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पुस्तक
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अनुनाद सिंह
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'''पुस्तक''' , ग्रन्थ या किताब। इसका माध्यम ताड़पत्र, स्वर्णपत्र, ताम्रपत्र, कागज, आदि कुछ भी हो सकता है। पुस्तक की भाषा, लिपि और विषय भिन्न भिन्न होते हैं।
== उद्धरण ==
* ''विषयश्चाधिकारी च सम्बन्धश्च प्रयोजनम् ।
: ''अनुबन्ध विना ग्रन्थे मङगलं नैव शस्यते॥ (श्रीमद्भगवद्गीता)
: ''ग्रन्थ का विषय, उसका प्रयोजन, उसका अधिकारी और प्रतिपाद्य–प्रतिपादक का सम्बन्ध ( इन चारों को ‘अनुबन्धचतुष्टय’ नाम से कहा जाता है) ये अनुबन्ध जिस ग्रन्थ में न हों उसका मङ्गल नहीं होता।
* '' प्रवृत्तिर्वा निवृत्तिर्वा नित्येन कृतकेन वा ।
: '' पुंसां येनोपदिश्येत तच्छास्त्रमभिधीयते ॥ (श्लोकवार्तिकम् शब्दपरिच्छेदः ४)
: ''मनुष्यों को जिससे सांसारिक विषयों में अनुरक्ति अथवा विरक्ति अथवा मानवरचित विषयों का उचित ज्ञान मिलता है, उसे शास्त्र कहा जाता है। तात्पर्य यह है कि जिस पुस्तक से यह पता चले कि किस आचरण को अपनाया जाय और किस आचरण को छोड़ दिया जाय, उसे शास्त्र कहते हैं।
*''तैलाद्रक्षेत् जलाद्रक्षेत् रक्षेत् शिथिल बंधनात् ।
:''मूर्खहस्ते न दातव्यमेवं वदति पुस्तकम् ॥
: पुस्तक कहता है कि, तेल से मेरी रक्षा करो, जल से रक्षा करो, मेरा बंधन शिथिल न होने दो, और मूर्ख के हाथ में मुझे न दो ।
* ''पुस्तकस्था तु या विद्या परहस्तगतं धनम्।
: ''कार्यकाले समुत्पन्ने न सा विद्या न तद्धनम्॥
: किसी पुस्तक में रखी विद्या और दूसरे के हाथ में गया हुआ धन। ये दोनों जब जरूरत होती है तब पुस्तक में स्थित विद्या विद्या नहीं है और दूसरे के हाथ में गया धन धन नहीं है। (ये दोनों हमारे किसी भी काम में नहीं आ पाते हैं)
* अच्छी पुस्तकें जीवन्त देव प्रतिमाएँ हैं। उनकी आराधना से तत्काल प्रकाश और उल्लास मिलता है। – पंडित श्रीराम शर्मा 'आचार्य'
* यदि आप केवल उन्हीं पुस्तकों को पढ़ते हैं जो हर कोई पढ़ रहा है, तो आप भी केवल वही सोच सकते हैं जो बाकी सब लोग सोच रहे हैं। -- हारुकी मुराकामी
* किताबों के बिना कमरा जैसे बिना आत्मा का शरीर। -- सिसरो
* किताब जैसा वफादार कोई दोस्त नहीं। –अर्नेस्ट हेमिंग्वे
* जब कभी आप कोई अच्छी पुस्तक पढ़ते हो, तो दुनिया में कहीं एक नया दरवाजा खुलता है और कुछ अधिक रोशनी अंदर आती है।-- वेरा नज़ैरियन
* जो कोई भी यह कहता है कि जीने के लिए बस एक ही जिंदगी है वह जरूर किताब पढ़ना नहीं जानता होगा।-- अज्ञात
* कई सारे छोटे-छोटे तरीके हैं जिनसे आप अपने बच्चे की दुनिया विस्तारित कर सकते हैं। उनमें सबसे अच्छा है किताबों से लगाव पैदा करना। -- जैकलीन कैनेडी ओनासिस
* कोई व्यक्ति, चाहे पुरुष हो या महिला, जिसे एक अच्छा उपन्यास पढने में आनन्द ना आये, वो निश्चित रूप से बहुत मूर्ख होगा।
* अच्छे मित्र, अच्छी किताबें, और साफ़ अंतःकरण : यही आदर्श जीवन है।
* जब पढने की मजबूरी ना हो तब आप क्या पढ़ते हैं यही निर्धारित करेगा कि आप जब आपके बस में ना हो तब आप क्या बनेंगे।
* मुझे टेलीविज़न बहुत शिक्षित करने वाला लगता है। हर बार जब कोई इसे चलाता है, मैं दूसरे कमरे में चला जाता हूँ और एक किताब पढता हूँ।
* यदि कोई एक ही किताब बार-बार पढने का आनन्द ना उठा पाए तो उसे पढने का कोई फायदा नहीं है।
* "क्लासिक" – एक ऐसी पुस्तक, जिसकी लोग प्रशंशा करते हैं और पढ़ते नहीं। -- [[मार्क ट्वेन]]
* अगर कोई बार-बार किताब पढ़ने का आनंद नहीं ले सकता है, तो उसे पढ़ने का कोई फायदा नहीं है। -- ऑस्कर वाइल्ड
* अच्छी किताब में लाइनों के बीच सर्वोत्तम चीजें होती हैं। – स्वीडन की कहावत
* अच्छी किताब वह है जो उम्मीद के साथ खुलती है और फायदे देकर बंद होती है। –ऐमस ब्रॉन्सन ऐल्कट
* अच्छी किताबें न पढ़ें। जीवन इसके लिए बहुत छोटा है। केवल सर्वश्रेष्ठ किताबे पढ़ें। -- अर्नेस्ट डिमनेट
* अच्छी किताबों को पढ़ना, पिछली सदियों के बेहतरीन व्यक्तियों के साथ बातचीत करने के समान है। -- डेसकार्टेस
* अच्छी पुस्तकें अपना सार राज़ एक बार में नहीं बतातीं। -- स्टीफेन किंग
* अच्छी पुस्तकें जीवंत देव प्रतिमाएं हैं। उनकी आराधना से तत्काल प्रकाश और उल्लास मिलता है। – पंडित श्रीराम शर्मा ‘आचार्य
* अच्छी पुस्तकें मन को आलोकित करती हैं, बुरी पुस्तकें आत्मा को दूषित करती हैं। -- डॉ टी पी चिया
* अच्छे मित्र, अच्छी किताबें, और साफ़ अंतःकरण : यही आदर्श जीवन है। -- मार्क ट्वेन
* अपना तेज बनाये रखने के लिए जिस तरह तलवार को पत्थर की ज़रुरत होती है उसी प्रकार दिमाग को किताबों की। -- जॉर्ज आर आर मार्टिन
* आप कभी भी इतना बड़ा चाय का प्याला या इतनी बड़ी किताब नहीं पा सकते जो मुझे सूट कर सके। -- सी। एस। लुईस
* आप खुशियां नहीं खरीद सकते, लेकिन किताब खरीद सकते हैं जो आपको खुशियां ही देगी। –अज्ञात
* आप बिना कुछ सीखे किताब नहीं खोल सकते। -- कन्फ़्यूशियस
* आपकी पढ़ी अच्छी किताब वह होती है जिसके आखिरी पन्ने पलटने पर आप कुछ यूं महसूस करें कि मानो आपका कोई दोस्त छूट गया हो। –पॉल स्वीनी
* पुस्तकें सबसे शान्त और सबसे स्थयी मित्र हैं, ये सबसे सुलभ और बुद्धिमान सलाहकार हैं, और सबसे धैर्यवान शिक्षक हैं। -- चार्ल्स विलियम एलियट
* आपके द्वारा नही पढ़ी गई पुस्तक, आपकी मदद नहीं करेगी। -- जिम रोहन
* इतनी अधिक किताबें, इतना कम समय। -- फ्रैंक ज़प्पा
* ईमानदारी ज्ञान की किताब का पहला अध्याय है। -- थॉमस जेफ़रसन
* उसपर ध्यान मत दो। वो बहुत किताबें पढ़ती है। -- जैसपर फोर्डे
* एक अच्छी किताब का कोई अंत नहीं होता। -- आर.डी. क्युमिंग
* एक अच्छी किताब सबसे अच्छी दोस्त होती है, आज के लिए और हमेशा के लिए। -- मार्टिन टुपर
* एक आदमी को उसके द्वारा पढ़ी किताबों से जाना जाता है। -- राल्फ वाल्डो इमर्सन
* एक उत्सुक व्यक्ति की किताब पढ़ने की इच्छा और थकान और ऊब मिटाने के लिए किताब पढ़ने की इच्छा दोनों में बड़ा फर्क है। –गिल्बर्ट के. चेस्टर्टन
