने उन्हें अपने अधीन दो डिवीजनों के यूक्रेनीकरण का आदेश दिया, तब स्कोरोपाडस्की ने प्रारंभ में इस निर्णय के प्रति अनिच्छा प्रकट की। उन्हें आशंका थी कि इस प्रकार का पुनर्गठन चल रहे युद्ध प्रयासों को कमजोर कर सकता है और सैन्य एकता को प्रभावित कर सकता है।{{sfn|Skoropadsky|2020}}{{sfn|Papakin|2003|p=93}} इस प्रकार, उनके व्यक्तित्व में उस समय एक स्पष्ट द्वंद्व दिखाई देता है—एक ओर उभरती राष्ट्रीय पहचान की स्वीकृति, और दूसरी ओर सैन्य कर्तव्य एवं व्यावहारिक चिंताओं के प्रति उनकी निष्ठा।
यूक्रेनी राष्ट्रवादी वर्गों में पावलो पेट्रोविच स्कोरोपाडस्की को प्रायः अत्यधिक रूस समर्थक दृष्टिकोण रखने वाला माना जाता था, जिसके कारण वे आलोचना और अविश्वास के पात्र बने रहे। उनकी नीतियों और विचारों में रूसी प्रभाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता था, जिससे यूक्रेनी स्वतंत्रता के पक्षधर समूह उन्हें संदेह की दृष्टि से देखते थे।
वहीं दूसरी ओर, विडंबना यह रही कि कुछ प्रमुख रूसी नेताओं ने भी उन्हें अपने पक्ष का नहीं माना। गैलिसिया और कीव के मेट्रोपॉलिटन एंटनी ख्रापोवित्स्की सहित कई रूसी विचारकों ने उन्हें रूस का गद्दार अथवा अलगाववादी कहकर उपहास का विषय बनाया।{{sfn|Savchenko|2008|p=197}} इसी प्रकार, श्वेत आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक एंटोन डेनिकिन तथा कीव से स्टेट ड्यूमा के सदस्य वासिली शुल्गिन भी उनके प्रति इसी प्रकार की आलोचनात्मक धारणा रखते थे।{{sfn|Papakin|2003|p=66}}
==सम्मान==
* [[File:Order of Saint Anna ribbon bar.svg|30px|link=Order of St. Anna]] सेंट अन्ना का आदेश, चौथा डिग्री, 1904
* [[File:Order of Saint Anna ribbon bar.svg|30px|link=Order of St. Anna]] सेंट अन्ना का तीसरा डिग्री पदक, तलवार और धनुष सहित, 1904
* [[File:RUS Imperial Order of Saint Stanislaus ribbon.svg|30px|link=Order of St. Stanislav]] सेंट स्टैनिस्लास द्वितीय श्रेणी का ऑर्डर, तलवारों सहित, 1905
* [[File:RUS Imperial Order of Saint Vladimir ribbon.svg|30px|link=Order of St. Vladimir]] सेंट व्लादिमीर का आदेश , तलवार और धनुष के साथ चौथा डिग्री, 1905
* [[File:Order of Glory Ribbon Bar.svg|30px|link=Golden Weapon for Bravery]] वीरता का स्वर्णिम हथियार , 1905
* [[File:Order of Saint Anna ribbon bar.svg|30px|link=Order of St. Anna]] सेंट ऐनी का द्वितीय श्रेणी का पदक, तलवारों सहित, 1906
* [[File:RUS Imperial Order of Saint Vladimir ribbon.svg|30px|link=Order of St. Vladimir]] सेंट व्लादिमीर का आदेश , तृतीय श्रेणी, 1900
* [[File:RUS Order of Saint George 4th class ribbon 2000.svg|30px|link=Order of Saint George (Russia)]] सेंट जॉर्ज का आदेश , चौथी श्रेणी,
* [[File:PRU Roter Adlerorden BAR.svg|30px|link= Order of the Red Eagle]] रेड ईगल का ऑर्डर , 1918 (प्रशिया)
==विरासत==
[[File:Skoropadsky coin 2 23 reverse.png|thumb|150px|2023 में जारी किया गया स्कोरोपाडस्की स्मारक सिक्का]]
पावलो पेट्रोविच स्कोरोपाडस्की की ऐतिहासिक भूमिका और योगदान की स्मृति आज भी यूक्रेन के सार्वजनिक जीवन में विभिन्न रूपों में जीवित है। उनके सम्मान में यूक्रेन के कुछ नगरों में सड़कों का नामकरण किया गया है, जो उनके प्रति सम्मान और ऐतिहासिक स्वीकृति का प्रतीक है।
इसके अतिरिक्त, वर्ष 2023 में उनके जन्म की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर यूक्रेन के राष्ट्रीय बैंक ने 2 [[युक्रेनियाई रिव्निया|ह्रीवनी मूल्य का एक स्मारक सिक्का]] जारी किया।<ref>{{cite web |title=Пам'ятна монета "Павло Скоропадський" |url=https://coins.bank.gov.ua/pam-atna-moneta-pavlo-skoropads-kii-/a-614.html |publisher=यूक्रेन का राष्ट्रीय बैंक |access-date=31 मई 2023 |language=Ukrainian}}</ref> यह न केवल उनके व्यक्तित्व और योगदान को श्रद्धांजलि देने का एक माध्यम था, बल्कि उनके ऐतिहासिक महत्व को नई पीढ़ियों तक पहुँचाने का भी एक प्रयास था। इस प्रकार, स्कोरोपाडस्की की विरासत केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह आज भी स्मृतियों और प्रतीकों के रूप में जीवित है।
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
== ग्रन्थसूची ==
{{Refbegin}}
* {{Cite book |last=स्कोरोपाडस्की |first=पावलो |title=Воспоминания. Конец 1917 г. – декабрь 1918 г. |language=ru |trans-title=Memories. The end of 1917 - दिसंबर 1918.|publisher=Издательство «Фолио»|year=2020}}
* {{Cite book |last=पापाकिन |first=हेओरही |title=Павло Скоропадський: патріот, державотворець, людина |year=2003 |isbn=966-8225-10-4 |language=uk |trans-title=Pavlo Skoropadsky: patriot, statesman and man}}
* {{cite book |last=प्रित्साक |first=ओमेलजान |date=1955 |title=Рід Скоропадських (Історично-ґенеалоґічна студія) |trans-title=The Skoropadsky Line (Historical-genetical study) |language=uk |location=न्यूयॉर्क:|publisher=बुलावा प्रकाशन निगम।}}
* {{cite book |last=सवचेंको |first=विक्टर|date=2008 |title= Павло Скоропадський - Останній Гетьман України|trans-title= Pavlo Skoropadsky - the last hetman of Ukraine|language=uk |isbn= 978-966-03-4058-9}}
* {{cite book |last=ओट-स्कोरोपाडस्का |first=ओलेना |date=2013 |title=Остання з роду Скоропадських |trans-title= The last of the Skoropadsky line|language=uk |isbn= 978-966-8853-33-3}}
* {{cite book |last=रीएंट |first=ऑलेक्ज़ेंडर |date=2003 |title=Скоропадський. Історичні нариси |trans-title= Skoropadsky. Historical notes|language=uk |isbn= 966-7217-82-5}}
* {{cite book |last=वॉन हेगन|first=मार्क |date=2005 |title="I love Russia and/but I want Ukraine", or How a Russian General Became Hetman of the Ukrainian State, 1917-1918|language=en}}
* {{cite book |last=-हे-निज़निक|first=पावलो |date=2019 |title=Павло Скоропадський і власний штаб гетьмана всієї України: боротьба за владу і державність |trans-title=Pavlo Skoropadsky and the staff of the Hetman of all Ukraine: the fight for power and statehood|language=uk |isbn= 978-617-692-517-0}}
* {{cite book |last=मायखाइलोवा |first=ओल्हा |date=2018 |title=Павло Скоропадський - «Крім негідників, усі підуть за мною» |trans-title=Pavlo Skoropadsky - "Besides the scoundrels, everyone will follow me" |language=uk |isbn= 978-966-922-132-2}}
{{Refend}}
==बाहरी कड़ियाँ==
{{Commonscatinline}}
* [https://web.archive.org/web/20070927175934/http://www.ukrop.com/ua/encyclopaedia/100names/6098.html Biography] {{in lang|uk}}
* Secret Police of Hetman Skoropadsky, The Papers of the Provisional Government of Ukraine, 1918 ({{langx|ru|Тайная полиция гетмана Скоропадского. Документы осведомительного отдела при киевском градоначальнике}}, रूसी का रोमनकरण
: Tainaia politsiia getmana Skoropadskogo. Dokumenty osvedomitelnogo otdela pri kievskom gradonachalnike) from East View Information Services[https://www.eastview.com/resources/e-collections/research-collections-ukrainian-studies/] हेटमैन स्कोरोपाडस्की की गुप्त पुलिस]
* यूक्रेन के विश्वकोश से [https://www.encyclopediaofukraine.com/pages/S/K/SkoropadskyPavlo.htm जीवनी], खंड. 4 (1993)
{{Authority control}}
[[श्रेणी:1873 में जन्मे लोग]]
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कानीवाड़ा
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'''कानीवाड़ा'''<ref>{{Cite web |title=Kaniwara Village Population - Ahore - Jalor, Rajasthan |url=https://www.census2011.co.in/data/village/89230-kaniwara-rajasthan.html |access-date=2026-05-17 |website=www.census2011.co.in}}</ref><ref>{{Cite web |title=Kaniwara Village (Pincode: 343001), Ahore, Jalore {{!}} Rajasthan {{!}} – Population, Area, Nearby Villages, Assembly & Parliament Constituency |url=https://villageinfo.org/village/89230 |access-date=2026-05-17 |website=villageinfo.org}}</ref> भारत के राजस्थान राज्य के जालोर जिले की आहोर तहसील में स्थित एक गाँव है। यह अपने ऐतिहासिक और अनूठे [[कानीवाड़ा हनुमान मंदिर]] के लिए व्यापक रूप से प्रसिद्ध है ।<ref>{{Cite web |title=कानीवाड़ा का 800 साल पुराना चमत्कारी हनुमानजी मंदिर, जानिए किस दिन पूरी होती है मनोकामना |url=https://www.patrika.com/jalore-news/hanuman-mandir-800-years-miraculous-hanuman-ji-temple-in-kaniwara-rajasthan-8490434 |access-date=2025-11-15 |website=Patrika News |language=hi}}</ref><ref>{{Cite web |last=Live |first=A. B. P. |date=2023-02-08 |title=कानीवाड़ा का चमत्कारी मंदिर, जहां बिना छत के रहते हैं हनुमान भगवान |url=https://www.abplive.com/lifestyle/religion/rajasthan-jalore-kaniwada-hanuman-mandir-jalore-dalit-priests-get-worship-done-unique-temple-without-roof-2328991 |access-date=2025-11-15 |website=ABP News |language=hi}}</ref><ref>{{Cite news |title=800 साल पुराना है जालोर का यह हनुमान मंदिर, आस्था और चमत्कार का है संगम, सामाजिक एकता का भी है प्रतीक |url=https://hindi.news18.com/news/dharm/jalore-kaniwada-hanuman-temple-is-800-years-old-confluence-of-faith-and-miracles-pm-modi-also-praised-social-unity-local18-9170844.html |archive-url=https://web.archive.org/web/20250413033034/https://hindi.news18.com/news/dharm/jalore-kaniwada-hanuman-temple-is-800-years-old-confluence-of-faith-and-miracles-pm-modi-also-praised-social-unity-local18-9170844.html |archive-date=13 अप्रैल 2025 |access-date= |work=News18 हिंदी |language=hi-IN|last=Bhati|first=Sonali|date=12 अप्रैल 2025}}</ref><ref>{{Cite web |last=डेस्क |first=डीएनए हिंदी वेब |title=Hanuman Mandir Jalore: राजस्थान के इस हनुमान मंदिर की कभी नहीं बन सकी छत, जानें क्यों ? |url=https://www.dnaindia.com/hindi/spiritual/report-jalore-kaniwada-hanuman-mandir-rajasthan-never-made-roof-know-reason-intresting-fact-4074779 |access-date=2025-11-15 |website=DNA Hindi |language=hi}}</ref>
==संदर्भ==
[[श्रेणी:जालोर जिले के दर्शनीय स्थल]]
[[श्रेणी:जालौर ज़िले के गाँव]]
[[श्रेणी:विकिडेटा पर अनुपलब्ध निर्देशांक]]
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सदस्य वार्ता:ArnavSingh979
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चाहर धर्मेंद्र
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स्ट्रिक्स टेलीविजन
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'''STRIX टेलीविजन''' [[स्वीडन|एक स्वीडिश]] [[दूरदर्शन|टेलीविजन]] प्रोडक्शन कंपनी है जिसकी स्थापना 1988 में हुई थी। स्वीडिश मूल कंपनी, जिसका स्वामित्व उस समय एमटीजी के पास था, के कार्यालय [[ऐम्स्टर्डैम|एम्स्टर्डम]], [[कोपनहेगन|कोपेनहेगन]], [[ओस्लो]], [[तेल अवीव]] और [[प्राग]] में थे। वर्तमान में स्ट्रिक्स नाम की दो स्वतंत्र कंपनियां हैं: स्वीडन में [https://strix.se/ स्ट्रिक्स टेलीविजन] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20240227173104/https://strix.se/ |date=27 फ़रवरी 2024 }} और [[नॉर्वे]] में [https://bergehus.thisisnice.as/ स्ट्रिक्स टेलीविजन] {{Dead link|date=अक्तूबर 2026 |bot=InternetArchiveBot }}, दोनों का स्वामित्व फ्रीमेंटल के पास है।
वह "सर्वाइवर" नामक रियलिटी टेलीविजन फॉर्मेट में एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय योगदानकर्ता हैं। 1997 से, स्ट्रिक्स [[यूरोप]] भर में लगातार बढ़ते दर्शकों के लिए एक्सपेडिशन रॉबिन्सन का निर्माण कर रहा है। कंपनी ने ''द फार्म'', ''द बार'' और हरेम जैसे अन्य रियलिटी शो प्रारूपों का विकास, निर्माण और वितरण भी किया।<ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2001/tv/news/swedening-the-tv-pot-1117851539/|title=Swedening the TV pot|last=Marlene Edmunds|date=August 21, 2001|website=[[Variety (magazine)|Variety]]}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2003/tv/news/reality-adventure-show-to-air-in-greece-1117885625/|title=Reality adventure show to air in Greece|last=Marlene Edmunds|date=May 5, 2003|website=[[Variety (magazine)|Variety]]}}</ref>
दुनिया भर में STRIX ''सर्वाइवर'' गेम्स:
* ''[[Survivor (franchise)|उत्तरजीवी]]''
* ''[[Expedition Robinson|रॉबिन्सन का अभियान]]''
== सन्दर्भ ==
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सदस्य:SAGAR SURYAVANSHI JAITHAL/प्रयोगपृष्ठ
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SAGAR SURYAVANSHI JAITHAL
938876
One Problem, Many Perspectives लेख निर्माण
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text/x-wiki
== एक समस्या, अनेक दृष्टिकोण: वैश्विक सहयोग द्वारा समस्या-समाधान की पहल ==
'''One Problem, Many Perspectives''': यह एक प्रारंभिक विचार-प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से वास्तविक समस्याओं को साझा करने, विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के ज्ञान एवं अनुभव का उपयोग करने और संभावित समाधानों की खोज में सहयोग को प्रोत्साहित करने वाली एक पहल की रूपरेखा प्रस्तुत करना है।
== 1. प्रस्तावना ==
इंटरनेट ने विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों, भाषाओं, व्यवसायों और शैक्षणिक पृष्ठभूमियों के लोगों के बीच संवाद तथा सूचना के आदान-प्रदान की संभावनाओं का विस्तार किया है। डिजिटल संचार माध्यमों की सहायता से व्यक्ति अपनी जानकारी, अनुभव, विचार और प्रश्न व्यापक समुदाय तक पहुँचा सकता है।
इस परिस्थिति में एक विचार विचारणीय है: क्या इन माध्यमों का अधिक व्यवस्थित उपयोग लोगों की वास्तविक समस्याओं को समझने, संबंधित ज्ञान तक पहुँचने तथा संभावित समाधानों की खोज में परस्पर सहयोग बढ़ाने के लिए किया जा सकता है?
इस प्रस्तावित पहल का मूल विचार यह है कि प्रत्येक इच्छुक व्यक्ति अपनी किसी एक प्रमुख समस्या को स्पष्ट रूप से साझा करे और दूसरे लोग अपने ज्ञान, अनुभव, शोध अथवा विशेषज्ञता के आधार पर उसमें योगदान देने का प्रयास करें।
इसका उद्देश्य समस्याओं को केवल सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाना नहीं, बल्कि जहाँ संभव हो, समस्या की पहचान से लेकर संभावित समाधान के मूल्यांकन और उससे प्राप्त सीख तक की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करना है।
== 2. विचार की पृष्ठभूमि ==
समस्याओं का समाधान खोजने के लिए अलग-अलग व्यक्तियों तथा समूहों के ज्ञान और क्षमताओं का उपयोग करना कोई नई अवधारणा नहीं है। सामूहिक बुद्धिमत्ता, जनसहभागिता द्वारा कार्य-संपादन और मुक्त नवाचार जैसी अवधारणाओं में भी बाहरी व्यक्तियों अथवा व्यापक समुदाय के योगदान का अध्ययन किया गया है।
प्रस्तावित पहल इन्हीं व्यापक विषयों से संबंधित है। इसका प्रारंभिक जोर किसी एक विशिष्ट वैज्ञानिक या व्यावसायिक समस्या पर नहीं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को अपनी वास्तविक समस्याएँ साझा करने और परस्पर सहयोग के लिए प्रेरित करने पर है।
यहाँ प्रस्तुत कार्यप्रणाली एक प्रस्ताव है। इसकी प्रभावशीलता, व्यापकता और विशिष्टता का निर्धारण वास्तविक क्रियान्वयन, उपलब्ध प्रमाणों और परिणामों के आधार पर किया जाना होगा।
== 3. मूल अवधारणा ==
इस पहल का केंद्रीय विचार है कि कोई व्यक्ति अपनी समस्या को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करे और अन्य इच्छुक व्यक्ति अपने ज्ञान तथा अनुभव के आधार पर उसमें योगदान दें।
उदाहरण के लिए, किसी विद्यार्थी को अध्ययन की उपयुक्त विधि खोजने में कठिनाई हो सकती है। कोई शिक्षक सीमित संसाधनों में शिक्षण सुधारने का तरीका खोज रहा हो सकता है। कोई किसान कृषि संबंधी चुनौती का सामना कर सकता है। कोई उद्यमी अपनी कार्यप्रणाली की लागत कम करने के विकल्प खोज सकता है।
इन परिस्थितियों में समस्या से संबंधित अन्य लोगों का अनुभव उपयोगी हो सकता है। हालाँकि, केवल समस्या साझा करने से समाधान की गारंटी नहीं मिलती।
इस प्रस्ताव के अनुसार, समस्या साझा करना सहयोग की शुरुआत हो सकती है। संभावित समाधान खोजने के लिए उसके बाद प्रासंगिक जानकारी, संवाद, मूल्यांकन और आवश्यकतानुसार व्यावहारिक परीक्षण की आवश्यकता होगी।
=== 3.1. मूल सूत्र ===
''समस्या की पहचान → समस्या का स्पष्ट विवरण → ज्ञान एवं अनुभव का आदान-प्रदान → संभावित समाधानों का मूल्यांकन → आवश्यकतानुसार परीक्षण → परिणामों से सीख।''
यह सूत्र प्रस्तावित कार्यप्रणाली का संक्षिप्त रूप है, न कि किसी स्थापित मॉडल का दावा।
== 4. पहल के उद्देश्य ==
इस प्रस्ताव के अंतर्गत निम्नलिखित उद्देश्य निर्धारित किए जा सकते हैं:
# लोगों को अपनी वास्तविक समस्याओं को स्पष्ट और व्यवस्थित रूप से व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करना।
# विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच ज्ञान, अनुभव और उपयोगी जानकारी के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।
# समस्याओं के समाधान में अलग-अलग दृष्टिकोणों और विशेषज्ञताओं के संभावित योगदान को पहचानना।
# उपलब्ध सुझावों की विश्वसनीयता, व्यवहार्यता और उपयुक्तता के मूल्यांकन को महत्त्व देना।
# जहाँ संभव हो, संभावित समाधानों के परीक्षण और परिणामों के प्रलेखन को प्रोत्साहित करना।
# किसी समस्या से प्राप्त उपयोगी सीख को दूसरे लोगों तक पहुँचाने के अवसर बढ़ाना।
# डिजिटल संवाद को केवल सूचना साझा करने तक सीमित न रखकर समाधान-केंद्रित सहयोग की दिशा में विकसित करने की संभावनाओं का परीक्षण करना।
== 5. लक्षित सहभागी ==
प्रस्तावित पहल किसी विशेष पेशे, आयु वर्ग, देश अथवा शैक्षणिक योग्यता तक सीमित नहीं होगी। इसमें भागीदारी स्वैच्छिक होगी।
संभावित प्रतिभागियों में निम्नलिखित समूह शामिल हो सकते हैं:
* विद्यार्थी और शिक्षक।
* शोधकर्ता तथा वैज्ञानिक।
* किसान और कृषि विशेषज्ञ।
* उद्यमी तथा व्यवसाय से जुड़े लोग।
* तकनीकी विशेषज्ञ।
* स्वास्थ्य अन्य क्षेत्रों के योग्य पेशेवर।
* सामाजिक कार्यकर्ता और सामुदायिक संगठन।
* संस्थाओं से जुड़े इच्छुक व्यक्ति।
* विभिन्न क्षेत्रों के सामान्य नागरिक।
किसी व्यक्ति का योगदान उसकी औपचारिक योग्यता तक सीमित नहीं होना चाहिए। व्यावहारिक अनुभव भी उपयोगी हो सकता है। इसके साथ ही, प्रत्येक सुझाव की उपयुक्तता उसके विषय, प्रमाण और परिस्थितियों के अनुसार जाँची जानी चाहिए।
== 6. समस्याओं के संभावित क्षेत्र ==
प्रस्तावित पहल में विभिन्न प्रकार की समस्याओं को शामिल किया जा सकता है।
=== 6.1. शिक्षा ===
शिक्षण विधियों, अध्ययन की रणनीतियों, शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता और सीखने में आने वाली कठिनाइयों से संबंधित प्रश्न।
=== 6.2. कृषि ===
खेती की कार्यप्रणाली, संसाधनों के उपयोग, कृषि संबंधी जानकारी तथा स्थानीय परिस्थितियों से जुड़ी चुनौतियाँ।
=== 6.3. पर्यावरण ===
जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन, प्रदूषण कम करने और पर्यावरण के प्रति जागरूकता से जुड़े प्रश्न।
=== 6.4. तकनीक और विज्ञान ===
तकनीकी बाधाओं, वैज्ञानिक प्रश्नों, उपकरणों के उपयोग और संभावित तकनीकी समाधानों से संबंधित समस्याएँ।
=== 6.5. रोजगार और व्यावसायिक विकास ===
कौशल विकास, कार्यप्रणाली में सुधार, पेशेवर सीख और रोजगार से संबंधित व्यावहारिक चुनौतियाँ।
=== 6.6. व्यवसाय और उद्यमिता ===
संसाधनों के उपयोग, प्रक्रियागत सुधार, ग्राहक अनुभव, लागत प्रबंधन तथा नवाचार से जुड़ी समस्याएँ।
=== 6.7. सामाजिक और सामुदायिक समस्याएँ ===
स्थानीय सुविधाओं, सामाजिक सहभागिता, सार्वजनिक जागरूकता और सामुदायिक स्तर पर सुधार के अवसरों से संबंधित प्रश्न।
=== 6.8. दैनिक जीवन ===
समय प्रबंधन, उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग, संगठन और अन्य सामान्य जीवन संबंधी चुनौतियाँ।
ये क्षेत्र केवल उदाहरण हैं। प्रस्तावित पहल की प्राथमिकताएँ उसके वास्तविक उद्देश्यों, प्रतिभागियों की आवश्यकताओं और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर तय की जा सकती हैं।
== 7. प्रस्तावित कार्यप्रणाली ==
पहल को सरल और समझने योग्य बनाए रखने के लिए इसकी प्रक्रिया पाँच चरणों में व्यवस्थित की जा सकती है।
=== 7.1. पहला चरण: समस्या का स्पष्ट विवरण ===
समस्या साझा करने वाला व्यक्ति बताए कि वास्तविक कठिनाई क्या है, उसका प्रभाव किस प्रकार पड़ रहा है और अब तक कौन-से प्रयास किए गए हैं।
उदाहरण के लिए, ''शिक्षा में सुधार की आवश्यकता है'' की तुलना में ''सीमित शिक्षण संसाधनों में विद्यार्थियों की गणित संबंधी बुनियादी समझ बेहतर करने के लिए कौन-सी विधियाँ उपयोगी हो सकती हैं?'' अधिक स्पष्ट प्रश्न है।
स्पष्ट विवरण से दूसरे लोगों को समस्या समझने और प्रासंगिक सुझाव देने में सहायता मिल सकती है।
=== 7.2. दूसरा चरण: ज्ञान और अनुभव का योगदान ===
अन्य सहभागी उपलब्ध जानकारी, व्यावहारिक अनुभव, संबंधित शोध या विशेषज्ञता के आधार पर सुझाव दे सकते हैं।
योगदान देने वाले व्यक्ति को जहाँ संभव हो, विश्वसनीय स्रोत प्रस्तुत करने चाहिए। विषय से संबंधित अनिश्चितताओं और अपनी विशेषज्ञता की सीमाओं को स्पष्ट करना भी उपयोगी होगा।
=== 7.3. तीसरा चरण: सुझावों का मूल्यांकन ===
प्राप्त सभी सुझावों को समान रूप से विश्वसनीय नहीं माना जाना चाहिए।
समाधान की उपयोगिता पर विचार करते समय निम्नलिखित बातों की जाँच की जा सकती है:
* उपलब्ध प्रमाण और स्रोत।
* समाधान की व्यावहारिकता।
* संभावित लाभ तथा जोखिम।
* आवश्यक संसाधन और लागत।
* संबंधित व्यक्ति की परिस्थितियाँ।
* विशेषज्ञ की सहायता की आवश्यकता।
=== 7.4. चौथा चरण: परीक्षण अथवा क्रियान्वयन ===
जहाँ सुरक्षित, उचित और संभव हो, संभावित समाधान को आजमाया जा सकता है।
परीक्षण की विधि समस्या की प्रकृति पर निर्भर करेगी। कुछ समस्याओं में छोटे व्यवहारगत परिवर्तन पर्याप्त हो सकते हैं, जबकि अन्य के लिए विशेषज्ञ, उपकरण, वित्तीय संसाधन या संस्थागत सहयोग की आवश्यकता हो सकती है।
सभी समस्याओं का परीक्षण सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त सुझावों के आधार पर स्वयं करना उचित नहीं है।
=== 7.5. पाँचवाँ चरण: परिणाम और सीख ===
समस्या साझा करने वाला व्यक्ति बताए कि सुझाए गए विकल्पों में से कौन-से उपयोगी रहे, किनमें कठिनाई आई और क्या परिणाम प्राप्त हुए।
यदि कोई समाधान अपेक्षित परिणाम न दे, तो उस अनुभव को भी उचित संदर्भ के साथ दर्ज किया जा सकता है।
इससे भविष्य में दूसरे लोगों को संभावित विकल्पों की उपयोगिता समझने में सहायता मिल सकती है।
== 8. सोशल मीडिया की भूमिका ==
प्रस्तावित पहल की प्रारंभिक गतिविधियों के लिए मौजूदा सोशल मीडिया मंचों का उपयोग किया जा सकता है।
इस व्यवस्था में किसी नए डिजिटल मंच की स्थापना प्रारंभिक अनिवार्यता नहीं होगी।
सहभागी अपने उपलब्ध सोशल मीडिया पर समस्याएँ साझा कर सकते हैं, प्रासंगिक विशेषज्ञों से संवाद कर सकते हैं और उपयोगी जानकारी के स्रोत उपलब्ध करा सकते हैं।
हालाँकि, सोशल मीडिया पर सामग्री की दृश्यता, उपयोगकर्ताओं की भागीदारी और प्राप्त प्रतिक्रियाओं की गुणवत्ता अलग-अलग हो सकती है। कोई उपयोगी प्रश्न पर्याप्त लोगों तक पहुँचेगा, इसकी गारंटी नहीं है।
इसके अतिरिक्त, विभिन्न मंचों की नीतियाँ, गोपनीयता संबंधी व्यवस्थाएँ तथा सामग्री के प्रबंधन के नियम अलग हो सकते हैं।
इसलिए पहल को किसी एक मंच पर निर्भर रखने के बजाय, जहाँ उपयुक्त हो, विभिन्न माध्यमों के उपयोग की संभावना पर विचार किया जा सकता है।
== 9. संभावित उपयोगिता ==
प्रस्तावित पहल से कई संभावित लाभ प्राप्त हो सकते हैं।
=== 9.1. विविध दृष्टिकोणों तक पहुँच ===
किसी समस्या पर अलग-अलग पृष्ठभूमियों के लोग विचार प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे समस्या को समझने के नए तरीके सामने आ सकते हैं।
=== 9.2. अनुभवों का आदान-प्रदान ===
किसी व्यक्ति का व्यावहारिक अनुभव दूसरे व्यक्ति को अपने विकल्प पहचानने में सहायता कर सकता है।
=== 9.3. विशेषज्ञों से संवाद के अवसर ===
स्पष्ट समस्या-विवरण संबंधित क्षेत्र के जानकार व्यक्तियों का ध्यान आकर्षित कर सकता है।
=== 9.4. संभावित समाधानों की पहचान ===
लोगों के सुझावों से ऐसे विकल्प सामने आ सकते हैं जिन पर समस्या साझा करने वाले व्यक्ति ने पहले विचार नहीं किया हो।
=== 9.5. साझा सीख का विकास ===
जब उपयोगी अनुभव उचित संदर्भ के साथ साझा किए जाते हैं, तो उनसे अन्य लोग भी सीख सकते हैं।
ये संभावित लाभ हैं। इन्हें इस पहल के प्रमाणित परिणाम के रूप में तभी प्रस्तुत किया जाना चाहिए जब वास्तविक क्रियान्वयन और विश्वसनीय साक्ष्यों से उनका समर्थन हो।
== 10. प्रमुख चुनौतियाँ और सीमाएँ ==
किसी व्यापक ऑनलाइन सहयोग पहल के क्रियान्वयन में कई चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं।
=== 10.1. सूचना की गुणवत्ता ===
ऑनलाइन प्राप्त सुझाव अपूर्ण, गलत अथवा भ्रामक हो सकते हैं। लोकप्रियता को किसी दावे की सत्यता का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
=== 10.2. प्रासंगिक प्रतिभागियों तक पहुँच ===
किसी समस्या पर पर्याप्त संख्या में प्रतिक्रिया मिलना और उचित विशेषज्ञता वाले व्यक्तियों की भागीदारी मिलना अलग-अलग बातें हैं।
=== 10.3. चर्चा से कार्रवाई तक पहुँचना ===
किसी समस्या पर विचार-विमर्श होने से उसका समाधान अपने आप नहीं हो जाता। कुछ समाधान समय लेने वाले हो सकते हैं।
=== 10.4. भाषा और पहुँच ===
भाषाई अंतर, इंटरनेट तक सीमित पहुँच तथा डिजिटल कौशल की असमानता भागीदारी को प्रभावित कर सकती है।
=== 10.5. अनावश्यक या अप्रासंगिक प्रतिक्रियाएँ ===
सार्वजनिक मंचों पर विषय से असंबंधित टिप्पणियाँ, प्रचारात्मक सामग्री और अनुपयोगी सुझाव भी प्राप्त हो सकते हैं।
=== 10.6. परिणामों की पुष्टि ===
किसी सहभागी का यह बताना कि समस्या हल हो गई, स्वयं में हर परिस्थिति में स्वतंत्र सत्यापन के समान नहीं है। दावों के प्रकार और महत्त्व के अनुसार उपयुक्त पुष्टि की आवश्यकता हो सकती है।
इन सीमाओं को ध्यान में रखकर पहल की कार्यप्रणाली और मूल्यांकन के मानदंड विकसित किए जाने चाहिए।
== 11. गोपनीयता, सुरक्षा और उत्तरदायित्व ==
समस्याएँ साझा करते समय प्रतिभागियों की निजता और सुरक्षा महत्त्वपूर्ण होगी।
प्रस्तावित पहल में निम्नलिखित सिद्धांत अपनाए जा सकते हैं:
* अनावश्यक व्यक्तिगत पहचान संबंधी जानकारी साझा करने से बचना।
* अन्य गोपनीय विवरण सार्वजनिक न करना।
* संभावित समाधान के लाभों के साथ उसके जोखिम और सीमाएँ भी बताना।
यह पहल पेशेवर सहायता का सार्वभौमिक विकल्प नहीं होगी। इसका उद्देश्य उपयोगी जानकारी तथा सहयोग की संभावनाएँ बढ़ाना होगा।
== 12. पहल से संबंधित प्रमुख प्रश्न ==
इस विचार को आगे विकसित करने के लिए निम्नलिखित प्रश्न उपयोगी हो सकते हैं:
# क्या लोग अपनी वास्तविक समस्याएँ सार्वजनिक रूप से साझा करने के लिए तैयार हैं?
# कौन-से प्रकार के समस्या-विवरण अधिक प्रासंगिक और उपयोगी प्रतिक्रियाएँ आकर्षित करते हैं?
# ऑनलाइन समुदायों में अलग-अलग पृष्ठभूमियों के लोगों का योगदान किस प्रकार उपयोगी बन सकता है?
# सुझावों की विश्वसनीयता और व्यवहार्यता का मूल्यांकन कैसे किया जा सकता है?
# सामाजिक मीडिया पर प्राप्त उपयोगी प्रतिक्रियाओं को वास्तविक कार्रवाई में बदलने में कौन-सी बाधाएँ आती हैं?
# किन परिस्थितियों में साझा अनुभव अन्य लोगों के लिए उपयोगी सिद्ध होते हैं?
# इस प्रकार की पहल के प्रभाव का विश्वसनीय मूल्यांकन कैसे किया जा सकता है?
# प्रतिभागियों की गोपनीयता बनाए रखते हुए परिणामों का प्रलेखन किस प्रकार किया जा सकता है?
इन प्रश्नों का उत्तर व्यवस्थित अध्ययन, प्रत्यक्ष अनुभव और विश्वसनीय प्रमाणों के आधार पर खोजा जाना चाहिए।
== 13. निष्कर्ष ==
''एक समस्या, अनेक दृष्टिकोण'' एक प्रस्तावित सहयोग पहल की रूपरेखा है। इसका केंद्रीय विचार यह है कि लोग अपनी वास्तविक समस्याएँ स्पष्ट रूप से साझा करें और दूसरे लोग अपने ज्ञान, अनुभव तथा विशेषज्ञता के आधार पर संभावित समाधानों की खोज में योगदान दें।
यह विचार सामूहिक बुद्धिमत्ता और नवाचार जैसे व्यापक विषयों से संबंधित है। इसकी व्यावहारिक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रतिभागियों के बीच सहयोग कितना सार्थक होता है, प्राप्त सुझाव कितने विश्वसनीय होते हैं और संभावित समाधान किस सीमा तक उपयोगी परिणाम देते हैं।
इसलिए शुरुआत में इसे एक परीक्षण योग्य प्रस्ताव के रूप में लेना उचित होगा। इसके परिणामों का मूल्यांकन करने और प्राप्त सीख के आधार पर कार्यप्रणाली में सुधार करने के बाद ही इसके व्यापक विस्तार पर विचार किया जाना चाहिए।
== संदर्भ ==
<references />
== आगे के अध्ययन के लिए ==
aem5kcqt7cut0lmtfdp77hw21bd9in1
6630497
6630496
2026-10-17T17:06:00Z
SAGAR SURYAVANSHI JAITHAL
938876
/* एक समस्या, अनेक दृष्टिकोण: वैश्विक सहयोग द्वारा समस्या-समाधान की पहल */ छोटा सा सुधार किया।
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wikitext
text/x-wiki
'''One Problem, Many Perspectives''': यह एक प्रारंभिक विचार-प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से वास्तविक समस्याओं को साझा करने, विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के ज्ञान एवं अनुभव का उपयोग करने और संभावित समाधानों की खोज में सहयोग को प्रोत्साहित करने वाली एक पहल की रूपरेखा प्रस्तुत करना है।
== 1. प्रस्तावना ==
इंटरनेट ने विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों, भाषाओं, व्यवसायों और शैक्षणिक पृष्ठभूमियों के लोगों के बीच संवाद तथा सूचना के आदान-प्रदान की संभावनाओं का विस्तार किया है। डिजिटल संचार माध्यमों की सहायता से व्यक्ति अपनी जानकारी, अनुभव, विचार और प्रश्न व्यापक समुदाय तक पहुँचा सकता है।
इस परिस्थिति में एक विचार विचारणीय है: क्या इन माध्यमों का अधिक व्यवस्थित उपयोग लोगों की वास्तविक समस्याओं को समझने, संबंधित ज्ञान तक पहुँचने तथा संभावित समाधानों की खोज में परस्पर सहयोग बढ़ाने के लिए किया जा सकता है?
इस प्रस्तावित पहल का मूल विचार यह है कि प्रत्येक इच्छुक व्यक्ति अपनी किसी एक प्रमुख समस्या को स्पष्ट रूप से साझा करे और दूसरे लोग अपने ज्ञान, अनुभव, शोध अथवा विशेषज्ञता के आधार पर उसमें योगदान देने का प्रयास करें।
इसका उद्देश्य समस्याओं को केवल सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाना नहीं, बल्कि जहाँ संभव हो, समस्या की पहचान से लेकर संभावित समाधान के मूल्यांकन और उससे प्राप्त सीख तक की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करना है।
== 2. विचार की पृष्ठभूमि ==
समस्याओं का समाधान खोजने के लिए अलग-अलग व्यक्तियों तथा समूहों के ज्ञान और क्षमताओं का उपयोग करना कोई नई अवधारणा नहीं है। सामूहिक बुद्धिमत्ता, जनसहभागिता द्वारा कार्य-संपादन और मुक्त नवाचार जैसी अवधारणाओं में भी बाहरी व्यक्तियों अथवा व्यापक समुदाय के योगदान का अध्ययन किया गया है।
प्रस्तावित पहल इन्हीं व्यापक विषयों से संबंधित है। इसका प्रारंभिक जोर किसी एक विशिष्ट वैज्ञानिक या व्यावसायिक समस्या पर नहीं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को अपनी वास्तविक समस्याएँ साझा करने और परस्पर सहयोग के लिए प्रेरित करने पर है।
यहाँ प्रस्तुत कार्यप्रणाली एक प्रस्ताव है। इसकी प्रभावशीलता, व्यापकता और विशिष्टता का निर्धारण वास्तविक क्रियान्वयन, उपलब्ध प्रमाणों और परिणामों के आधार पर किया जाना होगा।
== 3. मूल अवधारणा ==
इस पहल का केंद्रीय विचार है कि कोई व्यक्ति अपनी समस्या को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करे और अन्य इच्छुक व्यक्ति अपने ज्ञान तथा अनुभव के आधार पर उसमें योगदान दें।
उदाहरण के लिए, किसी विद्यार्थी को अध्ययन की उपयुक्त विधि खोजने में कठिनाई हो सकती है। कोई शिक्षक सीमित संसाधनों में शिक्षण सुधारने का तरीका खोज रहा हो सकता है। कोई किसान कृषि संबंधी चुनौती का सामना कर सकता है। कोई उद्यमी अपनी कार्यप्रणाली की लागत कम करने के विकल्प खोज सकता है।
इन परिस्थितियों में समस्या से संबंधित अन्य लोगों का अनुभव उपयोगी हो सकता है। हालाँकि, केवल समस्या साझा करने से समाधान की गारंटी नहीं मिलती।
इस प्रस्ताव के अनुसार, समस्या साझा करना सहयोग की शुरुआत हो सकती है। संभावित समाधान खोजने के लिए उसके बाद प्रासंगिक जानकारी, संवाद, मूल्यांकन और आवश्यकतानुसार व्यावहारिक परीक्षण की आवश्यकता होगी।
=== 3.1. मूल सूत्र ===
''समस्या की पहचान → समस्या का स्पष्ट विवरण → ज्ञान एवं अनुभव का आदान-प्रदान → संभावित समाधानों का मूल्यांकन → आवश्यकतानुसार परीक्षण → परिणामों से सीख।''
यह सूत्र प्रस्तावित कार्यप्रणाली का संक्षिप्त रूप है, न कि किसी स्थापित मॉडल का दावा।
== 4. पहल के उद्देश्य ==
इस प्रस्ताव के अंतर्गत निम्नलिखित उद्देश्य निर्धारित किए जा सकते हैं:
# लोगों को अपनी वास्तविक समस्याओं को स्पष्ट और व्यवस्थित रूप से व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करना।
# विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच ज्ञान, अनुभव और उपयोगी जानकारी के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।
# समस्याओं के समाधान में अलग-अलग दृष्टिकोणों और विशेषज्ञताओं के संभावित योगदान को पहचानना।
# उपलब्ध सुझावों की विश्वसनीयता, व्यवहार्यता और उपयुक्तता के मूल्यांकन को महत्त्व देना।
# जहाँ संभव हो, संभावित समाधानों के परीक्षण और परिणामों के प्रलेखन को प्रोत्साहित करना।
# किसी समस्या से प्राप्त उपयोगी सीख को दूसरे लोगों तक पहुँचाने के अवसर बढ़ाना।
# डिजिटल संवाद को केवल सूचना साझा करने तक सीमित न रखकर समाधान-केंद्रित सहयोग की दिशा में विकसित करने की संभावनाओं का परीक्षण करना।
== 5. लक्षित सहभागी ==
प्रस्तावित पहल किसी विशेष पेशे, आयु वर्ग, देश अथवा शैक्षणिक योग्यता तक सीमित नहीं होगी। इसमें भागीदारी स्वैच्छिक होगी।
संभावित प्रतिभागियों में निम्नलिखित समूह शामिल हो सकते हैं:
* विद्यार्थी और शिक्षक।
* शोधकर्ता तथा वैज्ञानिक।
* किसान और कृषि विशेषज्ञ।
* उद्यमी तथा व्यवसाय से जुड़े लोग।
* तकनीकी विशेषज्ञ।
* स्वास्थ्य अन्य क्षेत्रों के योग्य पेशेवर।
* सामाजिक कार्यकर्ता और सामुदायिक संगठन।
* संस्थाओं से जुड़े इच्छुक व्यक्ति।
* विभिन्न क्षेत्रों के सामान्य नागरिक।
किसी व्यक्ति का योगदान उसकी औपचारिक योग्यता तक सीमित नहीं होना चाहिए। व्यावहारिक अनुभव भी उपयोगी हो सकता है। इसके साथ ही, प्रत्येक सुझाव की उपयुक्तता उसके विषय, प्रमाण और परिस्थितियों के अनुसार जाँची जानी चाहिए।
== 6. समस्याओं के संभावित क्षेत्र ==
प्रस्तावित पहल में विभिन्न प्रकार की समस्याओं को शामिल किया जा सकता है।
=== 6.1. शिक्षा ===
शिक्षण विधियों, अध्ययन की रणनीतियों, शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता और सीखने में आने वाली कठिनाइयों से संबंधित प्रश्न।
=== 6.2. कृषि ===
खेती की कार्यप्रणाली, संसाधनों के उपयोग, कृषि संबंधी जानकारी तथा स्थानीय परिस्थितियों से जुड़ी चुनौतियाँ।
=== 6.3. पर्यावरण ===
जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन, प्रदूषण कम करने और पर्यावरण के प्रति जागरूकता से जुड़े प्रश्न।
=== 6.4. तकनीक और विज्ञान ===
तकनीकी बाधाओं, वैज्ञानिक प्रश्नों, उपकरणों के उपयोग और संभावित तकनीकी समाधानों से संबंधित समस्याएँ।
=== 6.5. रोजगार और व्यावसायिक विकास ===
कौशल विकास, कार्यप्रणाली में सुधार, पेशेवर सीख और रोजगार से संबंधित व्यावहारिक चुनौतियाँ।
=== 6.6. व्यवसाय और उद्यमिता ===
संसाधनों के उपयोग, प्रक्रियागत सुधार, ग्राहक अनुभव, लागत प्रबंधन तथा नवाचार से जुड़ी समस्याएँ।
=== 6.7. सामाजिक और सामुदायिक समस्याएँ ===
स्थानीय सुविधाओं, सामाजिक सहभागिता, सार्वजनिक जागरूकता और सामुदायिक स्तर पर सुधार के अवसरों से संबंधित प्रश्न।
=== 6.8. दैनिक जीवन ===
समय प्रबंधन, उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग, संगठन और अन्य सामान्य जीवन संबंधी चुनौतियाँ।
ये क्षेत्र केवल उदाहरण हैं। प्रस्तावित पहल की प्राथमिकताएँ उसके वास्तविक उद्देश्यों, प्रतिभागियों की आवश्यकताओं और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर तय की जा सकती हैं।
== 7. प्रस्तावित कार्यप्रणाली ==
पहल को सरल और समझने योग्य बनाए रखने के लिए इसकी प्रक्रिया पाँच चरणों में व्यवस्थित की जा सकती है।
=== 7.1. पहला चरण: समस्या का स्पष्ट विवरण ===
समस्या साझा करने वाला व्यक्ति बताए कि वास्तविक कठिनाई क्या है, उसका प्रभाव किस प्रकार पड़ रहा है और अब तक कौन-से प्रयास किए गए हैं।
उदाहरण के लिए, ''शिक्षा में सुधार की आवश्यकता है'' की तुलना में ''सीमित शिक्षण संसाधनों में विद्यार्थियों की गणित संबंधी बुनियादी समझ बेहतर करने के लिए कौन-सी विधियाँ उपयोगी हो सकती हैं?'' अधिक स्पष्ट प्रश्न है।
स्पष्ट विवरण से दूसरे लोगों को समस्या समझने और प्रासंगिक सुझाव देने में सहायता मिल सकती है।
=== 7.2. दूसरा चरण: ज्ञान और अनुभव का योगदान ===
अन्य सहभागी उपलब्ध जानकारी, व्यावहारिक अनुभव, संबंधित शोध या विशेषज्ञता के आधार पर सुझाव दे सकते हैं।
योगदान देने वाले व्यक्ति को जहाँ संभव हो, विश्वसनीय स्रोत प्रस्तुत करने चाहिए। विषय से संबंधित अनिश्चितताओं और अपनी विशेषज्ञता की सीमाओं को स्पष्ट करना भी उपयोगी होगा।
=== 7.3. तीसरा चरण: सुझावों का मूल्यांकन ===
प्राप्त सभी सुझावों को समान रूप से विश्वसनीय नहीं माना जाना चाहिए।
समाधान की उपयोगिता पर विचार करते समय निम्नलिखित बातों की जाँच की जा सकती है:
* उपलब्ध प्रमाण और स्रोत।
* समाधान की व्यावहारिकता।
* संभावित लाभ तथा जोखिम।
* आवश्यक संसाधन और लागत।
* संबंधित व्यक्ति की परिस्थितियाँ।
* विशेषज्ञ की सहायता की आवश्यकता।
=== 7.4. चौथा चरण: परीक्षण अथवा क्रियान्वयन ===
जहाँ सुरक्षित, उचित और संभव हो, संभावित समाधान को आजमाया जा सकता है।
परीक्षण की विधि समस्या की प्रकृति पर निर्भर करेगी। कुछ समस्याओं में छोटे व्यवहारगत परिवर्तन पर्याप्त हो सकते हैं, जबकि अन्य के लिए विशेषज्ञ, उपकरण, वित्तीय संसाधन या संस्थागत सहयोग की आवश्यकता हो सकती है।
सभी समस्याओं का परीक्षण सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त सुझावों के आधार पर स्वयं करना उचित नहीं है।
=== 7.5. पाँचवाँ चरण: परिणाम और सीख ===
समस्या साझा करने वाला व्यक्ति बताए कि सुझाए गए विकल्पों में से कौन-से उपयोगी रहे, किनमें कठिनाई आई और क्या परिणाम प्राप्त हुए।
यदि कोई समाधान अपेक्षित परिणाम न दे, तो उस अनुभव को भी उचित संदर्भ के साथ दर्ज किया जा सकता है।
इससे भविष्य में दूसरे लोगों को संभावित विकल्पों की उपयोगिता समझने में सहायता मिल सकती है।
== 8. सोशल मीडिया की भूमिका ==
प्रस्तावित पहल की प्रारंभिक गतिविधियों के लिए मौजूदा सोशल मीडिया मंचों का उपयोग किया जा सकता है।
इस व्यवस्था में किसी नए डिजिटल मंच की स्थापना प्रारंभिक अनिवार्यता नहीं होगी।
सहभागी अपने उपलब्ध सोशल मीडिया पर समस्याएँ साझा कर सकते हैं, प्रासंगिक विशेषज्ञों से संवाद कर सकते हैं और उपयोगी जानकारी के स्रोत उपलब्ध करा सकते हैं।
हालाँकि, सोशल मीडिया पर सामग्री की दृश्यता, उपयोगकर्ताओं की भागीदारी और प्राप्त प्रतिक्रियाओं की गुणवत्ता अलग-अलग हो सकती है। कोई उपयोगी प्रश्न पर्याप्त लोगों तक पहुँचेगा, इसकी गारंटी नहीं है।
इसके अतिरिक्त, विभिन्न मंचों की नीतियाँ, गोपनीयता संबंधी व्यवस्थाएँ तथा सामग्री के प्रबंधन के नियम अलग हो सकते हैं।
इसलिए पहल को किसी एक मंच पर निर्भर रखने के बजाय, जहाँ उपयुक्त हो, विभिन्न माध्यमों के उपयोग की संभावना पर विचार किया जा सकता है।
== 9. संभावित उपयोगिता ==
प्रस्तावित पहल से कई संभावित लाभ प्राप्त हो सकते हैं।
=== 9.1. विविध दृष्टिकोणों तक पहुँच ===
किसी समस्या पर अलग-अलग पृष्ठभूमियों के लोग विचार प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे समस्या को समझने के नए तरीके सामने आ सकते हैं।
=== 9.2. अनुभवों का आदान-प्रदान ===
किसी व्यक्ति का व्यावहारिक अनुभव दूसरे व्यक्ति को अपने विकल्प पहचानने में सहायता कर सकता है।
=== 9.3. विशेषज्ञों से संवाद के अवसर ===
स्पष्ट समस्या-विवरण संबंधित क्षेत्र के जानकार व्यक्तियों का ध्यान आकर्षित कर सकता है।
=== 9.4. संभावित समाधानों की पहचान ===
लोगों के सुझावों से ऐसे विकल्प सामने आ सकते हैं जिन पर समस्या साझा करने वाले व्यक्ति ने पहले विचार नहीं किया हो।
=== 9.5. साझा सीख का विकास ===
जब उपयोगी अनुभव उचित संदर्भ के साथ साझा किए जाते हैं, तो उनसे अन्य लोग भी सीख सकते हैं।
ये संभावित लाभ हैं। इन्हें इस पहल के प्रमाणित परिणाम के रूप में तभी प्रस्तुत किया जाना चाहिए जब वास्तविक क्रियान्वयन और विश्वसनीय साक्ष्यों से उनका समर्थन हो।
== 10. प्रमुख चुनौतियाँ और सीमाएँ ==
किसी व्यापक ऑनलाइन सहयोग पहल के क्रियान्वयन में कई चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं।
=== 10.1. सूचना की गुणवत्ता ===
ऑनलाइन प्राप्त सुझाव अपूर्ण, गलत अथवा भ्रामक हो सकते हैं। लोकप्रियता को किसी दावे की सत्यता का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
=== 10.2. प्रासंगिक प्रतिभागियों तक पहुँच ===
किसी समस्या पर पर्याप्त संख्या में प्रतिक्रिया मिलना और उचित विशेषज्ञता वाले व्यक्तियों की भागीदारी मिलना अलग-अलग बातें हैं।
=== 10.3. चर्चा से कार्रवाई तक पहुँचना ===
किसी समस्या पर विचार-विमर्श होने से उसका समाधान अपने आप नहीं हो जाता। कुछ समाधान समय लेने वाले हो सकते हैं।
=== 10.4. भाषा और पहुँच ===
भाषाई अंतर, इंटरनेट तक सीमित पहुँच तथा डिजिटल कौशल की असमानता भागीदारी को प्रभावित कर सकती है।
=== 10.5. अनावश्यक या अप्रासंगिक प्रतिक्रियाएँ ===
सार्वजनिक मंचों पर विषय से असंबंधित टिप्पणियाँ, प्रचारात्मक सामग्री और अनुपयोगी सुझाव भी प्राप्त हो सकते हैं।
=== 10.6. परिणामों की पुष्टि ===
किसी सहभागी का यह बताना कि समस्या हल हो गई, स्वयं में हर परिस्थिति में स्वतंत्र सत्यापन के समान नहीं है। दावों के प्रकार और महत्त्व के अनुसार उपयुक्त पुष्टि की आवश्यकता हो सकती है।
इन सीमाओं को ध्यान में रखकर पहल की कार्यप्रणाली और मूल्यांकन के मानदंड विकसित किए जाने चाहिए।
== 11. गोपनीयता, सुरक्षा और उत्तरदायित्व ==
समस्याएँ साझा करते समय प्रतिभागियों की निजता और सुरक्षा महत्त्वपूर्ण होगी।
प्रस्तावित पहल में निम्नलिखित सिद्धांत अपनाए जा सकते हैं:
* अनावश्यक व्यक्तिगत पहचान संबंधी जानकारी साझा करने से बचना।
* अन्य गोपनीय विवरण सार्वजनिक न करना।
* संभावित समाधान के लाभों के साथ उसके जोखिम और सीमाएँ भी बताना।
यह पहल पेशेवर सहायता का सार्वभौमिक विकल्प नहीं होगी। इसका उद्देश्य उपयोगी जानकारी तथा सहयोग की संभावनाएँ बढ़ाना होगा।
== 12. पहल से संबंधित प्रमुख प्रश्न ==
इस विचार को आगे विकसित करने के लिए निम्नलिखित प्रश्न उपयोगी हो सकते हैं:
# क्या लोग अपनी वास्तविक समस्याएँ सार्वजनिक रूप से साझा करने के लिए तैयार हैं?
# कौन-से प्रकार के समस्या-विवरण अधिक प्रासंगिक और उपयोगी प्रतिक्रियाएँ आकर्षित करते हैं?
# ऑनलाइन समुदायों में अलग-अलग पृष्ठभूमियों के लोगों का योगदान किस प्रकार उपयोगी बन सकता है?
# सुझावों की विश्वसनीयता और व्यवहार्यता का मूल्यांकन कैसे किया जा सकता है?
# सामाजिक मीडिया पर प्राप्त उपयोगी प्रतिक्रियाओं को वास्तविक कार्रवाई में बदलने में कौन-सी बाधाएँ आती हैं?
# किन परिस्थितियों में साझा अनुभव अन्य लोगों के लिए उपयोगी सिद्ध होते हैं?
# इस प्रकार की पहल के प्रभाव का विश्वसनीय मूल्यांकन कैसे किया जा सकता है?
# प्रतिभागियों की गोपनीयता बनाए रखते हुए परिणामों का प्रलेखन किस प्रकार किया जा सकता है?
इन प्रश्नों का उत्तर व्यवस्थित अध्ययन, प्रत्यक्ष अनुभव और विश्वसनीय प्रमाणों के आधार पर खोजा जाना चाहिए।
== 13. निष्कर्ष ==
''एक समस्या, अनेक दृष्टिकोण'' एक प्रस्तावित सहयोग पहल की रूपरेखा है। इसका केंद्रीय विचार यह है कि लोग अपनी वास्तविक समस्याएँ स्पष्ट रूप से साझा करें और दूसरे लोग अपने ज्ञान, अनुभव तथा विशेषज्ञता के आधार पर संभावित समाधानों की खोज में योगदान दें।
यह विचार सामूहिक बुद्धिमत्ता और नवाचार जैसे व्यापक विषयों से संबंधित है। इसकी व्यावहारिक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रतिभागियों के बीच सहयोग कितना सार्थक होता है, प्राप्त सुझाव कितने विश्वसनीय होते हैं और संभावित समाधान किस सीमा तक उपयोगी परिणाम देते हैं।
इसलिए शुरुआत में इसे एक परीक्षण योग्य प्रस्ताव के रूप में लेना उचित होगा। इसके परिणामों का मूल्यांकन करने और प्राप्त सीख के आधार पर कार्यप्रणाली में सुधार करने के बाद ही इसके व्यापक विस्तार पर विचार किया जाना चाहिए।
== संदर्भ ==
<references />
== आगे के अध्ययन के लिए ==
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2026-10-18T04:07:59Z
SAGAR SURYAVANSHI JAITHAL
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/* 8. सोशल मीडिया की भूमिका */ लेख में विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बाहरी संदर्भ (References) जोड़ा गया।
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text/x-wiki
'''One Problem, Many Perspectives''': यह एक प्रारंभिक विचार-प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से वास्तविक समस्याओं को साझा करने, विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के ज्ञान एवं अनुभव का उपयोग करने और संभावित समाधानों की खोज में सहयोग को प्रोत्साहित करने वाली एक पहल की रूपरेखा प्रस्तुत करना है।
== 1. प्रस्तावना ==
इंटरनेट ने विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों, भाषाओं, व्यवसायों और शैक्षणिक पृष्ठभूमियों के लोगों के बीच संवाद तथा सूचना के आदान-प्रदान की संभावनाओं का विस्तार किया है। डिजिटल संचार माध्यमों की सहायता से व्यक्ति अपनी जानकारी, अनुभव, विचार और प्रश्न व्यापक समुदाय तक पहुँचा सकता है।
इस परिस्थिति में एक विचार विचारणीय है: क्या इन माध्यमों का अधिक व्यवस्थित उपयोग लोगों की वास्तविक समस्याओं को समझने, संबंधित ज्ञान तक पहुँचने तथा संभावित समाधानों की खोज में परस्पर सहयोग बढ़ाने के लिए किया जा सकता है?
इस प्रस्तावित पहल का मूल विचार यह है कि प्रत्येक इच्छुक व्यक्ति अपनी किसी एक प्रमुख समस्या को स्पष्ट रूप से साझा करे और दूसरे लोग अपने ज्ञान, अनुभव, शोध अथवा विशेषज्ञता के आधार पर उसमें योगदान देने का प्रयास करें।
इसका उद्देश्य समस्याओं को केवल सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाना नहीं, बल्कि जहाँ संभव हो, समस्या की पहचान से लेकर संभावित समाधान के मूल्यांकन और उससे प्राप्त सीख तक की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करना है।
== 2. विचार की पृष्ठभूमि ==
समस्याओं का समाधान खोजने के लिए अलग-अलग व्यक्तियों तथा समूहों के ज्ञान और क्षमताओं का उपयोग करना कोई नई अवधारणा नहीं है। सामूहिक बुद्धिमत्ता, जनसहभागिता द्वारा कार्य-संपादन और मुक्त नवाचार जैसी अवधारणाओं में भी बाहरी व्यक्तियों अथवा व्यापक समुदाय के योगदान का अध्ययन किया गया है।
प्रस्तावित पहल इन्हीं व्यापक विषयों से संबंधित है। इसका प्रारंभिक जोर किसी एक विशिष्ट वैज्ञानिक या व्यावसायिक समस्या पर नहीं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को अपनी वास्तविक समस्याएँ साझा करने और परस्पर सहयोग के लिए प्रेरित करने पर है।
यहाँ प्रस्तुत कार्यप्रणाली एक प्रस्ताव है। इसकी प्रभावशीलता, व्यापकता और विशिष्टता का निर्धारण वास्तविक क्रियान्वयन, उपलब्ध प्रमाणों और परिणामों के आधार पर किया जाना होगा।
== 3. मूल अवधारणा ==
इस पहल का केंद्रीय विचार है कि कोई व्यक्ति अपनी समस्या को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करे और अन्य इच्छुक व्यक्ति अपने ज्ञान तथा अनुभव के आधार पर उसमें योगदान दें।
उदाहरण के लिए, किसी विद्यार्थी को अध्ययन की उपयुक्त विधि खोजने में कठिनाई हो सकती है। कोई शिक्षक सीमित संसाधनों में शिक्षण सुधारने का तरीका खोज रहा हो सकता है। कोई किसान कृषि संबंधी चुनौती का सामना कर सकता है। कोई उद्यमी अपनी कार्यप्रणाली की लागत कम करने के विकल्प खोज सकता है।
इन परिस्थितियों में समस्या से संबंधित अन्य लोगों का अनुभव उपयोगी हो सकता है। हालाँकि, केवल समस्या साझा करने से समाधान की गारंटी नहीं मिलती।
इस प्रस्ताव के अनुसार, समस्या साझा करना सहयोग की शुरुआत हो सकती है। संभावित समाधान खोजने के लिए उसके बाद प्रासंगिक जानकारी, संवाद, मूल्यांकन और आवश्यकतानुसार व्यावहारिक परीक्षण की आवश्यकता होगी।
=== 3.1. मूल सूत्र ===
''समस्या की पहचान → समस्या का स्पष्ट विवरण → ज्ञान एवं अनुभव का आदान-प्रदान → संभावित समाधानों का मूल्यांकन → आवश्यकतानुसार परीक्षण → परिणामों से सीख।''
यह सूत्र प्रस्तावित कार्यप्रणाली का संक्षिप्त रूप है, न कि किसी स्थापित मॉडल का दावा।
== 4. पहल के उद्देश्य ==
इस प्रस्ताव के अंतर्गत निम्नलिखित उद्देश्य निर्धारित किए जा सकते हैं:
# लोगों को अपनी वास्तविक समस्याओं को स्पष्ट और व्यवस्थित रूप से व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करना।
# विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच ज्ञान, अनुभव और उपयोगी जानकारी के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।
# समस्याओं के समाधान में अलग-अलग दृष्टिकोणों और विशेषज्ञताओं के संभावित योगदान को पहचानना।
# उपलब्ध सुझावों की विश्वसनीयता, व्यवहार्यता और उपयुक्तता के मूल्यांकन को महत्त्व देना।
# जहाँ संभव हो, संभावित समाधानों के परीक्षण और परिणामों के प्रलेखन को प्रोत्साहित करना।
# किसी समस्या से प्राप्त उपयोगी सीख को दूसरे लोगों तक पहुँचाने के अवसर बढ़ाना।
# डिजिटल संवाद को केवल सूचना साझा करने तक सीमित न रखकर समाधान-केंद्रित सहयोग की दिशा में विकसित करने की संभावनाओं का परीक्षण करना।
== 5. लक्षित सहभागी ==
प्रस्तावित पहल किसी विशेष पेशे, आयु वर्ग, देश अथवा शैक्षणिक योग्यता तक सीमित नहीं होगी। इसमें भागीदारी स्वैच्छिक होगी।
संभावित प्रतिभागियों में निम्नलिखित समूह शामिल हो सकते हैं:
* विद्यार्थी और शिक्षक।
* शोधकर्ता तथा वैज्ञानिक।
* किसान और कृषि विशेषज्ञ।
* उद्यमी तथा व्यवसाय से जुड़े लोग।
* तकनीकी विशेषज्ञ।
* स्वास्थ्य अन्य क्षेत्रों के योग्य पेशेवर।
* सामाजिक कार्यकर्ता और सामुदायिक संगठन।
* संस्थाओं से जुड़े इच्छुक व्यक्ति।
* विभिन्न क्षेत्रों के सामान्य नागरिक।
किसी व्यक्ति का योगदान उसकी औपचारिक योग्यता तक सीमित नहीं होना चाहिए। व्यावहारिक अनुभव भी उपयोगी हो सकता है। इसके साथ ही, प्रत्येक सुझाव की उपयुक्तता उसके विषय, प्रमाण और परिस्थितियों के अनुसार जाँची जानी चाहिए।
== 6. समस्याओं के संभावित क्षेत्र ==
प्रस्तावित पहल में विभिन्न प्रकार की समस्याओं को शामिल किया जा सकता है।
=== 6.1. शिक्षा ===
शिक्षण विधियों, अध्ययन की रणनीतियों, शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता और सीखने में आने वाली कठिनाइयों से संबंधित प्रश्न।
=== 6.2. कृषि ===
खेती की कार्यप्रणाली, संसाधनों के उपयोग, कृषि संबंधी जानकारी तथा स्थानीय परिस्थितियों से जुड़ी चुनौतियाँ।
=== 6.3. पर्यावरण ===
जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन, प्रदूषण कम करने और पर्यावरण के प्रति जागरूकता से जुड़े प्रश्न।
=== 6.4. तकनीक और विज्ञान ===
तकनीकी बाधाओं, वैज्ञानिक प्रश्नों, उपकरणों के उपयोग और संभावित तकनीकी समाधानों से संबंधित समस्याएँ।
=== 6.5. रोजगार और व्यावसायिक विकास ===
कौशल विकास, कार्यप्रणाली में सुधार, पेशेवर सीख और रोजगार से संबंधित व्यावहारिक चुनौतियाँ।
=== 6.6. व्यवसाय और उद्यमिता ===
संसाधनों के उपयोग, प्रक्रियागत सुधार, ग्राहक अनुभव, लागत प्रबंधन तथा नवाचार से जुड़ी समस्याएँ।
=== 6.7. सामाजिक और सामुदायिक समस्याएँ ===
स्थानीय सुविधाओं, सामाजिक सहभागिता, सार्वजनिक जागरूकता और सामुदायिक स्तर पर सुधार के अवसरों से संबंधित प्रश्न।
=== 6.8. दैनिक जीवन ===
समय प्रबंधन, उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग, संगठन और अन्य सामान्य जीवन संबंधी चुनौतियाँ।
ये क्षेत्र केवल उदाहरण हैं। प्रस्तावित पहल की प्राथमिकताएँ उसके वास्तविक उद्देश्यों, प्रतिभागियों की आवश्यकताओं और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर तय की जा सकती हैं।
== 7. प्रस्तावित कार्यप्रणाली ==
पहल को सरल और समझने योग्य बनाए रखने के लिए इसकी प्रक्रिया पाँच चरणों में व्यवस्थित की जा सकती है।
=== 7.1. पहला चरण: समस्या का स्पष्ट विवरण ===
समस्या साझा करने वाला व्यक्ति बताए कि वास्तविक कठिनाई क्या है, उसका प्रभाव किस प्रकार पड़ रहा है और अब तक कौन-से प्रयास किए गए हैं।
उदाहरण के लिए, ''शिक्षा में सुधार की आवश्यकता है'' की तुलना में ''सीमित शिक्षण संसाधनों में विद्यार्थियों की गणित संबंधी बुनियादी समझ बेहतर करने के लिए कौन-सी विधियाँ उपयोगी हो सकती हैं?'' अधिक स्पष्ट प्रश्न है।
स्पष्ट विवरण से दूसरे लोगों को समस्या समझने और प्रासंगिक सुझाव देने में सहायता मिल सकती है।
=== 7.2. दूसरा चरण: ज्ञान और अनुभव का योगदान ===
अन्य सहभागी उपलब्ध जानकारी, व्यावहारिक अनुभव, संबंधित शोध या विशेषज्ञता के आधार पर सुझाव दे सकते हैं।
योगदान देने वाले व्यक्ति को जहाँ संभव हो, विश्वसनीय स्रोत प्रस्तुत करने चाहिए। विषय से संबंधित अनिश्चितताओं और अपनी विशेषज्ञता की सीमाओं को स्पष्ट करना भी उपयोगी होगा।
=== 7.3. तीसरा चरण: सुझावों का मूल्यांकन ===
प्राप्त सभी सुझावों को समान रूप से विश्वसनीय नहीं माना जाना चाहिए।
समाधान की उपयोगिता पर विचार करते समय निम्नलिखित बातों की जाँच की जा सकती है:
* उपलब्ध प्रमाण और स्रोत।
* समाधान की व्यावहारिकता।
* संभावित लाभ तथा जोखिम।
* आवश्यक संसाधन और लागत।
* संबंधित व्यक्ति की परिस्थितियाँ।
* विशेषज्ञ की सहायता की आवश्यकता।
=== 7.4. चौथा चरण: परीक्षण अथवा क्रियान्वयन ===
जहाँ सुरक्षित, उचित और संभव हो, संभावित समाधान को आजमाया जा सकता है।
परीक्षण की विधि समस्या की प्रकृति पर निर्भर करेगी। कुछ समस्याओं में छोटे व्यवहारगत परिवर्तन पर्याप्त हो सकते हैं, जबकि अन्य के लिए विशेषज्ञ, उपकरण, वित्तीय संसाधन या संस्थागत सहयोग की आवश्यकता हो सकती है।
सभी समस्याओं का परीक्षण सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त सुझावों के आधार पर स्वयं करना उचित नहीं है।
=== 7.5. पाँचवाँ चरण: परिणाम और सीख ===
समस्या साझा करने वाला व्यक्ति बताए कि सुझाए गए विकल्पों में से कौन-से उपयोगी रहे, किनमें कठिनाई आई और क्या परिणाम प्राप्त हुए।
यदि कोई समाधान अपेक्षित परिणाम न दे, तो उस अनुभव को भी उचित संदर्भ के साथ दर्ज किया जा सकता है।
इससे भविष्य में दूसरे लोगों को संभावित विकल्पों की उपयोगिता समझने में सहायता मिल सकती है।
== 8. सोशल मीडिया की भूमिका ==
प्रस्तावित पहल की प्रारंभिक गतिविधियों के लिए मौजूदा सोशल मीडिया मंचों का उपयोग किया जा सकता है। ज्ञान के क्षेत्र में इस प्रकार के सामूहिक सहयोग और साझा बुद्धिमत्ता का सबसे बड़ा और सफल जीवित उदाहरण स्वयं विकिपीडिया (Wikipedia) है, जहाँ दुनिया भर के लोग मिलकर एक मुक्त ज्ञानकोश का निर्माण करते हैं।<ref>{{cite web |title=Wikipedia: About |url=https://wikipedia.org |website=Wikipedia |publisher=Wikimedia Foundation |access-date=18 अक्टूबर 2026}}</ref>
इस व्यवस्था में किसी नए डिजिटल मंच की स्थापना प्रारंभिक अनिवार्यता नहीं होगी।
सहभागी अपने उपलब्ध सोशल मीडिया पर समस्याएँ साझा कर सकते हैं, प्रासंगिक विशेषज्ञों से संवाद कर सकते हैं और उपयोगी जानकारी के स्रोत उपलब्ध करा सकते हैं।
हालाँकि, सोशल मीडिया पर सामग्री की दृश्यता, उपयोगकर्ताओं की भागीदारी और प्राप्त प्रतिक्रियाओं की गुणवत्ता अलग-अलग हो सकती है। कोई उपयोगी प्रश्न पर्याप्त लोगों तक पहुँचेगा, इसकी गारंटी नहीं है।
इसके अतिरिक्त, विभिन्न मंचों की नीतियाँ, गोपनीयता संबंधी व्यवस्थाएँ तथा सामग्री के प्रबंधन के नियम अलग हो सकते हैं।
इसलिए पहल को किसी एक मंच पर निर्भर रखने के बजाय, जहाँ उपयुक्त हो, विभिन्न माध्यमों के उपयोग की संभावना पर विचार किया जा सकता है।
== 9. संभावित उपयोगिता ==
प्रस्तावित पहल से कई संभावित लाभ प्राप्त हो सकते हैं।
=== 9.1. विविध दृष्टिकोणों तक पहुँच ===
किसी समस्या पर अलग-अलग पृष्ठभूमियों के लोग विचार प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे समस्या को समझने के नए तरीके सामने आ सकते हैं।
=== 9.2. अनुभवों का आदान-प्रदान ===
किसी व्यक्ति का व्यावहारिक अनुभव दूसरे व्यक्ति को अपने विकल्प पहचानने में सहायता कर सकता है।
=== 9.3. विशेषज्ञों से संवाद के अवसर ===
स्पष्ट समस्या-विवरण संबंधित क्षेत्र के जानकार व्यक्तियों का ध्यान आकर्षित कर सकता है।
=== 9.4. संभावित समाधानों की पहचान ===
लोगों के सुझावों से ऐसे विकल्प सामने आ सकते हैं जिन पर समस्या साझा करने वाले व्यक्ति ने पहले विचार नहीं किया हो।
=== 9.5. साझा सीख का विकास ===
जब उपयोगी अनुभव उचित संदर्भ के साथ साझा किए जाते हैं, तो उनसे अन्य लोग भी सीख सकते हैं।
ये संभावित लाभ हैं। इन्हें इस पहल के प्रमाणित परिणाम के रूप में तभी प्रस्तुत किया जाना चाहिए जब वास्तविक क्रियान्वयन और विश्वसनीय साक्ष्यों से उनका समर्थन हो।
== 10. प्रमुख चुनौतियाँ और सीमाएँ ==
किसी व्यापक ऑनलाइन सहयोग पहल के क्रियान्वयन में कई चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं।
=== 10.1. सूचना की गुणवत्ता ===
ऑनलाइन प्राप्त सुझाव अपूर्ण, गलत अथवा भ्रामक हो सकते हैं। लोकप्रियता को किसी दावे की सत्यता का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
=== 10.2. प्रासंगिक प्रतिभागियों तक पहुँच ===
किसी समस्या पर पर्याप्त संख्या में प्रतिक्रिया मिलना और उचित विशेषज्ञता वाले व्यक्तियों की भागीदारी मिलना अलग-अलग बातें हैं।
=== 10.3. चर्चा से कार्रवाई तक पहुँचना ===
किसी समस्या पर विचार-विमर्श होने से उसका समाधान अपने आप नहीं हो जाता। कुछ समाधान समय लेने वाले हो सकते हैं।
=== 10.4. भाषा और पहुँच ===
भाषाई अंतर, इंटरनेट तक सीमित पहुँच तथा डिजिटल कौशल की असमानता भागीदारी को प्रभावित कर सकती है।
=== 10.5. अनावश्यक या अप्रासंगिक प्रतिक्रियाएँ ===
सार्वजनिक मंचों पर विषय से असंबंधित टिप्पणियाँ, प्रचारात्मक सामग्री और अनुपयोगी सुझाव भी प्राप्त हो सकते हैं।
=== 10.6. परिणामों की पुष्टि ===
किसी सहभागी का यह बताना कि समस्या हल हो गई, स्वयं में हर परिस्थिति में स्वतंत्र सत्यापन के समान नहीं है। दावों के प्रकार और महत्त्व के अनुसार उपयुक्त पुष्टि की आवश्यकता हो सकती है।
इन सीमाओं को ध्यान में रखकर पहल की कार्यप्रणाली और मूल्यांकन के मानदंड विकसित किए जाने चाहिए।
== 11. गोपनीयता, सुरक्षा और उत्तरदायित्व ==
समस्याएँ साझा करते समय प्रतिभागियों की निजता और सुरक्षा महत्त्वपूर्ण होगी।
प्रस्तावित पहल में निम्नलिखित सिद्धांत अपनाए जा सकते हैं:
* अनावश्यक व्यक्तिगत पहचान संबंधी जानकारी साझा करने से बचना।
* अन्य गोपनीय विवरण सार्वजनिक न करना।
* संभावित समाधान के लाभों के साथ उसके जोखिम और सीमाएँ भी बताना।
यह पहल पेशेवर सहायता का सार्वभौमिक विकल्प नहीं होगी। इसका उद्देश्य उपयोगी जानकारी तथा सहयोग की संभावनाएँ बढ़ाना होगा।
== 12. पहल से संबंधित प्रमुख प्रश्न ==
इस विचार को आगे विकसित करने के लिए निम्नलिखित प्रश्न उपयोगी हो सकते हैं:
# क्या लोग अपनी वास्तविक समस्याएँ सार्वजनिक रूप से साझा करने के लिए तैयार हैं?
# कौन-से प्रकार के समस्या-विवरण अधिक प्रासंगिक और उपयोगी प्रतिक्रियाएँ आकर्षित करते हैं?
# ऑनलाइन समुदायों में अलग-अलग पृष्ठभूमियों के लोगों का योगदान किस प्रकार उपयोगी बन सकता है?
# सुझावों की विश्वसनीयता और व्यवहार्यता का मूल्यांकन कैसे किया जा सकता है?
# सामाजिक मीडिया पर प्राप्त उपयोगी प्रतिक्रियाओं को वास्तविक कार्रवाई में बदलने में कौन-सी बाधाएँ आती हैं?
# किन परिस्थितियों में साझा अनुभव अन्य लोगों के लिए उपयोगी सिद्ध होते हैं?
# इस प्रकार की पहल के प्रभाव का विश्वसनीय मूल्यांकन कैसे किया जा सकता है?
# प्रतिभागियों की गोपनीयता बनाए रखते हुए परिणामों का प्रलेखन किस प्रकार किया जा सकता है?
इन प्रश्नों का उत्तर व्यवस्थित अध्ययन, प्रत्यक्ष अनुभव और विश्वसनीय प्रमाणों के आधार पर खोजा जाना चाहिए।
== 13. निष्कर्ष ==
''एक समस्या, अनेक दृष्टिकोण'' एक प्रस्तावित सहयोग पहल की रूपरेखा है। इसका केंद्रीय विचार यह है कि लोग अपनी वास्तविक समस्याएँ स्पष्ट रूप से साझा करें और दूसरे लोग अपने ज्ञान, अनुभव तथा विशेषज्ञता के आधार पर संभावित समाधानों की खोज में योगदान दें।
यह विचार सामूहिक बुद्धिमत्ता और नवाचार जैसे व्यापक विषयों से संबंधित है। इसकी व्यावहारिक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रतिभागियों के बीच सहयोग कितना सार्थक होता है, प्राप्त सुझाव कितने विश्वसनीय होते हैं और संभावित समाधान किस सीमा तक उपयोगी परिणाम देते हैं।
इसलिए शुरुआत में इसे एक परीक्षण योग्य प्रस्ताव के रूप में लेना उचित होगा। इसके परिणामों का मूल्यांकन करने और प्राप्त सीख के आधार पर कार्यप्रणाली में सुधार करने के बाद ही इसके व्यापक विस्तार पर विचार किया जाना चाहिए।
== संदर्भ ==
<references />
== आगे के अध्ययन के लिए ==
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6630584
6630583
2026-10-18T04:15:47Z
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text/x-wiki
'''One Problem, Many Perspectives''': यह एक प्रारंभिक विचार-प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से वास्तविक समस्याओं को साझा करने, विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के ज्ञान एवं अनुभव का उपयोग करने और संभावित समाधानों की खोज में सहयोग को प्रोत्साहित करने वाली एक पहल की रूपरेखा प्रस्तुत करना है।
== 1. प्रस्तावना ==
इंटरनेट ने विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों, भाषाओं, व्यवसायों और शैक्षणिक पृष्ठभूमियों के लोगों के बीच संवाद तथा सूचना के आदान-प्रदान की संभावनाओं का विस्तार किया है। डिजिटल संचार माध्यमों की सहायता से व्यक्ति अपनी जानकारी, अनुभव, विचार और प्रश्न व्यापक समुदाय तक पहुँचा सकता है।
इस परिस्थिति में एक विचार विचारणीय है: क्या इन माध्यमों का अधिक व्यवस्थित उपयोग लोगों की वास्तविक समस्याओं को समझने, संबंधित ज्ञान तक पहुँचने तथा संभावित समाधानों की खोज में परस्पर सहयोग बढ़ाने के लिए किया जा सकता है?
