विकिस्रोत hiwikisource https://hi.wikisource.org/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A4:%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0 MediaWiki 1.47.0-wmf.22 first-letter मीडिया विशेष वार्ता सदस्य सदस्य वार्ता विकिस्रोत विकिस्रोत वार्ता चित्र चित्र वार्ता मीडियाविकि मीडियाविकि वार्ता साँचा साँचा वार्ता सहायता सहायता वार्ता श्रेणी श्रेणी वार्ता लेखक लेखक वार्ता अनुवाद अनुवाद वार्ता पृष्ठ पृष्ठ वार्ता विषयसूची विषयसूची वार्ता TimedText TimedText talk मॉड्यूल मॉड्यूल वार्ता Event Event talk विषयसूची:गो-दान.djvu 252 602 675951 675933 2026-10-02T02:54:47Z सौरभ तिवारी 05 49 परापूर्ण पृष्ठ को श्रेणी से जोड़ने के बाद विषयसूची को श्रेणी से जोड़ना अनावश्यक। 675951 proofread-index text/x-wiki {{:MediaWiki:Proofreadpage_index_template |Type=book |Title=गो-दान |Language=hi |Volume= |Author=प्रेमचंद |Co-author1= |Co-author2= |Translator= |Co-translator1= |Editor= |Illustrator= |Publisher=सरस्वती प्रेस |Address=बनारस |Year=1936 |Key= |ISBN= |Source=djvu |Image=5 |Progress=श |Pages=<pagelist 1to4=- 5=आमुख 6=लेखक-परिचय 7=आवरण-पृष्ठ 8=प्रकाशक 9=मुखपृष्ठ 10=- 11=आरंभ 12=10 109=108 364to369=-/> |Volumes= |Remarks= |Width= |Css= |Header= |Footer= }} [[श्रेणी:परापूर्ण अनुक्रम]] ptzk6nfl13axfczltl2eqk22uq44efh पृष्ठ:गो-दान.djvu/११ 250 614 675952 675931 2026-10-02T03:08:05Z सौरभ तिवारी 05 49 सुधार। 675952 proofread-page text/x-wiki <noinclude><pagequality level="4" user="AMAN KUMAR" /></noinclude>&nbsp; {{C|{{larger|'''१'''}}}} होरीराम ने दोनों बैलों को सानी-पानी देकर अपनी स्त्री धनिया से कहा—गोबर को ऊख गोड़ने भेज देना। मैं न जाने कब लौटूँ। जरा मेरी लाठी दे दे। धनिया के दोनों हाथ गोबर से भरे थे। उपले पाथकर आयी थी। बोली—अरे, कुछ रस-पानी तो कर लो। ऐसी जल्दी क्या है। होरी ने अपने झुर्रिर्यों से भरे हुए माथे को सिकोड़कर कहा—तुझे रस-पानी की पड़ी है, मुझे यह चिन्ता है कि अबेर हो गयी तो मालिक से भेंट न होगी। असनान-पूजा करने लगेंगे, तो घंटों बैठे बीत जायगा। 'इसी से तो कहती हूँ, कुछ जलपान कर लो। और आज न जाओगे तो कौन हरज होगा। अभी तो परसों गये थे।' 'तू जो बात नहीं समझती, उसमें टाँग क्यों अड़ाती है भाई! मेरी लाठी दे दे और अपना काम देख। यह इसी मिलते-जुलते रहने का परसाद है कि अब तक जान बची हुई है। नहीं कहीं पता न लगता कि किधर गये। गाँव में इतने आदमी तो हैं, किस पर बेदखली नहीं आयी, किस पर कुड़की नहीं आयी। जब दूसरे के पाँवों-तले अपनी गर्दन दबी हुई है, तो उन पाँवों को सहलाने में ही कुशल है।' धनिया इतनी व्यवहार-कुशल न थी। उसका विचार था कि हमने ज़मींदार के खेत जोते हैं, तो वह अपना लगान ही तो लेगा। उसकी खुशामद क्यों करें, उसके तलवे क्यों सहलायें। यद्यपि अपने विवाहित जीवन के इन बीस बरसों में उसे अच्छी तरह अनुभव हो गया था कि चाहे कितनी ही कतर-ब्योंत करो, कितना ही पेट-तन काटो, चाहे एक-एक कौड़ी को दाँत से पकड़ो; मगर लगान बेबाक़ होना मुश्किल है। फिर भी वह हार न मानती थी, और इस विषय पर स्त्री-पुरुष में आये दिन संग्राम छिड़ा रहता था। उसकी छः सन्तानों में अब केवल तीन जिन्दा है, एक लड़का गोबर कोई सोलह साल का, और दो लड़कियाँ सोना और रूपा, बारह और आठ साल की। तीन लड़के बचपन ही में मर गये। उसका मन आज भी कहता था, अगर उनकी दवादारू होती तो वे बच जाते; पर वह एक धेले की दवा भी न मँगवा सकी थी। उसकी ही उम्र अभी क्या थी। छत्तीसवाँ ही साल तो था; पर सारे बाल पक गये थे, चेहरे पर झुर्रियाँ पड़ गयी थीं। सारी देह ढल गयी थी, वह सुन्दर गेहुआँ रंग सँवला गया था और आँखों से भी कम सूझने लगा था। पेट की चिन्ता ही के कारण तो। कभी तो जीवन का सुख न मिला। इस चिरस्थायी जीर्णावस्था ने उसके आत्म-सम्मान को उदासीनता का रूप दे दिया था। जिस गृहस्थी में पेट की रोटियाँ भी न मिलें, उसके लिए इतनी खुशामद क्यों? इस परिस्थिति से उसका मन बराबर विद्रोह किया करता था। और दो चार घुड़कियाँ खा लेने पर ही उसे यथार्थ का ज्ञान होता था।<noinclude></noinclude> dxtepfnenkhyu38flumo10u2utw188s पृष्ठ:अयोध्या का इतिहास.pdf/६ 250 125970 675953 456644 2026-10-02T10:16:11Z विक्रम प्रताप 6475 /* प्रमाणित */ 675953 proofread-page text/x-wiki <noinclude><pagequality level="4" user="AMAN KUMAR" />{{dhr|12em</noinclude>{{c|{{larger|'''अयोध्या का इतिहास'''}}}}<noinclude>{{dhr|12em}}</noinclude> 1azohipf348lubmfkdj7fl4a8f393gg 675954 675953 2026-10-02T10:16:35Z विक्रम प्रताप 6475 सुधार 675954 proofread-page text/x-wiki <noinclude><pagequality level="4" user="AMAN KUMAR" />{{dhr|12em}}</noinclude>{{c|{{larger|'''अयोध्या का इतिहास'''}}}}<noinclude>{{dhr|12em}}</noinclude> trjb6ieln2pn27179oe0gf93in87zsi