* एक किताब कल्पना को प्रज्वलित करने के लिए एक माध्यम है। -- एलन बेनेट
* एक किताब की तरह वफादार कोई दोस्त नहीं है। -- अर्नेस्ट हेमिंग्वे
* एक किताब पढ़ना एक आलू चिप खाने की तरह है। -- डायने डुआन
* एक चीज जो आपको बिल्कुल सही-सही जाननी चाहिए वह है लाइब्रेरी का पता। –अल्बर्ट आइंसटाइन
* एक बार जब आप पढ़ना सीख लेते हैं, तो हमेशा के लिए आजाद हो जाते हैं। –फ्रेडरिक डगलस
* एक बेहतरीन किताब आपको कई प्रकार के अनुभव देती हैं, और अंत में थोड़ा उदास भी कर देती है। उसे पढ़ते हुए आप अनेक जीवन की यात्रा कर लेते हैं। –विलियम स्टायरन
* ऐसे मत पढो, जैसे बच्चे पढ़ते हैं, मजे के लिए, या जैसे महत्त्वाकांक्षी पढ़ते हैं, निर्देश के लिए। नहीं, जेने के लिए पढो। -- गुस्ताव फ्लौबेर्ट
* कई सारे छोटे-छोटे तरीके हैं जिनसे आप अपने बच्चे की दुनिया विस्तारित कर सकते हैं। उनमें सबसे अच्छा है किताबों से लगाव पैदा करना। –जैकलीन कैनेडी ओनासिस
* कभी ऐसे व्यक्ति पर भरोसा ना करें जिसने अपने साथ किताब ना लायी हो। -- लेमनी स्निकेट
* किताब एक ऐसा उपहार है जिसे आप बार-बार खोल सकते हैं। -- गैरिसन किलर
* किताब एक ऐसा उपहार है जिसे आप बार-बार खोल सकते हैं। -- गैरीसन केलर
* किताब के अंदर एकमात्र महत्व की चीज है आपके लिए उसमें निहित अर्थ। -- डब्ल्यू. सॉमरसेट
* किताब जैसा वफादार कोई दोस्त नहीं। –अर्नेस्ट हेमिंग्वे
* किताब पढ़ना अपने लिए इसे फिर से लिखने जैसा है। -- एंजेला कार्टर
* किताब वह उपकरण है जो हमारी कल्पना शक्ति को प्रज्ज्वलित करती है। -- ऐलन बेनेट
* किताब वह सपना है जिसे आप अपने हाथों में संभालते हैं। -- नील गैमन
* किताब: जेब में रखा एक बगीचा। -- अरबी कहावत
* किताबें आईने की तरह होती हैं: कोई बेवकूफ उसमें झांके तो प्रतिबिंब बुद्धिमान का दिखने की आप उम्मीद नहीं कर सकते। -- जे.के रॉलिंग
* किताबें आदमी को यह अहसास दिलाती हैं कि जिन्हें वह अपना मूल विचार समझता है वह कोई नया नहीं है। -- अब्राहम लिंकन
* किताबें आदमी को यह दिखती हैं उसके मूल विचार बिल्कुल नए नहीं हैं। -- अब्राहम लिंकन
* किताबें आदमी को ये बताने के काम आती हैं कि उसके मूल विचार आखिरकार इतने नए भी नहीं हैं। -- अब्राहम लिंकन
* किताबें आपके दिमाग को खोलती हैं, आपकी सोच को बड़ा करती हैं, और आपको मजबूत बनाती हैं। ऐसा ओर कोई नही कर सकता। -- विलियम फेदर
* किताबें एकांत में हमारा साथ देती हैं और हमें खुद पर बोझ बनने से बचाती हैं। -- जेरेमी कोलियर
* किताबें जलाने से भी बड़े कई अपराध हैं। उनमें से एक है उन्हें नहीं पढ़ना। -- जोसफ ब्रॉड्स्की
* किताबें दर्पण की तरह हैं: यदि एक मूर्ख अन्दर देखता है तो आप किसी प्रतिभावान के बाहर देखने की उम्मीद नहीं कर सकते। -- जे. के. राउलिंग
* किताबें पढ़ते रहिए, लेकिन याद रखिए किताब सिर्फ किताब है, चिंतन करने के लिए सीखना तो आपको खुद ही पड़ेगा। -- मैक्सिम गोर्की
* किताबें पढने की दो वजहें हैं ; पहली, कि आप उसका लुत्फ़ उठा सकें ; दूसरा कि आप उसके बारें में डींगें हांक सकें। -- बेरट्रेंड रसेल
* किताबें परिपूर्ण मनोरंजन हैं: कोई विज्ञापन नहीं, कोई बैटरी नहीं, हर डॉलर के बदले घंटों का आनंद। -- स्टीफन किंग
* किताबें मित्रों में सबसे शांत और स्थिर हैं ; वे सलाहकारों में सबसे सुलभ और बुद्धिमान हैं, और शिक्षकों में सबसे धैर्यवान हैं। -- चार्ल्स विलियम एलियोट
* किताबें मेरी दोस्त हैं, मेरी जीवनसाथी हैं। ये मुझे हंसाती हैं और रुलाती हैं और जीवन का अर्थ बताती हैं। -- क्रिस्टोफर पाओलिनी
* किताबें विमान हैं, ट्रेन हैं और सड़क हैं। ये मंजिल है, और यात्रा भी। ये घर हैं। -- अन्ना क्विन्डलेन
* किताबे सभ्यता की वाहक हैं। किताबों के बिना इतिहास मौन है, साहित्य गूंगा हैं, विज्ञान अपंग हैं, विचार और अटकलें स्थिर है। ये परिवर्तन का इंजन हैं, विश्व की खिड़कियां हैं, समय के समुद्र में खड़ा प्रकाशस्तंभ हैं। -- बारबरा डब्ल्यू तुचमन
* किताबें हवाई जहाज होती हैं, ट्रेन होती हैं और सड़क होती हैं। वे ही गंतव्य और सफर भी वही होती हैं। –ऐना क्विनलन
* किताबें हैं इतनी सारी और वक्त इतना कम –फ्रैंक ज़प्पा
* किताबें, सबसे सस्ती छुट्टियां हैं, जिसे आप खरीद सकते हैं। -- चार्लिन हैरिस
* किताबों के बगैर घर खिड़कियों के बिना कमरे के सामान है, -- होरेस मैन
* किताबों के बिना कमरा जैसे बिना आत्मा का शरीर। -- सिसरो
* किताबों वे चीजें हैं जिनकी मदद से आप बिना पाँव चलाए ही यात्रा पर निकल जाते हैं। –झुंपा लाहिरी
* किताबों से हमेशा सावधान रहना चाहिए,” टेसा ने कहा है, ” और जो उनके अन्दर है, क्योंकि शब्दों में हमें बदलने की शक्ति होती है। -- कैसेंड्रा क्लेयर
* किसी किताब को पढ़ना उसे अपने लिए दुबारा लिखने जैसा है। –एंजेला कार्टर
* कुछ ऐसी किताबें हैं जिसका अगला और पिछला हिस्सा ही उसका सबसे अच्छा भाग होता है। -- चार्ल्स डिकेन्स
* कुछ किताबों को चखना चाहिए, कुछ को निगलना, लेकिन बस कुछ को ही अच्छे से चबाना और पचाना चाहिए। -- कोर्नेलिया फंकी
* कुत्ते के बहार किताब आदमी की सबसे अच्छी मित्र है। कुत्ते के अन्दर इतना अँधेरा है कि पढ़ा नहीं जा सकता। -- ग्रुशो मार्क्स
* कोई व्यक्ति, चाहे पुरुष हो या महिला, जिसे एक अच्छा उपन्यास पढने में आनंद ना आये, वो निश्चित रूप से बहुत मूर्ख होगा। -- जेन ऑस्टेन
* क्या तुमने सचमुच अपने रूम में राखी सारी किताबें पढ़ी हैं? -- जॉन ग्रीन
* जब कभी आप कोई अच्छी पुस्तक पढ़ते हो, तो दुनिया में कहीं एक नया दरवाजा खुलता है और कुछ अधिक रोशनी अंदर आती है। – वेरा नज़ैरियन
* जब पढने की मजबूरी ना हो तब आप क्या पढ़ते हैं यही निर्धारित करेगा कि आप जब आपके बस में ना हो तब आप क्या बनेंगे। -- ऑस्कर वाइल्ड
* जब भी आप एक अच्छी किताब पढ़ते हैं, तो कहीं न कहीं दुनिया में अपने लिए रोशनी का एक नया दरवाजा खुलता है। -- वेरा नज़ीरियन
* जब मेरे पास कम पैसे होते हैं तो मैं किताबें खरीदता हूँ, और अगर कुछ बचता है तो मैं खान और कपड़े लेता हूँ। -- डेजीडेरिअस इरेस्मस रोटेरोदमस