इस प्रस्तावित पहल का मूल विचार यह है कि प्रत्येक इच्छुक व्यक्ति अपनी किसी एक प्रमुख समस्या को स्पष्ट रूप से साझा करे और दूसरे लोग अपने ज्ञान, अनुभव, शोध अथवा विशेषज्ञता के आधार पर उसमें योगदान देने का प्रयास करें।
इसका उद्देश्य समस्याओं को केवल सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाना नहीं, बल्कि जहाँ संभव हो, समस्या की पहचान से लेकर संभावित समाधान के मूल्यांकन और उससे प्राप्त सीख तक की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करना है।
== 2. विचार की पृष्ठभूमि ==
समस्याओं का समाधान खोजने के लिए अलग-अलग व्यक्तियों तथा समूहों के ज्ञान और क्षमताओं का उपयोग करना कोई नई अवधारणा नहीं है। सामूहिक बुद्धिमत्ता, जनसहभागिता द्वारा कार्य-संपादन और मुक्त नवाचार जैसी अवधारणाओं में भी बाहरी व्यक्तियों अथवा व्यापक समुदाय के योगदान का अध्ययन किया गया है। इंटरनेट के युग में इस पूरी प्रक्रिया को 'क्राउडसोर्सिंग' (Crowdsourcing) के नाम से भी जाना जाता है, जिसका सर्वप्रथम प्रयोग जेफ हावे द्वारा किया गया था।<ref>{{cite web |last=Howe |first=Jeff |title=The Rise of Crowdsourcing |url=https://wired.com |website=Wired |date=1 जून 2006 |access-date=18 अक्टूबर 2026}}</ref>
प्रस्तावित पहल इन्हीं व्यापक विषयों से संबंधित है। इसका प्रारंभिक जोर किसी एक विशिष्ट वैज्ञानिक या व्यावसायिक समस्या पर नहीं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को अपनी वास्तविक समस्याएँ साझा करने और परस्पर सहयोग के लिए प्रेरित करने पर है।
यहाँ प्रस्तुत कार्यप्रणाली एक प्रस्ताव है। इसकी प्रभावशीलता, व्यापकता और विशिष्टता का निर्धारण वास्तविक क्रियान्वयन, उपलब्ध प्रमाणों और परिणामों के आधार पर किया जाना होगा।
== 3. मूल अवधारणा ==
इस पहल का केंद्रीय विचार है कि कोई व्यक्ति अपनी समस्या को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करे और अन्य इच्छुक व्यक्ति अपने ज्ञान तथा अनुभव के आधार पर उसमें योगदान दें।
उदाहरण के लिए, किसी विद्यार्थी को अध्ययन की उपयुक्त विधि खोजने में कठिनाई हो सकती है। कोई शिक्षक सीमित संसाधनों में शिक्षण सुधारने का तरीका खोज रहा हो सकता है। कोई किसान कृषि संबंधी चुनौती का सामना कर सकता है। कोई उद्यमी अपनी कार्यप्रणाली की लागत कम करने के विकल्प खोज सकता है।
इन परिस्थितियों में समस्या से संबंधित अन्य लोगों का अनुभव उपयोगी हो सकता है। हालाँकि, केवल समस्या साझा करने से समाधान की गारंटी नहीं मिलती।
इस प्रस्ताव के अनुसार, समस्या साझा करना सहयोग की शुरुआत हो सकती है। संभावित समाधान खोजने के लिए उसके बाद प्रासंगिक जानकारी, संवाद, मूल्यांकन और आवश्यकतानुसार व्यावहारिक परीक्षण की आवश्यकता होगी।
=== 3.1. मूल सूत्र ===
''समस्या की पहचान → समस्या का स्पष्ट विवरण → ज्ञान एवं अनुभव का आदान-प्रदान → संभावित समाधानों का मूल्यांकन → आवश्यकतानुसार परीक्षण → परिणामों से सीख।''
यह सूत्र प्रस्तावित कार्यप्रणाली का संक्षिप्त रूप है, न कि किसी स्थापित मॉडल का दावा।
== 4. पहल के उद्देश्य ==
इस प्रस्ताव के अंतर्गत निम्नलिखित उद्देश्य निर्धारित किए जा सकते हैं:
# लोगों को अपनी वास्तविक समस्याओं को स्पष्ट और व्यवस्थित रूप से व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करना।
# विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच ज्ञान, अनुभव और उपयोगी जानकारी के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।
# समस्याओं के समाधान में अलग-अलग दृष्टिकोणों और विशेषज्ञताओं के संभावित योगदान को पहचानना।
# उपलब्ध सुझावों की विश्वसनीयता, व्यवहार्यता और उपयुक्तता के मूल्यांकन को महत्त्व देना।
# जहाँ संभव हो, संभावित समाधानों के परीक्षण और परिणामों के प्रलेखन को प्रोत्साहित करना।
# किसी समस्या से प्राप्त उपयोगी सीख को दूसरे लोगों तक पहुँचाने के अवसर बढ़ाना।
# डिजिटल संवाद को केवल सूचना साझा करने तक सीमित न रखकर समाधान-केंद्रित सहयोग की दिशा में विकसित करने की संभावनाओं का परीक्षण करना।
== 5. लक्षित सहभागी ==
प्रस्तावित पहल किसी विशेष पेशे, आयु वर्ग, देश अथवा शैक्षणिक योग्यता तक सीमित नहीं होगी। इसमें भागीदारी स्वैच्छिक होगी।
संभावित प्रतिभागियों में निम्नलिखित समूह शामिल हो सकते हैं:
* विद्यार्थी और शिक्षक।
* शोधकर्ता तथा वैज्ञानिक।
* किसान और कृषि विशेषज्ञ।
* उद्यमी तथा व्यवसाय से जुड़े लोग।
* तकनीकी विशेषज्ञ।
* स्वास्थ्य अन्य क्षेत्रों के योग्य पेशेवर।
* सामाजिक कार्यकर्ता और सामुदायिक संगठन।
* संस्थाओं से जुड़े इच्छुक व्यक्ति।
* विभिन्न क्षेत्रों के सामान्य नागरिक।
किसी व्यक्ति का योगदान उसकी औपचारिक योग्यता तक सीमित नहीं होना चाहिए। व्यावहारिक अनुभव भी उपयोगी हो सकता है। इसके साथ ही, प्रत्येक सुझाव की उपयुक्तता उसके विषय, प्रमाण और परिस्थितियों के अनुसार जाँची जानी चाहिए।
== 6. समस्याओं के संभावित क्षेत्र ==
प्रस्तावित पहल में विभिन्न प्रकार की समस्याओं को शामिल किया जा सकता है।
=== 6.1. शिक्षा ===
शिक्षण विधियों, अध्ययन की रणनीतियों, शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता और सीखने में आने वाली कठिनाइयों से संबंधित प्रश्न।
=== 6.2. कृषि ===
खेती की कार्यप्रणाली, संसाधनों के उपयोग, कृषि संबंधी जानकारी तथा स्थानीय परिस्थितियों से जुड़ी चुनौतियाँ।
=== 6.3. पर्यावरण ===
जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन, प्रदूषण कम करने और पर्यावरण के प्रति जागरूकता से जुड़े प्रश्न।
=== 6.4. तकनीक और विज्ञान ===
तकनीकी बाधाओं, वैज्ञानिक प्रश्नों, उपकरणों के उपयोग और संभावित तकनीकी समाधानों से संबंधित समस्याएँ।
=== 6.5. रोजगार और व्यावसायिक विकास ===
कौशल विकास, कार्यप्रणाली में सुधार, पेशेवर सीख और रोजगार से संबंधित व्यावहारिक चुनौतियाँ।
=== 6.6. व्यवसाय और उद्यमिता ===
संसाधनों के उपयोग, प्रक्रियागत सुधार, ग्राहक अनुभव, लागत प्रबंधन तथा नवाचार से जुड़ी समस्याएँ।
=== 6.7. सामाजिक और सामुदायिक समस्याएँ ===
स्थानीय सुविधाओं, सामाजिक सहभागिता, सार्वजनिक जागरूकता और सामुदायिक स्तर पर सुधार के अवसरों से संबंधित प्रश्न।
=== 6.8. दैनिक जीवन ===
समय प्रबंधन, उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग, संगठन और अन्य सामान्य जीवन संबंधी चुनौतियाँ।
ये क्षेत्र केवल उदाहरण हैं। प्रस्तावित पहल की प्राथमिकताएँ उसके वास्तविक उद्देश्यों, प्रतिभागियों की आवश्यकताओं और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर तय की जा सकती हैं।
== 7. प्रस्तावित कार्यप्रणाली ==
पहल को सरल और समझने योग्य बनाए रखने के लिए इसकी प्रक्रिया पाँच चरणों में व्यवस्थित की जा सकती है।
=== 7.1. पहला चरण: समस्या का स्पष्ट विवरण ===
समस्या साझा करने वाला व्यक्ति बताए कि वास्तविक कठिनाई क्या है, उसका प्रभाव किस प्रकार पड़ रहा है और अब तक कौन-से प्रयास किए गए हैं।
उदाहरण के लिए, ''शिक्षा में सुधार की आवश्यकता है'' की तुलना में ''सीमित शिक्षण संसाधनों में विद्यार्थियों की गणित संबंधी बुनियादी समझ बेहतर करने के लिए कौन-सी विधियाँ उपयोगी हो सकती हैं?'' अधिक स्पष्ट प्रश्न है।
स्पष्ट विवरण से दूसरे लोगों को समस्या समझने और प्रासंगिक सुझाव देने में सहायता मिल सकती है।
=== 7.2. दूसरा चरण: ज्ञान और अनुभव का योगदान ===
अन्य सहभागी उपलब्ध जानकारी, व्यावहारिक अनुभव, संबंधित शोध या विशेषज्ञता के आधार पर सुझाव दे सकते हैं।
योगदान देने वाले व्यक्ति को जहाँ संभव हो, विश्वसनीय स्रोत प्रस्तुत करने चाहिए। विषय से संबंधित अनिश्चितताओं और अपनी विशेषज्ञता की सीमाओं को स्पष्ट करना भी उपयोगी होगा।
=== 7.3. तीसरा चरण: सुझावों का मूल्यांकन ===
प्राप्त सभी सुझावों को समान रूप से विश्वसनीय नहीं माना जाना चाहिए।
समाधान की उपयोगिता पर विचार करते समय निम्नलिखित बातों की जाँच की जा सकती है:
* उपलब्ध प्रमाण और स्रोत।
* समाधान की व्यावहारिकता।
* संभावित लाभ तथा जोखिम।
* आवश्यक संसाधन और लागत।
* संबंधित व्यक्ति की परिस्थितियाँ।
* विशेषज्ञ की सहायता की आवश्यकता।
=== 7.4. चौथा चरण: परीक्षण अथवा क्रियान्वयन ===
जहाँ सुरक्षित, उचित और संभव हो, संभावित समाधान को आजमाया जा सकता है।
परीक्षण की विधि समस्या की प्रकृति पर निर्भर करेगी। कुछ समस्याओं में छोटे व्यवहारगत परिवर्तन पर्याप्त हो सकते हैं, जबकि अन्य के लिए विशेषज्ञ, उपकरण, वित्तीय संसाधन या संस्थागत सहयोग की आवश्यकता हो सकती है।
सभी समस्याओं का परीक्षण सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त सुझावों के आधार पर स्वयं करना उचित नहीं है।
=== 7.5. पाँचवाँ चरण: परिणाम और सीख ===
समस्या साझा करने वाला व्यक्ति बताए कि सुझाए गए विकल्पों में से कौन-से उपयोगी रहे, किनमें कठिनाई आई और क्या परिणाम प्राप्त हुए।
यदि कोई समाधान अपेक्षित परिणाम न दे, तो उस अनुभव को भी उचित संदर्भ के साथ दर्ज किया जा सकता है।
इससे भविष्य में दूसरे लोगों को संभावित विकल्पों की उपयोगिता समझने में सहायता मिल सकती है।
== 8. सोशल मीडिया की भूमिका ==
प्रस्तावित पहल की प्रारंभिक गतिविधियों के लिए मौजूदा सोशल मीडिया मंचों का उपयोग किया जा सकता है। ज्ञान के क्षेत्र में इस प्रकार के सामूहिक सहयोग और साझा बुद्धिमत्ता का सबसे बड़ा और सफल जीवित उदाहरण स्वयं विकिपीडिया (Wikipedia) है, जहाँ दुनिया भर के लोग मिलकर एक मुक्त ज्ञानकोश का निर्माण करते हैं।<ref>{{cite web |title=Wikipedia: About |url=https://wikipedia.org |website=Wikipedia |publisher=Wikimedia Foundation |access-date=18 अक्टूबर 2026}}</ref>
इस व्यवस्था में किसी नए डिजिटल मंच की स्थापना प्रारंभिक अनिवार्यता नहीं होगी।
सहभागी अपने उपलब्ध सोशल मीडिया पर समस्याएँ साझा कर सकते हैं, प्रासंगिक विशेषज्ञों से संवाद कर सकते हैं और उपयोगी जानकारी के स्रोत उपलब्ध करा सकते हैं।
हालाँकि, सोशल मीडिया पर सामग्री की दृश्यता, उपयोगकर्ताओं की भागीदारी और प्राप्त प्रतिक्रियाओं की गुणवत्ता अलग-अलग हो सकती है। कोई उपयोगी प्रश्न पर्याप्त लोगों तक पहुँचेगा, इसकी गारंटी नहीं है।
इसके अतिरिक्त, विभिन्न मंचों की नीतियाँ, गोपनीयता संबंधी व्यवस्थाएँ तथा सामग्री के प्रबंधन के नियम अलग हो सकते हैं।
इसलिए पहल को किसी एक मंच पर निर्भर रखने के बजाय, जहाँ उपयुक्त हो, विभिन्न माध्यमों के उपयोग की संभावना पर विचार किया जा सकता है।
== 9. संभावित उपयोगिता ==
प्रस्तावित पहल से कई संभावित लाभ प्राप्त हो सकते हैं।
=== 9.1. विविध दृष्टिकोणों तक पहुँच ===
किसी समस्या पर अलग-अलग पृष्ठभूमियों के लोग विचार प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे समस्या को समझने के नए तरीके सामने आ सकते हैं।
=== 9.2. अनुभवों का आदान-प्रदान ===
किसी व्यक्ति का व्यावहारिक अनुभव दूसरे व्यक्ति को अपने विकल्प पहचानने में सहायता कर सकता है।
=== 9.3. विशेषज्ञों से संवाद के अवसर ===
स्पष्ट समस्या-विवरण संबंधित क्षेत्र के जानकार व्यक्तियों का ध्यान आकर्षित कर सकता है।
=== 9.4. संभावित समाधानों की पहचान ===
लोगों के सुझावों से ऐसे विकल्प सामने आ सकते हैं जिन पर समस्या साझा करने वाले व्यक्ति ने पहले विचार नहीं किया हो।
=== 9.5. साझा सीख का विकास ===
जब उपयोगी अनुभव उचित संदर्भ के साथ साझा किए जाते हैं, तो उनसे अन्य लोग भी सीख सकते हैं।
ये संभावित लाभ हैं। इन्हें इस पहल के प्रमाणित परिणाम के रूप में तभी प्रस्तुत किया जाना चाहिए जब वास्तविक क्रियान्वयन और विश्वसनीय साक्ष्यों से उनका समर्थन हो।
== 10. प्रमुख चुनौतियाँ और सीमाएँ ==
किसी व्यापक ऑनलाइन सहयोग पहल के क्रियान्वयन में कई चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं।
=== 10.1. सूचना की गुणवत्ता ===
ऑनलाइन प्राप्त सुझाव अपूर्ण, गलत अथवा भ्रामक हो सकते हैं। लोकप्रियता को किसी दावे की सत्यता का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
=== 10.2. प्रासंगिक प्रतिभागियों तक पहुँच ===
किसी समस्या पर पर्याप्त संख्या में प्रतिक्रिया मिलना और उचित विशेषज्ञता वाले व्यक्तियों की भागीदारी मिलना अलग-अलग बातें हैं।
=== 10.3. चर्चा से कार्रवाई तक पहुँचना ===
किसी समस्या पर विचार-विमर्श होने से उसका समाधान अपने आप नहीं हो जाता। कुछ समाधान समय लेने वाले हो सकते हैं।
=== 10.4. भाषा और पहुँच ===
भाषाई अंतर, इंटरनेट तक सीमित पहुँच तथा डिजिटल कौशल की असमानता भागीदारी को प्रभावित कर सकती है।
=== 10.5. अनावश्यक या अप्रासंगिक प्रतिक्रियाएँ ===
सार्वजनिक मंचों पर विषय से असंबंधित टिप्पणियाँ, प्रचारात्मक सामग्री और अनुपयोगी सुझाव भी प्राप्त हो सकते हैं।
=== 10.6. परिणामों की पुष्टि ===
किसी सहभागी का यह बताना कि समस्या हल हो गई, स्वयं में हर परिस्थिति में स्वतंत्र सत्यापन के समान नहीं है। दावों के प्रकार और महत्त्व के अनुसार उपयुक्त पुष्टि की आवश्यकता हो सकती है।
इन सीमाओं को ध्यान में रखकर पहल की कार्यप्रणाली और मूल्यांकन के मानदंड विकसित किए जाने चाहिए।
== 11. गोपनीयता, सुरक्षा और उत्तरदायित्व ==
समस्याएँ साझा करते समय प्रतिभागियों की निजता और सुरक्षा महत्त्वपूर्ण होगी।
प्रस्तावित पहल में निम्नलिखित सिद्धांत अपनाए जा सकते हैं:
* अनावश्यक व्यक्तिगत पहचान संबंधी जानकारी साझा करने से बचना।
* अन्य गोपनीय विवरण सार्वजनिक न करना।
* संभावित समाधान के लाभों के साथ उसके जोखिम और सीमाएँ भी बताना।
यह पहल पेशेवर सहायता का सार्वभौमिक विकल्प नहीं होगी। इसका उद्देश्य उपयोगी जानकारी तथा सहयोग की संभावनाएँ बढ़ाना होगा।
== 12. पहल से संबंधित प्रमुख प्रश्न ==
इस विचार को आगे विकसित करने के लिए निम्नलिखित प्रश्न उपयोगी हो सकते हैं:
# क्या लोग अपनी वास्तविक समस्याएँ सार्वजनिक रूप से साझा करने के लिए तैयार हैं?
# कौन-से प्रकार के समस्या-विवरण अधिक प्रासंगिक और उपयोगी प्रतिक्रियाएँ आकर्षित करते हैं?
# ऑनलाइन समुदायों में अलग-अलग पृष्ठभूमियों के लोगों का योगदान किस प्रकार उपयोगी बन सकता है?
# सुझावों की विश्वसनीयता और व्यवहार्यता का मूल्यांकन कैसे किया जा सकता है?
# सामाजिक मीडिया पर प्राप्त उपयोगी प्रतिक्रियाओं को वास्तविक कार्रवाई में बदलने में कौन-सी बाधाएँ आती हैं?
# किन परिस्थितियों में साझा अनुभव अन्य लोगों के लिए उपयोगी सिद्ध होते हैं?
# इस प्रकार की पहल के प्रभाव का विश्वसनीय मूल्यांकन कैसे किया जा सकता है?
# प्रतिभागियों की गोपनीयता बनाए रखते हुए परिणामों का प्रलेखन किस प्रकार किया जा सकता है?
इन प्रश्नों का उत्तर व्यवस्थित अध्ययन, प्रत्यक्ष अनुभव और विश्वसनीय प्रमाणों के आधार पर खोजा जाना चाहिए।
== 13. निष्कर्ष ==
''एक समस्या, अनेक दृष्टिकोण'' एक प्रस्तावित सहयोग पहल की रूपरेखा है। इसका केंद्रीय विचार यह है कि लोग अपनी वास्तविक समस्याएँ स्पष्ट रूप से साझा करें और दूसरे लोग अपने ज्ञान, अनुभव तथा विशेषज्ञता के आधार पर संभावित समाधानों की खोज में योगदान दें।
यह विचार सामूहिक बुद्धिमत्ता और नवाचार जैसे व्यापक विषयों से संबंधित है। इसकी व्यावहारिक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रतिभागियों के बीच सहयोग कितना सार्थक होता है, प्राप्त सुझाव कितने विश्वसनीय होते हैं और संभावित समाधान किस सीमा तक उपयोगी परिणाम देते हैं।
इसलिए शुरुआत में इसे एक परीक्षण योग्य प्रस्ताव के रूप में लेना उचित होगा। इसके परिणामों का मूल्यांकन करने और प्राप्त सीख के आधार पर कार्यप्रणाली में सुधार करने के बाद ही इसके व्यापक विस्तार पर विचार किया जाना चाहिए।
== संदर्भ ==
<references />
== आगे के अध्ययन के लिए ==
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SAGAR SURYAVANSHI JAITHAL
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'''One Problem, Many Perspectives''': यह एक प्रारंभिक विचार-प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से वास्तविक समस्याओं को साझा करने, विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के ज्ञान एवं अनुभव का उपयोग करने और संभावित समाधानों की खोज में सहयोग को प्रोत्साहित करने वाली एक पहल की रूपरेखा प्रस्तुत करना है।
== 1. प्रस्तावना ==
इंटरनेट ने विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों, भाषाओं, व्यवसायों और शैक्षणिक पृष्ठभूमियों के लोगों के बीच संवाद तथा सूचना के आदान-प्रदान की संभावनाओं का विस्तार किया है। डिजिटल संचार माध्यमों की सहायता से व्यक्ति अपनी जानकारी, अनुभव, विचार और प्रश्न व्यापक समुदाय तक पहुँचा सकता है।
इस परिस्थिति में एक विचार विचारणीय है: क्या इन माध्यमों का अधिक व्यवस्थित उपयोग लोगों की वास्तविक समस्याओं को समझने, संबंधित ज्ञान तक पहुँचने तथा संभावित समाधानों की खोज में परस्पर सहयोग बढ़ाने के लिए किया जा सकता है?
इस प्रस्तावित पहल का मूल विचार यह है कि प्रत्येक इच्छुक व्यक्ति अपनी किसी एक प्रमुख समस्या को स्पष्ट रूप से साझा करे और दूसरे लोग अपने ज्ञान, अनुभव, शोध अथवा विशेषज्ञता के आधार पर उसमें योगदान देने का प्रयास करें।
इसका उद्देश्य समस्याओं को केवल सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाना नहीं, बल्कि जहाँ संभव हो, समस्या की पहचान से लेकर संभावित समाधान के मूल्यांकन और उससे प्राप्त सीख तक की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करना है।
== 2. विचार की पृष्ठभूमि ==
समस्याओं का समाधान खोजने के लिए अलग-अलग व्यक्तियों तथा समूहों के ज्ञान और क्षमताओं का उपयोग करना कोई नई अवधारणा नहीं है। सामूहिक बुद्धिमत्ता, जनसहभागिता द्वारा कार्य-संपादन और मुक्त नवाचार जैसी अवधारणाओं में भी बाहरी व्यक्तियों अथवा व्यापक समुदाय के योगदान का अध्ययन किया गया है। इंटरनेट के युग में इस पूरी प्रक्रिया को 'क्राउडसोर्सिंग' (Crowdsourcing) के नाम से भी जाना जाता है, जिसका सर्वप्रथम प्रयोग जेफ हावे द्वारा किया गया था।<ref>{{cite web |last=Howe |first=Jeff |title=The Rise of Crowdsourcing |url=https://wired.com |website=Wired |date=1 जून 2006 |access-date=18 अक्टूबर 2026}}</ref>
प्रस्तावित पहल इन्हीं व्यापक विषयों से संबंधित है। इसका प्रारंभिक जोर किसी एक विशिष्ट वैज्ञानिक या व्यावसायिक समस्या पर नहीं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को अपनी वास्तविक समस्याएँ साझा करने और परस्पर सहयोग के लिए प्रेरित करने पर है।
यहाँ प्रस्तुत कार्यप्रणाली एक प्रस्ताव है। इसकी प्रभावशीलता, व्यापकता और विशिष्टता का निर्धारण वास्तविक क्रियान्वयन, उपलब्ध प्रमाणों और परिणामों के आधार पर किया जाना होगा।
== 3. मूल अवधारणा ==
इस पहल का केंद्रीय विचार है कि कोई व्यक्ति अपनी समस्या को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करे और अन्य इच्छुक व्यक्ति अपने ज्ञान तथा अनुभव के आधार पर उसमें योगदान दें।
उदाहरण के लिए, किसी विद्यार्थी को अध्ययन की उपयुक्त विधि खोजने में कठिनाई हो सकती है। कोई शिक्षक सीमित संसाधनों में शिक्षण सुधारने का तरीका खोज रहा हो सकता है। कोई किसान कृषि संबंधी चुनौती का सामना कर सकता है। कोई उद्यमी अपनी कार्यप्रणाली की लागत कम करने के विकल्प खोज सकता है।
इन परिस्थितियों में समस्या से संबंधित अन्य लोगों का अनुभव उपयोगी हो सकता है। हालाँकि, केवल समस्या साझा करने से समाधान की गारंटी नहीं मिलती।
इस प्रस्ताव के अनुसार, समस्या साझा करना सहयोग की शुरुआत हो सकती है। संभावित समाधान खोजने के लिए उसके बाद प्रासंगिक जानकारी, संवाद, मूल्यांकन और आवश्यकतानुसार व्यावहारिक परीक्षण की आवश्यकता होगी।
=== 3.1. मूल सूत्र ===
''समस्या की पहचान → समस्या का स्पष्ट विवरण → ज्ञान एवं अनुभव का आदान-प्रदान → संभावित समाधानों का मूल्यांकन → आवश्यकतानुसार परीक्षण → परिणामों से सीख।''
यह सूत्र प्रस्तावित कार्यप्रणाली का संक्षिप्त रूप है, न कि किसी स्थापित मॉडल का दावा।
== 4. पहल के उद्देश्य ==
इस प्रस्ताव के अंतर्गत निम्नलिखित उद्देश्य निर्धारित किए जा सकते हैं:
# लोगों को अपनी वास्तविक समस्याओं को स्पष्ट और व्यवस्थित रूप से व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करना।
# विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच ज्ञान, अनुभव और उपयोगी जानकारी के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।
# समस्याओं के समाधान में अलग-अलग दृष्टिकोणों और विशेषज्ञताओं के संभावित योगदान को पहचानना।
# उपलब्ध सुझावों की विश्वसनीयता, व्यवहार्यता और उपयुक्तता के मूल्यांकन को महत्त्व देना।
# जहाँ संभव हो, संभावित समाधानों के परीक्षण और परिणामों के प्रलेखन को प्रोत्साहित करना।
# किसी समस्या से प्राप्त उपयोगी सीख को दूसरे लोगों तक पहुँचाने के अवसर बढ़ाना।
# डिजिटल संवाद को केवल सूचना साझा करने तक सीमित न रखकर समाधान-केंद्रित सहयोग की दिशा में विकसित करने की संभावनाओं का परीक्षण करना।
== 5. लक्षित सहभागी ==
प्रस्तावित पहल किसी विशेष पेशे, आयु वर्ग, देश अथवा शैक्षणिक योग्यता तक सीमित नहीं होगी। इसमें भागीदारी स्वैच्छिक होगी।
संभावित प्रतिभागियों में निम्नलिखित समूह शामिल हो सकते हैं:
* विद्यार्थी और शिक्षक।
* शोधकर्ता तथा वैज्ञानिक।
* किसान और कृषि विशेषज्ञ।
* उद्यमी तथा व्यवसाय से जुड़े लोग।
* तकनीकी विशेषज्ञ।
* स्वास्थ्य अन्य क्षेत्रों के योग्य पेशेवर।
* सामाजिक कार्यकर्ता और सामुदायिक संगठन।
* संस्थाओं से जुड़े इच्छुक व्यक्ति।
* विभिन्न क्षेत्रों के सामान्य नागरिक।
किसी व्यक्ति का योगदान उसकी औपचारिक योग्यता तक सीमित नहीं होना चाहिए। व्यावहारिक अनुभव भी उपयोगी हो सकता है। इसके साथ ही, प्रत्येक सुझाव की उपयुक्तता उसके विषय, प्रमाण और परिस्थितियों के अनुसार जाँची जानी चाहिए।
== 6. समस्याओं के संभावित क्षेत्र ==
प्रस्तावित पहल में विभिन्न प्रकार की समस्याओं को शामिल किया जा सकता है।
=== 6.1. शिक्षा ===
शिक्षण विधियों, अध्ययन की रणनीतियों, शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता और सीखने में आने वाली कठिनाइयों से संबंधित प्रश्न।
=== 6.2. कृषि ===
खेती की कार्यप्रणाली, संसाधनों के उपयोग, कृषि संबंधी जानकारी तथा स्थानीय परिस्थितियों से जुड़ी चुनौतियाँ।
=== 6.3. पर्यावरण ===
जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन, प्रदूषण कम करने और पर्यावरण के प्रति जागरूकता से जुड़े प्रश्न।
=== 6.4. तकनीक और विज्ञान ===
तकनीकी बाधाओं, वैज्ञानिक प्रश्नों, उपकरणों के उपयोग और संभावित तकनीकी समाधानों से संबंधित समस्याएँ।
=== 6.5. रोजगार और व्यावसायिक विकास ===
कौशल विकास, कार्यप्रणाली में सुधार, पेशेवर सीख और रोजगार से संबंधित व्यावहारिक चुनौतियाँ।
=== 6.6. व्यवसाय और उद्यमिता ===
संसाधनों के उपयोग, प्रक्रियागत सुधार, ग्राहक अनुभव, लागत प्रबंधन तथा नवाचार से जुड़ी समस्याएँ।
=== 6.7. सामाजिक और सामुदायिक समस्याएँ ===
स्थानीय सुविधाओं, सामाजिक सहभागिता, सार्वजनिक जागरूकता और सामुदायिक स्तर पर सुधार के अवसरों से संबंधित प्रश्न।
=== 6.8. दैनिक जीवन ===
समय प्रबंधन, उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग, संगठन और अन्य सामान्य जीवन संबंधी चुनौतियाँ।
ये क्षेत्र केवल उदाहरण हैं। प्रस्तावित पहल की प्राथमिकताएँ उसके वास्तविक उद्देश्यों, प्रतिभागियों की आवश्यकताओं और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर तय की जा सकती हैं।
== 7. प्रस्तावित कार्यप्रणाली ==
पहल को सरल और समझने योग्य बनाए रखने के लिए इसकी प्रक्रिया पाँच चरणों में व्यवस्थित की जा सकती है।
=== 7.1. पहला चरण: समस्या का स्पष्ट विवरण ===
समस्या साझा करने वाला व्यक्ति बताए कि वास्तविक कठिनाई क्या है, उसका प्रभाव किस प्रकार पड़ रहा है और अब तक कौन-से प्रयास किए गए हैं।
उदाहरण के लिए, ''शिक्षा में सुधार की आवश्यकता है'' की तुलना में ''सीमित शिक्षण संसाधनों में विद्यार्थियों की गणित संबंधी बुनियादी समझ बेहतर करने के लिए कौन-सी विधियाँ उपयोगी हो सकती हैं?'' अधिक स्पष्ट प्रश्न है।
स्पष्ट विवरण से दूसरे लोगों को समस्या समझने और प्रासंगिक सुझाव देने में सहायता मिल सकती है।
=== 7.2. दूसरा चरण: ज्ञान और अनुभव का योगदान ===
अन्य सहभागी उपलब्ध जानकारी, व्यावहारिक अनुभव, संबंधित शोध या विशेषज्ञता के आधार पर सुझाव दे सकते हैं।
योगदान देने वाले व्यक्ति को जहाँ संभव हो, विश्वसनीय स्रोत प्रस्तुत करने चाहिए। विषय से संबंधित अनिश्चितताओं और अपनी विशेषज्ञता की सीमाओं को स्पष्ट करना भी उपयोगी होगा।
=== 7.3. तीसरा चरण: सुझावों का मूल्यांकन ===
प्राप्त सभी सुझावों को समान रूप से विश्वसनीय नहीं माना जाना चाहिए।
समाधान की उपयोगिता पर विचार करते समय निम्नलिखित बातों की जाँच की जा सकती है:
* उपलब्ध प्रमाण और स्रोत।
* समाधान की व्यावहारिकता।
* संभावित लाभ तथा जोखिम।
* आवश्यक संसाधन और लागत।
* संबंधित व्यक्ति की परिस्थितियाँ।
* विशेषज्ञ की सहायता की आवश्यकता।
=== 7.4. चौथा चरण: परीक्षण अथवा क्रियान्वयन ===
जहाँ सुरक्षित, उचित और संभव हो, संभावित समाधान को आजमाया जा सकता है।
परीक्षण की विधि समस्या की प्रकृति पर निर्भर करेगी। कुछ समस्याओं में छोटे व्यवहारगत परिवर्तन पर्याप्त हो सकते हैं, जबकि अन्य के लिए विशेषज्ञ, उपकरण, वित्तीय संसाधन या संस्थागत सहयोग की आवश्यकता हो सकती है।
सभी समस्याओं का परीक्षण सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त सुझावों के आधार पर स्वयं करना उचित नहीं है।
=== 7.5. पाँचवाँ चरण: परिणाम और सीख ===
समस्या साझा करने वाला व्यक्ति बताए कि सुझाए गए विकल्पों में से कौन-से उपयोगी रहे, किनमें कठिनाई आई और क्या परिणाम प्राप्त हुए।
यदि कोई समाधान अपेक्षित परिणाम न दे, तो उस अनुभव को भी उचित संदर्भ के साथ दर्ज किया जा सकता है।
इससे भविष्य में दूसरे लोगों को संभावित विकल्पों की उपयोगिता समझने में सहायता मिल सकती है।
== 8. सोशल मीडिया की भूमिका ==
प्रस्तावित पहल की प्रारंभिक गतिविधियों के लिए मौजूदा सोशल मीडिया मंचों का उपयोग किया जा सकता है। ज्ञान के क्षेत्र में इस प्रकार के सामूहिक सहयोग और साझा बुद्धिमत्ता का सबसे बड़ा और सफल जीवित उदाहरण स्वयं विकिपीडिया (Wikipedia) है, जहाँ दुनिया भर के लोग मिलकर एक मुक्त ज्ञानकोश का निर्माण करते हैं।<ref>{{cite web |title=Wikipedia: About |url=https://wikipedia.org |website=Wikipedia |publisher=Wikimedia Foundation |access-date=18 अक्टूबर 2026}}</ref>
इस व्यवस्था में किसी नए डिजिटल मंच की स्थापना प्रारंभिक अनिवार्यता नहीं होगी।
सहभागी अपने उपलब्ध सोशल मीडिया पर समस्याएँ साझा कर सकते हैं, प्रासंगिक विशेषज्ञों से संवाद कर सकते हैं और उपयोगी जानकारी के स्रोत उपलब्ध करा सकते हैं।
हालाँकि, सोशल मीडिया पर सामग्री की दृश्यता, उपयोगकर्ताओं की भागीदारी और प्राप्त प्रतिक्रियाओं की गुणवत्ता अलग-अलग हो सकती है। कोई उपयोगी प्रश्न पर्याप्त लोगों तक पहुँचेगा, इसकी गारंटी नहीं है।
इसके अतिरिक्त, विभिन्न मंचों की नीतियाँ, गोपनीयता संबंधी व्यवस्थाएँ तथा सामग्री के प्रबंधन के नियम अलग हो सकते हैं।
इसलिए पहल को किसी एक मंच पर निर्भर रखने के बजाय, जहाँ उपयुक्त हो, विभिन्न माध्यमों के उपयोग की संभावना पर विचार किया जा सकता है।
== 9. संभावित उपयोगिता ==
प्रस्तावित पहल से कई संभावित लाभ प्राप्त हो सकते हैं।
=== 9.1. विविध दृष्टिकोणों तक पहुँच ===
किसी समस्या पर अलग-अलग पृष्ठभूमियों के लोग विचार प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे समस्या को समझने के नए तरीके सामने आ सकते हैं।
=== 9.2. अनुभवों का आदान-प्रदान ===
किसी व्यक्ति का व्यावहारिक अनुभव दूसरे व्यक्ति को अपने विकल्प पहचानने में सहायता कर सकता है।
=== 9.3. विशेषज्ञों से संवाद के अवसर ===
स्पष्ट समस्या-विवरण संबंधित क्षेत्र के जानकार व्यक्तियों का ध्यान आकर्षित कर सकता है।
=== 9.4. संभावित समाधानों की पहचान ===
लोगों के सुझावों से ऐसे विकल्प सामने आ सकते हैं जिन पर समस्या साझा करने वाले व्यक्ति ने पहले विचार नहीं किया हो।
=== 9.5. साझा सीख का विकास ===
जब उपयोगी अनुभव उचित संदर्भ के साथ साझा किए जाते हैं, तो उनसे अन्य लोग भी सीख सकते हैं।
ये संभावित लाभ हैं। इन्हें इस पहल के प्रमाणित परिणाम के रूप में तभी प्रस्तुत किया जाना चाहिए जब वास्तविक क्रियान्वयन और विश्वसनीय साक्ष्यों से उनका समर्थन हो।
== 10. प्रमुख चुनौतियाँ और सीमाएँ ==
किसी व्यापक ऑनलाइन सहयोग पहल के क्रियान्वयन में कई चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं।
=== 10.1. सूचना की गुणवत्ता ===
ऑनलाइन प्राप्त सुझाव अपूर्ण, गलत अथवा भ्रामक हो सकते हैं। लोकप्रियता को किसी दावे की सत्यता का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
=== 10.2. प्रासंगिक प्रतिभागियों तक पहुँच ===
किसी समस्या पर पर्याप्त संख्या में प्रतिक्रिया मिलना और उचित विशेषज्ञता वाले व्यक्तियों की भागीदारी मिलना अलग-अलग बातें हैं।
=== 10.3. चर्चा से कार्रवाई तक पहुँचना ===
किसी समस्या पर विचार-विमर्श होने से उसका समाधान अपने आप नहीं हो जाता। कुछ समाधान समय लेने वाले हो सकते हैं।
=== 10.4. भाषा और पहुँच ===
भाषाई अंतर, इंटरनेट तक सीमित पहुँच तथा डिजिटल कौशल की असमानता भागीदारी को प्रभावित कर सकती है।
=== 10.5. अनावश्यक या अप्रासंगिक प्रतिक्रियाएँ ===
सार्वजनिक मंचों पर विषय से असंबंधित टिप्पणियाँ, प्रचारात्मक सामग्री और अनुपयोगी सुझाव भी प्राप्त हो सकते हैं।
=== 10.6. परिणामों की पुष्टि ===
किसी सहभागी का यह बताना कि समस्या हल हो गई, स्वयं में हर परिस्थिति में स्वतंत्र सत्यापन के समान नहीं है। दावों के प्रकार और महत्त्व के अनुसार उपयुक्त पुष्टि की आवश्यकता हो सकती है।
इन सीमाओं को ध्यान में रखकर पहल की कार्यप्रणाली और मूल्यांकन के मानदंड विकसित किए जाने चाहिए।
== 11. गोपनीयता, सुरक्षा और उत्तरदायित्व ==
समस्याएँ साझा करते समय प्रतिभागियों की निजता और सुरक्षा महत्त्वपूर्ण होगी।
प्रस्तावित पहल में निम्नलिखित सिद्धांत अपनाए जा सकते हैं:
* अनावश्यक व्यक्तिगत पहचान संबंधी जानकारी साझा करने से बचना।
* अन्य गोपनीय विवरण सार्वजनिक न करना।
* संभावित समाधान के लाभों के साथ उसके जोखिम और सीमाएँ भी बताना।
यह पहल पेशेवर सहायता का सार्वभौमिक विकल्प नहीं होगी। इसका उद्देश्य उपयोगी जानकारी तथा सहयोग की संभावनाएँ बढ़ाना होगा।
== 12. पहल से संबंधित प्रमुख प्रश्न ==
इस विचार को आगे विकसित करने के लिए निम्नलिखित प्रश्न उपयोगी हो सकते हैं:
# क्या लोग अपनी वास्तविक समस्याएँ सार्वजनिक रूप से साझा करने के लिए तैयार हैं?
# कौन-से प्रकार के समस्या-विवरण अधिक प्रासंगिक और उपयोगी प्रतिक्रियाएँ आकर्षित करते हैं?
# ऑनलाइन समुदायों में अलग-अलग पृष्ठभूमियों के लोगों का योगदान किस प्रकार उपयोगी बन सकता है?
# सुझावों की विश्वसनीयता और व्यवहार्यता का मूल्यांकन कैसे किया जा सकता है?
# सामाजिक मीडिया पर प्राप्त उपयोगी प्रतिक्रियाओं को वास्तविक कार्रवाई में बदलने में कौन-सी बाधाएँ आती हैं?
# किन परिस्थितियों में साझा अनुभव अन्य लोगों के लिए उपयोगी सिद्ध होते हैं?
# इस प्रकार की पहल के प्रभाव का विश्वसनीय मूल्यांकन कैसे किया जा सकता है?
# प्रतिभागियों की गोपनीयता बनाए रखते हुए परिणामों का प्रलेखन किस प्रकार किया जा सकता है?
इन प्रश्नों का उत्तर व्यवस्थित अध्ययन, प्रत्यक्ष अनुभव और विश्वसनीय प्रमाणों के आधार पर खोजा जाना चाहिए।
== 13. निष्कर्ष ==
''एक समस्या, अनेक दृष्टिकोण'' एक प्रस्तावित सहयोग पहल की रूपरेखा है। इसका केंद्रीय विचार यह है कि लोग अपनी वास्तविक समस्याएँ स्पष्ट रूप से साझा करें और दूसरे लोग अपने ज्ञान, अनुभव तथा विशेषज्ञता के आधार पर संभावित समाधानों की खोज में योगदान दें।
यह विचार सामूहिक बुद्धिमत्ता और नवाचार जैसे व्यापक विषयों से संबंधित है। इसकी व्यावहारिक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रतिभागियों के बीच सहयोग कितना सार्थक होता है, प्राप्त सुझाव कितने विश्वसनीय होते हैं और संभावित समाधान किस सीमा तक उपयोगी परिणाम देते हैं।
इसलिए शुरुआत में इसे एक परीक्षण योग्य प्रस्ताव के रूप में लेना उचित होगा। इसके परिणामों का मूल्यांकन करने और प्राप्त सीख के आधार पर कार्यप्रणाली में सुधार करने के बाद ही इसके व्यापक विस्तार पर विचार किया जाना चाहिए।
== संदर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
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== आगे के अध्ययन के लिए ==
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'''One Problem, Many Perspectives''': यह एक प्रारंभिक विचार-प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से वास्तविक समस्याओं को साझा करने, विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के ज्ञान एवं अनुभव का उपयोग करने और संभावित समाधानों की खोज में सहयोग को प्रोत्साहित करने वाली एक पहल की रूपरेखा प्रस्तुत करना है।
== 1. प्रस्तावना ==
इंटरनेट ने विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों, भाषाओं, व्यवसायों और शैक्षणिक पृष्ठभूमियों के लोगों के बीच संवाद तथा सूचना के आदान-प्रदान की संभावनाओं का विस्तार किया है। डिजिटल संचार माध्यमों की सहायता से व्यक्ति अपनी जानकारी, अनुभव, विचार और प्रश्न व्यापक समुदाय तक पहुँचा सकता है।
इस परिस्थिति में एक विचार विचारणीय है: क्या इन माध्यमों का अधिक व्यवस्थित उपयोग लोगों की वास्तविक समस्याओं को समझने, संबंधित ज्ञान तक पहुँचने तथा संभावित समाधानों की खोज में परस्पर सहयोग बढ़ाने के लिए किया जा सकता है?
इस प्रस्तावित पहल का मूल विचार यह है कि प्रत्येक इच्छुक व्यक्ति अपनी किसी एक प्रमुख समस्या को स्पष्ट रूप से साझा करे और दूसरे लोग अपने ज्ञान, अनुभव, शोध अथवा विशेषज्ञता के आधार पर उसमें योगदान देने का प्रयास करें।
इसका उद्देश्य समस्याओं को केवल सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाना नहीं, बल्कि जहाँ संभव हो, समस्या की पहचान से लेकर संभावित समाधान के मूल्यांकन और उससे प्राप्त सीख तक की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करना है।
== 2. विचार की पृष्ठभूमि ==
समस्याओं का समाधान खोजने के लिए अलग-अलग व्यक्तियों तथा समूहों के ज्ञान और क्षमताओं का उपयोग करना कोई नई अवधारणा नहीं है। सामूहिक बुद्धिमत्ता, जनसहभागिता द्वारा कार्य-संपादन और मुक्त नवाचार जैसी अवधारणाओं में भी बाहरी व्यक्तियों अथवा व्यापक समुदाय के योगदान का अध्ययन किया गया है। इंटरनेट के युग में इस पूरी प्रक्रिया को 'क्राउडसोर्सिंग' (Crowdsourcing) के नाम से भी जाना जाता है, जिसका सर्वप्रथम प्रयोग जेफ हावे द्वारा किया गया था।<ref>{{cite web |last=Howe |first=Jeff |title=The Rise of Crowdsourcing |url=https://wired.com |website=Wired |date=1 जून 2006 |access-date=18 अक्टूबर 2026}}</ref>
प्रस्तावित पहल इन्हीं व्यापक विषयों से संबंधित है। इसका प्रारंभिक जोर किसी एक विशिष्ट वैज्ञानिक या व्यावसायिक समस्या पर नहीं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को अपनी वास्तविक समस्याएँ साझा करने और परस्पर सहयोग के लिए प्रेरित करने पर है।
यहाँ प्रस्तुत कार्यप्रणाली एक प्रस्ताव है। इसकी प्रभावशीलता, व्यापकता और विशिष्टता का निर्धारण वास्तविक क्रियान्वयन, उपलब्ध प्रमाणों और परिणामों के आधार पर किया जाना होगा।
== 3. मूल अवधारणा ==
इस पहल का केंद्रीय विचार है कि कोई व्यक्ति अपनी समस्या को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करे और अन्य इच्छुक व्यक्ति अपने ज्ञान तथा अनुभव के आधार पर उसमें योगदान दें।
उदाहरण के लिए, किसी विद्यार्थी को अध्ययन की उपयुक्त विधि खोजने में कठिनाई हो सकती है। कोई शिक्षक सीमित संसाधनों में शिक्षण सुधारने का तरीका खोज रहा हो सकता है। कोई किसान कृषि संबंधी चुनौती का सामना कर सकता है। कोई उद्यमी अपनी कार्यप्रणाली की लागत कम करने के विकल्प खोज सकता है।
इन परिस्थितियों में समस्या से संबंधित अन्य लोगों का अनुभव उपयोगी हो सकता है। हालाँकि, केवल समस्या साझा करने से समाधान की गारंटी नहीं मिलती।
इस प्रस्ताव के अनुसार, समस्या साझा करना सहयोग की शुरुआत हो सकती है। संभावित समाधान खोजने के लिए उसके बाद प्रासंगिक जानकारी, संवाद, मूल्यांकन और आवश्यकतानुसार व्यावहारिक परीक्षण की आवश्यकता होगी।
=== 3.1. मूल सूत्र ===
''समस्या की पहचान → समस्या का स्पष्ट विवरण → ज्ञान एवं अनुभव का आदान-प्रदान → संभावित समाधानों का मूल्यांकन → आवश्यकतानुसार परीक्षण → परिणामों से सीख।''
यह सूत्र प्रस्तावित कार्यप्रणाली का संक्षिप्त रूप है, न कि किसी स्थापित मॉडल का दावा।
== 4. पहल के उद्देश्य ==
इस प्रस्ताव के अंतर्गत निम्नलिखित उद्देश्य निर्धारित किए जा सकते हैं:
# लोगों को अपनी वास्तविक समस्याओं को स्पष्ट और व्यवस्थित रूप से व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करना।
# विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच ज्ञान, अनुभव और उपयोगी जानकारी के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।
# समस्याओं के समाधान में अलग-अलग दृष्टिकोणों और विशेषज्ञताओं के संभावित योगदान को पहचानना।
# उपलब्ध सुझावों की विश्वसनीयता, व्यवहार्यता और उपयुक्तता के मूल्यांकन को महत्त्व देना।
# जहाँ संभव हो, संभावित समाधानों के परीक्षण और परिणामों के प्रलेखन को प्रोत्साहित करना।
# किसी समस्या से प्राप्त उपयोगी सीख को दूसरे लोगों तक पहुँचाने के अवसर बढ़ाना।
# डिजिटल संवाद को केवल सूचना साझा करने तक सीमित न रखकर समाधान-केंद्रित सहयोग की दिशा में विकसित करने की संभावनाओं का परीक्षण करना।
== 5. लक्षित सहभागी ==
प्रस्तावित पहल किसी विशेष पेशे, आयु वर्ग, देश अथवा शैक्षणिक योग्यता तक सीमित नहीं होगी। इसमें भागीदारी स्वैच्छिक होगी।
संभावित प्रतिभागियों में निम्नलिखित समूह शामिल हो सकते हैं:
* विद्यार्थी और शिक्षक।
* शोधकर्ता तथा वैज्ञानिक।
* किसान और कृषि विशेषज्ञ।
* उद्यमी तथा व्यवसाय से जुड़े लोग।
* तकनीकी विशेषज्ञ।
* स्वास्थ्य अन्य क्षेत्रों के योग्य पेशेवर।
* सामाजिक कार्यकर्ता और सामुदायिक संगठन।
* संस्थाओं से जुड़े इच्छुक व्यक्ति।
* विभिन्न क्षेत्रों के सामान्य नागरिक।
किसी व्यक्ति का योगदान उसकी औपचारिक योग्यता तक सीमित नहीं होना चाहिए। व्यावहारिक अनुभव भी उपयोगी हो सकता है। इसके साथ ही, प्रत्येक सुझाव की उपयुक्तता उसके विषय, प्रमाण और परिस्थितियों के अनुसार जाँची जानी चाहिए।
== 6. समस्याओं के संभावित क्षेत्र ==
प्रस्तावित पहल में विभिन्न प्रकार की समस्याओं को शामिल किया जा सकता है।
=== 6.1. शिक्षा ===
शिक्षण विधियों, अध्ययन की रणनीतियों, शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता और सीखने में आने वाली कठिनाइयों से संबंधित प्रश्न।
=== 6.2. कृषि ===
खेती की कार्यप्रणाली, संसाधनों के उपयोग, कृषि संबंधी जानकारी तथा स्थानीय परिस्थितियों से जुड़ी चुनौतियाँ।
=== 6.3. पर्यावरण ===
जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन, प्रदूषण कम करने और पर्यावरण के प्रति जागरूकता से जुड़े प्रश्न।
=== 6.4. तकनीक और विज्ञान ===
तकनीकी बाधाओं, वैज्ञानिक प्रश्नों, उपकरणों के उपयोग और संभावित तकनीकी समाधानों से संबंधित समस्याएँ।
=== 6.5. रोजगार और व्यावसायिक विकास ===
कौशल विकास, कार्यप्रणाली में सुधार, पेशेवर सीख और रोजगार से संबंधित व्यावहारिक चुनौतियाँ।
=== 6.6. व्यवसाय और उद्यमिता ===
संसाधनों के उपयोग, प्रक्रियागत सुधार, ग्राहक अनुभव, लागत प्रबंधन तथा नवाचार से जुड़ी समस्याएँ।
=== 6.7. सामाजिक और सामुदायिक समस्याएँ ===
स्थानीय सुविधाओं, सामाजिक सहभागिता, सार्वजनिक जागरूकता और सामुदायिक स्तर पर सुधार के अवसरों से संबंधित प्रश्न।
=== 6.8. दैनिक जीवन ===
समय प्रबंधन, उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग, संगठन और अन्य सामान्य जीवन संबंधी चुनौतियाँ।
ये क्षेत्र केवल उदाहरण हैं। प्रस्तावित पहल की प्राथमिकताएँ उसके वास्तविक उद्देश्यों, प्रतिभागियों की आवश्यकताओं और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर तय की जा सकती हैं।
== 7. प्रस्तावित कार्यप्रणाली ==
पहल को सरल और समझने योग्य बनाए रखने के लिए इसकी प्रक्रिया पाँच चरणों में व्यवस्थित की जा सकती है।
=== 7.1. पहला चरण: समस्या का स्पष्ट विवरण ===
समस्या साझा करने वाला व्यक्ति बताए कि वास्तविक कठिनाई क्या है, उसका प्रभाव किस प्रकार पड़ रहा है और अब तक कौन-से प्रयास किए गए हैं।
उदाहरण के लिए, ''शिक्षा में सुधार की आवश्यकता है'' की तुलना में ''सीमित शिक्षण संसाधनों में विद्यार्थियों की गणित संबंधी बुनियादी समझ बेहतर करने के लिए कौन-सी विधियाँ उपयोगी हो सकती हैं?'' अधिक स्पष्ट प्रश्न है।
स्पष्ट विवरण से दूसरे लोगों को समस्या समझने और प्रासंगिक सुझाव देने में सहायता मिल सकती है।
=== 7.2. दूसरा चरण: ज्ञान और अनुभव का योगदान ===
अन्य सहभागी उपलब्ध जानकारी, व्यावहारिक अनुभव, संबंधित शोध या विशेषज्ञता के आधार पर सुझाव दे सकते हैं।
योगदान देने वाले व्यक्ति को जहाँ संभव हो, विश्वसनीय स्रोत प्रस्तुत करने चाहिए। विषय से संबंधित अनिश्चितताओं और अपनी विशेषज्ञता की सीमाओं को स्पष्ट करना भी उपयोगी होगा।
=== 7.3. तीसरा चरण: सुझावों का मूल्यांकन ===
प्राप्त सभी सुझावों को समान रूप से विश्वसनीय नहीं माना जाना चाहिए।
समाधान की उपयोगिता पर विचार करते समय निम्नलिखित बातों की जाँच की जा सकती है:
* उपलब्ध प्रमाण और स्रोत।
* समाधान की व्यावहारिकता।
* संभावित लाभ तथा जोखिम।
* आवश्यक संसाधन और लागत।
* संबंधित व्यक्ति की परिस्थितियाँ।
* विशेषज्ञ की सहायता की आवश्यकता।
=== 7.4. चौथा चरण: परीक्षण अथवा क्रियान्वयन ===
जहाँ सुरक्षित, उचित और संभव हो, संभावित समाधान को आजमाया जा सकता है।
परीक्षण की विधि समस्या की प्रकृति पर निर्भर करेगी। कुछ समस्याओं में छोटे व्यवहारगत परिवर्तन पर्याप्त हो सकते हैं, जबकि अन्य के लिए विशेषज्ञ, उपकरण, वित्तीय संसाधन या संस्थागत सहयोग की आवश्यकता हो सकती है।
सभी समस्याओं का परीक्षण सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त सुझावों के आधार पर स्वयं करना उचित नहीं है।
=== 7.5. पाँचवाँ चरण: परिणाम और सीख ===
समस्या साझा करने वाला व्यक्ति बताए कि सुझाए गए विकल्पों में से कौन-से उपयोगी रहे, किनमें कठिनाई आई और क्या परिणाम प्राप्त हुए।
यदि कोई समाधान अपेक्षित परिणाम न दे, तो उस अनुभव को भी उचित संदर्भ के साथ दर्ज किया जा सकता है।
इससे भविष्य में दूसरे लोगों को संभावित विकल्पों की उपयोगिता समझने में सहायता मिल सकती है।
== 8. सोशल मीडिया की भूमिका ==
प्रस्तावित पहल की प्रारंभिक गतिविधियों के लिए मौजूदा सोशल मीडिया मंचों का उपयोग किया जा सकता है। ज्ञान के क्षेत्र में इस प्रकार के सामूहिक सहयोग और साझा बुद्धिमत्ता का सबसे बड़ा और सफल जीवित उदाहरण स्वयं विकिपीडिया (Wikipedia) है, जहाँ दुनिया भर के लोग मिलकर एक मुक्त ज्ञानकोश का निर्माण करते हैं।<ref>{{cite web |title=Wikipedia: About |url=https://wikipedia.org |website=Wikipedia |publisher=Wikimedia Foundation |access-date=18 अक्टूबर 2026}}</ref>
इस व्यवस्था में किसी नए डिजिटल मंच की स्थापना प्रारंभिक अनिवार्यता नहीं होगी।
सहभागी अपने उपलब्ध सोशल मीडिया पर समस्याएँ साझा कर सकते हैं, प्रासंगिक विशेषज्ञों से संवाद कर सकते हैं और उपयोगी जानकारी के स्रोत उपलब्ध करा सकते हैं।
हालाँकि, सोशल मीडिया पर सामग्री की दृश्यता, उपयोगकर्ताओं की भागीदारी और प्राप्त प्रतिक्रियाओं की गुणवत्ता अलग-अलग हो सकती है। कोई उपयोगी प्रश्न पर्याप्त लोगों तक पहुँचेगा, इसकी गारंटी नहीं है।
इसके अतिरिक्त, विभिन्न मंचों की नीतियाँ, गोपनीयता संबंधी व्यवस्थाएँ तथा सामग्री के प्रबंधन के नियम अलग हो सकते हैं।
इसलिए पहल को किसी एक मंच पर निर्भर रखने के बजाय, जहाँ उपयुक्त हो, विभिन्न माध्यमों के उपयोग की संभावना पर विचार किया जा सकता है।
== 9. संभावित उपयोगिता ==
प्रस्तावित पहल से कई संभावित लाभ प्राप्त हो सकते हैं।
=== 9.1. विविध दृष्टिकोणों तक पहुँच ===
किसी समस्या पर अलग-अलग पृष्ठभूमियों के लोग विचार प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे समस्या को समझने के नए तरीके सामने आ सकते हैं।
=== 9.2. अनुभवों का आदान-प्रदान ===
किसी व्यक्ति का व्यावहारिक अनुभव दूसरे व्यक्ति को अपने विकल्प पहचानने में सहायता कर सकता है।
=== 9.3. विशेषज्ञों से संवाद के अवसर ===
स्पष्ट समस्या-विवरण संबंधित क्षेत्र के जानकार व्यक्तियों का ध्यान आकर्षित कर सकता है।
=== 9.4. संभावित समाधानों की पहचान ===
लोगों के सुझावों से ऐसे विकल्प सामने आ सकते हैं जिन पर समस्या साझा करने वाले व्यक्ति ने पहले विचार नहीं किया हो।
=== 9.5. साझा सीख का विकास ===
जब उपयोगी अनुभव उचित संदर्भ के साथ साझा किए जाते हैं, तो उनसे अन्य लोग भी सीख सकते हैं।
ये संभावित लाभ हैं। इन्हें इस पहल के प्रमाणित परिणाम के रूप में तभी प्रस्तुत किया जाना चाहिए जब वास्तविक क्रियान्वयन और विश्वसनीय साक्ष्यों से उनका समर्थन हो।
== 10. प्रमुख चुनौतियाँ और सीमाएँ ==
किसी व्यापक ऑनलाइन सहयोग पहल के क्रियान्वयन में कई चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं।
=== 10.1. सूचना की गुणवत्ता ===
ऑनलाइन प्राप्त सुझाव अपूर्ण, गलत अथवा भ्रामक हो सकते हैं। लोकप्रियता को किसी दावे की सत्यता का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
=== 10.2. प्रासंगिक प्रतिभागियों तक पहुँच ===
किसी समस्या पर पर्याप्त संख्या में प्रतिक्रिया मिलना और उचित विशेषज्ञता वाले व्यक्तियों की भागीदारी मिलना अलग-अलग बातें हैं।
=== 10.3. चर्चा से कार्रवाई तक पहुँचना ===
किसी समस्या पर विचार-विमर्श होने से उसका समाधान अपने आप नहीं हो जाता। कुछ समाधान समय लेने वाले हो सकते हैं।
=== 10.4. भाषा और पहुँच ===
भाषाई अंतर, इंटरनेट तक सीमित पहुँच तथा डिजिटल कौशल की असमानता भागीदारी को प्रभावित कर सकती है।
=== 10.5. अनावश्यक या अप्रासंगिक प्रतिक्रियाएँ ===
सार्वजनिक मंचों पर विषय से असंबंधित टिप्पणियाँ, प्रचारात्मक सामग्री और अनुपयोगी सुझाव भी प्राप्त हो सकते हैं।
=== 10.6. परिणामों की पुष्टि ===
किसी सहभागी का यह बताना कि समस्या हल हो गई, स्वयं में हर परिस्थिति में स्वतंत्र सत्यापन के समान नहीं है। दावों के प्रकार और महत्त्व के अनुसार उपयुक्त पुष्टि की आवश्यकता हो सकती है।
इन सीमाओं को ध्यान में रखकर पहल की कार्यप्रणाली और मूल्यांकन के मानदंड विकसित किए जाने चाहिए।
== 11. गोपनीयता, सुरक्षा और उत्तरदायित्व ==
समस्याएँ साझा करते समय प्रतिभागियों की निजता और सुरक्षा महत्त्वपूर्ण होगी।
प्रस्तावित पहल में निम्नलिखित सिद्धांत अपनाए जा सकते हैं:
* अनावश्यक व्यक्तिगत पहचान संबंधी जानकारी साझा करने से बचना।
* अन्य गोपनीय विवरण सार्वजनिक न करना।
* संभावित समाधान के लाभों के साथ उसके जोखिम और सीमाएँ भी बताना।
यह पहल पेशेवर सहायता का सार्वभौमिक विकल्प नहीं होगी। इसका उद्देश्य उपयोगी जानकारी तथा सहयोग की संभावनाएँ बढ़ाना होगा।
== 12. पहल से संबंधित प्रमुख प्रश्न ==
इस विचार को आगे विकसित करने के लिए निम्नलिखित प्रश्न उपयोगी हो सकते हैं:
# क्या लोग अपनी वास्तविक समस्याएँ सार्वजनिक रूप से साझा करने के लिए तैयार हैं?
# कौन-से प्रकार के समस्या-विवरण अधिक प्रासंगिक और उपयोगी प्रतिक्रियाएँ आकर्षित करते हैं?
# ऑनलाइन समुदायों में अलग-अलग पृष्ठभूमियों के लोगों का योगदान किस प्रकार उपयोगी बन सकता है?
# सुझावों की विश्वसनीयता और व्यवहार्यता का मूल्यांकन कैसे किया जा सकता है?
# सामाजिक मीडिया पर प्राप्त उपयोगी प्रतिक्रियाओं को वास्तविक कार्रवाई में बदलने में कौन-सी बाधाएँ आती हैं?
# किन परिस्थितियों में साझा अनुभव अन्य लोगों के लिए उपयोगी सिद्ध होते हैं?
# इस प्रकार की पहल के प्रभाव का विश्वसनीय मूल्यांकन कैसे किया जा सकता है?
# प्रतिभागियों की गोपनीयता बनाए रखते हुए परिणामों का प्रलेखन किस प्रकार किया जा सकता है?
इन प्रश्नों का उत्तर व्यवस्थित अध्ययन, प्रत्यक्ष अनुभव और विश्वसनीय प्रमाणों के आधार पर खोजा जाना चाहिए।
== 13. निष्कर्ष ==
''एक समस्या, अनेक दृष्टिकोण'' एक प्रस्तावित सहयोग पहल की रूपरेखा है। इसका केंद्रीय विचार यह है कि लोग अपनी वास्तविक समस्याएँ स्पष्ट रूप से साझा करें और दूसरे लोग अपने ज्ञान, अनुभव तथा विशेषज्ञता के आधार पर संभावित समाधानों की खोज में योगदान दें।
यह विचार सामूहिक बुद्धिमत्ता और नवाचार जैसे व्यापक विषयों से संबंधित है। इसकी व्यावहारिक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रतिभागियों के बीच सहयोग कितना सार्थक होता है, प्राप्त सुझाव कितने विश्वसनीय होते हैं और संभावित समाधान किस सीमा तक उपयोगी परिणाम देते हैं।
इसलिए शुरुआत में इसे एक परीक्षण योग्य प्रस्ताव के रूप में लेना उचित होगा। इसके परिणामों का मूल्यांकन करने और प्राप्त सीख के आधार पर कार्यप्रणाली में सुधार करने के बाद ही इसके व्यापक विस्तार पर विचार किया जाना चाहिए।
== इन्हें भी देखें ==
* [[मुक्त नवाचार]] – समस्याओं को सुलझाने के लिए बाहरी विचारों और सहभागिता को बढ़ावा देने की अवधारणा।
* [[नागरिक विज्ञान]] – आम जनता और वैज्ञानिकों के साझा सहयोग से वास्तविक दुनिया की समस्याओं पर काम करने की पहल।
* [[सहमति]] – किसी विचार या समाधान पर एक बड़े समूह द्वारा सामूहिक निर्णय और सहमति बनाने की प्रक्रिया।
* [[सहयोगात्मक सॉफ़्टवेयर]] – ऐसे डिजिटल टूल्स और मंच जो विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के लोगों को एक साथ मिलकर काम करने की सुविधा देते हैं।
* [[ओपन सोर्स]] – ज्ञान, तकनीक या सॉफ़्टवेयर को साझा और खुला रखने का आंदोलन, जहाँ कोई भी सुधार का सुझाव दे सकता है।
* [[सामूहिक बुद्धिमत्ता]] – वह सिद्धांत जो बताता है कि लोगों का सामूहिक ज्ञान अकेले विशेषज्ञ से बेहतर हो सकता है।
* [[क्राउडसोर्सिंग]] – इंटरनेट के माध्यम से किसी समस्या के समाधान के लिए आम जनता का सहयोग लेने की पद्धति।
== संदर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
<references />
== आगे के अध्ययन के लिए ==
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सुनन्दा पटनायक
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text/x-wiki
{{Infobox person
| name = सुनन्दा पटनायक
| image = SunandaPatnaik.JPG
| image_size =
| caption =
| birth_name = सुनन्दा पटनायक
| birth_date = 7 नवंबर 1934
| birth_place = ओडिशा, भारत
| death_date = 19 जनवरी 2020
| death_place = कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत
| nationality = भारतीय
| education = संगीत में स्नातकोत्तर
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| occupation = हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका
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| known_for = हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन और ओड़िसी संगीत
| style = खयाल, तराना
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}}
'''सुनन्दा पटनायक''' (7 नवंबर 1934 – 19 जनवरी 2020) भारत की प्रसिद्ध हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका थीं। वे [[ग्वालियर घराना|ग्वालियर घराने]] की गायन परंपरा से जुड़ी थीं और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ [[ओड़िसी संगीत]] के लिए भी जानी जाती थीं। संगीत जगत में उन्हें '''गुरुमा''' के नाम से संबोधित किया जाता था।
== प्रारंभिक जीवन ==
सुनन्दा पटनायक का जन्म 7 नवंबर 1934 को ओडिशा में हुआ था। वे प्रसिद्ध ओड़िया कवि [[बैकुण्ठनाथ पटनायक]] की पुत्री थीं। संगीत में उनकी रुचि बचपन से ही थी। उन्होंने 14 वर्ष की आयु में [[आकाशवाणी]] कटक से गायन आरंभ किया।<ref>{{cite news |title=Veteran Odia Hindustani vocalist Sunanda Patnaik passes away at 85 |url=https://www.newindianexpress.com/states/odisha/2020/Jan/19/veteran-odia-hindustani-vocalist-sunanda-patnaik-passes-away-at-85-2091585.html |work=The New Indian Express |date=19 जनवरी 2020 |access-date=25 सितंबर 2026}}</ref>
उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर भारत के प्रथम राष्ट्रपति [[राजेंद्र प्रसाद]] ने उन्हें संगीत की उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति दिलाने में सहायता की। इसके बाद उन्होंने पुणे में [[विनायक राव पटवर्धन]] से संगीत की शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 1956 में उन्होंने संगीत में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की।<ref>{{cite news |title=Veteran Odia Hindustani vocalist Sunanda Patnaik passes away at 85 |url=https://www.newindianexpress.com/states/odisha/2020/Jan/19/veteran-odia-hindustani-vocalist-sunanda-patnaik-passes-away-at-85-2091585.html |work=The New Indian Express |date=19 जनवरी 2020 |access-date=25 सितंबर 2026}}</ref>
== संगीत जीवन ==
सुनन्दा पटनायक ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में [[खयाल]] और [[तराना]] गायन को विशेष रूप से अपनाया। उनके गायन में तेज लय वाले तराने और शास्त्रीय रचनाओं की प्रस्तुति को विशेष पहचान मिली। वे ग्वालियर घराने की गायन परंपरा की प्रमुख प्रतिनिधियों में मानी जाती थीं।<ref>{{cite news |title=Gwalior gharana exponent, singer Sunanda Patnaik dies in Kolkata |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/bhubaneswar/gwalior-gharana-exponent-singer-sunanda-patnaik-dies-in-kolkata/articleshow/73393513.cms |work=The Times of India |date=19 जनवरी 2020 |access-date=25 सितंबर 2026}}</ref>
1957 में उन्होंने [[कलकत्ता]] में आयोजित अखिल भारतीय सदरंग संगीत सम्मेलन में भाग लिया। उनके गायन को वहाँ विशेष सराहना मिली। इसके बाद उन्होंने देश के विभिन्न भागों में संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किए और विदेशों में भी कार्यक्रम किए।<ref>{{cite news |title=Gwalior gharana exponent, singer Sunanda Patnaik dies in Kolkata |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/bhubaneswar/gwalior-gharana-exponent-singer-sunanda-patnaik-dies-in-kolkata/articleshow/73393513.cms |work=The Times of India |date=19 जनवरी 2020 |access-date=25 सितंबर 2026}}</ref>
सुनन्दा पटनायक ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के साथ ओड़िसी संगीत में भी योगदान दिया। उन्होंने [[ओड़िआ]] और [[हिंदी]] में भजनों तथा अन्य संगीत रचनाओं को स्वर दिया।<ref>{{cite news |title=Gwalior gharana exponent, singer Sunanda Patnaik dies in Kolkata |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/bhubaneswar/gwalior-gharana-exponent-singer-sunanda-patnaik-dies-in-kolkata/articleshow/73393513.cms |work=The Times of India |date=19 जनवरी 2020 |access-date=25 सितंबर 2026}}</ref>
== संगीत शिक्षण ==
1980 के दशक में सुनन्दा पटनायक कोलकाता में रहने लगीं। उन्होंने वहाँ '''विष्णु विनायक संगीत आश्रम''' की स्थापना की, जहाँ वे हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण देती थीं।<ref>{{cite news |title=Veteran Odia Hindustani vocalist Sunanda Patnaik passes away at 85 |url=https://www.newindianexpress.com/states/odisha/2020/Jan/19/veteran-odia-hindustani-vocalist-sunanda-patnaik-passes-away-at-85-2091585.html |work=The New Indian Express |date=19 जनवरी 2020 |access-date=25 सितंबर 2026}}</ref>
== पुरस्कार और सम्मान ==
* 1970–71 — ओडिशा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, ओड़िसी गायन।<ref>{{cite web |title=Odisha Reference Annual 2011 – Odisha Sangeet Nataka Akademi Award Winners |url=https://magazines.odisha.gov.in/orissaannualreference/ORA-2011/pdf/104-108.pdf |publisher=Government of Odisha |access-date=25 सितंबर 2026}}</ref>
* 1975 — अखिल भारतीय गांधर्व महाविद्यालय मंडल द्वारा डॉक्टर ऑफ म्यूजिक की मानद उपाधि।
* 1999 — [[उत्कल विश्वविद्यालय]] द्वारा डॉक्टर ऑफ लिटरेचर की मानद उपाधि।
* 2009 — जीवनपर्यंत उपलब्धि सम्मान।
* 2012 — ओड़िशा सोसाइटी ऑफ अमेरिका का जीवनपर्यंत उपलब्धि सम्मान।
* 2012 — [[संगीत नाटक अकादमी]] का '''टैगोर अकादमी पुरस्कार'''।<ref>{{cite web |title=Sangeet Natak Akademi Annual Report 2011–12 |url=https://www.sangeetnatak.gov.in/public/uploads/reports/164093189415902.pdf |publisher=Sangeet Natak Akademi |access-date=25 सितंबर 2026}}</ref>
== निधन ==
सुनन्दा पटनायक का निधन 19 जनवरी 2020 को कोलकाता में 85 वर्ष की आयु में हुआ।<ref>{{cite news |title=Veteran Odia Hindustani vocalist Sunanda Patnaik passes away at 85 |url=https://www.newindianexpress.com/states/odisha/2020/Jan/19/veteran-odia-hindustani-vocalist-sunanda-patnaik-passes-away-at-85-2091585.html |work=The New Indian Express |date=19 जनवरी 2020 |access-date=25 सितंबर 2026}}</ref>
== विरासत ==
सुनन्दा पटनायक ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत और ओड़िसी संगीत दोनों क्षेत्रों में योगदान दिया। कोलकाता में स्थापित विष्णु विनायक संगीत आश्रम के माध्यम से उन्होंने संगीत शिक्षा भी दी।<ref>{{cite news |title=Veteran Odia Hindustani vocalist Sunanda Patnaik passes away at 85 |url=https://www.newindianexpress.com/states/odisha/2020/Jan/19/veteran-odia-hindustani-vocalist-sunanda-patnaik-passes-away-at-85-2091585.html |work=The New Indian Express |date=19 जनवरी 2020 |access-date=25 सितंबर 2026}}</ref>
अक्टूबर 2020 में ओडिशा सरकार ने शास्त्रीय संगीत में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिए जाने वाले ओडिशा संगीत नाटक अकादमी के एक सम्मान का नाम बदलकर '''सुनन्दा सम्मान''' किया।<ref>{{cite news |title=Classical music award renamed as Sunanda Samman |url=https://www.newindianexpress.com/states/odisha/2020/Oct/23/classical-music-award-renamed-as-sunanda-samman-2214305.html |work=The New Indian Express |date=23 अक्टूबर 2020 |access-date=25 सितंबर 2026}} {{Dead link|date=अक्तूबर 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
== संदर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
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नय्यी नवेली
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Itsharshitt28
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text/x-wiki
{{Infobox film
| image =
| caption =
| director = बालाजी मोहन
| screenplay = दिव्य निधि शर्मा
| story = हिमांशु शर्मा
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*आनंद एल. राय
*हिमांशु शर्मा
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* [[यामी गौतम]]
* आदिनाथ कोठारे
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| cinematography = ऋषि पंजाबी
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'''नय्यी नवेली''' हिन्दी भाषा की भारतीय ड्रामा फिल्म है। फ़िल्म को हिमांशु शर्मा और दिव्य निधि शर्मा ने लिखा है। फ़िल्म को अमेज़न एमजीएम स्टूडियोज और कलर येलो प्रोडक्शंस के बैनर तले बालाजी मोहन ने निर्मित किया है। इसमें यामी गौतम मुख्य अभिनय भूमिका में हैं। यह फिल्म तमिल फिल्म निर्माता बालाजी मोहन की बॉलीवुड में निर्देशन की पहली फिल्म है।
यह फिल्म [[दशहरा]] त्योहार के अवसर पर 16 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी।
==कलाकार==
*[[यामी गौतम]]
*मीता वशिष्ठ
*सोनल झा
*सुनीता राजवार
*राजेश दुबे
*आदित्य कुलश्रेष्ठ
*अदिनाथ एम. कोठारे
*प्रतीक पचौरी
*सुष्मिता मुखर्जी
== निर्माण ==
'''कलाकार चयन'''
शुरुआत में [[कृति सैनॉन]] ने फिल्म में मुख्य अभिनेत्री के रूप में काम करने के लिए साइन किया था।<ref>{{Cite web |last=Kumar |first=Aman |date=2024-11-21 |title=Following Shraddha's Steps? After Bhediya, Kriti Sanon Signs A Horror-Comedy With Aanand L Rai |url=https://www.mensxp.com/entertainment/bollywood/172500-kriti-sanon-signs-horror-comedy-with-aanand-l-rai.html |access-date=2026-08-22 |website=MensXP |language=en-IN}}</ref> बाद में अक्टूबर 2025 में, [[बॉलीवुड हंगामा]] ने बताया कि [[तेरे इश्क में]] और [[कॉकटेल 2]] की व्यस्त शूटिंग के कारण सैनन को फिल्म के लिए फाइनल नहीं किया जा सका।<ref>{{Cite web |date=2025-10-09 |title=SCOOP: Kriti Sanon NOT a part of Aanand L. Rai's Nayi Naveli; Source clarifies, "She's completely focused on Tere Ishk Mein, Cocktail 2 and Don 3" |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/scoop-kriti-sanon-not-part-aanand-l-rais-nayi-naveli-source-clarifies-shes-completely-focused-tere-ishk-mein-cocktail-2-don-3/ |access-date=2026-08-22 |website=[[बॉलीवुड हंगामा]] |language=en}}</ref><ref>{{Cite news |date=2025-10-10 |title=Kriti Sanon not in Aanand L. Rai's 'Nayi Naveli'; The actress focuses on 'Tere Ishk Mein', 'Cocktail 2' and 'Don 3' |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/kriti-sanon-not-in-aanand-l-rais-nayi-naveli-the-actress-focuses-on-tere-ishk-mein-cocktail-2-and-don-3/articleshow/124451514.cms |access-date=2026-08-22 |work=[[द टाइम्स ऑफ इंडिया]] |issn=0971-8257}}</ref> जनवरी 2026 में यामी गौतम को मुख्य भूमिका के लिए फाइनल किया गया।<ref>{{Cite news |last=Sharma |first=Priyanka |date=2026-01-08 |title=Yami Gautam preparing for a horror-comedy film with Aanand L Rai |url=https://www.mid-day.com/entertainment/bollywood-news/article/yami-gautam-preparing-for-a-horror-comedy-film-with-aanand-l-rai-23611072 |access-date=2026-08-22 |work=Mid-Day}}</ref><ref>{{Cite news |date=2026-01-12 |title=Yami Gautam Dhar's Next is Horror-Comedy 'Nayi Naveli' Backed by Aanand L Rai |url=https://www.hollywoodreporterindia.com/features/insight/yami-gautam-dhars-next-is-horror-comedy-nayi-naveli-backed-by-aanand-l-rai |access-date=2026-08-22 |work=The Hollywood Reporter |language=en}}</ref><ref>{{Cite news |date=2026-08-19 |title='Nayyi Navelli': Yami Gautam Dhar to star in Aanand L Rai backed fantasy family-drama |url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/nayyi-navelli-yami-gautam-dhar-to-star-in-aanand-l-rai-backed-fantasy-family-drama/article71364838.ece |access-date=2026-10-01 |work=[[द हिंदू]] |language=en-IN |issn=0971-751X}}</ref>
'''फिल्माने'''
यामी गौतम ने 7 अप्रैल 2026 को फिल्म की शूटिंग शुरू की।<ref>{{Cite news |date=2026-04-04 |title=Yami Gautam Dhar to start filming Nayyi Navelli from April 7 |url=https://www.mid-day.com/entertainment/bollywood-news/article/yami-gautam-dhar-to-start-filming-nayyi-navelli-from-april-7-23624062 |access-date=2026-10-01 |work=Mid-Day}}</ref>
==विपणन==
प्रोडक्शन हाउस द्वारा 9 सितंबर 2026 को एक टीज़र जारी किया गया था।<ref>{{Cite news |last=Ramachandran |first=Naman |author-link=Naman Ramachandran |date=2026-09-10 |title=Yami Gautam Dhar’s Amazon MGM Studios, Colour Yellow Film ‘Nayyi Navelli’ Unveils Teaser (EXCLUSIVE) |url=https://variety.com/2026/film/news/yami-gautam-dhar-nayyi-navelli-teaser-1236856929/ |access-date=2026-09-15 |work=Variety (magazine) |language=en-US}}</ref><ref>{{Cite news |last=Sonali |first=Kriti |date=2026-09-10 |title=Nayyi Navelli teaser: Branded ‘daayan’, Yami Gautam’s new bride has ‘chudail-pishach’ for breakfast |url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/nayyi-navelli-teaser-branded-daayan-yami-gautams-new-bride-has-chudail-pishach-for-breakfast-10871509/ |access-date=2026-09-15 |work=The Indian Express |language=en}}</ref> 30 सितंबर 2026 को फ़िल्म का ट्रेलर जारी किया गया।<ref>{{cite news |url=https://www.amarujala.com/amp/entertainment/bollywood/nayi-naveli-trailer-yami-gautam-stars-in-a-mysterious-family-entertainer-film-releases-on-october-16-2026-09-30 |title=नई नवेली: 'भाभी डायन है?' यामी गौतम की आने वाली फिल्म का ट्रेलर रिलीज; कॉमेडी-रहस्य और एक्शन से भरी दिखी कहानी |access-date=1 October 2026 |language=hi |work=[[अमर उजाला]]}}</ref>
==संगीत==
जीवी प्रकाश कुमार ने फिल्म के लिए संगीत तैयार किया।<ref>{{Cite news |last=Tripathi |first=Aradhya |date=2026-06-23 |title='सेफ हैंड में है मेरा हिंदी डेब्यू', अपनी पहली बॉलीवुड फिल्म के संगीत को लेकर उत्साहित हैं जीवी प्रकाश|url =https://www.amarujala.com/entertainment/south-cinema/gv-prakash-kumar-on-his-hindi-debut-from-nayi-naveli-says-yami-gautam-is-lead-my-songs-are-in-safe-hands-2026-06-23| access-date=2026-08-22 |work=[[अमर उजाला]] |language=hi}}</ref><ref>{{cite news|title=G.V. Prakash Kumar on his Hindi debut 'Nayi Naveli': 'Yami Gautam is the lead, so my songs are in safe hands'|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/g-v-prakash-kumar-on-his-hindi-debut-nayi-naveli-yami-gautam-is-the-lead-so-my-songs-are-in-safe-hands/articleshow/131929882.cms|access-date=14 September 2026|work=Times of India}}</ref> पहला एकल गीत "भाभी तबाही" 25 सितंबर 2026 को रिलीज़ हुआ।<ref>{{Cite web |date= 25 September 2026 |title=Bhabhi Tabaahi Song From Nayyi Navelli Out! Yami Gautam Dhar Turns Muh Dikhayi Into A Musical Celebration- Watch|url= https://www.bollywoodbubble.com/bollywood-news/bhabhi-tabaahi-song-from-nayyi-navelli-out-yami-gautam-dhar-turns-muh-dikhayi-into-a-musical-celebration-watch/|access-date= 25 September 2026 |website=Bollywood Bubble }}</ref>
{{Track listing
| extra_column = गायक
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| extra1 = [[नीति मोहन]]
| title2 = फटा पटाखा
| lyrics2 = वायु
| extra2 = मधुबन्ति बगची
| length2 = 2:46
}}
==प्रोमोशन==
फिल्म 16 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी।<ref>{{Cite news |last=Iqbal |first=Murtuza |date=2026-08-19 |title=Yami Gautam's Nayyi Navelli All Set To Clash At Box Office With Rajinikanth's Jailer 2 & Rajkummar Rao Starrer Prahaar During Dussehra Weekend |url=https://www.freepressjournal.in/entertainment/yami-gautams-nayyi-navelli-all-set-to-clash-at-box-office-with-rajinikanths-jailer-2-rajkummar-rao-starrer-prahaar-during-dussehra-weekend |access-date=2026-08-22 |work=[[The Free Press Journal]] |language=en}}</ref><ref>{{Cite news |last=Sonali |first=Kriti |date=2026-08-20 |title='So this is what I married into': Aditya Dhar has the funniest reaction to Yami Gautam's Nayyi Navelli |url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/aditya-dhar-has-the-funniest-reaction-to-yami-gautams-nayyi-navelli-10841411/ |access-date=2026-08-22 |work=[[The Indian Express]] |language=en}}</ref><ref>{{Cite news |last=Ramachandran |first=Naman |author-link=Naman Ramachandran |date=2026-08-19 |title=Yami Gautam Dhar's 'Nayyi Navelli' Sets October Release From Amazon MGM Studios, Colour Yellow (EXCLUSIVE) |url=https://variety.com/2026/film/news/yami-gautam-dhar-nayyi-navelli-october-release-1236837564/ |access-date=2026-08-22 |work=[[Variety (magazine)|Variety]] |language=en-US}}</ref>
==सन्दर्भ==
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{IMDb title}}
* {{Bollywood Hungama movie}}
[[श्रेणी:2026 की फ़िल्में]]
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| map_caption = सिताई विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र को दर्शाने वाला इंटरैक्टिव मानचित्र
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| mla = [[संगीता रॉय]]
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| loksabha_cons = [[कूचबिहार लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|कूचबिहार]]
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| electors = 3,08,419<ref name="eci2026">{{cite web |url=https://results.eci.gov.in/ResultAcGenMay2026/candidateswise-S25006.htm |title=General Election to Assembly Constituencies: Trends & Results May-2026 - Constituency 6-Sitai (SC) (West Bengal) |publisher=भारत निर्वाचन आयोग |access-date=5 मई 2026}}</ref>
| reservation = अनुसूचित जाति (SC)
| abolished =
}}
'''सिताई विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र''' (अंग्रेज़ी: '''Sitai Assembly constituency''') [[भारत]] के [[पश्चिम बंगाल]] राज्य के [[कूचबिहार ज़िला|कूचबिहार ज़िले]] में स्थित पश्चिम बंगाल विधानसभा का क्रमांक 6 निर्वाचन क्षेत्र है। यह सीट [[अनुसूचित जाति]] (SC) के प्रत्याशियों के लिए आरक्षित है (2008 के परिसीमन से पूर्व यह एक अनारक्षित सामान्य सीट थी)। संसदीय परिसीमन के अनुसार, यह क्षेत्र [[कूचबिहार लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|कूचबिहार (अनुसूचित जाति)]] लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। वर्ष [[2026 बंगाल विधानसभा चुनाव|2026 के विधानसभा चुनाव]] में [[सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस]] की [[संगीता रॉय]] ने यहाँ से जीत दर्ज कर पार्टी का कब्जा बरकरार रखा।<ref name="toi2026">{{cite news |url=https://timesofindia.indiatimes.com/elections/assembly-elections/west-bengal/constituency-show/sitai |title=Sitai Assembly Election Results 2026: TMC's Sangita Roy wins |work=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया|The Times of India]] |date=4 मई 2026}}</ref><ref name="abp2026">{{cite news |url=https://bengali.abplive.com/elections/assembly-election-results-2026-sitai-wb-seat-updates |title=সিতাই বিধানসভা নির্বাচন ফলাফল ২০২৬: তৃণমূল প্রার্থী সঙ্গীতা রায়ের জয় |work=[[एबीपी आनंद|ABP Ananda]] |date=4 मई 2026}} {{Dead link|date=अक्तूबर 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref><ref name="anandabazar2026">{{cite news |url=https://www.anandabazar.com/west-bengal/north-bengal/west-bengal-assembly-election-2026-results-sitai-constituency/ |title=সিতাইয়ে ঘাসফুলের জয় অব্যাহত, বিজেপি প্রার্থীকে হারিয়ে বিধায়ক সঙ্গীতা রায় |work=[[आनंदबाजार पत्रिका|Anandabazar Patrika]] |date=4 मई 2026}}</ref>
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| caption = सिताई में दलों का ऐतिहासिक प्रदर्शन (जीत का प्रतिशत)
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}}
== क्षेत्र का विस्तार ==
पश्चिम बंगाल में निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के संबंध में [[परिसीमन आयोग (भारत)|परिसीमन आयोग]] के 2006 के आदेश (जो 2008 में अधिसूचित हुआ तथा 2011 के विधानसभा चुनाव से प्रभावी हुआ) के अनुसार, 6-सिताई (अ.जा.) विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में निम्नलिखित प्रशासनिक क्षेत्र शामिल हैं:<ref name="delimitation">{{cite web |url=http://eci.nic.in/delim/Final_Publications/WestBengal/FINAL%20ORDER%20NOTIFICATION_English.pdf |title=Delimitation Commission Order No. 18 |work=Table A – Assembly Constituencies and Their Extent |publisher=Government of West Bengal |access-date=27 मई 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100918130255/http://ceowestbengal.nic.in/news_pdf/gazette123.pdf |archive-date=18 सितंबर 2010 |url-status=live}}</ref>
* सिताई सामुदायिक विकास खंड
* दिनहाटा-I सामुदायिक विकास खंड की बारा आटाई-I, बारा आटाई-II, चावड़ाहाट, गितलदहा-I, गितलदहा-II, गोसानीमारी-I, गोसानीमारी-II, मातलहाट, ओकराबाड़ी, पेटा भानुकुमारी-I और पेटा भानुकुमारी-II ग्राम पंचायतें।
== विधानसभा सदस्य ==
=== सिताई (1967–वर्तमान) ===
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! वर्ष
! विधायक
! आरक्षित
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|-
| [[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 1967|1967]]
| rowspan="4"| [[मोहम्मद फजले हक]]<ref name="eci1967">{{cite web |url=https://eci.gov.in/files/file/3180-west-bengad-1967/ |title=Statistical Report on General Election, 1967 to the Legislative Assembly of West Bengal |publisher=Election Commission of India |access-date=15 जून 2014}}</ref>
| rowspan="10"| कोई नहीं
| rowspan="4" bgcolor='{{party color|Indian National Congress}}' |
| rowspan="4"| [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]
|-
| [[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 1969|1969]]<ref name="eci1969">{{cite web |url=https://eci.gov.in/files/file/3181-west-bengal-1969/ |title=Statistical Report on General Election, 1969 to the Legislative Assembly of West Bengal |publisher=Election Commission of India |access-date=15 जून 2014}}</ref>
|-
| [[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 1971|1971]]<ref name="eci1971">{{cite web |url=https://eci.gov.in/files/file/3182-west-bengal-1971/ |title=Statistical Report on General Election, 1971 to the Legislative Assembly of West Bengal |publisher=Election Commission of India |access-date=15 जून 2014}}</ref>
|-
| [[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 1972|1972]]<ref name="eci1972">{{cite web |url=https://eci.gov.in/files/file/3182-west-bengal-1972/ |title=Statistical Report on General Election, 1972 to the Legislative Assembly of West Bengal |publisher=Election Commission of India |access-date=15 जून 2014}}</ref>
|-
| [[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 1977|1977]]
| rowspan="2"| दीपेन्द्रनाथ बर्मन<ref name="eci1977">{{cite web |url=https://eci.gov.in/files/file/3183-west-bengal-1977/ |title=Statistical Report on General Election, 1977 to the Legislative Assembly of West Bengal |publisher=Election Commission of India |access-date=15 जून 2014}}</ref>
| rowspan="4" bgcolor='{{party color|ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लाक}}' |
| rowspan="4"| [[ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लाक]]
|-
| [[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 1982|1982]]<ref name="eci1982">{{cite web |url=https://eci.gov.in/files/file/3184-west-bengal-1982/ |title=Statistical Report on General Election, 1982 to the Legislative Assembly of West Bengal |publisher=Election Commission of India |access-date=15 जून 2014}}</ref>
|-
| [[पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव, 1987|1987]]
| दीपक सेनगुप्ता<ref name="eci1987">{{cite web |url=https://eci.gov.in/files/file/3185-west-bengal-1987/ |title=Statistical Report on General Election, 1987 to the Legislative Assembly of West Bengal |publisher=Election Commission of India |access-date=15 जून 2014}}</ref>
|-
| [[पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव, 1991|1991]]
| नृपेन्द्रनाथ राय<ref name="eci1991">{{cite web |url=https://eci.gov.in/files/file/3186-west-bengal-1991/ |title=Statistical Report on General Election, 1991 to the Legislative Assembly of West Bengal |publisher=Election Commission of India |access-date=15 जून 2014}}</ref>
|-
| [[पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव, 1996|1996]]
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| [[निर्दलीय राजनीतिज्ञ|निर्दलीय]]
|-
| [[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 2001|2001]]<ref name="eci2001">{{cite web |url=https://eci.gov.in/files/file/3188-west-bengal-2001/ |title=Statistical Report on General Election, 2001 to the Legislative Assembly of West Bengal |publisher=Election Commission of India |access-date=15 जून 2014}}</ref>
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| rowspan="2"| [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]
|-
| [[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 2006|2006]]<ref name="eci2006">{{cite web |url=https://eci.gov.in/files/file/3189-west-bengal-2006/ |title=Statistical Report on General Election, 2006 to the Legislative Assembly of West Bengal |publisher=Election Commission of India |access-date=15 जून 2014}}</ref>
|-
| [[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 2011|2011]]
| केशव चंद्र राय<ref name="eci2011">{{cite web |url=http://eciresults.nic.in/ConstituencywiseS25006.htm |title=Sitai Assembly Elections May 2011 Results |publisher=Election Commission of India |access-date=17 मई 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110516050812/http://eciresults.nic.in/ConstituencywiseS25006.htm |archive-date=16 मई 2011 |url-status=dead}}</ref>
| rowspan="5"| अनुसूचित जाति
| bgcolor='{{party color|Indian National Congress}}' |
| [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]
|-
| [[पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव, 2016|2016]]
| rowspan="2"| [[जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया]]<ref name="eci2016">{{cite web |url=https://eci.gov.in/files/file/3192-west-bengal-2016/ |title=Statistical Report on General Election, 2016 to the Legislative Assembly of West Bengal |publisher=Election Commission of India |access-date=15 जून 2016}}</ref>
| rowspan="4" bgcolor='{{party color|All India Trinamool Congress}}' |
| rowspan="4"| [[सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस|अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस]]
|-
| [[2021 पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव|2021]]<ref name="eci2021">{{cite web |url=https://results.eci.gov.in/ResultAcGenMar2021/ConstituencywiseS25006.htm |title=West Bengal General Legislative Election 2021 - Constituency-wise Trends & Results: 6-Sitai (SC) |publisher=भारत निर्वाचन आयोग |access-date=3 मई 2021}}</ref>
|-
| 2024{{efn|उप-चुनाव}}
| rowspan="2"| [[संगीता रॉय]]<ref name="bypoll2024">{{cite news |url=https://www.anandabazar.com/west-bengal/north-bengal/tmc-candidate-sangita-roy-won-sitai-assembly-bypoll/cid/1563214 |title=সিতাই উপনির্বাচনে বিপুল ভোটে জয়ী তৃণমূলের সঙ্গীতা রায় |work=[[आनंदबाजार पत्रिका|Anandabazar Patrika]] |date=23 नवंबर 2024}}</ref>
|-
| [[2026 बंगाल विधानसभा चुनाव|2026]]<ref name="eci2026" />
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== चुनाव परिणाम ==
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|title=विजेता उम्मीदवारों का मत प्रतिशत (1967–2026)
|titlebar=#ddd
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=== 2026 ===
2026 के चुनावों में [[सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस|तृणमूल कांग्रेस]] की [[संगीता रॉय]] ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी [[भारतीय जनता पार्टी|भाजपा]] के आशुतोष बर्मा को 2,721 मतों के अंतर से पराजित किया।<ref name="eci2026" /><ref name="toi2026" /><ref name="anandabazar2026" />
{{Election box begin | title=[[2026 बंगाल विधानसभा चुनाव]]: सिताई (अ.जा.)<ref name="eci2026" /><ref name="toi2026" /><ref>{{cite news |url=https://eisamay.com/elections/assembly-elections/west-bengal/constituency-details/sitai-6/ |title=সিতাই বিধানসভা কেন্দ্র ফলাফল ২০২৬: তৃণমূলের জয় |work=[[এই समय|Ei Samay]] |date=4 मई 2026}} {{Dead link|date=अक्तूबर 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref><ref>{{cite news |url=https://www.sangbadpratidin.in/bengal/west-bengal-assembly-election-2026-sitai-sc-seat-result/ |title=উত্তরবঙ্গে স্বস্তি তৃণমূলের, সিতাইয়ে জয়ী সঙ্গীতা রায় |work=[[সংবাদ প্রতিদিন|Sangbad Pratidin]] |date=4 मई 2026}}</ref>}}
{{Election box winning candidate with party link
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|party = नोटा (भारत)
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{{Election box hold with party link
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{{Election box end}}
=== 2024 उप-चुनाव ===
तत्कालीन विधायक जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया के [[कूचबिहार लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|कूचबिहार]] से लोकसभा सांसद चुने जाने के बाद 13 नवंबर 2024 को उप-चुनाव कराया गया। इसमें [[सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस|तृणमूल कांग्रेस]] की संगीता रॉय ने [[भारतीय जनता पार्टी|भाजपा]] के दीपक कुमार राय को 1,30,636 मतों के भारी अंतर से पराजित किया।<ref name="bypoll2024" />
{{Election box begin | title=2024 उप-चुनाव: सिताई (अ.जा.)<ref name="bypoll2024" />}}
{{Election box winning candidate with party link
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|winner = सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस
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{{Election box end}}
=== 2021 ===
2021 के चुनावों में, [[सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस|तृणमूल कांग्रेस]] के जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी [[भारतीय जनता पार्टी|भाजपा]] के दीपक कुमार राय को 10,112 मतों से हराया।<ref name="eci2021" /><ref>{{cite news |url=https://www.anandabazar.com/west-bengal/north-bengal/tmc-jagadish-chandra-barma-basunia-won-sitai-assembly-seat-dgtl/cid/1279469 |title=সিতাইয়ে ঘাসফুল শিবিরের স্বস্তি, জয়ী জগদীশ বর্মা বাসুনিয়া |work=[[आनंदबाजार पत्रिका|Anandabazar Patrika]] |date=2 मई 2021}}</ref><ref>{{cite news |url=https://www.thehindu.com/election/westbengal-sitai-assembly-constituency/ |title=Sitai Assembly Constituency Election Results 2021 |work=[[द हिन्दू|The Hindu]] |date=3 मई 2021}}</ref>
{{Election box begin | title=[[2021 पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव]]: सिताई (अ.जा.)<ref name="eci2021" /><ref>{{cite news |url=https://www.indiatoday.in/elections/story/sitai-west-bengal-assembly-election-result-2021-live-updates-1797088-2021-05-01 |title=Sitai Assembly Election Results 2021 |work=[[इंडिया टुडे|India Today]] |date=2 मई 2021}}</ref><ref>{{cite news |url=https://news.abplive.com/elections/sitai-wb-election-2021-results-live-updates-constituency-number-6-sitai-west-bengal-election-2021-vote-counting-results-leading-trailing-2-may-2021-1455615 |title=সিতাই বিধানসভা কেন্দ্র ফলাফল ২০২১: তৃণমূলের জগদীশ বর্মা বাসুনিয়া জয়ী |work=[[एबीपी आनंद|ABP Ananda]] |date=2 मई 2021}}</ref>}}
{{Election box winning candidate with party link
|party = सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस
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|party = अमरा बांगाली
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{{Election box end}}
=== 2016 ===
2016 के चुनावों में [[सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस|तृणमूल कांग्रेस]] के जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] के केशव चंद्र राय को 25,251 मतों से हराया।<ref name="eci2016" /><ref>{{cite news |url=https://timesofindia.indiatimes.com/elections/assembly-elections/west-bengal/constituency-show/sitai |title=Sitai Assembly Election 2016 Result |work=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया|The Times of India]] |date=19 मई 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20260504053750/https://timesofindia.indiatimes.com/elections/assembly-elections/west-bengal/constituency-show/sitai |archive-date=4 मई 2026 |access-date=3 अक्तूबर 2026 |url-status=live}}</ref>
{{Election box begin | title=[[पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव, 2016]]: सिताई (अ.जा.)<ref name="eci2016" /><ref>{{cite news |url=https://www.ndtv.com/elections/west-bengal/sitai-mla-results-2016 |title=Sitai Assembly Election Results 2016 |work=[[एनडीटीवी|NDTV]] |date=19 मई 2016}}</ref>}}
{{Election box winning candidate with party link
|party = सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस
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{{Election box end}}
=== 2011 ===
2011 के चुनावों में [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] के केशव चंद्र राय ने [[ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लाक|फार्वर्ड ब्लाक]] की रहमतुन्नेसा बेगम को 1,577 मतों से पराजित किया।<ref name="eci2011" /><ref>{{cite news |url=https://www.anandabazar.com/archive/2011/may/14/state_results.html |title=পশ্চিমবঙ্গ বিধানসভা ভোট ফলাফল ২০১১: সিতাইয়ে কংগ্রেসের স্বস্তি |work=[[आनंदबाजार पत्रिका|Anandabazar Patrika]] |date=14 मई 2011}}</ref>
{{Election box begin | title=[[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 2011]]: सिताई (अ.जा.)<ref name="eci2011" /><ref>{{cite news |url=https://www.ndtv.com/elections/west-bengal/sitai-mla-results |title=Sitai Assembly Election Results 2011 |work=[[एनडीटीवी|NDTV]] |date=13 मई 2011}}</ref>}}
{{Election box winning candidate with party link
|party = भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
|candidate = केशव चंद्र राय
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{{Election box candidate with party link
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}}
{{Election box end}}
=== 2006 ===
2006 के चुनावों में [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] के डॉ. मो. फजले हक ने [[ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लाक|फार्वर्ड ब्लाक]] के नृपेन्द्रनाथ राय को 4,790 मतों से हराया।<ref name="eci2006" />
{{Election box begin | title=[[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 2006]]: सिताई<ref name="eci2006" />}}
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{{Election box candidate with party link
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|winner = भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
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{{Election box end}}
=== 2001 ===
2001 के चुनावों में [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] के डॉ. मो. फजले हक ने [[ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लाक|फार्वर्ड ब्लाक]] के नृपेन्द्रनाथ राय को 7,420 मतों से हराया।<ref name="eci2001" />
{{Election box begin | title=[[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 2001]]: सिताई<ref name="eci2001" />}}
{{Election box winning candidate with party link
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{{Election box gain with party link
|winner = भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
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{{Election box end}}
=== 1996 ===
1996 के चुनावों में टिकट न मिलने पर [[निर्दलीय राजनीतिज्ञ|निर्दलीय]] लड़े डॉ. मो. फजले हक ने [[ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लाक|फार्वर्ड ब्लाक]] के नृपेन्द्रनाथ राय को 4,820 मतों से हराया।<ref name="eci1996" />
{{Election box begin | title=[[पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव, 1996]]: सिताई<ref name="eci1996" />}}
{{Election box candidate
|party = निर्दलीय
|candidate = [[मोहम्मद फजले हक]]
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{{Election box candidate with party link
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{{Election box candidate with party link
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|candidate = अजीजुल हक
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|percentage = 4.80
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|percentage = 85.40
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}}
{{Election box gain
|winner = निर्दलीय
|loser = ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लाक
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}}
{{Election box end}}
=== 1991 ===
1991 के चुनावों में [[ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लाक|फार्वर्ड ब्लाक]] के नृपेन्द्रनाथ राय ने [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] के डॉ. मो. फजले हक को 2,420 मतों से हराया।<ref name="eci1991" />
{{Election box begin | title=[[पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव, 1991]]: सिताई<ref name="eci1991" />}}
{{Election box winning candidate with party link
|party = ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लाक
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|party = भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
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{{Election box hold with party link
|winner = ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लाक
|swing = -2.05
}}
{{Election box end}}
=== 1987 ===
1987 के चुनावों में [[ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लाक|फार्वर्ड ब्लाक]] के दीपक सेनगुप्ता ने [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] के डॉ. मो. फजले हक को 6,430 मतों से हराया।<ref name="eci1987" />
{{Election box begin | title=[[पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव, 1987]]: सिताई<ref name="eci1987" />}}
{{Election box winning candidate with party link
|party = ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लाक
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|percentage = 51.20
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{{Election box candidate with party link
|party = भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
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{{Election box hold with party link
|winner = ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लाक
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}}
{{Election box end}}
=== 1982 ===
1982 के चुनावों में [[ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लाक|फार्वर्ड ब्लाक]] के दीपेन्द्रनाथ बर्मन ने [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] के डॉ. मो. फजले हक को पराजित किया।<ref name="eci1982" />
{{Election box begin | title=[[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 1982]]: सिताई<ref name="eci1982" />}}
{{Election box winning candidate with party link
|party = ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लाक
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|percentage = 52.80
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|party = भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
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{{Election box hold with party link
|winner = ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लाक
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}}
{{Election box end}}
=== 1977 ===
1977 के चुनावों में [[ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लाक|फार्वर्ड ब्लाक]] के दीपेन्द्रनाथ बर्मन ने [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] के डॉ. मो. फजले हक को 9,120 मतों से हराकर कांग्रेस से सीट छीनी।<ref name="eci1977" />
{{Election box begin | title=[[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 1977]]: सिताई<ref name="eci1977" />}}
{{Election box winning candidate with party link
|party = ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लाक
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|percentage = 54.10
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}}
{{Election box candidate with party link
|party = भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
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}}
{{Election box gain with party link
|winner = ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लाक
|loser = भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
|swing =
}}
{{Election box end}}
=== 1972 ===
1972 के चुनावों में [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] के डॉ. मो. फजले हक ने लगातार चौथी बार अपनी सीट बरकरार रखी।<ref name="eci1972" />
{{Election box begin | title=[[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 1972]]: सिताई<ref name="eci1972" />}}
{{Election box winning candidate with party link
|party = भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
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|percentage = 55.80
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}}
{{Election box candidate with party link
|party = ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लाक
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|percentage = 42.30
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}}
{{Election box majority
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}}
{{Election box turnout
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}}
{{Election box hold with party link
|winner = भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
|swing = +4.75
}}
{{Election box end}}
=== 1971 ===
1971 के चुनावों में [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] के डॉ. मो. फजले हक ने अपनी सीट बरकरार रखी।<ref name="eci1971" />
{{Election box begin | title=[[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 1971]]: सिताई<ref name="eci1971" />}}
{{Election box winning candidate with party link
|party = भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
|candidate = [[मोहम्मद फजले हक]]
|votes = {{formatnum:26100}}
|percentage = 50.20
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}}
{{Election box candidate
|party = स्वतंत्र
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|percentage = 46.30
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}}
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{{Election box turnout
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}}
{{Election box hold with party link
|winner = भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
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}}
{{Election box end}}
=== 1969 ===
1969 के चुनावों में [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] के डॉ. मो. फजले हक ने सीट बरकरार रखी।<ref name="eci1969" />
{{Election box begin | title=[[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 1969]]: सिताई<ref name="eci1969" />}}
{{Election box winning candidate with party link
|party = भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
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|votes = {{formatnum:27640}}
|percentage = 52.40
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}}
{{Election box candidate with party link
|party = ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लाक
|candidate = नृपेन्द्रनाथ राय
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{{Election box majority
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|percentage = 7.00
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}}
{{Election box turnout
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}}
{{Election box hold with party link
|winner = भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
|swing = +1.10
}}
{{Election box end}}
=== 1967 ===
1967 के चुनावों में इस नवनिर्मित विधानसभा क्षेत्र में [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] के डॉ. मो. फजले हक ने पहली ऐतिहासिक जीत दर्ज की।<ref name="eci1967" />
{{Election box begin | title=[[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 1967]]: सिताई<ref name="eci1967" />}}
{{Election box winning candidate with party link
|party = भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
|candidate = [[मोहम्मद फजले हक]]
|votes = {{formatnum:25890}}
|percentage = 51.10
|change = ''नया''
}}
{{Election box candidate
|party = स्वतंत्र
|candidate = एस. सेनगुप्ता
|votes = {{formatnum:23780}}
|percentage = 46.90
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}}
{{Election box majority
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}}
{{Election box turnout
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}}
{{Election box new seat win
|winner = भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
}}
{{Election box end}}
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://eci.gov.in/ भारत निर्वाचन आयोग - आधिकारिक सांख्यिकीय रिपोर्ट]
[[श्रेणी:पश्चिम बंगाल के विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र]]
[[श्रेणी:कूचबिहार ज़िला]]
9yea17l3kgz3kan5108no1vhvyzuxda
लता मंगेशकर के गानों की सूची
0
1619866
6630500
6630270
2026-10-17T17:26:33Z
Itsharshitt28
940812
6630500
wikitext
text/x-wiki
{{मुख्य|लता मंगेशकर}}
[[File:Lata Mangeshkar black-and-white.jpg|thumb|right|1953 में मंगेशकर]]
'''लता मंगेशकर''' (जन्म: '''हेमा मंगेशकर'''; 28 सितंबर 1929 - मृत्यु: 6 फरवरी 2022) एक दिग्गज भारतीय [[पार्श्व गायिका]] , [[संगीत निर्माता]] और [[संगीत निर्देशक]] थीं, जिन्होंने हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में संगीत रचा। उनके कई पुराने गाने विभिन्न नई फिल्मों (बॉलीवुड या भारतीय फिल्में) में शामिल किए गए हैं और उन्हें श्रेय भी दिया गया है। लेकिन ऐसे गाने, जब तक कि उन्हें दोबारा रिकॉर्ड न किया गया हो, नीचे सूचीबद्ध नहीं किए गए हैं।
'''नोट:''' इस लेख में मंगेशकर द्वारा गाए गए सभी गाने शामिल नहीं हैं।
==हिंदी गाने==
'''1940 के दशक'''
'''1945'''
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="2" | ''बड़ी माँ''
| "जननी जनमभूमि... तुम माँ हो बड़ी माँ"
| rowspan="2" | के. दत्त
|
| मीनाक्षी
|-
| "माता तेरे चरणों में"
|
| इशवरलाल, कोरस<ref name="auto">{{cite web |url=http://cineplot.com/music/lata-mangeshkars-song-list-1945-1948/ |title=Lata Mangeshkar's Song List (1945 – 1948) |access-date=2014-11-05 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141106003940/http://cineplot.com/music/lata-mangeshkars-song-list-1945-1948/ |archive-date=2014-11-06 |url-status=dead}}</ref>
|}
===1946===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! ''जीवन यात्रा''
| "चिड़िया बोले चूं चूं मैना बोले हूँ"
| वसंत देसाई
|
|
|-
! ''सोना चाँदनी''
| "प्यारे बापू की"
| तुफैल फारूक़ी
|
|
|-
! rowspan="3" | ''सुभद्रा''
| "मैं खिली खिली फुलवारी"
| rowspan="3" | वसंत देसाई
|
| rowspan="3" |
|-
| "पिया आयेगा गोरी सुध न बिसार"
|
|-
| "सांवरिया ओ बसुरिया ओ बजाई गयो रे"
|
|-
! rowspan="3" | ''आप की सेवा में''
| "अब कौन सुनेगा मेरे मन की बात"
| rowspan="3" | दत्ता दावजेकर
| rowspan="3" |
| rowspan="3" |
|-
| "एक नये रंग में दूजे उमंग में"
|-
| "चलो हो गयी तैयार"
|}
===1947===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! ''[[शादी से पहले]]''
| "पा लगूं कर जोड़ा जोड़ी होरी श्याम मोसे ना"
| पढंकर और करणार्ड
|
| [[मोहम्मद रफी]]
|-
! ''शेहनाई''
| "जवानी की रेल चली"
| सी. रामचंद्र
|
| [[गीता दत्त]], सी. रामचंद्र
|}
===1948===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! ''अंधों का सहारा''
| "मैं तो नाचो छमा छम नाच रे"
| एस. पारसेकर
|
|
|-
! rowspan='10' | ''अनोखा प्यार''
| "ऐ दिल मेरी वफ़ा में"
| rowspan='10' | अनिल विश्वास
| rowspan='10' |
| इरा नागरथ
|-
| "ऐ दिल मेरी वफ़ा"
| rowspan='8' |
|-
| "एक दिल का लगना"
|-
| "भोला भला री मेरा"
|-
| "घड़ी घड़ी पूछो ना"
|-
| "जीवन सपना टूट गया"
|-
| "मेरे लिए वो ग़म ए इंतज़ार"
|-
| "मेरे फूलों में छुपी है"
|-
| "याद रखना चाँद"
|-
| "याद रखना चाँद"
| [[मुकेश]]
|-
! rowspan='5' | ''आशा''
| "सजना रे तोरी कौन डगर"
| rowspan='5' | खेमचंद प्रकाश
|
| rowspan='9' |
|-
| "चेत चेत कर चल मधुर नर"
|
|-
| "दूर जाए रे राह मेरी आज तेरी राह से"
|
|-
| "एक मूरत मनोहर मेरी अंखियों को तरसे"
|
|-
| "कित जाए बसे हे मुरारी तोहे ढूंढत राधा"
|
|-
! ''बिहारी''
| "सब से कि डरफिशानी फूलों का सामियाना"
| एन. भट्टाचार्य
|
|-
! rowspan='3' | ''चाँद सितारे''
| "ऐ दुनिया की मालिक मुझे तुझसे मिला है"
| rowspan='3' | प्रेमनाथ
|
|-
| "जब दिल में तेरे दर्द"
|
|-
| "मेरी नाव चले धीरे-धीरे"
|
|-
! ''चुनरिया''
| "अंख मेरी लड़ गई"
| हंसराज बहल
|
| इंदर गोयल
|-
! ''दीदी''
| "तेरे नैनों में निंदिया निंदिया में सपने"
| मुकुंद मसूरेकर
|
| rowspan='3' |
|-
! ''दुखियारी''
| "अब किसको सुनाऊं मैं कथा कृष्णा"
| ज्ञान दत्त
|
|-
! rowspan='5' | ''गजरे''
| "बरस बरस बदली"
| rowspan='5' | अनिल विश्वास
|
|-
| "चली दुल्हन बारातियों के"
|
| इरा नागरथ
|-
| "घर यहाँ बसाने आये थे"
|
| rowspan='5' |
|-
| "कब तक कटेगी जिंदगी किनारे किनारे"
|
|-
| "प्रीतम तेरा मेरा प्यार"
|
|-
! rowspan='3' | ''हीर रांझा''
| "कैसे काटू ये काली रातें आ बलम"
| rowspan='3' | अजीज खान
|
|-
| "काहे को ब्याही बिदेस"
|
|-
| "खामोश फसाना है"
|
| जी.एम. दुर्रानी
|-
! rowspan='2' | ''खिड़की''
| "खुशियाँ मनायें"
| rowspan='2' | सी. रामचन्द्र
|
| मोहनतारा, शमशाद बेगम
|-
| "तेरे बिना सूना"
|
| गीता दत्त, सी. रामचन्द्र
|-
! rowspan='5' | ''मजबूर''
| "अब कोई जी के क्या करे"
| rowspan='5' | गुलाम हैदर
|
|
|-
| "अंग्रेजी छोरा चला गया"
|
| मुकेश
|-
| "दिल मेरा तोडा"
|
|
|-
| "गोरी सखियों से"
|
| rowspan='2' | गीता दत्त
|-
| "हर शे पे जवानी है"
|
|-
! ''मंदिर''
| "लो वो आई निंदिया चुप चुप धीरे"
| वसंत देसाई
|
| rowspan='2' |
|-
! ''मेरे लाल''
| "हमारा घर बन जाए महलों से प्यारा सुंदर"
| पुरूषोत्तम
|
|-
! rowspan='2' | ''मेरी कहानी''
| "दिलवालों दिलों का मेल दिलों का खेल"
| rowsapn='2' | के.दत्ता
|
|
|-
| "नहिं नहिं बून्दनियाँ जिया लहराये"
|
|
|-
! ''[[नदिया के पार (1948 फ़िल्म)|नदिया के पार]]''
| "हो गोरी हो चोरी कहाँ चली हो"
| सी. रामचन्द्र
|
| सी. रामचन्द्र
|-
! ''पद्मिनी''
| "बेदर्द तेरे दर्द को सीने से लगा के"
| गुलाम हैदर
|
|
|-
! ''[[शहीद (1948 फ़िल्म)|शहीद]]''
| "पिंजरे मेन बुलबुल बोले (शामिल नहीं)"
| गुलाम हैदर
|
| मैडम मोहन
|-
! rowspan='6' | ''[[ज़िद्दी (1948 फ़िल्म)|ज़िद्दी]]''
| "अब कौन सहारा है जब तेरा सहारा"
| rowspan='6' | खेमचंद प्रकाश
| rowspan='6' |
| rowspan='5' |
|-
| "चंदा रे जा रे जा पिया से संदेसा मोरा"
|-
| "जादू कर गई किसी के नैना"
|-
| "रूठ गए मोरे श्याम सखी रे"
|-
| "तुझे ओ बेवफा हम जिंदगी का आसरा"
|-
| "ये कौन आया रे करके ये"
| [[किशोर कुमार]] <ref name='auto'/>
|}
===1949===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan='7' | ''[[आइये]]''
| "इतनी बड़ी दुनिया में"
| rowspan='7' | शौकत हैदरी
|
| rowspan='3' |
|-
| "किस लिए आँखों में आंसू"
|
|-
| "आ भी जा जानेवाले"
|
|-
| "आइए आओ चले वहां"
|
| मुबारक बेगम
|-
| "दुनिया बदल गई"
|
| rowspan='2' | जी.एम. दुर्रानी
|-
| "कर सकेगा ना जुदा"
|
|-
| "जिया डोले किसी ख़यालिन में"
|
| शौकत हैदरी
|-
! rowspan='7' | ''[[अंदाज़ (1949 फ़िल्म)|अंदाज़]]''
| "मेरी लाडली रे बनी है"
| rowspan='7' | नौशाद
| rowspan='7' | [[मजरूह सुलतानपुरी]]
| rowspan='5' |
|-
| "कोई मेरे दिल में"
|-
| "उठाये जा उनके सितम"
|-
| "तोड़ दिया दिल मेरा"
|-
| "डरना मोहब्बत"
|-
| "यूं तो अपस मेन"
| rowspan='2' | मोहम्मद रफ़ी
|-
| "सुनलो दिल का अफसाना" (शामिल नहीं)
|-
! rowspan='2' | ''[[बंगला भेदी]]''
| "हौंसले दिल के मिट्टी प्यार के अरमान गया"
| rowspan='2' | पी. रमाकांत
|
| rowspan='10' |
|-
| "मन में तेरी याद बसी आँखों में है प्यार"
|
|-
! rowspan='10' | ''[[बरसात (1949 फ़िल्म)|बरसात]]''
| "बरसात में हमसे मिले" (शीर्षक गीत)
| rowspan='10' | [[शंकर-जयकिशन]]
|
|-
| "हवा में उड़ता जाए मेरा लाल दुपट्टा"
|
|-
| "जिया बेकरार है छायी बहार है"
|
|-
| "मुझे किसी से प्यार हो गया"
|
|-
| "मेरी आँखों में बस गया कोई"
|
|-
| "अब मेरा कौन सहारा"
|
|-
| "बिछड़े हुए परदेसी"
|
|-
| "हंस मुख फूलों ये मत भूलो"
|
|-
| "पतली कमर है"
|
| rowspan='2' | मुकेश
|-
| "छोड़ गए बलम"
|
|-
! rowspan='2' | ''[[बालम (1949 फ़िल्म)|बालम]]''
| "परदेसी मुसाफिर कैसे करता"
| rowspan='2' | हुस्नलाल भगतराम
| rowspan='2' | क़मर जलालाबादी
| rowspan='2' | सुरैया
|-
| "दुनिया वालो"
|-
! rowspan='6' | ''[[बाज़ार (1949 फ़िल्म)|बाज़ार]]''
| "साजन की गलियाँ छोड़ चले"
| rowspan='6' | श्याम सुंदर
|
| rowspan='3' |
|-
| "बसलो अपनी निगाहों में प्यार"
|
|-
| "ऐ दिल उनको याद ना करना"
|
|-
| "जरा सुनलो हम अपना प्यार"
|
| राजकुमारी
|-
| "ऐ मोहब्बत उनसे मिलने"
|
| मोहम्मद रफ़ी
|-
| "अपनी नसर से दूर हम"
|
| मोहम्मद रफ़ी
|-
! rowspan='3' | ''[[बड़ी बहन]]''
| "चले जाना नहीं नैन मिलाके"
| rowspan='9' | हुस्नलाल भगतराम
|
|
|-
| "जो दिल में घुसी बन आये"
|
|
|-
| "चुप चुप खड़े"
| प्रेमलता
|
|-
! rowspan='4' | ''बांसुरिया''
| "दिल तोड़ के जानेवाले"
| rowspan='6' |
| rowspan='6' |
|-
| "जो करके गये बरबाद हमन"
|-
| "ये दुनिया कहती है कोई फरियाद ना करे"
|-
| "चाहे चोरी चोरी आओ चाहे चुप चुप"
|-
! rowspan='2' | ''[[भोली]]''
| "दिल तोड़ने वाले क्या तूने किया है बर्बाद"
|-
| "इतना भी बेशुमार को न आसमां सताए"
|-
! ''[[चार दिन]]''
| "हाय ये भोली सूरत वाले"
| श्याम सुंदर
|
| राजकुमारी, कल्याणी, ज़ोहराबाई अम्बालेवाली, शमशाद बेगम, हमीदा बानो, इकबाल (हमीदा का भाई)
|-
! rowspan='3' | ''[[चकोरी (1949 फ़िल्म)|चकोरी]]''
| "कभी हंस हंसके नैन मिलाये"
| rowspan='3' | हंसराज बहल
|
| rowspan='3' |
|-
| "हाय चंदा गये परदेस चकोरी जहां"
|
|-
| "बहुत हमसे जुदा है पर तेरे लिए फिर भी"
|
|-
! rowspan='2' | ''[[चांदनी रात]]''
| "हाय छोरे की जात"
| rowspan='2' | नौशाद
|
| जी.एम. दुर्रानी
|-
| "हाय छोरे की जात"
|
| सआदत खान
|-
! rowspan='2' | ''[[दिल की बस्ती]]''
| "आग लगे जग सारा देखे"
| rowspan='2' | गुलाम मोहम्मद
|
| rowspan='2' |
|-
| "उनसे हम कुछ कहते रह गए"
|
|-
! rowspan='7' | ''[[दुलारी (फिल्म)|दुलारी]]''
| "आंखों में आया दिल में समा जा"
| rowspan='7' | नौशाद
|
| rowspan='5' |
|-
| "तकदीर जगा कर आयी हूँ"
|
|-
| "ऐ दिल तुझसे कसम है"
|
|-
| "दो दिन की बहार है प्यार कर"
|
|-
| "मोहब्बत हमारी ज़माना हमारा"
|
|-
| "मिल मिल के गाएँगे"
|
| rowspan='2' | मोहम्मद रफ़ी
|-
| "रात रंगीली मस्त"
|
|-
! rowspan='7' | ''[[एक थी लड़की]]''
| "घिर-घिर के आई बदरा सजनवा"
| rowspan='7' | विनोद
|
| rowspan='2' |
|-
| "मेरे दिल के तड़पने का तमाशा देखनेवाले"
|
|-
| "अब हाल ए दिल"
|
| rowspan='3' | मोहम्मद रफ़ी
|-
| "लंबी जोरू बड़ी मुसेबत"
|
|-
| "ये शोक सितारें"
|
|-
| "लारा लप्पा लारा लप्पा"
|
| मोहम्मद रफी, जी.एम. दुर्रानी
|-
| "हम चले दूर"
|
| मोहम्मद रफ़ी, सतीश बत्रा
|-
! rowspan='3' | ''[[गर्ल्स स्कूल (1949 फ़िल्म)|गर्ल्स स्कूल]]''
| "कुछ शरमते हुए और कुछ"
| rowspan='3' | अनिल विश्वास
|
| rowspan='2' |
|-
| "तुम ही कहो मेरा मन क्यों रहे उदास"
|
|-
| "बार-बार तुम सोच"
|
| शंकर दास गुप्ता<ref>{{cite web |url=http://cineplot.com/music/lata-mangeshkars-song-list-1949/ |title=Lata Mangeshkar's Songs List - 1949 |date=2014-11-06 |url-status=dead |access-date=6 October 2026 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141106050338/http://cineplot.com/music/lata-mangeshkars-song-list-1949/ |archive-date=6 नवंबर 2014}}</ref>
|-
! rowspan='3' | ''[[जल तरंग]]''
| "लुट गई उम्मीदों की दुनिया"
| rowspan='3' | हुस्नलाल भगतराम
|
|
|-
| "ज़रा तुमने देखा तो प्यार"
|
| मोहम्मद रफ़ी
|-
| "हाय तकदीर मेरी बनके बिगाड़ती क्यों"
|
| rowspan='9' |
|-
! rowspan='2' | ''[[जीत (1949 फ़िल्म)|जीत]]''
| "मस्त पावन है चंचल धारा"
| rowspan='2' | अनिल विश्वास
|
|-
| "हंसले गा ले ओ चांद मेरे"
|
|-
! ''किनारा''
| "जानेवाले ये जवानी चार दिन की"
| एम. आचार्य
|
|-
! rowspan='7' | ''लाडली''
| "आठ रोज़ की छुट्टी"
| rowspan='7' | अनिल विश्वास
| rowspan='7' |
|-
| "तुम्हारे बुलाने को जी चाहता है"
|-
| "कैसे कह दूं बजरिया के बीच"
|-
| "ज़िंदगी की रोशनी तो ख़त्म हो गई"
|-
| "ग़रीबों का हिसा ग़रीबों में"
|-
| "जय जय प्रेम देवता"
| मीना कपूर
|-
| "अग्रे को घाघरो मंगवादेई"
| आशालता
|-
! rowspan='7' | ''लाहौर''
| "बहारें फिर भी आएंगी"
| rowspan='7' | श्याम सुंदर
| rowspan='7' |
| rowspan='6' |
|-
| "सुनलो सजन मेरी बात दिल की बात"
|-
| "बेदर्द ज़माने क्या तेरी महफ़िल में"
|-
| "टूटे हुए अरमानों की एक दुनिया"
|-
| "उस दिल की किस्मत क्या कहेंगे"
|-
| "उम्मीद के रंगीन झूले में एक आस"
|-
| "दुनिया हमारे प्यार की यूँही"
| करण दीवान
|-
! rowspan ='3' | ''मां का प्यार''
| "मुरख मन कहे होत अधीर"
| rowspan='3' | पंडित गोबिंदराम
| rowspan='3' |
| rowspan='3' |
|-
| "सोजा मेरे नन्हे निंदिया तोहे आई"
|-
| "तूने जहां बना कर एहसान क्या किया"
|-
! rowspan='3' | ''[[महल (1949 फ़िल्म)|महल]]''
| "मुश्किल है बहुत मुश्किल"
| rowspan='3' | खेमचंद प्रकाश
| rowspan='3' | नक्शाब
| rowspan='3' |
|-
| "आएगा आएगा आनेवाला आएगा"
|-
| "दिल ने फिर याद किया बेवफ़ा"
|-
! rowspan='5' | ''नमूना''
| "भगवान तूने क्यों"
| rowspan='5' | सी. रामचन्द्र
|
| rowspan='4' |
|-
| "आज संभल के आना हो लाला"
|
|-
| "म्हारी गली में आवे जो"
|
|-
| "ज़ुल्म तुम्हारे सह न सके"
|
|-
| "तड़पके मुझे अब छोड़"
|
| मोहम्मद रफ़ी
|-
! rowspan='4' | ''[[नरसिंह अवतार]]''
| "भज रे मधुर मधुर नाम"
| rowspan='5' | वसंत देसाई
|
| rowspan='6' |
|-
| "चरण तुम्हारे फूल हमारे"
|
|-
| "हरि को बिसारो न बिसरेंगे"
|
|-
| "जगमग तारे झलके झलके अँधेरी"
|
|-
! ''[[नयी तालीम]]''
| "आ गई बहार आ गई"
|
|-
! rowspan='3' | ''नज़ारे''
| "एक ठेस लगी"
| rowapan='3' | बुलो सी. रानी
|
|-
| "क्या सोच के बनाई"
|
| मोहम्मद रफ़ी
|-
| "तड़पके मुझे छोड़ दिया"
|
| rowspan='11' |
|-
! rowspan='4' | ''[[पारस (1949 फ़िल्म)|पारस]]''
| "आज मेरी दुनिया में दिन हैं बहार के"
| rowspan='4' | गुलाम मोहम्मद
| rowspan='4' | शकील बदायूँनी
|-
| "दिल का सहारा टूटे ना जाए"
|-
| "इस दर्द की मारी दुनिया में"
|-
| "दिल लेके छुपनेवाले"
|-
! rowspan='3' | ''[[प्यार की रात]]''
| "चाहे वो हमें ऐसी किस्मत है कहाँ"
| rowspan='3' | एन. ए. जोलागोनकर
|
|-
| "वो नज़र मिली हंसी जिंदगी"
|
|-
| "एक बार चले आओ फिर चाहे ना आना"
|
|-
! rowspan='4' | ''[[पतंगा (1949 फ़िल्म)|पतंगा]]''
| "दिल से भुलादो तुम हमीं"
| rowspan='4' | सी. रामचन्द्र
| rowspan='3' |
|-
| "कभी खामोश हो जाना कभी फरियाद"
|-
| "ओ जानेवाले तूने अरमानों की दुनिया"
|-
| "प्यार के जहाँ की निराली"
|
| शमशाद बेगम
|-
! rowspan="3" | ''[[रात की रानी (फ़िल्म)|रात की रानी]]''
| "दिल तोड़ने वाले आ"
| rowspan="3" | हंसराज बेहल
|
|
|-
| "सुन तो लो मेरा अफसाना"
|
| rowspan="2" | मोहम्मद रफी
|-
| "उस रात के प्यारे चाँद"
|
|-
! ''रोशनी''
| "मेरे पास मेरे भोले सजन"
| सी. रामचंद्र
|
|
|-
! rowspan="3" | ''राखी''
| "कहे धीरे चली रे घड़ी"
| rowspan="3" | हुसंलाल भागतरं
| rowspan="3" |
| rowspan="3" |
|-
| "ओ रूठ जानेवाले मेरा कसूर क्या है"
|-
| "दिल किसी ने छीन लिया पहली मुलाक़ात में"
|-
! ''[[संत जनाबाई]]''
| "गोपे नंदलाल गूंथे सब वनमाला"
| सुधीर फड़के
|
|
|-
! ''सांवरिया''
| "जानी रे हम जानी रे"
| सी. रामचंद्र
|
| गीता दत्त
|-
! rowspan="6" | ''[[सावन भादों (1949 फ़िल्म)|सावन भादों]]''
| "सौ सौ ग़म ने घेरे"
| rowspan="6" | हुसंलाल भागतरं
|
| rowspan="4" |
|-
| "तेरी इस दो रंगी दुनिया में"
|
|-
| "तेरी अँखियाँ सजन चोर चोर"
|
|-
| "तुम बिन राजा नहीं मन का चैन"
|
|-
| "कलेजा थाम लो"
|
| ज़ोहराबाई अंबालवाली
|-
| "ये राह ए मोहब्बत"
|
| एस.दी. बतीश
|-
! rowspan="6" | ''[[सिपहिया]]''
| "दर्द जगा के टेस लगा के"
| rowspan="6" | सी. रामचंद्र
|
| rowspan="3" |
|-
| "हँसी हँसी न रही और खुशी न खुशी"
|
|-
| "आराम के थे साथी क्या क्या जब वक़्त पड़ा तो"
|
|-
| "चलो घूँघट में गुइयाँ"
|
| [[गीता दत्त]]
|-
| "लगा है कुछ निशाना"
|
| rowspan="2" | सी. रामचंद्र
|-
| "ऐ आँख अब न रोना"
|
|-
! rowspan="4" | ''[[शायर (1949 फ़िल्म)|शायर]]''
| "तू दूर है आँखों से मेरे दिल को यह ग़म"
| rowspan="4" | ग़ुलाम मोहम्मद्
|
| rowspan="2" |
|-
| "मोहब्बत पे बहार आती जहाँ गुलज़ार हो जाता"
|
|-
| "दो बिछड़े हुए दिल आपस में"
|
| जी.एम. दुर्रानि
|-
| "ये दुनिया है जहाँ दिल का लगन"
|
| मुकेश
|-
! rowspan="6" | ''[[उधार (फ़िल्म)|उधार]]''
| "आज जिंदगी के बंद द्वार खुल गए"
| rowspan="6" | वसंत देसाई
|
| rowspan="6" |
|-
| "कहाँ राम है राम फिर श्रीमुख"
|
|-
| "ओ कबीरा हिंदुआन की हिंदुआई देखो"
|
|-
| "पतझड़ के दिन बीत गये"
|
|-
| "रात जा रही नींद आ रही है"
|
|-
| "रंगीन गगन पीछे छूटा"
|
|-
! ''उषा किरण''
| "लहरों पे कभी नाचूँ किरणों से कभी"
| सरस्वती देवी
|
|
|-
! rowspan="5" | ''[[ज़ेवरात]]''
| "शिकवा न करेंगे न शिकायत"
| rowspan="5" | हंसराज बेहल
|
| rowspan="2" |
|-
| "एक ही था जगत में सहारा"
|
|-
| "सजन की ओर लेके"
|
| मोहम्मद रफी
|-
| "जा तेरी मुक़द्दर में हँसी है न खुशी"
|
| rowspan="2" |
|-
| "चले आओ जी मुझे तुमसे मोहब्बत है"
|
|-
|}
===1950 के दशक===
===1951===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="6" | ''[[आवारा]]''
| "घर आया मेरा परदेसी"
| rowspan="6" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="3" | शैलेंद्र
|
|-
| "दम भर जो उधर मुँह फेरे"
| मुकेश
|-
| "तेरे बिना आग ये चाँदनी"
| [[मन्ना डे]]
|-
| "एक बेवफ़ा से प्यार किया"
| rowspan="3" | [[हसरत जयपुरी]]
| rowspan="3" |
|-
| "अब रात वाली है"
|-
| "जब से बालम घर आये"
|}
===1952===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="5" | ''[[दाग (1952 फ़िल्म)|दाग]]''
| "काहे को देर लगाई रे"
| rowspan="5" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="5" |
| rowspan="5" |
|-
| "देखो आया ये कैसा"
|-
| "लागे जबसे नैन"
|-
| "प्रीत ये कैसी"
|-
| "ऐ मेरे दिल कहीं और चल"
|-
! rowspan="7" | ''शिन शिनाकि बूब्ला बू''
| "टक्का लाई कलि दई"
| rowspan="7" | सी. रामचंद्र
| rowspan="7" | प्यारेलाल संतोषी
| rowspan="4" |
|-
| "अरे बाबा ये हँसी बाबा ये खुशी बाबा"
|-
| "कैसे हैं मिज़ाज कहिये"
|-
| "साईं रे घर घर में एक चोर"
|-
| "एक बार जो परदे से फिर छम से तेरा आना हो"
| कुशिरो कुमार
|-
| "तुम क्या जानो तुम्हारी याद में हम कितना रोये"
|
|-
| "शिन शिनाकि बूब्ला बू"
| सी. रामचंद्र
|-
! rowspan="2" | ''[[दीवाना (1952 फ़िल्म)|दीवाना]]''
| "मेरे चाँद मेरे लाल"
| rowspan="2" | नौशाद
| rowspan="2" | शकील बदयूनी
| सुरैया
|-
| "तीर खाते जायेंगे"
|
|}
===1953===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="9" | ''[[अनारकली (1953 फ़िल्म)|अनारकली]]''
| "आजा अब तो आजा"
| rowspan="9" | सी. रामचंद्र, वसंत प्रकाश
| rowspan="9" |
| rowspan="8" |
|-
| "दुआ कर ग़म-ए-दिल"
|-
| "मुझसे मत पूछ"
|-
| "मोहब्बत ऐसी धड़कन है"
|-
| "मोहब्बत में ऐसे कदम"
|-
| "ये जिंदगी उसी की है" (1)
|-
| "ये जिंदगी उसी की है" (2)
|-
| "ओ आसमांवाले"
|-
| "जाग दर्द-ए-इश्क़ जाग, दिल को बेकरार कर छेड़के आँसुओं का राग"
| हेमंत कुमार
|-
! rowspan="7" | ''[[आह (फ़िल्म)|आह]]''
| "जाने ना नज़र" <ref>{{Citation |title=Jane Na Nazar Pehchane Jigar - Raj Kapoor - Nargis - Aah - Lata - Mukesh - Evergreen Hindi Songs |url=https://www.youtube.com/watch?v=90ooNta8icg |date=2011-12-02 |access-date=2016-02-24 |last=Filmi Gaane}}</ref>
| rowspan="7" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="2" | [[हसरत जयपुरी]]
| rowspan="3" | [[मुकेश]]
|-
| "आजा रे अब मेरा दिल"
|-
| "जो मैं जानती"
| rowspan="5" | शैलेंद्र
|-
| "झनन झनन झनन"
| rowspan="6" |
|-
| "ये शाम की तन्हाईयाँ"
|-
| "सुनते थे नाम"
|-
| "राजा की आयेगी बारात"
|-
! rowspan="4" | ''[[लड़की (1953 फ़िल्म)|लड़की]]''
| "साजन आजा दरस दिखा जा"
| rowspan="4" | आर. सुदरसनम–धनीराम
| rowspan="4" | राजेंद्र कृष्णन
|-
| "तोड़ के दुनिया की दीवार"
|-
| "मन मोर मचावे शोर"
| [[गीता दत्त]]
|-
| "मेरे वतन से अच्छा"
| rowspan="2" |
|-
! rowspan="3" | ''[[दो बीघा ज़मीन]]''
| "आजा री आ, निंदियाँ तू आ"
| rowspan="3" | सलिल चौधरी
| rowspan="3" | शैलेंद्र
|-
| "धरती कहे पुकार के, बीज बिछा ले प्यार के"
| rowspan="2" | मन्ना डे
|-
| "हरियाला सावन ढोल बजाता आया"
|}
===1954===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="9" | ''[[नागिन (1954 फ़िल्म)|नागिन]]''
| "मन डोले मेरा तन डोले"
| rowspan="9" | [[हेमंत कुमार]]
|
|
|-
| "सुन रसिया मन बसिया"
|
|
|-
| "सुन रि सखी"
|
|
|-
| "मेरा दिल ये पुकारे आजा"
|
|
|-
| "जादूगर सईयां"
|
|
|-
| "अरि छोड़ दे पतंग"
| [[हेमंत कुमार]]
|
|-
| "मेरा बादली में छुप गया चाँद"
| rowspan="5" |
|
|-
| "तेरी याद में जलकर देख लिया"
|
|-
| "ऊँची ऊँची दुनिया कि दीवारें"
|
|-
|-
! ''मयूरपंख''
| "तंदना तंदना तंदना"
| शैलेंद्र
| [[आशा भोसले]], [[उषा मंगेशकर]]
|-
! ''अमर''
| "न शिकवा है कोई ना कोई गिला है"
|
| शकील बदायूंई
|}
===1955===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="8" | ''[[आज़ाद (1955 फ़िल्म)|आज़ाद]]''
| "ना बोले, ना बोले"
| rowspan="8" | सी. रामचंद्र
| rowspan="8" | राजेंद्र कृष्ण
| rowspan="5" |
|-
| "कितनी जवान है रात"
|-
| "देखो जी बहार आयी"
|-
| "जा री, ओ कारी बदरिया"
|-
| "पीके दरस को तरस"
|-
| "कितना हसीन है मौसम, कितना हसीन सफर है"
| सी. रामचंद्र
|-
| "अपलम चपलम, चप लाई री दुनिया को छोड़"
| rowspan="2" | उषा मंगेशकर
|-
| "बलिए ओ बलिए, चल छलिये"
|-
! rowspan="3" | ''[[देवदास (1955 फ़िल्म)|देवदास]]''
| "जिसे तू कबूल करले"
| rowspan="3" | [[सचिन देव बर्मन]]
| rowspan="3" | [[साहिर लुधियानवी]]
|
|-
| "अब आगे तेरी मर्ज़ी"
|
|-
| "ओ आने वाले रुक जा"
|
|-
! rowspan="5" | ''[[श्री ४२० (1955 फ़िल्म)| श्री 420]]''
| "प्यार हुआ इकरार हुआ"
| rowspan="5" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="2" | शैलेंद्र
|
|-
| "रमैया वस्तावैया"
| [[मोहम्मद रफी]], [[मुकेश]]
|-
| "इचक दाना बीचक दाना"
| rowspan="3" | [[हसरत जयपुरी]]
| [[मुकेश]]
|-
| "ओ जानेवाले"
| rowspan="2" |
|-
| "शाम गयी रात आयी"
|-
! rowspan="10" | ''[[झनक झनक पायल बाजे]]''
| "झनक झनक पायल बाजे"
| rowspan="10" | वसंत देसाई
| rowspan="10" | हसरत जयपुरी
| [[हेमंत कुमार]]
|-
| "जो तुम तोड़ो पिया"
| rowspan="4" |
|-
| "सैयाँ जाओ"
|-
| "सुनो सुनो सुनो जी"
|-
| "कैसी ये मोहब्बत"
|-
| "मुरली मनोहर"
| rowspan="2" | मन्ना डे
|-
| "मेरे ए दिल बता"
|-
| "नैन सो नैन नाही मिलाओ"
| हेमंत कुमार
|-
| "राग मलिका"
| मन्ना डे
|-
| "रुत बसंत"
| rowspan="9" |
|-
! rowspan="8" | ''[[उड़न खटोला (फ़िल्म)|उड़न खटोला]]''
| "ना रो ए दिल"
| rowspan="8" | नौशाद
| rowspan="8" |
|-
| "हाल-ए-दिल मैं क्या कहूँ"
|-
| "घर आया मेहमान कोई"
|-
| "मेरा सलाम ले जा"
|-
| "हमारे दिल से न जाना
|-
| "मोरे सईयाँ जी उतरेंगे पार"
|-
| "डूबा तारा उम्मीदों"
|-
| "सितारों की मेहफिल"
|-
! rowspan="3" | ''[[बंदिश (1955 फ़िल्म)|बंदिश]]''
| "रात है सुहानी"
| rowspan="3" | हेमंत कुमार
| rowspan="3" |
| rowspan="3" |
|-
| "तुम्हारी याद में"
|-
| "झूमती जवानी है"
|}
===1956===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="5" | ''न्यू देल्ही''
| "कोई मेरे सपनों Mein आया"
| rowspan="5" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="5" | [[हसरत जयपुरी]], शैलेंद्र
| rowspan="5" |
|-
| "तुम संग प्रीत लगाई रसिया"
|-
| "जिंदगी बहार है"
|-
| "बारी बरसे खातन गायन"
|-
| "मुरली बैरन भाई"
|-
! rowspan="8" | ''[[चोरी चोरी (1956 फ़िल्म)|चोरी चोरी]]''
| रसिक बलमा
| rowspan="8" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="4" | [[हसरत जयपुरी]]
|
|-
| "उस पर साजन"
|
|-
| "आजा सनम मधुर चाँदनी में हम"
| rowspan="4" | [[मन्ना डे]]
|-
| "पंछी बनूँ उड़ती फिरूँ"
|-
| "जहाँ मैं जाती हूँ"
| rowspan="11" | शैलेंद्र
|-
| "यह रात भीगी भीगी"
|-
| "मनभावन के घर"
| [[आशा भोसले]]
|-
| "सवा लाख की लॉटरी"
| [[मोहम्मद रफी]]
|-
! rowspan="7" | ''[[पटरानी]]''
| "सात समुंदर पार"
| rowspan="13" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="4" |
|-
| "ओ बलम तुम बेदर्दी"
|-
| "चंद्रमा क्यों झूमे"
|-
| "दिल गया दर्द रहा सीने में"
|-
| "अरे कोई जाओ री पिया को बुलाओ री"
| मीना मंगेशकर, [[उषा मंगेशकर]]
|-
| "राजा प्यारे मत करो प्यार का मोल"
| [[उषा मंगेशकर]]
|-
| "न जाने तुम कौन मेरी आँखों में"
| rowspan="6" |
|-
! rowspan="6" | ''[[किस्मत का खेल]]''
| "अर्ज़ है आप से"
| rowspan="6" | शैलेंद्र, [[हसरत जयपुरी]]
|-
| "किस्मत का खेल है जनाबे आली"
|-
| "न बुरे न भले हम गरीब ग़म के पले"
|-
| "तु माने या न माने बालम अंजाने"
|-
| "ए ज़मीन ए आसमां इतना बता"
|-
| "कह दो जी कह दो"
| [[मन्ना डे]]
|-
! ''[[सुबह का तारा]]''
| "चमका चमका सुबह का तारा"
|
|
| [[तलत महमूद]]
|-
! rowspan="7" | ''[[देवता (1956 फ़िल्म)|देवता]]''
| "दो नैनों का बना"
| rowspan="7" | सी. रामचंद्र
| rowspan="7" | राजेंद्र कृषण
| rowspan="5" |
|-
| "कैसे आऊँ जमुना के तीर"
|-
| "फूलों के मेले"
|-
| "सुना है मेरे दिल का"
|-
| "ये चाँद का जो"
|-
| "किसी से प्यार है हमको"
| [[तलत महमूद]]
|-
| "ए चाँद कल जो आना उनको"
| rowspan="3" |
|-
! rowspan="2" | ''[[बंधन (1956 फ़िल्म)|बंधन]]''
| "वृंदावन की कुंज गली"
| rowspan="2" | हेमंत कुमार
| rowspan="2" | राजेंद्र कृष्णन
|-
| "मेरे देवता मुझको देना सहारा"
|-
|}
===1957===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="7" | ''[[कठपुतली (1957 फ़िल्म)|कठपुतली]]''
| "बक्कड़ बम बम"
| rowspan="7" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="7" | शैलेंद्र, [[हसरत जयपुरी]]
|
|-
| "बोल री काठ पुतली"
|
|-
| "बोल री काठ पुतली (दुखी)"
|
|-
| "मिनी मिनी चिचि"
| [[मुकेश]]
|-
| "हाय तू ही गया मोहे भूल रे"
| rowspan="6" |
|-
| "इतने बड़े जहाँ में ए दिल"
|-
| "सो जा रे सो जा"
|-
! rowspan="4" | ''[[आशा (1957 फ़िल्म)|आशा]]''
| "ज़रा रुक रुक के, मैं तो द्वार चली सखी"
| rowspan="4" | सी. रामचंद्र
| rowspan="4" | राजेंद्र कृष्णन
|-
| "चल चल रे कंहाई"
|-
| "तू न आया और होने लगी शाम रे"
|-
| "तुमको सलाम हैं"
| [[मोहम्मद रफी]]
|}
===1958===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="3" | ''[[सितारों से आगे]]''
| "मेहफिल में आये वो"
| rowspan="3" | एस. डी. बर्मन
| rowspan="3" | मजरूह सुल्तानपुरी
| rowspan="6" |
|-
| "पग ठुमक चलत"
|-
| "आ खिलाते है गुल"
|-
! rowspan="3" | ''[[साधना (1958 फ़िल्म)|साधना]]''
| "औरत ने जनम दिया मर्दों को"
| rowspan="3" | दत्ता नायक
| rowspan="3" | [[साहिर लुधियानवी]]
|-
| "कहोजी तुम क्या क्या खरीदोगे"
|-
| "ऐसे वैसे ठिकाने पे जाना बुरा है"
|-
! rowspan="5" | ''[[मधुमती]]''
| "दिल तड़प तड़प के कह रहा"
| rowspan="5" | [[सलिल चौधरी]]
| rowspan="5" | शैलेंद्र
| [[मुकेश]]
|-
| "आजा रे परदेसी"
|
|-
| "चढ़ गयो पापी बिछुआ"
| [[मन्ना डे]]
|-
| "घड़ी घड़ी मेरा दिल धड़के"
| rowspan="6" |
|-
| "ज़ुल्मी संग आँख लड़ि रे"
|-
! rowspan="2" | ''[[अमरदीप (1958 फ़िल्म)|अमरदीप]]''
| "मेरे मन के बावरा पंछी"
| rowspan="2" | सी. रामचंद्र
|
|-
| "दिल की दुनिया बसाके सांवरिया"
|
|-
! rowspan="4" | ''[[अदालत (1958 फ़िल्म)|अदालत]]''
| "उनको यह शिकायत है"
| rowspan="4" | [[मदन मोहन]]
| rowspan="4" | राजेंद्र कृष्णन
|-
| "जाना था हमसे दूर"
|-
| "जा जा रे जा साजना"
|
|-
| "यू हसरतो के दाग"
|
|}
===1959===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
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! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="5" | ''[[कन्हैया (1959 फ़िल्म)|कन्हैया]]''
| "ओ मोरे साँवरे सलोने पिया, तोसे मिलने को तरसे जिया"
| rowspan="5" | शंकर जैकिशन
|
|
|-
| "नि बलिए रुत है बहार की, कुछ मत पूछो कैसे बितिन"
|
| मुकेश
|-
| "ओ कँहाय्या आज आना ख्वाब में"
|
| rowspan="3" |
|-
| "सावन आवन कह गए दिल में समा के मिलने ना आये"
|
|-
| "कहाँ है कहाँ है कन्हैया, समझे न प्यार मेरा"
|
|}
===1960 के दशक===
===1960===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="5" | ''[[दिल अपना और प्रीत पराई]]''
| "अजीब दास्तां है ये"
| rowspan="5" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="4" | शैलेंद्र
| rowspan="14" |
|-
| "अंदाज़ मेरा मस्ताना"
|-
| "दिल अपना और प्रीत पराई"
|-
| "मेरा दिल अब तेरा हो साजन"
|-
| "शीशा-ए-दिल"
| [[हसरत जयपुरी]]
|-
! rowspan="4" | ''[[परख (1960 फ़िल्म)|परख]]''
| "ओ साजन, बरखा बहार आयी"
| rowspan="4" | [[सलिल चौधरी]]
| rowspan="4" | शैलेंद्र
|-
| "मिला है किसी का झुमका"
|-
| "ये बंसी क्यूँ गाये"
|-
| "मेरे मन के दिये"
|-
! rowspan="9" | ''[[मुग़ल-ए-आज़म]]''
| "मोहे पनघट पे"
| rowspan="9" | नौशाद
| rowspan="9" | शकील बदयूनि
|-
| "प्यार किया तो डरना क्या"
|-
| "मोहब्बत की झूठी"
|-
| "हमें काश तुमसे मोहब्बत"
|-
| "बेकस पे करम "
|-
| "तेरी मेहफिल में"
| शमशाद बेगम
|-
| "ये दिल की लगी"
| rowspan="3" |
|-
| "ए इश्क़ ये सब दुनियावाले"
|-
| "खु़दा निगेहबान"
|}
===1961===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="2" | ''[[नज़राना (1961 फ़िल्म)|नज़राना]]''
| "मेले हैं चिरागों की दिवाली"
| rowspan="2 | रवि
| rowspan="2" | राजेंद्र कृष्णन
|
|-
| "बिखरा के ज़ुल्फें चमन में"
| [[मुकेश]]
|-
! rowspan="4" | ''[[गंगा जमना]]''
| "ढूँडो ढूँडो रे साजना"
| rowspan="4" | [[नौशाद]]
| rowspan="4" | शकील बदयूनि
| rowspan="6" |
|-
| "दगाबाज़, तोरी बतियाँ न मानूँ रे"
|-
| "दो हँसों का जोड़ा बिछड़ गयो रे"
|-
| "झनन घूनगर बाजे"
|-
! rowspan="2" | ''[[हम दोनों (1961 फ़िल्म)|हम दोनों]]''
| "अल्लाह तेरो नाम"
| rowspan="2" | [[जयदेव]]
| rowspan="2" | [[साहिर लुधियानवी]]
|-
| "प्रभु तेरो नाम"
|}
===1962===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
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! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="5" | ''अनपढ़''
| "आप की नज़रों ने समझा"
| rowspan="5" | मदन मोहन कोहली
| rowspan="5" | राजा मेहदी अली खान
|
|-
| "है इसी में प्यार की आबरू"
|
|-
| "रंग बिरंगी राखी लेके आई"
|
|-
| "वो देखो, जला घर किसी का"
|
|-
| "जिया ले गयो जी मोरा"
|
|-
! rowspan="3" | ''[[असली-नकली]]''
| "तुझे जीवन की डोर से"
| rowspan="3" | शंकर जैकिशन
| rowspan="3" | हसरत जैपुरी
| मोहम्मद रफी
|-
| "लाख छुपाओ छुप न सकेगा"
| rowspan="2" |
|-
| "तेरा मेरा प्यार अमर"
|-
! rowspan="5" | ''[[प्रेम पत्र]]''
| "सावन की रातों में ऐसा"
| rowspan="5" | [[सलिल चौधरी]]
|
| rowspan="2" | [[तलत महमूद]]
|-
| "ये मेरे अंधेरे उजाले न होते"
| rowspan="2" |
|-
| "अब और न कुछ भी याद रहा"
|
|-
| "दो अखियाँ झुकी झुकी सी"
|
| [[मुकेश]]
|-
| "खुश हो रहे थे"
|
| rowspan="4" |
|-
! rowspan="4" | ''[[मन-मौजी]]''
| "मैं तो तुम संग नैन मिलाके"
| rowspan="4" | [[मदन मोहन]]
| rowspan="4" | राजेंद्र कृष्णन
|-
| "चंदा जा"
|-
| "आया है कहाँ से"
|-
| "एक था अब्दुल रहमान"
| [[किशोर कुमार]]
|}
===1963===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! ''[[परसमणि]]''
| "वो जब याद आये"
| [[लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल]]
|
| rowspan="4" | [[मोहम्मद रफी]]
|-
! ''[[ताज महल (1963 फ़िल्म)|ताज महल]]''
| "जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा"
| रोशन
|
|-
! rowspan="3" | ''[[तेरे घर के सामने]]''
| "देखो रूठा न करो"
| rowspan="3" | एस. डी. बर्मन
| rowspan="3" | हसरत जैपुरी
|-
| "तेरे घर के सामने"
|-
| ये तन्हाई है रे है
|
|-
! rowspan="6" | ''[[मेरे मेहबूब]]''
| "तेरे प्यार में दिलदार"
| rowspan="6" | [[नौशाद]]
| rowspan="6" | शकील बदयुनि
|
|-
| "अल्लाह बचाये"
|
|-
| "मेरे मेहबूब तुझे" (female)
|
|-
| "मेरे मेहबूब में क्या नही"
| rowspan="2" | आशा भोसले
|-
| "जानेमं एक नज़र देख ले"
|-
| "याद में तेरी"
|मोहम्मद रफी
|-
|rowspan='2' | '''[[दिल एक मंदिर]]'''
|"हम तेरे प्यार में सारा आलम"
| rowspan='2' | शंकर जैकीशन
| हसरत जैपुरी
|
|-
|"रुक जा रात"
|शैलेंद्र
|
|-
|}
===1964===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="2" | ''[[राजकुमार (1964 फ़िल्म)|राजकुमार]]''
| "आजा आयी बहार"
| rowspan="2" | शंकर जैकीशन
| rowspan="4" | शैलेंद्र
|
|-
| "नाच रे मन"
| [[आशा भोसले]]
|-
! rowspan="3" | ''[[संगम (1964 फ़िल्म)|संगम]]''
| "हर दिल जो प्यार करेगा"
|
| [[मुकेश]], [[महेंद्र कपूर]]
|-
| "ओ मेरे सनम"
|
| मुकेश
|-
| "मैं का करूँ राम मुझे बुढ्ढा मिलगया"
|
| हसरत जैपुरी
|
|-
! rowspan="4" | ''[[वो कौन थी (1964 फ़िल्म)|वो कौन थी?]]''
