विकिसूक्ति hiwikiquote https://hi.wikiquote.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0 MediaWiki 1.47.0-wmf.23 first-letter मीडिया विशेष वार्ता सदस्य सदस्य वार्ता विकिसूक्ति विकिसूक्ति वार्ता चित्र चित्र वार्ता मीडियाविकि मीडियाविकि वार्ता साँचा साँचा वार्ता सहायता सहायता वार्ता श्रेणी श्रेणी वार्ता TimedText TimedText talk मॉड्यूल मॉड्यूल वार्ता Event Event talk नाना पाटेकर 0 9346 33340 2026-10-09T04:23:35Z अनुनाद सिंह 658 "'''नाना पाटेकर''' (जन्म : -- मृत्यु : ८ अक्तूबर) एक फिल्म अभिनेता थे। उनका वास्तविक नाम विश्वनाथ पाटेकर है। उनका जीवन बहुत सरलता से भरा हुआ था। मुरुड-जंजीरा नाम के छोटे से गा..." के साथ नया पृष्ठ बनाया 33340 wikitext text/x-wiki '''नाना पाटेकर''' (जन्म : -- मृत्यु : ८ अक्तूबर) एक फिल्म अभिनेता थे। उनका वास्तविक नाम विश्वनाथ पाटेकर है। उनका जीवन बहुत सरलता से भरा हुआ था। मुरुड-जंजीरा नाम के छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने वह स्थान पाया जो बहुत कम लोगों को मिलता है। १३ की आयु में पत्थर की खदानों में काम करने से लेकर घर संभालने के लिए उन्होंने सिनेमा के पोस्टर तक पेंट किए। थियेटर में काम करने के बाद उन्होंने 'गमन' फिल्म के साथ 1978 में बॉलीवुड में कदम रखा। उन्हें जैसे-जैसे काम मिलता गया, वैसे-वैसे उन्होंने खुद की एक्टिंग से एक ऊंचा मुकाम हासिल किया। == विचार == * जीवन जितना साधारण होगा, बोझ उतना ही कम होगा। हम जितना अधिक भागते हैं, खुद से उतना ही दूर हो जाते हैं। * सच बोलना और अपनी जड़ों से जुड़े रहना, इंसान की सबसे बड़ी ताकत होती है। झूठ के पैर भले ही लंबे हों, पर मंजिल तक सच ही पहुंचता है। * मुश्किलें तो जिंदगी का हिस्सा हैं। अगर रास्ते आसान होंगे, तो आप कभी मजबूत नहीं बन पाएंगे। तपना तो पड़ता ही है। * जब तक आप किसी दूसरे के आंसू खुद की आंखों से महसूस नहीं करते, तब तक आप इंसान कहलाने के हकदार नहीं हैं। * इंसान की औकात ही क्या है? आज यहां हो, कल कहां रहोगे पता नहीं। फिर किस बात का घमंड? अहंकार इंसान को अंदर से खोखला कर देता है। * फल की चिंता करना बेकार है। आपका काम सिर्फ अपना कर्म पूरी ईमानदारी से करना है, बाकी ऊपर वाले पर छोड़ दीजिए। * जिंदगी बहुत छोटी है, इसे शिकायतों में मत बिताइए. जो है, जैसा है, उसमें खुश रहना सीखिए, यही असली कला है। * जीवन की नश्वरता को स्वीकारते हुए हर परिस्थिति में सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखना ही इस विचार का सार है। शिकायतें करने से समय और ऊर्जा दोनों बर्बाद होते हैं। जो मिला है, उसमें संतोष करना और वर्तमान क्षण का आनंद लेना ही जीवन जीने की कला है। * रोटी की खुशबू से बेहतर कोई खुशबू नहीं * अगर स्कूल या कॉलेज में कोई टीचर गुस्सा करते हैं, तो वो आपको पढ़ाना चाहते हैं। उनसे डरो-मत सीखो। * मैंने ए बी सी डी पाँचवीं कक्षा में सीखना शुरू किया था। * आपके सर भी ऐसे होंगे जो अग्रेसिव होते हैं, तो उनसे डरो मत। वो आपको पढ़ाना चाहते हैं आपको डराना नहीं चाहते। इस पूरी जिंदगी में अगर बटोरने की बजाय अगर हम कुछ देना चाहेंगे तो जिंदगी उससे खूबसूरत हो जाती है। * कॉन्फिडेंस का मतलब ये नहीं है कि मैं सबसे आगे रहूंगा, बल्कि यह है कि मैं यह देखने के लिए एक्साइटेड हूं कि मेरे बाद दूसरे नंबर पर कौन आता है। == कथोपकथन (डायलॉग) == * आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने? अब मुझे लटका