विकिसूक्ति hiwikiquote https://hi.wikiquote.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0 MediaWiki 1.47.0-wmf.13 first-letter मीडिया विशेष वार्ता सदस्य सदस्य वार्ता विकिसूक्ति विकिसूक्ति वार्ता चित्र चित्र वार्ता मीडियाविकि मीडियाविकि वार्ता साँचा साँचा वार्ता सहायता सहायता वार्ता श्रेणी श्रेणी वार्ता TimedText TimedText talk मॉड्यूल मॉड्यूल वार्ता Event Event talk सदस्य:Revi C. 2 2815 33109 29545 2026-08-01T23:56:27Z Pathoschild 47 global user pages ([[m:Synchbot|requested by Revi C.]]) 33109 wikitext text/x-wiki __NOINDEX__<div class="mw-content-ltr" lang="en" dir="ltr">{{#babel:ko|en-3|hi-0}} [[File:Revi wikimedia image.jpg|thumb|center|middle|If you are here to talk about CommonsDelinker removing a deleted image, please [[:c:User talk:Revi C.|go here]].]] Hello! I am [[:m:User:Revi C.|revi]]. 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काल ही इन सब की जड़ है। संसार की उत्पत्ति का बीज भी काल ही है और काल ही अकस्मात् सब का संहार कर देता है। * ''गतः कालो न चायाति ।​ : अर्थ : बीता हुआ समय (वापस) नहीं आता। * ''मातुलो यस्य गोविन्दः पिता यस्य धनञ्जयः। : ''अभिमन्युर्वधं प्राप्तः कालस्य कुटिला गतिः॥'' -- नराभरण २७५ : श्रीकृष्ण जिसके मामा थे और अर्जुन पिता, उस अभिमन्यु का भी वध हुआ। काल की गति कुटिल है। * ''कालस्य कुटिला गतिः। : अर्थ : काल की गति कुटिल (टेढ़ी-मेढ़ी) होती है। * ''कालो न यातो वयमेव याता ।'' (भर्तृहरि, वैराग्य शतक) : अर्थ : काल नहीं जाता, हम ही चले (मर) जाते हैं। * ''काले खलु समारब्धाः फलं बध्नन्ति नीतयः।'' -- रघुवंशम् 12/69 : अर्थ– समय पर आरम्भ की गयी नीतियां सफल होती हैं। * ''कालः पचति भूतानि कालः संहरते प्रजाः। : ''कालः सुप्तेषु जागर्ति कालो हि दुरतिक्रमः॥'' -- चाणक्यनीति : समय सभी प्राणियों को बदल देता है। समय मानवों का संहार करता हैं। सारे निद्रिस्तों में समय ही जागृत होता हैं। समय का अतिक्रमण नहीं किया जा सकता। * ''किं श्रिया किं च राज्येन कि कायेन किमीहया । : ''दिनैः कातिपयैरेव कालः सर्व निकृन्तति॥'' -- योगवासिष्ठ (श्रीराम द्वारा दशरथ की सभा में कहा गया) : वैभव, राज्य, देह और आकांक्षा का क्या उपयोग है? कुछ ही दिनों में काल इन सब का नाश करने वाला है। * ''तिथिर्वारश्च नक्षत्रं योगः करणमेव च । : ''एतेषां यत्र विज्ञानं पञ्चाङ्ग तन्निगद्यते॥ : अर्थात् तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण की जानकारी जिसमें मिलती है, उसी का नाम पञ्चाङ्ग है। * ''कः कुत्र केन भावेन कदा याति यमालयम्। : ''को न जानाति तत्तत्त्वं यतः कालो महाबली॥ : संसार में कोई भी व्यक्ति यह नहीं बता सकता कि उसकी मृत्यु कब, कहाँ और कैसे होगी। कौन इस 'तत्त्व' को नहीं जानता? (अर्थात सब जानते हैं) जिससे काल महाबली है। * '' तस्मादिदं कालविधानशास्त्रं यो ज्यौतिषं वेद स वेद यज्ञान्॥'' -- ऋक् ज्योतिष, ३६/ याजुष ज्योतिष, ३ : इसलिये यह (ज्योतिष शास्त्र) कालविधानशास्त्र है। जो ज्योतिष जानता है, वह यज्ञों को जानता है। * ''लोकानामन्तकृत् कालः कालोऽन्यः कलनात्मकः । : ''स द्विधा स्थूलसूक्ष्मत्वान्मूर्तश्चामूर्त उच्यते ॥'' -- सूर्यसिद्धान्त 1/10 : (काल दो प्रकार का होता है) एक काल प्राणियों की सृष्टि का संहार करने वाला काल है और दूसरा गणना करने वाला काल। इनमें से गणना करने वाला काल भी स्थूल और सूक्ष्म के भेद से क्रमशः मूर्त और अमूर्त (काल) कहे जाते हैं। * अंडकटाह अमित लयकारी । काल सदा दुरतिक्रम भारी ॥ -- [[तुलसीदास]] * काल करे सो आज कर, आज करे सो अब । : पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब ॥ (कबीरदास) : अर्थ – जो कल करना है उसे आज कर लो और जो आज करना है उसे अभी कर लो। किसी को पता नहीं अगर कहीं अगले ही पल में प्रलय आ जाये तो जीवन का अन्त हो जायेगा फिर जो करना है वो कब करोगे? * समय लाभ सम लाभ नहिं, समय चूक सम चूक । : चतुरन चित रहिमन लगी, समय चूक की हूक ॥ * समय पाय फल होत है, समय पाय झरि जात । : सदा रहे नहिं एक सी, का रहीम पछताय ॥ (रहीम) * का वर्षा जब कृषि सुखाने, समय चूकि पुनि का पछताने। : तात्पर्य यह है कि कुछ कार्य ऐसे हैं जिनका एक निश्चित समय से पहले करना बहुत जरूरी है। वह समय निकल गया तो उस कार्य को करने से कुछ भी लाभ नहीं होता, जैसे फसल सूख जाने के बाद वर्षा का होना। * रहिमन चुप ह्वै बैठिये, देखि दिनन को फेर । : जब नीके दिन आइहैं, बनत न लगिहैं देर ॥ -- रहीम : रहीम कहते हैं कि (जब बुरे दिन चल रहे हों) तब समय-चक्र को देखते हुए (समझते हुए) अच्छे दिनों प्रतीक्षा करनी चाहिये। जब अच्छे दिन आयेंगे तब बनते देर नहीं लगेगी। * ऐसी घड़ी नहीं बन सकती जो गुजरे हुए घण्टे को फिर से बजा दे। -- प्रेमचन्द * समय को व्यर्थ नष्ट मत करो क्योंकि यही वह चीज है जिससे जीवन का निर्माण हुआ है। -- बेन्जामिन फ्रैंकलिन * बुरी खबर यह है कि समय उड़ता है, अच्छी खबर यह है कि आप ही इसके पायलट हैं। -- माइकल आल्शुलर * समय और समुद्र की लहरें किसी की प्रतीक्षा नहीं करतीं। -- अज्ञात् * किसी भी काम के लिये आपको कभी भी समय नहीं मिलेगा। यदि आप समय पाना चाहते हैं तो इसका निर्माण करना पड़ेगा । * अगर पल हमेशा कुछ है, तो सब कुछ समय है। -- Benny Bellamacina * अतिरिक्त समय का एक टुकड़ा उधार लेना अच्छा था। -- Francesca Marciano * अतीत आखिरी नहीं हो सकता है, लेकिन यह अन्तहीन निशान के पीछे छोड़ देता है। -- Priyaanshu * अतीत चला गया उसके लिए अपना समय खराब मत करिये। भविष्य के सपने मत देखिये वो कभी नहीं आएगा, केवल वर्तमान आपके पास है- वर्तमान में जियो। -- अज्ञात * अनजाने में, और मेरी सहमति के बिना, समय बीत गया। -- Miranda July * अनिश्चितता के क्षण में चीजें अर्थपूर्ण रूप से कड़ी हो सकती हैं। -- John Ashbery * अनुभवी लोगों को जानना आपके लिए सबसे अच्छा अवकाश समय है। -- Mahrukh Memon * अपना वक्त किसी को देने से पहले दो बार सोचे, क्योंकि उसका हिसाब आपको ही देना होगा। -- अज्ञात * अपना समय क्रोध, पछतावा, चिंता तथा ईर्ष्या में मत ज़ाया करें। दुखी रहने के लिए ज़िन्दगी बहुत छोटी है। -- रॉय टी. बेनेट * अपनी आंतरिक शक्ति और शांति को विकसित करने का समय और प्रयास निवेश करें। -- Akiroq Brost * अपनी आत्मा को खिलाने के लिए समय निकालें और दिमाग-शरीर-भावना के कनेक्शन को मजबूत रखें। -- Dee Waldeck * बीता हुआ समय लौटकर नहीं आता, पर उसका फल ज़रूर आता है। * अपने जीवन के हर मिनट का आनंद लेना सीखें। अभी खुश रहो। भविष्य में आपको संतुष्ट करने के लिए खुद से बाहर किसी चीज़ का इंतज़ार न करें। इस बात पर विचार करें कि आपके पास कितना कीमती समय है। * असल बात समय को खर्च करना नही है, परंतु इसका उचित उपयोग करना है। -- स्टीफन आर. कोवे * आप एक बिंदु पर पहुंच जाते हैं जहां बुरा समय चला जाता है। -- Eugene Marten * आप मिनट का ध्यान रखे, घंटा अपना ध्यान खुद रख लेगा। -- लार्ड चेस्टरफिल्ड * आप विलम्ब कर सकते हैं पर समय नहीं करेगा। -- बेंजामिन फ्रैंकलिन * आप समय की सेवा करने के लिए नहीं हैं। समय आपकी सेवा करने के लिए है। अब अपने मालिक बनें। -- E'yen A. Gardner * आपका सबसे बड़ा संसाधन आपका समय है। -- Brian Tracy * आपका समय एक ऐसी चीज है जिसे आप किसी और पर नहीं छोड़ सकते। आप क्या करना चाहते हैं? क्या आप यह कर रहे हैं? -- अनीता ढेक * आपका समय, हर पल घटता रहता है। -- अज्ञात * आपकी व्यक्तिगत सच्चाई दुनिया के लिए आपका उपहार है। -- Jennifer Elisabeth * आपके अंदर का व्यस्त इंसान जीवन में समय की कमी से भली भांति परिचित है। और उसे पता है कि बीता हुआ कल आज की याद है और आने वाला कल आज के ख्वाब की तरह है। -- काहलिल गिब्रन * आपके द्वारा निवेश किए जाने वाले समय के अनुसार आपको मूल रूप से भुगतान मिलता है। -- Yohann Dafeu * आपके द्वारा प्यार किए जाने वाले किसी व्यक्ति के साथ बिताए एक दिन सबकुछ बदल सकता है। -- Mitch Albom * आपके