विकिपीडिया magwiki https://mag.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE MediaWiki 1.47.0-wmf.22 first-letter मीडिया विशेष वार्ता प्रयोगकर्ता प्रयोगकर्ता वार्ता विकिपीडिया विकिपीडिया वार्ता सञ्चिका सञ्चिका वार्ता मीडियाविकि मीडियाविकि वार्ता साँचा साँचा वार्ता सहयोग सहयोग वार्ता श्रेणी श्रेणी वार्ता TimedText TimedText talk घटक घटक वार्ता Event Event talk साँचा:विलुप्त 10 392 80581 1279 2026-10-02T11:48:46Z ऐक्टिवेटेड् 76 ऐक्टिवेटेड् पन्ना [[साँचा:Extinct]] के [[साँचा:विलुप्त]] पर स्थानान्तरित कैलन 1278 wikitext text/x-wiki <span title="Extinct">{{Noitalic|{{Nobold|†}}}}</span><noinclude> {{Documentation}} </noinclude> 1apvmeqv4fhii49crdapuhoyqq5if3z श्रेणी:दार्दी भाषा 14 4024 80540 64017 2026-10-02T11:04:32Z ऐक्टिवेटेड् 76 ऐक्टिवेटेड् पन्ना [[श्रेणी:दार्दीभाषा]] के [[श्रेणी:दार्दी भाषा]] पर स्थानान्तरित कैलन 64017 wikitext text/x-wiki [[बर्ग:हिन्द-आर्यभाषा]] [[बर्ग:हिन्द-ईरानीभाषा]] 82f5e5ee9o8zrpf2escb375kg6k53h1 80545 80540 2026-10-02T11:13:02Z ऐक्टिवेटेड् 76 80545 wikitext text/x-wiki [[श्रेणी:हिन्द-आर्य भाषा]] [[श्रेणी:हिन्द-इरानीय भाषा]] gkopnx0s5xk6f5za8ivm7w7hptyy6o0 श्रेणी:पुर्तगाली भाषा 14 4560 80525 65766 2026-10-02T11:00:48Z ऐक्टिवेटेड् 76 ऐक्टिवेटेड् पन्ना [[श्रेणी:पुर्तगालीभाषा]] के [[श्रेणी:पुर्तगाली भाषा]] पर स्थानान्तरित कैलन 65766 wikitext text/x-wiki [[बर्ग:रोमान्सभाषा]] [[बर्ग:ब्राजिलके भाषा]] [[बर्ग:पुर्तगालके भाषा]] 8yqmjfy34gwo3yjepqs0zi3q9kpms4s 80531 80525 2026-10-02T11:02:27Z ऐक्टिवेटेड् 76 80531 wikitext text/x-wiki [[श्रेणी:रोमान्स भाषा]] [[श्रेणी:ब्राजिलके भाषा]] [[श्रेणी:पुर्तगालके भाषा]] priwbje9blwatd866dvlyrci6y2z6hn श्रेणी:रोमान्स भाषा 14 5836 80527 66603 2026-10-02T11:01:03Z ऐक्टिवेटेड् 76 ऐक्टिवेटेड् पन्ना [[श्रेणी:रोमान्सभाषा]] के [[श्रेणी:रोमान्स भाषा]] पर स्थानान्तरित कैलन 66603 wikitext text/x-wiki [[बर्ग:हिन्द-यूरोपीयभाषा]] 5lpe63op5x2u1go3sf6nacjr7xgq5zt 80534 80527 2026-10-02T11:02:55Z ऐक्टिवेटेड् 76 80534 wikitext text/x-wiki [[श्रेणी:हिन्द-यूरोपीय भाषा]] l3tpcujmk51u39gb1edyvc5u2u68lzd श्रेणी:विश्वके भाषा 14 6063 80571 66757 2026-10-02T11:34:03Z ऐक्टिवेटेड् 76 80571 wikitext text/x-wiki [[श्रेणी:भाषा]] 4r36bwu1u9toinyi31kdyuvfyd8x26p श्रेणी:स्लावी भाषा 14 6654 80536 67204 2026-10-02T11:03:54Z ऐक्टिवेटेड् 76 ऐक्टिवेटेड् पन्ना [[श्रेणी:स्लावीभाषा]] के [[श्रेणी:स्लावी भाषा]] पर स्थानान्तरित कैलन 67204 wikitext text/x-wiki [[बर्ग:हिन्द-यूरोपीयभाषा]] 5lpe63op5x2u1go3sf6nacjr7xgq5zt 80544 80536 2026-10-02T11:12:17Z ऐक्टिवेटेड् 76 80544 wikitext text/x-wiki [[श्रेणी:हिन्द-यूरोपीय भाषा]] l3tpcujmk51u39gb1edyvc5u2u68lzd श्रेणी:हिन्द-इरानीय भाषा 14 6699 80538 67233 2026-10-02T11:04:16Z ऐक्टिवेटेड् 76 ऐक्टिवेटेड् पन्ना [[श्रेणी:हिन्द-ईरानीभाषा]] के [[श्रेणी:हिन्द-इरानीय भाषा]] पर स्थानान्तरित कैलन 67233 wikitext text/x-wiki [[बर्ग:भाषापरिवार]] [[बर्ग:एसियाके भाषा]] [[बर्ग:हिन्द-यूरोपीयभाषा]] g12pcg17csimpfyo7vca7kg0mnq2lzj 80543 80538 2026-10-02T11:12:14Z ऐक्टिवेटेड् 76 80543 wikitext text/x-wiki [[श्रेणी:भाषा परिवार]] [[श्रेणी:एसियाके भाषा]] [[श्रेणी:हिन्द-यूरोपीय भाषा]] hrxcaoi41qhvusncix5gnwryqls24jd श्रेणी:हिन्द-यूरोपीय भाषा 14 6705 80532 67239 2026-10-02T11:02:53Z ऐक्टिवेटेड् 76 ऐक्टिवेटेड् पन्ना [[श्रेणी:हिन्द-यूरोपीयभाषा]] के [[श्रेणी:हिन्द-यूरोपीय भाषा]] पर स्थानान्तरित कैलन 67239 wikitext text/x-wiki [[बर्ग:भाषा]] [[बर्ग:भाषापरिवार]] rdx3goxcsfxdf1rd6zrkjd3o74usvhk 80535 80532 2026-10-02T11:03:25Z ऐक्टिवेटेड् 76 80535 wikitext text/x-wiki [[श्रेणी:भाषा]] [[श्रेणी:भाषा परिवार]] 6sxiz8qqpyfelxhiytmyykss7dxmow3 अंग्रेजीभाषा 0 7305 80569 22503 2026-10-02T11:31:01Z ऐक्टिवेटेड् 76 पुनर्निर्दशनके लक्ष्य [[अङ्ग्रेजीभाषा]] से [[अङ्ग्रेजी भाषा]] मे बदललै 80569 wikitext text/x-wiki #REDIRECT [[अङ्ग्रेजी भाषा]] 1j0m2xtjbk1qzppw367b09i25av7osw अङ्ग्रेजी भाषा 0 7353 80562 22695 2026-10-02T11:27:19Z ऐक्टिवेटेड् 76 [[अङ्ग्रेजीभाषा]] तकके पुनर्निर्दशन हटावल गेलै 80562 wikitext text/x-wiki [[सञ्चिका:Anglospeak_(subnational_version).svg|thumb|अङ्ग्रेजीभाषा]] '''अङ्ग्रेजी''' ([[अङ्ग्रेजी भाषा|अङ्ग्रेजी]]: English, ''इङ्ग्लिश्'') [[भारोपीय भाषा परिबार]]के एगो [[पच्छिमी जर्मेनिक भाषा]] हे, जे मूलरूपसे प्रारम्भिक मध्धजुगीन [[इङ्ग्लैण्ड]] के निबासीद्वारा बोलल जा हे । ई अखनि [[भारतके अधिकारिक भाषा]]मे से एक हे । देसमे सबसे अधिक लैकन एही भाषामे पढ़हथिन । एकर बर्णमालामे २६ अच्छर हे । लेखनके सुबिधाला एकर दु रूप हे, जे ई प्रकारसे हे - बड़का अच्छर: A B C D E F G H I J K L M N O P Q R S T U V W X Y Z छोटका अच्छर: a b c d e f g h i j k l m n o p q r s t u v w x y z एकरामे ५ स्वर हे जैसे - A(a), E(e), I(i), O(o), U(u) आउ अन्य ब्यञ्जन । == सम्बन्धित लेख == * [[भारतके अधिकारिक भाषा]] * [[भारतके भाषा]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:अङ्ग्रेजी भाषा|*]] [[श्रेणी:भारतके अधिकारिक भाषा]] 7f0jb9qzvljevr1v2dd7szh5w0e3mz3 80570 80562 2026-10-02T11:32:10Z ऐक्टिवेटेड् 76 80570 wikitext text/x-wiki [[सञ्चिका:Anglospeak_(subnational_version).svg|thumb|अङ्ग्रेजीभाषा]] '''अङ्ग्रेजी''' ([[अङ्ग्रेजी भाषा|अङ्ग्रेजी]]: English, ''इङ्ग्लिश्'') [[भारोपीय भाषा परिबार]]के एगो [[पच्छिमी जर्मेनिक भाषा]] हे, जे मूलरूपसे प्रारम्भिक मध्धजुगीन [[इङ्ग्लैण्ड]] के निबासीद्वारा बोलल जा हे । ई अखनि [[भारतके अधिकारिक भाषा]]मे से एक हे । देसमे सबसे अधिक लैकन एही भाषामे पढ़हथिन । एकर बर्णमालामे २६ अच्छर हे । लेखनके सुबिधाला एकर दु रूप हे, जे ई प्रकारसे हे - बड़का अच्छर: A B C D E F G H I J K L M N O P Q R S T U V W X Y Z छोटका अच्छर: a b c d e f g h i j k l m n o p q r s t u v w x y z एकरामे ५ स्वर हे जैसे - A(a), E(e), I(i), O(o), U(u) आउ अन्य ब्यञ्जन । == सम्बन्धित लेख == * [[भारतके अधिकारिक भाषा]] * [[भारतके भाषा]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:अङ्ग्रेजी भाषा|*]] [[श्रेणी:भारतके अधिकारिक भाषा]] [[श्रेणी:हिन्द-यूरोपीय भाषा]] [[श्रेणी:विश्वके प्रमुखभाषा]] [[श्रेणी:विश्वके भाषा]] 54f44djt2zjedwbogw29bmiofffms9t अङ्ग्रेजीभाषा 0 7354 80563 67345 2026-10-02T11:27:21Z ऐक्टिवेटेड् 76 [[अङ्ग्रेजी भाषा]] के पुनर्निर्देशित 80563 wikitext text/x-wiki #REDIRECT [[अङ्ग्रेजी भाषा]] 1j0m2xtjbk1qzppw367b09i25av7osw आदिम-हिन्द-यूरोपीय भाषा 0 7744 80557 24516 2026-10-02T11:21:56Z ऐक्टिवेटेड् 76 [[आदिम-हिन्द-यूरोपीयभाषा]] तकके पुनर्निर्दशन हटावल गेलै 80557 wikitext text/x-wiki [[सञ्चिका:IndoEuropeanTree.svg|thumb|हिन्द-यूरोपीय भाषाके बर्गीकरण]] '''आदिम-हिन्द-यूरोपीय भाषा''' (आ॰हि॰यू॰) [[भाषाबिज्ञान|भाषाबैज्ञानिक]] द्वारा पूरा [[हिन्द-यूरोपीय भाषापरिबार]]के सभ भाषाके एकमात्र प्राचीन जननीभाषा मानल जा हे । मानल जाहे कि एकरा प्राचीनकालमे [[आदिम-हिन्द-यूरोपीय जन]] बोलल करहलन किन्तु ई भाषा सहस्र वर्ष पहिलहीँ पूरा प्रकारसे लुप्त हो गेल हल । बड्डीमनी हिन्द-यूरोपीय भाषाके [[सजातीय शब्द|सजातीय शब्दके]] एक-दोसरसे तुलनाके बाद भाषाबैज्ञानिक ई लुप्तभाषाके पुनर्निर्माण कैलन हे जेकरासे एकर शब्दके अनुमान लगावल जा सकहे । == एकरो देखहु == * [[हिन्द-यूरोपीय भाषा परिबार]] * [[सजातीय शब्द]] * [[आदिम-हिन्द-यूरोपीय जन]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:हिन्द-यूरोपीय भाषा]] [[श्रेणी:प्राचीनभाषा]] [[श्रेणी:भाषा परिवार]] kk3vprl5l4uj6qv30upeq6px5jnh0lo आदिम-हिन्द-यूरोपीयभाषा 0 7747 80558 67491 2026-10-02T11:23:41Z ऐक्टिवेटेड् 76 [[आदिम-हिन्द-यूरोपीय भाषा]] के पुनर्निर्देशित 80558 wikitext text/x-wiki #REDIRECT [[आदिम-हिन्द-यूरोपीय भाषा]] 91lrwgq1gxdaucsvgc73a8iyzu8xihz द्राविडीय भाषा 0 10793 80579 68566 2026-10-02T11:46:23Z ऐक्टिवेटेड् 76 80579 wikitext text/x-wiki {{Infobox language family | name = द्राविडीय | altname = द्राबिडीय भाषा वा द्राविडिक | region = [[दक्खिन एसिया]] आउ [[दक्खिनपुरुबी एसिया]], मुख्यतः [[दक्खिनभारत]], उत्तरपूरुबी [[श्रीलङ्का]] आउ [[पाकिस्तान]] | familycolor = द्राबिडीय | family = बिश्वके प्राथमिक-[[भाषाकुटुम्ब]]मे से एक | protoname = [[आदिम द्राबिडीय भाषा|आदिम द्राबिडीय]] | child1 = उत्तर | child2 = केन्द्रीय | child3 = दक्षिणकेन्द्रीय | child4 = दक्षिण | iso2 = dra | iso5 = dra | lingua = 49= (phylozone) | glotto = drav1251 | glottorefname = Dravidian | map = Dravidian map.svg | mapcaption = द्राबिडीय भाषाके बितरण | ancestor = | glottoname = | notes = }} '''द्राविडीय''' वा '''द्राबिड़ भाषा''' (अथवा कखनियो-कखनियो '''द्राविडिक भाषा'''<ref>{{Cite web |title=Definition of Dravidic {{!}} Dictionary.com |trans_title=द्राविडिकके परिभाषा |url=https://www.dictionary.com/browse/dravidic |website=www.dictionary.com |language=अङ्ग्रेजी |accessdate=2022-04-10 |archive-date=2023-04-09 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230409105614/https://www.dictionary.com/browse/dravidian |deadurl=yes }}</ref>) [[भाषा परिबार|भाषाके एगो परिबार]] हे जे मुख्यरूपसे [[दक्खिनभारत]], उत्तरपूरुबी [[श्रीलङ्का]] आउ दक्खिन-पच्छिम [[पाकिस्तान]]मे २५ करोड़ लोगद्वारा बोलल जाहे ।<ref name=EB>{{Cite encyclopedia|title= Overview of Dravidian languages |trans_title=द्राबिडीय भाषाके अबलोकन |url=https://www.britannica.com/topic/Dravidian-languages|encyclopedia=Encyclopædia Britannica |accessdate=४ जुलाई २०१८}}</ref> औपनिवेशिक जुगके बादसे, [[मारिशस]], [[म्यान्मार|बर्मा (म्यान्मार)]], [[सिङ्गापुर]], [[मलेसिया]], [[इण्डोनेसिया]], [[फिलिपिन्स|कलिङ्गद्वीप (फिलिपिन्स)]], [[संयुक्ताधिराज्य]], [[आस्ट्रेलिया]], [[फ्रान्स]], [[कनाडा]], [[जर्मनी]], [[दक्खिन अफ्रिका]] आउ [[संयुक्तराज्य अमेरिका]]मे छोट किन्तु महत्वपूर्ण आप्रवासी समुदाय रहहथ । == वर्गीकरण == === दक्षिण === *'''[[तमिल्-कन्नड भाषा|तमिल्-कन्नड]]''' - **तमिल्-मलयाल - ***[[तमिल् भाषा]] ([[तमिल् भाषा|तमिल्]], [[इरुला भाषा|इरुला]], [[वेट्टै कुरुम्ब भाषा|वेट्टै कुरुम्ब]], [[कुर्रु भाषा|कुर्रु (ऐरुकल)]], [[ऐरवल्लन्भाषा|ऐरवल्लन्]], [[मल भाषा|मलम् (कणिक्कारन्)]], [[मुथुवन्भाषा|मुथुवन्]], [[सोलिग भाषा|सोलिग (शोलग)]], [[कैक्काडि भाषा|कैक्काडि]], [[सङ्केति भाषा|सङ्केति]], श्रीलङ्कातमिल्, [[जाफना-तमिल् उपभाषा|जाफनी]]) ***[[मलयाल भाषा]] ([[मलयालम्]], [[पणिय भाषा|पणिय]], [[रवुल भाषा|रवुल]], [[ब्यारि भाषा|ब्यारि]], [[एरनाटन्भाषा|एरनाटन्]], [[येहूद्यमलयाल]], [[काटर भाषा|काटर्]], [[मलप्पण्डार भाषा|मलप्पणडारं]], [[मलर्यन्भाषा|मलर्यन्]], [[मलवेडन्भाषा|मलवेडन्]], [[मन्नन् भाषा|मन्नन्]], [[अरबी मलयाल]], [[पालियन्भाषा|पालियन्]], [[जसरि भाषा|जसरि (द्वीपभाषा)]], [[मुल्लु कुरुम्बा भाषा|मुल्लु कुरुम्बा]], [[सुरियानि मलयालम्]]) **कोडगु - [[कोडव भाषा|कोडव (कोडगु)]], [[कुरुम्ब भाषा|कुरुम्ब]] **[[कन्नड-बडग भाषा|कन्नड-बडग]] - [[कन्नड भाषा|कन्नड]], [[बडग भाषा|बडग]], [[ऊरालि भाषा|ऊरालि]], [[होलिय भाषा|होलिय]], [[कुन्दगन्नड उपभाषा|कुन्दगन्नद]] **तोड-कोत - [[तोड भाषा|तोड (तोता)]] , [[कोत भाषा|कोत]] *'''तुलु भाषा''' - [[तुलु भाषा|तुलु]], [[कोरग भाषा|कोरग]], [[कुडिया भाषा|कुडिया]] === दक्षिण-केन्द्रीय === *'''आदिम तेलुगु''' - [[तेलुगु]], [[चेञ्चु भाषा|चेञ्चु]], सवरा *'''गोण्डी-कुइ''' - **[[गोण्डी भाषा]] - [[गोण्डी भाषा|गोण्डी]], [[मुरिय भाषा|मुरिय]], [[मदिया भाषा|मदिया]], [[कोया भाषा|कोया]], खिर्वार् **कुवि-कुइ - [[कुवि भाषा|कुवि]], [[कुइ भाषा|कुइ]] **मण्ड-पेङ्गो - [[मण्ड भाषा|मण्ड]], [[पेङ्गो भाषा|पेङ्गो]] **डोरा - [[कोण्ड भाषा|कोण्ड]], मुखा, डोरा === केन्द्रीय === *'''कोलामी-नेयेकी''' - [[कोलामी भाषा|कोलामी]], [[नेयेकी भाषा|नेयेकी]] *'''पार्जी-गाडब''' - [[ओल्लारी भाषा|ओल्लारी]]<!--(कोण्ड्कोर)-->, [[दुरुवा भाषा|दुरुवा (धुरवा)]] === उत्तर === *'''कुरुख-माल्टो''' - [[कुंड़ुख़ भाषा|कुंड़ुख (कुंड़ुख़)]], [[माल्टो भाषा|माल्टो]] (कुमारभाग पहाड़िया, सौरिया पहाड़िया) *'''[[ब्राहुई भाषा|ब्राहुई]]''' === अवर्गीकृत === *अबर्गीकृत द्राबिडीय भाषा (एथ्नोलाग्-अनुसार) - [[अल्लर् भाषा|अल्लर्]], [[बाजिगर भाषा|बाजिगर्]], भारिया, मलङ्कुरवन्, [[विषावन्भाषा|विषावन्]] *अबर्गीकृत दक्षिणद्राबिडीय भाषा (एथ्नोलाग्-अनुसार) - मल मलैसर्, मलैसर्, थचनदन्, उल्लतन्, कलनदि, कुम्बरन्, कुण्डुवडि, कुरिचिया, अट्टपडि कुरुम्ब, मुदुगा, पाथिया, [[वयनाडु चेट्टि भाषा|वयनाडु चेट्टि]], पट्टपु == वितरण == {{Pie chart |caption=भाषानुसार द्राबिडीय भाषाके बक्ता |label1=[[तेलुगु]] |value1=30.5 |label2=[[तमिल् भाषा|तमिल्]] |value2=26 |label3=[[कन्नड भाषा|कन्नड]] |value3=22.4 |label4=[[मलयाल]] |value4=14.4 |label5=[[गोण्डी भाषा|गोण्डी]] |value5=1.2 |label6=[[ब्राहुई भाषा|ब्राहुई]] |value6=0.9 |label7=[[तुलु भाषा|तुलु]] |value7=0.7 |label8=[[कुंड़ुख]] |value8=0.8 |label9=[[ब्यारि भाषा|ब्यारि]] |value9=0.7 |label10=अन्य |value10=2.3 }} १९८१ के बादसे [[भारतके जनगणना]]मे खाली १०,००० से अधिक द्वारा बोलल जायेवाला भाषाके सूचना देल गेलहे, जौनमे १७ द्रबिड़भाषो शामिल हे । १९८१ मे ई भारतके जनसङ्ख्याके लगभग २४% हल ।<ref name="Ishtiaq 1999">{{Cite book |last=Ishtiaq |first=M. |title=Language Shifts Among the Scheduled Tribes in India: A Geographical Study |trans_title=भारतमे अनुसूचित जनजातिमे भाषापरिबर्तन - एक भौगोलिकाध्ययन |year=१९९९ |publisher=मोतिलाल बनारसीदास प्रकाशन|location=दिल्ली |isbn=978-81-208-1617-6 |url=https://books.google.com/books?id=fkIgsfb95rAC|accessdate=७ सितम्बर २०१२|pages=26–27}}</ref> २००१ के जनगणनामे उनखर सङ्ख्या २१.४ करोड़ हल, जे भारतके १०२ करोड़के कुल जनसङ्ख्याके २१% हल ।<ref>{{Cite web |title=Abstract of speakers' strength of languages and mother tongues –2001 |trans_title=भाषा आउ मातृभाषा भाषिकके बलके सारांश - २००१ |url=http://www.censusindia.gov.in/Census_Data_2001/Census_Data_Online/Language/Statement1.aspx |accessdate=१४ अक्तुबर २०१७ |work=जनगणना २००१ |publisher=महानिबन्धक आउ जनगणनायुक्तके कार्यालय, भारत }}</ref> एकर अतिरिक्त भारतके बाहिरे सबसे बड़का द्रबिड़भाषी समूह श्रीलङ्कामे लगभग ४७ लाख तमिल्भाषी हथ । द्राबिड भाषा बोलेवालाके कुल सङ्ख्या २२.७ कोटि हे, जे भारतीय उपमहाद्वीपके जनसङ्ख्याके लगभग १३% हे । द्राबिड भाषाके सबसे बड़का समूह दक्खिन द्राबिड भाषा हे, जेकर बोलेवालाके सङ्ख्या लगभग १५ करोड़ हे । [[तमिल् भाषा|तमिल्]], [[कन्नड भाषा|कन्नड]] आउ [[मलयाल भाषा|मलयाल]] बोलेवालाके सङ्ख्या ९८% हे, जौनमे क्रमशः ७.५ करोड़, ४.४ करोड़ आउ ३.७ करोड़ देसीबक्ता हथ । अगला सबसे बड़ दक्खिन-केन्द्रीयशाखा हे, जने ७.८ करोड़ देसीबक्ता हथ, जौनमे से अधिकान्श [[तेलुगु जन|तेलुगुभाषी]] हथ । ऊसभ लोगके शामिल करित जिनखर पहिलभाषा तेलुगु नै हे, तेलुगु बोलवालाके कुल सङ्ख्या ८.४ करोड़ हे । ई शाखामे मध्यभारतमे बोले जायेवाला एगो स्वदेसीभाषा [[गोण्डी भाषा|गोण्डियो]] शामिल हे । दोसर छोट शाखा उत्तरशाखा हे, जने लगभग ६.३ लाख बक्ता हथ । ई एकमात्र उपसमूह हे जेकर भाषा [[पाकिस्तान]]मे बोलल जा हे - [[ब्राहुई भाषा]] । सबसे छोट शाखा केन्द्रीयशाखा हे, जने खाली लगभग २ लाख बक्ता हथ । ईसभ भाषा अधिकतर जनजातीय हे आउ [[मध्यभारत]]मे बोलल जाहे । == सम्बन्धित लेख == * [[भारतके भाषा]] * [[भारतके आधिकारिक भाषा]] * [[हिन्द-आर्य भाषा]] * [[भाषा परिवार]] * [[भाषापरिबारके सूची]] * [[मातृभाषा वक्ताके सङ्ख्यानुसार भाषाके सूची]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:द्राविडीय भाषा|*]] [[श्रेणी:भाषा परिवार]] c64fih6cya84w1om63uuttuk0lnatht पश्तो भाषा 0 11524 80554 40341 2026-10-02T11:20:42Z ऐक्टिवेटेड् 76 [[पश्तोभाषा]] तकके पुनर्निर्दशन हटावल गेलै 80554 wikitext text/x-wiki '''पश्तो''' ({{Nastaliq|ur|پښتو}}), जेकरा '''पख्तो''' वा '''अफ्गानी''' एहु कहल जा हे, [[अफगनिस्तान]] आउ [[पाकिस्तान]]मे रहेवाला [[पठान]] समुदायके मुख्यभाषा हे । ई केन्द्रीय आउ दक्खिनी अफगनिस्तान आउ उत्तर-पच्छिमी पाकिस्तानके [[खैबर पख्तूनख्वा]] प्रदेसके बासी हथ । भौगोलिक दृष्टि से ई [[आमू दरिया]]से दक्खिन आउ [[सिन्धु नदी]]से पच्छिमके क्षेत्रमे रहहथ । पश्तो [[हिन्द-इरानीय भाषा|हिन्द-इरानीय भाषा-परिबार]]के [[इरानीय भाषा परिवार|इरानीय उपशाखा]]के सदस्य हे आउ इरानीय भाषामे एकरा एगो [[पूरुबी इरानीय भाषा]] मानल जा हे । == एकरो देखहु == * [[खैबर पख्तूनख्वा]] * [[हिन्द-इरानीय भाषा|हिन्द-इरानीय भाषा-परिबार]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची|2}} [[श्रेणी:पश्तो भाषा|*]] [[श्रेणी:इरानीय भाषा]] [[श्रेणी:पूर्व इरानीय भाषा]] [[श्रेणी:हिन्द-यूरोपीय भाषा]] [[श्रेणी:अफगानिस्तानके भाषा]] [[श्रेणी:पाकिस्तानके भाषा]] [[श्रेणी:विश्वके प्रमुखभाषा]] [[श्रेणी:विश्वके भाषा]] l20n08monh6f6ednughhe9eh4ghs6t9 पश्तोभाषा 0 11525 80555 68826 2026-10-02T11:20:52Z ऐक्टिवेटेड् 76 [[पश्तोभाषा]] के पुनर्निर्देशित 80555 wikitext text/x-wiki #REDIRECT [[पश्तोभाषा]] rqf201by57i62gpf4ktz0s21gnwatar 80556 80555 2026-10-02T11:21:01Z ऐक्टिवेटेड् 76 पुनर्निर्दशनके लक्ष्य [[पश्तोभाषा]] से [[पश्तो भाषा]] मे बदललै 80556 wikitext text/x-wiki #REDIRECT [[पश्तो भाषा]] gix44wl8qr47flagciitivrvbqdltmi पुर्तगाली भाषा 0 11732 80542 41395 2026-10-02T11:10:26Z ऐक्टिवेटेड् 76 [[पुर्तगालीभाषा]] तकके पुनर्निर्दशन हटावल गेलै 80542 wikitext text/x-wiki [[सञ्चिका:Detailed SVG map of the Lusophone world.svg|thumb]] '''पुर्तगालीभाषा''' (पुर्तगाली: língua portuguesa, português) एगो यूरोपीय भाषा हे । ई मूलरूपसे [[पुर्तगाल]]के भाषा हे आउ एकर ढेर भूतपूर्ब उपनिवेशोमे बहुमतभाषा हे, जैसे [[ब्राजिल]] । ई [[हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिबार]]के [[रोमान्स भाषा|रोमान्स शाखा]]मे आवहे । एकर लिपि [[रोमन लिपि|रोमन]] हे । ई भाषाके प्रथमभाषी लगभग २० करोड़ हथ । [[श्रेणी:पुर्तगाली भाषा|*]] [[श्रेणी:रोमान्सभाषा]] [[श्रेणी:विश्वके प्रमुखभाषा]] 88ih061fkn1v2yiot36c4tunot2j7nb 80553 80542 2026-10-02T11:18:34Z ऐक्टिवेटेड् 76 80553 wikitext text/x-wiki [[सञ्चिका:Detailed SVG map of the Lusophone world.svg|thumb]] '''पुर्तगालीभाषा''' (पुर्तगाली: língua portuguesa, português) एगो यूरोपीय भाषा हे । ई मूलरूपसे [[पुर्तगाल]]के भाषा हे आउ एकर ढेर भूतपूर्ब उपनिवेशोमे बहुमतभाषा हे, जैसे [[ब्राजिल]] । ई [[हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिबार]]के [[रोमान्स भाषा|रोमान्स शाखा]]मे आवहे । एकर लिपि [[रोमन लिपि|रोमन]] हे । ई भाषाके प्रथमभाषी लगभग २० करोड़ हथ । [[श्रेणी:पुर्तगाली भाषा|*]] [[श्रेणी:रोमान्स भाषा]] [[श्रेणी:विश्वके