विकिपीडिया magwiki https://mag.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE MediaWiki 1.47.0-wmf.19 first-letter मीडिया विशेष वार्ता प्रयोगकर्ता प्रयोगकर्ता वार्ता विकिपीडिया विकिपीडिया वार्ता सञ्चिका सञ्चिका वार्ता मीडियाविकि मीडियाविकि वार्ता साँचा साँचा वार्ता सहयोग सहयोग वार्ता श्रेणी श्रेणी वार्ता TimedText TimedText talk Module Module talk Event Event talk श्रेणी:पशुपालन 14 4484 79615 65719 2026-09-12T01:00:42Z अनिरुद्ध कुमार 172 79615 wikitext text/x-wiki इ पशुपालन से संबंधित श्रेणी हइ। [[बर्ग:धंधा]] [[बर्ग:प्राणी विज्ञान]] 38f23xhzbiweludgrdw17emghqifsfx श्रेणी:शब्दार्थ 14 6180 79603 19308 2026-09-11T17:15:19Z अनिरुद्ध कुमार 172 पन्ना खाली कैल गेलै 79603 wikitext text/x-wiki phoiac9h4m842xq45sp7s6u21eteeq1 काण्ड 0 8563 79604 64878 2026-09-11T17:20:36Z अनिरुद्ध कुमार 172 79604 wikitext text/x-wiki '''काण्ड''' प्रायः कौनो अनुचित या बुरा कृत्यके संज्ञाके काम करऽ है । कौनौ प्राकृतिक अप्रिय घटनाके काण्ड न कहल जा है । इ शब्द के उत्पत्ति पहिले के महाकाव्य के अध्याय ला प्रयुक्त शब्द काण्ड से होले हे। काण्ड में कोई महान कहानी के कोई महत्वपूर्ण घटना के वरणन रह हलै। काण्ड के अर्थ संकुचत हो गेलै। अब इ कोई बड़ी कहानी के घटना के बदले मगही क्षेत्र में कोई बड़ा लेकिन खराब काम के लिए प्रयुक्त होवे लगलै। 6njvym04ardortmegznhnfo4myedg5a 79605 79604 2026-09-11T17:21:08Z अनिरुद्ध कुमार 172 79605 wikitext text/x-wiki '''काण्ड''' प्रायः कौनो अनुचित या बुरा कृत्यके संज्ञाके काम करऽ है । कौनौ प्राकृतिक अप्रिय घटनाके काण्ड न कहल जा है । इ शब्द के उत्पत्ति पहिले के महाकाव्य के अध्याय ला प्रयुक्त शब्द काण्ड से होले हे। काण्ड में कोई महान कहानी के कोई महत्वपूर्ण घटना के वरणन रह हलै। काण्ड के अर्थ संकुचत हो गेलै। अब इ कोई बड़ी कहानी के घटना के बदले मगही क्षेत्र में कोई बड़ा लेकिन खराब काम के लिए प्रयुक्त होवे लगलै। [[श्रेणी:शब्द]] 1eiq7v04eczo9mj1c0vvmo2zwm9pqie चर 0 9503 79625 68112 2026-09-12T02:18:08Z AMAN KUMAR 377 कड़ी+ 79625 wikitext text/x-wiki बीजगणितके विशेषताके अनुसार [[बीजगणित]]<nowiki/>मे राशिके जगह [[चिह्न]] अथवा [[अच्छर]]<nowiki/>के प्रयोग कैल जाहे जिनखर मूल्य पृथक स्थान पर पृथक होवहे , उनखा 'चर' कहल जाहे । उदाहरण - y + 5 = 36 मे y एक चर हे आउ हियाँ y के मूल्य 31 होत । पुष्टिला कि का सचमे y के मूल्य 31 हे, अपने 5 के पक्षान्तर कर ली । (36-5=31) जैसे: <br /> y + 5 = 36 <br /> y = 36 - 5 <br /> = 31 <br /> [[बर्ग:चर (गणित)|*]] [[बर्ग:बीजगणित]] [[बर्ग:कलन]] [[बर्ग:प्राथमिक गणित]] [[बर्ग:वाक्यविन्यास (तर्क)]] cu0pwqr6dtc180ojaffop3zl7oivdol ज्ञान 0 9961 79626 68283 2026-09-12T02:25:21Z AMAN KUMAR 377 कड़ी+ 79626 wikitext text/x-wiki [[सञ्चिका:Classical Definition of Knowledge-hi.svg|thumb|ज्ञानके शास्त्रीय परिभाषा]]निरपेक्ष सत्यके स्वानुभूतिहे '''ज्ञान''' हे । ई प्रिय-अप्रिय, सुख-दु:ख इत्यादि भावसे निरपेक्ष होवहे । एकर [[विभाजन (गणित)|विभाजन]] विषयके आधार पर होवहे । विषय पाँच होवहे - रूप, [[रस (काव्यशास्त्र)|रस]], गन्ध, शब्द आउ स्पर्श । ज्ञान लोगके भौतिक आउ बौद्धिक सामाजिक क्रियाकलापके उपज, सङ्केतके रूपमे जगत् के वस्तुनिष्ठ गुण आउ सम्बन्ध, प्राकृतिक आउ मानवीय तत्त्वके बारेमे विचारके अभिव्यक्ति हे । ज्ञान दैनन्दिन तथा वैज्ञानिक हो सकहे । वैज्ञानिक ज्ञान आनुभविक आउ सैद्धान्तिक वर्गमे विभक्त होवहे । एकर अतिरिक्त समाजमे ज्ञानके मिथकीय, कलात्मक, धार्मिक आउ अन्य ढेर अनुभूति होवहे । सिद्धान्ततः सामाजिक-ऐतिहासिक अवस्था पर [[मानुस]]<nowiki/>के क्रियाकलापके निर्भरताके प्रकट कैल बिन ज्ञानके सारके न समझल जा सकहे । ज्ञानमे मानुसके सामाजिक शक्ति सञ्चित होवहे, निश्चित रूप धारण करहे तथा विषयीकृत होवहे । ई तथ्य मनुष्यके बौद्धिक कार्यकलापके प्रमुखता आउ आत्मनिर्भर स्वरूपके बारेमे आत्मगत-प्रत्ययवादी सिद्धान्तके आधार हे ।<ref>दर्शनकोश, प्रगति प्रकाशन, मास्को, १९८0, पृष्ठ-२२६, ISBN ५-0१000९0७-२</ref> स्वाभाविक आउ सहज शब्दमे हमनी ज्ञानके ई प्रकार परिभाषित कर सकहियै {{Quote|अनुभवके अनुभूतिये ज्ञान कहला हे ।}} == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[बर्ग:ज्ञानमीमांसा]] [[बर्ग:दर्शन]] mq6hsv70d7755zxrdsw0rht5qzdiugy पगहा 0 18118 79598 2026-09-11T17:05:52Z अनिरुद्ध कुमार 172 "''' पगहा ''' पालतु जानवर के बांध के रखे वाला एगो उपकरण है। इ रस्सी के या सिक्कड़ के बनावल जा है।" सङ्गे नया पन्ना बनावल गेलै 79598 wikitext text/x-wiki ''' पगहा ''' पालतु जानवर के बांध के रखे वाला एगो उपकरण है। इ रस्सी के या सिक्कड़ के बनावल जा है। pcwv2jqss8wdk65hmau7kfx57dotwwd 79599 79598 2026-09-11T17:07:03Z अनिरुद्ध कुमार 172 79599 wikitext text/x-wiki ''' पगहा ''' पालतु जानवर के बांध के रखे वाला एगो उपकरण हइ। इ रस्सी के या सिक्कड़ के बनावल जा हइ। ajbkwf4wr6yyyp1l3pnwozbbreok05p 79600 79599 2026-09-11T17:10:24Z अनिरुद्ध कुमार 172 79600 wikitext text/x-wiki ''' पगहा ''' पालतु जानवर के बांध के रखे वाला एगो उपकरण हइ। इ रस्सी के या सिक्कड़ के बनावल जा हइ। एकरा में रस्सी या सिक्कड़ के दोनों छोर पर फंदा बनावल रह है। एक फंदा जानवर के गले में पहिना देल जा है और दोसर सिरा के खूँटा में फँसा देवल जा है। जब जानवर के कहीं ले जाय के रह है तो इ पगहा के खूट्टा वाला सिरा के खु्टटा से निकाल देल जा है। jef6iu0ja72g86upbo4xzmm4suzbw89 79601 79600 2026-09-11T17:12:52Z अनिरुद्ध कुमार 172 79601 wikitext text/x-wiki ''' पगहा ''' पालतु [[जानवर]] के बांध के रखे वाला एगो उपकरण हइ। इ [[रस्सी]] के या [[सिक्कड़]] के बनावल जा हइ। एकरा में रस्सी या सिक्कड़ के दोनों छोर पर फंदा