| "लग जा गले की फिर ये हसीं रात हो ना हो"
| rowspan="4" | [[मदन मोहन]]
| rowspan="4" | राजा मेहदी अली खान
| rowspan="3" |
|-
| "नैना बरसे रिमझिम रिमझिम"
|-
| "जो हमने दास्ताँ अपनी सुनाई"
|-
| "छोड़ कर तेरे प्यार का दामन"
| [[महेंद्र कपूर]]
|}
===1965===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="2" | ''[[आरज़ू (1965 फ़िल्म)|आरज़ू]]''
| "अजी रूठ कर अब कहाँ जाइयेगा"
| rowspan="2" | शंकर जैकीशन
| rowspan="2" | हसरत जैपुरी
| rowspan="3" |
|-
| "बेदर्दी बलमा तुझको"
|-
! ''[[भीगी रात (1965 फ़िल्म)|भीगी रात]]''
| "दिल जो न कह सका"
| रोशन
| [[मजरूह सुलतानपुरी]]
|-
! ''[[गुमनाम (1965 फ़िल्म) |गुमनाम]]''
| "गुमनाम है कोयी"
| शंकर सिंह रघुवंशी
| हसरत जैपुरी, मजरूह सुलतानपुरी
|
|-
! rowspan="4" | ''[[गाइड (1965 फ़िल्म)|गाइड]]''
| "आज फिर जीने की तमन्ना"
| rowspan="4" | [[सचिन देव बर्मन]]
| rowspan="4" | शैलेंद्र
| rowspan="3" |
|-
| "पिया तोसे नैना लागे रे"
|-
| "सईयाँ बेईमान"
|-
| "गाता रहे मेरा दिल"
| [[किशोर कुमार]]
|-
! rowspan="3" | ''[[जब जब फूल खिले]]''
| "मैं जो चली हिंदुस्तान से"
| rowspan="3" | [[कल्याणजी-आनंदजी]]
| rowspan="3" | [[आनंद बख्शी]]
| rowspan="3" |
|-
| "पर्देसियों से न अखियाँ मिलाना"
|-
| "ये समा समा है प्यार का"
|}
===1966===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="3" | ''[[मेरा साया]]''
| "तू जहाँ जहाँ चलेगा मेरा साया साथ होगा"
| rowspan="3" | [[मदन मोहन]]
| rowspan="3" | [[राजा मेहदी अली खान]]
| rowspan="7" |
|-
| "नैनों में बदरा छाए"
|-
| "नैनोनवाली ने हाय मेरा दिल लूटा"
|-
! rowspan="4" | ''[[लव इन टोक्यो]]''
| "कोई मतवाला आया"
| rowspan="4" | शंकर–जैकीशन
| शैलेंद्र
|-
| "सयौनारा सयौनारा"
| rowspan="3" | हसरत जैपुरी
|-
| "मुझे तुम मिल गए"
|-
| "ओ मेरे शाह-ए-खुबा"
|-
! rowspan="4" | ''[[प्यार किये जा]]''
| "किसने पुकारा मुझे, मैं आ गयी"
| rowspan="4" | लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल
| rowspan="4" | राजेंद्र कृष्णन
| rowspan="2" | महेंद्र कपूर
|-
| "फूल बन जाऊंगा शर्त ये है मगर"
|-
| "दिल हमने दे दिया, क्यों तुमने ले लिया"
| किशोर कुमार
|-
| "सुनले प्यार के दुश्मन दुनिया दिलवालों के अफसाने"
| आशा भोसले, किशोर कुमार, मन्ना डे
|}
===1967===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="9" | ''[[मिलन (1967 फ़िल्म)|मिलन]]''
| "सावन का महीना"
| rowspan="13" | [[लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल]]
| rowspan="9" | [[आनंद बख्शी]]
| rowspan="3" | [[मुकेश]]
|-
| "हम तुम युग युग से"
|-
| "बोल गोरी बोल तेरा कौन पिया"
|-
| "आज दिल पे कोई"
|
|-
| "हम तुम युग युग से - 2"
| rowspan="3" | मुकेश
|-
| "ये गीत मिलन के"
|-
| "बोल गोरी बोल तेरा कौन पिया - 2"
|-
| "आज दिल पे कोई ज़ोर चलता नहीं - 2"
|
|-
| "तोहे साँवरिया"
|
|-
! rowspan="4" | ''शागिर्द''
| "दिल विल प्यार व्यार"
| rowspan="4" | [[मजरूह सुलतानपुरी]]
|
|-
| "कहाँ कहाँ आन पड़ी"
|
|-
| "वो हैं ज़रा ख़फ़ा ख़फ़ा"
| [[मोहम्मद रफी]]
|-
| "रुक जा ए हवा"
| rowspan="5" |
|-
! rowspan="6" | ''[[रात और दिन]]''
| "न छेड़ो कल के अफसाने"
| rowspan="6" | शंकर–जैकीशन
| rowspan="5" | शैलेंद्र
|-
| "जीना हमको रास न आया"
|-
| "आवारा ए मेरे दिल" (खुश)
|-
| "आवारा ए मेरे दिल" (दुखी)
|-
| "दिल की गिरह खोल दो"
| [[मन्ना डे]]
|-
| "रात और दिन दिया जले"
| हसरत जैपुरी
|
|}
===1968===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="3" | [[सरस्वतीचन्द्र (फ़िल्म) | सरस्वतीचंद्र]]
| "फूल तुम्हें भेजा है खत में"
| rowspan="3" | कल्याणजी-आनंदजी
| rowspan="3" | इंदीवर
| मुकेश
|-
|चंदन सा बदन
|
|-
|मैं तो भूल चली
|
|}
===1969===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan='5' | ''[[इन्तकाम (1988 फ़िल्म) |इंतकाम]]''
| "हम तुम्हारे लिए"
| rowspan='8' | [[लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल]]
| rowspan='5' | राजिंदर कृष्ण
| मोहम्मद रफ़ी
|-
| "कैसे रहूँ चुप"
|
|-
| "गीत तेरे साज़ का"
|
|-
| "ऐसा कोई महफ़िल सोयी"
|
|-
| "आ जाने जाँ"
|
|-
! rowspan='3' | ''[[दो रास्ते]]''
| "बिंदिया चमकेगी"
| rowspan='3' | आनंद बख्शी
|
|-
| "चुप गए सारे नज़ारे (दिल ने दिल को पुकारा)"
| मोहम्मद रफ़ी
|-
| "अपनी अपनी बीवी पे"
|
|-
! rowspan='3' | ''[[वारिस]]''
| "दिल की लगी को छुपाऊं कैसे"
| rowspan='3' | आर डी बर्मन
| rowspan='3' | राजेंद्र कृष्ण
|
|-
| "लहरा के आया है झोंका बहार का"
| rowspan='2' | मोहम्मद रफ़ी
|-
| "कभी कभी ऐसा भी होता है"
|}
===1970 के दशक===
===1970===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="2" | [[जॉनी मेरा नाम (1970 फ़िल्म)|जॉनी मेरा नाम]]
| "मोसे मोरा श्याम रूठा"
| rowspan="2" | कल्याणजी-आनंदजी
| rowspan="2" | [[इन्दीवर]]
| rowspan="2" |
|-
| "बाबुल प्यारे"
|-
|}
===1971===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan='3' | ''[[हाथी मेरे साथी (1971 फ़िल्म)|हाथी मेरे साथी]]''
| "धक धक कैसे चलती है गाड़ी"
| rowspan='3' | [[लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल]]
| rowspan='3' | [[आनंद बख्शी]]
| rowspan='3' | [[किशोर कुमार]]
|-
| "सुन जा आ ठंडी हवा"
|-
| "दिलबर जानी चली हवा मस्तानी"
|-
! rowspan='6' | ''[[ज्वाला (1971 फ़िल्म)|ज्वाला]]''
| "जागी रात भरी याद में बलम"
| rowspan='6' | शंकर-जयकिशन
| rowspan='6' |
|
|-
| "आहा ले गई ओ जिया ले गई, छवि सुंदर सलोने गोपाल की"
| आशा भोसले
|-
| "देखो जी आँखों में देखो, आँखें हमारे सपने तुम्हारे"
|
|-
| "होल होले एक भी ना घुंघरू बोले"
| सुधा मल्होत्रा, गीता दत्त
|-
| "आजा रे आजा मेरे साजना आ, सपनों की पालकी"
| मन्ना डे
|-
| "मेरा ज्वाला नाम जिया जलाने का काम"
|
|-
! rowspan='3' | ''[[मेमसाब (1971 फ़िल्म)|मेमसाब]]''
| "सुनो सुनो एक बात काहू"
| rowspan='3' | सोनिक ओम
| rowspan='3' | वर्मा मलिक
| मोहम्मद रफ़ी
|-
| "मुझे ढूंढ ले आ कर सैंया"
|
|-
| "जब से तेरे मेरे मन में"
|
|-
! ''[[शर्मीली]]''
| "मेघा छाये आधी रात"
| एस. डी. बर्मन
|
|
|}
===1972===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan='3' | ''[[शहजादा]]''
| "परियों की नगरी से आया"
| rowspan='3' | राहुल देव बर्मन
| rowspan='3' | राजेंद्र कृष्ण
|
|-
| "रिमझिम रिमझिम देखो बरस रही है"
| rowspan='2' | किशोर कुमार
|-
| "ना जाइयो, ना जाइयो, छोड़ के ना"
|-
! rowspan='4' | ''हरि दर्शन''
| "अपना हरि है हजार हाथ वाला"
| rowspan='4' | [[कल्याणजी-आनंदजी]]
|
|
|-
| "जय जय नारायण"
|
| महेंद्र कपूर
|-
| "मरने वाला है भगवान"
|
|
|-
| "प्रभु के भरोसे"
|
|
|-
! ''[[परिचय (1972 फ़िल्म)|परिचय]]''<ref name="1973award">{{cite web |url=http://iffi.nic.in/Dff2011/Frm20thNFAAward.aspx |title=20th National Awards For Films (1973) |publisher=Directorate of Film Festivals |format=PDF |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20131105220349/http://iffi.nic.in/Dff2011/Frm20thNFAAward.aspx |archive-date=5 November 2013}}</ref>
| "बीती ना बिताई रैना"
| राहुल देव बर्मन
|
|
|-
! rowspan='6' | ''[[पाकीज़ा]]''
| "चलते चलते"
| rowspan='6' | गुलाम मोहम्मद
| कैफ़ी आज़मी
| rowspan='5' |
|-
| "मौसम है आशिकाना"
| [[कमल अमरोही]]
|-
| "इन्ही लोगों ने"
| [[मजरूह सुलतानपुरी]]
|-
| "ठाड़े रहियो"
| [[कमल अमरोही]], [[मजरूह सुलतानपुरी]]
|-
| "तीर-ए-नज़र"
| rowspan='2' | कैफ भोपाली
|-
| "चलो दिलदार चलो"
| [[मोहम्मद रफी]]
|-
! rowspan='2' | ''धड़कन''
| "मैं आया तेरे द्वारे"
| rowspan='2' | रवि
|
|
|-
| "तो जा मेरे लाल सो जा मधुर सुरों में निंदिया गाये"
|
|
|-
! rowspan='5' | ''[[यह गुलिस्ताँ हमारा (1972 फ़िल्म) |यह गुलिस्ताँ हमारा]]''
| "रैना सोयी सोयी"
| rowspan='5' | एस. डी. बर्मन
|
|
|-
| "क्या ये जिंदगी है"
|
|
|-
| "ओ तुशिमा री तुशिमा"
|
|
|-
| "मेरा नाम आओ, मेरे पास आओ"
|
| डैनी डेन्जोंगपा
|-
| "गोरी गोरी गाँव की गोरी रे, किस लिए बन रही डोरी रे"
|
| rowspan='2' | किशोर कुमार
|-
! rowspan='2' | ''[[सीता और गीता]]''
| "कोई लड़की मुझे कल रात"
| rowspan='2' | आर. डी. बर्मन
| rowspan='2' | आनंद बख्शी
|-
| "हां जी हां मैंने शराब"
| rowspan='6' | एकल
|-
! rowspan='5' | ''[[राजा जानी (1972 फ़िल्म)|राजा जानी]]''
| "आ आजा आजा"
| rowspan='5' | लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
| rowspan='5' |
|-
| "ए बी सी डी छोड़ो"
|-
| "दुनिया का मेला"
|-
| "कितना मजा आ रहा है"
|-
| "मुबारक हो तुझे ऐ दिल"
|}
===1973===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan='4' | ''[[जुगनू (1973 फ़िल्म)|जुगनू]]''
| "जाने क्या पिलाये तूने"
| rowspan='4' | [[एस। डी. बर्मन]]
|
|
|-
| "जब बाघों में जुगनू"
|
|
|-
| "गिर गया झुमका"
|
| किशोर कुमार
|-
| "मेरी ये पायलिया गीत तेरे गये"
|
|
|-
! rowspan='2' | ''[[बंधे हाथ (1973 फ़िल्म) |बंधे हाथ]]''
| "ये कौन आज आया"
| rowspan='2' | राहुल देव बर्मन
|
|
|-
| "तूने छीन लिया"
|
|
|-
! rowspan='5' | ''[[दाग (1973 फ़िल्म)|दाग]]''
| "अब चाहे माँ रूठे या बाबा"
| rowspan='5' | [[लक्ष्मीकांत प्यारेलाल]]
| rowspan='5' | [[साहिर लुधियानवी]]
| rowspan='2' | किशोर कुमार
|-
| "हम और तुम तुम और हम"
|-
| "जब भी जी चाहे"
| एकल
|-
| "नी मैं यार मनाना नी"
| मीनू पुरूषोत्तम
|-
| "हवा चले कैसे"
| रोस्पैन='4' | एकल
|-
! ''[[लोफर (1973 फ़िल्म)|लोफर]]''
| "मैं तेरे इश्क में"
| आनंद बख्शी
|
|-
! rowspan='2' | ''[[फागुन (1973 फ़िल्म)|फागुन]]''
| "पिया संग खेलो होरी फागुन आयो रे"
| rowspan='2' | एस. डी. बर्मन
| rowspan='2' | मजरूह सुल्तानपुरी
|-
| "संध्या जो आए मन उड़ जाए जाने रे कहाँ"
|-
! ''बरखा बहार''
| "नज़र का ये पैगाम दिया जो आपने मेरे नाम"
| लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
|
| मोहम्मद रफ़ी
|-
| rowspan='2' |'''[[अनामिका (1973 फ़िल्म)|अनामिका]]'''
| "बाहों में चले आओ"
| rowspan='2' | आर. डी. बर्मन
| rowspan='2' | मजरूह सुल्तानपुरी
|
|-
|"बाहों में चले आओ (संवादों के साथ)"
|[[जया बच्चन]], [[संजीव कुमार]]
|-
| '''[[यादों की बारात]]'''
| "यादों की बारात निकली है आज दिल के द्वारे (महिला)"
| आर. डी. बर्मन
| मजरूह सुल्तानपुरी
| [[पद्मिनी कोल्हापुरे]], [[सुषमा श्रेष्ठ]]
|-
|}
===1974===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
! scope="col" style="width:18%;" | नोट्स
|-
! ''[[कोरा कागज़ (1974 फ़िल्म) |कोरा कागज़]]''
| "रूठे रूठे पिया"
| सलिल चौधरी
| वयलार
|
|सर्वश्रेष्ठ गायक के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार<ref name="1975award">{{cite web |url=http://iffi.nic.in/Dff2011/Frm22ndNFAAward.aspx |title=22nd National Awards For Films (1975) |publisher=Directorate of Film Festivals |format=PDF |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20140505171751/http://iffi.nic.in/Dff2011/Frm22ndNFAAward.aspx |archive-date=5 May 2014}}</ref>
|-
! rowspan='5' | ''[[आप की कसम]]''
| "जय जय शिव शंकर"
| rowspan='5' | आर. डी. बर्मन
| rowspan='5' | [[आनंद बख्शी]]
| rowspan='4' | [[किशोर कुमार]]
| बिनाका गीतमाला वार्षिक सूची 1974 में #2 पर
|-
| "करवातें बदलते रहें"
| बिनाका गीतमाला वार्षिक सूची 1974 में #17 पर
|-
| "पास नहीं आना"
|
|-
| "सुनो कहो कहा सुना"
|
|-
| "चोरी चोरी चुपके चुपके"
|
|
|-
! ''[[हमशक्ल (1974 फ़िल्म)|हमशकल]]''
| "काहे को बुलाया मुझे बलमा प्यार में नाम से"
| आर. डी. बर्मन
| आनंद बख्शी
| मोहम्मद रवि
|
|-
! ''आरोप''
| "नैनों में दर्पण है"
| भूपेन हजारिका
| माया गोविंद
| किशोर कुमार
|
|}
===1975===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan='2' | ''[[जूली (1975 फ़िल्म)|जूली]]''
| "ये रातें नई पुरानी"
| rowspan='2' | राजेश रोशन
| rowspan='2' | [[आनंद बख्शी]]
|
|-
| "भूल गया सब कुछ"
| [[किशोर कुमार]]
|-
! rowspan='2' | ''[[ज़ख्मी (1975 फ़िल्म)| ज़ख्मी]]''
| "आओ तुम्हें चाँद पे जाये"
| rowspan='2' | [[बप्पी लाहिड़ी]]
|
| rowspan='3' | एकल
|-
| "अभी अभी थी दुश्मनी"
|
|-
! ''[[वरदान]]''
| "देखो देखो दिल का तौफा"
| कल्याणजी-आनंदजी
|
|-
! rowspan='2' | ''[[सुनहरा संसार (1975 फ़िल्म)|सुनेहरा संसार]]''
| "भीगी भीगी हवा है, काली काली घटा है"
| rowspan='2' | नौशाद
| rowspan='4' | आनंद बख्शी
| मुकेश
|-
| "मेरी जवानी मेरी दुश्मन बनी रे"
| [[सुषमा श्रेष्ठ]]
|-
! rowspan='2' | ''[[वारंट (फ़िल्म)|वारंट]]''
| "लाडी नजरिया लाडी"
|rowspan='2' | आर. डी. बर्मन
| किशोर कुमार
|-
| "मैं तुमसे मोहब्बत"
| एकल
|-
! ''उमर क़ैद''
| "याद रहेगा प्यार का"
| सोनिक-ओमी
|
| मुकेश
|-
! rowspan='4' | ''[[प्रेम कहानी (1975 फ़िल्म)|प्रेम कहानी]]''
| "चल दरिया में"
| rowspan='7' | लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
| rowspan='4' |
| rowspan='2' | किशोर कुमार
|-
| "प्रेम कहानी में"
|-
| "फूल आहिस्ता फेंको"
| मुकेश
|-
| "नदिया से बिछड़ा"
| एकल
|-
! rowspan='3' | ''[[चैताली (1975 फ़िल्म)|चैताली]]''
| "धरती अम्बर निंद से जागे"
| rowspan='3' |
| मन्ना डे
|-
| "महबूबा नाम है मेरा"
| rowspan='5' | एकल
|-
| "सा नि धा पा मा ग नि धा"
|-
! rowspan='3' | ''वंदना''
| "आपकी इनायतें, आपका करम"
| rowspan='3' | रवि
| rowspan='3' | रवि
|-
| "ओ जग के पालनहारे"
|-
| "रुत है जवान"
|-
! rowspan='3' | ''[[धरम करम (1975 फ़िल्म)|धरम करम]]''
| "तू कहाँ गयी थी"
| rowspan='3' | आर. डी. बर्मन
| rowspan='3' | मजरूह सुल्तानपुरी
| किशोर कुमार
|-
| "नाचन नहीं आवत"
| एकल
|-
| "मुख पर जो छिड़का पानी"
| किशोर कुमार
|-
! rowspan='6' | ''[[सन्यासी (1975 फ़िल्म)|संन्यासी]]''
| "चल सन्यासी मंदिर में"
| rowspan='6' | [[शंकर जयकिशन|शंकर-जयकिशन]]
| विश्वेश्वर शर्मा
| rowspan='3' | मुकेश
|-
| "सुन बाल ब्रम्हचारी"
| वर्मा मलिक
|-
| "बाली उमरिया भजन करूं कैसे"
| विटालभाई पटेल
|-
| "शाम-ए-फुरकत का ढल गया साया"
| हसरत जयपुरी
| [[प्रेमनाथ]]
|-
| "जैसा मेरा रूप रंगीला"
| विश्वेश्वर शर्मा
| एकल
|-
| "ये है गीता का ज्ञान"
| एम. जी हशमत
| मुकेश
|-
! ''[[धर्मात्मा]]''
| "मेरी गलियों से लोगो की यारी"
| कल्याणजी आनंदजी
| इंदीवर
| महेंद्र कपूर
|-
! rowspan='3' | ''[[चुपके चुपके]]''
| "अब के सजन सावन में"
| rowspan='3' | एस. डी. बर्मन
| rowspan='6' | आनंद बख्शी
|
|-
| "बागानों में कैसे ये फूल खिलते हैं"
| मुकेश
|-
| "चुपके-चुपके चल रे पुरवइया"
| rowspan='3' | एकल
|-
! rowspan='3' | ''[[प्रतिज्ञा (1975 फ़िल्म)|प्रतिज्ञा]]''
| "मैं जंगल की मोरनी"
| rowspan='8' | लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
|-
| "परदेसी आया देस में"
|-
| "उठ निंद से मिर्जिया जाग जा"
| मोहम्मद रफ़ी
|-
! rowspan='2' | ''[[अपने रंग हज़ार (1975 फ़िल्म)|अपने रंग हज़ार]]''
| "गंगा में डूबा ना जमुना में डूबा"
| rowspan='2' |
| rowspan='3' | एकल
|-
| "इस क़दर आप हमको जो तड़पाएंगे"
|-
! rowspan='2' | ''जिंदा दिल''
| "नहीं नहीं जाना नहीं अभी नहीं"
| rowspan='3' |
|-
| "शाम सुहानी आई खुसिया बनके पहली बार"
| महेंद्र कपूर, शैलेन्द्र सिंह
|-
! ''[[सेवक (1975 फ़िल्म)|सेवक]]''
| "मेरा नाम बड़ा बदनाम"
| एकल
|}
===1976===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! ''[[नागिन (1976 फ़िल्म)|नागिन]]''
| "तेरे संग प्यार में"
| [[लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल]]
| [[वर्मा मलिक]]
|
|-
! ''[[अदालत (1976 फ़िल्म)|अदालत]]''
| "तुमसे दूर रहके"
| कल्याणजी आनंदजी
| गुलशन बावरा
| मोहम्मद रफ़ी
|-
! rowspan='5' | ''[[कभी कभी]]''
| "कभी कभी मेरे दिल में" (II)
| rowspan='5' | खय्याम
| rowspan='10' | साहिर लुधियानवी
| मुकेश
|-
| "तेरा फूलों जैसा रंग"
| किशोर कुमार
|-
| "मेरे घर आये एक नन्ही परी"
|
|-
| "सुर्ख जोड़े की ये जगमगाहत"
| पामेला चोपड़ा
|-
| "तेरे चेहरे से"
| किशोर कुमार
|-
! rowspan='5' | ''[[लैला मज़नू (1976 फ़िल्म)|लैला मजनू]]''
| "हुस्न हाज़िर है"
| rowspan='5' | मदन मोहन, जयदेव
|
|-
| "क्या रेशमी पाज़ेब की झंकार"
| rowspan='3' | मोहम्मद रफ़ी
|-
| "अब अगर हम से खुदाई भी"
|-
| "लिख कर तेरा नाम ज़मीन पर"
|-
| "कोई पत्थर से ना मारे मेरे दीवाने को"
| rowspan='4' | एकल
|-
! ''कोई जीता कोई हारा''
| "ओ बाबा शादी तुम ना करना"
| लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
| रोस्पैन='6' | आनंद बख्शी
|-
! rowspan='3' | ''[[जीवन ज्योति (1976 फिल्म)|जीवन ज्योति]]''
| "दुनिया रंग बदलती जाये"
| rowspan='3' | सलिल चौधरी
|-
| "जिस द्वारे पर घर की बहू"
|-
| "रांझे की आँखों से देखो हीर को, मुझको छेड़ो"
| किशोर कुमार
|-
! rowspan='3' | ''[[लगाम (1976 फ़िल्म)|लगाम]]''
| "आज पवन की चल चुरा के"
| rowspan='3' | कल्याणजी आनंदजी
| rowspan='3' |
|-
| "जैसे मोती सीप से बिछड़े"
|-
| "आधी आधी रात मेरी पायलिया भजे"
| मोहम्मद रफ़ी
|-
! rowspan='2' | ''महा चोर''
| "मैं तुमसे प्यार करती हूँ"
| rowspan='2' | आर. डी. बर्मन
| rowspan='2' | आनंद बख्शी
| किशोर कुमार
|-
| "तू क्या मुझे बर्बाद करेगा"
| एकल
|-
! rowspan='2' | ''[[नाच उठे संसार (1976 फ़िल्म)|नाच उठे संसार]]''
| "तेरे संग जीना, तेरे संग मरना"
| rowspan='2' | लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
| rowspan='2' |
| rowspan='2' | मोहम्मद रफ़ी
|-
| "नाच उठे संसार"
|-
! rowspan='3' | ''[[नेहले पे देहला (1976 फ़िल्म)|नहले पे दहला]]''
| "सावन का महीना आ गया"
| rowspan='3' | आर. डी. बर्मन
| rowspan='3' | आनंद बख्शी
| किशोर कुमार
|-
| "लोगों की ज़ुबान पर अपना नाम"
| मन्ना डे, किशोर कुमार
|-
| "माशूक अपने शबाब में"
|
|-
! ''[[रंगीला रतन (1976 फ़िल्म)|रंगीला रतन]]''
| "तुम्हीं हो तुम्हीं हो जाने-जान"
| कल्याणजी आनंदजी
| गुलशन बावरा
| किशोर कुमार
|-
! rowspan='3' | ''[[उधार का सिंदूर (1976 फ़िल्म)|उधार का सिन्दूर ]]''
| "बुद्ध प्यार मंगदा"
| rowspan='3' | राजेश रोशन
| rowspan='3' |
| rowspan='3' | एकल
|-
| "मां अब तो मैं भी"
|-
| "मां कभी मैं भी पिया घर"
|}
===1977===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
==संदर्भ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:भारतीय गायकों के गाये गीतों की सूचियाँ]]
{{भारत रत्न सम्मानित}}
{{पद्म भूषण धारक 1960–1969}}
{{दादासाहेब फाल्के पुरस्कार}}
{{फ़िल्मफ़ेयर लाइफ़ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार}}
{{फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका पुरस्कार}}
[[श्रेणी:1929 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:पद्म भूषण]]
[[श्रेणी:भारतीय हिन्दू]]
[[श्रेणी:बॉलीवुड]]
[[श्रेणी:गायिका]]
[[श्रेणी:भारतीय फिल्म पार्श्वगायक]]
[[श्रेणी:विकिपरियोजना संगीत]]
[[श्रेणी:मध्य प्रदेश के लोग]]
[[श्रेणी:दादासाहेब फाल्के पुरस्कार विजेता]]
[[श्रेणी:भारत रत्न सम्मान प्राप्तकर्ता]]
[[श्रेणी:इंदौर जिले के लोग]]
[[श्रेणी:भारतीय महिला गायक]]
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[[श्रेणी:२०२२ में निधन]]
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6630500
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Itsharshitt28
940812
/* 1962 */
6630501
wikitext
text/x-wiki
{{मुख्य|लता मंगेशकर}}
[[File:Lata Mangeshkar black-and-white.jpg|thumb|right|1953 में मंगेशकर]]
'''लता मंगेशकर''' (जन्म: '''हेमा मंगेशकर'''; 28 सितंबर 1929 - मृत्यु: 6 फरवरी 2022) एक दिग्गज भारतीय [[पार्श्व गायिका]] , [[संगीत निर्माता]] और [[संगीत निर्देशक]] थीं, जिन्होंने हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में संगीत रचा। उनके कई पुराने गाने विभिन्न नई फिल्मों (बॉलीवुड या भारतीय फिल्में) में शामिल किए गए हैं और उन्हें श्रेय भी दिया गया है। लेकिन ऐसे गाने, जब तक कि उन्हें दोबारा रिकॉर्ड न किया गया हो, नीचे सूचीबद्ध नहीं किए गए हैं।
'''नोट:''' इस लेख में मंगेशकर द्वारा गाए गए सभी गाने शामिल नहीं हैं।
==हिंदी गाने==
'''1940 के दशक'''
'''1945'''
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="2" | ''बड़ी माँ''
| "जननी जनमभूमि... तुम माँ हो बड़ी माँ"
| rowspan="2" | के. दत्त
|
| मीनाक्षी
|-
| "माता तेरे चरणों में"
|
| इशवरलाल, कोरस<ref name="auto">{{cite web |url=http://cineplot.com/music/lata-mangeshkars-song-list-1945-1948/ |title=Lata Mangeshkar's Song List (1945 – 1948) |access-date=2014-11-05 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141106003940/http://cineplot.com/music/lata-mangeshkars-song-list-1945-1948/ |archive-date=2014-11-06 |url-status=dead}}</ref>
|}
===1946===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! ''जीवन यात्रा''
| "चिड़िया बोले चूं चूं मैना बोले हूँ"
| वसंत देसाई
|
|
|-
! ''सोना चाँदनी''
| "प्यारे बापू की"
| तुफैल फारूक़ी
|
|
|-
! rowspan="3" | ''सुभद्रा''
| "मैं खिली खिली फुलवारी"
| rowspan="3" | वसंत देसाई
|
| rowspan="3" |
|-
| "पिया आयेगा गोरी सुध न बिसार"
|
|-
| "सांवरिया ओ बसुरिया ओ बजाई गयो रे"
|
|-
! rowspan="3" | ''आप की सेवा में''
| "अब कौन सुनेगा मेरे मन की बात"
| rowspan="3" | दत्ता दावजेकर
| rowspan="3" |
| rowspan="3" |
|-
| "एक नये रंग में दूजे उमंग में"
|-
| "चलो हो गयी तैयार"
|}
===1947===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
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! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! ''[[शादी से पहले]]''
| "पा लगूं कर जोड़ा जोड़ी होरी श्याम मोसे ना"
| पढंकर और करणार्ड
|
| [[मोहम्मद रफी]]
|-
! ''शेहनाई''
| "जवानी की रेल चली"
| सी. रामचंद्र
|
| [[गीता दत्त]], सी. रामचंद्र
|}
===1948===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! ''अंधों का सहारा''
| "मैं तो नाचो छमा छम नाच रे"
| एस. पारसेकर
|
|
|-
! rowspan='10' | ''अनोखा प्यार''
| "ऐ दिल मेरी वफ़ा में"
| rowspan='10' | अनिल विश्वास
| rowspan='10' |
| इरा नागरथ
|-
| "ऐ दिल मेरी वफ़ा"
| rowspan='8' |
|-
| "एक दिल का लगना"
|-
| "भोला भला री मेरा"
|-
| "घड़ी घड़ी पूछो ना"
|-
| "जीवन सपना टूट गया"
|-
| "मेरे लिए वो ग़म ए इंतज़ार"
|-
| "मेरे फूलों में छुपी है"
|-
| "याद रखना चाँद"
|-
| "याद रखना चाँद"
| [[मुकेश]]
|-
! rowspan='5' | ''आशा''
| "सजना रे तोरी कौन डगर"
| rowspan='5' | खेमचंद प्रकाश
|
| rowspan='9' |
|-
| "चेत चेत कर चल मधुर नर"
|
|-
| "दूर जाए रे राह मेरी आज तेरी राह से"
|
|-
| "एक मूरत मनोहर मेरी अंखियों को तरसे"
|
|-
| "कित जाए बसे हे मुरारी तोहे ढूंढत राधा"
|
|-
! ''बिहारी''
| "सब से कि डरफिशानी फूलों का सामियाना"
| एन. भट्टाचार्य
|
|-
! rowspan='3' | ''चाँद सितारे''
| "ऐ दुनिया की मालिक मुझे तुझसे मिला है"
| rowspan='3' | प्रेमनाथ
|
|-
| "जब दिल में तेरे दर्द"
|
|-
| "मेरी नाव चले धीरे-धीरे"
|
|-
! ''चुनरिया''
| "अंख मेरी लड़ गई"
| हंसराज बहल
|
| इंदर गोयल
|-
! ''दीदी''
| "तेरे नैनों में निंदिया निंदिया में सपने"
| मुकुंद मसूरेकर
|
| rowspan='3' |
|-
! ''दुखियारी''
| "अब किसको सुनाऊं मैं कथा कृष्णा"
| ज्ञान दत्त
|
|-
! rowspan='5' | ''गजरे''
| "बरस बरस बदली"
| rowspan='5' | अनिल विश्वास
|
|-
| "चली दुल्हन बारातियों के"
|
| इरा नागरथ
|-
| "घर यहाँ बसाने आये थे"
|
| rowspan='5' |
|-
| "कब तक कटेगी जिंदगी किनारे किनारे"
|
|-
| "प्रीतम तेरा मेरा प्यार"
|
|-
! rowspan='3' | ''हीर रांझा''
| "कैसे काटू ये काली रातें आ बलम"
| rowspan='3' | अजीज खान
|
|-
| "काहे को ब्याही बिदेस"
|
|-
| "खामोश फसाना है"
|
| जी.एम. दुर्रानी
|-
! rowspan='2' | ''खिड़की''
| "खुशियाँ मनायें"
| rowspan='2' | सी. रामचन्द्र
|
| मोहनतारा, शमशाद बेगम
|-
| "तेरे बिना सूना"
|
| गीता दत्त, सी. रामचन्द्र
|-
! rowspan='5' | ''मजबूर''
| "अब कोई जी के क्या करे"
| rowspan='5' | गुलाम हैदर
|
|
|-
| "अंग्रेजी छोरा चला गया"
|
| मुकेश
|-
| "दिल मेरा तोडा"
|
|
|-
| "गोरी सखियों से"
|
| rowspan='2' | गीता दत्त
|-
| "हर शे पे जवानी है"
|
|-
! ''मंदिर''
| "लो वो आई निंदिया चुप चुप धीरे"
| वसंत देसाई
|
| rowspan='2' |
|-
! ''मेरे लाल''
| "हमारा घर बन जाए महलों से प्यारा सुंदर"
| पुरूषोत्तम
|
|-
! rowspan='2' | ''मेरी कहानी''
| "दिलवालों दिलों का मेल दिलों का खेल"
| rowsapn='2' | के.दत्ता
|
|
|-
| "नहिं नहिं बून्दनियाँ जिया लहराये"
|
|
|-
! ''[[नदिया के पार (1948 फ़िल्म)|नदिया के पार]]''
| "हो गोरी हो चोरी कहाँ चली हो"
| सी. रामचन्द्र
|
| सी. रामचन्द्र
|-
! ''पद्मिनी''
| "बेदर्द तेरे दर्द को सीने से लगा के"
| गुलाम हैदर
|
|
|-
! ''[[शहीद (1948 फ़िल्म)|शहीद]]''
| "पिंजरे मेन बुलबुल बोले (शामिल नहीं)"
| गुलाम हैदर
|
| मैडम मोहन
|-
! rowspan='6' | ''[[ज़िद्दी (1948 फ़िल्म)|ज़िद्दी]]''
| "अब कौन सहारा है जब तेरा सहारा"
| rowspan='6' | खेमचंद प्रकाश
| rowspan='6' |
| rowspan='5' |
|-
| "चंदा रे जा रे जा पिया से संदेसा मोरा"
|-
| "जादू कर गई किसी के नैना"
|-
| "रूठ गए मोरे श्याम सखी रे"
|-
| "तुझे ओ बेवफा हम जिंदगी का आसरा"
|-
| "ये कौन आया रे करके ये"
| [[किशोर कुमार]] <ref name='auto'/>
|}
===1949===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan='7' | ''[[आइये]]''
| "इतनी बड़ी दुनिया में"
| rowspan='7' | शौकत हैदरी
|
| rowspan='3' |
|-
| "किस लिए आँखों में आंसू"
|
|-
| "आ भी जा जानेवाले"
|
|-
| "आइए आओ चले वहां"
|
| मुबारक बेगम
|-
| "दुनिया बदल गई"
|
| rowspan='2' | जी.एम. दुर्रानी
|-
| "कर सकेगा ना जुदा"
|
|-
| "जिया डोले किसी ख़यालिन में"
|
| शौकत हैदरी
|-
! rowspan='7' | ''[[अंदाज़ (1949 फ़िल्म)|अंदाज़]]''
| "मेरी लाडली रे बनी है"
| rowspan='7' | नौशाद
| rowspan='7' | [[मजरूह सुलतानपुरी]]
| rowspan='5' |
|-
| "कोई मेरे दिल में"
|-
| "उठाये जा उनके सितम"
|-
| "तोड़ दिया दिल मेरा"
|-
| "डरना मोहब्बत"
|-
| "यूं तो अपस मेन"
| rowspan='2' | मोहम्मद रफ़ी
|-
| "सुनलो दिल का अफसाना" (शामिल नहीं)
|-
! rowspan='2' | ''[[बंगला भेदी]]''
| "हौंसले दिल के मिट्टी प्यार के अरमान गया"
| rowspan='2' | पी. रमाकांत
|
| rowspan='10' |
|-
| "मन में तेरी याद बसी आँखों में है प्यार"
|
|-
! rowspan='10' | ''[[बरसात (1949 फ़िल्म)|बरसात]]''
| "बरसात में हमसे मिले" (शीर्षक गीत)
| rowspan='10' | [[शंकर-जयकिशन]]
|
|-
| "हवा में उड़ता जाए मेरा लाल दुपट्टा"
|
|-
| "जिया बेकरार है छायी बहार है"
|
|-
| "मुझे किसी से प्यार हो गया"
|
|-
| "मेरी आँखों में बस गया कोई"
|
|-
| "अब मेरा कौन सहारा"
|
|-
| "बिछड़े हुए परदेसी"
|
|-
| "हंस मुख फूलों ये मत भूलो"
|
|-
| "पतली कमर है"
|
| rowspan='2' | मुकेश
|-
| "छोड़ गए बलम"
|
|-
! rowspan='2' | ''[[बालम (1949 फ़िल्म)|बालम]]''
| "परदेसी मुसाफिर कैसे करता"
| rowspan='2' | हुस्नलाल भगतराम
| rowspan='2' | क़मर जलालाबादी
| rowspan='2' | सुरैया
|-
| "दुनिया वालो"
|-
! rowspan='6' | ''[[बाज़ार (1949 फ़िल्म)|बाज़ार]]''
| "साजन की गलियाँ छोड़ चले"
| rowspan='6' | श्याम सुंदर
|
| rowspan='3' |
|-
| "बसलो अपनी निगाहों में प्यार"
|
|-
| "ऐ दिल उनको याद ना करना"
|
|-
| "जरा सुनलो हम अपना प्यार"
|
| राजकुमारी
|-
| "ऐ मोहब्बत उनसे मिलने"
|
| मोहम्मद रफ़ी
|-
| "अपनी नसर से दूर हम"
|
| मोहम्मद रफ़ी
|-
! rowspan='3' | ''[[बड़ी बहन]]''
| "चले जाना नहीं नैन मिलाके"
| rowspan='9' | हुस्नलाल भगतराम
|
|
|-
| "जो दिल में घुसी बन आये"
|
|
|-
| "चुप चुप खड़े"
| प्रेमलता
|
|-
! rowspan='4' | ''बांसुरिया''
| "दिल तोड़ के जानेवाले"
| rowspan='6' |
| rowspan='6' |
|-
| "जो करके गये बरबाद हमन"
|-
| "ये दुनिया कहती है कोई फरियाद ना करे"
|-
| "चाहे चोरी चोरी आओ चाहे चुप चुप"
|-
! rowspan='2' | ''[[भोली]]''
| "दिल तोड़ने वाले क्या तूने किया है बर्बाद"
|-
| "इतना भी बेशुमार को न आसमां सताए"
|-
! ''[[चार दिन]]''
| "हाय ये भोली सूरत वाले"
| श्याम सुंदर
|
| राजकुमारी, कल्याणी, ज़ोहराबाई अम्बालेवाली, शमशाद बेगम, हमीदा बानो, इकबाल (हमीदा का भाई)
|-
! rowspan='3' | ''[[चकोरी (1949 फ़िल्म)|चकोरी]]''
| "कभी हंस हंसके नैन मिलाये"
| rowspan='3' | हंसराज बहल
|
| rowspan='3' |
|-
| "हाय चंदा गये परदेस चकोरी जहां"
|
|-
| "बहुत हमसे जुदा है पर तेरे लिए फिर भी"
|
|-
! rowspan='2' | ''[[चांदनी रात]]''
| "हाय छोरे की जात"
| rowspan='2' | नौशाद
|
| जी.एम. दुर्रानी
|-
| "हाय छोरे की जात"
|
| सआदत खान
|-
! rowspan='2' | ''[[दिल की बस्ती]]''
| "आग लगे जग सारा देखे"
| rowspan='2' | गुलाम मोहम्मद
|
| rowspan='2' |
|-
| "उनसे हम कुछ कहते रह गए"
|
|-
! rowspan='7' | ''[[दुलारी (फिल्म)|दुलारी]]''
| "आंखों में आया दिल में समा जा"
| rowspan='7' | नौशाद
|
| rowspan='5' |
|-
| "तकदीर जगा कर आयी हूँ"
|
|-
| "ऐ दिल तुझसे कसम है"
|
|-
| "दो दिन की बहार है प्यार कर"
|
|-
| "मोहब्बत हमारी ज़माना हमारा"
|
|-
| "मिल मिल के गाएँगे"
|
| rowspan='2' | मोहम्मद रफ़ी
|-
| "रात रंगीली मस्त"
|
|-
! rowspan='7' | ''[[एक थी लड़की]]''
| "घिर-घिर के आई बदरा सजनवा"
| rowspan='7' | विनोद
|
| rowspan='2' |
|-
| "मेरे दिल के तड़पने का तमाशा देखनेवाले"
|
|-
| "अब हाल ए दिल"
|
| rowspan='3' | मोहम्मद रफ़ी
|-
| "लंबी जोरू बड़ी मुसेबत"
|
|-
| "ये शोक सितारें"
|
|-
| "लारा लप्पा लारा लप्पा"
|
| मोहम्मद रफी, जी.एम. दुर्रानी
|-
| "हम चले दूर"
|
| मोहम्मद रफ़ी, सतीश बत्रा
|-
! rowspan='3' | ''[[गर्ल्स स्कूल (1949 फ़िल्म)|गर्ल्स स्कूल]]''
| "कुछ शरमते हुए और कुछ"
| rowspan='3' | अनिल विश्वास
|
| rowspan='2' |
|-
| "तुम ही कहो मेरा मन क्यों रहे उदास"
|
|-
| "बार-बार तुम सोच"
|
| शंकर दास गुप्ता<ref>{{cite web |url=http://cineplot.com/music/lata-mangeshkars-song-list-1949/ |title=Lata Mangeshkar's Songs List - 1949 |date=2014-11-06 |url-status=dead |access-date=6 October 2026 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141106050338/http://cineplot.com/music/lata-mangeshkars-song-list-1949/ |archive-date=6 नवंबर 2014}}</ref>
|-
! rowspan='3' | ''[[जल तरंग]]''
| "लुट गई उम्मीदों की दुनिया"
| rowspan='3' | हुस्नलाल भगतराम
|
|
|-
| "ज़रा तुमने देखा तो प्यार"
|
| मोहम्मद रफ़ी
|-
| "हाय तकदीर मेरी बनके बिगाड़ती क्यों"
|
| rowspan='9' |
|-
! rowspan='2' | ''[[जीत (1949 फ़िल्म)|जीत]]''
| "मस्त पावन है चंचल धारा"
| rowspan='2' | अनिल विश्वास
|
|-
| "हंसले गा ले ओ चांद मेरे"
|
|-
! ''किनारा''
| "जानेवाले ये जवानी चार दिन की"
| एम. आचार्य
|
|-
! rowspan='7' | ''लाडली''
| "आठ रोज़ की छुट्टी"
| rowspan='7' | अनिल विश्वास
| rowspan='7' |
|-
| "तुम्हारे बुलाने को जी चाहता है"
|-
| "कैसे कह दूं बजरिया के बीच"
|-
| "ज़िंदगी की रोशनी तो ख़त्म हो गई"
|-
| "ग़रीबों का हिसा ग़रीबों में"
|-
| "जय जय प्रेम देवता"
| मीना कपूर
|-
| "अग्रे को घाघरो मंगवादेई"
| आशालता
|-
! rowspan='7' | ''लाहौर''
| "बहारें फिर भी आएंगी"
| rowspan='7' | श्याम सुंदर
| rowspan='7' |
| rowspan='6' |
|-
| "सुनलो सजन मेरी बात दिल की बात"
|-
| "बेदर्द ज़माने क्या तेरी महफ़िल में"
|-
| "टूटे हुए अरमानों की एक दुनिया"
|-
| "उस दिल की किस्मत क्या कहेंगे"
|-
| "उम्मीद के रंगीन झूले में एक आस"
|-
| "दुनिया हमारे प्यार की यूँही"
| करण दीवान
|-
! rowspan ='3' | ''मां का प्यार''
| "मुरख मन कहे होत अधीर"
| rowspan='3' | पंडित गोबिंदराम
| rowspan='3' |
| rowspan='3' |
|-
| "सोजा मेरे नन्हे निंदिया तोहे आई"
|-
| "तूने जहां बना कर एहसान क्या किया"
|-
! rowspan='3' | ''[[महल (1949 फ़िल्म)|महल]]''
| "मुश्किल है बहुत मुश्किल"
| rowspan='3' | खेमचंद प्रकाश
| rowspan='3' | नक्शाब
| rowspan='3' |
|-
| "आएगा आएगा आनेवाला आएगा"
|-
| "दिल ने फिर याद किया बेवफ़ा"
|-
! rowspan='5' | ''नमूना''
| "भगवान तूने क्यों"
| rowspan='5' | सी. रामचन्द्र
|
| rowspan='4' |
|-
| "आज संभल के आना हो लाला"
|
|-
| "म्हारी गली में आवे जो"
|
|-
| "ज़ुल्म तुम्हारे सह न सके"
|
|-
| "तड़पके मुझे अब छोड़"
|
| मोहम्मद रफ़ी
|-
! rowspan='4' | ''[[नरसिंह अवतार]]''
| "भज रे मधुर मधुर नाम"
| rowspan='5' | वसंत देसाई
|
| rowspan='6' |
|-
| "चरण तुम्हारे फूल हमारे"
|
|-
| "हरि को बिसारो न बिसरेंगे"
|
|-
| "जगमग तारे झलके झलके अँधेरी"
|
|-
! ''[[नयी तालीम]]''
| "आ गई बहार आ गई"
|
|-
! rowspan='3' | ''नज़ारे''
| "एक ठेस लगी"
| rowapan='3' | बुलो सी. रानी
|
|-
| "क्या सोच के बनाई"
|
| मोहम्मद रफ़ी
|-
| "तड़पके मुझे छोड़ दिया"
|
| rowspan='11' |
|-
! rowspan='4' | ''[[पारस (1949 फ़िल्म)|पारस]]''
| "आज मेरी दुनिया में दिन हैं बहार के"
| rowspan='4' | गुलाम मोहम्मद
| rowspan='4' | शकील बदायूँनी
|-
| "दिल का सहारा टूटे ना जाए"
|-
| "इस दर्द की मारी दुनिया में"
|-
| "दिल लेके छुपनेवाले"
|-
! rowspan='3' | ''[[प्यार की रात]]''
| "चाहे वो हमें ऐसी किस्मत है कहाँ"
| rowspan='3' | एन. ए. जोलागोनकर
|
|-
| "वो नज़र मिली हंसी जिंदगी"
|
|-
| "एक बार चले आओ फिर चाहे ना आना"
|
|-
! rowspan='4' | ''[[पतंगा (1949 फ़िल्म)|पतंगा]]''
| "दिल से भुलादो तुम हमीं"
| rowspan='4' | सी. रामचन्द्र
| rowspan='3' |
|-
| "कभी खामोश हो जाना कभी फरियाद"
|-
| "ओ जानेवाले तूने अरमानों की दुनिया"
|-
| "प्यार के जहाँ की निराली"
|
| शमशाद बेगम
|-
! rowspan="3" | ''[[रात की रानी (फ़िल्म)|रात की रानी]]''
| "दिल तोड़ने वाले आ"
| rowspan="3" | हंसराज बेहल
|
|
|-
| "सुन तो लो मेरा अफसाना"
|
| rowspan="2" | मोहम्मद रफी
|-
| "उस रात के प्यारे चाँद"
|
|-
! ''रोशनी''
| "मेरे पास मेरे भोले सजन"
| सी. रामचंद्र
|
|
|-
! rowspan="3" | ''राखी''
| "कहे धीरे चली रे घड़ी"
| rowspan="3" | हुसंलाल भागतरं
| rowspan="3" |
| rowspan="3" |
|-
| "ओ रूठ जानेवाले मेरा कसूर क्या है"
|-
| "दिल किसी ने छीन लिया पहली मुलाक़ात में"
|-
! ''[[संत जनाबाई]]''
| "गोपे नंदलाल गूंथे सब वनमाला"
| सुधीर फड़के
|
|
|-
! ''सांवरिया''
| "जानी रे हम जानी रे"
| सी. रामचंद्र
|
| गीता दत्त
|-
! rowspan="6" | ''[[सावन भादों (1949 फ़िल्म)|सावन भादों]]''
| "सौ सौ ग़म ने घेरे"
| rowspan="6" | हुसंलाल भागतरं
|
| rowspan="4" |
|-
| "तेरी इस दो रंगी दुनिया में"
|
|-
| "तेरी अँखियाँ सजन चोर चोर"
|
|-
| "तुम बिन राजा नहीं मन का चैन"
|
|-
| "कलेजा थाम लो"
|
| ज़ोहराबाई अंबालवाली
|-
| "ये राह ए मोहब्बत"
|
| एस.दी. बतीश
|-
! rowspan="6" | ''[[सिपहिया]]''
| "दर्द जगा के टेस लगा के"
| rowspan="6" | सी. रामचंद्र
|
| rowspan="3" |
|-
| "हँसी हँसी न रही और खुशी न खुशी"
|
|-
| "आराम के थे साथी क्या क्या जब वक़्त पड़ा तो"
|
|-
| "चलो घूँघट में गुइयाँ"
|
| [[गीता दत्त]]
|-
| "लगा है कुछ निशाना"
|
| rowspan="2" | सी. रामचंद्र
|-
| "ऐ आँख अब न रोना"
|
|-
! rowspan="4" | ''[[शायर (1949 फ़िल्म)|शायर]]''
| "तू दूर है आँखों से मेरे दिल को यह ग़म"
| rowspan="4" | ग़ुलाम मोहम्मद्
|
| rowspan="2" |
|-
| "मोहब्बत पे बहार आती जहाँ गुलज़ार हो जाता"
|
|-
| "दो बिछड़े हुए दिल आपस में"
|
| जी.एम. दुर्रानि
|-
| "ये दुनिया है जहाँ दिल का लगन"
|
| मुकेश
|-
! rowspan="6" | ''[[उधार (फ़िल्म)|उधार]]''
| "आज जिंदगी के बंद द्वार खुल गए"
| rowspan="6" | वसंत देसाई
|
| rowspan="6" |
|-
| "कहाँ राम है राम फिर श्रीमुख"
|
|-
| "ओ कबीरा हिंदुआन की हिंदुआई देखो"
|
|-
| "पतझड़ के दिन बीत गये"
|
|-
| "रात जा रही नींद आ रही है"
|
|-
| "रंगीन गगन पीछे छूटा"
|
|-
! ''उषा किरण''
| "लहरों पे कभी नाचूँ किरणों से कभी"
| सरस्वती देवी
|
|
|-
! rowspan="5" | ''[[ज़ेवरात]]''
| "शिकवा न करेंगे न शिकायत"
| rowspan="5" | हंसराज बेहल
|
| rowspan="2" |
|-
| "एक ही था जगत में सहारा"
|
|-
| "सजन की ओर लेके"
|
| मोहम्मद रफी
|-
| "जा तेरी मुक़द्दर में हँसी है न खुशी"
|
| rowspan="2" |
|-
| "चले आओ जी मुझे तुमसे मोहब्बत है"
|
|-
|}
===1950 के दशक===
===1951===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="6" | ''[[आवारा]]''
| "घर आया मेरा परदेसी"
| rowspan="6" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="3" | शैलेंद्र
|
|-
| "दम भर जो उधर मुँह फेरे"
| मुकेश
|-
| "तेरे बिना आग ये चाँदनी"
| [[मन्ना डे]]
|-
| "एक बेवफ़ा से प्यार किया"
| rowspan="3" | [[हसरत जयपुरी]]
| rowspan="3" |
|-
| "अब रात वाली है"
|-
| "जब से बालम घर आये"
|}
===1952===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="5" | ''[[दाग (1952 फ़िल्म)|दाग]]''
| "काहे को देर लगाई रे"
| rowspan="5" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="5" |
| rowspan="5" |
|-
| "देखो आया ये कैसा"
|-
| "लागे जबसे नैन"
|-
| "प्रीत ये कैसी"
|-
| "ऐ मेरे दिल कहीं और चल"
|-
! rowspan="7" | ''शिन शिनाकि बूब्ला बू''
| "टक्का लाई कलि दई"
| rowspan="7" | सी. रामचंद्र
| rowspan="7" | प्यारेलाल संतोषी
| rowspan="4" |
|-
| "अरे बाबा ये हँसी बाबा ये खुशी बाबा"
|-
| "कैसे हैं मिज़ाज कहिये"
|-
| "साईं रे घर घर में एक चोर"
|-
| "एक बार जो परदे से फिर छम से तेरा आना हो"
| कुशिरो कुमार
|-
| "तुम क्या जानो तुम्हारी याद में हम कितना रोये"
|
|-
| "शिन शिनाकि बूब्ला बू"
| सी. रामचंद्र
|-
! rowspan="2" | ''[[दीवाना (1952 फ़िल्म)|दीवाना]]''
| "मेरे चाँद मेरे लाल"
| rowspan="2" | नौशाद
| rowspan="2" | शकील बदयूनी
| सुरैया
|-
| "तीर खाते जायेंगे"
|
|}
===1953===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="9" | ''[[अनारकली (1953 फ़िल्म)|अनारकली]]''
| "आजा अब तो आजा"
| rowspan="9" | सी. रामचंद्र, वसंत प्रकाश
| rowspan="9" |
| rowspan="8" |
|-
| "दुआ कर ग़म-ए-दिल"
|-
| "मुझसे मत पूछ"
|-
| "मोहब्बत ऐसी धड़कन है"
|-
| "मोहब्बत में ऐसे कदम"
|-
| "ये जिंदगी उसी की है" (1)
|-
| "ये जिंदगी उसी की है" (2)
|-
| "ओ आसमांवाले"
|-
| "जाग दर्द-ए-इश्क़ जाग, दिल को बेकरार कर छेड़के आँसुओं का राग"
| हेमंत कुमार
|-
! rowspan="7" | ''[[आह (फ़िल्म)|आह]]''
| "जाने ना नज़र" <ref>{{Citation |title=Jane Na Nazar Pehchane Jigar - Raj Kapoor - Nargis - Aah - Lata - Mukesh - Evergreen Hindi Songs |url=https://www.youtube.com/watch?v=90ooNta8icg |date=2011-12-02 |access-date=2016-02-24 |last=Filmi Gaane}}</ref>
| rowspan="7" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="2" | [[हसरत जयपुरी]]
| rowspan="3" | [[मुकेश]]
|-
| "आजा रे अब मेरा दिल"
|-
| "जो मैं जानती"
| rowspan="5" | शैलेंद्र
|-
| "झनन झनन झनन"
| rowspan="6" |
|-
| "ये शाम की तन्हाईयाँ"
|-
| "सुनते थे नाम"
|-
| "राजा की आयेगी बारात"
|-
! rowspan="4" | ''[[लड़की (1953 फ़िल्म)|लड़की]]''
| "साजन आजा दरस दिखा जा"
| rowspan="4" | आर. सुदरसनम–धनीराम
| rowspan="4" | राजेंद्र कृष्णन
|-
| "तोड़ के दुनिया की दीवार"
|-
| "मन मोर मचावे शोर"
| [[गीता दत्त]]
|-
| "मेरे वतन से अच्छा"
| rowspan="2" |
|-
! rowspan="3" | ''[[दो बीघा ज़मीन]]''
| "आजा री आ, निंदियाँ तू आ"
| rowspan="3" | सलिल चौधरी
| rowspan="3" | शैलेंद्र
|-
| "धरती कहे पुकार के, बीज बिछा ले प्यार के"
| rowspan="2" | मन्ना डे
|-
| "हरियाला सावन ढोल बजाता आया"
|}
===1954===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="9" | ''[[नागिन (1954 फ़िल्म)|नागिन]]''
| "मन डोले मेरा तन डोले"
| rowspan="9" | [[हेमंत कुमार]]
|
|
|-
| "सुन रसिया मन बसिया"
|
|
|-
| "सुन रि सखी"
|
|
|-
| "मेरा दिल ये पुकारे आजा"
|
|
|-
| "जादूगर सईयां"
|
|
|-
| "अरि छोड़ दे पतंग"
| [[हेमंत कुमार]]
|
|-
| "मेरा बादली में छुप गया चाँद"
| rowspan="5" |
|
|-
| "तेरी याद में जलकर देख लिया"
|
|-
| "ऊँची ऊँची दुनिया कि दीवारें"
|
|-
|-
! ''मयूरपंख''
| "तंदना तंदना तंदना"
| शैलेंद्र
| [[आशा भोसले]], [[उषा मंगेशकर]]
|-
! ''अमर''
| "न शिकवा है कोई ना कोई गिला है"
|
| शकील बदायूंई
|}
===1955===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="8" | ''[[आज़ाद (1955 फ़िल्म)|आज़ाद]]''
| "ना बोले, ना बोले"
| rowspan="8" | सी. रामचंद्र
| rowspan="8" | राजेंद्र कृष्ण
| rowspan="5" |
|-
| "कितनी जवान है रात"
|-
| "देखो जी बहार आयी"
|-
| "जा री, ओ कारी बदरिया"
|-
| "पीके दरस को तरस"
|-
| "कितना हसीन है मौसम, कितना हसीन सफर है"
| सी. रामचंद्र
|-
| "अपलम चपलम, चप लाई री दुनिया को छोड़"
| rowspan="2" | उषा मंगेशकर
|-
| "बलिए ओ बलिए, चल छलिये"
|-
! rowspan="3" | ''[[देवदास (1955 फ़िल्म)|देवदास]]''
| "जिसे तू कबूल करले"
| rowspan="3" | [[सचिन देव बर्मन]]
| rowspan="3" | [[साहिर लुधियानवी]]
|
|-
| "अब आगे तेरी मर्ज़ी"
|
|-
| "ओ आने वाले रुक जा"
|
|-
! rowspan="5" | ''[[श्री ४२० (1955 फ़िल्म)| श्री 420]]''
| "प्यार हुआ इकरार हुआ"
| rowspan="5" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="2" | शैलेंद्र
|
|-
| "रमैया वस्तावैया"
| [[मोहम्मद रफी]], [[मुकेश]]
|-
| "इचक दाना बीचक दाना"
| rowspan="3" | [[हसरत जयपुरी]]
| [[मुकेश]]
|-
| "ओ जानेवाले"
| rowspan="2" |
|-
| "शाम गयी रात आयी"
|-
! rowspan="10" | ''[[झनक झनक पायल बाजे]]''
| "झनक झनक पायल बाजे"
| rowspan="10" | वसंत देसाई
| rowspan="10" | हसरत जयपुरी
| [[हेमंत कुमार]]
|-
| "जो तुम तोड़ो पिया"
| rowspan="4" |
|-
| "सैयाँ जाओ"
|-
| "सुनो सुनो सुनो जी"
|-
| "कैसी ये मोहब्बत"
|-
| "मुरली मनोहर"
| rowspan="2" | मन्ना डे
|-
| "मेरे ए दिल बता"
|-
| "नैन सो नैन नाही मिलाओ"
| हेमंत कुमार
|-
| "राग मलिका"
| मन्ना डे
|-
| "रुत बसंत"
| rowspan="9" |
|-
! rowspan="8" | ''[[उड़न खटोला (फ़िल्म)|उड़न खटोला]]''
| "ना रो ए दिल"
| rowspan="8" | नौशाद
| rowspan="8" |
|-
| "हाल-ए-दिल मैं क्या कहूँ"
|-
| "घर आया मेहमान कोई"
|-
| "मेरा सलाम ले जा"
|-
| "हमारे दिल से न जाना
|-
| "मोरे सईयाँ जी उतरेंगे पार"
|-
| "डूबा तारा उम्मीदों"
|-
| "सितारों की मेहफिल"
|-
! rowspan="3" | ''[[बंदिश (1955 फ़िल्म)|बंदिश]]''
| "रात है सुहानी"
| rowspan="3" | हेमंत कुमार
| rowspan="3" |
| rowspan="3" |
|-
| "तुम्हारी याद में"
|-
| "झूमती जवानी है"
|}
===1956===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="5" | ''न्यू देल्ही''
| "कोई मेरे सपनों Mein आया"
| rowspan="5" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="5" | [[हसरत जयपुरी]], शैलेंद्र
| rowspan="5" |
|-
| "तुम संग प्रीत लगाई रसिया"
|-
| "जिंदगी बहार है"
|-
| "बारी बरसे खातन गायन"
|-
| "मुरली बैरन भाई"
|-
! rowspan="8" | ''[[चोरी चोरी (1956 फ़िल्म)|चोरी चोरी]]''
| रसिक बलमा
| rowspan="8" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="4" | [[हसरत जयपुरी]]
|
|-
| "उस पर साजन"
|
|-
| "आजा सनम मधुर चाँदनी में हम"
| rowspan="4" | [[मन्ना डे]]
|-
| "पंछी बनूँ उड़ती फिरूँ"
|-
| "जहाँ मैं जाती हूँ"
| rowspan="11" | शैलेंद्र
|-
| "यह रात भीगी भीगी"
|-
| "मनभावन के घर"
| [[आशा भोसले]]
|-
| "सवा लाख की लॉटरी"
| [[मोहम्मद रफी]]
|-
! rowspan="7" | ''[[पटरानी]]''
| "सात समुंदर पार"
| rowspan="13" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="4" |
|-
| "ओ बलम तुम बेदर्दी"
|-
| "चंद्रमा क्यों झूमे"
|-
| "दिल गया दर्द रहा सीने में"
|-
| "अरे कोई जाओ री पिया को बुलाओ री"
| मीना मंगेशकर, [[उषा मंगेशकर]]
|-
| "राजा प्यारे मत करो प्यार का मोल"
| [[उषा मंगेशकर]]
|-
| "न जाने तुम कौन मेरी आँखों में"
| rowspan="6" |
|-
! rowspan="6" | ''[[किस्मत का खेल]]''
| "अर्ज़ है आप से"
| rowspan="6" | शैलेंद्र, [[हसरत जयपुरी]]
|-
| "किस्मत का खेल है जनाबे आली"
|-
| "न बुरे न भले हम गरीब ग़म के पले"
|-
| "तु माने या न माने बालम अंजाने"
|-
| "ए ज़मीन ए आसमां इतना बता"
|-
| "कह दो जी कह दो"
| [[मन्ना डे]]
|-
! ''[[सुबह का तारा]]''
| "चमका चमका सुबह का तारा"
|
|
| [[तलत महमूद]]
|-
! rowspan="7" | ''[[देवता (1956 फ़िल्म)|देवता]]''
| "दो नैनों का बना"
| rowspan="7" | सी. रामचंद्र
| rowspan="7" | राजेंद्र कृषण
| rowspan="5" |
|-
| "कैसे आऊँ जमुना के तीर"
|-
| "फूलों के मेले"
|-
| "सुना है मेरे दिल का"
|-
| "ये चाँद का जो"
|-
| "किसी से प्यार है हमको"
| [[तलत महमूद]]
|-
| "ए चाँद कल जो आना उनको"
| rowspan="3" |
|-
! rowspan="2" | ''[[बंधन (1956 फ़िल्म)|बंधन]]''
| "वृंदावन की कुंज गली"
| rowspan="2" | हेमंत कुमार
| rowspan="2" | राजेंद्र कृष्णन
|-
| "मेरे देवता मुझको देना सहारा"
|-
|}
===1957===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="7" | ''[[कठपुतली (1957 फ़िल्म)|कठपुतली]]''
| "बक्कड़ बम बम"
| rowspan="7" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="7" | शैलेंद्र, [[हसरत जयपुरी]]
|
|-
| "बोल री काठ पुतली"
|
|-
| "बोल री काठ पुतली (दुखी)"
|
|-
| "मिनी मिनी चिचि"
| [[मुकेश]]
|-
| "हाय तू ही गया मोहे भूल रे"
| rowspan="6" |
|-
| "इतने बड़े जहाँ में ए दिल"
|-
| "सो जा रे सो जा"
|-
! rowspan="4" | ''[[आशा (1957 फ़िल्म)|आशा]]''
| "ज़रा रुक रुक के, मैं तो द्वार चली सखी"
| rowspan="4" | सी. रामचंद्र
| rowspan="4" | राजेंद्र कृष्णन
|-
| "चल चल रे कंहाई"
|-
| "तू न आया और होने लगी शाम रे"
|-
| "तुमको सलाम हैं"
| [[मोहम्मद रफी]]
|}
===1958===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="3" | ''[[सितारों से आगे]]''
| "मेहफिल में आये वो"
| rowspan="3" | एस. डी. बर्मन
| rowspan="3" | मजरूह सुल्तानपुरी
| rowspan="6" |
|-
| "पग ठुमक चलत"
|-
| "आ खिलाते है गुल"
|-
! rowspan="3" | ''[[साधना (1958 फ़िल्म)|साधना]]''
| "औरत ने जनम दिया मर्दों को"
| rowspan="3" | दत्ता नायक
| rowspan="3" | [[साहिर लुधियानवी]]
|-
| "कहोजी तुम क्या क्या खरीदोगे"
|-
| "ऐसे वैसे ठिकाने पे जाना बुरा है"
|-
! rowspan="5" | ''[[मधुमती]]''
| "दिल तड़प तड़प के कह रहा"
| rowspan="5" | [[सलिल चौधरी]]
| rowspan="5" | शैलेंद्र
| [[मुकेश]]
|-
| "आजा रे परदेसी"
|
|-
| "चढ़ गयो पापी बिछुआ"
| [[मन्ना डे]]
|-
| "घड़ी घड़ी मेरा दिल धड़के"
| rowspan="6" |
|-
| "ज़ुल्मी संग आँख लड़ि रे"
|-
! rowspan="2" | ''[[अमरदीप (1958 फ़िल्म)|अमरदीप]]''
| "मेरे मन के बावरा पंछी"
| rowspan="2" | सी. रामचंद्र
|
|-
| "दिल की दुनिया बसाके सांवरिया"
|
|-
! rowspan="4" | ''[[अदालत (1958 फ़िल्म)|अदालत]]''
| "उनको यह शिकायत है"
| rowspan="4" | [[मदन मोहन]]
| rowspan="4" | राजेंद्र कृष्णन
|-
| "जाना था हमसे दूर"
|-
| "जा जा रे जा साजना"
|
|-
| "यू हसरतो के दाग"
|
|}
===1959===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="5" | ''[[कन्हैया (1959 फ़िल्म)|कन्हैया]]''
| "ओ मोरे साँवरे सलोने पिया, तोसे मिलने को तरसे जिया"
| rowspan="5" | शंकर जैकिशन
|
|
|-
| "नि बलिए रुत है बहार की, कुछ मत पूछो कैसे बितिन"
|
| मुकेश
|-
| "ओ कँहाय्या आज आना ख्वाब में"
|
| rowspan="3" |
|-
| "सावन आवन कह गए दिल में समा के मिलने ना आये"
|
|-
| "कहाँ है कहाँ है कन्हैया, समझे न प्यार मेरा"
|
|}
===1960 के दशक===
===1960===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="5" | ''[[दिल अपना और प्रीत पराई]]''
| "अजीब दास्तां है ये"
| rowspan="5" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="4" | शैलेंद्र
| rowspan="14" |
|-
| "अंदाज़ मेरा मस्ताना"
|-
| "दिल अपना और प्रीत पराई"
|-
| "मेरा दिल अब तेरा हो साजन"
|-
| "शीशा-ए-दिल"
| [[हसरत जयपुरी]]
|-
! rowspan="4" | ''[[परख (1960 फ़िल्म)|परख]]''
| "ओ साजन, बरखा बहार आयी"
| rowspan="4" | [[सलिल चौधरी]]
| rowspan="4" | शैलेंद्र
|-
| "मिला है किसी का झुमका"
|-
| "ये बंसी क्यूँ गाये"
|-
| "मेरे मन के दिये"
|-
! rowspan="9" | ''[[मुग़ल-ए-आज़म]]''
| "मोहे पनघट पे"
| rowspan="9" | नौशाद
| rowspan="9" | शकील बदयूनि
|-
| "प्यार किया तो डरना क्या"
|-
| "मोहब्बत की झूठी"
|-
| "हमें काश तुमसे मोहब्बत"
|-
| "बेकस पे करम "
|-
| "तेरी मेहफिल में"
| शमशाद बेगम
|-
| "ये दिल की लगी"
| rowspan="3" |
|-
| "ए इश्क़ ये सब दुनियावाले"
|-
| "खु़दा निगेहबान"
|}
===1961===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="2" | ''[[नज़राना (1961 फ़िल्म)|नज़राना]]''
| "मेले हैं चिरागों की दिवाली"
| rowspan="2 | रवि
| rowspan="2" | राजेंद्र कृष्णन
|
|-
| "बिखरा के ज़ुल्फें चमन में"
| [[मुकेश]]
|-
! rowspan="4" | ''[[गंगा जमना]]''
| "ढूँडो ढूँडो रे साजना"
| rowspan="4" | [[नौशाद]]
| rowspan="4" | शकील बदयूनि
| rowspan="6" |
|-
| "दगाबाज़, तोरी बतियाँ न मानूँ रे"
|-
| "दो हँसों का जोड़ा बिछड़ गयो रे"
|-
| "झनन घूनगर बाजे"
|-
! rowspan="2" | ''[[हम दोनों (1961 फ़िल्म)|हम दोनों]]''
| "अल्लाह तेरो नाम"
| rowspan="2" | [[जयदेव]]
| rowspan="2" | [[साहिर लुधियानवी]]
|-
| "प्रभु तेरो नाम"
|}
===1962===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="5" | ''अनपढ़''
| "आप की नज़रों ने समझा"
| rowspan="5" | मदन मोहन कोहली
| rowspan="5" | राजा मेहदी अली खान
|
|-
| "है इसी में प्यार की आबरू"
|
|-
| "रंग बिरंगी राखी लेके आई"
|
|-
| "वो देखो, जला घर किसी का"
|
|-
| "जिया ले गयो जी मोरा"
|
|-
! rowspan="3" | ''[[असली नकली (1962 फ़िल्म)|असली-नकली]]''
| "तुझे जीवन की डोर से"
| rowspan="3" | शंकर जैकिशन
| rowspan="3" | हसरत जैपुरी
| मोहम्मद रफी
|-
| "लाख छुपाओ छुप न सकेगा"
| rowspan="2" |
|-
| "तेरा मेरा प्यार अमर"
|-
! rowspan="5" | ''[[प्रेम पत्र]]''
| "सावन की रातों में ऐसा"
| rowspan="5" | [[सलिल चौधरी]]
|
| rowspan="2" | [[तलत महमूद]]
|-
| "ये मेरे अंधेरे उजाले न होते"
| rowspan="2" |
|-
| "अब और न कुछ भी याद रहा"
|
|-
| "दो अखियाँ झुकी झुकी सी"
|
| [[मुकेश]]
|-
| "खुश हो रहे थे"
|
| rowspan="4" |
|-
! rowspan="4" | ''[[मन-मौजी]]''
| "मैं तो तुम संग नैन मिलाके"
| rowspan="4" | [[मदन मोहन]]
| rowspan="4" | राजेंद्र कृष्णन
|-
| "चंदा जा"
|-
| "आया है कहाँ से"
|-
| "एक था अब्दुल रहमान"
| [[किशोर कुमार]]
|}
===1963===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! ''[[परसमणि]]''
| "वो जब याद आये"
| [[लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल]]
|
| rowspan="4" | [[मोहम्मद रफी]]
|-
! ''[[ताज महल (1963 फ़िल्म)|ताज महल]]''
| "जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा"
| रोशन
|
|-
! rowspan="3" | ''[[तेरे घर के सामने]]''
| "देखो रूठा न करो"
| rowspan="3" | एस. डी. बर्मन
| rowspan="3" | हसरत जैपुरी
|-
| "तेरे घर के सामने"
|-
| ये तन्हाई है रे है
|
|-
! rowspan="6" | ''[[मेरे मेहबूब]]''
| "तेरे प्यार में दिलदार"
| rowspan="6" | [[नौशाद]]
| rowspan="6" | शकील बदयुनि
|
|-
| "अल्लाह बचाये"
|
|-
| "मेरे मेहबूब तुझे" (female)
|
|-
| "मेरे मेहबूब में क्या नही"
| rowspan="2" | आशा भोसले
|-
| "जानेमं एक नज़र देख ले"
|-
| "याद में तेरी"
|मोहम्मद रफी
|-
|rowspan='2' | '''[[दिल एक मंदिर]]'''
|"हम तेरे प्यार में सारा आलम"
| rowspan='2' | शंकर जैकीशन
| हसरत जैपुरी
|
|-
|"रुक जा रात"
|शैलेंद्र
|
|-
|}
===1964===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="2" | ''[[राजकुमार (1964 फ़िल्म)|राजकुमार]]''
| "आजा आयी बहार"
| rowspan="2" | शंकर जैकीशन
| rowspan="4" | शैलेंद्र
|
|-
| "नाच रे मन"
| [[आशा भोसले]]
|-
! rowspan="3" | ''[[संगम (1964 फ़िल्म)|संगम]]''
| "हर दिल जो प्यार करेगा"
|
| [[मुकेश]], [[महेंद्र कपूर]]
|-
| "ओ मेरे सनम"
|
| मुकेश
|-
| "मैं का करूँ राम मुझे बुढ्ढा मिलगया"
|
| हसरत जैपुरी
|
|-
! rowspan="4" | ''[[वो कौन थी (1964 फ़िल्म)|वो कौन थी?]]''
