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[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
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[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
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[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
[[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है ।
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[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
[[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है ।
सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै ।
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[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
[[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है ।
सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै ।
[[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल ।
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[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
[[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है ।
सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै ।
[[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल ।
==एकरो देखथिन==
* [[योगके इतिहास]]
* [[योग दर्शन]]
* [[अष्टाङ्ग योग]]
* [[योगसूत्र]]
* [[हठयोग]]
* [[जैनधर्ममे योग]]
* [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]]
* [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है ।
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[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
[[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है ।
सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै ।
[[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल ।
==एकरो देखथिन==
* [[योगके इतिहास]]
* [[योग दर्शन]]
* [[अष्टाङ्ग योग]]
* [[योगसूत्र]]
* [[हठयोग]]
* [[जैनधर्ममे योग]]
* [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]]
* [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है ।
== बाहरी कड़ी ==
{{विकिसूक्ति|योग}}
* [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]]
* [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण]
* [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है)
*[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि)
*[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे)
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[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
[[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है ।
सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै ।
[[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल ।
==एकरो देखथिन==
* [[योगके इतिहास]]
* [[योग दर्शन]]
* [[अष्टाङ्ग योग]]
* [[योगसूत्र]]
* [[हठयोग]]
* [[जैनधर्ममे योग]]
* [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]]
* [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है ।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ी ==
{{विकिसूक्ति|योग}}
* [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]]
* [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण]
* [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है)
*[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि)
*[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे)
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[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
[[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है ।
सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै ।
[[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल ।
==एकरो देखथिन==
* [[योगके इतिहास]]
* [[योग दर्शन]]
* [[अष्टाङ्ग योग]]
* [[योगसूत्र]]
* [[हठयोग]]
* [[जैनधर्ममे योग]]
* [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]]
* [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है ।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ी ==
{{विकिसूक्ति|योग}}
* [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]]
* [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण]
* [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है)
*[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि)
*[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे)
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}}
[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
[[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है ।
सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै ।
[[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल ।
==एकरो देखथिन==
* [[योगके इतिहास]]
* [[योग दर्शन]]
* [[अष्टाङ्ग योग]]
* [[योगसूत्र]]
* [[हठयोग]]
* [[जैनधर्ममे योग]]
* [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]]
* [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है ।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ी ==
{{विकिसूक्ति|योग}}
* [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]]
* [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण]
* [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है)
*[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि)
*[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे)
{{योग}}
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[[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]]
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}}
[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
[[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है ।
सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै ।
[[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल ।
== व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार ==
==एकरो देखथिन==
* [[योगके इतिहास]]
* [[योग दर्शन]]
* [[अष्टाङ्ग योग]]
* [[योगसूत्र]]
* [[हठयोग]]
* [[जैनधर्ममे योग]]
* [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]]
* [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है ।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ी ==
{{विकिसूक्ति|योग}}
* [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]]
* [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण]
* [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है)
*[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि)
*[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे)
{{योग}}
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[[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]]
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[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
[[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है ।
सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै ।
[[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल ।
== व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार ==
'''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज् शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे ।
==एकरो देखथिन==
* [[योगके इतिहास]]
* [[योग दर्शन]]
* [[अष्टाङ्ग योग]]
* [[योगसूत्र]]
* [[हठयोग]]
* [[जैनधर्ममे योग]]
* [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]]
* [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है ।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ी ==
{{विकिसूक्ति|योग}}
* [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]]
