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रामायण
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{{About|संस्कृत महाकाव्य}}
{{Infobox religious text
| name = रामायण
| image = Rāma slays Rāvaṇa.png
| alt = रामायण
| caption = राम द्वारा रावणके वध, एगो शाही मेवाड़ पाण्डुलिपिसे, १७मा शताब्दी
| language = [[संस्कृत]]
|religion = [[हिन्दुधर्म]]
|author = [[वाल्मीकि]]
|श्लोक=२४,०००
}}
{{सन्दूक हिन्दुधर्म}}
{{हिन्दु शास्त्र आउ ग्रन्थ}}
''' रामायण''' ([[संस्कृत]] : ''रामायणम्'' = राम + आयणम् ; शाब्दिक अर्थ : 'रामके जीवन-यात्रा'), [[वाल्मीकि]] द्वारा रचित [[संस्कृत]] [[महाकाव्य]] हे जेकरामे [[श्रीराम]]के गाथा हे । एकरा [[आदिकाव्य]]<ref>'रामायणमादिकाव्यम्', श्रीस्कन्दपुराणे उत्तरखण्डे रामायणमाहात्म्ये- १-३५ तथा ५-६१, श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण भाग-१, गीताप्रेस गोरखपुर, संस्करण-१९९६ ई०, पृष्ठ-९ एवं २५.</ref> आउ एकर रचयिता महर्षि वाल्मीकिके 'आदिकवि'यो<ref>ध्वन्यालोकः, १-५ (कारिका एवं वृत्ति) तथा ४-५ (वृत्ति), ध्वन्यालोक, हिन्दी व्याख्याकार- आचार्य विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि, ज्ञानमंडल लिमिटेड, वाराणसी, संस्करण-१९८५ ई०, पृष्ठ-२९-३० एवं ३४५ तथा ध्वन्यालोकः (लोचन सहित) हिन्दी अनुवाद- जगन्नाथ पाठक, चौखम्बा विद्याभवन, वाराणसी, संस्करण-२०१४, पृष्ठ-८६ एवं ८९ तथा पृ०-५७०.</ref> कहल जाहे ।
संस्कृत साहित्य परम्परामे [[रामायण]] आउ [[महाभारत]]के [[इतिहास]] कहल गेलैहे आउ दूनो सनातन संस्कृतिके सबसे प्रसिद्ध आउ लोकप्रिय ग्रन्थ हे । रामायणके सात अध्याय हे जे [[काण्ड]]के नामसे जानल जाहे । एकरामे कुल लगभग २४,००० [[श्लोक]]{{Ref_label|24000 श्लोक|ख|none}} हे । सतमा उत्तरकाण्ड प्रक्षिप्त हे, तत्वमार्तण्डोमे उत्तरकाण्डके प्रक्षिप्त मानल गेलैहे ।<ref>{{Cite book|url=https://www.google.co.in/books/edition/Sarasvat%C4%AB/UGIjAQAAIAAJ?hl=en|title=Sarasvatī|last=Presa|first=Iṇḍiyana|publisher=the University of California|year=1969|volume=70|pages=417}}</ref> ओकरा बादके संस्कृत आउ अन्य भारतीयभाषाके साहित्य पर ई महाकाव्यके बड्डी प्रभाव हे आउ रामकथाके लेके अनेक 'रामायण' रचल गेलै ।
== रचनाकाल ==
मान्यतानुसार रामायणके समय [[त्रेतायुग]]के मानल जा है। गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य श्री निश्चलानन्द सरस्वती प्रभृति सन्तके अनुसार श्रीराम अवतार [[कल्प|श्वेतवाराह कल्प]]के सतमा [[वैवस्वत मनु|वैवस्वत]] [[मन्वन्तर]] के चौबीसमा त्रेता युगमे होलै हल जेकर अनुसार श्रीरामचन्द्र जी के काल लगभग पौना दु करोड़ वर्ष पूर्व के है । एकर सन्दर्भमे विचार पीयूष, भुशुण्डि रामायण, पद्मपुराण, हरिवंश पुराण, वायु पुराण, सञ्जीवनी रामायण एवं पुराणसे प्रमाण देल जा है ।
ई महाकाव्यके ऐतिहासिक विकास आउ संरचनागत परतके जानेला ढेर प्रयास कैल गेलै हे । आधुनिक विद्वान एकर रचनाकाल ७मासे ४मा शताब्दी ईसा पूर्व मानऽ हथिन । कुछ विद्वान त एकरा तीसरा शताब्दी ई तकके रचना मानऽ हथिन ।<ref>{{Cite web|url=https://mumbaimirror.indiatimes.com/news/india/was-ram-born-in-ayodhya/articleshow/77380259.cms|title=Was Ram born in Ayodhya|first=Devdutt|last=Pattanaik|website=mumbaimirror| date=8 August 2020}}</ref> कुछ भारतीय कहऽ हैथिन कि ई ६०० ईपू से पहिले लिखल गेलै ।<ref name="BP">{{स्रोत किताब |last= सिंह|first= बी.पी.|editor= [[गोविन्द चन्द्र पाण्डे]]|others= |title= Life, Thought and Culture of India — “The Valmiki Ramayana: A Study”|year= 2001|publisher= Centre of Studies in Civilizations, नई दिल्ली|isbn= 81-87586-07-0}}</ref> ओकर पीछे तर्क ई है कि [[महाभारत]], [[बौद्धधर्म]]के बारेमे मौन है जखनकि ओकरामे [[जैन]], [[शैव]], [[पाशुपत]] आदि अन्य परम्पराके वर्णन है ।<ref>{{Cite web|url=https://amp.scroll.in/article/905466/how-did-the-ramayana-and-mahabharata-come-to-be-and-what-has-dharma-got-to-do-with-it|title=How did the ‘Ramayana’ and ‘Mahabharata’ come to be (and what has ‘dharma’ got to do with it)?}}</ref> महाभारत, रामायणके पश्चात् रचित है, अतः रामायण [[गौतम बुद्ध]]के कालके पूर्वके होवेके चाही । भाषा-शैलीके अनुसारो रामायण, [[पाणिनि]]के समयसे पहिलेके होवेके चाही ।
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{| align="center" style="border-collapse:collapse;border-style:none;background-color:transparent;max-width:40em;width:80%;"
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| valign="top" style="padding:0 1em;" | {{{1| रामायणके पहिला आउ अन्तिम काण्ड सम्भवतः बादमे जोड़ल गेलै हल । अध्याय दुसे सात तक ज्यादातर ई बात पर बल देल जा है कि राम [[विष्णु]]{{Ref_label|विष्णु|ग|none}} के अवतार हलथिन । कुछ लोगके अनुसार ई महाकाव्यमे यूनानी आउ ढेर अन्य सन्दर्भसे पता चलऽहै कि ई पुस्तक दोसरा सदी ईसा पूर्व से पहिले के न हो सकऽहै पर ई धारणा विवादास्पद है । ६०० ई०पू० से पहिलेके समय एहुसे ठीक है कि [[जातक कथा|बौद्ध जातक]] रामायणके पात्रके वर्णन करऽहै जखनकि रामायणमे जातकके चरित्रके वर्णन न है ।<ref name="BP"/> }}}
| valign="bottom" style="color:{{{color|silver}}};font-size:{{{size|3.6em}}};font-family:serif;font-weight:bold;text-align:right;padding:10px 0;" | „
|}
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== सङ्क्षेपमे रामायण-कथा ==
हिन्दु शास्त्रके अनुसार भगवान् राम, [[विष्णु]]के मानव अवतार हलथिन । ई अवतारके उद्देश्य मृत्युलोकमे मानवजातिके आदर्श जीवनला मार्गदर्शन देल हलै । अन्ततः श्रीराम राक्षस {{Ref_label|आचार्य|च|none}}के राजा [[रावण]]के वध कैलथिन आउ धर्मके पुनर्स्थापना कैलथिन ।
रामायणमे सात काण्ड है - बालकाण्ड, अयोध्यकाण्ड, अरण्यकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, लङ्काकाण्ड आउ उत्तरकाण्ड ।
=== बालकाण्ड ===
{{Main|बालकाण्ड}}
[[अयोध्या]] नगरीमे [[दशरथ]] नामके राजा होलथिन जिनकर [[कौशल्या]], [[कैकेयी]] आउ [[सुमित्रा]] नामक पत्नी सब हलथिन । सन्तान प्राप्ति हेतु अयोध्यापति दशरथ अपन गुरु श्री [[वशिष्ठ]]के आज्ञासे [[पुत्रकामेष्टि]] [[यज्ञ]] करौलन<ref>‘रामचरितमानस’, टीकाकार: हनुमानप्रसाद पोद्दार, प्रकाशक एवं मुद्रक: गीताप्रेस, गोरखपुर पृष्ठ १६३</ref> जेकरा [[ऋङ्गी ऋषि]] सम्पन्न कैलन ।
[[सञ्चिका:God emerge from fire give food to Dasratha.jpg|thumb|देवदूत द्वारा दशरथके खीर देल, चित्रकार हुसैन नक्काश आउ बासवान, अकबरके जयपुर रामायणसे]]
भक्तिपूर्ण आहुतिसब पाके [[अग्निदेव]] प्रसन्न होलन आउ ऊ स्वयं प्रकट होके राजा दशरथके हविष्यपात्र ([[खीर]], [[पायस]]) देलथिन जेकरा कि ऊ अपन तीनो पत्निमे बाँट देलन । खीरके सेवनके परिणामस्वरूप कौशल्याके गर्भ से रामके, कैकेयीके गर्भसे [[भरत]]के आउ सुमित्राके गर्भसे [[लक्ष्मण]] आउ [[शत्रुघ्न]]के जनम होलै ।
[[सञ्चिका:Ravi Varma-Rama-breaking-bow.jpg|thumb|right|300px|सीता स्वंयवर (चित्रकार: [[रवि वर्मा]])]]
राजकुमार सबके बड़ होवे पर [[आश्रम]]के राक्षससे रक्षा हेतु ऋषि [[विश्वामित्र]] राजा दशरथ से राम आउ लक्ष्मणके माङ्गके अपन साथ ले गेलन । राम [[ताड़का]] आउ [[सुबाहु]] नियन राक्षस सबके मार देलन आउ [[मारीच]]के बिन फलवाला [[बाण]]<ref>‘रामचरितमानस’, टीकाकार: हनुमानप्रसाद पोद्दार, प्रकाशक एवं मुद्रक: गीताप्रेस, गोरखपुर पृष्ठ १८०</ref> से मारके समुद्रके पार भेज देलन । ओन्ने लक्ष्मण राक्षस सबके सब सेनाके संहार कर दलन । [[धनुषयज्ञ]] हेतु राजा [[जनक]]के निमन्त्रण मिले पर [[विश्वामित्र]] राम आउ लक्ष्मणके साथे उनकर नगरी [[मिथिला]] ([[जनकपुर]]) आ गेलन । रस्तैयामे राम [[गौतम]] मुनिके स्त्री [[अहल्या]]के उद्धार कैलन । मिथिलामे आके जखनी राम शिवधनुषके देखके उठावेके प्रयत्न करे लगलन तखनी ऊ बीचेसे टूट गेलै आउ [[जनकप्रतिज्ञा]]के अनुसार राम सीतासे विवाह कैलन । राम आउ सीताके विवाहके साथे साथे गुरु वशिष्ठ भरतके [[माण्डवी]]से, लक्ष्मणके [[उर्मिला]]से आउ शत्रुघ्नके [[श्रुतकीर्ति]]से करवा देलन ।<ref>‘वाल्मीकीय रामायण’, प्रकाशक: देहाती पुस्तक भण्डार, दिल्ली पृष्ठ ९२-९३</ref>
=== अयोध्याकाण्ड ===
{{Main|अयोध्याकाण्ड}}
रामके विवाहके कुछ समय पश्चात् राजा दशरथ रामके [[राज्याभिषेक]] कैल चाहलन । तखनि मन्थरा,जे कैकेयीके दासी हलै, ऊ कैकेयीके बुद्धिके फेर देलकै । मन्थराके सलाहसे कैकेयी [[कोपभवन]]मे चल गेलै । दशरथ जखनि मनावे ऐलन त कैकेयी उनकासे वरदान<ref>‘वाल्मीकीय रामायण’, प्रकाशक: देहाती पुस्तक भण्डार, दिल्ली पृष्ठ 120-128</ref> माङ्गलन कि भरतके राजा बनावल जाये आउ रामके चौदह वर्षला वनवासमे भेज देल जाये ।
रामके साथे सीता आउ लक्ष्मणो वन चल गेलन । [[ऋङ्गवेरपुर]]मे [[निषादराज]] [[गुह]] तीनोके बड़ी सेवा कैलक । कुछ आनाकानी करेके बाद [[केवट]] तीनोके [[गङ्गा]] नदीके पार उतारकै । [[प्रयाग]] पहुँचके राम [[भारद्वाज ऋषि|भारद्वाज]] मुनिसे भेँट कैलन । ओहाँसे राम [[यमुना]] स्नान करित वाल्मीकि ऋषिके आश्रम पहुँचलन । वाल्मीकिसे भेल मन्त्रणाके अनुसार राम, सीता आउ लक्ष्मण [[चित्रकूट]]मे निवास करे लगलन ।
अयोध्यामे पुत्रके वियोगके कारण दशरथके स्वर्गवास हो गेलै । वशिष्ठ भरत आउ शत्रुघ्नके उनकर ननिहालसे बोलवा लेलन । वापिस आवे पर भरत अपन माता कैकेयीके, ओकर कुटिलताला बड़ी भर्तस्नाके आउ गुरुजनके आज्ञानुसार दशरथके [[अन्त्येष्टि क्रिया]] कर देलन । भरत अयोध्याके राज्यके अस्वीकार कर देलन आउ रामके मनाके वापिस लावेला समस्त स्नेहीजनके साथे चित्रकूट चल गेलन । कैकेयियोके अपन कैल पर अत्यन्त पश्चाताप भेल । भरत आउ अन्य सब लोग रामके वापस अयोध्या जाके राज्य करेके प्रस्ताव रखलन जेकरा कि राम, पिताके आज्ञा पालन करे आउ [[रघुवंश]]के रीति निभावेला, अमान्य कर देलन ।
भरत अपन स्नेही जनके साथे रामके पादुकाके साथे लेके वापिस अयोध्या आ गेलन । ऊ रामके पादुकाके राज सिंहासन पर विराजित कर देलन आउ स्वयं नन्दिग्राममे निवास करे लगलन ।<ref>‘रामचरितमानस’, टीकाकार: हनुमानप्रसाद पोद्दार, प्रकाशक एवं मुद्रक: गीताप्रेस, गोरखपुर पृष्ठ 554-557</ref>
=== अरण्यकाण्ड ===
{{Main|अरण्यकाण्ड}}
कुछ कालके पश्चात् [[राम]] चित्रकूटसे प्रयाण कैलन आउ ऊ [[अत्रि]] ऋषिके आश्रम पहुँचलन । अत्रि रामके स्तुतिके आउ उनकर पत्नी [[अनसूया]] [[सीता]]के [[पातिव्रत धर्म]]के मर्म समझौलन । ओहाँसे फिर राम आगे प्रस्थान कैलन आउ [[शरभंग]] मुनिसे भेँट कैलन । शरभङ्ग मुनि केवल रामके दर्शनके कामना से ओहाँ निवास कर रहथिन हल अतः रामके दर्शनके अपन अभिलाषा पूर्ण हो जायेसे योगाग्निसे अपन शरीरके जरा देलन आउ [[ब्रह्मलोक]]के गमन कैलन । आअ आगे बढ़े पर रामके स्थान स्थान पर हड्डी सबके ढेर लौकलै जिनकर विषयमे मुनि सब रामके बतौलन कि राक्षस अनेक मुनिके खा गेलै हे आउ उहे सब मुनिके हड्डी है । ई पर राम प्रतिज्ञा कैलन कि ऊ समस्त राक्षसके वध करके पृथ्वीके [[राक्षस]] विहीन कर देथिन । राम आउ आगे बढ़लन आउ पथमे [[सुतीक्ष्ण]], [[अगस्त्य]] आदि ऋषिसे भेँट करैत [[दण्डक वन]]मे प्रवेश कैलन जने उनकर भेँट [[जटायु]]से होलै । राम [[पञ्चवटी]]के अपन निवास स्थान बनौलन ।
[[सञ्चिका:Ravi Varma-Ravana Sita Jathayu.jpg|thumb|left|300px|सीता हरण (चित्रकार: [[रवि वर्मा]])]]
पञ्चवटीमे [[रावण]]के बहिन [[शूर्पणखा]] आके रामसे प्रणय निवेदन-कैलकै । राम ई कहके कि ऊ अपन पत्नीके साथे हथिन आउ उनकर छोट भाई अकेले है ओकरा [[लक्ष्मण]] भिजुन भेज देलन । लक्ष्मण ओकर प्रणय-निवेदनके अस्वीकार करैत शत्रुके बहिन जानके ओकर नाक आउ कान काट देलन । शूर्पणखा [[खर-दूषण]]से सहायताके माङ्ग कैलकै आउ ऊ अपन सेनाके साथे लड़ेला आ गेलै । लड़ाईमे राम खर-दूषण आउ ओकर सेनाके संहार कर देलन ।<ref>‘वाल्मीकीय रामायण’, प्रकाशक: देहाती पुस्तक भण्डार, दिल्ली पृष्ठ 251-263</ref> शूर्पणखा जाके अपन भाई रावणसे शिकायत कैलकै । रावण बदला लेबेला [[मारीच]]के [[स्वर्णमृग]] बनाके भेजकै जेकर छालके माङ्ग सीता राम से कैलम । लक्ष्मणके सीताके रक्षाके आज्ञा देके राम स्वर्णमृग रूपी मारीचके मारेला ओकर पाछे चल गेलन । मारीच रामके हाथ मारल गेलै पर मरैत मरैत मारीच रामके आवाज बनाके ‘हा लक्ष्मण’ के क्रन्दन कैलकै जेकरा सुनके सीता आशंकावश होके लक्ष्मणके राम भिजुन भेज देलन । लक्ष्मणके जायेके बाद अकेले सीताके रावण छलपूर्वक हरण कर लेलकै आउ अपन साथे [[लङ्का]] ले गेलै । रस्तामे [[जटायु]] सीताके बचाबेला रावणसे युद्ध कैलकै आउ रावण तलवारके प्रहार से ओकरा अधमरा कर देलकै ।<ref>‘रामचरितमानस’, टीकाकार: हनुमानप्रसाद पोद्दार, प्रकाशक एवं मुद्रक: गीताप्रेस, गोरखपुर पृष्ठ 603-606</ref>
सीताके न पाके राम अत्यन्त दुःखी होलन आउ विलाप करे लगलन । रस्तामे जटायुसे भेँट होबेपर ऊ रामके रावण द्वारा अपन दुर्दशा होबे आउ सीताके हरके दक्षिण दिशा दन्ने ले जायेके बात बतौलक । ई सब बताबेके बाद जटायु अपन प्राण त्याग देलकै आउ राम ओकर अन्तिम संस्कार करके सीताके खोजमे सघन वनके भीतरे आगे बढ़लन । रस्तामे राम [[दुर्वासा]]के शापके कारण राक्षस बनल [[गन्धर्व]] [[कबन्ध]]के वध करके ओकरा उद्धार कैलन आउ [[शबरी]]के आश्रम जा पहुँचलन जने कि ओकर देल जूठ बैरके ओकर भक्तिके वशमे होके खैलन । ई प्रकार राम सीताके खोजमे सघन वनके भीतरे आगे बढ़ित गेलन ।
=== किष्किन्धाकाण्ड ===
{{Main|किष्किन्धाकाण्ड}}
राम [[ऋष्यमूक]] पर्वतके भिरु आ गेलन । ऊ पर्वत पर अपन मन्त्री सहित [[सुग्रीव]] रहऽहलै । सुग्रीव ई आशङ्कामे कि कहुँ [[बालि]] ओकरा मारे लागी ऊ दोनो वीरके न भेजकै होत, [[हनुमान्]] के [[राम]] आउ [[लक्ष्मण]]के विषयमे जानकारी लेवेला ब्राह्मणके रूपमे भेजकै । ई जानेके बाद कि उनका बालि न भेजकै है हनुमान् राम आउ सुग्रीवमे मित्रता करवा देलन । सुग्रीव रामके सान्त्वना देलक कि [[जानकी]] जी मिल जैतन आउ उनका खोजेमे ऊ सहायता देतन, साथे अपन भाई बालिके अपन ऊपरे कैल गेल अत्याचारके विषयमे बतौलक । राम बालिके वध करके सुग्रीवके [[किष्किन्धा]]के राज्य आउ बालिके पुत्र [[अङ्गद]]के युवराजके पद दे देलक ।<ref>‘रामचरितमानस’, टीकाकार: हनुमानप्रसाद पोद्दार, प्रकाशक एवं मुद्रक: गीताप्रेस, गोरखपुर पृष्ठ 634-638</ref>
