विकिस्रोत
hiwikisource
https://hi.wikisource.org/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A4:%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0
MediaWiki 1.47.0-wmf.12
first-letter
मीडिया
विशेष
वार्ता
सदस्य
सदस्य वार्ता
विकिस्रोत
विकिस्रोत वार्ता
चित्र
चित्र वार्ता
मीडियाविकि
मीडियाविकि वार्ता
साँचा
साँचा वार्ता
सहायता
सहायता वार्ता
श्रेणी
श्रेणी वार्ता
लेखक
लेखक वार्ता
अनुवाद
अनुवाद वार्ता
पृष्ठ
पृष्ठ वार्ता
विषयसूची
विषयसूची वार्ता
TimedText
TimedText talk
मॉड्यूल
मॉड्यूल वार्ता
Event
Event talk
पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष षष्ठ भाग.djvu/१३२
250
45964
668724
665039
2026-07-25T15:34:06Z
सौरभ तिवारी 05
49
/* शोधित नहीं */
668724
proofread-page
text/x-wiki
<noinclude><pagequality level="1" user="सौरभ तिवारी 05" /></noinclude>१३.
गणपाथ-- गज मण्डलो
गजपाल (सं० पु० ) महावत, हाथोवान, वह जो हाथो | गजपुर (सं० क्लो० ) गस्य हस्तिनाम नृपस्य पुरं इ-तत् !
fafष्ठरको राजधानी हस्तिनापुर ।
को चलाता हो ।
गजपिप्पली (सं० स्त्री० ) गजपूर्वा, गजप्रिया वा पिप्पली ।
fatuatfaशेष, एक तरहको पीपर। इसका पर्याय -करि-
पिप्पली, इभकणा, कपिवली, कपिल्लिका, श्रेयसी, वसिर,
गजाना, कोलवलो, इभोषणा, चव्यजा, छिद्रविद हो,
दीर्घ ग्रन्थो, तजसी, वन्तल और स्थल बेदेही है ।
भावप्रकाश-
यह मंझोले आकारका एक पौधा है। इसकी
पत्तियां चौड़ी होती है। किनारे पर लहरिया नोकोला
कटाव होता है। इसमें दो या तीन पत्तोंके बाद एक
पतला सोका निकलता है। इसके सिरे पर प्रायः एक
चकी मोटी मंजरी छोटे छोटे फुलके माथ निकलती
है। यही मंजरी सुखाने पर घोषधक काममं बाजार में
fail है। इसका गुण-कट, उष्ण, वातनाशक, स्तनकर्ण-
efree तथा वेदना और मलनाशक है ।
के मतसे इसके फलका नाम गजपिप्पली है । इसका
गुचकट, वात, कफनाशक, अग्निहडिकारो, पति-
सार, खास, किण्ठरोग और कमिनाशक है।
गजपोपर (हिं० स्त्री० ) पियल देखो।"
पीपल ( हिं० स्त्री० ) गजपियो देखा।
पुङ्गव (सं० पु० ) बड़ा और सुन्दर हाथी ।
गजपुट ( ० पु० ) गजाञ्जयः पुरः शाकपार्थिववत्समासः ।
गर्तविशेष, एक तरहका गडा । यह प्रोषध पाक और
सोमारन प्रभृति कार्यके लिये उपयोगी है। कोई वैश्वक
एक हाथ गहरा, एक हाथ चौड़ा और एक हाथ लम्बा
गर्तको गजपुट कहते हैं।
हस्तप्रमाथी गर्यो यः पुटः स तु माय ।" (या)
भावप्रकाशके मतमे मवा हाथ लम्बा, मवा हाथ
चौड़ा और सवा हाथ गहरा गत को गनपुट कहते हैं ।
ऐसा गत प्रस्तुत कर उसमें पांच मी बिनुए कई विका
कर मध्यमें जिम घोषधको रखना होता है, उसे रख कर
उपरसे फिर ५०० कण्ड देकर गत के मुख पर चारो
तरफ से मिट्टो डाल देते हैं सिर्फ थोड़ी जगह मध्यमे
।
gee छोड़ दो जाती है और तब उसमें भाग लगा देते