* [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण]
* [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है)
*[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि)
*[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे)
{{योग}}
{{भारतीय दर्शन}}
[[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]]
[[श्रेणी:योग]]
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[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
[[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है ।
सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै ।
[[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल ।
== व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार ==
'''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज् शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे ।
पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है -
:१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय
:२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय
:३) युज् संयमने - चुरादिगणीय
==एकरो देखथिन==
* [[योगके इतिहास]]
* [[योग दर्शन]]
* [[अष्टाङ्ग योग]]
* [[योगसूत्र]]
* [[हठयोग]]
* [[जैनधर्ममे योग]]
* [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]]
* [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है ।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ी ==
{{विकिसूक्ति|योग}}
* [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]]
* [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण]
* [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है)
*[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि)
*[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे)
{{योग}}
{{भारतीय दर्शन}}
[[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]]
[[श्रेणी:योग]]
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}}
[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
[[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है ।
सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै ।
[[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल ।
== व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार ==
'''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज् शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे ।
पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है -
:१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय
:२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय
:३) युज् संयमने - चुरादिगणीय
'''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल ।
==एकरो देखथिन==
* [[योगके इतिहास]]
* [[योग दर्शन]]
* [[अष्टाङ्ग योग]]
* [[योगसूत्र]]
* [[हठयोग]]
* [[जैनधर्ममे योग]]
* [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]]
* [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है ।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ी ==
{{विकिसूक्ति|योग}}
* [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]]
* [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण]
* [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है)
*[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि)
*[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे)
{{योग}}
{{भारतीय दर्शन}}
[[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]]
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[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
[[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है ।
सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै ।
[[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल ।
== व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार ==
'''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज् शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे ।
पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है -
:१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय
:२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय
:३) युज् संयमने - चुरादिगणीय
'''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल ।
'''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३)
==एकरो देखथिन==
* [[योगके इतिहास]]
* [[योग दर्शन]]
* [[अष्टाङ्ग योग]]
* [[योगसूत्र]]
* [[हठयोग]]
* [[जैनधर्ममे योग]]
* [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]]
* [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है ।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ी ==
{{विकिसूक्ति|योग}}
* [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]]
* [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण]
* [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है)
*[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि)
*[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे)
{{योग}}
{{भारतीय दर्शन}}
[[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]]
[[श्रेणी:योग]]
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{{multiple image
| footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]]
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[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
[[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है ।
सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै ।
[[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल ।
== व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार ==
'''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज् शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे ।
पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है -
:१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय
:२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय
:३) युज् संयमने - चुरादिगणीय
'''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल ।
'''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३)
''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है ।
==एकरो देखथिन==
* [[योगके इतिहास]]
* [[योग दर्शन]]
* [[अष्टाङ्ग योग]]
* [[योगसूत्र]]
* [[हठयोग]]
* [[जैनधर्ममे योग]]
* [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]]
* [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है ।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ी ==
{{विकिसूक्ति|योग}}
* [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]]
* [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण]
* [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है)
*[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि)
*[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे)
{{योग}}
{{भारतीय दर्शन}}
[[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]]
[[श्रेणी:योग]]
[[श्रेणी:भारतीय दर्शन]]
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[[श्रेणी:ध्यान]]
[[श्रेणी:व्यायाम]]
[[श्रेणी:भारतीय खोज]]
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}}
[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
[[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है ।
सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै ।
[[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल ।
== व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार ==
'''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज् शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे ।
पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है -
:१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय
:२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय
:३) युज् संयमने - चुरादिगणीय
'''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल ।
'''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३)
''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है ।
ई प्रकार योगके अर्थ होलै - "योग साधनाके अपनावित मनके नियन्त्रित करके, संयमित करके, आत्माके परमात्मासे मिलन" ।
==एकरो देखथिन==
* [[योगके इतिहास]]
* [[योग दर्शन]]
* [[अष्टाङ्ग योग]]
* [[योगसूत्र]]
* [[हठयोग]]
* [[जैनधर्ममे योग]]
* [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]]
* [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है ।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ी ==
{{विकिसूक्ति|योग}}
* [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]]
* [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण]
* [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है)
*[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि)
*[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे)
{{योग}}
{{भारतीय दर्शन}}
[[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]]
[[श्रेणी:योग]]
[[श्रेणी:भारतीय दर्शन]]
[[श्रेणी:संस्कृत शब्द]]
[[श्रेणी:ध्यान]]
[[श्रेणी:व्यायाम]]
[[श्रेणी:भारतीय खोज]]
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| alt1 = एगो पुरुष योगी
| image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg
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| alt2 = दुगो महिला योगिनी
}}
[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
[[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है ।
सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै ।
[[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल ।
== व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार ==
'''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज् शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे ।
पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है -
:१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय
:२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय
:३) युज् संयमने - चुरादिगणीय
'''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल ।
'''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३)
''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है ।
ई प्रकार योगके अर्थ होलै - "योग साधनाके अपनावित मनके नियन्त्रित करके, संयमित करके, आत्माके परमात्मासे मिलन" ।
[[परिभाषा]] ऐसन होवेके चाही जे अव्याप्ति आउ अतिव्याप्ति दोषसे मुक्त होवे, योग शब्दके वाच्यार्थके ऐसन लक्षण बता सके जे प्रत्येक प्रसङ्गला उपयुक्त होवे आउ योगके इलावा कोनो अन्य वस्तुला उपयुक्त न होवे । [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ मानल जा है । ओकरामे योग शब्दके ढेर बार प्रयोग होलै हे । कखनियो अकेले आउ कखनियो सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग । वेदोत्तर कालमे [[भक्तियोग]] आउ [[हठयोग]] नामो प्रचलित हो गेलै हे । [[पतञ्जलि]] [[योगदर्शन]]मे 'क्रियायोग' शब्द देखेमे आव है । [[पाशुपत योग]] आउ माहेश्वर योग नियन शब्दोके प्रसङ्ग भेट है । ई सब स्थलमे योग शब्दके जे अर्थ है ऊ एक दोसरसे भिन्न है ।
==एकरो देखथिन==
* [[योगके इतिहास]]
* [[योग दर्शन]]
* [[अष्टाङ्ग योग]]
* [[योगसूत्र]]
* [[हठयोग]]
* [[जैनधर्ममे योग]]
* [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]]
* [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है ।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ी ==
{{विकिसूक्ति|योग}}
* [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]]
* [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण]
* [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है)
*[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि)
*[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे)
{{योग}}
{{भारतीय दर्शन}}
[[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]]
[[श्रेणी:योग]]
[[श्रेणी:भारतीय दर्शन]]
[[श्रेणी:संस्कृत शब्द]]
[[श्रेणी:ध्यान]]
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[[श्रेणी:भारतीय खोज]]
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{{multiple image
| footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]]
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}}
[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
[[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है ।
सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै ।
[[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल ।
== व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार ==
'''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज् शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे ।
पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है -
:१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय
:२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय
:३) युज् संयमने - चुरादिगणीय
'''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल ।
'''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३)
''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है ।
ई प्रकार योगके अर्थ होलै - "योग साधनाके अपनावित मनके नियन्त्रित करके, संयमित करके, आत्माके परमात्मासे मिलन" ।
[[परिभाषा]] ऐसन होवेके चाही जे अव्याप्ति आउ अतिव्याप्ति दोषसे मुक्त होवे, योग शब्दके वाच्यार्थके ऐसन लक्षण बता सके जे प्रत्येक प्रसङ्गला उपयुक्त होवे आउ योगके इलावा कोनो अन्य वस्तुला उपयुक्त न होवे । [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ मानल जा है । ओकरामे योग शब्दके ढेर बार प्रयोग होलै हे । कखनियो अकेले आउ कखनियो सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग । वेदोत्तर कालमे [[भक्तियोग]] आउ [[हठयोग]] नामो प्रचलित हो गेलै हे । [[पतञ्जलि]] [[योगदर्शन]]मे 'क्रियायोग' शब्द देखेमे आव है । [[पाशुपत योग]] आउ माहेश्वर योग नियन शब्दोके प्रसङ्ग भेट है । ई सब स्थलमे योग शब्दके जे अर्थ है ऊ एक दोसरसे भिन्न है ।
[[गीता]]मे [[श्रीकृष्ण]] एक स्थल पर कहलथिन हे ''''योगः कर्मसु कौशलम्'''' (कर्ममे कुशलते योग है) । ई वाक्य योगके परिभाषा न है । कुछ विद्वानके ई मत है कि जीवात्मा आउ परमात्माके मिल जाएके योग कहल जा है । ई बातके स्वीकार करेमे ई बड़ आपत्ति खड़ा होव है कि [[बौद्धधर्म|बौद्धमतावलम्बियो]] जे परमात्माके सत्ताके स्वीकार न करथिन, योग शब्दके व्यवहार कर आउ योगके समर्थन कर हथिन । एही बात [[साङ्ख्य|साङ्ख्यवादियो]]ला कहल जा सक है जे ईश्वरके सत्ताके असिद्ध मान हथिन । [[पतञ्जलि]] [[योगसूत्र]]मे जे परिभाषा देलथिन हे 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः', चित्तके वृत्तिके निरोधके नाम योग है । ई वाक्यके दु अर्थ हो सक है - चित्तवृत्तिके निरोधके अवस्थाके नाम योग है या ई अवस्थाके लावेके उपायके योग कहल जा है ।
==एकरो देखथिन==
* [[योगके इतिहास]]
* [[योग दर्शन]]
* [[अष्टाङ्ग योग]]
* [[योगसूत्र]]
* [[हठयोग]]
* [[जैनधर्ममे योग]]
* [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]]
* [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है ।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ी ==
{{विकिसूक्ति|योग}}
* [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]]
* [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण]
* [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है)
*[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि)
*[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे)
{{योग}}
{{भारतीय दर्शन}}
[[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]]
[[श्रेणी:योग]]
[[श्रेणी:भारतीय दर्शन]]
[[श्रेणी:संस्कृत शब्द]]
