विकिपीडिया magwiki https://mag.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE MediaWiki 1.47.0-wmf.21 first-letter मीडिया विशेष वार्ता प्रयोगकर्ता प्रयोगकर्ता वार्ता विकिपीडिया विकिपीडिया वार्ता सञ्चिका सञ्चिका वार्ता मीडियाविकि मीडियाविकि वार्ता साँचा साँचा वार्ता सहयोग सहयोग वार्ता श्रेणी श्रेणी वार्ता TimedText TimedText talk घटक घटक वार्ता Event Event talk योग 0 18327 80476 2026-09-26T05:31:38Z Pataliputra01 5 "{{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला यो..." सङ्गे नया पन्ना बनावल गेलै 80476 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} a7efhtowuhnyuhbu354sh4zohgs6s5d 80477 80476 2026-09-26T05:31:57Z Pataliputra01 5 /* */ 80477 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] dtb0l6yivpm6wi1armc8t09j564bxca 80478 80477 2026-09-26T05:33:47Z Pataliputra01 5 /* */ 80478 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । 0chzn1ntsvt2m423fazhnvfx86rb3uc 80479 80478 2026-09-26T05:37:33Z Pataliputra01 5 /* */ 80479 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । ip3d577xlg6n7lpbmrgyyljm7n493uy 80480 80479 2026-09-26T05:39:04Z Pataliputra01 5 /* */ 80480 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । r6og6nnvqpfkfsu53drr9b71nmcqf6t 80481 80480 2026-09-26T05:41:46Z Pataliputra01 5 /* */ 80481 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । m4wdiryqnd318cxr0tvjnks17q895fo 80482 80481 2026-09-26T05:43:48Z Pataliputra01 5 /* */ 80482 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । h2n1nn1qjl1jibom51qml23c1df2aso 80483 80482 2026-09-26T05:44:45Z Pataliputra01 5 /* */ 80483 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । 1od49087adrqviskbp0o56kwl1w9z6p 80484 80483 2026-09-26T05:45:44Z Pataliputra01 5 80484 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । == बाहरी कड़ी == {{विकिसूक्ति|योग}} * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि) *[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे) 6kizwgjn0zj60cee4brwrjaih4iqj8q 80485 80484 2026-09-26T05:45:57Z Pataliputra01 5 80485 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == बाहरी कड़ी == {{विकिसूक्ति|योग}} * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि) *[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे) cekw4rkr5eg7qtnwsaqq633o97pvqnt 80486 80485 2026-09-26T05:46:15Z Pataliputra01 5 80486 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == बाहरी कड़ी == {{विकिसूक्ति|योग}} * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि) *[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे) {{योग}} {{भारतीय दर्शन}} qxyx530a63u6oqks6qngvhlfi3u9tcz 80487 80486 2026-09-26T05:46:35Z Pataliputra01 5 80487 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == बाहरी कड़ी == {{विकिसूक्ति|योग}} * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि) *[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे) {{योग}} {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] 520xczn46zo8bgz2q98nj2bzkb89nvq 80488 80487 2026-09-26T05:47:39Z Pataliputra01 5 /* */ 80488 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । == व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार == ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == बाहरी कड़ी == {{विकिसूक्ति|योग}} * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि) *[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे) {{योग}} {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] ipfz6hymrbdpt3zdk6nuwldawxvjhze 80489 80488 2026-09-26T05:49:34Z Pataliputra01 5 80489 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । == व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार == '''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज्‌ शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे । ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == बाहरी कड़ी == {{विकिसूक्ति|योग}} * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि) *[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे) {{योग}} {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] fimictflx42b0f1jk933jju77rg9b7h 80490 80489 2026-09-26T05:50:03Z Pataliputra01 5 80490 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । == व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार == '''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज्‌ शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे । पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है - :१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय :२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय :३) युज् संयमने - चुरादिगणीय ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == बाहरी कड़ी == {{विकिसूक्ति|योग}} * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि) *[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे) {{योग}} {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] lxo46h5pt7jb1vn3a9fgllnof2tv0at 80491 80490 2026-09-26T05:50:50Z Pataliputra01 5 80491 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । == व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार == '''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज्‌ शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे । पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है - :१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय :२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय :३) युज् संयमने - चुरादिगणीय '''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल । ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == बाहरी कड़ी == {{विकिसूक्ति|योग}} * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि) *[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे) {{योग}} {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] hgvlk1j6islgo63en45gmgzsvsq4dtb 80492 80491 2026-09-26T05:51:53Z Pataliputra01 5 80492 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । == व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार == '''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज्‌ शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे । पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है - :१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय :२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय :३) युज् संयमने - चुरादिगणीय '''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल । '''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३) ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == बाहरी कड़ी == {{विकिसूक्ति|योग}} * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि) *[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे) {{योग}} {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] g6ncdo1gkvqu6e3hshp7gk895fjy5dn 80493 80492 2026-09-26T05:52:24Z Pataliputra01 5 80493 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । == व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार == '''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज्‌ शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे । पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है - :१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय :२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय :३) युज् संयमने - चुरादिगणीय '''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल । '''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३) ''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है । ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == बाहरी कड़ी == {{विकिसूक्ति|योग}} * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि) *[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे) {{योग}} {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] k2fhrdwuwesyegdruwa5tyfkkdfv0bi 80494 80493 2026-09-26T05:53:05Z Pataliputra01 5 80494 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । == व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार == '''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज्‌ शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे । पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है - :१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय :२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय :३) युज् संयमने - चुरादिगणीय '''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल । '''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३) ''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है । ई प्रकार योगके अर्थ होलै - "योग साधनाके अपनावित मनके नियन्त्रित करके, संयमित करके, आत्माके परमात्मासे मिलन" । ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == बाहरी कड़ी == {{विकिसूक्ति|योग}} * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि) *[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे) {{योग}} {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] iub5soessg8fi30vvo5z7p4aok5wcox 80495 80494 2026-09-26T05:56:01Z Pataliputra01 5 80495 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । == व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार == '''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज्‌ शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे । पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है - :१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय :२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय :३) युज् संयमने - चुरादिगणीय '''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल । '''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३) ''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है । ई प्रकार योगके अर्थ होलै - "योग साधनाके अपनावित मनके नियन्त्रित करके, संयमित करके, आत्माके परमात्मासे मिलन" । [[परिभाषा]] ऐसन होवेके चाही जे अव्याप्ति आउ अतिव्याप्ति दोषसे मुक्त होवे, योग शब्दके वाच्यार्थके ऐसन लक्षण बता सके जे प्रत्येक प्रसङ्गला उपयुक्त होवे आउ योगके इलावा कोनो अन्य वस्तुला उपयुक्त न होवे । [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ मानल जा है । ओकरामे योग शब्दके ढेर बार प्रयोग होलै हे । कखनियो अकेले आउ कखनियो सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग । वेदोत्तर कालमे [[भक्तियोग]] आउ [[हठयोग]] नामो प्रचलित हो गेलै हे । [[पतञ्जलि]] [[योगदर्शन]]मे 'क्रियायोग' शब्द देखेमे आव है । [[पाशुपत योग]] आउ माहेश्वर योग नियन शब्दोके प्रसङ्ग भेट है । ई सब स्थलमे योग शब्दके जे अर्थ है ऊ एक दोसरसे भिन्न है । ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == बाहरी कड़ी == {{विकिसूक्ति|योग}} * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि) *[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे) {{योग}} {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] 2yhdohj5tkl956m199807ia16gvsdmu 80496 80495 2026-09-26T05:59:13Z Pataliputra01 5 80496 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । == व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार == '''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज्‌ शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे । पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है - :१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय :२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय :३) युज् संयमने - चुरादिगणीय '''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल । '''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३) ''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है । ई प्रकार योगके अर्थ होलै - "योग साधनाके अपनावित मनके नियन्त्रित करके, संयमित करके, आत्माके परमात्मासे मिलन" । [[परिभाषा]] ऐसन होवेके चाही जे अव्याप्ति आउ अतिव्याप्ति दोषसे मुक्त होवे, योग शब्दके वाच्यार्थके ऐसन लक्षण बता सके जे प्रत्येक प्रसङ्गला उपयुक्त होवे आउ योगके इलावा कोनो अन्य वस्तुला उपयुक्त न होवे । [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ मानल जा है । ओकरामे योग शब्दके ढेर बार प्रयोग होलै हे । कखनियो अकेले आउ कखनियो सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग । वेदोत्तर कालमे [[भक्तियोग]] आउ [[हठयोग]] नामो प्रचलित हो गेलै हे । [[पतञ्जलि]] [[योगदर्शन]]मे 'क्रियायोग' शब्द देखेमे आव है । [[पाशुपत योग]] आउ माहेश्वर योग नियन शब्दोके प्रसङ्ग भेट है । ई सब स्थलमे योग शब्दके जे अर्थ है ऊ एक दोसरसे भिन्न है । [[गीता]]मे [[श्रीकृष्ण]] एक स्थल पर कहलथिन हे ''''योगः कर्मसु कौशलम्'''‌' (कर्ममे कुशलते योग है) । ई वाक्य योगके परिभाषा न है । कुछ विद्वानके ई मत है कि जीवात्मा आउ परमात्माके मिल जाएके योग कहल जा है । ई बातके स्वीकार करेमे ई बड़ आपत्ति खड़ा होव है कि [[बौद्धधर्म|बौद्धमतावलम्बियो]] जे परमात्माके सत्ताके स्वीकार न करथिन, योग शब्दके व्यवहार कर आउ योगके समर्थन कर हथिन । एही बात [[साङ्ख्य|साङ्ख्यवादियो]]ला कहल जा सक है जे ईश्वरके सत्ताके असिद्ध मान हथिन । [[पतञ्जलि]] [[योगसूत्र]]मे जे परिभाषा देलथिन हे 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः', चित्तके वृत्तिके निरोधके नाम योग है । ई वाक्यके दु अर्थ हो सक है - चित्तवृत्तिके निरोधके अवस्थाके नाम योग है या ई अवस्थाके लावेके उपायके योग कहल जा है । ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == बाहरी कड़ी == {{विकिसूक्ति|योग}} * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि) *[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे) {{योग}} {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] kyx7u7fhf1446rpc0lt9p4p5gsruqnv 80497 80496 2026-09-26T06:02:17Z Pataliputra01 5 80497 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । == व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार == '''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज्‌ शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे । पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है - :१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय :२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय :३) युज् संयमने - चुरादिगणीय '''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल । '''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३) ''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है । ई प्रकार योगके अर्थ होलै - "योग साधनाके अपनावित मनके नियन्त्रित करके, संयमित करके, आत्माके परमात्मासे मिलन" । [[परिभाषा]] ऐसन होवेके चाही जे अव्याप्ति आउ अतिव्याप्ति दोषसे मुक्त होवे, योग शब्दके वाच्यार्थके ऐसन लक्षण बता सके जे प्रत्येक प्रसङ्गला उपयुक्त होवे आउ योगके इलावा कोनो अन्य वस्तुला उपयुक्त न होवे । [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ मानल जा है । ओकरामे योग शब्दके ढेर बार प्रयोग होलै हे । कखनियो अकेले आउ कखनियो सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग । वेदोत्तर कालमे [[भक्तियोग]] आउ [[हठयोग]] नामो प्रचलित हो गेलै हे । [[पतञ्जलि]] [[योगदर्शन]]मे 'क्रियायोग' शब्द देखेमे आव है । [[पाशुपत योग]] आउ माहेश्वर योग नियन शब्दोके प्रसङ्ग भेट है । ई सब स्थलमे योग शब्दके जे अर्थ है ऊ एक दोसरसे भिन्न है । [[गीता]]मे [[श्रीकृष्ण]] एक स्थल पर कहलथिन हे ''''योगः कर्मसु कौशलम्'''‌' (कर्ममे कुशलते योग है) । ई वाक्य योगके परिभाषा न है । कुछ विद्वानके ई मत है कि जीवात्मा आउ परमात्माके मिल जाएके योग कहल जा है । ई बातके स्वीकार करेमे ई बड़ आपत्ति खड़ा होव है कि [[बौद्धधर्म|बौद्धमतावलम्बियो]] जे परमात्माके सत्ताके स्वीकार न करथिन, योग शब्दके व्यवहार कर आउ योगके समर्थन कर हथिन । एही बात [[साङ्ख्य|साङ्ख्यवादियो]]ला कहल जा सक है जे ईश्वरके सत्ताके असिद्ध मान हथिन । [[पतञ्जलि]] [[योगसूत्र]]मे जे परिभाषा देलथिन हे 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः', चित्तके वृत्तिके निरोधके नाम योग है । ई वाक्यके दु अर्थ हो सक है - चित्तवृत्तिके निरोधके अवस्थाके नाम योग है या ई अवस्थाके लावेके उपायके योग कहल जा है । किन्तु ई परिभाषा पर ढेर विद्वानके आपत्ति है । उनकर कहलाम है जे चित्तवृत्तिके प्रवाहेके नाम चित्त है । पूर्ण निरोधके अर्थ होतै चित्तके अस्तित्वके पूर्ण लोप, चित्ताश्रय समस्त स्मृति आउ संस्कारके निःशेष हो जाएल । यदि ऐसन हो जाए त फिर समाधिसे उठल सम्भव न होतै । काहेकि ऊ अवस्थाके सहाराला कोनो संस्कार बचल न होतै, प्रारब्ध दग्ध हो गेल होतै । निरोध यदि सम्भव होवै त [[श्रीकृष्ण]]के ई वाक्यके का अर्थ होतै ? ''योगस्थः कुरु कर्माणि'', योगमे स्थित होके कर्म करथिन । विरुद्धावस्थामे कर्म हो न सकै आउ ऊ अवस्थामे कोनो संस्कार न पड़ सकै, स्मृति न बन सकै, जे समाधिसे उठेके बाद कर्म करेमे सहायक होवे । ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == बाहरी कड़ी == {{विकिसूक्ति|योग}} * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि) *[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे) {{योग}} {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] ac8iqdo9n2e9931qdz0b14ip9iotjtb 80498 80497 2026-09-26T06:04:29Z Pataliputra01 5 80498 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । == व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार == '''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज्‌ शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे । पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है - :१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय :२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय :३) युज् संयमने - चुरादिगणीय '''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल । '''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३) ''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है । ई प्रकार योगके अर्थ होलै - "योग साधनाके अपनावित मनके नियन्त्रित करके, संयमित करके, आत्माके परमात्मासे मिलन" । [[परिभाषा]] ऐसन होवेके चाही जे अव्याप्ति आउ अतिव्याप्ति दोषसे मुक्त होवे, योग शब्दके वाच्यार्थके ऐसन लक्षण बता सके जे प्रत्येक प्रसङ्गला उपयुक्त होवे आउ योगके इलावा कोनो अन्य वस्तुला उपयुक्त न होवे । [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ मानल जा है । ओकरामे योग शब्दके ढेर बार प्रयोग होलै हे । कखनियो अकेले आउ कखनियो सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग । वेदोत्तर कालमे [[भक्तियोग]] आउ [[हठयोग]] नामो प्रचलित हो गेलै हे । [[पतञ्जलि]] [[योगदर्शन]]मे 'क्रियायोग' शब्द देखेमे आव है । [[पाशुपत योग]] आउ माहेश्वर योग नियन शब्दोके प्रसङ्ग भेट है । ई सब स्थलमे योग शब्दके जे अर्थ है ऊ एक दोसरसे भिन्न है । [[गीता]]मे [[श्रीकृष्ण]] एक स्थल पर कहलथिन हे ''''योगः कर्मसु कौशलम्'''‌' (कर्ममे कुशलते योग है) । ई वाक्य योगके परिभाषा न है । कुछ विद्वानके ई मत है कि जीवात्मा आउ परमात्माके मिल जाएके योग कहल जा है । ई बातके स्वीकार करेमे ई बड़ आपत्ति खड़ा होव है कि [[बौद्धधर्म|बौद्धमतावलम्बियो]] जे परमात्माके सत्ताके स्वीकार न करथिन, योग शब्दके व्यवहार कर आउ योगके समर्थन कर हथिन । एही बात [[साङ्ख्य|साङ्ख्यवादियो]]ला कहल जा सक है जे ईश्वरके सत्ताके असिद्ध मान हथिन । [[पतञ्जलि]] [[योगसूत्र]]मे जे परिभाषा देलथिन हे 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः', चित्तके वृत्तिके निरोधके नाम योग है । ई वाक्यके दु अर्थ हो सक है - चित्तवृत्तिके निरोधके अवस्थाके नाम योग है या ई अवस्थाके लावेके उपायके योग कहल जा है । किन्तु ई परिभाषा पर ढेर विद्वानके आपत्ति है । उनकर कहलाम है जे चित्तवृत्तिके प्रवाहेके नाम चित्त है । पूर्ण निरोधके अर्थ होतै चित्तके अस्तित्वके पूर्ण लोप, चित्ताश्रय समस्त स्मृति आउ संस्कारके निःशेष हो जाएल । यदि ऐसन हो जाए त फिर समाधिसे उठल सम्भव न होतै । काहेकि ऊ अवस्थाके सहाराला कोनो संस्कार बचल न होतै, प्रारब्ध दग्ध हो गेल होतै । निरोध यदि सम्भव होवै त [[श्रीकृष्ण]]के ई वाक्यके का अर्थ होतै ? ''योगस्थः कुरु कर्माणि'', योगमे स्थित होके कर्म करथिन । विरुद्धावस्थामे कर्म हो न सकै आउ ऊ अवस्थामे कोनो संस्कार न पड़ सकै, स्मृति न बन सकै, जे समाधिसे उठेके बाद कर्म करेमे सहायक होवे । संक्षेपमे आशय ई है कि योगके शास्त्रीय स्वरूप, ओकर दार्शनिक आधार, के सम्यक्‌ रूपसे बुझल बड़ी सरल न है । संसारके मिथ्या मानेवाला [[अद्वैत वेदान्त|अद्वैतवादियो]] निदिध्याह्नके नामसे ओकर समर्थन कर है । अनीश्वरवादी साङ्ख्य विद्वानो ओकर अनुमोदन कर हथिन । [[बौद्धधर्म|बौद्धे]] न, [[इस्लाम|मुसलमान]] [[सूफी]] आउ [[ईसाई]] मिस्टिको कोनो न कोनो प्रकार अपन सम्प्रदायके मान्यता आउ दार्शनिक सिद्धान्तके साथे ओकर सामञ्जस्य स्थापित कर ले हथिन । ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == बाहरी कड़ी == {{विकिसूक्ति|योग}} * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि) *[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे) {{योग}} {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] 4kvzl156838tkwg0ppspwhqeim7q3qo 80499 80498 2026-09-26T06:06:41Z Pataliputra01 5 80499 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । == व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार == '''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज्‌ शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे । पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है - :१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय :२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय :३) युज् संयमने - चुरादिगणीय '''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल । '''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३) ''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है । ई प्रकार योगके अर्थ होलै - "योग साधनाके अपनावित मनके नियन्त्रित करके, संयमित करके, आत्माके परमात्मासे मिलन" । [[परिभाषा]] ऐसन होवेके चाही जे अव्याप्ति आउ अतिव्याप्ति दोषसे मुक्त होवे, योग शब्दके वाच्यार्थके ऐसन लक्षण बता सके जे प्रत्येक प्रसङ्गला उपयुक्त होवे आउ योगके इलावा कोनो अन्य वस्तुला उपयुक्त न होवे । [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ मानल जा है । ओकरामे योग शब्दके ढेर बार प्रयोग होलै हे । कखनियो अकेले आउ कखनियो सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग । वेदोत्तर कालमे [[भक्तियोग]] आउ [[हठयोग]] नामो प्रचलित हो गेलै हे । [[पतञ्जलि]] [[योगदर्शन]]मे 'क्रियायोग' शब्द देखेमे आव है । [[पाशुपत योग]] आउ माहेश्वर योग नियन शब्दोके प्रसङ्ग भेट है । ई सब स्थलमे योग शब्दके जे अर्थ है ऊ एक दोसरसे भिन्न है । [[गीता]]मे [[श्रीकृष्ण]] एक स्थल पर कहलथिन हे ''''योगः कर्मसु कौशलम्'''‌' (कर्ममे कुशलते योग है) । ई वाक्य योगके परिभाषा न है । कुछ विद्वानके ई मत है कि जीवात्मा आउ परमात्माके मिल जाएके योग