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विकिस्रोत:गुणवत्ता संवर्द्धन संपादनोत्सव/जुलाई २०२६
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text/x-wiki
__NOTOC__
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<div style="overflow:hidden; height:auto; background: #ADD8E6; width: 100%; padding-bottom:18px;">
<div style="font-size: 36px; margin-top: 24px;margin-left: 16px; margin-right:10px; font-family: 'Linux Libertine',Georgia,Times,serif; line-height: 1.2em;">
<center>गुणवत्ता संवर्द्धन संपादनोत्सव<span style="color: #666"></span></center></div>
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'''गुणवत्ता संवर्द्धन संपादनोत्सव जुलाई २०२६''' [[w:विकिमीडिया फाउंडेशन|विकिमीडिया फाउंडेशन]] एवं [[w:गूगल|गूगल]] के सहयोग से '''हिंदी विकिमीडियन्स यूज़र ग्रुप''' द्वारा आयोजित पुस्तक निर्माण संपादनोत्सव है। इसका लक्ष्य ०३ जुलाई २०२६ से २२ जुलाई २०२६ तक विकिस्रोत के अशोधित पुस्तकों को शोधित करना है।
== नियम ==
इस संपादनोत्सव में शामिल होकर पुरस्कार जीतने के लिए निम्न नियमों का पालन अनिवार्य है :
# कोई भी विकिमीडिया खाता वाले सदस्य इस प्रतियोगिता में शामिल हो सकते हैं। यदि आप विकिमीडियन नहीं हैं तो पहले [https://hi.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BE_%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%81&returnto=%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A4%3A%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%A8+%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%B5%2F%E0%A4%9C%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%88+2024 खाता] बना लें।
# संपादनोत्सव अवधि (भारतीय समयानुसार) — ०३ जुलाई २०२६ (१२:०० पूर्वाह्न) से २२ जुलाई २०२६ (११:५९ अपराह्न) होगी।
# नीचे पुस्तक सूची में शामिल पुस्तकों के निर्देशित पृष्ठों में से शोधित किए गए पृष्ठ ही अंक के लिए गिने जाएँगे। सूची के बाहर की पुस्तकों या पृष्ठों पर किए गए कार्य संपादनोत्सव के लिए मान्य नहीं होंगे।
# निर्धारित पुस्तक के सामने १० अंक के लिए शोधित किए जाने वाले पृष्ठों की संख्या दी गई है। प्रतिभागी एक दिन में अधिकतम २० अंक के पृष्ठ शोधित कर सकते हैं। अधिक पृष्ठ शोधित करने पर आरंभिक २० अंक के पृष्ठों का मूल्यांकन किया जाएगा।
# संपादनोत्सव के २० दिनों में एक प्रतिभागी अधिकतम ३०० अंक के पृष्ठ सुधार सकते हैं। इससे अधिक पृष्ठ सुधारने पर आरंभिक ३०० अंकों के पृष्ठों का ही मूल्यांकन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त समग्र गुणवत्ता के आधार पर अधिकतम ५० गुणवत्ता के अंक निर्णायकों द्वारा दिए जाएँगे। गुणवत्ता के अंक शोधित अंक के ५०% से अधिक नहीं हो सकते हैं।
# यदि पृष्ठ में तीन या अधिक ग़लतियाँ हो तो उसे शोधित से अशोधित कर दिया जाएगा तथा उसके लिए प्रतिभागी को कोई अंक नहीं दिया जाएगा।
# प्रतिभागियों से पुस्तक को पृष्ठ संख्या के बढ़ते क्रम से शोधित करने की उम्मीद की जाती है जैसे १०१, १०२, १०३... आदि। शोधित करने के लिए किसी अन्य प्रतिभागी द्वारा चुनी हुई पुस्तक के अंश को न चुनें।
# पुस्तक सूची अनुभाग में प्रतिभागी मनपसंद पुस्तक की पुस्तक परिधि के सामने हस्ताक्षर कर पुस्तक के उस अंश को अपने संपादन कार्य के लिए सुरक्षित कर सकते हैं। सभी प्रतिभागी किन्ही अन्य प्रतिभागीयों के द्वारा चुनी गई पुस्तक परिधि के सामने हस्ताक्षर ना करें।
# पुस्तक अंश पर दो दिनों (४८ घंटे) तक संपादन न करने की स्थिति में प्रतिभागी के नाम के आगे से उसे हटाया जा सकता है तथा वह पुस्तक अंश किसी अन्य प्रतिभागी द्वारा शोधन के लिए चुना जा सकता है।
# प्रतिभागी संपादनोत्सव के अंतिम दिन (२२ जुलाई २०२६) तक ही अपने शोधित पृष्ठों की गलतियाँ सुधार सकते हैं। इसके बाद के सुधार संपादनोत्सव में शामिल नहीं होंगे। आयोजक/निर्णायक ऐसे पृष्ठों के शोधित स्तर को अशोधित कर सकते हैं जो अंतिम दिन तक ठीक नहीं किए गए हों मगर बाद में सुधारे जाएँ।
# दो चेतावनियों के बाद भी उपर्युक्त नियमों का उल्लंघन करने वाले को संपादनोत्सव से बाहर किया जा सकता है या प्रतिबंधित किया जा सकता है।
# प्रबंधक/पुनरीक्षक के संपादनोत्सव संबंधी निर्णय सर्वमान्य होंगे।
== पुरस्कार ==
इसमें दिए जाने वाले पुरस्कारों की सूची निम्नलिखित है:
# पहला पुरस्कार: ₹ ७,००० के कूपन (न्यूनतम अंक २५०)
# दूसरा पुरस्कार: ₹ ६,५०० के कूपन (न्यूनतम अंक २२५)
# तीसरा पुरस्कार: ₹ ६,००० के कूपन (न्यूनतम अंक २००)
# ३ उत्कृष्टता पुरस्कार: ₹ ५,००० के कूपन (न्यूनतम अंक १७५)
# ५ गुणवत्ता पुरस्कार: ₹ ४,००० के कूपन (न्यूनतम अंक १५०)
# ५ प्रोत्साहन पुरस्कार: ₹ ३,००० के कूपन (न्यूनतम अंक १२५)
# ५ सांत्वना पुरस्कार: ₹ २,००० के कूपन (न्यूनतम अंक १००)
पुरस्कार पाने वाले सभी प्रतिभागियों को वर्ष के अंत में अनुभव प्रमाण-पत्र दिया जाएगा।
== पुस्तक सूची ==
:यहाँ पृष्ठ परिधि विषयसूची पृष्ठ पर दिखाई देने वाली संख्या के अनुसार दी गई है। यह पीडीएफ की पृष्ठ संख्या से भिन्न हो सकती है। प्रतिभागी अपने शोधित करने वाले पृष्ठों को विषयसूची पृष्ठ की संख्या के अनुसार ही चुनें। सभी पुस्तकों के साथ १० अंक के लिए शोधित किए जाने वाले पृष्ठों की संख्या दे दी गई है।
:*(आवश्यकता पड़ने पर पुस्तक संख्या बढ़ाई जा सकती है।)
# [[विषयसूची:ज्ञानकोश भाग 1.pdf|ज्ञानकोश भाग एक]] — १० अंक के लिए ४ पृष्ठ शोधित करने होंगे।
## '''पृष्ठ-परिधि १''' : विषयसूची के अशोधित पृष्ठ (१२१ पृष्ठ = कुल ३०० अंक) —
# [[विषयसूची:हिन्दी विश्वकोष भाग 1.djvu|हिंदी विश्वकोष भाग एक]] — १० अंक के लिए ४ पृष्ठ शोधित करने होंगे।
## '''पृष्ठ-परिधि १''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ५९ से पृष्ठ संख्या ९३ तक (३० पृष्ठ) तथा पृष्ठ संख्या १७५ से पृष्ठ संख्या २६८ तक के अशोधित पृष्ठ (कुल ३१० अंक) —[[सदस्य:Shivaniya shaw|Shivaniya shaw]] ([[सदस्य वार्ता:Shivaniya shaw|वार्ता]]) ११:२९, २ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि २''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या २६९ से पृष्ठ संख्या ४५८ तक के अशोधित पृष्ठ (कुल ३१० अंक) —[[सदस्य:अमृता कुमारी पाण्डेय|अमृता कुमारी पाण्डेय]] ([[सदस्य वार्ता:अमृता कुमारी पाण्डेय|वार्ता]]) १२:१०, २ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ३''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ४५९ से पृष्ठ संख्या ५२२ तक के अशोधित पृष्ठ (कुल १५० अंक) —[[सदस्य:Sanjana Chowdhury|Sanjana Chowdhury]] ([[सदस्य वार्ता:Sanjana Chowdhury|वार्ता]]) १६:०१, २ जुलाई २०२६ (UTC)
# [[विषयसूची:हिंदी विश्वकोष भाग ३.djvu|हिंदी विश्वकोष भाग तीन]] — १० अंक के लिए ४ पृष्ठ शोधित करने होंगे।
## '''पृष्ठ-परिधि १''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या १८ से पृष्ठ संख्या १४१ तक (कुल ३१० अंक) — [[सदस्य:MuskanChaudhary121|MuskanChaudhary121]] ([[सदस्य वार्ता:MuskanChaudhary121|वार्ता]]) ०८:०८, ३ जुलाई २०२६ (UTC) --[[सदस्य:ममता साव9|ममता साव9]] ([[सदस्य वार्ता:ममता साव9|वार्ता]]) ०६:१९, ६ जुलाई २०२६ (UTC) प्रतियोगिता के शुरुआत हुए तीन दिन हो गये. इस परिधि के एक भी पृष्ठ में काम जारी नहीं हुआ.