* जितना अधिक आप पढ़ते हैं, उतनी ही अधिक चीजें आपको जानने को मिलती हैं और जितनी अधिक चीजें आप जानेंगे उतनी अधिक जगहों पर आप जाएंगे। –डॉ. ज्यूस
* जो आदमी अच्छी किताबें नहीं पढ़ता है, उसे अनपढ़ आदमी से ज्यादा फायदा नही मिलने वाला। -- मार्क ट्वेन
* जो कोई भी यह कहता है कि जीने के लिए बस एक ही जिंदगी है वह जरूर किताब पढ़ना नहीं जानता होगा। –अज्ञात
* टापुओ पर खजाने की तुलना में किताबो में अधिक खजाना है। -- वाल्ट डिज्नी
* दुनिया एक किताब है और वो जो घूमते नहीं बस एक पेज पढ़ पाते हैं। -- औगसटीन
* नई पुस्तकों के बारे में सबसे बुरी बात यह है कि वे हमें पुरानी पुस्तकें पढने से दूर रखती हैं -- जोसफ जोबेर्ट
* नीद अच्छी हैं, उसने कहा, और किताबें बेहतर। -- जॉर्ज आर। आर। मार्टिन
* पढ़ते रहिए। यही सबसे बेहतरीन एडवेंचर है। -- ल्योड अलेक्जैंडर
* पढ़ते हुए बीतने वाले पल जन्नत से चुराए पल होते हैं। -- थॉमस वार्टन
* पुराने जमाने में विद्वान किताबें लिखते थे और आम लोग उन्हें पढ़ते थे। अब आम लोग किताबें लिखते हैं और पढ़ता उन्हें कोई नहीं। –ऑस्कर वाइल्ड
* पुस्तकें वह विरासत हैं जो मानव जाति के लिए एक महान प्रतिभा छोड़ती हैं, जो पीढ़ी से पीढ़ी तक उन लोगों तक पहुंचाई जाती हैं, जो अभी तक जन्मे नही हैं। -- जोसेफ एडिसन
* पुस्तकें वे साधन हैं जिसकी मदद से हम संस्कृतियों के बीच पुल बनाते हैं (यानी, संस्कृतियों को जोड़ते हैं)। -डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
* पुस्तकें हवाईजाहज, ट्रेन, और सड़क हैं। वो गंतव्य हैं और यात्रा भी। वे घर हैं। -- एना क्विनडलेन
* पुस्तकें, संचित ज्ञान की जलती हुई दीपक हैं। -- जॉर्ज विलियम कर्टिस
* पोषण, आश्रय और साहचर्य के बाद, कहानियां वो चीजें हैं जिनकी हमें दुनिया में सबसे ज्यादा ज़रुरत होती है। -- फिलिप पुलमैन
* फिक्शन वो सच्चाई दिखा देता है जो रियलिटी छिपा जाती है। -- जैस्मिन वेस्ट
* बच्चों की कहानी जिसका सिर्फ बच्चे आनंद उठा सकें वो बिलकुल भी अच्छी बच्चों की कहानी नहीं है। -- सी। एस। लुइस -- : पंचतंत्र की कहानियां
* बिना किताबो वाला कमरा, आत्मा के बिना शरीर के समान है। -- मार्कस ट्यूलियस सिसेरो
* बिना शब्दों की किताब बिना चुम्बन के प्रेम के सामान है; वो खाली है। -- एंड्रू वोल्फे
* बेशक मैं लोगों से अधिक किताबों से प्यार करता हूँ। -- डायने सेटरफील्ड
* बोलने से पहले सोचो। सोचने से पहले पढ़ो। -- फ्रैन लेबोवित्ज़
* मुझे टेलीविज़न बहुत शिक्षित करने वाला लगता ही। हर बार जब कोई इसे चलाता है, मैं दूसरे रूम में चला जाता हूँ और एक किताब पढता हूँ। -- ग्रुशो मार्क्स
* मुझे तबतक नींद नहीं आती जबतक मैं किताबों से घिरा नहीं होता। –जॉर्गे लुइस बॉर्गेस ।
* मुझे तो किताबों कि गंध से भी प्यार है। -- ऐड्रीऐना त्रैजियेनी
* मुझे पक्का यकीन है कि जब आप कोई अच्छी किताब पढ़ते हैं तो कुछ बहुत ही चामत्कारिक घटित होता है। –जे.के. रॉलिंग
* मेरी किताबें पानी की तरह हैं; और उन महान प्रतिभाओं की शराब की तरह। (सौभाग्यवश) सभी लोग पानी पीते हैं। -- मार्क ट्वैन
* मेरी हमेशा यह कल्पना रही है कि स्वर्ग एक किस्म की लाइब्रेरी होगा – जॉर्गे लुइस बॉर्गेस
* मेरे सबसे अच्छा मित्र वो व्यक्ति है जो मुझे ऐसी किताब दे जो मैंने पढ़ी ना हो। -- अब्राहम लिंकन
* मैं ऐसे आदमी की तो कल्पना भी नहीं कर सकता जो किसी किताब से सचमुच आनंदित हुआ हो और फिर भी उसे एक ही बार पढ़ा हो। –सी.एस. लेविस
* मैं किताबों के बगैर जिंदा नहीं रह सकता। -- थॉमस जेफ़र्सन
* मैं सबके सामने घोषणा करता हूँ : पढने जैसा कोई आनंद नहीं है। -- जेन ऑस्टेन
* मैं सभी पाठकों को दो श्रेणियों में रखता हूं; एक वे जो याद रखने के लिए पढ़ते हैं और दूसरे वे जो पढ़कर भूल जाते हैं। -- विलियम लियोन फेल्प्स
* मैंने जिंदगी किताबों में अधिक जी है बजाए कहीं और जीने के। –नील गैमन
* मैंने जो किताबें पढ़ीं उन्हें मैंने जो खाया है उससे अधिक नहीं याद रख सकता, बावजूद इसके कि उन्होंने ने मुझे बनाया है। -- राल्फ वाल्डो एमर्सन
* मैंने हमेशा कल्पना की है कि स्वर्ग एक तरह का पुस्तकालय है। -- जॉर्ज लुईस बोर्गेज
* यदि आप किसी किताब को बार-बार पढ़कर आनंदित नहीं होते, तो वैसी किताब पढ़ना किस काम का। –ऑस्कर वाइल्ड
* यदि आपके पास एक बागीचा और पुस्तकालय है तो आपके पास वो सब कुछ है जो आपको चाहिए। -- मार्कस टुलीयस सिसरो
* यदि कोई एक ही किताब बार-बार पढने का आनंद ना उठा पाए तो उसे पढने का कोई फायदा नहीं है। -- ऑस्कर वाइल्ड
* यदि कोई ऐसी किताब है जिसे आप पढ़ना चाहते हैं और वह अब तक लिखी न गई हो, तो आप ही वह शख्स होंगे जो उसे लिखेगा। –टोनी मॉरिसन
* यदि कोई ऐसी बुक है जिसे तुम पढना चाहते हो, पर वो अभी लिखी ही नहीं गयी है, तो तुम्हे उसे ज़रूर लिखना चाहिए। -- टोनी मोरीसन
* यदि मैं किताब होती, तो मैं लाइब्रेरी की किताब बनना पसंद करती, ताकि हर तरह के बच्चे मुझे उठाकर घर ले जाते। -कॉर्नेलिया फंके
* यह नियम बना लीजिये; कभी किसी बच्चे को वो किताब नहीं दीजिये जो आप खुद नहीं पढेंगे। -- जॉर्ज बर्नार्ड शॉ
* याद रखिए: एक किताब, एक कलम, एक बच्चा और एक शिक्षक दुनिया बदल सकते हैं। –मलाला युसफजई
* लेकिन मेरे लिए, अगर किताब अच्छे से लिखी गयी है, वो हमेशा मुझे बहुत छोटी लगती है। -- जेन ऑस्टेन
* विज्ञान और धर्म एक दूसरे के खिलाफ नहीं हैं। बस विज्ञान अभी समझने के लिए बहुत छोटा है। -- डैन ब्राउन
* सबसे अच्छी किताबें वे हैं जो आपको वो बताएं जो आप पहले से जानते हों। -- जॉर्ज ओरवेल
* स्वस्थ्य संबधी किताबें पढने में सावधान रहिये। आप एक मुद्रण त्रुटी से मर सकते हैं। -- मार्क ट्वेन
* हम पढ़ते हैं यह जानने के लिए कि हमी अकेले नहीं हैं। -- विलियम निकोल्सन
* हमारी आत्मा के अंदर जमे हुए समुद्रों को तोड़ने के लिए बर्फ की कुल्हाड़ी रूपी किताब चाहिए। -- फ्रांज काफ्का
* हमारे बचपन में पूरे आनंद के साथ बीता शायद ही ऐसा कोई दिन हो जो किताबों के साथ न गुजरा हो। –मार्सल प्रूस्त