देंगे, मेरी जुबान और आंखें बाहर आ जाएंगी। थोड़ी देर लटकने के बाद मेरा भाई मुझे नीचे उतार देगा और फिर आप चर्चा करके घर चले जाएंगे, खाना खाएंगे और सो जाएंगे। तुम्हारी यह नामर्दानगी और बुजदिली एक दिन इस देश की मौत का तमाशा इसी खामोशी से देखेगी। (क्रांतिवीर- 1994) * तुम्हारे नापाक कदम आगे मत बढाओ, तोड़कर तुम्हारे गले में पहना देंगे। (क्रांतिवीर-1994) * ये मुसलमान का खून ये हिंदू का खून… बता इसमें मुसलमान का कौन सा, हिंदू का कौन सा... (क्रांतिवीर) * एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है... (यशवंत) * सौ में से अस्सी बेईमान, फिर भी मेरा भारत महान... (यशवंत) * मराठा मरता है या मारता है... (तिरंगा) * हम सब एक ही मिट्टी के बने हैं... (क्रांतिवीर) * धंधे में कोई किसी का भाई नहीं, कोई किसी का बेटा नहीं... (परिंदा) * हम सब सिस्टम का हिस्सा हैं, सिस्टम डिसाइड करता है, अपुन फॉलो करता है... (अब तक छप्पन) * एक सैनिक के लिए उसका देश ही उसका परिवार होता है... (प्रहार) * साला ये दुःख काहे खत्म नहीं होता बे... (वेलकम) * ये दुख नाम की बीमारी का इलाज किसी डॉक्टर के पास भी नहीं है। इसका इलाज खुद ढूंढना पड़ता है. दुख को भूलना पड़ता है। (परिन्दा-1989) * जान मत मांगना...इसकी बाजार में कोई कीमत नहीं। (गुलाम-ए-मुस्तफा-1997) * तुझे ऐसी मौत मारूंगा कि तेरी पापी आत्मा अगले सात जन्म तक किसी दूसरे शरीर में घुसने से पहले कांप उठेगी। (तिरंगा-1992) * ये तो लाल मिर्च है तीखी तीखी, हाथ लगाओ तो हाथ जले, मुंह लगाओ तो मुंह जले, दिल लगाओ तो दिल जले। तिरंगा-1992) * ये मुसलमान का खून ये हिन्दू का खून, बता इसमें मुसलमान का कौनसा और हिन्दू का कौनसा, बता? (क्रांतिवीर-1994) * अपना तो उसूल है, पहले लात, फिर बात, उसके बाद मुलाक़ात। (तिरंगा-1992) * गिरो सालों गिरो, लेकिन गिरो तो उस झरने की तरह जो पर्वत की ऊंचाई से गिरकर भी अपनी सुंदरता खोने नहीं देता। जमीन की तह से मिलके भी अपने अस्तित्व को नष्ट नहीं होने देता। (यशवंत-1996) * मैं तो लावारिस था, लेकिन मेरे मरने के बाद मेरी लाश लावारिस नहीं होगी। (गुलाम-ए-मुस्तफा, 1997) qynda2x610nsh0svq0qpgkxpw9y525o 33341 33340 2026-10-09T04:31:22Z अनुनाद सिंह 658 33341 wikitext text/x-wiki '''नाना पाटेकर''' (जन्म : -- मृत्यु : ८ अक्तूबर) एक फिल्म अभिनेता थे। उनका वास्तविक नाम विश्वनाथ पाटेकर है। उनका जीवन बहुत सरलता से भरा हुआ था। मुरुड-जंजीरा नाम के छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने वह स्थान पाया जो बहुत कम लोगों को मिलता है। १३ की आयु में पत्थर की खदानों में काम करने से लेकर घर संभालने के लिए उन्होंने सिनेमा के पोस्टर तक पेंट किए। थियेटर में काम करने के बाद उन्होंने 'गमन' फिल्म के साथ 1978 में बॉलीवुड में कदम रखा। उन्हें जैसे-जैसे काम मिलता गया, वैसे-वैसे उन्होंने खुद की एक्टिंग से एक ऊंचा मुकाम हासिल किया। == विचार == * स्थितियाँ आपकी उम्र तय करतीं हैं, लेकिन एक समय के बाद अपनी उम्र आप खुद तय करते हैं। * मानसिक मजबूती जरूरी है। * माता-पिता एक इंसान के जीवन में सबसे बड़ा सहारा होते हैं। उनकी छांव में रहने तक किसी और चीज की जरूरत नहीं होती। * भूख और अपमान गुरू की तरह होते हैं। * करने वाले का कुछ ना कुछ हो ही जाता है। * अच्छा हास्य जरूरी है क्योंकि यही मनुष्य को कठिन परिस्थितियों में भी जिंदा रखता है। * मैंने उन दिनों से बहुत कुछ सीखा है। आज के दिनों में वो सीख