| "लग जा गले की फिर ये हसीं रात हो ना हो"
| rowspan="4" | [[मदन मोहन]]
| rowspan="4" | राजा मेहदी अली खान
| rowspan="3" |
|-
| "नैना बरसे रिमझिम रिमझिम"
|-
| "जो हमने दास्ताँ अपनी सुनाई"
|-
| "छोड़ कर तेरे प्यार का दामन"
| [[महेंद्र कपूर]]
|}
===1965===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="2" | ''[[आरज़ू (1965 फ़िल्म)|आरज़ू]]''
| "अजी रूठ कर अब कहाँ जाइयेगा"
| rowspan="2" | शंकर जैकीशन
| rowspan="2" | हसरत जैपुरी
| rowspan="3" |
|-
| "बेदर्दी बलमा तुझको"
|-
! ''[[भीगी रात (1965 फ़िल्म)|भीगी रात]]''
| "दिल जो न कह सका"
| रोशन
| [[मजरूह सुलतानपुरी]]
|-
! ''[[गुमनाम (1965 फ़िल्म) |गुमनाम]]''
| "गुमनाम है कोयी"
| शंकर सिंह रघुवंशी
| हसरत जैपुरी, मजरूह सुलतानपुरी
|
|-
! rowspan="4" | ''[[गाइड (1965 फ़िल्म)|गाइड]]''
| "आज फिर जीने की तमन्ना"
| rowspan="4" | [[सचिन देव बर्मन]]
| rowspan="4" | शैलेंद्र
| rowspan="3" |
|-
| "पिया तोसे नैना लागे रे"
|-
| "सईयाँ बेईमान"
|-
| "गाता रहे मेरा दिल"
| [[किशोर कुमार]]
|-
! rowspan="3" | ''[[जब जब फूल खिले]]''
| "मैं जो चली हिंदुस्तान से"
| rowspan="3" | [[कल्याणजी-आनंदजी]]
| rowspan="3" | [[आनंद बख्शी]]
| rowspan="3" |
|-
| "पर्देसियों से न अखियाँ मिलाना"
|-
| "ये समा समा है प्यार का"
|}
===1966===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="3" | ''[[मेरा साया]]''
| "तू जहाँ जहाँ चलेगा मेरा साया साथ होगा"
| rowspan="3" | [[मदन मोहन]]
| rowspan="3" | [[राजा मेहदी अली खान]]
| rowspan="7" |
|-
| "नैनों में बदरा छाए"
|-
| "नैनोनवाली ने हाय मेरा दिल लूटा"
|-
! rowspan="4" | ''[[लव इन टोक्यो]]''
| "कोई मतवाला आया"
| rowspan="4" | शंकर–जैकीशन
| शैलेंद्र
|-
| "सयौनारा सयौनारा"
| rowspan="3" | हसरत जैपुरी
|-
| "मुझे तुम मिल गए"
|-
| "ओ मेरे शाह-ए-खुबा"
|-
! rowspan="4" | ''[[प्यार किये जा]]''
| "किसने पुकारा मुझे, मैं आ गयी"
| rowspan="4" | लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल
| rowspan="4" | राजेंद्र कृष्णन
| rowspan="2" | महेंद्र कपूर
|-
| "फूल बन जाऊंगा शर्त ये है मगर"
|-
| "दिल हमने दे दिया, क्यों तुमने ले लिया"
| किशोर कुमार
|-
| "सुनले प्यार के दुश्मन दुनिया दिलवालों के अफसाने"
| आशा भोसले, किशोर कुमार, मन्ना डे
|}
===1967===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="9" | ''[[मिलन (1967 फ़िल्म)|मिलन]]''
| "सावन का महीना"
| rowspan="13" | [[लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल]]
| rowspan="9" | [[आनंद बख्शी]]
| rowspan="3" | [[मुकेश]]
|-
| "हम तुम युग युग से"
|-
| "बोल गोरी बोल तेरा कौन पिया"
|-
| "आज दिल पे कोई"
|
|-
| "हम तुम युग युग से - 2"
| rowspan="3" | मुकेश
|-
| "ये गीत मिलन के"
|-
| "बोल गोरी बोल तेरा कौन पिया - 2"
|-
| "आज दिल पे कोई ज़ोर चलता नहीं - 2"
|
|-
| "तोहे साँवरिया"
|
|-
! rowspan="4" | ''शागिर्द''
| "दिल विल प्यार व्यार"
| rowspan="4" | [[मजरूह सुलतानपुरी]]
|
|-
| "कहाँ कहाँ आन पड़ी"
|
|-
| "वो हैं ज़रा ख़फ़ा ख़फ़ा"
| [[मोहम्मद रफी]]
|-
| "रुक जा ए हवा"
| rowspan="5" |
|-
! rowspan="6" | ''[[रात और दिन]]''
| "न छेड़ो कल के अफसाने"
| rowspan="6" | शंकर–जैकीशन
| rowspan="5" | शैलेंद्र
|-
| "जीना हमको रास न आया"
|-
| "आवारा ए मेरे दिल" (खुश)
|-
| "आवारा ए मेरे दिल" (दुखी)
|-
| "दिल की गिरह खोल दो"
| [[मन्ना डे]]
|-
| "रात और दिन दिया जले"
| हसरत जैपुरी
|
|}
===1968===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="3" | [[सरस्वतीचन्द्र (फ़िल्म) | सरस्वतीचंद्र]]
| "फूल तुम्हें भेजा है खत में"
| rowspan="3" | कल्याणजी-आनंदजी
| rowspan="3" | इंदीवर
| मुकेश
|-
|चंदन सा बदन
|
|-
|मैं तो भूल चली
|
|}
===1969===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan='5' | ''[[इन्तकाम (1988 फ़िल्म) |इंतकाम]]''
| "हम तुम्हारे लिए"
| rowspan='8' | [[लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल]]
| rowspan='5' | राजिंदर कृष्ण
| मोहम्मद रफ़ी
|-
| "कैसे रहूँ चुप"
|
|-
| "गीत तेरे साज़ का"
|
|-
| "ऐसा कोई महफ़िल सोयी"
|
|-
| "आ जाने जाँ"
|
|-
! rowspan='3' | ''[[दो रास्ते]]''
| "बिंदिया चमकेगी"
| rowspan='3' | आनंद बख्शी
|
|-
| "चुप गए सारे नज़ारे (दिल ने दिल को पुकारा)"
| मोहम्मद रफ़ी
|-
| "अपनी अपनी बीवी पे"
|
|-
! rowspan='3' | ''[[वारिस]]''
| "दिल की लगी को छुपाऊं कैसे"
| rowspan='3' | आर डी बर्मन
| rowspan='3' | राजेंद्र कृष्ण
|
|-
| "लहरा के आया है झोंका बहार का"
| rowspan='2' | मोहम्मद रफ़ी
|-
| "कभी कभी ऐसा भी होता है"
|}
===1970 के दशक===
===1970===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="2" | [[जॉनी मेरा नाम (1970 फ़िल्म)|जॉनी मेरा नाम]]
| "मोसे मोरा श्याम रूठा"
| rowspan="2" | कल्याणजी-आनंदजी
| rowspan="2" | [[इन्दीवर]]
| rowspan="2" |
|-
| "बाबुल प्यारे"
|-
|}
===1971===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan='3' | ''[[हाथी मेरे साथी (1971 फ़िल्म)|हाथी मेरे साथी]]''
| "धक धक कैसे चलती है गाड़ी"
| rowspan='3' | [[लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल]]
| rowspan='3' | [[आनंद बख्शी]]
| rowspan='3' | [[किशोर कुमार]]
|-
| "सुन जा आ ठंडी हवा"
|-
| "दिलबर जानी चली हवा मस्तानी"
|-
! rowspan='6' | ''[[ज्वाला (1971 फ़िल्म)|ज्वाला]]''
| "जागी रात भरी याद में बलम"
| rowspan='6' | शंकर-जयकिशन
| rowspan='6' |
|
|-
| "आहा ले गई ओ जिया ले गई, छवि सुंदर सलोने गोपाल की"
| आशा भोसले
|-
| "देखो जी आँखों में देखो, आँखें हमारे सपने तुम्हारे"
|
|-
| "होल होले एक भी ना घुंघरू बोले"
| सुधा मल्होत्रा, गीता दत्त
|-
| "आजा रे आजा मेरे साजना आ, सपनों की पालकी"
| मन्ना डे
|-
| "मेरा ज्वाला नाम जिया जलाने का काम"
|
|-
! rowspan='3' | ''[[मेमसाब (1971 फ़िल्म)|मेमसाब]]''
| "सुनो सुनो एक बात काहू"
| rowspan='3' | सोनिक ओम
| rowspan='3' | वर्मा मलिक
| मोहम्मद रफ़ी
|-
| "मुझे ढूंढ ले आ कर सैंया"
|
|-
| "जब से तेरे मेरे मन में"
|
|-
! ''[[शर्मीली]]''
| "मेघा छाये आधी रात"
| एस. डी. बर्मन
|
|
|}
===1972===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan='3' | ''[[शहजादा]]''
| "परियों की नगरी से आया"
| rowspan='3' | राहुल देव बर्मन
| rowspan='3' | राजेंद्र कृष्ण
|
|-
| "रिमझिम रिमझिम देखो बरस रही है"
| rowspan='2' | किशोर कुमार
|-
| "ना जाइयो, ना जाइयो, छोड़ के ना"
|-
! rowspan='4' | ''हरि दर्शन''
| "अपना हरि है हजार हाथ वाला"
| rowspan='4' | [[कल्याणजी-आनंदजी]]
|
|
|-
| "जय जय नारायण"
|
| महेंद्र कपूर
|-
| "मरने वाला है भगवान"
|
|
|-
| "प्रभु के भरोसे"
|
|
|-
! ''[[परिचय (1972 फ़िल्म)|परिचय]]''<ref name="1973award">{{cite web |url=http://iffi.nic.in/Dff2011/Frm20thNFAAward.aspx |title=20th National Awards For Films (1973) |publisher=Directorate of Film Festivals |format=PDF |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20131105220349/http://iffi.nic.in/Dff2011/Frm20thNFAAward.aspx |archive-date=5 November 2013}}</ref>
| "बीती ना बिताई रैना"
| राहुल देव बर्मन
|
|
|-
! rowspan='6' | ''[[पाकीज़ा]]''
| "चलते चलते"
| rowspan='6' | गुलाम मोहम्मद
| कैफ़ी आज़मी
| rowspan='5' |
|-
| "मौसम है आशिकाना"
| [[कमल अमरोही]]
|-
| "इन्ही लोगों ने"
| [[मजरूह सुलतानपुरी]]
|-
| "ठाड़े रहियो"
| [[कमल अमरोही]], [[मजरूह सुलतानपुरी]]
|-
| "तीर-ए-नज़र"
| rowspan='2' | कैफ भोपाली
|-
| "चलो दिलदार चलो"
| [[मोहम्मद रफी]]
|-
! rowspan='2' | ''धड़कन''
| "मैं आया तेरे द्वारे"
| rowspan='2' | रवि
|
|
|-
| "तो जा मेरे लाल सो जा मधुर सुरों में निंदिया गाये"
|
|
|-
! rowspan='5' | ''[[यह गुलिस्ताँ हमारा (1972 फ़िल्म) |यह गुलिस्ताँ हमारा]]''
| "रैना सोयी सोयी"
| rowspan='5' | एस. डी. बर्मन
|
|
|-
| "क्या ये जिंदगी है"
|
|
|-
| "ओ तुशिमा री तुशिमा"
|
|
|-
| "मेरा नाम आओ, मेरे पास आओ"
|
| डैनी डेन्जोंगपा
|-
| "गोरी गोरी गाँव की गोरी रे, किस लिए बन रही डोरी रे"
|
| rowspan='2' | किशोर कुमार
|-
! rowspan='2' | ''[[सीता और गीता]]''
| "कोई लड़की मुझे कल रात"
| rowspan='2' | आर. डी. बर्मन
| rowspan='2' | आनंद बख्शी
|-
| "हां जी हां मैंने शराब"
| rowspan='6' | एकल
|-
! rowspan='5' | ''[[राजा जानी (1972 फ़िल्म)|राजा जानी]]''
| "आ आजा आजा"
| rowspan='5' | लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
| rowspan='5' |
|-
| "ए बी सी डी छोड़ो"
|-
| "दुनिया का मेला"
|-
| "कितना मजा आ रहा है"
|-
| "मुबारक हो तुझे ऐ दिल"
|}
===1973===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan='4' | ''[[जुगनू (1973 फ़िल्म)|जुगनू]]''
| "जाने क्या पिलाये तूने"
| rowspan='4' | [[एस। डी. बर्मन]]
|
|
|-
| "जब बाघों में जुगनू"
|
|
|-
| "गिर गया झुमका"
|
| किशोर कुमार
|-
| "मेरी ये पायलिया गीत तेरे गये"
|
|
|-
! rowspan='2' | ''[[बंधे हाथ (1973 फ़िल्म) |बंधे हाथ]]''
| "ये कौन आज आया"
| rowspan='2' | राहुल देव बर्मन
|
|
|-
| "तूने छीन लिया"
|
|
|-
! rowspan='5' | ''[[दाग (1973 फ़िल्म)|दाग]]''
| "अब चाहे माँ रूठे या बाबा"
| rowspan='5' | [[लक्ष्मीकांत प्यारेलाल]]
| rowspan='5' | [[साहिर लुधियानवी]]
| rowspan='2' | किशोर कुमार
|-
| "हम और तुम तुम और हम"
|-
| "जब भी जी चाहे"
| एकल
|-
| "नी मैं यार मनाना नी"
| मीनू पुरूषोत्तम
|-
| "हवा चले कैसे"
| रोस्पैन='4' | एकल
|-
! ''[[लोफर (1973 फ़िल्म)|लोफर]]''
| "मैं तेरे इश्क में"
| आनंद बख्शी
|
|-
! rowspan='2' | ''[[फागुन (1973 फ़िल्म)|फागुन]]''
| "पिया संग खेलो होरी फागुन आयो रे"
| rowspan='2' | एस. डी. बर्मन
| rowspan='2' | मजरूह सुल्तानपुरी
|-
| "संध्या जो आए मन उड़ जाए जाने रे कहाँ"
|-
! ''बरखा बहार''
| "नज़र का ये पैगाम दिया जो आपने मेरे नाम"
| लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
|
| मोहम्मद रफ़ी
|-
| rowspan='2' |'''[[अनामिका (1973 फ़िल्म)|अनामिका]]'''
| "बाहों में चले आओ"
| rowspan='2' | आर. डी. बर्मन
| rowspan='2' | मजरूह सुल्तानपुरी
|
|-
|"बाहों में चले आओ (संवादों के साथ)"
|[[जया बच्चन]], [[संजीव कुमार]]
|-
| '''[[यादों की बारात]]'''
| "यादों की बारात निकली है आज दिल के द्वारे (महिला)"
| आर. डी. बर्मन
| मजरूह सुल्तानपुरी
| [[पद्मिनी कोल्हापुरे]], [[सुषमा श्रेष्ठ]]
|-
|}
===1974===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
! scope="col" style="width:18%;" | नोट्स
|-
! ''[[कोरा कागज़ (1974 फ़िल्म) |कोरा कागज़]]''
| "रूठे रूठे पिया"
| सलिल चौधरी
| वयलार
|
|सर्वश्रेष्ठ गायक के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार<ref name="1975award">{{cite web |url=http://iffi.nic.in/Dff2011/Frm22ndNFAAward.aspx |title=22nd National Awards For Films (1975) |publisher=Directorate of Film Festivals |format=PDF |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20140505171751/http://iffi.nic.in/Dff2011/Frm22ndNFAAward.aspx |archive-date=5 May 2014}}</ref>
|-
! rowspan='5' | ''[[आप की कसम]]''
| "जय जय शिव शंकर"
| rowspan='5' | आर. डी. बर्मन
| rowspan='5' | [[आनंद बख्शी]]
| rowspan='4' | [[किशोर कुमार]]
| बिनाका गीतमाला वार्षिक सूची 1974 में #2 पर
|-
| "करवातें बदलते रहें"
| बिनाका गीतमाला वार्षिक सूची 1974 में #17 पर
|-
| "पास नहीं आना"
|
|-
| "सुनो कहो कहा सुना"
|
|-
| "चोरी चोरी चुपके चुपके"
|
|
|-
! ''[[हमशक्ल (1974 फ़िल्म)|हमशकल]]''
| "काहे को बुलाया मुझे बलमा प्यार में नाम से"
| आर. डी. बर्मन
| आनंद बख्शी
| मोहम्मद रवि
|
|-
! ''आरोप''
| "नैनों में दर्पण है"
| भूपेन हजारिका
| माया गोविंद
| किशोर कुमार
|
|}
===1975===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan='2' | ''[[जूली (1975 फ़िल्म)|जूली]]''
| "ये रातें नई पुरानी"
| rowspan='2' | राजेश रोशन
| rowspan='2' | [[आनंद बख्शी]]
|
|-
| "भूल गया सब कुछ"
| [[किशोर कुमार]]
|-
! rowspan='2' | ''[[ज़ख्मी (1975 फ़िल्म)| ज़ख्मी]]''
| "आओ तुम्हें चाँद पे जाये"
| rowspan='2' | [[बप्पी लाहिड़ी]]
|
| rowspan='3' | एकल
|-
| "अभी अभी थी दुश्मनी"
|
|-
! ''[[वरदान]]''
| "देखो देखो दिल का तौफा"
| कल्याणजी-आनंदजी
|
|-
! rowspan='2' | ''[[सुनहरा संसार (1975 फ़िल्म)|सुनेहरा संसार]]''
| "भीगी भीगी हवा है, काली काली घटा है"
| rowspan='2' | नौशाद
| rowspan='4' | आनंद बख्शी
| मुकेश
|-
| "मेरी जवानी मेरी दुश्मन बनी रे"
| [[सुषमा श्रेष्ठ]]
|-
! rowspan='2' | ''[[वारंट (फ़िल्म)|वारंट]]''
| "लाडी नजरिया लाडी"
|rowspan='2' | आर. डी. बर्मन
| किशोर कुमार
|-
| "मैं तुमसे मोहब्बत"
| एकल
|-
! ''उमर क़ैद''
| "याद रहेगा प्यार का"
| सोनिक-ओमी
|
| मुकेश
|-
! rowspan='4' | ''[[प्रेम कहानी (1975 फ़िल्म)|प्रेम कहानी]]''
| "चल दरिया में"
| rowspan='7' | लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
| rowspan='4' |
| rowspan='2' | किशोर कुमार
|-
| "प्रेम कहानी में"
|-
| "फूल आहिस्ता फेंको"
| मुकेश
|-
| "नदिया से बिछड़ा"
| एकल
|-
! rowspan='3' | ''[[चैताली (1975 फ़िल्म)|चैताली]]''
| "धरती अम्बर निंद से जागे"
| rowspan='3' |
| मन्ना डे
|-
| "महबूबा नाम है मेरा"
| rowspan='5' | एकल
|-
| "सा नि धा पा मा ग नि धा"
|-
! rowspan='3' | ''वंदना''
| "आपकी इनायतें, आपका करम"
| rowspan='3' | रवि
| rowspan='3' | रवि
|-
| "ओ जग के पालनहारे"
|-
| "रुत है जवान"
|-
! rowspan='3' | ''[[धरम करम (1975 फ़िल्म)|धरम करम]]''
| "तू कहाँ गयी थी"
| rowspan='3' | आर. डी. बर्मन
| rowspan='3' | मजरूह सुल्तानपुरी
| किशोर कुमार
|-
| "नाचन नहीं आवत"
| एकल
|-
| "मुख पर जो छिड़का पानी"
| किशोर कुमार
|-
! rowspan='6' | ''[[सन्यासी (1975 फ़िल्म)|संन्यासी]]''
| "चल सन्यासी मंदिर में"
| rowspan='6' | [[शंकर जयकिशन|शंकर-जयकिशन]]
| विश्वेश्वर शर्मा
| rowspan='3' | मुकेश
|-
| "सुन बाल ब्रम्हचारी"
| वर्मा मलिक
|-
| "बाली उमरिया भजन करूं कैसे"
| विटालभाई पटेल
|-
| "शाम-ए-फुरकत का ढल गया साया"
| हसरत जयपुरी
| [[प्रेमनाथ]]
|-
| "जैसा मेरा रूप रंगीला"
| विश्वेश्वर शर्मा
| एकल
|-
| "ये है गीता का ज्ञान"
| एम. जी हशमत
| मुकेश
|-
! ''[[धर्मात्मा]]''
| "मेरी गलियों से लोगो की यारी"
| कल्याणजी आनंदजी
| इंदीवर
| महेंद्र कपूर
|-
! rowspan='3' | ''[[चुपके चुपके]]''
| "अब के सजन सावन में"
| rowspan='3' | एस. डी. बर्मन
| rowspan='6' | आनंद बख्शी
|
|-
| "बागानों में कैसे ये फूल खिलते हैं"
| मुकेश
|-
| "चुपके-चुपके चल रे पुरवइया"
| rowspan='3' | एकल
|-
! rowspan='3' | ''[[प्रतिज्ञा (1975 फ़िल्म)|प्रतिज्ञा]]''
| "मैं जंगल की मोरनी"
| rowspan='8' | लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
|-
| "परदेसी आया देस में"
|-
| "उठ निंद से मिर्जिया जाग जा"
| मोहम्मद रफ़ी
|-
! rowspan='2' | ''[[अपने रंग हज़ार (1975 फ़िल्म)|अपने रंग हज़ार]]''
| "गंगा में डूबा ना जमुना में डूबा"
| rowspan='2' |
| rowspan='3' | एकल
|-
| "इस क़दर आप हमको जो तड़पाएंगे"
|-
! rowspan='2' | ''जिंदा दिल''
| "नहीं नहीं जाना नहीं अभी नहीं"
| rowspan='3' |
|-
| "शाम सुहानी आई खुसिया बनके पहली बार"
| महेंद्र कपूर, शैलेन्द्र सिंह
|-
! ''[[सेवक (1975 फ़िल्म)|सेवक]]''
| "मेरा नाम बड़ा बदनाम"
| एकल
|}
===1976===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! ''[[नागिन (1976 फ़िल्म)|नागिन]]''
| "तेरे संग प्यार में"
| [[लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल]]
| [[वर्मा मलिक]]
|
|-
! ''[[अदालत (1976 फ़िल्म)|अदालत]]''
| "तुमसे दूर रहके"
| कल्याणजी आनंदजी
| गुलशन बावरा
| मोहम्मद रफ़ी
|-
! rowspan='5' | ''[[कभी कभी]]''
| "कभी कभी मेरे दिल में" (II)
| rowspan='5' | खय्याम
| rowspan='10' | साहिर लुधियानवी
| मुकेश
|-
| "तेरा फूलों जैसा रंग"
| किशोर कुमार
|-
| "मेरे घर आये एक नन्ही परी"
|
|-
| "सुर्ख जोड़े की ये जगमगाहत"
| पामेला चोपड़ा
|-
| "तेरे चेहरे से"
| किशोर कुमार
|-
! rowspan='5' | ''[[लैला मज़नू (1976 फ़िल्म)|लैला मजनू]]''
| "हुस्न हाज़िर है"
| rowspan='5' | मदन मोहन, जयदेव
|
|-
| "क्या रेशमी पाज़ेब की झंकार"
| rowspan='3' | मोहम्मद रफ़ी
|-
| "अब अगर हम से खुदाई भी"
|-
| "लिख कर तेरा नाम ज़मीन पर"
|-
| "कोई पत्थर से ना मारे मेरे दीवाने को"
| rowspan='4' | एकल
|-
! ''कोई जीता कोई हारा''
| "ओ बाबा शादी तुम ना करना"
| लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
| रोस्पैन='6' | आनंद बख्शी
|-
! rowspan='3' | ''[[जीवन ज्योति (1976 फिल्म)|जीवन ज्योति]]''
| "दुनिया रंग बदलती जाये"
| rowspan='3' | सलिल चौधरी
|-
| "जिस द्वारे पर घर की बहू"
|-
| "रांझे की आँखों से देखो हीर को, मुझको छेड़ो"
| किशोर कुमार
|-
! rowspan='3' | ''[[लगाम (1976 फ़िल्म)|लगाम]]''
| "आज पवन की चल चुरा के"
| rowspan='3' | कल्याणजी आनंदजी
| rowspan='3' |
|-
| "जैसे मोती सीप से बिछड़े"
|-
| "आधी आधी रात मेरी पायलिया भजे"
| मोहम्मद रफ़ी
|-
! rowspan='2' | ''महा चोर''
| "मैं तुमसे प्यार करती हूँ"
| rowspan='2' | आर. डी. बर्मन
| rowspan='2' | आनंद बख्शी
| किशोर कुमार
|-
| "तू क्या मुझे बर्बाद करेगा"
| एकल
|-
! rowspan='2' | ''[[नाच उठे संसार (1976 फ़िल्म)|नाच उठे संसार]]''
| "तेरे संग जीना, तेरे संग मरना"
| rowspan='2' | लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
| rowspan='2' |
| rowspan='2' | मोहम्मद रफ़ी
|-
| "नाच उठे संसार"
|-
! rowspan='3' | ''[[नेहले पे देहला (1976 फ़िल्म)|नहले पे दहला]]''
| "सावन का महीना आ गया"
| rowspan='3' | आर. डी. बर्मन
| rowspan='3' | आनंद बख्शी
| किशोर कुमार
|-
| "लोगों की ज़ुबान पर अपना नाम"
| मन्ना डे, किशोर कुमार
|-
| "माशूक अपने शबाब में"
|
|-
! ''[[रंगीला रतन (1976 फ़िल्म)|रंगीला रतन]]''
| "तुम्हीं हो तुम्हीं हो जाने-जान"
| कल्याणजी आनंदजी
| गुलशन बावरा
| किशोर कुमार
|-
! rowspan='3' | ''[[उधार का सिंदूर (1976 फ़िल्म)|उधार का सिन्दूर ]]''
| "बुद्ध प्यार मंगदा"
| rowspan='3' | राजेश रोशन
| rowspan='3' |
| rowspan='3' | एकल
|-
| "मां अब तो मैं भी"
|-
| "मां कभी मैं भी पिया घर"
|}
===1977===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
==संदर्भ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:भारतीय गायकों के गाये गीतों की सूचियाँ]]
{{भारत रत्न सम्मानित}}
{{पद्म भूषण धारक 1960–1969}}
{{दादासाहेब फाल्के पुरस्कार}}
{{फ़िल्मफ़ेयर लाइफ़ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार}}
{{फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका पुरस्कार}}
[[श्रेणी:1929 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:पद्म भूषण]]
[[श्रेणी:भारतीय हिन्दू]]
[[श्रेणी:बॉलीवुड]]
[[श्रेणी:गायिका]]
[[श्रेणी:भारतीय फिल्म पार्श्वगायक]]
[[श्रेणी:विकिपरियोजना संगीत]]
[[श्रेणी:मध्य प्रदेश के लोग]]
[[श्रेणी:दादासाहेब फाल्के पुरस्कार विजेता]]
[[श्रेणी:भारत रत्न सम्मान प्राप्तकर्ता]]
[[श्रेणी:इंदौर जिले के लोग]]
[[श्रेणी:भारतीय महिला गायक]]
[[श्रेणी:पद्म विभूषण धारक]]
[[श्रेणी:भारतीय शास्त्रीय गायिका]]
[[श्रेणी:२०२२ में निधन]]
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2026-10-18T05:51:09Z
Itsharshitt28
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wikitext
text/x-wiki
{{मुख्य|लता मंगेशकर}}
[[File:Lata Mangeshkar black-and-white.jpg|thumb|right|1953 में मंगेशकर]]
'''लता मंगेशकर''' (जन्म: '''हेमा मंगेशकर'''; 28 सितंबर 1929 - मृत्यु: 6 फरवरी 2022) एक दिग्गज भारतीय [[पार्श्व गायिका]] , [[संगीत निर्माता]] और [[संगीत निर्देशक]] थीं, जिन्होंने हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में संगीत रचा। उनके कई पुराने गाने विभिन्न नई फिल्मों (बॉलीवुड या भारतीय फिल्में) में शामिल किए गए हैं और उन्हें श्रेय भी दिया गया है। लेकिन ऐसे गाने, जब तक कि उन्हें दोबारा रिकॉर्ड न किया गया हो, नीचे सूचीबद्ध नहीं किए गए हैं।
'''नोट:''' इस लेख में मंगेशकर द्वारा गाए गए सभी गाने शामिल नहीं हैं।
==हिंदी गाने==
'''1940 के दशक'''
'''1945'''
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="2" | ''बड़ी माँ''
| "जननी जनमभूमि... तुम माँ हो बड़ी माँ"
| rowspan="2" | के. दत्त
|
| मीनाक्षी
|-
| "माता तेरे चरणों में"
|
| इशवरलाल, कोरस<ref name="auto">{{cite web |url=http://cineplot.com/music/lata-mangeshkars-song-list-1945-1948/ |title=Lata Mangeshkar's Song List (1945 – 1948) |access-date=2014-11-05 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141106003940/http://cineplot.com/music/lata-mangeshkars-song-list-1945-1948/ |archive-date=2014-11-06 |url-status=dead}}</ref>
|}
===1946===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! ''जीवन यात्रा''
| "चिड़िया बोले चूं चूं मैना बोले हूँ"
| वसंत देसाई
|
|
|-
! ''सोना चाँदनी''
| "प्यारे बापू की"
| तुफैल फारूक़ी
|
|
|-
! rowspan="3" | ''सुभद्रा''
| "मैं खिली खिली फुलवारी"
| rowspan="3" | वसंत देसाई
|
| rowspan="3" |
|-
| "पिया आयेगा गोरी सुध न बिसार"
|
|-
| "सांवरिया ओ बसुरिया ओ बजाई गयो रे"
|
|-
! rowspan="3" | ''आप की सेवा में''
| "अब कौन सुनेगा मेरे मन की बात"
| rowspan="3" | दत्ता दावजेकर
| rowspan="3" |
| rowspan="3" |
|-
| "एक नये रंग में दूजे उमंग में"
|-
| "चलो हो गयी तैयार"
|}
===1947===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! ''[[शादी से पहले]]''
| "पा लगूं कर जोड़ा जोड़ी होरी श्याम मोसे ना"
| पढंकर और करणार्ड
|
| [[मोहम्मद रफी]]
|-
! ''शेहनाई''
| "जवानी की रेल चली"
| सी. रामचंद्र
|
| [[गीता दत्त]], सी. रामचंद्र
|}
===1948===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! ''अंधों का सहारा''
| "मैं तो नाचो छमा छम नाच रे"
| एस. पारसेकर
|
|
|-
! rowspan='10' | ''अनोखा प्यार''
| "ऐ दिल मेरी वफ़ा में"
| rowspan='10' | अनिल विश्वास
| rowspan='10' |
| इरा नागरथ
|-
| "ऐ दिल मेरी वफ़ा"
| rowspan='8' |
|-
| "एक दिल का लगना"
|-
| "भोला भला री मेरा"
|-
| "घड़ी घड़ी पूछो ना"
|-
| "जीवन सपना टूट गया"
|-
| "मेरे लिए वो ग़म ए इंतज़ार"
|-
| "मेरे फूलों में छुपी है"
|-
| "याद रखना चाँद"
|-
| "याद रखना चाँद"
| [[मुकेश]]
|-
! rowspan='5' | ''आशा''
| "सजना रे तोरी कौन डगर"
| rowspan='5' | खेमचंद प्रकाश
|
| rowspan='9' |
|-
| "चेत चेत कर चल मधुर नर"
|
|-
| "दूर जाए रे राह मेरी आज तेरी राह से"
|
|-
| "एक मूरत मनोहर मेरी अंखियों को तरसे"
|
|-
| "कित जाए बसे हे मुरारी तोहे ढूंढत राधा"
|
|-
! ''बिहारी''
| "सब से कि डरफिशानी फूलों का सामियाना"
| एन. भट्टाचार्य
|
|-
! rowspan='3' | ''चाँद सितारे''
| "ऐ दुनिया की मालिक मुझे तुझसे मिला है"
| rowspan='3' | प्रेमनाथ
|
|-
| "जब दिल में तेरे दर्द"
|
|-
| "मेरी नाव चले धीरे-धीरे"
|
|-
! ''चुनरिया''
| "अंख मेरी लड़ गई"
| हंसराज बहल
|
| इंदर गोयल
|-
! ''दीदी''
| "तेरे नैनों में निंदिया निंदिया में सपने"
| मुकुंद मसूरेकर
|
| rowspan='3' |
|-
! ''दुखियारी''
| "अब किसको सुनाऊं मैं कथा कृष्णा"
| ज्ञान दत्त
|
|-
! rowspan='5' | ''गजरे''
| "बरस बरस बदली"
| rowspan='5' | अनिल विश्वास
|
|-
| "चली दुल्हन बारातियों के"
|
| इरा नागरथ
|-
| "घर यहाँ बसाने आये थे"
|
| rowspan='5' |
|-
| "कब तक कटेगी जिंदगी किनारे किनारे"
|
|-
| "प्रीतम तेरा मेरा प्यार"
|
|-
! rowspan='3' | ''हीर रांझा''
| "कैसे काटू ये काली रातें आ बलम"
| rowspan='3' | अजीज खान
|
|-
| "काहे को ब्याही बिदेस"
|
|-
| "खामोश फसाना है"
|
| जी.एम. दुर्रानी
|-
! rowspan='2' | ''खिड़की''
| "खुशियाँ मनायें"
| rowspan='2' | सी. रामचन्द्र
|
| मोहनतारा, शमशाद बेगम
|-
| "तेरे बिना सूना"
|
| गीता दत्त, सी. रामचन्द्र
|-
! rowspan='5' | ''मजबूर''
| "अब कोई जी के क्या करे"
| rowspan='5' | गुलाम हैदर
|
|
|-
| "अंग्रेजी छोरा चला गया"
|
| मुकेश
|-
| "दिल मेरा तोडा"
|
|
|-
| "गोरी सखियों से"
|
| rowspan='2' | गीता दत्त
|-
| "हर शे पे जवानी है"
|
|-
! ''मंदिर''
| "लो वो आई निंदिया चुप चुप धीरे"
| वसंत देसाई
|
| rowspan='2' |
|-
! ''मेरे लाल''
| "हमारा घर बन जाए महलों से प्यारा सुंदर"
| पुरूषोत्तम
|
|-
! rowspan='2' | ''मेरी कहानी''
| "दिलवालों दिलों का मेल दिलों का खेल"
| rowsapn='2' | के.दत्ता
|
|
|-
| "नहिं नहिं बून्दनियाँ जिया लहराये"
|
|
|-
! ''[[नदिया के पार (1948 फ़िल्म)|नदिया के पार]]''
| "हो गोरी हो चोरी कहाँ चली हो"
| सी. रामचन्द्र
|
| सी. रामचन्द्र
|-
! ''पद्मिनी''
| "बेदर्द तेरे दर्द को सीने से लगा के"
| गुलाम हैदर
|
|
|-
! ''[[शहीद (1948 फ़िल्म)|शहीद]]''
| "पिंजरे मेन बुलबुल बोले (शामिल नहीं)"
| गुलाम हैदर
|
| मैडम मोहन
|-
! rowspan='6' | ''[[ज़िद्दी (1948 फ़िल्म)|ज़िद्दी]]''
| "अब कौन सहारा है जब तेरा सहारा"
| rowspan='6' | खेमचंद प्रकाश
| rowspan='6' |
| rowspan='5' |
|-
| "चंदा रे जा रे जा पिया से संदेसा मोरा"
|-
| "जादू कर गई किसी के नैना"
|-
| "रूठ गए मोरे श्याम सखी रे"
|-
| "तुझे ओ बेवफा हम जिंदगी का आसरा"
|-
| "ये कौन आया रे करके ये"
| [[किशोर कुमार]] <ref name='auto'/>
|}
===1949===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan='7' | ''[[आइये]]''
| "इतनी बड़ी दुनिया में"
| rowspan='7' | शौकत हैदरी
|
| rowspan='3' |
|-
| "किस लिए आँखों में आंसू"
|
|-
| "आ भी जा जानेवाले"
|
|-
| "आइए आओ चले वहां"
|
| मुबारक बेगम
|-
| "दुनिया बदल गई"
|
| rowspan='2' | जी.एम. दुर्रानी
|-
| "कर सकेगा ना जुदा"
|
|-
| "जिया डोले किसी ख़यालिन में"
|
| शौकत हैदरी
|-
! rowspan='7' | ''[[अंदाज़ (1949 फ़िल्म)|अंदाज़]]''
| "मेरी लाडली रे बनी है"
| rowspan='7' | नौशाद
| rowspan='7' | [[मजरूह सुलतानपुरी]]
| rowspan='5' |
|-
| "कोई मेरे दिल में"
|-
| "उठाये जा उनके सितम"
|-
| "तोड़ दिया दिल मेरा"
|-
| "डरना मोहब्बत"
|-
| "यूं तो अपस मेन"
| rowspan='2' | मोहम्मद रफ़ी
|-
| "सुनलो दिल का अफसाना" (शामिल नहीं)
|-
! rowspan='2' | ''[[बंगला भेदी]]''
| "हौंसले दिल के मिट्टी प्यार के अरमान गया"
| rowspan='2' | पी. रमाकांत
|
| rowspan='10' |
|-
| "मन में तेरी याद बसी आँखों में है प्यार"
|
|-
! rowspan='10' | ''[[बरसात (1949 फ़िल्म)|बरसात]]''
| "बरसात में हमसे मिले" (शीर्षक गीत)
| rowspan='10' | [[शंकर-जयकिशन]]
|
|-
| "हवा में उड़ता जाए मेरा लाल दुपट्टा"
|
|-
| "जिया बेकरार है छायी बहार है"
|
|-
| "मुझे किसी से प्यार हो गया"
|
|-
| "मेरी आँखों में बस गया कोई"
|
|-
| "अब मेरा कौन सहारा"
|
|-
| "बिछड़े हुए परदेसी"
|
|-
| "हंस मुख फूलों ये मत भूलो"
|
|-
| "पतली कमर है"
|
| rowspan='2' | मुकेश
|-
| "छोड़ गए बलम"
|
|-
! rowspan='2' | ''[[बालम (1949 फ़िल्म)|बालम]]''
| "परदेसी मुसाफिर कैसे करता"
| rowspan='2' | हुस्नलाल भगतराम
| rowspan='2' | क़मर जलालाबादी
| rowspan='2' | सुरैया
|-
| "दुनिया वालो"
|-
! rowspan='6' | ''[[बाज़ार (1949 फ़िल्म)|बाज़ार]]''
| "साजन की गलियाँ छोड़ चले"
| rowspan='6' | श्याम सुंदर
|
| rowspan='3' |
|-
| "बसलो अपनी निगाहों में प्यार"
|
|-
| "ऐ दिल उनको याद ना करना"
|
|-
| "जरा सुनलो हम अपना प्यार"
|
| राजकुमारी
|-
| "ऐ मोहब्बत उनसे मिलने"
|
| मोहम्मद रफ़ी
|-
| "अपनी नसर से दूर हम"
|
| मोहम्मद रफ़ी
|-
! rowspan='3' | ''[[बड़ी बहन]]''
| "चले जाना नहीं नैन मिलाके"
| rowspan='9' | हुस्नलाल भगतराम
|
|
|-
| "जो दिल में घुसी बन आये"
|
|
|-
| "चुप चुप खड़े"
| प्रेमलता
|
|-
! rowspan='4' | ''बांसुरिया''
| "दिल तोड़ के जानेवाले"
| rowspan='6' |
| rowspan='6' |
|-
| "जो करके गये बरबाद हमन"
|-
| "ये दुनिया कहती है कोई फरियाद ना करे"
|-
| "चाहे चोरी चोरी आओ चाहे चुप चुप"
|-
! rowspan='2' | ''[[भोली]]''
| "दिल तोड़ने वाले क्या तूने किया है बर्बाद"
|-
| "इतना भी बेशुमार को न आसमां सताए"
|-
! ''[[चार दिन]]''
| "हाय ये भोली सूरत वाले"
| श्याम सुंदर
|
| राजकुमारी, कल्याणी, ज़ोहराबाई अम्बालेवाली, शमशाद बेगम, हमीदा बानो, इकबाल (हमीदा का भाई)
|-
! rowspan='3' | ''[[चकोरी (1949 फ़िल्म)|चकोरी]]''
| "कभी हंस हंसके नैन मिलाये"
| rowspan='3' | हंसराज बहल
|
| rowspan='3' |
|-
| "हाय चंदा गये परदेस चकोरी जहां"
|
|-
| "बहुत हमसे जुदा है पर तेरे लिए फिर भी"
|
|-
! rowspan='2' | ''[[चांदनी रात]]''
| "हाय छोरे की जात"
| rowspan='2' | नौशाद
|
| जी.एम. दुर्रानी
|-
| "हाय छोरे की जात"
|
| सआदत खान
|-
! rowspan='2' | ''[[दिल की बस्ती]]''
| "आग लगे जग सारा देखे"
| rowspan='2' | गुलाम मोहम्मद
|
| rowspan='2' |
|-
| "उनसे हम कुछ कहते रह गए"
|
|-
! rowspan='7' | ''[[दुलारी (फिल्म)|दुलारी]]''
| "आंखों में आया दिल में समा जा"
| rowspan='7' | नौशाद
|
| rowspan='5' |
|-
| "तकदीर जगा कर आयी हूँ"
|
|-
| "ऐ दिल तुझसे कसम है"
|
|-
| "दो दिन की बहार है प्यार कर"
|
|-
| "मोहब्बत हमारी ज़माना हमारा"
|
|-
| "मिल मिल के गाएँगे"
|
| rowspan='2' | मोहम्मद रफ़ी
|-
| "रात रंगीली मस्त"
|
|-
! rowspan='7' | ''[[एक थी लड़की]]''
| "घिर-घिर के आई बदरा सजनवा"
| rowspan='7' | विनोद
|
| rowspan='2' |
|-
| "मेरे दिल के तड़पने का तमाशा देखनेवाले"
|
|-
| "अब हाल ए दिल"
|
| rowspan='3' | मोहम्मद रफ़ी
|-
| "लंबी जोरू बड़ी मुसेबत"
|
|-
| "ये शोक सितारें"
|
|-
| "लारा लप्पा लारा लप्पा"
|
| मोहम्मद रफी, जी.एम. दुर्रानी
|-
| "हम चले दूर"
|
| मोहम्मद रफ़ी, सतीश बत्रा
|-
! rowspan='3' | ''[[गर्ल्स स्कूल (1949 फ़िल्म)|गर्ल्स स्कूल]]''
| "कुछ शरमते हुए और कुछ"
| rowspan='3' | अनिल विश्वास
|
| rowspan='2' |
|-
| "तुम ही कहो मेरा मन क्यों रहे उदास"
|
|-
| "बार-बार तुम सोच"
|
| शंकर दास गुप्ता<ref>{{cite web |url=http://cineplot.com/music/lata-mangeshkars-song-list-1949/ |title=Lata Mangeshkar's Songs List - 1949 |date=2014-11-06 |url-status=dead |access-date=6 October 2026 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141106050338/http://cineplot.com/music/lata-mangeshkars-song-list-1949/ |archive-date=6 नवंबर 2014}}</ref>
|-
! rowspan='3' | ''[[जल तरंग]]''
| "लुट गई उम्मीदों की दुनिया"
| rowspan='3' | हुस्नलाल भगतराम
|
|
|-
| "ज़रा तुमने देखा तो प्यार"
|
| मोहम्मद रफ़ी
|-
| "हाय तकदीर मेरी बनके बिगाड़ती क्यों"
|
| rowspan='9' |
|-
! rowspan='2' | ''[[जीत (1949 फ़िल्म)|जीत]]''
| "मस्त पावन है चंचल धारा"
| rowspan='2' | अनिल विश्वास
|
|-
| "हंसले गा ले ओ चांद मेरे"
|
|-
! ''किनारा''
| "जानेवाले ये जवानी चार दिन की"
| एम. आचार्य
|
|-
! rowspan='7' | ''लाडली''
| "आठ रोज़ की छुट्टी"
| rowspan='7' | अनिल विश्वास
| rowspan='7' |
|-
| "तुम्हारे बुलाने को जी चाहता है"
|-
| "कैसे कह दूं बजरिया के बीच"
|-
| "ज़िंदगी की रोशनी तो ख़त्म हो गई"
|-
| "ग़रीबों का हिसा ग़रीबों में"
|-
| "जय जय प्रेम देवता"
| मीना कपूर
|-
| "अग्रे को घाघरो मंगवादेई"
| आशालता
|-
! rowspan='7' | ''लाहौर''
| "बहारें फिर भी आएंगी"
| rowspan='7' | श्याम सुंदर
| rowspan='7' |
| rowspan='6' |
|-
| "सुनलो सजन मेरी बात दिल की बात"
|-
| "बेदर्द ज़माने क्या तेरी महफ़िल में"
|-
| "टूटे हुए अरमानों की एक दुनिया"
|-
| "उस दिल की किस्मत क्या कहेंगे"
|-
| "उम्मीद के रंगीन झूले में एक आस"
|-
| "दुनिया हमारे प्यार की यूँही"
| करण दीवान
|-
! rowspan ='3' | ''मां का प्यार''
| "मुरख मन कहे होत अधीर"
| rowspan='3' | पंडित गोबिंदराम
| rowspan='3' |
| rowspan='3' |
|-
| "सोजा मेरे नन्हे निंदिया तोहे आई"
|-
| "तूने जहां बना कर एहसान क्या किया"
|-
! rowspan='3' | ''[[महल (1949 फ़िल्म)|महल]]''
| "मुश्किल है बहुत मुश्किल"
| rowspan='3' | खेमचंद प्रकाश
| rowspan='3' | नक्शाब
| rowspan='3' |
|-
| "आएगा आएगा आनेवाला आएगा"
|-
| "दिल ने फिर याद किया बेवफ़ा"
|-
! rowspan='5' | ''नमूना''
| "भगवान तूने क्यों"
| rowspan='5' | सी. रामचन्द्र
|
| rowspan='4' |
|-
| "आज संभल के आना हो लाला"
|
|-
| "म्हारी गली में आवे जो"
|
|-
| "ज़ुल्म तुम्हारे सह न सके"
|
|-
| "तड़पके मुझे अब छोड़"
|
| मोहम्मद रफ़ी
|-
! rowspan='4' | ''[[नरसिंह अवतार]]''
| "भज रे मधुर मधुर नाम"
| rowspan='5' | वसंत देसाई
|
| rowspan='6' |
|-
| "चरण तुम्हारे फूल हमारे"
|
|-
| "हरि को बिसारो न बिसरेंगे"
|
|-
| "जगमग तारे झलके झलके अँधेरी"
|
|-
! ''[[नयी तालीम]]''
| "आ गई बहार आ गई"
|
|-
! rowspan='3' | ''नज़ारे''
| "एक ठेस लगी"
| rowapan='3' | बुलो सी. रानी
|
|-
| "क्या सोच के बनाई"
|
| मोहम्मद रफ़ी
|-
| "तड़पके मुझे छोड़ दिया"
|
| rowspan='11' |
|-
! rowspan='4' | ''[[पारस (1949 फ़िल्म)|पारस]]''
| "आज मेरी दुनिया में दिन हैं बहार के"
| rowspan='4' | गुलाम मोहम्मद
| rowspan='4' | शकील बदायूँनी
|-
| "दिल का सहारा टूटे ना जाए"
|-
| "इस दर्द की मारी दुनिया में"
|-
| "दिल लेके छुपनेवाले"
|-
! rowspan='3' | ''[[प्यार की रात]]''
| "चाहे वो हमें ऐसी किस्मत है कहाँ"
| rowspan='3' | एन. ए. जोलागोनकर
|
|-
| "वो नज़र मिली हंसी जिंदगी"
|
|-
| "एक बार चले आओ फिर चाहे ना आना"
|
|-
! rowspan='4' | ''[[पतंगा (1949 फ़िल्म)|पतंगा]]''
| "दिल से भुलादो तुम हमीं"
| rowspan='4' | सी. रामचन्द्र
| rowspan='3' |
|-
| "कभी खामोश हो जाना कभी फरियाद"
|-
| "ओ जानेवाले तूने अरमानों की दुनिया"
|-
| "प्यार के जहाँ की निराली"
|
| शमशाद बेगम
|-
! rowspan="3" | ''[[रात की रानी (फ़िल्म)|रात की रानी]]''
| "दिल तोड़ने वाले आ"
| rowspan="3" | हंसराज बेहल
|
|
|-
| "सुन तो लो मेरा अफसाना"
|
| rowspan="2" | मोहम्मद रफी
|-
| "उस रात के प्यारे चाँद"
|
|-
! ''रोशनी''
| "मेरे पास मेरे भोले सजन"
| सी. रामचंद्र
|
|
|-
! rowspan="3" | ''राखी''
| "कहे धीरे चली रे घड़ी"
| rowspan="3" | हुसंलाल भागतरं
| rowspan="3" |
| rowspan="3" |
|-
| "ओ रूठ जानेवाले मेरा कसूर क्या है"
|-
| "दिल किसी ने छीन लिया पहली मुलाक़ात में"
|-
! ''[[संत जनाबाई]]''
| "गोपे नंदलाल गूंथे सब वनमाला"
| सुधीर फड़के
|
|
|-
! ''सांवरिया''
| "जानी रे हम जानी रे"
| सी. रामचंद्र
|
| गीता दत्त
|-
! rowspan="6" | ''[[सावन भादों (1949 फ़िल्म)|सावन भादों]]''
| "सौ सौ ग़म ने घेरे"
| rowspan="6" | हुसंलाल भागतरं
|
| rowspan="4" |
|-
| "तेरी इस दो रंगी दुनिया में"
|
|-
| "तेरी अँखियाँ सजन चोर चोर"
|
|-
| "तुम बिन राजा नहीं मन का चैन"
|
|-
| "कलेजा थाम लो"
|
| ज़ोहराबाई अंबालवाली
|-
| "ये राह ए मोहब्बत"
|
| एस.दी. बतीश
|-
! rowspan="6" | ''[[सिपहिया]]''
| "दर्द जगा के टेस लगा के"
| rowspan="6" | सी. रामचंद्र
|
| rowspan="3" |
|-
| "हँसी हँसी न रही और खुशी न खुशी"
|
|-
| "आराम के थे साथी क्या क्या जब वक़्त पड़ा तो"
|
|-
| "चलो घूँघट में गुइयाँ"
|
| [[गीता दत्त]]
|-
| "लगा है कुछ निशाना"
|
| rowspan="2" | सी. रामचंद्र
|-
| "ऐ आँख अब न रोना"
|
|-
! rowspan="4" | ''[[शायर (1949 फ़िल्म)|शायर]]''
| "तू दूर है आँखों से मेरे दिल को यह ग़म"
| rowspan="4" | ग़ुलाम मोहम्मद्
|
| rowspan="2" |
|-
| "मोहब्बत पे बहार आती जहाँ गुलज़ार हो जाता"
|
|-
| "दो बिछड़े हुए दिल आपस में"
|
| जी.एम. दुर्रानि
|-
| "ये दुनिया है जहाँ दिल का लगन"
|
| मुकेश
|-
! rowspan="6" | ''[[उधार (फ़िल्म)|उधार]]''
| "आज जिंदगी के बंद द्वार खुल गए"
| rowspan="6" | वसंत देसाई
|
| rowspan="6" |
|-
| "कहाँ राम है राम फिर श्रीमुख"
|
|-
| "ओ कबीरा हिंदुआन की हिंदुआई देखो"
|
|-
| "पतझड़ के दिन बीत गये"
|
|-
| "रात जा रही नींद आ रही है"
|
|-
| "रंगीन गगन पीछे छूटा"
|
|-
! ''उषा किरण''
| "लहरों पे कभी नाचूँ किरणों से कभी"
| सरस्वती देवी
|
|
|-
! rowspan="5" | ''[[ज़ेवरात]]''
| "शिकवा न करेंगे न शिकायत"
| rowspan="5" | हंसराज बेहल
|
| rowspan="2" |
|-
| "एक ही था जगत में सहारा"
|
|-
| "सजन की ओर लेके"
|
| मोहम्मद रफी
|-
| "जा तेरी मुक़द्दर में हँसी है न खुशी"
|
| rowspan="2" |
|-
| "चले आओ जी मुझे तुमसे मोहब्बत है"
|
|-
|}
===1950 के दशक===
===1951===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="6" | ''[[आवारा]]''
| "घर आया मेरा परदेसी"
| rowspan="6" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="3" | शैलेंद्र
|
|-
| "दम भर जो उधर मुँह फेरे"
| मुकेश
|-
| "तेरे बिना आग ये चाँदनी"
| [[मन्ना डे]]
|-
| "एक बेवफ़ा से प्यार किया"
| rowspan="3" | [[हसरत जयपुरी]]
| rowspan="3" |
|-
| "अब रात वाली है"
|-
| "जब से बालम घर आये"
|}
===1952===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="5" | ''[[दाग (1952 फ़िल्म)|दाग]]''
| "काहे को देर लगाई रे"
| rowspan="5" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="5" |
| rowspan="5" |
|-
| "देखो आया ये कैसा"
|-
| "लागे जबसे नैन"
|-
| "प्रीत ये कैसी"
|-
| "ऐ मेरे दिल कहीं और चल"
|-
! rowspan="7" | ''शिन शिनाकि बूब्ला बू''
| "टक्का लाई कलि दई"
| rowspan="7" | सी. रामचंद्र
| rowspan="7" | प्यारेलाल संतोषी
| rowspan="4" |
|-
| "अरे बाबा ये हँसी बाबा ये खुशी बाबा"
|-
| "कैसे हैं मिज़ाज कहिये"
|-
| "साईं रे घर घर में एक चोर"
|-
| "एक बार जो परदे से फिर छम से तेरा आना हो"
| कुशिरो कुमार
|-
| "तुम क्या जानो तुम्हारी याद में हम कितना रोये"
|
|-
| "शिन शिनाकि बूब्ला बू"
| सी. रामचंद्र
|-
! rowspan="2" | ''[[दीवाना (1952 फ़िल्म)|दीवाना]]''
| "मेरे चाँद मेरे लाल"
| rowspan="2" | नौशाद
| rowspan="2" | शकील बदयूनी
| सुरैया
|-
| "तीर खाते जायेंगे"
|
|}
===1953===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="9" | ''[[अनारकली (1953 फ़िल्म)|अनारकली]]''
| "आजा अब तो आजा"
| rowspan="9" | सी. रामचंद्र, वसंत प्रकाश
| rowspan="9" |
| rowspan="8" |
|-
| "दुआ कर ग़म-ए-दिल"
|-
| "मुझसे मत पूछ"
|-
| "मोहब्बत ऐसी धड़कन है"
|-
| "मोहब्बत में ऐसे कदम"
|-
| "ये जिंदगी उसी की है" (1)
|-
| "ये जिंदगी उसी की है" (2)
|-
| "ओ आसमांवाले"
|-
| "जाग दर्द-ए-इश्क़ जाग, दिल को बेकरार कर छेड़के आँसुओं का राग"
| हेमंत कुमार
|-
! rowspan="7" | ''[[आह (फ़िल्म)|आह]]''
| "जाने ना नज़र" <ref>{{Citation |title=Jane Na Nazar Pehchane Jigar - Raj Kapoor - Nargis - Aah - Lata - Mukesh - Evergreen Hindi Songs |url=https://www.youtube.com/watch?v=90ooNta8icg |date=2011-12-02 |access-date=2016-02-24 |last=Filmi Gaane}}</ref>
| rowspan="7" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="2" | [[हसरत जयपुरी]]
| rowspan="3" | [[मुकेश]]
|-
| "आजा रे अब मेरा दिल"
|-
| "जो मैं जानती"
| rowspan="5" | शैलेंद्र
|-
| "झनन झनन झनन"
| rowspan="6" |
|-
| "ये शाम की तन्हाईयाँ"
|-
| "सुनते थे नाम"
|-
| "राजा की आयेगी बारात"
|-
! rowspan="4" | ''[[लड़की (1953 फ़िल्म)|लड़की]]''
| "साजन आजा दरस दिखा जा"
| rowspan="4" | आर. सुदरसनम–धनीराम
| rowspan="4" | राजेंद्र कृष्णन
|-
| "तोड़ के दुनिया की दीवार"
|-
| "मन मोर मचावे शोर"
| [[गीता दत्त]]
|-
| "मेरे वतन से अच्छा"
| rowspan="2" |
|-
! rowspan="3" | ''[[दो बीघा ज़मीन]]''
| "आजा री आ, निंदियाँ तू आ"
| rowspan="3" | सलिल चौधरी
| rowspan="3" | शैलेंद्र
|-
| "धरती कहे पुकार के, बीज बिछा ले प्यार के"
| rowspan="2" | मन्ना डे
|-
| "हरियाला सावन ढोल बजाता आया"
|}
===1954===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="9" | ''[[नागिन (1954 फ़िल्म)|नागिन]]''
| "मन डोले मेरा तन डोले"
| rowspan="9" | [[हेमंत कुमार]]
|
|
|-
| "सुन रसिया मन बसिया"
|
|
|-
| "सुन रि सखी"
|
|
|-
| "मेरा दिल ये पुकारे आजा"
|
|
|-
| "जादूगर सईयां"
|
|
|-
| "अरि छोड़ दे पतंग"
| [[हेमंत कुमार]]
|
|-
| "मेरा बादली में छुप गया चाँद"
| rowspan="5" |
|
|-
| "तेरी याद में जलकर देख लिया"
|
|-
| "ऊँची ऊँची दुनिया कि दीवारें"
|
|-
|-
! ''मयूरपंख''
| "तंदना तंदना तंदना"
| शैलेंद्र
| [[आशा भोसले]], [[उषा मंगेशकर]]
|-
! ''अमर''
| "न शिकवा है कोई ना कोई गिला है"
|
| शकील बदायूंई
|}
===1955===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="8" | ''[[आज़ाद (1955 फ़िल्म)|आज़ाद]]''
| "ना बोले, ना बोले"
| rowspan="8" | सी. रामचंद्र
| rowspan="8" | राजेंद्र कृष्ण
| rowspan="5" |
|-
| "कितनी जवान है रात"
|-
| "देखो जी बहार आयी"
|-
| "जा री, ओ कारी बदरिया"
|-
| "पीके दरस को तरस"
|-
| "कितना हसीन है मौसम, कितना हसीन सफर है"
| सी. रामचंद्र
|-
| "अपलम चपलम, चप लाई री दुनिया को छोड़"
| rowspan="2" | उषा मंगेशकर
|-
| "बलिए ओ बलिए, चल छलिये"
|-
! rowspan="3" | ''[[देवदास (1955 फ़िल्म)|देवदास]]''
| "जिसे तू कबूल करले"
| rowspan="3" | [[सचिन देव बर्मन]]
| rowspan="3" | [[साहिर लुधियानवी]]
|
|-
| "अब आगे तेरी मर्ज़ी"
|
|-
| "ओ आने वाले रुक जा"
|
|-
! rowspan="5" | ''[[श्री ४२० (1955 फ़िल्म)| श्री 420]]''
| "प्यार हुआ इकरार हुआ"
| rowspan="5" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="2" | शैलेंद्र
|
|-
| "रमैया वस्तावैया"
| [[मोहम्मद रफी]], [[मुकेश]]
|-
| "इचक दाना बीचक दाना"
| rowspan="3" | [[हसरत जयपुरी]]
| [[मुकेश]]
|-
| "ओ जानेवाले"
| rowspan="2" |
|-
| "शाम गयी रात आयी"
|-
! rowspan="10" | ''[[झनक झनक पायल बाजे]]''
| "झनक झनक पायल बाजे"
| rowspan="10" | वसंत देसाई
| rowspan="10" | हसरत जयपुरी
| [[हेमंत कुमार]]
|-
| "जो तुम तोड़ो पिया"
| rowspan="4" |
|-
| "सैयाँ जाओ"
|-
| "सुनो सुनो सुनो जी"
|-
| "कैसी ये मोहब्बत"
|-
| "मुरली मनोहर"
| rowspan="2" | मन्ना डे
|-
| "मेरे ए दिल बता"
|-
| "नैन सो नैन नाही मिलाओ"
| हेमंत कुमार
|-
| "राग मलिका"
| मन्ना डे
|-
| "रुत बसंत"
| rowspan="9" |
|-
! rowspan="8" | ''[[उड़न खटोला (फ़िल्म)|उड़न खटोला]]''
| "ना रो ए दिल"
| rowspan="8" | नौशाद
| rowspan="8" |
|-
| "हाल-ए-दिल मैं क्या कहूँ"
|-
| "घर आया मेहमान कोई"
|-
| "मेरा सलाम ले जा"
|-
| "हमारे दिल से न जाना
|-
| "मोरे सईयाँ जी उतरेंगे पार"
|-
| "डूबा तारा उम्मीदों"
|-
| "सितारों की मेहफिल"
|-
! rowspan="3" | ''[[बंदिश (1955 फ़िल्म)|बंदिश]]''
| "रात है सुहानी"
| rowspan="3" | हेमंत कुमार
| rowspan="3" |
| rowspan="3" |
|-
| "तुम्हारी याद में"
|-
| "झूमती जवानी है"
|}
===1956===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="5" | ''न्यू देल्ही''
| "कोई मेरे सपनों Mein आया"
| rowspan="5" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="5" | [[हसरत जयपुरी]], शैलेंद्र
| rowspan="5" |
|-
| "तुम संग प्रीत लगाई रसिया"
|-
| "जिंदगी बहार है"
|-
| "बारी बरसे खातन गायन"
|-
| "मुरली बैरन भाई"
|-
! rowspan="8" | ''[[चोरी चोरी (1956 फ़िल्म)|चोरी चोरी]]''
| रसिक बलमा
| rowspan="8" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="4" | [[हसरत जयपुरी]]
|
|-
| "उस पर साजन"
|
|-
| "आजा सनम मधुर चाँदनी में हम"
| rowspan="4" | [[मन्ना डे]]
|-
| "पंछी बनूँ उड़ती फिरूँ"
|-
| "जहाँ मैं जाती हूँ"
| rowspan="11" | शैलेंद्र
|-
| "यह रात भीगी भीगी"
|-
| "मनभावन के घर"
| [[आशा भोसले]]
|-
| "सवा लाख की लॉटरी"
| [[मोहम्मद रफी]]
|-
! rowspan="7" | ''[[पटरानी]]''
| "सात समुंदर पार"
| rowspan="13" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="4" |
|-
| "ओ बलम तुम बेदर्दी"
|-
| "चंद्रमा क्यों झूमे"
|-
| "दिल गया दर्द रहा सीने में"
|-
| "अरे कोई जाओ री पिया को बुलाओ री"
| मीना मंगेशकर, [[उषा मंगेशकर]]
|-
| "राजा प्यारे मत करो प्यार का मोल"
| [[उषा मंगेशकर]]
|-
| "न जाने तुम कौन मेरी आँखों में"
| rowspan="6" |
|-
! rowspan="6" | ''[[किस्मत का खेल]]''
| "अर्ज़ है आप से"
| rowspan="6" | शैलेंद्र, [[हसरत जयपुरी]]
|-
| "किस्मत का खेल है जनाबे आली"
|-
| "न बुरे न भले हम गरीब ग़म के पले"
|-
| "तु माने या न माने बालम अंजाने"
|-
| "ए ज़मीन ए आसमां इतना बता"
|-
| "कह दो जी कह दो"
| [[मन्ना डे]]
|-
! ''[[सुबह का तारा]]''
| "चमका चमका सुबह का तारा"
|
|
| [[तलत महमूद]]
|-
! rowspan="7" | ''[[देवता (1956 फ़िल्म)|देवता]]''
| "दो नैनों का बना"
| rowspan="7" | सी. रामचंद्र
| rowspan="7" | राजेंद्र कृषण
| rowspan="5" |
|-
| "कैसे आऊँ जमुना के तीर"
|-
| "फूलों के मेले"
|-
| "सुना है मेरे दिल का"
|-
| "ये चाँद का जो"
|-
| "किसी से प्यार है हमको"
| [[तलत महमूद]]
|-
| "ए चाँद कल जो आना उनको"
| rowspan="3" |
|-
! rowspan="2" | ''[[बंधन (1956 फ़िल्म)|बंधन]]''
| "वृंदावन की कुंज गली"
| rowspan="2" | हेमंत कुमार
| rowspan="2" | राजेंद्र कृष्णन
|-
| "मेरे देवता मुझको देना सहारा"
|-
|}
===1957===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="7" | ''[[कठपुतली (1957 फ़िल्म)|कठपुतली]]''
| "बक्कड़ बम बम"
| rowspan="7" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="7" | शैलेंद्र, [[हसरत जयपुरी]]
|
|-
| "बोल री काठ पुतली"
|
|-
| "बोल री काठ पुतली (दुखी)"
|
|-
| "मिनी मिनी चिचि"
| [[मुकेश]]
|-
| "हाय तू ही गया मोहे भूल रे"
| rowspan="6" |
|-
| "इतने बड़े जहाँ में ए दिल"
|-
| "सो जा रे सो जा"
|-
! rowspan="4" | ''[[आशा (1957 फ़िल्म)|आशा]]''
| "ज़रा रुक रुक के, मैं तो द्वार चली सखी"
| rowspan="4" | सी. रामचंद्र
| rowspan="4" | राजेंद्र कृष्णन
|-
| "चल चल रे कंहाई"
|-
| "तू न आया और होने लगी शाम रे"
|-
| "तुमको सलाम हैं"
| [[मोहम्मद रफी]]
|}
===1958===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="3" | ''[[सितारों से आगे]]''
| "मेहफिल में आये वो"
| rowspan="3" | एस. डी. बर्मन
| rowspan="3" | मजरूह सुल्तानपुरी
| rowspan="6" |
|-
| "पग ठुमक चलत"
|-
| "आ खिलाते है गुल"
|-
! rowspan="3" | ''[[साधना (1958 फ़िल्म)|साधना]]''
| "औरत ने जनम दिया मर्दों को"
| rowspan="3" | दत्ता नायक
| rowspan="3" | [[साहिर लुधियानवी]]
|-
| "कहोजी तुम क्या क्या खरीदोगे"
|-
| "ऐसे वैसे ठिकाने पे जाना बुरा है"
|-
! rowspan="5" | ''[[मधुमती]]''
| "दिल तड़प तड़प के कह रहा"
| rowspan="5" | [[सलिल चौधरी]]
| rowspan="5" | शैलेंद्र
| [[मुकेश]]
|-
| "आजा रे परदेसी"
|
|-
| "चढ़ गयो पापी बिछुआ"
| [[मन्ना डे]]
|-
| "घड़ी घड़ी मेरा दिल धड़के"
| rowspan="6" |
|-
| "ज़ुल्मी संग आँख लड़ि रे"
|-
! rowspan="2" | ''[[अमरदीप (1958 फ़िल्म)|अमरदीप]]''
| "मेरे मन के बावरा पंछी"
| rowspan="2" | सी. रामचंद्र
|
|-
| "दिल की दुनिया बसाके सांवरिया"
|
|-
! rowspan="4" | ''[[अदालत (1958 फ़िल्म)|अदालत]]''
| "उनको यह शिकायत है"
| rowspan="4" | [[मदन मोहन]]
| rowspan="4" | राजेंद्र कृष्णन
|-
| "जाना था हमसे दूर"
|-
| "जा जा रे जा साजना"
|
|-
| "यू हसरतो के दाग"
|
|}
===1959===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="5" | ''[[कन्हैया (1959 फ़िल्म)|कन्हैया]]''
| "ओ मोरे साँवरे सलोने पिया, तोसे मिलने को तरसे जिया"
| rowspan="5" | शंकर जैकिशन
|
|
|-
| "नि बलिए रुत है बहार की, कुछ मत पूछो कैसे बितिन"
|
| मुकेश
|-
| "ओ कँहाय्या आज आना ख्वाब में"
|
| rowspan="3" |
|-
| "सावन आवन कह गए दिल में समा के मिलने ना आये"
|
|-
| "कहाँ है कहाँ है कन्हैया, समझे न प्यार मेरा"
|
|}
===1960 के दशक===
===1960===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="5" | ''[[दिल अपना और प्रीत पराई]]''
| "अजीब दास्तां है ये"
| rowspan="5" | [[शंकर-जयकिशन]]
| rowspan="4" | शैलेंद्र
| rowspan="14" |
|-
| "अंदाज़ मेरा मस्ताना"
|-
| "दिल अपना और प्रीत पराई"
|-
| "मेरा दिल अब तेरा हो साजन"
|-
| "शीशा-ए-दिल"
| [[हसरत जयपुरी]]
|-
! rowspan="4" | ''[[परख (1960 फ़िल्म)|परख]]''
| "ओ साजन, बरखा बहार आयी"
| rowspan="4" | [[सलिल चौधरी]]
| rowspan="4" | शैलेंद्र
|-
| "मिला है किसी का झुमका"
|-
| "ये बंसी क्यूँ गाये"
|-
| "मेरे मन के दिये"
|-
! rowspan="9" | ''[[मुग़ल-ए-आज़म]]''
| "मोहे पनघट पे"
| rowspan="9" | नौशाद
| rowspan="9" | शकील बदयूनि
|-
| "प्यार किया तो डरना क्या"
|-
| "मोहब्बत की झूठी"
|-
| "हमें काश तुमसे मोहब्बत"
|-
| "बेकस पे करम "
|-
| "तेरी मेहफिल में"
| शमशाद बेगम
|-
| "ये दिल की लगी"
| rowspan="3" |
|-
| "ए इश्क़ ये सब दुनियावाले"
|-
| "खु़दा निगेहबान"
|}
===1961===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="2" | ''[[नज़राना (1961 फ़िल्म)|नज़राना]]''
| "मेले हैं चिरागों की दिवाली"
| rowspan="2 | रवि
| rowspan="2" | राजेंद्र कृष्णन
|
|-
| "बिखरा के ज़ुल्फें चमन में"
| [[मुकेश]]
|-
! rowspan="4" | ''[[गंगा जमना]]''
| "ढूँडो ढूँडो रे साजना"
| rowspan="4" | [[नौशाद]]
| rowspan="4" | शकील बदयूनि
| rowspan="6" |
|-
| "दगाबाज़, तोरी बतियाँ न मानूँ रे"
|-
| "दो हँसों का जोड़ा बिछड़ गयो रे"
|-
| "झनन घूनगर बाजे"
|-
! rowspan="2" | ''[[हम दोनों (1961 फ़िल्म)|हम दोनों]]''
| "अल्लाह तेरो नाम"
| rowspan="2" | [[जयदेव]]
| rowspan="2" | [[साहिर लुधियानवी]]
|-
| "प्रभु तेरो नाम"
|}
===1962===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="5" | ''अनपढ़''
| "आप की नज़रों ने समझा"
| rowspan="5" | मदन मोहन कोहली
| rowspan="5" | राजा मेहदी अली खान
|
|-
| "है इसी में प्यार की आबरू"
|
|-
| "रंग बिरंगी राखी लेके आई"
|
|-
| "वो देखो, जला घर किसी का"
|
|-
| "जिया ले गयो जी मोरा"
|
|-
! rowspan="3" | ''[[असली नकली (1962 फ़िल्म)|असली-नकली]]''
| "तुझे जीवन की डोर से"
| rowspan="3" | शंकर जैकिशन
| rowspan="3" | हसरत जैपुरी
| मोहम्मद रफी
|-
| "लाख छुपाओ छुप न सकेगा"
| rowspan="2" |
|-
| "तेरा मेरा प्यार अमर"
|-
! rowspan="5" | ''[[प्रेम पत्र]]''
| "सावन की रातों में ऐसा"
| rowspan="5" | [[सलिल चौधरी]]
|
| rowspan="2" | [[तलत महमूद]]
|-
| "ये मेरे अंधेरे उजाले न होते"
| rowspan="2" |
|-
| "अब और न कुछ भी याद रहा"
|
|-
| "दो अखियाँ झुकी झुकी सी"
|
| [[मुकेश]]
|-
| "खुश हो रहे थे"
|
| rowspan="4" |
|-
! rowspan="4" | ''[[मन-मौजी]]''
| "मैं तो तुम संग नैन मिलाके"
| rowspan="4" | [[मदन मोहन]]
| rowspan="4" | राजेंद्र कृष्णन
|-
| "चंदा जा"
|-
| "आया है कहाँ से"
|-
| "एक था अब्दुल रहमान"
| [[किशोर कुमार]]
|}
===1963===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! ''[[परसमणि]]''
| "वो जब याद आये"
| [[लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल]]
|
| rowspan="4" | [[मोहम्मद रफी]]
|-
! ''[[ताज महल (1963 फ़िल्म)|ताज महल]]''
| "जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा"
| रोशन
|
|-
! rowspan="3" | ''[[तेरे घर के सामने]]''
| "देखो रूठा न करो"
| rowspan="3" | एस. डी. बर्मन
| rowspan="3" | हसरत जैपुरी
|-
| "तेरे घर के सामने"
|-
| ये तन्हाई है रे है
|
|-
! rowspan="6" | ''[[मेरे मेहबूब]]''
| "तेरे प्यार में दिलदार"
| rowspan="6" | [[नौशाद]]
| rowspan="6" | शकील बदयुनि
|
|-
| "अल्लाह बचाये"
|
|-
| "मेरे मेहबूब तुझे" (female)
|
|-
| "मेरे मेहबूब में क्या नही"
| rowspan="2" | आशा भोसले
|-
| "जानेमं एक नज़र देख ले"
|-
| "याद में तेरी"
|मोहम्मद रफी
|-
|rowspan='2' | '''[[दिल एक मंदिर]]'''
|"हम तेरे प्यार में सारा आलम"
| rowspan='2' | शंकर जैकीशन
| हसरत जैपुरी
|
|-
|"रुक जा रात"
|शैलेंद्र
|
|-
|}
===1964===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="2" | ''[[राजकुमार (1964 फ़िल्म)|राजकुमार]]''
| "आजा आयी बहार"
| rowspan="2" | शंकर जैकीशन
| rowspan="4" | शैलेंद्र
|
|-
| "नाच रे मन"
| [[आशा भोसले]]
|-
! rowspan="3" | ''[[संगम (1964 फ़िल्म)|संगम]]''
| "हर दिल जो प्यार करेगा"
|
| [[मुकेश]], [[महेंद्र कपूर]]
|-
| "ओ मेरे सनम"
|
| मुकेश
|-
| "मैं का करूँ राम मुझे बुढ्ढा मिलगया"
|
| हसरत जैपुरी
|
|-
! rowspan="4" | ''[[वो कौन थी (1964 फ़िल्म)|वो कौन थी?]]''