* हमेशा ऐसी चीज पढ़िए जिसे पढ़ते वक़्त यदि आप मर भी जाएं तो लोग आपको अच्छा समझें। -- पी जे ओ ‘रुरके
== इन्हें भी देखें ==
* [[विद्या]]
* [[पुस्तकालय]]
* [[पाण्डुलिपि]]
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अनुनाद सिंह
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'''पुस्तक''' , ग्रन्थ या किताब। इसका माध्यम ताड़पत्र, स्वर्णपत्र, ताम्रपत्र, कागज, आदि कुछ भी हो सकता है। पुस्तक की भाषा, लिपि और विषय भिन्न भिन्न होते हैं।
== उद्धरण ==
* ''विषयश्चाधिकारी च सम्बन्धश्च प्रयोजनम् ।
: ''अनुबन्ध विना ग्रन्थे मङगलं नैव शस्यते॥ (श्रीमद्भगवद्गीता)
: ''ग्रन्थ का विषय, उसका प्रयोजन, उसका अधिकारी और प्रतिपाद्य–प्रतिपादक का सम्बन्ध ( इन चारों को ‘अनुबन्धचतुष्टय’ नाम से कहा जाता है) ये अनुबन्ध जिस ग्रन्थ में न हों उसका मङ्गल नहीं होता।
* '' प्रवृत्तिर्वा निवृत्तिर्वा नित्येन कृतकेन वा ।
: '' पुंसां येनोपदिश्येत तच्छास्त्रमभिधीयते ॥ (श्लोकवार्तिकम् शब्दपरिच्छेदः ४)
: ''मनुष्यों को जिससे सांसारिक विषयों में अनुरक्ति अथवा विरक्ति अथवा मानवरचित विषयों का उचित ज्ञान मिलता है, उसे शास्त्र कहा जाता है। तात्पर्य यह है कि जिस पुस्तक से यह पता चले कि किस आचरण को अपनाया जाय और किस आचरण को छोड़ दिया जाय, उसे शास्त्र कहते हैं।
*''तैलाद्रक्षेत् जलाद्रक्षेत् रक्षेत् शिथिल बंधनात् ।
:''मूर्खहस्ते न दातव्यमेवं वदति पुस्तकम् ॥'' -- (यह सूचना बहुत सी पुरानी पाण्डुलिपियों के अन्त में अंकित मिलती है।)
: पुस्तक कहता है कि, तेल से मेरी रक्षा करो, जल से रक्षा करो, मेरा बंधन शिथिल न होने दो, और मूर्ख के हाथ में मुझे न दो ।
* ''पुस्तकस्था तु या विद्या परहस्तगतं धनम्।
: ''कार्यकाले समुत्पन्ने न सा विद्या न तद्धनम्॥
: किसी पुस्तक में रखी विद्या और दूसरे के हाथ में गया हुआ धन। ये दोनों जब जरूरत होती है तब पुस्तक में स्थित विद्या विद्या नहीं है और दूसरे के हाथ में गया धन धन नहीं है। (ये दोनों हमारे किसी भी काम में नहीं आ पाते हैं)
* अच्छी पुस्तकें जीवन्त देव प्रतिमाएँ हैं। उनकी आराधना से तत्काल प्रकाश और उल्लास मिलता है। – पंडित श्रीराम शर्मा 'आचार्य'
* यदि आप केवल उन्हीं पुस्तकों को पढ़ते हैं जो हर कोई पढ़ रहा है, तो आप भी केवल वही सोच सकते हैं जो बाकी सब लोग सोच रहे हैं। -- हारुकी मुराकामी
* किताबों के बिना कमरा जैसे बिना आत्मा का शरीर। -- सिसरो
* किताब जैसा वफादार कोई दोस्त नहीं। –अर्नेस्ट हेमिंग्वे
* जब कभी आप कोई अच्छी पुस्तक पढ़ते हो, तो दुनिया में कहीं एक नया दरवाजा खुलता है और कुछ अधिक रोशनी अंदर आती है।-- वेरा नज़ैरियन
* जो कोई भी यह कहता है कि जीने के लिए बस एक ही जिंदगी है वह जरूर किताब पढ़ना नहीं जानता होगा।-- अज्ञात
* कई सारे छोटे-छोटे तरीके हैं जिनसे आप अपने बच्चे की दुनिया विस्तारित कर सकते हैं। उनमें सबसे अच्छा है किताबों से लगाव पैदा करना। -- जैकलीन कैनेडी ओनासिस
* कोई व्यक्ति, चाहे पुरुष हो या महिला, जिसे एक अच्छा उपन्यास पढने में आनन्द ना आये, वो निश्चित रूप से बहुत मूर्ख होगा।
* अच्छे मित्र, अच्छी किताबें, और साफ़ अंतःकरण : यही आदर्श जीवन है।
* जब पढने की मजबूरी ना हो तब आप क्या पढ़ते हैं यही निर्धारित करेगा कि आप जब आपके बस में ना हो तब आप क्या बनेंगे।
* मुझे टेलीविज़न बहुत शिक्षित करने वाला लगता है। हर बार जब कोई इसे चलाता है, मैं दूसरे कमरे में चला जाता हूँ और एक किताब पढता हूँ।
* यदि कोई एक ही किताब बार-बार पढने का आनन्द ना उठा पाए तो उसे पढने का कोई फायदा नहीं है।
* "क्लासिक" – एक ऐसी पुस्तक, जिसकी लोग प्रशंशा करते हैं और पढ़ते नहीं। -- [[मार्क ट्वेन]]
* अगर कोई बार-बार किताब पढ़ने का आनंद नहीं ले सकता है, तो उसे पढ़ने का कोई फायदा नहीं है। -- ऑस्कर वाइल्ड
* अच्छी किताब में लाइनों के बीच सर्वोत्तम चीजें होती हैं। – स्वीडन की कहावत
* अच्छी किताब वह है जो उम्मीद के साथ खुलती है और फायदे देकर बंद होती है। –ऐमस ब्रॉन्सन ऐल्कट
* अच्छी किताबें न पढ़ें। जीवन इसके लिए बहुत छोटा है। केवल सर्वश्रेष्ठ किताबे पढ़ें। -- अर्नेस्ट डिमनेट
* अच्छी किताबों को पढ़ना, पिछली सदियों के बेहतरीन व्यक्तियों के साथ बातचीत करने के समान है। -- डेसकार्टेस
* अच्छी पुस्तकें अपना सार राज़ एक बार में नहीं बतातीं। -- स्टीफेन किंग
* अच्छी पुस्तकें जीवंत देव प्रतिमाएं हैं। उनकी आराधना से तत्काल प्रकाश और उल्लास मिलता है। – पंडित श्रीराम शर्मा ‘आचार्य
* अच्छी पुस्तकें मन को आलोकित करती हैं, बुरी पुस्तकें आत्मा को दूषित करती हैं। -- डॉ टी पी चिया
* अच्छे मित्र, अच्छी किताबें, और साफ़ अंतःकरण : यही आदर्श जीवन है। -- मार्क ट्वेन
* अपना तेज बनाये रखने के लिए जिस तरह तलवार को पत्थर की ज़रुरत होती है उसी प्रकार दिमाग को किताबों की। -- जॉर्ज आर आर मार्टिन
* आप कभी भी इतना बड़ा चाय का प्याला या इतनी बड़ी किताब नहीं पा सकते जो मुझे सूट कर सके। -- सी। एस। लुईस
* आप खुशियां नहीं खरीद सकते, लेकिन किताब खरीद सकते हैं जो आपको खुशियां ही देगी। –अज्ञात
* आप बिना कुछ सीखे किताब नहीं खोल सकते। -- कन्फ़्यूशियस
* आपकी पढ़ी अच्छी किताब वह होती है जिसके आखिरी पन्ने पलटने पर आप कुछ यूं महसूस करें कि मानो आपका कोई दोस्त छूट गया हो। –पॉल स्वीनी
* पुस्तकें सबसे शान्त और सबसे स्थयी मित्र हैं, ये सबसे सुलभ और बुद्धिमान सलाहकार हैं, और सबसे धैर्यवान शिक्षक हैं। -- चार्ल्स विलियम एलियट
* आपके द्वारा नही पढ़ी गई पुस्तक, आपकी मदद नहीं करेगी। -- जिम रोहन
* इतनी अधिक किताबें, इतना कम समय। -- फ्रैंक ज़प्पा
* ईमानदारी ज्ञान की किताब का पहला अध्याय है। -- थॉमस जेफ़रसन
* उसपर ध्यान मत दो। वो बहुत किताबें पढ़ती है। -- जैसपर फोर्डे
* एक अच्छी किताब का कोई अंत नहीं होता। -- आर.डी. क्युमिंग
* एक अच्छी किताब सबसे अच्छी दोस्त होती है, आज के लिए और हमेशा के लिए। -- मार्टिन टुपर