कही सीखने को नहीं मिलेगी। * पैसों को सही इस्तेमाल करिए। * जीवन जितना साधारण होगा, बोझ उतना ही कम होगा। हम जितना अधिक भागते हैं, खुद से उतना ही दूर हो जाते हैं। * सच बोलना और अपनी जड़ों से जुड़े रहना, इंसान की सबसे बड़ी ताकत होती है। झूठ के पैर भले ही लंबे हों, पर मंजिल तक सच ही पहुंचता है। * मुश्किलें तो जिंदगी का हिस्सा हैं। अगर रास्ते आसान होंगे, तो आप कभी मजबूत नहीं बन पाएंगे। तपना तो पड़ता ही है। * जब तक आप किसी दूसरे के आंसू खुद की आंखों से महसूस नहीं करते, तब तक आप इंसान कहलाने के हकदार नहीं हैं। * इंसान की औकात ही क्या है? आज यहां हो, कल कहां रहोगे पता नहीं। फिर किस बात का घमंड? अहंकार इंसान को अंदर से खोखला कर देता है। * फल की चिंता करना बेकार है। आपका काम सिर्फ अपना कर्म पूरी ईमानदारी से करना है, बाकी ऊपर वाले पर छोड़ दीजिए। * जिंदगी बहुत छोटी है, इसे शिकायतों में मत बिताइए. जो है, जैसा है, उसमें खुश रहना सीखिए, यही असली कला है। * जीवन की नश्वरता को स्वीकारते हुए हर परिस्थिति में सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखना ही इस विचार का सार है। शिकायतें करने से समय और ऊर्जा दोनों बर्बाद होते हैं। जो मिला है, उसमें संतोष करना और वर्तमान क्षण का आनंद लेना ही जीवन जीने की कला है। * रोटी की खुशबू से बेहतर कोई खुशबू नहीं * अगर स्कूल या कॉलेज में कोई टीचर गुस्सा करते हैं, तो वो आपको पढ़ाना चाहते हैं। उनसे डरो-मत सीखो। * मैंने ए बी सी डी पाँचवीं कक्षा में सीखना शुरू किया था। * आपके सर भी ऐसे होंगे जो अग्रेसिव होते हैं, तो उनसे डरो मत। वो आपको पढ़ाना चाहते हैं आपको डराना नहीं चाहते। इस पूरी जिंदगी में अगर बटोरने की बजाय अगर हम कुछ देना चाहेंगे तो जिंदगी उससे खूबसूरत हो जाती है। * कॉन्फिडेंस का मतलब ये नहीं है कि मैं सबसे आगे रहूंगा, बल्कि यह है कि मैं यह देखने के लिए एक्साइटेड हूं कि मेरे बाद दूसरे नंबर पर कौन आता है। == कथोपकथन (डायलॉग) == * आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने? अब मुझे लटका देंगे, मेरी जुबान और आंखें बाहर आ जाएंगी। थोड़ी देर लटकने के बाद मेरा भाई मुझे नीचे उतार देगा और फिर आप चर्चा करके घर चले जाएंगे, खाना खाएंगे और सो जाएंगे। तुम्हारी यह नामर्दानगी और बुजदिली एक दिन इस देश की मौत का तमाशा इसी खामोशी से देखेगी। (क्रांतिवीर- 1994) * तुम्हारे नापाक कदम आगे मत बढाओ, तोड़कर तुम्हारे गले में पहना देंगे। (क्रांतिवीर-1994) * ये मुसलमान का खून ये हिंदू का खून… बता इसमें मुसलमान का कौन सा, हिंदू का कौन सा... (क्रांतिवीर) * एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है... (यशवंत) * सौ में से अस्सी बेईमान, फिर भी मेरा भारत महान... (यशवंत) * मराठा मरता है या मारता है... (तिरंगा) * हम सब एक ही मिट्टी के बने हैं... (क्रांतिवीर) * धंधे में कोई किसी का भाई नहीं, कोई किसी का बेटा नहीं... (परिंदा) * हम सब सिस्टम का हिस्सा हैं, सिस्टम डिसाइड करता है, अपुन फॉलो करता है... (अब तक छप्पन) * एक सैनिक के लिए उसका देश ही उसका परिवार होता है... (प्रहार) * साला ये दुःख काहे खत्म नहीं होता बे... (वेलकम) * ये दुख नाम की बीमारी का इलाज किसी डॉक्टर के पास भी नहीं है। इसका इलाज खुद ढूंढना पड़ता है. दुख को भूलना पड़ता है। (परिन्दा-1989) * जान मत मांगना...