प्रमुखभाषा]] d4hb136m7mbqypxrgprv7uwb0vpln3g पुर्तगालीभाषा 0 11733 80552 68899 2026-10-02T11:18:28Z ऐक्टिवेटेड् 76 [[पुर्तगाली भाषा]] के पुनर्निर्देशित 80552 wikitext text/x-wiki #REDIRECT [[पुर्तगाली भाषा]] 1vh6pfk7b7kou1dakmwrcen3cm05ict फ्रान्सीसी भाषा 0 12159 80559 42927 2026-10-02T11:24:34Z ऐक्टिवेटेड् 76 [[फ्रान्सीसीभाषा]] तकके पुनर्निर्दशन हटावल गेलै 80559 wikitext text/x-wiki '''फ्रान्सीसी भाषा''' ({{Lang-fr|français}}) एगो [[रोमान्स भाषा]] हे जे बिश्वभरमे लगभग ९ करोड़ लोगद्वारा प्रथमभाषाके रूपमे बोलल जाहे । मूलरूपसे ई भाषाके बोलेवाला अधिकांश लोग [[फ्रान्स]]मे रहहथ जन्ने ई भाषाके जनम होएल हल । ई भाषाके बोलेवाला अन्य क्षेत्र हे - अधिकांश [[कनाडा]], [[बेल्जियम्]], [[स्विट्जरलैण्ड]], अफ्रिकी फ्रेकोफोन, [[लक्जमबर्ग]] आउ [[मोनाको]] । फ्रान्सीसी भाषा १९ करोड़ लोगद्वारा दोसराभाषाके रूपमे आउ अन्य २० करोड़ द्वारा अधिग्रहित भाषाके रूपमे बोलल जा हे । बिश्वके ५४ देसमे ई भाषाके बोलेवालाके सङ्ख्या हे । == एकरो देखी == * [[फ्रेञ्चसाहित्य]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:फ्रान्सीसी भाषा|*]] [[श्रेणी:विश्वके प्रमुखभाषा]] [[श्रेणी:रोमान्स भाषा]] 030ires98288vy3oo95qlnx39r763aq फ्रान्सीसीभाषा 0 12160 80560 69018 2026-10-02T11:24:39Z ऐक्टिवेटेड् 76 [[फ्रान्सीसी भाषा]] के पुनर्निर्देशित 80560 wikitext text/x-wiki #REDIRECT [[फ्रान्सीसी भाषा]] mkqp1fvm0utfp7hcqr8vb8svoswv1gt फ्रेञ्चभाषा 0 12163 80567 42942 2026-10-02T11:29:48Z ऐक्टिवेटेड् 76 पुनर्निर्दशनके लक्ष्य [[फ्रान्सीसीभाषा]] से [[फ्रान्सीसी भाषा]] मे बदललै 80567 wikitext text/x-wiki #REDIRECT [[फ्रान्सीसी भाषा]] mkqp1fvm0utfp7hcqr8vb8svoswv1gt बलोची भाषा 0 12354 80572 69234 2026-10-02T11:36:30Z ऐक्टिवेटेड् 76 80572 wikitext text/x-wiki [[सञ्चिका:Idioma baluchi.png|right|thumb|300px|बलोचभाषी क्षेत्र]] '''बलूची''' वा '''बलोच भाषा''' ({{Nastaliq|ur|بلوچی}}) दक्खिन-पच्छिमी [[पाकिस्तान]], पूर्बी [[इरान]] आउ दक्खिनी [[अफगानिस्तान]]मे बसेवाला [[बलोच लोग]]के भाषा हे । ई [[इरानीय भाषा-परिबार]]के सदस्य हे आउ एकरामे प्राचीन [[अवस्ताई भाषा]]के झलक लौकहे, जे स्वयं [[बैदिक संस्कृत]]के बड्डी भिरु मानल जा हे । उत्तरपच्छिम [[इरान]], पूरुबी [[तुर्की]] आउ उत्तर [[इराक]]मे बोलल जायेवाला [[कुर्दी भाषा|कुर्दी भाषो]]से बलोची भाषाके कुछ समानता हे । बलोची पाकिस्तानके नौ सरकारी भाषामे से एक हे । अनुमानतः एकरा पूरा बिश्वमे लगभग ८० लाख लोग मातृभाषा नियन बोलहथ । == एकरो देखहु == * [[बलोच लोग]] * [[बलोच राष्ट्रवाद]] * [[बलूचिस्तान (पाकिस्तान)]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:बलोची भाषा|*]] [[श्रेणी:इरानीय भाषा]] [[श्रेणी:विश्वके भाषा]] [[श्रेणी:बलूचिस्तानके भाषा]] s791ucxnl7uxuwaubklt7rwslzdrg5z 80574 80572 2026-10-02T11:37:00Z ऐक्टिवेटेड् 76 ऐक्टिवेटेड् पन्ना [[बलोचीभाषा]] के [[बलोची भाषा]] पर स्थानान्तरित कैलन 80572 wikitext text/x-wiki [[सञ्चिका:Idioma baluchi.png|right|thumb|300px|बलोचभाषी क्षेत्र]] '''बलूची''' वा '''बलोच भाषा''' ({{Nastaliq|ur|بلوچی}}) दक्खिन-पच्छिमी [[पाकिस्तान]], पूर्बी [[इरान]] आउ दक्खिनी [[अफगानिस्तान]]मे बसेवाला [[बलोच लोग]]के भाषा हे । ई [[इरानीय भाषा-परिबार]]के सदस्य हे आउ एकरामे प्राचीन [[अवस्ताई भाषा]]के झलक लौकहे, जे स्वयं [[बैदिक संस्कृत]]के बड्डी भिरु मानल जा हे । उत्तरपच्छिम [[इरान]], पूरुबी [[तुर्की]] आउ उत्तर [[इराक]]मे बोलल जायेवाला [[कुर्दी भाषा|कुर्दी भाषो]]से बलोची भाषाके कुछ समानता हे । बलोची पाकिस्तानके नौ सरकारी भाषामे से एक हे । अनुमानतः एकरा पूरा बिश्वमे लगभग ८० लाख लोग मातृभाषा नियन बोलहथ । == एकरो देखहु == * [[बलोच लोग]] * [[बलोच राष्ट्रवाद]] * [[बलूचिस्तान (पाकिस्तान)]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:बलोची भाषा|*]] [[श्रेणी:इरानीय भाषा]] [[श्रेणी:विश्वके भाषा]] [[श्रेणी:बलूचिस्तानके भाषा]] s791ucxnl7uxuwaubklt7rwslzdrg5z बैदिक संस्कृत 0 12911 80547 69297 2026-10-02T11:15:26Z ऐक्टिवेटेड् 76 [[वैदिक संस्कृत]] के पुनर्निर्देशित 80547 wikitext text/x-wiki #REDIRECT [[वैदिक संस्कृत]] 4i2zkd0zqfnhsz6ul05chjxznoyiymo रोमान्स भाषा 0 14555 80523 69818 2026-10-02T11:00:43Z ऐक्टिवेटेड् 76 ऐक्टिवेटेड् पन्ना [[रोमान्सभाषा]] के [[रोमान्स भाषा]] पर स्थानान्तरित कैलन 69818 wikitext text/x-wiki '''रोमान्सभाषा''' [[हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिबार]]के एगो शाखा हे, जेकर उत्पत्ति [[लातिनीभाषा]]से होएल हे । एकरामे [[स्पेनीभाषा|स्पेनिशभाषा]], [[पुर्तगालीभाषा]], [[फ्रान्सीसीभाषा]], [[रोमानीभाषा]], [[इतालवीभाषा]], [[कातालानभाषा]] आउ [[गेलिशियनभाषा]] शामिल हे । == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[बर्ग:रोमान्सभाषा|*]] 69b6x0oar39tp5cvo6bnx8nf9swu4jq 80561 80523 2026-10-02T11:26:08Z ऐक्टिवेटेड् 76 80561 wikitext text/x-wiki '''रोमान्स भाषा''' [[हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिबार]]के एगो शाखा हे जेकर उत्पत्ति [[लातिनी भाषा]]से होएल हे । एकरामे [[स्पेनी भाषा|स्पेनी]], [[पुर्तगाली भाषा|पुर्तगाली]], [[फ्रान्सीसी भाषा|फ्रान्सीसी]], [[रोमानी भाषा|रोमानी]], [[इतालवी भाषा|इतालवी]], [[कातालान भाषा|कातालान]] आउ [[गेलिशियन भाषा]] शामिल हे । == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:रोमान्स भाषा|*]] 2oh9bslhz2qu07u09e5ob6x8d1kvtdx वैदिक संस्कृत 0 15108 80546 55558 2026-10-02T11:15:17Z ऐक्टिवेटेड् 76 [[बैदिक संस्कृत]] तकके पुनर्निर्दशन हटावल गेलै 80546 wikitext text/x-wiki {{Infobox language |name=वैदिक संस्कृत |nativename= |region= [[भारतीय उपमहाद्वीप]] |states= [[कान्स्यजुग भारत|कान्स्यजुग]], [[भारतमे लौहजुग|लौहजुग]] | era = {{Circa|1500}} - ६०० ईपू |familycolor=[[भारोपीय भाषा|भारोपीय]] |fam2=[[हिन्द-इरानीय भाषा|हिन्द-इरानीय]] |fam3=[[हिन्द-आर्य भाषा|हिन्द-आर्य]] |iso3=–<!-- vsn has been proposed but has not yet been approved --> |iso3comment=({{Code|vsn}} प्रस्तावित हे)<ref>{{Cite web|url=https://iso639-3.sil.org/request/2011-041|title=Change Request Documentation: 2011-041|publisher=[[SIL International]]|access-date=12 अप्रैल 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20190605141651/https://iso639-3.sil.org/request/2011-041|archive-date=5 जून 2019|url-status=dead}}</ref>{{Update after|2012|6}} |linglist=vsn |linglist2=qnk |lingname2=Rigvedic |notice=IPA }} [[सञ्चिका:Rigveda MS2097.jpg|thumb|240px|ऋग्वेदमे बैदिक संस्कृतके सबसे प्राचीनरूप भेटहे]] [[सञ्चिका:Rigved-shlok 10.90.2.png|thumb|240px|ऋग्वेद १०.९०:२ के श्लोक: ई पुरुष ऊ सर्वस्व हे जे भेलहे (भूतं) वा होतै (भव्यं) । अमरताके ईश्वर (ईशानः) अन्नसे आउओ बिस्तृत (अतिऽरोहति) होवहे ।]] '''बैदिक संस्कृत''' (वैदिक संस्कृत) ६०० ईसापूर्बसे लेके २००० ईसापूर्ब तक बोले जायेवाला एगो [[हिन्द-आर्य भाषा]] हल ।<ref>{{Cite web|url=https://www.mid-day.com/articles/devdutt-pattanaik-how-sanskrit-evolved-in-india/18368161|title=How Sanskrit evolved in India|access-date=6 जून 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190607023117/https://www.mid-day.com/articles/devdutt-pattanaik-how-sanskrit-evolved-in-india/18368161|archive-date=7 जून 2019|url-status=live}}</ref> ई [[संस्कृत भाषा|संस्कृतके]] पूर्वजभाषा हल आउ [[आदिम हिन्द-इरानीय भाषा]]के बड्डी भिरुके सन्तान हल । बैदिक संस्कृत आउ [[अवस्ताई भाषा]] (प्राचीनतम ज्ञात [[इरानी भाषा परिवार|इरानी भाषा]]) एक-दोसरके बड्डी भिरु हथ । बैदिक संस्कृत [[हिन्द-यूरोपीय भाषा परिवार]]के [[हिन्द-इरानीय भाषा|हिन्द-इरानीय भाषा शाखा]]के सबसे प्राचीन प्रामाणिक भाषा हे ।<ref name="ref42fopuf">[http://books.google.com/books?id=Kwnv3I6qIosC A brief history of India] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20161224100750/https://books.google.com/books?id=Kwnv3I6qIosC|date=24 दिसम्बर 2016}}, Alain Daniélou, Kenneth Hurry, Inner Traditions / Bear &#x26; Co, 2003, ISBN 978-0-89281-923-2, ''... The language of the Indian Aryans, Vedic Sanskrit, is the oldest of the languages known as Indo-European, of which written documents and spoken forms exist ...''</ref> == इहो देखहु == * [[आदिम-हिन्द-यूरोपीय भाषा]] * [[बैदिक व्याकरण]] * [[बैदिक सभ्यता]] * [[बैदिक साहित्य]] * [[बैदिक छन्द]] * [[बैदिक स्वराघात]] * [[अवस्ताई भाषा]] * [[हिन्द-इरानीय भाषा|हिन्द-इरानीय भाषा परिवार]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:ऋग्वैदिक भाषा]] [[श्रेणी:हिन्द-आर्य भाषा]] [[श्रेणी:हिन्द-इरानीय भाषा]] [[श्रेणी:विलुप्त भाषा]] [[श्रेणी:धार्मिक भाषा]] [[श्रेणी:भारतके इतिहास]] [[श्रेणी:संस्कृत]] d0rzgm6qap56hwkmii57hmypejlot1k 80550 80546 2026-10-02T11:16:35Z ऐक्टिवेटेड् 76 80550 wikitext text/x-wiki {{Infobox language |name=वैदिक संस्कृत |nativename= |region= [[भारतीय उपमहाद्वीप]] |states= [[कांस्य युग भारत|कांस्य युग]], [[भारतमे लौह युग|लौह युग]] | era = {{Circa|1500}} - ६०० ईपू |familycolor=[[भारोपीय भाषा|भारोपीय]] |fam2=[[हिन्द-इरानीय भाषा|हिन्द-इरानीय]] |fam3=[[हिन्द-आर्य भाषा|हिन्द-आर्य]] |iso3=–<!-- vsn has been proposed but has not yet been approved --> |iso3comment=({{Code|vsn}} प्रस्तावित हे)<ref>{{Cite web|url=https://iso639-3.sil.org/request/2011-041|title=Change Request Documentation: 2011-041|publisher=[[SIL International]]|access-date=12 अप्रैल 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20190605141651/https://iso639-3.sil.org/request/2011-041|archive-date=5 जून 2019|url-status=dead}}</ref>{{Update after|2012|6}} |linglist=vsn |linglist2=qnk |lingname2=Rigvedic |notice=IPA }} [[सञ्चिका:Rigveda MS2097.jpg|thumb|240px|ऋग्वेदमे बैदिक संस्कृतके सबसे प्राचीनरूप भेटहे]] [[सञ्चिका:Rigved-shlok 10.90.2.png|thumb|240px|ऋग्वेद १०.९०:२ के श्लोक: ई पुरुष ऊ सर्वस्व हे जे भेलहे (भूतं) वा होतै (भव्यं) । अमरताके ईश्वर (ईशानः) अन्नसे आउओ बिस्तृत (अतिऽरोहति) होवहे ।]] '''बैदिक संस्कृत''' (वैदिक संस्कृत) ६०० ईसापूर्बसे लेके २००० ईसापूर्ब तक बोले जायेवाला एगो [[हिन्द-आर्य भाषा]] हल ।<ref>{{Cite web|url=https://www.mid-day.com/articles/devdutt-pattanaik-how-sanskrit-evolved-in-india/18368161|title=How Sanskrit evolved in India|access-date=6 जून 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190607023117/https://www.mid-day.com/articles/devdutt-pattanaik-how-sanskrit-evolved-in-india/18368161|archive-date=7 जून 2019|url-status=live}}</ref> ई [[संस्कृत भाषा|संस्कृतके]] पूर्वजभाषा हल आउ [[आदिम हिन्द-इरानीय भाषा]]के बड्डी भिरुके सन्तान हल । बैदिक संस्कृत आउ [[अवस्ताई भाषा]] (प्राचीनतम ज्ञात [[इरानी भाषा परिवार|इरानी भाषा]]) एक-दोसरके बड्डी भिरु हथ । बैदिक संस्कृत [[हिन्द-यूरोपीय भाषा परिवार]]के [[हिन्द-इरानीय भाषा|हिन्द-इरानीय भाषा शाखा]]के सबसे प्राचीन प्रामाणिक भाषा हे ।<ref name="ref42fopuf">[http://books.google.com/books?id=Kwnv3I6qIosC A brief history of India] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20161224100750/https://books.google.com/books?id=Kwnv3I6qIosC|date=24 दिसम्बर 2016}}, Alain Daniélou, Kenneth Hurry, Inner Traditions / Bear &#x26; Co, 2003, ISBN 978-0-89281-923-2, ''... The language of the Indian Aryans, Vedic Sanskrit, is the oldest of the languages known as Indo-European, of which written documents and spoken forms exist ...''</ref> == इहो देखहु == * [[आदिम-हिन्द-यूरोपीय भाषा]] * [[बैदिक व्याकरण]] * [[बैदिक सभ्यता]] * [[बैदिक साहित्य]] * [[बैदिक छन्द]] * [[बैदिक स्वराघात]] * [[अवस्ताई भाषा]] * [[हिन्द-इरानीय भाषा|हिन्द-इरानीय भाषा परिवार]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:ऋग्वैदिक भाषा]] [[श्रेणी:हिन्द-आर्य भाषा]] [[श्रेणी:हिन्द-इरानीय भाषा]] [[श्रेणी:विलुप्त भाषा]] [[श्रेणी:धार्मिक भाषा]] [[श्रेणी:भारतके इतिहास]] [[श्रेणी:संस्कृत]] t74mavfl9sh3he935u3v5n9mlrcqpn6 स्पेनी भाषा 0 16102 80529 59735 2026-10-02T11:01:50Z ऐक्टिवेटेड् 76 [[स्पेनीभाषा]] तकके पुनर्निर्दशन हटावल गेलै 80529 wikitext text/x-wiki '''स्पेनी''' अथवा '''स्पेनिश भाषा''' ({{Audio-nohelp|Es-español.oga|español}} ''एस्पान्योल्'' वा {{Audio-nohelp|es_castellano_001.ogg|castellano}}) [[हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार]]के [[रोमान्स भाषा|रोमान्स शाखामे]] आवेवाला एगो भाषा हे । ई बिश्वके सर्वाधिक बोले जायेवाला भाषामे से एक हे । लगभग ४० करोड़ लोग एगो देशीयभाषाके रूपमे स्पेनिश बोलहथ । ई ईसभ देसके मुख्य- आउ राजभाषा हे: [[स्पेन]], [[अर्जेण्टीना]], [[चिली]], [[बोलीविया]], [[पनामा]], [[परागुए]], [[पेरु]], [[मेक्सिको]], [[कोस्टा रीका]], [[एल सेलवाडोर]], [[क्यूबा]], [[उरुग्वे]], [[वेनेजुएला]], आदि । == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:स्पेनी भाषा|*]] [[श्रेणी:विश्वके भाषा]] [[श्रेणी:रोमान्स भाषा]] 6jyumxv1yaynyqms8styy66d4nnjpzj स्पेनीभाषा 0 16103 80530 70376 2026-10-02T11:01:54Z ऐक्टिवेटेड् 76 [[स्पेनी भाषा]] के पुनर्निर्देशित 80530 wikitext text/x-wiki #REDIRECT [[स्पेनी भाषा]] lpcg3ism1w7ubxq3e9zv6h4fbbytayi हिन्द-आर्य भाषा 0 16277 80549 70433 2026-10-02T11:15:51Z ऐक्टिवेटेड् 76 80549 wikitext text/x-wiki '''हिन्द-आर्य भाषा''' [[हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार|हिन्द-यूरोपीय भाषा]]के [[हिन्द-इरानीय भाषा|हिन्द-इरानीय]] शाखाके एगो उपशाखा हे, जेकरा 'भारतीय उपशाखो' कहल जाहे । ईसभमे से अधिकतर भाषा [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]]से जनमल हे । हिन्द-आर्यभाषामे [[आदिम-हिन्द-यूरोपीय भाषा|आदि-हिन्द-यूरोपीय भाषा]]के घ् आउ ध् आउ भ् नियन व्यञ्जन परिरक्षित हथ, जे अन्य शाखामे लुप्त हो गेल हे । ई समूहमे भाषा आव हे : [[संस्कृत]], [[मगही भाषा|मगही]], [[भोजपुरी भाषा|नेपाली]], [[मैथिली भाषा|मैथिली]], [[हिन्दी]], [[बङ्गला भाषा|बङ्गला]], [[असमिया भाषा|असमिया]], [[नेपाली भाषा|नेपाली]], [[कश्मीरी भाषा|कश्मीरी]], [[सिन्धी भाषा|सिन्धी]], [[पञ्जाबी भाषा|पञ्जाबी]], [[रोमानी भाषा|रोमानी]], [[गुजराती भाषा|गुजराती]], [[मराठी भाषा|मराठी]], [[उर्दू]] इत्यादि । == शाखा आउ उपशाखा == गत दू शताब्दीमे [[भाषाविज्ञान|भाषाबैज्ञानिक]] हिन्द-आर्यभाषाके कय प्रकारसे बर्गीकृत कैलन हे आउ ई व्यवस्था बेर-बेर बदलैत रहहे । आधुनिक कालमे निम्न व्यवस्था अधिकतर भाषाबैज्ञानिकला मान्य हे आउ मसिका (१९९१) आउ काउसेन (२००६) के प्रयास पर आधारित हे । ===दार्दी=== {{मुख्य|दार्दी भाषा}} कुछ उल्लेखनीय भाषा हे : :[[कश्मीरी भाषा|कश्मीरी]], [[पाशायी भाषा|पाशायी]], [[खोवार भाषा|खोवार]], [[शीना भाषा|शीना]], [[कोहिस्तानी भाषा|कोहिस्तानी]] । ई मुख्यरूपसे पच्छिमोत्तर भारत, उत्तरी [[पाकिस्तान]] आउ पूर्बोत्तरी [[अफगानिस्तान]]मे बोलल जाहे । ===पश्चिमोत्तर क्षेत्र=== ;[[डोगरी-काङ्गड़ी भाषा|डोगरी-काङ्गड़ी]] (पच्छिमी पहाड़ी) : [[डोगरी भाषा|डोगरी]], [[काङ्गड़ी भाषा|काङ्गड़ी]] ;[[पञ्जाबी भाषा|पञ्जाबी]] : [[दोआबी उपभाषा|दोआबी]], [[लहन्दा भाषा|लहन्दा]], [[सराइकी]], [[हिन्दको भाषा|हिन्दको]], [[माझी उपभाषा|माझी]], [[मालवायी उपभाषा|मालवायी]] ;[[सिन्धी भाषा|सिन्धी]] ===पश्चिम क्षेत्र=== ;राजस्थानी : [[मारवाड़ी भाषा|मारवाड़ी]], [[राजस्थानी भाषा|राजस्थान]], [[हड़ौती भाषा|हाड़ौती]] ;[[कच्छी भाषा|कच्छी]] ;[[गुजराती भाषा|गुजराती]] ;[[भीली भाषा|भील]] ;[[अहिराणी भाषा|अहिराणी]] ===मध्य क्षेत्र (हिन्दी)=== ;[[पच्छिमी हिन्दी]] : [[हिन्दुस्तानी भाषा|हिन्दुस्तानी]], [[हरियाणवी भाषा|हरियाणवी]], [[ब्रजभाषा|ब्रज]], [[बुन्देली भाषा|बुन्देली]], [[कन्नौजी भाषा|कन्नौजी]] ;[[पूरुबी हिन्दी]] : [[अवधी भाषा|अवधी]], [[फिजी हिन्दी]], [[बघेली भाषा|बघेली]], [[छत्तीसगढ़ी भाषा|छत्तीसगढ़ी]] [[डोमारी भाषा|डोमारी]]–[[रोमानी भाषा|रोमानी]] आउ [[पर्याभाषा|पर्या]] ऐतिहासिक रूपसे मध्यक्षेत्रके सदस्स हल किन्तु भौगोलिक दूरीके चलते ओखनीमे ढेर व्याकरणीय आउ शाब्दिक बदलाव आएल हे । ===पूर्वी क्षेत्र (मागधी)=== ईसभ भाषा [[मागधी प्राकृत]]से बिकसित भेल हे ।<ref>Ray, Tapas S. (2007). [https://books.google.com/books?id=OtCPAgAAQBAJ&pg=PA444 "Chapter Eleven: "Oriya"] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20170106043141/https://books.google.com/books?id=OtCPAgAAQBAJ&pg=PA444|date=६ जनवरी २०१७}}. In Jain, Danesh; Cardona, George. ''The Indo-Aryan Languages''. Routledge. p. 445. ISBN 978-1-135-79711-9.</ref> ;[[बिहारी भाषा|बिहारी]] : [[भोजपुरी भाषा|भोजपुरी]], [[मगही भाषा|मगही]], [[मैथिली भाषा|मैथिली]], [[कैरेबीय हिन्दुस्तानी]], [[अङ्गिका भाषा|अङ्गिका]], [[नागपुरी भाषा|नागपुरी]], [[खोरठा भाषा|खोरठा]], [[पञ्चपरगनिया भाषा|पञ्चपरगनिया]], [[कुड़मालि भाषा|कुरमालि]] ;[[थारु भाषा|थारु]] ;[[ओड़िआ भाषा|ओड़िआ]] ;[[हल्बी भाषा|हल्बी]] ;[[बङ्गला-असामिया भाषा|बङ्गला-असामिया]]: [[असमियाभाषा|असमिया]], [[बङ्गला भाषा|बङ्गला]], [[बिष्णुप्रिया मणिपुरी]], [[रोहिङ्ग्या भाषा|रोहिङ्ग्या]] ===दक्षिणक्षेत्र=== ईसभ भाषा [[महाराष्ट्री प्राकृत]]से बिकसित भेल हे । ;[[मराठी भाषा|मराठी]] ;[[कोङ्कनी भाषा|कोङ्कनी]] ;द्वीपीय हिन्द-आर्य: [[सिन्हलभाषा|सिन्हल]], [[मह्ल भाषा|मालदीवीय]] (मह्ल, दिवेही) ईसभ द्वीपीयभाषामे कुछ आपसी समानता हे जे मुख्यभूमिके हिन्द-आर्यभाषामे उपस्थित न हे । ===अवर्गीकृत=== निम्नलिखित भाषा एक-दुसरासे सम्बन्धित हे किन्तु हिन्द-आर्य परिबारमे एखनीके बर्ग अखनि श्रेणीकृत न हो पाएल हे : '''कुसवारी'''<ref>{{Glottolog|kusw1234|Kuswaric}}</ref> :[[दनुवार भाषा|दनुवार (राय)]], [[बोट भाषा|बोट]], [[दरई भाषा|दरई]] '''चिनाली-लाहुल लोहार'''<ref>{{Glottolog|chin1491|Chinali–Lahul Lohar}}</ref> :[[चिनाली भाषा|चिनाली]], [[लाहुल लोहार भाषा|लाहुल लोहार]] निम्नलिखित भाषासभपर अधिक अध्ययन न होएल हे आउ [[एथ्नोलाग्|एथ्नोलाग् १७]] मे एखनीके हिन्द-आर्यमे अबर्गीकृत लिखल गेल हे : *[[कञ्जरी भाषा|कञ्जरी]] (पञ्जाबी?), [[ओड भाषा|ओड]] (मराठी?), [[वागड़ी बूली भाषा|वागड़ी बूली]] (हक्कीपिक्की), [[आन्ध भाषा|आन्ध]], [[कुमहाली भाषा|कुमहाली]], [[सोन्हा भाषा|सोन्हा]] (शायद मध्यक्षेत्रके होवे) । :'''खोलोसी भाषा''' [[खोलोसी भाषा]] हालहे मे दक्खिन [[इरान]]के दु गाँओमे बोलल जाइल मिलली हे आउ ई स्पष्ट रूपसे एगो हिन्द-आर्य भाषा हे किन्तु अखनि बर्गीकृत न करल गेलीहे ।