बनावल रह हइ। एक फंदा जानवर के गले में पहिना देल जा हइ और दोसर सिरा के खूँटा में फँसा देवल जा हइ। जब जानवर के कहीं ले जाय के रह हइ तो इ पगहा के खूट्टा वाला सिरा के खु्टटा से निकाल देल जा हइ। ono1jq7nbdjsxzdgdiyz4o4iaivl80v 79602 79601 2026-09-11T17:13:36Z अनिरुद्ध कुमार 172 79602 wikitext text/x-wiki ''' पगहा ''' पालतु [[जानवर]] के बांध के रखे वाला एगो उपकरण हइ। इ [[रस्सी]] के या [[सिक्कड़]] के बनावल जा हइ। एकरा में रस्सी या सिक्कड़ के दोनों छोर पर फंदा बनावल रह हइ। एक फंदा जानवर के गले में पहिना देल जा हइ और दोसर सिरा के खूँटा में फँसा देवल जा हइ। जब जानवर के कहीं ले जाय के रह हइ तो इ पगहा के खूट्टा वाला सिरा के खु्टटा से निकाल देल जा हइ। [[श्रेणी:पशुपालन]] iwqsr2tpo514h5pfangja1a768wyk2p जौरी 0 18119 79606 2026-09-12T00:38:28Z अनिरुद्ध कुमार 172 "''' जौरी ''' बाँधे के उपकरण हइ जे रस्सी की तरह होव हैहइ। इ धान के पुआल से बुनल रस्सी हइ। एकरा से जानवर के या सामान के बाँधल जा हइ। किसान एकर मदद से आँटी के बाँध के बोझा बा..." सङ्गे नया पन्ना बनावल गेलै 79606 wikitext text/x-wiki ''' जौरी ''' बाँधे के उपकरण हइ जे रस्सी की तरह होव हैहइ। इ धान के पुआल से बुनल रस्सी हइ। एकरा से जानवर के या सामान के बाँधल जा हइ। किसान एकर मदद से आँटी के बाँध के बोझा बाब हथिन। एकरा छप्पर छावे में भी उपयोग कइल जा हइ। 02li9c99oj981lg449nwsrvh23bvwjv 79607 79606 2026-09-12T00:42:14Z अनिरुद्ध कुमार 172 79607 wikitext text/x-wiki ''' जौरी ''' बाँधे के उपकरण हइ जे [[रस्सी]] की तरह होव हैहइ। इ [[धान]] के [[पुआल]] से बुनल रस्सी हइ। एकरा से [[जानवर]] के या सामान के बाँधल जा हइ। किसान एकर मदद से [[आँटी]] के बाँध के [[बोझा]] बनाब हथिन। एकरा [[छप्पर]] छावे में भी उपयोग कइल जा हइ। mtd350hg626qxyzioqcdwrktqpaqsiu 79608 79607 2026-09-12T00:43:24Z अनिरुद्ध कुमार 172 79608 wikitext text/x-wiki ''' जौरी ''' बाँधे के उपकरण हइ जे [[रस्सी]] की तरह होव हैहइ। इ [[धान]] के [[पुआल]] से बुनल रस्सी हइ। एकरा से [[जानवर]] के या सामान के बाँधल जा हइ। किसान एकर मदद से [[आँटी]] के बाँध के [[बोझा]] बनाब हथिन। एकरा [[छप्पर]] छावे में भी उपयोग कइल जा हइ। [[श्रेणी:खेती]] [[श्रेणी:पशुपालन]] [[श्रेणी:सामान]] o4nxjrfljzds372u7gjshs1tpfvz4db 79616 79608 2026-09-12T01:02:13Z अनिरुद्ध कुमार 172 79616 wikitext text/x-wiki ''' जौरी ''' बाँधे के सामान हइ जे [[रस्सी]] की तरह होव हैहइ। इ [[धान]] के [[पुआल]] से बुनल रस्सी हइ। एकरा से [[जानवर]] के या सामान के बाँधल जा हइ। किसान एकर मदद से [[आँटी]] के बाँध के [[बोझा]] बनाब हथिन। एकरा [[छप्पर]] छावे में भी उपयोग कइल जा हइ। [[श्रेणी:खेती]] [[श्रेणी:पशुपालन]] [[श्रेणी:सामान]] jvc0ukm6yq0inknz3210eb93ak9mbkh 79617 79616 2026-09-12T01:03:09Z अनिरुद्ध कुमार 172 79617 wikitext text/x-wiki ''' जौरी ''' बाँधे के सामान हइ जे [[रस्सी]] की तरह होव हैहइ। इ [[धान]] के [[पुआल]] से बुनल रस्सी हइ। एकरा से [[जानवर]] के या सामान के बाँधल जा हइ। किसान एकर मदद से [[आँटी]] के बाँध के [[बोझा]] बनाब हथिन। एकरा [[छप्पर]] छावे में भी उपयोग कइल जा हइ। [[बर्ग:खेती]] [[बर्ग:पशुपालन]] [[बर्ग:सामान]] i20mmbn5vv1wvi5kmppfxip0mg11275 श्रेणी:सामान 14 18120 79609 2026-09-12T00:44:08Z अनिरुद्ध कुमार 172 "यह सामान से संबंधित श्रेणी हइ।" सङ्गे नया पन्ना बनावल गेलै 79609 wikitext text/x-wiki यह सामान से संबंधित श्रेणी हइ। 2jkpw0s636sszfkozbxe28ldaaaww0v 79610 79609 2026-09-12T00:45:13Z अनिरुद्ध कुमार 172 79610 wikitext text/x-wiki यह सामान से संबंधित श्रेणी हइ। [[श्रेणी:विकिपीडिया]] 35wu2zejjvoksres4enveazr7mebia1 श्रेणी:खेती 14 18121 79611 2026-09-12T00:46:30Z अनिरुद्ध कुमार 172 "इ खेती से संबंधित श्रेणी हइ।" सङ्गे नया पन्ना बनावल गेलै 79611 wikitext text/x-wiki इ खेती से संबंधित श्रेणी हइ। hu98jifkue4b7rqsmct7l5o349oxn0i 79612 79611 2026-09-12T00:47:17Z अनिरुद्ध कुमार 172 79612 wikitext text/x-wiki इ खेती से संबंधित श्रेणी हइ। [[श्रेणी:धंधा]] k5ghsu7lepd5tj7z1l2ialhk9zc35w4 श्रेणी:धंधा 14 18122 79613 2026-09-12T00:47:56Z अनिरुद्ध कुमार 172 "इ धंधा से संबंधित श्रेणी हइ।" सङ्गे नया पन्ना बनावल गेलै 79613 wikitext text/x-wiki इ धंधा से संबंधित श्रेणी हइ। 5pl5h3517pybk5tor7rcs6k3cmcsdtk 79614 79613 2026-09-12T00:48:54Z अनिरुद्ध कुमार 172 79614 wikitext text/x-wiki इ धंधा से संबंधित श्रेणी हइ। [[श्रेणी:विकिपीडिया]] 7wedtyl3d0xgketj7l5nb6t4zki2g0k धान 0 18123 79618 2026-09-12T01:06:22Z अनिरुद्ध कुमार 172 "''' धान ''' एगो अनाज हइ। इ दू तरह के होब हइ। गरमाधान गरमी में उगाबल जा हइ। बरसाती धान बरसात के मौसम में उगाबल जा हइ। इ मगही क्षेत्र के लोगन के मुख्य भोजन है। इ दक्षिण भार..." सङ्गे नया पन्ना बनावल गेलै 79618 wikitext text/x-wiki ''' धान ''' एगो अनाज हइ। इ दू तरह के होब हइ। गरमाधान गरमी में उगाबल जा हइ। बरसाती धान बरसात के मौसम में उगाबल जा हइ। इ मगही क्षेत्र के लोगन के मुख्य भोजन है। इ दक्षिण भारत, बंगाल, उड़िसा, बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश आदि राज्यन के भी मुख्य खाना हइ। hmqgwmdfyaclu2wngwi8a7brjt75rxe 79619 79618 2026-09-12T01:07:15Z अनिरुद्ध कुमार 172 79619 wikitext text/x-wiki ''' धान ''' एगो अनाज हइ। इ दू तरह के होब हइ। गरमाधान गरमी में उगाबल जा हइ। बरसाती धान बरसात के मौसम में उगाबल जा हइ। इ मगही क्षेत्र के लोगन के मुख्य भोजन है। इ दक्षिण भारत, बंगाल, उड़िसा, बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश आदि राज्यन के भी मुख्य खाना हइ। [[बर्ग:अनाज]] [[बर्ग:खेती]] bcuml7pzrwuzrbzae1ruirjql4kxezw 79622 79619 2026-09-12T01:12:24Z