## '''पृष्ठ-परिधि २''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या १४२ से पृष्ठ संख्या २६५ तक (कुल ३१० अंक) —[[सदस्य:अँजली चौधरी|अँजली चौधरी]] ([[सदस्य वार्ता:अँजली चौधरी|वार्ता]]) १२:०४, २ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ३''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या २६६ से पृष्ठ संख्या ३८९ तक (कुल ३१० अंक) —[[सदस्य:अनुश्री साव|अनुश्री साव]] ([[सदस्य वार्ता:अनुश्री साव|वार्ता]]) १८:५१, २ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ४''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ३९० से पृष्ठ संख्या ५१३ तक (कुल ३१० अंक) — [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- १८:४४, ५ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ५''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ५१४ से पृष्ठ संख्या ६३७ तक (कुल ३१० अंक) —[[सदस्य:आदेश यादव|आदेश यादव]] ([[सदस्य वार्ता:आदेश यादव|वार्ता]]) ०२:०५, ३ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ६''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ६३७ से पृष्ठ संख्या ७६१ तक (कुल ३१० अंक) —[[सदस्य:अंजली राजभर|अंजली राजभर]] ([[सदस्य वार्ता:अंजली राजभर|वार्ता]]) ०५:०८, ३ जुलाई २०२६ (UTC)
# [[विषयसूची:हिन्दी विश्वकोष भाग 4.djvu|हिंदी विश्वकोष भाग चार]] — १० अंक के लिए ४ पृष्ठ शोधित करने होंगे।
## '''पृष्ठ-परिधि १''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या १ से पृष्ठ संख्या १२४ तक (कुल ३१० अंक) —[[सदस्य:Sweta rani Gupta|Sweta rani Gupta]] ([[सदस्य वार्ता:Sweta rani Gupta|वार्ता]]) १०:५७, ३ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि २''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या १२५ से पृष्ठ संख्या २४८ तक (कुल ३१० अंक) —[[सदस्य:Ranju Rajbhar|Ranju Rajbhar]] ([[सदस्य वार्ता:Ranju Rajbhar|वार्ता]]) १३:२८, ३ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ३''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या २४९ से पृष्ठ संख्या ३७२ तक (कुल ३१० अंक) —[[सदस्य:रेखा साव|रेखा साव]] ([[सदस्य वार्ता:रेखा साव|वार्ता]]) १६:४०, २ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ४''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ३७३ से पृष्ठ संख्या ४९७ तक (कुल ३१० अंक) —[[सदस्य:Lado Shaw|Lado Shaw]] ([[सदस्य वार्ता:Lado Shaw|वार्ता]]) १२:१३, २ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ५''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ४९८ से पृष्ठ संख्या ६२१ तक (कुल ३१० अंक) —[[सदस्य:Sonu kumar 07|Sonu kumar 07]] ([[सदस्य वार्ता:Sonu kumar 07|वार्ता]]) १४:४९, २ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ६''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ६२२ से पृष्ठ संख्या ७४५ तक (कुल ३१० अंक) —<span style="color:green;">✍</span>[[u:शीतल सिन्हा|<u><span style="color:Magenta;">शीतल </span></u>]] ([[User talk:शीतल सिन्हा|<span style="color:blue;">talk</span>]]) १९:१२, २ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ७''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ७४६ से पृष्ठ संख्या ७६५ तक (कुल ५० अंक) —
# [[विषयसूची:हिन्दी विश्वकोष षष्ठ भाग.djvu|हिन्दी विश्वकोष भाग छः]] — १० अंक के लिए ४ पृष्ठ शोधित करने होंगे।
## '''पृष्ठ-परिधि १''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या १ से पृष्ठ संख्या १२४ तक (कुल ३१० अंक) —
## '''पृष्ठ-परिधि २''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या १२५ से पृष्ठ संख्या २४८ तक (कुल ३१० अंक) — [[सदस्य:Avantika Shaw|Avantika Shaw]] ([[सदस्य वार्ता:Avantika Shaw|वार्ता]]) ०८:३७, ४ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ३''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या २४९ से पृष्ठ संख्या ३७२ तक (कुल ३१० अंक) — [[सदस्य:Koyal Singh|Koyal Singh]] ([[सदस्य वार्ता:Koyal Singh|वार्ता]]) १०:३३, ५ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ४''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ३७३ से पृष्ठ संख्या ४९६ तक (कुल ३१० अंक) — [[सदस्य:Arshsultanpuri|Arshsultanpuri]] ([[सदस्य वार्ता:Arshsultanpuri|वार्ता]]) ११:०१, ५ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ५''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ४९७ से पृष्ठ संख्या ६०४ तक (कुल २७० अंक) —
# [[विषयसूची:हिन्दी विश्वकोष अष्टादश भाग.djvu|हिन्दी विश्वकोष भाग अठारह]] — १० अंक के लिए ४ पृष्ठ शोधित करने होंगे।
## '''पृष्ठ-परिधि १''' : विषयसूची के पृष्ठ अभिमत से पृष्ठ संख्या १२२ तक (कुल ३१० अंक) — [[सदस्य:MuskanChaudhary121|MuskanChaudhary121]] ([[सदस्य वार्ता:MuskanChaudhary121|वार्ता]]) १६:१६, ७ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि २''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या १२३ से पृष्ठ संख्या २४६ तक (कुल ३१० अंक) — [[सदस्य:Prajjwal3959|Prajjwal3959]] ([[सदस्य वार्ता:Prajjwal3959|वार्ता]]) ०७:३१, १० जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ३''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या २४७ से पृष्ठ संख्या ३७० तक (कुल ३१० अंक) —
## '''पृष्ठ-परिधि ४''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ३७१ से पृष्ठ संख्या ४९४ तक (कुल ३१० अंक) —
## '''पृष्ठ-परिधि ५''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ४९५ से पृष्ठ संख्या ६१८ तक (कुल ३१० अंक) —
## '''पृष्ठ-परिधि ६''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ६१९ से पृष्ठ संख्या ७४२ तक (कुल ३१० अंक) —
## '''पृष्ठ-परिधि ७''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ७४३ से पृष्ठ संख्या ७६३ तक (कुल ५२ अंक) —
== प्रगति ==
{{Special:IndexPages|key=गुणवत्ता संवर्द्धन संपादनोत्सव जुलाई २०२६}}
==प्रतिभागी==
:प्रतिभागी यहाँ <nowiki>#~~~~</nowiki> लगाकर हस्ताक्षर कर
#[[सदस्य:Shivaniya shaw|Shivaniya shaw]] ([[सदस्य वार्ता:Shivaniya shaw|वार्ता]]) ११:१३, २ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:अँजली चौधरी|अँजली चौधरी]] ([[सदस्य वार्ता:अँजली चौधरी|वार्ता]]) ११:४९, २ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:Lado Shaw|Lado Shaw]] ([[सदस्य वार्ता:Lado Shaw|वार्ता]]) १२:११, २ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:अमृता कुमारी पाण्डेय|अमृता कुमारी पाण्डेय]] ([[सदस्य वार्ता:अमृता कुमारी पाण्डेय|वार्ता]]) १२:१२, २ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:Sonu kumar 07|Sonu kumar 07]] ([[सदस्य वार्ता:Sonu kumar 07|वार्ता]]) १४:५२, २ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:Sanjana Chowdhury|Sanjana Chowdhury]] ([[सदस्य वार्ता:Sanjana Chowdhury|वार्ता]]) १५:५२, २ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:रेखा साव|रेखा साव]] ([[सदस्य वार्ता:रेखा साव|वार्ता]]) १६:३८, २ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:अनुश्री साव|अनुश्री साव]] ([[सदस्य वार्ता:अनुश्री साव|वार्ता]]) १८:५०, २ जुलाई २०२६ (UTC)