पास कुछ भी नहीं करने के लिए पर्याप्त समय नहीं है। -- बिल वॉटर्सन * आपको देरी हो सकती है, लेकिन समय को नहीं। -- Benjamin Franklin * आपको समय नहीं मिलता है। आप समय बनाते हैं। -- Sanhita Baruah * आपने अभी यहां रहने का फैसला किया है। आपको वर्तमान में रहने की कोशिश करनी चाहिए। -- Francesca Marciano * प्रतीक्षा मत करो, जितना तुम सोचते हो समय उससे कहीं ज्यादा तेजी से बीतता जा रहा है। -- अज्ञात * प्रतीक्षा मत करो, समय कभी भी सही नही होगा। -- मार्क ट्वेन * इस उज्ज्वल नीले ग्रह पर बिताए गए हर पल कीमती है इसलिए इसे सावधानीपूर्वक उपयोग करें। -- Santosh Kalwar * इस आशा के साथ कि वह दरवाजा में बदल जाएगा, किसी दीवार को पीटने में अपना समय नष्ट मत करो। -- कोको चैनल * इस संसार में सब कुछ समय के अनुसार बदल जाता है। -- Sunday Adelaja * मानव को शान के साथ काम करने के लिए लंबे समय तक सपने देखने चाहिए, और ये सपने अक्सर अँधेरे में पलते हैं। -- जीन जेनेट * ईश्वर एक जन्मदिन निर्धारित करता है, न कि मनुष्य। -- Robert A. Bradley * उन लोगों के बारे में सोचने में एक मिनट बर्बाद न करें जिन्हें आप पसंद नहीं करते हैं। -- Dwight D. Eisenhower * उन लोगों के बीच अंतर जो उच्च उपलब्धि प्राप्त करने वाले हैं और जो ऐसा नहीं करने वाले हैं। यह फर्क उन तरीकों से होगा जो अपने समय का उपयोग चीजों को प्राप्त करने के लिए करते हैं। -- एरिक लोफहोम * उन लोगों के लिए समय क्या था जो जल्द ही डिजिटल अमरत्व प्राप्त करेंगे?। -- Clyde DeSouza * उन लोगों को समय और ऊर्जा दें जो आपको समय और ऊर्जा देते हैं। -- Akiroq Brost * उस समय सुनो क्योंकि यह सबकुछ ठीक कर सकता है। -- Sorin Cerin * एक अच्छा रवैया एक अच्छे दिन का निर्माण करता है, और एक अच्छा दिन एक अच्छे महीने का , और एक अच्छा महीना एक अच्छे साल का, और एक अच्छा साल एक अच्छे जीवन का निर्माण करता है। -- अज्ञात * एक आवाज की दूरी, स्पर्श से थोड़ी देर दूर है। -- Anthony Liccione * एक जीवन दस सेकंड में बदल सकता है या कभी-कभी यह 70 साल ले सकता है। -- Charles Bukowski * एक बुद्धिमान व्यक्ति एक बार में करता है, आखिर में मूर्ख क्या करता है। दोनों एक ही काम करते हैं; केवल अलग-अलग समय पर। -- Baltasar Gracian * एक मिनट देर करने से अच्छा है, कि समय से तीन घण्टे पूर्व कार्य कर लिया जाए। -- विलियम शेक्सपियर * एक व्यक्ति जो आपके समय का मूल्य नहीं रखता है, वह आपकी सलाह को महत्व नहीं देगा। -- Orrin Woodward * एक व्यक्ति जो जीवन के एक घंटे बर्बाद करने की हिम्मत करता है, उसने जीवन के मूल्य की खोज नहीं की है। -- Charles Darwin * एक समय में दो चीजें करना कुछ न करना है। -- Publius Syrus * एक समय होगा, जब आप जीवन के अलावा कुछ भी नहीं मांगेंगे। -- Lailah Gifty Akita * एकमात्र समस्या समय है। -- Seth MacFarlane * ऐसा नही है कि हमारे पास ज़िन्दगी जीने के लिए बहुत कम समय होता है, परंतु उसमे से अधिकांश का हम व्यर्थ में दुरुपयोग कर देते हैं। -- सेनेका * कई बार ऐसा लगता है कि अपनी घडी को वापस प्लाट दूँ, और उससे सारे बुरे और दुःख भरे पल अलग निकाल दूँ, पर फिर मुझे ऐसा महसूस होता है कि अगर मैंने ऐसा किया तो सारे खुशियों के पल भी मेरे जीवन से मिट जाएंगे । -- निकोलस स्पार्क्स * कठिन समय में समझदार व्यक्ति हल खोजता है, और कायर व्यक्ति बहाना बनाता है। -- अज्ञात * कभी भी कल पर मत छोड़ें जो आप आज कर सकते हैं। -- बेंजामिन फ्रैंकलिन * कभी-कभी प्रतीक्षा करना सबसे कठिन बात है। -- Dean Koontz * कल क्या होगा ये किसी को नहीं पता, जिंदगी एक सफर है, जिसमें किसी भी चीज़ की कोई गारंटी नहीं है। -- अज्ञात * कल तक के लिए कभी नहीं छोड़ें जो आप आज कर सकते हैं। -- Benjamin Franklin * कल बीत गया है। कल अभी तक नहीं आया है। हमारे पास आज ही है। चलो शुरू करें। -- Mother Teresa * कला लंबी है, और समय शीघ्र व्यतीत होनेवाला है। -- Henry Wadsworth Longfellow * कहने लायक चीजें - समय ले लो। -- Nicholas Denmon * कहानी जीवन के लिए रूपक है और जीवन समय पर रहता है। -- Robert McKee * काफी देर बाद, दुनिया में हर कोई आपका दुश्मन होगा। -- Chuck Palahniuk * कार्य करने के लिए कोई भी समय सही समय नही होता, खुद को तैयार करने से पहले अपनी चाल चलें और सब कुछ अपने आप ही अपने उचित स्थान पर आ जाएगा। -- ए. टी. जी. डब्लू * कुछ यादें ऐसी होती हैं, जिन्हें समय नही मिटा सकता, इस अभाव को पूरी उम्र में भी भुलाया नही जा सकता, बस लोग उसे सहन करना सीख लेते हैं। -- कैसान्द्रा क्लार * कुंजी समय बिताने में नहीं है, लेकिन इसे निवेश में है। -- Stephen R. Covey * कैलेंडर एक मानव आविष्कार है; समय आध्यात्मिक स्तर पर मौजूद नहीं है। -- Isabel Allende * कोई आज छाया में बैठा है क्योंकि किसी ने बहुत समय पहले एक पेड़ लगाया था। -- वारेन बफेट * खोया हुआ समय कभी लौट कर नहीं आता। -- Proverb * जब अपनों का साथ हो तो, बुरे से बुरा वक्त भी जल्दी कट जाता है। -- अज्ञात * जब आप अपनी आत्मा को उन चीजों पर समय बिताते हैं, जिनसे आप प्यार करते हैं, जिसके बारे में आप उत्साहित हैं, तो आपका उत्साह संक्रामक हो जाता है। -- रीता डेवनपोर्ट * जब आप पैसा सोच समझकर खर्च करते हैं तो समय के साथ ऐसी लापरवाही क्यों। * जब आप समय को बर्बाद करते हैं, तो याद रखें कि इसका कोई पुनर्जीवन नहीं है। -- A.W. Tozer * जब आपके पास इसे सही से करने का समय नहीं है तो इसे ख़त्म करने का समय कब होगा ? -- जॉन वुडन * जब तक आप अपना मूल्य नहीं समझेंगे तब तक आप अपने समय की महत्ता नहीं समझेंगे। जब तक आप अपने समय की महत्ता नहीं समझेंगे आप उसका कुछ नहीं करेंगे। -- एम्.स्कोट पेक * जब तक हम इसे महत्व देना नहीं चुनते हैं, तब तक समय का कोई अर्थ नहीं होता है। -- Leo F. Buscaglia * जब तक हम मर जाते हैं तब तक हम पैदा होते हैं, हम कृत्रिम सामान के साथ व्यस्त रहते हैं जो महत्वपूर्ण नहीं है। -- Tom Ford * जब दुर्लभ मौका आता है, तो इसे पकड़ो, दुर्लभ कार्य करने के लिए। -- Thiruvalluvar * जब मैं अपने भ्रमपूर्ण अस्तित्व की खोज करता हूं तो मैं समय की पकड़ खो देता हूं। -- Yash Thakur * जब संदेह में हों तो तब और समय लें। -- जॉन जिमरमैन * जबकि लोग झुकाते हैं, समय पीछे देखे बिना आगे निकलता है। -- Alan Lightman * ज़िन्दगी बहुत छोटी है। उस पर ध्यान केंद्रित करें जो आपके लिए सबसे अधिक मायने रखता है। समय के साथ साथ आपको अपनी प्राथमिकताएं बदलनी चाहिए। -- रॉय टी. बेनेट * ज़िन्दगी मील के पत्थरों से नही बनती बल्कि यह छोटे बड़े सभी पलों से मिलकर बनती है। -- रोज़ केनेडी * जीवन का आनंद लें। मरने के लिए बहुत समय है। -- Hans Christian Andersen * जीवन का सबसे अच्छा उपयोग प्यार है। प्यार की सबसे अच्छी अभिव्यक्ति समय है। प्यार करने का सबसे अच्छा समय अब है। -- Rick Warren * जीवन में मेरी पसंदीदा चीजों में कोई ख़ास खर्च नहीं है। यह वास्तव में बिलकुल स्पष्ट है कि सबसे कीमती संसाधन जो हमारे पास है वह है समय। -- स्टीव जॉब्स * जो चीज़ वास्तव में हमारे पास है, वह है समय, क्योंकि जिसके पास कुछ भी नही होता, उसके पास समय होता है। -- बाल्टसर ग्रेसियन * जो लोग अपने समय का सबसे अधिक दुरूपयोग करते हैं, वही लोग अक्सर समय न होने की शिकायत किया करते हैं। -- जीन डी ला ब्रुयेरे * जो लोग मौज-मस्ती के लिए समय नहीं निकाल पाते वो देर-सबेर बीमारी के लिए समय निकाल लेते हैं। -- जॉन वानामैकर * जो सबसे ज्यादा जानता है वह बर्बाद समय के लिए सबसे ज्यादा दुखी होता है। -- Dante * जो समय की कदर करता है समय उसकी कदर करता है। -- अज्ञात * टाइम के बारे में बात यह है कि हर किसी के लिए इतना प्रचुर, हर किसी के पास खुद को साबित करने के लिए एक दिन में ठीक चौबीस घंटे हैं, उस दिन के लिए हमारे पास जो कुछ भी है, उसे हासिल करने के लिए, हमारे पास हर एक दिन अपने को बेहतर बनाने का मौका है। -- जेम्स क्लियर * खराब घड़ी भी दिन में दो बार सही समय बताती है। -- Stephen Hunt * तीन घंटे जल्दी