| "लग जा गले की फिर ये हसीं रात हो ना हो"
| rowspan="4" | [[मदन मोहन]]
| rowspan="4" | राजा मेहदी अली खान
| rowspan="3" |
|-
| "नैना बरसे रिमझिम रिमझिम"
|-
| "जो हमने दास्ताँ अपनी सुनाई"
|-
| "छोड़ कर तेरे प्यार का दामन"
| [[महेंद्र कपूर]]
|}
===1965===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="2" | ''[[आरज़ू (1965 फ़िल्म)|आरज़ू]]''
| "अजी रूठ कर अब कहाँ जाइयेगा"
| rowspan="2" | शंकर जैकीशन
| rowspan="2" | हसरत जैपुरी
| rowspan="3" |
|-
| "बेदर्दी बलमा तुझको"
|-
! ''[[भीगी रात (1965 फ़िल्म)|भीगी रात]]''
| "दिल जो न कह सका"
| रोशन
| [[मजरूह सुलतानपुरी]]
|-
! ''[[गुमनाम (1965 फ़िल्म) |गुमनाम]]''
| "गुमनाम है कोयी"
| शंकर सिंह रघुवंशी
| हसरत जैपुरी, मजरूह सुलतानपुरी
|
|-
! rowspan="4" | ''[[गाइड (1965 फ़िल्म)|गाइड]]''
| "आज फिर जीने की तमन्ना"
| rowspan="4" | [[सचिन देव बर्मन]]
| rowspan="4" | शैलेंद्र
| rowspan="3" |
|-
| "पिया तोसे नैना लागे रे"
|-
| "सईयाँ बेईमान"
|-
| "गाता रहे मेरा दिल"
| [[किशोर कुमार]]
|-
! rowspan="3" | ''[[जब जब फूल खिले]]''
| "मैं जो चली हिंदुस्तान से"
| rowspan="3" | [[कल्याणजी-आनंदजी]]
| rowspan="3" | [[आनंद बख्शी]]
| rowspan="3" |
|-
| "पर्देसियों से न अखियाँ मिलाना"
|-
| "ये समा समा है प्यार का"
|}
===1966===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="3" | ''[[मेरा साया]]''
| "तू जहाँ जहाँ चलेगा मेरा साया साथ होगा"
| rowspan="3" | [[मदन मोहन]]
| rowspan="3" | [[राजा मेहदी अली खान]]
| rowspan="7" |
|-
| "नैनों में बदरा छाए"
|-
| "नैनोनवाली ने हाय मेरा दिल लूटा"
|-
! rowspan="4" | ''[[लव इन टोक्यो]]''
| "कोई मतवाला आया"
| rowspan="4" | शंकर–जैकीशन
| शैलेंद्र
|-
| "सयौनारा सयौनारा"
| rowspan="3" | हसरत जैपुरी
|-
| "मुझे तुम मिल गए"
|-
| "ओ मेरे शाह-ए-खुबा"
|-
! rowspan="4" | ''[[प्यार किये जा]]''
| "किसने पुकारा मुझे, मैं आ गयी"
| rowspan="4" | लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल
| rowspan="4" | राजेंद्र कृष्णन
| rowspan="2" | महेंद्र कपूर
|-
| "फूल बन जाऊंगा शर्त ये है मगर"
|-
| "दिल हमने दे दिया, क्यों तुमने ले लिया"
| किशोर कुमार
|-
| "सुनले प्यार के दुश्मन दुनिया दिलवालों के अफसाने"
| आशा भोसले, किशोर कुमार, मन्ना डे
|}
===1967===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="9" | ''[[मिलन (1967 फ़िल्म)|मिलन]]''
| "सावन का महीना"
| rowspan="13" | [[लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल]]
| rowspan="9" | [[आनंद बख्शी]]
| rowspan="3" | [[मुकेश]]
|-
| "हम तुम युग युग से"
|-
| "बोल गोरी बोल तेरा कौन पिया"
|-
| "आज दिल पे कोई"
|
|-
| "हम तुम युग युग से - 2"
| rowspan="3" | मुकेश
|-
| "ये गीत मिलन के"
|-
| "बोल गोरी बोल तेरा कौन पिया - 2"
|-
| "आज दिल पे कोई ज़ोर चलता नहीं - 2"
|
|-
| "तोहे साँवरिया"
|
|-
! rowspan="4" | ''शागिर्द''
| "दिल विल प्यार व्यार"
| rowspan="4" | [[मजरूह सुलतानपुरी]]
|
|-
| "कहाँ कहाँ आन पड़ी"
|
|-
| "वो हैं ज़रा ख़फ़ा ख़फ़ा"
| [[मोहम्मद रफी]]
|-
| "रुक जा ए हवा"
| rowspan="5" |
|-
! rowspan="6" | ''[[रात और दिन]]''
| "न छेड़ो कल के अफसाने"
| rowspan="6" | शंकर–जैकीशन
| rowspan="5" | शैलेंद्र
|-
| "जीना हमको रास न आया"
|-
| "आवारा ए मेरे दिल" (खुश)
|-
| "आवारा ए मेरे दिल" (दुखी)
|-
| "दिल की गिरह खोल दो"
| [[मन्ना डे]]
|-
| "रात और दिन दिया जले"
| हसरत जैपुरी
|
|}
===1968===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="3" | [[सरस्वतीचन्द्र (फ़िल्म) | सरस्वतीचंद्र]]
| "फूल तुम्हें भेजा है खत में"
| rowspan="3" | कल्याणजी-आनंदजी
| rowspan="3" | इंदीवर
| मुकेश
|-
|चंदन सा बदन
|
|-
|मैं तो भूल चली
|
|}
===1969===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan='5' | ''[[इन्तकाम (1988 फ़िल्म) |इंतकाम]]''
| "हम तुम्हारे लिए"
| rowspan='8' | [[लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल]]
| rowspan='5' | राजिंदर कृष्ण
| मोहम्मद रफ़ी
|-
| "कैसे रहूँ चुप"
|
|-
| "गीत तेरे साज़ का"
|
|-
| "ऐसा कोई महफ़िल सोयी"
|
|-
| "आ जाने जाँ"
|
|-
! rowspan='3' | ''[[दो रास्ते]]''
| "बिंदिया चमकेगी"
| rowspan='3' | आनंद बख्शी
|
|-
| "चुप गए सारे नज़ारे (दिल ने दिल को पुकारा)"
| मोहम्मद रफ़ी
|-
| "अपनी अपनी बीवी पे"
|
|-
! rowspan='3' | ''[[वारिस]]''
| "दिल की लगी को छुपाऊं कैसे"
| rowspan='3' | आर डी बर्मन
| rowspan='3' | राजेंद्र कृष्ण
|
|-
| "लहरा के आया है झोंका बहार का"
| rowspan='2' | मोहम्मद रफ़ी
|-
| "कभी कभी ऐसा भी होता है"
|}
===1970 के दशक===
===1970===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan="2" | [[जॉनी मेरा नाम (1970 फ़िल्म)|जॉनी मेरा नाम]]
| "मोसे मोरा श्याम रूठा"
| rowspan="2" | कल्याणजी-आनंदजी
| rowspan="2" | [[इन्दीवर]]
| rowspan="2" |
|-
| "बाबुल प्यारे"
|-
|}
===1971===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan='3' | ''[[हाथी मेरे साथी (1971 फ़िल्म)|हाथी मेरे साथी]]''
| "धक धक कैसे चलती है गाड़ी"
| rowspan='3' | [[लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल]]
| rowspan='3' | [[आनंद बख्शी]]
| rowspan='3' | [[किशोर कुमार]]
|-
| "सुन जा आ ठंडी हवा"
|-
| "दिलबर जानी चली हवा मस्तानी"
|-
! rowspan='6' | ''[[ज्वाला (1971 फ़िल्म)|ज्वाला]]''
| "जागी रात भरी याद में बलम"
| rowspan='6' | शंकर-जयकिशन
| rowspan='6' |
|
|-
| "आहा ले गई ओ जिया ले गई, छवि सुंदर सलोने गोपाल की"
| आशा भोसले
|-
| "देखो जी आँखों में देखो, आँखें हमारे सपने तुम्हारे"
|
|-
| "होल होले एक भी ना घुंघरू बोले"
| सुधा मल्होत्रा, गीता दत्त
|-
| "आजा रे आजा मेरे साजना आ, सपनों की पालकी"
| मन्ना डे
|-
| "मेरा ज्वाला नाम जिया जलाने का काम"
|
|-
! rowspan='3' | ''[[मेमसाब (1971 फ़िल्म)|मेमसाब]]''
| "सुनो सुनो एक बात काहू"
| rowspan='3' | सोनिक ओम
| rowspan='3' | वर्मा मलिक
| मोहम्मद रफ़ी
|-
| "मुझे ढूंढ ले आ कर सैंया"
|
|-
| "जब से तेरे मेरे मन में"
|
|-
! ''[[शर्मीली]]''
| "मेघा छाये आधी रात"
| एस. डी. बर्मन
|
|
|}
===1972===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan='3' | ''[[शहजादा]]''
| "परियों की नगरी से आया"
| rowspan='3' | राहुल देव बर्मन
| rowspan='3' | राजेंद्र कृष्ण
|
|-
| "रिमझिम रिमझिम देखो बरस रही है"
| rowspan='2' | किशोर कुमार
|-
| "ना जाइयो, ना जाइयो, छोड़ के ना"
|-
! rowspan='4' | ''हरि दर्शन''
| "अपना हरि है हजार हाथ वाला"
| rowspan='4' | [[कल्याणजी-आनंदजी]]
|
|
|-
| "जय जय नारायण"
|
| महेंद्र कपूर
|-
| "मरने वाला है भगवान"
|
|
|-
| "प्रभु के भरोसे"
|
|
|-
! ''[[परिचय (1972 फ़िल्म)|परिचय]]''<ref name="1973award">{{cite web |url=http://iffi.nic.in/Dff2011/Frm20thNFAAward.aspx |title=20th National Awards For Films (1973) |publisher=Directorate of Film Festivals |format=PDF |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20131105220349/http://iffi.nic.in/Dff2011/Frm20thNFAAward.aspx |archive-date=5 November 2013}}</ref>
| "बीती ना बिताई रैना"
| राहुल देव बर्मन
|
|
|-
! rowspan='6' | ''[[पाकीज़ा]]''
| "चलते चलते"
| rowspan='6' | गुलाम मोहम्मद
| कैफ़ी आज़मी
| rowspan='5' |
|-
| "मौसम है आशिकाना"
| [[कमल अमरोही]]
|-
| "इन्ही लोगों ने"
| [[मजरूह सुलतानपुरी]]
|-
| "ठाड़े रहियो"
| [[कमल अमरोही]], [[मजरूह सुलतानपुरी]]
|-
| "तीर-ए-नज़र"
| rowspan='2' | कैफ भोपाली
|-
| "चलो दिलदार चलो"
| [[मोहम्मद रफी]]
|-
! rowspan='2' | ''धड़कन''
| "मैं आया तेरे द्वारे"
| rowspan='2' | रवि
|
|
|-
| "तो जा मेरे लाल सो जा मधुर सुरों में निंदिया गाये"
|
|
|-
! rowspan='5' | ''[[यह गुलिस्ताँ हमारा (1972 फ़िल्म) |यह गुलिस्ताँ हमारा]]''
| "रैना सोयी सोयी"
| rowspan='5' | एस. डी. बर्मन
|
|
|-
| "क्या ये जिंदगी है"
|
|
|-
| "ओ तुशिमा री तुशिमा"
|
|
|-
| "मेरा नाम आओ, मेरे पास आओ"
|
| डैनी डेन्जोंगपा
|-
| "गोरी गोरी गाँव की गोरी रे, किस लिए बन रही डोरी रे"
|
| rowspan='2' | किशोर कुमार
|-
! rowspan='2' | ''[[सीता और गीता]]''
| "कोई लड़की मुझे कल रात"
| rowspan='2' | आर. डी. बर्मन
| rowspan='2' | आनंद बख्शी
|-
| "हां जी हां मैंने शराब"
| rowspan='6' | एकल
|-
! rowspan='5' | ''[[राजा जानी (1972 फ़िल्म)|राजा जानी]]''
| "आ आजा आजा"
| rowspan='5' | लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
| rowspan='5' |
|-
| "ए बी सी डी छोड़ो"
|-
| "दुनिया का मेला"
|-
| "कितना मजा आ रहा है"
|-
| "मुबारक हो तुझे ऐ दिल"
|}
===1973===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan='4' | ''[[जुगनू (1973 फ़िल्म)|जुगनू]]''
| "जाने क्या पिलाये तूने"
| rowspan='4' | [[एस। डी. बर्मन]]
|
|
|-
| "जब बाघों में जुगनू"
|
|
|-
| "गिर गया झुमका"
|
| किशोर कुमार
|-
| "मेरी ये पायलिया गीत तेरे गये"
|
|
|-
! rowspan='2' | ''[[बंधे हाथ (1973 फ़िल्म) |बंधे हाथ]]''
| "ये कौन आज आया"
| rowspan='2' | राहुल देव बर्मन
|
|
|-
| "तूने छीन लिया"
|
|
|-
! rowspan='5' | ''[[दाग (1973 फ़िल्म)|दाग]]''
| "अब चाहे माँ रूठे या बाबा"
| rowspan='5' | [[लक्ष्मीकांत प्यारेलाल]]
| rowspan='5' | [[साहिर लुधियानवी]]
| rowspan='2' | किशोर कुमार
|-
| "हम और तुम तुम और हम"
|-
| "जब भी जी चाहे"
| एकल
|-
| "नी मैं यार मनाना नी"
| मीनू पुरूषोत्तम
|-
| "हवा चले कैसे"
| रोस्पैन='4' | एकल
|-
! ''[[लोफर (1973 फ़िल्म)|लोफर]]''
| "मैं तेरे इश्क में"
| आनंद बख्शी
|
|-
! rowspan='2' | ''[[फागुन (1973 फ़िल्म)|फागुन]]''
| "पिया संग खेलो होरी फागुन आयो रे"
| rowspan='2' | एस. डी. बर्मन
| rowspan='2' | मजरूह सुल्तानपुरी
|-
| "संध्या जो आए मन उड़ जाए जाने रे कहाँ"
|-
! ''बरखा बहार''
| "नज़र का ये पैगाम दिया जो आपने मेरे नाम"
| लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
|
| मोहम्मद रफ़ी
|-
| rowspan='2' |'''[[अनामिका (1973 फ़िल्म)|अनामिका]]'''
| "बाहों में चले आओ"
| rowspan='2' | आर. डी. बर्मन
| rowspan='2' | मजरूह सुल्तानपुरी
|
|-
|"बाहों में चले आओ (संवादों के साथ)"
|[[जया बच्चन]], [[संजीव कुमार]]
|-
| '''[[यादों की बारात]]'''
| "यादों की बारात निकली है आज दिल के द्वारे (महिला)"
| आर. डी. बर्मन
| मजरूह सुल्तानपुरी
| [[पद्मिनी कोल्हापुरे]], [[सुषमा श्रेष्ठ]]
|-
|}
===1974===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
! scope="col" style="width:18%;" | नोट्स
|-
! ''[[कोरा कागज़ (1974 फ़िल्म) |कोरा कागज़]]''
| "रूठे रूठे पिया"
| सलिल चौधरी
| वयलार
|
|सर्वश्रेष्ठ गायक के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार<ref name="1975award">{{cite web |url=http://iffi.nic.in/Dff2011/Frm22ndNFAAward.aspx |title=22nd National Awards For Films (1975) |publisher=Directorate of Film Festivals |format=PDF |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20140505171751/http://iffi.nic.in/Dff2011/Frm22ndNFAAward.aspx |archive-date=5 May 2014}}</ref>
|-
! rowspan='5' | ''[[आप की कसम]]''
| "जय जय शिव शंकर"
| rowspan='5' | आर. डी. बर्मन
| rowspan='5' | [[आनंद बख्शी]]
| rowspan='4' | [[किशोर कुमार]]
| बिनाका गीतमाला वार्षिक सूची 1974 में #2 पर
|-
| "करवातें बदलते रहें"
| बिनाका गीतमाला वार्षिक सूची 1974 में #17 पर
|-
| "पास नहीं आना"
|
|-
| "सुनो कहो कहा सुना"
|
|-
| "चोरी चोरी चुपके चुपके"
|
|
|-
! ''[[हमशक्ल (1974 फ़िल्म)|हमशकल]]''
| "काहे को बुलाया मुझे बलमा प्यार में नाम से"
| आर. डी. बर्मन
| आनंद बख्शी
| मोहम्मद रवि
|
|-
! ''आरोप''
| "नैनों में दर्पण है"
| भूपेन हजारिका
| माया गोविंद
| किशोर कुमार
|
|}
===1975===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! rowspan='2' | ''[[जूली (1975 फ़िल्म)|जूली]]''
| "ये रातें नई पुरानी"
| rowspan='2' | राजेश रोशन
| rowspan='2' | [[आनंद बख्शी]]
|
|-
| "भूल गया सब कुछ"
| [[किशोर कुमार]]
|-
! rowspan='2' | ''[[ज़ख्मी (1975 फ़िल्म)| ज़ख्मी]]''
| "आओ तुम्हें चाँद पे जाये"
| rowspan='2' | [[बप्पी लाहिड़ी]]
|
| rowspan='3' | एकल
|-
| "अभी अभी थी दुश्मनी"
|
|-
! ''[[वरदान]]''
| "देखो देखो दिल का तौफा"
| कल्याणजी-आनंदजी
|
|-
! rowspan='2' | ''[[सुनहरा संसार (1975 फ़िल्म)|सुनेहरा संसार]]''
| "भीगी भीगी हवा है, काली काली घटा है"
| rowspan='2' | नौशाद
| rowspan='4' | आनंद बख्शी
| मुकेश
|-
| "मेरी जवानी मेरी दुश्मन बनी रे"
| [[सुषमा श्रेष्ठ]]
|-
! rowspan='2' | ''[[वारंट (फ़िल्म)|वारंट]]''
| "लाडी नजरिया लाडी"
|rowspan='2' | आर. डी. बर्मन
| किशोर कुमार
|-
| "मैं तुमसे मोहब्बत"
| एकल
|-
! ''उमर क़ैद''
| "याद रहेगा प्यार का"
| सोनिक-ओमी
|
| मुकेश
|-
! rowspan='4' | ''[[प्रेम कहानी (1975 फ़िल्म)|प्रेम कहानी]]''
| "चल दरिया में"
| rowspan='7' | लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
| rowspan='4' |
| rowspan='2' | किशोर कुमार
|-
| "प्रेम कहानी में"
|-
| "फूल आहिस्ता फेंको"
| मुकेश
|-
| "नदिया से बिछड़ा"
| एकल
|-
! rowspan='3' | ''[[चैताली (1975 फ़िल्म)|चैताली]]''
| "धरती अम्बर निंद से जागे"
| rowspan='3' |
| मन्ना डे
|-
| "महबूबा नाम है मेरा"
| rowspan='5' | एकल
|-
| "सा नि धा पा मा ग नि धा"
|-
! rowspan='3' | ''वंदना''
| "आपकी इनायतें, आपका करम"
| rowspan='3' | रवि
| rowspan='3' | रवि
|-
| "ओ जग के पालनहारे"
|-
| "रुत है जवान"
|-
! rowspan='3' | ''[[धरम करम (1975 फ़िल्म)|धरम करम]]''
| "तू कहाँ गयी थी"
| rowspan='3' | आर. डी. बर्मन
| rowspan='3' | मजरूह सुल्तानपुरी
| किशोर कुमार
|-
| "नाचन नहीं आवत"
| एकल
|-
| "मुख पर जो छिड़का पानी"
| किशोर कुमार
|-
! rowspan='6' | ''[[सन्यासी (1975 फ़िल्म)|संन्यासी]]''
| "चल सन्यासी मंदिर में"
| rowspan='6' | [[शंकर जयकिशन|शंकर-जयकिशन]]
| विश्वेश्वर शर्मा
| rowspan='3' | मुकेश
|-
| "सुन बाल ब्रम्हचारी"
| वर्मा मलिक
|-
| "बाली उमरिया भजन करूं कैसे"
| विटालभाई पटेल
|-
| "शाम-ए-फुरकत का ढल गया साया"
| हसरत जयपुरी
| [[प्रेमनाथ]]
|-
| "जैसा मेरा रूप रंगीला"
| विश्वेश्वर शर्मा
| एकल
|-
| "ये है गीता का ज्ञान"
| एम. जी हशमत
| मुकेश
|-
! ''[[धर्मात्मा]]''
| "मेरी गलियों से लोगो की यारी"
| कल्याणजी आनंदजी
| इंदीवर
| महेंद्र कपूर
|-
! rowspan='3' | ''[[चुपके चुपके]]''
| "अब के सजन सावन में"
| rowspan='3' | एस. डी. बर्मन
| rowspan='6' | आनंद बख्शी
|
|-
| "बागानों में कैसे ये फूल खिलते हैं"
| मुकेश
|-
| "चुपके-चुपके चल रे पुरवइया"
| rowspan='3' | एकल
|-
! rowspan='3' | ''[[प्रतिज्ञा (1975 फ़िल्म)|प्रतिज्ञा]]''
| "मैं जंगल की मोरनी"
| rowspan='8' | लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
|-
| "परदेसी आया देस में"
|-
| "उठ निंद से मिर्जिया जाग जा"
| मोहम्मद रफ़ी
|-
! rowspan='2' | ''[[अपने रंग हज़ार (1975 फ़िल्म)|अपने रंग हज़ार]]''
| "गंगा में डूबा ना जमुना में डूबा"
| rowspan='2' |
| rowspan='3' | एकल
|-
| "इस क़दर आप हमको जो तड़पाएंगे"
|-
! rowspan='2' | ''जिंदा दिल''
| "नहीं नहीं जाना नहीं अभी नहीं"
| rowspan='3' |
|-
| "शाम सुहानी आई खुसिया बनके पहली बार"
| महेंद्र कपूर, शैलेन्द्र सिंह
|-
! ''[[सेवक (1975 फ़िल्म)|सेवक]]''
| "मेरा नाम बड़ा बदनाम"
| एकल
|}
===1976===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
! ''[[नागिन (1976 फ़िल्म)|नागिन]]''
| "तेरे संग प्यार में"
| [[लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल]]
| [[वर्मा मलिक]]
|
|-
! ''[[अदालत (1976 फ़िल्म)|अदालत]]''
| "तुमसे दूर रहके"
| कल्याणजी आनंदजी
| गुलशन बावरा
| मोहम्मद रफ़ी
|-
! rowspan='5' | ''[[कभी कभी]]''
| "कभी कभी मेरे दिल में" (II)
| rowspan='5' | खय्याम
| rowspan='10' | साहिर लुधियानवी
| मुकेश
|-
| "तेरा फूलों जैसा रंग"
| किशोर कुमार
|-
| "मेरे घर आये एक नन्ही परी"
|
|-
| "सुर्ख जोड़े की ये जगमगाहत"
| पामेला चोपड़ा
|-
| "तेरे चेहरे से"
| किशोर कुमार
|-
! rowspan='5' | ''[[लैला मज़नू (1976 फ़िल्म)|लैला मजनू]]''
| "हुस्न हाज़िर है"
| rowspan='5' | मदन मोहन, जयदेव
|
|-
| "क्या रेशमी पाज़ेब की झंकार"
| rowspan='3' | मोहम्मद रफ़ी
|-
| "अब अगर हम से खुदाई भी"
|-
| "लिख कर तेरा नाम ज़मीन पर"
|-
| "कोई पत्थर से ना मारे मेरे दीवाने को"
| rowspan='4' | एकल
|-
! ''कोई जीता कोई हारा''
| "ओ बाबा शादी तुम ना करना"
| लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
| रोस्पैन='6' | आनंद बख्शी
|-
! rowspan='3' | ''[[जीवन ज्योति (1976 फिल्म)|जीवन ज्योति]]''
| "दुनिया रंग बदलती जाये"
| rowspan='3' | सलिल चौधरी
|-
| "जिस द्वारे पर घर की बहू"
|-
| "रांझे की आँखों से देखो हीर को, मुझको छेड़ो"
| किशोर कुमार
|-
! rowspan='3' | ''[[लगाम (1976 फ़िल्म)|लगाम]]''
| "आज पवन की चल चुरा के"
| rowspan='3' | कल्याणजी आनंदजी
| rowspan='3' |
|-
| "जैसे मोती सीप से बिछड़े"
|-
| "आधी आधी रात मेरी पायलिया भजे"
| मोहम्मद रफ़ी
|-
! rowspan='2' | ''महा चोर''
| "मैं तुमसे प्यार करती हूँ"
| rowspan='2' | आर. डी. बर्मन
| rowspan='2' | आनंद बख्शी
| किशोर कुमार
|-
| "तू क्या मुझे बर्बाद करेगा"
| एकल
|-
! rowspan='2' | ''[[नाच उठे संसार (1976 फ़िल्म)|नाच उठे संसार]]''
| "तेरे संग जीना, तेरे संग मरना"
| rowspan='2' | लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
| rowspan='2' |
| rowspan='2' | मोहम्मद रफ़ी
|-
| "नाच उठे संसार"
|-
! rowspan='3' | ''[[नेहले पे देहला (1976 फ़िल्म)|नहले पे दहला]]''
| "सावन का महीना आ गया"
| rowspan='3' | आर. डी. बर्मन
| rowspan='3' | आनंद बख्शी
| किशोर कुमार
|-
| "लोगों की ज़ुबान पर अपना नाम"
| मन्ना डे, किशोर कुमार
|-
| "माशूक अपने शबाब में"
|
|-
! ''[[रंगीला रतन (1976 फ़िल्म)|रंगीला रतन]]''
| "तुम्हीं हो तुम्हीं हो जाने-जान"
| कल्याणजी आनंदजी
| गुलशन बावरा
| किशोर कुमार
|-
! rowspan='3' | ''[[उधार का सिंदूर (1976 फ़िल्म)|उधार का सिन्दूर ]]''
| "बुद्ध प्यार मंगदा"
| rowspan='3' | राजेश रोशन
| rowspan='3' |
| rowspan='3' | एकल
|-
| "मां अब तो मैं भी"
|-
| "मां कभी मैं भी पिया घर"
|}
===1977===
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
|}
==
==तेलुगु गाने==
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | वर्ष
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
| rowspan='2' | 1955
! rowspan='2' | ''संथानम''
| "निद्दुरापोरा थम्मुडा" (भाग 1)
| rowspan='2' | सुसरला दक्षिणामूर्ति
| rowspan='2' | अनिसेट्टी और पिनिसेट्टी
|
|-
| "निद्दुरापोरा थम्मुडा" (भाग 2)
| घंटाशाला
|-
| 1988
! ''आखरी पोरतम''
| "टेल्लाचीराकु"
| इलयराजा
| वेटुरी
| [[एस॰ पी॰ बालसुब्रमण्यम]]
|}
==इंडोनेशियाई गाने==
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | वर्ष
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
! scope="col" style="width:15%;" | संदर्भ
|-
| rowspan='6' | 1991
! rowspan='6' | ''एल्बम खुसस सोनेटा खंड 1 - लता मंगेशकर रातू डंगडुत दुनिया''
| "सेकुन्तुम मावर मेराह"
| rowspan='6' | रोमा इरामा
| rowspan='6' | रोमा इरामा
| rowspan='3' | एकल
| rowspan='6' | <ref>{{उद्धरण |title=युगल लीजेंडरी रोमा इरामा और लता मंगेशकर [पूर्ण एल्बम] |url=https://www.youtube.com/watch?v=-J-aPYXWAn0 |language=en |access-date=2022-07-08}}</ref>
|-
| "ओरंग असिंग"
|-
| "दतांग अनटुक पेर्गी"
|-
| "दी टेपी पन्ताई"
| rowspan='3' | रोमा इरामा
|-
| "वहाई पेसोना"
|-
| "मुसिम सिंटा"
|}
==भोजपुरी गाने==
{| class="wikitable plainrowheaders"
|-
! scope="col" style="width:15%;" | वर्ष
! scope="col" style="width:15%;" | फ़िल्म
! scope="col" style="width:40%;" | गीत
! scope="col" style="width:15%;" | संगीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | गीतकार
! scope="col" style="width:15%;" | सह - कलाकार
|-
| rowspan='9' | 1963
! rowspan='5' | ''गंगा मैया तोहे पियारी चढ़इबो''
| "गंगा मैया तोहे पियारी चढ़इबो"
| rowsoan='11' | [[चित्रगुप्त (संगीतकार)|चित्रगुप्त]]
| rowspan='5' | शैलेंद्र
| rowspan='2' | [[उषा मंगेशकर]]
|-
| "मोरे करेजवा में पीर"
|-
| "काहे बांसुरिया बजाइले" (खुश)
|
|-
| "लुक छु बदरा"
|
|-
| "काहे बांसुरिया बजाइले" (दुःखद)
|
|-
! rowspan='4' | ''लगी नहीं छूटे राम''
| "लाल लाल होठवा से"
| rowspan='4' | मजरूह सुल्तानपुरी
| rowspan='4' | [[तलत महमूद]]
|-
| "रखिया बांधला भैया"
|-
| "लागी नहीं छूटे राम"
|-
| "मोरी कलैया"
|-
| rowspan='2' | 1965
! rowspan='2' | ''गंगा''
| "कान्हा तोरी बंसी के जुल्मी रे तान"
| rowspan='3' | शैलेंद्र
|
|-
| "मगन कहे नाचे तोर मन गोरी"
| उषा मंगेशकर
|-
| 1968
! ''विधान नाच नचावे''
| "देख देख हँसेला"
| दत्ताराम वाडकर
|
|}
==संदर्भ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:भारतीय गायकों के गाये गीतों की सूचियाँ]]
{{भारत रत्न सम्मानित}}
{{पद्म भूषण धारक 1960–1969}}
{{दादासाहेब फाल्के पुरस्कार}}
{{फ़िल्मफ़ेयर लाइफ़ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार}}
{{फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका पुरस्कार}}
[[श्रेणी:1929 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:पद्म भूषण]]
[[श्रेणी:भारतीय हिन्दू]]
[[श्रेणी:बॉलीवुड]]
[[श्रेणी:गायिका]]
[[श्रेणी:भारतीय फिल्म पार्श्वगायक]]
[[श्रेणी:विकिपरियोजना संगीत]]
[[श्रेणी:मध्य प्रदेश के लोग]]
[[श्रेणी:दादासाहेब फाल्के पुरस्कार विजेता]]
[[श्रेणी:भारत रत्न सम्मान प्राप्तकर्ता]]
[[श्रेणी:इंदौर जिले के लोग]]
[[श्रेणी:भारतीय महिला गायक]]
[[श्रेणी:पद्म विभूषण धारक]]
[[श्रेणी:भारतीय शास्त्रीय गायिका]]
[[श्रेणी:२०२२ में निधन]]
sa6zybaeekkk8y91gt1elcni8zw3z2n
प्रारूप:Sudhanshu Krishn Rai
0
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6630429
2026-10-17T12:32:24Z
KalaKar Ballia
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छोटा सा सुधार किया।
6630441
wikitext
text/x-wiki
{{db-spam}}
{{Infobox actor
| name = Sudhanshu Krishn Rai
| image =Sudhanshu Krishn Rai Actor Primary.jpg
| caption = Sudhanshu Krishn Rai (Abhineta va Nirmata)
| birth_date = 10 July 1994
| birth_place = Narhi, Ballia, Uttar Pradesh, Bharat
| nationality = Bhartiya
| occupation = Abhineta, Film Nirmata, Lekhak
| years_active = 2017–vartaman
| known_for = Sajni Chura Lihli Dilwa Hamar, Bypass Road
}}
'''[[File:Sudhanshu Krishn Rai Actor Primary.jpg | thumb | सुधांशु कृष्ण राय]]
'''सुधांशु कृष्ण राय''' (जन्म: 4 नवंबर 1992) , हालांकि आधिकारिक सरकारी दस्तावेजों और उनके वैश्विक IMDb प्रोफाइल पर उनकी जन्मतिथि 10 जुलाई 1994 दर्ज है।
एक भारतीय फिल्म निर्माता और अभिनेता हैं, जो मुख्य रूप से हिंदी टेलीविजन, बॉलीवुड और क्षेत्रीय भोजपुरी सिनेमा में अपने काम के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने 50 से अधिक लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों में अभिनय किया है और फिल्म निर्माता के रूप में 'बागेश्वर बालाजी फिल्म्स प्रोडक्शन प्राइवेट लिमिटेड' (Bageshwar Balaji Films Production Pvt. Ltd.) के एम.डी. (M.D.) हैं।
== प्रारंभिक जीवन ==
सुधांशु कृष्ण राय का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नरही गांव में एक प्रतिष्ठित राय परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री संतोष कुमार राय है और उनकी माता का नाम स्वर्गीय शिखा राय था। उनका पारिवारिक जुड़ाव कला और सिनेमा से गहरा है; बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री संदाली सिन्हा उनकी बुआ की लड़की हैं। उनके बड़े भाई परमांशु कुमार राय (गौरव राय) हैं, जो उनकी फिल्मों की पटकथा लिखते हैं। उनकी भाभी मोनिका राय हैं और उनका भतीजा यक्षित गौरव राय है, जिन्होंने बाल कलाकार के रूप में भोजपुरी सिनेमा में कदम रख लिया है।
== करियर ==
राय ने अपने करियर की शुरुआत भारतीय टेलीविजन उद्योग से की। उन्होंने 'क्राइम अलर्ट' और 'सावधान इंडिया' के कई एपिसोड्स में मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। इसके अलावा उन्होंने कई प्रसिद्ध सीरियल्स जैसे 'परमावतार श्री कृष्ण', 'शक्ति - अस्तित्व के एहसास की', 'अलीबाबा 40 चोर', 'तेनाली रामा', 'विघ्नहर्ता गणेश' और 'मेरे साईं' में काम किया।
=== बॉलीवुड और ओटीटी (OTT) ===
राय ने साल 2019 में बॉलीवुड फिल्म 'बायпас रोड' में एक वॉचमैन का किरदार निभाया था। साल 2024 में, उन्होंने नेटफ्लिक्स की सीरीज़ 'त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर' के एपिसोड 9 में 'सत्संगी' का किरदार निभाया। उन्होंने बॉलीवुड फिल्म 'पटना शुक्ला' (2024) में एक वार्ड बॉय का किरदार भी निभाया है।
=== भोजपुरी सिनेमा (फिल्म निर्माण) ===
अपने बैनर 'बागेश्वर बालाजी फिल्म्स' के तहत उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में साफ-सुथरी और पारिवारिक फिल्मों को बढ़ावा देने के ध्येय से कदम रखा। उनकी मुख्य फीचर फिल्म "सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार" है, जिसमें उन्होंने लीड एक्टर और प्रोड्यूसर की भूमिका निभाई है। वर्तमान में, वे अपने भतीजे के नाम पर स्थापित प्रोडक्शन कंपनी 'यक्षित गौरव राय सिनेमा' (Yakshit Gaurav Rai Cinema) के मैनेजिंग डायरेक्टर (M.D.) के रूप में भी कार्यरत हैं और इसके तहत नई फिल्मों के निर्माण की योजना बना रहे
=== खेलकूद और व्यक्तिगत रुचियाँ ===
अभिनय और फिल्म निर्माण के अलावा, सुधांशु कृष्ण राय की बचपन से ही खेलकूद में गहरी रुचि रही है। वे अपने शुरुआती दिनों में स्थानीय स्तर पर क्रिकेट और कबड्डी के खेल में काफी सक्रिय रहे। इसके साथ ही वे बैडमिंटन और अन्य पारंपरिक खेलों में भी उत्साहपूर्वक भाग लेते थे।
== फिल्मोग्राफी ==
=== फिल्में ===
* सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार (भोजपुरी) - अभिनेता एवं मुख्य निर्माता
* बायपास रोड (2019, बॉलीवुड) - वॉचमैन
* पटना शुक्ला (2024, बॉलीवुड) - वार्ड बॉय
* हारर है (भोजपुरी, आगामी) - मुख्य अभिनेता (भूत-प्रेतों पर आधारित फ़िल्म)
* रंगेबाज़ (भोजपुरी, आगामी) - मुख्य अभिनेता (फ़िल्म स्टार एंटरटेनर प्रोडक्शन)
=== ओटीटी (OTT) और टीवी धारावाहिक ===
* त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर (2024, नेटफ्लिक्स) - सत्संगी (एपिसोड 9)
* क्राइम अलर्ट - विभिन्न भूमिकाएं
* सावधान इंडिया - विभिन्न भूमिकाएं
== समाचार एवं मीडिया संदर्भ ==
<references />
* दैनिक जागरण (कानपुर/बिहार संस्करण, 11 जुलाई 2023) - "सुधांशु कृष्ण राय व गणेश शंकर सोनी की भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' का भव्य मुहूर्त सम्पन्न" (फिल्म निर्माण, भव्य मुहूर्त और मुख्य कलाकार सुधांशु कृष्ण राय, रूपा मिश्रा व यक्षित गौरव राय पर विशेष राष्ट्रीय प्रिंट कवरेज)।
* दैनिक जागरण (बलिया संस्करण) - "भोजपुरी रग-रग में, इसे अर्श तक पहुंचाना मुख्य ध्येय" (अभिनेता व निर्माता सुधांशु राय का विशेष साक्षात्कार, जिसमें नरहीं गांव के मूल निवासी होने और सती मइया रखिह सेंदुरवा के लाज आदि फ़िल्मों का उल्लेख है)।
* जनसंदेश टाइम्स (बलिया संस्करण) - "अश्लीलता परोसने वालों को नकारें" (अभिनेता, निर्माता व गायक सुधांशु राय की आगामी हॉरर फ़िल्म 'हारर है', फ़िल्म 'रंगेबाज़' और भोजपुरी एल्बम 'तरक्की देख जलेला' पर विशेष प्रेस वार्ता रिपोर्ट)।
* जन सागर टुडे (मनोरंजन/आजमगढ़) - "भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' का फर्स्ट लुक आउट, पोस्ट-प्रोडक्शन का काम पूरा।"
* हिन्द लाइव साप्ताहिक (मनोरंजन ब्लॉक, अंक 20) - "सुधांशु कृष्ण राय से पूजा तिवारी रचाई शादी, सोशल मीडिया पर फोटो हुए वायरल" (फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' के दृश्य पर विशेष मीडिया रिपोर्ट)।
* यशभूमि हिंदी समाचारपत्र (कुरुक्षेत्र संस्करण, 12 जुलाई 2023) - "सुधांशु कृष्ण राय व गणेश शंकर सोनी की भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' का भव्य मुहूर्त सम्पन्न।"
* हिंदी दैनिक घटनाएं (सिनेमा न्यूज़ संस्करण, 12 जुलाई 2023) - "भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' के भव्य मुहूर्त तथा निर्माण पर विशेष मीडिया कवरेज।"
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://imdb.com सुधांशु कृष्ण राय] आईएमडीबी (IMDb) पर
* [https://facebook.com सुधांशु कृष्ण राय] फेसबुक पर
* [https://instagram.com सुधांशु कृष्ण राय] इंस्टाग्राम पर
<references />
[[File:Sudhanshu_Krishn_Rai_Actor.jpg.jpg | thumb | सुधांशु कृष्ण राय (शूटिंग के दौरान)]]
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/* प्रारंभिक जीवन */ छोटा सा सुधार किया।
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{{Infobox actor
| name = Sudhanshu Krishn Rai
| image =Sudhanshu Krishn Rai Actor Primary.jpg
| caption = Sudhanshu Krishn Rai (Abhineta va Nirmata)
| birth_date = 10 July 1994
| birth_place = Narhi, Ballia, Uttar Pradesh, Bharat
| nationality = Bhartiya
| occupation = Abhineta, Film Nirmata, Lekhak
| years_active = 2017–vartaman
| known_for = Sajni Chura Lihli Dilwa Hamar, Bypass Road
}}
'''[[File:Sudhanshu Krishn Rai Actor Primary.jpg | thumb | सुधांशु कृष्ण राय]]
'''सुधांशु कृष्ण राय''' (जन्म: 4 नवंबर 1992) , हालांकि आधिकारिक सरकारी दस्तावेजों और उनके वैश्विक IMDb प्रोफाइल पर उनकी जन्मतिथि 10 जुलाई 1994 दर्ज है।
एक भारतीय फिल्म निर्माता और अभिनेता हैं, जो मुख्य रूप से हिंदी टेलीविजन, बॉलीवुड और क्षेत्रीय भोजपुरी सिनेमा में अपने काम के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने 50 से अधिक लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों में अभिनय किया है और फिल्म निर्माता के रूप में 'बागेश्वर बालाजी फिल्म्स प्रोडक्शन प्राइवेट लिमिटेड' (Bageshwar Balaji Films Production Pvt. Ltd.) के एम.डी. (M.D.) हैं।
== प्रारंभिक जीवन ==
सुधांशु कृष्ण राय का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नरही गांव में एक प्रतिष्ठित राय परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री संतोष कुमार राय है और उनकी माता का नाम स्वर्गीय शिखा राय था। उनका पारिवारिक जुड़ाव कला और सिनेमा से गहरा है; बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री संदाली सिन्हा उनकी बुआ की लड़की हैं। उनके बड़े भाई परमांशु कुमार राय (गौरव राय) हैं, जो उनकी फिल्मों की पटकथा लिखते हैं। उनकी भाभी मोनिका राय हैं और उनका भतीजा यक्षित गौरव राय है, जिन्होंने बाल कलाकार के रूप में भोजपुरी सिनेमा में कदम रख लिया है।राय ने अपनी प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड), इलाहाबाद से पूरी की। उन्होंने साल 2010 में श्री गांधी स्मारक इंटर कॉलेज, भीरपुर (गाज़ीपुर) से अपनी हाई स्कूल (10वीं) की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके पश्चात, साल 2012 में उन्होंने गोपाल इण्टर कॉलेज, कसौंडर (बलिया) से विज्ञान वर्ग (Science Stream) में अपनी इंटरमीडिएट (12वीं) की पढ़ाई पूरी की।
== करियर ==
राय ने अपने करियर की शुरुआत भारतीय टेलीविजन उद्योग से की। उन्होंने 'क्राइम अलर्ट' और 'सावधान इंडिया' के कई एपिसोड्स में मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। इसके अलावा उन्होंने कई प्रसिद्ध सीरियल्स जैसे 'परमावतार श्री कृष्ण', 'शक्ति - अस्तित्व के एहसास की', 'अलीबाबा 40 चोर', 'तेनाली रामा', 'विघ्नहर्ता गणेश' और 'मेरे साईं' में काम किया।
=== बॉलीवुड और ओटीटी (OTT) ===
राय ने साल 2019 में बॉलीवुड फिल्म 'बायпас रोड' में एक वॉचमैन का किरदार निभाया था। साल 2024 में, उन्होंने नेटफ्लिक्स की सीरीज़ 'त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर' के एपिसोड 9 में 'सत्संगी' का किरदार निभाया। उन्होंने बॉलीवुड फिल्म 'पटना शुक्ला' (2024) में एक वार्ड बॉय का किरदार भी निभाया है।
=== भोजपुरी सिनेमा (फिल्म निर्माण) ===
अपने बैनर 'बागेश्वर बालाजी फिल्म्स' के तहत उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में साफ-सुथरी और पारिवारिक फिल्मों को बढ़ावा देने के ध्येय से कदम रखा। उनकी मुख्य फीचर फिल्म "सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार" है, जिसमें उन्होंने लीड एक्टर और प्रोड्यूसर की भूमिका निभाई है। वर्तमान में, वे अपने भतीजे के नाम पर स्थापित प्रोडक्शन कंपनी 'यक्षित गौरव राय सिनेमा' (Yakshit Gaurav Rai Cinema) के मैनेजिंग डायरेक्टर (M.D.) के रूप में भी कार्यरत हैं और इसके तहत नई फिल्मों के निर्माण की योजना बना रहे
=== खेलकूद और व्यक्तिगत रुचियाँ ===
अभिनय और फिल्म निर्माण के अलावा, सुधांशु कृष्ण राय की बचपन से ही खेलकूद में गहरी रुचि रही है। वे अपने शुरुआती दिनों में स्थानीय स्तर पर क्रिकेट और कबड्डी के खेल में काफी सक्रिय रहे। इसके साथ ही वे बैडमिंटन और अन्य पारंपरिक खेलों में भी उत्साहपूर्वक भाग लेते थे।
== फिल्मोग्राफी ==
=== फिल्में ===
* सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार (भोजपुरी) - अभिनेता एवं मुख्य निर्माता
* बायपास रोड (2019, बॉलीवुड) - वॉचमैन
* पटना शुक्ला (2024, बॉलीवुड) - वार्ड बॉय
* हारर है (भोजपुरी, आगामी) - मुख्य अभिनेता (भूत-प्रेतों पर आधारित फ़िल्म)
* रंगेबाज़ (भोजपुरी, आगामी) - मुख्य अभिनेता (फ़िल्म स्टार एंटरटेनर प्रोडक्शन)
=== ओटीटी (OTT) और टीवी धारावाहिक ===
* त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर (2024, नेटफ्लिक्स) - सत्संगी (एपिसोड 9)
* क्राइम अलर्ट - विभिन्न भूमिकाएं
* सावधान इंडिया - विभिन्न भूमिकाएं
== समाचार एवं मीडिया संदर्भ ==
<references />
* दैनिक जागरण (कानपुर/बिहार संस्करण, 11 जुलाई 2023) - "सुधांशु कृष्ण राय व गणेश शंकर सोनी की भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' का भव्य मुहूर्त सम्पन्न" (फिल्म निर्माण, भव्य मुहूर्त और मुख्य कलाकार सुधांशु कृष्ण राय, रूपा मिश्रा व यक्षित गौरव राय पर विशेष राष्ट्रीय प्रिंट कवरेज)।
* दैनिक जागरण (बलिया संस्करण) - "भोजपुरी रग-रग में, इसे अर्श तक पहुंचाना मुख्य ध्येय" (अभिनेता व निर्माता सुधांशु राय का विशेष साक्षात्कार, जिसमें नरहीं गांव के मूल निवासी होने और सती मइया रखिह सेंदुरवा के लाज आदि फ़िल्मों का उल्लेख है)।
* जनसंदेश टाइम्स (बलिया संस्करण) - "अश्लीलता परोसने वालों को नकारें" (अभिनेता, निर्माता व गायक सुधांशु राय की आगामी हॉरर फ़िल्म 'हारर है', फ़िल्म 'रंगेबाज़' और भोजपुरी एल्बम 'तरक्की देख जलेला' पर विशेष प्रेस वार्ता रिपोर्ट)।
* जन सागर टुडे (मनोरंजन/आजमगढ़) - "भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' का फर्स्ट लुक आउट, पोस्ट-प्रोडक्शन का काम पूरा।"
* हिन्द लाइव साप्ताहिक (मनोरंजन ब्लॉक, अंक 20) - "सुधांशु कृष्ण राय से पूजा तिवारी रचाई शादी, सोशल मीडिया पर फोटो हुए वायरल" (फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' के दृश्य पर विशेष मीडिया रिपोर्ट)।
* यशभूमि हिंदी समाचारपत्र (कुरुक्षेत्र संस्करण, 12 जुलाई 2023) - "सुधांशु कृष्ण राय व गणेश शंकर सोनी की भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' का भव्य मुहूर्त सम्पन्न।"
* हिंदी दैनिक घटनाएं (सिनेमा न्यूज़ संस्करण, 12 जुलाई 2023) - "भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' के भव्य मुहूर्त तथा निर्माण पर विशेष मीडिया कवरेज।"
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://imdb.com सुधांशु कृष्ण राय] आईएमडीबी (IMDb) पर
* [https://facebook.com सुधांशु कृष्ण राय] फेसबुक पर
* [https://instagram.com सुधांशु कृष्ण राय] इंस्टाग्राम पर
<references />
[[File:Sudhanshu_Krishn_Rai_Actor.jpg.jpg | thumb | सुधांशु कृष्ण राय (शूटिंग के दौरान)]]
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/* समाचार एवं मीडिया संदर्भ */ छोटा सा सुधार किया।
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{{Infobox actor
| name = Sudhanshu Krishn Rai
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| caption = Sudhanshu Krishn Rai (Abhineta va Nirmata)
| birth_date = 10 July 1994
| birth_place = Narhi, Ballia, Uttar Pradesh, Bharat
| nationality = Bhartiya
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| years_active = 2017–vartaman
| known_for = Sajni Chura Lihli Dilwa Hamar, Bypass Road
}}
'''[[File:Sudhanshu Krishn Rai Actor Primary.jpg | thumb | सुधांशु कृष्ण राय]]
'''सुधांशु कृष्ण राय''' (जन्म: 4 नवंबर 1992) , हालांकि आधिकारिक सरकारी दस्तावेजों और उनके वैश्विक IMDb प्रोफाइल पर उनकी जन्मतिथि 10 जुलाई 1994 दर्ज है।
एक भारतीय फिल्म निर्माता और अभिनेता हैं, जो मुख्य रूप से हिंदी टेलीविजन, बॉलीवुड और क्षेत्रीय भोजपुरी सिनेमा में अपने काम के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने 50 से अधिक लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों में अभिनय किया है और फिल्म निर्माता के रूप में 'बागेश्वर बालाजी फिल्म्स प्रोडक्शन प्राइवेट लिमिटेड' (Bageshwar Balaji Films Production Pvt. Ltd.) के एम.डी. (M.D.) हैं।
== प्रारंभिक जीवन ==
सुधांशु कृष्ण राय का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नरही गांव में एक प्रतिष्ठित राय परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री संतोष कुमार राय है और उनकी माता का नाम स्वर्गीय शिखा राय था। उनका पारिवारिक जुड़ाव कला और सिनेमा से गहरा है; बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री संदाली सिन्हा उनकी बुआ की लड़की हैं। उनके बड़े भाई परमांशु कुमार राय (गौरव राय) हैं, जो उनकी फिल्मों की पटकथा लिखते हैं। उनकी भाभी मोनिका राय हैं और उनका भतीजा यक्षित गौरव राय है, जिन्होंने बाल कलाकार के रूप में भोजपुरी सिनेमा में कदम रख लिया है।राय ने अपनी प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड), इलाहाबाद से पूरी की। उन्होंने साल 2010 में श्री गांधी स्मारक इंटर कॉलेज, भीरपुर (गाज़ीपुर) से अपनी हाई स्कूल (10वीं) की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके पश्चात, साल 2012 में उन्होंने गोपाल इण्टर कॉलेज, कसौंडर (बलिया) से विज्ञान वर्ग (Science Stream) में अपनी इंटरमीडिएट (12वीं) की पढ़ाई पूरी की।
== करियर ==
राय ने अपने करियर की शुरुआत भारतीय टेलीविजन उद्योग से की। उन्होंने 'क्राइम अलर्ट' और 'सावधान इंडिया' के कई एपिसोड्स में मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। इसके अलावा उन्होंने कई प्रसिद्ध सीरियल्स जैसे 'परमावतार श्री कृष्ण', 'शक्ति - अस्तित्व के एहसास की', 'अलीबाबा 40 चोर', 'तेनाली रामा', 'विघ्नहर्ता गणेश' और 'मेरे साईं' में काम किया।
=== बॉलीवुड और ओटीटी (OTT) ===
राय ने साल 2019 में बॉलीवुड फिल्म 'बायпас रोड' में एक वॉचमैन का किरदार निभाया था। साल 2024 में, उन्होंने नेटफ्लिक्स की सीरीज़ 'त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर' के एपिसोड 9 में 'सत्संगी' का किरदार निभाया। उन्होंने बॉलीवुड फिल्म 'पटना शुक्ला' (2024) में एक वार्ड बॉय का किरदार भी निभाया है।
=== भोजपुरी सिनेमा (फिल्म निर्माण) ===
अपने बैनर 'बागेश्वर बालाजी फिल्म्स' के तहत उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में साफ-सुथरी और पारिवारिक फिल्मों को बढ़ावा देने के ध्येय से कदम रखा। उनकी मुख्य फीचर फिल्म "सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार" है, जिसमें उन्होंने लीड एक्टर और प्रोड्यूसर की भूमिका निभाई है। वर्तमान में, वे अपने भतीजे के नाम पर स्थापित प्रोडक्शन कंपनी 'यक्षित गौरव राय सिनेमा' (Yakshit Gaurav Rai Cinema) के मैनेजिंग डायरेक्टर (M.D.) के रूप में भी कार्यरत हैं और इसके तहत नई फिल्मों के निर्माण की योजना बना रहे
=== खेलकूद और व्यक्तिगत रुचियाँ ===
अभिनय और फिल्म निर्माण के अलावा, सुधांशु कृष्ण राय की बचपन से ही खेलकूद में गहरी रुचि रही है। वे अपने शुरुआती दिनों में स्थानीय स्तर पर क्रिकेट और कबड्डी के खेल में काफी सक्रिय रहे। इसके साथ ही वे बैडमिंटन और अन्य पारंपरिक खेलों में भी उत्साहपूर्वक भाग लेते थे।
== फिल्मोग्राफी ==
=== फिल्में ===
* सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार (भोजपुरी) - अभिनेता एवं मुख्य निर्माता
* बायपास रोड (2019, बॉलीवुड) - वॉचमैन
* पटना शुक्ला (2024, बॉलीवुड) - वार्ड बॉय
* हारर है (भोजपुरी, आगामी) - मुख्य अभिनेता (भूत-प्रेतों पर आधारित फ़िल्म)
* रंगेबाज़ (भोजपुरी, आगामी) - मुख्य अभिनेता (फ़िल्म स्टार एंटरटेनर प्रोडक्शन)
=== ओटीटी (OTT) और टीवी धारावाहिक ===
* त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर (2024, नेटफ्लिक्स) - सत्संगी (एपिसोड 9)
* क्राइम अलर्ट - विभिन्न भूमिकाएं
* सावधान इंडिया - विभिन्न भूमिकाएं
== समाचार एवं मीडिया संदर्भ ==
<references />
* ''हैपेन रीसेंटली (Happen Recently)'' (10 जुलाई 2023) - [https://happenrecently.com/sudhanshu-krishna-rai-and-ganesh-shankar-sonis-bhojpuri-film-sajni-chura-lihli-dilwa-hamar/ "Sudhanshu Krishna Rai and Ganesh Shankar Soni’s Bhojpuri film 'Sajni Chura lihli dilwa Hamar'"] (बागेश्वर बालाजी फिल्म्स प्रोडक्शन की फ़िल्म के भव्य मुहूर्त और मुख्य कलाकार सुधांशु कृष्ण राय पर विशेष डिजिटल मीडिया रिपोर्ट)।
* ''समर इंडिया लाइव (Samar India Live)'' - [https://samarindialive.in/page/2178/?newsmaticargs=custom&posts=random "अभिनेता और फिल्म निर्माता सुधांशु कृष्ण राय की भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' पर विशेष रिपोर्ट"] (बागेश्वर बालाजी फिल्म्स प्रोडक्शन के तहत मुख्य भूमिका और क्षेत्रीय सिनेमा में योगदान पर डिजिटल समाचार पोर्टल कवरेज)।
* दैनिक जागरण (कानपुर/बिहार संस्करण, 11 जुलाई 2023) - "सुधांशु कृष्ण राय व गणेश शंकर सोनी की भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' का भव्य मुहूर्त सम्पन्न" (फिल्म निर्माण, भव्य मुहूर्त और मुख्य कलाकार सुधांशु कृष्ण राय, रूपा मिश्रा व यक्षित गौरव राय पर विशेष राष्ट्रीय प्रिंट कवरेज)।
* दैनिक जागरण (बलिया संस्करण) - "भोजपुरी रग-रग में, इसे अर्श तक पहुंचाना मुख्य ध्येय" (अभिनेता व निर्माता सुधांशु राय का विशेष साक्षात्कार, जिसमें नरहीं गांव के मूल निवासी होने और सती मइया रखिह सेंदुरवा के लाज आदि फ़िल्मों का उल्लेख है)।
* जनसंदेश टाइम्स (बलिया संस्करण) - "अश्लीलता परोसने वालों को नकारें" (अभिनेता, निर्माता व गायक सुधांशु राय की आगामी हॉरर फ़िल्म 'हारर है', फ़िल्म 'रंगेबाज़' और भोजपुरी एल्बम 'तरक्की देख जलेला' पर विशेष प्रेस वार्ता रिपोर्ट)।
* जन सागर टुडे (मनोरंजन/आजमगढ़) - "भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' का फर्स्ट लुक आउट, पोस्ट-प्रोडक्शन का काम पूरा।"
* हिन्द लाइव साप्ताहिक (मनोरंजन ब्लॉक, अंक 20) - "सुधांशु कृष्ण राय से पूजा तिवारी रचाई शादी, सोशल मीडिया पर फोटो हुए वायरल" (फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' के दृश्य पर विशेष मीडिया रिपोर्ट)।
* यशभूमि हिंदी समाचारपत्र (कुरुक्षेत्र संस्करण, 12 जुलाई 2023) - "सुधांशु कृष्ण राय व गणेश शंकर सोनी की भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' का भव्य मुहूर्त सम्पन्न।"
* हिंदी दैनिक घटनाएं (सिनेमा न्यूज़ संस्करण, 12 जुलाई 2023) - "भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' के भव्य मुहूर्त तथा निर्माण पर विशेष मीडिया कवरेज।"
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://imdb.com सुधांशु कृष्ण राय] आईएमडीबी (IMDb) पर
* [https://facebook.com सुधांशु कृष्ण राय] फेसबुक पर
* [https://instagram.com सुधांशु कृष्ण राय] इंस्टाग्राम पर
<references />
[[File:Sudhanshu_Krishn_Rai_Actor.jpg.jpg | thumb | सुधांशु कृष्ण राय (शूटिंग के दौरान)]]
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/* समाचार एवं मीडिया संदर्भ */ छोटा सा सुधार किया।
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text/x-wiki
{{db-spam}}
{{Infobox actor
| name = Sudhanshu Krishn Rai
| image =Sudhanshu Krishn Rai Actor Primary.jpg
| caption = Sudhanshu Krishn Rai (Abhineta va Nirmata)
| birth_date = 10 July 1994
| birth_place = Narhi, Ballia, Uttar Pradesh, Bharat
| nationality = Bhartiya
| occupation = Abhineta, Film Nirmata, Lekhak
| years_active = 2017–vartaman
| known_for = Sajni Chura Lihli Dilwa Hamar, Bypass Road
}}
'''[[File:Sudhanshu Krishn Rai Actor Primary.jpg | thumb | सुधांशु कृष्ण राय]]
'''सुधांशु कृष्ण राय''' (जन्म: 4 नवंबर 1992) , हालांकि आधिकारिक सरकारी दस्तावेजों और उनके वैश्विक IMDb प्रोफाइल पर उनकी जन्मतिथि 10 जुलाई 1994 दर्ज है।
एक भारतीय फिल्म निर्माता और अभिनेता हैं, जो मुख्य रूप से हिंदी टेलीविजन, बॉलीवुड और क्षेत्रीय भोजपुरी सिनेमा में अपने काम के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने 50 से अधिक लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों में अभिनय किया है और फिल्म निर्माता के रूप में 'बागेश्वर बालाजी फिल्म्स प्रोडक्शन प्राइवेट लिमिटेड' (Bageshwar Balaji Films Production Pvt. Ltd.) के एम.डी. (M.D.) हैं।
== प्रारंभिक जीवन ==
सुधांशु कृष्ण राय का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नरही गांव में एक प्रतिष्ठित राय परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री संतोष कुमार राय है और उनकी माता का नाम स्वर्गीय शिखा राय था। उनका पारिवारिक जुड़ाव कला और सिनेमा से गहरा है; बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री संदाली सिन्हा उनकी बुआ की लड़की हैं। उनके बड़े भाई परमांशु कुमार राय (गौरव राय) हैं, जो उनकी फिल्मों की पटकथा लिखते हैं। उनकी भाभी मोनिका राय हैं और उनका भतीजा यक्षित गौरव राय है, जिन्होंने बाल कलाकार के रूप में भोजपुरी सिनेमा में कदम रख लिया है।राय ने अपनी प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड), इलाहाबाद से पूरी की। उन्होंने साल 2010 में श्री गांधी स्मारक इंटर कॉलेज, भीरपुर (गाज़ीपुर) से अपनी हाई स्कूल (10वीं) की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके पश्चात, साल 2012 में उन्होंने गोपाल इण्टर कॉलेज, कसौंडर (बलिया) से विज्ञान वर्ग (Science Stream) में अपनी इंटरमीडिएट (12वीं) की पढ़ाई पूरी की।
== करियर ==
राय ने अपने करियर की शुरुआत भारतीय टेलीविजन उद्योग से की। उन्होंने 'क्राइम अलर्ट' और 'सावधान इंडिया' के कई एपिसोड्स में मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। इसके अलावा उन्होंने कई प्रसिद्ध सीरियल्स जैसे 'परमावतार श्री कृष्ण', 'शक्ति - अस्तित्व के एहसास की', 'अलीबाबा 40 चोर', 'तेनाली रामा', 'विघ्नहर्ता गणेश' और 'मेरे साईं' में काम किया।
=== बॉलीवुड और ओटीटी (OTT) ===
राय ने साल 2019 में बॉलीवुड फिल्म 'बायпас रोड' में एक वॉचमैन का किरदार निभाया था। साल 2024 में, उन्होंने नेटफ्लिक्स की सीरीज़ 'त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर' के एपिसोड 9 में 'सत्संगी' का किरदार निभाया। उन्होंने बॉलीवुड फिल्म 'पटना शुक्ला' (2024) में एक वार्ड बॉय का किरदार भी निभाया है।
=== भोजपुरी सिनेमा (फिल्म निर्माण) ===
अपने बैनर 'बागेश्वर बालाजी फिल्म्स' के तहत उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में साफ-सुथरी और पारिवारिक फिल्मों को बढ़ावा देने के ध्येय से कदम रखा। उनकी मुख्य फीचर फिल्म "सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार" है, जिसमें उन्होंने लीड एक्टर और प्रोड्यूसर की भूमिका निभाई है। वर्तमान में, वे अपने भतीजे के नाम पर स्थापित प्रोडक्शन कंपनी 'यक्षित गौरव राय सिनेमा' (Yakshit Gaurav Rai Cinema) के मैनेजिंग डायरेक्टर (M.D.) के रूप में भी कार्यरत हैं और इसके तहत नई फिल्मों के निर्माण की योजना बना रहे
=== खेलकूद और व्यक्तिगत रुचियाँ ===
अभिनय और फिल्म निर्माण के अलावा, सुधांशु कृष्ण राय की बचपन से ही खेलकूद में गहरी रुचि रही है। वे अपने शुरुआती दिनों में स्थानीय स्तर पर क्रिकेट और कबड्डी के खेल में काफी सक्रिय रहे। इसके साथ ही वे बैडमिंटन और अन्य पारंपरिक खेलों में भी उत्साहपूर्वक भाग लेते थे।
== फिल्मोग्राफी ==
=== फिल्में ===
* सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार (भोजपुरी) - अभिनेता एवं मुख्य निर्माता
* बायपास रोड (2019, बॉलीवुड) - वॉचमैन
* पटना शुक्ला (2024, बॉलीवुड) - वार्ड बॉय
* हारर है (भोजपुरी, आगामी) - मुख्य अभिनेता (भूत-प्रेतों पर आधारित फ़िल्म)
* रंगेबाज़ (भोजपुरी, आगामी) - मुख्य अभिनेता (फ़िल्म स्टार एंटरटेनर प्रोडक्शन)
=== ओटीटी (OTT) और टीवी धारावाहिक ===
* त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर (2024, नेटफ्लिक्स) - सत्संगी (एपिसोड 9)
* क्राइम अलर्ट - विभिन्न भूमिकाएं
* सावधान इंडिया - विभिन्न भूमिकाएं
== समाचार एवं मीडिया संदर्भ ==
<references />
* ''हैपेन रीसेंटली (Happen Recently)'' (10 जुलाई 2023) - [https://happenrecently.com/sudhanshu-krishna-rai-and-ganesh-shankar-sonis-bhojpuri-film-sajni-chura-lihli-dilwa-hamar/ "Sudhanshu Krishna Rai and Ganesh Shankar Soni’s Bhojpuri film 'Sajni Chura lihli dilwa Hamar'"] (बागेश्वर बालाजी फिल्म्स प्रोडक्शन की फ़िल्म के भव्य मुहूर्त और मुख्य कलाकार सुधांशु कृष्ण राय पर विशेष डिजिटल मीडिया रिपोर्ट)।
* ''समर इंडिया लाइव (Samar India Live)'' - [https://samarindialive.in/page/2178/?newsmaticargs=custom&posts=random "अभिनेता और फिल्म निर्माता सुधांशु कृष्ण राय की भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' पर विशेष रिपोर्ट"] (बागेश्वर बालाजी फिल्म्स प्रोडक्शन के तहत मुख्य भूमिका और क्षेत्रीय सिनेमा में योगदान पर डिजिटल समाचार पोर्टल कवरेज)।
* ''सिटी अपडेट (CitiUpdate)'' - [https://www.citiupdate.com "अभिनेता व फ़िल्म निर्माता सुधांशु कृष्ण राय की फ़िल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' पर विशेष न्यूज़ रिपोर्ट"] (क्षेत्रीय भोजपुरी सिनेमा, बागेश्वर बालाजी फिल्म्स और आगामी परियोजनाओं पर डिजिटल समाचार पोर्टल कवरेज)।
* दैनिक जागरण (कानपुर/बिहार संस्करण, 11 जुलाई 2023) - "सुधांशु कृष्ण राय व गणेश शंकर सोनी की भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' का भव्य मुहूर्त सम्पन्न" (फिल्म निर्माण, भव्य मुहूर्त और मुख्य कलाकार सुधांशु कृष्ण राय, रूपा मिश्रा व यक्षित गौरव राय पर विशेष राष्ट्रीय प्रिंट कवरेज)।
* दैनिक जागरण (बलिया संस्करण) - "भोजपुरी रग-रग में, इसे अर्श तक पहुंचाना मुख्य ध्येय" (अभिनेता व निर्माता सुधांशु राय का विशेष साक्षात्कार, जिसमें नरहीं गांव के मूल निवासी होने और सती मइया रखिह सेंदुरवा के लाज आदि फ़िल्मों का उल्लेख है)।
* जनसंदेश टाइम्स (बलिया संस्करण) - "अश्लीलता परोसने वालों को नकारें" (अभिनेता, निर्माता व गायक सुधांशु राय की आगामी हॉरर फ़िल्म 'हारर है', फ़िल्म 'रंगेबाज़' और भोजपुरी एल्बम 'तरक्की देख जलेला' पर विशेष प्रेस वार्ता रिपोर्ट)।
* जन सागर टुडे (मनोरंजन/आजमगढ़) - "भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' का फर्स्ट लुक आउट, पोस्ट-प्रोडक्शन का काम पूरा।"
* हिन्द लाइव साप्ताहिक (मनोरंजन ब्लॉक, अंक 20) - "सुधांशु कृष्ण राय से पूजा तिवारी रचाई शादी, सोशल मीडिया पर फोटो हुए वायरल" (फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' के दृश्य पर विशेष मीडिया रिपोर्ट)।
* यशभूमि हिंदी समाचारपत्र (कुरुक्षेत्र संस्करण, 12 जुलाई 2023) - "सुधांशु कृष्ण राय व गणेश शंकर सोनी की भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' का भव्य मुहूर्त सम्पन्न।"
* हिंदी दैनिक घटनाएं (सिनेमा न्यूज़ संस्करण, 12 जुलाई 2023) - "भोजपुरी फिल्म 'सजनी चुरा लिहली दिलवा हमार' के भव्य मुहूर्त तथा निर्माण पर विशेष मीडिया कवरेज।"
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://imdb.com सुधांशु कृष्ण राय] आईएमडीबी (IMDb) पर
* [https://facebook.com सुधांशु कृष्ण राय] फेसबुक पर
* [https://instagram.com सुधांशु कृष्ण राय] इंस्टाग्राम पर
<references />
[[File:Sudhanshu_Krishn_Rai_Actor.jpg.jpg | thumb | सुधांशु कृष्ण राय (शूटिंग के दौरान)]]
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बाबुषा कोहली
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Aman Arora PTL
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'''बाबुषा कोहली''' (जन्म: 6 फ़रवरी 1979) हिंदी की कवयित्री और गद्यकार हैं। <ref name="Hindwi">{{cite web |title=बाबुषा कोहली का परिचय |url=[https://www.hindwi.org/poets/babusha-kohli/profile](https://www.hindwi.org/poets/babusha-kohli/profile) |website=हिंदवी}}\</ref>
== साहित्यिक कृतियाँ ==
उनका कविता-संग्रह ''प्रेम गिलहरी दिल अखरोट'' भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित हुआ। उनकी अन्य प्रकाशित कृतियों में ''बावन चिट्ठियाँ'', ''भाप के घर में शीशे की लड़की'', ''तट से नहीं… पानी से बँधती है नाव'', ''उस लड़की का नाम ब्रह्मलता है'', ''मिज़राब'' और ''लौ'' शामिल हैं।<ref name="Hindwi" /><ref name="Rukh">{{cite web |title=बाबुषा कोहली |url=[https://rukhpublication.com/authors/baabusha-kohli/](https://rukhpublication.com/authors/baabusha-kohli/) |website=रुख़ पब्लिकेशन्स}}\</ref>
== पुरस्कार ==
बाबुषा कोहली को ''प्रेम गिलहरी दिल अखरोट'' के लिए भारतीय ज्ञानपीठ का नवलेखन पुरस्कार मिला।<ref name="Jnanpith">{{cite web |title=बाबुषा कोहली |url=[https://www.jnanpith.net/author_detail.html?id=175](https://www.jnanpith.net/author_detail.html?id=175) |website=भारतीय ज्ञानपीठ}}\</ref>
== संदर्भ ==
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कर्ज़ (2008 फ़िल्म)
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'''कर्ज़''' 2008 में बनी हिन्दी भाषा की नाट्य एक्शन फिल्म है। इसका निर्देशन [[सतीश कौशिक]] ने किया और मुख्य भूमिकाओं में [[हिमेश रेशमिया]] और [[उर्मिला मातोंडकर]] हैं।
यह फ़िल्म सुभाष घई निर्देशित और [[ऋषि कपूर]], [[सिमी गरेवाल]] एवं [[टीना मुनीम]] अभिनीत ब्लॉकबस्टर फ़िल्म [[कर्ज़ (फ़िल्म)|''कर्ज़'']] (1980) की रीमेक है। इस फ़िल्म का संगीत हिमेश रेशमिया ने ही बनाया है।
==कहानी==
रवि वर्मा ([[डीनो मोरिया]]) ने केन्या में गैंगस्टर सर जुदाह ([[गुलशन ग्रोवर]]) के खिलाफ एक अदालती मामला जीत लिया है। इससे उसे कई हज़ार एकड़ के अंगूर के बाग मिल जाते हैं। अपनी इस जीत का जश्न मनाने के लिए वह अपनी प्रेमिका कामिनी ([[उर्मिला मातोंडकर]]) से शादी करता है और उसे अपनी माँ और बहन से मिलवाने का फैसला करता है। रवि को इस बात का पता नहीं होता है कि कामिनी, जुदाह के साथ मिली हुई है। वह उस विमान में तोड़फोड़ कर देती है जिसमें वे सफर कर रहे होते हैं और खुद सुरक्षित बच निकलती है। जबकि रवि के पास कोई पैराशूट नहीं बचता और उसकी मौत हो जाती है। अब वह 'प्रिंसेस कामिनी' बन चुकी है जिसे रवि की सारी संपत्ति मिल जाती है। इसके कारण रवि की माँ और बहन को घोर गरीबी में जीने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
25 साल बाद, कहानी में मॉन्टी ([[हिमेश रेशमिया]]) की एंट्री होती है। वह जो जे.जे. ओबेरॉय ([[राज बब्बर]]) का गोद लिया हुआ बेटा है और दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में एक मशहूर संगीतकार और रॉक स्टार है। उसके पास सब कुछ होते हुए भी वह खुश नहीं है। उसे टीना (जिससे वह प्यार करता है) और अपने दोस्त व करीबी साथी डॉ. दयाल के साथ समय बिताने में खुशी मिलती है। मॉन्टी को रवि के जीवन की घटनाओं की यादें (फ्लैशबैक) आने लगती हैं। वह यह समझने के लिए केन्या जाने का फैसला करता है कि ऐसा क्यों हो रहा है। आखिरकार, मॉन्टी को एहसास होता है कि वह असल में रवि का ही पुनर्जन्म है। अपने हादसे से जुड़ी सभी बातें याद आने के बाद मॉन्टी अपनी (यानी रवि की) माँ और बहन को खोजने निकल पड़ता है। वह प्रिंसेस कामिनी से दोस्ती करता है, जो कि संयोग से टीना को भी जानती है। कामिनी अब जुदाह की प्रेमिका है और रवि की संपत्ति की मालकिन है। मॉन्टी उसे अपने पुनर्जन्म के बारे में बताता है, लेकिन कहता है कि उसे यह याद नहीं है कि उसकी (यानी रवि की) मौत कैसे हुई थी। कामिनी उसे हादसे के बारे में गुमराह करती है और झूठ बोलती है कि रवि की माँ और बहन अब इस दुनिया में नहीं है। वह टीना और कबीरा के साथ मिलकर प्रिंसेस कामिनी को सज़ा दिलाने की योजना बनाता है।
मॉन्टी प्रिंसेस कामिनी को शादी करने के लिए मना लेता है। वे उसके शो के दौरान स्टेज पर ही शादी कर लेते हैं। परफॉरमेंस के दौरान वह उस हादसे को फिर से दोहराता है ताकि राजकुमारी कामिनी को यकीन हो जाए कि उसे याद है कि उसी ने उसे (रवि को) मारा था। इसके बाद दोनों के बीच के बीच तीखी बहस होती है। इसके बाद वह गुस्से में रवि की हत्या की बात कबूल कर लेती है।
== मुख्य कलाकार ==
* [[हिमेश रेशमिया]] — मॉन्टी ओबेरॉय, रवि प्रसाद वर्मा का पुनर्जन्म व्यक्तित्व
* [[उर्मिला मातोंडकर]] — कामिनी, रवि की पत्नी
* [[डीनो मोरिया]] — रवि प्रसाद वर्मा, कामिनी का पति
* [[डैनी डेंजोंगपा]] — कबीर चाचा
* [[राज बब्बर]] — जी. जी. ओबेरॉय
* [[स्मिता बंसल]] — ज्योति, रवि की बहन
* श्वेता कुमार — टीना खंडेलवाल, मॉन्टी की प्रेमिका
* [[रोहिणी हट्टंगड़ी]] — शांता वर्मा, रवि की माता
* [[गुलशन ग्रोवर]] — सर जुदाह
* [[बख्तियार ईरानी]] — डॉ. दयाल, मॉन्टी का दोस्त
* [[हिमानी शिवपुरी]] — नेहा ओबेरॉय, जी. जी. ओबेरॉय की पत्नी
* [[शिवा रिन्दानी]] — सर जुदाह का गुंडा
* [[असरानी]] — कॉलेज के प्रिंसिपल
* [[सुधीर पांडे]] — जॉन
== संगीत ==
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}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{imdb title|1156148|कर्ज़}}
[[श्रेणी:2008 में बनी हिन्दी फ़िल्म]]
[[श्रेणी: हिमेश रेशमिया द्वारा संगीतबद्ध फिल्में]]
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}}
'''कर्ज़''' 2008 में बनी हिन्दी भाषा की नाट्य एक्शन फिल्म है। इसका निर्देशन [[सतीश कौशिक]] ने किया और मुख्य भूमिकाओं में [[हिमेश रेशमिया]] और [[उर्मिला मातोंडकर]] हैं।
यह फ़िल्म सुभाष घई निर्देशित और [[ऋषि कपूर]], [[सिमी गरेवाल]] एवं [[टीना मुनीम]] अभिनीत ब्लॉकबस्टर फ़िल्म [[कर्ज़ (फ़िल्म)|''कर्ज़'']] (1980) की रीमेक है। इस फ़िल्म का संगीत हिमेश रेशमिया ने ही बनाया है।
==कहानी==
रवि वर्मा ([[डीनो मोरिया]]) ने केन्या में गैंगस्टर सर जुदाह ([[गुलशन ग्रोवर]]) के खिलाफ एक अदालती मामला जीत लिया है। इससे उसे कई हज़ार एकड़ के अंगूर के बाग मिल जाते हैं। अपनी इस जीत का जश्न मनाने के लिए वह अपनी प्रेमिका कामिनी ([[उर्मिला मातोंडकर]]) से शादी करता है और उसे अपनी माँ और बहन से मिलवाने का फैसला करता है। रवि को इस बात का पता नहीं होता है कि कामिनी, जुदाह के साथ मिली हुई है। वह उस विमान में तोड़फोड़ कर देती है जिसमें वे सफर कर रहे होते हैं और खुद सुरक्षित बच निकलती है। जबकि रवि के पास कोई पैराशूट नहीं बचता और उसकी मौत हो जाती है। अब वह 'प्रिंसेस कामिनी' बन चुकी है जिसे रवि की सारी संपत्ति मिल जाती है। इसके कारण रवि की माँ और बहन को घोर गरीबी में जीने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
25 साल बाद, कहानी में मॉन्टी ([[हिमेश रेशमिया]]) की एंट्री होती है। वह जो जे.जे. ओबेरॉय ([[राज बब्बर]]) का गोद लिया हुआ बेटा है और दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में एक मशहूर संगीतकार और रॉक स्टार है। उसके पास सब कुछ होते हुए भी वह खुश नहीं है। उसे टीना (जिससे वह प्यार करता है) और अपने दोस्त व करीबी साथी डॉ. दयाल के साथ समय बिताने में खुशी मिलती है। मॉन्टी को रवि के जीवन की घटनाओं की यादें (फ्लैशबैक) आने लगती हैं। वह यह समझने के लिए केन्या जाने का फैसला करता है कि ऐसा क्यों हो रहा है। आखिरकार, मॉन्टी को एहसास होता है कि वह असल में रवि का ही पुनर्जन्म है। अपने हादसे से जुड़ी सभी बातें याद आने के बाद मॉन्टी अपनी (यानी रवि की) माँ और बहन को खोजने निकल पड़ता है। वह प्रिंसेस कामिनी से दोस्ती करता है, जो कि संयोग से टीना को भी जानती है। कामिनी अब जुदाह की प्रेमिका है और रवि की संपत्ति की मालकिन है। मॉन्टी उसे अपने पुनर्जन्म के बारे में बताता है, लेकिन कहता है कि उसे यह याद नहीं है कि उसकी (यानी रवि की) मौत कैसे हुई थी। कामिनी उसे हादसे के बारे में गुमराह करती है और झूठ बोलती है कि रवि की माँ और बहन अब इस दुनिया में नहीं है। वह टीना और कबीर चाचा ([[डैनी डेन्जोंगपा]]) के साथ मिलकर प्रिंसेस कामिनी को सज़ा दिलाने की योजना बनाता है।
मॉन्टी प्रिंसेस कामिनी को शादी करने के लिए मना लेता है। वे उसके शो के दौरान स्टेज पर ही शादी कर लेते हैं। परफॉरमेंस के दौरान वह उस हादसे को फिर से दोहराता है ताकि राजकुमारी कामिनी को यकीन हो जाए कि उसे याद है कि उसी ने उसे (रवि को) मारा था। इसके बाद दोनों के बीच के बीच तीखी बहस होती है। इसके बाद वह गुस्से में रवि की हत्या की बात कबूल कर लेती है।
== मुख्य कलाकार ==
* [[हिमेश रेशमिया]] — मॉन्टी ओबेरॉय, रवि प्रसाद वर्मा का पुनर्जन्म व्यक्तित्व
* [[उर्मिला मातोंडकर]] — कामिनी, रवि की पत्नी
* [[डीनो मोरिया]] — रवि प्रसाद वर्मा, कामिनी का पति
* [[डैनी डेंजोंगपा]] — कबीर चाचा
* [[राज बब्बर]] — जी. जी. ओबेरॉय
* [[स्मिता बंसल]] — ज्योति, रवि की बहन
* श्वेता कुमार — टीना खंडेलवाल, मॉन्टी की प्रेमिका
* [[रोहिणी हट्टंगड़ी]] — शांता वर्मा, रवि की माता
* [[गुलशन ग्रोवर]] — सर जुदाह
* [[बख्तियार ईरानी]] — डॉ. दयाल, मॉन्टी का दोस्त
* [[हिमानी शिवपुरी]] — नेहा ओबेरॉय, जी. जी. ओबेरॉय की पत्नी
* [[शिवा रिन्दानी]] — सर जुदाह का गुंडा
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* [[सुधीर पांडे]] — जॉन
== संगीत ==
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== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{imdb title|1156148|कर्ज़}}
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[[श्रेणी: हिमेश रेशमिया द्वारा संगीतबद्ध फिल्में]]
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'''कर्ज़''' 2008 में बनी हिन्दी भाषा की नाट्य एक्शन फिल्म है। इसका निर्देशन [[सतीश कौशिक]] ने किया और मुख्य भूमिकाओं में [[हिमेश रेशमिया]] और [[उर्मिला मातोंडकर]] हैं।