<ref>{{Cite web|url=http://bamling-research.de/data/2013-icil5/abstracts/Anonby_Mohebbi%20Bahmani_Shipwrecked%20and%20landlocked%20Discovery%20of%20an%20Indo-Aryan%20language%20in%20southwest%20Iran_ICIL5.pdf| archive-url = https://web.archive.org/web/20160815025848/http://bamling-research.de/data/2013-icil5/abstracts/Anonby_Mohebbi%20Bahmani_Shipwrecked%20and%20landlocked%20Discovery%20of%20an%20Indo-Aryan%20language%20in%20southwest%20Iran_ICIL5.pdf| archive-date = 15 August 2016 |format=PDF |title=Shipwrecked and landlocked : Discovery of an Indo-Aryan language in southwest Iran |website=Bamling-research.de |accessdate=2016-05-20}}</ref> == सम्बन्धित लेख == * [[भारतके भाषा]] * [[भारतके आधिकारिकभाषा]] * [[भाषा परिवारके सूची]] * [[मातृभाषा बक्ताके सङ्ख्याके अनुसार भाषाके सूची]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:हिन्द-आर्य भाषा]] [[श्रेणी:भाषापरिवार]] [[श्रेणी:हिन्द-इरानीय भाषा]] 4hxqq1hh3uvmnrmk7lopw30ze24aunm 80551 80549 2026-10-02T11:16:58Z ऐक्टिवेटेड् 76 80551 wikitext text/x-wiki '''हिन्द-आर्य भाषा''' [[हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार|हिन्द-यूरोपीय भाषा]]के [[हिन्द-इरानीय भाषा|हिन्द-इरानीय]] शाखाके एगो उपशाखा हे, जेकरा 'भारतीय उपशाखो' कहल जाहे । ईसभमे से अधिकतर भाषा [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]]से जनमल हे । हिन्द-आर्यभाषामे [[आदिम-हिन्द-यूरोपीय भाषा|आदि-हिन्द-यूरोपीय भाषा]]के घ् आउ ध् आउ भ् नियन व्यञ्जन परिरक्षित हथ, जे अन्य शाखामे लुप्त हो गेल हे । ई समूहमे भाषा आव हे : [[संस्कृत]], [[मगही भाषा|मगही]], [[भोजपुरी भाषा|नेपाली]], [[मैथिली भाषा|मैथिली]], [[हिन्दी]], [[बङ्गला भाषा|बङ्गला]], [[असमिया भाषा|असमिया]], [[नेपाली भाषा|नेपाली]], [[कश्मीरी भाषा|कश्मीरी]], [[सिन्धी भाषा|सिन्धी]], [[पञ्जाबी भाषा|पञ्जाबी]], [[रोमानी भाषा|रोमानी]], [[गुजराती भाषा|गुजराती]], [[मराठी भाषा|मराठी]], [[उर्दू]] इत्यादि । == शाखा आउ उपशाखा == गत दू शताब्दीमे [[भाषाविज्ञान|भाषाबैज्ञानिक]] हिन्द-आर्यभाषाके कय प्रकारसे बर्गीकृत कैलन हे आउ ई व्यवस्था बेर-बेर बदलैत रहहे । आधुनिक कालमे निम्न व्यवस्था अधिकतर भाषाबैज्ञानिकला मान्य हे आउ मसिका (१९९१) आउ काउसेन (२००६) के प्रयास पर आधारित हे । ===दार्दी=== {{मुख्य|दार्दी भाषा}} कुछ उल्लेखनीय भाषा हे : :[[कश्मीरी भाषा|कश्मीरी]], [[पाशायी भाषा|पाशायी]], [[खोवार भाषा|खोवार]], [[शीना भाषा|शीना]], [[कोहिस्तानी भाषा|कोहिस्तानी]] । ई मुख्यरूपसे पच्छिमोत्तर भारत, उत्तरी [[पाकिस्तान]] आउ पूर्बोत्तरी [[अफगानिस्तान]]मे बोलल जाहे । ===पश्चिमोत्तर क्षेत्र=== ;[[डोगरी-काङ्गड़ी भाषा|डोगरी-काङ्गड़ी]] (पच्छिमी पहाड़ी) : [[डोगरी भाषा|डोगरी]], [[काङ्गड़ी भाषा|काङ्गड़ी]] ;[[पञ्जाबी भाषा|पञ्जाबी]] : [[दोआबी उपभाषा|दोआबी]], [[लहन्दा भाषा|लहन्दा]], [[सराइकी]], [[हिन्दको भाषा|हिन्दको]], [[माझी उपभाषा|माझी]], [[मालवायी उपभाषा|मालवायी]] ;[[सिन्धी भाषा|सिन्धी]] ===पश्चिम क्षेत्र=== ;राजस्थानी : [[मारवाड़ी भाषा|मारवाड़ी]], [[राजस्थानी भाषा|राजस्थान]], [[हड़ौती भाषा|हाड़ौती]] ;[[कच्छी भाषा|कच्छी]] ;[[गुजराती भाषा|गुजराती]] ;[[भीली भाषा|भील]] ;[[अहिराणी भाषा|अहिराणी]] ===मध्य क्षेत्र (हिन्दी)=== ;[[पच्छिमी हिन्दी]] : [[हिन्दुस्तानी भाषा|हिन्दुस्तानी]], [[हरियाणवी भाषा|हरियाणवी]], [[ब्रजभाषा|ब्रज]], [[बुन्देली भाषा|बुन्देली]], [[कन्नौजी भाषा|कन्नौजी]] ;[[पूरुबी हिन्दी]] : [[अवधी भाषा|अवधी]], [[फिजी हिन्दी]], [[बघेली भाषा|बघेली]], [[छत्तीसगढ़ी भाषा|छत्तीसगढ़ी]] [[डोमारी भाषा|डोमारी]]–[[रोमानी भाषा|रोमानी]] आउ [[पर्याभाषा|पर्या]] ऐतिहासिक रूपसे मध्यक्षेत्रके सदस्स हल किन्तु भौगोलिक दूरीके चलते ओखनीमे ढेर व्याकरणीय आउ शाब्दिक बदलाव आएल हे । ===पूर्वी क्षेत्र (मागधी)=== ईसभ भाषा [[मागधी प्राकृत]]से बिकसित भेल हे ।<ref>Ray, Tapas S. (2007). [https://books.google.com/books?id=OtCPAgAAQBAJ&pg=PA444 "Chapter Eleven: "Oriya"] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20170106043141/https://books.google.com/books?id=OtCPAgAAQBAJ&pg=PA444|date=६ जनवरी २०१७}}. In Jain, Danesh; Cardona, George. ''The Indo-Aryan Languages''. Routledge. p. 445. ISBN 978-1-135-79711-9.</ref> ;[[बिहारी भाषा|बिहारी]] : [[भोजपुरी भाषा|भोजपुरी]], [[मगही भाषा|मगही]], [[मैथिली भाषा|मैथिली]], [[कैरेबीय हिन्दुस्तानी]], [[अङ्गिका भाषा|अङ्गिका]], [[नागपुरी भाषा|नागपुरी]], [[खोरठा भाषा|खोरठा]], [[पञ्चपरगनिया भाषा|पञ्चपरगनिया]], [[कुड़मालि भाषा|कुरमालि]] ;[[थारु भाषा|थारु]] ;[[ओड़िआ भाषा|ओड़िआ]] ;[[हल्बी भाषा|हल्बी]] ;[[बङ्गला-असामिया भाषा|बङ्गला-असामिया]]: [[असमियाभाषा|असमिया]], [[बङ्गला भाषा|बङ्गला]], [[बिष्णुप्रिया मणिपुरी]], [[रोहिङ्ग्या भाषा|रोहिङ्ग्या]] ===दक्षिणक्षेत्र=== ईसभ भाषा [[महाराष्ट्री प्राकृत]]से बिकसित भेल हे । ;[[मराठी भाषा|मराठी]] ;[[कोङ्कनी भाषा|कोङ्कनी]] ;द्वीपीय हिन्द-आर्य: [[सिन्हलभाषा|सिन्हल]], [[मह्ल भाषा|मालदीवीय]] (मह्ल, दिवेही) ईसभ द्वीपीयभाषामे कुछ आपसी समानता हे जे मुख्यभूमिके हिन्द-आर्यभाषामे उपस्थित न हे । ===अवर्गीकृत=== निम्नलिखित भाषा एक-दुसरासे सम्बन्धित हे किन्तु हिन्द-आर्य परिबारमे एखनीके बर्ग अखनि श्रेणीकृत न हो पाएल हे : '''कुसवारी'''<ref>{{Glottolog|kusw1234|Kuswaric}}</ref> :[[दनुवार भाषा|दनुवार (राय)]], [[बोट भाषा|बोट]], [[दरई भाषा|दरई]] '''चिनाली-लाहुल लोहार'''<ref>{{Glottolog|chin1491|Chinali–Lahul Lohar}}</ref> :[[चिनाली भाषा|चिनाली]], [[लाहुल लोहार भाषा|लाहुल लोहार]] निम्नलिखित भाषासभपर अधिक अध्ययन न होएल हे आउ [[एथ्नोलाग्|एथ्नोलाग् १७]] मे एखनीके हिन्द-आर्यमे अबर्गीकृत लिखल गेल हे : *[[कञ्जरी भाषा|कञ्जरी]] (पञ्जाबी?), [[ओड भाषा|ओड]] (मराठी?), [[वागड़ी बूली भाषा|वागड़ी बूली]] (हक्कीपिक्की), [[आन्ध भाषा|आन्ध]], [[कुमहाली भाषा|कुमहाली]], [[सोन्हा भाषा|सोन्हा]] (शायद मध्यक्षेत्रके होवे) । :'''खोलोसी भाषा''' [[खोलोसी भाषा]] हालहे मे दक्खिन [[इरान]]के दु गाँओमे बोलल जाइल मिलली हे आउ ई स्पष्ट रूपसे एगो हिन्द-आर्य भाषा हे किन्तु अखनि बर्गीकृत न करल गेलीहे ।<ref>{{Cite web|url=http://bamling-research.de/data/2013-icil5/abstracts/Anonby_Mohebbi%20Bahmani_Shipwrecked%20and%20landlocked%20Discovery%20of%20an%20Indo-Aryan%20language%20in%20southwest%20Iran_ICIL5.pdf| archive-url = https://web.archive.org/web/20160815025848/http://bamling-research.de/data/2013-icil5/abstracts/Anonby_Mohebbi%20Bahmani_Shipwrecked%20and%20landlocked%20Discovery%20of%20an%20Indo-Aryan%20language%20in%20southwest%20Iran_ICIL5.pdf| archive-date = 15 August 2016 |format=PDF |title=Shipwrecked and landlocked : Discovery of an Indo-Aryan language in southwest Iran |website=Bamling-research.de |accessdate=2016-05-20}}</ref> == सम्बन्धित लेख == * [[भारतके भाषा]] * [[भारतके आधिकारिकभाषा]] * [[भाषा परिवारके सूची]] * [[मातृभाषा बक्ताके सङ्ख्याके अनुसार भाषाके सूची]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:हिन्द-आर्य भाषा]] [[श्रेणी:भाषा परिवार]] [[श्रेणी:हिन्द-इरानीय भाषा]] ecji48uke07g77veohtaj5nuhrs566j हिन्द-इरानीय भाषा 0 16279 80576 70434 2026-10-02T11:37:26Z ऐक्टिवेटेड् 76 ऐक्टिवेटेड् पन्ना [[हिन्द-इरानीयभाषा]] के [[हिन्द-इरानीय भाषा]] पर स्थानान्तरित कैलन 70434 wikitext text/x-wiki {{Infobox language family |name = हिन्द-इरानीयभाषा |altname = आर्य |region = [[दक्खिन एसिया|दक्खिन]], [[मध्य एसिया|मध्य]], [[पच्छिम एसिया|पच्छिम]], [[दक्खिनपूरुब एसिया]] आउ [[काकेसस]] / कुल बक्ता = लगभग १.५ अरब १५ देसमे |familycolor = हिन्द-यूरोपीय |protoname = [[आदिम-हिन्द-इरानीभाषा|आदिम-हिन्द-इरानी]] |child1 = [[हिन्द-आर्यभाषा|हिन्द-आर्य]] |child2 = [[इरानीभाषा|इरानी]] |child3 = [[नुरिस्थानीभाषा|नुरिस्थानी]] |iso5 = iir |glotto = indo1320 |glottorefname = Indo-Iranian |map = Indo-European branches map.svg |mapcaption = यूरेसियाके हिन्द-यूरोपीयशाखाके लमसम बर्तमान बितरण: {{Legend|#000080|हिन्द-इरानी}} |mapsize = 300px }} '''हिन्द इरानी''' शाखा [[हिन्द-यूरोपीय भाषापरिबार]]के एगो शाखा हे । ई सातम बर्गके भीतर आवहे । एकर दू उपशाखा हे : * [[हिन्द-आर्यभाषा|हिन्द-आर्य]] उपशाखा : जे भाषा [[संस्कृत]]से जन्मल हे, जैसे [[मगहीभाषा|मगही]], [[हिन्दी]], [[पञ्जाबीभाषा|पञ्जाबी]], [[रोमानीभाषा|रोमानी]], [[मराठीभाषा|मराठी]], [[कश्मीरीभाषा|कश्मीरी]], आदि । * [[इरानीयभाषा|इरानी]] उपशाखा : ई उपशाखाके प्राचीनतम भाषा हे [[अवस्ताई]] ([[पारसीधरम|पारसीके]] धर्मभाषा) आउ प्राचीन फारसी । एकरामे से जनमल भाषा हे [[फारसीभाषा|फारसी]], [[बलोचीभाषा|बलोची]], [[दारी फारसी|दारी]], [[पश्तोभाषा|पश्तो]], [[कुर्दीभाषा|कुर्दी]] इत्यादि । ई परिवारमे सभ भाषाके सामान्य पूर्वजके [[आदिम-हिन्द-इरानीभाषा|आदिम-हिन्द-इरानी]] कहल जाहे - जेकरा सामान्य आर्यो कहल जाहे - जे लगभग तीसरा सहस्राब्दी ईसा पूर्बमे बोलल जाहल । आधुनिक हिन्द-इरानीभाषाके तीन शाखा [[हिन्द-आर्यभाषा|हिन्द-आर्य]], [[इरानीभाषा|इरानी]] आउ [[नुरिस्थानीभाषा|नुरिस्थानी]] हे । एगो चौथा स्वतन्त्र शाखा, [[दार्दिकभाषा|दार्दिकके]] पहिले रखल गेलहल, किन्तु हालहे मे सामान्य स्थानमे छात्रवृत्ति भारतीय-आर्यशाखाके पुरातन सदस्यके रूपमे दार्दिकभाषाके स्थापित करहे ।<ref name="jain-cardona-2007">{{Cite encyclopaedia| year = 2007 | title = The Indo-Aryan languages | editor1-first = Danesh | editor1-last = Jain | editor2-first = George | editor2-last = Cardona | page = 905 | quote ='Dardic' is a geographic cover term for those Northwest Indo-Aryan languages which ''[..]'' developed new characteristics different from the IA languages of the Indo-Gangetic plain. Although the Dardic and Nuristani (previously 'Kafiri') languages were formerly grouped together, Morgenstierne (1965) has established that the Dardic languages are Indo-Aryan, and that the Nuristani languages constitute a separate subgroup of Indo-Iranian. | isbn = 978-0415772945 | author-first = Elena | author-last = Bashir |author-link=Elena Bashir}}</ref> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची|30em}} [[बर्ग:हिन्द-इरानीयभाषा]] [[बर्ग:भाषापरिवार]] ai9ubf1ql5renanyaxuoyi393qzt319 80578 80576 2026-10-02T11:39:03Z ऐक्टिवेटेड् 76 80578 wikitext text/x-wiki {{Infobox language family |name = हिन्द-इरानीय भाषा |altname = आर्य |region = [[दक्खिन एसिया|दक्खिन]], [[मध्य एसिया|मध्य]], [[पच्छिम एसिया|पच्छिम]], [[दक्खिनपूरुब एसिया]] आउ [[काकेसस]] / कुल बक्ता = लगभग १.५ अरब १५ देसमे |familycolor = हिन्द-यूरोपीय |protoname = [[आदिम-हिन्द-इरानीय भाषा|आदिम-हिन्द-इरानी]] |child1 = [[हिन्द-आर्य भाषा|हिन्द-आर्य]] |child2 = [[इरानीय भाषा|इरानी]] |child3 = [[नुरिस्तानी भाषा|नुरिस्तानी]] |iso5 = iir |glotto = indo1320 |glottorefname = Indo-Iranian |map = Indo-European branches map.svg |mapcaption = यूरेसियाके हिन्द-यूरोपीयशाखाके लमसम बर्तमान बितरण: {{Legend|#000080|हिन्द-इरानी}} |mapsize = 300px }} '''हिन्द इरानी''' शाखा [[हिन्द-यूरोपीय भाषा परिबार]]के एगो शाखा हे । ई सातम बर्गके भीतर आवहे । एकर दू उपशाखा हे : * [[हिन्द-आर्य भाषा|हिन्द-आर्य]] उपशाखा : जे भाषा [[संस्कृत]]से जन्मल हे, जैसे [[मगही भाषा|मगही]], [[हिन्दी]], [[पञ्जाबी भाषा|पञ्जाबी]], [[रोमानी भाषा|रोमानी]], [[मराठी भाषा|मराठी]], [[कश्मीरी भाषा|कश्मीरी]], आदि । * [[इरानीय भाषा|इरानी]] उपशाखा : ई उपशाखाके प्राचीनतम भाषा हे [[अवस्ताई]] ([[पारसी धरम|पारसीके]] धर्मभाषा) आउ प्राचीन फारसी । एकरामे से जनमल भाषा हे [[फारसी भाषा|फारसी]], [[बलोची भाषा|बलोची]], [[दारी फारसी|दारी]], [[पश्तो भाषा|पश्तो]], [[कुर्दी भाषा|कुर्दी]] इत्यादि । ई परिवारमे सभ भाषाके सामान्य पूर्वजके [[आदिम-हिन्द-इरानीय भाषा|आदिम-हिन्द-इरानी]] कहल जाहे - जेकरा सामान्य आर्यो कहल जाहे - जे लगभग तीसरा सहस्राब्दी ईसा पूर्बमे बोलल जाहल । आधुनिक हिन्द-इरानी भाषाके तीन शाखा [[हिन्द-आर्य भाषा|हिन्द-आर्य]], [[इरानी भाषा|इरानी]] आउ [[नुरिस्तानी भाषा|नुरिस्तानी]] हे । एगो चौथा स्वतन्त्र शाखा, [[दार्दिक भाषा|दार्दिकके]] पहिले रखल गेलहल, किन्तु हालहे मे सामान्य स्थानमे छात्रवृत्ति भारतीय-आर्यशाखाके पुरातन सदस्यके रूपमे दार्दिक भाषाके स्थापित करहे ।<ref name="jain-cardona-2007">{{Cite encyclopaedia| year = 2007 | title = The Indo-Aryan languages | editor1-first = Danesh | editor1-last = Jain | editor2-first = George | editor2-last = Cardona | page = 905 | quote ='Dardic' is a geographic cover term for those Northwest Indo-Aryan languages which ''[..]'' developed new characteristics different from the IA languages of the Indo-Gangetic plain. Although the Dardic and Nuristani (previously 'Kafiri') languages were formerly grouped together, Morgenstierne (1965) has established that the Dardic languages are Indo-Aryan, and that the Nuristani languages constitute a separate subgroup of Indo-Iranian. | isbn = 978-0415772945 | author-first = Elena | author-last = Bashir |author-link=Elena Bashir}}</ref> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची|30em}} [[श्रेणी:हिन्द-इरानीय भाषा]] [[श्रेणी:भाषा परिवार]] 8namiyiqakvw2heoqzr5j7hr6leug03 हिन्द-यूरोपीय भाषापरिवार 0 16286 80580 70435 2026-10-02T11:46:27Z ऐक्टिवेटेड् 76 80580 wikitext text/x-wiki {{Infobox language family | name = हिन्द-यूरोपीय | region = विश्वव्यापी | familycolor = Indo-European | family = विश्वके प्राथमिक भाषा परिवारमे से एक | protoname = [[Indo-Hittite]](?) *[[आद्य-हिन्द-यूरोपीय भाषा|आद्य-हिन्द-यूरोपीय]] | child1 = [[Albanoid]]? ([[Albanian language|Albanian]] and [[Messapic language|Messapic]] {{Extinct}}) | child2 = [[Anatolian languages|Anatolian]] {{Extinct}} | child3 = [[अर्मेनीय भाषा|अर्मेनीय]] | child4 = [[बाल्टो-स्लावी भाषा|बाल्टो-स्लावी]] | child5 = [[कैलटिक भाषा|कैलटिक]] | child6 = [[जर्मैनिक भाषा|जर्मैनिक]] | child7 = [[Graeco-Phrygian]]? ([[Hellenic languages|Hellenic]] and [[Phrygian language|Phrygian]] {{Extinct}}) | child8 = [[हिन्द-इरानीय भाषा|हिन्द-इरानीय]] | child9 = [[इतालिक भाषा|इतालिक]] | child10 = [[Tocharian languages|Tocharian]] {{Extinct}} | child11 = अवर्गीकृत (बेकार प्रमाणित): [[Dacian language|Dacian]] {{Extinct}}<br> [[Thracian language|Thracian]] {{Extinct}}<br> [[Elymian language|Elymian]] {{Extinct}}<br>[[Illyrian language|Illyrian]] (Albanoid?) {{Extinct}}<br>[[Lusitanian language|Lusitanian]] {{Extinct}}<br> [[Paeonian language|Paeonian]] {{Extinct}}<br> [[Liburnian language|Liburnian]] {{Extinct}}<br> | child12 = | child13 = | child14 = | child15 = | child16 = | child17 = | child18 = | child19 = | child20 = | iso2 = ine | iso5 = ine | glotto = indo1319 | glottorefname = Indo-European | map = Indo-European Language Family Branches in Eurasia.png | mapcaption = यूरेसियामे हिन्द-यूरोपीयभाषाके वर्तमान वितरण: {{Legend|#00CCFE|[[Albanoid]] ([[Albanian language|Albanian]])}} {{Legend|#7F007F|[[अर्मेनीय भाषा|अर्मेनीय]]}} {{Legend|#3d6098|[[:en:Baltic languages|Baltic]] ([[East Baltic languages|East]])}} {{Legend|#007F00|[[स्लावी भाषा|स्लावी]]}}{{Legend|#FEA600|[[Celtic languages|Celtic]] ([[Brittonic languages|Brittonic]] and [[Goidelic languages|Goidelic]])}} {{Legend|#D30000|[[जर्मेनिक भाषा|जर्मैनिक]] ([[उत्तर जर्मेनिक भाषा|उत्तर]] आउ [[पश्चिम जर्मेनिक भाषा|पश्चिम]])}} {{Legend|#FEDC55|[[Hellenic languages|Hellenic]] ([[यूनानी भाषा|यूनानी]])}} {{Legend|#00007F|[[इरानीय भाषा|इरानीय]]}} {{Legend|#751eb4|[[हिन्द-आर्य भाषा|हिन्द-आर्य]]}} {{Legend|#587f00 |[[Nuristani languages|Nuristani]]}} {{Legend|#967F12|[[इतालिक भाषा|इतालिक]] ([[Romance languages|Romance]])}} {{Legend|#BEBEBE|अहिन्द-यूरोपीय भाषा}} बिन्दुयुक्त/धारीदार क्षेत्र ई दर्शावहे कि बहुभाषिकता कन्ने सामान्य हे (मानचित्रके पूरी प्रकार बड़ करेपर ई आउ स्पष्ट होतै) । | glottoname = | notes = {{Ublist|{{Extinct}} भाषा परिवारक ई शाखा विलुप्त होवेके सङ्केत दे हे |}} | ancestor = }} '''हिन्द-यूरोपीय''' (अथवा '''भारोपीय''') भाषा परिवार संसारके सबसे बड़का भाषा परिवार (माने सम्बन्धित भाषाके समूह) हे । हिन्द-यूरोपीय (वा '''भारोपीय''') भाषापरिवारमे बिश्वके सैकड़ोसभ भाषा आउ बोली सम्मिलित हे । आधुनिक हिन्द-यूरोपीय भाषामे से कुछ हे : [[मगही भाषा|मगही]], [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]], [[हिन्दी]], [[अङ्ग्रेजी भाषा|अङ्ग्रेजी]], [[जर्मन भाषा|जर्मन]], [[पुर्तगाली भाषा|पुर्तगाली]], [[स्पेनी भाषा|स्पैनिश]], [[फारसी भाषा|फारसी]], [[बङ्गला भाषा|बङ्गला]], [[पञ्जाबी भाषा|पजाबी]], [[रूसी भाषा|रूसी]], इत्यादि । ईसभ भाषा एकहे आदिमभाषासे निकलल हे, ओकरा '''[[आदिम-हिन्द-यूरोपीय भाषा]]''' के नाम देल गेलहे । ई संस्कृतसे बड्डी मिल-जुलहल, जैसेकि ऊ संस्कृतेके आदिम रूप हे । <ref>{{Cite web|url=http://www.ethnologue.com/show_family.asp?subid=2-16|title=Ethnologue report for Indo-European|publisher=Ethnologue }}</ref> == एकरो देखहु == * [[भाषा परिवार]] * [[आदिम-हिन्द-यूरोपीय भाषा]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:हिन्द-यूरोपीय भाषापरिवार|*]] [[श्रेणी:भाषा]] [[श्रेणी:भाषा परिवार]] 9hrxlwdbxobj7ny4mo6cqnh7q7zg258 शकिरा 0 18326 80517 80475 2026-10-02T10:53:47Z ऐक्टिवेटेड् 76 ऐक्टिवेटेड् पन्ना [[शाकिरा]] के [[शकिरा]] पर स्थानान्तरित कैलन 80475 wikitext text/x-wiki '''शकीरा इज़ाबेल मेबारक रिपोल''' (जनम २ फरवरी १९७७), जेकरा विश्वमे '''शकीरा''' के नामसे जानल जा हे, एक कोलम्बियाई गायिका, गीतकार आउ नर्तकी हथ । ऊ मुख्यतः [[स्पेनी भाषा|स्पेनिश]] आउ [[अङ्ग्रेजी भाषा|अङ्ग्रेजी]] भाषामे गीत गावहथ, आउ उनका ''लैटिन सङ्गीतके रानी'' के नामसे जानल जा हे ।<ref>https://www.forbes.com/sites/andreazarczynski/2023/04/30/as-latin-music-booms-grammy-museum-honors-shakira/</ref> == करियर == [[File:Shakira in concert.jpg|right|thumb|शकीरा]] शकीराके जनम कोलम्बियाके बैरनक्विला शहरमे भेल हल । ऊ अपन गायनके आरम्भ १९९० के दशकमे कैलन हल ।<ref>https://rpp.pe/famosos/celebridades/shakira-de-magia-a-el-dorado-la-historia-musical-de-la-colombiana-a-traves-de-su-discografia-noticia-1463886</ref> ऊ अपन बहुमुखी सङ्गीत शैली आउ बेली डान्स ला विशेष रूपसे जानल जा हथ ।<ref>https://www.latimes.com/archives/la-xpm-2006-aug-17-wk-shakira17-story.html</ref> ऊ "हिप्स डोन्ट लाई" ("Hips Don't Lie"), "ह्वेनेवर, ह्वेयरएवर" ("Whenever, Wherever") आउ २०१० फिफा विश्व कपके थीम गीत "वाका वाका" ("Waka Waka") नियन अनेक विश्वव्यापी हिट गीत गैलन ।