#<span style="color:green;">✍</span>[[u:शीतल सिन्हा|<u><span style="color:Magenta;">शीतल </span></u>]] ([[User talk:शीतल सिन्हा|<span style="color:blue;">talk</span>]]) १९:०७, २ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:आदेश यादव|आदेश यादव]] ([[सदस्य वार्ता:आदेश यादव|वार्ता]]) ०२:०३, ३ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:अंजली राजभर|अंजली राजभर]] ([[सदस्य वार्ता:अंजली राजभर|वार्ता]]) ०४:४५, ३ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:MuskanChaudhary121|MuskanChaudhary121]] ([[सदस्य वार्ता:MuskanChaudhary121|वार्ता]]) ०७:५१, ३ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:Sweta rani Gupta|Sweta rani Gupta]] ([[सदस्य वार्ता:Sweta rani Gupta|वार्ता]]) १०:४९, ३ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:Ranju Rajbhar|Ranju Rajbhar]] ([[सदस्य वार्ता:Ranju Rajbhar|वार्ता]]) १३:२२, ३ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:Avantika Shaw|Avantika Shaw]] ([[सदस्य वार्ता:Avantika Shaw|वार्ता]]) ०८:३३, ४ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:Koyal Singh|Koyal Singh]] ([[सदस्य वार्ता:Koyal Singh|वार्ता]]) १०:३५, ५ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- १८:२१, ५ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:ममता साव9|ममता साव9]] ([[सदस्य वार्ता:ममता साव9|वार्ता]]) ०६:११, ६ जुलाई २०२६ (UTC)
== आयोजक एवं निर्णायक मंडल ==
संपादनोत्सव के सुचारु आयोजन तथा उसमें सुधारे गए पुस्तक पृष्ठों की गुणवत्ता पर निगरानी रखने तथा पुरस्कार प्रदान करने के लिए निम्नानुसार आयोजक एवं निर्णायक मंडली बनाई गई है :
:'''आयोजक-'''
# [[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) — संपर्क सूत्र (हिंदी विकिमीडियन्स यूज़र ग्रुप) एवं प्रबंधक
# [[सदस्य:अजीत कुमार तिवारी|अजीत कुमार तिवारी]] ([[सदस्य वार्ता:अजीत कुमार तिवारी|वार्ता]]) — प्रबंधक
:'''निर्णायक-'''
# [[सदस्य:नीलम|नीलम]] ([[सदस्य वार्ता:नीलम|वार्ता]]) प्रबंधक
# [[सदस्य:सौरभ तिवारी 05|सौरभ तिवारी 05]] ([[सदस्य वार्ता:सौरभ तिवारी 05|वार्ता]]) — प्रबंधक
== परिणाम ==
{| class="wikitable"
! सदस्य नाम !! कुल अंक !! परिणाम
|-
| [[सदस्य:अमृता कुमारी पाण्डेय|अमृता कुमारी पाण्डेय]] || 332 || पहला पुरस्कार
|-
| [[सदस्य:ममता साव9|ममता साव]] || 321 || दूसरा पुरस्कार
|-
| [[सदस्य:अँजली चौधरी|अँजली चौधरी]] || 315 || तीसरा पुरस्कार
|-
| [[सदस्य:Lado Shaw|Lado Shaw]] || 306 || उत्कृष्टता पुरस्कार
|-
| [[सदस्य:AMAN KUMAR|अमन कुमार]] || 254 || उत्कृष्टता पुरस्कार
|-
| [[सदस्य:Shivaniya shaw|Shivaniya shaw]] || 234 || उत्कृष्टता पुरस्कार
|-
| [[सदस्य वार्ता:Avantika Shaw|Avantika Shaw]] || 181 || गुणवत्ता पुरस्कार
|-
| [[सदस्य वार्ता:Sweta rani Gupta|Sweta rani Gupta]] || 154 || गुणवत्ता पुरस्कार
|-
| [[सदस्य:अंजली राजभर|अंजली राजभर]] || 145 || प्रोत्साहन पुरस्कार
|-
| [[सदस्य:आदेश यादव|आदेश यादव]] || 141 || प्रोत्साहन पुरस्कार
|-
| [[सदस्य वार्ता:Sanjana Chowdhury|Sanjana Chowdhury]] || 110 || सांत्वना पुरस्कार
|-
| [[सदस्य वार्ता:अनुश्री साव|अनुश्री साव]]|| 94 || न्यूनतम अर्हता प्राप्त नहीं
|-
| [[सदस्य वार्ता:रेखा साव|रेखा साव]] || 94 || न्यूनतम अर्हता प्राप्त नहीं
|-
| [[सदस्य वार्ता:Sonu kumar 07|Sonu kumar]] || 74 || न्यूनतम अर्हता प्राप्त नहीं।
|}
== रपट ==
</div>
</div>
<div style="padding: 10px; padding-left: 20px; ">
</div>
</div>
</div>
</div>
[[श्रेणी:संपादनोत्सव]]
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2026-07-27T14:39:30Z
सौरभ तिवारी 05
49
/* प्रतिभागी */ एक भी पृष्ठ शोधित नहीं करने वाले प्रतिभागी।
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wikitext
text/x-wiki
__NOTOC__
<div style="width: 99%; color: #111; {{box-shadow|0|0|6px|rgba(0, 0, 0, 0.55)}} {{border-radius|2px}}">
<div style="overflow:hidden; height:auto; background: #ADD8E6; width: 100%; padding-bottom:18px;">
<div style="font-size: 36px; margin-top: 24px;margin-left: 16px; margin-right:10px; font-family: 'Linux Libertine',Georgia,Times,serif; line-height: 1.2em;">
<center>गुणवत्ता संवर्द्धन संपादनोत्सव<span style="color: #666"></span></center></div>
<div style="font-size: 24px; padding-top: 0px; margin-left: 16px; margin-right:10px; font-family: 'Linux Libertine',Georgia,Times,serif; line-height:1.2em; color: #666; ">
{{/Navbar}}
'''गुणवत्ता संवर्द्धन संपादनोत्सव जुलाई २०२६''' [[w:विकिमीडिया फाउंडेशन|विकिमीडिया फाउंडेशन]] एवं [[w:गूगल|गूगल]] के सहयोग से '''हिंदी विकिमीडियन्स यूज़र ग्रुप''' द्वारा आयोजित पुस्तक निर्माण संपादनोत्सव है। इसका लक्ष्य ०३ जुलाई २०२६ से २२ जुलाई २०२६ तक विकिस्रोत के अशोधित पुस्तकों को शोधित करना है।
== नियम ==
इस संपादनोत्सव में शामिल होकर पुरस्कार जीतने के लिए निम्न नियमों का पालन अनिवार्य है :
# कोई भी विकिमीडिया खाता वाले सदस्य इस प्रतियोगिता में शामिल हो सकते हैं। यदि आप विकिमीडियन नहीं हैं तो पहले [https://hi.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BE_%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%81&returnto=%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A4%3A%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80+%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%A8+%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%B5%2F%E0%A4%9C%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%88+2024 खाता] बना लें।
# संपादनोत्सव अवधि (भारतीय समयानुसार) — ०३ जुलाई २०२६ (१२:०० पूर्वाह्न) से २२ जुलाई २०२६ (११:५९ अपराह्न) होगी।
# नीचे पुस्तक सूची में शामिल पुस्तकों के निर्देशित पृष्ठों में से शोधित किए गए पृष्ठ ही अंक के लिए गिने जाएँगे। सूची के बाहर की पुस्तकों या पृष्ठों पर किए गए कार्य संपादनोत्सव के लिए मान्य नहीं होंगे।
# निर्धारित पुस्तक के सामने १० अंक के लिए शोधित किए जाने वाले पृष्ठों की संख्या दी गई है। प्रतिभागी एक दिन में अधिकतम २० अंक के पृष्ठ शोधित कर सकते हैं। अधिक पृष्ठ शोधित करने पर आरंभिक २० अंक के पृष्ठों का मूल्यांकन किया जाएगा।
# संपादनोत्सव के २० दिनों में एक प्रतिभागी अधिकतम ३०० अंक के पृष्ठ सुधार सकते हैं। इससे अधिक पृष्ठ सुधारने पर आरंभिक ३०० अंकों के पृष्ठों का ही मूल्यांकन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त समग्र गुणवत्ता के आधार पर अधिकतम ५० गुणवत्ता के अंक निर्णायकों द्वारा दिए जाएँगे। गुणवत्ता के अंक शोधित अंक के ५०% से अधिक नहीं हो सकते हैं।
# यदि पृष्ठ में तीन या अधिक ग़लतियाँ हो तो उसे शोधित से अशोधित कर दिया जाएगा तथा उसके लिए प्रतिभागी को कोई अंक नहीं दिया जाएगा।
# प्रतिभागियों से पुस्तक को पृष्ठ संख्या के बढ़ते क्रम से शोधित करने की उम्मीद की जाती है जैसे १०१, १०२, १०३... आदि। शोधित करने के लिए किसी अन्य प्रतिभागी द्वारा चुनी हुई पुस्तक के अंश को न चुनें।
# पुस्तक सूची अनुभाग में प्रतिभागी मनपसंद पुस्तक की पुस्तक परिधि के सामने हस्ताक्षर कर पुस्तक के उस अंश को अपने संपादन कार्य के लिए सुरक्षित कर सकते हैं। सभी प्रतिभागी किन्ही अन्य प्रतिभागीयों के द्वारा चुनी गई पुस्तक परिधि के सामने हस्ताक्षर ना करें।
# पुस्तक अंश पर दो दिनों (४८ घंटे) तक संपादन न करने की स्थिति में प्रतिभागी के नाम के आगे से उसे हटाया जा सकता है तथा वह पुस्तक अंश किसी अन्य प्रतिभागी द्वारा शोधन के लिए चुना जा सकता है।
# प्रतिभागी संपादनोत्सव के अंतिम दिन (२२ जुलाई २०२६) तक ही अपने शोधित पृष्ठों की गलतियाँ सुधार सकते हैं। इसके बाद के सुधार संपादनोत्सव में शामिल नहीं होंगे। आयोजक/निर्णायक ऐसे पृष्ठों के शोधित स्तर को अशोधित कर सकते हैं जो अंतिम दिन तक ठीक नहीं किए गए हों मगर बाद में सुधारे जाएँ।
# दो चेतावनियों के बाद भी उपर्युक्त नियमों का उल्लंघन करने वाले को संपादनोत्सव से बाहर किया जा सकता है या प्रतिबंधित किया जा सकता है।
# प्रबंधक/पुनरीक्षक के संपादनोत्सव संबंधी निर्णय सर्वमान्य होंगे।
== पुरस्कार ==
इसमें दिए जाने वाले पुरस्कारों की सूची निम्नलिखित है:
# पहला पुरस्कार: ₹ ७,००० के कूपन (न्यूनतम अंक २५०)
# दूसरा पुरस्कार: ₹ ६,५०० के कूपन (न्यूनतम अंक २२५)
# तीसरा पुरस्कार: ₹ ६,००० के कूपन (न्यूनतम अंक २००)
# ३ उत्कृष्टता पुरस्कार: ₹ ५,००० के कूपन (न्यूनतम अंक १७५)
# ५ गुणवत्ता पुरस्कार: ₹ ४,००० के कूपन (न्यूनतम अंक १५०)
# ५ प्रोत्साहन पुरस्कार: ₹ ३,००० के कूपन (न्यूनतम अंक १२५)
# ५ सांत्वना पुरस्कार: ₹ २,००० के कूपन (न्यूनतम अंक १००)
पुरस्कार पाने वाले सभी प्रतिभागियों को वर्ष के अंत में अनुभव प्रमाण-पत्र दिया जाएगा।
== पुस्तक सूची ==
:यहाँ पृष्ठ परिधि विषयसूची पृष्ठ पर दिखाई देने वाली संख्या के अनुसार दी गई है। यह पीडीएफ की पृष्ठ संख्या से भिन्न हो सकती है। प्रतिभागी अपने शोधित करने वाले पृष्ठों को विषयसूची पृष्ठ की संख्या के अनुसार ही चुनें। सभी पुस्तकों के साथ १० अंक के लिए शोधित किए जाने वाले पृष्ठों की संख्या दे दी गई है।
:*(आवश्यकता पड़ने पर पुस्तक संख्या बढ़ाई जा सकती है।)
# [[विषयसूची:ज्ञानकोश भाग 1.pdf|ज्ञानकोश भाग एक]] — १० अंक के लिए ४ पृष्ठ शोधित करने होंगे।
## '''पृष्ठ-परिधि १''' : विषयसूची के अशोधित पृष्ठ (१२१ पृष्ठ = कुल ३०० अंक) —
# [[विषयसूची:हिन्दी विश्वकोष भाग 1.djvu|हिंदी विश्वकोष भाग एक]] — १० अंक के लिए ४ पृष्ठ शोधित करने होंगे।
## '''पृष्ठ-परिधि १''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ५९ से पृष्ठ संख्या ९३ तक (३० पृष्ठ) तथा पृष्ठ संख्या १७५ से पृष्ठ संख्या २६८ तक के अशोधित पृष्ठ (कुल ३१० अंक) —[[सदस्य:Shivaniya shaw|Shivaniya shaw]] ([[सदस्य वार्ता:Shivaniya shaw|वार्ता]]) ११:२९, २ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि २''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या २६९ से पृष्ठ संख्या ४५८ तक के अशोधित पृष्ठ (कुल ३१० अंक) —[[सदस्य:अमृता कुमारी पाण्डेय|अमृता कुमारी पाण्डेय]] ([[सदस्य वार्ता:अमृता कुमारी पाण्डेय|वार्ता]]) १२:१०, २ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ३''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ४५९ से पृष्ठ संख्या ५२२ तक के अशोधित पृष्ठ (कुल १५० अंक) —[[सदस्य:Sanjana Chowdhury|Sanjana Chowdhury]] ([[सदस्य वार्ता:Sanjana Chowdhury|वार्ता]]) १६:०१, २ जुलाई २०२६ (UTC)
# [[विषयसूची:हिंदी विश्वकोष भाग ३.djvu|हिंदी विश्वकोष भाग तीन]] — १० अंक के लिए ४ पृष्ठ शोधित करने होंगे।
## '''पृष्ठ-परिधि १''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या १८ से पृष्ठ संख्या १४१ तक (कुल ३१० अंक) — [[सदस्य:MuskanChaudhary121|MuskanChaudhary121]] ([[सदस्य वार्ता:MuskanChaudhary121|वार्ता]]) ०८:०८, ३ जुलाई २०२६ (UTC) --[[सदस्य:ममता साव9|ममता साव9]] ([[सदस्य वार्ता:ममता साव9|वार्ता]]) ०६:१९, ६ जुलाई २०२६ (UTC) प्रतियोगिता के शुरुआत हुए तीन दिन हो गये. इस परिधि के एक भी पृष्ठ में काम जारी नहीं हुआ.
## '''पृष्ठ-परिधि २''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या १४२ से पृष्ठ संख्या २६५ तक (कुल ३१० अंक) —[[सदस्य:अँजली चौधरी|अँजली चौधरी]] ([[सदस्य वार्ता:अँजली चौधरी|वार्ता]]) १२:०४, २ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ३''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या २६६ से पृष्ठ संख्या ३८९ तक (कुल ३१० अंक) —[[सदस्य:अनुश्री साव|अनुश्री साव]] ([[सदस्य वार्ता:अनुश्री साव|वार्ता]]) १८:५१, २ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ४''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ३९० से पृष्ठ संख्या ५१३ तक (कुल ३१० अंक) — [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- १८:४४, ५ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ५''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ५१४ से पृष्ठ संख्या ६३७ तक (कुल ३१० अंक) —[[सदस्य:आदेश यादव|आदेश यादव]] ([[सदस्य वार्ता:आदेश यादव|वार्ता]]) ०२:०५, ३ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ६''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ६३७ से पृष्ठ संख्या ७६१ तक (कुल ३१० अंक) —[[सदस्य:अंजली राजभर|अंजली राजभर]] ([[सदस्य वार्ता:अंजली राजभर|वार्ता]]) ०५:०८, ३ जुलाई २०२६ (UTC)
# [[विषयसूची:हिन्दी विश्वकोष भाग 4.djvu|हिंदी विश्वकोष भाग चार]] — १० अंक के लिए ४ पृष्ठ शोधित करने होंगे।
## '''पृष्ठ-परिधि १''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या १ से पृष्ठ संख्या १२४ तक (कुल ३१० अंक) —[[सदस्य:Sweta rani Gupta|Sweta rani Gupta]] ([[सदस्य वार्ता:Sweta rani Gupta|वार्ता]]) १०:५७, ३ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि २''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या १२५ से पृष्ठ संख्या २४८ तक (कुल ३१० अंक) —[[सदस्य:Ranju Rajbhar|Ranju Rajbhar]] ([[सदस्य वार्ता:Ranju Rajbhar|वार्ता]]) १३:२८, ३ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ३''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या २४९ से पृष्ठ संख्या ३७२ तक (कुल ३१० अंक) —[[सदस्य:रेखा साव|रेखा साव]] ([[सदस्य वार्ता:रेखा साव|वार्ता]]) १६:४०, २ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ४''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ३७३ से पृष्ठ संख्या ४९७ तक (कुल ३१० अंक) —[[सदस्य:Lado Shaw|Lado Shaw]] ([[सदस्य वार्ता:Lado Shaw|वार्ता]]) १२:१३, २ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ५''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ४९८ से पृष्ठ संख्या ६२१ तक (कुल ३१० अंक) —[[सदस्य:Sonu kumar 07|Sonu kumar 07]] ([[सदस्य वार्ता:Sonu kumar 07|वार्ता]]) १४:४९, २ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ६''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ६२२ से पृष्ठ संख्या ७४५ तक (कुल ३१० अंक) —<span style="color:green;">✍</span>[[u:शीतल सिन्हा|<u><span style="color:Magenta;">शीतल </span></u>]] ([[User talk:शीतल सिन्हा|<span style="color:blue;">talk</span>]]) १९:१२, २ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ७''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ७४६ से पृष्ठ संख्या ७६५ तक (कुल ५० अंक) —
# [[विषयसूची:हिन्दी विश्वकोष षष्ठ भाग.djvu|हिन्दी विश्वकोष भाग छः]] — १० अंक के लिए ४ पृष्ठ शोधित करने होंगे।
## '''पृष्ठ-परिधि १''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या १ से पृष्ठ संख्या १२४ तक (कुल ३१० अंक) —
## '''पृष्ठ-परिधि २''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या १२५ से पृष्ठ संख्या २४८ तक (कुल ३१० अंक) — [[सदस्य:Avantika Shaw|Avantika Shaw]] ([[सदस्य वार्ता:Avantika Shaw|वार्ता]]) ०८:३७, ४ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ३''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या २४९ से पृष्ठ संख्या ३७२ तक (कुल ३१० अंक) — [[सदस्य:Koyal Singh|Koyal Singh]] ([[सदस्य वार्ता:Koyal Singh|वार्ता]]) १०:३३, ५ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ४''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ३७३ से पृष्ठ संख्या ४९६ तक (कुल ३१० अंक) — [[सदस्य:Arshsultanpuri|Arshsultanpuri]] ([[सदस्य वार्ता:Arshsultanpuri|वार्ता]]) ११:०१, ५ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ५''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ४९७ से पृष्ठ संख्या ६०४ तक (कुल २७० अंक) —
# [[विषयसूची:हिन्दी विश्वकोष अष्टादश भाग.djvu|हिन्दी विश्वकोष भाग अठारह]] — १० अंक के लिए ४ पृष्ठ शोधित करने होंगे।
## '''पृष्ठ-परिधि १''' : विषयसूची के पृष्ठ अभिमत से पृष्ठ संख्या १२२ तक (कुल ३१० अंक) — [[सदस्य:MuskanChaudhary121|MuskanChaudhary121]] ([[सदस्य वार्ता:MuskanChaudhary121|वार्ता]]) १६:१६, ७ जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि २''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या १२३ से पृष्ठ संख्या २४६ तक (कुल ३१० अंक) — [[सदस्य:Prajjwal3959|Prajjwal3959]] ([[सदस्य वार्ता:Prajjwal3959|वार्ता]]) ०७:३१, १० जुलाई २०२६ (UTC)
## '''पृष्ठ-परिधि ३''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या २४७ से पृष्ठ संख्या ३७० तक (कुल ३१० अंक) —
## '''पृष्ठ-परिधि ४''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ३७१ से पृष्ठ संख्या ४९४ तक (कुल ३१० अंक) —
## '''पृष्ठ-परिधि ५''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ४९५ से पृष्ठ संख्या ६१८ तक (कुल ३१० अंक) —
## '''पृष्ठ-परिधि ६''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ६१९ से पृष्ठ संख्या ७४२ तक (कुल ३१० अंक) —
## '''पृष्ठ-परिधि ७''' : विषयसूची के पृष्ठ संख्या ७४३ से पृष्ठ संख्या ७६३ तक (कुल ५२ अंक) —
== प्रगति ==
