विकिपुस्तक hiwikibooks https://hi.wikibooks.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0 MediaWiki 1.47.0-wmf.14 first-letter मीडिया विशेष वार्ता सदस्य सदस्य वार्ता विकिपुस्तक विकिपुस्तक वार्ता चित्र चित्र वार्ता मीडियाविकि मीडियाविकि वार्ता साँचा साँचा वार्ता सहायता सहायता वार्ता श्रेणी श्रेणी वार्ता रसोई रसोई वार्ता विषय विषय चर्चा TimedText TimedText talk मॉड्यूल मॉड्यूल वार्ता Event Event talk सदस्य:पांडेय शिवशंकर शास्त्री 2 11538 83162 2026-08-10T20:46:25Z पांडेय शिवशंकर शास्त्री 16561 "पर्यावरण की रक्षा :- वायु,जल, खाद्यान्न,धूप छांव फल फूल दूध मांस सब कुछ में जबर्दस्त प्रदूषण फैला हुआ है। तरह तरह की बिमारियों से मानव का सामना हो रहा है।अभीं एक ऐसी बी..." के साथ नया पृष्ठ बनाया 83162 wikitext text/x-wiki पर्यावरण की रक्षा :- वायु,जल, खाद्यान्न,धूप छांव फल फूल दूध मांस सब कुछ में जबर्दस्त प्रदूषण फैला हुआ है। तरह तरह की बिमारियों से मानव का सामना हो रहा है।अभीं एक ऐसी बीमारी आई थी जिसे कोरोना वायरस के नाम से जाना गया। नदियों में इतने कचड़े फेंके जाने लगे हैं कि नदियों का जल पीने लायक नहीं बचा है। आज यदि हम शुद्ध आक्सीजन और हवा की बात करें तो इसमें ज़हर बह रहा है। खाद्यान्न की तो ऐसी स्थिति है कि उसमें कोई भी तत्व नहीं बचे हैं ।सब नष्ट हो चुके हैं।उनका स्वाद और उनके पोषक तत्व नहीं बचे हैं। धूप की बात भी कर लेते हैं, जिसमें नियमितता नहीं रह गई है।अकारण बाढ़ आ जाती है। फल भी बिना किसी कीटनाशक दवा के पैदा नहीं किया जा रहा है। आजकल दूध भी पहले की तरह से स्वादिष्ट नहीं है और घी भी पहले जैसा नहीं होता है। लगे लगाये मांस की भी बात कर लेते हैं।आज मांस भी प्रदूषित हो चुका है। उपरोक्त सभी समस्याओं का निराकरण एक मात्र पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करना है। पर्यावरण संरक्षण के उपाय:- कीटनाशक दवा का प्रयोग बंद किया जाए या फिर आंशिक किया जाए। रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग बंद किया जाए। अंधाधुंध उद्योग स्थापना जंगलों को काटकर न किया जाए। नदियों के किनारे से शहरों को दूर हटा देना चाहिए। शहरों की गंदगी का निस्तारण कर उसे उर्वरक के उपयोग में लाना चाहिए। नदियों को अबाध गति से आगे बहने देना चाहिए। शहरों को नदियों के किनारे से बिल्कुल ध्वस्त कर देना चाहिए और वहां पर वृक्षारोपण कर देना चाहिए। जंगलों को घना कर देना चाहिए और पानी की उचित व्यवस्था कर जंगलों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। पशुओं का फार्म हाउस स्वच्छ एवं दुर्गन्ध रहित होना चाहिए। इस तरह से जंगलों की सुरक्षा करनी चाहिए जैसे कि घर में रखे सोने के आभूषणों की करते हैं। बहुत से उपाय करें जिससे कि पर्यावरण की हत्या न हो। "पर्यावरण की हत्या आत्महत्या करने के बराबर है" लेखक:- पाण्डेय शिवशंकर शास्त्री। kdenv3mi1xagfocfosrjwpd8lsm9whp 83163 83162 2026-08-10T22:42:00Z पांडेय शिवशंकर शास्त्री 16561 83163 wikitext text/x-wiki पांडेय शिवशंकर शास्त्री (लेखक एवं कवि) 27 जनवरी 1971 मंगतपुर, पकरहट, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश। व्यवसाय:- कृषि कार्य के साथ साथ लेखन का कार्य"स्वतंत्र साहित्य एवं शोध साहित्य लेख लिखना। पौराणिक, राजनैतिक विषयों पर शोध एवं लेख। राजनैतिक विषयों पर चिंतन लेख, कविता, संस्मरण, पौराणिक लेख, एवं राजनैतिक सिद्धांत पर विस्तृत प्रकाश एवं व्याख्या। पर्यावरण संरक्षण। 5ul8en7f06abpecr7hngg3qb7tat3s7