<ref>https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/english/hollywood/news/birthday-special-waka-waka-to-hips-dont-lie-top-5-tracks-of-shakira/amp_articleshow/97547749.cms</ref> उनखर गीत आझो पूरा दुनियामे गूञ्जहे आउ ऊ विश्वके सबसे जादा रिकार्ड बिकेवाली सङ्गीतकारनमे से एक हथ ।<ref>https://www.rollingstone.com/music/music-latin/shakira-highest-grossing-tour-latin-artist-all-time-1235506789/</ref> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} diszbxyds4pbu9axtfk2qnz6ujc0amg 80522 80517 2026-10-02T10:58:23Z ऐक्टिवेटेड् 76 80522 wikitext text/x-wiki '''शकीरा इजाबेल मेबारक रिपोल''' (जनम २ फरवरी १९७७), जेकरा विश्वमे '''शकीरा''' के नामसे जानल जा हे, एक कोलम्बियाई गायिका, गीतकार आउ नर्तकी हथ । ऊ मुख्यतः [[स्पेनी भाषा|स्पेनिश]] आउ [[अङ्ग्रेजी भाषा|अङ्ग्रेजी]] भाषामे गीत गावहथ, आउ उनका ''लैटिन सङ्गीतके रानी'' के नामसे जानल जा हे ।<ref>https://www.forbes.com/sites/andreazarczynski/2023/04/30/as-latin-music-booms-grammy-museum-honors-shakira/</ref> == करियर == [[File:Shakira in concert.jpg|right|thumb|शकीरा]] शकीराके जनम कोलम्बियाके बैरनक्विला शहरमे भेल हल । ऊ अपन गायनके आरम्भ १९९० के दशकमे कैलन हल ।<ref>https://rpp.pe/famosos/celebridades/shakira-de-magia-a-el-dorado-la-historia-musical-de-la-colombiana-a-traves-de-su-discografia-noticia-1463886</ref> ऊ अपन बहुमुखी सङ्गीत शैली आउ बेली डान्स ला विशेष रूपसे जानल जा हथ ।<ref>https://www.latimes.com/archives/la-xpm-2006-aug-17-wk-shakira17-story.html</ref> ऊ "हिप्स डोण्ट लाई" ("Hips Don't Lie"), "ह्वेनेवर, ह्वेयरएवर" ("Whenever, Wherever") आउ २०१० फिफा विश्व कपके थीम गीत "वाका वाका" ("Waka Waka") नियन अनेक विश्वव्यापी हिट गीत गैलन ।<ref>https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/english/hollywood/news/birthday-special-waka-waka-to-hips-dont-lie-top-5-tracks-of-shakira/amp_articleshow/97547749.cms</ref> उनखर गीत आझो पूरा दुनियामे गूञ्जहे आउ ऊ विश्वके सबसे जादा रिकार्ड बिकेवाली सङ्गीतकारनमे से एक हथ ।<ref>https://www.rollingstone.com/music/music-latin/shakira-highest-grossing-tour-latin-artist-all-time-1235506789/</ref> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:जीवित व्यक्ति]] [[श्रेणी:१९७७ मे जन्म]] hel4fd6f80biwzku59ehh52ogjy1ub4 योग 0 18327 80513 80509 2026-10-02T07:01:45Z Pataliputra01 5 80513 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । == व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार == '''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज्‌ शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे । पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है - :१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय :२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय :३) युज् संयमने - चुरादिगणीय '''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल । '''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३) ''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है । ई प्रकार योगके अर्थ होलै - "योग साधनाके अपनावित मनके नियन्त्रित करके, संयमित करके, आत्माके परमात्मासे मिलन" । [[परिभाषा]] ऐसन होवेके चाही जे अव्याप्ति आउ अतिव्याप्ति दोषसे मुक्त होवे, योग शब्दके वाच्यार्थके ऐसन लक्षण बता सके जे प्रत्येक प्रसङ्गला उपयुक्त होवे आउ योगके इलावा कोनो अन्य वस्तुला उपयुक्त न होवे । [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ मानल जा है । ओकरामे योग शब्दके ढेर बार प्रयोग होलै हे । कखनियो अकेले आउ कखनियो सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग । वेदोत्तर कालमे [[भक्तियोग]] आउ [[हठयोग]] नामो प्रचलित हो गेलै हे । [[पतञ्जलि]] [[योगदर्शन]]मे 'क्रियायोग' शब्द देखेमे आव है । [[पाशुपत योग]] आउ माहेश्वर योग नियन शब्दोके प्रसङ्ग भेट है । ई सब स्थलमे योग शब्दके जे अर्थ है ऊ एक दोसरसे भिन्न है । [[गीता]]मे [[श्रीकृष्ण]] एक स्थल पर कहलथिन हे ''''योगः कर्मसु कौशलम्'''‌' (कर्ममे कुशलते योग है) । ई वाक्य योगके परिभाषा न है । कुछ विद्वानके ई मत है कि जीवात्मा आउ परमात्माके मिल जाएके योग कहल जा है । ई बातके स्वीकार करेमे ई बड़ आपत्ति खड़ा होव है कि [[बौद्धधर्म|बौद्धमतावलम्बियो]] जे परमात्माके सत्ताके स्वीकार न करथिन, योग शब्दके व्यवहार कर आउ योगके समर्थन कर हथिन । एही बात [[साङ्ख्य|साङ्ख्यवादियो]]ला कहल जा सक है जे ईश्वरके सत्ताके असिद्ध मान हथिन । [[पतञ्जलि]] [[योगसूत्र]]मे जे परिभाषा देलथिन हे 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः', चित्तके वृत्तिके निरोधके नाम योग है । ई वाक्यके दु अर्थ हो सक है - चित्तवृत्तिके निरोधके अवस्थाके नाम योग है या ई अवस्थाके लावेके उपायके योग कहल जा है । किन्तु ई परिभाषा पर ढेर विद्वानके आपत्ति है । उनकर कहलाम है जे चित्तवृत्तिके प्रवाहेके नाम चित्त है । पूर्ण निरोधके अर्थ होतै चित्तके अस्तित्वके पूर्ण लोप, चित्ताश्रय समस्त स्मृति आउ संस्कारके निःशेष हो जाएल । यदि ऐसन हो जाए त फिर समाधिसे उठल सम्भव न होतै । काहेकि ऊ अवस्थाके सहाराला कोनो संस्कार बचल न होतै, प्रारब्ध दग्ध हो गेल होतै । निरोध यदि सम्भव होवै त [[श्रीकृष्ण]]के ई वाक्यके का अर्थ होतै ? ''योगस्थः कुरु कर्माणि'', योगमे स्थित होके कर्म करथिन । विरुद्धावस्थामे कर्म हो न सकै आउ ऊ अवस्थामे कोनो संस्कार न पड़ सकै, स्मृति न बन सकै, जे समाधिसे उठेके बाद कर्म करेमे सहायक होवे । संक्षेपमे आशय ई है कि योगके शास्त्रीय स्वरूप, ओकर दार्शनिक आधार, के सम्यक्‌ रूपसे बुझल बड़ी सरल न है । संसारके मिथ्या मानेवाला [[अद्वैत वेदान्त|अद्वैतवादियो]] निदिध्याह्नके नामसे ओकर समर्थन कर है । अनीश्वरवादी साङ्ख्य विद्वानो ओकर अनुमोदन कर हथिन । [[बौद्धधर्म|बौद्धे]] न, [[इस्लाम|मुसलमान]] [[सूफी]] आउ [[ईसाई]] मिस्टिको कोनो न कोनो प्रकार अपन सम्प्रदायके मान्यता आउ दार्शनिक सिद्धान्तके साथे ओकर सामञ्जस्य स्थापित कर ले हथिन । ई सब विभिन्न दार्शनिक विचारधारामे कौन प्रकार ऐसन समन्वय हो सक है कि ऐसन धरातल मिल सके जेकरा पर योगके भित्ति खड़ा कैल जा सके, ई बड़ रोचक प्रश्न है किन्तु एकर विवेचनला बड़ी समय चाही । एहाँ ऊ प्रक्रिया पर तनीसुन विचार कर लेल आवश्यक है जेकर रूपरेखा हमनीके [[पतञ्जलि]]के सूत्रमे भेट है । तनीमनी शब्दभेदसे ई प्रक्रिया ऊ सब समुदायके मान्य है जे योगके अभ्यासके समर्थन कर हथिन । ===परिभाषा=== *(१) [[योगसूत्र|पातञ्जल योग दर्शन]]के अनुसार - '''योगश्चित्तवृतिनिरोधः''' (१/२) अर्थात् चित्तके वृत्तिके निरोधे योग है । *(२) [[साङ्ख्य दर्शन]]के अनुसार - '''पुरुषप्रकृत्योर्वियोगेपि योगइत्यमिधीयते ।''' अर्थात् पुरुष एवं प्रकृतिके पार्थक्यके स्थापित करके पुरुषके स्वरूपमे अवस्थित होइले योग है । *(३) [[विष्णुपुराण]]के अनुसार - '''योगः संयोग इत्युक्तः जीवात्म परमात्मने''' अर्थात् जीवात्मा एवं परमात्माके पूर्णतया मिलने योग है । *(४) [[भगवद्गीता]]के अनुसार - '''सिद्धासिद्धयो समोभूत्वा समत्वं योग उच्चते''' (२/४८) अर्थात् दुःख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत आउ उष्ण आदि द्वन्दमे सर्वत्र समभाव रखल योग है । *(५) [[भगवद्गीता]]के अनुसार - '''तस्माद्दयोगाययुज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्''' अर्थात् कर्त्तव्य कर्म बन्धक न होवे एहीसे निष्काम भावनासे अनुप्रेरित होके कर्त्तव्य करेके कौशल योग है । *(६) [[आचार्य हरिभद्र]]के अनुसार - '''मोक्खेण जोयणाओ सव्वो वि धम्म ववहारो जोगो''' अर्थात् [[मोक्ष]]से जोड़ेवाला सब व्यवहार योग है । *(७) [[बौद्धधर्म]]के अनुसार - '''कुशल चितैकग्गता योगः''' अर्थात् कुशल चित्तके एकाग्रता योग है । भारतीय दार्शनिक आउ धार्मिक परम्परामे "योग" शब्दके अलगे-अलगे विधिसे परिभाषित कैल गेलै हे । {| class="wikitable" |- ! मूल ग्रन्थ !! अनुमानित रचना-काल !! योगके परिभाषा |- |''[[मैत्रायणी उपनिषद]]'' | लगभग चतुर्थ शताब्दी ईसापूर्व | ''कत्वं प्राणमनसोरिन्द्रियाणां तथैव च ।'' <br>''सर्वभाव परित्यागो योग इत्यभिधीयते ॥'' -- मैत्रायणी उपनिषद् 6/25 <br>अर्थात् प्राण, मन एवं इन्द्रियके एक हो जाएल, एकाग्रावस्थाके प्राप्त कर लेल, बाह्म विषयसे विमुख होके इन्द्रियके मनमे आउ मन आत्मामे लग जाएल, प्राणके निष्चल हो जाएल योग है । |- | [[वैशेषिक सूत्र]] | लगभग चौथा शताब्दी ईसा पूर्व | ''तदनारम्भ आत्मस्ये मनसि शरीरस्य दुःखाभावः संयोगः ।'' -- वैशेषिक सूत्र ६/२/१६<br> अर्थात् मन आत्मामे स्थिर होवे पर ओकर (मनके) कार्यके अनारम्भ है, ऊ योग है । |- | ''[[कठोपनिषद]]'' | ईसा पूर्वके अन्तिम शताब्दी | ''यदा पञ्चावतिष्ठन्ते ज्ञानानि मनसा सह ।''<br>''बुद्धिश्च न विचेष्टते तामाहुः परमां गतिम् ॥''<br>''तां योगमिति मन्यन्ते स्थिरामिन्द्रियधारणाम्‌ ।''<br>''अप्रमत्तस्तदा भवति योगो हि प्रभवाप्ययौ ॥'' -- कठोपनिषद ६ / १०-११, नचिकेता आउ यमके बीच संवाद<br>जखनि मनके साथे समस्त ज्ञानेन्द्रिय भलीभाँति स्थिर हो जा है आउ बुद्धियोके कोनो चेष्टा न रहै तखनि ई अवस्थाके परमागति कहल जा है । ओही स्थिर इन्द्रिय-धारणाके योग कहल जा है । ऊ अवस्थामे साधक प्रमाद रहित होव है । काहेकि 'योग' एही पदार्थके उद्भव एवं लय (प्रभवाव्ययौ) दुनहीँ है । |- | ''[[भगवद्गीता]]'' | लगभग दोसर शताब्दी ईसा पूर्व | "सफलता आउ असफलता दुनोमे समभाव (एक समान) रहल । ऐसन समते योग कहला है ।" (२.४८) "कर्ममे कुशलते योग है ।" (२.५०) "ई जानथिन कि जेकरा योग कहल जा है, ऊ दुःखके संयोगसे वियोग (दुःखसे मुक्ति) है ।" (६.२३) |- | ''[[पतञ्जलि योगसूत्र]]'' | लगभग प्रारम्भिक शताब्दी ईस्वी | १.२. ''योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः'' – "चित्तके वृत्तिके रुक जाएले योग है ।" १.३. तखनि [[पुरुष (साङ्ख्य)|पुरुष]] |- | ''योगभाष्य'' | योगसूत्रके समाने | ''योगः समाधिः'' - "समाधिए योग है," जे [[एकाग्रता]] आउ ''निरुद्ध'' मने विषय-रहित [[समाधि]] (''असम्प्रज्ञात समाधि'') के सन्दर्भित कर है । |- | ''[[योगाचारभूमि-शास्त्र]] (श्रावकभूमि)'', एक [[महायान]] बौद्ध [[योगाचार]] ग्रन्थ | चौथा शताब्दी ईस्वी | | "योग चार प्रकारके है - श्रद्धा (विश्वास), आकांक्षा, दृढ़ता आउ उपाय ।" (२.१५२) |- | [[पाशुपत सूत्र]] पर कौण्डिन्यके ''पञ्चार्थभाष्य'' | चौथा शताब्दी ईस्वी | "ई प्रणालीमे जीवात्मा आउ ईश्वर (प्रभु) के मिलने योग है ।" (१.१.४३) |- | [[हरिभद्र सूरी]] द्वारा रचित एक [[जैन ग्रन्थ]] | छठा शताब्दी ईस्वी | "दृढ़ विश्वासके साथे योगीके स्वामि हमनीके सिद्धान्तमे योगके सम्यक् ज्ञानसे शुरू होवेवाला तीनो [सम्यक् ज्ञान, सम्यक् दर्शन आउ सम्यक् चारित्र] के संयोग (''सम्बन्धः'') के रूपमे परिभाषित कैलन हे काहेकि [एकरासे] [[मोक्ष]]के साथे जुड़ाव होव है.... सामान्य बोलचालमे ई [योग] शब्द एकर कारणके साथे [आत्माके] सम्पर्कोके दर्शाव है काहेकि कार्यला कारणके उपयोग सामान्य है ।" (२, ४) |- | ''[[लिङ्ग पुराण]]'' | ७मा–१०मा शताब्दी ईस्वी | " 'योग' शब्दसे तात्पर्य [[निर्वाण]]से है जे [[शिव]]के स्थिति है ।" (१.८.५ए) |- | [[आदि शङ्कराचार्य]]के ''[[ब्रह्मसूत्र]]-भाष्य'' | लगभग ८मा शताब्दी ईस्वी | "योगके ग्रन्थमे कहल गेलै है: 'योग वास्तविकता (तत्त्व) के जानेके साधन है' (''अथ तत्त्वदर्शनभ्युपायो योगः'')" (२.१.३) |- | ''मालिनीविजयोत्तर तन्त्र'', अद्वैत [[कश्मीर शैव दर्शन]]के प्राथमिक ग्रन्थमे से एक | ६ठा–१०मष शताब्दी ईस्वी | "एक सत्ताके दोसर सत्ताके साथ एक हो जाएल योग कहल जा है ।" (४.४-८) |- | [[शैव सिद्धान्त]]के विद्वान नारायणकण्ठके ''मृगेन्द्रतन्त्रवृत्ति'' | ६ठा–१०मा शताब्दी ईस्वी | "आत्म-नियन्त्रण (स्वामित्व) प्राप्त कैले योगी होएल है । योगी शब्दके अर्थ है 'ऊ जे अनिवार्य रूपसे अपन स्वरूपके अभिव्यक्ति... शिव-त्व (''शिवत्वम्'') से संयुक्त' होवे ।" |- | लक्ष्मणदेशिकेन्द्रके ''शारदातिलक'', एक [[शाक्त धर्म]] | ११मा शताब्दी ईस्वी | "योगके विशेषज्ञ कह हथ जीवात्माके [[आत्मा]] |- | ''[[योगबीज]]'', एक [[हठयोग]] ग्रन्थ | १४मा शताब्दी ईस्वी | "[[अपान]] आउ प्राण, अपन स्वयं के [[रज]] आउ वीर्य, सूर्य आउ चन्द्रमा, जीवात्मा आउ परमात्माके मिलन आउ एही प्रकार सब द्वन्द्वके मिलन योग कहला है ।" (८९) |} == योगके इतिहास == [[सञ्चिका:Shiva Pashupati.jpg|300px|thumb|right|मोहनजोदड़ो-हड़प्पासे प्राप्त मोहरमे योगमुद्रा]] {{मुख्य|योगके इतिहास}} [[वेद|वैदिक]] [[संहिता]]के अन्तर्गत तपस्वी ''तपस (संस्कृत)'' के बारेमे ([[ब्राह्मण|(कल ब्राह्मण)]]) प्राचीन कालसे वेदमे (१९०० से १५०० ईपू) उल्लेख भेट है जखनिकि तापसिक साधनाके समावेश प्राचीन वैदिक टिप्पणीमे प्राप्त है ।<ref name="Flood, p. 94">[21] ^फ्लड, पी. 94.</ref> ढेर मूर्ती जे सामान्य योग या [[समाधि]] मुद्राके प्रदर्शित कर है [[सिन्धुघाटी सभ्यता]] (३३००-१७०० ईपू) के स्थान पर प्राप्त होलै हे । पुरातत्त्वज्ञ ग्रेगरी पोस्सेह्लके अनुसार "ई सब मूर्ति योगके धार्मिक संस्कार" के योगसे सम्बन्धके सङ्केत कर है ।<ref>[22] ^ पोस्सेह्ल (2003), पीपी. 144-145</ref> यद्यपि ई बातके निर्णयात्मक सबूत न है तैयो अनेक पण्डितके रायमे सिन्धुघाटी सभ्यता आउ योग-[[ध्यान]]मे सम्बन्ध है ।<ref>देखथिन: * [[योनातान मार्क केनोयेर|जोनाथन मार्क केनोयेरएक]] मूर्तीके "योग मुद्रामे बैठल" ऐसन वर्णन कर है । [http://www.harappa.com/indus/33.html जोनाथन मार्क केनोयेर द्वारा लिखब, "अरौण्ड द इण्डस इन ९० स्लाइड्स". ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090323041459/http://www.harappa.com/indus/33.html|date=23 मार्च 2009}} * केरल वेर्नर लिख है " पुरातात्विक खोज हमनीके अनुमान करेके समर्थन कर है कि आर्य [[भारत]]के पूर्वके लोग योगशास्त्रके क्रियासे परिचित हलन". {{cite book|url=http://books.google.com/books?id=c6b3lH0-OekC&pg=PA103|title=Yoga and Indian Philosophy|last=Werner|first=Karel|date=1998|publisher=Motilal Banarsidass Publ.|isbn=9788120816091|page=103}}[23] * [[हेन्रीच जिम्मर]] एक मुद्रामे "योगमुद्रा" के वर्णन कर है । {{cite book|url=https://archive.org/details/mythssymbolsindi00zimm|title=Myths and Symbols in Indian Art and Civilization|last=Zimmer|first=Heinrich|publisher=Princeton University Press, New Ed edition|year=1972|ISBN=978-0691017785|page=[https://archive.org/details/mythssymbolsindi00zimm/page/n182 168]}} * [[थोमस म्क्विल्ले]] लिख हथिन कि "ई छौ रहस्यमय सिन्धुघाटी मुद्राके छविमे जे उत्कीर्ण मूर्ति है ओकरामे हठयोगके ''मूलबन्धासन '' नामके आसन या ओकरासे मिलित जुलित ''उत्कटासन '' या ''बद्धा कोनासना '' प्रदर्शित है । {{cite book|url=http://books.google.com/books?id=Vpqr1vNWQhUC&pg=PA219|title=The shape of ancient thought|last=McEvilley|first=Thomas|date=2002|publisher=Allworth Communications|isbn=9781581152036|pages=219-220}} * डॉ॰ फरजन्द मसीह, पञ्जाब विश्वविद्यालयके पुरातत्व विभागके अध्यक्ष हालेमे प्राप्त एगो मुद्राके वर्णन एक योगीके रूपके कह हथिन । [http://www.dawn.com/2007/05/08/nat7.htm अपूर्व वस्तुके खोज खण्डहरमे निहित खजाना दने सङ्केत कर है । ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20100215133034/http://www.dawn.com/2007/05/08/nat7.htm|date=15 फरवरी 2010}} * गेविन फ्लड, "पशुपति सील" जेकि अन्य सीलमे से एक है, के बारेमे विवाद करित लिख है कि ई रूप एक योग मुद्रामे बैठल व्यक्तिके स्पष्ट न लगै या ई एगो मानव आकृतिके प्रतिनिधित्व करित लग है । फ्लड, पीपी. 28-29 . * पशुपति सीलके बारेमे जियोफ्रे सामुएलके मानल है कि "वास्तवमे हमनीके ई स्पष्ट न है कि ई मूर्ति कोनो नारी या पुरुष केकर व्याख्या कर है".{{cite book|url=http://books.google.com/books?id=JAvrTGrbpf4C&pg=PA4|title=The Origins of Yoga and Tantra|last=Samuel|first=Geoffrey|date=2008|publisher=Cambridge University Press|isbn=9780521695343|page=4}}[26]</ref> [[ध्यान]]मे उच्च चैतन्यके प्राप्त करेके रीतिके विकास श्रमानिक परम्परा द्वारा एवं उपनिषद् के परम्परा द्वारा विकसित होलै हल ।<ref>[27] ^ फ्लड, पीपी. 94-95.</ref> बुद्धके पूर्व एवं प्राचीन ब्रह्मिनिक ग्रन्थमे [[ध्यान]]के बारेमे कोनो ठोस सबूत न भेट है । बुद्धके दु शिक्षकके ध्यानके लक्ष्यके प्रति कहल वाक्यके आधार पर वय्न्न ई तर्क कर है कि निर्गुण ध्यानके पद्धति ब्रह्मिन परम्परासे निकललै एहीसे उपनिषद् के [[सृष्टि]]के प्रति कहल कथनमे एवं ध्यानके लक्ष्यला कहल कथनमे समानता है ।<ref>[28] ^ अलेक्जेण्डर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 51.</ref> ई सम्भावित होहु सक है, नहियो.<ref>[29] ^ अलेक्जेण्डर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 56.</ref> उपनिषदमे [[ब्रह्माण्ड]] सम्बन्धी बयानके वैश्विक कथनमे कोनो [[ध्यान]]के रीतिके सम्भावनाके प्रति तर्क देइत कहल जा है कि [[नासदीय सूक्त]] कोनो [[ध्यान]]के पद्धति दने [[ऋग्वेद]]से पूर्वो इशारा कर है ।<ref>[30] ^ अलेक्जेण्डर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ बुद्धिस्ट मेडिटेशन । रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 51 ।</ref> [[हिन्दु]] ग्रन्थ आउ [[बौद्ध]] ग्रन्थ प्राचीन ग्रन्थमे से एक है जेकरामे ध्यान तकनीकके वर्णन प्राप्त होव है ।<ref>[31] ^ [[रिचर्ड गोम्ब्रिच]], ''थेरवाद बौद्ध धर्म: ए सोशल हिस्ट्री फ्रॉम एन्सिएण्ट बनारस टू माडर्न कोलम्बो ।'' रौतलेड्ग आउ केगन पॉल, 1988, पृष्ठ 44 ।</ref> ओखनी ध्यानके प्रथा आउ अवस्थाके वर्णन कर है जे बुद्धसे पहिले अस्तित्वमे हलै आउ साथे ऊ सब प्रथाके वर्णन कर है जे पहिले बौद्धधर्मके भीतरे विकसित होलै ।<ref>[32] ^ अलेक्जेण्डर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ बुद्धिस्ट मेडिटेशन । रौटलेड्ज 2007, पृष्ट 50 ।</ref> हिन्दु वाङ्मयमे "योग" शब्द पहिले कथा उपनिषदमे प्रस्तुत होलै जने ज्ञानेन्द्रियके नियन्त्रण आउ मानसिक गतिविधिके निवारणके अर्थमे प्रयुक्त होलै हे जे उच्चतम स्थिति प्रदान करेवाला मानल गेलै हे ।<ref>[33] ^ फ्लड, पी. 95 । विद्वान कथा उपनिषदके पूर्व बौद्धत्वके साथे सूचीबद्ध न करथिन । उदाहरणला हेल्मथ वान ग्लासेनप्प देख सक हथिन, 1950 कार्यवाहीके "अकादेमी देर विस्सेन्स्चाफ्तेँ," लितेरातुर अण्ड से [http://www.accesstoinsight.org/lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html http://www.accesstoinsight.org/ lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html.] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130204142029/http://www.accesstoinsight.org/lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html |date=4 फरवरी 2013 }} कुछ लोग कह हथिन कि ई पद बौद्ध है, उदाहरण हाजिम नाकामुरा के ए हिस्ट्री ऑफ एअर्ली वेदान्त फिलोसोफी, फिलोसोफी ईस्ट अण्ड वेस्ट, वोल. 37, अङ्क. 3 (जुलाई 1987) जेकरा अरविन्द शर्मा समीक्षा करलथिन हे, पीपी 325-331 । पाली शब्द "योग" के प्रयोग करेके एक व्यापक जाँचला पूर्व बौद्ध ग्रन्थमे देखथिन, थोमस विलियम र्ह्य्स डेविड, विलियम स्टेड, ''पाली-इङ्ग्लिश शब्दकोष'' मोतीलाल बनारसीदास पुब्ल द्वारा डालथिन, 1993, पृष्ठ 558: [http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&amp;pg=RA1-PA558&amp;dq=yoga+pali+term&amp;lr=#PRA1-PA558,M1 http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&amp;pg=RA1-PA558&amp;dq=yoga+pali+ term&amp;ir = # PRA1 lr-PA558, M1.] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20150322083352/http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&pg=RA1-PA558&dq=yoga+pali+term&lr=#PRA1-PA558,M1 |date=22 मार्च 2015 }} धम्मपदामे "आध्यात्मिक अभ्यास" के अर्थमे ई शब्दके प्रयोगला देखथिन गिल फ्रोन्स्दल, दी धम्मपदा, शम्भाला, 2005, पृष्ठ 56, 130 देखथिन ।</ref> महत्वपूर्ण ग्रन्थ जे योगके अवधारणासे सम्बन्धित है ऊ मध्यकालीन [[उपनिषद्]], [[महाभारत]], [[भगवद्गीता]] (२०० ईपू) एवं [[पतञ्जलि योगसूत्र]] (४०० ईपू) है । ==== पतञ्जलिके योगसूत्र ==== {{मुख्य|योगसूत्र}} ==योगके प्रसिद्ध ग्रन्थ== {| class="wikitable" |- ! ग्रन्थ !! रचयिता !! रचनाकाल/टिप्पणी |- | '''[[पतञ्जलि योगसूत्र|योगसूत्र]]''' || [[पतञ्जलि]] || ४०० ई पूर्व |- | '''[[योगभाष्य]]''' || [[वेदव्यास]] || द्वितीय शताब्दी |- | '''[[तत्त्ववैशारदी]]''' || [[वाचस्पति मिश्र]] || ८४१ ई |- |'''[[योगयाज्ञवल्क्य]]''' || [[याज्ञवल्क्य]] || सबसे पुरान संस्कृत पाण्डुलिपि ९मा-१०मष शताब्दीके है । |- | '''[[भोजवृत्ति]]''' || [[राजा भोज]] || ११मा शताब्दी |- | '''[[गोरक्षशतक]]''' || [[गुरु गोरख नाथ]] || ११मा-१२मा शताब्दी |- | '''[[योगचूडामण्युपनिषद]]''' || - || १४मा-१५मा शताब्दी (रिचर्ड रोसेन के अनुसार) |- | '''[[योगवार्तिक]]''' || [[विज्ञानभिक्षु]] || १६मा शताब्दी |- | '''[[योगसारसङ्ग्रह]]''' || विज्ञानभिक्षु || १६मा शताब्दी |- | '''[[हठयोगप्रदीपिका]]''' || [[स्वात्माराम|स्वामी स्वात्माराम]] || १५मा-१६मा शताब्दी |- | '''[[सूत्रवृत्ति]]''' || गणेशभावा || १७मा शताब्दी |- | '''[[योगसूत्रवृत्ति]]''' || [[नागेश भट्ट]]<ref>[https://kymyogavaisharadi.org/display/bhashya/vritti/devanagari नागोजीभट्ट कृत वृत्ति]</ref> || १७मा शताब्दी |- | '''[[शिवसंहिता]]''' || ऋषी आर्यवीर रुद्र || २५०० ई पूर्व |- | '''[[घेरण्डसंहिता]]''' || [[घेरण्ड मुनि]]|| १५०० ई पूर्व |- | '''[[हठरत्नावली]] || श्रीनिवास भट्ट || १७मा शताब्दी |- | '''[[मणिप्रभा]]''' || रामानन्द यति|| १८मा शताब्दी |- | '''[[सूत्रार्थप्रबोधिनी]]''' || नारायण तीर्थ || १८मा शताब्दी |- | '''[[जोगप्रदीपिका]]''' || जयतराम || १७३७ ई <br> ई हिन्दी, ब्रजभाषा, खड़ीबोलीके मिललजुलल भाषामे रचित है<br> आउ शब्दावली संस्कृतके अत्यन्त निकट है । |- | '''सचित्र योगसाधन''' || शिवमुनि || २०मा शताब्दी ; हिन्दीमे लिखित<ref>{{Cite web |url=https://www.shivmunisamaj.com/list-of-books-by-shivmuni |title=शिवमुनि महाराज का अमर साहित्य |access-date=31 दिसम्बर 2022 |archive-date=31 दिसम्बर 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20221231051935/https://www.shivmunisamaj.com/list-of-books-by-shivmuni |url-status=dead }}</ref> |- | '''[[योगदर्शनम्]]''' || [[स्वामी सत्यपति परिव्राजक]] || २१मा शताब्दी |} ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == बाहरी कड़ी == {{विकिसूक्ति|योग}} * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि) *[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे) {{योग}} {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] 9cprosjmulgosx5qwxuqf8ufgt5lwzy 80514 80513 2026-10-02T07:09:35Z Pataliputra01 5 80514 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । == व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार == '''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज्‌ शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे । पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है - :१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय :२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय :३) युज् संयमने - चुरादिगणीय '''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल । '''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३) ''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है । ई प्रकार योगके अर्थ होलै - "योग साधनाके अपनावित मनके नियन्त्रित करके, संयमित करके, आत्माके परमात्मासे मिलन" । [[परिभाषा]] ऐसन होवेके चाही जे अव्याप्ति आउ अतिव्याप्ति दोषसे मुक्त होवे, योग शब्दके वाच्यार्थके ऐसन लक्षण बता सके जे प्रत्येक प्रसङ्गला उपयुक्त होवे आउ योगके इलावा कोनो अन्य वस्तुला उपयुक्त न होवे । [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ मानल जा है । ओकरामे योग शब्दके ढेर बार प्रयोग होलै हे । कखनियो अकेले आउ कखनियो सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग । वेदोत्तर कालमे [[भक्तियोग]] आउ [[हठयोग]] नामो प्रचलित हो गेलै हे । [[पतञ्जलि]] [[योगदर्शन]]मे 'क्रियायोग' शब्द देखेमे आव है । [[पाशुपत योग]] आउ माहेश्वर योग नियन शब्दोके प्रसङ्ग भेट है । ई सब स्थलमे योग शब्दके जे अर्थ है ऊ एक दोसरसे भिन्न है । [[गीता]]मे [[श्रीकृष्ण]] एक स्थल पर कहलथिन हे ''''योगः कर्मसु कौशलम्'''‌' (कर्ममे कुशलते योग है) । ई वाक्य योगके परिभाषा न है । कुछ विद्वानके ई मत है कि जीवात्मा आउ परमात्माके मिल जाएके योग कहल जा है । ई बातके स्वीकार करेमे ई बड़ आपत्ति खड़ा होव है कि [[बौद्धधर्म|बौद्धमतावलम्बियो]] जे परमात्माके सत्ताके स्वीकार न करथिन, योग शब्दके व्यवहार कर आउ योगके समर्थन कर हथिन । एही बात [[साङ्ख्य|साङ्ख्यवादियो]]ला कहल जा सक है जे ईश्वरके सत्ताके असिद्ध मान हथिन । [[पतञ्जलि]] [[योगसूत्र]]मे जे परिभाषा देलथिन हे 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः', चित्तके वृत्तिके निरोधके नाम योग है । ई वाक्यके दु अर्थ हो सक है - चित्तवृत्तिके निरोधके अवस्थाके नाम योग है या ई अवस्थाके लावेके उपायके योग कहल जा है । किन्तु ई परिभाषा पर ढेर विद्वानके आपत्ति है । उनकर कहलाम है जे चित्तवृत्तिके प्रवाहेके नाम चित्त है । पूर्ण निरोधके अर्थ होतै चित्तके अस्तित्वके पूर्ण लोप, चित्ताश्रय समस्त स्मृति आउ संस्कारके निःशेष हो जाएल । यदि ऐसन हो जाए त फिर समाधिसे उठल सम्भव न होतै । काहेकि ऊ अवस्थाके सहाराला कोनो संस्कार बचल न होतै, प्रारब्ध दग्ध हो गेल होतै । निरोध यदि सम्भव होवै त [[श्रीकृष्ण]]के ई वाक्यके का अर्थ होतै ? ''योगस्थः कुरु कर्माणि'', योगमे स्थित होके कर्म करथिन । विरुद्धावस्थामे कर्म हो न सकै आउ ऊ अवस्थामे कोनो संस्कार न पड़ सकै, स्मृति न बन सकै, जे समाधिसे उठेके बाद कर्म करेमे सहायक होवे । संक्षेपमे आशय ई है कि योगके शास्त्रीय स्वरूप, ओकर दार्शनिक आधार, के सम्यक्‌ रूपसे बुझल बड़ी सरल न है । संसारके मिथ्या मानेवाला [[अद्वैत वेदान्त|अद्वैतवादियो]] निदिध्याह्नके नामसे ओकर समर्थन कर है । अनीश्वरवादी साङ्ख्य विद्वानो ओकर अनुमोदन कर हथिन । [[बौद्धधर्म|बौद्धे]] न, [[इस्लाम|मुसलमान]] [[सूफी]] आउ [[ईसाई]] मिस्टिको कोनो न कोनो प्रकार अपन सम्प्रदायके मान्यता आउ दार्शनिक सिद्धान्तके साथे ओकर सामञ्जस्य स्थापित कर ले हथिन । ई सब विभिन्न दार्शनिक विचारधारामे कौन प्रकार ऐसन समन्वय हो सक है कि ऐसन धरातल मिल सके जेकरा पर योगके भित्ति खड़ा कैल जा सके, ई बड़ रोचक प्रश्न है किन्तु एकर विवेचनला बड़ी समय चाही । एहाँ ऊ प्रक्रिया पर तनीसुन विचार कर लेल आवश्यक है जेकर रूपरेखा हमनीके [[पतञ्जलि]]के सूत्रमे भेट है । तनीमनी शब्दभेदसे ई प्रक्रिया ऊ सब समुदायके मान्य है जे योगके अभ्यासके समर्थन कर हथिन । ===परिभाषा=== *(१) [[योगसूत्र|पातञ्जल योग दर्शन]]के अनुसार - '''योगश्चित्तवृतिनिरोधः''' (१/२) अर्थात् चित्तके वृत्तिके निरोधे योग है । *(२) [[साङ्ख्य दर्शन]]के अनुसार - '''पुरुषप्रकृत्योर्वियोगेपि योगइत्यमिधीयते ।''' अर्थात् पुरुष एवं प्रकृतिके पार्थक्यके स्थापित करके पुरुषके स्वरूपमे अवस्थित होइले योग है । *(३) [[विष्णुपुराण]]के अनुसार - '''योगः संयोग इत्युक्तः जीवात्म परमात्मने''' अर्थात् जीवात्मा एवं परमात्माके पूर्णतया मिलने योग है । *(४) [[भगवद्गीता]]के अनुसार - '''सिद्धासिद्धयो समोभूत्वा समत्वं योग उच्चते''' (२/४८) अर्थात् दुःख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत आउ उष्ण आदि द्वन्दमे सर्वत्र समभाव रखल योग है । *(५) [[भगवद्गीता]]के अनुसार - '''तस्माद्दयोगाययुज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्''' अर्थात् कर्त्तव्य कर्म बन्धक न होवे एहीसे निष्काम भावनासे अनुप्रेरित होके कर्त्तव्य करेके कौशल योग है । *(६) [[आचार्य हरिभद्र]]के अनुसार - '''मोक्खेण जोयणाओ सव्वो वि धम्म ववहारो जोगो''' अर्थात् [[मोक्ष]]से जोड़ेवाला सब व्यवहार योग है । *(७) [[बौद्धधर्म]]के अनुसार - '''कुशल चितैकग्गता योगः''' अर्थात् कुशल चित्तके एकाग्रता योग है । भारतीय दार्शनिक आउ धार्मिक परम्परामे "योग" शब्दके अलगे-अलगे विधिसे परिभाषित कैल गेलै हे । {| class="wikitable" |- ! मूल ग्रन्थ !! अनुमानित रचना-काल !! योगके परिभाषा |- |''[[मैत्रायणी उपनिषद]]'' | लगभग चतुर्थ शताब्दी ईसापूर्व | ''कत्वं प्राणमनसोरिन्द्रियाणां तथैव च ।'' <br>''सर्वभाव परित्यागो योग इत्यभिधीयते ॥'' -- मैत्रायणी उपनिषद् 6/25 <br>अर्थात् प्राण, मन एवं इन्द्रियके एक हो जाएल, एकाग्रावस्थाके प्राप्त कर लेल, बाह्म विषयसे विमुख होके इन्द्रियके मनमे आउ मन आत्मामे लग जाएल, प्राणके निष्चल हो जाएल योग है । |- | [[वैशेषिक सूत्र]] | लगभग चौथा शताब्दी ईसा पूर्व | ''तदनारम्भ आत्मस्ये मनसि शरीरस्य दुःखाभावः संयोगः ।'' -- वैशेषिक सूत्र ६/२/१६<br> अर्थात् मन आत्मामे स्थिर होवे पर ओकर (मनके) कार्यके अनारम्भ है, ऊ योग है । |- | ''[[कठोपनिषद]]'' | ईसा पूर्वके अन्तिम शताब्दी | ''यदा पञ्चावतिष्ठन्ते ज्ञानानि मनसा सह ।''<br>''बुद्धिश्च न विचेष्टते तामाहुः परमां गतिम् ॥''<br>''तां योगमिति मन्यन्ते स्थिरामिन्द्रियधारणाम्‌ ।''<br>''अप्रमत्तस्तदा भवति योगो हि प्रभवाप्ययौ ॥'' -- कठोपनिषद ६ / १०-११, नचिकेता आउ यमके बीच संवाद<br>जखनि मनके साथे समस्त ज्ञानेन्द्रिय भलीभाँति स्थिर हो जा है आउ बुद्धियोके कोनो चेष्टा न रहै तखनि ई अवस्थाके परमागति कहल जा है । ओही स्थिर इन्द्रिय-धारणाके योग कहल जा है । ऊ अवस्थामे साधक प्रमाद रहित होव है । काहेकि 'योग' एही पदार्थके उद्भव एवं लय (प्रभवाव्ययौ) दुनहीँ है । |- | ''[[भगवद्गीता]]'' | लगभग दोसर शताब्दी ईसा पूर्व | "सफलता आउ असफलता दुनोमे समभाव (एक समान) रहल । ऐसन समते योग कहला है ।" (२.४८) "कर्ममे कुशलते योग है ।" (२.५०) "ई जानथिन कि जेकरा योग कहल जा है, ऊ दुःखके संयोगसे वियोग (दुःखसे मुक्ति) है ।" (६.२३) |- | ''[[पतञ्जलि योगसूत्र]]'' | लगभग प्रारम्भिक शताब्दी ईस्वी | १.२. ''योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः'' – "चित्तके वृत्तिके रुक जाएले योग है ।" १.३. तखनि [[पुरुष (साङ्ख्य)|पुरुष]] |- | ''योगभाष्य'' | योगसूत्रके समाने | ''योगः समाधिः'' - "समाधिए योग है," जे [[एकाग्रता]] आउ ''निरुद्ध'' मने विषय-रहित [[समाधि]] (''असम्प्रज्ञात समाधि'') के सन्दर्भित कर है । |- | ''[[योगाचारभूमि-शास्त्र]] (श्रावकभूमि)'', एक [[महायान]] बौद्ध [[योगाचार]] ग्रन्थ | चौथा शताब्दी ईस्वी | | "योग चार प्रकारके है - श्रद्धा (विश्वास), आकांक्षा, दृढ़ता आउ उपाय ।" (२.१५२) |- | [[पाशुपत सूत्र]] पर कौण्डिन्यके ''पञ्चार्थभाष्य'' | चौथा शताब्दी ईस्वी | "ई प्रणालीमे जीवात्मा आउ ईश्वर (प्रभु) के मिलने योग है ।" (१.१.४३) |- | [[हरिभद्र सूरी]] द्वारा रचित एक [[जैन ग्रन्थ]] | छठा शताब्दी ईस्वी | "दृढ़ विश्वासके साथे योगीके स्वामि हमनीके सिद्धान्तमे योगके सम्यक् ज्ञानसे शुरू होवेवाला तीनो [सम्यक् ज्ञान, सम्यक् दर्शन आउ सम्यक् चारित्र] के संयोग (''सम्बन्धः'') के रूपमे परिभाषित कैलन हे काहेकि [एकरासे] [[मोक्ष]]के साथे जुड़ाव होव है.... सामान्य बोलचालमे ई [योग] शब्द एकर कारणके साथे [आत्माके] सम्पर्कोके दर्शाव है काहेकि कार्यला कारणके उपयोग सामान्य है ।" (२, ४) |- | ''[[लिङ्ग पुराण]]'' | ७मा–१०मा शताब्दी ईस्वी | " 'योग' शब्दसे तात्पर्य [[निर्वाण]]से है जे [[शिव]]के स्थिति है ।" (१.८.५ए) |- | [[आदि शङ्कराचार्य]]के ''[[ब्रह्मसूत्र]]-भाष्य'' | लगभग ८मा शताब्दी ईस्वी | "योगके ग्रन्थमे कहल गेलै है: 'योग वास्तविकता (तत्त्व) के जानेके साधन है' (''अथ तत्त्वदर्शनभ्युपायो योगः'')" (२.१.३) |- | ''मालिनीविजयोत्तर तन्त्र'', अद्वैत [[कश्मीर शैव दर्शन]]के प्राथमिक ग्रन्थमे से एक | ६ठा–१०मष शताब्दी ईस्वी | "एक सत्ताके दोसर सत्ताके साथ एक हो जाएल योग कहल जा है ।" (४.४-८) |- | [[शैव सिद्धान्त]]के विद्वान नारायणकण्ठके ''मृगेन्द्रतन्त्रवृत्ति'' | ६ठा–१०मा शताब्दी ईस्वी | "आत्म-नियन्त्रण (स्वामित्व) प्राप्त कैले योगी होएल है । योगी शब्दके अर्थ है 'ऊ जे अनिवार्य रूपसे अपन स्वरूपके अभिव्यक्ति... शिव-त्व (''शिवत्वम्'') से संयुक्त' होवे ।" |- | लक्ष्मणदेशिकेन्द्रके ''शारदातिलक'', एक [[शाक्त धर्म]] | ११मा शताब्दी ईस्वी | "योगके विशेषज्ञ कह हथ जीवात्माके [[आत्मा]] |- | ''[[योगबीज]]'', एक [[हठयोग]] ग्रन्थ | १४मा शताब्दी ईस्वी | "[[अपान]] आउ प्राण, अपन स्वयं के [[रज]] आउ वीर्य, सूर्य आउ चन्द्रमा, जीवात्मा आउ परमात्माके मिलन आउ एही प्रकार सब द्वन्द्वके मिलन योग कहला है ।" (८९) |} == योगके इतिहास == [[सञ्चिका:Shiva Pashupati.jpg|300px|thumb|right|मोहनजोदड़ो-हड़प्पासे प्राप्त मोहरमे योगमुद्रा]] {{मुख्य|योगके इतिहास}} [[वेद|वैदिक]] [[संहिता]]के अन्तर्गत तपस्वी ''तपस (संस्कृत)'' के बारेमे ([[ब्राह्मण|(कल ब्राह्मण)]]) प्राचीन कालसे वेदमे (१९०० से १५०० ईपू) उल्लेख भेट है जखनिकि तापसिक साधनाके समावेश प्राचीन वैदिक टिप्पणीमे प्राप्त है ।<ref name="Flood, p. 94">[21] ^फ्लड, पी. 94.</ref> ढेर मूर्ती जे सामान्य योग या [[समाधि]] मुद्राके प्रदर्शित कर है [[सिन्धुघाटी सभ्यता]] (३३००-१७०० ईपू) के स्थान पर प्राप्त होलै हे । पुरातत्त्वज्ञ ग्रेगरी पोस्सेह्लके अनुसार "ई सब मूर्ति योगके धार्मिक संस्कार" के योगसे सम्बन्धके सङ्केत कर है ।<ref>[22] ^ पोस्सेह्ल (2003), पीपी. 144-145</ref> यद्यपि ई बातके निर्णयात्मक सबूत न है तैयो अनेक पण्डितके रायमे सिन्धुघाटी सभ्यता आउ योग-[[ध्यान]]मे सम्बन्ध है ।<ref>देखथिन: * [[योनातान मार्क केनोयेर|जोनाथन मार्क केनोयेरएक]] मूर्तीके "योग मुद्रामे बैठल" ऐसन वर्णन कर है । [http://www.harappa.com/indus/33.html जोनाथन मार्क केनोयेर द्वारा लिखब, "अरौण्ड द इण्डस इन ९० स्लाइड्स". ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090323041459/http://www.harappa.com/indus/33.html|date=23 मार्च 2009}} * केरल वेर्नर लिख है " पुरातात्विक खोज हमनीके अनुमान करेके समर्थन कर है कि आर्य [[भारत]]के पूर्वके लोग योगशास्त्रके क्रियासे परिचित हलन". {{cite book|url=http://books.google.com/books?id=c6b3lH0-OekC&pg=PA103|title=Yoga and Indian Philosophy|last=Werner|first=Karel|date=1998|publisher=Motilal Banarsidass Publ.|isbn=9788120816091|page=103}}[23] * [[हेन्रीच जिम्मर]] एक मुद्रामे "योगमुद्रा" के वर्णन कर है । {{cite book|url=https://archive.org/details/mythssymbolsindi00zimm|title=Myths and Symbols in Indian Art and Civilization|last=Zimmer|first=Heinrich|publisher=Princeton University Press, New Ed edition|year=1972|ISBN=978-0691017785|page=[https://archive.org/details/mythssymbolsindi00zimm/page/n182 168]}} * [[थोमस म्क्विल्ले]] लिख हथिन कि "ई छौ रहस्यमय सिन्धुघाटी मुद्राके छविमे जे उत्कीर्ण मूर्ति है ओकरामे हठयोगके ''मूलबन्धासन '' नामके आसन या ओकरासे मिलित जुलित ''उत्कटासन '' या ''बद्धा कोनासना '' प्रदर्शित है । {{cite book|url=http://books.google.com/books?id=Vpqr1vNWQhUC&pg=PA219|title=The shape of ancient thought|last=McEvilley|first=Thomas|date=2002|publisher=Allworth Communications|isbn=9781581152036|pages=219-220}} * डॉ॰ फरजन्द मसीह, पञ्जाब विश्वविद्यालयके पुरातत्व विभागके अध्यक्ष हालेमे प्राप्त एगो मुद्राके वर्णन एक योगीके रूपके कह हथिन । [http://www.dawn.com/2007/05/08/nat7.htm अपूर्व वस्तुके खोज खण्डहरमे निहित खजाना दने सङ्केत कर है । ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20100215133034/http://www.dawn.com/2007/05/08/nat7.htm|date=15 फरवरी 2010}} * गेविन फ्लड, "पशुपति सील" जेकि अन्य सीलमे से एक है, के बारेमे विवाद करित लिख है कि ई रूप एक योग मुद्रामे बैठल व्यक्तिके स्पष्ट न लगै या ई एगो मानव आकृतिके प्रतिनिधित्व करित लग है । फ्लड, पीपी. 28-29 . * पशुपति सीलके बारेमे जियोफ्रे सामुएलके मानल है कि "वास्तवमे हमनीके ई स्पष्ट न है कि ई मूर्ति कोनो नारी या पुरुष केकर व्याख्या कर है".{{cite book|url=http://books.google.com/books?id=JAvrTGrbpf4C&pg=PA4|title=The Origins of Yoga and Tantra|last=Samuel|first=Geoffrey|date=2008|publisher=Cambridge University Press|isbn=9780521695343|page=4}}[26]</ref> [[ध्यान]]मे उच्च चैतन्यके प्राप्त करेके रीतिके विकास श्रमानिक परम्परा द्वारा एवं उपनिषद् के परम्परा द्वारा विकसित होलै हल ।<ref>[27] ^ फ्लड, पीपी. 94-95.</ref> बुद्धके पूर्व एवं प्राचीन ब्रह्मिनिक ग्रन्थमे [[ध्यान]]के बारेमे कोनो ठोस सबूत न भेट है । बुद्धके दु शिक्षकके ध्यानके लक्ष्यके प्रति कहल वाक्यके आधार पर वय्न्न ई तर्क कर है कि निर्गुण ध्यानके पद्धति ब्रह्मिन परम्परासे निकललै एहीसे उपनिषद् के [[सृष्टि]]के प्रति कहल कथनमे एवं ध्यानके लक्ष्यला कहल कथनमे समानता है ।<ref>[28] ^ अलेक्जेण्डर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 51.</ref> ई सम्भावित होहु सक है, नहियो.<ref>[29] ^ अलेक्जेण्डर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 56.</ref> उपनिषदमे [[ब्रह्माण्ड]] सम्बन्धी बयानके वैश्विक कथनमे कोनो [[ध्यान]]के रीतिके सम्भावनाके प्रति तर्क देइत कहल जा है कि [[नासदीय सूक्त]] कोनो [[ध्यान]]के पद्धति दने [[ऋग्वेद]]से पूर्वो इशारा कर है ।<ref>[30] ^ अलेक्जेण्डर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ बुद्धिस्ट मेडिटेशन । रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 51 ।</ref> [[हिन्दु]] ग्रन्थ आउ [[बौद्ध]] ग्रन्थ प्राचीन ग्रन्थमे से एक है जेकरामे ध्यान तकनीकके वर्णन प्राप्त होव है ।<ref>[31] ^ [[रिचर्ड गोम्ब्रिच]], ''थेरवाद बौद्ध धर्म: ए सोशल हिस्ट्री फ्रॉम एन्सिएण्ट बनारस टू माडर्न कोलम्बो ।'' रौतलेड्ग आउ केगन पॉल, 1988, पृष्ठ 44 ।</ref> ओखनी ध्यानके प्रथा आउ अवस्थाके वर्णन कर है जे बुद्धसे पहिले अस्तित्वमे हलै आउ साथे ऊ सब प्रथाके वर्णन कर है जे पहिले बौद्धधर्मके भीतरे विकसित होलै ।<ref>[32] ^ अलेक्जेण्डर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ बुद्धिस्ट मेडिटेशन । रौटलेड्ज 2007, पृष्ट 50 ।</ref> हिन्दु वाङ्मयमे "योग" शब्द पहिले कथा उपनिषदमे प्रस्तुत होलै जने ज्ञानेन्द्रियके नियन्त्रण आउ मानसिक गतिविधिके निवारणके अर्थमे प्रयुक्त होलै हे जे उच्चतम स्थिति प्रदान करेवाला मानल गेलै हे ।<ref>[33] ^ फ्लड, पी. 95 । विद्वान कथा उपनिषदके पूर्व बौद्धत्वके साथे सूचीबद्ध न करथिन । उदाहरणला हेल्मथ वान ग्लासेनप्प देख सक हथिन, 1950 कार्यवाहीके "अकादेमी देर विस्सेन्स्चाफ्तेँ," लितेरातुर अण्ड से [http://www.accesstoinsight.org/lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html http://www.accesstoinsight.org/ lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html.] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130204142029/http://www.accesstoinsight.org/lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html |date=4 फरवरी 2013 }} कुछ लोग कह हथिन कि ई पद बौद्ध है, उदाहरण हाजिम नाकामुरा के ए हिस्ट्री ऑफ एअर्ली वेदान्त फिलोसोफी, फिलोसोफी ईस्ट अण्ड वेस्ट, वोल. 37, अङ्क. 3 (जुलाई 1987) जेकरा अरविन्द शर्मा समीक्षा करलथिन हे, पीपी 325-331 । पाली शब्द "योग" के प्रयोग करेके एक व्यापक जाँचला पूर्व बौद्ध ग्रन्थमे देखथिन, थोमस विलियम र्ह्य्स डेविड, विलियम स्टेड, ''पाली-इङ्ग्लिश शब्दकोष'' मोतीलाल बनारसीदास पुब्ल द्वारा डालथिन, 1993, पृष्ठ 558: [http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&amp;pg=RA1-PA558&amp;dq=yoga+pali+term&amp;lr=#PRA1-PA558,M1 http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&amp;pg=RA1-PA558&amp;dq=yoga+pali+ term&amp;ir = # PRA1 lr-PA558, M1.] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20150322083352/http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&pg=RA1-PA558&dq=yoga+pali+term&lr=#PRA1-PA558,M1 |date=22 मार्च 2015 }} धम्मपदामे "आध्यात्मिक अभ्यास" के अर्थमे ई शब्दके प्रयोगला देखथिन गिल फ्रोन्स्दल, दी धम्मपदा, शम्भाला, 2005, पृष्ठ 56, 130 देखथिन ।</ref> महत्वपूर्ण ग्रन्थ जे योगके अवधारणासे सम्बन्धित है ऊ मध्यकालीन [[उपनिषद्]], [[महाभारत]], [[भगवद्गीता]] (२०० ईपू) एवं [[पतञ्जलि योगसूत्र]] (४०० ईपू) है । ==== पतञ्जलिके योगसूत्र ==== {{मुख्य|योगसूत्र}} [[भारतीय दर्शन]]मे षड् [[आस्तिक दर्शन|दर्शन]]मे से एकके नाम योग है ।<ref>छौ आस्तिक दर्शन सम्प्रदायके एक सिंहावलोकन ला समूह पर विस्तारके साथ देखथिन : राधाकृष्णन अएण्ड मूर, "सामग्री" आउ पीपी स्कूल ^४५३-४८७ ।</ref><ref> योग घरानाके एक संक्षिप्त सिंहावलोकन ला देखथिन: चटर्जी एण्ड दत्ता, पी ४३ ।</ref> योग दार्शनिक प्रणाली,[[साङ्ख्य]] स्कूलके साथे निकटतासे सम्बन्धित है ।<ref>दर्शन आउ सङ्ख्याके बीच घनिष्ठ सम्बन्धला देखथिन: चटर्जी एण्ड दत्ता, पी ४३ ।</ref> ऋषि [[पतञ्जलि]] द्वारा व्याख्यायित योग सम्प्रदाय साङ्ख्य मनोविज्ञान आउ तत्वमीमांसाके स्वीकार कर है किन्तु साङ्ख्य घरानाके तुलनामे अधिक आस्तिक है । ई प्रमाण है काहेकि साङ्ख्य वास्तविकताके पच्चीस तत्वमे ईश्वरीय सत्तो जोड़ल गेलै हे ।<ref>अवधारणाके योग स्वीकृतिला किन्तु भगवान् ला एक वर्गके जोड़ेके क्रियाके साथ देखथिन: राधाकृष्णन एण्ड मूर, पी ४५३ ।</ref><ref>साङ्ख्यके २५ सिद्धान्तके योग स्वीकार करेला देखथिन: चटर्जी एण्ड दत्त, पी ४३ ।</ref> योग आउ साङ्ख्य एक दोसरासे एतना मिल-जुल है कि मेक्स म्युल्लर कह है "ई दु दर्शन एतना प्रसिद्ध हलै कि एक दोसराके अन्तर समझेला एकके प्रभुके साथे आउ दोसरके प्रभुके बिन मानल जा है ।...."<ref>म्युलर (१८९९), अध्याय ७, "योग फिलोसोफी", पी १०४ ।</ref> साङ्ख्य आउ योगके बीच घनिष्ठ सम्बन्ध हेन्रीच जिम्मेर समझाव हथिन : ==योगके प्रसिद्ध ग्रन्थ== {| class="wikitable" |- ! ग्रन्थ !! रचयिता !! रचनाकाल/टिप्पणी |- | '''[[पतञ्जलि योगसूत्र|योगसूत्र]]''' || [[पतञ्जलि]] || ४०० ई पूर्व |- | '''[[योगभाष्य]]''' || [[वेदव्यास]] || द्वितीय शताब्दी |- | '''[[तत्त्ववैशारदी]]''' || [[वाचस्पति मिश्र]] || ८४१ ई |- |'''[[योगयाज्ञवल्क्य]]''' || [[याज्ञवल्क्य]] || सबसे पुरान संस्कृत पाण्डुलिपि ९मा-१०मष शताब्दीके है । |- | '''[[भोजवृत्ति]]''' || [[राजा भोज]] || ११मा शताब्दी |- | '''[[गोरक्षशतक]]''' || [[गुरु गोरख नाथ]] || ११मा-१२मा शताब्दी |- | '''[[योगचूडामण्युपनिषद]]''' || - || १४मा-१५मा शताब्दी (रिचर्ड रोसेन के अनुसार) |- | '''[[योगवार्तिक]]''' || [[विज्ञानभिक्षु]] || १६मा शताब्दी |- | '''[[योगसारसङ्ग्रह]]''' || विज्ञानभिक्षु || १६मा शताब्दी |- | '''[[हठयोगप्रदीपिका]]''' || [[स्वात्माराम|स्वामी स्वात्माराम]] || १५मा-१६मा शताब्दी |- | '''[[सूत्रवृत्ति]]''' || गणेशभावा || १७मा शताब्दी |- | '''[[योगसूत्रवृत्ति]]''' || [[नागेश भट्ट]]<ref>[https://kymyogavaisharadi.org/display/bhashya/vritti/devanagari नागोजीभट्ट कृत वृत्ति]</ref> || १७मा शताब्दी |- | '''[[शिवसंहिता]]''' || ऋषी आर्यवीर रुद्र || २५०० ई पूर्व |- | '''[[घेरण्डसंहिता]]''' || [[घेरण्ड मुनि]]|| १५०० ई पूर्व |- | '''[[हठरत्नावली]] || श्रीनिवास भट्ट || १७मा शताब्दी |- | '''[[मणिप्रभा]]''' || रामानन्द यति|| १८मा शताब्दी |- | '''[[सूत्रार्थप्रबोधिनी]]''' || नारायण तीर्थ || १८मा शताब्दी |- | '''[[जोगप्रदीपिका]]''' || जयतराम || १७३७ ई <br> ई हिन्दी, ब्रजभाषा, खड़ीबोलीके मिललजुलल भाषामे रचित है<br> आउ शब्दावली संस्कृतके अत्यन्त निकट है । |- | '''सचित्र योगसाधन''' || शिवमुनि || २०मा शताब्दी ; हिन्दीमे लिखित<ref>{{Cite web |url=https://www.shivmunisamaj.com/list-of-books-by-shivmuni |title=शिवमुनि महाराज का अमर साहित्य |access-date=31 दिसम्बर 2022 |archive-date=31 दिसम्बर 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20221231051935/https://www.shivmunisamaj.com/list-of-books-by-shivmuni |url-status=dead }}</ref> |- | '''[[योगदर्शनम्]]''' || [[स्वामी सत्यपति परिव्राजक]] || २१मा शताब्दी |} ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == बाहरी कड़ी == {{विकिसूक्ति|योग}} * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि) *[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे) {{योग}} {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] lahcv7f1prrndylrptej54k1514tlac 80515 80514 2026-10-02T07:11:51Z Pataliputra01 5 80515 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । == व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार == '''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज्‌ शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे । पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है - :१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय :२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय :३) युज् संयमने - चुरादिगणीय '''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल । '''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३) ''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है । ई प्रकार योगके अर्थ होलै - "योग साधनाके अपनावित मनके नियन्त्रित करके, संयमित करके, आत्माके परमात्मासे मिलन" । [[परिभाषा]] ऐसन होवेके चाही जे अव्याप्ति आउ अतिव्याप्ति दोषसे मुक्त होवे, योग शब्दके वाच्यार्थके ऐसन लक्षण बता सके जे प्रत्येक प्रसङ्गला उपयुक्त होवे आउ योगके इलावा कोनो अन्य वस्तुला उपयुक्त न होवे । [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ मानल जा है । ओकरामे योग शब्दके ढेर बार प्रयोग होलै हे । कखनियो अकेले आउ कखनियो सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग । वेदोत्तर कालमे [[भक्तियोग]] आउ [[हठयोग]] नामो प्रचलित हो गेलै हे । [[पतञ्जलि]] [[योगदर्शन]]मे 'क्रियायोग' शब्द देखेमे आव है । [[पाशुपत योग]] आउ माहेश्वर योग नियन शब्दोके प्रसङ्ग भेट है । ई सब स्थलमे योग शब्दके जे अर्थ है ऊ एक दोसरसे भिन्न है । [[गीता]]मे [[श्रीकृष्ण]] एक स्थल पर कहलथिन हे ''''योगः कर्मसु कौशलम्'''‌' (कर्ममे कुशलते योग है) । ई वाक्य योगके परिभाषा न है । कुछ विद्वानके ई मत है कि जीवात्मा आउ परमात्माके मिल जाएके योग कहल जा है । ई बातके स्वीकार करेमे ई बड़ आपत्ति खड़ा होव है कि [[बौद्धधर्म|बौद्धमतावलम्बियो]] जे परमात्माके सत्ताके स्वीकार न करथिन, योग शब्दके व्यवहार कर आउ योगके समर्थन कर हथिन । एही बात [[साङ्ख्य|साङ्ख्यवादियो]]ला कहल जा सक है जे ईश्वरके सत्ताके असिद्ध मान हथिन । [[पतञ्जलि]] [[योगसूत्र]]मे जे परिभाषा देलथिन हे 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः', चित्तके वृत्तिके निरोधके नाम योग है । ई वाक्यके दु अर्थ हो सक है - चित्तवृत्तिके निरोधके अवस्थाके नाम योग है या ई अवस्थाके लावेके उपायके योग कहल जा है । किन्तु ई परिभाषा पर ढेर विद्वानके आपत्ति है । उनकर कहलाम है जे चित्तवृत्तिके प्रवाहेके नाम चित्त है । पूर्ण निरोधके अर्थ होतै चित्तके अस्तित्वके पूर्ण लोप, चित्ताश्रय समस्त स्मृति आउ संस्कारके निःशेष हो जाएल । यदि ऐसन हो जाए त फिर समाधिसे उठल सम्भव न होतै । काहेकि ऊ अवस्थाके सहाराला कोनो संस्कार बचल न होतै, प्रारब्ध दग्ध हो गेल होतै । निरोध यदि सम्भव होवै त [[श्रीकृष्ण]]के ई वाक्यके का अर्थ होतै ? ''योगस्थः कुरु कर्माणि'', योगमे स्थित होके कर्म करथिन । विरुद्धावस्थामे कर्म हो न सकै आउ ऊ अवस्थामे कोनो संस्कार न पड़ सकै, स्मृति न बन सकै, जे समाधिसे उठेके बाद कर्म करेमे सहायक होवे । संक्षेपमे आशय ई है कि योगके शास्त्रीय स्वरूप, ओकर दार्शनिक आधार, के सम्यक्‌ रूपसे बुझल बड़ी सरल न है । संसारके मिथ्या मानेवाला [[अद्वैत वेदान्त|अद्वैतवादियो]] निदिध्याह्नके नामसे ओकर समर्थन कर है । अनीश्वरवादी साङ्ख्य विद्वानो ओकर अनुमोदन कर हथिन । [[बौद्धधर्म|बौद्धे]] न, [[इस्लाम|मुसलमान]] [[सूफी]] आउ [[ईसाई]] मिस्टिको कोनो न कोनो प्रकार अपन सम्प्रदायके मान्यता आउ दार्शनिक सिद्धान्तके साथे ओकर सामञ्जस्य स्थापित कर ले हथिन । ई सब विभिन्न दार्शनिक विचारधारामे कौन प्रकार ऐसन समन्वय हो सक है कि ऐसन धरातल मिल सके जेकरा पर योगके भित्ति खड़ा कैल जा सके, ई बड़ रोचक प्रश्न है किन्तु एकर विवेचनला बड़ी समय चाही । एहाँ ऊ प्रक्रिया पर तनीसुन विचार कर लेल आवश्यक है जेकर रूपरेखा हमनीके [[पतञ्जलि]]के सूत्रमे भेट है । तनीमनी शब्दभेदसे ई प्रक्रिया ऊ सब समुदायके मान्य है जे योगके अभ्यासके समर्थन कर हथिन । ===परिभाषा=== *(१) [[योगसूत्र|पातञ्जल योग दर्शन]]के अनुसार - '''योगश्चित्तवृतिनिरोधः''' (१/२) अर्थात् चित्तके वृत्तिके निरोधे योग है । *(२) [[साङ्ख्य दर्शन]]के अनुसार - '''पुरुषप्रकृत्योर्वियोगेपि योगइत्यमिधीयते ।''' अर्थात् पुरुष एवं प्रकृतिके पार्थक्यके स्थापित करके पुरुषके स्वरूपमे अवस्थित होइले योग है । *(३) [[विष्णुपुराण]]के अनुसार - '''योगः संयोग इत्युक्तः जीवात्म परमात्मने''' अर्थात् जीवात्मा एवं परमात्माके पूर्णतया मिलने योग है । *(४) [[भगवद्गीता]]के अनुसार - '''सिद्धासिद्धयो समोभूत्वा समत्वं योग उच्चते''' (२/४८) अर्थात् दुःख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत आउ उष्ण आदि द्वन्दमे सर्वत्र समभाव रखल योग है । *(५) [[भगवद्गीता]]के अनुसार - '''तस्माद्दयोगाययुज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्''' अर्थात् कर्त्तव्य कर्म बन्धक न होवे एहीसे निष्काम भावनासे अनुप्रेरित होके कर्त्तव्य करेके कौशल योग है । *(६) [[आचार्य हरिभद्र]]के अनुसार - '''मोक्खेण जोयणाओ सव्वो वि धम्म ववहारो जोगो''' अर्थात् [[मोक्ष]]से जोड़ेवाला सब व्यवहार योग है । *(७) [[बौद्धधर्म]]के अनुसार - '''कुशल चितैकग्गता योगः''' अर्थात् कुशल चित्तके एकाग्रता योग है । भारतीय दार्शनिक आउ धार्मिक परम्परामे "योग" शब्दके अलगे-अलगे विधिसे परिभाषित कैल गेलै हे । {| class="wikitable" |- ! मूल ग्रन्थ !! अनुमानित रचना-काल !! योगके परिभाषा |- |''[[मैत्रायणी उपनिषद]]'' | लगभग चतुर्थ शताब्दी ईसापूर्व | ''कत्वं प्राणमनसोरिन्द्रियाणां तथैव च ।'' <br>''सर्वभाव परित्यागो योग इत्यभिधीयते ॥'' -- मैत्रायणी उपनिषद् 6/25 <br>अर्थात् प्राण, मन एवं इन्द्रियके एक हो जाएल, एकाग्रावस्थाके प्राप्त कर लेल, बाह्म विषयसे विमुख होके इन्द्रियके मनमे आउ मन आत्मामे लग जाएल, प्राणके निष्चल हो जाएल योग है । |- | [[वैशेषिक सूत्र]] | लगभग चौथा शताब्दी ईसा पूर्व | ''तदनारम्भ आत्मस्ये मनसि शरीरस्य दुःखाभावः संयोगः ।'' -- वैशेषिक सूत्र ६/२/१६<br> अर्थात् मन आत्मामे स्थिर होवे पर ओकर (मनके) कार्यके अनारम्भ है, ऊ योग है । |- | ''[[कठोपनिषद]]'' | ईसा पूर्वके अन्तिम शताब्दी | ''यदा पञ्चावतिष्ठन्ते ज्ञानानि मनसा सह ।''<br>''बुद्धिश्च न विचेष्टते तामाहुः परमां गतिम् ॥''<br>''तां योगमिति मन्यन्ते स्थिरामिन्द्रियधारणाम्‌ ।''<br>''अप्रमत्तस्तदा भवति योगो हि प्रभवाप्ययौ ॥'' -- कठोपनिषद ६ / १०-११, नचिकेता आउ यमके बीच संवाद<br>जखनि मनके साथे समस्त ज्ञानेन्द्रिय भलीभाँति स्थिर हो जा है आउ बुद्धियोके कोनो चेष्टा न रहै तखनि ई अवस्थाके परमागति कहल जा है । ओही स्थिर इन्द्रिय-धारणाके योग कहल जा है । ऊ अवस्थामे साधक प्रमाद रहित होव है । काहेकि 'योग' एही पदार्थके उद्भव एवं लय (प्रभवाव्ययौ) दुनहीँ है । |- | ''[[भगवद्गीता]]'' | लगभग दोसर शताब्दी ईसा पूर्व | "सफलता आउ असफलता दुनोमे समभाव (एक समान) रहल । ऐसन समते योग कहला है ।" (२.४८) "कर्ममे कुशलते योग है ।" (२.५०) "ई जानथिन कि जेकरा योग कहल जा है, ऊ दुःखके संयोगसे वियोग (दुःखसे मुक्ति) है ।" (६.२३) |- | ''[[पतञ्जलि योगसूत्र]]'' | लगभग प्रारम्भिक शताब्दी ईस्वी | १.२. ''योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः'' – "चित्तके वृत्तिके रुक जाएले योग है ।" १.३. तखनि [[पुरुष (साङ्ख्य)|पुरुष]] |- | ''योगभाष्य'' | योगसूत्रके समाने | ''योगः समाधिः'' - "समाधिए योग है," जे [[एकाग्रता]] आउ ''निरुद्ध'' मने विषय-रहित [[समाधि]] (''असम्प्रज्ञात समाधि'') के सन्दर्भित कर है । |- | ''[[योगाचारभूमि-शास्त्र]] (श्रावकभूमि)'', एक [[महायान]] बौद्ध [[योगाचार]] ग्रन्थ | चौथा शताब्दी ईस्वी | | "योग चार प्रकारके है - श्रद्धा (विश्वास), आकांक्षा, दृढ़ता आउ उपाय ।" (२.१५२) |- | [[पाशुपत सूत्र]] पर कौण्डिन्यके ''पञ्चार्थभाष्य'' | चौथा शताब्दी ईस्वी | "ई प्रणालीमे जीवात्मा आउ ईश्वर (प्रभु) के मिलने योग है ।" (१.१.४३) |- | [[हरिभद्र सूरी]] द्वारा रचित एक [[जैन ग्रन्थ]] | छठा शताब्दी ईस्वी | "दृढ़ विश्वासके साथे योगीके स्वामि हमनीके सिद्धान्तमे योगके सम्यक् ज्ञानसे शुरू होवेवाला तीनो [सम्यक् ज्ञान, सम्यक् दर्शन आउ सम्यक् चारित्र] के संयोग (''सम्बन्धः'') के रूपमे परिभाषित कैलन हे काहेकि [एकरासे] [[मोक्ष]]के साथे जुड़ाव होव है.... सामान्य बोलचालमे ई [योग] शब्द एकर कारणके साथे [आत्माके] सम्पर्कोके दर्शाव है काहेकि कार्यला कारणके उपयोग सामान्य है ।" (२, ४) |- | ''[[लिङ्ग पुराण]]'' | ७मा–१०मा शताब्दी ईस्वी | " 'योग' शब्दसे तात्पर्य [[निर्वाण]]से है जे [[शिव]]के स्थिति है ।" (१.८.५ए) |- | [[आदि शङ्कराचार्य]]के ''[[ब्रह्मसूत्र]]-भाष्य'' | लगभग ८मा शताब्दी ईस्वी | "योगके ग्रन्थमे कहल गेलै है: 'योग वास्तविकता (तत्त्व) के जानेके साधन है' (''अथ तत्त्वदर्शनभ्युपायो योगः'')" (२.१.३) |- | ''मालिनीविजयोत्तर तन्त्र'', अद्वैत [[कश्मीर शैव दर्शन]]के प्राथमिक ग्रन्थमे से एक | ६ठा–१०मष शताब्दी ईस्वी | "एक सत्ताके दोसर सत्ताके साथ एक हो जाएल योग कहल जा है ।" (४.४-८) |- | [[शैव सिद्धान्त]]के विद्वान नारायणकण्ठके ''मृगेन्द्रतन्त्रवृत्ति'' | ६ठा–१०मा शताब्दी ईस्वी | "आत्म-नियन्त्रण (स्वामित्व) प्राप्त कैले योगी होएल है । योगी शब्दके अर्थ है 'ऊ जे अनिवार्य रूपसे अपन स्वरूपके अभिव्यक्ति... शिव-त्व (''शिवत्वम्'') से संयुक्त' होवे ।" |- | लक्ष्मणदेशिकेन्द्रके ''शारदातिलक'', एक [[शाक्त धर्म]] | ११मा शताब्दी ईस्वी | "योगके विशेषज्ञ कह हथ जीवात्माके [[आत्मा]] |- | ''[[योगबीज]]'', एक [[हठयोग]] ग्रन्थ | १४मा शताब्दी ईस्वी | "[[अपान]] आउ प्राण, अपन स्वयं के [[रज]] आउ वीर्य, सूर्य आउ चन्द्रमा, जीवात्मा आउ परमात्माके मिलन आउ एही प्रकार सब द्वन्द्वके मिलन योग कहला है ।" (८९) |} == योगके इतिहास == [[सञ्चिका:Shiva Pashupati.jpg|300px|thumb|right|मोहनजोदड़ो-हड़प्पासे प्राप्त मोहरमे योगमुद्रा]] {{मुख्य|योगके इतिहास}} [[वेद|वैदिक]] [[संहिता]]के अन्तर्गत तपस्वी ''तपस (संस्कृत)'' के बारेमे ([[ब्राह्मण|(कल ब्राह्मण)]]) प्राचीन कालसे वेदमे (१९०० से १५०० ईपू) उल्लेख भेट है जखनिकि तापसिक साधनाके समावेश प्राचीन वैदिक टिप्पणीमे प्राप्त है ।<ref name="Flood, p. 94">[21] ^फ्लड, पी. 94.</ref> ढेर मूर्ती जे सामान्य योग या [[समाधि]] मुद्राके प्रदर्शित कर है [[सिन्धुघाटी सभ्यता]] (३३००-१७०० ईपू) के स्थान पर प्राप्त होलै हे । पुरातत्त्वज्ञ ग्रेगरी पोस्सेह्लके अनुसार "ई सब मूर्ति योगके धार्मिक संस्कार" के योगसे सम्बन्धके सङ्केत कर है ।<ref>[22] ^ पोस्सेह्ल (2003), पीपी. 144-145</ref> यद्यपि ई बातके निर्णयात्मक सबूत न है तैयो अनेक पण्डितके रायमे सिन्धुघाटी सभ्यता आउ योग-[[ध्यान]]मे सम्बन्ध है ।<ref>देखथिन: * [[योनातान मार्क केनोयेर|जोनाथन मार्क केनोयेरएक]] मूर्तीके "योग मुद्रामे बैठल" ऐसन वर्णन कर है । [http://www.harappa.com/indus/33.html जोनाथन मार्क केनोयेर द्वारा लिखब, "अरौण्ड द इण्डस इन ९० स्लाइड्स". ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090323041459/http://www.harappa.com/indus/33.html|date=23 मार्च 2009}} * केरल वेर्नर लिख है " पुरातात्विक खोज हमनीके अनुमान करेके समर्थन कर है कि आर्य [[भारत]]के पूर्वके लोग योगशास्त्रके क्रियासे परिचित हलन". {{cite book|url=http://books.google.com/books?id=c6b3lH0-OekC&pg=PA103|title=Yoga and Indian Philosophy|last=Werner|first=Karel|date=1998|publisher=Motilal Banarsidass Publ.|isbn=9788120816091|page=103}}[23] * [[हेन्रीच जिम्मर]] एक मुद्रामे "योगमुद्रा" के वर्णन कर है । {{cite book|url=https://archive.org/details/mythssymbolsindi00zimm|title=Myths and Symbols in Indian Art and Civilization|last=Zimmer|first=Heinrich|publisher=Princeton University Press, New Ed edition|year=1972|ISBN=978-0691017785|page=[https://archive.org/details/mythssymbolsindi00zimm/page/n182 168]}} * [[थोमस म्क्विल्ले]] लिख हथिन कि "ई छौ रहस्यमय सिन्धुघाटी मुद्राके छविमे जे उत्कीर्ण मूर्ति है ओकरामे हठयोगके ''मूलबन्धासन '' नामके आसन या ओकरासे मिलित जुलित ''उत्कटासन '' या ''बद्धा कोनासना '' प्रदर्शित है । {{cite book|url=http://books.google.com/books?id=Vpqr1vNWQhUC&pg=PA219|title=The shape of ancient thought|last=McEvilley|first=Thomas|date=2002|publisher=Allworth Communications|isbn=9781581152036|pages=219-220}} * डॉ॰ फरजन्द मसीह, पञ्जाब विश्वविद्यालयके पुरातत्व विभागके अध्यक्ष हालेमे प्राप्त एगो मुद्राके वर्णन एक योगीके रूपके कह हथिन । [http://www.dawn.com/2007/05/08/nat7.htm अपूर्व वस्तुके खोज खण्डहरमे निहित खजाना दने सङ्केत कर है । ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20100215133034/http://www.dawn.com/2007/05/08/nat7.htm|date=15 फरवरी 2010}} * गेविन फ्लड, "पशुपति सील" जेकि अन्य सीलमे से एक है, के बारेमे विवाद करित लिख है कि ई रूप एक योग मुद्रामे बैठल व्यक्तिके स्पष्ट न लगै या ई एगो मानव आकृतिके प्रतिनिधित्व करित लग है । फ्लड, पीपी. 28-29 . * पशुपति सीलके बारेमे जियोफ्रे सामुएलके मानल है कि "वास्तवमे हमनीके ई स्पष्ट न है कि ई मूर्ति कोनो नारी या पुरुष केकर व्याख्या कर है".{{cite book|url=http://books.google.com/books?id=JAvrTGrbpf4C&pg=PA4|title=The Origins of Yoga and Tantra|last=Samuel|first=Geoffrey|date=2008|publisher=Cambridge University Press|isbn=9780521695343|page=4}}[26]</ref> [[ध्यान]]मे उच्च चैतन्यके प्राप्त करेके रीतिके विकास श्रमानिक परम्परा द्वारा एवं उपनिषद् के परम्परा द्वारा विकसित होलै हल ।<ref>[27] ^ फ्लड, पीपी. 94-95.