* एक आदमी को उसके द्वारा पढ़ी किताबों से जाना जाता है। -- राल्फ वाल्डो इमर्सन
* एक उत्सुक व्यक्ति की किताब पढ़ने की इच्छा और थकान और ऊब मिटाने के लिए किताब पढ़ने की इच्छा दोनों में बड़ा फर्क है। –गिल्बर्ट के. चेस्टर्टन
* एक किताब कल्पना को प्रज्वलित करने के लिए एक माध्यम है। -- एलन बेनेट
* एक किताब की तरह वफादार कोई दोस्त नहीं है। -- अर्नेस्ट हेमिंग्वे
* एक किताब पढ़ना एक आलू चिप खाने की तरह है। -- डायने डुआन
* एक चीज जो आपको बिल्कुल सही-सही जाननी चाहिए वह है लाइब्रेरी का पता। –अल्बर्ट आइंसटाइन
* एक बार जब आप पढ़ना सीख लेते हैं, तो हमेशा के लिए आजाद हो जाते हैं। –फ्रेडरिक डगलस
* एक बेहतरीन किताब आपको कई प्रकार के अनुभव देती हैं, और अंत में थोड़ा उदास भी कर देती है। उसे पढ़ते हुए आप अनेक जीवन की यात्रा कर लेते हैं। –विलियम स्टायरन
* ऐसे मत पढो, जैसे बच्चे पढ़ते हैं, मजे के लिए, या जैसे महत्त्वाकांक्षी पढ़ते हैं, निर्देश के लिए। नहीं, जेने के लिए पढो। -- गुस्ताव फ्लौबेर्ट
* कई सारे छोटे-छोटे तरीके हैं जिनसे आप अपने बच्चे की दुनिया विस्तारित कर सकते हैं। उनमें सबसे अच्छा है किताबों से लगाव पैदा करना। –जैकलीन कैनेडी ओनासिस
* कभी ऐसे व्यक्ति पर भरोसा ना करें जिसने अपने साथ किताब ना लायी हो। -- लेमनी स्निकेट
* किताब एक ऐसा उपहार है जिसे आप बार-बार खोल सकते हैं। -- गैरिसन किलर
* किताब एक ऐसा उपहार है जिसे आप बार-बार खोल सकते हैं। -- गैरीसन केलर
* किताब के अंदर एकमात्र महत्व की चीज है आपके लिए उसमें निहित अर्थ। -- डब्ल्यू. सॉमरसेट
* किताब जैसा वफादार कोई दोस्त नहीं। –अर्नेस्ट हेमिंग्वे
* किताब पढ़ना अपने लिए इसे फिर से लिखने जैसा है। -- एंजेला कार्टर
* किताब वह उपकरण है जो हमारी कल्पना शक्ति को प्रज्ज्वलित करती है। -- ऐलन बेनेट
* किताब वह सपना है जिसे आप अपने हाथों में संभालते हैं। -- नील गैमन
* किताब: जेब में रखा एक बगीचा। -- अरबी कहावत
* किताबें आईने की तरह होती हैं: कोई बेवकूफ उसमें झांके तो प्रतिबिंब बुद्धिमान का दिखने की आप उम्मीद नहीं कर सकते। -- जे.के रॉलिंग
* किताबें आदमी को यह अहसास दिलाती हैं कि जिन्हें वह अपना मूल विचार समझता है वह कोई नया नहीं है। -- अब्राहम लिंकन
* किताबें आदमी को यह दिखती हैं उसके मूल विचार बिल्कुल नए नहीं हैं। -- अब्राहम लिंकन
* किताबें आदमी को ये बताने के काम आती हैं कि उसके मूल विचार आखिरकार इतने नए भी नहीं हैं। -- अब्राहम लिंकन
* किताबें आपके दिमाग को खोलती हैं, आपकी सोच को बड़ा करती हैं, और आपको मजबूत बनाती हैं। ऐसा ओर कोई नही कर सकता। -- विलियम फेदर
* किताबें एकांत में हमारा साथ देती हैं और हमें खुद पर बोझ बनने से बचाती हैं। -- जेरेमी कोलियर
* किताबें जलाने से भी बड़े कई अपराध हैं। उनमें से एक है उन्हें नहीं पढ़ना। -- जोसफ ब्रॉड्स्की
* किताबें दर्पण की तरह हैं: यदि एक मूर्ख अन्दर देखता है तो आप किसी प्रतिभावान के बाहर देखने की उम्मीद नहीं कर सकते। -- जे. के. राउलिंग
* किताबें पढ़ते रहिए, लेकिन याद रखिए किताब सिर्फ किताब है, चिंतन करने के लिए सीखना तो आपको खुद ही पड़ेगा। -- मैक्सिम गोर्की
* किताबें पढने की दो वजहें हैं ; पहली, कि आप उसका लुत्फ़ उठा सकें ; दूसरा कि आप उसके बारें में डींगें हांक सकें। -- बेरट्रेंड रसेल
* किताबें परिपूर्ण मनोरंजन हैं: कोई विज्ञापन नहीं, कोई बैटरी नहीं, हर डॉलर के बदले घंटों का आनंद। -- स्टीफन किंग
* किताबें मित्रों में सबसे शांत और स्थिर हैं ; वे सलाहकारों में सबसे सुलभ और बुद्धिमान हैं, और शिक्षकों में सबसे धैर्यवान हैं। -- चार्ल्स विलियम एलियोट
* किताबें मेरी दोस्त हैं, मेरी जीवनसाथी हैं। ये मुझे हंसाती हैं और रुलाती हैं और जीवन का अर्थ बताती हैं। -- क्रिस्टोफर पाओलिनी
* किताबें विमान हैं, ट्रेन हैं और सड़क हैं। ये मंजिल है, और यात्रा भी। ये घर हैं। -- अन्ना क्विन्डलेन
* किताबे सभ्यता की वाहक हैं। किताबों के बिना इतिहास मौन है, साहित्य गूंगा हैं, विज्ञान अपंग हैं, विचार और अटकलें स्थिर है। ये परिवर्तन का इंजन हैं, विश्व की खिड़कियां हैं, समय के समुद्र में खड़ा प्रकाशस्तंभ हैं। -- बारबरा डब्ल्यू तुचमन
* किताबें हवाई जहाज होती हैं, ट्रेन होती हैं और सड़क होती हैं। वे ही गंतव्य और सफर भी वही होती हैं। –ऐना क्विनलन
* किताबें हैं इतनी सारी और वक्त इतना कम –फ्रैंक ज़प्पा
* किताबें, सबसे सस्ती छुट्टियां हैं, जिसे आप खरीद सकते हैं। -- चार्लिन हैरिस
* किताबों के बगैर घर खिड़कियों के बिना कमरे के सामान है, -- होरेस मैन
* किताबों के बिना कमरा जैसे बिना आत्मा का शरीर। -- सिसरो
* किताबों वे चीजें हैं जिनकी मदद से आप बिना पाँव चलाए ही यात्रा पर निकल जाते हैं। –झुंपा लाहिरी
* किताबों से हमेशा सावधान रहना चाहिए,” टेसा ने कहा है, ” और जो उनके अन्दर है, क्योंकि शब्दों में हमें बदलने की शक्ति होती है। -- कैसेंड्रा क्लेयर
* किसी किताब को पढ़ना उसे अपने लिए दुबारा लिखने जैसा है। –एंजेला कार्टर
* कुछ ऐसी किताबें हैं जिसका अगला और पिछला हिस्सा ही उसका सबसे अच्छा भाग होता है। -- चार्ल्स डिकेन्स
* कुछ किताबों को चखना चाहिए, कुछ को निगलना, लेकिन बस कुछ को ही अच्छे से चबाना और पचाना चाहिए। -- कोर्नेलिया फंकी
* कुत्ते के बहार किताब आदमी की सबसे अच्छी मित्र है। कुत्ते के अन्दर इतना अँधेरा है कि पढ़ा नहीं जा सकता। -- ग्रुशो मार्क्स
* कोई व्यक्ति, चाहे पुरुष हो या महिला, जिसे एक अच्छा उपन्यास पढने में आनंद ना आये, वो निश्चित रूप से बहुत मूर्ख होगा। -- जेन ऑस्टेन
* क्या तुमने सचमुच अपने रूम में राखी सारी किताबें पढ़ी हैं? -- जॉन ग्रीन
* जब कभी आप कोई अच्छी पुस्तक पढ़ते हो, तो दुनिया में कहीं एक नया दरवाजा खुलता है और कुछ अधिक रोशनी अंदर आती है। – वेरा नज़ैरियन
* जब पढने की मजबूरी ना हो तब आप क्या पढ़ते हैं यही निर्धारित करेगा कि आप जब आपके बस में ना हो तब आप क्या बनेंगे। -- ऑस्कर वाइल्ड
