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सदस्य:पांडेय शिवशंकर शास्त्री
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2026-08-10T20:46:25Z
पांडेय शिवशंकर शास्त्री
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"पर्यावरण की रक्षा :- वायु,जल, खाद्यान्न,धूप छांव फल फूल दूध मांस सब कुछ में जबर्दस्त प्रदूषण फैला हुआ है। तरह तरह की बिमारियों से मानव का सामना हो रहा है।अभीं एक ऐसी बी..." के साथ नया पृष्ठ बनाया
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पर्यावरण की रक्षा :-
वायु,जल, खाद्यान्न,धूप छांव फल फूल दूध मांस सब कुछ में जबर्दस्त प्रदूषण फैला हुआ है।
तरह तरह की बिमारियों से मानव का सामना हो रहा है।अभीं एक ऐसी बीमारी आई थी जिसे कोरोना वायरस के नाम से जाना गया।
नदियों में इतने कचड़े फेंके जाने लगे हैं कि नदियों का जल पीने लायक नहीं बचा है।
आज यदि हम शुद्ध आक्सीजन और हवा की बात करें तो इसमें ज़हर बह रहा है।
खाद्यान्न की तो ऐसी स्थिति है कि उसमें कोई भी तत्व नहीं बचे हैं ।सब नष्ट हो चुके हैं।उनका स्वाद और उनके पोषक तत्व नहीं बचे हैं।
धूप की बात भी कर लेते हैं, जिसमें नियमितता नहीं रह गई है।अकारण बाढ़ आ जाती है।
फल भी बिना किसी कीटनाशक दवा के पैदा नहीं किया जा रहा है।
आजकल दूध भी पहले की तरह से स्वादिष्ट नहीं है और घी भी पहले जैसा नहीं होता है।
लगे लगाये मांस की भी बात कर लेते हैं।आज मांस भी प्रदूषित हो चुका है।
उपरोक्त सभी समस्याओं का निराकरण एक मात्र पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करना है।
पर्यावरण संरक्षण के उपाय:-
कीटनाशक दवा का प्रयोग बंद किया जाए या फिर आंशिक किया जाए।
रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग बंद किया जाए।
अंधाधुंध उद्योग स्थापना जंगलों को काटकर न किया जाए।
नदियों के किनारे से शहरों को दूर हटा देना चाहिए। शहरों की गंदगी का निस्तारण कर उसे उर्वरक के उपयोग में लाना चाहिए।
नदियों को अबाध गति से आगे बहने देना चाहिए।
शहरों को नदियों के किनारे से बिल्कुल ध्वस्त कर देना चाहिए और वहां पर वृक्षारोपण कर देना चाहिए।
जंगलों को घना कर देना चाहिए और पानी की उचित व्यवस्था कर जंगलों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
पशुओं का फार्म हाउस स्वच्छ एवं दुर्गन्ध रहित होना चाहिए।
इस तरह से जंगलों की सुरक्षा करनी चाहिए जैसे कि घर में रखे सोने के आभूषणों की करते हैं।
बहुत से उपाय करें जिससे कि पर्यावरण की हत्या न हो।
"पर्यावरण की हत्या आत्महत्या करने के बराबर है"
लेखक:-
पाण्डेय शिवशंकर शास्त्री।
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पांडेय शिवशंकर शास्त्री
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पांडेय शिवशंकर शास्त्री
(लेखक एवं कवि)
27 जनवरी 1971
मंगतपुर, पकरहट, सोनभद्र,
उत्तर प्रदेश।
व्यवसाय:-
कृषि कार्य के साथ साथ
लेखन का कार्य"स्वतंत्र साहित्य एवं शोध साहित्य लेख लिखना।
पौराणिक, राजनैतिक विषयों पर शोध एवं लेख।
राजनैतिक विषयों पर चिंतन लेख,
कविता, संस्मरण, पौराणिक लेख, एवं राजनैतिक सिद्धांत पर विस्तृत प्रकाश एवं व्याख्या।
पर्यावरण संरक्षण।
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