अनिरुद्ध कुमार 172 79622 wikitext text/x-wiki ''' धान ''' एगो [[अनाज]] हइ। इ दू तरह के होब हइ। गरमाधान गरमी में उगाबल जा हइ। बरसाती धान बरसात के मौसम में उगाबल जा हइ। इ मगही क्षेत्र के लोगन के मुख्य भोजन हइ। इ दक्षिण भारत, [[बंगाल]], [[ओड़िसा]], [[बिहार]], [[झारखंड]], [[उत्तरप्रदेश]] आदि राज्यन के भी मुख्य खाना हइ। [[बर्ग:अनाज]] [[बर्ग:खेती]] ey4kpcwf9a5su7ejz9lxfmcpp2j9j2p 79623 79622 2026-09-12T01:14:12Z अनिरुद्ध कुमार 172 79623 wikitext text/x-wiki ''' धान ''' एगो [[अनाज]] हइ। इ दू तरह के होब हइ। गरमाधान गरमी में उगाबल जा हइ। बरसाती धान बरसात के मौसम में उगाबल जा हइ। इ मगही क्षेत्र के लोगन के मुख्य भोजन हइ। इ दक्षिण भारत, [[बंगाल]], [[ओड़िसा]], [[बिहार]], [[झारखंड]], [[उत्तरप्रदेश]] आदि राज्यन के भी मुख्य खाना हइ। चीन औ भारत में एकर बहुत पैदावार होब हइ। छत्तीसगढ़ के धन के कटोरा कहल जा हइ। [[बर्ग:अनाज]] [[बर्ग:खेती]] s8pkcyqjody20ycpf3g3glhu0bpks9l 79624 79623 2026-09-12T02:11:44Z AMAN KUMAR 377 कड़ी+ 79624 wikitext text/x-wiki ''' धान ''' एगो [[अनाज]] हइ। इ दू तरह के होब हइ। गरमाधान गरमी में उगाबल जा हइ। बरसाती धान बरसात के मौसम में उगाबल जा हइ। इ मगही क्षेत्र के लोगन के मुख्य भोजन हइ। इ [[दक्षिणभारत]], [[बंगाल]], [[ओड़िसा]], [[बिहार]], [[झारखंड]], [[उत्तरप्रदेश]] आदि राज्यन के भी मुख्य खाना हइ। [[चीन]] औ [[भारत]] में एकर बहुत पैदावार होब हइ। [[छत्तीसगढ़]] के धन के कटोरा कहल जा हइ। [[बर्ग:अनाज]] [[बर्ग:खेती]] 5lothiil92imvbm7m6fx6ylui8pn41r श्रेणी:अनाज 14 18124 79620 2026-09-12T01:08:00Z अनिरुद्ध कुमार 172 "इ अनाज से संबंधित श्रेणी हइ।" सङ्गे नया पन्ना बनावल गेलै 79620 wikitext text/x-wiki इ अनाज से संबंधित श्रेणी हइ। bzdlnmxbea85s9dp707l98zpe7lkazt 79621 79620 2026-09-12T01:09:20Z अनिरुद्ध कुमार 172 79621 wikitext text/x-wiki इ अनाज से संबंधित श्रेणी हइ। [[बर्ग:खेती]] [[बर्ग:वनस्पति विज्ञान]] ldfu217yvc0zdmlm98ts7rb0omxcnpf प्रतापपुर (कन्नौज) 0 18125 79627 2026-09-12T02:44:38Z AMAN KUMAR 377 + 79627 wikitext text/x-wiki [[सञ्चिका:प्रतापपुर कन्नौज.jpg|thumb|प्रतापपुरके एगो गाँओ]] प्रतापपुर, भारतीय राज्य [[उत्तरप्रदेश]]<nowiki/>के [[कन्नौज]] जिलाके एगो [[गाँओ]] हइ । एखर पिनकोड २०९७३३ हइ ।<ref name="f184">{{cite web|title=Partappur Village Population|website=Census 2011 India|url=https://www.census2011.co.in/data/village/146962-partappur-uttar-pradesh.html|access-date=2026-09-12}}</ref> == सन्दर्भ == <references /> [[श्रेणी:कन्नौज]] 3643mhsezu6jao6ymo2c38bopvlzh7z 79628 79627 2026-09-12T02:46:00Z AMAN KUMAR 377 सुधार 79628 wikitext text/x-wiki [[सञ्चिका:प्रतापपुर कन्नौज.jpg|thumb|प्रतापपुरके एगो चित्र ]] प्रतापपुर, भारतीय राज्य [[उत्तरप्रदेश]]<nowiki/>के [[कन्नौज]] जिलाके एगो [[गाँओ]] हइ । एखर पिनकोड २०९७३३ हइ ।<ref name="f184">{{cite web|title=Partappur Village Population|website=Census 2011 India|url=https://www.census2011.co.in/data/village/146962-partappur-uttar-pradesh.html|access-date=2026-09-12}}</ref> == सन्दर्भ == <references /> [[श्रेणी:कन्नौज]] ly4nmi5sb1vg7ml08q3cwily8wawtup जय जिनेन्द्र 0 18126 79629 2026-09-12T06:37:56Z Pataliputra01 5 "{{जैनधर्म}}" सङ्गे नया पन्ना बनावल गेलै 79629 wikitext text/x-wiki {{जैनधर्म}} nvakbdbfofsfy4mb63vqb2e0k1jaa13 79630 79629 2026-09-12T06:39:03Z Pataliputra01 5 /* */ 79630 wikitext text/x-wiki {{जैनधर्म}} '''जय जिनेन्द्र''' एक प्रख्यात अभिवादन है । ई मुख्य रूपसे [[जैनधर्म]]के अनुयायी द्वारा प्रयोग कैल जा है । एकर अर्थ होव है "जिनेन्द्र भगवान् ([[तीर्थङ्कर]]) के नमस्कार" ।{{Sfn|Rankin|2013|p = 37}} ई दु संस्कृत अक्षरके मेलसे बनल है - जय आउ जिनेन्द्र । l5tapmrasnd2hl56zknifjlgc56x9kl 79631 79630 2026-09-12T06:40:11Z Pataliputra01 5 /* */ 79631 wikitext text/x-wiki {{जैनधर्म}} '''जय जिनेन्द्र''' एक प्रख्यात अभिवादन है । ई मुख्य रूपसे [[जैनधर्म]]के अनुयायी द्वारा प्रयोग कैल जा है । एकर अर्थ होव है "जिनेन्द्र भगवान् ([[तीर्थङ्कर]]) के नमस्कार" ।{{Sfn|Rankin|2013|p = 37}} ई दु संस्कृत अक्षरके मेलसे बनल है - जय आउ जिनेन्द्र । : '''जय''' शब्द [[केवली|जिनेन्द्र भगवान्]] के गुणके प्रशंसाला प्रयोग कैल जा है । : '''जिनेन्द्र''' ऊ सब आत्माला प्रयोग कैल जा है जे अपन मन, वचन आउ कायाके जीत लेलथिन आउ [[केवलज्ञान]] प्राप्त कर लेलथिन हो ।{{Sfn|Rankin|2013|p = 37}}{{Sfn|Sangave|2001|p = 16}}{{Sfn|Sangave|2001|p = 164}} owc049pdah45x495xc8ma53xoc6lp4m 79632 79631 2026-09-12T06:40:48Z Pataliputra01 5 /* */ 79632 wikitext text/x-wiki {{जैनधर्म}} '''जय जिनेन्द्र''' एक प्रख्यात अभिवादन है । ई मुख्य रूपसे [[जैनधर्म]]के अनुयायी द्वारा प्रयोग कैल जा है । एकर अर्थ होव है "जिनेन्द्र भगवान् ([[तीर्थङ्कर]]) के नमस्कार" ।{{Sfn|Rankin|2013|p = 37}} ई दु संस्कृत अक्षरके मेलसे बनल है - जय आउ जिनेन्द्र । : '''जय''' शब्द [[केवली|जिनेन्द्र भगवान्]] के गुणके प्रशंसाला प्रयोग कैल जा है । : '''जिनेन्द्र''' ऊ सब आत्माला प्रयोग कैल जा है जे अपन मन, वचन आउ कायाके जीत लेलथिन आउ [[केवलज्ञान]] प्राप्त कर लेलथिन हो ।{{Sfn|Rankin|2013|p = 37}}{{Sfn|Sangave|2001|p = 16}}{{Sfn|Sangave|2001|p = 164}} ==एकरो देखथिन== {{प्रवेशद्वार|जैनधर्म}} * [[महावीर]] kx3815kqdilmi61upz92psnjmp1ue2q 79633 79632 2026-09-12T06:41:02Z Pataliputra01 5 79633 wikitext text/x-wiki {{जैनधर्म}} '''जय जिनेन्द्र''' एक प्रख्यात अभिवादन है । ई मुख्य रूपसे [[जैनधर्म]]के अनुयायी द्वारा प्रयोग कैल जा है । एकर अर्थ होव है "जिनेन्द्र भगवान् ([[तीर्थङ्कर]]) के नमस्कार" ।