</ref> बुद्धके पूर्व एवं प्राचीन ब्रह्मिनिक ग्रन्थमे [[ध्यान]]के बारेमे कोनो ठोस सबूत न भेट है । बुद्धके दु शिक्षकके ध्यानके लक्ष्यके प्रति कहल वाक्यके आधार पर वय्न्न ई तर्क कर है कि निर्गुण ध्यानके पद्धति ब्रह्मिन परम्परासे निकललै एहीसे उपनिषद् के [[सृष्टि]]के प्रति कहल कथनमे एवं ध्यानके लक्ष्यला कहल कथनमे समानता है ।<ref>[28] ^ अलेक्जेण्डर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 51.</ref> ई सम्भावित होहु सक है, नहियो.<ref>[29] ^ अलेक्जेण्डर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 56.</ref> उपनिषदमे [[ब्रह्माण्ड]] सम्बन्धी बयानके वैश्विक कथनमे कोनो [[ध्यान]]के रीतिके सम्भावनाके प्रति तर्क देइत कहल जा है कि [[नासदीय सूक्त]] कोनो [[ध्यान]]के पद्धति दने [[ऋग्वेद]]से पूर्वो इशारा कर है ।<ref>[30] ^ अलेक्जेण्डर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ बुद्धिस्ट मेडिटेशन । रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 51 ।</ref> [[हिन्दु]] ग्रन्थ आउ [[बौद्ध]] ग्रन्थ प्राचीन ग्रन्थमे से एक है जेकरामे ध्यान तकनीकके वर्णन प्राप्त होव है ।<ref>[31] ^ [[रिचर्ड गोम्ब्रिच]], ''थेरवाद बौद्ध धर्म: ए सोशल हिस्ट्री फ्रॉम एन्सिएण्ट बनारस टू माडर्न कोलम्बो ।'' रौतलेड्ग आउ केगन पॉल, 1988, पृष्ठ 44 ।</ref> ओखनी ध्यानके प्रथा आउ अवस्थाके वर्णन कर है जे बुद्धसे पहिले अस्तित्वमे हलै आउ साथे ऊ सब प्रथाके वर्णन कर है जे पहिले बौद्धधर्मके भीतरे विकसित होलै ।<ref>[32] ^ अलेक्जेण्डर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ बुद्धिस्ट मेडिटेशन । रौटलेड्ज 2007, पृष्ट 50 ।</ref> हिन्दु वाङ्मयमे "योग" शब्द पहिले कथा उपनिषदमे प्रस्तुत होलै जने ज्ञानेन्द्रियके नियन्त्रण आउ मानसिक गतिविधिके निवारणके अर्थमे प्रयुक्त होलै हे जे उच्चतम स्थिति प्रदान करेवाला मानल गेलै हे ।<ref>[33] ^ फ्लड, पी. 95 । विद्वान कथा उपनिषदके पूर्व बौद्धत्वके साथे सूचीबद्ध न करथिन । उदाहरणला हेल्मथ वान ग्लासेनप्प देख सक हथिन, 1950 कार्यवाहीके "अकादेमी देर विस्सेन्स्चाफ्तेँ," लितेरातुर अण्ड से [http://www.accesstoinsight.org/lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html http://www.accesstoinsight.org/ lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html.] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130204142029/http://www.accesstoinsight.org/lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html |date=4 फरवरी 2013 }} कुछ लोग कह हथिन कि ई पद बौद्ध है, उदाहरण हाजिम नाकामुरा के ए हिस्ट्री ऑफ एअर्ली वेदान्त फिलोसोफी, फिलोसोफी ईस्ट अण्ड वेस्ट, वोल. 37, अङ्क. 3 (जुलाई 1987) जेकरा अरविन्द शर्मा समीक्षा करलथिन हे, पीपी 325-331 । पाली शब्द "योग" के प्रयोग करेके एक व्यापक जाँचला पूर्व बौद्ध ग्रन्थमे देखथिन, थोमस विलियम र्ह्य्स डेविड, विलियम स्टेड, ''पाली-इङ्ग्लिश शब्दकोष'' मोतीलाल बनारसीदास पुब्ल द्वारा डालथिन, 1993, पृष्ठ 558: [http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&amp;pg=RA1-PA558&amp;dq=yoga+pali+term&amp;lr=#PRA1-PA558,M1 http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&amp;pg=RA1-PA558&amp;dq=yoga+pali+ term&amp;ir = # PRA1 lr-PA558, M1.] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20150322083352/http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&pg=RA1-PA558&dq=yoga+pali+term&lr=#PRA1-PA558,M1 |date=22 मार्च 2015 }} धम्मपदामे "आध्यात्मिक अभ्यास" के अर्थमे ई शब्दके प्रयोगला देखथिन गिल फ्रोन्स्दल, दी धम्मपदा, शम्भाला, 2005, पृष्ठ 56, 130 देखथिन ।</ref> महत्वपूर्ण ग्रन्थ जे योगके अवधारणासे सम्बन्धित है ऊ मध्यकालीन [[उपनिषद्]], [[महाभारत]], [[भगवद्गीता]] (२०० ईपू) एवं [[पतञ्जलि योगसूत्र]] (४०० ईपू) है । ==== पतञ्जलिके योगसूत्र ==== {{मुख्य|योगसूत्र}} [[भारतीय दर्शन]]मे षड् [[आस्तिक दर्शन|दर्शन]]मे से एकके नाम योग है ।<ref>छौ आस्तिक दर्शन सम्प्रदायके एक सिंहावलोकन ला समूह पर विस्तारके साथ देखथिन : राधाकृष्णन अएण्ड मूर, "सामग्री" आउ पीपी स्कूल ^४५३-४८७ ।</ref><ref> योग घरानाके एक संक्षिप्त सिंहावलोकन ला देखथिन: चटर्जी एण्ड दत्ता, पी ४३ ।</ref> योग दार्शनिक प्रणाली,[[साङ्ख्य]] स्कूलके साथे निकटतासे सम्बन्धित है ।<ref>दर्शन आउ सङ्ख्याके बीच घनिष्ठ सम्बन्धला देखथिन: चटर्जी एण्ड दत्ता, पी ४३ ।</ref> ऋषि [[पतञ्जलि]] द्वारा व्याख्यायित योग सम्प्रदाय साङ्ख्य मनोविज्ञान आउ तत्वमीमांसाके स्वीकार कर है किन्तु साङ्ख्य घरानाके तुलनामे अधिक आस्तिक है । ई प्रमाण है काहेकि साङ्ख्य वास्तविकताके पच्चीस तत्वमे ईश्वरीय सत्तो जोड़ल गेलै हे ।<ref>अवधारणाके योग स्वीकृतिला किन्तु भगवान् ला एक वर्गके जोड़ेके क्रियाके साथ देखथिन: राधाकृष्णन एण्ड मूर, पी ४५३ ।</ref><ref>साङ्ख्यके २५ सिद्धान्तके योग स्वीकार करेला देखथिन: चटर्जी एण्ड दत्त, पी ४३ ।</ref> योग आउ साङ्ख्य एक दोसरासे एतना मिल-जुल है कि मेक्स म्युल्लर कह है "ई दु दर्शन एतना प्रसिद्ध हलै कि एक दोसराके अन्तर समझेला एकके प्रभुके साथे आउ दोसरके प्रभुके बिन मानल जा है ।...."<ref>म्युलर (१८९९), अध्याय ७, "योग फिलोसोफी", पी १०४ ।</ref> साङ्ख्य आउ योगके बीच घनिष्ठ सम्बन्ध हेन्रीच जिम्मेर समझाव हथिन : <blockquote class="toccolours" style="float:none;padding:10px 15px 10px 15px;display:table"> ई दोनोके भारतमे जुड़वाके रूपमे मानल जा है जे एके विषयके दु पहलू है । साङ्ख्य एहाँ मानव प्रकृतिके बुनियादी सैद्धान्तिकके प्रदर्शन, विस्तृत विवरण आउ ओकर तत्वके परिभाषित, बन्धन ''(बन्धा)'' के स्थितिमे उनकर सहयोग करेके विधि, सुलझावटके समय अपन स्थितिके विश्लेषण या मुक्तिमे वियोजन [[मोक्ष]]के व्याख्या कैल गेलै हे । योग विशेष रूपसे प्रक्रियाके गतिशीलताके सुलझावेला उपचार कर है आउ मुक्ति प्राप्त करेके व्यावहारिक तकनीकके सिद्धान्त कर है अथवा 'अलगाव-एकीकरण'''(कैवल्य)'' के उपचार कर है ।<ref>जिम्मेर (1951), पी २८० ।</ref> </blockquote> ==योगके प्रसिद्ध ग्रन्थ== {| class="wikitable" |- ! ग्रन्थ !! रचयिता !! रचनाकाल/टिप्पणी |- | '''[[पतञ्जलि योगसूत्र|योगसूत्र]]''' || [[पतञ्जलि]] || ४०० ई पूर्व |- | '''[[योगभाष्य]]''' || [[वेदव्यास]] || द्वितीय शताब्दी |- | '''[[तत्त्ववैशारदी]]''' || [[वाचस्पति मिश्र]] || ८४१ ई |- |'''[[योगयाज्ञवल्क्य]]''' || [[याज्ञवल्क्य]] || सबसे पुरान संस्कृत पाण्डुलिपि ९मा-१०मष शताब्दीके है । |- | '''[[भोजवृत्ति]]''' || [[राजा भोज]] || ११मा शताब्दी |- | '''[[गोरक्षशतक]]''' || [[गुरु गोरख नाथ]] || ११मा-१२मा शताब्दी |- | '''[[योगचूडामण्युपनिषद]]''' || - || १४मा-१५मा शताब्दी (रिचर्ड रोसेन के अनुसार) |- | '''[[योगवार्तिक]]''' || [[विज्ञानभिक्षु]] || १६मा शताब्दी |- | '''[[योगसारसङ्ग्रह]]''' || विज्ञानभिक्षु || १६मा शताब्दी |- | '''[[हठयोगप्रदीपिका]]''' || [[स्वात्माराम|स्वामी स्वात्माराम]] || १५मा-१६मा शताब्दी |- | '''[[सूत्रवृत्ति]]''' || गणेशभावा || १७मा शताब्दी |- | '''[[योगसूत्रवृत्ति]]''' || [[नागेश भट्ट]]<ref>[https://kymyogavaisharadi.org/display/bhashya/vritti/devanagari नागोजीभट्ट कृत वृत्ति]</ref> || १७मा शताब्दी |- | '''[[शिवसंहिता]]''' || ऋषी आर्यवीर रुद्र || २५०० ई पूर्व |- | '''[[घेरण्डसंहिता]]''' || [[घेरण्ड मुनि]]|| १५०० ई पूर्व |- | '''[[हठरत्नावली]] || श्रीनिवास भट्ट || १७मा शताब्दी |- | '''[[मणिप्रभा]]''' || रामानन्द यति|| १८मा शताब्दी |- | '''[[सूत्रार्थप्रबोधिनी]]''' || नारायण तीर्थ || १८मा शताब्दी |- | '''[[जोगप्रदीपिका]]''' || जयतराम || १७३७ ई <br> ई हिन्दी, ब्रजभाषा, खड़ीबोलीके मिललजुलल भाषामे रचित है<br> आउ शब्दावली संस्कृतके अत्यन्त निकट है । |- | '''सचित्र योगसाधन''' || शिवमुनि || २०मा शताब्दी ; हिन्दीमे लिखित<ref>{{Cite web |url=https://www.shivmunisamaj.com/list-of-books-by-shivmuni |title=शिवमुनि महाराज का अमर साहित्य |access-date=31 दिसम्बर 2022 |archive-date=31 दिसम्बर 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20221231051935/https://www.shivmunisamaj.com/list-of-books-by-shivmuni |url-status=dead }}</ref> |- | '''[[योगदर्शनम्]]''' || [[स्वामी सत्यपति परिव्राजक]] || २१मा शताब्दी |} ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == बाहरी कड़ी == {{विकिसूक्ति|योग}} * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि) *[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे) {{योग}} {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] gj2dm28bfsph7xmar0wmlqr1ptlyi7c 80516 80515 2026-10-02T07:15:33Z Pataliputra01 5 80516 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२मा-१३मा शताब्दीके एगो भारतीय चित्रमे [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = एगो पुरुष योगी | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = दुगो महिला योगिनी }} [[सञ्चिका:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रामे यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' प्राचीन भारतीय ऋषिमुनि आउ तत्त्ववेत्ता द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है । [[पतञ्जलि]] 'चित्तके वृत्तिके निरोध' के योग कहलथिन हे आउ एकर आठ अङ्ग (अष्टाङ्ग) बतैलथिन हे - [[यम]], [[नियम]], [[आसन]], [[प्राणायाम]], [[प्रत्याहार]], [[धारणा]], [[ध्यान]] आउ [[समाधि]] । [[वेद व्यास|व्यास]] [[समाधि|समाधिए]]के योग मान हथिन । [[योगवासिष्ठ]]के अनुसार योग ऊ युक्ति है जेकरा द्वारा संसार सागरसे पार जाएल जा सक है । योगके ढेर मनी अङ्ग आउ प्रकार होव है जेकरा द्वारा हमनीके [[ध्यान]], [[समाधि]] आउ [[मोक्ष]] तक पहुँचेला होव हैै । 'योग' शब्द आउ एकर प्रक्रिया एवं धारणा [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे [[ध्यान]] प्रक्रियासे सम्बन्धित है । योग शब्द भारतसे बौद्ध पन्थके साथे [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], [[दक्षिणपूर्व एशिया]] आउ [[श्रीलङ्का|श्रीलङ्को]]मे फैल गेलै हे आउ ई समय सब सभ्य जगत्‌ मे लोग एकरासे परिचित हथिन । सिद्धिके बाद पहिला बेर [[११ दिसम्बर]] [[२०१४]] के [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा]] प्रत्येक वर्ष [[२१ जून]]के [[विश्व योग दिवस]]के रूपमे मान्यता देलकै हे । [[हिन्दुधर्म]], [[जैनधर्म]] आउ [[बौद्धधर्म]]मे योगके अनेक सम्प्रदाय है । योगके विभिन्न लक्ष्य है आउ योगके अलगे-अलगे व्यवहार है ।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [६.१], देखथिन मनु दोषी (२००७) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग आउ एकर आधुनिक रूप विश्वभरमे प्रसिद्ध है । सबसे पहिले 'योग' शब्दके उल्लेख [[ऋग्वेद]]मे भेट है । एकर बाद अनेक [[उपनिषद]]मे एकर उल्लेख ऐलै हे । [[कठोपनिषद]]मे सबसे पहिले योग शब्द ओही अर्थमे प्रयुक्त होव है जे अर्थमे एकरा आधुनिक समयमे समझल जा है । मानल जा है कि कठोपनिषदके रचना ईसापूर्व पच्चीसमा आउ तीसरा शताब्दी ईसापूर्वके बीचके कालखण्डमे होइलै हल । [[पतञ्जलि]]के [[योगसूत्र]] योगके सबसे पूर्ण ग्रन्थ है । एकर रचनाकाल ईसाके प्रथम शताब्दी या ओकर आसपास मानल जा है । [[हठ योग]]के ग्रन्थ ९मा से लेके ११मा शताब्दीमे रचल जानल लगलै हल । एकर विकास [[तन्त्र]]से होलै । [[पश्चिमी जगत]]मे "योग" के हठयोगके आधुनिक रूपमे लेल जा है जेकरामे शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य आउ विश्रान्तिके तकनीकके प्रधानता है । ई सब तकनीक मुख्यतः [[आसन]] पर आधारित है जखनिकि परम्परागत योगके केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है आउ ऊ सांसारिक लगावसे छुटकारा दियावेके प्रयास कर है । पश्चिमी जगतमे आधुनिक योगके प्रचार-प्रसार भारतसे ऊ सब देशमे गेल गुरु कैलथिन जे प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]]के पश्चिमी जगतमे प्रसिद्धिके बाद ओहाँ गेलथिन हल । == व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार == '''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृतके क्रिया शब्द)|धातु]]मे ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगावेसे निष्पन्न होव है । [[धातुपाठ]]मे युज्‌ शब्दके तीन अर्थ उपलब्ध होव है - समाधि, संयोग, संयमन । किन्तु योगशात्रके प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातुसे बनल है जेकर व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । [[व्यास]]जी स्पष्ट शब्दमे कहलथिन हे - "योगः समाधिः" । ओइसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ एवं ‘युज संयमने’ धातुओसे निष्पन्न होव है किन्तु तखनि ई स्थितिमे योग शब्दके अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ एवं नियमन होतै । आगे योगमे हमनी देखबै कि आत्मा आउ परमात्माके विषयोमे योग कहल गेलै हे । पाणिनीय [[गणपाठ]]मे तीन 'युज्' धातुके पाठ भेट है - :१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय :२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय :३) युज् संयमने - चुरादिगणीय '''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातुके अर्थ है समाधि । समाधिके प्रकृति प्रत्यय अर्थ है सम्यक् स्थापन । दुसर अर्थमे समाधिके सिद्धिला जुड़ल । '''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातुके अर्थ है जुड़ल, जोड़ल, मेल कैल, संयोग कैल अर्थात् ई दुःख रूपी संसारसे वियोग आउ ईश्वरसे संयोगके नाम योग है । भगवद्गीतोमे वर्णन भेट है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (६/२३) ''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातुके अर्थ है संयमन अर्थात् मनके संयम अथवा मनके नियमन । मनके संयमित कैले योग है । ई प्रकार योगके अर्थ होलै - "योग साधनाके अपनावित मनके नियन्त्रित करके, संयमित करके, आत्माके परमात्मासे मिलन" । [[परिभाषा]] ऐसन होवेके चाही जे अव्याप्ति आउ अतिव्याप्ति दोषसे मुक्त होवे, योग शब्दके वाच्यार्थके ऐसन लक्षण बता सके जे प्रत्येक प्रसङ्गला उपयुक्त होवे आउ योगके इलावा कोनो अन्य वस्तुला उपयुक्त न होवे । [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ मानल जा है । ओकरामे योग शब्दके ढेर बार प्रयोग होलै हे । कखनियो अकेले आउ कखनियो सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग । वेदोत्तर कालमे [[भक्तियोग]] आउ [[हठयोग]] नामो प्रचलित हो गेलै हे । [[पतञ्जलि]] [[योगदर्शन]]मे 'क्रियायोग' शब्द देखेमे आव है । [[पाशुपत योग]] आउ माहेश्वर योग नियन शब्दोके प्रसङ्ग भेट है । ई सब स्थलमे योग शब्दके जे अर्थ है ऊ एक दोसरसे भिन्न है । [[गीता]]मे [[श्रीकृष्ण]] एक स्थल पर कहलथिन हे ''''योगः कर्मसु कौशलम्'''‌' (कर्ममे कुशलते योग है) । ई वाक्य योगके परिभाषा न है । कुछ विद्वानके ई मत है कि जीवात्मा आउ परमात्माके मिल जाएके योग कहल जा है । ई बातके स्वीकार करेमे ई बड़ आपत्ति खड़ा होव है कि [[बौद्धधर्म|बौद्धमतावलम्बियो]] जे परमात्माके सत्ताके स्वीकार न करथिन, योग शब्दके व्यवहार कर आउ योगके समर्थन कर हथिन । एही बात [[साङ्ख्य|साङ्ख्यवादियो]]ला कहल जा सक है जे ईश्वरके सत्ताके असिद्ध मान हथिन । [[पतञ्जलि]] [[योगसूत्र]]मे जे परिभाषा देलथिन हे 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः', चित्तके वृत्तिके निरोधके नाम योग है । ई वाक्यके दु अर्थ हो सक है - चित्तवृत्तिके निरोधके अवस्थाके नाम योग है या ई अवस्थाके लावेके उपायके योग कहल जा है । किन्तु ई परिभाषा पर ढेर विद्वानके आपत्ति है । उनकर कहलाम है जे चित्तवृत्तिके प्रवाहेके नाम चित्त है । पूर्ण निरोधके अर्थ होतै चित्तके अस्तित्वके पूर्ण लोप, चित्ताश्रय समस्त स्मृति आउ संस्कारके निःशेष हो जाएल । यदि ऐसन हो जाए त फिर समाधिसे उठल सम्भव न होतै । काहेकि ऊ अवस्थाके सहाराला कोनो संस्कार बचल न होतै, प्रारब्ध दग्ध हो गेल होतै । निरोध यदि सम्भव होवै त [[श्रीकृष्ण]]के ई वाक्यके का अर्थ होतै ? ''योगस्थः कुरु कर्माणि'', योगमे स्थित होके कर्म करथिन । विरुद्धावस्थामे कर्म हो न सकै आउ ऊ अवस्थामे कोनो संस्कार न पड़ सकै, स्मृति न बन सकै, जे समाधिसे उठेके बाद कर्म करेमे सहायक होवे । संक्षेपमे आशय ई है कि योगके शास्त्रीय स्वरूप, ओकर दार्शनिक आधार, के सम्यक्‌ रूपसे बुझल बड़ी सरल न है । संसारके मिथ्या मानेवाला [[अद्वैत वेदान्त|अद्वैतवादियो]] निदिध्याह्नके नामसे ओकर समर्थन कर है । अनीश्वरवादी साङ्ख्य विद्वानो ओकर अनुमोदन कर हथिन । [[बौद्धधर्म|बौद्धे]] न, [[इस्लाम|मुसलमान]] [[सूफी]] आउ [[ईसाई]] मिस्टिको कोनो न कोनो प्रकार अपन सम्प्रदायके मान्यता आउ दार्शनिक सिद्धान्तके साथे ओकर सामञ्जस्य स्थापित कर ले हथिन । ई सब विभिन्न दार्शनिक विचारधारामे कौन प्रकार ऐसन समन्वय हो सक है कि ऐसन धरातल मिल सके जेकरा पर योगके भित्ति खड़ा कैल जा सके, ई बड़ रोचक प्रश्न है किन्तु एकर विवेचनला बड़ी समय चाही । एहाँ ऊ प्रक्रिया पर तनीसुन विचार कर लेल आवश्यक है जेकर रूपरेखा हमनीके [[पतञ्जलि]]के सूत्रमे भेट है । तनीमनी शब्दभेदसे ई प्रक्रिया ऊ सब समुदायके मान्य है जे योगके अभ्यासके समर्थन कर हथिन । ===परिभाषा=== *(१) [[योगसूत्र|पातञ्जल योग दर्शन]]के अनुसार - '''योगश्चित्तवृतिनिरोधः''' (१/२) अर्थात् चित्तके वृत्तिके निरोधे योग है । *(२) [[साङ्ख्य दर्शन]]के अनुसार - '''पुरुषप्रकृत्योर्वियोगेपि योगइत्यमिधीयते ।''' अर्थात् पुरुष एवं प्रकृतिके पार्थक्यके स्थापित करके पुरुषके स्वरूपमे अवस्थित होइले योग है । *(३) [[विष्णुपुराण]]के अनुसार - '''योगः संयोग इत्युक्तः जीवात्म परमात्मने''' अर्थात् जीवात्मा एवं परमात्माके पूर्णतया मिलने योग है । *(४) [[भगवद्गीता]]के अनुसार - '''सिद्धासिद्धयो समोभूत्वा समत्वं योग उच्चते''' (२/४८) अर्थात् दुःख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत आउ उष्ण आदि द्वन्दमे सर्वत्र समभाव रखल योग है । *(५) [[भगवद्गीता]]के अनुसार - '''तस्माद्दयोगाययुज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्''' अर्थात् कर्त्तव्य कर्म बन्धक न होवे एहीसे निष्काम भावनासे अनुप्रेरित होके कर्त्तव्य करेके कौशल योग है । *(६) [[आचार्य हरिभद्र]]के अनुसार - '''मोक्खेण जोयणाओ सव्वो वि धम्म ववहारो जोगो''' अर्थात् [[मोक्ष]]से जोड़ेवाला सब व्यवहार योग है । *(७) [[बौद्धधर्म]]के अनुसार - '''कुशल चितैकग्गता योगः''' अर्थात् कुशल चित्तके एकाग्रता योग है । भारतीय दार्शनिक आउ धार्मिक परम्परामे "योग" शब्दके अलगे-अलगे विधिसे परिभाषित कैल गेलै हे । {| class="wikitable" |- ! मूल ग्रन्थ !! अनुमानित रचना-काल !! योगके परिभाषा |- |''[[मैत्रायणी उपनिषद]]'' | लगभग चतुर्थ शताब्दी ईसापूर्व | ''कत्वं प्राणमनसोरिन्द्रियाणां तथैव च ।'' <br>''सर्वभाव परित्यागो योग इत्यभिधीयते ॥'' -- मैत्रायणी उपनिषद् 6/25 <br>अर्थात् प्राण, मन एवं इन्द्रियके एक हो जाएल, एकाग्रावस्थाके प्राप्त कर लेल, बाह्म विषयसे विमुख होके इन्द्रियके मनमे आउ मन आत्मामे लग जाएल, प्राणके निष्चल हो जाएल योग है । |- | [[वैशेषिक सूत्र]] | लगभग चौथा शताब्दी ईसा पूर्व | ''तदनारम्भ आत्मस्ये मनसि शरीरस्य दुःखाभावः संयोगः ।'' -- वैशेषिक सूत्र ६/२/१६<br> अर्थात् मन आत्मामे स्थिर होवे पर ओकर (मनके) कार्यके अनारम्भ है, ऊ योग है । |- | ''[[कठोपनिषद]]'' | ईसा पूर्वके अन्तिम शताब्दी | ''यदा पञ्चावतिष्ठन्ते ज्ञानानि मनसा सह ।''<br>''बुद्धिश्च न विचेष्टते तामाहुः परमां गतिम् ॥''<br>''तां योगमिति मन्यन्ते स्थिरामिन्द्रियधारणाम्‌ ।''