करना एक मिनट देर करने से बेहतर है। -- विलियम शेक्सपियर * तुम्हारे पास समय बहुत कम है,किसी दूसरे का जीवन जीने में इसे बर्बाद न करें। -- अज्ञात * दिन सिर्फ घंटों का संग्रह है। -- Serj Tankian * दीवार को तोड़ने में समय लगाने के बजाये इस दरवाज़े का निर्माण करो। -- कोको चैनल * दुनिया की सृजन समय की शुरुआत में नहीं हुई थी, यह हर दिन होता है। -- Marcel Proust * दुर्घटनाएं दुर्घटनाएं नहीं हैं लेकिन गलत समय पर सटीक आगमन हैं। -- Dejan Stojanovic * दो सबसे महान योद्धा धैर्य और समय हैं। -- लियो टॉलस्टॉय * दो सबसे शक्तिशाली योद्धा धैर्य और समय हैं। -- Leo Tolstoy * दो स्थानों के बीच की अधिकतम दूरी समय होती है। -- टेनेसी विलियम्स * धन, मैं केवल पा या खो सकता हूं। लेकिन समय मैं केवल खो सकता है। तो, मुझे इसे सावधानी से खर्च करना होगा। -- Author Unknown * पल अंतहीन लग रहा था, लेकिन शायद यह केवल आधा था। -- Steve Toltz * पुरुष समय की हत्या के बारे में बात करते हैं, जबकि समय चुपचाप उन्हें मारता है। -- Dion Boucicault * पैसा नहीं, कौशल नहीं, लेकिन भारी धन निर्माण के लिए समय सबसे बड़ा लीवर है। -- Manoj Arora * पैसा बर्बाद करने से बस आपके पास पैसा नहीं होगा लेकिन समय बर्बाद करके आप ज़िन्दगी का एक हिस्सा खो देते हैं। -- माइकल लीबोईफ * प्यार पर खर्च नहीं किया गया कोई भी समय बर्बाद हो गया है। -- Torquato Tasso * प्यार हर समय से गुजरता है। -- Kerstin Gier * प्रकृति कभी नहीं दौड़ती है, फिर भी सब कुछ हो जाता है। -- Donald L. Hicks * प्रकृति के सब काम धीरे-धीरे होते है। -- अज्ञात * प्रत्येक दिन एक दिन जाता है। -- Carlo Goldoni * प्रत्येक फूल एक अलग गति से खिलता है। -- Suzy Kassem * फिर समय बीत गया। -- Carolyn Keene * बहुत कम समय है। हमें हर पल गिनती करने की जरूरत है। -- Shannon Delany * बीते समय के लिए मत रोइए , वो चला गया , और भविष्य की चिंता करना छोड़ो क्यूंकि वो अभी आया ही नहीं है , वर्तमान में जियो , इसे सुन्दर बनाओ । -- गौतम बुद्ध * बीते हुए समय पर अफ़सोस मत करो बल्कि, जो समय है, अब कार्रवाई शुरू करो। * बुरी खबर है की समय उड़ रहा है, लेकिन अच्छी खबर भी है की तुम इसके पायलट हो। -- माइकेल अल्थ्सुलर * बुरी खबर है यह है कि समय उड़ना है. अच्छी खबर यह है कि आप पायलट हैं। -- Michael Altshuler * भगवान व्यस्त है और आपके लिए कोई समय नहीं है। -- Dejan Stojanovic * भले ही हमारा समय अच्छा हो या बुरा हो, हमारे पास यही एकमात्र समय होता है। -- आर्ट बुचवाल्ड * भविष्य अनिश्चित है लेकिन अंत हमेशा निकट रहता है। -- Jim Morrison * भविष्य आज शुरू होता है, न कि कल। -- John Paul II * भविष्य की चिंता में खुद को मत डुबाओ, अभी जो पल मिला है उसमे जियो। -- फ्रेडरिक शीलर * भविष्य के बारे में सबसे अच्छी चीज यह है कि वो एक-एक दिन कर के आता है। -- अब्राहम लिंकन * मिनटों और घंटों का ख्याल रखना होगा। -- Lord Chesterfield * मुझे घड़ी पर शासन करना है, उससे शासित नहीं होना है। -- गोल्डा मेएर * मुझे नकारात्मकता अच्छी लगती थी। इस खाली ड्रामा में फंसने के लिए जीवन बहुत बड़ा है और समय बहुत कम है। -- अज्ञात * मुझे यह लगता है कि समय सभी चीजों को परिपक्व कर देता है, समय के साथ सभी चीजें उजागर हो जाती हैं, समय सत्य का प्रणेता है। -- फ़्रन्किओस राबेलैस * मुझे विश्वास है कि समय की सभी इकाइयां बराबर नहीं हैं। -- Crystal Woods * मुझे सबसे मूल्यवान चीज देना है मेरा समय है। -- Silvia Hartmann * मुझे समय की जरूरत नहीं है, मुझे समय सीमा की जरूरत है। -- Duke Ellington * मुझे समय से नफरत है। यह वह नहीं करता जो आप चाहते हैं। -- Nick Hornby * मेरे विचार से, अपने जीवन में कुछ शांत समय बीताना बहुत आवश्यक है। -- मरिएल हेमिंग्वे * मैंने कल्पना की कि मैं एक मिलीसेकंड के लिए भगवान था और लंबे समय तक भाषणहीन हो गया। -- Dejan Stojanovic * मैंने ज़िन्दगी के लिए कुछ समय निकाल लिया। -- जेम्स एल. ब्रूक्स * मैंने समय बर्बाद कर दिया, और अब मुझे समय बर्बाद कर देगा। -- William Shakespeare * मौका आदमी बनाता है। -- José de Alencar * मौत को धोखा नहीं दिया जा सकता है, लेकिन अंतहीन तरीके हैं जीवन जीने के। -- G.M.T. Schuilling * यथोचित तरीके से जीने का सबसे प्रभावी तरीका है हर सुबह एक दिन की योजना बनाना और हर रात प्राप्त परिणामों की जांच करना। -- एलेक्सिस कैरेल * यदि आप एक समय में दो कार्य कर रहे है, तो इसका अर्थ है कि आप दोनों ही कार्य नही कर रहे है। -- सायरस * यदि आप बहुत अधिक समय तक एक चीज़ के बारे में सोचते रहेंगे, तो आप कभी भी उसे पूरा नही कर पाएंगे। -- ब्रूस ली * यदि आप समय का महत्त्व नहीं समझ रहे हैं, तो समय भी ऐसा ही कर रहा है। * यदि आप समय को नष्ट शुरू करते हैं, तो अंत में आपको नष्ट कर देगा। -- Deyth Banger * यदि आपके पास समय है तो आपके पास समाधान खोजने का समय है। -- Dee Dee Artner * यदि समय पैसा है और आपने मेरा समय बर्बाद कर दिया है, तो मुझे अपना पैसा वापस दो। -- Ljupka Cvetanova * यह मेरी भावना है कि समय सभी चीजों को परिपक्व कर देता है; समय के साथ सभी चीजें उजागर हो जाती हैं ; समय सत्य का पिता है। -- फ़्रन्किओस राबेलैस * यह वास्तव में स्पष्ट है कि हमारे पास सबसे कीमती संसाधन समय है। -- स्टीव जॉब्स * यह सही विचार है, लेकिन सही समय नहीं है। -- John Dalton * ये जानिये की जो समय आपको मिला है, उसे कैसे जियें। -- डारियो फ़ो * रचनात्मकता समय बर्बाद होने का अवशेष है। -- Albert Einstein * रेत के कणों की तरह ही समय फिसलता चला जाता है और फिर कभी वापस नही मिलता। -- रोबिन शर्मा * रोज़ाना कुछ न कुछ करने की कोशिश करनी चाहिए इससे यह तुम्हे एक अच्छे भविष्य के नजदीक ले जाएगा। -- फाएर बाघ * लक्ष्य आपके समय को कुशलतापूर्वक और प्रभावी रूप से उपयोग करने में मदद करेंगे। बिना लक्ष्य के लोग आमतौर पर जितना हासिल करने में सक्षम होते हैं उससे बहुत कम पूरा करते हैं। -- कैथरीन पल्सीफेर * लोग कहते हैं कि वक़्त सारे घाव भर देता है, पर ये बात वो इस संदर्भ में कहते हैं कि उस दुःख का स्त्रोत निश्चित होता है। -- कैसान्द्रा क्लेयर * लोग समय नष्ट करने की बात करते हैं जबकि धीरे-धीरे समय उन्हें नष्ट करता रहता है। -- डीओंन बौसीकाउल्ट * वक्त जब सजा सुनाता है तो, ना किसी जज की जरूरत होती है और ना किसी वकील की। -- अज्ञात * वह जो अपना भविष्य आनंदमय बनाना चाहता है उसे अपना वर्तमान बर्बाद नहीं करना चाहिए। -- रोजर बार्ब्सन * वही व्यक्ति अपने जीवन के एक घंटा बर्बाद करने का दुस्साहस कर सकता है जो कीमत नही जनता हो। -- चार्ल्स डार्विन * विलंब समय का चोर है। -- एडवर्ड यंग * वो जो अपना भविष्य आनंदमय बनाना चाहता है उसे अपना वर्तमान नहीं बर्वाद करना चाहिए। -- रोजर बार्ब्सन * व्यक्ति समय की महत्व को पूरी तहर तब समझता है, उसके लिए बहुत कम समय बचा रहता है। -- P.W लिचफिल्ड * व्यस्त रहना महत्वपूर्ण नही है, क्योकि चीटियाँ भी व्यस्त रहती है, महत्वपूर्ण यह है कि आप किस कार्य में व्यस्त है। -- हेनरी डेविड * शायद कोयले की समय की परिभाषा हीरा है। -- Kahlil Gibran * सझदार व्यक्ति खुद सीख जाता है, नासमझ व्यक्ति को समय सिखा देता है। -- अज्ञात * सफल व्यक्ति अपने समय का उपयोग बुद्धिमत्ता पूर्वक करते हैं, वे साधारण लोगों की तरह अपने समय को बेमतलब के कार्यों में खर्च नही करते हैं। -- ए. टी. जी. डब्लू * सफलता और विफलता के बीच महान विभाजन रेखा को पांच शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है: "मेरे पास समय नहीं था।" -- Franklin Field * सभी महान उपलब्धियों के लिए समय की आवश्यकता है। -- Maya Angelou * सभी वस्तुओं का समय एक पल में मौजूद है। -- Amy Tan * समय अनमोल है। यह सुनिश्चित करें कि आपका समय सही लोगों के साथ ही व्यतीत हो। -- अज्ञात * समय अब ​​है, व्यक्ति आप है; अपने जीवन को बेहतर बनाएं और इस दिन और उम्र में एकजुट होने का नाम बनें। -- Ifeanyi Enoch Onuoha * समय आपके जीवन का