{{Sfn|Rankin|2013|p = 37}} ई दु संस्कृत अक्षरके मेलसे बनल है - जय आउ जिनेन्द्र । : '''जय''' शब्द [[केवली|जिनेन्द्र भगवान्]] के गुणके प्रशंसाला प्रयोग कैल जा है । : '''जिनेन्द्र''' ऊ सब आत्माला प्रयोग कैल जा है जे अपन मन, वचन आउ कायाके जीत लेलथिन आउ [[केवलज्ञान]] प्राप्त कर लेलथिन हो ।{{Sfn|Rankin|2013|p = 37}}{{Sfn|Sangave|2001|p = 16}}{{Sfn|Sangave|2001|p = 164}} ==एकरो देखथिन== {{प्रवेशद्वार|जैनधर्म}} * [[महावीर]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} g9yqseelie73og350gho6esutpef28q 79634 79633 2026-09-12T06:41:26Z Pataliputra01 5 79634 wikitext text/x-wiki {{जैनधर्म}} '''जय जिनेन्द्र''' एक प्रख्यात अभिवादन है । ई मुख्य रूपसे [[जैनधर्म]]के अनुयायी द्वारा प्रयोग कैल जा है । एकर अर्थ होव है "जिनेन्द्र भगवान् ([[तीर्थङ्कर]]) के नमस्कार" ।{{Sfn|Rankin|2013|p = 37}} ई दु संस्कृत अक्षरके मेलसे बनल है - जय आउ जिनेन्द्र । : '''जय''' शब्द [[केवली|जिनेन्द्र भगवान्]] के गुणके प्रशंसाला प्रयोग कैल जा है । : '''जिनेन्द्र''' ऊ सब आत्माला प्रयोग कैल जा है जे अपन मन, वचन आउ कायाके जीत लेलथिन आउ [[केवलज्ञान]] प्राप्त कर लेलथिन हो ।{{Sfn|Rankin|2013|p = 37}}{{Sfn|Sangave|2001|p = 16}}{{Sfn|Sangave|2001|p = 164}} ==एकरो देखथिन== {{प्रवेशद्वार|जैनधर्म}} * [[महावीर]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == स्रोत ग्रन्थ == * {{Citation|last = Rankin|first = Aidan|title = Living Jainism: An Ethical Science|url = https://books.google.co.in/books?id=bQxZAQAAQBAJ&dq=jai+jinendra&source=gbs_navlinks_s|year = 2013|publisher = John Hunt Publishing|isbn = 978-1780999111|chapter = Chapter 1. Jains Jainism and Jainness|access-date = 20 सितम्बर 2015|archive-url = https://web.archive.org/web/20160303235306/https://books.google.co.in/books?id=bQxZAQAAQBAJ&dq=jai+jinendra&source=gbs_navlinks_s|archive-date = 3 मार्च 2016|url-status = live}} * {{Citation|last = Sangave|first = Vilas Adinath|title = Aspects of Jaina religion|url = http://books.google.com/books?id=8UhvGRoyAqMC|edition = 3rd|year = 2001|publisher = Bharatiya Jnanpith|isbn = 81-263-0626-2|access-date = 20 सितम्बर 2015|archive-url = https://web.archive.org/web/20160506083824/https://books.google.com/books?id=8UhvGRoyAqMC|archive-date = 6 मई 2016|url-status = live}} 5u1s8bniik8aqyi4iynxt7mh0p66aej 79635 79634 2026-09-12T06:41:39Z Pataliputra01 5 79635 wikitext text/x-wiki {{जैनधर्म}} '''जय जिनेन्द्र''' एक प्रख्यात अभिवादन है । ई मुख्य रूपसे [[जैनधर्म]]के अनुयायी द्वारा प्रयोग कैल जा है । एकर अर्थ होव है "जिनेन्द्र भगवान् ([[तीर्थङ्कर]]) के नमस्कार" ।{{Sfn|Rankin|2013|p = 37}} ई दु संस्कृत अक्षरके मेलसे बनल है - जय आउ जिनेन्द्र । : '''जय''' शब्द [[केवली|जिनेन्द्र भगवान्]] के गुणके प्रशंसाला प्रयोग कैल जा है । : '''जिनेन्द्र''' ऊ सब आत्माला प्रयोग कैल जा है जे अपन मन, वचन आउ कायाके जीत लेलथिन आउ [[केवलज्ञान]] प्राप्त कर लेलथिन हो ।{{Sfn|Rankin|2013|p = 37}}{{Sfn|Sangave|2001|p = 16}}{{Sfn|Sangave|2001|p = 164}} ==एकरो देखथिन== {{प्रवेशद्वार|जैनधर्म}} * [[महावीर]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == स्रोत ग्रन्थ == * {{Citation|last = Rankin|first = Aidan|title = Living Jainism: An Ethical Science|url = https://books.google.co.in/books?id=bQxZAQAAQBAJ&dq=jai+jinendra&source=gbs_navlinks_s|year = 2013|publisher = John Hunt Publishing|isbn = 978-1780999111|chapter = Chapter 1. Jains Jainism and Jainness|access-date = 20 सितम्बर 2015|archive-url = https://web.archive.org/web/20160303235306/https://books.google.co.in/books?id=bQxZAQAAQBAJ&dq=jai+jinendra&source=gbs_navlinks_s|archive-date = 3 मार्च 2016|url-status = live}} * {{Citation|last = Sangave|first = Vilas Adinath|title = Aspects of Jaina religion|url = http://books.google.com/books?id=8UhvGRoyAqMC|edition = 3rd|year = 2001|publisher = Bharatiya Jnanpith|isbn = 81-263-0626-2|access-date = 20 सितम्बर 2015|archive-url = https://web.archive.org/web/20160506083824/https://books.google.com/books?id=8UhvGRoyAqMC|archive-date = 6 मई 2016|url-status = live}} {{जैन विषय}} g3q7xltch5nz5gq6bebbu4ppzj0l1m7 79636 79635 2026-09-12T06:41:58Z Pataliputra01 5 79636 wikitext text/x-wiki {{जैनधर्म}} '''जय जिनेन्द्र''' एक प्रख्यात अभिवादन है । ई मुख्य रूपसे [[जैनधर्म]]के अनुयायी द्वारा प्रयोग कैल जा है । एकर अर्थ होव है "जिनेन्द्र भगवान् ([[तीर्थङ्कर]]) के नमस्कार" ।{{Sfn|Rankin|2013|p = 37}} ई दु संस्कृत अक्षरके मेलसे बनल है - जय आउ जिनेन्द्र । : '''जय''' शब्द [[केवली|जिनेन्द्र भगवान्]] के गुणके प्रशंसाला प्रयोग कैल जा है । : '''जिनेन्द्र''' ऊ सब आत्माला प्रयोग कैल जा है जे अपन मन, वचन आउ कायाके जीत लेलथिन आउ [[केवलज्ञान]] प्राप्त कर लेलथिन हो ।