[[श्रेणी:ध्यान]]
[[श्रेणी:व्यायाम]]
[[श्रेणी:भारतीय खोज]]
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{{multiple image
| footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]]
| image1 = A yogi seated in a garden.jpg
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| alt1 = एगो पुरुष योगी
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}}
[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
[[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है ।
सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै ।
[[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल ।
== व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार ==
'''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज् शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे ।
पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है -
:१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय
:२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय
:३) युज् संयमने - चुरादिगणीय
'''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल ।
'''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३)
''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है ।
ई प्रकार योगके अर्थ होलै - "योग साधनाके अपनावित मनके नियन्त्रित करके, संयमित करके, आत्माके परमात्मासे मिलन" ।
[[परिभाषा]] ऐसन होवेके चाही जे अव्याप्ति आउ अतिव्याप्ति दोषसे मुक्त होवे, योग शब्दके वाच्यार्थके ऐसन लक्षण बता सके जे प्रत्येक प्रसङ्गला उपयुक्त होवे आउ योगके इलावा कोनो अन्य वस्तुला उपयुक्त न होवे । [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ मानल जा है । ओकरामे योग शब्दके ढेर बार प्रयोग होलै हे । कखनियो अकेले आउ कखनियो सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग । वेदोत्तर कालमे [[भक्तियोग]] आउ [[हठयोग]] नामो प्रचलित हो गेलै हे । [[पतञ्जलि]] [[योगदर्शन]]मे 'क्रियायोग' शब्द देखेमे आव है । [[पाशुपत योग]] आउ माहेश्वर योग नियन शब्दोके प्रसङ्ग भेट है । ई सब स्थलमे योग शब्दके जे अर्थ है ऊ एक दोसरसे भिन्न है ।
[[गीता]]मे [[श्रीकृष्ण]] एक स्थल पर कहलथिन हे ''''योगः कर्मसु कौशलम्'''' (कर्ममे कुशलते योग है) । ई वाक्य योगके परिभाषा न है । कुछ विद्वानके ई मत है कि जीवात्मा आउ परमात्माके मिल जाएके योग कहल जा है । ई बातके स्वीकार करेमे ई बड़ आपत्ति खड़ा होव है कि [[बौद्धधर्म|बौद्धमतावलम्बियो]] जे परमात्माके सत्ताके स्वीकार न करथिन, योग शब्दके व्यवहार कर आउ योगके समर्थन कर हथिन । एही बात [[साङ्ख्य|साङ्ख्यवादियो]]ला कहल जा सक है जे ईश्वरके सत्ताके असिद्ध मान हथिन । [[पतञ्जलि]] [[योगसूत्र]]मे जे परिभाषा देलथिन हे 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः', चित्तके वृत्तिके निरोधके नाम योग है । ई वाक्यके दु अर्थ हो सक है - चित्तवृत्तिके निरोधके अवस्थाके नाम योग है या ई अवस्थाके लावेके उपायके योग कहल जा है ।
किन्तु ई परिभाषा पर ढेर विद्वानके आपत्ति है । उनकर कहलाम है जे चित्तवृत्तिके प्रवाहेके नाम चित्त है । पूर्ण निरोधके अर्थ होतै चित्तके अस्तित्वके पूर्ण लोप, चित्ताश्रय समस्त स्मृति आउ संस्कारके निःशेष हो जाएल । यदि ऐसन हो जाए त फिर समाधिसे उठल सम्भव न होतै । काहेकि ऊ अवस्थाके सहाराला कोनो संस्कार बचल न होतै, प्रारब्ध दग्ध हो गेल होतै । निरोध यदि सम्भव होवै त [[श्रीकृष्ण]]के ई वाक्यके का अर्थ होतै ? ''योगस्थः कुरु कर्माणि'', योगमे स्थित होके कर्म करथिन । विरुद्धावस्थामे कर्म हो न सकै आउ ऊ अवस्थामे कोनो संस्कार न पड़ सकै, स्मृति न बन सकै, जे समाधिसे उठेके बाद कर्म करेमे सहायक होवे ।
==एकरो देखथिन==
* [[योगके इतिहास]]
* [[योग दर्शन]]
* [[अष्टाङ्ग योग]]
* [[योगसूत्र]]
* [[हठयोग]]
* [[जैनधर्ममे योग]]
* [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]]
* [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है ।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ी ==
{{विकिसूक्ति|योग}}
* [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]]
* [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण]
* [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है)
*[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि)
*[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे)
{{योग}}
{{भारतीय दर्शन}}
[[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]]
[[श्रेणी:योग]]
[[श्रेणी:भारतीय दर्शन]]
[[श्रेणी:संस्कृत शब्द]]
[[श्रेणी:ध्यान]]
[[श्रेणी:व्यायाम]]
[[श्रेणी:भारतीय खोज]]
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wikitext
text/x-wiki
{{multiple image
| footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]]
| image1 = A yogi seated in a garden.jpg
| width1 = 140
| alt1 = एगो पुरुष योगी
| image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg
| width2=160
| alt2 = दुगो महिला योगिनी
}}
[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
[[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है ।
सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै ।
[[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल ।
== व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार ==
'''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज् शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे ।
पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है -
:१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय
:२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय
:३) युज् संयमने - चुरादिगणीय
'''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल ।
'''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३)
''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है ।
ई प्रकार योगके अर्थ होलै - "योग साधनाके अपनावित मनके नियन्त्रित करके, संयमित करके, आत्माके परमात्मासे मिलन" ।
[[परिभाषा]] ऐसन होवेके चाही जे अव्याप्ति आउ अतिव्याप्ति दोषसे मुक्त होवे, योग शब्दके वाच्यार्थके ऐसन लक्षण बता सके जे प्रत्येक प्रसङ्गला उपयुक्त होवे आउ योगके इलावा कोनो अन्य वस्तुला उपयुक्त न होवे । [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ मानल जा है । ओकरामे योग शब्दके ढेर बार प्रयोग होलै हे । कखनियो अकेले आउ कखनियो सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग । वेदोत्तर कालमे [[भक्तियोग]] आउ [[हठयोग]] नामो प्रचलित हो गेलै हे । [[पतञ्जलि]] [[योगदर्शन]]मे 'क्रियायोग' शब्द देखेमे आव है । [[पाशुपत योग]] आउ माहेश्वर योग नियन शब्दोके प्रसङ्ग भेट है । ई सब स्थलमे योग शब्दके जे अर्थ है ऊ एक दोसरसे भिन्न है ।
[[गीता]]मे [[श्रीकृष्ण]] एक स्थल पर कहलथिन हे ''''योगः कर्मसु कौशलम्'''' (कर्ममे कुशलते योग है) । ई वाक्य योगके परिभाषा न है । कुछ विद्वानके ई मत है कि जीवात्मा आउ परमात्माके मिल जाएके योग कहल जा है । ई बातके स्वीकार करेमे ई बड़ आपत्ति खड़ा होव है कि [[बौद्धधर्म|बौद्धमतावलम्बियो]] जे परमात्माके सत्ताके स्वीकार न करथिन, योग शब्दके व्यवहार कर आउ योगके समर्थन कर हथिन । एही बात [[साङ्ख्य|साङ्ख्यवादियो]]ला कहल जा सक है जे ईश्वरके सत्ताके असिद्ध मान हथिन । [[पतञ्जलि]] [[योगसूत्र]]मे जे परिभाषा देलथिन हे 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः', चित्तके वृत्तिके निरोधके नाम योग है । ई वाक्यके दु अर्थ हो सक है - चित्तवृत्तिके निरोधके अवस्थाके नाम योग है या ई अवस्थाके लावेके उपायके योग कहल जा है ।
किन्तु ई परिभाषा पर ढेर विद्वानके आपत्ति है । उनकर कहलाम है जे चित्तवृत्तिके प्रवाहेके नाम चित्त है । पूर्ण निरोधके अर्थ होतै चित्तके अस्तित्वके पूर्ण लोप, चित्ताश्रय समस्त स्मृति आउ संस्कारके निःशेष हो जाएल । यदि ऐसन हो जाए त फिर समाधिसे उठल सम्भव न होतै । काहेकि ऊ अवस्थाके सहाराला कोनो संस्कार बचल न होतै, प्रारब्ध दग्ध हो गेल होतै । निरोध यदि सम्भव होवै त [[श्रीकृष्ण]]के ई वाक्यके का अर्थ होतै ? ''योगस्थः कुरु कर्माणि'', योगमे स्थित होके कर्म करथिन । विरुद्धावस्थामे कर्म हो न सकै आउ ऊ अवस्थामे कोनो संस्कार न पड़ सकै, स्मृति न बन सकै, जे समाधिसे उठेके बाद कर्म करेमे सहायक होवे ।