राज्य प्राप्तिके बाद सुग्रीव विलासमे लिप्त हो गेल आउ वर्षा एवं शरद् [[ऋतु]] व्यतीत हो गेलै । रामके नाराजगी पर सुग्रीव वानरके सीताके खोजला भेजलक । सीताके खोजमे गेल वानरके एक गुफामे एक तपस्विनीके दर्शन होलै । तपस्विनी खोज दलके योगशक्तिसे समुद्रतट पर पहुँचा देलक जन्ने उनकर भेँट [[सम्पाती]]से होलै । सम्पाती वानरके बतौलक कि रावण सीताके [[लङ्का]] [[अशोकवाटिका]]मे रखकै हे । [[जाम्बवन्त]] हनुमान् के समुद्र लाङ्घेला उत्साहित कैलन ।
=== सुन्दरकाण्ड ===
{{Main|सुन्दरकाण्ड}}
[[हनुमान्]] लङ्का दन्ने प्रस्थान कैलन । [[सुरसा]] हनुमान् के परीक्षा लेलकै<ref>‘रामचरितमानस’, टीकाकार: हनुमानप्रसाद पोद्दार, प्रकाशक एवं मुद्रक: गीताप्रेस, गोरखपुर पृष्ठ 658-659</ref> आउ उनका योग्य आउ सामर्थ्यवान पाके आशीर्वाद देलकै । मार्गमे हनुमान् परछायी पकड़े वाली राक्षसीके वध कैलन आउ [[लङ्किनी]] पर प्रहार करके [[लङ्का]]मे प्रवेश कैलन । उनकर [[विभीषण]]से भेँट होलै । जखनि हनुमान् [[अशोकवाटिका]]मे पहुँचलन त [[रावण]] [[सीता]]के धमकावैत हलै । रावणके जायेपर [[त्रिजटा]] सीताके सान्तवना देलकै । एकान्त होवेपर हनुमान् जी सीता मातासे भेँट करके उनका [[राम]]के [[मुद्रिका]] देलन । हनुमान् अशोकवाटिकाके विध्वंस करके रावणके पुत्र [[अक्षय कुमार]]के वध कर देलन । [[मेघनाथ]] हनुमान् के [[नागपाश]]मे बान्धके रावणके सभामे ले गेलै ।<ref>‘रामचरितमानस’, टीकाकार: हनुमानप्रसाद पोद्दार, प्रकाशक एवं मुद्रक: गीताप्रेस, गोरखपुर पृष्ठ 668-672</ref> रावणके प्रश्नके उत्तरमे हनुमान् अपन परिचय रामके दूतके रूपमे देलन । रावण हनुमान् के पोँछमे तेलमे डूबल कपड़ा बान्धके आग लगा देलकै, एकरा पर हनुमान् लङ्काके दहन कर देलन ।<ref>‘रामचरितमानस’, टीकाकार: हनुमानप्रसाद पोद्दार, प्रकाशक एवं मुद्रक: गीताप्रेस, गोरखपुर पृष्ठ 678-679</ref>
हनुमान् सीता भिजुन पहुँचलन । सीता अपन [[चूड़ामणि]] देके उनका विदा कैलन । ऊ वापस समुद्र पार आके सब वानरसे मिललन आउ सब वापिस सुग्रीव भिजुन चल गेलन । हनुमान् के कार्यसे राम अत्यन्त प्रसन्न भेलन । राम वानरके सेनाके साथे समुद्रतट पर पहुँचलन । ओन्ने विभीषण रावणके समझौलक कि रामसे बैर न लेथिन, एकरा पर रावण विभीषणके अपमानित करके लङ्कासे निकाल देलन । विभीषण रामके शरणमे आ गेलन आउ राम उनका लङ्काके राजा घोषित कर देलन । राम समुद्रसे रस्ता देवेके विनती कैलन । विनती न मानेपर राम क्रोध कैलन आउ उनकर क्रोधसे भयभीत होके समुद्र स्वयं आके [[राम]]के विनती करके पश्चात् [[नल]] आउ [[नील]]के द्वारा सेतु बनावेके उपाय बतौलकै ।
=== लङ्काकाण्ड (युद्धकाण्ड) ===
{{Main|लङ्काकाण्ड}}
[[जाम्बवन्त]]के आदेशसे [[नल (रामायण)|नल]] आउ [[नील (रामायण)|नील]] दुनो भाई वानर सेनाके सहायतासे समुद्र पर पुल बान्ध देलक ।<ref>‘रामचरितमानस’, टीकाकार: हनुमानप्रसाद पोद्दार, प्रकाशक एवं मुद्रक: गीताप्रेस, गोरखपुर पृष्ठ 709-711</ref> श्री[[राम]] श्री [[रामेश्वर]]के स्थापना करके भगवान् [[शङ्कर]]के पूजा कैलन आउ सेना सहित समुद्रके पार उतर गेलन । समुद्रके पार जाके राम डेरा डाललन । पुल बन्ध जाए आउ रामके समुद्रके पार उतर जायेके समाचारसे रावण मनमे अत्यन्त व्याकुल होलै । [[मन्दोदरी]]के रामसे बैर न लेवेला समझावहुँ पर रावणके अहङ्कार न गेलै । एन्ने राम अपन [[वानरसेना]]के साथे [[मेरु पर्वत]] पर निवास करे लगलन । [[अङ्गद]] रामके दूत बनके लङ्कामे रावण भिजुन गेलन आउ ओकरा रामके शरणमे आवेके सन्देश देलन किन्तु रावण न मानलक ।
शान्तिके सब प्रयास असफल हो जाए पर युद्ध आरम्भ हो गेलै । लक्ष्मण आउ [[मेघनाद]]के मध्य घोर युद्ध होलै । [[शक्तिबाण]]के वारसे लक्ष्मण मूर्छित हो गेलन । उनकर उपचारला हनुमान् [[सुषेण]] वैद्यके ले ऐलन आउ [[सञ्जीवनी]] लावेला चल गेलन । गुप्तचरसे समाचार मिलेपर रावण हनुमान् के कार्यमे बाधाला [[कालनेमि]]के भेजकै जेकर हनुमान् वध कर देलन । औषधिके पहचान न होवेके कारण हनुमान् पूरा पर्वतेके उठाके वापस चललन । मार्गमे हनुमान् के राक्षस होवेके सन्देहमे [[भरत]] बाण मारके मूर्छित कर देलन परन्तु यथार्थ जानेपर अपन बाण पर बैठाके वापिस [[लङ्का]] भेज देलन । एन्ने औषधि आवेमे विलम्ब देखके राम प्रलाप करे लगलन । सही समय पर हनुमान् औषधि लेके आ गेलन आउ सुषेणके उपचारसे लक्ष्मण स्वस्थ हो गेलन ।<ref>‘रामचरितमानस’, टीकाकार: हनुमानप्रसाद पोद्दार, प्रकाशक एवं मुद्रक: गीताप्रेस, गोरखपुर पृष्ठ 751-759</ref>
रावण युद्धला [[कुम्भकर्ण]]के जगौलक । कुम्भकर्णो रावणके रामके शरणमे जायेके असफल मन्त्रणा देलक । युद्धमे कुम्भकर्ण रामके हाथ परमगति प्राप्त कैलकै । लक्ष्मण मेघनादसे युद्ध करके ओकर वध कर देलन । राम आउ रावणके मध्य अनेक घोर युद्ध होलै आउ अन्तमे रावण रामके हाथ मारल गेलै ।<ref>‘रामचरितमानस’, टीकाकार: हनुमानप्रसाद पोद्दार, प्रकाशक एवं मुद्रक: गीताप्रेस, गोरखपुर पृष्ठ 802-807</ref> विभीषणके लङ्काके राज्य सौंपके राम, सीता आउ लक्ष्मणके साथे [[पुष्पकविमान]] पर चढ़के अयोध्या लागी प्रस्थान कैलन । <ref>‘वाल्मीकीय रामायण’, प्रकाशक: देहाती पुस्तक भण्डार, दिल्ली पृष्ठ 455-459</ref>
=== उत्तरकाण्ड ===
{{Main|उत्तरकाण्ड}}
[[उत्तरकाण्ड]] राम कथाके उपसंहार है । [[सीता]], [[लक्ष्मण]] आउ समस्त [[वानरसेना]]के साथे राम [[अयोध्या]] वापस पहुँचलन । [[राम]]के भव्य स्वागत होलै, [[भरत]]के साथे सर्वजनमे आनन्द व्याप्त हो गेलै । वेद आउ [[शिव]]के स्तुतिके साथे रामके [[राज्याभिषेक]] होलै । अभ्यागतके विदाई देल गेलै । राम प्रजाके उपदेश देलन आउ प्रजा कृतज्ञता प्रकट कैलन । चारो भाईके दु दु पुत्र होलै । [[रामराज्य]] एक आदर्श बन गेलै ।
उपरोक्त बातके साथे साथे गोस्वामी [[तुलसीदास]] जी उत्तरकाण्डमे श्रीराम-वशिष्ठ संवाद, [[नारद]] जी के अयोध्या आके रामचन्द्र जी के स्तुति कैल, शिव-पार्वती संवाद, [[गरुड़]] मोह आउ गरुड़ जी के [[काकभुशुण्डि]] जी से रामकथा एवं राम-महिमा सुनल, काकभुशुण्डि जी के पूर्वजन्मके कथा, ज्ञान-भक्ति निरूपण, ज्ञानदीपक आउ भक्तिके महान महिमा, गरुड़के सात प्रश्न आउ काकभुशुण्डि जी के उत्तर आदि विषयोके विस्तृत वर्णन कैल है ।
जन्ने तुलसीदास जी उपरोक्त वर्णन लिखके रामचरितमानसके समाप्त कर देलन हे ओहीँ आदिकवि वाल्मीकि अपन रामायणमे उत्तरकाण्डमे रावण आउ हनुमान् के जन्मके कथा,<ref>‘वाल्मीकीय रामायण’, प्रकाशक: देहाती पुस्तक भण्डार, दिल्ली पृष्ठ 463-475</ref> सीता का निर्वासन,<ref>‘वाल्मीकीय रामायण’‘, प्रकाशक: देहाती पुस्तक भण्डार, दिल्ली पृष्ठ 480-483</ref> राजा नृग, राजा निमि, राजा ययाति आउ रामराज्यमे कुत्ताके न्यायके उपकथा सब,<ref>‘वाल्मीकीय रामायण’, प्रकाशक: देहाती पुस्तक भण्डार, दिल्ली पृष्ठ 485-491</ref> लवकुशके जन्म,<ref>‘वाल्मीकीय रामायण’, प्रकाशक: देहाती पुस्तक भण्डार, दिल्ली पृष्ठ 495-496</ref> रामके द्वारा अश्वमेघ यज्ञके अनुष्ठान आउ ऊ यज्ञमे उनकर पुत्र लव आउ कुशके द्वारा महाकवि वाल्मीकि रचित रामायण गायन, सीताके रसातल प्रवेश,<ref>‘वाल्मीकीय रामायण’, प्रकाशक: देहाती पुस्तक भण्डार, दिल्ली पृष्ठ 508-512</ref> लक्ष्मणके परित्याग,<ref>‘वाल्मीकीय रामायण’, प्रकाशक: देहाती पुस्तक भण्डार, दिल्ली पृष्ठ 515-518</ref> ५१५ ५१८-ओ के वर्णन कैल है । वाल्मीकि रामायणमे उत्तरकाण्डके समापन रामके महाप्रयाणके बादो होलै हे ।<ref>‘वाल्मीकीय रामायण’, प्रकाशक: देहाती पुस्तक भण्डार, दिल्ली पृष्ठ 518-520</ref> उत्तरकाण्डके लेके ढेर प्रकारके विवादो है ।
ऐसन मानल जा है कि उत्तरकाण्ड मूल वाल्मीकि रामायणके भाग न है आउ एकरामे ढेर कहानी बादमे जोड़ल गेलै जे अलग अलग लेखक द्वारा लिखल गेल कहानीके जोड़के तैयार कैल गेलै हे ।
उत्तरकाण्ड मूल रामायणके भाग न है एकरा लेके ढेर विद्वान एकमत है ।
== आदर्श पुरुषके गुण ==
वाल्मीकि रामायणमे श्रीरामके सत्रह गुण बतावल गेलै हे, जे लोग सबमे नेतृत्व क्षमता बढ़ावे आउ कौनो क्षेत्रमे अगुवाई करेके अहम सूत्र है । वाल्मीकि जी नारद जी से प्रश्न कैलन कि सम्प्रति ई लोकमे ऐसन कौन मनुष्य है जे गुणवान, वीर्यवान, धर्मज्ञ, कृतज्ञ, सत्यवादी आउ दृढ़व्रत होवेके साथे साथे सदाचारसे युक्त होवे । जे सब प्राणीके हितकारक होवे, साथे विद्वान, समर्थ आउ प्रियदर्शन होवे ।
:'' कोऽन्वस्मिन् साम्प्रतं लोके गुणवान् कश्च वीर्यवान् ।''
:'' धर्मज्ञश्च कृतज्ञश्च सत्यवाक्यो दृढव्रतः ॥१-१-२''
:'' चारित्रेण च को युक्तः सर्वभूतेषु को हितः ।''
:'' विद्वान् कः कस्समर्थश्च कैश्चैकप्रियदर्शनः ॥१-१-३''
:'' आत्मवान् को जितक्रोधो द्युतिमान् कोऽनसूयकः ।''
:'' कस्य बिभ्यति देवाश्च जातरोषस्य संयुगे ॥१-१-४''
उत्तरमे नारद जी कहऽहथिन कि इक्ष्वाकु वंश मे उत्पन्न श्री राममे ई सब गुण है ।<ref><br>
:'' इक्ष्वाकुवंशप्रभवो रामो नाम जनैः श्रुतः । <br>''
:'' नियतात्मा महावीर्यो द्युतिमान धृतिमान वशी ॥<br>''
:'' बुद्धिमान नीतिमान वाग्मी श्रीमान शत्रुनिबर्हणः । <br>''
:'' धर्मज्ञस्सत्यसन्धश्च प्रजानां च हिते रतः ॥<br>''
:'' यशस्वी ज्ञानसम्पन्नः शुचिर्वश्यस्समाधिमान । <br>''
:'' रक्षिता जीवलोकस्य धर्मस्य परिरक्षिता ॥<br>''
:'' सर्वदाऽभिगतः सद्भिः समुद्र इव सिन्दुभिः । <br>''
:'' आर्यस्सर्वसमश्चैव सदैकप्रियदर्शनः ॥<br>''
:'' स च सर्वगुणोपेतः कौसल्यानन्दवर्द्धनः । <br>''
:'' समुद्र इव गाम्भीर्ये स्थैर्ये च हिमवानिव ॥<br>''
:'' विष्णुना सदृश्यो वीर्ये सोमवत प्रियदर्शनः । <br>''
:'' धनदेन समस्त्यागे सत्ये धर्म इवापरः ॥<br>''
</ref>
;श्रीरामके सोलह गुण, जे आदर्श पुरुषमे होवेके चाही-
# गुणवान्
# वीर्यवान् (वीर)
# धर्मज्ञ (धर्मके जानेवाला)
# कृतज्ञ (दोसर द्वारा कैल नीक कार्यके न भूलाए वाला)
# सत्यवाक्य (सत्य बोलेवाला)
# दृढव्रत (दृढ व्रती)
# चरित्रवान्
# सर्वभूतहितः (सब प्राणीके हित करेवाला)
# विद्वान्
# समर्थ
# सदैक प्रियदर्शन (सदा प्रियदर्शी)
# आत्मवान् (धैर्यवान)
# जितक्रोध (जे क्रोधके जीत लेलकै होवे)
# द्युतिमान् (कान्तियुक्त)
# अनसूयक (ईर्ष्याके दूर रखेवाला)
# बिभ्यति देवाश्च जातरोषस्य संयुगे (जेकर रुष्ट होवे पर युद्धमे देवतो भयभीत हो जा हथिन)
== रामायणके टीका ==
वाल्मीकि रामायणके तीन पाठ प्राप्त होलै हे-
*(१) दाक्षिणात्य पाठ
*(२) गौडीय पाठ
*(३) पश्चिमोत्तरीय पाठ या काश्मीरिक संस्करण (अमृत कतक टीका)
ई तीन पाठमे केवल पाठभेदे न प्राप्त होवै अपितु कहुँ-कहुँ एकर सर्गो भिन्न-भिन्न है । रमायणके ३० टीका प्राप्त होलै है । प्रमुख टीका निम्नलिखित है-
{|class='wikitable'
! टीकाके नाम !! टीकाकार
|-
| रामानुजीयम् ||
|-
| सर्वार्थसार ||
|-
| रामायणदीपिका ||
|-
| बृहदविवरण ||
|-
| लघुविवरण ||
|-
| रामायणतत्वदीपिका (महेश्वरतीर्थी) || महेश तीर्थ
|-
| भूषण (गोविन्दराजीय ) || गोविन्दराज
|-
| वाल्मीकिहृदय || अहोबल
|-
| अमृतकतक || माधवयोगी
|-
| रामायणतिलक ||
|-
| रामायणशिरोमणि ||
|-
| मनोहर ||
|-
| धर्माकूतम् || त्र्यम्बक मखिन्
|-
| तनिश्लोकी || पेरियर वाचाम्बिल्लै
|-
| विषमपदविवृति ||
|-
| रामायणभूषण || प्रबल मुकुन्दसूरि
|}
== रामायण द्वारा प्रेरित अन्य साहित्यिक महाकाव्य ==
[[वाल्मीकि रामायण]]से प्रेरित होके सन्त [[तुलसीदास]] [[रामचरितमानस]] नियन [[महाकाव्य]]के रचना कैलन जे कि [[वाल्मीकि]]के द्वारा [[संस्कृत]]मे लिखल रामायणके हिन्दी संस्करण है । रामचरितमानसमे [[हिन्दु]] आदर्शके उत्कृष्ट वर्णन है । एहीसे एकरा [[हिन्दुधर्म]]के प्रमुख ग्रन्थ होवेका श्रेय भेटलै हे ।
रामायणेसे प्रेरित होके [[मैथिलीशरण गुप्त]] [[पञ्चवटी]] आउ [[साकेत]] नामक [[खण्डकाव्य]]के रचना कैलन । रामायणमे [[लक्ष्मण]]के पत्नी [[उर्मिला]]के उल्लेखनीय त्यागके शायद भूलवश अनदेखा कर देल गेलै हे आउ ई भूलके साकेत खण्डकाव्य रचके मैथिलीशरण गुप्त सुधारलन हे ।
राम सम्बन्धी कथानकसे प्रेरित होके श्रीभागवतानन्द गुरु संस्कृत महाकाव्य श्रीराघवेन्द्रचरितम् के रचना कैलन जे अद्भुत आउ गुप्त कथाप्रसङ्गसे भरल है । ई ग्रन्थमे २० से अधिक प्रकारके रामायणके कथाके समावेश है ।
[[नेपाल]]के राजदरबारसे सम्मानित कविवर श्री राधेश्यामके राधेश्याम रामायण, प्रेमभूषणके प्रेम रामायण, महर्षि कम्बनके कम्ब रामायणके इलावा आउओ अनेक साहित्यकार रामायणसे प्रेरणा लेके अनेक कृतिके रचना कैलन हे ।
== एकरो देखी ==
* [[श्रीराम]]
* [[विभिन्न भाषामे रामायण]]
* [[रामचरितमानस]]
* [[महाभारत]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{रामायण}}
{{हिन्दु देवी-देवता}}
[[बर्ग:धर्मग्रन्थ]]
[[बर्ग:हिन्दुधर्म]]
[[बर्ग:रामायण| ]]
[[बर्ग:महाकाव्य]]
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विकिपीडिया:चबुतरा
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2026-10-16T00:06:39Z
अनिरुद्ध कुमार
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/* मगही दिवस पर एगो छोट सम्पादनोत्सवके आयोजन */ उत्तर
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text/x-wiki
{{विकिपीडिया:चबुतरा/शीर्ष}}
== मगही दिवस पर एगो छोट सम्पादनोत्सवके आयोजन ==
नमस्कार, 23 अक्टुबरके मगही दिवस आवेवाला है । हम सोचैत हलियै कि एही मौका पर एगो आनलाइन मगही सम्पादोनोत्सव रखल जाये । काहेकि ई मगहीके दिन है त विषय मगही-मगध रखल जायेके चाही । अपने सबके का विचार है? का अपनेसब आयोजन या भाग लेल चाहतथिन? @[[प्रयोगकर्ता:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] @[[प्रयोगकर्ता:Pataliputra01|Pataliputra01]] @[[प्रयोगकर्ता:अनुश्री साव|अनुश्री साव]] @[[प्रयोगकर्ता:शीतल सिन्हा|शीतल सिन्हा]] @[[प्रयोगकर्ता:JyotiTheLightHouse|JyotiTheLightHouse]] @[[प्रयोगकर्ता:Kandarpajit Kallol|Kandarpajit Kallol]] @[[प्रयोगकर्ता:Biplab Anand|Biplab Anand]]
-[[प्रयोगकर्ता:ऐक्टिवेटेड्|ऐक्टिवेटेड्]] ([[प्रयोगकर्ता वार्ता:ऐक्टिवेटेड्|वार्ता]]) ०१:४७, १४ अक्टुबर २०२६ (IST)
:@[[प्रयोगकर्ता:ऐक्टिवेटेड्|ऐक्टिवेटेड्]], प्रणाम। हम एह पहल के समर्थन करैत छी। अपने के ई विचार बहुत नीक है। मगही दिवस पर ‘मगही-मगध’ विषय पर ऑनलाइन संपादनोत्सव जरूर होवे के चाही। हमहूँ एह आयोजन में जरूर शामिल होब अउर अपन योगदान देब। ई आयोजन सफल हो, एही शुभकामना हे। — [[प्रयोगकर्ता:Kandarpajit Kallol|Kandarpajit Kallol]] ([[प्रयोगकर्ता वार्ता:Kandarpajit Kallol|वार्ता]]) ०९:१४, १४ अक्टुबर २०२६ (IST)
:इ बढ़िया विचार हय।। अपने सब चाहथिन त हम सामूहिक संपादन ला एगो पन्ना बनाके फाउंडेशन के लोगन से बात कर सक हियो। [[प्रयोगकर्ता:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[प्रयोगकर्ता वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) ०५:३६, १६ अक्टुबर २०२६ (IST)
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अनुश्री साव
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/* मगही दिवस पर एगो छोट सम्पादनोत्सवके आयोजन */