{{Sfn|Rankin|2013|p = 37}}{{Sfn|Sangave|2001|p = 16}}{{Sfn|Sangave|2001|p = 164}} ==एकरो देखथिन== {{प्रवेशद्वार|जैनधर्म}} * [[महावीर]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == स्रोत ग्रन्थ == * {{Citation|last = Rankin|first = Aidan|title = Living Jainism: An Ethical Science|url = https://books.google.co.in/books?id=bQxZAQAAQBAJ&dq=jai+jinendra&source=gbs_navlinks_s|year = 2013|publisher = John Hunt Publishing|isbn = 978-1780999111|chapter = Chapter 1. Jains Jainism and Jainness|access-date = 20 सितम्बर 2015|archive-url = https://web.archive.org/web/20160303235306/https://books.google.co.in/books?id=bQxZAQAAQBAJ&dq=jai+jinendra&source=gbs_navlinks_s|archive-date = 3 मार्च 2016|url-status = live}} * {{Citation|last = Sangave|first = Vilas Adinath|title = Aspects of Jaina religion|url = http://books.google.com/books?id=8UhvGRoyAqMC|edition = 3rd|year = 2001|publisher = Bharatiya Jnanpith|isbn = 81-263-0626-2|access-date = 20 सितम्बर 2015|archive-url = https://web.archive.org/web/20160506083824/https://books.google.com/books?id=8UhvGRoyAqMC|archive-date = 6 मई 2016|url-status = live}} {{जैन विषय}} [[श्रेणी:भारतके अभिवादन शब्द आउ वाक्यांश]] [[श्रेणी:जैनधर्म]] 4olnkpbw8h14qjs862fkzcib6pnky9c जैनधर्ममे भगवान् 0 18127 79637 2026-09-12T06:43:16Z Pataliputra01 5 "{{जैनधर्म}}" सङ्गे नया पन्ना बनावल गेलै 79637 wikitext text/x-wiki {{जैनधर्म}} nvakbdbfofsfy4mb63vqb2e0k1jaa13 79638 79637 2026-09-12T06:46:50Z Pataliputra01 5 /* */ 79638 wikitext text/x-wiki {{जैनधर्म}} '''जैनधर्ममे भगवान्''' [[अरिहन्त]] ([[केवली]]) आउ [[सिद्ध (जैनधर्म)|सिद्ध]] (मुक्त आत्मा) के कहल जा है । [[जैनधर्म]] ई ब्रह्माण्डके अभिव्यक्ति, निर्माण या रखरखावला जिम्मेदार कौनो निर्माता ईश्वर या शक्तिके धारणाके खारिज कर है ।{{sfn|शास्त्री|२००७|p=८७}} [[जैन दर्शन]]के अनुसार ई लोक आउ एकर छौ [[द्रव्य (जैन दर्शन)|द्रव्य]] ([[जीव]], [[पुद्गल]], [[आकाश]], [[काल]], [[धर्म]] आउ [[अधर्म]]) हमेशासे है आउ एकर अस्तित्व हमेशा रहतै । ई ब्रह्माण्ड स्वयं सञ्चालित है आउ सार्वभौमिक प्राकृतिक विधि पर चल है । जैन दर्शनके अनुसार भगवान्, एक अमूर्तिक वस्तु एक मूर्तिक वस्तु (ब्रह्माण्ड) के निर्माण न कर सकै । [[जैन ग्रन्थ]]मे देव (स्वर्ग निवासी) के एक विस्तृत विवरण भेट है किन्तु ई सब प्राणीके रचनाकारके रूपमे न देखल जा है; ओखनियो दुखके अधीन हथिन आउ अन्य सब जीवित प्राणी नियन अपन आयु पूरा करके अन्तिममे मर जा हथिन । r8lq75cciawkc80vsq89nw5o40tkn5s 79639 79638 2026-09-12T06:50:33Z Pataliputra01 5 /* */ 79639 wikitext text/x-wiki {{जैनधर्म}} '''जैनधर्ममे भगवान्''' [[अरिहन्त]] ([[केवली]]) आउ [[सिद्ध (जैनधर्म)|सिद्ध]] (मुक्त आत्मा) के कहल जा है । [[जैनधर्म]] ई ब्रह्माण्डके अभिव्यक्ति, निर्माण या रखरखावला जिम्मेदार कौनो निर्माता ईश्वर या शक्तिके धारणाके खारिज कर है ।{{sfn|शास्त्री|२००७|p=८७}} [[जैन दर्शन]]के अनुसार ई लोक आउ एकर छौ [[द्रव्य (जैन दर्शन)|द्रव्य]] ([[जीव]], [[पुद्गल]], [[आकाश]], [[काल]], [[धर्म]] आउ [[अधर्म]]) हमेशासे है आउ एकर अस्तित्व हमेशा रहतै । ई ब्रह्माण्ड स्वयं सञ्चालित है आउ सार्वभौमिक प्राकृतिक विधि पर चल है । जैन दर्शनके अनुसार भगवान्, एक अमूर्तिक वस्तु एक मूर्तिक वस्तु (ब्रह्माण्ड) के निर्माण न कर सकै । [[जैन ग्रन्थ]]मे देव (स्वर्ग निवासी) के एक विस्तृत विवरण भेट है किन्तु ई सब प्राणीके रचनाकारके रूपमे न देखल जा है; ओखनियो दुखके अधीन हथिन आउ अन्य सब जीवित प्राणी नियन अपन आयु पूरा करके अन्तिममे मर जा हथिन । जैनधर्मके अनुसार ई सृष्टिके कोनो न बनैलकै । देवी, देवता जे स्वर्गमे हथिन ऊ अपन निमन कर्मके कारण ओहाँ हथिन आउ भगवान् न मानल जा सकथिन । ई देवी, देवता एक निश्चित समयला ओहाँ हथिन आउ एहु मरण उपरान्त मनुष्य बनके मोक्ष जा सक हथिन । जैनधर्मके अनुसार हर आत्माके असली स्वभाव भगवन्ता है आउ हर आत्मामे अनन्त दर्शन, अनन्त शक्ति, अनन्त ज्ञान आउ अनन्त सुख है । आत्मा आउ कर्म पुद्गलके बन्धनके कारण ई गुण प्रकट न हो पावै । सम्यक् दर्शन, [[सम्यक् ज्ञान]], सम्यक् चरित्रके माध्यमसे आत्माके ई राज्यके प्राप्त कैल जा सक है । ई सब रतन्त्रयके धारकके भगवान् कहल जा है । एक भगवान्, ई प्रकार एक मुक्त आत्मा हो जा है - दुखसे मुक्ति, पुनर्जन्म, दुनिया, कर्म आउ अन्तिममे शरीरोसे मुक्ति । एकरा निर्वाण या [[मोक्ष (जैनधर्म)|मोक्ष]] कहल जा है । ई प्रकार जैनधर्ममे अनन्त भगवान हथिन, सब बराबर, मुक्त आउ सब गुणके अभिव्यक्तिमे अनन्त हथिन ।  m3wbrxhi53gjpjrgopxecpwdc427kdb 79640 79639 2026-09-12T06:52:44Z Pataliputra01 5 /* */ 79640 wikitext text/x-wiki {{जैनधर्म}} '''जैनधर्ममे भगवान्''' [[अरिहन्त]] ([[केवली]]) आउ [[सिद्ध (जैनधर्म)|सिद्ध]] (मुक्त आत्मा) के कहल जा है । [[जैनधर्म]] ई ब्रह्माण्डके अभिव्यक्ति, निर्माण या रखरखावला जिम्मेदार कौनो निर्माता ईश्वर या शक्तिके धारणाके खारिज कर है ।{{sfn|शास्त्री|२००७|p=८७}} [[जैन दर्शन]]के अनुसार ई लोक आउ एकर छौ [[द्रव्य (जैन दर्शन)|द्रव्य]] ([[जीव]], [[पुद्गल]], [[आकाश]], [[काल]], [[धर्म]] आउ [[अधर्म]]) हमेशासे है आउ एकर अस्तित्व हमेशा रहतै । ई ब्रह्माण्ड स्वयं सञ्चालित है आउ सार्वभौमिक प्राकृतिक विधि पर चल है । जैन दर्शनके अनुसार भगवान्, एक अमूर्तिक वस्तु एक मूर्तिक वस्तु (ब्रह्माण्ड) के निर्माण न कर सकै । [[जैन ग्रन्थ]]मे देव (स्वर्ग निवासी) के एक विस्तृत विवरण भेट है किन्तु ई सब प्राणीके रचनाकारके रूपमे न देखल जा है; ओखनियो दुखके अधीन हथिन आउ अन्य सब जीवित प्राणी नियन अपन आयु पूरा करके अन्तिममे मर जा हथिन । जैनधर्मके अनुसार ई सृष्टिके कोनो न बनैलकै । देवी, देवता जे स्वर्गमे हथिन ऊ अपन निमन कर्मके कारण ओहाँ हथिन आउ भगवान् न मानल जा सकथिन । ई देवी, देवता एक निश्चित समयला ओहाँ हथिन आउ एहु मरण उपरान्त मनुष्य बनके मोक्ष जा सक हथिन । जैनधर्मके अनुसार हर आत्माके असली स्वभाव भगवन्ता है आउ हर आत्मामे अनन्त दर्शन, अनन्त शक्ति, अनन्त ज्ञान आउ अनन्त सुख है । आत्मा आउ कर्म पुद्गलके बन्धनके कारण ई गुण प्रकट न हो पावै । सम्यक् दर्शन, [[सम्यक् ज्ञान]], सम्यक् चरित्रके माध्यमसे आत्माके ई राज्यके प्राप्त कैल जा सक है । ई सब रतन्त्रयके धारकके भगवान् कहल जा है । एक भगवान्, ई प्रकार एक मुक्त आत्मा हो जा है - दुखसे मुक्ति, पुनर्जन्म, दुनिया, कर्म आउ अन्तिममे शरीरोसे मुक्ति । एकरा निर्वाण या [[मोक्ष (जैनधर्म)|मोक्ष]] कहल जा है । ई प्रकार जैनधर्ममे अनन्त भगवान हथिन, सब बराबर, मुक्त आउ सब गुणके अभिव्यक्तिमे अनन्त हथिन । [[जैन दर्शन]]के अनुसार कर्म प्रकृतिके मौलिक कण होव है । जे कर्मके हनन करके केवलज्ञान प्राप्त कर लेलकै हे ओकरा [[अरिहन्त]] कहल जा है । तीर्थङ्कर विशेष अरिहन्त होव हथिन जे 'धर्म तीर्थ' के रचना कर हथिनम। मने कि जे अन्य जीवके मोक्ष-मार्ग देखाव है । जैनधर्म कोनो सर्वोच्च जीव पर निर्भरता न सिखावै । तीर्थङ्कर आत्मज्ञानला रस्ता देखाव हथिन किन्तु ज्ञानला सङ्घर्ष अपने करे पड़ है ।  