है, गजपुट इसी प्रणालीने पाक होता है। सब प्रकार-
के पुट पुट है
"समियो गमपुराण के परिवारितः । " ( भारत चमु० १५०० )
गजपुष्पी ( सं० स्त्री० ) गस्तमद इव गन्धयुत पुष्पमस्याः
यह व्रो० ततो ङोप | नागपुष्पलता, नागदोन ।
"तसो गिरिसटे जातामाया सदुरामदाम् ।
°
लायो गजपुष्पों तो तम्य कष्ठं समवान् ॥" ( रामः ४१२२४५)
गजप्रिया (मं० [स्त्री०) गजस्य प्रिया, ६-तत् । शसकी त
सलईका पेड़ ।
गजब ( ० पु० ) क्रोध, कोप, विलक्षण, अपूर्व, अन्याय ।
गजबदन (सं० पु० ) गणेश ।
गजबन्ध (सं० पु० ) एक प्रकारका चित्रकाव्य । इसमें
किसी कविता के पतरोंकी हाथीका धाकार बना कर
उनके अङ्ग प्रत्यन्नको परिपूर्ण कर देते हैं ।
गजबन्धनी (सं० स्त्री०) गजा बध्यन्ते ऽत्र बन्ध-ल्य ुट् ङीप्
च । हाथो बांधनेका स्थान, हाथोशाला । इसका पर्याय
वारी, वारि और प्रारम्भ है।
गजबन्धिनी (मं० [स्त्री०) गजस्य बन्धोऽस्ताव गजबन्ध-
इनि- डीप । गजशाला, वह स्थान जहां हाथो रखा
जाता हो ।
गजवला (सं० [स्त्री०) गोरली. एक प्रकारको बड़ी झाड़ी।
गजबाग (हिं० पु० ) हाथीका
अङ्क ुश ।
गजबीधी (सं० स्ती) रोहिणी, मृगशिरा धीर भाद्रक
ममूहका नाम जिसके मध्य होकर शुक्र गमन करे ।
गजयेति (हिं स्त्री०) एक प्रकारका लोहा ।
गजभतक (सं० पु० ) गजो भक्तकोऽस्य बहुवो। पोपल
पोपलका पे |
गजभक्षा (सं० खो) भच्यतेऽसा भय विच कर्मणि प्
ततः टाप् । मल्लको वृक्ष, सलईका पेड़ । (शब्दरत्नावली)
गजभच्या (सं० स्त्री०) गजेन भक्ष्या, ३- तत् । शनको वृक्ष ।
( अमर )
गजमणि (सं० पु० स्त्री० ) गजमुक्ता गजमोती।
गजमण्डन (सं० क्ली० ) गजस्य मण्डनं ६ तत् । हस्ति-
भूषण, हाथीका अलङ्कार ।
°
गजमण्डली (सं० सी० ) मजानाम् मण्डलो वेष्टनाकार-
परिधि -सत् १ हाथोको वेष्टनाकार परिधि । २ ि
समूह ।<noinclude></noinclude>
2vlihupnzdepioqft845pmsqb10wumd
विषयसूची:प्रेमघन सर्वस्व भाग 2.pdf
252
84579
668725
534521
2026-07-26T11:54:05Z
अजीत कुमार तिवारी
12
668725
proofread-index
text/x-wiki
{{:MediaWiki:Proofreadpage_index_template
|Type=book
|Title=प्रेमघन सर्वस्व
|Language=hi
|Volume=
|Author=बदरी नारायण चौधरी 'प्रेमघन'
|Co-author1=
|Co-author2=
|Translator=
|Co-translator1=
|Editor=प्रभाकरेश्वर प्रसाद उपाध्याय, दिनेश नारायण उपाध्याय
|Illustrator=
|Publisher=हिंदी साहित्य सम्मेलन
|Address=प्रयाग
|Year=1939
|Key=
|ISBN=
|Source=pdf
|Image=1
|Progress=श
|Pages=<pagelist
1=मुखपृष्ठ
2=प्रकाशक
3=चित्र
4=–
5=प्रकाशकीय
6=–
7=विषय-सूची
8=2
10=–
11=भूमिका
12=2
33=1
573=शुद्धि-पत्र/>
|Volumes=2
|Remarks=
|Width=
|Css=
|Header=
|Footer=
}}
[[श्रेणी:प्रेमघन सर्वस्व]]
[[श्रेणी:भारतीय विकिस्रोत संपादनोत्सव अगस्त २०२१]]
7h9a1032kwkfv1z05hg5ps2qgig4d0i