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text/x-wiki
{{विकिपीडिया:चबुतरा/शीर्ष}}
== मगही दिवस पर एगो छोट सम्पादनोत्सवके आयोजन ==
नमस्कार, 23 अक्टुबरके मगही दिवस आवेवाला है । हम सोचैत हलियै कि एही मौका पर एगो आनलाइन मगही सम्पादोनोत्सव रखल जाये । काहेकि ई मगहीके दिन है त विषय मगही-मगध रखल जायेके चाही । अपने सबके का विचार है? का अपनेसब आयोजन या भाग लेल चाहतथिन? @[[प्रयोगकर्ता:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] @[[प्रयोगकर्ता:Pataliputra01|Pataliputra01]] @[[प्रयोगकर्ता:अनुश्री साव|अनुश्री साव]] @[[प्रयोगकर्ता:शीतल सिन्हा|शीतल सिन्हा]] @[[प्रयोगकर्ता:JyotiTheLightHouse|JyotiTheLightHouse]] @[[प्रयोगकर्ता:Kandarpajit Kallol|Kandarpajit Kallol]] @[[प्रयोगकर्ता:Biplab Anand|Biplab Anand]]
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:@[[प्रयोगकर्ता:ऐक्टिवेटेड्|ऐक्टिवेटेड्]], प्रणाम। हम एह पहल के समर्थन करैत छी। अपने के ई विचार बहुत नीक है। मगही दिवस पर ‘मगही-मगध’ विषय पर ऑनलाइन संपादनोत्सव जरूर होवे के चाही। हमहूँ एह आयोजन में जरूर शामिल होब अउर अपन योगदान देब। ई आयोजन सफल हो, एही शुभकामना हे। — [[प्रयोगकर्ता:Kandarpajit Kallol|Kandarpajit Kallol]] ([[प्रयोगकर्ता वार्ता:Kandarpajit Kallol|वार्ता]]) ०९:१४, १४ अक्टुबर २०२६ (IST)
:इ बढ़िया विचार हय।। अपने सब चाहथिन त हम सामूहिक संपादन ला एगो पन्ना बनाके फाउंडेशन के लोगन से बात कर सक हियो। [[प्रयोगकर्ता:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[प्रयोगकर्ता वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) ०५:३६, १६ अक्टुबर २०२६ (IST)
: हम एह पहल के समर्थन कर हकिये। एह सम्पादनोत्सव होबे से मगही समूह के बढ़ावा मिलते। [[प्रयोगकर्ता:अनुश्री साव|अनुश्री साव]] ([[प्रयोगकर्ता वार्ता:अनुश्री साव|वार्ता]]) ०९:०५, १६ अक्टुबर २०२६ (IST)
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EmausBot
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Fixing double redirect from [[विकिपीडिया:सहयोग]] to [[सहयोग:विषयसूची]]
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text/x-wiki
#REDIRECT [[सहयोग:विषयसूची]]
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मीडियाविकि:Common.css
8
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61882
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Maintenance script
2
Use thumb.wikimedia.org for thumbnails ([[phab:T427465]], Operator: Ladsgroup)
81957
css
text/css
/*
* This is the CSS common to all desktop skins on en.Wikipedia.
* Styling inside .mw-parser-output should generally use TemplateStyles.
*/
/* Reset italic styling set by user agent */
cite,
dfn {
font-style: inherit;
}
/* Straight quote marks for <q> */
q {
quotes: '"' '"' "'" "'";
}
/* Avoid collision of blockquote with floating elements by swapping margin and padding */
blockquote {
overflow: hidden;
margin: 1em 0;
padding: 0 40px;
}
/* Consistent size for <small>, <sub> and <sup> */
small {
font-size: 85%;
}
.mw-body-content sub,
.mw-body-content sup {
font-size: 80%;
}
/* Same spacing for indented and unindented paragraphs on talk pages */
.ns-talk .mw-body-content dd {
margin-top: 0.4em;
margin-bottom: 0.4em;
}
/* Reduce page jumps by hiding collapsed/dismissed content */
.client-js .collapsible:not( .mw-made-collapsible).collapsed > tbody > tr:not(:first-child),
/* Avoid FOUC/reflows on collapsed elements. */
/* This copies MediaWiki's solution for T42812 to apply to innercollapse/outercollapse (T325115). */
/* TODO: Use :is() selector at some reasonable future when support is good for Most Clients */
/* Reference: https://gerrit.wikimedia.org/g/mediawiki/core/+/ecda06cb2aef55b77c4b4d7ecda492d634419ead/resources/src/jquery/jquery.makeCollapsible.styles.less#75 */
.client-js .outercollapse .innercollapse.mw-collapsible:not( .mw-made-collapsible ) > p,
.client-js .outercollapse .innercollapse.mw-collapsible:not( .mw-made-collapsible ) > table,
.client-js .outercollapse .innercollapse.mw-collapsible:not( .mw-made-collapsible ) > thead + tbody,
.client-js .outercollapse .innercollapse.mw-collapsible:not( .mw-made-collapsible ) tr:not( :first-child ),
.client-js .outercollapse .innercollapse.mw-collapsible:not( .mw-made-collapsible ) .mw-collapsible-content,
/* Hide charinsert base for those not using the gadget */
#editpage-specialchars {
display: none;
}
/* Make the list of references smaller
* Keep in sync with Template:Refbegin/styles.css
* And Template:Reflist/styles.css
*/
ol.references {
font-size: 90%;
margin-bottom: 0.5em;
}
/* Cite customizations for Parsoid
* Once everything uses the one true parser these are just customizations
*/
span[ rel="mw:referencedBy" ] {
counter-reset: mw-ref-linkback 0;
}
span[ rel='mw:referencedBy' ] > a::before {
content: counter( mw-ref-linkback, lower-alpha );
font-size: 80%;
font-weight: bold;
font-style: italic;
}
a[ rel="mw:referencedBy" ]::before {
font-weight: bold;
content: "^";
}
span[ rel="mw:referencedBy" ]::before {
content: "^ ";
}
/* Styling for jQuery makeCollapsible, matching that of collapseButton */
.mw-parser-output .mw-collapsible-toggle:not(.mw-ui-button) {
font-weight: normal;
padding-right: 0.2em;
padding-left: 0.2em;
}
.mw-collapsible-leftside-toggle .mw-collapsible-toggle {
/* @noflip */
float: left;
}
/* Lists in wikitable data cells are always left-aligned */
.wikitable td ul,
.wikitable td ol,
.wikitable td dl {
/* @noflip */
text-align: left;
}
/* Change the external link icon to a PDF icon for all PDF files */
.mw-parser-output a[href$=".pdf"].external,
.mw-parser-output a[href*=".pdf?"].external,
.mw-parser-output a[href*=".pdf#"].external,
.mw-parser-output a[href$=".PDF"].external,
.mw-parser-output a[href*=".PDF?"].external,
.mw-parser-output a[href*=".PDF#"].external {
background: url("//upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/4/4d/Icon_pdf_file.png") no-repeat right;
/* @noflip */
padding: 8px 18px 8px 0;
}
/* System messages styled similarly to fmbox */
/* for .mw-warning-with-logexcerpt, behavior of this line differs between
* the edit-protected notice and the special:Contribs for blocked users
* The latter has specificity of 3 classes so we have to triple up here.
*/
.mw-warning-with-logexcerpt.mw-warning-with-logexcerpt.mw-warning-with-logexcerpt,
div.mw-lag-warn-high,
div.mw-cascadeprotectedwarning,
div#mw-protect-cascadeon {
clear: both;
margin: 0.2em 0;
border: 1px solid #bb7070;
background-color: #ffdbdb;
padding: 0.25em 0.9em;
box-sizing: border-box;
}
/* default colors for partial block message */
/* gotta get over the hump introduced by the triple class above */
.mw-contributions-blocked-notice-partial .mw-warning-with-logexcerpt.mw-warning-with-logexcerpt {
border-color: #fc3;
background-color: #fef6e7;
}
/* Minimum thumb width */
figure[typeof~='mw:File/Thumb'],
figure[typeof~='mw:File/Frame'],
.thumbinner {
min-width: 100px;
}
/* Prevent floating boxes from overlapping any category listings,
file histories, edit previews, and edit [Show changes] views. */
#mw-subcategories,
#mw-pages,
#mw-category-media,
#filehistory,
#wikiPreview,
#wikiDiff {
clear: both;
}
/* Styling for tags in changes pages */
.mw-tag-markers {
font-style: italic;
font-size: 90%;
}
/* Hide stuff meant for accounts with special permissions. Made visible again in
[[MediaWiki:Group-checkuser.css]], [[MediaWiki:Group-sysop.css]], [[MediaWiki:Group-abusefilter.css]],
[[MediaWiki:Group-abusefilter-helper.css]], [[MediaWiki:Group-patroller.css]],
[[MediaWiki:Group-templateeditor.css]], [[MediaWiki:Group-extendedmover.css]],
[[MediaWiki:Group-extendedconfirmed.css]], and [[Mediawiki:Group-autoconfirmed.css]]. */
.checkuser-show,
.sysop-show,
.abusefilter-show,
.abusefilter-helper-show,
.patroller-show,
.templateeditor-show,
.extendedmover-show,
.extendedconfirmed-show,
.autoconfirmed-show,
.user-show {
display: none;
}
/* Hide the redlink generated by {{Editnotice}},
this overrides the ".sysop-show { display: none; }" above that applies
to the same link as well. See [[phab:T45013]]
Hide the images in editnotices to keep them readable in VE view.
Long term, editnotices should become a core feature so that they can be designed responsive. */
.ve-ui-mwNoticesPopupTool-item .editnotice-redlink,
.ve-ui-mwNoticesPopupTool-item .mbox-image,
.ve-ui-mwNoticesPopupTool-item .mbox-imageright {
display: none !important;
}
/* Remove bullets when there are multiple edit page warnings */
ul.permissions-errors {
margin: 0;
}
ul.permissions-errors > li {
list-style: none;
}
/* larger inline math */
span.mwe-math-mathml-inline {
font-size: 118%;
}
/* Make <math display="block"> be left aligned with one space indent for
* compatibility with style conventions
*/
.mwe-math-fallback-image-display,
.mwe-math-mathml-display {
margin-left: 1.6em !important;
margin-top: 0.6em;
margin-bottom: 0.6em;
}
.mwe-math-mathml-display math {
display: inline;
}
@media screen {
/* Put a chequered background behind images, only visible if they have transparency,
* except on main, user, and portal namespaces
*/
body:not(.ns-0):not(.ns-2):not(.ns-100) .gallerybox .thumb img {
background: #fff url(//upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/5/5d/Checker-16x16.png) repeat;
}
/* Display "From Wikipedia, the free encyclopedia" in skins that support it,
do not apply to print mode */
#siteSub {
display: block;
}
}
/* Hide FlaggedRevs notice UI when there are no pending changes */
.flaggedrevs_draft_synced,
.flaggedrevs_stable_synced,
/* "Temporary" to remove links in sidebar T255381 */
#t-upload,
/* Hide broken download box on Special:Book pending T285400 */
.mw-special-Book #coll-downloadbox {
display: none;
}
/*
* BELOW HERE THERE BE SOONTOBE TEMPLATESTYLES THINGS;
* SEE [[MediaWiki talk:Common.css/to do]]
*/
/* Infobox template style */
.infobox {
border: 1px solid #a2a9b1;
border-spacing: 3px;
background-color: #f8f9fa;
color: black;
/* @noflip */
margin: 0.5em 0 0.5em 1em;
padding: 0.2em;
/* @noflip */
float: right;
/* @noflip */
clear: right;
font-size: 88%;
line-height: 1.5em;
width: 22em;
}
.infobox-header,
.infobox-label,
.infobox-above,
.infobox-full-data,
.infobox-data,
.infobox-below,
.infobox-subheader,
.infobox-image,
.infobox-navbar,
/* Remove element selector when every .infobox thing is using the standard module/templates */
.infobox th,
.infobox td {
vertical-align: top;
}
.infobox-label,
.infobox-data,
/* Remove element selector when every .infobox thing is using the standard module/templates */
.infobox th,
.infobox td {
/* @noflip */
text-align: left;
}
/* Remove .infobox when element selectors above are removed */
.infobox .infobox-above,
.infobox .infobox-title,
/* Remove element selector when every .infobox thing is using the standard module/templates */
.infobox caption {
font-size: 125%;
font-weight: bold;
text-align: center;
}
.infobox-title,
/* Remove element selector when every .infobox thing is using the standard module/templates */
.infobox caption {
padding: 0.2em;
}
/* Remove .infobox when element selectors above are removed */
.infobox .infobox-header,
.infobox .infobox-subheader,
.infobox .infobox-image,
.infobox .infobox-full-data,
.infobox .infobox-below {
text-align: center;
}
/* Remove .infobox when element selectors above are removed */
.infobox .infobox-navbar {
/* @noflip */
text-align: right;
}
/* Normal font styling for wikitable row headers with scope="row" tag */
.wikitable.plainrowheaders th[scope=row],
.wikitable.plainrowheaders th[scope=rowgroup] {
font-weight: normal;
/* @noflip */
text-align: left;
}
/* Remove underlines from certain links */
.nounderlines a,
.IPA a:link,
.IPA a:visited {
text-decoration: none !important;
}
/* Prevent line breaks in silly places where desired (nowrap)
and links when we don't want them to (nowraplinks a) */
.nowrap,
.nowraplinks a {
white-space: nowrap;
}
/* But allow wrapping where desired: */
.wrap,
.wraplinks a {
white-space: normal;
}
/* texhtml class for inline math (based on generic times-serif class) */
span.texhtml {
font-family: "Nimbus Roman No9 L", "Times New Roman", Times, serif;
font-size: 118%;
line-height: 1;
white-space: nowrap;
/* Force tabular and lining display for texhtml */
font-variant-numeric: lining-nums tabular-nums;
font-kerning: none;
}
span.texhtml span.texhtml {
font-size: 100%;
}
@media screen {
.nochecker .gallerybox .thumb img {
background-image: none;
}
}
/* Put anything you mean to be a sitewide addition above the TemplateStyles
* comment above.