इसकी बाजार में कोई कीमत नहीं। (गुलाम-ए-मुस्तफा-1997) * तुझे ऐसी मौत मारूंगा कि तेरी पापी आत्मा अगले सात जन्म तक किसी दूसरे शरीर में घुसने से पहले कांप उठेगी। (तिरंगा-1992) * ये तो लाल मिर्च है तीखी तीखी, हाथ लगाओ तो हाथ जले, मुंह लगाओ तो मुंह जले, दिल लगाओ तो दिल जले। तिरंगा-1992) * ये मुसलमान का खून ये हिन्दू का खून, बता इसमें मुसलमान का कौनसा और हिन्दू का कौनसा, बता? (क्रांतिवीर-1994) * अपना तो उसूल है, पहले लात, फिर बात, उसके बाद मुलाक़ात। (तिरंगा-1992) * गिरो सालों गिरो, लेकिन गिरो तो उस झरने की तरह जो पर्वत की ऊंचाई से गिरकर भी अपनी सुंदरता खोने नहीं देता। जमीन की तह से मिलके भी अपने अस्तित्व को नष्ट नहीं होने देता। (यशवंत-1996) * मैं तो लावारिस था, लेकिन मेरे मरने के बाद मेरी लाश लावारिस नहीं होगी। (गुलाम-ए-मुस्तफा, 1997) a6df5fr9xhv22c54octyhl40b4v7l99 33342 33341 2026-10-09T04:33:53Z अनुनाद सिंह 658 33342 wikitext text/x-wiki '''[[:w:नाना पाटेकर|नाना पाटेकर]]''' (जन्म : १ जनवरी १९५१ -- मृत्यु : ८ अक्तूबर २०२६) एक फिल्म अभिनेता थे। उनका वास्तविक नाम ''''विश्वनाथ पाटेकर''' है। उनका जीवन बहुत सरलता से भरा हुआ था। मुरुड-जंजीरा नाम के छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने वह स्थान पाया जो बहुत कम लोगों को मिलता है। १३ वर्ष की आयु में पत्थर की खदानों में काम करने से लेकर घर संभालने के लिए उन्होंने सिनेमा के पोस्टर तक पेंट किए। थियेटर में काम करने के बाद उन्होंने 'गमन' फिल्म के साथ 1978 में बॉलीवुड में कदम रखा। उन्हें जैसे-जैसे काम मिलता गया, वैसे-वैसे उन्होंने खुद की एक्टिंग से एक ऊंचा मुकाम हासिल किया। == विचार == * स्थितियाँ आपकी उम्र तय करतीं हैं, लेकिन एक समय के बाद अपनी उम्र आप खुद तय करते हैं। * मानसिक मजबूती जरूरी है। * माता-पिता एक इंसान के जीवन में सबसे बड़ा सहारा होते हैं। उनकी छांव में रहने तक किसी और चीज की जरूरत नहीं होती। * भूख और अपमान गुरू की तरह होते हैं। * करने वाले का कुछ ना कुछ हो ही जाता है। * अच्छा हास्य जरूरी है क्योंकि यही मनुष्य को कठिन परिस्थितियों में भी जिंदा रखता है। * मैंने उन दिनों से बहुत कुछ सीखा है। आज के दिनों में वो सीख कही सीखने को नहीं मिलेगी। * पैसों को सही इस्तेमाल करिए। * जीवन जितना साधारण होगा, बोझ उतना ही कम होगा। हम जितना अधिक भागते हैं, खुद से उतना ही दूर हो जाते हैं। * सच बोलना और अपनी जड़ों से जुड़े रहना, इंसान की सबसे बड़ी ताकत होती है। झूठ के पैर भले ही लंबे हों, पर मंजिल तक सच ही पहुंचता है। * मुश्किलें तो जिंदगी का हिस्सा हैं। अगर रास्ते आसान होंगे, तो आप कभी मजबूत नहीं बन पाएंगे। तपना तो पड़ता ही है। * जब तक आप किसी दूसरे के आंसू खुद की आंखों से महसूस नहीं करते, तब तक आप इंसान कहलाने के हकदार नहीं हैं। * इंसान की औकात ही क्या है? आज यहां हो, कल कहां रहोगे पता नहीं। फिर किस बात का घमंड? अहंकार इंसान को अंदर से खोखला कर देता है। * फल की चिंता करना बेकार है। आपका काम सिर्फ अपना कर्म पूरी ईमानदारी से करना है, बाकी ऊपर वाले पर छोड़ दीजिए। * जिंदगी बहुत छोटी है, इसे शिकायतों में मत बिताइए. जो है, जैसा है, उसमें खुश रहना सीखिए, यही असली कला है। * जीवन की नश्वरता को स्वीकारते हुए हर परिस्थिति में सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखना ही इस विचार का सार है। शिकायतें करने से समय और ऊर्जा दोनों बर्बाद होते हैं। जो मिला है, उसमें संतोष करना और वर्तमान क्षण का आनंद लेना ही जीवन जीने की कला है। * रोटी की