यह फ़िल्म सुभाष घई निर्देशित और [[ऋषि कपूर]], [[सिमी गरेवाल]] एवं [[टीना मुनीम]] अभिनीत ब्लॉकबस्टर फ़िल्म [[कर्ज़ (फ़िल्म)|''कर्ज़'']] (1980) की रीमेक है। इस फ़िल्म का संगीत हिमेश रेशमिया ने ही बनाया है।
==कहानी==
रवि वर्मा ([[डीनो मोरिया]]) ने केन्या में गैंगस्टर सर जुदाह ([[गुलशन ग्रोवर]]) के खिलाफ एक अदालती मामला जीत लिया है। इससे उसे कई हज़ार एकड़ के अंगूर के बाग मिल जाते हैं। अपनी इस जीत का जश्न मनाने के लिए वह अपनी प्रेमिका कामिनी ([[उर्मिला मातोंडकर]]) से शादी करता है और उसे अपनी माँ और बहन से मिलवाने का फैसला करता है। रवि को इस बात का पता नहीं होता है कि कामिनी, जुदाह के साथ मिली हुई है। वह उस विमान में तोड़फोड़ कर देती है जिसमें वे सफर कर रहे होते हैं और खुद सुरक्षित बच निकलती है। जबकि रवि के पास कोई पैराशूट नहीं बचता और उसकी मौत हो जाती है। अब वह 'प्रिंसेस कामिनी' बन चुकी है जिसे रवि की सारी संपत्ति मिल जाती है। इसके कारण रवि की माँ और बहन को घोर गरीबी में जीने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
25 साल बाद, कहानी में मॉन्टी ([[हिमेश रेशमिया]]) की एंट्री होती है। वह जो जे.जे. ओबेरॉय ([[राज बब्बर]]) का गोद लिया हुआ बेटा है और दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में एक मशहूर संगीतकार और रॉक स्टार है। उसके पास सब कुछ होते हुए भी वह खुश नहीं है। उसे टीना (जिससे वह प्यार करता है) और अपने दोस्त व करीबी साथी डॉ. दयाल के साथ समय बिताने में खुशी मिलती है। मॉन्टी को रवि के जीवन की घटनाओं की यादें (फ्लैशबैक) आने लगती हैं। वह यह समझने के लिए केन्या जाने का फैसला करता है कि ऐसा क्यों हो रहा है। आखिरकार, मॉन्टी को एहसास होता है कि वह असल में रवि का ही पुनर्जन्म है। अपने हादसे से जुड़ी सभी बातें याद आने के बाद मॉन्टी अपनी (यानी रवि की) माँ और बहन को खोजने निकल पड़ता है। वह प्रिंसेस कामिनी से दोस्ती करता है, जो कि संयोग से टीना को भी जानती है। कामिनी अब जुदाह की प्रेमिका है और रवि की संपत्ति की मालकिन है। मॉन्टी उसे अपने पुनर्जन्म के बारे में बताता है, लेकिन कहता है कि उसे यह याद नहीं है कि उसकी (यानी रवि की) मौत कैसे हुई थी। कामिनी उसे हादसे के बारे में गुमराह करती है और झूठ बोलती है कि रवि की माँ और बहन अब इस दुनिया में नहीं है। वह टीना और कबीर चाचा ([[डैनी डेन्जोंगपा]]) के साथ मिलकर प्रिंसेस कामिनी को सज़ा दिलाने की योजना बनाता है।
मॉन्टी प्रिंसेस कामिनी को शादी करने के लिए मना लेता है। वे उसके शो के दौरान स्टेज पर ही शादी कर लेते हैं। परफॉरमेंस के दौरान वह उस हादसे को फिर से दोहराता है ताकि राजकुमारी कामिनी को यकीन हो जाए कि उसे याद है कि उसी ने उसे (रवि को) मारा था। इसके बाद दोनों के बीच के बीच तीखी बहस होती है। इसके बाद वह गुस्से में रवि की हत्या की बात कबूल कर लेती है।
== मुख्य कलाकार ==
* [[हिमेश रेशमिया]] — मॉन्टी ओबेरॉय, रवि प्रसाद वर्मा का पुनर्जन्म व्यक्तित्व
* [[उर्मिला मातोंडकर]] — कामिनी, रवि की पत्नी
* [[डीनो मोरिया]] — रवि प्रसाद वर्मा, कामिनी का पति
* [[डैनी डेंजोंगपा]] — कबीर चाचा
* [[राज बब्बर]] — जी. जी. ओबेरॉय
* [[स्मिता बंसल]] — ज्योति, रवि की बहन
* श्वेता कुमार — टीना खंडेलवाल, मॉन्टी की प्रेमिका
* [[रोहिणी हट्टंगड़ी]] — शांता वर्मा, रवि की माता
* [[गुलशन ग्रोवर]] — सर जुदाह
* [[बख्तियार ईरानी]] — डॉ. दयाल, मॉन्टी का दोस्त
* [[हिमानी शिवपुरी]] — नेहा ओबेरॉय, जी. जी. ओबेरॉय की पत्नी
* [[शिवा रिन्दानी]] — सर जुदाह का गुंडा
* [[असरानी]] — कॉलेज के प्रिंसिपल
* [[सुधीर पांडे]] — जॉन
== संगीत ==
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== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{imdb title|1156148|कर्ज़}}
[[श्रेणी:2008 में बनी हिन्दी फ़िल्म]]
[[श्रेणी: हिमेश रेशमिया द्वारा संगीतबद्ध फिल्में]]
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{{Infobox Film
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'''कर्ज़''' 2008 में बनी हिन्दी भाषा की नाट्य एक्शन फिल्म है। इसका निर्देशन [[सतीश कौशिक]] ने किया और मुख्य भूमिकाओं में [[हिमेश रेशमिया]] और [[उर्मिला मातोंडकर]] हैं।
यह फ़िल्म सुभाष घई निर्देशित और [[ऋषि कपूर]], [[सिमी गरेवाल]] एवं [[टीना मुनीम]] अभिनीत ब्लॉकबस्टर फ़िल्म [[कर्ज़ (फ़िल्म)|''कर्ज़'']] (1980) की रीमेक है। इस फ़िल्म का संगीत हिमेश रेशमिया ने ही बनाया है।
==कहानी==
रवि वर्मा ([[डीनो मोरिया]]) ने केन्या में गैंगस्टर सर जुदाह ([[गुलशन ग्रोवर]]) के खिलाफ एक अदालती मामला जीत लिया है। इससे उसे कई हज़ार एकड़ के अंगूर के बाग मिल जाते हैं। अपनी इस जीत का जश्न मनाने के लिए वह अपनी प्रेमिका कामिनी ([[उर्मिला मातोंडकर]]) से शादी करता है और उसे अपनी माँ और बहन से मिलवाने का फैसला करता है। रवि को इस बात का पता नहीं होता है कि कामिनी, जुदाह के साथ मिली हुई है। वह उस विमान में तोड़फोड़ कर देती है जिसमें वे सफर कर रहे होते हैं और खुद सुरक्षित बच निकलती है। जबकि रवि के पास कोई पैराशूट नहीं बचता और उसकी मौत हो जाती है। अब वह 'प्रिंसेस कामिनी' बन चुकी है जिसे रवि की सारी संपत्ति मिल जाती है। इसके कारण रवि की माँ और बहन को घोर गरीबी में जीने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
25 साल बाद, कहानी में मॉन्टी ([[हिमेश रेशमिया]]) की एंट्री होती है। वह जो जे.जे. ओबेरॉय ([[राज बब्बर]]) का गोद लिया हुआ बेटा है और दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में एक मशहूर संगीतकार और रॉक स्टार है। उसके पास सब कुछ होते हुए भी वह खुश नहीं है। उसे टीना (जिससे वह प्यार करता है) और अपने दोस्त व करीबी साथी डॉ. दयाल के साथ समय बिताने में खुशी मिलती है। मॉन्टी को रवि के जीवन की घटनाओं की यादें (फ्लैशबैक) आने लगती हैं। वह यह समझने के लिए केन्या जाने का फैसला करता है कि ऐसा क्यों हो रहा है। आखिरकार, मॉन्टी को एहसास होता है कि वह असल में रवि का ही पुनर्जन्म है। अपने हादसे से जुड़ी सभी बातें याद आने के बाद मॉन्टी अपनी (यानी रवि की) माँ और बहन को खोजने निकल पड़ता है। वह प्रिंसेस कामिनी से दोस्ती करता है, जो कि संयोग से टीना को भी जानती है। कामिनी अब जुदाह की प्रेमिका है और रवि की संपत्ति की मालकिन है। मॉन्टी उसे अपने पुनर्जन्म के बारे में बताता है, लेकिन कहता है कि उसे यह याद नहीं है कि उसकी (यानी रवि की) मौत कैसे हुई थी। कामिनी उसे हादसे के बारे में गुमराह करती है और झूठ बोलती है कि रवि की माँ और बहन अब इस दुनिया में नहीं है। वह टीना और कबीर चाचा ([[डैनी डेन्जोंगपा]]) के साथ मिलकर प्रिंसेस कामिनी को सज़ा दिलाने की योजना बनाता है।
मॉन्टी प्रिंसेस कामिनी को शादी करने के लिए मना लेता है। वे उसके शो के दौरान स्टेज पर ही शादी कर लेते हैं। परफॉरमेंस के दौरान वह उस हादसे को फिर से दोहराता है ताकि राजकुमारी कामिनी को यकीन हो जाए कि उसे याद है कि उसी ने उसे (रवि को) मारा था। इसके बाद दोनों के बीच के बीच तीखी बहस होती है। इसके बाद वह गुस्से में रवि की हत्या की बात कबूल कर लेती है।
== मुख्य कलाकार ==
* [[हिमेश रेशमिया]] — मॉन्टी ओबेरॉय, रवि प्रसाद वर्मा का पुनर्जन्म व्यक्तित्व
* [[उर्मिला मातोंडकर]] — कामिनी, रवि की पत्नी
* [[डीनो मोरिया]] — रवि प्रसाद वर्मा, कामिनी का पति
* [[डैनी डेंजोंगपा]] — कबीर चाचा
* [[राज बब्बर]] — जी. जी. ओबेरॉय
* [[स्मिता बंसल]] — ज्योति, रवि की बहन
* श्वेता कुमार — टीना खंडेलवाल, मॉन्टी की प्रेमिका
* [[रोहिणी हट्टंगड़ी]] — शांता वर्मा, रवि की माता
* [[गुलशन ग्रोवर]] — सर जुदाह
* [[बख्तियार ईरानी]] — डॉ. दयाल, मॉन्टी का दोस्त
* [[हिमानी शिवपुरी]] — नेहा ओबेरॉय, जी. जी. ओबेरॉय की पत्नी
* [[शिवा रिन्दानी]] — सर जुदाह का गुंडा
* [[असरानी]] — कॉलेज के प्रिंसिपल
* [[सुधीर पांडे]] — जॉन
== संगीत ==
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== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{imdb title|1156148|कर्ज़}}
[[श्रेणी:2008 में बनी हिन्दी फ़िल्म]]
[[श्रेणी: हिमेश रेशमिया द्वारा संगीतबद्ध फिल्में]]
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}}
'''कर्ज़''' 2008 में बनी हिन्दी भाषा की नाट्य एक्शन फिल्म है। इसका निर्देशन [[सतीश कौशिक]] ने किया और मुख्य भूमिकाओं में [[हिमेश रेशमिया]] और [[उर्मिला मातोंडकर]] हैं।
यह फ़िल्म सुभाष घई निर्देशित और [[ऋषि कपूर]], [[सिमी गरेवाल]] एवं [[टीना मुनीम]] अभिनीत ब्लॉकबस्टर फ़िल्म [[कर्ज़ (फ़िल्म)|''कर्ज़'']] (1980) की रीमेक है। इस फ़िल्म का संगीत हिमेश रेशमिया ने ही बनाया है।
==कहानी==
रवि वर्मा ([[डीनो मोरिया]]) ने केन्या में गैंगस्टर सर जुदाह ([[गुलशन ग्रोवर]]) के खिलाफ एक अदालती मामला जीत लिया है। इससे उसे कई हज़ार एकड़ के अंगूर के बाग मिल जाते हैं। अपनी इस जीत का जश्न मनाने के लिए वह अपनी प्रेमिका कामिनी ([[उर्मिला मातोंडकर]]) से शादी करता है और उसे अपनी माँ और बहन से मिलवाने का फैसला करता है। रवि को इस बात का पता नहीं होता है कि कामिनी, जुदाह के साथ मिली हुई है। वह उस विमान में तोड़फोड़ कर देती है जिसमें वे सफर कर रहे होते हैं और खुद सुरक्षित बच निकलती है। जबकि रवि के पास कोई पैराशूट नहीं बचता और उसकी मौत हो जाती है। अब वह 'प्रिंसेस कामिनी' बन चुकी है जिसे रवि की सारी संपत्ति मिल जाती है। इसके कारण रवि की माँ और बहन को घोर गरीबी में जीने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
25 साल बाद, कहानी में मॉन्टी ([[हिमेश रेशमिया]]) की एंट्री होती है। वह जो जे.जे. ओबेरॉय ([[राज बब्बर]]) का गोद लिया हुआ बेटा है और दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में एक मशहूर संगीतकार और रॉक स्टार है। उसके पास सब कुछ होते हुए भी वह खुश नहीं है। उसे टीना (जिससे वह प्यार करता है) और अपने दोस्त व करीबी साथी डॉ. दयाल के साथ समय बिताने में खुशी मिलती है। मॉन्टी को रवि के जीवन की घटनाओं की यादें (फ्लैशबैक) आने लगती हैं। वह यह समझने के लिए केन्या जाने का फैसला करता है कि ऐसा क्यों हो रहा है। आखिरकार, मॉन्टी को एहसास होता है कि वह असल में रवि का ही पुनर्जन्म है। अपने हादसे से जुड़ी सभी बातें याद आने के बाद मॉन्टी अपनी (यानी रवि की) माँ और बहन को खोजने निकल पड़ता है। वह प्रिंसेस कामिनी से दोस्ती करता है, जो कि संयोग से टीना को भी जानती है। कामिनी अब जुदाह की प्रेमिका है और रवि की संपत्ति की मालकिन है। मॉन्टी उसे अपने पुनर्जन्म के बारे में बताता है, लेकिन कहता है कि उसे यह याद नहीं है कि उसकी (यानी रवि की) मौत कैसे हुई थी। कामिनी उसे हादसे के बारे में गुमराह करती है और झूठ बोलती है कि रवि की माँ और बहन अब इस दुनिया में नहीं है। वह टीना और कबीर चाचा ([[डैनी डेन्जोंगपा]]) के साथ मिलकर प्रिंसेस कामिनी को सज़ा दिलाने की योजना बनाता है।
मॉन्टी प्रिंसेस कामिनी को शादी करने के लिए मना लेता है। वे उसके शो के दौरान स्टेज पर ही शादी कर लेते हैं। परफॉरमेंस के दौरान वह उस हादसे को फिर से दोहराता है ताकि राजकुमारी कामिनी को यकीन हो जाए कि उसे याद है कि उसी ने उसे (रवि को) मारा था। इसके बाद दोनों के बीच के बीच तीखी बहस होती है। इसके बाद वह गुस्से में रवि की हत्या की बात कबूल कर लेती है।
== मुख्य कलाकार ==
* [[हिमेश रेशमिया]] — मॉन्टी ओबेरॉय, रवि प्रसाद वर्मा का पुनर्जन्म व्यक्तित्व
* [[उर्मिला मातोंडकर]] — कामिनी, रवि की पत्नी
* [[डीनो मोरिया]] — रवि प्रसाद वर्मा, कामिनी का पति
* [[डैनी डेंजोंगपा]] — कबीर चाचा
* [[राज बब्बर]] — जी. जी. ओबेरॉय
* [[स्मिता बंसल]] — ज्योति, रवि की बहन
* श्वेता कुमार — टीना खंडेलवाल, मॉन्टी की प्रेमिका
* [[रोहिणी हट्टंगड़ी]] — शांता वर्मा, रवि की माता
* [[गुलशन ग्रोवर]] — सर जुदाह
* [[बख्तियार ईरानी]] — डॉ. दयाल, मॉन्टी का दोस्त
* [[हिमानी शिवपुरी]] — नेहा ओबेरॉय, जी. जी. ओबेरॉय की पत्नी
* [[शिवा रिन्दानी]] — सर जुदाह का गुंडा
* [[असरानी]] — कॉलेज के प्रिंसिपल
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== संगीत ==
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== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{imdb title|1156148|कर्ज़}}
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[[श्रेणी:2008 में बनी हिन्दी फ़िल्म]]
[[श्रेणी: हिमेश रेशमिया द्वारा संगीतबद्ध फिल्में]]
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox Film
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| released = 17 अक्टूबर, 2008
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}}
'''कर्ज़''' 2008 में बनी हिन्दी भाषा की नाट्य एक्शन फिल्म है। इसका निर्देशन [[सतीश कौशिक]] ने किया और मुख्य भूमिकाओं में [[हिमेश रेशमिया]] और [[उर्मिला मातोंडकर]] हैं।
यह फ़िल्म सुभाष घई निर्देशित और [[ऋषि कपूर]], [[सिमी गरेवाल]] एवं [[टीना मुनीम]] अभिनीत ब्लॉकबस्टर फ़िल्म [[कर्ज़ (फ़िल्म)|''कर्ज़'']] (1980) की रीमेक है। इस फ़िल्म का संगीत हिमेश रेशमिया ने ही बनाया है।
==कहानी==
रवि वर्मा ([[डीनो मोरिया]]) ने केन्या में गैंगस्टर सर जुदाह ([[गुलशन ग्रोवर]]) के खिलाफ एक अदालती मामला जीत लिया है। इससे उसे कई हज़ार एकड़ के अंगूर के बाग मिल जाते हैं। अपनी इस जीत का जश्न मनाने के लिए वह अपनी प्रेमिका कामिनी ([[उर्मिला मातोंडकर]]) से शादी करता है और उसे अपनी माँ और बहन से मिलवाने का फैसला करता है। रवि को इस बात का पता नहीं होता है कि कामिनी, जुदाह के साथ मिली हुई है। वह उस विमान में तोड़फोड़ कर देती है जिसमें वे सफर कर रहे होते हैं और खुद सुरक्षित बच निकलती है। जबकि रवि के पास कोई पैराशूट नहीं बचता और उसकी मौत हो जाती है। अब वह 'प्रिंसेस कामिनी' बन चुकी है जिसे रवि की सारी संपत्ति मिल जाती है। इसके कारण रवि की माँ और बहन को घोर गरीबी में जीने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
25 साल बाद, कहानी में मॉन्टी ([[हिमेश रेशमिया]]) की एंट्री होती है। वह जो जे.जे. ओबेरॉय ([[राज बब्बर]]) का गोद लिया हुआ बेटा है और दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में एक मशहूर संगीतकार और रॉक स्टार है। उसके पास सब कुछ होते हुए भी वह खुश नहीं है। उसे टीना (जिससे वह प्यार करता है) और अपने दोस्त व करीबी साथी डॉ. दयाल के साथ समय बिताने में खुशी मिलती है। मॉन्टी को रवि के जीवन की घटनाओं की यादें (फ्लैशबैक) आने लगती हैं। वह यह समझने के लिए केन्या जाने का फैसला करता है कि ऐसा क्यों हो रहा है। आखिरकार, मॉन्टी को एहसास होता है कि वह असल में रवि का ही पुनर्जन्म है। अपने हादसे से जुड़ी सभी बातें याद आने के बाद मॉन्टी अपनी (यानी रवि की) माँ और बहन को खोजने निकल पड़ता है। वह प्रिंसेस कामिनी से दोस्ती करता है, जो कि संयोग से टीना को भी जानती है। कामिनी अब जुदाह की प्रेमिका है और रवि की संपत्ति की मालकिन है। मॉन्टी उसे अपने पुनर्जन्म के बारे में बताता है, लेकिन कहता है कि उसे यह याद नहीं है कि उसकी (यानी रवि की) मौत कैसे हुई थी। कामिनी उसे हादसे के बारे में गुमराह करती है और झूठ बोलती है कि रवि की माँ और बहन अब इस दुनिया में नहीं है। वह टीना और कबीर चाचा ([[डैनी डेन्जोंगपा]]) के साथ मिलकर प्रिंसेस कामिनी को सज़ा दिलाने की योजना बनाता है।
मॉन्टी प्रिंसेस कामिनी को शादी करने के लिए मना लेता है। वे उसके शो के दौरान स्टेज पर ही शादी कर लेते हैं। परफॉरमेंस के दौरान वह उस हादसे को फिर से दोहराता है ताकि राजकुमारी कामिनी को यकीन हो जाए कि उसे याद है कि उसी ने उसे (रवि को) मारा था। इसके बाद दोनों के बीच के बीच तीखी बहस होती है। इसके बाद वह गुस्से में रवि की हत्या की बात कबूल कर लेती है।
== मुख्य कलाकार ==
* [[हिमेश रेशमिया]] — मॉन्टी ओबेरॉय, रवि प्रसाद वर्मा का पुनर्जन्म व्यक्तित्व
* [[उर्मिला मातोंडकर]] — कामिनी, रवि की पत्नी
* [[डीनो मोरिया]] — रवि प्रसाद वर्मा, कामिनी का पति
* [[डैनी डेंजोंगपा]] — कबीर चाचा
* [[राज बब्बर]] — जी. जी. ओबेरॉय
* [[स्मिता बंसल]] — ज्योति, रवि की बहन
* श्वेता कुमार — टीना खंडेलवाल, मॉन्टी की प्रेमिका
* [[रोहिणी हट्टंगड़ी]] — शांता वर्मा, रवि की माता
* [[गुलशन ग्रोवर]] — सर जुदाह
* [[बख्तियार ईरानी]] — डॉ. दयाल, मॉन्टी का दोस्त
* [[हिमानी शिवपुरी]] — नेहा ओबेरॉय, जी. जी. ओबेरॉय की पत्नी
* [[शिवा रिन्दानी]] — सर जुदाह का गुंडा
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== संगीत ==
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== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{imdb title|1156148|कर्ज़}}
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[[श्रेणी:2008 में बनी हिन्दी फ़िल्म]]
[[श्रेणी: हिमेश रेशमिया द्वारा संगीतबद्ध फिल्में]]
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एक सन्दर्भ
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'''कर्ज़''' 2008 में बनी हिन्दी भाषा की नाट्य एक्शन फिल्म है। इसका निर्देशन [[सतीश कौशिक]] ने किया और मुख्य भूमिकाओं में [[हिमेश रेशमिया]] और [[उर्मिला मातोंडकर]] हैं।
यह फ़िल्म सुभाष घई निर्देशित और [[ऋषि कपूर]], [[सिमी गरेवाल]] एवं [[टीना मुनीम]] अभिनीत ब्लॉकबस्टर फ़िल्म [[कर्ज़ (फ़िल्म)|''कर्ज़'']] (1980) की रीमेक है।<ref>{{cite web |title=1980 में आई थी पुनर्जन्म वाली ब्लॉकबस्टर, रीमेक बना मेकर्स ने पीट दी भद्द, हुआ करोड़ों का नुकसान, उड़ा मजाक |url=https://hindi.news18.com/amp/news/entertainment/bollywood-rishi-kapoor-blockbuster-movie-karz-remake-release-in-2008-where-himesh-reshammiya-play-lead-role-but-film-was-turn-biggest-flop-of-the-year-7638303.html |publisher=[[न्यूज़ 18]]}}</ref> इस फ़िल्म का संगीत हिमेश रेशमिया ने ही बनाया है।
==कहानी==
रवि वर्मा ([[डीनो मोरिया]]) ने केन्या में गैंगस्टर सर जुदाह ([[गुलशन ग्रोवर]]) के खिलाफ एक अदालती मामला जीत लिया है। इससे उसे कई हज़ार एकड़ के अंगूर के बाग मिल जाते हैं। अपनी इस जीत का जश्न मनाने के लिए वह अपनी प्रेमिका कामिनी ([[उर्मिला मातोंडकर]]) से शादी करता है और उसे अपनी माँ और बहन से मिलवाने का फैसला करता है। रवि को इस बात का पता नहीं होता है कि कामिनी, जुदाह के साथ मिली हुई है। वह उस विमान में तोड़फोड़ कर देती है जिसमें वे सफर कर रहे होते हैं और खुद सुरक्षित बच निकलती है। जबकि रवि के पास कोई पैराशूट नहीं बचता और उसकी मौत हो जाती है। अब वह 'प्रिंसेस कामिनी' बन चुकी है जिसे रवि की सारी संपत्ति मिल जाती है। इसके कारण रवि की माँ और बहन को घोर गरीबी में जीने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
25 साल बाद, कहानी में मॉन्टी ([[हिमेश रेशमिया]]) की एंट्री होती है। वह जो जे.जे. ओबेरॉय ([[राज बब्बर]]) का गोद लिया हुआ बेटा है और दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में एक मशहूर संगीतकार और रॉक स्टार है। उसके पास सब कुछ होते हुए भी वह खुश नहीं है। उसे टीना (जिससे वह प्यार करता है) और अपने दोस्त व करीबी साथी डॉ. दयाल के साथ समय बिताने में खुशी मिलती है। मॉन्टी को रवि के जीवन की घटनाओं की यादें (फ्लैशबैक) आने लगती हैं। वह यह समझने के लिए केन्या जाने का फैसला करता है कि ऐसा क्यों हो रहा है। आखिरकार, मॉन्टी को एहसास होता है कि वह असल में रवि का ही पुनर्जन्म है। अपने हादसे से जुड़ी सभी बातें याद आने के बाद मॉन्टी अपनी (यानी रवि की) माँ और बहन को खोजने निकल पड़ता है। वह प्रिंसेस कामिनी से दोस्ती करता है, जो कि संयोग से टीना को भी जानती है। कामिनी अब जुदाह की प्रेमिका है और रवि की संपत्ति की मालकिन है। मॉन्टी उसे अपने पुनर्जन्म के बारे में बताता है, लेकिन कहता है कि उसे यह याद नहीं है कि उसकी (यानी रवि की) मौत कैसे हुई थी। कामिनी उसे हादसे के बारे में गुमराह करती है और झूठ बोलती है कि रवि की माँ और बहन अब इस दुनिया में नहीं है। वह टीना और कबीर चाचा ([[डैनी डेन्जोंगपा]]) के साथ मिलकर प्रिंसेस कामिनी को सज़ा दिलाने की योजना बनाता है।
मॉन्टी प्रिंसेस कामिनी को शादी करने के लिए मना लेता है। वे उसके शो के दौरान स्टेज पर ही शादी कर लेते हैं। परफॉरमेंस के दौरान वह उस हादसे को फिर से दोहराता है ताकि राजकुमारी कामिनी को यकीन हो जाए कि उसे याद है कि उसी ने उसे (रवि को) मारा था। इसके बाद दोनों के बीच के बीच तीखी बहस होती है। इसके बाद वह गुस्से में रवि की हत्या की बात कबूल कर लेती है।
== मुख्य कलाकार ==
* [[हिमेश रेशमिया]] — मॉन्टी ओबेरॉय, रवि प्रसाद वर्मा का पुनर्जन्म व्यक्तित्व
* [[उर्मिला मातोंडकर]] — कामिनी, रवि की पत्नी
* [[डीनो मोरिया]] — रवि प्रसाद वर्मा, कामिनी का पति
* [[डैनी डेंजोंगपा]] — कबीर चाचा
* [[राज बब्बर]] — जी. जी. ओबेरॉय
* [[स्मिता बंसल]] — ज्योति, रवि की बहन
* श्वेता कुमार — टीना खंडेलवाल, मॉन्टी की प्रेमिका
* [[रोहिणी हट्टंगड़ी]] — शांता वर्मा, रवि की माता
* [[गुलशन ग्रोवर]] — सर जुदाह
* [[बख्तियार ईरानी]] — डॉ. दयाल, मॉन्टी का दोस्त
* [[हिमानी शिवपुरी]] — नेहा ओबेरॉय, जी. जी. ओबेरॉय की पत्नी
* [[शिवा रिन्दानी]] — सर जुदाह का गुंडा
* [[असरानी]] — कॉलेज के प्रिंसिपल
* [[सुधीर पांडे]] — जॉन
== संगीत ==
{{Tracklist
| heading = गीत
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| title1 = लुट जाऊं लुट जाऊं
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| note9 = बोल:- [[आनन्द बक्शी]]
}}
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{imdb title|1156148|कर्ज़}}
{{T-Series}}
[[श्रेणी:2008 में बनी हिन्दी फ़िल्म]]
[[श्रेणी: हिमेश रेशमिया द्वारा संगीतबद्ध फिल्में]]
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2026-10-18T09:56:57Z
हिंदुस्थान वासी
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox Film
| name = कर्ज़
| image =Karz,_2008_film.jpg
| caption = '''कर्ज़''' का पोस्टर
| producer = [[भूषण कुमार]]
| director = [[सतीश कौशिक]]
| music = [[हिमेश रेशमिया]]
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| story =
| starring = हिमेश रेशमिया, <br />[[उर्मिला मातोंडकर]], <br />[[डैनी डेंजोंगपा]] <br />
| screenplay =
| released = 17 अक्टूबर, 2008
| country = [[भारत]]
| language = [[हिन्दी]]
| budget =
}}
'''कर्ज़''' 2008 में बनी हिन्दी भाषा की नाट्य एक्शन फिल्म है। इसका निर्देशन [[सतीश कौशिक]] ने किया और मुख्य भूमिकाओं में [[हिमेश रेशमिया]] और [[उर्मिला मातोंडकर]] हैं।
यह फ़िल्म सुभाष घई निर्देशित और [[ऋषि कपूर]], [[सिमी गरेवाल]] एवं [[टीना मुनीम]] अभिनीत ब्लॉकबस्टर फ़िल्म [[कर्ज़ (फ़िल्म)|''कर्ज़'']] (1980) की रीमेक है।<ref>{{cite web |title=1980 में आई थी पुनर्जन्म वाली ब्लॉकबस्टर, रीमेक बना मेकर्स ने पीट दी भद्द, हुआ करोड़ों का नुकसान, उड़ा मजाक |url=https://hindi.news18.com/amp/news/entertainment/bollywood-rishi-kapoor-blockbuster-movie-karz-remake-release-in-2008-where-himesh-reshammiya-play-lead-role-but-film-was-turn-biggest-flop-of-the-year-7638303.html |publisher=[[न्यूज़ 18]]}}</ref> इस फ़िल्म का संगीत हिमेश रेशमिया ने ही बनाया है।
==कहानी==
रवि वर्मा ([[डीनो मोरिया]]) ने केन्या में गैंगस्टर सर जुदाह ([[गुलशन ग्रोवर]]) के खिलाफ एक अदालती मामला जीत लिया है। इससे उसे कई हज़ार एकड़ के अंगूर के बाग मिल जाते हैं। अपनी इस जीत का जश्न मनाने के लिए वह अपनी प्रेमिका कामिनी ([[उर्मिला मातोंडकर]]) से शादी करता है और उसे अपनी माँ और बहन से मिलवाने का फैसला करता है। रवि को इस बात का पता नहीं होता है कि कामिनी, जुदाह के साथ मिली हुई है। वह उस विमान में तोड़फोड़ कर देती है जिसमें वे सफर कर रहे होते हैं और खुद सुरक्षित बच निकलती है। जबकि रवि के पास कोई पैराशूट नहीं बचता और उसकी मौत हो जाती है। अब वह 'प्रिंसेस कामिनी' बन चुकी है जिसे रवि की सारी संपत्ति मिल जाती है। इसके कारण रवि की माँ और बहन को घोर गरीबी में जीने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
25 साल बाद, कहानी में मॉन्टी ([[हिमेश रेशमिया]]) की एंट्री होती है। वह जो जे.जे. ओबेरॉय ([[राज बब्बर]]) का गोद लिया हुआ बेटा है और दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में एक मशहूर संगीतकार और रॉक स्टार है। उसके पास सब कुछ होते हुए भी वह खुश नहीं है। उसे टीना (जिससे वह प्यार करता है) और अपने दोस्त व करीबी साथी डॉ. दयाल के साथ समय बिताने में खुशी मिलती है। मॉन्टी को रवि के जीवन की घटनाओं की यादें (फ्लैशबैक) आने लगती हैं। वह यह समझने के लिए केन्या जाने का फैसला करता है कि ऐसा क्यों हो रहा है। आखिरकार, मॉन्टी को एहसास होता है कि वह असल में रवि का ही पुनर्जन्म है। अपने हादसे से जुड़ी सभी बातें याद आने के बाद मॉन्टी अपनी (यानी रवि की) माँ और बहन को खोजने निकल पड़ता है। वह प्रिंसेस कामिनी से दोस्ती करता है, जो कि संयोग से टीना को भी जानती है। कामिनी अब जुदाह की प्रेमिका है और रवि की संपत्ति की मालकिन है। मॉन्टी उसे अपने पुनर्जन्म के बारे में बताता है, लेकिन कहता है कि उसे यह याद नहीं है कि उसकी (यानी रवि की) मौत कैसे हुई थी। कामिनी उसे हादसे के बारे में गुमराह करती है और झूठ बोलती है कि रवि की माँ और बहन अब इस दुनिया में नहीं है। वह टीना और कबीर चाचा ([[डैनी डेन्जोंगपा]]) के साथ मिलकर प्रिंसेस कामिनी को सज़ा दिलाने की योजना बनाता है।
मॉन्टी प्रिंसेस कामिनी को शादी करने के लिए मना लेता है। वे उसके शो के दौरान स्टेज पर ही शादी कर लेते हैं। परफॉरमेंस के दौरान वह उस हादसे को फिर से दोहराता है ताकि राजकुमारी कामिनी को यकीन हो जाए कि उसे याद है कि उसी ने उसे (रवि को) मारा था। इसके बाद दोनों के बीच के बीच तीखी बहस होती है। इसके बाद वह गुस्से में रवि की हत्या की बात कबूल कर लेती है।
== मुख्य कलाकार ==
* [[हिमेश रेशमिया]] — मॉन्टी ओबेरॉय, रवि प्रसाद वर्मा का पुनर्जन्म व्यक्तित्व
* [[उर्मिला मातोंडकर]] — कामिनी, रवि की पत्नी
* [[डीनो मोरिया]] — रवि प्रसाद वर्मा, कामिनी का पति
* [[डैनी डेंजोंगपा]] — कबीर चाचा
* [[राज बब्बर]] — जी. जी. ओबेरॉय
* [[स्मिता बंसल]] — ज्योति, रवि की बहन
* श्वेता कुमार — टीना खंडेलवाल, मॉन्टी की प्रेमिका
* [[रोहिणी हट्टंगड़ी]] — शांता वर्मा, रवि की माता
* [[गुलशन ग्रोवर]] — सर जुदाह
* [[बख्तियार ईरानी]] — डॉ. दयाल, मॉन्टी का दोस्त
* [[हिमानी शिवपुरी]] — नेहा ओबेरॉय, जी. जी. ओबेरॉय की पत्नी
* [[शिवा रिन्दानी]] — सर जुदाह का गुंडा
* [[असरानी]] — कॉलेज के प्रिंसिपल
* [[सुधीर पांडे]] — जॉन
== संगीत ==
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==सन्दर्भ==
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== बाहरी कड़ियाँ ==
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{{T-Series}}
[[श्रेणी:2008 में बनी हिन्दी फ़िल्म]]
[[श्रेणी: हिमेश रेशमिया द्वारा संगीतबद्ध फिल्में]]
[[श्रेणी:भारतीय म्यूजिकल ड्रामा फ़िल्में]]
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सदस्य:Direttore1623/Hirofumi Yoshida
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2026-10-18T11:48:34Z
Direttore1623
953918
Add two verified years (2021 Odesa; 2022 Modena founding) with independent sources (AI-assisted, disclosed on en talk page)Add two verified years (2021 Odesa; 2022 Modena founding) with independent sources (AI-assisted, disclosed on en talk page)
6630736
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<!-- Draft prepared by User:Direttore1623 (conflict of interest: a friend of the subject; unpaid). Not intended for the main namespace until independent editors have reviewed it. -->
'''हिरोफुमी योशिदा''' (जापानी: 吉田 裕史; जन्म 1968, होक्काइदो) एक जापानी संचालक (कंडक्टर) हैं, जो मुख्य रूप से इटली में कार्यरत हैं। वे स्थापना से मोडेना के फ़िलारमोनिका देल टेआत्रो कोमुनाले (Filarmonica del Teatro Comunale di Modena; 2022 में स्थापित)<ref name="carlino2022">[https://www.ilrestodelcarlino.it/modena/cultura/filarmonica-modena-expo-osaka-39f98634 La Filarmonica di Modena in trionfo all’Expo di Osaka: 15 minuti di applausi], il Resto del Carlino, 2025-09-10</ref> के संगीत निदेशक<ref name="filar">[https://www.filarmonicamodena.it/hirofumi-yoshida/ Hirofumi Yoshida, direttore musicale], Filarmonica di Modena</ref> और 2021 से ओडेसा राष्ट्रीय अकादमिक ओपेरा और बैले थिएटर के प्रमुख अतिथि संचालक हैं।<ref name="odcol">[https://operahouse.od.ua/collective/ Колектив — Диригенти], Одеський національний академічний театр опери та балету</ref><ref name="kpref" /><ref name="kyivpost2023">[https://www.kyivpost.com/uk/post/21645 Японський диригент Хірофумі Йошида привіз в Україну італійську оперу], Kyiv Post, 2023-09-17</ref> उनका प्रदर्शन-सूची मुख्यतः पुच्चीनी और वेर्दी के ओपेरा पर केंद्रित है।
== जीवन ==
वे फ़ुनाबाशी में पले-बढ़े और उन्होंने टोक्यो कॉलेज ऑफ़ म्यूज़िक में संचालन, पियानो, डबल बेस और संगीतशास्त्र का अध्ययन किया। 1994–95 में उन्होंने वियना के संगीत एवं प्रदर्शन कला विश्वविद्यालय में पढ़ाई की, और 1996 में सिएना की अकादमिया चिगियाना में यूरी तेमिरकानोव और म्युंग-वुन चुंग के मास्टर कोर्स में भाग लिया।<ref name="tcbo">[https://www.tcbo.it/wp-content/uploads/HIROFUMI-YOSHIDA.pdf Hirofumi Yoshida – Direttore d'orchestra], Teatro Comunale di Bologna</ref> 1999 में जापान की सांस्कृतिक एजेंसी के विदेश-प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत उन्होंने म्यूनिख, मानहाइम और माल्मो में प्रशिक्षण लिया।<ref name="tcbo" />
== करियर ==
2002 में वे गोतो मेमोरियल कल्चरल अवार्ड (ओपेरा वर्ग) पाने वाले पहले संचालक बने।<ref name="tcbo" /> 2005 में उन्होंने क्लुज़-नापोका (रोमानिया) में पहली अंतरराष्ट्रीय बेला बार्तोक ओपेरा संचालन प्रतियोगिता में तीसरा स्थान प्राप्त किया।<ref name="tcbo" /> 2007 में उन्होंने रोम ओपेरा के ग्रीष्मकालीन सत्र में काराकाला के स्नानागारों में «पाल्याच्ची» का संचालन किया।<ref name="tcbo" />
जनवरी 2010 से वे मंतोवा के टेआत्रो सोचाले के संगीत निदेशक रहे।<ref name="tcbo" /> उसी वर्ष उन्होंने तोरे देल लागो के पुच्चीनी महोत्सव में «तुरांदोत» से पदार्पण किया।<ref name="tcbo" /> 2013 में उन्हें एनरिको कारूसो अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिला।<ref name="tcbo" />
2014 से वे बोलोन्या के फ़िलारमोनिका देल टेआत्रो कोमुनाले के कलात्मक निदेशक रहे, और जुलाई 2015 में उन्हें बोलोन्या के टेआत्रो कोमुनाले का प्रमुख अतिथि संचालक नियुक्त किया गया।<ref name="tcbo" /><ref name="sawa">[https://www.sawakami-opera.org/wp/20150815_1 マエストロ吉田裕史、ボローニャ歌劇場首席客演指揮者就任], さわかみオペラ芸術振興財団, 2015-08-15</ref> जापान ओपेरा फ़ेस्टिवल (आरंभ में क्योटो ओपेरा फ़ेस्टिवल) के कलात्मक निदेशक के रूप में उन्होंने जापान की विश्व धरोहर स्थलों में, जिनमें कियोमिज़ु-देरा मंदिर भी शामिल है, खुले आसमान के नीचे ओपेरा प्रस्तुत किए।<ref name="tcbo" />
वे ओडेसा ओपेरा थिएटर के साथ जुड़े हैं।<ref name="odcol" /> 2 मार्च 2025 को उन्होंने कानागावा प्रीफ़ेक्चरल हॉल (योकोहामा) में ओडेसा ओपेरा के ऑर्केस्ट्रा का संचालन किया।<ref name="kyodo">[https://kyodonewsprwire.jp/release/202502043763 ウクライナ国立オデーサ歌劇場オーケストラ 日本公演がついに実現!], 共同通信PRワイヤー, 2025-02-04</ref><ref name="kpref">[https://www.pref.kanagawa.jp/chiji/press-conference/2024/0128.html 定例会見(2025年1月28日)結果概要], 神奈川県, 2025-01-30</ref>
मोडेना के फ़िलारमोनिका के संगीत निदेशक के रूप में उन्होंने 1 जनवरी 2023 को थिएटर के नववर्ष समारोह का संचालन किया,<ref name="em24">[https://www.24emilia.com/la-filarmonica-del-teatro-di-modena-saluta-il-2023-con-un-concerto-in-stile-viennese/ La Filarmonica del teatro di Modena saluta il 2023 con un concerto in stile viennese], 24Emilia, 2022-12-27</ref> 28 जनवरी 2023 को मोडेना कैथेड्रल में संत जेमिनियानो के सम्मान में संगीत समारोह का,<ref name="fdm">[https://www.fondazionedimodena.it/news/concerto-in-duomo-per-san-geminiano/ Concerto in Duomo per San Geminiano], Fondazione di Modena, 2023-01-20</ref> और मई 2023 में नारा के होर्यू-जी मंदिर में «इल त्रोवातोरे» का।<ref name="nara">[https://www.naraken.com/musik/2023/event/947/ ジャパン・オペラ・フェスティヴァル2023法隆寺公演 野外オペラ「トロヴァトーレ」], ムジークフェストなら2023</ref><ref name="iic">[https://iicosaka.esteri.it/it/gli_eventi/calendario/l-opera-il-trovatore-al-tempio/ L'opera “Il Trovatore” al Tempio Horyu-ji], Istituto Italiano di Cultura di Osaka</ref> 5 जुलाई 2024 को उन्होंने कौनास (लिथुआनिया) के अंतरराष्ट्रीय ओपेरेटा महोत्सव में «मदामा बटरफ़्लाई» का संचालन किया।<ref name="kaunas">[https://www.rolanddg.com/en/news/2024/240607-kaunas-opera-festival-sponsorship Roland DG and DG DIMENSE to Sponsor XXIII International Festival Operetta at Kaunas], Roland DG, 2024-06-07</ref> 22 नवंबर 2024 को टोक्यो में सऊदी राष्ट्रीय ऑर्केस्ट्रा और गायक-मंडली की एशिया में पहली प्रस्तुति «Marvels of Saudi Orchestra» हुई; टोक्यो कॉलेज ऑफ़ म्यूज़िक के अनुसार योशिदा टोक्यो प्रस्तुति के कलात्मक निदेशक थे।<ref name="arab">[https://www.arabnews.com/node/2580182/lifestyle 'Marvels of Saudi Orchestra' heads to Tokyo], Arab News, 2024-11-21</ref><ref name="tcm">[https://www.tokyo-ondai.ac.jp/information/42337.php 卒業生インタビュー 第18回 吉田裕史さん], 東京音楽大学, 2025-01-29</ref> सितंबर 2025 में उन्होंने मोडेना के ऑर्केस्ट्रा के साथ जापान में तीन संगीत समारोहों का दौरा किया (ओसाका — एक्सपो 2025 और इज़ुमी हॉल; अमामी द्वीप)।<ref name="carl1">[https://www.ilrestodelcarlino.it/modena/cronaca/la-filarmonica-in-tour-portiamo-e3a4a50f La Filarmonica in tour: «Portiamo in Giappone tutta la bellezza di Modena e dell'Italia»], il Resto del Carlino, 2025-09-07</ref>
== रिकॉर्डिंग और प्रकाशन ==
2026 में Tactus लेबल ने «Sinfonie Italiane» (TD810005) जारी किया, जो 11 सितंबर 2025 को इज़ुमी हॉल में हुए संगीत समारोह की लाइव रिकॉर्डिंग है और जिसमें मेंडेलसोन, रोस्सिनी, वेर्दी और मास्कानी की रचनाएँ हैं।<ref name="carl2">[https://www.ilrestodelcarlino.it/modena/cronaca/filarmonica-in-un-cd-il-242f2091 Filarmonica, in un cd il concerto di Osaka], il Resto del Carlino, 2026-04-07</ref><ref name="tactus">[https://www.tactus.it/en/td810005-vv-aa-italian-symphonies/ Italian Symphonies (TD810005)], Tactus</ref> अक्टूबर 2025 में उनके संस्मरण «Tamashii no ongaku yo, Nihon ni todoke» (जापानी में) प्रकाशित हुए।<ref name="mitsui">[https://mitsui-publishing.com/product/soul-music 魂の音楽よ、日本に届け], ミツイパブリッシング</ref>
== पुरस्कार ==
* 2002 — गोतो मेमोरियल कल्चरल अवार्ड (ओपेरा वर्ग)<ref name="tcbo" />
* 2005 — बेला बार्तोक अंतरराष्ट्रीय ओपेरा संचालन प्रतियोगिता में तृतीय पुरस्कार<ref name="tcbo" />
* 2013 — एनरिको कारूसो अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार<ref name="tcbo" />
* 2024 — जापान के शिक्षा, संस्कृति, खेल, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री द्वारा सम्मान (25 सितंबर)<ref name="mext">[https://www.mext.go.jp/b_menu/activity/detail/2024/20240925_2.html 指揮者の吉田裕史氏への文部科学大臣表彰], 文部科学省, 2024-09-25</ref>
== संदर्भ ==
<references />
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अन्या का पार्क
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'''अन्या का पार्क''' ({{lang|fi|’’’Anjan puisto’’’}}) [[फिनलैंड]] के मिकेली शहर के पास स्थित एक वृक्षालय (arboretum) है, जिसकी स्थापना 1968 में कलाकार अन्या लाक्सोनेन द्वारा की गई थी। यह वृक्षालय अपनी विभिन्न विशेषताओं के लिए जाना जाता है, जिनमें पेड़-पौधों की प्रजातियों से लेकर मूर्तियाँ, चित्र, तालाब और जानवर तक शामिल हैं।<ref name=":2">{{Cite web |date=2016-07-24 |title=Yksityinen puisto on haukannut tekijältään puoli vuosisataa – "Tykkään kauheasti katsella kauneutta" |url=https://yle.fi/a/3-9039109 |access-date=2024-03-06 |language=fi |archive-date=2024-04-01 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240401142328/https://yle.fi/a/3-9039109 }}</ref>
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'''अन्या का पार्क''' ({{lang|fi|’’’Anjan puisto’’’}}) [[फिनलैंड]] के मिकेली शहर के पास स्थित एक वृक्षालय (arboretum) है, जिसकी स्थापना 1968 में कलाकार अन्या लाक्सोनेन द्वारा की गई थी। यह वृक्षालय अपनी विभिन्न विशेषताओं के लिए जाना जाता है, जिनमें पेड़-पौधों की प्रजातियों से लेकर मूर्तियाँ, चित्र, तालाब और जानवर तक शामिल हैं।<ref name=":2">{{Cite web |date=2016-07-24 |title=Yksityinen puisto on haukannut tekijältään puoli vuosisataa – "Tykkään kauheasti katsella kauneutta" |url=https://yle.fi/a/3-9039109 |access-date=2024-03-06 |language=fi |archive-date=2024-04-01 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240401142328/https://yle.fi/a/3-9039109 }}</ref>
== इतिहास ==
अन्या के पार्क की स्थापना अन्या लाक्सोनेन ने 1968 में होंकालाहटी, मिकेली में की थी, जब उन्होंने पहला पेड़ लगाया था।<ref>{{Cite web |date=2017-07-06 |title=Sadan ja yhden kanin puisto |url=https://www.mikkelinkaupunkilehti.fi/paikalliset/4014671 |access-date=2024-03-06 |language=fi |archive-date=2024-04-01 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240401142330/https://www.mikkelinkaupunkilehti.fi/paikalliset/4014671 }}</ref> अन्या के अनुसार, जो शुरुआत में एक "छोटा आँगन" होने वाला था, वह भूमि का विकास करते रहने के कारण "थोड़ा बड़ा हो गया": "जब आप ज़मीन का एक टुकड़ा तैयार कर लेते थे, तो उसके बगल वाला हिस्सा और भी नीरस लगता था। इसलिए आपको इसे जारी रखना पड़ता था।"<ref name=":2" /> भूनिर्माण और बागवानी के साथ-साथ, अन्या ने चित्रकारी और मूर्तिकला के माध्यम से, तथा प्राकृतिक चट्टानों, पेड़ के तनों और जड़ों से कलाकृतियाँ बनाईं।<ref name=":0">{{Cite web |date=2013-08-01 |title=Piha piti siistiä - seitsemän hehtaaria puutarhaa tuli |url=https://yle.fi/a/3-6755037 |access-date=2024-03-06 |language=fi}}</ref><ref>{{Cite web |last=Annukka |first=Oksanen |date=1991-07-24 |title=Anjalla on pahuksen hieno puisto |url=https://www.hs.fi/kotimaa/art-2000003080275.html |access-date=2024-03-06 |language=fi}}</ref><ref name=":3">{{Cite web |date=2020-02-01 |title=Anjan Puisto Mikkelissä on yhden naisen satumainen elämäntyö — "Teen tätä, koska pidän kaikesta kauniista" - Länsi-Savo |url=https://lansi-savo.fi/teemat/kesa/ea8a5026-89c0-4aa5-814a-42d2bb6ac97e |access-date=2024-04-01 |language=fi |archive-date=2020-02-01 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200201013448/https://lansi-savo.fi/teemat/kesa/ea8a5026-89c0-4aa5-814a-42d2bb6ac97e }}</ref> 1999 में, अन्या के पार्क में लगी एक भीषण आग में एक खलिहान जलकर खाक हो गया था।<ref>{{Cite web |date=1999-05-28 |title=Anjan puisto avautuu maanantaina |url=https://yle.fi/a/3-5163887 |access-date=2026-04-05 |language=fi}}</ref> अन्या के निधन के बाद 2020 में वृक्षालय को आगंतुकों के लिए बंद कर दिया गया था।<ref>{{Cite web |date=2020-07-13 |title=Anjan puisto pysyy suljettuna – Perustaja Anja Laaksosen menehtyminen hiljensi mikkeliläisen suosikkikohteen |url=https://www.lansi-savo.fi/paikalliset/3695726 |access-date=2024-03-06 |language=fi |archive-date=2024-04-01 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240401142330/https://www.lansi-savo.fi/paikalliset/3695726 }}</ref>
== विवरण ==
अन्या के पार्क का क्षेत्रफल लगभग सात हेक्टेयर है।<ref>{{Cite web |date=2015-07-15 |title=Anjan puisto kukoistaa ja kaakattaa - katso kuvat! |url=https://www.lansi-savo.fi/paikalliset/3764587 |access-date=2024-03-06 |language=fi |archive-date=2024-04-01 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240401142328/https://www.lansi-savo.fi/paikalliset/3764587 }}</ref> यह वृक्षालय आला-सैनात्जर्वी (Ala-Säynätjärvi) और इसो-पालवानेन (Iso-Palvanen) झीलों के बीच एक स्थलडमरूमध्य पर एक पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है।<ref name=":1">{{Cite web |title=Anjan Puisto – заповедник дикой и домашней природы |url=http://e-finland.ru/rest/summer/anjan-puisto-zapovednik-dikoyi-i-domashneyi-prirody.html |access-date=2024-03-06 |language=ru}}</ref> इसमें 28 तालाब हैं, जिन्हें अन्या ने स्वयं खोदा था।<ref name=":0" /> वृक्षालय के जानवरों में तीतर, फेज़ेंट, मोर, मुर्गियाँ, टर्की, खरगोश, सूअर, गाय, भेड़ और रिहाना नाम का एक कुत्ता शामिल रहे हैं।<ref name=":2" /><ref name=":1" /><ref name=":4">{{Cite web |date=2017-07-10 |title=Anja Laaksonen raivasi metsästä itselleen paratiisin – puistossa on 28 lampea, kymmeniä puulajeja ja eläimiä kuin Nooan arkissa |url=https://www.maaseuduntulevaisuus.fi/lukemisto/a1f1109e-7dbf-5731-978f-bd88a36dc29b |access-date=2026-04-05 |language=fi}}</ref>
अन्या के पार्क के पेड़ों में ''Pinus peuce'', ''Betula pubescens'' ''f.'' ''rubra'', ''Picea abies f. pendula'', ''Betula pendula 'Youngii'<nowiki/>'', ''Picea abies f. aurea'', ''Quercus robur'', ''Salix euxina 'Bullata'<nowiki/>'',<ref name=":2" /> ''Picea mariana'', ''Picea pungens'', ''Phellodendron amurense'',<ref name=":1" /> ''Picea abies f. virgata'',<ref name=":4" /> और ''Picea abies 'Sampon pallo''' जैसी प्रजातियाँ शामिल हैं।<ref name=":3" /> वृक्षालय के पौधों में फूलों की विभिन्न क्यारियाँ भी शामिल हैं।<ref name=":2" />
== संदर्भ ==
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'''अन्या का पार्क''' ({{lang|fi|’’’Anjan puisto’’’}}) [[फिनलैंड]] के मिकेली शहर के पास स्थित एक वृक्षालय (arboretum) है, जिसकी स्थापना 1968 में कलाकार अन्या लाक्सोनेन द्वारा की गई थी। यह वृक्षालय अपनी विभिन्न विशेषताओं के लिए जाना जाता है, जिनमें पेड़-पौधों की प्रजातियों से लेकर मूर्तियाँ, चित्र, तालाब और जानवर तक शामिल हैं।<ref name=":2">{{Cite web |date=2016-07-24 |title=Yksityinen puisto on haukannut tekijältään puoli vuosisataa – "Tykkään kauheasti katsella kauneutta" |url=https://yle.fi/a/3-9039109 |access-date=2024-03-06 |language=fi |archive-date=2024-04-01 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240401142328/https://yle.fi/a/3-9039109 }}</ref>
== इतिहास ==
अन्या के पार्क की स्थापना अन्या लाक्सोनेन ने 1968 में होंकालाहटी, मिकेली में की थी, जब उन्होंने पहला पेड़ लगाया था।<ref>{{Cite web |date=2017-07-06 |title=Sadan ja yhden kanin puisto |url=https://www.mikkelinkaupunkilehti.fi/paikalliset/4014671 |access-date=2024-03-06 |language=fi |archive-date=2024-04-01 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240401142330/https://www.mikkelinkaupunkilehti.fi/paikalliset/4014671 }}</ref> अन्या के अनुसार, जो शुरुआत में एक "छोटा आँगन" होने वाला था, वह भूमि का विकास करते रहने के कारण "थोड़ा बड़ा हो गया": "जब आप ज़मीन का एक टुकड़ा तैयार कर लेते थे, तो उसके बगल वाला हिस्सा और भी नीरस लगता था। इसलिए आपको इसे जारी रखना पड़ता था।"<ref name=":2" /> भूनिर्माण और बागवानी के साथ-साथ, अन्या ने चित्रकारी और मूर्तिकला के माध्यम से, तथा प्राकृतिक चट्टानों, पेड़ के तनों और जड़ों से कलाकृतियाँ बनाईं।<ref name=":0">{{Cite web |date=2013-08-01 |title=Piha piti siistiä - seitsemän hehtaaria puutarhaa tuli |url=https://yle.fi/a/3-6755037 |access-date=2024-03-06 |language=fi}}</ref><ref>{{Cite web |last=Annukka |first=Oksanen |date=1991-07-24 |title=Anjalla on pahuksen hieno puisto |url=https://www.hs.fi/kotimaa/art-2000003080275.html |access-date=2024-03-06 |language=fi}}</ref><ref name=":3">{{Cite web |date=2020-02-01 |title=Anjan Puisto Mikkelissä on yhden naisen satumainen elämäntyö — "Teen tätä, koska pidän kaikesta kauniista" - Länsi-Savo |url=https://lansi-savo.fi/teemat/kesa/ea8a5026-89c0-4aa5-814a-42d2bb6ac97e |access-date=2024-04-01 |language=fi |archive-date=2020-02-01 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200201013448/https://lansi-savo.fi/teemat/kesa/ea8a5026-89c0-4aa5-814a-42d2bb6ac97e }}</ref> 1999 में, अन्या के पार्क में लगी एक भीषण आग में एक खलिहान जलकर खाक हो गया था।<ref>{{Cite web |date=1999-05-28 |title=Anjan puisto avautuu maanantaina |url=https://yle.fi/a/3-5163887 |access-date=2026-04-05 |language=fi}}</ref> अन्या के निधन के बाद 2020 में वृक्षालय को आगंतुकों के लिए बंद कर दिया गया था।<ref>{{Cite web |date=2020-07-13 |title=Anjan puisto pysyy suljettuna – Perustaja Anja Laaksosen menehtyminen hiljensi mikkeliläisen suosikkikohteen |url=https://www.lansi-savo.fi/paikalliset/3695726 |access-date=2024-03-06 |language=fi |archive-date=2024-04-01 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240401142330/https://www.lansi-savo.fi/paikalliset/3695726 }}</ref>
== विवरण ==
अन्या के पार्क का क्षेत्रफल लगभग सात हेक्टेयर है।<ref>{{Cite web |date=2015-07-15 |title=Anjan puisto kukoistaa ja kaakattaa - katso kuvat! |url=https://www.lansi-savo.fi/paikalliset/3764587 |access-date=2024-03-06 |language=fi |archive-date=2024-04-01 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240401142328/https://www.lansi-savo.fi/paikalliset/3764587 }}</ref> यह वृक्षालय आला-सैनात्जर्वी (Ala-Säynätjärvi) और इसो-पालवानेन (Iso-Palvanen) झीलों के बीच एक स्थलडमरूमध्य पर एक पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है।<ref name=":1">{{Cite web |title=Anjan Puisto – заповедник дикой и домашней природы |url=http://e-finland.ru/rest/summer/anjan-puisto-zapovednik-dikoyi-i-domashneyi-prirody.html |access-date=2024-03-06 |language=ru}}</ref> इसमें 28 तालाब हैं, जिन्हें अन्या ने स्वयं खोदा था।<ref name=":0" /> वृक्षालय के जानवरों में तीतर, फेज़ेंट, मोर, मुर्गियाँ, टर्की, खरगोश, सूअर, गाय, भेड़ और रिहाना नाम का एक कुत्ता शामिल रहे हैं।<ref name=":2" /><ref name=":1" /><ref name=":4">{{Cite web |date=2017-07-10 |title=Anja Laaksonen raivasi metsästä itselleen paratiisin – puistossa on 28 lampea, kymmeniä puulajeja ja eläimiä kuin Nooan arkissa |url=https://www.maaseuduntulevaisuus.fi/lukemisto/a1f1109e-7dbf-5731-978f-bd88a36dc29b |access-date=2026-04-05 |language=fi}}</ref>
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== संदर्भ ==
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श्रेणी:जालौर जिले के लोग
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[[श्रेणी:जालौर ज़िला]]
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सदस्य वार्ता:खेमचंद्र पुनवानी
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== अक्टूबर 2026 ==
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चित्र:Karz, 2008 film.jpg
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[[File:Pink_tax_Byly_deodorant_women_vs_men_5,99$_Uniprix_20240108_115733.jpg|अंगूठाकार|लिंग-आधारित मूल्य अन्तर महिलाओं हेतु बाइली [[दुर्गंधनाशक|दुर्गन्धनाशक]] (५० मिलीलीटर) तथा पुरुषों हेतु बाइली दुर्गन्धनाशक (७५ मिलीलीटर) के मध्य प्रदर्शित है। दोनों [[क्यूबेक]] स्थित युनिप्रिक्स में ५.९९ कनाडाई डॉलर में विक्रय किए जाते हैं। महिलाओं का उत्पाद १/३ लघुतर है।]]
'''पाटल कर''' अथवा '''गुलाबी कर''' ({{Langx|en|pink tax|italic=no}}, ''पिंक टैक्स'') उस प्रवृत्ति को निर्दिष्ट करता है जिसमें विशेष रूप से [[लिंग ताटस्थ्य|महिलाओं के लिए विपणित उत्पाद]] पुरुषों के लिए विपणित उत्पादों की तुलना में अधिक महँगे होते हैं। इस परिघटना का कारण प्रायः लिंग-आधारित मूल्य भेदभाव माना जाता है, परन्तु आर्थिक परामर्श संस्था कॉर्नरस्टोन रिसर्च द्वारा कृत एक शोधपत्र मुख्य कारण यह प्रस्तुत करता है, महिलाओं का उच्चतर सीमांत लागत वाली वस्तुओं की ओर उन्मुख होना।<ref>{{Cite journal|last1=Barnes|first1=Kayleigh|last2=Brounstein|first2=Jakob|date=November 4, 2022|title=The Pink Tax: Why Do Women Pay More?|doi=10.2139/ssrn.4269217|s2cid=253833427|ssrn=4269217|doi-access=free}}</ref><ref>{{Cite journal|last1=Moshary|first1=Sarah|last2=Tuchman|first2=Anna|last3=Bhatia Vajravelu|first3=Natasha|date=December 16, 2021|title=Gender-Based Pricing in Consumer Packaged Goods: A Pink Tax?|doi=10.2139/ssrn.3882214|s2cid=243416921|ssrn=3882214|doi-access=free}}</ref><ref name=":0">{{Cite web|url=http://www1.nyc.gov/assets/dca/downloads/pdf/partners/Study-of-Gender-Pricing-in-NYC.pdf|title=From Cradle to Cane: The Cost of Being A Female Consumer|last=Bessendorf|first=Anna|website=NYC DCA}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.investopedia.com/pink-tax-5095458|title=Pink Tax|website=Investopedia|language=en|access-date=2021-11-13}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bankrate.com/finance/credit-cards/pink-tax-how-women-pay-more/|title=The Pink Tax: How Women Pay More for Pink|last=Hoffman|first=Meredith|website=Bankrate|language=en-US|access-date=2021-12-30}}</ref><ref name=":7">{{Cite news|url=https://www.marketwatch.com/story/5-things-women-pay-more-for-than-men-2014-01-17|title=6 times it's more expensive to be a woman|last=Hill|first=Catey|work=MarketWatch|access-date=2018-05-23|language=en-US}}</ref><ref name=":10">{{Cite web|url=https://www.jec.senate.gov/public/_cache/files/8a42df04-8b6d-4949-b20b-6f40a326db9e/the-pink-tax---how-gender-based-pricing-hurts-women-s-buying-power.pdf|title=The Pink Tax -- How Gender Based Price Discrimination Hurts Women's Buying Power|last=Maloney|first=Carolyn|date=December 2016}}</ref> यह नाम इस अवलोकन से उत्पन्न है, अनेक प्रभावित उत्पाद पाटल वर्ण के हैं।
== पृष्ठभूमि ==
न्यूयॉर्क नगर उपभोक्ता कार्य विभाग द्वारा २०१५ में महिला उपभोक्ता होने की लागत पर कृत एक अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला, महिलाओं के उत्पाद सामान्यतः पुरुषों के उत्पादों की तुलना में बिना उचित कारण अधिक महँगे होते हैं।<ref name=":03">{{Cite web|url=http://www1.nyc.gov/assets/dca/downloads/pdf/partners/Study-of-Gender-Pricing-in-NYC.pdf|title=From Cradle to Cane: The Cost of Being A Female Consumer|last=Bessendorf|first=Anna|website=NYC DCA}}</ref> उसने यह भी निष्कर्ष निकाला, विशेष रूप से महिलाओं के लिए विपणित उत्पाद पुरुषों के लिए विपणित उत्पादों की तुलना में औसतन सात प्रतिशत अधिक मूल्य के होते हैं। यह अन्तरवस्त्रों, खिलौनों तथा स्वास्थ्य देखभाल उत्पादों आदि में लागू होता है। खिलौना क्षेत्र में बालिकाओं के खिलौने बालकों के खिलौनों की तुलना में औसतन सात प्रतिशत अधिक मूल्य के होते हैं। अध्ययन ने रेडियो फ़्लायर स्कूटर की साथ-साथ तुलना प्रस्तुत की, लाल स्कूटर का मूल्य २४.९९ अमरीकी डॉलर तथा पाटल स्कूटर का मूल्य ४९ अमरीकी डॉलर है, जो वर्ण को छोड़कर सर्वथा समान है। बालवस्त्रों में बालिकाओं के वस्त्र बालकों के वस्त्रों की तुलना में चार प्रतिशत अधिक महँगे थे। महिलाओं के वस्त्र पुरुषों के वस्त्रों की तुलना में आठ प्रतिशत अधिक महँगे थे। सर्वाधिक अन्तर व्यक्तिगत देखभाल/स्वच्छता उत्पादों में आया, महिलाओं के उत्पाद पुरुषों के उत्पादों की तुलना में तेरह प्रतिशत अधिक मूल्य के थे।<ref name=":02">{{Cite web|url=http://www1.nyc.gov/assets/dca/downloads/pdf/partners/Study-of-Gender-Pricing-in-NYC.pdf|title=From Cradle to Cane: The Cost of Being A Female Consumer|last=Bessendorf|first=Anna|website=NYC DCA}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:लिंगवाद]]
[[श्रेणी:आर्थिक असमानता]]
[[श्रेणी:लैंगिक समानता]]
[[श्रेणी:उपभोक्ता व्यवहार]]
[[श्रेणी:ब्रांड प्रबंधन]]
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गुलाबी कर
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2026-10-17T23:27:26Z
स्वर्ण
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[[पाटल कर]] को अनुप्रेषित
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गुरपाल सिंह अहलूवालिया
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न्यायमूर्ति गुरपाल सिंह अहलूवालिया मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हैं, जो वर्तमान में [[जबलपुर]] में प्रधान सीट पर कार्यरत हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.cdjlawjournal.com/honorablejudgesdetails.php?cid=82&jid=1183#|title=CDJ Law Journal|website=www.cdjlawjournal.com|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.caseon.in/judge/justice-gurpal-singh-ahluwalia|title=Justice Gurpal Singh Ahluwalia – Judge Profile|website=Caseon|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://mphc.gov.in/portfolio-judges|title=Portfolio Judges|publisher=High Court of Madhya Pradesh|access-date=3 April 2025}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.verdictum.in/tags/justice-gurpal-singh-ahluwalia|title=Read All Latest Judgment News Updates on and About.Justice Gurpal Singh Ahluwalia|last=Verdictum|website=www.verdictum.in|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/legal-news/madhya-pradesh-high-court-slams-police-parallel-enquiry-rape-case-10653476/|title=‘Really shocking’: Madhya Pradesh High Court rebukes police over parallel probe to aid rape accused|date=2026-04-24|website=The Indian Express|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/india/madhya-pradesh-high-court-unnatural-sex-ipc-section-377-9307988/|title=Unnatural sex with wife not offence under IPC Section 377: Madhya Pradesh High Court|date=2024-05-04|website=The Indian Express|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref>
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न्यायमूर्ति गुरपाल सिंह अहलूवालिया मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हैं, जो वर्तमान में [[जबलपुर]] में प्रधान सीट पर कार्यरत हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.cdjlawjournal.com/honorablejudgesdetails.php?cid=82&jid=1183#|title=CDJ Law Journal|website=www.cdjlawjournal.com|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.caseon.in/judge/justice-gurpal-singh-ahluwalia|title=Justice Gurpal Singh Ahluwalia – Judge Profile|website=Caseon|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://mphc.gov.in/portfolio-judges|title=Portfolio Judges|publisher=High Court of Madhya Pradesh|access-date=3 April 2025}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.verdictum.in/tags/justice-gurpal-singh-ahluwalia|title=Read All Latest Judgment News Updates on and About.Justice Gurpal Singh Ahluwalia|last=Verdictum|website=www.verdictum.in|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/legal-news/madhya-pradesh-high-court-slams-police-parallel-enquiry-rape-case-10653476/|title=‘Really shocking’: Madhya Pradesh High Court rebukes police over parallel probe to aid rape accused|date=2026-04-24|website=The Indian Express|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/india/madhya-pradesh-high-court-unnatural-sex-ipc-section-377-9307988/|title=Unnatural sex with wife not offence under IPC Section 377: Madhya Pradesh High Court|date=2024-05-04|website=The Indian Express|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref>
==संदर्भ==
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न्यायमूर्ति गुरपाल सिंह अहलूवालिया मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हैं, जो वर्तमान में [[जबलपुर]] में प्रधान सीट पर कार्यरत हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.cdjlawjournal.com/honorablejudgesdetails.php?cid=82&jid=1183#|title=CDJ Law Journal|website=www.cdjlawjournal.com|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.caseon.in/judge/justice-gurpal-singh-ahluwalia|title=Justice Gurpal Singh Ahluwalia – Judge Profile|website=Caseon|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://mphc.gov.in/portfolio-judges|title=Portfolio Judges|publisher=High Court of Madhya Pradesh|access-date=3 April 2025}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.verdictum.in/tags/justice-gurpal-singh-ahluwalia|title=Read All Latest Judgment News Updates on and About.Justice Gurpal Singh Ahluwalia|last=Verdictum|website=www.verdictum.in|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/legal-news/madhya-pradesh-high-court-slams-police-parallel-enquiry-rape-case-10653476/|title=‘Really shocking’: Madhya Pradesh High Court rebukes police over parallel probe to aid rape accused|date=2026-04-24|website=The Indian Express|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/india/madhya-pradesh-high-court-unnatural-sex-ipc-section-377-9307988/|title=Unnatural sex with wife not offence under IPC Section 377: Madhya Pradesh High Court|date=2024-05-04|website=The Indian Express|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref>
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'''न्यायमूर्ति गुरपाल सिंह अहलूवालिया''' मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हैं, जो वर्तमान में [[जबलपुर]] में प्रधान सीट पर कार्यरत हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.cdjlawjournal.com/honorablejudgesdetails.php?cid=82&jid=1183#|title=CDJ Law Journal|website=www.cdjlawjournal.com|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.caseon.in/judge/justice-gurpal-singh-ahluwalia|title=Justice Gurpal Singh Ahluwalia – Judge Profile|website=Caseon|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://mphc.gov.in/portfolio-judges|title=Portfolio Judges|publisher=High Court of Madhya Pradesh|access-date=3 April 2025}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.verdictum.in/tags/justice-gurpal-singh-ahluwalia|title=Read All Latest Judgment News Updates on and About.Justice Gurpal Singh Ahluwalia|last=Verdictum|website=www.verdictum.in|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/legal-news/madhya-pradesh-high-court-slams-police-parallel-enquiry-rape-case-10653476/|title=‘Really shocking’: Madhya Pradesh High Court rebukes police over parallel probe to aid rape accused|date=2026-04-24|website=The Indian Express|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/india/madhya-pradesh-high-court-unnatural-sex-ipc-section-377-9307988/|title=Unnatural sex with wife not offence under IPC Section 377: Madhya Pradesh High Court|date=2024-05-04|website=The Indian Express|language=en|access-date=2026-10-16}}</ref>
==संदर्भ==
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वार्ता:गुरपाल सिंह अहलूवालिया
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सदस्य:Dr. Ankur Bharti
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2026-10-18T02:03:50Z
Dr. Ankur Bharti
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text/x-wiki
Bhagavati Trishlananand Saraswati is an influential practitioner of Goddess Bhadrakali and Matangi within the Saraswati and Kali Kula of the Shakta sect. Under the Shakta sect, she established two Shakti Peethas: Shri Chandi Bhadrakali Peeth and Shri Matangi Saraswati Peeth. Her worldly name is Trishla Devki Prasad Vashistha. She was born in Udaipur, Rajasthan on March 28, 1940, to her father Devki Prasad and mother Janaki Devi. At the age of 36, following her initiation (Deeksha) by Guru Sacchidanand Ji, her new spiritual name was designated as Bhagavati Trishlananand Saraswati. She has numerous disciples in India and abroad, among whom Dr. Ankur Trishlananand Saraswati has been the most influential spiritual practitioner and disciple, who currently serves as the spiritual and initiatory Guru of the Shakta sect. Bhagavati Trishlananand Saraswati carried out many welfare activities for the betterment of the lives of widowed and abandoned women who have children; notably, arranging remarriages for widowed and abandoned women, and providing paternal happiness as well as a father's name to fatherless girls. Under the rules of initiation in her Shakta sect, it is mandatory for an initiated man to marry an initiated widowed or abandoned woman who has a daughter, to bring her happiness, and to joyfully raise and nurture her daughter as his own.