सिक्का है। आपके पास बस यही एक सिक्का है, और सिर्फ आप ही तय कर सकते हैं कि इसे कैसे खर्च करना है। सावधान रहिये नहीं तो आपके लिए और लोग इसे खर्च कर देंगे। -- कार्ल सैंडबर्ग * समय आपके लिए इंतजार नहीं करता है, इसलिए इसे रिंग करने से पहले पहुंचें। -- Ram Ghale * समय इनकार का प्राणघातक दुश्मन है और हमेशा इसके खिलाफ विजयी होता है। -- Chris Dietzel * समय एक अनमोल वस्तु है। यदि आप अपनी युवावस्था में इस वास्तविकता के प्रति सजग नहीं हुए हैं, तो आप निश्चित रूप से बुढ़ापे में अफ़सोस करेंगे। -- अर्ल ब्रैंडोन * समय एक खिलाड़ी है। समय आज का हिस्सा है, न केवल इसके गुजरने का एक उपाय। -- Jeanette Winterson * समय एक तूफान है जिसमें हम सब खो गए हैं। -- William Carlos Williams * समय एक दिशा में बढ़ता है, यादें दूसरी तरफ। -- विल्लियम गिब्सन * समय एक निर्मित वस्तु के समान है। यह कहना कि ‘मेरे पास समय नही है’, यह कहने के समान है कि ‘मैं उक्त कार्य करना नही चाहता। -- अज्ञात * समय एक भ्रम है। -- Albert Einstein * समय एक महान शिक्षक है, लेकिन दुर्भाग्य से यह अपने सभी छात्रों को मारता है। -- Hector Berlioz * समय एक समान अवसर नियोक्ता है, लेकिन हम समय के साथ कैसे व्यवहार करते हैं, यह बराबर नहीं है। -- जॉन सी. * समय और ज्वार किसी आदमी के लिए इंतजार नहीं करते हैं। -- Stephen King * समय का एकमात्र कारण इतना है कि सब कुछ एक बार में नहीं होता है। -- अल्बर्ट आइंस्टीन * समय किसी की प्रतीक्षा नही करता। -- अज्ञात * समय की कमी नहीं बल्कि दिशा की कमी समस्या है। हम सभी के पास चौबीस घंटे का दिन है। -- जिग जिगलर * समय की कोई शुरुआत या अंत नहीं है। -- Sunday Adelaja * समय की परीक्षा कठिन जरूर होती है, लेकिन परिणाम आपके हाथों में होता है। -- अज्ञात * समय कीमती है, लेकिन समय की तुलना में सच्चाई अधिक कीमती है। -- Benjamin Disraeli * समय कुछ भी नहीं करता है लेकिन आपको कमजोर और पुरानी चीजें सौंप देता है। -- Aleksandar Hemon * समय के गुजरने से कोई नहीं बच सकता। हम सभी उम्र बढ़ने और मृत्यु दर के अधीन हैं। -- अज्ञात * समय के साथ जिंदगी के नए चरण पर चले जाना चाहिए , एक ही चीज़ पर अटके नहीं रहना चाहिए , मतलब सदा गतिमान रहो। -- अज्ञात * समय केवल एक मौका देता है, अगर आप इसे एक बार खो देते हैं, तो आप इसे वापस कभी नहीं प्राप्त कर सकते हैं। -- Sunday Adelaja * समय को नष्ट न करना ही समय का उत्पादन है। -- Softyuva * समय दुनिया का सबसे बड़ा धन है। -- अज्ञात * समय दो स्थानों के बीच सबसे लंबी दूरी है। -- Tamara Ireland Stone * समय दोस्ती से कभी दूर नही कर सकता और न ही अलगाव से दोस्ती कम होती है। -- टेनेसी विलियम्स * समय धीरे-धीरे चलता है, लेकिन जल्दी से गुजरता है। -- Alice Walker * समय ने मुझे आशा को नही छोड़ना सिखाया है, फिर भी आशा में बहुत अधिक भरोसा नहीं करना है। -- Carlos Ruiz Zafón * समय ने सभी चीजों को दुर्लभ बना दिया। -- Lionel Shriver * समय फिसलता है, इसे एक बार ढीला करने पर, इसकी डोर हाथ से हमेशा के लिए फिसलती चली जाती है। -- एंथोनी डोरर * समय बीतने से ज्यादातर चीजों का जहर निकाला जाएगा और उन्हें हानिरहित किया जाएगा। -- Haruki Murakami * समय भी गहरे घावों को ठीक करता है। -- Sharon E. Rainey * समय महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण व्यक्ति है। -- Imants Ziedonis * समय महान चिकित्सक है। -- अज्ञात * समय मुफ्त में मिलता है, परंतु यह अनमोल है। आप इसे अपना नही सकते, लेकिन आप इसका उपयोग कर सकते हैं। आप इसे रख नही सकते, पर आप इसे खर्च कर सकते हैं। एक बार आपने इसे खो दिया, तो वापस कभी इसे पा नही पाएंगे। -- हार्वे मैके * समय राय के भविष्यवाणियों को समाप्त करता है और प्रकृति के फैसलों की पुष्टि करता है। -- Marcus Tullius Cicero * समय वह स्कूल है जिसमे हम सीखते हैं, समय वो आग है जिसमे हम जलते हैं। -- डेलमोर स्वार्त्ज़ * समय वो है जिसे हम सबसे ज्यादा चाहते हैं, पर जिसे हम सबसे गलत तरीके से उपयोग करते हैं। -- विल्लियम पेन * समय व्यतीत करने वाला सबसे मूल्यवान चीज है। -- Laertius Diogenes * समय शब्दों का सार है। -- Deyth Banger * समय सच्ची दयालुता के कर्मों के माध्यम से बनाया जाता है। -- Dara Horn * समय सबसे मूल्यवान चीज है जो एक आदमी खर्च कर सकता है। -- Diogenes Laërtius * समय सभी घावों को ठीक नहीं करता है, केवल दूरी ही उनके डंक को कम कर सकती है। -- Ally Carter * समय सभी घावो को भर देता है समय से बलवान कुछ नहीं है। -- अज्ञात * समय सभी चीजों में सबसे बुद्धिमान है जो; आपके लिए सब कुछ प्रकाश में लाता है। -- Thales * समय सीमित धारणा वाले प्राणियों द्वारा निर्मित भ्रम है। -- Ken Poirot * समय से कुछ भी स्वतंत्र नहीं है। -- Sunday Adelaja * समय हम सभी को मिटा देता है। -- Meg Rosoff * समय हमारे ऊपर उड़ता है, लेकिन अपना छाया पीछे छोड़ देता है। -- Nathaniel Hawthorne * समय हमारे झूठ को सच्चाइयों में बदल देता है। -- Gene Wolfe * समय हमेशा घटता है कभी बढ़ता नही। -- Softyuva * समय, जिसके दांत सब कुछ चबा जाते हैं, वो सत्य के सामने शक्तिहीन है। -- थोमस हक्सले * समयबद्धता समय का चोर है। -- Oscar Wilde * सही होने का समय हमेशा सही होता है। -- Martin Luther King, Jr. * सामान्य आदमी समय को काटने के बारे सोचते है और महान आदमी सोचते है इसका उपयोग कैसे करे? -- फ्रेंकलिन * सिर्फ एक ही चीज़ है जो हमारे समय से अधिक कीमती है, वह यह कि हम इसे किस पर खर्च कर रहे हैं। -- लियो क्रिस्टोफर * सेवानिवृत्ति परियोजनाओं से भरा समय है। -- Tahar Ben Jelloun * सोने का प्रत्येक धागा मूल्यवान होता है, इसी प्रकार समय का प्रत्येक क्षण भी मूल्यवान होता है। -- मेसन * हम भूल जाते हैं कि जीवन केवल वर्तमान काल में परिभाषित किया जा सकता है। -- Dennis Potter * हम सभी के पास चौबीस घंटे है। आप अभी जहाँ भी हैं, यह इसका परिणाम है कि इन घंटों का प्रयोग आपने कैसे किया। * हमे अपना समय हमेशा बुद्धि के साथ उपयोग करना चाहिए और हमेशा ये याद रखना चाहिए, सही कार्य करने के लिए समय हमेशा ही उचित होता है। -- नेल्सन मंडेला * हमें दिन याद नहीं रहता लेकिन अच्छे बुरे लम्हे हमेशा याद रहते हैं। -- अज्ञात * हर उस मिनट में जिसमे आप क्रोधित होते हो, आप अपनी खुशियों के 60 सेकंड गंवा देते हो। -- अज्ञात * हर समय का समय सीमित है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सबसे महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान केंद्रित करना सबसे महत्वपूर्ण है। -- Roy Bennett == इन्हें भी देखें == * [[भविष्य]] * [[इतिहास]] * [[ऋतु]] *[[देशकाल]] ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} 1hilthml2hrdei0rjau8g0i1wdrp5ff भवभूति 0 9300 33113 2026-08-02T01:06:34Z अनुनाद सिंह 658 "'''[[:w:भवभूति]]''' संस्कृत के महान साहित्यकार थे। उत्तरामचरितम् और मालतीमाधव आदि उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं। == उक्तियाँ == * ''एते हि ह्रदयमर्मच्छिद: संसारभावाः'' : (राम सीता स..." के साथ नया पृष्ठ बनाया 33113 wikitext text/x-wiki '''[[:w:भवभूति]]''' संस्कृत के महान साहित्यकार थे। उत्तरामचरितम् और मालतीमाधव आदि उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं। == उक्तियाँ == * ''एते हि ह्रदयमर्मच्छिद: संसारभावाः'' : (राम सीता से कहते है कि) ये सांसारिक भाव हृदय के मर्मस्थल का भेदन करने वाले हैं। * ''इयं गेहे लक्ष्मीरियममृतवर्तिर्नयनयोः : (राम कहते हैं कि) यह सीता घर में लक्ष्मी है, यह नेत्रों के लिए अमृत की शलाका है । * ''दुर्जनः असुखमुत्पादयति : दुर्जन दुःख उत्पन्न करता है। (सीता का कथन, राम-लक्ष्मण के समक्ष) * ''तीर्थोदकं च वह्निश्च नान्यतः शुद्धिर्महतः : (राम सीता के परिपेक्ष्य में कहते हैं कि) तीर्थ, जल और अग्नि ये अन्य पदार्थों से शुद्धि के योग्य नहीं हैं। * ''नैसर्गिकी सुरभिणः कुसुमस्य सिद्धा मूर्ध्नि स्थितिर्न