{{Special:IndexPages|key=गुणवत्ता संवर्द्धन संपादनोत्सव जुलाई २०२६}}
==प्रतिभागी==
:प्रतिभागी यहाँ <nowiki>#~~~~</nowiki> लगाकर हस्ताक्षर कर
#[[सदस्य:Shivaniya shaw|Shivaniya shaw]] ([[सदस्य वार्ता:Shivaniya shaw|वार्ता]]) ११:१३, २ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:अँजली चौधरी|अँजली चौधरी]] ([[सदस्य वार्ता:अँजली चौधरी|वार्ता]]) ११:४९, २ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:Lado Shaw|Lado Shaw]] ([[सदस्य वार्ता:Lado Shaw|वार्ता]]) १२:११, २ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:अमृता कुमारी पाण्डेय|अमृता कुमारी पाण्डेय]] ([[सदस्य वार्ता:अमृता कुमारी पाण्डेय|वार्ता]]) १२:१२, २ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:Sonu kumar 07|Sonu kumar 07]] ([[सदस्य वार्ता:Sonu kumar 07|वार्ता]]) १४:५२, २ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:Sanjana Chowdhury|Sanjana Chowdhury]] ([[सदस्य वार्ता:Sanjana Chowdhury|वार्ता]]) १५:५२, २ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:रेखा साव|रेखा साव]] ([[सदस्य वार्ता:रेखा साव|वार्ता]]) १६:३८, २ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:अनुश्री साव|अनुश्री साव]] ([[सदस्य वार्ता:अनुश्री साव|वार्ता]]) १८:५०, २ जुलाई २०२६ (UTC)
#<s><span style="color:green;">✍</span>[[u:शीतल सिन्हा|<u><span style="color:Magenta;">शीतल </span></u>]] ([[User talk:शीतल सिन्हा|<span style="color:blue;">talk</span>]]) १९:०७, २ जुलाई २०२६ (UTC)</s>
#[[सदस्य:आदेश यादव|आदेश यादव]] ([[सदस्य वार्ता:आदेश यादव|वार्ता]]) ०२:०३, ३ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:अंजली राजभर|अंजली राजभर]] ([[सदस्य वार्ता:अंजली राजभर|वार्ता]]) ०४:४५, ३ जुलाई २०२६ (UTC)
#<s>[[सदस्य:MuskanChaudhary121|MuskanChaudhary121]] ([[सदस्य वार्ता:MuskanChaudhary121|वार्ता]]) ०७:५१, ३ जुलाई २०२६ (UTC)</s>
#[[सदस्य:Sweta rani Gupta|Sweta rani Gupta]] ([[सदस्य वार्ता:Sweta rani Gupta|वार्ता]]) १०:४९, ३ जुलाई २०२६ (UTC)
#<s>[[सदस्य:Ranju Rajbhar|Ranju Rajbhar]] ([[सदस्य वार्ता:Ranju Rajbhar|वार्ता]]) १३:२२, ३ जुलाई २०२६ (UTC)</s>
#[[सदस्य:Avantika Shaw|Avantika Shaw]] ([[सदस्य वार्ता:Avantika Shaw|वार्ता]]) ०८:३३, ४ जुलाई २०२६ (UTC)
#<s>[[सदस्य:Koyal Singh|Koyal Singh]] ([[सदस्य वार्ता:Koyal Singh|वार्ता]]) १०:३५, ५ जुलाई २०२६ (UTC)</s>
#[[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- १८:२१, ५ जुलाई २०२६ (UTC)
#[[सदस्य:ममता साव9|ममता साव9]] ([[सदस्य वार्ता:ममता साव9|वार्ता]]) ०६:११, ६ जुलाई २०२६ (UTC)
== आयोजक एवं निर्णायक मंडल ==
संपादनोत्सव के सुचारु आयोजन तथा उसमें सुधारे गए पुस्तक पृष्ठों की गुणवत्ता पर निगरानी रखने तथा पुरस्कार प्रदान करने के लिए निम्नानुसार आयोजक एवं निर्णायक मंडली बनाई गई है :
:'''आयोजक-'''
# [[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) — संपर्क सूत्र (हिंदी विकिमीडियन्स यूज़र ग्रुप) एवं प्रबंधक
# [[सदस्य:अजीत कुमार तिवारी|अजीत कुमार तिवारी]] ([[सदस्य वार्ता:अजीत कुमार तिवारी|वार्ता]]) — प्रबंधक
:'''निर्णायक-'''
# [[सदस्य:नीलम|नीलम]] ([[सदस्य वार्ता:नीलम|वार्ता]]) प्रबंधक
# [[सदस्य:सौरभ तिवारी 05|सौरभ तिवारी 05]] ([[सदस्य वार्ता:सौरभ तिवारी 05|वार्ता]]) — प्रबंधक
== परिणाम ==
{| class="wikitable"
! सदस्य नाम !! कुल अंक !! परिणाम
|-
| [[सदस्य:अमृता कुमारी पाण्डेय|अमृता कुमारी पाण्डेय]] || 332 || पहला पुरस्कार
|-
| [[सदस्य:ममता साव9|ममता साव]] || 321 || दूसरा पुरस्कार
|-
| [[सदस्य:अँजली चौधरी|अँजली चौधरी]] || 315 || तीसरा पुरस्कार
|-
| [[सदस्य:Lado Shaw|Lado Shaw]] || 306 || उत्कृष्टता पुरस्कार
|-
| [[सदस्य:AMAN KUMAR|अमन कुमार]] || 254 || उत्कृष्टता पुरस्कार
|-
| [[सदस्य:Shivaniya shaw|Shivaniya shaw]] || 234 || उत्कृष्टता पुरस्कार
|-
| [[सदस्य वार्ता:Avantika Shaw|Avantika Shaw]] || 181 || गुणवत्ता पुरस्कार
|-
| [[सदस्य वार्ता:Sweta rani Gupta|Sweta rani Gupta]] || 154 || गुणवत्ता पुरस्कार
|-
| [[सदस्य:अंजली राजभर|अंजली राजभर]] || 145 || प्रोत्साहन पुरस्कार
|-
| [[सदस्य:आदेश यादव|आदेश यादव]] || 141 || प्रोत्साहन पुरस्कार
|-
| [[सदस्य वार्ता:Sanjana Chowdhury|Sanjana Chowdhury]] || 110 || सांत्वना पुरस्कार
|-
| [[सदस्य वार्ता:अनुश्री साव|अनुश्री साव]]|| 94 || न्यूनतम अर्हता प्राप्त नहीं
|-
| [[सदस्य वार्ता:रेखा साव|रेखा साव]] || 94 || न्यूनतम अर्हता प्राप्त नहीं
|-
| [[सदस्य वार्ता:Sonu kumar 07|Sonu kumar]] || 74 || न्यूनतम अर्हता प्राप्त नहीं।
|}
== रपट ==
</div>
</div>
<div style="padding: 10px; padding-left: 20px; ">
</div>
</div>
</div>
</div>
[[श्रेणी:संपादनोत्सव]]
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पृष्ठ:कविता कौमुदी.pdf/१०
250
196396
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2026-07-28T10:49:58Z
Chahar 009
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/* अशोधित */ "( ११ ) आवश्यक है। सचारी भाव को व्यभिचारी भाव भी कहते है । व्यभिचारी भाव के ३३ भेद है । यथा — निर्वेद, ग्लानि, शंका, असूया, श्रम, मद, ' वृति, आलस्य, विषाद, मति, चिंता, मोह, स्वप्न,..." के साथ नया पृष्ठ बनाया
668737
proofread-page
text/x-wiki
<noinclude><pagequality level="1" user="Chahar 009" /></noinclude>( ११ )
आवश्यक है। सचारी भाव को व्यभिचारी भाव भी कहते है । व्यभिचारी
भाव के ३३ भेद है । यथा — निर्वेद, ग्लानि, शंका, असूया, श्रम, मद,
'
वृति, आलस्य, विषाद, मति, चिंता, मोह, स्वप्न, विबोध, स्मृति, अमर्ष,
गर्व, उत्सुकता, अवहित्थ, दीनता, हर्ष, व्रीड़ा, उग्रता, निद्रा, व्याधि,
मरण, अपस्मार, आवेग, त्रास, उन्माद, जडता,
-ये स्थायीभाव रूपी समुद्र मे छोटी-बड़ी लहरो
चपलता, और वितर्क ।
के समान उठते और
- नष्ट होते रहते है । इनका प्रभाव चिरस्थायी नही होता । हृदय-हीन
जड़ पुरुष के हृदय में काव्य से रस उत्पन्न नही होता ।
अर्थ
रस के साथ ही काव्य में गुण की भी आवश्यकता है । शब्द और
गुणयुक्त होने चाहिये । गुण रस से पृथक् नही रह सकता । गुण
रस का धर्म है । गुण के तीन भेद है- माधुर्य, ओज और प्रसाद ।
अनुस्वारयुक्त वर्णो का अधिक प्रयोग, टवर्ग का बिल्कुल अभाव और
समास की न्यूनता कविता का माधुर्यगुण है । संयुक्ताक्षर, रेफ और
टवर्ग का अधिक प्रयोग, दीर्घ समासयुक्त उद्धत रचना में कविता का
श्रजगुण कहा जाता है । और जो शब्द योजना और समास मनोहर हों
और सुनते ही जिनका अर्थ समझ में श्रा जाय, उनमे प्रसादगुण कहा
जाता है ।
काव्य की भाषा सदा अर्थ का अनुसरण करती हुई होनी चाहिये ।
शृङ्गार, करुण, हास्य और शांत रस के वर्णन मे माधुर्य-गुण-युक्त भाषा
का और अद्भुत, वीर, रौद्र, भयानक और वीभत्स रस में प्रोज गुण-
युक्त भाषा का प्रयोग करना चाहिये । चन्द और भूषण की कविता में
श्रीज गुण
'की अच्छी बहार देखने को मिल सकती है । प्रसाद की आव-
श्यकता तो सब रसो मे रहती है । प्रसाद-गुण से रहित काव्य को तो
काव्य कहना ही न चाहिये ।
काव्य का माधुर्य देखना हो तो जयदेव - रचित गीत-गोविन्द मे
देखिये--<noinclude></noinclude>
3etrf4mzr38j37llo7imvi1w96mw71m
पृष्ठ:कविता कौमुदी.pdf/११
250
196397
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2026-07-28T10:50:19Z