खुशबू से बेहतर कोई खुशबू नहीं * अगर स्कूल या कॉलेज में कोई टीचर गुस्सा करते हैं, तो वो आपको पढ़ाना चाहते हैं। उनसे डरो-मत सीखो। * मैंने ए बी सी डी पाँचवीं कक्षा में सीखना शुरू किया था। * आपके सर भी ऐसे होंगे जो अग्रेसिव होते हैं, तो उनसे डरो मत। वो आपको पढ़ाना चाहते हैं आपको डराना नहीं चाहते। इस पूरी जिंदगी में अगर बटोरने की बजाय अगर हम कुछ देना चाहेंगे तो जिंदगी उससे खूबसूरत हो जाती है। * कॉन्फिडेंस का मतलब ये नहीं है कि मैं सबसे आगे रहूंगा, बल्कि यह है कि मैं यह देखने के लिए एक्साइटेड हूं कि मेरे बाद दूसरे नंबर पर कौन आता है। == कथोपकथन (डायलॉग) == * आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने? अब मुझे लटका देंगे, मेरी जुबान और आंखें बाहर आ जाएंगी। थोड़ी देर लटकने के बाद मेरा भाई मुझे नीचे उतार देगा और फिर आप चर्चा करके घर चले जाएंगे, खाना खाएंगे और सो जाएंगे। तुम्हारी यह नामर्दानगी और बुजदिली एक दिन इस देश की मौत का तमाशा इसी खामोशी से देखेगी। (क्रांतिवीर- 1994) * तुम्हारे नापाक कदम आगे मत बढाओ, तोड़कर तुम्हारे गले में पहना देंगे। (क्रांतिवीर-1994) * ये मुसलमान का खून ये हिंदू का खून… बता इसमें मुसलमान का कौन सा, हिंदू का कौन सा... (क्रांतिवीर) * एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है... (यशवंत) * सौ में से अस्सी बेईमान, फिर भी मेरा भारत महान... (यशवंत) * मराठा मरता है या मारता है... (तिरंगा) * हम सब एक ही मिट्टी के बने हैं... (क्रांतिवीर) * धंधे में कोई किसी का भाई नहीं, कोई किसी का बेटा नहीं... (परिंदा) * हम सब सिस्टम का हिस्सा हैं, सिस्टम डिसाइड करता है, अपुन फॉलो करता है... (अब तक छप्पन) * एक सैनिक के लिए उसका देश ही उसका परिवार होता है... (प्रहार) * साला ये दुःख काहे खत्म नहीं होता बे... (वेलकम) * ये दुख नाम की बीमारी का इलाज किसी डॉक्टर के पास भी नहीं है। इसका इलाज खुद ढूंढना पड़ता है. दुख को भूलना पड़ता है। (परिन्दा-1989) * जान मत मांगना...इसकी बाजार में कोई कीमत नहीं। (गुलाम-ए-मुस्तफा-1997) * तुझे ऐसी मौत मारूंगा कि तेरी पापी आत्मा अगले सात जन्म तक किसी दूसरे शरीर में घुसने से पहले कांप उठेगी। (तिरंगा-1992) * ये तो लाल मिर्च है तीखी तीखी, हाथ लगाओ तो हाथ जले, मुंह लगाओ तो मुंह जले, दिल लगाओ तो दिल जले। तिरंगा-1992) * ये मुसलमान का खून ये हिन्दू का खून, बता इसमें मुसलमान का कौनसा और हिन्दू का कौनसा, बता? (क्रांतिवीर-1994) * अपना तो उसूल है, पहले लात, फिर बात, उसके बाद मुलाक़ात। (तिरंगा-1992) * गिरो सालों गिरो, लेकिन गिरो तो उस झरने की तरह जो पर्वत की ऊंचाई से गिरकर भी अपनी सुंदरता खोने नहीं देता। जमीन की तह से मिलके भी अपने अस्तित्व को नष्ट नहीं होने देता। (यशवंत-1996) * मैं तो लावारिस था, लेकिन मेरे मरने के बाद मेरी लाश लावारिस नहीं होगी। (गुलाम-ए-मुस्तफा, 1997) 6ux4mvc0t9mmdj8sgk1zjnch1evx3sl 33343 33342 2026-10-09T04:39:03Z अनुनाद सिंह 658 33343 wikitext text/x-wiki [[चित्र:Nana Patekar 2025.jpg|right|thumb|300px|नाना पाटेकर , वर्ष २०२५ में]] '''[[:w:नाना पाटेकर|नाना पाटेकर]]''' (जन्म : १ जनवरी १९५१ -- मृत्यु : ८ अक्तूबर २०२६) एक फिल्म अभिनेता थे। उनका वास्तविक नाम '''विश्वनाथ पाटेकर''' है। उनका जीवन बहुत सरलता से भरा हुआ था। मुरुड-जंजीरा नाम के छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने वह स्थान पाया जो बहुत कम लोगों को मिलता