<br>''अप्रमत्तस्तदा भवति योगो हि प्रभवाप्ययौ ॥'' -- कठोपनिषद ६ / १०-११, नचिकेता आउ यमके बीच संवाद<br>जखनि मनके साथे समस्त ज्ञानेन्द्रिय भलीभाँति स्थिर हो जा है आउ बुद्धियोके कोनो चेष्टा न रहै तखनि ई अवस्थाके परमागति कहल जा है । ओही स्थिर इन्द्रिय-धारणाके योग कहल जा है । ऊ अवस्थामे साधक प्रमाद रहित होव है । काहेकि 'योग' एही पदार्थके उद्भव एवं लय (प्रभवाव्ययौ) दुनहीँ है । |- | ''[[भगवद्गीता]]'' | लगभग दोसर शताब्दी ईसा पूर्व | "सफलता आउ असफलता दुनोमे समभाव (एक समान) रहल । ऐसन समते योग कहला है ।" (२.४८) "कर्ममे कुशलते योग है ।" (२.५०) "ई जानथिन कि जेकरा योग कहल जा है, ऊ दुःखके संयोगसे वियोग (दुःखसे मुक्ति) है ।" (६.२३) |- | ''[[पतञ्जलि योगसूत्र]]'' | लगभग प्रारम्भिक शताब्दी ईस्वी | १.२. ''योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः'' – "चित्तके वृत्तिके रुक जाएले योग है ।" १.३. तखनि [[पुरुष (साङ्ख्य)|पुरुष]] |- | ''योगभाष्य'' | योगसूत्रके समाने | ''योगः समाधिः'' - "समाधिए योग है," जे [[एकाग्रता]] आउ ''निरुद्ध'' मने विषय-रहित [[समाधि]] (''असम्प्रज्ञात समाधि'') के सन्दर्भित कर है । |- | ''[[योगाचारभूमि-शास्त्र]] (श्रावकभूमि)'', एक [[महायान]] बौद्ध [[योगाचार]] ग्रन्थ | चौथा शताब्दी ईस्वी | | "योग चार प्रकारके है - श्रद्धा (विश्वास), आकांक्षा, दृढ़ता आउ उपाय ।" (२.१५२) |- | [[पाशुपत सूत्र]] पर कौण्डिन्यके ''पञ्चार्थभाष्य'' | चौथा शताब्दी ईस्वी | "ई प्रणालीमे जीवात्मा आउ ईश्वर (प्रभु) के मिलने योग है ।" (१.१.४३) |- | [[हरिभद्र सूरी]] द्वारा रचित एक [[जैन ग्रन्थ]] | छठा शताब्दी ईस्वी | "दृढ़ विश्वासके साथे योगीके स्वामि हमनीके सिद्धान्तमे योगके सम्यक् ज्ञानसे शुरू होवेवाला तीनो [सम्यक् ज्ञान, सम्यक् दर्शन आउ सम्यक् चारित्र] के संयोग (''सम्बन्धः'') के रूपमे परिभाषित कैलन हे काहेकि [एकरासे] [[मोक्ष]]के साथे जुड़ाव होव है.... सामान्य बोलचालमे ई [योग] शब्द एकर कारणके साथे [आत्माके] सम्पर्कोके दर्शाव है काहेकि कार्यला कारणके उपयोग सामान्य है ।" (२, ४) |- | ''[[लिङ्ग पुराण]]'' | ७मा–१०मा शताब्दी ईस्वी | " 'योग' शब्दसे तात्पर्य [[निर्वाण]]से है जे [[शिव]]के स्थिति है ।" (१.८.५ए) |- | [[आदि शङ्कराचार्य]]के ''[[ब्रह्मसूत्र]]-भाष्य'' | लगभग ८मा शताब्दी ईस्वी | "योगके ग्रन्थमे कहल गेलै है: 'योग वास्तविकता (तत्त्व) के जानेके साधन है' (''अथ तत्त्वदर्शनभ्युपायो योगः'')" (२.१.३) |- | ''मालिनीविजयोत्तर तन्त्र'', अद्वैत [[कश्मीर शैव दर्शन]]के प्राथमिक ग्रन्थमे से एक | ६ठा–१०मष शताब्दी ईस्वी | "एक सत्ताके दोसर सत्ताके साथ एक हो जाएल योग कहल जा है ।" (४.४-८) |- | [[शैव सिद्धान्त]]के विद्वान नारायणकण्ठके ''मृगेन्द्रतन्त्रवृत्ति'' | ६ठा–१०मा शताब्दी ईस्वी | "आत्म-नियन्त्रण (स्वामित्व) प्राप्त कैले योगी होएल है । योगी शब्दके अर्थ है 'ऊ जे अनिवार्य रूपसे अपन स्वरूपके अभिव्यक्ति... शिव-त्व (''शिवत्वम्'') से संयुक्त' होवे ।" |- | लक्ष्मणदेशिकेन्द्रके ''शारदातिलक'', एक [[शाक्त धर्म]] | ११मा शताब्दी ईस्वी | "योगके विशेषज्ञ कह हथ जीवात्माके [[आत्मा]] |- | ''[[योगबीज]]'', एक [[हठयोग]] ग्रन्थ | १४मा शताब्दी ईस्वी | "[[अपान]] आउ प्राण, अपन स्वयं के [[रज]] आउ वीर्य, सूर्य आउ चन्द्रमा, जीवात्मा आउ परमात्माके मिलन आउ एही प्रकार सब द्वन्द्वके मिलन योग कहला है ।" (८९) |} == योगके इतिहास == [[सञ्चिका:Shiva Pashupati.jpg|300px|thumb|right|मोहनजोदड़ो-हड़प्पासे प्राप्त मोहरमे योगमुद्रा]] {{मुख्य|योगके इतिहास}} [[वेद|वैदिक]] [[संहिता]]के अन्तर्गत तपस्वी ''तपस (संस्कृत)'' के बारेमे ([[ब्राह्मण|(कल ब्राह्मण)]]) प्राचीन कालसे वेदमे (१९०० से १५०० ईपू) उल्लेख भेट है जखनिकि तापसिक साधनाके समावेश प्राचीन वैदिक टिप्पणीमे प्राप्त है ।<ref name="Flood, p. 94">[21] ^फ्लड, पी. 94.</ref> ढेर मूर्ती जे सामान्य योग या [[समाधि]] मुद्राके प्रदर्शित कर है [[सिन्धुघाटी सभ्यता]] (३३००-१७०० ईपू) के स्थान पर प्राप्त होलै हे । पुरातत्त्वज्ञ ग्रेगरी पोस्सेह्लके अनुसार "ई सब मूर्ति योगके धार्मिक संस्कार" के योगसे सम्बन्धके सङ्केत कर है ।<ref>[22] ^ पोस्सेह्ल (2003), पीपी. 144-145</ref> यद्यपि ई बातके निर्णयात्मक सबूत न है तैयो अनेक पण्डितके रायमे सिन्धुघाटी सभ्यता आउ योग-[[ध्यान]]मे सम्बन्ध है ।<ref>देखथिन: * [[योनातान मार्क केनोयेर|जोनाथन मार्क केनोयेरएक]] मूर्तीके "योग मुद्रामे बैठल" ऐसन वर्णन कर है । [http://www.harappa.com/indus/33.html जोनाथन मार्क केनोयेर द्वारा लिखब, "अरौण्ड द इण्डस इन ९० स्लाइड्स". ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090323041459/http://www.harappa.com/indus/33.html|date=23 मार्च 2009}} * केरल वेर्नर लिख है " पुरातात्विक खोज हमनीके अनुमान करेके समर्थन कर है कि आर्य [[भारत]]के पूर्वके लोग योगशास्त्रके क्रियासे परिचित हलन". {{cite book|url=http://books.google.com/books?id=c6b3lH0-OekC&pg=PA103|title=Yoga and Indian Philosophy|last=Werner|first=Karel|date=1998|publisher=Motilal Banarsidass Publ.|isbn=9788120816091|page=103}}[23] * [[हेन्रीच जिम्मर]] एक मुद्रामे "योगमुद्रा" के वर्णन कर है । {{cite book|url=https://archive.org/details/mythssymbolsindi00zimm|title=Myths and Symbols in Indian Art and Civilization|last=Zimmer|first=Heinrich|publisher=Princeton University Press, New Ed edition|year=1972|ISBN=978-0691017785|page=[https://archive.org/details/mythssymbolsindi00zimm/page/n182 168]}} * [[थोमस म्क्विल्ले]] लिख हथिन कि "ई छौ रहस्यमय सिन्धुघाटी मुद्राके छविमे जे उत्कीर्ण मूर्ति है ओकरामे हठयोगके ''मूलबन्धासन '' नामके आसन या ओकरासे मिलित जुलित ''उत्कटासन '' या ''बद्धा कोनासना '' प्रदर्शित है । {{cite book|url=http://books.google.com/books?id=Vpqr1vNWQhUC&pg=PA219|title=The shape of ancient thought|last=McEvilley|first=Thomas|date=2002|publisher=Allworth Communications|isbn=9781581152036|pages=219-220}} * डॉ॰ फरजन्द मसीह, पञ्जाब विश्वविद्यालयके पुरातत्व विभागके अध्यक्ष हालेमे प्राप्त एगो मुद्राके वर्णन एक योगीके रूपके कह हथिन । [http://www.dawn.com/2007/05/08/nat7.htm अपूर्व वस्तुके खोज खण्डहरमे निहित खजाना दने सङ्केत कर है । ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20100215133034/http://www.dawn.com/2007/05/08/nat7.htm|date=15 फरवरी 2010}} * गेविन फ्लड, "पशुपति सील" जेकि अन्य सीलमे से एक है, के बारेमे विवाद करित लिख है कि ई रूप एक योग मुद्रामे बैठल व्यक्तिके स्पष्ट न लगै या ई एगो मानव आकृतिके प्रतिनिधित्व करित लग है । फ्लड, पीपी. 28-29 . * पशुपति सीलके बारेमे जियोफ्रे सामुएलके मानल है कि "वास्तवमे हमनीके ई स्पष्ट न है कि ई मूर्ति कोनो नारी या पुरुष केकर व्याख्या कर है".{{cite book|url=http://books.google.com/books?id=JAvrTGrbpf4C&pg=PA4|title=The Origins of Yoga and Tantra|last=Samuel|first=Geoffrey|date=2008|publisher=Cambridge University Press|isbn=9780521695343|page=4}}[26]</ref> [[ध्यान]]मे उच्च चैतन्यके प्राप्त करेके रीतिके विकास श्रमानिक परम्परा द्वारा एवं उपनिषद् के परम्परा द्वारा विकसित होलै हल ।<ref>[27] ^ फ्लड, पीपी. 94-95.</ref> बुद्धके पूर्व एवं प्राचीन ब्रह्मिनिक ग्रन्थमे [[ध्यान]]के बारेमे कोनो ठोस सबूत न भेट है । बुद्धके दु शिक्षकके ध्यानके लक्ष्यके प्रति कहल वाक्यके आधार पर वय्न्न ई तर्क कर है कि निर्गुण ध्यानके पद्धति ब्रह्मिन परम्परासे निकललै एहीसे उपनिषद् के [[सृष्टि]]के प्रति कहल कथनमे एवं ध्यानके लक्ष्यला कहल कथनमे समानता है ।<ref>[28] ^ अलेक्जेण्डर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 51.</ref> ई सम्भावित होहु सक है, नहियो.<ref>[29] ^ अलेक्जेण्डर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 56.</ref> उपनिषदमे [[ब्रह्माण्ड]] सम्बन्धी बयानके वैश्विक कथनमे कोनो [[ध्यान]]के रीतिके सम्भावनाके प्रति तर्क देइत कहल जा है कि [[नासदीय सूक्त]] कोनो [[ध्यान]]के पद्धति दने [[ऋग्वेद]]से पूर्वो इशारा कर है ।<ref>[30] ^ अलेक्जेण्डर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ बुद्धिस्ट मेडिटेशन । रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 51 ।</ref> [[हिन्दु]] ग्रन्थ आउ [[बौद्ध]] ग्रन्थ प्राचीन ग्रन्थमे से एक है जेकरामे ध्यान तकनीकके वर्णन प्राप्त होव है ।<ref>[31] ^ [[रिचर्ड गोम्ब्रिच]], ''थेरवाद बौद्ध धर्म: ए सोशल हिस्ट्री फ्रॉम एन्सिएण्ट बनारस टू माडर्न कोलम्बो ।'' रौतलेड्ग आउ केगन पॉल, 1988, पृष्ठ 44 ।</ref> ओखनी ध्यानके प्रथा आउ अवस्थाके वर्णन कर है जे बुद्धसे पहिले अस्तित्वमे हलै आउ साथे ऊ सब प्रथाके वर्णन कर है जे पहिले बौद्धधर्मके भीतरे विकसित होलै ।<ref>[32] ^ अलेक्जेण्डर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ बुद्धिस्ट मेडिटेशन । रौटलेड्ज 2007, पृष्ट 50 ।</ref> हिन्दु वाङ्मयमे "योग" शब्द पहिले कथा उपनिषदमे प्रस्तुत होलै जने ज्ञानेन्द्रियके नियन्त्रण आउ मानसिक गतिविधिके निवारणके अर्थमे प्रयुक्त होलै हे जे उच्चतम स्थिति प्रदान करेवाला मानल गेलै हे ।<ref>[33] ^ फ्लड, पी. 95 । विद्वान कथा उपनिषदके पूर्व बौद्धत्वके साथे सूचीबद्ध न करथिन । उदाहरणला हेल्मथ वान ग्लासेनप्प देख सक हथिन, 1950 कार्यवाहीके "अकादेमी देर विस्सेन्स्चाफ्तेँ," लितेरातुर अण्ड से [http://www.accesstoinsight.org/lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html http://www.accesstoinsight.org/ lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html.] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130204142029/http://www.accesstoinsight.org/lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html |date=4 फरवरी 2013 }} कुछ लोग कह हथिन कि ई पद बौद्ध है, उदाहरण हाजिम नाकामुरा के ए हिस्ट्री ऑफ एअर्ली वेदान्त फिलोसोफी, फिलोसोफी ईस्ट अण्ड वेस्ट, वोल. 37, अङ्क. 3 (जुलाई 1987) जेकरा अरविन्द शर्मा समीक्षा करलथिन हे, पीपी 325-331 । पाली शब्द "योग" के प्रयोग करेके एक व्यापक जाँचला पूर्व बौद्ध ग्रन्थमे देखथिन, थोमस विलियम र्ह्य्स डेविड, विलियम स्टेड, ''पाली-इङ्ग्लिश शब्दकोष'' मोतीलाल बनारसीदास पुब्ल द्वारा डालथिन, 1993, पृष्ठ 558: [http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&amp;pg=RA1-PA558&amp;dq=yoga+pali+term&amp;lr=#PRA1-PA558,M1 http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&amp;pg=RA1-PA558&amp;dq=yoga+pali+ term&amp;ir = # PRA1 lr-PA558, M1.] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20150322083352/http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&pg=RA1-PA558&dq=yoga+pali+term&lr=#PRA1-PA558,M1 |date=22 मार्च 2015 }} धम्मपदामे "आध्यात्मिक अभ्यास" के अर्थमे ई शब्दके प्रयोगला देखथिन गिल फ्रोन्स्दल, दी धम्मपदा, शम्भाला, 2005, पृष्ठ 56, 130 देखथिन ।</ref> महत्वपूर्ण ग्रन्थ जे योगके अवधारणासे सम्बन्धित है ऊ मध्यकालीन [[उपनिषद्]], [[महाभारत]], [[भगवद्गीता]] (२०० ईपू) एवं [[पतञ्जलि योगसूत्र]] (४०० ईपू) है । ==== पतञ्जलिके योगसूत्र ==== {{मुख्य|योगसूत्र}} [[भारतीय दर्शन]]मे षड् [[आस्तिक दर्शन|दर्शन]]मे से एकके नाम योग है ।<ref>छौ आस्तिक दर्शन सम्प्रदायके एक सिंहावलोकन ला समूह पर विस्तारके साथ देखथिन : राधाकृष्णन अएण्ड मूर, "सामग्री" आउ पीपी स्कूल ^४५३-४८७ ।</ref><ref> योग घरानाके एक संक्षिप्त सिंहावलोकन ला देखथिन: चटर्जी एण्ड दत्ता, पी ४३ ।</ref> योग दार्शनिक प्रणाली,[[साङ्ख्य]] स्कूलके साथे निकटतासे सम्बन्धित है ।<ref>दर्शन आउ सङ्ख्याके बीच घनिष्ठ सम्बन्धला देखथिन: चटर्जी एण्ड दत्ता, पी ४३ ।</ref> ऋषि [[पतञ्जलि]] द्वारा व्याख्यायित योग सम्प्रदाय साङ्ख्य मनोविज्ञान आउ तत्वमीमांसाके स्वीकार कर है किन्तु साङ्ख्य घरानाके तुलनामे अधिक आस्तिक है । ई प्रमाण है काहेकि साङ्ख्य वास्तविकताके पच्चीस तत्वमे ईश्वरीय सत्तो जोड़ल गेलै हे ।<ref>अवधारणाके योग स्वीकृतिला किन्तु भगवान् ला एक वर्गके जोड़ेके क्रियाके साथ देखथिन: राधाकृष्णन एण्ड मूर, पी ४५३ ।</ref><ref>साङ्ख्यके २५ सिद्धान्तके योग स्वीकार करेला देखथिन: चटर्जी एण्ड दत्त, पी ४३ ।</ref> योग आउ साङ्ख्य एक दोसरासे एतना मिल-जुल है कि मेक्स म्युल्लर कह है "ई दु दर्शन एतना प्रसिद्ध हलै कि एक दोसराके अन्तर समझेला एकके प्रभुके साथे आउ दोसरके प्रभुके बिन मानल जा है ।...."<ref>म्युलर (१८९९), अध्याय ७, "योग फिलोसोफी", पी १०४ ।</ref> साङ्ख्य आउ योगके बीच घनिष्ठ सम्बन्ध हेन्रीच जिम्मेर समझाव हथिन : <blockquote class="toccolours" style="float:none;padding:10px 15px 10px 15px;display:table"> ई दोनोके भारतमे जुड़वाके रूपमे मानल जा है जे एके विषयके दु पहलू है । साङ्ख्य एहाँ मानव प्रकृतिके बुनियादी सैद्धान्तिकके प्रदर्शन, विस्तृत विवरण आउ ओकर तत्वके परिभाषित, बन्धन ''(बन्धा)'' के स्थितिमे उनकर सहयोग करेके विधि, सुलझावटके समय अपन स्थितिके विश्लेषण या मुक्तिमे वियोजन [[मोक्ष]]के व्याख्या कैल गेलै हे । योग विशेष रूपसे प्रक्रियाके गतिशीलताके सुलझावेला उपचार कर है आउ मुक्ति प्राप्त करेके व्यावहारिक तकनीकके सिद्धान्त कर है अथवा 'अलगाव-एकीकरण'''(कैवल्य)'' के उपचार कर है ।<ref>जिम्मेर (1951), पी २८० ।</ref> </blockquote> पतञ्जलि व्यापक रूपसे औपचारिक योग दर्शनके संस्थापक मानल जा हथिन ।<ref>दार्शनिक प्रणालीके संस्थापक पतञ्जलि योगके ई रूप देलथिन, देखथिन : चटर्जी आउ पी० दत्त ४२ </ref> पतञ्जलि योग, बुद्धिके नियन्त्रणला एक प्रणाली है जेकरा [[राज योग]]के रूपमे जानल जा है ।<ref>मनके नियन्त्रणला एक तन्त्रके रूपमे "राजा योग" ला आउ एक महत्वपूर्ण कार्यके रूपमे पतण्जलिके योग सूत्रके साथे सम्बन्धला देखथिन: फ्लड (१९९६), पीपी ९६-९८ ।</ref> पतञ्जलि उनकर दुसर सूत्रमे "योग" शब्दके परिभाषित कर हथिन<ref name="yogasutrastext">{{cite web| last = Patañjali| first = | authorlink = Patanjali| author2 = | title = Yoga Sutras of Patañjali| work = | publisher = Studio 34 Yoga Healing Arts| date = 2001-02-01| url = http://www.studio34yoga.com/yoga.php#reading| format = [[etext]]| doi = | accessdate = 2008-11-24| archive-url = https://www.webcitation.org/61C1yPwVm?url=http://www.studio34yoga.com/classes#reading| archive-date = 25 अगस्त 2011| url-status = dead}}</ref> जे उनकर पूरा कामला व्याख्या सूत्र मानल जा है: <blockquote class="toccolours" style="float:none;padding:10px 15px 10px 15px;display:table">'''''योगः चित्त-वृत्ति निरोधः''' '' <br />- योग सूत्र 1.2</blockquote> ==योगके प्रसिद्ध ग्रन्थ== {| class="wikitable" |- ! ग्रन्थ !! रचयिता !! रचनाकाल/टिप्पणी |- | '''[[पतञ्जलि योगसूत्र|योगसूत्र]]''' || [[पतञ्जलि]] || ४०० ई पूर्व |- | '''[[योगभाष्य]]''' || [[वेदव्यास]] || द्वितीय शताब्दी |- | '''[[तत्त्ववैशारदी]]''' || [[वाचस्पति मिश्र]] || ८४१ ई |- |'''[[योगयाज्ञवल्क्य]]''' || [[याज्ञवल्क्य]] || सबसे पुरान संस्कृत पाण्डुलिपि ९मा-१०मष शताब्दीके है । |- | '''[[भोजवृत्ति]]''' || [[राजा भोज]] || ११मा शताब्दी |- | '''[[गोरक्षशतक]]''' || [[गुरु गोरख नाथ]] || ११मा-१२मा शताब्दी |- | '''[[योगचूडामण्युपनिषद]]''' || - || १४मा-१५मा शताब्दी (रिचर्ड रोसेन के अनुसार) |- | '''[[योगवार्तिक]]''' || [[विज्ञानभिक्षु]] || १६मा शताब्दी |- | '''[[योगसारसङ्ग्रह]]''' || विज्ञानभिक्षु || १६मा शताब्दी |- | '''[[हठयोगप्रदीपिका]]''' || [[स्वात्माराम|स्वामी स्वात्माराम]] || १५मा-१६मा शताब्दी |- | '''[[सूत्रवृत्ति]]''' || गणेशभावा || १७मा शताब्दी |- | '''[[योगसूत्रवृत्ति]]''' || [[नागेश भट्ट]]<ref>[https://kymyogavaisharadi.org/display/bhashya/vritti/devanagari नागोजीभट्ट कृत वृत्ति]</ref> || १७मा शताब्दी |- | '''[[शिवसंहिता]]''' || ऋषी आर्यवीर रुद्र || २५०० ई पूर्व |- | '''[[घेरण्डसंहिता]]''' || [[घेरण्ड मुनि]]|| १५०० ई पूर्व |- | '''[[हठरत्नावली]] || श्रीनिवास भट्ट || १७मा शताब्दी |- | '''[[मणिप्रभा]]''' || रामानन्द यति|| १८मा शताब्दी |- | '''[[सूत्रार्थप्रबोधिनी]]''' || नारायण तीर्थ || १८मा शताब्दी |- | '''[[जोगप्रदीपिका]]''' || जयतराम || १७३७ ई <br> ई हिन्दी, ब्रजभाषा, खड़ीबोलीके मिललजुलल भाषामे रचित है<br> आउ शब्दावली संस्कृतके अत्यन्त निकट है । |- | '''सचित्र योगसाधन''' || शिवमुनि || २०मा शताब्दी ; हिन्दीमे लिखित<ref>{{Cite web |url=https://www.shivmunisamaj.com/list-of-books-by-shivmuni |title=शिवमुनि महाराज का अमर साहित्य |access-date=31 दिसम्बर 2022 |archive-date=31 दिसम्बर 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20221231051935/https://www.shivmunisamaj.com/list-of-books-by-shivmuni |url-status=dead }}</ref> |- | '''[[योगदर्शनम्]]''' || [[स्वामी सत्यपति परिव्राजक]] || २१मा शताब्दी |} ==एकरो देखथिन== * [[योगके इतिहास]] * [[योग दर्शन]] * [[अष्टाङ्ग योग]] * [[योगसूत्र]] * [[हठयोग]] * [[जैनधर्ममे योग]] * [[अन्तर्राष्ट्रिय योग दिवस]] * [[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मान हथिन कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञानके दोसरा नाम है । ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == बाहरी कड़ी == {{विकिसूक्ति|योग}} * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् के ई जालस्थल पर योगके अनेक ग्रन्थ उपलब्ध है) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध लागि) *[https://sanskritdocuments.org/sanskrit/yoga/ योग सम्बन्धित ग्रन्थ] (देवनागरीमे) {{योग}} {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिन्दु दार्शनिक अवधारणा]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] 91k7xq61qhbr6hy6b2h8e8f9wos1gkv शाकिरा 0 18329 80518 2026-10-02T10:53:47Z ऐक्टिवेटेड् 76 ऐक्टिवेटेड् पन्ना [[शाकिरा]] के [[शकिरा]] पर स्थानान्तरित कैलन 80518 wikitext text/x-wiki #REDIRECT [[शकिरा]] 6tlfvjs2y7xfe3m1pcqrmccidju8wqi शकीरा 0 18330 80519 2026-10-02T10:56:02Z ऐक्टिवेटेड् 76 [[शकिरा]] के पुनर्निर्देशित 80519 wikitext text/x-wiki #REDIRECT [[शकिरा]] 6tlfvjs2y7xfe3m1pcqrmccidju8wqi सकीरा 0 18331 80520 2026-10-02T10:56:04Z ऐक्टिवेटेड् 76 [[शकिरा]] के पुनर्निर्देशित 80520 wikitext text/x-wiki #REDIRECT [[शकिरा]] 6tlfvjs2y7xfe3m1pcqrmccidju8wqi सकिरा 0 18332 80521 2026-10-02T10:56:06Z ऐक्टिवेटेड् 76 [[शकिरा]] के पुनर्निर्देशित 80521 wikitext text/x-wiki #REDIRECT [[शकिरा]] 6tlfvjs2y7xfe3m1pcqrmccidju8wqi रोमान्सभाषा 0 18333 80524 2026-10-02T11:00:43Z ऐक्टिवेटेड् 76 ऐक्टिवेटेड् पन्ना [[रोमान्सभाषा]] के [[रोमान्स भाषा]] पर स्थानान्तरित कैलन 80524 wikitext text/x-wiki #REDIRECT [[रोमान्स भाषा]] mqo29xrrynin4e2hl2olfv77hos6poi श्रेणी:पुर्तगालीभाषा 14 18334 80526 2026-10-02T11:00:48Z ऐक्टिवेटेड् 76 ऐक्टिवेटेड् पन्ना [[श्रेणी:पुर्तगालीभाषा]] के [[श्रेणी:पुर्तगाली भाषा]] पर स्थानान्तरित कैलन 80526 wikitext text/x-wiki #REDIRECT [[:श्रेणी:पुर्तगाली भाषा]] 98ta138y9gnrmudfbsz7i45slppmcqf श्रेणी:रोमान्सभाषा 14 18335 80528 2026-10-02T11:01:03Z ऐक्टिवेटेड् 76 ऐक्टिवेटेड् पन्ना [[श्रेणी:रोमान्सभाषा]] के 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