* जब भी आप एक अच्छी किताब पढ़ते हैं, तो कहीं न कहीं दुनिया में अपने लिए रोशनी का एक नया दरवाजा खुलता है। -- वेरा नज़ीरियन
* जब मेरे पास कम पैसे होते हैं तो मैं किताबें खरीदता हूँ, और अगर कुछ बचता है तो मैं खान और कपड़े लेता हूँ। -- डेजीडेरिअस इरेस्मस रोटेरोदमस
* जितना अधिक आप पढ़ते हैं, उतनी ही अधिक चीजें आपको जानने को मिलती हैं और जितनी अधिक चीजें आप जानेंगे उतनी अधिक जगहों पर आप जाएंगे। –डॉ. ज्यूस
* जो आदमी अच्छी किताबें नहीं पढ़ता है, उसे अनपढ़ आदमी से ज्यादा फायदा नही मिलने वाला। -- मार्क ट्वेन
* जो कोई भी यह कहता है कि जीने के लिए बस एक ही जिंदगी है वह जरूर किताब पढ़ना नहीं जानता होगा। –अज्ञात
* टापुओ पर खजाने की तुलना में किताबो में अधिक खजाना है। -- वाल्ट डिज्नी
* दुनिया एक किताब है और वो जो घूमते नहीं बस एक पेज पढ़ पाते हैं। -- औगसटीन
* नई पुस्तकों के बारे में सबसे बुरी बात यह है कि वे हमें पुरानी पुस्तकें पढने से दूर रखती हैं -- जोसफ जोबेर्ट
* नीद अच्छी हैं, उसने कहा, और किताबें बेहतर। -- जॉर्ज आर। आर। मार्टिन
* पढ़ते रहिए। यही सबसे बेहतरीन एडवेंचर है। -- ल्योड अलेक्जैंडर
* पढ़ते हुए बीतने वाले पल जन्नत से चुराए पल होते हैं। -- थॉमस वार्टन
* पुराने जमाने में विद्वान किताबें लिखते थे और आम लोग उन्हें पढ़ते थे। अब आम लोग किताबें लिखते हैं और पढ़ता उन्हें कोई नहीं। –ऑस्कर वाइल्ड
* पुस्तकें वह विरासत हैं जो मानव जाति के लिए एक महान प्रतिभा छोड़ती हैं, जो पीढ़ी से पीढ़ी तक उन लोगों तक पहुंचाई जाती हैं, जो अभी तक जन्मे नही हैं। -- जोसेफ एडिसन
* पुस्तकें वे साधन हैं जिसकी मदद से हम संस्कृतियों के बीच पुल बनाते हैं (यानी, संस्कृतियों को जोड़ते हैं)। -डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
* पुस्तकें हवाईजाहज, ट्रेन, और सड़क हैं। वो गंतव्य हैं और यात्रा भी। वे घर हैं। -- एना क्विनडलेन
* पुस्तकें, संचित ज्ञान की जलती हुई दीपक हैं। -- जॉर्ज विलियम कर्टिस
* पोषण, आश्रय और साहचर्य के बाद, कहानियां वो चीजें हैं जिनकी हमें दुनिया में सबसे ज्यादा ज़रुरत होती है। -- फिलिप पुलमैन
* फिक्शन वो सच्चाई दिखा देता है जो रियलिटी छिपा जाती है। -- जैस्मिन वेस्ट
* बच्चों की कहानी जिसका सिर्फ बच्चे आनंद उठा सकें वो बिलकुल भी अच्छी बच्चों की कहानी नहीं है। -- सी। एस। लुइस -- : पंचतंत्र की कहानियां
* बिना किताबो वाला कमरा, आत्मा के बिना शरीर के समान है। -- मार्कस ट्यूलियस सिसेरो
* बिना शब्दों की किताब बिना चुम्बन के प्रेम के सामान है; वो खाली है। -- एंड्रू वोल्फे
* बेशक मैं लोगों से अधिक किताबों से प्यार करता हूँ। -- डायने सेटरफील्ड
* बोलने से पहले सोचो। सोचने से पहले पढ़ो। -- फ्रैन लेबोवित्ज़
* मुझे टेलीविज़न बहुत शिक्षित करने वाला लगता ही। हर बार जब कोई इसे चलाता है, मैं दूसरे रूम में चला जाता हूँ और एक किताब पढता हूँ। -- ग्रुशो मार्क्स
* मुझे तबतक नींद नहीं आती जबतक मैं किताबों से घिरा नहीं होता। –जॉर्गे लुइस बॉर्गेस ।
* मुझे तो किताबों कि गंध से भी प्यार है। -- ऐड्रीऐना त्रैजियेनी
* मुझे पक्का यकीन है कि जब आप कोई अच्छी किताब पढ़ते हैं तो कुछ बहुत ही चामत्कारिक घटित होता है। –जे.के. रॉलिंग
* मेरी किताबें पानी की तरह हैं; और उन महान प्रतिभाओं की शराब की तरह। (सौभाग्यवश) सभी लोग पानी पीते हैं। -- मार्क ट्वैन
* मेरी हमेशा यह कल्पना रही है कि स्वर्ग एक किस्म की लाइब्रेरी होगा – जॉर्गे लुइस बॉर्गेस
* मेरे सबसे अच्छा मित्र वो व्यक्ति है जो मुझे ऐसी किताब दे जो मैंने पढ़ी ना हो। -- अब्राहम लिंकन
* मैं ऐसे आदमी की तो कल्पना भी नहीं कर सकता जो किसी किताब से सचमुच आनंदित हुआ हो और फिर भी उसे एक ही बार पढ़ा हो। –सी.एस. लेविस
* मैं किताबों के बगैर जिंदा नहीं रह सकता। -- थॉमस जेफ़र्सन
* मैं सबके सामने घोषणा करता हूँ : पढने जैसा कोई आनंद नहीं है। -- जेन ऑस्टेन
* मैं सभी पाठकों को दो श्रेणियों में रखता हूं; एक वे जो याद रखने के लिए पढ़ते हैं और दूसरे वे जो पढ़कर भूल जाते हैं। -- विलियम लियोन फेल्प्स
* मैंने जिंदगी किताबों में अधिक जी है बजाए कहीं और जीने के। –नील गैमन
* मैंने जो किताबें पढ़ीं उन्हें मैंने जो खाया है उससे अधिक नहीं याद रख सकता, बावजूद इसके कि उन्होंने ने मुझे बनाया है। -- राल्फ वाल्डो एमर्सन
* मैंने हमेशा कल्पना की है कि स्वर्ग एक तरह का पुस्तकालय है। -- जॉर्ज लुईस बोर्गेज
* यदि आप किसी किताब को बार-बार पढ़कर आनंदित नहीं होते, तो वैसी किताब पढ़ना किस काम का। –ऑस्कर वाइल्ड
* यदि आपके पास एक बागीचा और पुस्तकालय है तो आपके पास वो सब कुछ है जो आपको चाहिए। -- मार्कस टुलीयस सिसरो
* यदि कोई एक ही किताब बार-बार पढने का आनंद ना उठा पाए तो उसे पढने का कोई फायदा नहीं है। -- ऑस्कर वाइल्ड
* यदि कोई ऐसी किताब है जिसे आप पढ़ना चाहते हैं और वह अब तक लिखी न गई हो, तो आप ही वह शख्स होंगे जो उसे लिखेगा। –टोनी मॉरिसन
* यदि कोई ऐसी बुक है जिसे तुम पढना चाहते हो, पर वो अभी लिखी ही नहीं गयी है, तो तुम्हे उसे ज़रूर लिखना चाहिए। -- टोनी मोरीसन
* यदि मैं किताब होती, तो मैं लाइब्रेरी की किताब बनना पसंद करती, ताकि हर तरह के बच्चे मुझे उठाकर घर ले जाते। -कॉर्नेलिया फंके
* यह नियम बना लीजिये; कभी किसी बच्चे को वो किताब नहीं दीजिये जो आप खुद नहीं पढेंगे। -- जॉर्ज बर्नार्ड शॉ
* याद रखिए: एक किताब, एक कलम, एक बच्चा और एक शिक्षक दुनिया बदल सकते हैं। –मलाला युसफजई
* लेकिन मेरे लिए, अगर किताब अच्छे से लिखी गयी है, वो हमेशा मुझे बहुत छोटी लगती है। -- जेन ऑस्टेन
* विज्ञान और धर्म एक दूसरे के खिलाफ नहीं हैं। बस विज्ञान अभी समझने के लिए बहुत छोटा है। -- डैन ब्राउन
* सबसे अच्छी किताबें वे हैं जो आपको वो बताएं जो आप पहले से जानते हों। -- जॉर्ज ओरवेल
* स्वस्थ्य संबधी किताबें पढने में सावधान रहिये। आप एक मुद्रण त्रुटी से मर सकते हैं। -- मार्क ट्वेन