4eexxe1qmbgov4dvv3u9zgafpdidl9m 79641 79640 2026-09-12T06:53:04Z Pataliputra01 5 /* */ 79641 wikitext text/x-wiki {{जैनधर्म}} '''जैनधर्ममे भगवान्''' [[अरिहन्त]] ([[केवली]]) आउ [[सिद्ध (जैनधर्म)|सिद्ध]] (मुक्त आत्मा) के कहल जा है । [[जैनधर्म]] ई ब्रह्माण्डके अभिव्यक्ति, निर्माण या रखरखावला जिम्मेदार कौनो निर्माता ईश्वर या शक्तिके धारणाके खारिज कर है ।{{sfn|शास्त्री|२००७|p=८७}} [[जैन दर्शन]]के अनुसार ई लोक आउ एकर छौ [[द्रव्य (जैन दर्शन)|द्रव्य]] ([[जीव]], [[पुद्गल]], [[आकाश]], [[काल]], [[धर्म]] आउ [[अधर्म]]) हमेशासे है आउ एकर अस्तित्व हमेशा रहतै । ई ब्रह्माण्ड स्वयं सञ्चालित है आउ सार्वभौमिक प्राकृतिक विधि पर चल है । जैन दर्शनके अनुसार भगवान्, एक अमूर्तिक वस्तु एक मूर्तिक वस्तु (ब्रह्माण्ड) के निर्माण न कर सकै । [[जैन ग्रन्थ]]मे देव (स्वर्ग निवासी) के एक विस्तृत विवरण भेट है किन्तु ई सब प्राणीके रचनाकारके रूपमे न देखल जा है; ओखनियो दुखके अधीन हथिन आउ अन्य सब जीवित प्राणी नियन अपन आयु पूरा करके अन्तिममे मर जा हथिन । जैनधर्मके अनुसार ई सृष्टिके कोनो न बनैलकै । देवी, देवता जे स्वर्गमे हथिन ऊ अपन निमन कर्मके कारण ओहाँ हथिन आउ भगवान् न मानल जा सकथिन । ई देवी, देवता एक निश्चित समयला ओहाँ हथिन आउ एहु मरण उपरान्त मनुष्य बनके मोक्ष जा सक हथिन । जैनधर्मके अनुसार हर आत्माके असली स्वभाव भगवन्ता है आउ हर आत्मामे अनन्त दर्शन, अनन्त शक्ति, अनन्त ज्ञान आउ अनन्त सुख है । आत्मा आउ कर्म पुद्गलके बन्धनके कारण ई गुण प्रकट न हो पावै । सम्यक् दर्शन, [[सम्यक् ज्ञान]], सम्यक् चरित्रके माध्यमसे आत्माके ई राज्यके प्राप्त कैल जा सक है । ई सब रतन्त्रयके धारकके भगवान् कहल जा है । एक भगवान्, ई प्रकार एक मुक्त आत्मा हो जा है - दुखसे मुक्ति, पुनर्जन्म, दुनिया, कर्म आउ अन्तिममे शरीरोसे मुक्ति । एकरा निर्वाण या [[मोक्ष (जैनधर्म)|मोक्ष]] कहल जा है । ई प्रकार जैनधर्ममे अनन्त भगवान हथिन, सब बराबर, मुक्त आउ सब गुणके अभिव्यक्तिमे अनन्त हथिन । [[जैन दर्शन]]के अनुसार कर्म प्रकृतिके मौलिक कण होव है । जे कर्मके हनन करके केवलज्ञान प्राप्त कर लेलकै हे ओकरा [[अरिहन्त]] कहल जा है । तीर्थङ्कर विशेष अरिहन्त होव हथिन जे 'धर्म तीर्थ' के रचना कर हथिनम। मने कि जे अन्य जीवके मोक्ष-मार्ग देखाव है । जैनधर्म कोनो सर्वोच्च जीव पर निर्भरता न सिखावै । तीर्थङ्कर आत्मज्ञानला रस्ता देखाव हथिन किन्तु ज्ञानला सङ्घर्ष अपने करे पड़ है । ==एकरो देखथिन== * [[गुणस्थान]] 5z5oqf33x8yfks8fzv9vq71txb5sml6 79642 79641 2026-09-12T06:53:17Z Pataliputra01 5 79642 wikitext text/x-wiki {{जैनधर्म}} '''जैनधर्ममे भगवान्''' [[अरिहन्त]] ([[केवली]]) आउ [[सिद्ध (जैनधर्म)|सिद्ध]] (मुक्त आत्मा) के कहल जा है । [[जैनधर्म]] ई ब्रह्माण्डके अभिव्यक्ति, निर्माण या रखरखावला जिम्मेदार कौनो निर्माता ईश्वर या शक्तिके धारणाके खारिज कर है ।{{sfn|शास्त्री|२००७|p=८७}} [[जैन दर्शन]]के अनुसार ई लोक आउ एकर छौ [[द्रव्य (जैन दर्शन)|द्रव्य]] ([[जीव]], [[पुद्गल]], [[आकाश]], [[काल]], [[धर्म]] आउ [[अधर्म]]) हमेशासे है आउ एकर अस्तित्व हमेशा रहतै । ई ब्रह्माण्ड स्वयं सञ्चालित है आउ सार्वभौमिक प्राकृतिक विधि पर चल है । जैन दर्शनके अनुसार भगवान्, एक अमूर्तिक वस्तु एक मूर्तिक वस्तु (ब्रह्माण्ड) के निर्माण न कर सकै । [[जैन ग्रन्थ]]मे देव (स्वर्ग निवासी) के एक विस्तृत विवरण भेट है किन्तु ई सब प्राणीके रचनाकारके रूपमे न देखल जा है; ओखनियो दुखके अधीन हथिन आउ अन्य सब जीवित प्राणी नियन अपन आयु पूरा करके अन्तिममे मर जा हथिन । जैनधर्मके अनुसार ई सृष्टिके कोनो न बनैलकै । देवी, देवता जे स्वर्गमे हथिन ऊ अपन निमन कर्मके कारण ओहाँ हथिन आउ भगवान् न मानल जा सकथिन । ई देवी, देवता एक निश्चित समयला ओहाँ हथिन आउ एहु मरण उपरान्त मनुष्य बनके मोक्ष जा सक हथिन । जैनधर्मके अनुसार हर आत्माके असली स्वभाव भगवन्ता है आउ हर आत्मामे अनन्त दर्शन, अनन्त शक्ति, अनन्त ज्ञान आउ अनन्त सुख है । आत्मा आउ कर्म पुद्गलके बन्धनके कारण ई गुण प्रकट न हो पावै । सम्यक् दर्शन, [[सम्यक् ज्ञान]], सम्यक् चरित्रके माध्यमसे आत्माके ई राज्यके प्राप्त कैल जा सक है । ई सब रतन्त्रयके धारकके भगवान् कहल जा है । एक भगवान्, ई प्रकार एक मुक्त आत्मा हो जा है - दुखसे मुक्ति, पुनर्जन्म, दुनिया, कर्म आउ अन्तिममे शरीरोसे मुक्ति । एकरा निर्वाण या [[मोक्ष (जैनधर्म)|मोक्ष]] कहल जा है । ई प्रकार जैनधर्ममे अनन्त भगवान हथिन, सब बराबर, मुक्त आउ सब गुणके अभिव्यक्तिमे अनन्त हथिन । [[जैन दर्शन]]के अनुसार कर्म प्रकृतिके मौलिक कण होव है । जे कर्मके हनन करके केवलज्ञान प्राप्त कर लेलकै हे ओकरा [[अरिहन्त]] कहल जा है । तीर्थङ्कर विशेष अरिहन्त होव हथिन जे 'धर्म तीर्थ' के रचना कर हथिनम। मने कि जे अन्य जीवके मोक्ष-मार्ग देखाव है । जैनधर्म कोनो सर्वोच्च जीव पर निर्भरता न सिखावै । तीर्थङ्कर आत्मज्ञानला रस्ता देखाव हथिन किन्तु ज्ञानला सङ्घर्ष अपने करे पड़ है । ==एकरो देखथिन== * [[गुणस्थान]] ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} 6vne742d90zyhh9gm6eqfatdumbqous 79643 79642 2026-09-12T06:53:59Z Pataliputra01 5 79643 wikitext text/x-wiki {{जैनधर्म}} '''जैनधर्ममे भगवान्''' [[अरिहन्त]] ([[केवली]]) आउ [[सिद्ध (जैनधर्म)|सिद्ध]] (मुक्त आत्मा) के कहल जा है । [[जैनधर्म]] ई ब्रह्माण्डके अभिव्यक्ति, निर्माण या रखरखावला जिम्मेदार कौनो निर्माता ईश्वर या शक्तिके धारणाके खारिज कर है ।