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2026-10-18T03:24:54Z
विक्रम प्रताप
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शीघ्र हटाने का अनुरोध ( मापदंड:[[वि:शीह#स3|शीह स3]])
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Bhagavati Trishlananand Saraswati is an influential practitioner of Goddess Bhadrakali and Matangi within the Saraswati and Kali Kula of the Shakta sect. Under the Shakta sect, she established two Shakti Peethas: Shri Chandi Bhadrakali Peeth and Shri Matangi Saraswati Peeth. Her worldly name is Trishla Devki Prasad Vashistha. She was born in Udaipur, Rajasthan on March 28, 1940, to her father Devki Prasad and mother Janaki Devi. At the age of 36, following her initiation (Deeksha) by Guru Sacchidanand Ji, her new spiritual name was designated as Bhagavati Trishlananand Saraswati. She has numerous disciples in India and abroad, among whom Dr. Ankur Trishlananand Saraswati has been the most influential spiritual practitioner and disciple, who currently serves as the spiritual and initiatory Guru of the Shakta sect. Bhagavati Trishlananand Saraswati carried out many welfare activities for the betterment of the lives of widowed and abandoned women who have children; notably, arranging remarriages for widowed and abandoned women, and providing paternal happiness as well as a father's name to fatherless girls. Under the rules of initiation in her Shakta sect, it is mandatory for an initiated man to marry an initiated widowed or abandoned woman who has a daughter, to bring her happiness, and to joyfully raise and nurture her daughter as his own.
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2026-10-18T03:26:35Z
विक्रम प्रताप
911487
मापदंड बदला ([[:m:User:Max/MaxEdit.js|MaxEdit]])
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{{शीह-व7}}
Bhagavati Trishlananand Saraswati is an influential practitioner of Goddess Bhadrakali and Matangi within the Saraswati and Kali Kula of the Shakta sect. Under the Shakta sect, she established two Shakti Peethas: Shri Chandi Bhadrakali Peeth and Shri Matangi Saraswati Peeth. Her worldly name is Trishla Devki Prasad Vashistha. She was born in Udaipur, Rajasthan on March 28, 1940, to her father Devki Prasad and mother Janaki Devi. At the age of 36, following her initiation (Deeksha) by Guru Sacchidanand Ji, her new spiritual name was designated as Bhagavati Trishlananand Saraswati. She has numerous disciples in India and abroad, among whom Dr. Ankur Trishlananand Saraswati has been the most influential spiritual practitioner and disciple, who currently serves as the spiritual and initiatory Guru of the Shakta sect. Bhagavati Trishlananand Saraswati carried out many welfare activities for the betterment of the lives of widowed and abandoned women who have children; notably, arranging remarriages for widowed and abandoned women, and providing paternal happiness as well as a father's name to fatherless girls. Under the rules of initiation in her Shakta sect, it is mandatory for an initiated man to marry an initiated widowed or abandoned woman who has a daughter, to bring her happiness, and to joyfully raise and nurture her daughter as his own.
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सदस्य वार्ता:Dr. Ankur Bharti
3
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2026-10-18T02:13:27Z
Dr. Ankur Bharti
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text/x-wiki
Dr. Ankur Trishalanand Saraswati is the current spiritual and initiation guru (Diksha Guru) of the Shakta sect. Within the Saraswati lineage of the Shakta tradition, he is the most outstanding disciple of the great practitioner and Shakta guru, Bhagwati Trishalanand Saraswati Ji. His worldly name is Ankur Bharti, and his parents are Shri Surendra Singh and Shanti Devi. He was born on March 28, 1995, in Ghodi Dhabiri village within the Hamirpur district of Himachal Pradesh. He holds a Ph.D. degree in Physics.
Currently, he serves as the head (Peethadhishwar) of the Bhagwati Trishalanand Saraswati Peeth in Rajasthan and the Bhagwati Matangi Saraswati Peeth in Udaipur. On May 16, 2024, his spiritual and initiation guru, Bhagwati Trishalanand Saraswati Ji, designated him as the guru of the Shakta sect. Following the merger of his guru into the supreme consciousness (Brahmatatva), he officially took charge as the spiritual and initiation guru of the Shakta sect on March 28, 2025.
At present, the work of documenting, amending, and publishing the fundamental rules and principles of the Shakta sect is being completed under his guidance. He bears the responsibility of illuminating the Shakta sect and operating and advancing the secrets, glories, and practices (Sadhana) of Bhagwati Jagdamba at the highest level.
To improve the lives of widowed and abandoned women, he established the "Ankur Trishalanand Saraswati Foundation," which works towards the remarriage and financial empowerment of widowed and destitute women. For the elevation and promotion of Sanatan Dharma, Vedic scriptures, Puranas, and Astrology, he founded the "Devi Tyamli Spiritual Service Institute," where proper knowledge of all these subjects is imparted. He has authored several books on the Shakta tradition, prominently including Shakta Rahasya, Shakti Sadhana, Tantrokt Durga Saptashati, Matangi Saraswati Sadhana Rahasya, and Shri Durga Sadhana Rahasya.
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विक्रम प्रताप
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शीघ्र हटाने का अनुरोध ( मापदंड:[[वि:शीह#व7|शीह व7]])
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text/x-wiki
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Dr. Ankur Trishalanand Saraswati is the current spiritual and initiation guru (Diksha Guru) of the Shakta sect. Within the Saraswati lineage of the Shakta tradition, he is the most outstanding disciple of the great practitioner and Shakta guru, Bhagwati Trishalanand Saraswati Ji. His worldly name is Ankur Bharti, and his parents are Shri Surendra Singh and Shanti Devi. He was born on March 28, 1995, in Ghodi Dhabiri village within the Hamirpur district of Himachal Pradesh. He holds a Ph.D. degree in Physics.
Currently, he serves as the head (Peethadhishwar) of the Bhagwati Trishalanand Saraswati Peeth in Rajasthan and the Bhagwati Matangi Saraswati Peeth in Udaipur. On May 16, 2024, his spiritual and initiation guru, Bhagwati Trishalanand Saraswati Ji, designated him as the guru of the Shakta sect. Following the merger of his guru into the supreme consciousness (Brahmatatva), he officially took charge as the spiritual and initiation guru of the Shakta sect on March 28, 2025.
At present, the work of documenting, amending, and publishing the fundamental rules and principles of the Shakta sect is being completed under his guidance. He bears the responsibility of illuminating the Shakta sect and operating and advancing the secrets, glories, and practices (Sadhana) of Bhagwati Jagdamba at the highest level.
To improve the lives of widowed and abandoned women, he established the "Ankur Trishalanand Saraswati Foundation," which works towards the remarriage and financial empowerment of widowed and destitute women. For the elevation and promotion of Sanatan Dharma, Vedic scriptures, Puranas, and Astrology, he founded the "Devi Tyamli Spiritual Service Institute," where proper knowledge of all these subjects is imparted. He has authored several books on the Shakta tradition, prominently including Shakta Rahasya, Shakti Sadhana, Tantrokt Durga Saptashati, Matangi Saraswati Sadhana Rahasya, and Shri Durga Sadhana Rahasya.
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वार्ता:बेनवंशी
1
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~2026-55238-45
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/* बेनवंशी बियार जाती के लोग है क्योंकि यह राजा बेन के साथ अपना संबंध रखते है और किसी के मृत्यु पर बियार समाज के लोग अपना मुंडन करवाते है और जनेव पहनते है ये बियार जाती के लोग युद्ध में शामिल थे और बियार जाती के लोग बहुत ही शक्तिशाली थे */ नया अनुभाग
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== बेनवंशी बियार जाती के लोग है क्योंकि यह राजा बेन के साथ अपना संबंध रखते है और किसी के मृत्यु पर बियार समाज के लोग अपना मुंडन करवाते है और जनेव पहनते है ये बियार जाती के लोग युद्ध में शामिल थे और बियार जाती के लोग बहुत ही शक्तिशाली थे ==
Biyar जाति जनजाति [[विशेष:योगदान/~2026-55238-45|~2026-55238-45]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-55238-45|वार्ता]]) 02:59, 18 अक्टूबर 2026 (UTC)
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विक्रम प्रताप
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पृथ्वी सिंह
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ArnavSingh979
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पृथ्वी सिंह
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<nowiki>*</nowiki>पृथ्वी सिंह के बारे में*
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ArnavSingh979
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/* */ पृथ्वी सिंह एक भारतीय बाल कलाकार हैं, जिनका जन्म 21 मार्च 2009 को मुंबई में हुआ। इनका गृहनगर सीबीडी बेलापुर, नवी मुंबई है। *परिवार:* पिता बिन्तेश सिंह, माता शिवानी सिंह, भाई वंश सयानी, बहन त्रिशा सिंह और छोटा भाई आरव सिंह। उन्होंने 2014 में *दिया और बाती हम* सीरियल से अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद *बालिका वधू 2, बालवीर रिटर्न्स और बालवीर* जैसे बड़े शोज़ में काम किया। अभिनय के साथ-साथ वे होस्टिंग भी करते हैं।
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<nowiki>*</nowiki>पृथ्वी सिंह के बारे में
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चाहर धर्मेंद्र
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शीघ्र हटाने का अनुरोध ( मापदंड:[[वि:शीह#व2|शीह व2]])
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<nowiki>*</nowiki>पृथ्वी सिंह के बारे में
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सदस्य वार्ता:Anitya Gautam
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चाहर धर्मेंद्र
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सामान्य टिप्पणी: विकिपीडिया का प्रोमोशन अथवा प्रचार के लिए प्रयोग करना [[:पराबैंगनी]] पर.
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== अक्टूबर 2026 ==
[[Image:Information.svg|25px|alt=|link=]] विकिपीडिया पर आपका स्वागत है। इस ज्ञानकोश पर रचनात्मक योगदान के लिए सभी का स्वागत है। परन्तु कृपया लेख या अन्य विकिपीडिया पन्नों पर प्रचार सामग्री न जोड़ें, जैसा की आपने [[:पराबैंगनी]] पर किया। विकिपीडिया का [[विकिपीडिया:विकिपीडिया क्या नहीं है#विकिपीडिया भाषण देने या प्रचार करने का मंच नहीं है|भाषण या प्रचार मंच]] के रूप में इस्तेमाल करना विकिपीडिया नीतियों के विरुद्ध है और यहाँ ऐसा करने की अनुमति नहीं है। विकिपीडिया के बारे में अधिक जानने के लिए [[विकिपीडिया:स्वागत|स्वागत पृष्ठ]] देखें। धन्यवाद।[[श्रेणी:सदस्य वार्ता पृष्ठ जिनपर Uw-advert1 सूचना है|{{PAGENAME}}]]<!-- Template:Uw-advert1 --> <span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 05:45, 18 अक्टूबर 2026 (UTC)
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Anitya Gautam
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/* अक्टूबर 2026 */ उत्तर
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== अक्टूबर 2026 ==
[[Image:Information.svg|25px|alt=|link=]] विकिपीडिया पर आपका स्वागत है। इस ज्ञानकोश पर रचनात्मक योगदान के लिए सभी का स्वागत है। परन्तु कृपया लेख या अन्य विकिपीडिया पन्नों पर प्रचार सामग्री न जोड़ें, जैसा की आपने [[:पराबैंगनी]] पर किया। विकिपीडिया का [[विकिपीडिया:विकिपीडिया क्या नहीं है#विकिपीडिया भाषण देने या प्रचार करने का मंच नहीं है|भाषण या प्रचार मंच]] के रूप में इस्तेमाल करना विकिपीडिया नीतियों के विरुद्ध है और यहाँ ऐसा करने की अनुमति नहीं है। विकिपीडिया के बारे में अधिक जानने के लिए [[विकिपीडिया:स्वागत|स्वागत पृष्ठ]] देखें। धन्यवाद।[[श्रेणी:सदस्य वार्ता पृष्ठ जिनपर Uw-advert1 सूचना है|{{PAGENAME}}]]<!-- Template:Uw-advert1 --> <span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 05:45, 18 अक्टूबर 2026 (UTC)
:हमे माफ़ कीजिये गा अगर हमारी वजह से आपको कोई दिक्कत आई हो तो हम अगली बार से ध्यान रखेंगे इस बात का | धन्यवाद | [[सदस्य:Anitya Gautam|Anitya Gautam]] ([[सदस्य वार्ता:Anitya Gautam|वार्ता]]) 07:18, 18 अक्टूबर 2026 (UTC)
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चाहर धर्मेंद्र
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/* अक्टूबर 2026 */ Anitya Gautam को उत्तर दिया ([[mw:c:Special:MyLanguage/User:JWBTH/CD|CD]])
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== अक्टूबर 2026 ==
[[Image:Information.svg|25px|alt=|link=]] विकिपीडिया पर आपका स्वागत है। इस ज्ञानकोश पर रचनात्मक योगदान के लिए सभी का स्वागत है। परन्तु कृपया लेख या अन्य विकिपीडिया पन्नों पर प्रचार सामग्री न जोड़ें, जैसा की आपने [[:पराबैंगनी]] पर किया। विकिपीडिया का [[विकिपीडिया:विकिपीडिया क्या नहीं है#विकिपीडिया भाषण देने या प्रचार करने का मंच नहीं है|भाषण या प्रचार मंच]] के रूप में इस्तेमाल करना विकिपीडिया नीतियों के विरुद्ध है और यहाँ ऐसा करने की अनुमति नहीं है। विकिपीडिया के बारे में अधिक जानने के लिए [[विकिपीडिया:स्वागत|स्वागत पृष्ठ]] देखें। धन्यवाद।[[श्रेणी:सदस्य वार्ता पृष्ठ जिनपर Uw-advert1 सूचना है|{{PAGENAME}}]]<!-- Template:Uw-advert1 --> <span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 05:45, 18 अक्टूबर 2026 (UTC)
:हमे माफ़ कीजिये गा अगर हमारी वजह से आपको कोई दिक्कत आई हो तो हम अगली बार से ध्यान रखेंगे इस बात का | धन्यवाद | [[सदस्य:Anitya Gautam|Anitya Gautam]] ([[सदस्य वार्ता:Anitya Gautam|वार्ता]]) 07:18, 18 अक्टूबर 2026 (UTC)
:: कोई बात नहीं, आपको क्षमा माँगने की आवश्यकता नहीं है। विकिपीडिया पर हम सभी सीखते हुए योगदान करते हैं। आपके सकारात्मक दृष्टिकोण के लिए धन्यवाद। आशा है कि आप आगे भी विकिपीडिया पर रचनात्मक योगदान देते रहेंगे। बस संपादन करते समय [[विकिपीडिया:नीतियाँ और दिशानिर्देश|विकिपीडिया की नीतियों और दिशानिर्देशों]] का ध्यान रखें। शुभकामनाएँ! <span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 07:37, 18 अक्टूबर 2026 (UTC)
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मुबारक़ शाह
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नया पृष्ठ: {{Infobox royalty | succession = दिल्ली का सुल्तान |image= [[File:Coin of Mubarak Shah of the Delhi Sultanate (Sayyid dynasty).jpg|250px|]] |caption = मुबारक़ शाह के समय के सिक्के | reign = 21 मई 1421 <br> 19 फ़रवरी 1434 | dynasty = [[सैयद वंश]] | predecessor = [[ख़िज्र खाँ]] | successor = मुहम्मद शा...
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}}
'''मुइज़ुद्दीन मुहम्मद मुबारक शाह द्वितीय''' 1421 से 1434 तक दिल्ली का सुल्तान था और [[सैयद वंश]] का दूसरा सम्राट था, जिसने [[दिल्ली सल्तनत]] पर शासन किया। वह [[ख़िज्र खाँ]] का पुत्र था।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:१५वीं सदी के भारतीय सम्राट]]
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'''मुइज़ुद्दीन मुहम्मद मुबारक शाह द्वितीय''' 1421 से 1434 तक दिल्ली का सुल्तान था और [[सैयद वंश]] का दूसरा सम्राट था, जिसने [[दिल्ली सल्तनत]] पर शासन किया। वह [[ख़िज्र खाँ]] का पुत्र था।<ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/dli.ernet.527074|title=The Delhi Sultanate|last=Majumdar R.c.|date=1960|publisher=Bharatiya Vidya Bhavan Bombay}}</ref>
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:१५वीं सदी के भारतीय सम्राट]]
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बजरंग मुनि
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Rishi1410
12394
व्यक्तिगत तौर पर ये मेरी जानकारी है जो पूरी तरह अनुभव पर आधारित है और प्रामाणिक स्रोतों के आधार पर है। स्रोतों के लिंक देना दे दिये गए हैं.
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text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति
| name = बजरंग मुनि
| other_names = बजरंग लाल अग्रवाल (जन्म एवं राजकीय नाम)<br />बजरंग बाबू (स्थानीय लोकप्रिय नाम)
| image = Bajrang_Muni.jpg
| caption = बजरंग मुनि (बजरंग लाल अग्रवाल)
| birth_name = बजरंग लाल अग्रवाल
| birth_date = 25 दिसंबर 1939
| birth_place = [[रामानुजगंज]], [[बलरामपुर जिला, छत्तीसगढ़|बलरामपुर-रामानुजगंज जिला]] (तत्कालीन [[सरगुजा जिला|सरगुजा]]), [[छत्तीसगढ़]], [[भारत]]
| nationality = भारतीय
| occupation = संवैधानिक चिंतक, लेखक, समाज सुधारक
| organization = ज्ञान यज्ञ आश्रम (रामानुजगंज), मार्गदर्शक
| known_for = ''भारत का संविधान'' (395 अनुच्छेदों का वैकल्पिक प्रारूप, 1987), ''लोक स्वराज्य'' एवं ''ग्राम सभा सशक्तिकरण'' अभियान
| notable_works = ''भारत का संविधान'' (1987), ''मौलिक भारत का संविधान'' (2015), ''लोक स्वराज्य''
}}
'''बजरंग मुनि''' (जन्म एवं राजकीय नाम: '''बजरंग लाल अग्रवाल'''; स्थानीय लोकप्रिय नाम: '''बजरंग बाबू'''; जन्म: 25 दिसंबर 1939) [[छत्तीसगढ़]] के [[रामानुजगंज]] (तत्कालीन [[सरगुजा जिला]], वर्तमान [[बलरामपुर जिला, छत्तीसगढ़|बलरामपुर-रामानुजगंज जिला]]) से संबंधित एक भारतीय संवैधानिक चिंतक, लेखक और सामाजिक-राजनीतिक विचारक हैं।<ref name="RBRai">राम बहादुर राय (2021), ''[https://www.prabhatbooks.com/bharatiya-samvidhan-anakahi-kahani.htm भारतीय संविधान : अनकही कहानी]'', प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली, ISBN 978-93-90900-96-1, पृष्ठ 12–13 ([https://www.scribd.com/document/705600684 पूर्ण पुस्तक पीडीएफ व पाठ])।</ref> वे 1980 के दशक से [[भारत का संविधान|भारतीय संविधान]] की समीक्षा, सत्ता के विकेंद्रीकरण, 'ग्राम सभा सशक्तिकरण' और 'लोक स्वराज्य' के विषय पर शोध, लेखन और जन-जागरण अभियान चला रहे हैं।
वरिष्ठ पत्रकार एवं [[इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र]] (IGNCA) के अध्यक्ष पद्मभूषण [[राम बहादुर राय]] ने अपनी पुस्तक ''भारतीय संविधान : अनकही कहानी'' (प्रभात प्रकाशन, 2021) में स्वतंत्रता के बाद भारत में तैयार किए गए चार प्रमुख वैकल्पिक संविधान प्रारूपों में रामानुजगंज के 'ज्ञान यज्ञ आश्रम' द्वारा प्रकाशित 395 अनुच्छेदों के ''भारत का संविधान'' (1987) को प्रथम स्थान पर सूचीबद्ध किया है तथा बजरंग लाल अग्रवाल के इस संवैधानिक अभियान में पूर्व [[लोक सभा|लोकसभा]] महासचिव [[सुभाष कश्यप|डॉ. सुभाष कश्यप]], गांधीवादी चिंतक ठाकुरदास बंग और अमरनाथ भाई की सहभागिता का विवरण दर्ज किया है।<ref name="RBRai" />
== प्रारंभिक जीवन, पूर्व राजनीतिक यात्रा और वानप्रस्थ (2008) ==
बजरंग मुनि का जन्म 25 दिसंबर 1939 को तत्कालीन सरगुजा रियासत (वर्तमान [[बलरामपुर जिला, छत्तीसगढ़|बलरामपुर-रामानुजगंज जिला]], [[छत्तीसगढ़]]) के [[रामानुजगंज]] में हुआ था। सरकारी दस्तावेजों एवं राजकीय पत्रों में उनका नाम '''बजरंग लाल अग्रवाल''' दर्ज है, जबकि सरगुजा और रामानुजगंज अंचल में स्थानीय लोगों के बीच वे ''''बजरंग बाबू'''' के नाम से जाने जाते रहे हैं।<ref name="RBRai" /><ref name="NewsPlus21Kadvi">[https://www.youtube.com/watch?v=0mD3z2PuAqE "कड़वी बात बजरंग मुनि के साथ"], ''NewsPlus21'' (लाइव प्रसारण), 23 मार्च 2022।</ref>
अपने प्रारंभिक सार्वजनिक जीवन में वे सक्रिय राजनीति से जुड़े रहे और अविभाजित [[सरगुजा जिला|सरगुजा जिले]] में [[भारतीय जनसंघ]] तथा बाद में [[जनता पार्टी]] के जिला अध्यक्ष रहे। वर्ष 1975–1977 के [[आपातकाल (भारत)|आपातकाल]] के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों के आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्होंने जेल यात्रा भी की। वर्ष 1980 से 1984 तक वे [[भारतीय जनता पार्टी]] (भाजपा) में रहे, किंतु 1984 में उन्होंने दलगत और चुनावी राजनीति से स्थायी संन्यास ले लिया और निर्दलीय रूप से संवैधानिक चिंतन एवं समाज सुधार के कार्य में जुट गए।<ref name="NewsPlus21Kadvi" />
वर्ष 2008 में रामानुजगंज में आयोजित एक सार्वजनिक समारोह में योगगुरु [[स्वामी रामदेव]] की उपस्थिति में उन्होंने औपचारिक रूप से [[वानप्रस्थ आश्रम|वानप्रस्थ]] ग्रहण किया। वानप्रस्थ ग्रहण करने और पारिवारिक संपत्ति के स्वामित्व का त्याग करने के पश्चात उन्होंने स्वयं को ''''बजरंग मुनि'''' के रूप में घोषित किया।<ref name="NewsPlus21Untold">[http://www.youtube.com/watch?v=ayuodNjE9g0 "खास चर्चा : The Untold Story (बजरंग मुनि विशेष साक्षात्कार)"], ''NewsPlus21'', 2022 (समय: 00:01:40–00:03:00)।</ref>
== संवैधानिक आंदोलन और 'ज्ञान यज्ञ आश्रम' (1987–वर्तमान) ==
दलगत राजनीति छोड़ने के बाद बजरंग बाबू ने रामानुजगंज में ''''ज्ञान यज्ञ आश्रम'''' (तथा बाद में 'मार्गदर्शक' मंच) की स्थापना की और वर्तमान भारतीय संविधान की केंद्रीकृत संरचना के स्थान पर भारतीय गणतांत्रिक मूल्यों एवं ग्राम-स्वराज्य पर आधारित वैकल्पिक संविधान का प्रारूप तैयार करने का अभियान शुरू किया।<ref>व्यक्तिगत तौर पर ये मेरी जानकारी है जो पूरी तरह अनुभव पर आधारित है और प्रामाणिक स्रोतों के आधार पर प्रमाणित है।</ref>
पद्मभूषण [[राम बहादुर राय]] ने अपनी पुस्तक ''भारतीय संविधान : अनकही कहानी'' के प्रथम अध्याय (पृष्ठ 12–13) में इस अभियान का उल्लेख करते हुए लिखा है:<ref name="RBRai" />
<blockquote>छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिले में बजरंग लाल अग्रवाल ने एक समय संविधान पर विचार-विमर्श के लिए अनेक कार्यक्रम किए। एकाधिक सेमिनार में लोकसभा के पूर्व महासचिव और संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप भी शामिल हुए थे। उन लोगों ने भी एक संविधान बनाया था। उसे पुस्तकाकार छपवाया। बजरंग लाल अग्रवाल के निमंत्रण पर मैं दो बार उनके कार्यक्रमों में गया था। उन कार्यक्रमों में गांधीवादी अर्थशास्त्री ठाकुरदास बंग और सर्व सेवा संघ के पूर्व अध्यक्ष अमरनाथ भाई भी आए थे।</blockquote>
राम बहादुर राय ने अपनी पुस्तक में जिन चार वैकल्पिक संवैधानिक प्रयासों का उल्लेख किया है, उनमें ''''भारत का संविधान — ज्ञान यज्ञ आश्रम, रामानुजगंज (म.प्र.), 1987 ई., कुल अनुच्छेद 395'''' को प्रथम स्थान पर रखा है।<ref name="RBRai" /> वर्ष 1987 के इस प्रारूप के बाद उन्होंने वर्ष 2015 में 192 अनुच्छेदों वाला संक्षिप्त प्रारूप ''''मौलिक भारत का संविधान'''' भी प्रकाशित किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने ''विस्फोट डॉट कॉम (Visfot.com)'' जैसी ई-पत्रिकाओं और विभिन्न मंचों पर भारतीय संविधान की समीक्षा करते हुए लेख लिखे।
=== वैकल्पिक संवैधानिक प्रारूप के मुख्य बिंदु ===
बजरंग मुनि द्वारा प्रस्तावित संवैधानिक ढांचे और 'लोक स्वराज्य' के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:<ref name="A2Z_Ep1">[https://www.youtube.com/watch?v=oyAMDc1di3Q "ऐसा देश हो मेरा - एपिसोड 1 (बजरंग मुनि के साथ संवैधानिक चर्चा)"], ''A2Z News'' (एंकर: रामवीर श्रेष्ठ), 1 नवंबर 2011।</ref><ref name="Sarthak2016">[https://www.youtube.com/watch?v=CYu7kwUhfCA "बजरंग मुनि से खास मुलाकात"], ''सार्थक न्यूज़ (Sarthak News)'', 2 सितंबर 2016।</ref>
* '''पंच-स्तरीय शासन व्यवस्था:''' शासन की शक्ति और बजट का सीधा विभाजन पांच स्तरों—ग्राम (अथवा नगर वार्ड), ब्लॉक, जिला, प्रदेश और केंद्र—के बीच किया जाए, जिसमें सबसे निचली इकाई ([[ग्राम सभा]] / नागरिक इकाई) संप्रभु हो।
* '''राइट टू रिकॉल (जनप्रतिनिधि को वापस बुलाने का अधिकार):''' यदि कोई निर्वाचित प्रतिनिधि जनहित के विरुद्ध कार्य करे, तो मतदाताओं को बहुमत से उसे कार्यकाल के बीच में ही पद से हटाने का संवैधानिक अधिकार हो।
* '''जनमत संग्रह (Referendum):''' राष्ट्र और समाज को प्रभावित करने वाले बड़े नीतिगत निर्णयों एवं संविधान संशोधनों पर सीधे नागरिकों की राय ली जाए।
* '''सुलभ एवं त्वरित न्याय व्यवस्था:''' न्याय प्रणाली को स्थानीय स्तर पर सरल और भारतीय समाज के अनुकूल बनाया जाए।
== 'लोक स्वराज्य' और अरविंद केजरीवाल को वैचारिक मार्गदर्शन ==
वर्ष 2007–2008 के दौरान जब [[अरविंद केजरीवाल]] और [[मनीष सिसोदिया]] जन-आंदोलन एवं 'स्वराज' की अवधारणा पर कार्य कर रहे थे, तब वरिष्ठ पत्रकार [[राम बहादुर राय]] के सुझाव पर वे राजनीतिक व संवैधानिक मार्गदर्शन के लिए रामानुजगंज जाकर बजरंग मुनि से मिले थे।<ref name="A2Z_Ep5">[https://www.youtube.com/watch?v=YfH7_NRTKWs "ऐसा देश हो मेरा - एपिसोड 5 (अरविंद केजरीवाल एवं संवैधानिक आंदोलन पर चर्चा)"], ''A2Z News'' (एंकर: रामवीर श्रेष्ठ), 21 नवंबर 2011 (समय: 00:13:50–00:14:55)।</ref><ref name="NewsPlus21Untold" />
राष्ट्रीय समाचार चैनल ''A2Z News'' के कार्यक्रम ''ऐसा देश हो मेरा'' (एपिसोड 5) और ''NewsPlus21'' के साक्षात्कार ''खास चर्चा : द अनटोल्ड स्टोरी'' में प्रसारित विवरण के अनुसार, अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने रामानुजगंज में दो-तीन दिनों तक रुककर बजरंग मुनि के साथ 'लोक स्वराज्य', 'ग्राम सभा सशक्तिकरण' और 'राइट टू रिकॉल' जैसे संवैधानिक सुधारों की रूपरेखा पर विचार-विमर्श किया था।<ref name="A2Z_Ep5" /><ref name="NewsPlus21Untold" /> बाद में जब इस आंदोलन ने एक राजनीतिक दल का रूप ले लिया, तो दलगत राजनीति से दूर रहने के अपने सिद्धांत के कारण बजरंग मुनि ने उससे दूरी बना ली।
== राष्ट्रीय संगोष्ठियां और अकादमिक संवाद ==
बजरंग मुनि ने विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और राष्ट्रीय मंचों पर संविधान, लोक स्वराज्य और न्याय व्यवस्था पर संगोष्ठियों को संबोधित किया है:
* '''मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस (वसुंधरा, गाजियाबाद) की संगोष्ठियां:''' [[ग़ाज़ियाबाद|गाजियाबाद]] के वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस (चेयरमैन: डॉ. अशोक कुमार गदिया)<ref name="MewarProfile">[https://mewarinstituteofmanagement.com/chairman's_profile.php "Chairman's Profile - CA (Dr.) Ashok Kumar Gadiya"], ''Mewar Institute of Management'' एवं [https://www.mewaruniversity.org/uploads/files/Chancellor_Profile(2).pdf ''Mewar University Official Profile'']।</ref> में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठियों में बजरंग मुनि ने संविधान विशेषज्ञ [[सुभाष कश्यप|डॉ. सुभाष कश्यप]], वरिष्ठ पत्रकार पद्मभूषण [[राम बहादुर राय]], अर्थशास्त्री डॉ. भरत झुनझुनवाला, तथा राष्ट्रीय आयोगों एवं अनुसंधान परिषदों के अध्यक्षों के साथ मंच साझा करते हुए संवैधानिक सुधारों पर विचार रखे। वर्ष 2023 में भी मेवाड़ संस्थान में राम बहादुर राय और राष्ट्रीय अनुसंधान परिषद/आयोग के पदाधिकारियों की उपस्थिति में संवैधानिक विमर्श का आयोजन हुआ।
* '''कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया (नई दिल्ली, 2023) का सम्मेलन:''' वर्ष 2023 में [[नई दिल्ली]] स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित संवैधानिक संगोष्ठी में बजरंग मुनि के साथ सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय, मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया, और [[छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय]] के सेवानिवृत्त न्यायाधीश सहित कई विधिवेत्ताओं ने भाग लिया।
* '''राष्ट्रीय ज्ञानोत्सव, रामानुजगंज (जून 2024):''' जून 2024 में रामानुजगंज के लरंगसाय कम्युनिटी हॉल में बजरंग मुनि के मार्गदर्शन में तीन दिवसीय 'राष्ट्रीय ज्ञानोत्सव' आयोजित हुआ, जिसमें देश के 16 राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था और समाज की चुनौतियों पर चर्चा की।<ref name="Bharatwani2024">[https://bharatwani.live/archives/23752 "रामानुजगंज में तीन दिवसीय राष्ट्रीय ज्ञानोत्सव का समापन"], ''भारतवाणी (Bharatwani Live)'', 10 जून 2024।</ref><ref name="HindustanSamvad2024">[http://hindustansamvad.in/?p=276917 "बजरंग मुनि के सान्निध्य में तीन दिवसीय राष्ट्रीय ज्ञानोत्सव संपन्न"], ''हिंदुस्तान संवाद (Hindustan Samvad)'', 10 जून 2024।</ref>
== जनसंचार, टेलीविजन शृंखला और फिल्म रूपांतरण ==
* '''राष्ट्रीय टेलीविजन शृंखला (''ऐसा देश हो मेरा''):''' वर्ष 2011 में राष्ट्रीय समाचार चैनल ''A2Z News'' ने पत्रकार रामवीर श्रेष्ठ के संचालन में बजरंग मुनि के संवैधानिक विचारों और वैकल्पिक संविधान प्रारूप पर ''''ऐसा देश हो मेरा'''' शीर्षक से 12 एपिसोड की एक साप्ताहिक शृंखला प्रसारित की।<ref name="A2Z_Ep1" /><ref name="A2Z_Ep6">[https://www.youtube.com/watch?v=dnWF95SacZs "ऐसा देश हो मेरा - एपिसोड 6 (बजरंग मुनि)"], ''A2Z News'', 19 दिसंबर 2011।</ref> इसके अतिरिक्त ''सार्थक न्यूज़'' (2016, 2018)<ref name="Sarthak2016" /><ref name="Sarthak2018">[https://www.youtube.com/watch?v=WvS61z_PTZA "बजरंग मुनि के साथ संवैधानिक चर्चा"], ''सार्थक न्यूज़ (Sarthak News)'', 9 अप्रैल 2018।</ref> और ''NewsPlus21'' (2022)<ref name="NewsPlus21Kadvi" /> ने भी उनके साक्षात्कार प्रसारित किए।
* '''फिल्म एवं नाट्य रूपांतरण (''रामानुजगंज एक आवाज'', 2023):''' जनवरी 2023 में 'मदारी आर्ट्स' (Madari Arts) के बैनर तले निर्देशक राकेश के निर्देशन में बजरंग मुनि के जीवन-संघर्ष और रामानुजगंज से शुरू हुए संवैधानिक जन-जागरण अभियान पर आधारित ''''रामानुजगंज एक आवाज'''' नामक नाटक-रूपांतरित फिल्म का निर्माण किया गया, जिसमें अभिनेता शाहिद नजीर ने बजरंग मुनि की भूमिका निभाई।<ref name="Slumdog2023">[http://www.youtube.com/watch?v=oFar6_ixJyw "'रामानुजगंज एक आवाज' — बजरंग मुनि के जीवन पर आधारित फिल्म की शूटिंग रिपोर्ट"], ''Slumdog Entertainment'', 29 जनवरी 2023।</ref>
== प्रमुख कृतियां ==
* ''भारत का संविधान'' (395 अनुच्छेदों वाला वैकल्पिक संवैधानिक प्रारूप) — प्रकाशक: ज्ञान यज्ञ आश्रम, रामानुजगंज (1987)<ref name="RBRai" />
* ''मौलिक भारत का संविधान'' (192 अनुच्छेदों वाला संक्षिप्त संवैधानिक प्रारूप, 2015)
* ''लोक स्वराज्य'' (ग्राम सभा सशक्तिकरण एवं सहभागी लोकतंत्र पर वैचारिक कृति)
== सन्दर्भ ==
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[[श्रेणी:1939 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:छत्तीसगढ़ के लेखक]]
[[श्रेणी:भारतीय समाज सुधारक]]
[[श्रेणी:भारतीय राजनीतिक चिंतक]]
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चाहर धर्मेंद्र
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शीघ्र हटाने का अनुरोध ( मापदंड:[[वि:शीह#व1|शीह व1]])
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मुहम्मद शाह IV
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'''अलाउद्दीन आलम शाह''', 1445 से 1451 तक दिल्ली का सुल्तान था और [[सैयद वंश]] का चौथा और अंतिम सम्राट था, जिसने [[दिल्ली सल्तनत]] पर शासन किया।
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'''अलाउद्दीन आलम शाह''', 1445 से 1451 तक दिल्ली का सुल्तान था और [[सैयद वंश]] का चौथा और अंतिम सम्राट था, जिसने [[दिल्ली सल्तनत]] पर शासन किया।<ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/dli.ernet.527074|title=The Delhi Sultanate|last=Majumdar R.c.|date=1960|publisher=Bharatiya Vidya Bhavan Bombay}}</ref>
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अधिसेकण्ड
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स्वर्ण
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[[File:Leapsecond2016.png|अंगूठाकार|अन्तिम अधिसेकण्ड के समय, ३१ दिसम्बर २०१६ को, time.gov से लिए गए [[सार्व निर्देशांकित काल|समन्वित सार्वभौमिक समय]] घड़ी का [[स्क्रीनशॉट]] (पर्दापटल-चित्र)।]]
'''अधिसेकण्ड''', '''अधिक्षण''', '''अधिसानिया''' ({{Langx|en|leap second|italic=no}}, ''लीप सेकंड'') अथवा '''अन्तर्संयोजित सेकण्ड''' ({{Langx|en|intercalary seconds|italic=no}}), १९७२ से २०१६ के मध्य [[सार्व निर्देशांकित काल|समन्वित सार्वभौमिक समय]] (यूटीसी) में यदा-कदा लागू किए गए एक-[[सेकण्ड]] के समायोजन थे, जिनका उद्देश्य [[अन्तरराष्ट्रीय परमाण्विक काल|अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु समय]], जो [[परमाणु घड़ी|परमाणु घड़ियों]] द्वारा यथार्थ रूप से मापा जाता है, तथा प्रेक्षित [[सौर समय]], जो [[पृथ्वी]] के घूर्णन की अनियमितताओं एवं दीर्घकालिक मन्दन के कारण परिवर्तित होता है, के मध्य अन्तर को समायोजित करना था।
समन्वित सार्वभौमिक समय मानक, जो अन्तर्राष्ट्रीय समयपालन हेतु व्यापक रूप से प्रयुक्त तथा अधिकांश देशों में नागरिक समय के सन्दर्भ के रूप में प्रयुक्त होता है, अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु समय का उपयोग करता है और परिणामतः प्रेक्षित सौर समय से आगे चलता है, यदि आवश्यकतानुसार उसे प्रेक्षित सौर समय पर पुनःस्थापित न किया जाए: मानक ने ±०.९ सेकण्ड का परम अनुमत विचलन निर्धारित किया। विचलन-सीमा प्राप्त होने पर यह समायोजन प्रदान करने हेतु अधिसेकण्ड-व्यवस्था विद्यमान थी। अधिसेकण्ड १९७२ में प्रवर्तित किया गया। उस समय समन्वित सार्वभौमिक समय अन्तर को प्रबन्धित करने की पूर्ववर्ती विधियों के कारण अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु समय से १० सेकण्ड पीछे रह चुका था। समग्रतः समन्वित सार्वभौमिक समय में २७ अधिसेकण्ड जोड़े गए, अन्तिम ३१ दिसम्बर २०१६ को हुआ; अतः जनवरी २०१७ से समन्वित सार्वभौमिक समय तथा अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु समय के मध्य अन्तर ३७ सेकण्ड रहा है। सभी धनात्मक अधिसेकण्ड थे, जो समन्वित सार्वभौमिक समय के दिवस में एक सेकण्ड जोड़ते थे; ऋणात्मक अधिसेकण्ड सैद्धान्तिक रूप से सम्भव था, तथापि कोई भी कभी घटित नहीं हुआ।<ref name="Martin-2024">{{Cite magazine|first=Cassie|last=Martin|date=19 January 2024|title=50 years ago, timekeepers deployed the newly invented leap second|url=https://www.sciencenews.org/article/50-years-ago-leap-second|magazine=[[Science News]]}}</ref>
यतः पृथ्वी की घूर्णन गति जलवायु-सम्बन्धी एवं भूवैज्ञानिक घटनाओं के प्रति परिवर्तित होती है, अतः समन्वित सार्वभौमिक समय के अधिसेकण्ड अनियमित अन्तरालों पर स्थित थे तथा यथार्थतः पूर्वानुमेय नहीं थे।<ref>{{cite web|url=https://www.iers.org/IERS/EN/Science/EarthRotation/EarthRotation.html|title=IERS science background|date=2013|publisher=[[IERS]]|access-date=6 August 2016}}</ref> अधिसेकण्ड अन्तर्निवेशन का निर्णय अन्तर्राष्ट्रीय पृथ्वी घूर्णन एवं सन्दर्भ प्रणाली सेवा द्वारा सामान्यतः लगभग छह मास पूर्व लिया जाता था, जिससे यह सुनिश्चित हो सके, समन्वित सार्वभौमिक समय तथा प्रेक्षित सौर समय के मध्य अन्तर ±०.९ सेकण्ड की विचलन-सीमा को न अतिक्रमित करे।<ref name="BulletinC49">{{cite web|url=http://hpiers.obspm.fr/eoppc/bul/bulc/bulletinc.49|title=Bulletin C 49|last=Gambis|first=Daniel|date=5 January 2015|publisher=[[IERS]]|access-date=5 January 2015}}</ref>
यह प्रथा विघटनकारी थी, विशेषतः आधुनिक अंकीय (डिजिटल) प्रणालियों में, जिन्हें सतत तथा यथार्थ समयचिह्नन अपेक्षित होता है। यतः सभी प्रणालियों ने अधिसेकण्ड समायोजन एकरूपता से लागू नहीं किए, अतः कतिपय संगणनात्मक, जालकर्म-सम्बन्धी तथा उपग्रह-आधारित प्रणालियों में विसंगतियाँ उत्पन्न हुईं।<ref>{{cite journal|last1=Finkleman|first1=David|last2=Allen|first2=Steve|last3=Seago|first3=John|last4=Seaman|first4=Rob|last5=Seidelmann|first5=P. Kenneth|year=2011|title=The Future of Time: UTC and the Leap Second|url=https://www.americanscientist.org/article/the-future-of-time-utc-and-the-leap-second|journal=[[American Scientist]]|volume=99|issue=4|pages=312–319|arxiv=1106.3141|doi=10.1511/2011.91.312}}</ref> १५ अक्तूबर २०२६ को [[भार एवं मापन पर सामान्य सम्मेलन|भार एवं मापों पर सामान्य सम्मेलन]] ने २० मई २०२७ से प्रभावी रूप से भावी अधिसेकण्डों के योग अथवा व्यवकलन को बन्द करने तथा परम अनुमत विचलन की सीमा को एक घण्टा तक बढ़ाने हेतु मतदान किया।<ref>{{Cite web|url=https://www.bipm.org/en/cgpm-2026/resolution-5|title=Resolution 5 of the 28th CGPM (2026) On the technical actions needed to ensure the continuity of UTC|access-date=15 Oct 2026}}</ref>
[[File:Leapsecond.ut1-utc.svg|अंगूठाकार|प्रेक्षित सौर समय तथा समन्वित सार्वभौमिक समय के मध्य अन्तर दर्शाने वाला आलेख। असन्ततियाँ अधिसेकण्डों के संगत हैं।]]
== सन्दर्भ ==
<templatestyles src="Reflist/styles.css" />{{Reflist}}
== अग्रिम पठन ==
* {{Cite news|title=Savouring the last leap second in history|last=Ahuja|first=Anjana|date=30 October 2005|work=[[New Straits Times]]|page=F10|author-link=Anjana Ahuja}}
*
* {{Cite journal|last=Finkleman|first=David|last2=Allen|first2=Steve|last3=Seago|first3=John|last4=Seaman|first4=Rob|last5=Seidelmann|first5=P. Kenneth|year=2011|title=The Future of Time: UTC and the Leap Second|url=https://www.americanscientist.org/article/the-future-of-time-utc-and-the-leap-second|journal=[[American Scientist]]|volume=99|issue=4|pages=312–319|arxiv=1106.3141|doi=10.1511/2011.91.312|s2cid=118403321}}
* {{Cite journal|last=Kamp|first=Poul-Henning|year=2011|title=The One-Second War|journal=[[Communications of the ACM]]|volume=54|issue=5|pages=44–48|doi=10.1145/1941487.1941505|doi-access=free}}
* {{Cite book|title=TIME From Earth Rotation to Atomic Physics|last=McCarthy|first=Dennis D.|last2=Seidelmann|first2=P. Kenneth|publisher=[[Wiley-VCH]]|year=2009|isbn=978-3527407804|location=[[Weinheim]]|doi=10.1002/9783527627943|author-link=Dennis McCarthy (scientist)}}
[[श्रेणी:विज्ञान में समय]]
[[श्रेणी:समयपालन]]
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[[File:Leapsecond2016.png|अंगूठाकार|अन्तिम अधिसेकण्ड के समय, ३१ दिसम्बर २०१६ को, time.gov से लिए गए [[सार्व निर्देशांकित काल|समन्वित सार्वभौमिक समय]] घड़ी का [[स्क्रीनशॉट]] (पर्दापटल-चित्र)।]]
[[File:Leapsecond.ut1-utc.svg|अंगूठाकार|प्रेक्षित सौर समय तथा समन्वित सार्वभौमिक समय के मध्य अन्तर दर्शाने वाला आलेख। असन्ततियाँ अधिसेकण्डों के संगत हैं।]]
'''अधिसेकण्ड''', '''अधिक्षण''', '''अधिसानिया''' ({{Langx|en|leap second|italic=no}}, ''लीप सेकंड'') अथवा '''अन्तर्संयोजित सेकण्ड''' ({{Langx|en|intercalary seconds|italic=no}}), १९७२ से २०१६ के मध्य [[सार्व निर्देशांकित काल|समन्वित सार्वभौमिक समय]] (यूटीसी) में यदा-कदा लागू किए गए एक-[[सेकण्ड]] के समायोजन थे, जिनका उद्देश्य [[अन्तरराष्ट्रीय परमाण्विक काल|अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु समय]], जो [[परमाणु घड़ी|परमाणु घड़ियों]] द्वारा यथार्थ रूप से मापा जाता है, तथा प्रेक्षित [[सौर समय]], जो [[पृथ्वी]] के घूर्णन की अनियमितताओं एवं दीर्घकालिक मन्दन के कारण परिवर्तित होता है, के मध्य अन्तर को समायोजित करना था।
समन्वित सार्वभौमिक समय मानक, जो अन्तर्राष्ट्रीय समयपालन हेतु व्यापक रूप से प्रयुक्त तथा अधिकांश देशों में नागरिक समय के सन्दर्भ के रूप में प्रयुक्त होता है, अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु समय का उपयोग करता है और परिणामतः प्रेक्षित सौर समय से आगे चलता है, यदि आवश्यकतानुसार उसे प्रेक्षित सौर समय पर पुनःस्थापित न किया जाए: मानक ने ±०.९ सेकण्ड का परम अनुमत विचलन निर्धारित किया। विचलन-सीमा प्राप्त होने पर यह समायोजन प्रदान करने हेतु अधिसेकण्ड-व्यवस्था विद्यमान थी। अधिसेकण्ड १९७२ में प्रवर्तित किया गया। उस समय समन्वित सार्वभौमिक समय अन्तर को प्रबन्धित करने की पूर्ववर्ती विधियों के कारण अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु समय से १० सेकण्ड पीछे रह चुका था। समग्रतः समन्वित सार्वभौमिक समय में २७ अधिसेकण्ड जोड़े गए, अन्तिम ३१ दिसम्बर २०१६ को हुआ; अतः जनवरी २०१७ से समन्वित सार्वभौमिक समय तथा अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु समय के मध्य अन्तर ३७ सेकण्ड रहा है। सभी धनात्मक अधिसेकण्ड थे, जो समन्वित सार्वभौमिक समय के दिवस में एक सेकण्ड जोड़ते थे; ऋणात्मक अधिसेकण्ड सैद्धान्तिक रूप से सम्भव था, तथापि कोई भी कभी घटित नहीं हुआ।<ref name="Martin-2024">{{Cite magazine|first=Cassie|last=Martin|date=19 January 2024|title=50 years ago, timekeepers deployed the newly invented leap second|url=https://www.sciencenews.org/article/50-years-ago-leap-second|magazine=[[Science News]]}}</ref>
यतः पृथ्वी की घूर्णन गति जलवायु-सम्बन्धी एवं भूवैज्ञानिक घटनाओं के प्रति परिवर्तित होती है, अतः समन्वित सार्वभौमिक समय के अधिसेकण्ड अनियमित अन्तरालों पर स्थित थे तथा यथार्थतः पूर्वानुमेय नहीं थे।<ref>{{cite web|url=https://www.iers.org/IERS/EN/Science/EarthRotation/EarthRotation.html|title=IERS science background|date=2013|publisher=[[IERS]]|access-date=6 August 2016}}</ref> अधिसेकण्ड अन्तर्निवेशन का निर्णय अन्तर्राष्ट्रीय पृथ्वी घूर्णन एवं सन्दर्भ प्रणाली सेवा द्वारा सामान्यतः लगभग छह मास पूर्व लिया जाता था, जिससे यह सुनिश्चित हो सके, समन्वित सार्वभौमिक समय तथा प्रेक्षित सौर समय के मध्य अन्तर ±०.९ सेकण्ड की विचलन-सीमा को न अतिक्रमित करे।<ref name="BulletinC49">{{cite web|url=http://hpiers.obspm.fr/eoppc/bul/bulc/bulletinc.49|title=Bulletin C 49|last=Gambis|first=Daniel|date=5 January 2015|publisher=[[IERS]]|access-date=5 January 2015}}</ref>
यह प्रथा विघटनकारी थी, विशेषतः आधुनिक अंकीय (डिजिटल) प्रणालियों में, जिन्हें सतत तथा यथार्थ समयचिह्नन अपेक्षित होता है। यतः सभी प्रणालियों ने अधिसेकण्ड समायोजन एकरूपता से लागू नहीं किए, अतः कतिपय संगणनात्मक, जालकर्म-सम्बन्धी तथा उपग्रह-आधारित प्रणालियों में विसंगतियाँ उत्पन्न हुईं।<ref>{{cite journal|last1=Finkleman|first1=David|last2=Allen|first2=Steve|last3=Seago|first3=John|last4=Seaman|first4=Rob|last5=Seidelmann|first5=P. Kenneth|year=2011|title=The Future of Time: UTC and the Leap Second|url=https://www.americanscientist.org/article/the-future-of-time-utc-and-the-leap-second|journal=[[American Scientist]]|volume=99|issue=4|pages=312–319|arxiv=1106.3141|doi=10.1511/2011.91.312}}</ref> १५ अक्तूबर २०२६ को [[भार एवं मापन पर सामान्य सम्मेलन|भार एवं मापों पर सामान्य सम्मेलन]] ने २० मई २०२७ से प्रभावी रूप से भावी अधिसेकण्डों के योग अथवा व्यवकलन को बन्द करने तथा परम अनुमत विचलन की सीमा को एक घण्टा तक बढ़ाने हेतु मतदान किया।<ref>{{Cite web|url=https://www.bipm.org/en/cgpm-2026/resolution-5|title=Resolution 5 of the 28th CGPM (2026) On the technical actions needed to ensure the continuity of UTC|access-date=15 Oct 2026}}</ref>
== सम्बन्धित विषय ==
* [[अधिवर्ष]]
== सन्दर्भ ==
<templatestyles src="Reflist/styles.css" />{{Reflist}}
== अग्रिम पठन ==
* {{Cite news|title=Savouring the last leap second in history|last=Ahuja|first=Anjana|date=30 October 2005|work=[[New Straits Times]]|page=F10|author-link=Anjana Ahuja}}
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* {{Cite journal|last=Finkleman|first=David|last2=Allen|first2=Steve|last3=Seago|first3=John|last4=Seaman|first4=Rob|last5=Seidelmann|first5=P. Kenneth|year=2011|title=The Future of Time: UTC and the Leap Second|url=https://www.americanscientist.org/article/the-future-of-time-utc-and-the-leap-second|journal=[[American Scientist]]|volume=99|issue=4|pages=312–319|arxiv=1106.3141|doi=10.1511/2011.91.312|s2cid=118403321}}
* {{Cite journal|last=Kamp|first=Poul-Henning|year=2011|title=The One-Second War|journal=[[Communications of the ACM]]|volume=54|issue=5|pages=44–48|doi=10.1145/1941487.1941505|doi-access=free}}
* {{Cite book|title=TIME From Earth Rotation to Atomic Physics|last=McCarthy|first=Dennis D.|last2=Seidelmann|first2=P. Kenneth|publisher=[[Wiley-VCH]]|year=2009|isbn=978-3527407804|location=[[Weinheim]]|doi=10.1002/9783527627943|author-link=Dennis McCarthy (scientist)}}
[[श्रेणी:विज्ञान में समय]]
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[[File:Braque_Family_Triptych_closed_WGA.jpg|अंगूठाकार|रोज़िये वान देर वेइदेन के ब्राक त्रिपट (लगभग १४५२) के बाहरी पटल स्वामी की खोपड़ी दर्शाते हैं, जो भीतरी पटलों पर प्रदर्शित है। हड्डियाँ एक ईंट पर विश्राम करती हैं, जो उसके पूर्ववर्ती श्रम एवं उपलब्धि का प्रतीक है।]]
'''मरणं स्मर''' अथवा '''मेमेन्तो मोरी''' ({{Langx|la|memento mori|italic=no}}) एक कलात्मक प्रतीक अथवा अलंकार है, जो मौत-ए-अनिवार्य का स्मरण कराता है।<ref name="oed">[https://web.archive.org/web/20130629014511/http://oxforddictionaries.com/definition/english/memento-mori Literally 'remember (that you have) to die'], [[Oxford English Dictionary]], Third Edition, June 2001.</ref> इस तसव्वुर की जड़ें फ़लासिफ़ा-ए-अहद-ए-क़दीम तथा मसीहीयत में हैं, और यह क़ुरून-ए-वुस्ता से आगे जनाज़ा-कला एवं जनाज़ा-मिमारी में ज़ाहिर हुआ।<ref name="oed2">[https://web.archive.org/web/20130629014511/http://oxforddictionaries.com/definition/english/memento-mori Literally 'remember (that you have) to die'], [[Oxford English Dictionary]], Third Edition, June 2001.</ref>
सबसे आम मोतीफ़ एक खोपड़ी है, जिसके साथ अक्सर हड्डियाँ भी होती हैं। अकेली यही बात प्रायः अलंकार-ए-मरण को जगाने के लिए काफ़ी होती है, तथापि अन्य मोतीफ़ों में ताबूत, [[रेतीघड़ी]] अथवा मुर्झाते गुल भी हैं, जो ज़िन्दगी-ए-फ़ानी की निशानी हैं। प्रायः ये किसी विस्तृत कृति के भीतर किसी दूसरे केन्द्रीय विषय, जैसे शबीह-साज़ी, के साथ आते हैं; बहरहाल, इस तसव्वुर में मुस्तक़िल असनाफ़ भी शामिल हैं, जैसे बसरी कला में ख़ालीपन-चित्र तथा मौत-का-नाच, और मूर्तिकला में जिस्म-मक़बरे।
== सन्दर्भ ==
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[[श्रेणी:मृत्यु]]
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[[File:Braque_Family_Triptych_closed_WGA.jpg|अंगूठाकार|रोज़िये वान देर वेइदेन के ब्राक त्रिपट (लगभग १४५२) के बाहरी पटल स्वामी की खोपड़ी दर्शाते हैं, जो भीतरी पटलों पर प्रदर्शित है। हड्डियाँ एक ईंट पर विश्राम करती हैं, जो उसके पूर्ववर्ती श्रम एवं उपलब्धि का प्रतीक है।]]
'''मरणं स्मर''' अथवा '''मेमेन्तो मोरी''' ({{Langx|la|memento mori|italic=no}}) एक कलात्मक प्रतीक अथवा तमसीली अलंकार है, जो मृत्यु की अनिवार्यता का स्मरण कराता है।<ref name="oed">[https://web.archive.org/web/20130629014511/http://oxforddictionaries.com/definition/english/memento-mori Literally 'remember (that you have) to die'], [[Oxford English Dictionary]], Third Edition, June 2001.</ref> इस तसव्वुर की जड़ें प्राचीन शास्त्रीय युग के दानिशवरों तथा मसीही मत में निहित हैं, तथापि यह मध्ययुग से आगे तक मज़ार-ओ-मक़बरों की स्थापत्य-कला में निरन्तर प्रकट होती रही।<ref name="oed2">[https://web.archive.org/web/20130629014511/http://oxforddictionaries.com/definition/english/memento-mori Literally 'remember (that you have) to die'], [[Oxford English Dictionary]], Third Edition, June 2001.</ref>
इसका सर्वाधिक प्रचलित प्रतीक मानव-कपाल है, जिसके साथ प्रायः अस्थियाँ भी होती हैं। प्रायः अकेला यही प्रतीक उस कैफ़ियत को जगाने के लिए पर्याप्त होता है; किन्तु अन्य प्रतीकों में ताबूत, [[रेतीघड़ी|रेत-घड़ी]] अथवा मुरझाते पुष्प भी सम्मिलित हैं, जो हयात-ए-इन्सानी की अनित्यता का संकेत करते हैं।
== सन्दर्भ ==
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{{Stub}}
{{Authority control}}
[[श्रेणी:मृत्यु]]
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