*/
/* wikipedia logo */
.wikilogo {
background: url("//upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/1/10/Wikipedia-logo-v2-200px-transparent.png");
background-repeat: no-repeat;
}
/* Geographical coordinates defaults. See [[Template:Coord/link]]
for how these are used. The classes "geo", "longitude", and
"latitude" are used by the [[Geo microformat]].
*/
.geo-default, .geo-dms, .geo-dec { display: inline; }
.geo-nondefault, .geo-multi-punct { display: none; }
.longitude, .latitude { white-space: nowrap; }
/* Styling for citations */
span.citation, cite {
font-style: normal;
word-wrap: break-word;
}
/* Reset top margin for lists embedded in columns */
div.columns {
margin-top: 0.3em;
}
div.columns dl,
div.columns ol,
div.columns ul {
margin-top: 0;
}
/* Avoid list items from breaking between columns */
div.columns li,
div.columns dd dd {
-webkit-column-break-inside: avoid;
page-break-inside: avoid;
break-inside: avoid-column;
}
/* Pie chart: transparent borders */
.transborder {
border: solid transparent;
}
/* Style for horizontal lists (separator following item).
IE8-specific classes are assigned in [[MediaWiki:Common.js/IEFixes.js]].
@source mediawiki.org/wiki/Snippets/Horizontal_lists
@revision 5 (2014-02-24)
@author [[User:Edokter]]
*/
.hlist dl,
.hlist ol,
.hlist ul {
margin: 0;
padding: 0;
}
/* Display list items inline */
.hlist dd,
.hlist dt,
.hlist li {
margin: 0;
display: inline;
}
/* Display nested lists inline */
.hlist dl dl, .hlist dl ol, .hlist dl ul,
.hlist ol dl, .hlist ol ol, .hlist ol ul,
.hlist ul dl, .hlist ul ol, .hlist ul ul {
display: inline;
}
/* Generate interpuncts */
.hlist dt:after {
content: ": ";
}
.hlist dd:after,
.hlist li:after {
content: " · ";
font-weight: bold;
}
.hlist dd:last-child:after,
.hlist dt:last-child:after,
.hlist li:last-child:after {
content: none;
}
/* For IE8 */
.hlist dd.hlist-last-child:after,
.hlist dt.hlist-last-child:after,
.hlist li.hlist-last-child:after {
content: none;
}
/* Add parentheses around nested lists */
.hlist dd dd:first-child:before, .hlist dd dt:first-child:before, .hlist dd li:first-child:before,
.hlist dt dd:first-child:before, .hlist dt dt:first-child:before, .hlist dt li:first-child:before,
.hlist li dd:first-child:before, .hlist li dt:first-child:before, .hlist li li:first-child:before {
content: " (";
font-weight: normal;
}
.hlist dd dd:last-child:after, .hlist dd dt:last-child:after, .hlist dd li:last-child:after,
.hlist dt dd:last-child:after, .hlist dt dt:last-child:after, .hlist dt li:last-child:after,
.hlist li dd:last-child:after, .hlist li dt:last-child:after, .hlist li li:last-child:after {
content: ") ";
font-weight: normal;
}
/* For IE8 */
.hlist dd dd.hlist-last-child:after, .hlist dd dt.hlist-last-child:after, .hlist dd li.hlist-last-child:after,
.hlist dt dd.hlist-last-child:after, .hlist dt dt.hlist-last-child:after, .hlist dt li.hlist-last-child:after,
.hlist li dd.hlist-last-child:after, .hlist li dt.hlist-last-child:after, .hlist li li.hlist-last-child:after {
content: ") ";
font-weight: normal;
}
/* Put ordinals in front of ordered list items */
.hlist ol {
counter-reset: listitem;
}
.hlist ol > li {
counter-increment: listitem;
}
.hlist ol > li:before {
content: " " counter(listitem) " ";
white-space: nowrap;
}
.hlist dd ol > li:first-child:before,
.hlist dt ol > li:first-child:before,
.hlist li ol > li:first-child:before {
content: " (" counter(listitem) " ";
}
/* Unbulleted lists */
.plainlist ul {
line-height: inherit;
list-style: none none;
margin: 0;
}
.plainlist ul li {
margin-bottom: 0;
}
/* Default style for navigation boxes */
.navbox { /* Navbox container style */
border: 1px solid #aaa;
width: 100%;
margin: auto;
clear: both;
font-size: 88%;
text-align: center;
padding: 1px;
}
.navbox-inner,
.navbox-subgroup {
width: 100%;
}
.navbox-group,
.navbox-title,
.navbox-abovebelow {
padding: 0.25em 1em; /* Title, group and above/below styles */
line-height: 1.5em;
text-align: center;
}
th.navbox-group { /* Group style */
white-space: nowrap;
/* @noflip */
text-align: right;
}
.navbox,
.navbox-subgroup {
background: #fdfdfd; /* Background color */
}
.navbox-list {
line-height: 1.8em;
border-color: #fdfdfd; /* Must match background color */
}
.navbox th,
.navbox-title {
background: #ccccff; /* Level 1 color */
}
.navbox-abovebelow,
th.navbox-group,
.navbox-subgroup .navbox-title {
background: #ddddff; /* Level 2 color */
}
.navbox-subgroup .navbox-group,
.navbox-subgroup .navbox-abovebelow {
background: #e6e6ff; /* Level 3 color */
}
.navbox-even {
background: #f7f7f7; /* Even row striping */
}
.navbox-odd {
background: transparent; /* Odd row striping */
}
table.navbox + table.navbox { /* Single pixel border between adjacent navboxes */
margin-top: -1px; /* (doesn't work for IE6, but that's okay) */
}
.navbox .hlist td dl,
.navbox .hlist td ol,
.navbox .hlist td ul,
.navbox td.hlist dl,
.navbox td.hlist ol,
.navbox td.hlist ul {
padding: 0.125em 0; /* Adjust hlist padding in navboxes */
}
ol + table.navbox,
ul + table.navbox {
margin-top: 0.5em; /* Prevent lists from clinging to navboxes */
}
/* Default styling for Navbar template */
.navbar {
display: inline;
font-size: 88%;
font-weight: normal;
}
.navbar ul {
display: inline;
white-space: nowrap;
}
.navbar li {
word-spacing: -0.125em;
}
.navbar.mini li span {
font-variant: small-caps;
}
/* Navbar styling when nested in infobox and navbox */
.infobox .navbar {
font-size: 100%;
}
.navbox .navbar {
display: block;
font-size: 100%;
}
.navbox-title .navbar {
/* @noflip */
float: left;
/* @noflip */
text-align: left;
/* @noflip */
margin-right: 0.5em;
width: 6em;
}
/* 'show'/'hide' buttons created dynamically by the CollapsibleTables javascript
in [[MediaWiki:Common.js]] are styled here so they can be customised. */
.collapseButton {
/* @noflip */
float: right;
font-weight: normal;
/* @noflip */
margin-left: 0.5em;
/* @noflip */
text-align: right;
width: auto;
}
/* In navboxes, the show/hide button balances the v·d·e links
from [[Template:Navbar]], so they need to be the same width. */
.navbox .collapseButton {
width: 6em;
}
/* Styling for JQuery makeCollapsible, matching that of collapseButton */
.mw-parser-output .mw-collapsible-toggle {
font-weight: normal;
/* @noflip */
text-align: right;
}
.navbox .mw-collapsible-toggle {
width: 6em;
}
/* Styles for geography infoboxes, eg countries,
country subdivisions, cities, etc. */
.infobox.geography {
text-align: left;
border-collapse: collapse;
line-height: 1.2em;
font-size: 90%;
}
.infobox.geography td,
.infobox.geography th {
border-top: 1px solid #aaa;
padding: 0.4em 0.6em 0.4em 0.6em;
}
.infobox.geography .mergedtoprow td,
.infobox.geography .mergedtoprow th {
border-top: 1px solid #aaa;
padding: 0.4em 0.6em 0.2em 0.6em;
}
.infobox.geography .mergedrow td,
.infobox.geography .mergedrow th {
border: 0;
padding: 0 0.6em 0.2em 0.6em;
}
.infobox.geography .mergedbottomrow td,
.infobox.geography .mergedbottomrow th {
border-top: 0;
border-bottom: 1px solid #aaa;
padding: 0 0.6em 0.4em 0.6em;
}
.infobox.geography .maptable td,
.infobox.geography .maptable th {
border: 0;
padding: 0;
}
/* ...unless they also use the hlist class */
.wikitable.hlist td ul,
.wikitable.hlist td ol,
.wikitable.hlist td dl {
text-align: inherit;
}
/* Icons for medialist template [[Template:Listen]] */
div.listenlist {
background: url("//upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/3/3f/Gnome_speakernotes_30px.png");
padding-left: 40px;
}
/* Style rules for media list templates */
div.medialist {
min-height: 50px;
margin: 1em;
background-position: top left;
background-repeat: no-repeat;
}
div.medialist ul {
list-style-type: none;
list-style-image: none;
margin: 0;
}
div.medialist ul li {
padding-bottom: 0.5em;
}
div.medialist ul li li {
font-size: 91%;
padding-bottom: 0;
}
/* Content in columns with CSS instead of tables [[Template:Columns]] */
div.columns-2 div.column {
float: left;
width: 50%;
min-width: 300px;
}
div.columns-3 div.column {
float: left;
width: 33.3%;
min-width: 200px;
}
div.columns-4 div.column {
float: left;
width: 25%;
min-width: 150px;
}
div.columns-5 div.column {
float: left;
width: 20%;
min-width: 120px;
}
/* Style for "notices" */
.notice {
margin: 1em;
padding: 0.2em;
}
#disambig {
border-top: 1px solid #ccc;
border-bottom: 1px solid #ccc;
}
#spoiler {
border-top: 2px solid #ddd;
border-bottom:2px solid #ddd;
}
/* Standard talk template style */
.Talk-Notice {
border: 1px solid #C0C090;
background-color: #F8EABA;
margin-bottom: 3px;
width: 85%;
border-spacing: 3px;
margin-left: auto;
margin-right: auto;
}
.Talk-Notice:after {
content: "The CSS for this template should be changed. See [[Wikipedia:Template Standardisation]].";
}
/* Make template background appear correctly on all browsers */
.Talk-Notice td {
background: inherit;
}
/* Persondata */
table.persondata {
border: 1px solid #aaa;
display: none;
speak: none;
}
.persondata-label {
color: #aaa;
}
/* Class for links with loudspeaker icon next to them */
.audiolink a{
background: url("//thumb.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/8/8a/Loudspeaker.svg/11px-Loudspeaker.svg.png") center left no-repeat !important;
padding-left: 16px !important;
padding-right: 0 !important;
}
div.medialist ul {
list-style-type: none;
list-style-image: none;
margin: 0;
}
div.medialist ul li {
padding-bottom: 0.5em;
}
div.medialist ul li li {
font-size: 91%;
padding-bottom: 0;
}
/* Messagebox templates */
.messagebox {
border: 1px solid #a2a9b1;
background-color: #f8f9fa;
width: 80%;
margin: 0 auto 1em auto;
padding: .2em;
}
.messagebox.merge {
border: 1px solid #c0b8cc;
background-color: #f0e5ff;
text-align: center;
}
.messagebox.cleanup {
border: 1px solid #9f9fff;
background-color: #efefff;
text-align: center;
}
.messagebox.standard-talk {
border: 1px solid #c0c090;
background-color: #f8eaba;
margin: 4px auto;
}
/* For old WikiProject banners inside banner shells. */
.mbox-inside .standard-talk,
.messagebox.nested-talk {
border: 1px solid #c0c090;
background-color: #f8eaba;
width: 100%;
margin: 2px 0;
padding: 2px;
}
.messagebox.small {
width: 238px;
font-size: 85%;
/* @noflip */
float: right;
clear: both;
/* @noflip */
margin: 0 0 1em 1em;
line-height: 1.25em;
}
.messagebox.small-talk {
width: 238px;
font-size: 85%;
/* @noflip */
float: right;
clear: both;
/* @noflip */
margin: 0 0 1em 1em;
line-height: 1.25em;
background-color: #F8EABA;
}
/* Cell sizes for ambox/tmbox/imbox/cmbox/ombox/fmbox/dmbox message boxes */
th.mbox-text, td.mbox-text { /* The message body cell(s) */
border: none;
/* @noflip */
padding: 0.25em 0.9em; /* 0.9em left/right */
width: 100%; /* Make all mboxes the same width regardless of text length */
}
td.mbox-image { /* The left image cell */
border: none;
/* @noflip */
padding: 2px 0 2px 0.9em; /* 0.9em left, 0px right */
text-align: center;
}
td.mbox-imageright { /* The right image cell */
border: none;
/* @noflip */
padding: 2px 0.9em 2px 0; /* 0px left, 0.9em right */
text-align: center;
}
td.mbox-empty-cell { /* An empty narrow cell */
border: none;
padding: 0;
width: 1px;
}
/* Article message box styles */
table.ambox {
margin: 0 10%; /* 10% = Will not overlap with other elements */
border: 1px solid #aaa;
/* @noflip */
border-left: 10px solid #1e90ff; /* Default "notice" blue */
background: #fbfbfb;
}
table.ambox + table.ambox { /* Single border between stacked boxes. */
margin-top: -1px;
}
.ambox th.mbox-text,
.ambox td.mbox-text { /* The message body cell(s) */
padding: 0.25em 0.5em; /* 0.5em left/right */
}
.ambox td.mbox-image { /* The left image cell */
/* @noflip */
padding: 2px 0 2px 0.5em; /* 0.5em left, 0px right */
}
.ambox td.mbox-imageright { /* The right image cell */
/* @noflip */
padding: 2px 0.5em 2px 0; /* 0px left, 0.5em right */
}
table.ambox-notice {
/* @noflip */
border-left: 10px solid #1e90ff; /* Blue */
}
table.ambox-speedy {
/* @noflip */
border-left: 10px solid #b22222; /* Red */
background: #fee; /* Pink */
}
table.ambox-delete {
/* @noflip */
border-left: 10px solid #b22222; /* Red */
}
table.ambox-content {
/* @noflip */
border-left: 10px solid #f28500; /* Orange */
}
table.ambox-style {
/* @noflip */
border-left: 10px solid #f4c430; /* Yellow */
}
table.ambox-move {
/* @noflip */
border-left: 10px solid #9932cc; /* Purple */
}
table.ambox-protection {
/* @noflip */
border-left: 10px solid #bba; /* Gray-gold */
}
/* Image message box styles */
table.imbox {
margin: 4px 10%;
border-collapse: collapse;
border: 3px solid #1e90ff; /* Default "notice" blue */
background: #fbfbfb;
}
.imbox .mbox-text .imbox { /* For imboxes inside imbox-text cells. */
margin: 0 -0.5em; /* 0.9 - 0.5 = 0.4em left/right. */
display: block; /* Fix for webkit to force 100% width. */
}
.mbox-inside .imbox { /* For imboxes inside other templates. */
margin: 4px;
}
table.imbox-notice {
border: 3px solid #1e90ff; /* Blue */
}
table.imbox-speedy {
border: 3px solid #b22222; /* Red */
background: #fee; /* Pink */
}
table.imbox-delete {
border: 3px solid #b22222; /* Red */
}
table.imbox-content {
border: 3px solid #f28500; /* Orange */
}
table.imbox-style {
border: 3px solid #f4c430; /* Yellow */
}
table.imbox-move {
border: 3px solid #9932cc; /* Purple */
}
table.imbox-protection {
border: 3px solid #bba; /* Gray-gold */
}
table.imbox-license {
border: 3px solid #88a; /* Dark gray */
background: #f7f8ff; /* Light gray */
}
table.imbox-featured {
border: 3px solid #cba135; /* Brown-gold */
}
/* Category message box styles */
table.cmbox {
margin: 3px 10%;
border-collapse: collapse;
border: 1px solid #aaa;
background: #DFE8FF; /* Default "notice" blue */
}
table.cmbox-notice {
background: #D8E8FF; /* Blue */
}
table.cmbox-speedy {
margin-top: 4px;
margin-bottom: 4px;
border: 4px solid #b22222; /* Red */
background: #FFDBDB; /* Pink */
}
table.cmbox-delete {
background: #FFDBDB; /* Red */
}
table.cmbox-content {
background: #FFE7CE; /* Orange */
}
table.cmbox-style {
background: #FFF9DB; /* Yellow */
}
table.cmbox-move {
background: #E4D8FF; /* Purple */
}
table.cmbox-protection {
background: #EFEFE1; /* Gray-gold */
}
/* Other pages message box styles */
table.ombox {
margin: 4px 10%;
border-collapse: collapse;
border: 1px solid #aaa; /* Default "notice" gray */
background: #f9f9f9;
}
table.ombox-notice {
border: 1px solid #aaa; /* Gray */
}
table.ombox-speedy {
border: 2px solid #b22222; /* Red */
background: #fee; /* Pink */
}
table.ombox-delete {
border: 2px solid #b22222; /* Red */
}
table.ombox-content {
border: 1px solid #f28500; /* Orange */
}
table.ombox-style {
border: 1px solid #f4c430; /* Yellow */
}
table.ombox-move {
border: 1px solid #9932cc; /* Purple */
}
table.ombox-protection {
border: 2px solid #bba; /* Gray-gold */
}
/* Talk page message box styles */
table.tmbox {
margin: 4px 10%;
border-collapse: collapse;
border: 1px solid #c0c090; /* Default "notice" gray-brown */
background: #f8eaba;
}
.mediawiki .mbox-inside .tmbox { /* For tmboxes inside other templates. The "mediawiki" class ensures that */
margin: 2px 0; /* this declaration overrides other styles (including mbox-small above) */
width: 100%; /* For Safari and Opera */
}
.mbox-inside .tmbox.mbox-small { /* "small" tmboxes should not be small when */
line-height: 1.5em; /* also "nested", so reset styles that are */
font-size: 100%; /* set in "mbox-small" above. */
}
table.tmbox-speedy {
border: 2px solid #b22222; /* Red */
background: #fee; /* Pink */
}
table.tmbox-delete {
border: 2px solid #b22222; /* Red */
}
table.tmbox-content {
border: 2px solid #f28500; /* Orange */
}
table.tmbox-style {
border: 2px solid #f4c430; /* Yellow */
}
table.tmbox-move {
border: 2px solid #9932cc; /* Purple */
}
table.tmbox-protection,
table.tmbox-notice {
border: 1px solid #c0c090; /* Gray-brown */
}
/* Disambig and set index box styles */
table.dmbox {
clear: both;
margin: 0.9em 1em;
border-top: 1px solid #ccc;
border-bottom: 1px solid #ccc;
background: transparent;
}
/* Footer and header message box styles */
table.fmbox {
clear: both;
margin: 0.2em 0;
width: 100%;
border: 1px solid #aaa;
background: #f9f9f9; /* Default "system" gray */
}
table.fmbox-system {
background: #f9f9f9;
}
table.fmbox-warning {
border: 1px solid #bb7070; /* Dark pink */
background: #ffdbdb; /* Pink */
}
table.fmbox-editnotice {
background: transparent;
}
/* Div based "warning" style fmbox messages. */
div.mw-warning-with-logexcerpt,
div.mw-lag-warn-high,
div.mw-cascadeprotectedwarning,
div#mw-protect-cascadeon {
clear: both;
margin: 0.2em 0;
border: 1px solid #bb7070;
background: #ffdbdb;
padding: 0.25em 0.9em;
}
/* Div based "system" style fmbox messages.