Chahar 009
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/* अशोधित */ "( १२ ) उन्मदमदनमनोरथ पथिकवधूजनजनितविलापे । अलिकुलसंकुलकुसुमसमूहनिराकुलवकुलकलापे ॥ * * पतति पतत्रे विचलित पत्रे * शङ्कित भवदुपयानम् । रचयति शयन सचकित नयन पश्यति तव प..." के साथ नया पृष्ठ बनाया
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proofread-page
text/x-wiki
<noinclude><pagequality level="1" user="Chahar 009" /></noinclude>( १२ )
उन्मदमदनमनोरथ पथिकवधूजनजनितविलापे ।
अलिकुलसंकुलकुसुमसमूहनिराकुलवकुलकलापे ॥
*
*
पतति पतत्रे विचलित पत्रे
*
शङ्कित भवदुपयानम् ।
रचयति शयन सचकित नयन
पश्यति तव पन्थानम् ॥
कितनी मधुर शब्द-योजना है।
कितना सरल प्रवाह है । हिन्दी-
कविता मे भी माधुर्य गुण खूब है। देखिये ---
कङ्कन किंकिनि नूपुर धुनि सुनि ।
कहत लखन सन राम हृदय गुनि ॥
कबहुँक हो इहि रहनि रहोगो ।
परहित निरत निरन्तर मन क्रम वचन नेम निबहोगो ॥
परुष बचन प्रति दुसह स्रवन सुनि तेहि पावक न दहौंगो ।
विगत मान सम सीतल मन परगुन अवगुन न कहींगो ॥
परिहरि देह जनित चिता दुख सुख समवृद्धि सहौगो ।
तुलसिदास प्रभु इहि पथ रहि अविचल हरि भक्ति लहोगो ॥
*
*
*
यह तो गुणो की बात हुई । काव्य मे दोष का भी विचार बहुत
आवश्यक है | शब्द-दोष, अर्थ-दोष, रस- दोष आदि कई प्रकार के दोष
है | श्रुतिकटुत्व, अश्लीलता, ग्राम्यता, अप्रसिद्धता, सदिग्धता, क्लिष्टता,
पुनरुक्ति, छदोभग, यतिभंग आदि दोषो से बचना चाहिये ।
काव्य में अलङ्कार की भी आवश्यकता है। केशवदास ने कहा है-
भूषण बिना न सोहई, कविता बनिता मित्र ।
गुण और अलङ्कार में भेद है। गुण रस के बिना नही रहते, पर अलङ्कार
रस के बिना भी रह सकते है । अलङ्कार रस के सहायक होते है । शब्द
और अर्थ में उत्कर्ष प्रदान कर वे रस की वृद्धि करते है । पर जहा रस
नही, वहां केवल अलङ्कार भी उक्ति में वैचित्र्य उत्पन्न कर देते है ।<noinclude></noinclude>
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पृष्ठ:कविता कौमुदी.pdf/१२
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/* अशोधित */ "( १३ ) रस के सहायक छद भी है । मंदाक्रान्ता, द्रुतविलम्बित, शिखरिणी ' और मालिनी छद मे शृङ्गार, शात और करुण रस अधिक मनोहर हो जाते हैं । भुजङ्गप्रयात, वंशस्थ और शार्दूलविक्र..." के साथ नया पृष्ठ बनाया
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<noinclude><pagequality level="1" user="Chahar 009" /></noinclude>( १३ )
रस के सहायक छद भी है । मंदाक्रान्ता, द्रुतविलम्बित, शिखरिणी
' और मालिनी छद मे शृङ्गार, शात और करुण रस अधिक मनोहर हो
जाते हैं । भुजङ्गप्रयात, वंशस्थ और शार्दूलविक्रीडित मे वीर, रौद्र और
भयानक रस विशेष प्रभावोत्पादक हो जाते है । हिन्दी छन्दों में सवैया
और बर मे शृङ्गार, करुण और शात रस, छप्पय मे वीर, रौद्र और
भयानक रस; घनाक्षरी, दोहा, चौपाई और सोरठा में प्रायः सभी रस
उद्दीप्त होते है । सवैया और बरखं मे वीररस का काव्य नीरस हो
जायगा । काव्य में विरोधी और सहायक रसों का भी ध्यान रखना
चाहिये । वीर या रौद्ररस के वर्णन मे शृङ्गार, हास्य और करुण रस की
उपस्थिति से रस की सिद्धि नही हो सकती । हास्यरस से शृङ्गाररस
वृद्धिपाता है, पर वीभत्स, भयानक और करुण रस से
बाधा पहुंचती है । हास्यरस करुणरस का घातक है ।
उसकी सिद्धि मे
कवि ही नहीं,
श्रच्छे वक्ता भी रसो के शत्रुओ और मित्रो की जानकारी से अपने विषय
- को बहुत प्रभावोत्पादक बना लेते है ।
आगे के कोष्ठक में यह विषय अधिक स्पष्ट कर दिया जाता है-
सख्यां रस रस के मित्र
रस के शत्रु
१ श्रृङ्गार, हास्य, अद्भुत ।
२ हास्य शृङ्गार, अद्भुत
३ अद्भुत, भयानक ।
।
करुणि, वीभत्स, रौद्र, वीर, भयानक ।
भयानक, करुण, वीर ।
४ शांत करुण ।
५ रौद्र,
भयानक ।
-६ वीर,
रौद्र ।
७
करुण, शांत ।
८
रौद्र |
वीर, शृङ्गार, रौद्र, हास्य, भयानक ।
,
हास्य शृङ्गार, अद्भुत ।
शात, शृङ्गार ।
हास्य शृङ्गार |
भयानक, अद्भुत, रौद्र, वीर । शृङ्गार, हास्य, शात ।
९ वीभत्स ।
+
शृङ्गार |
कवि कौन है ? कवि सृष्टि के सौन्दर्य का मर्मज्ञ है । वह एक ऐसा
यन्त्र है; जिसके द्वारा सृष्टि का सौन्दर्य देखा जाता है । कदि सौन्दयं<noinclude></noinclude>
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पृष्ठ:कविता कौमुदी.pdf/१३
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/* अशोधित */ "( १४ ) का उपभोग करता है, और जब उन्मत्त होजाता है, तब उसके प्रलाप रूप मे उसकी उन्मत्तता का कुल प्रसाद सहृदय जनो को मिल जाता है ॥ वह प्रलाप ही काव्य है । तत्ववेत्ता और कवि मे..." के साथ नया पृष्ठ बनाया
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<noinclude><pagequality level="1" user="Chahar 009" /></noinclude>( १४ )
का उपभोग करता है, और जब उन्मत्त होजाता है, तब उसके प्रलाप
रूप मे उसकी उन्मत्तता का कुल प्रसाद सहृदय जनो को मिल जाता है ॥
वह प्रलाप ही काव्य है । तत्ववेत्ता और कवि में अन्तर है । तत्ववेत्ता
मस्तिष्क का निवासी है और कवि हृदय का । हृदय त्रिगुणात्मक सृष्टि
का केन्द्र है । कवि उसी केन्द्र में स्थित होकर सृष्टि का निरीक्षण करता
हैं | हृदय मनुष्य मात्र के है । पर कुछ तो हृदय के मर्म समझते हो नही;
कुछ समझते तो हैं, पर उनकी वाणी में इतनी शक्ति नहीं होती कि वे
उसे प्रकट कर सके । कवि हृदय की बातें समझता भी है और उसे कह
भी सकता है। माधारण जन और कवि मे यही अन्तर है ।
कवीना मानस नौमि तरन्ति प्रतिभाम्भसि ।
यत्र हसवयासीव भुवनानि चतुर्दश ॥
अर्थात् कवि के हृदयरूपी मानसरोवर को में नमस्कार करता हू;
जिसके प्रतिभारूपी जल में चौदहो भुवन ह्स की तरह तेरा करते है ।
श्रग्रेज कवि शेक्सपियर ने कहा है-
The lunatic, the lover and the poet,
Are of imagination all compact
अर्थात् पागल प्रेमी और कवि, इनकी कल्पनाए एक-सी होती है ।
कवि जब एक अलौकिक आनन्द की दशा मे जागृत होता है, तब
लोग उसे पागल कहते है। प्रेमी की भी ऐसी ही दशा होती है । पर
प्रेमी अपने आनन्द को प्रकट नही कर सकता; वह एकान्त मे अकेले
श्रानन्द का अनुभव करना पसन्द करता है । और कवि स्वय अनुभव
करके दूसरों को बाँटता भी है । दोनो में यही अन्तर है । दोनो का
अन्तर इस शेर से और भी साफ हो जाता है-
इश्क कहता है कि श्रालम से जुदा हो जाओ ।
हुस्न कहता है जिधर जायो नया आलम है |
प्रेमी इश्क का उपासक होता है और कवि हुस्न का ।
कवि की कोई वात सोन्दर्यहीन नही होती, सब मे कुछ-न-कुछ<noinclude></noinclude>
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पृष्ठ:कविता कौमुदी.pdf/१४
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/* अशोधित */ "( १५ ) चमत्कार होता है । उसकी दृष्टि साधारण लोगो की दृष्टि से भिन्न होती है । उसका कथन निराले ढग का होता है । ससार की तुच्छ से तुच्छ बातो मे भी वह सौन्दर्य ढूंढ निकालता है..." के साथ नया पृष्ठ बनाया
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<noinclude><pagequality level="1" user="Chahar 009" /></noinclude>( १५ )
चमत्कार होता है । उसकी दृष्टि साधारण लोगो की दृष्टि से भिन्न होती
है । उसका कथन निराले ढग का होता है । ससार की तुच्छ से तुच्छ
बातो मे भी वह सौन्दर्य ढूंढ निकालता है । गढ़ो मे बरसात का पानी
जमा होकर जब सूख जाता है तब उसमे कीचड़ शेष रह जाती है । जब
कीचड़ का पानी भी सूख जाता है तब उसमे दरारे पड जाती है । यह
ससार की ऐसी साधारण-सी बटना है कि गढे के पास से आने-जाने
वाले लोग कभी इस घटना पर व्यान भी नही देते । किन्तु कवि की दृष्टि
से वह कहाँ छूट सकता है ? तुलसीदास ने कीचड ऐसे तुच्छ पदार्थ को
और उस पर बीती हुई प्रकृति की एक अत्यन्त साधारण घटना को
सौन्दर्य से चमत्कृत कर दिया। वे कहते है--
हृदय न विदरेउ एक जिमि, बिछुरत प्रीतम नीर ।
जानत हो मोहि दीन्ह विधि, यह जातना- सरीर ॥
अर्थात्, प्रियतम जल के बिछुडते ही कीचड़ का हृदय फट गया,
किन्तु मेरा नही फटा। इससे जान पडता है कि विधाता ने मुझे यातना
भोगने के लिए ही यह शरीर दिया है ।
कीचड़ के मन की वेदना कवि के सिवा साधारण जन कैसे समझ
सकते है ?