चरणैरवताडनानि॥'' : (श्रीराम सीता को लक्ष्य कर लक्ष्मण से कहते हैं कि) सुगंधपूर्ण वस्तुओं का सिर पर रखा जाना स्वाभावसिद्ध है, न कि पैरों से कुचला जाना। * ''सत्तां केनापि कार्येण लोकस्याराधनं व्रतम् : जनता को प्रसन्न रखना ही राजा का परम कर्तव्य है। (जब दुर्मुख नामक गुप्तचर श्रीराम को सीता के संबंध में फैले लोकापवाद को कहता है तो श्री राम सीता को त्यागने का निर्णय लेते हैं। उस समय का कथन) * ''सन्तापकारिणो बन्धुजनविप्रयोगा भवन्ति । : (सीता, राम और लक्ष्मण के सम्मुख कहती हैं कि) बंधुजनों का वियोग बहुत दुखदायी होता है। == भवभूति के बारे में कथन == * ''उत्तरे रामचरिते भवभूतिर्विविष्यते'' : उत्तररामचरित में भवभूति विशिष्ट बन गये हैं। jrik45wtukc3qbrvgfrcdo1di0gvh05 33114 33113 2026-08-02T01:38:10Z अनुनाद सिंह 658 33114 wikitext text/x-wiki '''[[:w:भवभूति]]''' [[संस्कृत]] के महान नाटकार एवं श्रेष्ठ कवि हैं। महावीरचरितम, मालतीमाधव और उत्तरामचरितम् उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं। उनकी कृतियों में अनेक सूक्तियाँ उनके नीतिज्ञता एवं भनोवैज्ञानिक वैशिष्ट्य को प्रमाणित करतीं हैं। उन्होंने अपनी कृतियों में की प्रस्तावनाओं में भी अपने को "पद-वाक्य-प्रमाणज्ञ" कहा है जिसका अर्थ है कि वे व्याकरण (पद), मीमांसा (वाक्य) और न्याय (प्रमाण) के विद्वान थे । == उक्तियाँ == * ''"वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि, : ''लोकोत्तराणां चेतांसि को हि विज्ञातुमर्हति। : महान और असाधारण लोगों का मन वज्र से भी कठोर और फूल से भी कोमल होता है। इसे समझना बहुत कठिन है। * ''एते हि ह्रदयमर्मच्छिद: संसारभावाः'' : (राम सीता से कहते है कि) ये सांसारिक भाव हृदय के मर्मस्थल का भेदन करने वाले हैं। * ''इयं गेहे लक्ष्मीरियममृतवर्तिर्नयनयोः : (राम कहते हैं कि) यह सीता घर में लक्ष्मी है, यह नेत्रों के लिए अमृत की शलाका है । * ''दुर्जनः असुखमुत्पादयति : दुर्जन दुःख उत्पन्न करता है। (सीता का कथन, राम-लक्ष्मण के समक्ष) * ''तीर्थोदकं च वह्निश्च नान्यतः शुद्धिर्महतः : (राम सीता के परिपेक्ष्य में कहते हैं कि) तीर्थ, जल और अग्नि ये अन्य पदार्थों से शुद्धि के योग्य नहीं हैं। * ''नैसर्गिकी सुरभिणः कुसुमस्य सिद्धा मूर्ध्नि स्थितिर्न चरणैरवताडनानि॥'' : (श्रीराम सीता को लक्ष्य कर लक्ष्मण से कहते हैं कि) सुगंधपूर्ण वस्तुओं का सिर पर रखा जाना स्वाभावसिद्ध है, न कि पैरों से कुचला जाना। * ''सत्तां केनापि कार्येण लोकस्याराधनं व्रतम् : जनता को प्रसन्न रखना ही राजा का परम कर्तव्य है। (जब दुर्मुख नामक गुप्तचर श्रीराम को सीता के संबंध में फैले लोकापवाद को कहता है तो श्री राम सीता को त्यागने का निर्णय लेते हैं। उस समय का कथन) * ''सन्तापकारिणो बन्धुजनविप्रयोगा भवन्ति । : (सीता, राम और लक्ष्मण के सम्मुख कहती हैं कि) बंधुजनों का वियोग बहुत दुखदायी होता है। * लोक-व्यवहार यही है कि केवल आँख मिलने से ही अनुराग उत्पन्न हो जाता है। प्रीति वस्तुतः एक अनिर्वचनीय अनुभूति है। यह अहेतुक पक्षपात है, जिसका प्रतिकार असम्भव होता है। यह वह स्नेहात्मक तन्तु है, जो प्राणियों के हृदयों को एक सूत्र में सी देता है। (उत्तररामचरित) * ऋषियों का कथन है कि राक्षसी वाणी का प्रयोग उन्मत्त लोग करते हैं अथवा दृप्त लोग। यह राक्षसी वाणी सब वैर-भावनाओं की मूल होती है। इससे लोगों में प्रतिशोध की ज्वाला प्रदीप्त होती है। सब लोग इस वाणी की निन्दा करते हैं और दूसरी वाणी की प्रशंसा करते हैं। यह दूसरी सूनृता वाणी कामधेनु के समान सब कामनाओं को दुहती है, अलक्ष्मी को दूर करती है, कीर्ति का प्रसार करती है और दुष्ट हृदय वालों की दुष्टता का नाश करती है। यह सुनृता वाणी शुद्ध, शान्त एवं सब मंगलों की जननी होती है। (उत्तररामचरित) * संसारी साधुओं की वाणी तो अर्थ का अनुसरण करती है, परन्तु आदि ऋषियों के सम्बन्ध में यह सत्य है कि अर्थ उनकी वाणी का अनुसरण करता है। (उत्तररामचरित) * भगवति पृथिवि! आप संसार की शरीर-रूप हो। * करुण ही वस्तुतः एक रस है। वही निमित्त-भेद से भिन्न होता हुआ पृथक्-पृथक् शृंगार आदि परिणामों का आश्रय करता है। जैसे एक ही जल भँवर, बुद्‌बुद और तरंग-रूप अनेक विकारों में परिणत होता है, परन्तु वह सब वस्तुतः जल ही है—इसी प्रकार अन्य सब रस करुण रस के ही विकारमात्र हैं। == भवभूति के बारे में कथन == * ''उत्तरे रामचरिते भवभूतिर्विविष्यते'' : उत्तररामचरित में भवभूति विशिष्ट बन गये हैं। ss5b08btt1ylqatlashf96z1z2a8ilv 33115 33114 2026-08-02T01:38:49Z अनुनाद सिंह 658 /* उक्तियाँ */ 33115 wikitext text/x-wiki '''[[:w:भवभूति]]''' [[संस्कृत]] के महान नाटकार एवं श्रेष्ठ कवि हैं। महावीरचरितम, मालतीमाधव और उत्तरामचरितम् उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं। उनकी कृतियों में अनेक सूक्तियाँ उनके नीतिज्ञता एवं भनोवैज्ञानिक वैशिष्ट्य को प्रमाणित करतीं हैं। उन्होंने अपनी कृतियों में की प्रस्तावनाओं में भी अपने को "पद-वाक्य-प्रमाणज्ञ" कहा है जिसका अर्थ है कि वे व्याकरण (पद), मीमांसा (वाक्य) और न्याय (प्रमाण) के विद्वान थे । == उक्तियाँ == * ''वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि, : ''लोकोत्तराणां चेतांसि को हि विज्ञातुमर्हति। : महान और असाधारण लोगों का मन वज्र से भी कठोर और फूल से भी कोमल होता है। इसे समझना बहुत कठिन है। * ''एते हि ह्रदयमर्मच्छिद: संसारभावाः'' : (राम सीता से कहते है कि) ये सांसारिक भाव हृदय के मर्मस्थल का भेदन करने वाले हैं। * ''इयं गेहे लक्ष्मीरियममृतवर्तिर्नयनयोः : (राम कहते हैं कि) यह सीता घर में लक्ष्मी है, यह नेत्रों के लिए अमृत की शलाका है । * ''दुर्जनः असुखमुत्पादयति : दुर्जन दुःख उत्पन्न करता है। (सीता का कथन, राम-लक्ष्मण के समक्ष) * ''तीर्थोदकं च वह्निश्च नान्यतः शुद्धिर्महतः : (राम सीता के परिपेक्ष्य में कहते हैं कि) तीर्थ, जल और अग्नि ये अन्य पदार्थों से शुद्धि के योग्य नहीं हैं। * ''नैसर्गिकी सुरभिणः कुसुमस्य सिद्धा मूर्ध्नि स्थितिर्न चरणैरवताडनानि॥'' : (श्रीराम सीता को लक्ष्य कर लक्ष्मण से कहते हैं कि) सुगंधपूर्ण वस्तुओं का सिर पर रखा जाना स्वाभावसिद्ध है, न कि पैरों से कुचला जाना। * ''सत्तां केनापि कार्येण लोकस्याराधनं व्रतम् : जनता को प्रसन्न रखना ही राजा का परम कर्तव्य है। (जब दुर्मुख नामक गुप्तचर श्रीराम को सीता के संबंध में फैले लोकापवाद को कहता है तो श्री राम सीता को त्यागने का निर्णय लेते हैं। उस समय का कथन) * ''सन्तापकारिणो बन्धुजनविप्रयोगा भवन्ति । : (सीता, राम और लक्ष्मण के सम्मुख कहती हैं कि) बंधुजनों का वियोग बहुत दुखदायी होता है। * लोक-व्यवहार यही है कि केवल आँख मिलने से ही अनुराग उत्पन्न हो जाता है। प्रीति वस्तुतः एक अनिर्वचनीय अनुभूति है। यह अहेतुक पक्षपात है, जिसका प्रतिकार असम्भव होता है। यह वह स्नेहात्मक तन्तु है, जो प्राणियों के हृदयों को एक सूत्र में सी देता है। (उत्तररामचरित) * ऋषियों का कथन है कि राक्षसी वाणी का प्रयोग उन्मत्त लोग करते हैं अथवा दृप्त लोग। यह राक्षसी वाणी सब वैर-भावनाओं की मूल होती है। इससे लोगों में प्रतिशोध की ज्वाला प्रदीप्त होती है। सब लोग इस वाणी की निन्दा करते हैं और दूसरी वाणी की प्रशंसा करते हैं। यह दूसरी सूनृता वाणी कामधेनु के समान सब कामनाओं को दुहती है, अलक्ष्मी को दूर करती है, कीर्ति का प्रसार करती है और दुष्ट हृदय वालों की दुष्टता का नाश करती है। यह सुनृता वाणी शुद्ध, शान्त एवं सब मंगलों की जननी होती है। (उत्तररामचरित) * संसारी साधुओं की वाणी तो अर्थ का अनुसरण करती है, परन्तु आदि ऋषियों के सम्बन्ध में यह सत्य है कि अर्थ उनकी वाणी का अनुसरण करता है। (उत्तररामचरित) * भगवति पृथिवि! आप संसार की शरीर-रूप हो। * करुण ही वस्तुतः एक रस है। वही निमित्त-भेद से भिन्न होता हुआ पृथक्-पृथक् शृंगार आदि परिणामों का आश्रय करता है। जैसे एक ही जल भँवर, बुद्‌बुद और तरंग-रूप अनेक विकारों में परिणत होता है, परन्तु वह सब