संक्षेपमे आशय ई है कि योगके शास्त्रीय स्वरूप, ओकर दार्शनिक आधार, के सम्यक् रूपसे बुझल बड़ी सरल न है । संसारके मिथ्या मानेवाला [[अद्वैत वेदान्त|अद्वैतवादियो]] निदिध्याह्नके नामसे ओकर समर्थन कर है । अनीश्वरवादी साङ्ख्य विद्वानो ओकर अनुमोदन कर हथिन । [[बौद्धधर्म|बौद्धे]] न, [[इस्लाम|मुसलमान]] [[सूफी]] आउ [[ईसाई]] मिस्टिको कोनो न कोनो प्रकार अपन सम्प्रदायके मान्यता आउ दार्शनिक सिद्धान्तके साथे ओकर सामञ्जस्य स्थापित कर ले हथिन ।
==एकरो देखथिन==
* [[योगके इतिहास]]
* [[योग दर्शन]]
* [[अष्टाङ्ग योग]]
* [[योगसूत्र]]
* [[हठयोग]]
* [[जैनधर्ममे योग]]
* [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]]
* [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है ।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ी ==
{{विकिसूक्ति|योग}}
* [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]]
* [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण]
* [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है)
*[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि)
*[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे)
{{योग}}
{{भारतीय दर्शन}}
[[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]]
[[श्रेणी:योग]]
[[श्रेणी:भारतीय दर्शन]]
[[श्रेणी:संस्कृत शब्द]]
[[श्रेणी:ध्यान]]
[[श्रेणी:व्यायाम]]
[[श्रेणी:भारतीय खोज]]
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{{multiple image
| footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]]
| image1 = A yogi seated in a garden.jpg
| width1 = 140
| alt1 = एगो पुरुष योगी
| image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg
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| alt2 = दुगो महिला योगिनी
}}
[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
[[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है ।
सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै ।
[[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल ।
== व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार ==
'''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज् शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे ।
पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है -
:१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय
:२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय
:३) युज् संयमने - चुरादिगणीय
'''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल ।
'''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३)
''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है ।
ई प्रकार योगके अर्थ होलै - "योग साधनाके अपनावित मनके नियन्त्रित करके, संयमित करके, आत्माके परमात्मासे मिलन" ।
[[परिभाषा]] ऐसन होवेके चाही जे अव्याप्ति आउ अतिव्याप्ति दोषसे मुक्त होवे, योग शब्दके वाच्यार्थके ऐसन लक्षण बता सके जे प्रत्येक प्रसङ्गला उपयुक्त होवे आउ योगके इलावा कोनो अन्य वस्तुला उपयुक्त न होवे । [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ मानल जा है । ओकरामे योग शब्दके ढेर बार प्रयोग होलै हे । कखनियो अकेले आउ कखनियो सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग । वेदोत्तर कालमे [[भक्तियोग]] आउ [[हठयोग]] नामो प्रचलित हो गेलै हे । [[पतञ्जलि]] [[योगदर्शन]]मे 'क्रियायोग' शब्द देखेमे आव है । [[पाशुपत योग]] आउ माहेश्वर योग नियन शब्दोके प्रसङ्ग भेट है । ई सब स्थलमे योग शब्दके जे अर्थ है ऊ एक दोसरसे भिन्न है ।
[[गीता]]मे [[श्रीकृष्ण]] एक स्थल पर कहलथिन हे ''''योगः कर्मसु कौशलम्'''' (कर्ममे कुशलते योग है) । ई वाक्य योगके परिभाषा न है । कुछ विद्वानके ई मत है कि जीवात्मा आउ परमात्माके मिल जाएके योग कहल जा है । ई बातके स्वीकार करेमे ई बड़ आपत्ति खड़ा होव है कि [[बौद्धधर्म|बौद्धमतावलम्बियो]] जे परमात्माके सत्ताके स्वीकार न करथिन, योग शब्दके व्यवहार कर आउ योगके समर्थन कर हथिन । एही बात [[साङ्ख्य|साङ्ख्यवादियो]]ला कहल जा सक है जे ईश्वरके सत्ताके असिद्ध मान हथिन । [[पतञ्जलि]] [[योगसूत्र]]मे जे परिभाषा देलथिन हे 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः', चित्तके वृत्तिके निरोधके नाम योग है । ई वाक्यके दु अर्थ हो सक है - चित्तवृत्तिके निरोधके अवस्थाके नाम योग है या ई अवस्थाके लावेके उपायके योग कहल जा है ।
किन्तु ई परिभाषा पर ढेर विद्वानके आपत्ति है । उनकर कहलाम है जे चित्तवृत्तिके प्रवाहेके नाम चित्त है । पूर्ण निरोधके अर्थ होतै चित्तके अस्तित्वके पूर्ण लोप, चित्ताश्रय समस्त स्मृति आउ संस्कारके निःशेष हो जाएल । यदि ऐसन हो जाए त फिर समाधिसे उठल सम्भव न होतै । काहेकि ऊ अवस्थाके सहाराला कोनो संस्कार बचल न होतै, प्रारब्ध दग्ध हो गेल होतै । निरोध यदि सम्भव होवै त [[श्रीकृष्ण]]के ई वाक्यके का अर्थ होतै ? ''योगस्थः कुरु कर्माणि'', योगमे स्थित होके कर्म करथिन । विरुद्धावस्थामे कर्म हो न सकै आउ ऊ अवस्थामे कोनो संस्कार न पड़ सकै, स्मृति न बन सकै, जे समाधिसे उठेके बाद कर्म करेमे सहायक होवे ।
संक्षेपमे आशय ई है कि योगके शास्त्रीय स्वरूप, ओकर दार्शनिक आधार, के सम्यक् रूपसे बुझल बड़ी सरल न है । संसारके मिथ्या मानेवाला [[अद्वैत वेदान्त|अद्वैतवादियो]] निदिध्याह्नके नामसे ओकर समर्थन कर है । अनीश्वरवादी साङ्ख्य विद्वानो ओकर अनुमोदन कर हथिन । [[बौद्धधर्म|बौद्धे]] न, [[इस्लाम|मुसलमान]] [[सूफी]] आउ [[ईसाई]] मिस्टिको कोनो न कोनो प्रकार अपन सम्प्रदायके मान्यता आउ दार्शनिक सिद्धान्तके साथे ओकर सामञ्जस्य स्थापित कर ले हथिन ।
ई सब विभिन्न दार्शनिक विचारधारामे कौन प्रकार ऐसन समन्वय हो सक है कि ऐसन धरातल मिल सके जेकरा पर योगके भित्ति खड़ा कैल जा सके, ई बड़ रोचक प्रश्न है किन्तु एकर विवेचनला बड़ी समय चाही । एहाँ ऊ प्रक्रिया पर तनीसुन विचार कर लेल आवश्यक है जेकर रूपरेखा हमनीके [[पतञ्जलि]]के सूत्रमे भेट है । तनीमनी शब्दभेदसे ई प्रक्रिया ऊ सब समुदायके मान्य है जे योगके अभ्यासके समर्थन कर हथिन ।
==एकरो देखथिन==
* [[योगके इतिहास]]
* [[योग दर्शन]]
* [[अष्टाङ्ग योग]]
* [[योगसूत्र]]
* [[हठयोग]]
* [[जैनधर्ममे योग]]
* [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]]
* [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है ।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ी ==
{{विकिसूक्ति|योग}}
* [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]]
* [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण]
* [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है)
*[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि)
*[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे)
{{योग}}
{{भारतीय दर्शन}}
[[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]]
[[श्रेणी:योग]]
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{{multiple image
| footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]]
| image1 = A yogi seated in a garden.jpg
| width1 = 140
| alt1 = एगो पुरुष योगी
| image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg
| width2=160
| alt2 = दुगो महिला योगिनी
}}
[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
[[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है ।
सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै ।
[[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल ।
== व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार ==
'''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज् शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे ।
पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है -
:१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय
:२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय
:३) युज् संयमने - चुरादिगणीय
'''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल ।
'''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३)
''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है ।
ई प्रकार योगके अर्थ होलै - "योग साधनाके अपनावित मनके नियन्त्रित करके, संयमित करके, आत्माके परमात्मासे मिलन" ।
[[परिभाषा]] ऐसन होवेके चाही जे अव्याप्ति आउ अतिव्याप्ति दोषसे मुक्त होवे, योग शब्दके वाच्यार्थके ऐसन लक्षण बता सके जे प्रत्येक प्रसङ्गला उपयुक्त होवे आउ योगके इलावा कोनो अन्य वस्तुला उपयुक्त न होवे । [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ मानल जा है । ओकरामे योग शब्दके ढेर बार प्रयोग होलै हे । कखनियो अकेले आउ कखनियो सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग । वेदोत्तर कालमे [[भक्तियोग]] आउ [[हठयोग]] नामो प्रचलित हो गेलै हे । [[पतञ्जलि]] [[योगदर्शन]]मे 'क्रियायोग' शब्द देखेमे आव है । [[पाशुपत योग]] आउ माहेश्वर योग नियन शब्दोके प्रसङ्ग भेट है । ई सब स्थलमे योग शब्दके जे अर्थ है ऊ एक दोसरसे भिन्न है ।
[[गीता]]मे [[श्रीकृष्ण]] एक स्थल पर कहलथिन हे ''''योगः कर्मसु कौशलम्'''' (कर्ममे कुशलते योग है) । ई वाक्य योगके परिभाषा न है । कुछ विद्वानके ई मत है कि जीवात्मा आउ परमात्माके मिल जाएके योग कहल जा है । ई बातके स्वीकार करेमे ई बड़ आपत्ति खड़ा होव है कि [[बौद्धधर्म|बौद्धमतावलम्बियो]] जे परमात्माके सत्ताके स्वीकार न करथिन, योग शब्दके व्यवहार कर आउ योगके समर्थन कर हथिन । एही बात [[साङ्ख्य|साङ्ख्यवादियो]]ला कहल जा सक है जे ईश्वरके सत्ताके असिद्ध मान हथिन । [[पतञ्जलि]] [[योगसूत्र]]मे जे परिभाषा देलथिन हे 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः', चित्तके वृत्तिके निरोधके नाम योग है । ई वाक्यके दु अर्थ हो सक है - चित्तवृत्तिके निरोधके अवस्थाके नाम योग है या ई अवस्थाके लावेके उपायके योग कहल जा है ।
किन्तु ई परिभाषा पर ढेर विद्वानके आपत्ति है । उनकर कहलाम है जे चित्तवृत्तिके प्रवाहेके नाम चित्त है । पूर्ण निरोधके अर्थ होतै चित्तके अस्तित्वके पूर्ण लोप, चित्ताश्रय समस्त स्मृति आउ संस्कारके निःशेष हो जाएल । यदि ऐसन हो जाए त फिर समाधिसे उठल सम्भव न होतै । काहेकि ऊ अवस्थाके सहाराला कोनो संस्कार बचल न होतै, प्रारब्ध दग्ध हो गेल होतै । निरोध यदि सम्भव होवै त [[श्रीकृष्ण]]के ई वाक्यके का अर्थ होतै ? ''योगस्थः कुरु कर्माणि'', योगमे स्थित होके कर्म करथिन । विरुद्धावस्थामे कर्म हो न सकै आउ ऊ अवस्थामे कोनो संस्कार न पड़ सकै, स्मृति न बन सकै, जे समाधिसे उठेके बाद कर्म करेमे सहायक होवे ।
संक्षेपमे आशय ई है कि योगके शास्त्रीय स्वरूप, ओकर दार्शनिक आधार, के सम्यक् रूपसे बुझल बड़ी सरल न है । संसारके मिथ्या मानेवाला [[अद्वैत वेदान्त|अद्वैतवादियो]] निदिध्याह्नके नामसे ओकर समर्थन कर है । अनीश्वरवादी साङ्ख्य विद्वानो ओकर अनुमोदन कर हथिन । [[बौद्धधर्म|बौद्धे]] न, [[इस्लाम|मुसलमान]] [[सूफी]] आउ [[ईसाई]] मिस्टिको कोनो न कोनो प्रकार अपन सम्प्रदायके मान्यता आउ दार्शनिक सिद्धान्तके साथे ओकर सामञ्जस्य स्थापित कर ले हथिन ।
ई सब विभिन्न दार्शनिक विचारधारामे कौन प्रकार ऐसन समन्वय हो सक है कि ऐसन धरातल मिल सके जेकरा पर योगके भित्ति खड़ा कैल जा सके, ई बड़ रोचक प्रश्न है किन्तु एकर विवेचनला बड़ी समय चाही । एहाँ ऊ प्रक्रिया पर तनीसुन विचार कर लेल आवश्यक है जेकर रूपरेखा हमनीके [[पतञ्जलि]]के सूत्रमे भेट है । तनीमनी शब्दभेदसे ई प्रक्रिया ऊ सब समुदायके मान्य है जे योगके अभ्यासके समर्थन कर हथिन ।
===परिभाषा===
*(१) [[योगसूत्र|पातञ्जल योग दर्शन]]के अनुसार - '''योगश्चित्तवृतिनिरोधः''' (१/२) अर्थात् चित्तके वृत्तिके निरोधे योग है ।
*(२) [[साङ्ख्य दर्शन]]के अनुसार - '''पुरुषप्रकृत्योर्वियोगेपि योगइत्यमिधीयते ।''' अर्थात् पुरुष एवं प्रकृतिके पार्थक्यके स्थापित करके पुरुषके स्वरूपमे अवस्थित होइले योग है ।
*(३) [[विष्णुपुराण]]के अनुसार - '''योगः संयोग इत्युक्तः जीवात्म परमात्मने''' अर्थात् जीवात्मा एवं परमात्माके पूर्णतया मिलने योग है ।
*(४) [[भगवद्गीता]]के अनुसार - '''सिद्धासिद्धयो समोभूत्वा समत्वं योग उच्चते''' (२/४८) अर्थात् दुःख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत आउ उष्ण आदि द्वन्दमे सर्वत्र समभाव रखल योग है ।
*(५) [[भगवद्गीता]]के अनुसार - '''तस्माद्दयोगाययुज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्''' अर्थात् कर्त्तव्य कर्म बन्धक न होवे एहीसे निष्काम भावनासे अनुप्रेरित होके कर्त्तव्य करेके कौशल योग है ।
*(६) [[आचार्य हरिभद्र]]के अनुसार - '''मोक्खेण जोयणाओ सव्वो वि धम्म ववहारो जोगो''' अर्थात् [[मोक्ष]]से जोड़ेवाला सब व्यवहार योग है ।
*(७) [[बौद्धधर्म]]के अनुसार - '''कुशल चितैकग्गता योगः''' अर्थात् कुशल चित्तके एकाग्रता योग है ।
==एकरो देखथिन==
* [[योगके इतिहास]]
* [[योग दर्शन]]
* [[अष्टाङ्ग योग]]
* [[योगसूत्र]]
* [[हठयोग]]
* [[जैनधर्ममे योग]]
* [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]]
* [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है ।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ी ==
{{विकिसूक्ति|योग}}
* [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]]
* [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण]
* [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है)
*[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि)
*[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे)
{{योग}}
{{भारतीय दर्शन}}
[[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]]
[[श्रेणी:योग]]
[[श्रेणी:भारतीय दर्शन]]
[[श्रेणी:संस्कृत शब्द]]
[[श्रेणी:ध्यान]]
[[श्रेणी:व्यायाम]]
[[श्रेणी:भारतीय खोज]]
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{{multiple image
| footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]]
| image1 = A yogi seated in a garden.jpg
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| alt1 = एगो पुरुष योगी
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}}
[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
[[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है ।
सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै ।
[[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल ।
== व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार ==
'''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज् शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे ।
पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है -
:१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय
:२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय
:३) युज् संयमने - चुरादिगणीय
'''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल ।
'''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३)
''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है ।
ई प्रकार योगके अर्थ होलै - "योग साधनाके अपनावित मनके नियन्त्रित करके, संयमित करके, आत्माके परमात्मासे मिलन" ।
[[परिभाषा]] ऐसन होवेके चाही जे अव्याप्ति आउ अतिव्याप्ति दोषसे मुक्त होवे, योग शब्दके वाच्यार्थके ऐसन लक्षण बता सके जे प्रत्येक प्रसङ्गला उपयुक्त होवे आउ योगके इलावा कोनो अन्य वस्तुला उपयुक्त न होवे । [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ मानल जा है । ओकरामे योग शब्दके ढेर बार प्रयोग होलै हे । कखनियो अकेले आउ कखनियो सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग । वेदोत्तर कालमे [[भक्तियोग]] आउ [[हठयोग]] नामो प्रचलित हो गेलै हे । [[पतञ्जलि]] [[योगदर्शन]]मे 'क्रियायोग' शब्द देखेमे आव है । [[पाशुपत योग]] आउ माहेश्वर योग नियन शब्दोके प्रसङ्ग भेट है । ई सब स्थलमे योग शब्दके जे अर्थ है ऊ एक दोसरसे भिन्न है ।
