विकिस्रोत hiwikisource https://hi.wikisource.org/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A4:%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0 MediaWiki 1.47.0-wmf.23 first-letter मीडिया विशेष वार्ता सदस्य सदस्य वार्ता विकिस्रोत विकिस्रोत वार्ता चित्र चित्र वार्ता मीडियाविकि मीडियाविकि वार्ता साँचा साँचा वार्ता सहायता सहायता वार्ता श्रेणी श्रेणी वार्ता लेखक लेखक वार्ता अनुवाद अनुवाद वार्ता पृष्ठ पृष्ठ वार्ता विषयसूची विषयसूची वार्ता TimedText TimedText talk मॉड्यूल मॉड्यूल वार्ता Event Event talk पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 34.pdf/५३१ 250 187483 676023 674865 2026-10-12T16:23:04Z सौरभ तिवारी 05 49 /* शोधित नहीं */ 676023 proofread-page text/x-wiki <noinclude><pagequality level="1" user="सौरभ तिवारी 05" /></noinclude>भाषण : 'गीता 'पर, मद्रास में ४९५ बना रहे हैं, बल्कि खुद देशकी उन्नतिको भी असम्भव बना रहे हैं। समान लक्ष्य प्राप्त करनेकी अधीरतामें आप यह भूल जाते हैं कि देशकी प्रगति में आप स्वयं ही सबसे बड़ी बाधा बन रहे हैं। आप एक सीधी-सी चीजको, जो आपके सामने बिलकुल स्पष्ट है, समझनेसे इनकार करते हैं, और फिर जब आपको कामका दूसरा कोई क्षेत्र नहीं सूझ पड़ता तब आप इतने हताश हो बैठते हैं जो मनुष्यको शोभा नहीं देता । मेरा आग्रह है कि आप देशकी खातिर, करोड़ों मेहनतकशोंकी खातिर, ईश्वरकी खातिर इस काहिलीको अपने अन्दरसे निकाल दें । काश, में अपने हृदय में उमड़ते उद्गारोंको इस भारी श्रोतृ-समुदाय के समक्ष प्रकट कर सकता और उनको सुननेके लिए आपको और अधिक बैठाये रख सकता । पर ऐसा नहीं कर सकता। इसलिए मैं सर्व-साक्षी ईश्वरसे अपनी इस प्रार्थनाके साथ अपना भाषण समाप्त करता हूँ कि वह हमें अपना मार्ग पहचाननेका विवेक और उस मार्गपर चलनेकी शक्ति दे । [ अंग्रेजीसे ] हिन्दू, ५-९-१९२७ ४०९. भाषण : गीता 'पर, मद्रासमें ' ४ सितम्बर, १९२७ मानपत्र और थैलीके लिए आपको धन्यवाद । मुझे अभी मालूम हुआ कि कभी श्री शास्त्री इस पाठशाला के प्रधानाध्यापकके पदपर रह चुके हैं। यह जानने के बाद मेरे लिए इस थैली और मानपत्रका भी महत्त्व दूना हो गया है। सर्वेट्स ऑफ इंडिया सोसाइटीको श्री गोखलेका उत्तराधिकारी और भारतको एक सर्वाधिक प्रतिभा- शाली और निष्ठावान सुपुत्र देनेके लिए आपको मेरी बधाई। आपकी पाठशाला अपनेको एक हिन्दू पाठशाला मानती है, और इस 'हिन्दू' विशेषणको महत्त्व देती है । इसलिए मैं समझता हूँ कि मुझे यह आशा रखनेका अधिकार है कि आप सब लोगों में किसी-न-किसी मात्रा में हिन्दूका विशेष गुण होगा ही । यदि आप अपने इस विशे- षणको सार्थक करना चाहें तो आपसे यही अपेक्षा की जायेगी कि आप अपने प्रत्येक कार्य में हिन्दू संस्कृतिका सर्वोत्कृष्ट रूप प्रकट करें। सोचता हूँ कि यदि आप लोगोंसे पूछा जाये कि आप सबने 'भगवद्गीता' पढ़ी है या नहीं तो क्या आप सबका उत्तर 'हाँ' में हो सकेगा । जिन्होंने पढ़ी हो, कृपया अपने हाथ उठायें, बिलकुल ईमानदारीसे (लगभग १० व्यक्तियोंने हाथ उठाये ) । लगता है कि इस पहले ही इम्तहान में आप लोग बहुत बड़ी तादाद में फेल रहे । अंग्रेजीमें एक कहावत है, जिसका मतलब है कि अगर नमक ही अपना नमकीनपन खो बैठे तो फिर उसे किस चीजसे नमकीन बनाया १. हिन्दू ट्रिप्लकेनके हाई स्कूलके सिंगराचारी हॉलमें। Gandhi Heritage Portal<noinclude></noinclude> 9ugvlypb4wasvfniwkcp8bah47m7ovu