Used in [[MediaWiki:Readonly lag]]. */
div.mw-lag-warn-normal,
div.fmbox-system {
clear: both;
margin: 0.2em 0;
border: 1px solid #aaa;
background: #f9f9f9;
padding: 0.25em 0.9em;
}
/* These mbox-small classes must be placed after all other
ambox/tmbox/ombox etc classes. "body.mediawiki" is so
they override "table.ambox + table.ambox" above. */
body.mediawiki table.mbox-small { /* For the "small=yes" option. */
/* @noflip */
clear: right;
/* @noflip */
float: right;
/* @noflip */
margin: 4px 0 4px 1em;
width: 238px;
font-size: 88%;
line-height: 1.25em;
}
body.mediawiki table.mbox-small-left { /* For the "small=left" option. */
/* @noflip */
margin: 4px 1em 4px 0;
width: 238px;
border-collapse: collapse;
font-size: 88%;
line-height: 1.25em;
}
/* Style for compact ambox */
/* Hide the images */
.compact-ambox table .mbox-image,
.compact-ambox table .mbox-imageright,
.compact-ambox table .mbox-empty-cell {
display: none;
}
/* Remove borders, backgrounds, padding, etc. */
.compact-ambox table.ambox {
border: none;
border-collapse: collapse;
background: transparent;
margin: 0 0 0 1.6em !important;
padding: 0 !important;
width: auto;
display: block;
}
body.mediawiki .compact-ambox table.mbox-small-left {
font-size: 100%;
width: auto;
margin: 0;
}
/* Style the text cell as a list item and remove its padding */
.compact-ambox table .mbox-text {
padding: 0 !important;
margin: 0 !important;
}
.compact-ambox table .mbox-text-span {
display: list-item;
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मगही दिवस
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Kandarpajit Kallol
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"'''मगही दिवस''' हर साल [[२३ अक्टूबर]] के दिन बिहार के मगध क्षेत्र अउर देश-विदेश में रहइ वाला मगही भाषी लोगन द्वारा मनावल जा हे। ई दिन मगही भाषा, ओकर साहित्य अउर सांस्कृत..." सङ्गे नया पन्ना बनावल गेलै
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'''मगही दिवस''' हर साल [[२३ अक्टूबर]] के दिन बिहार के मगध क्षेत्र अउर देश-विदेश में रहइ वाला मगही भाषी लोगन द्वारा मनावल जा हे। ई दिन मगही भाषा, ओकर साहित्य अउर सांस्कृतिक विरासत के बढ़ावा देवे खातिर मनावल जा हे। मगही भाषा के ऐतिहासिक संबंध मागधी प्राकृत से मानल जा हे।<ref>{{Cite web |title=मगही या मागधी भाषा : उत्पत्ति, विकास, लिपि और साहित्यिक परंपरा |url=https://knowledgesthali.com/मगही-या-मागधी-भाषा/ |website=Knowledge Sthali |access-date=१६ अक्टूबर २०२६}}</ref>
== इतिहास अउर शुरुआत ==
मगही दिवस मनावे के शुरुआत मगही के प्रमुख कवि डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के जयंती के अवसर पर भेल। १४ अगस्त २०१० के प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के पटना जिला के नीरपुर गाँव में अखिल भारतीय मगही-कवि सम्मेलन के आयोजन भेल हल। सम्मेलन के अध्यक्षता मगही अकादमी के अध्यक्ष अउर साहित्यकार उदय शंकर कइलथिन, जबकि संचालन कवि रामाश्रय झा कइलथिन।
एह सम्मेलन में बिहार अउर उत्तर प्रदेश से आइल कई गो साहित्यकार अउर कवि शामिल भेलथिन। सम्मेलन के समापन पर साहित्यकार लोग घोषणा कइलथिन कि कवि योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के जयंती [[२३ अक्टूबर]] के हर साल '''मगही दिवस''' के रूप में मनावल जायत।<ref>{{Cite web |title=मगही दिवस के रूप मे मनेगी योगेश की जयंती |url=https://magadhee.blogspot.com/2010/08/blog-post_14.html |website=मागधी |date=१४ अगस्त २०१० |access-date=१६ अक्टूबर २०२६}}</ref>
== डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' ==
डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' आधुनिक मगही साहित्य के प्रमुख कवि अउर साहित्यकार रहथिन। ऊ मगही भाषा में कविता, प्रबंध काव्य अउर अन्य साहित्यिक रचना कइलथिन। उनकर रचना में आम लोग के जीवन, सामाजिक परिस्थिति अउर ग्रामीण समाज के चित्रण मिल हे। ऊ मगही भाषा के साहित्यिक विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान देलथिन।
योगेश के निधन १२ अगस्त २००९ के बिहार के पटना जिला स्थित उनकर पैतृक गाँव नीरपुर में भेल हल। निधन के समय उनकर उमिर लगभग ८० साल बतावल गेल हल। उनकर निधन के बाद प्रकाशित समाचार रिपोर्ट के अनुसार, ऊ मगही के पहिल महाकाव्य 'गौतम' समेत दू दर्जन से अधिक पुस्तक के रचना कइलथिन। बिहार सरकार द्वारा उनखा लोकगाथा सम्मान समेत कई गो पुरस्कार से सम्मानित कइल गेल हल।<ref>{{Cite web |title=मगही के महाकवि डा. योगेश्वर प्रसाद सिंह योगेश का निधन |url=https://magahi-sahitya.blogspot.com/2009/08/24.html |website=मगही भाषा एवं साहित्य |date=२३ अगस्त २००९ |access-date=१६ अक्टूबर २०२६}}</ref>
== 'गौतम' महाकाव्य ==
'गौतम' डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के प्रमुख साहित्यिक रचना में से एगो हे। एकरा मगही भाषा के पहिल महाकाव्य के रूप में जानल जा हे। ई महाकाव्य भगवान बुद्ध के जीवन अउर विचार से संबंधित हे।
उपलब्ध साहित्यिक स्रोत के अनुसार, योगेश १९६६ में 'गौतम' महाकाव्य के रचना कइलथिन।<ref>{{Cite web |title=मगही के महाकवि डा. योगेश्वर प्रसाद सिंह योगेश का निधन |url=https://magahi-sahitya.blogspot.com/2009/08/24.html |website=मगही भाषा एवं साहित्य |access-date=१६ अक्टूबर २०२६}}</ref>
योगेश के साहित्यिक योगदान मगही भाषा में प्रबंध काव्य अउर महाकाव्य के परंपरा के विकास में महत्त्वपूर्ण रहल हे। उनकर रचना मगही साहित्य के इतिहास में खास स्थान रख हे।<ref>{{Cite web |title=Content - Magadh |url=https://ignca.gov.in/coilnet/mg005.htm |website=Indira Gandhi National Centre for the Arts |access-date=१६ अक्टूबर २०२६}}</ref>
== मगही दिवस के महत्त्व अउर आयोजन ==
मगही दिवस के मुख्य उद्देश्य मगही भाषा के प्रचार-प्रसार, ओकर साहित्यिक परंपरा के संरक्षण अउर नई पीढ़ी के आपन मातृभाषा से जोड़ल हे। एह दिन मगही के साहित्यकार, कवि अउर भाषा के विकास में योगदान देवे वाला लोग के याद कइल जा हे।
बिहार के मगध क्षेत्र में मगही भाषा से जुड़ल साहित्यिक अउर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कइल जा हे। एह कार्यक्रम में कवि सम्मेलन, कविता पाठ, साहित्यिक गोष्ठी अउर सांस्कृतिक गतिविधि शामिल रह हे।
१८ अक्टूबर २०११ के प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, योगेश के जयंती के अवसर पर २३ अक्टूबर के उनकर पैतृक गाँव नीरपुर में मगही दिवस मनावे के तैयारी कइल जा रहल हल। एह आयोजन में कवि के साहित्यिक योगदान के याद करे खातिर विशेष कार्यक्रम आयोजित करे के योजना बनावल गेल हल।<ref>{{Cite web |title=मगही दिवस पर जारी होगा कवि का कैलेंडर |url=https://magadhee.blogspot.com/2011/10/blog-post.html |website=मागधी |date=१८ अक्टूबर २०११ |access-date=१६ अक्टूबर २०२६}}</ref>
== मगही भाषा के संरक्षण अउर प्रचार-प्रसार ==
मगही भाषा के साहित्यिक परंपरा में कविता, महाकाव्य, कहानी, नाटक अउर लोकसाहित्य के महत्त्वपूर्ण स्थान हे। आधुनिक मगही साहित्य के विकास में योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के अलावा श्रीकृष्णदेव प्रसाद, श्रीकान्त शास्त्री अउर अन्य साहित्यकार के योगदान रहल हे।<ref>{{Cite web |title=Content - Magadh |url=https://ignca.gov.in/coilnet/mg005.htm |website=Indira Gandhi National Centre for the Arts |access-date=१६ अक्टूबर २०२६}}</ref>
इंटरनेट अउर डिजिटल माध्यम के विकास से मगही भाषा के साहित्य, इतिहास अउर संस्कृति के अधिक लोग तक पहुँचावे के अवसर बढ़ल हे। ऑनलाइन मंचन के माध्यम से मगही भाषा के सामग्री के संरक्षण अउर प्रचार-प्रसार में मदद मिल सकऽ हे।
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:मगही भाषा]]
[[श्रेणी:सांस्कृतिक उत्सव]]
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/* इतिहास अउर शुरुआत */
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'''मगही दिवस''' हर साल [[२३ अक्टूबर]] के दिन बिहार के मगध क्षेत्र अउर देश-विदेश में रहइ वाला मगही भाषी लोगन द्वारा मनावल जा हे। ई दिन मगही भाषा, ओकर साहित्य अउर सांस्कृतिक विरासत के बढ़ावा देवे खातिर मनावल जा हे। मगही भाषा के ऐतिहासिक संबंध मागधी प्राकृत से मानल जा हे।<ref>{{Cite web |title=मगही या मागधी भाषा : उत्पत्ति, विकास, लिपि और साहित्यिक परंपरा |url=https://knowledgesthali.com/मगही-या-मागधी-भाषा/ |website=Knowledge Sthali |access-date=१६ अक्टूबर २०२६}}</ref>
== इतिहास अउर शुरुआत ==
मगही दिवस मनावे के शुरुआत मगही के प्रमुख कवि डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के जयंती के अवसर पर भेल। १४ अगस्त २०१० के प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के [[पटना जिला]] के नीरपुर गाँव में अखिल भारतीय मगही-कवि सम्मेलन के आयोजन भेल हल। सम्मेलन के अध्यक्षता मगही अकादमी के अध्यक्ष अउर साहित्यकार उदय शंकर कइलथिन, जबकि संचालन कवि रामाश्रय झा कइलथिन।
एह सम्मेलन में बिहार अउर [[उत्तर प्रदेश]] से आइल कई गो साहित्यकार अउर कवि शामिल भेलथिन। सम्मेलन के समापन पर साहित्यकार लोग घोषणा कइलथिन कि कवि योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के जयंती २३ अक्टूबर के हर साल '''मगही दिवस''' के रूप में मनावल जायत।<ref>{{Cite web |title=मगही दिवस के रूप मे मनेगी योगेश की जयंती |url=https://magadhee.blogspot.com/2010/08/blog-post_14.html |website=मागधी |date=१४ अगस्त २०१० |access-date=१६ अक्टूबर २०२६}}</ref>
== डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' ==
डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' आधुनिक मगही साहित्य के प्रमुख कवि अउर साहित्यकार रहथिन। ऊ मगही भाषा में कविता, प्रबंध काव्य अउर अन्य साहित्यिक रचना कइलथिन। उनकर रचना में आम लोग के जीवन, सामाजिक परिस्थिति अउर ग्रामीण समाज के चित्रण मिल हे। ऊ मगही भाषा के साहित्यिक विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान देलथिन।
योगेश के निधन १२ अगस्त २००९ के बिहार के पटना जिला स्थित उनकर पैतृक गाँव नीरपुर में भेल हल। निधन के समय उनकर उमिर लगभग ८० साल बतावल गेल हल। उनकर निधन के बाद प्रकाशित समाचार रिपोर्ट के अनुसार, ऊ मगही के पहिल महाकाव्य 'गौतम' समेत दू दर्जन से अधिक पुस्तक के रचना कइलथिन। बिहार सरकार द्वारा उनखा लोकगाथा सम्मान समेत कई गो पुरस्कार से सम्मानित कइल गेल हल।<ref>{{Cite web |title=मगही के महाकवि डा. योगेश्वर प्रसाद सिंह योगेश का निधन |url=https://magahi-sahitya.blogspot.com/2009/08/24.html |website=मगही भाषा एवं साहित्य |date=२३ अगस्त २००९ |access-date=१६ अक्टूबर २०२६}}</ref>
== 'गौतम' महाकाव्य ==
'गौतम' डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के प्रमुख साहित्यिक रचना में से एगो हे। एकरा मगही भाषा के पहिल महाकाव्य के रूप में जानल जा हे। ई महाकाव्य भगवान बुद्ध के जीवन अउर विचार से संबंधित हे।
उपलब्ध साहित्यिक स्रोत के अनुसार, योगेश १९६६ में 'गौतम' महाकाव्य के रचना कइलथिन।<ref>{{Cite web |title=मगही के महाकवि डा. योगेश्वर प्रसाद सिंह योगेश का निधन |url=https://magahi-sahitya.blogspot.com/2009/08/24.html |website=मगही भाषा एवं साहित्य |access-date=१६ अक्टूबर २०२६}}</ref>
योगेश के साहित्यिक योगदान मगही भाषा में प्रबंध काव्य अउर महाकाव्य के परंपरा के विकास में महत्त्वपूर्ण रहल हे। उनकर रचना मगही साहित्य के इतिहास में खास स्थान रख हे।<ref>{{Cite web |title=Content - Magadh |url=https://ignca.gov.in/coilnet/mg005.htm |website=Indira Gandhi National Centre for the Arts |access-date=१६ अक्टूबर २०२६}}</ref>
== मगही दिवस के महत्त्व अउर आयोजन ==
मगही दिवस के मुख्य उद्देश्य मगही भाषा के प्रचार-प्रसार, ओकर साहित्यिक परंपरा के संरक्षण अउर नई पीढ़ी के आपन मातृभाषा से जोड़ल हे। एह दिन मगही के साहित्यकार, कवि अउर भाषा के विकास में योगदान देवे वाला लोग के याद कइल जा हे।
बिहार के मगध क्षेत्र में मगही भाषा से जुड़ल साहित्यिक अउर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कइल जा हे। एह कार्यक्रम में कवि सम्मेलन, कविता पाठ, साहित्यिक गोष्ठी अउर सांस्कृतिक गतिविधि शामिल रह हे।
१८ अक्टूबर २०११ के प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, योगेश के जयंती के अवसर पर २३ अक्टूबर के उनकर पैतृक गाँव नीरपुर में मगही दिवस मनावे के तैयारी कइल जा रहल हल। एह आयोजन में कवि के साहित्यिक योगदान के याद करे खातिर विशेष कार्यक्रम आयोजित करे के योजना बनावल गेल हल।<ref>{{Cite web |title=मगही दिवस पर जारी होगा कवि का कैलेंडर |url=https://magadhee.blogspot.com/2011/10/blog-post.html |website=मागधी |date=१८ अक्टूबर २०११ |access-date=१६ अक्टूबर २०२६}}</ref>
== मगही भाषा के संरक्षण अउर प्रचार-प्रसार ==
मगही भाषा के साहित्यिक परंपरा में कविता, महाकाव्य, कहानी, नाटक अउर लोकसाहित्य के महत्त्वपूर्ण स्थान हे। आधुनिक मगही साहित्य के विकास में योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के अलावा श्रीकृष्णदेव प्रसाद, श्रीकान्त शास्त्री अउर अन्य साहित्यकार के योगदान रहल हे।<ref>{{Cite web |title=Content - Magadh |url=https://ignca.gov.in/coilnet/mg005.htm |website=Indira Gandhi National Centre for the Arts |access-date=१६ अक्टूबर २०२६}}</ref>
इंटरनेट अउर डिजिटल माध्यम के विकास से मगही भाषा के साहित्य, इतिहास अउर संस्कृति के अधिक लोग तक पहुँचावे के अवसर बढ़ल हे। ऑनलाइन मंचन के माध्यम से मगही भाषा के सामग्री के संरक्षण अउर प्रचार-प्रसार में मदद मिल सकऽ हे।
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:मगही भाषा]]
[[श्रेणी:सांस्कृतिक उत्सव]]
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'''मगही दिवस''' हर साल २३ अक्टूबर के दिन [[बिहार]] के [[मगध]] क्षेत्र अउर देश-विदेश में रहइ वाला मगही भाषी लोगन द्वारा मनावल जा हे। ई दिन [[मगही भाषा]], ओकर [[साहित्य]] अउर [[संस्कृति|सांस्कृतिक]] विरासत के बढ़ावा देवे खातिर मनावल जा हे। मगही भाषा के ऐतिहासिक संबंध [[मागधी प्राकृत]] से मानल जा हे।<ref>{{Cite web |title=मगही या मागधी भाषा : उत्पत्ति, विकास, लिपि और साहित्यिक परंपरा |url=https://knowledgesthali.com/मगही-या-मागधी-भाषा/ |website=Knowledge Sthali |access-date=१६ अक्टूबर २०२६}}</ref>
== इतिहास अउर शुरुआत ==
मगही दिवस मनावे के शुरुआत मगही के प्रमुख कवि डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के जयंती के अवसर पर भेल। १४ अगस्त २०१० के प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के [[पटना जिला]] के नीरपुर गाँव में अखिल भारतीय मगही-कवि सम्मेलन के आयोजन भेल हल। सम्मेलन के अध्यक्षता मगही अकादमी के अध्यक्ष अउर साहित्यकार उदय शंकर कइलथिन, जबकि संचालन कवि रामाश्रय झा कइलथिन।