* हम पढ़ते हैं यह जानने के लिए कि हमी अकेले नहीं हैं। -- विलियम निकोल्सन
* हमारी आत्मा के अंदर जमे हुए समुद्रों को तोड़ने के लिए बर्फ की कुल्हाड़ी रूपी किताब चाहिए। -- फ्रांज काफ्का
* हमारे बचपन में पूरे आनंद के साथ बीता शायद ही ऐसा कोई दिन हो जो किताबों के साथ न गुजरा हो। –मार्सल प्रूस्त
* हमेशा ऐसी चीज पढ़िए जिसे पढ़ते वक़्त यदि आप मर भी जाएं तो लोग आपको अच्छा समझें। -- पी जे ओ ‘रुरके
== इन्हें भी देखें ==
* [[विद्या]]
* [[पुस्तकालय]]
* [[पाण्डुलिपि]]
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सज्जन
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अनुनाद सिंह
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'''सज्जन''' (सत् + जन) का अर्थ है 'अच्छा व्यक्ति'। साधु, सन्त, सुजन, महात्मा आदि इसके पर्याय हैं।
== उक्तियाँ ==
* ''परोपकारय सतां विभूतयः।''
: सज्जन लोगों का धन परोपकार के लिए होता है।
* ''विद्या विवादाय धनं मदाय शक्तिः परेषां परिपीडनाय ।
: ''खलस्य साधोर्विपरीतमेतत् ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय ॥'' -- सुभाषितरत्नभाण्डागारम्
: दुर्जन पुरुष की विद्या विवाद के लिये होती है, धन घमण्ड के लिये होता है, और शक्ति दूसरों को पीड़ित करने के लिये होती है। इसके विपरीत सज्जनों की विद्या ज्ञान के लिये, धन दान के लिये और शक्ति रक्षा के लिये होती है।
* ''उदेति सविता ताम्रस्ताम्रः एवास्तमेति च।
: ''सम्पत्तौ च विपत्तौ च महतामेकरूपता॥
: सूर्य उदित होने के समय भी लाल रहता है और अस्त होने के समय भी। महान् पुरुष सम्पत्ति (सुख) एवं विपत्ति (द:ख) में एक समान रहते हैं।
* ''योऽसाधुभ्योऽर्थमादाय साधुभ्यः संप्रयच्छति ।
: ''स कृत्वा प्लवमात्मानं संतारयति तावुभौ ॥ '' -- [[मनुस्मृति]]
: जो दुर्जन व्यक्तियों का धन लेकर सज्जन लोगों को देता है वह अपने आप को तो पार लगाता ही है, उन दोनों (दुर्जन मनुष्य और सज्जन मनुष्य) को भी तार देत है।
* ''न प्रहॄष्यति सन्माने नापमाने च कुप्यति ।
: ''न क्रुद्धः परूषं ब्रूयात् स वै साधूत्तमः स्मॄतः ॥'' -- [[मनुस्मृति]]
: जो सम्मान करने पर हर्षित न हों और अपमान करने पर क्रोध न करें, क्रोधित होने पर कठोर वचन न बोलें, उनको ही सज्जनों में श्रेष्ठ कहा गया है।
* ''श्लोकस्तु श्लोकतां याति यत्र तिष्ठन्ति साधवः।
: ''लकारो लुप्यते तत्र यत्र तिष्ठन्त्यसाधवः ॥
: जिस सभा में सज्जन व्यक्ति उपस्थित रहते हैं वहाँ श्लोकों (संस्कृत काव्य) के संचालक होते हैं और उनके मनोरंजक लोग कलाकार होते हैं। जिस सभा में असाधु (नीच और दुष्ट) व्यक्ति रहते हैं वहां 'श्लोक' शब्द से 'ल' अक्षर लुप्त हो जाता है अर्थात वहाँ 'शोक' होता है।
* ''यथा चित्तं तथा वाचो यथा वाचस्तथा क्रियाः।
: ''चित्ते वाचि क्रियायांच साधुनामेक्रूपता॥
: अर्थात एक अच्छा व्यक्ति मन में जो होता है, और जैसा बोलता है वैसा ही करता है। सज्जन पुरुषों के मन, वाणी और क्रिया में एकरूपता होती है।
* साधू ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय।
: सार सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय ॥ -- कबीरदास
* सन्त न छोड़े सन्तई, कोटिक मिले असन्त
: मलय भुजंगहि बेधिया, शीतलता न तजन्त ॥'' -- कबीरदास
: सज्जन को चाहे करोड़ों दुष्ट पुरुष मिलें फिर भी वह अपने भले स्वभाव को नहीं छोड़ता। चन्दन के पेड़ से सांप लिपटे रहते हैं, पर वह अपनी शीतलता नहीं छोड़ता।
* साधु चरित सुभ चरित कपासू। निरस बिसद गुनमय फल जासू॥
: जो सहि दुख परछिद्र दुरावा। बंदनीय जेहिं जग जस पावा॥ -- [[तुलसीदास]] ([[रामचरितमानस]] में)
: संतों का चरित्र कपास के चरित्र (जीवन) के समान शुभ होता है जिसका फल नीरस, विशद और गुणमय होता है।जैसे कपास का धागा सुई के किए हुए छेद को अपना तन देकर ढँक देता है, अथवा कपास जैसे लोढ़े जाने, काते जाने और बुने जाने का कष्ट सहकर भी वस्त्र के रूप में परिणत होकर दूसरों के गोपनीय स्थानों को ढँकता है, उसी प्रकार संत स्वयं दुःख सहकर दूसरों के छिद्रों (दोषों) को ढँकता है, जिसके कारण उसने जगत में वंदनीय यश प्राप्त किया है।
*मुद मंगलमय संत समाजू। जो जग जंगम तीरथराजू॥
: राम भगति जहँ सुरसरि धारा। सरसइ ब्रह्म बिचार प्रचारा॥ –- बालकांड , रामचरितमानस
: संतों का समाज आनन्द और कल्याणमय है, जो जगत में चलता-फिरता तीर्थराज (प्रयाग) है। जहां (उस संत समाज रूपी प्रयागराज में) राम भक्ति रूपी गंगाजी की धारा है और ब्रह्मविचार का प्रचार सरस्वतीजी हैं।
* ''संत असंतन्हि कै असि करनी। जिमि कुठार चंदन आचरनी॥
: ''काटइ परसु मलय सुनु भाई। निज गुन देइ सुगंध बसाई॥''
: ''ताते सुर सीसन्ह चढ़त जग बल्लभ श्रीखंड।
: ''अनल दाहि पीटत घनहिं परसु बदन यह दंड॥'' -- तुलसीदास
: संत और असंतों की करनी ऐसी है जैसे चंदन और कुठार (कुल्हाड़ी) का आचरण होता है। हे भाई! सुनो, कुल्हाड़ी चंदन को काटती है (क्योंकि उसका स्वभाव या काम ही वृक्षों को काटना है), किन्तु चन्दन अपने स्वभाववश उसे (काटने वाली कुल्हाड़ी को) अपना गुण (सुगंध) देकर उसे सुसंधित कर देता है॥
: इसी गुण के कारण चंदन देवताओं के सिरों पर चढ़ता है और जगत् का प्रिय है। (इसके उल्टा) कुल्हाड़ी के मुख को यह दंड मिलता है कि उसको आग में जलाकर फिर घन से पीटते हैं।
* ''बिषय अलंपट सील गुनाकर। पर दुख दुख सुख सुख देखे पर॥
: ''सम अभूतरिपु बिमद बिरागी। लोभामरष हरष भय त्यागी॥'' -- तुलसीदास
: संत विषयों में लंपट (लिप्त) नहीं होते, शील और सद्गुणों की खान होते हैं। उन्हें पराया दुःख देखकर दुःख और पराया सुख देखकर सुख होता है। वे (सबमें, सर्वत्र, सब समय) समता रखते हैं, उनके मन कोई उनका शत्रु नहीं है। वे मद से रहित और वैराग्यवान् होते हैं तथा लोभ, क्रोध, हर्ष और भय का त्याग किए हुए रहते हैं।
* ''कोमलचित दीनन्ह पर दाया। मन बच क्रम मम भगति अमाया॥
: ''सबहि मानप्रद आपु अमानी। भरत प्रान सम मम ते प्रानी॥'' -- तुलसीदास