है। १३ वर्ष की आयु में पत्थर की खदानों में काम करने से लेकर घर संभालने के लिए उन्होंने सिनेमा के पोस्टर तक पेंट किए। थियेटर में काम करने के बाद उन्होंने 'गमन' फिल्म के साथ 1978 में बॉलीवुड में कदम रखा। उन्हें जैसे-जैसे काम मिलता गया, वैसे-वैसे उन्होंने खुद की एक्टिंग से एक ऊंचा मुकाम हासिल किया। == विचार == * स्थितियाँ आपकी उम्र तय करतीं हैं, लेकिन एक समय के बाद अपनी उम्र आप खुद तय करते हैं। * मानसिक मजबूती जरूरी है। * माता-पिता एक इंसान के जीवन में सबसे बड़ा सहारा होते हैं। उनकी छांव में रहने तक किसी और चीज की जरूरत नहीं होती। * भूख और अपमान गुरू की तरह होते हैं। * करने वाले का कुछ ना कुछ हो ही जाता है। * अच्छा हास्य जरूरी है क्योंकि यही मनुष्य को कठिन परिस्थितियों में भी जिंदा रखता है। * मैंने उन दिनों से बहुत कुछ सीखा है। आज के दिनों में वो सीख कही सीखने को नहीं मिलेगी। * पैसों को सही इस्तेमाल करिए। * जीवन जितना साधारण होगा, बोझ उतना ही कम होगा। हम जितना अधिक भागते हैं, खुद से उतना ही दूर हो जाते हैं। * सच बोलना और अपनी जड़ों से जुड़े रहना, इंसान की सबसे बड़ी ताकत होती है। झूठ के पैर भले ही लंबे हों, पर मंजिल तक सच ही पहुंचता है। * मुश्किलें तो जिंदगी का हिस्सा हैं। अगर रास्ते आसान होंगे, तो आप कभी मजबूत नहीं बन पाएंगे। तपना तो पड़ता ही है। * जब तक आप किसी दूसरे के आंसू खुद की आंखों से महसूस नहीं करते, तब तक आप इंसान कहलाने के हकदार नहीं हैं। * इंसान की औकात ही क्या है? आज यहां हो, कल कहां रहोगे पता नहीं। फिर किस बात का घमंड? अहंकार इंसान को अंदर से खोखला कर देता है। * फल की चिंता करना बेकार है। आपका काम सिर्फ अपना कर्म पूरी ईमानदारी से करना है, बाकी ऊपर वाले पर छोड़ दीजिए। * जिंदगी बहुत छोटी है, इसे शिकायतों में मत बिताइए. जो है, जैसा है, उसमें खुश रहना सीखिए, यही असली कला है। * जीवन की नश्वरता को स्वीकारते हुए हर परिस्थिति में सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखना ही इस विचार का सार है। शिकायतें करने से समय और ऊर्जा दोनों बर्बाद होते हैं। जो मिला है, उसमें संतोष करना और वर्तमान क्षण का आनंद लेना ही जीवन जीने की कला है। * रोटी की खुशबू से बेहतर कोई खुशबू नहीं * अगर स्कूल या कॉलेज में कोई टीचर गुस्सा करते हैं, तो वो आपको पढ़ाना चाहते हैं। उनसे डरो-मत सीखो। * मैंने ए बी सी डी पाँचवीं कक्षा में सीखना शुरू किया था। * आपके सर भी ऐसे होंगे जो अग्रेसिव होते हैं, तो उनसे डरो मत। वो आपको पढ़ाना चाहते हैं आपको डराना नहीं चाहते। इस पूरी जिंदगी में अगर बटोरने की बजाय अगर हम कुछ देना चाहेंगे तो जिंदगी उससे खूबसूरत हो जाती है। * कॉन्फिडेंस का मतलब ये नहीं है कि मैं सबसे आगे रहूंगा, बल्कि यह है कि मैं यह देखने के लिए एक्साइटेड हूं कि मेरे बाद दूसरे नंबर पर कौन आता है। == कथोपकथन (डायलॉग) == * आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने? अब मुझे लटका देंगे, मेरी जुबान और आंखें बाहर आ जाएंगी। थोड़ी देर लटकने के बाद मेरा भाई मुझे नीचे उतार देगा और फिर आप चर्चा करके घर चले जाएंगे, खाना खाएंगे और सो जाएंगे। तुम्हारी यह नामर्दानगी और बुजदिली एक दिन इस देश की मौत का तमाशा इसी खामोशी से देखेगी। (क्रांतिवीर- 1994) * तुम्हारे नापाक कदम आगे मत बढाओ, तोड़कर तुम्हारे गले में पहना देंगे। (क्रांतिवीर-1994) * ये मुसलमान का खून ये हिंदू का खून… बता इसमें मुसलमान का कौन सा, हिंदू का