एह सम्मेलन में बिहार अउर [[उत्तर प्रदेश]] से आइल कई गो साहित्यकार अउर कवि शामिल भेलथिन। सम्मेलन के समापन पर साहित्यकार लोग घोषणा कइलथिन कि कवि योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के जयंती २३ अक्टूबर के हर साल '''मगही दिवस''' के रूप में मनावल जायत।<ref>{{Cite web |title=मगही दिवस के रूप मे मनेगी योगेश की जयंती |url=https://magadhee.blogspot.com/2010/08/blog-post_14.html |website=मागधी |date=१४ अगस्त २०१० |access-date=१६ अक्टूबर २०२६}}</ref>
== डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' ==
डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' आधुनिक मगही साहित्य के प्रमुख कवि अउर साहित्यकार रहथिन। ऊ मगही भाषा में कविता, प्रबंध काव्य अउर अन्य साहित्यिक रचना कइलथिन। उनकर रचना में आम लोग के जीवन, सामाजिक परिस्थिति अउर ग्रामीण समाज के चित्रण मिल हे। ऊ मगही भाषा के साहित्यिक विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान देलथिन।
योगेश के निधन १२ अगस्त २००९ के बिहार के पटना जिला स्थित उनकर पैतृक गाँव नीरपुर में भेल हल। निधन के समय उनकर उमिर लगभग ८० साल बतावल गेल हल। उनकर निधन के बाद प्रकाशित समाचार रिपोर्ट के अनुसार, ऊ मगही के पहिल महाकाव्य 'गौतम' समेत दू दर्जन से अधिक पुस्तक के रचना कइलथिन। बिहार सरकार द्वारा उनखा लोकगाथा सम्मान समेत कई गो पुरस्कार से सम्मानित कइल गेल हल।<ref>{{Cite web |title=मगही के महाकवि डा. योगेश्वर प्रसाद सिंह योगेश का निधन |url=https://magahi-sahitya.blogspot.com/2009/08/24.html |website=मगही भाषा एवं साहित्य |date=२३ अगस्त २००९ |access-date=१६ अक्टूबर २०२६}}</ref>
== 'गौतम' महाकाव्य ==
'गौतम' डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के प्रमुख साहित्यिक रचना में से एगो हे। एकरा मगही भाषा के पहिल महाकाव्य के रूप में जानल जा हे। ई महाकाव्य भगवान बुद्ध के जीवन अउर विचार से संबंधित हे।
उपलब्ध साहित्यिक स्रोत के अनुसार, योगेश १९६६ में 'गौतम' महाकाव्य के रचना कइलथिन।<ref>{{Cite web |title=मगही के महाकवि डा. योगेश्वर प्रसाद सिंह योगेश का निधन |url=https://magahi-sahitya.blogspot.com/2009/08/24.html |website=मगही भाषा एवं साहित्य |access-date=१६ अक्टूबर २०२६}}</ref>
योगेश के साहित्यिक योगदान मगही भाषा में प्रबंध काव्य अउर महाकाव्य के परंपरा के विकास में महत्त्वपूर्ण रहल हे। उनकर रचना मगही साहित्य के इतिहास में खास स्थान रख हे।<ref>{{Cite web |title=Content - Magadh |url=https://ignca.gov.in/coilnet/mg005.htm |website=Indira Gandhi National Centre for the Arts |access-date=१६ अक्टूबर २०२६}}</ref>
== मगही दिवस के महत्त्व अउर आयोजन ==
मगही दिवस के मुख्य उद्देश्य मगही भाषा के प्रचार-प्रसार, ओकर साहित्यिक परंपरा के संरक्षण अउर नई पीढ़ी के आपन मातृभाषा से जोड़ल हे। एह दिन मगही के साहित्यकार, कवि अउर भाषा के विकास में योगदान देवे वाला लोग के याद कइल जा हे।
बिहार के मगध क्षेत्र में मगही भाषा से जुड़ल साहित्यिक अउर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कइल जा हे। एह कार्यक्रम में कवि सम्मेलन, कविता पाठ, साहित्यिक गोष्ठी अउर सांस्कृतिक गतिविधि शामिल रह हे।
१८ अक्टूबर २०११ के प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, योगेश के जयंती के अवसर पर २३ अक्टूबर के उनकर पैतृक गाँव नीरपुर में मगही दिवस मनावे के तैयारी कइल जा रहल हल। एह आयोजन में कवि के साहित्यिक योगदान के याद करे खातिर विशेष कार्यक्रम आयोजित करे के योजना बनावल गेल हल।<ref>{{Cite web |title=मगही दिवस पर जारी होगा कवि का कैलेंडर |url=https://magadhee.blogspot.com/2011/10/blog-post.html |website=मागधी |date=१८ अक्टूबर २०११ |access-date=१६ अक्टूबर २०२६}}</ref>
== मगही भाषा के संरक्षण अउर प्रचार-प्रसार ==
मगही भाषा के साहित्यिक परंपरा में कविता, महाकाव्य, कहानी, नाटक अउर लोकसाहित्य के महत्त्वपूर्ण स्थान हे। आधुनिक मगही साहित्य के विकास में योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के अलावा श्रीकृष्णदेव प्रसाद, श्रीकान्त शास्त्री अउर अन्य साहित्यकार के योगदान रहल हे।<ref>{{Cite web |title=Content - Magadh |url=https://ignca.gov.in/coilnet/mg005.htm |website=Indira Gandhi National Centre for the Arts |access-date=१६ अक्टूबर २०२६}}</ref>
इंटरनेट अउर डिजिटल माध्यम के विकास से मगही भाषा के साहित्य, इतिहास अउर संस्कृति के अधिक लोग तक पहुँचावे के अवसर बढ़ल हे। ऑनलाइन मंचन के माध्यम से मगही भाषा के सामग्री के संरक्षण अउर प्रचार-प्रसार में मदद मिल सकऽ हे।
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:मगही भाषा]]
[[श्रेणी:सांस्कृतिक उत्सव]]
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'''मगही दिवस''' हर साल २३ अक्टूबर के दिन [[बिहार]] के [[मगध]] क्षेत्र अउर देश-विदेश में रहे वाला मगही भाषी लोग द्वारा मनावल जा हे। एह दिन के उद्देश्य [[मगही भाषा]], ओकर [[साहित्य]] अउर [[संस्कृति|सांस्कृतिक]] विरासत के प्रचार-प्रसार करना हे। मगही भाषा के ऐतिहासिक संबंध [[मागधी प्राकृत]] से मानल जा हे।<ref name="KnowledgeSthali">{{Cite web |title=मगही या मागधी भाषा : उत्पत्ति, विकास, लिपि और साहित्यिक परंपरा |url=https://knowledgesthali.com/मगही-या-मागधी-भाषा/ |website=Knowledge Sthali |access-date=16 October 2026}}</ref>
== इतिहास अउर शुरुआत ==
मगही दिवस मनावे के शुरुआत मगही के प्रमुख कवि डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के जयंती के अवसर पर भेल। १४ अगस्त २०१० के प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के [[पटना जिला]] के नीरपुर गाँव में अखिल भारतीय मगही-कवि सम्मेलन के आयोजन भेल हल। सम्मेलन के अध्यक्षता मगही अकादमी के अध्यक्ष अउर साहित्यकार उदय शंकर कइलथिन, जबकि संचालन कवि रामाश्रय झा कइलथिन।
एह सम्मेलन में बिहार अउर [[उत्तर प्रदेश]] से आइल कई गो साहित्यकार अउर कवि शामिल भेलथिन। सम्मेलन के समापन पर साहित्यकार लोग घोषणा कइलथिन कि कवि योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के जयंती २३ अक्टूबर के हर साल '''मगही दिवस''' के रूप में मनावल जायत।<ref name="MagahiDay2010">{{Cite web |title=मगही दिवस के रूप मे मनेगी योगेश की जयंती |url=https://magadhee.blogspot.com/2010/08/blog-post_14.html |website=मागधी |date=14 August 2010 |access-date=16 October 2026}}</ref>
== डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' ==
डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' आधुनिक मगही साहित्य के प्रमुख कवि अउर साहित्यकार रहथिन। ऊ मगही भाषा में कविता, प्रबंध काव्य अउर अन्य साहित्यिक रचना कइलथिन। उनकर रचना में आम लोग के जीवन, सामाजिक परिस्थिति अउर ग्रामीण समाज के चित्रण मिल हे। ऊ मगही भाषा के साहित्यिक विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान देलथिन।
योगेश के निधन १२ अगस्त २००९ के बिहार के पटना जिला स्थित उनकर पैतृक गाँव नीरपुर में भेल हल। निधन के समय उनकर उमिर लगभग ८० साल बतावल गेल हल। उनकर निधन के बाद प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, ऊ मगही के पहिल महाकाव्य 'गौतम' समेत दू दर्जन से अधिक पुस्तक के रचना कइलथिन। बिहार सरकार द्वारा उनखा लोकगाथा सम्मान समेत कई गो पुरस्कार से सम्मानित कइल गेल हल।<ref name="YogeshObituary">{{Cite web |title=मगही के महाकवि डा. योगेश्वर प्रसाद सिंह योगेश का निधन |url=https://magahi-sahitya.blogspot.com/2009/08/24.html |website=मगही भाषा एवं साहित्य |date=23 August 2009 |access-date=16 October 2026}}</ref>
== 'गौतम' महाकाव्य ==
'गौतम' डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के प्रमुख साहित्यिक रचना में से एगो हे। एकरा मगही भाषा के पहिल महाकाव्य के रूप में जानल जा हे। ई महाकाव्य भगवान बुद्ध के जीवन अउर विचार से संबंधित हे।
उपलब्ध साहित्यिक स्रोत के अनुसार, योगेश १९६६ में 'गौतम' महाकाव्य के रचना कइलथिन।<ref name="YogeshObituary"/>
योगेश के साहित्यिक योगदान मगही भाषा में प्रबंध काव्य अउर महाकाव्य के परंपरा के विकास में महत्त्वपूर्ण रहल हे। उनकर रचना मगही साहित्य के इतिहास में खास स्थान रख हे।<ref name="IGNCAMagadh">{{Cite web |title=Content - Magadh |url=https://ignca.gov.in/coilnet/mg005.htm |website=Indira Gandhi National Centre for the Arts |access-date=16 October 2026}}</ref>
== मगही दिवस के महत्त्व अउर आयोजन ==
मगही दिवस के मुख्य उद्देश्य मगही भाषा के प्रचार-प्रसार, ओकर साहित्यिक परंपरा के संरक्षण अउर नई पीढ़ी के आपन मातृभाषा से जोड़ना हे। एह दिन मगही के साहित्यकार, कवि अउर भाषा के विकास में योगदान देवे वाला लोग के याद कइल जा हे।
बिहार के मगध क्षेत्र में मगही भाषा से जुड़ल साहित्यिक अउर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कइल जा हे। एह कार्यक्रम में कवि सम्मेलन, कविता पाठ, साहित्यिक गोष्ठी अउर सांस्कृतिक गतिविधि शामिल रह हे।
१८ अक्टूबर २०११ के प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, योगेश के जयंती के अवसर पर २३ अक्टूबर के उनकर पैतृक गाँव नीरपुर में मगही दिवस मनावे के तैयारी कइल जा रहल हल। एह आयोजन में कवि के साहित्यिक योगदान के याद करे खातिर विशेष कार्यक्रम आयोजित करे के योजना बनावल गेल हल।<ref name="MagahiDay2011">{{Cite web |title=मगही दिवस पर जारी होगा कवि का कैलेंडर |url=https://magadhee.blogspot.com/2011/10/blog-post.html |website=मागधी |date=18 October 2011 |access-date=16 October 2026}}</ref>
== मगही भाषा के संरक्षण अउर प्रचार-प्रसार ==
मगही भाषा के साहित्यिक परंपरा में कविता, महाकाव्य, कहानी, नाटक अउर लोकसाहित्य के महत्त्वपूर्ण स्थान हे। आधुनिक मगही साहित्य के विकास में योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के अलावा श्रीकृष्णदेव प्रसाद, श्रीकान्त शास्त्री अउर अन्य साहित्यकार के योगदान रहल हे।<ref name="IGNCAMagadh"/>
इंटरनेट अउर डिजिटल माध्यम के विकास से मगही भाषा के साहित्य, इतिहास अउर संस्कृति के अधिक लोग तक पहुँचावे के अवसर बढ़ल हे। ऑनलाइन मंचन के माध्यम से मगही भाषा के सामग्री के संरक्षण अउर प्रचार-प्रसार में मदद मिल सकऽ हे।
== संदर्भ ==
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[[श्रेणी:मगही भाषा]]
[[श्रेणी:सांस्कृतिक उत्सव]]
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'''मगही दिवस''' हर साल २३ अक्टूबर के दिन [[बिहार]] के [[मगध]] क्षेत्र अउर देश-विदेश में रहे वाला मगही भाषी लोग द्वारा मनावल जा हे। एह दिन के उद्देश्य [[मगही भाषा]], ओकर [[साहित्य]] अउर [[संस्कृति|सांस्कृतिक]] विरासत के प्रचार-प्रसार करना हे। मगही भाषा के ऐतिहासिक संबंध [[मागधी प्राकृत]] से मानल जा हे।<ref name="KnowledgeSthali">{{Cite web |title=मगही या मागधी भाषा : उत्पत्ति, विकास, लिपि और साहित्यिक परंपरा |url=https://knowledgesthali.com/मगही-या-मागधी-भाषा/ |website=Knowledge Sthali |access-date=16 October 2026}}</ref>
== इतिहास अउर शुरुआत ==
मगही दिवस मनावे के शुरुआत मगही के प्रमुख कवि डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के जयंती के अवसर पर भेल। १४ अगस्त २०१० के प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के [[पटना जिला]] के नीरपुर गाँव में अखिल भारतीय मगही-कवि सम्मेलन के आयोजन भेल हल। सम्मेलन के अध्यक्षता मगही अकादमी के अध्यक्ष अउर साहित्यकार उदय शंकर कइलथिन, जबकि संचालन कवि रामाश्रय झा कइलथिन।
एह सम्मेलन में बिहार अउर [[उत्तर प्रदेश]] से आइल कई गो साहित्यकार अउर कवि शामिल भेलथिन। सम्मेलन के समापन पर साहित्यकार लोग घोषणा कइलथिन कि कवि योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के जयंती २३ अक्टूबर के हर साल '''मगही दिवस''' के रूप में मनावल जायत।<ref name="MagahiDay2010">{{Cite web |title=मगही दिवस के रूप मे मनेगी योगेश की जयंती |url=https://magadhee.blogspot.com/2010/08/blog-post_14.html |website=मागधी |date=14 August 2010 |access-date=16 October 2026}}</ref>
== डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' ==
डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' आधुनिक मगही साहित्य के प्रमुख कवि अउर साहित्यकार रहथिन। ऊ मगही भाषा में कविता, प्रबंध काव्य अउर अन्य साहित्यिक रचना कइलथिन। उनकर रचना में आम लोग के जीवन, सामाजिक परिस्थिति अउर ग्रामीण समाज के चित्रण मिल हे। ऊ मगही भाषा के साहित्यिक विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान देलथिन।
योगेश के निधन १२ अगस्त २००९ के बिहार के पटना जिला स्थित उनकर पैतृक गाँव नीरपुर में भेल हल। निधन के समय उनकर उमिर लगभग ८० साल बतावल गेल हल। उनकर निधन के बाद प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, ऊ मगही के पहिल महाकाव्य 'गौतम' समेत दू दर्जन से अधिक पुस्तक के रचना कइलथिन। बिहार सरकार द्वारा उनखा लोकगाथा सम्मान समेत कई गो पुरस्कार से सम्मानित कइल गेल हल।<ref name="YogeshObituary">{{Cite web |title=मगही के महाकवि डा. योगेश्वर प्रसाद सिंह योगेश का निधन |url=https://magahi-sahitya.blogspot.com/2009/08/24.html |website=मगही भाषा एवं साहित्य |date=23 August 2009 |access-date=16 October 2026}}</ref>
== 'गौतम' महाकाव्य ==
'गौतम' डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के प्रमुख साहित्यिक रचना में से एगो हे। एकरा मगही भाषा के पहिल महाकाव्य के रूप में जानल जा हे। ई महाकाव्य भगवान बुद्ध के जीवन अउर विचार से संबंधित हे।
उपलब्ध साहित्यिक स्रोत के अनुसार, योगेश १९६६ में 'गौतम' महाकाव्य के रचना कइलथिन।<ref name="YogeshObituary"/>
योगेश के साहित्यिक योगदान मगही भाषा में प्रबंध काव्य अउर महाकाव्य के परंपरा के विकास में महत्त्वपूर्ण रहल हे। उनकर रचना मगही साहित्य के इतिहास में खास स्थान रख हे।<ref name="IGNCAMagadh">{{Cite web |title=Content - Magadh |url=https://ignca.gov.in/coilnet/mg005.htm |website=Indira Gandhi National Centre for the Arts |access-date=16 October 2026}}</ref>
== मगही दिवस के महत्त्व अउर आयोजन ==
मगही दिवस के मुख्य उद्देश्य मगही भाषा के प्रचार-प्रसार, ओकर साहित्यिक परंपरा के संरक्षण अउर नई पीढ़ी के आपन मातृभाषा से जोड़ना हे। एह दिन मगही के साहित्यकार, कवि अउर भाषा के विकास में योगदान देवे वाला लोग के याद कइल जा हे।
बिहार के मगध क्षेत्र में मगही भाषा से जुड़ल साहित्यिक अउर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कइल जा हे। एह कार्यक्रम में कवि सम्मेलन, कविता पाठ, साहित्यिक गोष्ठी अउर सांस्कृतिक गतिविधि शामिल रह हे।