: उनका चित्त बड़ा कोमल होता है। वे दीनों पर दया करते हैं तथा मन, वचन और कर्म से मेरी निष्कपट (विशुद्ध) भक्ति करते हैं। सबको सम्मान देते हैं, पर स्वयं मानरहित होते हैं। हे भरत! वे प्राणी (संतजन) मेरे प्राणों के समान हैं।
* ''अब सन्तन की मण्डली, बन्दत हौं शिरनाय।
: ''बिना कृपा जिनकी भये, हरि-यश गाय न जाय॥'' -- ब्रजवासीदास, ब्रज विलास
* पवित्र हृदय वाले सज्जनों को बुद्धि कभी कुंठित ( कुंद ) नही होती। – वाल्मीकि रामायण
* सज्जन को चाहे करोड़ों दुष्ट पुरुष मिलें फिर भी वह अपने भले स्वभाव को नहीं छोड़ता। चन्दन के पेड़ से सांप लिपटे रहते हैं, पर वह अपनी शीतलता नहीं छोड़ता। -- संत कबीर
* प्रशंसा सफलता की नहीं, सज्जनता की होनी चाहिए। -- श्री राम शर्मा आचार्य
* सज्जन व्यक्ति वह होता है जो कभी भी अनजाने में भी किसी की भावनाओं को ठेस नही पहुँचाता हैं। -- ऑस्कर वाइल्ड
* सज्जन व्यक्ति वह होता है जो दुनिया से कम लेता है और ज्यादा देता हैं। -- जॉर्ज बर्नार्ड शॉ
* जहाँ एक ओर सोना, सज्जन और साधुजन सौ बार टूट कर अर्थात पराजित हो कर भी अपनी हिम्मत नहीं हारते हैं और पुनः प्रयास करते रहते हैं, वही दूसरी ओर दुर्जन और कुम्हार के बनाये हुए मिट्टी के घड़े बस एक ठोकर में ही चूर चूर हो जाते हैं। -- कबीर दास
* सज्जन व्यक्ति जरूर शर्मिंदा होगा यदि उसने कुछ कहा और किया नहीं। -- कन्फ्यूशियस
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==इन्हें भी देखें==
*[[दुर्जन]]
*[[सत्संगति]]
*[[धर्म]]
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मूर्ख
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अनुनाद सिंह
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text/x-wiki
* ''मूर्खस्य पञ्चचिन्हानि गर्वो दुर्वचनं तथा।
: ''क्रोधश्च दृढवादश्च परवाक्येष्वनादरः॥''
: मूर्ख के पाँच लक्षण हैं - गर्व, अपशब्द, क्रोध, हठ और दूसरों की बातों का अनादर।
* ''अज्ञः सुखमाराध्यः सुखतरमाराध्यते विशेषज्ञः ।
: ''ज्ञानलवदुर्विदग्धं ब्रह्मापि तं नरं न रञ्जयति ॥'' -- भर्तृहरि विरचित नीतिशतकम्
: अज्ञानी मनुष्य को समझाना सामान्यतः सरल होता है। उससे भी आसान होता है जानकार या विशेषज्ञ अर्थात् चर्चा में निहित विषय को जानने वाले को समझाना । किन्तु जो व्यक्ति अल्पज्ञ होता है, जिसकी जानकारी आधी-अधूरी होती है, उसे समझाना तो स्वयं सृष्टिकर्ता ब्रह्मा के भी वश से बाहर होता है।
* ''काव्यशास्त्रविनोदेन कालो गच्छति धीमताम्।
: ''व्यसनेन तु मूर्खाणां निद्रया कलहेन वा॥
: जो बुद्धिमान (ज्ञानी) मनुष्य होते है उनका ज्यादातर समय काव्य, शास्त्र के ज्ञान को पाने उसके आनन्द को प्राप्त करने में व्यतीत होता है वहीं जो मूर्ख व्यक्ति है उनका अधिकांश समय व्यसन , निद्रा और कलह (झगड़े) करने में नष्ट हो जाता है।
* ''शक्यो वारयितुं जलेन हुतभुक्छत्रेण सूर्यातपः
: ''नागेन्द्रो निशिताङ्कुशेन समदो दण्डेन गोगर्दभौ।
: ''व्याधिर्भेषजसङ्ग्रहैश्च विविधैर्मन्त्रप्रयोगैर्विषं
: ''सर्वस्यौषधमस्ति शास्त्रविहितं मूर्खस्य नास्त्यौषधम्॥'' -- नीतिशतक
: जल से आग बुझाई जा सकती है, सूर्य के ताप को छाते से रोका जा सकता है, मतवाले हाथी को तीखे अंकुश से वश में किया जा सकता है, पशुओं को दण्ड से वश में किया जा सकता है, औषधियों से रोग भी शान्त हो सकता है, विष को भी अनेक मन्त्रों के प्रयोगों से शान्त कर सकते हैं - इस तरह सब उपद्रवों की औषधि शास्त्र में है, परन्तु मूर्ख की कोई औषधि नहीं है।
== विदुर के अनुसार मूर्ख (मूढ) ==
*'' स्वमर्थं यः परित्यज्य परार्थमुनुतिष्ठति।
: मिथ्या चरति मित्रार्थे यश्च मूढः स उच्यते॥
: जो अपना कर्तव्य छोड़कर दूसरे के कर्तव्य का पालन करता है, तथा मित्र के साथ असत् आचरण करता है, वह मूर्ख कहलाता है।
*'' अकामान् कामयति यः कामयानान् परित्यजेत्।
:'' बलवन्तं च यो द्वेष्टि तमाहुर्मूढचेतसम्॥
: जो न चाहने वालों को चाहता है, और चाहने वालों को त्याग देता है, जो अपने से बलवान के साथ बैर करता है, उसे मूढ़ विचार वाला मनुष्य कहते हैं।
*'' अमित्रं कुरुते मित्रं मित्रं द्वेष्टि हिनस्ति च।
:'' कर्म चारभते दुष्टं तमाहुर्मूढचेतसम्॥
: जो शत्रु को मित्र बनाता और मित्र से द्वेष करते हुए उसे कष्ट पहुँचाता है तथा सदा बुरे कर्मों का आरम्भ किया करता है, उसे मूढ चित्तवाला कहते हैं।
*'' संसारयति कृत्यानि सर्वत्र विचिकित्सते।
:'' चिरं करोति क्षिप्रार्थे स मूढो भरतर्षभ॥
: भरतश्रेष्ठ! जो अपने कर्मों को व्यर्थ ही फैलाता है, सर्वत्र संदेह करता है तथा शीघ्र होने वाले काम में भी देर लगता है, वह मूढ है।
*'' श्राद्धं पित्रुभ्यो न ददाति दैवतानि नार्चति।
:'' सुहृन्मित्रं न लभते तमाहुर्मूढचेतसम्॥
: जो पितरों का श्राद्ध और देवताओं का पूजन नहीं करता तथा जिसे सुहृद् नहीं मिलता, उसे मूढ चित्तवाला कहते हैं।
*'' अनाहूतः प्रविशति अपृष्टो बहुभाषते।
:'' अविश्वस्ते विश्वसिति मूढचेता नराधमः॥
: मूढ चित्तवाला अधम मनुष्य बिना बुलाये ही भीतर चला आता है, बिना पूछे ही बहुत बोलता है तथा अविश्वसनीय मुनुष्य पर भी विश्वास करता है।
*'' परं क्षिपति दोषेण वर्तमानः स्वयं तथा।
:'' यश्च कृध्यत्यनीशानः स च मूढतमो नरः॥
: दोषयुक्त बर्ताव करते हुए भी जो दूसरे पर उसके दोष बताकर आक्षेप करता है तथा जो असमर्थ होते हुए भी क्रोध सकता है, वह मुष्य महामूर्ख है।
*'' आत्मनो बलमज्ञाय धर्मार्थपरिवरिजितम्।
:'' अलभ्यमिच्छन् नैष्कर्म्यान्मूढबुद्धिरहोच्यते॥
: जो अपने बल को न समझकर विना काम किये ही धर्म और अर्थ से विरुद्ध तथा न पाने योग्य वस्तुकी इच्छा करता है, वह पुरुष इस संसार में मूढबुद्धि कहलाता है।
*'' अशिष्यं शास्ति यो राजन् यश्च शून्यमुपासते।
:'' कदर्यं भजते यश्च तमाहुर्मूढचेतसम्॥
: जो अनधिकारी को उपदेश देता है और शून्य की उपासना करता है, तथा जो कृपण का आश्रय लेता है, उसे मूढचित्तवाला कहते है।
==इन्हें भी देखें==
* [[पण्डित]]
* [[बुद्धि]]
* [[ज्ञान]]
* [[अनुभव]]
* [[विद्या]]
* [[शिक्षा]]
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