{{sfn|शास्त्री|२००७|p=८७}} [[जैन दर्शन]]के अनुसार ई लोक आउ एकर छौ [[द्रव्य (जैन दर्शन)|द्रव्य]] ([[जीव]], [[पुद्गल]], [[आकाश]], [[काल]], [[धर्म]] आउ [[अधर्म]]) हमेशासे है आउ एकर अस्तित्व हमेशा रहतै । ई ब्रह्माण्ड स्वयं सञ्चालित है आउ सार्वभौमिक प्राकृतिक विधि पर चल है । जैन दर्शनके अनुसार भगवान्, एक अमूर्तिक वस्तु एक मूर्तिक वस्तु (ब्रह्माण्ड) के निर्माण न कर सकै । [[जैन ग्रन्थ]]मे देव (स्वर्ग निवासी) के एक विस्तृत विवरण भेट है किन्तु ई सब प्राणीके रचनाकारके रूपमे न देखल जा है; ओखनियो दुखके अधीन हथिन आउ अन्य सब जीवित प्राणी नियन अपन आयु पूरा करके अन्तिममे मर जा हथिन । जैनधर्मके अनुसार ई सृष्टिके कोनो न बनैलकै । देवी, देवता जे स्वर्गमे हथिन ऊ अपन निमन कर्मके कारण ओहाँ हथिन आउ भगवान् न मानल जा सकथिन । ई देवी, देवता एक निश्चित समयला ओहाँ हथिन आउ एहु मरण उपरान्त मनुष्य बनके मोक्ष जा सक हथिन । जैनधर्मके अनुसार हर आत्माके असली स्वभाव भगवन्ता है आउ हर आत्मामे अनन्त दर्शन, अनन्त शक्ति, अनन्त ज्ञान आउ अनन्त सुख है । आत्मा आउ कर्म पुद्गलके बन्धनके कारण ई गुण प्रकट न हो पावै । सम्यक् दर्शन, [[सम्यक् ज्ञान]], सम्यक् चरित्रके माध्यमसे आत्माके ई राज्यके प्राप्त कैल जा सक है । ई सब रतन्त्रयके धारकके भगवान् कहल जा है । एक भगवान्, ई प्रकार एक मुक्त आत्मा हो जा है - दुखसे मुक्ति, पुनर्जन्म, दुनिया, कर्म आउ अन्तिममे शरीरोसे मुक्ति । एकरा निर्वाण या [[मोक्ष (जैनधर्म)|मोक्ष]] कहल जा है । ई प्रकार जैनधर्ममे अनन्त भगवान हथिन, सब बराबर, मुक्त आउ सब गुणके अभिव्यक्तिमे अनन्त हथिन । [[जैन दर्शन]]के अनुसार कर्म प्रकृतिके मौलिक कण होव है । जे कर्मके हनन करके केवलज्ञान प्राप्त कर लेलकै हे ओकरा [[अरिहन्त]] कहल जा है । तीर्थङ्कर विशेष अरिहन्त होव हथिन जे 'धर्म तीर्थ' के रचना कर हथिनम। मने कि जे अन्य जीवके मोक्ष-मार्ग देखाव है । जैनधर्म कोनो सर्वोच्च जीव पर निर्भरता न सिखावै । तीर्थङ्कर आत्मज्ञानला रस्ता देखाव हथिन किन्तु ज्ञानला सङ्घर्ष अपने करे पड़ है । ==एकरो देखथिन== * [[गुणस्थान]] ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} == सन्दर्भ ग्रन्थ == * {{citation|last=प्रमाणसागर|first=मुनि|title=जैन तत्त्वविद्या|year=२००८|publisher=भारतीय ज्ञानपीठ|url=https://books.google.co.in/books?id=kKqDPzCrwf0C&dq=Jain+Tattvavidya&source=gbs_navlinks_s|isbn=978-81-263-1480-5|access-date=10 जनवरी 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20150925201536/https://books.google.co.in/books?id=kKqDPzCrwf0C&dq=Jain+Tattvavidya&source=gbs_navlinks_s|archive-date=25 सितम्बर 2015|url-status=live}} * {{Citation|last = Sangave|first = Vilas Adinath|title = Aspects of Jaina religion|url = http://books.google.com/books?id=8UhvGRoyAqMC|edition = 3rd|year = 2001|publisher = Bharatiya Jnanpith|isbn = 81-263-0626-2|access-date = 28 सितम्बर 2015|archive-url = https://web.archive.org/web/20160506083824/https://books.google.com/books?id=8UhvGRoyAqMC|archive-date = 6 मई 2016|url-status = live}} * {{Citation|last = शास्त्री |first = प. कैलाशचन्द्र |title = जैन धर्म|year = २००७|publisher = आचार्य शन्तिसागर 'छाणी' स्मृति ग्रन्थमाला|isbn = 81-902683-8-4}} * {{cite book|title= आचार्य समन्तभद्र कृत रत्नकरण्ड श्रावकाचार| last1= जलज| first1=जयकुमार|year=2006|isbn=81-88769-04-5}} qpeszek0lzmz07fyesm4xlwoht2rbxk 79644 79643 2026-09-12T06:54:14Z Pataliputra01 5 79644 wikitext text/x-wiki {{जैनधर्म}} '''जैनधर्ममे भगवान्''' [[अरिहन्त]] ([[केवली]]) आउ [[सिद्ध (जैनधर्म)|सिद्ध]] (मुक्त आत्मा) के कहल जा है । [[जैनधर्म]] ई ब्रह्माण्डके अभिव्यक्ति, निर्माण या रखरखावला जिम्मेदार कौनो निर्माता ईश्वर या शक्तिके धारणाके खारिज कर है ।{{sfn|शास्त्री|२००७|p=८७}} [[जैन दर्शन]]के अनुसार ई लोक आउ एकर छौ [[द्रव्य (जैन दर्शन)|द्रव्य]] ([[जीव]], [[पुद्गल]], [[आकाश]], [[काल]], [[धर्म]] आउ [[अधर्म]]) हमेशासे है आउ एकर अस्तित्व हमेशा रहतै । ई ब्रह्माण्ड स्वयं सञ्चालित है आउ सार्वभौमिक प्राकृतिक विधि पर चल है । जैन दर्शनके अनुसार भगवान्, एक अमूर्तिक वस्तु एक मूर्तिक वस्तु (ब्रह्माण्ड) के निर्माण न कर सकै । [[जैन ग्रन्थ]]मे देव (स्वर्ग निवासी) के एक विस्तृत विवरण भेट है किन्तु ई सब प्राणीके रचनाकारके रूपमे न देखल जा है; ओखनियो दुखके अधीन हथिन आउ अन्य सब जीवित प्राणी नियन अपन आयु पूरा करके अन्तिममे मर जा हथिन । जैनधर्मके अनुसार ई सृष्टिके कोनो न बनैलकै । देवी, देवता जे स्वर्गमे हथिन ऊ अपन निमन कर्मके कारण ओहाँ हथिन आउ भगवान् न मानल जा सकथिन । ई देवी, देवता एक निश्चित समयला ओहाँ हथिन आउ एहु मरण उपरान्त मनुष्य बनके मोक्ष जा सक हथिन । जैनधर्मके अनुसार हर आत्माके असली स्वभाव भगवन्ता है आउ हर आत्मामे अनन्त दर्शन, अनन्त शक्ति, अनन्त ज्ञान आउ अनन्त सुख है । आत्मा आउ कर्म पुद्गलके बन्धनके कारण ई गुण प्रकट न हो पावै । सम्यक् दर्शन, [[सम्यक् ज्ञान]], सम्यक् चरित्रके माध्यमसे आत्माके ई राज्यके प्राप्त कैल जा सक है । ई सब रतन्त्रयके धारकके भगवान् कहल जा है । एक भगवान्, ई प्रकार एक मुक्त आत्मा हो जा है - दुखसे मुक्ति, पुनर्जन्म, दुनिया, कर्म आउ अन्तिममे शरीरोसे मुक्ति । एकरा निर्वाण या [[मोक्ष (जैनधर्म)|मोक्ष]] कहल जा है । ई प्रकार जैनधर्ममे अनन्त भगवान हथिन, सब बराबर, मुक्त आउ सब गुणके अभिव्यक्तिमे अनन्त हथिन । [[जैन दर्शन]]के अनुसार कर्म प्रकृतिके मौलिक कण