१८ अक्टूबर २०११ के प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, योगेश के जयंती के अवसर पर २३ अक्टूबर के उनकर पैतृक गाँव नीरपुर में मगही दिवस मनावे के तैयारी कइल जा रहल हल। एह आयोजन में कवि के साहित्यिक योगदान के याद करे खातिर विशेष कार्यक्रम आयोजित करे के योजना बनावल गेल हल।<ref name="MagahiDay2011">{{Cite web |title=मगही दिवस पर जारी होगा कवि का कैलेंडर |url=https://magadhee.blogspot.com/2011/10/blog-post.html |website=मागधी |date=18 October 2011 |access-date=16 October 2026}}</ref>
== मगही भाषा के संरक्षण अउर प्रचार-प्रसार ==
मगही भाषा के साहित्यिक परंपरा में कविता, महाकाव्य, कहानी, नाटक अउर लोकसाहित्य के महत्त्वपूर्ण स्थान हे। आधुनिक मगही साहित्य के विकास में योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के अलावा श्रीकृष्णदेव प्रसाद, श्रीकान्त शास्त्री अउर अन्य साहित्यकार के योगदान रहल हे।<ref name="IGNCAMagadh"/>
इंटरनेट अउर डिजिटल माध्यम के विकास से मगही भाषा के साहित्य, इतिहास अउर संस्कृति के अधिक लोग तक पहुँचावे के अवसर बढ़ल हे। ऑनलाइन मंचन के माध्यम से मगही भाषा के सामग्री के संरक्षण अउर प्रचार-प्रसार में मदद मिल सकऽ हे।
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:मगध]]
[[श्रेणी:संस्कृति]]
[[श्रेणी:उत्सव]]
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'''मगही दिवस''' हर साल २३ अक्टूबर के दिन [[बिहार]] के [[मगध]] क्षेत्र अउर देश-विदेश में रहे वाला मगही भाषी लोग द्वारा मनावल जा हे। एह दिन के उद्देश्य [[मगही भाषा]], ओकर [[साहित्य]] अउर [[संस्कृति|सांस्कृतिक]] विरासत के प्रचार-प्रसार करना हे। मगही भाषा के ऐतिहासिक संबंध [[मागधी प्राकृत]] से मानल जा हे।<ref name="KnowledgeSthali">{{Cite web |title=मगही या मागधी भाषा : उत्पत्ति, विकास, लिपि और साहित्यिक परंपरा |url=https://knowledgesthali.com/मगही-या-मागधी-भाषा/ |website=Knowledge Sthali |access-date=16 October 2026}}</ref>
== इतिहास अउर शुरुआत ==
मगही दिवस मनावे के शुरुआत मगही के प्रमुख कवि डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के जयंती के अवसर पर भेल। १४ अगस्त २०१० के प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के [[पटना जिला]] के नीरपुर गाँव में अखिल भारतीय मगही-कवि सम्मेलन के आयोजन भेल हल। सम्मेलन के अध्यक्षता मगही अकादमी के अध्यक्ष अउर साहित्यकार उदय शंकर कइलथिन, जबकि संचालन कवि रामाश्रय झा कइलथिन।
एह सम्मेलन में बिहार अउर [[उत्तर प्रदेश]] से आइल कई गो साहित्यकार अउर कवि शामिल भेलथिन। सम्मेलन के समापन पर साहित्यकार लोग घोषणा कइलथिन कि कवि योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के जयंती २३ अक्टूबर के हर साल '''मगही दिवस''' के रूप में मनावल जायत।<ref name="MagahiDay2010">{{Cite web |title=मगही दिवस के रूप मे मनेगी योगेश की जयंती |url=https://magadhee.blogspot.com/2010/08/blog-post_14.html |website=मागधी |date=14 August 2010 |access-date=16 October 2026}}</ref>
== डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' ==
डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' आधुनिक मगही साहित्य के प्रमुख कवि अउर साहित्यकार रहथिन। ऊ मगही भाषा में कविता, प्रबंध काव्य अउर अन्य साहित्यिक रचना कइलथिन। उनकर रचना में आम लोग के जीवन, सामाजिक परिस्थिति अउर ग्रामीण समाज के चित्रण मिल हे। ऊ मगही भाषा के साहित्यिक विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान देलथिन।
योगेश के निधन १२ अगस्त २००९ के बिहार के पटना जिला स्थित उनकर पैतृक गाँव नीरपुर में भेल हल। निधन के समय उनकर उमिर लगभग ८० साल बतावल गेल हल। उनकर निधन के बाद प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, ऊ मगही के पहिल महाकाव्य 'गौतम' समेत दू दर्जन से अधिक पुस्तक के रचना कइलथिन। बिहार सरकार द्वारा उनखा लोकगाथा सम्मान समेत कई गो पुरस्कार से सम्मानित कइल गेल हल।<ref name="YogeshObituary">{{Cite web |title=मगही के महाकवि डा. योगेश्वर प्रसाद सिंह योगेश का निधन |url=https://magahi-sahitya.blogspot.com/2009/08/24.html |website=मगही भाषा एवं साहित्य |date=23 August 2009 |access-date=16 October 2026}}</ref>
== 'गौतम' महाकाव्य ==
'गौतम' डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के प्रमुख साहित्यिक रचना में से एगो हे। एकरा मगही भाषा के पहिल महाकाव्य के रूप में जानल जा हे। ई महाकाव्य भगवान बुद्ध के जीवन अउर विचार से संबंधित हे।
उपलब्ध साहित्यिक स्रोत के अनुसार, योगेश १९६६ में 'गौतम' महाकाव्य के रचना कइलथिन।<ref name="YogeshObituary"/>
योगेश के साहित्यिक योगदान मगही भाषा में प्रबंध काव्य अउर महाकाव्य के परंपरा के विकास में महत्त्वपूर्ण रहल हे। उनकर रचना मगही साहित्य के इतिहास में खास स्थान रख हे।<ref name="IGNCAMagadh">{{Cite web |title=Content - Magadh |url=https://ignca.gov.in/coilnet/mg005.htm |website=Indira Gandhi National Centre for the Arts |access-date=16 October 2026}}</ref>
== मगही दिवस के महत्त्व अउर आयोजन ==
मगही दिवस के मुख्य उद्देश्य मगही भाषा के प्रचार-प्रसार, ओकर साहित्यिक परंपरा के संरक्षण अउर नई पीढ़ी के आपन मातृभाषा से जोड़ना हे। एह दिन मगही के साहित्यकार, कवि अउर भाषा के विकास में योगदान देवे वाला लोग के याद कइल जा हे।
बिहार के मगध क्षेत्र में मगही भाषा से जुड़ल साहित्यिक अउर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कइल जा हे। एह कार्यक्रम में कवि सम्मेलन, कविता पाठ, साहित्यिक गोष्ठी अउर सांस्कृतिक गतिविधि शामिल रह हे।
१८ अक्टूबर २०११ के प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, योगेश के जयंती के अवसर पर २३ अक्टूबर के उनकर पैतृक गाँव नीरपुर में मगही दिवस मनावे के तैयारी कइल जा रहल हल। एह आयोजन में कवि के साहित्यिक योगदान के याद करे खातिर विशेष कार्यक्रम आयोजित करे के योजना बनावल गेल हल।<ref name="MagahiDay2011">{{Cite web |title=मगही दिवस पर जारी होगा कवि का कैलेंडर |url=https://magadhee.blogspot.com/2011/10/blog-post.html |website=मागधी |date=18 October 2011 |access-date=16 October 2026}}</ref>
== मगही भाषा के संरक्षण अउर प्रचार-प्रसार ==
मगही भाषा के साहित्यिक परंपरा में कविता, महाकाव्य, कहानी, नाटक अउर लोकसाहित्य के महत्त्वपूर्ण स्थान हे। आधुनिक मगही साहित्य के विकास में योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के अलावा श्रीकृष्णदेव प्रसाद, श्रीकान्त शास्त्री अउर अन्य साहित्यकार के योगदान रहल हे।<ref name="IGNCAMagadh"/>
इंटरनेट अउर डिजिटल माध्यम के विकास से मगही भाषा के साहित्य, इतिहास अउर संस्कृति के अधिक लोग तक पहुँचावे के अवसर बढ़ल हे। ऑनलाइन मंचन के माध्यम से मगही भाषा के सामग्री के संरक्षण अउर प्रचार-प्रसार में मदद मिल सकऽ हे।
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:मगध]]
[[श्रेणी:संस्कृति]]
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'''मगही दिवस''' हर साल २३ अक्टूबर के दिन [[बिहार]] के [[मगध]] क्षेत्र अउर देश-विदेश में रहे वाला मगही भाषी लोग द्वारा मनावल जा हे। एह दिन के उद्देश्य [[मगही भाषा]], ओकर [[साहित्य]] अउर [[संस्कृति|सांस्कृतिक]] विरासत के प्रचार-प्रसार करना हे। मगही भाषा के ऐतिहासिक संबंध [[मागधी प्राकृत]] से मानल जा हे।<ref name="KnowledgeSthali">{{Cite web |title=मगही या मागधी भाषा : उत्पत्ति, विकास, लिपि और साहित्यिक परंपरा |url=https://knowledgesthali.com/मगही-या-मागधी-भाषा/ |website=Knowledge Sthali |access-date=16 October 2026}}</ref>
== इतिहास अउर शुरुआत ==
मगही दिवस मनावे के शुरुआत मगही के प्रमुख कवि डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के जयंती के अवसर पर भेल। १४ अगस्त २०१० के प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के [[पटना जिला]] के नीरपुर गाँव में अखिल भारतीय मगही-कवि सम्मेलन के आयोजन भेल हल। सम्मेलन के अध्यक्षता मगही अकादमी के अध्यक्ष अउर साहित्यकार उदय शंकर कइलथिन, जबकि संचालन कवि रामाश्रय झा कइलथिन।
एह सम्मेलन में बिहार अउर [[उत्तर प्रदेश]] से आइल कई गो साहित्यकार अउर कवि शामिल भेलथिन। सम्मेलन के समापन पर साहित्यकार लोग घोषणा कइलथिन कि कवि योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के जयंती २३ अक्टूबर के हर साल '''मगही दिवस''' के रूप में मनावल जायत।<ref name="MagahiDay2010">{{Cite web |title=मगही दिवस के रूप मे मनेगी योगेश की जयंती |url=https://magadhee.blogspot.com/2010/08/blog-post_14.html |website=मागधी |date=14 August 2010 |access-date=16 October 2026}}</ref>
== डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' ==
डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' आधुनिक मगही साहित्य के प्रमुख कवि अउर साहित्यकार रहथिन। ऊ मगही भाषा में कविता, प्रबंध काव्य अउर अन्य साहित्यिक रचना कइलथिन। उनकर रचना में आम लोग के जीवन, सामाजिक परिस्थिति अउर ग्रामीण समाज के चित्रण मिल हे। ऊ मगही भाषा के साहित्यिक विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान देलथिन।
योगेश के निधन १२ अगस्त २००९ के बिहार के पटना जिला स्थित उनकर पैतृक गाँव नीरपुर में भेल हल। निधन के समय उनकर उमिर लगभग ८० साल बतावल गेल हल। उनकर निधन के बाद प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, ऊ मगही के पहिल महाकाव्य 'गौतम' समेत दू दर्जन से अधिक पुस्तक के रचना कइलथिन। बिहार सरकार द्वारा उनखा लोकगाथा सम्मान समेत कई गो पुरस्कार से सम्मानित कइल गेल हल।<ref name="YogeshObituary">{{Cite web |title=मगही के महाकवि डा. योगेश्वर प्रसाद सिंह योगेश का निधन |url=https://magahi-sahitya.blogspot.com/2009/08/24.html |website=मगही भाषा एवं साहित्य |date=23 August 2009 |access-date=16 October 2026}}</ref>
== 'गौतम' महाकाव्य ==
'गौतम' डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के प्रमुख साहित्यिक रचना में से एगो हे। एकरा मगही भाषा के पहिल महाकाव्य के रूप में जानल जा हे। ई महाकाव्य भगवान बुद्ध के जीवन अउर विचार से संबंधित हे।
उपलब्ध साहित्यिक स्रोत के अनुसार, योगेश १९६६ में 'गौतम' महाकाव्य के रचना कइलथिन।<ref name="YogeshObituary"/>
योगेश के साहित्यिक योगदान मगही भाषा में प्रबंध काव्य अउर महाकाव्य के परंपरा के विकास में महत्त्वपूर्ण रहल हे। उनकर रचना मगही साहित्य के इतिहास में खास स्थान रख हे।<ref name="IGNCAMagadh">{{Cite web |title=Content - Magadh |url=https://ignca.gov.in/coilnet/mg005.htm |website=Indira Gandhi National Centre for the Arts |access-date=16 October 2026}}</ref>
== मगही दिवस के महत्त्व अउर आयोजन ==
मगही दिवस के मुख्य उद्देश्य मगही भाषा के प्रचार-प्रसार, ओकर साहित्यिक परंपरा के संरक्षण अउर नई पीढ़ी के आपन मातृभाषा से जोड़ना हे। एह दिन मगही के साहित्यकार, कवि अउर भाषा के विकास में योगदान देवे वाला लोग के याद कइल जा हे।
बिहार के मगध क्षेत्र में मगही भाषा से जुड़ल साहित्यिक अउर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कइल जा हे। एह कार्यक्रम में कवि सम्मेलन, कविता पाठ, साहित्यिक गोष्ठी अउर सांस्कृतिक गतिविधि शामिल रह हे।
१८ अक्टूबर २०११ के प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, योगेश के जयंती के अवसर पर २३ अक्टूबर के उनकर पैतृक गाँव नीरपुर में मगही दिवस मनावे के तैयारी कइल जा रहल हल। एह आयोजन में कवि के साहित्यिक योगदान के याद करे खातिर विशेष कार्यक्रम आयोजित करे के योजना बनावल गेल हल।<ref name="MagahiDay2011">{{Cite web |title=मगही दिवस पर जारी होगा कवि का कैलेंडर |url=https://magadhee.blogspot.com/2011/10/blog-post.html |website=मागधी |date=18 October 2011 |access-date=16 October 2026}}</ref>
== मगही भाषा के संरक्षण अउर प्रचार-प्रसार ==
मगही भाषा के साहित्यिक परंपरा में कविता, महाकाव्य, कहानी, नाटक अउर लोकसाहित्य के महत्त्वपूर्ण स्थान हे। आधुनिक मगही साहित्य के विकास में योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के अलावा श्रीकृष्णदेव प्रसाद, श्रीकान्त शास्त्री अउर अन्य साहित्यकार के योगदान रहल हे।<ref name="IGNCAMagadh"/>
इंटरनेट अउर डिजिटल माध्यम के विकास से मगही भाषा के साहित्य, इतिहास अउर संस्कृति के अधिक लोग तक पहुँचावे के अवसर बढ़ल हे। ऑनलाइन मंचन के माध्यम से मगही भाषा के सामग्री के संरक्षण अउर प्रचार-प्रसार में मदद मिल सकऽ हे।
== संदर्भ ==
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[[श्रेणी:बिहार]]
[[श्रेणी:मगध]]
[[श्रेणी:संस्कृति]]
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'''मगही दिवस''' हर साल २३ अक्टूबर के दिन [[बिहार]] के [[मगध]] क्षेत्र अउर देश-विदेश में रहे वाला मगही भाषी लोग द्वारा मनावल जा हे। एह दिन के उद्देश्य [[मगही भाषा]], ओकर [[साहित्य]] अउर [[संस्कृति|सांस्कृतिक]] विरासत के प्रचार-प्रसार करना हे। मगही भाषा के ऐतिहासिक संबंध [[मागधी प्राकृत]] से मानल जा हे।<ref name="KnowledgeSthali">{{Cite web |title=मगही या मागधी भाषा : उत्पत्ति, विकास, लिपि और साहित्यिक परंपरा |url=https://knowledgesthali.com/मगही-या-मागधी-भाषा/ |website=Knowledge Sthali |access-date=16 October 2026}}</ref>
== इतिहास अउर शुरुआत ==
मगही दिवस मनावे के शुरुआत मगही के प्रमुख कवि डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के जयंती के अवसर पर भेल। १४ अगस्त २०१० के प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के [[पटना जिला]] के नीरपुर गाँव में अखिल भारतीय मगही-कवि सम्मेलन के आयोजन भेल हल। सम्मेलन के अध्यक्षता मगही अकादमी के अध्यक्ष अउर साहित्यकार उदय शंकर कइलथिन, जबकि संचालन कवि रामाश्रय झा कइलथिन।
एह सम्मेलन में [[बिहार]] अउर [[उत्तर प्रदेश]] से आइल कई गो साहित्यकार अउर कवि शामिल भेलथिन। सम्मेलन के समापन पर साहित्यकार लोग घोषणा कइलथिन कि कवि योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के जयंती २३ अक्टूबर के हर साल '''मगही दिवस''' के रूप में मनावल जायत।<ref name="MagahiDay2010">{{Cite web |title=मगही दिवस के रूप मे मनेगी योगेश की जयंती |url=https://magadhee.blogspot.com/2010/08/blog-post_14.html |website=मागधी |date=14 August 2010 |access-date=16 October 2026}}</ref>
== डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' ==
डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' आधुनिक मगही साहित्य के प्रमुख कवि अउर साहित्यकार रहथिन। ऊ मगही भाषा में कविता, प्रबंध काव्य अउर अन्य साहित्यिक रचना कइलथिन। उनकर रचना में आम लोग के जीवन, सामाजिक परिस्थिति अउर ग्रामीण समाज के चित्रण मिल हे। ऊ मगही भाषा के साहित्यिक विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान देलथिन।