ससार में कौन मनुष्य नही रोया ? मनुष्य जीवन मे रोना सब से
पहला काम है । रोने के साथ आँखो से आँसुओ की धारा बहती है ।
आँसू किसने नही देखा ? पर कवि की दृष्टि से सब नही देखते । सुत्रों
के साथ रहीम ने एक प्रद्भुत रहस्य खोज निकाला है ।
" रहिमन " अँसुवा नयन ढरि, जिय दुख
जाहि निकारी गेह ते कस न भेद
प्रकट करेय ।
कहि देय ।।
जिसे हम घर से निकाल देगे, वह घर का भेद अवश्य प्रकट कर
देगा | जैसे आँसु ने निकल कर हृदय का दुख बता दिया ।
कवि सौन्दर्य देखता है । चाहे वह सौन्दर्य बहिर्जगत् का हो, चाहे
अन्तर्जगत् का । जो केवल बाहरी सौन्दर्य का ही वर्णन करता है, वह<noinclude></noinclude>
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पृष्ठ:कविता कौमुदी.pdf/१५
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/* अशोधित */ "( १६ ) कवि है; पर जो मनुष्य के मन के सौन्दर्य का भी वर्णन करता है वह / महाकवि है । भीतरी सौन्दर्य के वर्णन करने में हो कवि की कवित्व- शक्ति का पता चल सकता है। देखिये तुलसीदास..." के साथ नया पृष्ठ बनाया
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<noinclude><pagequality level="1" user="Chahar 009" /></noinclude>( १६ )
कवि है; पर जो मनुष्य के मन के सौन्दर्य का भी वर्णन करता है वह /
महाकवि है । भीतरी सौन्दर्य के वर्णन करने में हो कवि की कवित्व-
शक्ति का पता चल सकता है। देखिये तुलसीदास ने बाहरी और भीतरी
ari सौन्दर्यो का एक साथ कितना सुन्दर वर्णन कर दिया है--
+
विष्णु कहा ग्रस विहँसि तब, बोलि सकल द्विजराज ।
'
बिलग विलग होइ चलहु सब, निज निज सहित समाज ||
बर अनुहार बरात न भाई । हँसी करइहउ परपुर जाई ॥
विष्णु बचन सुनि सुर मुसकाने । निजनिज सेन सहित बिलगाने ॥
मन ही मन महेस मुसुकाही । हरि के व्यङ्गवचन नहिं जाही ||
"मन ही मन महेस मुसुकाही" लिखकर तुलसीदास ने कवित्वशक्ति
का अद्भुत परिचय दिया है। शकर के मन मे विष्णु के लिए अगाव
प्रेम है । उस प्रेम के समुद्र को तुलसीदास ने इस चौपाई के एक चरण
रूपी नन्हे से बूंद मे भर कर रख दिया है ।
बाहरी सौन्दर्य तो सुचतुर चित्रकार के चित्र में भी देखने को मिल
सकता है, पर मन का सौन्दर्य महाकवि की वाणी ही मे मिलता है ।
चित्रकार विम्बोष्ठी, चारुनेत्रा, हिमकरवदना, कान्तकुन्तला, पृथुलजघना
कामिनी का ऐसा मनोहर चित्र बना सकता है कि सभव है वैसा चित्र
कवि अपनी कविता मे न खीच सके । पर चित्रकार उस रमणी
के हृदय को कैसे दिखला सकता है ? वह सेनापति के इस छंद का भाव
कैसे चित्रित कर सकता है ?
फूलन सो बाल की बनाइ गुही बेनी लाल
अग
भाल दीन्ही बेदी मृगमद् की प्रसित है ।
अग भूषन बनाइ व्रजभूषन जू
बीरी निज कर ते खवाई अति हित है ॥
ह्न के रसबस जब दीबे को महावर के
सेनापति स्याम गह्यो चरन ललित है ॥<noinclude></noinclude>
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पृष्ठ:कविता कौमुदी.pdf/१६
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/* अशोधित */ "( १७ ) चूमि हाथ नाथ के लगाइ रही श्रखिन सों कही, प्रानपति ! यह अति श्रनुचित है ॥ "यह अति अनुचित है” बताकर कवि ने जो स्त्री के हृदय की छटा 'दिखलाई है, वह चित्रकार नही दिखला सकत..." के साथ नया पृष्ठ बनाया
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<noinclude><pagequality level="1" user="Chahar 009" /></noinclude>( १७ )
चूमि हाथ नाथ के लगाइ रही श्रखिन सों
कही, प्रानपति ! यह अति श्रनुचित है ॥
"यह अति अनुचित है” बताकर कवि ने जो स्त्री के हृदय की छटा
'दिखलाई है, वह चित्रकार नही दिखला सकता ।
कवि की कविता का प्रभाव स्वयं कवि के हृदय पर नही पड़ता ।
वह शृगार रस की मनोहर कविता लिखता है । कितने ही युवक-युवती
उसकी कविता पढकर प्रेमोन्मत्त हो जाते है । पर स्वय कवि उस कविता
के लिख चुकने पर निश्चिन्त सा होकर अपने मामूली काम में लग जाता
है । वह वीर रस की कविता लिखता है । सभव है, उसकी कविता
“पढकर कोई व्यक्ति युद्ध में निर्भयता से प्राण दे दे । पर कवि महाशय
तो उस कविता की रचना करने के बाद शायद नहाने धोने और खाने-
'पीने मे लग जाया करते है । वे कविता पढ़ते-पढते युद्ध क्षेत्र की ओर
दौड़ते हुए नही दिखाई पड़ेगे । उनकी करुण और शातिरस की कविता
पढकर कोई सहृदय चाहे ससार से विरक्त, राग-द्वेष से रहित हो जाय ।
*पर कवि महाराज अपना शरीर सजाने मे शायद ही कभी त्रुटि करे ।
इन बातों के लिखने का अभिप्राय यह है कि
कमलपत्र की तरह निर्लेप होता है । उसपर
कवि का हृदय जल में
उसकी ही कल्पना या
रचना का कोई प्रभाव नही पड़ता । सस्कृत के एक पंडित ने इस पर
कवि का गूढ परिहास करते हुए यह लिखा है-
कवि करोति काव्यानि स्वादु जानन्ति पण्डिता ।
सुन्दर्या अपि लावण्यं पतिर्जानाति नो पिता ||
कवि काव्य रचता है, पर स्वाद पण्डित जानते है । जैसे, सुन्दरी
स्त्री के लावण्य को उसका पति जानता है, ( उत्पन्न करनेवाला )
"पिता नही ।
कवि अपने लिए कविता नही रचता, दूसरो के लिए रचता है ।
एकान्त स्थान में बैठकर, इन्द्रियासक्ति परित्याग करके वह सहृदय
रसिकजनो के लिए काव्य रचता है । कवि के समान परोपकारी कौन है ?<noinclude></noinclude>
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पृष्ठ:कविता कौमुदी.pdf/१७
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/* अशोधित */ "( १८ ) कवि कैसी ही हीन दशा मे क्यो न हो, वह स्वभाव में राजा और उदारता मे हरिश्चन्द्र से कम नही होता। किसी राजा को एक वटा देश विजय करने में उतना आनन्द नहीं होता, जितना कवि को..." के साथ नया पृष्ठ बनाया
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<noinclude><pagequality level="1" user="Chahar 009" /></noinclude>( १८ )
कवि कैसी ही हीन दशा मे क्यो न हो, वह स्वभाव में राजा और
उदारता मे हरिश्चन्द्र से कम नही होता। किसी राजा को एक वटा
देश विजय करने में उतना आनन्द नहीं होता, जितना कवि को एक
शब्द किसी स्थान पर ठीक बैठा देने मे होता है । शब्द ही उसकी
सम्पत्ति है, वही उसकी सेना है । शब्दों से वह विश्व का हृदय जीतने
की शक्ति रखता है । जब वह काव्य रचने बैठता है, तब उसके ब्रह्माड
मे शब्दों के समूह के समूह चक्कर लगाते है । कवि उनमें से पकड़
पकडकर उन्हे उपयुक्त स्थानो पर सजा देता है | कभी-कभी कौड़ी के