कहल जा है । ई बातके स्वीकार करेमे ई बड़ आपत्ति खड़ा होव है कि [[बौद्धधर्म|बौद्धमतावलम्बियो]] जे परमात्माके सत्ताके स्वीकार न करथिन, योग शब्दके व्यवहार कर आउ योगके समर्थन कर हथिन । एही बात [[साङ्ख्य|साङ्ख्यवादियो]]ला कहल जा सक है जे ईश्वरके सत्ताके असिद्ध मान हथिन । [[पतञ्जलि]] [[योगसूत्र]]मे जे परिभाषा देलथिन हे 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः', चित्तके वृत्तिके निरोधके नाम योग है । ई वाक्यके दु अर्थ हो सक है - चित्तवृत्तिके निरोधके अवस्थाके नाम योग है या ई अवस्थाके लावेके उपायके योग कहल जा है । किन्तु ई परिभाषा पर ढेर विद्वानके आपत्ति है । उनकर कहलाम है जे चित्तवृत्तिके प्रवाहेके नाम चित्त है । पूर्ण निरोधके अर्थ होतै चित्तके अस्तित्वके पूर्ण लोप, चित्ताश्रय समस्त स्मृति आउ संस्कारके निःशेष हो जाएल । यदि ऐसन हो जाए त फिर समाधिसे उठल सम्भव न होतै । काहेकि ऊ अवस्थाके सहाराला कोनो संस्कार बचल न होतै, प्रारब्ध दग्ध हो गेल होतै । निरोध यदि सम्भव होवै त [[श्रीकृष्ण]]के ई वाक्यके का अर्थ होतै ? ''योगस्थः कुरु कर्माणि'', योगमे स्थित होके कर्म करथिन । विरुद्धावस्थामे कर्म हो न सकै आउ ऊ अवस्थामे कोनो संस्कार न पड़ सकै, स्मृति न बन सकै, जे समाधिसे उठेके बाद कर्म करेमे सहायक होवे । संक्षेपमे आशय ई है कि योगके शास्त्रीय स्वरूप, ओकर दार्शनिक आधार, के सम्यक्‌ रूपसे बुझल बड़ी सरल न है । संसारके मिथ्या मानेवाला [[अद्वैत वेदान्त|अद्वैतवादियो]] निदिध्याह्नके नामसे ओकर समर्थन कर है । अनीश्वरवादी साङ्ख्य विद्वानो ओकर अनुमोदन कर हथिन । [[बौद्धधर्म|बौद्धे]] न, [[इस्लाम|मुसलमान]] [[सूफी]] आउ [[ईसाई]] मिस्टिको कोनो न कोनो प्रकार अपन सम्प्रदायके मान्यता आउ दार्शनिक सिद्धान्तके साथे ओकर सामञ्जस्य स्थापित कर ले हथिन । ई सब विभिन्न दार्शनिक विचारधारामे कौन प्रकार ऐसन समन्वय हो सक है कि ऐसन धरातल मिल सके जेकरा पर योगके भित्ति खड़ा कैल जा सके, ई बड़ रोचक प्रश्न है किन्तु एकर विवेचनला बड़ी समय चाही । एहाँ ऊ प्रक्रिया पर तनीसुन विचार कर लेल आवश्यक है जेकर रूपरेखा हमनीके [[पतञ्जलि]]के सूत्रमे भेट है । तनीमनी शब्दभेदसे ई प्रक्रिया ऊ सब समुदायके मान्य है जे योगके अभ्यासके समर्थन कर हथिन । ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == बाहरी कड़ी == {{विकिसूक्ति|योग}} * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि) *[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे) {{योग}} {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] rxjj8xox8qvl7bwoq8yphkaeuqv2oxi 80500 80499 2026-09-26T06:08:53Z Pataliputra01 5 80500 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । == व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार == '''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज्‌ शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे । पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है - :१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय :२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय :३) युज् संयमने - चुरादिगणीय '''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल । '''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३) ''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है । ई प्रकार योगके अर्थ होलै - "योग साधनाके अपनावित मनके नियन्त्रित करके, संयमित करके, आत्माके परमात्मासे मिलन" । [[परिभाषा]] ऐसन होवेके चाही जे अव्याप्ति आउ अतिव्याप्ति दोषसे मुक्त होवे, योग शब्दके वाच्यार्थके ऐसन लक्षण बता सके जे प्रत्येक प्रसङ्गला उपयुक्त होवे आउ योगके इलावा कोनो अन्य वस्तुला उपयुक्त न होवे । [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ मानल जा है । ओकरामे योग शब्दके ढेर बार प्रयोग होलै हे । कखनियो अकेले आउ कखनियो सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग । वेदोत्तर कालमे [[भक्तियोग]] आउ [[हठयोग]] नामो प्रचलित हो गेलै हे । [[पतञ्जलि]] [[योगदर्शन]]मे 'क्रियायोग' शब्द देखेमे आव है । [[पाशुपत योग]] आउ माहेश्वर योग नियन शब्दोके प्रसङ्ग भेट है । ई सब स्थलमे योग शब्दके जे अर्थ है ऊ एक दोसरसे भिन्न है । [[गीता]]मे [[श्रीकृष्ण]] एक स्थल पर कहलथिन हे ''''योगः कर्मसु कौशलम्'''‌' (कर्ममे कुशलते योग है) । ई वाक्य योगके परिभाषा न है । कुछ विद्वानके ई मत है कि जीवात्मा आउ परमात्माके मिल जाएके योग कहल जा है । ई बातके स्वीकार करेमे ई बड़ आपत्ति खड़ा होव है कि [[बौद्धधर्म|बौद्धमतावलम्बियो]] जे परमात्माके सत्ताके स्वीकार न करथिन, योग शब्दके व्यवहार कर आउ योगके समर्थन कर हथिन । एही बात [[साङ्ख्य|साङ्ख्यवादियो]]ला कहल जा सक है जे ईश्वरके सत्ताके असिद्ध मान हथिन । [[पतञ्जलि]] [[योगसूत्र]]मे जे परिभाषा देलथिन हे 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः', चित्तके वृत्तिके निरोधके नाम योग है । ई वाक्यके दु अर्थ हो सक है - चित्तवृत्तिके निरोधके अवस्थाके नाम योग है या ई अवस्थाके लावेके उपायके योग कहल जा है । किन्तु ई परिभाषा पर ढेर विद्वानके आपत्ति है । उनकर कहलाम है जे चित्तवृत्तिके प्रवाहेके नाम चित्त है । पूर्ण निरोधके अर्थ होतै चित्तके अस्तित्वके पूर्ण लोप, चित्ताश्रय समस्त स्मृति आउ संस्कारके निःशेष हो जाएल । यदि ऐसन हो जाए त फिर समाधिसे उठल सम्भव न होतै । काहेकि ऊ अवस्थाके सहाराला कोनो संस्कार बचल न होतै, प्रारब्ध दग्ध हो गेल होतै । निरोध यदि सम्भव होवै त [[श्रीकृष्ण]]के ई वाक्यके का अर्थ होतै ? ''योगस्थः कुरु कर्माणि'', योगमे स्थित होके कर्म करथिन । विरुद्धावस्थामे कर्म हो न सकै आउ ऊ अवस्थामे कोनो संस्कार न पड़ सकै, स्मृति न बन सकै, जे समाधिसे उठेके बाद कर्म करेमे सहायक होवे । संक्षेपमे आशय ई है कि योगके शास्त्रीय स्वरूप, ओकर दार्शनिक आधार, के सम्यक्‌ रूपसे बुझल बड़ी सरल न है । संसारके मिथ्या मानेवाला [[अद्वैत वेदान्त|अद्वैतवादियो]] निदिध्याह्नके नामसे ओकर समर्थन कर है । अनीश्वरवादी साङ्ख्य विद्वानो ओकर अनुमोदन कर हथिन । [[बौद्धधर्म|बौद्धे]] न, [[इस्लाम|मुसलमान]] [[सूफी]] आउ [[ईसाई]] मिस्टिको कोनो न कोनो प्रकार अपन सम्प्रदायके मान्यता आउ दार्शनिक सिद्धान्तके साथे ओकर सामञ्जस्य स्थापित कर ले हथिन । ई सब विभिन्न दार्शनिक विचारधारामे कौन प्रकार ऐसन समन्वय हो सक है कि ऐसन धरातल मिल सके जेकरा पर योगके भित्ति खड़ा कैल जा सके, ई बड़ रोचक प्रश्न है किन्तु एकर विवेचनला बड़ी समय चाही । एहाँ ऊ प्रक्रिया पर तनीसुन विचार कर लेल आवश्यक है जेकर रूपरेखा हमनीके [[पतञ्जलि]]के सूत्रमे भेट है । तनीमनी शब्दभेदसे ई प्रक्रिया ऊ सब समुदायके मान्य है जे योगके अभ्यासके समर्थन कर हथिन । ===परिभाषा=== *(१) [[योगसूत्र|पातञ्जल योग दर्शन]]के अनुसार - '''योगश्चित्तवृतिनिरोधः''' (१/२) अर्थात् चित्तके वृत्तिके निरोधे योग है । *(२) [[साङ्ख्य दर्शन]]के अनुसार - '''पुरुषप्रकृत्योर्वियोगेपि योगइत्यमिधीयते ।''' अर्थात् पुरुष एवं प्रकृतिके पार्थक्यके स्थापित करके पुरुषके स्वरूपमे अवस्थित होइले योग है । *(३) [[विष्णुपुराण]]के अनुसार - '''योगः संयोग इत्युक्तः जीवात्म परमात्मने''' अर्थात् जीवात्मा एवं परमात्माके पूर्णतया मिलने योग है । *(४) [[भगवद्गीता]]के अनुसार - '''सिद्धासिद्धयो समोभूत्वा समत्वं योग उच्चते''' (२/४८) अर्थात् दुःख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत आउ उष्ण आदि द्वन्दमे सर्वत्र समभाव रखल योग है । *(५) [[भगवद्गीता]]के अनुसार - '''तस्माद्दयोगाययुज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्''' अर्थात् कर्त्तव्य कर्म बन्धक न होवे एहीसे निष्काम भावनासे अनुप्रेरित होके कर्त्तव्य करेके कौशल योग है । *(६) [[आचार्य हरिभद्र]]के अनुसार - '''मोक्खेण जोयणाओ सव्वो वि धम्म ववहारो जोगो''' अर्थात् [[मोक्ष]]से जोड़ेवाला सब व्यवहार योग है । *(७) [[बौद्धधर्म]]के अनुसार - '''कुशल चितैकग्गता योगः''' अर्थात् कुशल चित्तके एकाग्रता योग है । ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == बाहरी कड़ी == {{विकिसूक्ति|योग}} * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि) *[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे) {{योग}} {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] mnely6yaj2osb5oipoxvktdzc7pf0h9 80501 80500 2026-09-26T06:09:29Z Pataliputra01 5 80501 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । == व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार == '''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज्‌ शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे । पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है - :१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय :२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय :३) युज् संयमने - चुरादिगणीय '''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल । '''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३) ''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है । ई प्रकार योगके अर्थ होलै - "योग साधनाके अपनावित मनके नियन्त्रित करके, संयमित करके, आत्माके परमात्मासे मिलन" । [[परिभाषा]] ऐसन होवेके चाही जे अव्याप्ति आउ अतिव्याप्ति दोषसे मुक्त होवे, योग शब्दके वाच्यार्थके ऐसन लक्षण बता सके जे प्रत्येक प्रसङ्गला उपयुक्त होवे आउ योगके इलावा कोनो अन्य वस्तुला उपयुक्त न होवे । [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ मानल जा है । ओकरामे योग शब्दके ढेर बार प्रयोग होलै हे । कखनियो अकेले आउ कखनियो सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग । वेदोत्तर कालमे [[भक्तियोग]] आउ [[हठयोग]] नामो प्रचलित हो गेलै हे । [[पतञ्जलि]] [[योगदर्शन]]मे 'क्रियायोग' शब्द देखेमे आव है । [[पाशुपत योग]] आउ माहेश्वर योग नियन शब्दोके प्रसङ्ग भेट है । ई सब स्थलमे योग शब्दके जे अर्थ है ऊ एक दोसरसे भिन्न है । [[गीता]]मे [[श्रीकृष्ण]] एक स्थल पर कहलथिन हे ''''योगः कर्मसु कौशलम्'''‌' (कर्ममे कुशलते योग है) । ई वाक्य योगके परिभाषा न है । कुछ विद्वानके ई मत है कि जीवात्मा आउ परमात्माके मिल जाएके योग कहल जा है । ई बातके स्वीकार करेमे ई बड़ आपत्ति खड़ा होव है कि [[बौद्धधर्म|बौद्धमतावलम्बियो]] जे परमात्माके सत्ताके स्वीकार न करथिन, योग शब्दके व्यवहार कर आउ योगके समर्थन कर हथिन । एही बात [[साङ्ख्य|साङ्ख्यवादियो]]ला कहल जा सक है जे ईश्वरके सत्ताके असिद्ध मान हथिन । [[पतञ्जलि]] [[योगसूत्र]]मे जे परिभाषा देलथिन हे 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः', चित्तके वृत्तिके निरोधके नाम योग है । ई वाक्यके दु अर्थ हो सक है - चित्तवृत्तिके निरोधके अवस्थाके नाम योग है या ई अवस्थाके लावेके उपायके योग कहल जा है । किन्तु ई परिभाषा पर ढेर विद्वानके आपत्ति है । उनकर कहलाम है जे चित्तवृत्तिके प्रवाहेके नाम चित्त है । पूर्ण निरोधके अर्थ होतै चित्तके अस्तित्वके पूर्ण लोप, चित्ताश्रय समस्त स्मृति आउ संस्कारके निःशेष हो जाएल । यदि ऐसन हो जाए त फिर समाधिसे उठल सम्भव न होतै । काहेकि ऊ अवस्थाके सहाराला कोनो संस्कार बचल न होतै, प्रारब्ध दग्ध हो गेल होतै । निरोध यदि सम्भव होवै त [[श्रीकृष्ण]]के ई वाक्यके का अर्थ होतै ? ''योगस्थः कुरु कर्माणि'', योगमे स्थित होके कर्म करथिन । विरुद्धावस्थामे कर्म हो न सकै आउ ऊ अवस्थामे कोनो संस्कार न पड़ सकै, स्मृति न बन सकै, जे समाधिसे उठेके बाद कर्म करेमे सहायक होवे । संक्षेपमे आशय ई है कि योगके शास्त्रीय स्वरूप, ओकर दार्शनिक आधार, के सम्यक्‌ रूपसे बुझल बड़ी सरल न है । संसारके मिथ्या मानेवाला [[अद्वैत वेदान्त|अद्वैतवादियो]] निदिध्याह्नके नामसे ओकर समर्थन कर है । अनीश्वरवादी साङ्ख्य विद्वानो ओकर अनुमोदन कर हथिन । [[बौद्धधर्म|बौद्धे]] न, [[इस्लाम|मुसलमान]] [[सूफी]] आउ [[ईसाई]] मिस्टिको कोनो न कोनो प्रकार अपन सम्प्रदायके मान्यता आउ दार्शनिक सिद्धान्तके साथे ओकर सामञ्जस्य स्थापित कर ले हथिन । ई सब विभिन्न दार्शनिक विचारधारामे कौन प्रकार ऐसन समन्वय हो सक है कि ऐसन धरातल मिल सके जेकरा पर योगके भित्ति खड़ा कैल जा सके, ई बड़ रोचक प्रश्न है किन्तु