योगेश के निधन १२ अगस्त २००९ के बिहार के पटना जिला स्थित उनकर पैतृक गाँव नीरपुर में भेल हल। निधन के समय उनकर उमिर लगभग ८० साल बतावल गेल हल। उनकर निधन के बाद प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, ऊ मगही के पहिल महाकाव्य 'गौतम' समेत दू दर्जन से अधिक पुस्तक के रचना कइलथिन। बिहार सरकार द्वारा उनखा लोकगाथा सम्मान समेत कई गो पुरस्कार से सम्मानित कइल गेल हल।<ref name="YogeshObituary">{{Cite web |title=मगही के महाकवि डा. योगेश्वर प्रसाद सिंह योगेश का निधन |url=https://magahi-sahitya.blogspot.com/2009/08/24.html |website=मगही भाषा एवं साहित्य |date=23 August 2009 |access-date=16 October 2026}}</ref>
== 'गौतम' महाकाव्य ==
'गौतम' डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के प्रमुख साहित्यिक रचना में से एगो हे। एकरा मगही भाषा के पहिल महाकाव्य के रूप में जानल जा हे। ई महाकाव्य भगवान बुद्ध के जीवन अउर विचार से संबंधित हे।
उपलब्ध साहित्यिक स्रोत के अनुसार, योगेश १९६६ में 'गौतम' महाकाव्य के रचना कइलथिन।<ref name="YogeshObituary"/>
योगेश के साहित्यिक योगदान मगही भाषा में प्रबंध काव्य अउर महाकाव्य के परंपरा के विकास में महत्त्वपूर्ण रहल हे। उनकर रचना मगही साहित्य के इतिहास में खास स्थान रख हे।<ref name="IGNCAMagadh">{{Cite web |title=Content - Magadh |url=https://ignca.gov.in/coilnet/mg005.htm |website=Indira Gandhi National Centre for the Arts |access-date=16 October 2026}}</ref>
== मगही दिवस के महत्त्व अउर आयोजन ==
मगही दिवस के मुख्य उद्देश्य मगही भाषा के प्रचार-प्रसार, ओकर साहित्यिक परंपरा के संरक्षण अउर नई पीढ़ी के आपन मातृभाषा से जोड़ना हे। एह दिन मगही के साहित्यकार, कवि अउर भाषा के विकास में योगदान देवे वाला लोग के याद कइल जा हे।
बिहार के मगध क्षेत्र में मगही भाषा से जुड़ल साहित्यिक अउर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कइल जा हे। एह कार्यक्रम में कवि सम्मेलन, कविता पाठ, साहित्यिक गोष्ठी अउर सांस्कृतिक गतिविधि शामिल रह हे।
१८ अक्टूबर २०११ के प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, योगेश के जयंती के अवसर पर २३ अक्टूबर के उनकर पैतृक गाँव नीरपुर में मगही दिवस मनावे के तैयारी कइल जा रहल हल। एह आयोजन में कवि के साहित्यिक योगदान के याद करे खातिर विशेष कार्यक्रम आयोजित करे के योजना बनावल गेल हल।<ref name="MagahiDay2011">{{Cite web |title=मगही दिवस पर जारी होगा कवि का कैलेंडर |url=https://magadhee.blogspot.com/2011/10/blog-post.html |website=मागधी |date=18 October 2011 |access-date=16 October 2026}}</ref>
== मगही भाषा के संरक्षण अउर प्रचार-प्रसार ==
मगही भाषा के साहित्यिक परंपरा में कविता, महाकाव्य, कहानी, नाटक अउर लोकसाहित्य के महत्त्वपूर्ण स्थान हे। आधुनिक मगही साहित्य के विकास में योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के अलावा श्रीकृष्णदेव प्रसाद, श्रीकान्त शास्त्री अउर अन्य साहित्यकार के योगदान रहल हे।<ref name="IGNCAMagadh"/>
इंटरनेट अउर डिजिटल माध्यम के विकास से मगही भाषा के साहित्य, इतिहास अउर संस्कृति के अधिक लोग तक पहुँचावे के अवसर बढ़ल हे। ऑनलाइन मंचन के माध्यम से मगही भाषा के सामग्री के संरक्षण अउर प्रचार-प्रसार में मदद मिल सकऽ हे।
== संदर्भ ==
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[[श्रेणी:बिहार]]
[[श्रेणी:मगध]]
[[श्रेणी:संस्कृति]]
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'''मगही दिवस''' हर साल २३ अक्टूबर के दिन [[बिहार]] के [[मगध]] क्षेत्र अउर देश-विदेश में रहे वाला मगही भाषी लोग द्वारा मनावल जा हे। एह दिन के उद्देश्य [[मगही भाषा]], ओकर [[साहित्य]] अउर [[संस्कृति|सांस्कृतिक]] विरासत के प्रचार-प्रसार करना हे। मगही भाषा के ऐतिहासिक संबंध [[मागधी प्राकृत]] से मानल जा हे।<ref name="KnowledgeSthali">{{Cite web |title=मगही या मागधी भाषा : उत्पत्ति, विकास, लिपि और साहित्यिक परंपरा |url=https://knowledgesthali.com/मगही-या-मागधी-भाषा/ |website=Knowledge Sthali |access-date=16 October 2026}}</ref>
== इतिहास अउर शुरुआत ==
मगही दिवस मनावे के शुरुआत मगही के प्रमुख कवि डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के जयंती के अवसर पर भेल। १४ अगस्त २०१० के प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के [[पटना जिला]] के नीरपुर गाँव में अखिल भारतीय मगही-कवि सम्मेलन के आयोजन भेल हल। सम्मेलन के अध्यक्षता मगही अकादमी के अध्यक्ष अउर साहित्यकार उदय शंकर कइलथिन, जबकि संचालन कवि रामाश्रय झा कइलथिन।
एह सम्मेलन में [[बिहार]] अउर [[उत्तर प्रदेश]] से आइल कई गो साहित्यकार अउर कवि शामिल भेलथिन। सम्मेलन के समापन पर साहित्यकार लोग घोषणा कइलथिन कि कवि योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के जयंती २३ अक्टूबर के हर साल '''मगही दिवस''' के रूप में मनावल जायत।<ref name="MagahiDay2010">{{Cite web |title=मगही दिवस के रूप मे मनेगी योगेश की जयंती |url=https://magadhee.blogspot.com/2010/08/blog-post_14.html |website=मागधी |date=14 August 2010 |access-date=16 October 2026}}</ref>
== डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' ==
डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' आधुनिक [[मगही साहित्य]] के प्रमुख कवि अउर साहित्यकार रहथिन। ऊ मगही भाषा में कविता, प्रबंध काव्य अउर अन्य साहित्यिक रचना कइलथिन। उनकर रचना में आम लोग के जीवन, सामाजिक परिस्थिति अउर ग्रामीण समाज के चित्रण मिल हे। ऊ मगही भाषा के साहित्यिक विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान देलथिन।
योगेश के निधन १२ अगस्त २००९ के बिहार के पटना जिला स्थित उनकर पैतृक गाँव नीरपुर में भेल हल। निधन के समय उनकर उमिर लगभग ८० साल बतावल गेल हल। उनकर निधन के बाद प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, ऊ मगही के पहिल महाकाव्य 'गौतम' समेत दू दर्जन से अधिक पुस्तक के रचना कइलथिन। बिहार सरकार द्वारा उनखा लोकगाथा सम्मान समेत कई गो पुरस्कार से सम्मानित कइल गेल हल।<ref name="YogeshObituary">{{Cite web |title=मगही के महाकवि डा. योगेश्वर प्रसाद सिंह योगेश का निधन |url=https://magahi-sahitya.blogspot.com/2009/08/24.html |website=मगही भाषा एवं साहित्य |date=23 August 2009 |access-date=16 October 2026}}</ref>
== 'गौतम' महाकाव्य ==
'गौतम' डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के प्रमुख साहित्यिक रचना में से एगो हे। एकरा मगही भाषा के पहिल महाकाव्य के रूप में जानल जा हे। ई महाकाव्य भगवान बुद्ध के जीवन अउर विचार से संबंधित हे।
उपलब्ध साहित्यिक स्रोत के अनुसार, योगेश १९६६ में 'गौतम' महाकाव्य के रचना कइलथिन।<ref name="YogeshObituary"/>
योगेश के साहित्यिक योगदान मगही भाषा में प्रबंध काव्य अउर महाकाव्य के परंपरा के विकास में महत्त्वपूर्ण रहल हे। उनकर रचना मगही साहित्य के इतिहास में खास स्थान रख हे।<ref name="IGNCAMagadh">{{Cite web |title=Content - Magadh |url=https://ignca.gov.in/coilnet/mg005.htm |website=Indira Gandhi National Centre for the Arts |access-date=16 October 2026}}</ref>
== मगही दिवस के महत्त्व अउर आयोजन ==
मगही दिवस के मुख्य उद्देश्य मगही भाषा के प्रचार-प्रसार, ओकर साहित्यिक परंपरा के संरक्षण अउर नई पीढ़ी के आपन मातृभाषा से जोड़ना हे। एह दिन मगही के साहित्यकार, कवि अउर भाषा के विकास में योगदान देवे वाला लोग के याद कइल जा हे।
बिहार के मगध क्षेत्र में मगही भाषा से जुड़ल साहित्यिक अउर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कइल जा हे। एह कार्यक्रम में कवि सम्मेलन, कविता पाठ, साहित्यिक गोष्ठी अउर सांस्कृतिक गतिविधि शामिल रह हे।
१८ अक्टूबर २०११ के प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, योगेश के जयंती के अवसर पर २३ अक्टूबर के उनकर पैतृक गाँव नीरपुर में मगही दिवस मनावे के तैयारी कइल जा रहल हल। एह आयोजन में कवि के साहित्यिक योगदान के याद करे खातिर विशेष कार्यक्रम आयोजित करे के योजना बनावल गेल हल।<ref name="MagahiDay2011">{{Cite web |title=मगही दिवस पर जारी होगा कवि का कैलेंडर |url=https://magadhee.blogspot.com/2011/10/blog-post.html |website=मागधी |date=18 October 2011 |access-date=16 October 2026}}</ref>
== मगही भाषा के संरक्षण अउर प्रचार-प्रसार ==
मगही भाषा के साहित्यिक परंपरा में कविता, महाकाव्य, कहानी, नाटक अउर लोकसाहित्य के महत्त्वपूर्ण स्थान हे। आधुनिक मगही साहित्य के विकास में योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के अलावा श्रीकृष्णदेव प्रसाद, श्रीकान्त शास्त्री अउर अन्य साहित्यकार के योगदान रहल हे।<ref name="IGNCAMagadh"/>
इंटरनेट अउर डिजिटल माध्यम के विकास से मगही भाषा के साहित्य, इतिहास अउर संस्कृति के अधिक लोग तक पहुँचावे के अवसर बढ़ल हे। ऑनलाइन मंचन के माध्यम से मगही भाषा के सामग्री के संरक्षण अउर प्रचार-प्रसार में मदद मिल सकऽ हे।
== संदर्भ ==
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[[श्रेणी:बिहार]]
[[श्रेणी:मगध]]
[[श्रेणी:संस्कृति]]
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'''मगही दिवस''' हर साल २३ अक्टूबर के दिन [[बिहार]] के [[मगध]] क्षेत्र अउर देश-विदेश में रहे वाला मगही भाषी लोग द्वारा मनावल जा हे। एह दिन के उद्देश्य [[मगही भाषा]], ओकर [[साहित्य]] अउर [[संस्कृति|सांस्कृतिक]] विरासत के प्रचार-प्रसार करना हे। मगही भाषा के ऐतिहासिक संबंध [[मागधी प्राकृत]] से मानल जा हे।<ref name="KnowledgeSthali">{{Cite web |title=मगही या मागधी भाषा : उत्पत्ति, विकास, लिपि और साहित्यिक परंपरा |url=https://knowledgesthali.com/मगही-या-मागधी-भाषा/ |website=Knowledge Sthali |access-date=16 October 2026}}</ref>
== इतिहास अउर शुरुआत ==
मगही दिवस मनावे के शुरुआत मगही के प्रमुख कवि डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के जयंती के अवसर पर भेल। १४ अगस्त २०१० के प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के [[पटना जिला]] के नीरपुर गाँव में अखिल भारतीय मगही-कवि सम्मेलन के आयोजन भेल हल। सम्मेलन के अध्यक्षता मगही अकादमी के अध्यक्ष अउर साहित्यकार उदय शंकर कइलथिन, जबकि संचालन कवि रामाश्रय झा कइलथिन।
एह सम्मेलन में [[बिहार]] अउर [[उत्तर प्रदेश]] से आइल कई गो साहित्यकार अउर कवि शामिल भेलथिन। सम्मेलन के समापन पर साहित्यकार लोग घोषणा कइलथिन कि कवि योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के जयंती २३ अक्टूबर के हर साल '''मगही दिवस''' के रूप में मनावल जायत।<ref name="MagahiDay2010">{{Cite web |title=मगही दिवस के रूप मे मनेगी योगेश की जयंती |url=https://magadhee.blogspot.com/2010/08/blog-post_14.html |website=मागधी |date=14 August 2010 |access-date=16 October 2026}}</ref>
== डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' ==
डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' आधुनिक [[मगही साहित्य]] के प्रमुख कवि अउर साहित्यकार रहथिन। ऊ मगही भाषा में कविता, प्रबंध काव्य अउर अन्य साहित्यिक रचना कइलथिन। उनकर रचना में आम लोग के जीवन, सामाजिक परिस्थिति अउर ग्रामीण समाज के चित्रण मिल हे। ऊ मगही भाषा के साहित्यिक विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान देलथिन।
योगेश के निधन १२ अगस्त २००९ के बिहार के पटना जिला स्थित उनकर पैतृक गाँव नीरपुर में भेल हल। निधन के समय उनकर उमिर लगभग ८० साल बतावल गेल हल। उनकर निधन के बाद प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, ऊ मगही के पहिल महाकाव्य 'गौतम' समेत दू दर्जन से अधिक पुस्तक के रचना कइलथिन। बिहार सरकार द्वारा उनखा लोकगाथा सम्मान समेत कई गो पुरस्कार से सम्मानित कइल गेल हल।<ref name="YogeshObituary">{{Cite web |title=मगही के महाकवि डा. योगेश्वर प्रसाद सिंह योगेश का निधन |url=https://magahi-sahitya.blogspot.com/2009/08/24.html |website=मगही भाषा एवं साहित्य |date=23 August 2009 |access-date=16 October 2026}}</ref>
== 'गौतम' महाकाव्य ==
'गौतम' डॉ. योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के प्रमुख साहित्यिक रचना में से एगो हे। एकरा मगही भाषा के पहिल महाकाव्य के रूप में जानल जा हे। ई महाकाव्य भगवान बुद्ध के जीवन अउर विचार से संबंधित हे।
उपलब्ध साहित्यिक स्रोत के अनुसार, योगेश १९६६ में 'गौतम' महाकाव्य के रचना कइलथिन।<ref name="YogeshObituary"/>
योगेश के साहित्यिक योगदान मगही भाषा में प्रबंध काव्य अउर महाकाव्य के परंपरा के विकास में महत्त्वपूर्ण रहल हे। उनकर रचना मगही साहित्य के इतिहास में खास स्थान रख हे।<ref name="IGNCAMagadh">{{Cite web |title=Content - Magadh |url=https://ignca.gov.in/coilnet/mg005.htm |website=Indira Gandhi National Centre for the Arts |access-date=16 October 2026}}</ref>
== मगही दिवस के महत्त्व अउर आयोजन ==
मगही दिवस के मुख्य उद्देश्य मगही भाषा के प्रचार-प्रसार, ओकर साहित्यिक परंपरा के संरक्षण अउर नई पीढ़ी के आपन मातृभाषा से जोड़ना हे। एह दिन मगही के साहित्यकार, कवि अउर भाषा के विकास में योगदान देवे वाला लोग के याद कइल जा हे।
बिहार के मगध क्षेत्र में मगही भाषा से जुड़ल साहित्यिक अउर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कइल जा हे। एह कार्यक्रम में कवि सम्मेलन, कविता पाठ, साहित्यिक गोष्ठी अउर सांस्कृतिक गतिविधि शामिल रह हे।
१८ अक्टूबर २०११ के प्रकाशित एगो रिपोर्ट के अनुसार, योगेश के जयंती के अवसर पर २३ अक्टूबर के उनकर पैतृक गाँव नीरपुर में मगही दिवस मनावे के तैयारी कइल जा रहल हल। एह आयोजन में कवि के साहित्यिक योगदान के याद करे खातिर विशेष कार्यक्रम आयोजित करे के योजना बनावल गेल हल।<ref name="MagahiDay2011">{{Cite web |title=मगही दिवस पर जारी होगा कवि का कैलेंडर |url=https://magadhee.blogspot.com/2011/10/blog-post.html |website=मागधी |date=18 October 2011 |access-date=16 October 2026}}</ref>
== मगही भाषा के संरक्षण अउर प्रचार-प्रसार ==
मगही भाषा के साहित्यिक परंपरा में कविता, [[महाकाव्य]], कहानी, [[नाटक]] अउर लोकसाहित्य के महत्त्वपूर्ण स्थान हे। आधुनिक मगही साहित्य के विकास में योगेश्वर प्रसाद सिंह 'योगेश' के अलावा श्रीकृष्णदेव प्रसाद, श्रीकान्त शास्त्री अउर अन्य साहित्यकार के योगदान रहल हे।<ref name="IGNCAMagadh"/>
इंटरनेट अउर डिजिटल माध्यम के विकास से मगही भाषा के साहित्य, इतिहास अउर संस्कृति के अधिक लोग तक पहुँचावे के अवसर बढ़ल हे। ऑनलाइन मंचन के माध्यम से मगही भाषा के सामग्री के संरक्षण अउर प्रचार-प्रसार में मदद मिल सकऽ हे।
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:बिहार]]
[[श्रेणी:मगध]]
[[श्रेणी:संस्कृति]]
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