मोल के शब्द को वह ऐसे स्थान पर जड़ देता है, जहा वह होरे की तरह
चमक उठता है । "कहु” ( कही) एक साधारण शब्द है । पर श्रीवर
पाठक ने उसके हाथ में सुवा-भवन की चावी ही सौप दी है।
यही स्वर्ग सुरलोक यही सुरकानन सुन्दर ।
यहि अमरन कौ प्रोक यही कहु बमत पुरन्दर । 'काश्मीर सुखमा'
"यही कहु बसत पुरन्दर" में "कहु" पुरन्दर से भी अधिक प्रभाव-
शाली बन गया है । काश्मीर मे पाठकजी को पुरन्दर के मिलने से
कितना श्रानन्द होता, इसका अनुभव अकेले पाठकजी ही कर सकते है ।
पर " कहु" सहृदय रसिक पाठको को घर बैठे इन्द्र-मिलन से भी अधिक
श्रानन्द प्रदान कर रहा है । कवि और शब्द की विचित्र महिमा है । शब्द
कवि को अमर बना देते है और कवि शब्द को भाग्यवान् ।
कवि दो प्रकार के होते है । एक कवि केवल अपनी कथा कहता है।
अर्थात् अपनी प्रतिभा द्वारा केवल अपने हृदय के सुख-दुख, कल्पना और
अनुभव को कविता रूप मे प्रकट करता है। वर्तमान काल में रवीन्द्रनाथ
ठाकुर इसी श्रेणी के कवि है । दूसरे प्रकार का कवि समस्त देश, समग्र
जाति या युग की कथा कहता है। वह कवि केवल निमित्त मात्र होता
है, उसके द्वारा समग्र जाति की सरस्वती बोलती है । उसको रचना
किसी व्यक्ति विशेष की रचना नही रह जाती। उसकी रचना सम्पूर्ण
समाज की मिलकियत हो जाती है। तुलसीदास एक व्यक्ति का नाम था<noinclude></noinclude>
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पृष्ठ:कविता कौमुदी.pdf/१८
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/* अशोधित */ "(?ε). ⋅ एक जनसमूह की सरस्वती उनके द्वारा प्रकट हुई। उन्होने उस जनसमूह के हृदय की बात कही । वह जनसमूह तुलसीदास के कथन को अपनी सम्पत्ति समझता है । इसीसे वह कथन अजर और अमर हो..." के साथ नया पृष्ठ बनाया
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<noinclude><pagequality level="1" user="Chahar 009" /></noinclude>(?ε).
⋅
एक जनसमूह की सरस्वती उनके द्वारा प्रकट हुई। उन्होने उस जनसमूह
के हृदय की बात कही । वह जनसमूह तुलसीदास के कथन को अपनी
सम्पत्ति समझता है । इसीसे वह कथन अजर और अमर होगया कितने
ही ऐसे अपढ और ग्रामीण मनुष्यो के मुख से भी कभी-कभी-
होइ है वहि जो राम रचि राखा ।
ॐ
*
.
जाकर जापर सत्य सनेहू । सो तेहि मिलत न कछु सदेहू ||
आदि सुन पडता है, जो तुलसीदास को जानते भी नही । इसका कारण
यह है कि वे अपनी वस्तु का उपयोग करते हैं । तुलसीदास के लिए
उनको केवल इसीलिए कृतज्ञ होना चाहिये कि तुलसीदास ने उनके हृदय
की बातों को पद्य-रूप में करके बोलने में आसान बना दिया । तुलसीदास
अपनी रचना मे व्याप्त होकर अदृष्य हो गये। लोग उनके वचन को
अपना सा मानकर बोलते हैं । यही कवि की व्यापकता है । जो कवि
व्यापक नही, उसकी कविता जब कभी उदाहरण रूप में उपस्थित होती
है, तब उसके साथ उसका नाम भी लगा रहता है । पर तुलसीदास के
वचनो के साथ उनके नाम की आवश्यकता नही पडती, क्योकि तुलसी-
दास दूध और शक्कर की तरह समाज मे घुल-मिल गये हैं । यही उनका
अमरत्व है; यही उनका महा-कवित्व है । ग्राज उनकी श्रमर वाणी से
धार्मिक हिन्दुओं के मन्दिर, घर, मुख और श्रवण गूज रहे है । इसीप्रकार
हिन्दी के और भी कितने ही अमर कवि है, जैसे कबीर, सूर, मीराबाई
आदि;
जो हिन्दू समाज मे अपने लिए खास स्थान रखते है । वह कैसी
शुभ घड़ी थी, जब उनकी वाणी से या लेखनी से एक वाक्य निकल गया
और वह हजारो मुखो से प्रतिध्वनित हो उठा। न जाने उनकी किस
तपस्या के फल से, किस मंत्र की साधना से उनकी वाणी रूपी तागे का
अन्त नही श्राता और अब तक उसमे सहस्रो हृदय सुमन पिरोये जा रहे है।
कवि की योग्यता के सम्बन्ध में नारद ने "सगीत मकरन्द" मे यह
श्लोक लिखा है--<noinclude></noinclude>
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पृष्ठ:कविता कौमुदी.pdf/१९
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2026-07-28T10:53:01Z
Chahar 009
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/* अशोधित */ "( २० ) शुचिर्दक्ष शान्त सुजनविनत सूनृततर. कलावेदी विद्वानतिमृदुपद काव्यचतुर रसज्ञो दैवज्ञः सरस हृदय सत्कुलभव शुभाकारश्छन्दोगुणगणविवेको स च कवि इतने गुण जिस पुरुष..." के साथ नया पृष्ठ बनाया
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text/x-wiki
<noinclude><pagequality level="1" user="Chahar 009" /></noinclude>( २० )
शुचिर्दक्ष शान्त सुजनविनत सूनृततर.
कलावेदी विद्वानतिमृदुपद काव्यचतुर
रसज्ञो दैवज्ञः सरस हृदय
सत्कुलभव
शुभाकारश्छन्दोगुणगणविवेको स च कवि
इतने गुण जिस पुरुष मे हों, वह ससार में कितना भाग्यशाला
होगा ! कवि होना कैसे सौभाग्य की बात है ||
आजकल की हिन्दी कविता की ओर जब हम ध्यान देते है, तब
बहुत निराश होना पडता है। कोरी तुकबन्दी को कविता का नाम दिया
जारहा है; बक को हंस और कौवे को मोर बताया जारहा है। जिस
पद्य में न रस है, न माधुर्य, न प्रसाद और न अलङ्कार, उसे कविता को
उपाधि से विभूषित किया जा रहा है। और उसके रचयिता को समाचार
पत्रो के चाटुकार सम्पादक कविवर, कवि-केसरी, कवि सम्राट्, कवि-कुजर
कवि-पुङ्गव, कवीन्द्र श्रादि कहकर उसकी रचना के द्वारा अपने पत्र
की ग्राहक संख्या बढाने के प्रयत्न में है । यह कितने खेद की बात है । कवि
की जिम्मेदारी इतनी बडी है कि तुलसीदास भी कवि होने का दावा
नही करते थे । किन्तु आजकल नीरस तुकबन्दी करने वाला भी कवि-
सम्राट् कहकर प्राघोषित किया जाता है । ऐसा करके
प्रशंसक लोग
अपनी काव्य-शास्त्र सम्बन्धी अनभिज्ञता की घोषणा करते है या पद्य-
रचयिता की प्रशसा । यह सोचने की बात है । प्रशसा तो वह है जो
यथार्थ हो । असत्य प्रशंसा तो निन्दा ही का एक रूप है ।
लिखते-लिखते अन्त मे में कुछ कड़ी बाते लिख गया। इसके लिए
मुझे खेद है; पर मेरा उद्देश्य यह नही कि इससे किसी सम्पादक या
कवि का जी दुखे । मै तो सिर्फ यह चाहता हूँ कि काव्य शास्त्र का अच्छी
तरह अध्ययन कर लेने के बाद लोग कविता रचने का श्रम करे । आज-
कल की खड़ी बोली की कविता में काव्य के गुण न होने से पढ़ते समय
ऐसा जान पड़ता है मानो जीभ के मैदान पर अक्षर लट्ठ चला
.
ऊपर काव्य और कवि के सम्बन्ध में जो कुछ लिखा गया है,
रहे है ।
वह उत्ते-<noinclude></noinclude>
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