कौन सा... (क्रांतिवीर) * एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है... (यशवंत) * सौ में से अस्सी बेईमान, फिर भी मेरा भारत महान... (यशवंत) * मराठा मरता है या मारता है... (तिरंगा) * हम सब एक ही मिट्टी के बने हैं... (क्रांतिवीर) * धंधे में कोई किसी का भाई नहीं, कोई किसी का बेटा नहीं... (परिंदा) * हम सब सिस्टम का हिस्सा हैं, सिस्टम डिसाइड करता है, अपुन फॉलो करता है... (अब तक छप्पन) * एक सैनिक के लिए उसका देश ही उसका परिवार होता है... (प्रहार) * साला ये दुःख काहे खत्म नहीं होता बे... (वेलकम) * ये दुख नाम की बीमारी का इलाज किसी डॉक्टर के पास भी नहीं है। इसका इलाज खुद ढूंढना पड़ता है. दुख को भूलना पड़ता है। (परिन्दा-1989) * जान मत मांगना...इसकी बाजार में कोई कीमत नहीं। (गुलाम-ए-मुस्तफा-1997) * तुझे ऐसी मौत मारूंगा कि तेरी पापी आत्मा अगले सात जन्म तक किसी दूसरे शरीर में घुसने से पहले कांप उठेगी। (तिरंगा-1992) * ये तो लाल मिर्च है तीखी तीखी, हाथ लगाओ तो हाथ जले, मुंह लगाओ तो मुंह जले, दिल लगाओ तो दिल जले। तिरंगा-1992) * ये मुसलमान का खून ये हिन्दू का खून, बता इसमें मुसलमान का कौनसा और हिन्दू का कौनसा, बता? (क्रांतिवीर-1994) * अपना तो उसूल है, पहले लात, फिर बात, उसके बाद मुलाक़ात। (तिरंगा-1992) * गिरो सालों गिरो, लेकिन गिरो तो उस झरने की तरह जो पर्वत की ऊंचाई से गिरकर भी अपनी सुंदरता खोने नहीं देता। जमीन की तह से मिलके भी अपने अस्तित्व को नष्ट नहीं होने देता। (यशवंत-1996) * मैं तो लावारिस था, लेकिन मेरे मरने के बाद मेरी लाश लावारिस नहीं होगी। (गुलाम-ए-मुस्तफा, 1997) ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} eqxwxxcm1r3dy18iiwkkn0a2suo1ygy सदस्य वार्ता:Payal gril 3 9347 33344 2026-10-09T11:06:16Z New user message 2225 स्वागत 33344 wikitext text/x-wiki {{साँचा:स्वागत|name=Payal gril}} -- [[सदस्य:New user message|New user message]] ([[सदस्य वार्ता:New user message|वार्ता]]) १६:३६, ९ अक्टूबर २०२६ (IST) 5a26r87bksmh8z4ute4a3qzce0kr08s 33348 33344 2026-10-09T11:33:31Z Payal gril 5585 /* */ उत्तर 33348 wikitext text/x-wiki {{साँचा:स्वागत|name=Payal gril}} -- [[सदस्य:New user message|New user message]] ([[सदस्य वार्ता:New user message|वार्ता]]) १६:३६, ९ अक्टूबर २०२६ (IST) :helo mujhe ismein pratidin kya karna hoga please mujhe bataen [[सदस्य:Payal gril|Payal gril]] ([[सदस्य वार्ता:Payal gril|वार्ता]]) १७:०३, ९ अक्टूबर २०२६ (IST) peanin7flaw4vf96bp9m4thq0hiup93 33349 33348 2026-10-09T11:34:21Z Payal gril 5585 /* */ उत्तर 33349 wikitext text/x-wiki {{साँचा:स्वागत|name=Payal gril}} -- [[सदस्य:New user message|New user message]] ([[सदस्य वार्ता:New user message|वार्ता]]) १६:३६, ९ अक्टूबर २०२६ (IST) :helo mujhe ismein pratidin kya karna hoga please mujhe bataen [[सदस्य:Payal gril|Payal gril]] ([[सदस्य वार्ता:Payal gril|वार्ता]]) १७:०३, ९ अक्टूबर २०२६ (IST) ::agar mujhe koi pareshani Hui is aadami to main aapse kaise poochh sakti hun [[सदस्य:Payal gril|Payal gril]] ([[सदस्य वार्ता:Payal gril|वार्ता]]) १७:०४, ९ अक्टूबर २०२६ (IST) c1545ed54v3y26o8uf6q5mkbj33w7xt 33350 33349 2026-10-09T11:35:16Z Payal gril 5585 /* Hindi medium */ नया अनुभाग 33350 wikitext text/x-wiki {{साँचा:स्वागत|name=Payal