वस्तुतः जल ही है—इसी प्रकार अन्य सब रस करुण रस के ही विकारमात्र हैं। == भवभूति के बारे में कथन == * ''उत्तरे रामचरिते भवभूतिर्विविष्यते'' : उत्तररामचरित में भवभूति विशिष्ट बन गये हैं। fanxhy9tqygcflzen340uka2riwx1xl 33116 33115 2026-08-02T02:13:26Z अनुनाद सिंह 658 33116 wikitext text/x-wiki '''[[:w:भवभूति]]''' [[संस्कृत]] के महान नाटकार एवं श्रेष्ठ कवि हैं। महावीरचरितम, मालतीमाधव और उत्तरामचरितम् उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं। उनकी कृतियों में अनेक सूक्तियाँ उनके नीतिज्ञता एवं भनोवैज्ञानिक वैशिष्ट्य को प्रमाणित करतीं हैं। उन्होंने अपनी कृतियों में की प्रस्तावनाओं में भी अपने को "पद-वाक्य-प्रमाणज्ञ" कहा है जिसका अर्थ है कि वे व्याकरण (पद), मीमांसा (वाक्य) और न्याय (प्रमाण) के विद्वान थे । == उक्तियाँ == * ''वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि, : ''लोकोत्तराणां चेतांसि को हि विज्ञातुमर्हति। : महान और असाधारण लोगों का मन वज्र से भी कठोर और फूल से भी कोमल होता है। इसे समझना बहुत कठिन है। * ''एते हि ह्रदयमर्मच्छिद: संसारभावाः'' : (राम सीता से कहते है कि) ये सांसारिक भाव हृदय के मर्मस्थल का भेदन करने वाले हैं। * ''इयं गेहे लक्ष्मीरियममृतवर्तिर्नयनयोः : (राम कहते हैं कि) यह सीता घर में लक्ष्मी है, यह नेत्रों के लिए अमृत की शलाका है । * ''दुर्जनः असुखमुत्पादयति : दुर्जन दुःख उत्पन्न करता है। (सीता का कथन, राम-लक्ष्मण के समक्ष) * ''तीर्थोदकं च वह्निश्च नान्यतः शुद्धिर्महतः : (राम सीता के परिपेक्ष्य में कहते हैं कि) तीर्थ, जल और अग्नि ये अन्य पदार्थों से शुद्धि के योग्य नहीं हैं। * ''नैसर्गिकी सुरभिणः कुसुमस्य सिद्धा मूर्ध्नि स्थितिर्न चरणैरवताडनानि॥'' : (श्रीराम सीता को लक्ष्य कर लक्ष्मण से कहते हैं कि) सुगंधपूर्ण वस्तुओं का सिर पर रखा जाना स्वाभावसिद्ध है, न कि पैरों से कुचला जाना। * ''सत्तां केनापि कार्येण लोकस्याराधनं व्रतम् : जनता को प्रसन्न रखना ही राजा का परम कर्तव्य है। (जब दुर्मुख नामक गुप्तचर श्रीराम को सीता के संबंध में फैले लोकापवाद को कहता है तो श्री राम सीता को त्यागने का निर्णय लेते हैं। उस समय का कथन) * ''सन्तापकारिणो बन्धुजनविप्रयोगा भवन्ति । : (सीता, राम और लक्ष्मण के सम्मुख कहती हैं कि) बंधुजनों का वियोग बहुत दुखदायी होता है। * ''ये नाम केचिदिह नः प्रथयन्त्यवज्ञां : ''जानन्ति ते किमपि तान्प्रति नैष यत्नः। : ''उत्पत्स्यतेऽस्ति मम कोऽपि समानधर्मा : ''कालो ह्ययं निरवधिर्विपुला च पृथ्वी॥ '' -- मालतीमाधव 1.6 : अर्थ - कुछ अनाम लोग जो मेरी इस कृति का अनादर कर रहे हैं, वे जानते हैं कि मेरा यह यत्न (रचना) उनके लिये नहीं है। (किसी दिन अवश्य ही मेरे ही समानधर्म वाला कोई उत्पन्न होगा। क्योंकि इस काल की कोई अवधि (अन्तिम समय) नहीं है और पृथ्वी बहुत बड़ी है। * ''सस्वेद -रोमाञ्चित-कम्पिताङ्गी जाता प्रियस्पर्शसुखेन वत्सा। : ''मरुन्नवाम्प्भः प्रतिधूतसिक्ता कदम्बयष्टिः स्फुटकोरकेव॥ '' -- उत्तररामचरितम् , तृतीय अंक : राम के स्पर्श से पुलकित सीता पसीने से लटपट , रोमांचित हैं। उनके अंग कम्पन कर रहे हैं। वह (सीता) वायु से हिलायी गयी, जलबिन्दुओं सिक्त , स्फुट कलिकाओं से युक्त कदम्ब की डाली के समान प्रतीत हो रही हैं। * लोक-व्यवहार यही है कि केवल आँख मिलने से ही अनुराग उत्पन्न हो जाता है। प्रीति वस्तुतः एक अनिर्वचनीय अनुभूति है। यह अहेतुक पक्षपात है, जिसका प्रतिकार असम्भव होता है। यह वह स्नेहात्मक तन्तु है, जो प्राणियों के हृदयों को एक सूत्र में सी देता है। (उत्तररामचरित) * ऋषियों का कथन है कि राक्षसी वाणी का प्रयोग उन्मत्त लोग करते हैं अथवा दृप्त लोग। यह राक्षसी वाणी सब वैर-भावनाओं की मूल होती है। इससे लोगों में प्रतिशोध की ज्वाला प्रदीप्त होती है। सब लोग इस वाणी की निन्दा करते हैं और दूसरी वाणी की प्रशंसा करते हैं। यह दूसरी सूनृता वाणी कामधेनु के समान सब कामनाओं को दुहती है, अलक्ष्मी को दूर करती है, कीर्ति का प्रसार करती है और दुष्ट हृदय वालों की दुष्टता का नाश करती है। यह सुनृता वाणी शुद्ध, शान्त एवं सब मंगलों की जननी होती है। (उत्तररामचरित) * संसारी साधुओं की वाणी तो अर्थ का अनुसरण करती है, परन्तु आदि ऋषियों के सम्बन्ध में यह सत्य है कि अर्थ उनकी वाणी का अनुसरण करता है। (उत्तररामचरित) * भगवति पृथिवि! आप संसार की शरीर-रूप हो। * ''एको रसः करूण एव निमित्तभेदात् : करुण ही वस्तुतः एकमात्र रस है। वही निमित्त-भेद से भिन्न होता हुआ पृथक्-पृथक् शृंगार आदि परिणामों का आश्रय करता है। जैसे एक ही जल भँवर, बुद्‌बुद और तरंग-रूप अनेक विकारों में परिणत होता है, परन्तु वह सब वस्तुतः जल ही है—इसी प्रकार अन्य सब रस करुण रस के ही विकारमात्र हैं। == भवभूति के बारे में कथन == * ''उत्तरे रामचरिते भवभूतिर्विविष्यते'' : उत्तररामचरित में भवभूति विशिष्ट बन गये हैं। kd6gby3ikug1y6isvh91kql8agvakhi 33117 33116 2026-08-02T02:21:43Z अनुनाद सिंह 658 33117 wikitext text/x-wiki '''[[:w:भवभूति|भवभूति]]''' [[संस्कृत]] के महान नाटकार एवं श्रेष्ठ कवि हैं। महावीरचरितम, मालतीमाधव और उत्तरामचरितम् उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं। उनकी कृतियों में अनेक सूक्तियाँ उनके नीतिज्ञता एवं भनोवैज्ञानिक वैशिष्ट्य को प्रमाणित करतीं हैं। उन्होंने अपनी कृतियों में की प्रस्तावनाओं में भी अपने को "पद-वाक्य-प्रमाणज्ञ" कहा है जिसका अर्थ है कि वे व्याकरण (पद), मीमांसा (वाक्य) और न्याय (प्रमाण) के विद्वान थे । == उक्तियाँ == * ''वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि, : ''लोकोत्तराणां चेतांसि को हि विज्ञातुमर्हति। : महान और असाधारण लोगों का मन वज्र से भी कठोर और फूल से भी कोमल होता है। इसे समझना बहुत कठिन है। * ''एते हि ह्रदयमर्मच्छिद: संसारभावाः'' : (राम सीता से कहते है कि) ये सांसारिक भाव हृदय के मर्मस्थल का भेदन करने वाले हैं। * ''इयं गेहे लक्ष्मीरियममृतवर्तिर्नयनयोः : (राम कहते हैं कि) यह सीता घर में लक्ष्मी है, यह नेत्रों के लिए अमृत की शलाका है । * ''दुर्जनः असुखमुत्पादयति : दुर्जन दुःख उत्पन्न करता है। (सीता का कथन, राम-लक्ष्मण के समक्ष) * ''तीर्थोदकं च वह्निश्च नान्यतः शुद्धिर्महतः : (राम सीता के परिपेक्ष्य में कहते हैं कि) तीर्थ, जल और अग्नि ये अन्य पदार्थों से शुद्धि के योग्य नहीं हैं। * ''नैसर्गिकी सुरभिणः कुसुमस्य सिद्धा मूर्ध्नि स्थितिर्न चरणैरवताडनानि॥'' : (श्रीराम सीता को लक्ष्य कर लक्ष्मण से कहते हैं कि) सुगंधपूर्ण वस्तुओं का सिर पर रखा जाना स्वाभावसिद्ध है, न कि पैरों से कुचला जाना। * ''सत्तां केनापि कार्येण लोकस्याराधनं व्रतम् : जनता को प्रसन्न रखना ही राजा का परम कर्तव्य है। (जब दुर्मुख नामक गुप्तचर श्रीराम को सीता के संबंध में फैले लोकापवाद को कहता है तो श्री राम सीता को त्यागने का निर्णय लेते हैं। उस समय का कथन) * ''सन्तापकारिणो बन्धुजनविप्रयोगा भवन्ति । : (सीता, राम और लक्ष्मण के सम्मुख कहती हैं कि) बंधुजनों का वियोग बहुत दुखदायी होता है। * ''ये नाम केचिदिह नः प्रथयन्त्यवज्ञां : ''जानन्ति ते किमपि तान्प्रति नैष यत्नः। : ''उत्पत्स्यतेऽस्ति मम कोऽपि समानधर्मा : ''कालो ह्ययं निरवधिर्विपुला च पृथ्वी॥ '' -- मालतीमाधव 1.6 : अर्थ - कुछ अनाम लोग जो मेरी इस कृति का अनादर कर रहे हैं, वे जानते हैं कि मेरा यह यत्न (रचना) उनके लिये नहीं है। (किसी दिन अवश्य ही मेरे ही समानधर्म वाला कोई उत्पन्न होगा। क्योंकि इस काल की कोई अवधि (अन्तिम समय) नहीं है और पृथ्वी बहुत बड़ी है। * ''सस्वेद -रोमाञ्चित-कम्पिताङ्गी जाता प्रियस्पर्शसुखेन वत्सा। : ''मरुन्नवाम्प्भः प्रतिधूतसिक्ता कदम्बयष्टिः स्फुटकोरकेव॥ '' -- उत्तररामचरितम् , तृतीय अंक : राम के स्पर्श से पुलकित सीता पसीने से लटपट , रोमांचित हैं। उनके अंग कम्पन कर रहे हैं। वह (सीता) वायु से हिलायी गयी, जलबिन्दुओं सिक्त , स्फुट कलिकाओं से युक्त कदम्ब की डाली के समान प्रतीत हो रही हैं। * लोक-व्यवहार यही है कि केवल आँख मिलने से ही अनुराग उत्पन्न हो जाता है। प्रीति वस्तुतः एक अनिर्वचनीय अनुभूति है। यह अहेतुक पक्षपात है, जिसका प्रतिकार असम्भव होता है। यह वह स्नेहात्मक तन्तु है, जो प्राणियों के हृदयों को एक सूत्र में सी देता है। (उत्तररामचरित) * ऋषियों का कथन है कि राक्षसी वाणी का प्रयोग उन्मत्त लोग करते हैं अथवा दृप्त लोग। यह राक्षसी वाणी सब वैर-भावनाओं की मूल होती है। इससे लोगों में प्रतिशोध की ज्वाला प्रदीप्त होती है। सब लोग इस वाणी की निन्दा करते हैं और दूसरी वाणी की प्रशंसा करते हैं। यह दूसरी सूनृता वाणी कामधेनु के समान सब कामनाओं को दुहती है, अलक्ष्मी को दूर करती है, कीर्ति का प्रसार करती है और दुष्ट हृदय वालों की दुष्टता का नाश करती है। यह सुनृता वाणी शुद्ध, शान्त एवं सब मंगलों की जननी होती है। (उत्तररामचरित) * संसारी साधुओं की वाणी तो अर्थ का अनुसरण करती है, परन्तु आदि ऋषियों के सम्बन्ध में यह सत्य है कि अर्थ उनकी वाणी का अनुसरण करता है। (उत्तररामचरित) * भगवति पृथिवि! आप संसार की शरीर-रूप हो। * ''एको रसः करूण एव निमित्तभेदात् : करुण ही वस्तुतः एकमात्र रस है। वही निमित्त-भेद से भिन्न होता हुआ पृथक्-पृथक् शृंगार आदि परिणामों का आश्रय करता है। जैसे एक ही जल भँवर, बुद्‌बुद और तरंग-रूप अनेक विकारों में परिणत होता है, परन्तु वह सब वस्तुतः जल ही है—इसी प्रकार अन्य सब रस करुण रस के ही विकारमात्र हैं। == भवभूति के बारे में कथन == * ''उत्तरे रामचरिते भवभूतिर्विविष्यते'' : उत्तररामचरित में भवभूति विशिष्ट बन गये हैं। (कालिदास से भी आगे निकल गये हैं) 345irbc1y8iocjobm5viykvaamx8gkk 33118 33117 2026-08-02T02:22:30Z अनुनाद सिंह 658 /* भवभूति के बारे में कथन */ 33118 wikitext text/x-wiki '''[[:w:भवभूति|भवभूति]]''' [[संस्कृत]] के महान नाटकार एवं श्रेष्ठ कवि हैं। महावीरचरितम, मालतीमाधव और उत्तरामचरितम् उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं। उनकी कृतियों में अनेक सूक्तियाँ उनके नीतिज्ञता एवं भनोवैज्ञानिक वैशिष्ट्य को प्रमाणित करतीं हैं। उन्होंने अपनी कृतियों में की प्रस्तावनाओं में भी अपने को "पद-वाक्य-प्रमाणज्ञ" कहा है जिसका अर्थ है कि वे व्याकरण (पद), मीमांसा (वाक्य) और न्याय (प्रमाण) के विद्वान थे । == उक्तियाँ == * ''वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि, : ''लोकोत्तराणां चेतांसि को हि विज्ञातुमर्हति। : महान और असाधारण लोगों का मन वज्र से भी कठोर और फूल से भी कोमल होता है। इसे समझना बहुत कठिन है। * ''एते हि ह्रदयमर्मच्छिद: संसारभावाः'' : (राम सीता से कहते है कि) ये सांसारिक भाव हृदय के मर्मस्थल का भेदन करने वाले हैं। * ''इयं गेहे लक्ष्मीरियममृतवर्तिर्नयनयोः : (राम कहते हैं कि) यह सीता घर में लक्ष्मी है, यह नेत्रों के लिए अमृत की शलाका है । * ''दुर्जनः असुखमुत्पादयति : दुर्जन दुःख उत्पन्न करता है। (सीता का कथन, राम-लक्ष्मण के समक्ष) * ''तीर्थोदकं च वह्निश्च नान्यतः शुद्धिर्महतः : (राम सीता के परिपेक्ष्य में कहते हैं कि) तीर्थ, जल और अग्नि ये अन्य पदार्थों से शुद्धि के योग्य नहीं हैं। * ''नैसर्गिकी सुरभिणः कुसुमस्य सिद्धा मूर्ध्नि स्थितिर्न चरणैरवताडनानि॥'' : (श्रीराम सीता को लक्ष्य कर लक्ष्मण से कहते हैं कि) सुगंधपूर्ण वस्तुओं का सिर पर रखा जाना स्वाभावसिद्ध है, न कि पैरों से कुचला जाना। * ''सत्तां केनापि कार्येण लोकस्याराधनं व्रतम् : जनता को प्रसन्न रखना ही राजा का परम कर्तव्य है। (जब दुर्मुख नामक गुप्तचर श्रीराम को सीता के संबंध में फैले लोकापवाद को कहता है तो श्री राम सीता को त्यागने का निर्णय लेते हैं। उस समय का कथन) * ''सन्तापकारिणो बन्धुजनविप्रयोगा भवन्ति । : (सीता, राम और लक्ष्मण के सम्मुख कहती हैं कि) बंधुजनों का वियोग बहुत दुखदायी होता है। * ''ये नाम केचिदिह नः प्रथयन्त्यवज्ञां : ''जानन्ति ते किमपि तान्प्रति नैष यत्नः। : ''उत्पत्स्यतेऽस्ति मम कोऽपि समानधर्मा : ''कालो ह्ययं निरवधिर्विपुला च पृथ्वी॥ '' -- मालतीमाधव 1.6 : अर्थ - कुछ अनाम लोग जो मेरी इस कृति का अनादर कर रहे हैं, वे जानते हैं कि मेरा यह यत्न (रचना) उनके लिये नहीं है। (किसी दिन अवश्य ही मेरे ही समानधर्म वाला कोई उत्पन्न होगा। क्योंकि इस काल की कोई अवधि (अन्तिम समय) नहीं है और पृथ्वी बहुत बड़ी है। * ''सस्वेद -रोमाञ्चित-कम्पिताङ्गी जाता प्रियस्पर्शसुखेन वत्सा। : ''मरुन्नवाम्प्भः प्रतिधूतसिक्ता कदम्बयष्टिः स्फुटकोरकेव॥ '' -- उत्तररामचरितम् , तृतीय अंक : राम के स्पर्श से पुलकित सीता पसीने से लटपट , रोमांचित हैं। उनके अंग कम्पन कर रहे हैं। वह (सीता) वायु से हिलायी गयी, जलबिन्दुओं सिक्त , स्फुट कलिकाओं से युक्त कदम्ब की डाली के समान प्रतीत हो रही हैं। * लोक-व्यवहार यही है कि केवल आँख मिलने से ही अनुराग उत्पन्न हो जाता है। प्रीति वस्तुतः एक अनिर्वचनीय अनुभूति है। यह अहेतुक पक्षपात है, जिसका प्रतिकार असम्भव होता है। यह वह स्नेहात्मक तन्तु है, जो प्राणियों के हृदयों को एक सूत्र में सी देता है। (उत्तररामचरित) * ऋषियों का कथन है कि राक्षसी वाणी का प्रयोग उन्मत्त लोग करते हैं अथवा दृप्त लोग। यह राक्षसी वाणी सब वैर-भावनाओं की मूल होती है। इससे लोगों में प्रतिशोध की ज्वाला प्रदीप्त होती है। सब लोग इस वाणी की निन्दा करते हैं और दूसरी वाणी की प्रशंसा करते हैं। यह दूसरी सूनृता वाणी कामधेनु के समान सब कामनाओं को दुहती है, अलक्ष्मी को दूर करती है, कीर्ति का प्रसार करती है और दुष्ट हृदय वालों की दुष्टता का नाश करती है। यह सुनृता वाणी शुद्ध, शान्त एवं सब मंगलों की जननी होती है। (उत्तररामचरित) * संसारी साधुओं की वाणी तो अर्थ का अनुसरण करती है, परन्तु आदि ऋषियों के सम्बन्ध में यह सत्य है कि अर्थ उनकी वाणी का अनुसरण करता है। (उत्तररामचरित) * भगवति पृथिवि! आप संसार की शरीर-रूप हो। * ''एको रसः करूण एव निमित्तभेदात् : करुण ही वस्तुतः एकमात्र रस है। वही निमित्त-भेद से भिन्न होता हुआ पृथक्-पृथक् शृंगार आदि परिणामों का आश्रय करता है। जैसे एक ही जल भँवर, बुद्‌बुद और तरंग-रूप अनेक विकारों में परिणत होता है, परन्तु वह सब वस्तुतः जल ही है—इसी प्रकार अन्य सब रस करुण रस के ही विकारमात्र हैं। == भवभूति के बारे में कथन == * ''उत्तरे रामचरिते भवभूतिर्विविष्यते'' : उत्तररामचरित में भवभूति विशिष्ट बन गये हैं। ([[कालिदास]] से भी आगे निकल गये हैं) qok0vwsqwv7crkvx2ew5i85rmte35pz 33119 33118 2026-08-02T02:24:15Z अनुनाद सिंह 658 /* उक्तियाँ */ 33119 wikitext text/x-wiki '''[[:w:भवभूति|भवभूति]]''' [[संस्कृत]] के महान नाटकार एवं श्रेष्ठ कवि हैं। महावीरचरितम, मालतीमाधव और उत्तरामचरितम् उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं। उनकी कृतियों में अनेक सूक्तियाँ उनके नीतिज्ञता एवं भनोवैज्ञानिक वैशिष्ट्य को प्रमाणित करतीं हैं। उन्होंने अपनी कृतियों में की प्रस्तावनाओं में भी अपने को "पद-वाक्य-प्रमाणज्ञ" कहा है जिसका अर्थ है कि वे व्याकरण (पद), मीमांसा (वाक्य) और न्याय (प्रमाण) के विद्वान थे । == उक्तियाँ == * ''वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि, : ''लोकोत्तराणां चेतांसि को हि विज्ञातुमर्हति। : महान और असाधारण लोगों का मन वज्र से भी कठोर और फूल से भी कोमल होता है। इसे समझना बहुत कठिन है। * ''एते हि हृदयमर्मच्छिद: संसारभावाः'' : (राम सीता से कहते है कि) ये सांसारिक भाव हृदय के मर्मस्थल का भेदन करने वाले हैं। * ''इयं गेहे लक्ष्मीरियममृतवर्तिर्नयनयोः : (राम कहते हैं कि) यह सीता घर में लक्ष्मी है, यह नेत्रों के लिए अमृत की शलाका है । * ''दुर्जनः असुखमुत्पादयति : दुर्जन दुःख उत्पन्न करता है। (सीता का कथन, राम-लक्ष्मण के समक्ष) * ''तीर्थोदकं च वह्निश्च नान्यतः शुद्धिर्महतः : (राम सीता के परिपेक्ष्य में कहते हैं कि) तीर्थ, जल और अग्नि ये अन्य पदार्थों से शुद्धि के योग्य नहीं हैं। * ''नैसर्गिकी सुरभिणः कुसुमस्य सिद्धा मूर्ध्नि स्थितिर्न चरणैरवताडनानि॥'' : (श्रीराम सीता को लक्ष्य कर लक्ष्मण से कहते हैं कि) सुगंधपूर्ण वस्तुओं का सिर पर रखा जाना स्वाभावसिद्ध है, न कि पैरों से कुचला जाना। * ''सत्तां केनापि कार्येण लोकस्याराधनं व्रतम् : जनता को प्रसन्न रखना ही राजा का परम कर्तव्य है। (जब दुर्मुख नामक गुप्तचर श्रीराम को सीता के संबंध में फैले लोकापवाद को कहता है तो श्री राम सीता को त्यागने का निर्णय लेते हैं। उस समय का कथन) * ''सन्तापकारिणो बन्धुजनविप्रयोगा भवन्ति । : (सीता, राम और लक्ष्मण के सम्मुख कहती हैं कि) बंधुजनों का वियोग बहुत दुखदायी होता है। * ''ये नाम केचिदिह नः प्रथयन्त्यवज्ञां : ''जानन्ति ते किमपि तान्प्रति नैष यत्नः। : ''उत्पत्स्यतेऽस्ति मम कोऽपि समानधर्मा : ''कालो ह्ययं निरवधिर्विपुला च पृथ्वी॥ '' -- मालतीमाधव 1.6 : अर्थ - कुछ अनाम लोग जो मेरी इस कृति का अनादर कर रहे हैं, वे जानते हैं कि मेरा यह यत्न (रचना) उनके लिये नहीं है। (किसी दिन अवश्य ही मेरे ही समानधर्म वाला कोई उत्पन्न होगा। क्योंकि इस काल की कोई अवधि (अन्तिम समय) नहीं है और पृथ्वी बहुत बड़ी है। * ''सस्वेद -रोमाञ्चित-कम्पिताङ्गी जाता प्रियस्पर्शसुखेन वत्सा। : ''मरुन्नवाम्प्भः प्रतिधूतसिक्ता कदम्बयष्टिः स्फुटकोरकेव॥ '' -- उत्तररामचरितम् , तृतीय अंक : राम के स्पर्श से पुलकित सीता पसीने से लटपट , रोमांचित हैं। उनके अंग कम्पन कर रहे हैं। वह (सीता) वायु से हिलायी गयी, जलबिन्दुओं सिक्त , स्फुट कलिकाओं से युक्त कदम्ब की डाली के समान प्रतीत हो रही हैं। * लोक-व्यवहार यही है कि केवल आँख मिलने से ही अनुराग उत्पन्न हो जाता है। प्रीति वस्तुतः एक अनिर्वचनीय अनुभूति है। यह अहेतुक पक्षपात है, जिसका प्रतिकार असम्भव होता है। यह वह स्नेहात्मक तन्तु है, जो प्राणियों के हृदयों को एक सूत्र में सी देता है। (उत्तररामचरित) * ऋषियों का कथन है कि राक्षसी वाणी का प्रयोग उन्मत्त लोग करते हैं अथवा दृप्त लोग। यह राक्षसी वाणी सब वैर-भावनाओं की मूल होती है। इससे लोगों में प्रतिशोध की ज्वाला प्रदीप्त होती है। सब लोग इस वाणी की निन्दा करते हैं और दूसरी वाणी की प्रशंसा करते हैं। यह दूसरी सूनृता वाणी कामधेनु के समान सब कामनाओं को दुहती है, अलक्ष्मी को दूर करती है, कीर्ति का प्रसार करती है और दुष्ट हृदय वालों की दुष्टता का नाश करती है। यह सुनृता वाणी शुद्ध, शान्त एवं सब मंगलों की जननी होती है। (उत्तररामचरित) * संसारी साधुओं की वाणी तो अर्थ का अनुसरण करती है, परन्तु आदि ऋषियों के सम्बन्ध में यह सत्य है कि अर्थ उनकी वाणी का अनुसरण करता है। (उत्तररामचरित) * भगवति पृथिवि! आप संसार की शरीर-रूप हो। * ''एको रसः करूण एव निमित्तभेदात् : करुण ही वस्तुतः एकमात्र रस है। वही निमित्त-भेद से भिन्न होता हुआ पृथक्-पृथक् शृंगार आदि परिणामों का आश्रय करता है। जैसे एक ही जल भँवर, बुद्‌बुद और तरंग-रूप अनेक विकारों में परिणत होता है, परन्तु वह सब वस्तुतः जल ही है—इसी प्रकार अन्य सब रस करुण रस के ही विकारमात्र हैं। == भवभूति के बारे में कथन == * ''उत्तरे रामचरिते भवभूतिर्विविष्यते'' : उत्तररामचरित में भवभूति विशिष्ट बन गये हैं। ([[कालिदास]] से भी आगे निकल गये हैं) e2ufn6cedvdhnfrwefsg9ioic2cmlj4 33120 33119 2026-08-02T03:18:01Z अनुनाद सिंह 658 /* उक्तियाँ */ 33120 wikitext text/x-wiki '''[[:w:भवभूति|भवभूति]]''' [[संस्कृत]] के महान नाटकार एवं श्रेष्ठ कवि हैं। महावीरचरितम, मालतीमाधव और उत्तरामचरितम् उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं। उनकी कृतियों में अनेक सूक्तियाँ उनके नीतिज्ञता एवं भनोवैज्ञानिक वैशिष्ट्य को प्रमाणित करतीं हैं। उन्होंने अपनी कृतियों में की प्रस्तावनाओं में भी अपने को "पद-वाक्य-प्रमाणज्ञ" कहा है जिसका अर्थ है कि वे व्याकरण (पद), मीमांसा (वाक्य) और न्याय (प्रमाण) के विद्वान थे । == उक्तियाँ == * ''वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि, : ''लोकोत्तराणां चेतांसि को हि विज्ञातुमर्हति। : महान और असाधारण लोगों का मन वज्र से भी कठोर और फूल से भी कोमल होता है। इसे समझना बहुत कठिन है। * ''एते हि हृदयमर्मच्छिद: संसारभावाः'' : (राम सीता से कहते है कि) ये सांसारिक भाव हृदय के मर्मस्थल का भेदन करने वाले हैं। * ''इयं गेहे लक्ष्मीरियममृतवर्तिर्नयनयोः : (राम कहते हैं कि) यह सीता घर में लक्ष्मी है, यह नेत्रों के लिए अमृत की शलाका है । * ''दुर्जनः असुखमुत्पादयति : दुर्जन दुःख उत्पन्न करता है। (सीता का कथन, राम-लक्ष्मण के समक्ष) * ''तीर्थोदकं च वह्निश्च नान्यतः शुद्धिर्महतः : (राम सीता के परिपेक्ष्य में कहते हैं कि) तीर्थ, जल और अग्नि ये अन्य पदार्थों से शुद्धि के योग्य नहीं हैं। * ''नैसर्गिकी सुरभिणः कुसुमस्य सिद्धा मूर्ध्नि स्थितिर्न चरणैरवताडनानि॥'' : (श्रीराम सीता को लक्ष्य कर लक्ष्मण से कहते हैं कि) सुगंधपूर्ण वस्तुओं का सिर पर रखा जाना स्वाभावसिद्ध है, न कि पैरों से कुचला जाना। * ''सत्तां केनापि कार्येण लोकस्याराधनं व्रतम् : जनता को प्रसन्न रखना ही राजा का परम कर्तव्य है। (जब दुर्मुख नामक गुप्तचर श्रीराम को सीता के संबंध में फैले लोकापवाद को कहता है तो श्री राम सीता को त्यागने का निर्णय लेते हैं। उस समय का कथन) * ''सन्तापकारिणो बन्धुजनविप्रयोगा भवन्ति । : (सीता, राम और लक्ष्मण के सम्मुख कहती हैं कि) बंधुजनों का वियोग बहुत दुखदायी होता है। * ''ये नाम केचिदिह नः प्रथयन्त्यवज्ञां : ''जानन्ति ते किमपि तान्प्रति नैष यत्नः। : ''उत्पत्स्यतेऽस्ति मम कोऽपि समानधर्मा : ''कालो ह्ययं निरवधिर्विपुला च पृथ्वी॥ '' -- मालतीमाधव 1.6 : अर्थ - कुछ अनाम लोग जो मेरी इस कृति का अनादर कर रहे हैं, वे जानते हैं कि मेरा यह यत्न (रचना) उनके लिये नहीं है। (किसी दिन अवश्य ही मेरे ही समानधर्म वाला कोई उत्पन्न होगा। क्योंकि इस काल की कोई अवधि (अन्तिम समय) नहीं है और पृथ्वी बहुत बड़ी है। * ''सस्वेद -रोमाञ्चित-कम्पिताङ्गी जाता प्रियस्पर्शसुखेन वत्सा। : ''मरुन्नवाम्प्भः प्रतिधूतसिक्ता कदम्बयष्टिः स्फुटकोरकेव॥ '' -- उत्तररामचरितम् , तृतीय अंक : राम के स्पर्श से पुलकित सीता पसीने से लटपट , रोमांचित हैं। उनके अंग कम्पन कर रहे हैं। वह (सीता) वायु से हिलायी गयी, जलबिन्दुओं सिक्त , स्फुट कलिकाओं से युक्त कदम्ब की डाली के समान प्रतीत हो रही हैं। * लोक-व्यवहार यही है कि केवल आँख मिलने से ही अनुराग उत्पन्न हो जाता है। प्रीति वस्तुतः एक अनिर्वचनीय अनुभूति है। यह अहेतुक पक्षपात है, जिसका प्रतिकार असम्भव होता है। यह वह स्नेहात्मक तन्तु है, जो प्राणियों के हृदयों को एक सूत्र में सी देता है। (उत्तररामचरित) * ऋषियों का कथन है कि राक्षसी वाणी का प्रयोग उन्मत्त लोग करते हैं अथवा दृप्त लोग। यह राक्षसी वाणी सब वैर-भावनाओं की मूल होती है। इससे लोगों में प्रतिशोध की ज्वाला प्रदीप्त होती है। सब लोग इस वाणी की निन्दा करते हैं और दूसरी वाणी की प्रशंसा करते हैं। यह दूसरी सूनृता वाणी कामधेनु के समान सब कामनाओं को दुहती है, अलक्ष्मी को दूर करती है, कीर्ति का प्रसार करती है और दुष्ट हृदय वालों की दुष्टता का नाश करती है। यह सुनृता वाणी शुद्ध, शान्त एवं सब मंगलों की जननी होती है। (उत्तररामचरित) * संसारी साधुओं की वाणी तो अर्थ का अनुसरण करती है, परन्तु आदि ऋषियों के सम्बन्ध में यह सत्य है कि अर्थ उनकी वाणी का अनुसरण करता है। (उत्तररामचरित) * भगवति पृथिवि! आप संसार की शरीर-रूप हो। * ''एको रसः करुण एव निमित्तभेदात् : करुण ही वस्तुतः एकमात्र रस है। वही निमित्त-भेद से भिन्न होता हुआ पृथक्-पृथक् शृंगार आदि परिणामों का आश्रय करता है। जैसे एक ही जल भँवर, बुद्‌बुद और तरंग-रूप अनेक विकारों में परिणत होता है, परन्तु वह सब वस्तुतः जल ही है—इसी प्रकार अन्य सब रस करुण रस के ही विकारमात्र हैं। == भवभूति के बारे में कथन == * ''उत्तरे रामचरिते भवभूतिर्विविष्यते'' : उत्तररामचरित में भवभूति विशिष्ट बन गये हैं। ([[कालिदास]] से भी आगे निकल गये हैं) djjvf8e8wutb8rdk6tuke0wr5fin8hp