एकर विवेचनला बड़ी समय चाही । एहाँ ऊ प्रक्रिया पर तनीसुन विचार कर लेल आवश्यक है जेकर रूपरेखा हमनीके [[पतञ्जलि]]के सूत्रमे भेट है । तनीमनी शब्दभेदसे ई प्रक्रिया ऊ सब समुदायके मान्य है जे योगके अभ्यासके समर्थन कर हथिन । ===परिभाषा=== *(१) [[योगसूत्र|पातञ्जल योग दर्शन]]के अनुसार - '''योगश्चित्तवृतिनिरोधः''' (१/२) अर्थात् चित्तके वृत्तिके निरोधे योग है । *(२) [[साङ्ख्य दर्शन]]के अनुसार - '''पुरुषप्रकृत्योर्वियोगेपि योगइत्यमिधीयते ।''' अर्थात् पुरुष एवं प्रकृतिके पार्थक्यके स्थापित करके पुरुषके स्वरूपमे अवस्थित होइले योग है । *(३) [[विष्णुपुराण]]के अनुसार - '''योगः संयोग इत्युक्तः जीवात्म परमात्मने''' अर्थात् जीवात्मा एवं परमात्माके पूर्णतया मिलने योग है । *(४) [[भगवद्गीता]]के अनुसार - '''सिद्धासिद्धयो समोभूत्वा समत्वं योग उच्चते''' (२/४८) अर्थात् दुःख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत आउ उष्ण आदि द्वन्दमे सर्वत्र समभाव रखल योग है । *(५) [[भगवद्गीता]]के अनुसार - '''तस्माद्दयोगाययुज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्''' अर्थात् कर्त्तव्य कर्म बन्धक न होवे एहीसे निष्काम भावनासे अनुप्रेरित होके कर्त्तव्य करेके कौशल योग है । *(६) [[आचार्य हरिभद्र]]के अनुसार - '''मोक्खेण जोयणाओ सव्वो वि धम्म ववहारो जोगो''' अर्थात् [[मोक्ष]]से जोड़ेवाला सब व्यवहार योग है । *(७) [[बौद्धधर्म]]के अनुसार - '''कुशल चितैकग्गता योगः''' अर्थात् कुशल चित्तके एकाग्रता योग है । भारतीय दार्शनिक आउ धार्मिक परम्परामे "योग" शब्दके अलगे-अलगे विधिसे परिभाषित कैल गेलै हे । ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == बाहरी कड़ी == {{विकिसूक्ति|योग}} * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि) *[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे) {{योग}} {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] r9xueddqpjw95xg2wpkqzunhak2m3lq 80502 80501 2026-09-26T06:21:54Z Pataliputra01 5 80502 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । == व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार == '''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज्‌ शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे । पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है - :१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय :२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय :३) युज् संयमने - चुरादिगणीय '''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल । '''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३) ''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है । ई प्रकार योगके अर्थ होलै - "योग साधनाके अपनावित मनके नियन्त्रित करके, संयमित करके, आत्माके परमात्मासे मिलन" । [[परिभाषा]] ऐसन होवेके चाही जे अव्याप्ति आउ अतिव्याप्ति दोषसे मुक्त होवे, योग शब्दके वाच्यार्थके ऐसन लक्षण बता सके जे प्रत्येक प्रसङ्गला उपयुक्त होवे आउ योगके इलावा कोनो अन्य वस्तुला उपयुक्त न होवे । [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ मानल जा है । ओकरामे योग शब्दके ढेर बार प्रयोग होलै हे । कखनियो अकेले आउ कखनियो सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग । वेदोत्तर कालमे [[भक्तियोग]] आउ [[हठयोग]] नामो प्रचलित हो गेलै हे । [[पतञ्जलि]] [[योगदर्शन]]मे 'क्रियायोग' शब्द देखेमे आव है । [[पाशुपत योग]] आउ माहेश्वर योग नियन शब्दोके प्रसङ्ग भेट है । ई सब स्थलमे योग शब्दके जे अर्थ है ऊ एक दोसरसे भिन्न है । [[गीता]]मे [[श्रीकृष्ण]] एक स्थल पर कहलथिन हे ''''योगः कर्मसु कौशलम्'''‌' (कर्ममे कुशलते योग है) । ई वाक्य योगके परिभाषा न है । कुछ विद्वानके ई मत है कि जीवात्मा आउ परमात्माके मिल जाएके योग कहल जा है । ई बातके स्वीकार करेमे ई बड़ आपत्ति खड़ा होव है कि [[बौद्धधर्म|बौद्धमतावलम्बियो]] जे परमात्माके सत्ताके स्वीकार न करथिन, योग शब्दके व्यवहार कर आउ योगके समर्थन कर हथिन । एही बात [[साङ्ख्य|साङ्ख्यवादियो]]ला कहल जा सक है जे ईश्वरके सत्ताके असिद्ध मान हथिन । [[पतञ्जलि]] [[योगसूत्र]]मे जे परिभाषा देलथिन हे 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः', चित्तके वृत्तिके निरोधके नाम योग है । ई वाक्यके दु अर्थ हो सक है - चित्तवृत्तिके निरोधके अवस्थाके नाम योग है या ई अवस्थाके लावेके उपायके योग कहल जा है । किन्तु ई परिभाषा पर ढेर विद्वानके आपत्ति है । उनकर कहलाम है जे चित्तवृत्तिके प्रवाहेके नाम चित्त है । पूर्ण निरोधके अर्थ होतै चित्तके अस्तित्वके पूर्ण लोप, चित्ताश्रय समस्त स्मृति आउ संस्कारके निःशेष हो जाएल । यदि ऐसन हो जाए त फिर समाधिसे उठल सम्भव न होतै । काहेकि ऊ अवस्थाके सहाराला कोनो संस्कार बचल न होतै, प्रारब्ध दग्ध हो गेल होतै । निरोध यदि सम्भव होवै त [[श्रीकृष्ण]]के ई वाक्यके का अर्थ होतै ? ''योगस्थः कुरु कर्माणि'', योगमे स्थित होके कर्म करथिन । विरुद्धावस्थामे कर्म हो न सकै आउ ऊ अवस्थामे कोनो संस्कार न पड़ सकै, स्मृति न बन सकै, जे समाधिसे उठेके बाद कर्म करेमे सहायक होवे । संक्षेपमे आशय ई है कि योगके शास्त्रीय स्वरूप, ओकर दार्शनिक आधार, के सम्यक्‌ रूपसे बुझल बड़ी सरल न है । संसारके मिथ्या मानेवाला [[अद्वैत वेदान्त|अद्वैतवादियो]] निदिध्याह्नके नामसे ओकर समर्थन कर है । अनीश्वरवादी साङ्ख्य विद्वानो ओकर अनुमोदन कर हथिन । [[बौद्धधर्म|बौद्धे]] न, [[इस्लाम|मुसलमान]] [[सूफी]] आउ [[ईसाई]] मिस्टिको कोनो न कोनो प्रकार अपन सम्प्रदायके मान्यता आउ दार्शनिक सिद्धान्तके साथे ओकर सामञ्जस्य स्थापित कर ले हथिन । ई सब विभिन्न दार्शनिक विचारधारामे कौन प्रकार ऐसन समन्वय हो सक है कि ऐसन धरातल मिल सके जेकरा पर योगके भित्ति खड़ा कैल जा सके, ई बड़ रोचक प्रश्न है किन्तु एकर विवेचनला बड़ी समय चाही । एहाँ ऊ प्रक्रिया पर तनीसुन विचार कर लेल आवश्यक है जेकर रूपरेखा हमनीके [[पतञ्जलि]]के सूत्रमे भेट है । तनीमनी शब्दभेदसे ई प्रक्रिया ऊ सब समुदायके मान्य है जे योगके अभ्यासके समर्थन कर