[[गीता]]मे [[श्रीकृष्ण]] एक स्थल पर कहलथिन हे ''''योगः कर्मसु कौशलम्'''' (कर्ममे कुशलते योग है) । ई वाक्य योगके परिभाषा न है । कुछ विद्वानके ई मत है कि जीवात्मा आउ परमात्माके मिल जाएके योग कहल जा है । ई बातके स्वीकार करेमे ई बड़ आपत्ति खड़ा होव है कि [[बौद्धधर्म|बौद्धमतावलम्बियो]] जे परमात्माके सत्ताके स्वीकार न करथिन, योग शब्दके व्यवहार कर आउ योगके समर्थन कर हथिन । एही बात [[साङ्ख्य|साङ्ख्यवादियो]]ला कहल जा सक है जे ईश्वरके सत्ताके असिद्ध मान हथिन । [[पतञ्जलि]] [[योगसूत्र]]मे जे परिभाषा देलथिन हे 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः', चित्तके वृत्तिके निरोधके नाम योग है । ई वाक्यके दु अर्थ हो सक है - चित्तवृत्तिके निरोधके अवस्थाके नाम योग है या ई अवस्थाके लावेके उपायके योग कहल जा है ।
किन्तु ई परिभाषा पर ढेर विद्वानके आपत्ति है । उनकर कहलाम है जे चित्तवृत्तिके प्रवाहेके नाम चित्त है । पूर्ण निरोधके अर्थ होतै चित्तके अस्तित्वके पूर्ण लोप, चित्ताश्रय समस्त स्मृति आउ संस्कारके निःशेष हो जाएल । यदि ऐसन हो जाए त फिर समाधिसे उठल सम्भव न होतै । काहेकि ऊ अवस्थाके सहाराला कोनो संस्कार बचल न होतै, प्रारब्ध दग्ध हो गेल होतै । निरोध यदि सम्भव होवै त [[श्रीकृष्ण]]के ई वाक्यके का अर्थ होतै ? ''योगस्थः कुरु कर्माणि'', योगमे स्थित होके कर्म करथिन । विरुद्धावस्थामे कर्म हो न सकै आउ ऊ अवस्थामे कोनो संस्कार न पड़ सकै, स्मृति न बन सकै, जे समाधिसे उठेके बाद कर्म करेमे सहायक होवे ।
संक्षेपमे आशय ई है कि योगके शास्त्रीय स्वरूप, ओकर दार्शनिक आधार, के सम्यक् रूपसे बुझल बड़ी सरल न है । संसारके मिथ्या मानेवाला [[अद्वैत वेदान्त|अद्वैतवादियो]] निदिध्याह्नके नामसे ओकर समर्थन कर है । अनीश्वरवादी साङ्ख्य विद्वानो ओकर अनुमोदन कर हथिन । [[बौद्धधर्म|बौद्धे]] न, [[इस्लाम|मुसलमान]] [[सूफी]] आउ [[ईसाई]] मिस्टिको कोनो न कोनो प्रकार अपन सम्प्रदायके मान्यता आउ दार्शनिक सिद्धान्तके साथे ओकर सामञ्जस्य स्थापित कर ले हथिन ।
ई सब विभिन्न दार्शनिक विचारधारामे कौन प्रकार ऐसन समन्वय हो सक है कि ऐसन धरातल मिल सके जेकरा पर योगके भित्ति खड़ा कैल जा सके, ई बड़ रोचक प्रश्न है किन्तु एकर विवेचनला बड़ी समय चाही । एहाँ ऊ प्रक्रिया पर तनीसुन विचार कर लेल आवश्यक है जेकर रूपरेखा हमनीके [[पतञ्जलि]]के सूत्रमे भेट है । तनीमनी शब्दभेदसे ई प्रक्रिया ऊ सब समुदायके मान्य है जे योगके अभ्यासके समर्थन कर हथिन ।
===परिभाषा===
*(१) [[योगसूत्र|पातञ्जल योग दर्शन]]के अनुसार - '''योगश्चित्तवृतिनिरोधः''' (१/२) अर्थात् चित्तके वृत्तिके निरोधे योग है ।
*(२) [[साङ्ख्य दर्शन]]के अनुसार - '''पुरुषप्रकृत्योर्वियोगेपि योगइत्यमिधीयते ।''' अर्थात् पुरुष एवं प्रकृतिके पार्थक्यके स्थापित करके पुरुषके स्वरूपमे अवस्थित होइले योग है ।
*(३) [[विष्णुपुराण]]के अनुसार - '''योगः संयोग इत्युक्तः जीवात्म परमात्मने''' अर्थात् जीवात्मा एवं परमात्माके पूर्णतया मिलने योग है ।
*(४) [[भगवद्गीता]]के अनुसार - '''सिद्धासिद्धयो समोभूत्वा समत्वं योग उच्चते''' (२/४८) अर्थात् दुःख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत आउ उष्ण आदि द्वन्दमे सर्वत्र समभाव रखल योग है ।
*(५) [[भगवद्गीता]]के अनुसार - '''तस्माद्दयोगाययुज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्''' अर्थात् कर्त्तव्य कर्म बन्धक न होवे एहीसे निष्काम भावनासे अनुप्रेरित होके कर्त्तव्य करेके कौशल योग है ।
*(६) [[आचार्य हरिभद्र]]के अनुसार - '''मोक्खेण जोयणाओ सव्वो वि धम्म ववहारो जोगो''' अर्थात् [[मोक्ष]]से जोड़ेवाला सब व्यवहार योग है ।
*(७) [[बौद्धधर्म]]के अनुसार - '''कुशल चितैकग्गता योगः''' अर्थात् कुशल चित्तके एकाग्रता योग है ।
भारतीय दार्शनिक आउ धार्मिक परम्परामे "योग" शब्दके अलगे-अलगे विधिसे परिभाषित कैल गेलै हे ।
==एकरो देखथिन==
* [[योगके इतिहास]]
* [[योग दर्शन]]
* [[अष्टाङ्ग योग]]
* [[योगसूत्र]]
* [[हठयोग]]
* [[जैनधर्ममे योग]]
* [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]]
* [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है ।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ी ==
{{विकिसूक्ति|योग}}
* [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]]
* [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण]
* [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है)
*[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि)
*[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे)
{{योग}}
{{भारतीय दर्शन}}
[[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]]
[[श्रेणी:योग]]
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[[श्रेणी:व्यायाम]]
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wikitext
text/x-wiki
{{multiple image
| footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]]
| image1 = A yogi seated in a garden.jpg
| width1 = 140
| alt1 = एगो पुरुष योगी
| image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg
| width2=160
| alt2 = दुगो महिला योगिनी
}}
[[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]]
'''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है ।
योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत् मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे ।
[[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है ।
सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै ।
[[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल ।
== व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार ==
'''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज् शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे ।
पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है -
:१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय
:२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय
:३) युज् संयमने - चुरादिगणीय
'''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल ।
'''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३)
''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है ।
ई प्रकार योगके अर्थ होलै - "योग साधनाके अपनावित मनके नियन्त्रित करके, संयमित करके, आत्माके परमात्मासे मिलन" ।
[[परिभाषा]] ऐसन होवेके चाही जे अव्याप्ति आउ अतिव्याप्ति दोषसे मुक्त होवे, योग शब्दके वाच्यार्थके ऐसन लक्षण बता सके जे प्रत्येक प्रसङ्गला उपयुक्त होवे आउ योगके इलावा कोनो अन्य वस्तुला उपयुक्त न होवे । [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ मानल जा है । ओकरामे योग शब्दके ढेर बार प्रयोग होलै हे । कखनियो अकेले आउ कखनियो सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग । वेदोत्तर कालमे [[भक्तियोग]] आउ [[हठयोग]] नामो प्रचलित हो गेलै हे । [[पतञ्जलि]] [[योगदर्शन]]मे 'क्रियायोग' शब्द देखेमे आव है । [[पाशुपत योग]] आउ माहेश्वर योग नियन शब्दोके प्रसङ्ग भेट है । ई सब स्थलमे योग शब्दके जे अर्थ है ऊ एक दोसरसे भिन्न है ।
[[गीता]]मे [[श्रीकृष्ण]] एक स्थल पर कहलथिन हे ''''योगः कर्मसु कौशलम्'''' (कर्ममे कुशलते योग है) । ई वाक्य योगके परिभाषा न है । कुछ विद्वानके ई मत है कि जीवात्मा आउ परमात्माके मिल जाएके योग कहल जा है । ई बातके स्वीकार करेमे ई बड़ आपत्ति खड़ा होव है कि [[बौद्धधर्म|बौद्धमतावलम्बियो]] जे परमात्माके सत्ताके स्वीकार न करथिन, योग शब्दके व्यवहार कर आउ योगके समर्थन कर हथिन । एही बात [[साङ्ख्य|साङ्ख्यवादियो]]ला कहल जा सक है जे ईश्वरके सत्ताके असिद्ध मान हथिन । [[पतञ्जलि]] [[योगसूत्र]]मे जे परिभाषा देलथिन हे 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः', चित्तके वृत्तिके निरोधके नाम योग है । ई वाक्यके दु अर्थ हो सक है - चित्तवृत्तिके निरोधके अवस्थाके नाम योग है या ई अवस्थाके लावेके उपायके योग कहल जा है ।
किन्तु ई परिभाषा पर ढेर विद्वानके आपत्ति है । उनकर कहलाम है जे चित्तवृत्तिके प्रवाहेके नाम चित्त है । पूर्ण निरोधके अर्थ होतै चित्तके अस्तित्वके पूर्ण लोप, चित्ताश्रय समस्त स्मृति आउ संस्कारके निःशेष हो जाएल । यदि ऐसन हो जाए त फिर समाधिसे उठल सम्भव न होतै । काहेकि ऊ अवस्थाके सहाराला कोनो संस्कार बचल न होतै, प्रारब्ध दग्ध हो गेल होतै । निरोध यदि सम्भव होवै त [[श्रीकृष्ण]]के ई वाक्यके का अर्थ होतै ? ''योगस्थः कुरु कर्माणि'', योगमे स्थित होके कर्म करथिन । विरुद्धावस्थामे कर्म हो न सकै आउ ऊ अवस्थामे कोनो संस्कार न पड़ सकै, स्मृति न बन सकै, जे समाधिसे उठेके बाद कर्म करेमे सहायक होवे ।