होव है । जे कर्मके हनन करके केवलज्ञान प्राप्त कर लेलकै हे ओकरा [[अरिहन्त]] कहल जा है । तीर्थङ्कर विशेष अरिहन्त होव हथिन जे 'धर्म तीर्थ' के रचना कर हथिनम। मने कि जे अन्य जीवके मोक्ष-मार्ग देखाव है । जैनधर्म कोनो सर्वोच्च जीव पर निर्भरता न सिखावै । तीर्थङ्कर आत्मज्ञानला रस्ता देखाव हथिन किन्तु ज्ञानला सङ्घर्ष अपने करे पड़ है । ==एकरो देखथिन== * [[गुणस्थान]] ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} == सन्दर्भ ग्रन्थ == * {{citation|last=प्रमाणसागर|first=मुनि|title=जैन तत्त्वविद्या|year=२००८|publisher=भारतीय ज्ञानपीठ|url=https://books.google.co.in/books?id=kKqDPzCrwf0C&dq=Jain+Tattvavidya&source=gbs_navlinks_s|isbn=978-81-263-1480-5|access-date=10 जनवरी 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20150925201536/https://books.google.co.in/books?id=kKqDPzCrwf0C&dq=Jain+Tattvavidya&source=gbs_navlinks_s|archive-date=25 सितम्बर 2015|url-status=live}} * {{Citation|last = Sangave|first = Vilas Adinath|title = Aspects of Jaina religion|url = http://books.google.com/books?id=8UhvGRoyAqMC|edition = 3rd|year = 2001|publisher = Bharatiya Jnanpith|isbn = 81-263-0626-2|access-date = 28 सितम्बर 2015|archive-url = https://web.archive.org/web/20160506083824/https://books.google.com/books?id=8UhvGRoyAqMC|archive-date = 6 मई 2016|url-status = live}} * {{Citation|last = शास्त्री |first = प. कैलाशचन्द्र |title = जैन धर्म|year = २००७|publisher = आचार्य शन्तिसागर 'छाणी' स्मृति ग्रन्थमाला|isbn = 81-902683-8-4}} * {{cite book|title= आचार्य समन्तभद्र कृत रत्नकरण्ड श्रावकाचार| last1= जलज| first1=जयकुमार|year=2006|isbn=81-88769-04-5}} {{जैन विषय}} qbx0oxyn4g4a18ei7qr3uful0ndnnqy 79645 79644 2026-09-12T06:54:29Z Pataliputra01 5 79645 wikitext text/x-wiki {{जैनधर्म}} '''जैनधर्ममे भगवान्''' [[अरिहन्त]] ([[केवली]]) आउ [[सिद्ध (जैनधर्म)|सिद्ध]] (मुक्त आत्मा) के कहल जा है । [[जैनधर्म]] ई ब्रह्माण्डके अभिव्यक्ति, निर्माण या रखरखावला जिम्मेदार कौनो निर्माता ईश्वर या शक्तिके धारणाके खारिज कर है ।{{sfn|शास्त्री|२००७|p=८७}} [[जैन दर्शन]]के अनुसार ई लोक आउ एकर छौ [[द्रव्य (जैन दर्शन)|द्रव्य]] ([[जीव]], [[पुद्गल]], [[आकाश]], [[काल]], [[धर्म]] आउ [[अधर्म]]) हमेशासे है आउ एकर अस्तित्व हमेशा रहतै । ई ब्रह्माण्ड स्वयं सञ्चालित है आउ सार्वभौमिक प्राकृतिक विधि पर चल है । जैन दर्शनके अनुसार भगवान्, एक अमूर्तिक वस्तु एक मूर्तिक वस्तु (ब्रह्माण्ड) के निर्माण न कर सकै । [[जैन ग्रन्थ]]मे देव (स्वर्ग निवासी) के एक विस्तृत विवरण भेट है किन्तु ई सब प्राणीके रचनाकारके रूपमे न देखल जा है; ओखनियो दुखके अधीन हथिन आउ अन्य सब जीवित प्राणी नियन अपन आयु पूरा करके अन्तिममे मर जा हथिन । जैनधर्मके अनुसार ई सृष्टिके कोनो न बनैलकै । देवी, देवता जे स्वर्गमे हथिन ऊ अपन निमन कर्मके कारण ओहाँ हथिन आउ भगवान् न मानल जा सकथिन । ई देवी, देवता एक निश्चित समयला ओहाँ हथिन आउ एहु मरण उपरान्त मनुष्य बनके मोक्ष जा सक हथिन । जैनधर्मके अनुसार हर आत्माके असली स्वभाव भगवन्ता है आउ हर आत्मामे अनन्त दर्शन, अनन्त शक्ति, अनन्त ज्ञान आउ अनन्त सुख है । आत्मा आउ कर्म पुद्गलके बन्धनके कारण ई गुण प्रकट न हो पावै । सम्यक् दर्शन, [[सम्यक् ज्ञान]], सम्यक् चरित्रके माध्यमसे आत्माके ई राज्यके प्राप्त कैल जा सक है । ई सब रतन्त्रयके धारकके भगवान् कहल जा है । एक भगवान्, ई प्रकार एक मुक्त आत्मा हो जा है - दुखसे मुक्ति, पुनर्जन्म, दुनिया, कर्म आउ अन्तिममे शरीरोसे मुक्ति । एकरा निर्वाण या [[मोक्ष (जैनधर्म)|मोक्ष]] कहल जा है । ई प्रकार जैनधर्ममे अनन्त भगवान हथिन, सब बराबर, मुक्त आउ सब गुणके अभिव्यक्तिमे अनन्त हथिन । [[जैन दर्शन]]के अनुसार कर्म प्रकृतिके मौलिक कण होव है । जे कर्मके हनन करके केवलज्ञान प्राप्त कर लेलकै हे ओकरा [[अरिहन्त]] कहल जा है । तीर्थङ्कर विशेष अरिहन्त होव हथिन जे 'धर्म तीर्थ' के रचना कर हथिनम। मने कि जे अन्य जीवके मोक्ष-मार्ग देखाव है । जैनधर्म कोनो सर्वोच्च जीव पर निर्भरता न सिखावै । तीर्थङ्कर आत्मज्ञानला रस्ता देखाव हथिन किन्तु ज्ञानला सङ्घर्ष अपने करे पड़ है । ==एकरो देखथिन== * [[गुणस्थान]] ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} == सन्दर्भ ग्रन्थ == * {{citation|last=प्रमाणसागर|first=मुनि|title=जैन तत्त्वविद्या|year=२००८|publisher=भारतीय ज्ञानपीठ|url=https://books.google.co.in/books?id=kKqDPzCrwf0C&dq=Jain+Tattvavidya&source=gbs_navlinks_s|isbn=978-81-263-1480-5|access-date=10 जनवरी 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20150925201536/https://books.google.co.in/books?id=kKqDPzCrwf0C&dq=Jain+Tattvavidya&source=gbs_navlinks_s|archive-date=25 सितम्बर 2015|url-status=live}} * {{Citation|last = Sangave|first = Vilas Adinath|title = Aspects of Jaina religion|url = http://books.google.com/books?id=8UhvGRoyAqMC|edition = 3rd|year = 2001|publisher = Bharatiya Jnanpith|isbn = 81-263-0626-2|access-date = 28 सितम्बर 2015|archive-url = https://web.archive.org/web/20160506083824/https://books.google.com/books?id=8UhvGRoyAqMC|archive-date = 6 मई 2016|url-status = live}} * {{Citation|last = शास्त्री |first = प. कैलाशचन्द्र |title = जैन धर्म|year = २००७|publisher = आचार्य शन्तिसागर 'छाणी' स्मृति ग्रन्थमाला|isbn = 81-902683-8-4}} * {{cite book|title= आचार्य समन्तभद्र कृत रत्नकरण्ड श्रावकाचार| last1= जलज| first1=जयकुमार|year=2006|isbn=81-88769-04-5}} {{जैन विषय}} [[श्रेणी:जैनधर्म]] [[श्रेणी:ईश्वर]] [[श्रेणी:जैनधर्ममे भगवान्]] 14mwq2clegp7ns2qg4syos4zkmr79fa