हथिन । ===परिभाषा=== *(१) [[योगसूत्र|पातञ्जल योग दर्शन]]के अनुसार - '''योगश्चित्तवृतिनिरोधः''' (१/२) अर्थात् चित्तके वृत्तिके निरोधे योग है । *(२) [[साङ्ख्य दर्शन]]के अनुसार - '''पुरुषप्रकृत्योर्वियोगेपि योगइत्यमिधीयते ।''' अर्थात् पुरुष एवं प्रकृतिके पार्थक्यके स्थापित करके पुरुषके स्वरूपमे अवस्थित होइले योग है । *(३) [[विष्णुपुराण]]के अनुसार - '''योगः संयोग इत्युक्तः जीवात्म परमात्मने''' अर्थात् जीवात्मा एवं परमात्माके पूर्णतया मिलने योग है । *(४) [[भगवद्गीता]]के अनुसार - '''सिद्धासिद्धयो समोभूत्वा समत्वं योग उच्चते''' (२/४८) अर्थात् दुःख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत आउ उष्ण आदि द्वन्दमे सर्वत्र समभाव रखल योग है । *(५) [[भगवद्गीता]]के अनुसार - '''तस्माद्दयोगाययुज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्''' अर्थात् कर्त्तव्य कर्म बन्धक न होवे एहीसे निष्काम भावनासे अनुप्रेरित होके कर्त्तव्य करेके कौशल योग है । *(६) [[आचार्य हरिभद्र]]के अनुसार - '''मोक्खेण जोयणाओ सव्वो वि धम्म ववहारो जोगो''' अर्थात् [[मोक्ष]]से जोड़ेवाला सब व्यवहार योग है । *(७) [[बौद्धधर्म]]के अनुसार - '''कुशल चितैकग्गता योगः''' अर्थात् कुशल चित्तके एकाग्रता योग है । भारतीय दार्शनिक आउ धार्मिक परम्परामे "योग" शब्दके अलगे-अलगे विधिसे परिभाषित कैल गेलै हे । {| class="wikitable" |- ! मूल ग्रन्थ !! अनुमानित रचना-काल !! योगके परिभाषा |- |''[[मैत्रायणी उपनिषद]]'' | लगभग चतुर्थ शताब्दी ईसापूर्व | ''कत्वं प्राणमनसोरिन्द्रियाणां तथैव च ।'' <br>''सर्वभाव परित्यागो योग इत्यभिधीयते ॥'' -- मैत्रायणी उपनिषद् 6/25 <br>अर्थात् प्राण, मन एवं इन्द्रियके एक हो जाएल, एकाग्रावस्थाके प्राप्त कर लेल, बाह्म विषयसे विमुख होके इन्द्रियके मनमे आउ मन आत्मामे लग जाएल, प्राणके निष्चल हो जाएल योग है । |- | [[वैशेषिक सूत्र]] | लगभग चौथा शताब्दी ईसा पूर्व | ''तदनारम्भ आत्मस्ये मनसि शरीरस्य दुःखाभावः संयोगः ।'' -- वैशेषिक सूत्र ६/२/१६<br> अर्थात् मन आत्मामे स्थिर होवे पर ओकर (मनके) कार्यके अनारम्भ है, ऊ योग है । |- | ''[[कठोपनिषद]]'' | ईसा पूर्वके अन्तिम शताब्दी | ''यदा पञ्चावतिष्ठन्ते ज्ञानानि मनसा सह ।''<br>''बुद्धिश्च न विचेष्टते तामाहुः परमां गतिम् ॥''<br>''तां योगमिति मन्यन्ते स्थिरामिन्द्रियधारणाम्‌ ।''<br>''अप्रमत्तस्तदा भवति योगो हि प्रभवाप्ययौ ॥'' -- कठोपनिषद ६ / १०-११, नचिकेता आउ यमके बीच संवाद<br>जखनि मनके साथे समस्त ज्ञानेन्द्रिय भलीभाँति स्थिर हो जा है आउ बुद्धियोके कोनो चेष्टा न रहै तखनि ई अवस्थाके परमागति कहल जा है । ओही स्थिर इन्द्रिय-धारणाके योग कहल जा है । ऊ अवस्थामे साधक प्रमाद रहित होव है । काहेकि 'योग' एही पदार्थके उद्भव एवं लय (प्रभवाव्ययौ) दुनहीँ है । |- | ''[[भगवद्गीता]]'' | लगभग दोसर शताब्दी ईसा पूर्व | "सफलता आउ असफलता दुनोमे समभाव (एक समान) रहल । ऐसन समते योग कहला है ।" (२.४८) "कर्ममे कुशलते योग है ।" (२.५०) "ई जानथिन कि जेकरा योग कहल जा है, ऊ दुःखके संयोगसे वियोग (दुःखसे मुक्ति) है ।" (६.२३) |- | ''[[पतञ्जलि योगसूत्र]]'' | लगभग प्रारम्भिक शताब्दी ईस्वी | १.२. ''योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः'' – "चित्तके वृत्तिके रुक जाएले योग है ।" १.३. तखनि [[पुरुष (साङ्ख्य)|पुरुष]] |- | ''योगभाष्य'' | योगसूत्रके समाने | ''योगः समाधिः'' - "समाधिए योग है," जे [[एकाग्रता]] आउ ''निरुद्ध'' मने विषय-रहित [[समाधि]] (''असम्प्रज्ञात समाधि'') के सन्दर्भित कर है । |- | ''[[योगाचारभूमि-शास्त्र]] (श्रावकभूमि)'', एक [[महायान]] बौद्ध [[योगाचार]] ग्रन्थ | चौथा शताब्दी ईस्वी | | "योग चार प्रकारके है - श्रद्धा (विश्वास), आकांक्षा, दृढ़ता आउ उपाय ।" (२.१५२) |- | [[पाशुपत सूत्र]] पर कौण्डिन्यके ''पञ्चार्थभाष्य'' | चौथा शताब्दी ईस्वी | "ई प्रणालीमे जीवात्मा आउ ईश्वर (प्रभु) के मिलने योग है ।" (१.१.४३) |- | [[हरिभद्र सूरी]] द्वारा रचित एक [[जैन ग्रन्थ]] | छठा शताब्दी ईस्वी | "दृढ़ विश्वासके साथे योगीके स्वामि हमनीके सिद्धान्तमे योगके सम्यक् ज्ञानसे शुरू होवेवाला तीनो [सम्यक् ज्ञान, सम्यक् दर्शन आउ सम्यक् चारित्र] के संयोग (''सम्बन्धः'') के रूपमे परिभाषित कैलन हे काहेकि [एकरासे] [[मोक्ष]]के साथे जुड़ाव होव है.... सामान्य बोलचालमे ई [योग] शब्द एकर कारणके साथे [आत्माके] सम्पर्कोके दर्शाव है काहेकि कार्यला कारणके उपयोग सामान्य है ।" (२, ४) |- | ''[[लिङ्ग पुराण]]'' | ७मा–१०मा शताब्दी ईस्वी | " 'योग' शब्दसे तात्पर्य [[निर्वाण]]से है जे [[शिव]]के स्थिति है ।" (१.८.५ए) |- | [[आदि शङ्कराचार्य]]के ''[[ब्रह्मसूत्र]]-भाष्य'' | लगभग ८मा शताब्दी ईस्वी | "योगके ग्रन्थमे कहल गेलै है: 'योग वास्तविकता (तत्त्व) के जानेके साधन है' (''अथ तत्त्वदर्शनभ्युपायो योगः'')" (२.१.३) |- | ''मालिनीविजयोत्तर तन्त्र'', अद्वैत [[कश्मीर शैव दर्शन]]के प्राथमिक ग्रन्थमे से एक | ६ठा–१०मष शताब्दी ईस्वी | "एक सत्ताके दोसर सत्ताके साथ एक हो जाएल योग कहल जा है ।" (४.४-८) |- | [[शैव सिद्धान्त]]के विद्वान नारायणकण्ठके ''मृगेन्द्रतन्त्रवृत्ति'' | ६ठा–१०मा शताब्दी ईस्वी | "आत्म-नियन्त्रण (स्वामित्व) प्राप्त कैले योगी होएल है । योगी शब्दके अर्थ है 'ऊ जे अनिवार्य रूपसे अपन स्वरूपके अभिव्यक्ति... शिव-त्व (''शिवत्वम्'') से संयुक्त' होवे ।" |- | लक्ष्मणदेशिकेन्द्रके ''शारदातिलक'', एक [[शाक्त धर्म]] | ११मा शताब्दी ईस्वी | "योगके विशेषज्ञ कह हथ जीवात्माके [[आत्मा]] |- | ''[[योगबीज]]'', एक [[हठयोग]] ग्रन्थ | १४मा शताब्दी ईस्वी | "[[अपान]] आउ प्राण, अपन स्वयं के [[रज]] आउ वीर्य, सूर्य आउ चन्द्रमा, जीवात्मा आउ परमात्माके मिलन आउ एही प्रकार सब द्वन्द्वके मिलन योग कहला है ।" (८९) |} ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == बाहरी कड़ी == {{विकिसूक्ति|योग}} * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि) *[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे) {{योग}} {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] 0kivna9oksj8w65yyj5igafjslg0oce