संक्षेपमे आशय ई है कि योगके शास्त्रीय स्वरूप, ओकर दार्शनिक आधार, के सम्यक् रूपसे बुझल बड़ी सरल न है । संसारके मिथ्या मानेवाला [[अद्वैत वेदान्त|अद्वैतवादियो]] निदिध्याह्नके नामसे ओकर समर्थन कर है । अनीश्वरवादी साङ्ख्य विद्वानो ओकर अनुमोदन कर हथिन । [[बौद्धधर्म|बौद्धे]] न, [[इस्लाम|मुसलमान]] [[सूफी]] आउ [[ईसाई]] मिस्टिको कोनो न कोनो प्रकार अपन सम्प्रदायके मान्यता आउ दार्शनिक सिद्धान्तके साथे ओकर सामञ्जस्य स्थापित कर ले हथिन ।
ई सब विभिन्न दार्शनिक विचारधारामे कौन प्रकार ऐसन समन्वय हो सक है कि ऐसन धरातल मिल सके जेकरा पर योगके भित्ति खड़ा कैल जा सके, ई बड़ रोचक प्रश्न है किन्तु एकर विवेचनला बड़ी समय चाही । एहाँ ऊ प्रक्रिया पर तनीसुन विचार कर लेल आवश्यक है जेकर रूपरेखा हमनीके [[पतञ्जलि]]के सूत्रमे भेट है । तनीमनी शब्दभेदसे ई प्रक्रिया ऊ सब समुदायके मान्य है जे योगके अभ्यासके समर्थन कर हथिन ।
===परिभाषा===
*(१) [[योगसूत्र|पातञ्जल योग दर्शन]]के अनुसार - '''योगश्चित्तवृतिनिरोधः''' (१/२) अर्थात् चित्तके वृत्तिके निरोधे योग है ।
*(२) [[साङ्ख्य दर्शन]]के अनुसार - '''पुरुषप्रकृत्योर्वियोगेपि योगइत्यमिधीयते ।''' अर्थात् पुरुष एवं प्रकृतिके पार्थक्यके स्थापित करके पुरुषके स्वरूपमे अवस्थित होइले योग है ।
*(३) [[विष्णुपुराण]]के अनुसार - '''योगः संयोग इत्युक्तः जीवात्म परमात्मने''' अर्थात् जीवात्मा एवं परमात्माके पूर्णतया मिलने योग है ।
*(४) [[भगवद्गीता]]के अनुसार - '''सिद्धासिद्धयो समोभूत्वा समत्वं योग उच्चते''' (२/४८) अर्थात् दुःख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत आउ उष्ण आदि द्वन्दमे सर्वत्र समभाव रखल योग है ।
*(५) [[भगवद्गीता]]के अनुसार - '''तस्माद्दयोगाययुज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्''' अर्थात् कर्त्तव्य कर्म बन्धक न होवे एहीसे निष्काम भावनासे अनुप्रेरित होके कर्त्तव्य करेके कौशल योग है ।
*(६) [[आचार्य हरिभद्र]]के अनुसार - '''मोक्खेण जोयणाओ सव्वो वि धम्म ववहारो जोगो''' अर्थात् [[मोक्ष]]से जोड़ेवाला सब व्यवहार योग है ।
*(७) [[बौद्धधर्म]]के अनुसार - '''कुशल चितैकग्गता योगः''' अर्थात् कुशल चित्तके एकाग्रता योग है ।
भारतीय दार्शनिक आउ धार्मिक परम्परामे "योग" शब्दके अलगे-अलगे विधिसे परिभाषित कैल गेलै हे ।
{| class="wikitable"
|-
! मूल ग्रन्थ !! अनुमानित रचना-काल !! योगके परिभाषा
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|''[[मैत्रायणी उपनिषद]]''
| लगभग चतुर्थ शताब्दी ईसापूर्व
| ''कत्वं प्राणमनसोरिन्द्रियाणां तथैव च ।'' <br>''सर्वभाव परित्यागो योग इत्यभिधीयते ॥'' -- मैत्रायणी उपनिषद् 6/25 <br>अर्थात् प्राण, मन एवं इन्द्रियके एक हो जाएल, एकाग्रावस्थाके प्राप्त कर लेल, बाह्म विषयसे विमुख होके इन्द्रियके मनमे आउ मन आत्मामे लग जाएल, प्राणके निष्चल हो जाएल योग है ।
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| [[वैशेषिक सूत्र]]
| लगभग चौथा शताब्दी ईसा पूर्व
| ''तदनारम्भ आत्मस्ये मनसि शरीरस्य दुःखाभावः संयोगः ।'' -- वैशेषिक सूत्र ६/२/१६<br> अर्थात् मन आत्मामे स्थिर होवे पर ओकर (मनके) कार्यके अनारम्भ है, ऊ योग है ।
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| ''[[कठोपनिषद]]''
| ईसा पूर्वके अन्तिम शताब्दी
| ''यदा पञ्चावतिष्ठन्ते ज्ञानानि मनसा सह ।''<br>''बुद्धिश्च न विचेष्टते तामाहुः परमां गतिम् ॥''<br>''तां योगमिति मन्यन्ते स्थिरामिन्द्रियधारणाम् ।''<br>''अप्रमत्तस्तदा भवति योगो हि प्रभवाप्ययौ ॥'' -- कठोपनिषद ६ / १०-११, नचिकेता आउ यमके बीच संवाद<br>जखनि मनके साथे समस्त ज्ञानेन्द्रिय भलीभाँति स्थिर हो जा है आउ बुद्धियोके कोनो चेष्टा न रहै तखनि ई अवस्थाके परमागति कहल जा है । ओही स्थिर इन्द्रिय-धारणाके योग कहल जा है । ऊ अवस्थामे साधक प्रमाद रहित होव है । काहेकि 'योग' एही पदार्थके उद्भव एवं लय (प्रभवाव्ययौ) दुनहीँ है ।
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| ''[[भगवद्गीता]]''
| लगभग दोसर शताब्दी ईसा पूर्व
| "सफलता आउ असफलता दुनोमे समभाव (एक समान) रहल । ऐसन समते योग कहला है ।" (२.४८) "कर्ममे कुशलते योग है ।" (२.५०) "ई जानथिन कि जेकरा योग कहल जा है, ऊ दुःखके संयोगसे वियोग (दुःखसे मुक्ति) है ।" (६.२३)
|-
| ''[[पतञ्जलि योगसूत्र]]''
| लगभग प्रारम्भिक शताब्दी ईस्वी
| १.२. ''योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः'' – "चित्तके वृत्तिके रुक जाएले योग है ।" १.३. तखनि [[पुरुष (साङ्ख्य)|पुरुष]]
|-
| ''योगभाष्य''
| योगसूत्रके समाने
| ''योगः समाधिः'' - "समाधिए योग है," जे [[एकाग्रता]] आउ ''निरुद्ध'' मने विषय-रहित [[समाधि]] (''असम्प्रज्ञात समाधि'') के सन्दर्भित कर है ।
|-
| ''[[योगाचारभूमि-शास्त्र]] (श्रावकभूमि)'', एक [[महायान]] बौद्ध [[योगाचार]] ग्रन्थ
| चौथा शताब्दी ईस्वी |
| "योग चार प्रकारके है - श्रद्धा (विश्वास), आकांक्षा, दृढ़ता आउ उपाय ।" (२.१५२)
|-
| [[पाशुपत सूत्र]] पर कौण्डिन्यके ''पञ्चार्थभाष्य''
| चौथा शताब्दी ईस्वी
| "ई प्रणालीमे जीवात्मा आउ ईश्वर (प्रभु) के मिलने योग है ।" (१.१.४३)
|-
| [[हरिभद्र सूरी]] द्वारा रचित एक [[जैन ग्रन्थ]]
| छठा शताब्दी ईस्वी
| "दृढ़ विश्वासके साथे योगीके स्वामि हमनीके सिद्धान्तमे योगके सम्यक् ज्ञानसे शुरू होवेवाला तीनो [सम्यक् ज्ञान, सम्यक् दर्शन आउ सम्यक् चारित्र] के संयोग (''सम्बन्धः'') के रूपमे परिभाषित कैलन हे काहेकि [एकरासे] [[मोक्ष]]के साथे जुड़ाव होव है.... सामान्य बोलचालमे ई [योग] शब्द एकर कारणके साथे [आत्माके] सम्पर्कोके दर्शाव है काहेकि कार्यला कारणके उपयोग सामान्य है ।" (२, ४)
|-
| ''[[लिङ्ग पुराण]]''
| ७मा–१०मा शताब्दी ईस्वी
| " 'योग' शब्दसे तात्पर्य [[निर्वाण]]से है जे [[शिव]]के स्थिति है ।" (१.८.५ए)
|-
| [[आदि शङ्कराचार्य]]के ''[[ब्रह्मसूत्र]]-भाष्य''
| लगभग ८मा शताब्दी ईस्वी
| "योगके ग्रन्थमे कहल गेलै है: 'योग वास्तविकता (तत्त्व) के जानेके साधन है' (''अथ तत्त्वदर्शनभ्युपायो योगः'')" (२.१.३)
|-
| ''मालिनीविजयोत्तर तन्त्र'', अद्वैत [[कश्मीर शैव दर्शन]]के प्राथमिक ग्रन्थमे से एक
| ६ठा–१०मष शताब्दी ईस्वी
| "एक सत्ताके दोसर सत्ताके साथ एक हो जाएल योग कहल जा है ।" (४.४-८)
|-
| [[शैव सिद्धान्त]]के विद्वान नारायणकण्ठके ''मृगेन्द्रतन्त्रवृत्ति''
| ६ठा–१०मा शताब्दी ईस्वी
| "आत्म-नियन्त्रण (स्वामित्व) प्राप्त कैले योगी होएल है । योगी शब्दके अर्थ है 'ऊ जे अनिवार्य रूपसे अपन स्वरूपके अभिव्यक्ति... शिव-त्व (''शिवत्वम्'') से संयुक्त' होवे ।"
|-
| लक्ष्मणदेशिकेन्द्रके ''शारदातिलक'', एक [[शाक्त धर्म]]
| ११मा शताब्दी ईस्वी
| "योगके विशेषज्ञ कह हथ जीवात्माके [[आत्मा]]
|-
| ''[[योगबीज]]'', एक [[हठयोग]] ग्रन्थ
| १४मा शताब्दी ईस्वी
| "[[अपान]] आउ प्राण, अपन स्वयं के [[रज]] आउ वीर्य, सूर्य आउ चन्द्रमा, जीवात्मा आउ परमात्माके मिलन आउ एही प्रकार सब द्वन्द्वके मिलन योग कहला है ।" (८९)
|}
==एकरो देखथिन==
* [[योगके इतिहास]]
* [[योग दर्शन]]
* [[अष्टाङ्ग योग]]
* [[योगसूत्र]]
* [[हठयोग]]
* [[जैनधर्ममे योग]]
* [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]]
* [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है ।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ी ==
{{विकिसूक्ति|योग}}
* [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]]
* [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण]
* [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है)
*[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि)
*[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे)
{{योग}}
{{भारतीय दर्शन}}
[[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]]
[[श्रेणी:योग]]
[[श्रेणी:भारतीय दर्शन]]
[[श्रेणी:संस्कृत शब्द]]
[[श्रेणी:ध्यान]]
[[श्रेणी:व्यायाम]]
[[श्रेणी:भारतीय खोज]]
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