gril}} -- [[सदस्य:New user message|New user message]] ([[सदस्य वार्ता:New user message|वार्ता]]) १६:३६, ९ अक्टूबर २०२६ (IST) :helo mujhe ismein pratidin kya karna hoga please mujhe bataen [[सदस्य:Payal gril|Payal gril]] ([[सदस्य वार्ता:Payal gril|वार्ता]]) १७:०३, ९ अक्टूबर २०२६ (IST) ::agar mujhe koi pareshani Hui is aadami to main aapse kaise poochh sakti hun [[सदस्य:Payal gril|Payal gril]] ([[सदस्य वार्ता:Payal gril|वार्ता]]) १७:०४, ९ अक्टूबर २०२६ (IST) == Hindi medium == hindi [[सदस्य:Payal gril|Payal gril]] ([[सदस्य वार्ता:Payal gril|वार्ता]]) १७:०५, ९ अक्टूबर २०२६ (IST) lhogxkerzfbo0e5s15ylfbwikk5xpop महात्मा गांधी के विचार 0 9348 33345 2026-10-09T11:11:49Z Payal gril 5585 "Mohandas Karamchand Bharat ke ek aadhyatmik rajnitik karmchari the yah Desh ke prati nirnay bhav rakhte the vah sambhavit sambhavit bhav rakhte th. Narendra Modi kaise bane yah chhoti si umra mein chai bechate the tatha inhone Apne jivan mein bahut parishram Kiya aur mehnat ki yah chai bechkar pradhanmantri bane" के साथ नया पृष्ठ बनाया 33345 wikitext text/x-wiki Mohandas Karamchand Bharat ke ek aadhyatmik rajnitik karmchari the yah Desh ke prati nirnay bhav rakhte the vah sambhavit sambhavit bhav rakhte th. Narendra Modi kaise bane yah chhoti si umra mein chai bechate the tatha inhone Apne jivan mein bahut parishram Kiya aur mehnat ki yah chai bechkar pradhanmantri bane a1fqc04xvcdp4srwcc9lu71xce5wsw2 33346 33345 2026-10-09T11:17:18Z Payal gril 5585 /* */ 33346 wikitext text/x-wiki Ek Vidyarthi Apne Desh ke liye kya kar sakta hai Ek Vidyarthi Apne Desh ke liye agar Apne man mein bitha lekar mujhe yah kartavya ya Apne ichchayen Puri karni ho yah samaj ke prati apna dayitv nibhaanaa Ho Apne man mein is baat Ko utha le to vah hamesha is kam ko kar sakta hai koi bhi yah mat soche ki ham kuchh nahin kar sakte Jo humne Apne dimag Dil mein than liya hai ki hamen Desh ke liye kuchh kar dikhana hai to vah Vidyarthi kuchh Na kuchh kar sakta hai vah apne माता-पिता samaj ke prati Apne Desh bhakti ko nibha sakta hai Main Payal Hun main ek chhoti si gaon mein rahti hun main aaj yah vichar prastut karna chahti hun ki koi ladka ya ladki Apne mummy papa per department Ho hai Lekin Apne mummy papa ke liye Jo kar sake vah kijiye please unki har EK aam mein sahayata kijiye tatha Apne mummy papa ke liye kuchh kar dikhayen yah mat sochiye ki ham kuchh kar nahin sakte ham kar sakte hain Jo ham than le vah ham kar sakte hain aur karenge kyon nahin karenge hamen itni himmat hai ham itne kamjor nahin hai ham karenge Jo hamare man mein hamare Dil mein socha hai samjha hai dhanyvad aaj ka Mera vichar yahi samapt hota hai d2p0en01mu9ck8ipizl8ldtmhuszump सदस्य:Payal gril 2 9349 33347 2026-10-09T11:25:49Z Payal gril 5585 /* */ 33347 wikitext text/x-wiki Mera sadasya prusth yah hai ki ki meri Ruchi Hindi kavitaen likhni ya kahaniyan banana tatha English English aur bhugol political inmein meri Ruchi hai p5oqoleizb8ilmszc9k9n9zyb2hr1bd